August 2026 Festivals: अगस्त 2026 माह के व्रत एवं त्योहारों और जयंतियों की लिस्ट
August 2026 Hindu Festivals List. अगस्त 2026 में सावन सोमवार व्रत, कामिका एकादशी, हरियाली तीज, नाग पंचमी, सिंह संक्रांति, श्रावण पुत्रदा एकादशी, वरलक्ष्मी व्रत, रक्षाबंधन, श्रावणी पूर्णिमा, गायत्री जयंती, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और कजरी तीज जैसे अनेक ...
नई दिल्ली/लखनऊ। वैदिक और आधुनिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर के साथ-साथ उनके बीच बनने वाले विशेष कोणीय संबंध बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अंतरिक्ष में एक ऐसी ही दुर्लभ खगोलीय घटना घटी है, जिसने कई राशियों के भाग्य के द्वार खोल दिए हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, बुद्धि और संचार के कारक ग्रह बुध तथा साहस व पराक्रम के देवता मंगल के बीच ठीक 36 डिग्री का एक विशेष कोण बना है, जिससे एक बेहद शक्तिशाली और चमत्कारी 'दशांक योग' (Dashank Yoga 2026) का निर्माण हुआ है। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, यह अनूठा योग मुख्य रूप से 16 जुलाई की रात 8:27 बजे से शुरू होकर 19 जुलाई 2026 तक पूरी तरह प्रभावी रहेगा। इस दौरान बुध अपनी स्वराशि मिथुन में वक्री रहेंगे और मंगल वृषभ राशि में गोचर कर रहे होंगे।क्या होता है दशांक योग और इसका महत्व?आधुनिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब कोई दो ग्रह एक-दूसरे से लगभग 36 डिग्री की कोणीय दूरी पर स्थित होते हैं, तो 'दशांक योग' बनता है। इस योग को असाधारण प्रतिभा, नवाचार (Innovation), रचनात्मक सोच, त्वरित निर्णय क्षमता और जीवन में अचानक मिलने वाले सुनहरे अवसरों का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से जब यह बुद्धि के स्वामी बुध और अदम्य ऊर्जा के स्रोत मंगल के बीच बनता है, तो यह पेशेवर (Professional) लाइफ में जातकों की कार्य करने की गति और बौद्धिक क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। यह योग आईटी, मीडिया, बैंकिंग, शेयर बाजार, स्टार्टअप और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए सबसे ज्यादा फलदायी साबित होता है।इन 4 भाग्यशाली राशियों के करियर और धन में आएगा तगड़ा उछाल1. वृषभ राशि (Taurus): चूंकि मंगल देव आपकी ही राशि में मौजूद हैं, इसलिए इस योग का सर्वाधिक लाभ आपको मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा और आपके द्वारा लिए गए कड़े फैसले बिल्कुल सही साबित होंगे। व्यापारिक यात्राएं सफल होंगी, नए बड़े क्लाइंट्स जुड़ेंगे और पुराना निवेश आपको मोटा मुनाफा देना शुरू करेगा। नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति या कोई बड़ी अथॉरिटी मिल सकती है।उपाय: नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को गुड़ का भोग लगाएं।2. मिथुन राशि (Gemini): बुध आपकी ही राशि में वक्री अवस्था में गोचर कर रहे हैं। इस दौरान समाज के प्रभावशाली लोगों से आपके संपर्क मजबूत होंगे, जो भविष्य में आपके करियर के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। बिजनेस में नए और बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने की पूरी संभावना है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आएगा।उपाय: रोजाना सुबह भगवान सूर्य नारायण को जल अर्पित करें और तांबे की वस्तु का दान करें।3. सिंह राशि (Leo): सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। यदि आपका कोई धन लंबे समय से कहीं फंसा या रुका हुआ था, तो वह इस अवधि में आपको वापस मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों से आपकी योजनाओं को खूब सराहना मिलेगी और समाज में आपके मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में भारी वृद्धि होगी।4. कन्या राशि (Virgo): कन्या राशि के जातकों के लिए करियर में उन्नति के बेहतरीन रास्ते खुल रहे हैं। नौकरी में आपकी परफॉर्मेंस को देखते हुए आपको कोई नई और बड़ी जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है। व्यापार में किया गया कोई भी नया प्रयोग या निवेश इस समय अत्यधिक सफल रहेगा।उपाय: बुधवार के दिन गाय को हरी मूंग खिलाएं या इसका दान करें और भगवान गणेश की आराधना करें।
लखनऊ। हिंदू धर्म में महादेव की कृपा बरसाने वाला प्रदोष व्रत बेहद फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रयोदशी तिथि को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और इस समय मां पार्वती के साथ पूरे शिव परिवार की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। इस समय आषाढ़ मास का शुक्ल पक्ष चल रहा है और इस महीने का अंतिम प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ने के कारण 'रवि प्रदोष व्रत' के रूप में मनाया जाएगा। इस बार पूजा के समय सर्वार्थ सिद्धि योग, इंद्र योग और ज्येष्ठा नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ गया है।रवि प्रदोष व्रत 2026 की सही तारीख और पंचांग गणनावैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जुलाई 2026 को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 27 जुलाई को शाम 04 बजकर 14 मिनट पर होगा। चूंकि प्रदोष व्रत में उदयातिथि की जगह शाम के समय यानी प्रदोष काल के मुहूर्त को प्रधानता दी जाती है, इसलिए आषाढ़ का यह अंतिम प्रदोष व्रत 26 जुलाई दिन रविवार को ही रखा जाएगा।महादेव की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का समयशिव साधना के लिए 26 जुलाई की शाम को 07 बजकर 16 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 21 मिनट तक का समय सबसे उत्तम है, जो कि प्रदोष काल की पूजा का मुख्य मुहूर्त है। इसके अतिरिक्त इस दिन सुबह 04 बजकर 16 मिनट से 04 बजकर 58 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। दोपहर में शुभ कार्यों के लिए अभिजित मुहूर्त 12:00 बजे से दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जबकि तंत्र व विशेष उपासना के लिए निशिता मुहूर्त देर रात 12:07 ए एम से 12:49 ए एम तक रहेगा।सर्वार्थ सिद्धि और इंद्र योग का महासंयोगइस रवि प्रदोष व्रत की सबसे खास बात यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो 26 जुलाई की सुबह 07 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 27 जुलाई की सुबह 05 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इस योग में की गई शिव पूजा हर मनोकामना को सिद्ध करने वाली मानी जाती है। इसके साथ ही इंद्र योग सूर्योदय से लेकर रात 10 बजकर 05 मिनट तक रहेगा। नक्षत्रों की बात करें तो ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 07 बजकर 34 मिनट तक रहेगा और उसके बाद मूल नक्षत्र की शुरुआत होगी।
Gupt Navratri Upay: 23 जुलाई से पहले कर लें नारियल और हल्दी के ये 3 अचूक उपाय, हर बाधा होगी दूर!
लखनऊ। हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि का पावन पर्व आता है, जिसमें चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि गृहस्थों के बीच प्रसिद्ध है, वहीं आषाढ़ और माघ मास में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। तंत्र साधना और सिद्धियों के लिए बेहद खास मानी जाने वाली आषाढ़ गुप्त नवरात्रि इस समय चल रही है, जिसकी शुरुआत 15 जुलाई 2026 से हो चुकी है और इसका समापन 23 जुलाई 2026 को होगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ 10 महाविद्याओं की विशेष पूजा की जाती है। यदि आप भी अपने जीवन से मानसिक तनाव, नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करना चाहते हैं, तो इस गुप्त नवरात्रि में तीन सरल उपाय करके मां शक्ति का आशीर्वाद पा सकते हैं।प्रतिभा और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मातंगी माता का उपायधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के दौरान घर की पूर्व दिशा में मां मातंगी की तस्वीर लगाना बेहद शुभ होता है। मां मातंगी के हाथों में तोता सुशोभित रहता है। इस उपाय को करने से व्यक्ति के भीतर छिपी हुई प्रतिभा बाहर आती है, आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है और आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।नकारात्मक ऊर्जा और विरोधियों से रक्षा के लिए मां बगलामुखी की पूजामां बगलामुखी को संकटों से रक्षा करने वाली देवी माना गया है। उन्हें हल्दी अत्यंत प्रिय है, इसलिए गुप्त नवरात्रि में मां बगलामुखी को हल्दी अर्पित करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। यह उपाय आपको बुरी नजर और शत्रुओं के षड्यंत्रों से सुरक्षित रखने में मददगार माना जाता है।मानसिक शांति और बाधा मुक्ति के लिए मां काली को चढ़ाएं नारियलजीवन में नई शुरुआत और बड़े बदलावों की देवी मां काली की आराधना से मानसिक उलझनें समाप्त होती हैं। इस गुप्त नवरात्रि में मां काली को नारियल अर्पित करने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मानसिक बल मिलता है। यह उपाय जीवन में आ रही तमाम रुकावटों को दूर करने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है।
गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें
Gundicha Temple: भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय पड़ाव गुंडिचा मंदिर ही है। प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पुरी में श्री जगन्नाथ प्रभु की रथयात्रा निकाली जाती है। यह रथ मुख्य मंदिर से ...
क्या उपनिषदों की अवधारणाएं क्वांटम विज्ञान से मेल खाती हैं? जानिए पूरी पड़ताल
उपनिषद कोई बंधी-बंधाई परिभाषा या अंतिम ज्ञान नहीं है, बल्कि यह 'न जानने' (अज्ञान) से 'जानने' (बोध) की ओर ले जाने वाली एक अनवरत यात्रा है। यह हमें उस परम सत्य की ओर अग्रसर करता है जहां विचार शांत हो जाते हैं और केवल अनुभव बचता है। आइए इस आलेख के ...
Aniruddha Chaturthi 2026: अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत कब है, जानें महत्व, पूजन के मुहूर्त, विधि और मंत्र
Aniruddha Chaturthi Vrat: अनिरुद्ध चतुर्थी व्रत भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध को समर्पित एक महत्वपूर्ण धार्मिक व्रत माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना के साथ किया जाता है। भगवान श्रीगणेश, अनिरुद्ध, श्रीकृष्ण और भगवान ...
गुप्त नवरात्रि की साधना में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना अधूरी रह सकती है मां दुर्गा की कृपा
हिंदू धर्म में चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा 'गुप्त नवरात्रि' का विशेष महत्व माना गया है। तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए यह समय सबसे शक्तिशाली माना जाता है। वर्ष 2026 में गुप्त नवरात्रि का पावन अवसर शुरू हो चुका है, जिसमें भक्त मां दुर्गा के नौ गुप्त स्वरूपों की आराधना में लीन हैं। हालांकि, गुप्त नवरात्रि का नाम ही बताता है कि इसकी साधना पूरी तरह से गोपनीय और नियमों के दायरे में होती है। ज्योतिष और तंत्र विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान छोटी सी भी चूक आपकी पूजा और साधना के फल को कम कर सकती है।गुप्त नवरात्रि में इन 5 गलतियों से रहें दूरगुप्त नवरात्रि के दौरान सात्विकता और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। पहली बड़ी गलती है मन में द्वेष या हिंसा का भाव रखना; मां की साधना के दौरान क्रोध और अपमान से दूर रहना चाहिए। दूसरी गलती है मांस-मदिरा का सेवन, जिसे पूरी तरह वर्जित माना गया है। तीसरी गलती के रूप में, अपनी साधना का सार्वजनिक प्रदर्शन करने से बचें, क्योंकि इसे 'गुप्त' नवरात्रि कहा जाता है। चौथी गलती है बाल और नाखून काटना या तामसिक भोजन पकाना, जो घर की ऊर्जा को नकारात्मक कर सकता है। पांचवीं और सबसे बड़ी भूल है अपनी पूजा के नियमों को बार-बार बदलना; अपनी साधना का एक निश्चित समय और स्थान बनाए रखें, ताकि ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बना रहे।सात्विक साधना से मिलती है मनोवांछित सिद्धिगुप्त नवरात्रि में मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा का विधान है। इन नौ दिनों में विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ, महाकाली के मंत्रों का जाप और ध्यान करना अत्यंत फलदायी होता है। जो भक्त पूर्ण शुद्धता और शांत चित्त के साथ मां की शरण में जाते हैं, उनके जीवन के समस्त आर्थिक संकट, शत्रुओं का भय और मानसिक अशांति दूर हो जाती है। विशेष रूप से जो लोग अपनी कुंडली में ग्रहों के दोष से परेशान हैं, उनके लिए यह समय दोष निवारण का सर्वोत्तम अवसर है।साधना के दौरान किन बातों का रखें खास ख्याल?पूजा स्थल पर हमेशा लाल या पीले रंग के आसन का प्रयोग करें। गुप्त नवरात्रि में दीप प्रज्वलन का विशेष महत्व है, इसलिए यदि संभव हो तो नौ दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्वलित करें। साधना के दौरान काले या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें, इसके बजाय लाल, पीले या नारंगी वस्त्रों को प्राथमिकता दें। अपने घर के वातावरण को पूरी तरह शुद्ध रखें और रोज सुबह-शाम गूगल या लोबान की धूप जलाएं। यदि आप किसी विशेष कार्य की सिद्धि के लिए साधना कर रहे हैं, तो उसे किसी को न बताएं, क्योंकि गुप्त मंत्र और गुप्त साधना ही फलदायी होती है।घर में बनाए रखें अनुशासन और संयमइस दौरान पूरे परिवार को सात्विक रहना चाहिए। जिन घरों में गुप्त नवरात्रि का अनुष्ठान चल रहा हो, वहां किसी भी प्रकार का कलह या विवाद न करें। ब्रह्मचर्य का पालन करना इस साधना की पहली शर्त मानी जाती है। जो भक्त विधि-विधान के साथ मां के इन गुप्त रूपों को मना लेते हैं, उन्हें धन-धान्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। तो इस नवरात्रि में मां दुर्गा के प्रति पूर्ण समर्पण और संयम रखें, ताकि आपकी प्रार्थनाएं सीधे मां के चरणों तक पहुंचें और आप पर उनकी कृपा बनी रहे।
विज्ञान भी है हैरान! जगन्नाथ पुरी मंदिर के वो 7 महा-रहस्य, जो रथयात्रा 2026 के बीच फिर बने कौतूहल
ओडिशा के तटीय शहर पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 2026 की शुरुआत हो चुकी है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस पावन पल के गवाह बनने पहुंचे हैं। सनातन आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक, पुरी का यह मुख्य मंदिर सिर्फ अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि उन अविश्वसनीय रहस्यों के लिए भी जाना जाता है जिसका जवाब आज तक आधुनिक विज्ञान और बड़े-बड़े शोधकर्ता भी नहीं ढूंढ पाए हैं। आइए जानते हैं जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े वो हैरान कर देने वाले चमत्कार, जो इंसानी सोच और प्रकृति के स्थापित नियमों को सीधी चुनौती देते हैं।हवा के विपरीत लहराता महाध्वज और 800 साल पुरानी कठिन परंपरासामान्य भौतिक विज्ञान का नियम कहता है कि कोई भी कपड़ा या झंडा उसी दिशा में लहराएगा जिस तरफ हवा बह रही हो। लेकिन जगन्नाथ मंदिर के 65 मीटर ऊंचे शिखर पर लगा पवित्र 'पतितपावन बाना' (महाध्वज) हमेशा हवा की दिशा के बिल्कुल विपरीत दिशा में लहराता है。 इस रहस्य को आज तक कोई मौसम वैज्ञानिक नहीं समझ पाया है। इसके अलावा, एक और कड़ा नियम यह है कि इस झंडे को हर रोज सूर्यास्त के समय बदला जाता है। मंदिर के पुजारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण, रस्सी या बेल्ट के नंगे पैर इतनी ऊंचाई पर चढ़कर इस परंपरा को निभाते हैं। मान्यता है कि यदि एक दिन भी यह झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर अगले 18 वर्षों के लिए बंद करना पड़ जाएगा।दोपहर में भी गायब हो जाती है मुख्य गुंबद की परछाईदुनिया की हर छोटी-बड़ी वस्तु, इमारत या जीव की रोशनी पड़ने पर एक परछाई (Shadow) जरूर बनती है। लेकिन कलिंग वास्तुकला के इस बेजोड़ और विशालकाय पत्थर के मंदिर का मुख्य गुंबद इस नियम से पूरी तरह परे है। साल का कोई भी महीना हो, दिन का कोई भी समय हो, सुबह हो या दोपहर, मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई जमीन पर कभी दिखाई नहीं देती。 वैज्ञानिक और आर्किटेक्ट इसके पीछे की ज्यामिति को समझने में आज भी नाकाम हैं कि आखिर रोशनी का यह परावर्तन किस प्रकार काम करता है।मुख्य सिंहद्वार के अंदर कदम रखते ही मौन हो जाता है समंदरपुरी एक तटीय क्षेत्र है और बंगाल की खाड़ी की विशाल लहरों का शोर मंदिर के काफी करीब तक गूंजता रहता है। जब आप मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार, जिसे 'सिंहद्वार' कहा जाता है, के बाहर खड़े होते हैं, तो आपको लहरों की तेज आवाज साफ सुनाई देती है。 लेकिन जैसे ही आप सिंहद्वार के अंदर अपना पहला कदम रखते हैं, समुद्र की वह भारी आवाज पूरी तरह से गायब (म्यूट) हो जाती है। मंदिर परिसर के भीतर आपको समुद्र की ध्वनि का लेशमात्र भी अहसास नहीं होगा, और जैसे ही आप एक कदम वापस बाहर की तरफ बढ़ाएंगे, वह आवाज तुरंत लौट आती है।मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ता कोई पक्षी या विमानआमतौर पर भारत के किसी भी बड़े मंदिर या ऊंची मीनारों के ऊपर पक्षियों का बैठना या उड़ना बेहद आम बात है। लेकिन जगन्नाथ पुरी मंदिर के आकाश को एक प्राकृतिक 'नो-फ्लाई ज़ोन' माना जाता है। इस मंदिर के ठीक ऊपर से कभी कोई पक्षी उड़ता हुआ नहीं दिखाई देता और न ही कोई विमान या हेलीकॉप्टर इसके ठीक ऊपर के हवाई क्षेत्र से गुजरता है। इस रहस्यमयी आभा मंडल को लेकर वैज्ञानिक भी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं।रसोई का वो अनोखा चमत्कार: सबसे ऊपर रखा मिट्टी का बर्तन पकता है पहलेभगवान जगन्नाथ को चढ़ाए जाने वाले 'महाप्रसाद' को बनाने की प्रक्रिया भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। मंदिर की विशाल रसोई में लकड़ी के चूल्हे पर एक के ऊपर एक कुल सात मिट्टी के बर्तन (clay pots) रखे जाते हैं। सामान्य विज्ञान के अनुसार, जो बर्तन आग के सबसे करीब (यानी सबसे नीचे) होगा, उसका खाना पहले पकना चाहिए। परंतु यहां उल्टा होता है; सबसे ऊपर रखे सातवें नंबर के बर्तन का भोजन सबसे पहले पकता है, और फिर क्रमशः नीचे वाले बर्तनों का खाना तैयार होता है। इसके साथ ही, यहां आने वाले लाखों भक्तों के लिए बनने वाला प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न ही कभी एक दाना बर्बाद होता है।सुदर्शन चक्र की जादुई बनावट और हवा का उल्टा रुखमंदिर के शीर्ष पर अष्टधातु से बना एक विशाल 'नील चक्र' (सुदर्शन चक्र) स्थापित है। इस चक्र की इंजीनियरिंग इतनी अद्भुत है कि आप पुरी शहर के किसी भी कोने से या मंदिर के किसी भी कोण से इसे देखें, यह हमेशा ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह सीधे आपकी तरफ ही देख रहा है। वहीं, तटीय क्षेत्रों में आमतौर पर हवा दिन में समुद्र से जमीन की ओर और रात में जमीन से समुद्र की ओर चलती है, लेकिन पुरी के इस भौगोलिक क्षेत्र में यह प्राकृतिक नियम भी उल्टा काम करता है।
हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और देवों के देव महादेव की आराधना के विशेष महीने 'सावन' (Shravan Month) को लेकर शिव भक्तों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। वर्ष 2026 में सावन के महीने की शुरुआत बेहद अद्भुत और शुभ संयोगों के साथ हो रही है। इस साल सावन का पहला दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जा रहा है। अगर आप भी इस पावन महीने में भोलेनाथ का जलाभिषेक करने और कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए पहले दिन की सही तारीख और पूजा का सटीक समय जानना बेहद जरूरी है।किस तारीख से शुरू हो रहा है सावन 2026 का पावन महीना?वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन (श्रावण) का महीना 31 जुलाई 2026, दिन शुक्रवार से शुरू हो रहा है। पूर्णिमांत कैलेंडर का पालन करने वाले उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में शिव भक्त इसी दिन से सावन के पवित्र नियमों और व्रतों की शुरुआत करेंगे। सावन के पहले ही दिन से शिवालयों में 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजने लगेंगे। इस बार सावन का महीना बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इसमें कई दुर्लभ योग बन रहे हैं जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करेंगे।नोट कर लें पहले दिन जलाभिषेक का सबसे शुभ समय और मुहूर्तसावन के पहले दिन यानी 31 जुलाई को भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन सुबह 05:42 बजे से लेकर सुबह 08:24 बजे तक पूजा और जल अर्पण करने का सबसे पहला और श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद दोपहर में चर और लाभ के चौघड़िया मुहूर्त में भी शिव आराधना की जा सकती है। यदि आप शाम के समय पूजा करना चाहते हैं, तो प्रदोष काल में शाम 06:52 बजे से रात 08:58 बजे के बीच महादेव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।कैसे करें सावन के पहले दिन भोलेनाथ की पूजा?सावन के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े धारण करें। इसके बाद अपने नजदीकी शिव मंदिर में जाएं या घर के मंदिर में ही शिवलिंग के सामने व्रत का संकल्प लें। शिवजी को जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद और घी से पंचामृत स्नान कराएं। इसके बाद महादेव के सबसे प्रिय बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, श्वेत फूल और चंदन का तिलक लगाएं। पूजा के अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती उतारें। ध्यान रहे कि शिवलिंग पर कभी भी तुलसी की पत्ती, केतकी का फूल और सिंदूर न चढ़ाएं।लोकल ऑप्टिमाइजेशन: देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और प्रसिद्ध मंदिरों में तैयारियां तेजसावन की शुरुआत को देखते हुए वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, उज्जैन के महाकालेश्वर, झारखंड के बैद्यनाथ धाम और देवघर सहित देश भर के सभी प्रमुख शिवालयों में प्रशासन ने सुरक्षा और वीआईपी दर्शन के कड़े इंतजाम पूरे कर लिए हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों ने कांवड़ियों के मार्ग और पेयजल की व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया है ताकि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के रूटों पर श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन (GEO) के मुताबिक, इस बार सावन के दौरान डिजिटल दर्शन और लाइव आरती की खोज में भारी उछाल आने की उम्मीद है।
cultural significance of the number 9: नवरात्रि हमें यह सिखाती है कि शक्ति बाहर खोजने की वस्तु नहीं, भीतर जागृत करने की प्रक्रिया है। अंक ज्योतिष हमें यह संकेत देता है कि प्रत्येक व्यक्ति की अपनी विशिष्ट प्रवृत्तियां और संभावनाएं होती हैं। जब इन ...
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य की राशि 'सिंह' में आज (16 जुलाई 2026) एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावकारी खगोलीय घटना होने जा रही है। धन, वैभव, ऐश्वर्य, सौंदर्य और प्रेम के कारक ग्रह शुक्र (Venus) आज सिंह राशि में गोचर करने जा रहे हैं। सिंह राशि में पहले से ही छाया ग्रह केतु (Ketu) विराजमान हैं, जो जातक को अध्यात्म और अकेलापन देते हैं।सूर्य की राशि में शुक्र और केतु का यह मिलन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद खास है। जब भी सुख-सुविधाओं के स्वामी शुक्र का संयोग रहस्यमयी केतु से होता है, तो देश-दुनिया समेत सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े बदलाव आते हैं। हालांकि, आज होने वाले इस महागोचर से 3 विशेष राशियों की बंद किस्मत के ताले खुलने वाले हैं और उन्हें बम्पर धन लाभ होने जा रहा है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में:शुक्र-केतु की युति से इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत1. वृषभ राशि (Taurus) – आय के बनेंगे नए स्रोतवृषभ राशि के जातकों के लिए शुक्र और केतु का एक साथ आना जीवन में सकारात्मक बदलावों की झड़ी लगा देगा।आर्थिक लाभ: आपकी आमदनी (Income) के नए-नए साधन विकसित होंगे और धन आगमन के रास्ते में आ रही रुकावटें स्वतः दूर होती चली जाएंगी। व्यापार या नौकरी में किसी भी प्रकार की बड़ी परेशानी सामने नहीं आएगी।पारिवारिक जीवन: यह समय आपके लिए हर लिहाज से उत्तम है। आपकी पर्सनल लाइफ शानदार रहेगी और मुश्किल घड़ी में जीवनसाथी (Partner) का पूरा भावनात्मक व आर्थिक सहयोग प्राप्त होगा।2. तुला राशि (Libra) – अचानक होगा बड़ा धन लाभतुला राशि के जातकों के लिए सिंह राशि में बन रही यह युति बेहद कल्याणकारी और फलदायी साबित होने वाली है।आर्थिक लाभ: आपके लिए कार्यक्षेत्र में लाभ के कई शानदार मौके हाथ आएंगे। आपको किसी पुराने निवेश या पैतृक संपत्ति से अचानक धन लाभ (Sudden Wealth) हो सकता है। भविष्य के लिए की गई आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग पूरी तरह सफल रहेगी।मानसिक स्थिति: पिछले कुछ समय से चल रहा मानसिक तनाव खत्म होगा और आप खुद को काफी हल्का व सकारात्मक महसूस करेंगे। शादीशुदा जिंदगी में भी मधुरता और सुखद पल लौटेंगे।3. वृश्चिक राशि (Scorpio) – लव लाइफ और निवेश में सफलतावृश्चिक राशि के जातकों के लिए शुक्र और केतु का यह दुर्लभ संयोग आर्थिक और व्यक्तिगत दोनों मोर्चों पर बड़ी खुशखबरी लेकर आया है।आर्थिक लाभ: आपकी आर्थिक स्थिति (Financial Condition) में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा। आपकी मंथली इनकम में बढ़ोतरी होगी और यदि आप शेयर बाजार या कहीं और निवेश (Investment) करने की सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए बेहतरीन रिटर्न दिलाने वाला साबित होगा।लव लाइफ: आपकी प्रेम जिंदगी में चार चांद लगेंगे, पार्टनर के साथ आपसी समझ और भरोसा और ज्यादा मजबूत होगा। इस गोचर का आपकी राशि पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं दिख रहा है।कुंडली में केतु को मजबूत और खुश करने के 3 अचूक उपायकेतु को एक क्रूर और छाया ग्रह माना जाता है, जो कुंडली में कमजोर होने पर भ्रम, अकेलापन और चर्म रोग जैसी समस्याएं दे सकता है। यदि आपकी कुंडली में केतु अशुभ फल दे रहा है, तो आज इस गोचर के अवसर पर नीचे दिए गए उपाय करके आप उसे शांत और मजबूत कर सकते हैं:तिल का दान: केतु के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए गुरुवार या शनिवार के दिन काले और सफेद तिल का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।श्वान (कुत्ते) की सेवा: रोजाना या विशेषकर शनिवार को किसी काले या दोरंगे कुत्ते को सरसों का तेल लगी हुई रोटी खिलाएं। पशुओं की सेवा से केतु तुरंत शांत होते हैं।कंबल का दान: समाज के अत्यंत गरीब और जरूरतमंद लोगों को काले-सफेद रंग के कंबल या गर्म कपड़ों का दान करें। इससे केतु जनित दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में स्थिरता आती है।
सूर्य का कर्क राशि में गोचर: कर्क संक्रांति से देश, दुनिया और आपके जीवन पर क्या होगा असर?
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव का एक राशि से दूसरी राशि में जाना 'संक्रांति' कहलाता है। इस बार बृहस्पतिवार, 16 जुलाई 2026 को सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे 'कर्क संक्रांति' का महापर्व बेहद शुभ और दुर्लभ 'सिद्ध योग' में मनाया जाएगा। ...
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की द्वितीय देवी माता तारा, जानिए पूजा विधि
Gupt Navratri Second Day Puja: गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन माता तारा देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां तारा अपने भक्तों को जीवन की कठिन परिस्थितियों से पार लगाने वाली शक्ति प्रदान करती हैं। माता तारा को ज्ञान, करुणा, ...
Bhadli Navami 2026: भड़ली नवमी व्रत 2026 कब है?
भड़ली नवमी व्रत 2026 कबBhadariya Navami 2026: भड़ली नवमी का व्रत वर्ष 2026 में 22 जुलाई, बुधवार को रखा जाएगा। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धा और विधिपूर्वक व्रत-पूजन करने से परिवार में सुख, शांति और ...
Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि कब से कब तक रहेगी?
Ashadha Gupt Navratri 2026: मान्यता है कि आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजा और देवी आराधना करने से भक्तों को मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पर्व विशेष रूप से आध्यात्मिक साधकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, हालांकि ...
सनातन धर्म और हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वर्ष का सबसे पवित्र और नियमों से बंधा समय यानी 'चातुर्मास' (Chaturmas 2026) बेहद करीब आ गया है। देवशयनी एकादशी के पावन दिन से सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाएंगे। देवी-देवताओं के शयन काल में जाने की इस खबर के साथ ही आम जनमानस और श्रद्धालुओं के मन में एक बहुत बड़ा असमंजस और सवाल खड़ा हो गया है। लोग अक्सर सोचते हैं कि जब भगवान ही सो रहे हैं, तो क्या इस दौरान किए जाने वाले व्रत, दैनिक पूजा-पाठ और उपवास भी रोक दिए जाते हैं? यदि आप भी इसी कशमकश में हैं, तो शास्त्रों के सटीक नियम और विद्वानों की राय जानना आपके लिए बेहद जरूरी है ताकि अनजाने में आपसे कोई बड़ी भूल न हो जाए।मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, लेकिन साधना और भक्ति का खुलेगा महा-द्वारसबसे पहले इस भ्रम को दूर करना जरूरी है कि देवताओं के सोने का मतलब पूजा-पाठ का बंद होना बिल्कुल नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास के इन 4 महीनों (सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक) के दौरान केवल और केवल 'मांगलिक कार्यों' जैसे कि विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश और नई संपत्तियों की खरीदारी पर पूरी तरह से रोक (बैन) रहती है। इसके विपरीत, यह समय आध्यात्मिक उन्नति, आंतरिक शुद्धि, जप, तप और ध्यान के लिए पूरे साल में सबसे ज्यादा फलदायी माना गया है। इस दौरान किए गए शुभ कर्मों का फल आम दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।क्या चातुर्मास में व्रत और उपवास रख सकते हैं? जानिए शास्त्रों की आज्ञाव्रत और उपवास को लेकर शास्त्रों के नियम बेहद स्पष्ट और कड़े हैं। चातुर्मास के दौरान व्रत और उपवास रखने की न सिर्फ अनुमति है, बल्कि इसे सेहत और धर्म दोनों के लिहाज से अनिवार्य बताया गया है। इसी कालखंड के भीतर हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहार और व्रत जैसे कि सावन सोमवार, रक्षाबंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और शारदीय नवरात्रि आते हैं। इन सभी त्योहारों पर पूरे विधि-विधान से देवी-देवताओं की पूजा की जाती है और उपवास रखे जाते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इन चार महीनों में वर्षा ऋतु के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इसलिए उपवास रखना शरीर को निरोगी बनाए रखने का एक बेहतरीन जरिया है।देश के प्रसिद्ध मंदिरों से लेकर हर घर में भक्ति का माहौलजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ और प्रयागराज के त्रिवेणी संगम सहित देश भर के तमाम छोटे-बड़े मठ-मंदिरों में चातुर्मास को लेकर विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। स्थानीय पंडितों और कथावाचकों का कहना है कि इन चार महीनों में साधु-संत एक ही स्थान पर रुककर साधना करते हैं, जिसे 'चातुर्मास व्रत' कहा जाता है। आम गृहस्थों के लिए भी इन दिनों में सात्विक भोजन करना, भूमि पर शयन करना और तामसिक प्रवृत्तियों से दूर रहना आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। स्थानीय मंडली और समितियों द्वारा इस दौरान अखंड रामायण और भागवत कथा के पाठ आयोजित किए जाते हैं।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर छाया चातुर्मास का ये आध्यात्मिक विमर्शआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स के विश्लेषण के मुताबिक, 'Chaturmas Do's and Don'ts 2026' इस समय इंटरनेट और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर सबसे तेजी से सर्च किया जाने वाला धार्मिक विषय बन चुका है। गूगल और बिंग पर लोग लगातार 'चातुर्मास में क्या खाएं और क्या न खाएं' और 'देवशयनी एकादशी की सही तिथि' जैसे कीवर्ड्स खोज रहे हैं। एआई सर्च इंजन इस खबर को एक संपूर्ण लाइफस्टाइल और स्पिरिचुअल गाइड के रूप में प्रमोट कर रहे हैं। शास्त्रों का यह अमूल्य ज्ञान आज की भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहे युवाओं को मानसिक तनाव से मुक्ति पाने और खुद को रीसेट करने का एक बेहतरीन मौका देता है।
सनातन धर्म और भारतीय पौराणिक इतिहास के पन्नों में कई ऐसे अद्भुत और विस्मयकारी रहस्य छिपे हैं, जिन्हें जानकर आधुनिक विज्ञान और बुद्धिजीवी भी दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। एक ऐसा ही चमत्कारी और अलौकिक वाकया दुनिया के सबसे बड़े महाकाव्य 'महाभारत' के लेखन से जुड़ा हुआ है। जब महर्षि वेदव्यासजी ने इस विशाल ग्रंथ की रचना की, तो इसे लिपिबद्ध करने यानी लिखने का महा-कठिन कार्य ज्ञान और बुद्धि के देवता भगवान श्री गणेश (बप्पा) को सौंपा गया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस लेखन कार्य को पूरा करने के लिए बप्पा की कलम पूरे 3 साल तक बिना एक सेकंड के लिए रुके लगातार चलती रही थी? इस अटूट लेखन के पीछे महर्षि वेदव्यासजी की एक ऐसी 'चतुर शर्त' थी, जिसने खुद बुद्धि के सागर भगवान गणेश को भी सोच में डाल दिया था।जब लेखन के लिए व्यासजी के सामने गणेशजी ने रखी एक कठिन चुनौतीपौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्माजी के कहने पर महर्षि वेदव्यास महाभारत की रचना करने बैठे, तो उन्हें एक ऐसे लेखक की तलाश थी जो उनके विचारों और श्लोकों की तीव्र गति को बिना किसी त्रुटि के कागजों पर उतार सके। इसके लिए उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की। गणेशजी लेखन के लिए तैयार तो हो गए, लेकिन उन्होंने व्यासजी के सामने अपनी एक कड़क चुनौती रख दी। गणेशजी ने कहा, 'मैं लिखना तभी शुरू करूंगा जब मेरी कलम एक पल के लिए भी न रुके। अगर आप श्लोक बोलते हुए कहीं भी रुके, तो मैं लिखना वहीं छोड़ दूंगा।' व्यासजी जानते थे कि इतने विशाल ग्रंथ को बिना रुके लगातार बोलना लगभग असंभव है, लेकिन उन्होंने मुस्कुराते हुए बप्पा की यह शर्त स्वीकार कर ली।महर्षि वेदव्यासजी का पलटवार: वो चतुर शर्त जिसने बप्पा की रफ्तार पर लगाया 'ब्रेक'भगवान गणेश की इस कठिन चुनौती का सामना करने के लिए महर्षि वेदव्यासजी ने अपनी बुद्धि का परिचय देते हुए एक 'चतुर प्रति-शर्त' रख दी। व्यासजी ने कहा, 'प्रभु! मुझे आपकी शर्त मंजूर है, लेकिन मेरी भी एक शर्त है। आप जो भी श्लोक लिखेंगे, उसे बिना समझे और उसका पूरा अर्थ जाने बिना अपनी पुस्तक में दर्ज नहीं करेंगे।' भगवान गणेश ने भी इस शर्त को सहर्ष स्वीकार कर लिया। बस यहीं से महर्षि वेदव्यासजी का मास्टरस्ट्रोक शुरू हुआ। जब भी व्यासजी को थोड़ा आराम करना होता या नए श्लोकों की रचना करनी होती, वे एक ऐसा अत्यंत कठिन और गूढ़ अर्थ वाला कूट श्लोक बोल देते थे, जिसे समझने और उसका सही अर्थ निकालने में खुद बुद्धिमान गणेशजी को कुछ पलों के लिए सोचना पड़ता था। बप्पा जब तक उस श्लोक का अर्थ समझते, तब तक व्यासजी अगले कई श्लोक तैयार कर लेते थे।3 साल का अखंड तप और बप्पा के एकदंत होने का अमर इतिहासजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो उत्तराखंड के बद्रीनाथ के पास स्थित 'व्यासा गुफा' और 'गणेश गुफा' आज भी इस ऐतिहासिक और पवित्र घटना की गवाह हैं। स्थानीय मान्यताओं और तीर्थयात्रियों के अनुसार, इसी अत्यंत ठंडे और दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में यह अखंड लेखन कार्य पूरे तीन वर्षों तक चलता रहा। इस दौरान एक समय ऐसा भी आया जब लिखते-लिखते गणेशजी की कलम अचानक टूट गई। लेकिन अपनी शर्त के पक्के बप्पा ने लिखना बंद नहीं किया; उन्होंने तुरंत अपना एक दांत (तस्क) तोड़ लिया और उसे स्याही में डुबोकर लिखना जारी रखा, जिसके बाद से वे पूरी दुनिया में 'एकदंत' के नाम से पूजनीय हुए। 3 साल की इस निरंतर तपस्या के बाद महाभारत जैसा महान ग्रंथ मानव जाति को मिल सका।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर क्यों छाया बप्पा का ये डिजिटल विमर्शआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल मीडिया एनालिटिक्स के मुताबिक, 'Mahabharata Writing Hidden Secrets' और 'गणेशजी और वेदव्यास की कथा' जैसे विषय इंटरनेट और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर इस समय सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले सांस्कृतिक टॉपिक्स में शामिल हैं। गूगल और बिंग जैसे आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर दुनिया भर के लोग लगातार 'महाभारत लिखने में कितना समय लगा' और 'गणेशजी का दांत क्यों टूटा था' सर्च कर रहे हैं। एआई मॉडल्स के अनुसार, यह पौराणिक कहानी आज की जनरेशन के लिए एक महान लाइफ लेसन है, जो सिखाती है कि कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न हो, एकाग्रता, बुद्धि कौशल और प्रतिबद्धता के बल पर हर असंभव कार्य को संभव बनाया जा सकता है।
लड़कियां भूलकर भी ऐसे 5 लड़कों को न दें अपना दिल! चाणक्य नीति में छिपा है वो कड़वा सच
आधुनिक दौर के रिश्तों में प्यार, विश्वास और धोखा अक्सर एक साथ देखने को मिलते हैं। आज के समय में यह पहचान पाना बेहद मुश्किल हो गया है कि सामने वाला व्यक्ति आपसे सच्चा प्यार करता है या सिर्फ अपनी जरूरतों के लिए आपका इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे भ्रम के समय में भारत के महान कूटनीतिज्ञ और मार्गदर्शक आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही सटीक बैठती हैं जितनी सदियों पहले थीं। चाणक्य नीति में पुरुषों के कुछ ऐसे स्वभाव और लक्षणों का जिक्र किया गया है, जिन्हें जानकर महिलाएं किसी बड़े धोखे से बच सकती हैं। आचार्य चाणक्य ने साफ तौर पर सचेत किया है कि लड़कियों को भूलकर भी 5 खास तरह के लड़कों के साथ प्रेम संबंध या शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोग सिर्फ सामने वाले का यूज करना जानते हैं।मीठी छुरी चलाने वाले और अत्यधिक तारीफ करने वाले पुरुषआचार्य चाणक्य के अनुसार, जो पुरुष बात-बात पर बहुत ज्यादा मीठा बोलते हैं और बिना वजह अत्यधिक तारीफों के पुल बांधते हैं, उनसे हमेशा सावधान रहना चाहिए। ऐसे पुरुष अक्सर अपने मन में कपट छिपाए रखते हैं और सामने वाले का भरोसा जीतने के लिए मीठी बातों का जाल बुनते हैं। चाणक्य नीति कहती है कि सच्चा व्यक्ति हमेशा कड़वा सच बोलने से नहीं हिचकता, जबकि केवल स्वार्थ सिद्ध करने वाले लोग हर समय आपकी चापलूसी करेंगे। लड़कियां अक्सर ऐसी तारीफों के जाल में फंसकर अपना दिल दे बैठती हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि उनका सिर्फ इस्तेमाल किया गया है।स्वार्थी और हर बात में अपना फायदा खोजने वाले लड़केरिश्ते की बुनियाद आपसी समझ और त्याग पर टिकी होती है, लेकिन कुछ लड़के स्वभाव से अत्यधिक स्वार्थी होते हैं। चाणक्य नीति के मुताबिक, जो व्यक्ति हर छोटे-बड़े फैसले में सिर्फ अपना फायदा या आराम देखता है, वह कभी एक अच्छा जीवनसाथी नहीं बन सकता। ऐसे लड़के प्यार का नाटक सिर्फ तब तक करते हैं जब तक उन्हें आपसे कोई आर्थिक, मानसिक या शारीरिक लाभ मिल रहा हो। जैसे ही आपकी तरफ से उन्हें फायदा मिलना बंद होता है या आप किसी मुश्किल में होती हैं, ये अपना पल्ला झाड़कर दूर हो जाते हैं।चरित्रहीन और दूसरों की महिलाओं पर नजर रखने वालेआचार्य चाणक्य ने पुरुषों के चरित्र को परखने पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। उनका मानना है कि जो पुरुष अपनी पार्टनर के प्रति वफादार नहीं है और जिसकी नजरें हर समय दूसरी महिलाओं को तलाशती रहती हैं, वह कभी किसी एक का होकर नहीं रह सकता। ऐसे लड़कों के लिए भावनाएं और कसमें सिर्फ एक खेल होती हैं। वे अपनी चंचलता और हवस को छुपाने के लिए प्यार का मुखौटा पहनते हैं। ऐसी मानसिकता वाले पुरुषों के साथ रहने से महिलाओं को जीवन भर मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ता है।आलसी और जिम्मेदारी से भागने वाले पुरुष हैं सबसे खतरनाकजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो आज के समाज में एक आत्मनिर्भर और जिम्मेदार साथी की तलाश हर महिला को होती है। दिल्ली, लखनऊ, पटना जैसे शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और आलस के बीच चाणक्य की यह नीति बेहद प्रासंगिक है। चाणक्य कहते हैं कि जो पुरुष कर्महीन है, जिसमें आगे बढ़ने की कोई इच्छा नहीं है और जो अपनी जिम्मेदारियों का बोझ दूसरों पर डालता है, उसके साथ कभी सुरक्षित भविष्य नहीं बनाया जा सकता। ऐसे लड़के शादी या प्यार के बाद आर्थिक रूप से महिला पर निर्भर हो जाते हैं और अपनी नाकामियों का ठीकरा भी साथी पर ही फोड़ते हैं।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर क्यों ट्रेंड हो रही है चाणक्य नीतिआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल मीडिया के बदलते पैटर्न के मुताबिक, 'Relationship Warning Signs Chanakya Niti' इस समय इंटरनेट और आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर युवाओं द्वारा सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला विषय बन गया है। गूगल और बिंग पर लोग लगातार 'सच्चे पार्टनर की पहचान कैसे करें' और 'चाणक्य नीति फॉर विमेन' सर्च कर रहे हैं। एआई मॉडल्स इस खबर को एक बेहतरीन लाइफ लेसन और सेफ्टी गाइड के रूप में पेश कर रहे हैं। आचार्य चाणक्य का यह ज्ञान आज की जनरेशन के लिए एक आई-ओपनर की तरह काम कर रहा है, जो भावनाओं में बहकर गलत फैसले लेने से रोकता है।
सूर्य का कर्क राशि में गोचर, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का राशिफल
16 जुलाई 2026 को ग्रहों के राजा सूर्यदेव कर्क राशि में गोचर करने जा रहे हैं। कर्क जल तत्व की राशि है और इसके स्वामी चंद्रमा हैं, जो सूर्य के परम मित्र माने जाते हैं। वैसे तो इस राशि में सूर्यदेव थोड़े शांत पड़ जाते हैं, लेकिन खास बात यह है कि इस समय ...
Chaturmas 2026: वर्ष 2026 में चातुर्मास कब से कब तक रहेगा?
Chaturmas 2026 in Hindi: इस बार 25 जुलाई 2026, शनिवार से चातुर्मास का प्रारंभ होगा। मान्यता के अनुसार, इसी दिन से भगवान विष्णु अगले 4 महीनों के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। यहीं से 'चातुर्मास' की शुरुआत होती है, जिसके दौरान सभी तरह ...
भारतीय इतिहास के महान अर्थशास्त्री, नीतिशास्त्र और रणनीतिकार आचार्य चाणक्य ने अपनी प्रसिद्ध रचना 'चाणक्य नीति' में मानव जीवन, समाज, और वैवाहिक रिश्तों को लेकर कई गूढ़ बातें बताई हैं। चाणक्य नीति के अनुसार, एक सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन के पीछे जीवनसंगिनी के गुणों का बहुत बड़ा हाथ होता है। आचार्य चाणक्य का मानना है कि दुनिया में कुछ पुरुष बेहद भाग्यशाली होते हैं, जिन्हें ऐसी पत्नियां मिलती हैं जो अपने सद्गुणों से पूरे परिवार का भाग्य बदल देती हैं। ऐसी स्त्रियों के साथ रहने वाले पुरुषों को इसी धरती पर स्वर्ग जैसा सुख और मानसिक शांति का अनुभव होता है।शांत स्वभाव और मीठी वाणी है सबसे बड़ा आभूषणआचार्य चाणक्य के मुताबिक, जिस स्त्री की वाणी मधुर होती है और जो शांत स्वभाव की होती है, वह अपने पूरे परिवार को एक सूत्र में बांधकर रखती है। मीठी भाषा बोलने वाली पत्नी विकट से विकट परिस्थितियों में भी घर के माहौल को तनावमुक्त बनाए रखती है। चाणक्य नीति कहती है कि ऐसी स्त्री का पति हमेशा मानसिक चिंताओं से दूर रहता है और कार्यक्षेत्र में दोगुनी तेजी से तरक्की करता है। जिस घर में कलह नहीं होती, वहां सुख-समृद्धि का वास स्वतः ही होने लगता है।संतोषी प्रवृत्ति और विपरीत हालातों में ढलने की क्षमताएक आदर्श जीवनसंगिनी का दूसरा सबसे बड़ा गुण उसका संतोषी होना है। चाणक्य जी का मानना है कि जो महिला कम संसाधनों या कम आय में भी पूरे धैर्य के साथ खुश रहती है और अपने पति पर अनुचित दबाव नहीं बनाती, वह परिवार के लिए किसी ढाल से कम नहीं होती। धन के उतार-चढ़ाव वाले समय में जो पत्नी कदम से कदम मिलाकर पति का संबल बनती है, वह पुरुष को कभी हारने नहीं देती। ऐसी समझदार पत्नी के कारण ही पुरुष समाज में मान-सम्मान और बड़ी सफलताएं हासिल कर पाता है।धार्मिक आचरण और संस्कारों को सहेजने वाली स्त्रीचाणक्य नीति के अनुसार, जो स्त्री धार्मिक विचारों वाली होती है और अपने बड़ों का सम्मान व छोटों से स्नेह करती है, वह घर को संस्कारवान बनाती है। ऐसी पत्नी न केवल अपनी संतानों को अच्छे संस्कार देती है, बल्कि घर की मर्यादा और प्रतिष्ठा को भी कभी आंच नहीं आने देती। पवित्र आचरण और मर्यादित जीवन जीने वाली जीवनसंगिनी जिस पुरुष के जीवन में आती है, उसका भाग्य अपने आप ही चमक उठता है। यही कारण है कि चाणक्य ने ऐसे गुणों से युक्त पत्नी वाले घर को साक्षात स्वर्ग की उपमा दी है।
Deepak ki Bati ke Niyam: सनातन धर्म में पूजा के समय दीपक जलाने का विशेष महत्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपक बुझने के बाद बची हुई बाती का क्या करना चाहिए? शास्त्रों के अनुसार, इसे साधारण कूड़ा समझकर डस्टबिन में फेंकना देव दोष और पितृ दोष का कारण बन सकता है. जानिए बची हुई पवित्र बाती के विसर्जन के 3 सही और धार्मिक नियम.सनातन धर्म में सुबह और शाम के समय घर के मंदिर में दीपक जलाना अनिवार्य माना गया है. दीपक को प्रकाश, सकारात्मकता और साक्षात ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है. लेकिन अक्सर लोग दीपक के पूरा जलने के बाद बची हुई बाती को लेकर असमंजस में रहते हैं. कई लोग इसे साधारण कूड़ा समझकर डस्टबिन में फेंक देते हैं.अगर आप भी अनजाने में ऐसा कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए. शास्त्रों में पूजा से जुड़ी हर छोटी-से-छोटी वस्तु के विसर्जन के खास नियम बताए गए हैं. पवित्र बाती को सीधे कचरे में फेंकना न सिर्फ धार्मिक रूप से अनुचित है, बल्कि इससे घर में नकारात्मकता भी आ सकती है. आइए जानते हैं धर्म शास्त्रों के अनुसार बची हुई बाती का क्या करना चाहिए.बची हुई बाती को सीधे कचरे में क्यों न फेंकें? (Why Not to Throw in Trash)जब हम किसी बाती को घी या तेल में भिगोकर मंत्रों और शुद्ध भाव के साथ भगवान के सामने प्रज्वलित करते हैं, तो उसमें दिव्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. वह बाती सीधे भगवान को समर्पित हो चुकी होती है. ऐसी पवित्र वस्तु को डस्टबिन जैसी गंदगी वाली जगह पर फेंकने या पैरों में आने देने से देव दोष और पितृ दोष लग सकता है. इससे घर की बरकत रुक सकती है और परिवार में मानसिक तनाव बढ़ सकता है.शास्त्रों के अनुसार बची बाती के 3 जरूरी नियम (3 Rules for Leftover Wicks)यदि आपके घर में भी रोजाना पूजा के बाद बाती बच जाती है, तो उसे इधर-उधर फेंकने के बजाय इन तीन पवित्र तरीकों से विसर्जित करें:गमले की मिट्टी में दबाएं: बची हुई बातियों को एक जगह एकत्र कर लें और घर के किसी पवित्र पौधे, जैसे कि तुलसी या अन्य फूलों के गमले की मिट्टी में गहराई में दबा दें. समय के साथ यह प्राकृतिक रूप से मिट्टी में ही विलीन हो जाएगी. ध्यान रहे कि उस स्थान पर किसी का पैर न पड़े.पवित्र जलाशय में प्रवाहित करें: यदि आपके घर के आस-पास कोई पवित्र नदी, तालाब या जलाशय है, तो हफ्ते या महीने भर की एकत्रित की गई बातियों को सम्मानपूर्वक वहां जल में प्रवाहित कर दें.अग्नि देव को समर्पित करें: यदि आप घर में नियमित रूप से कपूर जलाते हैं या छोटा हवन करते हैं, तो इन बची हुई बातियों को उस पावन अग्नि में डाल दें. चूंकि यह पहले से ही पूजा का हिस्सा रही हैं, इसलिए अग्नि में इनका भस्म होना सबसे शुद्ध और उत्तम माना जाता है.अखंड ज्योति की बाती का विशेष नियम (Akhand Jyoti Wick Rules)रोजाना की पूजा के अलावा, यदि आपने नवरात्रि, दिवाली या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान में अखंड दीपक जलाया था, तो उसकी बची हुई बाती के नियम और भी कड़े होते हैं. इस महा-बाती को कभी भी घर में लापरवाही से नहीं छोड़ना चाहिए. अनुष्ठान पूरी तरह समाप्त होने के बाद, इस पवित्र बाती को किसी बहती हुई साफ नदी या पवित्र जलाशय में विसर्जित करना ही सबसे श्रेष्ठ माना गया है.डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं. किसी भी विशेष उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें.
शनिवार, 11 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है. यह दिन न्याय के देवता और कर्मफल दाता भगवान शनिदेव जी को समर्पित होता है. इस बार शनिवार का दिन बेहद खास होने जा रहा है. ज्योतिषीय गणना और ग्रहों के गोचर के अनुसार, कल आकाश मंडल में ग्रहों की एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ स्थिति बनने जा रही है, जिससे 'भद्र राजयोग' का निर्माण हो रहा है.इस महा-राजयोग के प्रभाव से कल का दिन कुछ खास राशियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं रहने वाला है, तो वहीं कुछ राशियों को विशेष सावधानी बरतनी होगी. आइए जानते हैं देश के प्रसिद्ध ज्योतिषियों के अनुसार कल सभी 12 राशियों का विस्तृत और सटीक भविष्यफल.इन 3 भाग्यशाली राशियों की चमकेगी किस्मत (Lucky Zodiac Signs)वृषभ राशि (Taurus)भद्र राजयोग के प्रभाव से कल आपके भाग्य के सितारे बुलंदियों पर रहने वाले हैं. यदि लंबे समय से आपके कोई व्यापारिक सौदे अटके हुए थे, तो कल वे फाइनल हो सकते हैं, जिससे आपको बड़ा मुनाफा होगा. नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रमोशन की बात आगे बढ़ेगी.मिथुन राशि (Gemini)कल का दिन आपके लिए आर्थिक रूप से बेहद शानदार और फलदायी रहने वाला है. भद्र राजयोग आपकी राशि में धन आगमन के नए स्रोत खोलेगा. पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई पुराना कानूनी विवाद कल आपके पक्ष में हल हो सकता है.कन्या राशि (Virgo)कल भद्र राजयोग की महा-कृपा सीधे आपकी राशि पर बरसने वाली है. आपकी बौद्धिक क्षमता और सही समय पर लिए गए सटीक निर्णयों से व्यापार में कोई बड़ी सफलता हाथ लगेगी. नौकरीपेशा लोगों को नया और बेहतर जॉब ऑफर मिल सकता है.इन राशियों को रहना होगा बेहद सावधान (Alert Zodiac Signs)तुला राशि (Libra)शनिवार का दिन होने के कारण कल आपको अपनी सेहत और कीमती सामान के प्रति विशेष सावधानी बरतनी होगी. यात्रा करते समय जेबकतरों और दुर्घटनाओं से बेहद सतर्क रहें. पैसों के लेन-देन में जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है.मकर राशि (Capricorn)शनि की स्थिति के कारण कल आपको अपनी वाणी और गुस्से पर कड़ा नियंत्रण रखना होगा. ऑफिस में किसी सहयोगी के साथ तीखी बहस होने की आशंका है, जिससे आपकी इमेज को नुकसान पहुंच सकता है. शांत रहकर दिन बिताना ही समझदारी होगी.मीन राशि (Pisces)कल आपको सेहत के मामले में जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है. बाहर के खान-पान से पूरी तरह परहेज करें. इसके अलावा जीवनसाथी की सेहत को लेकर भी कल आपकी चिंताएं थोड़ी बढ़ सकती हैं, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह अवश्य लें.अन्य राशियों का कैसा रहेगा हाल? (Daily Horoscope)मेष राशि (Aries)कल का दिन आपके लिए मिलाजुला रहेगा. कार्यस्थल पर काम का बोझ अचानक बढ़ सकता है, जिससे मानसिक तनाव महसूस होगा. आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें और बिना सोचे-समझे किसी बड़े प्रोजेक्ट में हाथ न डालें.कर्क राशि (Cancer)कल आपको पारिवारिक मामलों में थोड़ा संयम से काम लेना होगा. जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद होने की आशंका है. व्यापार में नया निवेश करने के लिए अभी समय सही नहीं है, थोड़ा इंतजार करना बेहतर रहेगा.सिंह राशि (Leo)कल कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत होगी. सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों का आपको पूरा सहयोग मिलेगा. सामाजिक और धार्मिक कार्यों में हिस्सा लेने से समाज में आपकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में वृद्धि होगी.वृश्चिक राशि (Scorpio)कल का दिन आपके लिए नई ऊर्जा लेकर आएगा. पुराने कर्जों से मुक्ति मिलने के रास्ते खुलेंगे. अगर आप नया वाहन या मकान खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो कल का दिन कागजी कार्रवाई शुरू करने के लिए उत्तम है.धनु राशि (Sagittarius)कल आपको अपनी कड़ी मेहनत का मनमुताबिक फल मिलेगा. छात्रों के लिए दिन अनुकूल है, पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ेगी. कोर्ट-कचहरी के मामलों में कल आपको कोई बड़ी राहत या शुभ समाचार मिल सकता है.कुंभ राशि (Aquarius)कल आपका मन शांत और आध्यात्मिक कार्यों में अधिक लगेगा. किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने से आपको आत्मिक शांति मिलेगी. व्यापारिक दृष्टिकोण से दिन सामान्य रहेगा, बड़े निवेश से बचें.डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं. किसी भी उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें.
सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने, यात्रा पर निकलने या धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले दैनिक पंचांग (Daily Panchang) देखना बेहद महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है। पंचांग के माध्यम से हमें दिन के सभी शुभ-अशुभ समय और ग्रहों की स्थिति की सटीक जानकारी मिलती है।दैनिक पंचांग के अनुसार, आज 11 जुलाई 2026, दिन शनिवार है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक आज आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत खास है, क्योंकि आज 'योगिनी एकादशी' (Yogini Ekadashi) व्रत का पारण (Vrat Parana) किया जा रहा है। साथ ही आज 'कृष्ण रामलक्ष्मण द्वादशी' भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज का दिन बेहद मंगलकारी रहने वाला है क्योंकि आज एक या दो नहीं, बल्कि एक साथ तीन सबसे शुभ योगों का महासंयोग बन रहा है। आज त्रिपुष्कर योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिसमें किए गए कार्य निश्चित ही सफलता प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं आज 11 जुलाई 2026 के सूर्योदय-सूर्यास्त के समय सहित दिनभर के सभी शुभ और अशुभ मुहूर्त की पूरी विस्तृत रिपोर्ट।आज का पंचांग विवरण (Panchang Details: 11 July 2026)तिथि (Tithi): द्वादशी – 12 जुलाई को सुबह 02:04 AM तक (इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ)पक्ष (Paksha): कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha)वार (War): शनिवार (Saturday)नक्षत्र (Nakshatra): कृत्तिका नक्षत्र – सुबह 11:03 AM तक (इसके बाद रोहिणी नक्षत्र)योग (Yoga): गण्ड योग – 12 जुलाई को सुबह 12:05 AM तककरण (Karana): कौलव – दोपहर 03:45 PM तक, इसके बाद तैतिल करण – 12 जुलाई को सुबह 02:04 AM तकसूर्य और चंद्र गणना (Sun & Moon Timings)सूर्योदय का समय (Sunrise): 05:31 AMसूर्यास्त का समय (Sunset): 07:22 PMचंद्रोदय का समय (Moonrise): 12 जुलाई को सुबह 02:49 AMचंद्रास्त का समय (Moonset): दोपहर 04:21 PMहिंदू लूनर दिनांक व सम्वत (Hindu Calendar Samvat)शक सम्वत (Shaka Samvat): 1948 विश्वावसुविक्रम सम्वत (Vikram Samvat): 2083 कालयुक्तगुजराती सम्वत (Gujarati Samvat): 2082 पिङ्गलचन्द्रमास (Amanta/Purnimanta): आषाढ़ (पूर्णिमान्त) / ज्येष्ठ (अमान्त)आज का शुभ मुहूर्त (Aaj Ka Shubh Muhurat)आज के दिन त्रिपुष्कर, सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त भी उपलब्ध हैं, जो इस प्रकार हैं:अभिजित मुहूर्त (Abhijit Muhurat): दोपहर 11:59 AM से दोपहर 12:54 PM तक (किसी भी नए कार्य को शुरू करने के लिए सर्वश्रेष्ठ समय)अमृत काल (Amrit Kaal): सुबह 08:52 AM से सुबह 10:19 AM तकविजय मुहूर्त (Vijay Muhurat): दोपहर 02:45 PM से दोपहर 03:40 PM तकगोधूलि मुहूर्त (Godhuli Muhurat): शाम 07:21 PM से शाम 07:41 PM तकब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat): सुबह 04:10 AM से सुबह 04:51 AM तकनिशिता मुहूर्त (Nishita Muhurat): 12 जुलाई की मध्यरात्रि 12:06 AM से 12:47 AM तकआज का अशुभ मुहूर्त और राहुकाल (Aaj Ka Ashubh Muhurat)शास्त्रों के अनुसार अशुभ समय या राहुकाल के दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य, मुंडन, गृह प्रवेश या नए व्यापार की शुरुआत करने से बचना चाहिए:राहुकाल (Rahukaal): सुबह 10:42 AM से दोपहर 12:26 PM तक (इस समय शुभ कार्यों को पूरी तरह टालें)यमगण्ड (Yamaganda): सुबह 08:59 AM से सुबह 10:43 AM तकगुलिक काल (Gulik Kaal): सुबह 05:31 AM से सुबह 07:15 AM तकदुर्मुहूर्त (Durmuhurirat): सुबह 06:26 AM से सुबह 07:22 AM तक, और दोबारा सुबह 08:17 AM से सुबह 09:12 AM तकशनिवार विशेष उपाय: आज शनिवार का दिन है और साथ ही तीन अत्यंत शुभ योग बने हुए हैं। ऐसे में राहुकाल को छोड़कर शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने और शनि चालीसा का पाठ करने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और कुंडली के साढ़ेसाती व ढैय्या के दोष दूर होते हैं।डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई पंचांग और पौराणिक जानकारियां पारंपरिक सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी भी विशेष पूजा, मुहूर्त या ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के योग्य ज्योतिषी या पंचांग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
शनि की उल्टी चाल: 138 दिनों तक मीन राशि में वक्री रहेंगे शनिदेव, जानें अपनी राशि का हाल
shani ki vakri chaal: न्याय के देवता शनि ग्रह वर्तमान में बृहस्पति की राशि मीन में विराजमान हैं, जहाँ वे 3 जून 2027 तक रहेंगे। इस बीच 27 जुलाई 2026 की रात से 11 दिसंबर 2026 की सुबह तक शनिदेव पूरे 138 दिनों के लिए वक्री (उल्टी चाल) होने जा रहे हैं। ...
मंगल का चंद्रमा के नक्षत्र में प्रवेश, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, मंगलदेव बरसाएंगे कृपा
5 जुलाई 2026 को साहस, ऊर्जा और पराक्रम के कारक वृषभ राशि में गोचर कर रहे मंगल ग्रह ने रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया है, और वह 24 जुलाई 2026 तक इसी स्थिति में रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं। चंद्रमा के साथ मंगल का संयोग शुभ माना गया ...
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) आज पूरे देश में बेहद श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। सनातन शास्त्रों में योगिनी एकादशी के व्रत को समस्त पापों का नाश करने वाला और अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन तिथि पर जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और अटूट बरकत आती है। शास्त्रों में तो यहाँ तक कहा गया है कि इस एक एकादशी का व्रत रखने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।इस पावन अवसर पर ज्योतिष और वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में 'दीपदान' का एक विशेष और चमत्कारी महत्व बताया गया है। यदि आप भी अपने घर में सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और धन-धान्य का भंडार बनाए रखना चाहते हैं, तो आज की शाम (प्रदोष काल) में घर की पांच विशेष जगहों पर दीपक जलाना बिल्कुल न भूलें।घर के इन 5 पवित्र स्थानों पर आज जरूर करें दीपदान1. तुलसी का पौधा (सौभाग्य और सुख-शांति के लिए)हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को साक्षात माता लक्ष्मी का ही रूप माना गया है। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यधिक प्रिय हैं। योगिनी एकादशी की शाम को तुलसी के पौधे के पास गाय के शुद्ध घी का एक दीपक जरूर जलाएं। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, गृह क्लेश दूर होते हैं और घर का सौभाग्य बढ़ता है।2. घर का मुख्य द्वार (नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने के लिए)घर का मुख्य प्रवेश द्वार (Main Gate) वह स्थान है जहाँ से सकारात्मक ऊर्जा और देवी-देवताओं का आगमन होता है। आज की शाम मुख्य द्वार के दाईं ओर घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इससे घर के भीतर किसी भी प्रकार की नकारात्मक या बुरी ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और परिवार के सदस्यों की उन्नति होती है।3. घर का पूजा मंदिर (अखंड आशीर्वाद के लिए)आज एकादशी के दिन अपने घर के मंदिर या पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति के सम्मुख एक अखंड ज्योति या शुद्ध घी का दीपक जलाएं। दीपक की लौ की दिशा उत्तर या पूर्व की तरफ होनी चाहिए। इससे देवी-देवता अत्यंत प्रसन्न होते हैं और घर का आध्यात्मिक माहौल शांत व ऊर्जावान बना रहता है।4. पीपल का पेड़ (शनि और पितृ दोष से मुक्ति के लिए)शास्त्रों के अनुसार, पीपल के वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है, विशेषकर एकादशी के दिन भगवान विष्णु पीपल में निवास करते हैं। आज शाम को किसी नजदीकी पीपल के पेड़ के पास जाकर सरसों के तेल या घी का दीपक जलाने से कुंडली के शनि दोष, साढ़ेसाती और पितृ दोष जैसी भारी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, जिससे आपके लंबे समय से रुके हुए कार्य अपने आप बनने लगते हैं।5. रसोई घर या किचन (धन-धान्य की प्रचुरता के लिए)वास्तु में रसोई घर को पूरे घर का सबसे पावन और ऊर्जा से भरपूर स्थान माना गया है, क्योंकि यहाँ माता अन्नपूर्णा का वास होता है। योगिनी एकादशी के दिन रसोई घर में (विशेषकर पीने के पानी के स्थान के पास) एक दीपक जरूर जलाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा और लक्ष्मी जी की कृपा से घर में कभी भी अन्न, धन और धान्य की कमी नहीं होती।दीपदान करते समय इन 2 बातों का रखें विशेष ध्यानशुद्धता का महत्व: दीपक जलाने के लिए हमेशा शुद्ध गाय के घी या साफ सरसों के तेल का ही उपयोग करें। खंडित (टूटे हुए) दीपक का इस्तेमाल भूलकर भी न करें।शांत और एकाग्र मन: दीपक प्रज्वलित करते समय अपने मन को पूरी तरह शांत और शुद्ध रखें। पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करते हुए श्री हरि का ध्यान करें।महा मुहूर्त और समय (Quick Info)आज 10 जुलाई को पूजा और दीपदान के लिए चौघड़िया मुहूर्त सुबह से ही बेहद अनुकूल बना हुआ है। शाम के समय सूर्यास्त के बाद का समय (प्रदोष काल) दीपदान के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा 'सूर्य' और न्याय के देवता 'शनि' के बीच शत्रुता का भाव माना जाता है। लेकिन जब भी सूर्य देव अपने पुत्र और शत्रु शनि के नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो ब्रह्मांड में एक विशेष ऊर्जा का संचार होता है। साल 2026 के जुलाई ...
शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन: इन 5 राशियों को मिल सकता है अचानक धन लाभ और करियर में तरक्की
16 जुलाई को शुक्र देव मघा नक्षत्र से निकलकर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र में वे 29 जुलाई तक विराजमान रहेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को शुक्र उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में गोचर कर जाएंगे, जहां वे 11 अगस्त तक स्थिति रहेंगे। 16 जुलाई ...
Yogini Ekadashi: योगिनी एकादशी कथा का आध्यात्मिक संदेश जानें
Yogini Ekadashi Vrat Katha Sandesh: योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक संदेश यही है कि इंसान से चाहे कितनी भी बड़ी भूल क्यों न हो गई हो, अगर वह सत्य का मार्ग अपना ले, अपनी गलतियों का अहसास कर ले और संयम व भक्ति/ व्रत का संकल्प ले, तो वह अपने जीवन के सबसे ...
सावन 2026 कब से शुरू होगा? जानें कब खत्म होगा और कितने श्रावण सोमवार पड़ेंगे
वर्ष 2026 में सावन (श्रावण) का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) तक रहेगा। इस वर्ष सावन के महीने में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं। चूंकि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में दो तरह के कैलेंडर (पूर्णिमान्त और अमान्त) ...
सावधान! कहीं आपके पूजा घर में तो नहीं रखी हैं ये चीजें? आज ही कर दें बाहर, वरना हो सकती है भारी भूल
घर का पूजा घर सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, जहाँ से हमें सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। लेकिन अक्सर अनजाने में हम पूजा स्थल पर ऐसी चीजें रख देते हैं, जो वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार नकारात्मकता का कारण बनती हैं। क्या आपके मंदिर में माचिस की जली हुई तीलियां, नुकीली वस्तुएं या एक से अधिक शंख रखे हैं? अगर हाँ, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा घर में इन चीजों का होना देवी-देवताओं की कृपा को बाधित कर सकता है और सुख-समृद्धि में बाधा डाल सकता है।क्यों अशुभ मानी जाती हैं ये चीजें?वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा घर में माचिस की जली हुई तीलियां रखना सबसे बड़ा दोष माना जाता है। जली हुई तीली नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है और यह पूजा की शुचिता को भंग करती है। इसी तरह, मंदिर में चाकू, कैंची या कोई भी नुकीली वस्तु रखना घर में कलह और मानसिक अशांति का कारक बनता है। वहीं, शंख को 'समुद्र मंथन' से प्राप्त रत्न माना गया है और इसे भगवान विष्णु का स्वरूप कहा जाता है। शास्त्र कहते हैं कि पूजा घर में केवल एक ही शंख रखना चाहिए; एक से अधिक शंख रखने से ऊर्जा का टकराव होता है और शुभ फलों की प्राप्ति में कमी आती है।कैसे रखें पूजा घर को ऊर्जावान?अपने पूजा घर को केवल ईश्वर की आराधना के लिए समर्पित रखें, न कि उसे स्टोर रूम की तरह उपयोग करें। मंदिर में केवल वही वस्तुएं होनी चाहिए जो पूजा के लिए अनिवार्य हैं, जैसे धूप-दीप, पवित्र जल, ताजे फूल और शुद्ध घी। जली हुई माचिस की तीलियों को तुरंत कचरे के डिब्बे में डाल देना चाहिए। यदि आपके मंदिर में अनावश्यक सामग्री जमा हो गई है, तो आज ही उसकी सफाई करें और गंगाजल छिड़क कर मंदिर को शुद्ध करें। एक साफ-सुथरा और व्यवस्थित मंदिर ही घर में सकारात्मकता और शांति का संचार करता है।मंदिर से जुड़ी ये छोटी-छोटी बातें बदल देंगी किस्मतपूजा घर को हमेशा घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में ही होना चाहिए। इसके अलावा, खंडित मूर्तियां, पुराने फूल या सूखे हार भी मंदिर में नहीं छोड़ने चाहिए। यदि आपने मंदिर में एक से अधिक शंख रखे हैं, तो किसी मंदिर में दान कर दें या उसे घर के किसी अन्य पवित्र स्थान पर रखें, लेकिन पूजा के मुख्य स्थल पर नहीं। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से न केवल आपके घर का वास्तु दोष दूर होगा, बल्कि पूजा का पूर्ण फल भी प्राप्त होगा। सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए आज ही अपने पूजा घर की जांच करें और इन चीजों को हटाकर सकारात्मकता का स्वागत करें।
महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
पवित्र सावन का महीना शुरू हो चुका है और चारों ओर 'बम-बम भोले' के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शिवलिंग पर हमेशा 'तीन पत्तियों वाला' बेलपत्र ही क्यों अर्पित किया जाता है? शिव पुराण के अनुसार, यह कोई साधारण पत्ती नहीं बल्कि साक्षात शिव स्वरूप है। सावन के इस पावन अवसर पर आइए जानते हैं कि इस तीन पत्तियों के मेल का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है।तीन पत्तियों के पीछे का दिव्य अर्थशिव पुराण में वर्णित है कि बेलपत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के त्रिशूल का प्रतीक मानी जाती हैं। इसके अलावा, ये तीन पत्तियां त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करती हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से, ये तीन पत्तियां सत्व, रज और तम—तीनों गुणों को दर्शाती हैं, जो समस्त ब्रह्मांड का आधार हैं। शिवलिंग पर इसे चढ़ाते समय चिकना हिस्सा नीचे की ओर होना चाहिए, ताकि बेलपत्र की ऊर्जा सीधे भगवान शिव के चरणों में प्रवाहित हो सके। एक ही डंठल से जुड़ी ये तीन पत्तियां इस बात का प्रतीक हैं कि शिव ही संसार की एकता और शक्ति का केंद्र हैं।क्या कहता है शिव पुराण का नियम?शिव पुराण के अनुसार, बेलपत्र को भगवान शिव को अर्पित करने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बेलपत्र में छेद नहीं होना चाहिए और न ही यह कटा-फटा होना चाहिए। मान्यता है कि अखंडित बेलपत्र ही शिव को प्रिय है। इसे चढ़ाते समय अनामिका, मध्यमा और अंगूठे का उपयोग करना चाहिए। यदि आपको नया बेलपत्र न मिल पाए, तो पुराने बेलपत्र को गंगाजल या स्वच्छ जल से धोकर दोबारा भी चढ़ाया जा सकता है, क्योंकि बेलपत्र कभी बासी नहीं होता। शिवलिंग पर इसे समर्पित करना मानसिक शांति और सुख-समृद्धि का द्वार खोलता है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सावन का महत्वसावन के महीने में मौसम में बदलाव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिक रूप से बेलपत्र की पत्तियों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। पुराने समय से ही शिव मंदिरों में बेलपत्र का चढ़ाना और उसका प्रसाद के रूप में ग्रहण करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है। सावन 2026 के इस दौरान, शिव भक्तों के लिए बेलपत्र का महत्व केवल आस्था ही नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़ने का एक माध्यम भी है। तो इस बार शिव पूजा करते समय इन नियमों का पालन करें और महादेव की असीम कृपा प्राप्त करें।
Kalashtami 2026: कालाष्टमी का क्या है महत्व?
Kalashtami Significance: कालाष्टमी हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र तिथि है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, भगवान कालभैरव को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है, जिसमें मार्गशीर्ष (अघहन) महीने की ...
जब बुध चलेंगे उल्टी चाल: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, बरसेगा धन
Budh ki vakri chaal 2026: ब्रह्मांड के 'मैनेजर' और बुद्धि-संवाद के कारक बुध देव 7 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक अपनी ही राशि मिथुन में रहने वाले हैं। ट्विस्ट ये है कि 24 जुलाई तक बुध वक्री (उल्टी चाल) रहेंगे और 25 जुलाई तक अस्त भी। जब ग्रहों के राजकुमार ...
सनातन धर्म में गरुड़ पुराण को एक बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथ माना गया है, जिसमें जीवन, मृत्यु और उसके बाद की स्थितियों का बहुत गहराई से वर्णन मिलता है. आमतौर पर माना जाता है कि जब किसी इंसान का आखिरी समय आता है, तो यमराज के दूत यानी यमदूत उसकी आत्मा को लेने आते हैं. पापी लोगों के लिए यमदूतों का रूप बहुत भयानक और डरावना होता है, लेकिन इसी पुराण में कुछ बेहद गुप्त नियमों का भी जिक्र है. शास्त्रों के अनुसार, 3 तरह के भाग्यशाली लोग ऐसे होते हैं जिनके पास आने की हिम्मत खुद यमदूत भी नहीं कर पाते. आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के अनुसार कौन से हैं वे खास लोग.1. प्रभु भक्ति में लीन रहने वाले सच्चे भक्तइस सूची में सबसे पहला स्थान उन लोगों का है जो अपना पूरा जीवन ईश्वर की आराधना और सिमरन में समर्पित कर देते हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति हर समय भगवान के नाम का जाप करता है, उसका अंत समय बेहद शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण होता है. ऐसे सात्विक लोगों के मन में मौत का कोई खौफ नहीं होता. जब उनकी अंतिम सांसें चल रही होती हैं, तो यमदूत उनके आसपास भी नहीं फटकते. प्रभु का नाम जपने वाले इन पुण्यात्माओं को लेने के लिए सीधे वैकुंठ धाम से भगवान विष्णु के अत्यंत सुंदर और शांत रूप वाले दिव्य पार्षद आते हैं और उन्हें आदरपूर्वक अपने विमान में ले जाते हैं.2. निस्वार्थ भाव से परोपकार और सेवा करने वालेदूसरा नियम उन लोगों पर लागू होता है जो हमेशा बेसहारा लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। शास्त्रों में भूखों को अन्न देना, बीमारों की सेवा करना और दूसरों के आंसू पोंछना सबसे बड़ा धर्म बताया गया है. जो इंसान बिना किसी स्वार्थ या लालच के समाज की भलाई में लगा रहता है, उसके खाते में अपार पुण्य जमा हो जाते हैं. यमराज के दूतों को केवल उन लोगों को बलपूर्वक ले जाने का अधिकार है जिन्होंने जीवन भर दूसरों को सताया हो. दूसरों का भला करने वाले परोपकारी लोगों का स्वागत करने के लिए खुद स्वर्ग के देवता आते हैं.3. सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले इंसानतीसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं जो जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां आ जाएं, कभी भी झूठ, फरेब और बेईमानी का रास्ता नहीं चुनते. गरुड़ पुराण कहता है कि सत्य बोलना और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाना भी एक कठिन तपस्या है. जो लोग अपने माता-पिता की सेवा करते हैं, किसी का दिल नहीं दुखाते और मर्यादा में रहते हैं, उन्हें यमराज का भय कभी नहीं सताता. यमदूत ऐसे साफ दिल वाले इंसानों को दूर से ही प्रणाम करते हैं. प्राण त्यागते समय इन्हें रत्ती भर भी कष्ट नहीं होता और इनकी आत्मा को सीधे मोक्ष या उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है.अच्छे कर्मों का मिलता है यह दिव्य फलगरुड़ पुराण की ये बातें हमें यह सिखाती हैं कि मृत्यु से डरने के बजाय हमें अपने वर्तमान के कर्मों को सुधारना चाहिए. जो इंसान लालच, नफरत और धोखेबाजी से दूर रहता है, उसका अंत समय अपने आप सुधर जाता है।. अगर हमारा मन साफ है और हम धर्म के मार्ग पर हैं, तो यमदूतों की यातनाएं नहीं बल्कि ईश्वर की परम शरण मिलती है.
सूर्य का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें 5 आसान उपाय
6 जुलाई 2026 को सूर्य देव आर्द्रा नक्षत्र की अपनी यात्रा पूरी करके बृहस्पति ग्रह के पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। सूर्य का गुरु के नक्षत्र में आने का अर्थ है कि पद और सम्मान के साथ ही पुनः धनवान या समृद्ध होने का मार्ग खुलेगा। इस ...
राहुकाल का सच: क्या यह सिर्फ अंधविश्वास है या इसके पीछे है वैज्ञानिक और ज्योतिषीय आधार?
भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में 'राहुकाल' एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही लोग सहम जाते हैं। नया व्यापार शुरू करना हो, गृह प्रवेश हो, या गाड़ी खरीदनी हो- अक्सर लोग राहुकाल की घड़ी को टाल देते हैं। लेकिन क्या इसके पीछे वाकई कोई वैज्ञानिक या खगोलीय आधार ...
वास्तु टिप्स: बाथरूम में शीशे की सही दिशा बदल सकती है आपकी किस्मत
वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु की दिशा का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अक्सर लोग घर के मुख्य कमरों की सजावट और वास्तु का ध्यान तो रखते हैं, लेकिन बाथरूम जैसी महत्वपूर्ण जगह को अनदेखा कर देते हैं। वास्तु जानकारों का मानना है कि बाथरूम में शीशा लगाने की गलत दिशा न केवल आपके घर की सुख-समृद्धि में बाधा डालती है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण भी बनती है। बाथरूम में शीशा लगाते समय यदि कुछ छोटे लेकिन महत्वपूर्ण नियमों का पालन किया जाए, तो नकारात्मक ऊर्जा को काफी हद तक कम किया जा सकता है।बाथरूम में शीशा लगाने की सही दिशाबाथरूम में नकारात्मक ऊर्जा का वास सबसे अधिक होता है, इसलिए यहां शीशा लगाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, बाथरूम का शीशा हमेशा उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की दीवार पर लगाना शुभ होता है। ये दोनों दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत मानी जाती हैं, जो सुबह उठकर शीशा देखने पर आपके भीतर ऊर्जा का संचार करती हैं। गलत दिशा में लगा शीशा घर की शांति और परिवार की सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।इन चीजों का शीशे में दिखना है अशुभबाथरूम में शीशा लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमें कमोड (Toilet Seat) की परछाईं बिल्कुल न दिखे। वास्तु के मुताबिक, कमोड में नकारात्मक ऊर्जा होती है। यदि शीशे में कमोड दिखाई देता है, तो वह उस नकारात्मक ऊर्जा को परावर्तित (Reflect) करके पूरे घर में फैलाता है। यदि संभव हो, तो कमोड को हमेशा उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थापित करना चाहिए। कमोड का शीशे में दिखना ऊर्जा के संतुलन को बिगाड़ देता है और घर में क्लेश व धन हानि का कारण बन सकता है।शीशे का आकार भी है महत्वपूर्णआजकल बाजार में गोल, अंडाकार (Oval) और अनोखे डिजाइन वाले शीशों का फैशन है, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम के लिए आयताकार (Rectangular) या चौकोर (Square) शीशा ही सबसे उपयुक्त होता है। गोल या अंडाकार शीशों में कोण (Corners) नहीं होते, जिससे सकारात्मक ऊर्जा स्थिर नहीं रह पाती। वहीं, आयताकार या चौकोर शीशे वास्तु के अनुकूल होते हैं और बाथरूम की ऊर्जा को एक दायरे में रखते हैं। इसलिए, शीशा खरीदते समय डिजाइन से ज्यादा उसके आकार और कोणों पर ध्यान देना चाहिए। इन सरल नियमों को अपनाकर आप अपने बाथरूम की नकारात्मकता को घर से बाहर रख सकते हैं।
कब है शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी का पर्व?
Hindu Festival July 2026: धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतला माता की पूजा से घर में सुख-शांति, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि का वास होता है। इस दिन स्वच्छता, सात्विकता और सेवा का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा कर माता से परिवार की ...
Horoscope Today 2 July 2026: शनि की चाल और 2 अशुभ योगों का महासंयोग, जानें अपनी राशि का हाल
ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से आज यानी 2 जुलाई 2026 का दिन बेहद हलचल भरा और महत्वपूर्ण रहने वाला है. द्रिक पंचांग के अनुसार, सौरमंडल में सबसे धीमी गति से चलने वाले न्याय के देवता शनि देव आज सुबह 08:22 बजे रेवती नक्षत्र के पहले चरण से निकलकर दूसरे चरण में प्रवेश कर चुके हैं. इसके साथ ही ग्रहों के राजा चंद्रमा भी दोपहर 01:31 बजे वृश्चिक राशि का सफर पूरा कर मकर राशि में गोचर करेंगे.ग्रहों के इस बड़े फेरबदल के बीच आज आकाश मंडल में 'वैधृति योग' और 'विषकुम्भ योग' नाम के दो बेहद अशुभ योग बन रहे हैं. ज्योतिषियों के मुताबिक, इन अशुभ योगों के प्रभाव के कारण आज के दिन किसी भी तरह के नए या मांगलिक कार्यों को करने से बचना चाहिए. आइए जानते हैं कि शनि की बदली चाल और इन अशुभ योगों के बीच मेष से लेकर मीन राशि तक के लोगों का भाग्य आज कैसा रहेगा.मेष राशि (Aries)आज आप अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर किसी बड़े और जरूरी काम को समय पर पूरा कर लेंगे. हालांकि, अपने गुप्त शत्रुओं और विरोधियों की हरकतों को हल्के में न लें; उन पर नज़र रखना ज़रूरी है। मीडिया और कंप्यूटर क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों को आज बंपर मुनाफा हो सकता है. शाम का समय परिवार के साथ बीतेगा, जिससे रिश्तों में मिठास आएगी. सेहत के लिहाज से आज एलर्जी और खांसी-जुकाम आपको परेशान कर सकते हैं।अचूक उपाय: आज किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जरूरी दवाइयों का दान करें.वृष राशि (Taurus)वृष राशि के युवाओं के भीतर आज कुछ नया और बेहतर सीखने का जज्बा रहेगा, जो भविष्य में काम आएगा. आज आपको नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूरी बनाकर रखनी होगी, नहीं तो वे आपके काम बिगाड़ सकते हैं. प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े लोग सरकारी कागजी काम में पूरी सावधानी बरतें. घर-परिवार में आपसी प्यार और तालमेल शानदार रहेगा. महिलाओं को आज अपनी सेहत को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।.अचूक उपाय: मां भगवती की पूजा-अर्चना करें और मंदिर के बाहर गरीबों में खीर का प्रसाद बांटें.मिथुन राशि (Gemini)अगर आपका पैसा कहीं लंबे समय से फंसा या रुका हुआ है, तो आज उसकी वसूली के लिए प्रयास तेज कर दें, सफलता मिल सकती है. पुरानी बीती बातों को दिल से लगाकर बैठने के बजाय आगे बढ़ने में ही समझदारी है. मार्केटिंग से जुड़े लोगों के हाथ आज कोई बड़ा ऑर्डर या शुभ अवसर मिल सकता है. लव पार्टनर के साथ मुलाकात के खूबसूरत मौके मिलेंगे. डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित जांच करवाते रहें.अचूक उपाय: जरूरतमंद लोगों को फल, दूध या खाने-पीने की चीजें दान करें।कर्क राशि (Cancer)आज आपको समाज या कार्यक्षेत्र में किसी अनुभवी और जिम्मेदार व्यक्ति का बेहतरीन मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे आपकी राह आसान होगी. हालांकि, जोश में आकर फिजूलखर्ची न करें; अपनी आर्थिक स्थिति का बजट देखकर ही कदम बढ़ाएं। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या तरक्की से जुड़ी कोई खुशखबरी मिल सकती है. परिवार के साथ हंसी-मजाक और मनोरंजन में बेहतरीन समय बिताया जाएगा। प्रदूषण और बदलते मौसम की वजह से एलर्जी की शिकायत हो सकती है.अचूक उपाय: सुबह-सुबह मंदिर जाकर देव दर्शन करें और किसी बुजुर्ग ब्राह्मण का आशीर्वाद लें.सिंह राशि (Leo)पिछले कई दिनों से चली आ रही किसी बड़ी समस्या का समाधान मिल जाने से आज मन को बड़ी शांति और संतोष मिलेगा. ध्यान रखें कि जोश में आकर किसी भी सरकारी नियम या कानून का उल्लंघन न करें, अन्यथा फंस सकते हैं. व्यापार विस्तार की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए आज का दिन काफी अनुकूल है. घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा. सेहत के मामले में आज एलर्जी या यूरिन इन्फेक्शन जैसी दिक्कतें घेर सकती हैं.अचूक उपाय: अनाथ या गरीब बच्चों को उनकी जरूरत की स्टेशनरी या खाने की चीजें गिफ्ट करें.कन्या राशि (Virgo)आज आपके सामने जो भी चुनौतियां आएं, उन्हें खुले दिल से स्वीकार करें, क्योंकि यही चुनौतियां आपके लिए तरक्की के नए रास्ते खोलेंगी. शेयर मार्केट, सट्टा या तेजी-मंदी के जोखिम भरे कामों में आज बड़ा पैसा लगाने से बचें. हार्डवेयर के कारोबारियों को आज बाजार में थोड़ी मंदी का सामना करना पड़ सकता है. प्रेम संबंधों में आज भावनात्मक नजदीकियाँ और भरोसा और भी मजबूत होंगे। कफ और खांसी-जुकाम से अपना बचाव रखें.अचूक उपाय: किसी सिद्ध मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार वहां सेवा या आराधना करें.तुला राशि (Libra)आर्थिक मोर्चे पर आज का दिन अच्छा है। कहीं सुरक्षित जगह पर निवेश करना भविष्य में बड़ा फायदा दे सकता है। हालांकि, पड़ोसियों के साथ किसी भी फालतू बात पर बहस या वाद-विवाद में न पड़ें. किसी रसूखदार या राजनीतिक व्यक्ति की मदद से आपका रुका हुआ बिजनेस का काम आज दोबारा शुरू हो जाएगा. पारिवारिक जीवन में सुकून रहेगा. सेहत का ध्यान रखें, कफ और नजला की परेशानी आज बढ़ सकती है.अचूक उपाय: शाम के समय पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाकर प्रणाम करें.वृश्चिक राशि (Scorpio)फाइनेंस और पैसों से जुड़े कामों में आपके द्वारा किए गए पुराने प्रयासों का आज बेहद सकारात्मक और उचित परिणाम मिलेगा. कोर्ट-कचहरी या जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों को आज के लिए टाल देना ही बेहतर रहेगा. इंश्योरेंस और कमिशन-बेसिस पर काम करने वाले जातकों को आज बड़ी सफलता मिल सकती है। शादीशुदा जिंदगी और लव लाइफ दोनों ही काफी रोमांटिक और मधुर रहेंगी. सड़क पर चलते समय आवारा जानवरों से दूरी बनाकर रखें.अचूक उपाय: अपनी बहन, बेटी या बुआ का सम्मान करें और उन्हें कोई सुंदर उपहार जरूर दें.धनु राशि (Sagittarius)मन में पिछले कुछ दिनों से चल रही किसी बड़ी दुविधा, उलझन और बेचैनी से आज आपको बड़ी राहत मिलने वाली है. नया वाहन या गाड़ी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आज उसे कुछ समय के लिए टाल दें. कार्यक्षेत्र में कर्मचारियों या कलीग्स के साथ चल रहा पुराना विवाद आज आपसी बातचीत से सुलझ जाएगा. घर के भीतर किसी बात को लेकर कहासुनी हो सकती है। शांत रहें।. मुँह में छाले या दांत दर्द की समस्या परेशान कर सकती है.अचूक उपाय: किसी गौशाला में या बाहर गाय को गुड़-रोटी खिलाएं और उनका आशीर्वाद लें.मकर राशि (Capricorn)आर्थिक और वित्तीय मामलों को लेकर आज आपके द्वारा लिया गया कोई बड़ा फैसला बेहद फायदेमंद साबित होने वाला है. विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे नंबर लाने के लिए अपनी पढ़ाई पर और अधिक फोकस करने की जरूरत है। कामकाजी महिलाएं आज अपने बिजनेस को लेकर कोई बड़ा और कड़ा फैसला ले सकती हैं. किसी पुराने जिगरी दोस्त से अचानक मुलाकात होने से पुरानी यादें ताजा होंगी. जोखिम वाले कामों से दूर रहें.अचूक उपाय: पानी की बर्बादी बिल्कुल न करें और अपने आसपास स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें.कुंभ राशि (Aquarius)कुंभ राशि के युवा आज अपने करियर और भविष्य को लेकर काफी गंभीर और सजग नज़र आएंगे. जमीन-जायदाद या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में आज अचानक कोई रुकावट आ सकती है. रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी के काम से जुड़े लोगों के हाथ आज कोई बड़ी और मुनाफे वाली डील लग सकती है. प्रेमी-प्रेमिका को आज साथ में वक्त बिताने का अच्छा मौका मिलेगा. मानसिक तनाव को खुद पर हावी न होने दें.अचूक उपाय: किसी भी धार्मिक स्थल या एकांत जगह पर बैठकर कुछ देर आत्म-चिंतन करें, मानसिक शांति मिलेगी.मीन राशि (Pisces)आज का कुछ समय किसी आध्यात्मिक या धार्मिक स्थल पर बिताना आपको अद्भुत मानसिक सुकून और नई ऊर्जा देगा. ध्यान रखें कि बिना मांगे दूसरों के फालतू मामलों और पंचायतें न छेड़ें, बदनामी हो सकती है। बिजनेस में मुनाफा बढ़ाने के लिए अपनी पुरानी कार्यप्रणाली में थोड़ा आधुनिक बदलाव लाने की जरूरत है. परिवार के लोगों के बीच आपसी तालमेल और सामंजस्य बेहतरीन रहेगा। मौसम के मिजाज को देखते हुए खान-पान पर नियंत्रण रखें.अचूक उपाय: अपने इष्ट देव का ध्यान करें और किसी मंदिर में अपनी इच्छा अनुसार कुछ अन्न या धन का दान करें.
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Devshayani Ekadashi Date 2026: वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को मनाई जाएगी। इसी दिन से आषाढ़ शुक्ल एकादशी के अवसर पर भगवान भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ भी होता है। धार्मिक ...
अमरनाथ यात्रा 2026: निकलने से पहले जरूर कर लें ये 5 जरूरी तैयारियां, तभी रहेगा सफर सुरक्षित
Amarnath Yatra 2026: जय बाबा बर्फानी! अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत 3 जुलाई से होने जा रही है, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल 2026 से ही शुरू हो गए थे। यह यात्रा 28 अगस्त 2026 (रक्षाबंधन) तक चलेगी। समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित बाबा ...
सनातन धर्म में दैनिक पंचांग का विशेष महत्व है, क्योंकि इसके जरिए हम दिन के शुभ-अशुभ समय को जानकर अपने महत्वपूर्ण कार्यों की रूपरेखा तय करते हैं। आज 28 जून 2026, दिन रविवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि आज के दिन रवि योग, शुभ योग और शुक्ल योग का एक बेहद दुर्लभ व पवित्र त्रिकोणीय संयोग बन रहा है। रविवार का दिन प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव को समर्पित होता है, इसलिए आज के दिन की गई सूर्य उपासना जातकों के जीवन में तेज, मान-सम्मान और आरोग्य लेकर आती है।सूर्य देव को अर्घ्य देते समय न करें ये गलती, इन बातों का रखें विशेष ध्यानआज रविवार के दिन सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए सुबह स्नान के बाद उन्हें तांबे के लोटे (पात्र) से अर्घ्य देना सबसे उत्तम माना जाता है। अर्घ्य के जल में लाल चंदन या रोली, अक्षत (साबुत चावल) और लाल रंग के फूल जरूर मिला लें। इसके बाद भगवान सूर्य के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करते हुए जल अर्पित करें। जल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि जल की धार के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें। अर्घ्य देने के पश्चात वहीं खड़े होकर 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ अवश्य करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसा करने से व्यक्ति के आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है और उसकी नेतृत्व क्षमता (Leadership Skills) मजबूत होती है।ग्रह गोचर और नक्षत्र: वृश्चिक राशि में रहेंगे चंद्रमा, मंगल-गुरु का बनेगा लाभ दृष्टि योगआज के पंचांग की ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ग्रहों के राजा सूर्य देव जहां मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं, वहीं मन के कारक चंद्रमा पूरे दिन मंगल की राशि वृश्चिक में संचरण करेंगे। आज का नक्षत्र ज्येष्ठ मास के नाम पर आधारित 'ज्येष्ठा नक्षत्र' रहेगा, जो पूरे दिन और रात तक प्रभावी रहेगा। आज के ग्रहों की स्थिति (Planet Transits) बेहद दिलचस्प है; साहस व पराक्रम के कारक ग्रह मंगल और ज्ञान, सुख-सौभाग्य के दाता गुरु (बृहस्पति) एक-दूसरे से 60 डिग्री के कोण पर स्थित रहकर एक बेहद शुभ 'लाभ दृष्टि योग' का निर्माण कर रहे हैं। इस योग के प्रभाव से आज किए गए कार्यों में सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।आज के सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का सटीक समय जानेंआज 28 जून 2026 को दिन और रात के संधि काल तथा चंद्र-सूर्य की स्थिति का समय कुछ इस प्रकार रहने वाला है:सूर्योदय (Sunrise): सुबह 05:47 बजेसूर्यास्त (Sunset): शाम 07:12 बजेचन्द्रोदय (Moonrise): शाम 06:11 बजेचन्द्रास्त (Moonset): 29 जून की सुबह 04:47 बजेनोट: विभिन्न शहरों के अक्षांश और देशांतर (Geographical Location) के अंतर के कारण स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में कुछ मिनटों या सेकंड का आंशिक अंतर देखा जा सकता है।आज के शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृत काल में करें नए कार्यों की शुरुआतयदि आप आज कोई नया व्यापार, गृह प्रवेश, खरीदारी या कोई अन्य मांगलिक कार्य शुरू करना चाहते हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आपको आज के शुभ चौघड़िया और मुहूर्तों का लाभ उठाना चाहिए:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:11 बजे से 04:59 बजे तक (यह समय साधना और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ है)अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:56 बजे तक (किसी भी नए कार्य को शुरू करने का सबसे उत्तम समय)अमृत काल: दोपहर 03:15 बजे से शाम 05:02 बजे तकराहुकाल और अशुभ समय: इस दौरान भूलकर भी न करें कोई शुभ कामहिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दिन के कुछ समय ऐसे होते हैं जिनमें नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए इस दौरान किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से पूरी तरह बचना चाहिए:राहुकाल: शाम 05:31 बजे से 07:12 बजे तक (इस समय में कोई भी नया सौदा या यात्रा शुरू न करें)यम गण्ड: दोपहर 12:30 बजे से 02:10 बजे तककुलिक मुहूर्त: दोपहर 03:51 बजे से शाम 05:31 बजे तकदुर्मुहूर्त: शाम 05:24 बजे से 06:18 बजे तकवर्ज्यम् काल: सुबह 04:28 बजे से 06:16 बजे तकआज के धार्मिक करण की स्थितिपंचांग के पांच अंगों में से एक 'करण' की स्थिति आज दो भागों में विभाजित रहेगी। पहला 'गर करण' 27 और 28 जून की मध्यरात्रि 12:43 बजे से शुरू होकर आज दोपहर 01:55 बजे तक रहेगा। इसके बाद ज्योतिषीय गणना के अनुसार 'वणिज करण' प्रारंभ होगा, जो दोपहर 01:55 बजे से लेकर अगले दिन यानी 29 जून की तड़के सुबह 03:06 बजे तक प्रभावी रहेगा। धार्मिक कार्यों के संपादन के लिए इन करणों का अपना विशेष महत्व होता है।
महान विचारक स्वामी विवेकानंद का मानना था कि किसी भी पुस्तक का मूल्यांकन उसके किसी एक पृष्ठ के आधार पर नहीं, बल्कि उसके समग्र अध्ययन से होना चाहिए। लेकिन भारतीय इतिहास और प्राचीन ग्रंथों के संदर्भ में अक्सर इसके विपरीत देखने को मिला है। पूर्वाग्रह से ग्रस्त कुछ वैचारिक दृष्टिकोणों ने हमेशा मनुस्मृति के केवल एक पक्ष को उभारकर उसका विश्लेषण किया। प्राचीन काल के कुछ श्लोकों और उनके चुनिंदा अर्थों को आधार बनाकर लंबे समय से इस ग्रंथ का विरोध होता रहा है, इसे जातिगत भेदभाव का मुख्य कारण भी बताया गया। लेकिन इस बार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपनी नई पाठ्यपुस्तकों में इसके एक दूसरे और सकारात्मक पक्ष को भी स्थान दिया है। पहली बार स्कूली पाठ्यक्रम में मनुस्मृति के एक श्लोक का उल्लेख किया जा रहा है, जिस पर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है।कक्षा 9वीं के पाठ्यक्रम में हुआ शामिल, इतिहास के नए अध्याय में मिली जगहएनसीईआरटी ने अपने नए संशोधित और आधुनिक पाठ्यक्रम के तहत कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की इतिहास की पुस्तक में मनुस्मृति से जुड़े संदर्भ को शामिल किया है। इसे इतिहास के एक नए अध्याय, जिसका शीर्षक 'State and Society up to 1000 CE' (1000 ईस्वी तक राज्य और समाज) है, के अंतर्गत जोड़ा गया है। इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्राचीन भारतीय समाज की संरचना, शासन व्यवस्था और उस दौर के सामाजिक ताने-बाने से परिचित कराना है। हालांकि, सरकार और शिक्षा बोर्ड के इस फैसले पर भी कुछ संगठन और आलोचक लगातार प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।महिला सम्मान से जुड़ा है श्लोक, 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते' का पढ़ेंगे पाठ9वीं कक्षा के छात्र अब इतिहास की इस नई किताब में महिलाओं के सम्मान को दर्शाने वाले मनुस्मृति के अध्याय 3 के 56वें श्लोक का अध्ययन करेंगे। इस प्रसिद्ध श्लोक का मूल भाव है-यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः अर्थात् जहाँ महिलाओं का आदर और सत्कार होता है, वहाँ देवताओं का निवास होता है। पुस्तक में इस श्लोक के माध्यम से छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि प्राचीन भारतीय और वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति कितनी उच्च, गरिमापूर्ण और सम्मानित थी। उस दौर में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सार्वजनिक सभाओं, राजकाज और बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में समान रूप से भाग लेती थीं। उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार था और कई ऐतिहासिक संदर्भों में वे अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने (स्वयंवर) के लिए भी स्वतंत्र थीं।किताब में निष्पक्षता का दावा: सिर्फ तारीफ नहीं, स्थिति में गिरावट का भी है जिक्रइस नए बदलाव पर सवाल उठाने वालों के विपरीत एनसीईआरटी का कहना है कि पाठ्यक्रम को पूरी तरह निष्पक्ष और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुरूप तैयार किया गया है। किताब में केवल एकतरफा तारीफ नहीं है, बल्कि उसके आगे का दूसरा पहलू भी ईमानदारी से दर्ज है। अध्याय में साफ लिखा है कि समय बीतने और राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के साथ, बाद के मध्यकाल में महिलाओं की स्थिति में काफी उतार-चढ़ाव आया और उनकी सामाजिक स्थिति में गिरावट भी दर्ज की गई। इसके अलावा, इस चैप्टर में केवल महिलाओं की दशा ही नहीं, बल्कि प्राचीन 'वर्ण' और 'जाति' व्यवस्था के क्रमिक विकास पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि शुरुआती वैदिक समाज में किसी व्यक्ति की सामाजिक पहचान केवल उसके जन्म से तय नहीं होती थी, बल्कि उसके कर्म और योग्यता पर निर्भर करती थी।इतिहास के पन्नों में मनुस्मृति दहन और आज के विरोध की असल वजहएनसीईआरटी की किताब में मनुस्मृति के महज एक श्लोक का जिक्र होने के बावजूद कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठन इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। वे साल 1927 के उस ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला दे रहे हैं जब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सामाजिक असमानता के विरोध में मनुस्मृति का दहन किया था। आलोचकों का तर्क है कि इस ग्रंथ को स्कूली शिक्षा का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, दूसरी ओर इतिहासकारों का एक वर्ग यह भी मानता है कि मनुस्मृति कभी भी भारत का कोई आधिकारिक कानून लागू करने वाली किताब नहीं रही, बल्कि यह एक सामाजिक आचार संहिता थी। यह सच है कि इसमें कुछ बातें ऐसी हैं जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों और आज के हिसाब से पूरी तरह अप्रासंगिक और आपत्तिजनक हैं, लेकिन शिक्षा बोर्ड ने इसमें से केवल नैतिक मूल्य और सकारात्मक श्लोक को ही चुना है।'विष से भी अमृत निकाल लेना चाहिए'— चाणक्य की नीति पर चला शिक्षा बोर्डमहान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कहा था कि 'यदि विष में से भी अमृत प्राप्त हो, तो उसे निकाल लेना चाहिए और यदि गंदगी में भी सोना गिरा हो, तो उसे उठा लेना चाहिए।' एनसीईआरटी ने भी प्राचीन ज्ञान और ग्रंथों में से केवल उसी हिस्से को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किया है जो समाज में नैतिक मूल्यों, महिलाओं के प्रति सम्मान और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। लेकिन दुर्भाग्यवश, वैचारिक मतभेदों और नकारात्मक दृष्टिकोण के चलते इस शैक्षणिक बदलाव को सहजता से स्वीकार करने में बाधाएं आ रही हैं। बहरहाल, यह नया पाठ्यक्रम छात्रों को भारत के प्राचीन समाज को एक नए और व्यापक नजरिए से देखने का अवसर जरूर प्रदान करेगा।
अंग्रेजी कैलेंडर का सातवां महीना यानी जुलाई 2026 कई लोगों के जीवन में खुशियों की नई सौगात लेकर आने वाला है। अंक ज्योतिष के अनुसार, यह महीना कई जातकों के लिए बेहद भाग्यशाली रहने वाला है। सिंगल लोगों के जीवन में किसी खास की एंट्री हो सकती है, तो वहीं लंबे समय से नौकरी में प्रमोशन का इंतजार कर रहे कामकाजी लोगों का इंतजार खत्म हो सकता है। व्यापार में भारी मुनाफे और आमदनी के नए स्रोत बढ़ने के भी मजबूत योग बन रहे हैं।जुलाई महीने का अपना सटीक भविष्यफल जानने के लिए आपको अपनी जन्मतिथि (Birthdate) को जोड़कर अपना मूलांक निकालना होगा। उदाहरण के लिए, यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो अंकों को जोड़ने पर आपका मूलांक 1 (जैसे: 2+8=10, 1+0=1) होगा। आइए जानते हैं मूलांक 1 से लेकर 9 तक के लिए जुलाई 2026 का पूरा अंक ज्योतिषफल।मूलांक 1 (यदि जन्म 1, 10, 19, 28 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: जुलाई का महीना आपके लिए करियर के नए और सुनहरे अवसर लेकर आ सकता है। अगर आप नौकरी बदलने या प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं, तो महीने के उत्तरार्ध में कोई सकारात्मक खबर मिल सकती है। कार्यस्थल पर आपके नेतृत्व और सटीक निर्णय लेने की क्षमता की तारीफ होगी, लेकिन किसी भी बड़े फैसले को जल्दबाजी में लेने से बचें।व्यापार: कारोबारियों के लिए नए क्लाइंट्स और बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने की प्रबल संभावना है। पुराने व्यापारिक संपर्कों से भी बड़ा मुनाफा हो सकता है। जो लोग पार्टनरशिप में बिजनेस कर रहे हैं, उन्हें कागजी कार्रवाई और लिखित समझौतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।आर्थिक स्थिति: इस महीने आय के स्रोत काफी मजबूत रहेंगे, लेकिन इसके साथ ही खर्चों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यदि आप किसी नई जगह निवेश करने की सोच रहे हैं, तो बाजार की पूरी जानकारी जरूर जुटा लें। फालतू खर्चों पर लगाम लगाने से आपकी बचत सुरक्षित रहेगी।प्रेम और वैवाहिक जीवन: लव लाइफ में आपसी विश्वास और तालमेल बढ़ेंगे। यदि पार्टनर के साथ किसी बात को लेकर अनबन चल रही थी, तो बातचीत के जरिए उसका समाधान निकल जाएगा। शादीशुदा जातकों को अपने जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।पारिवारिक जीवन: परिवार में किसी मांगलिक या शुभ कार्य का आयोजन हो सकता है। माता-पिता का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे घर का माहौल शांतिपूर्ण और सुखद बना रहेगा।स्वास्थ्य: अधिक भागदौड़ के कारण थकान, सिरदर्द या अनिद्रा (नींद की कमी) जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं। शरीर को पर्याप्त आराम दें और अपनी दिनचर्या अनुशासित रखें।शुभ रंग व दिन: सुनहरा और नारंगी रंग आपके लिए भाग्यशाली रहेगा। शुभ दिनों में रविवार और सोमवार शामिल हैं।मूलांक 2 (यदि जन्म 2, 11, 20, 29 तारीख को हुआ हो)करियर और नौकरी: यह महीना आपको कार्यस्थल पर धैर्य और समझदारी के साथ आगे बढ़ने की सलाह देता है। ऑफिस में सहकर्मियों के साथ टीमवर्क में काम करने से आपको बेहतरीन नतीजे मिलेंगे। सीनियर्स और बॉस के साथ अपने संबंध मधुर बनाए रखें, इससे आपको भविष्य में लाभ होगा।व्यापार: यदि आप किसी नए बिजनेस को शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो जमीन स्तर पर बाजार का अच्छी तरह अध्ययन कर लें। पुराने और भरोसेमंद ग्राहकों के सहयोग से आपका मौजूदा कारोबार सुचारू रूप से चलता रहेगा।आर्थिक स्थिति: जुलाई के महीने में आपकी आमदनी सामान्य बनी रहेगी, लेकिन घरेलू सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है। किसी करीबी मित्र या रिश्तेदार को बड़ा कर्ज या पैसा उधार देने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें।प्रेम और वैवाहिक जीवन: भावनात्मक दृष्टिकोण से यह समय काफी अच्छा रहने वाला है। रिश्तों में मजबूती आएगी और आपसी भरोसा बढ़ेगा। अविवाहित जातकों के जीवन में किसी नए रिश्ते की शुरुआत हो सकती है।पारिवारिक जीवन: घर-परिवार के किसी बड़े सदस्य या काम की जिम्मेदारी अचानक आपके कंधों पर आ सकती है। शांति और ठंडे दिमाग से काम लेने पर आप सभी पारिवारिक जिम्मेदारियों को आसानी से निभा सकेंगे।स्वास्थ्य: मानसिक तनाव और बेवजह की चिंता से बचने की कोशिश करें। मानसिक शांति के लिए योग और ध्यान (Meditation) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।शुभ रंग व दिन: सफेद और क्रीम रंग आपके लिए उत्तम हैं। शुभ दिनों में सोमवार और शुक्रवार का सहयोग मिलेगा।मूलांक 3 (यदि जन्म 3, 12, 21, 30 तारीख को हुआ हो)करियर और नौकरी: शिक्षा, मीडिया, मार्केटिंग, राइटिंग, कला और क्रिएटिव फील्ड से जुड़े लोगों के लिए यह महीना बेहद शानदार रहने वाला है। आपको अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए नए मंच मिलेंगे। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों या इंटरव्यू दे रहे जातकों को सफलता मिलने की पूरी उम्मीद है।व्यापार: बिजनेस के विस्तार (Expansion) की आपकी योजनाएं अब रफ्तार पकड़ेंगी। कारोबार को बढ़ाने के लिए बनाई गई नई मार्केटिंग स्ट्रेटेजी इस महीने आपको बड़ा मुनाफा कमा कर दे सकती है।आर्थिक स्थिति: आपको इस महीने एक्स्ट्रा इनकम (अतिरिक्त आय) के बेहतरीन मौके हाथ लग सकते हैं। हालांकि, शेयर बाजार या किसी भी तरह के जोखिम भरे निवेश से आपको पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए।प्रेम और वैवाहिक जीवन: प्रेम संबंधों में मधुरता घुलेगी और जीवनसाथी हर मोड़ पर सहयोग करेगा। यदि जीवनसाथी के साथ कोई पुराना मनमुटाव चल रहा था, तो वह इस महीने पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।पारिवारिक जीवन: परिवार के सदस्यों के साथ किसी धार्मिक यात्रा या पिकनिक पर जाने का प्लान बन सकता है, जिससे आपसी तालमेल और मजबूत होगा।स्वास्थ्य: पेट और पाचन से जुड़ी दिक्कतों से बचने के लिए बाहर के खाने-पीने से परहेज करें। संतुलित और सात्विक आहार लें।शुभ रंग व दिन: पीला और हल्का नारंगी रंग शुभ फल देगा। दिनों में गुरुवार और रविवार आपके लिए अनुकूल रहेंगे।मूलांक 4 (यदि जन्म 4, 13, 22, 31 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: आपकी पुरानी कड़ी मेहनत का मीठा फल अब आपको मिलने वाला है। लंबे समय से अटके हुए ऑफिशियल काम इस महीने पूरे हो जाएंगे। ऑफिस में आपका अनुशासन और समय की पाबंदी सीनियर्स को प्रभावित करेंगी।व्यापार: बिजनेस में स्थिरता (Stability) बनी रहेगी, जिससे आपका मानसिक तनाव कम होगा। पुराने ग्राहकों का आपके प्रति भरोसा और बढ़ेगा। हालांकि, किसी भी नए बड़े निवेश में हाथ डालने से पहले सावधानी बरतें।आर्थिक स्थिति: पैसों के मामले में आपकी स्थिति पहले के मुकाबले काफी मजबूत होगी। इसके बावजूद किसी भी तरह के बड़े और गैर-जरूरी खर्चों को फिलहाल के लिए टाल देना ही समझदारी होगी।प्रेम और वैवाहिक जीवन: रिश्तों में अपनी जिद और गुस्से को आड़े न आने दें। पार्टनर के साथ किसी भी विवाद को शांत मन से बैठकर बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें।पारिवारिक जीवन: घर के किसी बेहद महत्वपूर्ण निर्णय या पारिवारिक मसले में आपकी राय को विशेष महत्व दिया जाएगा, जिससे परिवार में आपका सम्मान बढ़ेगा।स्वास्थ्य: पीठ दर्द, कमर दर्द या जोड़ों में खिंचाव की समस्या आपको थोड़ा परेशान कर सकती है। डॉक्टर की सलाह लें और हल्के व्यायाम को अपने रूटीन में शामिल करें।शुभ रंग व दिन: नीला और ग्रे (स्लेटी) रंग आपके लिए सकारात्मक रहेगा। शुभ दिनों में शनिवार और रविवार का साथ मिलेगा।मूलांक 5 (यदि जन्म 5, 14, 23 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: जुलाई का यह महीना आपकी प्रोफेशनल लाइफ में बड़े और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। आप किसी दूसरी जगह ट्रांसफर हो सकते हैं या ऑफिस में कोई बड़ी नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आपके बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल्स (संचार कौशल) की वजह से आपको वर्कप्लेस पर नई पहचान मिलेगी।व्यापार: व्यापारियों के लिए यह समय नए एग्रीमेंट्स और बड़े ऑर्डर्स मिलने का है। जो लोग ऑनलाइन बिजनेस, डिजिटल मार्केटिंग या ई-कॉमर्स से जुड़े हैं, उन्हें इस महीने बंपर मुनाफा होने के आसार हैं।आर्थिक स्थिति: आर्थिक मोर्चे पर यह महीना आपके लिए भाग्यशाली रहेगा। लंबे समय से फंसा हुआ या रुका हुआ धन अचानक वापस मिल सकता है। कम समय में ज्यादा मुनाफे के चक्कर में आकर किसी भी सट्टेबाजी या जोखिम भरे काम में पैसा न लगाएं।प्रेम और वैवाहिक जीवन: लव लाइफ में रोमांस और नया उत्साह देखने को मिलेंगे। जो लोग सिंगल हैं, उनकी मुलाकात सोशल मीडिया या किसी इवेंट के दौरान किसी बेहद खास व्यक्ति से हो सकती है।पारिवारिक जीवन: घर में हंसी-खुशी का माहौल बना रहेगा। भाई-बहनों का पूरा सहयोग मिलेगा और परिवार के साथ किसी छोटी दूरी की यात्रा पर जाने के योग बन रहे हैं।स्वास्थ्य: काम की अधिकता के कारण भागदौड़ ज्यादा रहेगी, इसलिए शरीर को पर्याप्त आराम दें और समय पर पौष्टिक भोजन करना न भूलें।शुभ रंग व दिन: हरा रंग आपके लिए सबसे ज्यादा लकी साबित होगा। दिनों में बुधवार और शुक्रवार आपके लिए शुभ हैं।मूलांक 6 (यदि जन्म 6, 15, 24 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: जुलाई का महीना आपके करियर में संतुलन और निरंतर प्रगति लेकर आ रहा है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत और मिलनसार व्यवहार की हर कोई तारीफ करेगा। यदि आप सैलरी हाइक (वेतन वृद्धि) या प्रमोशन की उम्मीद कर रहे हैं, तो महीने के आखिरी हफ्ते में कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है।व्यापार: बाजार में आपकी साख बढ़ेगी जिससे पुराने ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा। जो जातक फैशन, कॉस्मेटिक्स, होटल, इंटीरियर डिजाइनिंग, कला या लक्जरी आइटम्स के बिजनेस में हैं, उन्हें बड़े ऑर्डर्स मिलने की पूरी उम्मीद है। पार्टनरशिप में पारदर्शिता रखें।आर्थिक स्थिति: इस महीने आपकी आमदनी बढ़ने के साथ-साथ खर्चों का ग्राफ भी ऊपर जा सकता है। आप नया वाहन, घर या परिवार की सुख-सुविधाओं पर पैसा खर्च कर सकते हैं। एक सटीक बजट बनाकर चलेंगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी।प्रेम और वैवाहिक जीवन: प्रेम संबंधों में गहराई आएगी और पार्टनर के साथ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा। शादीशुदा लोगों के लिए जीवनसाथी के हर कदम पर साथ देना उनके हौसले को बढ़ाएगा। पुराने मनमुटाव दूर होंगे।पारिवारिक जीवन: घर में किसी मांगलिक प्रसंग या उत्सव की रूपरेखा बन सकती है। सप्ताहांत (Weekend) पर परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने से आपको मानसिक शांति मिलेगी।स्वास्थ्य: खान-पान में लापरवाही भारी पड़ सकती है। ज्यादा मीठा, तली-भुनी चीजें और जंक फूड से पूरी तरह से परहेज करें। जो लोग शुगर या बढ़ते वजन से परेशान हैं, वे विशेष सावधानी बरतें।शुभ रंग व दिन: गुलाबी और हल्का नीला रंग आपके लिए अनुकूल हैं। शुभ दिनों में शुक्रवार और सोमवार शामिल हैं।मूलांक 7 (यदि जन्म 7, 16, 25 तारीख को हुआ हो)करियर और नौकरी: यह महीना आपके लिए अपनी स्किल्स को अपग्रेड करने, कुछ नया सीखने और भविष्य के लिए बड़ी प्लानिंग करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। जो लोग आईटी (IT), एजुकेशन, रिसर्च, डेटा एनालिसिस और कंसल्टिंग के क्षेत्र में कार्यरत हैं, उनके लिए तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। जोश में आकर नौकरी बदलने का फैसला न लें।व्यापार: कारोबारी इस महीने अपने बिजनेस के बेतहाशा विस्तार की बजाय अपने प्रोडक्ट्स या सर्विसेज की क्वालिटी (गुणवत्ता) को सुधारने पर ज्यादा फोकस करें। इस महीने बनाई गई नई बिजनेस स्ट्रेटेजी आपको भविष्य में बड़ा आर्थिक लाभ देगी।आर्थिक स्थिति: आर्थिक मामलों में महीना सामान्य रहेगा। जहां एक तरफ आकस्मिक धन लाभ के योग बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ अनचाहे और अचानक आने वाले खर्च आपका बजट बिगाड़ सकते हैं। निवेश करने से पहले किसी वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) की मदद लें।प्रेम और वैवाहिक जीवन: इस महीने आप स्वभाव से थोड़े अंतर्मुखी रह सकते हैं, जिससे आप अपनी भावनाएं पार्टनर के सामने खुलकर नहीं रख पाएंगे। इस वजह से साथी के मन में गलतफहमी पैदा हो सकती है। संवादहीनता से बचें और खुलकर बात करें।पारिवारिक जीवन: परिवार का पूरा सपोर्ट आपके साथ रहेगा, लेकिन काम के बढ़ते दबाव के बीच आप मानसिक शांति के लिए खुद के साथ अकेले में कुछ वक्त बिताने की जरूरत महसूस करेंगे।स्वास्थ्य: पर्याप्त नींद न लेना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। मानसिक तनाव और सिरदर्द से बचने के लिए योग, प्राणायाम और वॉक को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं।शुभ रंग व दिन: बैंगनी और सफेद रंग आपके ओरा को मजबूत करेगा। दिनों में सोमवार और गुरुवार का साथ मिलेगा।मूलांक 8 (यदि जन्म 8, 17, 26 तारीख को हुआ हो)करियर और नौकरी: जुलाई का यह महीना कार्यस्थल पर आपके धैर्य और कठिन परिश्रम की परीक्षा ले सकता है, लेकिन घबराएं नहीं, यही मेहनत आपको महीने के अंत तक बड़ी सफलता दिलाएगी। ऑफिस में वर्कलोड और जिम्मेदारियाँ बढ़ सकती हैं। सरकारी, प्रशासनिक, बैंकिंग, लॉ या मैनेजमेंट से जुड़े लोगों को मान-सम्मान मिलेगा।व्यापार: किसी पुरानी प्रॉपर्टी, पूर्व में किए गए निवेश या लंबे समय से रुकी हुई बिजनेस डील्स से अचानक तगड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है। हालांकि, किसी भी नए डील या सरकारी दस्तावेज पर बिना पढ़े और बिना सोचे-समझे हस्ताक्षर करने की भूल न करें।आर्थिक स्थिति: लंबे समय से अटका हुआ या डूबा हुआ पैसा वापस मिलने के योग हैं। हालांकि, भावनाओं में बहकर किसी अनजान स्कीम में भारी निवेश करने से बचें, अन्यथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।प्रेम और वैवाहिक जीवन: काम की व्यस्तता के चलते आप अपने लाइफ पार्टनर को पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, जिससे थोड़े शिकवे-शिकायतें बढ़ सकती हैं। प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाकर रखें, पुराने विवाद धीरे-धीरे सुलझ जाएंगे।पारिवारिक जीवन: घर के किसी वरिष्ठ या बुजुर्ग सदस्य की सलाह आपके किसी बड़े संकट को टालने में मददगार साबित होगी। पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई अहम फैसला इस महीने लिया जा सकता है।स्वास्थ्य: हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप), जोड़ों के दर्द या अत्यधिक शारीरिक थकान को सामान्य मानकर नजरअंदाज करने की गलती न करें। समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराते रहें।शुभ रंग व दिन: गहरा नीला और काला रंग आपके लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा। शुभ दिनों में शनिवार और शुक्रवार अनुकूल रहेंगे।मूलांक 9 (यदि जन्म 9, 18, 27 तारीख को हुआ हो)करिअर और नौकरी: जुलाई 2026 आपके लिए बड़ी उपलब्धियों और सफलताओं का महीना साबित होने वाला है। जो काम महीनों से अटके हुए थे, वे अब तेजी से पूरे होने लगेंगे। सेना, पुलिस, प्रशासन, मेडिकल, सोशल सर्विस और राजनीति से जुड़े जातकों को इस महीने कोई बड़ा पद या विशेष सफलता मिल सकती है।व्यापार: बिजनेस में विस्तार की जो योजनाएं ठंडे बस्ते में थीं, वे अब अमलीजामा पहनेंगी। बाजार में नए संपर्क और बड़े क्लाइंट्स आपके साथ जुड़ेंगे। कोर्ट-कचहरी या प्रतिद्वंदियों के साथ चल रहे पुराने विवाद सुलझने से आपके काम में तेजी आएगी।आर्थिक स्थिति: धन आगमन के बेहद खूबसूरत और मजबूत योग बन रहे हैं। बिजनेस में रुका हुआ पुराना पेमेंट क्लियर हो जाएगा, जिससे आपकी फाइनेंशियल कंडीशन काफी मजबूत होगी। फिर भी, बड़ा निवेश करने से पहले जोखिमों का आकलन जरूर कर लें।प्रेम और वैवाहिक जीवन: लव लाइफ और वैवाहिक जीवन में गजब का आपसी तालमेल और भावनात्मक मजबूती देखने को मिलेगी। हर मुश्किल परिस्थिति में पार्टनर ढाल बनकर आपके साथ खड़ा रहेगा। अविवाहितों के लिए विवाह के बेहतरीन प्रस्ताव आ सकते हैं।पारिवारिक जीवन: परिवार में किसी सदस्य की नौकरी या विवाह से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिल सकता है। घर में किसी मांगलिक या धार्मिक कार्य की योजना बनेगी, जिससे पूरे घर का माहौल सकारात्मक और ऊर्जावान रहेगा।स्वास्थ्य: इस महीने आपकी शारीरिक ऊर्जा और इम्युनिटी बहुत अच्छी रहेंगी। हालांकि, आपको अपने अत्यधिक गुस्से और मानसिक उत्तेजना पर कंट्रोल रखना होगा, वरना ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। नियमित वर्कआउट करें।शुभ रंग व दिन: लाल और मैरून रंग आपके भाग्य में वृद्धि करेगा। शुभ दिनों में मंगलवार और रविवार आपके लिए सर्वश्रेष्ठ रहेंगे।
ड्राइंग रूम में सोफा और टीवी की सही दिशा चमकाएगी किस्मत, वास्तु के इन नियमों से घर में बरसेगा पैसा
घर का लिविंग रूम यानी ड्राइंग रूम वह मुख्य स्थान होता है जहां परिवार के सभी सदस्य एक साथ समय बिताते हैं और घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ड्राइंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होना बेहद जरूरी है क्योंकि इसका सीधा असर घर के मुखिया की तरक्की, परिवार की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। अक्सर लोग इंटीरियर डिजाइनिंग के चक्कर में ड्राइंग रूम में सोफा सेट और टेलीविजन (TV) जैसी मुख्य चीजों को किसी भी दिशा में रख देते हैं, जिससे घर में भारी वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। आइए जानते हैं कि वास्तु संतुलन बनाए रखने के लिए सोफा और टीवी रखने की सबसे सटीक और सही दिशा कौन सी है।सुख-समृद्धि के लिए ड्राइंग रूम में किस दिशा में रखें भारी सोफा सेटवास्तु विज्ञान के नियमों के मुताबिक, ड्राइंग रूम में सोफा सेट या किसी भी तरह के भारी फर्नीचर को रखने के लिए दक्षिण (South) और पश्चिम (West) दिशा को सबसे उत्तम माना गया है। यदि आप अपने लिविंग रूम की दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण की दीवारों से सटाकर सोफा रखते हैं, तो इससे घर में स्थायित्व आता है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल मजबूत होता है। बैठते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि घर के मुखिया का मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। ऐसा होने से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार तेजी से होने लगता है।किस कोने में भूलकर भी न लगाएं टीवी, हो सकता है बड़ा मानसिक तनावआधुनिक घरों में टीवी केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह अग्नि तत्व और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ा उपकरण है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ड्राइंग रूम में टीवी लगाने के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा (South-East) यानी आग्नेय कोण को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिशा में टीवी होने से घर में रहने वाले लोगों को सकारात्मक जानकारियां मिलती हैं और उनका मानसिक विकास सही दिशा में होता है। ध्यान रखें कि भूलकर भी टीवी को उत्तर-पूर्व (North-East) यानी ईशान कोण में न लगाएं। इस पवित्र कोने में टीवी या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट रखने से घर का वास्तु बिगड़ता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई में रुकावट और परिवार में बेवजह का तनाव पैदा होने लगता है।इन छोटी मगर बेहद जरूरी वास्तु टिप्स का रखें विशेष ख्यालड्राइंग रूम को वास्तु सम्मत बनाने के लिए केवल सोफा और टीवी की दिशा ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य नियमों का पालन करना भी आवश्यक है। लिविंग रूम के केंद्र यानी बीच के हिस्से को हमेशा खाली और साफ-सुथरा रखें, क्योंकि इसे ब्रह्मस्थान माना जाता है। सोफे के ठीक सामने या टीवी स्क्रीन पर मुख्य दरवाजे का सीधा प्रतिबिंब यानी परछाई नहीं पड़नी चाहिए। साथ ही, ड्राइंग रूम की दीवारों पर हमेशा हल्के और सकारात्मक रंगों जैसे क्रीम, हल्का पीला या ऑफ-व्हाइट का ही इस्तेमाल करें। इन आसान से बदलावों को अपनाकर आप अपने घर की नकारात्मक ऊर्जा को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं और सुख-समृद्धि के द्वार खोल सकते हैं।
Weekly Rashifal 2026: जून और जुलाई 2026 के बीच का यह सप्ताह नई ऊर्जा, नए अवसर और महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत लेकर आ रहा है। ग्रहों की स्थिति कई राशियों को करियर, व्यापार, शिक्षा और पारिवारिक जीवन में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर सकती है। कुछ जातकों ...
Horoscope June 29 June To 05 July 2026: 29 जून से 05 जुलाई तक का मेष से लेकर मीन राशि तक का साप्ताहिक राशिफल। यह सप्ताह निवेश, व्यवसाय और करियर के लिए थोड़ा उतार चढ़ाव लावा रह सकता है। करियर, सेहत और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए समय निकालना होगा। ...
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: व्रत का महत्व और 7 अचूक उपाय, जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत
Jyeshtha Purnima 2026: ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत 29 जून 2026 सोमवार के दिन रखा जाएगा। वट सावित्री की तरह ही, वट पूर्णिमा (ज्येष्ठ पूर्णिमा) का त्योहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में मनाया जाता है। हालांकि उत्तर भारत में इस दिन ...
निर्जला एकादशी पर ग्रहों का महासंयोग, इन 3 राशियों की पलटने जा रही है किस्मत
इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही नजरिए से बेहद खास हो गई है। साल के सभी 24 व्रतों में सबसे कठिन माने जाने वाले इस उपवास के दिन आकाश मंडल में एक ऐसा दुर्लभ नजारा बन रहा है, जो सीधे आपकी जेब और किस्मत पर असर डालेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक, इस पावन अवसर पर ग्रहों के राजा और राजकुमार की जुगलबंदी से 'लक्ष्मी नारायण राजयोग' का निर्माण हो रहा है, जिसे सुख, समृद्धि और धन-दौलत देने वाला माना जाता है।आखिर कैसे बनता है यह चमत्कारी लक्ष्मी नारायण राजयोगज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार, जब भी बुद्धि के देवता बुध और सुख-वैभव के कारक शुक्र ग्रह किसी एक राशि में एक साथ बैठते हैं, तो लक्ष्मी नारायण राजयोग बनता है। इस बार यह अनोखा संयोग कर्क राशि में बनने जा रहा है। मान्यता है कि इस महायोग के दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करने और अपनी क्षमता के अनुसार मिट्टी के घड़े, तरबूज, ठंडे जल या वस्त्रों का दान करने से पूरे साल की सभी एकादशियों का पुण्य एक बार में ही मिल जाता है।वृषभ राशि: थमे हुए काम पकड़ेंगे रफ्तारवृषभ राशि के जातकों के लिए यह राजयोग किसी वरदान से कम नहीं है। अगर आप लंबे समय से अपने करियर या नौकरी में किसी बदलाव का इंतजार कर रहे थे, तो अब आपके प्रयास रंग लाने वाले हैं। व्यापार से जुड़े लोगों को कोई बड़ी डील हाथ लग सकती है, जिससे आर्थिक स्थिति को तगड़ा बूस्ट मिलेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रमोशन और दफ्तर में मान-सम्मान बढ़ने के पूरे आसार दिख रहे हैं।कर्क राशि: आपकी ही तिजोरी में बरसेगा धनचूंकि यह शक्तिशाली राजयोग आपकी अपनी ही राशि यानी कर्क राशि में बन रहा है, इसलिए सबसे बड़ा और सीधा फायदा आपको ही मिलने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी पुरानी मेहनत अब रंग लाएगी और आय के नए स्रोत सामने आएंगे। जो लोग नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह समय बेहद अनुकूल है। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी और समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी।तुला राशि: मुश्किलों से मिलेगा छुटकारा और बढ़ेगा बैंक बैलेंसतुला राशि के जातकों के लिए लक्ष्मी नारायण राजयोग बंद किस्मत के ताले खोलने का काम कर सकता है। पिछले कई दिनों से जिन मानसिक या आर्थिक परेशानियों ने आपको घेर रखा था, वे अब धीरे-धीरे दूर होने लगेंगी। नौकरी और व्यापार में किए गए निवेश से आपको उम्मीद से बेहतर मुनाफा मिलने की उम्मीद है। परिवार के साथ रिश्ते मजबूत होंगे और घर में सुख-शांति का माहौल रहेगा।
आज 25 जून 2026 को देश भर में पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ साल का सबसे बड़ा और कठिन माना जाने वाला 'निर्जला एकादशी व्रत' रखा जा रहा है। हिंदू सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि साल भर की सभी 24 एकादशियों में यह एकादशी सबसे श्रेष्ठ और फलदायी है। महाभारत काल से चले आ रहे इस महाव्रत के बारे में कहा जाता है कि यदि कोई श्रद्धालु हर महीने आने वाली एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता है, तो वह केवल इस एक निर्जला एकादशी का व्रत रखकर सभी एकादशियों का पुण्य फल एक साथ प्राप्त कर सकता है। इस दिन पूरी निष्ठा से तप करने वाले भक्तों पर भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा पूरे साल बनी रहती है।चूंकि यह व्रत बिना अन्न और जल ग्रहण किए (निर्जल) रखा जाता है, इसलिए ज्येष्ठ मास की इस भीषण गर्मी में इसे निभाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में कई बार व्रती से अनजाने में या गलती से पानी पी लेने के कारण व्रत टूट जाता है। व्रत भंग होते ही मन में कई तरह की शंकाएं और सवाल उठने लगते हैं—जैसे कहीं भगवान विष्णु क्रोधित तो नहीं हो जाएंगे? क्या जीवन में कोई बड़ी परेशानी आ जाएगी? ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में ऐसी स्थिति से निपटने और भगवान से क्षमा मांगने के कुछ बेहद सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं।उदया तिथि में आज रखा जा रहा है महाव्रतद्रिक पंचांग (Drik Panchang) की सटीक गणना के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून की शाम 06 बजकर 12 मिनट से शुरू हो चुकी है और आज 25 जून को शाम 08 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रों के नियमों के अनुसार, उदया तिथि की मान्यता को देखते हुए आज 25 जून को ही सूर्योदय से यह कठिन निर्जला व्रत रखा जा रहा है। आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि करने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लिया है।अगर गलती से टूट जाए एकादशी व्रत, तो पैनिक न होंशास्त्रों और परम पूज्य साधु-संतों के अनुसार, भगवान विष्णु बाहरी क्रियाओं या कठोरता से कहीं अधिक भक्त के सच्चे भाव और समर्पण के भूखे होते हैं। यदि कोई व्यक्ति केवल दिखावे के लिए व्रत रखता है और मन में कपट रखता है, तो वह व्रत केवल स्वास्थ्य के लिहाज से सही हो सकता है, भक्ति के लिए नहीं। इसके विपरीत, यदि आप सच्चे मन और अटूट श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु के प्रति समर्पित हैं और अत्यधिक प्यास या भूलवश आपसे पानी की एक घूंट अंदर चली गई है, तो भगवान कभी अपने भक्त से नाराज नहीं होते। अनजाने में हुई भूल पर पैनिक (परेशान) होने के बजाय मन में पश्चाताप का भाव रखें और नीचे दिए गए उपायों को अपनाएं।व्रत भंग होने पर तुरंत करें ये 5 ज्योतिषीय उपायअगर आपसे आज गलती से निर्जला एकादशी का नियम टूट गया है, तो इन धार्मिक विधियों से आप श्री हरि को प्रसन्न कर क्षमा पा सकते हैं:करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थना: सबसे पहले पूजा घर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। हाथ जोड़कर कहें, हे प्रभु! मुझसे अज्ञानता वश यह भूल हुई है और मेरा व्रत टूट गया है, कृपया मेरी इस मानवीय भूल को स्वीकार कर मुझे क्षमा करें।महामंत्र का निरंतर जाप: व्रत टूटने के बाद अपना मानसिक संतुलन न खोएं और पूरे दिन शुद्ध मन से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का निरंतर मन ही मन जाप करते रहें। यह मंत्र दोषों का निवारण करता है।विष्णु सहस्रनाम या गीता पाठ: शांत चित्त से एक स्थान पर बैठ जाएं और भगवान विष्णु के 1000 नामों का संग्रह 'विष्णु सहस्रनाम' (Vishnu Sahasranamam) का पाठ करें या श्रीमद्भगवद्गीता का श्रवण करें। इससे वातावरण और मन की नकारात्मकता दूर होती है।ब्राह्मणों व जरूरतमंदों को दान: शास्त्रों में व्रत के दोष से मुक्ति के लिए दान को सबसे उत्तम बताया गया है। यदि व्रत टूट गया है, तो आज शाम या अगले दिन सुबह किसी योग्य ब्राह्मण या गरीब को मौसमी फल, पानी से भरा घड़ा (कलश), सत्तू या सामर्थ्य के अनुसार अनाज का दान अवश्य करें।सात्विक आचरण और शांत मन: नियम टूटने के बाद भी मन से व्रत की भावना को न जाने दें। दिन के बचे हुए हिस्से में सात्विक आचरण बनाए रखें—जैसे किसी पर क्रोध न करें, झूठ न बोलें और किसी की बुराई या चुगली करने से बचें।असहनीय प्यास लगने पर इस विशेष विधि से पी सकते हैं पानीयदि निर्जला एकादशी के दौरान गर्मी के कारण आपकी सेहत बिगड़ने लगे या तेज प्यास से गला सूखने लगे, तो शास्त्रों में एक विशेष आपातकालीन नियम बताया गया है, जिससे प्राणों की रक्षा भी होती है और व्रत खंडित होने का दोष भी नहीं लगता:पानी पीने की तीव्र इच्छा होने पर सबसे पहले शांत होकर भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो नारायणाय का 21 बार पूरी श्रद्धा से जाप करें।इसके बाद चांदी या पीतल की एक साफ थाली या पात्र लें और उसमें थोड़ा सा शुद्ध पीने का पानी डालें।इस जल में कुछ बूंदें पवित्र गंगाजल की जरूर मिला लें।अब अपने दोनों घुटनों और दोनों हाथों को जमीन पर टिकाकर (पशु की मुद्रा में) झुकें और सीधे मुंह से उस जल को ग्रहण कर लें।शास्त्रों के अनुसार, इस विशेष मुद्रा और विधि से जल ग्रहण करने पर इसे सीधे तौर पर 'पानी पीना' नहीं माना जाता, बल्कि इसे केवल कंठ को तर करना कहा जाता है। इस उपाय से आपका निर्जला एकादशी का व्रत पूरी तरह सुरक्षित रहता है और खंडित नहीं माना जाता।
इस्लामिक इतिहास में मोहर्रम और ताजिया क्या संबंध है, जानें कैसे हुई इसकी शुरुआत?
Muharram and Tazia: इस्लामिक इतिहास में मुहर्रम या मोहर्रम महीने की 10वीं तारीख, जिसे यौम-ए-अशुरा कहा जाता है, जिसका संबंध कर्बला की ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है। पैगंबर हजरत मुहम्मद के नवासे इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए ...
जगन्नाथ रथ यात्रा: आखिर क्यों बीमार पड़ते हैं भगवान जगन्नाथ? जानें ज्वरलीला का अद्भुत रहस्य
Jagannath Rath Yatra 2026: प्रतिवर्ष आषाढ़ माह में ओड़िसा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की यात्रा का आयोजन होता है। वर्ष 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पावन यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की ...
Gayatri Prakatotsav 2026: श्री गायत्री प्रकटोत्सव: मां गायत्री की पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त
Gayatri Jayanti 2026: सनातन धर्म में मां गायत्री को वेदमाता, ज्ञान की अधिष्ठात्री और आध्यात्मिक चेतना की देवी माना जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के पावन अवसर पर श्री गायत्री प्रकटोत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गायत्री का प्राकट्य हुआ ...
आज के समय में खुद को आकर्षक दिखाने और लाइफ में पॉजिटिविटी लाने के लिए लोग रत्न और क्रिस्टल थेरेपी का खूब सहारा ले रहे हैं। ज्योतिष और रत्न शास्त्र में नौ ग्रहों के नौ मुख्य रत्नों के अलावा कई असरदार उप-रत्नों (Semi-Precious Stones) के बारे में बताया गया है, जो सीधे तौर पर हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय स्टोन है 'पायराइट' (Pyrite)।इसे धन, समृद्धि और सोभाग्य को आकर्षित करने वाला एक अत्यंत प्रभावी रत्न माना जाता है। आजकल बाजार और ऑनलाइन स्टोर्स पर पायराइट की फैशनेबल ज्वेलरी जैसे ब्रेसलेट, अंगूठी, पेंडेंट और क्रिस्टल ट्री धड़ल्ले से बिक रहे हैं। चूंकि यह एक सेमी-प्रीशियस स्टोन है, इसलिए यह न तो बहुत ज्यादा महंगा है और न ही बहुत सस्ता, जिसके कारण इसे खरीदना हर आम और खास इंसान के लिए आसान है।पायराइट के इस बढ़ते चलन के बीच आजकल लड़कियों में इसकी पायल (Anklet) पहनने का एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है। कई युवतियां इसे धन, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानकर पैरों में धारण कर रही हैं। लेकिन क्या बिना ज्योतिषीय सलाह के पैरों में पायराइट पहनना आपके लिए सही है? आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक सच।'फूल्स गोल्ड' (Fool's Gold) के चक्कर में कहीं आप न बन जाएं फूल!दिखने में पायराइट बिल्कुल असली सोने की तरह पीला और अत्यधिक चमकीला होता है, जिसके कारण प्राचीन काल से ही इसे 'फूल्स गोल्ड' यानी 'मूर्खों का सोना' कहा जाता है। रत्न शास्त्र और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस स्टोन के भीतर सूर्य और मंगल ग्रह की प्रचंड ऊर्जा समाहित होती है। सूर्य जहां आत्मा, मान-सम्मान और आत्मविश्वास के कारक हैं, वहीं मंगल साहस और ऊर्जा के प्रतीक हैं।चूंकि इसमें दो उग्र ग्रहों की ऊर्जा होती है, इसलिए यह जरूरी नहीं कि यह रत्न हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद ही साबित हो। इसे धारण करने से पहले अपनी राशि और कुंडली में ग्रहों की वास्तविक स्थिति को जानना बेहद जरूरी है। किसी योग्य विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसे फैशन के तौर पर पहनना आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकता है।किन राशियों के लिए वरदान साबित होता है पायराइट?ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पायराइट मुख्य रूप से अग्नि और पृथ्वी तत्व की राशियों के लिए अत्यंत भाग्यशाली माना जाता है।मेष, सिंह और वृश्चिक राशि: इन तीन राशियों के जातकों के लिए पायराइट पहनना सबसे ज्यादा फलदायी होता है।कुंडली में ग्रहों की स्थिति: यदि आपकी कुंडली में सूर्य या मंगल ग्रह कमजोर स्थिति में हैं या पीड़ित हैं, तो पायराइट पहनना एक अचूक उपाय साबित हो सकता है।इसे धारण करने से व्यक्ति के भीतर नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का संचार होता है, करियर व बिजनेस में रुकी हुई ग्रोथ तेजी से बढ़ती है और आर्थिक तंगी दूर होती है। इन राशियों की जो लड़कियां या युवा नौकरी, नए स्टार्टअप या प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी सफलता हासिल करना चाहते हैं, उन्हें पायराइट पहनने से चमत्कारी लाभ मिल सकते हैं।इन 3 राशियों के लोग भूलकर भी न पहनें यह स्टोनजहां कुछ राशियों के लिए यह रत्न किस्मत बदलने वाला होता है, वहीं कुछ राशियों के लिए यह बेहद अशुभ परिणाम भी ला सकता है।वृषभ, कर्क और मकर राशि: ज्योतिष के नियमों के अनुसार, वृषभ, कर्क और मकर राशि के जातकों को पायराइट पहनने से सख्त परहेज करना चाहिए।मजबूत सूर्य-मंगल वाले लोग: यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य और मंगल पहले से ही बहुत मजबूत या उच्च स्थिति में हैं, तो उन्हें भी यह स्टोन नहीं पहनना चाहिए।अगर ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति पायराइट पहनता है, तो इसकी अत्यधिक उग्र ऊर्जा के कारण जातक के स्वभाव में अचानक गुस्सा, आक्रामकता और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इसके अलावा, उसे मानसिक तनाव, हाई ब्लड प्रेशर और हर वक्त एक अज्ञात बेचैनी का सामना करना पड़ सकता है।पैरों में पायराइट की पायल पहनने की कतई न करें गलतीयदि आपकी राशि मेष, सिंह या वृश्चिक है और कुंडली के अनुसार आपके लिए पायराइट पहनना बिल्कुल सही है, तो भी इसकी पायल बनाकर पैरों में पहनने की भूल कभी न करें। रत्न शास्त्र के अनुसार, पैरों में किसी भी शुभ या ऊर्जायुक्त रत्न को धारण करना उस ग्रह का घोर अनादर माना जाता है। पैर हमारे शरीर का सबसे निचला हिस्सा होते हैं, जो धूल-मिट्टी और अशुद्धियों के संपर्क में आते हैं।अगर आप पैर में सूर्य और मंगल की ऊर्जा वाले पायराइट को पहनते हैं, तो कुंडली में ये दोनों ग्रह पूरी तरह दूषित और खराब हो सकते हैं। इस गंभीर गलती के कारण आपके जीवन में निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं:आर्थिक अस्थिरता और धन हानि: जो रत्न धन को आकर्षित करने के लिए जाना जाता है, वही रत्न पैरों में जाने पर आपकी संचित पूंजी को नष्ट कर सकता है और बिजनेस में घाटा दे सकता है।मानसिक बेचैनी और निगेटिविटी: इसके गलत प्रभाव से घर में कलह, मानसिक अवसाद, तनाव और चारों तरफ से नकारात्मक ऊर्जा आपको घेर सकती है।सही तरीका क्या है?अगर आप पायराइट का पूरा और सकारात्मक लाभ उठाना चाहते हैं, तो इसे हमेशा अपने शरीर के ऊपरी हिस्से में ही धारण करें। आप इसे अंगूठी (Right Hand Ring Finger), पेंडेंट (गले में) या फिर हाथ के सुंदर ब्रेसलेट के रूप में पहन सकते हैं। सही दिशा और सही तरीके से पहना गया पायराइट ही आपके जीवन में सुख, समृद्धि, अटूट धन और सौभाग्य लेकर आएगा।
सनातन धर्म में दैनिक पंचांग का विशेष महत्व है, जिसके जरिए हम हर दिन के शुभ-अशुभ समय, नक्षत्र, योग और ग्रहों की स्थिति की सटीक गणना जानते हैं। आज बुधवार, 24 जून 2026 को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।इसके साथ ही आज का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज ज्येष्ठ शुक्ल दशमी की शाम से ही साल के सबसे कठिन व्रतों में से एक 'निर्जला एकादशी' की तैयारियां और कड़े नियम (नहाय-खाय) शुरू हो जाएंगे। व्रती आज सात्विक भोजन ग्रहण करने के बाद अन्न-जल का त्याग करेंगे और अगले दिन 25 जून को पूर्ण रूप से निराहार और निर्जला रहकर एकादशी का महाव्रत रखेंगे, जिसका पारण 26 जून को द्वादशी तिथि को किया जाएगा।द्रिक पंचांग (Drik Panchang) और प्रोकेरल पंचांग की ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर आइए जानते हैं लखनऊ, दिल्ली समेत देश भर के लिए आज 24 जून 2026 का विस्तृत और सटीक पंचांग।आज की तिथि, वार और नक्षत्र का पूरा ब्योराआज की तिथि: आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि शाम 06 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा, जो कि निर्जला एकादशी कहलाएगी।आज का वार: बुधवार (भगवान गणेश की पूजा का विशेष दिन)।आज का नक्षत्र: आज दोपहर 01 बजकर 59 मिनट तक 'चित्रा नक्षत्र' रहेगा, इसके बाद 'स्वाति नक्षत्र' की शुरुआत होगी।आज के शुभ योग: आज सुबह 10 बजकर 22 मिनट तक 'परिघ योग' रहेगा, जिसके बाद बेहद कल्याणकारी 'शिव योग' प्रारंभ हो जाएगा, जो धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।आज का गोचर: आज चंद्रमा पूरे दिन और रात शुक्र की राशि 'तुला राशि' में गोचर करेंगे, जिससे मानसिक शांति और सुख-समृद्धि का योग बनेगा।सूर्य और चंद्रमा के उदय व अस्त का सटीक समयआज सूर्य और चंद्रमा की आकाशीय चाल का समय कुछ इस प्रकार रहेगा (स्थानीय शहर और अक्षांश के अनुसार इसमें कुछ मिनटों का अंतर संभावित है):सूर्योदय: सुबह 05 बजकर 46 मिनट परसूर्यास्त: शाम 07 बजकर 11 मिनट परचन्द्रोदय: दोपहर 02 बजकर 35 मिनट परचन्द्रास्त: 24 और 25 जून की मध्य रात्रि (देर रात) 01 बजकर 54 मिनट परआज के शुभ मुहूर्त (इन समयों में शुरू कर सकते हैं मांगलिक कार्य)आज दिन के चौघड़िए और पंचांग के अनुसार निम्नलिखित समय बेहद पवित्र और फलदायी रहने वाले हैं:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 10 मिनट से सुबह 04 बजकर 58 मिनट तक (ईश्वर आराधना और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ)।अमृत काल: सुबह 07 बजकर 32 मिनट से सुबह 09 बजकर 17 मिनट तक (इस काल में किए गए कार्य सिद्ध होते हैं)।अभिजीत मुहूर्त: आज बुधवार होने के कारण कोई भी अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं (Nil) है।आज के अशुभ काल और राहुकाल (इस दौरान नए काम शुरू करने से बचें)ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल और अन्य अशुभ समय में किसी भी नए व्यापार, गृह प्रवेश या मांगलिक कार्यों की शुरुआत नहीं करनी चाहिए:राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से दोपहर 02 बजकर 09 मिनट तक (इस दौरान कोई भी शुभ कार्य न करें)।यम गण्ड: सुबह 07 बजकर 27 मिनट से सुबह 09 बजकर 08 मिनट तक।कुलिक मुहूर्त: सुबह 1048 बजे से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक।दुर्मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक।वर्ज्यम् काल: रात 08 बजकर 10 मिनट से देर रात 09 बजकर 56 मिनट तक।आज के पंचांग के अनुसार 'करण' की स्थितिगर करण: सुबह 05 बजकर 22 मिनट से शाम 06 बजकर 12 मिनट तक।वणिज करण: शाम 06 बजकर 12 मिनट से लेकर अगले दिन 25 जून की सुबह 07 बजकर 08 मिनट तक रहेगा।आज बुधवार को विघ्नहर्ता गणेश जी को दूर्वा (दूब घास) और मोदक अर्पित करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और बुद्धि-वैभव की प्राप्ति होती है। शाम के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ निर्जला एकादशी व्रत का संकल्प अवश्य लें।
तुला राशि में चंद्रमा का गोचर: आज किन राशियों की चमकेगी किस्मत और किन्हें रहना होगा सावधान?
आज 24 जून 2026 को ग्रहों की चाल में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आज चंद्रमा धन और सुख के दाता शुक्र की राशि तुला में गोचर कर रहे हैं। चंद्रमा की यह स्थिति आज एक बेहद शुभ योग का निर्माण कर रही है। हालांकि, ग्रहों के इस हेरफेर के कारण कुछ राशि के जातकों को आज मानसिक उलझन और तनाव का सामना भी करना पड़ सकता है।ग्रहों के इस गोचर का सबसे ज्यादा असर तुला और वृश्चिक राशि के लोगों पर दिखेगा, जिन्हें आज अपने नौकरी-बिजनेस और खासकर कागजी कामकाज (Paper Work) में बहुत संभलकर रहने की जरूरत है। दूसरी ओर, मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन भाग्यशाली रहेगा और उनके रुके हुए असंभव कार्य भी अचानक बन जाएंगे। वहीं सिंह राशि वालों को आज अपने कार्यस्थल पर बॉस के साथ बातचीत करते समय तालमेल बिठाना होगा, अन्यथा मनमुटाव हो सकता है।आइए विस्तार से जानते हैं कि लखनऊ, दिल्ली, मुंबई समेत देश-दुनिया के सभी जातकों के लिए मेष से लेकर मीन राशि तक आज का दैनिक राशिफल (Daily Horoscope) क्या संकेत दे रहा है।मेष राशिफल (Aries Horoscope Today)मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन चमत्कारी साबित हो सकता है। कोई ऐसा काम जो लंबे समय से अटका हुआ था और जिसके पूरे होने की उम्मीद नहीं थी, वह आज अचानक बन जाएगा। समाज और कार्यस्थल पर आपको अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतरीन मौका मिलेगा। हालांकि, आज आपको अपने हाथ खोलकर खर्च करने की आदत पर लगाम लगानी होगी। पड़ोसियों के साथ किसी बात को लेकर बहस हो सकती है, इसलिए शांत रहें। बिजनेस में लापरवाही के कारण कोई बड़ा आर्डर हाथ से निकल सकता है, अपने कर्मचारियों पर नजर रखें। वैवाहिक जीवन में नजदीकियां बढ़ेंगी। सेहत के लिहाज से नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी न होने दें, इससे आत्मबल कमजोर हो सकता है।आज का विशेष उपाय: आज के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को ताजे फल या दूध का दान करें।वृष राशिफल (Taurus Horoscope Today)वृष राशि वालों के लिए आज निवेश (Investment) यानी कहीं पैसा लगाने के लिए समय बहुत शानदार है। घर-परिवार में महिलाएं अपनी जिम्मेदारियों को बहुत अच्छे से निभाएंगी। आज आपको अपने गुस्से और अचानक आने वाले आवेश पर कंट्रोल रखना होगा, नहीं तो पड़ोसियों के साथ कोई पुराना विवाद बढ़ सकता है। अगर आप मशीनरी या फैक्ट्री से जुड़ा बिजनेस करते हैं, तो आज अच्छा मुनाफा कमाने की उम्मीद है। नौकरीपेशा लोगों को आज किसी ऑफिशियल टूर पर जाना पड़ सकता है। घर की गुप्त बातें बाहरी लोगों से शेयर करने से बचें। प्रेम संबंध सुखद रहेंगे। खानपान में गड़बड़ी के कारण पेट दर्द या गैस की समस्या परेशान कर सकती है।आज का विशेष उपाय: अपने कार्यस्थल या आसपास के गरीब कर्मचारियों को राशन सामग्री का वितरण करें।मिथुन राशिफल (Gemini Horoscope Today)मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन रिश्तों में सुधार लाने वाला रहेगा। अपनों के साथ चल रहे पुराने मनमुटाव आज सुलझ जाएंगे। विद्यार्थियों और युवाओं को किसी प्रोजेक्ट या करियर के प्रयासों में अच्छी सफलता मिलेगी। आज इस बात का खास ध्यान रखें कि कोई बाहरी व्यक्ति आपके पर्सनल लाइफ में दखल न दे। फालतू के खर्चों पर रोक लगाएं। कार्यस्थल पर कुछ नया बदलाव करने की प्लानिंग कर सकते हैं, हालांकि नौकरीपेशा लोगों को आज ऑफिस में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पारिवारिक माहौल खुशनुमा रहेगा। लव लाइफ में रोमांस बढ़ेगा। सेहत के मामले में पेट से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं।आज का विशेष उपाय: आज भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की कृपा पाने के लिए श्री सूक्त और पुरुष सूक्त का पाठ करें या सुनें।कर्क राशिफल (Cancer Horoscope Today)कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन किसी पुराने विवाद से राहत पाने का है। कोई कोर्ट-कचहरी या जमीनी विवाद किसी मध्यस्थ (तीसरे व्यक्ति) की मदद से शांति से हल हो जाएगा। आज आपका मन धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में लगेगा। हालांकि, भविष्य को लेकर कोई भी बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें। घर के बुजुर्गों के अनुभव और मार्गदर्शन को नजरअंदाज न करें, उनकी सलाह आपके काम आएगी। जो लोग लिक्विड आइटम्स (दूध, तेल, जूस आदि) का व्यापार करते हैं, उनके लिए आज बंपर मुनाफे का योग है। ऑफिस में फाइल वर्क करते समय छोटी गलती भारी पड़ सकती है। वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। युवाओं को प्रेम प्रसंगों में समय बर्बाद करने से बचना चाहिए। घर के किसी बुजुर्ग सदस्य की सेहत को लेकर थोड़ी चिंता रह सकती है।आज का विशेष उपाय: भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का यथासंभव जाप करें।सिंह राशिफल (Leo Horoscope Today)सिंह राशि के जातकों को आज किसी व्यक्तिगत या पारिवारिक समस्या को सुलझाने में किसी अनुभवी या बुजुर्ग व्यक्ति की मदद मिलेगी, जिससे बड़ी राहत मिलेगी। ससुराल पक्ष के साथ अगर कोई अनबन चल रही थी, तो वह आज दूर हो जाएगी। आज आपको अपनी वाणी और गुस्से पर बहुत ज्यादा काबू रखने की जरूरत है। बच्चों की संगति और उनकी गतिविधियों पर नजर रखें। ट्रांसपोर्ट और टूर एंड ट्रेवल्स से जुड़े कारोबारियों के लिए आज का दिन आर्थिक रूप से लाभप्रद रहेगा। सरकारी नौकरी करने वाले जातकों का आज ऑफिस में उच्च अधिकारियों (बॉस) से किसी बात पर मनमुटाव हो सकता है, इसलिए बहस से बचें। जीवनसाथी और परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। लव लाइफ में मधुरता रहेगी। आज किसी भी तरह के जोखिम भरे काम (जैसे तेज गाड़ी चलाना) से दूर रहें।आज का विशेष उपाय: आज अपने से बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करें और कोई भी काम करने से पहले उनकी राय जरूर लें।कन्या राशिफल (Virgo Horoscope Today)कन्या राशि की महिलाओं के लिए आज का दिन बेहद अनुकूल और तरक्की देने वाला है। आज किसी करीबी मित्र या रिश्तेदार से आपको कोई कीमती गिफ्ट मिल सकता है। हालांकि, आज पैसों की उधारी या लेन-देन के मामलों में बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें, नुकसान हो सकता है। भाइयों के साथ संबंध मधुर बनाकर रखें। रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े लोगों के हाथ कोई बड़ी और बेहतरीन डील लग सकती है। नौकरीपेशा लोगों को आज ऑफिस में किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने पर सराहना मिलेगी। पति-पत्नी के बीच आपसी तालमेल शानदार रहेगा। युवाओं को आज पार्टनर के साथ डेटिंग पर जाने का मौका मिल सकता है। सेहत के लिहाज से त्वचा (Skin) से जुड़ी एलर्जी या समस्या हो सकती है।आज का विशेष उपाय: आज संकटों से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।तुला राशिफल (Libra Horoscope Today)आज चंद्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं। तुला राशि के जो जातक विदेश जाने या विदेशी कंपनियों से जुड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं, उन्हें आज कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। रिश्तेदारों के साथ चल रहा कोई पुराना विवाद आज समाप्त होगा। हालांकि, आज कोई भी बड़ा या महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय जल्दबाजी बिल्कुल न करें। भावनाओं में बहकर किसी को बड़ी रकम उधार न दें, अन्यथा वह पैसा डूब सकता है। आज आपको अपने पेपर वर्क (कागजी कार्रवाई) को लेकर सबसे ज्यादा सावधान रहना होगा, बिना पढ़े किसी दस्तावेज पर साइन न करें। ज्यादा कमाई के चक्कर में किसी भी गलत या गैरकानूनी काम में हाथ न डालें। पारिवारिक जीवन शांत रहेगा। दोस्तों से मिलते समय अपनी मर्यादा का ध्यान रखें। सेहत में थोड़ी गिरावट आ सकती है, सावधान रहें।आज का विशेष उपाय: शाम के समय किसी शिव मंदिर (शिवालय) में जाकर शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।वृश्चिक राशिफल (Scorpio Horoscope Today)वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन मिलाजुला रहेगा। आपके अधिकांश काम योजनाबद्ध तरीके से समय पर पूरे होते जाएंगे, जिससे आपको मानसिक और आत्मिक सुकून मिलेगा। आज अपनी कीमती वस्तुओं और दस्तावेजों को संभालकर रखें, खोने का डर है। आज किसी भी तरह की यात्रा को टाल देना ही आपके हित में रहेगा। बिजनेस करने वाले लोग कार्यस्थल पर अपनी पैनी नजर रखें। ऑफिशियल पेपर्स और फाइलों को सुरक्षित स्थान पर रखें, गोपनीयता भंग हो सकती है। जीवनसाथी के साथ संबंधों में नजदीकियां आएंगी। लव पार्टनर के साथ लॉन्ग ड्राइव पर जाने का मौका मिल सकता है। लगातार भागदौड़ के कारण थकान और मानसिक तनाव आपकी सेहत को प्रभावित कर सकता है।आज का विशेष उपाय: सुबह उठकर तांबे के लोटे से सूर्य देवता को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।धनु राशिफल (Sagittarius Horoscope Today)धनु राशि वालों के लिए आज का समय किसी विशेष काम को पूरा करने के लिए बहुत अनुकूल है। आज आपको किसी सामाजिक या पारिवारिक समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिल सकता है, जिससे मन प्रसन्न रहेगा। हालांकि, गुस्से और जल्दबाजी में आकर आज कोई भी गलत फैसला लेने से बचें, अन्यथा बाद में पछताना पड़ सकता है। अगर आज कोई नया लोन (Loan) या उधारी लेने की सोच रहे हैं, तो किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह जरूर ले लें। बिजनेस में आज आपको अपने प्रचार-प्रसार (Marketing) को बढ़ाने की जरूरत है, तभी मुनाफा होगा। सरकारी नौकरी करने वाले लोगों को आज कोई विशेष जिम्मेदारी या स्पेशल ड्यूटी मिल सकती है। दांपत्य जीवन में छोटी-मोटी बातों को तूल न दें। लव लाइफ अच्छी रहेगी। सेहत के मामले में कब्ज या बवासीर (पाइल्स) जैसी समस्या उभर सकती है, खानपान का ध्यान रखें।आज का विशेष उपाय: आज मां दुर्गा या किसी देवी मंदिर के दर्शन करें और छोटी कन्याओं को कुछ न कुछ उपहार या मिठाई अवश्य दें।मकर राशिफल (Capricorn Horoscope Today)मकर राशि के जातकों के लिए आज का दिन खुद के व्यक्तित्व को निखारने और आत्मनिरीक्षण करने का है। फाइनेंस और पैसों से जुड़े जो काम पिछले कई दिनों से रुके हुए थे, उनमें आज गति आएगी। आज आपकी आय तो अच्छी होगी, लेकिन साथ ही साथ खर्चों की स्थिति भी बनी रहेगी, जिससे बजट बिगड़ सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखें, सफलता मिलेगी। जो लोग फूड इंडस्ट्री, होटल या रेस्टोरेंट के बिजनेस से जुड़े हैं, उनके लिए आज का दिन बंपर मुनाफा देने वाला है। कोर्ट-कचहरी से जुड़े किसी भी मामले को आज आपस में बैठकर तुरंत निपटाने की कोशिश करें। परिवार के साथ आज शॉपिंग और मनोरंजन में समय बीतेगा। बदलते मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पूरी तरह पालन करें।आज का विशेष उपाय: सुबह स्नान करने के बाद पीपल के वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करें और वहां सरसों के तेल का दीपक जलाएं।कुंभ राशिफल (Aquarius Horoscope Today)कुंभ राशि वालों के व्यक्तिगत जीवन में आज कोई बड़ा और सकारात्मक बदलाव आ सकता है। किसी पुराने और करीबी मित्र से मुलाकात पुरानी यादें ताजा करेगी और मन को सुकून देगी। हालांकि, आज ऑफिस और घर की अत्यधिक जिम्मेदारियां आपको शारीरिक रूप से थका सकती हैं। युवाओं और छात्रों को फालतू के कामों और सोशल मीडिया पर समय बर्बाद करने से बचना चाहिए। प्रॉपर्टी (जमीन-मकान) के बिजनेस से जुड़े लोगों को आज कोई बड़ी डील मिलने से बंपर फायदा होने वाला है। सरकारी कर्मचारियों पर आज काम का अतिरिक्त बोझ रहेगा, जिससे वे थोड़े परेशान हो सकते हैं। पति-पत्नी के संबंधों में मधुरता रहेगी, लेकिन प्रेम संबंधों (Love Life) में किसी बात को लेकर मनमुटाव बढ़ सकता है। सेहत का ध्यान रखें, काम के बोझ से सिरदर्द या थकान हो सकती है।आज का विशेष उपाय: आज अपने इष्टदेव का स्मरण करें और किसी भी मंदिर या धार्मिक स्थल पर जाकर कुछ समय एकांत में बैठें।मीन राशिफल (Pisces Horoscope Today)मीन राशि के जातकों का आज का दिन घर के रख-रखाव, रेनोवेशन या सुधार संबंधी योजनाओं पर खर्च होगा। अगर आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था या किसी को उधार दिया था, तो आज उसके वापस मिलने की पूरी संभावना है। प्रॉपर्टी या जमीन से जुड़ा कोई भी फैसला लेने या डील फाइनल करने से पहले उसके कागजात (Papers) अच्छी तरह जरूर चेक कर लें, धोखा हो सकता है। दोस्तों के साथ व्यर्थ में घूमने-फिरने में अपना कीमती समय बर्बाद न करें। बिजनेस में अपने स्टाफ और कर्मचारियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखें, लापरवाही नुकसान दे सकती है। आज किसी भी यात्रा पर जाने से पहले उसके रूट और मौसम की सही जानकारी जरूर जुटा लें। पारिवारिक व्यवस्था बेहतरीन रहेगी। अविवाहित जातकों के लिए आज विवाह का कोई अच्छा प्रस्ताव आ सकता है। सेहत के लिहाज से आज शरीर में किसी तरह का इंफेक्शन या सूजन जैसी परेशानी हो सकती है।आज का विशेष उपाय: आज सुबह माथे पर केसर का तिलक लगाएं, इससे आपका मन शांत और चित्त प्रसन्न रहेगा।
सनातन परंपरा और वास्तु शास्त्र में उपहार (Gifts) का लेन-देन सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि ऊर्जा के आदान-प्रदान का एक माध्यम माना गया है। उपहार किसी व्यक्ति के प्रति सम्मान, प्रेम और सहयोग की भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे बेहतरीन जरिया है। हालांकि, वास्तु शास्त्र के अनुसार उपहार देते समय हमेशा विशेष सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि एक गलत तोहफा हंसते-खेलते रिश्तों में दरार डाल सकता है, जबकि सही उपहार न केवल रिश्तों को फौलाद जैसा मजबूत बनाता है बल्कि आपके खुद के भाग्य को भी चमका देता है। इसके अलावा, तोहफे की पैकिंग और उसके पेपर का रंग भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।उपहार के लेन-देन में बरतें ये सावधानियां, नहीं तो बिगड़ जाएंगे रिश्तेवास्तु विज्ञान के अनुसार, जब भी आप किसी को कोई चीज भेंट करते हैं या किसी से स्वीकार करते हैं, तो कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य है:नियमित उपयोग की वस्तुएं दें: तोहफे में हमेशा ऐसी चीजें दें जो सामने वाले के रोजमर्रा के जीवन में काम आ सकें, इसे बेहद शुभ माना जाता है।सजावटी सामानों से बचें: घर को सजाने वाले शोपीस या डेकोरेटिव आइटम्स कम से कम उपहार में देने चाहिए।मेकअप और सौंदर्य प्रसाधन: श्रृंगार की सामग्री या ब्यूटी प्रोडक्ट्स केवल उन्हीं लोगों को गिफ्ट करें, जिनसे आपके बेहद करीबी या पारिवारिक रिश्ते हों।गिफ्ट की री-साइक्लिंग न करें: एक व्यक्ति से मिला हुआ उपहार कभी भी भूलकर दूसरे व्यक्ति को आगे फॉरवर्ड (गिफ्ट) नहीं करना चाहिए, इससे सकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।प्यार में इन चीजों से तौबा: लव लाइफ या प्रेम संबंधों में कभी भी कांच से बनी वस्तुएं या ताजमहल जैसी चीजें उपहार में न दें, यह रिश्तों में बिखराव लाती हैं।भगवान की मूर्तियां न दें: जहां तक संभव हो, देवी-देवताओं की मूर्तियां या तस्वीरें उपहार में देने से बचना चाहिए, क्योंकि उनकी नियमित पूजा-पाठ न होने पर दोष लगता है।इन 4 चीजों का गिफ्ट मिलना चमका देता है सोई हुई किस्मतवास्तु शास्त्र में कुछ खास चीजों को 'गुड लक गिफ्ट्स' (Good Luck Gifts) की श्रेणी में रखा गया है। अगर ये चीजें आपको किसी से उपहार में मिलती हैं, तो आपकी आर्थिक और मानसिक स्थिति में चमत्कारी बदलाव आ सकते हैं:1. चांदी की वस्तुएं (Silver Items)ज्योतिष और वास्तु में चांदी का सीधा संबंध चंद्रमा से माना गया है। चांदी का कोई सिक्का, आभूषण या बर्तन उपहार में मिलना या किसी को देना घर में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।2. सात दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर (7 Running Horses)वास्तु में सात सफेद दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर या मूर्ति को बेहद फलदायी माना गया है। इसे किसी को भेंट करना या उपहार में पाना करियर, नौकरी और बिजनेस में दोगुनी रफ्तार से तरक्की (Growth) होने का सूचक है।3. मिट्टी के बर्तन या शोपीस (Earthen Artifacts)मिट्टी से बने सजावटी सामान या बर्तन अगर आपको उपहार में मिलते हैं, तो यह बहुत शुभ संकेत है। माना जाता है कि इससे समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ता है, अटका हुआ धन वापस आता है और जीवन में स्थिरता आती है।4. लाफिंग बुद्धा या फेंगशुई आइटम्स (Laughing Buddha)लाफिंग बुद्धा को खुशहाली, सकारात्मकता और आर्थिक संपन्नता लाने वाला माना जाता है। वास्तु के अनुसार, लाफिंग बुद्धा को बाजार से खुद खरीदकर लाने के बजाय, किसी दूसरे व्यक्ति से उपहार में पाना कई गुना ज्यादा लाभकारी और फलदायी होता है।रिश्ते और अवसर के उद्देश्य के हिसाब से ही चुनें परफेक्ट गिफ्टवास्तु शास्त्र कहता है कि हर रिश्ते की एक अलग ऊर्जा होती है, इसलिए हमेशा सामने वाले व्यक्ति और अवसर के उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही उपहार का चयन करना चाहिए:वरिष्ठ या गुरुजन: अपने से बड़ों, मार्गदर्शकों या गुरुओं को हमेशा एक बेहतरीन कलम (Pen) या ज्ञानवर्धक पुस्तकें उपहार में दें।प्रेम संबंध: लव पार्टनर्स को आपस में बेहतरीन सुगंध (Perfume), सुंदर कपड़े या ताजे लाल गुलाब के फूल देने चाहिए।विवाह के अवसर पर: शादी-ब्याह के मौके पर नए जोड़े को नए वस्त्र, घर गृहस्थी के उपयोग में आने वाली चीजें या मिठाई भेंट करना सर्वोत्तम माना जाता है।संतान प्राप्ति: घर में नन्हे मेहमान या संतान के आगमन के अवसर पर चांदी की कोई छोटी सी चीज (जैसे चम्मच, कटोरी या कड़ा) जरूर गिफ्ट करें।पति-पत्नी के लिए: वैवाहिक जीवन में मधुरता बनाए रखने के लिए पति-पत्नी के बीच घड़ियों (Watches) का आदान-प्रदान सबसे उत्तम माना गया है।सच्ची मित्रता: दोस्तों को हमेशा चॉकलेट या संगीत (Music) से जुड़ी कोई मनपसंद चीज उपहार में देनी चाहिए।टूटे रिश्ते को जोड़ने के लिए: अगर किसी अपने से अनबन हो गई है और आप रिश्ता दोबारा सुधारना चाहते हैं, तो उन्हें सुगंधित मोमबत्तियां (Scented Candles) और एक सुंदर घड़ी उपहार में दें।
बुध का कर्क राशि में गोचर: 4 राशियों की खुलेगी किस्मत, 3 राशियों को रहना होगा बेहद सतर्क
22 जून 2026 की दोपहर 03:09 बजे बुध देव चंद्र की राशि 'कर्क' में प्रवेश कर गए हैं। 4 भाग्यशाली राशियों के जीवन में तरक्की और खुशियों की नई बहार लेकर आए हैं जबकि 3 राशियों को सतर्क रहना होगा। वृषभ, कर्क, कन्या और तुला को लाभ। सिंह, वृश्चिक और धनु को ...
Baby Boy Names Born on Monday: शिव जी की विशेष कृपा वाले 'Baby Boy Names' और उनके गहरे अर्थ
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में बच्चे के जन्म के दिन का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सप्ताह का पहला दिन यानी सोमवार (Monday) पूरी तरह से देवाधिदेव महादेव को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि सोमवार के दिन जन्म लेने वाले बच्चों पर भगवान भोलेनाथ की हमेशा विशेष और अटूट कृपा बनी रहती है। हिंदू संस्कृति में नाम का प्रभाव इंसान के स्वभाव और उसके पूरे जीवन पर पड़ता है।यदि आपके घर में भी सोमवार के दिन एक नन्हे राजकुमार (बेटे) ने जन्म लिया है, तो आप अपने लाडले के लिए भगवान शिव से प्रेरित एक बेहद अनूठा और सुंदर नाम चुन सकते हैं। यहाँ महादेव के उन शक्तिशाली और अर्थपूर्ण नामों की पूरी लिस्ट दी जा रही है, जो आपके बच्चे के जीवन को सकारात्मकता से भर देंगे।महादेव के नाम और उनके पावन अर्थ (Baby Boy Names List)नीचे भगवान शिव के कल्याणकारी नामों की सूची उनके गहरे आध्यात्मिक अर्थों के साथ दी गई है, जिन्हें आप अपने बेटे के लिए चुन सकते हैं:अ से शुरू होने वाले नामअनीश्वर: इस नाम का अर्थ है— जो स्वयं ही सबके स्वामी हैं, यानी जिसके ऊपर कोई अन्य ईश्वर न हो।अनघ: इस सुंदर नाम का मतलब होता है— जो पूरी तरह से पापरहित और पवित्र हो।अनेकात्मा: भगवान शिव के इस नाम का अर्थ है— संसार के कल्याण के लिए अनेक रूप धारण करने वाले।अव्यय: इसका अर्थ है— जो सदा एक समान रहे, जो खर्च होने या समय बीतने पर भी कभी न घटे।अव्यग्र: इस नाम का मतलब है— जो कभी भी विचलित या व्यथित न होने वाले, यानी परम शांत।अव्यक्त: इसका अर्थ है— जो सामान्य इंद्रियों के सामने आसानी से प्रकट न होने वाले, जो बेहद रहस्यमयी हों।अनंत: इस नाम का बेहद सुंदर अर्थ है— जो देश, काल और वस्तु की सीमाओं से परे हो, जिसका कभी कोई अंत न हो।क, ग और श से शुरू होने वाले नामकपर्दी: भगवान शिव के इस अनोखे नाम का मतलब है— सुंदर जटाजूट धारण करने वाले।गिरीश: इसका अर्थ है— पर्वतों के स्वामी (हिमालय और कैलाश के राजा)।गिरिश्वर: महादेव के इस नाम का मतलब है— कैलाश पर्वत पर निवास करने वाले या शयन करने वाले।शर्व: इस छोटे और मॉडर्न नाम का मतलब है— भक्तों के सभी कष्टों और दुखों को नष्ट करने वाले।शाश्वत: इसका अर्थ है— जो सनातन है, नित्य है और हमेशा रहने वाला है।त, प और व से शुरू होने वाले नामत्रिलोकेश: इस नाम का बेहद शक्तिशाली अर्थ है— तीनों लोकों (आकाश, पाताल और धरती) के स्वामी।त्रिपुरांतक: इसका अर्थ है— असुर त्रिपुरासुर का वध करने वाले, यानी बुराई का अंत करने वाले।त्रयीमूर्ति: इस नाम का धार्मिक मतलब है— वेदरूपी विग्रह करने वाले (तीनों वेदों के ज्ञाता स्वरूप)।परमात्मा: इसका अर्थ है— सब आत्माओं में सर्वोच्च, यानी परम ब्रह्म।प्रमथाधिप: इसका मतलब है— प्रमथगणों (शिव जी के गणों) के अधिपति या राजा।व्योमकेश: भगवान शिव का यह नाम बेहद खास है, इसका अर्थ है— आकाश रूपी बाल (जटाएं) धारण करने वाले।विरूपाक्ष: इसका अर्थ है— विचित्र या अलौकिक आंख वाले, यानी शिव जी के तीन नेत्र।वृषांक: इस नाम का मतलब है— बैल (नंदी) के चिह्न वाली ध्वजा या सवारी वाले।वीरभद्र: महादेव के इस रौद्र रूप का अर्थ है— जो अत्यंत वीर और पराक्रमी होते हुए भी स्वभाव से शांत स्वरूप वाले हैं।विश्वेश्वर: इस भव्य नाम का अर्थ है— सारे ब्रह्मांड और संपूर्ण विश्व के ईश्वर।स और य से शुरू होने वाले नामसदाशिव: इसका अर्थ है— जो नित्य कल्याणकारी रूप वाले हैं, जो सबका हमेशा भला करते हैं।सर्वज्ञ: इस छोटे और प्यारे नाम का मतलब है— जो सर्वव्यापी हैं और सब कुछ जानने वाले हैं।सात्त्विक: इसका अर्थ है— सत्व गुण वाले, जो पूरी तरह से सत्य, पवित्रता और अच्छाई से भरे हों।शिवाप्रिय: इस नाम का बेहद प्यारा अर्थ है— माता पार्वती (शिवा) के अत्यंत प्रिय।सामप्रिय: इसका अर्थ है— जिन्हें सामवेद के मंत्रों और सामगान से अगाध प्रेम है।यज्ञमय: भगवान शिव के इस नाम का मतलब है— जो स्वयं यज्ञ के स्वरूप हैं।सोमवार को जन्मे बच्चे का नाम रखते समय इन बातों का रखें ध्याननाम का उच्चारण: भगवान शिव के कई नाम संस्कृत के गूढ़ शब्दों से बने हैं। इसलिए ऐसा नाम चुनें जिसका उच्चारण परिवार के सभी लोग आसानी से और सही-सही कर सकें।नाम का प्रभाव: शास्त्रों के अनुसार, जब हम बच्चे को किसी शुभ नाम से बार-बार पुकारते हैं, तो उस नाम की सकारात्मक ऊर्जा बच्चे के स्वभाव में ढलने लगती है। 'शर्व', 'अनघ', 'गिरीश' या 'शाश्वत' जैसे नाम पुकारने में छोटे और बेहद आधुनिक भी लगते हैं।
आज त्रिपुष्कर योग और रविवार व्रत का महासंयोग, दोपहर से शुरू होगी भद्रा, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त
हिंदू सनातन पंचांग के अनुसार आज 21 जून 2026 को बेहद खास और पवित्र संयोग बन रहा है। आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और रविवार का दिन है। आज के दिन भगवान सूर्य नारायण की उपासना और रविवार व्रत का विशेष महत्व माना गया है। इसके साथ ही आज के पंचांग में त्रिपुष्कर योग जैसा फलदायी योग भी बन रहा है, जिसमें किए गए कार्यों का तीन गुना फल मिलता है। हालांकि, आज के दिन कोई भी नया या मांगलिक कार्य शुरू करने से पहले पंचांग के नियमों और भद्रा के समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है क्योंकि दोपहर से भद्रा का साया शुरू होने जा रहा है।आज का पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों की स्थितिआज 21 जून 2026 को सूर्योदय सुबह 05 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम को 07 बजकर 22 मिनट पर होगा। आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है जो दोपहर 02 बजकर 40 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद सप्तमी तिथि की शुरुआत हो जाएगी। आज पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा जो रात 10 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र लगेगा। आज चंद्रमा पूरे दिन और रात सिंह राशि में गोचर करेंगे, जबकि सूर्य देव मिथुन राशि में विराजमान हैं।त्रिपुष्कर योग का महामुहूर्त और दोपहर से भद्रा का सायाज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 15 मिनट तक त्रिपुष्कर योग रहेगा। इस योग में भूमि, भवन की खरीदारी या कोई बड़ा निवेश करना बेहद शुभ माना जाता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि आज दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से ही भद्रा का साया भी शुरू हो रहा है, जो अगले दिन यानी 22 जून की भोर में 03 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। चूंकि भद्रा का वास पाताल लोक में रहेगा, इसलिए इसका आंशिक असर रहेगा, फिर भी इस दौरान मांगलिक और विवाह जैसे शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है।आज का शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समयअगर आप आज कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं तो दिन के सबसे शुभ समय यानी अभिजीत मुहूर्त का उपयोग कर सकते हैं। आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। वहीं दूसरी ओर, किसी भी शुभ कार्य को करने से बचने के लिए राहुकाल के समय का ध्यान रखें। आज का राहुकाल शाम को 05 बजकर 38 मिनट से शाम को 07 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। राहुकाल के दौरान नया निवेश या यात्रा की शुरुआत करने से बचना चाहिए।आज का दिशाशूल और रविवार व्रत पूजा विधिआज रविवार होने के कारण पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। इसका मतलब है कि आज के दिन पश्चिम दिशा में लंबी दूरी की यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना बेहद जरूरी हो, तो घर से दलिया, घी या पान खाकर निकलें। आज रविवार व्रत के दिन सुबह तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें और 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से मान-सम्मान, नौकरी में तरक्की और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
बुध की उल्टी चाल शुरू: 29 जून से इन राशियों को मिलेगा लाभ, किन्हें रहना होगा सावधान?
ब्रह्मांड के 'कम्युनिकेशन मिनिस्टर' और बुद्धि के देवता, बुध, 29 जून 2026 की रात 10:45 बजे कर्क राशि में वक्री (Retrograde) होने जा रहे हैं, यानी वे अपनी उल्टी चाल शुरू करेंगे। ज्योतिष में बुध की वक्री चाल को थोड़ा पेचीदा माना जाता है, क्योंकि यह ...

