डिजिटल समाचार स्रोत

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इंटरव्यू में पत्रकार पर ट्रंप भड़के, कहा- मैं रेपिस्ट नहीं: मुझे क्लीन चिट मिल चुकी है; एंकर ने हमलावर का बयान टीवी पर पढ़ दिया था

इसी मैनिफेस्टो को लेकर पत्रकार नोरा ओ’डोनल ने ट्रम्प से सवाल किया कि क्या आरोपी के ये आरोप उनकी ओर इशारा करते हैं। इस सवाल पर ट्रम्प ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि उनका इन आरोपों से कोई संबंध नहीं है और वे पूरी तरह निर्दोष हैं।

देशबन्धु 27 Apr 2026 12:15 pm

जापान में 6.2 तीव्रता का भूकंप, पीएम ताकाइची ने लोगों को अलर्ट रहने की दी चेतावनी

सोमवार सुबह उत्तरी जापान के एक हिस्से में 6.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए। हालांकि, किसी नुकसान या किसी के हताहत होने की खबर नहीं है

देशबन्धु 27 Apr 2026 9:42 am

व्हाइट हाउस के डिनर प्रोग्राम में गोलीबारी से 'चिंतित' नहीं थे ट्रंप, एजेंसियों की तुरंत कार्रवाई की प्रशंसा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन डिनर के दौरान गोलीबारी के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जब ये घटना हुई, वे चिंतित नहीं थे

देशबन्धु 27 Apr 2026 8:40 am

ट्रंप ने की 30 दिनों के भीतर फिर से व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर आयोजित करने की अपील

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर को 30 दिनों के भीतर फिर से आयोजित किया जाना चाहिए

देशबन्धु 27 Apr 2026 8:30 am

सिक्किम की रानी भारत से दार्जिलिंग चाहती थी:इंदिरा बोली- मेरे पिता से गलती हुई; सिक्किम विलय की कहानी, आज सालगिरह पर जाएंगे पीएम मोदी

PM मोदी आज सिक्किम विलय की सालगिरह पर राजधानी गंगटोक जा रहे हैं। 1947 में आजादी मिलने के 28 साल बाद तक सिक्किम भारत का पूर्ण राज्य नहीं, सिर्फ प्रोटेक्टर स्टेट था। 1975 तक वहां नामग्याल राजवंश का शासन था और भारत सिर्फ विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े मामले देखता था। 1970 के दशक में सिक्किम के राजा की अमेरिकी पत्नी ने भारत से दार्जिलिंग लेने की ख्वाहिश जताई। इंदिरा गांधी इसके खतरे समझ गईं। उन्होंने RAW चीफ से पूछा- कुछ हो सकता है? आइए, जानते हैं सिक्किम के भारत में विलय की रोचक कहानी… अंग्रेजों ने सिक्किम को नेपाल से बचाया, तो राजा ने दार्जिलिंग दे दिया 1642 में सिक्किम में बौद्ध राजतंत्र की स्थापना हुई। पहले चोग्याल बने फुंटसोग नामग्याल। सिक्किम में चोग्याल का मतलब ‘धर्म से शासन करने वाला राजा’ होता है। 19वीं सदी में भारत से तिब्बत में व्यापार करने के लिए अंग्रेजों को सिक्किम रूट की जरूरत थी। इधर सिक्किम के दाईं तरफ नेपाल की गोरखा आर्मी लगातार अपना विस्तार कर रही थी। 1814 से 1816 के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल की गोरखा आर्मी के बीच एंग्लो-गोरखा युद्ध हुआ। सिक्किम ने सोचा कि गोरखाओं के हमले बंद करवाने के लिए लड़ाई में अंग्रेजों का साथ देना चाहिए। जंग में गोरखा हार गए, तो सिक्किम में कब्जाई सारी जमीन अंग्रेजों को लौटा दी। अंग्रेजों ने यह जमीन सिक्किम को लौटा दी और सुरक्षा की गारंटी भी दी। बदले में सिक्किम के रास्ते तिब्बत से व्यापार करने का अधिकार ले लिया। धीरे-धीरे सिक्किम के अंदरूनी मामलों में भी अंग्रेजों का दखल होने लगा। 1828 में ब्रिटिश ऑफिसर कैप्टन लॉयड दार्जिलिंग गए थे। उस समय दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल का नहीं बल्कि सिक्किम का हिस्सा था। उन्हें यह जगह गर्मियों में सैनिकों के आराम और तिब्बत के ट्रेड रूट पर नजर रखने के लिए जरूरी लगी। इधर सिक्किम को भी नेपाल से सुरक्षा के लिए अंग्रेजों की जरूरत थी। इसलिए 1835 में चोग्याल ने अंग्रेजों को दार्जिलिंग तोहफे में दे दिया। बदले में उन्हें हथियार और कई तरह के तोहफे मिले। 1841 से अंग्रेजों ने सिक्किम को हर साल 3,000 रुपए का मुआवजा देना शुरू किया, जो बाद में बढ़कर 6,000 रुपए हो गया। 1889 में अंग्रेजों ने सिक्किम में नेपाली मजदूरों को आने की इजाजत दे दी। 1941 तक इनकी आबादी 75% तक पहुंच गई। सिक्किम में पहले से रह रहा भूटिया समुदाय 11% और लेपचा समुदाय सिर्फ 14% तक सीमित हो गया था। अंग्रेज गए तो नेहरू ने कहा- ‘हम सिक्किम की सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे’ भारत की आजादी के समय 600 प्रिंसली स्टेट में से एक सिक्किम भी था लेकिन चोग्याल भारत में विलय के लिए तैयार नहीं थे। ‘सिक्किम: डॉन ऑफ डेमोक्रेसी’ किताब में जी. बी. एस. सिद्धु लिखते हैं, ‘सरदार पटेल सिक्किम के साथ बाकी भारतीय रियासतों की तरह ही व्यवहार करना चाहते थे। लेकिन नेहरू के विचार सिक्किम के साथ अलग व्यवहार करने के थे।’ नेहरू चाहते थे कि जैसे भूटान के साथ भारत ने मित्रता की संधि की है, वैसे ही सिक्किम के साथ भी हो जाए। 1950 में भारत-सिक्किम शांति समझौता हुआ। इसके तहत सिक्किम भारत का प्रोटेक्टर स्टेट यानी संरक्षित राज्य बना। अब सिक्किम की सुरक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी भारत की थी। भारत वहां सेना तो तैनात कर सकता था, लेकिन सिक्किम के आंतरिक मामलों में दखल नहीं कर सकता था। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, ‘अगर सिक्किम या भूटान पर कोई दूसरा देश हमला करता है, तो हम उनकी सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे।’ इधर भारत की आजादी के समय सिक्किम की अंदरूनी राजनीति में उथल-पुथल मची थी। जो लोग सिक्किम का भारत में विलय चाहते थे, उन्होंने सिक्किम स्टेट कांग्रेस पार्टी बनाई। काजी लेहेंडप दोरजी इसके अध्यक्ष बने। आगे चलकर उन्होंने सिक्किम नेशनल कांग्रेस बनाई। वहीं सिक्किम की आजादी चाहने वालों ने सिक्किम नेशनल पार्टी बनाई। सिक्किम की रानी दार्जिलिंग वापस चाहती थी, राजा ने आजाद राज्य की मांग की सिक्किम की सीमा भारत के साथ-साथ चीन से भी लगती है। 1962 में चीन से युद्ध हारने के बाद भारत ने सिक्किम में भी अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी, ताकि चीन को भारत में घुसने से रोका जा सके। 5 साल बाद 1 अक्टूबर, 1967 को चीनी सेना ने नाथू-ला के रास्ते सिक्किम में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय आर्मी इस हमले को रोकने में सफल रही, लेकिन अभी इस सीमा को और मजबूत करने की जरूरत थी। दूसरी तरफ सिक्किम के चोग्याल पाल्डेन थोंडुप नामग्याल 1950 की संधि को बदलकर, सिक्किम को भूटान जैसा दर्जा देने की मांग करने लगे। वह सिक्किम को भारत से अलग पहचान दिलाना चाहते थे और लगातार विदेश यात्राएं कर रहे थे। चोग्याल की पत्नी होप कूक अमेरिकी नागरिक थीं, कई लोग उन्हें अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट भी मानते थे। उन्होंने एक आर्टिकल में लिखा, '1835 में सिक्किम के राजपरिवार ने अंग्रेजों को दार्जिलिंग लीज पर दिया था। राजपरिवार दार्जिलिंग को वापस मांग सकता है।' चोग्याल भारत से आजादी चाहते थे, लेकिन सिक्किम की जनता चोग्याल से। 1960 और 70 के दशक में सिक्किम में राजशाही का विरोध बढ़ने लगा। देश की 75% से ज्यादा नेपाली आबादी चोग्याल पर भेदभाव के आरोप लगा रही थी। चुनाव में गड़बड़ी के आरोप भी लग रहे थे। ये सिक्किम को भारत में शामिल करने का सबसे सही मौका था। तीन फेज में सिक्किम का भारत में विलय हुआ पहला फेज: सिक्किम में हो रहे विरोध को समर्थन, विपक्षी पार्टियों से हाथ मिलाया इंदिरा गांधी सिक्किम की समस्या का हल चाहती थीं। उन्होंने मुख्य सचिव पी. एन. धर से कहा, ‘मेरे पिता ने सिक्किम के लोगों की भारत में शामिल होने की इच्छा न मानकर गलती की।’ इंदिरा ने खुफिया एजेंसी RAW के चीफ आर. एन. काओ से पूछा- 'क्या आप सिक्किम के मामले में कुछ कर सकते हैं?' काओ ने कलकत्ता में RAW और IB के रीजनल ऑफिस के इंचार्ज पी. एन. बनर्जी और गंगटोक में क्रॉस बॉर्डर इंफॉर्मेशन जुटाने के लिए तैनात ऑफिसर अजीत सिंह स्याली से बात की। सिक्किम को भारत में मिलाने के लिए 5 काम तय हुए… बनर्जी और स्याली ने 1973 में सिक्किम में ऑपरेशन - 'जनमत' और 'ट्विलाइट' शुरु किया। यह सिक्किम नेशनल कांग्रेस के काजी और जनता कांग्रेस के के. सी. प्रधान के कोडनेम थे। इन दोनों ने चोग्याल के खिलाफ लड़ाई में साथ आकर जॉइंट एक्शन कमेटी बनाई थी। दूसरा फेज: भारत ने चोग्याल के गार्ड्स हटाए, सिक्किम में चुनाव कराए आखिरी फेज: सिक्किम के लोगों ने भारत में शामिल होने पर किया वोट, चोग्याल की सत्ता खत्म --------ये खबर भी पढ़िए… एक गलती से हर घंटे दो परमाणु बम ‘फूटने’ लगे: आग बुझाने वालों को खून की उल्टियां, स्किन में फफोले; 40 साल बाद भी जानलेवा है चर्नोबिल 26 अप्रैल 1986 यानी आज से ठीक 40 साल पहले। तब के सोवियत रूस का हिस्सा रहे यूक्रेन का प्रिपयत शहर। रात के 1 बजकर 28 मिनट पर 25 साल के फायरफाइटर वसिली इग्नातेंको की नींद एक फोन से टूटी। आवाज आई- कहीं आग लगी है, तुरंत आओ। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 27 Apr 2026 4:50 am

15 दिन में सैलरी, अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूल में:पीएम बालेन शाह के 30 दिनों की कहानी; नेपाल को बदलेंगे या तानाशाह बनेंगे

27 मार्च 2026 यानी आज से ठीक १ महीने पहले। 35 साल के बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पीएम बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवा दिया गया। सरकारी दफ्तरों से नेताओं की तस्वीरें उतरवा दी गईं। छात्र राजनीति पर रोक लगा दी गई। अब अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना होगा, जबकि कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी मिलेगी। इसके साथ ही भारत से 100 रुपए से ज्यादा का सामान लाने पर टैक्स भी लगा दिया गया। इन फैसलों के बीच महज एक महीने में बालेन के 2 मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं। बॉर्डर के लोग धरने पर हैं और बालेन का गीत गाने वाले जेन-Z और छात्र भी अब सवाल पूछने लगे हैं। बालेन शाह की पिछली जिंदगी, बतौर पीएम 30 दिनों के काम का एनालिसिस और आगे की पूरी कहानी; जानेंगे मंडे मेगा स्टोरी में… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा -------- ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ:पापा के कहने पर 'किलर' बने, दोस्त को छत से फेंकने पर अड़े; अब ईरान को बास्टर्ड कहा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 अप्रैल की शाम गालियों से भरा एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘मंगलवार को ईरान ऐसा नजारा देखेगा, जो उसने पहले कभी नहीं देखा होगा! ओ पागल, बास्टर्ड! होर्मुज स्ट्रेट खोल दो, वरना तुम नर्क के लिए तैयार रहो।’ उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 27 Apr 2026 4:50 am

बंगाल चुनाव, मायने डर:ममता के मोहल्ले में पुलिस की दादागिरी, बाहर TMC की; लोग बोले- मुंह खोला तो रोजी-रोटी जाएगी

‘ये बंगाल है, वेस्ट बंगाल, बंगाली में बात करो… जो बोला जाए उसका जवाब बंगाली में दो।‘ ये खुद को पुलिसवाला कह रहे। जगह- कोलकाता का भवानीपुर। मोहल्ला ममता का। हां ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के घर के बाहर। हमने एतराज जताया, कहा क्या बंगाली आनी जरूरी है, हिंदी में बात नहीं कर सकते? इस बीच पुलिस वाले के साथ और पुलिस वाले आ जाते हैं। सब सादे कपड़ों में हैं। बहस के बीच उनमें से कुछ तल्ख होते हैं और कुछ नरम भी, लेकिन हमारे कैमरे की रिकॉर्डिंग डिलीट कराने के पीछे पड़ जाते हैं। फिर हमें वहां से जाने को कहते हैं। ये महज एक घटना नहीं है। पश्चिम बंगाल में चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान हमें डर का ये माहौल जगह-जगह नजर आया। भवानीपुर मुंह खोला तो रोजी-रोटी चली जाएगी, परिवार होता तो मैं भी नहीं बोलता पश्चिम बंगाल में पिछले एक महीने की रिपोर्टिंग के दौरान जब हमने चुनाव पर सवाल किए, तो लोग कैमरे पर बोलने से बचते दिखे। पहले लगा कि शायद सहज नहीं हैं, लेकिन बाद में कई लोगों ने ऑफ कैमरा बात करने की इच्छा जताई। तब समझ आया कि ये झिझक नहीं, डर है। लोगों ने TMC का दबाव होने और डर की आशंका जताई। भवानीपुर में हमें कैटरिंग का काम करने वाले चंदन दास मिले। उन्होंने बताया, लोग यहां खुलकर नहीं बोलते, क्योंकि चुनाव के बाद हिंसा का डर रहता है। मुझे कोई डर नहीं, क्योंकि मेरा परिवार नहीं है। अगर होता तो मैं भी आपसे कभी बात नहीं करता। रंगाई-पुताई का काम करने वाले बबला कहते हैं, ‘यहां लोग उसी पार्टी के साथ चलना सुरक्षित समझते हैं, जो सरकार में होती है।‘ अर्जुन दास फुटपाथ की ढलाई का काम करते हैं। वे कहते हैं, ‘मैं किसी के बारे में कुछ नहीं बोलूंगा, वरना रोजी-रोटी छिन जाएगी। पहले भवानीपुर में वोट देता था। अब नाम कटवाकर झारखंड में अपने गांव पर ट्रांसफर करा लिया है।‘ वहीं, मधुश्री कौर महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बताती हैं। उनका कहना है कि कोलकाता में लोग खुलकर राय रखने में हिचकते हैं। पश्चिमी मेदिनीपुर हर बार पोलिंग बूथ से लौटाया, 40 साल में पहली बार वोट डाला बंगाल में पहले चरण की वोटिंग के दौरान हम पश्चिमी मेदिनीपुर में थे। यहां 40 साल के महादेव मांडी बताते हैं, ‘अबकी पहली बार वोट डाला। पहले जब भी वोटिंग सेंटर गया, ये कहकर लौटा दिया गया कि तुम्हारा वोट डल चुका है।‘ वो हैरानी जताते हुए कहते हैं, ’वोटर आईडी कार्ड मेरा पास है, लेकिन मेरा वोट कोई और डाल रहा था। मुझे कभी मौका ही नहीं मिला।‘ यहां मिले एक स्थानीय बताते हैं कि 280 नंबर अयोध्याबार बूथ को पहले चरण की वोटिंग में TMC कार्यकर्ताओं ने जाम कर दिया था। वो BJP के वोटर बूथ तक पहुंचने नहीं दे रहे थे। जब दैनिक भास्कर की टीम वहां पहुंची, तब बूथ के बाहर 7 से 8 महिला एजेंट्स और एक पुरुष एजेंट मिले। ये बिना किसी रोक-टोक बैठे रहे। इन पर बूथ से 200 मीटर का फासला मेंटेन करने का दबाव भी नहीं था। इस पर TMC कार्यकर्ता अभिजीत कहते हैं, ‘BJP कार्यकर्ताओं के लगाए आरोप महज अफवाह हैं। बूथ पर सुरक्षा के लिए ममता बनर्जी की पुलिस नहीं, सेंट्रल फोर्स तैनात है। उनसे घटना की पुष्टि की जा सकती है।‘ पानीहाटी पीड़ित डॉक्टर की मां की सभा खाली, TMC वाले निगरानी कर रहे आरजी कर अस्पताल में रेप-मर्डर की पीड़ित की मां रतना देबनाथ यहां से BJP उम्मीदवार हैं। लोग उनका समर्थन करने या सभा में शामिल होने तक से डर रहे हैं। सभा के दौरान हमें एक महिला मिलीं। वो रतना का समर्थन करते हुए कहती हैं, ‘हम सब उनके साथ हैं, लेकिन साथ खड़े नहीं हो सकते। TMC के लोग यहीं घूम रहे हैं। अगर देख लिया, तो हमें कोई मदद नहीं मिलेगी।‘ जब हम महिला से बात कर रहे थे, तभी एक बाइक सवार वहां से तीन-चार बार चक्कर काटता दिखा। मैं बाइक वाले को रोककर पूछती हूं, आप किसी पार्टी से हैं क्या ? वो अपना नाम पार्थो दास बताता है। ठेकेदारी का काम करता है। फिर उसने कहा- आप यहां पहली बार आई हैं, इसलिए फॉलो कर रहा था और कोई वजह नहीं है। राजरहाट गोपालपुर पाड़ा क्लबों से TMC का प्रचार, इसलिए बोलने से कतरा रहे कोलकाता में रहने वाले सुदर्शन मिश्रा अक्सर लोकल क्लब जाते हैं। क्लब का नाम केष्टोपुर है। सुदर्शन कहते हैं, ‘क्लब के बारे में बहुत कुछ जानकर भी कुछ नहीं कह सकता। बगल में रहकर उनके खिलाफ कैसे बोलूं। जिसे जहां अपना स्वार्थ लगता है, वहां काम करता है। यहां सब लोग साथ रहते हैं, इसलिए कुछ कहने से डर लगता है।’ सुदर्शन इतना बताते हैं, लेकिन बाकी लोग कुछ भी कहने को तैयार नहीं होते। वे कहते हैं, ’आगे चले जाइए, यहां आपसे कोई बात नहीं करेगा।’ संदेशखाली चुनाव से पहले हिरासत में लिया, अबकी पता नहीं क्या करेंगे संदेशखाली में स्थानीय लोग बताते हैं कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान वोटिंग से ठीक दो दिन पहले संदेशखाली पुलिस ने उन्हें उठा लिया और जेल में डाल दिया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यही घटना हुई। उन्हें वोटिंग से दो दिन पहले फिर हिरासत में ले लिया गया। 2026 के चुनाव को लेकर वे डरे हुए हैं। उन्हें अंदाजा नहीं कि दूसरे चरण की वोटिंग से पहले उनके साथ क्या होगा। शाहजहां के गुंडे आज भी धमका रहे, पुलिस भी उनकी सुनती यहीं मिली एक महिला ने बताया कि गांव में महिलाओं और लड़कियों का उत्पीड़न आम बात थी। शाहजहां के डर से कई परिवार उजड़ गए। उन्होंने पुलिस पर भी मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि वो ग्रामीणों की सुनने के बजाय शाहजहां के इशारों पर काम करती थी। वे ममता बनर्जी के दौरे पर निराशा जताते हुए कहती हैं, ‘दीदी ने लोकल लोगों की समस्याएं सुनने के बजाय सिर्फ बाहरी लोगों से बात की। अब भी शाहजहां के आदमी हमें धमका रहे हैं, इसलिए अब चुप नहीं रहेंगे और बदलाव के लिए संघर्ष करेंगे।‘ एक्सपर्ट बोले- पश्चिम बंगाल चुनाव में डर का फैक्टर 30% बंगाल चुनाव में डर के माहौल को लेकर हमने रविंद्र भारती यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रवर्ती से बात की। वे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल के चुनावों में डर बड़ा फैक्टर है। पिछले तीन-चार चुनावों में TMC की जीत में डर की भूमिका लगभग 30% रही है।‘ ‘वोटरों और BJP कार्यकर्ताओं को डराकर TMC चुनाव प्रचार करने और वोटिंग करने से रोकती है। लोगों को धमकाया जाता है कि अगर BJP को वोट दिया, तो 'लक्ष्मी भंडार' जैसी सरकारी योजनाओं का फायदा मिलना बंद हो जाएगा।‘ ​वे आगे कहते हैं कि सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद BJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की जा रही है। TMC का राजनीतिक कल्चर ही हिंसा और डर के आधार पर चुनाव जीतना रहा है। मालदा की एक घटना का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं, ‘जब सत्ताधारी पार्टी के समर्थक जजों को डरा सकते हैं, तो आम जनता को डराना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है।‘ TMC बोली- ये डर TMC से नहीं, BJP से TMC में आईटी सेल और सोशल मीडिया सेल के प्रमुख देवांशु भट्टाचार्य इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। वे कहते हैं, 'ये डर TMC से नहीं, BJP से है। बंगाल में एग्जिट पोल इसलिए कई बार गलत साबित होते हैं क्योंकि लोग सार्वजनिक तौर पर BJP का समर्थन करते हैं, लेकिन वोट TMC को देते हैं।' भवानीपुर की घटना को लेकर वे कहते हैं कि ये व्यक्ति विशेष का व्यवहार हो सकता है। पार्टी ऐसी किसी भी घटना का समर्थन नहीं करती है। ………………….. पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां BJP कैंडिडेट, सभा में कुर्सियां खाली पानीहाटी सीट से आरजीकर रेप केस की पीड़ित की मां रतना देबनाथ BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। 12 अप्रैल को सभा करने गईं तो कुर्सियां खाली पड़ी थीं। रतना देबनाथ अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई बता रही हैं। महिलाएं उनकी सभा के सामने से गुजरते हुए रुकती हैं। पूछने पर कहती हैं, ‘हम साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 27 Apr 2026 4:48 am

अफगानिस्तान: ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अभियान में 80 लोग गिरफ्तार, भारी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद

गृह मंत्रालय ने एक बयान में बताया क‍ि अफगान कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने देश के अलग-अलग प्रांतों में चलाए गए ऑपरेशन के दौरान ड्रग्स तस्करी के आरोप में 80 लोगों को गिरफ्तार किया है

देशबन्धु 26 Apr 2026 11:19 pm

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बाद तेल बाजार को उबरने में लगेंगे महीनों: रूस

रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अवरोध के बाद वैश्विक तेल बाजार को सामान्य स्थिति में लौटने में कई महीने लग सकते हैं

देशबन्धु 26 Apr 2026 10:49 pm

ईरान का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला: खाड़ी देशों से भारत आ रही उड़ानों की संख्या बढ़ी, फंसे हुए भारतीयों के लिए बड़ी राहत

विदेश मंत्रालय ने रविवार को बताया कि ईरान का हवाई क्षेत्र कार्गो और चार्टर्ड उड़ानों के लिए आंशिक रूप से खुला है, लेकिन भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे इस देश की यात्रा करने से बचें, और जो लोग पहले से ही वहां मौजूद हैं, उनसे आग्रह किया जाता है कि वे दूतावास की मदद से जमीनी सीमा के रास्ते वहां से निकल जाएं।

देशबन्धु 26 Apr 2026 10:44 pm

US से बातचीत को तैयार हुआ ईरान? ओमान से वापस PAK जाएंगे अराघची, 24 घंटे में दूसरा दौरा

शनिवार को विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को इस्लामाबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाक़ात की थी और फिर ओमान चले गए. इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि अमेरिका से कोई प्रतिनिधत्व पाकिस्तान नहीं जाएगा.

देशबन्धु 26 Apr 2026 6:39 pm

FBI: काश पटेल की कुर्सी पर संकट, ट्रंप जल्द कर सकते हैं एफबीआई प्रमुख की छुट्टी

काश पटेल इन दिनों कई तरह के विवादों के कारण सुर्खियों में हैं। पॉलिटिको की एक रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि पटेल को लेकर प्रशासन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।

देशबन्धु 26 Apr 2026 6:24 pm

संडे जज्बात-हम अधेड़ कुंवारे कौवों जैसे अपशकुन माने जाते हैं:सरकार हमें देती है पेंशन, जाने कितने जानवरों से रेप करते पकड़े गए

लोग मुझे मेरे नाम से कम, रं@#% कहकर ज्यादा बुलाते हैं। मुझे शुभ कामों से दूर रखा जाता है। गलती से पहुंच जाऊं तो लोगों का चेहरा उतर जाता है। मैं वीरेंद्र दून। हरियाणा के जिला हांसी के गांव पेटवाड़ का रहने वाला हूं। मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी कमी है कि 46 साल का होने के बावजूद मेरी शादी नहीं हुई। इसलिए लोग मुझे रं@#% रं@#% कहकर पुकारते हैं। गांव और रिश्तेदारी में शादी-ब्याह हो, तो लोग मुझे बुलाते तो जरूर हैं, लेकिन काम करवाने के लिए- कुर्सियां लगाने, पानी भरवाने, टेंट संभालने के लिए। घर में हवन हो तो कह दिया जाता है- तू यहां से हट जा, जोड़ा बैठेगा। इस व्यवहार की इतनी आदत हो चुकी है कि कोई इज्जत दे तो अजीब लगता है। मैं अकेला नहीं हूं। हरियाणा में बच्चियों को गर्भ में मारने की वजह से हजारों पुरुष हैं, जो कुंवारे रह गए हैं। शादी न होने से कई तो शराब में डूब गए, कइयों ने जान तक दे दी। ऐसे ही लोगों के बीच से निकला है हमारा एक संगठन- 'कुंवारे मर्दों की यूनियन’ दरअसल, मैं और मेरा दोस्त सीलू सांगवान साथ-साथ बड़े हुए। सीलू 45 साल का है और मैं 46 साल का। हम दोनों ने 12वीं तक पढ़ाई साथ की है। उस समय जिंदगी बहुत सीधी लगती थी। न कोई चिंता थी, न कोई सवाल। सोचते थे, बड़े होंगे, कमाएंगे और अपना घर बसाएंगे। हालांकि, किस्मत ने हमारे लिए कुछ और ही तय कर रखा था। जब शादी की उम्र हुई तो घर वालों ने कई जगह रिश्ते की बात चलाई, लेकिन हर बार कोई न कोई कमी निकाल दी जाती थी। सबसे बड़ी कमी यही बताई जाती थी कि मेरे पास जमीन कम है और कोई पक्की नौकरी भी नहीं है। धीरे-धीरे साल गुजरते गए। बहुत कोशिशों के बाद भी मेरी शादी नहीं हो पाई। मैं कुंवारा रह गया। जब 30 साल का हुआ, तब दिल्ली में पीएसओ यानी पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर की नौकरी मिली। सोचा था कि अब शायद शादी हो जाएगी, और अगर नहीं भी हुई तो कम से कम जिंदगी अच्छे से कट जाएगी। नौकरी करते एक साल भी नहीं बीता, मैं फिर बेरोजगार हो गया। वजह पता चली तो सन्न रह गया। मुझे अपशकुन माना गया, क्योंकि कुंवारा था। इसके बाद फरीदाबाद गया। जैसे-तैसे फिर नौकरी मिली। धीरे-धीरे वहां भी सभी को पता चल गया कि मेरी शादी नहीं हो रही है। लोग कहने लगे कि दूसरों की बहन-बेटियों पर गलत नजर डालेगा, इसलिए इसे हटा दो। आखिरकार यही वजह बताते हुए मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। वे बातें मुझे अंदर तक चुभ गईं। कई रात तो मैं सो नहीं पाया। तब तक 38 साल का हो चुका था। शादी की कोशिशें तब तक भी चल रही थीं, लेकिन कहीं बात नहीं बनी। कई महीनों तक नौकरी के लिए भटकता रहा, आखिरकार गांव लौट आया। यहीं खेती करने लगा। फिर गांव में भी यही सब होने लगा। लोगों की नजरें, ताने और तरह-तरह की फुसफुसाहटें सुनने को मिलती। किसी बात पर चर्चा होती। अगर मैं कोई मशविरा देता, तो उसे सुना नहीं जाता। लोग बीच में ही रोक देते। कहते- ‘तू रं@#%है, तुझे क्या पता?’ यही नहीं अपने घर में भी तवज्जो नहीं मिलती थी। मेरे कहने पर कोई फसल बोई जाती और अच्छी हो जाती, तो उसका क्रेडिट बड़े भाई को दे दिया जाता। कोई भी शुभ काम होता तो मुझे दूर बैठाया जाता। मेरे ही घर में हवन होता तो कहा जाता- ‘दूर बैठ, तू यहां बैठेगा तो अशुभ हो जाएगा।’ हां, लेकिन आधी रात में खेत में पानी देना हो तो सबको मेरी याद आ जाती थी। उसमें भी ताने मारतेकि- ‘तेरे भाई की शादी हो चुकी है। अगर उसे मोटर चलाते समय करंट लग गया, सांप ने काट लिया या ठंड लग गई तो क्या होगा? उसके बच्चों का क्या होगा? तेरा क्या है, तू तो रं@#% है।’ यह सब सुनकर मैं अंदर से टूट जाता था। किसी की शादी-ब्याह में जाने से रोका जाता था। कहा जाता कि वहां जाओगे तो लोग क्या कहेंगे? अगर कुछ गलत हो गया, तो दोष तुम्हारे सिर मढ़ दिया जाएगा। मेरे लिए कभी भी नए कपड़े तक नहीं खरीदे गए। हमेशा भाई की उतरन पहननी पड़ती थी। घरवाले कहते थे- ‘तुम्हें कौन सा ससुराल जाना है?’ घर के बच्चे तक भाव नहीं देते थे। कभी भाई के बच्चों को डांट देता तो भाभी कहती- ‘तेरी तो शादी नहीं हुई, बच्चे नहीं हुए, इसलिए तुझे मेरे बच्चे देखे नहीं जाते।’ यहां तक कि छोटे बच्चों को मेरे पास नहीं आने दिया जाता। उनके मां-बाप कहते कि उसके पास मत जाओ, गलत बातें सिखाएगा। मुझे एक तरह से कौवा बना दिया गया था। जैसे किसी शुभ काम के समय कौवे को अपशकुन माना जाता है, वैसे ही मुझे माना जाता है। हरियाणा में कुछ अविवाहित पुरुष ऐसे भी हैं, जिन्हें अपने ही घर में रहने तक की जगह नहीं दी गई। उन्हें पशुओं के बाड़े के पास रहने को मजबूर किया गया। जहां पशु बंधे होते हैं, वहीं बगल में बिस्तर लगाना पड़ता है। कहा जाता है- जाकर जानवरों के पास रहो। घर में तुम्हारे छोटे भाई की बहू है, उसे घूंघट करना पड़ेगा। वैसे भी सुबह जल्दी उठकर तुम्हें पशुओं की ही देखभाल करनी है। मैं सुबह 4 बजे उठ जाता हूं। पशुओं को चारा देता हूं, दूध निकालता हूं और उन्हें जोड़ यानी तालाब पर नहलाने ले जाता हूं। रात को फिर यही काम करता हूं। इस तरह सुबह 4 बजे उठकर रात 11 बजे जाकर सो पाता हूं। हालांकि, चाहें तो हम दलालों के जरिए पैसे देकर शादी कर सकते हैं, लेकिन कई मामलों में ठगी सामने आई है। शादी के नाम पर धोखाधड़ी का खेल चल रहा है। कई गिरोह ऐसे हैं, जो हमसे डेढ़-दो लाख रुपए लेकर शादी करवाने का दावा करते हैं। मेरे भाई की शादी भी इसी तरह करवाई गई थी, लेकिन कुछ समय बाद उसकी पत्नी जेवर और सामान लेकर भाग गई। ऐसे ही मेरे एक दोस्त ने कोर्ट मैरिज के लिए एक वकील को डेढ़ लाख रुपए दिए। डेढ़ लाख से ज्यादा के जेवर भी बनवाए। शादी हुई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद लड़की मायके जाने का बहाना बनाकर सब लेकर चली गई। अब मेरा दोस्त कर्ज उतार रहा है। लोग उसका मजाक उड़ाते हैं- वाह, बड़ा बन रहा था लुगाई लाने वाला, क्या हुआ? आ गई लुगाई? अब गांव की चौपाल पर उसका अक्सर मजाक बनाया जाता है। जब इस तरह शादी टूटती है या दुल्हन चली जाती है, तो लोग जिस तरह मजाक बनाते है, वह अलग ही दर्द देने वाला होता है। अब तो हम सिर्फ समय काट रहे हैं। खाली पड़े रहते हैं, तो कुछ लोग खेत या बाग में घास कटाई का काम दे देते हैं। बदले में कभी पैसा तो कभी शराब दे देते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग गलत काम करते भी पकड़े गए। एक बार मैं एक गांव गया था, जहां कुछ लोग एक कुंवारे मर्द को पीट रहे थे। पता चला कि वह एक कुतिया के साथ रेप कर रहा था। मैंने लोगों को समझाकर उस आदमी को बचाया और उसे भी समझाया। बाद में हमारी यूनियन ने लोगों को जागरूक किया कि इससे बचें, क्योंकि इससे संक्रमण और गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे ही कुछ कुंवारे मर्द एक-दूसरे के साथ सेक्स करते पकड़े गए, जिससे गांवों में विवाद और तनाव बढ़ता दिखा। इसके खिलाफ भी हमने जागरूकता अभियान चलाया। हमारी यूनियन कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ भी काम कर रही है, ताकि बेटियों को बराबरी का दर्जा मिले और राज्य में यह समस्या खत्म हो। हम लोगों का सबसे बड़ा दर्द अकेलापन है। शादीशुदा आदमी अपनी हर बात पत्नी से साझा कर लेता है, लेकिन हम किससे कहें? हम रातभर घुटते हैं, और सुबह फिर वही जिंदगी शुरू हो जाती है। अब तो मन मर चुका है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है, मुझ पर दबाव डाला जा रहा है कि मैं अपने भाई के बच्चे को गोद ले लूं, ताकि मेरी संपत्ति उसे मिल जाए। लेकिन मैंने ऐसे कई मामले देखे हैं, जहां भाई के बच्चों को जायदाद मिलते ही वे धीरे-धीरे अविवाहित लोगों को किनारे कर देते हैं। यहां तक कि उन्हें खाना तक नहीं देते और बीमारी में इलाज भी नहीं कराते। मैंने कई ऐसे लोग देखे हैं, जिन्हें ठीक देखभाल मिलती तो वे ज्यादा जी सकते थे, लेकिन कम उम्र में ही चले गए। अब जाकर मेरे गांव और आसपास के कुंवारे पुरुष जुटे और विचार किया कि इस समस्या का हल कैसे निकाला जाए। हम कब तक समाज की नजरों में चुभते रहेंगे? बातचीत के बाद हमने फैसला किया कि एक एसोसिएशन बनाई जाए- ‘समस्त अविवाहित पुरुष समाज एंड एकीकृत रं@#%यूनियन’। तय किया गया कि अब हम इसके जरिए अपने हक की आवाज उठाएंगे। हमारी यूनियन ने राज्य में प्रदर्शन कर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई। सरकार ने ध्यान दिया और अब हमें 3200 रुपए पेंशन मिल रही है। हालांकि, कई अविवाहित पुरुषों की फैमिली आईडी नहीं बन पाई है, इसलिए उन्हें पेंशन नहीं मिल रही। आखिर जिनका परिवारिक रिकॉर्ड ही नहीं है, वे फैमिली आईडी कहां से लाएं? हमारी यूनियन में लगभग साढ़े पांच लाख लोग हैं, जिनमें से 80 हजार को ही पेंशन मिल रही है। मेरे दोस्त सीलू सांगवान के माता-पिता नहीं हैं। इसलिए उनकी फैमिली आईडी नहीं बन पाई, जिससे उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा। आखिर में सरकार से बस एक ही मांग है- हमें शक की नजर से न देखा जाए। हम भी इंसान हैं। हमें सम्मान के साथ जीने का हक मिले। (वीरेंद्र दून ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------- 1- संडे जज्बात-मैंने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने मुझे झकझोर दिया था मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-उन्होंने हेलिकॉप्टर से लाश भेजी, हम ट्रेनें भर देंगे:दिल्ली वालों ने पीट-पीटकर मार डाला मेरा बेटा, क्योंकि हमारी शक्ल अलग है मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 26 Apr 2026 5:44 am

एक गलती से हर घंटे दो परमाणु बम ‘फूटने’ लगे:आग बुझाने वालों को खून की उल्टियां, स्किन में फफोले; 40 साल बाद भी जानलेवा है चेर्नोबिल

26 अप्रैल 1986 यानी आज से ठीक 40 साल पहले। तब के सोवियत रूस का हिस्सा रहे यूक्रेन का प्रिपयत शहर। रात के 1 बजकर 28 मिनट पर 25 साल के फायरफाइटर वसिली इग्नातेंको की नींद एक फोन से टूटी। आवाज आई- कहीं आग लगी है, तुरंत आओ। वसिली उठे। वर्दी पहनी। जाते-जाते पत्नी ल्युडमिला से बस इतना कहा- ‘घबराओ मत। जल्द लौटूंगा।’ ल्युडमिला नहीं जानती थी कि ये उनके पति के आखिरी शब्द हैं। वसिली कभी वापस नहीं आए। क्योंकि जिस ‘आग’ को बुझाने वे गए थे, वो कोई साधारण आग नहीं थी। वो चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट के रिएक्टर-4 की आग थी, वो दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु त्रासदी बन गई। 1980 का दशक। अमेरिका और सोवियत रूस के बीच कोल्ड वार अपने चरम पर थी। दोनों देश एक-दूसरे को दिखाना चाहते थे कि हम ताकतवर हैं, हम आधुनिक हैं। इसी होड़ में सोवियत रूस ने यूक्रेन के एक छोटे से कस्बे चेर्नोबिल के पास एक विशाल न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाया। 1983 में तैयार हुआ ये प्लांट यूक्रेन की राजधानी कीव से 130 किलोमीटर दूर था और वहां की 10% बिजली अकेले यही प्लांट देता था। प्लांट से महज 3 किलोमीटर दूर था प्रिपयत। एक खूबसूरत, आधुनिक शहर, जहां 50 हजार लोग रहते थे। ज्यादातर प्लांट के ही कर्मचारी और उनके परिवार। कहानी में आगे बढ़ने से पहले सीधे शब्दों में जान लेते हैं कि ये RBMK रिएक्टर प्लांट काम कैसे करता था- यूरेनियम की छड़ें को गर्म करो, उससे पानी गर्म होगा, भाप बनेगी, भाप से टर्बाइन घुमेगा और बिजली तैयार। 25 अप्रैल, 1986 को चेर्नोबिल प्लांट के रिएक्टर-4 में पानी के पंप को लेकर एक रूटीन टेस्ट किया जाना था। इसका मकसद ये देखना था कि अगर रिएक्टर एनर्जी जेनरेट करना बंद कर दे, तो बची हुई बिजली से वॉटर पंप्स, बैकअप जेनरेटर चालू होने तक रिएक्टर को ठंडा रख पाते हैं या नहीं। बिजली की मांग बढ़ने से टेस्ट सुबह नहीं हो सका, तो नाइट शिफ्ट को जिम्मेदारी दी गई। रिएक्टर कंट्रोल इंजीनियर लियोनिद टॉपटुनोव और नाइट शिफ्ट सुपरवाइजर अलेक्सांद्र अकिमोव टेस्ट कंडक्ट कर रहे थे। डिप्टी चीफ इंजीनियर अनातोली डायटलोव इसकी निगरानी कर रहे थे। यहां पेच ये था कि टॉपटुनोव, जिनके पास टेस्ट की जिम्मेदारी थी, वे 25 साल के थे और उनके पास महज 3 महीने का अनुभव था। रात 11 बजकर 10 मिनटः रिएक्टर 1 हजार मेगावॉट (MW) कैपिसिटी पर काम कर रहा था। टेस्ट 700 MW पर किया जाना था। कंट्रोल रॉड्स अंदर डालकर पावर घटाई गई, जिससे रिएक्शन धीमी हो सके। रात 12 बजकर 28 मिनटः अचानक पावर 700 के बजाय 30 MW तक गिर गई। इसे ऊपर लाने के लिए कुछ कंट्रोल रॉड्स बाहर निकाली गईं। रात 1 बजेः पावर नहीं बढ़ी, तो सुपरवाइजर ने और कंट्रोल रॉड्स निकालने को कहा। इंजीनियर टॉपटुनोव ने मना करते हुए कहा कि कम से कम 15 कंट्रोल रॉड्स रिएक्टर में होनी ही चाहिए। रात 1 बजकर 5 मिनटः डिप्टी चीफ इंजीनियर ने सस्पेंड करने की धमकी दी। टॉपटुनोव ने और रॉड्स निकालीं। अब रिएक्टर में महज 8 रॉड्स थीं, जो सेफ्टी प्रोटोकॉल के खिलाफ था। रात 1 बजकर 23 मिनटः 203 कंट्रोल रॉड्स बाहर होने से रिएक्टर कैपिसिटी एकदम से बढ़कर 2,600 MW तक पहुंच गई। रिएक्टर भट्टी की तरह तपने लगा। जेनरेटर चालू होकर पूरी क्षमता तक पहुंच पाता, उसके पहले ही अंदर मौजूद पानी जिसका काम रिएक्टर ठंडा करना था, भाप बनकर उड़ गया। इससे तापमान और बढ़ गया। रात 1 बजकर 25 मिनटः सुपरवाइजर अकिमोव ने स्थिति हाथ से निकलती देख इमरजेंसी शटडाउन बटन (AZ-5) दबाया, जिससे सारी कंट्रोल रॉड्स एक साथ अंदर चली गई। कंट्रोल रॉड्स के अंदर जाते ही रिएक्शन कंट्रोल हो जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। RBMK रिएक्टर में एक बड़ा ‘डिजाइन फ्लॉ’ था। कंट्रोल रॉड्स की टिप ग्रेफाइट की बनी थी, जिसने रिएक्शन को कई गुना बढ़ा दिया। रिएक्टर में 2 भयानक विस्फोट हुए, जिससे ऊपर लगी 1 हजार टन की कवर प्लेट उड़़ गई। बाहर खड़े लोगों ने नीली रोशनी की एक लकीर आसमान की तरफ जाती हुई देखी। कुछ ने सोचा रंग-बिरंगी आतिशबाजी है। वे नहीं जानते थे कि वो रोशनी जानलेवा रेडिएशन की थी। फायर फाइटर वसिली इग्नातेंको अपने 20 साथियों के साथ प्लांट पहुंचे। उन्हें बताया गया था कि एक फैक्ट्री में आग है। उनके पास न कोई सुरक्षा उपकरण थे और न ही रेडिएशन मापने का कोई यंत्र। प्लांट की छत पर जो ग्रेफाइट के जले-पिघले टुकड़े बिखरे थे, वसिली के साथियों ने उन्हें हाथ से उठाकर फेंका। उन्हें क्या पता था कि वो टुकड़े इतने रेडियोएक्टिव थे कि कुछ ही मिनटों में किसी की जान ले सकते थे। कुछ ही देर में फायरफाइटर्स को उल्टियां होने लगीं। त्वचा लाल पड़ गई। आंखें जलने लगीं। एक-एक करके वे बेहोश होकर गिरने लगे। इलाज के दौरान कई फायरफाइटर्स के शरीर अंदर से टूटने लगे थे। उनकी त्वचा जलकर उतर रही थी और मांस के लोथड़े तक गिरने लगे थे। वसिली और उनके 20 साथियों ने आने वाले हफ्तों में दम तोड़ दिया। पत्नी ल्युडमिला बाद में याद करती हैं- ‘अस्पताल में वसिली को शीशे के पीछे रखा गया था। मैं उन्हें छू भी नहीं सकती थी। जब भी मिलती, नर्स चिल्लाती- दूर रहो, ये रेडियोएक्टिव हैं। मैंने कहा- मुझे परवाह नहीं।’ सोवियत यूनियन ने घटना से निपटने के लिए तुरंत एक हाई लेवल टीम बनाई, जिसकी कमान डिप्टी प्राइम मिनिस्टर बॉरिस शरबीना को सौंपी। टीम में कुर्चाटोव इस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर रिसर्च के प्रोफेसर वेलेरी लेगासोव को एक्सपर्ट के रूप में जोड़ा गया। जब वेलेरी मौके पर पहुंचे, तो उन्हें प्लांट का सेंसर 3.6 रॉन्टगेन का रेडिएशन दिखा रहा था। जो खतरनाक जरूर था, लेकिन तुरंत जानलेवा नहीं। लेगासोव को शक हुआ। नई मशीन मंगवाई। असली आंकड़ा था- 15,000 रॉन्टगेन। यानी 4000 गुना ज्यादा। 500 रॉन्टगेन के रेडिएशन में एक मिनट में जान जा सकती है। यहां 15,000 था। इसे ऐसे समझिए कि उस रात चेर्नोबिल से जितना रेडिएशन हवा में फैला, उसकी तुलना हिरोशिमा पर हर घंटे दो एटम बम गिराए जाने से की जाती है। लेगासोव ने डिप्टी प्राइम मिनिस्टर बॉरिस शरबीना से कहा- ‘प्रिपयत शहर तुरंत खाली कराओ। 50 हजार लोगों की जान खतरे में है।’ बॉरिस ने मना कर दिया। उनकी चिंता थी कि खबर फैली तो पूरी दुनिया में सोवियत रूस की बदनामी होगी। इस बीच प्रिपयत के हॉस्पिटल नंबर-126 में भयावह दृश्य था। हर घंटे सैकड़ों लोग आ रहे थे। जलन, उल्टी, बेहोशी के साथ। हॉस्पिटल भर गया। गेट लगाया गया। कई लोगों ने बाहर ही दम तोड़ दिया। हादसे में बचे एक चश्मदीद अलेक्सांद्र युवचेंको बताते हैं- कुछ लोग अपने छोटे बच्चों को नर्सों की गोद में सौंप रहे थे। उन्हें पता था वे नहीं बचेंगे। बस चाहते थे कि बच्चा बच जाए। 27 अप्रैल की सुबह हालात और बिगड़ने पर बॉरिस राजी हुए। 47 हजार से ज्यादा लोगों को 1000 बसों में भरकर शहर से निकाला गया। कहा गया 3 दिन में वापस आ जाओगे। वे लोग कभी वापस नहीं आए। चेर्नोबिल प्लांट में लगी आग बुझाना मुश्किल हो रहा था। रिएक्टर खुला था और उसमें मौजूद ग्रैफाइट के ब्लॉक्स जल रहे थे। जब फायरब्रिगेड से बात नहीं बनी, तो हेलिकॉप्टर की मदद से प्लांट पर लगभग 5 हजार टन बोरॉन पार्टिकल, रेत और मिट्टी बरसाए गए। आग बुझाने में 10 दिन लगे, लेकिन खतरा अभी टला नहीं था। प्लांट के नीचे भारी मात्रा में पानी मौजूद था। वेलेरी को डर था कि अगर पिघला हुआ यूरेनियम उससे टकराया, तो पानी तेजी से भाप बन जाएगा, जिससे बड़ा विस्फोट हो सकता है। तब तीन कर्मचारी आगे आए। उन्होंने रिएक्टर के नीचे मौजूद रेडियोएक्टिव मटेरियल से भरे हिस्से में गए और वाल्व खोलकर पानी निकाला। सोवियत संघ ने सैकड़ों माइनर्स की मदद से रिएक्टर के नीचे सुरंग खोदकर नीचे एक कॉन्क्रीट बेस तैयार करवाया, जिससे यूरेनियम धरती में जाकर मिट्टी की उर्वरता और पास मौजूद प्रिपयत नदी के पानी को दूषित न कर पाए। माइनर्स ने रेडिएशन के बीच दिन-रात काम किया, कई लोग गर्मी के कारण कम कपड़ों में काम करते थे। इस वजह से वे रेडिएशन के डायरेक्ट कॉन्टैक्ट में आए और रेडिएशन से जुड़ी बीमारियों के शिकार हुए। UN के मुताबिक, चेर्नोबिल से निकला रेडिएशन हिरोशिमा में गिराए परमाणु बम से 400 गुना ज्यादा था। अगले 4 सालों में 5000 से ज्यादा लोग थायरॉइड कैंसर से मरे। ग्रीनपीस जैसी संस्थाएं मानती हैं कि सोवियत रूस ने आंकड़े छुपाए और असली संख्या 93 हजार से 2 लाख के बीच हो सकती है। प्लांट के आस-पास 30 किलोमीटर का इलाका आज भी ‘एक्सक्लूजन जोन’ है। यहां न रहना मुमकिन है, न खेती। हादसे के 206 दिन बाद रिएक्टर के ऊपर कंक्रीट का एक ढांचा बनाया गया। साल 2019 में उसके ऊपर 1.6 अरब डॉलर की लागत से एक विशाल स्टील डोम बनाया गया जो 100 साल तक रेडिएशन रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। उस डोम के अंदर आज भी 4 टन जानलेवा रेडियोएक्टिव पदार्थ बंद है। प्रोफेसर वेलेरी लेगासोव ने पूरी दुनिया को चेर्नोबिल की सच्चाई बताई। 1986 में वियना में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सामने RBMK रिएक्टर की डिजाइन खामियां उजागर कीं। सोवियत सरकार नाराज हो गई। लेगासोव ने एक के बाद एक टेप रिकॉर्ड करके सच दुनिया के सामने रखा- कैसे सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया, कैसे अफसरों ने जानबूझकर खतरे को छुपाया। उनकी रिकॉर्ड की हुई ‘लेगासोव टेप्स’ सोवियत संघ के पतन के बाद सार्वजनिक हुईं। कहा जाता है कि इन टेपों ने सोवियत सरकार की विश्वसनीयता को ऐसा धक्का दिया जो देश के टूटने में अहम कारण बना। डायटलोव समेत तीन मुख्य आरोपियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई। हादसे के बाद प्रिपयत शहर हमेशा के लिए वीरान हो गया। बच्चों के खिलौने, परिवारों की तस्वीरें, खाने की अधूरी थालियां, सब जहां थे, वहीं पड़े रहे। आज भी उस शहर की इमारतों में पेड़ उग आए हैं। सड़कों में दरारें पड़ गई हैं। लेकिन कोई इंसान वहां नहीं रहता।***ये स्टोरी दैनिक भास्कर में फेलोशिप कर रहे प्रथमेश व्यास ने लिखी है। *** References and Further Readings:- -------------------- ये खबर भी पढ़िए… जब 3 हजार चीनी सैनिकों से भिड़ गए 120 बहादुर:एक इंच पीछे नहीं हटे, पोजिशन पर जमी लाशें मिलीं; रेजांग-ला की लड़ाई भारत और चीन के बीच जंग जारी थी। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC के नजदीक लद्दाख के रेजांग ला में 13 कुमाऊं बटालियन की चार्ली कंपनी तैनात थी। माइनस 30 डिग्री की तूफानी हवाओं से बचने के लिए जवानों के पास ढंग के स्वेटर और दस्ताने तक नहीं थे। पत्थरों से बने बिना छत वाले बंकर, जरूरत से आधी ऑक्सीजन के साथ इस चौकी पर जिंदा रहना भी किसी जंग से कम नहीं था। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 26 Apr 2026 5:42 am

ईरान युद्ध पर बढ़ी नाटो में दरार, स्पेन को सस्‍पेंड करने की अटकलों से बढ़ा विवाद

विवाद की जड़ स्पेन का ईरान युद्ध पर लिया गया सख्त रुख है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। इसके साथ ही स्पेन ने अमेरिका को अपने एयरबेस और नेवल बेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

देशबन्धु 25 Apr 2026 12:22 pm

पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता की तैयारी: ईरान से अराघची पहुंचे, ट्रंप ने विटकाफ-कुशनर को भेजा

व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में ईरान के साथ सीधे शांति वार्ता करेगा। अमेरिका लंबे समय से ईरान के साथ बातचीत के जरिए क्षेत्रीय तनाव कम करने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर समझौता करने की कोशिश कर रहा है।

देशबन्धु 25 Apr 2026 9:56 am

महत्वपूर्ण खनिजों पर अमेरिका में छिड़ी बहस, चीन से बढ़ते जोखिम पर चिंता

अमेरिका की कांग्रेस में अहम खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित करने के मुद्दे पर तीखा राजनीतिक मतभेद देखने को मिला। लॉ मेकर्स उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि इन खनिजों पर चीन का बढ़ता दबदबा देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है

देशबन्धु 25 Apr 2026 9:11 am

अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी पर घमासान, कई डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने उठाई जीएओ जांच की मांग

अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर विवाद के बीच शीर्ष डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं

देशबन्धु 25 Apr 2026 8:30 am

ईंधन की कीमतों में उछाल से एयरलाइंस बेहाल, अमेरिका में छिड़ा विवाद

ईरान से जुड़े तनाव के कारण जेट ईंधन (हवाई जहाज का ईंधन) की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर अमेरिकी एयरलाइनों पर पड़ रहा है

देशबन्धु 25 Apr 2026 8:21 am

ईरानी तेल व्यापार को लेकर अमेरिका का एक्शन, चीन की रिफाइनरी पर लगाया प्रतिबंध

अमेरिका ने चीन में स्थित एक रिफाइनरी और ईरान के तेल कारोबार से जुड़े कई जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है।

देशबन्धु 25 Apr 2026 8:19 am

बंगाल चुनाव में क्या आरजी कर रेप-मर्डर केस भूले लोग:पीड़ित की मां की सभा में कुर्सियां खाली, महिलाएं बोलीं-TMC वाले देख लेंगे

सीन-1तारीख: 12 अप्रैल जगह: पानीहाटी सीट, पश्चिम बंगाल BJP की उम्मीदवार और आरजीकर रेप केस की पीड़िता की मां रतना देबनाथ सभा करने पहुंची, लेकिन सभा में लोग ही नहीं आए थे। सिर्फ आगे की कुर्सियों पर कुछ लोग बैठे थे। रतना ने धीरे से पति से कहा, यहां तो लोग ही नहीं, संबोधित किसे करूं। पति कुछ नहीं बोले, शांत ही रहे। रतना बोलना शुरू करती हैं, ‘मुझे पूरा देश पहचानता है। एक मां होने के नाते बस इतना चाहती हूं, कभी किसी की संतान को ऐसी दर्दनाक मौत न देखनी पड़े।’ ये सुनकर वहां से गुजर रहीं महिलाएं रुक जाती हैं। घर के बाहर बैठी महिलाओं की आंखों में भी आंसू नजर आते हैं। उनसे पूछती हूं, ‘आप इनके साथ क्यों नहीं है? जवाब मिलता है, ‘साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ हमें बात करता देख एक बाइक वाला वहां चक्कर काटने लगता है। महिलाएं उसे देखते ही वापस घर में चली जाती हैं। मैं बाइक वाले को रोककर पूछती हूं, आप किसी पार्टी से हैं क्या ? वो अपना नाम पार्थो दास बताता है। ठेकेदारी का काम करता है। कहता है- ’TMC ही जीतेगी, यहां मुकाबला एकतरफा है।’ मैं फिर पूछती हूं, इतने भरोसे से कैसे कह रहे हैं ? जवाब मिला- ’यहां लोगों से बात करके अंदाजा हुआ।’ डर के माहौल से जुड़े सवाल पर पार्थो कहते हैं- ’नहीं, अब पानीहाटी में ऐसा नहीं होता।’ पार्थो कुछ भी कहे, लेकिन रतना की सभा में पहुंचे चुनिंदा लोग भी उठकर जाने लगते हैं। सीन-2तारीख: 24 अप्रैलजगह: पानीहाटी सीट इन सबके 12 दिन बाद यहीं PM मोदी ने रतना देबनाथ के समर्थन में चुनावी सभा की, लेकिन तस्वीर इसके उलट दिखी। PM की सभा में हजारों की संख्या में भीड़ जुटी। अस्पताल की दीवारों पर लिखा, क्या हम महफूज हैं पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को सेकंड फेज में 142 सीटों पर वोटिंग होनी है। रतना देबनाथ भी अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई कह रही हैं। पानीहाटी में रतना की सभा देखने के बाद मैं सीधा आरजी कर अस्पताल पहुंची। अंदर दाखिल होते ही सामने स्टेज है। पीड़ित डॉक्टर के नाम से 18 महीने के अन्याय का पोस्टर और उसकी फोटो लगी है। फोटो पर धूल जमा है और माला के फूल मुरझा गए हैं। ये कई महीनों तक चले प्रोटेस्ट, कैंडल मार्च और रैलियों की याद दिलाता है। अस्पताल की दीवारों पर लिखा है- ‘क्या हम महफूज हैं? हमें जवाब चाहिए, न्याय चाहिए।‘ 'नाइट ड्यूटी में दरवाजा नॉक होते ही आज भी डर जाते हैं' अस्पताल में मौजूद हॉस्टल में हमें डॉ. स्वस्तिका कौशिक मिलीं। वे कहती हैं, ‘उस घटना के बाद से पेरेंट्स डरे रहते हैं। नाइट ड्यूटी के दौरान आज भी कोई दरवाजा खटखटा दे, तो डर जाती हूं। पहले दो बार पूछती हूं, तभी खोलती हूं। किसी भी लड़की के साथ अगर ऐसा हो जाए और दोषी को फांसी जैसी सख्त सजा भी ना मिले, तो इसे पूरा न्याय नहीं कह सकते।‘ हॉस्टल से निकलकर हमने कैंपस में कुछ और मेडिकल स्टूडेंट्स से बात करने की कोशिश की। ये सभी प्रोटेस्ट में शामिल हुई थीं, लेकिन उसके बाद क्या हुआ, उस पर कुछ नहीं कहना चाहतीं। एक गार्ड से जरूर बात हुई। उसने एक बिल्डिंग की ओर इशारा करते हुए कहा ,‘जूनियर डॉक्टर के साथ वहां तीसरी मंजिल पर गलत हुआ था।‘ यहां से हम चेस्ट एंड मेडिसिन डिपार्टमेंट की ओर बढ़े। क्राइम स्पॉट पर पहुंचे तो वहां ‘Do Not Cross‘ का टेप लगा मिला। सेंट्रल सिक्योरिटी फोर्स और कोलकाता पुलिस ने ये कहकर आगे नहीं जाने दिया कि जगह प्रतिबंधित हैं।’ फिर वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाने लगे। 'बेटी को न्याय नहीं मिला, इसलिए चुनाव लड़ रही' अस्पताल से निकलकर हम आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित जूनियर डॉक्टर के घर पहुंचे। अंदर दाखिल होते ही सामने पीड़िता का कमरा नजर आता है। उनकी फोटो लगी है। बिस्तर पर किताबें, गुलदस्ता, कुछ चॉकलेट और मां दुर्गा की फोटो रखी है। घर पर उनकी मां रतना देबनाथ मिलीं। रतना पति के साथ स्कूल ड्रेस सिलने की फैक्ट्री चलाती थीं। बेटी की मौत के बाद सब छोड़कर उसे न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रही हैं। घटना वाली रात को याद करते हुए कहती हैं, ‘हमेशा की तरह उसे अपने हाथों से खाना खिलाकर ड्यूटी पर भेजा था। रात 11:15 बजे तक उससे बात भी हुई, अस्पताल में सब ठीक था। सुबह खबर आई कि वो नहीं रही।’ ’अस्पताल में चल रहे करप्शन का सच जानने के बाद से ही हमें उसकी सेफ्टी को लेकर डर था और वही हुआ भी। हैरानी इस बात की है कि इतने बड़े अस्पताल में कोई गवाह सामने नहीं आया।’ हमने पूछा कैसा करप्शन? इस पर कहती हैं, उसने हमें नकली दवाइयों, फर्जी सलाइन और थीसिस से जुड़ी गड़बड़ियों के बारे में बताया था। वहां एडमिशन कराने और पास कराने के भी पैसे मांगे जाते थे। मेरी बेटी पर भी दबाव बनाया गया था। चुनाव लड़ने के बारे में पूछने पर रतना कहती हैं, ‘हमें आज तक इंसाफ नहीं मिल सका, इसलिए अब कोर्ट से सड़क और सड़क से चुनाव मैदान तक आ गई हूं।‘ हमने पूछा- BJP से चुनाव लड़ने की क्या कोई खास वजह है? इस पर कहती हैं, ‘सबसे बड़ी पार्टी है। ममता को हटाने के लिए BJP को सपोर्ट कर रहे हैं। मैंने फोन करके टिकट मांगा है।‘ हमने पूछा- लोगों से कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? इस पर वे कहती हैं, ‘अब ये एक परिवार का नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। लोग इसे गंभीरता से ले रहे हैं। अगर चुनाव में जीती तो लोगों की आवाज विधानसभा तक पहुंचाऊंगी।‘ ‘बेटी का रेप नहीं मर्डर हुआ, एक नहीं कई आरोपी शामिल’ रतना कहती है, ‘मेरी बेटी का रेप नहीं हुआ। उसके बाल अच्छे से बने हुए थे। उसकी डायरी के पेज फटे थे। जींस और अंडरगारमेंट साफ थे। चादर तनी थी, किताब-लैपटॉप भी सुरक्षित रखा था। ये सब देखकर हम समझ गए थे कि ये सिर्फ मर्डर है।’ ‘इस मामले में सिर्फ संजय दोषी नहीं है। प्रिंसिपल समेत और भी लोग शामिल हैं। प्रिंसिपल ने ही मौत की पुष्टि से पहले डेड बॉडी मॉर्चुरी भेजी थी। अस्पताल पहुंचने पर सेमिनार रूम (जहां जूनियर डॉक्टर की बॉडी मिली) की जगह हमें जानबूझकर इमरजेंसी में भेज दिया। हमने कहा कि बस एक बार बेटी को दिखा दो, लेकिन कोई राजी नहीं हुआ, बोले- पुलिस जांच चल रही है।‘ ‘उस दिन अस्पताल में मुरलीधर शर्मा, बिनीत गोयल जैसे IPS अफसर मौजूद थे। मैं पुलिस के पैर पकड़कर भी सेमिनार रूम तक नहीं पहुंच पाईं, लेकिन TMC विधायक निर्मल घोष आसानी से अंदर पहुंच गए।‘ ममता ने माना, हॉस्पिटल के अंदर के लोग भी शामिल रतना आगे कहती हैं, ‘घटना के चार दिन बाद ही ममता बनर्जी हमारे घर आईं। बोलीं- असली अपराधी को पकड़ लिया गया है। मैंने कहा- वो असली अपराधी नहीं। मेरी बेटी डॉक्टर और सिविक वॉलंटियर थी। बिना अंदर के व्यक्ति के शामिल हुए, उसके बारे में किसी को कैसे पता चला। ममता सिर झुकाए चुपचाप सुनती रहीं। उन्होंने पुलिस कमिश्नर बिनीत गोयल की तरफ देखा। कमिश्नर ने कहा, अंदर से किसी को पकड़ें, तो सब मान लेंगे।‘ ‘ममता सरकार हमें 10 लाख की मदद दे रही थी। हमने मना कर दिया क्योंकि हमें सिर्फ न्याय चाहिए। तब उन्होंने माना कि केस में हॉस्पिटल के अंदर के लोग भी शामिल हैं। हालांकि आज तक कोई गिरफ्तार नहीं हुआ।‘ पिता बोले- वो बेटी नहीं, गार्जियन थी, न्याय ही मकसद पीड़ित जूनियर डॉक्टर के पिता देबाशीष देबनाथ भी पत्नी के चुनाव प्रचार में जा रहे हैं। वे कहते हैं, ‘चुनाव को लेकर मेरी कोई भावना नहीं है। मेरा लक्ष्य सिर्फ इंसाफ पाना है। वो सिर्फ मेरी बेटी नहीं, गार्जियन भी थी। मैं कहीं भी रहूं, रोज रात 9:30 बजे उसका फोन आ जाता था। बस यही कहती- बापी, जल्दी घर आ जाओ। दवा से लेकर हमारी हर छोटी-बड़ी चीजों का ध्यान रखती थी।‘ चुनावी सभा को लेकर वे कहते हैं, ‘हम जहां भी सभा करने जाते हैं, वहां आने वालों को डराया-धमकाया जाता है। पानीहाटी में यही हो रहा है।‘ एक्सपर्ट बोले- BJP का टिकट मिलने से असर नहीं पड़ेगा आरजी कर रेप-मर्डर केस और रतना देबनाथ के चुनाव लड़ने पर सोशल एक्टिविस्ट काजी मासूम अख्तर कहते हैं, ‘ये मामला अब जनता के जेहन से धुंधला पड़ चुका है, इसलिए पीड़ित की मां को BJP से टिकट मिलने का कोई खास फायदा नहीं होगा।‘ वे आगे कहते हैं, ‘पहले रतना लेफ्ट की विचारधारा के प्रभाव में थीं, तब उन्होंने BJP नेताओं का विरोध किया था। अब वे सियासी जमीन तलाशने के लिए कई पार्टियों के संपर्क में हैं। परिवार का 10 लाख रुपए की मदद ठुकराना भी डॉक्टरों के प्रभाव में लिया गलत फैसला था।‘ TMC उम्मीदवार बोले: पानीहाटी में क्लीन स्वीप को तैयार इसके बाद हम TMC ऑफिस पहुंचे, जहां सभा के बाहर चक्कर काट रहा पार्थो दास हमें पहले से बैठे मिले। यहां हम पानीहाटी से TMC उम्मीदवार तीर्थंकर घोष से मिले। उनके पिता निर्मल घोष इसी सीट से पिछले 15 साल से विधायक हैं। तीर्थंकर कहते हैं, ‘यहां मुकाबला एकतरफा है। पिछले कई चुनावों से यहां ममता दीदी का दबदबा रहा है। अबकी TMC क्लीन स्वीप करेगी।‘ डर के माहौल पर वे कहते हैं, ‘ये सब प्रोपेगैंडा है। चुनाव प्रशासन और CRPF के कंट्रोल में है।’ रतना देबनाथ के चुनाव लड़ने पर वे कहते हैं, ‘हम उनका दर्द समझते हैं, लेकिन पानीहाटी के लोग जानते हैं कि विधायक किसे और क्यों चुनना है।‘ …………………. पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… क्या BJP को बंगाल जिताएगा सुषमा स्वराज का फॉर्मूला पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार कुछ बड़ा पक रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले BJP और RSS खामोशी से अब तक की सबसे बड़ी बिसात बिछा चुके हैं। बूथ से लेकर बॉर्डर तक संगठन एक्टिव हैं। BJP ने सीनियर लीडर रहीं सुषमा स्वराज का फॉर्मूला ‘1 बूथ-10 यूथ’ पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर लागू किया है। पढ़िए पूरी खबर…

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