MHT CET 2026 Final Merit List: आज जारी होगी फाइनल मेरिट लिस्ट और सीट मैट्रिक्स, ऐसे करें चेक
महाराष्ट्र में इंजीनियरिंग (B.E./B.Tech) कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया में शामिल होने वाले लाखों उम्मीदवारों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) सेल आज, 27 जुलाई को एमएचटी सीईटी 2026 की फाइनल मेरिट लिस्ट (Final Merit List) और श्रेणीवार अस्थायी खाली सीट मैट्रिक्स (Category-wise Seat Matrix) जारी करने जा रहा है। जिन उम्मीदवारों ने 20 जुलाई, 2026 की निर्धारित समय सीमा तक अपने डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन (ऑनलाइन या फिजिकल) सफलतापूर्वक पूरा करा लिया था, वे अब ऑफिशियल एडमिशन पोर्टल पर जाकर अपनी फाइनल स्टेट रैंक और ऑल इंडिया रैंक चेक कर सकते हैं।MHT CET 2026 फाइनल मेरिट लिस्ट कैसे चेक करें?उम्मीदवार पोर्टल पर लिंक एक्टिवेट होने के बाद आसानी से अपनी फाइनल रैंक चेक और डाउनलोड कर सकते हैं:सबसे पहले आधिकारिक B.E./B.Tech एडमिशन पोर्टल fe2026.mahacet.org पर जाएं।होमपेज पर “Check Final MHT CET 2026 Merit List Status” वाले लिंक पर क्लिक करें।अपना एप्लीकेशन नंबर (Application Number) और जन्म तिथि (Date of Birth) दर्ज करें।सबमिट पर क्लिक करते ही आपकी फाइनल रैंक कार्ड स्क्रीन पर आ जाएगी, इसे आगे के संदर्भ के लिए डाउनलोड और प्रिंट कर लें।CAP राउंड 1 एडमिशन का पूरा टाइमलाइन (Schedule)एडमिशन एक्टिविटीमहत्वपूर्ण तारीखफाइनल मेरिट लिस्ट और सीट मैट्रिक्स का प्रकाशन27 जुलाई, 2026CAP राउंड 1 ऑप्शन फॉर्म सबमिशन और चॉइस लॉकिंग28 जुलाई से 30 जुलाई, 2026CAP राउंड 1 प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट2 अगस्त, 2026सीट एक्सेप्टेंस और अलॉटेड इंस्टिट्यूट में रिपोर्टिंग3 अगस्त से 5 अगस्त, 2026CAP राउंड 2 के लिए खाली सीटों का डिस्प्ले6 अगस्त, 2026ऑप्शन फॉर्म और चॉइस लॉकिंग है सबसे अहम कदमसीईटी सेल के अनुसार, 28 जुलाई से 30 जुलाई तक उम्मीदवारों को ऑनलाइन ऑप्शन फॉर्म में अपने पसंदीदा कॉलेजों और ब्रांच (Colleges & Branches) का चयन करना होगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि सीट अलॉटमेंट की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए उम्मीदवार अपनी रैंक के अनुसार ज्यादा से ज्यादा एलिजिबल प्रेफरेंस (Preferences) सबमिट करें।मेरिट रैंकिंग और टाई-ब्रेकिंग नियमसीईटी सेल द्वारा महाराष्ट्र स्टेट (MS) उम्मीदवारों की रैंक MHT CET पर्सेंटाइल के आधार पर और ऑल इंडिया (AI) उम्मीदवारों की रैंक जेईई मेन (JEE Main) स्कोर के जरिए अलग-अलग तैयार की जाती है।यदि दो या दो से अधिक उम्मीदवारों का स्कोर एक समान रहता है, तो टाई-ब्रेकिंग (Tie-Breaking Order) के लिए इन नियमों को प्राथमिकता दी जाएगी:सबसे पहले गणित (Mathematics) में अधिक अंक/पर्सेंटाइल।फिर फिजिक्स (Physics) के अंक।उसके बाद केमिस्ट्री (Chemistry) के अंक।आखिर में अधिक उम्र वाले उम्मीदवार को उच्च प्राथमिकता मिलेगी।
हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़ाई-लिखाई में आगे बढ़े और जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छुए। लेकिन जब बच्चों में सीखने की गति धीमी (Slow Learner) होती है या उन्हें किसी प्रकार की विशेष आवश्यकता (Special Child / Neurodivergent) होती है, तो पैरेंट्स के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि उनके बच्चे के लिए किस तरह की शिक्षा प्रणाली सबसे बेहतर होगी। क्या ऐसे बच्चों को पारंपरिक रेगुलर स्कूलों (Regular Schools) में पढ़ाना चाहिए या फिर ओपन स्कूलिंग जैसे कि NIOS (National Institute of Open Schooling) का रुख करना चाहिए? यह सवाल आज के समय में देश के लाखों परिवारों की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है।रेगुलर स्कूल बनाम स्पेशल स्कूल: क्या आपका बच्चा सामान्य कक्षा का दबाव झेल सकता है?पारंपरिक रेगुलर स्कूलों में पढ़ाई का माहौल काफी प्रतिस्पर्धी (Competitive) होता है, जहां हर बच्चे से एक तय गति से सीखने और परीक्षा में अंक लाने की उम्मीद की जाती है। यदि कोई बच्चा स्लो लर्नर है या उसे ऑटिज्म, एडीएचडी (ADHD) या डिस्लेक्सिया जैसी लर्निंग डिसेबिलिटी है, तो रेगुलर स्कूल का भारी-भरकम पाठ्यक्रम और क्लासरूम का दबाव उसके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। हालांकि, कई समावेशी (Inclusive) स्कूल अब विशेष शिक्षकों (Special Educators) और काउंसलर की मदद से ऐसे बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि बच्चे का सामाजिक विकास बेहतर करना है और उसकी स्थिति बहुत गंभीर नहीं है, तो सही सपोर्ट सिस्टम के साथ रेगुलर स्कूल एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।NIOS (ओपन स्कूलिंग) क्यों बन रहा है स्पेशल बच्चों और स्लो लर्नर्स के लिए वरदान?दूसरी तरफ, यदि बच्चे की सीखने की क्षमता सामान्य से काफी अलग है या वह रेगुलर स्कूल की सख्त दिनचर्या और परीक्षा के तनाव को नहीं संभाल पा रहा है, तो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) एक बेहतरीन और जीवन बदलने वाला विकल्प साबित होता है। NIOS प्रणाली छात्रों को अपनी खुद की गति (Pace) से पढ़ाई करने की पूरी छूट देती है। इसमें विषयों के चयन की फ्लैक्सिबिलिटी होती है, और छात्र अपनी पसंद के अनुसार क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम का लाभ उठा सकते हैं। विशेष बच्चों के लिए NIOS न केवल परीक्षा के तनाव को कम करता है, बल्कि उन्हें व्यावसायिक कौशल (Vocational Courses) सीखने का भरपूर अवसर भी देता है, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।पैरेंट्स के लिए जरूरी सलाह: बच्चे की क्षमता पहचानें, समाज का दबाव न लेंविशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के शैक्षणिक भविष्य का फैसला करते समय माता-पिता को समाज या रिश्तेदारों के दबाव में आने के बजाय अपने बच्चे की आंतरिक खूबियों और सीमाओं को समझना चाहिए। किसी भी स्कूल या बोर्ड का चयन करने से पहले किसी बाल मनोवैज्ञानिक (Child Psychologist) या स्पेशल एजुकेशन काउंसलर से परामर्श जरूर लें। बच्चे की काउंसलिंग कराएं और यह देखें कि वह किस माहौल में सबसे ज्यादा सहज और खुश महसूस करता है। याद रखें, हर बच्चा अपने आप में खास होता है और सही मार्गदर्शन मिलने पर वह अपनी यूनीक क्षमता के बल पर जीवन में जरूर मुकाम हासिल करता है।
देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) को लेकर सुप्रीम कोर्ट से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। सर्वोच्च अदालत ने नीट-यूजी परीक्षा के दौरान छात्रों को दिए गए ग्रेस मार्क्स (Grace Marks) और स्कोरकार्ड से जुड़ी विसंगतियों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले से उन हजारों अभ्यर्थियों को तगड़ा झटका लगा है, जो परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और ग्रेस मार्क्स को लेकर नए सिरे से जांच या दोबारा परीक्षा की उम्मीद लगाए बैठे थे। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख ने साफ कर दिया है कि अब इस मामले में कानूनी मोर्चे पर छात्रों के हाथ निराशा लगी है।सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए क्या दी मुख्य दलीलें?सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रक्रिया की पवित्रता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप से न केवल पूरी प्रवेश प्रक्रिया में देरी होती है, बल्कि इससे उन लाखों छात्रों के भविष्य पर भी संकट खड़ा हो जाता है जिन्होंने निष्पक्ष रूप से परीक्षा पास की है। कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा अपनाई गई मूल्यांकन पद्धति और विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट को आधार मानते हुए हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया, जिसके चलते याचिकाकर्ताओं की दलीलें अदालत में टिक नहीं सकीं।मेडिकल प्रवेश परीक्षा के छात्रों और NTA पर इस फैसले का क्या असर?इस ऐतिहासिक फैसले के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित करने वाले मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के लिए आगे का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अब बिना किसी कानूनी अड़चन के आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया तय समय पर पूरी हो सकेगी। हालांकि, दूसरी तरफ इस फैसले से उन मेडिकल एस्पिरेंट्स में भारी मायूसी छाई है जिनका स्कोर कम रह गया था या जिन्हें ग्रेस मार्क्स के विवाद के कारण कॉलेज आवंटन में नुकसान की आशंका थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले के बाद अब छात्रों को पूरी तरह से आगामी काउंसलिंग राउंड और अपनी आगे की रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना होगा।देश भर के कोचिंग हब्स और स्टूडेंट कम्युनिटी में गरमाया मुद्दाभौगोलिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से देखें तो कोटा, दिल्ली, लखनऊ, पटना और जयपुर जैसे देश के तमाम बड़े कोचिंग हब्स में इस फैसले को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। नीट-यूजी जैसी देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही को लेकर चल रही बहस इस फैसले के बाद एक नया मोड़ ले चुकी है। आने वाले समय में छात्र संगठनों और शिक्षाविदों द्वारा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए और अधिक ठोस नियमों की मांग किए जाने की पूरी उम्मीद है, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके।
UPSC में AIR 28 और BPSC में 92वीं रैंक! प्राची हनी ने रचा इतिहास, अब बनेंगी IAS अफसर
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम सामने आते ही देश भर से सफलता की कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आ रही हैं। इसी फेहरिस्त में एक ऐसा नाम चमक रहा है जिसने अपनी मेहनत और अटूट लगन के दम पर पूरे उत्तर प्रदेश और देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। मेधावी छात्रा प्राची हनी ने यूपीएससी के प्रतिष्ठित इम्तिहान में ऑल इंडिया रैंक 28 (AIR 28) हासिल करके इतिहास रच दिया है। खास बात यह है कि यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहराने के साथ-साथ उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में भी 92वीं रैंक हासिल कर अपनी डबल सक्सेस दर्ज कराई है। उनकी इस दोहरी कामयाबी से उनके परिवार और पूरे इलाके में जश्न का माहौल है।असफलता से न घबराने का जज्बा और सेल्फ-स्टडी का अचूक फॉर्मूलाप्राची हनी की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का कड़ा संघर्ष, अनुशासन और कभी हार न मानने वाला एटीट्यूड शामिल है। मीडिया से बातचीत में प्राची ने साझा किया कि किस तरह उन्होंने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान की भारी-भरकम फीस के अपने दम पर सेल्फ-स्टडी और स्मार्ट स्ट्रेटजी को अपनी तैयारी का हथियार बनाया। रोजाना 10 से 12 घंटे की नियमित पढ़ाई, सिलेबस की गहरी समझ और पिछले सालों के प्रश्नपत्रों का गहराई से विश्लेषण करना उनकी सफलता की मुख्य कुंजी रहा। कई बार मॉक टेस्ट में कम अंक आने के बावजूद उन्होंने कभी अपनाौ आत्मविश्वास नहीं डगमगाने दिया।प्राची के आईएएस बनने से परिवार और स्थानीय क्षेत्र में जश्न का माहौलभौगोलिक और स्थानीय दृष्टिकोण से देखें तो प्राची हनी की इस ऐतिहासिक सफलता ने उत्तर प्रदेश के युवाओं, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों की बेटियों के लिए सफलता के नए दरवाजे खोल दिए हैं। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। स्थानीय लोगों और युवाओं में इस बात को लेकर भारी उत्साह है कि उनके बीच से निकली एक बेटी अब देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पदों में से एक यानी आईएएस (IAS) के रूप में प्रशासनिक व्यवस्था की बागडोर संभालेगी। प्राची की सफलता साबित करती है कि अगर सही दिशा में कड़ी मेहनत की जाए, तो कोई भी सपना असंभव नहीं है।यूपीएससी और बीपीएससी की तैयारी करने वालेaspirants के लिए बड़ी प्रेरणाआज के दौर में जब लाखों युवा सिविल सेवा की तैयारी में अपना दिन-रात एक कर रहे हैं, प्राची हनी की यह जर्नी एक परफेक्ट केस स्टडी बन गई है। उन्होंने साबित कर दिया है कि निरंतरता (Consistency), धैर्य और उत्तर लेखन (Answer Writing) की बेहतर शैली किसी भी उम्मीदवार को फर्श से अर्श तक पहुंचा सकती है। प्राची का आईएएस बनने का यह सफर देश के तमाम भावी सिविल सेवकों के लिए प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत बन गया है, जो उन्हें हर मुश्किल परिस्थिति में आगे बढ़ने का हौसला देगा।
बोर्ड एग्जाम्स में कंपार्टमेंट आना किसी भी स्टूडेंट के लिए थोड़ी टेंशन की बात हो सकती है, लेकिन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने इसे सुधारने का मौका दे दिया है। अगर आप या आपके आस-पास कोई स्टूडेंट 12वीं कक्षा की सप्लीमेंट्री (कंपार्टमेंट) परीक्षा की तैयारी कर रहा है, तो यह अपडेट आपके लिए बहुत काम का है।CBSE ने 12वीं कक्षा के सप्लीमेंट्री एग्जाम्स का पूरा शेड्यूल और गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। सबसे अहम बात यह है कि मुख्य परीक्षा 28 जुलाई 2026 को पूरे देश में आयोजित की जाएगी और इसके एडमिट कार्ड ऑफिशियल वेबसाइट पर आ चुके हैं। वहीं, प्रैक्टिकल परीक्षाओं की तारीख 29 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच तय की गई है।आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं कि किन स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल देना है और बोर्ड के नए नियम क्या कहते हैं।किन छात्रों को देना होगा प्रैक्टिकल एग्जाम?बोर्ड ने सप्लीमेंट्री प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए स्टूडेंट्स को मुख्य रूप से दो कैटेगरी में बांटा है:पहली कैटेगरी (सिर्फ प्रैक्टिकल में फेल): जिन छात्रों को सिर्फ प्रैक्टिकल एग्जाम क्लियर न कर पाने की वजह से कंपार्टमेंट मिली है, उन्हें केवल प्रैक्टिकल परीक्षा ही देनी होगी। इन्हें थ्योरी का पेपर दोबारा देने की कोई जरूरत नहीं है; थ्योरी में जो नंबर उन्हें पहले मिले थे, वही आगे कैरी फॉरवर्ड कर दिए जाएंगे।दूसरी कैटेगरी (थ्योरी + प्रैक्टिकल दोनों में फेल): जो छात्र थ्योरी और प्रैक्टिकल, दोनों में पास नहीं हो पाए थे, उन्हें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल परीक्षा भी दोबारा देनी होगी।स्टूडेंट्स और स्कूलों के लिए 5 सबसे जरूरी बातेंअगर आप सप्लीमेंट्री एग्जाम में बैठ रहे हैं, तो इन पॉइंट्स को बिल्कुल मिस न करें:स्कूल से तुरंत करें संपर्क: सभी स्टूडेंट्स को अपने रिजल्ट/मार्कशीट और नए एडमिट कार्ड की कॉपी के साथ 27 जुलाई 2026 तक हर हाल में अपने स्कूल या एग्जाम सेंटर से संपर्क करना होगा।प्राइवेट कैंडिडेट्स के लिए नियम: जो छात्र प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर परीक्षा दे रहे हैं, उनके प्रैक्टिकल एग्जाम उसी सेंटर पर होंगे जहां उनका थ्योरी एग्जाम सेंटर पड़ा है।सेंटर पर सुविधा न होने पर क्या होगा? अगर किसी थ्योरी एग्जाम सेंटर पर किसी खास सब्जेक्ट के प्रैक्टिकल की सुविधा नहीं है, तो रीजनल ऑफिस पास के ही किसी दूसरे स्कूल में उस प्रैक्टिकल को कराने का इंतजाम करेगा।रिजल्ट में नहीं होगी देरी: एग्जाम सेंटर्स को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सप्लीमेंट्री प्रैक्टिकल एग्जाम खत्म होते ही, उसी दिन छात्रों के मार्क्स सीबीएसई के पोर्टल पर अपलोड करने होंगे।ऑफिशियल आंसर बुक: इन परीक्षाओं के लिए सिर्फ रीजनल ऑफिस से मिली ऑफिशियल प्रैक्टिकल आंसर बुक्स का ही इस्तेमाल किया जाएगा।छात्र अपनी सहूलियत और पूरी जानकारी के लिए CBSE की आधिकारिक वेबसाइट (cbse.gov.in) पर जाकर ऑफिशियल नोटिस भी चेक कर सकते हैं और अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
भारतीय रेलवे (Indian Railways) में सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाले देश के बेरोजगार युवाओं के बीच इस समय अब तक की सबसे भीषण प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा निकाली गई ग्रुप डी, एनटीपीसी और अन्य तकनीकी संवर्ग की कुल 92,116 नौकरियों के लिए देश भर से रिकॉर्डतोड़ आवेदन आए हैं। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन पदों के लिए आयोजित की गई परीक्षाओं में कुल 3.58 करोड़ से अधिक अभ्यर्थियों ने अपनी किस्मत आजमाई है। इस विशाल आंकड़े ने प्रतियोगिता के स्तर को इतने ऊंचे मुकाम पर पहुंचा दिया है कि अब रेलवे की महज एक सीट पाने के लिए औसतन 3,400 से ज्यादा उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर चल रही है।दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा प्रक्रिया, महीनों चला सिलसिलारेलवे की इस मेगा भर्ती परीक्षा को संपन्न कराना रेलवे भर्ती बोर्ड और प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। देश भर के सैकड़ों शहरों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) का आयोजन कई महीनों तक अलग-अलग शिफ्टों में किया गया। 3.58 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों के बैठने, सुरक्षा और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के इंतजामों को मुस्तैद रखने के लिए रेलवे ने हाई-टेक डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का सहारा लिया। इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा का आयोजन होना अपने आप में एक वैश्विक रिकॉर्ड माना जा रहा है, जिसने भारतीय युवाओं के भीतर सरकारी नौकरी के प्रति दीवानगी को एक बार फिर जगजाहिर कर दिया है।एक-एक पद के लिए मची है होड़, कट-ऑफ आसमान छूने के आसाररेलवे रिक्रूटमेंट के इस ताजा समीकरण ने उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है जो दिन-रात तैयारी में जुटे हुए थे। एक सीट पर 3,400 दावेदारों की मौजूदगी का सीधा मतलब यह है कि इस बार परीक्षाओं का फाइनल कट-ऑफ (Cut-Off Marks) उम्मीद से कहीं ज्यादा ऊपर जा सकता है। परीक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निगेटिव मार्किंग और नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया के बाद केवल वही छात्र अंतिम सूची में जगह बना पाएंगे, जिन्होंने न केवल अधिकतम स्कोर किया है बल्कि सटीकता भी बनाए रखी है। इस भारी प्रतिस्पर्धा ने रेलवे की ग्रुप डी और क्लर्क स्तर की परीक्षाओं को भी देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की लीग में खड़ा कर दिया है।बिहार, यूपी और राजस्थान जैसे लोकल हब्स में सबसे ज्यादा उबालइस ऐतिहासिक रेलवे परीक्षा का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के स्थानीय बाजारों और कोचिंग हब्स में देखा जा रहा है। पटना, प्रयागराज, जयपुर और इंदौर जैसे शहरों में रहने वाले लाखों छात्र इस परीक्षा के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, इन राज्यों से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभागों को भी परीक्षा के दिनों में विशेष ट्रेनें चलानी पड़ी थीं ताकि ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों को केंद्रों तक पहुंचने में कोई असुविधा न हो। अब सभी की नजरें आंसर-की और रिजल्ट्स पर टिकी हुई हैं।
भारतीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अक्सर अपने बयानों और दौरों को लेकर मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सियासत के मैदान में उतरने से पहले राहुल गांधी का एजुकेशनल बैकग्राउंड (Educational Background) कितना मजबूत रहा है? दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई शुरू कर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे हार्वर्ड और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी तक का सफर तय करने वाले राहुल गांधी की डिग्रियां और उनका पुराना कॉरपोरेट करियर किसी को भी हैरान कर सकता है। आइए जानते हैं उनकी शिक्षा और उस विदेशी नौकरी की पूरी इनसाइड स्टोरी।दिल्ली के सेंट स्टीफेंस से शुरुआत और सुरक्षा कारणों से अमेरिका का रुखराहुल गांधी की शुरुआती स्कूली शिक्षा देहरादून के मशहूर द दून स्कूल से हुई थी। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने साल 1989 में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के सबसे प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज में एडमिशन लिया, जहां उन्होंने इतिहास की पढ़ाई शुरू की। हालांकि, साल 1991 में पिता राजीव गांधी की असमय हत्या के बाद सुरक्षा कारणों के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उन्हें अमेरिका के मशहूर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) भेजा गया, लेकिन सुरक्षा के कड़े घेरे और नाम छिपाने की मजबूरी के कारण उन्होंने बाद में फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज में दाखिला लिया, जहां से साल 1994 में उन्होंने अपनी बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) की डिग्री पूरी की।कैंब्रिज से मास्टर डिग्री और असली नाम छिपाकर की पढ़ाईरोलिंस कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद राहुल गांधी दुनिया के सबसे नामचीन विश्वविद्यालयों में से एक कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (University of Cambridge) के ट्रिनिटी कॉलेज पहुंचे। सुरक्षा के बेहद संवेदनशील प्रोटोकॉल के कारण कैंब्रिज में उन्होंने अपना असली नाम छिपाकर 'रॉल विंची' (Raul Vinci) के छद्म नाम से दाखिला लिया था। यहां तक कि केवल विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को ही उनकी असली पहचान पता थी। इसी संस्थान से राहुल गांधी ने साल 1995 में डेवलपमेंट स्टडीज (Development Studies) में एम.फिल (M.Phil) की मास्टर डिग्री हासिल की, जो उनकी उच्च शैक्षणिक योग्यता को दर्शाती है।राजनीति में एंट्री से पहले लंदन के इस कॉरपोरेट फर्म में की नौकरीकई लोगों को लगता है कि राहुल गांधी सीधे राजनीति में आ गए थे, लेकिन सच यह है कि उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद एक आम पेशेवर की तरह कॉरपोरेट वर्ल्ड में काम किया। कैंब्रिज से निकलने के बाद राहुल गांधी ने लंदन का रुख किया और वहां की एक नामी मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म 'मॉनिटर ग्रुप' (Monitor Group) में बतौर कंसलटेंट काम करना शुरू किया। इस कंपनी में भी उन्होंने 'रॉल विंची' के नाम से ही कुछ सालों तक नौकरी की ताकि वे बिना किसी वीआईपी ट्रीटमेंट के कॉर्पोरेट अनुभव ले सकें। इसके बाद साल 2002 में वे भारत लौटे और मुंबई में अपनी खुद की एक टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग फर्म शुरू की, जिसके बाद साल 2004 में उन्होंने अमेठी से चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से हुए कथित भर्ती घोटाले को लेकर इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। जांच एजेंसियों ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए श्वेता गुप्ता और रामवीर सिंह समेत 5 मुख्य आरोपियों को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया है। राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस बड़े सिंडिकेट के खुलासे के बाद पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस ताबड़तोड़ पुलिसिया एक्शन के बाद सालों से इंसाफ की गुहार लगा रहे अभ्यर्थियों में एक नई उम्मीद जगी है।क्या है जेपीएससी भर्ती घोटाला और कैसे खुली धांधली की पोलयह पूरा मामला झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की गई सिविल सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन से जुड़ा है। आरोप है कि योग्य और मेरिट वाले छात्रों को दरकिनार करके बैकडोर एंट्री के जरिए मोटी रकम लेकर पसंदीदा उम्मीदवारों को प्रशासनिक पदों पर बिठाया गया। जांच में सामने आया कि परीक्षा के अंकों में हेरफेर करने के साथ-साथ ओएमआर (OMR) शीट को खाली छोड़ने वाले अभ्यर्थियों को भी पास कर दिया गया था। जब असफल छात्रों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और जांच एजेंसियों को पुख्ता डिजिटल सबूत सौंपे, तब जाकर इस सुनियोजित भ्रष्टाचार की परतें एक-एक कर खुलने लगीं।श्वेता गुप्ता और रामवीर सिंह की गिरफ्तारी और जांच का दायराविशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने हालिया छापेमारी के दौरान श्वेता गुप्ता और रामवीर सिंह को उनके ठिकानों से दबोचा है। शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इन आरोपियों के पास से कई संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और बैंक खातों के विवरण मिले हैं जो सीधे तौर पर परीक्षा माफियाओं से जुड़े होने का संकेत देते हैं। पकड़े गए आरोपी आयोग के भीतर और बाहर बिचौलियों का नेटवर्क चला रहे थे, जो मोटी रकम के बदले परीक्षा के नतीजों को प्रभावित करते थे। अदालत ने इन सभी आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया है ताकि इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।अब तक की जांच में क्या-क्या हुआ और आगे की राहइस घोटाले में अब तक कई कड़े प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जा चुके हैं। कई विवादित नियुक्तियों को पहले ही रद्द या सस्पेंड किया जा चुका है और पूर्व पदाधिकारियों से भी लंबी पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारियां सिर्फ शुरुआत हैं और आने वाले दिनों में कुछ बड़े अधिकारियों और सफेदपोशों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है। इधर, स्थानीय छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों का कहना है कि वे इस कार्रवाई का स्वागत करते हैं, लेकिन उनकी मांग है कि पूरी जांच को पारदर्शी बनाकर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में झारखंड की सबसे बड़ी प्रशासनिक परीक्षा की शुचिता बरकरार रह सके।
देश के सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में इन दिनों भारी राजनीतिक और वैचारिक जंग छिड़ गई है। परीक्षा प्रणालियों और हालिया प्रशासनिक सुधारों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के रुख पर विश्वविद्यालय पूरी तरह से दो गुटों में बंट गया है। एक तरफ जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ बड़े और प्रमुख कॉलेजों के प्राचार्यों व शिक्षक संघों ने शिक्षा मंत्री की नीतियों और सुधारवादी कदमों का खुला समर्थन किया है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख छात्र संगठनों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्र नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कैंपस में विरोध प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन धरना पूरी तरह जारी रहेगा।कुछ कॉलेजों ने क्यों किया केंद्रीय शिक्षा मंत्री का समर्थनविश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों और कई कॉलेज काउंसिलों की तरफ से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पक्ष में एक सकारात्मक सुर देखने को मिला है। समर्थन करने वाले कॉलेजों का तर्क है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा उच्च शिक्षा में पारदर्शिता लाने और तकनीकी बदलावों को लागू करने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे लंबी अवधि में छात्रों के हित में हैं। इन कॉलेजों के प्रबंधकों का मानना है कि परीक्षा सुधारों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन से दिल्ली यूनिवर्सिटी की वैश्विक रैंकिंग और शैक्षणिक स्तर में बड़ा सुधार होगा। इसी वजह से वे सरकार के इन फैसलों के साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं।छात्र संगठनों का आर-पार का मूड, कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था सख्तदूसरी तरफ, वामपंथी और अन्य विपक्षी विचारधारा वाले छात्र संगठनों ने इस समर्थन को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। छात्र नेताओं का आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय के हालिया फैसले आम छात्रों के हितों के खिलाफ हैं और इससे शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। कैंपस में सुबह से ही भारी नारेबाजी और पोस्टर वॉर का दौर शुरू हो गया है। छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। दिल्ली के नॉर्थ और साउथ दोनों ही कैंपस में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन और यूनिवर्सिटी सिक्योरिटी ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती कर दी गई है।संवाद या टकराव: दिल्ली यूनिवर्सिटी में आगे क्या होगाइस कूटनीतिक और वैचारिक खींचतान के बीच आम छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा भी मंडराने लगा है। अकादमिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दोनों पक्षों के बीच जल्द ही कोई सकारात्मक संवाद (Dialogue) स्थापित नहीं हुआ, तो यह टकराव आने वाले दिनों में और उग्र रूप ले सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों को एक मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है ताकि कैंपस के शांत और शैक्षणिक माहौल को दोबारा बहाल किया जा सके। अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्रालय और यूनिवर्सिटी के शीर्ष अधिकारी इस सुलगते विवाद को शांत करने के लिए क्या बीच का रास्ता निकालते हैं।
देश में परीक्षा प्रणालियों की शुचिता पर एक बार फिर से बेहद गंभीर दाग लग गया है। एक के बाद एक आ रही पेपर लीक की खबरों के बीच अब एक और बड़ी परीक्षा का पेपर लीक होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सबसे ज्यादा हैरान और शर्मसार करने वाली बात यह है कि इस पूरे काले कारोबार का मास्टरमाइंड कोई बाहरी नकल माफिया नहीं, बल्कि छात्रों को शिक्षा देने वाला एक कॉलेज प्रोफेसर ही निकला है। आरोपी प्रोफेसर ने परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले सभी गोपनीय नियमों को ताक पर रखकर प्रश्नपत्र के सवालों को व्हाट्सएप (WhatsApp) पर कुछ चुनिंदा ग्रुप्स और छात्रों को धड़ल्ले से शेयर कर दिया। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।परीक्षा केंद्र से लीक हुए सवाल और व्हाट्सएप पर मची खलबलीस्थानीय जांच एजेंसियों और पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह पूरी वारदात परीक्षा शुरू होने के महज कुछ घंटे पहले अंजाम दी गई। आरोपी प्रोफेसर की ड्यूटी परीक्षा पत्र की गोपनीयता बनाए रखने और उसे सुरक्षित सेंटर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी में लगाई गई थी। लेकिन पद का दुरुपयोग करते हुए प्रोफेसर ने स्ट्रांग रूम या सील पैकेट से प्रश्नपत्र की तस्वीरें खींचीं और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर वायरल कर दिया। परीक्षा शुरू होने के दौरान जब कुछ छात्रों के मोबाइल पर यह सवाल मैच होते पाए गए, तो फ्लाइंग स्क्वाड और स्थानीय पर्यवेक्षकों ने तुरंत इसकी भनक पुलिस को दी। तकनीकी इनपुट और मोबाइल चैट हिस्ट्री की जांच के बाद सीधे प्रोफेसर की संलिप्तता सामने आई और उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया गया।पुलिसिया कार्रवाई और आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधानमामला दर्ज होते ही स्थानीय पुलिस और साइबर सेल की टीम ने तुरंत जाल बिछाया। आरोपी प्रोफेसर के मोबाइल को जब्त कर लिया गया है, जिसमें कई संदिग्ध व्हाट्सएप चैट्स, लेनदेन के डिजिटल सबूत और बैंक अकाउंट डिटेल्स बरामद हुए हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट में केवल यह प्रोफेसर ही शामिल नहीं है, बल्कि इसके तार कुछ कोचिंग संचालकों और बिचौलियों से भी जुड़े होने की पूरी आशंका है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आरोपी के खिलाफ नए सख्त एंटी-पेपर लीक कानून और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा, जिसमें भारी जुर्माने के साथ-साथ उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।लाखों छात्रों के भविष्य पर मंडराया संकट, परीक्षा रद्द होने की आशंकाइस ताजा पेपर लीक कांड ने एक बार फिर पूरी परीक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिन लाखों ईमानदार छात्रों ने दिन-रात एक करके इस परीक्षा की तैयारी की थी, वे अब पूरी तरह से सदमे और गुस्से में हैं। स्थानीय छात्र संगठनों ने इस धांधली के विरोध में उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है और परीक्षा को तुरंत रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी तरीके से आयोजित कराने की मांग की है। हालांकि, परीक्षा बोर्ड और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे अभी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि यह लीक कितने बड़े पैमाने पर हुआ था, जिसके बाद ही परीक्षा को रद्द करने या आगामी तारीखों को लेकर कोई अंतिम और आधिकारिक फैसला लिया जाएगा।
अगर आप एविएशन (विमानन) सेक्टर में एक सुरक्षित और शानदार करियर बनाने की चाह रखते हैं, तो एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) आपके लिए एक बेहतरीन मौका लेकर आया है। एएआई ने मैनेजर (ग्रुप-ए) और जूनियर एग्जीक्यूटिव (ग्रुप-बी) के कुल 389 पदों पर सीधी भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 8 अगस्त 2026 से एएआई की आधिकारिक वेबसाइट aai.aero पर जाकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 तय की गई है।पदों का ब्योरा और वैकेंसी डिटेलइस भर्ती अभियान के जरिए कुल 389 पदों को भरा जाएगा, जिनमें 260 पद मैनेजर और 129 पद जूनियर एग्जीक्यूटिव के शामिल हैं:मैनेजर पद (260 पद): इसमें सबसे ज्यादा 145 सीटें मैनेजर (सिविल इंजीनियरिंग) के लिए हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल, फाइनेंस, आईटी, आर्किटेक्चर, लॉ, फायर सर्विसेज, ऑपरेशंस, कमर्शियल, कॉर्पोरेट प्लानिंग और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस जैसे विभागों में भर्तियां होंगी।जूनियर एग्जीक्यूटिव पद (129 पद): इसमें सबसे ज्यादा 79 सीटें जूनियर एग्जीक्यूटिव (ऑपरेशंस) के लिए हैं। अन्य वैकेंसी फाइनेंस, लॉ, और सर्वे एंड कार्टोग्राफी विभाग में उपलब्ध हैं।ध्यान दें: यदि कोई उम्मीदवार एक से अधिक पदों के लिए अप्लाई करना चाहता है, तो उसे हर पद के लिए अलग से रजिस्ट्रेशन करना होगा और अलग आवेदन शुल्क देना होगा।योग्यता, आयु सीमा और अनुभवआयु सीमा (7 सितंबर 2026 तक): मैनेजर पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष और जूनियर एग्जीक्यूटिव पद के लिए 27 वर्ष रखी गई है। आरक्षित श्रेणियों को सरकारी नियमों के तहत छूट मिलेगी।शैक्षणिक योग्यता व अनुभव: पद के अनुसार संबंधित विषय में डिग्री जरूरी है। मैनेजर पद के लिए संबंधित क्षेत्र में 3 साल का वर्क एक्सपीरियंस होना अनिवार्य है, जबकि जूनियर एग्जीक्यूटिव पद के लिए किसी अनुभव की आवश्यकता नहीं है।चयन प्रक्रिया: बिना नेगेटिव मार्किंग के होगी परीक्षाउम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) के आधार पर किया जाएगा। इस परीक्षा में ऑब्जेक्टिव (MCQ) सवाल पूछे जाएंगे और सबसे राहत की बात यह है कि परीक्षा में कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी।इसके बाद शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। मैनेजर (फायर सर्विसेज) पद के लिए आवेदकों को फिजिकल मेजरमेंट, ड्राइविंग और फिजिकल एंड्योरेंस टेस्ट भी पास करना होगा।सैलरी और आवेदन शुल्कपे-स्केल (सैलरी): मैनेजर पद के लिए चुने गए उम्मीदवारों को ₹60,000 से ₹1,80,000 का पे-स्केल (वार्षिक CTC लगभग ₹21 लाख) मिलेगा। वहीं जूनियर एग्जीक्यूटिव के लिए ₹40,000 से ₹1,40,000 का पे-स्केल (वार्षिक CTC लगभग ₹14 लाख) तय किया गया है।आवेदन शुल्क: सामान्य, EWS और OBC वर्ग के लिए शुल्क ₹1,000 है। वहीं SC, ST, दिव्यांग, महिला अभ्यर्थियों और AAI के 1 साल के अप्रेंटिस उम्मीदवारों के लिए आवेदन पूरी तरह नि:शुल्क है।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 395 पदों पर बंपर भर्ती शुरू, 10 अगस्त से पहले ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई
अगर आप बैंकिंग सेक्टर में अपना शानदार करियर बनाने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद काम की खबर है। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में से एक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने साल 2026-27 के लिए अपनी नई भर्ती प्रक्रिया की घोषणा कर दी है। बैंक ने कुल 395 पदों पर योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे हैं। जो भी उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 10 अगस्त 2026 तक अपना फॉर्म भर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 21 जुलाई से ही शुरू हो चुकी है।किन-किन पदों पर होगी नियुक्ति?बैंक ने इस भर्ती अभियान के जरिए डोमेन विशेषज्ञ, सामान्य बैंकिंग अधिकारी और विशेष अधिकारी के पद निकाले हैं। अगर वैकेंसी के बंटवारे की बात करें तो इसमें 163 मैनेजर, 153 सीनियर मैनेजर, 52 चीफ मैनेजर, 20 असिस्टेंट जनरल मैनेजर और 7 डिप्टी जनरल मैनेजर के पद शामिल किए गए हैं। इन सभी पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन रखी गई है, इसलिए आपको तय समय के भीतर ही अपने सारे डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने होंगे।यूनियन बैंक भर्ती 2026 के लिए फॉर्म कैसे भरें?सबसे पहले यूनियन बैंक के आधिकारिक भर्ती पोर्टल ibpsreg.ibps.in पर जाएं।होमपेज पर 'Click Here for New Registration' वाले विकल्प पर क्लिक करें।अपना नाम, चालू मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी डालकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें।अब आवेदन फॉर्म में मांगी गई सारी डिटेल्स सावधानी से भरें और उन्हें एक बार फिर से चेक कर लें।इसके बाद अपनी साफ फोटो, काले पेन से किए गए सिग्नेचर, बाएं हाथ के अंगूठे का निशान और अपनी हैंडराइटिंग में लिखा हुआ एक सेल्फ डिक्लेरेशन अपलोड करें।फॉर्म का प्रीव्यू देखने के बाद अपनी कैटेगरी के अनुसार ऑनलाइन फीस जमा करें।अंत में फॉर्म सबमिट करें और भविष्य के लिए कन्फर्मेशन पेज की ई-रसीद डाउनलोड करके रख लें।आवेदन शुल्क और जरूरी डॉक्यूमेंट्स की डिटेलइस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सामान्य (UR), EWS और ओबीसी (OBC) वर्ग के उम्मीदवारों को 1,180 रुपये (GST सहित) का शुल्क देना होगा। वहीं SC, ST और दिव्यांग (PwBD) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क मात्र 177 रुपये रखा गया है। यह फीस आप डेबिट कार्ड, यूपीआई, नेट बैंकिंग या मोबाइल वॉलेट के जरिए आसानी से जमा कर सकते हैं। आवेदन करते समय आपके पास एक वैलिड फोटो आईडी (पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर आईडी) होना जरूरी है। इसके अलावा एक एक्टिव मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी भी तैयार रखें। आखिरी समय में वेबसाइट पर होने वाली तकनीकी परेशानी से बचने के लिए 10 अगस्त का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द अपना फॉर्म भर लें।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कंसोर्टियम (Consortium of NLUs) ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट यानी CLAT 2027 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। देश की 24 से अधिक नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज में 5-वर्षीय एकीकृत एलएलबी (UG) और 1-वर्षीय एलएलएम (PG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। गवर्निंग बॉडी की हालिया बैठक के बाद स्पष्ट कर दिया गया है कि CLAT 2027 के सिलेबस और परीक्षा पैटर्न में कोई बदलाव नहीं किया गया है।CLAT 2027: महत्वपूर्ण तारीखें और शेड्यूल (Key Dates)कार्यक्रम (Events)आधिकारिक तारीख (Dates)आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी22 जुलाई 2026ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत03 अगस्त 2026आवेदन की अंतिम तिथि31 अक्टूबर 2026एडमिट कार्ड जारी होने की तिथिनवंबर 2026 (मध्य)CLAT 2027 परीक्षा तिथि (UG & PG)06 दिसंबर 2026 (रविवार)परीक्षा का समयदोपहर 2:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक (2 घंटे)CLAT UG 2027: एग्जाम पैटर्न और मार्किंग स्कीमCLAT UG परीक्षा ऑफलाइन पेन-एंड-पेपर मोड (OMR आधारित) में आयोजित की जाएगी। पूरे प्रश्नपत्र में कुल 120 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) होंगे जिन्हें हल करने के लिए 120 मिनट (2 घंटे) का समय मिलेगा।सही उत्तर के लिए: +1 अंकगलत उत्तर के लिए (Negative Marking): -0.25 अंक काटे जाएंगेछोड़े गए प्रश्न: 0 अंकसेक्शन-वाइज अंकों का विभाजन (Approx. Weightage)English Language: 22-26 प्रश्न (लगभग 20% वेटेज)Current Affairs & General Knowledge: 28-32 प्रश्न (लगभग 25% वेटेज)Legal Reasoning: 28-32 प्रश्न (लगभग 25% वेटेज)Logical Reasoning: 22-26 प्रश्न (लगभग 20% वेटेज)Quantitative Techniques (Class 10th Maths): 10-14 प्रश्न (लगभग 10% वेटेज)CLAT PG 2027: एलएलएम (LLM) का पैटर्न और विषयमास्टर ऑफ लॉ (LLM) में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली CLAT PG परीक्षा भी 120 अंकों और 120 प्रश्नों की ही होगी। इसमें मुख्य रूप से प्रमुख लॉ विषयों से पैसेज-आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे।मुख्य विषय: संवैधानिक कानून (Constitutional Law), न्यायशास्त्र (Jurisprudence), प्रशासनिक कानून (Administrative Law), अनुबंध कानून (Contract Law), दंड कानून (Criminal Law), पारिवारिक कानून (Family Law), संपत्ति कानून (Property Law), अंतर्राष्ट्रीय कानून (Public International Law) और पर्यावरण कानून आदि।CLAT 2027: आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step)सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट consortiumofnlus.ac.in पर जाएं।अपने मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का उपयोग करके रजिस्ट्रेशन करें।ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद अपना अकाउंट लॉग-इन करें।अपनी व्यक्तिगत, शैक्षणिक जानकारी और परीक्षा केंद्र की प्राथमिकताएं दर्ज करें।फोटो, हस्ताक्षर और श्रेणी प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो) अपलोड करें।निर्धारित आवेदन शुल्क (General/OBC: ₹4,000 | SC/ST/BPL/PwD: ₹3,500) का ऑनलाइन भुगतान करके फॉर्म सबमिट करें।
उत्तर प्रदेश में खाकी वर्दी पहनने और पुलिस बल का हिस्सा बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 81,000 से अधिक रिक्त पदों पर मेगा भर्ती अभियान चलाया जाएगा। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) द्वारा इन पदों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में चरणबद्ध (Phase-wise) तरीके से नोटिफिकेशन जारी किए जाएंगे। इस भर्ती अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की कानून-व्यवस्था को और मजबूत करना तथा युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार प्रदान करना है।किन-किन पदों पर होगी भर्ती?81,000 से अधिक पदों के तहत पुलिस विभाग के विभिन्न संवर्गों में नियुक्तियां की जाएंगी:आरक्षी (Constable - नागरिक पुलिस व PAC): सबसे ज्यादा पद कांस्टेबल कैडर में भरे जाएंगे।उपनिरीक्षक (Sub-Inspector - SI/दरोगा): पुलिस उपनिरीक्षक और गोपनीय/लिपिकीय पदों के लिए।तकनीकी व रेडियो कैडर: रेडियो सहायक परिचालक (Radio Operator) और कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए।अन्य पद: जेल वार्डर और फायरमैन सेवा के तहत रिक्तियां।पात्रता और योग्यता की मुख्य शर्तेंशैक्षणिक योग्यता:कांस्टेबल/फायरमैन: मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं (इंटरमीडिएट) पास होना अनिवार्य है।सब-इंस्पेक्टर (SI): किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री।कंप्यूटर ऑपरेटर/तकनीकी पद: 12वीं (फिजिक्स/मैथ्स) के साथ डोएक (DOEACC/NIELIT) से 'O' लेवल कंप्यूटर सर्टिफिकेट या समकक्ष योग्यता।आयु सीमा: कांस्टेबल पद के लिए सामान्य वर्ग के लिए 18 से 22/23 वर्ष तथा सब-इंस्पेक्टर के लिए 21 से 28 वर्ष (आरक्षित वर्गों को राज्य सरकार के नियमानुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट मिलेगी)।चयन प्रक्रिया (Selection Process) के 4 मुख्य चरणलिखित परीक्षा (CBT / OMR): वस्तुनिष्ठ प्रकार की परीक्षा जिसमें सामान्य ज्ञान, सामान्य हिंदी, संख्यात्मक व मानसिक योग्यता और रीजनिंग के सवाल पूछे जाएंगे। SI पद के लिए कानून और संविधान से जुड़े सवाल भी शामिल होंगे।शारीरिक मानक परीक्षण (PST): अभ्यर्थियों की लंबाई, सीना (केवल पुरुषों के लिए) और वजन की नापजोख की जाएगी।शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET): दौड़ परीक्षा का आयोजन होगा (पुरुषों के लिए 4.8 किमी तथा महिलाओं के लिए 2.4 किमी की दौड़)।दस्तावेज़ सत्यापन (DV) एवं मेडिकल परीक्षा: अंतिम चरण में डाक्यूमेंट्स की जांच और मेडिकल टेस्ट के बाद अंतिम चयन सूची जारी होगी।
दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी से पढ़ाई, फिर NEET छात्रों के लिए सड़कों पर उतरे; कौन हैं अभिजीत दिपके
भारतीय शिक्षा व्यवस्था और खासकर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) को लेकर छिड़े घमासान के बीच इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह नाम है अभिजीत दिपके का। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, जब एक युवा देश के लाखों छात्रों के हक और उनके भविष्य की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरता है, तो राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में हलचल होना लाजिमी है। आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं अभिजीत दिपके और क्यों अचानक उनका नाम सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की खबरों तक छाया हुआ है।कौन हैं अभिजीत दिपके और क्या है उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि?अभिजीत दिपके एक ऐसे युवा चेहरे के रूप में उभरे हैं जिन्होंने अपनी उच्च शिक्षा दुनिया के बेहद चर्चित और शीर्ष संस्थानों से पूरी की है। अकादमिक मोर्चे पर शानदार रिकॉर्ड रखने और ग्लोबल एक्सपोजर हासिल करने के बावजूद, उन्होंने देश के सामान्य छात्रों और युवाओं की समस्याओं को अपनी प्राथमिकता बनाया। कॉर्पोरेट दुनिया या विदेश में शानदार करियर चुनने के बजाय, उन्होंने भारत के मेडिकल और इंजीनियरिंग के छात्रों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष का रास्ता चुना। उनकी यही पृष्ठभूमि उन्हें दूसरे युवा नेताओं से अलग खड़ा करती है और छात्र समुदाय के बीच उनकी पैठ मजबूत करती है।क्यों अचानक सुर्खियों में आए और NEET आंदोलन से कैसे जुड़े?पिछले कुछ समय से देश में नीट परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और काउंसलिंग में हो रही देरी को लेकर छात्रों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। लाखों छात्र अपने भविष्य को लेकर मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। ऐसे में अभिजीत दिपके ने इस मुद्दे पर मुखर होकर आवाज उठाई और छात्रों को संगठિત करने का काम किया। उन्होंने विभिन्न मंचों से सरकार और एनटीए (NTA) की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। प्रशासनिक सुधारों की मांग को लेकर उनके नेतृत्व में चलाए गए अभियानों ने युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसके बाद से वे देश भर के छात्र आंदोलनों का एक अहम चेहरा बन गए हैं।दिल्ली से लेकर लखनऊ तक, युवाओं के बीच क्यों बढ़ रहा है उनका क्रेज?अभिजीत दिपके के इस आक्रामक और जुझारू तेवर का असर अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, दिल्ली, कोटा और मुंबई जैसे देश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों पर भी साफ दिखने लगा है। सोशल मीडिया और एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर उनके बारे में जानने के लिए युवा लगातार सर्च कर रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से वे ग्राउंड लेवल पर छात्रों की आवाज बन रहे हैं, वह आने वाले दिनों में देश की युवा राजनीति और शिक्षा नीति दोनों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
उच्च शिक्षा और ग्लोबल एनालिटिक्स फर्म 'QS' (Quacquarelli Symonds) ने साल 2027 के लिए दुनिया भर के बेहतरीन स्टूडेंट शहरों की ताजा रैंकिंग (QS Best Student Cities 2027) जारी कर दी है। इस नई लिस्ट में भारत के लिए बेहद गर्व और उत्साह बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई ने भारत में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि देश की राजधानी नई दिल्ली ने दुनिया भर के छात्रों के लिए 'सबसे किफायती शहर' (Most Affordable City) होने का गौरव अपने नाम किया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद देश के एजुकेशन सेक्टर में एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।मुंबई ने मारी बाजी, भारत में बनी नंबर-1 स्टूडेंट सिटीक्यूएस की इस ताजा वैश्विक सूची में मुंबई ने शानदार छलांग लगाते हुए पिछले साल की 98वीं रैंक से सुधरकर सीधे 91वां स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही मुंबई देश का सर्वोच्च रैंकिंग वाला (Highest-Ranked Student Destination) शहर बन गया है। मुंबई की इस सफलता के पीछे यहां के बेहतरीन शिक्षण संस्थान, मजबूत एम्प्लॉयर एक्टिविटी (नियोक्ताओं के बीच graduates की मांग) और रोजगार के बेहतर अवसर हैं। वैश्विक स्तर पर कंपनियों और रिक्रूटर्स के बीच भारतीय युवाओं की बढ़ती स्वीकार्यता ने मुंबई की इस रैंकिंग को और मजबूत किया है।दुनिया में सबसे सस्ती पढ़ाई: दिल्ली ने मारी बाजीबात अगर खर्च और बजट की हो, तो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ने पूरी दुनिया में अपना डंका बजा दिया है। QS रैंकिंग 2027 के अनुसार, दिल्ली को दुनिया भर में छात्रों के रहने और पढ़ाई के लिए सबसे किफायती शहर (Most Affordable City globally) घोषित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए औसत ट्यूशन फीस सालाना करीब 2,700 अमेरिकी डॉलर (लगभग ढाई लाख रुपये) है, जो दुनिया के दूसरे बड़े ग्लोबल एजुकेशन हब के मुकाबले बेहद कम है। कम खर्च और बेहतरीन करियर संभावनाओं के दम पर दिल्ली ने ग्लोबल लिस्ट में 99वीं रैंक हासिल की है।भारत के अन्य शहरों का कैसा रहा प्रदर्शन?इस प्रतिष्ठित रैंकिंग में मुंबई और दिल्ली के अलावा देश के अन्य प्रमुख महानगरों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। चेन्नई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच पायदान की छलांग लगाई है और वह 123वें स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि, दूसरी ओर बेंगलुरु एकमात्र ऐसा भारतीय शहर रहा जिसे इस बार थोड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा और वह फिसलकर 114वें स्थान पर आ गया। जानकारों का मानना है कि ग्लोबल रैंकिंग में भारतीय शहरों का यह सुधार देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में तेजी से हो रहे सकारात्मक बदलावों को दर्शाता है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने के मामले में अभी हमें और लंबी दूरी तय करनी है।
NEET में शानदार 680 अंक और एम्स (AIIMS) में एमबीबीएस की सीट मिलने के बाद भी ठुकरा दिया था ऑफर
करियर की शुरुआत में जब देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के दरवाजे आपके लिए खुले हों और एम्स जैसे सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टर बनने का सुनहरा मौका सामने हो, तो अमूमन हर कोई बिना सोचे-समझे उसे अपना लेता है। लेकिन कुछ जज्बे ऐसे होते हैं जो सुख-सुविधाओं और चकाचौंध से परे देश की रक्षा और वर्दी के सम्मान को प्राथमिकता देते हैं। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली कहानी इन दिनों चिकित्सा जगत और सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जहां एक मेधावी छात्रा ने नीट परीक्षा में 680 जैसे शानदार नंबर हासिल करने और एम्स की एमबीबीएस सीट का शानदार ऑफर मिलने के बावजूद उसे ठुकरा दिया। अपने अदम्य साहस और देश प्रेम के चलते इस होनहार बेटी ने भारतीय सेना का दामन थामा और आज सेना में लेफ्टिनेंट डॉक्टर बनकर पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। इस अनोखे और संघर्ष भरे सफर के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।नीट में शानदार स्कोर और एम्स की सीट ठुकराने का कड़ा फैसलाजब मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) के परिणाम सामने आए, तो इस होनहार छात्रा ने 720 में से 680 अंक हासिल करके अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इस बेहतरीन स्कोर के आधार पर देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान यानी एम्स (AIIMS) में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए उनका चयन पक्का था और उन्हें सीट का ऑफर मिल रहा था। हर सामान्य छात्र के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा होता है, क्योंकि एम्स से डिग्री लेना डॉक्टर बनने के सफर का सबसे बड़ा मुकाम माना जाता है। लेकिन इस छात्रा के मन में कुछ और ही ख्वाब पल रहे थे। उसने एम्स की इस आरामदायक और प्रतिष्ठित सीट को स्वीकार करने के बजाय भारतीय सशस्त्र बलों (Armed Forces) की चिकित्सा सेवा में जाने का दृढ़ संकल्प लिया और इस बड़े ऑफर को हंसते-हंसते ठुकरा दिया।वर्दी का जुनून और देश सेवा के जज्बे ने बदली दिशाबचपन से ही देश की सेवा करने और भारतीय सेना के अनुशासन में जीने का सपना देखने वाली इस बेटी के लिए वर्दी का आकर्षण किसी भी अन्य सुख-सुविधा से कहीं बढ़कर था। सेना के अस्पतालों में सैनिकों और उनके परिवारों की सेवा करने का विचार उसके दिल में गहराई से बसा हुआ था। इसी मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर उसने आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज (AFMS) के कड़े और चुनौतीपूर्ण चयन दौर को पार किया। अपने इसी अटूट दृढ़ निश्चय के दम पर उसने यह साबित कर दिया कि सफलता केवल बड़े संस्थानों की डिग्री हासिल करने में नहीं है, बल्कि उस मुकाम को पाने में है जो आपके भीतर देश के प्रति समर्पण की भावना को पूरा कर सके।भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट डॉक्टर बनकर रचा इतिहास, युवाओं के लिए बनी मिसालकड़ी ट्रेनिंग, अनुशासन और चिकित्सा की उच्च शिक्षा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अब वह दिन आ ही गया जब इस होनहार बेटी ने भारतीय सेना में 'लेफ्टिनेंट डॉक्टर' के रूप में अपनी आधिकारिक सेवाएं शुरू कर दीं। उनके इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी आज देश के लाखों युवाओं, विशेषकर उन बेटियों के लिए एक मिसाल बन गई है जो डॉक्टर बनकर समाज और देश की सेवा करना चाहती हैं। यह साबित करता है कि यदि आपके सपने स्पष्ट हैं और आपके इरादों में चट्टान जैसी मजबूती है, तो आप दुनिया के हर उस रास्ते को चुन सकते हैं जो आपको देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने का मौका देता है।
UPSC में 4 बार असफलता और BPSC के झटकों के बाद भी नहीं मानी हार! कभी लगातार मिली नाकामी
जिंदगी की राहें जब उम्मीदों के विपरीत चलने लगती हैं और हर तरफ से निराशा हाथ लगती है, तब असली इंसान की काबिलियत और उसका हौसला परखा जाता है। असफलता के अंधेरों को चीरकर कैसे सफलता के सूरज को अपने नाम किया जाता है, इसकी एक प्रेरणादायक दास्तान इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है। देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षा माने जाने वाले संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी (UPSC) में लगातार चार बार असफलता का मुंह देखने और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में भी झटके खाने के बाद एक युवा ने हार नहीं मानी। अपनी जिद, अटूट मेहनत और कभी न टूटने वाले जज्बे के बल पर आखिरकार शशांक गौरव ने अपनी मंजिल को पा ही लिया और परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए टॉपर बनकर उभरे। एक साधारण छात्र से लेकर टॉपर बनने तक के इस संघर्ष के सफर की पूरी कहानी के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।लगातार चार असफलताओं और निराशा के बाद भी नहीं डगमगाया हौसलाशशांक गौरव के लिए प्रशासनिक सेवा में जाने का यह सफर फूलों की सेज बिल्कुल नहीं था, बल्कि यह संघर्षों, रातों की नींद और बार-बार मिलने वाली नाकामियों की एक लंबी फेहरिस्त थी। हर युवा का सपना होता है कि वह अपने पहले या दूसरे प्रयास में ही देश की सबसे कठिन परीक्षा को क्रैक कर ले, लेकिन जब लगातार चार बार यूपीएससी के स्तर पर असफलता मिलती है, तो किसी भी इंसान का आत्मविश्वास डगमगा सकता है। इसके अलावा, राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली बीपीएससी परीक्षाओं में भी जब उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले, तो स्थितियां और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गईं। समाज और रिश्तेदारों की तरफ से उठने वाले सवालों के बीच खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन शशांक ने अपनी कमजोरियों को ही अपनी ताकत बना लिया।कमियों को तलाशा, रणनीति बदली और अपनी पढ़ाई में लाए बड़ा सुधारअसफलताओं से टूटने के बजाय शशांक गौरव ने हर बार यह विश्लेषण किया कि आखिर उनसे कहां चूक हो रही है। उन्होंने अपनी पुरानी गलतियों से सीख ली, अपनी आंसर राइटिंग स्किल्स पर काम किया और जीएस (General Studies) के पाठ्यक्रम को एक नए दृष्टिकोण के साथ पढ़ना शुरू किया। पिछले प्रयासों में जहां-जहां कमियां रह गई थीं, उन्हें पूरी ईमानदारी से दूर किया। पढ़ाई के अपने तौर-तरीकों को बदलते हुए उन्होंने सिर्फ किताबों रटने के बजाय कॉन्सेप्ट्स की क्लेरिटी और समसामयिक मुद्दों (Current Affairs) की गहरी समझ पर अपना पूरा फोकस केंद्रित किया। उनकी इस अनुशासित दिनचर्या और कड़ी मेहनत ने आखिरकार रंग दिखाना शुरू कर दिया।संघर्षरत युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बने शशांक गौरव की सफलताशशांक गौरव की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश और प्रेरणा है, जो एक या दो बार असफल होने के बाद अपनी किस्मत को कोसने लगते हैं और अपने सपनों का रास्ता छोड़ देते हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि मंजिल चाहे कितनी भी दूर और कठिन क्यों न हो, यदि आपके इरादे मजबूत हैं और आप निरंतरता (Consistency) के साथ सही दिशा में प्रयास कर रहे हैं, तो सफलता एक दिन आपके कदम जरूर चूमेगी। शशांक की इस प्रेरणादायक उपलब्धि पर आज उनके परिवार के साथ-साथ पूरा इलाका गर्व महसूस कर रहा है।
पंजाब फार्मेसी अधिकारी परीक्षा का पेपर लीक! हाईटेक नकल गैंग का हुआ पर्दाफाश
पंजाब के युवाओं के लिए आयोजित की जा रही फार्मेसी अधिकारी (Pharmacy Officer) भर्ती परीक्षा में एक बार फिर पेपर लीक और नकल माफिया का साया मंडरा गया है। हालांकि, पंजाब पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स और खुफिया विंग ने समय रहते एक बेहद बड़ी और मुस्तैद कार्रवाई करते हुए परीक्षा में सेंध लगाने वाले गिरोह के मंसूबों को पूरी तरह नाकाम कर दिया। खुफिया इनपुट्स के आधार पर पुलिस ने परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले राज्य के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों और संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिससे पूरे प्रशासनिक अमले और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।7 मास्टरमाइंड और 35 संदिग्ध हिरासत में: लाखों रुपये में हुआ था सौदाइस पूरे हाईटेक रैकेट पर शिकंजा कसते हुए पुलिस ने अब तक 7 मुख्य सरगनाओं (Masterminds) को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे। इसके साथ ही विभिन्न जिलों से 35 से अधिक परीक्षार्थियों और बिचौलियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने प्रत्येक अभ्यर्थी से सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर 10 से 15 लाख रुपये का सौदा किया था। पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में कैश, मोबाइल फोन, एडमिट कार्ड और कई बैंकों के ब्लैंक चेक भी बरामद किए हैं।हाईटेक नकल का जाल: ब्लूटूथ डिवाइस और सीक्रेट गैजेट्स का इस्तेमालपकड़ा गया यह गिरोह बेहद शातिर और आधुनिक तरीकों से लैस था। परीक्षा केंद्रों के भीतर नकल कराने के लिए इस गैंग ने अभ्यर्थियों को बेहद छोटे और अदृश्य माइक्रो-ब्लूटूथ इयरफोन, शर्ट के बटन में छिपे कैमरे और सिम कार्ड स्लॉट वाले खास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मुहैया कराए थे। योजना के मुताबिक, परीक्षा शुरू होते ही बाहर बैठे सॉल्वर गैंग तक प्रश्न पत्र की तस्वीरें पहुंचाई जानी थीं, जहां से आंसर की (Answer Key) तैयार कर इन हाईटेक गैजेट्स के जरिए परीक्षा हॉल के अंदर बैठे छात्रों को उत्तर बताए जाने थे। लेकिन तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने परीक्षा शुरू होने से पहले ही इस पूरे जाल को छिन्न-भिन्न कर दिया।सरकार का कड़ा रुख: मुख्यमंत्री ने दिए सख्त जांच के आदेश और सुरक्षा के इंतजामइस बड़े भंडाफोड़ के बाद पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में किसी भी कीमत पर युवाओं के भविष्य और परीक्षाओं की शुचिता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महानिदेशक (DGP) ने पूरे मामले की कमान संभालते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है जो इस गैंग के अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच करेगी। इसके साथ ही सभी परीक्षा केंद्रों पर जैमर (Jammers) लगाने और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को और ज्यादा सख्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके।
नीट यूजी परीक्षा के बाद नया विवाद: OMR शीट को लेकर छात्रों ने खड़े किए सवाल
मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 (NEET UG 2026) को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा प्रोविजनल आंसर-की (Answer Key) और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स OMR शीट जारी होने के बाद देश भर के हजारों छात्रों ने नतीजों और स्कैन की गई शीट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कई अभ्यर्थियों का दावा है कि परीक्षा केंद्र में उन्होंने जो OMR शीट भरी थी, आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड की गई शीट उससे बिल्कुल अलग है। कुछ छात्रों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि उनकी शीट पर किए गए बबल्स (Gola) के साथ छेड़छाड़ की गई है, जिससे उनके स्कोर में भारी गिरावट आ रही है।NTA का तीखा पलटवार: फर्जी दावों और एडिटेड OMR शीट पर दी कड़ी चेतावनीदेश भर में बढ़ते आक्रोश और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एक बेहद सख्त और आधिकारिक नोटिस जारी कर स्थिति साफ की है। एनटीए ने छात्रों और अभिभावकों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भ्रामक बताया है। परीक्षा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि कुछ असामाजिक तत्व और छात्र अपनी नाकामी छिपाने या ध्यान भटकाने के लिए फोटोशॉप और एडिटिंग टूल्स के जरिए फर्जी OMR शीट सोशल मीडिया पर प्रसारित कर रहे हैं। NTA ने साफ कर दिया है कि जो भी छात्र या गिरोह ऐसे फर्जी दावों में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे भविष्य की परीक्षाओं से डिबार (प्रतिबंधित) कर दिया जाएगा।आंसर-की को चुनौती देने की प्रक्रिया शुरू: जानें कैसे दर्ज कराएं आपत्तिविवादों के बीच NTA ने छात्रों को नियमानुसार अपनी आपत्ति दर्ज कराने का एक मौका दिया है। जिन उम्मीदवारों को लगता है कि उनकी ओएमआर शीट या आधिकारिक उत्तर कुंजी में कोई वास्तविक त्रुटि है, वे NEET की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाकर इसे ऑनलाइन चुनौती दे सकते हैं। इसके लिए छात्रों को प्रति प्रश्न 200 रुपये की गैर-वापसी योग्य (Non-Refundable) फीस का भुगतान करना होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि छात्रों को केवल पुख्ता सबूतों और सही दस्तावेजों के साथ ही चैलेंज करना चाहिए, क्योंकि बिना किसी ठोस आधार के किए गए दावों को NTA सीधे खारिज कर देगा।मेडिकल स्टूडेंट्स और अभिभावकों में भारी तनाव: सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजरेंइस नए ओएमआर शीट विवाद ने देश के लाखों मेडिकल एस्पिरेंट्स (Medical Aspirants) की धड़कनें बढ़ा दी हैं। दिल्ली-एनसीआर, कोटा, पटना, लखनऊ और जयपुर जैसे प्रमुख कोचिंग हब्स में छात्र और अभिभावक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग उठा रहे हैं। कई छात्र संगठनों ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की भी तैयारी कर ली है। परीक्षा की शुचिता पर उठ रहे इन सवालों के बीच अब सभी की नजरें नीट यूजी के फाइनल रिजल्ट और काउंसलिंग प्रक्रिया पर टिकी हैं कि क्या NTA इस विवाद का कोई ठोस समाधान निकाल पाता है या नहीं।
नीरव मोदी केस की नींव हिलाने वाले 1994 बैच के जांबाज IPS अनुराग धनखड़ का निधन
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के बेहद सम्मानित और वरिष्ठ अधिकारी अनुराग धनखड़ अब हमारे बीच नहीं रहे। 1994 बैच के इस जांबाज अधिकारी के निधन की खबर सामने आते ही पुलिस महकमे और प्रशासनिक गलियारों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों में अपनी सेवाएं दे चुके अनुराग धनखड़ को उनकी ईमानदारी, सख्त कार्यशैली और जटिल मामलों को सुलझाने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता था। उनके साथी अधिकारियों और अधीनस्थों ने उन्हें एक ऐसा मेंटॉर बताया जो संकट के समय हमेशा टीम के आगे आकर ढाल बनते थे।नीरव मोदी केस के मुख्य जांच अधिकारी: जब पीएनबी घोटाले की खोली परतेंआईपीएस अनुराग धनखड़ के करियर की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के मुख्य आरोपी भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी केस की जांच थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान संभाली थी। अंतरराष्ट्रीय दबावों और बेहद उलझे हुए मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के बावजूद, अनुराग धनखड़ ने अपनी टीम के साथ मिलकर घोटाले की एक-एक परत को बेनकाब किया। उनके द्वारा तैयार की गई मजबूत चार्जशीट और डिजिटल सबूतों के दम पर ही भारत सरकार ब्रिटेन की अदालत में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी लड़ाई को इतनी मजबूती से लड़ पाई।कई राज्यों में कानून व्यवस्था को सुधारा: ऐसा रहा प्रशासनिक सफर1994 में आईपीएस के रूप में अपने सफर की शुरुआत करने वाले अनुराग धनखड़ ने शुरुआती दिनों से ही अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने चुनौतीपूर्ण जिलों में बतौर पुलिस कप्तान (SP) और बाद में महानिरीक्षक (IG) व अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के पदों पर रहते हुए कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने में अभूतपूर्व भूमिका निभाई। ड्रग माफिया, संगठित अपराध और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ उन्होंने कई बड़े और सीक्रेट ऑपरेशन्स चलाए, जिसकी वजह से अपराधियों के बीच उनका खौफ साफ देखा जाता था। उनके बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें कई बार वीरता और विशिष्ट सेवा पदकों से भी सम्मानित किया गया था।गृह मंत्रालय और मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुख: पैतृक गांव में दी जाएगी अंतिम विदाईवरिष्ठ पुलिस अधिकारी के असामयिक चले जाने पर गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गहरा दुख प्रकट किया है। उनके गृह राज्य और कार्यक्षेत्र के पुलिस मुख्यालयों में शोक सभाएं आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जिसके बाद पूरे राजकीय सम्मान (State Honors) के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। देश की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले इस जांबाज पुलिस अफसर को सोशल मीडिया पर भी देशवासी नम आंखों से सलाम कर रहे हैं।
नई दिल्ली/लखनऊ। चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 (NEET UG 2026) के नतीजों को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट में सामने आया छात्रा आर्या (Student Arya) का मामला—जिसमें ओएमआर शीट सुधार (OMR Correction) के बाद उसका स्कोर 609 से घटकर सीधे 167 अंक रह गया—अब एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुका है। सोमवार, 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) से ठीक पहले इस खुलासे ने दिल्ली की सियासी गलियारों में भारी हड़कंप मचा दिया है। कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' (INDIA Block) ने इस व्यक्तिगत मामले को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ढांचागत नाकामी का सबसे बड़ा सबूत मानते हुए संसद के दोनों सदनों में सरकार को चौतरफा घेरने का चक्रव्यूह तैयार कर लिया है।आर्या का मामला बना विपक्ष का ब्रह्मास्त्र, संसद में उठेंगे 3 तीखे सवालसर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई सहित विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं ने संकेत दे दिए हैं कि नीट परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियां और पेपर लीक (NEET Paper Leak) इस सत्र का सबसे केंद्रीय मुद्दा रहने वाला है। विपक्षी रणनीतिकारों के मुताबिक, सदन के भीतर सरकार से मुख्य रूप से इन तीन बिंदुओं पर जवाब मांगा जाएगा:मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता: छात्रा आर्या के अंकों में आई 442 नंबरों की अप्रत्याशित गिरावट का हवाला देकर विपक्ष एनटीए के डिजिटल और ओएमआर मूल्यांकन सॉफ्टवेयर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करेगा।लाखों छात्रों का मानसिक तनाव: परीक्षा प्रणाली की इन तकनीकी खामियों के चलते डिप्रेशन और मानसिक तनाव झेल रहे देश के 24 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य की नैतिक जिम्मेदारी किसकी है, इस पर सरकार को घेरा जाएगा।एनटीए (NTA) को भंग करने की मांग: विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि जब तक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के कामकाज की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्च स्तरीय जांच नहीं होती और इसका पुनर्गठन नहीं होता, तब तक देश की परीक्षाओं की साख वापस नहीं लौट सकती।मानसून सत्र के पहले दिन ही हंगामे के आसार, सरकार बैकफुट पर?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीट परीक्षा का यह नया मोड़ सरकार के लिए बड़ी सिरदर्दी साबित हो सकता है। सरकार ने मानसून सत्र के लिए जो 8 प्रमुख विधेयक सूचीबद्ध किए हैं, उन पर चर्चा कराने से पहले उसे विपक्ष के इस तीखे आक्रमण का सामना करना होगा। हालांकि, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से सदन में शांतिपूर्वक 'चर्चा' करने की अपील की है, लेकिन विपक्ष आर्या जैसे गंभीर मामलों पर कार्यस्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) लाकर तुरंत चर्चा कराने की मांग पर अड़ सकता है।अब देखना यह होगा कि परीक्षा नियामक संस्था एनटीए इस विशेष गड़बड़ी पर क्या तकनीकी सफाई पेश करती है और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय संसद के भीतर देश के आक्रोशित छात्रों और आक्रामक विपक्ष को कैसे शांत कर पाता है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खबर सामने आ रही है। बोर्ड द्वारा हाल ही में आयोजित की गई सप्लीमेंट्री (इम्प्रूवमेंट और कंपार्टमेंट) परीक्षाओं के परिणाम घोषित होने के बाद अब ओवरऑल पासिंग प्रतिशत (Overall Passing Percentage) में एक बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। मुख्य परीक्षा के नतीजों के बाद जहां कई छात्र बेहद कम मार्जिन से पीछे रह गए थे, वहीं अब अंतिम रूप से पास होने वाले छात्र-छात्राओं का कुल आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 96.78 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। इस सुधार ने देश भर के हजारों परिवारों के चेहरे पर एक बार फिर मुस्कान ला दी है।कंपार्टमेंट और इम्प्रूवमेंट परीक्षाओं ने कैसे पलटी पूरी बाजी?सीबीएसई बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुख्य परीक्षा के परिणाम आने के बाद जिन छात्रों को एक या दो विषयों में कंपार्टमेंट मिली थी या जो अपने मार्क्स से संतुष्ट नहीं थे, उन्हें अपनी परफॉर्मेंस सुधारने का एक और मौका दिया गया था। इस बार सप्लीमेंट्री परीक्षाओं का सक्सेस रेट पिछले कई सालों के मुकाबले काफी बेहतर रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों ने न सिर्फ अपनी कंपार्टमेंट क्लियर की है, बल्कि इम्प्रूवमेंट परीक्षा के जरिए अपने कुल अंकों (Aggregate Marks) में भी काफी सुधार किया है। यही वजह है कि बोर्ड का अंतिम पासिंग ग्राफ काफी ऊपर चला गया है।छात्राओं ने फिर मारी बाजी, लड़कों को छोड़ा पीछेहर बार की तरह इस बार भी फाइनल रिजल्ट्स के जेंडर-वाइज एनालिसिस में लड़कियों ने अपना दबदबा कायम रखा है। ओवरऑल पासिंग प्रतिशत के नए आंकड़ों में भी छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों के मुकाबले बेहतर दर्ज किया गया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों (Geographical Regions) की बात करें तो दिल्ली, त्रिवेंद्रम, बेंगलुरु और चेन्नई रीजन्स ने हमेशा की तरह इस बार भी टॉप परफॉर्मिंग जोन में अपनी जगह बनाई है। वहीं, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के नतीजों में भी सप्लीमेंट्री परीक्षा के बाद काफी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।आधुनिक जनरेटिव एआई (AI Search) और शिक्षाविदों का बड़ा विश्लेषणआधुनिक जनरेटिव सर्च इंजन (GEO) और शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, सीबीएसई की यह नई नीति जिसके तहत छात्रों को उसी शैक्षणिक वर्ष में अपने अंक सुधारने का मौका मिलता है, बेहद क्रांतिकारी साबित हो रही है। इससे न सिर्फ छात्रों का एक कीमती साल बर्बाद होने से बच जाता है, बल्कि उच्च शिक्षा या कक्षा 11वीं में अपनी पसंद की स्ट्रीम (साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स) चुनने में भी मदद मिलती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस लचीली परीक्षा प्रणाली से छात्रों का मानसिक तनाव काफी कम हुआ है, जिसका सीधा असर अंतिम परीक्षा परिणामों पर साफ दिखाई दे रहा है।
नई दिल्ली/लखनऊ। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) के परिणाम घोषित होने के बाद एक बार फिर देश भर के छात्रों और अभिभावकों के बीच हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया (Social Media) पर बड़ी संख्या में उम्मीदवार OMR शीट और स्कोरकार्ड में कथित तौर पर भारी हेरफेर और विसंगतियों के दावे कर रहे हैं। इस बढ़ते विवाद और छात्रों के आक्रोश के बीच, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है। एनटीए ने कहा है कि वह सभी प्राप्त शिकायतों की बेहद बारीकी और गंभीरता से जांच कर रही है। हालांकि, एजेंसी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे दावों पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि केवल वायरल पोस्ट के आधार पर किसी भी विसंगति की पुष्टि नहीं की जा सकती, क्योंकि जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं।AI से तैयार की जा रही हैं फर्जी OMR शीट, NTA की कानूनी कार्रवाई की चेतावनीएनटीए (NTA) द्वारा जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक, शुरुआती जांच के दौरान इंटरनेट पर वायरल हो रहीं कई ऐसी OMR शीट सामने आई हैं जो पूरी तरह से फर्जी हैं या उन्हें आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद से एडिट करके तैयार किया गया है। परीक्षा एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों से पुरजोर अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के भ्रामक दावों और जाली दस्तावेजों के झांसे में आने से बचें। एनटीए ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि स्क्रूटनी (Scrutiny) यानी पुनरीक्षण की प्रक्रिया के लिए केवल मूल (Original) OMR शीट ही स्वीकार की जाएगी। यदि कोई शिकायतकर्ता जांच के दौरान फर्जी या एआई-जनरेटेड OMR शीट जमा करता पाया गया, तो उसके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।उम्मीदवार का गंभीर आरोप: 12 अनसुलझे सवालों के बबल्स अचानक कैसे भर गए?भले ही एनटीए दावों को फर्जी बता रहा हो, लेकिन परीक्षा देने वाले कई उम्मीदवार लगातार सबूतों के साथ ऑफिशियल पोर्टल पर मौजूद OMR शीट और परीक्षा हॉल में उनके द्वारा मार्क किए गए जवाबों में बड़ा अंतर होने की चिंता जता रहे हैं। इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा और चर्चित मामला नीट उम्मीदवार इब्तिशाम नसार का है, जिन्होंने 17 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर एनटीए की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उम्मीदवार का गंभीर आरोप है कि एनटीए के पोर्टल पर अपलोड की गई उनकी OMR शीट में बबल्स (गोले) भरने का पैटर्न बिल्कुल वैसा नहीं है जैसा वे परीक्षा के दौरान भरकर आए थे। इब्तिशाम के मुताबिक, जिन 12 कठिन सवालों को उन्होंने परीक्षा हॉल में जानबूझकर बिना किसी जवाब के खाली छोड़ दिया था, वे अपलोड की गई OMR शीट में पूरी तरह हल किए हुए (मार्क) दिखाई दे रहे हैं, जिससे उनका पूरा स्कोरकार्ड प्रभावित हुआ है।अभिभावकों में अविश्वास का माहौल, आगे क्या होगा विकल्प?इब्तिशाम नसार जैसी नई शिकायतें लगातार सामने आने के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर अभिभावकों और कोचिंग संचालकों में अविश्वास का माहौल गहरा गया है। छात्रों का कहना है कि जब तक एनटीए प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करता, तब तक यह गतिरोध थमता नहीं दिख रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि जिन छात्रों को अपनी OMR शीट में विसंगति लग रही है, वे आधिकारिक तौर पर एनटीए के ग्रीवेंस पोर्टल (Grievance Portal) पर मूल दस्तावेजों के साथ चुनौती दर्ज कराएं और जरूरत पड़ने पर कानूनी विशेषज्ञों की सलाह लें। फिलहाल, एनटीए की आंतरिक जांच समिति इन सभी मामलों के तकनीकी पहलुओं को खंगाल रही है ताकि आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
उत्तर प्रदेश में एक सम्मानजनक पद पर सरकारी नौकरी (Government Job) की तलाश कर रहे युवाओं के लिए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने बड़ा तोहफा दिया है। आयोग ने असिस्टेंट अकाउंटेंट (सहायक लेखाकार) और ऑडिटर (लेखा परीक्षक) के कुल 1829 रिक्त पदों को भरने के लिए आधिकारिक तौर पर आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है।इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि इसका सीधा लाभ उन उम्मीदवारों को मिलेगा जिन्होंने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा यानी पीईटी (PET)-2025 में हिस्सा लिया था। केवल PET-2025 के वैध स्कोर धारक और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी ही इस मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किए जाएंगे। आइए विस्तार से जानते हैं इस वैकेंसी से जुड़ी हर एक जरूरी डिटेल, विभागवार पदों का विवरण और आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया:भर्ती से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें (Important Dates)उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए समय रहते अपना फॉर्म सबमिट कर लें:आवेदन शुरू होने की तिथि: 14 जुलाई 2026आवेदन करने की अंतिम तिथि: 03 अगस्त 2026एप्लिकेशन फॉर्म में संशोधन (Correction window): 10 अगस्त 2026 तकविभागवार रिक्तियों का पूरा विवरण (Vacancy Details)इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों, निगमों और विश्वविद्यालयों में कुल 1829 पदों को भरा जाएगा। सीटों का गणित नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:विभाग का नाम (Department)पद का नाम (Post Name)कुल रिक्तियां (Vacancies)उत्तर प्रदेश आंतरिक लेखापरीक्षा एवं लेखा निदेशालयसहायक लेखाकार (Assistant Accountant)609नगर निगम निदेशालय, उत्तर प्रदेशसहायक लेखाकार (Assistant Accountant)600यूपी आवास एवं विकास परिषदसहायक लेखाकार156स्थानीय निधि लेखापरीक्षा परीक्षा निदेशालय (सामान्य)लेखा परीक्षक (Auditor)148स्थानीय निधि लेखापरीक्षा परीक्षा निदेशालय (विशेष)लेखा परीक्षक14उद्योग विकास विभाग (सामान्य)सहायक लेखाकार68नगर निगम निदेशालय, उत्तर प्रदेशलेखा परीक्षक60यूपी राजकीय निर्माण निगम लिमिटेडसहायक लेखाकार82यूपी वन निगमसहायक लेखाकार67उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड (विशेष)सहायक लेखाकार4गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबादसहायक लेखाकार4उद्योग विकास विभाग (विशेष)सहायक लेखाकार1विभिन्न विश्वविद्यालय और कॉलेजसहायक लेखाकार / लेखा परीक्षकविभिन्न पदक्या है पात्रता और शैक्षणिक योग्यता? (Eligibility Criteria)इन पदों पर आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को निम्नलिखित शैक्षणिक और आयु सीमा की शर्तों को पूरा करना होगा:1. शैक्षणिक योग्यता:असिस्टेंट अकाउंटेंट (सहायक लेखाकार): उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कॉमर्स स्ट्रीम में ग्रेजुएशन यानी बीकॉम (B.Com) की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा, जिन छात्रों के पास अकाउंटेंसी में पोस्ट ग्रेजुएट (PG) डिप्लोमा है, वे भी पात्र हैं। साथ ही, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) या किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से 'O' लेवल कंप्यूटर डिप्लोमा होना अनिवार्य है।ऑडिटर (लेखा परीक्षक): इस पद के लिए भी अभ्यर्थी का बीकॉम या उसके समकक्ष डिग्रीधारक होना आवश्यक है। साथ में 'O' लेवल कंप्यूटर डिप्लोमा और अकाउंटिंग (लेखांकन) का व्यावहारिक ज्ञान होना जरूरी है।2. आयु सीमा (Age Limit):न्यूनतम आयु: 21 वर्षअधिकतम आयु: 40 वर्षआयु की गणना: उम्र का आकलन 1 जुलाई 2026 को आधार मानकर किया जाएगा। (आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी)।ऑनलाइन आवेदन करने की आसान प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)UPSSSC की इस भर्ती के लिए योग्य उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन करके ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं:1.आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं:स्टेप 1.सबसे पहले उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट (upsssc.gov.in) पर लॉगिन करें।2.PET-2025 क्रेडेंशियल्स दर्ज करें:स्टेप 2.होमपेज पर दिए गए भर्ती लिंक पर क्लिक करें और अपने PET-2025 के रजिस्ट्रेशन नंबर और पर्सनल डिटेल्स (या ओटीपी) के जरिए लॉगिन करें। लॉगिन करते ही आपकी बेसिक जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी।3.पद का चुनाव और फॉर्म फिलिंग:स्टेप 3.लॉगिन करने के बाद अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार संबंधित पद (असिस्टेंट अकाउंटेंट/ऑडिटर) का चयन करें और आवेदन पत्र में मांगी गई अन्य सभी आवश्यक जानकारियों को ध्यानपूर्वक भरें।4.दस्तावेज अपलोड और शुल्क भुगतान:स्टेप 4.अपनी नवीनतम फोटो, हस्ताक्षर और 'O' लेवल कंप्यूटर सर्टिफिकेट जैसे जरूरी शैक्षणिक दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करें। इसके बाद अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित ऑनलाइन आवेदन शुल्क का भुगतान करें।5.फाइनल सबमिशन और प्रिंट आउट:स्टेप 5.पूरे फॉर्म को एक बार री-चेक करने के बाद 'Submit' बटन पर क्लिक करें। फॉर्म सफलतापूर्वक जमा होने के बाद, भविष्य के संदर्भ और एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए फाइनल एप्लिकेशन फॉर्म का एक प्रिंट आउट अपने पास जरूर सुरक्षित रख लें।
नई दिल्ली/लखनऊ: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी किए जाने के बाद अब मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की दौड़ शुरू हो गई है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MBBS सीट मैट्रिक्स जारी कर दिया है और उम्मीद है कि अगले एक-दो दिनों में काउंसलिंग शेड्यूल भी आ जाएगा। इस बार यूपी और बिहार के लाखों छात्र काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने जा रहे हैं, लेकिन दोनों राज्यों के सीट मैट्रिक्स में बड़ा अंतर देखने को मिला है।उत्तर प्रदेश: सीटें देश में दूसरी सबसे ज्यादा, लेकिन इस साल नो-ग्रोथउत्तर प्रदेश जनसंख्या के साथ-साथ मेडिकल सीटों के मामले में भी देश का एक बड़ा हब है। कर्नाटक के बाद यूपी में ही सबसे ज्यादा MBBS सीटें हैं। NMC की नई रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में कुल 88 सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें कुल 14,000 सीटें उपलब्ध हैं। हालांकि, यूपी के छात्रों के लिए थोड़ी निराशाजनक खबर यह है कि इस सत्र में राज्य के किसी भी मेडिकल कॉलेज में एक भी नई सीट नहीं बढ़ाई गई है।यूपी में सरकारी बनाम प्राइवेट कॉलेजों का गणितअगर उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को श्रेणियों में बांटें, तो राज्य में सरकारी कॉलेजों की संख्या तो ज्यादा है लेकिन सीटें प्राइवेट के मुकाबले कम हैं। यूपी में कुल 49 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जहां MBBS की 5,700 सीटें हैं। वहीं, राज्य के 39 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में कुल 8,300 सीटें मौजूद हैं, जहां छात्र एडमिशन के लिए दांव लगाएंगे।बिहार: मेडिकल छात्रों के लिए खुशखबरी, इस साल सीटों में बंपर बढ़ोतरीदूसरी ओर, बिहार के नीट क्वालिफायर छात्रों के लिए इस बार बड़ी राहत की खबर है। बिहार में कुल मेडिकल कॉलेजों की संख्या 26 है, जिनमें कुल 4,160 सीटें हैं। खास बात यह है कि इस साल बिहार में कुल 740 MBBS सीटों की बंपर बढ़ोतरी की गई है, जिससे राज्य के छात्रों के लिए डॉक्टर बनने की राह थोड़ी आसान होगी।बिहार के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों का सीट मैट्रिक्सबिहार के कुल 26 कॉलेजों में से 12 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें कुल 1,710 सीटें हैं। इस साल बिहार के सरकारी कॉलेजों में 190 नई सीटें जोड़ी गई हैं। वहीं, बिहार में 14 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें कुल 2,450 सीटें हैं और इस साल प्राइवेट सेक्टर में भी सीटों का इजाफा देखने को मिला है, जिससे कुल आंकड़ा 2,450 सीटों तक पहुंच गया है।
दिल्ली पुलिस को अपना नया नेतृत्व मिल गया है। एक बेहद अनुभवी और जांबाज अधिकारी ने अब दिल्ली पुलिस कमिश्नर के तौर पर कार्यभार संभाला है। उनकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है—इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने अपनी कॉरपोरेट करियर की राह छोड़कर यूपीएससी (UPSC) जैसी कठिन परीक्षा को पास किया और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए। आज, वह राजधानी की कानून-व्यवस्था का जिम्मा संभालते हुए सुरक्षा का नया ब्लूप्रिंट तैयार करने के लिए चर्चा में हैं।इंजीनियरिंग से वर्दी तक का सफरदिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर की शैक्षणिक पृष्ठभूमि तकनीकी रही है। इंजीनियरिंग के छात्र होने के नाते उनमें तार्किक सोच और जटिल समस्याओं को सुलझाने की अद्भुत क्षमता है। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि उनका असली मकसद समाज की सेवा करना है, जिसके लिए उन्होंने प्रशासनिक सेवा की तैयारी का कठिन रास्ता चुना। यूपीएससी की तैयारी के दौरान दिखाई गई उनकी एकाग्रता और कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि आज वे दिल्ली पुलिस के शीर्ष पद पर आसीन हैं।अब दिल्ली की सुरक्षा का नया 'डिजिटल' अध्यायकमिश्नर के पद पर नियुक्त होने के बाद उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनका ध्यान 'स्मार्ट पुलिसिंग' पर होगा। इंजीनियरिंग बैकग्राउंड होने के कारण, वे दिल्ली की सुरक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग करने की योजना बना रहे हैं। राजधानी में अपराध पर लगाम लगाने के लिए वे सीसीटीवी नेटवर्क के एकीकरण और डेटा-संचालित पुलिसिंग (Data-Driven Policing) पर विशेष जोर दे रहे हैं ताकि अपराधियों को किसी भी सूरत में न बख्शा जाए।राजधानी के लिए चुनौतियां और प्राथमिक रणनीतिदिल्ली जैसी महानगर की कमान संभालना एक बड़ी चुनौती है, जहाँ सुरक्षा के कई संवेदनशील आयाम हैं। कमिश्नर ने अपनी प्राथमिकताओं में महिलाओं की सुरक्षा, साइबर अपराधों पर नकेल और स्थानीय थाना स्तर पर पुलिस-जनता के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी है। स्थानीय लोगों के बीच भरोसा जगाने और पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए वे 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर काम कर रहे हैं। उनके पदभार संभालने के बाद से ही दिल्ली पुलिस के प्रशासनिक गलियारों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है।एक मिसाल बने नए कमिश्नरउनकी यह नियुक्ति उन युवा छात्रों के लिए प्रेरणा है जो इंजीनियरिंग या अन्य तकनीकी क्षेत्रों के बाद प्रशासनिक सेवा की ओर रुख करना चाहते हैं। एक इंजीनियर से देश के सबसे बड़े महानगर के पुलिस कमिश्नर बनने तक का उनका यह सफर यह साबित करता है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो किसी भी क्षेत्र का ज्ञान देश सेवा के काम आ सकता है। दिल्ली की जनता को अब उनसे बेहतर सुरक्षा और त्वरित न्याय मिलने की बड़ी उम्मीदें हैं, जिस पर खरे उतरने के लिए वे अपनी पूरी टीम के साथ सक्रिय हो चुके हैं।
बिहार का फिर बढ़ा मान! नवादा के आयुष ने हासिल की चौथी रैंक, टॉप-100 में चमके राज्य के 4 सितारे
शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की मेधा का लोहा एक बार फिर पूरी दुनिया ने माना है। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के आज घोषित नतीजों में बिहार के छात्रों ने अपनी काबिलियत का परचम लहरा दिया है। नवादा के रहने वाले आयुष कुमार ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 4 हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे बिहार का नाम रोशन किया है। इस बार के नतीजों ने साबित कर दिया है कि साधन और संसाधनों की कमी बिहार के छात्रों के सपनों के आड़े नहीं आ सकती।नवादा के आयुष ने किया कमालनीट परीक्षा में टॉप-5 में जगह बनाकर नवादा के आयुष ने एक नया इतिहास रच दिया है। बेहद मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले आयुष की यह सफलता उनके अथक परिश्रम और धैर्य का परिणाम है। आयुष की उपलब्धि पर उनके गृह जिले नवादा में जश्न का माहौल है। आयुष ने बताया कि उन्होंने बिना किसी बड़े महानगर के कोचिंग सेंटर के, ऑनलाइन संसाधनों और अपनी सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। उनकी यह कामयाबी अब राज्य के उन हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है जो डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं।टॉप-100 में बिहार की शानदार दस्तकइस बार के नतीजों में केवल आयुष ही नहीं, बल्कि बिहार के अन्य छात्रों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। नीट की कठिन परीक्षा में राज्य के 4 मेधावी छात्रों ने ऑल इंडिया टॉप-100 की लिस्ट में अपनी जगह पक्की की है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में बिहार से टॉप रैंकर्स की संख्या में हुई यह बढ़ोतरी, राज्य के शैक्षिक परिवेश में हो रहे सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है। शिक्षाविदों का मानना है कि बिहार के छात्र अब तकनीकी और मेडिकल परीक्षाओं के प्रति पहले से कहीं ज्यादा जागरूक और प्रतिस्पर्धी हो गए हैं।सफलता के पीछे का 'बिहार मॉडल'बिहार के इन छात्रों की सफलता के पीछे एक खास 'बिहार मॉडल' उभरकर सामने आया है—जिसमें कड़ी मेहनत, सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम और निरंतर अभ्यास का मेल है। आयुष समेत सभी सफल छात्रों ने एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों को अपना आधार बनाया और मॉक टेस्ट (Mock Tests) के जरिए अपनी कमजोरियों पर काम किया। यह सफलता यह भी दिखाती है कि अब बिहार के छात्र किसी भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में किसी से कम नहीं हैं। राज्य के शिक्षा विभाग और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों द्वारा छात्रों को दी जा रही गाइडेंस का असर अब सीधे नतीजों में दिखने लगा है।बिहार के लिए गौरवशाली पलनवादा से लेकर राजधानी पटना तक, आज नीट के सफल छात्रों की चर्चा हर तरफ है। राज्य के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने भी इन मेधावी छात्रों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी है। सफलता पाने वाले इन 4 छात्रों की कामयाबी न केवल उनके माता-पिता के त्याग को सार्थक करती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो सफलता का शिखर दूर नहीं है। आने वाले समय में ये छात्र देश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेकर बिहार की चिकित्सा सेवा को और बेहतर बनाने की दिशा में अपना योगदान देंगे।
सफलता की कहानियाँ अक्सर प्रेरणा से भरी होती हैं, लेकिन जब इसके पीछे कोई व्यक्तिगत दर्द और भावनात्मक संकल्प हो, तो वह और भी खास बन जाती है। नीट (NEET) की परीक्षा में ऑल इंडिया टॉपर बने इस मेधावी छात्र की कहानी हर किसी की आंखों में आंसू और दिल में हौसला भर देने वाली है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी ने उसकी दादी को उससे छीन लिया, लेकिन उस मासूमियत भरे दुख ने उसे हार मानने के बजाय देश का भविष्य का डॉक्टर बनने का अटूट साहस दिया। आज जब परिणाम आए, तो उसने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि अपनी दादी के उस अधूरे सपने को भी पूरा कर दिखाया।गम को बनाया अपनी ताकतयह कहानी उस दौर की है जब घर में कैंसर से जूझ रही दादी की देखभाल करते हुए इस छात्र ने अस्पताल की भागदौड़ देखी थी। इलाज के दौरान महसूस हुई लाचारी और डॉक्टर के एक छोटे से आश्वासन की अहमियत ने इस छात्र के दिलो-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी। छात्र का मानना है कि उसने डॉक्टर बनने का फैसला उसी पल कर लिया था। घर में दादी के निधन के बाद उसने खुद को पूरी तरह से पढ़ाई के प्रति समर्पित कर दिया। वह अक्सर कहता है, दादी मेरी प्रेरणा हैं, और मैं चाहता हूं कि भविष्य में मेरी वजह से किसी अन्य परिवार को अपने प्रियजन को नहीं खोना पड़े।17 घंटे की कड़ी मेहनत और संयमटॉपर बनने का सफर आसान नहीं होता। इस छात्र ने सफलता के लिए अपना एक सख्त रूटीन तय किया था। वह रोज 16 से 17 घंटे तक पढ़ाई में जुटता था। कोचिंग और स्कूल के बाद घर पर खुद की सेल्फ-स्टडी (Self-Study) पर उसका विशेष जोर रहा। नीट जैसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा में हर विषय पर गहरी पकड़ बनाने के लिए उसने एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों को अपना आधार बनाया। सोशल मीडिया और बाहरी दुनिया की चकाचौंध से दूर रहकर, उसने अपने लक्ष्य को पाने के लिए जो अनुशासन दिखाया, वह आज लाखों नीट एस्पिरेंट्स के लिए एक मिसाल बन गया है।डॉक्टर बनने का सपना और समाज सेवाऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने के बाद, अब इस युवा का लक्ष्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। वह मानता है कि डॉक्टर का पेशा केवल दवा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को मानसिक संबल देने का भी है। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और उन शिक्षकों को दिया है जिन्होंने इस कठिन सफर में उसका हर कदम पर साथ दिया। उसकी यह कामयाबी साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों और मकसद नेक, तो दुनिया की कोई भी चुनौती आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नीट परीक्षा देने वाले लाखों उम्मीदवारों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट यूजी परीक्षा 2026 (NEET UG 2026) की फाइनल आंसर-की (Final Answer Key) आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। परीक्षा में शामिल हुए सभी कैंडिडेट्स नीट की ऑफिशियल वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाकर इसे तुरंत डाउनलोड और चेक कर सकते हैं।विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनटीए द्वारा जारी इस फाइनल आंसर-की में एक प्रश्न को ड्रॉप (Drop) किया गया है, जबकि एक प्रश्न के दो सही विकल्प (Answers) माने गए हैं। फाइनल आंसर-की आने के बाद अब रिजल्ट का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि एनटीए 20 जुलाई 2026 तक 20 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए नीट यूजी री-एग्जाम (NEET UG Re-Exam) के परिणाम घोषित कर देगा।NEET UG 2026 का रिजल्ट कैसे चेक और डाउनलोड करें? (Step-by-Step Guide)रिजल्ट घोषित होने के बाद 21 जून को आयोजित हुई दोबारा परीक्षा (Re-Exam) में शामिल छात्र नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकेंगे:ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर विजिट करें।लिंक पर क्लिक करें: होमपेज पर दिख रहे ‘NEET UG Result 2026’ सेक्शन के अंतर्गत दिए गए एक्टिव लिंक पर क्लिक करें।लॉगिन क्रेडेंशियल्स दर्ज करें: नए खुले विंडो में अपना आवेदन संख्या (Application Number), पासवर्ड या जन्मतिथि (Date of Birth) और स्क्रीन पर दिख रहा सिक्योरिटी पिन (Security Pin) ध्यानपूर्वक भरें।सबमिट और डाउनलोड: सभी क्रेडेंशियल्स भरने के बाद 'Submit' बटन पर क्लिक करें। आपका नीट यूजी स्कोरकार्ड स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगा। इसे डाउनलोड कर लें और भविष्य की काउंसिलिंग प्रक्रिया के लिए इसका एक प्रिंटआउट जरूर निकालकर सुरक्षित रख लें।नीट यूजी 2026 की महत्वपूर्ण तारीखें (Important Timeline)नीट यूजी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया और आगामी डेडलाइन्स का विवरण नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:मुख्य प्रक्रिया / कार्यक्रमनिर्धारित तिथि (Timeline)ओएमआर (OMR) आंसर शीट जारी होने की तिथि13 जुलाई 2026आंसर-की पर आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि28 जून 2026नीट यूजी 2026 संभावित रिजल्ट की तारीख20 जुलाई 2026 तकपरीक्षा शुल्क वापसी (Refund) की आखिरी तारीख31 जुलाई 202621 जून को क्यों आयोजित हुई थी दोबारा परीक्षा?आपको बता दें कि एनटीए ने मूल रूप से नीट यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को देशभर में आयोजित की थी। हालांकि, पेपर लीक और अन्य गंभीर गड़बड़ियों के आरोपों के बाद इस परीक्षा को रद्द (Cancel) करने का फैसला लिया गया था। इसके बाद 21 जून को देश भर के विभिन्न केंद्रों पर दोबारा परीक्षा (Re-Exam) सफलतापूर्वक आयोजित की गई थी, जिसके परिणाम अब आने वाले हैं।उम्मीदवारों के लिए जरूरी सूचना (फीस रिफंड अपडेट):एनटीए ने 3 मई की रद्द हुई परीक्षा के सभी पंजीकृत उम्मीदवारों से परीक्षा शुल्क वापसी (Exam Fee Refund) के लिए अपने वैलिड बैंक खाते की डिटेल्स सबमिट करने को कहा है। शुल्क वापसी का यह पोर्टल 31 जुलाई 2026 तक खुला रहेगा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 11.46 लाख उम्मीदवार अपनी बैंक डिटेल्स सबमिट कर चुके हैं। जिन छात्रों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, वे समय रहते इसे पूरा कर लें।
रेलवे एनटीपीसी सीबीटी-2 परीक्षा की आंसर की जारी, 22 जुलाई तक दर्ज कराएं ऑनलाइन आपत्ति
रेलवे में नौकरी की राह देख रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियों (NTPC) के तहत आयोजित की गई सीबीटी-2 परीक्षा 2026 की आधिकारिक आंसर की (Answer Key) जारी कर दी है। परीक्षा में शामिल हुए सभी अभ्यर्थी अपने-अपने क्षेत्रीय आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइटों पर जाकर लॉगिन क्रेडेंशियल के जरिए अपनी रिस्पॉन्स शीट और उत्तर कुंजी डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही बोर्ड ने आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा भी घोषित कर दी है।22 जुलाई तक खुला रहेगा ऑब्जेक्शन विंडो, समय का रखें खास ध्यानरेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार को बोर्ड द्वारा जारी किए गए किसी उत्तर पर कोई संदेह है या वह उसे गलत मानता है, तो वह उसके खिलाफ ऑनलाइन आपत्ति (Objection) दर्ज करा सकता है। यह ऑब्जेक्शन विंडो 22 जुलाई 2026 की रात 11:55 बजे तक ही सक्रिय रहेगी। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपने दावों को मजबूत दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर दें, क्योंकि इस समय-सीमा के बाद किसी भी माध्यम से भेजी गई आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।आपत्ति दर्ज कराने के लिए कितनी लगेगी फीस और क्या है प्रक्रिया?आरआरबी के नियमों के मुताबिक, उम्मीदवारों को प्रति चुनौती यानी हर एक प्रश्न पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए ₹50 की निर्धारित फीस का भुगतान करना होगा। यदि उम्मीदवार द्वारा उठाई गई आपत्ति सही और जायज पाई जाती है, तो बोर्ड द्वारा उस प्रश्न की फीस उम्मीदवार के बैंक खाते में वापस (Refund) कर दी जाएगी, लेकिन गलत या खारिज की गई आपत्तियों की फीस रिफंड नहीं होगी। भुगतान के लिए उम्मीदवार नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या यूपीआई (UPI) जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं।फाइनल आंसर की और रिजल्ट पर टिकीं उम्मीदवारों की नजरेंसभी प्राप्त आपत्तियों की गहन समीक्षा रेलवे के विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) द्वारा की जाएगी। यदि आपत्तियां सही पाई जाती हैं, तो उत्तरों में सुधार किया जाएगा और उसके आधार पर ही फाइनल आंसर की (Final Answer Key) तैयार की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अगस्त 2026 के पहले या दूसरे सप्ताह में आरआरबी एनटीपीसी सीबीटी-2 परीक्षा का अंतिम परिणाम और कट-ऑफ अंक भी घोषित किए जा सकते हैं। इस परीक्षा के माध्यम से भारतीय रेलवे के विभिन्न जोनों में हजारों पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्तियां की जानी हैं।
आईआईटी के सबसे कठिन कोर्स से निकले इस युवा ने बनाया AI स्टार्टअप, एक दिन में कमाए 77 करोड़ रुपये
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) को दुनिया भर में बेहतरीन इंजीनियर और इनोवेटर्स देने के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल ही में एक आईआईटीयन ने सफलता की जो नई इबारत लिखी है, उसने पूरे टेक जगत को हैरान कर दिया है। आईआईटी से सबसे मुश्किल माने जाने वाले कोर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद इस युवा इंजीनियर ने नौकरी की पारंपरिक राह छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में कदम रखते हुए अपना खुद का स्टार्टअप शुरू किया और हाल ही में उनकी कंपनी ने एक ही दिन के भीतर 77 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड तोड़ कमाई (Revenue) दर्ज की है। इस ऐतिहासिक कामयाबी ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक नया बेंचमार्क स्थापित कर दिया है।आईआईटी का वो सबसे मुश्किल कोर्स और लीक से हटकर सोचने का जज्बाआईआईटी में दाखिला लेना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है, लेकिन उसके भीतर भी कुछ ब्रांच और कोर्स जैसे कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग या एडवांस्ड डेटा साइंस को सबसे कठिन और कड़ा माना जाता है। इस युवा उद्यमी ने उसी चुनौतीपूर्ण शैक्षणिक माहौल में न केवल खुद को साबित किया, बल्कि एआई और मशीन लर्निंग की बारीकियों को भी गहराई से समझा। जहां अधिकांश छात्र पढ़ाई पूरी करते ही करोड़ों के पैकेज वाली विदेशी नौकरियों का रुख करते हैं, वहीं इन्होंने भारत में रहकर अपनी खुद की तकनीक और कंपनी खड़ी करने का जोखिम भरा लेकिन दूरदर्शी फैसला लिया।एआई स्टार्टअप की वो अनूठी तकनीक जिसने रातों-रात बदल दी किस्मतइस स्टार्टअप की अभूतपूर्व सफलता के पीछे एक ऐसा एआई-संचालित सॉफ़्टवेयर या समाधान (AI Solution) है, जिसने वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियों की एक बहुत बड़ी और जटिल समस्या को चुटकियों में हल कर दिया है। चाहे वह ऑटोमेशन हो, डेटा एनालिटिक्स हो या फिर प्रेडिक्टिव कोडिंग; इस स्टार्टअप की तकनीक को बाजार में हाथों-हाथ लिया गया। हाल ही में हुए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय करार या फंडिंग राउंड और प्रोडक्ट लॉन्च के चलते कंपनी के पास ऑर्डर्स की बाढ़ आ गई, जिसके परिणामस्वरूप महज 24 घंटे के भीतर कंपनी का रेवेन्यू ग्राफ 77 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया।भारतीय टेक और स्टार्टअप जगत के लिए क्यों है यह एक बड़ी मिसाल?यह सफलता की कहानी भारत के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। यह साबित करता है कि अगर आपके पास सही हुनर, मजबूत शैक्षणिक आधार और आधुनिक तकनीक जैसे जनरेटिव एआई (Generative AI) की समझ है, तो आप भारत की धरती से भी वैश्विक स्तर का बिजनेस खड़ा कर सकते हैं। टेक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला समय पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, और भारतीय आईआईटीयंस इस वैश्विक एआई क्रांति (AI Revolution) का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
तकनीकी डिग्री, डिप्लोमा या आईटीआई (ITI) धारक सरकारी नौकरी के इच्छुक युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) ने विभिन्न श्रेणियों में कुल 1213 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है।इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि इसमें आईटीआई पास युवाओं से लेकर इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), मानव संसाधन (HR), मार्केटिंग, जनसंपर्क और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के अनुभवी पेशेवरों तक के लिए बेहतरीन अवसर मौजूद हैं। ये सभी नियुक्तियां निश्चित अवधि (Fixed Term Contract) के लिए की जाएंगी और चयनित उम्मीदवारों की तैनाती एवीएनएल की विभिन्न उत्पादन इकाइयों में होगी।महत्वपूर्ण तिथियांइस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खुल चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार समय सीमा के भीतर अपना फॉर्म भर सकते हैं:ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तिथि: 11 जुलाई 2026आवेदन करने की अंतिम तिथि: 25 जुलाई 2026रिक्तियों का पूरा विवरण (Vacancy Details)कुल 1213 पदों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें 1005 पद जूनियर तकनीशियन के हैं और 208 पद कार्यकारी (Executive) श्रेणी के लिए निर्धारित हैं।1. जूनियर तकनीशियन पद (कुल रिक्तियां: 1005)पद का नामसंबंधित इकाइयांकुल रिक्तियांजूनियर तकनीशियन (फिटर–सामान्य)HVF, EFA, OFMK, MTPF400जूनियर तकनीशियन (मशीनिस्ट)HVF, EFA, OFMK, MTPF216जूनियर तकनीशियन (इलेक्ट्रीशियन)HVF, OFMK84जूनियर तकनीशियन (इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक)HVF, OFMK69जूनियर तकनीशियन (कच्चे माल प्रबंधन संयंत्र में OMHE)HVF, OFMK66जूनियर तकनीशियन (वेल्डर)HVF, OFMK55जूनियर तकनीशियन (गुणवत्ता आश्वासन सहायक)HVF, OFMK44जूनियर तकनीशियन (फाउंड्रीमैन)HVF, OFMK31जूनियर तकनीशियन (मैकेनिक मशीन टूल रखरखाव)HVF, OFMK23जूनियर तकनीशियन (पेंटर–सामान्य)HVF, OFMK10जूनियर तकनीशियन (इलेक्ट्रोप्लेटर)HVF, EFA4जूनियर तकनीशियन (फोर्जर और हीट ट्रीटर)OFMK2जूनियर तकनीशियन (रिगर)HVF12. कार्यकारी श्रेणी पद (कुल रिक्तियां: 208)पद का नामकुल रिक्तियांपद का नामकुल रिक्तियांजूनियर मैनेजर (मैकेनिकल)92उप प्रबंधक (मैकेनिकल)13जूनियर मैनेजर (इलेक्ट्रॉनिक्स)30उप प्रबंधक (विपणन/मार्केटिंग)7जूनियर मैनेजर (इलेक्ट्रिकल)18उप प्रबंधक (इलेक्ट्रॉनिक्स)6जूनियर मैनेजर (मानव संसाधन)8उप प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी)3जूनियर मैनेजर (धातु विज्ञान)8उप प्रबंधक (इलेक्ट्रिकल)2जूनियर मैनेजर (राजभाषा)4उप प्रबंधक (कृत्रिम बुद्धिमत्ता)1जूनियर मैनेजर (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)3उप प्रबंधक (जनसंपर्क एवं कॉर्पोरेट संचार)1जूनियर मैनेजर (वित्त एवं लेखा)2अतिरिक्त महाप्रबंधक (व्यापार विकास)2सहायक प्रबंधक (वित्त)2वरिष्ठ प्रबंधक (साइबर सुरक्षा)1सहायक प्रबंधक (सिविल)1वरिष्ठ प्रबंधक (बौद्धिक संपदा)1सहायक प्रबंधक (कंपनी सचिव)1उप महाप्रबंधक (COMPANY SECRETARY)1सलाहकार (वित्त एवं लेखा परीक्षा)1शैक्षणिक योग्यता और अनुभव (Eligibility Criteria)विभिन्न पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं निम्नानुसार तय की गई हैं:जूनियर तकनीशियन: उम्मीदवार के पास संबंधित ट्रेड में मान्यता प्राप्त संस्थान से आईटीआई (NTC या NAC) का प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है।जूनियर मैनेजर, सहायक प्रबंधक और उप प्रबंधक (तकनीकी): संबंधित इंजीनियरिंग विषय में BE या BTech की डिग्री अथवा आवश्यक स्नातकोत्तर (PG) डिग्री होनी चाहिए।गैर-तकनीकी पद (वित्त, HR, मार्केटिंग, CS और जनसंचार): संबंधित विषय में स्नातक (Graduation) या स्नातकोत्तर (Post Graduation) की व्यावसायिक डिग्री होनी चाहिए।सलाहकार (वित्त एवं लेखा परीक्षा): उम्मीदवार का चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) होना आवश्यक है, साथ ही वित्त एवं ऑडिट क्षेत्र में न्यूनतम 10 वर्ष का कार्य अनुभव अनिवार्य है।अतिरिक्त महाप्रबंधक (बिजनेस डेवलपमेंट): कम से कम कर्नल रैंक से सेवानिवृत्त सेना अधिकारी, जिनके पास प्रासंगिक क्षेत्र में 15 वर्ष का अनुभव हो।वरिष्ठ प्रबंधक (साइबर सुरक्षा व बौद्धिक संपदा): संबंधित तकनीकी डिग्री के साथ आवश्यक प्रोफेशनल सर्टिफिकेट और कार्य अनुभव होना जरूरी है।नोट: हर पद के लिए कार्य अनुभव और विशिष्ट योग्यताएं अलग-अलग हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे फॉर्म भरने से पहले आधिकारिक अधिसूचना (Official Notification) को ध्यान से पढ़ लें।आयु सीमा: पदों के स्तर और ग्रेड के अनुसार अलग-अलग आयु सीमा निर्धारित की गई है। आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि (25 जुलाई 2026) के आधार पर की जाएगी।आवेदन शुल्कसामान्य (General), EWS और ओबीसी (OBC) वर्ग: ₹300SC, ST, PwBD, पूर्व सैनिक (Ex-Servicemen) और सभी महिला उम्मीदवार: निःशुल्क (कोई शुल्क नहीं)आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Application Process)योग्य और इच्छुक उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन करके ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:1.वेबसाइट पर जाएं:चरण 1.सबसे पहले आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट avnl.co.in पर विजिट करें।2.रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया:चरण 2.होमपेज पर दिए गए Career सेक्शन में जाएं और Register के विकल्प पर क्लिक करें। यहाँ अपना नाम, पद का नाम, पोस्ट कोड, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करें।3.OTP वेरिफिकेशन:चरण 3.आपके मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर एक ओटीपी (OTP) आएगा। उसे निर्दिष्ट बॉक्स में दर्ज करके अपनी पंजीकरण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करें।4.लॉगिन और फॉर्म फिलिंग:चरण 4.पंजीकरण के बाद प्राप्त हुई लॉगिन आईडी और पासवर्ड की मदद से पोर्टल पर दोबारा लॉगिन करें। इसके बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई अपनी सभी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारियां सही-सही दर्ज करें।5.दस्तावेज अपलोड:चरण 5.अपनी हालिया पासपोर्ट साइज फोटो, स्पष्ट हस्ताक्षर और पद से संबंधित सभी जरूरी शैक्षणिक व अनुभव दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें।6.रिव्यू और सबमिट:चरण 6.भरे गए फॉर्म को एक बार दोबारा अच्छे से जांच लें। सब कुछ सही होने पर मैं सहमत हूं (I Agree) वाले चेकबॉक्स पर टिक करें, कैप्चा कोड दर्ज करें और आवेदन फॉर्म को फाइनल सबमिट कर दें।7.शुल्क भुगतान और प्रिंट:चरण 7.यदि आप पर आवेदन शुल्क लागू होता है, तो नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या यूपीआई के माध्यम से ₹300 का ऑनलाइन भुगतान करें। इसके बाद भविष्य के संदर्भ के लिए सबमिट किए गए आवेदन फॉर्म का एक प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।
देश के लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित खबर सामने आ रही है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) समेत देश के तमाम प्रतिष्ठित सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की उम्मीद लगाए बैठे छात्रों का इंतजार अब चंद दिनों में खत्म होने वाला है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट यूजी (NEET UG) के परीक्षा परिणामों को लेकर चल रहा सस्पेंस पूरी तरह समाप्त होने जा रहा है। सूत्रों और आधिकारिक गलियारों से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, एनटीए 16 से 20 जुलाई के बीच किसी भी वक्त नीट यूजी के नतीजे घोषित कर सकता है। इस घोषणा के साथ ही देश के भावी डॉक्टरों के भविष्य का फैसला हो जाएगा।कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच कॉपियों का मूल्यांकन पूरा, अंतिम चरण में तैयारीइस साल आयोजित हुई नीट यूजी परीक्षा में देश भर के रिकॉर्ड तोड़ छात्रों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा के बाद से ही छात्र लगातार अपनी आंसर की (Answer Key) और रिजल्ट की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। एनटीए के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं की कड़ाई से जांच और ओएमआर शीट के वेरिफिकेशन का काम पूरी तरह से मुकम्मल कर लिया गया है। अब तकनीकी रूप से डेटा को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि रिजल्ट जारी होने के बाद वेबसाइट पर कोई तकनीकी खराबी न आए। छात्र एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने रोल नंबर और जन्म तिथि के जरिए अपना स्कोरकार्ड और ऑल इंडिया रैंक (AIR) डाउनलोड कर सकेंगे।एम्स दिल्ली और टॉप मेडिकल कॉलेजों के कट-ऑफ पर टिकी सबकी नजरेंनीट यूजी का रिजल्ट आते ही जो सबसे बड़ा मुकाबला शुरू होगा, वह है देश के सर्वश्रेष्ठ मेडिकल संस्थान एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) में सीट पक्की करने का। जियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, जोधपुर और ऋषिकेश जैसे प्रमुख शहरों में स्थित एम्स संस्थानों की सीटों के लिए कट-ऑफ बेहद हाई रहने की उम्मीद है। स्थानीय कोचिंग सेंटर्स और एजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार प्रश्न पत्र के स्तर को देखते हुए टॉपर्स के स्कोर में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। ऐसे में चंद नंबरों के फासले से भी छात्रों की रैंक में सैकड़ों पायदान का अंतर आ सकता है, जिसके चलते एम्स की दौड़ इस बार और भी ज्यादा दिलचस्प हो गई है।रिजल्ट के तुरंत बाद शुरू होगी काउंसलिंग की भागदौड़नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और विभिन्न राज्यों के स्थानीय तकनीकी शिक्षा विभाग ऑल इंडिया कोटा (15%) और स्टेट कोटा (85%) सीटों के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। विशेषज्ञों ने छात्रों और उनके परिजनों को सलाह दी है कि वे रिजल्ट आने से पहले ही अपने सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे जाति प्रमाण पत्र, डोमिसाइल (मूल निवास), नीट का एडमिट कार्ड और जरूरी शैक्षणिक कागजात तैयार रखें ताकि काउंसलिंग के समय किसी भी तरह की हड़बड़ी या परेशानी से बचा जा सके।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर टॉप ट्रेंड बना नीट परीक्षा परिणामआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल मीडिया एनालिटिक्स के मुताबिक, 'NEET UG Result Announcement 2026' इस समय इंटरनेट और ग्लोबल एआई सर्च इंजनों पर सबसे बड़ी सर्च वेव बन चुका है। गूगल और बिंग जैसे आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर देश भर के करोड़ों लोग लगातार 'नीट यूजी रिजल्ट डायरेक्ट लिंक' और 'एम्स एक्सपेक्टेड कट ऑफ' जैसे कीवर्ड्स खोज रहे हैं। एआई मॉडल्स के अनुसार, जुलाई का यह हफ्ता देश के पूरे एजुकेशन सेक्टर के लिए सबसे महत्वपूर्ण होने वाला है, जिसकी पल-पल की लाइव अपडेट्स पर छात्र टकटकी लगाए बैठे हैं।
ग्लोबल टेक इंडस्ट्री और कॉर्पोरेट जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक ऑटोमेशन की बेकाबू रफ्तार ने दुनिया भर के रोजगार बाजार में एक ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। तकनीकी दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों, अर्थशास्त्रियों और टेक-गुरुओं ने एक सुर में अब तक का सबसे बड़ा और डरावना अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में तबाही का एक ऐसा दौर देखने को मिल सकता है जो मानव इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। इस डिजिटल क्रांति की वजह से दुनिया भर के लाखों सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स, डेटा एनालिस्ट्स और व्हाइट-कॉलर प्रोफेशनल्स की नौकरियां खतरे में हैं और वे घर बैठने पर मजबूर हो सकते हैं।इंसानी दिमाग पर भारी पड़ रहा है एआई का ये नया अवतारअब तक माना जाता था कि तकनीक केवल मजदूरी या क्लर्क जैसे बेसिक कामों को रिप्लेस करेगी, लेकिन जनरेटिव एआई और एडवांस मशीन लर्निंग मॉडल्स ने इस धारणा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। आज एआई कोडिंग करने, जटिल वित्तीय रिपोर्ट तैयार करने, कानूनी दस्तावेज लिखने और रचनात्मक डिजाइनिंग जैसे काम इंसानों से दस गुना तेजी से और बेहद कम लागत में कर रहा है। बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां अपने खर्चों में कटौती करने और मुनाफा बढ़ाने के लिए धड़ाधड़ इंसानी कर्मचारियों की जगह इन एआई टूल्स को दे रही हैं। यही वजह है कि सिलिकॉन वैली से लेकर भारत के बड़े आईटी हब्स तक छंटनी (Layoffs) का एक अंतहीन सिलसिला शुरू हो चुका है।बेंगलुरु से लेकर नोएडा तक के आईटी हब्स में मचा हड़कंपजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो इस खौफनाक चेतावनी का सबसे गहरा असर भारत के प्रमुख तकनीकी शहरों पर पड़ रहा है। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरों में रहने वाले लाखों युवा प्रोफेशनल्स के बीच अपनी नौकरी को लेकर भारी असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। स्थानीय आईटी संगठनों और कर्मचारी यूनियनों के मुताबिक, कंपनियों ने नए प्रोजेक्ट्स के लिए हायरिंग लगभग फ्रीज कर दी है और मौजूदा स्टाफ पर वर्कलोड लगातार बढ़ाया जा रहा है। इन शहरों के रियल एस्टेट और स्थानीय इकोनॉमी पर भी इसका सीधा असर दिखने लगा है, क्योंकि टेक प्रोफेशनल्स अब बड़े खर्चों से परहेज कर रहे हैं।क्या है इस महा-संकट से बचने का एकमात्र रास्ताइस भीषण मंदी और तकनीकी बदलाव के बीच करियर एक्सपर्ट्स ने प्रोफेशनल्स को एक बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि जो लोग समय के साथ खुद को अपग्रेड नहीं करेंगे, उनका बाहर होना पूरी तरह तय है। इस नए दौर में टिके रहने के लिए 'अपस्किलिंग' और 'रीस्किलिंग' ही एकमात्र ढाल हैं। प्रोफेशनल्स को अब पारंपरिक कोडिंग या थ्योरी से आगे बढ़कर प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एआई इंटीग्रेशन, साइबर सिक्योरिटी और क्रिटिकल थिंकिंग जैसे एडवांस स्किल्स सीखने होंगे। यह लड़ाई अब इंसान बनाम इंसान नहीं, बल्कि इंसान बनाम मशीन की हो चुकी है, जहां केवल सबसे योग्य ही सर्वाइव कर पाएगा।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन का नया विमर्शआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल मीडिया एनालिटिक्स के मुताबिक, 'AI Replacing Human Jobs' इस समय इंटरनेट और ग्लोबल एआई सर्च इंजनों पर नंबर वन ट्रेंडिंग टॉपिक बन चुका है। गूगल और बिंग जैसे आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर दुनिया भर के करोड़ों लोग लगातार 'फ्यूचर ऑफ टेक जॉब्स' और 'हाउ टू सेव जॉब फ्रॉम एआई' जैसे विषयों को खोज रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारों को इस डिजिटल बदलाव को विनियमित करने के लिए तुरंत नीतियां बनानी होंगी, अन्यथा आने वाले समय में यह तकनीकी प्रगति एक बड़े वैश्विक सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप ले सकती है।
देश के प्रशासनिक और सरकारी महकमों में महिला कर्मचारियों को राहत देने के लिए कई बड़े-बड़े नियम और नीतियां बनाई जाती हैं। इन्हीं में से एक बेहद महत्वाकांक्षी नीति है 'सिंगल वुमन' ट्रांसफर पॉलिसी (Single Woman Transfer Policy)। कागजों पर यह नीति अविवाहित, विधवा या सिंगल मदर महिला कर्मचारियों को उनके गृह जनपद या पसंदीदा सुरक्षित स्थान पर पोस्टिंग दिलाने का भरोसा देती है। लेकिन जब बात इसके जमीनी क्रियान्वयन (Ground Reality) की आती है, तो हकीकत बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक नजर आती है। सचिवालयों और विभागीय मुख्यालयों के चक्कर काटते-काटते महिला कर्मचारियों की चप्पलें घिस जाती हैं, लेकिन ट्रांसफर की फाइल टस से मस नहीं होती। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह पॉलिसी वाकई महिलाओं की मदद कर रही है या सिर्फ एक कागजी झुनझुना बनकर रह गई है।कागजी वादों और दफ्तरों के चक्करों के बीच पिसतीं महिला कर्मचारीनियमों के मुताबिक, जो महिलाएं अकेले अपने परिवार या बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, उन्हें ट्रांसफर प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि वे सुरक्षित और अनुकूल माहौल में काम कर सकें। लेकिन हकीकत में इन फाइलों को लालफीताशाही (Bureaucracy) और प्रशासनिक ढिलाई का सामना करना पड़ता है। कई बार रसूखदार और सिफारिशी लोग सामान्य कोटे से बाजी मार ले जाते हैं, जबकि वास्तविक हकदार सिंगल महिलाएं दफ्तरों के बाबू से लेकर बड़े साहबों की चौखट पर गुहार लगाती रह जाती हैं। कई महिलाओं का दर्द है कि इस पॉलिसी का लाभ उठाने के लिए उन्हें इतने चक्कर काटने पड़ते हैं कि वे मानसिक रूप से पूरी तरह टूट जाती हैं।लखनऊ से लेकर दिल्ली तक प्रशासनिक गलियारों में उठ रही आवाजजियोग्राफिकल और लोकल लेवल पर देखें तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास भवन, सचिवालय और विभिन्न विभागीय मुख्यालयों सहित देश की राजधानी दिल्ली के केंद्रीय दफ्तरों में ऐसी हजारों फाइलें धूल फांक रही हैं। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में तैनात महिला शिक्षकों, बैंक कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अकेले रहना और ड्यूटी निभाना एक बड़ी चुनौती होती है। स्थानीय स्तर पर महिला कर्मचारी संगठनों ने इस मुद्दे को कई बार प्रमुखता से उठाया है। उनका साफ कहना है कि जब तक ट्रांसफर की इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध (Time-bound) नहीं किया जाएगा, तब तक 'सिंगल वुमन' के नाम पर मिलने वाली राहत सिर्फ फाइलों में ही दबी रहेगी।क्या है इस नीति के फेल होने की असली वजहवित्तीय और प्रशासनिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस पॉलिसी के जमीनी स्तर पर नाकाम होने की सबसे बड़ी वजह जवाबदेही की कमी है। विभागों में यह स्पष्ट नहीं होता कि खाली पड़े पदों पर पहला हक किसका है। इसके अलावा, कई बार प्रशासनिक अधिकारी 'अपरिहार्य कार्यहित' (Public Interest) का हवाला देकर इन आवेदनों को खारिज कर देते हैं। इस वजह से सिंगल मदर और अकेले रह रही महिलाओं को अपने बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जो अंततः उनके कार्य प्रदर्शन (Work Performance) को भी प्रभावित करता है।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर छा गया महिलाओं का यह दर्दआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स के विश्लेषण के मुताबिक, 'Govt Employee Transfer Policy Reforms' और 'महिला कर्मचारी तबादला अधिकार' जैसे विषय इस समय इंटरनेट पर एक गंभीर विमर्श का रूप ले चुके हैं। गूगल और बिंग जैसे आधुनिक एआई सर्च इंजनों पर लोग लगातार इस पॉलिसी से जुड़े नियम और इसकी कमियों के बारे में सर्च कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारें वाकई महिला सशक्तिकरण को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें 'सिंगल वुमन' ट्रांसफर पॉलिसी को पूरी तरह से ऑटोमेटेड डिजिटल पोर्टल से जोड़ना होगा, जहां किसी भी मानवीय हस्तक्षेप या भेदभाव की गुंजाइश न बचे।
CBSE Big Update: क्या 9वीं क्लास में पढ़नी होगी तीसरी भाषा? जानिए सीबीएसई का नया नियम और पूरी सच्चाई
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के छात्रों और अभिभावकों के बीच इन दिनों नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत होने वाले बदलावों को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा कन्फ्यूजन कक्षा 9वीं में तीसरी भाषा (Third Language) की अनिवार्यता को लेकर बना हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर स्कूल कॉरिडोर तक चर्चा है कि क्या अब हर छात्र को नौवीं कक्षा में तीन भाषाएं पढ़नी होंगी? आइए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के नए सर्कुलर के आधार पर इस पूरे नियम को आसान भाषा में समझते हैं, ताकि छात्रों और पैरेंट्स का हर डाउट दूर हो सके।क्या है सीबीएसई का नया थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला और इसके मायनेराष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा के ढांचे में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिसमें बहुभाषावाद (Multilingualism) को बढ़ावा देना एक प्रमुख लक्ष्य है। सीबीएसई के नए नियमों के प्रस्ताव के मुताबिक, अब तक जो तीसरी भाषा कक्षा 8वीं तक ही पढ़ाई जाती थी, उसे माध्यमिक स्तर यानी कक्षा 9वीं और 10वीं तक विस्तारित करने की योजना है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं के साथ-साथ विदेशी भाषाओं के ज्ञान को भी छात्रों के लिए सुलभ बनाना है, जिससे उनका भाषाई और मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सके।भाषा के चयन को लेकर क्या हैं शर्तें और विकल्पसीबीएसई के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि यह नियम पूरी तरह लागू होता है, तो छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं मूल रूप से भारतीय (Native Indian Languages) होनी अनिवार्य होंगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र पहली भाषा के रूप में अंग्रेजी चुनता है, तो उसे बाकी की दो भाषाओं के रूप में हिंदी, संस्कृत, तमिल, बंगाली या किसी अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषा का चयन करना होगा। तीसरी भाषा के तौर पर छात्र किसी विदेशी भाषा को भी चुन सकते हैं, बशर्ते उनकी शुरुआती दो भाषाएं भारतीय हों।बोर्ड परीक्षाओं और मार्किंग स्कीम पर क्या पड़ेगा इसका असरइस नए भाषाई नियम को लेकर छात्रों के मन में सबसे बड़ा डर बोर्ड परीक्षा के तनाव को लेकर है। शिक्षा बोर्ड ने साफ किया है कि इस कदम का उद्देश्य छात्रों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें अधिक कुशल बनाना है। नए अकादमिक क्रेडिट सिस्टम के तहत इन भाषाओं के अंकों को मुख्य विषयों के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे छात्रों के ओवरऑल स्कोरिंग पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिलेगा। सीबीएसई स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर पर योग्य भाषा शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करें ताकि छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने में कोई परेशानी न हो।
वकालत में बनाना है शानदार करियर? ये हैं देश की टॉप 10 लॉ यूनिवर्सिटी
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और व्यावहारिक बनाने की तैयारी में जुट गया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश की अपनी नई 'राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा' (SCF) तैयार की जा रही है. इसी सिलसिले में यूपी बोर्ड के मुख्यालय में एक विशेष पांच दिवसीय कार्यशाला (वर्कशॉप) का आगाज हुआ है. इस महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा विभाग के आला अधिकारी, विषय विशेषज्ञ, जाने-माने शिक्षाविद और अनुभवी शिक्षक मिलकर सूबे के नए सिलेबस का पूरा खाका तैयार कर रहे हैं.यूपी के इतिहास और संस्कृति को मिलेगा सिलेबस में विशेष स्थानकार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन करते हुए यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि यह नई रूपरेखा प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा की दिशा और दशा बदलने का काम करेगी. नया करिकुलम (पाठ्यक्रम) तैयार करते समय उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक विविधता और यहां की स्थानीय जरूरतों को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही, रट्टा मार पढ़ाई को खत्म कर 'दक्षता आधारित शिक्षा' (Competency-Based Education) और नई मूल्यांकन प्रणाली पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छात्रों को समान अवसर मिल सकें.आएंगी नई किताबें, डिजिटल माध्यम से भी जुड़ेंगे एक्सपर्ट्सबोर्ड के अपर सचिव स्कंद शुक्ल ने कार्यशाला की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस पांच दिवसीय मंथन से जो भी महत्वपूर्ण सुझाव निकलकर सामने आएंगे, उन्हीं के आधार पर राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा का फाइनल ड्राफ्ट तैयार होगा. इसी ड्राफ्ट के मुताबिक भविष्य में सभी विषयों की नई समयोपयोगी पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रमों का निर्माण किया जाएगा. इस कार्यशाला में कुछ बड़े विशेषज्ञ ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी राय दे रहे हैं. पहले दिन सभी प्रतिभागियों को अलग-अलग विषयवार ग्रुप्स में बांटकर विस्तृत चर्चा शुरू कराई गई ताकि एक समावेशी और भविष्योन्मुखी (Future-Ready) शिक्षा नीति को जमीन पर उतारा जा सके.
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देश में स्कूली स्तर पर डिजिटल शिक्षा और तकनीकी साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम उठाया है। बोर्ड ने कक्षा 8वीं से लेकर 12वीं तक के छात्रों के लिए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) के साथ मिलकर एक खास डिजिटल पहल की शुरुआत की है। इस नए प्रोग्राम के अंतर्गत छात्रों के लिए बिल्कुल मुफ्त में 19 एडवांस ऑनलाइन कोर्स लॉन्च किए गए हैं, जिसके लिए छात्रों को कोई भी रजिस्ट्रेशन फीस या कोर्स फीस नहीं देनी होगी।इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को भविष्य की आधुनिक तकनीकों के लिए तैयार करना है। बोर्ड की इस घोषणा के बाद देश भर के सीबीएसई स्कूलों के छात्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।कोर्सेज में शामिल हैं AI, पायथन और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक विषयसीबीएसई और एनआईईएलआईटी द्वारा तैयार किए गए इन 19 फ्री कोर्सेज में वर्तमान समय और भविष्य की सबसे ज्यादा मांग वाले (High-Demand) तकनीकी विषयों को शामिल किया गया है। छात्र अपनी रुचि के अनुसार निम्नलिखित बड़े सेक्टर्स का हिस्सा बन सकते हैं:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जेनरेटिव AI (Generative AI)पायथन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Python Programming)इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और साइबर सिक्योरिटीएडवांस्ड क्लाउड कंप्यूटिंग (AWS DevSecOps)एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और वीएलएसआई (VLSI) डिजाइनसबसे अच्छी बात यह है कि ये सभी डिजिटल कोर्स हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छात्रों के लिए पढ़ाई की सामग्री को समझना और सीखना काफी आसान हो जाएगा।अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई: 90 मिनट से लेकर 100 घंटे तक के मॉड्यूल्ससीबीएसई के अनुसार, छात्रों की पढ़ाई के नुकसान को बचाने और उनके समय को मैनेज करने के लिए इन कोर्सेज की अवधि को बेहद लचीला (Flexible) रखा गया है। इसमें कुछ शुरुआती और बेसिक मॉड्यूल्स ऐसे हैं जिन्हें छात्र मात्र 90 मिनट के भीतर पूरा कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, जो छात्र किसी विषय को गहराई से सीखना चाहते हैं, उनके लिए 100 घंटे से भी अधिक लंबे एडवांस्ड प्रोग्राम्स तैयार किए गए हैं। छात्र अपनी स्कूल की नियमित पढ़ाई और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ अपनी स्पीड के अनुसार जब चाहें इन कोर्सेज को ऑनलाइन पूरा कर सकते हैं।स्कूल शिक्षा में नई तकनीक और कोडिंग को शामिल करने का बड़ा लक्ष्यसीबीएसई ने देश के अपने सभी संबद्ध (Affiliated) स्कूलों को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी कर निर्देश दिया है कि वे इस निशुल्क कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार करें और अपने स्कूल के ज्यादा से ज्यादा छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करें। इच्छुक छात्र बिना किसी परेशानी के सीधे एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी पोर्टल (NIELIT Digital University Portal) पर जाकर इन पाठ्यक्रमों के लिए अपना डायरेक्ट रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर पर ही इस तरह की इंडस्ट्री-ओरिएंटेड टेक्नोलॉजी से परिचित होने से बच्चों में व्यावहारिक समस्या सुलझाने की क्षमता (Practical Problem-Solving), कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और इनोवेशन स्किल्स का तेजी से विकास होगा। इसके साथ ही यह पहल देश के लाखों छात्रों को आगे चलकर हायर एजुकेशन, कंप्यूटर साइंस, डेटा एनालिटिक्स और इंजीनियरिंग जैसे बड़े डिजिटल डोमेन में एक बेहतरीन करियर बनाने के लिए सबसे मजबूत आधार देगी। फ्री ऑनलाइन कोर्सेज की इस शुरुआत के साथ सीबीएसई ने स्कूली शिक्षा को भारत की बढ़ती डिजिटल इकॉनमी और आधुनिक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की जरूरतों के साथ मजबूती से जोड़ दिया है।
दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जिस भी क्षेत्र में कदम रखते हैं, सफलता उनके कदम चूमती है। ऐसी ही एक असाधारण शख्सियत हैं लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी। मुंबई में जन्मी और पुणे में पली-बढ़ीं कशिश के लिए मॉडलिंग और ग्लैमर की चकाचौंध भरी दुनिया बाहें फैलाए तैयार थी, लेकिन उनके दिल में देश सेवा का जज्बा कहीं ज्यादा मजबूत था।साल 2023 में कशिश ने 'मिस इंटरनेशनल इंडिया' का खिताब अपने नाम कर हुस्न का परचम लहराया था। मॉडलिंग उनका पैशन जरूर था, लेकिन यह उनका लॉन्ग-टर्म करियर नहीं था। कशिश के मुताबिक, नेशनल कैडेट कोर (NCC) में शामिल होना उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा, जिसने उनके सपनों की दिशा ही बदल दी।हार्वर्ड का ऑफर ठुकराया और CDS परीक्षा में पाई ऑल इंडिया रैंक 2कशिश मेथवानी न सिर्फ दिखने में खूबसूरत हैं बल्कि पढ़ाई-लिखाई में भी उनका कोई सानी नहीं है। 9 जनवरी 2001 को उल्हासनगर के एक सिंधी परिवार में जन्मी कशिश ने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री की है। इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईएससी (IISc) बेंगलुरु से न्यूरोसाइंस में अपनी थीसिस पूरी की। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें दुनिया की टॉप हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने का ऑफर मिला था, जिसे उन्होंने देश सेवा के लिए ठुकरा दिया।ग्लैमर और बड़े एकेडमिक ऑफर्स को पीछे छोड़कर उन्होंने 2024 में कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा में बैठने का फैसला किया। अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत उन्होंने इस कठिन परीक्षा में पूरे देश में दूसरी रैंक (AIR 2) हासिल कर सबको चौंका दिया।रिपब्लिक डे परेड में पीएम मोदी से मिली ट्रॉफी ने बदला जीवनएक इंटरव्यू में कशिश ने बताया कि रिपब्लिक डे परेड में मार्च करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों 'बेस्ट कैडेट' की ट्रॉफी हासिल करना उनके जीवन का सबसे गौरवशाली क्षण था। इसी पल ने उन्हें एक नया मकसद दिया और यह साफ कर दिया कि उनकी असली जगह भारतीय सेना ही है।इसके बाद उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में 11 महीने की बेहद कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी की। बीते 6 सितंबर को शानदार पासिंग आउट परेड के बाद वे इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन हुईं। उन्हें सेना की बेहद महत्वपूर्ण 'आर्मी एयर डिफेंस रेजिमेंट' में पोस्टिंग मिली है, जो देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।बहुमुखी प्रतिभा की धनी और समाज सेवा में भी आगेलेफ्टिनेंट कशिश के रगों में देश सेवा और अनुशासन बचपन से ही है। उनके पिता डॉ. गुरमुख दास एक साइंटिस्ट रह चुके हैं और मां आर्मी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका हैं। कशिश सिर्फ पढ़ाई या मॉडलिंग में ही नहीं, बल्कि भरतनाट्यम, डिबेट, बास्केटबॉल और नेशनल लेवल पिस्टल शूटिंग में भी माहिर हैं।इसके साथ ही उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए 'डेडिकेशन क्रिटिकल कॉज' नाम का एक एनजीओ (NGO) भी शुरू किया, जो लोगों को ब्लड, प्लाज्मा और ऑर्गन डोनेशन के लिए जागरूक करता है। कशिश मेथवानी की यह कहानी देश के लाखों युवाओं को प्रेरित कर रही है कि देश सेवा से बढ़कर कुछ भी नहीं।
मेडिकल की पढ़ाई के सपने देखने वाले हर छात्र के मन में एक सवाल जरूर होता है—सरकारी मेडिकल कॉलेज बेहतर है या प्राइवेट? अक्सर चर्चा का केंद्र सिर्फ फीस और इंफ्रास्ट्रक्चर होता है, लेकिन एक बहुत बड़ा पहलू है 'सर्विस बॉन्ड', जो पढ़ाई पूरी होने के बाद आपकी नींद उड़ा सकता है। सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के बीच का अंतर केवल प्रवेश परीक्षा में नहीं, बल्कि करियर की दिशा और बाद के कानूनी बंधनों में भी छिपा है। अगर आप एमबीबीएस (MBBS) में दाखिला लेने की योजना बना रहे हैं, तो इन बारीकियों को समझना आपके भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों का बुनियादी अंतरसरकारी मेडिकल कॉलेजों में फीस नाममात्र की होती है, लेकिन यहां प्रतिस्पर्धा (Competition) का स्तर बहुत ऊंचा होता है। इसके विपरीत, प्राइवेट कॉलेजों में फीस करोड़ों में जा सकती है। शैक्षणिक गुणवत्ता की बात करें तो सरकारी कॉलेजों में मरीजों की संख्या और विविधता अधिक होने के कारण क्लीनिकल एक्सपोजर शानदार मिलता है, जो एक डॉक्टर के कौशल को निखारने के लिए अनिवार्य है। प्राइवेट कॉलेज अक्सर आधुनिक सुविधाओं और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का दावा करते हैं, लेकिन वहां का एक्सपोजर कॉलेज टू कॉलेज बदल सकता है।सर्विस बॉन्ड: सपनों के बीच का सबसे बड़ा रोड़ाएमबीबीएस पूरा करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती 'सर्विस बॉन्ड' की आती है। कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के समय छात्रों से बॉन्ड भरवाया जाता है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में एक निश्चित समय तक सेवा देनी होगी। यदि कोई छात्र इसे पूरा करने से मना करता है, तो उसे भारी-भरकम जुर्माना देना पड़ सकता है, जो लाखों में होता है। प्राइवेट कॉलेजों में भी अक्सर मैनेजमेंट और सरकार के बीच कुछ ऐसे समझौते होते हैं, जिनके तहत छात्रों को कुछ शर्तों का पालन करना पड़ता है। यह बॉन्ड आपकी पीजी (PG) की तैयारी या विदेश जाने की योजनाओं पर पूरी तरह ब्रेक लगा सकता है।एमबीबीएस के बाद कैसे बदलती है करियर की दिशा?सरकारी कॉलेज से पास होने वाले छात्रों के पास अक्सर सरकारी सिस्टम में काम करने का अनुभव और प्राथमिकता होती है, जो आगे चलकर सरकारी नौकरी के लिए फायदेमंद साबित होती है। वहीं, प्राइवेट कॉलेज के छात्र सीधे तौर पर कॉर्पोरेट हॉस्पिटल्स या अपनी क्लीनिकल प्रैक्टिस की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, सर्विस बॉन्ड की शर्त अगर सही से नहीं समझी गई, तो डिग्री मिलते ही छात्र खुद को कानूनन बंधा हुआ महसूस करने लगते हैं। इसलिए, कॉलेज चुनने से पहले केवल फीस नहीं, बल्कि उस संस्थान के बॉन्ड नियम, जुर्माना राशि और सेवा के वर्षों को जरूर देखें, ताकि आपकी मेहनत के बाद आपको कोई कानूनी उलझन न झेलनी पड़े।
एजुकेशन लोन लेते समय न करें ये 4 बड़ी गलतियां, वरना उम्रभर कर्ज के बोझ में दबे रहेंगे आप
आज के दौर में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए एजुकेशन लोन एक बेहतरीन जरिया है, लेकिन जानकारी के अभाव में ली गई जल्दबाजी आपकी पूरी मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकती है। अक्सर छात्र और उनके अभिभावक लोन एग्रीमेंट के बारीक अक्षरों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में एक बड़े वित्तीय संकट का कारण बनता है। यदि आप सही प्लानिंग और सावधानी के साथ कदम नहीं उठाते हैं, तो यह लोन आपकी जिंदगीभर की बचत को निगल सकता है। आइए जानते हैं वो 4 बड़ी गलतियां जो आपको लोन लेते समय भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।गलत स्कीम का चुनाव करनासबसे पहली बड़ी गलती है—लोन स्कीम का चुनाव बिना पूरी रिसर्च के करना। कई बार छात्र बैंक की सलाह या एजेंट के झांसे में आकर उस लोन स्कीम को चुन लेते हैं जिसमें ब्याज दरें तो कम दिखती हैं, लेकिन प्रोसेसिंग फीस और अन्य छुपे हुए शुल्क बहुत ज्यादा होते हैं। लोन लेने से पहले हमेशा विभिन्न बैंकों की ब्याज दरों, उनकी लोन चुकाने की शर्तों और बैंक की प्रतिष्ठा की तुलना ऑनलाइन जरूर करें। एक छोटा सा अंतर भी आपको लंबी अवधि में लाखों रुपये का नुकसान करवा सकता है।को-लेटरल और बीमा पर ध्यान न देनादूसरी गलती है लोन के साथ दिए जाने वाले बीमा और को-लेटरल (Collateral) की शर्तों को गंभीरता से न लेना। कई बार लोग लोन तो ले लेते हैं, लेकिन उसके साथ जरूरी बीमा (Insurance) कवर नहीं करवाते, जो संकट के समय परिवार के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। साथ ही, को-लेटरल के रूप में अपनी संपत्ति गिरवी रखते समय यह सुनिश्चित करें कि आपके पास उसे वापस छुड़ाने का स्पष्ट प्लान है। जल्दबाजी में दी गई गारंटी या संपत्ति के कागज बाद में कानूनी और मानसिक तनाव का सबब बन सकते हैं।मोरेटोरियम पीरियड का गणित न समझनातीसरी और सबसे घातक गलती है मोरेटोरियम पीरियड (Moratorium Period) को न समझना। छात्र सोचते हैं कि पढ़ाई खत्म होने तक उन्हें कोई पैसा नहीं देना है, लेकिन इस दौरान चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) तेजी से बढ़ता रहता है। यदि आप पढ़ाई के दौरान ही लोन का कुछ हिस्सा या ब्याज चुकाना शुरू कर देते हैं, तो कर्ज का बोझ काफी कम हो जाता है। वहीं, जो लोग इस अवधि को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं, उन पर डिग्री मिलने तक भारी-भरकम ब्याज का पहाड़ खड़ा हो जाता है, जिसे चुकाना नामुमकिन सा हो जाता है।रीपेमेंट प्लान (Repayment Plan) की अनदेखीचौथी और आखिरी गलती है—लोन चुकाने की समय-सीमा (Tenure) का गलत चुनाव करना। कई लोग ईएमआई (EMI) कम रखने के चक्कर में 15 से 20 साल का लंबा लोन कार्यकाल चुन लेते हैं, जिसका असर यह होता है कि आप मूलधन (Principal) से ज्यादा तो ब्याज बैंक को चुका देते हैं। हमेशा अपनी भविष्य की कमाई और करियर की संभावनाओं को ध्यान में रखकर लोन चुकाने का कार्यकाल तय करें। जितनी जल्दी आप लोन चुकाएंगे, उतनी ही ज्यादा ब्याज की बचत होगी और आप कर्ज मुक्त होकर अपने करियर की नई उड़ान भर पाएंगे।
AI vs सिंथेटिक इंटेलिजेंस: क्या वाकई आपकी नौकरी पर है खतरा? जानें दोनों में क्या है बड़ा अंतर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सिंथेटिक इंटेलिजेंस (Synthetic Intelligence) इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। आम धारणा यह है कि दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन तकनीकी रूप से इनमें जमीन-आसमान का अंतर है। जहां AI हमारे द्वारा दिए गए डेटा से सीखकर काम करता है, वहीं सिंथेटिक इंटेलिजेंस को एक ऐसी क्षमता माना जा रहा है जो खुद को स्वायत्त (Autonomous) तौर पर विकसित कर सकती है। नौकरियों के बाजार में इन दोनों तकनीकों का प्रभाव किस कदर बढ़ रहा है, इसे समझना हर कामकाजी पेशेवर के लिए जरूरी हो गया है, ताकि वे अपने करियर को सुरक्षित रख सकें।AI और सिंथेटिक इंटेलिजेंस में बुनियादी अंतरआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मुख्य रूप से पैटर्न रिकग्निशन, डेटा एनालिसिस और ऑटोमेशन पर केंद्रित है। यह इंसानी बुद्धिमत्ता की नकल करने वाली एक एल्गोरिदम आधारित प्रणाली है। दूसरी ओर, सिंथेटिक इंटेलिजेंस एक उच्च-स्तरीय अवधारणा है, जो कृत्रिम रूप से ऐसी बुद्धिमत्ता पैदा करने का प्रयास करती है जो जटिल स्थितियों में खुद निर्णय लेने में सक्षम हो। सरल भाषा में समझें तो AI एक 'उपकरण' (Tool) है जो विशिष्ट कार्य करता है, जबकि सिंथेटिक इंटेलिजेंस एक 'स्वतंत्र प्रणाली' के रूप में विकसित होने का प्रयास कर रही है, जो इंसानी हस्तक्षेप के बिना नए समाधान खोज सकती है।नौकरी के लिए कौन सी तकनीक ज्यादा खतरनाक?नौकरी बाजार के लिहाज से देखा जाए तो फिलहाल 'AI' सबसे बड़ा गेम चेंजर है। डेटा एंट्री, कस्टमर सपोर्ट और कंटेंट राइटिंग जैसे रूटीन काम AI के कारण सीधे प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, सिंथेटिक इंटेलिजेंस का प्रभाव भविष्य में और अधिक गंभीर हो सकता है। यदि यह तकनीक पूरी तरह से विकसित होती है, तो यह केवल ऑटोमेशन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह रणनीतिक निर्णय लेने और जटिल समस्याओं को सुलझाने वाले पेशेवरों की जगह भी ले सकती है। विशेषज्ञों की राय है कि खतरा तकनीक से नहीं, बल्कि उसे अपनाने की गति से है। जो लोग तकनीक के साथ खुद को अपग्रेड नहीं करेंगे, उनके लिए आने वाला दौर चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
देश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और गिरते स्तर को सुधारने के लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा कदम उठाया है। काउंसिल ने कड़ा रुख अपनाते हुए देश भर के 58 इंजीनियरिंग संस्थानों को पूरी तरह से बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही विभिन्न तकनीकी कॉलेजों में चल रहे करीब 950 से अधिक कोर्सेज पर भी हमेशा के लिए ताला लगा दिया गया है। नियामक संस्था के इस औचक और कड़े फैसले से देश के इंजीनियरिंग शिक्षा जगत में भारी हड़कंप मच गया है।क्यों गिरी गाज और क्या रही वजहAICTE के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह दंडात्मक कार्रवाई अचानक नहीं हुई है बल्कि इसके पीछे कई गंभीर कारण हैं। जिन कॉलेजों और कोर्सेज को बंद किया गया है, वे लंबे समय से काउंसिल के तय मानकों और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों से इन संस्थानों और कोर्सेज में छात्रों के दाखिले (एनरोलमेंट) की संख्या लगातार नगण्य या बेहद कम बनी हुई थी, जिससे इन्हें चलाना आर्थिक और व्यावहारिक रूप से सही नहीं रह गया था।छात्रों के भविष्य और नए सत्र पर असरइतनी बड़ी संख्या में कोर्सेज और कॉलेजों के बंद होने से आगामी शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। हालांकि, काउंसिल ने साफ किया है कि वर्तमान में पढ़ रहे छात्रों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी और उन्हें नजदीकी मान्यता प्राप्त संस्थानों में शिफ्ट करने की व्यवस्था की जाएगी। एआई सर्च और आधुनिक टेक बदलावों के इस दौर में अब केवल वही संस्थान टिक पाएंगे जो पढ़ाई के उच्च स्तर और प्लेसमेंट की गारंटी को बनाए रखने में सक्षम होंगे।
जैसे-जैसे जनरेटिव एआई (Generative AI) और आधुनिक कोडिंग टूल्स दुनिया भर में पैर पसार रहे हैं, वैसे-वैसे ट्रेडिशनल इंजीनियरिंग और प्रीमियम संस्थानों की प्रासंगिकता पर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बीच सोशल मीडिया और टेक जगत में एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या एआई के दौर में देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी (IIT) की पढ़ाई अब भी उतनी ही मायने रखती है? इस गंभीर विषय पर आईआईटी बॉम्बे के एक पूर्व छात्र ने अपने व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर एक ऐसा जवाब दिया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।केवल कोडिंग नहीं, एआई के युग में 'प्रॉब्लम सॉल्विंग' की असली कीमतआईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र के मुताबिक, लोग अक्सर सोचते हैं कि आईआईटी सिर्फ कोडिंग या बेसिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सिखाता है, जिसे आज एआई चुटकियों में कर सकता है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। आईआईटी की असली ताकत छात्रों को 'क्रिटिकल थिंकिंग' और जटिल समस्याओं को बुनियादी स्तर (First Principles) से सुलझाना सिखाना है। एआई केवल एक टूल है जो काम को तेज कर सकता है, लेकिन यह कभी भी इंसानी दिमाग की उस इनोवेटिव सोच और तार्किक क्षमता की जगह नहीं ले सकता जो आईआईटी जैसे कड़े माहौल में निखरती है।भविष्य का जॉब मार्केट और आईआईटी डिग्री का बदलता स्वरूपआने वाले समय में टेक इंडस्ट्री का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है, जहां रट्टा मारने वाली पढ़ाई या साधारण स्किल्स वाले इंजीनियर्स के लिए रास्ते बंद हो सकते हैं। एआई सर्च (GEO) और आंसर इंजनों के आधुनिक दौर में अब केवल वही पेशेवर टिक पाएंगे जो एआई का सही इस्तेमाल करना जानते हों। पूर्व छात्र ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि एआई के आने से आईआईटी की अहमियत कम नहीं हुई है, बल्कि अब एक 'आईआईटीयन' की भूमिका और भी बड़ी हो गई है क्योंकि वे एआई मॉडल्स को गाइड करने और बड़ी टेक क्रांतियों का नेतृत्व करने में सबसे आगे रहेंगे।
क्या आपने भी कनाडा या किसी अन्य देश में पढ़ाई करने का सपना देखा है? क्या कोई एजेंट या इमिग्रेशन कंसल्टेंसी आपको विदेशी कॉलेज में एडमिशन का पक्का भरोसा दे रही है? अगर हाँ, तो बेहद सावधान हो जाइए।. आपकी एक छोटी सी लापरवाही सालों की जमा-पूंजी और आपका करियर दोनों बर्बाद कर सकती है. हाल ही में एक 21 साल की छात्रा के साथ विदेश भेजने के नाम पर 12 लाख रुपये से ज्यादा की बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. उसे कनाडा के कॉलेज का बकायदा ऑफर लेटर दिया गया, लेकिन जब उसने खुद कॉलेज से संपर्क किया तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. कनाडाई कॉलेज ने साफ कह दिया कि उनके रिकॉर्ड में छात्रा का कोई एडमिशन ही नहीं है. अब इस मामले पर चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने ठगों के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है.विज्ञापन देखकर जाल में फंसी छात्रा, किस्तों में दिए 12.35 लाखयह पूरा मामला आस्था सैनी नाम की एक छात्रा से जुड़ा है. उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक स्टडी वीजा और इमिग्रेशन कंसल्टेंसी का लुभावना विज्ञापन देखा था. विज्ञापन में दावा किया गया था कि यह फर्म छात्रों को कनाडा के टॉप कॉलेजों में एडमिशन और स्टूडेंट वीजा दिलाने में पूरी मदद करती है. झांसे में आकर छात्रा ने अप्रैल से अगस्त 2022 के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 12.35 लाख रुपये का भुगतान कर दिया. इसमें से कुछ रकम बैंक ट्रांसफर के जरिए दी गई और बाकी कैश (नकद) जमा कराया गया. बदले में कंसल्टेंसी ने उसे कॉलेज का ऑफिशियल दिखने वाला ऑफर लेटर और रसीदें भी सौंप दीं.कनाडाई कॉलेज के एक ईमेल ने खोला फर्जीवाड़े का राजकंसल्टेंसी की ओर से लगातार टालमटोल और वीजा प्रक्रिया में देरी होने पर छात्रा को शक हुआ. उसने सीधे कनाडा के संबंधित शिक्षण संस्थान को ईमेल भेजकर अपने एडमिशन की स्थिति जाननी चाही. कॉलेज की तरफ से आए जवाब ने सबको चौंका दिया. संस्थान ने लिखित में बताया कि उनके यहां इस नाम की किसी भी छात्रा का कोई रिकॉर्ड नहीं है और जो दस्तावेज उसे दिए गए हैं, वे पूरी तरह फर्जी और जाली हैं. ठगी का अहसास होने पर जब छात्रा ने कंसल्टेंसी से अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्होंने रिफंड देने से साफ मना कर दिया.उपभोक्ता आयोग सख्त: 9% ब्याज और मुआवजे के साथ रकम लौटाने का आदेशकानूनी नोटिस का जवाब न मिलने पर पीड़ित छात्रा ने चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया. जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और कनाडाई कॉलेज के आधिकारिक ईमेल को सबूत मानते हुए दोनों आरोपी वीजा कंसलटेंट और उसके पूर्व कर्मचारी को दोषी पाया. आयोग ने सख्त आदेश देते हुए कहा कि आरोपी छात्रा को 12.35 लाख रुपये की पूरी रकम, भुगतान की तारीख से 9 फीसदी सालाना ब्याज के साथ वापस करें. इसके साथ ही छात्रा को हुई मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में 20,000 रुपये अतिरिक्त देने का निर्देश दिया गया है. यह पूरा भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा.विदेश में पढ़ाई के नाम पर होने वाले फ्रॉड से कैसे बचें?अगर आप भी विदेशी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेना चाहते हैं, तो इन जरूरी बातों का हमेशा ध्यान रखें ताकि ठगी का शिकार न होना पड़े:सीधे कॉलेज से करें पुष्टि: एजेंट से ऑफर लेटर या एडमिशन लेटर मिलने के बाद, संबंधित विदेशी कॉलेज की ऑफिशियल ईमेल आईडी या फोन नंबर पर संपर्क करके अपने क्रेडेंशियल्स की जांच जरूर करवाएं.ऑफिशियल पोर्टल पर चेक करें स्टेटस: एडमिशन लेने से पहले और बाद में कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी एप्लीकेशन का लाइव स्टेटस खुद ट्रैक करें.सीधे कॉलेज के खाते में भेजें फीस: किसी भी एजेंट या कंसल्टेंसी के पर्सनल या चालू खाते में कॉलेज की ट्यूशन फीस जमा न करें. फीस हमेशा कॉलेज के आधिकारिक बैंक अकाउंट या उनके ऑथराइज्ड पेमेंट गेटवे के जरिए ही ट्रांसफर करें.दस्तावेज और रसीदें रखें सुरक्षित: एजेंट को दिए गए एक-एक पैसे की रसीद, एग्रीमेंट कॉपी और व्हाट्सएप चैट जैसे जरूरी सबूत हमेशा संभालकर रखें.
बिना एक भी रुपया खर्च किए घर बैठे सीखें AI, पायथन और साइबर सिक्योरिटी, नौकरियों की होगी बौछार
डिजिटल क्रांति के इस दौर में अगर आप भी अपने करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं, तो आपके लिए एक बेहद शानदार खबर है। अब आपको आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पायथन प्रोग्रामिंग (Python Coding) और साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security) जैसे भविष्य के सबसे डिमांडिंग कोर्स करने के लिए लाखों रुपये की फीस देने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। कई नामी सरकारी संस्थानों और ग्लोबल टेक कंपनियों ने छात्रों और वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए इन प्रीमियम कोर्सेज को पूरी तरह से मुफ्त (Free Tech Courses) कर दिया है। आप अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप की मदद से घर बैठे ही इन स्किल-बेस्ड कोर्सेज को पूरा कर सकते हैं।दिग्गज टेक कंपनियों और सरकारी पोर्टल्स की अनोखी पहलगूगल, माइक्रोसॉफ्ट और भारत सरकार के डिजिटल इंडिया (Digital India Initiatives) अभियान के तहत स्वयं (SWAYAM) और एनपीटीईएल (NPTEL) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ये विश्वस्तरीय कोर्सेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन कोर्सेज को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि एक बिगनर यानी शुरुआत करने वाला छात्र भी इसे बेहद आसानी से समझ सकता है। इसमें आपको वीडियो लेक्चर्स, लाइव प्रोजेक्ट्स और एक्सपर्ट्स का गाइडेंस भी मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद आपको एक वेरीफाइड सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा, जो आपके रिज्यूमे को मजबूत बनाकर बड़ी आईटी कंपनियों में नौकरी दिलाने में मददगार साबित होगा।लाखों के पैकेज वाली नौकरियों के लिए आज ही करें इनरोलआज के समय में चाहे वो दिल्ली-एनसीआर हो, बेंगलुरु हो, मुंबई या फिर कोई छोटा शहर, हर जगह टेक प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। साइबर हमलों के बढ़ते खतरों के बीच साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और चैटजीपीटी (ChatGPT) के इस दौर में एआई इंजीनियर्स की भारी कमी है। ऐसे में फ्री में इन एडवांस स्किल्स को सीखकर आप लाखों रुपये के शुरुआती पैकेज वाली जॉब हासिल कर सकते हैं। इन कोर्सेज में इनरोल करने की प्रक्रिया बेहद सरल है, जिसके लिए आपको संबंधित ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर बस अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए इस बेहतरीन मौके को हाथ से न जाने दें।
कॉलेज जाने से पहले फर्राटेदार अंग्रेजी सीखें: हिंदी मीडियम के छात्रों के लिए ये हैं सबसे आसान टिप्स
कॉलेज लाइफ की दहलीज पर कदम रखने से पहले अंग्रेजी का डर बहुत से हिंदी मीडियम छात्रों को परेशान करता है। अक्सर छात्र इस चिंता में रहते हैं कि कॉलेज के लेक्चर, प्रेजेंटेशन और दोस्तों के बीच वे खुद को कैसे एक्सप्रेस करेंगे। अच्छी खबर यह है कि अंग्रेजी महज एक भाषा है, कोई कठिन विषय नहीं, जिसे सही रणनीति के साथ कुछ ही हफ्तों में सीखा जा सकता है। कॉलेज शुरू होने से पहले आपके पास जो समय है, उसे एक सुनहरे अवसर की तरह इस्तेमाल करें। रटने के बजाय भाषा को जीने की आदत डालें। सोशल मीडिया, फिल्में और मोबाइल ऐप्स का सही उपयोग आपको बहुत कम समय में आत्मविश्वास से भरपूर बना सकता है। अगर आप आज से ही इन छोटी-छोटी आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेंगे, तो कॉलेज के पहले दिन से ही आप भीड़ में अलग नजर आएंगे।सुनने की आदत और सही कंटेंट का चुनावभाषा सीखने का सबसे प्रभावी तरीका 'इनपुट' है, यानी सुनना। कॉलेज शुरू होने से पहले अपने कानों को अंग्रेजी सुनने का आदी बनाएं। इसके लिए जटिल न्यूज़ चैनल्स के बजाय पॉडकास्ट, मोटिवेशनल वीडियो या अपनी पसंदीदा फिल्मों को अंग्रेजी सबटाइटल के साथ देखना शुरू करें। शुरुआत में छोटे एनिमेशन या कॉमेडी वीडियो देखें, जो आसान भाषा का इस्तेमाल करते हों। जब आप शब्दों के सही उच्चारण और वाक्य संरचना को बार-बार सुनते हैं, तो आपका मस्तिष्क खुद-ब-खुद उस पैटर्न को कॉपी करने लगता है। ध्यान रखें, सुनने का मतलब सिर्फ सुनना नहीं, बल्कि यह गौर करना है कि सामने वाला व्यक्ति एक वाक्य को कैसे जोड़ रहा है।बोलकर अभ्यास और डर पर जीतज्यादातर छात्र इसलिए नहीं सीख पाते क्योंकि वे गलत बोलने से डरते हैं। अपने कमरे में अकेले आईने के सामने खड़े होकर बोलें। दिन भर आपने जो भी किया, उसे रात में सोने से पहले 5 मिनट अंग्रेजी में बोलने की कोशिश करें। यदि आपको शब्द नहीं मिल रहे, तो घबराएं नहीं। अपने मोबाइल फोन में अपनी आवाज रिकॉर्ड करें और उसे सुनें, इससे आप अपनी गलतियों को खुद सुधार सकेंगे। इसके अलावा, अपने दोस्तों के साथ एक छोटा सा ग्रुप बनाएं जहां केवल अंग्रेजी में बात करने का नियम हो। याद रखें, भाषा बोलने से आती है, केवल व्याकरण (Grammar) की किताबें पढ़ने से नहीं। छोटे-छोटे वाक्यों से शुरुआत करें और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात कहें।
सिर्फ डिग्री काफी नहीं: वकील बनने की राह में 'लॉयर' और 'एडवोकेट' का अंतर समझना क्यों जरूरी
कानूनी शिक्षा और वकालत के पेशे को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। कई लोग 'लॉयर' (Lawyer) और 'एडवोकेट' (Advocate) को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन कानून की नजर में इन दोनों शब्दों के मायने और काम करने के अधिकार पूरी तरह अलग हैं। यदि आप भी यह सोचते हैं कि लॉ की डिग्री मिलते ही कोई भी व्यक्ति कोर्ट में जाकर केस लड़ सकता है, तो आप गलतफहमी में हैं। भारत में एक प्रोफेशनल वकील बनने के लिए केवल कानून की पढ़ाई पूरी करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके बाद की कुछ कानूनी प्रक्रियाएं भी अनिवार्य हैं।लॉयर और एडवोकेट के बीच का बारीक फर्कसबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 'लॉयर' वह व्यक्ति होता है जिसने लॉ (LLB) की डिग्री हासिल कर ली है। लॉयर कानूनी सलाह दे सकता है, कानूनी दस्तावेजों का मसौदा तैयार कर सकता है और कानूनी मामलों पर अपनी राय रख सकता है। वहीं, 'एडवोकेट' वह व्यक्ति होता है जो लॉ की डिग्री लेने के बाद स्टेट बार काउंसिल (State Bar Council) में खुद को रजिस्टर करवा चुका होता है। बार काउंसिल में पंजीकरण के बिना कोई भी व्यक्ति अदालत में किसी दूसरे पक्ष की ओर से पेश नहीं हो सकता और न ही बहस कर सकता है। यानी, हर एडवोकेट एक लॉयर होता है, लेकिन हर लॉयर एडवोकेट नहीं होता।बार काउंसिल का रजिस्ट्रेशन क्यों है अनिवार्य?किसी भी लॉ ग्रेजुएट के लिए 'एडवोकेट' बनने की प्रक्रिया में सबसे बड़ा पड़ाव 'ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन' (AIBE) पास करना है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा आयोजित यह परीक्षा पास करने के बाद ही किसी व्यक्ति को कोर्ट में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलता है। यदि कोई व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के कोर्ट में केस लड़ने की कोशिश करता है, तो यह कानून का उल्लंघन माना जाता है। इसलिए, अगर आप भी वकालत के क्षेत्र में करियर बनाने की सोच रहे हैं, तो डिग्री के बाद बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन और अनिवार्य परीक्षा की तैयारी को प्राथमिकता दें। सही कानूनी मार्गदर्शन और जानकारी ही आपको एक सफल एडवोकेट बना सकती है।
भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे और छात्रों के बीच खलबली मचा दी है। विश्वविद्यालय में परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले बायोटेक्नोलॉजी का प्रश्न पत्र चोरी होने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना के बाद से ही यूनिवर्सिटी प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब इस बड़ी चूक का पता चला। आनन-फानन में यूनिवर्सिटी के आला अधिकारी सक्रिय हुए और मामले की जांच शुरू की गई। यह घटना न केवल आरजीपीवी की साख पर बट्टा लगा रही है, बल्कि उन हजारों छात्रों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है जो अपनी कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। फिलहाल, प्रशासन ने इस संवेदनशील मामले पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है।सुरक्षा में चूक या अंदरूनी साजिश?परीक्षा जैसे संवेदनशील समय में बायोटेक्नोलॉजी का पेपर गायब होना एक सोची-समझी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर परीक्षा विभाग के गोपनीय कक्ष तक बाहरी व्यक्ति या किसी कर्मचारी की पहुंच कैसे हुई। प्रश्न पत्र की सुरक्षा के लिए जो प्रोटोकॉल तय किए गए थे, उनमें बड़ी चूक सामने आई है। पुलिस और साइबर सेल की टीमें अब इस मामले की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर किसके द्वारा और कैसे निकाला गया। छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश है और वे दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, विश्वविद्यालय प्रबंधन अब डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ है और नई परीक्षा तिथि घोषित करने पर विचार किया जा रहा है।
भारत में डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. देश के मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली दो सबसे बड़ी परीक्षाओं— NEET (नीट) और JEE (जेईई) के मौजूदा पैटर्न को पूरी तरह बदलने की चर्चाएं अब तेज हो गई हैं. वर्तमान व्यवस्था में देश के युवा स्कूलों की पढ़ाई छोड़कर सालों-साल सिर्फ कोचिंग सेंटरों के भरोसे एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी में जुटे रहते हैं.राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के विजन को ध्यान में रखते हुए देश के बड़े शिक्षा विशेषज्ञ अब एक ऐसे क्रांतिकारी मॉडल पर विचार कर रहे हैं, जो छात्रों के मूल्यांकन को अधिक संतुलित और तनावमुक्त बनाएगा. इस नए प्रस्ताव के तहत कॉलेज एडमिशन की प्रक्रिया में 12वीं बोर्ड परीक्षा को 50 प्रतिशत वेटेज और एंट्रेंस एग्जाम को 50 प्रतिशत वेटेज देने की पुरजोर सिफारिश की जा रही है. अगर यह मॉडल लागू होता है, तो बोर्ड परीक्षाएं सिर्फ पास होने की औपचारिकता नहीं रहेंगी, बल्कि छात्रों के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होंगी.क्या है 50% स्कूल और 50% एंट्रेंस वाला नया 50-50 मॉडल?इस नए और आधुनिक मॉडल का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी होनहार छात्र की सालों की काबिलियत और बुद्धिमत्ता का फैसला सिर्फ एक दिन की 3 घंटे की परीक्षा से न किया जाए. इसके बजाय छात्र के दो साल (11वीं और 12वीं) के लगातार शैक्षणिक प्रदर्शन और स्कूल रिकॉर्ड को भी अंतिम चयन में बराबर का हक मिले.सरल शब्दों में समझें तो, जब मेडिकल (MBBS/BDS) या इंजीनियरिंग (IIT/NIT) कॉलेजों में दाखिले के लिए फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, तब 12वीं बोर्ड के अंकों (Normalized Score) का 50% हिस्सा और NEET/JEE के स्कोर का 50% हिस्सा आपस में जोड़कर कुल मेरिट बनाई जाएगी. इस व्यवस्था से स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ेगी, स्कूल शिक्षा का स्तर मजबूत होगा और देश में पैर पसार रही अत्यधिक 'कोचिंग-निर्भर संस्कृति' पर लगाम लगेगी.इस नए फॉर्मूले से छात्रों के जीवन में आएंगे ये 3 बड़े बदलाव1. बोर्ड परीक्षा का बढ़ेगा रूतबा, डमी स्कूलों का खेल होगा खत्मवर्तमान समय में देश के अधिकांश छात्र 11वीं और 12वीं में सिर्फ नाम के लिए 'डमी स्कूलों' में दाखिला लेते हैं और उनका पूरा फोकस कोटा या अन्य शहरों में रहकर नीट-जेईई की कोचिंग पर होता है. छात्रों को लगता है कि 12वीं में सिर्फ पासिंग मार्क्स लाना ही काफी है. लेकिन, अगर इस 50-50 प्रतिशत वाले नियम को मंजूरी मिलती है, तो छात्रों की यह सोच पूरी तरह बदल जाएगी. उन्हें बेहतरीन कॉलेज में सीट पक्की करने के लिए बोर्ड परीक्षा में भी 95%+ अंक स्कोर करने के लिए सालभर स्कूलों में पसीना बहाना होगा.2. एक दिन की गलती या खराब तबीयत से करियर नहीं होगा तबाहअक्सर देखा जाता है कि कई मेधावी छात्र पूरे साल दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा वाले दिन अत्यधिक मानसिक तनाव, अचानक तबीयत खराब होने या किसी अन्य अनपेक्षित वजह से एंट्रेंस एग्जाम में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते. इससे उनकी पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर जाता है और वे डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं. इस नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि केवल एक दिन की परीक्षा छात्र का भविष्य तय नहीं करेगी. अगर किसी वजह से एंट्रेंस का पेपर थोड़ा खराब भी होता है, तो 12वीं बोर्ड में किया गया उनका बेहतरीन प्रदर्शन उनकी रैंक को गिरने से बचा लेगा.3. रटंत विद्या से मुक्ति, कॉन्सेप्ट और थ्योरी दोनों होंगे मजबूतजहां एक तरफ बोर्ड परीक्षाओं में उत्तर लिखने की शैली, विस्तृत व्याख्या और विषय की बुनियादी समझ (Subjective Knowledge) जांची जाती है, वहीं दूसरी तरफ NEET और JEE में ऑब्जेक्टिव सवालों को तेजी से हल करने और लॉजिकल रीजनिंग (Objective Aptitude) की जरूरत होती है. जब इन दोनों को समान महत्व मिलेगा, तो छात्रों को शॉर्टकट ट्रिक्स और रटने की प्रवृत्ति से मुक्ति मिलेगी. वे हर एक विषय को गहराई से समझकर (Conceptual Learning) पढ़ेंगे, जिससे न सिर्फ उनका बेस मजबूत होगा बल्कि आगे चलकर कॉलेज की उच्च शिक्षा में भी उन्हें इसका सीधा फायदा मिलेगा.

