Iran- US conflict: अमेरिका ईरान पर किसी भी समय सैन्य कार्रवाई कर सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद इस बात के संकेत दिए जाने लगे हैं. इस बीच पोलैंड के पीएम ने ईरान में रहने वाले अपने नागरिकों से कहा कि वह जल्द से जल्द स्वदेश लौट आएं.
संयुक्त अरब अमीरात में रमजान के महीने में निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिला है. यूएई के श्रम कानून के तहत अब निजी क्षेत्र में काम करने वाले मुस्लिम या गैर-मुस्लिम सभी कर्मचारी प्रतिदिन दो घंटे कम काम करेंगे.
King Charles Brother Arrested: ब्रिटेन के किंग चार्ल्स के भाई एंड्र्यू को गिरफ्तार कर लिया गया है. इसके पहले अक्टूबर में एंड्रयू से उनके बाकी रॉयल टाइटल्स छीन लिए गए थे, जिनमें 'हिज़ रॉयल हाइनेस' (HRH) और 'प्रिंस' शामिल थे. उन्होंने घोषणा की थी कि जेफरी एपस्टीन से उनके कनेक्शन को लेकर दबाव के बीच वह ड्यूक ऑफ़ यॉर्क सहित अपने टाइटल्स का इस्तेमाल करना बंद कर देंगे.
US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के मध्य जंग की आहट के बीच गनबोट डिप्लोमेसी क्या है?
क्या अमेरिका इस वीकेंड तक ईरान पर हमला कर सकता है? कहा जा रहा है कि युद्ध की तैयारी कर ली गई है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनुमति का इंतजार किया जा रहा है.
ब्रिटेन में किंग चार्ल्स के भाई एंड्रयू गिरफ्तार:एपस्टीन मामले में आया था नाम
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टेम्स वैली पुलिस पूर्व प्रिंस की ओर से कथित रूप से दोषी यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन के साथ गोपनीय जानकारी साझा किए जाने की शिकायत की जांच कर रही है।
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून को उम्रकैद की सजा, मार्शल लॉ के मामले में हुई कार्रवाई
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सूक येओल को 2024 में मार्शल लॉ लगाने की नाकाम कोशिश के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
यह घटनाक्रम न केवल दक्षिण कोरिया के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है, बल्कि शासन और संवैधानिक जवाबदेही को लेकर भी एक बड़ा संदेश देता है. फिलहाल यून सुक-योल को ग्वाचियोन के सीआईओ कार्यालय में पूछताछ के लिए ले जाया गया है.
ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर सैन्य हमले की तैयारी पूरी कर ली है, बताया जा रहा है कि इस शनिवार को अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है. ऐसे में 18 फरवरी 2026 को वियना में ईरान, रूस और चीन के राजदूतों ने IAEA चीफ राफेल ग्रॉसी से मुलाकात करके एक जॉइंट लेटर दिया है. जानें पूरी खबर.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावित अमेरिकी कार्रवाई जून में इजरायल द्वारा किए गए 12-दिवसीय हमले से कहीं अधिक व्यापक हो सकती है। यह ऑपरेशन ईरान के परमाणु और मिसाइल ढांचे को निशाना बना सकता है। बताया जा रहा है कि पेंटागन संभावित ईरानी जवाबी हमले को देखते हुए क्षेत्र में अपनी तैयारियां बढ़ा रहा है।
'ट्रंप फिर खोज रहे हैं भारत पर टैरिफ लगाने के बहाने...', ट्रेड डील के बाद अमेरिकी सांसद का बड़ा दावा
India Tariffs: US कांग्रेसी ब्रैड शेरमन भारत पर प्रस्तावित टैरिफ को लेकर प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की जमकर आलोचना की है. उन्होंने कहा कि टैरिफ के जरिए हमारे दोस्त को परेशान किया जा रहा है.
अमेरिका के रोड आइलैंड में एक हाई स्कूल हॉकी मैच के दौरान हुई गोलीबारी में एक पिता ने अपने ही बेटे और पूर्व पत्नी की हत्या कर दी. आरोपी की पहचान 56 वर्षीय रॉबर्ट डॉर्गन के रूप में हुई है. आरोपी अपने काम की जगह पर रॉबर्टा नाम से जाना जाता था. इस घटना में उसके पूर्व ससुराल पक्ष के लोग भी घायल हुए हैं.
हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा अचानक वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन को चेताया है कि इस रणनीतिक द्वीप को लंबी लीज पर देना खतरनाक होगा.माना जा रहा है कि ईरान से टकराव की स्थिति में यही बेस अमेरिका की असली ताकत बन सकता है. जानते हैं आखिर क्या हैडिएगो गार्सिया, इसकी पूरी कहानी.
हमले के डर से जमीन में दफन हो रहे न्यूक्लियर ठिकाने! ईरान ने बना लिए कंक्रीट के ‘अजेय किले’
Iran Nuclear Sites: ईरान और अमेरिका में तकरार छिड़ी है. दोनों देश एक दूसरे पर जमकर निशाना साध रहे हैं. इसी बीच कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई है, जिसमें देखा जा सकता है ईरान न्यूक्लियर साइट्स को बंकर में तब्दील करने में लगा है.
सिंगापुर ने सिंगल अमेरिकियों के लिए एक अनोखा टूरिज्म कैंपेन शुरू किया है. इसमें डेटिंग ऐप की जगह आंटियों की मदद से लोगों की जोड़ी बनाई जाएगी. चुने गए दो लोगों को सिंगापुर बुलाकर ब्लाइंड डेट करवाई जाएगी जिसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी.
एक सच्ची कहानी- ग्रेटर नोएडा के किसान रामेश्वर सिंह की। 12 एकड़ जमीन सरकार ने ली और बदले में सवा पांच करोड़ रुपए मिले। पैसा खाते में आते ही जिंदगी बदल गई। रामेश्वर बताते हैं- ‘मुआवजे के पैसे से सबसे पहले बागपत में तीन करोड़ की जमीन खरीदी। गांव में दो बड़े मकान बनवाए- डेढ़ करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ। दो महंगी गाड़ियां आ गईं। फिर शादियों का सिलसिला शुरू हुआ- तीन बेटियों, दो पोतियों और बाद में तीन पोतों की शादी। पोतियों को 20-20 तोला सोना और 20-20 लाख की गाड़ियां दहेज में दीं। एक शादी में ही करीब 80 लाख खर्च हो गए। बहुओं को भी 20-20 तोला सोने के जेवर दिए गए। आज वे मानते हैं- ‘पैसा संभालना नहीं आया।’ वजह पूछने पर बताते हैं कि जैसे ही पैसा मिला, हमारा दिमाग आसमान छूने लगा। यह कहानी ग्रेटर नोएडा के सिर्फ एक परिवार की नहीं। 1979 से न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने जमीन अधिग्रहण शुरू किया। 1991 में ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी बनी और 2007-2012 के बीच 39 से ज्यादा गांवों की जमीन ली गई। 15-20 साल बाद वही जमीन 70 से 200 करोड़ की हो चुकी है, लेकिन अब लगभग 95% परिवारों का मुआवजा खत्म हो चुका है। कई किसान अपनी ही जमीन पर बनी फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड हैं। कोई वहीं बनी इमारतों में दूध बेच रहा है। ब्लैकबोर्ड में इस बार ग्रेटर नोएडा में मुआवजे की रकम से करोड़पति बने और अब बर्बादी की कगार पर पहुंचे किसानों की स्याह कहानियां। 90 साल के रामेश्वर सिंह चौपाल में बैठे मिल जाते हैं। सरकार ने उनकी 12 एकड़ जमीन ली, जिसके बदले में उन्हें सवा पांच करोड़ रुपए दिए। लेकिन आज उनकी उसी जमीन की कीमत 80 करोड़ रुपए है। वह बताते हैं, ‘हमने पैसा हाथ में आते ही बागपत के अलावा हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में जमीन खरीदी। मैं जानता था- जमीन का पैसा जमीन में ही टिकता है। मेरी ही तरह करीब 95 फीसदी बड़े किसानों ने आसपास के इलाकों में दूसरी जगह जमीन खरीदी। हां, कुछ लोगों ने पैसा संभाला नहीं… लापरवाही में खर्च कर दिया।’ वह दोहराते हैं- 'अब 90 फीसदी से ज्यादा लोगों का मुआवजा खत्म हो चुका है। कोई दूध बेच रहा है, कोई छोटी-मोटी नौकरी कर रहा है। जिनके पास कभी खेत थे, अब वे रोज की कमाई जोड़कर घर चला रहे हैं। हमारी जमीन पर फैक्ट्रियां लगी हैं। लेकिन हमारे बच्चों को नौकरी नहीं मिलती। फैक्ट्री मालिकों को लगता है कि लोकल लड़के बदमाश होते हैं। सोचिए, जमीन हमारी गई और हम ही पराए हो गए।’ अब अगली पीढ़ी के लिए क्या बचा? न जमीन, न पैसा, न पढ़ाई के सहारे पक्की नौकरी का रास्ता? बड़ी तनख्वाह वाली नौकरी मिलती नहीं, छोटी नौकरी बच्चे करते नहीं। पहले कम से कम जमीन का सहारा तो था।’ सुबह की धूप में बैठे एक दूसरे किसान श्यामजी अपने पक्के मकान की छत पर खड़े नजर आते हैं। उनके पास पहुंची तो वह वहां से दूर चमकती कांच की इमारतों की तरफ देखते हैं। धीरे से हाथ उठाकर बताते हैं- वहीं कहीं हमारी 17 बीघे जमीन थी, जिसके बदले 50 लाख मिले थे। तब लगा था कि किस्मत खुल गई। लेकिन सच यह है कि आज मेरा बेटा 25 हजार महीने की प्राइवेट नौकरी करता है। दूसरा बेटा हमारी ही जमीनों पर बनी ऊंची-ऊंची ईमारतों में घर-घर दूध बेचता है। गांव के एक और किसान रमेश सुबह खाट पर बैठे-बैठे आंगन में बंधी भैंसों की ओर देख रहे हैं। कभी यही आंगन कच्चा था, दीवारें टेढ़ी थीं। 2008 में जब उनकी 8-10 बीघे जमीन गई और 14 लाख रुपए का चेक हाथ में आया, तो उन्हें लगा था अब जिंदगी संभल जाएगी। वह धीमे से कहते हैं- 'सबसे पहले घर बनवाया। सोचा पक्का मकान होगा तो इज्जत रहेगी। फिर दो बेटियों की शादी की। रिश्तेदार, बारात, जेवर और देखते ही देखते मेरे पूरे 14 लाख खत्म हो गए। बेटों के लिए कुछ बचा ही नहीं।', यह बात कहते हुए वह ठहर जाते हैं। उनकी आवाज में पछतावा है। वह कहते हैं आज मेरे तीनों बेटे भैंसें पालते हैं। सुबह-सुबह दूध लेकर निकलते हैं और उसी से घर चलता है। जमीन नहीं रही, तो यही अब सहारा बचा है। रमेश कहते हैं- गलती हो गई शायद… सारा पैसा घर और शादियों में लगा दिया। अब हालत यह है कि रोजमर्रा का खर्च भी मुश्किल से निकलता है। जब कभी वे बेटों से कुछ पैसे मांग लेते हैं, तो घर का माहौल भारी हो जाता है। बच्चे कहते हैं- आपको किसलिए पैसे चाहिए? हमारे बच्चों के इतने खर्चे हैं, हम नहीं दे पाएंगे’, ये बातें रमेश आंखें झुकाकर बताते हैं। वह थोड़ी देर चुप रहते हैं, फिर कहते हैं- हम भी तो बीमार होते हैं कभी-कभार… दवा-दरू के लिए पैसे चाहिए होते हैं। हुक्का-पानी भी बिना पैसे के नहीं चलता। 70 साल की उम्र हो चुकी है। अभी तो ठीक-ठाक हूं, चल-फिर लेता हूं, लेकिन कल कुछ हो गया तो क्या होग?’ वे आंगन की तरफ देखते हुए जोड़ते हैं, ‘बच्चों को हमारी फिक्र नहीं है अब। सब अपनी-अपनी जिंदगी में उलझे हैं। हम तो बस राम भरोसे हैं।’ रमेश की आवाज अचानक धीमी हो जाती है। कहते हैं- कभी-कभी खाना खाते हुए अगर बेटों से पानी मांग लूं न… तो ऐसे देखते हैं जैसे मैंने कुछ गलत कह दिया हो। थोड़ी देर चुप रहकर कहते हैं- लगता है अब उनके लिए मैं कुछ भी नहीं रहा… न जमीन रही, न पैसा… तो शायद मेरी कीमत भी नहीं रही। इस दौरान अहाते में बंधी भैंसों की घंटियां बजती रहती हैं, और रमेश की बात वहीं ठहर जाती है। वह लंबी सांस लेकर कहते हैं- बेटियों का आना-जाना लगा रहता है… तीन बहनें भी घर आती हैं। तीज-त्योहार पड़ते हैं तो खाली हाथ रहते हैं। देने को कुछ नहीं होता हमारे पास… बड़ी बेइज्जती लगती है। मुआवजा कब का खत्म हो गया। एक पाई नहीं बची। उल्टा 7 लाख का कर्ज चढ़ा है। कई बार इधर-उधर से उधार लेकर रस्म निभाते हैं। पत्नी का जिक्र आते ही उनकी आवाज और धीमी हो जाती है। ‘वो भी चली गई… अब आगे जिंदगी और मुश्किल होगी।’ फिर जैसे खुद से ही सवाल करते हैं- जब जमीन-जायदाद ही नहीं बची तो जिंदगी कैसे चलेगी? एक पल को रुकते हैं और कहते हैं- कभी-कभी तो सोचता हूं… मुझे भी मौत आ जाए।’ उनकी इस बात से जैसे आंगन में सन्नाटा फैल जाता है। रमेश थोड़ा संभलकर बैठते हैं और कहते हैं- मेरी बेटियां तो खुद कहती हैं- पापा, खर्च चाहिए हो तो बता देना। लेकिन उनसे कैसे ले लूं? आखिर उनकी शादी ही तो की है… बाप हूं उनका। वैसे भी बहुत कुछ दे नहीं पाया उन्हें… अब उन्हीं से पैसे लूं, ये बात गले नहीं उतरती। यह कहते हुए वे नजरें फेर लेते हैं- जैसे आत्मसम्मान और मजबूरी के बीच कहीं अटक गए हों। मुआवजा घर बनाने में खर्च क्यों कर दिया? रमेश बिना देर किए जवाब देते हैं। 'घर कच्चा था… दीवारें झरती थीं। रसोई खुली रहती थी, कुत्ते मुंह मार जाते थे। ऐसे में कैसे गुजारा होता?’ थोड़ा रुककर जोड़ते हैं, ‘रिश्तेदार आते-जाते थे तो शर्म लगती थी। बेटियों की शादी करनी थी… बिना पक्के घर के कौन रिश्ता करता? एक घर बनवाना जरूरी था।’ उनकी आवाज में सफाई कम, मजबूरी ज्यादा थी। ग्रेटर नोएडा के औरंगपुर गांव में राहुल नागर स्कूल में पढ़ाते हैं। वे बताते हैं, ‘2008 में हमारी 200 बीघे जमीन गई थी… 7 करोड़ मिले थे।’ फिर थोड़ी देर रुककर जोड़ते हैं, 'आज वही जमीन 200 करोड़ की हो गई है।’ राहुल कहते हैं- हमने तो जमीन के बदले जमीन ले ली, लेकिन हमारे बड़े-बुजुर्गों का बहुत नुकसान हुआ। जब जमीन थी न, तो मां-बाप किसी भी तरह बच्चों को पढ़ा लेते थे। खेत की ताकत थी, हिम्मत थी। जमीन बिकने के बाद जो मुआवजा मिला, वह बच्चों के असली काम नहीं आया। गांव में कई लोगों ने बड़ी-बड़ी गाड़ियां खरीद लीं, कुछ ने आलीशान मकान बनवा लिए।’ यह कहते हुए उनकी आवाज में अफसोस नजर आता है। वह थोड़ी देर चुप रहकर कहते हैं, ‘एक और नुकसान हुआ… हमारे बुजुर्ग बीमार पड़ने लगे। पहले उनकी आदत थी- सुबह खेत तक पैदल जाना, मेड़ों पर घूमना। वही उनकी कसरत थी। जमीन बिकने के बाद सब बदल गया। अब वे घर पर ही बैठे रहते हैं। बदले में हमने जो जमीन खरीदी, वो यहां से 150 किलोमीटर दूर है। वहां तक वे जा नहीं पाते। अब मेरे पिताजी सुबह उठते हैं, आंगन में ही टहल लेते हैं। कभी आसपास निकल जाते हैं, लेकिन… खुश नहीं रहते। दिन का ज्यादातर वक्त या तो घर के अंदर गुजरता है या आंगन में चक्कर लगाते हुए। राहुल कहते हैं- जब जमीन थी तो हमारे बुजुर्ग 100 साल तक जीते थे। अब बड़ी मुश्किल से 70 साल तक फिट रह पा रहे हैं। 45 से 70 साल की जो पीढ़ी है, वो जैसे बीच में अटक गई है। बच्चों के पास भी समय नहीं। सब अपनी-अपनी जिंदगी के बोझ में दबे हैं।’ उनकी बातों में बड़ी नाउम्मीदी दिखती है। इसी गांव के आशेराम अपने दरवाजे पर खड़े-खड़े बात करते हैं। ‘मेरे दो बेटे हैं और तीन बेटियां। बड़ा बेटा उधम सिंह ने लॉ की पढ़ाई की है, छोटा बेटा गौरव ग्रेजुएट है। लेकिन पीछे बंधी मवेशियों की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं- अब हमारे पास चार भैंसें और दो गाय ही सहारा हैं।’ वे बताते हैं, ‘2003 में हमारी जमीन कुछ लाख में एक्वायर हुई थी… आज वही जमीन 3 करोड़ की है।’ मुआवजे का पैसा कहां गया? इस पर वे सीधा जवाब देते हैं, ‘घर बना, बच्चों की पढ़ाई हुई, शादियां कीं… और सब खत्म। अब हाल यह है कि 14 लाख रुपए का कर्ज चढ़ चुका है। साहूकार आते-जाते रहते हैं, पूछते हैं पैसा कब दोगे।' यह कहते हुए उनके चेहरे पर थकान है- जैसे हिसाब-किताब अब जमीन का नहीं, रोज की जिंदगी का रह गया हो। वह कहते हैं, 'अब हम दूध बेचकर गुजारा कर रहे हैं। मेरे दोनों बेटे हमारी ही जमीन पर बने फ्लैट्स में दूध बेचते हैं। अगर वे यह काम न करें तो कर्ज की ब्याज चुकाना मुश्किल हो जाएगा। घर भी नहीं चलने वाला। कई बार बच्चे इस काम से परेशान हो जाते हैं। बीमारी से हमारे लाखों के जानवर मर जाते हैं। सोचिए एक भैंस हमारी दो लाख रुपए की होती है। कोई मर जाए तो हम मुसीबत में आ जाते हैं। जानवरों का काम आसान नहीं है। हमारे बच्चे पशुओं के साथ पशु बनकर काम करते हैं। अक्सर खीज में रहते हैं। आशेराम थोड़ी देर आसमान की तरफ देखते हैं, फिर कहते हैं, ‘हमने तो यही सोचा था… यहां इतनी कंपनियां लगेंगी, तो हमारे बच्चों को नौकरी मिल जाएगी। लेकिन कुछ नहीं मिला। न बड़ी कंपनी में जगह, न पक्की नौकरी। बस उम्मीद ही रह गई,’ वे धीरे से कहते हैं। जैसे एक सपना था, जो चुपचाप बिना शोर किए टूट गया। आशेराम कहते हैं, ‘सोचिए जरा… नोएडा में मेरी ही जमीन पर बनी एक फर्म में मेरा बेटा सिक्योरिटी गार्ड है। वो नौकरी न करे तो अपने बच्चे कैसे पालेगा? उसका गुस्सा हम पर ही उतरता है। ताना मार देता है- जमीन बेचकर अच्छा नहीं किया। कहता है कि मुआवजे के पैसे से कहीं और जमीन ले ली होती। या जमीन ठेके पर दी होती, तो जितना वह गार्ड बनकर कमा रहा है, उतना तो उसी से आ जाता। वह कहता है आपने हमारे लिए किया ही क्या? सारा पैसा घर बनवाने में लगा दिया। यह बताते हुए वे वे चुप हो जाते हैं, जैसे जवाब भीतर ही अटक जाता हो।' फिर धीरे से सफाई देते हैं, ‘अब सोचिए जरा… घर न बनवाता तो इनकी शादियां कैसे करता? हमारे यहां तो बेटी की शादी से पहले घर देखा जाता है। पक्का मकान न हो तो रिश्ता नहीं होता।’ आशेराम की बातें खत्म होती है तो आंगन में कुछ देर सन्नाटा रहता है। पक्के घर की दीवारें खड़ी हैं, लेकिन भीतर एक अधूरापन गूंजता है। जिन खेतों ने पीढ़ियों को सहारा दिया, वे अब कांच और कंक्रीट में बदल चुके हैं। बेटा अपनी ही जमीन पर बनी इमारत में गार्ड है, पिता अपने फैसलों का हिसाब देता फिर रहा है, और पोती-पोतों का भविष्य अंधेरे में खड़ा है। नोएडा की चमकती सड़कों से यह दर्द दिखाई नहीं देता। वहां सिर्फ विकास दिखता है- मेट्रो, मॉल, कंपनियां। लेकिन गांवों के आंगन में बैठा किसान पूछ रहा है- क्या तरक्की का मतलब जड़ों से कट जाना होता है? ------------------------------------- 1-ब्लैकबोर्ड-‘एक्स्ट्रा सर्विस’ न देने पर मारी गई थी अंकिता भंडारी:मां-बाप ने खुद को घर में बंद किया; न कमा रहे, न राशन खरीद पा रहे दिल्ली से आए मीडिया के लोग दिनभर अंकिता भंडारी के माता-पिता से बात करने के लिए उनके घर के बाहर बैठे रहे, लेकिन वे घर पर ताला लगाकर चले गए थे। तब तक नहीं लौटे, जब तक मीडिया के लोग वापस नहीं चले गए। अगले दिन मैं बिना बताए उनके घर पहुंची। वह हड़बड़ा गईं, लेकिन बात करने से पहले एक शर्त रख दी- ‘मनीषा जी, आप पत्रकार बनकर नहीं, मेरी बेटी बनकर सुनेंगी, तभी बात करूंगी,’ मैंने हामी भर दी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-पापा को फांसी दिलाकर आत्महत्या कर लूंगी:कहते थे ब्राह्मण होकर नीच से शादी कैसे की, गोली मारकर बोले- अब मैं बहुत खुश हूं हम दोनों की लव मैरिज को तीन महीने बीत चुके थे। लग रहा था कि अब घर वाले शांत हो गए हैं और हमारी जिंदगी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रह गया है, लेकिन 5 अगस्त 2025 की शाम, करीब 5 बजे, सब कुछ बदल गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
असम के कामरूप जिले में एक महिला साइकिल पर बेटी को लेकर जा रही थीं। हमने पूछा- सरकारी योजनाओं के पैसे मिले क्या? जवाब में कहा- ‘हां, मिले हैं।’ हमने पूछा, अबकी बार किसकी सरकार? वे मुस्कुराकर बोलीं- ‘BJP की…BJP जिंदाबाद, हिमंता जिंदाबाद’ असम में करीब दो महीने बाद चुनाव होने हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची। यहां सड़कें चुनावी होर्डिंग और बैनरों से पटी मिलीं। हर चौक-चौराहे पर सरकारी योजनाओं और उनका फायदा लेने वालों की तस्वीरें हैं, जिनमें CM हिमंता बिस्वा सरमा महिलाओं को चेक देते दिख रहे हैं। ये चेक महिलाओं के खाते में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के हैं। असम में अरुणोदय योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1,250 रुपए मिलते हैं। इस बार सरकार जनवरी से अप्रैल तक के 5 हजार रुपए एक साथ 20 फरवरी को देने वाली है। साथ में 3 हजार रुपए राज्य के सबसे बड़े त्योहार बिहू के लिए अलग से दिए जाएंगे। ऐसे में सवाल ये है कि चार महीने की राशि एकमुश्त देने का ऐलान क्यों, बिहू का तोहफा पहली बार चुनावी साल में ही क्यों दिया जा रहा है? क्या सीएम हिमंता ने भी वही दांव खेला है, जो बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान BJP गठबंधन ने खेला था। वहां छठ पूजा से पहले महिलाओं के खातों में 10 हजार रुपए की एकमुश्त राशि भेजी गई थी। मध्यप्रदेश, ओडिशा, दिल्ली जैसे 6 राज्यों में BJP के लिए ये जीत का फॉर्मूला रहा है। क्या चुनाव नतीजों पर इसका असर दिखेगा, क्या असम चुनाव से पहले महिलाओं को साधने के लिए ये CM का मास्टरस्ट्रोक है। दैनिक भास्कर की टीम ने ग्राउंड पर पहुंचकर हर तबके की महिलाओं से बातचीत कर इसे समझने की कोशिश की। जगह: रंगिया, गुवाहाटी‘पैसा मिला, सुविधाएं भी, कमल के फूल को ही वोट देंगे’सबसे पहले हम गुवाहाटी से 62 किलोमीटर दूर रंगिया पहुंचे। यहां हमें 40 साल की बैतन बीबी मिलीं। बैतन जिस कम्युनिटी से आती हैं, उसे CM हिमंता, मियां मुस्लिम कहते हैं। सरकारी योजनाओं से मिलने वाले फायदे के बारे में पूछने पर वे बताती हैं कि दो महीने पहले ही सेल्फ हेल्प ग्रुप से 10 हजार रुपए का चेक मिला है। अरुणोदय के तहत हर महीने 1250 रुपए मिलते हैं। 19 साल की बेटी तस्लीमा को हर महीने 1200 रुपए मिलते हैं। ये 11वीं पास करने के बाद निजुत मोइना योजना के तहत दिए जाते हैं। इसके अलावा परिवार को राशन समेत राज्य और केंद्र की बाकी योजनाओं के फायदे भी मिलते हैं। बैतन अभी हाल में मिले 30 हजार रुपए से बहुत खुश हैं। वे कहती हैं, ‘हमने दो बकरी और दुकान के लिए कुछ सामान खरीदा है। जो पैसा मिला बहुत है, आगे और मिलेगा। मेरे पति भी सरकार से मिलने वाली सुविधाओं से खुश हैं। इस चुनाव में हम कमल के फूल को ही वोट देंगे।‘ ‘CM हमें भले पसंद न करें, हम उन्हें ही वोट करेंगे’पास में खड़ी फरीदा बेगम कहती हैं, ‘मेरी बेटी को PM मोदी और मुख्यमंत्री हिमंता हर महीने निजुत मोइना के 1200 रुपए देते हैं। पहले हम तिरपाल डालकर रहते थे, अब हमारे पास मोदी सरकार का दिया घर है।' 'कांग्रेस के लोग वोटर कार्ड मांगते आते हैं और ग्रुप बनाने को कहते हैं। हम गरीब जरूर हैं, लेकिन बेईमान नहीं हैं। हम जिसका खाते हैं, उसी से डरते हैं। मोदी सरकार ने हमें बहुत राशन दिया। हम 6 महीने बैठ कर खाए। हम बेईमानी नहीं करेंगे, जिसका खाया है, उसे ही फायदा पहुंचाएंगे।’ ’हमारा पूरा परिवार BJP को वोट देता है। हमें कोई मारे या काटे, हम BJP को ही वोट करेंगे। हम जब तक जिंदा रहेंगे, हिमंता को वोट करेंगे। मुख्यमंत्री हमें भले ना पसंद करें, लेकिन हम उन्हें बहुत पसंद करते हैं।’ जगह: कामरूप ‘सरकार के दिए पैसों से घर चलता है, BJP को ही जिताएंगे’इसके बाद हम कामरूप जिले में रहने वाली 32 साल जोनाली डेका से मिले। उन्हें दो साल से अरुणोदय योजना का फायदा मिल रहा है। पिछले साल मार्च में पति गुजर गए। तब से जोनाली दोनों बच्चों की जिम्मेदारी अकेले ही उठा रही हैं। बच्चों की फीस समेत घर का खर्च चलाने के लिए वो सिलाई का काम करती हैं। योजना के तहत मिलने वाले 1250 रुपए से कुछ मदद हो जाती है। जोनाली कहती हैं, ‘पहले महिलाओं को पति के सामने हाथ फैलाना पड़ता था, अब खुद पैसे खर्च करने का अधिकार मिला है। मुख्यमंत्री ने जो पैसे दिए, उससे हमारा काम चलता है। अभी फरवरी में मिलने वाले एकमुश्त 8 हजार रुपए से बकरी और मुर्गी खरीदेंगे, ताकि आगे घर चलाना आसान हो। सरकार ने हमारी जिंदगी आसान बनाई है, इसलिए चुनाव में BJP को ही जिताएंगे।‘ जगह: बक्सा ‘BJP ने घर बैठी महिलाओं को सम्मान दिया, उसे ही जिताएंगे’बक्सा जिले की रहने वाली अनु को भी सेल्फ हेल्प ग्रुप और अरुणोदय योजना का फायदा मिलता है। 45 की उम्र में इन पैसों से उन्होंने दुकान खोली है। 25 हजार रुपए की अगली रकम 6 से 12 महीने बाद मिलेगी। वो किराए की दुकान छोड़कर अपनी दुकान खरीदना चाहती हैं। इसी गांव की रहने वाली संगीता बताती हैं, मेरी सासू मां को भी इन योजनाओं का फायदा मिला। उन्होंने इससे दुकान खोली। अब वो मुझे और पूरे परिवार को BJP को वोट देने के लिए कहती हैं। हम बंगाली हिंदू कम्युनिटी के ठिकाने तुलसी बाड़ी पहुंचे। यहां मिलीं सुचित्रा पॉल कहती हैं, ‘महिलाएं पहले घर में ही रहती थीं। अब सरकार के दिए पैसों से हम कुछ करने लायक हो गए हैं। BJP ने महिलाओं को ये सम्मान दिया। इसी फरवरी में मुख्यमंत्री ने बिहू के आशीर्वाद के तौर पर 3 हजार रुपए ज्यादा देने का ऐलान किया है।‘ सुचित्रा की पड़ोसी रूमी पॉल को भी 3 महीने पहले अरुणोदय का पैसा मिलना शुरू हुआ है। रूमी कहती हैं, ‘पहले पति कभी-कभार पैसे देते थे। अब ये मेरा पैसा है, जब चाहे जैसे चाहे खर्च करती हूं। जिस दिन मुझे अरुणोदय के 10 हजार रुपए मिले, पति बोले- आज उनका लक्की डे है।’ शहरी महिलाएं बोलीं- हमारा काम रुका, हर महीने पैसे दे सरकार इसके बाद हम शहरी इलाकों की महिलाओं से मिले। गुवाहाटी के पंजाबरी में मल्या दास की किराने की दुकान है। योजना की रकम के बारे में पूछने पर हताशा से कहती हैं, ‘फॉर्म भर दिया है, लेकिन अभी पैसा नहीं मिला है। उम्मीद है जल्द ही पैसे आने लगेंगे।‘ कुछ दूर आगे बढ़े तो हमारी मुलाकात मंजू भुयान और मधुस्मिता से हुई। महिलाओं के लिए सरकारी योजनाओं के लेकर उनका कहना है कि सरकार हमें आगे बढ़ने के लिए बहुत मदद कर रही है। गुवाहाटी के सिलपुखुरी में रहने वाली 42 साल की पोडु बेगम कहती हैं, ‘इस महीने पैसे नहीं मिले, इसलिए काफी दिक्कत हो रही है। पति नहीं हैं, बेटी की शादी हो गई है। पैर में चोट लगी है। घर का किराया देना मुश्किल हो गया है। मकान मालिक घर खाली करने को कह रहे हैं। हम चाहते हैं कि सरकार हर महीने पैसे दें। हमारी बहुत सी जरूरतें हैं। हमें पैसा रोककर एकमुश्त नहीं चाहिए।‘ चुनाव आयोग बोला- योजना पुरानी, बिहू गिफ्ट बस नया एडिशनचुनाव के पहले बिहू के तोहफे के ऐलान को लेकर चुनाव आयोग का क्या रुख है, ये जानने के लिए हम असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल से मिले। वे कहते हैं, ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद लागू होता है। राज्य सरकार या केंद्र के पास ये पावर है कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लगने से पहले किसी भी सरकारी स्कीम के तहत लोगों को सुविधाएं दे सकती है। सरकारें चुनाव की घोषणा के बाद किसी स्कीम में मिलने वाली राशि को नहीं बढ़ा सकतीं, लेकिन उससे पहले कोई रोक-टोक नहीं।’ पिछले 5 साल में चार बिहू गुजर गए, लेकिन तब पैसा बढ़कर नहीं मिला। फिर इस बार क्यों? अनुराग कहते हैं, ’अरुणोदय पुरानी योजना है। समय के साथ लाभार्थियों की संख्या और पैसा दोनों बढ़ा। इस बार बिहू नया एडिशन है। मुझे लगता है कि ये हर साल कायम रहेगा।’ ‘ये सिर्फ असम में ही नहीं हो रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों में कई पार्टियों ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ये कोशिशें की हैं। ऐसे में सिर्फ असम को लेकर इस तरह की बात करना सही नहीं होगा।‘ पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…कांग्रेस: ये महिला सशक्तिकरण नहीं, ब्लैकमेलिंग स्कीमअसम की प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर का कहना है कि ये योजनाएं महिला सशक्तिकरण की नहीं है। महिला को 1250 दिया, लेकिन उसी महिला के ग्रेजुएट बच्चों के पास रोजगार नहीं है। असम सरकार पर 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। ये कर्ज असम के हर नागरिक पर है। असम में हिमंता के राजनीतिक दिन अब गिनती के हैं। क्या मियां मुस्लिम हिमंता को पसंद करते हैं? जवाब में मीरा कहती हैं, ‘मुख्यमंत्री के मियां मुस्लिमों से अच्छे रिलेशन हैं। वो खुद कहते हैं कि जब वोट की जरूरत होती तो बदर भाई (बदरुद्दीन अजमल) को बोल देता हूं, वो दिलवा देते हैं। मुस्लिमों में वो BJP के स्टार प्रचारक हैं। स्टेज पर दिखाने के लिए कुछ और बोलते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। वहीं नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया कहते हैं, ’महिला सशक्तिकरण के नाम पर असम सरकार सिर्फ चुनावी प्रलोभन दे रही है। चुनाव से ठीक पहले पैसे बांटना साफ तौर पर महिला वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश है। BJP का ये तथाकथित सशक्तिकरण असल में एक ब्लैकमेलिंग स्कीम है, जो महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठा रही है।’ ’ये योजना महिलाओं के उत्थान के लिए नहीं बल्कि BJP के लिए महिला वोट सुरक्षित करने के लिए है। कांग्रेस भी ऐसी योजनाएं लाएगी लेकिन हम BJP की तरह वोट के लिए लाभार्थियों को ब्लैकमेल नहीं करेंगे। हमारी योजनाओं में कलाकार, पत्रकार और दिव्यांग भी शामिल होंगे, जिन्हें मौजूदा सरकार ने बाहर कर दिया है।’ BJP: ये वोट बैंक नहीं, महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की कोशिशइसके बाद हमने BJP सरकार में मंत्री पीयूष हजारिका से मिले। हमने पूछा कि इस बार एकमुश्त 8 हजार देने के पीछे क्या वजह है? जवाब मिला, ‘चुनाव के वक्त आदर्श आचार संहिता के कारण हम पैसा दे नहीं सकते। कभी-कभी मामला कोर्ट में भी चला जाता है। इसलिए हमने सोचा कि चार-पांच महीने का पैसा इकट्ठा दे दिया जाए। असम के लिए बिहू बड़ा फेस्टिवल है, तो इसमें बिहू का गिफ्ट 3,000 रुपए जोड़ा गया है।‘ बिहू गिफ्ट पिछले सालों में क्यों नहीं दिया गया, चुनावी साल में ही क्यों? इस पर जवाब मिला, ‘कहीं न कहीं से तो शुरुआत करनी पड़ती है। अगर इस बार चुनाव नहीं होता, हम तब भी ये देते। अरुणोदय योजना हमने पिछले चुनाव से पहले शुरू की थी, लेकिन चुनाव के बाद भी बंद नहीं की।‘ विपक्ष आरोप लगा रहा है कि 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) महिलाओं को वोट बैंक बनाने के लिए है, जैसे बाकी राज्यों में भी देखा गया। हालांकि पीयूष इससे इनकार करते हैं। एक्सपर्ट: फ्रीबीज से फायदा, लेकिन BJP के लिए राह आसान नहींगुवाहाटी यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर अब्दुल मन्नान कहते हैं, ‘ये आम धारणा है कि वोटर सिर्फ पैसे या ऐसे फायदों के आधार पर वोट करते हैं। ये सच है कि हाल के सालों में यहां को लोगों को जो आर्थिक फायदे हुए, महिलाओं को जो सुविधाओं दी गईं, उसका चुनावी असर पड़ सकता है।’ ’हालांकि अगर आने वाले दिनों में विपक्षी दल मिलकर एक मजबूत गठबंधन बनाने में कामयाब रहे तो BJP के लिए चुनाव जीतना इतना भी आसान नहीं होगा। मौजूदा सर्वे के मुताबिक, सिर्फ करीब 40% वोटर की BJP के सपोर्ट में है। करीब 60% लोग उसके खिलाफ रुख रखते हैं।’ मन्नान के मुताबिक, कांग्रेस, वामपंथी दल और रीजनल पार्टियां अगर एक मजबूत गठबंधन बनाती हैं, तो चुनावी नतीजे पूरी तरह बदल सकते हैं। …………………..ये खबर भी पढ़ें… गोगोई बोले- हिमंता मुख्यमंत्री रहने लायक नहीं असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। CM ने गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के संबंधों पर सवाल उठाए हैं। पूरी खबर पढ़िए…
DNA Analysis: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को खुद हत्या का डर सता रहा है. डॉनल्ड ट्रंप तो ये भी कह रहे हैं कि उन्होने पहले ही अमेरिका की सेना को बता दिया है अगर उनकी हत्या हो जाए, तो ईरान को किस तरह तबाह करना है. इसके बाद कई सवाल खड़े होने लगे हैं.
ईरान में बरसने वाले हैं मिसाइल-बम? इजरायल ने खोला पावरबैंक, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में भेजे '53 दानव'
America To Attack Iran: ईरान और अमेरिका समय बीतने के सात अब जंग के करीब नजर आ रहे हैं. इसको लेकर इजरायली और अमेरिकी अधिकारियों के कुछ बयान देखने को मिले हैं.
क्यूबा का वो नेता, जिसे नहीं डिगा पाई अमेरिका की हनक, गुरिल्ला युद्ध में था माहिर
Fidel Castro Legacy: फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा के क्रांतिकारी नेताओं में आते हैं, जिनका क्यूबा की स्थिति को सुधारने में बड़ा हाथ है. उन्होंने क्यूबा को शिक्षा, स्वास्थ्य और अमेरिका के खिलाफ कड़े प्रतिरोध से एक वैश्विक पहचान दिलाई.
हांगकांग में एक ऐसी रस्म निभाई जाती है, जो अपने आप में काफी अनोखी और अलग है. इसको दुष्ट को मारने की परंपरा के नाम से जाना जाता है. हर साल मार्च के महीने में इसको निभाया जाता है, इसमें बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं.
Bangladesh News: प्रधानमंत्री तारिक रहमान देश की कमान संभालने के बाद एक्शन मोड पर आ गई है. सरकार मॉब कल्चर पर नकेल कसने और पुलिस की खोई हुई साख को बहाल करने की पूरी कोशिश कर रही है.
सोकर उठी तो बदल गई आवाज, विदेशी लहजे में बात करने लगी महिला; डॉक्टरों ने बताई ये बात
Shocking News: कनाडा की रहने वाली 56 साल की तारा लिविंगस्टन एक दिन सोकर उठीं तो उनकी आवाज और बोलने का तरीका बदल चुका था. सोने से पहले वो रोज की तरह कनाडाई लहजे (canadian accent) में बाते कर रही थीं, लेकिन सोकर उठने के बाद उनकी आवाज रूसी लहजे (Russian accent) में बदल गई या उसके जैसी लगने लगी.
भारत का 'वीरू' कौन? रूस, फ्रांस, अमेरिका या इजरायल, किसने निभाया संकट में ज्यादा साथ?
India Global Superpower: आज के समय में जहां दोस्त गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं, वहीं जियो पॉलिटिक्स (Geopolitics 2026) में देशों की एक-दूसरे से दोस्ती और दुश्मनी को समझना मुश्किल हो जाता है. लेकिन भारत के साथ ऐसा नहीं है, भारत के कुछ ऐसे दोस्त हैं, जो उनके साथ चट्टान की तरह सालों से खड़े रहे हैं (India International Relations).
ढाका के मीरपुर में एक अनोखा नजारा देखने को मिला. जमात-ए-इस्लामी के अमीर और संसद में विपक्ष के नेता शफीकुर रहमान ने फजर की नमाज के बाद खुद झाड़ू उठाकर गलियों और मुहल्लों की सफाई की. कभी सख्त राजनीति के लिए चर्चित नेता का यह नया रूप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और सबको चौंका रहा है.
बांग्लादेश की नई सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़
बांग्लादेश में करीब 19 महीने के राजनीतिक उथल-पुथल के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के गठबंधन वाली सरकार ने शपथ तो ले ली है. लेकिन उसके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है.
china secret underground nuclear test: अमेरिका ने आरोप लगाया है कि चीन ने वर्ष दो हजार बीस में भूमिगत परमाणु परीक्षण किया था और इसे छिपाने की कोशिश की गई. हालांकि संयुक्त राज्य अमेरिका की बात पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था ने साफ पुष्टि नहीं की है और चीन ने सभी आरोपों को गलत बताया है.
Does Netanyahu have prostate cancer?इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की सेहत को लेकर फैल रही प्रोस्टेट कैंसर की खबरों पर आखिरकार विराम लग गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट जारी कर साफ कर दिया कि उन्हें कैंसर नहीं है. हालांकि सर्जरी के बाद उन्हें यूरिन इन्फेक्शन है, जिसका इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने दावा किया कि जरूरत पड़ी तो युद्धपोत समुद्र की गहराई में पहुंच सकता है. इसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान की मिसाइलें सच में अमेरिकी सुपरकैरियर USS Gerald R. Ford को डुबो सकती हैं या यह सिर्फ राजनीतिक संदेश है.
सोना-चांदी नहीं...इस देश में आसमान छू रही खीरे की कीमतें, महंगाई में 'मीट' भी छूटा पीछे
Russia News: दुनियाभर में सोने-चांदी की कीमतों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, इसी बीच रूस में खीरे की कीमतों ने हर किसी को हैरान-परेशान हो रहे हैं. आलम ऐसा है कि सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.
Smart Control Drill: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को सैन्य अभ्यास के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. बता दें कि यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है. यहां से लगभग 20% वैश्विक तेल की आपूर्ति गुजरती है.
H-1B से शुरू हुई बहस, ‘Indian Hate’ तक पहुंची, अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ 115% बढ़ी नफरत
America News: अमेरिका के H-1B वीजा प्रोग्राम को लेकर भारतीय काफी ज्यादा परेशान थे. इसकी वजह से यहां रहने वाले भारतीयों के खिलाफ नफरत तेजी से बढ़ रही है.
US 50 jet deployment to Middle East: मिडिल ईस्ट में अचानक सैन्य हलचल तेज हो गई है. अमेरिका ने सिर्फ 24 घंटे के भीतर F-22, F-35 और F-16 समेत 50 से ज्यादा फाइटर जेट तैनात कर दिए हैं. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत के बीच यह कदम बड़ा संदेश माना जा रहा है. अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि आगे डील होगी या टकराव.
90 feet hanuman statue controversy texas: टेक्सास के शुगर लैंड में स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में बनी नब्बे फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है. रिपब्लिकन कार्यकर्ता कार्लोस टुर्सियोस के बयान के बाद भारतीय मूल के लोगों ने कहा कि यह निजी जमीन पर बनी आस्था की प्रतीक प्रतिमा है और इसे निशाना बनाना गलत है.
3,98,40,00,00,00,000 की दौलत दान करने जा रहा यह शख्स, कभी पर्दे की दुकान पर करते थे काम
Stephen Schwarzman: ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म ब्लैकस्टोन के को-फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव स्टीफन श्वार्जमैन अपनी संपत्ति को दान करने की योजना बना रहे है. ये दान वो फिलैंथ्रोपिक फाउंडेशन को देंगे.
कश्मीर में पहलगाम के पास मट्टन में कश्मीरी पंडितों की बस्ती है। आबादी करीब 300 की है। यहां की गलियों में दिन के 4 बजते ही सन्नाटा पसर जाता है। मट्टन में रहने वाले रमेश कौल (बदला हुआ नाम) अब अनजान नंबरों से आने वाले फोन नहीं उठाते। वजह पूछने पर बताते हैं, ‘कश्मीरी पंडितों को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। पुलिस ने कहा है कि शाम होने से पहले घर आ जाएं। अजनबियों से दूर रहें। अंधेरे में बाहर न निकलें और कोई संदिग्ध दिखे, तो तुरंत खबर करें।’ कश्मीरी पंडितों को टारगेट किलिंग की धमकी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ग्रुप द रेजिस्टेंस फोर्स यानी TRF ने दी है। इसके अलावा 1990 के दशक में एक्टिव रहे ग्रुप मुस्लिम जांबाज फोर्स ने भी पोस्टर लगाकर कश्मीर की आजादी तक जंग जारी रहने की धमकी दी है। इन धमकियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीरी पंडितों को अलर्ट रहने की हिदायत दी है। फाल्कन स्क्वाड के नाम से आई धमकीकश्मीरी पंडितों के लिए जारी धमकी वाला लेटर फाल्कन स्क्वाड के नाम से जारी किया गया है। इसमें लिखा है... कश्मीरी पंडितों थोड़े फायदे के लिए बलि का बकरा मत बनो। पहले ही देख चुके हो कि इस रास्ते पर चलने का अंजाम जान गंवाना होता है, जैसा राहुल पंडित, माखन लाल बिंद्रू, मोहन लाल और बाकी के साथ हुआ था। इन्हें हमने कई बार चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने नजरअंदाज कर दिया। तुम लोग उनकी तरह मत बनो। अपना नाम मरने वालों की लिस्ट में मत लिखवाओ। RSS की सरकार ने लोकल कश्मीरियों को बदनाम करने के लिए तुम लोगों का इस्तेमाल किया है। झूठे आरोप लगाकर लोकल कश्मीरियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया, उनकी प्रॉपर्टी जब्त की गई। कश्मीरी पंडितों की नौकरी का रास्ता खोला गया। इससे गैर-कश्मीरियों और कश्मीरी पंडितों की मौत का रास्ता साफ हो रहा है। हमने काफी समय से कश्मीरी पंडितों को टारगेट करने से खुद को रोक रखा था क्योंकि कुछ कश्मीरी पंडितों के ग्रुप ने हमें भरोसा दिया था कि सरकार के हाथों में नहीं खेलेंगे। अब आपने अपने बड़ों के समझौते को खत्म कर दिया है। इसलिए राहुल पंडित, बिंद्रू और दूसरे लोगों के साथ तुम लोग भी उसी तरह के अंजाम के लिए तैयार हो जाओ। तुम लोगों की सभी एक्टिविटी पर हमारी नजर है। आने वाले दिनों में कोई दिक्कत होती है, तो आंसू नहीं बहाना। तीन साल की शांति, फिर मिलने लगीं धमकियांकश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों को उनकी जिंदगी पर क्या असर पड़ा है, इसे समझने के लिए हमने मट्टन में रहने वाले रमेश कौल से बात की। रमेश और उनके परिवार ने 1990 के दशक में आतंकवाद बढ़ने पर कश्मीर छोड़ दिया था। विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए सरकार की योजना के तहत 2010 में उन्हें नौकरी मिली। इसके बाद वे फिर से कश्मीर लौट आए। तब से मट्टन में ही रह रहे हैं। हमने रमेश को शाम करीब 6 बजे फोन किया। उन्होंने फोन नहीं उठाया। दूसरी बार भी फोन रिसीव नहीं हुआ, तब मैसेज किया। पहचान जाहिर करने के बाद रमेश ने कॉल बैक किया। हमने फोन न उठाने की वजह पूछी। जवाब मिला- हम अनजान कॉल नहीं उठा रहे हैं। रमेश ने पूछा आपको मेरा नंबर कैसे मिला। हमने बताया कि आपके एक करीबी दोस्त ने नंबर दिया है। रमेश ने दोस्त से कंफर्म किया, फिर बात करने के लिए तैयार हो गए। वे बताते हैं- धमकी मिलने के बाद हमें सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। आखिरी बार इस तरह की धमकी 2022 में मिली थी। फिर 3 साल तक सब शांत रहा। अब अचानक फिर धमकियां मिलने लगी हैं। रमेश आगे कहते हैं, 'गृहमंत्री अमित शाह 5 फरवरी को तीन दिन के लिए कश्मीर आए थे। उनके दौरे से पहले 3 फरवरी को ये धमकी आई। अब इसके पीछे क्या वजह है, ये तो जांच एजेंसियां ही बता सकेंगी।’ ‘हमें सलाह दी गई है कि अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें। शाम 4 से 5 बजे के बाद बाहर निकलने में सावधानी बरतें। जरूरी न हो, तो घर में ही रहें। ऑफिस आने-जाने के लिए रास्ता बदलते रहें। हम अलर्ट तो हैं, लेकिन ये भी सच है कि अब डरने वाले नहीं है। आखिर कब तक ऐसी धमकी से डरते रहें।’ RSS का नाम लेकर क्यों धमकी मिल रही है? रमेश जवाब देते हैं, ‘हम मंदिर और धर्म को लेकर काफी एक्टिव हैं। आखिर अपनी पहचान क्यों छिपाकर रखें। पुराने मंदिरों को फिर से ठीक किया गया है। लोग पूजा करने आ रहे हैं। कश्मीर में कई साल से हमारी धार्मिक यात्राएं रुक गई थीं। हमने इसे दोबारा शुरू किया है। पहले गणेश चतुर्थी नहीं मनाते थे, हमारी रथयात्रा बंद हो गई थी, अब सब शुरू कर दिया है। ये यात्रा कन्याकुमारी से कश्मीर तक होती है।’ ‘कन्याकुमारी से यात्रा शुरू हो चुकी है। वहां से जम्मू आएगी। अगले कुछ दिनों में कश्मीर के कुपवाड़ा, गांदरबल, उरी और श्रीनगर पहुंचेगी। फिर श्रीनगर से मार्तंड होते हुए कन्याकुमारी के लिए रवाना हो जाएगी। आतंकी चाहते हैं कि हिंदू एक्टिव न हों। इसलिए वे फिर से धमकी दे रहे हैं।’ ‘आतंकी धमकी दे रहे, लेकिन अब डरेंगे नहीं’हमने श्रीनगर में रहने वाले एक और कश्मीरी पंडित से बात की। वे अपनी पहचान छिपाते हुए बताते हैं, ‘1990 के दशक में विस्थापित हो चुके कश्मीरी पंडित फिर से अपनी जमीनें पहचानने में जुटे हैं। इन जमीनों पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। जर्जर हो चुके मंदिर फिर से बनवा रहे हैं। इससे भी आतंकी भड़के हुए हैं। वे धमकियां दे रहे हैं, ताकि हम डर जाएं। 'हम RSS से जुड़े हों या न जुड़े हों, आतंकी संगठन हमें RSS से जुड़ा बताते हैं। हम अपनी मर्जी से पहचान और अधिकार तलाश रहे हैं। इसलिए डर नहीं रहे हैं। वे आगे बताते हैं, ‘हमें सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस से पूरा सपोर्ट मिल रहा है। हम कुछ भी कर लें, उनकी जिहादी मानसिकता खत्म नहीं हो सकती। फाल्कन स्क्वाड की धमकी हो या मुस्लिम जांबाज फोर्स के पोस्टर, ये सभी लश्कर-ए-तैयबा से ही जुड़े हैं। अब तो सभी आतंकी संगठन मिलकर टारगेट कर रहे हैं। हमें भी अपनी फोर्स पर यकीन है।’ एक और कश्मीरी पंडित ने फोन पर बताया, ‘1990 के दशक में हिंसा के दौरान 800 से ज्यादा परिवार कश्मीर छोड़कर नहीं गए थे। इनमें से 150 के घरों की हालत बहुत खराब है। जम्मू-कश्मीर सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। पिछले 35 साल से कश्मीरी पंडितों को रोजगार नहीं मिल रहा है।’ ‘1990 में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हिंसा हो रही थी, तब करीब 25 हजार हिंदुओं के पास सरकारी नौकरी थी। ये लोग विस्थापित हो गए। उनकी जगह बंदूक के जोर पर लोकल लोगों को नौकरी मिल गई। इस समय कश्मीरी पंडितों को राहत पैकेज पर सिर्फ 5 हजार लोगों को नौकरी मिली है। इस समय 15 हजार से ज्यादा कश्मीरी पंडित यहां रह रहे हैं।’ ‘जम्मू के विलेज डिफेंस गार्ड की तरह हथियारों की ट्रेनिंग मिले’एक कश्मीरी पंडित कहते हैं, ‘आतंकियों की धमकी को देखते हुए हमें भी जम्मू के विलेज डिफेंस गार्ड की तरह ट्रेनिंग और लाइसेंसी हथियार देने चाहिए। इससे हम किसी हमले के दौरान खुद को बचा सकेंगे। अगर ऐसा हुआ तो कश्मीर से बाहर जा चुके कश्मीरी पंडित भी लौट पाएंगे।’ ये शख्स दावा करते हैं कि बीते 700 साल में कश्मीरी पंडितों को 7 बार कश्मीर से भगाया जा चुका है। एक बार तो कश्मीर में पंडितों के सिर्फ 11 घर रह गए थे। आज 15 हजार के करीब आबादी बची है। अगर ऐसे धमकी मिलती रही, टारगेट किलिंग हुई तो परेशानी आ सकती है। दिल्ली ब्लास्ट के बाद मुस्लिम जांबाज फोर्स एक्टिवजनवरी के आखिर में कश्मीर के कुछ इलाकों में मुस्लिम जांबाज फोर्स के पोस्टर मिले थे। पोस्टर पर लिखा था, कश्मीर की आजादी तक, भारत की बर्बादी तक, जंग जारी रहेगी। खुदा के लिए जिहाद करना है। हमारे सोर्स बताते हैं कि 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद एक्टिव हुआ ये ग्रुप कश्मीरी नौजवानों को ब्रेनवॉश कर रहा है। पोस्टर के जरिए उन्हें जिहाद के लिए उकसा रहा है। मुस्लिम जांबाज फोर्स ग्रुप 1990 के दशक में काफी एक्टिव था। 2021 में इसने श्रीनगर के फेमस कृष्णा ढाबे के मालिक के बेटे आकाश मेहरा की हत्या की जिम्मेदारी ली थी। आकाश मेहरा को 17 फरवरी 2021 को गोली मारी गई थी। आतंकी ग्रुप का मानना है कि बाहरी लोग कश्मीर में अपना बिजनेस बढ़ा रहे हैं। इस वजह से आकाश मेहरा की हत्या की गई। पहले मुस्लिम जांबाज फोर्स और फिर फाल्कन स्क्वाड की तरफ से कश्मीरी पंडितों को टारगेट किलिंग की धमकी को सुरक्षा एजेंसियां भी गंभीरता से ले रहीं हैं। हमने इस पर जम्मू-कश्मीर से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बात की। वे कहते हैं कि आतंकी माहौल खराब करने के लिए ऐसी धमकी देते हैं। हमारी सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस पूरी तरह अलर्ट हैं। कश्मीरी पंडितों को किसी तरह से खतरा नहीं होगा। कश्मीरी पंडितों के पलायन और हत्याओं के अलग-अलग आंकड़ेRTI से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘1990 से 2021 के बीच यानी 31 साल में आतंकवादियों के हाथों कुल 1724 लोग मारे गए। इनमें 5% यानी कुल 81 कश्मीरी पंडित थे। इस दौरान 1 लाख 54 हजार 161 लोग कश्मीर छोड़कर चले गए। इनमें 88% यानी 1,35,426 हिंदू थे। पलायन करने वाले मुस्लिमों की संख्या 18,735 थी। हालांकि, कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति की रिपोर्ट कहती हैं कि 1990 के बाद कुल 399 कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई थी। ये सर्वे 2008-09 में किया गया था। इसमें दावा किया गया कि 1990 में ही 302 हत्याएं हुई थीं। बाकी 97 हत्याएं उसके बाद के सालों में हुईं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मार्च 2010 में एक सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने अलग आंकड़ा दिया था। सरकार के मुताबिक, 1989 से 2004 के बीच कश्मीर में 219 कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई थी। स्टोरी में सहयोग: जम्मू-कश्मीर से रऊफ डार ………………………………… जम्मू-कश्मीर से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें...पाकिस्तानी आतंकियों से लड़ेंगी जम्मू की अनीता-सोनाली, विलेज डिफेंस गार्ड एक्टिव जम्मू के डोडा में रहने वाली अनीता राज और सोनाली विलेज डिफेंस गार्ड्स यानी VDG की ट्रेनिंग ले रही हैं। उन्होंने पहली बार ऑटोमैटिक राइफल चलानी सीखी है। डोडा की रहने वाली कई महिलाएं विलेज डिफेंस गार्ड भी हैं। ये पिछले एक साल से घर के कामकाज के अलावा सेना के साथ गांव की सुरक्षा भी कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर...
रमजान से पहले इजराइल का बड़ा कदम! अल-अक्सा के सीनियर इमाम के मस्जिद में एंट्री से रोका, मचा घमासान
Israel Ramadan Tension: इजरायली अधिकारियों ने रमजान से ठीक पहले अल-अक्सा मस्जिद के इमाम शेख इकरीमा साबरी के प्रवेश पर रोक लगा दी है. इस फैसले के बाद क्षेत्र में तनाव और विरोध बढ़ने की गंभीर आशंका जताई जा रही है.
बांग्लादेश में हुए आम चुनाव में बीएनपी ने शानदार जीत हासिल की है. मंगलवार को तारिक रहमान ने बांग्लादेश के पीएम पद की शपथ ले. उनके मंत्रिमंडल में एक नाम हिंदू समुदाय के नेता निताई रॉय चौधरी का भी है, लेकिन उनको अभी कोई विभाग नहीं आवंटित हुआ है.
Superbloom In Death Valley: डेथ वैली को धरती की सबसे गर्म जगहों में से एक माना जाता है. इस बंजर जमीन पर फूल खिलना भी सामान्य बात नहीं है, हालांकि इस साल इसमें परिवर्तन देखने को मिल सकता है.
Kilauea Volcano Eruption In Hawaii: हवाई द्वीप पर स्थित किलाउआ ज्वालामुखी एक बूार फिर तेजी से फटा है. यह घटना लगभग 10 घंटे तक चली, जिसमें लावा 1,300 फीट की ऊंचाई तक उछलता रहा.
पाताल में समा रही धरती! इंडोनेशिया में दिखा खतरनाक 'सिंकहोल', क्यों धीरे-धीरे धंसती जा रही जमीन?
Giant Sinkhole Indonesia: इंडोनेशिया से एक भयंकर खबर सामने आ रही है, यहां एक विशाल सिंकहोल ने हेक्टेयर खेली वाली जमीन को निगल लिया है, जिससे एक गहरा गड्ढा बन गया है. खतरनाक बात ये है कि ये गड्ढा बढ़ता ही जा रहा है.
ना तेल बचा, ना कैश और ना ही खाना...अमेरिका ने दबाई क्यूबा की नस, जनता के भूखे मरने की आ गई नौबत
Cuba in Crisis: क्यूबा वर्तमान में अमेरिकी प्रतिबंधों और तेली की नाकेबंदी के कारण सबसे बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है. देश तेल की कमी, बिजली कटौती और पार्यप्त भोजन न मिलने की समस्या झेल रहा है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंम ने क्यूबा को 'फेल्ड नेशन' बताया है.
'चिकन नेक' अटैक और टूटी हुई इकोनॉमी... क्या कड़वे अतीत के पेड़ पर तारिक रहमान उगा पाएंगे मीठे फल?
व्हाइट हाउस की घोषणा में बांग्लादेशी सामानों पर टैरिफ 20% से घटाकर 19% कर दिया गया है, कुछ टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स को छूट के साथ थोड़ी राहत देती है. इससे स्ट्रक्चरल चुनौती में कोई बदलाव नहीं आता. एक ऐसी इकोनॉमी जो कपड़ों पर निर्भर है, ग्लोबल डिमांड के प्रति सेंसिटिव है और घरेलू दिक्कतों के प्रति कमज़ोर है. युवाओं को तारिक रहमान सरकार से उम्मीदें बहुत ज़्यादा हैं.
चीन की चेतावनी को दरकिनार करते हुए अमेरिका ने फिलीपींस में और सैन्य ताकत तैनात करने का फैसला लिया है. माना जा रहा है कि इससे चीन और यूएस के बीच तनाव बढ़ सकता है.
ICE Detains Indian National over Physical Assault: अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों (ICE) की ओर से हाल ही में एक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया गया है.
तारिक रहमान के शपथ से शहबाज शरीफ ने क्यों बनाई दूरी? क्या जमात की हार से दुखी है पाकिस्तान
Shehbaz Sharif: बांग्लादेश में चुनाव जीतने के बाद बीएनपी नेता तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. भारत और पाकिस्तान समेत 13 देशों को न्योता भेजा गया है, लेकिन शहबाज शरीफ समारोह में शामिल नहीं होंगे. जानकारों के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी के सरकार में न आने से पाकिस्तान ने ‘वेट एंड वॉच’ नीति अपनाई है.
बांग्लादेश की राजनीति में नई हलचल शुरू हो चुकी है. सत्ता संभालने की तैयारी कर रही BNP ने अपनी नई कैबिनेट टीम का ऐलान कर दिया है. पार्टी प्रमुख तारिक रहमान ने कुल 49 नेताओं पर भरोसा जताते हुए 25 कैबिनेट मंत्री और 24 राज्य मंत्रियों के नाम तय किए हैं.
अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर आज, ट्रंप ने दी चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच आज जिनेवा में दूसरे राउंड की बैठक होने वाली है। आज का दिन दोनों देशों के लिए बेहद खास है
दो दशक बाद बांग्लादेश में बीएनपी की वापसी, नया प्रधानमंत्री आज
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) लगभग दो दशकों के बाद दक्षिण एशियाई देश में सत्ता में वापसी करने के लिए तैयार है। मंगलवार को बीएनपी के नए चुने गए सांसद शपथ ग्रहण करेंगे
Bangladesh Tariq Rahman Oath Ceremony:17 फरवरी को बांग्लादेश में तारिक रहमान पीएम पद की शपथ लेने वाले हैं, उनके सांसदों ने शपथ ले ली है, शपथ ग्रहण के बीच BNP सांसदों ने ड्यूटी-फ्री कार और सरकारी प्लॉट लेने से इनकार कर दिया है. पार्टी की संसदीय बैठक में यह फैसला हुआ, जहां तारिक रहमान को संसदीय दल का नेता भी चुना गया. शपथ से पहले लिया गया यह निर्णय सियासी सादगी और नई राजनीति का संकेत माना जा रहा है.
Why will Bangladesh MPs be sworn in twice: बांग्लादेश में नई संसद के गठन के साथ इस बार सांसद दो बार शपथ लेने की बात कही जा रही है. यानी17 फरवरी 2026 कोआज बांग्लादेश में कुछ ऐसा हुआ जो पहले कभी नहीं देखा गया. तारिक रहमान के राज में दोहरी शपथ की बात क्यों उठ रही है, जानें इसके पीछे की कहानी की कहानी.
जोमो केन्याटा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पर कर्मचारियों की हड़ताल से उड़ानें प्रभावित
केन्या के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सोमवार को कई उड़ानें प्रभावित हुईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा
Bangladesh News: अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मोहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में 'सेवन सिस्टर्स' का राग अलापा. उन्होंने ये बयान ऐसे समय पर दिया है तारिक रहमान ने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में सुधार की बात की है.
अमेरिका के रोड आइलैंड हॉकी एरिना में गोलीबारी में तीन की मौत, तीन गंभीर रूप से घायल
अमेरिका के पावकेट स्थित एक आइस एरीना में हुई फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, मृतकों में हमलावर भी शामिल है
आइस हॉकी मैच में 'खूनी खेल'! स्टैंड से अचानक चली गोलियां, हमलावर समेत 3 की मौत से दहल उठा अमेरिका
Ice hockey match shooting: अमेरिका के रोड आइलैंड में एक आइस हॉकी मैच के दौरान हुई गोलीबारी में हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं. पुलिस के अनुसार, यह हिंसक घटना किसी पुराने पारिवारिक विवाद का परिणाम हो सकती है, जिसकी जांच जारी है.
बांग्लादेश की राजनीति में आज एक बड़ा इतिहास रचने वाला दिन है. पिता जियाउर रहमान राष्ट्रपति थे, मां खालिदा जिया तीन बार प्रधानमंत्री बनीं, और अब बेटा तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे हैं. ये पहली बार है जब जिया परिवार की तीसरी पीढ़ी देश की सत्ता संभाल रही है. आज 17 फरवरी 2026 को ढाका के जतिया संसद भवन में तारिक रहमान PM बनकर इतिहास रचने वाले हैं. जानते हैं पूरी कहानी.
Colombia News: करीब छह दशक पहले कोलंबिया की सेना और विद्रोहियों के बीच भीषण गोलीबारी हुई थी. इस गोलीबारी में एक कोलंबियाई पादरी की भी जान चली गई थी. अब जाकर उनकी पहचान हो पाई है.
16 जनवरी 2026, हरिद्वार में गंगा घाट पर जगह-जगह बोर्ड लगा दिए गए। लिखा था- ‘हर की पैड़ी पर गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।’ बोर्ड पर किसी संस्था का नाम नहीं है। नीचे सिर्फ इतना लिखा है कि आज्ञा से म्युनिसिपल एक्ट हरिद्वार। इसके बाद से उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ समेत 47 तीर्थस्थलों पर गैर हिंदुओं की एंट्री बैन करने की मांग ने जोर पकड़ लिया। इसके लिए प्रस्ताव लाया जा रहा है। हर की पैड़ी का जिम्मा संभालने वाली श्री गंगा सभा ने गंगा घाटों पर बोर्ड लगाकर इसकी शुरुआत कर दी। चारधामों में भी जल्द ही ऐसे बोर्ड नजर आने वाले हैं। चारधाम बोर्ड या कमेटियां ही नहीं, सरकार ने भी रुख साफ कर दिया है। CM पुष्कर धामी ने कहा है कि चारधामों की कमेटियां, संत समाज और तीर्थस्थलों के लिए जिम्मेदार लोग जो कहेंगे, हम वहीं करेंगे। इसके लिए 1916 के हरिद्वार म्युनिसिपल एक्ट/बायलॉज पर स्टडी भी हो रही है। सवाल है कि हिंदुओं के तीर्थस्थलों पर क्या गैर हिंदू जाते हैं या इनसे कितने गैर हिंदुओें की रोजी-रोटी जुड़ी है। दैनिक भास्कर की टीम ने इन सवालों के जवाब, बैन की मांग की वजह और जरूरत समझने के लिए गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम और बद्रीनाथ केदारनाथ कमेटी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से बात की। 'बैन न लगाते तो क्या देवताओं की धरती को इस्लाम का घर बनते देखते' हरिद्वार के सभी तीर्थस्थलों पर गैर हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। हर की पैड़ी में बोर्ड भी लग चुका है। अब बाकी जगहों की धार्मिक समितियां भी औपचारिक तौर पर जल्द इसकी घोषणा करने वाली हैं। हमने हरिद्वार की सबसे पुरानी धार्मिक संस्था और हर की पैड़ी का जिम्मा संभालने वाली संस्था श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम से पूछा कि बैन लगाने की मांग की जरूरत क्यों पड़ी? नितिन कहते हैं, 'ये नई मांग नहीं है। ये उस कानून की बात है, जो यहीं के लिए बना था। वो लागू भी है, बस उसका पालन नहीं हो रहा। हम उस कानून के तहत हिंदुओं के तीर्थस्थल पर गैर हिंदुओं का बैन चाहते हैं। हर की पैड़ी में ये हो चुका है। अब बाकी जगहों पर भी होगा।' नितिन गौतम आगे कहते हैं, 'सबसे बड़ा खतरा कौन हैं, ये सब जानते हैं। कुरान में लिखा है- पहले दारुल अमन करें, फिर दारुल हरम और फिर दारुल इस्लाम। यानी जहां ये कम्युनिटी (मुस्लिम) बहुत कम संख्या में हो, वहां भाईचारे की बात करें, गंगा जमुनी तहजीब दिखाएं। आबादी बढ़ जाए तो दारुल हरम यानी दंगा-फसाद करें।' 'इसके बाद आखिरी मकसद दारुल इस्लाम पूरा करें। यानी उस जगह-जमीन को इस्लाम का घर बनाएं। हरिद्वार ही नहीं, उत्तराखंड में जहां देखिए, वहीं मुस्लिम दंगे-फसाद कर रहे हैं। ये दारुल हरम की पोजीशन तक पहुंच गए हैं।' दावा- मुस्लिमों के कारण हरिद्वार में अपराध बढ़ेइस मांग पर सरकार का रुख क्या है? नितिन गौतम बताते हैं, 'CM पुष्कर धामी का बयान आपने सुना होगा। उन्होंने कहा कि संत समाज और तीर्थस्थलों से जुड़ी कमेटियां इन मामलों में फैसला लेंगी। सरकार की टीम 1916 के हरिद्वार म्युनिसिपल एक्ट या बाइलॉज की गंभीरता से स्टडी कर रही है।' क्या गैर हिंदू भी हिंदुओं के तीर्थस्थलों पर आते हैं? 'वे तीर्थयात्री बनकर तो नहीं आते, लेकिन पैसा कमाने तो आते हैं। हर की पैड़ी या मंदिरों के आसपास चाय की दुकानें, सैलून और फलों की दुकानें इन्हीं की होती है। ये अस्थायी ठिकाना तो बनाते ही हैं।' ‘पिछले कुछ साल में हरिद्वार में इनकी वजह से अचानक वारदात बढ़ गई हैं। अगर इन्हें नहीं रोका गया तो ये लोग इसे इस्लाम का घर यानी दारुल इस्लाम बनाकर ही छोड़ेंगे, इसीलिए ये जरूरी है।’ क्या कुंभ क्षेत्र में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश पर पाबंदी है? इस पर नितिन कहते हैं, 'अभी औपचारिक तौर पर तो नहीं है, लेकिन वहां भी बैन होगा। ये रुद्रप्रयाग से लेकर हरिद्वार तक का करीब 75-80 किलोमीटर का क्षेत्र है। यहां भी वही एक्ट लागू है, जो बाकी तीर्थस्थलों पर है। इसलिए यहां भी बैन होगा।' बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले गैर हिंदुओं की एंट्री पर लगेगा बैनचारधामों में दो धाम बद्रीनाथ-केदारनाथ हैं। हर की पैड़ी और कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदुओं के नो एंट्री के बोर्ड के बाद यहां भी इसकी मांग उठ रही है। हमने बद्रीनाथ-केदारनाथ टेंपल कमेटी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से बात की। वे उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री हैं। वे साफ कहते हैं, ‘गैर हिंदुओं पर पाबंदी मुद्दा बनना ही नहीं चाहिए क्योंकि ये हिंदुओं के तीर्थस्थल हैं न कि कोई पर्यटन स्थल। यहां हिंदू ही आएंगे। हमने प्रस्ताव बना लिया है। सबकी सहमति भी है। जैसे ही बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख आएगी। उससे पहले हम बोर्ड की बैठक करेंगे और इस पर मुहर लग जाएगी।’ वे आगे कहते हैं, 'यहां आदि शंकराचार्य की स्थापित की वैदिक सनातन परंपरा के मुताबिक, पूजा पद्धति और नियम कायदे हैं। इनकी पवित्रता और पौराणिकता बनाए रखना हमारा धर्म है। विदेशी और गैर-आस्था वाले लोगों के प्रवेश का यहां कभी नियम ही नहीं रहा।' तो क्या इस साल बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले हरिद्वार म्युनिसिपल एक्ट सख्ती से लागू हो जाएगा? जवाब मिला, 'हां, बिल्कुल।' ‘इलाका प्रतिबंधित, फिर भी मजारें बन गई, नमाज होने लगी’ क्या बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे प्रमुख मंदिरों में भी गैर हिंदू आते हैं? हेमंत जवाब में कहते हैं, 'यहां लगातार कई अवैध मजारें बन गई हैं, तो इससे एक बात तो साफ है कि ये लोग यहां आते हैं। इनका यहां आने का मकसद वो नहीं, जो हमारा है, इसलिए इनसे खतरा भी है।' क्या बद्रीनाथ या केदारनाथ धाम के आसपास भी नई मजारें बनी हैं? जवाब में वे कहते हैं, 'हां, दो साल पहले से ये लोग यहां नमाज पढ़ने लगे, जबकि ये इलाका प्रतिबंधित है। फिर हर की पैड़ी में भी ऐसा ही मामला सामने आ गया, तो इन्हें रोकना तो पड़ेगा।' सरकार इससे सहमत है? हेमंत ने कहा, 'सरकार की सहमति या असहमति का मसला ही क्यों, राज्य तो कानून से चलता है। हरिद्वार म्युनिसिपल एक्ट वही कहता है, जो हम कह रहे हैं। ये एक्ट अभी लागू है, हम बस यही याद दिला रहे हैं।' गैर हिंदुओं में जैन, सिख और बौद्ध नहीं तो फिर कौन?राज्यमंत्री हेमंत द्विवेदी से हमने पूछा कि आपसे हिसाब से हिंदू कौन है? वे कहते हैं, 'संविधान के आर्टिकल-25 में साफ लिखा है- सिख, जैन, बौद्ध हिंदू हैं।' क्या ईसाई और मुस्लिमों के लिए बैन का प्रस्ताव सरकार ने भी मान लिया है? जवाब मिला- 'ऐसे मसलों पर तो सुप्रीम कोर्ट भी रुख साफ कर चुका है। उज्जैन महाकाल के गर्भगृह में प्रवेश का एक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि ये मंदिर समिति का मामला है। वो तय करेगी कि कौन जाए और कौन नहीं। यहां भी वही स्थिति है। तीर्थस्थलों, मंदिरों के बारे में जो कुछ तय करना है, समिति करेगी। ये सरकार भी मानती है।' 2027 का अर्ध कुंभ क्या मुस्लिमों-ईसाइयों के लिए बैन होगा? हेमंत द्विवेदी से पूछा गया कि क्या इस बार 2027 का अर्धकुंभ भी गैर हिंदुओं यानी मुस्लिमों और ईसाइयों के लिए बैन होगा तो उनका जवाब था, 'बिल्कुल होगा। नियम हमेशा सबके लिए होते हैं।' फिर क्या इकोनॉमिक गतिविधियों में भी मुस्लिमों की भागीदारी खत्म होगी। जवाब मिला- 'ऐसा नहीं है। प्रतिबंधित इलाके के बाहर जो चाहें करें, लेकिन अंदर आने की परमिशन नहीं होगी।' वक्फ बोर्ड बोला- इसमें गलत क्या, मक्का में भी गैर मुस्लिम बैन हैं उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स भी बैन का समर्थन करते हैं। वे कहते हैं, 'आप कभी मक्का गई हैं, नहीं गई होंगी। अगर आप जाने की कोशिश भी करती, तों नहीं जा पातीं। वहां हिंदू नहीं जा सकते। वो मुस्लिमों का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। इसलिए अगर उत्तराखंड के तीर्थस्थलों में गैर हिंदू बैन किए जा रहे हैं, तो इसमें मुझे कोई बुराई नहीं दिखती।' ‘अगर किसी को हिंदू धर्म में इतनी रुचि है तो वो धर्म बदलकर इन तीर्थस्थलों पर जा सकता है। देश में ऐसे बहुत से मामले आए, जैसे- गर्भगृह में प्रवेश का हो या किस मंदिर में एंट्री का, लगभग सभी जगहों पर धार्मिक कमेटियों का पक्ष कोर्ट ने स्वीकार किया। यहां भी हमें दूसरे के धर्म की आस्था और नियमों का सम्मान करना चाहिए।’ अगर बैन लगा, तो क्या गैर मुस्लिमों के कामकाज पर पड़ेगा असर उत्तराखंड के चारधाम तीर्थ क्षेत्र में यात्रा के दौरान लाखों लोग काम करते हैं। इसमें 10 से 12 हजार से ज्यादा लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इनमें घोड़ा-खच्चर ऑपरेटर, होटल या रेस्टोरेंट में काम करने वाला स्टाफ, ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े लोग और सुरक्षाकर्मी हैं। अकेले गौरीकुंड जैसे इलाके में 350 से ज्यादा होटल, रेस्टोरेंट और टेंट आवास हैं। वहीं, यात्रा के दौरान तीर्थ यात्रियों को चढ़ाई के लिए घोड़े, खच्चर, पालकी या डांडी-कंडी की जरूरत पड़ती है। केदारनाथ में ही लगभग 8,000 से ज्यादा डांडी-कंडी, टट्टू और घोड़े-खच्चर ऑपरेटर रजिस्टर्ड हैं। कुछ परिवारों में ऐसे भी खच्चर और कंडी वाले हैं, जो रजिस्टर्ड नहीं है। ऐसे में इनकी असल संख्या 12 से 15 हजार के बीच हो सकती है। इनमें बड़ी संख्या मुस्लिमों कर्मचारियों की है। अगर बैन लगा तो इनकी रोजी रोटी पर सीधा असर होगा। वहीं चारों धाम के यात्रा मार्ग पर मौजूद होटल-रेस्टोरेंट में काम करने वाले भी 2 हजार से ज्यादा है, इनमें भी काफी मुस्लिम लोग हैं। इनका काम भी प्रभावित होगा। ……………….ये खबर भी पढ़ें… यूपी चुनाव से पहले मायावती को क्यों मिला बड़ा बंगला अप्रैल, 2024 की बात है। लोकसभा चुनाव होने वाले थे। मायावती के भतीजे आकाश आनंद यूपी के सीतापुर में रैली करने पहुंचे थे। उन्होंने BJP को नफरत फैलाने वाली और आतंकवादियों की पार्टी कहा। इससे बुआ मायावती इतनी नाराज हुईं कि फौरन आनंद को नेशनल कोआर्डिनेटर पद से हटा दिया। पढ़िए पूरी खबर…
DNA: ट्रंप-खलीफा के बीच..'बिन बारूद वाला युद्ध', हथियार नहीं चल रहे, फिर भी कैसे चल रही वॉर?
अमेरिका के राष्ट्रपति खामेनेई को झुकाने के लिए ट्रंप सीधे उनकी जिंदगी की सुरक्षा को लेकर चेतावनी जारी कर रहे हैं. इस कारण ही ईरान और अमेरिका के बीच साइलेंट बैटल शुरू हो चुका है. आइए डिटेल में इसके बारे में बताते हैं...
पेंशन के लिए घर पर ही सड़ाई 100 साल से भी ज्यादा उम्र की मां की लाश, सालों बाद पकड़ में आरोपी
Mummified Body Found In Germany: जर्मनी में एक महिला कई सालों तक अपनी मां के ममीफाइड शरीर के साथ रह रही थी. पुलिस की एक जांच में इसका खुलासा हुआ.
लोकतांत्रिक बदलाव या सत्ता का नया चेहरा! मादुरो की विदाई के बाद वेनेजुएला के क्या हैं हाल?
Venezuela After Maduro: निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और सत्ता से बेदखली वेनेजुएला की राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है. लेकिन अब सवाल ये है कि ये बदलाव देश में वास्तविक लोकतंत्र की बहाली करता है या केवल यह सत्ता के नए चेहरे का उदय बनकर रह जाएगा.
Israel-America Meeting On Iran Conflict: हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अमेरिका ने इजरायल को ईरान पर हमले को लेकर आश्वासन दिया था.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. इन सब के बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास शुरू किया है. इस अभ्यास का नाम 'Smart Control of the Strait of Hormuz' रखा गया था.
North Korea News: उत्तर कोरिया की राजनीति में एक नया चेहरा नजर आ रहा है. उत्तर कोरिया के राजनीतिक आयोजनों में किम जोंग उन की बेटी किम जू-ए नजर आ रही है, जिससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि जू-ए उत्तर कोरिया की अगली सुल्तान होने सकती हैं.
Amber Luke Tattoos Journey: ऑस्ट्रेलिया की सबसे ज्यादा टैटू वाली महिला एम्बर ल्यूक का नाम आपने जरूर सुना होगा. अपने शरीर को कैनवास बनाने वाली महिला का जीवन उसके टैटू की तरह इतना रंगीन नहीं है. टैटू के शौक ने 3 हफ्तों तक उनकी आंखों की रोशनी छीन ली. इस खबर में एम्बर के जीवन के बारे में बताएंगे..
पटरियों पर दौड़ रही थी ट्रेन, अचानक आ गया बर्फ का तूफान, 80 यात्रियों के साथ खिसक गए डिब्बे
Swiss Railway Line Hit By Avalanche: स्विट्जरलैंड में एक पैसेंजर ट्रेन भारी हिमस्खलन के चलते पटरी से नीचे उतर गई. इस हादसे में कई लोगों के घायल होने की आशंका है.
मशहूर टीवी एंकर सवाना गुथरी की मां नैन्सी गुथरी अब भी तीसरे हफ्ते में भी गायब हैं. 31 जनवरी की रात को वो अपने घर से अचानक लापता हो गईं, जिसके बाद पूरे अमेरिका की पुलिस इस मामले में खोजबीन कर रही है, लेकिन अब तक नैन्सी गुथरी का पता नहीं लग पाई है, जबकि गुथरी को खोजने के लिए 18 हजार फोन कॉल और 13 हजार टिप्स लोगों ने दे दिया है. पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है.
रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया के करीब 6000 सैनिक मारे या घायल हुए हैं. यह दावा दक्षिण कोरिया की तरफ से किया गया है. इसी बीच उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन ने बेटी किम जू ए के साथ जंग में शहीद परिवारों को‘लग्जरी मरहम’ दिया है.किम को पता है कि अपने देश के सैनिक इस तरह जंग में मारे जाते गए तो जनता में गुस्स फैल सकता है. जानें पूरी रिपोर्ट.
Bangladesh Tarique Rahman oath-taking on Feb 17:बांग्लादेश में BNP की ऐतिहासिक जीत के बाद नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह बेहद भव्य होने जा रहा है. ढाका के संसद परिसर में होने वाले इस कार्यक्रम में करीब 1200 देशी-विदेशी मेहमान शामिल होंगे. भारत, भूटान, पाकिस्तान समेत कई देशों के बड़े नेता पहुंचेंगे. देखें कौन-कौन दिग्गज होंगे शामिल.
रूस ने नावाल्नी को दिया जहर: यूरोपीय देशों का दावा
जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, स्वीडन और नीदरलैंड्स ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि यूरोपीय प्रयोगशालाओं में हुए टेस्ट इस बात की पुष्टि करते हैं कि अलेक्सी नावाल्नी की हत्या एपिबेटिडीन नाम के न्यूरोटॉक्सिन से की गई
ओबामा का ट्रंप प्रशासन पर तीखा हमला, वर्तमान दौर की अमेरिकी राजनीति को बताया जोकरों का शो
ओबामा ने वर्तमान राजनीतिक विमर्श को इंटरनेट मीडिया और टेलीविजन पर चल रहे “सर्कस” से तुलना करते हुए कहा कि राजनीति में गंभीरता और गरिमा का स्तर गिरा है।
Awami League Dilemma Before Tarique Rahman:बांग्लादेश में चुनाव के बाद नई सत्ता बनने जा रही है और सबकी नजर तारिक रहमान के अगले कदम पर टिकी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अवामी लीग और शेख हसीना के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई होगी या देश मेल-मिलाप की राह पर चलेगा. नई सरकार का रुख ही देश की राजनीति की दिशा तय करेगा.
12 साल के लड़के ने बना डाला न्यूक्लियर फ्यूजन, बच्चे का कारनामा देख दुनिया हैरान
एडन का न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर एक दिन में तैयार नहीं हुआ। इस परियोजना को पूरा करने में उसे कुल चार साल लगे। इस दौरान उसे कई तकनीकी अड़चनों, सुरक्षा जांचों और असफल प्रयोगों का सामना करना पड़ा।
Tarique Rahman Meet Jamaat ameer, NCP convener: बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने शपथ ग्रहण से ठीक दो दिन पहले जमात-ए-इस्लामी अमीर शफीकुर रहमान और एनसीपी कन्वेनर नाहिद इस्लाम से मुलाकात की है. शफीकुर ने इसे 'राष्ट्रीय राजनीति का ऐतिहासिक पल' बताया और तारिक को भावी पीएम कहकर बधाई दी है. तारिक रहमान ने शपथ ग्रहण से पहले दोनों विपक्षी पार्टियों के मुखिया से मुलाकात करकेराजनीतिक समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है.जानें इसके पीछे की कहानी.
हिंद महासागर में अमेरिकी सेना की बड़ी कार्रवाई
पेंटागन ने बताया कि अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में वेनेजुएला से जुड़े एक अन्य तेल टैंकर को रोका और उस पर सवार हो गई
US magazine report on pakistan proxy war: अमेरिकी पत्रिका की रिपोर्ट में कहा गया कि यूएन के ध्यान ना देने के कारण पाकिस्तान पर कड़ा दबाव नहीं बन पाया और वह पड़ोसी देशों के खिलाफ प्रॉक्सी युद्ध की नीति अपनाता रहा है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि इंडिया को आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के सच्चाई को दुनिया के सामने लगातार लाना चाहिए और अपने सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाना चाहिए.
Donald Trump: जेनेवा में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच नेतन्याहू ने कहा कि किसी भी परमाणु समझौते में ईरान का परमाणु ढांचा पूरी तरह नष्ट होना चाहिए. इस बीच आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य तैयारी भी बढ़ा रहा है, ताकि बात के साथ-साथ ईरान पर सैन्य तैनाती के जरिए भी दबाव बनाया जा सके.
शेख हसीना के तख्तापलट के करीब डेढ़ साल बाद बांग्लादेश को चुनी हुई सरकार मिल रही है। 12 फरवरी को हुए चुनाव में BNP गठबंधन ने 212 सीटें जीती हैं। लंदन से बांग्लादेश लौटे BNP लीडर तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। पार्टी से 3 हिंदू सांसद भी चुने गए हैं। इनमें से ढाका-3 सीट से जीत दर्ज करने वाले गोयेश्वर चंद्र रॉय मंत्री बन सकते हैं। गोयेश्वर पिछली BNP सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। वे भारत से अच्छे रिश्तों के हिमायती हैं लेकिन उन्हें भारत से कई सारी शिकायतें भी हैं। दैनिक भास्कर ने हिंदुओं की सुरक्षा, शेख हसीना की वापसी और भारत से बांग्लादेश के रिश्तों समेत तमाम मुद्दों पर गोयेश्वर चंद्र रॉय से बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: मुस्लिम बहुल सीट ढाका-3 से आप एकतरफा जीते हैं। बदले माहौल में चुनाव लड़ने और जीतने का सफर कैसा रहा?जवाब: जो हम चाहते थे, वही नतीजे आए। हमारी पहले से तैयारी थी कि हम पूरे दम से चुनाव लड़ेंगे। हमने फासीवादी शेख हसीना के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। चुनाव से पहले हमने बांग्लादेश के लोगों के सामने अपनी योजना रखी थी। हम युवाओं को फोकस में रखकर सरकार चलाएंगे। लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करेंगे। इकोनॉमी को मजबूत करने और एक्सपोर्ट बढ़ाने की हमारी कोशिश है। चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि जनता हमारी प्लानिंग से संतुष्ट हैं। सवाल: आपने विपक्ष में रहकर अवामी लीग के खिलाफ 17 साल लड़ाई लड़ी है, ये कितना मुश्किल था?जवाब: सिर्फ मुझ पर ही 61 केस दर्ज किए गए। हमने हसीना सरकार के आसमान छूते भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। इसलिए मुझे दबाने के लिए अवामी लीग ने ये फर्जी केस किए थे। बांग्लादेश में हर व्यक्ति करप्शन और टॉर्चर से छुटकारा चाहता था, कोई सुरक्षित महसूस नहीं करता था। इस चुनाव में लोगों ने अपने मन की बात बैलेट के जरिए बताई है। सवाल: बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को लेकर तारिक रहमान से आपकी क्या बातचीत हुई?जवाब: बांग्लादेश की ऐसी विचारधारा है कि हम अल्पसंख्यक शब्द में यकीन नहीं करते हैं। देश में रहने वाला हर व्यक्ति इस मिट्टी से जन्मा है। सबके पास संविधान के मुताबिक बराबरी का अधिकार है। सरकार और प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम करती है। हसीना सरकार के वक्त कई हिंदुओं को घर से निकालकर टॉर्चर किया गया। हमारे पास इसके सबूत हैं, लेकिन भारत ने कभी कोई एक्शन नहीं लिया। मुझे नहीं लगता है कि भारत कथित बांग्लादेशी अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए कुछ करना चाहता है। हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई सभी ने BNP को वोट दिया है। लोगों को यकीन है कि हमारी सरकार कानून व्यवस्था सुधारेगी और लोगों की सुरक्षा तय करेगी। सवाल: जनता ने कट्टरपंथी पार्टी जमात को क्यों खारिज किया, आपको क्या लगता है?जवाब: बांग्लादेश के लोग धार्मिक हैं, लेकिन कट्टर नहीं। हमारे यहां सांप्रदायिक सद्भाव है, यही हमारी हजारों साल पुरानी परंपरा है। हम पूजा और रोजा दोनों साथ करते हैं। सवाल: आपको क्या लगता है कि जमात को लोग कभी पसंद नहीं करेंगे?जवाब: जमात के बारे में हम जानते हैं कि वो कितने कट्टर हैें। हालांकि अब वो संवैधानिक रास्ते पर हैं और चुनाव लड़ रहे हैं। अगर जनता उन्हें चुनकर भेज रही है तो हम क्या कर सकते हैं। भला हम उनका विरोध कैसे कर सकते हैं। अगर जमात को कुछ सीटें मिली हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि बांग्लादेशी कट्टर हो रहे हैं। अवामी लीग के वोटर्स ने BNP को वोट दिया है, ना कि जमात को। सवाल: यूनुस सरकार का कार्यकाल आप कैसे देखते हैं। क्या आपको नहीं लगता कि उन्होंने हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ गलत किया?जवाब: मैं फिर से कहूंगा कि आप अल्पसंख्यकों पर फोकस मत कीजिए। हर किसी को खतरा रहा है, हर कम्युनिटी को धमकियां मिली हैं। शेख हसीना सरकार के वक्त प्रशासन की कोई जवाबदेही नहीं थी क्योंकि उनके ऑर्डर के बिना कुछ नहीं हो सकता था। हसीना ने सिर्फ अल्पसंख्यकों को नहीं सबको टॉर्चर किया। मैं हिंदू कम्युनिटी से हूं, आप मुझे अल्पसंख्यकों का नेता कहते हैं। हालांकि मुझे अल्पसंख्यकों का नेता कहलाया जाना पसंद नहीं है। हसीना सरकार ने मुझे टॉर्चर किया, दर्जनों केस किए, जेल भेजा। तब किसी ने नहीं कहा कि अल्पसंख्यकों को टॉर्चर किया जा रहा है। तब भारत ने भी कुछ नहीं कहा। अगर अवामी लीग के हिंदू लीडर पर भी सियासी वजहों से हमला होता है, तो आप माइनॉरिटी की बात करने लगते हैं। 23 मार्च 1973 को शेख मुजीब ने रोमना काली के एतिहासिक मंदिर पर हमला किया था, लेकिन तब भारत ने कोई सवाल नहीं किया। 2001 में PM रहीं खालिदा जिया के नेतृत्व में मैंने उस मंदिर का पुनर्निमाण करवाया। आप जाकर वो मंदिर देख सकते हैं। अवामी लीग के नेताओं ने कई मंदिरों पर हमले किए, हिंदुओं की जमीन हड़प लीं लेकिन उसकी कभी कोई चर्चा नहीं हुई। सवाल: पिछले दिनों अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों का जिम्मेदार कौन है?जवाब: जो भी हत्याएं हुई हैं, वो राजनीतिक हत्याएं हैं। किसी को धर्म की वजह से नहीं मारा गया। चुनाव के वक्त साउथ एशिया के हर देश में कुछ ना कुछ होता रहता है। आपको भी ये बात समझनी चाहिए, ताकि माइनॉरिटी को लेकर ये प्रोपेगेंडा बंद हो। सियासी रंजिश में होने वाली हिंसा हमारे यहां आम बात है। जब आप ऐसे मुद्दे उठाते हैं तो मुस्लिम कम्युनिटी अपमानित महसूस करती है। अगर आप खबरों के जरिए मुसलमानों को अपमानित महसूस कराएंगे तो अल्पसंख्यकों का क्या होगा। सवाल: आपके नजरिए से डॉ यूनुस का डेढ़ साल का कार्यकाल कैसा रहा?जवाब: वो राजनीतिक नहीं एक अंतरिम सरकार थी। मैं उनकी तारीफ करूंगा कि वो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवा पाए। अंतरिम सरकार के सामने कई चुनौतियां थीं लेकिन बांग्लादेश में फाइनेंशियल दिक्कतें और कानून व्यवस्था के चलते उसे हल नहीं कर सके। उन्हें जो करना था, उन्होंने किया। अब हमारी चुनी हुई सरकार को कानून के मुताबिक काम करना चाहिए, पार्टी के हिसाब से नहीं। सवाल: बांग्लादेशियों के लिए आपका क्या सपना है और भारत उसमें कैसे मदद कर सकता है?जवाब: भारत ने 1971 में हमारी मदद की लेकिन उसे समझना चाहिए कि सिर्फ एक पार्टी से दोस्ती करके कुछ नहीं होगा। दोस्ती देशों, लोगों और सरकारों के बीच होनी चाहिए। हमारी भाषा, संस्कृति, सोच-विचार सब एक जैसा है। भारत को लगता था कि बांग्लादेश में सिर्फ हसीना ही सरकार है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ मोमिन से किसी ने पूछा कि भारत-बांग्लादेश के संबंध कैसे हैं? उन्होंने जवाब दिया, पति-पत्नी की तरह हैं। क्या ये दोस्ताना रिश्ते की बातें हैं? लोग उनसे पूछ रहे हैं कि पत्नी कौन और पति कौन है? बांग्लादेश के लोग एंटी-इंडियन कभी नहीं रहे, लोग अवामी लीग के खिलाफ रहे हैं। भारत ने हमेशा अवामी लीग को प्रमोट किया। सवाल: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कैसे बेहतर किए जा सकते हैं?जवाब: भारत को ये स्वीकारना होगा कि उन्होंने जो किया वो गलत था। भारत के उच्चायोग ने मुझे कभी नहीं बुलाया लेकिन 5 अगस्त के बाद खूब संबंध बनाने की कोशिश की। क्या हमें नहीं पता है कि ऐसा क्यों किया। पिछले 17 सालों में उन्होंने मुझे कभी नहीं बुलाया, वो मेरा नाम तक नहीं जानते थे। अब उन्हें लग रहा है कि मेरे पास पावर आ रही है, तो मुझसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि उन्होंने जो किया वो गलत है। उन्हें अपनी विदेश नीति में बदलाव करना चाहिए। मुझे लगता है कि पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध होना बहुत जरूरी है। दोस्ती में बड़े या छोटे देश का सवाल नहीं होता, बराबरी के स्तर पर संबंध बनाए जाते हैं। सवाल: शेख हसीना अभी भारत में हैं, क्या आप उनकी वापसी के लिए बात करेंगे?जवाब: लोकतंत्र की मां, बेगम खालिदा जिया ने कभी देश नहीं छोड़ा। उन्होंने देश में रहकर कानून और कोर्ट का सामना किया। हसीना को वापस आकर कोर्ट का सामना करना चाहिए। भारत को लंबे वक्त के लिए हसीना को पनाह नहीं देनी चाहिए। ये भारत के लिए शर्मनाक है। भारत ने सभी क्रिमिनल्स को कोलकाता में पनाह दी हुई है। उन सबको वापस आना चाहिए और कोर्ट का सामना करना चाहिए। सवाल: अवामी लीग का बांग्लादेश में क्या फ्यूचर है?जवाब: मुझे नहीं पता कि लोग क्या सोच रहे हैं। BNP का हमेशा मानना रहा है कि किसी राजनीतिक पार्टी को बैन करना समाधान नहीं है। अवामी लीग को भी बैन नहीं करना चाहिए। हमारी पार्टी ने इस पर बयान भी जारी किया था। अगर अवामी लीग चुनाव लड़ती तो BNP की जीत और बड़ी होती। सवाल: चुनाव के साथ रेफरेंडम पर भी वोटिंग हुई और जुलाई चार्टर के पक्ष में वोटिंग हुई, ये कैसे लागू होगा?जवाब: रेफरेंडम में कई सारे सुधारों के सुझाव हैं, हमने खुद कई बार ये सुधार करने की बातें की हैं। अगर ये सुधार नहीं होंगे तो लोग हमारे खिलाफ भी हो सकते हैं। हमें बहुत सतर्कता से काम करना होगा। हमें संविधान के रास्ते पर चलना होगा। हम पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। हम 16 साल से न्याय के लिए लड़ रहे हैं, ताकि एक निष्पक्ष सिस्टम बन सकें। सवाल: क्या रेफरेंडम के बाद बांग्लादेश अब सेक्युलर राज्य नहीं रहेगा? क्या लोगों का ये डर वाजिब है?जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है। हम प्रैक्टिकली सेक्युलर है। हम सिर्फ इस्लाम की विचारधारा में यकीन नहीं रखते हैं बल्कि सभी की धार्मिक भावनाओं को मानते हैं। हम सबके धार्मिक अधिकारों की वकालत करते हैं। सेक्युलरिज्म के मुद्दे पर हम समझौता कर सकते हैं, लेकिन हम असांप्रदायिक देश बनाना चाहते हैं। हम कम्युनल नहीं हो सकते। पिछले चुनावों में शेख हसीना को दो तिहाई बहुमत मिला और विपक्ष नाम मात्र का था। तब भी उन्होंने संविधान से ‘बिस्मिल्ला-ए-रहमान ए रहीम’ हटाने की कोशिश नहीं की। सवाल: अब लगता है कि बांग्लादेश में स्थिरता का दौर आ रहा है, आपके हिसाब से 3 बड़ी चुनौतियां क्या हैं?जवाब: सबसे बड़ी चुनौती राजनीति है। मुझे लगता है कि अवामी लीग और जमात, सरकार के खिलाफ माहौल बनाएंगे और अस्थिरता लाने की कोशिश करेंगे। जब ये होगा तब भारत का क्या रुख होने वाला है, ये देखना सबसे अहम होगा। जमात और अवामी लीग सरकार गिराने के लिए हाथ मिला सकते हैं। सवाल: आपके हिसाब से BNP लीडर तारिक रहमान की 3 सबसे बड़ी खूबियां क्या हैं?जवाब: वो जिया उर रहमान का खून हैं और खालिदा जिया की विरासत आगे बढ़ा रहे हैं। वो लोगों की बातें ध्यान से सुनते हैं और उन पर अमल करते हैं। वो बहुत व्यवहारिक हैं। उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दूसरी पार्टी की आलोचना नहीं की। सवाल: क्या आप शेख मुजीब की लेगेसी का संरक्षित करेंगे?जवाब: मैं उनका घर तोड़े जाने की घटना की निंदा करता हूं। वो शेख हसीना का घर है। हसीना को देश वापस आना चाहिए और अपने घर जाना चाहिए। अगर किसी मदद की जरूरत होगी, तो हम उनकी मदद भी करेंगे। हम किसी का घर-इमारत तोड़ने में यकीन नहीं रखते हैं। गलत चीज, गलत होती है। बाकी लेगेसी के संरक्षण की बात है, तो ये हमारी जिम्मेदारी नहीं है। मुझे लगता है कि शेख मुजीब अवामी लीग के फादर हो सकते हैं, वो फादर ऑफ नेशन नहीं हैं। सवाल: क्या आप भारत जाना चाहते हैं?जवाब: बिल्कुल जाना चाहता हूं, लेकिन भारत मुझे वीजा और इजाजत ही नहीं देता। मेरे कोलकाता, दिल्ली, मुंबई हर जगह बहुत सारे जानने वाले हैं, मैं उनसे मिलना चाहता हूं। …………………….ये खबर भी पढ़ें… अवामी लीग-हिंदुओं के वोट BNP को मिले, जमात हारी करीब ढाई महीने पहले ही लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है। 12 फरवरी को हुए चुनाव में उनकी पार्टी BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के गठबंधन ने 299 में से 212 सीटें जीती हैं। सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की जरूरत थी। कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है। पढ़िए पूरी खबर…

