अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. इन सब के बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास शुरू किया है. इस अभ्यास का नाम 'Smart Control of the Strait of Hormuz' रखा गया था.
North Korea News: उत्तर कोरिया की राजनीति में एक नया चेहरा नजर आ रहा है. उत्तर कोरिया के राजनीतिक आयोजनों में किम जोंग उन की बेटी किम जू-ए नजर आ रही है, जिससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि जू-ए उत्तर कोरिया की अगली सुल्तान होने सकती हैं.
Amber Luke Tattoos Journey: ऑस्ट्रेलिया की सबसे ज्यादा टैटू वाली महिला एम्बर ल्यूक का नाम आपने जरूर सुना होगा. अपने शरीर को कैनवास बनाने वाली महिला का जीवन उसके टैटू की तरह इतना रंगीन नहीं है. टैटू के शौक ने 3 हफ्तों तक उनकी आंखों की रोशनी छीन ली. इस खबर में एम्बर के जीवन के बारे में बताएंगे..
पटरियों पर दौड़ रही थी ट्रेन, अचानक आ गया बर्फ का तूफान, 80 यात्रियों के साथ खिसक गए डिब्बे
Swiss Railway Line Hit By Avalanche: स्विट्जरलैंड में एक पैसेंजर ट्रेन भारी हिमस्खलन के चलते पटरी से नीचे उतर गई. इस हादसे में कई लोगों के घायल होने की आशंका है.
मशहूर टीवी एंकर सवाना गुथरी की मां नैन्सी गुथरी अब भी तीसरे हफ्ते में भी गायब हैं. 31 जनवरी की रात को वो अपने घर से अचानक लापता हो गईं, जिसके बाद पूरे अमेरिका की पुलिस इस मामले में खोजबीन कर रही है, लेकिन अब तक नैन्सी गुथरी का पता नहीं लग पाई है, जबकि गुथरी को खोजने के लिए 18 हजार फोन कॉल और 13 हजार टिप्स लोगों ने दे दिया है. पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है.
रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया के करीब 6000 सैनिक मारे या घायल हुए हैं. यह दावा दक्षिण कोरिया की तरफ से किया गया है. इसी बीच उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन ने बेटी किम जू ए के साथ जंग में शहीद परिवारों को‘लग्जरी मरहम’ दिया है.किम को पता है कि अपने देश के सैनिक इस तरह जंग में मारे जाते गए तो जनता में गुस्स फैल सकता है. जानें पूरी रिपोर्ट.
जर्मनी में बढ़ रहे हैं दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रेरित अपराध
जर्मनी की सरकार ने संसद में बताया है कि साल 2025 में 2024 के मुकाबले दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रेरित अपराधों की संख्या बढ़ी है. जर्मन पुलिस के आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी गई है
रूस ने नावाल्नी को दिया जहर: यूरोपीय देशों का दावा
जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, स्वीडन और नीदरलैंड्स ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि यूरोपीय प्रयोगशालाओं में हुए टेस्ट इस बात की पुष्टि करते हैं कि अलेक्सी नावाल्नी की हत्या एपिबेटिडीन नाम के न्यूरोटॉक्सिन से की गई
ओबामा का ट्रंप प्रशासन पर तीखा हमला, वर्तमान दौर की अमेरिकी राजनीति को बताया जोकरों का शो
ओबामा ने वर्तमान राजनीतिक विमर्श को इंटरनेट मीडिया और टेलीविजन पर चल रहे “सर्कस” से तुलना करते हुए कहा कि राजनीति में गंभीरता और गरिमा का स्तर गिरा है।
Awami League Dilemma Before Tarique Rahman:बांग्लादेश में चुनाव के बाद नई सत्ता बनने जा रही है और सबकी नजर तारिक रहमान के अगले कदम पर टिकी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अवामी लीग और शेख हसीना के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई होगी या देश मेल-मिलाप की राह पर चलेगा. नई सरकार का रुख ही देश की राजनीति की दिशा तय करेगा.
12 साल के लड़के ने बना डाला न्यूक्लियर फ्यूजन, बच्चे का कारनामा देख दुनिया हैरान
एडन का न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर एक दिन में तैयार नहीं हुआ। इस परियोजना को पूरा करने में उसे कुल चार साल लगे। इस दौरान उसे कई तकनीकी अड़चनों, सुरक्षा जांचों और असफल प्रयोगों का सामना करना पड़ा।
Tarique Rahman Meet Jamaat ameer, NCP convener: बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने शपथ ग्रहण से ठीक दो दिन पहले जमात-ए-इस्लामी अमीर शफीकुर रहमान और एनसीपी कन्वेनर नाहिद इस्लाम से मुलाकात की है. शफीकुर ने इसे 'राष्ट्रीय राजनीति का ऐतिहासिक पल' बताया और तारिक को भावी पीएम कहकर बधाई दी है. तारिक रहमान ने शपथ ग्रहण से पहले दोनों विपक्षी पार्टियों के मुखिया से मुलाकात करकेराजनीतिक समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है.जानें इसके पीछे की कहानी.
हिंद महासागर में अमेरिकी सेना की बड़ी कार्रवाई
पेंटागन ने बताया कि अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में वेनेजुएला से जुड़े एक अन्य तेल टैंकर को रोका और उस पर सवार हो गई
US magazine report on pakistan proxy war: अमेरिकी पत्रिका की रिपोर्ट में कहा गया कि यूएन के ध्यान ना देने के कारण पाकिस्तान पर कड़ा दबाव नहीं बन पाया और वह पड़ोसी देशों के खिलाफ प्रॉक्सी युद्ध की नीति अपनाता रहा है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि इंडिया को आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के सच्चाई को दुनिया के सामने लगातार लाना चाहिए और अपने सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाना चाहिए.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा सिर्फ कूटनीतिक इवेंट नहीं है। इसके साथ जुड़ी है 3.60 लाख करोड़ की 114 राफेल फाइटर जेट की संभावित डील, जो भारतीय वायुसेना के लिए ऑक्सीजन साबित हो सकती है। चीन-पाकिस्तान से दो मोर्चों पर निपटने के लिए भारतीय वायुसेना में 42.5 स्क्वाड्रन मंजूर किए गए हैं। इस वक्त भारत के पास करीब 29 स्क्वाड्रन ऑपरेशनल हैं। यानी जरूरत से 13 कम। इसमें भी अगले 10 साल में जगुआर, मिग-29 और मिराज-2000 जैसी कई मौजूदा फ्लीट रिटायर हो जाएंगी। इसलिए सवाल कई हैं- 114 नए राफेल की डील कितनी क्रूशियल है, 42.5 स्क्वाड्रन पूरे होने में कितना वक्त लगेगा और जब चीन छठवीं पीढ़ी के जेट्स पर आगे बढ़ चुका है और पाकिस्तान को भी 5वीं पीढ़ी के जेट्स मिलने वाले हैं, तो भारत की क्या स्ट्रैटजी है। मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी... **** ग्राफिक्स: द्रगचन्द्र भुर्जी और अजीत सिंह ------ ये खबर भी पढ़िए 239 पैसेंजर्स के साथ अचानक कैसे गायब हुआ MH370 विमान:12 साल बाद सबसे महंगा सर्च ऑपरेशन फिर शुरू; कौन-से राज खुलेंगे 12 साल पहले 239 पैसेंजर्स के साथ गायब हुए MH370 विमान की गुत्थी सुलझ सकती है। 31 दिसंबर 2025 से दुनिया का सबसे महंगा सर्च ऑपरेशन फिर शुरू हुआ है। मलेशिया की ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री के मुताबिक नए तरीके से प्लेन की लोकेशन का अंदाजा लगाया गया है। पूरी खबर पढ़िए…
शेख हसीना के तख्तापलट के करीब डेढ़ साल बाद बांग्लादेश को चुनी हुई सरकार मिल रही है। 12 फरवरी को हुए चुनाव में BNP गठबंधन ने 212 सीटें जीती हैं। लंदन से बांग्लादेश लौटे BNP लीडर तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। पार्टी से 3 हिंदू सांसद भी चुने गए हैं। इनमें से ढाका-3 सीट से जीत दर्ज करने वाले गोयेश्वर चंद्र रॉय मंत्री बन सकते हैं। गोयेश्वर पिछली BNP सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। वे भारत से अच्छे रिश्तों के हिमायती हैं लेकिन उन्हें भारत से कई सारी शिकायतें भी हैं। दैनिक भास्कर ने हिंदुओं की सुरक्षा, शेख हसीना की वापसी और भारत से बांग्लादेश के रिश्तों समेत तमाम मुद्दों पर गोयेश्वर चंद्र रॉय से बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: मुस्लिम बहुल सीट ढाका-3 से आप एकतरफा जीते हैं। बदले माहौल में चुनाव लड़ने और जीतने का सफर कैसा रहा?जवाब: जो हम चाहते थे, वही नतीजे आए। हमारी पहले से तैयारी थी कि हम पूरे दम से चुनाव लड़ेंगे। हमने फासीवादी शेख हसीना के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। चुनाव से पहले हमने बांग्लादेश के लोगों के सामने अपनी योजना रखी थी। हम युवाओं को फोकस में रखकर सरकार चलाएंगे। लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करेंगे। इकोनॉमी को मजबूत करने और एक्सपोर्ट बढ़ाने की हमारी कोशिश है। चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि जनता हमारी प्लानिंग से संतुष्ट हैं। सवाल: आपने विपक्ष में रहकर अवामी लीग के खिलाफ 17 साल लड़ाई लड़ी है, ये कितना मुश्किल था?जवाब: सिर्फ मुझ पर ही 61 केस दर्ज किए गए। हमने हसीना सरकार के आसमान छूते भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। इसलिए मुझे दबाने के लिए अवामी लीग ने ये फर्जी केस किए थे। बांग्लादेश में हर व्यक्ति करप्शन और टॉर्चर से छुटकारा चाहता था, कोई सुरक्षित महसूस नहीं करता था। इस चुनाव में लोगों ने अपने मन की बात बैलेट के जरिए बताई है। सवाल: बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को लेकर तारिक रहमान से आपकी क्या बातचीत हुई?जवाब: बांग्लादेश की ऐसी विचारधारा है कि हम अल्पसंख्यक शब्द में यकीन नहीं करते हैं। देश में रहने वाला हर व्यक्ति इस मिट्टी से जन्मा है। सबके पास संविधान के मुताबिक बराबरी का अधिकार है। सरकार और प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम करती है। हसीना सरकार के वक्त कई हिंदुओं को घर से निकालकर टॉर्चर किया गया। हमारे पास इसके सबूत हैं, लेकिन भारत ने कभी कोई एक्शन नहीं लिया। मुझे नहीं लगता है कि भारत कथित बांग्लादेशी अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए कुछ करना चाहता है। हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई सभी ने BNP को वोट दिया है। लोगों को यकीन है कि हमारी सरकार कानून व्यवस्था सुधारेगी और लोगों की सुरक्षा तय करेगी। सवाल: जनता ने कट्टरपंथी पार्टी जमात को क्यों खारिज किया, आपको क्या लगता है?जवाब: बांग्लादेश के लोग धार्मिक हैं, लेकिन कट्टर नहीं। हमारे यहां सांप्रदायिक सद्भाव है, यही हमारी हजारों साल पुरानी परंपरा है। हम पूजा और रोजा दोनों साथ करते हैं। सवाल: आपको क्या लगता है कि जमात को लोग कभी पसंद नहीं करेंगे?जवाब: जमात के बारे में हम जानते हैं कि वो कितने कट्टर हैें। हालांकि अब वो संवैधानिक रास्ते पर हैं और चुनाव लड़ रहे हैं। अगर जनता उन्हें चुनकर भेज रही है तो हम क्या कर सकते हैं। भला हम उनका विरोध कैसे कर सकते हैं। अगर जमात को कुछ सीटें मिली हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि बांग्लादेशी कट्टर हो रहे हैं। अवामी लीग के वोटर्स ने BNP को वोट दिया है, ना कि जमात को। सवाल: यूनुस सरकार का कार्यकाल आप कैसे देखते हैं। क्या आपको नहीं लगता कि उन्होंने हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ गलत किया?जवाब: मैं फिर से कहूंगा कि आप अल्पसंख्यकों पर फोकस मत कीजिए। हर किसी को खतरा रहा है, हर कम्युनिटी को धमकियां मिली हैं। शेख हसीना सरकार के वक्त प्रशासन की कोई जवाबदेही नहीं थी क्योंकि उनके ऑर्डर के बिना कुछ नहीं हो सकता था। हसीना ने सिर्फ अल्पसंख्यकों को नहीं सबको टॉर्चर किया। मैं हिंदू कम्युनिटी से हूं, आप मुझे अल्पसंख्यकों का नेता कहते हैं। हालांकि मुझे अल्पसंख्यकों का नेता कहलाया जाना पसंद नहीं है। हसीना सरकार ने मुझे टॉर्चर किया, दर्जनों केस किए, जेल भेजा। तब किसी ने नहीं कहा कि अल्पसंख्यकों को टॉर्चर किया जा रहा है। तब भारत ने भी कुछ नहीं कहा। अगर अवामी लीग के हिंदू लीडर पर भी सियासी वजहों से हमला होता है, तो आप माइनॉरिटी की बात करने लगते हैं। 23 मार्च 1973 को शेख मुजीब ने रोमना काली के एतिहासिक मंदिर पर हमला किया था, लेकिन तब भारत ने कोई सवाल नहीं किया। 2001 में PM रहीं खालिदा जिया के नेतृत्व में मैंने उस मंदिर का पुनर्निमाण करवाया। आप जाकर वो मंदिर देख सकते हैं। अवामी लीग के नेताओं ने कई मंदिरों पर हमले किए, हिंदुओं की जमीन हड़प लीं लेकिन उसकी कभी कोई चर्चा नहीं हुई। सवाल: पिछले दिनों अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों का जिम्मेदार कौन है?जवाब: जो भी हत्याएं हुई हैं, वो राजनीतिक हत्याएं हैं। किसी को धर्म की वजह से नहीं मारा गया। चुनाव के वक्त साउथ एशिया के हर देश में कुछ ना कुछ होता रहता है। आपको भी ये बात समझनी चाहिए, ताकि माइनॉरिटी को लेकर ये प्रोपेगेंडा बंद हो। सियासी रंजिश में होने वाली हिंसा हमारे यहां आम बात है। जब आप ऐसे मुद्दे उठाते हैं तो मुस्लिम कम्युनिटी अपमानित महसूस करती है। अगर आप खबरों के जरिए मुसलमानों को अपमानित महसूस कराएंगे तो अल्पसंख्यकों का क्या होगा। सवाल: आपके नजरिए से डॉ यूनुस का डेढ़ साल का कार्यकाल कैसा रहा?जवाब: वो राजनीतिक नहीं एक अंतरिम सरकार थी। मैं उनकी तारीफ करूंगा कि वो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवा पाए। अंतरिम सरकार के सामने कई चुनौतियां थीं लेकिन बांग्लादेश में फाइनेंशियल दिक्कतें और कानून व्यवस्था के चलते उसे हल नहीं कर सके। उन्हें जो करना था, उन्होंने किया। अब हमारी चुनी हुई सरकार को कानून के मुताबिक काम करना चाहिए, पार्टी के हिसाब से नहीं। सवाल: बांग्लादेशियों के लिए आपका क्या सपना है और भारत उसमें कैसे मदद कर सकता है?जवाब: भारत ने 1971 में हमारी मदद की लेकिन उसे समझना चाहिए कि सिर्फ एक पार्टी से दोस्ती करके कुछ नहीं होगा। दोस्ती देशों, लोगों और सरकारों के बीच होनी चाहिए। हमारी भाषा, संस्कृति, सोच-विचार सब एक जैसा है। भारत को लगता था कि बांग्लादेश में सिर्फ हसीना ही सरकार है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ मोमिन से किसी ने पूछा कि भारत-बांग्लादेश के संबंध कैसे हैं? उन्होंने जवाब दिया, पति-पत्नी की तरह हैं। क्या ये दोस्ताना रिश्ते की बातें हैं? लोग उनसे पूछ रहे हैं कि पत्नी कौन और पति कौन है? बांग्लादेश के लोग एंटी-इंडियन कभी नहीं रहे, लोग अवामी लीग के खिलाफ रहे हैं। भारत ने हमेशा अवामी लीग को प्रमोट किया। सवाल: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कैसे बेहतर किए जा सकते हैं?जवाब: भारत को ये स्वीकारना होगा कि उन्होंने जो किया वो गलत था। भारत के उच्चायोग ने मुझे कभी नहीं बुलाया लेकिन 5 अगस्त के बाद खूब संबंध बनाने की कोशिश की। क्या हमें नहीं पता है कि ऐसा क्यों किया। पिछले 17 सालों में उन्होंने मुझे कभी नहीं बुलाया, वो मेरा नाम तक नहीं जानते थे। अब उन्हें लग रहा है कि मेरे पास पावर आ रही है, तो मुझसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि उन्होंने जो किया वो गलत है। उन्हें अपनी विदेश नीति में बदलाव करना चाहिए। मुझे लगता है कि पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध होना बहुत जरूरी है। दोस्ती में बड़े या छोटे देश का सवाल नहीं होता, बराबरी के स्तर पर संबंध बनाए जाते हैं। सवाल: शेख हसीना अभी भारत में हैं, क्या आप उनकी वापसी के लिए बात करेंगे?जवाब: लोकतंत्र की मां, बेगम खालिदा जिया ने कभी देश नहीं छोड़ा। उन्होंने देश में रहकर कानून और कोर्ट का सामना किया। हसीना को वापस आकर कोर्ट का सामना करना चाहिए। भारत को लंबे वक्त के लिए हसीना को पनाह नहीं देनी चाहिए। ये भारत के लिए शर्मनाक है। भारत ने सभी क्रिमिनल्स को कोलकाता में पनाह दी हुई है। उन सबको वापस आना चाहिए और कोर्ट का सामना करना चाहिए। सवाल: अवामी लीग का बांग्लादेश में क्या फ्यूचर है?जवाब: मुझे नहीं पता कि लोग क्या सोच रहे हैं। BNP का हमेशा मानना रहा है कि किसी राजनीतिक पार्टी को बैन करना समाधान नहीं है। अवामी लीग को भी बैन नहीं करना चाहिए। हमारी पार्टी ने इस पर बयान भी जारी किया था। अगर अवामी लीग चुनाव लड़ती तो BNP की जीत और बड़ी होती। सवाल: चुनाव के साथ रेफरेंडम पर भी वोटिंग हुई और जुलाई चार्टर के पक्ष में वोटिंग हुई, ये कैसे लागू होगा?जवाब: रेफरेंडम में कई सारे सुधारों के सुझाव हैं, हमने खुद कई बार ये सुधार करने की बातें की हैं। अगर ये सुधार नहीं होंगे तो लोग हमारे खिलाफ भी हो सकते हैं। हमें बहुत सतर्कता से काम करना होगा। हमें संविधान के रास्ते पर चलना होगा। हम पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। हम 16 साल से न्याय के लिए लड़ रहे हैं, ताकि एक निष्पक्ष सिस्टम बन सकें। सवाल: क्या रेफरेंडम के बाद बांग्लादेश अब सेक्युलर राज्य नहीं रहेगा? क्या लोगों का ये डर वाजिब है?जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है। हम प्रैक्टिकली सेक्युलर है। हम सिर्फ इस्लाम की विचारधारा में यकीन नहीं रखते हैं बल्कि सभी की धार्मिक भावनाओं को मानते हैं। हम सबके धार्मिक अधिकारों की वकालत करते हैं। सेक्युलरिज्म के मुद्दे पर हम समझौता कर सकते हैं, लेकिन हम असांप्रदायिक देश बनाना चाहते हैं। हम कम्युनल नहीं हो सकते। पिछले चुनावों में शेख हसीना को दो तिहाई बहुमत मिला और विपक्ष नाम मात्र का था। तब भी उन्होंने संविधान से ‘बिस्मिल्ला-ए-रहमान ए रहीम’ हटाने की कोशिश नहीं की। सवाल: अब लगता है कि बांग्लादेश में स्थिरता का दौर आ रहा है, आपके हिसाब से 3 बड़ी चुनौतियां क्या हैं?जवाब: सबसे बड़ी चुनौती राजनीति है। मुझे लगता है कि अवामी लीग और जमात, सरकार के खिलाफ माहौल बनाएंगे और अस्थिरता लाने की कोशिश करेंगे। जब ये होगा तब भारत का क्या रुख होने वाला है, ये देखना सबसे अहम होगा। जमात और अवामी लीग सरकार गिराने के लिए हाथ मिला सकते हैं। सवाल: आपके हिसाब से BNP लीडर तारिक रहमान की 3 सबसे बड़ी खूबियां क्या हैं?जवाब: वो जिया उर रहमान का खून हैं और खालिदा जिया की विरासत आगे बढ़ा रहे हैं। वो लोगों की बातें ध्यान से सुनते हैं और उन पर अमल करते हैं। वो बहुत व्यवहारिक हैं। उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दूसरी पार्टी की आलोचना नहीं की। सवाल: क्या आप शेख मुजीब की लेगेसी का संरक्षित करेंगे?जवाब: मैं उनका घर तोड़े जाने की घटना की निंदा करता हूं। वो शेख हसीना का घर है। हसीना को देश वापस आना चाहिए और अपने घर जाना चाहिए। अगर किसी मदद की जरूरत होगी, तो हम उनकी मदद भी करेंगे। हम किसी का घर-इमारत तोड़ने में यकीन नहीं रखते हैं। गलत चीज, गलत होती है। बाकी लेगेसी के संरक्षण की बात है, तो ये हमारी जिम्मेदारी नहीं है। मुझे लगता है कि शेख मुजीब अवामी लीग के फादर हो सकते हैं, वो फादर ऑफ नेशन नहीं हैं। सवाल: क्या आप भारत जाना चाहते हैं?जवाब: बिल्कुल जाना चाहता हूं, लेकिन भारत मुझे वीजा और इजाजत ही नहीं देता। मेरे कोलकाता, दिल्ली, मुंबई हर जगह बहुत सारे जानने वाले हैं, मैं उनसे मिलना चाहता हूं। …………………….ये खबर भी पढ़ें… अवामी लीग-हिंदुओं के वोट BNP को मिले, जमात हारी करीब ढाई महीने पहले ही लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है। 12 फरवरी को हुए चुनाव में उनकी पार्टी BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के गठबंधन ने 299 में से 212 सीटें जीती हैं। सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की जरूरत थी। कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है। पढ़िए पूरी खबर…
NBC 5 डलास-फोर्ट वर्थ की ओरिजिनल रिपोर्ट के मुताबिक, एडन ने पहले दो साल फिजिक्स के थ्योरेटिकल पहलुओं पर पूरी तरह फोकस किया, इससे पहले कि वह किसी इक्विपमेंट को छूते भी नहीं थे.
आसमान में उड़ रहा जहाज बना जंग का मैदान, तुर्की से मैनचेस्टर जा रही फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग
Turkiye to Manchester flight: मारपीट के दौरान एक व्यक्ति ने दूसरे को पकड़कर जकड़ लिया, जिसकी वजह से विमान में बैठे परिवार और बुजुर्ग यात्री डर गए. गवाहों के अनुसार सीटों पर खून के निशान दिखे और फर्श पर दांत तक पड़े दिख रहे थे. इस घटना में कुछ यात्रियों ने घायलों को प्राथमिक उपचार भी दिया.
ट्रंप टैरिफ-टैरिफ खेलते रहे और US में इस बीमारी ने मचा दी तबाही, बंद करने पड़े कॉलेज
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में खसरे पर नज़र रखने वाले प्रोजेक्ट को लीड करने वाली पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट लॉरेन गार्डनर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल मामलों की संख्या और भी ज़्यादा होगी, जिसका एक बड़ा कारण बच्चों के वैक्सीनेशन रेट में कमी है.
888 महीनों के अंदर समुद्र में डूब सकते हैं दुनिया के ये 11 शहर, लिस्ट में बैंकाक से ढाका का नाम
City submerged: फिलहाल 2026 चल रहा है, ऐसे में दुनिया के 11 शहरों के पास मात्र 74 वर्ष यानी की 888 महीनों का वक्त है, जिसके बाद इन शहरों की इमारतों, घरों और पूरे समुदाय पर समुद्र और बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है. अगर ऐसे हालात बनते हैं तो फिर लोग सड़कों पर रेंगते पानी, बाढ़ से प्रभावित बाजारों और टूटी सड़कों पर चलते नजर आएंगे. हालांकि, कुछ लोगों को ये बात दूर की लगती है लेकिन इस चेतावनी के संकेत अभी भी मौजूद हैं.
Pews religious survey on Hindus:प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2010 से 2020 तक दुनियाभर में हिंदू आबादी एकदम संतुलित रूप से बढ़ी है. हालिया अनुमानित आंकड़े सनातन हिंदू धर्म के अनुयाइयों को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह बताते हैं.
हिन्द महासागर में चल रहा था तेल का खेल... फिर अमेरिका ने अचानक मार दी भांजी, अब क्या करेंगे ट्रंप?
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन बेहद सटीक और सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया. बताया गया कि ‘वेरोनिका III’ ने अमेरिकी निगरानी से बचने के लिए Caribbean Sea से लेकर Indian Ocean तक लंबा समुद्री रास्ता तय किया.
Extraterrestrial life: लंबे समय से एरिया 51 को लेकर कई तरह की साजिश वाली कहानियां चलती आ रही हैं. इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने ये भी दावा किया कि 1947 मेंरोसवैल में गिरे कथित एलियन यान का मलबा यहां लाकर छिपाया गया था. हालांकि अमेरिकी सरकार ने कभी इन दावों की पुष्टि नहीं की है.
एलेक्सी नवलनी को ‘डार्ट मेंढक’ का जहर दिए जाने का दावा, पांच यूरोपीय देशों ने रूस पर लगाया आरोप
पांचों देशों के विदेश मंत्रालयों ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि नवलनी से संबंधित जैविक नमूनों के स्वतंत्र विश्लेषण में ‘एपिबेटिडाइन’ नामक रासायनिक पदार्थ की उपस्थिति की पुष्टि हुई है।
Saket Srinivasaiah: यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया का निधन हो गया, उनके निधन ने हर किसी को चौंका दिया है. अब उनके भारतीय स्टूडेंट के रूममेट ने बताया कि मौत से पहले श्रीनिवासैया कैसे हो गए थे.
आत्महत्या नहीं, Epstein का कत्ल हुआ था... US डॉक्टर के दावे ने फिर खोली साजिश की परतें
Jeffrey Epstein:जेफरी एपस्टीन की 2019 में जेल में हुई मौत पर विवाद फिर तेज हो गया है. पोस्टमार्टम की निगरानी करने वाले डॉ. माइकल बैडेन ने दावा किया कि मौत फांसी से नहीं बल्कि गला घोंटने से हुई थी.
Larry the cat 15 years anniversary: ब्रिटेन की सरकार की बिल्ली लैरी ने 15 साल पूरे कर लिए हैं और वह छह प्रधानमंत्रियों के दौर में 10 डाउनिंग स्ट्रीट में रह चुका है. सड़क से उठाकर लाए गए इस चीफ माउसर को अब स्थिरता और ब्रिटिश राजनीति की अनोखी पहचान के रूप में देखा जाता है.
ईरान पर बड़े हमले की योजना बना रहा अमेरिकाः रिपोर्ट
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ईरान में मिलिट्री ऑपरेशन की योजना बना रहा है. इस ऑपरेशन के पहले से कहीं ज्यादा लंबा और गंभीर होने की संभावना भी जताई गई है
म्यूनिख में अमेरिका के सामने एकजुट यूरोप
जर्मनी में चल रहे म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में यूरोपीय नेता अमेरिका के सामने एकजुट हो कर खड़े होने का संदेश देते दिख रहे हैं. वहीं अमेरिका ने दोस्ती बरकरार रखने का संकेत दिया है
सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि स्थानीय पुलिस ने साकेत श्रीनिवासैया का शव बरामद होने की पुष्टि की है।
बांग्लादेश में स्पीकर दिलाता है शपथ लेकिन वो तो जेल में है, अब कौन कराएगा तारिक रहमान की ताजपोशी?
Bangladesh: बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को आम चुनाव में बहुमत मिलने के बाद तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. संसद भंग और स्पीकर पद खाली होने के कारण शपथ प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
जेलेंस्की का बड़ा बयान: यूक्रेन वास्तविक शांति समझौते के लिए तैयार
यूक्रेन शांति समझौते के लिए तैयार हो गया है। राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने जर्मनी के म्यूनिख में कहा कि यूक्रेन एक ऐसे समझौते के लिए तैयार है, जो वास्तविक शांति लाएगा
Russian oil: अमेरिका लगातार दावा कर रहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीद को कम कर दिया है. जिसपर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मनी में जवाब दिया है. ये जवाब म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में दिया है. जानिए विदेश मंत्री ने क्या कुछ कहा?
कैंपस से निकले, बैग-पासपोर्ट मिला...पर 6 दिन तक कहां थे साकेत? IITian की मौत बनी रहस्य की पहेली
Saket Srinivasaiah Death: दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करना लाखों युवाओं का सपना होता है. कर्नाटक के छात्र साकेत श्रीनिवासैया ने भी यही सपना देखा और इसे पूरा करने के लिए IIT मद्रास से बीटेक करने के बाद वे अमेरिका की टॉप यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में मास्टर्स की पढ़ाई करने पहुंचे. लेकिन यह उड़ान अचानक एक रुक गई है और लापता होने के 6 दिनों बाद उनका शव मिला है.
10 मिनट में मौत! ग्लव्स पहनकर ही उस मेंढक को छूना, रूस के विपक्षी नेता की मौत में सनसनीखेज खुलासा
मेंढक में जहर? जब से रूस के विपक्षी नेता की मौत में यह एंगल पता चला है भारत के लोग भी हैरान हैं. वो कौन सा मेंढक होता है? क्या वह आसपास के तालाबों में मिलता है? रंगीन दिखने वाले इस मेंढक के भीतर जहर कैसे बन जाता है जिससे एलेक्सी नवलनी की हत्या का दावा किया जा रहा है?
Youngest PM: तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले पीएम बनने वाले हैं. तारिक रहमान की उम्र के साथ-साथ हम जानेंगे दक्षिण एशिया के कुछ प्रधानमंत्रियों के बारे में, किसकी उम्र क्या है?
बांग्लादेश चुनाव: दूसरी ताकत बनने के बावजूद सत्ता से दूर रही जमात-ए-इस्लामी
हाल ही में संपन्न 13वें संसदीय चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरने के बावजूद जमात-ए-इस्लामी अपनी संख्यात्मक ताकत को सार्थक राजनीतिक सफलता में नहीं बदल सकी
उत्तरप्रदेश के शहर फैजाबाद का रहने वाला मैं मोहम्मद शरीफ। बीते 25 सालों में मैंने 23 हजार से ज्यादा लावारिस और कटी-फटी लाशों का अंतिम संस्कार किया है। मुझे आज भी याद है वो दिन जब बड़ा बेटा रईस काम पर जाने के लिए घर से निकला था। उसकी अम्मी जिद करने लगी कि बिना खाना खाए घर से नहीं जाएगा।अम्मी का मन रखने के लिए उसके ही हाथ से दो निवाले खाकर निकला था। तब हमें क्या पता था कि आखिरी बार उसको देख रहे हैं। हम तो इतने बदनसीब थे कि अपने बच्चे की लाश भी नहीं देख पाए। रईस होमियोपैथी दवाओं का एमआर था। उसे पढ़ने का बहुत शौक था। सात बच्चों में सबसे बड़ा वही था। उसकी कमाई से ही घर चलता था। मैं तो साइकिल मैकेनिक था। घर की सारी जिम्मेदारी वही उठाता था। उस रोज जब शाम तक वो नहीं लौटा तो हमने उसकी दुकान पर पता किया। दुकान खुली थी, लेकिन रईस वहां पहुंचा ही नहीं था। वहां काम करने वाले लड़के को भी कुछ नहीं पता था। हम वापस घर आ गए। सारी रात इंतजार करते रहे। सुबह हम उस साइकिल स्टैंड पर गए ,जहां रईस अपनी साइकिल खड़ी करता था। साइकिल स्टैंड वाले ने बताया कि मेरे पास कल सुबह साइकिल खड़ी करके गए थे। जाते हुए कह गया था कि सुल्तानपुर जा रहा हूं, शाम तक आऊंगा। हमने सुल्तानपुर में भी पता करवाया लेकिन कुछ पता नहीं चला। कई दिन बीत गए, रईस का कुछ पता नहीं चला। हम उसकी तस्वीर लेकर मारे-मारे घूम रहे थे। घर में न खाना बनता था, न ही कोई खाता था। हमने बड़े शहरों में भी उसे तलाशा। जब कोई सुराग नहीं मिला तो थककर घर बैठ गए। रिश्तेदारों और पड़ोसियों से पैसे मांगकर घर का खर्च चला रहे थे। लगभग डेढ़ महीने के बाद लोकल थाने से दो पुलिस वाले आए। उनके हाथ में एक थैला था। मुझे देखते ही उन्होंने थैले से एक मुड़ी हुई कमीज निकाल कर दी। वह कमीज मेरे बेटे की थी, मेरे रईस की। पुलिस वालों ने बताया कि महीने भर पहले सुल्तानपुर में आपके बेटे की हत्या हुई है। उसकी लाश कई दिन तक सड़क किनारे पड़ी थी। कुत्ते उसकी लाश को नोच-नोचकर खा गए थे। हमने इसका पता ढूंढने की बहुत कोशिश की। कई दिनों तक इसके बारे में कुछ पता नहीं चला तो उसकी लाश नदी में फेंक दी। पुलिस उसकी शर्ट पर लगे टेलर के टैग के जरिए डेढ़ महीने बाद हम लोगों तक पहुंच पाई थी। पुलिस वाले एक महीने से ये शर्ट लिए आसपास के इलाकों के दर्जियों के पास भटक रहे थे। आखिर वो लोग शेख टेलर के पास पहुंचे, जिसने रईस की शर्ट सिली थी। उसी ने शर्ट पहचान कर पुलिस को हमारे घर भेजा। ये सुनते ही हम लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। रईस की अम्मी रो-रोकर बेहोश हो जाती थी। कई दिनों तक घर में चूल्हा नहीं जला। घर में किसी को कुछ होश नहीं था। घर के खर्च से लेकर छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई तक सबकुछ रईस देखता था। हमें सारी उम्मीदें उसी से थीं। एक झटके में हमारा सब उजड़ गया। मैं तो 15 दिन तक घर में रह ही नहीं पाया। जैसे ही घर आता उसकी याद आने लगती। ये सोच-सोचकर परेशान हो जाता कि मेरे बेटे की लाश इस तरह फेंक दी गई। लगभग पांच-छह महीने के बाद मैंने फैसला किया कि जैसा मेरे बेटे की लाश के साथ हुआ, वो किसी के साथ नहीं होगा। अब फैजाबाद में किसी की लाश फेंकी नहीं जाएगी। मैं उनके धर्म को अनुसार अंतिम संस्कार करुंगा। इसके लिए मैं एसडीएम साहब से मिला। उन्हें लिखित में दिया कि लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार अब मैं करुंगा। उसके बाद मुझे पुलिस स्टेशन से फोन आने लगे। जिस लाश का 72 घंटे तक कोई दावेदार नहीं होता है उन लाशों को मुझे सौंप दिया जाता है। ये लाशें या तो सड़क दुर्घटना में मारे गए लोगों की होती या फिर जिन्हें मारकर फेंक दिया जाता उनकी। हिंदू लाशों का दाह संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया जाता है और मुस्लिम लाशों का इस्लाम के अनुसार। हिंदूओं के तमाम रीति-रिवाज मैं पास खड़े होकर अपनी निगरानी में करवाता हूं। आजकल एक लाश के दाह संस्कार का खर्च लगभग दस हजार रुपये लग जाते हैं। पहले ज्यादा खर्च नहीं आता था तो खुद ही कर लेता था या फिर लोगों से चंदा मांगता था। मैंने अपनी सारी पूंजी लाशों के अंतिम संस्कार पर लगा दी। जब लोग मेरे बारे में जानने लगे, सबकुछ मीडिया में आ गया तो मुकेश अंबानी जैसे-जैसे बड़े-बड़े लोगों ने मेरा काम को सराहा। फिर धीरे-धीरे अयोध्या और फैजाबाद के बड़े बिजनेसमैन ने आगे बढ़कर मेरा साथ देना शुरू किया। हिंदू लाशों के दाह संस्कार के लिए लकड़ी का इंतजाम फैजाबाद के बड़े बिजनेसमैन और होटल के मालिक शरद करते हैं। ऐसे ही मुस्लिम कब्रों को खोदने के लिए भी बड़े लोग सामने आए। अब इस काम के लिए पैसे की दिक्कत नहीं होती। जब मैंने इस काम की शुरुआत की तो लोग मुझपर हंसते थे, चिढ़ाते थे। कहते थे कि पागल है, सड़ी-गली लाशें उठाता है। सबने मुझे दावतों और रिश्तेदारी में बुलाना बंद कर दिया गया। मुझे अपने साथ बैठने नहीं देते थे। फिर भी मैंने ये सब छोड़ा नहीं। घंटो पोस्ट मार्टम कमरे के सामने बैठकर इंतजार करता था। ये काम करके मुझे बहुत सुकून मिलता है। हर बार लावारिस लाश का अंतिम संस्कार कर के मुझे मेरा बेटा याद आ जाता है। मैं आज भी किराए के मकान में रहता हूं। लगभग 92 साल उम्र है और सेहत लगातार खराब चल रही है। रईस के जाने के बाद एक सड़क दुर्घटना में छोटे बेटे की भी मौत हो गई थी। अब सिर्फ एक बेटा बचा है उसे भी पिछले साल मुंह का कैंसर हो गया था। वह स्कूल के बच्चों की वैन चलाता है। पूरे घर परिवार की जिम्मेदारी अब उसपर है। घर का इकलौता कमाने वाला भी खुद ही बीमार है। साल 2020 में मुझे मेरे इन कामों के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। हाल ही में मेरे स्पाइन का ऑपरेशन उत्तर प्रदेश सरकार ने करवाया है। मुझे खुशी है कि मैंने खुद से जो वादा किया था उसे निभाया। मुश्किलें आईं लेकिन रुका नहीं। कसम खाई थी कि अब लावारिस लाशें फेंकी नहीं जाएगी और मैंने उसे कायम रखा। जब बाद में लोगों को पता चलता कि उनके लोगों का अंतिम संस्कार मैंने किया है तो मुझसे मिलने आते। शुक्रिया करते हैं। आज मैं इतना बीमार हूं फिर भी काम जारी है। परसों ही एक मुस्लिम शव का संस्कार किया है , लेकिन इतने साल बाद भी ऐसी लाशें देखकर अपने बेटे का याद करके रोता हूं। (मोहम्मद शरीफ ने अपने जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए हैं) --------------------- 1- संडे जज्बात-लोग भैंस, बुलडोजर आंटी कहते थे:30 की उम्र में 92 किलो वजन था- किडनी खराब होने लगी तो 100 दिन में 20 किलो घटाया मैं कानपुर की रहने वाली आभा शुक्ला हूं। भैंस, मोटी, 45 साल की आंटी, चलती-फिरती बुलडोजर, किसी के ऊपर गिर जाए, तो वो दबकर ही मर ही जाए… कभी ये सारे नाम मेरे ही थे। लोग मुझे इन्हीं नामों से बुलाते थे। मेरे असली नाम ‘आभा शुक्ला’ से नहीं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
Scorpion Venom Business: लोग सुरक्षित भविष्य के लिए सोना-चांदी में निवेश करना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिच्छू का जहर सोने से भी 80 गुणा ज्यादा महंगा बिकता है. सोने के दाम जहां डेड़ करोड़ रुपये प्रति किलो हैं. वहीं बिच्छा का जहर 80 करोड़ रुपये प्रति किलो बिक रहा है.
Ali Khamenei AI:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए इस टूल ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस के उन संवेदनशील इलाकों का चयन किया था जिनपर आगे चलकर अमेरिकी वायुसेना ने बमबारी की थी. इसके साथ ही साथ सैटेलाइट की तस्वीरों का आकलन करके इस AI टूल ने ये भी बता दिया था कि मादुरो की सुरक्षा को किस तरह भेदा जा सकता है.
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक साक्षात्कार में एक ऐसा दावा किया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है.
Zelensky Comments on Hungarian PM: यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने हंगरी के पीएम विक्टर ओरबान पर तीखा तंज कसा है. म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए जेलेंस्की ने कहा कि यूरोप की सुरक्षा हम कर रहे हैं और आप सेनाओं को मजबूत करने बजाय अपना पेट बढ़ा रहे हैं.
Job Chances News in Dubai: क्या दुबई में जिंदगी वाकई इतनी आसान है कि वहां जाकर हर कोई सेटल हो जाए? इस सवाल का जवाब भारत से दुबई नौकरी की तलाश में गए एक व्यक्ति ने अपने वीडियो में दिया है. जिसके आपको जरूर देखना चाहिए.
UK PM: ब्रिटेन ने नाटो के अनुच्छेद 5 सिद्धांत के प्रति अपने समर्थन को दोहराया. जिसके लिए उन्होंने कहा कि किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा और ब्रिटेन की कमेंटमेंट पहले की तरह ही मजबूत बनी हुई है. उनका ये बयान डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से यूरोपीय सहयोगियों द्वारा अपने दायित्वों को पूरा नहीं करने पर उठाए गए सवाल के बाद आया है.
पुतिन विरोधी वकील Navalny की हुई थी हत्या, 5 देशों ने रूस पर लगाया जहर देकर मारने का आरोप
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी समेत यूरोप के पांच देशों ने रूस पर आरोप लगाया है कि मास्को की सरकार ने विपक्ष के नेता और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कट्टर आलोचक एलेक्सी नवेलनी को जहर देकर मार दिया है.
सैलरी से लेकर भत्तों तक, भारत और बांग्लादेश के सांसदों में कौन ज्यादा ‘कमाता’ है? जान लीजिए हकीकत
India and Bangladesh MP Salary Allowances: क्या आप जानते हैं कि सैलरी से लेकर भत्तों तक, भारत और बांग्लादेश के सांसदों में कौन ज्यादा ‘कमाता’ है? आज हम आपको दोनों मुल्कों में सांसदों को मिलने वाले वेतन-भत्तों के साथ ही सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताएंगे.
इटली में ओलंपिक खेल जारी है. इसी बीच कुछ संदिग्धों ने एक जगह पर रेलवे और इससे जुड़ी संपत्तियों में तोड़फोड़ की, जिससे मध्य इटली से गुजरने वाली ट्रेनों की रफ्तार थम गई. ट्रेनों का आवागमन करीब 1 घंटे बाद फिर से सुचारु रूप से शुरू हो सका.
Bangladesh Pakistan Ties: बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी की इकतरफा जीत के बाद दिल्ली से लेकर लंदन, पेरिस, इस्लामाबाद तक मंथन जारी है. बीएनपी की विदेश नीति कैसी होगी खासकर पड़ोसी देशों से उसके रिश्ते कैसे होंगे? यूनुस सरकार रिसेट होते ही यानी रहमान के प्रधानमंत्री बनते ही सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि वो पाकिस्तान के साथ कैसे डील करते हैं.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि एक शाही शादी में सोने की बिस्कुट जैसी चीज नजर आ रही है. यूजर्स ने दावा किया है कि यह 24 कैरेट सोना है, लेकिन वास्तव में कुछ और ही सच्चाई सामने आई है.
चीनी सैन्य अधिकारियों को CIA ने दिया खुलेआम मुखबिरी का आफर, चीन आग बबूला
राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा है। इस अभियान के तहत पार्टी और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में कई वरिष्ठ और मध्यम स्तर के अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई हुई है।
पीएम मोदी जाएंगे बांग्लादेश? तारिक रहमान की ताजपोशी का न्योता देगी BNP! कहा- सहयोग बढ़ेगा
बांग्लादेश में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में बीएनपी की बड़ी जीत के बाद नई सरकार बनने जा रही है. पार्टी के नेता तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाने की तैयारी है. बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता ने इसे आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश बताया है.
Sultan Bin Sulayem Resignation: दुबई की चमकदार स्काईलाइन और बिजनेस जगत का बड़ा नाम सुल्तान अहमद बिन सुलायेम इन दिनों बड़े गंभीर विवाद में घिर गए हैं. चार दशकों तक दुबई को ग्लोबल ट्रेड हब बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले इस दिग्गज कारोबारी का नाम अमेरिका में जारी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइल्स में सामने आया है. एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद DP World में बड़ा बदलाव हुआ है और सुल्तान बिन सुलायम को पद से हटा दिया गया है.
बांग्लादेश में भी 'BJP' की जीत, 105543 वोट पाकर अंदलीव रहमान की जीत ने बढ़ाई हलचल
BJP in bangladesh: बांग्लादेश में संसदीय चुनाव हुआ है, जिसमें ऐसा नतीजा सामने आया है, जिसने भारत के लोगों को चौका दिया है. दरअसल बांग्लादेश में बीजेपी नामक पार्टी भी एक सीट जीती है. जिससे लोग कनफ्यूज हो गए थे.
जीत के तुरंत बाद बीएनपी ने की शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग, भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर नई बहस
बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री पहले ही शेख हसीना के प्रत्यर्पण की औपचारिक अपील कर चुके हैं और पार्टी इस पहल का समर्थन करती है।
पासपोर्ट-लैपटॉप मिला, लेकिन छात्र नहीं! कैलिफोर्निया में गायब भारतीय स्टूडेंट ने छोड़े कई सवाल
22 साल के साकेत श्रीनिवासैया जो कर्नाटक के रहने वाले हैं 9 फरवरी से लापता हो गए हैं. वह यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में केमिकल और बायोमॉलिक्यूलर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि उन्हें आखिरी बार कैंपस से करीब एक किलोमीटर दूर देखा गया था.
North korea new supream leader: साउथ कोरिया की एजेंसी एनआईएस ने ये साफ किया है कि, किम जोंग अपनी बेटी किम जू ऐ को नया सुप्रीम लीडर बनाने का फैसला कर चुके हैं.
धर्म की दुनिया में किसका वर्चस्व? मुसलमान सबसे तेजी से बढ़े, ईसाई टॉप पर, हिंदुओं की क्या है स्थिति?
Religious Diversity Index: दुनिया के 201 देशों पर की गई एक बड़ी स्टडी में सिंगापुर को सबसे ज्यादा धार्मिक विविधता वाला देश बताया गया है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ईसाई दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समूह है. मुसलमान सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं. हिंदुओं की संख्या करीब 15 प्रतिशत पर स्थिर है. वहीं बौद्धों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है.
भारत-कनाडा के रिश्ते पूरी मजबूती के साथ ‘वापस पटरी पर’
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा है कि भारत और कनाडा के संबंध अब बेहद अच्छे हो गए हैं और पूरी तरह सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं
54 वर्षीय गुप्ता ने मैनहटन की संघीय अदालत में मजिस्ट्रेट जज के समक्ष सुपारी देकर हत्या की कोशिश, हत्या की साजिश और मनी लांड्रिंग की साजिश जैसे तीन गंभीर आरोपों में दोषी होने की बात मानी।
World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. उनक कहना है कि पिछले 47 सालों से ईरान सिर्फ बातों में समय बर्बाद कर रहा है जिससे भारी नुकसान हुआ है. अब ट्रंप इस मसले को हमेशा के लिए सुलझाना चाहते हैं.
Bangladesh News: बांग्लादेश की सत्ता में BNP ने एक बार फिर वापसी की है. तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले पीएम बनने वाले हैं, सवाल ये है कि क्या BNP आवामी लीग पर प्रतिबंध हटा देगी, जानिए पूर्व भारतीय हाई कमिश्नर ने क्या कहा है.
अमेरिका के साथ बातचीत 'ज्यादा मांगों' के बिना सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ सकती है : ईरान
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है और दोनों देशों के हितों की रक्षा कर सकती है
अमेरिका के कोलोराडो में विमान हादसा : तीन लोगों की मौत
अमेरिका के कोलोराडो राज्य के स्टीमबोट स्प्रिंग्स में एक विमान दुर्घटना में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। संघीय विमानन प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है
बांग्लादेश चुनाव: बीएनपी की ऐतिहासिक जीत, जनता को कहा धन्यवाद
बांग्लादेश चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को बहुमत मिला है। अब बीएनपी की तरफ से कहा गया है कि पार्टी लंबे समय से बांग्लादेश में लोगों के वोट का अधिकार बहाल करने के लिए संघर्ष कर रही है
मस्जिद पर हमले ने खोली पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था की पोल
पाकिस्तान में जिस तरह से चरमपंथी हमले और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, वह शहबाज शरीफ सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. इससे पार पाने में पाकिस्तान की सरकार संघर्ष करती नजर आ रही है
यादगार के रूप में बिक रहे बर्लिन वॉल के नकली टुकड़े?
बर्लिन की दीवार गिरने के लगभग 40 साल बाद भी जर्मनी की राजधानी बर्लिन में लोग इसके टुकड़े यादगार के रूप में खरीद सकते हैं. लेकिन क्या यह टुकड़े सच में असली हैं?
2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों में से किसी भी राज्य में BJP की सरकार नहीं थी। कुल मिलाकर 9 विधायक और महज 4 सांसद थे। त्रिपुरा, सिक्किम और मिजोरम में तो BJP के पास एक भी सीट नहीं थी। आज नॉर्थ ईस्ट के 6 राज्यों में BJP सत्ता में है। चार राज्यों में उसका मुख्यमंत्री है। कुल 197 विधायक और 13 सांसद हैं। यानी, 2014 के मुकाबले 22 गुना ज्यादा विधायक और तीन गुना ज्यादा सांसद हैं। आज पीएम मोदी असम दौरे पर जा रहे हैं, तो एकबार फिर सवाल उठा- आखिर बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में इतना बड़ा उलटफेर कैसे किया? जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… हिमंता को सीएम बनाने वाले थे आजाद, राहुल ने रोका साल 2014, जून-जुलाई का महीना… कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद श्रीनगर में छुट्टियां बिता रहे थे। दोपहर 12 बजे, दिल्ली से अहमद पटेल ने आजाद को फोन किया- ‘मैडम आपसे बात करना चाहती हैं।’ अब टेलिफोन पर सोनिया गांधी थीं। उन्होंने आजाद से पूछा- आप कहां हो, मैं कब से ढूंढ रही हूं? आजाद ने जवाब दिया- श्रीनगर में हूं। सोनिया- आप अभी दिल्ली आ जाइए। अगर प्लेन नहीं मिल रहा हो, तो बोलिए मैं यहां से भेज देती हूं। आजाद- नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं है। यहां से हर घंटे दिल्ली के लिए प्लेन है। सोनिया- शाम 5 बजे हम बैठक करेंगे, लेकिन उसके पहले आपको दो काम करते हुए आना है। आजाद- क्या? सोनिया- असम में बहुत बड़ा संकट आ गया है। हिमंता बिस्व सरमा ने 40-50 विधायकों के साथ बगावत कर दी है। मैंने सुना है कि वो आपके करीब हैं। आप फोन करके बोलिए कि अभी वो अपना प्लान होल्ड पर रखें। राज्यपाल भी आपके करीबी हैं, उन्हें भी बोलिए कि अभी कुछ फैसला नहीं लें। शाम करीब 5 बजे आजाद, दिल्ली पहुंचे और सोनिया गांधी से मिले। सोनिया आजाद से बोलीं- आप असम जाइए और वहां लीडर चुनिए। आजाद- मैडम मैं वहां जाने से पहले यहीं पर एक्सरसाइज करना चाहता हूं। वहां जाकर अपने मन से किसी को मुख्यमंत्री बना दूंगा, तो आप कहोगे कि इसको नहीं बनाना था। सोनिया - प्लान लीक हो गया तो? आजाद- कोई प्लान लीक नहीं होगा। मैं इंदिराजी के जमाने से यही काम करता आ रहा हूं। इसके बाद आजाद ने हिमंता बिस्व सरमा को फोन किया और कहा कि वे अलग-अलग जहाजों से अपने विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंचें। सरमा के साथ 40-50 विधायक दिल्ली पहुंचे। उन्हें दिल्ली में अलग-अलग होटलों में रखा गया। किसी को कहीं बयान देने से सख्त मना किया गया। आजाद ने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से कहा कि आपके समर्थन में जो विधायक हैं, उन्हें दिल्ली भेजिए। गोगोई ने 7 विधायकों को दिल्ली भेजा। 10 विधायक और दिल्ली आए, जिनका कहना था कि वे आलाकमान का फैसला मानेंगे। आजाद ने सभी आंकड़े नोट किए और जाकर सोनिया को बताया कि हिमंता बिस्व सरमा के पास बहुमत है। सोनिया आजाद से बोलीं- ठीक है…आप असम जाइए और वहां जो नेता चुना जाए, उसे सीएम बनाइए। आजाद को जिस रोज असम जाना था, उससे एक दिन पहले, रात के करीब 8 बजे राहुल गांधी ने उन्हें फोन किया। राहुल गांधी ने आजाद से कहा - मुझे पता चला है कि आप असम के मुख्यमंत्री को बदलने वाले हैं? आजाद- हां। राहुल- आप प्लान कैंसिल करिए। कोई असम नहीं जाएगा। इसके बाद आजाद, राहुल गांधी से मिलने उनके घर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि राहुल के साथ तरुण गोगोई और उनके बेटे गौरव गोगोई बैठे हैं। राहुल, आजाद से कहते हैं- मैंने सुना है आप लोग इन्हें तंग कर रहे हैं। आजाद- मैं क्यों तंग करूंगा। मुझे जो काम दिया गया, वो कर रहा हूं। हिमंता के पास बहुमत है। आप सोचकर बताइएगा क्या करना है। राहुल- सोचना क्या है… अभी जो मुख्यमंत्री है, वही रहेगा। आजाद- फिर हिमंता पार्टी छोड़ देगा। राहुल- जाने दो उसे RSS में। गुलाम नबी आजाद ने इस पूरे किस्से का जिक्र अपनी किताब ‘आजाद: एन ऑटोबायोग्राफी’ में किया है। हिमंता बिस्व सरमा, नॉर्थ-ईस्ट में कांग्रेस का बड़ा चेहरा थे। वे पूर्व सीएम तरुण गोगोई के करीबी माने जाते थे। 2001 से 2011 तक हिमंता लगातार 3 बार कांग्रेस से विधायक रहे। गोगोई ने कैबिनेट में उन्हें अहम मंत्रालय दिए थे। हिमंता और तरुण गोगोई के रिश्तों में दरार की शुरुआत हुई 2013 में, जब तरुण ने बेटे गौरव की पॉलिटिकल लॉन्चिंग की। 2014 में गौरव को कलियाबोर से लोकसभा का टिकट मिला और वे जीत भी गए। यहां से सरकार के कामकाज में भी गौरव की भूमिका रहने लगी। कहा जाता है कि 2014 से पहले ही हिमंता बिस्व सरमा, बीजेपी नेता राम माधव के संपर्क में थे। RSS से बीजेपी में आने वाले राम माधव तब असम के प्रभारी थे। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वे राम माधव, हिमंता को बीजेपी में लाने का ब्लू प्रिंट तैयार कर रहे थे। हिमंता बोले- बात करने के बजाय कुत्ते से खेलते रहे राहुल गांधी बीजेपी में शामिल होने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में हिमंता बिस्व सरमा ने बताया- '2014 की बात है। असम में क्राइसिस को लेकर मैं दिल्ली में राहुल गांधी से मिला। मेरे साथ असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और कांग्रेस नेता सीपी जोशी भी थे। थोड़ी देर बाद सीपी जोशी और गोगोई के बीच बहस हो गई, लेकिन राहुल ने उन पर ध्यान नहीं दिया। वे अपने कुत्ते के साथ खेलते रहे। इसी बीच कुत्ते ने टेबल पर प्लेट में रखे बिस्किट को जूठा कर दिया। मुझे लगा कि राहुल किसी को आवाज देकर बुलाएंगे और प्लेट चेंज करवाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोग उसी प्लेट से बिस्किट खाते रहे और उन्हें देखकर राहुल हंसते रहे। ये हम सब का अपमान था। उसी दिन मैं बीजेपी के राम माधव से मिला और फिर जो हुआ सबको पता है।' साल 2015 और तारीख 21 जुलाई। असम के बीजेपी नेता सर्बानंद सोनोवाल और केंद्रीय राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने एक बुकलेट जारी कर बताया कि लुईस बर्जर घोटाले में हिमंता बिस्व सरमा मुख्य संदिग्ध हैं। दरअसल, ED ने दावा किया था कि 2010 में वाटर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए असम और गोवा में भारतीय अधिकारियों को फर्जी कंपनियों ने रिश्वत दी है। कहा जाता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन यानी 22 जुलाई को हिमंता की बीजेपी जॉइन करने वाले थे, लेकिन घोटाले में नाम आने के बाद जॉइनिंग टाल दी गई। असम के बीजेपी अध्यक्ष रहे सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया- ‘सर्बानंद सोनोवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मैं, हिमंता के साथ दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिला और उन्हें बताया कि आरोप झूठे हैं। शाह ने कहा कि ये तो गलत हुआ। अब गलती सुधारिए।’ ठीक एक महीने बाद 23 अगस्त 2015 को हिमंता ने दिल्ली में शाह से मुलाकात की और उसी दिन बीजेपी जॉइन की। यहीं से उस पटकथा की शुरुआत हुई, जिसने बीजेपी को नॉर्थ-ईस्ट में कामयाबी दिलवाई… असम: हिमंता के बीजेपी में आने के 10 महीने बाद ही सरकार बनाई 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में तीन बड़े मुद्दों को उठाया था- बांग्लादेशी मुस्लिम को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजना, नेहरू-गांधी परिवार पर नॉर्थ-ईस्ट से भेदभाव का आरोप और करप्शन। इस चुनाव में बीजेपी को असम की 14 में से 7 सीटें और 36.6% वोट मिले। 2009 के लोकसभा चुनाव से 2 ज्यादा सीटें और करीब 20% ज्यादा वोट। एक सीट अरुणाचल प्रदेश में भी जीती। लेकिन बाकी के 6 राज्यों में बीजेपी का खाता तक नहीं खुला। पहली बार बीजेपी को नॉर्थ-ईस्ट में 25 में से 8 लोकसभा सीटें मिलीं। वहीं आम चुनावों के साथ अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव भी हुए। अरुणाचल में बीजेपी को 11 सीटें और 33% वोट मिले। जबकि सिक्किम में उसे कोई सीट नहीं मिली। करीब डेढ़ साल बाद 2016 में असम विधानसभा चुनाव हुए। 29 जनवरी 2016 को बीजेपी ने पुराने चेहरे को तवज्जो देते हुए सर्बानंद सोनोवाल को सीएम फेस बनाया। इसके अलावा बीजेपी ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यानी BPF और असम गणपरिषद के साथ अलायंस किया। BPF असम की बोडो जनजाति के अलग राज्य बोडोलैंड की मांग से निकली थी। 19 मई को नतीजे आए तो 126 सीटों में से 60 पर बीजेपी और 26 सीटों पर उसके सहयोगियों को जीत मिलीं। जबकि कांग्रेस 26 सीटों पर सिमट गई। पहली बार नॉर्थ-ईस्ट के किसी राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। 2021 में भी असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला। हालांकि, इस बार पार्टी ने चेहरा बदल दिया और हिमंता बिस्व सरमा मुख्यमंत्री बने। NDA की जगह NEDA, ताकि बीजेपी बाहरी पार्टी नहीं लगे नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी- उसकी बाहरी पार्टी की पहचान। RSS लंबे समय से वहां काम कर रहा था, उसके बाद भी बीजेपी के पास मजबूत कैडर नहीं था। इसकी काट निकालने के लिए 26 मई 2016 को नॉर्थ-ईस्ट की स्थानीय पार्टियों को मिलाकर एक नया गठबंधन ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ यानी, NEDA बना। हिमंता बिस्व सरमा को NEDA का संयोजक बनाया गया। बीजेपी के साथ नागा पीपुल्स फ्रंट, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल, असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट जैसी स्थानीय पार्टियां इसमें शामिल हुईं। सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और असम के मुख्यमंत्री इसके फाउंडिंग मेंबर बने। अरुणाचल प्रदेश: 33 विधायक तोड़कर बनाई सरकार 2014 के असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 11 सीटें मिलीं। दो साल बाद सितंबर 2016 में कांग्रेस के 43 विधायक ‘पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल’ में शामिल हो गए। फिर दिसंबर 2016 में इस पार्टी के 33 विधायक बीजेपी में चले गए। इस तरह अरुणाचल में बीजेपी की सरकार बन गई। पेमा खांडू मुख्यमंत्री बने, जो पहले कांग्रेस से पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में और फिर बीजेपी में आए थे। 2019 के विधानसभा में बीजेपी ने 60 सीटों में से 41 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई। पेमा खांडू एक बार फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने। 2024 में बीजेपी ने 46 सीटें जीतीं और पेमा खांडू सीएम बने। मणिपुर: कांग्रेस बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सरकार बीजेपी ने बनाई 2017 में मणिपुर में चुनाव हुए। 60 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को 28 और बीजेपी को 21 सीटें मिलीं। 2011 के बाद पहली बार बीजेपी का मणिपुर में खाता खुला। पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 34% वोट शेयर बढ़ा। बीजेपी ने नेशनल पीपुल्स पार्टी, नागा पीपुल्स फ्रंट और लोक जनशक्ति पार्टी के साथ मिलकर मणिपुर में सरकार बनाई। एन वीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने, जो 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 32 सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाई। वीरेन सिंह को फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा होने लगी। वीरेन सिंह पर स्थिति न संभाल पाने के आरोप लगे। ऐसे में 9 फरवरी 2025 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और राष्ट्रपति शासन लग गया। एक साल बाद 4 फरवरी 2026 को बीजेपी के युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री बने। त्रिपुरा: 25 साल पुराना लेफ्ट का किला ध्वस्त किया 2018 में त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव हुए। 3 मार्च को जब नतीजे आए, तो 60 में से 35 सीटें जीतकर बीजेपी ने न सिर्फ त्रिपुरा में पहली बार खाता खोला, बल्कि अपने दम पर सरकार बनाई। लेफ्ट का 25 साल पुराना किला ध्वस्त हो गया। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बिप्लव देब मुख्यमंत्री बने, लेकिन 4 साल बाद मई 2022 में उन्हें हटाकर माणिक साहा को सीएम बनाया गया। साहा 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे। 2023 विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने 32 सीटें जीतकर यहां वापसी की। हालांकि, पिछले चुनाव के मुकाबले उसकी 3 सीटें कम हो गईं। वोट शेयर भी करीब 4% कम हुआ। सिक्किम: अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन खाता नहीं खुला 2019 के विधानसभा चुनाव में सिक्किम विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कुल 5700 वोट मिले। एक भी सीट नहीं जीती, लेकिन बाद में बीजेपी के पास 12 विधायक हो गए और सरकार में भी रही। दरअसल, चुनाव के बाद 3 विधायकों को इस्तीफा देना पड़ा, क्योंकि वे दो-दो सीटों से लड़े थे। इन पर उपचुनाव हुए, तो 2 सीटें बीजेपी ने जीत लीं। वहीं सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 15 में से 10 विधायक बीजेपी में चले गए। यानी सिक्किम में बीजेपी के 12 विधायक हो गए और वह गठबंधन की सरकार में शामिल हो गई। हालांकि, 2024 के चुनाव से पहले बीजेपी ने गठबंधन तोड़ लिया और जब नतीजे आए तो खाता भी नहीं खुला। नगालैंड: पांच साल में 11 विधायक बढ़े, गठबंधन की सरकार का हिस्सा 2018 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व सीएम केएल चिशी बीजेपी में शामिल हो गए। उनके साथ 12 नेता भी बीजेपी में गए। बीजेपी ने नागा पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन तोड़ा और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ चुनाव में उतर गई। तब बीजेपी को 12 सीटें मिलीं, यानी पिछले चुनाव से 11 ज्यादा। 2023 विधानसभा में भी बीजेपी को 12 सीटें मिलीं और इस बार भी वो गठबंधन की सरकार में शामिल हुई। मिजोरम: 2018 में पहली बार खाता खुला 2018 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी 39 सीटों पर लड़ी और एक सीट ही जीत सकी। यहां पहली बार बीजेपी का खाता खुला। पिछले चुनाव के मुकाबले उसका वोट शेयर भी करीब 8% बढ़ गया। 2023 चुनाव में बीजेपी को दो सीटें मिलीं। फिलहाल वो यहां विपक्ष में है। मेघालय: लगातार दो बार से गठबंधन की सरकार में मेघालय में बीजेपी को 2018 और 2013 दोनों ही विधानसभा चुनावों 2-2 सीटें मिलीं। दोनों ही बार वो गठबंधन की सरकार में शामिल हुई। बीजेपी के नॉर्थ-ईस्ट मेंकामयाब होने की 7 बड़ी वजह 1. मुस्लिम घुसपैठिए बनाम मूल निवासी 2014 में जब बीजेपी नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लोकसभा चुनाव में उतरी, तब नॉर्थ-ईस्ट में उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। लगभग हर रैली में मोदी ने इसका जिक्र किया। 24 फरवरी 2014 को असम के रामनगर की रैली में मोदी ने कहा- ‘कांग्रेस सरकार ने डिटेंशन सेंटर के नाम पर मानवाधिकारों का हनन किया। घुसपैठिए आपके अधिकार छीन रहे हैं। असम के नौजवान बेरोजगार हैं और बाहरी रोजी रोटी कमा रहे हैं। ये अन्याय है कि नहीं। दिल्ली में सरकार बना दीजिए, न्याय मिलने की शुरुआत हो जाएगी। सारे डिटेंशन सेंटर खत्म कर दूंगा।’ असम के साथ ही पूरे नॉर्थ-ईस्ट में मूल निवासी बनाम बाहरी का मुद्दा लंबे अरसे से रहा है। 1980 के दशक में इसको लेकर असम में खूब हिंसा हुई और 2 हजार से ज्यादा बांग्लादेशी प्रवासी मारे गए थे। 15 अगस्त 1985 को प्रधानमंत्री राजीव गांधी और छात्र संगठन आसू के बीच समझौता हुआ, जिसे असम अकॉर्ड कहा जाता है। इसके बाद नागरिकता कानून में बदलाव किया गया। जो लोग मार्च 1971 के बाद असम आए, उन्हें अवैध प्रवासी माना गया। 1980 के दशक से ही बीजेपी बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर भेजने की मांग करती रही है। हालांकि, बाद में बीजेपी ने अपना स्टैंड बदला और बांग्लादेशी हिंदुओं को नागरिकता देने और बांग्लादेशी मुस्लिमों को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजने की मांग करने लगी। 2. हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण नॉर्थ-ईस्ट के 8 राज्यों में से 4 राज्य- त्रिपुरा, असम, सिक्किम और मणिपुर हिंदू बहुल हैं। जबकि नगालैंड, मेघालय और मिजोरम में 80% से ज्यादा आबादी ईसाई है। असम में 34% मुस्लिम हैं, जो नॉर्थ-ईस्ट के अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। पूरे नॉर्थ-ईस्ट में 37% हिंदू, 42.3% ईसाई और 7.7% मुस्लिम आबादी है। बीजेपी के बड़े नेता नॉर्थ-ईस्ट में हिंदू-मुस्लिम मुद्दा उछालते रहे हैं। 2021 में हिमंता बिस्व सरमा ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था- 'मुझे मियां वोट्स नहीं चाहिए। मैं उनके पास वोट मांगने नहीं जाऊंगा और वे भी मेरे पास नहीं आएंगे।' बांग्लादेशी मुस्लिम प्रवासियों को घुसपैठिया बताकर बाहर भेजने की बात हो या हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा करके बीजेपी नॉर्थ-ईस्ट में पोलराइजेशन को मुद्दा बनाने में कामयाब रही है। 24 फरवरी 2014 को असम के रामनगर की चुनावी रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा- ‘दुनिया के किसी देश में हिंदुओं को खदेड़ दिया जाएगा, तो उसके लिए एक ही जगह बची है, वो यहीं चला आएगा। हम नहीं चाहते कि बांग्लादेशी हिंदुओं का बोझ अकेले, असम उठाए। पूरे हिंदुस्तान को इसका बोझ उठाना चाहिए।’ 3. दूसरे दलों के बड़े नेता-विधायक बीजेपी में आए नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी की कामयाबी के पीछे दूसरी पार्टियों के बड़े नेताओं का अहम रोल है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू सभी पहले कांग्रेसी या स्थानीय पार्टियों के बड़े नेता थे। इसके अलावा दूसरी पार्टियों से बड़ी संख्या में विधायक और नेता बीजेपी में शामिल हुए। 2015 में हिमंता अपने साथ 10 से ज्यादा विधायक लेकर बीजेपी में आए थे। 2016 में पेमा खांडू 33 विधायक लेकर बीजेपी में शामिल हुए। सिक्किम में तो बीजेपी ने स्थानीय पार्टी के 15 में से 10 विधायकों को पार्टी में शामिल करा लिया। इतना ही नहीं, नॉर्थ-ईस्ट के हर राज्य में बीजेपी का किसी न किसी पार्टी के साथ गठबंधन जरूर है। 4. केंद्र में बीजेपी की सरकार का होना आम तौर पर नॉर्थ-ईस्ट के लोग उसी पार्टी को प्राथमिकता देते हैं, जिनकी केंद्र में सरकार होती है। नॉर्थ-ईस्ट में लंबे समय से राजनीति को कवर कर रहे बिश्वेंदु भट्टाचार्य बताते हैं, 'नॉर्थ-ईस्ट में ज्यादातर दल छोटे-छोटे हैं। बड़े खर्चे के लिए सरकार के फंड और ग्रांट पर निर्भर रहना इनकी मजबूरी है। केंद्र सरकार में काबिज होने के बाद इन दलों को बीजेपी ने लुभाया, राज्य में उनकी सरकार बनी, तो उन्हें पद मिलेगा, मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। यहां के स्थानीय नेता ट्राइबल बेल्ट में जाकर बोलते थे, यदि कमल पर वोट दिया, तो हम मंत्री बनेंगे, आपका बेटा ये बनेगा। बीजेपी को इसका बहुत फायदा भी मिला।' 5. आजादी से पहले से नॉर्थ-ईस्ट में एक्टिव है RSS 6. कल्चरल स्ट्रैटजी नॉर्थ इंडिया में बीजेपी और संघ बीफ का खूब विरोध करते हैं, लेकिन नॉर्थ-ईस्ट में वे ऐसा नहीं करते। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले नगालैंड के बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम यानथुंगो पैटन ने कहा, नगालैंड में बीफ मुख्य भोजन है। बीजेपी, कांग्रेस या कोई भी नेशनल पार्टी हमारे खानपान में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। बीफ खाना नगालैंड के साथ ही पूरे नॉर्थ-ईस्ट में कोई इश्यू नहीं है। 7. पीएम मोदी 10 साल में 70 बार नॉर्थ-ईस्ट गए 2014 से 2024 के बीच 10 साल में पीएम मोदी ने करीब 70 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। मार्च 2024 में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वे बतौर प्रधानमंत्री 70 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। उनके मंत्री 10 सालों में 680 बार नॉर्थ-ईस्ट जा चुके हैं। अभी तक सभी प्रधानमंत्री मिलकर जितनी बार नॉर्थ-ईस्ट गए होंगे, उससे कई गुना ज्यादा बार मैं अकेले गया हूं। -----------असम चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… असम में फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश, 2.43 लाख नाम हटे: राज्य में अब 2.49 करोड़ वोटर; बंगाल में फाइनल लिस्ट की तारीख 14 दिन बढ़ी चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को असम में हुए स्पेशल रिवीजन (SR) 2026 के तहत फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी। EC के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की तुलना में 2.43 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। अब राज्य में कुल 2,49,58,139 वोटर्स रजिस्टर्ड हैं। पूरी खबर पढ़ें…
निखिल गुप्ता ने अमेरिकी अदालत में कबूला जुर्म, हो सकती है 40 साल की सजा
खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिकी अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया है
तारीख : 1 जनवरी क्या हुआ : भुवनेश्वर–नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस के यात्री ने वीडियो शेयर कर कहा कि, परोसा गया खाना ‘इंसानों के खाने लायक नहीं’ है, इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा है। तारीख : 23 जनवरी क्या हुआ : कामाख्या–हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को अधपके चावल, कड़क रोटियां और बेहद कम मात्रा में खाना परोसा गया। तारीख : 25 जनवरी क्या हुआ : कामाख्या–हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को दुर्गंध वाली दाल परोसी गई। हंगामा होने के बाद कैटरिंग स्टाफ ने खुद खाना फेंका। तारीख : 7 मई क्या हुआ : 15 रुपए की पानी की बोतल यात्री को 20 रुपए में दी गई। उन्होंने इसकी ऑनलाइन शिकायत की। इसके बाद पैंट्री कार स्टाफ ने यात्री के साथ मारपीट की। इस तरह की 6645 शिकायतें IRCTC को 2024–25 में मिलीं। अधिकतर मामले मेन्यू से आइटम गायब होने, ओवरचार्जिंग, बासी खाना, खराब खाना, मात्रा कम होने से जुड़े हैं। दैनिक भास्कर ने पड़ताल कर जाना कि रेलवे के सिस्टम में गड़बड़ कहां है, और प्रीमियम ट्रेनों में तो यात्रियों से एडवांस पेमेंट लिया जा रहा है, फिर अच्छी सर्विस क्यों नहीं मिल पा रही। हिस्सेदार कौन–कौन हैं IRCTC : ठेका, निगरानी और कार्रवाई का जिम्मा टेंडर लेने वाली कंपनियां : खाना बनाने, ट्रांसपोर्ट, सर्व करने का जिम्मा रेलवे बोर्ड : नीति और सिस्टम में सुधार का जिम्मा यात्री : पैसा देने के बाद भी अच्छी सर्विस नहीं यात्रियों के साथ कहां, क्या गड़बड़ी, कौन कसूरवार, पढ़िए… पहला जिम्मेदार : IRCTC मोनोपॉली को नहीं रोक रहे, शिकायतों के बाद भी ठेका रद्द नहीं IRCTC ट्रेन में मील फेसिलिटी प्रोवाइड करने का काम निजी कंपनियों के जरिए करता है। 5 साल के लिए ठेके दिए जाते हैं। परफॉर्मेंस के हिसाब से 2 साल का एक्सटेंशन मिलता है। राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदेभारत, तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के अधिकतर ठेके एक ही कंपनी आरके ग्रुप को दिए गए हैं। क्लस्टर ए में आने वाली 265 ट्रेनों में से 218 के ठेके आरके ग्रुप के पास हैं। जबकि इस ग्रुप के खिलाफ रेलवे को 2021 से 2024 के बीच 1910 शिकायतें मिलीं। इसके अलावा क्लासिक कैटर्स के खिलाफ 1439, पी शिवा प्रसाद के खिलाफ 1208, आरके ग्रुप की ही वृंदावन फूड प्रोडक्ट्स के खिलाफ 1196 और एक्सप्रेस फूड सर्विसेज के खिलाफ 1162 शिकायतें मिलीं। रेलवे की पॉलिसी में सिलिंग लिमिट नहीं होने से एक ग्रुप की मोनोपॉली है, जिससे काम्पीटिशन खत्म हो गया है। 2017 में संसद में पेश की गई CAG की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि, सिलिंग लिमिट न होने से रेलवे ने मोनोपलाइजेशन को प्रमोट किया। दूसरा जिम्मेदार : ठेका लेने वाली कंपनियां कई गुना ज्यादा देकर टेंडर लिया, अब कमाई कैसे किसी भी ट्रेन से सालभर में होने वाली बिक्री के हिसाब से IRCTC उस ट्रेन के लिए एक रिजर्व प्राइज तय करता है। टेंडर लेने के लिए यह मिनिमम लाइसेंस फीस होती है। यानी इससे कम में टेंडर नहीं मिलेगा। अभी यह 15 फीसदी है। पड़ताल में पता चला कि, टेंडर लेने की होड़ में कंपनियां 70 फीसदी तक रिजर्व प्राइज जमा कर रही हैं। जुलाई 2017 में संसद में पेश CAG की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि, ‘रेलवे ने कई कैटरिंग ठेके बहुत ज्यादा बोली (लाइसेंस फीस) पर दे दिए, जो व्यवहारिक नहीं थे।’ ‘ठेकेदार ठेका पाने के लिए रिजर्व प्राइस से काफी ऊपर बोली लगा रहे थे, लेकिन रेलवे के पास ऐसी ‘अनरियलिस्टिक’ बोली को रोकने का साफ नियम नहीं था।’ ‘इसका नतीजा यह हुआ कि वेंडरों पर खर्च का दबाव बढ़ा और उन्होंने खाना घटिया देना, मात्रा कम करना या यात्रियों से ज्यादा पैसा वसूलना जैसे तरीके अपनाए।’ हमारे पास IRCTC का 24 अप्रैल 2024 का लेटर ऑफ अवॉर्ड यानी LOA है। इसमें 10 ट्रेनों का जिक्र है। इन ट्रेनों की कैटरिंग को 8 सितंबर 2026 से 14 जुलाई 2029 तक के लिए आरके ग्रुप से जुड़ी वृंदावन फूड प्रोडक्ट्स को हैंडओवर किया गया है। रेलवे ने खुद जितनी एनुअल फीस तय की है, उससे 70 फीसदी ज्यादा तक जमा करके टेंडर ले लिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि, कंपनी बचे हुए 30 फीसदी अमाउंट में से अच्छा खाना कैसे बनाएगी, स्टाफ को सैलरी और खुद का प्रॉफिट कैसे निकालेगी। प्रॉफिट निकालने के लिए ठेकेदार ओवरचार्जिंग, मेन्यू से आइटम गायब करना, क्वालिटी से समझौता करते हैं, एक एग्जाम्पल से समझिए यात्रियों से लूट कैसे… ट्रेन में आपको मिलने वाली थाली में से एक छोटा सा आइटम गायब करके ही IRCTC के ठेकेदार करोड़ों का मुनाफा बना रहे हैं। IRCTC ने माना मोनोपॉली से क्वालिटी नहीं मिल रही IRCTC ने 28 नवंबर 2025 को रेलवे मिनिस्ट्री को एक पत्र लिखकर न्यू कैटरिंग पॉलिसी से जुड़े चैलेंजेस बताए। इसके पॉइंट नंबर–5 में कहा कि, सिलिंग लिमिट न होने से कुछ फर्म/ कंपनीज के खिलाफ मोनोपॉली की शिकायतें हैं। ज्यादा लाइसेंस फीस देकर टेंडर लिए गए, इसके चलते अब खाने की क्वालिटी से समझौता कर रहे हैं, और टेंडर की शर्तों एवं नियमों का पालन नहीं कर पा रहे। तीसरा जिम्मेदार : रेलवे बोर्ड नियम टूट रहे, फिर भी एक्शन नहीं नीति और निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी रेलवे बोर्ड की है। पॉलिसी बनाना, मेन्यू, दरें तय करना, IRCTC की निगरानी, क्वालिटी चेक और शिकायतों पर कार्रवाई का जिम्मा बोर्ड का ही है। 2010 की पॉलिसी में यह नियम था कि, कोई भी कॉन्ट्रेक्टर कुल कॉन्ट्रेक्ट का 10 फीसदी से ज्यादा नहीं ले सकता। लेकिन बड़े ग्रुप्स ने अलग–अलग नाम से कंपनियां बनाकर इस नियम को ब्रेक कर दिया। 2017 की पॉलिसी में रेलवे ने सिलिंग लिमिट का जिक्र ही नहीं किया, यानी सिलिंग लिमिट हटा दी गई। रेलवे ने 14 नवंबर 2023 को पॉलिसी से जुड़ी नई जानकारी में कहा कि, ट्रेनों के क्लस्टर और बेस किचन को दो ग्रुप ए और बी में बांटा गया है। एक क्लस्टर मतलब– कुछ ट्रेनों का एक समूह। एक क्लस्टर में 10 जोड़ी ट्रेन होती हैं। क्लसटर ए में प्रीमियम प्रीपेड ट्रेन और पेंट्री कार वाली मेल/ एक्सप्रेस ट्रेन हैं। कहा गया कि, यदि क्लस्टर में 5 जोड़ी ट्रेनें शामिल हैं तो इसमें मेल/ एक्सप्रेस ट्रेन के साथ में एक प्रीमियम प्रीपेड ट्रेन शामिल हो सकती है। यदि क्लस्टर में 6 से 10 जोड़ी ट्रेनें हैं तो प्रीमियम प्रीपेड ट्रेन की संख्या अधिकतम दो हो सकती है। लेकिन रेलवे ने खुद ही इस नियम को फॉलो नहीं किया। एक ही कंपनी को एक रूट पर 10 में से 7 प्रीमियम ट्रेनें दे दी गईं। भास्कर के पास मौजूदा एक रूट के टेंडर में 10 में से 7 प्रीमियम ट्रेनें नजर आ रही हैं। IRCTC ने रेलवे बोर्ड की बनाई पॉलिसी को ही कई बार तोड़ा। इसके बावजूद बोर्ड ने कोई दखल नहीं दिया। खराब खाने की 6645 शिकायतें रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि, 2024-25 में IRCTC को 6645 खराब गुणवत्ता वाले खाने की 6645 शिकायतें मिलीं। इनमें से 1341 केस में फूड सप्लायर्स पर फाइन लगाया गया। 2995 केस में वॉर्निंग दी गई। 1547 केस में एडवाइजरी दी। 762 केस में अन्य जरूरी कार्रवाई की गई। IRCTC को सवाल भेजे – भास्कर ने इस पूरे मामले में IRCTC को सवाल भेजे हैं, लेकिन अभी जवाब नहीं आया है। जवाब आते ही खबर में अपडेट किया जाएगा। हमने आरके ग्रुप के सीईओ और प्रेसीडेंट कैलाश अग्रवाल से भी संपर्क किया। उन्होंने मीटिंग में होने का हवाला देते हुए बाद में बात करने की बात कही। ……………………………….. आप ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं ‘नोट ले आना, बैंक की गाड़ी में बदल दूंगा’:2 हजार के नोट हाथों–हाथ बदल रहे, 50 करोड़ की डील में 22 करोड़ कमीशन ‘बैंक की नकदी लाने-लेजाने का काम जिस गाड़ी में होता है, उसी में आपके 2 हजार के नोट बदल देंगे। 50 करोड़ के नोट होंगे, तब भी दिक्कत नहीं। 40 फीसदी कमीशन हमारा होगा।’ यह खुलासा 2 हजार के नोट बदलने वाले माफिया ने भास्कर के कैमरे पर किया। चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म की आड़ में माफिया नोट बदलने का कारोबार चला रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…।
शेख हसीना के तख्तापलट के करीब डेढ़ साल बाद हुए चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP बहुमत के साथ जीत गई। रिकॉर्ड जीत के बावजूद न जश्न मना, न जीत के जुलूस निकले। ढाका की सड़कें सूनी ही रहीं। BNP के चेयरमैन तारिक रहमान ने पार्टी वर्कर्स से कहा कि जुमे की नमाज के बाद पूरे देश में खास दुआ करें और अल्लाह को शुक्रिया कहें। इसके बाद लोग घरों से निकले, मस्जिदों में नमाज अदा की और लौट गए। ढाका समेत पूरे बांग्लादेश में शांति रही। बांग्लादेश में चुनाव के रिजल्ट से तीन बातें साफ हो गईं। तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। कट्टरपंथी मानी जाने वाली पार्टी जमात की धर्म की राजनीति नहीं चली और शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले स्टूडेंट्स को अपनी जगह बनाने में बहुत मेहनत करनी होगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, BNP की जीत के पीछे हिंदू वोटर, शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के सपोर्टर और महिलाएं हैं। दैनिक भास्कर ने चुनाव नतीजों पर अलग-अलग तबके के लोगों से बात की। उनसे समझा कि BNP के जीतने की क्या वजहें रहीं, लोगों ने उसे क्यों वोट दिया और आखिरकार वे नई सरकार से क्या चाहते हैं। पढ़िए रिपोर्ट… जमात सपोर्टर: शेख हसीना के वक्त धांधली होती थी, इस बार भी हुईढाका में जमात के ऑफिस में मौजूद समर्थक मायूस दिखे। उन्हें लग रहा है कि चुनाव में धांधली हुई है। ऑफिस में मिले रेजा अल करीम खुद को जमात-ए-इस्लामी का कट्टर समर्थक बताते हैं। वे ऑफिस के बाहर बैठकर जमात चीफ शफीकुर रहमान से मिलने का इंतजार कर रहे थे। करीम कहते हैं, ‘लोगों में चुनाव के लिए सुबह से उत्साह था। वोटिंग के आखिर तक हमें उम्मीद थी कि चुनाव सही तरह से होंगे। शेख हसीना के वक्त भी हमने इलेक्शन देखा है कि कैसे रात में वोट डालकर धांधली होती थी। लोगों को वोट तक डालने नहीं देते थे। इस बार कम से कम हम वोट डाल पाए। इस बार भी बैलेट बॉक्स छीनने और फर्जी वोट डालने की कोशिश की गई। हमें शक है कि रिजल्ट में धांधली हुई है।’ ‘हम जीत रहे थे, रात 11 बजे के बाद रिजल्ट बदला’ऑफिस में बैठे मुफज्जल हुसैन पेशे से कारोबारी हैं। वे कहते हैं, ‘वोटिंग की शाम तक आ रहे रुझान के हिसाब से जमात-ए-इस्लामी आगे चल रही थी। रात 11 बजे के बाद अचानक नतीजे बदल गए। अब जो भी सत्ता में आ रहा है, उसे करप्शन और बिजनेस सिंडिकेट खत्म करने, नौकरियां पैदा करने, विदेश में काम करने वालों को सुविधाएं देने पर काम करना चाहिए।' हमारे यहां बहुत सारे लोग पढ़े-लिखे हैं, लेकिन उनके पास काम या नौकरी नहीं है। सरकार को इकोनॉमी के लिए बड़े कदम उठाने चाहिए। आम लोग: रहमान का जीतना बांग्लादेश के लिए बहुत जरूरीजमात समर्थकों के बाद हमने कुछ आम लोगों से बात की। वे चुनाव नतीजों से खुश नजर आए। मोहम्मद सुहैल ढाका में रिक्शा चलाते हैं। वे कहते हैं, ‘BNP को पूरे देश में सपोर्ट मिल रहा था। चुनाव के रिजल्ट में यही दिखा है। BNP का जीतना बांग्लादेश के लिए बहुत जरूरी था। मैं भी यही चाहता था।’ ‘बांग्लादेश में BNP को खत्म करने की कोशिश की गई। फिर भी लोगों ने उसे वोट दिया और सत्ता में लाकर खड़ा कर दिया। देश में कानून-व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। अगर कोई सड़क पर चले तो सुरक्षित महसूस करे। सरकार कानून-व्यवस्था ठीक करती है, तो लोग उसके साथ रहेंगे।’ अवामी लीग के समर्थक: जमात पसंद नहीं, BNP का जीतना अच्छाई-रिक्शा चलाने वाले मोहम्मद सबुज भुइया अवामी लीग के समर्थक रहे हैं। अवामी लीग और BNP धुर विरोधी पार्टियां रही हैं। फिर भी मोहम्मद सबुज BNP की जीत से खुश हैं। वे कहते हैं, ‘तारिक रहमान चुनकर आए हैं। वे अच्छे से देश चलाएं, ज्यादा उत्साह ना दिखाएं। वे प्रधानमंत्री बनेंगे, ये सुनकर अच्छा लग रहा है।’ मोहम्मद सबुज आगे कहते हैं, ‘मुझे जमात के लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं। कुछ वक्त से ऐसा माहौल बना दिया गया कि मैं खुद को अवामी लीग का समर्थक बताने में भी डरने लगा था। उम्मीद है अब ये डर कम होगा। मैंने इस बार वोट नहीं दिया। अगर अवामी लीग का कैंडिडेट चुनाव लड़ता, तो मैं वोट देता। अब देश ने तारिक रहमान को प्रधानमंत्री चुन लिया है। हमारे लिए भी ये अच्छा है।’ हिंदू वोटर: जमात की हार ने बताया, धर्म की राजनीति नहीं चलेगीढाका यूनिवर्सिटी में हमें दीपांकर चंद्र शील मिले। वे स्टूडेंट लीडर होने के साथ बांग्लादेश हिंदू बौद्ध छात्र एकता परिषद के सेक्रेटरी भी हैं। वे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के लिए काम करते हैं। दीपांकर कहते हैं, ‘बांग्लादेश सेक्युलर देश है। शेख हसीना सरकार गिरने के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले होते रहे। पूरा समुदाय डरकर रहता था। बीते डेढ़ साल में हमने बहुत जुल्म सहा है। चुनाव के नतीजों ने बता दिया कि जमात जैसी पार्टी हमें धर्म के आधार पर नहीं बांट सकती।’ 'तारिक रहमान बांग्लादेश के लिए सबसे अच्छे लीडर हैं। वे हमारे गार्जियन की तरह हैं। तारिक रहमान से हमारी मांग है कि पिछले दिनों अल्पसंख्यकों पर जो जुल्म हुआ है, उसकी जांच कराएं। बांग्लादेश के सभी लोग बिना डरे रह सकें, ऐसा माहौल बनाना बहुत जरूरी है।’ स्टूडेंट: ‘तारिक रहमान जेंटलमैन, स्टूडेंट लीडर अपने स्वार्थ में हारेढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले फाहिम मसूम शेख हसीना के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन में शामिल थे। शेख हसीना सरकार गिरने तक वे सड़कों पर लड़ते रहे। आंदोलन से निकली छात्रों की पार्टी NCP चुनाव में बुरी तरह हार गई। उसके 30 में से सिर्फ 6 कैंडिडेट जीते हैं। फाहिम कहते हैं, ‘हमने छात्र आंदोलन से नेताओं को उभरते देखा। इनमें से कई ने यूनुस सरकार बनने के बाद वैसा बर्ताव नहीं किया, जैसी वे बातें करते थे। कई स्टूडेंट ने अपने स्वार्थ में पार्टी बनाई। यहां तक भी ठीक था। NCP ने जमात का समर्थन किया, उसके बाद पार्टी ने अपना आधार खो दिया। कुछ स्टूडेंट लीडर भले जीत गए, लेकिन बांग्लादेश के लोगों की नजरों में उन्होंने साख खो दी है।’ जमात की हार पर फाहिम कहते हैं, ‘जमात अब भी 1971 की पॉलिटिक्स से ऊपर नहीं उठ पाई है। जमात के लोग कैसे बांग्लादेश पर शासन करने की बात कर सकते हैं। उन्होंने बांग्लादेश बनने का विरोध किया था। अब इसी बांग्लादेश में चुनाव जीतना चाहते हैं। ये दोगलापन है। पूरे देश को जमात का दोगलापन पता है। इसलिए लोगों ने उन्हें खारिज कर दिया।’ ‘तारिक रहमान का देश के नेता के तौर पर चुनकर आना खास मौका है। प्रचार के दौरान उन्होंने जैसी मैच्योरिटी दिखाई, उससे पूरा देश उनका मुरीद हो गया। रहमान में लोगों को एकजुट करने का जज्बा है। वे जेंटलमैन हैं। तारिक रहमान ने पूरे चुनाव के दौरान मैसेज दिया कि वे बेहतर बांग्लादेश चाहते हैं। उन्होंने किसी भी पार्टी के खिलाफ बात नहीं की। वे सिर्फ लोगों को एकजुट करने और डेवलपमेंट की बात करते रहे।' महिलाएं: जमात को लोगों ने पहचान लिया, उसे सही जगह दिखाईढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ने वालीं मालिहा खान BNP की जीत और जमात की हार से खुश हैं। वे कहती हैं, ‘पिछले 17 साल से हम सही और निष्पक्ष चुनाव का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार इस बार वैसा चुनाव देखने को मिला। हम चाहते थे कि जो सच में लोगों की बात करता हो, वही जनता के वोट से जीते। जुलाई के आंदोलन के बाद हमारी यह उम्मीद पूरी हुई।’ ‘पिछले 17 साल में BNP ने बहुत मुश्किलें झेली हैं। तारिक रहमान खुद भी इस दौर से गुजरे हैं। इतनी मुश्किलों के बाद वे देश का नेतृत्व करने आ रहे हैं। यह हमारे लिए उम्मीद की बात है। उन्होंने अपने मेनिफेस्टो में अच्छी और साफ राजनीति करने का वादा किया है। हम चाहते हैं कि वे अपने वादे पूरे करें।’ ‘जहां तक जमात की हार का सवाल है, लोगों ने उन्हें पहचान लिया है। वोट के जरिए अपना जवाब दे दिया है। ढाका यूनिवर्सिटी के चुनाव के बाद लगा था कि वे राष्ट्रीय चुनाव को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसा नहीं हुआ।’ मालिहा खान आगे कहती हैं, ‘उम्मीद थी कि जो लोग आंदोलन में आगे थे, वे जनता के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे। वे करप्शन और जुल्म के खिलाफ बोलेंगे। बाद में उनमें से कई लोगों पर अलग-अलग आरोप लगे। कुछ विवादों में भी फंस गए। NCP नाम की नई पार्टी बनी, लेकिन लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी।’ ‘इससे सवाल उठता है कि क्या वे सच में जुलाई आंदोलन की सही आवाज थे। शायद लोगों ने उनके जरिए उस आंदोलन को स्वीकार नहीं किया। चुनाव के नतीजों से लगता है कि लोगों ने किसी और पर भरोसा जताया है। हम उम्मीद करते हैं कि इस बार जो लोग संसद में जाएंगे, वे सच में जनता के लिए काम करेंगे। बांग्लादेश इलेक्शन पर ये रिपोर्ट भी पढ़ेंअवामी लीग-हिंदुओं के वोट BNP को मिले, हसीना की सरकार गिराने वाले भी हारे 12 फरवरी को हुए चुनाव में उनकी पार्टी BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के गठबंधन ने 299 में से 212 सीटें जीती हैं। कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया। पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है। पढ़ें पूरी खबर...
23 साल छोटी इटैलियन PA से दिल लगा बैठा NATO का ब्रिटिश अफसर, स्टोरी में फिर आया ये ट्विस्ट
British man Italian women love story: क्या कोई अधेड़ आदमी, खुद से आधी उम्र की पर्सनल सेकेट्री जिसने बतौर इंटर्न करियर शुरु किया हो उसके चक्कर में देश की सुरक्षा जैसी अहम जिम्मेदारी निभाने के बजाए उसके साथ बावरा बनकर घूमने लगे. ये सच्ची कहानी ब्रिटेन के 55 साल के NATO एंबैसडर की है, जो इटली की कोर्टिनी के चक्कर में बदनाम हो गए.
India-AI Impact Summit 2026 News: AI समिट के लिए दिल्ली में राष्ट्राध्यक्षों का जमावड़ा लगने वाला है. इस सम्मेलन के जरिए भारत तकनीक के क्षेत्र में दुनिया को बड़े संदेश देने जा रहा है. जिसे विश्व में महसूस भी किया जा रहा है.
DNA: अवैध प्रवासियों की अब खैर नहीं, मेलोनी ने अपनाया 'योगी मॉडल'; नेवी को मिली ये बड़ी ताकत
Illegal Immigrants:इटली में अवैध प्रवासियों की आबादी 9 प्रतिशत है लेकिन अपराध में इनकी हिस्सेदारी तकरीबन 35 प्रतिशत है. पिछले 2 सालों में जितने अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं उनमें से 35 प्रतिशत अवैध प्रवासी निकले हैं.
Muhammad Yunus news: बांग्लादेश की जनता ने फैसला सुना दिया है. आम चुनावों में बीएनपी प्रचंड बहुमत से सत्ता में लौटी. तारिक रहमान (Tarique Rahman) के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ होते ही 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के सियासी भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' जैसा नारा देकर सत्ता में आए ट्रंप, विदेशी अप्रवासियों और डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे, लोगों पर बेहद सख्ती से पेश आ रहे हैं. सड़कों पर आईसीई गार्ड्स उतारकर दहशत फैला चुके ट्रंप ने 300 लोगों को घर भेजने के लिए 362 करोड़ फूंक दिए. यह खुलासा होते ही विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के नेता राशन-पानी लेकर उनके ऊपर चढ़ गए.
Bangladesh Elections 2026 Results: बांग्लादेश में हुए संसदीय चुनाव में BNP की जीत के साथ ही कट्टरवादी विचारधारा वाली जमात ए इस्लामी की हार हुई है, हालांकि इस हार से भी भारत को बड़ा खतरा है.
सांपों का 'हनीमून स्पॉट', यहां हर साल सर्दियों में रोमांस करने आते हैं 70 हजार से ज्यादा सांप
Garter Snakes Hibernation: कनाडा के मैनिटोबा में नार्सिस नाम की एग जगह है, जहां हर साल हजारों की संख्या में सांपों का जमावड़ा लगता है. ये सांप यहां खुद को सर्दी से बचाते हैं.
BNP Demands Extradition Of Sheikh Hasina: बांग्लादेश चुनाव में अपनी बड़ी जीत के बाद BNP ने ढाका में शेख हसीना के प्रत्यर्पण की बात कही है. इसको लेकर एक नेता का बयान सामने आया है.
कूड़े में फेंक दिया 12 लाख का सोना, छोटी-सी भूल ने उड़ा दिए होश; फिर 3 दिन बाद आया फोन...
Dubai Gold Recovery Story: कभी-कभी छोटी सी भूल या लापरवाही बड़ा नुकसान करवा देती है. दुबई में रहने वाली कामिनी कन्नन के साथ जो हुआ वो इंसानियत, ईमानदारी, भरोसे और नसीब की अजीब और रोचक कहानी बन गई है.
Gayeshwar Chandra Roy BNP Result:बांग्लादेश में लंबे वक्त के बाद हुए संसदीय चुनाव में BNP के एक हिंदू लीडर की बड़ी जीत देखने को मिली है. इस नेता ने जमात ए इस्लामी के उम्मीदवार को हराया है.
US Iran tensions: अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर दिया है. परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.
चुनाव अभियान के दौरान एक अंतरराष्ट्रीय आयाम भी जुड़ गया। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी राजनयिक जमात-ए-इस्लामी के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
रूस में व्हाट्सएप पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, सरकार ने ‘राष्ट्रीय मैसेंजर’ मैक्स अपनाने की अपील की
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि करते हुए कहा कि यह फैसला कंपनी द्वारा रूसी कानूनों का पालन न करने के कारण लिया गया है। साथ ही उन्होंने नागरिकों से सरकार समर्थित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ‘मैक्स’ का उपयोग करने की अपील की।
बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार बनने वाली है। उनकी पार्टी BNP ने 299 में से 165 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बीएनपी की जीत पर बधाई दी है। तारिक रहमान की बड़ी चुनौतियों में से एक अपने पड़ोसी भारत के साथ संबंधों को बहाल करना होगा। दशकों से भारत का दोस्त रहा बांग्लादेश, शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद से चीन और पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। बांग्लादेश में नई सरकार से जुड़े 6 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बांग्लादेश चुनाव में किसे कितनी सीटें मिलीं? जवाब: 12 फरवरी को शाम 4:30 बजे तक 299 सीटों पर वोटिंग हुई। करीब 55% वोट पड़े। इसके बाद काउंटिंग शुरू हुई और 13 जनवरी की सुबह तक नतीजे आए… BNP के तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। उनकी पार्टी को 165 सीटें मिलीं हैं। 20 नवंबर 1965 को जन्में तारिक रहमान पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं। 17 साल के निर्वासन के बाद वे 25 दिसंबर 2025 को लंदन से लौटे। वापसी के सिर्फ 5 दिन बाद उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद BNP की कमान पूरी तरह तारिक के हाथों में आ गई। उन्हीं के चेहरे पर BNP चुनाव में उतरी। तारिक ने खुद दो सीटों- ढाका-17 और बोगरा-6 से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत दर्ज की। दरअसल, तारिक ने खुद को युवाओं और मध्यम वर्ग के मतदाताओं से कनेक्ट किया। उन्होंने खुद को शांत, सुनने वाला और पॉलिसी पर फोकस करने वाले नेता की तरह पेश किया। इसके अलावा तारिक को उनकी मां के निधन के बाद मिली सिम्पैथी और उनकी पॉलिटिकल रीलॉन्चिंग से भी फायदा हुआ। सवाल-2: क्या तारिक रहमान भारत के साथ रिश्ते सुधारेंगे? जवाब: शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में गिरावट आई। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने भारत के परंपरागत विरोधी पाकिस्तान और चीन से दोस्ती बढ़ाई। ऐसे में भारत को उम्मीद थी कि बांग्लादेश की नई सरकार से रिश्ते ठीक किए जाएंगे। माना जाता है कि BNP भारत का पसंदीदा ऑप्शन है और वे संपर्क में भी है। जब खालिदा जिया का निधन हुआ तो पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट की। खालिदा के निधन पर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ढाका पहुंचे और तारिक से मिले। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग गए और शोक व्यक्त किया। BNP ने अपने मेनिफेस्टो में विदेश नीति ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ और ‘फ्रेंड यस, मास्टर नो’ नारों के इर्द-गिर्द तैयार की है। एक चुनावी रैली में तारिक रहमान ने कहा, ‘न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सर्वोपरि’। यानी उन्होंने भारत और पाकिस्तान के प्रभाव से मुक्त रहने की बात कही। पूर्व हाई कमिश्नर रीवा गांगुली दास मानती हैं कि हम पड़ोसी हैं और पड़ोसी बदले नहीं जा सकते। हमें एक-दूसरे के साथ काम करना ही पड़ता है। भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी सत्ता में आए हम उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं। BNP ने चुनावी वादा किया है कि… बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर रहे हर्षवर्धन श्रृंगला का कहना है कि तारिक रहमान समझ चुके हैं कि एक सफल पीएम बनने के लिए उन्हें भारत के समर्थन की जरूरत है, या कम से कम भारत की दुश्मनी वह मोल नहीं लेना चाहेंगे। अब देखना यह होगा कि उनकी कथनी और करनी मेल खाती हैं या नहीं। अमेरिकी थिंकटैंक Atlantic Council में साउथ एशिया सेंटर की सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन मानते हैं कि भारत को उम्मीद है कि नई सरकार बातचीत करने को तैयार होगी। वह उन किरदारों से प्रभावित न हो, जो भारत के हितों के लिए खतरा हैं। BNP और भारत दोनों ही एक-दूसरे के साथ काम करने को तैयार हैं। 13 फरवरी की सुबह पीएम मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा, यह जीत दिखाती है कि बांग्लादेश की जनता को आपके नेतृत्व पर भरोसा है। भारत हमेशा एक लोकतांत्रिक और आगे बढ़ते हुए बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा। मैं दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने और मिलकर विकास के लिए काम करने को तैयार हूं। सवाल-3: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सुधरना दोनों के लिए क्यों जरूरी है? जवाब: बांग्लादेश की 94% सीमा भारत से लगती है। बांग्लादेश लगभग चारों तरफे भारत से घिरा हुआ है, इसलिए इसे 'इंडिया लॉक्ड' देश कहा जाता है। ऐसे में बांग्लादेश सुरक्षा और व्यापार के मामले में भारत पर निर्भर है। वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों से बाकी भारत को जोड़ने में बांग्लादेश की अहम भूमिका है। शेख हसीना के सत्ता में रहते हुए भारत को कभी पूर्वोत्तर को लेकर बांग्लादेश की ओर से किसी परेशानियों की चिंता नहीं करनी पड़ी, लेकिन उनके तख्तापलट के बाद एक सिक्योरिटी थ्रेट खड़ा हो गया। मार्च 2025 में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने चीन दौरे में कहा, 'भारत के पूर्वोत्तर राज्य जमीन से घिरे हुए हैं। समुद्र तक पहुंचने के लिए बांग्लादेश ही उनका एकलौता रास्ता है।' इसके अलावा कई बांग्लादेशी नेताओं ने 'सेवन सिस्टर्स' को अलग करने की धमकी तक दी और उसे बांग्लादेश का हिस्सा बताया। पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को बाकी देश से सिलिगुड़ी कॉरिडोर जोड़ता है, जो सिर्फ 40 किमी लंबा और 22 से 30 किमी चौड़ा है। इसे ही चिकन नेक कहते हैं। इसके एक तरफ नेपाल और दूसरी तरफ बांग्लादेश है। यहां से चीन महज 200 किमी दूर है। मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की सीनियर फेलो स्मृति पटनायक के मुताबिक, पूर्वोत्तर की सुरक्षा को लेकर भारत जरा भी ढील नहीं देगा। ये मुद्दा बेहद अहम है और इसको लेकर भारत कोई समझौता नहीं करेगा। ये मैसेज बांग्लादेश की पूरी लीडरशिप तक पहुंचा दिया गया है। रिटायर्ड ब्रिगेडियर रंजीत बरठाकुर मानते हैं कि बांग्लादेश में चिकन नेक से छेड़छाड़ करने की कुव्वत नहीं है। वह कट्टरपंथियों की मदद करके और घुसपैठ से भारत को परेशान कर सकता है, लेकिन चिकन नेक को निशाना बनाने की हिम्मत नहीं करेगा। असल दिक्कत चीन है और हमें तैयार रहना होगा। हालांकि बांग्लादेश में भारत के एम्बेस्डर रहे अनिल त्रिगुणायत मानते हैं कि तारिक रहमान के सत्ता में आने से भारत की सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश में घुसपैठ कर रहे पाकिस्तान और अन्य भारत-विरोधी आतंकवादी समूहों पर नजर रखना होगा। सवाल-4: क्या तारिक सरकार पाकिस्तान से और नजदीकियां बढ़ाएगी? जवाब: 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद से पाकिस्तान से उसके रिश्ते लंबे वक्त तक तनाव भरे रहे। BNP की पिछली सरकारों यानी खालिदा जिया के समय पाकिस्तान से रिश्ते सुधरे, लेकिन शेख हसीना ने फिर दूरी बना ली। हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से 3 बार मुलाकात की। दोनों देशों के नेता और सैन्य अधिकारी भी मिले। पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने भी मुलाकात की। दोनों देशों के बीच दशकों बाद सीधी समुद्री सेवा शुरू हुई। रक्षा साझेदारी बढ़ाने पर बात हुई। जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज और हथियार बनाने पर सोचा गया। पूर्व हाई कमिश्नर हर्षवर्धन श्रृंगला के मुताबिक, 2001-2006 के BNP शासन के दौरान बांग्लादेश ने भारत विरोधी रुख अपनाया और पाकिस्तान के बेहद करीब हो गया। तब तारिक रहमान सरकार में अहम व्यक्ति थे और उनका प्रभाव कहीं ज्यादा था। दरअसल, उस वक्त भारत में बीजेपी के अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। वहीं बांग्लादेश में BNP की खालिदा जिया सरकार चला रहीं थीं। दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा, नदी जल बंटवारा, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, इमिग्रेशन और सशस्त्र विद्रोह जैसे मुद्दों पर विरोध था। तब भारत ने BNP पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की मदद करने का आरोप भी लगाया था, जिनका ढाका ने का खंडन किया था। ढाका यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डेलवर हुसैन मानते हैं कि सत्ता में कोई भी आए, बांग्लादेश-पाकिस्तान के रिश्ते और बेहतर होंगे और अचानक बदलाव की कोई संभावना नहीं है। BNP सरकार का पाकिस्तान से मजबूत रिश्ते होने का अतीत रहा है। हालांकि पाकिस्तान के लिए नई सरकार मुद्दा नहीं है। वह देखेगा कि नई सरकार की भारत को लेकर क्या पॉलिसी होगी और पाकिस्तान को किस हद तक सपोर्ट करेंगे? इंटरनेशनल रिलेशंस एक्सपर्ट स्मृति पटनायक मानती हैं कि बांग्लादेश पाकिस्तान से चाहे जितने मजबूत रिश्ते बना लें, उन्हें बिना सिक्योरिटी चेक के बांग्लादेश बुला ले। यह भारत की चिंता का मुद्दा नहीं है। दरअसल, पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ मिलकर SAARC को फिर से एक्टिव करना चाहता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई सरकार से कश्मीर जैसे मुद्दे पर साथ या तटस्थ रहने की उम्मीद करता है। सवाल-5: चीन से कैसे रिश्ते रखेंगे तारिक रहमान? जवाब: बांग्लादेश पर जैसे-जैसे भारत का प्रभाव कम हुआ, उस गैप को चीन ने भरा। आमतौर पर बांग्लादेशी नेता शपथ के बाद पहली विदेश यात्रा भारत की करते हैं, लेकिन यूनुस ने चीन को चुना। 26 से 29 मार्च 2025 तक उन्होंने चीन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चीन के साथ 9 समझौते साइन किए। इनमें तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट, 98% प्रोडक्ट्स पर जीरो टैरिफ, डिफेंस लॉजिस्टिक्स, डिजिटल कनेक्टिविटी और लालमोनिरहाट एयरपोर्ट को रिन्यू करने जैसे समझौते हैं। भारतीय थिंकटैंक सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के कॉन्स्टेंटिनो जेवियर का कहना है कि चीन भारत-बांग्लादेश रिश्तों में संकट का फायदा उठाते हुए खुले तौर पर और पर्दे के पीछे दोनों तरह से अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है। अमेरिकी थिंकटैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के फेलो जोशुआ कुर्लांट्जिक मानते हैं कि बंगाल की खाड़ी के मामले में चीन की स्ट्रैटजी का बांग्लादेश केंद्र बन चुका है। चीन को भरोसा है कि बांग्लादेश इसमें उसकी मदद करेगा। चीन में बांग्लादेश के एम्बेस्डर रहे मुंशी फैज अहमद के मुताबिक, बांग्लादेश के लिए चीन का जगह किसी अन्य देश से नहीं बदली जा सकती। क्योंकि पिछले कुछ साल में चीन एक बड़े निवेशक के साथ-साथ ट्रेड पार्टनर के तौर पर उभरा है। बांग्लादेश के नेशनल रेवेन्यू बोर्ड के मुताबिक, 2024-25 में बांग्लादेश का चीन के साथ ट्रेड 21.3 अरब डॉलर से ज्यादा का था। वहीं भारत के साथ करीब 11.5 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। अहमद मानते हैं कि भले ही लोग सोचते थे कि भारत हमारे बहुत करीब हैं, लेकिन ट्रेड और कॉमर्स के मामले में चीन से हमारे रिश्ते लगातार बढ़ रहे हैं। हमारे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में चीन का पैसा लगा है। लंबे समय तक बांग्लादेश चीन से नजदीकियां जारी रखेगा, क्योंकि चीन जो दे सकता है, वह कोई नहीं कर सकता। सवाल-6: बांग्लादेश में जनमत संग्रह का नतीजा क्या रहा और इससे क्या फर्क पड़ेगा? जवाब: जनमत संग्रह के पक्ष में 66.7% लोगों ने वोट दिया। वहीं इसके खिलाफ में 32.27% वोट पड़े। यानी अब बांग्लादेश में जुलाई चार्टर लागू हुआ। नई संसद पहले 180 दिनों तक एक 'संवैधानिक सुधार परिषद' की तरह काम करेगी और चार्टर की सिफारिशों को कानून में बदलेगी। दरअसल, बांग्लादेश में राजनीतिक और संवैधानिक सुधार लाने के लिए नेशनल कंसेंशन कमीशन बनाया गया। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस इसके चेयरमैन बने। इस कमीशन के 5 अलग-अलग आयोगों ने 33 पॉलिटिकल पार्टियों और अलायंस से 72 मीटिंग कर 166 सिफारिशों पर चर्चा की। इसके बाद ‘नेशनल चार्टर ऑफ जुलाई 2025‘ तैयार हुआ, जिसमें 84 सिफारिशें शामिल थीं। इसमें कुछ बदलाव होने जा रहे हैं… ------------------ बांग्लादेश चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… बांग्लादेश में 20 साल बाद BNP की जीत: तारिक रहमान का PM बनना तय; देश को 35 साल बाद मिलेगा पुरुष प्रधानमंत्री बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। BNP ने 299 सीटों में से 209 हासिल कर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया। अब तक 286 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…
उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच ड्रोन को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा हो गया है.
9 die during Bangladesh voting: 12 फरवरी को बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के मतदान के दौरान कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई. इनमें BNP नेता, प्रिसाइडिंग ऑफिसर, पोलिंग अधिकारी और आम मतदाता शामिल हैं. कुछ की मौत हार्ट अटैक से बताई जा रही है, तो कहीं धक्का-मुक्की और भगदड़ के आरोप लगे हैं. लाइन में खड़े-खड़े मौत की खबर ने लोगों को झकझोर दिया.
बांग्लादेश चुनाव से पहले ही यूनुस ने कर ली थी सेटिंग! तारिक रहमान के पीएम बनते ही होगा ऐलान?
बांग्लादेश में चुनाव तो हो गए, अब मोहम्मद यूनुस का क्या होगा? पहले वह चार साल तक कुर्सी पर जमे रहने का ख्वाब देख रहे थे लेकिन प्रेशर बढ़ा तो सेटिंग कर ली. नए संविधान के नाम पर नई पावर या कहें 'शक्तिमान' जैसी पावर लेकर देश की बड़ी कुर्सी पर काबिज होने का उनका प्लान है.
बांग्लादेश की मशहूर बैरिस्टर और पूर्व सांसद रूमीन फरहाना ने ब्राह्मणबारिया-2 सीट से इंडिपेंडेंट उम्मीदवार बनकर धमाकेदार जीत हासिल की है. लंदन से पढ़ीं ये मुस्लिम नेत्री BNP से निकाले जाने के बाद भी 1 लाख से ज्यादा वोट पाकर इतिहास रच दिया है. उनके पिता ओली अहद की विरासत को आगे बढ़ाते हुए वो अब संसद में नई ऊर्जा लाएंगी.
करीब ढाई महीने पहले ही लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है। सुबह 9:30 बजे तक आए नतीजों के मुताबिक उनकी पार्टी BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 299 में से 209 सीटें जीती हैं। सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की जरूरत थी। पहली बार सत्ता के करीब दिख रही कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी। उसके गठबंधन को सिर्फ 70 सीटें मिलीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया। BNP की एकतरफा जीत और जमात की हार की तीन वजह समझ आईं। 1. पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है।2. जमात का अतीत आड़े आ गया, लोगों को याद रहा कि उसने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध किया था। जमात इस दाग को नहीं धो पाई।3. स्टूडेंट्स की नेशनल सिटीजन पार्टी को आपसी फूट और जमात से गठबंधन करना भारी पड़ा। उन्हें लोगों ने पूरी तरह खारिज कर दिया। BNP की जीत के सबसे बड़े फैक्टर तारिक रहमानतारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। BNP की जीत का पूरा क्रेडिट तारिक रहमान के हिस्से में है। करीब 17 साल के निर्वासन के बाद वे 25 दिसंबर 2025 को लंदन से बांग्लादेश लौटे थे। 2008 में तारिक रहमान को देश छोड़कर भागना पड़ा था। शेख हसीना सरकार ने उन पर 80 से ज्यादा केस दर्ज किए थे। उन्हें अलग-अलग मामलों में उम्रकैद के अलावा 17 साल की सजा मिल चुकी थी। वे लंदन से ही पार्टी का काम संभालते रहे। चुनावों से ठीक पहले उनकी वापसी BNP के लिए बड़े पॉलिटिकल बूस्टर की तरह रही। तारिक रहमान 2018 से पार्टी के एक्टिंग चेयरमैन थे। 9 जनवरी 2026 को उन्हें चेयरमैन बनाया गया। पार्टी की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद यह पद खाली हो गया था। खालिदा जिया का निधन 30 दिसंबर, 2025 को हुआ था। देश लौटने पर तारिक रहमान का स्वागत हीरो की तरह हुआ। ढाका पहुंचने पर उन्होंने मिट्टी को छूकर सलाम किया। इसकी फोटो काफी वायरल हुई थीं। लौटने के बाद रहमान ने पूरे देश का दौरा किया। वे लोगों से सीधे बात करते। उन्हें मंच पर बुलाते। उन्होंने देश की इकोनॉमी सुधारने का रोडमैप पेश किया। तारिक रहमान की वापसी के अलावा खालिया जिया के निधन से उपजी सहानुभूति, अवामी लीग का चुनाव न लड़ना, लोगों को स्टूडेंट्स लीडर से मिली निराशा और जमात के लिए गुस्सा, सब BNP के पक्ष में गया। ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और पॉलिटिकल एनालिस्ट सैफुल आलम चौधरी कहते हैं, ‘BNP ने इस चुनाव में बहुत कुछ अलग या खास नहीं किया। BNP की जीत में एक बड़ा फैक्टर ये भी रहा कि अवामी लीग के करीब 10% वोटर्स ने मतदान किया है। दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने BNP को वोट किया है।’ जमात को अतीत और खराब इमेज ने डुबोयाजमात-ए-इस्लामी इस बार 10 पार्टियों के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी। इनमें स्टूडेंट्स की पार्टी NCP भी शामिल है। इसके बावजूद जमात बुरी तरह हारी। एक्सपर्ट मानते हैं कि जमात का अतीत और कट्टरपंथी इमेज लोगों को कभी पसंद नहीं आई। लोगों को याद है कि जमात ने बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था। सैफुल आलम चौधरी जमात की हार की मौजूदा वजहें बताते हैं। वे कहते हैं, ‘चुनाव से दो दिन पहले ऐसे वीडियो वायरल हो रहे थे, जिनमें जमात के लोग पैसे बांटते दिख रहे थे। इससे लोगों में मैसेज गया कि जमात गलत तरीके से चुनाव लड़ रही है। बैलेट पेपर में भी हेरफेर की कोशिश की खबरें आईं। इससे जमात को नुकसान पहुंचा।’ ‘हर वर्ग को खुश करना, जमात की सबसे बड़ी गलती’चौधरी आगे कहते हैं, ‘जमात इस्लामिक राज का सपोर्ट करती है। इस बार चुनाव से पहले उसने कहा कि सरकार बनी तब भी वे शरिया कानून नहीं लाएंगे। इससे जमात का कोर वोटर दूर हो गया। जमात ने खुद को आजाद ख्याल पार्टी साबित करने की कोशिश की। हर वर्ग को खुश करने की कोशिश की, लेकिन लोग समझ गए कि ये चुनावी बातें हैं। जमात ने चुनाव के पहले खुद को काफी हद तक बदलने की कोशिश की, लेकिन वो लोगों में भरोसा पैदा नहीं कर पाई।’ BNP के नेता फजीउल रहमान को एकतरफा जीत मिली है। उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। साफ दिखता कि लोगों ने आजादी की लड़ाई के पक्ष में वोट दिया और आजादी का विरोध करने वालों को खारिज किया है। वहीं सीनियर जर्नलिस्ट मॉन्जरूल आलम पन्ना कहते हैं, ‘लोगों का रुझान साफ है। वे जमात को रिजेक्ट करना चाहते थे, इसलिए दूसरा ऑप्शन BNP ही है। हिंदू वोटर्स ने बड़ी संख्या ने BNP को वोट दिया है। यह पहले से अंदाजा था कि हिंदू वोटर्स जमात को वोट नहीं देंगे।’ ‘अवामी लीग चुनाव लड़ती, तो जमात को फायदा होगा’सैफुल आलम चौधरी कहते हैं कि अवामी लीग का चुनाव न लड़ना जमात के लिए मुसीबत बन गया। जमात ने अंतरिम सरकार पर दबाव बनाया कि अवामी लीग को चुनाव न लड़ने दिया जाए। ऐसे में वह अनजाने में पिछले 18 महीनों से BNP के लिए जमीन तैयार कर रही थी। अगर अवामी लीग चुनाव लड़ती तो जमात को फायदा होता। अवामी लीग और BNP में वोट बंट जाते। दूसरी तरफ जमात अपने गठबंधन के साथ वोट एकजुट कर सकती थी। स्टूडेंट्स लीडर नाहिद इस्लाम जीते, लेकिन पार्टी हारी शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी NCP कुछ कमाल नहीं कर पाई। हालांकि, पार्टी के सबसे बड़े चेहरे नाहिद इस्लाम ढाका-11 सीट से जीत गए हैं। NCP ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन 4 सीटें ही जीत पाई। पार्टी ही हार की 5 वजहें… 1. आंदोलन का असर खत्म और आपसी फूटअगस्त, 2024 में हुए छात्र आंदोलन का असर बीते डेढ़ साल में काफी कम रह गया है। शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले कई छात्र नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। NCP ने जमात के साथ गठबंधन किया तो पार्टी के अंदर ही मतभेद हो गए। 2. कैडर का न होनाNCP कुछ महीने पहले बनी पार्टी है। उनके पास सरकार विरोधी आंदोलन में शामिल रहे छात्र तो थे, लेकिन वोट डलवाने वाली चुनावी मशीनरी नहीं थी। दूसरी तरफ BNP और जमात के पास पुराना कैडर है, जो हर बूथ पर मौजूद रहा। NCP सिर्फ जेन जी वोटर्स के भरोसे थी। 3. वोट का बंटवारा अवामी लीग के खिलाफ लोगों के पास दो ही विकल्प थे, BNP या NCP। लोगों ने नई पार्टी की बजाय अनुभव को चुना। उन्हें लगा कि देश चलाने के लिए पुरानी पार्टी स्टूडेंट्स से बेहतर विकल्प है। 4. अर्बन पार्टी की छविNCP की पहचान सोशल मीडिया और ढाका यूनिवर्सिटी तक है। देश के बाकी हिस्सों में वोटर तारिक रहमान की विरासत या जमात के इस्लामी कार्ड से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। छात्रों का 'रिफॉर्म एजेंडा' वहां तक नहीं पहुंच पाया। 5. अनुभव की कमी का डरलोगों को डर था कि बिना अनुभव वाले स्टूडेंट देश की कमजोर हो रही इकोनॉमी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं संभाल पाएंगे। इसलिए उन्होंने BNP को चुना। नेशनल गवर्नमेंट बनने की संभावना खत्मBNP को बहुमत मिलने के बाद सवाल है कि BNP अपने राजनीतिक एजेंडे पर चलेगी या अंतरिम सरकार संभाल रहे डॉ. मोहम्मद यूनुस के दबाव में काम करेगी। हालांकि, जिस मजबूती से BNP चुनाव जीती है, यूनुस के लिए दबाव बनाना आसान नहीं होगा। चुनाव से पहले जमात ने प्रस्ताव दिया था कि सभी की सहमति वाली नेशनल गवर्नमेंट बनाई जाए। तारिक रहमान ने ये प्रस्ताव खारिज कर दिया। जमात ने खुद को विपक्षी दल के तौर पर स्थापित किया है। ऐसे में BNP के लिए उसके साथ सरकार बनाना जोखिम भरा हो सकता है। BNP के लिए ज्यादा बेहतर यही है कि जमात विपक्ष में रहे।
बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत: 13वें संसदीय चुनाव में दो-तिहाई बहुमत, तारिक रहमान बनेंगे PM
चुनाव परिणामों के शुरुआती रुझानों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह चुनाव देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने बीएनपी को बांग्लादेश चुनावों में जीत की बधाई दी है।

