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मारुति की कारें ₹30,000 तक महंगी होंगी:नई कीमतें जून 2026 से लागू की जाएंगी, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते फैसला किया

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी की ओर से बढ़ाई गई ये नई कीमतें जून 2026 से प्रभावी होंगी। लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत के कारण कंपनी ने यह फैसला किया है। मारुति के अनुसार, पोर्टफोलियो के सभी मॉडल्स पर कीमतों में यह बढ़ोतरी लागू होगी। हालांकि, किस कार के दाम कितने बढ़ेंगे, यह उसके मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करेगा। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में यह जानकारी दी है। एरिना-नेक्सा के सभी मॉडल्स के प्राइस बढ़ेंगे कंपनी अपने वाहनों की बिक्री दो अलग-अलग डीलरशिप चैनल्स के जरिए करती है, जिनमें एरिना और नेक्सा शामिल हैं। जून से इन दोनों ही चैनल्स से बिकने वाली कारें महंगी हो जाएंगी। कंपनी के लागत कम करने के प्रयास विफल ग्राहकों पर कम से कम असर डालने की कोशिश कंपनी ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के कारण बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा बाजार पर डालना अब जरूरी हो गया था। इसके बावजूद कंपनी ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि इस प्राइस हाइक का आम ग्राहकों पर कम से कम असर पड़े। 1 साल से ज्यादा समय बाद बढ़ रहे हैं दाम मारुति सुजुकी ने इससे पहले आखिरी बार अप्रैल 2025 में अपनी कारों की कीमतें बढ़ाई थीं। उस समय कंपनी ने अलग-अलग मॉडल्स के दाम में ₹62,000 तक की बढ़ोतरी की थी। अब करीब 1 साल से भी ज्यादा समय के अंतराल के बाद कंपनी ने दोबारा कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। इस बीच मास-मार्केट और लग्जरी सेगमेंट की कई अन्य कार कंपनियां जनवरी 2026 में ही अपने वाहनों के दाम बढ़ा चुकी हैं चौथी तिमाही में मुनाफा ₹3,659 करोड़ रहा मारुति सुजुकी इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 52,946 करोड़ रुपए की कुल कमाई की। यह पिछले साल के मुकाबले 25% बढ़ी है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 42,431 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इसी तिमाही में कंपनी ने 6.76 लाख कारें बेचीं। कुल कमाई में से सैलरी, टैक्स, कच्चे माल की कीमत जैसे खर्चे निकाल दें तो कंपनी के पास 3,659 करोड़ रुपए शुद्ध मुनाफे (नेट प्रॉफिट) के रूप में बचे। यह 2025 की जनवरी-मार्च तिमाही से 6.44% कम रहा है। पिछले साल कंपनी को 3,911 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। रेवेन्यू 28.20% बढ़कर ₹52,462 करोड़ रहा चौथी तिमाही में कंपनी को प्रोडक्ट और सर्विस बेचकर 52,462 करोड़ रुपए का राजस्व यानी रेवेन्यू हासिल हुआ। सालाना आधार पर यह 28.20% बढ़ा है। जनवरी-मार्च 2025 में कंपनी ने 40,920 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया था। चौथी तिमाही में गाड़ियों की बिक्री 11.8% बढ़ी चौथी तिमाही में मारुति सुजुकी ने कुल 6,76,209 गाड़ियां बेचीं। घरेलू मार्केट में कंपनी की सेल इस दौरान सालाना आधार पर 3.7% बढ़ी, जबकि एक्सपोर्ट 61.3% ज्यादा रहा। इसके चलते कंपनी की सालाना आधार पर ओवरऑल सेल्स ग्रोथ 11.8% रही। डोमेस्टिक मार्केट में कंपनी ने 5,38,994 गाड़ियां बेचीं, जबकि 1,37,215 गाड़ियों को एक्सपोर्ट किया। यह कंपनी का ऑल-टाइम-हाई एक्सपोर्ट है। 1982 में बनी थी मारुति सुजुकी इंडिया मारुति सुजुकी की स्थापना 24 फरवरी 1981 को भारत सरकार के स्वामित्व में मारुति इंडस्ट्रीज लिमिटेड रूप में हुई थी। 1982 में कंपनी ने जापान की सुजुकी कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर 'मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड' बनाई। भारतीयों के लिए पहली बजट कार 1983 में मारुति 800 लॉन्च हुई। 47,500 रुपए की एक्स शोरूम कीमत पर कंपनी ने देश के एक बड़े तबके को कार खरीदने के लिए सक्षम बनाया था। मारुति सुजुकी पिछले 40 साल में देश में 3 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां बेच चुकी है। रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है? ये खबर भी पढ़ें… ओप्पो रेनो 15 प्रो मिनी रिव्यू: छोटे साइज के फोन में 200MP कैमरा और 6200mAh बैटरी; जानें सभी फीचर्स ओप्पो ने मार्केट में अपनी नई रेनो 15 सीरीज के साथ कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप रेनो 15 प्रो मिनी पेश किया है, जिसमें प्रीमियम डिजाइन और जबरदस्त पावर है. इसमें 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और फ्लैगशिप डाइमेंसिटी 8450 प्रोसेसर दिया गया है जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूथ बनाता है। इसके 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत ₹62,999 जबकि 512GB मॉडल की कीमत ₹67,999 है। चलिए जानते हैं इसमें और क्या खास है… पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 21 May 2026 7:44 pm

‘स्मार्ट’ से ऊबे लोग, ‘बेसिक’ चीजों में सुकून की तलाश:टेक सेवी युवा चुन रहे, क्या कनेक्ट करना जरूरी है, क्या नहीं

टेक्नोलॉजी की दुनिया में कुछ साल पहले तक ‘स्मार्ट’ शब्द जादू जैसा लगता था। स्मार्ट फोन, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट वॉच, स्मार्ट होम... हर नई चीज भविष्य के और करीब ले जाने का दावा करती। सपना ये था कि फ्रिज खुद दूध ऑर्डर करेगा, दरवाजा मोबाइल से खुलेगा और माइक्रोवेव जवाब देगा। लेकिन, अब ‘स्मार्ट’ के उलट ‘बेसिक’ चीजों का ट्रेंड उभर रहा है। यानी ऐसे फोन, टीवी और उपकरण, जो सिर्फ अपना काम करें। हर वक्त इंटरनेट या एप से जुड़े न रहें। अमेरिका सहित पश्चिमी बाजारों में युवा बेसिक फोन की ओर लौट रहे हैं। इनमें सिर्फ कॉल, मैसेज और कुछ जरूरी फीचर होते हैं। गजेल की रिपोर्ट के मुताबिक 2021-24 के बीच जेन-जी में ऐसे फोन की बिक्री 148% बढ़ी। 16% जेन जी वयस्कों के पास ऐसे फोन थे। 28% खरीदने के इच्छुक थे। भारत में स्मार्ट गैजेट्स की हाइप ठंडी पड़ने का संकेत वियरेबल मार्केट में दिखा। आईडीसी के मुताबिक, 2024 में भारत का वियरेबल मार्केट 11.3% घटकर 11.9 करोड़ यूनिट रहा। स्मार्टवॉच शिपमेंट 34.4% गिरी। लोग ‘बेसिक टीवी’ खोज रहे हैं। ऐसी स्क्रीन, जो सिर्फ वही दिखाए जो आप चलाना चाहें, न कि आपके देखने की आदतें ट्रैक करे। इस बदलाव की वजह अतीत की कसक नहीं, बल्कि डिजिटल थकान है। प्यू रिसर्च के अनुसार, अमेरिका के आधे किशोर लगभग हर वक्त ऑनलाइन रहते हैं। ये ट्रेंड प्रौद्योगिकी विरोधियों में नहीं, बल्कि टेक सेवी युवाओं में दिख रहा है। वे टेक्नोलॉजी का अपनी शर्तों पर प्रयोग चाहते हैं। उनके लिए स्मार्टनेस हर चीज को कनेक्ट करना नहीं, बल्कि ये चुनना है कि कौनसी चीज कनेक्ट करनी है और कौनसी नहीं। बेसिक चीजें पिछड़ेपन का नहीं, बल्कि सुकून, प्राइवेसी और अपने वक्त पर नियंत्रण का प्रतीक हैं। शायद अगली टेक क्रांति यही हो- कम बोलने वाली, लेकिन ज्यादा समझदार। भारत में स्मार्ट होम का बाजार अभी बढ़ने के ट्रेंड में है अमेरिका में कोपलैंड के 2024 के सर्वे में 27% लोगों ने स्मार्ट डिवाइसेज में डेटा सुरक्षा पर चिंता जताई थी, जबकि 2022 में ये आंकड़ा 23% था। हालांकि, भारत में स्मार्ट होम अभी बढ़ने वाला बाजार है। यह 2024 में 3.23 अरब डॉलर (करीब 31 हजार करोड़ रु.) था, जो 2030 तक 16.39 अरब डॉलर (करीब 1.57 लाख करोड़ रु.) तक पहुंच सकता है।

दैनिक भास्कर 19 May 2026 4:19 pm

ओप्पो रेनो 15 प्रो मिनी रिव्यू:छोटे साइज के फोन में 200MP कैमरा और 6200mAh बैटरी; जानें सभी फीचर्स

ओप्पो ने मार्केट में अपनी नई रेनो 15 सीरीज के साथ कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप रेनो 15 प्रो मिनी पेश किया है, जिसमें प्रीमियम डिजाइन और जबरदस्त पावर है. इसमें 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और फ्लैगशिप डाइमेंसिटी 8450 प्रोसेसर दिया गया है जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूथ बनाता है। इसके 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत ₹62,999 जबकि 512GB मॉडल की कीमत ₹67,999 है। चलिए जानते हैं इसमें और क्या खास है… डिजाइन: रिबन पैटर्न और दमदार मजबूती पहली नजर में रेनो 15 प्रो मिनी अपने फ्लैट मेटल फ्रेम और मैट ग्लास बैक की वजह से बहुत प्रीमियम दिखता है। इसके बैक पैनल पर दिया गया रिबन पैटर्न डिजाइन इसे दूसरे फोन्स से अलग और क्लासी लुक देता है। खास बात यह है कि यह फोन IP69 रेटिंग के साथ आता है, जिसका मतलब है कि यह पानी और धूल के प्रति बेहद सख्त है। 4.55mm की मोटाई (ओपन होने पर) के साथ यह हाथ में काफी सॉलिड और कंफर्टेबल महसूस होता है। डिस्प्ले और परफॉर्मेंस: छोटा पैकेट, बड़ा धमाका फोन में 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दी गई है। 120Hz रिफ्रेश रेट की वजह से स्क्रॉलिंग काफी स्मूथ है। छोटे साइज के कारण इसे एक हाथ से चलाना बहुत आसान है। कैमरा: 200MP का पावरफुल सेंसर कैमरा डिपार्टमेंट में ओप्पो ने कोई कसर नहीं छोड़ी है: बैटरी और स्मार्ट फीचर्स: कॉम्पैक्ट साइज में 'जम्बो' पावर अक्सर छोटे फोंस में बैटरी लाइफ की समस्या होती है, लेकिन यहां ओप्पो ने चौंका दिया है। इतने कॉम्पैक्ट साइज में भी 6200mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जिसे चार्ज करने के लिए 80W का फास्ट चार्जर मिलता है। स्मार्ट फीचर्स के तौर पर इसमें गूगल जेमिनी एआई का फुल सपोर्ट है। 'AI माइंड स्पेस' जैसे फीचर्स स्क्रीन के कंटेंट को तुरंत समराइज कर देते हैं। साथ ही, ओप्पो का अपना डायलर है जिससे आप बिना सामने वाले को पता चले (बिना अनाउंसमेंट) कॉल रिकॉर्डिंग कर सकते हैं।

दैनिक भास्कर 19 May 2026 2:35 pm

पेटीएम का पॉकेट मनी फीचर लॉन्च:बच्चे बिना बैंक अकाउंट कर सकेंगे UPI पेमेंट, मंथली लिमिट ₹15000; पैरेंट्स के पास खर्च का पूरा कंट्रोल होगा

पेटीएम ने टीनेजर्स के लिए 'पेटीएम पॉकेट मनी' फीचर लॉन्च किया है, जिसके जरिए वे बिना खुद का बैंक अकाउंट खोले सुरक्षित डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे। इस नए फीचर में पैरेंट्स को बच्चों के खर्च पर नजर रखने, मंथली लिमिट तय करने और रीयल-टाइम ट्रैकिंग करने की पूरी सुविधा मिलेगी। फिनटेक फर्म वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (पेटीएम) ने 18 मई, सोमवार को आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान किया है। पैरेंट्स के पास रहेगा खर्च का पूरा कंट्रोल कंपनी के बयान के मुताबिक, पैरेंट्स और परिवार के भरोसेमंद सदस्य अपने बच्चों को सुरक्षित और रेगुलेटेड पेमेंट एक्सेस दे सकते हैं। वे अपने पेटीएम एप के जरिए बच्चों के लिए एक तय खर्च सीमा निर्धारित कर सकेंगे। इससे पैरेंट्स अपने बच्चों के हर ट्रांजैक्शन को लगातार ट्रैक कर पाएंगे और उनका कंट्रोल हमेशा बना रहेगा। रोजमर्रा के खर्चों को डिजिटल बनाने की कोशिश भारत में टीनेजर्स हर दिन शॉपिंग, मोबाइल रिचार्ज, मेट्रो किराया, कैब बुकिंग और स्कूल-कॉलेज की कैंटीन जैसे जरूरी कामों के लिए लगातार डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। वर्तमान में कई बच्चे इन खर्चों के लिए पूरी तरह पैरेंट्स या कैश पर निर्भर हैं। 'पेटीएम पॉकेट मनी' के जरिए बच्चों को एक सुरक्षित माध्यम मिलेगा, जिससे परिवारों में छोटी उम्र से ही जिम्मेदार वित्तीय आदतें विकसित करने में मदद मिलेगी। अब ओटीपी मांगने की जरूरत नहीं होगी इस फीचर के एक्टिवेट होने के बाद टीनेजर्स अपने खुद के फोन में पेटीएम एप का इस्तेमाल करके ऑनलाइन और ऑफलाइन मर्चेंट्स को सुरक्षित यूपीआई पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए अब उन्हें पेमेंट करते समय पैरेंट्स से ओटीपी मांगने, उनका फोन उधार लेने या पैरेंट्स को वॉट्सएप पर क्यूआर कोड भेजने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। 15 हजार का मंथली कैप तय किया गया पेटीएम पॉकेट मनी के तहत पैरेंट्स एनपीसीआई के 'यूपीआई सर्कल' के माध्यम से बच्चों को इनवाइट कर सकते हैं। इसके तहत पूरे यूपीआई नेटवर्क पर मंथली लिमिट अधिकतम 15,000 रुपए और एक बार में इंडिविजुअल पेमेंट की लिमिट 5,000 रुपए तक सेट की जा सकती है। यह सर्विस सेविंग्स और करंट दोनों तरह के अकाउंट्स पर अवेलेबल है, लेकिन इससे इंटरनेशनल पेमेंट्स और कैश विड्रॉल करने पर पाबंदी रहेगी। स्पेंड समरी से पूरा बजट ट्रैक होगा यह नया फीचर पेटीएम स्पेंड समरी के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट है, जो हर एक पेमेंट को ऑटोमैटिकली अलग-अलग कैटेगरीज में बांट देता है। इससे परिवार आसानी से अपने कुल खर्चों पर नजर रख सकते हैं, पॉकेट मनी के बजट को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं और बच्चों को पैसों के सही इस्तेमाल की सीख दे सकते हैं। एप में पेमेंट हिस्ट्री देखने का भी पूरा ऑप्शन मिलेगा। सुरक्षा के लिए इन-बिल्ट सेफ्टी मेजर्स पेटीएम ने इसमें सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। फीचर एक्टिवेट होने के शुरुआती 30 मिनट में केवल 500 रुपए और पहले 24 घंटों में अधिकतम 5,000 रुपए तक का ही ट्रांजैक्शन किया जा सकेगा। किसी भी समय जरूरत पड़ने पर पैरेंट्स अपने पेटीएम यूपीआई पिन का इस्तेमाल करके खर्च की लिमिट को बदल सकते हैं या बच्चों का एक्सेस तुरंत कैंसल कर सकते हैं। इसके अलावा डिवाइस लॉक होना भी अनिवार्य है। क्या होता है यूपीआई सर्कल और इन-बिल्ट सेफ्टी?

दैनिक भास्कर 18 May 2026 6:55 pm

वनप्लस 15R स्मार्टफोन ₹7000 महंगा हुआ:स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 प्रोसेसर और 32 मेगापिक्सल कैमरा जैसे फीचर, शुरुआती कीमत ₹54,999

टेक कंपनी वनप्लस ने अपने फ्लैगशिप फोन वनप्लस 15R की कीमत 7 हजार रुपए बढ़ा दी है। वनप्लस ने फोन को दिसंबर-2025 में 47,999 रुपए की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया था। अब इसकी कीमत 54,999 रुपए हो गई है। वनप्लस 15R दो वैरिएंट में स्नैपड्रैगन 8 जेन-5 प्रोसेसर, 7400mAh बैटरी और 32 मेगापिक्सल कैमरा के साथ आता है। वनप्लस 15R: वैरिएंट वाइस प्राइस वनप्लस 15R: स्पेसिफिकेशंस परफॉर्मेंस: वनप्लस 15R में परफॉर्मेंस के लिए स्नैपड्रैगन 8 जेन-5 प्रोसेसर दिया गया है। यह मोबाइल चिपसेट 3 नैनोमीटर प्रोसेस पर बना ऑक्टा-कोर प्रोसेसर है, जो 3.8 गीगाहर्ट्ज तक की क्लॉक स्पीड पर रन कर सकता है। ये पावरफुल और लैगफ्री प्रोसेसिंग देता है। वहीं, ग्राफिक्स के लिए फोन में एड्रेनो 830 GPU दिया गया है। हैवी गेमिंग के दौरान फोन को हीट होने से बचाने के लिए इसमें 360 डिग्री क्रेयो वेलोसिटी कूलिंग सिस्टम भी लगाया गया है। फोन एंड्रॉएड 15 पर बेस्ड ColorOS 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। इसमें LPDDR5X रैम दी गई है, जो स्मूथ मल्टीटास्किंग करने में मदद करती है। मोबाइल में UFS 4.1 स्टोरेज लगी है, जिससे फास्ट डाटा ट्रांसफर होता है। इसके अलावा फोन में NFC, वाई-फाई 7 और ब्लूटूथ 5.4 का सपोर्ट दिया गया है। बैटरी: पावरबैकअप के लिए वनप्ल्स 15R में 7400mAh की बैटरी दी गई है। इसे चार्ज करने के लिए 80W सुपरवूक चार्जिंग तकनीक मिलेगी। इससे पहले वनप्लस का कोई भी फोन इतनी बड़ी बैटरी के साथ नहीं आया है। हाल ही में लॉन्च हुआ वनप्लस 15 स्मार्टफोन 7300mAh बैटरी पर लॉन्च हुआ था। वनप्लस 15R की बैटरी को सिलीकॉन नेनोस्टेक टेक्नोलॉजी पर बनाया गया है। कंपनी का दावा है कि 4 साल बाद भी इसकी बैटरी हेल्थ 80% से कम नहीं जाएगी। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए वनप्लस 15R डिटेलमैक्स इंजन वाला डुअल रियर कैमरा सपोर्ट करता है। इसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेब्लाइजेशन के साथ 50 मेगापिक्सल का सोनी IMX906 मेन रियर सेंसर और 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड एंगल लेंस शामिल है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन में अल्ट्रा क्लीयर मोड, क्लीयर बर्स्ट और क्लियर नाइट इंजन जैसे एडवांस फीचर्स मिलेंगे। डिस्प्ले: वनप्लस 15R में 28001272 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.83-इंच की 1.5K स्क्रीन दी गई। यह एमोलेड पैनल पर बनी डिस्प्ले 165Hz तक के हाई रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है। इसके साथ 1800 निट्स की पीक ब्राइटनेस और 450PPI ऑटो डिमिंग मिलेगी। कंपनी ने बताया कि मोबाइल TUV राइनलैंड इंटेलीजेंट आई केयर 5.0 सर्टिफाइड है, जो अंधेरे में फोन चलाने पर भी आंखों को नुकसान से बचाने में मदद करेगा। स्क्रीन में इन-डिस्प्ले ​अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर भी है।

दैनिक भास्कर 18 May 2026 5:06 pm

दिल्ली-NCR और MP में CNG आज से ₹3 तक महंगी:दिल्ली में ₹80.09 और नोएडा-गाजियाबाद में ₹88.70 किलो हुई, भोपाल में ₹93.75 पर पहुंची

दिल्ली-NCR में आज यानी 17 मई से CNG के दाम 1 रुपए बढ़ गए हैं। दिल्ली में अब CNG 80.09 रुपए किलो में मिलेगी। वहीं नोएडा-गाजियाबाद में इसके दाम 88.70 रुपए हो गए हैं। 2 दिनों में कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को CNG के दाम 2 रुपए प्रति किलो बढ़ाए थे। इसके अलावा मध्यप्रदेश में भी शनिवार रात से 3 रुपए प्रतिकिलो तक रेट बढ़े हैं। भोपाल में 1 किलो गैस के रेट अब 93.75 रुपए हो गए हैं। पेट्रोल-डीजल ₹3-3 महंगे हुए 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़ी थीं। इससे दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं, कंपनियों ने प्रमुख शहरों में CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी कर दी। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए ₹79.09 खर्च करने पड़ रहे हैं। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रही है तो पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। क्या अभी और बढ़ेंगे दाम? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹3 की यह बढ़ोतरी काफी नहीं है। अपना घाटा पूरी तरह खत्म करने और 'ब्रेक-ईवन' यानी नो प्रॉफिट-नो लॉस की स्थिति में आने के लिए इन कंपनियों को अभी पेट्रोल के दाम ₹28 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹32 प्रति लीटर तक बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल पेट्रोल पर 29.5% और डीजल पर 36.5% की कमी बनी हुई है। अगर ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई इसी तरह प्रभावित रही, तो आने वाले दिनों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है। -------------------------------------------------------

दैनिक भास्कर 17 May 2026 9:31 am

गूगल जून में रोलआउट करेगा एंड्रॉइड-17, ‘गूगलबुक’ भी लॉन्च होगा:बड़े बदलाव; स्कैम कॉल खुद ब्लॉक होंगी, स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल मिलेगा

गूगल ने इस हफ्ते आयोजित ‘एंड्रॉइड शो 2026’ में कई बड़े बदलावों का ऐलान किया। कंपनी अब एंड्रॉइड को एआई आधारित पर्सनल असिस्टेंट प्लेटफॉर्म में बदलना चाहती है। नए अपडेट्स में जेमिनी एआई, गूगल क्रोम में ऑटोमेशन और एआई कीबोर्ड जैसे नए फीचर्स आएंगे। इसके साथ ही क्रोमबुक लैपटॉप के बाद अब कंपनी नया गूगलबुक भी पेश करेगी। कंपनी के मुताबिक जून 2026 तक एंड्रॉइड-17 रोलआउट होगा, लेकिन अन्य एआई फीचर्स पूरे साल अलग-अलग समय पर आएंगे। गूगल इन मोर्चों पर कर रहा काम फ्रॉड - फर्जी कॉल खुद पहचानकर काट देगा स्कैमर्स अक्सर बैंक कर्मचारी बनकर कॉल करते हैं और लोगों से ओटीपी या अकाउंट डिटेल मांगकर ठगते हैं। अब एंड्रॉइड का नया ‘वेरिफाइड फाइनेंशियल कॉल’ फीचर्स आ रहा है। अगर फोन में बैंक का आधिकारिक एप है और कोई फेक कॉल आए, तो सिस्टम खुद जांच करेगा कि बैंक सच में कॉल कर रहा है या नहीं। अगर बैंक से कॉल नहीं की गई, तो एआई की मदद से आपका फोन कॉल कट कर देगा। स्क्रॉलिंग - रील्स की लत कम करेगा नया फीचर रील्स की लत लगी है, तो ‘पॉज पॉइंट’ फीचर भी आ रहा है। इसमें ध्यान भटकाने वाले एप्स चुने जा सकेंगे। ये एप्स तुरंत नहीं खुलेंगे, इसमें 10 सेकंड का ‘पॉज’ रहेगा। इन 10 सेकंड में यूजर उस एप के इस्तेमाल की समय सीमा तय कर सकेगा, जैसे- सिर्फ 5 मिनट चलाने का विकल्प चुन सकेंगे। गूगलबुक- एंड्रॉइड वाला नया लैपटॉप लाएगा गूगल अब क्रोमबुक के बाद गूगलबुक नाम की नई श्रेणी पर काम कर रहा है। यह एंड्रॉइड आधारित लैपटॉप होगा, विंडोज जैसा इंटरफेस जरूर देगा, पर एंड्रॉइड एप्स विंडो मोड में चलेंगे। इसमें जेमिनी एआई, मल्टीकलर एलईडी स्ट्रिप, हल्का डिजाइन… और लंबी बैटरी लाइफ जैसे फीचर्स होंगे। एआई - जेमिनी बनेगा पर्सनल असिस्टेंट जेमिनी फोन पर आपके कई काम खुद कर सकेगा। अगर आप खाना ऑर्डर करना चाहते हैं, तो यह आपकी पसंद, लोकेशन और बजट के हिसाब से रेस्टोरेंट ढूंढ सकेगा, खाना चुन सकेगा और ऑर्डर प्रक्रिया पूरी करने में मदद करेगा। हालांकि सुरक्षा के लिए भुगतान का अंतिम चरण यूजर को ही पूरा करना होगा। टाइपिंग - अब बोलकर लिखना आसान होगा गूगल अपने की-बोर्ड ‘गूगल बोर्ड’ में रैमब्लर नाम का नया एआई वॉइस टाइपिंग फीचर ला रहा है। यह फीचर बिखरी हुई बातों को व्यवस्थित टेक्स्ट में बदलेगा। आपकी बात समझेगा और उसके हिसाब से टाइप करेगा। यह लगभग हर एंड्रॉइड एप में काम करेगा जहां टाइपिंग की सुविधा है।

दैनिक भास्कर 16 May 2026 4:23 pm

स्मार्टफोन की लाइफ लंबी करने के पांच टिप्स:100% चार्जिंग और फुल स्टोरेज से घटती है फोन की लाइफ, अपडेट्स भी जरूरी

हर साल टेक कंपनियां नए स्मार्टफोन लॉन्च करती हैं। यूजर्स को अपग्रेड करने के लिए आकर्षित किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर आपका मौजूदा फोन ठीक चल रहा है, तो क्या हर दो-तीन साल में नया फोन लेना जरूरी है? ज्यादातर लोग हर 2-3 साल में फोन बदल देते हैं, जबकि सही देखभाल की जाए तो स्मार्टफोन कहीं ज्यादा समय तक चल सकता है। आज ऐसे 5 तरीके जानें, जिससे फोन की लाइफ बढ़ सकती है। चार्जिंग से स्टोरेज तक... ये टिप्स अपनाएं 1. बार-बार फोन को ‘ओवरहीटिंग’ से बचाएं एपल, गूगल और सैमसंग जैसी कंपनियां सलाह देती हैं कि फोन को बहुत ज्यादा गर्म या बहुत ज्यादा ठंडे तापमान में इस्तेमाल न करें। 35 डिग्री से ज्यादा गर्मी बैटरी को नुकसान पहुंचाती है। धूप में फोन छोड़ना, कार की धूप में ज्यादा गर्म होने देना, लगातार ओवरहीटिंग बैटरी लाइफ कम कर सकता है। 2. हर बार 100% चार्ज करना जरूरी नहीं फोन को रोज 100% तक चार्ज करना बैटरी की उम्र घटा सकता है। अगर फोन की बैटरी 20% से 80% के बीच रखी जाए, तो उसकी लाइफ बढ़ सकती है। आईफोन व सैमसंग जैसे फोन ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग फीचर देते हैं, जो बैटरी को जरूरत से ज्यादा चार्ज होने से बचाते हैं। 3. बैटरी बचाने के लिए ये 6 सेटिंग्स बदलें अगर बैटरी जल्दी खत्म होती है, तो कुछ छोटे बदलाव मदद कर सकते हैं।- डार्क मोड इस्तेमाल करें - ऑटो ब्राइटनेस चालू रखें -स्क्रीन टाइमआउट 60 सेकेंड से कम - लो पावर मोड ऑन करें -जरूरत न हो तो जीपीएस आधारित एप्स कम ही इस्तेमाल करें 4. फोन में 20% तक स्टोरेज खाली रखें फोन की स्टोरेज लगभग भर जाने पर उसका परफॉर्मेंस भी धीमा होने लगता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आपके फोन में कम से कम 10% और आदर्श रूप में 20% स्टोरेज खाली होना चाहिए। अगर फोन की कुल स्टोरेज 128 जीबी है तो 24 जीबी तक फोन में खाली स्पेस होना परफॉर्मेंस तेज करता है। 5. सॉफ्टवेयर अपडेट्स को नजरअंदाज न करें अपडेट्स सिक्योरिटी के लिए बेहद जरूरी होते हैं। फोन को नए सिक्योरिटी अपडेट्स न मिले तो… - हैकिंग रिस्क बढ़ सकता है - एप्स ठीक से काम नहीं करते - प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है -एपल लगभग हर 4-6 हफ्ते में सिक्योरिटी अपडेट्स देता है, इन्हें जरूर अपडेट रखना चाहिए।

दैनिक भास्कर 16 May 2026 4:13 pm

टर्बो 5 नाम से आएगी रेडमी की गेमिंग स्मार्टफोन सीरीज:मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट और 100W फास्ट चार्जिंग जैसे फीचर्स मिलेंगे

शाओमी का सब-ब्रांड रेडमी अपनी परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड 'टर्बो' सीरीज भारत में पहली बार लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसका टीजर जारी किया है। फोन मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट के साथ आएगा। ये फोन चीन में लॉन्च हो चुका है, जहां इसकी शुरुआती कीमत युआन1,999 (करीब ₹28,200) है। भारत में इसकी कीमत 45 हजार रुपए के आसपास रह सकती है और इसे 5 जून को पेश किया जा सकता है। यह वनप्लस नॉर्ड 6 और वीवो V70 FE जैसे स्मार्टफोन्स को टक्कर देगा। मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट से होगा लैस परफॉर्मेंस के लिए फोन में मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट दिया गया है। यह फोन खास तौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो गेमिंग और हैवी टास्क करते हैं। फोन में बेहतरीन थर्मल स्टेबिलिटी और गेमिंग परफॉर्मेंस मिलने की उम्मीद है। मजबूती के लिए मिली है IP69K रेटिंग फोन में मेटल फ्रेम के साथ ग्लास बैक दिया गया है। ड्यूरेबिलिटी के मामले में भी यह फोन काफी एडवांस है। इसे धूल और पानी से बचाव के लिए IP66, IP68 और IP69K जैसी हाई रेटिंग्स मिली हैं। स्टोरेज की बात करें तो इसमें 16GB तक LPDDR5X रैम और 512GB तक की UFS 4.1 इंटरनल स्टोरेज दी गई है। 7560mAh बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग रेडमी टर्बो 5 की सबसे बड़ी खूबी इसकी 7560mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बैटरी क्षमता 9000mAh तक भी हो सकती है। फोन को चार्ज करने के लिए 100W की वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 27W की रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा। 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और 50MP कैमरा रेडमी टर्बो 5 में 6.59-इंच का 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) के साथ 50MP का सोनी IMX882 प्राइमरी कैमरा मिलता है।

दैनिक भास्कर 15 May 2026 10:48 pm

सब्सक्रिप्शन का ‘चक्रव्यूह’, नुकसान में ग्राहक:75% अमेरिकी कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना चुकीं; एक क्लिक से शुरू सफर, हर महीने तनाव

ब्रुकलिन की 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेनोर लुई की कहानी आज हर दूसरे शख्स की कहानी है। एलेनोर हर महीने ऐसे वीडियो गेम के लिए भुगतान कर रही हैं, जिसमें उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। वह कहती हैं, ‘मैंने 5 साल से यह गेम नहीं खेला है। पर समझ नहीं आ रहा कि इससे पीछा कैसे छुड़ाऊं...।’ यह तो सिर्फ बानगी है। अगर आप क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट या यूपीआई की ऑटो-डेबिट हिस्ट्री खंगालेंगे, तो हैरान रह जाएंगे। वहां लंबी फेहरिस्त मिलेगी- स्ट्रीमिंग एप, क्लाउड स्टोरेज, ई-कॉमर्स साइट्स की प्राइम मेंबरशिप, जिम व फिटनेस एप्स और यहां तक कि आरओ मशीन भी... सबकुछ सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आ गया है। और तो और अब ‘सब्सक्रिप्शन’ के अंदर भी एक और सब्सक्रिप्शन छिपा होता है। किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म का बेस पैक लीजिए, फिर उसमें बिना एड के कंटेंट या लाइव स्पोर्ट्स देखने के लिए ‘प्रीमियम’ का खर्च अलग। और यह याद रखने के लिए कि कौन सा रीचार्ज कब खत्म हो रहा है- सारे सब्सक्रिप्शन ट्रैक करने वाले एक और एप की मेंबरशिप लेनी पड़ती है। ब्रिटिश प्लेटफॉर्म ‘बैंगो’ की स्टडी के मुताबिक ब्रिटेन व अमेरिका में एक औसत व्यक्ति हर माह करीब 5,700 से 16 हजार रु. खर्च कर रहा है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की रिपोर्ट के अनुसार सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाली 75% कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना चुकी हैं। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रो. गिल एपल कहते हैं, कंपनियां चालाकी से चीजें अलग-अलग बेचती हैं। जैसे दही खरीदें पर चम्मच सब्सक्रिप्शन पर लें। सामान्य रूप से यह संभव नहीं है, पर एप्स की दुनिया में यह आम है। इसका सबसे पेचीदा पहलू ‘कैंसिलेशन’ है। कंपनियों के एप्स में ‘सब्सक्राइब’ करना आसान होता है, पर उसे बंद करना बेहद कठिन। इसकी प्रक्रिया लंबी और उलझी होती है या कस्टमर केयर पर लंबा इंतजार करना पड़ता है। प्रो. एपल कहते हैं,‘अगली बार जब किसी एप पर ‘स्टार्ट सब्सक्रिप्शन’ पर क्लिक करें, तो ध्यान रखें- शुरुआत आसान दिखेगी, पर हर महीने कटने वाला छोटा हिस्सा कंपनियों को ताकतवर और आपको लाचार बना देगा।’ स्टेटमेंट का ऑडिट करें, सालाना के बजाय मंथली प्लान बेहतर अमेरिकी फाइनेंस एक्सपर्ट व ‘आई विल टीच यू टू बी रिच’ के लेखक रमित सेठी के अनुसार, सब्सक्रिप्शन के चक्रव्यूह से निकलने का सबसे प्रभावी तरीका सचेत होकर खर्च करना है। अपने बैंक स्टेटमेंट का ‘निर्दयी ऑडिट’ करें, जिस सेवा का इस्तेमाल 30 दिनों में नहीं किया है, उसे बिना सोचे तुरंत कैंसल कर देना चाहिए। किसी भी ‘फ्री ट्रायल’ के लिए साइन-अप करते ही उसे तुरंत कैंसल कर दें, ताकि ट्रायल अवधि का फायदा भी उठा सकें और भविष्य में भूलवश कटने वाले पैसों से भी बच जाएं। सालाना डिस्काउंट के बजाय मासिक प्लान बेहतर है क्योंकि हर महीने जेब से कटने वाला पैसा आपको सचेत रखता है।

दैनिक भास्कर 15 May 2026 5:15 pm

देश में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की लॉन्चिंग अटकी:ऑटो कंपनियां बोलीं- पहले फ्यूल मिले, तेल कंपनियों ने कहा- पहले गाड़ियां आएं

सरकार देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां तेजी से सड़क पर उतारना चाहती है, लेकिन यह प्लान अब ' पहले मुर्गी आई या अंडे' वाली उलझन में फंस गया है। ऑटोमोबाइल कंपनियां बड़े पैमाने पर तब तक हाई-एथेनॉल ब्लेंड वाली गाड़ियां बनाने को तैयार नहीं हैं, जब तक बाजार में पर्याप्त मात्रा में फ्लैक्स फ्यूल उपलब्ध न हो। वहीं, तेल कंपनियां तब तक E85 और E100 जैसे फ्यूल के स्टोरेज और सप्लाई में निवेश करने से कतरा रही हैं, जब तक सड़कों पर इन्हें चलाने वाली गाड़ियां न आ जाएं। अब सरकार दोनों पक्षों से बात कर रही है। क्या है फ्लेक्स-फ्यूल और भारत की जरूरत? फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां सामान्य गाड़ियों से अलग होती हैं, क्योंकि ये पेट्रोल के साथ किसी भी मात्रा में एथेनॉल-मिक्स पेट्रोल पर चल सकती हैं। अभी भारत में 20% एथेनॉल वाले (E20) पेट्रोल अनिवार्य है। सरकार अब E85 (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) और E100 यानी 100% एथेनॉल जैसे फ्लैक्स फ्यूल की ओर बढ़ना चाहती है, ताकि कच्चे तेल के आयात को कम किया जा सके। एथेनॉल को गन्ने के रस, मक्का और सड़े हुए अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। ये फ्यूल पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करता है। 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। तेल कंपनियों की चिंता: एथेनॉल स्टॉक खराब होने का डर तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि हाई-एथेनॉल ब्लेंड वाले फ्यूल को लंबे समय तक स्टोर करना जोखिम भरा है। अगर स्टॉक का उपयोग तुरंत नहीं हुआ, तो एथेनॉल नमी सोख लेता है, जिससे इंजन खराब या कोरोड (जंग लगना) हो सकता है। कंपनियों का मानना है कि जब तक मांग सुनिश्चित नहीं होती, तब तक स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना घाटे का सौदा है। ऑटो सेक्टर की मांग: फ्यूल सप्लाई पर मिले स्पष्टता दूसरी तरफ, ऑटो कंपनियों का तर्क है कि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां सामान्य पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले महंगी होंगी। ऐसे में ग्राहक इन्हें तभी खरीदेंगे जब उन्हें देशभर में फ्यूल की उपलब्धता का भरोसा मिले। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक फ्यूल सप्लाई पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक इन गाड़ियों की डिमांड पैदा करना मुश्किल है। क्रूड इम्पोर्ट घटाना है सरकार की प्राथमिकता अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में तेल आयात बिल पिछले साल के $137 बिलियन से घटकर $123 बिलियन रहा है, लेकिन सरकार इसे और कम करना चाहती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ऊर्जा संकट को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन अपनाने पर जोर दिया है। एथेनॉल उत्पादकों के पास सरप्लस स्टॉक, सरकार से लगाई गुहार देश के एथेनॉल उत्पादक फिलहाल ओवरकैपेसिटी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (Aida) के मुताबिक, उन्होंने करीब 20 अरब लीटर एथेनॉल बनाया है, जबकि सरकार के 20% ब्लेंडिंग टारगेट से केवल 11 अरब लीटर के ऑर्डर मिले हैं। एथेनॉल मेकर्स ने सरकार को पत्र लिखकर फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए इंसेंटिव और ऊंचे ब्लेंडिंग टारगेट की मांग की है। ब्राजील मॉडल से सीख और पायलट प्रोजेक्ट का सुझाव एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को ब्राजील से सीखना चाहिए, जहां 2003 में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां आईं और आज वहां 90% से ज्यादा नई गाड़ियां इसी तकनीक पर चलती हैं। टेरी (TERI) की एसोसिएट डायरेक्टर संयुक्ता सुबुद्धि ने सुझाव दिया है कि एक छोटे लेवल पर 'पायलट प्रोजेक्ट' शुरू करना चाहिए। इससे तेल और ऑटो कंपनियों को जरूरी डेटा मिलेगा और बड़े स्तर पर रोलआउट करना आसान होगा। विदेशी मुद्रा की बचत: मंत्री ने गिनाए फायदे पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, साल 2025 में E20 ब्लेंडिंग की वजह से भारत ने लगभग $19.3 बिलियन (करीब 1.6 लाख करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा बचाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों और ईंधन, दोनों पर खरीदारी की छूट देती है, तो इस डेडलॉक को तोड़ा जा सकता है। टोयोटा, मारुति इथेनॉल वाले वाहन पेश कर चुके टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां पहले ही हाई इथेनॉल ब्लेंड से चलने वाले वाहन पेश कर चुकी हैं। टीवीएस मोटर के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी संकेत दिए हैं कि कंपनी अपाचे सहित अपने कई सेगमेंट में इथेनॉल से चलने वाले वाहन लाने की योजना बना रही है। इन 4 मोर्चों पर चुनौतियों से निपटना होगा SP ग्लोबल के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता का कहना है कि E85 को अपनाने के लिए बड़े इकोसिस्टम की जरूरत होगी। इसमें 4 मुख्य चुनौतियां हैं: माइलेज और कीमत बन सकती है रुकावट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीक से ज्यादा बड़ी चुनौती फ्यूल की कीमत और माइलेज है। इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का माइलेज 20 से 30% तक गिर सकता है। इस कमी की भरपाई के लिए फ्यूल की कीमत कम रखनी होगी ।

दैनिक भास्कर 14 May 2026 10:17 pm

मोटोरोला रेजर फोल्ड प्रीमियम स्मार्टफोन भारत में लॉन्च:50MP के तीन रियर कैमरे और 8.1 इंच 2K डिस्प्ले, शुरुआती कीमत ₹1.50 लाख

टेक कंपनी मोटोरोला ने भारत में अपना सबसे प्रीमियम फोल्डेबल स्मार्टफोन मोटोरोला रेजर फोल्ड लॉन्च किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 8.1-इंच का फोल्डेबल डिस्प्ले और लेटेस्ट स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 प्रोसेसर है। फोन 50 मेगापिक्सल के तीन रियर कैमरे के साथ आया है। मोटोरोला ने इस रेजर फोल्ड को दो स्टोरेज वैरिएंट और एक स्पेशल एडिशन के साथ उतारा है। इसकी कीमत ₹1.50 लाख से शुरू होती है। मोटोरोला रेजर फोल्ड: वैरिएंट वाइस प्राइस लॉन्च ऑफर में 10,000 रुपए का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट या एक्सचेंज बोनस मिलेगा। साथ ही 18 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का भी ऑप्शन है। 20 जून तक फोन खरीदने वालों को 1 साल के लिए 'फ्री वन-टाइम स्क्रीन रिप्लेसमेंट' की सुविधा मिलेगी। फोन के प्री-ऑर्डर शुरू हो चुके हैं। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: फोल्ड होने पर भी काफी स्लिम मोटोरोला रेजर फोल्ड का डिजाइन काफी प्रीमियम और स्लीक है। ओपन होने पर इसकी मोटाई सिर्फ 4.55mm रह जाती है, जिससे यह पकड़ने में काफी हल्का महसूस होता है। स्पेसिफिकेशंस: डिस्प्ले से लेकर परफॉर्मेंस तक सब 'एक्सट्रीम' 1. डिस्प्ले: दो स्क्रीन और 120Hz रिफ्रेश रेट 2. कैमरा: ट्रिपल 50MP सेटअप 3. परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर 4. पावरबैकअप: 6000mAh की बड़ी बैटरी

दैनिक भास्कर 14 May 2026 4:47 pm

नासा का नया सुपर स्पेस सूट:चांद पर उछलने की जरूरत नहीं, 8 घंटे का ‘टॉयलेट’ बैकअप; चंद्र मिशन के लिए 2031 तक तैयार

नासा के 2028 तक इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजने के मिशन को झटका लग सकता है। अमेरिकी ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एक्जिओम स्पेस’ के नए स्पेस सूट तैयार होने में 2031 तक की देरी हो सकती है। हालांकि, नासा एडमिनिस्ट्रेटर जेरड इसाकमैन ने भरोसा जताया है कि 2028 तक अंतरिक्ष यात्री इन्हीं सूट्स में चांद पर उतरेंगे। जानें स्पेस सूट की खासियतें। - इटली की फैशन कंपनी ‘प्राडा’ भी नासा के नए स्पेस सूट को बनाने के प्रोजेक्ट में जुड़ी है। उसने सूट के फैब्रिक व डिजाइन पर काम किया है। नासा के नए एक्सईएमयू की 7 खास बातें - लिक्विड कूलिंग सिस्टम - सूट के अंदर ‘लिक्विड कूलिंग’ सिस्टम वाला खास अंडरगारमेंट होगा, जो शरीर का तापमान नियंत्रित रखेगा।- स्मार्ट शूज - खास ‘स्मार्ट’ जूते चांद की सतह पर अच्छी ग्रिप देंगे। पिछले मिशन की तरह उछलकर चलने की जरूरत नहीं होगी।- वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम - 8 घंटे का टॉयलेट बैकअप रहेगा। यानी सूट उतारे बिना काम कर सकेंगे। माइनस 2000 तक ठंड में भी सुरक्षित रखेगा। - फैब्रिक - चंद्रमा की धूल कांच के टुकड़ों की तरह नुकीली और चिपकने वाली होती है। सूट का बाहरी फैब्रिक चांद की महीन धूल को कम चिपकने देगा। - रियर एंटी सिस्टम - नए सूट में ‘रियर एंट्री’ सिस्टम होगा। यानी अंतरिक्ष यात्री पीछे की तरफ से सूट में प्रवेश करेंगे। इसे पहनना और उतारना आसान होगा। - विशेष सूट - अपोलो मिशन के समय सूट पुरुषों के हिसाब से ही बने थे। नए सूट को पुरुष और महिला दोनों अंतरिक्ष यात्री पहन सकेंगे। - स्मार्ट हेलमेट - हेलमेट में एचडी कैमरा, लाइट्स और 4जी/एलटीई कम्युनिकेशन सिस्टम होगा, जिससे संपर्क और रिकॉर्डिंग बेहतर होगी। आर्टेमिस-3 मिशन के लिए सूट बनने में देरी क्यों हो रही? नया स्पेस सूट ऐसा बनाना है, जो चंद्रमा की सतह व अंतरिक्ष की भारहीन स्थिति में काम कर सके। 2022 में नासा ने ‘एक्सिओम स्पेस’ और ‘कॉलिन्स एयरोस्पेस’ को यह प्रोजेक्ट दिया था, लेकिन बाद में कॉलिन्स इससे अलग हो गई। अब ‘एक्सिओम स्पेस’ कंपनी पर पूरे प्रोजेक्ट का भार है, जिसकी वजह से टेस्टिंग और डेवलपमेंट में देरी हो रही है। क्या है आर्टेमिस-3 मिशन इसमें अंतरिक्ष यात्रियों को पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। उद्देश्य वहां स्थायी बेस बनाना है।

दैनिक भास्कर 14 May 2026 1:01 pm

चीन में नया संघर्ष; रोबोट-ड्रोन से ड्राइवर खतरे में:रोबोटैक्सी और फूड-डिलीवरी ड्रोन तेजी से सड़कों पर कब्जा कर रहे, ट्रेंड का विरोध बढ़ा

चीन एआई और ऑटोमेशन के दुष्प्रभाव से जूझ रहा है। बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने का खतरा मंडरा रहा है। किंगदाओ जैसे शहर ऑटोमेशन और इंसानी संघर्ष की लैब बन गए हैं। महज एक साल पहले इस शहर में ऑटोनॉमस व्हीकल गिने-चुने थे। आज यह दुनिया के सबसे उन्नत शहरों में है। नियोलिक्स कंपनी ने यहां 1,200 मानवरहित डिलीवरी वैन उतारी है। दिसंबर तक इसे बढ़ाकर 4,000 करने का लक्ष्य है। यह शहर उस बदलाव का प्रतीक है, जहां रोबोटैक्सी और फूड-डिलीवरी ड्रोन तेजी से सड़कों पर कब्जा कर रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स के आंकड़ों के अनुसार 2025 के अंत तक चीन की सड़कों पर 33,000 शॉर्ट-रेंज डिलीवरी वाहन थे। 2026 के अंत तक मानवरहित कैब 14,000 होने की उम्मीद है। 5 साल में, चीनी शहरों में 7 लाख रोबोटैक्सी होंगी। यह कुल राइड-हेलिंग सेवाओं का 12% होगी। दिग्गज एप मीटुआन का अनुमान है कि वह चीन की 10% क्विक फूड डिलीवरी ड्रोन के जरिए कर सकता है। पिछले वर्ष 6 हजार करोड़ डिलीवरी हुई थीं। इससे ड्राइवरों की रोजी-रोटी छिनने लगी है। ऐसे में चीनी नेतृत्व ने रणनीति बदली है। सरकार ने मार्च में जारी पंचवर्षीय आर्थिक योजना में स्पष्ट कहा कि बड़े पैमाने पर बेरोजगारी के जोखिम को रोकना होगा। अप्रैल में जारी एक मसौदा दस्तावेज में डेवलपर्स को सख्त हिदायत दी गई कि वे रोजगार खत्म करने के इरादे से एआई का इस्तेमाल न करें। रिसर्च फर्म टॉम ननलिस्ट के मुताबिक, चीनी एआई रेगुलेशन में रोजगार बचाने के लिए किया गया अनुरोध दुर्लभ है। इससे पहले नीतिगत स्तर पर मानव श्रम के संरक्षण का ऐसा उदाहरण नहीं मिलता। असली खतरा उन 2.2 करोड़ ड्राइवरों को है जो सवारियां ढोते हैं या ग्राहकों को पार्सल पहुंचाते हैं। तनाव कम करने के लिए मीटुआन जैसी कंपनियां ड्राइवरों को नई भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं। शंघाई में ड्राइवरों को ड्रोन डिलीवरी संचालित करने, खाना लोड करने और कमांड सेंटर से निगरानी करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। वुहान में ऑटोमेशन कारों से जाम बढ़ रहा, ड्राइवर संगठित हो रहे चीन में ऑटोमेशन की राह आसान भी नहीं है। वुहान जैसे शहरों में, जहां बायडू लगभग 1,000 रोबोटैक्सी चला रहा है, तकनीकी खामियां ट्रैफिक जाम कर रही हैं। मार्च में दर्जनों टैक्सियां अचानक सड़क पर ‘फ्रीज’ हो गईं, जिससे यातायात ठप हो गया। इसके बाद सरकार ने रोबोटैक्सी के नए लाइसेंस पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, ड्राइवर अब संगठित होकर विरोध कर रहे हैं। 2024 में वुहान में हुए प्रदर्शनों के बाद, अधिकारियों ने बायडू को अपने रोबोटैक्सी के आंकड़े सार्वजनिक करने से मना कर दिया।

दैनिक भास्कर 13 May 2026 4:27 pm

होंडा की NX500 ई-क्लच ₹7.44 लाख में लॉन्च:गियर बदलते समय क्लच दबाने की जरूरत नहीं होगी; कावासाकी वर्सिस 650 से मुकाबला

होंडा ने अपनी ई-क्लच टेक्नोलॉजी के साथ नई NX500 को भारत में लॉन्च कर दिया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹7.44 लाख है। इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब राइडर को गियर बदलते समय क्लच लीवर का इस्तेमाल नहीं करना होगा। क्लच का मैनुअल कंट्रोल भी अपने ले सकते हैं होंडा की ई-क्लच तकनीक में इलेक्ट्रॉनिक एक्चुएटर्स का इस्तेमाल किया गया है। यह गियर शिफ्ट करते समय या बाइक को रोकते और शुरू करते समय क्लच को अपने आप ऑपरेट करता है। खास बात यह है कि राइडर जब चाहे क्लच का मैनुअल कंट्रोल अपने हाथ में ले सकता है। बाइक में क्लच लीवर और गियर पैडल दोनों दिए गए हैं। ई-क्लच मैकेनिज्म काफी कॉम्पैक्ट है, जिससे बाइक का वजन केवल 3 किलो बढ़ा है और अब इसका कुल वजन 199 किलो हो गया है। पुराने मॉडल के मुकाबले ₹1.11 लाख महंगी कीमत के मामले में नई NX500 पहले के मुकाबले काफी महंगी हो गई है। ई-क्लच वेरिएंट की कीमत पुराने मॉडल (कन्वेंशनल क्लच) से ₹1.11 लाख ज्यादा है। मार्केट में इसका सीधा मुकाबला BMW F 450 GS ट्रॉफी (कीमत ₹5.30 लाख) और कावासाकी वर्सिस 650 (कीमत ₹8.63 लाख) से होगा। होंडा की यह बाइक अपनी मजबूती और कम मेंटेनेंस खर्च के लिए जानी जाती है। इंजन और परफॉर्मेंस में कोई बदलाव नहीं ई-क्लच के अलावा बाइक के बाकी मैकेनिकल फीचर्स पहले जैसे ही हैं। इसमें वही पुराना 471cc का ट्विन-सिलेंडर, लिक्विड-कूल्ड इंजन दिया गया है। इंजन 8,500 rpm पर 47hp की पावर जनरेट करता है। बाइक में 6-स्पीड गियरबॉक्स दिया गया है। सस्पेंशन के लिए फ्रंट में USD फोर्क और रियर में मोनोशॉक दिए गए हैं। ब्रेकिंग के लिए फ्रंट में 296mm के दो डिस्क ब्रेक और रियर में 240mm का सिंगल डिस्क ब्रेक मिलता है। सुरक्षा के लिए इसमें डुअल चैनल ABS दिया गया है। बुकिंग शुरू, दो रंगों में उपलब्ध NX500 ई-क्लच को दो रंगों - व्हाइट और ब्लैक में पेश किया गया है। सभी ऑथोराइज्ड होंडा बिगविंग डीलरशिप पर इसकी बुकिंग शुरू हो गई है। बाइक में 5-इंच की TFT स्क्रीन और स्विचेबल ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स मिलते हैं। हालांकि, इसमें राइडिंग मोड नहीं दिए गए हैं। नॉलेज पार्ट ई-क्लच: यह एक ऐसी तकनीक है जो क्लच के काम को ऑटोमेट कर देती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो ट्रैफिक में बार-बार क्लच दबाने से परेशान होते हैं।

दैनिक भास्कर 12 May 2026 11:58 am

2026 स्कोडा कोडिएक लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹36.99 लाख:₹3 लाख तक सस्ती हुई SUV, 14.86kmpl का माइलेज के साथ सेफ्टी के लिए लेवल-2 ADAS

स्कोडा ऑटो इंडिया ने प्रीमियम फुल साइज SUV स्कोडा कोडिएक का 2026 मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने अपडेटेड मॉडल में सबसे बड़ा बदलाव सेफ्टी को लेकर किया है, जिसमें अब लेवल-2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) फीचर शामिल किया गया है। कंपनी का दावा है कि कार 14.86kmpl का माइलेज देती है। अपडेटेड मॉडल की एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत 36.99 लाख रुपए रखी गई है। खास बात यह है कि इसके बेस वैरिएंट 'लाउंज' की कीमत 3 लाख रुपए घटाई गई है। हालांकि, अन्य वैरिएंट्स नए फीचर्स जुड़ने से महंगे हुए हैं। कार में मैकेनिकली कोई बदलाव नहीं है। यह पहले की तरह टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ 3 वैरिएंट्स और 5 कलर ऑप्शंस में मिलेगी। भारत में इसका मुकाबला फॉक्सवैगन टिगुआन आर-लाइन, टोयोटा फॉर्च्यूनर, MG ग्लोस्टर, जीप मेरिडियन, हुंडई टूसॉन और निसान एक्स-ट्रेल से रहेगा। एक्सटीरियर और इंटीरियर: इल्यूमिनेटेड ग्रिल और लग्जरी कैबिन लुक की बात करें तो 2026 मॉडल का डिजाइन पहले जैसा ही रखा गया है। हालांकि, अब 'स्पोर्टलाइन' वैरिएंट में भी इल्यूमिनेटेड फ्रंट ग्रिल मिलेगी, जो पहले सिर्फ टॉप मॉडल LK में आती थी। कार 5 और 7-सीटर कॉन्फिगरेशन के साथ 5 कलर ऑप्शंस में अवेलेबल है। इंटीरियर: 12.9-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम केबिन में नया लेयर्ड डैशबार्ड और 12.9-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो और एपल कारप्ले सपोर्ट करता है। इसमें फिजिकल कंट्रोल्स भी हैं, जिनसे क्लाइमेट कंट्रोल और इंफोटेनमेंट कई काम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ड्राइवर के लिए 10.25-इंच का डिजिटल क्लस्टर मौजूद है। गियर सिलेक्टर स्टीयरिंग कॉलम में है और सेंटर कंसोल के नीचे कई स्टोरेज स्पेस दिए गए हैं। इसमें दो केबिन कलर थीम: स्पोर्टलाइन के साथ ब्लैक और सिलेक्शन LK के साथ ब्लैक/टेन दी गई है। कंफर्ट के लिए कार में वेंटिलेटेड और मसाज फंक्शन वाली 12-वे पावर्ड फ्रंट सीटें, थ्री-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, दो वायरलेस फोन चार्जर, मल्टी-कलर एम्बिएंट लाइटिंग, पैनोरमिक सनरूफ और 13-स्पीकर वाला कैंटन साउंड सिस्टम मिलता है। परफॉरमेंस: 2-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन और 14.86kmpl माइलेज इंजन की बात करें तो इसमें कोई बदलाव नहीं है। कार में पहले वाला ही 2-लीटर टर्बो पेट्रोल TSI इंजन मिलता है। सेफ्टी: अब लेवल-2 ADAS के साथ 9 एयरबैग्स स्कोडा ने 2026 कोडिएक में सेफ्टी को अगले लेवल पर पहुंचा दिया है। अब इसके स्पोर्टलाइन और LK वैरिएंट में लेवल-2 ADAS फीचर्स मिलेंगे।

दैनिक भास्कर 11 May 2026 11:03 pm

टेक्नोलॉजी व एआई रखेंगे स्वस्थ और खुश:बुजुर्गों को नई तकनीक सीखने में जागरूकता और स्क्रीन टाइम का ध्यान रखना जरूरी है

बढ़ती उम्र में नई टेक्नोलॉजी सीखना बुजुर्गों की मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद है। बशर्ते इसमें स्क्रीन टाइम का ध्यान रखने के साथ इसका उपयोग पूरी जागरूकता से किया जाए। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास का एक शोध कहता है कि डिजिटल स्किल सीखने से सीनियर सिटीजन की याददाश्त 30 फीसदी तक बढ़ सकती है। मस्तिष्क की सीखने की क्षमता बढ़ाती है नई टेक्नोलॉजी टेक्सास यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि जब आप नई तकनीक सीखते हैं तो याददाश्त मजबूत होती है। रिसर्च में पाया गया कि जो बुजुर्ग नई एप्स खुद सीखते, वीडियो ट्यूटोरियल देखकर प्रैक्टिस करते, या ग्रुप क्लासेज जॉइन करते हैं, उनकी मेंटल हेल्थ पर सकारात्मक असर दिखा। मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है। एआई ट्यूटर्स का इस्तेमाल करें, आत्मविश्वास बढ़ेगा जब आप एआई ट्यूटर्स से नई भाषा, संगीत अथवा स्किल सीखते हैं तो दिमाग व्यस्त और सक्रिय रहता है। नया सीखने और समस्या सुलझाने की इस प्रक्रिया में मस्तिष्क में 'डोपामाइन' रिलीज होता है, जिससे आपके जीवन में खुशी का स्तर और आत्मविश्वास बढ़ता है। टेक्नोलॉजी पर्सनल ब्रेन कोच की तरह काम करती है एआई आधारित एप्स बुजुर्गों की मानसिक क्षमता का आकलन करते हैं। और फिर उनकी याददाश्त के स्तर के हिसाब से पहेलियां और चुनौतियां डिजाइन करके उनके समक्ष पेश करते हैं। इससे निरंतर सीखने की प्रक्रिया (न्यूरोप्लास्टिसिटी) को बढ़ावा मिलता है। इससे अल्जाइमर जैसे रोगों का खतरा कम होता है। गैजेट्स, हेल्थ डिवाइस बीमारी का समय पर संकेत देते हैं टेक्नोलॉजी उपयोगी साबित हो रही है, क्योंकि कई स्मार्टवॉच और हेल्थ डिवाइस का डेटा सीधे एआई आधारित एल्गोरिदम तक पहुंचता है। यह दिल की धड़कन, सांसों की गति या नींद के पैटर्न में आए मामूली बदलावों को भी पहचान लेता है, जो बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ऐसे मजबूत करता है मेमोरी अकेलेपन में कमी आती है शोध में पाया कि ऑनलाइन ग्रुप, वीडियो कॉल, मेल या व्हाट्सएप पर रिश्तेदार‑दोस्तों से जुड़े रहने वाले बुजुर्गों में अकेलापन और तनाव कम होता, क्योंकि टेक्नोलॉजी की मदद से उन में रिश्तों का डिजिटल ब्रिज बन जाता है। चीजें सीखने को प्रेरित होते हैं जब बुजुर्ग नई तकनीक जैसे-ऑनलाइन बैंकिंग, यूट्यूब पर वीडियो आदि खुद बनाते हैं तो उनके मस्तिष्क के न्यूरल नेटवर्क एक्टिवेट रहते हैं, जिससे डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा घटता है। सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है यूरोप-अमेरिका में 60-80 वर्ष तक के लोगों पर हुई रिसर्च में पाया गया कि जो बुजुर्ग स्मार्टफोन, इंटरनेट आदि खुद चलाते हैं उनमें समस्याएं हल करने और सोचने-समझने की क्षमता दूसरों से बेहतर होती है। (एक्सपर्ट पैनल: ∙ डॉ. मंजरी त्रिपाठी, एचओडी, न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट, एम्स नई दिल्ली ∙ डॉ. अर्चना वर्मा, सीनियर न्यूरो फिजिशियन ∙ डॉ. राहुल माथुर, साइकेट्रिस्ट, एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर)

दैनिक भास्कर 11 May 2026 1:20 pm

स्कूलों में पढ़ाया जा रहा गणित असल जिंदगी में फेल:गणना के बजाय डेटा-रीजनिंग पर फोकस बढ़ाएं, सेहत से लेकर निवेश तक में होंगे सफल

गणित का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में स्कूल के दिनों की वे डरावनी यादें ताजा हो जाती हैं- अलजेब्रा, ज्योमेट्री, ट्रिगोनोमेट्री और कैलकुलस का एक अंतहीन चक्रवात... लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गणित के लिए हमने हजारों घंटे बर्बाद किए, वह हमारे वास्तविक जीवन में कितना काम आता है? आधुनिक शोध और विशेषज्ञों का मानना है कि हम न सिर्फ गलत गणित पढ़ रहे हैं, बल्कि उसे आंकने का हमारा तरीका भी पूरी तरह गलत है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अमेरिका समेत दुनिया के कई हिस्सों में गणित का वर्तमान पाठ्यक्रम 1893 की ‘कमेटी ऑफ टेन’ द्वारा निर्धारित किया गया था। उस दौर में रटकर गणना करना (रोट मैथ) आर्किटेक्ट, खगोलविदों और सिविल इंजीनियरों के लिए जरूरी था। पर आज, जब हमारे हाथ में सुपरकंप्यूटर जैसे स्मार्टफोन हैं, तब भी हम बच्चों को हाथ से जटिल समीकरण हल करना सिखा रहे हैं। ‘आफ्टरमैथ: द लाइफ-चेंजिंग मैथ दैट स्कूल्स वॉन्ट टीच यू’ के लेखक टेड डिनर्टस्मिथ कहते हैं, आज की दुनिया डेटा, एल्गोरिदम, सांख्यिकी व एआई से चलती है। पर हमारी शिक्षा नीति अब भी 19वीं सदी के रटने वाले गणित व मल्टीपल चॉइस टेस्ट स्कोर के पीछे भाग रही है।’ एक्सपर्ट मानते हैं अगर कंप्यूटर कोई काम बेहतर व तेज कर सकता है, तो बच्चों को उसी काम में उलझाए रखना गुणवत्ता का पैमाना नहीं हो सकता। गणित की अज्ञानता से जोखिम ओईसीडी के एजुकेशन डायरेक्टर एंड्रियास श्लीचर के मुताबिक गणित की व्यावहारिक समझ न होना सिर्फ अकादमिक कमी नहीं, बल्कि जिंदगी व स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा जोखिम है। डेटा की समझ न होने से लोग मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट व डॉक्टरों द्वारा डेटा की गलत व्याख्या से जीवन-मरण से जुड़े गलत फैसले ले लेते हैं। वहीं, ‘मैथ एंग्जायटी’ के शिकार 93% लोग वित्तीय जाल में फंस रहे हैं; वे महंगाई व ब्याज के गणित को न समझ पाने से निवेश व भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। यही अज्ञानता जनता को नीति-निर्धारकों के आंकड़ों के मायाजाल में भी उलझाती है। कई देशों में बेरोजगारी के आधिकारिक आंकड़े हकीकत छुपाते हैं, जबकि असली दर ज्यादा है। पर गणित से दूरी, यह गफलत समझा नहीं पाती। जनगणना जैसी प्रक्रियाओं में भी डेटा की गलतियों से संसाधनों का गलत आवंटन होता है। जब तक हम आंकड़ों में छिपा सच नहीं समझेंगे, तब तक गुमराह होते रहेंगे।एक्सपर्ट कहते हैं,‘गणित का सही ज्ञान न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता के लिए जरूरी है, बल्कि यह लोकतंत्र को भी मजबूत करता है। जब नागरिक डेटा व आंकड़ों को समझना शुरू करेंगे, तभी सही सवाल पूछ सकेंगे। वक्त आ गया है कि हम रटने वाले गणित से बाहर निकलें और उस गणित को अपनाएं जो हमारा कल संवार सके। 80% वक्त गणना पर खर्च हो रहा, इसे एआई-कंप्यूटर को करने दें अमेरिकी शिक्षाविद् कॉनराड वोल्फ्राम का तर्क है कि हमें ‘डेटा एनालिटिक्स’ व ‘फाइनेंशियल लिटरेसी’ को महत्व देना चाहिए। वर्तमान शिक्षा 80% समय ‘गणना’ पर खर्च करती है, जबकि यह काम कंप्यूटर व एआई कहीं बेहतर कर सकते हैं। छात्रों को गणना के बोझ से मुक्त कर समस्या सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए। छात्र सांख्यिकीय तर्क व वित्तीय फैसले सीखें जो जीवन को प्रभावित करते हैं। यदि छात्र स्कूल से निकलने के बाद टैक्स, निवेश या ब्याज दर नहीं समझ सकते, तो उनकी गणित की शिक्षा अधूरी है। इन व्यावहारिक आंकड़ों में दक्षता ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

दैनिक भास्कर 9 May 2026 5:08 pm

चैटजीपीटी लॉन्च कर सकता है एआई फोन:एपल रोबोट से चैटजीपीटी पिन तक; अब AI गैजेट्स की रेस

चैटजीपीटी को आम लोगों के लिए खुले हुए अब तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं और इस दौरान बहुत कुछ बदल गया है। चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई एलएलएम अब सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ऐसे एजेंट बनते जा रहे हैं जो जटिल काम आसान कर सकते हैं, उन्हें तेज कर सकते हैं या कुछ काम खुद ही संभाल सकते हैं। तो अब ओपनएआई के लिए अगला कदम क्या है? सैम आल्टमैन की अगुवाई वाली यह कंपनी एआई मॉडल्स और एजेंट्स के बाद ‘एआई एजेंट फोन’ बनाने की तैयारी में है। AI हार्डवेयर का नया दौर ओपनएआई का बड़ा प्रोडक्ट ऐसा स्मार्टफोन हो सकता है, जो एक एआई फोन होगा और फोन इस्तेमाल करने का तरीका ही बदल सकता है। इस रेस में ओपनएआई अकेला नहीं है। दूसरी कंपनियां भी एआई को ध्यान में रखकर नए डिवाइस बना रही हैं। मेटास्टैट रिसर्च के मुताबिक, एआई गैजेट्स का बाजार 2032 तक हर साल करीब 24% की रफ्तार से बढ़ सकता है। इस दिशा में तेजी अब दिखने लगी है, जहां ओपनएआई और एपल जैसी कंपनियां दिलचस्पी ले रही हैं। आइए जानते हैं ऐसे कुछ आने वाले गैजेट्स, जिनका फोकस एआई पर है। जल्द लॉन्च होंगे ये एआई डिवाइस चैटजीपीटी फोन - 6 पॉइंट से समझिए कैसा होगा - इसका इंटरफेस एंड्रॉइड और आईओएस से अलग हो सकता है। - इस फोन में एप-आधारित सिस्टम की जगह टास्क-आधारित इंटरफेस हो सकता है, जहां ज्यादातर काम चैटजीपीटी या उसके एप्स संभालेंगे। - उदाहरण के लिए आप सुबह उठकर आप फोन से सभी अपडेट्स ले सकते हैं। फोन खुद ईमेल का जवाब दे सकेगा, कॉल कर सकेगा और ग्रोसरी ऑर्डर भी खुद कर पाएगा यानी स्क्रॉल करने की जगह आप फोन को काम सौंप सकेंगे। - इसमें मीडियाटेक डायमेंसिटी 9600 प्रोसेसर, दो NPU (एआई प्रोसेसिंग यूनिट) हो सकते हैं। - कैमरा भी आसपास को स्कैन कर जवाब देने के लिए इस्तेमाल होगा। - एनालिस्ट मिंग ची कुओ के अनुसार फोन 2027 तक लॉन्च हो सकता है और पहले साल करीब 3 करोड़ यूनिट्स बेचने का अनुमान है। ओपनएआई स्मार्ट पिन ओपनएआई का यह एक स्क्रीनलेस वियरेबल होगा, जिसमें माइक्रोफोन, कैमरा और स्पीकर हो सकता है। यह आसपास की चीजों को रिकॉर्ड करके चैटजीपीटी को देगा और इससे बातचीत कर सकेंगे। 2026 तक लॉन्च की चर्चा थी। अब टाइमलाइन बदल सकती है। एपल का एआई पिन - एपल भी एक एआई पिन पर काम कर रहा है। यह एयरटैग जितना छोटा हो सकता है और इसमें दो कैमरे, तीन माइक्रोफोन और स्पीकर हो सकते हैं। - यह डिवाइस मीटिंग नोट्स लेने और रियल-टाइम ट्रांसलेशन जैसे काम कर सकता है। - 2027 के अंत तक आ सकता है। गूगल का स्मार्ट ग्लास - इसका इंटरफेस ऐसा होगा कि स्क्रीन आंखों के सामने दिखेगी, लेकिन नजर को ब्लॉक नहीं करेगी… यानी ट्रांसपेरेंट एलिमेंट्स के जरिए जानकारी दिखेगी। ये जेमिनी पर आधारित होंगे, जो सवालों के जवाब देंगे, रास्ता बताएंगे और नोटिफिकेशन लेंस पर दिखाएंगे एपल का टेबलटॉप रोबोट एपल एक ऐसे रोबोट पर काम कर रहा है, जिसमें टैबलेट जैसी स्क्रीन हो सकती है। स्क्रीन से आप वीडियो देख सकते हैं या मेन्यू कंट्रोल कर सकते हैं। इसका मुख्य इंटरफेस वॉइस होगा। एआई पावर्ड सिरी होगी, जो ज्यादा एडवांस जवाब दे सकेगी।

दैनिक भास्कर 9 May 2026 3:23 pm

रील स्क्रॉलिंग भी जंक फूड की तरह; मेमोरी -फोकस कमजोर:माता-पिता का स्क्रीन टाइम ज्यादा, तो बच्चों में फोन की लत लगने के चांस ज्यादा

लोगों में रील्स देखने की आदत बढ़ रही है। खासकर बच्चों और युवाओं में यह आदत देखी जाती है, लेकिन बड़े भी इससे उतने ही प्रभावित हैं। वे खुद स्क्रीन टाइम को कम नहीं कर पाते और बच्चों के लिए उदाहरण बनते हैं। लेकिन रील स्क्रॉल के कई दुष्प्रभाव हैं। इससे आपकी याद्दाश्त और ध्यान भी कमजोर होता है। ऐसे में जानें फोन एडिक्शन की साइंस और बचाव के तरीके। स्क्रीन टाइम से ज्यादा देखे जा रहे कंटेंट के बारे में सोचें स्क्रीन टाइम निर्धारित नहीं करता कि आपको फोन की लत है। इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया एप्स, जिनमें हम रैंडम रील्स स्क्रॉल करते हैं, वे ‘जंक फूड’ की तरह हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क की स्टडी के मुताबिक इस तरह के कंटेंट की आदत याददाश्त और फोकस को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इस तरह के एप्स से दूरी बनाना ज्यादा जरूरी है। आदत कम करने के लिए फैमिली मीडिया प्लान बनाएं प्रो.जेसन नागाटा के अनुसार, जिन माता-पिता का स्क्रीन टाइम ज्यादा होता है, उनके बच्चों में भी फोन की लत ज्यादा देखने को मिलती है। इसे कम करने के लिए अपना फैमिली मीडिया प्लान बनाएं। यानी घर में कुछ नियम तय करें, जैसे खाने और सोने के समय फोन न इस्तेमाल करना। फोन को बेडरूम और डाइनिंग टेबल से दूर रखना। जानें कब फोन चलाना हमारी आदत बन जाती है फोन का ज्यादा इस्तेमाल करना और लत लगना, दो अलग बातें है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को के एसोसिएट प्रो. जेसन नागाटा इसकी तुलना नशे की लत से करते हैं। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताने लगे, दोस्तों से दूरी बनाने लगे या पढ़ाई- काम पर असर दिखने लगे, तो यह संकेत है कि अब इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

दैनिक भास्कर 9 May 2026 1:39 pm

स्पैम कॉल-खराब नेटवर्क जैसी शिकायतें 15 दिन में निपटानी होंगी:नहीं तो 50 लाख जुर्माना लगेगा, TRAI ने ​शिकायत निवारण का ड्राफ्ट पेश किया

दूरसंचार नियामक ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों पर शिकंजे की तैयारी कर ली है। स्पैम, अनवांटेड, फ्रॉड कॉल और मोबाइल सेवा की गुणवत्ता से जुड़ी ​शिकायतें अब इन्हें 24x7 सुननी होंगी। शिकायतें निपटाने में 15 दिन से ज्यादा विलंब होने पर कंपनियों पर अधिकतम 50 लाख रु. तक का जुर्माना लगेगा। ये बातें टेलीकॉम उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथे सुधार) विनियम-2026 में ड्रॉफ्ट का हिस्सा हैं। ट्राई ने इसे जनचर्चा के लिए पेश किया है। इसके मुताबिक, ​रिकॉर्डेड ऑटोमेटेड रिप्लाई से बात नहीं बनेगी। ग्राहक की मांग के हिसाब से महिला/पुरुष टेलीकॉलर से कनेक्ट करना जरूरी होगा। हर तरह के प्रमोशनल कॉल पर ग्राहक को कॉलबैक की सुविधा देनी होगी। ग्राहकों की दर्ज शिकायत पर हो रही कार्रवाई के अपडेट एसएमएस, ईमेल और एप पर लगातार करना होगा। गलत निपटारे पर भी दंड लगेगा 1. गलत तरीके से शिकायत बंद करने पर कंपनी का क्या होगा?कंपनी को ₹1,000 रुपए प्रति शिकायत जुर्माना देना होगा। 2. अपील के गलत निपटारे पर कितना जुर्माना लगाया जाएगा? हर लापरवाही पर ₹5,000 रु. प्रति अपील का दंड लगेगा। 3. एक तिमाही में अधिकतम कितना जुर्माना लग सकता है?कुल जुर्माने की ऊपरी सीमा ₹50 लाख रु. तय की गई है। 4. तिमाही रिपोर्ट जमा करने में देरी करने पर क्या नियम है?पहले 15 दिन की देरी पर ₹प्रति दिन 5,000 रु., उसके बाद ₹20,000/दिन लगेंगे। 5. रिपोर्टिंग में देरी पर क्या?प्रति केस अधिकतम ₹10 लाख वसूले जा सकते हैं। 6. जुर्माना समय ने न भरा तो?बकाया राशि पर कंपनी को अतिरिक्त ब्याज देना होगा। 7. इन बदलावों से क्या सुधरेगा?कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी और वे शिकायतों को जल्द सुलझाने के लिए बाध्य होंगी। 8. मौजूदा व्यवस्था में क्या है?कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं, न ही जुर्माना की सीमा तय है। ………………….. यह खबर भी पढ़ें… फर्जी-SMS और फ्रॉड रोकने के लिए TRAI का नया नियम: अब कॉमर्शियल SMS के साथ प्री-टैगिंग जरूरी, कंपनियों को 60 दिन में बदलाव करना होगा टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने अब फर्जी SMS और फिशिंग एक्टिविटीज पर रोक लगाने के लिए एक कड़ा कदम उठाया है। TRAI ने देश की सभी टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि कॉमर्शियल कम्युनिकेशन के लिए भेजे जाने वाले सभी SMS टेम्प्लेट्स में मौजूद 'वेरिएबल कंपोनेंट्स' को अब पहले से ही टैग (Pre-Tag) करना होगा। पूरी खबर पढ़ें… पब्लिक वाई-फाई का पूरे देश में एक ही पासवर्ड होगा: अब बार-बार ओटीपी से राहत मिलेगी; देश में 4 लाख हॉट स्पॉट, ट्राई ने सुझाव मांगे सरकार पीएम-वाणी की विफलता से सबक लेते हुए एक नया और उन्नत पब्लिक वाई-फाई सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यूजर अनुभव को बेहतर बनाना और डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाना है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 9 May 2026 1:30 am

आइटेल A100C स्मार्टफोन लॉन्च, कीमत ₹7,999:मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन के साथ 90Hz डिस्प्ले और 5000mAh बैटरी जैसे फीचर्स

टेक कंपनी आइटेल ने अपना नया स्टाइलिश स्मार्टफोन A100C न्यू लॉन्च किया है। कंपनी ने फोन को खासतौर पर उन लोगों के लिए पेश किया है, जो कम बजट में मजबूती और बेहतर फीचर्स चाहते हैं। स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती है। इसे मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन (MIL-STD-810H) मिला हुआ है, जो इसे गिरने या झटकों से खराब होने से बचाता है। CMR ड्यूरेबिलिटी इंडेक्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, आइटेल 10 हजार रुपए से कम के सेगमेंट में देश का सबसे भरोसेमंद और टिकाऊ ब्रांड बनकर उभरा है। आइटेल A100C न्यू स्मार्टफोन की भारत में कीमत 7,999 रुपए रखी गई है। कंपनी ने इसे सिल्क ग्रीन, टाइटेनियम गोल्ड और प्योर ब्लैक जैसे तीन कलर ऑप्शन के साथ उतारा है। मेमोरी और परफॉर्मेंस: 64GB स्टोरेज के साथ ऑक्टा-कोर प्रोसेसर स्मार्टफोन 2GB रैम के साथ आता है, जिसे वर्चुअल रैम की मदद से 4GB और बढ़ाकर कुल 6GB तक किया जा सकता है। इसमें 64GB की इंटरनल स्टोरेज दी गई है। फोन की स्पीड को बेहतर बनाने के लिए इसमें यूनिसोक T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है। यह एंड्रॉइड 15 गो एडिशन पर चलता है, जो कम रैम वाले फोन में भी स्मूथ गेमिंग और वीडियो कॉलिंग का अनुभव देता है। डिस्प्ले और ऑडियो: 90Hz रिफ्रेश रेट के साथ DTS साउंड बेहतर विजुअल एक्सपीरियंस के लिए फोन में 6.6-इंच का HD+ डिस्प्ले दिया गया है, जो 90Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। स्क्रीन चलाने में काफी स्मूथ है। ऑडियो के लिए इसमें DTS पावर्ड साउंड टेक्नोलॉजी दी गई है, जो मूवी देखने या गाने सुनने के दौरान शानदार आवाज देती है। बैटरी और सिक्योरिटी: दिनभर चलेगी 5000mAh की बैटरी लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए आइटेल ने इसमें 5000mAh की बड़ी बैटरी दी है, जिसे चार्ज करने के लिए 10W का चार्जर साथ मिलता है। सिक्योरिटी के लिए फोन में फेस अनलॉक के साथ साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है, जो इसे इस्तेमाल करने में आसान और सुरक्षित बनाता है। डायनामिक बार और कैमरा फीचर्स फोन में एक खास 'डायनामिक बार' फीचर दिया गया है। इसकी मदद से यूजर बिना किसी रुकावट के बैटरी स्टेटस, कॉल और नोटिफिकेशन चेक कर सकते हैं। फोटोग्राफी के लिए इसमें एडवांस्ड इमेज प्रोसेसिंग वाला 8MP का रियर कैमरा है, जो बेहतरीन और जीवंत तस्वीरें क्लिक करने में सक्षम है।

दैनिक भास्कर 8 May 2026 4:27 pm

फर्स्ट क्लास यात्रा को अल्ट्रा लग्जरी बनाने की तैयारी:प्राइवेट जेट जैसा अहसास होगा; जीरो-ग्रैविटी सीट, निजी शावर-स्पा जैसे फीचर्स

एविएशन वर्ल्ड में ‘फर्स्ट क्लास’ अब आलीशान ‘प्राइवेट सुइट’ का रूप ले चुका है। भविष्य के डिजाइनों में फर्श से छत तक के दरवाजे, अलग सोने के लिए फुल-साइज बेड और यहां तक कि निजी बाथरूम जोड़े जा रहे हैं। इंजीनियरिंग की चुनौतियों के बावजूद, एयरलाइंस वजन और ईंधन दक्षता से समझौता कर यात्रियों को ‘अल्ट्रा-लग्जरी’ अनुभव देने की होड़ में हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक एयरलाइंस अब कमर्शियल उड़ानों में प्राइवेट जेट जैसा अहसास देना चाहती हैं ताकि हाई-नेट-वर्थ यात्री उनकी ओर आकर्षित हों। एयरलाइंस कमर्शियल उड़ानों में प्राइवेट जेट जैसा अहसास देना चाहती हैं ताकि हाई-नेट-वर्थ यात्री आएं प्राइवेसी और सुइट का नया पैमानाएमिरेट्स ने बोइंग 777 सुइट्स में फर्श से छत तक के दरवाजे और वर्चुअल विंडोज पेश की हैं, जो हाई-डेफिनिशन कैमरा तकनीक का उपयोग करती हैं। सीटों में नासा से प्रेरित ‘जीरो-ग्रैविटी’ तकनीक है, जो शरीर के दबाव को कम कर वजनहीनता का अहसास कराती है। इन-सुइट बाथरूम का ऑफरएमिरेट्स के प्रेसिडेंट सर टिम क्लार्क ने भविष्य के बोइंग 777एक्स विमानों के लिए हर सुइट में एक पूरी तरह से निजी बाथरूम जोड़ने की योजना का संकेत दिया है, जो वर्तमान के साझा शावर स्पा से एक कदम आगे होगा। टचलेस और स्मार्ट कंट्रोल कतर एयरवेज और एमिरेट्स जैसी कंपनियां अब यात्रियों को अपने स्मार्टफोन या टैबलेट से सुइट की लाइटिंग और तापमान नियंत्रित करने की सुविधा दे रही हैं। पर्सनल स्पेस - एक सुइट, कई कमरेएयरलाइंस एक ही सुइट में अलग-अलग गतिविधियों के लिए जगह दे रही है। एतिहाद एयरवेज- ‘द रेजिडेंस’ में अलग लिविंग रूम, डबल बेड वाला बेडरूम, एक निजी शॉवर की सुविधा। सिंगापुर एयर. -ए380 सुइट्स में अलग रिक्लाइनर और फोल्डेबल बेड, ताकि यात्री को घर जैसा अनुभव मिले। लुफ्थांसा - सुइट प्लस फीचर्स में 2 यात्री एक साथ बैठ सकते हैं। सीट को एक बड़े बेड में बदल सकते हैं। जापान एयर.- नए ए350-1000 में इन-सीट स्टीरियो तकनीक, जिससे बिना हेडफोन के संगीत सुना जा सकता है।

दैनिक भास्कर 6 May 2026 12:48 pm