डिजिटल समाचार स्रोत

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चीन और रूस ने मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की

चीन और रूस ने 20 मई को सर्वांगीण रणनीतिक समंव्य और मजबूत कर अच्छे पड़ोसियों के मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की।

देशबन्धु 22 May 2026 1:50 am

चीन के खनिज संसाधन कानून के कार्यान्वयन के लिए नियमावली लागू होगा

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने हाल में राज्य परिषद के आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत चीन के खनिज संसाधन कानून के कार्यान्वयन के लिए नियमावली 15 जून को लागू होगी।

देशबन्धु 22 May 2026 1:19 am

चीन-अमेरिका को द्विपक्षीय कृषि व्यापार के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनानी चाहिए : चीनी वाणिज्य मंत्रालय

चीनी वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, प्रवक्ता हे याडोंग ने चीन द्वारा अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद के बारे में सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कृषि व्यापार चीन-अमेरिका आर्थिक और व्यापारिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण भाग है।

देशबन्धु 22 May 2026 1:15 am

सर्बिया : चीनी वृत्तचित्रों की स्क्रीनिंग का शुभारंभ बेलग्रेड में हुआ

सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की चीन की राजकीय यात्रा से पहले, बेलग्रेड में सर्बिया में चीनी वृत्तचित्रों की स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया।

देशबन्धु 22 May 2026 12:35 am

आज का एक्सप्लेनर:कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 दिन में बीजेपी-कांग्रेस को पछाड़ा, इंस्टा पर डेढ़ करोड़ फॉलोअर्स; ये सिर्फ मजाक है या बदलाव की आहट

BJP और कांग्रेस ने 2014 में इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। 12 साल में बीजेपी के 88 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हुए हैं। लेकिन महज 5 दिन पहले बनी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने इन दोनों आंकड़ों को छोटा साबित कर दिया। CJP ने अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए हैं। हर घंटे करीब 5 लाख फॉलोअर्स बढ़ रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म चीफ जस्टिस सूर्यकांत के उस बयान के बाद खड़ा हुआ, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। क्या है कॉकरोच जनता पार्टी, इसके पीछे किन लोगों का हाथ और क्या वाकई ये पार्टी कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कॉकरोच जनता पार्टी है क्या?जवाबः ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक व्यंगात्मक ऑनलाइन कैंपेन है… 21 मई की शाम तक यानी महज 5 दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टा फॉलोअर्स ने बीजेपी और कांग्रेस को भी पीछे छोड़ दिया है। CJP के इंस्टाग्राम पर गुरुवार शाम 5 बजे तक 1.49 करोड़ फॉलोअर्स हो गए। जबकि कांग्रेस के करीब 1.33 करोड़, बीजेपी के 88 लाख और AAP के 19 लाख फॉलोअर्स हैं। CJP औपचारिक रूप से चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है। इसकी वेबसाइट पर व्यंग्य में लिखा गया है कि ये कॉकरोचिस्तान के नो इलेक्शन कमीशन पर कॉकरोच एक्ट के तहत एक नॉन-रजिस्टर्ड पार्टी है। 30 साल के अभिजीत दीपके ने खुद को इसका फाउंडर बताया है। सवाल-2: अभिजीत दीपके कौन हैं और क्या उनका कोई पॉलिटिकल कनेक्शन है?जवाबः 30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। अभिजीत AAP के IT सेल के चीफ अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए AAP छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर अभिजीत X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। सवाल-3: आखिर इंटरनेट पर लोग कॉकरोच जनता पार्टी को पसंद क्यों कर रहे हैं?जवाबः 3 बड़ी वजहें हैं- 1. सोशल मीडिया पर यूथ से जुड़ी कंटेंट स्ट्रैटेजी 2. CJP के लॉन्च की परफेक्ट टाइमिंग 3. बेरोजगारी के चलते युवाओं में फ्रस्ट्रेशन अभिजीत कहते हैं, मैं ये नहीं कहूंगा कि ये सब मैंने हासिल किया है। यूथ के अंदर कई सालों से जो निराशा और गुस्सा पल रहा है, वही इतने बड़े रिएक्शन की वजह है। सरकार की नाकामियों की वजह से युवा बेरोजगार है। उन्हें एक मंच मिला, जहां पर वो अपनी निराशा और गुस्सा निकाल सकते हैं। सवाल-4: कॉकरोच जनता पार्टी का एजेंडा क्या है?जवाबः CJP का फिलहाल कोई सीरियस घोषित एजेंडा नहीं है। उसने अपने मैनिफेस्टो में 5 वादे किए हैं- सवाल-5: क्या इससे पहले भी ऑनलाइन कैंपेन से पार्टियां बनी हैं, उनका क्या हुआ?जवाबः भारत में अभी तक किसी ऑनलाइन कैंपेन या मूवमेंट से भारत में कोई राजनीतिक पार्टी उभर कर नहीं आई है। हालांकि दुनिया में इसके 3 बड़े उदाहरण हैं… 1. फाइव स्टार मूवमेंट, इटली 2. पोलिश बीयर लवर्स पार्टी, पोलैंड 3. बेस्ट पार्टी, आइसलैंड सवाल-6: क्या वाकई CJP असली पार्टी बनकर कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी?जवाबः CJP फिलहाल कोई ऑफिशियली रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी या ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। औपचारिक चुनावी राजनीति के लिए CJP को चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। अभिजीत के बयानों से ऐसा लगता है कि फिलहाल उनका इरादा औपचारिक राजनीतिक दल बनाने का नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों को लेकर सरकार के खिलाफ एक्टिविज्म जारी रखने का है। अभिजीत के ये बयान पढ़िए- इधर 21 मई की दोपहर करीब 12 बजे CJP के X अकाउंट पर रोक लगाई गई है। अभिजीत ने कहा है कि जैसी आशंका थी, वैसा ही हुआ। X स्थानीय कानून, कोर्ट के आदेश या कानूनी शिकायत के आधार पर Withhold करने यानी रोक लगाने की कार्रवाई करता है। **** रिसर्च सहयोग- उत्कर्ष राज **** ये खबर भी पढ़ें… CJI सूर्यकांत ने कॅाकरोच वाले बयान पर सफाई दी:कहा- इसे गलत तरीके से पेश किया गया, मैंने फर्जी डिग्रीधारियों की आलोचना की थी चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी पैरासाइट और कॅाकरोच वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होनें कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 21 May 2026 6:55 pm

ईरान मुद्दे पर ट्रंप और नेतन्याहू में बढ़े मतभेद, सैन्य कार्रवाई बनाम बातचीत को लेकर अलग-अलग रुख

दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर लंबी फोन वार्ता हुई, जिसमें ईरान को लेकर भविष्य की रणनीति पर गंभीर चर्चा की गई। इस बातचीत ने यह संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में आगे की स्थिति को लेकर अमेरिका और इजराइल पूरी तरह एक राय में नहीं हैं।

देशबन्धु 21 May 2026 2:00 pm

ईरान को कड़ा जवाब: ट्रंप बोले– जरूरत पड़ी तो और सख्ती

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस कोस्ट गार्ड अकादमी के दीक्षांत समारोह में छात्रों की तारीफ की

देशबन्धु 21 May 2026 10:08 am

अमेरिका को क्यूबा के राष्ट्रपति ने दिया जवाब, कहा- 'राउल कास्त्रो पर आरोपों का कोई कानूनी आधार नहीं'

क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कैनेल ने अमेरिका के आरोपों के बाद क्यूबा क्रांति के नेता राउल कास्त्रो का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि राउल कास्त्रो के खिलाफ अमेरिकी सरकार की ओर से लगाए गए आरोप एक 'राजनीतिक स्टंट' हैं

देशबन्धु 21 May 2026 9:57 am

रियल मैड्रिड में साल 2009 के बाद पहली बार, अध्यक्ष पद के चुनाव में हो सकते हैं एक से ज्यादा उम्मीदवार

साल 2009 के बाद पहली बार रियल मैड्रिड के अध्यक्ष पद के चुनाव में एक से ज्यादा उम्मीदवार हो सकते हैं

देशबन्धु 21 May 2026 8:20 am

ब्लैकबोर्ड-’ईसाई बन गए थे दादा, कब्र खोदकर ले गए लाश’:गांव वाले बोले- शव को शराब पिलाए बगैर नहीं दफना सकते

17 दिसंबर 2025। चारों तरफ जंगल और उसके बीच खाली खेत में 90 पंचायतों के लोग जुटे हैं। सभी के हाथ में लाठी-डंडे, कुदाल और फावड़े हैं। पंचायत में एक शख्स ने फरमान सुनाया कि उस कब्र को खोद डालो और लाश निकाल लो। इतना सुनते ही भीड़ कब्र की ओर चल पड़ी। एक खेत के किनारे ईंट-पत्थर से कब्र बनी है। भीड़ से कुछ लोग कुदाल-फावड़े से उसे तोड़ने लगते हैं। कुछ ही देर में कब्र टूट जाती है। दो लोग आगे आकर कब्र से एक लाश निकालते हैं। लाश सड़ चुकी है। कफन के चीथड़े बाहर बिखरे पड़े हैं। वे लाश को घसीटते हुए सड़क की तरफ चल पड़ते हैं। भीड़ लाश को कहां ले गई आज तक पता नहीं चला। लाश को गायब हुए 6 महीने हो चुके हैं। यह लाश चमरा राम सलाम की थी। इस भीड़ को चमरा राम सलाम का ईसाई धर्म को मानना मंजूर नहीं था। इस बार ब्लैकबोर्ड सीरीज में इस घटना का स्याह पहलू जानने के लिए मैं नीरज झा छत्तीसगढ़ के कांकेर पहुंचा हूं। कांकेर से 50 किलोमीटर दूर बड़े तेवड़ा गांव। यहां एक घर के बाहर आम के पेड़ के नीचे मेरी मुलाकात एक लड़की से होती है। यह 14 साल की लड़की चमरा राम सलाम की पोती है। नाम है ज्योति। वह कच्चे आम छील रही है। ज्योति बताती है, ‘उस दिन 90 गांव की भीड़ के साथ पुलिस भी थी। हम डरकर घर के एक कमरे में दुबक गए। चाची ने फौरन भीतर से कुंडी लगा लिया। मैं घर के एक झरोखे से क्रब तोड़ने का सारा मंजर देख रही थी। आज भी जब खेत की तरफ देखती हूं या दो से ज्यादा लोगों को उधर जाते हुए देखती हूं, तो डर लगता है। वही नजारा आंखों के सामने आ जाता है।’ ये बातें सुनते हुए पास में बैठीं ज्योति की मां ललिता रोने लगती हैं। घटना के बाद उनके पति सरपंच राजमन सलाम इतने डर गए कि पिछले 6 महीने से गांव से फरार हैं। ललिता टूटी-फूटी हिंदी में डर-डरकर बताती हैं- ‘पति से बात किए 6 महीने हो चुके हैं। पता नहीं कहां हैं। चारों बच्चे अपने पापा को याद कर के रोते हैं। कहते हैं कि दादा की तो लाश भी नहीं बची, पापा भी घर छोड़कर चले गए।’ ललिता आंसू पोंछते हुए कहती हैं- अब बच्चों को ये कैसे बताऊं कि धर्म बदलने के कारण गांव वालों ने हमारा ऐसा हाल कर दिया है। हमारा राशन-पानी, सड़क पर चलना-फिरना सब बंद कर दिया है। ‘गांव वालों की चोरी से राशन खरीदने जाती हूं’ पानी भी दूसरे गांव के बोरवेल से लाना पड़ता है, वो भी रात में ताकि कोई पहचान न सके। राशन भी रात में चुपके से लाती हूं, तब घर का चूल्हा जलता है। ऊपर से मुकदमा भी हमारे ही खिलाफ लिखा है। हर 15 दिन में हमारे परिवार को थाने बुलाया जाता है। पुलिस भी पैसे लेती है और तभी घर आने देती है। जबकि मुकदमा तो हमें करना चाहिए था। ललिता अपने बाल खींचकर कहती हैं- ‘देखिए, अभी भी मेरे बाल कटे हुए हैं। पिछले साल 15 दिसंबर की बात है। मेरे ससुर चमरा राम कई दिनों से बीमार थे। तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो हम उन्हें शहर लेकर भागे। शाम होते-होते अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई। पति ने गांव वालों को फोन करके खबर दी कि- पिताजी की मौत हो गई है। कल आप लोग मिट्टी देने आ जाइएगा। तब तक तो अंदाजा ही नहीं था कि लोग हमारे ईसाई धर्म अपना लेने से नाराज हैं। ससुर ने मरने से पहले ही कह दिया था मेरा अंतिम संस्कार ईसाई धर्म के अनुसार करना। जब मेरे पति ससुर का शव लेकर घर पहुंचे तो छोटे देवर राम सिंह ने कहा- भइया, पिताजी का अंतिम संस्कार आदिवासी हिंदू रीति-रिवाज से ही होना चाहिए, ईसाई धर्म के मुताबिक नहीं। देवर राम सिंह ने धर्म नहीं बदला है, वे आज भी आदिवासी हिंदू हैं। उनकी बात पर मेरे पति नाराज हो गए और सख्ते लहजे में कहा- मैं घर का बड़ा बेटा हूं, जिस धर्म को मानता हूं, उसी के मुताबिक पिताजी का अंतिम संस्कार करूंगा। ‘पति ने मिन्नतें की तब जाकर अंतिम संस्कार हुआ’ ये सुनते ही देवर राम सिंह ने गुस्से में गांव वालों को जुटा लिया और झगड़ा करने लगे। कहने लगे कि पिताजी तो हिंदू थे। फिर उन्हें ईसाई धर्म के मुताबिक कैसे दफना सकते हो? हम ऐसा नहीं होने देंगे। ये सब होते-होते शाम होने लगी। लाश दरवाजे पर रखी थी। मेरे पति मिन्नतें करने लगे कि पिताजी की यही इच्छा थी, देर मत करो। अंतिम संस्कार हो जाने दो। आखिरकार सबने हामी भर दी। मेरे पति ने अपने तीनों भाइयों के साथ मिलकर ससुर का शव घर के पास वाले खेत में दफना दिया। सभी ने ईसाई धर्म के मुताबिक प्रार्थना की। फिर ईंट और सीमेंट से पक्की कब्र बनवाई। अगले दिन 17 दिसंबर को मैं और मेरे पति कुछ रिश्तेदारों के साथ इसी आम के पेड़ के नीचे बैठे थे। अचानक 90 गांव के लोग पंचायत करके मेरे घर आ धमके। उनके हाथ में लाठी-डंडे थे। वे हमें पीटने लगे। मेरे सिर पर किसी ने डंडा मारा और मैं बेहोश हो गई। वे घर में घुसकर तोड़-फोड़ करने लगे। घर के बगल में बना हमारा चर्च भी तोड़ दिया। मुझे होश आया तो सिर से खून बह रहा था। पति भी बुरी तरह घायल थे। फौरन हमें हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर ने दो दिन भर्ती रखा। जब वापस घर लौटे, तो सब कुछ उजड़ चुका था। गांव वाले ससुर की लाश को कब्र से खोदकर निकाल ले गए थे। कहां ले गए, आज तक नहीं पता चला। पुलिस भी कुछ बताती नहीं। ललिता बात करते-करते मुझे, अपने खेत की ओर ले गईं। वहां एक आम के पेड़ के नीचे कब्र खुदी हुई है। क्रब के पास ही मिट्टी का ढेर लगा है। सामने एक टूटी हुई खाट पड़ी है। जिस पर उनके ससुर की लाश लाई गई थी। ललिता कहती हैं, ‘अब तो हम यहां आते ही नहीं। ससुर की लाश ही नहीं है, कैसे आंसू बहाएं?’ टूटी कब्र दिखाकर ललिता वापस लौट आती हैं। सामने अपनी देवरानी की घर की ओर इशारा करते हुए कहती हैं- मेरी सास अब उसी के घर रहती हैं।’ अब ललिता के देवरानी के घर पहुंचता हूं। आंगन में 65 साल की वैशाखी बाई बैठी हैं। नीचे चटाई पर बैठते हुए डबडबाई आंखों के साथ गोंडी भाषा में कहती हैं- मेरे सामने की बात है। गांव वाले पति की लाश कब्र से खोदकर कुत्ते की तरह घसीटते हुए ले गए। अब मैं कब्र पर नहीं जाती। जाती हूं तो कई दिन तक पति को याद करके रोती हूं। हाथ में पति की धुंधली सी पासपोर्ट साइज फोटो लिए वैशाखी बाई बताती हैं कि आज भी खेत में उनके कफन के फटे हुए टुकड़े पड़े हैं। अब तो केवल अपने बच्चों का सहारा है। मेरे पति को तो कब्र तक नसीब न हुई। लाश भी खोदकर ले गए। पास ही बैठी वैशाखी बाई की छोटी बहू ऊषा बीच में ही बोल पड़ीं, ‘10 साल पहले मेरी जेठानी ललिता ने ईसाई धर्म अपनाया था। मुझे बच्चे नहीं हो रहे थे, तो मुझे भी अपने साथ चर्च ले जाने लगीं। उसी साल मुझे बच्चा हुआ। तब से मैं भी ईसाई धर्म मानने लगी। मेरे गांव के लोगों को ईसाई धर्म से दिक्कत है।’ ऊषा की बात खत्म होते ही अब मैं अपने साथी को लेकर गांव की तरफ निकल पड़ता हूं। रास्ते में एक घर और उसके बरामदे पर बैठे कुछ लोग दिखाई पड़ते हैं। मैं रुककर इन लोगों से बात करने लगता हूं। ये सभी ‘ग्राम पटेल’ नाम के समूह के सदस्य हैं। यहां ग्राम पटेल कई पंचों का एक समूह को कहते हैं। इन्हीं में से एक हिरऊ राम सलाम छत्तीसगढ़ी जुबान में चमरा राम सलाम के बेटे सरपंच राजमन को गाली देते हुए कहते हैं- ‘हां, वह हमारा पट्टीदार है। सर, हम तो आदिवासी हिंदू हैं। शीतला माता की पूजा करते हैं, लेकिन उसका परिवार गलत रास्ते पर चल दिया। अपने देवी-देवता को छोड़कर ईसा-मसीह को मानने लगा। सिर्फ राजमन का भाई राम सिंह आदिवासी हिंदू धर्म मानता है। वह पिता का अंतिम संस्कार उसी के मुताबिक करना चाहता था, लेकिन नहीं करने दिया। उस परिवार के साथ जो हुआ, ठीक ही हुआ है। लेकिन आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं? आपका कोई एजेंडा तो नही? आप भी ईसाई तो नहीं हैं?’ यह कहते हुए लोगों के बीच बैठे हिरऊ राम सलाम भड़क गए। बातचीत के लिए लगाया माइक निकालकर फेंकने लगे। गुस्से में उनकी आंखें लाल हो गईं। शायद शराब भी पी रखी है। बोले- अब आपसे बात नहीं करना चाहता। उनका गुस्सा शांत करने के लिए मैंने अपने हाथ में बंधा रक्षा-सूत्र कई बार दिखाया। मेरे साथ मौजूद लोकल ड्राइवर युवराज के माथे पर लगे चंदन को दिखाते हुए समझाया कि हम हिंदू हैं। तब जाकर वह फिर से बात करने के लिए तैयार हुए। वह कहते हैं- ‘देखिए सर, सरपंच राजमन के पिता चमरा राम सलाम तो मेरे चाचा थे। जब उनकी मौत हुई, तो हम लोगों ने कहा कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू आदिवासी रीति-रिवाज से होना चाहिए। राम सिंह हिंदू धर्म मानता है। वही चाचा का अंतिम संस्कार करेगा, लेकिन वह नहीं माने। दरअसल, हमारे आदिवासी समाज में अंतिम संस्कार का एक रीति-रिवाज है। हम भी शव को दफनाते हैं, लेकिन कब्र खोदने से पहले जमीन पर दारू गिराते हैं। फिर तीन बार जमीन पर कुदाल मारी जाती है। उसके बाद कोई भी कब्र खोद सकता है। उसके बाद शव को शराब पिलाते हैं। आखिरी तौर पर दफनाने का काम मरे हुए आदमी की समधन करती है। लेकिन राजमन और उसका परिवार इस रिवाज के खिलाफ गया। हमें बिना बताए कब्र खोदी और चाचा का अंतिम संस्कार ईसाई रीति-रिवाज के मुताबिक किया। हम चाचा को इस तरह कभी भी अपने गांव में दफनाने नहीं देंगे।’ यह बातचीत चल ही रही थी कि हिरऊ राम सलाम मेरी गाड़ी में बैठे दो लड़कों देखकर फिर से भड़क जाते हैं। वे उन लड़को को पहचानते हैं। कुछ ही साल पहले ही दोनों लड़कों ने ईसाई धर्म अपनाया है। ये लड़के मुझे सरपंच राजमन सलाम के घर और अब हिरऊ राम सलाम तक लेकर पहुंचे हैं। हिरऊ राम सलाम और उनके साथ बैठे बाकी लोग दोनों लड़कों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, ‘आप इन लोगों को अपने साथ लेकर क्यों घूम रहे हो? आप झूठ बोल रहे हैं कि आप ईसाई नहीं हैं। दरअसल, आप लोग हमारे गांव में ईसाई धर्म का प्रचार कर रहे हैं। जल्दी से अपना मोबाइल निकालो। गांव में जिन भी परिवारों का वीडियो बनाया है, सारे डिलीट कर दो। नहीं तो वापस नहीं जा पाओगे’ इस हल्ला-गुल्ला के बीच अचानक दर्जनभर के करीब और लोग जमा हो जाते हैं। इस बीच हिरऊ राम सलाम की मोबाइल पर एक के बाद एक कॉल आने लगती हैं। वह अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर देते हैं। कॉल पर एक आदमी बात करते हुए खुद को सरपंच बता रहा है। उसे सरपंच राजमन सलाम के फरार होने के बाद गांव वालों ने अस्थायी सरपंच चुना है। नाम है- श्याम सिंह सरफे। श्याम सिंह सरफे स्पीकर पर मुझसे कहते हैं, ‘थाने की परमिशन के बिना आपकी गांव में घुसने की हिम्मत कैसे हुई? आप ईसाई धर्म मानने वाले लोगों को लेकर गाड़ी में घूम रहे हैं? हम भी आ रहे हैं। जब तक हम पहुंचते नहीं। आप कहीं नहीं जाएंगे।’ उसके बाद वहां खड़े बाकी लोग मेरी गाड़ी को घेर लेते हैं। माहौल खराब होता देख मैं फौरन अपने मोबाइल, माइक समेटता हूं और अपनी गाड़ी में बैठ जाता हूं। गाड़ी का शीशा चढ़ाता हूं और अपने ड्राइवर युवराज साहू को इशार करके गाड़ी भगाने को कहता हूं। रास्ते में युवराज बताने लगते हैं, ‘सर, ये लोग जंगल से पता नहीं किस-किस तरह के जानवर मारकर खाते हैं। अगर कब्र में दफनाया गया शव निकाल सकते हैं, तो पता नहीं और क्या-क्या कर सकते हैं। यहां से जितना जल्दी हो निकल चलना बेहतर होगा। लोकल थाना भी इनसे मिला हुआ है।’ ड्राइवर की यह बात सुनते ही मेरा ध्यान अचानक आमाबेड़ा थाने के उस गेट की तरफ चला गया, जहां कुछ देर पहले वीडियो शूट करते वक्त तैनात सिपाही ने मुझसे मेरा धर्म पूछा था। मैंने उसे हिंदू होने की बात बताई थी। आगे पूछा था कि- ‘आप किस गांव में जा रहे हैं? हमें तो सरकार ने यहां मरने के लिए छोड़ दिया है।’ लेकिन मैं उसे बताए बगैर बड़े तेवड़ा गांव पहुंच गया था। ---------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-'तुम ईसाई बन गए, बाप की लाश नाले में बहाओ':22 दिन तक सड़ती रही लाश, सरपंच बोला- अंतिम संस्कार किया तो बीवी-बच्चों के बारे में सोच लेना कुछ देर तक शव देखते खड़े रहे, फिर कड़क आवाज में बोले- ‘देखो, तुम अपने बाप की लाश गांव के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकते। वहां केवल दलित हिंदू ही शव दफना सकते हैं। तुम लोगों ने धर्म बदला है। इसलिए गांव के बाहर लाश दफनाओ'। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-सुहागरात पर ड्रग्स लेने गया, रातभर नहीं लौटा:हर हफ्ते लड़कियां बदलता, सड़क पर अंडरवियर में मिला; नशे के लिए 25 लाख की नौकरी छोड़ी जुलाई 2022 की वो रात… जिस रात के लिए ज्यादातर लोग सपने बुनते हैं। उस दिन मेरी सुहागरात थी। कमरा सज चुका था। रिश्तेदार थककर सो गए थे। दुल्हन मेरे कमरे में इंतजार कर रही थी। मैं उसके कमरे में गया और उससे बात किए बिना बगल में लेट गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 21 May 2026 5:09 am

दिल्ली की सीक्रेट शुद्धिसभा, हर हफ्ते 400 हिंदू बन रहे:राजा मानसिंह के वंशज अनवर बने नरेश, हर साल 2.5 लाख घर वापसी का दावा

तारीख- 28 अप्रैल 2026, जगह- दिल्ली के कमला नगर का आर्य समाज मंदिर। मंदिर के कुंड से धुआं उठ रहा था। हवन की सौंधी खुशबू थी। हमने वही खड़े मंदिर के सेवादार से पूछा कि अभी हवन हुआ है क्या। उन्होंने जवाब दिया- हां, अभी-अभी शुद्धि हुई है। एक मुस्लिम लड़की ने हिंदू धर्म स्वीकार किया है। आर्य समाज में बताए तरीकों से उसकी वैदिक धर्म में वापसी कराई गई है। मंदिर से 50 मीटर दूर एक टूटा-फूटा कमरा है। बाहर सफेद रंग की नेम प्लेट लगी है, जिस पर लिखा है- शुद्धि सभा। कमरे के अंदर कुछ रैक हैं, जिनमें डॉक्यूमेंट्स का ढेर लगा है। इसमें शुद्धि यानी वैदिक धर्म में वापसी करने वालों का हिसाब-किताब है। पूजा-हवन के बाद पंडितजी बोले- अब लड़की हिंदू हुई शुद्धि कैसे होती है? इसके जवाब में मंदिर के सेवादार कहते हैं, ‘आप 15 मिनट पहले आतीं, तो शुद्धिकरण होते देख लेतीं।' उन्होंने हमें 18-20 मिनट की एक रिकॉर्डिंग दिखाई। इसमें एक लड़की दो महिलाओं के साथ थी। वैदिक मंत्रों के साथ हवनकुंड में आहुतियां देने के बाद पंडित जी ने लड़की के माथे पर रोली से तिलक लगाया। हाथ में कलावा बांधा। पूजा के बाद बोले- अब लड़की हिंदू हुई।‘ लड़की का नाम रीता (बदला हुआ नाम) रखा गया। उसने पंडित जी, सास और ननद के पैर छुए। एक सेवादार ने पीछे से कहा- ‘घर वापसी की बधाई।’ लड़की शांत थी, चेहर पर कृतज्ञता थी या दुविधा, ये नहीं पता, लेकिन हल्की सी मुस्कान जरूर थी। आर्य समाज मंदिर के बगल में शुद्धि सभा, हर हफ्ते करीब 400 शुद्धिकरणकमला नगर में कभी बिरला मिल चलती थी। अब बंद है। इसके नाम पर गली का नाम बिरला लेन हो गया। भीड़भाड़ वाला इलाका है, लेकिन शुद्धि सभा के बारे में पूछने पर लोग बगले झांकने लगते हैं। आर्यसमाज मंदिर के बारे में पूछेंगे, तो तुरंत बता देंगे। भारतीय हिंदू शुद्धि सभा भवन का 10 बाई 10 का ऑफिस है। अंदर एक टेबल, दो कुर्सियां और एक रैक रखी है। यही हमारी मुलाकात केयरटेकर से हुई, जो अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते। वे बताते हैं, 'जिस दफ्तर से इतना बड़ा आंदोलन चल रहा है, उसका पता किसी को क्यों बताएं। हमेशा हमले का खतरा बना रहता है। हम प्रचार कम, काम ज्यादा पर भरोसा करते हैं।' वे ऑफिस की रैक में रखी एक फाइल निकालकर कुछ लिखने लगे। हमने पूछा कि ये रजिस्टर किसलिए है, इसमें क्या लिखा? जवाब मिला, ‘आज जो शुद्धिकरण कराया गया, उसकी एंट्री की है। लड़की मुस्लिम से हिंदू बनी है। उसकी होने वाली सास और ननद लेकर आए थे। वो हिंदू लड़के से शादी करना चाहती है, इसलिए मर्जी से हिंदू बनना स्वीकार किया।' उसके परिवार वाले नहीं आए? इस पर वे कहते हैं, ‘नहीं। मां राजी थी, लेकिन डर की वजह से साथ नहीं आई। घर वालों को पता चल जाएगा तो लड़की, लड़के और उनके परिवार को जान का खतरा हो जाएगा।’ क्या हर शुद्धिकरण की एंट्री होती है? जवाब मिला- ‘हां, डेटा तो रखना पड़ता है।‘ हफ्ते भर में कितने लोगों का शुद्धिकरण करवाते हैं? वे कहते हैं, ‘डेटा नहीं बता सकते, कॉन्फिडेंशियल है।‘ फिर बोले, ‘यही कोई 400 से 500 लोगों का शुद्धिकरण करते हैं । रोज कोई न कोई आता ही है। कोई अकेले आता है, कोई परिवार के साथ, कई परिवार एक साथ भी आ जाते हैं।‘ वे रजिस्टर दिखाने को तैयार हो गए, लेकिन फोटो या वीडियो लेने से मना कर दिया। रैक पर रखे रजिस्टरों में पिछले एक साल का रिकॉर्ड है। 1923 से शुरू हुई शुद्धि सभा, 30 हजार राजपूतों की घर वापसी इसके बाद हम भारतीय हिंदू शुद्धि सभा (BHSS) के महामंत्री सुभाष चंद्र दुआ से मिले। घर वापसी के इतिहास पर वे कहते हैं, ’देहरादून के रहने वाले मोहम्मद उमर, आर्यसमाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती के संपर्क में आए। उन्होंने वैदिक धर्म में वापसी की इच्छा जताई। दयानंद जी ने उनका शुद्धिकरण किया और अलखधारी नाम दिया।’ ’अलखधारी बाद में सनातन के प्रचारक बने। तब शुद्धि आंदोलन की नींव रखी जा रही थी। दयानंद सरस्वती ने ऐसे बहुत से लोगों का शुद्धिकरण किया। वे 1875 से ये काम कर रहे थे।’ '25 फरवरी को स्वामी श्रद्धानंद जी ने आगरा के रायभा गांव में सबसे पहले शुद्धि की। एक साथ करीब 5 हजार लोगों ने सनातन में वापसी की। 1923 के आखिर तक ये आंकड़ा 30 हजार के पार हो गया। इसमें मलकाना राजपूतों ने बड़े स्तर पर घर वापसी की।' घर वापसी करने वालों की संख्या पूछने पर सुभाष कहते हैं कि हम सटीक आंकड़ा तो नहीं बता सकते। हमारे पास सब डाक्यूमेंटेड है। मोटे तौर पर हर साल करीब 2.5 लाख लोग घर वापसी करते हैं। इसमें मुस्लिम और ईसाई दोनों हैं। मुसलमान ज्यादा हैं। मलकाना राजपूतों के गांव में आज भी है शुद्धि मोहल्ला सुभाष की बातों की पुष्टि के लिए हम आगरा के रायभा गांव पहुंचे। यहां की बड़ी आबादी मलकाना राजपूत है। गांववाले कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं हुए। कुछ लोगों ने बताया, ‘हम तो उस वक्त नहीं थे। पूर्वजों ने जरूर बताया था कि मुगलों के आक्रमण के वक्त जान बचाने के लिए हम हिंदू से मुसलमान बने, लेकिन बाद में शुद्धिकरण कर हिंदू बन गए।’ वे कहते हैं, ‘बेटे-बेटियों, नाती-पोतों की शादियां अब हिंदुओं में होती हैं। रिश्तेदार ये सब नहीं जानते। इतनी पुरानी बात बताने का मतलब भी नहीं। अगर ये खबर फैली, तो लोग हमारे हिंदू होने पर शक करेंगे। अगर सबूत चाहिए, तो यहां आज भी एक मोहल्ले का नाम शुद्धि है, जहां वैदिक रीति-रिवाज से हमारे पूर्वज हिंदू बने थे।‘ अमेरिका में बसे राजघराने के वंशजों की घर वापसी कराई भारतीय शुद्धि सभा के महामंत्री सुभाष चंद्र दुआ आगे बताते हैं, ‘जयपुर के महाराज मानसिंह का जिक्र आपने सुना होगा। वे मुगल सेना के साथ महाराणा प्रताप के खिलाफ लड़े थे। मुगलों ने उन्हें रियासत दी और वे मुसलमान बन गए। इनके वंशज अभी अमेरिका में रहते हैं। अनवर रजा और पत्नी जारा खान। दोनों 4 साल पहले वैदिक परंपरा में लौटे हैं।’ क्या आपने उनका शुद्धिकरण करवाया? सुभाष कहते हैं, ‘हां, अमेरिका में ही। शुद्धिकरण के बाद अनवर रजा नरेश सिंह राजपूत और पत्नी जारा खान अब जारा सिंह हो गई हैं। भारत ही नहीं विदेशों में भी हमारा बड़ा नेटवर्क है, खासकर दक्षिण अफ्रीका में।' नमाज छोड़ी, ध्यान सीखा, 4 साल पहले टेक्सास में हुई शुद्धि अनवर रजा से हिंदू बने नरेश सिंह राजपूत से हमने बात की। वे 1980 से अमेरिका में रह रहे हैं। नरेश बताते हैं, ‘मेरी पैदाइश पाकिस्तान के लाहौर की है। पिता कट्टर मुस्लिम थे। मुझे भी जमात-ए-इस्लामी पार्टी के मुखिया मौलाना मौदूदी के पास इस्लामी विचारधारा सीखने भेजते थे।‘ मेरे दादा खुद को पक्का मुसलमान नहीं मानते थे। मुझ पर उनका बहुत असर था। उन्होंने ही मुझे रामचंद्र और रानी लक्ष्मीबाई के बारे में बताया। उन साहित्यों के बारे में जाना, जो हिंदू संस्कृति का हिस्सा है। क्या दादा से आपको परिवार के इतिहास के बारे में पता चला। इस पर वे कहते हैं, ‘नहीं, सीधा तो नहीं। उन्होंने पापा को जो फैमिली ट्री दिया था, उसे उर्दू से अंग्रेजी में अनुवाद किया, तब मिर्जा राजा मानसिंह के बारे में पता चला। ये राजस्थान के आमेर के 29वें कछवाहा राजा थे और मुगल शासक अकबर के खास थे। हमारे पूर्वज उनकी सेना में थे।‘ ‘उन्हें और हमारे परिवार को मुस्लिम बनने पर किस चीज ने मजबूर किया होगा, इसका जवाब तो नहीं मिलेगा। हालांकि, यहीं से मुझे अपनी जड़ों की ओर लौटने का पहला इशारा मिला। मैंने नॉनवेज खाना छोड़ दिया। नमाज बंद कर दी। मन की शांति के लिए विपश्यना की और ध्यान करना सीखा।‘ ‘मैं मन ही मन सनातन में वापसी तो चाहता था, लेकिन रास्ता समझ नहीं आ रहा था। इसी दौरान मेरी सोशल मीडिया पोस्ट पढ़कर भारतीय हिंदू शुद्धि सभा के एक कार्यकर्ता ने मुझसे संपर्क किया। मैंने अपने बारे में सब बताया और पूछा कि क्या मैं दोबारा हिंदू बन सकता हूं। इसके बाद आर्यसमाज के एक कार्यकर्ता ने यहीं टेक्सास में ही वैदिक रीति रिवाज से मेरी शुद्धि करवाई।‘ आपकी पत्नी ने भी स्वीकार किया? जवाब मिला- ‘हां, हमने एक साथ ही घर वापसी की। वो अभी ब्रह्मकुमारी संस्था की कार्यकर्ता हैं। शादी के वक्त मैं मुस्लिम था, तो मुस्लिम से ही शादी की थी, लेकिन पत्नी ने मुझे ध्यान, विपश्यना करते देख ये सब करने की इच्छा जताई।‘ परिवार ने विरोध नहीं किया? नरेश कहते हैं, ‘ये सब अचानक नहीं किया। मैं धीरे-धीरे इस्लाम छोड़ ही रहा था। मेरा खान-पान, पूजा-पद्धति सब पहले ही बदल चुका था। बस नाम बदलना बाकी था। करीब 4 साल पहले शुद्धिकरण के जरिए ये भी हो गया।‘ बच्चे कौन सा धर्म मानते हैं? वे कहते हैं, ‘जारा और मेरे बच्चे नहीं हैं। मेरी पत्नी की पहली शादी से तीन बच्चे हैं। इनमें से दो इस्लाम मानते हैं और एक नास्तिक है।‘ कानूनी तरीके से होता है धर्म परिवर्तन शुद्धि सभा के केयरटेकर के मुताबिक, आर्य समाज रजिस्टर्ड गैर सरकारी संगठन है। घर वापसी के इच्छुक या उनके संबंधी आवेदन करते हैं। आवेदन करने वाले बालिग हैं या नहीं, इसके लिए मैट्रिक सर्टिफिकेट या एफिडेविट लगता है। उसे नया नाम देकर साइन या अंगूठा लगवाया जाता है। ये पूरी कानूनी प्रक्रिया है, इसमें डर और दबाव नहीं है। केयरटेकर बताते हैं, ‘हम व्यक्ति की प्राइवेसी और सुरक्षा को देखते हुए, धर्म बदलने वाले के डाक्यूमेंट किसी से शेयर नहीं करते। दो साल पहले एक लड़की ने यहां धर्म बदला था। न जाने कैसे उसके घरवालों को पता चला और लड़की की हत्या कर दी गई, इसलिए हम सबकुछ कॉन्फिडेंशियल रखते हैं।‘ ………………..ये खबर भी पढ़ें… TCS केस- हिंदुओं को नमाज पढ़ाने वाला तौसीफ मास्टरमाइंड 26 मार्च से 3 अप्रैल 2026 के बीच नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की 9 महिला कर्मचारियों ने FIR दर्ज कराई। 9 में से 6 FIR में TCS नासिक के टीम लीडर तौसीफ अत्तार का नाम है। तौसीफ पर सेक्शुअल हैरेसमेंट, जबरन धर्म परिवर्तन और वर्कप्लेस पर डराने-धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 21 May 2026 5:06 am

संतुलित वैश्विक स्वास्थ्य विकास को बढ़ावा देना आवश्यक: 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में चीन के प्रतिनिधि

वैश्विक स्वास्थ्य शासन प्रणाली के सुधार में सदस्य देशों के नेतृत्व का पालन करना, विकासशील देशों की आवाजों और जरूरतों पर ध्यान देना और संतुलित वैश्विक स्वास्थ्य विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है।

देशबन्धु 21 May 2026 3:32 am

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने लाइबेरिया की विदेश मंत्री के साथ वार्ता की

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 19 मई को पेइचिंग में लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेयसोलो न्यांती के साथ वार्ता की।

देशबन्धु 21 May 2026 3:30 am

भारत-इटली ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब यूरो तक पहुंचाने पर जताई सहमति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बुधवार को भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का लाभ उठाकर वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने पर सहमति जताई।

देशबन्धु 21 May 2026 3:10 am

शी चिनफिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्ता की

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीन की राजकीय यात्रा पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ पेइचिंग के जन वृहद भवन में वार्ता की। दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने चीन और रूस के बीच अच्छे पड़ोसी और मैत्रीपूर्ण सहयोग संधि को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

देशबन्धु 21 May 2026 2:55 am

चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने चीन-अमेरिका आर्थिक वार्ता की प्रारंभिक उपलब्धियों की व्याख्या की

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 से 15 मई तक चीन की राजकीय यात्रा की। इसके दौरान दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने पेइचिंग में मुलाकात की।

देशबन्धु 21 May 2026 2:51 am

चीन के प्रति सक्रिय राय वाले अमेरिकी लोगों की संख्या बढ़ी

अमेरिका के निर्दलीय मतदान संगठन प्यू रिसर्च सेंटर ने हाल में एक रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के मौके पर चीन के प्रति अमेरिकी जनता की राय में सुधार हुआ

देशबन्धु 20 May 2026 11:42 pm

चीनी राज्य परिषद के प्रवक्ता ने थाईवान के नेता के बयान के बारे में रुख प्रकट किया

चीनी राज्य परिषद के थाईवान कार्यालय के प्रवक्ता छन पिनहुआ ने थाईवान के नेता के बयान के बारे में रुख प्रकट किया।

देशबन्धु 20 May 2026 10:37 pm

ईरान के साथ बातचीत उम्मीद से ज्यादा लंबी चल रही : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ चल रही बातचीत उम्मीद से ज्यादा लंबी खिंच रही है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका कड़े विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।

देशबन्धु 20 May 2026 10:29 pm

आज का एक्सप्लेनर:5 देशों से क्या लेकर लौट रहे पीएम मोदी; UAE तेल रिजर्व भरेगा, नीदरलैंड्स से चीन का काउंटर, मेलोनी से भी डील

PM मोदी 15 मई की सुबह नई दिल्ली से UAE के लिए निकले थे। फिर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे। वे 6 दिनों के भीतर 5 देशों का दौरा कर 21 की सुबह दिल्ली लौट आएंगे। करीब 140 घंटे के इस मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी और भारत के लिए उसके मायने क्या हैं; आज के एक्सप्लेनर में… पहला पड़ाव था- UAE। मोदी यहां करीब 3 घंटे रुके। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। इस दौरान 7 MoU साइन किए, इसमें सबसे अहम था- स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व एग्रीमेंट। इसके तहत UAE की अबुधाबी नेशनल ऑइल कंपनी अब भारत के स्ट्रैटजिक तेल भंडारों में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगी। जंग के हालात या सप्लाई रुकने पर इस रिजर्व पर पहला हक भारत का होगा। UAE इस रिजर्व का किराया भी भरेगा। फिलहाल भारत के पास कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में 3 स्ट्रैटजिक ऑइल रिजर्व है। इनकी क्षमता 53.3 लाख मीट्रिक टन है, यानी इनमें करीब 4 करोड़ बैरल तेल स्टोर हो सकता है। ओडिशा के चंदीखोल में नया रिजर्व और कर्नाटक के पादुर में रिजर्व क्षमता बढ़ाई जा रही है। भारतीय रिजर्व के अलावा, UAE के फुजैराह में भी भारत के लिए पेट्रोलियम रिजर्व करने की व्यवस्था की जाएगी। इस डील के मायने UAE से 2 और अहम डील दूसरा स्टॉप था- नीदरलैंड्स। वो यहां 15 मई की रात करीब 9 बजे पहुंचे और डेढ़ दिन रुके। उन्होंने नीदरलैंड्स के राजपरिवार और प्रधानमंत्री रॉब जेटेन से मुलाकात की। इस दौरान 17 MoU साइन हुए। इनमें 2 मुख्य हैं- 1. चिप-मेकिंग डील 2. क्रिटिकल मिनरल सपोर्ट नीदरलैंड्स से 2 और डील हुई तीसरे पड़ाव के लिए मोदी 17 मई को स्वीडन पहुंचे। उन्हें स्वीडन के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार’ से सम्मानित किया गया। मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन से मुलाकात की और स्ट्रैटेजिक साझेदारी के 6 समझौते किए। इसमें अगले 5 साल में कारोबार दोगुना करने जैसी बाते हैं। एक बड़ा डेवलपमेंट जरूर दिखा। स्वीडन में मोदी से यूरोपियन यूनियन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने वादा किया कि साल के अंत तक वो भारत और EU के बीच तय हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन कर देंगी। लेयेन ने जब गणतंत्र दिवस पर भारत का दौरा किया था, तब 27 जनवरी को इस समझौते की घोषणा हुई थी। मोदी और लेयेन ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' नाम दिया था। इस डील के तहत यूरोप से आने वाले करीब 96.6% चीजों से टैरिफ पूरी तरह हटा दिया जाएगा या बहुत कम कर दिया जाएगा। ऐसा ही यूरोप ने भी भारत से आने वाले 99.5% सामान पर होगा। चौथे पड़ाव नॉर्वे था, जहां मोदी 18 मई को पहुंचे। आखिरी बार 1983 में इंदिरा गांधी नॉर्वे गईं थी। अब 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की यात्रा की है। कुल 12 मुद्दों पर समझौते हुए। इसमें सबसे जरूरी है- ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप। इसके तहत नॉर्वे, भारत के क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट में निवेश करेगा। क्लीन एनर्जी यानी ऐसी ऊर्जा, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। जैसे- सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत, परमाणु ऊर्जा। नॉर्वे की करीब 98% बिजली आपूर्ति क्लीन एनर्जी से ही होती है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी उत्पादन करना है। अप्रैल 2026 तक सिर्फ 283.46 गीगावाट तक की क्षमता इंस्टॉल हुई है। यानी टारगेट से लगभग आधी। यूरोप का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है नॉर्वे, भारत LPG खरीद रहा नॉर्वे तीन तरफ से समुद्र से घिरा है। यह नॉर्वेजियन सागर और बारेंट्स सागर से तेल निकालता है। नॉर्वे हर दिन करीब 2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है और यूरोप का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है। इसका 90% एक्सपोर्ट कर देता है। ज्यादातर तेल यूरोपीय देशों को ही बेचता है। भारत कई मौकों पर नॉर्वे से छोटी खेपों में तेल खरीद भी चुका है। ईरान जंग शुरू होने के बाद से भारत ने नॉर्वे से LPG की खरीद भी बढ़ाई है। इंडिया-नॉर्वे बिजनेस समिट के दौरान नॉर्वे की सबसे बड़ी तेल कंपनी एक्विनॉर भी शामिल हुई थी। इससे पहले 2024 में भी एक्विनॉर से भारत के स्ट्रैटजिक रिजर्व के लिए कच्चा तेल खरीदने की खबरें आई थी। भारत भविष्य में भी नॉर्वे से तेल खरीदने के विकल्प तलाश सकता है। पत्रकार के सवाल का जवाब न देने पर विवाद राजधानी ऑस्लो में मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने जॉइंट प्रेस ब्रीफिंग की थी। जब वह कॉन्फ्रेंस से जाने लगे तो एक महिला पत्रकार ने पूछा, ‘आप दुनिया की सबसे आजाद प्रेस के सवालों के जवाब क्यों नहीं देते?’ पीएम उन्हें जवाब दिए बिना चले गए तो पत्रकार हेली लिंग ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और हेली को इसमें अपने सवाल पूछने को कहा। यहां भी विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज और हेली के बीच बहस हुई। यूरोप दौरे के आखिरी पड़ाव के लिए मोदी 19 मई को इटली पहुंचे। जहां उन्होंने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। इटली में दोनों नेता एक ही कार में घूमे और 2000 साल पुराने कोलोजियम में सेल्फी ली। मोदी ने मेलोडी टॉफी भी गिफ्ट की। भारत और इटली के बीच कई समझौते हुए, इनमें से 2 प्रमुख हैं- 1. IMEC से ट्रेड कनेक्टिविटी इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी IMEC को आगे बढ़ाने पर दोनों देश सहमत हुए हैं। IMEC की घोषणा 9 सितंबर 2023 को दिल्ली में G20 समिट के दौरान हुई थी। ये प्रोजेक्ट भारत को मिडिल ईस्ट और यूरोप से रेलवे, पोर्ट और शिपिंग नेटवर्क के जरिए जोड़ने का प्लान है। IMEC क्यों अहम? 2. AI, टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी मोदी ने कहा, ‘भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और इटली की इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी को जोड़कर नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन इकोसिस्टम बनाया जाएगा। दोनों देश जिम्मेदार और सुरक्षित AI डेवलपमेंट पर भी साथ काम करेंगे। इसके अलावा भारत और इटली 2029 तक आपसी व्यापार को 20 अरब यूरो से ज्यादा तक ले जाने का लक्ष्य बनाया है। फिलहाल भारत-इटली के बीच 14 अरब यूरो यानी 1.60 लाख करोड़ का व्यापार है। दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा देने का फैसला किया है। मोदी ने मेलोनी को भारत आने का न्योता भी दिया। ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… मेलोनी के पिता ड्रग तस्करी में जेल गए, खुद बारटेंडर रहीं; कैसे बनीं इटली की पहली महिला पीएम, इटली में मोदी से हुई मुलाकात कभी ट्रम्प ने बीच भाषण रोककर खूबसूरती की तारीफ की, कभी अल्बानिया के पीएम ने घुटने पर बैठकर स्वागत किया। मोदी के साथ सेल्फी ली तो #Melodi ट्रेंड हो गया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी जब भी किसी विदेशी नेता से मिलती हैं, वो मुलाकात मोमेंट बन जाती है। आज पीएम मोदी से फिर उनकी मुलाकात हुई है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 20 May 2026 6:23 pm

बीजिंग में पुतिन-जिनपिंग की अहम मुलाकात, ईरान युद्ध से लेकर ऊर्जा साझेदारी तक कई मुद्दों पर चर्चा; 40 समझौतों पर साइन होंगे

बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में शी जिनपिंग ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। दोनों नेता रेड कार्पेट पर साथ चलते नजर आए, जबकि सैन्य बैंड ने रूस और चीन के राष्ट्रगान बजाए। इस दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहे।

देशबन्धु 20 May 2026 11:47 am

'बातचीत का इंतजार है', द्विपक्षीय चर्चाओं से पहले रोम में प्रधानमंत्री मोदी ने की मेलोनी से मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की है। दोनों नेताओं ने डिनर पर मुलाकात के दौरान अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने रोम के प्रतिष्ठित कोलोसियम का भी दौरा किया

देशबन्धु 20 May 2026 10:01 am

जेडी वेंस की ईरान को चेतावनी, डील नहीं हुई तो फिर शुरू हो सकता है सैन्य अभियान

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि डोनाल्‍ड ट्रंप की सरकार ईरान के साथ गंभीर और लगातार बातचीत कर रही है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर तेहरान न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने वाली डील पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका मिलिट्री ऑपरेशन को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।

देशबन्धु 20 May 2026 8:50 am

अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर, क्वाड और रक्षा सहयोग पर होगी अहम चर्चा

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो चार दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं। वे शनिवार को भारत पहुंचेंगे और 23 से 26 मई तक देश के अलग-अलग राज्यों का दौरा करेंगे। इस दौरान क्वाड साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रक्षा सहयोग पर मुख्य रूप से चर्चा होने की उम्मीद है।

देशबन्धु 20 May 2026 8:43 am

प्रधानमंत्री मोदी की इटली के कलाकारों ने जमकर की प्रशंसा, बोले- यादगार रहा अनुभव

पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली पहुंचे हैं। यहां भारतीय नागरिकों के साथ-साथ इटली के लोग भी उनका स्वागत करने पहुंचे

देशबन्धु 20 May 2026 8:41 am

“आपका स्वागत है, मेरे दोस्त!” मेलोनी ने मोदी का किया गर्मजोशी से स्वागत

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मंगलवार रात रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी अपने पांच देशों के दौरे के आखिरी चरण में इटली पहुंचे हैं।

देशबन्धु 20 May 2026 8:25 am

वंदे भारत से 5 घंटे में जम्मू से श्रीनगर:855 रुपए किराया, सुरक्षा में CORAS कमांडो; यूरोप सा नजारा, सेब कारोबारी खुश

जावेद के ससुर की सर्जरी होनी थी। इसके लिए चंडीगढ़ जाना था। जावेद कश्मीर के पुलवामा में रहते हैं। कश्मीर से चंडीगढ़ तक पहुंचने के लिए जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) ही इकलौता रास्ता है। वो भी लैंडस्लाइड या बर्फबारी की वजह से अक्सर बंद हो जाता है। इसे ध्यान में रखकर जावेद सर्जरी से कुछ दिन पहले ही चंडीगढ़ के लिए निकल गए। 50 किमी दूर काजीगुंड पहुंचकर पता चला कि रामबन के पास रास्ता बंद है। दिक्कत तब बढ़ गई, जब सर्जरी की तारीख पास आने लगी और रास्ता नहीं खुला। अब फ्लाइट टिकट बुक कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। परिवार के चार-पांच लोगों के टिकट का खर्च लगभग सर्जरी के खर्च के बराबर हो गया। जावेद अहमद की ये कहानी 2023 है। 30 अप्रैल से पहले तक यही परेशानी कश्मीर में रहने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थी। अब जम्मू ट्रेन के जरिए सीधे कश्मीर घाटी से जुड़ गया है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत जम्मू से श्रीनगर तक वंदे भारत एक्सप्रेस चलने से घाटी में बदलाव दिख रहा है। लोकल लोगों की बात…20 दिन में दो बार सफर किया, सिर्फ हजार रुपए खर्च हुए जम्मू-श्रीनगर के बीच 270 किमी की दूरी है। यहां रोड कनेक्टिविटी हमेशा बड़ी चुनौती रही है। अब जावेद कहते हैं, ‘अगर तीन साल पहले ट्रेन की सुविधा होती तो हम इतने बड़े खर्च और परेशानी से बच सकते थे। हम जैसे उन मिडिल क्लास परिवारों के लिए ये बड़ी राहत है, जो हवाई सफर या महंगी रोड ट्रिप पर खर्च नहीं कर सकते हैं।’ ट्रेन चलने के बाद दो बार सफर कर चुका हूं। महज हजार रुपए में सुबह घर से निकलकर शाम तक लौट आया। पैसा और समय दोनों बचा। जावेद बताते हैं कि सर्दियों में रामबन, बनिहाल और रामसू जैसे इलाकों में लैंडस्लाइड और बर्फबारी होने से सड़क कई दिनों या हफ्तों तक बंद रहती थी। इससे न सिर्फ काम रुकता था, बल्कि कश्मीर में जरूरी सामानों की भी कमी हो जाती थी। अब सड़कें जरूर पहले से बेहतर हुई हैं। हाईवे फोर-लेन और टनल से लैस हैं, लेकिन ट्रेन का सफर ज्यादा आसान, सस्ता और भरोसेमंद है। बाहर पढ़ रहे 70 हजार स्टूडेंट्स के लिए सफर आसान हुआ जम्मू-कश्मीर के करीब 70 हजार स्टूडेंट दिल्ली, चंडीगढ़ और देश के बाकी शहरों में रहकर पढ़ रहे हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट श्रीगुफवारा के रहने वाले मोहम्मद आमिर कहते हैं, ‘पहले सर्दी या बारिश में जब NH-44 बंद हो जाता, तो मजबूरी में हवाई सफर करके घर जाना पड़ता था। अब घर आने-जाने से पहले सोचना नहीं पड़ेगा।‘ आमिर सरकार से अनंतनाग में ट्रेन के स्टॉपेज की मांग भी करते हैं। वे कहते हैं कि इससे साउथ कश्मीर में अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां जिलों के स्टूडेंट्स को सीधा फायदा मिलेगा। अमरनाथ यात्रियों के लिए अनंतनाग में स्टॉपेज की मांग साउथ कश्मीर के लोग भी अनंतनाग में वंदे भारत ट्रेन के स्टॉपेज की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे अनंतनाग धार्मिक पर्यटन का बड़ा ट्रांजिट हब बन सकता है। अमरनाथ यात्रियों और इलाके के टूरिज्म को भी फायदा होगा। अमरनाथ यात्रियों के लिए अनंतनाग पारंपरिक बेस कैंप का मुख्य प्रवेश द्वार है। यहां ट्रेन रुकने से यात्रियों के सफर का समय और खर्च दोनों कम होगा। यात्रियों की आवाजाही से होटल, रेस्त्रां, टैक्सी ऑपरेटर और छोटे व्यापारियों को भी फायदा मिलेगा। फल कारोबारियों की बात…अब सेब सड़ेंगे नहीं, ढुलाई भी सस्ती हुई एशिया की दूसरी सबसे बड़ी सोपोर फ्रूट मंडी के अध्यक्ष फैयाज अहमद भट कहते हैं, ‘पहले सड़क के रास्ते दिल्ली तक एक सेब की पेटी 100–130 रुपए में भेजते थे। ट्रेन से ये लागत घटकर 30-45 रुपए रह गई है।‘ फैयाज के मुताबिक, ये सेक्टर हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपए का कारोबार करता है। इससे लगभग 7 लाख परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है और करीब 35 लाख लोगों को रोजगार देता है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘पिछले साल सेब के सीजन में NH-44 काफी दिनों तक बंद रहा और हमें 2 हजार करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। ये रास्ता लैंडस्लाइड के चलते 7 साल में 284 दिनों तक बंद रहा है। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई। जब ट्रक रास्ते में फंसते हैं, तो माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है और किसानों की कमाई घट जाती है।‘ ’रेल से फलों का ट्रांसपोर्ट किफायती है, लेकिन इसके लिए बेहतर इंतजाम जरूरी है। बुकिंग सीधे रेलवे से हो ताकि आम लोगों को फायदा मिले। एजेंट सक्रिय हुए तो ना ट्रांसपेरेंसी रहेगी, मोनोपोली अलग हो जाएगी। अभी फलों के लिए भी सीमेंट ढोने वाले वैगन इस्तेमाल हो रहे हैं, जो सही नहीं हैं।’ पर्यटकों की बात…कश्मीर में यूरोप सा नजारा, 10-12 घंटे का सफर 5 घंटे में पिछले 13 साल से परिवार के साथ कश्मीर घूमने आ रहे गणेश उंडाले कहते हैं, ‘रेलवे ने पूरा सफर ही बदल दिया। पहले मुंबई से जम्मू और फिर सड़क के रास्ते श्रीनगर पहुंचने में वक्त और पैसा दोनों लगता था। अब ट्रेन का किराया क्लास के हिसाब से 855 से 1600 रुपए तक है, जबकि टैक्सी का खर्च 7 से 8 हजार रुपए तक पहुंच जाता है।’ ’रोड के बजाय ट्रेन से सफर ज्यादा सेफ है। स्टेशनों पर एयरपोर्ट जैसा सिक्योरिटी चेक होता है। जम्मू से श्रीनगर का सफर सिर्फ 5 घंटे में तय हो जाता है। रोड ट्रिप की तुलना में 5-7 घंटे बचते हैं। फिर कश्मीर में ट्रेन जब पहाड़ों और खूबसूरत वादियों से गुजरती है, तो यूरोप की खूबसूरती को भी टक्कर देती है। चिनाब रेलवे ब्रिज से गुजरना एक्सपीरियंस को और खास बनाता है।’ ट्रेन की सुरक्षा के लिए CORAS कमांडो जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस देश के सबसे संवेदनशील इलाकों से गुजरती है। इस रेल रूट की कई जगहें आतंकियों के निशाने पर रही हैं। भारतीय रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां इसीलिए ट्रेन को हाई-सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तरह देख रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इंतजाम: ……………. ये खबर भी पढ़ें… कैसे बना चिनाब रेलवे ब्रिज, 10 पुलों के बराबर लगा लोहा जम्मू और पीर-पंजाल में पहाड़ियों पर बना है दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज। 16 साल में 1486 करोड़ रुपए की लागत से बना ये ब्रिज इंजीनियरिंग का शानदार नमूना तो है ही, भारतीय रेलवे के लिए भी अब तक का सबसे चैलेंजिंग प्रोजेक्ट रहा है। दैनिक भास्कर आपको बता रहा है इस ब्रिज की पूरी कहानी, वो भी ग्राउंड जीरो से। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 20 May 2026 5:11 am

आज का एक्सप्लेनर:मेलोनी के पिता ड्रग तस्करी में जेल गए, खुद बारटेंडर रहीं; कैसे बनीं इटली की पहली महिला पीएम, आज मोदी से मुलाकात

कभी ट्रम्प ने बीच भाषण रोककर खूबसूरती की तारीफ की, कभी अल्बानिया के पीएम ने घुटने पर बैठकर स्वागत किया। मोदी के साथ सेल्फी ली तो #Melodi ट्रेंड हो गया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी जब भी किसी विदेशी नेता से मिलती हैं, वो मुलाकात मोमेंट बन जाती है। आज पीएम मोदी फिर उनसे मिलने वाले हैं। मेलोनी की असली कहानी इन वायरल पलों से कहीं ज्यादा दिलचस्प है। कैसे एक नाइट क्लब में बारटेंडर लड़की, इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… बचपनः मां एबॉर्शन करवाने वाली थीं, 1 साल की उम्र में पिता छोड़ गए इटली का सबसे मशहूर शहर है रोम। 15 जनवरी 1977 को यहीं जॉर्जिया मेलोनी पैदा हुईं। पिता फ्रांसेस्को टैक्स एडवाइजर थे और मां अन्ना नॉवेल राइटर। उनकी शादीशुदा जिंदगी में सब ठीक नहीं था। ऑटोबायोग्राफी 'इओ सोनो जॉर्जिया (मैं जॉर्जिया हूं)' में मेलोनी लिखती हैं- जब मैं गर्भ में थीं, तो मां ने इसे गिराने का सोचा। आखिरी वक्त पर क्लीनिक से लौट आईं। मैं अपनी मां और उनकी हिम्मत की कर्जदार हूं। उनके साहस और समझदारी के इस कदम के बिना मेरा जन्म ही नहीं होता।' अन्ना का पति से रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चला। 1978 में जब जॉर्जिया एक साल की हुईं, तो फ्रांसेस्को परिवार छोड़कर स्पेन के कैनरी द्वीप चले गए और दूसरी शादी कर ली। पिता जिस घर को छोड़कर गए थे, वो रोम के पॉश इलाके कैमिलुचिया में था। 1980 की बात है। 3 साल की मेलोनी बड़ी बहन एरियाना के साथ खेल रही थीं, तभी एक बड़ा हादसा हो गया। उस हादसे के बारे में एरियाना ने एक इंटरव्यू में बताया- हम लाइट नहीं जलाना चाहते थे, इसलिए मोमबत्तियां जला लीं। फिर हमने उन्हें रजाई और खिलौनों से ढक दिया और टीवी पर कार्टून देखने चले गए। कमरे में आग लग गई। जो कुछ बचा था, सब खत्म हो गया। जब तक नया घर नहीं मिला, मेलोनी नाना-नानी के गरबाटेला वाले घर में फर्श पर गद्दे बिछाकर सोती थीं। मां पास में ही अपनी एक दोस्त के यहां चली जाती थीं। नाइट क्लब में बारटेंडर, 15 साल में राजनीति शुरू की 1990 के आखिर में मां उपन्यास लिखकर कुछ पैसे कमाती थीं, लेकिन ये घर के खर्च के लिए काफी नहीं होते थे। बहन एरियाना कहती हैं, ‘जॉर्जिया गरीबी के चलते कॉलेज नहीं जा सकी। उसने सीडी बेचकर और बच्चों की देखभाल करके पैसे कमाए।' जॉर्जिया ने रोम के सबसे मशहूर नाइट क्लब 'पाइपर क्लब' में बारटेंडर का भी काम किया। 2013 में मेलोनी ने कहा था, ‘मैंने जिंदगी के बारे में संसद में काम करके नहीं, बार काउंटर के पीछे खड़े होकर सीखा है।’ 15 साल की उम्र में जॉर्जिया ने MSI नाम की पार्टी ज्वॉइन की। ये एक फासीवादी पार्टी थी, जिसे 1945 तक इटली के तानाशाह रहे मुसोलिनी की मौत के बाद उनके समर्थकों ने खड़ा किया था। 25 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री बनने के बाद संसद में अपने पहले भाषण में जॉर्जिया ने कहा, ‘मैंने 15 साल की उम्र में विया डी’एमेलियो नरसंहार के बाद राजनीति शुरू की, जिसमें माफिया ने जज पाओलो बोर्सेलिनो को मारा था। मुझे लगा कि अब चुपचाप बैठना मुमकिन नहीं।’ दरअसल, इटली के माफिया नेटवर्क के खिलाफ जांच कर रहे जज पाओलो बोर्सेलिनो की कार को बम से उड़ा दिया गया था। इसमें उनके अलावा 5 बॉडीगार्ड भी मारे गए थे। 1996 में मेलोनी ने फ्रेंच टीवी के साथ इंटरव्यू में कहा, ‘मुसोलिनी एक अच्छे नेता थे। पिछले 50 सालों के नेताओं के उलट उन्होंने जो कुछ भी किया, देश के लिए किया।' इसी वीडियो में मेलोनी की मां अन्ना भी दिखाई दे रही हैं। वो कहती हैं, ‘मैंने अपनी बेटी पर धुर दक्षिणपंथी विचार थोपने की कोशिश नहीं की है।’ 1995 में MSI के नेता जियानफ्रैंको फिनी ने पार्टी को फासीवाद से दूर करके एक नेशनल-कंजर्वेटिव पार्टी बनाने की पहल की। MSI की जगह नया नाम ‘नेशनल अलायंस’ रखा गया। 1997 में 20 साल की मेलोनी इसकी यूथ विंग के रोम सेक्शन की चीफ बनीं। सबसे कम उम्र की कैबिनेट मिनिस्टर 2004 में 27 साल की मेलोनी को पूरे इटली में नेशनल अलायंस की यूथ विंग का चीफ चुना गया। एक तरह से युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष। पहली बार किसी महिला को ये पद मिला था। 2006 में मेलोनी गरबाटेला से सांसद बनीं। फिर 2008 में उन्हें यूथ मिनिस्टर और इटली की संसद के निचले सदन यानी 'चैंबर ऑफ डेप्युटीज' का डिप्टी प्रेसिडेंट भी बनाया गया। इधर 2009 में नेशनल अलायंस के नेता फिनी ने इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के साथ मिलकर गठबंधन बनाया और इसे नाम दिया गया- 'द पीपुल ऑफ लिबर्टी।' ये एक तरह से दक्षिणपंथी नेताओं का जमावड़ा था। 2012 में बर्लुस्कोनी ने गठबंधन का नया नेता चुनने के लिए चुनाव से इनकार किया, तो मेलोनी और उनके साथियों ने ये गठबंधन छोड़ दिया और अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया। अपनी पार्टी बनाई, इटली की पहली महिला पीएम बनीं मेलोनी अपनी पार्टी का नाम अंग्रेजी में 'We Italians' रखना चाहती थीं, लेकिन उनके साथी और पार्टी के फाउंडर मेंबर फैबियो रामपेली ने नाम सुझाया- फ्रेटेली डी'इटैलिया यानी 'ब्रदर्स ऑफ इटली'। ये इटली के राष्ट्रगान की पहली लाइन से लिया गया है। 'ब्रदर्स ऑफ इटली' के ज्यादातर नेता वही हैं, जो MSI में थे। पार्टी का हेडक्वार्टर और पार्टी का तीन रंगों वाला प्रतीक भी लगभग वही है। 2018 के इटली चुनाव में मेलोनी की पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' को 4.4% वोट मिले। 2022 के आम चुनाव में 26% वोट के साथ 'ब्रदर्स ऑफ इटली' देश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई। इसने संसद के निचले सदन की 400 सीटों में से 119 सीटें जीतीं। बर्लुस्कोनी की पार्टी ‘फोर्जा इटालिया’ सहित कई अन्य दलों से गठबंधन किया और 22 अक्टूबर, 2022 को मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। परिवारः टीवी जर्नलिस्ट के साथ 8 साल रिश्ते में रहीं, 10 साल की बेटी 2014 में एक टीवी शो चल रहा था। ब्रेक के दौरान मेलोनी ने केला खाया और उसका छिलका पास खड़े एक शख्स को असिस्टेंट समझकर पकड़ा दिया। ये शख्स टीवी जर्नलिस्ट एंड्रिया जियाम्ब्रूनो थे। इस मुलाकात के बाद दोनों करीब आए।मेलोनी 2015 से 2023 तक एंड्रिया के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहीं। 2016 में मेलोनी को एक बेटी हुई जिसका नाम जिनेवरा है। 20 अक्टूबर 2023 को मेलोनी ने एंड्रिया के साथ अपने रिश्ते को खत्म करने का ऐलान करते हुए कहा- ‘करीब 10 साल चला हमारा रिश्ता अब खत्म होता है। शानदार समय साथ बिताने और मुझे मेरे जीवन की सबसे अहम चीज मेरी बेटी जिनेवरा देने के लिए मैं एंड्रिया की शुक्रगुजार हूं।’ वहीं जॉर्जिया की बहन एरियाना पार्टी की पॉलिटिकल सेक्रटेरियट की चीफ हैं। पार्टी के अहम फैसले एरियाना ही लेती हैं। उन्हें मेलोनी की करीबी सलाहकार माना जाता है। जॉर्जिया 12 साल की उम्र तक अपने पिता फ्रांसेस्को से मिलती रहीं, लेकिन उसके बाद संपर्क खत्म हो गया। 1995 में फ्रांसेस्को को स्पेन में ड्रग्स की तस्करी के आरोप में 9 साल की जेल हुई फिर 2012 में उनकी मौत हो गई थी। मेलोनी की कौन-सी बातें उन्हें अलग बनाती हैं? 2024 में फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर महिला बताया। 3 बातें उन्हें खास बनाती हैं- 1. इटली के 161 साल के चुनावी इतिहास में पहली महिला पीएम 3. 77 सालों में 68 सरकारें बदलीं, मेलोनी तीसरी लॉन्गेस्ट सर्विंग पीएम 3. चुलबुला अंदाज, आम इंसान वाली छवि इसके अलावा अंतराष्ट्रीय मंचों पर मेलोनी के कई नेताओं के साथ हंसी-मजाक के वीडियो भी वायरल होते हैं, जिससे वे चर्चाओं में बनी रहती हैं। मेलोनी की विदेशी नेताओं से मुलाकात कैसे मोमेंट बन जाती है? PM मोदी के साथ सेल्फी ली, #Melodi लिखकर पोस्ट की ट्रम्प ने बीच भाषण में मेलोनी को खूबसूरत कहा फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने किस किया, तो चौंक गई मेलोनी तुर्किए के राष्ट्रपति ने स्मोकिंग छोड़ने को कहा अल्बानिया के प्रधानमंत्री ने घुटनों पर बैठकर स्वागत किया 2023 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक कार्यक्रम में दिया गया उनका भाषण जमकर वायरल हुआ था। उन्होंने कहा था, 'दुनिया महिलाओं को ऊपर उठते नहीं देखना चाहती, लेकिन हम फिर भी आ जाते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता।’ ----------------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ:पापा के कहने पर 'किलर' बने, दोस्त को छत से फेंकने पर अड़े; ईरान को बास्टर्ड कहा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 अप्रैल की शाम गालियों से भरा एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘मंगलवार को ईरान ऐसा नजारा देखेगा, जो उसने पहले कभी नहीं देखा होगा! ओ पागल, बास्टर्ड! होर्मुज स्ट्रेट खोल दो, वरना तुम नर्क के लिए तैयार रहो।’ पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 19 May 2026 6:56 pm

अमेरिका की सैन डिएगो मस्जिद में गोलीबारी, 5 की मौत, धार्मिक नफरत से जुड़े हमले की आशंका

शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि हमले के बाद दोनों ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई और मस्जिद परिसर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

देशबन्धु 19 May 2026 11:32 am

बांग्लादेश लौटने की तैयारी में शेख हसीना, बोलीं- लोकतंत्र बहाल होते ही करूंगी वापसी

शेख हसीना ने कहा कि उनकी वापसी किसी तय तारीख पर निर्भर नहीं है। उनके अनुसार, सबसे जरूरी यह है कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक वातावरण दोबारा स्थापित हो, लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिले और राजनीतिक अधिकारों की बहाली हो।

देशबन्धु 19 May 2026 9:52 am

ट्रंप ने ईरान पर होने वाला हमला टाला: खाड़ी देशों के कहने पर फैसला; बोले- समझौता नहीं हुआ तो सेना बड़े हमले के लिए तैयार

डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी देते हुए कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नेताओं ने उनसे आग्रह किया था कि सैन्य कार्रवाई से पहले बातचीत का रास्ता खुला रखा जाए।

देशबन्धु 19 May 2026 9:40 am

पीएम मोदी ने नॉर्वे के किंग हेराल्ड V से की मुलाकात, दोनों देशों के बीच पुरानी दोस्ती को लेकर हुई बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ओस्लो के रॉयल पैलेस में नॉर्वे के राजा हेराल्ड V से मुलाकात की और अलग-अलग क्षेत्र, खासकर नई तकनीक में भारतीय और नॉर्वेजियन कंपनियों की शानदार तरक्की पर चर्चा की

देशबन्धु 19 May 2026 7:30 am

भारत-नॉर्वे बिजनेस समिट में पीएम मोदी का आह्वान, कारोबार और रिसर्च साझेदारी मजबूत करने की अपील

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में भारत-नॉर्वे बिजनेस और रिसर्च समिट में हिस्सा लिया

देशबन्धु 19 May 2026 7:20 am

ट्रंप का यू‑टर्न: समुद्री रूसी क्रूड पर छूट फिर बढ़ी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अपने पहले के फैसले से यू-टर्न लेते हुए समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की खरीद पर प्रतिबंधों में दी गई छूट को फिर से बढ़ा दिया है

देशबन्धु 19 May 2026 6:57 am

पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे पर दोनों देशों के बीच इन 12 मुद्दों पर बनी बात

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के दौरे पर सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। वहीं दोनों देशों के बीच कई एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए

देशबन्धु 19 May 2026 6:50 am

‘माइनस10°C में मौत, लेकिन हम करते हैं नंगे बदन तपस्या’:ध्यान में ही थम जाती हैं हमारी सांसें, मरने के 15 दिन बाद अंतिम संस्कार

हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। जहां भारी-भरकम जैकेट में लिपटे हमारे शरीर ठिठुर रहे हैं, वहीं इन लोगों पर सर्द हवाओं का कोई असर नहीं दिख रहा। ये लोग असल में तपस्वी हैं, बौद्ध तपस्वी। इनका मकसद है बुद्ध को पाना या मोक्ष को पाना। बर्फीले तूफान आते हैं, शरीर को बर्फ की सफेद चादर से ढंक देते हैं। मौत का आभास भी होता है, लेकिन इनका तप जारी रहता है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं, लेह से 38 किलोमीटर दूर फ्यांग गांव के पास पर्वत पर तप कर रहे तपस्वियों की कहानी… चलिए चलते हैं, उसी पर्वत की चोटी पर जहां तपस्वी तप कर रहे हैं। मेरे साथ हैं सोनम वांगचुक। सोनम लेह में रहते हैं। बौद्ध धर्म और यहां के मठों के जानकार हैं। वे मुझे समझाते हैं कि यहां जो लोग नंगे बदन तपस्या कर रहे हैं, उनकी वीडियो या फोटो नहीं ले सकते। मैं सोनम से पूछती हूं- ये लोग कब से तप कर रहे हैं, और क्यों? सोनम बताते हैं- ‘तपस्या 3 साल, 3 महीने, 6 दिन में पूरी होती है। यह तप का आखिरी चरण है। इसमें एक साल तक नंगे बदन पर्वतों पर तपस्या करना जरूरी है, चाहे कितनी भी बर्फ-ठंड क्यों न हो।’ यदि कोई इतनी ठंड सहन न कर सके तो…? सोनम बताते हैं- ‘बौद्ध दर्शन में सांस के दो रूप माने जाते हैं। पहली- बाहरी सांस, जो हम नाक से लेते हैं। दूसरी- अंदरूनी, जो हमारी आत्मा या ऊर्जा का हिस्सा है।' ‘मौत के बाद बाहरी सांस तो थम जाती है, लेकिन अंदरूनी ऊर्जा को शरीर छोड़ने में वक्त लगता है। इसलिए, तपस्वी के शव को 15 दिनों तक अपनी जगह से नहीं हटाया जाता। कोशिश रहती है कि जिस 'ध्यान मुद्रा' में अंतिम सांस ली, उनका शरीर उसी अवस्था में बना रहे।’ फिर क्या करते हैं? वे बताते हैं- ‘15 दिन के बाद उनके शरीर को उसी 'ध्यान मुद्रा' में मंत्रोच्चार के साथ अग्नि के हवाले कर देते हैं।’ क्या यहां सभी की अंतिम विदाई ऐसे ही होती है? ‘नहीं, बौद्ध परंपरा में आध्यात्मिक स्तर का काफी ध्यान रखा जाता है। मौत के बाद एक तपस्वी के शव को 15 दिन, लामाओं के शव को 7 दिन और आम शिष्यों के शव को 4-5 दिन रखा जाता है। जहां तपस्वियों और लामाओं को उनकी साधना की स्थिति यानी 'बिठाकर' मुखाग्नि दी जाती है, वहीं आम शिष्यों को ‘लिटाकर’।’ जब अग्नि शांत होती है, तो उनकी अस्थियां समेट ली जाती हैं। इन्हीं अस्थियों को सहेजकर बनाया जाता है- स्तूप। इतना कहकर, वे मुझे चोटी से सड़क की तरफ देखने का इशारा करते हैं। वहां लकड़ी के कई ढांचे हैं, जिन पर सफेद और सुनहरा रंग है और उनकी छत नुकीली है। सोनम बताते हैं- ‘यह उन तपस्वियों और लामा के स्तूप हैं, जिन्होंने तप करते-करते जीवन को त्याग दिया।’ इतने में पर्वत के दूसरी ओर ढलान पर एक घर दिखाई देता है। सोनम बताते हैं- ‘वहां बौद्ध तपस्वी सेवंग गैलसन रहते हैं। उनकी उम्र सिर्फ 38 साल है। हमें उन्हीं से मिलना है। उन्होंने अभी कुछ दिन के लिए तपस्या रोकी है।’ मैंने पूछा- मतलब? वे बताते हैं- ‘बौद्ध धर्म में तपस्या आसान नहीं है। तपस्वी 3 महीने, 6 महीने, एक साल या फिर 3 साल 3 महीने 6 दिन के लिए पर्वत पर तप करते हैं।’ भिक्षु, लामा और तपस्वी में क्या अंतर है? सोनम बताते हैं- ’भिक्षु बुद्ध के नियमों और भिक्षा पर जीते हैं। लामा तिब्बती परंपरा के बहुत पढ़े-लिखे गुरू होते हैं। तपस्वी कठिन तप करते हैं।’ अब हम सेवंग के घर पहुंच चुके थे, दरवाजों पर कंबल और बोरियों से बने पर्दे लगे हैं। सोनम बताते हैं- ‘इससे ठंडी हवा घर में नहीं आती।’ घर में अंदर जाते ही, एक लड़का हमें कमरे में बैठाता है। कमरे में ही सामने चूल्हा जल रहा है। इसे यहां ‘चुछुंग’ कहते हैं। इससे कमरे में गर्माहट महसूस हो रही है। इसका धुआं एक पाइप के जरिए घर से बाहर निकल रहा है। तभी, मैरून रंग का चोगा पहने एक भिक्षु आते हैं। सोनम बताते हैं- ‘ये ही बौद्ध तपस्वी सेवंग गैलसन हैं। मैंने सेवंग को ‘जूले’ कहा। यहां नमस्ते, हेलो को जूले कहते हैं। उन्होंने हमें एक आसन पर बैठने के लिए कहा। आसन काफी गद्देदार था। इस पर याक की खाल से बना कंबल बिछा था, जिस पर बैठते ही शरीर को राहत मिली।’ सेवंग कुछ सोच रहे हैं और हमें बड़े गौर से देख रहे हैं। इतने में वो एक लड़के को आवाज देते हैं और लद्दाखी भाषा में चाय लाने के लिए कहते हैं। कुछ ही मिनटों में वो प्यालों में चाय और लद्दाखी ब्रेड देकर चला जाता है। इस बीच सेवंग चुप बैठे रहे। चाय की चुस्कियां लेते-लेते उन्होंने सेवंग गैलसन को बताया कि मैं कौन हूं और यहां क्यों आई हूं? इसके बाद, वे एक छोटे कमरे में चले जाते हैं। थोड़ी देर बाद, हमें उस कमरे में बुलाया जाता है। कमरे में सेवंग अपने आसन पर बैठे हैं। यह तपस्या का कमरा है। यहां सामने एक घंटी और पानी भरा प्याला है। पास ही एक चमकीला कपड़ा बिछा है, जिस पर एक बड़ा सफेद पत्थर रखा है। पत्थर पर कुछ शब्द उकेरे गए हैं। शायद कोई मंत्र। सेवंग बताते हैं- ‘जब मैं तपस्या करता हूं, तो घर के दरवाजे पर इस पत्थर को रख देता हूं, ताकि लोगों को पता रहे कि यहां तप चल रहा है। इस कमरे में एक खिड़की है, जहां लोग चुपचाप खाने-पीने का सामान रख जाते हैं।‘ मैं पूछती हूं- आप यहां कब से हैं? वे बताते हैं- ‘7 साल की उम्र में फ्यांग बौद्ध मठ आ गया था। यहीं 7वीं तक स्कूली शिक्षा और धार्मिक शिक्षा साथ-साथ ली।’ बौद्ध धर्म में धार्मिक शिक्षा को छुई कहते हैं। इसमें या तो आप बौद्ध दार्शनिक बनते हैं, मठ में काम करते हैं या फिर लामा, तपस्वी बनते हैं। कुछ परिवार अपने बच्चों को लामा बनाने के लिए मठ को दान दे देते हैं। पहले अगर किसी के तीन बेटे होते थे, तो मझले बेटे को लामा बनाने के लिए बौद्ध मठ को दे दिया जाता था। मैं बीच में ही पर्वतों पर तप कर रहे तपस्वियों का जिक्र करती हूं। वे कहते हैं- बौद्ध धर्म का एक ही मूल है- महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं का पालन करना और मोक्ष प्राप्त करना। इसी बीच सेवंग के पास लामा निमाह आते हैं। निमाह हिंदी बोलना और लिखना जानते हैं। वज्रयान में तंत्र साधना की चर्चा दुनियाभर में लामा निमाह बताते हैं- 'यहां तीन बड़े संप्रदाय हैं- ’थेरवाद, महायान और वज्रयान।’ सबसे मुख्य है- ‘वज्रयान, इसमें तंत्र साधना होती है। इसके रहस्य की दुनियाभर में चर्चा होती है।’ सेवंग बताते हैं- ‘वज्रयान में किया जाने वाला तप सबसे कठिन है। इसमें 3 साल, 3 महीने, 6 दिन की तपस्या करनी होती है। हर साल के अलग नियम हैं।’ पहले साल में गुरू का ध्यान और दूसरे साल में एक लाख मंत्रोच्चार का जाप करते हैं। इस दौरान, खुद को मनुष्य नहीं, देवता का अंश मानते हैं। इतना कहने के बाद सेवंग हमें बाहर ले जाते हैं। वह बताते हैं- तीसरे साल का तप काफी कठिन है। पर्वतों पर बर्फ के बीच सांस रोककर तपस्या करनी होती है। इतना कठोर तप कैसे कर पाते हैं? सेवंग बताते हैं- ‘सांस को रोकने की क्षमता से यह मुमकिन है। इससे शरीर के अंदर ऊर्जा पैदा होती है और ऐसा महसूस होता है कि हमारी नाभि से निकली ऊर्जा पूरे शरीर को गर्म कर रही है। जब साधक इतना मजबूत हो जाता है, तो वह बर्फ में भी बिना कपड़ों के तप कर लेता है।’ तभी एक लड़का थर्मस में गुर-गुर चाय और कुछ प्याले लेकर आया। इसे ‘बटर टी’ भी कहते हैं। ठंड है, इसलिए जैसे ही एक प्याला खाली होता है, तो वह दूसरा भर देता। सेवंग उस चाय में सत्तू मिलाकर पी रहे हैं। वे बताते हैं- ‘तपस्या के दौरान हम गुर-गुर चाय या पानी में सिर्फ जौ का सत्तू मिलाकर पीते हैं।’ सेवंग बताते हैं- ’इन पर्वतों पर कई तपस्वी तप कर रहे हैं।’ शाम होने को थी, इसलिए हम सेवंग से विदा लेकर फ्यांग बौद्ध मठ की ओर जाते हैं। डरावने मुखौटे पहनकर भिक्षु करते हैं 'छम' नृत्य चटख रंगों से सजा फ्यांग बौद्ध मठ दूर से ऐसा दिख रहा है, जैसे पर्वतों के बीच कोई रंगों की दुनिया हो। मठ में चारों तरफ कपड़ों पर पेंटिंग बनी हुई थी। मठ के अंदर मंत्रोच्चार चल रहा है। अंदर कई बच्चे और बड़े मैरून रंग का चोगा पहने हुए हैं। इनमें से कुछ लामा हैं। जैसे ही फोटो के लिए कैमरा उठाया तो मुझे रोक दिया। कहा- यहां वीडियो, फोटो नहीं ले सकते। काफी मशक्कत के बाद एक साधक बातचीत के लिए राजी हुए। उन्होंने बताया- ‘इस मठ का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का वार्षिक उत्सव है। इसमें भिक्षु भारी और डरावने मुखौटे पहनकर 'छम’' नृत्य करते हैं। इसे देखने के लिए आसपास से भी लोग आते हैं।’ ऐसा क्यों करते हैं? वे बताते हैं- ‘यह नृत्य बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह हर साल जुलाई में होता है। रात गहरा रही थी, इसलिए हम वहां से लेह की ओर निकल पड़ते हैं।’ हेमिस मठ सबसे अमीर, यहां सोने से लिखे ग्रंथ हैं अगले दिन, सुबह 10 बजे हम लेह से हेमिस बौद्ध मठ निकल पड़ते हैं। रास्ते में सोनम बताते हैं- हेमिस, लद्दाख का सबसे अमीर बौद्ध मठ है। इसे जान-बूझकर संकरी घाटी में बनाया गया, ताकि हमलावरों की नजर इस पर न पड़े। थोड़ी देर में हम हेमिस बौद्ध मठ पहुंच जाते हैं। यहां लामा दोरजे हमारा इंतजार कर रहे थे, वे यहां प्रशासनिक व्यवस्था भी देखते हैं। वो हमें एक कमरे में ले गए। मैं कुछ पूछती, उससे पहले ही दोरजे बताते हैं- ’हमारे मठ में सभी सुबह 5 बजे उठ जाते हैं। ध्यान करते हैं। इसके बाद बच्चों को पढ़ाते हैं। सुबह 8 से 9 के बीच लामा गांवों में जाते हैं। अपनी तंत्र साधना से बताते हैं कि किस घर में क्या दिक्कत है, फिर उसके अनुसार पूजा करते हैं।’ मैंने उनसे भी पूछा- क्या यहां भी पर्वतों पर तप होता है? वे बताते हैं- ‘गोच्छंग और खसपंग जैसे दुर्लभ इलाकों में 108 गुफाएं हैं, जिनमें तपस्वी तप करते हैं। यह तंत्र साधना है, इसलिए इसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकता।’ वे बताते हैं- ‘तपस्वी, आम लामा लोगों से अलग होते हैं। वे किसी दूसरे व्यक्ति से बात नहीं करते।’ उन्होंने दावा किया कि पुराने जमाने में तो तपस्वी अपने तप बल से उड़कर आया- जाया करते थे। मैं पूछती हूं- इसे सबसे अमीर मठ क्यों कहते हैं? दोरजे बताते हैं- यहां आज भी सोने-चांदी के तार से बनी थांका पेंटिंग हैं। सोने से लिखे बौद्ध ग्रंथ हैं। यहां से करीब 1000 मठ जुड़े हैं। इसलिए आर्थिक और आध्यात्मिक दोनों तरह से यह मठ अमीर है। क्या बौद्ध भिक्षु शादी करते हैं? वे कहते हैं- ‘नहीं, अगर कोई भिक्षु किसी महिला के साथ संबंधों में दोषी पाया जाता है, तो उसे मठ से निकाल दिया जाता है।’ यहां भिक्षु,लामा और बाकी सब मैरून रंग का चोला ही क्यों पहनते हैं? दोरजे बताते हैं- ’मैरून रंग सादगी और मोह-माया के त्याग का प्रतीक है। सभी का एक ही रंग के वस्त्र पहनना उनके बीच के अहंकार को मिटाकर उन्हें एक समान स्तर पर लाता है, इसलिए इसे पहनते हैं। मैं कुछ पूछती, उससे पहले ही दोरजे कहते हैं- साधना का वक्त हो गया है, मैं चलता हूं। इसके बाद, हम हेमिस मठ के म्यूजियम में जाते हैं। म्यूजियम में डिम लाइट के बीच कई पुरानी मूर्तियां रखी हैं। यहां देखरेख करने वाले एक लामा ने बताया कि इसका इतिहास 900 साल पुराना है। हेमिस अपने विशाल रेशमी थांका (बौद्ध पेंटिंग) के लिए प्रसिद्ध है। म्यूजियम में कई ऐसी थांका पेंटिंग है, जिनमें सोने और चांदी के धागों का काम किया गया है। इसके बाद हमें मठ में खाने के लिए कहा जाता है। खाने में यहां दाल-चावल, बैगन की सब्जी, रायता परोसा गया। म्यूजियम देखने के बाद हम लेह के लिए निकल पड़ते हैं। प्रकृति में संतुलन के लिए 5 रंग के कपड़ों की झंडियां मैं सोनम से पूछती हूं- यहां हर पहाड़ी पर नीले, सफेद, लाल, हरे और पीले कपड़ों की झंडियां लगी हैं, ये क्या हैं? सोनम बताते हैं- इसे ‘लुंग टा’ कहते हैं। ‘लुंग’ का मतलब- हवा और ‘टा’ का मतलब- घोड़ा। इसे यहां 'वायु अश्व' कहते हैं। ये पांच रंग प्रकृति के तत्वों के बीच संतुलन को बताते हैं। वो कैसे? वे बताते हैं- लुंग टा का एक निश्चित क्रम है। नीला- आसमान, सफेद- हवा/बादल, लाल- आग, हरा- पानी और पीला रंग- धरती के लिए है। माना जाता है कि इन 5 रंगों की झंडियां लगाने से हवा शुद्ध होती है। सुख-शांति रहती है। मैं पूछती हूं- क्या महिलाएं भी लामा बनती हैं। सोनम बताते हैं- हां, बौद्ध धर्म में 'लामा' एक पदवी है, जो आध्यात्मिक गुरू को दी जाती है। महिलाएं भी इस पद तक पहुंचती हैं। वे भी मैरून रंग का चोगा ही पहनती हैं। अचानक मेरी नजर एक ड्रम पर पड़ी, जिसे कुछ लोग घूमा रहे थे। मैंने पूछा- ये क्या है? सोनम बताते हैं- यह 'मानी' है, यह तांबे या लोहे से बना होता है। इसे घड़ी की सुई की दिशा में घुमाया जाता है। इनके भीतर कागज के लंबे रोल पर हजारों बार 'ॐ मणि पद्मे हुम' मंत्र लिखा होता है। यहां मान्यता है कि इस ड्रम को एक बार घुमाना, उसमें लिखे हजारों मंत्रों को एक साथ पढ़ने के बराबर है। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए अडिया जनजाति की कहानी…. ------------------------------- 1- नाचती लड़की का हाथ पकड़ा और भगा ले गया लड़का:मैतेई लोगों में शादी की अनोखी परंपरा, पैदा होते ही बच्चे को खिला देते हैं नमक शाम के 5 बजे हैं। एक सुनसान जगह पर कुछ लोग जमीन को चौकोर खोद रहे हैं। आसपास भीड़ है। आधे घंटे बाद खुदाई करने वालों को गड्ढे में कुछ नजर आया। कुछ पल बाद दो-तीन लोग उस गड्‌ढे में उतरे और एक लाश बाहर निकालकर रख दी। लाश के कई हिस्से कंकाल में तब्दील हो चुके हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 19 May 2026 5:05 am

चीनी उप प्रधानमंत्री और रूसी उप प्रधानमंत्री ने 10वें चीन-रूस एक्सपो के उद्घाटन समारोह में भाग लिया

चीनी उप प्रधानमंत्री चांग कुओछिंग और रूसी उप प्रधानमंत्री यूरी पेत्रोविच ट्रुत्नेव ने संयुक्त रूप से उत्तर चीन के हार्बिन शहर में आयोजित 10वें चीन-रूस एक्सपो के उद्घाटन समारोह में भाग लिया।

देशबन्धु 19 May 2026 5:00 am

दक्षिण चीन के ल्योचो शहर में 5.2 तीव्रता का भूंकप

दक्षिण चीन के क्वांग शी चुआंग स्वायत्त प्रदेश के ल्योचो शहर के ल्योनान डिस्ट्रिक्ट में रिक्टर स्केल पर 5.2 तीव्रता वाला भूकंप आया, जिसके केंद्र की गहराई 8 किलोमीटर है।

देशबन्धु 19 May 2026 4:30 am

पहले चार महीनों में, चीन की रेलवे ने 1 अरब 50 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा दी

चाइना स्टेट रेलवे ग्रुप कंपनी लिमिटेड के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष के पहले चार महीनों में, चीन की रेलवे ने 1 अरब 55 करोड़ 50 लाख यात्रियों को सेवा दी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 6.8% की वृद्धि है

देशबन्धु 19 May 2026 1:40 am

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।

देशबन्धु 18 May 2026 10:37 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या थलापति विजय से जलते हैं रजनीकांत; कहां से उठी सीएम बनने में अड़ंगा लगाने की बात, पूरी कहानी जानिए

17 मई की शाम। थलाइवा रजनीकांत ने चेन्नई के पोएस गार्डेन स्थित अपने घर पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। सफाई देते हुए कहा- मैं विजय को तब से देख रहा हूं, जब वो बच्चे थे। उनके सीएम बनने से मुझे क्यों जलन होगी। आखिर रजनीकांत के विजय से जलन की बात क्यों उठी, क्या वो विजय को सीएम नहीं बनने देना चाहते थे; इससे जुड़ी पूरी कहानी जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: रजनीकांत और विजय के बीच क्या मसला है? जवाब: रजनीकांत ने 1975 में तमिल फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। फिल्म थी- के बालाचंदर की ‘अपूर्व रागंगल’। 1980 के दशक में ‘बिल्ला’, ‘थिल्लू-मुल्लू’ जैसी फिल्मों के बाद उन्हें सुपरस्टार का दर्जा मिला, जो 5 दशकों से जारी है।इधर विजय ने भी 1966 में अपनी पहली बड़ी हिट फिल्म दी। लेकिन ‘थलापति’ और सुपरस्टार वाला दर्जा उन्हें 2007 में आई ‘पोक्किरी’ से मिला।‘सुपरस्टार’ के टैग पर विजय और रजनीकांत के फैंस अक्सर सोशल मीडिया पर भिड़ जाते हैं, लेकिन दोनों एक्टर्स के बीच सार्वजनिक रूप से कोई तनातनी नहीं दिखी हालांकि विजय के राजनीति में आते ही यह बदल गया- सवाल-2: रजनीकांत का राजनीति से क्या रिश्ता रहा है? जवाब: रजनीकांत के फिल्मों में आने के एक दशक बाद ही उनकी राजनीति में आने की चर्चा शुरू हो गई थी। वजह थी उनकी राजनीतिक बयानबाजियां, पार्टियों से नजदीकी और दमदार फैन बेस… 1996: जयललिता पर बयान, सरकार बदलने का क्रेडिट मिला 2002-2014: BJP को समर्थन, मोदी से मिले, कई बार चुनाव लड़ने के संकेत 2017-2021: पार्टी बनाने का ऐलान, लेकिन बिना चुनाव लड़े ही संन्यास सवाल-3: रजनीकांत राजनीति में विजय जैसा करिश्मा क्यों नहीं दिखा पाए? जवाब: 4 बड़े कारण हैं- 1. फैन बेस को कैडर में तब्दील नहीं कर पाए 2. द्रविड़ियन राजनीति में फिट नहीं बैठे थलाइवा 3. आधे-अधूरे मन से शुरुआत, कमिटमेंट पर संदेह 4. रजनीकांत ने एंट्री में देरी कर दी सवाल-4: क्या वाकई विजय की राजनीतिक सफलता से जलते हैं रजनीकांत? जवाब: रजनीकांत ने सीएम विजय से प्रतिस्पर्धा की बात से इनकार किया है। उन्होंने 17 मई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस चुनाव के बाद विजय और मेरे रिश्ते को लेकर कई बातें हो रही हैं। अगर मैं इनका खंडन न करूं, तो ये बातें सच मानी जाएंगी। विजय से जलन पर कहा- कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं विजय से जलता हूं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। वो मुझसे 25 साल जूनियर हैं। मैं राजनीति छोड़ चुका हूं, तो विजय से मुझे भला क्यों जलन होगी। अगर मैं विजय से तुलना करूं तो मेरे लिए ये ठीक नहीं है। अगर विजय मुझसे तुलना करें तो वो उनके लिए ठीक नहीं है। मैं उन्हें तब से देख रहा हूं जब से वो बच्चे थे। उनके सीएम बनने से मुझे क्यों जलन होगी?’ स्टालिन से मिलने पर कहा- ‘यह सही है कि मैं स्टालिन से मिला था, लेकिन मैं राजनीति के लिए किसी भी हद तक गिरने वाला व्यक्ति नहीं हूं। स्टालिन पिछले 30 साल से मेरे दोस्त हैं। हमारी दोस्ती राजनीति से परे है।’ विजय को CM बनने से रोकने पर कहा- ‘मैं स्टालिन से दोस्त के तौर पर मिला था। लेकिन खबरें आने लगीं कि दोनों पार्टियां (DMK-AIADMK) विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए बैठकें कर रही हैं और मैं उनमें शामिल रहा हूं। मैं आपको बता दूं कि रजनीकांत ऐसा शख्स नहीं है जो इतना नीचे गिर जाए।' विजय से तुलना पर कहा- ‘जब मैं राजनीति में हूं ही नहीं, तो उनसे मेरी तुलना करना गलत है। उनके और मेरे बीच एक जेनरेशन गैप है। अगर मैंने 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ा होता, तो मैं जरूर जीत जाता। मुझे उनकी जीत पर अचंभा हुआ। मैं उनकी जीत को लेकर खुश हुआ। लोगों को विजय से काफी उम्मीदें हैं और मुझे आशा है कि वो इन्हें पूरा करेंगे।’ ’ विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद रजनीकांत ने विजय को चुनाव जीतने की बधाई दी थी। फिलहाल वो राजनीति में नहीं है, इसलिए जलन वाली बात सही नहीं लगती। रजनीकांत ने मुस्कुराते हुए ये जरूर कहा- 'मैं राजनीति में हूं ही नहीं, तो विजय से जलूं क्यों? हां, अगर कमल हासन सीएम बनते तो जरूर जलता।' ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास --------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… 4 बच्चे होने पर मिलेंगे 95 हजार, आंध्र प्रदेश CM ने क्यों कहा- बच्चे ही हमारी दौलत; इसका भारत पर क्या असर आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू ने 16 मई को कहा, 'राज्य में तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को 30 हजार रुपए और चौथे के जन्म पर 40 हजार रुपए दिए जाएंगे। एक समय मैंने जनसंख्या कंट्रोल करने के लिए बहुत मेहनत की थी, लेकिन अब जन्म दर बढ़ाने की जरूरत है।' पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 18 May 2026 6:04 pm

अमेरिका की जंग खत्म करने के लिए 5 शर्तें: ईरान को मुआवजा नहीं, एनरिच्ड यूरेनियम सौंपे, ईरान ने भी जवाब में रखीं पांच शर्तें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ईरान के पास अब बहुत कम समय बचा है और यदि उसने जल्द फैसला नहीं लिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

देशबन्धु 18 May 2026 5:06 pm

जापान में 30 साल से रह रहे भारतीय कारोबारी को देश छोड़ने का आदेश, बदले वीजा नियम बने वजह

इस फैसले के बाद मनीष और उनका परिवार गहरे सदमे में है। उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों तक ईमानदारी से कारोबार किया और जापान के समाज का हिस्सा बनकर जीवन बिताया, लेकिन अचानक बदले नियमों ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

देशबन्धु 18 May 2026 10:29 am

सऊदी अरब ने इराकी हवाई क्षेत्र से देश की सीमा में घुसे 3 ड्रोन को मार गिराया

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने इराकी हवाई क्षेत्र से देश की सीमा में घुसे 3 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। सऊदी अरब ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी हमले के प्रयास का जवाब देने के लिए सभी आवश्यक सैन्य कदम उठाए जाएंगे।

देशबन्धु 18 May 2026 10:09 am

ईरान पर फिर मंडराया युद्ध का खतरा: नेतन्याहू-ट्रंप की चर्चा

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर ईरान को लेकर बातचीत हुई। इजरायल के सरकारी टीवी चैनल कान टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने की संभावना पर चर्चा की।

देशबन्धु 18 May 2026 8:48 am

आईडीएफ का दावा: गाजा में हमास के ऑपरेशंस कमांडर बहा बरौद को एयरस्ट्राइक में मार गिराया

इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने रविवार को दावा किया कि उसने हमास के उस ऑपरेशंस हेडक्वार्टर कमांडर को मार गिराया है, जो इजरायली सेना के खिलाफ साजिशों को आगे बढ़ा रहा था।

देशबन्धु 18 May 2026 8:30 am

अंग, बंग, कलिंग समेत 22 राज्यों में बीजेपी सरकार:अब केरलम समेत दक्षिण भी जीतने की तैयारी; जानिए 10 साल का पूरा रोडमैप

2013 में बीजेपी की सरकार 7 राज्यों में थी, आज 22 राज्यों में है। उत्तर, पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर… एक-एक कर बीजेपी ने सब जीत लिए। अब बची है दक्षिण की दीवार। कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगले 2-3 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ये किला भी फतेह कर सकती है। लेकिन कैसे? क्या बाकी राज्यों वाला फॉर्मूला दक्षिण में भी काम करेगा? भास्कर एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… फैक्टर-1: जमीन पर RSS राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS और उससे जुड़े विद्यार्थी परिषद यानी ABVP, सेवा भारती, वनवासी कल्याण आश्रम वगैरह पहले से ही बीजेपी के लिए जमीन तैयार करते है। जैसे- फैक्टर-2: वोट शेयर की धीमी चढ़ाई बीजेपी सीधे सत्ता के बजाय, पहले विपक्ष या दूसरे नंबर की रणनीति पर चलती है और वोट शेयर बढ़ाती है… फैक्टर-3ः हिंदुत्व + लोकल जातीय समीकरण बीजेपी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के कॉमन एजेंडे के साथ लोकल जातियों और कल्चर के समीकरण को साधती है… फैक्टर-4ः विपक्ष के नाराज लोगों को अपनाना जिस नेता को कांग्रेस, बीजेडी, टीएमसी जैसे विपक्षी दलों ने दरकिनार किया, बीजेपी ने उसे अपने साथ लिया और वैक्यूम भरा… फैक्टर-5: हार से सीखना, रणनीति बदलना पिछले चुनावों की हार और रणनीतिक गलतियों से सबक लेकर बीजेपी अगले चुनाव में नई स्ट्रैटजी और नेताओं की फौज के साथ उतरती है… इन्हीं फैक्टर्स के आधार पर बीजेपी अब दक्षिण में अपना रोडमैप तैयार कर रही है। कर्नाटकः सबसे करीब, सबसे अहम आंध्र प्रदेश: सहयोगी के कंधे पर सवारी तेलंगाना: इंतजार और क्षेत्रीय गठजोड़ केरलम: धीमी लेकिन असली चढ़ाई तमिलनाडुः सबसे लंबा रास्ता 1. भाषाई-सांस्कृतिक पहचान 2. क्षेत्रीय पार्टियों की गहरी जड़ें 3. RSS का कमजोर जमीनी नेटवर्क --------- यह खबर भी पढ़िए… बीजेपी की बंगाल जीत में SIR का कितना रोल:केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस कैसे लौटी; नतीजों के पीछे 5 बड़े फैक्टर्स बंगाल में बीजेपी ने हिंदुत्व का वो रूप दिखाया जो उत्तर भारत से बिल्कुल अलग था- माछ भात खाते हुए, मां काली का नाम लेते हुए। असम में मुस्लिम वोट इस तरह बंटे कि विपक्ष का गणित ही बिगड़ गया। केरलम में राहुल गांधी ने भगवान अयप्पा के नाम पर वो नैरेटिव सेट किया, जिसे लेफ्ट काट नहीं पाया। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 18 May 2026 5:14 am