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‘रॉकेट बनाने का सामान’ लेकर चीन से 2 जहाज रवाना:ईरान की मदद क्यों कर रहे जिनपिंग; क्या अमेरिका रास्ते में ही उड़ा सकता है

ईरान की सरकारी शिपिंग कंपनी के दो जहाज चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए हैं। भीषण जंग के बीच ईरान की तरफ बढ़ते जहाजों से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन पर ऐसा मिलिट्री केमिकल लदा हो सकता है, जो रॉकेट बनाने में इस्तेमाल होगा। अगर ऐसा हुआ तो ईरानी हमले जारी रह सकते हैं और जंग लंबी खींच सकती है। क्या वाकई इन जहाजों में रॉकेट बनाने का सामान, ईरान की मदद क्यों कर रहे जिनपिंग और क्या अमेरिका इन कंटेनर्स को रास्ते में ही उड़ा सकता है; भास्कर एक्सप्लेनर में 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: चीन से रवाना हुए ईरानी जहाजों में क्या लदा है? जवाब: ईरान की सरकारी कंपनी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स यानी IRISL के 2 जहाज- शब्दीस और बर्जिन चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से इसकी पुष्टि हुई… सवाल-2: क्या अमेरिका इन जहाजों को ईरान तक पहुंचने देगा? जवाब: फिलहाल दोनों जहाज साउथ चाइना सी पार करके मलक्का स्ट्रेट के करीब पहुंच गए हैं… दोनों को ईरान पहुंचने के लिए होर्मुज स्ट्रेट पार करना होगा, जहां अमेरिकी और ईरानी बेड़े तैनात हैं। यहां हमले भी हो रहे हैं। वहीं, चाबहार पोर्ट पर भी हमले हुए हैं। हाल ही में बंदर अब्बास के आसपास काले धुएं के गुबार देखे गए हैं। इसके अलावा 4 मार्च को अमेरिकी नेवी की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के पास हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को Mk-48 टॉरपीडो से डुबो दिया। ये फ्रिगेट युद्धक्षेत्र से करीब 3 हजार किमी दूर था और जंग में शामिल भी नहीं था। फिर भी ऐसा हुआ। अमेरिकी थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में एशिया मैरीटाइम ट्रांसपिरेंसी इनिशिएटिव के डिप्टी डायरेक्टर हैरिसन प्रेटैट के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद से हॉर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद है। पहले रोजाना औसतन 153 जहाज गुजरते थे, लेकिन 1 मार्च के बाद से ये आंकड़ा 13 हो गया है। चीन तक के दर्जनों जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हैं। यानी अगर शब्दीस और बर्जिन हॉर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़े तो अमेरिकी नेवी इन पर हमला कर सकती है। इस आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि अगर इन जहाजों पर लदा समान ईरान के लिए इतना अहम है तो फिर संभावना है कि IRGC की नेवल फ्लीट इन्हें एस्कॉर्ट करें। ऐसा हुआ तो अगले हफ्ते तक दोनों जहाज ईरानी बंदरगाहों तक सुरक्षित पहुंच सकते हैं। हाल ही में बंदर अब्बास पोर्ट की ओर जा रहे 3 ईरानी जहाजों- हमुना, अबियान और अर्जिन ने रास्ता बदला है। उन्होंने तय रास्तों से इतर खुले समुद्री रास्तों का इस्तेमाल किया। 7 मार्च को ये ईरान के पास मंडराते हुए दिखे। हालाकिं इसको लेकर अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट ‘पेंटागन’, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और व्हाइट हाउस ने कोई बयान जारी नहीं किया है। सवाल-3: जंग के बीच ईरान को सोडियम परक्लोरेट क्यों दे रहा है चीन? जवाब: जंग के बीच में चीन की ओर से सोडियम परक्लोरेट की खेप ईरान भेजने के पीछे 4 बड़ी वजहें हो सकती हैं… अमेरिकी थिंकटैंक वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो ग्रांट रमली के मानते हैं कि चीन के लिए ईरान केवल एनर्जी सोर्स नहीं, बल्कि रणनीतिक ढाल भी है। अगर ईरान से तेल सप्लाई रुकी, तो चीन की निर्भरता सऊदी अरब या रूस पर बढ़ेगी। ऐसा चीन नहीं चाहता। सवाल-4: तो क्या चीन ने जंग में खुलकर ईरान का खेमा चुन लिया है? जवाब: अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले की चीन ने निंदा की थी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सीजफायर करने और बातचीत से मामला सुलझाने की अपील की थी। ऐसे में चीनी खेप का ईरान के लिए रवाना होना सवाल उठता है कि क्या चीन खुलकर ईरान के साथ है? अमेरिकी थिंकटैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में चाइना स्टडीज के सीनियर फेलो आइसैक कार्डन के मुताबिक, 'चीन इन जहाजों को कुछ और दिन पोर्ट पर रोक सकता था। उनकी वापसी में प्रशासनिक देरी कर सकता था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। चीन सभी के सामने कहता है कि वो शांति चाहता है, लेकिन युद्ध के समय ऐसे फैसले ले रहा है।' ग्रांट रमली मानते हैं कि चीन ऐसा रुख असमान्य और साहसिक है। क्योंकि अभी ईरान खाड़ी देशों पर मिसाइले दाग रहा है। ऐसे समय में ईरान की मदद करने से चीन के अरब देशों से रिश्ते खराब होने की आशंका है। सवाल-5: आखिर चीन की मिडिल-ईस्ट को लेकर क्या स्ट्रैटजी है? जवाब: चीन की ज्यादा दिलचस्पी इसमें नहीं है कि ईरान की मौजूदा सत्ता बनी रहे। वो ईरान और मिडिल ईस्ट में अपने निवेश सुरक्षित रखना चाहता है। उसकी एनर्जी सप्लाई प्रभावित न हो। चीन का आधा तेल मिडिल ईस्ट से आता है। वो सउदी अरब, कुवैत, इराक, ईरान और UAE से तेल खरीदता है। चीन को चिंता है कि ईरान पूरे मिडिल ईस्ट में रीजनल वॉर छेड़ देगा। इससे खाड़ी देशों से आने वाला तेल प्रभावित होगा। यहां चीन का काफी निवेश है। ईरान के हमलों से इन्हें भी नुकसान होगा। इसके अलावा चीन ने खुद को दुनिया के समाने अमेरिका का ऑप्शन बताया है। दोनों का टकराव किसी से छिपी नहीं है। मिडिल-ईस्ट में चीन ने ईरान से रिश्ते इसलिए बनाए क्योंकि अमेरिका के बाकी अरब देशों से मजबूत हैं और ईरान उसके लिए सबसे बड़ी दिक्कत है। हालांकि चीन कभी खुलकर अमेरिका की निंदा नहीं करता, बल्कि उससे डिप्लोमैटिक रिश्ते बनाकर चलता है। अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन का दौरा करने वाले हैं। ईरान जंग के चलते अमेरिका की मिलिट्री और फंड्स मिडिल-ईस्ट में शिफ्ट हो गए हैं। चीन यही चाहता है। ब्रिटिश थिंकटैंक चैटम हाउस में मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका प्रोग्राम के असोसिएट फेलो अहमद अबूदू के मुताबिक, 'चीन, ईरान की मिसाइल और ड्रोन स्ट्रैटजी मजबूत करने के लिए जरूरी तकनीक साझा कर सकता है। वो अमेरिका और चीन के मौजूदा रिश्ते खराब किए बिना ईरान की मदद करना चाहता है, जिससे उसके लॉन्ग टर्म गोल पूरे हो सकें।' ------------- ईरान जंग से जुड़ी ये भी खबर पढ़िए… खामेनेई के बेटे को ईरान की कमान, कभी मुजतबा के मरने की दुआएं मांगी गईं; पिता क्यों नहीं बनाना चाहते थे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे बेटे मुजतबा अब ईरान के सुप्रीम लीडर हैं। 17 साल की उम्र में जंग लड़ी, 30 की उम्र में मदरसा पढ़ने गए और 56 साल में ईरान के सर्वोच्च नेता बन गए। मुजतबा को ईरान की राजनीति का सबसे रहस्यमयी चेहरा कहा जाता है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 10 Mar 2026 5:23 am

मुस्लिम से की शादी, भाई की पढ़ाई और राशन बंद:मंदिर में एंट्री नहीं, लड़की शहर भागी; गांववाले बोले- ये धर्मांतरण की साजिश

‘मैं और मेरा परिवार गांव में अकेला हो गया है। शादी मैंने की थी, अब उससे बाहर भी आना चाहती हूं, लेकिन फिर भी सजा मिल रही है। छोटे भाई का स्कूल छूट गया क्योंकि कोई ऑटो वाला उसे ले जाने को तैयार नहीं है। खेतों में लगी आलू की फसल खराब हो गई क्योंकि उसे निकालने के लिए कोई मजदूर तैयार नहीं। मेरा परिवार मुसीबत में है।‘ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। मीता ने दो साल पहले एक मुस्लिम लड़के से लव मैरिज की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली, लेकिन अलग धर्म में शादी करने की ‘सजा’ मीता और उनके परिवार को अब तक मिल रही है। गांववालों का कहना है कि मीता मुसलमान हो गई है। दो साल बाद इसलिए गांव आई है, ताकि लड़के-लड़कियों का धर्म बदलवा सके। ‘न कोई दुकानदार राशन देगा, न मंदिर में मिलेगी एंट्री’मीता का गांव कोलकाता से करीब 250 किमी दूर है। परिवार गांव के आखिरी छोर पर रहता है। बुजुर्ग माता-पिता के अलावा छह साल का भाई है। सोशल बायकॉट की वजह से परिवार ज्यादातर घर के अंदर ही रहता है। परिवार का हाल पूछने पर मीता बांग्ला में लिखा पैम्फलेट पढ़कर सुनाती हैं, जिसमें उनके पिता के नाम के साथ बायकॉट के पॉइंट्स लिखे हैं। पैम्फलेट में लिखा है, ‘गांव के लोग सुदीप घोष के परिवार से कोई संपर्क नहीं रखेंगे। उनके किसी कार्यक्रम में नहीं जाएंगे। घोष परिवार न मंदिर में पूजा कर सकेगा और न कोई दुकान वाला इन्हें राशन देगा। किसी धार्मिक कार्यक्रम में भी शामिल नहीं किया जाएगा।‘ इसे पढ़ते हुए मीता भावुक हो जाती हैं। वे बताती हैं, ‘मैंने 2024 में एक मुस्लिम लड़के से शादी की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली। जुलाई 2025 में घर लौट आई। इसके बाद गांव में दिक्कतें शुरू हुईं। आसपास के लोगों ने बहुत बवाल किया। हमारे घर पर पत्थर फेंके। बाबा ने सबसे माफी मांगी। मंदिर जाकर समाज के सामने हाथ जोड़े, लेकिन गांव वाले नहीं माने। वे बस यही चाहते हैं कि मैं गांव में न रहूं।‘ ‘गांववालों ने बाबा से कहा कि अगर बेटी को घर में रखोगे तो पूरे परिवार को बाहर निकाल देंगे। ये सुनकर मैं डर गई। मैंने बाबा से कहा कि मुझे शहर छोड़ दो। गांव के हालात देखते हुए बाबा ने मुझे करीब 10 किमी दूर दुबराजपुर में हॉस्टल भेज दिया। छह महीने बाद हॉस्टल भी खाली हो गया। अब मेरे पास घर लौटने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।‘ ढोल बजाकर गांव में मुनादी- नियम तोड़े तो 5 हजार जुर्माना लगेगामीता आगे बताती हैं, ‘बाबा फरवरी के पहले हफ्ते में मुझे घर वापस ले आए। गांववालों का विरोध फिर शुरू हो गया। चासपाड़ा के लोगों ने ढोल बजाकर पूरे गांव में कहा कि कोई भी घोष परिवार से संबंध नहीं रखेगा। पूरे गांव में पर्चे बांटे गए, जिसमें नियम तोड़ने वाले पर 5 हजार रुपए जुर्माने का आदेश था।‘ हमने मीता से पति से अलग होने की वजह पूछी। उन्होंने कोई साफ वजह तो नहीं बताई, सिर्फ इतना कहा कि माता-पिता के बिना नहीं रह सकती, इसलिए घर वापस आ गई। मीता ने अब तलाक के लिए अर्जी लगाई है। इस साल जुलाई में आपसी रजामंदी से तलाक हो जाएगा। हमने मीता से पूछा, घर की जरूरत का सामान कहां से लाते हैं? वे कहती हैं, ‘सामान तो हम शहर से ले आते हैं, कभी ताऊ के बेटे ले आते हैं। समस्या ये है कि अगर कोई बीमार पड़ जाए तो गांव के डॉक्टर दवा नहीं देंते। दिन में कुछ होगा तो शहर चले जाएंगे, लेकिन रात में हुआ तो क्या करेंगे। हमें अब भी डर लगता है कि कोई हमला न कर दे। पहले ही पत्थर मारकर खिड़कियां तोड़ दी थीं, अब पता नहीं क्या करेंगे।‘ ‘बेटी से गलती हुई, माफी मांगी, लेकिन सब बदल नहीं सकते’मीता के बगल में उनके पिता सुदीप घोष (बदला हुआ नाम) बैठे थे। वे हिंदी नहीं बोल पाते। बंगाली में कहते हैं, ‘गांव वालों ने हमारा जीना मुश्किल कर दिया है। हालत ये है कि मेरा छह साल का बेटा स्कूल नहीं जा सकता। लोगों ने स्कूल वैन वाले को धमकाया है। इसलिए वो स्कूल नहीं जा पा रहा है। पढ़ाई में कोई रुकावट न हो, इसलिए अभी भाई की बहू के पास ट्यूशन जाता है।‘ ‘खेत में आलू लगे हैं, लेकिन उसे निकालने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। पहले जो लोग हमारी एक बोली पर खेत में काम करने आ जाते थे, आज वो बात करने को भी राजी नहीं हैं।‘ सुदीप आगे कहते हैं, ‘बेटी से गलती हो गई, मैंने पूरे गांव से हाथ जोड़कर माफी भी मांग ली है। इससे ज्यादा अब क्या कर सकता हूं, जो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता।‘ अब गांववालों की बात…हमने मीता से विरोध करने वालों के बारे में पूछा तो उन्होंने गांव में रहने वाले पंकज चौधरी और आशीष मंडल का नाम लिया। उनसे मिलने के लिए गांव में आगे बढ़े। करीब सौ कदम दूर मनसा मंदिर पहुंचे। यहां बैठे लोगों से सुदीप घोष के बारे में पूछा। वे कुछ बोलने को राजी नहीं हुए। उनका कहना था कि जो भी फैसला लिया है, वो सही है। इसके बाद हम आशीष मंडल के घर पहुंचे। वे घर पर नहीं थे। उनके भाई की पत्नी मिलीं, लेकिन कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं थी। उन्होंने बस इतना कहा कि आशीष हार्ट के मरीज हैं। कुछ वक्त पहले ही उनका ऑपरेशन हुआ है। घोष फैमिली के बायकॉट से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इस मामले में पूरा गांव शामिल है। घोष परिवार सिर्फ कुछ लोगों को टारगेट कर रहा है। ‘बेटी भागी तो थाना घिरवाया, लौट आई तो बताया भी नहीं’गली में आगे पंकज चौधरी का घर है। मिट्टी के मकान का ज्यादातर हिस्सा धान और दूसरी फसलों से भरा है। घर पर हमें पंकज के बुजुर्ग माता-पिता मिले। घोष फैमिली के सोशल बायकॉट के बारे में पूछने पर पिता तारापोदो चौधरी कहते हैं, ‘इसमें सिर्फ मेरा बेटा ही शामिल नहीं है, पूरा गांव विरोध कर रहा है। इस विरोध के कई कारण भी हैं।‘ कारण पूछने पर बताते हैं, ‘दो साल पहले घोष की बेटी मुस्लिम लड़के के साथ चली गई। तब गांव के हर घर से एक व्यक्ति थाने गया था। सब परिवार के साथ खड़े थे, ताकि लड़की समाज में लौट आए। वो वापस नहीं आई। लड़की बालिग थी, इसलिए जोर जबरदस्ती भी नहीं की जा सकी। उस मुश्किल वक्त में पूरे गांव ने घोष परिवार का साथ दिया।‘ ‘दो साल बाद लड़की अचानक गांव में वापस आ गई। तब उसके पिता ने किसी को ये बताना भी जरूरी नहीं समझा। गांव के लोगों को पता चला तो वे नाराज हुए। लोगों ने घोष को मंदिर पर बुलाया और लड़की को गांव से बाहर रखने के लिए कहा।‘ ‘दूसरी सबसे बड़ी बात ये है कि मीता ने मुस्लिम लड़के के साथ शादी की है। अब वो हिंदू समाज का हिस्सा नहीं है। आने वाले समय में गांव के बाकी लड़के-लड़कियां भी ऐसा काम न करें, इसलिए ये फैसला लिया गया।‘ ‘बायकॉट जरूरी, ताकि कोई और ये गलती न दोहराए’सोशल बायकॉट के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘पूरे गांव का यही फैसला है कि कोई भी शादी, प्रोग्राम, पूजा-पाठ या बाकी किसी आयोजन में उनके परिवार को शामिल नहीं करेगा। अगर उन्हें मंदिर में पूजा करनी है, तो वे अलग से जाकर करें।‘ गांव से राशन नहीं लेने वाली बात पूछने पर तारापोदो कहते हैं ‘ये सब झूठ है। मीता की नानी का घर इसी गांव में है। पूरा परिवार उनसे मिलता है और उनका सारा काम भी हो रहा है। विरोध इस बात का है कि कहीं भविष्य में कोई बच्चा समाज से बाहर जाने की गलती न करें।‘ घोष परिवार के विरोध में बांटे गए पैम्फलेट में लिखा था कि गांव से उन्हें किसी तरह की सुविधा नहीं दी जाएगी। इसे पुख्ता करने के लिए हम गांव के ही चैताली स्टोर में गए। दुकान मालिक समीर दास से बायकॉट के बारे पूछा। उन्होंने कहा, ‘सोशल बायकॉट का फैसला तो लिया गया है। फिर भी वे समान लेने आएंगे तो मैं दूंगा। अब तक तो समान लेने नहीं आए।‘ मीता अब मुसलमान, धर्मांतरण करने गांव में आईहमने आशीष मंडल और पंकज चौधरी से दोबारा मिलने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं मिले। आखिर में हमने पंकज चौधरी से फोन पर बात की। उनकी एक एडवरटाइजमेंट एजेंसी है। उनका मानना है कि गांव में माहौल सही रहे, इसलिए बायकॉट जरूरी है। हमने पूछा कि लव मैरिज करना या तलाक लेने का अधिकार तो संविधान देता है। क्या आप संविधान को नहीं मानते हैं? इसके जवाब में पंकज कहते हैं, ‘संविधान मानते हैं, लेकिन गांव के भी कुछ नियम-कायदे होते हैं, जिन्हें सभी को मानना होता है। मीता ने मुस्लिम लड़के से शादी की।’ सोशल बायकॉट नहीं हटा तो केस करेंगेगांव में ही रहने वाले धर्म जागरण समन्वय के सह संयोजक डॉ. रंजन बनर्जी इस मामले को पहले दिन से देख रहे हैं। उनकी राय गांव वालों से अलग है। वे कहते हैं, ‘मीता किसी का धर्म परिवर्तन नहीं कर रही है। वो खुद पीड़ित है। उसने एक शादी की, जो नहीं चल सकी। इसके भी कई कारण है, क्योंकि दोनों का समाज और संस्कृति अलग-अलग है।‘ ‘रही बायकॉट की बात तो इसकी अनुमति न तो हिंदू धर्म देता है और न ही कानून। इसलिए हमने इसके खिलाफ मीता से पहले DM और फिर लोकल पुलिस स्टेशन में मेल करवाया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। हमने कोलकाता हाईकोर्ट में सोशल बायकॉट के खिलाफ नोटिस दिया है। अगर ये नहीं हटा, तो केस करेंगे।‘ इसके बाद हम गांव के प्रधान गौतम मंडल से मिले। वे कहते हैं, ‘जिस दिन ये घटना हुई, उस दिन मैं गांव में नहीं था। सुदीप घोष ने मुझे बाद में बताया। इसे लेकर गांव के लोगों से भी बात की, लेकिन कोई नहीं माना। दुबराजपुर थाना के पुलिस अफसरों ने आशीष मंडल और पंकज चौधरी के साथ कुछ लोगों को थाने बुलाकर समझाया था, लेकिन बात नहीं बनी।‘ मीता ने भी हमें मेल दिखाए थे। उस पर अधिकारियों का कोई रिप्लाई नहीं था। हमने केस की स्थिति जानने के लिए DM से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन जवाब नहीं मिला। वकील बोले- शादी निजी मामला, इसमें सोशल बायकॉट गैरकानूनीसोशल बायकॉट को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील सब्यसाची चटर्जी कहते हैं, ‘बंगाल में खासकर बांग्लादेश के साथ बॉर्डर साझा करने वाले इलाकों में अंतरधार्मिक विवाह का चलन पहले से है। पिछले कुछ साल में आदिवासी और बॉर्डर वाले इलाके में बड़े स्तर पर हिंदुत्व का प्रचार हुआ। इस कारण यहां धर्म को लेकर बड़ा भेदभाव दिखता है।‘ ‘किस इंसान को किसके साथ शादी करनी है, ये उसका निजी मामला है। इसमें समाज का कोई दखल नहीं होना चाहिए। अगर कोई इस आधार पर सोशल बायकॉट कर रहा है, तो ये गैर कानूनी है। संविधान के अनुसार विवाह धारा-21 के तहत मौलिक अधिकार है। अगर कोई इसमें किसी तरह की अड़चन डालता है तो सजा का प्रावधान है। साथ ही धारा-15 और 17 सोशल बायकॉट के खिलाफ है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘अपनी मर्जी से शादी करने के लिए किसी का भी बहिष्कार नहीं किया जा सकता है। इसमें भी अगर व्यक्ति शेड्यूल कास्ट से आता है, तो उसके खिलाफ ऐसा करने पर SC/ST एक्ट 1989 के मुताबिक सजा का प्रावधान है, जो गैर जमानती है।‘ ………………ये खबर भी पढ़ें… मॉरीशस में चलते शिप से कैसे गायब हुआ सार्थक 3 फरवरी रात करीब 8:30 बजे ओडिशा के भुवनेश्वर में रहने वाली रश्मिता साहू के पास एक कॉल आया। बताया गया कि उनका बेटा सार्थक लापता है। सार्थक मर्चेंट नेवी में इंटर्न है। 14 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर तैनात हुआ था। जब गायब हुआ, तब शिप मॉरीशस के पास समुद्री इलाके में था। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 10 Mar 2026 5:18 am

नेपाल में बालेन शाह होंगे पहले मधेशी प्रधानमंत्री, पुराने दलों को किया खारिज, पीएम मोदी ने की बात

इस जीत के साथ ही काठमांडू के मेयर और लोकप्रिय नेता बालेंद्र (बालेन) शाह देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो वह नेपाल के पहले मधेशी प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

देशबन्धु 9 Mar 2026 9:40 pm

तेहरान के आसमान में काला धुआं, तेल ठिकानों पर हमलों के बाद ‘जहरीली बारिश’ का खतरा

ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि हालिया हमलों के बाद जहरीली एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने की संभावना है, जो लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।

देशबन्धु 9 Mar 2026 8:30 pm

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी प्रतिबंधों को खत्म करने के लिए अमेरिकी संसद में विधेयक पेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एच-1बी से जुड़ी घोषणा के खिलाफ एक एक डेमोक्रेटिक सांसद ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पेश किया है

देशबन्धु 9 Mar 2026 9:29 am

यूएई एयर डिफेंस ने ईरानी मिसाइलों को रोका, दुबई मरीना में टावर पर गिरा मलबा

यूएई ने ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया है, जिनका मलबा दुबई मरीना में टावर पर जाकर गिरा। इससे बिल्डिंग के सामने के हिस्से से धुआं उठने लगा और इलाके में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया

देशबन्धु 9 Mar 2026 8:55 am

रूस की तीखी प्रतिक्रिया: ‘अंतरराष्ट्रीय कानून अब केवल कागजों में’, पुतिन ने पी-5 शिखर सम्मेलन की वकालत की

रूस ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (पी-5) रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन का विशेष शिखर सम्मेलन बुलाने के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पुराने प्रस्ताव को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है।

देशबन्धु 9 Mar 2026 8:48 am

पश्चिम एशिया में युद्ध का नया मोड़, ईरान के भीषण हमले में अमेरिकी 'थाड' रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान

रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने न केवल इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि जॉर्डन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर में स्थित कुछ महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भी प्रभावित किया है।

देशबन्धु 9 Mar 2026 8:30 am

स्कूल स्ट्राइक का संबंध ईरान में आईआरजीसी ठिकाने पर हुए अमेरिकी हमले से, मीडिया ने नए वीडियो में किया दावा

ईरान के मिनाब शहर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नौसैनिक अड्डे पर हुए हमले से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आया है

देशबन्धु 9 Mar 2026 8:08 am

ईरान ने ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमला होने पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी

ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने क्षेत्र के मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे अमेरिका और इजराइल को ईरान के ईंधन और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करने से रोकें

देशबन्धु 9 Mar 2026 8:07 am

वैश्विक तेल बाजार स्थिर करने के लिए भारत से की तेल खरीद की बात: अमेरिकी ऊर्जा मंत्री

अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने रविवार को कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए भारत से उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने को कहा, जो अभी चीन के रिफ़ाइनरियों पर अनलोड होने के लिए इंतजार कर रहे थे।

देशबन्धु 9 Mar 2026 8:06 am

UAE Air Defense: ईरानी ड्रोन को आसमान में किया ध्वस्त

यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए ईरानी यूएवी (ड्रोन) को रोककर नष्ट कर दिया, जो देश को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा था

देशबन्धु 9 Mar 2026 8:04 am

200+ रन जीत की गारंटी नहीं रहे:नई टीमों ने धमक दी, भारत का वर्चस्व बरकरार; क्यों याद रखा जाएगा ये वर्ल्डकप

2026 का टी20 वर्ल्ड कप सिर्फ भारत के वर्चस्व की कहानी नहीं, बल्कि वर्ल्ड क्रिकेट के बदलते पैटर्न की कहानी भी है। कैसे? जानिए मंडे मेगा स्टोरी में… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अंकुर बंसल रिसर्च: ब्रज पांडे -------- क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 28 मार्च से शुरू होगा IPL 2026:टी-20 वर्ल्डकप फाइनल से पहले ऐलान, बंगाल-तमिलनाडु समेत 5 राज्यों में चुनावों के चलते शेड्यूल बदला IPL 2026 की शुरुआत 28 मार्च को होगी। इसकी घोषणा रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाले भारत-न्यूजीलैंड टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल से पहले ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स ने की। पहले टूर्नामेंट 26 मार्च से शुरू होना था। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 9 Mar 2026 5:12 am

मॉरीशस में चलती शिप से कैसे गायब हुआ सार्थक:34 दिन बाद भी पता नहीं, मां बोली- कंपनी कुछ छिपा रही

3 फरवरी रात करीब 8:30 बजे ओडिशा के भुवनेश्वर में रहने वाली रश्मिता साहू के पास एक कॉल आया। बताया गया कि उनका बेटा सार्थक लापता है। सार्थक मर्चेंट नेवी में इंटर्न है। 14 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर तैनात हुआ था। जब गायब हुआ, तब शिप मॉरीशस के पास समुद्री इलाके में थी। 4 फरवरी को दो लोग रश्मिता के घर पहुंचे। ये कैप्टन देबाशीष पटनायक और कैप्टन दासगुप्ता थे। दोनों उसी एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से आए थे, जिसकी शिप से सार्थक गायब हुआ। दोनों ने फैमिली को एक लेटर सौंपा, जिसमें सार्थक की गुमशुदगी की ऑफिशियल जानकारी थी। सार्थक को लापता हुए अब एक महीना गुजर चुका है लेकिन कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार परेशान है। मां का कहना है कि कंपनी जरूर कुछ छिपा रही है। मामला इंटरनेशनल मैरीटाइम सिक्योरिटी से जुड़ा है इसलिए MRCC मॉरीशस इस सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर रही है। इसमें एक और वेसल शिप की भी मदद ली जा रही है। सार्थक की गुमशुदगी को लेकर फैमिली और उसके दोस्तों का क्या कहना है? शिप मैनेजमेंट कंपनी ने अब तक क्या बताया, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची। शिप के सिंगापुर लौटने से 9 दिन पहले गायब हुआ सार्थक भद्रक जिले के केस्पुर गांव के रहने वाले हैं। बीते लगभग 11 साल से मां और नाना-नानी के साथ भुवनेश्वर में किराए के मकान में रह रहे थे। मां रश्मिता साहू निजी अस्पताल में असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट हैं। वहीं पिता सत्यजीत महापात्रा राउरकेला में एक निजी कंपनी में काम करते हैं और वहीं रहते हैं। परिवार के मुताबिक, 12 जुलाई 2025 को सार्थक भुवनेश्वर से मुंबई के लिए निकला था। 16 जुलाई 2025 को M.V. EA JERSEY शिप पर सवार हुआ। उसके साथ 23 क्रू मेंबर सवार थे। शिप हांगकांग से घाना होते हुए 11 फरवरी को सिंगापुर लौट रहा था। 2 फरवरी को जब शिप सिंगापुर के करीब था, तब सार्थक की मां और परिवार के बाकी लोगों से बात भी हुई थी। फिर 3 फरवरी की रात करीब 8:30 बजे परिवार को उसकी गुमशुदगी की खबर मिली हैं। बताया गया कि जिस जगह उसके लापता होने का पता चला, वो मॉरीशस कोस्ट स्टेशन के सबसे नजदीक है। मां बोलीं- चलते शिप से कोई कैसे गायब हो जाएगारश्मिता बताती हैं, ‘जब मुझे बताया गया कि सार्थक अपने कमरे और शिप में नहीं मिला तो मेरे लिए ये मानना मुश्किल था। मुझे सबसे पहले ये शंका हुई कि मेरे बेटे के साथ कुछ गलत हुआ है। क्योंकि चलती शिप से भला कोई व्यक्ति कैसे गायब हो सकता है। ‘1 फरवरी की रात करीब 9 बजे से 11 बजे तक सार्थक से मेरी फोन पर लंबी बातचीत हुई थी। उसमें किसी डर की बात सामने नहीं आई थी। अगले दिन फिर दोपहर और रात में हमारी फिर बात हुई। तब भी सब कुछ सामान्य था। वो बस मेरी तबीयत को लेकर परेशान था। अभी स्किन ट्यूबरकुलोसिस का इलाज चल रहा है। वहीं, डायबिटीज और थायरॉइड मुझे पहले से है।‘ फिर 2 फरवरी की ही रात रश्मिता के पास अनजान नंबर से दो से तीन बार फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को सार्थक का दोस्त बताया और कहा कि वो ओडिशा घूमने आना चाहता है। उसने घर का पता भी पूछा। ये बात उन्हें असहज लगी। लिहाजा उन्होंने घर का पता देने से मना कर दिया। हालांकि रश्मिता ने सार्थक को मैसेज कर इसकी जानकारी दे दी। वो बताती हैं, ‘बेटे को काफी देर तक मैसेज डिलीवर नहीं हुआ। पहले मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और सोचा नेटवर्क में नहीं होगा इसलिए नहीं पहुंचा होगा। जब 3 फरवरी को भी सार्थक ने फोन नहीं उठाया और न कॉलबैक आया। तब बेचैनी बढ़ने लगी।‘ कैसे-किन हालात में गायब हुआ बेटा, कंपनी छिपा रहीरश्मिता आगे बताती हैं, ‘3 फरवरी की शाम कंपनी से कैप्टन देबाशीष पटनायक का फोन आया। उन्होंने बताया कि सार्थक गायब हो गया है। वो सुबह करीब 6.20 बजे अपने कमरे में गया था लेकिन जब उसके लिए नाश्ता भेजा गया, तब वो कमरे में नहीं था।‘ ‘कोलकाता से आए कैप्टन दासगुप्ता और देबाशीष पटनायक ने भी कंपनी का लेटर देते वक्त यही बात दोहराई थी। जब हमने जानना चाहा कि जांच कैसे हो रही, किस स्तर तक पहुंची और इसमें कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल हैं, तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला।‘ ‘मुझे ये भी नहीं बताया गया कि सार्थक कैसे लापता हुआ और ये सब किन हालात में हुआ। अगर सही तरह से खोजबीन की जाए तो वो शिप में ही मिल सकता है। लापता होने की बात बहुत जल्दी और बिना किसी ठोस आधार के फैला दी गई।‘ CCTV में आखिरी बार दिखने का दावा, फुटेज मांगने पर पलटी कंपनीरश्मिता आगे कहती हैं, ‘हमने शिप के चीफ अफसर से सीधे बात करने की भी कोशिश की लेकिन नहीं हो सकी। जब मैंने दासगुप्ता से इसकी शिकायत की तो कहा गया कि कंपनी के नियमों के तहत वो परिवार से सीधे बात नहीं कर सकते। काफी गुजारिश के बाद हमें वीडियो कॉल करके सार्थक का कमरा और आसपास का हाल दिखाया गया।‘ ‘कंपनी ने कहा था कि CCTV में सार्थक को फोन पर बात करते हुए रूम से बाहर जाते देखा गया है। जब हमने CCTV फुटेज मांगा, तब हमें वीडियो कॉल करके दिखाया गया कि वहां कोई कैमरा ही नहीं लगा है। जब हमने सवाल किया फिर उसे किस कैमरे में देखा गया तो कंपनी ने कुछ क्लियर नहीं किया। हर बार अलग-अलग बात कही गई।‘ सार्थक का परिवार अब सरकार से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। उन्हें कुछ जनप्रतिनिधियों ने केस में जल्द मदद का भरोसा दिलाया है। सार्थक के घर पहुंचे तो उसकी गुमशुदगी की खबर मिली इसके बाद हम सार्थक के बचपन के दोस्त शाश्वत महालिक से भी मिले। दोनों नर्सरी क्लास से साथ हैं। गांव में इनका घर भी अगल-बगल है। शाश्वत के मुताबिक, पढ़ाई और काम के बावजूद वे लगातार एक-दूसरे से बात करते और जिंदगी की हर बड़ी-छोटी बात शेयर करते हैं। वे बताते हैं, ‘2 फरवरी को रात करीब 10 बजे हमारी फोन पर बात हुई थी। सार्थक अच्छे मूड में था। वो दोस्तों का हालचाल पूछ रहा था। मुझसे भी आगे का प्लान पूछा और अपने प्लान भी शेयर किए। उसकी 18 महीनों की इंटर्नशिप लगभग पूरी होने वाली है। उसने एक कोर्स में भी दाखिला लिया है ताकि उसे पास करके प्रमोशन मिल सके।‘ ’उस रात सार्थक बस आंटी (अपनी मां) की तबीयत लेकर परेशान था। इसलिए चाहता था कि हम दोस्त घर जाकर एक बार उनसे मिल आएं। उसके कहने पर हम अगले ही दिन (3 फरवरी) आंटी से मिलने सार्थक के घर पहुंचे। तभी हमें उसके लापता होने का पता चला।’ अब कंपनी सार्थक की मेंटल कंडीशन पर सवाल उठा रही शाश्वत और उनके साथियों ने एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की लेकिन सीधा संपर्क नहीं हो सका। बस कंपनी के हेड ऑफिस से सार्थक की गुमशुदगी का एक मेल मिला। शाश्वत सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘आखिर चलती हुई शिप से सार्थक कैसे गायब हो सकता है। कैडेट को एक छोटा सा कमरा मिलता है। वहां से बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं होता। फिर वो कहां गायब हो गया। हम चाहते हैं कि शिप में लगे CCTV कैमरों के फुटेज और VDR (वॉयस डेटा रिकॉर्डर) दिए जाएं। इसी में शिप की गतिविधियां और आवाजें रिकॉर्ड होती हैं, जो किसी भी घटना की जांच में अहम होती हैं। हालांकि अभी कंपनी से कोई जवाब नहीं मिला है।‘ वे आगे बताते हैं, ‘सार्थक के शिप पर सभी से अच्छे संबंध थे। उसकी गुमशुदगी की खबर लेकर आए कंपनी के अफसर भी ये बात मान रहे हैं। फिर भी कंपनी ये दिखाने की कोशिश में लगी है कि सार्थक की मानसिक हालत ठीक नहीं थी। वो मां को याद कर रहा था और मानसिक रूप से कमजोर पड़ गया था। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल अलग है।’ अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी शाश्वत कहते हैं, ‘कंपनी ने बताया कि 2 फरवरी की रात सार्थक सोया नहीं था, इसलिए सुबह 4 बजे से 8 बजे वाली ड्यूटी भी नहीं कर सका। जब वो मेस भी नहीं पहुंचा तो 8.30 बजे नाश्ता उसके कमरे भेजा गया था लेकिन वहां भी नहीं मिला।‘ हालांकि शाश्वत इसे लेकर सवाल खड़े करते हैं। वे पूछते हैं कि अगर सार्थक सोया नहीं था, तो रात भर कहां था, किसके साथ था और क्या कर रहा था। कंपनी इन सवालों के जवाब क्यों नहीं दे रही है। कंपनी ने ये भी साफ नहीं किया कि वो डेक के पास गया था या शिप के किसी दूसरे हिस्से में। अफसर बोले- मुमकिन है कि सार्थक ने छलांग लगा दीकेस की जांच को लेकर हमने एंग्लो ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि देबाशीष पटनायक से भी बात की। वे बताते हैं कि इस मामले में फिलहाल कोई बड़ा अपडेट नहीं है। न ही सार्थक की मानसिक स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी है। देबाशीष ने दावा किया कि वे कंफर्म हैं कि सार्थक ने ओवरबोर्ड छलांग लगाई है। क्योंकि शिप से किसी का लापता होना बिल्कुल नामुमकिन है। ये भी संभव नहीं कि कोई किसी को उठाकर समुद्र में फेंक दे। हमने पूछा क्या शिप पर किसी तरह की निगरानी नहीं होती? इस पर देबाशीष बताते हैं, ‘निगरानी का काम ब्रिज पर होता है। वेसल स्टाफ को कोई अलग से मॉनीटर नहीं करता क्योंकि वे सभी एम्प्लॉयी होते हैं। अगर सार्थक ने वास्तव में छलांग लगाई होगी, तो समुद्र में उसकी लाश मिलना भी लगभग नामुमकिन है। क्योंकि बड़े से बड़ा तैराक भी ज्यादा से ज्यादा चार घंटे ही पानी में रह सकता है।‘ क्या सार्थक के केबिन में होने की कोई संभावना है? देबाशीष इसे सिरे से खारिज करते हैं और कहते हैं, ‘अगर केबिन में होता तो अब तक मिल चुका होता। सभी CCTV फुटेज रिट्रीव कर लिए गए हैं। उसी से पता चला है कि सार्थक फोन लेकर कमरे से बाहर निकला था। ये फुटेज जल्द ही परिवार को भी भेजा जाएगा।‘ थर्ड ऑफिसर से हुए विवाद के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘शिप में छोटे-मोटे विवाद होते रहते हैं। इसे लेकर कोई इतना बड़ा कदम नहीं उठाता। वैसे भी सार्थक को सभी पसंद करते थे। मुझे किसी केसाथ उसके गंभीर विवाद की जानकारी नहीं है।‘ फिलहाल MRCC मॉरीशस, सार्थक की तलाश में शुरू हुए अभियान को लीड कर रहा है। इसमें शानडोंग सिविलाइजेशन नाम के एक और वेसल शिप की मदद ली जा रही है। ओडिशा सरकार ने मदद के लिए पहल कीसार्थक के लापता होने के मामले में ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार के कई अहम विभागों से दखल देने की मांग की है। सरकार ने शिपिंग महानिदेशालय और पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय से संपर्क कर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली स्थित ओडिशा के चीफ रेजिडेंट कमिश्नर ऑफिस से जारी ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, ये मामला तब सामने आया, जब सार्थक की मां रश्मिता साहू ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने CM को लिखे पत्र में बताया कि उनका बेटा ड्यूटी के दौरान रहस्यमय हालात में गायब हो गया है। इधर ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने भी सार्थक के लापता होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि खोज और बचाव अभियान तेज किया जाए, ताकि सार्थक को जल्द से जल्द सुरक्षित तलाशा जा सके। अपने बयान में नवीन पटनायक ने भारत सरकार के शिपिंग महानिदेशालय और विदेश मंत्रालय से आग्रह किया कि वे इस मामले में तुरंत मदद करें और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर परिवार को सहयोग दें। साथ ही तलाशी अभियान में तेजी लाएं।………………….ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में पत्नी की मौत, पति ने मांगे 100 करोड़ 8 सितंबर 2025, नेपाल में सरकार के खिलाफ जेन जी प्रोटेस्ट शुरू हुआ। अगले ही दिन प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। सरकारी इमारतें, होटल और दुकानें प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आ गए। राजधानी काठमांडू में होटल हयात रीजेंसी को भी निशाना बनाया गया। चारों तरफ गोलियों की आवाज और आग की लपटें थीं। इसी होटल में भारत के गाजियाबाद से आए रामबीर सिंह गोला और उनकी पत्नी राजेश देवी रुके थे। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 9 Mar 2026 5:09 am

अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला हमारा आत्मरक्षा का अधिकार: अराघची

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला आत्मरक्षा के अधिकार का हिस्सा है

देशबन्धु 8 Mar 2026 10:15 pm

ईरान के परमाणु भंडार पर कब्जे की तैयारी?: अमेरिका-इस्राइल उतार सकता है विशेष बल, रिपोर्ट में दावा

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के परमाणु भंडार को सुरक्षित करने का यह संभावित मिशन मौजूदा युद्ध के अगले चरण में किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अभी यह केवल एक रणनीतिक विकल्प के रूप में विचाराधीन है और इसे तभी लागू किया जाएगा जब युद्ध की परिस्थितियां उस दिशा में आगे बढ़ेंगी।

देशबन्धु 8 Mar 2026 2:26 pm

ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और ठिकानों की रूस दे रहा खुफिया जानकारी?: पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच बड़ा दावा

अमेरिकी खुफिया जानकारी से परिचित अधिकारियों के अनुसार, रूस द्वारा साझा की गई जानकारी से ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों, सैन्य विमानों और अन्य रक्षा संसाधनों की गतिविधियों के बारे में अहम संकेत मिल सकते हैं।

देशबन्धु 8 Mar 2026 11:48 am

Nepal PM : काठमांडू की सड़कों पर बालेन-बालेन की धूम, युवाओं के पसंदीदा नेता बने बालेंद्र शाह

काठमांडू: नेपाल की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम तेजी से उभरकर सामने आया है—बालेंद्र शाह (बालेन शाह)। राजधानी काठमांडू की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह “बालेन-बालेन” की चर्चा सुनाई दे रही है। महज 35 वर्ष की उम्र में बालेंद्र शाह (Balendra Shah) देश के युवाओं के बीच बदलाव के प्रतीक बनकर उभरे हैं। नेपाल के युवा वर्ग को उनमें ऐसा नेता दिखाई दे रहा है जो पारंपरिक राजनीति से अलग होकर व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता ला सकता है। यही वजह है कि हाल के चुनावों में जनता ने पुराने राजनीतिक चेहरों से दूरी बनाते हुए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में समर्थन दिया।   निर्दलीय मेयर से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर बालेंद्र शाह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 2022 में काठमांडू के मेयर चुनाव से की थी। उन्होंने यह चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और अप्रत्याशित जीत हासिल की। मेयर बनने के बाद उन्होंने राजधानी काठमांडू के प्रशासन में कई बदलाव किए। शहर के विकास, सफाई व्यवस्था, यातायात सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर उन्होंने सक्रिय कदम उठाए। चार वर्षों के भीतर उनके कामकाज की शैली ने आम लोगों का भरोसा जीत लिया। लोगों को लगने लगा कि पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से अलग भी एक ईमानदार और परिणाम देने वाला नेतृत्व संभव है। टाइम मैगजीन की सूची में मिली पहचान बालेंद्र शाह की लोकप्रियता सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रही। 2023 में प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 उभरते हुए नेताओं की सूची में शामिल किया। नेपाल जैसे सीमित संसाधनों वाले देश के एक युवा नेता के लिए यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मानी गई। इस सम्मान के बाद बालेंद्र शाह की पहचान वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हुई। ‘जेन जी आंदोलन’ के दौरान बढ़ी लोकप्रियता नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव 2025 के ‘जेन जी आंदोलन’ के दौरान देखने को मिला। इस आंदोलन में देश के युवाओं ने भ्रष्टाचार और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई। इस आंदोलन के दबाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से हटना पड़ा। उस समय देश में कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बालेंद्र शाह का नाम भी चर्चा में आया था। हालांकि उस समय विभिन्न दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया। मेयर पद छोड़कर आरएसपी में शामिल हुए जनता के बढ़ते समर्थन को देखते हुए बालेंद्र शाह ने जनवरी 2026 में काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए। इसके बाद देश में जब ओली सरकार ने आलोचना को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट मीडिया पर प्रतिबंध लगाया, तब बालेंद्र शाह युवाओं की आवाज बनकर सामने आए। उन्होंने खुलकर इस फैसले का विरोध किया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। इससे उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई।   प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने बालेन आरएसपी ने बालेंद्र शाह की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। हाल के चुनावों में पार्टी को जबरदस्त सफलता मिली और लंबे समय बाद नेपाल की राजनीति में किसी नई पार्टी ने इतना मजबूत प्रदर्शन किया। यह नतीजा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नेपाल की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व से हटकर नई पीढ़ी के नेताओं को मौका देना चाहती है। इंजीनियर से रैपर और फिर राजनेता बालेंद्र शाह का जीवन सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। वह मूल रूप से सिविल इंजीनियर हैं, लेकिन युवावस्था में उन्होंने रैप संगीत के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। उनके रैप गीतों में अक्सर सामाजिक समस्याओं, भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था की खामियों पर तीखा व्यंग्य देखने को मिलता था। यही कारण था कि नेपाल के युवाओं ने उनके संगीत में अपनी आवाज महसूस की। धीरे-धीरे उनका यह अंदाज उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाता गया और बाद में वही लोकप्रियता उनकी राजनीतिक ताकत बन गई। दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ा नेपाल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय नेता जैसे केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और कमल थापा जैसे दिग्गजों के मुकाबले बालेंद्र शाह एक नए चेहरे के रूप में सामने आए। चुनाव में उन्होंने खुद चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को उनके ही क्षेत्र में लगभग 50 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया, जो नेपाल की राजनीति में एक बड़ी घटना मानी जा रही है। निजी जीवन भी चर्चा में राजनीतिक जीवन के साथ-साथ बालेंद्र शाह का निजी जीवन भी चर्चा में रहता है। उन्होंने 2018 में सबीना से विवाह किया था और उनकी लगभग तीन साल की एक बेटी भी है। नेपाल के युवा उन्हें केवल एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि अपने जैसे साधारण पृष्ठभूमि से आए व्यक्ति के रूप में देखते हैं, जिसने मेहनत और प्रतिभा के दम पर पहचान बनाई है। नेपाल की राजनीति में बदलाव की उम्मीद विश्लेषकों का मानना है कि बालेंद्र शाह का उभार नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। युवाओं की बड़ी आबादी वाले इस देश में अब ऐसी राजनीति की मांग बढ़ रही है जो पारदर्शिता, विकास और नई सोच पर आधारित हो। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बालेंद्र शाह वास्तव में उन उम्मीदों को पूरा कर पाते हैं, जिनके कारण आज नेपाल की जनता उन्हें बदलाव का प्रतीक मान रही है।

देशबन्धु 8 Mar 2026 11:09 am

VIDEO: बांग्लादेश के कोमिल्ला में मंदिर के पास सिलसिलेवार पेट्रोल बम धमाके, पुजारी समेत तीन घायल

घटना कलागाछितला मंदिर और उसके पास की सड़क के आसपास हुई, जहां हमलावरों ने एक के बाद एक कई विस्फोट किए। घायलों में मंदिर के पुजारी केशव चक्रवर्ती, स्थानीय निवासी अब्दुल बारेक और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

देशबन्धु 8 Mar 2026 10:22 am

ईरान के ट्रांजिशन प्लान में भारत के साथ संबंधों और चाबहार पोर्ट के फिर से शुरू होने पर जोर

ईरान के विपक्षी नेताओं ने एक ब्लू प्रिंट तैयार किया है, जिसमें भारत के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है

देशबन्धु 8 Mar 2026 10:19 am

ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म, 70 प्रतिशत रॉकेट लॉन्चर तबाह : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि एक हफ्ते से जारी सैन्य संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य ताकत लगभग पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है

देशबन्धु 8 Mar 2026 8:53 am

ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बाद ईरान ने इजरायली रिफाइनरी पर किया हमला

ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बाद ईरान ने इजरायली रिफाइनरी पर हमला किया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने जानकारी दी

देशबन्धु 8 Mar 2026 8:33 am

बिट्टू बजरंगी से क्या सच में हुआ शादी वाला फ्रॉड:बोले- शबनम ने मुझे ठगा, पुलिस बोली- न सबूत दिए, न लड़की का पता

‘मेरे साथ लव जिहाद हुआ है। ठगी हुई है। जिस दिन मैं शादी करने अलीगढ़ गया था, उसी दिन मैंने दो हिंदू लड़कियों को लव जिहाद से बचाया था। और देखिए, मेरे साथ ही कांड हो गया।’ शादी के नाम पर ठगी का आरोप लगा रहे बिट्टू बजरंगी गोरक्षा बजरंग फोर्स के अध्यक्ष हैं। फरीदाबाद में रहते हैं। असली नाम राजकुमार पांचाल है और उम्र 48 साल। 31 जुलाई 2023 को हरियाणा के नूंह में भड़की हिंसा में आरोपी थे। मुस्लिमों के खिलाफ भड़काऊ बयान देते रहे हैं। अभी अपनी शादी की वजह से चर्चा में हैं। बिट्टू बजरंगी का आरोप है कि उनका रिश्ता पूजा नाम की महिला से हुआ था, लेकिन वह असल में शबनम थी। शबनम और उसके पति दानिश ने 1.3 लाख रुपए ठग लिए। बिट्टू बजरंगी शादी के लिए अलीगढ़ के लोधा गांव के एक मंदिर पहुंचे, तो वहां न पूजा मिली, न उसके रिश्तेदार और न पंडित। उनका दावा है कि उन्होंने सारे सबूत पुलिस को दे दिए हैं, लेकिन पुलिस कह रही है कि अब तक कोई सबूत नहीं मिला। इस फ्रॉड को समझने के लिए हमने बिट्टू बजरंगी और पुलिस अधिकारियों से बात की। अलीगढ़ में उस मंदिर और महिला के पते पर भी पहुंचे, जो बिट्टू बजरंगी को दिया गया था। पहले पढ़िए मामला शुरू कहां से हुआ… शादी के लिए 2 साल से लड़की देख रहे थे, पड़ोसी ने कहा- हम दुल्हन दिलाएंगे बिट्टू बजरंगी कहते हैं कि मैं बजरंग बली का भक्त हूं। मैंने शादी नहीं करने की ठानी थी, लेकिन क्या करें, भाई की मौत हो गई और उसकी पत्नी मायके चली गई। अब 7 साल की भतीजी मेरी जिम्मेदारी है। मैं अपने लिए पत्नी नहीं, बच्ची के लिए मां खोज रहा था। बिट्टू ने अपनी बात कहने के लिए बजरंगी बली का मंदिर चुना। कहा कि हनुमान जी हमारी-आपकी बात के साक्षी होंगे। बिट्टू बताते हैं, ‘मैं 2 साल से शादी के लिए लड़की तलाश रहा था। मुझे गोरक्षा और सनातन के काम के लिए बाहर जाना पड़ता है। इसलिए भतीजी को दूसरों के पास छोड़कर जाता हूं। संगठन के लोगों ने कहा कि मुझे शादी कर लेनी चाहिए। संगठन और समाज की सलाह पर मैंने हां कर दी।’ तीन लड़कियों को रिजेक्ट किया, फिर पूजा पसंद आई बिट्टू कहते हैं, ‘मेरे पड़ोस में हरि सिंह रहते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे पंकज का साला बंटी शादियां करवाता है। वो तुम्हारी भी शादी करवा देगा। मैं तैयार हो गया। मुझे अलीगढ़ में तीन लड़कियां दिखाई गई थीं। किसी न किसी वजह से तीनों पसंद नहीं आईं। अलीगढ़ की ही चौथी लड़की पसंद आई।’ 'मैं पहले तीन बार गया था, लेकिन इस बार नहीं गया। 5 सितंबर, 2025 को लड़की को लेकर उसका भाई, चाचा, पिता बिचौलिए यानी पड़ोसी के घर आए थे। रिश्ता तय होने के बाद 7 सितंबर को शादी के लिए लोधा गांव के मंदिर बुलाया।’ बिट्टू बजरंगी ने एक फोटो दिखाई, जिसमें वे एक महिला के साथ बैठे हैं। बिट्टू आगे कहते हैं, ‘लोग कह रहे हैं कि मैंने लड़की को खरीदा था। सब ये फोटो देख लें। उस दिन बाकायदा रस्मों के साथ टीका हुआ था। क्या लड़की की खरीद ऐसे होती है। हमने पूछा फोटो में लड़की की उम्र कम लग रही है। बिट्टू ने जवाब दिया, ‘नहीं, 38 साल की है। मैं 48 का हूं। 10 साल का गैप तो चलता है।’ हमने पूछा, लड़की अलीगढ़ में कहां की रहने वाली है? बिट्टू साफ-साफ नहीं बताते। बस इतना कहते हैं कि लड़की कहां है, मुझे सब पता है। पुलिस अगर मेरे साथ चले, तो सबको गाड़ी में भरकर ले आऊंगा। उन्होंने बताया कि वे शादी करने जिस मंदिर में गए थे, वो अलीगढ़ के लोधा गांव में है। फिर कहते हैं कि लड़की का घर लोधा गांव से 6-7 किलोमीटर दूर सूत मिल चौराहे के पास बने सरकारी फ्लैट में है। हालांकि, फ्लैट का नंबर या मंदिर के बारे में बहुत पूछने पर भी कुछ नहीं बताया। हमारे रिपोर्टर अलीगढ़ की दोनों लोकेशन पर पहुंचे। यहां लड़की के परिवार वालों को कोई नहीं जानता। बिट्टू ने हमें बताया था कि लड़की लोधा गांव की है। वहीं वो मंदिर था, जहां बिट्टू शादी के लिए गए थे। गांव के लोगों ने बताया कि यहां 3-4 मंदिर हैं। कोई भी लड़की के घर का पता नहीं बता पाया। शादी में चढ़ावे के लिए खरीदे जेवर और कपड़े दान किएबिट्टू बताते हैं, 'मेरे साथ 1.3 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी हुई है। मेकअप, फेशियल और लहंगे के लिए 30 हजार रुपए शादी से ठीक पहले दिए थे। लड़की वाले टीका करने आए थे, उस दिन गाड़ी के किराए के लिए 3 हजार रुपए मांगे थे। मैंने ऑनलाइन पैसे भेज दिए। आने-जाने, गाड़ी करने में मेरे करीब एक लाख रुपए खर्च हुए। चढ़ावे के लिए इयर रिंग, अंगूठी, चेन और साड़ियां खरीदी थीं। ये सब दान कर दिया।' रिश्ता कराने वाले बिचौलिए और पड़ोसी घर में नहींबिट्टू बजरंगी का रिश्ता कराने वाले बिचौलिए हरि सिंह और उनका परिवार घर में नहीं है। 19 फरवरी को फरीदाबाद के सारन थाने में दर्ज FIR में बिट्टू ने हरि सिंह के बेटे के साले बंटी, लक्ष्मी नाम की एक महिला और लड़की के भाई बनकर आए प्रदीप का नंबर दिया है। वे अब प्रदीप को दानिश बता रहे हैं। इन सभी लोगों के नंबर बंद आ रहे हैं। पुलिस का दावा- बिट्टू ने अब तक एक सबूत नहीं दियाहमने फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता से पूछा कि इस केस की जांच कहां तक पहुंची। क्या इसमें किसी रैकेट के शामिल होने की आशंका है? उन्होंने अपने PRO यशपाल सिंह से बात कराई। उन्होंने बताया- बिट्टू बजरंगी सिर्फ मीडियाबाजी कर रहे हैं। पुलिस ने उन्हें कई बार नोटिस भेजा, ताकि वे थाने आकर जांच में सहयोग करें। वे नोटिस ही रिसीव नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अब तक एक भी सबूत नहीं दिया है। न ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड दिखाया, न लड़की के घर की लोकेशन बताई। बिट्टू बजरंगी झूठ क्यों बोलेंगे, इसकी वजह क्या हो सकती है? जवाब मिला, 'जब तक बिट्टू खुद आकर सहयोग न करें, तब तक हम कुछ नहीं कह सकते। पीड़ित खुद थाने आकर सहयोग करता है, ताकि उसका केस जल्दी निपटे। यहां बिट्टू मीडिया में हंगामा कर रहे हैं। और पुलिस से किनारा कर रहे हैं।' बिट्टू बजरंगी बोले- पुलिस झूठ बोल रही, सारे सबूत दे दिएपुलिस के दावे पर बिट्टू बताते हैं कि मेरे पास पहला नोटिस एक मार्च को आया है। मैं सारे सबूत लेकर तीन बार थाने गया, लेकिन किसी ने लिए नहीं। सब एक-दूसरे का नाम लेकर टाल रहे हैं। वे दावा करते हैं कि पुलिस झूठ बोल रही है। मेरा पूरा सनातनी नेटवर्क उस लड़की की कुंडली खंगाल रहा है। सब कुछ मीडिया के सामने लाऊंगा। लड़की मुसलमान है। उसका नाम शबनम और पति का नाम दानिश है। पति ही उसका भाई बनकर आया था। ये पूरा मामला लव जिहाद का है। पुलिस ने जिस तरह मेरे भाई की हत्या का केस बंद कर दिया था, वैसे ही मेरा भी केस बंद करना चाहती है।’ बिट्टू के भाई को जलाकर मारा, पुलिस ने कहा- सबूत नहीं मिलाबिट्टू आगे बताते हैं, ‘2024 में जिहादियों ने मेरे भाई महेश पांचाल की हत्या कर दी थी। वे हत्या तो मेरी करने आए थे, लेकिन मेरा भाई उनके हत्थे चढ़ गया। उसे फरीदाबाद में जलाया गया। हम उसे लेकर अस्पताल भागे। वहां उसकी मौत हो गई। उसने पुलिस को दिए बयान में हत्यारे का नाम भी बताया था। पुलिस ने कुछ महीने जांच की और कहा कि सबूत नहीं मिले।’ ‘दरअसल नूंह दंगों में मेरा नाम आया था। जिहादियों के दिमाग में मैं बस गया। मेरे भाई के केस में भी पुलिस ने कह दिया कि हत्या का कोई सबूत नहीं मिला। इस बार भी पुलिस यही कह रही है, कि उसे सबुत नहीं मिल रहा। मैं भाई का केस हाईकोर्ट में ले गया हूं। शादी की इस साजिश का भी पर्दाफाश करूंगा।’ …………………………ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंमेरठ में मिली लाश, मरने वाली अर्चिता या तुर्कमेनिस्तान की मुहब्बत यूपी के मेरठ का मवाना खुर्द इलाका। 21 फरवरी को यहां फार्म हाउस के पास खेत में एक लड़की की लाश मिली। चेहरा जला हुआ था इसलिए पहचानना मुश्किल था। पुलिस ने डेडबॉडी दिल्ली की रहने वाली अर्चिता अरोड़ा की बताई। तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं ने दावा किया कि मरने वाली लड़की भारतीय नहीं, बल्कि तुर्कमेनिस्तान की रहने वाली मुहब्बत है। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 8 Mar 2026 5:35 am

AI युग सिर्फ अपग्रेड नहीं, पूरी इकोनॉमी का रीसेट: जियो

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में मैथ्यू ओमेन ने रखा ‘इंटेलिजेंस ग्रिड’ का विजन बार्सिलोना, 4 मार्च 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर टेलीकॉम सेक्टर के लिए सिर्फ टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं, बल्कि इकोनॉमी और बिज़नेस मॉडल का रीसेट है। मैथ्यू ओमेन, ग्रुप सीईओ, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC) बार्सिलोना में कहा कि दुनिया अब “मिनट्स ... Read more

अजमेरनामा 8 Mar 2026 4:30 am

ट्रंप ने रक्षा मंत्री हेगसेथ को बताया शानदार, किया दावा- अमेरिकी सेना ने 42 ईरानी वॉरशिप डुबोए

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका के हमलों से ईरान पस्त हो गया है और उसकी सेना को भारी नुकसान हुआ है

देशबन्धु 7 Mar 2026 10:35 pm

पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करेगा ईरान, राष्ट्रपति पेजेशकियान ने किया बड़ा ऐलान, अमेरिका की ‘सरेंडर’ मांग ठुकराई

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में लगातार मिसाइल हमलों, ड्रोन हमलों और हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव के बीच ईरान का यह बयान हालात को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

देशबन्धु 7 Mar 2026 1:54 pm

नेपाल में भ्रष्ट नेताओं और उनके अमीर बच्चों को मुद्दा बनाने वाली पार्टी बहुमत की ओर

नेपाल में तीन साल पुरानी राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी बहुमत की ओर बढ़ रही है. राजनेताओं के अमीर बच्चों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने वाली इस पार्टी की कमान 35 साल के बालेंद्र शाह संभाल रहे हैं.

देशबन्धु 7 Mar 2026 10:52 am

ईरान युद्ध: रूस क्यों नहीं आ रहा ईरान की मदद के लिए सामने?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी कम सहयोगियों वाली ईरानी सरकार, अमेरिका और इस्राएल के जारी हमलों के बीच मॉस्को के समर्थन की उम्मीद कर रही थी. लेकिन अब तक तो उसे केवल निराशा ही हासिल हुई है

देशबन्धु 7 Mar 2026 10:48 am

अली लारीजानी, जो पर्दे के पीछे से चला रहे हैं ईरान की हुकूमत

अमेरिका और इस्राएल के हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और अन्य बड़े नेताओं के मारे जाने के बाद, अब अनुभवी नेता अली लारीजानी ही सारे बड़े फैसले ले रहे हैं

देशबन्धु 7 Mar 2026 10:42 am

युद्ध खत्म होने के बाद कैसा दिख सकता है ईरान का भविष्य

अभी कोई नहीं जानता कि अमेरिका, इस्राएल और ईरान के बीच छिड़ी यह जंग कब खत्म होगी. यह कहना भी मुश्किल है कि लड़ाई के बाद ईरान की हालत कैसी होगी

देशबन्धु 7 Mar 2026 10:39 am

अधिकांश जर्मन मतदाता ईरान युद्ध के खिलाफ; डर का माहौल

जर्मनी के एक नए सर्वे के अनुसार जर्मन मतदाता ईरान पर अमेरिका-इस्राएल हमलों और मध्य पूर्व की स्थिति के वैश्विक प्रभावों को लेकर चिंतित हैं. अमेरिका पर जर्मन लोगों का भरोसा कम हो गया है

देशबन्धु 7 Mar 2026 9:50 am

ट्रंप की हत्या की साजिश के आरोप में पाकिस्तानी को दोषी ठहराया गया

पाकिस्तान के एक व्यक्ति को ईरान के साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान युद्ध की स्थिति में आमने-सामने हैं।

देशबन्धु 7 Mar 2026 9:43 am

ईरान के खिलाफ कार्रवाई अपने लक्ष्य की ओर, भविष्य के नेतृत्व पर नजर : अमेरिका

व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की कार्रवाई अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश में हथियारों के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं

देशबन्धु 7 Mar 2026 9:00 am

व्हाइट हाउस ने पेश की नई साइबर रणनीति

व्हाइट हाउस ने अमेरिका के लिए एक साइबर रणनीति जारी की है, जिसमें साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, प्रतिद्वंद्वियों से डिजिटल खतरों का मुकाबला करने और वैश्विक भागीदारों के साथ सहयोग को गहरा करने की एक व्यापक योजना की रूपरेखा दी गई है।

देशबन्धु 7 Mar 2026 8:49 am

ग्रीन टेक्नोलॉजी पर बांग्लादेश का फोकस, यही दुनिया का भविष्य : हाफिजुर रहमान

रनर ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन हाफिजुर रहमान खान ने शनिवार को कहा कि भविष्य के बाजार में धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित प्रौद्योगिकी (ग्रीन टेक्नोलॉजी) जैसे डीएमआई तकनीक, पीएचईवी वाहनों की ओर रुझान बढ़ेगा

देशबन्धु 7 Mar 2026 8:35 am

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने किया ईरान को बड़े सैन्य नुकसान का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बड़े सैन्य नुकसान का दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन ने ईरान के सशस्त्र बलों को बहुत कमजोर कर दिया है और उसके सैन्य ढांचे को लगभग तबाह कर दिया है।

देशबन्धु 7 Mar 2026 8:33 am

अमेरिका रूस पर तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार

स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि मध्य-पूर्व संघर्ष के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए वॉशिंगटन रूस के तेल आपूर्ति पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दे सकता है

देशबन्धु 7 Mar 2026 8:06 am

नीतीश ने 3 महीने में ही सीएम कुर्सी क्यों छोड़ी:चुनाव से पहले बीजेपी ने लिखी स्क्रिप्ट; चिराग को ज्यादा सीटें, नीतीश के लिए कैंपेन

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के ऐलान के साथ ही बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना तय है। भले ही नतीजों के लगभग चार महीने बाद ऐसा होने जा रहा है, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट बीजेपी ने चुनाव से पहले ही लिख रखी थी। सीटों के बंटवारे से लेकर नीतीश के लिए मजबूती से कैंपेन करना, बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। 4 पॉइंट में जानेंगे बीजेपी ने कैसे लिखी स्क्रिप्ट… लेकिन उससे पहले बैकग्राउंड समझ लेते हैं… 2020 बिहार चुनाव में मुकाबला दो बड़े गठबंधनों के बीच था। एक तरफ बीजेपी, जेडीयू, मांझी की हम और साहनी की वीआईपी पार्टी वाला एनडीए और दूसरी तरफ आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट का महागठबंधन। ढाई साल पहले ही नीतीश पाला बदलकर वापस बीजेपी के साथ आए थे। एनडीए की तरफ से सीएम का चेहरा भी वहीं थे। पर पर्दे के पीछे से बीजेपी अपना सीएम बनाने की जुगत में थी। उसने जदयू के बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की, लेकिन नीतीश इसके लिए तैयार नहीं हुए। नीतीश को पता था कि बीजेपी ज्यादा सीटें जीत गई, तो सीएम की कुर्सी पर दावा ठोक देगी। इसलिए वे खुद बड़े भाई की भूमिका में रहना चाहते थे। चिराग की पार्टी एलजेपी तब एनडीए में शामिल होना चाहती थी। खुद को मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग ने एलजेपी के लिए 40 सीटों की मांग कर दी। नीतीश इसके लिए भी तैयार नहीं हुए। उन्होंने साफ कह दिया कि बीजेपी, एलजेपी को गठबंधन में शामिल करना चाहती है, तो अपने कोटे से सीटें दे दें। बीजेपी ने इनकार कर दिया। ऐसे में एलजेपी अकेले मैदान में उतरी और सोची समझी रणनीति के तहत नीतीश की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए। इनमें से ज्यादातर उम्मीदवार बीजेपी छोड़कर आए थे। कई तो सीधे तौर पर संघ से ताल्लुक रखने वाले थे। तब सियासी गलियारों में चर्चा छिड़ी कि नीतीश को कमजोर करने के लिए एलजेपी, बीजेपी की बी टीम बनकर चुनाव लड़ रही है। चिराग ने भी कुछ ऐसा ही कैंपेन किया। जब नतीजे आए तो 115 सीटों पर लड़ने वाली जदयू 43 सीटों पर सिमट गई। 34 सीटों पर चिराग की पार्टी ने वोट काटकर उसे हरवा दिया। जबकि बीजेपी ने 110 सीटों पर लड़कर 74 सीटें जीत ली। 74 सीटें जीतकर बीजेपी NDA में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। HAM और VIP को मिलाकर वह 82 तक पहुंच गई, लेकिन नीतीश के बिना बहुमत के लिए जरूरी 122 से काफी पीछे रह गई। यानी उसे सत्ता के लिए नीतीश का साथ जरूरी हो गया। कम सीट जीतने के बाद भी नीतीश ने ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तब कहा गया कि कुछ समय बाद बीजेपी अपना सीएम बनाएगी। बीजेपी की तरफ से ऐसी कोशिशें भी हुईं। पर दो साल बाद ही नीतीश ने पाला बदलकर फिर से राजद के साथ सरकार बना ली। नीतीश ने आरोप भी लगाया कि उनकी पार्टी तोड़ने की साजिश रची जा रही थी। दो साल बाद यानी 2024 में जदयू फिर से एनडीए में लौटी, लेकिन इस बार भी बीजेपी अपना सीएम नहीं बना पाई। मुख्यमंत्री नीतीश ही बने। क्योंकि मैजिक फिगर नीतीश के साथ ही था। अब तक तो सियासी गलियारों में यह मान लिया गया कि नीतीश जब तक चाहेंगे वे सीएम रहेंगे और जिसके साथ जब जी करे सरकार बना लेंगे। लगातार चार बार पलटी मारकर उन्होंने यह बात बहुत हद तक साबित भी कर दी थी। नीतीश के लिए बीजेपी ने 2025 के चुनाव में 4 खास स्ट्रैटजी अपनाई… 1. बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ना 2019 के लोकसभा में बीजेपी और जदयू बराबर-बराबर सीटों पर लड़ीं, लेकिन 2020 के विधानसभा में नीतीश ही बिग ब्रदर रहे। 2025 के चुनाव में बीजेपी ने साफ कर दिया था कि वह बराबर सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी। इसलिए ही बीजेपी ने आखिर-आखिर तक चिराग फैक्टर को मौजू बनाए रखा। आखिरकार जदयू और बीजेपी 101-101 सीटों पर लड़ने के लिए राजी हो गए। वजह: बराबर सीटों पर लड़कर बड़ी पार्टी बनना। नतीजे भी बीजेपी के फेवर में आए और वो सबसे बड़ी पार्टी बनी। 2. सहयोगियों को ज्यादा से ज्यादा सीटें देना बीजेपी समझ चुकी थी कि नीतीश इस बार चिराग को अलग चुनाव लड़ाने की गलती नहीं करेंगे। ऐसे में चिराग ने फिर से 40 सीटों की मांग कर दी। शुरुआत में तो जदयू ना नुकर करती रही, लेकिन फिर वो राजी हो गई। इस तरह 43 सीटें सहयोगियों के खाते में चली गईं। इनमें से 29 सीटें चिराग की पार्टी को मिलीं। NDA के भीतर बिहार में पहली बार गैर बीजेपी-जदयू वाले दलों को 43 सीटें मिलीं। वजह: बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं- ‘बीजेपी चाहती थी कि जदयू कम से कम सीटों पर लड़े। ऐसा तभी संभव था जब एनडीए के भीतर सहयोगियों को ज्यादा से ज्यादा सीटें मिले। और हुआ भी वैसा ही। चिराग को 29, मांझी-कुशवाहा को 6-6 सीटें मिलीं। यानी 43 सीट। इस तरह एनडीए में बिना नीतीश आंकड़ा 143 पहुंच गया। बीजेपी यहीं चाहती थी कि वो नीतीश के बिना वह बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच सके।’ 3. चुनाव से पहले नीतीश के नाम पर भ्रम फैलाना ये 5 बयान पढ़िए… वजह: अमरनाथ तिवारी के मुताबिक बीजेपी चाहती थी कि पूरा चुनाव इस बात पर हो कि नीतीश सीएम होंगे या नहीं। राजद और कांग्रेस ने बार-बार कहा कि बीजेपी, नीतीश को सीएम नहीं बनाएगी। इन बयानों से जनता के बीच ये मैसेज चला गया कि नीतीश कमजोर हुए तो बीजेपी अपना सीएम बनाएगी। ऐसे में नीतीश के वोटर और पिछड़े तबके ने तय कर लिया कि नीतीश को इतना मजबूत बना दें कि बीजेपी उन्हें हटा नहीं पाए। कई लोगों ने नीतीश के आखिरी चुनाव समझकर भी उन्हें वोट किया। नतीजों में भी यह साफ दिखा। जदयू ने 101 में से 85 सीटें जीत ली। इसका सीधा नुकसान राजद को हुआ। 4. जदयू की सीटों पर मजबूती से प्रचार करना प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार चुनाव के दौरान कुल 16 रैलियां कीं। कुल 122 सीटें कवर कीं। इनमें से 42 सीटों पर जदयू लड़ रही थी। नतीजे आए तो 32 सीटें जदयू को मिलीं। इनमें से ज्यादातर वो सीटें थीं, जो 2020 में जदयू हार गई थी। इसी तरह गृहमंत्री अमित शाह ने 28 रैलियों से 141 सीटें कवर कीं। इनमें से 58 सीटों पर जदयू लड़ रही थी। 42 पर उसे जीत भी मिल गई। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 25 रैलियों से कुल 122 सीटें कवर कीं। इनमें से 47 सीटें जदयू के खाते की थीं। 40 पर उसे जीत भी मिल गई। यानी पीएम मोदी, शाह और योगी ने जहां रैली की वहां कुल 86 सीटों पर जदयू चुनाव लड़ रही थी। इनमें से 74 पर उसे जीत मिली। यानी स्ट्राइक रेट 86% रहा। वजह: करीब 65% सीटों पर जदयू की सीधी लड़ाई आरजेडी से ही थी। बीजेपी चाहती थी कि आमने-सामने की टक्कर की ज्यादातर सीटें जदयू जीत ले और राजद कमजोर पड़ जाए। हुआ भी ऐसा ही। बीजेपी के मनमुताबिक नतीजे आए, नीतीश का पाला बदलना मुश्किल नतीजे आए तो बीजेपी को 89, जदयू को 85, चिराग की पार्टी को 19, हम को 5 और कुशवाहा की पार्टी आरएलएम को 4 सीटें मिलीं। इस तरह NDA का आंकड़ा 202 पहुंच गया। जबकि आरजेडी को 25, कांग्रेस को 6 और बाकी सहयोगियों को 4 सीटें मिलीं। यानी महागठबंधन को 35 सीटें मिलीं। इस तरह एकतरफा सीटें NDA के खाते में आ गईं और राजद बेहद कमजोर हो गई। इसे ऐसे समझिए… नीतीश के बिना बहुमत के करीब पहुंच गई NDA नीतीश राजद के साथ गए तो भी बहुमत से दूर अगर नीतीश पाला बदलकर राजद के साथ जाते, तो भी बहुमत के आंकड़े से दूर रह जाते। गणित को ऐसा ही है। नीतीश की जदयू (85)+ राजद (25)+ कांग्रेस (6) + लेफ्ट+ (4)= 120 यानी बहुमत के लिए 122 से 2 कम। बीजेपी ने अपना सीएम बनाने के लिए तीन महीने इंतजार क्यों किया? चुनावी नतीजे बीजेपी के फेवर में थे। वह तब भी अपना मुख्यमंत्री बना सकती थी, लेकिन उसने नीतीश को सीएम बनाया। आखिर क्यों…? बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं- बीजेपी, नीतीश या विपक्ष को विक्टिम कार्ड खेलने का मौका नहीं देना चाहती थी। क्योंकि चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ा गया था और बीजेपी अपना सीएम बनाती तो पिछड़े वर्ग के वोटर नाराज हो सकते थे। नीतीश के कोर वोटर्स यानी कोईरी-कुर्मी बीजेपी से हमेशा के लिए कट सकते थे। ऐसे में बीजेपी चाहती थी कि नीतीश खुद आगे आकर सत्ता सौंपे। राज्यसभा के चुनाव उसके लिए सबसे मुफीद रहा। बीजेपी के प्लान के मुताबिक नीतीश ने राज्यसभा के लिए नामांकन किया और खुद ही सत्ता छोड़ने का ऐलान कर दिया। ------------- बिहार से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…बिहार में बीजेपी का सीएम बनना ही था: 6 राज्यों में बीजेपी की राजनीति से समझिए, आखिर नीतीश को क्यों जाना पड़ा राज्यसभा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के ठीक 105 दिन बाद नीतीश कुमार ने राज्यसभा का पर्चा भर दिया। मतलब वे सीएम नहीं रहेंगे। अब बिहार में पहली बार बीजेपी का सीएम बन सकता है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 7 Mar 2026 5:15 am

जेफरी एपस्टीन केस में नए एफबीआई दस्तावेज जारी, महिला ने ट्रंप पर लगाए गंभीर आरोप

न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों के अनुसार, एफबीआई एजेंटों ने 2019 में इस अज्ञात महिला से चार बार पूछताछ की थी। ये साक्षात्कार जेफरी एपस्टीन के खिलाफ चल रही जांच के दौरान लिए गए थे।

देशबन्धु 7 Mar 2026 3:58 am

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- बिना शर्त आत्मसमर्पण करे ईरान, तेहरान ने किया पलटवार, जानें क्‍या हुआ युद्ध के सातवें दिन

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संकेत दिया कि कुछ देश युद्ध समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। इसे संघर्ष खत्म करने के लिए संभावित कूटनीतिक पहल का शुरुआती संकेत माना जा रहा है।

देशबन्धु 7 Mar 2026 3:40 am

दुनिया भर में अमेरिकी तख्ता पलट की कोशिशों का दागदार इतिहास

कई अमेरिकी राष्ट्रपति विदेशों में अलोकप्रिय शासकों को हटाने के लिए पहले भी सैन्य बल भेज चुके हैं. ट्रैक रिकॉर्ड मिला जुला रहा है. ईरान युद्ध के शुरु में ट्रंप ने दावा किया था कि उनका एक लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन था. ईरान के साथ मौजूदा युद्ध की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अपने उद्देश्यों को लेकर साफ थे. तेहरान को न तो परमाणु और न ही पारंपरिक सैन्य खतरा पैदा करने की हालत में होना चाहिए, और कमजोर हुए मुल्ला शासन सत्ता को सत्ता से हटा दिया जाना चाहिए. उसके बाद से, ट्रंप और दूसरे वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान पर हवाई हमलों के लिए अलग-अलग कारण बताए हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोमवार को यहां तक कहा कि वर्तमान संघर्ष कथित सत्ता-परिवर्तन का युद्ध नहीं है.” लेकिन अमेरिकी इतिहास को देखते हुए, हैरानी नहीं होगी अगर ट्रंप का मूल तर्क ही मौजूदा सैन्य हस्तक्षेप के प्रेरक कारकों में से एक हो. आखिरकार, अमेरिका का तथाकथित तख्ता पलट” अभियानों को लेकर किसी भी अन्य देश से ज्यादा अनुभव है. 2019 के एक अध्ययन के अनुसार, केवल शीत युद्ध (1947–1989) के दौरान ही, अमेरिका ने विदेशों में सत्ता संतुलन अपने पक्ष में बदलने के लिए 72 प्रयास किए थे. इनमें से 64 मामले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के जासूसी अभियान थे, जिनकी सफलता दर लगभग 40 प्रतिशत रही थी. उदाहरण के लिए, 1953 में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने ब्रिटिश एमआई6 के साथ मिलकर ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग को सत्ता से हटा दिया था. इसके कारण ईरान के नए शासक शाह मोहम्मद रजा पहलवी को अमेरिका की कठपुतली” के रूप में देखा जाने लगा और 1979 की इस्लामी क्रांति में उनको सत्ता से बेदखल कर गया. उस समय स्थापित हुई धार्मिक और अधिक दमनकारी सत्ता आज हवाई हमलों के केंद्र में है. एक सफल दिखने वाला सत्ता-परिवर्तन अभियान भी लंबे समय में नई समस्याएं पैदा कर सकता है. अमेरिका से जुड़े कुछ खुफिया और कुछ खुलेआम हुए सत्ता परिवर्तन अभियानों पर एक नजर. लीबिया (2011) 2011 में जब अरब वसंत के दौरान उत्तरी अफ्रीका में बदलाव की उम्मीदें जगी थी, तब लीबिया में लंबे समय से शासन कर रहे मुअम्मर अल-गद्दाफी के खिलाफ भी प्रतिरोध बढ़ा था. अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के नेतृत्व में अमेरिका ने तुरंत विरोधी पक्ष के नेशनल ट्रांजिशनल काउंसिल का साथ दिया था. अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने जल्द ही नाटो के ऑपरेशन यूनिफाइड प्रोटेक्टर के तहत हवाई हमले शुरू कर दिए थे. उसी साल अक्टूबर में, एक अमेरिकी ड्रोन और फ्रांसीसी लड़ाकू विमान ने गद्दाफी के काफिले पर हमला बोल दिया था, जिसके बाद नेशनल ट्रांजिशनल काउंसिल के लड़ाकों ने उन्हें मार दिया था. लगभग 15 साल बाद लीबिया आज भी राजनीतिक रूप से विभाजित और अस्थिर है. इराक (2003) 1 मई 2003 को तानाशाह सद्दाम हुसैन के पतन के कुछ ही हफ्ते बाद, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इराक युद्ध के अंत की घोषणा की थी. अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर लगे बैनर पर लिखा था मिशन पूरा हुआ.” बुश ने कहा था, तानाशाही से लोकतंत्र में बदलाव आने में समय तो लगेगा, लेकिन यह एक जरूरी प्रयास है. हमारा गठबंधन तब तक बना रहेगा जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता. उसके बाद हम वापस लौट जाएंगे और अपने पीछे एक स्वतंत्र इराक को छोड़कर जाएंगे.” हालांकि, इसके बाद के कब्जे वाले दौर में भी न तो शांति आई और न ही स्थिरता. सरकारी संस्थाएं कमजोर रहीं, और पड़ोसी ईरान ने स्थानीय शिया मिलिशिया का समर्थन किया, जो सुन्नी गुटों के साथ हिंसक झड़पों में उलझे रहे. सत्ता के शून्य के बीच तथाकथित इस्लामिक स्टेट आतंकी संगठन बना और एक शक्तिशाली खिलाड़ी के रूप में उभरा, जिसने इराक, सीरिया और पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया. अमेरिकी इतिहासकार जोसेफ स्टीब के अनुसार, अमेरिकी लोग इस गलतफहमी में थे कि ऐसे माहौल में उदार लोकतंत्र अपने आप फल-फूल जाएगा. स्टीब ने कहा, उनका मानना था कि इराक जैसे शासन को गिराने के बाद उन्हें बदलना अपेक्षाकृत आसान होगा.” अफगानिस्तान (2001) इराक पर हमला जॉर्ज डब्ल्यू बुश का इकलौता सत्ता-परिवर्तन” युद्ध नहीं था. 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के चार हफ्ते बाद, अमेरिका ने ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम” शुरू किया था. तालिबान शासन को जल्द ही बेदखल करने के बाद भी अमेरिका समर्थित सरकार लंबे समय तक टिक नहीं पाई. 2014 में जर्मनी सहित अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के अपने सैनिकों की संख्या घटाने के बाद, तालिबान ने धीरे-धीरे खोई जमीन वापस पाना शुरू कर दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप ने अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में तालिबान से बचे हुए अमेरिकी सैनिकों की वापसी का समझौता किया और बदले में उन पर हमला न करने का वादा किया. लेकिन 2021 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के शासन के दौरान अंतिम सैनिकों की वापसी के तुरंत बाद तालिबान ने पूरे देश पर फिर से नियंत्रण स्थापित कर लिया और अमेरिकी हमले से पहले की राजनीतिक व्यवस्था को बहाल कर दिया. पनामा (1989) 1980 के दशक में पनामा में तानाशाह मानुएल नोरिएगा का शासन था. सालों तक सीआईए से पैसा लेते रहने के बाद, नोरिएगा अमेरिकी सरकार के लिए बोझ बन गया था. उसके शासन में पनामा ड्रग्स की तस्करी का अड्डा था, और अमेरिका को डर था कि पनामा नहर के विस्तार में उसे दरकिनार कर दिया जाएगा. 1980 के दशक में अमेरिका के साथ नोरिएगा के रिश्ते बिगड़ते गए. मई 1989 में विपक्षी नेता गिल्येर्मो एंदारा ने चुनाव जीता, लेकिन नोरिएगा ने चुनावी नतीजों को मानने से इनकार कर दिया. आखिरकार दिसंबर में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश ने नोरिएगा को सत्ता से हटाने के लिए ऑपरेशन जस्ट कॉज” का आदेश दे दिया. पनामा पर हमले के बाद नोरिएगा को पकड़ लिया गया और अमेरिका ले जाया गया और मुकदमा चलाया गया. बाद में उन्होंने अमेरिका, फ्रांस और पनामा में अलग-अलग जेलों में सजा काटी और 2017 में उनकी मौत हो गई. इस अमेरिकी सैन्य अभियान की कीमत 33.1 करोड़ डॉलर बताई गई. ग्रेनेडा (1983) 1979 से कैरेबियाई देश ग्रेनेडा ने अपनी राजनीति सोवियत संघ के साथ तेजी के साथ जोड़ दिया. जब प्रधानमंत्री मॉरिस बिशप ने अमेरिका को खुश करने की कोशिश की, तो उन्हें सैनिक गुटों ने गद्दी से हटा दिया और उनकी हत्या कर दी. इस पृष्ठभूमि में, अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने कई कैरेबियाई देशों के समर्थन से ग्रेनेडा पर आक्रमण कर दिया था. हालांकि, ब्रिटेन ने इसका कड़ा विरोध किया था. वह कॉमनवेल्थ सदस्य ग्रेनेडा को अपने प्रभावक्षेत्र में मानता था. अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद, एक ब्रिटिश गवर्नर ने 1984 में वहां सत्ता परिवर्तन और चुनावों की देखरेख की थी. डोमिनिकन रिपब्लिक (1965) कई तख्तापलटों के बाद, 1965 में डोमिनिकन रिपब्लिक गृहयुद्ध की कगार पर था. राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन ने अमेरिकी देशों के संगठन (OAS) के वोट के बाद, सैन्य आक्रमण कर दिया था. इसका आधिकारिक उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा था. लेकिन, अनौपचारिक तौर पर इसका लक्ष्य शीत युद्ध के दरम्यान अमेरिका के पड़ोस में स्थित डोमिनिकन रिपब्लिक को एक समाजवादी राज्य यानि की दूसरा क्यूबा बनने से रोकना था. वहां तैनात 44,000 सैनिकों की मदद से अमेरिका ने ये सुनिश्चित किया कि उसके पसंदीदा सरकार प्रमुख ने सत्ता संभाली. वेनेजुएला (2026) सबसे हालिया संभावित सत्ता परिवर्तन” का ऑपरेशन इतना नया है कि इसका अंतिम मूल्यांकन अभी मुमकिन नहीं है. जनवरी 2026 की शुरुआत में, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक सैनिक ऑपरेशन के जरिए वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो के अपहरण को अंजाम दिया. मादुरो पर न्यूयॉर्क में ड्रग टेररिज्म” का मुकदमा चलाया जाएगा. वेनेजुएला में उनकी सहयोगी उप राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अब सत्ता के शीर्ष पर बैठी हैं. मादुरो की सत्ता का हिस्सा होने के बावजूद ट्रंप ने घोषणा की है कि वह रोड्रिगेज के साथ सहयोग करेंगे. बदले में अमेरिका को वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों तक पहुंच मिलेगी. हालांकि, 2025 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और ट्रंप समर्थक मारिया कोरीना मचाडो ने वेनेजुएला लौटने और लोकतंत्र की राह पर उसका नेतृत्व करने की इच्छा जताई है. अमेरिका के सैन्य हमले के दो महीने बाद भी वेनेजुएला का भविष्य अनिश्चित है. यह लेख मूल रूप से जर्मन में प्रकाशित हुआ था.

देशबन्धु 6 Mar 2026 9:56 am

जर्मनी में सैन्यीकरण की बहस के बीच बर्लिन की एक फैक्टरी सुर्खियों में

बर्लिन की एक फैक्ट्री के बाहर आंदोलनकारी प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि ऑटो पार्ट्स बनाने वाली यह फैक्ट्री अब हथियार बनाएगी. लेकिन मजदूर और यूनियन बंटे हुए हैं. वे शांति चाहते हैं. अलबत्ता हथियार नौकरी की गारंटी देते हैं

देशबन्धु 6 Mar 2026 9:54 am

नेपाल चुनाव 2026: शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी सबसे आगे, बड़े नेताओं को कड़ी चुनौती

मतगणना के शुरुआती दौर में नेपाल की राजनीति के कई दिग्गज नेताओं को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रुझानों के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने निर्वाचन क्षेत्र में हजार से ज्यादा वोटों से पीछे चल रहे हैं।

देशबन्धु 6 Mar 2026 9:16 am

व्हाइट हाउस में ट्रंप ने फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी और इंटर मियामी टीम को किया सम्मानित

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित समारोह में 2025 मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) चैंपियन इंटर मियामी टीम की मेजबानी की

देशबन्धु 6 Mar 2026 9:01 am

इजरायल की चेतावनी, 'विदेशों में रहने वाले यहूदियों पर हमले का खतरा बढ़ा', सतर्क रहने की सलाह

ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की घोषणा की है

देशबन्धु 6 Mar 2026 8:56 am

ईरान के खिलाफ बढ़ेंगे अमेरिका-इजरायल के हमले, पेंटागन ने दिया संकेत

अमेरिका ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ उसका सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' आने वाले समय में आगे बढ़ सकता है। अमेरिकी और इजरायली सेना तेहरान की सेना और मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने के मकसद से हमले तेज करने की तैयारी कर रही है।

देशबन्धु 6 Mar 2026 8:45 am

ट्रंप ने दिए क्यूबा को लेकर अमेरिका की नीति में बदलाव के संकेत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर अमेरिका की नीति में संभावित बदलाव के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कुछ प्रगति हो रही है और विदेश नीति से जुड़े मौजूदा मुद्दों से निपटने के बाद क्यूबा को लेकर नई पहल की जा सकती है।

देशबन्धु 6 Mar 2026 8:25 am

ट्रंप का दावा, ईरान समझौता करने के लिए कर रहा है कॉल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारी सैन्य नुकसान झेलने के बाद ईरान अब बातचीत करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और इजरायल की सेनाएं तेहरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को निशाना बनाकर लगातार हमले कर रही हैं।

देशबन्धु 6 Mar 2026 8:24 am

इजराइल की विपक्षी नेता बोलीं- ईरानी हमारे भाई-बहन:खामेनेई का मरना ईरान के लिए अच्छा, वहां की सरकार टेररिस्ट

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले को 5 दिन हो गए। एक हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। 10 और देश इस जंग की जद में हैं। इजराइल के धुरविरोधी विपक्षी नेता भी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ईरान पर 8 महीने में दूसरी बार किए हमले का समर्थन कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इजराइल के विपक्षी दल येश अतीद की सांसद शैली टाल मेरोन से बात की। प्रधानमंत्री नेतन्याहू लिकुद पार्टी के हैं, जो दक्षिणपंथी रुझान रखती है। येश अतीद सेंटर लेफ्ट लिबरल पार्टी है। इजराइल की खासियत यही है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर यहां सेंटर, लेफ्ट, राइट नहीं देखा जाता। देखिए और पढ़िए इजराइल की विपक्षी सांसद शैली से खास बातचीत… सवाल: इजराइल ने एक साल में दूसरी बार ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ा है, वजह न्यूक्लियर हथियार होना बताया। इस संघर्ष का अंतिम लक्ष्य क्या है, ये हमेशा के लिए कब रुकेगा?जवाब: एक दिन पहले ही हमने देखा कि एक ईरानी मिसाइल सिनागॉग (यहूदियों की इबादतगाह) पर गिरी और वो जगह तबाह हो गई। 9 लोगों की मौत हुई और कई घायल हो गए। मैंने खुद वहां का दौरा किया और देखा कि एक बैलेस्टिक मिसाइल कितनी तबाही करती है। हमें ये समझना होगा कि सिर्फ न्यूक्लियर बम ही हमारे लिए खतरा नहीं है, बल्कि बैलेस्टिक मिसाइल भी बड़ा खतरा है। हमें दूसरी बार ईरान पर ऑपरेशन अमेरिका के साथ मिलकर इसलिए करना पड़ा ताकि हम ईरान को न्यूक्लियर बम बनाने से रोक पाएं या बैलेस्टिक मिसाइल प्लान पर काम करने से रोक पाएं। ईरान के पास 20 हजार बैलेस्टिक मिसाइल बताई जाती हैं। और अगर इतनी मिसाइल हैं, तो ये एक तरह से परमाणु बम ही है। इजराइल ईरान की दोनों क्षमताओं को खत्म करेगा। हमें ईरानी लोगों से नफरत नहीं है, वे हमारे भाई-बहन की तरह हैं। हम उनकी भलाई की कामना करते हैं। हमारा मानना है कि अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता हटेगी और फिर ईरान शांतिप्रिय देश बनेगा। खामेनेई की सत्ता ने अपने ही 30 हजार लोगों की हत्या की है। आप सोच सकते हैं कि वो दूसरे देश के लोगों के साथ क्या करते हैं। हम पिछले 5 दिन से देख रहे हैं कि वे अपने अरब पड़ोसियों पर ही हमले कर रहे हैं। ये सिर्फ इजराइल-अमेरिका की बात नहीं, पूरी दुनिया की बात है। सवाल: कभी न्यूक्लियर प्रोग्राम, कभी सरकार बदलना, और अब मिसाइल प्रोग्राम खत्म करना, बार-बार लक्ष्य बदल रहा है, ऐसा क्यों?जवाब: हम एक साथ कई सारी चीजों पर काम कर रहे हैं। मिलिट्री के स्तर पर न्यूक्लियर और बैलेस्टिक मिसाइल ठिकानों को स्ट्राइक कर तबाह करना है। ये मिलिट्री एक्शन हम इसलिए कर रहे हैं, ताकि ये ईरान के लोगों के लिए सत्ता पलटने की जमीन तैयार करे। इजराइल का सत्ता पलटने में पूरी तरह नियंत्रण नहीं है, लेकिन ईरान के लोगों के पास सत्ता पलटने के लिए सारा इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, ताकि वे नई सरकार के साथ आम जिंदगी जी सकें। ऐसी सरकार जो लोगों की मदद करें, न कि उन्हें प्रदर्शन करते हुए मार दे। एक तरफ हम मिलिट्री एक्शन कर रहे हैं, दूसरा काम वहां के लोगों को करना है। सवाल: इजराइल-अमेरिका की स्ट्राइक से ईरान में सत्ता बदलने के लिए माहौल बनेगा?जवाब: हमें यही उम्मीद है, लेकिन मैं अपने स्तर पर ये बात नहीं कह सकती कि सत्ता परिवर्तन होगा या नहीं। हमें लगता है कि ईरान में खामेनेई का न होना ईरान के लिए बेहतर भविष्य होगा। सवाल: युद्ध में इजराइल और ईरान के साथ पश्चिम एशिया के अलग-अलग मुल्कों में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है। आपको नहीं लगता कि अगर युद्ध आगे खिंचा, तो बड़े पैमाने पर नुकसान होगा?जवाब: आम नागरिकों के मारे जाने पर मुझे बहुत दुख होता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। अमेरिका और इजराइल ने जानबूझकर नागरिकों पर हमला नहीं किया। हमारा लक्ष्य मिलिट्री और सत्ता के ठिकाने हैं। ईरान सिर्फ नागरिकों पर ही हमला कर रहा है। वो इजराइल को खत्म करना चाहता है। सवाल: ईरान कह रहा है कि इजराइल ने अपने हित के लिए अमेरिका को युद्ध में खींच लिया। आपका इस पर क्या कहना है?जवाब: ईरान झूठ बोल रहा है। हम उसके किसी भी आरोप को गंभीरता से नहीं लेते। ईरान ने पूरी दुनिया में प्रॉक्सी खड़े किए हैं। हूती, हिजबुल्ला और हमास जैसे सभी आतंकी संगठन ईरानी सत्ता से ही चलते हैं। ईरानी सत्ता सरकार नहीं है, बल्कि आतंकी सरगना है, जो दुनियाभर मे आतंकी संगठन तैयार कर रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि इजराइल ने अमेरिका का साथ दिया, न कि अमेरिका ने इजराइल का साथ दिया। ईरान तेजी से बैलेस्टिक मिसाइल बना रहा था। वो तेजी से यूरेनियम का भंडारण कर रहे थे। ईरान की पहुंच एशिया से लेकर यूरोप तक हो चुकी थी। मैं अमेरिका के प्रशासन और ट्रम्प का धन्यवाद करती हूं। इजराइल और अमेरिका मिलकर दुनिया बचाने की कोशिश में लगे हैं। सवाल: पिछले साल जून में इजराइल ने ईरान पर हमला किया था, तब और इस बार के युद्ध में क्या फर्क दिख रहा है?जवाब: इजराइल के लोग धाकड़ लोग हैं। हम जानते हैं कि युद्ध में कैसे एकजुट रहना है। दोनों ऑपरेशन पेचीदा रहे हैं, लेकिन हमने बहादुरी दिखाई है। पिछली बार वे एक ही बार में ज्यादा मिसाइलें दाग रहे थे। इस बार वे कई बार में थोड़ी-थोड़ी मिसाइलें दाग रहे हैं। हमने इजराइल में ईरान और हिजबुल्ला दोनों तरफ से एक साथ, एक ही समय में मिसाइलें झेली हैं। इस बार दुनिया समझ गई है कि ये लड़ाई हमें कामयाबी के साथ खत्म करनी है। हमें परमाणु बम-बैलेस्टिक मिसाइल का खात्मा और सत्ता परिवर्तन दोनों ही करना है। ईरान ने इस युद्ध में अपने साथ हिजबुल्ला को उतार दिया है। हम लेबनान के लोगों से भी कहेंगे कि हम उनके साथ हैं। हिजबुल्ला लेबनान को जंग में ले जा रहा है। सवाल: क्या आपको नहीं लगता कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए बूट्स ऑन द ग्राउंड मतलब सैनिकों को जमीन पर उतारकर लड़ाई लड़नी होगी। क्या इजराइल-अमेरिका जमीनी ऑपरेशन के लिए तैयार हैं?जवाब: मैं अमेरिका की तरफ से बात नहीं कर सकती। वे खुद अपना फैसला लेंगे। मैं इंटरव्यू में नहीं बता सकती कि जमीन पर लड़ाई के लिए सैनिक उतारने होंगे कि नहीं। हम ये चर्चा अंदरूनी स्तर पर करेंगे और वक्त आने पर अमेरिका के साथ करेंगे। आर्मी हर तरह की चुनौती के लिए तैयार है। सवाल: ईरान कह रहा है कि वो 6 महीने के युद्ध के लिए तैयार हैं। 6 महीने नहीं, लेकिन एक महीने भी जंग चलती है, तो इजराइल को भी बहुत नुकसान होगा?जवाब: मैं इस ऑपरेशन के लिए समयसीमा नहीं बता सकती। मुझे नहीं पता कि क्या होगा। मुझे लगता है कि हमें अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए वक्त चाहिए। कोई लंबा युद्ध नहीं चाहता। इजराइल ने युद्ध में बहुत कुछ खोया है। भविष्य के लिए जो भी जरूरी होगा, हम वो करेंगे। सवाल: युद्ध शुरू होने के लिए दो दिन पहले ही PM मोदी इजराइल में स्टेट विजिट पर थे। युद्ध के बीच इजराइल में भारत को लेकर क्या बात हो रही है?जवाब: पीएम मोदी का दौरा ऐतिहासिक रहा है। हमने उन्हें संसद में सम्मान दिया। उन्होंने शानदार भाषण दिया। हमने ट्रेड, स्पेस, मिलिट्री, एआई, एग्रीकल्चर जैसे मुद्दों पर सहयोग का वादा किया है। दोनों देश एक दूसरे की मदद के लिए खड़े हैं। सवाल: इस युद्ध में भारत अमेरिका और इजराइल के साथ खड़ा दिख रहा है। युद्ध के बीच आप भारत के लोगों और सरकार से क्या कहेंगी?जवाब: भारत के लोग इजराइल का दर्द समझ सकते हैं, क्योंकि हम दोनों ही आतंक से परेशान हैं। 1948 में इजराइल बनने के बाद से हम पर आतंक का साया रहा। हम आतंक के खिलाफ और लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं। हमारी टेरर को लेकर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है। हमें इस पर एकजुट रहना चाहिए। मैं भारत के साथ के लिए शुक्रिया अदा करती हूं। ………………………… ईरान जंग पर ये स्टोरी भी पढ़िए1. ईरान 6 महीने जंग को तैयार, अमेरिका महीनेभर नहीं टिकेगा ईरान के थिंक टैंक डिप्लोमैटिक हाउस के डायरेक्टर हामिद रेजा गोलामजादेह कहते हैं कि ईरान ने 6 महीने जंग की तैयारी कर रखी है। अमेरिका अभी से नेवी पीछे हटाने लगा है। अभी ईरान पुरानी मिसाइलें ही इस्तेमाल कर रहा है, मॉडर्न मिसाइलें तो बाकी हैं। पढ़िए पूरी खबर... 2. ईरान पर अजरबैजान में ड्रोन हमले का आरोप, अजरबैजानी राष्ट्रपति बोले- माफी मांगो अजरबैजान ने खुद पर हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा कि इस घटना पर ईरान को माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार एक ड्रोन नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन से टकराया। एयरपोर्ट टर्मिनल को नुकसान पहुंचा है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 6 Mar 2026 4:54 am