बांग्लादेश चुनाव में हिंसा की छाया: खुलना में बीएनपी नेता की मौत, कई जिलों में बम धमाके
खुलना के एक वोटिंग सेंटर के बाहर कथित तौर पर BNP और जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई। इसी दौरान BNP नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की मौत हो गई।
बांग्लादेश में आज आम चुनाव हो रहे हैं. साल 2024 में हुए जेन-जी प्रदर्शन के बाद यह पहला चुनाव है. इस बार के चुनाव में देश ही नहीं दुनिया के तमाम हिस्सों में बैठे बांग्लादेश के लोग हिस्सा ले रहे हैं. देश में लोग अपने बूथ पर वोटिंग कर रहे है, तो विदेशों में बैठे लोगों ने पोस्टल वोटिंग बैलेट के माध्यम से चुनाव में हिस्सा लिया है.
Jellyfish UFO: सोवियत युग के दस्तावेजों में खुलासा! रूसी शहर के ऊपर देखा गया था 'जेलीफिश' जैसी UFO
Jellyfish UFO: सोवियत-युग के दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से अनोखी रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में 1980 के दशक में रूस के एक शहर के ऊपर 'जेलीफिश' जैसे दिखने वाले (UFO) का जिक्र है.
बांग्लादेश के खुलना में आलिया मदरसा पोलिंग सेंटर के अंदर हुई झड़प के बाद BNP नेता महिफुज्जमान कोची की मौत हो गई. पार्टी ने आरोप लगाया कि धक्का-मुक्की में वे गिर पड़े. पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह बताने की बात कही है. घटना से चुनावी माहौल में तनाव बढ़ गया है.
अमेरिका के सिएटल शहर में भारतीय छात्रा जाह्नवी कंडुला की मौत के मामले में उनके परिवार को करीब 262 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. यह समझौता शहर प्रशासन और परिवार के बीच हुआ है. जाह्नवी की मौत जनवरी 2023 में एक तेज रफ्तार पुलिस गाड़ी की टक्कर से हुई थी.
शेख हसीना के बगैर बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में दो वोट क्यों डलवाए जा रहे? गुलाबी बैलेट की कहानी
Bangladesh National Election 2026: बांग्लादेश में संसदीय चुनाव कराए जा रहे हैं.नई सरकार के लिए देश के 12 करोड़ से ज्यादा लोग वोट डालेंगे. युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद यह पहला चुनाव है. तब शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था.
Digital Arrests: कंबोडिया में बड़े स्तर पर डिजिटल अरेस्ट के अड्डे का खुलासा हुआ है. यहां पर एक खाली पड़े कंपाउंड के अंदर नकली मुंबई पुलिस और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के लोगो वाले नकली साइनबोर्ड मिले हैं.
Tamil Brahmi Inscription: मिस्र के मशहूर वैली ऑफ किंग्स में करीब 2,000 साल पुराने ऐसे लिखे हुए नाम मिले हैं, जो भारत से जुड़े हैं. इन नामों में ज्यादातर तमिल भाषा में हैं. इससे पता चलता है कि उस दौर में भारतीय व्यापारी मिस्र तक जाते थे. वहां काफी समय भी बिताते थे.
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में टंबलर रिज शहर में 10 फरवरी 2026 को 18 साल की जेसी वैन रूटसेलार (ट्रांसजेंडर) ने पहले घर में अपनी 39 साल की मां जेनिफर स्ट्रांग और 11 साल के सौतेले भाई को गोली मार दी. फिर टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल जाकर एक महिला टीचर और पांच स्टूडेंट्स (12-13 साल के) को मार डाला. कुल 8 मौतें हुई हैं. जिसके बाद जेसी ने खुद को गोली मार ली.
बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने मतदान के बाद कहा कि अगर चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हुआ तो उनकी पार्टी जनता का फैसला स्वीकार करेगी. 2014, 2018 और 2024 में जेल में रहने के कारण वोट न डाल पाने का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे “नए अध्याय की शुरुआत” बताया और सरकार बनाने का भरोसा जताया है.
हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि कतर स्थित अल-उदीद एयर बेस पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को मोबाइल लॉन्चरों पर तैनात किया गया है।
सूडान में नाव हादसा, नील नदी में 15 से ज्यादा लोगों की मौत
उत्तरी सूडान में एक नाव डूबने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने सूडान के नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
Great opportunities to work with India: BNPकड़ी सुरक्षा के बीच बांग्लादेश में मतदान हो रहा है. अवामी लीग की गैरमौजूदगी और जमात-ए-इस्लामी की चुनौती ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.BNP सत्ता की दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही है. ऐसे में बहुत सारे सवाल लोगों के मन में है. क्या ढाका और दिल्ली के रिश्तों में नया मोड़ आने वाला है? बीएनपी ने अब वोटिंग के दौरान भारत के रिश्तों पर अपने पत्ते खोल दिए हैं.
बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव से ठीक एक दिन पहले ठाकुरगांव जिले के जमात-ए-इस्लामी अमीर बेलाल उद्दीन प्रधान को सैदपुर एयरपोर्ट पर 74 लाख टका कैश के साथ डिटेन किया गया. पूछताछ के दौरान सीने में दर्द हुआ, हार्ट अटैक आ गया. उन्हें रंगपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के CCU में भर्ती कराया गया है.
UN Report: संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले साल सीरिया के राष्ट्रपति, गृहमंत्री और विदेश मंत्री को मारने की 5 कोशिशों को नाकाम कियाा गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये साजिशें इस्लामिक स्टेट (आईएस) से जुड़े एक समूह ने रची थीं. इससे साफ है कि आईएस अब भी सीरिया में एक्टिव है और नई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है.
रस्सी से बंधे हाथ-पैर, शरीर पर जख्म के निशान; बांग्लादेश में मतदान के बीच मिली एक और हिंदू की लाश
Bangladesh Murder: बांग्लादेश में आज आम चुनावों के लिए वोटिंग की जा रही है. इसी बीच एक और हिंदू युवक की लाश बरामद हुई है. युवक के हाथ-पैर बंधे थे और शरीर पर गहरे जख्मों के निशान थे.
शेख हसीना के बगैर आज बांग्लादेश में दो वोट क्यों डलवाए जा रहे? गुलाबी बैलेट की कहानी
Bangladesh National Election 2026: बांग्लादेश में संसदीय चुनाव कराए जा रहे हैं.नई सरकार के लिए देश के 12 करोड़ से ज्यादा लोग वोट डालेंगे. युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद यह पहला चुनाव है. तब शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था.
बांग्लादेश में आम चुनाव आज, 12.77 करोड़ मतदाता करेंगे नई सरकार का चयन
बांग्लादेश में गुरुवार सुबह 7:30 बजे से 13वें आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। कुल 300 संसदीय सीटों में से 299 पर वोट डाले जा रहे हैं
तीन दिन तक सीता देवी की लाश बिस्तर पर पड़ी रही। उनका 38 साल का मनोरोगी बेटा बगल में बैठकर चिल्लाता रहता-मां खाना खा लो। अपनी मां को हिलाता-डुलाता, जब कुछ देर तक कोई हलचल नहीं होती तो उसे लगता मां गहरी नींद में सो रही है। फिर वो घर से चला जाता। रात में घर लौटता और फिर मां को उठाता। कुछ देर बाद थक हारकर मां की लाश के बगल में सो जाता। सीतादेवी की लाश पर मक्खियां भिनभिनाने लगीं। चीटियां लाश का हाथ-पैर और चेहरा खा गईं। लगभग तीन महीने पहले ये घटना उत्तराखंड के श्रीनगर में लोयगढ़ नाम के भुतहा गांव में हुई। इस घटना ने आसपास को गावों को भी हिलाकर रख दिया। खाली हो चुके गांव लोयगढ़ में सीतादेवी अपने मनोरोगी बेटे के साथ रहती थीं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में इस तरह के भुतहा गांवों की संख्या 1700 है। ब्लैकबोर्ड के इस एपिसोड में स्याह कहानी उत्तराखंड के खाली हो चुके ऐसे ही भुतहा गांव की, जहां लोग अपना घर, खेत-खलिहान सब छोड़कर जा चुके हैं… ये पूरी कहानी जानने के लिए मुझे लोयगढ़ गांव जाना था। जिसका रास्ता भालू और बाघों से भरे घने जंगल से होकर गुजरता है। सड़क का तो कोई नामो निशान नहीं है। पैदल चलने के लिए पगडंडी तक नहीं है। श्रीनगर से बड़ी मुश्किल से एक टैक्सी ड्राइवर मलछोड़ा गांव जाने को तैयार हुआ। दरअसल, हाईवे से नीचे उतरकर मलछोड़ा गांव है। इस गांव को पार करके एक पहाड़ चढ़ना पड़ता है, जिसके पार लोयगढ़ गांव है। हाईवे पर टैक्सी से उतरकर एक लंबा रास्ता पैदल ही तय करना था। कंटीली झाड़ियां पार करते हुए मैं ड्राइवर के साथ पैदल निकल पड़ी। पगडंडी से नीचे उतरना शुरू किया। जहां तक नजर दौड़ाओ केवल पहाड़ ही नजर आ रहे हैं। चलते-चलते मैं एक जगह रुकी तो ड्राइवर ने कहा- यहां रुकना खतरे से खाली नहीं। बाघ हमला कर सकते हैं। इसलिए हमने फिर चलना शुरू किया। लगभग आधे घंटे बाद हम मलछोड़ा गांव पहुंचे। यहां गांव वालों ने बताया कि लोयगढ़ गांव में बाघ भी मिल सकते हैं। क्योंकि जो गांव खाली हो जाते हैं, बाघ उसे अपना ठिकाना बना लेते हैं। सीतादेवी के बारे में पूछने पर गांव वालों ने बताया कि वहां केवल सीतादेवी का बेटा भीरू रहता है। बाकी हर घर में ताला लगा है। कुछ देर यहां बैठने के बाद हम लोयगढ़ के लिए चल पड़े। मलछोड़ा पार करने के बाद हम लोयगढ़ के लिए पहाड़ चढ़ने लगे। जंगल घना होता जा रहा था और चढ़ाई एकदम खड़ी। चढ़ते चढ़ते सांस फूलने लगी, लेकिन यहां रुक नहीं सकते हैं। आखिरकार एक छोटी सी मैदानी जगह आई, जिस पर घास उगी हुई है। ड्राइवर ने बताया कि ये लोयगढ़ गांववालों के खेत हैं, जो अब बंजर हो चुके हैं। हमने फिर चलना शुरु किया। थोड़ा और ऊपर जाने पर एक पानी की पाइप दिखाई दे रही है। घनी झाड़ियां आती तो ड्राइवर तेज आवाज में बातें करने लगता या फिर सीटी बजाता। उसका कहना था कि ऐसी आवाजों से बाघ दूर चले जाते हैं। लगभग 45 मिनट चढ़ाई चढ़ने के बाद एक मकान दिखाई दे रहा है। यह लयोगढ़ गांव का पहला मकान है। इस घर के करीब पहुंची तो देखे, खंडहर हो चुके घर के बगल में एक सफेद रंग से पुता दो मंजिला मकान बहुत सुंदर बना हुआ है। पत्थर की छत और बाहर खुला आंगन है। नीले और हरे रंग के दरवाजे पर ताला लगा हुआ है। थोड़ा और आगे जाने पर एक साथ दो घर दिखाई दिए हैं। यहां भी ताला लगा हुआ है। एक घर में डिश एंटीना भी लगा हुआ है। कुछ घर खंडहर बन चुके हैं। उनकी छतों और दीवारों पर तो पेड़ पौधे उग आए हैं। कुछ घर गिरने की कगार पर हैं। ये सब देखते हुए मैं गांव के आखिरी घर में पहुंची। जहां चूल्हे में राख है। लकड़ियां रखी हैं। आंगन में ओखली है। घर की दीवार पर एक मैली-कुचैली जैकेट टंगी है। घर खुला है, दरवाजा खोलकर मैंने देखा कि वहां कुछ बर्तन रखे हैं। आंगन में माल्टे का पेड़ है। बैंगन के पौधे भी लगे हुए हैं। यही सीतादेवी का घर है। उनका मनोरोगी बेटा भीरू यहीं रहता है। फिलहाल भीरू घर पर नहीं है। इसके अलावा गांव में करीब दस घर हैं। सभी में जंग लगे ताले जड़े हुए हैं। यहां पलायन की सबसे बड़ी वजह है कि आने-जाने के लिए सड़क नहीं है। कोई बीमार हो जाए तो उसे ठीक होने के लिए किसी चमत्कार का इंतजार करना पड़ता है। गांव में पानी की पाइप तो है लेकिन पानी नहीं है। न तो स्कूल है, न दुकान, न आंगनबाड़ी और न ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। इस पूरे गांव में हमें एक आदमी नहीं मिला। हम वापस मलछोड़ा गांव के लिए निकल पड़े। यहां हमारी मुलाकात स्थानीय पत्रकार गंगा से हुई। लोयगढ़ के बारे में पूछने पर गंगा बताती हैं, 'उस गांव में केवल भीरू नाम का आदमी बचा है। वो भी लोगों को देखकर छिप जाता है। उसकी मां सीतादेवी की लाश ऐसी स्थिति मिली थी कि उसपर मक्खियां भिनभिना रहीं थी। लाश के हाथ-पैर और चेहरा चींटियां खा गई थीं। भीरू मनोरोगी है, इसलिए उसे पता ही नहीं चला कि मां जिंदा है या मर गई। मां के मरने के तीन दिन बाद वो मलछोड़ा आया और यहां महिलाओं से कहा कि मेरी मां ने तीन दिन से खाना नहीं खाया है। गांववालों को शक हुआ। वहां जाकर देखा तो पता चला कि सीतादेवी मर चुकी थी। भीरू की पत्नी भी उसे छोड़कर अपने चार बच्चों के साथ हरिद्वार चली गई है।‘ मैंने पूछा- ‘भीरू के खाने का इंतजाम कैसे होता है?’ इसपर गंगा कहती हैं कि ‘पास में ही एक छोटा सा पहाड़ी बाजार है। दिनभर वहीं रहता है। उसकी पत्नी वहां एक दुकानदार को पैसे दे जाती है, ताकि वह भीरु को खाना खिला दे।’ गंगा आगे कहती हैं कि ‘लोग अपनी जमीने छोड़कर जा चुके हैं। कुछ लोगों की जमीन पर चीड़ के पेड़ उग आए हैं। सरकार ने उस जमीन को वन विभाग के हवाले कर दिया है। जब उन लोगों ने लौटकर आना शुरू किया तो सरकार ने उन्हें पेड़ काटने की इजाजत भी नहीं दी। इसलिए अब कोई लौटकर आना भी नहीं चाहता।’ गंगा के बाद मेरी मुलाकात मलछोड़ा गांव के रहने वाली गुड्डी देवी से हुई। वो बताती हैं कि ‘हम लयोगढ़ में घास काटने जाते थे। सीतादेवी को सांस की तकलीफ थी। वह बीमार थी लेकिन न तो दवा मिली और न ही खाना। उन्हें कोई देखने वाला नहीं था। सीतादेवी के मरने की खबर मिली तो हमारे गांव को लोग ही गए थे। जब हम घर पहुंचे तो भीरू की मां की लाश को चीटियां खा गई थीं, मक्खियां भिनभिना रही थीं। वो अपनी मां की लाश छोड़कर सैर करने चला जाता था। बारिश का मौसम था इसलिए झाड़ियां और ज्यादा घनी थीं। कंधे पर उसकी लाश रखकर शमशान ले गए थे। मरने के बाद भी उनकी बहू नहीं आई।’ मलछोड़ा गांव के रहने वाले सतीशचंद्र पांडे बताते हैं कि 'लोयगढ़ गांव तक जाने का न तो रास्ता है और न ही गांव में पानी है। ऐसे में कोई वहां क्यों रहेगा। जरूरी काम के लिए पहाड़ उतरकर नदी के पास जाना पड़ता है पानी लेने के लिए। कुछ साल पहले तक लोग अपना घर देखने आया करते थे लेकिन अब वो भी बंद कर दिया। ऐसे ही हालात रहे तो जल्द ही मलछोड़ा गांव भी खाली हो जाएगा। मलछोड़ा गांव के राकेश पांडे बताते हैं कि हमारे गांव में भी अब ज्यादातर बुजुर्ग ही रहते हैं। हमारा गांव भी खाली होने के कगार पर है। कोई बीमार हो जाए तो अस्पताल ले जाना मुश्किल है। सिरदर्द की गोली खरीदने के लिए भी चार किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है।’ ------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-किडनैप कर 10 दिन तक मेरा रेप किया:होश आया तो हाथ-पैर बंधे थे, चादर खून से सनी थी, रिश्तेदार ने एक लाख में बेचा था ‘2021 की बात है। दोपहर के 2 बज रहे थे। मैं अपनी सहेली के घर कुछ काम से जा रही थी। अचानक दो लड़के दौड़ते हुए मेरी तरफ आए। उन्होंने मुझे जबरदस्ती एक बोलेरो गाड़ी में बैठा लिया। मैं चीख-चीखकर पूछ रही थी- मुझे कहां ले जा रहे हो। तभी एक लड़के ने थप्पड़ मारा और रूमाल से मेरा मुंह दबाते हुए बोला- चुपचाप बैठी रहो। सागर जिले में सब तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-पापा को फांसी दिलाकर आत्महत्या कर लूंगी:कहते थे ब्राह्मण होकर नीच से शादी कैसे की, गोली मारकर बोले- अब मैं बहुत खुश हूं हम दोनों की लव मैरिज को तीन महीने बीत चुके थे। लग रहा था कि अब घर वाले शांत हो गए हैं और हमारी जिंदगी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रह गया है, लेकिन 5 अगस्त 2025 की शाम, करीब 5 बजे, सब कुछ बदल गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
बांग्लादेश में चुनाव के पहले राजधानी ढाका करीब-करीब खाली है। सड़कों पर ट्रैफिक न के बराबर है। देशभर से बड़ी तादाद में लोग काम के लिए ढाका आते हैं। वे 12 फरवरी यानी आज होने वाली वोटिंग के लिए लौट रहे हैं। अंतरिम सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को 3 दिन की छुट्टी दे दी है। प्राइवेट वर्कर्स को 4 दिन की छुट्टी दी गई है। ट्रेनें खचाखच भरी हैं। लोग छतों पर बैठकर सफर कर रहे हैं। बांग्लादेश में दो दिन पहले चुनावी प्रचार खत्म हो चुका है। इस बार पूर्व PM खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सरकार बनाने की रेस में सबसे आगे है। पार्टी ने पिछली बार 2001 में सरकार बनाई थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, BNP को कुल 300 में से 130-140 सीटें मिल सकती हैं। दूसरे नंबर पर जमात-ए-इस्लामी का गठबंधन है, जिसे 90 से 100 सीटें मिलने के आसार हैं। लगातार 4 बार से चुनाव जीत रही शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस बार मैदान में नहीं है। दैनिक भास्कर ने चुनाव के मुद्दों और पार्टियों की स्थिति पर आम लोगों के अलावा एक्सपर्ट्स से बात की। 9 घंटे वोटिंग, 13 फरवरी की सुबह तक रिजल्टचुनाव के लिए वोटिंग 12 फरवरी को सुबह 7:30 बजे शुरू होगी और शाम 4:30 बजे तक चलेगी। इसके बाद काउंटिंग शुरू हो जाएगी। बांग्लादेश में बैलेट पेपर से ही चुनाव होता है। इसलिए वोटों की गिनती में ज्यादा वक्त लगता है। बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, 300 सीटों पर वोटिंग के लिए 64 जिलों में 42,761 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ वोटर हैं। पहली बार डाक से वोट देने की सुविधा दी गई है। इसका फायदा करीब 1.5 करोड़ वोटर्स को होगा, जो काम के लिए घर से दूर चले गए हैं। 350 सीटों वाली संसद में 300 सांसदों के लिए चुनाव होता है। बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। रिजर्व सीटें चुनाव के नतीजों के हिसाब से मिलती हैं, जैसे अगर BNP को 120 सीटें मिलती हैं, तो उसे महिलाओं के लिए रिजर्व 20 सीटें मिलेंगी। अवामी लीग के न होने से BNP को फायदाबांग्लादेश में करीब 10% हिंदू आबादी हैं। हिंदू वोटर अवामी लीग के वोटर रहे हैं। अवामी लीग ने 2024 के चुनाव में 272 सीटें जीती थीं। उसे 30 से 40% वोट मिलते रहे हैं। इस बार ये वोट बैंक किसके हिस्से में जाएगा, यही सवाल है। अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध का फायदा BNP को होता दिख रहा है। हिंदू वोटर जमात से दूरी बनाते दिख रहे हैं क्योंकि जमात का नाम अल्पसंख्यकों पर हमले में आता रहा है। ऐसे में उनका झुकाव BNP की ओर दिख रहा है। ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर में मिले डॉ. सुनीरमल रॉय कहते हैं, ‘हमें पता है कि जमात-ए-इस्लामी इस्लामिक पार्टी है। BNP लोकतांत्रिक पार्टी है।’ पेशे से बिजनेसमैन मोहम्मद शौकत अजीज BNP के ऑफिस के बाहर खड़े मिले। वे कहते हैं, ‘बांग्लादेश के लोगों ने आजादी के लिए मुक्ति संग्राम लड़ा था। वह संग्राम इसी मतदान के अधिकार और लोकतंत्र के लिए तो था। उम्मीद है कि चुनाव में यही भावना दिखेगी। लोग वोट के जरिए गलत का विरोध करेंगे। जो पार्टियां झूठ बयान देकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, लोग उन्हें जवाब देंगे।’ ऑटो रिक्शा चलाने वाले अनवर हुसैन कहते हैं, ‘चुनाव में अच्छा माहौल है। मुझे भरोसा है कि BNP बड़े अंतर से जीतेगी।’ एक्सपर्ट बोले- सबसे बड़ी फिक्र चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहींढाका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट सैफुल इस्लाम चौधरी कहते हैं, ‘चुनाव के नतीजे क्या होंगे, मुझे इससे ज्यादा फिक्र इस बात की है कि चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहीं। लोग खुलकर वोट डाल पाएंगे या नहीं। एक रात पहले ही ढाका के बाहर कई घटनाएं हुई हैं।' 'कुछ न कुछ गड़बड़ करने की कोशिशें चल रही हैं। कैंडिडेट धमकी दे रहे हैं कि अगर वे नहीं जीते तो विरोधियों के घरों में तोड़फोड़ करेंगे। इसीलिए सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। अगर लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं होगा, तो वे डर की वजह से पोलिंग बूथ तक नहीं जाएंगे।’ चौधरी आगे कहते हैं, ‘अगर चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई, तो कहना मुश्किल है कि कौन कितनी सीटें जीतेगा। मैं इस देश के लोगों के वोटिंग बिहेवियर को जानता हूं। यहां लोग कैंडिडेट की बजाय पार्टी को वोट देते हैं। अवामी लीग इस बार नहीं है। मुझे लगता है कि बहुत से लोग BNP को वोट देंगे। चुनाव में धांधली नहीं हुई, तो हो सकता है कि BNP सत्ता में आ जाए।’ हिंदू और अवामी लीग के वोट किसे वोट देंगे? चौधरी जवाब देते हैं, ‘अगर अवामी लीग के 10% वोटर भी मतदान करें और उनमें से 8 से 9% BNP को वोट दे दें, तो भी BNP आसानी से जीत सकती है। अगर वे जमात को वोट देंगें, तो जमात जीत सकती है। हालांकि, सैफुल इस्लाम चौधरी मानते हैं कि किसी भी पार्टी को बहुमत लायक 151 सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। वे कहते हैं, ‘इस स्थिति में शायद जमात और BNP के बीच पर्दे के पीछे समझौता हो सकता है। ये थोड़ा अजीब होगा, लेकिन दोनों मिलकर सरकार बना सकते हैं।’ ‘जनमत संग्रह महज दिखावा, संवैधानिक बदलाव होना तय’बांग्लादेश में चुनाव के साथ संविधान में सुधार के लिए जनमत संग्रह भी होना है। डॉ. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने खुलकर इसके पक्ष में वोट करने के लिए कहा है। चुनाव की कवरेज करते हुए हमने देखा कि सरकारी कर्मचारी भी जनमत संग्रह के पक्ष में वोट करने की अपील करते हुए दिखे। चौधरी कहते हैं, सरकार खुद पक्ष लेती है, तो विपक्ष के जीतने की संभावना नहीं रहती। इसलिए लग रहा है कि संविधान में बदलाव के पक्ष में ज्यादा वोट आएंगे। ‘जनमत संग्रह दिखावा लगता है। सरकार पहले ही संविधान में बदलाव के पक्ष में है। बांग्लादेश जैसे देश में सरकार की इच्छा के खिलाफ रिजल्ट आना बहुत मुश्किल है। मान लीजिए एक हजार वोटर हैं, तो सरकार 900 वोट ‘हां’ के वोट दिखा सकती है। यह एक तरह का खेल है, पैसों की बर्बादी है। सरकार चाहे तो अध्यादेश के जरिए भी फैसला कर सकती है। जनमत-संग्रह की जरूरत नहीं है।’ ‘धांधली हुई, तभी जमात सत्ता में आएगी’सीनियर जर्नलिस्ट मोन्जुरुल आलम पन्ना का मानना है कि पहले के मुकाबले जमात के वोटर और समर्थक बढ़े हैं। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि उन्हें अपने दम पर सरकार बनाने लायक समर्थन मिल गया है। अगर चुनाव निष्पक्ष हुए, तो BNP काफी आगे रहेगी। वे इतनी सीटें जीत सकते हैं कि सरकार बना सकें। अगर कोई हेरफेर हुआ, तो हालात अलग हो सकते हैं। ऐसे में जमात भी आगे आ सकती है। इस बार बांग्लादेश चुनाव में कौन से मुद्दे हावी रहे? मोन्जुरुल बताते हैं, ‘पार्टियों ने एक करोड़ नौकरियां, फैमिली कार्ड, 5 करोड़ पेड़ लगाने जैसे वादे किए हैं। चाहे BNP हो या जमात, उनके वादे सुनने में अच्छे लगते हैं। अनुभव बताता है कि सत्ता में आने के बाद पार्टियां मुश्किल से 10 से 20% वादे ही पूरे करती हैं। वादा करने में कोई खर्च नहीं होता। इसलिए इन घोषणाओं को ज्यादा महत्व नहीं देता। मेरे लिए ज्यादा अहम उनका पिछला रिकॉर्ड है।’ ‘5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 18 महीनों में BNP पर वसूली, बदले और दमन के आरोप लगे हैं। इससे उनकी छवि को नुकसान हुआ है। जमात ने सीधा टकराव कम किया है, हालांकि उन पर भी टोकन के जरिए चंदा वसूली और जमीन कब्जाने के आरोप हैं। फिर भी ऐसे मामले कम हैं।’ अवामी लीग के कोर वोटर्स क्या करेंगे? मोन्जुरुल का मानना है कि अवामी लीग के कुछ वोटर वोट डालने न जाएं, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि कोई भी नहीं जाएगा। अगर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो क्या होगा?मोन्जुरुल कहते हैं, ‘त्रिशंकु संसद की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। मान लीजिए BNP को 125–130 सीटें मिलती हैं और जमात को 120–125। तब गठबंधन की राजनीति के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। अगर BNP दूसरी पार्टियों से समझौता नहीं कर पाती, तो उसे जमात पर निर्भर होना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में मिली-जुली सरकार भी बन सकती है। फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता।’ सीटें, जिन पर नजर रहेगी बांग्लादेश से ये स्टोरी भी पढ़ें1. हिफाजत-ए-इस्लाम के लीडर बोले- जमात इस्लामिक शासन नहीं लाई तो उससे भी लड़ेंगे बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामिक संगठन है हिफाजत-ए-इस्लाम। ये संगठन बांग्लादेश में इस्लामिक राज चाहता है। पूरे बांग्लादेश में हिफाजत का नेटवर्क है। इसलिए चुनाव के दौर में हिफाजत की अहमियत बढ़ जाती है। संगठन के लीडर अजीज-उल-हक कहते हैं अगर जमात देश में इस्लामिक शासन नहीं लाता है तो हम उसके भी खिलाफ हो जाएंगे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू... 2. जमात के पहले हिंदू कैंडिडेट बोले- शरिया नहीं लाएंगे, पैसे बांटते कैमरे में कैद बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही माहौल हिंदुओं के खिलाफ है। शरिया कानून की वकालत करने वाली जमात की छवि हमेशा कट्टरपंथी पार्टी की रही है। हालांकि, इस बार जमात ने पहली बार चुनाव में हिंदू कैंडिडेट उतारा है। खुलना जिले की दाकोप सीट से लड़ रहे कृष्णा नंदी दावा करते हैं कि जमात बांग्लादेश में शरिया नहीं लाएगी। नंदी रैली में वोटरों को खुलेआम कैश बांटते कैमरे में भी कैद हो गए। पढ़िए पूरी खबर…
बांग्लादेश: महिला सशक्तिकरण पर जमात के वादों के पीछे छिपा रूढ़िवादी रुख
बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के हालिया बयान और चुनावी घोषणापत्र में महिलाओं के प्रति समावेशी और सुरक्षात्मक छवि पेश की गई है, लेकिन उसकी लंबे समय से चली आ रही रूढ़िवादी सोच में कोई वास्तविक बदलाव नहीं दिखता। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह दावा किया गया।
BNP हो या जमात, दोनों के टारगेट पर हिंदू, क्या बांग्लादेश में चुनाव हिंदुओं की बलि लेकर होंगे?
Bangladesh Hindu Crisis: बांग्लादेश में नई सरकार बनाने के लिए गुरुवार को वोट डाले जाएंगे. इन चुनाव में BNP और जमात, दो मुख्य पार्टियां हैं. लेकिन विडंबना ये है कि दोनों ही पार्टियां हिंदुओं की घोर दुश्मन हैं.
US-Iran War:इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू जब इजरायल से अमेरिका के लिए निकले थे तो उन्होंने साफ साफ कहा था कि इस दौरे में सबसे प्रमुख ईरान का मुद्दा होगा. और वॉशिंगटन में उतरने के बाद नेतन्याहू ने सबसे पहले डॉनल्ड ट्रंप के उन दूतों से मुलाकात की, जो ओमान में ईरान से समझौते की बातचीत में अमेरिकी वार्ताकार थे.
Brazil Pilot Got Arrested: ब्राजील से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आ रही है. यहां एक 60 साल के पायलट को विमान के अंदर से गिरफ्तार कर लिया गया. पायलट पर आरोप है कि वह गरीब परिवारों की लालच देकर उनके बच्चों को खरीदता था और उनका यौन शोषण करता था.
बांग्लादेश में होने वाले चुनाव में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी की सीधी टक्कर होने जा रही है. चुनाव के ठीक पहले जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख शफ़ीकुर रहमान ने एक बड़ा बयान दिया और कहा कि हमारे देश का कोई नागरिक अल्पसंख्यक नहीं है.
प्लेटफॉर्म पर टाइम पर पहुंची बर्फ से जमी ट्रेन, इस देश की पंक्चुअलिटी देख दुनिया हैरान!
Viral Frozen Train Reel: जापान की ट्रेन का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसमें दिखता है कि ट्रेन पूरी तरह बर्फ से जमी हुई है, खिड़कियां बर्फ से ढकी हुई हैं, लेकिन ऐसे में भी ट्रेन समय पर पहुंच रही है. चलिए देखते हैं ये खूबसूरत और अनोखा वीडियो.
Couple Kidnapped in Azerbaijan: गुजरात से अमेरिका जाने की चाहत लिए एक कपल ने एजेंट से संपर्क किया. एजेंट ने मोटी रकम लेकर उन्हें अजरबैजान पहुंचा दिया, जहां पर उन्हें बदमाशों ने किडनैप कर लिया. इसके बाद विदेश मंत्रालय को उनकी रिहाई के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा.
‘उनके नेता का लहजा नहीं आया पसंद...’ फोन कॉल पर भड़के ट्रंप; स्विट्जरलैंड पर लगा दिया 39% टैरिफ
US-Switzerland Trade Row:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने स्विट्जरलैंड पर टैरिफ 30% से बढ़ाकर 39% इसलिए किया क्योंकि उन्हें एक स्विस नेता का उनसे बात करने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आया. ट्रंप के अनुसार, स्विट्जरलैंड के साथ 42 अरब डॉलर के व्यापार घाटे और बातचीत के लहजे ने उनके फैसले को प्रभावित किया है.
Iran president apology protests: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने देशभर में हुए प्रदर्शनों और हिंसक कार्रवाई को लेकर माफी मांगते हुए कहा कि सरकार जनता से टकराव नहीं चाहती है. इसी बीच अमेरिका द्वारा एक और विमानवाहक पोत भेजने के संकेत और परमाणु बातचीत को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है.
बांग्लादेश में चुनाव से ठीक पहले करीब 3,350 करोड़ रुपए (370 मिलियन डॉलर) की बड़ी फंडिंग को मंजूरी मिली है. इस फंडिंग की टाइमिंग को लेकर चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि इसका असर पूरे देश पर पड़ सकता है.
Donald Trump Claims: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को उन्होंने रोका था. उनका कहना है कि अगर समय रहते दखल न दिया जाता तो हालात परमाणु युद्ध तक पहुंच सकते थे. ट्रंप का कहना है कि उन्होंने टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल कर दोनों देशों पर दबाव बनाया. वहीं भारत ने इन दावों को साफ तौर पर खारिज किया है.
व्हाइट हाउस की ओर से जारी पहले तथ्य पत्र में कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कुछ खाद्य व कृषि वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेगा या समाप्त करेगा। सूची में सूखे अनाज, लाल ज्वार, पेड़ के मेवे, फल और नट्स, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और वाइन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए थे।
खत्म होगी H1B वीजा योजना? भारतीय टेक और आईटी सेक्टर में मची खलबली, जानिए बिल की पूरी सच्चाई
America h1b visa scrap bill: अमेरिका में H1B वीजा योजना खत्म करने के लिए रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने नया बिल पेश किया है, जिसमें 2027 से हर साल H1B वीजा की संख्या शून्य करने का प्रस्ताव है. अगर यह कानून बना, तो इसका सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा, क्योंकि H1B वीजा पाने वालों में 70 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय हैं.
क्या है एरिया 51? एलियंस और UFO की कहानियों से जुड़ा दुनिया का सबसे रहस्यमयी ठिकाना
Area 51 Real Truth: एरिया 51 का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में एलियंस और UFO की तस्वीर आ जाती है. फिल्मों और टीवी शो ने भी इसे रहस्य से भरी जगह के रूप में दिखाया है. हालांकि असल में यह जगह क्या है इसे लेकर अब काफी बातें साफ हो चुकी हैं. आज हम आपको उसी के बारे में बताएंगे.
जर्मनी में कार्निवाल परेड में होगा ट्रंप का पर्दाफाश
इस साल जर्मनी की मशहूर ‘रोज मंडे परेड’ में डॉनल्ड ट्रंप, फ्रीडरिष मैर्त्स और इमानुएल माक्रों का मजाक उड़ाने वाली झलकियां दिखाई देंगी, लेकिन व्लादिमीर पुतिन पर कोई कटाक्ष नहीं होगा. इसके पीछे एक खास वजह है
Jacques Leveugle: फ्रांस के 79 वर्षीय पूर्व शिक्षक जैक्स लेव्यूगल पर 1967 से 2022 के बीच भारत समेत नौ देशों में 89 नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप है. मामला यूएसबी ड्राइव से उजागर हुआ. आरोपी 2024 से हिरासत में है.
चीन के शीर्ष सैन्य जनरलों से डगमगा रहा शी जिनपिंग का भरोसा
चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी में हाल ही में उजागर हुए भ्रष्टाचार घोटाले ने सेना को झकझोर दिया है. शी जिनपिंग के दो उप-प्रमुखों के खिलाफ जांच ने सशस्त्र सेनाओं में वफादारी, सत्ता और नियंत्रण की खींचतान को उजागर कर दिया है
US-Bangladesh Trade Deal:बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी ने कहा कि बांग्लादेश-US व्यापार डील से भारत को चिंता नहीं करनी चाहिए. उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में शून्य टैरिफ मिलेगा, वहां भारत प्रतिस्पर्धी आपूर्ति कर सकता है.
कनाडा के स्कूल में गोलीबारी: हमलावर समेत 10 लोगों की मौत
ब्रिटिश कोलंबिया में सामूहिक गोलीबारी से दहशत हाई स्कूल के अंदर छह शव मिले, पुलिस जांच में जुटी स्थानीय MLA ने जताया दुख, समुदाय सदमे में वसूली नहीं, कारणों की जांच जारी; पुलिस सतर्क ब्रिटिश कोलंबिया। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में हुई एक सामूहिक गोलीबारी में हमलावर समेत कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह घटना मंगलवार (स्थानीय समय) को ब्रिटिश कोलंबिया के टंबलर रिज स्थित एक स्कूल में हुई। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के मुताबिक, हाई स्कूल के अंदर छह लोग मृत पाए गए। एक अन्य व्यक्ति की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार संदिग्ध हमलावर भी मृत पाया गया। पुलिस का कहना है कि उसकी मौत खुद को पहुंचाई गई चोट के कारण हुई। यह जानकारी कनाडा के प्रमुख मीडिया संस्थान सीबीसी ने दी है। इसके अलावा, एक घर से भी दो लोगों के शव मिले हैं। पुलिस का मानना है कि इस घर का संबंध इसी गोलीबारी की घटना से है। घटना में घायल सभी लोगों को प्राथमिक उपचार देने के बाद अस्पताल भेज दिया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। एमएलए लैरी न्यूफेल्ड ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा, टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल में हुई दुखद और बहुत परेशान करने वाली घटना के बाद मैं टंबलर रिज की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा हूं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने कन्फर्म किया है कि कई लोग मारे गए हैं। उन्होंने आगे बताया कि एक्टिव शूटर अलर्ट हटा लिया गया है, लेकिन जांच जारी है। न्यूफेल्ड ने आगे कहा, मैं फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स, स्कूल स्टाफ और लोकल अधिकारियों को इस बहुत मुश्किल हालात में उनके तेज़ और प्रोफेशनल रिस्पॉन्स के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मेरी दुआएं स्टूडेंट्स, परिवारों, टीचर्स और पूरी टम्बलर रिज कम्युनिटी के साथ हैं। यह एक छोटा और आपस में जुड़ा हुआ शहर है, जहां इस तरह की घटना का असर हर कोई महसूस करता है। उन्होंने आगे कहा, जिन लोगों पर असर पड़ा है, उनके सम्मान में, यह ज़रूरी है कि हम पुलिस को अपनी जांच पूरी करने और डिटेल्स कन्फर्म करने के लिए ज़रूरी समय दें। जैसे ही वेरिफाइड जानकारी मिलेगी, मैं उसे शेयर करता रहूंगा। एमएलए ने यह भी कहा कि अगर घटना के बाद किसी को मानसिक या भावनात्मक कठिनाई महसूस हो रही है तो वे उनसे संपर्क कर सकते हैं। इस बीच पुलिस ने कहा है कि गोलीबारी के कारणों की जांच अभी चल रही है। संदिग्ध के बारे में फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी जारी नहीं की गई है। आगे की डिटेल्स का इंतजार है।
Miguel Uribe father enters Colombia presidential race: कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मोड़ आया है. गोली से मारे गए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिगुएल उरीबे तुर्बे के पिता मिगुएल उरीबे लोंडोनो ने खुद चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने मैदान में उतरे हैं.जिसके बादभावनाओं ने कोलंबिया का सियासी खेल बदल दिया है.
ट्रेड वार के बीच ट्रंप की नई चेतावनी, नहीं खुलने देंगे अमेरिका-कनाडा ब्रिज
करीब ढाई किलोमीटर लंबे गार्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। यह पुल डेट्राइट (मिशिगन) को विंडसर (ओंटारियो) से जोड़ेगा और दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इस परियोजना की लागत लगभग 4.7 अरब डॉलर बताई जा रही है।
India-US Trade Deal: व्हाइट हाउस ने अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर पहली आधिकारिक फैक्ट शीट जारी की. जानकारी के अनुसार, इसमें वाणिज्यिक और डिजिटल उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ कटौती, भारत का डिजिटल सेवा कर हटाने का निर्णय और प्रौद्योगिकी सहयोग शामिल है. हालांकि, शीट में रूस से तेल की खरीद बंद करने पर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया.
बदल गए US के सुर! PoK और अक्साई चीन को भारत का हिस्सा बताने वाला मैप भी डिलीट किया
US removes India map showing pok aksai chin: अमेरिका ने अपने ट्रेड डील पोस्ट से भारत का नक्शा हटा दिया जिसमें पीओके और अक्साई चिन भारत में दिखाए गए थे. ये कदम भारत की आपत्ति के बाद विवाद को शांत करने के लिए उठाया गया था.
बांग्लादेश के बोगुरा जिले में BNP और जमात समर्थकों के बीच हिंसक झड़प में छह लोग घायल हो गए. BNP का आरोप है कि जमात-शिबिर कार्यकर्ताओं ने एक स्थानीय नेता की आंख निकाल ली है. जमात का ये रूप उस समय है, जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव है. बेटे की हालत जैसे ही मां ने सुनी उनका निधन हो गया.
कनाडा के स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग, शूटर समेत 10 की मौत, पूरे शहर में लगा लॉकडाउन
Canada School Shooting: कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के पीस रीजन में मंगलवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई. यहां टम्बलर रिज सेकेंडरी स्कूल में अचानक गोलीबारी शुरू हो गई. इस हमले में 10 लोगों की जान चली गई. रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने इस घटना की पुष्टि की है.
घर के अंदर ट्रंप को लेकर झगड़ा, अमेरिकी राजनीति ने पिता को बनाया हत्यारा! बेटी का कर दिया कत्ल
Woman Shot Dead By Father: अमेरिका के टेक्सास में रहने वाले एक पिता ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी राजनीति पर हुए झगड़े के बाद अपनी ही बेटी को गोली मार दी. ब्रिटेन की रहने वाली लूसी हैरिसन की इस घटना में मौत हो गई. वह 23 साल की थीं. यह मामला अब ब्रिटेन की एक अदालत में हुई जांच के दौरान सामने आया है जहां लूसी के पूर्व बॉयफ्रेंड ने पूरी घटना के बारे में बताया है.
बांग्लादेश में कल यानी 12 फरवरी को चुनाव हैं। 13 साल बैन रहने के बाद जमात-ए-इस्लामी पहली बार चुनाव लड़ रही है। कट्टरपंथी पार्टी माने जाने वाली जमात ने पिछला चुनाव 2008 में लड़ा था। जमात ने इस बार एक हिंदू कैंडिडेट उतारा है, वहीं किसी महिला को टिकट नहीं दिया। दैनिक भास्कर से बातचीत में जमात के चुनाव प्रभारी एहसान-उल-जुबैर कहते हैं कि मर्दों के लिए चुनाव लड़ना जितना आसान होता है, उतना महिलाओं के लिए नहीं होता। विरोधी उन पर हमला करते है, हिजाब उतार देते हैं। सुरक्षा बड़ा मुद्दा है। इसलिए सभी महिलाएं चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं। उन्होंने भारत से रिश्तों, संविधान में बदलाव के लिए हो रहे जनमत संग्रह और हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा पर भी जवाब दिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: अगर जमात सत्ता में आती है, तो भारत के साथ कैसे रिश्ते होंगे?जवाब: हम सम्मान और मर्यादा के आधार पर दूसरे देशों से रिश्ते रखना चाहते हैं। पिछले 16 साल में जो लोग सत्ता में थे, उन्होंने बांग्लादेश की विदेश नीति को पूरी तरह एक देश पर फोकस कर दिया था। ये बांग्लादेश के सम्मान और मर्यादा के मुताबिक नहीं था। हम चाहते हैं कि पड़ोसियों के साथ दोबारा रिश्ते बनाए जाएं। भारत के साथ हमारे कई मुद्दे हैं, जैसे तीस्ता बैराज, बॉर्डर पर हत्याएं और 54 नदियों के पानी का बंटवारा। भारत ऊपरी देश होने की वजह से पानी रोकता है। इससे बांग्लादेश को बहुत नुकसान होता है। यहां सूखे जैसे हालात बन रहे है। इन समस्याओं को आपसी समझ के जरिए सुलझाना चाहिए। सवाल: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा के मामले बढ़े हैं। इसकी क्या वजह है? जवाब: हम अपने लोगों को बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक में अलग नहीं बांटते। जो यहां जन्मे हैं, वे देश के नागरिक हैं। शेख हसीना के राज में कई घटनाएं हुईं। इन्हें हमारे और विपक्ष के खिलाफ इस्तेमाल किया गया। बाद में साबित हुआ कि वे सच नहीं थीं। पिछले 17-18 महीनों में जो घटनाएं हुईं, उनकी वजह धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक है। हमने किसी घटना का समर्थन नहीं किया। उनकी निंदा की और कहा कि सरकार जांच करके दोषियों को कानून के सामने लाएं। हम कानून हाथ में लेने का समर्थन नहीं करते। सवाल: आपने खुलना-1 सीट से हिंदू कैंडिडेट कृष्णा नंदी को उतारा है। ये चुनाव जीतने की रणनीति है या आप वाकई सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं?जवाब: हमने कई बार कोशिश की, लेकिन बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति अस्थिर थी। 2014 में हमें चुनाव नहीं लड़ने दिया गया। 2018 में रातोंरात चुनाव हो गया। 2024 में भी हमें नहीं लड़ने दिया गया। इस साल हम बातचीत के बाद एक कैंडिडेट उतार पाए। जिन सीटों पर जमात-ए-इस्लामी और BNP को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया, वहां वास्तव में चुनाव हुआ ही नहीं। अब हालात मुफीद होने की वजह से हमें चुनाव लड़ने का मौका मिल रहा है। एक गैर-मुस्लिम उम्मीदवार ने इच्छा जताई, हमने उसे टिकट दिया। सवाल: 10% हिंदू आबादी वाले मुल्क में सिर्फ एक हिंदू कैंडिडेट, ये कैसे सही है?जवाब: अगर और लोग चाहेंगे तो हम उन्हें भी टिकट देंगे। हम देखते हैं कि उम्मीदवार में संसद के लायक काबिलियत हो, करप्ट न हो, चाहे वह मुस्लिम हो या गैर-मुस्लिम। हम उसकी निजी इच्छा भी देखते हैं। हमने ढाका यूनिवर्सिटी के चुनाव में एक स्टूडेंट को टिकट दिया था। उसके समुदाय और परिवार ने रोका, फिर भी वह चुनाव लड़ा और जीता। सुरक्षा की वजह से कई बार समुदाय या परिवार से दिक्कतें आती हैं। हम किसी को चुनते हैं, वह सहमति देता है, हम उसका नॉमिनेशन करवाते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह जीतेगा। सवाल: जमात पर 1971 में बांग्लादेश की आजादी के आंदोलन को दबाने और पाकिस्तान का साथ देने का दाग है, ये कैसे मिटेगा?जवाब: अवामी लीग ने अपनी राजनीति में इन मुद्दों का इस्तेमाल किया। हमारे खिलाफ उनके पास कहने को कुछ नहीं था, इसलिए उन्होंने यह सब किया। वे हमें राजनीति में नहीं हरा पाए, तो कानून और ट्रिब्यूनल बनाए। ये बाद में गलत साबित हुए। हमारे एक लीडर को बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। पूरे मामले की समीक्षा कर कहा कि यह इतिहास का सबसे बुरा ट्रायल था। इंग्लैंड के सुप्रीम कोर्ट ने भी यही कहा। अब साफ हो चुका है कि इन आरोपों के पीछे राजनीति थी। सवाल: जमात पर धर्म के आधार पर भेदभाव के आरोप लगते हैं, हिंसा में भी नाम आया है। इस पर क्या कहेंगे?जवाब: हिंदू, ईसाई, बौद्ध, सब इस देश के नागरिक हैं। हम सब मिलकर देश बनाना चाहते हैं। हर आपदा में हमने धर्म नहीं देखा, मानवता देखी। 5 अगस्त 2024 के बाद सभी धर्मों के पूजा स्थलों की सुरक्षा की। हमने उन्हें भरोसा दिया कि किसी तरह की नाइंसाफी नहीं होगी। सवाल: जमात ने एक भी महिला को टिकट नहीं दिया। ऐसा क्यों?जवाब: बांग्लादेश के कुल वोटर में आधी महिलाएं हैं। बांग्लादेश के समाज में महिलाओं के लिए कुछ तयशुदा नियम, परंपराएं और मान्यताएं हैं। हर देश का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक इतिहास और परंपराएं होती हैं। उसी के हिसाब से उस देश की राजनीति और सिस्टम चलता है। जमात-ए-इस्लामी में करीब 40% महिलाएं हैं। जमीनी कैडर से लेकर संगठन में ऊपर तक हर जगह महिलाओं की मौजूदगी है। हर जगह उन्हें सम्मान मिलता है। मर्यादा में रहकर संगठन चलाने का मौका मिलता है। कोई महिला राजनीति करे या चुनाव लड़े या न लड़े, यह उसका निजी और पारिवारिक फैसला होता है। हम किसी महिला पर चुनाव लड़ने के लिए दबाव नहीं डालते। फिर भी यूनियन परिषद और उपजिला परिषद में हमारी महिला प्रतिनिधि रही हैं। उन्होंने अच्छे से जिम्मेदारी निभाई है। संसद में भी 2001 और 1991 में हमारी महिला सदस्य रही हैं। उन्होंने अच्छा काम किया है। सवाल: आप कह रहे हैं कि महिलाओं और पुरुषों में फर्क नहीं है, फिर कुछ महिलाओं को तो टिकट देना चाहिए था?जवाब: हमने कोशिश की है। मर्दों के लिए जो आसान है, वह महिलाओं के लिए नहीं है। 11 दिसंबर को चुनाव की तारीख का ऐलान हुआ था। अगले ही दिन ढाका-8 सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे शरीफ उस्मान हादी को दिनदहाड़े गोली मार दी गई। चार दिन पहले हमारी पार्टी से जुड़े एक नेता की शेरपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा हमारी महिला कार्यकर्ता चुनाव में काम कर रही होती हैं, तब दूसरी पार्टी के कार्यकर्ता उन पर हमला करते हैं। उनका हिजाब उतार देते हैं। उनका सामान छीन लेते हैं। उन्हें परेशान करते हैं। महिलाओं की सुरक्षा बड़ा मुद्दा है। इसलिए सभी महिलाएं चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं। वे राजनीति करेंगी या नहीं, यह उनका फैसला है। हम किसी पर दबाव नहीं डालते। हम मानते हैं कि माहौल और बेहतर बनाया जाए, तो भविष्य में महिलाएं चुनाव में ज्यादा हिस्सा लेंगी। सवाल: बांग्लादेश में दो महिलाएं प्रधानमंत्री रही हैं, फिर कोई काम महिलाओं के लिए कैसे मुश्किल हो सकता है?जवाब: दोनों ने पिछले 30 साल में दो पार्टियों का नेतृत्व किया और प्रधानमंत्री बनीं। आगे भी कोई महिला आ सकती है। इसमें बांग्लादेश के संविधान में कोई रुकावट नहीं है। संसद में बहुमत पाने वाली पार्टी तय करेगी कि उसका नेता कौन होगा। सवाल: बांग्लादेश के लोगों के पास दूसरे विकल्प भी हैं, फिर वे जमात जैसी कट्टर पार्टी को क्यों चुनें?जवाब: हर पार्टी की अपनी नीति और विचारधारा होती है। लोग नेताओं का बर्ताव, काबिलियत, लीडरशिप देखकर सही व्यक्ति और सही पार्टी को चुनेंगे। हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी को समर्थन मिलेगा। सवाल: बांग्लादेश में चुनाव के साथ जनमत संग्रह भी हो रहा है। अगर फिर से संविधान बनाने की बात आई, तो क्या ये इस्लामिक कानूनों के हिसाब से बनेगा?जवाब: 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से लोगों को बहुत उम्मीद हैं। 2014, 2018 और 2024 में हुए तीनों चुनाव देश की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सके। बल्कि चुनाव के नाम पर मजाक हुआ था। इस बार चुनाव के साथ-साथ जनमत संग्रह भी होगा। हमने लंबे विचार-विमर्श के बाद जुलाई चार्टर बनाया है। इसमें सुधार के कई प्रस्ताव शामिल हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि बांग्लादेश के करीब 13 करोड़ वोटर इसमें शामिल होंगे। बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी डेमोक्रेटिक और इस्लामी उसूलों के हिसाब से काम करने वाली पार्टी है। ये बांग्लादेश के लोगों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बन गई है। शेख हसीना सरकार के दौरान जमात पर बहुत ज्यादा जुल्म हुआ। इस वजह से जमात-ए-इस्लामी के लिए लोगों में भावनाएं, उम्मीदें और समर्थन बढ़ा है। हम लोगों के साथ रहे, उनकी मदद की। हमेशा हमारी पॉलिसी रही है कि लोगों के साथ खड़े रहें। इसलिए आने वाले चुनाव में हम उम्मीद कर रहे हैं कि जमात जनता के समर्थन से अच्छी स्थिति में रहेगी। सवाल: नए संविधान में क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं?जवाब: बांग्लादेश में हमने संविधान के लिए लड़ाई लड़ी है। पिछले डेढ़ साल से देश में अंतरिम सरकार है। उसके साथ राष्ट्रीय सुधार आयोग और जातीय ऐकमत्य कमीशन नाम से दो आयोग बने। इनके जरिए कई सुधार किए गए। इन सुधारों के आधार पर नया संविधान बन रहा है। बांग्लादेश अब उसी के आधार पर चलेगा। जनमत-संग्रह में कुल 48 धाराएं बदलेंगी। बांग्लादेश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच शक्तियों का बंटवारा होगा। अभी पूरी ताकत प्रधानमंत्री के पास है। ऐसी स्थिति अब नहीं रहेगी। कुछ शक्तियां राष्ट्रपति को मिलेंगी। प्रधानमंत्री का कार्यकाल ज्यादा से ज्यादा 10 साल का ही होगा। अगर जनमत संग्रह में हां के पक्ष में ज्यादा वोट होते हैं, तो फिर उसी के आधार पर बांग्लादेश और सरकारें चलेंगी। यह लोगों की उम्मीदों के मुताबिक होगा। सवाल: अगर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है, तो चुनाव के बाद जमात किसके साथ जाएगी?जवाब: तब हालात के मुताबिक, फैसला लेंगे। पहले भी बांग्लादेश में गठबंधन सरकारें रही हैं। 1991 में हमने BNP का समर्थन किया, 2001 में सरकार में रहे। इसमें कोई समस्या नहीं है। …………………….बांग्लादेश से ये स्टोरी भी पढ़ें1. हिफाजत-ए-इस्लाम के लीडर बोले- जमात इस्लामिक शासन नहीं लाई तो उससे भी लड़ेंगे बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामिक संगठन है हिफाजत-ए-इस्लाम। ये संगठन बांग्लादेश में इस्लामिक राज चाहता है। पूरे बांग्लादेश में हिफाजत का नेटवर्क है। इसलिए चुनाव के दौर में हिफाजत की अहमियत बढ़ जाती है। संगठन के लीडर अजीज-उल-हक कहते हैं अगर जमात देश में इस्लामिक शासन नहीं लाता है तो हम उसके भी खिलाफ हो जाएंगे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू... 2. जमात के पहले हिंदू कैंडिडेट बोले- शरिया नहीं लाएंगे, पैसे बांटते कैमरे में कैद बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही माहौल हिंदुओं के खिलाफ है। शरिया कानून की वकालत करने वाली जमात की छवि हमेशा कट्टरपंथी पार्टी की रही है। हालांकि, इस बार जमात ने पहली बार चुनाव में हिंदू कैंडिडेट उतारा है। खुलना जिले की दाकोप सीट से लड़ रहे कृष्णा नंदी दावा करते हैं कि जमात बांग्लादेश में शरिया नहीं लाएगी। नंदी रैली में वोटरों को खुलेआम कैश बांटते कैमरे में भी कैद हो गए। पढ़िए पूरी खबर…
आपने ओला-उबर या रैपिडो से कैब बुक करके सफर तो किया होगा। 5 फरवरी को दिल्ली में देश की पहली को-ऑपरेटिव कैब सर्विस भारत टैक्सी एप लॉन्च हो गई। इसका पूरा किराया ड्राइवर के पास जाएगा क्योंकि ये किसी कंपनी का एप नहीं, ना ही इसमें किसी एक व्यक्ति या कंपनी का मालिकाना हक होगा। इसमें ड्राइवर ही मालिक है। किराया किफायती है। दावा ये भी है कि बारिश या पीक आवर में भी किराया नहीं बढ़ेगा। इन दावों को परखने और सर्विसेज आजमाने के लिए दिल्ली में दैनिक भास्कर की टीम ने भारत टैक्सी एप डाउनलोड किया। किराया बाकी कैब के मुकाबले कम मिला। एक ही लोकेशन के लिए उबर की तुलना में इसका किराया 14-15 रुपए कम था। वहीं ओला की तुलना में करीब 138 रुपए कम दिखा। सर्विसेज देखने के लिए 7 फरवरी को हमने कैब बुक की। बुकिंग के बाद वेटिंग टाइम पहले 7 मिनट था, फिर ये बढ़ते-बढ़ते 12-13 मिनट हो गया। दो बार बुकिंग कंफर्म हुई लेकिन कैब नहीं आई। आखिरकार दोनों बार राइड कैंसिल हो गई। इसके बाद कैब न मिल पाने की वजह जानने और भारत टैक्सी एप का एक्पीरिएंस समझने के लिए हम कुछ ड्राइवर्स से मिले। ड्राइवर्स बोले- राइड मिल रहीं लेकिन रेट खराबशिवराज सिंह बुलंदशहर के रहने वाले हैं। पिछले 10 साल से कैब चला रहे हैं। उन्होंने 25 दिन पहले भारत टैक्सी एप इंस्टॉल किया लेकिन सही रेट न मिलने के कारण राइड नहीं ले रहे हैं। शिवराज कहते हैं, ‘मैंने अब तक सिर्फ एक ही राइड ली है। इसमें टाइमिंग का ख्याल नहीं रखा गया है। सिर्फ किलोमीटर नहीं, किसी जगह जाने में कितना समय लग रहा है, उसके हिसाब से भी पैसे मिलने चाहिए। अगर दूरी कम है लेकिन जाम के कारण ज्यादा समय लग रहा है तो CNG ज्यादा ही जलेगी। मैं भारत टैक्सी एप भी खोलकर रखता हूं लेकिन ये दूसरे एप के मुकाबले कम पैसे दे रहा है।‘ ‘इस पर राइड भी ज्यादातर उन इलाकों में मिल रही है, जहां ड्राइवर नहीं जाना चाहते हैं या ऐसे इलाके में जहां ज्यादा जाम या भीड़भाड़ रहती है। अगर ये एप चल गया और दूसरी कंपनियों का मार्केट खराब हुआ तो कहीं हमें बंधुआ मजदूर ना बना लिया जाए। हमसे मनमाने दाम पर न टैक्सी चलवाई जाए। क्योंकि ये तो हमें अभी से रेट नहीं दे रहे हैं।‘ बाकी कैब कंपनियों के बारे में पूछने पर शिवराज कहते हैं, ‘अभी जो कंपनियां सब्सक्रिप्शन लेकर काम करा रही हैं, उसका कमीशन भी 20 परसेंट तक बैठता है। भारत टैक्सी जब तक सही रेट नहीं देगी, तब तक ड्राइवर कमीशन देने के बाद भी उन्हीं कंपनियों की कैब चलाएंगे।‘ किराया बहुत कम, ये दूरी और समय के हिसाब से तय होइसी तरह महेश कुमार भी 20 दिनों से भारत टैक्सी एप इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन वो भी रेट से खुश नहीं हैं। महेश कहते हैं, ‘पीक टाइम में इसका रेट नहीं बढ़ता है। दूरी और समय दोनों हिसाब से रेट तय होना चाहिए। अभी रेट 16-17 रुपए प्रति किलोमीटर है। कभी कम भी हो जाता है। हमें 25 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराया मिलना चाहिए।‘ ‘कोई नहीं चाहता कि वो टैक्सी चलाए। हम मजबूर होकर टैक्सी चलाते हैं। अब प्राइवेट कंपनी कस्टमर को रिझाने के लिए कम किराया दिखाएगी तो वे उन्हीं के पास जाएंगे। मैं चाहता हूं कि सरकार सबके लिए एक रेट फिक्स करे। हमारा किराया हमें सरकार दिलवाए।‘ महेश को दिन भर में भारत टैक्सी से सिर्फ 4-5 बुकिंग मिलती है। ओला-उबर जैसी कंपनियों की खामियों पर वे कहते हैं, ‘ये कंपनियां अब सब्सक्रिप्शन लेकर काम करा रही हैं। कभी-कभी सही रेट मिल जाता है लेकिन उसके बाद 8 से 10 रुपए प्रति किलोमीटर का किराया ही देती हैं। इन कंपनियों ने ड्राइवरों को बहुत लूटा है। ये अच्छी बात है कि भारत टैक्सी हमारे भविष्य के लिए है लेकिन किराया सही मिलना चाहिए।’ ये हमारा एप लेकिन कम पैसे में कौन काम करेगाअजीत मिश्रा दिल्ली में एप के जरिए ऑटो चलाते हैं। पिछले डेढ़-दो महीने से भारत टैक्सी एप भी चला रहे हैं। वे कहते हैं कि पहले कम पिकअप मिलते थे लेकिन लॉन्च होने के बाद बुकिंग बढ़ रही है। हमने पूछा अब तक कितनी राइड ली? इस पर अजीत कहते हैं, ’अब तक दो ही राइड ली क्योंकि रेट बहुत कम है।’ ’हर व्यक्ति को पैसे चाहिए। जो अच्छे पैसे दे रहा है, हम उसी के पास जा रहे हैं। भारत टैक्सी कभी-कभी मीटर से भी कम किराया दे रहा है। पहले दिल्ली सरकार ने भी ऐसा एक मॉडल शुरू किया था लेकिन वो (पूछो ऐप) करप्शन की भेंट चढ़ गया। ड्राइवर को कोई फायदा नहीं हुआ।’ भारत टैक्सी में सुधार को लेकर अजीत कहते हैं, ’हम इसे अपना एप मान रहे हैं। 30 रुपए बेसिक के अलावा प्रति किलोमीटर 11 रुपए मिलने चाहिए। अगर हम जाम में खड़े हैं, तो उस वेटिंग टाइम के भी पैसे मिलने चाहिए। अगर ये मिल जाए तो हमें भारत टैक्सी से कोई दिक्कत नहीं है। बुकिंग मिल रही है लेकिन कम रेट के चलते राइड नहीं ले पा रहे हैं। हम सिर्फ उम्मीद ही कर सकते हैं कि आगे कुछ बढ़िया हो जाए।’ आशु खान अलग-अलग टैक्सी एप के जरिए बाइक सर्विस देते हैं। पिछले दो महीने से भारत टैक्सी भी इस्तेमाल कर रहे हैं। आशु कहते हैं, ‘जो लोग इस्तेमाल कर रहे थे, उन्हीं से इस एप का पता चला। अंतर यही है कि बाकी एप की तुलना में पूरे पैसे मिल रहे हैं। कोई कमीशन नहीं है। जबकि दूसरी कंपनियां 25 से 30% तक कमीशन लेती हैं। अगर 100 रुपए की राइड मिली तो 75-80 रुपए ही मेरे पास आते हैं।’ हालांकि आशु कहते हैं कि अभी उन्हें भारत टैक्सी के जरिए 3-4 राइड ही मिल रही हैं। जबकि दूसरी कंपनियों की बुकिंग दिन भर मिलती है। इसके बारे में ज्यादा लोगों को पता चलेगा तो हमें भी इसका फायदा होगा। गाड़ियों और ऑटो पर एड प्रिंट करवाकर इसका प्रचार करना चाहिए। एक्सपर्ट: प्री-पेड टैक्सी की तरह सरकार तय करे किरायाइंडियन फेडरेशन ऑफ एप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के नेशनल जनरल सेक्रेटरी शेख सलाउद्दीन 'भारत टैक्सी' को एक अच्छी पहल बताते हैं, हालांकि उनकी कुछ चिंताएं भी हैं। सलाउद्दीन कहते हैं, ‘सबसे बड़ी चुनौती किराया है। सरकार को सबके (प्राइवेट कैब कंपनियों समेत भारत टैक्सी) लिए एक किराया तय करना चाहिए। जो किराया है, वो ना तो बहुत कम हो, ना ही बहुत ज्यादा।‘ ‘सरकार को सभी संगठनों के साथ एक मीटिंग करनी चाहिए। इसके बाद अपने-अपने राज्यों के हिसाब से रेट तय करने चाहिए, तब जाकर भारत टैक्सी जैसा मॉडल सफल हो सकेगा। जैसे बड़े शहरों में प्री-पेड टैक्सी का किराया सरकार तय करती है, उसी तरह का सिस्टम बनना चाहिए।‘ भारत टैक्सी की चुनौतियों पर सलाउद्दीन कहते हैं कि प्लेटफॉर्म कंपनियों (प्राइवेट कैब कंपनियां) के पास ज्यादा पैसा है लेकिन जब उन कंपनियों को ड्राइवरों ने ही बड़ा बनाया है, तो वे भारत टैक्सी को बड़ा क्यों नहीं बना सकते हैं।‘ प्रचार की जरूरत ताकि बड़ी कंपनियों के कस्टमर शिफ्ट होंट्रांसपोर्ट सेक्टर पर रिसर्च करने वाले बासुदेव बर्मन भी सलाउद्दीन की बातों का समर्थन करते हैं। वे कहते हैं कि अभी बड़ी कंपनियों का जो कस्टमर बेस बना हुआ है, उसे कैसे शिफ्ट कराया जाएगा, ये बड़ी चुनौती होगी। बर्मन कहते हैं, ‘अभी हमें पता चल रहा है कि भारत टैक्सी का किराया दूसरी कंपनियों की तुलना में थोड़ा ज्यादा है। इसके कारण भरोसा बनाना और कस्टमर बनाना एक चुनौती है। सरकार को ही पहल करनी होगी कि वो इस पर ड्राइवर और कस्टमर का भरोसा बनाए। इस मार्केट को रेगुलेट करने की जरूरत है। जब तक एक तय किराए पर कैब नहीं चलेगी, प्राइवेट कंपनियां मनमानी करती रहेंगी।‘ कैब मार्केट में आने वाले बदलावों पर बर्मन कहते हैं, ‘प्राइवेट कैब कंपनियों ने तो पहले ही रणनीति बदल ली है। अब वे कमीशन के बदले सब्सक्रिप्शन के मॉडल पर आ गए हैं। ज्यादातर ड्राइवर अब हर राइड पर कमीशन नहीं दे रहे हैं। कंपनियां ड्राइवर को एक तय समय के लिए सब्सक्रिप्शन दे रही हैं।‘ ‘इसकी तुलना में भारत टैक्सी के प्रचार के लिए सरकार को आगे आना होगा क्योंकि उसके पास संसाधन है। इसी से भारत टैक्सी का विस्तार हो सकता है। खुद ड्राइवर्स ये काम नहीं कर सकते हैं।‘ देश में 2 लाख करोड़ का टैक्सी मार्केटये सही है कि कैब कंपनियां पहले सिर्फ कमीशन मॉडल पर काम कर रही थीं। हर राइड के किराए पर कंपनियां 15 से 30% तक कमीशन लेती थीं। हालांकि अब सभी कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रही हैं। यानी महीने, हफ्ते या दिन के हिसाब से एक तय सब्सक्रिप्शन राशि देने के बाद ड्राइवर हर राइड का पूरा किराया रख सकते हैंं। जैसे उबर एक दिन के सब्सक्रिप्शन का 129 रुपए ले रही है। इसके बाद कैब ड्राइवर को पूरे दिन की कमाई में कोई कमीशन नहीं देना पड़ेगा। इसी तरह ओला में एक दिन का सब्सक्रिप्शन 149 रुपए का है। इस रिचार्ज के बाद दिन भर का किराया ड्राइवर के पास जाएगा। दूसरी कंपनियां भी यही मॉडल अपना रही हैं। मार्केट रिसर्च कंपनी मॉर्डर इंटेलिजेंस (Mordor Intelligence) की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में भारत का कुल टैक्सी मार्केट 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का है। इसमें 65% हिस्सा एप बेस्ड कैब कंपनियों का है। यानी लगभग 1.31 लाख करोड़ रुपए। इसमें भी मुख्य रूप से उबर, ओला और रैपिडो का मार्केट शेयर सबसे बड़ा है। आने वाले सालों में एप बेस्ड राइड का मार्केट और ज्यादा बढ़ने वाला है। भारत टैक्सी के CEO बोले- हमेशा एक जैसा रेट होगाभारत टैक्सी के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) विवेक पांडे बताते हैं कि एप से अभी 4 लाख से ज्यादा ड्राइवर जुड़ गए हैं। वहीं करीब 13 लाख कस्टमर जुड़ चुके हैं। करीब 2-3 लाख लोग रोज भारत टैक्सी एप पर आकर सर्च कर रहे हैं। ड्राइवर्स को होने वाले फायदों पर विवेक कहते हैं, ‘सभी ड्राइवर्स धीरे-धीरे सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजना के तहत लाए जाएंगे, जैसे- आयुष्मान योजना, मुद्रा योजना। उन्हें जीरो कमीशन के अलावा इन सबका फायदा मिलेगा। कभी किसी की आईडी ब्लॉक नहीं होगी, उनकी सुनवाई होगी क्योंकि बोर्ड मेंबर में ड्राइवर भी हैं।‘ ‘दूसरा पक्ष कस्टमर का है। उन्हें सही रेट में कैब मिलेगी। ये नहीं होगा कि ज्यादा कस्टमर को लाने के लिए आज रेट घटा देंगे और फिर बढ़ा देंगे।‘ बैलेंस रेट रखकर कस्टमर लाने की कोशिशमार्केट कॉम्पिटिशन को लेकर विवेक कहते हैं, ‘अभी हम ड्राइवर से रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि रेट को लेकर परेशान ना हों क्योंकि अभी हमें कस्टमर लाने हैं। रेट ज्यादा कर देंगे तो कस्टमर नहीं आएंगे। इसलिए हम कहीं दावा नहीं कर रहे हैं कि भारत टैक्सी सबसे सस्ती है।‘ ‘हम एक बैलेंस कीमत रखने की कोशिश कर रहे हैं। कस्टमर से भी अपील है कि वे इसका इस्तेमाल करें, इसका पैसा किसी कंपनी के पास या बाहर के देशों में नहीं जा रहा है। बड़ी कंपनियां अनलिमिटेड समय तक तो डिस्काउंट देकर बुकिंग नहीं लेगी, इससे उनका बिजनेस भी नहीं चलेगा।‘ ‘एक साल के अंदर बड़े शहरों में भारत टैक्सी उपलब्ध होगी और तीन साल में ये सर्विस पूरे देश में शुरू हो जाएगी।‘ ड्राइवर्स के 'मालिक' बनने पर वे कहते हैं, ‘कोई भी ड्राइवर 500 रुपए तक के अधिकतम 5 शेयर खरीद सकते हैं। कल को अगर कंपनी को मुनाफा होता है, तो इसमें ड्राइवर की भी हिस्सेदारी होगी। वहीं इंश्योरेंस के लिए भी बहुत ही कम पैसे देने होंगे।‘ महिला ड्राइवर्स को लेकर विवेक कहते हैं कि अभी उस पर काम किया जा रहा है, जब एक साथ कई सारी महिला ड्राइवर्स हो जाएंगी तो ये विकल्प भी खोला जाएगा। अगर अभी खोला जाएगा और कस्टमर को ड्राइवर नहीं मिलेगी तो दिक्कत होगी। सभी के लिए एकसमान रेट की मांग पर विवेक कहते हैं कि ट्रांसपोर्ट राज्य सरकारों का विषय है, अगर सरकार किराया तय करती है तो हम उसका पालन जरूर करेंगे।………….. ये खबर भी पढ़ें… न बजट में कुछ-न कंपनियों ने सुनी; क्या हम रोबोट 3 फरवरी को ऑनलाइन डिलीवरी एप्स और प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स ने दिल्ली में हड़ताल की। इसमें शामिल अर्बन कंपनी की वर्कर नेहा (बदला हुआ नाम) 7-8 सालों से गुरुग्राम में काम कर रही हैं। वे कहती हैं, ‘12-13 घंटे काम करने के बाद 20-25 हजार रुपए बचते हैं। कंपनी 250 करोड़ का टर्नओवर कर रही है, लेकिन हम लोगों को नोचा जा रहा है।‘ पढ़िए पूरी खबर…
इस बार ईरान का परमाणु कवच तोड़ना मुश्किल? तेहरान में खलीफा का सबसे बड़ा ऑपरेशन
Israel Iran tension: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने अपने बयान में ईसाइयों की पवित्र धार्मिक पुस्तक बाइबल का जिक्र करते हुए कहा, यह शांति का नहीं युद्ध का समय है. इसीलिए माना जा रहा है नेतन्याहू, युद्ध की तारीख तय करने के मकसद से ही वॉशिंगटन जा रहे हैं और ईरान को भी हमले की पूरी आशंका है.
कनाडा में सिख फॉर जस्टिस पर बैन, SFJ आतंकी संगठन घोषित; डोभाल के दौरे के बाद बड़ी कूटनीतिक कामयाबी
SFJ Ban: कनाडा की सरकार ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए भारत में प्रतिबंधित टेरर ऑर्गेनाइजेशन संगठन सिख फॉर जस्टिस को आतंकी संगठन घोषित किया है.सिख फॉर जस्टिस (Sikhs for Justice case) पंजाब समेत अन्य जगहों पर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल है.
बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे. साल 2024 में हुई हिंसा और शेख हसीना के पीएम पद छोड़ने के बाद यह पहला चुनाव है. बांग्लादेश में ये चुनाव ऐसे समय पर हो रहा है, जब देश में अल्पसख्यकों के साथ तमाम हिंसा की खबरे आ रही हैं.
क्या ब्रिटेन की अलगी PM होगी मुस्लिम महिला? जानें कौन हैं शबाना महमूद, जो रच सकती हैं इतिहास
Who is Shabana Mahmood: ईरान में जारी तनाव के बीच ब्रिटेन में PoK मूल की मुस्लिम महिला शबाना महमूद के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में इस खबर में हम आपको शबाना महमूद के बारे में डिटेल में बताएंगे..
VIDEO: टेकऑफ करते ही जमीन पर धड़ाम से गिरा विमान, थर्राया समुद्र तट; फिर क्या हुआ?
Plane Crash In Somalia: सोमालिया में एक समुद्र किनारे विमान क्रैश हो गया. टेकऑफ के तुरंत बाद ही यह विमान टेक्निकल समस्या के चलते जमीन पर गिर गया. हादसे में सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं.
17 फरवरी को भारतीय दौरे पर होंगे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इन अहम मुद्दों पर होगी बात
Emmanuel Macron India Visit: फांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वे पीएम मोदी के साथ रक्षा, AI और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग पर बात करेंगे.
दीपू दास के परिवार को बांग्लादेश सरकार की ओर से मदद का ऐलान, परिजनों को मिलेगी 29 लाख की आर्थिक मदद
Bangladesh Mob Lynching: बांग्लादेश में लिंचिंग में मारे गए दीपू दास के परिवार को सरकार द्वारा 29 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है. ये दर्दनाक घटना पिछले साल 18 दिसंबर का घटित हुई है, जिसमें दीपू दास को पीट-पीटकर और जालकर मार दिया गया था.
ट्रंप ने किया था जीरो टैरिफ का क्लेम, व्हाइट हाउस की फैक्टशीट से क्या दिख रहा है?
भारत में अमेरिका के साथ हुई डील को लेकर मचा कोहराम थमने का नाम नहीं ले रहा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार देश के कृषि और डेयरी सेक्टर के सेफ होने का दावा कर रहे हैं.
हांगकांग एयरपोर्ट पर भीषण आग से हड़कंप, तीन बोर्डिंग ब्रिज किया गया बंद; यात्रियों में मची अफरा-तफरी
हांग कांग से एक बड़ी घटना की सामने आई है. यहां पर हांगकांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल एक पर भीषण आग लग गई. आग के कारण वहां पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया. एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से बताया गया कि ये घटना मंगलवार दोपहर तीन बजे की है.
Yunus Trump secret Trade Deal: अमेरिका और बांग्लादेश के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता हुआ है, जिसमें अमेरिका ने ढाका के कुछ टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स पर टैरिफ को 20 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया है.
बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने को हैं. बावजूद इसके वहां पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का सिलसिला जारी है. इस कड़ी में एक और हिंदू की बेरहमी से हत्या कर दी गई है.
US President Trump plans to visit Beijing:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अप्रैल में चीन की राजधानी बीजिंग का दौरा करेंगे. जैसे ही यह खबर सामने आई, हर कोई हैरान हो गया. हैरान होने की बात ही है, यही ट्रंप कभी चीन को सबसे बड़ा दुश्मन बताते थे. और कोई दूसरा देश चीन चला जाए तो डराते-धमकाते थे. टैरिफ जंग के बीच ट्रंप का यह कदम बहुत चौंकाने वाला माना जा रहा है. जानें पूरी रिपोर्ट.
US President Trump plans to visit Beijing:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अप्रैल में चीन की राजधानी बीजिंग का दौरा करेंगे. जैसे ही यह खबर सामने आई, हर कोई हैरान हो गया. हैरान होने की बात ही है, यही ट्रंप कभी चीन को सबसे बड़ा दुश्मन बताते थे. और कोई दूसरा देश चीन चला जाए तो डराते-धमकाते थे. टैरिफ जंग के बीच ट्रंप का यह कदम बहुत चौंकाने वाला माना जा रहा है. जानें पूरी रिपोर्ट.
कारिना शुलियाक मूल रूप से बेलारूस की रहने वाली हैं और पेशे से डेंटिस्ट बताई जाती हैं। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों में उन्हें एपस्टीन की “प्रेमिका” के रूप में उल्लेखित किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कारिना की एपस्टीन से पहली मुलाकात वर्ष 2010 में बेलारूस की राजधानी मिंस्क में हुई थी।
Nepal Elections: नेपाल में भी बजी रणभेरी, कोली के गढ़ झापा में बालेन ने गाड़ा झंडा
Nepal Election Highprofile Seat Jhapa:नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है. झापा में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह और अपदस्थ पीएम केपी शर्मा ओली को सीधी चुनौती दे रहे हैं. दोनों ने जोरदार प्रचार शुरू किया है, जबकि क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है. इसी बीच ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ओमान जा रहे हैं. ओमान इन बातचीतों में मध्यस्थ है. माना जा रहा है कि यह सीक्रेट मीटिंग तय करेगी कि न्यूक्लियर मुद्दे पर जंग बढ़ेगी या समझौते की राह खुलेगी.
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है. इसी बीच ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ओमान जा रहे हैं. ओमान इन बातचीतों में मध्यस्थ है. माना जा रहा है कि यह सीक्रेट मीटिंग तय करेगी कि न्यूक्लियर मुद्दे पर जंग बढ़ेगी या समझौते की राह खुलेगी.
चीन, बांग्लादेश के मौजूदा हालात को अपने लिए अनुकूल मानता है. उसको लगता है कि भारत का दबदबा यहां कम हुआ है. लिहाजा अपने संबंध बढ़ाने के लिए उसने ढाका में अपने निवेश और कूटनीतिक पहुंच को बढ़ा दिया है.
प्रिंस विलियम की सऊदी यात्रा पर विवाद, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात को लेकर उठे सवाल
Mohammed Bin Salman: ब्रिटिश सरकार के अनुरोध पर प्रिंस विलियम सऊदी अरब की यात्रा पर हैं, जहां उनकी मुलाकात क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से हुई. ऊर्जा और युवाओं पर केंद्रित यह दौरा सऊदी मानवाधिकार रिकॉर्ड, महिलाओं की स्थिति और जमाल खशोगी हत्या से जुड़े आरोपों के कारण विवादों में है.
Cuba Fuel Shortage:ट्रंप द्वारा क्यूबा की तेल आपूर्ति पर सख्ती के बाद देश में ईंधन संकट गहरा गया है. विमानन ईंधन की कमी के चलते एयर कनाडा ने क्यूबा के लिए अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं.
How Many Hindus Candidate In Bangladesh Elections 2026: पूरी दुनिया की नजरें इन दिनोंबांग्लादेश में होने वाले चुनाव पर टिकी हैं. सबसे बड़ी बात इस बार के चुनाव में मात्र 80 हिंदू-अल्पसंख्यक कैंडिडेट उतरे हैं.जबकि बांग्लादेश में 12 करोड़ 77 लाख से अधिक मतदाता हैं. तो आइए इस 2026 में होने वाले चुनाव में हिंदू-हिंदू-अल्पसंख्यक कैंडिडेट और उनसे जुड़ी सारी जानकारी समझते हैं.
Bangladesh Referendum: बांग्लादेश में अब बस दो दिन बाकी हैं, 12 फरवरी को लोग संसद के लिए वोट डालेंगे, साथ ही एक रेफरेंडम भी होगा- जहां सिर्फ 'YES' या 'NO' चुनना है. ये रेफरेंडम 'जुलाई नेशनल चार्टर 2025' पर है, जो पिछले साल की छात्र क्रांति (मॉनसून रिवॉल्यूशन या जुलाई अपराइजिंग) के बाद बना.
क्या बंद हो जाएगा संयुक्त राष्ट्र? सिर्फ 141 दिन में पैसे खत्म, UN की तिजोरी खाली करने के पीछे कौन?
UN financial crisis: संयुक्त राष्ट्र अब फाइनेंशियल क्राइसिस का सामना कर रहा है, क्योंकि 193 सदस्य देशों पर 4 अरब डॉलर का बकाया है, जिसमें करीब 95 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिका का बताया जा रहा है, जिससे यूएन गंभीर आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है. यूएन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो जुलाई तक संस्था के पास कामकाज के लिए पैसा खत्म हो सकता है.
बांग्लादेश में अब बस दो दिन बाकी हैं, 12 फरवरी को लोग संसद के लिए वोट डालेंगे, साथ ही एक रेफरेंडम भी होगा- जहां सिर्फ 'YES'या 'NO'चुनना है. ये रेफरेंडम 'जुलाई नेशनल चार्टर 2025'पर है, जो पिछले साल की छात्र क्रांति (मॉनसून रिवॉल्यूशन या जुलाई अपराइजिंग) के बाद बना.
इस्तीफे पे इस्तीफा! क्या ब्रिटेन में गिरने वाली है लेबर पार्टी की सरकार; PM स्टारमर ने खुद दिया जवाब
Epstein Controversy:प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस्तीफा देने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी सरकार देश में बदलाव के एजेंडे पर काम जारी रखेगी. विवादों और इस्तीफे की मांगों के बावजूद प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया कि स्टारमर पद नहीं छोड़ेंगे.
Donald Trump threatened canada: डोनाल्ड ट्रंप ने गॉर्डी हाउ ब्रिज परियोजना में अमेरिका को आधी हिस्सेदारी और मुआवजा न मिलने पर उसके उद्घाटन को रोकने की चेतावनी दी है. उन्होंने कनाडा की डेयरी नीति और चीन से रिश्तों पर भी आपत्ति जताते हुए 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने तक की बात कही है.
बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामिक संगठन है हिफाजत-ए-इस्लाम। ये संगठन बांग्लादेश में इस्लाम की तालीम देता है। पूरे देश में हिफाजत के मदरसे हैं। अजीज-उल-हक इस्लामाबादी संगठन के जॉइंट जनरल सेक्रेटरी हैं। पूरे बांग्लादेश में हिफाजत का नेटवर्क है। गांव-कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक सेंटर हैं। इसलिए चुनाव के दौर में हिफाजत की अहमियत बढ़ जाती है। ये संगठन सीधे राजनीति में शामिल होने से इनकार करता है, लेकिन उसके पास लोगों को प्रभावित करने की ताकत है। अजीज-उल-हक बांग्लादेश में इस्लामिक कानून की वकालत करते हैं। महिलाओं की आजादी की बात करते हैं, साथ ही कहते हैं कि जिस कौम की लीडर महिला है, वह कौम कामयाब नहीं हो सकती। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: भारत और बांग्लादेश के बीच हाल में खटास आई है। भारत के साथ कैसे रिश्ते होने चाहिए?जवाब: हम अंग्रेजों के खिलाफ जंग की वजह से अलग हुए हैं। अल्लाह की तरफ से हमें आजादी मिली। हिंदुस्तान के साथ हमारी दोस्ती और मोहब्बत होना चाहिए। दोनों के बीच अदावत नहीं होना चाहिए। हमने 17 साल देखा है कि हिंदुस्तान की हुकूमत ने सिर्फ अवामी लीग का समर्थन किया और इस्लामी तंजीम को खत्म करने के लिए साजिश की। अवामी लीग को एकतरफा सपोर्ट करने की वजह से लोग हिंदुस्तान के खिलाफ खड़े हुए। सिर्फ एक पार्टी के साथ दोस्ती रखना हिंदुस्तान की पॉलिसी की गड़बड़ी है। सवाल: डॉ. यूनुस की अंतरिम सरकार के बारे में क्या फीडबैक आया, क्या वे इस्लाम के हिसाब से काम कर रहे हैं?जवाब: वे इस्लाम का निजाम कायम करने के लिए तो नहीं आए हैं। फिर भी मैं कह सकता हूं कि डॉ. यूनुस ने इस्लाम के खिलाफ कोई काम नहीं किया। सवाल: क्या बांग्लादेश इस्लामिक देश बनने के रास्ते पर है?जवाब: 1971 से 2026 तक बांग्लादेश में मुसलमान बहुसंख्यक हैं। हिंदू, बौद्ध, क्रिश्चियन अलग-अलग धर्म को मानने वाले यहां रहते हैं। हम सबके साथ मिलकर काम करते हैं। बांग्लादेश के लोग इस्लाम को हुकूमत में ले जाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यहां डेमोक्रेटिक और कम्युनिस्ट पार्टियां हैं। 54 साल तक उन्होंने हुकूमत चलाई। इस्लाम शांति और सलामती की बात करता है। सवाल: क्या देश शरिया से चलना चाहिए?जवाब: हम तो चाहते हैं, लेकिन बांग्लादेश की ज्यादातर आबादी शरिया की जरूरत महसूस नहीं करती। अगर शरिया के मुताबिक बांग्लादेश का कानून बने, तो सब अच्छा हो जाएगा। हर किसी को इंसाफ मिलेगा। ये शरिया से ही हासिल होगा। सवाल: आप सभी को इंसाफ देने की बात कर रहे हैं। हिफाजत-ए-इस्लाम की लीडरशिप में कितनी महिलाएं हैं?जवाब: महिलाएं हमारा साथ देती हैं। महिलाओं की शिक्षा भी जरूरी है। महिलाओं को मशविरा देने का हक है। सवाल: मशविरा तो ठीक है, लेकिन क्या महिला नेतृत्व नहीं कर सकतीं?जवाब: इस्लामिक कानून में महिलाओं की लीडरशिप की मनाही है। सवाल: बांग्लादेश में तो शेख हसीना और खालिदा जिया प्रधानमंत्री रही हैं। इस्लामिक कानून क्या फिर किसी महिला को PM नहीं बनने देगा?जवाब: अल्लाह के नबी ने फरमाया है कि जिस कौम की लीडर महिला है, वो कौम कामयाब नहीं हो सकती। हम अल्लाह और उसके रसूल के फरमान को मानते हैं। अल्लाह ने किसी महिला को नबी नहीं बनाया। अमेरिका में तो कोई औरत प्रेसिडेंट नहीं हुईं। जो बांग्लादेश की हुकूमत में आने के लिए साजिशें करते हैं, उनके मुल्क में तो महिलाओं को लीडर नहीं बनाते। फिर हमारे मुसलमान देश में क्यों ऐसी उम्मीद करते हैं। हम बांग्लादेश में अच्छे से हुकूमत चलाते हैं। औरतें हमारे खिलाफ नहीं होतीं। सेक्युलर, डेमोक्रेटिक और कम्युनिस्ट पार्टियों में महिलाएं विरोध करती हैं। इस्लाम में तो कोई विरोध नहीं करता। इस्लाम तो मिसाल है कि हमारी औरतें घर में शांति से रहती हैं। अपने हक पाती हैं। अधिकारों के लिए आंदोलन करना जरूरी नहीं है। महिलाएं अपने पति, भाई के खिलाफ मुकदमा नहीं करतीं, लेकिन हम देखते हैं दूसरे देशों में यही सब होता है। हम खुद महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा हक देने के लिए तैयार हैं। सवाल: अफगानिस्तान में तालिबान ने सभी धर्म की महिलाओं को हिजाब जरूरी कर दिया है। क्या बांग्लादेश में भी बुर्का या हिजाब जरूरी किया जाना चाहिए?जवाब: मुसलमान को अपना धर्म मानना चाहिए। अल्लाह का हुकुम मानना चाहिए। जिस धर्म में अल्लाह का हुकुम नहीं है, जैसे ईसाई, यहूदी, बौद्ध को ये मानना जरूरी नहीं है। मुसलमानों को कुरान को मानना चाहिए। अगर कोई कुरान नहीं मानना चाहे, तो हम मजबूर नहीं करते हैं। शेख हसीना सेक्युलर PM थीं, लेकिन कुरान नहीं मानती थीं। बांग्लादेश के उलेमा ने उनके खिलाफ तो कोई विरोध नहीं किया। ये एक प्रोपेगैंडा है। अगर बांग्लादेश में इस्लामिक हुकूमत कायम हो सके, तो मर्दों और औरतों के लिए अलग-अलग सिलेबस होना चाहिए। सवाल: बांग्लादेश की सबसे बड़ी इंडस्ट्री टेक्सटाइल में आधी से ज्यादा वर्कफोर्स महिलाओं की है, क्या उन्हें काम करने की आजादी नहीं होना चाहिए?जवाब: 2013 में अवामी लीग ने हमारे बारे में साजिशन ये फैलाया कि हम महिलाओं की काम करने की आजादी के खिलाफ हैं। ये इस्लाम के खिलाफ प्रोपेगैंडा है। हमने सबसे पहले महिलाओं की सैलरी 5 से बढ़ाकर 8 हजार करने की मांग की थी। सवाल: आपने कहा कि हिफाजत गैर सियासी संगठन है, लेकिन आपके संगठन के बड़े लीडर ममनुल हक जमात के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं?जवाब: हम गैर सियासी संगठन हैं। इस्लामकि स्कॉलर इसमें शामिल हो सकते हैं। हिफाजत में कोई सिर्फ राजनीति में होने की वजह से नहीं आ सकता। हिफाजत का आधार राजनीति नहीं है। हमारे बैनर के अंदर राजनीति नहीं कर सकते। सवाल: ढाका यूनिवर्सिटी में लड़कियां साड़ी पहनकर आती हैं, लड़के कुर्ता पहनते हैं, गाना-बजाना भी करते हैं, अगर इस्लामिक हुकूमत बनती है, तो क्या तब भी ये सब कर सकेंगे?जवाब: अगर बांग्लादेश में इस्लामिक हुकूमत कायम हो, तब इस्लामिक कानून नाफिज (लागू) हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी में अभी सब मौजूदा कानून के हिसाब से होता है। दूसरे मजहब की संस्कृति, गाना-बजाना, ये मुसलमानों के लिए सही नहीं है। हम उनसे गुजारिश ही करते हैं कि आप इस्लामिक कानून पर चलें। सवाल: इस बार का चुनाव BNP और जमात के बीच है। आप इस्लामिक हक की बात कर रहे हैं, कौन सी पार्टी ये बेहतर तरीके से कर सकती है?जवाब: सत्ता में आने के लिए बहुमत चाहिए। इस वक्त इस्लामिक हुकूमत कायम करने की कोशिश करना हमारा फर्ज है। अगर बांग्लादेश के लोग ये नहीं मानते हैं, तो हम क्या कर सकते हैं। जिस पार्टी के हुकूमत में आने से देश, मस्जिद-मदरसे, इस्लाम की तरक्की हो, उसे सत्ता में आना चाहिए। सवाल: वो पार्टी कौन सी है?जवाब: जो पहले से सत्ता संभाल चुके हैं, जिनके पास तजुर्बा है, ऐसी पार्टी को वोट करना चाहिए। सवाल: अगर चुनी हुई सरकार इस्लामिक हुकूमत लाती है और लोग विरोध करते हैं तो हिफाजत का क्या रोल रहेगा?जवाब: बांग्लादेश के ज्यादार लोग और सरकारी कर्मचारी इस्लामिक हुकूमत लाना चाहते हैं। हम भी इस्लामिक कानून चाहते हैं। सवाल: अगर जमात सत्ता में आती है, तो क्या आप उन पर इस्लामिक शासन लाने के लिए दबाव बनाएंगे?जवाब: जमात ने तो ऐलान कर दिया है कि वे इस्लामिक कानून नहीं लाएंगे। अगर इस्लामिक कानून लागू नहीं करते हैं, तो हम उनके खिलाफ जाएंगे। हमारा मंसूबा है- अल्लाह का निजाम। जमात ने अमेरिका से वादा किया कि अगर हम हुकूमत में आए, तो आपके मशविरे से चलेंगे और शरिया लागू नहीं करेंगे। सवाल: खबरें हैं कि अमेरिकी डिप्लोमैट जमात के नेताओं से मिले थे, ये बात सही है?जवाब: दुनिया में एक बात मशहूर है कि अमेरिका जिसका दोस्त है, उसे दुश्मन की जरूरत नहीं है। जमात दोस्त के नाम पर दुश्मन पाल रही है। इराक और लीबिया में अमेरिका ने क्या किया, बांग्लादेश को हम इराक-लीबिया नहीं बनाना चाहते। सवाल: हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामिक संगठन है। आपने अपने समर्थकों को किसे वोट देने का मैसेज दिया है?जवाब: अवामी लीग (पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी) ने बांग्लादेश के लोगों पर बहुत जुल्म किए। इसके खिलाफ हुए आंदोलन में देश के आम लोग शामिल हुए। अल्लाह ने हमें एक जालिम हुकूमत से निजात दिलाई है। 12 फरवरी को चुनाव हैं। इसके लिए हिफाजत-ए-इस्लाम की तरफ से पैगाम है कि उस पार्टी को वोट करें, जो मुल्क, दीन, तालीम और मदरसा महफूज कर पाए। हम किसी सियासी कार्यक्रम में शिरकत नहीं करते, लेकिन मुल्क का नागरिक होने की वजह से वोट देना हमारा हक है। ये हक अदा करना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी है। सवाल: देश में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। भीड़ ने दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोप में मार दिया। इसके सबूत भी नहीं हैं। आप इस हिंसा को कैसे देखते हैं?जवाब: हमने अखबार में साफ बयान दिया था कि ये काम गलत है। इस्लाम इसका समर्थन नहीं करता। हम देश के लोगों को पैगाम देते हैं कि इस तरह के हमले में शामिल न हों। अगर कोई इस्लाम या कुरान के खिलाफ बयान दे, तो कानूनी रास्ते से शिकायत करें। कानून अपने हाथ में न लें। ……………………….बांग्लादेश से ये रिपोर्ट भी पढ़े 1. भारत से दोस्ती या दुश्मनी, चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बांग्लादेश में होने वाले चुनाव पर ढाका के रहने वाले अहीदुज्जमान कहते हैं, ‘मुझे चुनाव से कोई फर्क नहीं पड़ता। अवामी लीग ने देश को आजादी दिलवाई, उसी को चुनाव नहीं लड़ने दिया जा रहा। दूसरी तरफ जो 1971 के मुक्ति संग्राम के खिलाफ थे, वे चुनाव में जमकर प्रचार कर रहे हैं। अहीदुज्जमान के जैसी उलझन हर बांग्लादेशी के सामने है। यहां समझ आया कि भारत सबसे बड़ा मुद्दा है। वोटर दो हिस्सों में बंटे हैं, एक भारत समर्थक है और दूसरा भारत विरोधी। पढ़ें पूरी खबर… 2. BNP लीडर बोले- इंडिया स्पेशल नहीं, शेख हसीना को पनाह देने से रिश्ते कैसे सुधरेंगे शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। दैनिक भास्कर ने BNP की सेंट्रल कमेटी के मेंबर अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। वे कहते हैं कि हम भारत से अच्छी दोस्ती चाहते हैं, लेकिन भारत में कुछ स्पेशल नहीं है। समझ नहीं आता उसने शेख हसीना को पनाह क्यों दी है। इससे रिश्ते अच्छे नहीं हो पाएंगे। पढ़ें पूरा इंटरव्यू...
असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। CM ने गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के संबंधों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एलिजाबेथ पाकिस्तान की एक फर्म में काम करती थीं और भारत से जुड़ी जानकारियां तौकीर को भेजीं। हालांकि, गौरव इसे लोगों को असल मुद्दे से भटकाने की चाल कहते हैं। उनका कहना है कि हिमंता के खिलाफ खुद आरोपों का पहाड़ खड़ा है, इसलिए निजी हमले कर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री रहने के लायक नहीं हैं। असम में जल्द विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले इन सियासी आरोपों को लेकर दैनिक भास्कर ने कांग्रेस लीडर गौरव गोगोई से बात की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: CM हिमंता बिस्वा सरमा आपके ऊपर पाकिस्तान से लिंक होने के आरोप लगा रहे हैं?जवाब: लोगों को साफ पता चल रहा है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे उठा रही है। 4,000 एकड़ जमीन मुख्यमंत्री और उनके परिवार के कब्जे में है। यहां बेरोजगारी और महंगाई बड़ी समस्या है। इन्हें छिपाने के लिए BJP झूठे आरोप लगा रही है। ये आरोप एक-दो महीने पहले से नहीं, एक साल से लगा रही है। उन्होंने एक SIT भी बनाई, जिसकी रिपोर्ट 6 महीने पहले उन्हें पता चल गई थी। इसके बाद भी वे चुप रहे। ये रिपोर्ट उन्होंने केंद्र सरकार को भी नहीं दी। अगर मामला इतना अहम है, तो 6 महीने क्यों बैठे रहे। लोगों को भी पता चल गया है कि यह सिर्फ अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए, कांग्रेस के एजेंडे को पटरी से उतारने के लिए, लोगों का ध्यान भटकाने के लिए उनकी राजनीतिक चाल है। सवाल: CM आपके परिवार की नागरिकता पर भी सवाल उठा रहे हैं?जवाब: हम अपने समाज में बाहर से आई बहू का बहुत सम्मान करते हैं। असम के लोगों ने मेरे परिवार को वही सम्मान दिया है। मुख्यमंत्री के पास मेरे स्वर्गीय पिता के खिलाफ कहने को कुछ नहीं बचा है। मैं तीन बार से सांसद हूं। 10 साल से संसदीय राजनीति में हूं। मेरे खिलाफ उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है, जबकि उनके खिलाफ सबूतों का पहाड़ बन रहा है। अवैध कंपनियां, उनके परिवार के नाम पर चैनल खोला गया है, उसमें एड के नाम पर कितना सरकारी फंड जाता है, उनके परिवार के नाम पर कंपनी है, उसके लिए नियम बदलकर संपत्ति का मालिक बनाया जाता है। कहीं ना कहीं उनकी दुविधा है कि वे मेरे परिवार के खिलाफ क्या बोलें। इसलिए वे निजी टिप्पणी कर रहे हैं। सवाल: BJP आपकी पत्नी पर आरोप लगाती है, कांग्रेस CM की पत्नी पर आरोप लगाती है। असम में क्या ‘वाइफ पॉलिटिक्स’ चल रही है?जवाब: हम जो सवाल उठा रहे हैं, वो लोगों से जुड़े हैं। कैसे जमीन के नियम बदले जा रहे हैं। क्यों एक चुना हुआ मुख्यमंत्री अपने परिवार को सरकारी पैसा एडवर्टाइजमेंट के नाम पर दे रहे हैं। क्यों पीडब्ल्यूडी के कॉन्ट्रैक्ट उनके परिवार को मिल रहे हैं। मेरे परिवार की जहां तक बात कर रहे हैं, कभी विदेशी एजेंट, कभी जासूस, कभी नागरिकता जैसे आरोप लगाए, जिनके कोई सबूत नहीं हैं। सवाल: CM हिमंता का मुस्लिम शख्स को टारगेट करते वीडियो वायरल हुआ। उसे आप कैसे देखते हैं?जवाब: यह बहुत घिनौना वीडियो है। प्रदेश के चुने हुए मुख्यमंत्री को इस तरह के वीडियो को बढ़ावा देना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अपराध किया है। उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। मुझे पता चला है कि कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। उन्होंने भले ही वीडियो डिलीट कर दिया हो, लेकिन ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले उन्होंने विशेष समुदाय के खिलाफ काफी जहरीली भाषा का इस्तेमाल किया है। उस पर कानूनी कार्रवाई हो रही है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेरे 5 और 9 साल के बच्चों के पासपोर्ट की डिटेल्स मीडिया के सामने रखी। यह भी कानूनी अपराध है। वे बार-बार साबित कर रहे हैं कि वे असम या किसी राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के योग्य नहीं हैं। सवाल: मुख्यमंत्री मुस्लिमों पर लगातार बयान दे रहे हैं। इस पर कांग्रेस क्या कर रही है?जवाब: लोग जानते हैं कि वे अपने आपको हिंदू नेता साबित करना चाहते हैं। ये कैसे हिंदू नेता हैं, जो प्रदेश में गाय की तस्करी को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे जुड़े लोगों को मंत्री बनाए हुए हैं, उन्हें टिकट देने का फैसला लिया है। उन्होंने हिंदू जनजाति की लगभग 12 हजार एकड़ जमीन अडाणी-अंबानी को बेच दी है। यहां के बंगाली लोग खुद को भारतीय कहते हैं। आज BJP के राजनीति की वजह से उन्हें लोग बांग्लादेशी की तरह देखने लगे हैं। इन्होंने असम के हिंदू समाज के साथ अन्याय किया है और उनकी तुच्छ राजनीति से हिंदू भी बहुत प्रभावित हुए हैं। यही बातें हम लोगों के बीच ले जा रहे है। सवाल: कौन लोग हैं, जो गाय की तस्करी में शामिल हैं?जवाब: ये तो उनको पता है, लोगों को भी पता है कि गाय की तस्करी में जुड़े हुए व्यक्ति उनकी कैबिनेट में हैं और बहुत करीबी हैं। यहां कोयला सिंडिकेट चल रहा है। ED ने बोला है कि हर दिन हजारों ट्रक असम, मेघालय सीमा को पार करते हैं। हर ट्रक से 1.5 लाख रुपए की वसूली होती है। सवाल: मुस्लिमों के घर तोड़े जा रहे हैं या फिर वोटर लिस्ट से उनका नाम कट रहा है, उनके लिए कांग्रेस क्या कर रही है?जवाब: अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ संवेदनशील मामला है। कांग्रेस की सरकार ने इस पर ठोस कदम उठाए थे। हमने सीमा पर फेंसिंग का जितना काम कराया, BJP सरकार केंद्र में 10 साल रहने के बाद भी नहीं कर पाई। हमने जितने बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट किया, उसका आधा भी BJP सरकार नहीं कर पाई। हमने अवैध बांग्लादेशियों की पहचान के लिए NRC की प्रोसेस शुरू की थी, BJP सरकार उसे भी पूरा नहीं कर पाई। असली समस्या का समाधान करने में BJP बार-बार नाकाम रही है। सवाल: कांग्रेस किन मुद्दों के साथ जनता के बीच जाएगी, क्या CM फेस का ऐलान होगा?जवाब: हमने हाल ही में हर जिले में जाकर लोगों से बात की है कि वे क्या चाहते हैं। इसका सार हम जल्द पब्लिश करेंगे। मुख्यमंत्री चेहरे का फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा। हमें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे निभाने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। सवाल: आप पर आरोप हैं कि आप राहुल गांधी के नजदीक हैं और कार्यकर्ताओं से दूर रहते हैं?जवाब: असम में अगर जमीनी कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच सबसे ज्यादा कोई रहता है, तो वो मैं हूं। मुख्यमंत्री आपको मंचों पर और भीड़ में दिखेंगे, लेकिन मजदूर, दुकानदार या किसी शोकग्रस्त परिवार के घर कभी नहीं दिखेंगे। हम कोशिश करते हैं कि हर घर, हर व्यक्ति तक पहुंचें। ……………ये खबर भी पढ़ें… संदेशखाली गैंगरेप- 2 विक्टिम पलटीं, एक गीता पाठ करा रहीं पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना का छोटा सा गांव संदेशखाली। फरवरी 2024 में ये गांव सुर्खियों में आया, जब तीन महिलाओं ने ममता बनर्जी की पार्टी TMC के नेता रहे शाहजहां शेख पर गैंगरेप के आरोप लगाए। महिलाओं की कहानी दिल दहलाने वाली थी। आरोपों के मुताबिक, शाहजहां और उसके लोगों को जो औरत अच्छी लगती, उसे पार्टी की मीटिंग के बहाने ऑफिस में बुला लेते। दो दिन, तीन दिन, चार दिन, जब तक मन होता, ऑफिस में ही रखते। पढ़िए पूरी खबर…
'मॉल जाओ तो लगता है पाकिस्तान घूम रहे' अमेरिका में बदल गई 'डेमोग्राफी'? ट्रंप के सांसद ने उठाया सवाल
ट्रंप के करीबी और अमेरिकी सांसद ब्रैंडम गिल के एक बयान ने अमेरिका में तूफान मचा दिया है. अपने विवादित बयानों से सुर्खियों में रहने वाले ब्रैंडम का कहना है कि अमेरिका के शहरों में घूमते हुए ऐसा लगता है, जैसे हम पाकिस्तान में रह रहे हैं.
स्टार्मर के करीबी सहयोगियों के इस्तीफों ने यह संकेत दिया है कि सरकार के भीतर अस्थिरता बढ़ रही है। मॉर्गन मैकस्वीनी को स्टार्मर का सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता था। 2020 में लेबर पार्टी के नेता बनने के बाद से वे स्टार्मर के साथ रहे और जुलाई 2024 के आम चुनावों में पार्टी की जीत के प्रमुख सूत्रधारों में शामिल थे।
ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि प्रधानमंत्री स्टार्मर अपने काम में लगे हैं और देश को आगे ले जा रहे हैं. वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे. ब्रिटेन में सियासी भूचाल उस वक्त आ गया, जब ब्रिटिश पीएम के सबसे करीबी सलाहकार और चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दे दिया.
DNA: ईरान के हाथ लगी अमेरिका की ये एक्सक्लूसिव हथियार टेक्निक, हमला करने से पहले थरथराएंगे ट्रंप
Iran-America Conflict: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि तेहरान के पास अमेरिका की एक्सक्लूसिव हथियार तकनीक हाथ लग गई है. इससे ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
Epstein files: एपस्टीन फाइल्स में मौजूद कंटेट की पड़ताल कई वकील और पत्रकार कर रहे हैं. एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत जारी हुए दस्तावेजों में दर्जनों महिलाओं के नाम सामने आए हैं. इनमें प्रिंस एंड्रयू की पूर्व पत्नी सारा फर्ग्यूसन, उनकी बेटियों के अलावा अब करीना का नाम सामने आया है.
दुनिया में कई ऐसे मामले सामने आते हैं, जिसको जानने के बाद हम हैरान हो जाते हैं. कुछ ऐसा एक प्रकरण इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑक्सफ़ोर्ड क्राउन कोर्ट में एक हत्या का मामला सुना जा रहा था. इस दौरान दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
Norway Ambassador Resigns: नॉर्वे की जॉर्डन में मौजूद राजदूत मोना जूल ने अपने पद से इस्तीफा दिया है. उनका यह इस्तीफा जेफरी एपस्टीन के साथ अपने संपर्क की जांच के बीच आया है.
ट्रंप की थू-थू, ओबामा का मजाक उड़ाने पर बढ़ा बवाल, इंटरनेट ने बता दिया नस्लवादी
Donald Trump Monkey Post On Obama: डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक की ओबामा को बंदर के रूप में दिखाने पर लोगों ने आपत्ति जताई है.
ब्रिटेन सरकार के मुखिया इस समय सियासी संकट से जूझ रहे हैं. ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर आने वाले समय में इस्तीफा दे सकते हैं. चूंकि, हाल में ही ब्रिटिश के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. एस्पटीन फाइल में हुए एक खुलासे के बाद उन्होंने यह कदम उठाया था.
President patrick hermini bilateral meeting: प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की बैठक में द्विपक्षीय सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में साझा हितों पर चर्चा हुई. भारत ने 175 मिलियन डॉलर के आर्थिक पैकेज की घोषणा की, जो हाउसिंग, ई-मोबिलिटी, स्वास्थ्य और कौशल विकास में मदद करेगा.
Bangladesh Election 2026: 'दो बेगमों' के बिना हो रहे बांग्लादेश के चुनाव में झलक रहा नेतृत्व संकट
दक्षिण एशिया में महिला नेतृत्व के प्रतीक के रूप में पहचाने जाने वाले बांग्लादेश में इस बार चुनावी मैदान में महिलाओं की उपस्थिति बेहद सीमित है। कुल 1,981 उम्मीदवारों में से केवल 76 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं यानी कुल का चार प्रतिशत से भी कम।
थाईलैंड चुनाव 2026: पीएम अनुतिन की पार्टी आगे, बहुमत से दूर; गठबंधन की राह पर भूमजाईथाई पार्टी
मतगणना में भूमजाईथाई को 195 सीटें मिल चुकी हैं। 500 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत के लिए 251 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। ऐसे में साफ है कि नई सरकार गठबंधन के सहारे ही बनेगी, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संभावित गठबंधन में अनुतिन की पार्टी का वर्चस्व रहेगा।
रिपोर्टों के मुताबिक, 33 हजार वर्ग फीट में फैले एपस्टीन के जोरो रैंच को वह एक ऐसे परिसर के रूप में विकसित करना चाहता था, जहां महिलाएं उसके बच्चों को जन्म दें। कुछ स्रोतों ने दावा किया कि वह इसे “बच्चों की फसल” उगाने वाले फार्म की तरह देखता था।

