Bangladesh Election 2026: 'दो बेगमों' के बिना हो रहे बांग्लादेश के चुनाव में झलक रहा नेतृत्व संकट
दक्षिण एशिया में महिला नेतृत्व के प्रतीक के रूप में पहचाने जाने वाले बांग्लादेश में इस बार चुनावी मैदान में महिलाओं की उपस्थिति बेहद सीमित है। कुल 1,981 उम्मीदवारों में से केवल 76 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं यानी कुल का चार प्रतिशत से भी कम।
थाईलैंड चुनाव 2026: पीएम अनुतिन की पार्टी आगे, बहुमत से दूर; गठबंधन की राह पर भूमजाईथाई पार्टी
मतगणना में भूमजाईथाई को 195 सीटें मिल चुकी हैं। 500 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत के लिए 251 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। ऐसे में साफ है कि नई सरकार गठबंधन के सहारे ही बनेगी, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संभावित गठबंधन में अनुतिन की पार्टी का वर्चस्व रहेगा।
रिपोर्टों के मुताबिक, 33 हजार वर्ग फीट में फैले एपस्टीन के जोरो रैंच को वह एक ऐसे परिसर के रूप में विकसित करना चाहता था, जहां महिलाएं उसके बच्चों को जन्म दें। कुछ स्रोतों ने दावा किया कि वह इसे “बच्चों की फसल” उगाने वाले फार्म की तरह देखता था।
64 वर्षीय ताकाइची, जो जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं, ने अक्टूबर में पद संभालने के बाद से ही अपनी सख्त छवि, स्पष्ट वक्तव्य शैली और तेज़ कार्यशैली के दम पर लोकप्रियता हासिल की है। बढ़ती स्वीकार्यता को भुनाने के लिए उन्होंने दुर्लभ शीतकालीन चुनाव कराने का जोखिम उठाया था।
Posters of Khaleda everywhere none of Hasina: शेख हसीना की आवामी लीग का वो आलीशान हेडक्वार्टर, जहां कभी नेता-कार्यकर्ता भरे रहते थे, यही से सरकार देश चलाती थी, अब यही ऑफिस बदबूदार टॉयलेट जैसा हो गया है. फूल वाले टेम्पो पार्क कर रहे हैं, दीवारें गंदी हैं, और बाहर का माहौल ऐसा कि कोई भी दूर से गुजरता है तो नाक सिकोड़ लेता है. अब ये जगह लोगों के लिए पेशाबघर बन गया हैं. दूसरी तरफ एक नेता की तस्वीरों से पूरा ढाका पटा हुआ नजर आ रहा है. जानें पूरी रिपोर्ट.
Iran refuses to give up on uranium enrichment:ईरान ने अमेरिका के दबाव और सैन्य धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि वह यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगा.विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि किसी भी देश को ईरान की नीति तय करने का अधिकार नहीं है.ओमान में चल रही वार्ता पर भी उन्होंने अमेरिका की मंशा पर सवाल उठाए.
UK के राजदूत का एपस्टीन विवाद में नाम आने से बढ़ा बवाल, PM स्टार्मर के 'राइट हैंड' ने दिया इस्तीफा
Morgan mcsweeney resigns after epstein case: एपस्टीन विवाद के बाद पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को गलत बताते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दे दिया है.
भारत के स्पेस प्रोग्राम के सबसे भरोसेमंद रॉकेट PSLV के लगातार 2 मिशन नाकाम रहे हैं। वो भी महज 9 महीने में। इसी के चलते NSA अजीत डोभाल ने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर का गुप्त दौरा किया। 2 दिन तक उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ मीटिंग्स की। कहा जा रहा है कि डोभाल ने PSLV मिशन के सबोटाज यानी जानबूझकर मिशन फेल करने के एंगल से जानकारियां जुटाईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी के कहने पर NSA ने यह दौरा किया। आखिर PSLV इतना भरोसेमंद कैसे है, क्या कोई सबोटाज का खतरा है और क्या पहले भी ऐसा कुछ हो चुका है; जानेंगे मंडे मेगा स्टोरी में… ढेरों सुरक्षा उपाय और निगरानी होने के बावजूद भी भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत, हत्या, जासूसी, हनीट्रैप वगैरह के मामले हुए हैं… **** ग्राफिक- अजीत सिंह और अंकुर बंसल -------- अजीत डोभाल से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 80 वर्षीय डोभाल पर इतना भरोसा क्यों करते हैं मोदी: कभी आडवाणी के फेवरेट, रिटायर होते ही मोदी ने गुजरात बुलाया; ‘भारतीय जेम्स बॉन्ड' के किस्से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर लगातार हमलावर थे। कभी सीजफायर के मुद्दे पर, तो कभी टैरिफ पर। अचानक 7 अगस्त को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ मुलाकात का वीडियो सामने आता है और चीजें बदलने लगती हैं। पूरी खबर पढ़िए…
बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद 12 फरवरी को आम चुनाव हैं। छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से बेदखल हुई शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग चुनाव का हिस्सा नहीं है। वहीं 2014 और 2024 के चुनाव में शामिल नहीं हुई बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी पार्टियां जोरशोर से चुनाव लड़ रही हैं। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही माहौल हिंदुओं के खिलाफ है। जबकि शरिया कानून की वकालत करने वाली जमात की छवि हमेशा कट्टरपंथी पार्टी की रही है। हालांकि इस बार जमात ने पहली बार चुनाव में हिंदू कैंडिडेट उतारा है। ऐसे में जमात के लिए चुनाव में हिंदुओं की सुरक्षा कितना बड़ा मुद्दा है, ये समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम पार्टी की चुनावी रैली में पहुंची। हम खुलना जिले की उसी दाकोप सीट पर पहुंचे, जहां से पार्टी के पहले और अकेले हिंदू कैंडिडेट कृष्णा नंदी चुनाव लड़ रहे हैं। वे दावा करते हैं कि जमात बांग्लादेश में शरिया नहीं लाएगी। हालांकि उनकी रैली में महिलाएं पर्दे के पीछे बैठी दिखीं। नंदी रैली में वोटरों को खुलेआम कैश बांटते कैमरे में भी कैद हो गए। ये सब रिपोर्ट करने के दौरान न सिर्फ हमें डराया धमकाया गया बल्कि वीडियो डिलीट करने का भी दवाब बनाया गया। जमात की रैली में और क्या हुआ, पार्टी के पहले हिंदू कैंडिडेट क्या दावे कर रहे और रैली में आए समर्थकों का क्या कहना है। पढ़िए इस रिपोर्ट में... जमात की रैली में महिलाओं को पर्दे के पीछे बैठायाभारत के बॉर्डर पर पड़ने वाले खुलना जिले के दाकोप में 55% हिंदू आबादी है। ये इलाका गंगा के डेल्टा और सुंदरबन के पास है। इस छोटे-छोटे टापुओं वाले इलाके तक पहुंचने के लिए हमें नदी पार करनी थी। लिहाजा पहले हमने फेरी के जरिए नदी पार की। फिर कुछ दूर पैदल चले और यहां से बाइक पर सवार होकर उबड़-खाबड़ रास्ते से होते हुए दाकोप पहुंचे। यहां 1 फरवरी को जमात कैंडिडेट कृष्णा नंदी की चुनावी रैली थी। कृष्णा पेशे से व्यापारी हैं और इलाके में उनका दबदबा है। जब हम रैली में पहुंचे तो गांव में धार्मिक नारों के साथ यात्रा निकाली जा रही थी। वैसे दाकोप हिंदू बहुल इलाका है, लेकिन रैली में ज्यादातर मुस्लिम ही दिखे। इस रैली में सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि महिलाओं को मंच के किनारे पर्दा लगाकर बैठाया गया था। ताकि पुरुष और महिलाओं को अलग-अलग रखा जा सके। रैली में ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं ही पहुंचीं। जमात शरिया नहीं लाएगा, सबको साथ लेकर चलेंगेदाकोप से कैंडिडेट कृष्णा नंदी से बात करके हमने समझने की कोशिश की कि आखिर हिंदू कम्युनिटी से होते हुए भी वो इस्लामिक कट्टरपंथी पार्टी से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं? इसके जवाब में नंदी कहते हैं, ‘मैं जमात की विचारधारा से सहमत हूं। ये ईमानदारी, सच्चाई और न्याय के लिए लड़ने वाली पार्टी है। इसलिए मैं जमात से जुड़ा।‘ वे आगे कहते हैं, ‘दाकोप, हिंदू आबादी वाला इलाका है। मैं यहां सभी लोगों के लिए काम करना चाहता हूं। मैंने लोगों से वादा किया है कि हिंदुओं को बराबरी का सम्मान दिया जाएगा। हमारे यहां सभी धर्म के लोग मिलकर रहते हैं। यहां लोग जबरन वसूली और प्रोटेक्शन मनी की धमकियों से आजादी चाहते हैं। मैंने वादा किया है कि मैं इसके खिलाफ लड़ाई लड़ूंगा।’ क्या जमात इस्लामिक कानून लाना चाहता है? नंदी कहते हैं, ‘नहीं, जमात शरिया नहीं लाएगा। हम सभी को साथ लेकर चलेंगे।’ फिर आपकी रैली में महिलाओं को अलग क्यों बैठाया गया है। हमने पहले किसी रैली में ऐसा नहीं देखा। आप खुद हिंदू होकर ये कैसे स्वीकार कर रहे हैं? इस पर नंदी कहते हैं, ‘जमात के राज में महिलाएं सम्मान और गरिमा के साथ रहेंगी। ऐसा नहीं है कि महिला-पुरुष रैली में साथ शरीक नहीं हो सकते। हम मिलकर महिलाओं को सुऱक्षा देंगे। हमने महिलाओं के बैठने के लिए अलग सेक्शन भी बनाया है।’ हमारा भी यही सवाल है कि अलग बैठाने की क्या जरूरत है, क्या महिलाएं साथ नहीं बैठ सकतीं? ‘हमें यहां के समाज के हिसाब से व्यवस्था करनी होती है।’ ये कहकर नंदी बात टालने लगे। वो कहते हैं कि अगर जमात की सरकार बनी तो भारत से बेहतर संबंध बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। जमात कैंडिडेट ने प्रचार के दौरान बांटा कैशहमारी बातचीत के मुश्किल से 10 मिनट बाद ही ईमानदारी के दावे कर रहे जमात कैंडिडेट कृष्णा नंदी एक वोटर को कैश बांटते हमारे कैमरे में कैद हो गए। दरअसल पार्टी के लोगों ने कृष्णा नंदी को घेर रखा था और हम कुछ दूरी से उनका वीडियो शूट कर रहे थे। इसी बीच एक महिला आई और उसने नंदी को एक फोटो दिखाई। नंदी ने नोट निकाले और करीब एक हजार टका महिला को थमा दिए। कैमरा देखते ही जमात समर्थक घबरा गए। उन्होंने कैंडिडेट कृष्णा नंदी को इशारा किया कि कैमरे में सब कुछ शूट हो रहा है। नंदी को जब इन सबका आभास हुआ तो वो भी अलर्ट हो गए। इसके बाद जमात समर्थकों ने हमें घेरने की कोशिश शुरू कर दी। एक ने हमें धमकाने के लहजे में पूछा- भारत से हो क्या? अपना नंबर दो ? हम पर वीडियो डिलीट करने का भी दबाव बनाया गया। कैश लेने वाली महिला बोली- जमात के साथ हम ज्यादा सेफ इन सबके बीच हमने उस महिला को तलाशा, जिसे कृष्णा नंदी कैश बांट रहे थे। महिला का नाम माधवी महालदार है। जमात के बारे में पूछने पर वे कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि यहां महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा सुरक्षित हैं। हम जमात के साथ सेफ महसूस करते हैं। हम बिना किसी परेशानी के जीना चाहते हैं इसलिए मुझे लगता है कि जमात ही शांति से देश चलाएगी।’ जमात की रैली में पहुंची सुष्मिता मंडल कहती हैं, ‘हमें यहां कोई दिक्कत नहीं है। जमात के लोगों का जिस तरह का बात, व्यवहार है, वो अच्छा है। मैं एक अच्छे देश का सपना देखती हूं। मुझे जमात पर पूरा यकीन है।’ हमने हिंदू कैंडिडेट उतारा, ताकि वो कम्युनिटी की तकलीफें समझे इस रैली में दाकोप के ही एक किसान जीएम नईम पहुंचे। वे जमात के कट्टर समर्थक हैं। नईम कहते हैं, ‘जमात सांप्रदायिक सौहार्द्र के आधार पर देश को फिर से बनाने की कोशिश कर रहा है। ये इस बात से पता चलता है कि हमने यहां से चुनाव में हिंदू कैंडिडेट उतारा है। मेरा मानना है कि हमारे हिंदू बहुल इलाके के मुद्दे, हिंदू उम्मीदवार बेहतर तरीके से संसद में उठा सकता है।’ हमने नईम से पूछा कि फिर महिलाओं को अलग बैठने की व्यवस्था क्यों गई है? वे कहते हैं, ‘हम महिलाओं की सुरक्षा चाहते हैं इसीलिए उन्हें बैठने के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं। अभी हमारे देश में ऐसे हालात नहीं हैं कि पुरुष और महिलाएं हर जगह एक साथ बैठ सकें।’ हमने कट्टरपंथ का रास्ता छोड़ा, हम महिलाओं के समर्थकजमात की रैली में पहुंचे चलना म्युनिसिपल कमेटी के प्रेसिडेंट नजरूल इस्लाम कहते हैं, ‘जमात धर्म के आधार पर बनी पार्टी है लेकिन हमारा मानना है कि हम हर धर्म के लोग मिल जुलकर रह सकते हैं। हमने कट्टरपंथ का रास्ता छोड़ दिया है। इसका प्रूफ यही है कि हमने इस सीट से हिंदू कैंडिडेट को टिकट दिया है। हमारे साथ हर तरह के लोग हैं। हम कतई कट्टरपंथी नहीं है।‘ नजरूल महिलाओं को अलग बैठाने के सवाल पर कहते हैं, ‘महिलाओं को राजनीति करने के लिए जमात कोई रोक-टोक नहीं करती।’ हालांकि रैली की कवरेज के दौरान हम जमात के निशाने पर आ गए। पार्टी कैंडिडेट कृष्णा नंदी के सिक्योरिटी अफसर ने कवरेज को लेकर हमारे कैमरा सहयोगी को बुलाया और अकेले कमरे में बात की। उससे कहा गया कि तुम्हारे साथ जो भारतीय आया है, साहब ने उसका पासपोर्ट और वीजा मंगवाया है, भेज दो। हम समझ गए थे, अब इस रिवर आईलैंड पर रुकना सेफ नहीं। हम तुरंत रैली से निकले और बोट लेकर लौटने लगे। हम वहां से निकल तो आए लेकिन रास्ते भर अलग-अलग अफसरों के फोन आते रहे। एक पुलिस अधिकारी ने हमसे फोन कर पूछा कि बांग्लादेश कब आए, कहां से आए और कब लौटोगे? फिर एक और अधिकारी का फोन आया, उसने खुद को आर्मी इंटेलिजेंस का अफसर बताया। उसने भी हमसे कई तरह के सवाल किए। करीब 1 घंटे तक हमें लगातार कॉल पर कॉल आते रहे। स्टोरी में सहयोग: बांग्लादेश से अरिफुल शब्बीर इस्लाम……………………..बांग्लादेश से ये रिपोर्ट भी पढ़ें BNP लीडर बोले- इंडिया स्पेशल नहीं, शेख हसीना को पनाह देने से रिश्ते कैसे सुधरेंगे शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। वे कहते हैं कि हम भारत से अच्छी दोस्ती चाहते हैं, लेकिन भारत में कुछ स्पेशल नहीं है। समझ नहीं आता उसने शेख हसीना को पनाह क्यों दी है। इससे रिश्ते अच्छे नहीं हो पाएंगे। पढ़ें पूरा इंटरव्यू…
US में डाक के जरिए वोटिंग होनी चाहिए या नहीं? एलन मस्क ने रखी राय तो सोशल मीडिया पर आ गया तूफान
Elon Musk Latest News: US में डाक के जरिए वोटिंग होनी चाहिए या नहीं? इस मुद्दे पर अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने भी अपनी राय रखी है. उनके पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तूफान जैसा आ गया है और लोग जमकर अपनी-अपनी बात रख रहे हैं.
अमेरिका में भी वोटों की चोरी, ट्रंप ने चुनाव सुधारों के लिए बुलंद की आवाज, लगे हाथ ये मांग भी कर दी
US Elections: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में चुनाव सुधारों की मांग की और कहा कि चुनावों में जमकर धांधली हुई, वोटों की चोरी हुई. इसलिए पूरी दुनिया में अमेरिका की जगहंसाई हुई.
Nargis Mohammadi Latest News: यूएस के युद्धपोत ईरान को घेरे हुए खड़े हैं और तबाही कभी भी उस पर झपट्टा मार सकती है. इसके बावजूद ईरान अपनी कट्टरता छोड़ने को तैयार नहीं है. उसने विषम माहौल में भी अपना कट्टरपंथी रवैया बरकरार रखते हुए नोबेल विजेता नर्गिस मोहम्मदी को 6 साल जेल की सजा सुनाई है.
सेट हो गई खालिस्तानियों की फील्डिंग... कनाडाई NSA से मिले डोभाल, अब होगा 'डायरेक्ट एक्शन'?
Ajit Dobhav Canada Visit News: कनाडा में छिपे बैठे खालिस्तानी अब अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर भारत विरोधी गतिविधि नहीं चला पाएंगे. कनाडाई NSA से मिलकर डोभाल ने खालिस्तानियों के खिलाफ 'डायरेक्ट एक्शन' की रणनीति तैयार कर ली है. अब ऐसे तत्वों के खिलाफ दोनों मुल्क मिलकर एक्शन लेंगे.
60 वर्षीय रहमान ने शुक्रवार को अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के एकता सरकार बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जबकि अगले हफ्ते होने वाले चुनावों में जीत का भरोसा जताया. BNP अध्यक्ष, जो पिछले लगभग दो दशकों से निर्वासन में थे, पिछले साल दिसंबर में अपनी मां खालिदा ज़िया की बिगड़ती सेहत के बाद बांग्लादेश लौट आए थे.
Epstein files: वॉल स्ट्रीट टाइकून ने $100 मिलियन डॉलर यानी 9 अरब रुपये के तलाक के केस में अपनी पत्नी पर सीक्रेट लवर रखने और उस पर अपनी करोड़ों की दौलत लुटाने का आरोप लगाया है.
Deadly Attack on Sheikh Hasina Story: बांग्लादेश की राजनीति में हिंसा कोई नई बात नहीं है. ऐसा ही एक वाकया 2004 में हुआ था. जब शेख हसीना भाषण देकर मंच से उतरने वाली थीं, तभी उन पर हथगोलों और गोलियों की बौछार होने लगी थी. उस हमले में 24 लोग मारे गए थे.
रेत के समंदर में निकला 'नायाब' खजाना, क्या है न्यू मैक्सिको की रहस्यमयी 3400 साल पुरानी गुफा का राज?
यह गुफा सिर्फ एक जमी हुई बर्फ से कहीं ज़्यादा है. यह एक प्राकृतिक प्रयोगशाला है. रिसर्चर्स को इस 'आइसकेव' में एक ही जगह पर बर्फ संरक्षण, सूक्ष्मजीव जीवन और ज्वालामुखी भूविज्ञान का अध्ययन का मौका मिलता है. इस बीच, यहां आने वाले पर्यटक 'आइसकेव' की अवास्तविकता से आकर्षित होते हैं.
ओमान वार्ता के बाद बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर लगाए 25% अतिरिक्त टैरिफ
ओमान वार्ता के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए एक नया टैरिफ आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है।
एपस्टीन फाइल्स में दलाई लामा का नाम? 169 बार जिक्र होने के दावों पर कहा- न कभी मिले, न कभी इजाजत दी
Dalai lama in epstein files: दलाई लामा के ऑफिस ने एपस्टीन फाइल्स में उनके नाम आने की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कहा कि उनका एपस्टीन से कोई संपर्क नहीं था. नए जारी डॉक्यूमेंट्स में कई विश्व प्रसिद्ध नेताओं और बिजनेस लीडर्स के नाम सामने आए हैं, लेकिन दलाई लामा इनसे अलग हैं.
Iran us nuclear talks in mascat: ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में हुई बातचीत को ईरान ने अच्छी शुरुआत बताया है, लेकिन कहा है कि भरोसा बनने में समय लगेगा और वह अपना यूरेनियम संवर्धन व मिसाइल कार्यक्रम नहीं छोड़ेगा. वहीं ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ का ऐलान किया है और दोनों देशों के बीच अगले दौर की बातचीत जल्द होने की बात कही गई है.
‘जियोपोलिटिकल मॉनिटर’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन दोबारा सक्रिय होते दिख रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन संगठनों की परिचालन क्षमता में निरंतरता इस बात का संकेत है कि उन्हें संसाधन और संरचनात्मक समर्थन उपलब्ध है।
USA: अमेरिकी सांसद ब्रैंडन गिल ने डलास में बढ़ते इस्लामीकरण पर टिप्पणी करते हुए डलास की पाकिस्तान से तुलना की, जिससे विवाद खड़ा हो गया. उनके बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया आई और गिल को मुस्लिम-विरोधी बताया गया.
रूस से तेल खरीद पर संशय बरकरार, जानें क्या है ट्रंप की धमकी और भारत के रुख की स्थिति?
यदि व्यापार मंत्री को यह संकेत मिलता है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद दोबारा शुरू कर दी है, तो वे राष्ट्रपति को अतिरिक्त कार्रवाई की सिफारिश कर सकते हैं। इसमें दोबारा टैरिफ लागू करना भी शामिल हो सकता है।
एपस्टीन फाइल्स में अनिल अंबानी की चैट सामने आई: दावा- सुनहरे बालों वाली स्वीडिश महिला की पेशकश हुई
रिकॉर्ड के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच दोनों के बीच पेरिस और न्यूयॉर्क में संभावित मुलाकातों की योजना पर चर्चा हुई। मई 2019 में अनिल अंबानी के न्यूयॉर्क दौरे के दौरान एपस्टीन ने उन्हें मैनहैटन स्थित अपने निवास पर आमंत्रित किया था, जहां कथित तौर पर मुलाकात हुई।
PM modi in malaysia: मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने पीएम मोदी के साथ भारत-मलेशिया संबंधों को रणनीतिक और महत्वपूर्ण बताते हुए 11 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. इस मुलाकात में व्यापार, शिक्षा, रक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है.
न्यूजरूम में सन्नाटे के बाद बोर्डरूम में भूचाल, वॉशिंगटन पोस्ट के CEO ने भी ली अचानक विदाई
Washington Post CEO Resignation: वॉशिंगटन पोस्ट के न्यूज रूम में छंटनी की गई थी, जिसकी वजह से लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. न्यूजरूम के बाद अब वॉशिंगटन पोस्ट के CEO ने भी इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कुछ कहा जानते हैं.
PM Modi Malaysia Visit: मलेशिया दौरे पर पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भव्य स्वागत की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. इन तस्वीरों में पीएम मोदी के साथ ही चर्चा उस इमारत की हो रही है जिसके सामने खड़े होकर पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. तीन विशाल हरे गुंबदों वाली यह इमारत का क्या नाम है और क्यों खास है, आइए जानते हैं...
Savannah Guthrie: अमेरिकी टीवी की मशहूर एंकर सवाना गुथरी ने एक नया वीडियो जारी किया है. उन्होंने किडनैपर्स से कहा है कि हम पैसे दे देंगे, मेरी मां को लौटा दो, एक हफ्ते पहले सवाना गुथरी की मां की किडनैपिंग हो गई थी.
मलेशिया दौरे पर पीएम मोदी, अनवर इब्राहिम संग द्विपक्षीय बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की महत्वपूर्ण बातचीत की
PM Modi:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मलेशिया की दो दिवसीय यात्रा के दौरान पेरदाना पुत्रा में औपचारिक स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. दोनों नेताओं के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है.
Neo nazi teen attack on Indian: बाशकोर्तोस्तान की मेडिकल यूनिवर्सिटी में 15 साल के नव-नाजी हमलावर ने विदेशी छात्रों पर चाकू से हमला किया, जिसमें चार भारतीय छात्र भी घायल हुए हैं. पुलिस और प्रशासन ने गंभीर जांच शुरू कर दी है, हमलावर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
PM Modi in Malaysia: पीएम मोदी मलेशिया दौरे पर हैं. यहां पर उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री का आभार जताया और कहा कि आपने जो आयोजन किया ये हमेशा याद रहने वाला है. आतंकवाद पर पीएम ने ये बातें कही.
जापान में आम चुनाव की वोटिंग शुरू, सत्ता बचाने की चुनौती में एलडीपी गठबंधन
जापान में आम चुनाव के लिए मतदान रविवार सुबह शुरू हो गया। इस चुनाव में संसद के निचले सदन, यानी प्रतिनिधि सभा की 465 सीटों के लिए कुल 1,284 उम्मीदवार मैदान में हैं
ऑफिस में दोस्ती, फिर की करोड़ों की ठगी, भारतीय मूल के व्यक्ति ने इस देश में कराई जगहंसाई
Singapore News: सिंगापुर में एक भारतीय मूल के व्यक्ति को ठगी के आरोप में 2 साल की सजा सुनाई गई है. उसने 25 साल की महिला से 7 महीने में करीब 1.6 करोड़ रुपये की ठगी की थी.
Japan lower house election 2026: जापान के निचले सदन के चुनाव को प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के नेतृत्व पर जनता की सीधी राय के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें एलडीपी और उसके सहयोगी बहुमत की कोशिश में हैं. अगर सत्ता में बनी पार्टी गठबंधन बहुमत से चूकती है तो ताकाइची पर इस्तीफे का दबाव बन सकता है और देश में फिर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है.
मिलान ओलंपिक से पहले सुलगा इटली: सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोग, मेलोनी के खिलाफ क्यों हो रही जनता?
Winter Olympics 2026: इटली के मिलान में 2026 शीतकालीन ओलंपिक के खिलाफ प्रदर्शन शनिवार रात हिंसक हो गया. दिनभर शांतिपूर्ण रहे मार्च में रात को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं जिसके कारण पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.
यूरोप बूढ़ा हो रहा है! ग्रीस के मंत्री का अलार्म-‘हमें भारतीय युवाओं की सख्त जरूरत’
India eu forum 2026: यूरोप में युवाओं की कमी को देखते हुए ग्रीस के रक्षा मंत्री ने भारतीय उपमहाद्वीप को कानूनी प्रवासन के लिए बेहतर ऑप्शन बताया और संतुलित नीति पर जोर दिया है.
US Iran tension update: बातचीत के बहाने अमेरिका, ईरान पर जंग की तैयारी कर रहा है. उसने ईरान से 700 किमी दूर अरब सागर में अपना एयरक्राफ्ट कैरियर खड़ा कर रखा है, जिससे वह कभी भी हमला कर सकता है.
रूस - यूक्रेन जंग के बीच मेडिकल यूनिवर्सिटी में चाकूबाजी, हमले में 4 भारतीय छात्र घायल
Russia Stabbing: रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य स्थित ऊफा स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में चाकूबाजी की वारदात सामने आई है, इस हमले में 4 भारतीय छात्र बुरी तरह घायल हो गए हैं.
मैं एक अडॉप्टेड चाइल्ड हूं, सहर हाशमी। एक्टिविस्ट शबनम हाशमी और गौहर रजा की गोद ली हुई बेटी। मैं केवल 9 महीने की थी जब सगे मां-बाप अनाथालय छोड़ गए थे। जब अम्मा-पापा अनाथालय आए थे, तब मैं महज एक साल की थी। अम्मा बताती हैं कि मैं शीशे से उन्हें देख रही थी। जैसे ही वो लोग मेरे सामने पहुंचे, मैंने अपना हाथ उनकी तरफ बढ़ा दिया। अम्मा-पापा ने फौरन मेरा हाथ थाम लिया, जबकि उनका पहले से एक बेटा था साहिर हाशमी। कागजी कार्रवाई के बाद मुझे घर ले आए। घर में धूमधाम से मेरा स्वागत हुआ। मिठाई बांटी गई। मां बताती है कि साहिर भाई के दोस्त अक्सर स्कूल में बहनों की बातें किया करते थे। भाई सबकुछ सुनते रहते और घर आकर जिद करते कि मुझे भी बहन चाहिए। तब अम्मा और पापा ने तय किया कि हम एक बेटी गोद लेंगे। जब पांच साल की हुई तब पहली बार अम्मा ने बताया कि मुझे गोद लिया है। तब मुझे कुछ समझ नहीं आया। उसके कुछ समय बाद एक दफा मेंहदी लगाने के लिए अम्मा के साथ लाजपतनगर मार्केट जा रही थी। मुझे बहुत शौक था, जैसे ही मेंहदी का रंग फीका होता मैं दोबारा लगवा लेती थी। मेंहदी लगवाते हुए अचानक मैंने अम्मा से पूछा- साहिर भाई कैसे पैदा हुए हैं? अम्मा बोलीं- साहिर मेरे पेट से पैदा हुआ है। फिर मैंने पूछा क्या मैं भी आपके पेट से पैदा हुई हूं? अम्मा बोलीं- नहीं, तुम मेरे पेट से पैदा नहीं हुई हो। अम्मा की ये बात मेरे मन में बैठ गई। मैं सोचने लगी कि अम्मा ये क्या बोल रही हैं? मैं सच में इनकी बेटी नहीं हूं। तब तो ये लोग मुझे प्यार ही नहीं करते होंगे। मेरे लिए कभी कुछ करेंगे भी नहीं। सब कुछ साहिर भाई के लिए करेंगे। मुझे लंबे समय तक लगता रहा कि यह लोग मुझसे प्यार नहीं करते हैं। अम्मा-पापा दूसरे पैरेंट्स से बिलकुल अलग थे। किसी तरह की रोक-टोक नहीं करते थे। वो सोचते थे कि बच्चा अपने फैसले खुद लेना सीखे। जब मैं उनसे कुछ मांगती थी और नहीं मिलता था तब लगता था कि इनकी बेटी नहीं हूं इसलिए नहीं देते। जबकि वे लोग ठीक होते थे अपनी जगह। उनके पास पैसे नहीं होते थे। जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई तो बाकी बच्चों से एकदम अलग होती चली गई। मेरे अंदर गुस्सा था। मैं गुस्से में हिंसक हो जाती थी। कुछ भी उठाकर फेंक देना, किसी को भी मार देना। उस वक्त अम्मा-पापा मेरी इन हरकतों को सामान्य समझते थे। कहते थे कि बच्चा है, कोई बात नहीं है। कुछ समय बाद साहिर भाई पढ़ाई के लिए बाहर चले गए। जब वो घर आते तो मुझे उनसे भी दिक्कत होती। ऐसे लगता कि ये क्यों आए हैं। मुझे हर बात पर शक होता जैसे कि कुछ अच्छा खाना बने तो मुझे लगता कि उनका बेटा है इसलिए बन रहा। अपने बेटे से हंस-हंस कर बात कर रहे हैं। ये सब देखते ही मैं वहां से उठकर चली जाती थी। भाई मुझसे इतना प्यार करते थे, तब भी मुझे उनसे दिक्कत होती थी। शुरुआत में अम्मा-पापा को लगता था कि वे लोग मुझे समय नहीं दे पाते, इसलिए चिड़चिड़ी हो गई हूं। फिर उन्होंने एक साथ ट्रैवल करना बंद किया। दोनों में से एक हमेशा मेरे पास घर में रहते थे। फिर उन्होंने गूगल पर पढ़ना शुरू किया। उन्होंने काउंसलर से भी बात करी, लेकिन जब साल 2014 में मैंने बाहरवीं पास की और आत्महत्या की कोशिश की तो यह उनके लिए अति हो गई थी। फिर उन्हें काउंसलर ने कहा कि इसे साइकैट्रिक ट्रीटमेंट की जरूरत है, वरना वे अपना बच्चा खो देंगे। अगर कोई मुझे कह देता कि ये क्या पहन लिया, अच्छी नहीं लग रही हो। इतनी सी बात सुनकर मैं ट्रिगर हो जाती थी। अगर मुझसे कोई तेज आवाज में बात करे तो मैं सहन नहीं कर पाती थी। अगर अम्मा मुझे किसी बात पर व्हॉटसएप पर थम्स-अप साइन भेज देती तो मैं अपसेट हो जाती। सोचने लगती कि उन्होंने ठीक से बात नहीं की। मेरे लिए टाइम ही नहीं है उनके पास। फिर मैं बहुत गहरी सोच में चली जाती। मेरे शौक बहुत मंहगे होते थे। मुझे मंहगी चीजों की आदत हो गई थी। जब आईफोन XR आया तो मुझे चाहिए था। किसी तरह अम्मा-पापा ने मुझे EMI पर फोन दिलवाया और तीसरे दिन वह चोरी हो गया। मैं बहुत अपसेट हो गई। एक हफ्ते के बाद पापा ने मुझे दोबारा आईफोन दिलवाया तब मैं खुश हुई। मेरे लिए पैसे खर्च करना एक सेफ्टी वॉल जैसा था। जब मेजर ब्रेकडाउन होता तो मैं कुर्सी उठाकर मार देती थी। मुझे न सुनना बिलकुल पसंद नहीं है। अगर मैंने कोई चीज मांगी और पापा ने मना कर दी, तब तो मुझे वो चीज चाहिए ही होती थी। चाहे कुछ हो जाए। मैं खुद को मारने लगती थी। यहां तक की मैंनें अम्मा-पापा पर भी हाथ उठाया था। मेरा डॉग जो मुझे जान से ज्यादा प्यारा था, उसे भी उठाकर फेंक दिया था। अपना कमरा लॉक कर लेना। अम्मा को धक्का दे देना। घंटों तक रोना। आपा खो देना। मुझे सबसे आसान लगता था कि मैं खुद को मार लूं। मैं ही हर समस्या की जड़ हूं। फिर सिर दर्द हो जाता था तो पांच छह लोग मुझे एक दवा देने में लग जाते थे जिसके बाद मैं सो जाती थी। ऐसे में शॉपिंग या मंहगी चीजों की खरीदारी मेरे लिए सेफ्टी वॉल का काम करता था। बस तब मैं थोड़ा शांत हो जाती थी। एक दफा मैंने पापा पर हाथ उठाया था। उसके बाद देर रात मैं कमरे में ये सब सोचकर रो रही थी। शायद पापा ने मेरी आवाज सुन ली और भागकर कमरे में आए। मैंने उनसे कहा कि आप पर हाथ उठाया, आपको चोट लग गई। मुझे बहुत बुरा लग रहा है। मैं आपको मारना नहीं चाहती थी, लेकिन पता नहीं क्या हो जाता है। खुद को कंट्रोल नहीं कर पाती। पापा ने मुझे गले लगा लिया। फिर कहने लगे कि मैं जानता हूं। जब गुस्सा आए और तुम्हें लगे कि पापा को मारकर शांत हो सकती हो तो तुम मार लिया करो मुझे। मुझे बॉर्डर लाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर था। इसके अलग-अलग लक्षण होते हैं। मेरे अंदर था कि मुझे बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना अच्छा लगता था। जब पैसे देने से अम्मा-पापा मना कर देते तो पूरे घर में हिंसा और तोड़-फोड़ होती थी। इसके अलावा मेरे अंदर आत्महत्या करने की बहुत इच्छा होती थी। मैंने बहुत बार कोशिश की, लेकिन बच गई। मैं खुद को बहुत नुकसान पहुंचाती थी। मैं खुद को बहुत नकारा समझती थी और लगता था कि मुझसे तो दुनिया में कुछ हो ही नहीं पाएगा। मैं तो बहुत बेचारी हूं। मेरी बीमारी के बारे में तब पता चला जब मैं 18 साल की हुई और आत्महत्या करने के लिए अपनी कलाई की नस काट ली थी। देर से डायग्नोस होने की वजह से मेरी और मेरे परिवार की जिंदगी के कीमती 18 साल बरबाद हो गए। सबसे बड़ी बात है कि इस बीमारी से ग्रस्त कोई इंसान अगर परिवार में है तो उसकी चपेट में पूरा परिवार आता है। मैंने आत्महत्या की कोशिश तो बहुत बार की है लेकिन साल 2014 वाला मुझे याद है। उस दिन अम्मा लैपटॉप पर काम कर रही थीं और मैं नीचे सोसाइटी के बच्चों के साथ खेल रही थी। हम रेड हैंड गेम खेल रहे थे। एक बच्चे ने मेरे हाथ पर बहुत तेज मार दिया। मैं रोते हुए घर आई और अम्मा को बताया। अम्मा काम में इतना व्यस्त थीं कि ध्यान नहीं दे पाईं। मैंने टेबल पर रखा कटर उठाया और कलाई काट ली। फिर मैंने कई बार छत से कूदने की कोशिश की। कई बार ट्रक के नीचे आने के लिए हाईवे पर भाग गई। मैं गिन नहीं सकती कि ऐसा कितनी बार किया मैंने। इन सब वजहों से घर का माहौल बहुत खराब रहता था। 24 घंटे घर में मेरे जैसा मरीज था, इसलिए अम्मा अक्सर रोती रहती थी। जो लोग मुझे पसंद नहीं थे, वे घर नहीं आ सकते थे। मुझे अच्छा नहीं लगता था। दो साल के लिए तो मैंने खुद को कमरे में लॉक कर लिया था। बाहर नहीं आती थी। शरीर 70 साल की औरत जैसा हो गया था। लाइट का बटन भी बंद नहीं कर पाती थी, शरीर इतना कमजोर हो गया था। रिमोट तक नहीं उठा पाती थी। बिस्तर पर बैठी चिल्लाती रहती थी कि खाने को दे दो। सारा दिन क्राइम पेट्रोल देखती थी। वहीं से मुझे आत्महत्या के ख्याल आते थे। एक साल तक मैं 10-10 घंटे तक पेंटिंग करती थी। पहले मैं सिर्फ ब्लैक एंड वाइट पेंटिंग करती थी। फिर कलरफुल बनानी शुरू की। साल 2016 में जब मां ने मेरी एक साल की पेंटिंग देखी तो बोलीं- हम एग्जीबिशन लगाएंगे। उनकी बात सुनते ही मैं डर गई। मुझे लगा कि घर में रहते हुए दो साल बीत गए हैं। अब मैं लोगों से बात कैसे करुंगी, कैसे लोगों का सामना करुंगी। अम्मा ने मुझे बहुत समझाया। उसके बाद बस अम्मा-पापा ने कहा कि तुम्हें साइकेट्रिस्ट के पास जाना चाहिए। लेकिन मैं मना कर देती थी। मुझे बॉलीवुड की फिल्में देखकर लगता था कि वहां तो पागल जाते हैं। वे लोग मुझे जंजीरों से बांध देंगे, कमरे में बंद कर देंगे। बिजली के झटके देंगे। जब मैं साइकेट्रिस्ट के पास गई तो बहुत अच्छा लगा। बच्चों के साइकेट्रिस्ट तो वैसे ही बहुत अच्छे होते हैं। वहां बहुत सारे पोस्टर लगे हुए थे, खिलौने थे। वहां जाते-जाते मुझे लगने लगा कि यह मेरे लिए कितना जरूरी है। समय बीतता गया, मेरी दवाइयां चलती रहीं। 20 साल डिप्रेशन में रहने के बाद धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर लौटने लगी। मैं अम्मा-पापा के साथ समय गुजारने लगी। उन्हें समझने लगी। बहुत साल तक तो मैं अपनी सगी मां से नफरत करती रही कि वह कितनी गंदी थीं जो अनाथालय छोड़ गईं। हालांकि अब ऐसा नहीं है। मौका मिले तो मैं अपनी सगी मां से जरूर मिलना चाहूंगी। मेरे लिए दिक्कत यह भी थी कि हर डॉक्टर हमसे फैमिली हिस्ट्री पूछता था। तब अम्मा-पापा बताते थे कि अडॉप्टेड चाइल्ड हूं। तब मैं बहुत गुस्सा करती थी लेकिन अब नहीं। अब कहीं जाकर मैं अडॉप्शन को लेकर नॉर्मल हुई हूं। मेरे लिए शबनम हाशमी और गौहर रजा ही असली मम्मी-पापा हैं। मैं उनसे बहुत प्यार करती हूं। आज मैं निफ्ट से सर्टिफाइड फैशन स्टाइलिश्ट और मोटीवेशनल स्पीकर हूं। मैंने मेंटल हेल्थ पर जो स्टिगमा बना हुआ है, उसे तोड़ने की शुरुआत की है। 11 मार्च 2024 को मैंने रॉयल इनफील्ड खरीदी और दुनिया से इसपर बात करने के लिए निकल गई। शहर दर शहर रॉयल इन फील्ड पर सबसे ज्यादा सेमिनार करने का विश्व रिकॉर्ड मेरे नाम है। मेरी सारी जिंदगी एक ऐसे अंधेरे नरक में गुजरी है कि मुझे लगता है कि मैं देश के कोने कोने में जाकर इसपर बात करूं। मैं बाइक पर जाती हूं। लोगों से बात करती हूं। उन्हें बताती हूं कि यह बीमारी नहीं है। (सहर हाशमी ने अपने जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए हैं) ---------------------- 1- संडे जज्बात-लोग भैंस, बुलडोजर आंटी कहते थे:30 की उम्र में 92 किलो वजन था- किडनी खराब होने लगी तो 100 दिन में 20 किलो घटाया मैं कानपुर की रहने वाली आभा शुक्ला हूं। भैंस, मोटी, 45 साल की आंटी, चलती-फिरती बुलडोजर, किसी के ऊपर गिर जाए, तो वो दबकर ही मर ही जाए… कभी ये सारे नाम मेरे ही थे। लोग मुझे इन्हीं नामों से बुलाते थे। मेरे असली नाम ‘आभा शुक्ला’ से नहीं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
कनाडा के पियर्सन एयरपोर्ट पर उस दिन सब नॉर्मल था। दुबई से आने वाली फ्लाइट टेकऑफ हुई थी। ग्रे कलर की हुडी पहने एक शख्स को देखते ही कुछ लोग तेजी से बढ़े और उसे पकड़ लिया। ये शख्स पाकिस्तानी मूल का अरसलान चौधरी था। चौधरी की गिरफ्तारी कनाडा की सबसे बड़ी सोने की चोरी में पुलिस की बड़ी कामयाबी थी। अप्रैल 2023 में चौधरी और उसके 8 साथियों ने एयरपोर्ट से 184 करोड़ रुपए का 400 किलो सोना चुराया था। वो 3 साल बाद 13 जनवरी, 2026 को पुलिस के हाथ आया। तीन साल की मेहनत और 32 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद पुलिस मास्टरमाइंड अरसलान चौधरी तक पहुंच पाई। कुल 9 आरोपियों में 5 भारतीय मूल के हैं। इनमें से सिमरनप्रीत अब भी पकड़ा नहीं गया है। चोरी की पूरी कहानीये कहानी 18 अप्रैल 2023 से शुरू हुई थी। दोपहर 2 बजे कनाडा पुलिस को सूचना मिली कि टोरंटो के पियर्सन एयरपोर्ट के वेयरहाउस से एक कंटेनर गायब है। इसमें 24 कैरेट सोने के 6 हजार बिस्किट और 2 करोड़ कनाडियन डॉलर यानी 134 करोड़ रुपए थे। ये सोना और डॉलर स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख से फ्लाइट के जरिए कनाडा लाया गया था। सोना टोरंटो के एक बैंक के लिए था और कैश वैंकूवर में एक मनी एक्सचेंज सेंटर में जाना था। ये कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी चोरी थी। चोरों को पकड़ने के लिए पुलिस ने ऑपरेशन शुरू किया, जिसे प्रोजेक्ट 24K नाम दिया। पुलिस ने वेयरहाउस से कंटेनर गायब होने से जुड़ी डिटेल जुटानी शुरू की। शुरुआत में पता चला कि चोर जिस ट्रक से सोने और कैश से भरा कंटेनर ले गए, वही ट्रक एक दिन पहले सी-फूड का कंटेनर ले जाने के लिए आया था। सी-फूड का बिल दिखाकर चोर वेयरहाउस में घुसे और सोने वाला कंटेनर चुरा ले गए। CCTV फुटेज से पता चला कि ये ट्रक शाम 6:03 बजे एयरपोर्ट कार्गो से निकला था। सिमरन प्रीत पनेसर की एंट्रीजिसे पुलिस की मदद में लगाया, वही चोरी में शामिल जांच में पुलिस की मदद करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ने भारतीय मूल के अधिकारी सिमरन प्रीत पनेसर को लगाया। पुलिस अफसरों को वेयरहाउस से जुड़ी कोई जानकारी चाहिए होती, तो वह सिमरन प्रीत पनेसर से ही बात करते। पहली बार सिमरनप्रीत पुलिस टीम को क्राइम स्पॉट पर ले गया, तो उसे पसीना आ रहा था। एक पुलिस अफसर ने इसे नोटिस कर लिया, लेकिन जानबूझकर नहीं टोका। जांच चल ही रही थी कि अचानक एक दिन सिमरनप्रीत पनेसर ने एयरपोर्ट की नौकरी छोड़ दी और गायब हो गया। पता चला कि वह भारत में है और चंडीगढ़ में रह रहा है। कनाडा की पील रीजनल पुलिस ने इस केस में कुल 9 आरोपी बनाए। इनमें मास्टरमाइंड अरसलान चौधरी था। दूसरे नंबर पर सिमरनप्रीत पनेसर को रखा गया। पुलिस के मुताबिक, ओंटारियो के ब्रैम्पटन में रहने वाले सिमरनप्रीत पनेसर ने ही ट्रक ड्राइवर को एयरपोर्ट पर एक्सेस दिलाई थी। वो कंटेनर चोरी होने तक ऑनलाइन उसे ट्रैक करता रहा। पुलिस अब तक उसे पकड़ नहीं पाई है। भारत में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED भी मामले की जांच कर रही है। पुलिस को आरोपियों की चैट मिली, चोरी से पहले 772 कॉल और मैसेज जांच के दौरान पुलिस को 17 अप्रैल 2023 को चोरी वाले दिन का एक चैट रूम मिला। इसमें अरसलान चौधरी और सिमरनप्रीत पनेसर समेत 4 लोग जुड़े थे। इस ग्रुप में दो दिन में 772 कॉल और मैसेज मिले। चोरी के अगले दिन सिमरनप्रीत पनेसर को एक साथी का मैसेज मिला। इसमें लिखा था कि मुझे मेरे कजिन का कॉल आया था। उसने पूछा कि कल रात कार्गो में चोरी के बारे में सुना। इस पर सिमरनप्रीत ने रिप्लाई किया- ऐसा कुछ नहीं हुआ। पुलिस को चैट के अलावा सिमरनप्रीत के खिलाफ डिजिटल एविडेंस भी मिले। पुलिस को पता चला कि सिमरनप्रीत एयरपोर्ट पर काम करता था, तब उसके पास हाई वैल्यू शिपमेंट को सर्च करने के लिए जरूरी एक्सेस था। चोरी के वक्त वही ऑपरेशंस कंट्रोल का एक्टिंग सुपरवाइजर था। उसके कंप्यूटर सिस्टम की जांच से साफ हुआ कि जिस दिन फ्लाइट से सोना आ रहा था, उस दिन सिमरनप्रीत उसे ट्रैक कर रहा था। फ्लाइट से शिपमेंट कब उतरा, किस कंटेनर में रखा गया। इसे भी वो लगातार ट्रैक कर रहा था। उसने कंटेनर को फिजिकली हटाने में मदद करने के लिए एयर कनाडा कार्गो सिस्टम में भी गड़बड़ी की। एयरपोर्ट पर सोना उतरने के बाद करीब तीन घंटे में गायब कर दिया गया। वेयरहाउस से ट्रक बाहर निकलते ही सिमरनप्रीत ने सिस्टम पर उसे सर्च करना बंद कर दिया। पुलिस को सिमरनप्रीत पर शक था, लेकिन उसे अरेस्ट नहीं किया गया। पुलिस ने इसके लिए दलील दी कि ये पता चल गया था कि वह मास्टरमाइंड नहीं है। इसलिए इसे तुरंत हिरासत में नहीं लिया गया। ऐसा करने से दूसरे आरोपी फरार हो जाते। ये भी उम्मीद नहीं थी कि वह जॉब छोड़कर देश से बाहर चला जाएगा। चोरी का मास्टरमाइंड अरसलान चौधरीचोरी होने तक एयरपोर्ट के पास होटल में रुका रहा 43 साल के अरसलान चौधरी ने सोने का कंटेनर चुराने की साजिश रची थी। चोरी के दौरान वह एयरपोर्ट के पास एक होटल में रुका रहा। यहीं से वो एयरपोर्ट पर नजर रख रहा था। चोरी के तुरंत बाद अरसलान ने होटल छोड़ दिया। चोरी किया सोना एयरपोर्ट से करीब 17 किमी दूर मिसिसॉगा के एक सेफ हाउस में छिपाया गया। इसे अरसलान ने किराए पर ले रखा था। सेफ हाउस में सोना छिपाकर अरसलान करीब 100 किमी दूर एलिस्टन पहुंच गया। ये गांव जैसा एरिया है, जहां लोग गर्मियों की छुट्टियां बिताने आते हैं। यहां किराए पर घर, अपार्टमेंट या विला मिलते हैं। अरसलान चौधरी ने पैराडाइज सुइट्स नाम का एक विला किराए पर ले लिया। सभी आरोपी यहां जुटे और जश्न मनाया। अरसलान चौधरी ने सेफ हाउस से धीरे-धीरे पूरा सोना और कैश ठिकाने लगा दिया। सोने का बड़ा हिस्सा कनाडा में ही पिघला दिया। कुछ सोना और कैश हवाला के जरिए दुबई और भारत पहुंचा दिया। भागते वक्त घर में छोड़ गए 2.6 करोड़ रुपएपुलिस अरसलान चौधरी के सेफ हाउस भी पहुंची थी। घर बंद था। तलाशी में करीब डेढ़ लाख कनाडियन डॉलर मिले। इसके अलावा जहां-जहां आरोपी छिपे थे, वहां से कुल 4.3 लाख कनाडाई डॉलर यानी करीब 2.6 करोड़ रुपए मिले। मिसिसॉगा के सेफ हाउस से पुलिस को 12 फोन, दो पर्चियां और 10 हजार दिरहम मिले थे। पर्चियों पर कैश बंटवारे का हिसाब लिखा था। इससे पता चला कि कुल एक करोड़ कनाडियन डॉलर यानी 67 करोड़ रुपए बंटने थे। इनमें 80 लाख डॉलर आपस में बांटने का जिक्र है। बाकी 20 लाख डॉलर सोना दुबई शिफ्ट करने पर खर्च होने थे। इसमें फ्लाइट के लिए 50 हजार डॉलर, नाव के लिए 20 हजार डॉलर, रहने के लिए घर पर खर्च के लिए ढाई लाख डॉलर, सेफ स्पॉट के लिए 20 हजार डॉलर और दुबई के लिए 2.20 लाख डॉलर खर्च करने का जिक्र है। सिर्फ 55 लाख का सोना मिला, जांच पर 32 करोड़ से ज्यादा खर्चएयरपोर्ट से कंटेनर चुराने का काम डुरांटे किंग मैक्लीन ने किया था। वह सी-फूड का नकली बिल लेकर वेयरहाउस तक पहुंचा था। फिंगरप्रिंट से कनाडा पुलिस ने उसकी पहचान की थी। 2 सितंबर 2023 को मैक्लीन को अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में गाड़ियों की रूटीन जांच के दौरान पकड़ा गया था। उसकी कार में स्पेयर टायर के बीच छिपाकर रखे बैग में पिस्टल मिली थीं। इस केस में अमेरिका के फेडरल कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल की गई। इसमें लिखा है कि मैक्लीन भारतीय मूल के अर्चित ग्रोवर और प्रसाद परमालिंगम के साथ मिलकर हथियारों की तस्करी कर रहा था। अर्चित ग्रोवर और प्रसाथ परमालिंगम की भूमिका कनाडा में सोना चोरी केस में भी है। मैक्लीन के अरेस्ट होने से अरसलान चौधरी परेशान हो गया था। उसने अमेरिका में रहने वाले साथियों को मैसेज भेजा था कि उसे बताओ कि हम अपनी तरफ से सारी कोशिशें कर रहे हैं। अरसलान चौधरी की तरफ से कानूनी मदद मिलने के बाद मैक्लीन अमेरिकी कोर्ट में किसी भी क्राइम में शामिल होने से मुकर गया। हालांकि मैक्लीन अभी अमेरिकी जेल में है। आरोपियों में 6 भारतीय मूल के, एक कनाडाई और दो पाकिस्तानी चोरी में कुल 9 आरोपी हैं। 8 पर सोना चुराने और एक पर उसे पिघलाने का आरोप है। भारतीय मूल के आरोपियों में सिमरनप्रीत पनेसर, अर्चित ग्रोवर, प्रसाद परमालिंगम, परमपाल सिद्धू और अमित जलोटा हैं। परमपाल भी पियर्सन एयरपोर्ट पर काम करता था। अरसलान चौधरी और अम्माद चौधरी पाकिस्तानी मूल के हैं। करीब 55 लाख रुपए के सोने को गलाकर कंगन बनाने के आरोप में अरेस्ट अली रजा पाकिस्तान का है। उससे सोने के 6 कंगन मिले थे। सिमरनप्रीत पनेसर के अलावा सभी आरोपी पकड़ लिए गए। परमपाल सिद्धू, अमित जलोटा, अम्माद चौधरी, अली रजा, अर्चित ग्रोवर और प्रसाथ परमालिंगम को बाद में जमानत मिल गई। सवाल अब भी बाकी, कहां गया 400 किलो सोनाकनाडा पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ गोल्ड छोड़कर बाकी दूसरे देशों खासकर भारत और दुबई भेजा जा चुका है। मास्टरमाइंड अरसलान चौधरी खुद चोरी के बाद दुबई में छिप गया था। दुबई में सोना खपाना आसान है। चोरी के 4 महीने बाद अरसलान चौधरी को किए मैसेज से उसके दुबई में होने की पुष्टि हुई। मैसेज में लिखा था, ‘आज ही उस प्लान पर काम करो और दुबई जाओ।’ इस केस में 8 लोग अरेस्ट हुए, लेकिन किसी ने जुर्म कबूल नहीं किया। इसलिए सोने की रिकवरी नहीं हो पाई। इकलौता फरार और वॉन्टेड आरोपी सिमरनप्रीत पनेसर है। वो भारत में अपनी पत्नी के साथ म्यूजिक प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहा है। दैनिक भास्कर ने सोशल मीडिया के जरिए उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन कॉन्टैक्ट नहीं हो पाया। पुलिस ने 28 किमी एरिया में CCTV फुटेज खंगाले, सेफ हाउस से सुराग मिलादैनिक भास्कर ने इस केस पर कनाडा की पील रीजनल पुलिस के हेड माइक मैविटी से बात की। वे बताते हैं, ‘चोरी की जांच के लिए जून, 2023 में 20 अफसरों की स्पेशल टीम बनाई गई। टीम ने एयरपोर्ट के आसपास 28 किमी दायरे का हर सीसीटीवी फुटेज खंगाला। एक महीने बाद सुराग मिलना शुरू हुए। पहला सुराग अरसलान चौधरी के सेफ हाउस का था, जहां चोरी के तुरंत बाद सोना रखा गया था।’ ‘हमारी टीम ने एक साल में 9500 घंटे से ज्यादा ओवरटाइम काम करके 9 आरोपियों का पता लगाया। अरसलान चौधरी को चोरी का टॉप डॉग नाम दिया है। चोरी के बाद वह जिस AIRBNB में रुका था, वहां के वाईफाई से फोन कनेक्ट किया था। सभी आरोपियों के आपस में कनेक्शन मिले हैं।’ ………………………… ये रिपोर्ट भी पढ़ें फिरौती मांगने का अबू सलेम स्टाइल, कौन है शुभम लोनकर 31 जनवरी को फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर 5 राउंड फायरिंग हुई। घटना की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग के गुर्गे शुभम लोनकर ने ली। वही शुभम, जो सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग केस में भी वांटेड है। रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग से 5 दिन पहले फिल्म फाइनेंसर सनी नाना वाघचौरे से 5 करोड़ रुपए रंगदारी मांगी गई थी। पढ़ें पूरी खबर...
शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलन से निकले स्टूडेंट लीडर महफूज आलम अंतरिम सरकार में मंत्री बने, डॉ. मोहम्मद यूनुस के राइट हैंड की तरह काम किया, फिर अचानक इस्तीफा देना पड़ा। महफूज आलम कहते हैं कि वे अल्पसंख्यकों के लिए काम करना चाहते थे, लेकिन डॉ. यूनुस सरकार पर प्रेशर था, इस वजह से नहीं कर पाए। आखिर में दिसंबर में इस्तीफा दे दिया। बांग्लादेश में 12 फरवरी को वोटिंग होनी है। दैनिक भास्कर ने चुनाव, अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों, कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के उभार और छात्रों की पार्टी NCP पर बात की। महफूज आलम NCP और जमात गठबंधन के भी खिलाफ थे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: अंतरिम सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सबसे खराब दौर में हैं, ऐसा क्यों हुआ?जवाब: हमने भारत के साथ बात की थी। भारत को वास्तविकता का अंदाजा नहीं था। उसे सभी पार्टियों और लोगों के साथ बराबरी का रिश्ता रखना चाहिए था। हमने भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने की कोशिश की थी। इंडियन मीडिया को बांग्लादेश के बारे में प्रोपेगैंडा फैलाए बिना, फैक्ट पर रिपोर्टिंग करनी चाहए। बांग्लादेश भारत से 30 मिनट दूर है, आइए और जमीन पर सच्चाई देखिए। सवाल: आपने कहा कि बांग्लादेश दूसरा पाकिस्तान नहीं बनेगा, ऐसा क्यों कहा?जवाब: हमने बांग्लादेश के लिए पश्चिमी पाकिस्तान से लड़ाई लड़ी। पाकिस्तान ने हमारे साथ न्याय नहीं किया। पूर्वी बंगाल के दलितों का शोषण किया। पाकिस्तान चाहता था कि सिर्फ मुसलमानों के पास अधिकार होंगे, लेकिन हमने बांग्लादेश में ऐसा नहीं किया। हमारे देश में कई अल्पसंख्यक समुदाय हैं। हम सभी को साथ लेकर आगे बढ़े। हम 1947 के बंटवारे का दर्द नहीं भूले हैं। हमें एक पॉलिटिकल कमेटी की जरूरत है, जिसमें बांग्लादेश के सभी धर्म, समुदाय, जातियों को शामिल करके काम करना होगा। सवाल: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के पीछे कोई संगठन है या ये अलग-अलग घटनाएं हैं? जवाब: मुझे लगता है कि दोनों बातें हैं। ये उलेमा या मौलवी ही नहीं करवाते, हिंसा के पीछे ज्यादातर अवामी लीग, BNP और दूसरी पार्टियां होती हैं। ग्रामीण इलाकों में उलेमा या मौलवियों के पास इतनी पॉलिटिकल पावर नहीं है कि भीड़ जुटा सकें। वे धर्म को मानने वाले लोगों पर तो असर डाल सकते हैं, लेकिन कुछ बड़ा नहीं कर सकते। ज्यादातर राजनीतिक रूप से काम करने वाले लोकल संगठन ये काम करते हैं। अगर किसी बिजनेसमैन को अल्पसंख्यक की जमीन चाहिए, तो वो धमकियां देना शुरू करता है। इस तरह के गुंडों को पार्टियां संरक्षण देती हैं। अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा के पीछे सबसे बड़ी वजह जमीन होती है। लोकल कारोबारी या गुंडे अल्पसंख्यकों की जमीन हड़पना चाहते हैं। ये गुंडे ही पार्टियों में शामिल होते हैं, इसलिए उन पर कार्रवाई नहीं हो पाती। सवाल: आप अल्पसंख्यकों के लिए काम करना चाहते थे, लेकिन ऐसा करने से कौन रोक रहा था?जवाब: मैं अगस्त में अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोगों से मिला था। डॉ. यूनुस के दफ्तर से मैं अल्पसंख्यक समुदाय के मसले डील कर रहा था। 53 साल बाद बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के लिए एक दिन की ज्यादा छुट्टी दी गई। मैंने खुद इसके लिए लड़ाई लड़ी। मैं ये लड़ाई क्यों ना लड़ूं, हमने शेख हसीना के भेदभाव के खिलाफ लड़े थे, तो फिर किसी और समुदाय के खिलाफ भी भेदभाव नहीं होना चाहिए। यहां विरोध का सवाल नहीं है। मैं इस मुद्दे पर अलग तरीके से काम करना चाहता था। वे (अंतरिम सरकार) अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर सरकारी तरीके से काम कर रहे थे। सही तरीका बातचीत और लोकतांत्रिक है। इससे हालात और ज्यादा खराब नहीं होते। अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के हल के लिए राजनीतिक पहल करना जरूरी है। मेरा रास्ता यही है। सवाल: आपने अंतरिम सरकार में डॉ. यूनुस के राइट हैंड की तरह काम किया। स्टूडेंट लीडर से मंत्री बनने और फिर इस्तीफे तक का सफर कैसा रहा?जवाब: अंतरिम सरकार में बिल्कुल नया अनुभव था। हम कई तरह के बदलाव और सुधार करना चाहते थे, लेकिन समझ आया कि हकीकत कुछ और होती है। हम इसे समझ नहीं पाए। बदलाव के दौर में बनी सरकार की अपनी सीमाएं होती हैं।हमने पहले ही तय किया था कि हम कुछ वक्त तक सरकार चलाएंगे और फिर चुनाव करवाकर जीतने वाली पार्टी को सत्ता सौंप देंगे। हम ज्यादा कुछ नहीं कर पाए। सवाल: आप छात्र आंदोलन का चेहरा थे, फिर छात्रों की नेशनल सिटिजन पार्टी क्यों जॉइन नहीं की?जवाब: हमारी राजनीतिक समझ अलग थी। हालांकि मैं चाहता था कि छात्र आंदोलन में शामिल लोग पार्टी बनाएं। पार्टी बनी भी, लेकिन मैं उसमें शामिल नहीं हुआ। अल्पसंख्यकों पर हमले, भीड़ की हिंसा, मजारों पर हो रहे हमले जैसे मुद्दों पर मेरी राय अलग थी। मैं सिर्फ सरकारी तौर-तरीकों से इन घटनाओं को रोकने के पक्ष में नहीं था। मेरा मानना था कि सरकार को इसे राजनीतिक और व्यावहारिक तरीके से रोकना चाहिए। सवाल: छात्र आंदोलन के बाद अंतरिम सरकार बनाते हुए आपने जो आदर्श तय किए थे, क्या सरकार उन पर खरी उतरी है?जवाब: नहीं, वैसा बिल्कुल भी नहीं हुआ। मुझे लगता है कि सरकार को राजनीतिक पार्टियों का समर्थन नहीं मिला। दिखाने के लिए राजनीतिक पार्टियां सहयोग कर रही थीं। हमने मुद्दों पर काम करना शुरू किया, तो उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करवाने शुरू कर दिए। सरकार का राजनीतिक तौर पर मजबूत होना जरूरी है, लेकिन ऐसा था नहीं। सवाल: डॉ. यूनुस पहले की तरह ही हैं या बांग्लादेश की राजनीति ने उन्हें बदल दिया?जवाब: मुझे लगता है कि वे छात्रों के साथ मिलकर बांग्लादेश के लिए बहुत कुछ काम करना चाहते थे। पॉलिटिकल पार्टियों ने डॉ. यूनुस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि सरकार से स्टूडेंट लीडर को निकालो। वे पार्टियों के दबाव में आ गए। सवाल: कौन सी पार्टी डॉ. यूनुस पर दबाव बना रही थी?जवाब: दोनों ही पार्टियां (BNP और जमात) दबाव बना रही थीं। एक खुलेआम ऐसा कर रही थी और दूसरी पार्टी मेरे खिलाफ थी। मैं उस पार्टी के गलत काम के बारे में खुलकर बोलता था। सवाल: डॉ. यूनुस में क्या बदलाव दिखते हैं?जवाब: डॉ. यूनुस आए थे, तब उनके अंदर बांग्लादेश को बदलने की चाहत थी। अब वे सरकार से बाहर जाने वाले हैं। उन्हें लग रहा है कि वे काम नहीं कर पाए। इसलिए निराशा से भर गए हैं। वे बड़े सपने देखा करते थे, लेकिन ये बहुत मुश्किल काम था। हालांकि, अब भी छात्रों के लिए अच्छा सोचते हैं। सवाल: छात्र आंदोलन की शुरुआत सेक्युलरिज्म की भावना से हुई थी। अब छात्रों की पार्टी ने कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रही हैं, क्यों?जवाब: मैंने हमेशा जमात की विचारधारा के बारे में खुलकर बोला है। वह लोकतांत्रिक पार्टी है, लेकिन हमारी सोच जमात से अलग है। जमात और नए दौर की राजनीति के बीच फर्क होना चाहिए। सवाल: आपने जमात से गठबंधन पर अपने छात्र आंदोलन के साथी नेताओं से बात की, डॉ. यूनुस ने इस पर क्या कहा?जवाब: मुझे नहीं पता कि डॉ. यूनुस इस बारे में क्या सोचते हैं। मैं तब तक सरकार छोड़ चुका था। कई छात्र इस गठबंधन से खुश भी थे। वे अपने राजनीतिक हितों के हिसाब से सोच रहे थे। मैंने साफ तौर पर कहा कि अगर आप जमात के साथ जाना चाहते हैं तो जाइए, लेकिन मैं इस गठबंधन के खिलाफ हूं। सवाल: आपको जमात के बारे कौन सी बात सबसे खराब लगती है?जवाब: जमात की पॉलिटिक्स सबको साथ लेकर नहीं चलती। मुझे लगता है आगे इसी पर दिक्कत होगी। 1971 के मुक्ति संग्राम के बारे में उनके एक्टिविस्ट बुरी बातें करते हैं। मैंने नाहिद (स्टूडेंट एडवाइजर) से भी कहा कि अभी जमात को आगे बढ़ने में और समय लगेगा। इसलिए जमात में मत शामिल होइए। अगर जमात खुद को बदलती है, तो आगे कभी उनके साथ जा सकते हो। अगर तुम जमात को सत्ता में आने में मदद करोगे, तो लोग तुम्हें पूरी जिंदगी कोसेंगे। तुम जमात की परछाई से कभी बाहर नहीं आ पाओगे। सवाल: बांग्लादेश में चुनाव कौन जीत रहा है?जवाब: मुझे लगता है कि जमात को 30% तक वोट मिल सकता है। हालांकि, सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिल पाएंगी। सवाल: क्या जमात सत्ता में आने के लिए दूसरे रास्ते चुनेगी?जवाब: मुझे नहीं लगता चुनाव के बाद गठबंधन का कोई मौका होगा। सवाल: अगर जमात सत्ता में आती है, तो आपके मन में सबसे बड़ा डर क्या है?जवाब: जमात राजनीतिक इस्लामिक पार्टी है। उसने खुद में पहले से सुधार किया है। जमात शरिया के मुताबिक चलने वाली सोसायटी से मुख्यधारा में आ रहा है, लेकिन ये सुधार नीचे के कार्यकर्ताओं तक नहीं गया है। सवाल: अगर जमात सरकार बना लेती है तो अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर क्या असर होगा?जवाब: वे दिखाने के लिए कहेंगे कि हम सबके लिए बराबरी का रवैया रखते हैं। हकीकत में ऐसा नहीं होगा। वे इनके मुद्दों पर कुछ नहीं बोलेंगे। सीधे तौर पर परेशान तो नहीं करेंगे, लेकिन बचाएंगे भी नहीं। अगर जमात सत्ता में आती है, तो सूफियों को दिक्कतें हो सकती हैं। सवाल: अंतरिम सरकार ने अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में कैसा काम किया है, खासतौर पर दिसंबर और जनवरी में, जब उन पर हमलों की ज्यादा खबरें आई हैं?जवाब: जो हुआ, वह बहुत दुखद है। अगर हम सत्ता में होते, तो बेहतर तरीके से काम करते। ……………………….बांग्लादेश से ये रिपोर्ट भी पढ़ें 1. भारत से दोस्ती या दुश्मनी, चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बांग्लादेश में होने वाले चुनाव पर ढाका के रहने वाले अहीदुज्जमान कहते हैं, ‘मुझे चुनाव से कोई फर्क नहीं पड़ता। अवामी लीग ने देश को आजादी दिलवाई, उसी को चुनाव नहीं लड़ने दिया जा रहा। दूसरी तरफ जो 1971 के मुक्ति संग्राम के खिलाफ थे, वे चुनाव में जमकर प्रचार कर रहे हैं। अहीदुज्जमान के जैसी उलझन हर बांग्लादेशी के सामने है। यहां समझ आया कि भारत सबसे बड़ा मुद्दा है। वोटर दो हिस्सों में बंटे हैं, एक भारत समर्थक है और दूसरा भारत विरोधी। पढ़ें पूरी खबर… 2. BNP लीडर बोले- इंडिया स्पेशल नहीं, शेख हसीना को पनाह देने से रिश्ते कैसे सुधरेंगे शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। वे कहते हैं कि हम भारत से अच्छी दोस्ती चाहते हैं, लेकिन भारत में कुछ स्पेशल नहीं है। समझ नहीं आता उसने शेख हसीना को पनाह क्यों दी है। इससे रिश्ते अच्छे नहीं हो पाएंगे। पढ़ें पूरा इंटरव्यू...
पाकिस्तान अपने ही बुने जाल में हर दूसरे दिन फंस रहा है। बम विस्फोट और गोलीबारी की खबरें अब आम हो चली हैं
इस खूबसूरत देश में सीवर लीकेज से कोहराम, पीने के पानी के लाले, नहाने की मनाही और...
Wellington news: भारी बारिश से मोआ पॉइंट सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की निचली मंजिलों में पूरी तरह पानी भर गया, जिससे 1.8 Km लंबी आउटफॉल पाइप में सीवेज बैकअप हो गया, जो आम तौर पर ट्रीटेड गंदे पानी को कुक स्ट्रेट में छोड़ता है. लिहाजा, बिना ट्रीट हुआ सीवेज एक छोटी 5 मीटर की आउटफॉल पाइप से वेलिंगटन के दक्षिणी तट के पानी में बहने लगा.
आखिर जिस बात का था डर वही हुआ! अब इंसानों को हायर करेगा AI? यहां जानिए सबकुछ
Al खुद फिजिकल वर्क्स के लिए इंसानों की हायरिंग शुरू कर रहा है. हो सकता है कि हमारी बात पर आपको यकीं न हो लेकिन RentAHuman.ai नाम का एक नया प्लेटफॉर्म आया है जहां Al एजेंट काम करवाने के लिए इंसानों को किराए पर लेने की सुविधा दे रहा है.
मुस्लिम बहुल देश में दिखी पीएम मोदी की 'कार डिप्लोमैसी', बोले-मलेशियाई PM ने अपनी सीट तक दे दी
पीएम मोदी साल के पहले विदेशी दौरे पर मलेशिया पहुंचे हैं. वहां पर भारतीय जनसमुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने यहां आने का वादा पूरा किया है. जिस तरह का भव्य स्वागत यहां पर मेरा हुआ है, उसका भव्य स्वागत भारत हमेशा याद रखेगा.
14 साल पहले हमला, अब हुई पहली गिरफ्तारी, अमेरिका लाया गया बेनगाजी हमले का संदिग्ध
Benghazi Attack: लीबिया के बेनगाजी में 14 साल पहले US मिशन पर हमला कर दिया गया था. जिसमें अब जाकर पहली गिरफ्तारी की गई है. संदिग्ध को पकड़कर अमेरिका लाया गया है.
India thailand air force joint exercise: भारत और थाईलैंड की वायु सेनाएं 9 फरवरी को अंडमान के पास नॉर्थ मलक्का स्ट्रेट में संयुक्त हवाई अभ्यास करेंगी, जिसमें सुखोई-30 और ग्रिपेन फाइटर जेट शामिल होंगे. इस अभ्यास का मकसद दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच तालमेल, ऑपरेशनल क्षमता और समुद्री क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है.
बांग्लादेश चुनाव से पहले यूनुस के घर के बाहर उग्र प्रदर्शन, हिंसक टकराव में 50 लोग घायल
Violent protests erupt outside Yunus home ahead of Bangladesh elections 50 people injured in clashes
वीडियो में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा को आपत्तिजनक तरीके से वनमानुष के रूप में दर्शाया गया था। इस पोस्ट को लेकर नागरिक अधिकार संगठनों, विपक्षी नेताओं और कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी आपत्ति जताई।
इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान आत्मघाती हमला, 31 की मौत, 169 लोग घायल
धमाका उस समय हुआ जब मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग जुमे की नमाज अदा कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मस्जिद परिसर में अफरातफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से खुला बड़ा बाजार, अमेरिकी उत्पादों को मिलेगा फायदा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति के तहत भारत का बड़ा बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए खुल रहा है
जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार तेज, पीओके बना ‘राजनीतिक ब्लैक होल’
अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिली विशेष स्थिति समाप्त किए जाने के बाद क्षेत्र के विकास का रास्ता खुला, जहां भारत ने विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया और समावेशी शासन को बढ़ावा दिया
भारत-अमेरिका रिश्तों में नई शुरुआत- ट्रंप ने हटाया 25% टैरिफ
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क हटा दिया है
क्रेमलिन का बयान: रूस और अमेरिका ने परमाणु संधि पर बातचीत शुरू करने की जरूरत पर दिया जोर
रूस और अमेरिका ने नई सामरिक हथियार कटौती संधि (न्यू स्टार्ट) पर जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। यह जानकारी शुक्रवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दी
‘भारत ने यकीन दिलाया...’ रूसी तेल विवाद के बीच ट्रंप ने 25% टैरिफ हटाने के आदेश पर किए दस्तखत
US Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीद के कारण भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ को हटाने की घोषणा की है. आदेश में कहा गया है कि भारत ने रूसी तेल आयात बंद करने, अमेरिका से ऊर्जा खरीदने और रक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है. यह फैसला 7 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा.
पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना का छोटा सा गांव संदेशखाली। फरवरी 2024 में ये गांव सुर्खियों में आया, जब तीन महिलाओं ने ममता बनर्जी की पार्टी TMC के नेता रहे शाहजहां शेख पर गैंगरेप के आरोप लगाए। महिलाओं की कहानी दिल दहलाने वाली थी। आरोपों के मुताबिक, शाहजहां और उसके लोगों को जो औरत अच्छी लगती, उसे पार्टी की मीटिंग के बहाने ऑफिस में बुला लेते। दो दिन, तीन दिन, चार दिन, जब तक मन होता, ऑफिस में ही रखते। अगर कोई महिला बुलाने पर नहीं आती उसे घर से उठा लेते। ये सब 13 साल से चल रहा था। शाहजहां शेख और उसके करीबी शिबू हाजरा, उत्तम सरदार को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। शाहजहां के खिलाफ सेक्शुअल हैरेसमेंट, गैंगरेप के साथ जमीन कब्जा करने के भी आरोप लगे। CBI को करीब 50 शिकायतें मिलीं, लेकिन कुछ ही महीनों में दो महिलाओं ने केस वापस ले लिया। हालांकि, तीनों आरोपी अब भी कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में हैं। दो साल बीत चुके हैं। मार्च-अप्रैल में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। संदेशखाली में क्या बदला, विक्टिम और उनके परिवार किस हाल में है, तीनों आरोपियों का खौफ कितना कम हुआ और केस कहां तक पहुंचा? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम कोलकाता से लगभग 90 किलोमीटर दूर संदेशखाली पहुंचीं। विक्टिम नंबर-1संदेशखाली में गीता पाठ और हनुमान चालीसा संदेशखाली गांव एक टापू पर बसा है। धमाखाली से यहां हम नाव से नदी पार करके पहुंचे। फेरीघाट से जाने वाला रास्ता BJP और TMC के झंडों से पटा हुआ है। टापू में अलग-अलग पाड़ा यानी मोहल्ले हैं। केस की अकेली विक्टिम अब रेखा पात्रा ही हैं। वे माझेर पाड़ा में रहती हैं। यहीं से दो साल पहले महिलाओं ने शाहजहां शेख के खिलाफ मोर्चा खोला था। रेखा अब कोलकाता शिफ्ट हो चुकी हैं। SIR की प्रक्रिया के लिए संदेशखाली आई हुई थीं। यहां लाइब्रेरी मैदान में 30 जनवरी को हिंदू जागरण मंच ने गीता और हनुमान चालीसा का पाठ कराया था। रेखा अलग-अलग पाड़ों में जाकर उसी का पर्चा बांट रही थीं। वे घर-घर जाकर कह रही थीं, ’ये किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यक्रम नहीं है। इसके लिए आप कुछ योगदान करें और परिवार के साथ इसका हिस्सा बने। लाल पाड़े वाली सफेद साड़ी पहनकर आना है। उस दिन खाना बनाने की जरुरत नहीं है, यहीं खाना है। संदेशखाली की महिलाओं के लिए यही सही रास्ता है, ये हमारी ताकत है।’ हमने रेखा पात्रा से पूछा- क्या पहले भी इस तरह का आयोजन हुआ था? जवाब में वे कहती हैं, ‘नहीं, ऐसा पहली बार हो रहा है।‘ रेखा पात्रा ने 2024 में BJP के टिकट पर बशीरहाट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ी थीं, लेकिन हार गईं। ‘शाहजहां शेख को फांसी होगी, तभी इंसाफ मिलेगा’संदेशखाली के मौजूदा माहौल के बारे में पूछने पर रेखा कहती हैं, ‘संदेशखाली में पुलिस आज भी लोगों को झूठे केस में अंदर कर देती है। BJP का समर्थन करने वालों पर केस कर दिया जाता है। अभी कुछ दिनों पहले ही दो लड़कों पर केस किया गया। राज्य की पुलिस हमारे खिलाफ है। कैसे कह दें कि डर का माहौल नहीं है। मैं इन वजहों से ही कोलकाता शिफ्ट हो गई हूं।‘ पिछले दो साल के बारे में पूछने पर वे कहती हैं, ‘मेरी जिंदगी में बदलाव तब आएगा, जब शाहजहां शेख और उसके गुर्गों को फांसी की सजा दी जाएगी। शाहजहां शेख ने कहा था मैं भले ही जेल चला जाऊं, लेकिन मैंने हजारों शेख खड़े किए हैं, जो मेरे लिए काम करेंगे। अभी कुछ दिन पहले ही केस के एक मुख्य गवाह का एक्सीडेंट करके उसे मार दिया गया। इसलिए डर लगता है कि कहीं कुछ हो न जाए।’ सियासी जिम्मेदारियों के बारे में पूछने पर रेखा कहती हैं, ’इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा हैं। पार्टी जो पद देगी, मैं उसके मुताबिक काम करती जाऊंगी।’ विधानसभा चुनाव में फिर किस्मत आजमाएंगी क्या? वे कहती हैं, ’पार्टी जो फैसला लेगी, वो मुझे मंजूर है।’ संदेशखाली केस में आपके साथ शिकायत करने वाली दो महिलाओं ने पिछले दिनों केस वापस ले लिया। आरोप है कि BJP ने उनसे प्लेन पेपर पर साइन करा लिया था। इसके जवाब में रेखा कहती हैं, ‘वो दोनों पहले से ही TMC से जुड़ी हुई थीं। हालांकि एक दिन उन्हें अहसास होगा कि उन्होंने क्या कर दिया। दोनों हिंदू हैं, एक न एक दिन उन्हें हमारी शरण में आना ही पड़ेगा।‘ विक्टिम नंबर-2शाहजहां के गुंडों से पीछा छूटा, अब हालात बेहतरइसके बाद हम माझेपाड़ा में दूसरी विक्टिम कविता (बदला हुआ नाम) से मिलने पहुंचे। हम लोकसभा चुनाव के दौरान यहां आए थे, तब मिट्टी का घर था। इसके बाहर कविता की सुरक्षा में पुलिस बैठी थी। अब डेढ़ साल बाद तस्वीर अलग है। मिट्टी की झोपड़ी की जगह पक्का मकान है। कविता हमें घर के पास ही गली में खड़ी मिलीं। केस के बारे में पूछने की कोशिश की, लेकिन बात करने को राजी नहीं हुईं। वे बांग्ला में कहते हुए निकल गईं, ‘ऐखोन कौनो प्रॉब्लम नेई, ऐखोन सोब ठीक आछे।’ मतलब फिलहाल कोई परेशानी नहीं है, सब ठीक है। इसके बाद हम संदेशखाली के बाजार पहुंचे, जहां आंदोलन का हिस्सा रहीं डॉली अधिकारी की कपड़े की दुकान है। डॉली खुश हैं कि शाहजहां शेख के गुर्गे शिबू हाजरा और उत्तम सोदार जेल में हैं। वे कहती हैं, ‘लोग इनके आतंक से परेशान थे। रोजी-रोटी कमानी मुश्किल थी। शिबू और उत्तम ने मेरे पति को बुलाकर धमकी दी थी कि अगर बात नहीं मानी, तो दुकान नहीं चलने देंगे।‘ वे आगे कहती हैं, ‘इन्होंने सब पर जुल्म किया। लड़कियों और महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव किया गया और पुरुषों को मारा-पीटा। अगर उनकी बात नहीं सुनी जाती, तो उनके आतंक का शिकार होना पड़ता। पहले गांव के लोग आपस में बंटे हुए थे। यहां आपस में बात भी BJP और TMC देखकर की जाती थी। इन लोगों के जेल चले जाने के बाद अब ये दूरियां कम हुई हैं और लोग प्यार से रह रहे हैं।‘ विक्टिम नंबर-3लीज पर कहकर जमीन कब्जा ली, न पैसे दिए न जमीन मिलीइसके बाद हम सुनीता सोदार (बदला हुआ नाम) से मिले। इन्होंने शाहजहां शेख और उसके साथियों पर जमीन कब्जाने का आरोप लगाया था। सुनीता बताती हैं, ‘2010 में आए चक्रवती तूफान आयला ने हमें बर्बाद कर दिया। खेती की जमीन में नमक वाला पानी भर गया। यहां खेती के बजाय मछली पालन होने लगा। शाहजहां शेख के गुर्गों ने हमसे जमीनें लीज पर ले लीं और पैसा भी नहीं दिया। उनका डर इतना था कि लोग न पैसे मांग सके और न जमीन वापस ले सकते थे।‘ वे आगे बताती हैं, ‘तूफान में मेरा पूरा मकान टूटकर तबाह हो गया था। शाहजहां के गुर्गे उत्तम और उसके साथी कई बार घर की फोटो खींचकर ले गए। बनवाने का वादा किया, लेकिन कुछ नहीं कराया। वे हर बार सरकारी तिरपाल देकर फोटो खींच लेते, लेकिन मिलता कुछ नहीं। इतने साल बाद अब जाकर घर का कुछ हिस्सा तैयार किया है।‘ शाहजहां के खिलाफ दो साल पहले हुए आंदोलन के बारे में सुनीता बताती हैं, ‘पहले अंधेरा हो जाने के बाद बाहर नहीं निकल सकते थे। अब ऐसा नहीं है। पहले से आतंक थोड़ा कम हुआ है।’ विक्टिम नंबर-4शाहजहां जेल न जाता, तो जमीन वापस नहीं मिलती2024 में राशन घोटाले में शेख शाहजहां के घर ईडी की रेड पड़ी थी। इसी के बाद संदेशखाली की महिलाओं ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने की शिकायत की थी। इस मामले में करीब 50 महिलाओं ने याचिका दायर की थी, जिसके बाद शाहजहां शेख को TMC ने पार्टी से निकाल दिया था। हालांकि अब कई विक्टिम फैमिली अपनी जमीन वापस ले रही हैं। इनमें कुछ ऐसे हैं, जिन्हें लीज के पैसे मिले हैं और कुछ को नहीं। पार्वती उनमें से एक हैं। पति का निधन हो गया। वे संदेशखाली में बेटों के साथ रहती हैं, जो खेती करते हैं। पार्वती बताती हैं, ‘हमारे पास 3 एकड़ जमीन थी। शिबू हाजरा और उत्तम ने उस पर कब्जा कर लिया था। तीन साल जमीन उन्हीं के पास थी, जिसमें मछली पालन हो रहा था। हमें एक पैसा नहीं दिया। उनके जेल जाने के बाद जमीन वापस मिली। अगर वे अंदर नहीं जाते, तो शायद आज भी नहीं मिलती।’ पार्वती के छोटे बेटे बताते हैं, ‘कुछ महीने पहले ही जमीन वापस मिली है, लेकिन खेती करने लायक नहीं थी। हमने 30 हजार रुपए लगाकर मिट्टी ठीक कराई है। कई दिन तक मैं खुद भी काम करता रहा। अब जमीन धान की खेती के लायक हुई है।‘ हाफीज्जुल रहमान गाजी भी खुद को शाहजहां शेख का विक्टिम बताते हैं। वे कहते हैं, ‘इनके (शेख शेरजहां) गुंडे जब से अंदर गए हैं, यहां लोग आराम से जिंदगी गुजार रहे हैं। नहीं तो ये लोगों की जमीन ही नहीं छोड़ते थे।‘ उन्हीं के बगल में बैठे श्यामल बारो कहते हैं, ‘संदेशखाली के लोग अब आजाद हुए हैं। इनके आंतक के कारण लोगों ने जीना छोड़ दिया था। ये लोग इतने घटिया थे कि एक प्रेग्नेंट महिला इनके पैर पकड़ती रही, लेकिन फिर भी उसके पति को नहीं छोड़ा। हर शख्स को डराकर काबू में रखना चाहते थे। अब सब शांत हो गए हैं।‘ शाहजहां की मां बोलीं…मैं टीचर रही, क्या बेटे को रेप सिखाऊंगीइसके बाद हम शेख शाहजहां के घर पहुंचे। ये संदेशखाली से करीब 7 किलोमीटर पहले ही है। सड़क से सटकर चार मकान बने हैं। यहां शाहजहां शेख के परिवार के साथ उसके दो भाई और मां रहती हैं। घर पर कुछ बच्चे खेलते मिले। हमारी पहली मुलाकात शाहजहां के भाई की पत्नी से हुई। उन्होंने शाहजहां की मां रजिया शेख से मिलवाया। शाहजहां से मुलाकात हुई या नहीं, ये पूछते ही 70 साल की रजिया कहती हैं, ‘अब तक तीन बार मिली हूं। हर बार वो एक ही बात कहता है- मां मेरे लिए दुआ करो, अल्लाह सब ठीक कर देंगे। मुझे भी कानून पर भरोसा है। इतने दिन से वो जेल में हैं, हम सबको न्याय की उम्मीद है।‘ राजिया आगे कहती हैं, ‘हमारे परिवार के बारे में क्या कुछ नहीं कहा गया, जबकि मैं खुद टीचर थी। आसपास के कई बच्चे मेरे पास पढ़ने आते थे। अब आंखें काम नहीं करतीं, इसलिए पढ़ाना छोड़ दिया। आपको लगता है कि मैं अपने बच्चों को रेप की शिक्षा दूंगी। मैं दो बार हज करके आई हूं। जिस साल ये घटना हुई, मेरे बेटे और बहुएं भी हज के लिए जाने वाले थे, लेकिन खुदा की कुछ और ही मर्जी थी।‘ शाहजहां को जेल में इसलिए डाला क्योंकि वो मुसलमानमां रजिया शेख के पास खड़ी शाहजहां की भाभी कैमरे पर आने को तो राजी नहीं हुईं, लेकिन मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहती हैं, ‘जिस वक्त शाहजहां शेख के खिलाफ आंदोलन हुआ, सभी चैनलों में दिखाया गया। उसके पक्ष में लोगों ने आंदोलन किया, तो किसी ने नहीं दिखाया।‘ शाहजहां ने किसी को आंख उठाकर भी नहीं देखा। न ही उसने मदद करते वक्त किसी की जाति या धर्म देखा, लेकिन उसे धर्म देखकर जेल में डाला गया है। ‘संदेशखाली हमारे घर से इतनी दूर है, वो वहां क्या करने जाएगा? हमारा सारा कारोबार नदी के इस पार है। वहां से हमारा कोई लेना-देना नहीं हैं। उसे इसलिए जेल में डाला गया क्योंकि वो मुसलमान है। यहां अब सिर्फ हिंदू मुसलमान ही होता है।‘ वे आगे कहती हैं, ‘हमारे परिवार में सब पढ़े-लिखे हैं। पति डॉक्टर हैं। आसपास के लोगों में ही हमारा अच्छा उठना-बैठना है। हम तो मदद भी धर्म देखकर नहीं करते। फिर भी हमारे साथ ऐसा हो रहा है।‘ पिछले दो साल में आए बदलाव के बारे में पूछते ही वे गुस्से में कहती हैं, ‘हमारी जिंदगी ही मुश्किल हो गई है। सारा काम घर की महिलाओं को देखना पड़ता है। बच्चों को स्कूल पहुंचाने से लेकर कोर्ट कचहरी तक सब हम ही लोग देख रहे हैं। कभी नहीं सोचा था कि ऐसी जिंदगी हो जाएगी।‘ पुलिस बोली- शाहजहां मर्डर और हिंसा के केस में जेल मेंकेस की जांच कहां तक पहुंची, जब इसकी जानकारी हमने संदेशखाली पुलिस स्टेशन के SHO से मांगी, तो उन्होंने कहा कि चार्जशीट कोर्ट में जा चुकी है। इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकते। लिहाजा हमने बशीरहाट SP ऑफिस का रुख किया। यहां एक पुलिस अधिकारी ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि वो दो मामलों में जेल में हैं। एक 2019 का मामला है, जब शाहजहां शेख को इलेक्शन के बाद प्रदीप मंडल, देवदास मंडल और सुकांता मंडल की हत्या के मामले में CBI ने मुख्य आरोपी पाया था। इसके अलावा दूसरा केस 2024 में ED की रेड के दौरान हुई हिंसा का है। रेप केस के बारे में पूछने पर बोले कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है।…………….. ये खबर भी पढ़ें… ‘हमें बचा लो, बांग्लादेश में मर जाएंगे‘ 'पुलिस ने हमें मारपीट कर जबरदस्ती बांग्लादेश भेज दिया। हमारे पास न खाने-पीने के लिए कुछ है और न रहने की जगह। हम बहुत तकलीफ में हैं, हमें यहां से निकाल लो वरना मर जाएंगे। हमें भारत लौटना है। बच्चे भी पास नहीं हैं।' 65 साल की अलकन बीबी बांग्लादेश से फोन कर रिश्तेदारों से मदद मांग रही हैं। पढ़िए पूरी खबर…
मार्च, 2025 की बात है, बांग्लादेश में चांदपुर के पूरनबाजार में बने मंदिर के बाहर करीब 600 लोग पहुंच गए। उन्हें मंदिर के पुजारी अनिक गोस्वामी की तलाश थी। भीड़ का आरोप था कि अनिक गोस्वामी ने पैगंबर का अपमान किया है। अनिक वहां से भाग निकले। वे अब भी छिपकर रह रहे हैं। उनके मुताबिक, भीड़ को कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के सदस्य लीड कर रहे थे। अगस्त, 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में धार्मिक हिंसा के 2000 से ज्यादा मामले हुए हैं। इनमें जमात से जुड़े तौहिदी जनता ग्रुप और हिज्ब उत तहरीर का नाम आया। अब बांग्लादेश में चुनाव हैं। 12 फरवरी को वोटिंग होगी। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस बार चुनाव नहीं लड़ रही है। जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी में मुकाबला है। अल्पसंख्यकों को टारगेट करने वाली जमात सत्ता की दावेदार है। ये चुनाव अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के लिए परीक्षा जैसे हैं। उन पर हमले हो रहे हैं। रंगदारी मांगी जा रही है। धमकियां मिल रही हैं। ऐसे में 900 साल पुराने ढाकेश्वरी मंदिर में पूजा कर रहे श्रद्धालु हों या ढाका यूनिवर्सिटी के जगन्नाथ हॉल कैंपस के स्टूडेंट, सबके मन में एक ही सवाल है- वोट देने में ज्यादा खतरा है या न देने में। इस रिपोर्ट में पढ़िए और देखिए बांग्लादेशी हिंदुओं की परेशानी और वोट को लेकर उनकी उलझन। जगह: ढाकेश्वरी मंदिर, बख्शी बाजार, ढाका बांग्लादेश की राजधानी ढाका का नाम ढाकेश्वरी मंदिर के नाम से ही पड़ा था। चुनाव की कवरेज के दौरान हम यहां पहुंचे। मंदिर के बाहर अच्छी खासी चहल-पहल है। अंदर भी करीब 300 श्रद्धालु थे। उस वक्त दोपहर में होने वाली आरती की तैयारी चल रही थी। गीता पाठ का भी कार्यक्रम था। हमने पूजा करने आए कुछ लोगों से बात की। उनसे ये 5 सवाल पूछे… 1. बांग्लादेश में होने जा रहे चुनाव पर वे क्या सोचते हैं? 2. बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले बढ़े हैं, इनके पीछे कौन है?3. शेख हसीना के जाने के बाद देश में बने हालात का क्या असर पड़ा हैं? 4. करीब 10% आबादी वाला हिंदू समुदाय किसे वोट किसे करेगा?5. क्या वे बांग्लादेश में सुरक्षित महसूस करते हैं या कहीं और जाने के बारे में सोच रहे हैं? ‘हम हिंदू, हमारी किस्मत में ही जुल्म लिखा है’ढाका की रहने वाली निशा रानी दत्त ढाकेश्वरी मंदिर में वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर रही थीं। निशा सरकारी बैंक में नौकरी करती हैं। हमने उनसे पूछा कि चुनाव में हिंदुओं के लिए कैसा माहौल है? वे जवाब देती हैं, ‘हमें समझ नहीं आ रहा चुनाव में क्या करना है। चुनाव आते ही दूसरे लोग हमें परेशान करने लगते हैं। हम हिंदू हैं, हमारी किस्मत में सताया जाना ही लिखा है।’ ‘मैं ढाका में रहती हूं। इसलिए बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं होती। चटगांव, खुलना, जॉयपुरहाट और लालमोनिरहाट में हिंदुओं पर बहुत जुल्म होते हैं। फिर भी ये देश हमारा है। हम कभी इसे छोड़कर नहीं जाएंगे।’ निशा के साथ मौजूद सोमा भी कहती हैं, ‘ये मेरा देश है। मेरा जन्म यहीं हुआ। मैं यहीं रहना चाहती हूं। मैं कहीं और जाने के बारे में नहीं सोच रही। कोई भी सरकार में आए, लेकिन हम अपने धर्म को जिस तरह से मानते आए हैं, वैसे ही मानेंगे।’ ‘हिंदू जमात-ए-इस्लामी को वोट नहीं दे सकते, BNP को ही देंगे’सुनीरमल रॉय पेशे से डॉक्टर हैं। ढाकेेश्वरी मंदिर में पूजा करने आते रहते हैं। वे कहते हैं, ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP और जमात के बीच चुनाव होना है। शेख हसीना की अवामी लीग को तो बैन कर दिया गया है। अभी समझ नहीं आ रहा कि चुनाव कौन जीतेगा। चुनाव की वजह से हमारे लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। कई बार घर पर हमला हो जाता है, धमकियां दी जाती हैं।’ हिंदू समुदाय इस बार किसे वोट करेगा? सुनीरमल जवाब देते हैं, ‘हमें पता है कि जमात-ए-इस्लामी इस्लामिक पार्टी है। BNP लोकतांत्रिक पार्टी है। ज्यादातर हिंदू BNP को सपोर्ट करेंगे। जमात को बहुत कम ही हिंदू वोट करेंगे।’ अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के 2000 से ज्यादा मामलेबांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल अल्पसंख्यकों का संगठन है। ये देश में धार्मिक आधार पर होने वाली हिंसा के आंकड़े जुटाकर रिपोर्ट जारी करता है। संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से धार्मिक हिंसा की 2000 से ज्यादा मामले हो चुके हैं। इनमें 68 लोगों की हत्या हुई है। 28 केस महिलाओं के खिलाफ हिंसा के हैं। मंदिरों पर भी हमले हुए हैं। हालांकि, डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार ने इस डेटा को खारिज किया है। काउंसिल के जनरल सेक्रेटरी मणिंद्र कुमार नाथ कहते हैं, बांग्लादेश में चुनाव करीब आते ही हालात खराब हो रहे हैं। अल्पसंख्यकों के लिए हर दिन के साथ डर बढ़ता जा रहा है। हम अपनी परेशानियों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रहते हैं, लेकिन सरकार हमारी बात नजरअंदाज कर रही है। ‘अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर डॉ. मोहम्मद यूनुस ने माना है कि धार्मिक हिंसा के 71 मामले हुए हैं। इनमें सिर्फ एक मामले में मौत हुई है। हमारा डेटा कहता है कि धार्मिक हिंसा में 66 लोगों की मौत हुई है। हमें लगता है कि ये हत्याएं धार्मिक वजहों से ही की गई हैं, लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं है।’ ‘हमारे देश की बुनियाद सेक्युलरिज्म पर टिकी है, लेकिन अब कट्टर इस्लामिक ताकतें इसे सांप्रदायिक बनाना चाहती हैं। जमात-ए-इस्लामी, BNP और अवामी लीग भी धार्मिक हिंसा के पीछे होती हैं। पार्टियां अपनी राजनीति के लिए धर्म का सहारा लेती हैं और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाती हैं।’ हालांकि अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस के एडवाइजर शफीकुल आलम ने भास्कर को दिए इंटरव्यू में कहा था कि पिछले साल हमने हिंसा पर सालाना रिपोर्ट जारी की थी। कम्युनल और हेट क्राइम के मामले में पिछले एक साल में सिर्फ एक ही हत्या हुई है, जिसमें दीपू चंद्र दास का मामला है। उन्होंने दावा किया कि दूसरी घटनाओं में जमीन और कानून व्यवस्था के मामले या किसी दूसरी वजहों से हत्या हुई हैं। अवामी लीग हर हिंदू की हत्या को धार्मिक हिंसा में हुई मौत बता रही है। ‘हम वोट दें तो दिक्कत, न दें तो दिक्कत’ढाका की रहने वाली सुप्रिया भट्टाचार्य सरकारी स्कूल में टीचर थीं। नौकरी छोड़कर सोशल वर्क करने लगीं। वे महिला एकता परिषद की प्रेसिडेंट हैं और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए काम करती हैं। सुप्रिया भट्टाचार्य ढाकेश्वरी मंदिर में दर्शन के लिए आई थीं। करीब 300 लोगों में साथ गीता पाठ कर रही थीं। पाठ खत्म होते ही 12 फरवरी को होने वाले चुनाव पर बातें होने लगीं। सुप्रिया कहती हैं कि बांग्लादेश में जब भी चुनाव होते हैं, हमारे दिलों में खौफ घर कर जाता है। सुप्रिया कहती हैं, ‘चुनाव के वक्त अल्पसंख्यक समुदाय के लोग डरे हुए हैं। मैं तो ढाका में रहती हूं, इसलिए उतना डर नहीं है। दूरदराज के इलाकों और गांवों में रहने वाले हिंदू बहुत ज्यादा डर में जी रहे हैं। इस बार हिंदू समुदाय पर एक और दबाव है। हमें रेफरेंडम के पक्ष या विपक्ष में वोट करना है। हमें समझ नहीं आ रहा कि संविधान बदलने के लिए वोट करें या जो संविधान है, उसी के पक्ष में रहें।’ हिंदुओं पर हमले कौन करता है? जवाब में सुप्रिया कहती हैं, ‘साफतौर पर नहीं कह सकते कि ये कौन कर रहा है। ये आतंकी मानसिकता के लोग हैं। जरूरी नहीं कि वे किसी पार्टी के लोग हों, लेकिन अगर बांग्लादेश की सरकार ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं करती है, तो ये उसकी नाकामी है।’ मंदिर में आईं केएस सिन्हा डांस टीचर हैं। वे कहती हैं, ‘बांग्लादेश में बहुत सारे हिंदू रहते हैं। हम वोट डालना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि बांग्लादेश में ऐसी सरकार बने, जो सबकी सुरक्षा के लिए काम करे, न कि किसी एक धर्म के लिए।’ जगह: जगन्नाथ हॉल कैंपस, ढाका यूनिवर्सिटीढाकेश्वरी मंदिर के बाद हम ढाका यूनिवर्सिटी के जगन्नाथ हॉल कैंपस पहुंचे। ये कैंपस अल्पसंख्यक छात्रों के लिए है। हॉस्टल में रहने वाले ज्यादातर छात्र हिंदू हैं। हॉस्टल के अंदर मंदिर, काली पूजा के लिए जगह और बुद्ध की मूर्तियां हैं। हॉल यूनियन के लीडर सुदीप्तो प्रमाणिक कहते हैं, ‘जब भी चुनाव होते हैं, हमें अपनी सुरक्षा की चिंता होने लगती है। हम चाहते हैं कि ऐसी सरकार आए, जो अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दे। 1971 से ही अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव हो रहा है। सरकार जिन अधिकारियों को प्रमोशन दे रही है, उनमें एक भी हिंदू नहीं है।’ ‘मैं धार्मिक पहचान के तौर पर कड़ा पहनता हूं। मुझे ये पहनने से दिक्कत नहीं हुई, लेकिन मेरे एक जूनियर को हॉस्टल में एक साल पहले कलावा पहनने की वजह से पीटा गया था। लड़कियों को बिंदी या टीका लगाने की वजह से टारगेट किया जाता है। शेख हसीना के वक्त ऐसा नहीं होता था।’ जनवरी में साम्प्रदायिक हिंसा के 42 केस1 से 27 जनवरी के बीच देशभर में साम्प्रदायिक हिंसा के 42 केस दर्ज किए गए। इनमें 11 लोग मारे गए। बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने 29 जनवरी को ये डेटा जारी किया था। काउंसिल ने ढाका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय डर और असुरक्षा के साए में जी रहे हैं। वे मजबूर हैं कि चुनाव में किसी को भी वोट न करें। सुदीप्तो प्रमाणिक इस पर कहते हैं, ‘अगर ऐसी ही स्थिति रहती है और अल्पसंख्यक वोट डालने से हिचकिचाते हैं, तो इसकी जिम्मेदार सरकार है। सरकार, प्रशासन, चुनाव आयोग और राजनीतिक पार्टियां अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने में नाकाम रही हैं।’ मुस्लिम बोले- हिंदुओं से कोई टकराव नहींढाका के रहने वाले एएसएम फैजल फार्मासिस्ट हैं। हमने उनसे देश में हिंदुओं की स्थिति के बारे में पूछा। वे जवाब देते हैं, ‘मैं अलग-अलग धर्मों के लोगों से मिलता हूं। उनमें से कुछ से मेरे अच्छे संबंध हैं। मैंने कभी किसी को किसी पर जुल्म करते नहीं देखा। हो सकता है कि लोगों के बीच घरेलू या जमीन से जुड़े विवाद हों, उन्हीं वजहों से कभी-कभार घटनाएं हो जाती हों। मुझे ऐसा कभी नहीं लगा कि किसी पर सिर्फ इसलिए हमला किया गया हो क्योंकि वह अल्पसंख्यक है।’ हिंदुओं को धमकी- 5 लाख टका दो, वर्ना दुर्गा पूजा नहीं करने देंगेसितंबर, 2024 में दुर्गा पूजा के पहले हिंदुओं को धमकी भरे लेटर मिले थे। खुलना जिले के दाकोप में भी ऐसा ही लेटर पहुंचा था। इसमें लिखा था कि अगर गांववाले 5 लाख बांग्लादेशी टका नहीं देंगे, तो दुर्गा पूजा नहीं मनाने दी जाएगी। दाकोप के कमर खोला गांव में स्कूल टीचर साइकत गिलदार मंदिर के प्रमुख हैं। गांव के मुखिया भी हैं। वे बताते हैं, ‘धमकी भरा लेटर किसने भेजा था, इसका पता नहीं चला। उसमें लिखा था कि अगर दुर्गा पूजा का त्योहार मनाना है, तो पैसा देना होगा, नहीं तो तुम्हें मार देंगे।’ हाथ में धमकी भरा लेटर पकड़े हुए साइकत अब भी डरे हुए हैं। वे बताते हैं कि हम इतना डर गए थे कि दुर्गा पूजा का उत्सव ही नहीं मनाया। लेटर में लिखा था कि इस बार दुर्गा पूजा के लिए तुम्हें 5 लाख टका (करीब 3.5 लाख रुपए) देना होगा, वर्ना किसी हालत में पूजा नहीं करने देंगे। यह हमारी तरफ से आखिरी चेतावनी है। अगर तुमने इसे हल्के में लिया, तो नतीजे बहुत बुरे होंगे। पैसे तैयार रखो। हम बताएंगे कि कालीनगर बाजार में कहां और कैसे पैसे पहुंचाने हैं। अगर पुलिस को बताया तो याद रखना, तुम्हें और तुम्हारे परिवार को छोड़ा नहीं जाएगा। आसपास के सभी मंदिरों को हमारी बात माननी होगी। दाकोप की रहने वालीं तुलसी गलदार साइकत की भाभी हैं। वे कहती हैं कि गांव में कोई दिक्कत नहीं है। सब मिल-जुलकर रहते हैं, लेकिन इस तरह की खबरें पढ़ती हूं, तो डर जाती हूं। मुझे डर लगता है क्योंकि मैं हिंदू हूं।’ ……………………….बांग्लादेश से ये रिपोर्ट भी पढ़ें 1. भारत से दोस्ती या दुश्मनी, चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बांग्लादेश में होने वाले चुनाव पर ढाका के रहने वाले अहीदुज्जमान कहते हैं, ‘मुझे चुनाव से कोई फर्क नहीं पड़ता। अवामी लीग ने देश को आजादी दिलवाई, उसी को चुनाव नहीं लड़ने दिया जा रहा। दूसरी तरफ जो 1971 के मुक्ति संग्राम के खिलाफ थे, वे चुनाव में जमकर प्रचार कर रहे हैं। अहीदुज्जमान के जैसी उलझन हर बांग्लादेशी के सामने है। यहां समझ आया कि भारत सबसे बड़ा मुद्दा है। वोटर दो हिस्सों में बंटे हैं, एक भारत समर्थक है और दूसरा भारत विरोधी। पढ़ें पूरी खबर… 2. BNP लीडर बोले- इंडिया स्पेशल नहीं, शेख हसीना को पनाह देने से रिश्ते कैसे सुधरेंगे शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। वे कहते हैं कि हम भारत से अच्छी दोस्ती चाहते हैं, लेकिन भारत में कुछ स्पेशल नहीं है। समझ नहीं आता उसने शेख हसीना को पनाह क्यों दी है। इससे रिश्ते अच्छे नहीं हो पाएंगे। पढ़ें पूरा इंटरव्यू...
DNA: खलीफा का संवाद यानी युद्ध का आगाज!...ईरान के लिए ट्रंप का 'अंडरकवर प्लान'; जानिए पूरी डिटेल
अमेरिका और ईरान के बीच वर्ता होने की खबर सामने आने के बाद एक उम्मीद की किरण दिखी है. माना जा रहा है कि इस वार्ता से ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव कम हो सकता है.
US Presidents: अमेरिका के लगभग सभी राष्ट्रपति दो खास तुरुप के इक्कों की वजह से खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर नेता मानते हैं. खासकर 23 देशों वाले उत्तरी अमेरिका महाद्वीप और 12 देशों वाले दक्षिण अमेरिका पर तो उनकी खास नजर रहती है. ग्लोबल ग्लोब पर एशिया, अफ्रीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्टिका तक अमेरिकी राष्ट्रपति कैसे अपनी नजर रखते हैं, जानिए.
बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा भड़क गई है. इस बार सरकारी कर्मचारियों ने मोहम्मद यूनुस के आवास जमुना के बार प्रदर्शन किया है. हिंसक झड़प में कई लोगों के घायल होने की खबर है.
UAE Releases More Than 100 Afghan Prisoners:यूएई ने अपने नेशनल डे के मौके पर 100 से ज्यादा अफगान नागरिकों को जेल से रिहा कर दिया है. यह कदम ऐसे दौर में हुआ है, जब पाकिस्तान और तालिबान के बीच रिश्तों में जमकर तनाव फैला हुआ है. समझते हैं पूरी बात.
जेफ्री एपस्टीन से रिश्तों पर बिल गेट्स ने जताया खेद, कहा-उसके साथ बिताए हर मिनट पर पछतावा
ऑस्ट्रेलिया के ‘9न्यूज’ को दिए एक साक्षात्कार में गेट्स ने कहा कि उन्हें एपस्टीन के साथ बिताए समय पर गहरा पछतावा है और वे इसके लिए माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा, “उसके साथ बिताए हर मिनट पर मुझे अफसोस है। वह एक बड़ी गलती थी।”
बांग्लादेश के पूर्व विदेश मंत्री ए. के. अब्दुल मोमेन ने 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव को “पाखंड” करार दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर विपक्षी दलों को चुनाव से बाहर कर दिया गया है. मोमेन ने अमेरिका से अपील की है कि वह इस चुनाव को मान्यता न दे.
अमेरिका में सस्ती दवाओं के लिए वेबसाइट लॉन्च, ट्रंप बोले- ये है 'वेरी बिग डील'; लोगों का बचेगा पैसा
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सस्ती दवाओं के लिए TrumpRx.gov नाम की नई फेडरल वेबसाइट लॉन्च की है. ट्रंप का दावा है कि इससे प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों में ऐतिहासिक कमी आएगी और लोग पैसा बचाकर स्वस्थ रहेंगे. योजना के तहत कूपन के जरिए दवाएं वैश्विक न्यूनतम कीमत पर उपलब्ध होंगी.
दक्षिण कोरिया में जनसंख्या संकट पर चर्चा के दौरान जिंदो काउंटी के गवर्नर किम ही-सू का एक बयान भारी विवाद में घिर गया है. उन्होंने ग्रामीण इलाकों में आबादी बढ़ाने के लिए श्रीलंकाई और वियतनामी कुंवारियों को आयात करने जैसी टिप्पणी कर दी. जिसके बाद इस बयान पर देशभर में गुस्सा फूट पड़ा, सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया आई और अंततः गवर्नर को माफी मांगनी पड़ी है.
बीएलए के प्रवक्ता ने दावा किया है कि उनके लड़ाकों ने अब तक पाकिस्तानी सेना के 310 सैनिकों को मार गिराया है। वहीं पाकिस्तानी सेना ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में 216 विद्रोहियों को ढेर किया है और अभियान को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया गया है।
ओमान में आज से शुरू अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता
शुक्रवार को परमाणु वार्ता के लिए यूएस और ईरान ओमान में मिलेंगे। व्हाइट हाउस ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम कूटनीति पर काम कर रही है जिसका मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण रोक लगाना है
ये खबर सुनकर आपको भी हंसी और हैरानी दोनों होगी. पोलैंड में संसद के निचले सदन (सीज्म) के स्पीकर व्लोडजिमिएर्ज चार्जास्टी(Wodzimierz Czarzasty) ने अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को खुलकर लताड़ लगाई है. ऐसी बात कही है, जिसके बाद पूरी दुनिया में अपना दबदबा बना रहे ट्रंप की सरकार भड़क गई है. जानें पूरी बात.
अमेरिका में बड़ा रेल हादसा, पटरी से उतरी मालगाड़ी, पानी में गिरे प्रोपेन से भरे डिब्बे
US Train Accident: अमेरिका में एक बड़ा हादसा हो गया है. यहां के कनेक्टिकट राज्य के मैन्सफील्ड शहर में एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. इस ट्रेन में दो इंजन और 41 डिब्बे थे.
अमेरिका में सस्ती दवाओं की नई राह: ट्रंप ने लॉन्च की वेबसाइट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रंपआरएक्सडॉटजीओवी नाम की एक नई फेडरल वेबसाइट लॉन्च की, जो आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दर्जनों प्रिस्क्रिप्शन दवाओं पर भारी छूट देने का विश्वास दिलाती है
Zohran Mamdani: न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी हिजाब का समर्थन करके फंस गए हैं. उन्होंने हिजाब को मुस्लिम विरासत की भक्ति और जश्न का एक शक्तिशाली प्रतीक बताया, जिसके बाद लोगों ने उनकी जमकर आलोचना की.
Russia-Ukraine Talks Second Round: अमेरिका की मध्यस्थता में रूस-यूक्रेन वार्ता का दूसरा दौर समाप्त हो गया है, हालांकि युद्धविराम, क्षेत्रीय विवाद और सुरक्षा गारंटी जैसे अहम मुद्दों पर अब भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि अगली शांति वार्ता जल्द होगी.
अमेरिका में बड़ा रेल हादसा: प्रोपेन से भरे डिब्बे पानी में गिरे
अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य के मैन्सफील्ड शहर में एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई। न्यू इंग्लैंड सेंट्रल रेलरोड (एनईसीआर) की इस ट्रेन में दो इंजन और 41 डिब्बे थे, जिनमें से कई पटरी से उतर गए
यूएई में रूस-यूक्रेन वार्ता खत्म, कैदियों की अदला-बदली पर सहमति
अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत का दूसरा दौर पूरा हो गया है। इस बातचीत में दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर कैदियों की अदला-बदली पर सहमति जताई
अमेरिका की मशहूर टीवी एंकर सवाना गुथरी की 84 वर्षीय मां नैन्सी गुथरी पिछले पांच दिनों से लापता हैं. घर से खून के निशान मिले हैं और मीडिया को फिरौती नोट भेजे गए हैं. क्या जिंदा हैं नैन्सी गुथरी? मशहूर एंकर की मां की तलाश में ट्रंप ने पूरी फौज उतार दी है. नैन्सी गुथरी का केस बन जाएगा ऐतिहासिक किडनैपिंग मामला? जानें कुछ अमेरिकीहाई-प्रोफाइल किडनैपिंग मामला.
नेपाल में बारात ले जा रही बस हादसे का शिकार, 8 लोगों की मौत
नेपाल के बैतडी जिले में गुरुवार शाम एक शादी की बारात ले जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई
5 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस को लेकर कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा- पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी ने देश के लोगों को समस्या माना। पीएम ने बिना नाम लिए राहुल और उनके परिवार पर आरोप लगाया कि महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया। पीएम मोदी के ऐसे ही 4 बड़े बयान और उनके पीछे की सच्चाई जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… बयान-1: नेहरू-इंदिरा ने देश के लोगों को समस्या माना पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘हमारी और कांग्रेस की अप्रोच में जमीन-आसमान का अंतर है। देश के नौजवानों पर हमें भरोसा है। कांग्रेस देशवासियों को ही समस्या मानती है। एक बार इंदिरा जी ईरान में भाषण दे रहीं थी। उन्होंने नेहरू जी के साथ बातचीत का उल्लेख किया, 'जब किसी ने मेरे पिता जी से पूछा कि उनके सामने कितनी समस्याएं हैं तो उन्होंने कहा 35 करोड़।' उस समय हमारे देश की जनसंख्या 35 करोड़ थी।’ ‘इंदिरा जी ने आगे कहा- आज देश की जनसंख्या 57 करोड़ है। मेरी समस्याओं की संख्या भी इतनी ही बड़ी है।’ कोई ऐसा हो सकता है कि अपने देश के लोगों को समस्या मानें? ये लोग भारत के लोगों को समस्या मानते हैं।’ सच्चाई क्या है? बयान-2: 'महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया' पीएम मोदी ने क्या कहा- नेहरू- गांधी परिवार का नाम लिए बिना पीएम बोले, ‘चोरी इनका खानदानी पेशा है। इन्होंने महात्मा गांधी का सरनेम चुरा लिया।’ सच्चाई क्या है? बयान-3: ‘मोहब्बत की दुकान वाले मोदी तेरी कब्र खुदेगी के नारे लगा रहे’ पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘मोहब्बत की दुकान खोलने वाले ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के नारे लगा रहे हैं। ये कौन सी दुकान है जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने की बात करते हैं? ये कौन से संविधान से सीखा है, जो देश के किसी नागरिक की कब्र खोदने की बात करते हैं?’ सच्चाई क्या है? बयान-4: सरदार सरोवर प्रोजेक्ट नेहरु ने शुरु किया, दशकों बाद मैंने पूरा किया पीएम मोदी ने क्या कहा- ‘सरदार पटेल ने इसका सपना देखा था, नेहरू ने इसकी आधारशिला रखी थी, और कई दशकों बाद मैंने इसका उद्घाटन किया। यही कांग्रेस की हालत है। वे सिर्फ कल्पना करते हैं, लेकिन उसे लागू नहीं कर पाते। जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब इस प्रोजेक्ट के लिए मुझे 3 दिन अनशन पर बैठना पड़ा था। ’ सच्चाई क्या है? --------- ये खबर भी पढ़िए… क्या लोकसभा में पीएम मोदी को खतरा था:स्पीकर बिरला ने क्यों टाली उनकी स्पीच; किस 'अप्रत्याशित घटना' का संकेत दिया 22 साल बाद प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ। 4 फरवरी को बजट सत्र के 7वें दिन विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में पीएम मोदी नहीं पहुंचे। पूरी खबर पढ़िए…
शेख हसीना के तख्तापलट और भागकर भारत आने के बाद से ही बांग्लादेश और इंडिया के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। एक तरफ बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं तो दूसरी तरफ जमात और BNP जैसी पार्टियां हसीना को वापस भेजने की मांग पर अड़ी हुई हैं। 12 फरवरी को बांग्लादेश में आम चुनाव हैं। इन चुनावों में भी सबसे बड़ा मुद्दा भारत के साथ दोस्ती या दुश्मनी ही नजर आ रहा है। फिलहाल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार डॉ यूनुस चला रहे हैं। ये सरकार हिंदुओं पर हो रहे हमलों को कम्युनल न मानकर निजी दुश्मनी के मामले बता रही है। दैनिक भास्कर ने डॉ यूनुस के चीफ एडवाइजर और प्रेस सेक्रेटरी शफीकुल आलम से भारत से रिश्तों, शरिया कानून और हिंदुओं के कत्ल जैसे मुद्दों पर बात की। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सबसे बुरे दौर में हैं। आप भारत से क्या चाहते हैं?जवाब: भारत को समझना होगा कि बांग्लादेश बड़ा देश है। वो हमें भूटान न समझे। हम 18 करोड़ आबादी वाला देश हैं। हसीना के दौर में खुलेआम चुनाव में धांधली हुई। इसके बावजूद किसने हसीना का समर्थन किया, लोग ये सब समझते हैं। रिश्तों को बेहतर करने के लिए दोनों देशों को समझना होगा कि रिश्ता ईमानदारी, सम्मान और बराबरी के साथ हो सकता है। हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। भारत हमारा बड़ा पड़ोसी है। भारतीय इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है। हमारे बीच 4 हजार किमी का बॉर्डर है। हम भौगोलिक रूप से जुड़े हुए हैं। एक-दूसरे की रिश्तेदारियां हैं। हमारी भाषा, संस्कृति काफी मिलती-जुलती है। सवाल: डॉ. यूनुस क्या चाहते हैं, वे इन विवादों को कैसे देख रहे हैं?जवाब: मुझे लगता है कि सभी शेख हसीना की वापसी चाहते हैं। उनके दिल्ली में होने से किसी का फायदा नहीं हो रहा। वे वहां रहकर बांग्लादेश में लोगों को भड़का रही हैं, विद्रोह की कोशिश कर रही हैं। सवाल: बांग्लादेश की टीम ने भारत आकर टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप खेलने से मना कर दिया, ऐसा क्यों?जवाब: टीम की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी चिंता थी। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने जो फैसला लिया, हमने उसका समर्थन किया। मैं इस पर ज्यादा नहीं कहना चाहता। सवाल: चुनाव के ठीक पहले 118 अफसरों का प्रमोशन हुआ लेकिन उसमें एक भी हिंदू या अल्पसंख्यक नहीं है? जवाब: उसमें बौद्ध कम्युनिटी से आने वाले एक अफसर हैं। वैसे मुझे लगता है कि हम धर्म देखकर ऐसे फैसले नहीं करते। हसीना सरकार में अच्छे अफसरों को काफी नजरअंदाज किया गया था। सवाल: मतलब आप कह रहे हैं कि सभी हिंदू अफसर अवामी लीग के समर्थक हैं?जवाब: हमने सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि उन मुस्लिम अफसरों को भी प्रमोट नहीं किया, जो भ्रष्ट या नाकाबिल थे। हमने जो नई सरकारी नौकरियां दी हैं, उनमें कई कर्मचारी हिंदू कम्युनिटी के भी हैं। सवाल: स्टूडेंट लीडर उस्मान हादी की हत्या हुई, सरकार ये क्यों नहीं रोक सकी?जवाब: 2014 में हसीना के वक्त चुनाव में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। BNP ने चुनाव का बहिष्कार किया था। तब चुनाव में 115 लोगों की हत्या हुई थी। अब ऐसा नहीं है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि इस बार चुनाव अनाउंस होने के बाद से अब तक सिर्फ 4 मौतें हुईं। इसमें स्टूडेंट लीडर उस्मान हादी भी शामिल हैं। उस्मान को अवामी लीग के समर्थकों ने मारा है। हमारी रिपोर्ट्स बताती हैं कि अवामी लीग के सीनियर लीडर ने हादी को मरवाने के लिए फंडिंग की है। पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसी के मुताबिक हादी की हत्या करने के बाद हत्यारे बांग्लादेश की सीमा पार करके भारत में दाखिल हो गए। सवाल: बांग्लादेश की भारत से दूरी बढ़ रही हैं लेकिन दूसरे देशों से नजदीकियां बढ़ी हैं?जवाब: हमें पूरी दुनिया से समर्थन मिला है। अमेरिका, चीन, सार्क देश और वेस्टर्न यूरोप के देशों से समर्थन मिला है। डॉ यूनुस ने शांति और स्थिरता लाने के लिए काम किया है। इकोनॉमी में भी ग्रोथ देखने को मिली है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि हम 6% ग्रोथ के साथ आगे बढ़ेंगे। हमारा फोकस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के साथ संबंध बेहतर करने पर था और डॉ यूनुस ने इसे बखूबी किया है। सवाल: चुनाव से पहले बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले और हत्याएं हुईं, आपके सरकार में रहते ऐसा कैसे हो रहा है?जवाब: पिछले साल हमने हिंसा पर सालाना रिपोर्ट जारी की थी। दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा के वक्त हालात बेहतर थे। कम्युनल और हेट क्राइम के मामले में पिछले एक साल में सिर्फ एक ही हत्या हुई है, जिसमें दीपू चंद्र दास का मामला है। दूसरी घटनाओं में जमीन और कानून व्यवस्था के मामले या किसी दूसरी वजहों से हत्या हुई हैं। अवामी लीग हर हिंदू की हत्या को धार्मिक हिंसा में हुई मौत बता रही है। आप खुद जाकर इन्वेस्टिगेशन करें। हम आपका स्वागत करते हैं कि आप जाकर उन परिवारों से मिलें और बात करें। सवाल: हिंदू अल्पसंख्यक कम्युनिटी ने डेटा देकर कहा कि पिछली सरकार के मुकाबले अपराध बढ़े हैं, क्या वे झूठ बोल रहे हैं?जवाब: मुझे लगता है कि ऐसे संगठनों के नेता अवामी लीग से मिले हुए हैं। वे जो डेटा जारी करते हैं वो गलत हैं। कई मीडिया संगठनों ने उनके डेटा पर रिसर्च की है। वे बताते हैं कि डेटा में से कोई भी घटना कम्युनल किलिंग की नहीं है। ज्यादातर मामले लूटपाट, आपसी रंजिश के हैं। बांग्लादेश हिंदू, बुद्ध, क्रिश्चियन परिषद नाम के संगठन और लोग हसीना के पालतू कुत्तों की तरह के हैं। सवाल: डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार निष्पक्ष चुनाव कराना कैसे सुनिश्चित करेगी?जवाब: ये अंतरिम और निष्पक्ष सरकार है। बांग्लादेश में किसी पार्टी ने अंतरिम सरकार पर पक्षपाती होने का आरोप नहीं लगाया है। डॉ यूनुस की सरकार में ईमानदारी से काम हो रहा है। हमने चुनाव में 10 लाख सिक्योरिटी फोर्स, पुलिस, पैरामिलिट्री और एलीट फोर्स लगाने का फैसला किया है। मुश्किल जगहों पर सीसीटीवी कैमरा और सुरक्षाबलों को वियरेबल कैमरे देंगे। हमने क्रिटिकल इलाकों में ड्रोन सर्विलांस की भी तैयारी की है। ताकि हम चुनाव मॉनीटर कर सकें। अगर चुनाव के दौरान कोई गड़बड़ी होती है, तो पुलिस और सुरक्षाबल तुरंत मौके पर पहुंच पाएं। हमने इसकी डिटेल प्लानिंग की है। लोकल प्रशासन में हमने निष्पक्षता और बैकग्राउंड चेक करके ही अधिकारियों को चुना है। सवाल: वोटिंग के दिन एक वोट सरकार बनाने के लिए और दूसरा रेफरेंडम के लिए देना होगा, क्या इससे कनफ्यूजन नहीं होगा ?जवाब: मुझे लगता है कि जिसे भी बहुमत मिलेगा, वो सरकार बनाएगा। बाकी रेफरेंडम देश में रिफॉर्म को लेकर है। अगर लोग ‘हां’ के पक्ष में वोट देते हैं तो हम बेहतर राजनीतिक व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उसमें कोई भी नेता हसीना की तरह तानाशाही नहीं कर पाएगा। सवाल: अगर किसी को बहुमत नहीं मिला तब क्या होगा?जवाब: किसी भी दूसरे देश या भारत की तरह गठबंधन की सरकार बन सकती है। सवाल: अगर रेफरेंडम के पक्ष में वोटिंग हुई तो क्या बांग्लादेश से सेक्युलरिज्म निकाल दिया जाएगा?जवाब: मुझे लगता है कि वैसा ही रहेगा। सेक्युलरिज्म को हम प्लूरलिज्म से बदलेंगे। हालांकि मुझे नहीं लगता कि इस मामले में कोई बड़ा बदलाव होगा। सवाल: क्या बांग्लादेश में सेक्युलरिज्म की जगह इस्लामिक शरिया कानून होगा?जवाब: ऐसा नहीं होगा, इसे लागू करने का सवाल ही नहीं उठता। सवाल: 40% वोट शेयर वाली अवामी लीग को चुनाव नहीं लड़ने दे रहे, आपको नहीं लगता ये अलोकतांत्रिक है?जवाब: अवामी लीग अपना वोट शेयर 40% होने का दावा करती है, लेकिन सभी चुनावों में धांधली हुई थी। उनका वोटिंग शेयर 10% ही था। वे जानते थे कि BNP उनके लिए चुनौती है, इसलिए चुनाव में धांधली करके जीतते थे। अवामी लीग ने जुलाई और अगस्त 2024 में सारा समर्थन खो दिया लेकिन मुझे लगता है कि पुलिस और सिक्योरिटी की वजह से हुई मौतों से जनाधार कम नहीं हुआ। बल्कि अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और स्टूडेंट लीडर्स की हिंसा से उनका समर्थन खत्म हो गया है। हसीना के ऑर्डर पर हजारों लोग गायब कर दिए गए, हजारों की हत्या कर दी गई। हसीना सरकार धरती पर सबसे भ्रष्ट सरकार थी लेकिन उनकी पार्टी ने अब तक सॉरी नहीं कहा। हसीना भारतीय मीडिया को इंटरव्यू दे रहीं और अच्छी-अच्छी बातें कर रही हैं। सवाल: अगर शेख हसीना अवामी लीग पार्टी से अलग हो गईं तो क्या बैन हटाएंगे?जवाब: ये तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल अभी इलेक्शन होने हैं। ……………… ये इंटरव्यू भी पढ़ें… ‘जिस देश ने हसीना को पनाह दी, वो दोस्त कैसे’ बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं। शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। पार्टी की कमान पूर्व PM खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है। दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…
ओमान की बैठक हुई फेल तो जल उठेगा मिडिल ईस्ट! आर-पार की तैयारी में अमेरिका और ईरान
वार्ता से पहले ही दोनों देशों के रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्य चुनौती बातचीत की विषय-वस्तु को लेकर ही होगी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि यदि बातचीत सार्थक होनी है तो उसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों जैसे मुद्दों को शामिल करना होगा।
वॉशिंगटन पोस्ट ने की बड़े पैमाने पर छंटनी, शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर भी बाहर
ईशान थरूर पिछले 12 वर्षों से वाशिंगटन पोस्ट से जुड़े थे और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नियमित स्तंभ लिखते थे। छंटनी की जानकारी साझा करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे आज वाशिंगटन पोस्ट से निकाल दिया गया है। मेरे साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी और कई अन्य शानदार सहकर्मी भी निकाले गए हैं। ”
पाकिस्तान: सर्वे डेटा से जनता और सरकारी संस्थानों के बीच भरोसे की गहरी खाई उजागर
पाकिस्तान में जनता और सरकारी संस्थानों के बीच भरोसे की कमी सामने आई है। इप्सोस और फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा जारी एक पारदर्शिता सर्वेक्षण में “धारणा और वास्तविकता के बीच अंतर” को उजागर किया गया है
Iran-America Conflict: ईरान और अमेरिका इन दिनों जंग की कगार पर खड़े हैं. भले ही दोनों देश वार्ता के लिए मान चुके हैं, लेकिन जंग को लेकर अभी भी संभावना जताई जा रही है.
यूरोप के खूबसूरत देशों में शुमार ग्रीस धार्मिक उन्माद, हिंसा और कट्टरपंथ से परेशान हैं. ग्रीस आने वाले समय में कई बड़े एक्शन की तैयारी में है. ग्रीस सरकार एथेंस में अवैध मस्जिदों की पहचान करने के लिए अभियान चला रही है.
अमेरिका की डिफेंस इनोवेशन यूनिट और डीआरडीओ एक साथ कर सकते हैं काम
नई दिल्ली में भारत-अमेरिका संयुक्त तकनीकी समूह की 24वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मकसद रक्षा विज्ञान और नई तकनीकों के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को और आगे बढ़ाना था।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को कैसे क्रूड ऑयल ने किया प्रभावित? जानिए क्या है एक्सपर्ट्स की राय
भारत अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते की घोषण की जा चुकी है. जल्द ही दोनों देशों के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर किया जाना है. ट्रंप ने भारत पर थोपा गया 50 प्रतिशत का टैरिफ घटा कर 18 प्रतिशत कर दिया है.
घाना को क्यों कहा जाता है'सोने का देश', भारत के साथ कैसा ही इस देश का रिश्ता?
भारत अपनी कुल सोने की जरूरत का 70 प्रतिशत से अधिक आयात घाना से करता है, जिससे यह द्विपक्षीय व्यापार का मुख्य आधार बन गया है. वित्त वर्ष 2024-25 में घाना ने भारत को करीब 12,157.74 मिलियन डॉलर मूल्य का सोना निर्यात किया.
22 साल बाद प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ। 4 फरवरी को बजट सत्र के 7वें दिन विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में पीएम मोदी नहीं पहुंचे। आज स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि लोकसभा में पीएम मोदी के साथ अप्रत्याशित घटना हो सकती थी। इसलिए कल उनकी स्पीच टालनी पड़ी। आखिर लोकसभा में ऐसा क्या हुआ कि स्पीकर ने पीएम को भाषण न देने की सलाह दी और उन्हें क्या होने की आशंका थी; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: लोकसभा में क्या हुआ और स्पीकर ने क्या कहा? जवाब: 4 फरवरी को पीएम मोदी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था। शाम 5 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो विपक्ष की महिला सांसदों ने सत्ताधारी नेताओं की कुर्सियां घेर लीं। इनमें पीएम मोदी की कुर्सी भी थी। हंगामा बढ़ने के बाद सदन की कार्यवाही प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही स्थगित कर दी गई। आज 5 फरवरी को कार्रवाई फिर शुरू हुई। इस दौरान स्पीकर ओम बिरला ने एक दिन पहले सदन स्थगित करने और पीएम का भाषण टालने का कारण बताया। उन्होंने कहा, ‘जब सदन के नेता पीएम मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था तो विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते थे।’ बिरला ने आगे कहा, ‘अगर ये घटना हो जाती, तो लोकतंत्र की परंपरा तार-तार हो जाती। इसे टालने के लिए मैंने पीएम से सदन में न आने का आग्रह किया। पीएम ने मेरे सुझाव को माना।’ बिरला ने महिला सांसदों का पीएम की कुर्सी तक जाना मर्यादा के खिलाफ बताया। उन्होंने विपक्षी सांसदों से कहा, ‘आप पोस्टर लेकर आएंगे तो सदन नहीं चलेगा। जिस तरह से महिला सदस्य पीएम की सीट तक पहुंचीं, उसे देश ने देखा। ये उचित नहीं था। ये सदन की गरिमा के अनुकूल भी नहीं था।’ सवाल-2: विपक्ष ने ऐसा क्या किया कि स्पीकर ने पीएम को भाषण न देने की सलाह दी? जवाब: स्पीकर ओम बिरला ने 4 फरवरी को लोकसभा में हुई घटना का जिक्र करते हुए पीएम को भाषण न देने की सलाह दी। सवाल-3: स्पीकर बिरला को संसद में क्या होने की आशंका थी? जवाब: स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि संसद में कुछ अप्रत्याशित हो सकता था, जिससे लोकतंत्र की परंपरा तार-तार हो जाती। स्पीकर बिरला के मुताबिक, 4 फरवरी को विपक्ष के कई संसदों ने उनके चैंबर का भी घेराव किया था। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद में दो तरह की ‘अप्रत्याशित घटना’ हो सकती थी- राजनीतिक विवाद या सुरक्षा पर खतरा। सदन में इससे पहले हुई अप्रत्याशित घटनाओं से समझते हैं कि लोकसभा में राजनीतिक या सुरक्षा की नजर से क्या अप्रत्याशित हो सकता था… सदन में हुई अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाएं 1988: तमिलनाडु विधानसभा में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा 1989: जे. जयललिता की साड़ी खींची 1997: उत्तर प्रदेश में विधायकों ने कुर्सियां और माइक फेंके 2014: कांग्रेस सांसद ने चलाया मिर्ची स्प्रे 2016: विधायक ने मंत्री पर जूता फेंका सदन की सिक्योरिटी अप्रत्याशित घटनाएं 1994: विजिटर गैलरी से एक आदमी कूद गया 2001: संसद भवन पर आतंकी हमला 2002: ओडिशा विधानसभा में बजरंग दल, विहिप का हंगामा 2023: संसद में घुसे 2 युवक, पीले धुएं वाले कैनिस्टर छोड़े सवाल-4: अगर हंगामा बढ़ता या कुछ अप्रत्याशित होता, तो फिर क्या होता? जवाब: संसद में अगर कोई अप्रत्याशित घटना या बहुत ज्यादा हंगामा होता है, तो सिक्योरिटी प्रोसिजर और प्रोटोकॉल तुरंत एक्टिव हो जाता है… 1. सदन की कार्यवाही रोकना 2. सांसदों और मंत्रियों की सुरक्षा 3. सुरक्षा चूक पर लॉकडाउन 4. कानूनी सख्त कार्रवाई -----------
अमेरिकी टीवी की मशहूर एंकर सवाना गुथरी (Savannah Guthrie) की अमेरिका समेत पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. इनसे जुड़ा मामला इतना भावुक है कि पूरी कहानी पढ़कर आप रो देंगे. तो समझे पूरी कहानी.
ख्वाजा आसिफ ने संसद में कहा कि बलूचिस्तान भौगोलिक रूप से पाकिस्तान का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। उन्होंने तर्क दिया कि इतने विशाल और कम आबादी वाले, पहाड़ी व रेगिस्तानी क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखना किसी घनी आबादी वाले शहर की तुलना में कहीं अधिक कठिन है।

