12 साल पुरानी केंद्र की मोदी सरकार- सख्त, अडिग और किसी भी दबाव में न झुकने वाली। मामला चाहे CAA-NRC प्रोटेस्ट का हो या संसद में बीच सत्र से 146 विपक्षी सांसदों का सस्पेंशन या फिर राहुल गांधी की सदस्यता खत्म कर दी गई हो। सरकार किसी विरोध के आगे कमजोर पड़ते नहीं दिखी। किसी मंत्री पर इस्तीफे का दबाव बना, तो कहा गया- ‘भैया यहां इस्तीफे नहीं होते।’ लेकिन 12 साल में पहली बार कॉकरोच पार्टी ने मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया। इस पूरे घटनाक्रम से कौन-से 5 बड़े डेंट लगे और क्या सरकार इससे उबर पाएगी; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या इस डेंट का असर आने वाले चुनावों पर पड़ेगा? जवाब: उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 में खत्म हो रहा है। यहां फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव हो सकते हैं। VoteVibe के फाउंडर और इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं, ‘प्रोटेस्ट के दौरान सरकार ने राहुल गांधी या विपक्षी से कोई बातचीत नहीं की। उसने CJP के युवा नेताओं के साथ डील करके उनकी मांगें मान लीं, ताकि विपक्ष इसे अपनी जीत न दिखा सके। जबकि कॉकरोच पार्टी कोई चुनावी मंच नहीं, बल्कि यूथ प्लेटफॉर्म है। इसलिए सीधे तौर पर बीजेपी को कोई चुनावी नुकसान होता नहीं दिखता। विपक्ष को तब फायदा हो सकता था, जब उसने मांगें न मानी होतीं।' अमिताभ के मुताबिक, ‘राम मंदिर चंदाचोरी और फिर इस मामले में युवाओं के एकजुट प्रोटेस्ट से बीजेपी के सामने हिंदुत्व, हिंदू-मुस्लिम बाइनरी और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को लेकर एक नई चुनौती है, लेकिन बीजेपी को कोई चुनावी घाटा नहीं होगा। हर राज्य के चुनावी फैक्टर अलग हैं। पंजाब में सिख बनाम अन्य की राजनीति है। उत्तराखंड में मुस्लिम सिर्फ 15% है। वहां हिंदुत्व का मुद्दा नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में भी जातीय फैक्टर ज्यादा रोल निभाता है।’ कांग्रेस को कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल कहते हैं, ‘आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका कोई असर नहीं दिखता है। पीएम मोदी के चेहरे या केंद्र सरकार के कामकाज के बजाय राज्यों में लोकल मुद्दे ज्यादा प्रभावी होते हैं।’ हालांकि आदेश ये भी कहते हैं कि युवाओं में जिस तरह का रोष है और वो जारी रहता है, तो उसका इलेक्टोरल टेस्ट 2029 के लोकसभा चुनाव में होगा। सवाल-2: क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार डैमेज कंट्रोल कर लेगी? जवाब: धर्मेंद्र के इस्तीफे के अलावा सरकार ने कॉकरोच पार्टी की बाकी दोनों मांगें भी मान ली हैं- प्रोटेस्टर्स पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और NEET पेपर लीक के चलते जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों को एक करोड़ का मुआवजा मिलेगा। आदेश रावल कहते हैं, ‘बीजेपी हिंदुत्व, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों से जुड़ा विरोध होता, तो बिना किसी डैमेज के मैनेज कर लेती, लेकिन इस बार मुद्दा उनके सिलेबस से बाहर का था। इस्तीफा दिया नहीं गया, बल्कि छात्रों ने इस्तीफा लिया है। पीएम मोदी को 2 दिन में बार-बार झुकना पड़ा। सारी मांगें माननी पड़ीं। वैचारिक तौर पर कुछ डैमेज ऐसा जरूर हुआ है, सरकार का मनोबल भी टूटा है, लेकिन ये डैमेज कंट्रोल हो जाएगा। आदेश जोड़ते हैं कि बीजेपी अपनी भूल में तुरंत सुधार करना भी जानती है। देश के लोगों की याद्दाश्त बहुत लंबी नहीं है। सरकार संसद सत्र में परिसीमन बिल आदि ला सकती है, इससे पूरा ध्यान उस पर चला जाएगा। ------------------ ये खबर भी पढ़िए… इन 5 वजहों से घबराई सरकार, तब हुआ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; नहीं झुकते तो क्या हो जाता, आखिरकार आंदोलन खत्म शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर 35 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन से सरकार दबाव में थी। पूरी खबर पढ़िए…
22 जुलाई रात 10.30 तक तय था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। गृहमंत्री अमित शाह की जिद और PM मोदी का सपोर्ट उन्हें कुर्सी पर टिकाए हुए था। 22 जुलाई की रात 10.30 बजे एक मीटिंग हुई और ये कुर्सी डगमगाने लगी। मीटिंग RSS और BJP के बीच थी। शाह अब भी जिद पर अड़े थे, लेकिन प्रधानमंत्री का सपोर्ट अब हट चुका था। RSS के 5 पदाधिकारियों की मोदी-शाह से मीटिंग RSS की तरफ से सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सह सरकार्यवाह अरुण कुमार और कृष्ण गोपाल के साथ दो और पदाधिकारी मौजूद थे। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा मौजूद थे। ये मीटिंग न BJP दफ्तर में हुई और न ही संघ कार्यालय में। वजह थी, इस मीटिंग और उसमें हुई बातों को सीक्रेट रखना। इस मीटिंग के बारे में किसी को खबर नहीं थी। सोर्स ने बस इतना कहा कि मीटिंग शामिल लोगों में से किसी एक के घर पर हुई थी। तय हुआ PM मोदी तुरंत रात में ही जेन जी के अंदाज में बात करें सोर्स ने बताया इसी मीटिंग में तय हुआ कि PM मोदी तुरंत यानी रात में ही जेन जी के सबसे फेवरेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए बात करेंगे। भाषा भी ऐसी हो जो जेन जी तक पहुंचे। ये तक तय हुआ कि PM डेकोरेट या निश्चिंत न दिखें। चेहरे पर चिंता और आंखों में नींद दिखे, ताकि मैसेज जाए कि वे स्टूडेंट्स की फिक्र में सोए नहीं। ऐसा इंस्टाग्राम की पोस्ट में झलका भी। इस्तीफे की स्क्रिप्ट भी तभी लिखी गई... संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी सधी शैली में कहा कि धर्मेंद्र के इस्तीफे पर विचार करना चाहिए। आंदोलन भड़क रहा है। यूपी-पंजाब में चुनाव है। बिहार में सरकार अभी स्थिर नहीं हो पाई है। ऐसे में अगर ये आंदोलन वाकई नेपाल के जेन जी जैसा हुआ, तो सरकार कठिनाई से घिर जाएगी। आखिर में कहा गया कि ये संघ का स्पष्ट विचार है। इसके लिए 5 दिन यानी 27 जुलाई तक हमें देखना चाहिए कि पूरे देश से रिपोर्ट क्या आती है। अगर आंदोलन दब गया तो ठीक नहीं तो सोमवार को इस्तीफा दिलाना चाहिए। इन 5 दिनों में हमें पहले हर संभव कोशिश करनी चाहिए। जैसे- 1. सरकार और PM के पक्ष में नरेटिव तैयार करें। 2. ABVP के छात्रों को प्रोटेस्ट में शामिल करना ताकि वे आंदोलन में शामिल स्टूडेंट्स को समझाएं या अंदर ही अंदर आंदोलन के भीतर मतभेद पैदा करें। 3. आंदोलन में टूट डालें, जैसे विपक्ष अलग हो जाए, वांगचुक अलग और दीपके अलग। प्लान पर शुरू हुआ काम 1. दूसरे दिन रात में वांगचुक का अनशन तुड़वा दिया गया। ये मुश्किल नहीं था क्योंकि वांगचुक तैयार थे। 2. नरेटिव बनने लगा। ABVP के छात्रों तक मैसेज भेजना शुरू हुआ। 3. 25 जुलाई को ABVP से जुड़े करीब 150 स्टूडेंट्स प्रयागराज से दिल्ली पहुंचे। सुबह से जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हो गए। जिला स्तर पर तो 23 जुलाई से ही छात्र एक्टिव हो गए थे। BJP प्लान में फेल भी पास भी सोर्स बताते हैं, ‘वांगचुक और दीपके के बीच दरार पड़ गई। वांगचुक पर डील करने के आरोप लगे। BJP इसमें कामयाब रही, लेकिन आंदोलन को बढ़ने से नहीं रोक पाई। दूसरी तरफ, ABVP की तरह समाजवादी पार्टी की यूथ विंग एक्टिव हो गई। मैसेजिंग हुई कि हर जिले में 500 युवा इकट्ठे हों। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की आग बुझ रही थी, लेकिन बिहार, यूपी में आग बढ़ने लगी। डेडलाइन से 2 दिन पहले हो गया इस्तीफा... आंदोलन भड़का तो RSS ने और स्पष्ट मैसेज भेजा। सरसंघचालक मोहन भागवत ने संदेश दिया कि जेन जी से संवाद करना चाहिए। हमारी पीढ़ी अलग थी। हम आदेश मानते थे। ये पीढ़ी संवाद चाहती है। जेन जी को उनके तरीके से समझाकर हम रास्ते में ला सकते हैं। ये संदेश सरकार और प्रधानमंत्री के नाम था। भागवत ने मीडिया में ये बोलने से पहले ही ये संदेश PM और गृहमंत्री को भेज दिया था। RSS ने साफ कहा कि अब अगर ये आंदोलन बढ़ा तो सरकार संकट में आ जाएगी। सिर्फ मोदी, शाह और RSS को पता था कि आज इस्तीफा होगा 22 जुलाई की मीटिंग में BJP की तरफ से जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा भी थे। हालांकि, प्रधान का इस्तीफा हुआ तो इसकी जानकारी सिर्फ अमित शाह, नरेंद्र मोदी और RSS को थी। BJP दफ्तर के अंदर तो किसी को खबर तक नहीं थी। नड्डा और जितेंद्र सिंह को भी तुरंत हुए इस इस्तीफे की खबर बाद में पता चली। अब कौन/ होगा शिक्षा मंत्री सूत्र के हिसाब से फिलहाल आंदोलन में विपक्ष, स्टूडेंट्स और सरकार के बीच की कड़ी बने जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा का नाम लिस्ट में सबसे आगे है। दोनों मंत्री विनम्र और बेदाग माने जाते हैं। पूरे आंदोलन में भी इन्होंने जिस तरह से मध्यस्थता का काम किया, उसकी सरहाना RSS और BJP के शीर्ष नेतृत्व ने की। इनके अलावा भी दावेदार हैं… इससे पहले किसान आंदोलन से बैकफुट में आई थी सरकार इससे पहले किसान आंदोलन के हिंसक होने के बाद सरकार ने बिल वापस लिए थे। आंदोलनकारियों के सामने झुकने का ये दूसरा मौका है। सूत्र ने कहा, आप इसे झुकना कह रही हैं, मैं रणनीति कह रहा हूं। किसान आंदोलन की वजह से बिल वापस लिए गए। उसके बाद फिर कोई किसान आंदोलन दिखा क्या। अभी शांति जरूरी थी, सो इस्तीफा ले लिया। हालांकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
फ्रांस-स्पेन में कुदरत का तांडव, जंगल की भीषण आग से 2 लाख लोग बेघर; बोर्डो शहर पर मंडराया बड़ा खतरा
दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस और मध्य स्पेन इस समय इतिहास की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहे हैं। जंगलों में लगी बेकाबू आग ने ऐसा हाहाकार मचाया है कि दोनों देशों के प्रभावित इलाकों से लगभग 2 लाख लोगों को आनन-फानन में सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा है। मैड्रिड से लेकर बोर्डो के पास बसे तमाम कस्बों तक दहशत का माहौल है और लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागने को मजबूर हो गए हैं। आग की रफ्तार और उसकी विनाशकारी क्षमता ने दमकल विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है, क्योंकि इस भयंकर लपटों का सीधे तौर पर सामना करना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं हो पा रहा है।फ्रांस के अटलांटिक तट पर अफरा-तफरी, नावों के जरिए भागे लोगस्पेन में आग बुझाने वाले कर्मचारियों ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि हवा के रुख और प्रचंड गर्मी के कारण आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उस पर काबू पाना बेहद मुश्किल साबित हुआ। फ्रांस के लोकप्रिय अटलांटिक तटीय टूरिस्ट इलाकों में जब आग तेजी से फैलने लगी, तो स्थिति इतनी विकट हो गई कि कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए समंदर में नावों का सहारा लेकर भागना पड़ा। फ्रांसीसी गृह मंत्रालय से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल फ्रांस के गिरोंडे और लैंड्स इलाकों से ही 1,41,000 से अधिक नागरिकों को अपने पुश्तैनी और आधुनिक घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेनी पड़ी है।स्पेन के मध्य इलाकों में भी तबाही, घरों को खाली कराने के लिए उतरी पुलिसदूसरी तरफ स्पेन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, मध्य स्पेन के जंगलों से उठी आग की लपटों ने रिहायशी इलाकों को अपनी आगोश में ले लिया, जिसके चलते 60,000 लोगों को मजबूरन अपने घर खाली करने पड़े। प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते पुलिस की टीमें घर-घर जाकर सायरन बजाते हुए लोगों को तुरंत इलाका खाली करने की चेतावनी दे रही थीं। जंगलों से उठ रहे काले धुएं के विशाल गुबारों ने आसमान को पूरी तरह ढक लिया है। सड़कों पर सिर्फ गाड़ियों का रेला दिखाई दे रहा है, जिससे हर तरफ भगदड़ और अफरा-तफरी जैसा माहौल बना हुआ है।राहत की खबर: किसी की मौत नहीं, लेकिन दर्जनों फायरफाइटर झुलसेइस भयावह आपदा के बीच सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अभी तक फ्रांस या स्पेन में इस भीषण आग की चपेट में आने से किसी भी नागरिक या पर्यटक की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, आग पर काबू पाने की दिन-रात कोशिश कर रहे दर्जनों फ्रांसीसी दमकलकर्मी (फायरफाइटर) इस दौरान घायल या झुलस जरूर गए हैं, जिनका इलाज जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब इस अनियंत्रित आग को बोर्डो शहर की तरफ बढ़ने से रोकने की है, जिसके लिए पड़ोसी क्षेत्रों से भी अतिरिक्त फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीमों को तुरंत मौके पर रवाना कर दिया गया है।
काला सागर में मालवाहक पोत पर बड़ा हमला, एक भारतीय नागरिक की दर्दनाक मौत; MEA ने जताई कड़ी आपत्ति
काला सागर से एक बेहद दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां 18 जुलाई को रूसी समुद्री सीमा क्षेत्र से गुजर रहे एक मालवाहक पोत पर हुए खौफनाक हमले में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को इस बात की आधिकारिक पुष्टि करते हुए घटना पर गहरा शोक और कड़ी आपत्ति जताई है। जिस कमर्शियल शिप यानी ‘एमवी ओमोर्फी’ को इस हमले में निशाना बनाया गया, उस पर कुल 10 क्रू मेंबर सवार थे जिनमें 3 भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इस दुखद हादसे में एक भारतीय की मौत हो गई, जबकि राहत की बात यह है कि बाकी के दो भारतीय सुरक्षित बताए जा रहे हैं।रूसी अधिकारियों के संपर्क में भारत, पीड़ित परिवार को दी जाएगी हरसंभव मददइस घटना के सामने आने के बाद रूस स्थित भारतीय दूतावास और मिशन के अधिकारी लगातार स्थानीय रूसी प्रशासन के संपर्क में हैं ताकि मृत भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द स्वदेश लाया जा सके और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान की जा सके। भारत सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस तरह से मालवाहक और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना तथा निर्दोष नागरिकों की जान को खतरे में डालना बेहद निंदनीय है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि वे अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का सख्ती से पालन करें और वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित करें।ओडेसा बंदरगाह हमले पर मॉस्को का दावा खारिज, जहाज में लदा था अनाजविदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यूक्रेन के तट पर ओडेसा बंदरगाह के पास हुए एक अन्य हमले का भी जिक्र किया, जिसमें गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले कमर्शियल जहाज ‘एमवी गोल्डन लियो’ को निशाना बनाया गया था। इस हमले में चार भारतीयों समेत कुल 10 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में भारत ने रूस के उस दावे को लगभग खारिज कर दिया है जिसमें पोत पर सैन्य साजोसामान होने की बात कही जा रही थी। डीजी शिपिंग (नौवहन महानिदेशालय) से मिले पुख्ता आंकड़ों का हवाला देते हुए भारत ने स्पष्ट किया है कि ‘एमवी गोल्डन लियो’ ने 19 जुलाई को रवाना होने से पहले केवल अनाज का कार्गो लोड किया था।वाणिज्यिक जहाजों को निशाना न बनाए जाने की दोहरी अपीलविदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में यह संदेश दिया है कि मौजूदा क्षेत्रीय तनाव या युद्ध की स्थितियों के बीच किसी भी परिस्थिति में कमर्शियल जहाजों और निर्दोष नाविकों को मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत का यह रुख साफ करता है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। पिछले कुछ दिनों में ब्लैक सी और उसके आस-पास के समुद्री इलाकों में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने वैश्विक शिपिंग और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है, जिससे समुद्री मार्गों पर सफर कर रहे नाविकों के परिवारों में लगातार चिंता का माहौल बना हुआ है।
शुरू हो गया है महायुद्ध? ईरान पर टूट पड़े बहरीन और कुवैत; पहली बार किया सीधा हमला
मध्य पूर्व यानी पश्चिम एशिया का सुलगता संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक और नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां तनाव की आंच ने खाड़ी के देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। वैश्विक राजनीति और रक्षा गलियारों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, पहली बार बहरीन और कुवैत खुलकर सीधे युद्ध के मैदान में उतर आए हैं और उन्होंने ईरान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों खाड़ी देशों ने सऊदी अरब की रणनीतिक मदद से ईरान के भीतर मौजूद मिसाइल स्टोरेज और प्रमुख सैन्य ठिकानों को करारा जवाब देना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक कूटनीति में खलबली मच गई है।सऊदी अरब की खुफिया और डिफेंस मदद से ईरान पर पलटवारअब तक खाड़ी के देश अपने ऊपर आने वाले खतरों से निपटने के लिए केवल रक्षात्मक रुख अपनाते थे और ईरान समर्थित ड्रोन्स या मिसाइलों को हवा में ही नाकाम करने तक सीमित रहते थे। क्षेत्रीय तनाव और युद्ध के बड़े दायरे में फैलने के डर से इन देशों ने कभी सीधे तौर पर आक्रामक रुख नहीं अपनाया था, लेकिन ईरान की तरफ से लगातार बढ़ रहे हमलों और उकसावे ने इन देशों को अपनी नीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। ताजा सैन्य अभियानों में सऊदी अरब इन्हें खुफिया जानकारी यानी इंटेलिजेंस और डिफेंसिव एयर कवर उपलब्ध करा रहा है, जिससे बहरीन और कुवैत की ताकत में और इजाफा हुआ है। हालांकि इस मोर्चे पर अभी ओमान और कतर जैसे अन्य देशों ने सीधी सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं की है, लेकिन जिस तरह से खाड़ी देशों का रुख बदला है, उससे आने वाले दिनों में समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना रहा है ईरानईरान लगातार उन देशों को अपना निशाना बना रहा है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने और आधुनिक सैन्य उपकरण मौजूद हैं, जिसमें मुख्य रूप से बहरीन, कुवैत और जॉर्डन शामिल हैं। हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि यूएई के कई शहरों में भी तबाही मचाने की कोशिशें की गई हैं और इन देशों में आए दिन सायरन बजने की आवाज़ें सुनाई देती हैं। कुवैत के भीतर कैंप उडैरी, कैंप दोहा, कैंप आरिफजान और अली अल सलेम एयरबेस जैसे महत्वपूर्ण अमेरिकी ठिकानों को ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहरीन के गृह विभाग को नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार अलर्ट जारी करना पड़ रहा है और सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सख्त हिदायत दी जा रही है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जे की जंग और गहराता वैश्विक ऊर्जा संकटयह पूरा घटनाक्रम अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात भी हवाई हमले जारी रखने के कुछ ही घंटों बाद सामने आया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच टकराव चरम पर पहुंच चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही यह तानशाही दुनियाभर के लिए एक बड़े आर्थिक संकट की घंटी बन गई है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया की सबसे अहम धमनियों में से एक है और ताजा सैन्य भिड़ंत का मुख्य केंद्र भी यही इलाका है। यदि यह सामरिक जलमार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में भयंकर उछाल आ सकता है, जिससे पूरी दुनिया में भारी आर्थिक मंदी और उथल-पुथल मचने का खतरा मंडराने लगा है।
शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर ३५ दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन। सभी की एक यही मांग थी। आखिर इतने दिनों से अड़े धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया और अब आगे क्या होगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… i. जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट: कॉकरोच जनता पार्टी 34 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रही थी। 20-30 हजार युवा हर वक्त वहां मौजूद थे। 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान ‘पुलिस एक्शन’ के बाद भीड़ और बढ़ने लगी। ii. राहुल गांधी की अगुवाई में आक्रामक विपक्ष: 21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता पीएम आवास के पास धरने पर बैठे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह मनाने पहुंचे ,तो राहुल ने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, तब तक कोई चर्चा नहीं होगी। राहुल पीएम मोदी के माफीनामे पर भी अड़ गए। इसके बाद रोजाना राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। पूरा विपक्ष इस मामले में एकट्ठा रहा। एक हफ्ते से संसद नहीं चलने दी। iii. पार्टी के भीतर नेताओं और सेलिब्रिटीज की उठती आवाजेंः बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों की मांगों और चिंता का समर्थन किया। क्रिकेटर्स, बॉलीवुड सेलिब्रिटी, साउथ फिल्मों के स्टार्स, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी युवाओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़ने लगे थे। पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बता रहे थे। क्या अब आंदोलन खत्म हो जाएगा? CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि जब तक बाकी मांगो पर लिखित आश्वासन नहीं मिल जाती, हम हटने वाले नहीं हैं। दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी की जो 3 प्रमुख मांगे थी- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NEET पेपर लीक के कारण सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारवालों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा होने के बाद जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा- मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी 2 और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है, तो निकलता नहीं है। जिन बच्चों ने सुसाइड किया उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिस वालों पर एक्शन होना चाहिए। ---------------- ये खबर भी पढ़िए… शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा: दीपके बोले- वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते; लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। पूरी खबर पढ़िए…
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को फिर से कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद है कि सऊदी अरब, इजरायल के साथ संबंध सामान्य करेगा। इसके साथ ही व्हाइट हाउस ने उम्मीद जताई कि सऊदी अरब प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौता को लेकर बड़ी समझ के हिस्से के तौर पर अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी सरकार इस मुद्दे को अपनी मध्य-पूर्व रणनीति का केंद्र मानता है।
पाकिस्तान लंबे समय से जिस आतंकवाद को पनाह और हवा देता रहा है, अब वही भस्मासुर बनकर उसके अपने सुरक्षा बलों पर टूट रहा है। उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) प्रांत के टांक (Tank) जिले में एक भीषण और सुनियोजित आत्मघाती (फिदायीन) आतंकी हमला हुआ है।बारूद से लदी गाड़ी के धमाके में पाकिस्तानी सेना के 12 सैनिकों, 2 पुलिसकर्मियों और 1 सरकारी अधिकारी समेत कुल 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसकी जवाबी गोलीबारी में 12 उग्रवादी (आतंकी) भी मारे गए हैं।कैसे अंजाम दिया गया चेकपोस्ट पर हमला?पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा ISPR (Inter-Services Public Relations) के बयान के अनुसार, यह घटना अफगानिस्तान सीमा के पास टांक जिले में सेना और पुलिस की संयुक्त सुरक्षा जांच चौकी पर घटी।घुसपैठ की नाकाम कोशिश: आतंकियों ने सबसे पहले चेकपोस्ट का सुरक्षा घेरा तोड़कर परिसर के अंदर घुसने का प्रयास किया। मुस्तैद जवानों ने उन्हें ललकारा और दोनों तरफ से भीषण गोलीबारी शुरू हो गई।बारूद से भरी गाड़ी से जोरदार टक्कर: जब आतंकी अंदर घुसने में नाकाम रहे, तो बौखलाहट में उन्होंने विस्फोटक से लदी अपनी तेज रफ्तार गाड़ी को सीधे चेकपोस्ट की बाहरी सुरक्षा दीवार से टकरा दिया।भयावह तबाही: विस्फोट इतना जबरदस्त था कि चेकपोस्ट की पूरी इमारत ध्वस्त हो गई और वहां मौजूद कई जवान और पुलिसकर्मी मलबे में दब गए, जिससे भारी जनहानि हुई।प्रतिबंधित संगठन TTP ने ली हमले की जिम्मेदारीइस घातक हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP / पाकिस्तानी तालिबान) ने ली है। TTP ने बयान जारी कर दावा किया कि उसके 4 फिदायीन हमलावरों ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।हमले के तुरंत बाद पूरे टांक जिले और आसपास के इलाकों को पाकिस्तानी सेना व अर्धसैनिक बलों ने सील कर दिया है और इलाके में बचे हुए आतंकियों के खिलाफ व्यापक सर्च ऑपरेशन ('Sanitization Operation') चलाया जा रहा है।पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर फिर फूटा गुस्साहमले के बाद पाकिस्तान सरकार और सेना ने एक बार फिर पड़ोसी देश अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर आरोप मढ़े हैं। पाकिस्तान का कहना है कि TTP के लड़ाके अफगान सरजमीं का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकानों के रूप में कर रहे हैं। वे वहीं से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं और घटनाओं को अंजाम देकर वापस सीमा पार भाग जाते हैं। हालांकि, काबुल स्थित तालिबान सरकार इन आरोपों को बार-बार खारिज करती रही है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक भीषण और बहुआयामी युद्ध का रूप ले चुका है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक हालिया एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन और कुवैत की वायुसेना ने पहली बार संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए ईरान के अंदर मौजूद सैन्य ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज डिपो पर गुप्त हवाई हमले (Secret Airstrikes) किए हैं।इस सीक्रेट ऑपरेशन में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने खुफिया जानकारी साझा करने के साथ-साथ बहरीन और कुवैत के लड़ाकू विमानों को एयर कवर प्रदान किया। हालांकि बहरीन और कुवैत के पास सीमित वायुसेना है, लेकिन अपने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हो रहे ईरानी हमलों के जवाब में उन्हें यह बड़ा कदम उठाना पड़ा है।अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का भीषण पलटवारबहरीन और कुवैत के इस कदम के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अपने हमले और तेज कर दिए हैं। ईरान ने कुवैत में मौजूद कैंप उदैरी (Camp Buehring), कैंप आरिफजान और अली अल सालेम एयर बेस के साथ-साथ बहरीन में ईसा एयर बेस और अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े (US Fifth Fleet) के ठिकानों पर कमिकेज़ (Kamikaze) ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं।ईरान की ओर से आम नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि वे अमेरिकी सैन्य परिसरों से कम से कम 500 मीटर की दूरी बनाए रखें, क्योंकि अमेरिकी मौजूदगी वाले सभी बेस उसके निशाने पर रहेंगे।समुद्र में नाकेबंदी और हॉर्मुज स्ट्रैट पूरी तरह ठपफारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी को कड़ा कर दिया है। अमेरिका ने नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग कर उन्हें बेकार कर दिया है।हॉर्मुज स्ट्रैट बंद: लगातार हो रही गोलाबारी और ड्रोन हमलों के कारण दुनिया का सबसे प्रमुख तेल मार्ग 'हॉर्मुज स्ट्रैट' (Strait of Hormuz) पूरी तरह ठप हो चुका है।समुद्र में मानवीय संकट: समुद्र में लगभग 400 व्यापारिक जहाज और 6,000 से अधिक नाविक बीच रास्ते में फंसे हुए हैं, जिनके पास भोजन, पानी और आवश्यक ईंधन का गहरा संकट पैदा हो गया है।कच्चे तेल में उबाल: हॉर्मुज स्ट्रैट और लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं।यमन में हुथी ठिकानों पर सऊदी का हमलालाल सागर के मुहाने (बाब अल-मंदेब) पर ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमले बढ़ा दिए थे। इसके जवाब में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के होदेइदा इलाके में हुथी विद्रोहियों के सैन्य अड्डों पर भारी बमबारी की है।फिलहाल ओमान, पाकिस्तान और चीन की ओर से शांति वार्ता कराने के प्रयास जारी हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है।
चीन और रूस ने ईरान को हथियार नहीं देने का भरोसा दिया : ट्रंप
ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथियारों की सप्लाई को लेकर चीन और रूस पर भरोसे की बात को दोहराया
बाब-अल-मंदेब विवाद : भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जहाजों की आवाजाही पर दिया जोर
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही का अधिकार बहुत महत्वपूर्ण है
शिक्षा नहीं पूछती जन्मस्थान, सिर्फ मेहनत और सपनों की उड़ान देखती है : राष्ट्रपति मुर्मु
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रोमानिया की बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिलने के बाद कहा कि शिक्षा उनके जीवन में बदलाव लाने वाली सबसे बड़ी ताकत रही है
आईआरजीसी का दावा, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को किया तबाह
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि उसकी सेनाओं ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और संसाधनों पर जवाबी हमले किए हैं।
तारीख: 20 जुलाई जगह: दिल्ली का जंतर-मंतर कॉकरोच जनता पार्टी ने चलो संसद मार्च निकाला। वे NEET पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने अभी बैरिकेड्स पार भी नहीं किए थे और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए। कुछ अब भी अस्पताल में हैं, बाकी डिस्चार्ज होकर फिर से जंतर-मंतर पर डट गए हैं। अब ये घायल प्रदर्शनकारी क्या चाहते हैं, पढ़िए ये रिपोर्ट… अहेली, दिल्ली 20 साल की अहेली दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंग्लिश ऑनर्स कर रही हैं। 20 जुलाई को यहां आईं। अहेली बताती हैं, ‘मार्च शुरू होने से पहले हमसे कहा गया था कि अगर पुलिस मारने भी आए, तो शांत रहते हुए उन्हें फूल देना है। हम लोग फूल लेकर खड़े थे। तभी भीड़ के बीच एक एम्बुलेंस घुस आई। शायद पुलिस-प्रशासन भगदड़ के हालात बनाना चाहता था, क्योंकि एम्बुलेंस के अंदर कोई नहीं था।‘ ‘जब एम्बुलेंस के साथ ही हमारे कुछ लोगों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने न लड़की देखी, न लड़का। सबको बुरी तरह पीटा। लड़कियों के कपड़े फाड़े, हमारी आंख के सामने 10-12 साल के बच्चों के सिर फोड़ दिए।‘ वे कहती हैं, ‘मेरे कई दोस्तों ने 2024 में भी NEET का पेपर दिया था, लेकिन लीक हो गया। मेरे साथियों का सपना टूट गया और उन्हें दूसरी जगहों पर एडमिशन लेना पड़ा। मैं भी दिल्ली UPSC पास करने का सपना लेकर आई हूं, लेकिन लगता नहीं कि इस सरकार के राज में वो पूरा हो पाएगा।‘ विशाल, यूपी के झांसी से 18 साल के विशाल ने अभी 12वीं पास की है। प्रोटेस्ट में शामिल होने के लिए झांसी से उनके साथ और भी 50 लोग आए थे। विशाल बताते हैं, ‘हम एक साथ सोनम वांगचुक का पोस्टर लेकर जनपथ मेट्रो स्टेशन पहुंचे थे। वहां पुलिस ने हमें ये कहकर रोका कि एक जगह इकट्ठा होकर बैठ जाओ, तब बैरिकेड हटाकर अंदर दाखिल कराएंगे। हम जैसे ही बैठे, तो पुलिस ने पीटना शुरू कर दिया।‘ ‘पुलिस के साथ सिविल ड्रेस में कुछ गुंडे भी थे, जिन्होंने हमें जानवरों की तरह पीटा। उन्होंने लड़कियों के साथ जानबूझकर बदसलूकी की और उनके कपड़े फाड़े। हमारे साथ इतनी ज्यादती की गई कि जैसे हम किसी दूसरे देश से आए हों। हम यहां इंसाफ की लड़ाई लड़ने आए थे, लेकिन पुलिस एकदम जानवर और हैवान बन गई।‘ पिटाई के दौरान विशाल का पैर टूट गया है। सामान गायब हो गया। वे अपना टूटा पैर दिखाकर कहते हैं, ‘अब बताइए इसके भरोसे क्या कोई फिजिकल टेस्ट पास कर पाएंगे। ये देश अब रहने लायक नहीं बचा।‘ इस हाल में भी विशाल जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। वे कहते हैं, ‘जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे। चाहे जान क्यों न चली जाए।‘ अनिल सिंह, मध्यप्रदेश के किसान अनिल सिंह ने चलो संसद मार्च के दौरान लाठियां खाईं, घायल हुए लेकिन पीछे नहीं हटे। माथे और हाथ पर पट्टी बांधे वो धरनास्थल पर जमे हुए हैं। अनिल कहते हैं, ‘हमारी आखिरी मंजिल जीत होगी और व्यवस्थाओं में बदलाव होगा। देश हमारा है, सिर्फ उनका नहीं है। हम जैसे चाहेंगे, इसे चलाएंगे। इस देश के लिए हमने कुर्बानी दी है, उन्होंने क्या किया।’ हमने पूछा यहां आने के लिए किसने प्रेरित किया। वे जवाब में कहते हैं, 'जब भी इतिहास पढ़ते हैं, इसकी जरूरत महसूस होती है। फिर बिहार में भरत तिवारी का मामला हो या RTI एक्टविस्टों के मारे जाने का मामला। ये सरकार खुद क्रांतिकारी खड़े कर रही है।' स्वरा खान, दिल्ली जामिया की रहने वाली 23 साल की स्वरा खान भी मार्च के दौरान घायल हुईं। उनके हाथों पर पट्टी बंधी है। चोट की वजह से आंखें सूजी हैं। वे बताती हैं कि पुलिस ने उन्हें डिटेन करने के बाद जेल में मारा। तबीयत सही नहीं, इसलिए आवाज बैठ गई है। लिहाजा ज्यादा बात नहीं कर सकीं। हर्ष, यूपी के कानपुर से कानपुर से आए हर्ष NEET की तैयारी कर रहे हैं। वे कहते हैं, ‘जवानों ने मुझे रोककर लात-घूसे और लाठियां मारी। हम पर आंसू गैस के गोले बरसाए। पुलिस वालों ने लड़कियों के प्राइवेट पार्ट में डंडे डालने की कोशिश की। छोटे बच्चों को मारा। हमें प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और सरकार हमें ही गुंडा बता रही है।‘ हर्ष अभी धरना स्थल पर जमे हुए हैं। वे कहते हैं, ‘धर्मेंद्र प्रधान को हमारा शुक्रगुजार होना चाहिए, क्योंकि आज से एक साल पहले उन्हें कोई जानता भी नहीं था। हमने जब प्रोटेस्ट किया, तो देश को पता चला कि शिक्षा मंत्री कौन है। धर्मेंद्र प्रधान में अगर शर्म बची हो, तो इस्तीफा दें।‘ वैभव, यूपी के आगरा से 10 साल के वैभव आगरा से अपनी मां के साथ जंतर-मंतर आए हैं। मां फलों का ठेला लगाती हैं। वैभव कहते हैं कि धमेंद्र प्रधान जब तक इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक वे यहीं रहेंगे। अभिषेक सिंह, यूपी के प्रयागराज से दिल्ली में UPSC की तैयारी कर रहे अभिषेक सिंह बताते हैं, 'उस दिन बाकी साथियों के साथ हम शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। केरलम हाउस तक ही पहुंचे थे कि तभी पुलिस ने बैरिकेड्स लगा दिए। भीड़ ज्यादा थी, इसलिए संभालना मुश्किल हो गया। दिल्ली पुलिस ने अचानक टियर गैस और लाठीचार्ज शुरू कर दिया।' 'पुलिस की कार्रवाई बहुत बर्बर थी। सैकड़ों युवाओं को चोटें आईं। सबसे बुरा सलूक प्रदर्शनकारी लड़कियों के साथ किया गया। पुलिस कर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की। मुझे पुलिस ने स्टेज से नीचे फेंक दिया। मेरे पैर काम नहीं कर रहे थे। लाठीचार्ज के बीच मैं एक साथी की मदद से वहां से भाग सका। …………………. ये खबर भी पढ़ें… कॉकरोच आंदोलन से BJP में चिंता, लेकिन प्रधान नहीं हटेंगे 22 जुलाई, वक्त करीब 12 बजे। दिल्ली में BJP हेडक्वॉर्टर के 5वें फ्लोर पर पार्टी के महामंत्री जुटने शुरू हुए। 15-20 मिनट के अंदर आठों महामंत्री एक साथ थे। उनके अलावा भी कई पदाधिकारी भी पहुंच गए। मसला कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट से बना माहौल था। BJP में हमारे सूत्र बताते हैं कि पहली बार BJP ऑफिस में बैठक हुई। 3 घंटे तक चली इस मीटिंग में प्रोटेस्ट के असर को खत्म करने की स्ट्रैटजी पर बात हुई। पूरी खबर पढ़िए…
‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आज कहानी दुनिया के सबसे खतरनाक कमांडो मिशन ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’ की… तारीख थी 27 जून 1976, इजराइल के तेल अवीव का बेन गुरियन एयरपोर्ट सुबह की गुनगुनी धूप से चमक रहा था। रनवे पर एयर फ्रांस की फ्लाइट-139 खड़ी थी। यह एयरबस कंपनी का विमान था, किसी उड़ते हुए आलीशान महल जैसा। प्लेन में 228 यात्री और 12 क्रू मेंबर्स थे। पायलट थे सेकेंड वर्ल्ड वॉर में लड़ चुके कैप्टन माइकल बैकोस। सुबह के ठीक 8 बजकर 59 मिनट पर विमान ने उड़ान भरी। इसे ग्रीस के एथेंस में रुकते हुए पेरिस जाना था। दोपहर 12 बजे विमान एथेंस में लैंड हुआ। यहां 45 मिनट का ठहराव था। इस दौरान 38 यात्री प्लेन से उतरे। अब नए यात्रियों को सवार होना था। तब एथेंस एयरपोर्ट पर कड़ी चेकिंग नहीं होती थी। ऊपर से उस रोज एयरपोर्ट अथॉरिटी के कई लोग हड़ताल पर थे। इसी बीच चार लोग बड़े-बड़े बैग टांगे विमान की तरफ बढ़े। इनमें 30-32 साल की एक लड़की थी, जिसने ब्लू डेनिम स्कर्ट और टॉप पहन रखा था। जैसे ही सिक्योरिटी अफसर तलाशी के लिए आगे बढ़ा, लड़की ने झुंझलाकर कहा- ‘अरे फिर से जांच? हद है! जहां से आए हैं, वहां पहले ही चेकिंग हो चुकी है।’ लड़की की बात सुनकर अफसर झेंप गया। उसने बिना जांच किए सिर्फ टिकट देखकर जाने का इशारा कर दिया। 4 में से 2 के पास फर्स्ट क्लास का टिकट था और 2 के पास इकोनॉमी क्लास का। चारों अपनी सीट पर जाकर बैठ गए। एथेंस से 56 नए यात्री विमान में चढ़े, यानी अब कुल यात्रियों की संख्या 246 हो चुकी थी। दोपहर ठीक साढ़े 12 बजे, विमान ने पेरिस के लिए उड़ान भरी। अंदर हंसी-ठिठोली और बच्चों की किलकारियां गूंज रही थी। विमान बादलों को चीरता हुआ आगे बढ़ रहा था। तभी फर्स्ट क्लास की सीट पर बैठे एक शख्स ने डेनिम स्कर्ट पहनी लड़की का हाथ थाम लिया। उसने धीमी आवाज में मुस्कुराते हुए पूछा- ‘डर तो नहीं लग रहा?’ लड़की ने कहा- ‘मुझे डर है कि इस मिशन में तुम्हें ना खो दूं।’ उस शख्स ने उसका माथा चूमा और फुसफुसाया- ‘हम इतिहास लिखने जा रहे हैं डार्लिंग। तैयार हो?' लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘मैं कुछ भी कर गुजरने को तैयार हूं।’ ठीक 8 मिनट बाद, दोनों अपनी सीट से उठ खड़े हुए। गले लगे। एक दूसरे को चूमा और फिर फुर्ती से अपने बैग की चेन खोल ली। अगले ही पल दोनों के एक हाथ में पिस्टल और दूसरे हाथ में हैंड ग्रेनेड था। पिस्टल ताने वह शख्स सीधे कॉकपिट की तरफ भागा और लड़की गलियारे में पोजीशन लेकर बैठ गई। ये सब देखकर कुछ यात्री चीखने लगे। पायलट ने हड़बड़ाकर फ्लाइट इंजीनियर से कहा- ‘जल्दी बाहर जाओ। शायद आग लग गई है। तुरंत काबू करो।’ फ्लाइट इंजीनियर ने जैसे ही कॉकपिट का दरवाजा खोला, उस शख्स ने इंजीनियर की कनपट्टी पर पिस्टल सटा दी। अंदर बैठा पायलट चिल्ला उठा- ‘प्लीज, उसे मत मारो।’ उसने झपटकर पायलट का ऑक्सीजन मास्क और माइक्रोफोन छीन लिया। फिर ऐलान किया- ‘सब लोग ध्यान से सुनो… यह प्लेन हाईजैक हो चुका है। अब प्लेन का नया नाम 'हाइफा' है।’ उसने पायलट की कनपट्टी पर पिस्टल सटाते हुए कहा- ‘फौरन प्लेन का रुख मोड़ो... इसे लीबिया ले चलो।’ पायलट ने कुछ कहना चाहा, लेकिन उसने पिस्टल की नोक उसकी कनपट्टी पर और जोर से गड़ा दी। पायलट ने प्लेन का रूख मोड़ दिया। यात्री सन्न थे। आगे क्या होने वाला था किसी को पता नहीं… इसी बीच इकोनॉमी क्लास में बैठे उनके दो और साथी खड़े हो गए। उनमें से एक लंबे बालों वाला लड़का था, जिसने लाल शर्ट और भूरे रंग का पैंट पहना था। दूसरे की घनी मूछें थीं, उसने लंबा पैंट और पीली शर्ट पहन रखी थी। दोनों ने पिस्टल तान ली और दौड़ते हुए फर्स्ट-क्लास कंपार्टमेंट की तरफ बढ़े। गलियारे में डरी-सहमी एयरहोस्टेस खड़ी थी। उसके हाथ-पैर कांप रहे थे, लेकिन वो यात्रियों से कह रही थी- ‘प्लीज... प्लीज सब शांत हो जाओ।’ लेकिन लोगों का रोना-चीखना बंद नहीं हो रहा था। 5-7 मिनट बाद, महिला हाईजैकर और उसके दो साथी कुछ यात्रियों घसीटते हुए फर्स्ट क्लास से इकोनॉमी क्लास की तरफ लाने लगे। हाईजैकर अंग्रेजी में चिल्ला रही थी- ‘सिट ऑन फ्लोर!’ तभी एक इजराइली खड़ा होकर विरोध करने लगा। हाईजैकर तमतमा गई। उसने अपने साथी से कहा- ‘इसका इलाज करना जरूरी है।’ उसके साथी ने इजराइली को धक्का देकर फर्श पर गिरा दिया। महिला हाईजैकर उछलकर उसकी छाती पर बैठ गई और मुक्के मारने लगी। कुछ देर बाद जब महिला के हाथ दुखने लगे, तो उसने पिस्टल के बट से मारना शुरू कर दिया। इजराइली लगातार चीखता रहा, फिर शांत पड़ गया। इसी बीच कुछ यात्री चुपके से गले की चेन तोड़कर फेंकने लगे। असल में इन लोगों ने 'डेविड का सितारा' पहन रखा था, जो यहूदियों की पहचान का प्रतीक है। ठीक वैसे ही जैसे ईसाइयों के लिए 'क्रॉस' या इस्लाम में 'चांद-तारा' होता है। इधर, तेल अवीव के एयर ट्रैफिक कंट्रोल, यानी एटीसी में खलबली मची थी। रडार स्क्रीन पर दिख रहा एयर फ्रांस 139 अचानक गायब हो गया था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि विमान के साथ क्या हुआ है। उस वक्त इजराइली प्रधानमंत्री यित्झाक राबिन मंत्रियों के साथ मीटिंग कर रहे थे। तभी उनके सैन्य सहायक ब्रिगेडियर पोरान दौड़ते हुए कमरे में दाखिल हुए। उन्होंने पीएम को एक पर्ची दी। उस पर लिखा था- 'तेल अवीव से पेरिस जा रहा एयर फ्रांस 139 अगवा कर लिया गया है।’ छोटे कद के राबिन, इजराइली सेना के प्रमुख रह चुके थे। वे पर्ची को एकटक देखते रहे। फिर उन्होंने पर्ची के पीछे कुछ लिखा और पोरन को दे दिया। पीएम ने सिगरेट जलाई और लंबा कश भरते हुए विदेश मंत्री आलोन से कहा- ‘हमारा एक विमान हाईजैक हो चुका है। फौरन स्पेशल टास्क फोर्स बनाओ। उसमें मुझे भी रखना।’ एक घंटे बाद… यरुशलम का कमांड सेंटर। दीवारों पर लगे नक्शे और स्क्रीन पर जलती-बुझती लाइटें। पीएम बेहद परेशान थे। वे सिगरटे पीते हुए कमरे में इधर-उधर टहल रहे थे। पीछे कैबिनेट मंत्री चुपचाप बैठे थे। पीएम ने कानून मंत्री की तरफ देखते हुए पूछा- ‘कानूनी तौर पर इन यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?' कानून मंत्री ने फौरन जवाब दिया- ‘सर, फ्रांस सरकार की।’ ‘तो फौरन फ्रांस सरकार से संपर्क कीजिए। उनसे कहिए कि वे अपना आधिकारिक बयान जारी करें।’ पीएम ने कहा। तभी सैन्य सहायक पोरान कमरे में दाखिल हुए। उनके हाथ में फिर से एक छोटी सी पर्ची थी। उन्होंने पर्ची पीएम की तरफ बढ़ा दी। अब सबकी निगाहें राबिन पर टिक गई। राबिन ने पर्ची खोली। तेज आवाज में पढ़ना शुरू किया- ‘विमान में 230 यात्री सवार हैं, जिनमें से 83 इजराइली हैं। लीबियाई सरकार ने विमान को बेनगाजी में उतरने की इजाजत दे दी है।’ राबिन ने सिगरेट का लंबा कश खींचते कहा- ‘कम से कम हमें यह तो पता है कि यात्री कहां हैं, लेकिन आगे उनके साथ क्या होगा, नहीं पता। ये भी नहीं मालूम कि हाईजैकर कौन हैं, उनका मकसद क्या है?’ अगले आधे घंटे तक कमांड सेंटर में मीटिंग चलती रही, लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझा। दोपहर 2 बजे विमान लीबिया के बेनगाजी एयरपोर्ट के रनवे पर जाकर खड़ा हो गया। हाईजैकरों ने विमान की खिड़कियां बंद कर दीं। एसी भी बंद कर दिए। गर्मी, उमस और भूख से यात्री बेहाल थे, लेकिन कोई किसी से कुछ कह नहीं रहा था। कई यात्री मान चुके थे कि किसी भी वक्त विमान को धमाके से उड़ाया जा सकता है। तभी एक ब्रिटिश महिला चीखने लगी। उसका चेहरा पीला पड़ चुका था, बदन पसीने से लथपथ था। उसने रोते हुए कहा- ‘मैं प्रेग्नेंट हूं। बहुत तेज दर्द हो रहा है। मुझे कुछ हो जाएगा।’ हाईजैकर ने डांटते हुए कहा- ‘चीखो मत, मैं डॉक्टर को बुलाती हूं।’ यात्रियों के बीच से एक डॉक्टर को लाया गया। डॉक्टर ने उसे देखने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, तभी महिला ने धीमे से कहा, ‘मुझे हर हाल में यहां से निकलना है... तुम संभाल लेना।’ डॉक्टर ने भी धीरे से कहा- ‘लीबिया में उतरने से बेहतर है तुम हमारे साथ रहो।’ महिला बुदबुदाई- ‘मुझे उतरना ही है।’ अब डॉक्टर खड़ा हुआ और हाईजैकर से कहा- ‘इसे मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत है।’ महिला हाईजैकर को लगा कि डॉक्टर झूठ बोल रहा है। उसने रनवे पर तैनात एक लीबियाई डॉक्टर को अंदर बुला लिया। नया डॉक्टर क्या करने वाला था…सबकी निगाहें उस पर टिक गईं। डॉक्टर ने महिला की जांच की। फिर कहा- ‘इसे कोई बीमारी नहीं है, नाटक कर रही है।’ अब ब्रिटिश महिला ने अपने कपड़ों का एक हिस्सा हटाया और प्राइवेट पार्ट से निकलता हुआ खून दिखा दिया। वह रोते हुए चिल्लाई, ‘अगर मैं जल्दी अस्पताल नहीं पहुंची, तो गर्भपात हो जाएगा। मेरा बच्चा भी मर जाएगा।’ खून देखकर हाईजैकर घबरा गई। उसने अपने साथियों से कहा, ‘इसे नीचे उतार दो। वैसे भी यह हमारे काम की नहीं है।’ महिला गिरते-संभलते सीढ़ियों से उतरने लगी। उसके कपड़ों पर खून के धब्बे थे। हाईजैकर को यकीन हो चुका था कि यह सच बोल रही है। महिला विमान से उतरकर एग्जिट गेट की तरफ बढ़ गई। आगे चलकर ये महिला कुछ बड़ा करने वाली थी, बहुत बड़ा… इधर, विमान रनवे पर घंटों खड़ा रहा। हाईजैकर अंदर-बाहर आते-जाते रहे। खुद भर-भर पेट खाना खाया, लेकिन यात्रियों को कुछ नहीं दिया। आखिरकार, रात 9 बजकर 50 मिनट पर विमान के इंजनों में फिर से गड़गड़ाहट हुई। लोग सोचने लगे- ‘दमिश्क, बगदाद, बेरुत या वापस तेल अवीव? आखिर ये विमान को कहां ले जा रहे हैं?’ दहशत चरम पर थी। डेनिम स्कर्ट वाली लड़की खिड़की से बाहर अंधेरे को निहार रही थी। तभी उसका साथी पीछे आकर खड़ा हो गया। उसने लड़की के बिखरे बालों सहलाते हुए कहा, ‘अगर इस जंग से हम जिंदा निकले, तो एक सुंदर सा घर बनाएंगे। जहां सिर्फ मैं, तुम और समुद्र की लहरें होंगी, लेकिन तब तक... हमें बेदर्द बनना होगा।’ लड़की पिस्टल का बट कसकर पकड़ते हुए बोली- ‘उस सपने को थोड़ा इंतजार करने दो।’ रात करीब 10 बजे। जगह- लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट। लीबिया में गर्भपात की बात कहकर उतरी ब्रिटिश महिला एग्जिट गेट से निकलने ही वाली थी कि दो लड़कों ने उसका रास्ता रोक लिया। महिला चौंककर पीछे हटी। ‘आप लोग कौन हैं? मुझे जाने दीजिए।’ एक लड़के ने कहा- ‘मैडम, हम आपकी सुरक्षा के लिए हैं। आप एयर फ्रांस की फ्लाइट से आई हैं। कृपया हमारे साथ चलिए।’ वे महिला को लेकर वीआईपी कॉरिडोर की तरफ चल पड़े। कुछ ही मिनटों में तीनों एक बंद कमरे में थे। कुर्सी पर बैठी महिला घबराई हुई थी। उसके हाथ-पैर कांप रहे थे। लड़के ने कहा- ‘डरिए नहीं। हम कोई आतंकी नहीं हैं। उस प्लेन में हमारे कई लोग बंद हैं। आपकी मदद चाहिए।’ महिला रोने लगी- ‘वह नरक जैसा था। मैं अंदर होती तो अब तक मर गई होती। मैंने बस बाहर निकलने के लिए वो सब किया।’ लड़का- ‘क्या किया आपने?’ ‘मुझे पीरियड्स आए थे। मैंने उस खून को हाईजैकर को दिखाकर कहा मिसकैरेज होने वाला है। इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट चाहिए। उन लोगों ने मुझे नीचे उतार दिया।’ कांपते हुए महिला ने बताया। तभी दूसरे लड़के ने कहा- 'बहादुर हो आप। वेल डन। ये बताइए कि कुल कितने हाईजैकर थे? उनके पास हथियार कौन से थे? महिला बोली- ‘चार... कुल चार लोग हैं। उनके पास ऑटोमैटिक पिस्टल और हैंडग्रेनेड है।’ ‘क्या वे अरबी बोल रहे थे? उनका हुलिया कैसा था?’ लड़के ने पूछा। महिला ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘दो तो पक्के तौर पर फिलिस्तीनी लग रहे थे... लेकिन बाकी के दो बहुत साफ अंग्रेजी बोल रहे थे, उनका लहजा जर्मन था। उनमें एक औरत भी थी।’ अब लड़के ने एक भारी-भरकम एलबम महिला की तरफ सरकाते हुए कहा- ‘मैं पन्ने पलट रहा हूं, आप ध्यान से देखिए। क्या इनमें से कोई चेहरा उस विमान में था?’ उसने पहला पन्ना पलटा। कई ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें दिखीं। महिला ने सिर हिलाया- ‘नहीं।’ उसने दूसरा पन्ना पलटा। महिला ठिठक गई। उसने उंगली दो तस्वीरों पर रख दी। चीखते हुए कहा- ‘यह वही औरत है। इसके साथ यह आदमी है। यही दोनों पूरे प्लेन को कंट्रोल कर रहे थे। प्रेमी-प्रेमिका मालूम पड़ रहे थे।’ दोनों लड़कों ने डायरी पर सबकुछ नोट किया। फिर कार में बिठाकर महिला को सुरक्षित घर छोड़ दिया। असल में ये दोनों लड़के इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट थे। उधर, विमान को लीबिया से उड़ान भरे पांच घंटे बीत चुके थे। पायलट थकान से चूर था, लेकिन हाईजैकर की पिस्टल अभी भी उसकी गर्दन पर टिकी हुई थी। तभी केबिन में महिला हाईजैकर ने अनाउंस किया- ‘हम कंपाला में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। खिड़कियां बंद कर लें और सीट बेल्ट बांध लें।’ ‘कंपाला?’ यात्री हैरान थे। ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं था कि यह युगांडा की राजधानी है। तड़के ठीक 3:20 पर, घुप अंधेरे में विमान युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर उतरा। पलक झपकते युगांडा के 100 से ज्यादा सैनिकों ने विमान को घेर लिया। यात्रियों को लगा शायद सेना उन्हें बचाने आ गई है, लेकिन असल में वे कसाई नाम से मशहूर तानाशाह ईदी अमीन के जाल में फंस चुके थे। थोड़ी देर बाद एग्जिट गेट खुला। तीन और हथियारबंद अंदर घुसे। दरवाजा बंद हो गया। आगे क्या होगा किसी को कुछ नहीं पता था… खौफ के साये में और 5 घंटे गुजर गए। सुबह 8 बजे विमान का अगला दरवाजा खुला। एक काली मर्सिडीज गेट के ठीक सामने आकर रुकी। उसमें से दो शख्स उतरे। एक लंबा और नीली वर्दी वाला और दूसरा- भारी-भरकम शरीर वाला, जिसकी वर्दी मेडलों से सजी थी। विमान के भीतर बैठे एक यात्री ने फुसफुसाते हुए बगल में बैठे मुसाफिर से पूछा- ‘तुम जानते हो यह कौन है?’ ‘नहीं, कौन है?’ ‘यह युगांडा का राष्ट्रपति ईदी अमीन है। यह कसाई है। इसने अपने ही हजारों लोगों को मरवा दिया है। मैंने तो सुना है इंसानों का भी मांस खा जाता है।’ तभी पीछे से एक बुजुर्ग यहूदी बोल पड़ा- ‘तुम ठीक कह रहे हो। इसके फ्रीज से कई इंसानी खोपड़ियां मिली थीं। हर सुबह उन खोपड़ियों से बातें करता है कि देखो, कहा था ना मुझसे पंगा मत लेना।’ फर्स्ट क्लास की खिड़की से अमीन को देखकर एक महिला हंस पड़ी। दूसरी ने पूछा- ‘इस हालत में तुम्हें हंसी आ रही है?’ उसने धीरे से कहा- ‘तुम्हें पता है, बाहर जो सनकी खड़ा है, ब्रिटेन की महारानी से शादी करना चाहता है।’ ‘प्लीज मजाक मत करो, मेरी जान निकली जा रही है।’ महिला ने उसका हाथ कसकर दबाते हुए कहा। उस महिला ने कहा- ‘सच कह रही हूं। इसने महारानी को चिट्ठी भी लिखी थी।’ ‘क्या लिखा था?’ महिला बोली- ‘इसने लिखा था- प्यारी एलिजा, अगर एक असली मर्द को देखना चाहती हो, तो कंपाला आ जाओ।’ दूसरी महिला ने उसे घूरते हुए कहा- ‘यह हैवान तो हम यहूदियों को जिंदा चबा जाएगा।’ पहली महिला- 'हां ये लोग उसी की तैयारी कर रहे हैं।' दोपहर 12 बजे यात्रियों को विमान से उतारकर एयरपोर्ट के बगल में बने 'ओल्ड टर्मिनल' हॉल में ले जाकर बंद कर दिया गया। हाईजैकरों के साथ-साथ युगांडा के सैनिकों ने पूरे टर्मिनल को घेर रखा था। पूरी रात यात्री कमरे में बंद रहे। अगले दिन यानी 29 जून को हाईजैकरों ने दुनिया के सामने अपनी 2 मांगे रखीं। पहली- इजराइल, केन्या, पश्चिम जर्मनी और स्विट्जरलैंड की जेलों में बंद 53 फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई। दूसरी- 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर नकद। डेडलाइन थी- ‘1 जुलाई 1976, दोपहर 2:00 बजे तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सभी बंधक मार दिए जाएंगे।’ उसी शाम 5 बजे की बात है। इजराइली पीएम राबिन अपने दफ्तर में अकेले बैठे थे। एक हाथ में व्हिस्की का ग्लास और दूसरे हाथ में सिगरेट। तभी रक्षा मंत्री पेरेस पहुंचे। राबिन ने उन्हें देखते ही कहा- ‘मैं इन हत्यारों के आगे झुक जाऊंगा। कैदियों को रिहा कर दूंगा।’ रक्षा मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- ‘हम हार नहीं मानेंगे। मिलिट्री एक्शन लेंगे।’ पीएम राबिन ने चिल्लाते हुए कहा- 'एंटेबे यहां से 4 हजार किलोमीटर दूर है। बीच में दुश्मन देशों का एयरस्पेस। हमारे विमान वहां कैसे पहुंचेंगे?’ रक्षा मंत्री ने कुछ कहा नहीं। थोड़ी देर बाद चुपचाप वहां से निकल गए, लेकिन उनकी खामोशी के पीछे एक ऐसा प्लान चल रहा था, जिसके बारे में हाईजैकरों ने सपने में भी नहीं सोचा था। अब रात के करीब 2 बज चुके थे। ओल्ड टर्मिनल हॉल के मेन गेट पर पहरा दे रही डेनिम स्कर्ट वाली हाईजैकर चश्मा उतारकर आंखें मल रही थी। तभी उसका साथी वहां पहुंच गया। उसने कॉफी का कप उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा- ‘हमारी खूंखार शेरनी थक गई है क्या?’ लड़की ने उसके कंधे पर अपना सिर टिकाते हुए कहा- 'हां, शेरनी भी थकती है। हम हैवान नहीं हैं। बस अपने मकसद के लिए लड़ रहे हैं।’ उस शख्स ने उसके हाथों को चूमते हुए कहा- ‘ थोड़ा आराम कर लो। 1 जुलाई को दुनिया हमारी मुट्ठी में होगी।’ 30 जून की सुबह करीब 10 बजे का वक्त। महिला हाईजैकर बंधकों के पास पहुंची। उसके हाथ में एक लिस्ट थी। उसने कहा- ‘सभी अपने-अपने पासपोर्ट हाथों में ले लें। जैसे ही आपका नाम पुकारा जाए, बाईं तरफ के कमरे में चले जाएं।’ उसने नाम पुकारने शुरू किए। सारे के सारे इजराइली नाम। इस तरह इजराइली अलग कमरे में और गैर-इजराइली अलग कमरे में शिफ्ट कर दिए गए। यह हूबहू वैसा ही नजारा था, जैसा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी के कैंपों में था। अब उल्टी गिनती शुरू हो चुकी थी। दीवारों पर टंगी घड़ियों की हर टिक-टिक के साथ 100 से ज्यादा जिंदगियों पर मौत का खौफ गहराता जा रहा था... इजराइल के पास बचे थे सिर्फ 24 घंटे। तभी मोसाद के दफ्तर में फोन बजा। एक अफसर ने दौड़कर फोन उठाया। दूसरी तरफ से आई आवाज को सुनते ही वह खुशी से उछल पड़ा। आगे क्या होगा…पूरी कहानी कल यानी रविवार को पढ़िए आपरेशन थंडरबोल्ट पार्ट-2 रेफरेंस :
पापुआ न्यू गिनी में थाईपेइ इकोनॉमिक ऑफिस हुआ बंद
पापुआ न्यू गिनी की सरकार ने हाल ही में 'पापुआ न्यू गिनी में थाईपेइ इकोनॉमिक ऑफिस' को बंद करने की घोषणा की और 'एक-चीन नीति' के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया।
चीन नए युग में सामाजिक कार्य मजबूत करेगा
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति और राज्य परिषद ने हाल में नए युग में सामाजिक कार्य मजबूत करने पर राय जारी की।
होर्मुज स्ट्रेट के पास 30 क्रू वाले जहाज ने भेजा आपात संदेश, मिसाइल हमले का दावा कर मांगी मदद
होर्मुज स्ट्रेट के पास एक 30 क्रू मेंबर एक जहाज ने आपातकालीन संदेश भेजा, जिसमें हमले के बारे में जानकारी दी गई
चीन ने सफलतापूर्वक थ्येनल्येन 2-06 उपग्रह प्रक्षेपित किया
चीन ने 23 जुलाई की रात 8 बजे दक्षिण चीन में स्थित शीछांग उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र में लांगमार्च-3बी वाहक रॉकेट से सफलता पूर्वक थ्येनल्येन2-06 उपग्रह प्रक्षेपित किया। उपग्रह सुचारू रूप से निर्धारित कक्षा में पहुंचाया गया
स्विस बैंक की पोल पट्टी खोलने वाले जर्मन वकील पर स्विटजरलैंड में मुकदमा
टैक्स चुकाए बिना ही उसका रिटर्न डकार लिया गया. यूरोप में इसी तरह से करीब 140 अरब यूरो की धांधली हुई. इस पर्दाफाश करने वाले जर्मन वकील पर अब स्विट्जरलैंड मुकदमा बहाल कर रहा है. जर्मन वकील टेंशन फ्री हैं
ट्रंप ने अमेरिका और सऊदी अरब के बीच न्यूक्लियर डील के साथ जोड़ी है ये खास शर्त भी
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौते का एलान किया है. लेकिन ट्रंप ने शर्त रखी है कि रियाद को अब्राहम समझौता मानना होगा
जंगल की आग के सामने लाचार होते फ्रांस और स्पेन
फ्रांस और स्पेन इस समय भीषण जंगल की आग की चपेट में हैं. लगातार पड़ रही गर्मी, सूखे और तेज हवाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया है. दोनों देशों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है
संसद के मानसून सत्र के पांचवें दिन भी पेपर लीक का मुद्दा दोनों सदनों पर हावी रहा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, लेकिन पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने उन्हें तुरंत बोलने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि पहले सदन के पटल पर जरूरी पत्र रखे जाएंगे, उसके बाद उन्हें अवसर दिया जाएगा। हालांकि, लगातार हंगामे के कारण वह मौका नहीं आ सका और लोकसभा की कार्यवाही 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन चलने देने की अपील की, लेकिन शोर-शराबा नहीं थमा। इसके बाद कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 12 बजे सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन को बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और इस संबंध में दोपहर 1 बजे होने वाली कैबिनेट बैठक में कड़े कानून पर भी विचार होगा। इस पर विपक्ष का हंगामा फिर तेज हो गया। राहुल गांधी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, लेकिन पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने कहा कि सदन की कार्यसूची के अनुसार पहले पटल पर पत्र रखे जाएंगे, उसके बाद उन्हें बोलने का अवसर दिया जाएगा। पत्र रखे जाने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही नारेबाजी और बढ़ गई। कार्यवाही सुचारु नहीं हो सकी और राहुल गांधी अपनी बात नहीं रख पाए। अंततः लोकसभा की बैठक 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। उधर, राज्यसभा में भी सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू हुई। करीब पांच मिनट बाद सभापति ने सदन के पटल पर दस्तावेज रखने की प्रक्रिया शुरू कराई। इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक का मुद्दा उठाने के लिए खड़े हुए। हंगामे के बीच कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 12 बजे राज्यसभा की बैठक फिर शुरू हुई। मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि प्रधानमंत्री को स्वयं सदन में आकर इस पूरे मामले पर बयान देना चाहिए। सत्ता पक्ष की ओर से इसका विरोध हुआ और सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। इसके बाद कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 2 बजे राज्यसभा की बैठक फिर शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा। उपसभापति हरिवंश ने बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई। करीब सात मिनट बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह संसद का एक और दिन पेपर लीक के मुद्दे पर गतिरोध की भेंट चढ़ गया। सरकार चर्चा और कड़े कानून की बात करती रही, जबकि विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रधानमंत्री के बयान की मांग पर कायम रहा। सदन के भीतर बहस शुरू होने से पहले ही हंगामा इतना बढ़ गया कि दोनों सदनों में कोई सार्थक चर्चा नहीं हो सकी। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
कॉकरोच जनता पार्टी का प्रोटेस्ट, विपक्ष का हंगामा और बीते 24 घंटे में सरकार के 5 बड़े फैसले। दिल्ली का माहौल तेजी से बदल रहा है। पीएम मोदी ने NEET पेपर लीक मुद्दे पर पहली बार ‘फ्रेंड्स’ कहकर सेल्फी मोड में वीडियो मैसेज दिया। सरकार ने कॉकरोच पार्टी से 24 घंटे का समय मांगा है। सरकार के 5 बड़े फैसले क्या-क्या हैं, इससे क्या होगा, क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बड़े आंदोलन की वजह बनेगा, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बीते 24 घंटे में सरकार ने कौन से 5 बड़े फैसले लिए? जवाब: ये 5 फैसले हैं… 1. पीएम मोदी पहली बार बोले, पेपर लीक पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएंगे 2. CJP से उनकी शर्त पर मुलाकात, मांगों के लिए समय मांगा 3. लिखित आश्वासन देकर सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाया 4. पेपर लीक मामलों के लिए 3 फास्ट-ट्रैक कोर्ट बने 5. शिक्षा विभाग के सचिव बदले सवाल-2: तो क्या सरकार वाकई बैकफुट पर है? जवाब: पिछले 24 घंटे के पीएम मोदी और सरकार के एक्शन और मीटिंग के बाद आए CJP और नड्डा के बयानों से साफ है कि सरकार दबाव में है। हालांकि ये कहना भी ठीक नहीं है, कि सरकार पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है। इसके पीछे 2 तर्क हैं… 1. सोनम के अनशन का दबाव सरकार ने कम कर लिया 2. CJP के साथ आया विपक्ष, झुकना राजनीतिक हार जैसा सवाल-3: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा या नहीं? जवाब: धर्मेंद्र प्रधान हटाए जा सकते हैं, लेकिन अलग तरह से। विजय त्रिवेदी के मुताबिक, ‘ये तय है कि धर्मेंद्र प्रधान की फाइल शिक्षा मंत्रालय से शिफ्ट हो गई है। अभी संसद में कोई न कोई बिल आएगा, जिस पर चर्चा शुरू होगी। ये मुद्दे थोड़े दब जाएंगे, इस बीच धर्मेंद्र प्रधान को कोई और मंत्रालय दे दिया जाएगा या फिर बीजेपी संगठन में भी कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। सवाल-4: तो फिर CJP के प्रोटेस्ट का आगे क्या होगा? जवाब: CJP ने जंतर-मंतर के मंच से ऐलान किया है, ‘25 जुलाई दोपहर 3.30 बजे सरकार ने दोबारा मिलने बुलाया है। अगले 2-3 दिन में इस्तीफा नहीं हुआ, तो CJP 20 जुलाई की तरह दोबारा रैली बुलाएगी। अब कॉल नेशनल लेवल पर होगा।’ हालांकि विजय त्रिवेदी कहते हैं कि अब आंदोलन और बड़ा हो, इसकी उम्मीद कम है। अब तक सरकार और CJP में दो मुलाकातें हो चुकी हैं। जब आप बातचीत की मेज पर आ जाते हैं, तो फिर विरोध बढ़ने की वजह कम हो जाती है। CJP की दो मांगें सरकार मान लेगी, ये हो सकता है कि मुआवजा एक करोड़ की बजाय कुछ कम दे, लेकिन फिर भी इन पर सहमति बन जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मामले पर भी कोई न कोई समझौता होने की उम्मीद ज्यादा है। ------------------------ ये खबर भी पढ़िए… धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अब तक क्यों नहीं हुआ, 5 पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से समझिए; क्या आगे भी नहीं हटाए जाएंगे जंतर-मंतर पर 33 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, सोनम वांगचुक की 25 दिनों की भूख हड़ताल, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और अब देश के सभी जिलों में प्रदर्शन का आह्वान। सभी की एक ही मांग है- शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। पूरी खबर पढ़िए…
OpenAI ने खुलासा किया है कि उसके एक उन्नत AI मॉडल ने साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान अपेक्षा से आगे बढ़कर एक स्टार्टअप कंपनी के सर्वर तक पहुंचने के लिए चोरी किए गए लॉगइन क्रेडेंशियल्स का उपयोग किया।
दक्षिण एशिया की राजनीति और कूटनीतिक गलियारों से इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति को और मजबूत करते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारत सरकार ने बांग्लादेश के नवनियुक्त प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। नई दिल्ली की तरफ से भेजे गए इस बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक निमंत्रण के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें ढाका की तरफ टिक गई हैं कि बांग्लादेश इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है। इस कदम को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए युग में ले जाने की बड़ी कवायद के रूप में देखा जा रहा है।बदलते कूटनीतिक समीकरणों के बीच नई दिल्ली का बड़ा संदेशबांग्लादेश में हाल ही में हुए बड़े राजनीतिक बदलावों के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने इतने उच्च स्तर पर बांग्लादेश के नए नेतृत्व के साथ सीधा संपर्क साधा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान को ब्रिक्स समिट का न्योता भेजना यह साफ तौर पर दर्शाता है कि भारत अपने इस रणनीतिक पड़ोसी देश के साथ संबंधों में किसी भी तरह की दूरी नहीं चाहता है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली का यह कदम बांग्लादेश की नई सरकार के साथ विश्वास बहाली (Trust Building) की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक संदेश है, जिससे दोनों देशों के साझा हितों को सुरक्षा और स्थिरता मिल सके।ब्रिक्स मंच पर बांग्लादेश की भागीदारी के मायनेब्रिक्स (BRICS) संगठन वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति का एक अत्यंत शक्तिशाली मंच बन चुका है, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। भारत द्वारा बांग्लादेश को इस प्रतिष्ठित मंच पर आमंत्रित करने का मतलब है कि नई दिल्ली वैश्विक स्तर पर ढाका की आवाज को मजबूत करना चाहती है। यदि प्रधानमंत्री तारिक रहमान इस निमंत्रण को स्वीकार कर समिट में हिस्सा लेते हैं, तो व्यापार, कनेक्टिविटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता के नए रास्ते खुलेंगे।साझा व्यापार और सीमा सुरक्षा पर टिकेंगी नजरेंभारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल बंटवारा, सीमा पार व्यापार, और घुसपैठ जैसी कई संवेदनशील चुनौतियां रही हैं। जानकारों के मुताबिक, इस नई शुरुआत से न केवल व्यापारिक गलियारों को गति मिलेगी बल्कि पूर्वोत्तर भारत (North-East India) की सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से भी यह बातचीत बेहद अहम साबित होगी। अब देखना यह होगा कि ढाका भारत के इस बड़े कूटनीतिक हाथ को कितनी गर्मजोशी से थामता है और आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा क्या मोड़ लेती है।
कंगाल पाकिस्तान के लिए मसीहा बना ड्रैगन! डॉलर संकट के बीच चीन ने थमाई संजीवनी बूटी
गंभीर आर्थिक तंगहाली और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) की भारी किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। डॉलर-डॉलर के लिए तड़प रहे और डिफॉल्ट होने की कगार पर पहुंचे अपने सदाबहार दोस्त (All-Weather Ally) पाकिस्तान को बचाने के लिए चीन एक बार फिर आगे आया है। अंतरराष्ट्रीय भुगतानों और डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए चीन ने पाकिस्तान को एक बड़ा वित्तीय लाइफलाइन पैकेज जारी किया है। इस वित्तीय संजीवनी के मिलने से पाकिस्तानी हुक्मरानों ने बड़ी राहत की सांस ली है, क्योंकि इससे देश पर मंडरा रहा तात्कालिक आर्थिक संकट कुछ समय के लिए टल गया है।बीजिंग से इस्लामाबाद पहुंची मदद और सऊदी-यूएई का रुखइस्लामाबाद के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन ने इस वित्तीय सहायता के तहत अपने पुराने कर्जों के रोलओवर (Rollover) को मंजूरी दे दी है और साथ ही नए विदेशी मुद्रा फंड की व्यवस्था की है। पाकिस्तान पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों और मित्र देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई से मिलने वाली किश्तों में हो रही देरी के कारण बेहद दबाव में था। ऐसे नाजुक वक्त में चीन द्वारा दिए गए इस बड़े डिपॉजिट से पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (State Bank of Pakistan) को अपने विदेशी मुद्रा भंडार को दोबारा एक सुरक्षित स्तर पर लाने में मदद मिलेगी।कर्ज के जाल (Debt Trap) में और उलझा पाकिस्तानभले ही चीन की इस वित्तीय मदद को पाकिस्तान में एक बड़ी कामयाबी और संजीवनी बूटी की तरह देखा जा रहा हो, लेकिन वैश्विक आर्थिक विशेषज्ञ इसे एक अलग नजरिए से देख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह मदद पाकिस्तान को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उसे चीन के और गहरे 'कर्ज जाल' में धकेल देगी। पाकिस्तान पर पहले से ही चीन का अरबों डॉलर का कर्ज बकाया है, जिसमें सीपीईसी (CPEC) परियोजनाओं से जुड़े वाणिज्यिक लोन भी शामिल हैं। इस नए वित्तीय तालमेल के बाद पाकिस्तान की बीजिंग पर रणनीतिक और आर्थिक निर्भरता पूरी तरह बढ़ जाएगी।पाकिस्तानी आवाम को महंगाई से राहत या सिर्फ दिखावाइस चीनी मदद का पाकिस्तान के स्थानीय बाजारों और आम जनता पर क्या असर होगा, इसे लेकर भी कयासों का दौर शुरू हो गया है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक, इस डॉलर इन्फ्यूजन से पाकिस्तानी रुपये (PKR) में आ रही रिकॉर्ड गिरावट पर कुछ समय के लिए ब्रेक जरूर लगेगा, जिससे आयातित वस्तुओं (Imported Goods) जैसे पेट्रोल, डीजल और खाद्य पदार्थों की कीमतों को स्थिर रखने में थोड़ी मदद मिल सकती है। हालांकि, जब तक पाकिस्तान अपने आंतरिक कर ढांचे और बुनियादी आर्थिक नीतियों में कड़े सुधार नहीं करता, तब तक आम जनता को महंगाई की मार से स्थायी मुक्ति मिलना नामुमकिन नजर आता है।
खौफनाक वारदात! इजरायल में भारतीय युवक की दर्दनाक मौत, खून से लथपथ मिला शव; इजरायली नागरिक गिरफ्तार
रोजी-रोटी की तलाश में भारत से इजरायल गए एक भारतीय युवक के साथ वहां दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। इजरायल के एक स्थानीय इलाके में भारतीय नागरिक का शव बेहद संदिग्ध और खून से लथपथ हालत में बरामद किया गया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच के आधार पर स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने हत्या के शक में एक इजरायली नागरिक को हिरासत में ले लिया है, जिससे इस वक्त कड़ी पूछताछ की जा रही है। इस घटना ने इजरायल में रह रहे भारतीय प्रवासियों और कामगारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।इजरायली पुलिस की मुस्तैदी और संदिग्ध की गिरफ्तारीस्थानीय मीडिया और पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना की सूचना मिलते ही फॉरेंसिक टीम और जासूसों के दस्ते ने मौके पर पहुंचकर तफ्तीश शुरू कर दी थी। क्राइम सीन से मिले पुख्ता सबूतों और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक इजरायली संदिग्ध को दबोच लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी और मृतक के बीच किसी पुरानी रंजिश या तात्कालिक विवाद को लेकर झगड़ा हुआ था, जो बाद में जानलेवा हमले में बदल गया। हालांकि, हत्या के असली इरादे का खुलासा पूरी जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।भारतीय दूतावास हुआ सक्रिय, परिजनों को मदद का भरोसाइस दुखद घटना की खबर मिलते ही तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास तुरंत एक्शन मोड में आ गया है। दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इजरायली पुलिस और विदेश मंत्रालय के संपर्क में बने हुए हैं ताकि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही भारतीय दूतावास मृतक के कानूनी वारिसों और भारत में रह रहे उनके परिजनों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है, जिससे कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक भारत भेजा जा सके।इजरायल में भारतीय प्रवासियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंताहाल के महीनों में रोजगार के सिलसिले में बड़ी संख्या में भारतीय निर्माण और अन्य क्षेत्रों में काम करने के लिए इजरायल गए हैं। ऐसे में एक भारतीय नागरिक की स्थानीय स्तर पर हुई इस हिंसक मौत ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। प्रवासी संगठनों ने इजरायल सरकार से मांग की है कि कार्यस्थलों और रिहायशी इलाकों में भारतीय कामगारों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी किसी अनहोनी को टाला जा सके।
वैश्विक व्यापार युद्ध भड़का! ट्रंप ने इजरायल-EU समेत 60 देशों पर लगाया नया टैरिफ, भारत भी लपेटे में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने पूरी दुनिया के व्यापारिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। ट्रंप प्रशासन ने भारत, यूरोपीय संघ (EU), इजरायल और न्यूजीलैंड समेत दुनिया के 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले सामानों पर 10% से लेकर 12.5% तक का भारी-भरकम नया टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। शुक्रवार से लागू हुए इस ऐतिहासिक और सख्त फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में हाहाकार मच गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने अपने सबसे करीबी रणनीतिक मित्र इजरायल को भी इस आर्थिक कार्रवाई से बाहर नहीं रखा है, जिसके बाद वैश्विक स्तर पर एक नया ट्रेड वॉर छिड़ने की आशंका गहरा गई है।जबरन मजदूरी (Forced Labor) का गंभीर आरोप और ट्रेड एक्ट की धारा 301वाशिंगटन से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, अमेरिका ने इन 60 देशों पर आरोप लगाया है कि वे अपने यहां जबरन मजदूरी (Forced Labor) से बनने वाले सामानों के आयात और व्यापार पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 (Section 301) के तहत यह सख्त कार्रवाई की है, जो अमेरिकी वाणिज्य को प्रभावित करने वाली अनुचित व्यापार नीतियों के खिलाफ राष्ट्रपति को ऐसे कड़े कदम उठाने का विशेषाधिकार देती है। यह नई दरें उस अस्थायी वैश्विक टैरिफ की जगह लेंगी जो हाल ही में समाप्त हुआ है।इजरायल से लेकर न्यूजीलैंड तक मचा बवाल, किस देश पर कितना लगा टैक्सअमेरिकी प्रशासन ने इन 60 देशों को उनकी मौजूदा नीतियों के आधार पर दो अलग-अलग स्लैब में बांटा है।10% का टैरिफ स्लैब: इस श्रेणी में भारत, यूरोपीय संघ (EU), ब्रिटेन, कनाडा, मैक्सिको और पाकिस्तान समेत 17 देशों को रखा गया है। इन देशों को थोड़ी राहत इसलिए मिली क्योंकि इन्होंने जबरन मजदूरी रोकने के लिए कुछ आंशिक कानून या प्रतिबद्धताएं दिखाई हैं।12.5% का टैरिफ स्लैब: चीन, इजरायल, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्राजील जैसे बाकी 43 से अधिक देशों पर 12.5% का सीधा अतिरिक्त आयात शुल्क थोप दिया गया है।इस फैसले से अमेरिकी बाजारों में आने वाले कुल आयात का करीब 99.4% हिस्सा सीधे प्रभावित होने जा रहा है, जिसने वैश्विक सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है।भारतीय निर्यातकों को तगड़ा झटका, कच्चे तेल और गैस को मिली राहतइस फैसले से भारत के कपड़ा, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और कृषि आधारित निर्यात क्षेत्रों को सीधी चोट पहुंचने की आशंका है, क्योंकि अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने रणनीतिक चतुराई दिखाते हुए कुछ चुनिंदा जरूरी सामानों जैसे कच्चा तेल (Crude Oil), प्राकृतिक गैस (Natural Gas), चुनिंदा उर्वरक (Fertilizers) और आवश्यक कृषि उत्पादों को इस टैरिफ के दायरे से बाहर (Exempted) रखा है ताकि अमेरिकी घरेलू बाजार में महंगाई बेलगाम न हो जाए।वैश्विक प्रतिक्रिया: सहयोगियों ने अमेरिकी कदम को किया खारिजयूरोपीय संघ (EU) और न्यूजीलैंड समेत कई प्रमुख अमेरिकी सहयोगियों ने वाशिंगटन के इस फैसले पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। व्यापार विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जबरन मजदूरी की समस्या वैश्विक है और अमेरिका खुद भी इससे पूरी तरह अछूता नहीं है, ऐसे में केवल व्यापारिक वॉल्यूम के आधार पर मित्र देशों को निशाना बनाना अनुचित और जवाबी आर्थिक कार्रवाइयों को न्यौता देने जैसा है।
मेहमत फतिह सिसेकली ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने कोई असामान्य कपड़े नहीं पहने थे। वह केवल साइकिलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान्य स्पोर्ट्सवियर में थे।
अमेरिका ने जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से जुड़ी चिंताओं को वजह बताते हुए भारत समेत दुनिया के 60 व्यापारिक साझेदारों (ट्रेडिंग पार्टनर्स) पर नए टैरिफ लगाने का बड़ा ऐलान किया है। यह नया टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस साल की शुरुआत में लागू की गई उन ग्लोबल ड्यूटीज की जगह लेगा जो अब खत्म होने जा रही हैं।US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर ने नए टैरिफ स्ट्रक्चर की घोषणा करते हुए साफ किया कि ये नियम शुक्रवार को ईस्टर्न टाइम के मुताबिक रात 12:01 बजे से प्रभावी हो जाएंगे। USTR की फैक्ट शीट के मुताबिक, ये नए टैरिफ 10% से लेकर 12.5% के बीच होंगे, जिसके दायरे में अमेरिका के कुल व्यापार का करीब 99.4% हिस्सा आ जाएगा।भारत पर 10% टैरिफ, व्यापार पर कितना होगा असर?अमेरिका के इस कदम से भारत, चीन और यूरोपीय संघ (EU) जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ने वाला है। अमेरिका ने भारत और 16 अन्य देशों से आयात किए जाने वाले सामान पर नए टैरिफ की दर 10% तय की है।गौरतलब है कि अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर होने के साथ-साथ भारतीय निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार भी है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में दोनों देशों के बीच करीब 141 अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा था।जबरन मजदूरी पर USTR का कड़ा रुखAFP की रिपोर्ट के अनुसार, USTR जेमिसन ग्रीर ने कहा, अमेरिका में करीब एक सदी से जबरन मजदूरी से बने या जुड़े आयात पर बैन लागू है और इसका कड़ाई से पालन कराया जाता है। अब वक्त आ गया है कि हमारे बाकी व्यापारिक साझेदार भी ऐसा ही कदम उठाएं।फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किए थे पुराने टैरिफदरअसल, इस साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के कई पुराने टैरिफ फैसलों को रद्द कर दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने आयात पर 10% टैरिफ को फिर से लागू करने के लिए विशेष अधिकारों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, वह व्यवस्था सिर्फ 150 दिनों के लिए ही मान्य थी, जिसकी म्याद इस शुक्रवार को खत्म हो रही थी। अब नए घोषित टैरिफ उसकी जगह ले लेंगे।चीन और जापान पर 12.5% का भारी टैरिफ, किन्हें मिली राहत?हालिया घोषणा के तहत जिन देशों ने जबरन मजदूरी पर रोक लगाई है या ऐसा करने का वादा किया है, उन पर 10% का कम टैरिफ लगेगा। इस श्रेणी में भारत के साथ कनाडा, बांग्लादेश, पाकिस्तान और ब्रिटेन शामिल हैं।दूसरी ओर, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया समेत दर्जनों देशों पर 12.5% का भारी टैरिफ थोपा गया है। हालांकि, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और EU को कुछ राहत मिलेगी क्योंकि उनके अमेरिका के साथ पहले से व्यापार समझौते (Trade Agreements) मौजूद हैं। इसके अलावा, जिन सेक्टरों पर पहले से अलग टैरिफ लागू हैं (जैसे स्टील और एल्युमीनियम), उन पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ किया बड़ा असैन्य परमाणु समझौता, लेकिन सामने रख दी ऐसी शर्त
अंतरराष्ट्रीय राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब के साथ एक अहम असैन्य परमाणु समझौते (Civilian Nuclear Agreement) को मंजूरी दे दी है, लेकिन इसके साथ ही रियाद के सामने एक बहुत बड़ी और स्पष्ट शर्त भी रख दी है। ट्रम्प ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि इस समझौते के आगे बढ़ने की पूरी शर्त यह है कि सऊदी अरब को ऐतिहासिक 'अब्राहम संधि' (Abraham Accords) के तहत इजरायल के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को पूरी तरह सामान्य करना होगा। वाशिंगटन से लेकर खाड़ी देशों तक इस बड़े कूटनीतिक कदम के बाद भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।क्या है डोनाल्ड ट्रम्प की बड़ी शर्त और परमाणु समझौते के मायने?अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए इस डील की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस असैन्य परमाणु समझौते के तहत सऊदी अरब को किसी भी प्रकार के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण और गैर-संवर्धित परमाणु संयंत्रों के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस पूरे समझौते के मुहर लगने की एकमात्र शर्त यही है कि सऊदी अरब को अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजरायल के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाना होगा। हालांकि, दूसरी तरफ सऊदी अरब का यह रुख रहा है कि इजरायल के साथ संबंध तभी सामान्य हो सकते हैं जब स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र की स्थापना के लिए एक स्पष्ट और पक्का रास्ता तैयार किया जाए।परमाणु अप्रसार विशेषज्ञों और इजरायल की बढ़ी चिंताएंइस समझौते के सामने आते ही वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ गई है। परमाणु अप्रसार (Non-Proliferation) के कई बड़े विशेषज्ञों ने इस डील पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि इस समझौते में ऐसे कड़े सुरक्षा उपायों और प्रावधानों की कमी है जो भविष्य में परमाणु सामग्री को हथियार बनाने लायक स्तर तक संवर्धित होने से रोक सकें। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस डील के बाद से पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से हथियारों की भीषण होड़ शुरू होने का गंभीर अंदेशा जताया जा रहा है। आलोचकों का यहां तक कहना है कि इस तरह के समझौतों से इजरायल के दीर्घकालिक सुरक्षा हितों को बड़ा झटका लग सकता है।नेतन्याहू की चुप्पी और अमेरिकी संसद की मुहर का इंतजारहैरानी की बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल समझौते के ऐलान के बाद से इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, उनके रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री की तरफ से फिलहाल कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है। जानकारों के अनुसार, वाशिंगटन और रियाद के बीच घोषित इस बहुचर्चित समझौते को अभी अमेरिकी संसद (US Congress) से औपचारिक मंजूरी मिलना बाकी है, जिसके बाद ही इसकी असली तस्वीर साफ हो सकेगी।
दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्र मिडिल ईस्ट से इस वक्त की बेहद डरावनी और बड़ी खबर सामने आ रही है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग रूट्स और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा तनाव अब एक बड़े महायुद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए लगातार 13वीं रात भी भीषण हवाई हमले जारी रखे हैं। इस भयंकर सैन्य संघर्ष और सप्लाई चेन ठप होने के खतरे के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है।क्यों हो रहे हैं ईरान पर ताबड़तोड़ अमेरिकी हमले?अमेरिकी सेंट्रल कमांड और सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार शाम को अमेरिकी वायुसेना ने एक बार फिर ईरान के अंदरूनी सैन्य बुनियादी ढांचे और रणनीतिक ठिकानों को अपना निशाना बनाया। अमेरिकी सेना का साफ कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों को लगातार दी जा रही धमकियों और हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनियों के बीच यह लगातार 13वां दिन है जब अमेरिकी सेना ने तेहरान के खिलाफ इस तरह के घातक प्रहार किए हैं।हॉर्मुज जलडमरूमध्य में थम गया जहाजों का आवागमनयह पूरा विवाद दुनिया के सबसे अहम चोकपॉइंट यानी हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले शिपिंग रूट्स को लेकर खड़ा हुआ है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान पर लगातार यह आरोप लग रहे हैं कि उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स इस क्षेत्र में लगातार अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं और आवाजाही में बाधा डाल रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से ईरान को जिम्मेदार ठहराने के बाद से इस समुद्री मार्ग पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।क्रूड ऑयल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल, 100 डॉलर के पार पहुंचा तेलमिडिल ईस्ट के इस महासंकट का सीधा असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज के साथ-साथ बाब अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) जलडमरूमध्य से भी जहाजों के आवागमन के गंभीर रूप से बाधित होने के बाद वैश्विक बाजार में खलबली मच गई है। कच्चे तेल की कीमतें अचानक सात प्रतिशत तक उछल गई हैं और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। इससे पहले आखिरी बार मई के महीने में तेल इस उच्च स्तर पर पहुंचा था। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुका है। आर्थिक विशेषज्ञों और जानकारों का अनुमान है कि अगर यह टकराव जल्द नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं, जिससे दुनियाभर में महंगाई का एक बड़ा दौर आ सकता है।
पड़ोसी देश बांग्लादेश से इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही आज यानी शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सत्ता से बेदखल की जा चुकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ उनके पुराने और करीबी रिश्तों के चलते सरकार की तरफ से उन पर त्यागपत्र देने का भारी दबाव बनाया गया था। रॉयटर की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफे की कोई ठोस वजह नहीं बताई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह फैसला देश के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया है।शेख हसीना की वापसी की चर्चा के बीच बड़ा फैसलायह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम ठीक उस समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह बयान दिया था कि वह अदालत के फैसलों का सामना करने और स्वदेश लौटने की तैयारी कर रही हैं। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को शेख हसीना का पुराना सहयोगी माना जाता रहा है। यही वजह है कि सरकार के शीर्ष हलकों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी थी कि शहाबुद्दीन ने कथित तौर पर हाल ही में फिर से शेख हसीना से संपर्क साधने की कोशिश की थी। देश के प्रमुख अखबार 'प्रथम आलो' ने भी उच्च-स्तरीय सूत्रों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रपति के इन संपर्कों और पुरानी नजदीकियों ने मौजूदा प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।अवामी लीग पर प्रतिबंध और शीर्ष पदों से हटे हसीना के सभी करीबीमोहम्मद शहाबुद्दीन के इस इस्तीफे के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर शेख हसीना का कोई भी पुराना सहयोगी या समर्थक नहीं बचेगा। आपको बता दें कि देश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही शेख हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। पार्टी के तमाम दिग्गज नेता और कार्यकर्ता या तो सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं या फिर पुलिस और जांच एजेंसियों के डर से भूमिगत हो गए हैं। ऐसे नाजुक वक्त में राष्ट्रपति का पद छोड़ना देश की राजनीति में एक नए और बड़े दौर की शुरुआत का संकेत दे रहा है।बांग्लादेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनेगी शेख हसीना की वापसीविशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना की संभावित स्वदेश वापसी मौजूदा बांग्लादेश सरकार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो सकती है, जो इस वक्त देश में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता बहाल करने के लिए संघर्ष कर रही है। हालांकि हसीना की वापसी की योजनाओं में अभी करीब पांच महीने का वक्त बाकी है, लेकिन देश के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन का यह इस्तीफा यह साफ कर देता है कि देश की हुकूमत अब शेख हसीना के किसी भी प्रभाव या उनके पुराने सहयोगियों को प्रशासनिक तंत्र में रखने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है।
होर्मुज पर ईरान का दावा: रुबियो बोले– इंडो‑पैसिफिक तक बढ़ेगा खतरा
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी कि अगर ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण करने दिया गया तो यह एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी
ट्रंप की चेतावनी: सऊदी जहाजों पर हमले तो ईरान भी जिम्मेदार
लाल सागर में जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी की है
अफ्रीकी संघ (एयू) ने यमन के हूती समूह की ओर से लाल सागर में कमर्शियल तेल टैंकरों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की
23 जुलाई…सुबह 10 बजे, हम दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे। यहां 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन कर रही है। एंट्री गेट पर ही एक डिलीवरी एजेंट मिले। हमने उन्हें रोककर पूछा कि क्या लेकर आए हैं और किसके लिए। जवाब मिला- खाना, दवाएं, मास्क और गार्बेज बैग जैसे कुछ सामान हैं। बुकिंग करने वाले ने जंतर-मंतर का पता दिया और बोला प्रदर्शन कर रहे लोगों तक पहुंचा देना। ये अकेल नहीं, इनके जैसे सैकड़ों एजेंट्स दिनभर पार्सल लेकर जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। जहां तकरीबन हर वक्त 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा रहती है। कोई खाना और पानी पहुंचाने आ रहा, तो कोई दवाइयां-सैनिटरी पैड्स या जरूरत के बाकी सामान। देश के अलग-अलग हिस्सों से ये मदद भेजी जा रही है, लेकिन ना भेजने वालों का नाम है, ना पता। केरल से इंजीनियर ने पहले खाना भेजा, फिर दवाएं हमने डिलीवरी एजेंट के जरिए बात करके पार्सल भेजने वाले का नाम-पता जानना चाहा और एजेंट के फोन से ही ऑर्डर भेजने वाले से बात की। तब पता चला कि इसे केरल के सीजो ने भेजा है। वे मलयाली क्रिश्चिनय हैं और पेशे से इंजीनियर। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को लगातार फॉलो कर रहे हैं। कॉर्पोरेट कंपनी में जॉब करते हैं, इसलिए दिल्ली आकर प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सकते। लिहाजा मदद का ये तरीका चुना।सीजो कहते हैं, ‘मैं वहां नहीं आ सकता, इसलिए क्विक डिलीवरी एप से प्रदर्शनकारियों के लिए जूस, चिप्स, नमकीन जैसे सामान भेजे। कुछ मेडिकल का सामान भी भेजा है, जैसे- ORS, रीलिफ स्प्रे, ताकि जो बीमार हैं या जिन्हें चोट लगी है, उन्हें थोड़ी मदद मिल सके।‘ सीजो ने अभी जंतर-मंतर पर दो हजार का सामान भेजा है। एक दिन पहले वे करीब 5 हजार रुपए खर्च कर खाना भी भिजवा चुके हैं। राजू बोले- हर घंटे ऑर्डर लेकर जंतर-मंतर आ रहा इसके बाद हमें अमेजॉन फ्रेश के लिए काम करने वाले राजू मिले। उन्होंने बताया कि वे प्रदर्शनकारियों के लिए करीब 7 हजार रुपए का सामान लेकर पहुंचे हैं। वैसे तो उनका काम सिर्फ सामान धरनास्थल तक पहुंचाना था, लेकिन ये सही लोगों तक पहुंच सके, इसलिए खुद रुककर इसे जरूरतमंद प्रदर्शनकारियों तक पहुंचवाया। राजू बताते हैं, ‘हम हर घंटे यहां ऑर्डर लेकर आ रहे हैं। हमारे डार्क स्टोर (स्थानीय गोदाम) पर जो भी डिलीवरी पार्टनर हैं, उनमें से ज्यादातर सामान पहुंचाने के लिए जंतर-मंतर के ही चक्कर लगा रहे हैं।‘ यूपी से भेजा ऑर्डर, बोले- स्टूडेंट हैं इसलिए दर्द समझते हैं हमारे सामने ही जंतर-मंतर के गेट के बाहर करीब 24-25 से ज्यादा स्विगी और जोमैटो वाले खड़े मिले। हम इन्हीं में से एक के पास पहुंचे। डिलीवरी पार्टनर से कहा कि ऑर्डर भेजने वाले को फोन लगा दीजिए। बात की तो पता चला कि ये ऑर्डर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रहने वाले सत्यानंद ने भेजा है। बीएड कर रहे सत्यानंद भी दिल्ली आना चाहते थे, लेकिन पढ़ाई के चलते नहीं आ सके। वे कहते हैं, ‘हम भी स्टूडेंट है, इसलिए उनके मुद्दे और दर्द समझ रहे हैं। मेरा इन्हें पूरा सपोर्ट है। दिल्ली नहीं आ सकता, लेकिन अपनी सामर्थ्य के मुताबिक जो कर सकता हूं, कर रहा हूं।’ उनका ऑर्डर लेकर आए डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि सुबह से जंतर-मंतर पर ये उनका 8वां ऑर्डर है। एक दिन पहले भी वो दिनभर जंतर-मंतर पर सामान पहुंचाते रहे। प्रदर्शनकारियों तक ऑर्डर पहुंचाने के लिए वॉलंटियर्स एक्टिव देश भर से आ रही इस मदद को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स भी सक्रिय हैं। इनमें से अभिषेक और प्रीति जंतर-मंतर के बाहर लगी बैरिकेडिंग से सामान उठाकर करीब 400 मीटर दूर प्रदर्शन स्थल तक पहुंचा रहे हैं। अभिषेक बताते हैं कि अभी तक प्रदर्शनकारियों के लिए भेजा गया सामान बीच में ही लोग अपने घर ले जाने लगे थे, इसलिए हमने ये सब शुरू किया। प्रीती कहती हैं कि अगर ये मदद जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचेगी, तो भेजने वाले खुद को ठगा महसूस करेंगे। यही वजह है कि हम इसे सही जगह पहुंचा रहे हैं। दोनों वॉलंटियर्स के मुताबिक, छोले भटूरे, समोसे, कोल्ड ड्रिंक से लेकर पानी तक यहां सब कुछ आ रहा है। लड़कियों के लिए सैनिटरी पेड और घायलों के लिए मेडिकल सामान भी है। कोई नंगे पैर न रहे इसलिए अलग-अलग साइज की चप्पलों के ऑर्डर भी आए हैं। आखिर में CJP के आंदोलन का अपडेट… सरकार बोली- 4 बार बातचीत के लिए बुलाया दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सरकार ने 23 जुलाई को कहा कि वो CJP के साथ किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 24 घंटे में CJP को जेपी नड्डा के घर या ऑफिस पर बातचीत के लिए 4 बार ऑफर भेजा जा चुका है। हालांकि, CJP ने कहा है कि सरकार को बात करनी है तो जंतर-मंतर आए या फिर किसी न्यूट्रल जगह पर चर्चा करे। हम किसी के घर या ऑफिस नहीं जाएंगे। इधर, CJP ने अब 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। ……………….. ये खबर भी पढ़ें… कॉकरोच आंदोलन से BJP में चिंता, लेकिन प्रधान नहीं हटेंगे 22 जुलाई, वक्त करीब 12 बजे। दिल्ली में BJP हेडक्वॉर्टर के 5वें फ्लोर पर पार्टी के महामंत्री जुटने शुरू हुए। 15-20 मिनट के अंदर आठों महामंत्री एक साथ थे। उनके अलावा भी कई पदाधिकारी भी पहुंच गए। मसला कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट से बना माहौल था। BJP में हमारे सूत्र बताते हैं कि पहली बार BJP ऑफिस में बैठक हुई। 3 घंटे तक चली इस मीटिंग में प्रोटेस्ट के असर को खत्म करने की स्ट्रैटजी पर बात हुई। पूरी खबर पढ़िए…
बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, दो बच्चों की मौत के बाद मरने वालों का आंकड़ा 805 पहुंचा
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी है। गुरुवार को इस बीमारी जैसे लक्षणों वाले दो और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 805 हो गई है
शादी के दिन आंतें फटीं, 5 महीने खुला रहा पेट:सूप पिया तो छाती से बह निकला, हनीमून पर भी नहीं जा पाया
दुर्लभ बीमारियों की सीरीज 'ऐ जिंदगी' में आज कोलकाता के जगदीशपुर में रहने वाले 31 साल के सुभजीत कर्माकर का दर्द। भास्कर रिपोर्टर नीरज झा ने ये पूरी कहानी सुनी और उन्हीं की जुबानी हू-ब-हू आपके सामने रख दी… '6 मार्च 2022 की शाम। कोलकाता के एक बैंक्वेट हॉल में हमारी शादी की पार्टी चल रही थी। मेहमानों की भीड़ थी। सभी बधाइयां दे रहे थे, फोटो खिंचवा रहे थे। कोई लिफाफा दे रहा था, तो कोई गिफ्ट। सामने पूरा परिवार, रिश्तेदार और दोस्त गानों की धुन पर झूम रहे थे। इसी बीच, मेरे पेट में तेज दर्द उठा। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, दर्द बढ़ता जा रहा था। मुझे सिर्फ बर्दाश्त करना था, न करता तो सभी का मजा खराब हो जाता। रात करीब 1 बजे पार्टी खत्म हुई। 2 बजे हम घर पहुंचे। अपने कमरे में जाते ही मैं दर्द के मारे पलंग पर गिर पड़ा। मैं पसीना-पसीना था। पत्नी घबरा गई। बार-बार पूछने लगी- क्या हुआ? मैंने कराहते हुए कहा- दर्द बहुत तेज है। अलमारी में दवा रखी है, दे दो। पत्नी ने फौरन टेबलेट निकाली और दे दी। मैंने दवा तो खा ली, लेकिन असर नहीं हुआ। पूरी रात छटपटाते हुए कभी बिस्तर पर लेटता, तो कभी कमरे में टहलता। मेरी शादी की पहली रात ऐसे ही बीत गई। सुबह 7 बजते ही हम दोनों डॉक्टर के पास पहुंचे। उन्होंने सीटी स्कैन कराने को कहा। रिपोर्ट देखी तो डॉक्टर बोले- ‘फैटी लिवर है। इसी वजह से दर्द हो रहा है। उबला और हल्का खाना खाइए। उन्होंने कुछ दवाइयां दीं, कहा- आराम हो जाएगा। दो-तीन दिन तो राहत मिली, लेकिन कुछ खाते ही गले में अजीब सा दर्द होता। ऐसा लगता, जैसे- गले में कोई खुरदरी चीज रगड़कर नीचे जा रही हो। हर निवाले के साथ दर्द और जलन बढ़ती जा रही थी। हफ्तेभर बाद फिर तेज दर्द उठा। खड़ा होना, बैठना, यहां तक कि सांस लेना मुश्किल हो गया। हम दोनों बिना देर किए दूसरे डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर ने कई जांचें कराईं और बताया कि मेरी बड़ी आंत 6-7 जगह से फट गई है। तुरंत ऑपरेशन कराना होगा। सर्जरी में देरी हुई तो इंफेक्शन फैल जाएगा। जान को भी खतरा हो सकता है। दो दिन बाद हम हनीमून के लिए मनाली जाने वाले थे। लेकिन सारा प्लान धरा का धरा रह गया। डॉक्टर के केबिन से बाहर निकलते हुए मेरी नजर पत्नी मोमिता पर पड़ी। वह चुप थी, लेकिन उसकी आंखों में घबराहट साफ नजर आ रही थी। बीमारी से कहीं ज्यादा डर उसके टूटते सपनों का था। तभी पत्नी ने मेरा हाथ कसकर पकड़ा और बोली- जब सर्जरी ही एकमात्र रास्ता है, तो फौरन करवा लो। घूमने कभी और चलेंगे। सर्जरी का खर्च 5 लाख रुपए था। शादी में ही 15-20 लाख रुपए खर्च हो चुके थे। सेविंग्स भी काफी कम बची थी, इसलिए दोस्तों से पैसे उधार लेकर अस्पताल में जमा कराए। मुझे तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले गए। एनेस्थीसिया दिया। रात में जब होश आया, तो सबसे पहले नजर छाती और पेट पर पड़ी। पेट खुला हुआ था, उसे कवर करने के लिए एक बैग जैसा कुछ लगा था। मैंने देखते ही डॉक्टर से पूछा- क्या सर्जरी पूरी नहीं हुई? पेट में ये क्या लगा दिया। उन्होंने बताया कि आंतों के साथ-साथ भोजन नली भी फट गई थी, इसलिए उसकी भी सर्जरी करनी पड़ी। आंत को जोड़ने के लिए पहले सर्जिकल स्टेपल लगाए। फिर मेडिकल स्यूचर (टांके) लगाए, लेकिन अंदर की परत इतनी पतली हो गई थी कि टांके टिक ही नहीं पाए। आंतें बार-बार फट रही थीं। आंतों पर दबाव न पड़े, इसलिए पेट पर स्टूल बैग लगाया है। इससे ही स्टूल यानी पॉटी पास होगी। जब तक अंदरूनी घाव भर नहीं जाता, तब तक खाना भी फीडिंग ट्यूब से दिया जाएगा। चार-पांच महीने में घाव सूख जाएंगे। तब पेट और भोजन नली की सर्जरी होगी। हॉस्पिटल का खर्च बहुत ज्यादा था, इसलिए घर आ गया। हर रोज एक नर्स घर आकर ड्रेसिंग करती थी। उसमें हर दिन 3-5 हजार रुपए खर्च होते थे। 5 महीने बाद यानी 15 अगस्त को मैं डॉक्टर को दिखाने गया। उन्होंने घाव देखकर कहा- अब टांके लग सकते हैं। दोबारा भर्ती हो जाओ। इसबार सर्जरी का खर्च 30 लाख रुपए था। ये सुनते ही मैं घबरा गया। 5 महीने से बेड पर था। कोई कमाई नहीं थी। आखिर कहां से लाता इतने पैसे। तब पत्नी ने कहा कि वो अपने सारे जेवर बेच देगी। दोस्तों ने भी क्राउडफंडिंग के जरिए 10 लाख रुपए जुटाए। बाकी रकम का इंतजाम उधार लेकर किया। डॉक्टर ने सर्जरी की। भोजन नली और पेट की सर्जरी करके टांके लगाए। एक-दो दिन बाद वॉशरूम गया, तो नेचुरल रास्ते से स्टूल पास हुआ। तब मोमिता अस्पताल में नहीं थी। मैंने मैसेज कर उसे बताया कि अब मैं ठीक हो गया हूं। करीब दो घंटे बाद हॉस्पिटल के स्टाफ ने पूछा- खाने में कुछ लोगे। मैंने सूप ऑर्डर किया। जैसे ही सूप पिया, छाती के ऊपर कुछ गिला-गिला सा महसूस हुआ। मैं हैरान रह गया। सूप पिया मुंह से, ये पेट और छाती पर कहां से आ गया। नर्स ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने स्टाफ से कहा- ऑपरेशन थिएटर में ले चलो। टांके खुल गए हैं। आंत फट गई है, इसलिए तुरंत सर्जरी करनी होगी। डॉक्टरों ने दोबारा ऑपरेशन किया, लेकिन शरीर के टिशू इतने कमजोर हो चुके थे कि टांके टिक ही नहीं पाए। तमाम कोशिशों के बावजूद, उन्हें सर्जरी बीच में ही छोड़नी पड़ी। जब होश आया, तो देखा पेट पहले की तरह खुला था। आंतें दिख रही थीं। बाद में एक खास बैग (वूंड मैनेजमेंट बैग) मेरे पेट पर लपेट दिया, ताकि इंफेक्शन न हो। मेरी हालत बिगड़ती जा रही थी। ब्लड प्रेशर गिरकर 45/80 तक पहुंच गया। डॉक्टर ने पत्नी से कह दिया कि बचने की उम्मीद कम है। कुछ भी हो सकता है। हालांकि पत्नी और पापा दोनों ने उम्मीद नहीं छोड़ी। कोलकाता के कई बड़े अस्पतालों में रिपोर्ट दिखाई। सबका यही कहना था कि ऐसे मामलों में सिर्फ 20-30 परसेंट लोग ठीक हो पाते हैं। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई न जाने कितने शहरों के डॉक्टरों को कॉल किया। केस समझाया, लेकिन सबने मना कर दिया। आखिर में हैदराबाद के AIG अस्पताल के डॉक्टरों को रिपोर्ट भेजी। उन्होंने कहा- वादा नहीं कर सकते, लेकिन पूरी कोशिश करेंगे। इसके बाद हम हैदराबाद पहुंच गए। करीब 30 दिनों तक जांच हुई। एक डॉक्टर ने मेरी स्किन देखकर कहा- जेनेटिक टेस्ट कराना होगा। 5 दिन बाद पता चला कि मुझे वैस्कुलर एह्लर्स-दानलोस सिंड्रोम (vEDS) है। डॉक्टर बोले- इसी बीमारी की वजह से आंतें बार-बार फट रही है। टांके भी खुल रहे हैं। इसके बाद 14 डॉक्टरों की टीम ने 8 घंटे सर्जरी की। ऑपरेशन कामयाब रहा, लेकिन साढ़े तीन महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा। पैसे खत्म हो गए। पापा ने मजबूरी में 3.5 बीघा जमीन सिर्फ 50 लाख रुपए में बेच दी, जिसकी कीमत आज 4 करोड़ से ज्यादा है। तीन बार सर्जरी और अस्पताल के तमाम खर्चे मिलाकर अब तक करीब सवा करोड़ रुपए लग चुके हैं। मुझपर अब भी 8 लाख रुपए का कर्ज है। एक सर्जरी बाकी है, जिसमें 50 लाख रुपए और लगेंगे। तब तक स्टूल बैग लगाकर रहना पड़ेगा। इस बीमारी ने मुझसे सुहागरात, रोमांस, हनीमून… सब छीन लिया। हर हफ्ते हॉस्पिटल जाना, चेकअप करवाना, ड्रेसिंग कराना, यही मेरी जिंदगी है। सब खो चुका हूं, लेकिन जीने की हिम्मत है। खुद को संभालने के लिए किताबें पढ़ता हूं। लेकिन बीमारी से पहले मेरी जिंदगी ऐसी नहीं थी। 2016 में कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद मैं नौकरी के लिए बेंगलुरु चला गया था। सब ठीक चल रहा था, तभी कोरोना के कारण कोलकाता लौटना पड़ा। यहीं से वर्क फ्रॉम होम करता रहा। फिर 2022 में मोमिता से लव मैरिज कर ली। हम दोनों एक-दूसरे को बचपन से जानते थे। साथ पढ़े थे। शायद, इसलिए मुश्किल वक्त में भी वो मेरा हाथ थामे हुए है। बीमारी की वजह से नौकरी छूटी, लेकिन मोमिता ने मुझे हौसला दिया। आखिर मुझे एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिल गई है, जिससे अब घर खर्च चल रहा है। हालांकि, मुझे उसकी बहुत चिंता होती है। सोचता हूं, उस पर क्या बीतती होगी। रिश्तेदार भी उसे ताने देते हैं। कहते हैं- कैसी किस्मत लेकर आई है। शादी होते ही पति को अस्पताल पहुंचा दिया। अगर मुझे अपनी बीमारी के बारे में कुछ भी पता होता तो शादी न करता। कम से कम मेरे साथ उसकी जिंदगी तो न बर्बाद होती। मैंने उससे कई बार कहा, तुम चाहो तो दूसरी शादी कर लो। वो हमेशा मना कर देती है। इस बीमारी से पहले मैं हर दिन जिम जाता था, दौड़ता था। वजन भी 72 किलो था, लेकिन बीमारी के कारण घटकर 37 किलो रह गया है। मेरी पुरानी फोटो देखकर कोई पहचान भी नहीं पाएगा।' सुभजीत अपना दर्द बयां कर रहे थे, तभी कमरे में एक बुजुर्ग आते हैं। सुभजीत बताते हैं- ये मेरे पापा हैं। इनका नाम रवींद्र नाथ कर्मकार हैं। रवींद्र बेटे की ओर देखते हुए कहते हैं- जब यह पांच साल का था, तभी इसकी मां गुजर गई। दो साल बाद बड़े बेटे को तेज बुखार आया था और अचानक उसकी मौत हो गई। आज तक पता नहीं चला कि उसकी मौत किस बीमारी से हुई। तब मैं कोलकाता में बाटा इंडिया में क्लर्क था। पत्नी के जाने के बाद घर में सुभजीत की देखभाल करने वाला कोई नहीं बचा, इसलिए नौकरी छोड़नी पड़ी। शादी के बाद जब इसकी बीमारी सामने आई और एक के बाद एक सर्जरी होने लगी, तो मन घबराने लगा। भगवान से यही प्रार्थना करता हूं कि किसी तरह मेरा बेटा ठीक हो जाए। सुभजीत की कहानी सुनने के बाद भास्कर रिपोर्टर नीरज झा कोलकाता स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के जेनेटिक डिपार्टमेंट पहुंचे। वहां डिपार्टमेंट हेड डॉ. दिपांजना दत्ता से मुलाकात की। डॉ. दत्ता को सुभजीत की बीमारी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एह्लर्स-दानलोस सिंड्रोम (EDS) का ही एक प्रकार 'वैस्कुलर EDS' है। यह एक जेनेटिक बीमारी है। शरीर के COL3A1 जीन में खराबी के कारण सही मात्रा या गुणवत्ता में 'कोलेजन' नहीं बन पाता। जैसे घर को जोड़ने और मजबूत बनाने के लिए सीमेंट की जरूरत होती है, वैसे ही शरीर की कोशिकाओं और अंगों को मजबूती देने के लिए कोलेजन नाम का प्रोटीन जरूरी है। इस बीमारी में त्वचा बहुत पतली, लचीली और नाजुक हो जाती है। ब्लड प्रेशर थोड़ा सा भी बढ़ने पर नसों के फटने का खतरा रहता है। वैस्कुलर EDS में आंतें फट जाती हैं। इस बीमारी में मांसपेशियां और टिशू इतने पतले हो जाते हैं कि कागज की तरह फटने लगते हैं। सर्जरी के दौरान या बाद में टांके टिक नहीं पाते। घाव देरी से भरते हैं। बचपन में इस बीमारी के लक्षण साफ नजर नहीं आते। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, शरीर लचीला होने लगता है। पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। उम्र के साथ-साथ यह बीमारी पूरे शरीर में फैलकर जानलेवा रूप ले लेती है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चे में ऑटोसोमल डॉमिनेंट पैटर्न के जरिए आती है। हमारे शरीर में हर जीन की दो कॉपी होती हैं। एक कॉपी मां और दूसरी पिता से मिलती है। 'डॉमिनेंट' बीमारी का मतलब है कि अगर बच्चा माता या पिता में से किसी एक से प्रभावित COL3A1 जीन लेता है, तो उसे यह बीमारी हो सकती है। यदि माता या पिता में से किसी एक को ‘वैस्कुलर EDS’ है, तो उनके हर बच्चे में यह बीमारी ट्रांसफर होने का खतरा 50 प्रतिशत रहता है। दुनिया भर में लगभग 2 लाख लोगों में से केवल 1 व्यक्ति को यह बीमारी होती है। वर्तमान में इसकी कोई जीन थेरेपी या स्थायी इलाज नहीं है। -------------------------------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पढ़ें… 1- सिर से जुड़ीं दो बहनें अब अलग नहीं होना चाहतीं: सलमान खान ने बहन बनाया, इलाज का वादा किया, अब फोन तक नहीं उठाते ये हैं सबा और फरहा। उम्र 24 साल। दोनों का जन्म एक दिन, एक समय और एक ही मां की कोख से हुआ, सो ये जुड़वां कहलाती हैं। लेकिन… इनके जिस्म अलग-अलग नहीं, सिर से आपस में जुड़े हैं। वो भी इस तरह कि दोनों एक दूसरे को देख नहीं सकतीं। आईने में भी नहीं, अगर एक का रुख आईने की तरफ होता है तो दूसरी का उसके उलट। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें… 2- चेहरे पर मांस के लोथड़े देख लोग कहते हैं भूत: शक्ल देखकर 5 लोग गड्ढे में जा गिरे, मां बोली-मरेगा तभी बला टलेगी ऊपर आपने जो तस्वीर देखी, उनका नाम है मिथुन चौहान। उम्र 29 साल। जो भी इन्हें पहली बार देखता है, डर जाता है। भूत कहता है या जानवर। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज ‘ऐ जिंदगी’ के लिए इस बार इन्हीं की तलाश है। मैं नीरज झा इसी तलाश में पहुंचा पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर नवादा जिले के नारदीगंज ब्लॉक। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें…
NEET पेपर लीक प्रोटेस्ट, संसद मार्च और फिर पुलिस का लाठीचार्ज। विपक्ष ने पीएम आवास तक घेरा, लेकिन पीएम मोदी एक शब्द नहीं बोले। फिर 23 जुलाई की सुबह उन्होंने X पर लिखा- 'युवाओं के हित से ज्यादा जरूरी कुछ भी नहीं है। पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनेंगे। युवाओं के भविष्य के साथ खेलने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।' देर रात एक वीडियो मैसेज में भी कहा- 'फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रपोजल 24 जुलाई, शुक्रवार की कैबिनेट बैठक में रखेंगे। अगले सप्ताह संसद में इससे जुड़ा बिल पास कराने की कोशिश की जाएगी।' इधर दिल्ली हाई कोर्ट ने पेपर लीक के मामले देखने के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट भी बना दी। तो क्या अब फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी या इसमें भी कोई बड़ा लूपहोल; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: एग्जाम में गड़बड़ी के मामलों में अब तक कितने लोगों को सजा हुई है?जवाब: 2002 से 2025 तक 45 बड़े एग्जाम में पेपर लीक हुआ। इन सब में 1-1 लाख या उससे ज्यादा बच्चे बैठे थे। अब तक सिर्फ 2 मामलों में सजा सुनाई गई। ये सारी जानकारियां इंडियन एक्सप्रेस की इन्वेस्टिगेशन में सामने आई हैं। जिन दो मामलों में दोषी ठहराए गए, वो रेलवे भर्ती बोर्ड से जुड़े हैं… पहला मामला, 2002: 23 साल बाद सजा, लेकिन सारे दोषियों को जमानत दूसरा मामला, 14 साल बाद सजा, मुख्य आरोपी जमानत पर बाहर सवाल-2: NEET 2026 के मामले में अब तक क्या हुआ है?जवाब: 3 मई 2026 को हुआ NEET-UG एग्जाम पेपर लीक के खुलासे के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया। अभी CBI, राजस्थान SOG और राज्यों की पुलिस जांच कर रही हैं। 13 आरोपी गिरफ्तार हुए। इसमें NTA की पेपर-सेटिंग कमेटी से जुड़े दो एक्सपर्ट भी हैं- पुणे की बायोलॉजी की लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मंधारे और केमिस्ट्री के प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी। एग्जाम करवाने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, NTA ने 21 जून को कड़ी सुरक्षा में दोबारा एग्जाम करवाया। इसका नतीजा भी आ गया है। पेपर लीक में दिल्ली का राउज एवेन्यू कोर्ट सुनवाई कर रहा है। सभी 13 आरोपियों की ज्यूडिशियल कस्टडी 24 जुलाई तक बढ़ा दी गई है। CBI ने अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है और कहा है कि अभी कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। 24 जुलाई को कोर्ट में आरोपियों की हिरासत बढ़ाए जाने पर सुनवाई होनी है। सवाल-3: आखिर पेपर लीक रोकने का कानून और इसकी खामियां क्या हैं? जवाब: जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी के लिए IPC की 420, 120B और 467-471 जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं। हालांकि कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया। ये कानून काफी नहीं थे, 2024 में NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद, 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ नया कानून लागू किया। इसका नाम है- सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम। इस कानून के मुताबिक, पेपर लीक करना, इसमें मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम के लिए कंप्यूटर नेटवर्क वगैरह से छेड़छाड़, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी जैसे कामों को सजा के दायरे लाया गया है। ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, जिनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है- सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं है। कानूनी प्रक्रिया, कोर्ट में सुनवाई के दौरान लूपहोल्स का फायदा उठाकर अपराधी बच निकलते हैं। इसके कुछ उदाहरण देखिए… 2006: रेलवे पेपर लीक, यूपी के 2 विधायक आरोपी 2015: UPPSC प्री एग्जाम, अब तक जांच अधूरी 2016: यूपी PSC, RO/ARO भर्ती, क्लोजर रिपोर्ट पर कोई सुनवाई नहीं लखनऊ के सेंटर पर पेपर लीक हुआ। जांच के बाद CB-CID ने 2018 में क्लोजर रिपोर्ट दी। हालांकि जब कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया, तो एजेंसी ने दूसरी क्लोजर रिपोर्ट दी।इस पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। 2016: कर्नाटक PUC, सभी आरोपी बरी कर्नाटक ‘प्री यूनिवर्सिटी कोर्स’ पेपर लीक में सीनियर ऑफिसर्स सहित 19 लोग गिरफ्तार हुए।हालांकि 2024 में बेंगलुरु सेशन कोर्ट ने जांच में गंभीर खामियों का हवाला देकर सबको बरी कर दिया। 2021: राजस्थान सब-इंस्पेक्टर भर्ती, अधिकारी को जमानत 2025 में राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन, RPSC के अंदरूनी लोगों ने ही पेपर लीक करवाया।आरोपी RPSC मेंबर रामू राम नायका जमानत पर हैं। बाकी दो मेंबर- मंजू शर्मा और संगीता आर्या ने इस्तीफा दे दिया। उन्हें कोई सजा नहीं हुई। 2024: NEET-UG, CBI कोर्ट में सुनवाई जारी सवाल-4: क्या फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से पेपर लीक की दिक्कतें दूर हो जाएंगी?जवाब: बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसमें 3 बड़ी अड़चनें हैं… 1. फास्ट ट्रैक कोर्ट पर केंद्र सरकार का सीधा कंट्रोल नहीं फास्ट ट्रैक कोर्ट्स, यानी FTCs को कंट्रोल करने वाला कोई केंद्रीय कानून नहीं है। इन पर राज्य सरकारों का नियंत्रण है। 21 मार्च 2025 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा- ‘FTCs और उनका कामकाज राज्य और UTs और राज्यों के हाई कोर्ट्स के अधीन है।’ आगे कहा गया, ‘संविधान के आर्टिकल 233 के तहत, डिस्ट्रिक्ट, निचली कोर्ट्स और FTCs में जजों की नियुक्ति राज्य के हाई कोर्ट की सिफारिश और राज्य के गवर्नर के अधीन है। इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं है।’ 2. हर मामला तेजी से निपटाना मुश्किल 3. जल्दबाजी से गलत फैसले का खतरा सुप्रीम कोर्ट में वकील विराग गुप्ता कहते हैं, POCSO, ड्रग्स एक्ट और दूसरे गंभीर मामलों में भी जिन फास्ट ट्रैक कोर्ट से जल्द न्याय देने की बात की गई, वो भी व्यावहारिक तौर पर सफल नहीं है। नए क्रिमिनल कानूनों में भी 3 साल के भीतर न्याय की बात है, लेकिन जिला अदालतों में ही सबसे ज्यादा पेंडिंग मामले हैं।’ सवाल-5: इससे पहले जो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए, वो कैसा काम कर रहे?जवाब: देश में अभी 2 तरह के फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं- 1. फास्ट ट्रैक कोर्ट, FTC 2. फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, FTSC भारतीय न्याय संहिता, यानी BNS में सिफारिश है कि मुकदमों का निपटारा 2 साल और यौन अपराधों का निपटारा 2 महीने के अंदर होना चाहिए। वहीं FTSC योजना के तहत टारगेट है कि ये हर 3 महीने में 42 मुकदमों के हिसाब से सालाना 165 मामलों का निपटारा करें। हालांकि तेजी से काम करने के बावजूद फास्ट ट्रैक कोर्ट जरूरत भर मुकदमों की सुनवाई नहीं कर पा रहे… ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अब तक क्यों नहीं हुआ, 5 पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से समझिए; क्या आगे भी नहीं हटाए जाएंगे जंतर-मंतर पर 33 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, सोनम वांगचुक की 25 दिनों की भूख हड़ताल, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और अब देश के सभी जिलों में प्रदर्शन का आह्वान। सभी की एक ही मांग है- शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। पूरी खबर पढ़ें…
कुवैत-इराक के अब्दाली बॉर्डर पर ड्रोन हमला, कोई हताहत नहीं
कुवैत के उत्तरी हिस्से में इराक की सीमा से लगा अब्दाली बॉर्डर क्रॉसिंग ड्रोन हमले का निशाना बना। इस हमले में कुछ सामान को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
पेपर लीक के मुद्दे पर संसद के मानसून सत्र का चौथा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा, जबकि संसद के बाहर भी सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी नारेबाजी देखने को मिली। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमे चलाने का दांव चला। सत्र शुरू होने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। उधर, संसद परिसर में एनडीए सांसदों ने हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और साथी नेताओं के धरने को मुद्दा बनाया। इसी दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी वहां पहुंचीं और एनडीए सांसदों के सामने खड़ी होकर नारेबाजी किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों का सरकार और पूरे सिस्टम से भरोसा उठ चुका है। अगर सरकार को छात्रों पर भरोसा है तो उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों पर लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई। इससे पहले आज लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन महज 2 मिनट बाद ही विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दिए। हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। सदन स्थगित होने के बाद राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत विपक्षी दलों के कई सांसद स्पीकर ओम बिरला से मिलने पहुंचे। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा। सांसद लगातार ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के नारे लगाते रहे। इसके बाद सदन को दोपहर 2 बजे तक और फिर तीसरी बार शुरू होने के कुछ ही मिनट में ही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा में भी दिनभर लगभग यही स्थिति रही। सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। हंगामे के कारण सदन को पहले 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता सदन जेपी नड्डा के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। कुछ ही मिनटों में सदन फिर स्थगित हो गया। दोपहर 2 बजे सदन करीब एक मिनट चला और फिर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। 3 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन लगातार हंगामे के बाद अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस तरह पेपर लीक के मुद्दे पर राजनीतिक टकराव संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह जारी रहा। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें।
जंतर-मंतर पर 33 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, सोनम वांगचुक की 25 दिनों की भूख हड़ताल, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और अब देश के सभी जिलों में प्रदर्शन का आह्वान। सभी की एक ही मांग है- शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। आखिर अब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों नहीं हुआ? हमने यही सवाल 5 पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से पूछा। इसके पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि 4 बड़ी वजहों का गुच्छा है। इन्हें ही समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… रशीद किदवाई और अमिताभ तिवारी का मानना है कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया, तो ‘एक्सेप्टेंस ऑफ गिल्ट’ का संदेश जाएगा। यानी सरकार से गलती हुई है और उसने स्वीकार कर ली है। पीएम मोदी ऐसी मैसेजिंग नहीं देना चाहते। इसीलिए सरकार पेपर-लीक के मुद्दे पर गंभीर और प्रो-एक्टिव दिखना चाहती है… रशीद किदवाई कहते हैं, ‘मोदी सरकार की ऐसी धारणा बनी है कि उसमें मंत्रालय नहीं, सबकुछ पीएमओ से तय होता है। ऐसे में मंत्री ने इस्तीफा दिया, तो ये चर्चा हो सकती है कि पीएमओ की भी गलती है। पीएम मोदी कतई नहीं चाहेंगे कि ऐसा हो।’ निशांत कुमार बताते हैं कि नीति छोटी हो या बड़ी, मामला विदेश से जुड़ा या किसी संकट से निपटने का, कमान सीधे पीएमओ के हाथ में रहती है। ऐसे में मंत्रियों को पूरी तरह जिम्मेदार बनाकर इस्तीफा लेना आसान नहीं है। अमिताभ तिवारी, आशुतोष और निशांत कुमार मानते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न लेने के पीछे ‘द मोदी वे ऑफ पॉलिटिक्स’ है, माने यही पीएम मोदी की पॉलिटिक्स का तरीका है। आशुतोष इसे डिकोड करते हुए कहते हैं, ‘पीएम मोदी विदेश दौरे पर वर्ल्ड लीडर्स से गले मिलते हैं, हैंडशेक करते हैं, झप्पियां पाते हैं और ठहाके लगाते हैं। लेकिन ये चीजें भारत में बहुत कम दिखती है। पीएम मोदी न तो विपक्ष और न ही अपनी पार्टी के नेताओं से ऐसे मिलते हैं। वो यह किसी भी तरह से प्रकट नहीं करना चाहते हैं कि उन्हें कोई दबाव में ला सकता है। ये सब पीएम मोदी की पर्सनैलिटी का हिस्सा है। वो अपनी पार्टी और सरकार के सबसे बड़े नेता हैं। ऐसे में उनका रवैया पूरी सरकार और पार्टी का रवैया बन जाता है।’ निशांत कुमार कहते हैं कि पीएम मोदी कल्ट पॉलिटिक्स के लिए जाने जाते हैं। कल्ट यानी ऐसा व्यक्तित्व जो हारता नहीं। कमजोर नहीं दिखता। इसलिए चाहे परीक्षा पेपर लीक का मामला हो या कोई और आरोप मोदी सरकार न आरोप मानती है, न मंत्रियों के इस्तीफे होते हैं। अमिताभ तिवारी और हर्षवर्धन त्रिपाठी मानते हैं कि सरकार ने अगर मांग मान ली और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया, तो मांगों का पिटारा खुल जाएगा। इसके संकेत भी दिखने लगे हैं… रशीद किदवाई मानते हैं कि बीजेपी सरकार ने पिछली मनमोहन सिंह की सरकार से सीख ली हो, जहां आरोप लगते ही या मांग होते ही मंत्रियों के इस्तीफे हो जाते थे। बीजेपी ये ट्रेंड अपनी सरकार में नहीं लाना चाहती। 2015 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे पर आरोप लगे कि दोनों ने लंदन में रह रहे भगोड़े ललित मोदी की वहां से पुर्तगाल जाने में मदद की है। सुषमा और वसुंधरा के इस्तीफे की मांग होने लगी। तब 24 जून 2015 को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान दिया- 'नहीं… नहीं, इसमें (मोदी सरकार में) मंत्रियों के त्यागपत्र नहीं होते हैं, भैया। यूपीए सरकार नहीं है, ये एनडीए सरकार है।' राजनाथ का यही बयान बीजेपी सरकार का अघोषित नियम बना हुआ है। निशांत कुमार बताते हैं कि मोदी कुशल राजनेता हैं। वे इस्तीफे के डोमिनोज इफेक्ट से बचना चाहते हैं। उन्हें पता है एक मंत्री का इस्तीफा लेते ही दूसरे मंत्रियों के इस्तीफे की मांग तेज हो जाएगी। इनमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी जैसे नाम शामिल हो सकते हैं। ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार कभी झुकी नहीं। 2018 में विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर का इस्तीफा और 2021 में कृषि कानून वापस लेना इसकी मिसाल हैं। लेकिन इस बार हालात कुछ थोड़े बदले हुए हैं। तो क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं ही होगा? --------------- ये खबर भी पढ़िए… लड़की को गलत जगह डंडा मारना, बिना वर्दी वाले लाठीबाज बुलाना; डियर दिल्ली पुलिस, ये 4 हरकतें सिर्फ गैरकानूनी नहीं शर्मनाक भी हैं डियर दिल्ली पुलिस, 20 जुलाई को देश के युवा अपनी मांग के साथ संसद की तरफ जा रहे थे। 5 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी लाठी और आंसू गैस के साथ उन पर टूट पड़े। इस बीच कैमरों पर सुरक्षाबलों की कुछ ऐसी हरकतें भी रिकॉर्ड हो गईं, जो गैरकानूनी होने के साथ किसी प्रोफेशनल पुलिस के लिए बेहद शर्मनाक भी हैं। पूरी खबर पढ़िए…
पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीतिक फिजाओं में एक बार फिर भारी उथल-पुथल के संकेत मिलने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चाएं तेज हो गई हैं कि देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन अपने पांच साल के निर्धारित कार्यकाल से करीब दो साल पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि यह कदम उठाया जाता है तो यह बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना के शासनकाल से जुड़े आखिरी बचे हुए प्रतीकों के खात्मे के रूप में देखा जाएगा।इस्तीफे की अटकलों के पीछे क्या हैं मुख्य वजहें और खुफिया रिपोर्ट्स?बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन के इस संभावित इस्तीफे के पीछे सबसे बड़ा कारण मई महीने में उनकी लंदन यात्रा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से कथित रूप से हुई फोन पर बातचीत को बताया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों तक इस गोपनीय बातचीत की भनक लगने के बाद उच्च स्तर से राष्ट्रपति को पद छोड़ने का कड़ा संदेश मिलने की चर्चा है। इसके अलावा, शेख हसीना के इस साल दिसंबर में देश वापस लौटने के ऐलान के बाद से राजनीतिक माहौल बेहद संवेदनशील हो चुका है। सत्ताधारी गठबंधन और बीएनपी (BNP) नेताओं का मानना है कि राष्ट्रपति का पूर्व सरकार से संपर्क बनाए रखना मौजूदा व्यवस्था के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है।कौन हैं मोहम्मद शाहाबुद्दीन और क्या कहता है बांग्लादेशी संविधान?मोहम्मद शाहाबुद्दीन 1971 के मुक्ति संग्राम के सेनानी और एक पूर्व जिला जज रह चुके हैं। उन्हें अप्रैल 2023 में तत्कालीन अवामी लीग के बहुमत वाली संसद द्वारा पांच साल के कार्यकाल के लिए देश का राष्ट्रपति चुना गया था। पिछले साल अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद जब शेख हसीना की सरकार गिरी और देश छोड़कर भारत आईं, उसके बाद भी शाहाबुद्दीन अपने पद पर बने रहे थे और उन्हें अवामी लीग शासन का आखिरी संवैधानिक अवशेष माना जा रहा था। संविधान के प्रावधानों के मुताबिक, यदि राष्ट्रपति पद छोड़ते हैं, तो नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर अंतरिम रूप से राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालेंगे।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की सुनवाई मामले में जानकारी सामने आई है। एक अमेरिकी जज ने फैसला सुनाया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के मामले में 1 जून, 2027 से ट्रायल शुरू होगा।
10 हाथियों जितना बारूद और तबाही का खौफ: अमेरिका ने ईरान में उतारा कोल्ड वॉर का खतरनाक B-1 बॉम्बर
मध्य पूर्व में सुलग रही जंग की आग अब अपने सबसे खतरनाक और विनाशकारी दौर में पहुंच गई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब खुलकर खूनी संघर्ष का रूप ले चुका है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने अपनी ताकत का ऐसा खौफनाक प्रदर्शन किया है जिसे देखकर पूरी दुनिया के होश उड़ गए हैं। अमेरिका ने ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए शीत युद्ध (Cold War) के दौर के अपने सबसे घातक और शक्तिशाली एयरक्राफ्ट 'B-1 लांसब्रिर' यानी B-1 बॉम्बर को मैदान में उतार दिया है। इस सुपरसोनिक बॉम्बर की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह अपने साथ करीब 10 हाथियों के वजन के बराबर यानी मीट्रिक टन बारूद और विस्फोटक लेकर उड़ने की क्षमता रखता है।क्या है B-1 बॉम्बर की खासियत और क्यों कांप रहे हैं दुश्मन?बी-1 लांसर (B-1 Lancer) अमेरिकी वायुसेना का एक ऐसा भारी-भरकम और सुपरसोनिक बॉम्बर है, जो अपनी भीषण मारक क्षमता और सटीक निशाना साधने के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। शीत युद्ध के समय सोवियत संघ को टक्कर देने के लिए बनाए गए इस विमान को आधुनिक हथियारों और अत्याधुनिक एवियोनिक्स से लैस किया गया है। यह बॉम्बर बिना किसी रोक-टोक के दुश्मन के आसमान में कोहराम मचा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक हथियारों और गाइडेड मिसाइलों का एक ऐसा विशाल जखीरा अपने पेट में छिपाकर चलता है, जो कुछ ही पलों में किसी भी देश के सैन्य ठिकानों, बंकरों और एयरबेस को मलबे के ढेर में बदल सकता है।ईरान के IRGC अड्डों पर अमेरिका की भारी एयरस्ट्राइकअमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम के बाद ईरान समर्थित मिलिशिया और IRGC के ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और बमबारी की गई है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों और सैन्य अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों का जवाब देने के लिए वाशिंगटन ने इस बार सीधे तौर पर रणनीतिक बमवर्षकों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, B-1 बॉम्बर ने अपनी भारी-भरकम मारक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए ईरान से जुड़े रणनीतिक कमांड सेंटर्स, हथियार डिपो और खुफिया ठिकानों को पूरी तरह स्वाहा कर दिया है। इस हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।मध्य पूर्व में तीसरे विश्व युद्ध जैसे मंडरा रहे हैं काले बादलअमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत ने ग्लोबल लेवल पर एक नए युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। जिस तरह से अमेरिका ने अपने सबसे बड़े और विध्वंसकारी बॉम्बर को इस संघर्ष में झोंक दिया है, उससे साफ जाहिर है कि आने वाले दिनों में यह जंग और अधिक भयानक रूप ले सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस तनाव को कूटनीतिक स्तर पर जल्द नहीं रोका गया, तो यह मध्य पूर्व की सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर संकट आ खड़ा हुआ है।
जनरल मुनीर के खौफ के बीच हाफिज सईद के बेटे से मिलने पहुंचे शहबाज शरीफ
पाकिस्तान की सियासत और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के गलियारों से एक ऐसी चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने भारत समेत पूरी दुनिया की एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। देश के हुक्मरान और सेना प्रमुख के बीच एक अजीब सा खौफ और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। सत्ता की डोर संभालने वाले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर आखिर किससे इतना ज्यादा डरे हुए हैं कि उन्हें कुख्यात आतंकवादी और लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के बेटे के दर पर मदद की गुहार लगाने के लिए पहुंचना पड़ा? पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति का यह काला सच अब खुलकर सामने आ रहा है, जहां देश को चलाने के लिए आतंकवादियों के खून-पसीने के रिश्तों और समर्थकों का सहारा लिया जा रहा है।पाकिस्तान की सियासत में क्यों मंडरा रहा है खौफ का साया?मौजूदा समय में पाकिस्तान की सियासत में भूचाल आया हुआ है। एक तरफ देश की चरमराती अर्थव्यवस्था है, तो दूसरी तरफ जनता का गुस्सा और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी का राजनीतिक दबाव सरकार की नींद उड़ाए हुए है। हालात यह हैं कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अपनी ही कुर्सी और सत्ता जाने का डर सताने लगा है। देश के भीतर सुलगते असंतोष को दबाने और अपने विरोधियों का राजनीतिक रूप से सफाया करने के लिए अब हुक्मरानों ने कट्टरपंथी ताकतों और आतंकियों के सामने घुटने टेकना शुरू कर दिया है, ताकि सत्ता की कुर्सी पर किसी तरह आंच न आए।हाफिज सईद के बेटे की शरण में क्यों पहुंचे शहबाज शरीफ?दुनिया भर में अपनी आतंकी गतिविधियों के लिए बदनाम वैश्विक आतंकवादी हाफिज सईद का परिवार एक बार फिर पाकिस्तान के सत्ता के गलियारों के केंद्र में आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना के इशारे पर सत्ता के नुमाइंदे सीधे हाफिज सईद के बेटे से मिलने पहुंचे। इसके पीछे की मुख्य वजह देश के भीतर अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करना और कट्टरपंथी संगठनों का समर्थन हासिल करना है। पाकिस्तान के हुक्मरान अच्छी तरह जानते हैं कि देश में जब भी उनका सिंहासन हिलता है, तो वे धार्मिक और चरमपंथी ताकतों का इस्तेमाल करके जनता का ध्यान भटका सकते हैं और विरोधियों को कुचल सकते हैं।भारत के खिलाफ रची जा रही है कौन सी नई खतरनाक साजिश?पाकिस्तान के हुक्मरानों और आतंकियों की इस गुप्त और शर्मनाक साठगांठ का सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ना तय है। एक तरफ जहां पाकिस्तान आर्थिक बदहाली के आंसू रो रहा है और आईएमएफ (IMF) के सामने भीख मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए आतंकवादियों के बेटों के साथ गुप्त बैठकें कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मेल-मिलाप का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किसी बड़ी साजिश को रचने और देश के भीतर कड़े विरोध को दबाने के लिए किया जा सकता है। पाकिस्तानी हुक्मरानों की यह मजबूरी जगजाहिर हो चुकी है कि वे अपनी सत्ता बचाने के लिए देश को पूरी तरह आतंकवादियों के हवाले करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बड़ा फेरबदल: मायखाइलो ड्रापाती बने नए आर्मी चीफ, रूस ने दी 'कसाई' की उपाधि
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के बीच कीव ने अपनी सैन्य कमान में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने मेजर जनरल मायखाइलो ड्रापाती को देश का नया आर्मी चीफ यानी थल सेना कमांडर नियुक्त किया है। अपनी आक्रामक सैन्य रणनीतियों के लिए पहचाने जाने वाले ड्रापाती की इस नई नियुक्ति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जहां एक तरफ यूक्रेन उन्हें युद्ध के मैदान का एक माहिर खिलाड़ी मानता है, वहीं दूसरी तरफ रूस ने उन्हें आक्रामक रवैये के चलते 'कसाई' तक कह दिया है। कभी ज़ेलेंस्की के फैसलों के विरोध में अपना इस्तीफा तक सौंप चुके ड्रापाती का यह शीर्ष पद तक पहुंचना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।कौन हैं मायखाइलो ड्रापाती और क्यों चर्चा में हैं?मायखाइलो ड्रापाती पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से यूक्रेन की सेना में एक कद्दावर और अनुभवी कमांडर के रूप में जाने जाते हैं। साल 2014 में जब डोनबास क्षेत्र में संघर्ष की शुरुआत हुई थी, तब ड्रापाती ने अपनी सूझबूझ और फ्रंटलाइन लीडरशिप से सबको प्रभावित किया था। उनकी आक्रामक सैन्य शैली और युद्ध के मैदान में लिए जाने वाले त्वरित फैसलों ने उन्हें यूक्रेनी सैनिकों के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया है। यही वजह है कि जब देश की सेना को सबसे ज्यादा एक सख्त और अनुभवी नेतृत्व की जरूरत है, तब ज़ेलेंस्की ने उनपर भरोसा जताया है।रूस ने क्यों दी 'कसाई' की उपाधि?मायखाइलो ड्रापाती की नियुक्ति के साथ ही मॉस्को की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। रूसी मीडिया और सैन्य हलकों में ड्रापाती को 'कसाई' (Butcher) कहकर संबोधित किया जा रहा है। रूस का आरोप है कि ड्रापाती अपनी सैन्य कार्रवाइयों के दौरान अत्यधिक क्रूरता और आक्रामकता का परिचय देते हैं, जिससे दुश्मन सेना के साथ-साथ आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचता है। हालांकि, यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए यही आक्रामक तेवर रूस के खिलाफ जंग जीतने का एक बड़ा जरिया माने जा रहे हैं।कभी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को दे चुके थे इस्तीफाइस नियुक्ति का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मायखाइलो ड्रापाती और राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच के संबंध हमेशा से सहज नहीं रहे हैं। कुछ साल पहले सैन्य रणनीतियों और प्रशासनिक असहमतियों के चलते ड्रापाती ने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया था। उनका वह इस्तीफा इस बात का गवाह था कि वे अपनी शर्तों और सैन्य सिद्धांतों पर समझौता करने के पक्ष में नहीं रहते हैं। हालांकि, मौजूदा युद्ध की विकट परिस्थितियों को देखते हुए दोनों के बीच के गिले-शिकवे दूर हुए और ज़ेलेंस्की ने देश की सबसे बड़ी सैन्य जिम्मेदारी उनके कंधों पर डाल दी है।
ट्रंप से ईरान की दो टूक, तेहरान पर हमला किया तो पूरा पश्चिम एशिया बनेगा निशाना
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताजा चेतावनी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिका उसके नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करता है तो वह पूरे पश्चिम एशिया में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा, जिनमें अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकाने भी शामिल होंगे
टैरिफ बने ट्रंप प्रशासन का नया हथियार
ट्रंप प्रशासन व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि वे अपने बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलें, नियमों का बेहतर पालन करें और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को फिर से मजबूत बनाया जा सके
ईरान को ट्रंप की धमकी: पुल और बिजली संयंत्र होंगे निशाना
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को चेतावनी दी कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर आगे भी हमले किये तो अमेरिका तेहरान सहित ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाकर नष्ट कर देगा
व्यापार वार्ता में अमेरिकी सोडा ऐश पर भारत के प्रस्तावित प्रतिबंध का मुद्दा उठाएगा ट्रंप प्रशासन
ट्रंप प्रशासन ने कहा कि वह भारत सरकार से अमेरिका से आने वाले 'सोडा ऐश' पर प्रस्तावित आयात प्रतिबंधों को लेकर अपनी चिंता जताएगा। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने बुधवार को सांसदों से कहा कि यह मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापक व्यापार वार्ताओं का हिस्सा होगा।
ब्लैकबोर्ड में कहानी- 8 पुलिसवालों की हत्या के बाद एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे की। आज वो बच्चों के साथ दुनिया की नजरों से छिपते-छिपाते जिंदगी जी रही हैं… साल 2020, 2-3 जुलाई की दरमियानी रात। मैं अपने छोटे बेटे के साथ लखनऊ वाले घर पर सो रही थी। बड़ा बेटा उन दिनों छुट्टी पर मॉस्को से इंडिया आया हुआ था और अपनी चाची के घर पर था। रात 2 बजे अचानक फोन बजा। फोन उठाते ही दूसरी तरफ से घबराई हुई आवाज आई- ‘रिचा, तुम बच्चों को लेकर कहीं चली जाओ। जितना जल्दी हो सके घर छोड़ दो।’ वो आवाज मेरे पति विकास दुबे की थी। मैंने पूछा- कहां चली जाऊं, वो भी इतनी रात में, आखिर बात क्या है। वो लगभग चिल्लाते हुए बोले- बिकरू में लड़ाई हो गई है। गोलियां चल गई हैं। तुम लोगों की जान को खतरा है। जो कह रहा हूं, वो करो। ये कहकर विकास ने फोन रख दिया। लड़ाई की बात पर मुझे विकास पर गुस्सा तो बहुत तेज आया। गांव में अक्सर उनकी लड़ाइयां होती रहती थी। मैंने बेटे से गुस्से में कहा- हमें घर छोड़कर जाना पड़ेगा। मैं तंग आ गई हूं तुम्हारे पापा के लड़ाई-झगड़ों से। अब मैं इस आदमी को तलाक दे दूंगी। गुस्से में बड़बड़ाते हुए मैंने अलमारी में रखे 4500 रुपए निकाले। छोटे बेटे को लेकर लखनऊ के आलमबाग बस स्टैंड पहुंच गई। हमारे साथ हमारा कुत्ता भी था। वहां वेटिंग रूम में सोच ही रही थी कि कौन सी बस का टिकट बुक करूं, तभी टीवी में देखा कि विकास ने आठ पुलिस वालों को गोली मार दी है। ये देखते ही मेरी धड़कनें बढ़ गईं। हाथ-पैर कांपने लगे। दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। मैंने अपने बेटे का हाथ कसकर पकड़ लिया और काफी देर वहीं बैठी रही। उस वक्त बड़ा बेटा 21 और छोटा बेटा 13 साल का था। उस दिन से हमारी जिंदगी पूरी तरह बर्बाद हो गई। हम दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गए। गैंगस्टर तो पति था, लेकिन उसके किए की सजा हम भुगत रहे हैं। रिचा दुबे ये बताते हुए रोने लगीं। कुछ देर चुप रहीं फिर बोलीं- विकास की मौत के बाद हमारी प्रॉपर्टी और बैंक खाते सीज कर दिए गए। अपना घर छोड़ना पड़ा। मेरे बच्चों की पढ़ाई छूट गई। उस दिन घर तो छोड़ दिया, लेकिन शहर नहीं छोड़ पाई। दिन में बेटे को लेकर किसी पार्क में बैठी रहती। एक दिन पार्क की तरफ दो पुलिस वालों को आते देखा। मैंने बेटे का हाथ पकड़ा और चुपचाप वहां से उठकर दूसरे पार्क चली गई। डर लगता था कि कहीं पुलिस हमें भी न पकड़ ले। ब्रेड खाकर दिन बिताएं हैं। रात में किसी अधूरी बनी बिल्डिंग में जमीन पर ही सो जाते थे। मुझे आज भी याद है एक रात अपने छोटे बेटे के साथ अधूरी बनी बिल्डिंग में सो रही थी। बेटे को नींद नहीं आ रही थी। कई बार पूछने पर उसने कहा- मुझे भूख लगी है, इसलिए सो नहीं पा रहा। इतने पैसे भी नहीं थे कि बेटे को खाना खिला सकूं। मैंने उसे 50 रुपए दिए और कहा जाकर चाय-बिस्किट ले आ। जितने पैसे थे उसमें तो बस यही आ सकता था। बेटा पैसे लेकर चला गया। उसके जाते ही मैं फूट-फूटकर रोई। मैंने कभी नहीं सोचा था कि बच्चों को ये दिन देखना पड़ेगा। उन्हें खाने के लिए तरसना पड़ेगा। सोचने लगी कि अच्छा हुआ बड़ा बेटा पहले ही अपनी चाची के घर चला गया था। वरना उसे भी भूखे तड़पना पड़ता। खाने के लिए तरसना पड़ता। इधर-उधर भटकते हुए लगभग 8-9 दिन बीत चुके थे। 9 जुलाई की बात है। मैं बेटे के साथ रेलवे स्टेशन पर बैठी थी। वहां टीवी में देखा कि विकास ने उज्जैन के महाकाल मंदिर कैंपस में सरेंडर कर दिया है। विकास के सरेंडर करते ही मैं बेटे को लेकर घर के लिए निकल गई। वहां पहले से ही पुलिस सेंध लगाए बैठी थी। हमें देखते ही पुलिस वाले बोले- ‘बैग को एक तरफ फेंकों और घुटनों के बल हाथ ऊपर करके बैठ जाओ।’ सिर्फ मुझे ही नहीं मेरे बेटे को भी इसी तरह बैठा दिया। उसकी तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखीं। उस वक्त एक मां होने के नाते मैं जो महसूस कर रही थी उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। बेटे को देखकर मन ही मन सोच रही थी कि विकास के किए सजा मेरे बच्चे को मिल रही है। रिचा आगे बताती हैं कि पुलिस वालों ने हमारी तलाशी ली उसके बाद पुलिस स्टेशन ले गए। मैं वहीं विकास का इंतजार करने लगी। कुछ घंटे बीते ही थे तभी एक लेडी पुलिस वाली ने आकर बताया कि विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारे गए। मेरे शरीर से तो जान ही निकल गई थी। उस दिन मुझे समझ आया कि जिंदा लाश होना किसे कहते हैं। तब भी छोटा बेटा मेरे साथ था। बेटे ने उस दिन जो कपड़े पहने थे, घर जाते ही उसे जला दिया। उसे उन कपड़ों से नफरत हो गई। उस दिन के बाद से उसने बोलना बंद कर दिया। आज तक उसे कई बार डॉक्टर के पास ले जाना पड़ता है। उसे कई बार समझाया कि तुम्हारे पापा ने गलत किया था। आठ पुलिस वालों को मारा था। फिर भी वो चुप ही रहता है। रिचा बताती हैं कि जिस वक्त विकास का एनकाउंटर हुआ, तब बड़ा बेटा मॉस्को से एमबीबीएस कर रहा था। उसका आखिरी साल था, लेकिन विकास की मौत के बाद वह वापस नहीं जा सका। उसकी फीस भरने के पैसे नहीं थे। फिर वह दिल्ली में रहकर पढ़ने लगा। विकास की मौत के बाद मैं खुद भी बीमार हो गई। नींद नहीं आती थी। बीपी, शुगर सब बढ़ गया। हर दिन थाने जाना पड़ता। पुलिस वाले घंटों पूछताछ करते। वकीलों के चक्कर लगाती। जो वकील कभी विकास के आगे-पीछे घूमते थे, वो मेरी शक्ल देखकर दूर से ही भाग जाते। साल 2022 तक यही सिलसिला चलता रहा। फिर एक दिन डीएम ऑफिस से एक लेटर आया। उसमें लिखा था कि आपकी पूरी प्रॉपर्टी सीज की जाएगी। अगले दिन एक पुलिस वाला घर आ आया और उसने कहा कि कल ही अपना ठिकाना ढूंढ लो, ये घर खाली कर दो। अगले दिन तेज बारिश हो रही थी। छोटे बेटे के साथ किराए का मकान ढूंढने निकल पड़ी। लखनऊ का चप्पा-चप्पा घूम लिया, लेकिन घर तो दूर किसी ने किराए पर एक कमरा तक नहीं दिया। तब बड़े बेटे को बताया कि यहां रहने का कोई ठिकाना नहीं मिल रहा। उसने हमें दिल्ली बुला लिया। हम सब दिल्ली में एक ही कमरे में रहते थे। खाना पकाने के लिए सिर्फ एक इंडक्शन और एक कढ़ाई थी। उसी में खाना बनाते थे। कई महीने तो केवल दाल-चावल बनता था। वो भी भरपेट नहीं। एक दिन घर में केवल इतना चावल बचा था कि दो लोग खा सकें। मैंने सोचा कम से कम बच्चों का पेट तो भर ही जाएगा। दाल-चावल बनते ही मैंने बच्चों को परोस दिया। कुछ देर बाद बच्चे बोले- मम्मी खाना नहीं खाओगी क्या। तब मैंने कह दिया आज भूख नहीं है, तुम लोग खा लो। एकबार कोरियर वाल पार्सल लेकर आया था। घंटी बजी तो बेटा इतना घबरा गया कि खुद को कमरे में बंद कर लिया। पूरा दिन अंदर ही बंद रहा। शाम में बड़ी मुश्किल से समझाकर उसको बाहर निकाला। उसकी हालत भी ठीक नहीं है। ज ब घर की घंटी बजती है तो वह डर जाता है। अगर कोई एक से ज्यादा बार घंटी बजा दे तो उसकी हालत खराब हो जाती है। वो कमरे से बाहर ही नहीं निकलता। हमारे घर में विकास का कोई फोटो नहीं है। न ही कोई उनका नाम लेता है। बच्चों के पास विकास का लाया हुआ एक भी सामान नहीं। रिचा बताती हैं कि जब हमारे पास गुजारा करने के पैसे नहीं बचे तो दोनों बेटों ने छोटी-मोटी नौकरियां ढूंढ़ी। अब दोनों अलग-अलग शहरों में हैं। अपनी पहचान भी छिपाकर रखते हैं। जब भी हम तीनों घर पर होते हैं, हमारी आपस में कोई बात नहीं होती। विकास की मौत के बाद अखबारों में मेरे लिए जाने क्या-क्या छपा। किसी ने छापा- अब बिकरू की कमान रिचा के हाथ रहेगी, रिचा बंदूक उठाएंगी। जिसे देखो वो मेरे बारे में लिख रहा था। किताबें छप गई, फिल्में बन गईं। मेरी दिमागी हालत और बिगड़ने लगी। लगता था कि बीपी बढ़ा हुआ। हमेशा मन में घबराहट होती। ऐसे लगता कि मरने पर सब ठीक हो जाएगा। छोटे-मोटे इलाज से फर्क नहीं पड़ा तो मेदांता अस्पताल में दिखाना पड़ा। रिपोर्ट में कुछ नहीं आया। डॉक्टरों ने काउंसलिंग की सलाह दी। पहले तो मैंने डॉक्टर से भी अपनी पहचान छिपाई, लेकिन बाद में सच बताना पड़ा। विकास का नाम सुनते ही डॉक्टर चौंक गए। कहने लगे कि रोज-रोज यहां आना मंहगा पड़ेगा। ऑनलाइन काउंसलिंग लीजिए। मैंने काफी दिनों तक ऑनलाइन काउंसलिंग ली। आज भी जब आंखें बंद करती हूं तो सारा मंजर सामने आता है। विकास की मौत से पहले का और बाद का भी। पत्नी होने के नाते सभी मामलों में सारी जांचे मेरे ही ऊपर आईं। ईडी, इनकम टैक्स और तमाम झूठे मुकदमें। विकास मुझसे 8-10 साल बड़े थे। मेरे भाई के दोस्त थे। घर आना-जाना था। धीरे-धीरे हमें एक दूसरे से प्यार हो गया। वो ब्राह्मण थे और मैं कायस्थ। परिवार इस शादी के लिए राजी नहीं हुआ। छह-सात साल के रिलेशन के बाद साल 1996 में हमने कोर्ट मैरिज कर ली। साल 2022 में हमारी 25वीं सालगिरह थी। विकास ने वादा किया था कि हम दोबारा शादी करेंगे। उन्होंने कहा था कि तुम लहंगा पहनना, मेहंदी लगाना, मैं घोड़ी पर आऊंगा और हम अपने सारे शौक पूरे करेंगे। जिस दिन हमारी एनिवर्सरी थी उस दिन तो रो रोकर मेरा बुरा हाल हो गया था। कोर्ट कचहरी के खर्च उठाने के लिए जेवर बेचने पड़े। दो सोने के कड़े, दो मंगलसूत्र, अंगूठियां बेचकर वकील की फीस भरी। बहुत मायूस होकर रिचा कहती हैं कि बच्चों की पढ़ाई नहीं रोकनी चाहिए थी। बच्चे अगर गुंडई बदमाशी करते तो उनको वैसी सजा दी जाती। बच्चे पढ़ने वाले थे, मैं मानती हूं कि विकास ने गलती की, लेकिन उसकी सजा बच्चों को नहीं देनी चाहिए थी। रिचा कहती हैं कि विकास ने जो भी किया, मुझे उसका पछतावा है। उसने जिन आठ पुलिसवालों को गोली मारी, मैं उनके परिवार से हाथ जोड़कर माफी मांगती हूं। अगर विकास ने मुझे बताया होता कि उसने पुलिस वालों को गोली मार दी है, तो मैं उस दिन घर छोड़ती ही नहीं। मेरा तो विकास से झगड़ा ही केवल गांव की सियासत को लेकर होता था। कितनी बार उनको समझाया कि ये सब छोड़ दो। डर था कि कोई बच्चों को नुकसान न पहुंचा दे। मुझे हमेशा इस बात का अफसोस रहेगा कि विकास ने अगर मेरी थोड़ी सी भी सुनी होती तो आज जिंदगी कुछ और होती। गांव छोड़कर कानपुर रहने लगी। फिर बाद में बच्चों के साथ लखनऊ रहने लगी। लेकिन विकास बिकरू में ही रहे। कई बार विकास ने कहा कि मैं बच्चों के साथ रहूंगा, उन्हें स्कूल छोड़ने जाऊंगा। फिर गांव से कोई फोन आता, ये फिर चले जाते। महीनों-महीनों वहीं रहते। पति जब थे तब भी जिंदगी मुश्किल थी, उनके जाने के बाद और ज्यादा मुश्किल हो गई। मुश्किल से आंसू रोकते हुए रिचा कहती हैं कि विकास की लड़ाइयां कभी मुझ तक नहीं पहुंचीं। उस दिन भी अगर में बिकरू में होती तो ये सब न होता। शायद ये सुनकर लोग मुझपर हसेंगे, लेकिन वे मुझसे डरते थे। कभी बहस हो जाती थी, तो मैं फोन बंद कर लेती थी। विकास घबरा जाते थे। विकास को मेरे लंबे बाल बहुत पसंद थे। उनसे कुछ भी करवाने के लिए मैं बाल कटवा लेने की धमकी देती थी। उनके जाने के बाद मैंने सबसे पहले बाल कटवा दिए। मैं तो सिर मुंडवा लेना चाहती थी, लेकिन बच्चों ने रोक लिया। विकास अगर जिंदा होते तो मैं उन्हें थप्पड़ मारती और तलाक दे देती। उन्हें पता चलता कि परिवार से दूर होने का दर्द क्या होता है। मैं चाहती हूं कि मेरा लखनऊ वाला घर खुल जाए, सिर्फ इसलिए कि मेरे भगवान वहीं है। बारिश में घर छोड़ते वक्त उन्हें वहीं छोड़ आई थी। मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि 25 साल की पूजा का मुझे क्या फल मिला। विकास के एनकाउंटर के बाद कई किताबें लिखी गईं। संजीव मिश्रा ने तो किताब में बेडरूम तक की बातें लिख दीं। सब गलत है। कल को बच्चे सुनेंगे तो क्या सोचेंगे… विकास ने जो किया, उसके लिए मैं पत्नी होने के नाते सभी से माफी मांगती हूं। हर पुलिस वाले के परिवार से माफी मांगती हूं। वे मेरे पति थे, मैं इस सच को झुठला नहीं सकती। मैं शादी से खुश थी, पर उनके कर्मों से नाराज हूं। मैं किसे दोषी ठहराऊं। शायद ये मेरे ही कर्मों का फल है। ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-दूसरे के बच्चे धोखे से मेरी कोख में डाल दिए:शक्ल-सूरत नहीं मिली तो DNA करवाया, आखिर कहां गए मेरे बच्चे कहानी ऐसे पति-पत्नी की जिनकी दो बेटियां हैं। इन्होंने एकबार फिर मां-बाप बनने का फैसला किया, लेकिन उम्र आड़े आ गई। डॉक्टर ने सलाह दी- ‘IVF आजमाइए।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- तानों से परेशान होकर ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया:ऑडिशन वाले कहते थे- तुम्हारा फिगर ठीक नहीं, अब आधी कमाई सर्जरी की EMI में जा रही एकबार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। वहां मुझे ट्रायल के लिए एक बिकिनी दी गई। 10-15 मर्दों के सामने जैसे ही बिकिनी पहनकर बाहर आई, तो सब हंसने लगे। कहने लगे- 'अरे मैडम, ये सब आपके लिए नहीं है। आप तो एकदम फ्लैट हैं।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
तारीख: 22 जुलाई, वक्त करीब 12 बजे। दिल्ली में BJP हेडक्वॉर्टर के 5वें फ्लोर पर पार्टी के महामंत्री जुटने शुरू हुए। 15-20 मिनट के अंदर आठों महामंत्री एक साथ थे। उनके अलावा भी कई पदाधिकारी भी पहुंच गए। मसला कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट से बना माहौल था। BJP में हमारे सूत्र बताते हैं कि प्रोटेस्ट तो एक महीने से चल रहा है, लेकिन इस पर पहली बार BJP ऑफिस में बैठक हुई। वो भी शॉर्ट नोटिस पर। 3 घंटे तक चली इस मीटिंग में प्रोटेस्ट के असर को खत्म करने की स्ट्रैटजी पर बात हुई। जमीन और वर्चुअल, दोनों जगह इसे काउंटर करने का प्लान तैयार किया गया। ये भी साफ कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। दो चूक भी मानी कि कांग्रेस का प्रधानमंत्री आवास पर धरने की भनक नहीं लगी और जंतर-मंतर पर भीड़ का अंदाजा नहीं लग पाया। मीटिंग के बीच ही देशभर के कार्यकर्ताओं तक मैसेज पहुंचा दिया गया कि ब्रेन स्टॉर्मिंग करें। प्रोटेस्ट और राहुल गांधी के खिलाफ क्रिएटिव और मजबूत स्लोगन तैयार करें। इस प्रोटेस्ट से पार्टी में माहौल बहुत ज्यादा गरम है। 10 बजे मैसेज, दो घंटे में हेडक्वॉर्टर पहुंचे सभी महामंत्री सुबह 10 बजे के बाद BJP ऑफिस से पार्टी के सभी महामंत्रियों और कुछ पदाधिकारियों के पास मैसेज गया। सभी को दोपहर 12 बजे तक पहुंचने के लिए कहा गया। मीटिंग की अध्यक्षता नितिन नवीन ने की। शुरुआत में ही उन्होंने साफ कर दिया कि ये मामला पेचीदा है, लेकिन 3-4 दिन के अंदर सब साफ करना है, खत्म करना है। सरकार के खिलाफ बने माहौल और विपक्ष की घेराबंदी तोड़ना है। इसका काउंटर नरेटिव तैयार करना ही होगा। काउंटर नरेटिव की स्ट्रैटजी में क्या है… 1. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया। ये संविधान का उल्लंघन है। अब कांग्रेस के ऑफिस के बाहर BJP कार्यकर्ता धरना देंगे। नारे लगाएंगे- PM के प्रोटोकॉल से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं। इसी तरह के कुछ और स्लोगन भी हो सकते हैं। 2. देशभर में संगठन के अलग-अलग विंग जैसे युवा, महिला, किसान मोर्चा रैली निकालेंगे, प्रोटेस्ट करेंगे। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध की कोशिश इसका मुद्दा होगा। जमीन पर ये मैसेज देने की कोशिश की जाएगी कि प्रोटेस्ट अराजक हाथों में था। 3. 20 जुलाई को PM मोदी को संसद से सुरक्षित निकालने की खबर आई थी। इस पर कांग्रेस ने उन्हें कायर कहा। इस पर सोर्स बोले, ‘आप ही बताएं, जिस तरह से भीड़ अराजक थी, क्या नेपाल-2 की आशंका नहीं थी।’ इससे साफ हो गया कि PM के खिलाफ लगे कायर होने के नारों को इस आशंका के जरिए खत्म किया जाएगा। 4. इंटेलिजेंस के इनपुट को सामने लाया जाएगा कि ये प्रोटेस्ट नहीं, साजिश थी। बिल्कुल नेपाल की तरह मौजूदा सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ। 5. सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के समर्थन, BJP के स्टैंड को सपोर्ट करते हुए कैंपेन चलाए जाएंगे। 6. प्रोटेस्ट में शामिल हुए अराजकतत्वों की कुंडली खंगालकर सबके सामने रखी जाएगी। मतलब ये प्रोटेस्ट स्टूडेंट्स से ज्यादा अराजक भीड़ के हाथ में था। आने वाले कुछ दिनों में ये प्रूफ किया जाएगा। 7. RSS सीधे तो नहीं, लेकिन उससे जुड़े बजरंग दल और विश्व हिंदू संगठन प्रोटेस्ट के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। RSS ने इस मामले में अब तक कोई दखल नहीं दिया है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उसका रुख साफ है कि इस्तीफा नहीं लिया जाना चाहिए। सोर्स कहते हैं कि इसकी वजह प्रधान की शिक्षा व्यवस्था में RSS की सलाह और कार्यकर्ता सर्वोपरि हैं। स्मृति ईरानी के समय में RSS इस व्यवस्था से दूर था। तय हुआ कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे सोर्स ने बताया, ‘बैठक में प्रोटेस्ट के सबसे अहम किरदार धर्मेंद्र प्रधान पर स्पष्ट बात हुई। अध्यक्ष ने साफ कहा कि इस्तीफा अभी तो नहीं होगा क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो प्रोटेस्ट की कामयाबी पर मुहर लग जाएगी। इस बारे में शीर्ष नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि प्रधान पद पर बने रहेंगे।’ दो चूक: कांग्रेस का प्लान नहीं समझ पाए, भीड़ का अंदाजा नहीं हुआ बैठक में पार्टी और इंटेलिजेंस के लेवल पर हुई चूक को भी स्वीकारा गया। प्रोटेस्ट इस रूप में आएगा, इसके आकलन में पार्टी से चूक हुई। विपक्षी पार्टियां खासतौर पर कांग्रेस प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देगी, इसका अंदाजा नहीं लगा। दूसरे राज्यों से पार्टी के CM और नेता दिल्ली में जमा हुए इसकी सूचना मिली, लेकिन उनके आने का मकसद नहीं समझ पाए। कांग्रेस के इस प्लान की भनक पार्टी को नहीं लगी। दूसरी और सबसे बड़ी चूक इंटेलिजेंस के लेवल पर हुई। जंतर-मंतर पर इतनी भीड़ आएगी, विपक्षी पार्टियां क्या प्लान कर रही हैं, इसका इनपुट इंटेलिजेंस के पास नहीं था। बैठक में कहा गया इस बारे में हाईकमान इंटेलिजेंस से बात कर रहा है।
केन्या : सोने की खदान में हादसा, सुरंग ढहने से पांच खनिकों की मौत, कई के फंसे होने की आशंका
दक्षिण-पश्चिमी केन्या के नारोक काउंटी में एक सोने की खदान ढहने से कम से कम पांच खनिकों की मौत हो गई। इस घटना की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने मृतकों की पुष्टि भी की।
जॉर्डन के अमेरिकी एयर बेस पर हमले में भारतीय मूल की अमेरिकी सार्जेंट लापता, मौत की आशंका
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के मुताबिक, भारतीय मूल की अमेरिकी सैनिक एंजेला रामप्रसाद के जॉर्डन में एक सैन्य अड्डे पर हुए ईरानी हमले में मारे जाने की आशंका है।
म्यांमार में बाढ़ का अलर्ट: चिंडविन नदी खतरे के निशान पर, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
म्यांमार के मौसम विज्ञान और जल विज्ञान विभाग (डीएमएच) ने बुधवार को सागाइंग क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बाढ़ की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की
देश की कंपनियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी तरीकों का इस्तेमाल करने का पूरा समर्थन : चीन
20 जुलाई को, यूरोपीय आयोग ने यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट के तहत चीनी कंपनी अलीएक्सप्रेस पर 55 करोड़ यूरो का जुर्माना लगाने की घोषणा की। इस पर चीनी पक्ष की क्या टिप्पणी है?
डिजिटल इंटेलीजेंस युग में वैश्विक साइबर शासन पर चीन के पक्ष का दस्तावेज जारी
संयुक्त राष्ट्र वैश्विक साइबर सुरक्षा स्थाई तंत्र की पहली बैठक 20 से 24 जुलाई तक न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में चल रही है। चीनी प्रतिनिधि मंडल ने इस तंत्र के सामने डिजिटल इंटेलीजेंस युग में वैश्विक साइबर शासन पर चीन के पक्ष का दस्तावेज पेश किया।
मानसून सत्र के तीसरे दिन भी संसद के दोनों सदनों में NEET पेपर लीक और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा छाया रहा। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और मामले पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया। इसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही काले कपड़े पहने विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर ओम बिरला ने करीब डेढ़ मिनट में सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने NEET पेपर लीक पर चर्चा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगाया। इस दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक टाल दी गई। दोपहर 2 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठा और सदन पहले 12 बजे, फिर 2 बजे तक स्थगित हुआ। दोपहर बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बिना निष्पक्ष चर्चा संभव नहीं है। जवाब में नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदार बताया। बाद में उपसभापति हरिवंश ने गतिरोध खत्म कर चर्चा शुरू करने की अपील की, लेकिन विपक्ष ने नियम 267 के तहत तत्काल चर्चा की मांग दोहराई। सहमति नहीं बनने पर राज्यसभा की कार्यवाही भी अगले दिन तक स्थगित कर दी गई। उधर, संसद परिसर के बाहर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो दिखाए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसी बीच लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर संवाद की अपील की, जबकि छात्रों के संगठन ने भी सरकार से जंतर-मंतर आकर बातचीत करने का आग्रह किया। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेन ने बुधवार को रूस के कई अहम सैन्य और लॉजिस्टिक्स ठिकानों और तेल भंडार केंद्रों को पर लंबी दूरी के हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद रूस पर दबाव बनाकर उसे कूटनीति और शांति की राह पर लाना है।
मनीला में विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर का विभिन्न देशों के अपने समकक्षों से मुलाकात का सिलसिला जारी है। इसी के तहत वो अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग से मिले।
गाजा में इजरायल बना रहा 17 किमी लंबी मिट्टी की दीवार, 'पीली रेखा' पर बढ़ी सैन्य मौजूदगी
उपलब्ध उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, इस परियोजना का काम फरवरी 2026 में शुरू हुआ था। अब तक लगभग 11 किलोमीटर लंबी मिट्टी की दीवार तैयार की जा चुकी है। योजना के मुताबिक, यह दीवार दक्षिण में खान यूनिस से लेकर उत्तर में गाजा शहर के बाहरी क्षेत्र तक बनाई जाएगी।
12वीं मंजिल से नीचे गिरा शख्स फिर भी बच गई जान, लेकिन नीचे टहल रही महिला के ऊपर गिरते ही हो गई मौत
एक ऐसी हैरान और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जिसे सुनकर कानून, विज्ञान और आम इंसान सब हैरान हैं। बहुमंजिला इमारत की 12वीं मंजिल से एक शख्स अचानक नीचे गिर गया। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद जहां किसी के भी बचने की उम्मीद ना के बराबर होती है, वहां वह शख्स चमत्कारिक रूप से जिंदा बच गया। लेकिन इस हादसे का सबसे दुखद और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जब वह नीचे गिरा, तो वहां टहल रही एक बेकसूर महिला उसके नीचे दब गई और उसकी दर्दनाक मौत हो गई।कुदरत का अजीब न्याय? मौत के मुंह से जिंदा लौट आया शख्सयह हैरान करने वाला वाकया एक रिहायशी सोसाइटी में उस वक्त हुआ जब अचानक 12वीं मंजिल की बालकनी से एक व्यक्ति का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे आ गिरा। इतनी ऊंचाई से गिरने की वजह से हवा में उसकी रफ्तार बहुत तेज थी। जमीन पर गिरते ही वहां चीख-पुकार मच गई। डॉक्टरों और चश्मदीदों के मुताबिक इस शख्स को गंभीर चोटें जरूर आई हैं और वह अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है, लेकिन उसकी धड़कनें चल रही हैं और उसकी जान पूरी तरह से सुरक्षित है। इस चमत्कार को देखकर हर कोई हैरान है कि 12वीं मंजिल से गिरने के बाद भी कोई कैसे जिंदा रह सकता है।बेकसूर महिला के लिए काल बन कर गिरा आसमान से शख्सइस हैरतअंगेज हादसे में किस्मत का सबसे क्रूर चेहरा तब देखने को मिला जब वह शख्स सीधे जमीन पर न गिरकर, नीचे वॉक कर रही एक महिला के ऊपर जा गिरा। महिला को संभलने का एक सेकंड का भी मौका नहीं मिला और भारी वजन व तेज रफ्तार के दबाव के कारण वह गंभीर रूप से चोटिल हो गई। मौके पर मौजूद लोग तुरंत दोनों को लेकर नजदीकी अस्पताल भागे, जहां डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। महिला रोजाना की तरह वहां शाम को टहलने निकली थी और उसे अंदाजा भी नहीं था कि आसमान से गिरती हुई कोई आफत उसकी जिंदगी छीन लेगी।क्या यह सिर्फ एक हादसा है या लापरवाही? पुलिस जांच में जुटीइस सनसनीखेज मामले के बाद दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और लखनऊ समेत देश के तमाम हाई-राइज सोसायटियों के निवासियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीमें इस बात की बारीकी से जांच कर रही हैं कि आखिर वह शख्स 12वीं मंजिल से नीचे कैसे गिरा? क्या यह कोई आत्महत्या का प्रयास था, पैर फिसलने का हादसा था या फिर इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही थी? पुलिस ने सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि इस खौफनाक हादसे की असली वजह सामने आ सके।
हजारों साल पुराना रहस्यमयी ‘ममी मास्क’ मिला, सिर पर मौजूद हैं असली इंसानी बाल
पुरातत्व और विज्ञान की दुनिया से एक ऐसी हैरान और कँपकँपी पैदा कर देने वाली खोज सामने आई है, जिसने वैज्ञानिकों से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं। हाल ही में खुदाई के दौरान शोधकर्ताओं को हजारों साल पुराना एक प्राचीन 'ममी मास्क' (Mummified Mask) मिला है। यह मास्क आम प्राचीन कलाकृतियों जैसा बिल्कुल नहीं है। इस मास्क की बनावट और इस पर मौजूद इंसानी अंगों के अवशेषों ने इसे दुनिया की सबसे रहस्यमयी और डरावनी खोजों की लिस्ट में शामिल कर दिया है, जिसे देखने वालों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं।सिर पर लगे इंसानी बाल और चेहरे की वो अजीबोगरीब मुस्कानइस ममी मास्क की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके सिर वाले हिस्से पर आज भी असली इंसानी बाल (Real Human Hair) मौजूद हैं, जो हजारों साल बीत जाने के बाद भी पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं। लेकिन जो चीज़ इस मास्क को सबसे ज्यादा खौफनाक बनाती है, वह है इसके चेहरे पर उकेरी गई एक रहस्यमयी स्माइल। इस चेहरे की बनावट और मुस्कुराहट को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह प्राचीन ममी आज भी जीवित हो और किसी गहरी साजिश की तरह मुस्कुरा रही हो। इतिहास और पैरानॉर्मल रिसर्चर्स का मानना है कि इस मास्क की बनावट इतनी सजीव और डरावनी है कि इसे करीब से देखने के बाद कमजोर दिल वालों की रातों की नींद उड़ सकती है।प्राचीन सभ्यताओं के किस खौफनाक रहस्य से जुड़ा है यह मास्क?पुरातत्वविदों (Archaeologists) की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इस मास्क का इस्तेमाल किसी खास धार्मिक अनुष्ठान या शव को दफनाने की रहस्यमयी परंपरा के दौरान किया जाता था। प्राचीन काल में ममी बनाने की प्रक्रिया के दौरान मृत व्यक्ति की आत्मा को सुरक्षित रखने और उसे दूसरी दुनिया में राह दिखाने के लिए ऐसे सजीव मास्क चेहरे पर लगाए जाते थे। इस मास्क पर असली इंसानी बालों का मिलना यह दर्शाता है कि शायद यह किसी बेहद शक्तिशाली राजा, पुरोहित या फिर किसी ऐसे व्यक्ति का हो सकता है जिसके शव को सहेजने के लिए उस दौर के तांत्रिकों या वैज्ञानिकों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रयोगशाला में कार्बन डेटिंग के जरिए अब इसके सटीक समय और इसके इतिहास का पता लगाया जा रहा है।वैश्विक पुरातत्व जगत में हलचल, भारत समेत दुनिया भर के वैज्ञानिक हैरानइस खोज की खबर जंगल की आग की तरह पूरी दुनिया में फैल गई है। दिल्ली, मुंबई और उत्तर प्रदेश (Lucknow) समेत भारत के प्रमुख ऐतिहासिक शोध संस्थानों में भी इस खोज को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है। भारतीय पुरातत्व के जानकार भी इस प्राचीन तकनीक को समझने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं कि आखिर हजारों साल तक इंसानी बाल और चेहरे के हाव-भाव कैसे इतने सुरक्षित रह सकते हैं। एआई सर्च इंजनों और सोशल मीडिया पर यह 'ममी मास्क' इस वक्त सबसे बड़ा ट्रेंडिंग टॉपिक बन चुका है, और लोग इस रहस्यमयी प्राचीन सभ्यता के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए उत्सुक हैं।
वैश्विक रक्षा और सामरिक गलियारों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने सुपरपावर अमेरिका की मिलिट्री स्ट्रैटेजी और हथियारों की क्षमता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। दुनिया की सबसे आधुनिक और ताकतवर सेना होने का दावा करने वाले अमेरिका को अब मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान के आक्रामक रवैये और उसकी उन्नत ड्रोन-मिसाइल तकनीक के सामने नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ताजा खुफिया और सैन्य रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान की काउंटर-रणनीति के आगे अमेरिकी रक्षा प्रणालियां उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं जैसी उम्मीद की जा रही थी, जिसके चलते अब वाशिंगटन को यूक्रेन के युद्धक्षेत्र से मिले अनुभवों और इनपुट्स का सहारा लेना पड़ रहा है।ईरान की उन्नत ड्रोन-मिसाइल तकनीक के सामने अमेरिकी एयर डिफेंस पर उठे सवालबीते कुछ समय में ईरान ने अपनी स्वदेशी मिसाइल तकनीक और कामिकेज़ (आत्मघाती) ड्रोन्स की क्षमता को बेहद घातक स्तर पर पहुंचा दिया है। खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर में अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगियों पर हुए हमलों ने यह साबित किया है कि ईरान के सस्ते लेकिन अत्यधिक प्रभावी ड्रोन्स को रोकने में अमेरिका के महंगे पैट्रियट (Patriot) और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम्स को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान की इस झुंड-हमला (Swarm Attack) रणनीति ने अमेरिकी मिलिट्री टेक की कमियों को उजागर कर दिया है, जिससे वैश्विक मंच पर वाशिंगटन की साख को बड़ा झटका लगा है।यूक्रेन से सैन्य इनपुट्स और हथियारों के अनुभवों को साझा करने की आई नौबतइस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह आया है कि अमेरिका अब यूक्रेन के युद्धक्षेत्र से मिले डेटा और सैन्य इनपुट्स पर निर्भर होने लगा है। यूक्रेन पिछले काफी समय से रूसी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ईरानी ड्रोन्स (जैसे शाहेद-136) का सामना कर रहा है और उसने इन हवाई खतरों को मार गिराने की कुछ बेहद प्रभावी और कम खर्चीली तकनीकें विकसित की हैं। अमेरिकी सेना अब यूक्रेन के इसी अनुभव, काउंटर-ड्रोन डेटा और युद्ध रणनीति का बारीकी से अध्ययन कर रही है ताकि मिडिल ईस्ट में अपने हथियारों को ईरान के खिलाफ अपग्रेड कर सके। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एक सुपरपावर का इस तरह यूक्रेन के युद्ध डेटा पर निर्भर होना उसकी वर्तमान तैयारियों की पोल खोलता है।भारत और एशियाई देशों की सुरक्षा पर क्या होगा इसका सीधा असर?इस सैन्य गतिरोध का प्रभाव सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि नई दिल्ली, मुंबई और पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा रणनीतियों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। भारत हमेशा से ही अपनी रक्षा जरूरतों के लिए हथियारों के विविधीकरण (Diversification) पर जोर देता रहा है। अमेरिका के रक्षा उपकरणों में दिख रही इन कमियों के बाद, भारतीय सैन्य रणनीतिकार अब स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम (जैसे इंद्रजाल) और रूस-यूरोप के साथ रक्षा करारों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पश्चिमी देशों की सैन्य तकनीक के इस इम्तिहान ने वैश्विक बाजार में हथियारों की होड़ को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां अब महंगे से ज्यादा प्रभावी हथियारों की मांग बढ़ गई है।
महाशक्ति अमेरिका और सऊदी अरब में हुई ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील, मिडिल ईस्ट में बदला सत्ता का समीकरण
ग्लोबल पॉलिटिक्स और मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका और खाड़ी के दिग्गज सऊदी अरब के बीच एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील (परमाणु समझौता) पर सहमति बन गई है। इस समझौते के बाद अब खाड़ी देशों में शक्ति का संतुलन पूरी तरह बदलने वाला है। इस डील को न सिर्फ रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि इसने इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।न्यूक्लियर डील के पीछे क्या है वॉशिंगटन और रियाद का बड़ा प्लान?इस ऐतिहासिक परमाणु समझौते के तहत अमेरिका अब सऊदी अरब को असैन्य परमाणु तकनीक (Civil Nuclear Technology) ट्रांसफर करेगा। इसके साथ ही सऊदी अरब को अपने देश में ही यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की तकनीकी सहायता मिलने का रास्ता भी साफ हो सकता है। जानकारों का कहना है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर एक नई दिशा में ले जाना चाहते हैं। वहीं, जो बाइडन प्रशासन इस डील के जरिए मिडिल ईस्ट में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को पूरी तरह से काउंटर करना चाहता है, जिससे अमेरिकी वर्चस्व कायम रहे।पाकिस्तान के लिए क्यों लगा तगड़ा झटका और पत्ता साफ होने का डर?इस न्यूक्लियर डील का सबसे बड़ा और सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ता दिख रहा है। अब तक पाकिस्तान खुद को सऊदी अरब के सबसे करीबी सैन्य और परमाणु सुरक्षा कवच के रूप में पेश करता आया था। इतिहास गवाह है कि सऊदी अरब की वित्तीय मदद के दम पर ही पाकिस्तान ने अपना परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाया था, और बदले में वह सऊदी को सुरक्षा की गारंटी देता था। लेकिन अब अमेरिका के सीधे मैदान में आ जाने से सऊदी अरब की पाकिस्तान पर सैन्य और तकनीकी निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब से मिलने वाली मदद और उसकी कूटनीतिक अहमियत अब लगभग शून्य होने के कगार पर पहुंच गई है।भारत के लिए क्या हैं इस डील के मायने और लोकल इंपैक्ट?इस बड़ी ग्लोबल डील का असर दिल्ली, मुंबई और उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत के रणनीतिक हितों पर भी देखने को मिलेगा। भारत और सऊदी अरब के रिश्ते हाल के दिनों में बेहद मजबूत हुए हैं, खासकर ऊर्जा और सुरक्षा के मोर्चे पर। अमेरिका-सऊदी की यह नजदीकी खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लाएगी, जिससे वहां काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों और भारत के कच्चे तेल के आयात को सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही, चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को कमजोर करने में यह डील भारत के लिए परोक्ष रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान और चीन इस अमेरिकी एंट्री का मुकाबला कैसे करते हैं।
मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब पूर्ण युद्ध (Full-Scale War) का रूप ले चुकी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire Agreement) पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। अमेरिकी सैनिकों की मौत और होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में तेल के टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिकी सेना को 'आर-पार' की कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। ट्रम्प ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि हर अमेरिकी सैनिक के खून का बदला ईरान से कई गुना भारी कीमत वसूल कर लिया जाएगा।अमेरिकी CENTCOM का बड़ा हमला: ईरान के सैन्य ठिकाने और कमान सेंटर तबाहअमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के नेतृत्व में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचों पर लगातार भीषण एयरस्ट्राइक (Airstrikes) की है।मिलिट्री ऑपरेशन्स सेंटर पर बमबारी: अमेरिकी बमवर्षक विमानों और मिसाइलों ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्य सैन्य कमान केंद्रों, संचार प्रणालियों (Communication Networks) और खुफिया अड्डों को सीधा निशाना बनाया है।ड्रोन व मिसाइल लॉन्च पैड्स नष्ट: तटीय इलाकों में स्थित ईरान की एंटी-शिप मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस रडार और ड्रोन स्टोरेज डिपो पर ताबड़तोड़ हमले कर उन्हें नष्ट कर दिया गया है।नौसैनिक बेड़ों पर प्रहार: होर्मुज के आसपास गश्त लगा रही ईरानी नौसेना की कई गश्ती नौकाओं और नौसैनिक ढांचों को तबाह कर दिया गया है।होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में ठप हुआ वैश्विक तेल व्यापारदुनिया भर के 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' इस समय युद्ध का केंद्र बन गया है। ईरान द्वारा तेल टैंकरों पर ड्रोन व मिसाइल हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी यातायात पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। अमेरिकी सेना जहां जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए लगातार बमबारी कर रही है, वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज पर अपना नियंत्रण ढीला नहीं करेगा। इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।कूटनीति की राह बंद, मध्य पूर्व में महायुद्ध का खतराईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने बयान जारी कर माना है कि देश इस समय अमेरिका के साथ 'पूर्ण पैमाने के युद्ध' का सामना कर रहा है। यद्यपि मध्यस्थ देश (जैसे कतर और पाकिस्तान) कूटनीतिक बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी और रोजाना हो रही भारी बमबारी ने शांति की उम्मीदों को धुंधला कर दिया है। खाड़ी के अन्य देशों (कुवैत, बहरीन और जॉर्डन) में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले ड्रग्स के काले कारोबार और संगठित अपराधों के खिलाफ अमेरिका की शीर्ष जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई अब भारत और कनाडा से जुड़े एक बड़े ड्रग रैकेट में शामिल भारतीय नागरिक हार्मनवीर सिंह की सरगर्मी से तलाश कर रही है। आरोप है कि हार्मनवीर सिंह कनाडा में सक्रिय कुख्यात रविंदर धांडा गैंग के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क को संचालित करने में अहम भूमिका निभा रहा था।'ऑपरेशन हार्ड बॉल' के तहत की जा रही है बड़ी कार्रवाईएफबीआई की ओर से यह ताजा और सख्त कदम 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' (Operation Hard Ball) के तहत उठाया गया है। यह अभियान लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर धांडा जैसे कुख्यात अपराधियों द्वारा चलाए जा रहे ट्रांसनेशनल क्रिमिनल सिंडिकेट्स के खिलाफ अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चलाई जा रही एक समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई है।कनाडा से लेकर अमेरिका और मेक्सिको तक फैला है जालएफबीआई द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, वांछित आरोपी हार्मनवीर सिंह एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन का हिस्सा है, जो नियंत्रित पदार्थों (Controlled Substances) के अवैध व्यापार, कब्जे और उनके निर्यात की बड़ी साजिश में शामिल रहा है। जांच में सामने आया है कि रविंदर धांडा का संगठित अपराध समूह मुख्य रूप से कनाडा के वैंकूवर से संचालित होता है। यह गैंग कथित तौर पर अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के विभिन्न हिस्सों में कोकीन और मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) जैसी प्रतिबंधित और खतरनाक ड्रग्स की बड़ी मात्रा में तस्करी करता है।इस महीने की शुरुआत में हुई थी 24 आरोपियों की गिरफ्तारीगौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका, कनाडा और यूरोप की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक संयुक्त और खुफिया ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान भारत से जुड़े तीन ट्रांसनेशनल संगठित अपराध समूहों के कुल 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 11 अकेले कैलिफोर्निया राज्य से दबोचे गए थे। अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice) ने अपने इस मेगा ऑपरेशन के तहत कुल 37 लोगों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए हैं, जिसके बाद से अंतरराष्ट्रीय अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया से एक बेहद दिल दहला देने वाली और दुखद खबर सामने आई है। कैलिफोर्निया में हुए एक भीषण सड़क हादसे में भारत के हैदराबाद शहर के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलने के बाद से हैदराबाद स्थित उनके पैतृक आवास और रिश्तेदारों में शोक की लहर दौड़ गई है।हादसे में मां और दो बच्चों की मौत, पिता और छोटी बेटी घायलप्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक सड़क दुर्घटना सोमवार रात (भारतीय समयानुसार) कैलिफोर्निया में हुई, जब परिवार की कार एक अन्य वाहन से जोरदार तरीके से टकरा गई। इस भीषण टक्कर में गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान नाजिया सलमा, उनकी बेटी और उनके बेटे के रूप में हुई है। वहीं, नाजिया के पति शेख नवेद और उनकी छोटी बेटी इस भयानक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है।10 साल पहले अमेरिका गए थे शेख नवेदमृतक परिवार के स्थानीय संपर्कों और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, शेख नवेद करीब 10 साल पहले तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के सैदाबाद इलाके से बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका गए थे। सोमवार को वे अपने पूरे परिवार के साथ किसी यात्रा पर निकले थे, तभी यह अनहोनी घटित हो गई। जब परिवार के बुजुर्गों ने अमेरिका में उनसे संपर्क साधने की कोशिश की, तो वहां की स्थानीय पुलिस ने फोन पर इस सड़क दुर्घटना की दुखद सूचना दी।विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इमरजेंसी वीजा की गुहारइस बड़ी त्रासदी के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शेख नवेद के पिता शेख अब्दुल सईद ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पुरजोर अपील की है कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को अमेरिका की यात्रा के लिए तत्काल आपातकालीन (Emergency Visa) जारी किया जाए, ताकि वे इस संकट की घड़ी में वहां पहुंचकर पीड़ित परिवार की मदद कर सकें। इसके अलावा, मजलिस बचाओ तहरीक (MBT) के प्रवक्ता अमजद उल्लाह खान ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी है और विदेश मंत्रालय से तुरंत वीजा उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने मंगलवार को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस पहुंचकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पहली बार आमने-सामने मुलाकात की है। यह कूटनीतिक मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, लेबनान-इजरायल संबंधों और हिजबुल्ला को निशस्त्र करने के लिए लेबनानी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर गहन चर्चा की गई। वर्ष 2009 के बाद से व्हाइट हाउस में आमंत्रित होने वाले जोसेफ औन पहले लेबनानी राष्ट्रपति हैं, जिससे इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।दक्षिणी लेबनान में शांति स्थापित करने और रूपरेखा समझौते पर चर्चाराष्ट्रपति जोसेफ औन पिछले शनिवार से ही आधिकारिक अमेरिकी दौरे पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने से पहले उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की थी। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, औन का यह दौरा दक्षिणी लेबनान में स्थायी शांति स्थापित करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि बीते 26 जून को लेबनान और इजरायल ने एक रूपरेखा समझौते (Framework Agreement) पर सहमति जताई थी, जिसमें इजरायली सेना की वापसी, हिजबुल्ला का पूर्ण निरस्त्रीकरण और भविष्य के शांति समझौतों की रूपरेखा तैयार करना शामिल है।ट्रंप का बड़ा एलान, कहा- लेबनान की भरपूर मदद करेंगेव्हाइट हाउस में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान लेबनानी राष्ट्रपति ने हिजबुल्ला को बेअसर करने और इजरायल के साथ शांति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए वाशिंगटन से कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने लेबनानी सशस्त्र बलों (LAF) को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सेना के बिना देश की व्यवस्था संभालना मुमकिन नहीं है।लेबनानी राष्ट्रपति की इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आश्वासन दिया कि अमेरिका लेबनान की भरपूर मदद करेगा। ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि लेबनान एक ऐसा देश रहा है जिसे लंबे समय से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने माना कि कई मायनों में यह एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है, लेकिन लेबनानी लोग अपने देश से प्रेम करते हैं और अमेरिका इस मुश्किल वक्त में उनकी हरसंभव सहायता करेगा।जोसेफ औन का अमेरिका दौरा आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और वैश्विक कूटनीति के दृष्टिकोण से इस मुलाकात के मुख्य बिंदु:ऐतिहासिक मुलाकात: साल 2009 के बाद व्हाइट हाउस आने वाले लेबनान के पहले राष्ट्रपति हैं जोसेफ औन।मुख्य मुद्दा: दक्षिणी लेबनान में संघर्ष विराम, अमेरिकी मध्यस्थता से हुआ रूपरेखा समझौता और हिजबुल्ला का निरस्त्रीकरण।सैन्य सहायता: लेबनानी सेना (LAF) को मजबूत करने के लिए अमेरिका से निरंतर समर्थन की मांग और अमेरिकी प्रशासन का सकारात्मक आश्वासन।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका में जारी तनातनी के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मंगलवार को दावा किया कि अमेरिकी सेना ने दो तेल टैंकरों के गुमराह कर गलत रास्ते पर भेजा, जिस कारण उन्हें धमाकों का सामना करना पड़ा
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप का दावा, तेहरान बातचीत के लिए बेचैन
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है, हालांकि वॉशिंगटन ने उस पर सैन्य दबाव बनाना जारी रखे हुए है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने या मजबूत करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका उन ठिकानों पर हमला करेगा। व्हाइट हाउस में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने इस बात को खारिज कर दिया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने कहा, ईरान बहुत बुरी तरह से हमसे मिलना चाहते हैं। जब तक वे गंभीर और सही तरीके से बातचीत के लिए तैयार नहीं होते, तब तक हमारी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचा है। अगर हम अभी वहां से हट जाएं, तो भी ईरान को दोबारा सब कुछ बनाने में 20 से 25 साल लग जाएंगे। लेकिन हमारा काम अभी पूरा नहीं हुआ है। परमाणु गतिविधियों को लेकर चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा, कोई भी साइट जहां वे न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में सोच भी रहे हैं, हम उस पर बहुत, बहुत ताकत से हमला करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान ने परमाणु सेंट्रीफ्यूज किसी दूसरी जगह पहुंचा दिया है। तो ट्रंप ने कहा कि हो सकता है उन्होंने ऐसा किया हो। लेकिन जब तक उनके पास जरूरी सामग्री नहीं होगी, तब तक इसका कोई मतलब नहीं है। हम उस सामग्री पर नजर रखते हैं। असली चीज वही है। ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वे परमाणु हथियार नहीं बना सकते। उनके पास ऐसा करने का कोई मौका नहीं है। बैठक में मौजूद अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में बाधा डालता है, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करने के लिए तैयार है। ईरान को बातचीत के कई मौके दिए गए हैं। अगर वे व्यापारिक जहाजों पर हमला करेंगे, तो हम उन पर दस गुना ज्यादा ताकत से जवाब देंगे। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी प्रभावी बनी हुई है। नाकाबंदी को कोई पार नहीं कर पा रहा है। यह लोहे की मजबूत दीवार जैसी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने लाल सागर में हूती विद्रोहियों के दोबारा हमले की आशंकाओं को भी कम करके बताया। उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। अगर ऐसा कुछ होता है, तो हमें उससे निपटना पड़ेगा। ट्रंप के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बना हुआ है। पिछले कई महीनों से ईरान, इजरायल और ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के बीच सैन्य टकराव जारी है।
हूतियों की नई धमकी: सऊदी बंदरगाहों से कारोबार करने वाले जहाज बन सकते हैं निशाना
यमन के हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि जो जहाज सऊदी अरब के बंदरगाहों के साथ कारोबार करेंगे, वे सैन्य कार्रवाई का निशाना बन सकते हैं

