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आज का एक्सप्लेनर:क्या बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य सुलझ गया, वैज्ञानिकों को समुद्र के नीचे क्या मिला; क्यों गायब होते हैं जहाज और विमान

500 सालों में 50 से ज्यादा शिप्स और दर्जनों प्लेन एक खास इलाके से गुजरते हुए गायब हो गए। न मलबा मिला, न कोई लाश। बरमूडा ट्रायंगल की यही मिस्ट्री दुनिया को डराती रही है। अब वैज्ञानिकों ने वहां के समुद्र में कुछ ऐसा खोजा है, जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं है। तो क्या इसबार बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य खुल गया? इसी से जुड़े सवाल समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बरमूडा ट्रायंगल से कैसे गायब होते रहे हैं शिप्स और प्लेन? जवाब: उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिका के फ्लोरिडा तट, ब्रिटेन के बरमूडा द्वीप और प्यूर्टो रिको द्वीप को मिलाएं, तो एक त्रिभुज बनता है। इसे ही बरमूडा ट्रायंगल कहते हैं। इसका एरिया करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर है। साल 1492 की बात है। क्रिस्टोफर कोलंबस तीन बड़ी नौकाओं और 90 लोगों के साथ इस इलाके से गुजर रहे थे, तो कुछ अनोखा देखा। जहाज की लॉगबुक में दर्ज किया- समुद्र में आग की लपटें थीं और कंपास की रीडिंग भी असामान्य हो गई। कोलंबस वही नाविक हैं, जिन्होंने अमेरिका खोजा था। बरमूडा ट्रायंगल से शिप गायब होने का पहला बड़ा मामला 31 दिसंबर 1812 का है। ‘पैट्रियट’ नाम का अमेरिकी जहाज साउथ कैरोलिना से न्यूयॉर्क के लिए निकला। इसमें तब के अमेरिकी उपराष्ट्रपति हारून बर्र की बेटी थियोडोसिया सवार थीं। पैट्रियट बरमूडा ट्रायंगल में अचानक गायब हो गया। 3 साल बाद USS एपेरवियर भी वहीं गायब हुआ। न इसका मलबा मिला और न इसमें सवार 135 लोगों में किसी की लाश। मार्च 1918 में अमेरिका का ‘USS साइक्लोप्स’ जहाज गायब होने के बाद दुनिया भर में खतरनाक बरमूडा ट्रायंगल की चर्चा तेज हो गई। इसमें 10 हजार टन मैंगनीज और 309 लोग सवार थे। इसके मलबे और जहाज की जानकारी 108 साल बाद भी नहीं है। बरमूडा ट्रायंगल के ऊपर से गुजरने वाले विमानों और जहाजों के गायब होने के करीब 50 इंसीडेंट्स दर्ज हैं… सवाल-2: बरमूडा में विमान, जहाज गायब होने के पीछे क्या वजह बताई जाती है? जवाब: बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य से जुड़ी 5 प्रमुख थ्योरी और दावे किए जाते हैं… 1. नुकीले बादल एयर बम बनाते हैं 2. मीथेन गैस विस्फोट थ्योरी 3. मैग्नेटिक इफेक्ट की थ्योरी 4. 'इलेक्ट्रॉनिक फॉग' और 'टाइम वार्प' थ्योरी 5. विशालकाय भटकती लहरें ये भी कहा जाता है कि बरमूडा ट्रायंगल में पानी के अंदर एलियंस का एक स्पेस शिप है, जो अपनी तकनीक से गुजरते जहाजों और विमानों को निशाना बनाता है। 1974 में चार्ल्स बर्लिट्ज की किताब 'The Bermuda Triangle' से प्रचलित हुआ कि बरमूडा ट्रायंगल के नीचे 'खोया हुआ पौराणिक शहर 'अटलांटिस' है। उस सभ्यता की उन्नत तकनीक आज भी एक्टिव है, जो गुजरने वाले जहाजों और विमानों को खींचती है। सवाल-3: अब वैज्ञानिकों को इस इलाके के बारे में क्या पता चला है? जवाब: अमेरिका के कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस और येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक विलियम फ्रेजर और जेफरी पार्क की टीम ने एक रिसर्च की है। कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस की वेबसाइट पर 8 मई को ये रिसर्च छपी है। इससे पता चला कि बरमूडा द्वीप के नीचे एक ऐसा खास स्ट्रक्चर है, जिसे दुनिया में और कहीं नहीं देखा गया है। दरअसल, समुद्र के बीच में ज्वालामुखी का पहाड़ या द्वीप उसके नीचे के 'मेंटल प्लम' के ऊपर बनता है। ‘मेंटल प्लम’ यानी धरती के अंदर का बेहद गर्म चट्टानों का गुबार। ये समुद्र की तली को ऊपर की तरफ धकेलता है। हालांकि समय के साथ टेक्टोनिक प्लेटें खिसकती हैं और ये द्वीप वापस नीचे की तरफ धंसने लगते हैं। जबकि बरमूडा द्वीप के मामले में ऐसा नहीं है। 3 करोड़ साल से भी ज्यादा समय से बरमूडा के नीचे ज्वालामुखी पूरी तरह शांत है। फिरे भी बरमूडा द्वीप समुद्र तल से लगभग 1600 फीट की ऊंचाई पर टिका हुआ है। इस गुत्थी को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने बरमूडा के इलाके में भूकंप की तरंगों के जरिए द्वीप के 20 मील नीचे की एक तस्वीर तैयार की। इससे पता चला कि समुद्री क्रस्ट के नीचे 12 मील मोटी एक अजीबोगरीब चट्टान की परत है। ये परत आसपास के मेंटल की तुलना में बहुत हल्की और कम घनत्व वाली है। ये हल्की चट्टान एक नाव की तरह काम कर रही है। इसी के सहारे बरमूडा और उसके आसपास का समुद्री तल तैर रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब ये खोजना बाकी है कि क्या दुनिया के किसी और द्वीप के नीचे भी इसी तरह की कोई हल्की चट्टान है या नहीं। सवाल-4: क्या इस नई खोज से बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य खुल जाएगा? जवाब: नहीं, ये रिसर्च सिर्फ बरमूडा द्वीप के भूगर्भ से जुड़ी है। बरमूडा द्वीप का एरिया सिर्फ 54 वर्गकिमी है। जबकि बरमूडा ट्रायंगल 13 लाख वर्ग किमी का समुद्री इलाका है। वैज्ञानिकों ने भी इस रिसर्च में बरमूडा ट्रायंगल में जहाज डूबने या विमानों के हादसे का जिक्र नहीं किया है। हालांकि बरमूडा द्वीप को लेकर ये जानकारी नई जरूर है, साथ ही किसी और द्वीप के नीचे इस तरह के अनोखे स्ट्रक्चर की जानकारी अब तक नहीं है, इसलिए इसे बरमूडा ट्रायंगल के रहस्यों से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जो बरमूडा ट्रायंगल में जहाजों और विमानों के गायब होने के पीछे किसी रहस्यमयी थ्योरी से इनकार करता है। सवाल-5: बरमूडा ट्रायंगल में वाकई कोई रहस्य छिपा है, या सिर्फ सामान्य हादसे हैं? जवाब: अमेरिकी मौसम विभाग से जुड़ी संस्था ‘नेशनल ओशियनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’, यानी NOAA के मुताबिक, ‘बरमूडा ट्रायंगल इलाके में होने वाले हादसे खराब मौसम, मुश्किल नेविगेशन और इंसानी गलतियों की वजह से होते हैं। इनके पीछे कोई सुपरनैचुरल पावर नहीं है।’ इसी तरह अमेरिकी रिसर्चर लॉरेंस डेविड कुस्चे अपनी किताब 'द बरमूडा ट्रायंगल मिस्ट्री सॉल्व्ड' में लिखते हैं, 'ट्रायंगल पर हुए हादसों पर जो रिपोर्ट्स सामने आईं, उनमें से ज्यादातर बढ़ा-चढ़ाकर लिखी गई हैं। ये हादसे दुनिया के दूसरे समुद्री रास्तों पर होने वाले हादसों से ज्यादा नहीं हैं।’ हवाई जहाजों और शिप्स का इंश्योरेंस करने वाली कंपनी ‘लॉयड ऑफ लंदन’ को अपनी रिसर्च में बरमूडा ट्रायंगल के ज्यादा खतरनाक होने के पुख्ता सबूत नहीं मिले। इसके बाद 1970 के दशक में कंपनी ने बरमूडा ट्रायंगल से गुजरने वाले जहाजों के लिए बीमा के बदले एक्सट्रा प्रीमियम लेना बंद कर दिया। सिंगापुर के रिसर्चर डेरिक ली ने 2021 में दुनिया भर के 85 हजार से ज्यादा विमान हादसों का एनालिसिस किया। इसमें बरमूडा ट्रायंगल के अंदर महज 56 हादसे मिले। डेरिक के मुताबिक, 'इन हादसों के पैटर्न खोजने पर कुछ भी असामान्य या रहस्यमयी नहीं मिला। ये मौसम की खराबी से जुड़े साधारण हादसे थे, जो दुनिया की बाकी जगहों पर भी देखने को मिलते हैं। अक्टूबर 2024 में नाइजीरिया के प्रोफेसर चिगोजी एके ने कहा था कि कुछ न्यूज चैनलों ने बरमूडा ट्रायंगल की खबरों को सनसनीखेज बना दिया, जिससे लोगों में डर पैदा हुआ और इसे सच माना जाने लगा। दुनिया में कई समुद्री इलाके हैं, जिन्हें बरमूडा से भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है। उदाहरण के लिए ड्रेक पैसेज, अर्जेंटीना। चिली के केप हॉर्न और अंटार्कटिका के साउथ शेटलैंड द्वीपों के बीच मौजूद ड्रेक पैसेज में लहरें अक्सर 40 फीट तक पहुंच जाती हैं। यहां लगभग 800 जहाज तबाह हो चुके हैं और करीब 20 हजार नाविकों की मौत हो चुकी है। सबसे चर्चित हादसा 1819 में स्पेन के जहाज ‘सैन टेल्मो’ के डूबने का है, जिसमें 644 लोगों की मौत हुई थी। आस्ट्रेलियाई साइंटिस्ट डॉ. कार्ल क्रुजेलनिकी कहते हैं कि बरमूडा ट्रायंगल के हादसों के लिए एलियंस के बजाय खराब प्लानिंग को जिम्मेदार ठहराना चाहिए। ये कोई सुपरनैचुरल पावर नहीं, बल्कि प्रकृति की ताकत और इंसानी गलतियों का नतीजा है। ---------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… चुटकी में हैक कर लेता है बैंक, दुनियाभर की सरकारों को Mythos AI का डर; क्या खातों में जमा आपका पैसा भी खतरे में है एंथ्रोपिक का नया AI मॉडल 'क्लॉड मिथोस' इतना खतरनाक है कि इसे आम लोगों के लिए रिलीज ही नहीं किया गया। हालांकि ये किसी तरह लीक हो गया है। एंथ्रोपिक के मुखिया डेरियो अमोदेई ने खुद इसके खतरे की चेतावनी दी है। दुनियाभर की सरकारें आशंका से डरी हुई हैं। 23 अप्रैल को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी एक हाई-लेवल बैठक बुलाई। इसमें चर्चा हुई कि भारत के बैंकिंग सिस्टम को मिथोस से कैसे बचाया जाए। सरकार एंथ्रोपिक के सीनियर ऑफिसर्स से भी बात कर रही है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 16 May 2026 6:51 pm

ट्रंप का बड़ा बयान: बाइडन दौर में गिरता हुआ देश बन गया था अमेरिका

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लंबा पोस्ट लिखते हुए दावा किया कि जो बाइडन की नीतियों ने अमेरिका को आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा के स्तर पर कमजोर कर दिया। उन्होंने कहा कि खुली सीमा नीति के कारण अमेरिका में अवैध प्रवासियों की संख्या तेजी से बढ़ी और इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।

देशबन्धु 16 May 2026 12:36 pm

ट्रंप और जिनपिंग के बीच ताइवान, साइबर सुरक्षा, व्यापार और एआई पर हुई 'ऐतिहासिक' चर्चा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई अहम मुद्दों पर लंबी बातचीत हुई

देशबन्धु 16 May 2026 10:55 am

चीन टैरिफ से बचना चाहता है तो अमेरिका में बनाए कारखाने : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर चीन अमेरिका से टैरिफ से बचना चाहता है, तो उसे अमेरिका में कारखाने लगाने चाहिए और अमेरिकियों को नौकरी देनी चाहिए

देशबन्धु 16 May 2026 9:51 am

पेंटागन ने पोलैंड में 4,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने की योजना रद्द की

पेंटागन ने अमेरिका में तैनात 4,000 से अधिक सैनिकों को अस्थायी रूप से पोलैंड भेजने की योजना रद्द कर दी है। कई अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी। इसके साथ ही

देशबन्धु 16 May 2026 9:44 am

ड्रोन भविष्य के युद्ध की दिशा तय करेंगे, समय के साथ चलना जरूरी : अमेरिकी सेना

अमेरिकी सेना ने लॉमेकर्स को बताया है कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और बिना इंसानी नियंत्रण वाले सिस्टम आधुनिक युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहे हैं

देशबन्धु 16 May 2026 7:50 am

पीएम की 1 साल तक सोना न खरीदने की अपील:सरकार खुद अपनी तिजोरियों में लगातार सोना क्यों भर रही; पीछे की पूरी कहानी

पीएम मोदी ने 10 मई को लोगों से सोना न खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा- हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। 15 मई को कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने निशाना साधा- ‘आप बोलते हैं कि एक मंगलसूत्र मत खरीदो। जेवर मत खरीदो… और मोदी सरकार 7 महीने में 85.88 मीट्रिक टन सोना खरीद रही है। ऐसा क्यों?’ ये सवाल आपके मन में भी हो सकता है। इसी को समझेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… पहले जानते हैं कि क्या सरकार ने वाकई सोने की खरीद बढ़ा दी है? जवाब है- हां। लेकिन उतना नहीं, जितना सुरजेवाला दावा कर रहे। भारतीय रिजर्व बैंक, यानी RBI के पास अभी 880.5 टन गोल्ड रिजर्व है। ये ऑल टाइम हाई है। भारत आज गोल्ड रिजर्व की ग्लोबल रैंकिंग में 5वें नंबर पर है। 2021 से 2025 के बीच 185 टन सोना खरीदा गया। पिछले 10 साल में RBI का गोल्ड रिजर्व 560 टन से बढ़कर 880.5 टन हो गया, यानी 57% की बढ़त। फिलहाल भारत के कुल फॉरेन रिजर्व, यानी विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 16.7% है, जो पिछले साल से 5% ज्यादा है। दिलचस्प बात ये है कि RBI विदेशों बैंकों की बजाय अब अपनी तिजोरियों में सोना जमा कर रहा है। 2023 में RBI के गोल्ड रिजर्व का सिर्फ 38% देश में था, जो आज 77% हो गया है। फिलहाल 680.05 टन सोना देश में है, बाकी का करीब 197.67 टन सोना विदेशी तिजोरियों में रखा है। वहीं 2.8 टन गोल्ड डिपोजिट में है, यानी ब्याज कमाने के लिए निवेश किया गया है। सोने की ये घरवापसी पिछले 3 कारोबारी साल में बढ़ी है। ये ग्राफिक देखिए- आखिर सरकार लगातार सोना क्यों खरीद रही है? सोना खरीदने का ट्रेंड सिर्फ भारत में नहीं है। चीन, ब्राजील, तुर्किये, पोलैंड जैसे कई देशों के सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। चीन तो पिछले 18 महीने से लगातार सोना जुटा रहा है। अभी उसके पास 2313.46 टन गोल्ड रिजर्व है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, कारोबारी साल 2025-26 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 900 टन से ज्यादा सोना खरीदा, जो औसत से ज्यादा खरीद का लगातार चौथा साल है। सोने की ताबड़तोड़ खरीदी का डायरेक्ट कनेक्शन अमेरिकी डॉलर से है। सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व सर्वे-2025 की ये दो फाइंडिंग्स देखिए… दुनिया भर में चर्चा है कि कारोबार और बचत के लिए अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम की जाए। इस चर्चा की सबसे बड़ी वजह है- अमेरिका का एक फैसला। दरअसल, 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ, तो अमेरिका ने अपने यूरोपीय दोस्तों के साथ मिलकर रूस के 300 बिलियन डॉलर के फॉरेन रिजर्व पर रोक लगा दी थी। दरअसल, रूस का जो पैसा अमेरिकी ट्रेजरी बिल में जमा रखा था, अमेरिका ने उसे कैश करने से मना कर दिया था। अमेरिका के इस कदम से एक झटके में पूरी दुनिया सहम गई। माना जाने लगा कि अमेरिका अपनी करेंसी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है। इसके बाद से दुनियाभर के देशों में डॉलर के प्रति भरोसा कम होने लगा और वो अपना फॉरेन रिजर्व दूसरी करेंसी और खासकर सोने में जमा करने लगे। 2016 में दुनियाभर के कुल फॉरेन रिजर्व में 65% अमेरिकी डॉलर था, जो अब घटकर 57% रह गया है। भारत ने भी ऐसा किया है। दरअसल, RBI सोना खरीद कर फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर निर्भरता घटाना चाहता है। डॉलर में उतार-चढ़ाव आता रहता है। अमेरिका ऐन वक्त पर इसे कैश करने में दगाबाजी भी कर सकता है। लेकिन सोना ऐसी चीज है, जिससे हम किसी भी देश से कोई भी सामान खरीद सकते हैं या सोने से कोई भी करेंसी खरीद सकते हैं। जब सरकार को लग रहा है कि सोना मुश्किल वक्त में काम आएगा, तब वो लोगों को सोना खरीदने से क्यों रोक रही है? इसका जवाब भारत के आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़ा है। दरअसल, भारत अपने इस्तेमाल का करीब 99% सोना विदेशों से खरीदता है। इसके लिए डॉलर चुकाए जाते हैं और ये डॉलर फॉरेन रिजर्व यानी विदेशी मुद्रा भंडार से खर्च होते हैं। यानी ज्यादा सोना खरीदा, तो ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ेंगे। इससे आयात बिल बढ़ेगा और फॉरेन रिजर्व घटेगा। फिलहाल भारत के आयात बिल, यानी विदेशों से खरीदे जाने वाले सामान के कुल खर्चे में 9% की हिस्सेदारी के साथ सोना दूसरे नंबर पर है। पिछले कारोबारी साल में भारत ने 6.4 लाख करोड़ रुपए का सोना खरीदा गया। इसमें भी दिलचस्प बात ये है कि 2025-26 में पिछले कारोबारी साल के मुकाबले 4.76% कम मात्रा में सोना खरीदा, लेकिन सोने के इम्पोर्ट बिल में 24% तक का उछाल आया। इसकी सबसे बड़ी वजह थी- सोने की तेजी से बढ़ती कीमतें। सोने का दाम 76 हजार डॉलर प्रति किलो से बढ़कर 1 लाख डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गया। अभी सोने की कीमत करीब 1.52 लाख डॉलर प्रति किलो है। इन कीमतों पर सोना खरीदने से भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर तेजी से घटेगा। सोने की बढ़ी कीमतों के चलते गोल्ड इम्पोर्टर्स हाथ पीछे खींच रहे हैं और कम सोना भारत आ रहा है। जनवरी में करीब 100 टन, फरवरी में करीब 65 टन और मार्च में करीब 22 टन सोना खरीदा गया। अप्रैल में अनुमान है कि सिर्फ 15 टन सोना खरीदा जाएगा, जो पिछले 30 सालों के सबसे निचले स्तर में से एक है। सोने की घरेलू कीमतें करीब 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम हैं, जिसका असर कस्टमर की जेब पर पड़ रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक 2026 की पहली तिमाही में भारत में निवेश के लिए सोने की मांग गहनों से भी ज्यादा है। यानी अगर आप सोना नहीं खरीदेंगे, तो भारत का इम्पोर्ट बिल घटेगा। इससे फॉरेन रिजर्व में डॉलर स्थिर बना रहेगा और रुपया तेजी से कमजोर नहीं होगा। -------- महंगाई से जुड़े ये खबर भी पढ़िए… 48 घंटे के भीतर पेट्रोल, सोना और दूध महंगा हुआ, अगला नंबर किसका; क्या सरकार के हाथों से चीजें निकल रही हैं बुधवार की रात सोना महंगा हुआ। गुरुवार सुबह दूध। शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल और CNG महंगे हो गए। इन सबके बीच आंकड़ा आया कि थोक महंगाई 42 महीने में सबसे ज्यादा और डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। 48 घंटे में महंगाई की चौतरफा मार। लेकिन यह शुरुआत है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 16 May 2026 5:01 am

ईरान को उम्‍मीद 'सुनहरे द्वार' चाबहार बंदरगाह पर भारत जारी रखेगा काम : अराघची

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान के बीच सहयोग का एक प्रतीक बताया

देशबन्धु 15 May 2026 11:39 pm

चीनी राष्ट्रीय आपदा निवारण एवं शमन दिवस का मुख्य कार्यक्रम च्यांगशी प्रांत के नानछांग में आयोजित

हाल ही में चीन के राष्ट्रीय आपदा निवारण एवं शमन दिवस और आपदा निवारण एवं शमन प्रचार सप्ताह के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय आपदा निवारण, शमन एवं राहत समिति के कार्यालय, आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय, चाइना मीडिया ग्रुप और च्यांगशी प्रांत की स्थानीय सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।

देशबन्धु 15 May 2026 11:28 pm

ईरान स्थिति पर चीन ने कहा: संवाद के दरवाजे एक बार खुले तो फिर बंद नहीं होने चाहिए

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में चीन-अमेरिका शिखर बैठक में ईरान मुद्दे पर चर्चा होने या न होने के सवाल के जवाब में कहा कि हाल ही में, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हुआ है और दोनों पक्षों ने वार्ता के माध्यम से समाधान तलाशने की शुरुआत की है, जिसका क्षेत्रीय देशों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने स्वागत किया है।

देशबन्धु 15 May 2026 11:21 pm

आज का एक्सप्लेनर:48 घंटे के भीतर पेट्रोल, सोना और दूध महंगा हुआ, अगला नंबर किसका; क्या सरकार के हाथों से चीजें निकल रही हैं

बुधवार की रात सोना महंगा हुआ। गुरुवार सुबह दूध। शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल और CNG महंगे हो गए। इन सबके बीच आंकड़ा आया कि थोक महंगाई 42 महीने में सबसे ऊपर और डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। 48 घंटे में महंगाई की चौतरफा मार। लेकिन यह शुरुआत है। आगे और क्या महंगा होगा, आपकी जेब पर कितना बोझ पड़ेगा, और क्या वाकई सरकार के हाथ से चीजें निकल रही हैं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: पिछले 48 घंटे में क्या-क्या महंगा हुआ? जवाब: 10 और 11 मई को पीएम मोदी ने लोगों से सोना न खरीदने, पेट्रोल कम खर्च करने जैसी 7 अपीलों से संकेत दे दिए थे। इसके बाद 4 चीजों के दाम सीधे बढ़े हैं- 1. इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से सोना-चांदी महंगे हुए 2. दूध के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़े 3. पेट्रोल-डीजल 3-3 रुपए महंगा हुआ 4. CNG के दाम 2 रुपए किलो बढ़े इससे पहले मई की शुरूआत में कमर्शियल LPG (19 किलो) की कीमत 993 रुपए बढ़कर अगल-अलग शहरों में 3,315 रुपए तक हो गई थी। ईरान जंग शुरू होने के बाद से 3 बार इसकी कीमत बढ़ चुकी है। वहीं घरेलू LPG (14.2 किलो) की कीमत 7 मार्च को 60 रुपए से बढ़ी थी। मार्च में प्रीमियम पेट्रोल की कीमत भी 2 से 2.35 रुपए तक बढ़ी थी। इसके अलावा कई प्राइवेट प्रोवाइडर्स जैसे नायरा एनर्जी और शेल इंडिया ने भी मार्च और अप्रैल में पेट्रोल के दाम 5 से 7.4 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाए थे। सवाल-2: इन चीजों के दाम बढ़ने से आम आदमी पर कितना बोझ बढ़ेगा? जवाब: पहले कीमतें बढ़ने का सीधा असर समझते हैं… पेट्रोल-डीजल: अगर आप महीने में 50 लीटर पेट्रोल खर्च करते हैं, तो 3 रुपए प्रति लीटर कीमत बढ़ने से महीने का खर्च 150 रुपए बढ़ जाएगा। ऐसा ही डीजल के मामले में होगा। दूध: अगर हर दिन 2 लीटर दूध इस्तेमाल करते हैं, तो महीने का खर्च 120 रुपए बढ़ेगा। CNG: हर महीने 50 किलो CNG खरीदते हैं, तो महीने का 100 रुपए खर्च बढ़ेगा। सोना-चांदी: इनके दाम हर दिन बढ़ते-घटते हैं। आज के भाव के हिसाब से 10 ग्राम सोना खरीदना 8,148 रुपए और एक किलो चांदी खरीदना 9,313 रुपए महंगा हो गया है। (मार्केट बंद होने के बाद फाइनल डेटा) हालांकि इन चीजों के डायरेक्ट असर से बड़े हैं इनडायरेक्ट असर जैसे... सवाल-3: अभी और किन चीजों के दाम बढ़ सकते हैं? जवाब: अभी 4 और चीजों के दाम बढ़ सकते हैं… 1. पेट्रोल-डीजल 13-14 रुपए और महंगा हो सकता है अब सवाल आता है कितना? 14 मई का मोटा-मोटी कैलकुलेशन है कि कंपनियों को अपना घाटा पूरा करने के लिए पेट्रोल पर 16 रुपए और डीजल 17 रुपए बढ़ाने की जरूरत है। इसमें अभी सिर्फ 3 रुपए दाम बढ़े हैं, बाकी बढ़ोत्तरी आगे हो सकती है। हिसाब नीचे ग्राफिक में देख लीजिए- 2. खाने का तेल 5% महंगा हो सकता है 3. रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों के दाम 10% तक बढ़ सकते हैं 4. दवाइयां और मेडिकल डिवाइस के दाम बढ़ सकते हैं सवाल-4: क्या हालात अब सरकार के कंट्रोल से बाहर जा रहे हैं? जवाब: 5 संकेत, जो बताते हैं कि चीजें सरकार के मन-मुताबिक नहीं चल रही हैं… 1. डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल-टाइम लो 2. थोक महंगाई दर 42 महीने में सबसे ज्यादा 3. फॉरेक्स रिजर्व में बड़ी गिरावट 4. विदेशी निवेशकों ने निकाले 2 लाख करोड़ 5. सरकार के घाटे में 0.3% का इजाफा इकॉनोमिक एक्सपर्ट शरद कोहली कहते हैं रुपए की कमजोरी, महंगाई या विदेशी निवेश में कमी जैसी दिक्कतों के पीछे रूट कॉज एक ही है- क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ना। फिलहाल ग्लोबल स्थितियों के हिसाब से ही भारत के हालात बदलेंगे। शरद कहते हैं कि पूरी दुनिया में इस समय ‘स्टैगफ्लेशन’ का दौर है, यानी एकसाथ आर्थिक वृद्धि में कमी, बेरोजगारी और महंगाई। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से ही ग्लोबल इकोनॉमी दोबारा पटरी पर आ सकती है। इस बीच आम भारतीयों को अपना बजट बनाना चाहिए। जिन खर्चों में कटौती की जा सकती है, उनमें कटौती करनी चाहिए। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…आज का एक्सप्लेनर:पीएम मोदी क्यों चाहते हैं कि आप सोना न खरीदें, ऐसी 7 अपील के पीछे की कहानी; क्या आपको चिंता करनी चाहिए पीएम मोदी ने रविवार को तेलंगाना की एक रैली में देश से 7 अपीलें कीं। इनमें एक अपील सोना न खरीदने की भी थी। पीएम मोदी ने कहा- देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। हालांकि सरकार ने खुद पिछले कुछ सालों से RBI के जरिए सोने की खरीद बढ़ा दी है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 15 May 2026 4:06 pm

ट्रंप-शी वार्ता में ताइवान को लेकर चीन की कड़ी चेतावनी, ईरान और व्यापार पर बनी सहमति

चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी चिनफिंग ने बैठक में ताइवान को चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यह विषय बीजिंग की ‘रेड लाइन’ है और इसमें किसी भी प्रकार की गलती या उकसावे की स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।

देशबन्धु 15 May 2026 9:36 am

इस्लामाबाद की राजनयिक गलतियों के चलते पाकिस्तान-यूएई संबंधों में बढ़ रहा तनाव: रिपोर्ट

पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच राजनयिक तनाव अब महज छोटी-मोटी रुकावट नहीं लगता, बल्कि द्विपक्षीय साझेदारी को हुआ नुकसान अब स्थायी प्रतीत होता है

देशबन्धु 15 May 2026 6:40 am

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने आंधी-तूफान और बिजली गिरने से हुई जनहानि पर जताया शोक

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में बुधवार की शाम को आए तेज आंधी-तूफान, भारी बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने से हुई भारी जनहानि और बड़े पैमाने पर नुकसान पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शोक संदेश भेजा।

देशबन्धु 15 May 2026 3:50 am

जल्द खत्म नहीं होगा पश्चिम एशिया का संकट, मंदी का खतरा बढ़ा: सिंगापुर पीएम

दुनिया भर के नेताओं ने ईरान युद्ध और उससे पैदा हो रहे बड़े आर्थिक संकट को लेकर चेतावनी देनी शुरू कर दी है। इसी बीच सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने भी कहा कि पश्चिम एशिया का यह संकट जल्दी खत्म होने वाला नहीं है और इसके आर्थिक नुकसान और बढ़ सकते हैं।

देशबन्धु 14 May 2026 11:18 pm

आज का एक्सप्लेनर:खून का थक्का पैर से फेफड़े में पहुंचा, जिससे प्रतीक यादव की मौत; ये कैसी बीमारी, क्या शरीर पर चोटों से कनेक्शन

पैर की एक नस में बना खून का थक्का, खामोशी से बहते हुए फेफड़े तक पहुंचा और 13 मई की सुबह अचानक सपा मुखिया अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निकला- 'पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म’। उनके शरीर में 6 जगह चोट के निशान भी मिले हैं। पल्मोनरी एम्बोलिज्म कैसी बीमारी है और इसका प्रतीक के शरीर पर मिले चोट के निशान से क्या कोई कनेक्शन है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला?जवाब: मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना के बेटे प्रतीक की 13 मई की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। लखनऊ के सिविल अस्पताल में चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डीसी पांडेय के मुताबिक- जब प्रतीक को लाया गया, तब उनकी पल्स पूरी तरह डाउन थी। दिल भी रुक चुका था। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, यानी KGMU में प्रतीक का पोस्टमॉर्टम हुआ। 13 मई की शाम जारी शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया कि प्रतीक के फेफड़ों में बड़ी मात्रा में खून के थक्के जम गए थे। जिससे दिल और फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। सवाल-2: आखिर क्या है पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म?जवाब: प्रतीक की मौत के पीछे जो बीमारी बताई गई, उसमें 3 टर्म हैं- पल्मोनरी, यानी फेफड़े से जुड़ी दिक्कत, थ्रॉम्बो, यानी खून का थक्का और एम्बोलिज्म, यानी शरीर की धमनियों में कोई रुकावट। 'पल्मोनरी थ्रॉम्बो-एम्बोलिज्म' को डॉक्टरी जुबान में PE कहा जाता है। इसमें शरीर के किसी दूसरे हिस्से से खून का थक्का फेफड़े के अंदर या फेफड़े तक जाने वाली नसों तक पहुंच जाता है और खून के फ्लो को ब्लॉक कर देता है। इससे फेफड़े काम नहीं कर पाते और ऑक्सीजन शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंच पाती। इससे कार्डियक अरेस्ट आता है और मौत हो जाती है। आम तौर पर ये थक्का पैर या पेल्विस के इलाके की नसों में बनना शुरू होता है। फिर ये टूटकर खून के फ्लो के साथ-साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है। ग्राफिक में पूरा प्रॉसेस देख लीजिए- अमेरिका के मेडिकल सेंटर क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, PE के चलते अमेरिका में हर साल कम से कम एक लाख लोगों की मौत होती है। हालांकि भारत में इस बीमारी से मौतों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। सवाल-3: ये बीमारी कैसे हो जाती है?जवाबः PE के ज्यादातर मामलों की शुरुआत DVT, यानी 'डीप वेन थ्रॉम्बोसिस' से होती है। इसमें आमतौर पर पैर की नस में खून का थक्का बनने लगता है। DVT 4 बड़ी वजहों से हो सकती है... 1. लंबे समय तक निष्क्रिय रहना 2. कोई सर्जरी या चोट लगना 3. खून में थक्का बनने के डिसऑर्डर 4. कैंसर या कुछ और बीमारियां हॉर्मोन थेरेपी और कुछ गर्भनिरोधक गोलियों से भी PE का खतरा हो सकता है। इसके अलावा मोटापे, किडनी की बीमारी, नसों की बीमारी 'वैरिकोज वेंस', परिवार में किसी को DVT या PE होने, स्टेरॉयड्स जैसी कुछ दवाएं लेने, धूम्रपान और किसी तरह के इन्फेक्शन से भी DVT और PE हो सकता है। सवाल-4: इस बीमारी में अचानक मौत होना कितना कॉमन है?जवाब: आमतौर पर PE के लक्षण अचानक ही नजर आते हैं। कुछ मामलों में पैरों में दर्द, सूजन और गर्मी महसूस हो सकती है। क्लीवलैंड के मुताबिक, PE की चपेट में आए करीब एक-तिहाई लोगों की कुछ ही घंटे के अंदर मौत हो जाती है। अक्सर इलाज मिलने से पहले ही। सवाल-5: क्या प्रतीक की अचानक मौत के पीछे PE ही इकलौती वजह है?जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतीक करीब 5 साल से हाई ब्लड प्रेशर और DVT से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। प्रतीक की पत्नी अपर्णा की करीबी मित्र रीना सिंह ने बताया कि 4 महीने पहले उन्हें पता चला था कि प्रतीक को फेफड़े में इन्फेक्शन हुआ है, जिसका ऑपरेशन हुआ था। 30 अप्रैल को भी प्रतीक सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द की शिकायत के चलते एडमिट हुए थे। 3 दिन में उन्हें थोड़ा आराम मिला। रिपोर्ट्स हैं कि वो अपनी मर्जी से बिना छुट्टी लिए घर चले गए। मेदांता हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रुचिता शर्मा ने बताया, प्रतीक हमारे पुराने मरीज थे। मैं काफी समय से उनके हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन और DVT जैसी दिक्कतों के लिए देख रही थी। कुछ ही दिन पहले, उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने के बाद सांस फूलने के चलते यहां एडमिट किया गया था। दरअसल, PE के इलाज के लिए कुछ दिनों तक खून को पतला करने वाली ‘ब्लड थिनर’, यानी एंटीकोगुलेंट दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मामला हो तो ऑपरेशन या सर्जरी करके भी थक्के को निकाला जाता है। कुछ मामलों में पेट की एक बड़ी नस में एक जाल डाल दिया जाता है, ताकि थक्का फेफड़े तक न पहुंचे। डॉ. रुचिता शर्मा के मुताबिक, प्रतीक खून पतला करने वाली और बीपी की दवाइयां रेगुलर ले रहे थे। इस बार क्या हुआ, ये कहना मुश्किल है। उत्तर प्रदेश में लाइफलाइन हॉस्पिटल के संचालक और सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. सतीश कुमार कहते हैं, PE के मरीजों को अस्पताल में रखकर इलाज करना जरूरी है, ताकि कंडीशन लगातार मॉनिटर की जा सके। अगर PE का इलाज पूरा न हो पाए, तो कुछ खून के थक्के बचे रह सकते हैं। DVT के चलते भी दोबारा थक्के बन सकते हैं और PE हो सकता है। डॉ. सतीश के मुताबिक, हो सकता है कि प्रतीक की थेरेपी पूरी न हुई और उन्होंने बिना पूरी डोज लिए अस्पताल से डिस्चार्ज ले लिया। ऐसे में सबसे प्रबल संभावना है कि उन्हें अचानक PE हुआ, जिससे उनके फेफड़े और फिर दिल ने काम करना बंद कर दिया। सवाल-6: क्या प्रतीक के शरीर पर चोट के निशान से इसका कोई कनेक्शन है?जवाब: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतीक की छाती, दाएं हाथ, कोहनी, बाएं हाथ सहित कुल 6 जगहों पर चोट के निशान पाए गए… इन सभी को ‘कन्ट्यूजन’, यानी अंदरूनी चोट का निशान बताया गया है। साथ ही सभी चोटों के नीचे एकीमॉसिस, यानी खून जमने के निशान पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी चोटें मौत लगने से पहले की हैं। पहली, दूसरी और तीसरी चोट 5 से 7 दिन, जबकि चौथी, पांचवीं और छठी चोट करीब 1 दिन पुरानी है। डॉ. सतीश कुमार के मुताबिक, ‘पैर पर तो PE या DVT के चलते चोट का निशान हो सकता है, लेकिन जिस तरह के निशान प्रतीक के शरीर पर हैं, उनका इस बीमारी से संबंध होना मुश्किल है। इस तरह के निशान किसी और मेडिकल कंडीशन, एलर्जी या दवाइयों के चलते भी हो सकते हैं।’ सवाल-7: प्रतीक की मौत पर किन सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले?जवाब: प्रतीक के शरीर पर चोट के निशान उनकी मौत के पहले के हैं। ये निशान कैसे पड़े, अभी इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। प्रतीक की मौत पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने पहले बयान में संकेत दिया था कि प्रतीक फाइनेंशियल स्थितियों के चलते तनाव में थे। 19 जनवरी को प्रतीक ने अचानक इंस्टाग्राम पोस्ट पर अपर्णा से तलाक की घोषणा करते हुए कहा था- अपर्णा ने मेरी जिंदगी नरक बना दी।’ हालांकि, 9 दिन बाद दोनों में सुलह हो गई थी। प्रतीक ने अपर्णा के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- ‘All is Good’, यानी सब अच्छा है। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग कई सवाल उठा रहे हैं…. पूरे हार्ट और फेफड़ों के थ्रोम्बोएम्बोलिक मटेरियल, यानी थक्के वाले हिस्सों को आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा विसरा, यानी अंदरूनी अंगों के सैंपल भी सुरक्षित किए गए हैं, ताकि किसी जहर या केमिकल की पुष्टि की जा सके। सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने मांग की है कि हाई कोर्ट के किसी पूर्व जज से प्रतीक की मौत की जांच करवाई जाए। ---- ये खबर भी पढ़ें… प्रतीक यादव की मौत से ससुराल वाले शॉक्ड:उत्तरकाशी में अपर्णा के भाई बोले- परिवार के साथ गलत हुआ; पूरे मामले की जांच होनी चाहिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भाई और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के निधन की खबर बुधवार को उत्तरकाशी के डुंडा ब्लॉक स्थित गढ़बरसाली (कुरा) गांव तक पहुंची तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। पूरी खबर पढ़ें..

दैनिक भास्कर 14 May 2026 6:19 pm

2026 चीन-अमेरिका रिश्तों का ऐतिहासिक साल बताएंगे : राष्ट्रपति शी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 2026 एक ऐतिहासिक, लैंडमार्क साल होगा, जो चीन-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगा।

देशबन्धु 14 May 2026 10:51 am

चीन के ग्रेट हॉल में ट्रंप का भव्य स्वागत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर पहुंचे हुए हैं। चीन के ग्रेट हॉल में गुरुवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति ट्रंप का स्वागत किया

देशबन्धु 14 May 2026 9:07 am

अमेरिका पर बढ़ता कर्ज बना चिंता का कारण, ईरान युद्ध के बाद पेट्रोडॉलर व्यवस्था पर भी मंडराने लगे सवाल

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक बड़ी विशेषता उसकी खुली निवेश प्रणाली है। दुनिया का कोई भी देश या निवेशक अमेरिका में आसानी से निवेश कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पैसा निकाल भी सकता है। यही व्यवस्था अब अमेरिका के लिए जोखिम का कारण बनती दिख रही है।

देशबन्धु 14 May 2026 8:57 am

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप, एक नागरिक की मौत, दो लोग जबरन गायब

बुधवार को एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कहा कि पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की ओर से बलूचिस्तान में कम से कम एक आम नागरिक को बिना कानूनी प्रक्रिया के मार दिया गया और दो अन्य लोगों को जबरन गायब कर दिया गया।

देशबन्धु 14 May 2026 8:54 am

ब्लैकबोर्ड-’अब तुम हिंदू नहीं, बाप की लाश नाले में बहाओ’:पोस्टमार्टम हाउस में 22 दिन तक सड़ती रही लाश, कसूर इतना कि धर्म बदल लिया

‘7 जनवरी 2025। सुबह के 10 बजे थे। पापा की किडनी फेल होने की वजह से मौत हो गई थी। देखते ही मां रो-रो कर बेहाल हो गई। शव बरामदे में रखते ही चीख-पुकार मच गई। सभी रिश्तेदार घर पहुंचने लगे। सभी कहने लगे- अंतिम संस्कार की तैयारी करो। जब तक लाश दरवाजे पर रहेगी, सब रोते रहेंगे। हम लोग अर्थी सजा रहे थे, तभी गांव के लोगों के साथ सरपंच आए। उनके साथ थानेदार और तहसीलदार भी थे। कुछ देर तक शव देखते खड़े रहे, फिर कड़क आवाज में बोले- ‘देखो, तुम अपने बाप की लाश गांव के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकते। वहां केवल दलित हिंदू ही शव दफना सकते हैं। तुम लोगों ने धर्म बदला है। इसलिए गांव के बाहर लाश दफनाओ'। तुम लोगों ने महार जाति के खिलाफ जाकर ईसाई धर्म अपनाया है। इसलिए लाश को गांव के बाहर दफनाओ'। खाट पर बैठे रमेश बघेल अपने पापा की मौत का दिन याद करते हुए ये वाकया बताते हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज ऐसे परिवारों की कहानी, जिन्होंने ईसाई धर्म अपनाया तो गांव के लोगों ने विरोध किया। परिवार में किसी की मृत्यु हुई तो उसके शव को ईसाई धर्म के मुताबिक दफनाने से रोक दिया। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर छिंदावाड़ा गांव। रास्ते में कई जगह ईंट से बनी कब्र नजर आ रही हैं। गांव पहुंचते ही मेरी मुलाकात 42 साल के रमेश बघेल से हुई। रमेश बताते हैं, ‘उस दिन हम सभी पापा की लाश के पास बैठकर रो रहे थे। अचानक सरपंच और गांव के लोग कहने लगे- लाश को गांव की सीमा से बाहर दफनाओ या फिर किसी नाली या गटर में फेंक दो। तुम लोगों ने महार जाति के खिलाफ जाकर ईसाई धर्म अपनाया है, इसलिए लाश यहां नहीं दफना सकते। सोचने लगा कि लोग तो कुत्ते-बिल्ली को भी मौत के बाद अपनी जमीन में दफनाते हैं। मुझसे पापा की लाश नाली में फेंकने को कहा गया, जबकि पापा तो 13 एकड़ जमीन के मालिक थे। मरने के बाद उन्हें दो गज जमीन भी न दे सका।' रमेश कहते हैं- 'उनकी बातें सुनते ही मैं लोगों से मिन्नतें करने लगा। कहने लगा कि सिर्फ मूर्ति पूजा में यकीन नहीं करता हूं, इसलिए ईसा-मसीह को मानता हूं। मैंने घर पर बनी चर्च में भी ईसा मसीह की मूर्ति नहीं लगाई है। पक्का ईसाई नहीं हूं। मेरे पापा को कब्रिस्तान में जगह मिलनी चाहिए। जो आदमी इस गांव में पैदा हुआ। पला-बढ़ा, उसे मरने के बाद गांव की मिट्टी नसीब होनी चाहिए। इतनी गुहार लगाने पर सरपंच ने गाली देते हुए कहा- क्या तुम लोगों ने हमसे पूछकर धर्म बदला था? किसी भी कीमत पर तुम्हें ये लाश गांव में नहीं दफनाने देंगे। तुम ही नहीं, तुम्हारे पापा भी ईसाई धर्म मानते थे। ईसाइयों के कब्रिस्तान जहां हों, वहां लाश लेकर जाओ। यह सुनते ही मैं फूट-फूटकर रोने लगा। फिर से हाथ जोड़ते हुए कहा- अगर गांव के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकता, तो अपनी जमीन में दफनाऊंगा। पापा ने बड़ी मेहनत-मजदूरी करके 13 एकड़ जमीन खरीदी थी। अपने भाइयों से कहा कि पापा की अर्थी तैयार करो। सरपंच और बाकी लोग फिर से भड़क गए। बोले- पंचायत ने फैसला लिया है कि तुम अपनी जमीन में भी लाश नहीं दफना सकते। पंचायत का फैसला तुम्हें मानना पड़ेगा। हमने एक साल पहले ही तय कर लिया था कि अब से ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों को गांव के कब्रिस्तान में शव नहीं दफनाने देंगे। केवल दलित हिंदू ही यहां शव दफना सकते हैं। अगर तुमने गांव वालों के खिलाफ जाकर शव दफनाया, तो बीवी-बच्चों के बारे में सोच लेना। ये बताते हुए रमेश की आंखें भर आईं। खुद को संभालते हुए वो बोले- उस वक्त ऐसा लगा कि सच में अनाथ हूं।' 'उनसे कहा- देखता हूं, कैसे आप लोग पापा की लाश को नहीं दफनाने देंगे। मामले को कोर्ट में लेकर जाऊंगा। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, पापा की लाश दफनाऊंगा नहीं। सुनते ही पुलिस बोली- अभी फिलहाल, लाश को जगदलपुर पोस्टमार्टम हाउस लेकर जाना होगा। उधर, पुलिस पापा की लाश पोस्टमार्टम हाउस लेकर गई और मैं रोते हुए तुरंत बिलासपुर हाईकोर्ट के लिए निकल पड़ा।' रमेश बघेल को उनके पिता की लाश न दफनाने देने का यह पहला मामला नहीं था। गांव में ऐसे कई ईसाई परिवारों को शव दफनाने से रोका गया था। रमेश ने बिलासपुर पहुंचकर एक वकील की मदद से हाईकोर्ट में अपील दायर की। कोर्ट ने करीब एक हफ्ते बाद फैसला सुनाया- 'ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के लिए पहले से कब्रिस्तान बने हैं। वहीं ले जाना होगा। गांव में दफनाने का आदेश देने से माहौल खराब हो जाएगा।' कोर्ट के फैसले से मुझे बहुत निराशा हुई। उसके बाद दिल्ली के लिए फ्लाइट ली और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।' रमेश आगे बताते हैं कि, 'सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। कहा- बहुत दुख की बात है कि एक बेटे को अपने पिता का शव दफनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आना पड़ा। 4 महीने में राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट दे। सरकार ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों के लिए अलग से कब्रिस्तान की व्यवस्था करे। लेकिन उस रिपोर्ट का क्या हुआ, आज तक पता नहीं चला।' 'पिता की कोई तस्वीर है आपके पास?' मैंने पूछा ‘है न! बड़ी तस्वीर है, लेकिन एक बक्से में है। उनकी तस्वीर देखता हूं तो ये सारी बातें याद आने लगती हैं। मां भी उस तस्वीर को देखकर रोने लगती हैं। फिलहाल रुकिए, दिखाता हूं।’ रमेश घर से पास्टर यानी ईसाई धर्म के प्रचारक पिता सुरेश बघेल की एक बड़ी-सी तस्वीर निकालकर लाते हैं। उनकी नजर बार-बार उस तस्वीर पर रुक जा रही है। मानो वह खुद को रोने से रोक रहे हों। वह कहते हैं- 'पापा का शव 22 दिन तक जगदलपुर पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा रहा। जब सुप्रीम कोर्ट से भी न्याय नहीं मिला तो उन्हें जगदलपुर में ही बने ईसाई कब्रिस्तान में दफनाया। गांव नहीं ला पाया, जिसका जिंदगीभर मलाल रहेगा। उन 22 दिनों तक घर का चूल्हा नहीं जला। शव को अंतिम संस्कार किए बिना चूल्हा कैसे जला सकते थे? पड़ोसी हमें खाना खिला रहे थे। आखिर केस लड़ने में ही हमारे लाख-दो लाख खर्च हो गए, लेकिन पिता की लाश को न्याय दिलाने का खर्च गिनाते हुए अच्छा नहीं लग रहा। वो सब याद करके रो देता हूं। अब एक साल बीत चुके हैं। दिसंबर 2024 की बात है। पिता को हाई लेवल डायबिटीज था। तबीयत लगातार खराब होती जा रही थी। करीब हफ्तेभर उन्हें जगदलपुर के अस्पताल में भर्ती रखा। 24 तारीख को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर आए थे। एकदम ठीक लग रहे थे। उसके 14 दिन बाद यानी 7 जनवरी 2025 की बात है। सुबह के 8 बजे थे। पत्नी ने नाश्ते में दलिया बनाया था। कहने लगीं- बाबूजी, अभी तक सो कर नहीं उठे हैं, रोज तो जल्दी उठ जाते थे। मैंने मां से पिताजी को जगाने के लिए कहा। मां ने आवाज दी, हिला-डुलाया। जब नहीं जगे तो रोने लगीं। पापा की मौत हो चुकी थी।' इस बातचीत के दौरान सामने एक अलग तरह का सफेद रंग का मकान दिख रहा है। बार-बार मेरी नजर उस पर जा रही है। रमेश कहते हैं- ‘यही मेरा चर्च है। पिताजी ने 1994 में बनवाया था। वह भी ईसा मसीह को मानते थे। दरअसल, मेरे घर में अक्सर लोगों पर देवी-देवता सवार हो जाते थे। झाड़-फूंक चलती रहती थी।’ रमेश कहते हैं कि- 'ओझा ने बताया था कि हमारी पड़ोसन ने करिश्मा कर दिया है। तुम्हारे परिवार पर भूत भेज दिया है। उससे कई बार पड़ोसियों से झगड़े हुए और मार-पिटाई भी। परेशान होकर पिताजी चर्च में जाने लगे। धीरे-धीरे उनका ईसाई धर्म के प्रति झुकाव बढ़ता गया और हिंदू धर्म से विश्वास उठने लगा। उसके बाद मेरा पूरा परिवार चर्च में प्रार्थना करने जाने लगा। ईसाई धर्म मानने के बाद हमारे घर में भूत-प्रेत की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई। उसके बाद पिताजी ने यह चर्च बनवाया। हमने चर्च में आज भी ईसा मसीह की मूर्ति नहीं रखी है। इसमें सिर्फ प्रार्थना करते हैं। आखिर इसमें बुराई क्या है?' बातचीत के बीच रमेश बघेल की मां आ जाती हैं। रमेश इशारा करते हैं- 'अब बातचीत बंद कीजिए। मां यह सब सुनेंगी, तो रोने लगेंगी। वह बताते हैं कि अब तो ईसाई धर्म मानने वाले लोगों की एक टीम तैयार कर ली है। जिसके घर में कोई दिक्कत आती है, जाकर हम उसकी मदद करते हैं। किसी के घर में मृत्यु होने पर इलाके में उसके दफनाने की व्यवस्था करते हैं। काश, पिता को अपनी जमीन में दफना पाता और उनकी कब्र पर जाकर उन्हें याद कर पाता!' रमेश बघेल के घर से दो किलोमीटर दूर चंद्रवती का घर है। कच्चे मकान के आंगन में वह कई घंटे से बैठी हैं। साथ में बेटी ओजमनी भी हैं। चंद्रवती को गोंडी भाषा ही आती है। उनकी बेटी ओजमनी बताती हैं- 'मैं तो अपने पापा के शव को गांव लेकर आई ही नहीं। कैसे आती? उनकी मृत्यु से पहले ही गांव के लोग घर के बाहर जुट गए थे। कह रहे थे- गांव में शव को लेकर आए, तो पूरे घर को तोड़ देंगे। 21 जनवरी 2026 की बात है। विशाखापट्टनम में पढ़ाई करती थी। घर से खबर आई कि पिता की तबीयत खराब है। उनके ब्रेन में खून जम गया है। मम्मी और मेरे भाई पापा को लेकर रायपुर भागे। दो दिन वहां भर्ती रहे। 23 तारीख की सुबह उनकी सर्जरी हुई। उसके कुछ घंटे बाद ही मौत हो गई। उस वक्त हम नहीं चाहते थे कि किसी तरह का झगड़ा-विवाद हो। इसलिए पापा के शव को जगदलपुर के ईसाई कब्रिस्तान में ले जाकर दफनाया।' मैंने ओजमनी से पूछा- ‘धर्म कब बदला?’जवाब मिला- 'बहुत साल पहले। अब तो 25 साल की हूं। ईसाई धर्म में ही पैदा हुई। मम्मी बताती हैं कि मेरे छोटे चाचा पास्टर यानी ईसाई धर्म के प्रचारक थे। उस वक्त मम्मी को जितने भी बच्चे होते, सभी की मौत हो जाती थी। चाचा के कहने पर मम्मी चर्च जाकर प्रार्थना करने लगीं। हम पैदा हुए और सभी बच गए। हम लोग तीन बहन और एक भाई हैं। तब से हम ईसाई धर्म को मानने लगे। लेकिन बस्तर और मेरे गांव में हाल-फिलहाल में जो कुछ हुआ है, वह तो कुछ भी नहीं है। यहां कई इलाके तो ऐसे हैं, जहां ईसाई धर्म मानने की वजह से कई दफनाए हुए शवों को कब्र से बाहर निकाल दिया गया।' उनकी बात सुनकर मेरी भौहें तन जाती हैं। मन-ही-मन सवाल उठ रहा है- शायद यह लड़ाई कफन और दफन की है। इसके बाद मैं बस्तर के उस इलाके के लिए निकल पड़ता हूं, जहां एक शख्स के पिता का शव 90 गांव के लोग कब्र से निकालकर ले गए। पूरी कहानी अगले गुरुवार, 21 मई को ‘ब्लैकबोर्ड’ की नई सीरीज में… ---------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-सुहागरात पर ड्रग्स लेने गया, रातभर नहीं लौटा:हर हफ्ते लड़कियां बदलता, सड़क पर अंडरवियर में मिला; नशे के लिए 25 लाख की नौकरी छोड़ी 'जुलाई 2022 की वो रात… जिस रात के लिए ज्यादातर लोग सपने बुनते हैं। उस दिन मेरी सुहागरात थी। कमरा सज चुका था। रिश्तेदार थककर सो गए थे। दुल्हन मेरे कमरे में इंतजार कर रही थी। मैं उसके कमरे में गया और उससे बात किए बिना बगल में लेट गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 1- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 14 May 2026 5:13 am

रात 3 बजे मीटिंग, राहुल एक्टिव, लेकिन CM तय नहीं:केरलम के विधायकों को वेणुगोपाल पसंद, लीडर सतीशन की तरफ; राहुल-प्रियंका फंसे

10 दिन बीत गए, बहुमत के बाद भी कांग्रेस केरलम में CM तय नहीं कर पाई। राहुल गांधी एक्टिव हैं, 12 मई की रात तीन बजे तक मल्लिकार्जुन खड़गे के घर मीटिंग चली, फिर भी नाम फाइनल नहीं कर पाए। केरलम के साथ ही 4 मई को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी के चुनाव नतीजे आए थे। चारों राज्यों में नए CM की शपथ हो गई, लेकिन केरलम को अब तक CM नहीं मिला। पार्टी नेता जयराम रमेश के मुताबिक, 14 मई को CM के नाम का ऐलान होगा। राहुल के भरोसेमंद केसी वेणुगोपाल, राज्य में कांग्रेस के सबसे बड़े लीडर वीडी सतीशन और पार्टी के सबसे अनुभवी रमेश चेन्नीथला दावेदार हैं। बीते 5 दिन से CM तय करने के लिए मीटिंग चल रही हैं। इस उलझन में केरलम में पार्टी टूटने की हालत हो गई। सोर्स बताते हैं कि हाईकमान केसी वेणुगोपाल को CM बनाना चाहता है, सतीशन और रमेश चेन्नीथला इसके विरोध में हैं। कांग्रेस समर्थक सतीशन के साथ हैं, लेकिन विधायकों का समर्थन वेणुगोपाल को हासिल है। वहीं, पार्टी ने 2011 में रमेश से वादा किया था कि उन्हें आगे बड़ा पद मिलेगा। हो सकता है कि दो बड़े दावेदारों की लड़ाई में वे बाजी मार ले जाएं। 3 दिन से राहुल एक्टिव, रात तीन बजे तक खड़गे के घर मीटिंग पार्टी सोर्स के मुताबिक, केरलम का CM तय करने के लिए 12 मई की देर रात करीब 3 बजे तक मल्लिकार्जुन खड़गे के घर मीटिंग हुई। राहुल गांधी 3 दिन से केरलम के कांग्रेस नेताओं, समर्थकों, दावेदारों और सहयोगी पार्टियों से बात कर रहे हैं। फिर भी मामला फंसा हुआ है। आखिरी फैसला राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ही करेंगे। वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी नेताओं से बात कर रही हैं। केरल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनसे अलग से मुलाकात की है। सोर्स का दावा: राहुल चाहते हैं, CM हाईकमान की ओर से थोपा हुआ न लगे सोर्स बताते हैं कि सिर्फ विधायकों की संख्या के आधार पर फैसला करना होता, तो नतीजों के बाद 2 दिन में ही CM चुन लेते। हाईकमान विधायकों, पार्टी के नेताओं और समर्थकों की राय जानने की कोशिश कर रहा है। राहुल गांधी दिल्ली से CM चुनकर नहीं भेजना चाहते। वे चाहते हैं कि सबकी सहमति से फैसला हो। सहयोगी दलों और सिविल सोसायटी की भी राय ली जा रही है। राहुल गांधी 3 दिन में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष सनी जोसेफ और पूर्व अध्यक्षों से अलग-अलग मिल चुके हैं। अब तक ये तीन सिनेरियो सामने हैं… 1. 50% सहमति वेणुगोपाल के नाम पर राहुल गांधी की पहली पसंद केसी वेणुगोपाल हैं, लेकिन उनके लिए कांग्रेस नेताओं का फीडबैक अच्छा नहीं है। राहुल गांधी कोई चूक नहीं होने देना चाहते, इसलिए सबसे मिलकर नाम तय कर रहे हैं। वेणुगोपाल विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े। वे CM बने, तो उनके लिए उपचुनाव होगा। वेणुगोपाल केरल की अलाप्पुझा सीट से सांसद हैं। उन्हें इस्तीफा देना होगा और विधायक चुनकर आना होगा, यानी पार्टी को दो सीटों पर चुनाव में उतरना होगा। अभी ये रिस्क लेना आसान नहीं है। 2. 40% सहमति सतीशन के नाम पर वीडी सतीशन 5 साल से विपक्ष के नेता थे। लेफ्ट सरकार को घेरते रहे। सतीशन के चेहरे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन UDF ने चुनाव लड़ा। उनका ग्राउंड कनेक्ट अच्छा है। 22 सीटें जीतने वाली सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग भी सतीशन के नाम पर राजी है। अगर हाईकमान किसी और का नाम फाइनल करती है, तो गठबंधन पर आंच आ सकती है। पहले कांग्रेस में सतीशन के नाम पर सहमति बनी थी, इसलिए केसी वेणुगोपाल को चुनाव नहीं लड़ाया गया। चुनाव के बाद विधायकों ने केसी वेणुगोपाल का समर्थन किया, उससे सतीशन की सरकार चलाने की क्षमता पर सवाल उठा है। 3. 10% सहमति रमेश चेन्नीथला के नाम पर रमेश चेन्नीथला का नाम तीसरे नंबर पर है। अगर केसी वेणुगोपाल रमेश चेन्नीथला का समर्थन कर दें, तो समीकरण बदल जाएंगे। सतीशन भी वरिष्ठ होने की वजह से चेन्नीथला का विरोध नहीं कर पाएंगे और विधायकों का समर्थन चेन्नीथला के पक्ष में चला जाएगा। ऐसा भी हो सकता है कि सतीशन चेन्नीथला का समर्थन कर देें। ऐसे में केसी वेणुगोपाल को पीछे हटना पड़ सकता है। वायनाड में पोस्टर- राहुल-प्रियंका यहां से दोबारा नहीं जीत पाओगे कांग्रेस में टूट का एक संकेत वायनाड से है। ये 15 साल में कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीट है। 2019 में राहुल गांधी अमेठी से हारे, लेकिन वायनाड से 4.3 लाख वोट से जीते। अब यहां पोस्टर लगे हैं- राहुल और प्रियंका वायनाड को भूल जाओ, यहां फिर नहीं जीतोगे। वायनाड अगला अमेठी होगा। ये पोस्टर कांग्रेस समर्थकों ने लगाए हैं। उन्होंने हाईकमान को चेताया है कि केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया, तो ठीक नहीं होगा। एक्सपर्ट: कांग्रेस के पास अच्छे मैनेजर नहीं, इसलिए राहुल-प्रियंका फंसे वहीं, कांग्रेस को लंबे वक्त तक कवर करने वाले जर्नलिस्ट आदेश रावल कहते हैं कि हाईकमान के सामने संकट है कि विधायकों की सुने या समर्थकों की। इसलिए पूरी प्रक्रिया में समय लग रहा है। राहुल गांधी चाहते है कि ऑब्जर्वर भेजकर विधायकों की राय लें और उनके साथ जाएं, लेकिन यहां वे फैसला नहीं कर पाए हैं। …………………………… केरलम चुनाव पर ये खबर भी पढ़ें...49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं,1957 में केरलम से शुरुआत; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाला लेफ्ट अलायंस LDF हार गया। केरलम में इस हार के बाद 49 साल में यह पहली होने जा रहा है, जब देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं है। देश में वामपंथ का विस्तार, जीत और हार से जुड़ी बड़ी बातें… पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 14 May 2026 5:08 am

ट्रंप के साथ एयर फोर्स वन में सवार होकर चीन दौरे पर पहुंचे एलन मस्क, शी जिनपिंग के साथ बीजिंग शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

अरबपति उद्योगपति एलन मस्क ने पुष्टि की कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कई बड़े अमेरिकी कारोबारी नेताओं के साथ एयर फोर्स वन में बीजिंग जा रहे हैं

देशबन्धु 13 May 2026 11:27 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या देश पर कोई बड़ा संकट आने वाला है, 3 संकेत; सरकार क्या कर रही, आप कैसे तैयार रहें

बैंकर उदय कोटक ने मंगलवार को चेतावनी दी- ‘बड़ा झटका आने ही वाला है… मुश्किल वक्त के लिए तैयार रहें।’ इससे दो दिन पहले पीएम मोदी ने भी कहा था- 1 साल तक सोना न खरीदें और पेट्रोल-डीजल कम खर्च करें। तो क्या कोई बड़ा संकट आने वाला है? हां, तो सरकार क्या कर रही और आप कैसे तैयार रहें; आज के एक्सप्लेनर में इसी की बात… सवाल-1: संकट के संकेत क्या हैं? जवाब: 3 बड़ी बातें हैं- 1. प्रधानमंत्री की 7 अपीलें 10 मई को तेलंगाना के सिकंदराबाद की रैली में कहा- कोरोना सदी का सबसे बड़ा संकट था, तो अमेरिका-ईरान जंग से बने हालात इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। इससे निपटने के लिए देशवासियों से 7 अपील की। कुछ देर बाद ही बीजेपी ने सोशल प्लेटफॉर्म पर ये पोस्टर भी जारी कर दिया- पश्चिम एशिया की जंग 27 फरवरी को शुरू हुई थी। सरकार कहती रही सब ठीक है। लेकिन ढाई महीने बाद प्रधानमंत्री सबसे अपील कर रहे हैं। 2. वित्त मंत्रालय ने कहा- ‘महंगे तेल का बोझ टाल नहीं सकते’ 3. सोने-चांदी पर अचानक इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाना सवाल-2: आखिर वो संकट होगा क्या? जवाब: मौजूदा हालात में 3 ऐसी बातें हैं जो लोगों के लिए संकट पैदा करेंगी… 1. पेट्रोल-डीजल 17 रुपए तक महंगा हो सकता है इन तीनों कंपनियों की नेट वर्थ अभी 3.48 लाख करोड़ रुपए है। अगर यही घाटा जारी रहा, तो सिर्फ दो और तिमाही यानी 6 महीने में इनकी नेटवर्थ शून्य हो सकती है। सीधे शब्दों में कंपनियां कागज पर दिवालिया हो जाएंगी। इसलिए पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने की चर्चा है। अब सवाल आता है कितना? मोटा-मोटी कैलकुलेशन है कि कंपनियों को अपना घाटा पूरा करने के लिए पेट्रोल पर 16 रुपए और डीजल 17 रुपए बढ़ाने की जरूरत है। हिसाब नीचे ग्राफिक में देख लीजिए- बीते दो महीने में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के चलते 120 से ज्यादा देशों में दाम बढ़ाए जा चुके हैं। पाकिस्तान में 44%, अमेरिका में 42% और चीन में 31%। 2. महंगाई दर 1% बढ़ने से आपका मंथली बजट 15% बढ़ सकता है अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में 15% की बढ़ोतरी होने पर थोक महंगाई दर में 1% की सीधी बढ़ोत्तरी होती है। ये मौजूदा 3.7% से बढ़कर 4.7% हो सकती है। सुनने में ये एक आंकड़ा है, लेकिन असल जिंदगी में इसके असर काफी गहरे हैं। मान लीजिए कि पेट्रोल-डीजल के दाम ₹15 प्रति लीटर बढ़ जाते हैं, तो एक मिडिल क्लास फैमिली का बजट कुछ ऐसे बिगड़ेगा- इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में काम कर रहे लोगों की नौकरी का संकट होगा। ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ऑर्गेनाइजेशन 'ऑल इंडियन मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मेंबर शैलेंद्र गुप्ता के मुताबिक, पहले से पेट्रोल-डीजल के संकट की वजह से 10% गाड़ियां नहीं चल रही हैं। अगर तेल की कीमत बढ़ी तो 30% गाड़ियां नहीं चल पाएंगी।’ 3. जून-जुलाई में 39 मिलियन टन खाद की जरूरत, स्टॉक में सिर्फ आधा सवाल-3: सरकार के पास इस संकट से निपटने की क्या तैयारी है? जवाब: सरकार का दावा है कि उसने तेल, गैस और खाद का जरूरी स्टॉक कर रखा है… 60 दिन के लिए कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद: भारत के पास विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पादुर के स्टोरेज प्लांट में 5.53 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चा तेल रखने की कैपिसिटी है। इनमें अभी 64% यानी लगभग 3.37 MMT कच्चा तेल भरा है। हरदीप पुरी के मुताबिक, भारत के पास 60 दिन के कच्चा तेल का स्टॉक मौजूद है। LPG का प्रोडक्शन डेढ़ गुना तक बढ़ा: भारत ने अपनी जामनगर, पानीपत, मथुरा और गुवाहाटी समेत कुल 23 गैस-तेल रिफाइनरियों में LPG का प्रोडक्शन बढ़ाया है। पुरी के मुताबिक, ‘पहले हमारा घरेलू LPG उत्पादन रोजाना 35 से 36 हजार मीट्रिक टन था, जिसे हमने बढ़ाकर 50 से 54 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचा दिया है।’ खाद का स्टॉक आम दिनों से ज्यादा: फर्टिलाइजर विभाग की एडिशनल सेक्रेटरी अपर्णा शर्मा के मुताबिक, 'यूरिया प्लांट पूरी कैपिसिटी से चल रहे हैं और फॉस्फेट व पोटाश वाली खाद का प्रोडक्शन भी बढ़ाया गया है। अभी सरकार के पास 51% स्टॉक है, जबकि आमतौर पर इस समय सिर्फ 33% स्टॉक रहता है। खाद सब्सिडी के लिए बजट में 1.70 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा दिए गए हैं, ताकि खाद के दाम बढ़ने पर भी किसानों पर बोझ न बढ़े।’ इसके अलावा दुनिया में जंग के हालात के दौरान भी भारत की अर्थव्यवस्था की असली ताकत उसकी घरेलू मांग में है। देश की GDP का करीब 70% हिस्सा घरेलू खपत से आता है, इससे इकॉनमी पर बाहरी दबावों का असर कम पड़ता है। एक्सपर्ट्स ने युद्ध के चलते भारत की GDP ग्रोथ 7.7% से घटकर 6.7% तक आने की संभावना जताई है, फिर भी ये ज्यादातर देशों के मुकाबले तेज ग्रोथ होगी। टैक्स और ऑडिट फर्म ‘डेलॉइट’ के मुताबिक, भारत ने अपनी सबसे बड़ी ताकत घरेलू मांग पर ध्यान दिया है, जिससे महंगाई कंट्रोल में रही और खपत को बढ़ावा मिला है। सवाल-4: इस संकट के असर से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं? जवाब: पेट्रोल-डीजल, LPG, कुकिंग ऑयल और फर्टिलाइजर जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ाना या घटाना सरकार के हाथ में है। आप पर उसका असर कम हो, इसकी तैयारी जरूर कर सकते हैं। फाइनेंशियल प्लानर स्वाती कुमारी बताती हैं- इमरजेंसी फंड बढ़ाइए: ज्यादा बचत इमरजेंसी के खर्चों और महंगाई के समय सुरक्षा देती है। अगर इस समय आपके इमरजेंसी फंड में 5 लाख रुपए हैं, तो आप इसे 7-8 लाख के बीच कर लीजिए। उदाहरण के तौर पर, जिस परिवार का मासिक खर्च 50 हजार है, तो उसे कम से कम 3 लाख रुपए का इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए। बड़े खर्च रोक दीजिए: खर्च बढ़ेगा और कमाई नहीं बढ़ेगी, तो सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। ऐसे में अगर आप अपनी कार अपडेट करना चाहते हैं या फिर विदेश यात्रा का प्लान हैं, तो इसे कम से कम एक साल के लिए टाल दीजिए। हेल्थ इश्योरेंस कवर बढ़ा लीजिए: संकट के समय में अगर कोई हेल्थ इमरजेंसी आती है, तो सेविंग कम होने और मेडिकल खर्च बढ़ने की कंडीशन में आप अपनी FD या फिर दूसरे इन्वेस्टमेंट्स से पैसा निकालना चाहेंगे, जो सही डिसिजन नहीं होगा। ऐसे में अगर गुंजाइश हो, तो अपना हेल्थ इंश्योरेंस कवर बढ़ा लें। इन सेक्टर्स में बढ़ाएं निवेश: कोविड के समय में फार्मा और IT जैसे सेक्टर्स के शेयर बढ़े थे। मौजूदा संकट में भी कुछ सेक्टर्स मुनाफा दे सकते हैं। अगर आपके पास एक्स्ट्रा पैसा है, तो आप रिन्यूएबल एनर्जी, EV और रेलवे जैसे सेक्टर्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं। -------------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास ----------------------------------------ये खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी क्यों चाहते हैं कि आप सोना न खरीदें, ऐसी 7 अपील के पीछे की कहानी; क्या आपको चिंता करनी चाहिए पीएम मोदी ने रविवार को तेलंगाना की एक रैली में देश से 7 अपीलें कीं। इनमें एक अपील सोना न खरीदने की भी थी। पीएम मोदी ने कहा- देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। हालांकि सरकार ने खुद पिछले कुछ सालों से RBI के जरिए सोने की खरीद बढ़ा दी है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 13 May 2026 7:32 pm

बंकर में छिपने की अटकलों के बीच सामने आया पुतिन का वीडियो, पुरानी टीचर से मुलाकात की तस्वीरें वायरल

अब इन दावों के बीच क्रेमलिन ने एक नया वीडियो जारी किया है, जिसमें पुतिन मॉस्को की सड़कों पर खुद कार चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में पुतिन अपनी पुरानी स्कूल टीचर से मुलाकात करते नजर आते हैं।

देशबन्धु 13 May 2026 3:58 pm

ट्रंप-चिनफिंग नहीं चाहते, ईरान संकट के कारण पटरी से उतरे द्विपक्षीय संबंध

इस यात्रा को केवल एक सामान्य द्विपक्षीय बैठक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ईरान संकट, ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। अमेरिका लंबे समय से चीन पर दबाव बना रहा है कि वह ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे, ताकि युद्ध खत्म हो सके और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सके

देशबन्धु 13 May 2026 3:40 pm

यूक्रेन में युद्ध का अंत बहुत करीब : ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच समझौते की संभावना अब काफी करीब दिखाई दे रही है

देशबन्धु 13 May 2026 10:39 am

डेमोक्रेटिक नेताओं ने दी ईरान में बढ़े पैमाने पर युद्ध बढ़ने की चेतावनी

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका को मध्य पूर्व में एक और लंबे युद्ध की तरफ धकेल सकता है

देशबन्धु 13 May 2026 9:01 am

रूस ने सरमत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया

रूस के स्ट्रेटेजिक मिसाइल फोर्सेज के कमांडर के मुताबिक, रूस ने 'सरमत' इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है।

देशबन्धु 13 May 2026 8:40 am

बन्नू पुल‍िस चौकी आत्‍मघाती हमला: तालिबान ने पाकिस्तान के आरोपों को किया खारिज

काबुल में तालिबान शासन ने पाकिस्तान के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि बन्नू में पुलिस चौकी पर हमले की साज‍िश अफगान‍िस्‍तान में रची गई थी। तालिबान ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया।

देशबन्धु 13 May 2026 7:10 am