ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक स्टडी में सामने आया है कि पुरानी E10 कंप्लायंट गाड़ियों में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। 10 सवालों के जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: ARAI की इस रिपोर्ट में सबसे मुख्य बात क्या निकलकर सामने आई है? जवाब: ARAI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, E10 गाड़ियों में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर फ्यूल-सिस्टम खराब हो सकता है। इससे गाड़ी के रबर पार्ट्स जैसे पाइप, गैस्केट्स, सील्स और ओ-रिंग्स को नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। सवाल 2: क्या रिपोर्ट को आम जनता के लिए जारी किया गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: नहीं, इस स्टडी रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, यह रिपोर्ट सरकार और देश के प्रमुख वाहन निर्माताओं (OEMs) के बीच इस पूरे मामले पर नीति बनाने और तकनीकी सुधार करने के लिए एक मुख्य रेफरेंस पॉइंट बनी हुई है। सवाल 3: चार पहिया वाहनों के इंजन पर E20 ईंधन के असर को लेकर क्या टेस्टिंग की गई थी? जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, दो OEMs ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए थे। इसमें एक निर्माता की गाड़ी के इंजन ने 400 घंटे की टेस्टिंग के बाद कोई समस्या नहीं दिखाई और उसका परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ सही पाया गया। लेकिन दूसरे निर्माता के मामले में स्थिति अलग रही। सवाल 4: दूसरे चार पहिया वाहन निर्माता की गाड़ी में क्या तकनीकी समस्या देखी गई? जवाब: दूसरे OEM के इंजन की जब 809 घंटे तक टेस्टिंग की गई, तो उसके एग्जॉस्ट वाल्व में 'थर्मोमैकेनिकल फेलियर' देखा गया। हालांकि, इस मामले के जानकारों का कहना है कि एग्जॉस्ट वाल्व के फेल होने के पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। सवाल 5: यह 'थर्मोमैकेनिकल फेलियर' क्या होता है और इससे इंजन को क्या नुकसान है? जवाब: थर्मोमैकेनिकल फेलियर तब होता है जब अत्यधिक गर्मी और तेज व बार-बार होने वाली हलचल (मैकेनिकल स्ट्रेस) एक साथ मिलती हैं। इन दोनों के संयुक्त दबाव के कारण इंजन का एग्जॉस्ट वाल्व मुड़ सकता है, उसमें दरार आ सकती है या वह पूरी तरह से टूट सकता है। सवाल 6: BS-IV और BS-VI इंजन वाली चार पहिया गाड़ियों की टेस्टिंग में क्या अंतर मिला? जवाब: रिपोर्ट में 4-व्हीलर इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के तहत बताया गया है कि टेस्टिंग के दौरान एक BS-IV इंजन का परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य रहा। इसके विपरीत, एक BS-VI टर्बो चार्ज्ड इंजन में 265 घंटे की ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग के बाद ही समस्या देखी गई। सवाल 7: दो पहिया वाहनों पर इस टेस्टिंग का क्या परिणाम रहा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, तीन दो पहिया वाहन निर्माताओं ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए गए थे। इन टेस्ट्स में इंजनों में कोई समस्या नहीं पाई गई। इन्हें E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य पाया गया है। सवाल 8: क्या E20 ईंधन से गाड़ियों के मैटेलिक पार्ट्स या उत्सर्जन पर बुरा असर पड़ता है? जवाब: नहीं, सभी टेस्ट किए गए वाहनों पर इस स्टडी में पाया गया कि E20 ईंधन का मैटेलिक कंपोनेंट्स पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा, E10-कंप्लायंट वाहनों में E20 ईंधन डालने पर भी साइलेंसर से होने वाला उत्सर्जन तय कानूनी सीमाओं के भीतर ही पाया गया। सवाल 9: गाड़ियों की माइलेज या ईंधन की खपत पर इससे क्या प्रभाव पड़ा? जवाब: ARAI की स्टडी में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E10 ईंधन की तुलना में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने पर वाहनों की ईंधन खपत 2% से 6% तक बढ़ जाती है। यानी गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है। हालांकि, ईंधन की खपत में होने वाली यह बढ़ोतरी अलग-अलग गाड़ियों के मॉडल और कैटेगरी के हिसाब से बदलती है। सवाल 10: गाड़ी के स्टार्ट होने, चलने और वाष्पीकरण उत्सर्जन पर क्या असर दिखा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, E20 ईंधन के साथ गाड़ियों का इवैपोरेटिव एमिशन भी पूरी तरह से कानूनी सीमा के भीतर पाया गया। इसके साथ ही, गाड़ियों की स्टार्टेबिलिटी (आसानी से स्टार्ट होना) और ड्राइवैबिलिटी (चलने की परफॉर्मेंस) भी E20 ईंधन के साथ बिल्कुल ठीक पाई गई। सरकार ने कहा था- टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान का सबूत नहीं मिला बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाड़ी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूद रहे थे। उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए थे। पेट्रोल में 25% एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला टाल सकती है सरकार E20 फ्यूल के विरोध के बीच सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। सरकार इस ट्रांजिशन को जल्दबाजी में करने के बजाय धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहती है। सरकार ने शुरुआत में साल 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्लान बनाया था। लेकिन इस टारगेट से बहुत पहले ही E20 फ्यूल (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) को पूरे देश में स्टैंडर्ड पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया है और अब हर जगह यही पेट्रोल मिल रहा है।
अब टेलीग्राम एप पर फ्री पायरेटेड फिल्में और वेब सीरीज नहीं मिल पाएंगी। केंद्र सरकार ने टेलीग्राम से फिल्मों और OTT कंटेंट के पायरेटेड वर्जन देने वाले चैनल्स और ग्रुप्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने को कहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज कंपनी को नोटिस भेजा। मंत्रालय ने कहा कि टेलीग्राम अगले 15 दिन में पायरेटेड कंटेंट पर लिए एक्शन की रिपोर्ट सौंपे। एप को 3 दिन में सरकार का दूसरा नोटिस मिला है। इससे पहले टेलीग्राम को 2 जुलाई को एक नोटिस भेजा गया था, जिसमें आईटी मिनिस्ट्री ने यूजरनेम फीचर और यूजर्स की प्राइवेसी पर सवाल पूछे थे। टेलीग्राम पर 3000 से ज्यादा चैनल ब्लॉक हो चुके नीट पेपर लीक के बाद भी टेलीग्राम पर बैन लगा था इससे पहले जून में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की सिफारिश पर सरकार ने पेपर लीक मामले में टेलीग्राम पर 16 जून से 22 जून तक बैन लगा दिया था। इसके अलावा, 21 जून को हुई NEET 2026 की दोबारा परीक्षा को देखते हुए सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक अपना 'मैसेज-एडिटिंग' फीचर बंद रखने का भी आदेश दिया था। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूजरनेम फीचर पर वॉट्सएप के बाद टेलीग्राम को नोटिस: सरकार ने पूछा- इससे साइबर अपराधों का खतरा, रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने वॉट्सएप के बाद गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से पूछा कि उसे यूजरनेम फीचर जारी रखने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। सरकार ने बुधवार को मेटा और वॉट्सएप के यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…
भारत सरकार के E20 यानी 20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के फैसले पर जहां देश में विवाद और विरोध चल रहा है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय ऑयल कंपनियों (OMCs) के E20 पेट्रोल लेने से मना कर दिया है। भूटानी मीडिया 'द भूटानीज' की रिपोर्ट के मुताबिक, भूटान ने भारत से अनुरोध किया है कि जब तक भारतीय बाजार में नॉर्मल पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उन्हें बिना मिलावट वाला पुराना पेट्रोल ही सप्लाई किया जाए। पुरानी स्टोरेज और वाटर लीकेज सबसे बड़ा कारण भूटान के अधिकारियों के मुताबिक, देश का फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर काफी पुराना है। वहां के पेट्रोल पंपों के फ्यूल टैंक जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बने हैं, जिनमें पानी रिसने यानी सीपेज का खतरा रहता है। नॉर्मल पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल में हाइड्रोक्सिल ग्रुप होता है, जो हवा या आसपास की नमी को बहुत तेजी से सोखता है (हाइग्रोस्कोपिक नेचर)। अगर E20 पेट्रोल को ऐसे टैंकों में रखा जाए जहां पानी का रिसाव हो, तो पेट्रोल में पानी मिल जाएगा। इस पानी को पेट्रोल से अलग करना बेहद मुश्किल होता है। इसके अलावा, टैंक में पानी होने से स्टील के टैंकों और पाइपलाइनों में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं। पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों के परफॉर्मेंस की चिंता भूटान का इलाका पूरी तरह से पहाड़ी और ऊंचा-नीचा है। ऐसी चढ़ाई वाले रास्तों पर गाड़ियों को चलने के लिए मैक्सिमम पावर यानी ज्यादा ताकत की जरूरत होती है। भूटानी अधिकारियों को डर है कि एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों को वो परफॉर्मेंस और पावर नहीं दे पाएगा, जो नॉर्मल पेट्रोल देता है। भारत में क्यों हो रहा है E20 पेट्रोल का विरोध? भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि एथेनॉल से माइलेज में मामूली कमी जरूर आती है, लेकिन इससे गाड़ी का पिकअप और इंजन परफॉर्मेंस बेहतर होता है। भूटान को कैसे पता चलेगा कि पेट्रोल में मिलावट है? भूटान अपनी जरूरत का पूरा ईंधन भारत से ही खरीदता है। फिलहाल भूटान भारत से महंगे और हाई-एक्सपोर्ट क्वालिटी वाले पेट्रोल-डीजल की खरीद करता है, जो भारतीय पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले फ्यूल से ज्यादा शुद्ध और महंगा होता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत गलती से E20 पेट्रोल भूटान भेज भी देता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकता है। एथेनॉल वाले पेट्रोल में जरा सा भी पानी मिलते ही उसका रंग दूधिया हो जाता है, जिससे टेस्ट के दौरान तुरंत पकड़ में आ जाएगा। एडवांस नोटिस और लीक-प्रूफ टैंक की मांग चुनौतियों को देखते हुए भूटान सरकार ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से कहा है कि अगर वे भविष्य में एथेनॉल का ब्लेंडिंग प्रतिशत बढ़ाते हैं या पूरी तरह एथेनॉल पेट्रोल ही सप्लाई करने का फैसला करते हैं, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। साथ ही भूटान ने भारत से लीक-प्रूफ टैंक उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।
वॉट्सएप जल्द ही इंस्टाग्राम और टेलीग्राम की तरह यूजरनेम फीचर लाने वाला था। इसके जरिए लोग बिना मोबाइल नंबर शेयर किए एक-दूसरे को मैसेज कर सकते हैं। हालांकि, सुरक्षा चिंताओं के चलते सरकार ने फिलहाल इस फीचर की लॉन्चिंग पर रोक लगा दी है। दरअसल भारत में वॉट्सएप के करीब 90 करोड़ यूजर्स हैं। इसमें कई फीचर्स ऐसे भी हैं जिनके बारे में ज्यादातर यूजर्स नहीं जानते। ये प्राइवेसी बढ़ाने से लेकर चैट को ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाने में मदद कर सकते हैं। आज इन्हीं फीचर्स के बारे में जानते हैं। वॉइस नोट को अपने आप टेक्स्ट में कन्वर्ट करें, चैट को लॉक करने का भी विकल्प; जानें पूरी प्रक्रिया चैट लॉक - इससे चैट को छिपाया जा सकता है। इसके लिए पहले चैट लॉक करें। फिर लॉक्ड चैट्स फोल्डर में जाकर चैट लॉक सेटिंग्स में Hide Locked Chats ऑन करें और एक सीक्रेट कोड बना लें। अब चैट तब तक नहीं दिखेगी, जब तक सर्च बार में वही कोड टाइप नहीं होगा। यूजरनेम फीचर - इसके जरिए किसी को सीधे मैसेज नहीं भेजा जा सकेगा। बातचीत शुरू करने के लिए सामने वाले यूजर को अपना पिन साझा करना होगा। पिन मिलने के बाद ही दोनों के बीच चैट शुरू हो सकेगी। हालांकि भारत सरकार ने इस फीचर पर फिलहाल रोक लगाई है। वॉइस ट्रांसक्रिप्शन - वॉट्सएप अब वॉइस मैसेज ट्रांसक्रिप्ट फीचर देता है, जिससे वॉइस नोट टेक्स्ट में बदल सकते हैं। ऑन करने के लिए... Settings > Chats > Voice Message Transcripts| यह अभी अंग्रेजी-स्पेनिश जैसी कुछ भाषाओं में उपलब्ध है। चैट लिस्ट - अब ऑफिस, परिवार, दोस्तों या किसी प्रोजेक्ट से जुड़ी चैट्स को अलग-अलग लिस्ट्स में रखा जा सकता है। किसी चैट को दबाकर रखें, फिर Add to List चुनें और इसे नई या पुरानी लिस्ट में जोड़ दें। इससे जरूरी चैट्स ढूंढने में समय नहीं लगता है। मेटा एआई सपोर्ट - अब मेटा एआई को अलग चैट में खोलने की जरूरत नहीं है। चैट के दौरान ही एआई से जानकारी लेना, टेक्स्ट लिखवाना, ट्रांसलेट कराना या आइडिया बनाना संभव है। इससे किसी दोस्त से बात करते हुए भी बिना चैट छोड़े जानकारी हासिल की जा सकती है। बिना नंबर सेव के मैसेज - नए व्यक्ति को मैसेज भेजने के लिए नंबर सेव नहीं करना होगा। ब्राउजर में wa.me/91XXXXXXXXXX टाइप करें। यहां 91 भारत का कंट्री कोड है और उसके बाद व्यक्ति का मोबाइल नंबर लिखें। इससे सीधे उस व्यक्ति की वॉट्सएप चैट खुल जाएगी। क्लाउड बैकअप - वॉट्सएप चैट्स तो पहले से एंड-टु-एंड एन्क्रिप्टेड होती हैं, लेकिन गूगल ड्राइव या आई क्लाउड पर इनके सेव बैकअप अलग से सुरक्षित नहीं होता है। ऐसे में यह सेटिंग सक्रिय करना जरूरी हो जाता है। इसे सुरक्षित करने के लिए जाएं: Settings > Chats > Chat Backup > End-to-End Encrypted Backup चुनें। इसके बाद एक पासवर्ड सेट करें। ध्यान रखें कि पासवर्ड भूलने पर बैकअप वापस नहीं मिलेगा।
अब आप आधार सेवा केंद्र जाए बिना मोबाइल से ही अपने आधार में ईमेल ID फ्री में लिंक और अपडेट कर सकते हैं। इसके लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने नए आधार एप में 1 जुलाई से 6 महीने के लिए नई सर्विस शुरू कर दी है। UIDAI के नोटिफिकेशन के मुताबिक, 31 दिसंबर तक यूजर नए आधार एप के जरिए ईमेल ID अपडेट कर सकेंगे। खास बात ये है कि, डिजिटल सर्विस के शुरू होने के सिर्फ दो दिन में ही देशभर में 2.5 लाख से ज्यादा लोग एप से अपना ईमेल ID अपडेट कर चुके हैं। नई सर्विस कैसे काम करेगी? UIDAI के मुताबिक एप के जरिए आधार में अपडेट की प्रोसेस काफी सिंपल है। इसके लिए कोई डॉक्यूमेंट या फिजिकल विजिट की जरूरत नहीं है। पूरी प्रोसेस कुछ मिनटों में हो जाएगी। अगर आपने एप डाउनलोड नहीं किया है तो इसे डाउनलोड करके सेटअप करना होगा। नया आधार एप Android और Apple iOS, दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। फायदा: ईमेल ID अपडेट होने से तुरंत अलर्ट मिलेगा आधार से ईमेल ID जोड़ने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब आपके आधार का इस्तेमाल कर ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट भेजी जाएगी, तो आपको तुरंत ईमेल पर इसका अलर्ट मिलेगा। इससे आपको हमेशा पता रहेगा कि आपका आधार कहां और कौन इस्तेमाल कर रहा है। इस तरह कोई भी आपके पीठ पीछे आपके आधार का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा और धोखाधड़ी का खतरा नहीं रहेगा। आधार के नए एप के फीचर्स 2009 में शुरू हुआ था आधार आधार 2009 में शुरू हुआ था। अब 1.3 अरब यानी 130 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास आधार हैं। पहले पेपर कार्ड था, फिर mAadhaar एप आया। अब डिजिटल इंडिया के तहत फुली डिजिटल एप लाया गया है। सरकार की कोशिश है कि हर सर्विस ऑनलाइन हो जाए।
RailOne App का बड़ा कमाल, AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं
भारतीय रेलवे का डिजिटल टिकटिंग सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और आधुनिक हो गया है। वर्ष 1986 में शुरू हुई रेलवे आरक्षण प्रणाली में पिछले चार दशकों के दौरान कई छोटे-बड़े बदलाव हुए, लेकिन अब इसे अत्याधुनिक तकनीक के साथ पूरी तरह अपग्रेड कर दिया ...
दिल्ली समेत कई शहरों में ई-रिक्शा चालकों के लिए परेशानी बने 'BAT-BMS' समेत दो चीनी एप को सरकार ने एप स्टोर से हटाने के आदेश दिए हैं। आईटी मंत्रालय ने इसकी जानकारी शुक्रवार को दी। हालांकि, दोनों एप प्लेस्टोर पर अब भी मौजूद हैं। हाल ही में शिकायतें मिली थीं कि कुछ लोग BAT-BMS और इपोच ली-आयन एप से ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी को कंट्रोल कर रहे थे। इसके बाद वे चलते ई-रिक्शा को बंद कर देते थे। इससे चालकों को काफी परेशानी हो रही थी। इन घटनाओं के वीडियो भी वायरल हुए। दरअसल, कुछ ई-रिक्शा की लीथियम बैटरियों का ब्लूटूथ मैनेजमेंट सिस्टम बिना पासवर्ड या कमजोर सुरक्षा के था, इसलिए एप उससे कनेक्ट हो गया। हालांकि, कारों के बैटरी सिस्टम में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन होता है, इसलिए कोई सामान्य एप उनसे कनेक्ट नहीं हो सकता। सवाल 1: सोशल मीडिया पर वायरल BAT-BMS एप क्या है? जवाब: 'BAT-BMS' रियल टाइम बैटरी मैनेजमेंट टूल है। इसे चीनी कंपनी 'शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी' ने डेवलप किया है। इसका मुख्य काम ब्लूटूथ-इनेबल्ड लीथियम बैटरी की निगरानी करना है। यह एप बैटरी की ओवरऑल जानकारियां डिस्प्ले करता है। यानी, यह बैटरी का डिजिटल डैशबोर्ड जैसा है। सवाल 2: यह एप कैसे काम करता है और लोग इससे चलते हुए ई-रिक्शा कैसे रोक पा रहे हैं? जवाब: ई-रिक्शा की बैटरी में चार्जिंग, टेमप्रेचर, वोल्टेज और उसकी हेल्थ पर नजर रखने के लिए ब्लूटूथ वाला बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाता है। ड्राइवर या मैकेनिक BAT-BMS एप के जरिए इस सिस्टम से कनेक्ट हो जाते हैं और बैटरी की जानकारी देख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर उसकी सेटिंग्स मैनेज कर सकते हैं। यह 10 से 15 मीटर के दायरे में कनेक्ट हो सकता है। बदमाश इसी का फायदा उठा रहे हैं। सवाल 3: क्या देश के सभी ई-रिक्शा या इलेक्ट्रिक वाहन इस एप के जरिए रोके जा सकते हैं? जवाब: सोशल मीडिया पर यह वायरल हो रहा है। हकीकत में सभी ई-व्हीकल इसके जोखिम में नहीं हैं। यह एप केवल उन्हीं वाहनों पर असर डालता है जो कुछ खास शर्तों को पूरा करते हैं। सवाल 3: कौन से ई-रिक्शा इस एप के प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित हैं? जवाब: भारत में अभी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा पुरानी लेड-एसिड बैटरियों पर चलते हैं, जिनमें ब्लूटूथ या डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होता। इसलिए ये इन एप से पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके अलावा, जिन लीथियम बैटरियों के ब्लूटूथ सिस्टम में मैन्युफैक्चरर या डीलर ने मजबूत पासवर्ड सेट किया है, उन्हें भी इस एप के जरिए एक्सेस नहीं किया जा सकता। सवाल 4: चीनी कंपनी ने ये एप किस उद्देश्य से बनाए थे? क्या ये ई-रिक्शा के लिए थे? जवाब: नहीं, कंपनी ने इन एप को ई-रिक्शा को कंट्रोल करने के लिए नहीं बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा उपकरणों और नावों या जहाजों की बैटरी में लगी लीथियम बैटरियों की सेहत पर नजर रखना था। इन एप का डिस्चार्ज ऑन/ऑफ फीचर सुरक्षा और रखरखाव के लिहाज से दिया गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर बैटरी ओनर पावर कट कर सके। लेकिन भारत में इसका इस्तेमाल ई-रिक्शा की बैटरियों को रिमोटली बंद करने के लिए किया जाने लगा। सवाल 5: इससे ई-रिक्शा चालकों और सड़क सुरक्षा पर क्या असर पड़ रहा है? जवाब: लोगों का मानना है कि ई-रिक्शा की धीमी चाल के कारण ट्रैफिक जाम होता है। इससे परेशान होकर लोग इन्हें एप से बंद कर रहे हैं। कुछ लोग ऐसा मसखरी करने के लिए कर रहे हैं। यह चालकों के लिए मुसीबत बन गया है। सवाल 6: सुरक्षा की इस बड़ी चूक के लिए असल में जिम्मेदार कौन है? जवाब: स्थानीय स्तर पर बैटरी असेंबल करने वाले, डीलर्स और कुछ लो-कॉस्ट वाले लीथियम बैटरी मेकर्स जिम्मेदार हैं। भारत में सस्ते ई-रिक्शा पार्ट्स के बाजार में कई ऐसी लीथियम बैटरियां बेची जा रही हैं, जिनके ब्लूटूथ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को बिना किसी पासवर्ड के खुला छोड़ दिया जाता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी ने अपने घर का मुख्य दरवाजा खुला छोड़ दिया हो और कोई भी अंदर आ जाए। सवाल 7: इस सुरक्षा खामी को ठीक करने का क्या उपाय है? जवाब: वाहनों के डीलर्स और निर्माताओं को तय करना होगा कि वे वाहनों की बैटरी के मैनेजमेंट सिस्टम में मजबूत और यूनिक पासवर्ड सेट करें। इससे बाहरी व्यक्ति एप के जरिए बैटरी से कनेक्ट नहीं हो पाएगा। इसके अलावा, जिन ड्राइवरों के पास पहले से ऐसी बैटरियां हैं, वे डीलर के पास जाकर अपनी बैटरी के बीएमएस सेटिंग्स में पासवर्ड लॉक लगवा सकते हैं। ई-रिक्शा चालकों के लिए जरूरी टिप्स:
यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने वॉट्सएप के बाद गुरुवार 2 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से पूछा कि उसे यूजरनेम फीचर जारी रखने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। सरकार ने बुधवार को मेटा और वॉट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया था। सरकार ने आशंका जताई कि इससे ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और ठगी की घटनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार ने वॉट्सएप को फिलहाल यह फीचर लागू नहीं करने का निर्देश दिया है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। टेलीग्राम से पूछा- सुरक्षा के लिए क्या किया सरकार ने टेलीग्राम और सिग्नल जवाब मांगा कि इस फीचर के दुरुपयोग और साइबर ठगी रोकने के लिए कौन से सुरक्षा उपाय अपना रहे हैं। दोनों प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम फीचर पहले से उपलब्ध है। नीट पेपरलीक के बाद भी टेलीग्राम पर लगा था बैन पिछले महीने NEET पेपर लीक, फर्जी प्रश्न पत्रों के सर्कुलेशन और धोखाधड़ी के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के आरोप में सरकार ने टेलीग्राम और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। वॉट्सएप ने सरकार को जवाब दिया- हमारा फीचर सुरक्षित वॉट्सएप ने सरकार के नोटिस पर कहा था कि यूजरनेम फीचर में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल हैं, जो फर्जी पहचान, ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों से सुरक्षा करेंगे। भारत वॉट्सएप का सबसे बड़ा बाजार है। देश में इसके 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Lenovo ने भारतीय बाजार में अपना नया Lenovo Tab Plus Gen 2 टैबलेट लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने नई LOQ Gaming Monitor सीरीज भी पेश की है। नया टैबलेट एंटरटेनमेंट, मल्टीटास्किंग, पढ़ाई, ऑफिस वर्क और गेमिंग को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
ओप्पो ने आज भारत में नई स्मार्टफोन सीरीज रेनो 16 लॉन्च की है। इसमें कंपनी ने रेनो 16 और रेनो 16C पेश किए हैं। दोनों ही मोबाइल को स्टाइलिश लुक, 50 मेगापिक्सल टेलीफोटो और 50MP अल्ट्रा वाइड सेल्फी कैमरा और स्नैपड्रैगन 7 जेन 4 प्रोसेसर के साथ प्रीमियम मिड रेंज में उतारा गया है। ओप्पो रेनो 16C को तीन वैरिएंट में उतारा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 46,999 रुपए है। वहीं, ओप्पो रेनो 16 को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी कीमत 61,999 रुपए से शुरु होती है। इसके अलावा कंपनी ने ओप्पो एनको एयर 5 बड्स भी पेश किए हैं। स्मार्टफोन की सेल 9 जुलाई 2026 से शुरू होगी। लॉन्च ऑफर्स के में बैंक कार्ड्स पर 10% तक इंस्टेंट कैशबैक, एक्सचेंज बोनस, 180 दिन की स्क्रीन डैमेज प्रोटेक्शन और ओप्पो एनको बड्स 3 प्रो+ पर 50% तक की छूट भी दी जा रही है। डिजाइन: भारत में पहली बार होलोवर्स 3D डिजाइन ओप्पो रेनो 16 में दोनों स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसका नया होलोवर्स 3D डिजाइन है। जिसे कंपनी भारत में पहली बार लेकर आई है। स्टारी वाइट कलर वैरियंट में मिलने वाला यह डिजाइन अलग-अलग एंगल से देखने पर 3D इफेक्ट देता है, जिससे फोन का लुक प्रीमियम लगता है। दोनों फोन के डिजाइन को जानते हैं। बैक पैनल और मटीरियल डायमेंशन, वजन और इन-हैंड फील फ्रंट डिस्प्ले, बेजल्स और सेल्फी कैमरा पोर्ट्स और बटन्स कलर और वॉटरप्रूफिंग ओप्पो रेनो 16: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.32 इंच की फुल HD+ एमोलेड स्क्रीन दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है, जिससे फोन का इस्तेमाल और स्क्रॉलिंग बहुत स्मूद लगती है। ये 1800 निट्स की पीक ब्राइटनेस का सपोर्ट करती है, जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: इस फोन में नया और पावरफुल क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 7 जेन 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो 4 नैनोमीटर तकनीक पर बना है। यह पुराने मॉडल के मुकाबले ज्यादा फास्ट है। बेहतर गेमिंग के लिए इसमें AI हाइपर बूस्ट 2.0 और मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी के लिए AI लिंक बूस्ट 4.0 तकनीक दी गई है। फोन लेटेस्ट एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड कलरOS 16 पर चलता है, जो इस्तेमाल करने में काफी आसान है। कैमरा सेटअप: इसके बैक पैनल पर 50-50 मेगापिक्सल के तीन कैमरे हैं। इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा, 50MP का 3.5x टेलीफोटो पोर्ट्रेट कैमरा और 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा शामिल है। वहीं, फ्रंट में भी 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा है, जो 100 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ आता है। इससे ग्रुप सेल्फी में सभी लोग आसानी से आ जाते हैं। फोन के सभी कैमरों से 60fps पर 4K HDR वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। साथ ही इसमें जूम फ्री वीडियो और ऑटो स्ट्रेटन वीडियो जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। स्मार्ट AI फीचर्स: यह फोन कई एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स से लैस है… बैटरी और चार्जिंग: फोन में 6700mAh की बहुत बड़ी और दमदार बैटरी दी गई है, जो आराम से लंबा बैकअप देती है। इस बड़ी बैटरी को तेजी से चार्ज करने के लिए 80W सूपरवूक फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। सेल्फी डिवाइस ओप्पो बबल भी लॉन्च ओप्पो ने रेनो 16 सीरीज के साथ नया स्मार्ट कैमरा एक्सेसरी ओप्पो बबल भी लॉन्च किया है। यह 27.5 ग्राम का डिवाइस है, इसमें 1.73-इंच एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो रियर कैमरे का लाइव प्रीव्यू शो करता है और बेहतर सेल्फी और कंटेंट क्रिएशन में मदद करता है। इसकी कीमत 7,999 रुपए है यह भी फोन के साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर मिलेगा।
वॉट्सएप ने अपने आने वाले 'यूजरनेम' फीचर को लेकर एक डिटेल्ड FAQs यानी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की गाइडलाइन जारी की है। केंद्र सरकार ने हाल ही में वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस जारी कर इस फीचर से होने वाले संभावित फ्रॉड के खतरों पर चिंता जताई थी। सरकार ने चेतावनी दी थी कि जब तक इस मुद्दे पर पूरी संतुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इसे रोलआउट न किया जाए। इसके बाद वॉट्सएप ने स्पष्ट किया है कि वह सुरक्षा के क्या-क्या कदम उठा रहा है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। 9 आसान सवाल-जवाब में जानें वॉट्सएप की नई गाइडलाइन सवाल 1: वॉट्सएप पर यूजरनेम बनाना क्या सभी के लिए जरूरी होगा? जवाब: नहीं, यह बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं है। वॉट्सएप ने साफ किया है कि यूजरनेम बनाना पूरी तरह से ऑप्शनल होगा। अगर आप अपनी पहचान या फोन नंबर छिपाना चाहते हैं, तभी इसे बनाएं। सवाल 2. मुझे अपनी पसंद का यूजरनेम नहीं मिला, तो इसकी क्या वजह हो सकती है? जवाब: इसके तीन मुख्य कारण हो सकते हैं: सवाल 3. मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर फ्रॉड करने वालों को वॉट्सएप कैसे रोकेगा? जवाब: वॉट्सएप का कहना है कि अभी यूजरनेम से मैसेज भेजने का फीचर लाइव नहीं किया गया है, सिर्फ नाम रिजर्व हो रहे हैं। जब यह लाइव होगा और आपको किसी अनजान यूजरनेम से मैसेज आएगा, तो वॉट्सएप आपको उस अकाउंट के देश की जानकारी देगा। साथ ही पहली बार मैसेज आने पर एक वॉर्निंग भी स्क्रीन पर दिखेगी। इसके अलावा कंपनी ब्लॉक और रिपोर्ट करने वाले अकाउंट्स पर कड़ी नजर रखेगी ताकि स्कैमर्स पर तुरंत एक्शन लिया जा सके। सवाल 4. क्या कोई भी अनजान व्यक्ति मेरा यूजरनेम गेस करके मुझे मैसेज भेज सकता है? जवाब: जैसे आज आप वॉट्सएप पर किसी का भी फोन नंबर सर्च नहीं कर सकते, वैसे ही किसी का यूजरनेम भी सर्च नहीं किया जा सकेगा। अनजान लोगों से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप एक बिल्कुल अलग यूजरनेम चुनें और वॉट्सएप के नए सुरक्षा फीचर 'यूजरनेम की' को ऑन कर लें। सवाल 5. यह 'यूजरनेम की' क्या है और यह कैसे सुरक्षा देगी? जवाब: यह आपकी सुरक्षा की एक एक्स्ट्रा लेयर है। इसे एक्टिवेट करने के बाद अगर कोई नया व्यक्ति आपसे कनेक्ट होना चाहता है, तो उसे आपके 'यूजरनेम' के साथ-साथ आपकी 'यूजरनेम की' भी पता होनी चाहिए। इसके बिना वह आपको मैसेज नहीं भेज पाएगा। आप इस 'की' को कभी भी रिसेट कर सकते हैं, जिससे पुराने लोग आपके यूजरनेम के जरिए दोबारा नया संपर्क नहीं कर पाएंगे। सवाल 6. क्या यूजरनेम बनाने के लिए मुझे अपने फेसबुक या इंस्टाग्राम अकाउंट को लिंक करना पड़ेगा? जवाब: अगर आप वही यूजरनेम चाहते हैं जो आपके इंस्टाग्राम या फेसबुक पर है, तो आपको अकाउंट लिंक करना होगा। यह इसलिए किया गया है ताकि फ्रॉड को कम किया जा सके और पहचान वेरिफाई हो सके। हालांकि, एक बार यूजरनेम मिलने के बाद आप चाहें तो इन अकाउंट्स को अनलिंक कर सकते हैं या फिर वॉट्सएप के लिए बिल्कुल अलग यूजरनेम चुन सकते हैं। सवाल 7. क्या मैं अपना वॉट्सएप यूजरनेम बाद में बदल सकता हूं? जवाब: हां, आप इसे बाद में कभी भी बदल सकते हैं, बशर्ते आपका नया पसंदीदा नाम प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होना चाहिए। सवाल 8. इंटरनेट पर मशहूर नामों को एडवांस में बुक करने के दावे किए जा रहे हैं, क्या यह सच है? जवाब: वॉट्सएप ने इसे पूरी तरह अफवाह बताया है। कंपनी ने कहा कि जो लोग पॉपुलर या मशहूर नामों को रिजर्व करने का दावा कर रहे हैं, वे झूठे हैं। सेलिब्रिटीज और सरकारी संस्थाओं के नाम पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें सिर्फ उनके असली और लीगल मालिक ही क्लेम कर सकते हैं। सवाल 9. वॉट्सएप इस फीचर को इतनी जल्दी में क्यों लेकर आया और यह कब से शुरू होगा? जवाब: वॉट्सएप का कहना है कि उन्होंने यूजरनेम लॉन्च करने से काफी पहले ही नाम रिजर्व करने की प्रक्रिया इसलिए शुरू की क्योंकि लोग अपनी पसंद के नाम को लेकर काफी गंभीर होते हैं। कंपनी अभी सरकार और यूजर्स के फीडबैक को सुन रही है। इस साल के अंत में जब इसे पूरी तरह से रोलआउट किया जाएगा, तब तक इसे पूरी तरह सुरक्षित और परफेक्ट बना दिया जाएगा।
भारतीय रेलवे अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को पूरी तरह से अपग्रेड कर रहा है। इस बड़े बदलाव के बाद रेलवे का नया बुकिंग सिस्टम हर मिनट 1.25 लाख टिकट बुक कर सकेगा। यह मौजूदा क्षमता से पूरे 5 गुना ज्यादा है। अभी रेलवे का सिस्टम एक मिनट में सिर्फ 25 हजार टिकट ही प्रोसेस कर पाता है, जिससे तत्काल बुकिंग या भारी लोड के समय यात्री परेशान होते हैं। सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) ने बुधवार को अपने 41वें स्थापना दिवस पर यह जानकारी दी। बढ़ती डिमांड पूरा करेगा नया सिस्टम, हैंग होने की समस्या कम होगी CRIS के मुताबिक, टिकट बुकिंग क्षमता में 5 गुना बढ़ोतरी से सिस्टम की परफॉर्मेंस में बड़ा सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे यात्रियों की रिजर्वेशन की बढ़ती मांग को तेजी से पूरा कर सकेगा। आम यात्रियों को अब तत्काल टिकट बुक करते समय एप या वेबसाइट के बार-बार हैंग होने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। सुपर रेलवन एप: 4.35 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल लॉन्च हुए रेलवे के सुपर एप 'रेलवन' को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। इसका आसान डिजाइन यात्रियों को बेहतर अनुभव देता है। अब तक इसे 4.35 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और इस एप से हर दिन औसतन 10 लाख ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। रेलवे में AI तकनीक से क्या बदलेगा रेलवे अब कामकाज को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इसके आने से ट्रेनों के मेंटेनेंस का काम खराबी आने से पहले ही हो जाएगा, जिससे हादसे रुकेंगे और सुरक्षा मजबूत होगी। CRIS के MD जीवीएल सत्य कुमार ने कहा कि चाहे नया ऐप हो या AI तकनीक, हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि तकनीक का पूरा फायदा देश के आम नागरिकों को मिले।
केंद्र सरकार वॉट्सएप के नए यूजरनेम फीचर की जांच करेगी। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक इस फीचर से पहचान छिपाकर धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड का खतरा काफी बढ़ सकता है। पेरेंट कंपनी मेटा ने अपने इंस्टेंट मैसेजिंग एप में मोबाइल नंबर बताए बिना चैट करने वाला फीचर लॉन्च किया था। इसमें लोग सिर्फ यूजरनेम के जरिए किसी नए व्यक्ति से चैट कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, सरकार वॉट्सएप के इस अपकमिंग यूजरनेम फीचर की बारीकी से जांच करेगी। चिंता इस बात को लेकर है कि जब यूजर्स को फोन नंबर छिपाने की आजादी मिल जाएगी, तो जालसाजों के लिए किसी दूसरे के नाम का फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है। भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। इतने बड़े यूजर बेस की सुरक्षा और फेक प्रोफाइल से होने वाले फ्रॉड रोकने के लिए सरकार नए फीचर के सेफ्टी स्टैंडर्ड्स परखना चाहती है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। सबसे पहले जानें, जल्दी यूजरनेम बुक करना क्यों जरूरी है दुनियाभर में करोड़ों यूजर्स एक जैसे या मिलते-जुलते यूजरनेम चुन सकते हैं। ऐसे में जो लोग पहले अपना यूजरनेम रिजर्व करेंगे, उन्हें अपनी पसंद का यूजरनेम मिलने की संभावना ज्यादा होगी। WhatsApp के हेड कुणाल शाह ने X पर लिखा सही समय ही सब कुछ है। दुनिया भर में यह फीचर जारी होने से पहले ही WhatsApp से जुड़ें और अपना यूजरनेम सुरक्षित कर लें। अब अपनी पसंद का यूजरनेम लेने का समय है। लोगों से जुड़ने का एक अधिक निजी (प्राइवेट) तरीका जल्द ही आपके WhatsApp पर आने वाला है। इस नए फीचर से क्या बदलेगा यूजरनेम फीचर आने के बाद कुछ स्थितियों में फोन नंबर अपने-आप दिखाई नहीं देगा। इनमें शामिल हैं: जब आपको किसी बड़े ग्रुप चैट में जोड़ा जाएगा। जब आप पहली बार किसी व्यक्ति को मैसेज करेंगे। इस बदलाव से आपका फोन नंबर निजी (प्राइवेट) रहेगा। वह तभी दिखाई देगा, जब आप खुद उसे साझा करना चाहेंगे। वॉट्सएप Username फीचर से जुड़े 8 सवाल-जवाब, जो आपको जानना जरूरी है वॉट्सएप यूजरनेम फीचर क्यों लाया: वॉट्सएप का कहना है कि कई बार लोग किसी नए व्यक्ति से बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन अपना मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना चाहते। जैसे किसी नेटवर्किंग इवेंट में मिले व्यक्ति, नए क्लासमेट, पड़ोसी या बच्चों के स्कूल/स्पोर्ट्स ग्रुप के दूसरे पैरेंट्स से बात करते समय प्राइवेसी बनाए रखना जरूरी होता है। ऐसे में अब मोबाइल नंबर की जगह सिर्फ यूजरनेम शेयर किया जा सकेगा। यूजरनेम बनाने के नियम क्या हैं: यूजरनेम 3 से 35 कैरेक्टर का होगा। इसमें केवल a-z (छोटे अंग्रेजी अक्षर), 0-9 (अंक), डॉट (.) और अंडरस्कोर (_) का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा। जरूरत पड़ने पर इसे बदला, हटाया या अपडेट किया जा सकेगा। क्या मोबाइल नंबर पूरी तरह नहीं दिखेगा: हां, लेकिन केवल उन लोगों के लिए जो पहली बार आपसे संपर्क करेंगे। अगर आपने यूजरनेम सेट किया है, तो नया व्यक्ति आपका मोबाइल नंबर नहीं देख पाएगा। हालांकि वॉट्सएप अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर सेव है, वे पहले की तरह ही आपसे चैट कर सकेंगे। क्या कोई भी यूजरनेम सर्च करके नंबर ढूंढ सकेगा: नहीं। वॉट्सएप कोई सार्वजनिक यूजरनेम डायरेक्टरी नहीं बनाएगा। कंपनी किसी दूसरे यूजर को आपका यूजरनेम सुझाव (Suggest) भी नहीं देगी। कोई व्यक्ति तभी आपको मैसेज भेज सकेगा, जब उसे आपका सही यूजरनेम पता होगा। Username Key क्या है: वॉट्सएप Username Key नाम का एक नया ऑप्शनल सुरक्षा फीचर भी ला रहा है। यह सिक्योरिटी कोड एक पिन की तरह काम करेगा। अगर यूजर इसे चालू करता है, तो कोई अनजान व्यक्ति सिर्फ आपका यूजरनेम जानकर आपको मैसेज नहीं कर सकेगा। पहली बार मैसेज भेजने वाले व्यक्ति को पहले यह Key दर्ज करनी होगी। इसके बाद ही चैट शुरू हो सकेगी। यूजर जब चाहें इस Key को बदल भी सकेंगे। इसका उद्देश्य स्पैम और अनचाहे मैसेज कम करना है। पुराने चैट्स और कॉन्टैक्ट्स पर क्या असर पड़ेगा: मौजूदा चैट, कॉन्टैक्ट और ग्रुप पहले की तरह ही काम करेंगे। जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर है, उनके लिए कुछ नहीं बदलेगा। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, ब्लॉक और रिपोर्ट जैसे सभी सुरक्षा फीचर्स पहले की तरह ही काम करते रहेंगे। इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा क्या होगा: नए लोगों से बात करने के लिए मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना पड़ेगा। यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी। स्पैम और अनचाहे मैसेज कम करने में मदद मिलेगी। क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए Meta के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक जैसी डिजिटल पहचान बनाए रखना आसान होगा। इन लोगों को आपसे संपर्क करने के लिए यूजरनेम की जरूरत नहीं होगी जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर पहले से सेव है। जिन लोगों से आप पहले चैट कर चुके हैं। जो आपके साथ किसी जॉइंट ग्रुप में हैं। जिन्होंने आपका क्यूआर कोड स्कैन किया है। जिन्हें आपने पहले मैसेज किया है। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
‘चार दिन में सामने वाले को प्यार में उलझाओ।’ यह फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि म्यांमार के साइबर स्कैम सेंटर्स में काम करने वालों को दिया जाने वाला आदेश है। डिजिटल दुनिया में भरोसे और भावनाओं को हथियार बनाकर चल रही साइबर महाठगी फैक्ट्री में नौकरी का झांसा देकर भारत समेत कई देशों से तस्करी कर लाए गए युवक-युवतियां शामिल हैं। म्यांमार के ऐसे ही एक स्कैम सेंटर से बचाए गए केरल निवासी सफीर मोहम्मद कूरीमन्निल भी हैं। वे घर लौट चुके हैं, लेकिन यादें अब भी उनका पीछा करती हैं। कूरीमन्निल बताते हैं कि म्यांमार के एक स्कैम कंपाउंड में उनसे जबरन ऑनलाइन ठगी कराई गई। वे 28 साल की सिंगापुर की युवती बनकर दर्जनों फर्जी प्रोफाइल चलाते थे। हर शिफ्ट में 100 से ज्यादा लोगों से चैट, चार दिन में भरोसा और प्यार जीतने का लक्ष्य। रिकॉर्ड बताते हैं कि सिर्फ एक महीने में उन्होंने 17 देशों के 50 हजार से ज्यादा लोगों को निशाना बनाया। एपी और फ्रंटलाइन की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर ठगी का पूरा खेल अमेरिकी टेक्नोलॉजी और एआई के सहारे चलता है। चैटजीपीटी और जेमिनाई से बने सॉफ्टवेयर स्कैमर्स को 100 से ज्यादा भाषाओं में बातचीत, पीड़ितों की कमजोरी पहचानने में मदद करते हैं। कूरीमन्निल बताते हैं कि उनकी और उनकी तरह झांसे से यहां आए लोगों की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती थी। डर इतना था कि कई कर्मचारी रात में सो भी नहीं पाते थे। युगांडा, केन्या समेत कई देशों की महिलाओं को सोशल मीडिया मैनेजर या फैक्ट्री की नौकरी का झांसा देकर लाया गया और बाद में स्कैम सेंटरों में बेच दिया गया। उनसे 18-18 घंटे काम कराया जाता था। फर्जी वीडियो कॉल के जरिए लोगों को प्रेमजाल में फंसाकर क्रिप्टो निवेश के नाम पर ठगी कराई जाती। अगर कोई महिला जालसाजी का ‘टारगेट’ पूरा नहीं कर पाती, तो सजा के रूप में उसके साथ मारपीट और सामूहिक दुष्कर्म तक किया जाता है। कुछ के जबरन गर्भपात और गर्भावस्था के दौरान भी यातनाएं दी जाती हैं। डार्क रूम - सफल स्कैमर्स को इनाम- ‘यौन शोषण’ महिला पीड़ितों के अनुसार कई स्कैम सेंटरों में ‘डार्क रूम’ बनाए गए हैं। यहां टारगेट पूरा नहीं करने वाली महिलाओं को ले जाकर पिटाई, इलेक्ट्रिक शॉक और दुष्कर्म किया जाता है। वहीं, कुछ मामलों में बड़ी ठगी कराने वाले पुरुष स्कैमर्स को महिलाओं का यौन शोषण करने की छूट ‘इनाम’ के रूप में दी जाती थी। संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी ऐसे मामलों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है।
एआई नियमों और कागजी डेटा को तो आसानी से रट लेता है, लेकिन इंसानों के उस हुनर को नहीं सीख पाता जो बरसों के अनुभव, अंतःप्रेरणा और सूझबूझ से आता है। उदाहरण के लिए, एक अनुभवी डॉक्टर को रिपोर्ट देखने से पहले ही मरीज की सांसें देखकर बीमारी का अंदाजा हो जाता है, या कोडर बिना किसी नियम के भी पेचीदा बग ढूंढ लेता है। इंसान इस हुनर को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। इस हुनर को चुराने के लिए कंपनियां कर्मचारियों के कंप्यूटर के हर क्लिक व हरकत पर नजर रख रही हैं, हेड कैमरे लगाकर एआई को ट्रेंड किया जा रहा है जिससे कर्मचारी नाराज हैं और जानकारी छिपा रहे हैं, जानिए कर्मचारियों की इन्हीं तरकीबों के बारे में... रफ पेपर पर लिख रहे लॉजिक सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स जानते हैं कि उनके की स्ट्रोक्स और कोडिंग पैटर्न एआई मॉडल द्वारा ट्रैक किए जा रहे हैं। इससे बचने के लिए वे अब शैडो थिंकिंग करते हैं। इसमें डेवलपर्स कंप्यूटर पर सीधे सोचने के बजाय कोड का लॉजिक और एल्गोरिदम रफ कागज या डायरी पर लिखते हैं। सिस्टम पर वे सिर्फ फाइनल कोड टाइप करने आते हैं। एआई को भ्रमित करने के लिए वे जानबूझकर जंक कोड डालते हैं और बाद में उसे हटा देते हैं। इस रणनीति से एआई उनके सोचने की सटीक क्रोनोलॉजी पकड़ नहीं पाता। चैट बॉक्स से दूरी कॉल सेंटर्स और कंसल्टिंग फर्म्स में एआई चैट और वॉयस को ट्रैक करता है। इससे बचने के लिए कर्मचारियों ने ‘बिटवीन द लाइन्स’ (बातों के बीच की बात) का तरीका निकाला है। जब कोई पेचीदा केस आता है, तो वे एआई-निगरानी वाले आधिकारिक चैट बॉक्स के बजाय आपस में बात करने के लिए कोडवर्ड्स या पर्सनल फोन इस्तेमाल करते हैं। समाधान आपस में ‘ऑफ-द-रिकॉर्ड’ तय करते हैं और स्क्रीन पर औपचारिक उत्तर लिखते हैं, जिससे एआई नहीं सीख पाता कि कठिन ग्राहक को किस मानवीय सूझबूझ से मनाया गया। माउस जिटरर्स का इस्तेमाल मेटा जैसे टेक दिग्गज माउस क्लिक और कर्सर की स्पीड तक को एआई ट्रेनिंग के लिए ट्रैक करते हैं। डिजाइनर्स ने इसे चकमा देने के लिए ‘माउस जिटरर्स’ या ऐसे हार्डवेयर टूल्स का इस्तेमाल शुरू किया है जो बैकग्राउंड में कर्सर को स्क्रीन पर रैंडम तरीके से घुमाते रहते हैं। जब डिजाइनर असल में डिजाइन की बारीकियों पर सोच रहा होता है, तब यह टूल एआई को नकली डेटा फीड कर रहा होता है। इससे एआई एल्गोरिदम असली क्रिएटिव चॉइस व नकली मूवमेंट में फर्क नहीं कर पाता और कन्फ्यूज हो जाता है। एआई पॉइजनिंग कलाकार अब फाइनल वर्क सबमिट करने या स्क्रीन पर प्रोसेस करने से पहले ‘नाइटशेड’ व ‘ग्लैज’ जैसे एंटी-एआई टूल्स का इस्तेमाल बैकग्राउंड में कर रहे हैं। शिकागो यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए ये टूल डिजिटल पेंटिंग के पिक्सल में ऐसे बदलाव कर देते हैं जो सामान्य रूप से नहीं दिखते, पर जब एआई इस डेटा को चुराता है, तो उसका दिमाग खराब हो जाता है। उदाहरण के लिए, आर्टिस्ट बना रहा होगा ‘कुत्ता’, पर एआई ट्रैकर उसे ‘बिल्ली’ समझकर फीड कर लेगा, जिससे पूरी एआई ट्रेनिंग का कबाड़ा हो जाता है।
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब ग्रीस में भी लाइव हो गया है। ग्रीस इस डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ने वाला नया देश बन गया है। एथेंस में यूरोबैंक के हेडक्वार्टर में यूरोबैंक और NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड की पार्टनरशिप से शुरू हुई इस सर्विस का लाइव डेमो भी देखा गया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में डेमो हुआ केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एथेंस की अपनी ऑफिशियल विजिट के दौरान इस सर्विस के लाइव डेमो को देखा। उन्होंने कहा कि UPI को मिल रही वैश्विक स्वीकार्यता से यह साबित होता है कि भारत की टेक्नोलॉजी पर दुनिया का भरोसा बढ़ रहा है। यह तकनीक सीमाओं के पार भी बेहतरीन तरीके से काम कर सकती है। अब 10 देशों में मिलेगी UPI की सुविधा ग्रीस के इस नेटवर्क में शामिल होने के बाद अब दुनिया के 10 देशों में अलग-अलग रूपों में UPI का इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह भारतीय यात्रियों के लिए QR-कोड आधारित मर्चेंट पेमेंट से लेकर क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस सर्विसेज (पैसे ट्रांसफर करने) तक की सुविधा देता है। ग्रीस से पहले कंबोडिया में शुरू हुआ था UPI ग्रीस से ठीक पहले कंबोडिया इस लिस्ट में शामिल होने वाला 9वां देश बना था। इसके लिए NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड ने वहां के ACLEDA बैंक के साथ पार्टनरशिप की थी। इसके तहत कंबोडिया के नेशनल QR कोड 'KHQR' के जरिए क्रॉस-बॉर्डर UPI पेमेंट्स की शुरुआत की गई थी। इससे पहले सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर और श्रीलंका को उन आठ देशों के रूप में लिस्ट किया था, जहां UPI को स्वीकार किया जा रहा है। फ्रांस के एफिल टॉवर से हुई थी शुरुआत यूरोप में UPI के विस्तार में फ्रांस एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। साल 2024 में पेरिस के एफिल टॉवर से UPI को लॉन्च किया गया था। इसके बाद इस सर्विस का विस्तार वहां के बड़े रिटेल डेस्टिनेशंस जैसे नीस में स्थित 'गैलरीज लाफायेट' तक किया गया। क्या है UPI और इसके ग्लोबल विस्तार का भविष्य कैसे काम करता है विदेशी धरती पर UPI? भारतीय यात्री विदेशों में इंटरनेशनल रोमिंग या एक्टिवेटेड UPI एप के जरिए वहां के स्थानीय QR कोड (जैसे कंबोडिया में KHQR या ग्रीस में यूरोबैंक मर्चेंट नेटवर्क) को स्कैन करके सीधे अपने भारतीय बैंक अकाउंट से पेमेंट कर सकते हैं। इससे उन्हें विदेशी करेंसी एक्सचेंज कराने के झंझट से मुक्ति मिलती है। ये खबर भी पढ़ें… अब यूजरनेम से भी होगी WhatsApp पर चैट: 29 जून से बुकिंग शुरू; बिना मोबाइल नंबर बताए बातचीत भी कर सकेंगे अब तक वॉट्सएप पर किसी नए व्यक्ति से बात करने के लिए मोबाइल नंबर देना जरूरी होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सएप ने यूजरनेम फीचर लॉन्च करने का ऐलान किया है। इसके बाद लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट कर सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
अब तक वॉट्सएप पर किसी नए व्यक्ति से बात करने के लिए अपना मोबाइल नंबर देना जरूरी होता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सएप ने यूजरनेम फीचर लॉन्च करने का ऐलान किया है। इसके बाद लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट कर सकेंगे। कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम रिजर्वेशन शुरू कर दिया है। हालांकि यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर आपके इलाके में उपलब्ध होगा, तब वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। वॉट्सएप सीआओ कुणाल शाह ने X पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने फीचर सार्वजनिक होने से पहले ही अपना यूजरनेम रिजर्व कर लिया है। उन्होंने लोगों से भी जल्द अपना पसंदीदा यूजरनेम लेने की अपील की। वॉट्सएप Username फीचर से जुड़े 8 सवालों के जवाब ……………….. यह खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
अब खराब विजिबिलिटी में भी प्लेन सुरक्षित लैंड कर सकेंगे। क्योंकि, भारत में पहली बार किसी बड़े कॉमर्शियल जेट को ग्राउंड से रेडियो सिग्नल भेजे बिना सीधे सैटेलाइट सिग्नल्स की मदद से सुरक्षित उतारने का सफल ट्रायल कर लिया गया है। विमानन नियामक DGCA की देखरेख में 27 जून को इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A320 विमान ने स्वदेशी 'गगन' नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर यह ऐतिहासिक लैंडिंग की। हालांकि इंडिगो ने 2022 में छोटे ATR विमानों पर इसका परीक्षण किया था, लेकिन बड़े कॉमर्शियल जेट के साथ देश में यह पहला सफल ट्रायल है। इसे ऐसे समझें पहले: जैसे रास्ता पूछने के लिए आपको हर चौराहे पर किसी व्यक्ति की मदद चाहिए।अब: आपके फोन में GPS हो और वह सीधे सैटेलाइट से रास्ता बताता रहे। विमान के लिए भी यही हुआ। अब उसे एयरपोर्ट के रेडियो उपकरणों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और सैटेलाइट आधारित 'गगन' सिस्टम उसे अधिक सटीक तरीके से रनवे तक पहुंचाएगा। इससे क्या फायदा होगा 5 सवाल-जवाब से जानिए गगन सिस्टम के बारे में… सवाल: क्या है स्वदेशी गगन सिस्टम? जवाब: गगन का पूरा नाम 'जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GAGAN) है। यह भारत का अपना सैटेलाइट-बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने मिलकर तैयार किया है। गगन, भारत के नाविक या अमेरिका के GPS की तरह कोई स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम नहीं है, जो सीधे लोकेशन बताता हो। बल्कि, यह पहले से मौजूद GPS सिग्नल्स की कमियों और गलतियों को ठीक करके उन्हें विमानों के लिए और ज्यादा सटीक व भरोसेमंद बनाता है। सवाल: सैटेलाइट लैंडिंग पारंपरिक सिस्टम से कैसे अलग है? जवाब: आमतौर पर बड़े और प्रमुख एयरपोर्ट्स पर विमानों को उतारने के लिए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत रनवे के आसपास महंगे ग्राउंड-बेस्ड उपकरण और रेडियो बीम लगाए जाते हैं, जो पायलट को रनवे का सटीक रास्ता बताते हैं। इसके उलट, 27 जून को हुए टेस्ट में सैटेलाइट-बेस्ड लैंडिंग सिस्टम (SLS) का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक में जमीन पर लगे भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती, बल्कि आसमान में मौजूद सैटेलाइट्स सीधे प्लेन को गाइड करते हैं। प्लेन में बैठे यात्रियों को इस बदलाव का बिल्कुल भी अहसास नहीं हुआ, लेकिन एविएशन सेफ्टी और खर्च के लिहाज से यह बेहद क्रांतिकारी बदलाव है। सवाल: यह तकनीक छोटे एयरपोर्ट्स के लिए गेम चेंजर क्यों हो सकती है? जवाब: भारत के कई छोटे और सेकेंडरी शहरों के एयरपोर्ट्स पर ILS सिस्टम नहीं लगा है। इसका कारण इसकी भारी-भरकम इंस्टॉलेशन कॉस्ट और हर महीने रखरखाव पर होने वाला बड़ा खर्च है। सैटेलाइट गाइडेड सिस्टम आने से अब इन छोटे एयरपोर्ट्स पर भी खराब मौसम या कम विजिबिलिटी के दौरान विमानों की सटीक और सुरक्षित लैंडिंग कराई जा सकेगी। विमान बनाने वाली दिग्गज कंपनी 'एयरबस' के मुताबिक, यह तकनीक पायलटों को खराब मौसम में भी बिना किसी अतिरिक्त एयरपोर्ट इक्विपमेंट के स्थिर और सीधी अप्रोच बनाने में मदद करती है। मुख्य सिस्टम के फेल होने या मेंटेनेंस के वक्त यह एक बेहतरीन बैकअप की तरह भी काम करेगा। सवाल: स्मार्टफोन वाला GPS प्लेन क्यों नहीं उतार सकता? जवाब: हमारे स्मार्टफोन में जो GPS होता है, वह कुछ मीटर तक की सटीकता देता है, जो सड़क पर रास्ता ढूंढने के लिए तो ठीक है लेकिन बादलों के बीच से आ रहे तेज रफ्तार कमर्शियल विमान को सुरक्षित रनवे पर उतारने के लिए काफी नहीं है। जब GPS सिग्नल्स अंतरिक्ष से जमीन की तरफ आते हैं, तो वायुमंडल की ऊपरी परत (आयनोस्फीयर) के कारण उनमें थोड़ी देरी और गड़बड़ी आ जाती है। भारत के ऊपर यह गड़बड़ी और तेजी से बदलती है क्योंकि हमारा देश इक्वेटोरियल आयनाइजेशन एनोमली के ठीक नीचे आता है। विमानों को सटीक लैंडिंग के लिए न सिर्फ एकदम सटीक डेटा चाहिए होता है, बल्कि इस बात की गारंटी भी चाहिए होती है कि जो डेटा मिल रहा है, वह 100% सही है। सवाल: इस साल 40 से ज्यादा एयरपोर्ट्स पर सुविधा मिलेगी जवाब: इंडिगो अब इस सैटेलाइट-बेस्ड तकनीक को अपने पूरे बेड़े में तेजी से लागू कर रहा है। भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने देश के कई एयरपोर्ट्स पर पहले ही 23 सैटेलाइट गाइडेड अप्रोच प्रोसीजर पब्लिश कर दिए हैं और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक यह संख्या 40 के पार चली जाएगी। इसरो के मुताबिक, गगन सिस्टम के दो मुख्य लक्ष्य हैं- पहला, नागरिक उड्डयन को बेहद सुरक्षित और सटीक बनाना और दूसरा, विमानों को सीधे और छोटे रूट्स पर उड़ाकर एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर करना है, जिससे ईंधन की बचत हो सके। यह सिस्टम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया गया है, जिससे विदेशी सीमाओं को पार करते समय भी विमान बिना किसी रुकावट के नेविगेट कर सकेंगे। कमर्शियल जेट की यह पहली सफल लैंडिंग भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन नेटवर्क को अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… सऊदी अरब में हेलिकॉप्टर क्रैश, 14 लोगों की मौत:मरने वाले सभी सऊदी के नागरिक, हेलिकॉप्टर दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको का था सऊदी अरब के रास तनुरा में रविवार को दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। हादसे में हेलिकॉप्टर सवार सभी 14 लोगों की मौत हो गई। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) के मुताबिक, हेलिकॉप्टर में सवार सभी लोग सऊदी अरब के ही नागरिक थे। हालांकि, क्रैश की वजह की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
बजाज ऑटो ने भारत में अपनी पल्सर N125 बाइक को बंद कर दिया है। अक्टूबर 2024 में लॉन्च हुई यह बाइक भारतीय बाजार में दो साल भी पूरे नहीं कर पाई। कंपनी ने देश के डीलर्स को इसकी सप्लाई बंद कर दी है। कम बिक्री के कारण कंपनी ने इसे भारतीय बाजार से हटाने का फैसला किया। बजाज ऑटो का इतिहास रहा है कि जो बाइक्स पर्याप्त संख्या में नहीं बिकती हैं, उन्हें कंपनी बंद कर देती है। पल्सर N125 इसका नया उदाहरण है। हालांकि, बाइक अभी भी बजाज की भारतीय वेबसाइट पर दिखाई दे रही है। बिल्कुल नए प्लेटफॉर्म पर तैयार हुई थी बाइक अजीब लुक और डिजाइन पसंद नहीं आया इस बाइक का पतला और फैला हुआ लुक भारतीय ग्राहकों को पसंद नहीं आया। इसके मुकाबले बाजार में मौजूद दूसरी बाइक्स जैसे हीरो एक्सट्रीम 125R और होंडा CB125 हॉरनेट काफी लोकप्रिय हैं। ये बाइक्स अपनी वास्तविक क्षमता से ज्यादा बड़ी और स्पोर्टी दिखती हैं, जो ग्राहकों को आकर्षित करती हैं। TFT डिस्प्ले और ABS जैसे फीचर्स की थी कमी पल्सर N125 में लिमिटेड फीचर्स होना भी इसके बंद होने की एक बड़ी वजह बना। इस बाइक में कई ऐसे फीचर्स मौजूद नहीं थे, जो इसके कॉम्पिटिटर्स में मिलते हैं। उदाहरण के लिए, इस बाइक में ग्राहकों को TFT डिस्प्ले और ABS (एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम) की सुविधा नहीं मिलती थी। विदेशी बाजारों में बिकती रहेगी बाइक भारत में बंद होने के बावजूद पल्सर N125 का सफर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कंपनी इस बाइक को कई विदेशी बाजारों में बेचना जारी रखेगी। इनमें नेपाल, पेरू, कोलंबिया और मोरक्को जैसे देश शामिल हैं। हालांकि, बदले हुए लुक और ज्यादा फीचर्स के साथ यह बाइक या इसका प्लेटफॉर्म भविष्य में भारत में वापसी करेगा या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। क्या होता है TFT डिस्प्ले और ABS?
महाराष्ट्र के ठाणे में एक खड़ी कार में अचानक एयरबैग खुलने से 25 साल के युवक मौत हो गई। युवक एक कार डीलर था। इसका नाम मोहित सोनी है। वह एक 15 साल पुरानी कार के अंदर बैठा था। तभी अचानक गाड़ी का सेफ्टी सिस्टम एक्टिव हो गया। एयरबैग इतनी तेजी से खुला कि उसके जोरदार झटके से युवक को गंभीर चोटें आईं और मेडिकल मदद मिलने से पहले ही ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मौत हो गई। युवक को चोट कहां लगी इसकी जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है। यह घटना बुधवार को ठाणे के काशिमीरा इलाके में हुई। पुलिस ने जानकारी शनिवार को दी। घटना के बाद की 2 तस्वीरें… पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ का केस दर्ज किया ठाणे पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि कार भले ही पुरानी थी, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उसके पास वैलिड फिटनेस सर्टिफिकेट था। पुलिस ने मामले में एक्सीडेंटल डेथ का केस दर्ज किया है। पुलिस जांच के लिए ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स से भी सलाह ले रही है। एयरबैग खुलने की स्पीड 200 से 300 किमी/घंटा के बीच हो सकती है। इस वजह से तेज झटका लगता है। इससे बचने के लिए सीट बेल्ट लगाना जरूरी होता है। सीट बेल्ट ना लगाने की स्थिति में जोरदार झटका लगने से गंभीर चोट लग सकती है या मौत भी हो सकती है। एयरबैग क्या है एयरबैग कार का एक सेफ्ट टूल है। ये गुब्बारे की तरह कॉटन का बना एक थैला होता है। जिस पर सिलिकॉन की कोटिंग होती है। कार की टक्कर होने जैसा फील होते ही यह तुरंत एक्टिव होकर कार में बैठे व्यक्ति को स्टीयरिंग व्हील, डैशबोर्ड या दरवाजों से यात्री के सिर और छाती को टकराने से बचाता है। इसके खुलने की प्रोसेस सेंटीकंड्स में होती है। एयरबैग कैसे काम करता है एयरबैग से दूरी 10 इंच रखना जरूरी, तभी सुरक्षित ------------------- महाराष्ट्र की ये खबर भी पढ़ें… महाराष्ट्र में TET पेपर लीक, कल एग्जाम होना था:सरकार ने परीक्षा रद्द की, पेपर ठाणे से बरामद; सरकारी टीचर्स के लिए ये परीक्षा जरूरी महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का पेपर करीब 24 घंटे पहले लीक हो गया। एग्जाम रविवार को होना था। महाराष्ट्र स्टेट एग्जामिनेशन काउंसिल (MSEC) ने इसके बाद परीक्षा स्थगित कर दी है। नई तारीखों का ऐलान बाद में किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें
अगर आप अमेजन पर नई किताबें खोजते हैं, तो हो सकता है उनमें बड़ी संख्या ऐसी हो जिन्हें किसी लेखक ने नहीं, बल्कि एआई ने लिखा हो। 2022 में चैटजीपीटी जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल आने के बाद अमेजन पर हर महीने प्रकाशित होने वाली ई-बुक्स की संख्या करीब 1 लाख से बढ़कर 3 लाख हो गई है। यानी सिर्फ तीन साल में यह आंकड़ा लगभग तीन गुना हो गया। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री इमके रीमर्स और यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के प्रोफेसर जोएल वाल्डफोगेल ने करीब 50 हजार किताबों का विश्लेषण किया। उन्होंने एआई डिटेक्शन टूल्स, अमेजन रेटिंग और बिक्री के आधार पर तुलना की। निष्कर्ष साफ था कि एआई किताबों की संख्या तेजी से बढ़ी। लेकिन उन्हें कम रेटिंग मिली। बिक्री भी इंसानी लेखकों की किताबों से कम रही। पाठकों ने उन्हें कम उपयोगी माना। प्रकाशक भी एआई को अपना रहे हैं। प्रसिद्ध ट्रैवल गाइड कंपनी Fodor’s ने अपना चैटबॉट तैयार किया है। यह उनके संपादित कंटेंट के आधार पर ट्रैवल गाइड बनाता है।
स्मार्टवॉच के बाद अब टेक कंपनियां आपकी नींद को अगला बड़ा बाजार मान रही हैं। पहले घड़ी आपकी हार्ट रेट और कदम गिनती थी, अब बिस्तर पूरी रात आपकी हर करवट, शरीर का तापमान और खर्राटों पर नजर रखेगा। अमेरिका की स्लीप टेक कंपनी Eight Sleep का आई आधारित Pod इन दिनों चर्चा में है। यह एक स्मार्ट मैट्रेस टॉपर है। यह रातभर आपके शरीर की गतिविधियों को समझकर खुद ही बिस्तर का तापमान बदलता रहता है, ताकि नींद बेहतर हो सके। शरीर के तापमान के हिसाब से तय करता है मैट्रेस का टेम्प्रेचर इलॉन मस्क, मार्क जुकरबर्ग और एंटी-एजिंग उद्यमी ब्रायन जॉनसन जैसे कई बड़े नाम इसका इस्तेमाल कर चुके हैं। इसकी शुरुआती कीमत करीब 3,500 डॉलर (करीब 3 लाख रुपए) है। इस तकनीक की सबसे अलग खासियत यह है कि बिस्तर के दोनों हिस्सों का तापमान अलग-अलग रखा जा सकता है। यानी अगर एक व्यक्ति ठंडा माहौल पसंद करता है और दूसरा थोड़ा गर्म, तो दोनों अपनी-अपनी सेटिंग चुन सकते हैं। इस तरह से काम करता है एआई वाला मैस्ट्रेस, स्लीप स्कोर भी देता है इस मैट्रेस टॉपर में बेहद संवेदनशील सेंसर लगे हैं, जो पूरी रात शरीर से जुड़े कई संकेत रिकॉर्ड करते हैं। शरीर का तापमान, हार्ट रेट, सांस लेने की गति, नींद के अलग-अलग चरण, करवट बदलने की संख्या... इन जानकारियों के आधार पर एआई यह तय करता है कि बिस्तर को थोड़ा ठंडा करना है या गर्म। सुबह उठने पर एप पूरी रात का विश्लेषण दिखाता है और एक स्लीप फिटनेस स्कोर भी देता है।
सिलिकॉन वैली के एक आलीशान टेक ऑफिस में सन्नाटा पसरा है। स्क्रीन पर कोडिंग की लाखों लाइनें तैर रही हैं। एक तरफ दुनिया के बेहतरीन कंप्यूटर इंजीनियर्स सिर पकड़े बैठे हैं, और दूसरी तरफ शांत मुद्रा में दार्शनिक दिख रहे हैं। यह दृश्य उस हकीकत को बयां करता है, जिसने टेक वर्ल्ड के पुराने ढर्रे को पूरी तरह पलट दिया है। एक दशक पहले युवाओं को कहा जाता था-‘नौकरी चाहिए तो कोडिंग सीखो।’ लेकिन अब कोडर्स नौकरियों को लेकर चिंतित हैं, जबकि फिलॉसफी के छात्रों की मांग बढ़ रही है। फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर 7%, जबकि दर्शनशास्त्र ग्रेजुएट्स की सिर्फ 5.1% है। येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लुसियानो फ्लोरिडी कहते हैं,‘दर्शनशास्त्र विभागों से छात्रों और प्रोफेसरों का ‘टेक कंपनियों में जाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कंप्यूटर को तो गणित व कोड की भाषा समझ आती है, तो दार्शनिकों की जरूरत क्यों..? प्रो. फ्लोरिडी कहते हैं, क्योंकि कंप्यूटर को कोडिंग सिखाने से ज्यादा मुश्किल उसे नैतिकता सिखाना है। आज के एआई मॉडल्स की सबसे बड़ी समस्या ‘चापलूसी’ और ‘मतिभ्रम’ है। वे अक्सर वही कहते हैं जो यूजर सुनना चाहता है, चाहे झूठ ही क्यों न हो। इसे सुधारने के लिए दार्शनिकों ने सुकरात की पद्धति अपनाई, जिससे एआई को अपनी अज्ञानता का अहसास कराया जाता है। गूगल डीपमाइंड के दार्शनिक इयासोन गैब्रिएल बताते हैं कि इस दार्शनिक विनम्रता से एआई के झूठ बोलने की आदत में भारी कमी आई है। इतना ही नहीं, एंथ्रोपिक ने क्लाउड मॉडल के लिए 78 पन्नों का ‘संविधान’ बनाया है, जिसे कर्मचारी कंप्यूटर की ‘आत्मा का दस्तावेज’ कहते हैं। इसमें जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के विचारों की मदद ली गई, जिससे मॉडल को नैतिक दिशा मिली। जैसे-जैसे गाड़ियां खुद चलने लगी हैं और एआई हथियारों पर फैसले लेने लगा है, उलझनें गहरी हो रही हैं। क्या बुजुर्ग की जान बचाने के लिए बच्चे की जान दांव पर लगाई जाए? पर्यावरण बचाने के लिए विकास रोका जाए? ऐसे सवालों का हल सिर्फ कोडिंग से नहीं, बल्कि सदियों पुराने दार्शनिक विचार के मंथन से ही निकल सकता है। कंप्यूटर को गुरु बनाना खतरनाक आलोचक ‘नैतिक कौशल के खत्म होने’ को लेकर चिंतित हैं... अगर कंप्यूटर ही नैतिक फैसले लेने लगेंगे, तो क्या इंसान फैसले लेने की क्षमता खो देंगे? लुइसविले यूनिवर्सिटी के एआई सिद्धांतकार रोमन याम्पोल्सकी तर्क देते हैं कि सही-गलत का पैमाना हर देश, काल व परिस्थिति में बदलता रहता है। इसलिए, कंप्यूटर को ‘गुरु’ बना देना खतरनाक है, क्योंकि वह सिर्फ कोड समझता है, इंसानी भावना व बदलती दुनिया की पेचीदगियां नहीं। एआई को इंसानों की तरह संवेदनशील बनाने पर जोर प्रो. फ्लोरिडी कहते हैं,‘एआई कंपनियां दो दार्शनिक सिद्धांतों पर जंग लड़ रही हैं। पहला- कर्तव्यवाद जो सख्त नियमों पर आधारित है... कभी झूठ न बोलना या धोखा न देना। एंथ्रोपिक और इंफ्लेक्शन एआई इसी सिद्धांत पर चलते हैं, जिससे उनका एआई ज्यादा ईमानदार और इंसानों की मानसिक स्थिति के प्रति संवेदनशील बनता है। दूसरा- परिणाम आधारित सोच... यानी फैसले से होने वाले नफे-नुकसान को तौलना। चैटजीपीटी और जेमिनी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं। जैसे- वेमो की सेल्फ-ड्राइविंग कारें इसी सिद्धांत पर दुर्घटना की स्थिति में दिशा वही चुनती हैं, जिससे सबसे कम नुकसान या मौतें हों।
आईटेल ने भारतीय बाजार में अपना नया फीचर फोन 'आईटेल पावर 451' लॉन्च कर दिया है। ₹1,699 की कीमत वाले इस फोन में एआई एनवायरनमेंटल नॉइज कैंसिलेशन (AI-ENC), टाइप-C चार्जिंग और 55 दिनों के स्टैंडबाय वाली बड़ी बैटरी दी गई है। 1 साल की रिप्लेसमेंट वारंटी और 4 स्टाइलिश कलर्स यह फोन चार कलर्स - ब्लू, ग्रीन, पर्पल और ब्लैक में आता है। आईटेल इस फीचर फोन पर किसी भी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट के लिए 1 साल की 'काउंटर रिप्लेसमेंट' ऑफर भी दे रही है। फीचर फोन सेगमेंट में पहली बार AI-ENC तकनीक आईटेल भारत का एकमात्र ऐसा ब्रांड है जो फीचर फोन सेगमेंट में AI-ENC तकनीक दे रहा है। यह एडवांस फीचर भीड़भाड़ वाले बाजारों, व्यस्त सड़कों या दफ्तरों के शोर-शराबे को कम कर देता है। इससे यूजर को बिल्कुल साफ आवाज में बात करने का अनुभव मिलता है। 2.4-इंच की स्क्रीन और ऑटो कॉल रिकॉर्डिंग जैसे फीचर्स बैक कवर मिलेगा और फोन में टाइप-C चार्जिंग पोर्ट फोन के साथ कंपनी एक प्रोटेक्टिव बैक कवर भी दे रही है। इसके अलावा, फोन में टाइप-C चार्जिंग सपोर्ट दिया गया है, जो आमतौर पर सिर्फ स्मार्टफोन्स में मिलता है। 2500 mAh की बड़ी बैटरी और 55 दिनों का स्टैंडबाय टाइम आईटेल पावर 451 में 2500 mAh की पावरफुल बैटरी दी गई है। कंपनी के मुताबिक, यह बैटरी 'सुपर बैटरी मोड' और 'AI मोड' के साथ 55 दिनों तक का स्टैंडबाय टाइम देने में सक्षम है। यह उन यूजर्स के लिए बेहद मददगार साबित होगा जो दिनभर घर से बाहर रहते हैं। कंपनी के सीईओ बोले- 'रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाना ही इनोवेशन' इस नए फोन के लॉन्च पर आईटेल इंडिया के सीईओ अरिजीत तालापात्रा ने कहा, आईटेल में हमारा फोकस हमेशा से ऐसे काम के इनोवेशन लाने पर रहा है जो भारतीय उपभोक्ताओं की असली समस्याओं को हल कर सकें और तकनीक को हर बजट में उपलब्ध कराएं। आईटेल ने ही फीचर फोन में AI ENC तकनीक की शुरुआत की थी। हमारे लिए इनोवेशन का मतलब हमेशा से यही रहा है कि जो उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बना सके. नॉलेज पार्ट:
सैमसंग ने अपनी गैलेक्सी A-सीरीज का नया स्मार्टफोन गैलेक्सी A27 5G ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दिया है। यह नया हैंडसेट पुराने गैलेक्सी A26 5G का अपग्रेड वर्जन है। इस स्मार्टफोन में ग्राहकों को 6.7-इंच की सुपर AMOLED डिस्प्ले, क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 6 जेन 3 चिपसेट और एडवांस AI फीचर्स के साथ 6 साल का सॉफ्टवेयर सपोर्ट मिलेगा। 3 जुलाई से चुनिंदा बाजारों में बिक्री शुरू, 4 कलर ऑप्शन्स मिलेंगे सैमसंग ने बताया है कि नया गैलेक्सी A27 5G स्मार्टफोन 3 जुलाई से चुनिंदा वैश्विक बाजारों में बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएगा। कंपनी इस फोन को चार कलर ऑप्शन्स में लेकर आई है, जिसमें ब्लैक, ब्लू, लाइट ग्रीन और लाइट पिंक शामिल हैं। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी कीमतों और भारतीय बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 120Hz रिफ्रेश रेट वाली सुपर AMOLED डिस्प्ले और स्लिम डिजाइन सैमसंग गैलेक्सी A27 5G में 6.7-इंच का फुल HD+ सुपर AMOLED इन्फिनिटी-O डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। कंपनी का कहना है कि इसके नए पंच-होल डिजाइन की वजह से कैमरा एरिया अब कम दिखाई देता है। इसके साथ ही फोन की बॉडी को 7.8mm स्लिम बनाया गया है, जिससे इसे हाथ में पकड़ना आरामदायक हो जाता है। 4nm स्नैपड्रैगन प्रोसेसर और 2TB तक स्टोरेज बढ़ाने की सुविधा परफॉर्मेंस के लिए इस स्मार्टफोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 6 जेन 3 प्रोसेसर दिया गया है, जो 4nm प्रोसेस पर बेस्ड है। यह फोन बाजार में तीन स्टोरेज वेरिएंट्स में उपलब्ध होगा, जिसमें 6GB RAM + 128GB स्टोरेज, 8GB RAM + 128GB स्टोरेज और 8GB RAM + 256GB स्टोरेज शामिल हैं। यूजर्स माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से इसके स्टोरेज को 2TB तक बढ़ा सकते हैं। ओआईएस सपोर्ट के साथ 50MP का मेन कैमरा फोटोग्राफी और वीडियो कॉलिंग के लिए गैलेक्सी A27 5G के रियर पैनल पर ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) सपोर्ट के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा, 5MP का अल्ट्रा-वाइड सेंसर और 2MP का मैक्रो कैमरा शामिल है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉल्स के लिए फोन के फ्रंट में 12MP का कैमरा मिलता है। 5,000mAh की बड़ी बैटरी और एंड्रॉयड 16 ऑपरेटिंग सिस्टम स्मार्टफोन में 5,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 25W की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह डिवाइस आउट ऑफ द बॉक्स एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड वन यूआई 8.5 ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करता है। धूल और पानी से सुरक्षा के लिए इसे IP64 की रेटिंग मिली है। 22 भाषाओं में वॉइस ट्रांसलेशन और एडवांस AI फीचर्स सैमसंग ने गैलेक्सी A27 5G में अपने AI फीचर्स के दायरे को और बढ़ा दिया है। इस फोन में गूगल का 'सर्कल टू सर्च' फीचर दिया गया है, जो अब मल्टी-ऑब्जेक्ट रिकग्निशन को सपोर्ट करता है। इसके अलावा फोन में ऑब्जेक्ट इरेज़र और 22 भाषाओं में ट्रांसलेशन सपोर्ट करने वाला वॉइस ट्रांसक्रिप्शन फीचर भी शामिल है। डिवाइस को नेचुरल लैंग्वेज से कंट्रोल करने के लिए इसमें गूगल जेमिनी , परप्लेक्सिटी और बिक्सबी जैसे AI असिस्टेंस का सपोर्ट दिया गया है। 6 साल का सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट्स गैलेक्सी A27 5G खरीदने वाले यूजर्स को 6 जनरेशन तक एंड्रॉयड ओएस और वन यूआई अपग्रेड्स मिलेंगे। इसके साथ ही कंपनी 6 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स भी देगी। फोन की डेटा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इसमें सैमसंग नॉक्स वॉल्ट को शामिल किया गया है। नॉलेज पार्ट :
एपल ने गुरुवार को अमेरिका में अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतों में 300 डॉलर तक की बढ़ोतरी कर दी है। भारत में भी इनकी कीमतों में ₹1 लाख तक का इजाफा हुआ है। कंपनी का कहना है कि AI इंडस्ट्री के डेटा सेंटर बनाने के कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते अब ग्राहकों को इस बढ़ी हुई कीमत से बचाना संभव नहीं रह गया है। कीमत बढ़ने से अमेरिका में कौन-से प्रोडक्ट्स महंगे हुए इस फैसले से एपल के सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट आईफोन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी के सबसे कम कीमत वाले लैपटॉप 'नियो' की शुरुआती कीमत लॉन्च के कुछ महीने बाद ही 599 डॉलर से बढ़कर 699 डॉलर हो जाएगी। इसके अलावा 512 गीगाबाइट वाले मैकबुक एयर की कीमत 200 डॉलर बढ़ गई है, जबकि 1 टेराबाइट स्टोरेज वाले मैकबुक प्रो की कीमत में 300 डॉलर का इजाफा होगा। एपल ने अपने होमपॉड स्मार्ट स्पीकर के दोनों वर्जन और एपल टीवी सेट-टॉप बॉक्स की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। इस घोषणा के बाद एपल के शेयर करीब 5% गिर गए, जबकि उसकी कॉम्पिटिटर कंपनी डेल के शेयर 8% से ज्यादा टूट गए। चिप मेकर्स ने एनवीडिया जैसी कंपनियों को दी प्राथमिकता माइक्रोन जैसी मेमोरी मैन्युफैक्चरर कंपनियों ने पिछले कुछ महीनों में एनवीडिया जैसे AI चिपमेकर्स के ऑर्डर्स को प्राथमिकता दी है। इस कदम से मेमोरी मैन्युफैक्चरर को रिकॉर्ड मुनाफा तो हुआ है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए इसकी सप्लाई बेहद कम बची है। सप्लाई कम होने के कारण कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एपल के सप्लायर्स के साथ बेहतरीन संबंध होने के बावजूद वह इस संकट से नहीं बच पाई है। हालांकि, मजबूत संबंधों के कारण एपल को कुछ राहत जरूर मिली है, क्योंकि उसके कॉम्पिटिटर्स को कीमतों में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ी है। कंपोनेंट की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी एपल ने एक बयान जारी कर कहा कि हमने किसी कंपोनेंट की कीमत में इतनी तेजी से और इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी है। हम अब तक अपने ग्राहकों को इन बढ़ी हुई कीमतों से बचाते आ रहे थे, लेकिन अब हम एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां हमें आईपैड और मैक सहित कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना शुरू करना पड़ रहा है। अगले फेज में आईफोन की कीमतें बढ़ने की आशंका मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि अगला नंबर आईफोन का हो सकता है। रिसर्च फर्म IDC की सीनियर रिसर्च डायरेक्टर नबीला पोपल ने कहा कि आईफोन इस बढ़ोतरी से अछूता नहीं है, इसकी कीमतें भी जल्द ही बढ़ने वाली हैं। एपल के लिए आईफोन की फॉल लॉन्चिंग से ठीक पहले कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा करना बेहद स्ट्रैटेजिक कदम था, ताकि लॉन्चिंग के समय सुर्खियां कीमतों में बढ़ोतरी के बजाय नए फोन की वैल्यू पर फोकस रहें। क्या है रैम-एगेडन का पूरा बैकग्राउंड मॉडर्न टेक गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाली डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM) की कीमतों में 2026 की पहली तिमाही में 98% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इंडस्ट्री ट्रैकर ट्रेंडफोर्स के मुताबिक, चालू तिमाही में भी इसकी कीमतों में 58% से 63% तक का उछाल आने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स इस स्थिति को रैम-एगेडन कह रहे हैं। यह संकट AI डेटा सेंटर डेवलपमेंट में आए उछाल के कारण पैदा हुआ है, जहां एनवीडिया जैसी कंपनियां मेमोरी मैन्युफैक्चरर के साथ लॉन्ग-टर्म डील कर रही हैं। माइक्रोन ने बुधवार को बताया कि उसने अपनी मेमोरी सप्लाई सुरक्षित करने के इच्छुक ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट लॉक किए हैं। गैजेट्स मार्केट के फ्यूचर पर असर लागत में हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर इस साल डिवाइस की बिक्री पर पड़ने की उम्मीद है। रिसर्च फर्म IDC के अनुमान के मुताबिक, इस बढ़ती लागत के कारण स्मार्टफोन बाजार में इस साल करीब 14% की अब तक की सबसे बड़ी सालाना गिरावट देखने को मिल सकती है, जबकि पीसी (PC) मार्केट में भी 11.3% की कमी आने की आशंका है। ये खबर भी पढ़ें… चीन में 7 लाख डिलीवरी वर्कर्स की जगह लेंगे रोबोट: ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू का चाइना सीईओ फोरम में बयान चीन में एक ही कंपनी के करीब 7 लाख डिलीवरी कर्मचारियों की जगह रोबोट ले सकते हैं। ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू ने एपीईसी चाइना सीईओ फोरम में कहा कि भविष्य में डिलीवरी कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं होगी। सारी डिलीवरी रोबोट द्वारा की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
चीन में एक ही कंपनी के करीब 7 लाख डिलीवरी कर्मचारियों की जगह रोबोट ले सकते हैं। ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू ने एपीईसी चाइना सीईओ फोरम में कहा कि भविष्य में डिलीवरी कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं होगी। सारी डिलीवरी रोबोट द्वारा की जाएगी। कंपनी के करीब 7 लाख डिलीवरी और फ्रंटलाइन कर्मचारी इस बदलाव से प्रभावित हो सकते हैं। जेडी.कॉम पहले से ही अपने वेयरहाउस, सॉर्टिंग सेंटर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन का उपयोग कर रही है। रिचर्ड लियू ने बताया कि उनकी कंपनी ने एआई और रोबोटिक्स से प्रभावित होने वाले कर्मचारियों के लिए एक निर्वाण योजना शुरू की है। इसके तहत चीन के लगभग 120 शिक्षण संस्थानों की मदद से कर्मचारियों को रोबोट मरम्मत, रखरखाव, मॉनिटरिंग और तकनीकी संचालन जैसे कौशल सिखाए जाएंगे। 100 से ज्यादा काम रोबोट से करवाने की कोशिश चीन की कोशिश है कि इस साल के आखिर तक ह्यूमनॉइड रोबोट 100 से ज्यादा तरह के असल जिंदगी के कामों में सक्रिय हो जाएं। चीन के उद्योग मंत्रालय ने सरकारी उद्यमों को निर्देश दिए हैं कि वे रोबोट्स को ‘वर्क मोड’ में लाएं। भारत में क्या स्थिति है? भारत में अभी लास्ट-माइल डिलीवरी काफी हद तक मानव श्रमिकों पर निर्भर है। हालांकि बड़े वेयरहाउस, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और ग्राहक सेवा क्षेत्रों में एआई व ऑटोमेशन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। नौकरियों की प्रकृति बदल सकते हैं रोबोट विशेषज्ञों के अनुसार रोबोट जॉब खत्म नहीं करेंगे, बल्कि नौकरियों की प्रकृति बदलेंगे। इंसान रोबोट की मरम्मत, मेंटेनेंस, मॉनिटरिंग और तकनीकी संचालन जैसे काम करेंगे। रोबोट ऑपरेटर और रोबोट मेंटेनेंस इंजीनियर जैसी नई नौकरियां उभर सकती हैं। चीन की 44% वर्कफोर्स अस्थायी रोजगार में लगी थिंक चाइना की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की गिग इकोनॉमी दुनिया में सबसे बड़ी है। डिलीवरी और राइड-हेलिंग जैसे प्लेटफॉर्म पर 8.4 करोड़ लोग काम करते हैं। अस्थायी रोजगार पर निर्भर आबादी 32 करोड़ (करीब 44%) तक पहुंच गई है।
अब आपकी प्राइवेसी और पर्सनल डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा, क्योंकि अब टेलीकॉम कंपनियों को आपके फोन, इंटरनेट इस्तेमाल और कॉलिंग से जुड़ा सभी तरह का डेटा और लॉग्स अब भारत में ही स्टोर करना होगा। कोई भी कंपनी आपका पर्सनल डेटा देश के बाहर नहीं भेज पाएगी और न ही किसी विदेशी संस्था के साथ शेयर कर सकेगी। दरअसल, दूरसंचार विभाग (DoT) ने बुधवार को टेलीकॉम कंपनियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। आइए टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े सरकार के नए नियम और उनसे होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं... 1. लाइसेंस राज खत्म, टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल शुरू DoT ने कंपनियों के लिए टेलीकॉम सेक्टर में दशकों पुराना लाइसेंस राज खत्म कर एक नया और आसान मंजूरी सिस्टम शुरू किया है। इसके साथ ही सरकार ने 'टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल' नाम की एक वेबसाइट भी बनाई है, ताकि सारा काम डिजिटल हो सके। अब तक कंपनियों को मोबाइल या इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए सरकार से जटिल और लंबी 'लाइसेंस' प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिसमें महीनों लग जाते थे। पुराने लाइसेंस वाले भी नए सिस्टम में आ सकेंगे जो टेलीकॉम कंपनियां पहले से काम कर रही हैं और जिनके पास पुराने सिस्टम के तहत अलग-अलग तरह के लाइसेंस (जैसे इंटरनेट या कॉलिंग के लिए) हैं, सरकार ने उन्हें भी इस नए और आसान सिस्टम में शिफ्ट होने की सुविधा दी है। इसका मतलब है कि पुरानी कंपनियों को भी अब कागज़ी कार्रवाई से राहत मिलेगी। 2. सस्ते और नए प्लान्स मिल सकते हैं नए नियमों के तहत अब कंपनियां एक ही डिजिटल पोर्टल से नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस के लिए एक साथ अप्लाई कर सकती हैं। 3. सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर सरकार सख्त अगर आप आने वाले समय में इलॉन मस्क की स्टारलिंक या अमेजॉन जैसी कंपनियों से सीधे सैटेलाइट (बिना तार या टावर वाला डायरेक्ट इंटरनेट) लेने की सोच रहे हैं, तो सरकार ने आपकी सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाए हैं। 4. आपका पर्सनल डेटा सुरक्षित रहेगा आजकल सबसे बड़ा डर डेटा चोरी या लीक होने का होता है। सरकार ने इस पर बेहद सख्त नियम बनाया है। टेलीकॉम कंपनियों के लिए अब यह जरूरी कर दिया गया है कि वे भारतीय यूजर्स का सारा डेटा और रिकॉर्ड भारत के अंदर ही स्टोर कर रखेंगी। 5. देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं जम्मू-कश्मीर या उत्तर-पूर्व जैसे संवेदनशील इलाकों में नेटवर्क लगाने के लिए कंपनियों को विशेष सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, देश विरोधी या संदिग्ध संदेशों पर नजर रखने के लिए भी कंपनियों को सिस्टम बनाना होगा।
इससे सस्ता नहीं कभी न मिलेगा iPhone 17, आने वाली है धमाकेदार सेल!
Apple iPhone 17 Sale: अगर आप भी काफी समय से Apple का लेटेस्ट और प्रीमियम स्मार्टफोन iPhone 17 खरीदने की सोच रहे थे, लेकिन बजट के कारण अपने कदम पीछे खींच रहे थे, तो अब आपके लिए जश्न मनाने का समय आ गया है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर साल की सबसे बड़ी ...
इंस्टेंट मैसेजिंग एप टेलीग्राम 7 दिन बाद भारत में फिर से चालू हो गया है। नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के नकली और लीक पेपर सर्कुलेट होने के विवाद के बाद केंद्र सरकार ने एप और उससे जुड़ी वेब सर्विसेज को 22 जून तक ब्लॉक कर दिया था। 21 जून को NEET री-एग्जाम होने के बाद एप पर लगा अस्थायी प्रतिबंध खत्म हो गया है। इसके बाद 23 जून की सुबह से एप गूगल प्ले स्टोर पर दोबारा दिखने तो लगा, लेकिन कई यूजर्स ने एप डाउनलोड नहीं हो पाने की शिकायत की। वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि 'एप डाउनलोड करने के बाद वे साइन अप नहीं कर पा रहे हैं या चैट एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। कुछ मामलों में यह समस्या जियो और एयरटेल दोनों नेटवर्क के यूजर्स हुई। वहीं, आईफोन यूजर्स के लिए टेलीग्राम एप स्टोर पर अवेलेबल नहीं था। हालांकि, मंगलवार देर रात कंपनी ने पोस्ट कर सभी तरह की सर्विस चालू होने की जानकारी दी। यूजर्स 30 जून तक मैसेज एडिट नहीं कर पाएंगे भले ही टेलीग्राम की भारत में वापसी हो गई है, लेकिन सरकार ने कंपनी को आगामी 30 जून तक अपने प्लेटफॉर्म पर ‘मैसेज-एडिटिंग’ फीचर की सुविधा बंद रखने के निर्देश दिए हैं। यानी यूजर भेजे गए मैसेज में कोई बदलाव नहीं कर पाएंगे। सरकार ने टेलीग्राम को ब्लॉक क्यों किया? केंद्र सरकार ने टेलीग्राम और उससे जुड़ी वेब सर्विसेज पर 22 जून तक के लिए ब्लंकेट ब्लॉक यानी पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। सरकार का आरोप था कि यह प्लेटफॉर्म नीट परीक्षा से जुड़े लीक और फर्जी पेपर्स, भ्रामक कंटेंट और परीक्षा में धोखाधड़ी से जुड़ी अन्य गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा था। यह प्रतिबंध 21 जून को हुई नीट की दोबारा परीक्षा के समय लागू रखा गया, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, इस री-एग्जामिनेशन के दौरान किसी भी गड़बड़ी की खबर सामने नहीं आई है। दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सरकार के फैसले को सही माना सरकार के ऑर्डर को टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, पिछले हफ्ते मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के प्रतिबंध को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि देश के इतने बड़े नेशनल-लेवल मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की गरिमा और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सरकार की पाबंदियां जरूरी हैं। कोर्ट ने टेलीग्राम की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने कहा था कि बैन लगाने में तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। टेलीग्राम बैन किया तो वॉट्सएप क्यों नहीं? टेलीग्राम पर अपराधियों को पहचान छिपाने और लाखों का ग्रुप बनाने की आजादी मिलने के कारण, इस पर अस्थायी प्रतिबंध लगाना पड़ा। वहीं, वॉट्सएप भारतीय नियमों को मानता है। यहां यूजर को ट्रैक करना आसान है… ------------------ ये भी पढ़ें… टेलीग्राम पर NEET का फर्जी पेपर बेचने वाला गिरफ्तार: राजस्थान में अमेरिकी नेटवर्क यूज कर रहा था; दिल्ली हाईकोर्ट बोला- टेलीग्राम पर रोक जारी रहेगी टेलीग्राम पर रोक के बाद भी राजस्थान के भीलवाड़ा से NEET का फर्जी पेपर बेचने की कोशिश की गई है। इस मामले में पुलिस एक स्टूडेंट को हिरासत में लिया है। आरोपी टेलीग्राम का इस्तेमाल अमेरिका के वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) के जरिए कर रहा था। उसके टेलीग्राम चैनल का नाम पेपर माफिया है। उधर, टेलीग्राम पर NEET री-एग्जाम तक रोक जारी रहेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम की केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ लगाई याचिका खारिज कर दी। केंद्र ने 16 जून को टेलीग्राम पर 22 जून तक रोक लगाने का आदेश दिया था। पूरी खबर पढ़ें…
कोरोना ने हमें सिखाया कि खुली हवा जितनी ही अहम बंद कमरों की हवा भी है। इसी सबक को ध्यान में रखते हुए, अब वैज्ञानिक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिससे इमारतें इंसानी शरीर की तरह खुद ही हवा में मौजूद बीमारियों से लड़ सकेंगी। अमेरिकी सरकार की एजेंसी एआरपीए-एच (एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी फॉर हेल्थ) इसे हकीकत में बदलने के लिए 1250 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इस प्रोजेक्ट को ‘ब्रीद’ नाम दिया गया है। फिलहाल हवा में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस की जांच करने में लैब को कई घंटे या दिन लग जाते हैं। तब तक संक्रमण फैल चुका होता है। वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी की पर्यावरण इंजीनियर डॉ. लिंसी मार ने ऐसा सेंसर बनाया है, जो ‘रियल-टाइम’ में हवा में मौजूद खतरनाक कणों को पहचान लेता है।हाल ही में इस प्रोजेक्ट के डेमो में दिखाया गया कि सेंसर ने हवा में मौजूद ‘डस्ट माइट’ (अस्थमा बढ़ाने वाले धूल के कणों में मौजूद बारीक जीव) को तुरंत पकड़ लिया। यह सेंसर फिलहाल कोरोना वायरस, इन्फ्लूएंजा और ई-कोलाई सहित 10 तरह के पैथोजन्स (रोगजनकों) को पहचान सकता है। वैज्ञानिक जल्द ही इसकी क्षमता बढ़ाकर 25 और आगे चलकर 100 पैथोजन्स तक करने में जुटे हैं। हालांकि, कुछ वैज्ञानिक इस तकनीक को थोड़ा पेचीदा और खर्चीला मान रहे हैं। इटली के इंजीनियर जियोर्जियो बुओनान्नों का कहना है कि सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड सेंसर लगाना और वेंटिलेशन सुधारना ज्यादा व्यावहारिक है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एरोबायोलॉजिस्ट जोशुआ सेंटार्पिया का मानना है कि बड़े बदलावों के लिए बड़े कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें सिर्फ ज्यादा डाक (चिठ्ठियां) भेजने से इंटरनेट नहीं मिला, उसके लिए नई खोज करनी पड़ी।’ इस तकनीक का पहला वास्तविक परीक्षण 2028 में वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर और अमेरिका के कुछ डे-केयर सेंटर्स में किया जाएगा। इसकी सटीकता के बाद भविष्य में हमारे घर, स्कूल और दफ्तर सिर्फ कंक्रीट के ढांचे नहीं, बल्कि बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा कवच बन जाएंगे। फायर अलार्म और स्प्रिंकलर की तरह काम करती है तकनीक प्रोजेक्ट की प्रोग्राम मैनेजर डॉ. जेसिका ग्रीन कहती हैं, ‘यह तकनीक बिल्डिंग में लगे फायर अलार्म और स्प्रिंकलर की तरह काम करती है। सेंसर को हवा में वायरस या एलर्जी बढ़ाने वाले तत्व की भनक लगते ही बिल्डिंग का कंट्रोल सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। ये सिस्टम अस्पताल व स्कूल में वायरस का पता चलते ही वेंटिलेशन में लगी यूवी लाइट और एयर फिल्टर चालू कर देंगे। डे-केयर के लिए सॉफ्टवेयर अनुमान लगाएगा कि हवा किस कमरे से कहां बह रही है और खतरा बढ़ते ही बाहर की ताजी हवा अंदर भेजना शुरू कर देगा। हमारा लक्ष्य इमारतों को इस तरह तैयार करना है कि वे सांस संबंधी बीमारियों को 25% तक घटा सकें।
शिक्षा क्षेत्र में एआई की एंट्री ने पहले ही टीचर्स की नींद उड़ा रखी थी। लेकिन, अब मामला गंभीर हो चुका है। बड़ी टेक कंपनियों से लेकर छोटे स्टार्टअप्स तक, ऐसे नए एआई टूल्स का जमकर प्रचार कर रहे हैं, जो छात्रों को टीचर्स और एआई डिटेक्टर्स को चकमा देने की खुली छूट दे रहे हैं। दिलचस्प पहलू ये है कि छात्रों को ऐसे टूल्स देने वाली कंपनियां ही टीचर्स और संस्थानों को चोरी पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर बेच रही हैं। टेक जगत में इसे ‘डिटेक्शन आर्म्स रेस’ यानी पकड़ने और बचने की आधुनिक जंग कहा जा रहा है। ऐसे में, हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटीज अब पारंपरिक निबंधों के बजाय ‘इन-क्लास पेन-पेपर टेस्ट’ और मौखिक परीक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर इन दिनों छात्रों के लिए ट्यूटोरियल्स और विज्ञापनों की बाढ़ है। ऑफर दिया जा रहा है- ‘एआई से होमवर्क कराओ और पकड़े भी मत जाओ।’ दो टूल ह्यूमनाइजर्स और ऑटोटाइपर्स छात्रों के पसंदीदा बने हुए हैं। शिक्षक छात्रों की चोरी पकड़ने के लिए असाइनमेंट की वर्जन हिस्ट्री जांचते हैं। अगर एक हजार शब्दों का निबंध अचानक एक मिनट में कॉपी-पेस्ट हो जाए, तो साफ हो जाता है कि यह एआई का काम है। टेक कंपनियों ने इसका तोड़ निकाला है। ह्यूमनाइजर्स टूल एआई टेक्स्ट को इंसानी अंदाज में बदल देता है। वहीं, ऑटोटाइपर्स टूल शब्दों को धीरे-धीरे टाइप करता है, टाइपिंग में जानबूझकर गलतियां करता है और उन्हें सुधारता है, ताकि लगे कि इंसान सोच-समझकर लिख रहा है। कुछ एप प्रचार कर रहे हैं कि जब छात्र सैर-सपाटे पर हों और असाइनमेंट की डेडलाइन करीब हो तो वे ऐसा डॉक्यूमेंट बनाकर देंगे, जो छात्रों द्वारा लिखा गया ही दिखेगा। ऐसे टूल्स ज्यादातर वही कंपनियां दे रही हैं, जो एआई चोरी पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर बेचती हैं। जैसे- ‘ग्रामरली’ प्रोफेसर्स को एआई की चोरी पकड़ने के लिए ‘ऑथरशिप टूल’ बेचता है, तो छात्रों को पूरा निबंध लिखने और एआई डिटेक्टर से बचने के लिए टेक्स्ट को ह्यूमनाइज करने की छूट देता है। ‘जीपीटीजीरो’ एआई कंटेंट पकड़ने का दावा करता है, लेकिन सोशल मीडिया पर ‘फर्जी प्रोफेसर’ का किरदार बनाकर छात्रों को सिखाया कि कैसे इस टूल के जरिए वे असली प्रोफेसर्स को चकमा देकर बेहतर ग्रेड ला सकते हैं। टाइपिंग पैटर्न, राइटिंग रीप्ले जैसी तकनीकों से हो रही निगरानी एआई जनरेटेड असाइनमेंट व चीटिंग टूल्स से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर 3 उपाय कारगर हैं। ‘जीपीटी जीरो’ छात्रों के टाइपिंग पैटर्न, सोचने के समय और बदलावों का बैकग्राउंड में लाइव वीडियो ट्रैक रिकॉर्ड रखती हैं। यह राइटिंग रीप्ले तकनीक ऑटोटाइपर्स की चोरी पकड़ने में सबसे सटीक है। ‘गूगल डीपमाइंड’ एआई-टेक्स्ट में अदृश्य कोड (डिजिटल वॉटरमार्किंग) छिपाते हैं, जिससे एआई डिटेक्टर्स उसे तुरंत पहचान लेते हैं।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने क्रेड (CRED) एप के फाउंडर कुणाल शाह को वॉट्सएप का नया ग्लोबल हेड बनाया है। वे विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जो 7 साल से वॉट्सएप की कमान संभाल रहे थे। कैथकार्ट अब मेटा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। सोमवार को यह जानकारी मेटा CEO मार्क जुकरबर्ग ने एक पोस्ट कर दी है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने यह फैसला उस डील के तहत लिया है, जिसमें मेटा UPI और बिल पेमेंट एप क्रेड में करीब 8,550 करोड़ रुपए निवेश करेगी। इसके बदले मेटा को क्रेड में 20% की हिस्सेदारी मिलेगी। इसके बाद क्रेड कंपनी की कुल वैल्यूएशन बढ़कर ₹43,239 करोड़ हो जाएगी। वॉट्सएप में AI इंटीग्रेशन और विज्ञापन से कमाई बढ़ाने पर फोकस होगा मेटा के मुताबिक, कुणाल शाह के बॉस बनने के बाद वॉट्सएप का पूरा ध्यान दो बड़ी चीजों पर होगा। मितेन संपत बने क्रेड के अंतरिम CEO, IPO लाने की तैयारी तेज वॉट्सएप के ग्लोबल हेड की कमान संभालने के लिए कुणाल शाह क्रेड CEO के अपने मौजूदा ऑपरेटिंग पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद वह मेटा का हिस्सा बनेंगे। क्रेड ने फिलहाल मितेन संपत को कंपनी का अंतरिम CEO बनाया है। मितेन संपत साल 2020 से क्रेड में स्ट्रेटजी और फाइनेंस विभाग की कमान संभाल रहे थे। क्रेड के बोर्ड और मैनेजमेंट ने बताया कि वे कंपनी के लिए एक लॉन्ग-टर्म मैनेजमेंट स्ट्रक्चर तैयार करने पर काम कर रहे हैं, क्योंकि कंपनी आने वाले समय में अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO लाने की योजना बना रही है। वॉट्सएप-फेसबुक-इंस्टाग्राम के प्लस वर्जन आएंगे मेटा ने हाल ही में इंस्टाग्राम, फेसबुक और वॉट्सएप के लिए नए सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किए हैं। इसके तहत एप्स के ‘प्लस’ वर्जन रोल आउट किए गए हैं। इस प्लान को लेने वाले यूजर्स को स्पेशल टूल्स और कस्टमाइजेशन के विकल्प मिलेंगे। पूरी खबर पढ़ें… क्रेड का डेटा सुरक्षित, मेटा को नहीं मिलेगी जानकारीइस बड़ी डील के बाद क्रेड के ग्राहकों के मन में डेटा प्राइवेसी को लेकर सवाल उठ रहे थे। हालांकि, मेटा ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि एक रणनीतिक निवेशक (Strategic Investor) बनने के बावजूद उसे क्रेड के ग्राहकों की किसी भी तरह की निजी या फाइनेंशियल जानकारी का एक्सेस नहीं दिया जाएगा। ग्राहकों का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। नई फंडिंग से बिजनेस बढ़ाने और क्रेड को आगे ले जाने का प्लान निवेश और लीडरशिप में हुए इस बड़े बदलाव पर बात करते हुए कुणाल शाह ने कहा कि क्रेड की शुरुआत सिर्फ अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले लोगों को रिवॉर्ड देने के एक आइडिया से हुई थी, जो आज लाखों मेंबर्स और मुनाफे वाले बिजनेस मॉडल के साथ एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। उन्होंने बताया कि क्रेड की लीडरशिप टीम अगले फेज में कंपनी को और आगे ले जाएगी। नए अंतरिम CEO मितेन संपत ने भी कहा कि इस फ्रेश कैपिटल (नई फंडिंग) का इस्तेमाल अलग-अलग वर्टिकल्स में लीडरशिप मजबूत करने और क्रेड को शेयर बाजार में लिस्ट कराने से पहले बिजनेस का दायरा बढ़ाने के लिए किया जाएगा। ------------------ पूरी खबर पढ़ें… ब्रोकरेज हाउसेज ने डिकोड की रिलायंस की AGM: जियो IPO से कमाई का रास्ता खुलेगा, न्यू एनर्जी और AI से ग्रोथ मिलेगी; शेयर आज 2% चढ़ा रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयर में आज कारोबार के दौरान 2% से ज्यादा की तेजी है। कंपनी का शेयर ₹1,345 के स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार को हुई 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के बाद कई बड़े ब्रोकरेज हाउसेज ने इसके भविष्य के रोडमैप और जियो इन्फोकॉम के IPO के लिए सेबी (Sebi) के पास दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) को लेकर अपनी एनालिसिस रिपोर्ट जारी की है। पूरी खबर पढ़ें…

