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SSC का बड़ा झटका! CGL परीक्षा पैटर्न में हुआ अचानक बहुत बड़ा बदलाव, 12,256 पदों के लिए भिड़ेंगे रिकॉर्ड 30 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा की तैयारी कर रहे देश के लाखों युवाओं के लिए एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। आयोग ने परीक्षा को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए SSC CGL 2026 के परीक्षा पैटर्न और चयन प्रक्रिया में अचानक एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव कर दिया है। इस साल आयोग ने रिकॉर्ड 12,256 रिक्त पदों पर भर्ती निकाली है, जिसके लिए देश भर से रिकॉर्डतोड़ 30 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इस कड़े मुकाबले के बीच परीक्षा पैटर्न में हुए इस अप्रत्याशित बदलाव ने परीक्षार्थियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं और कोचिंग सेंटरों से लेकर सोशल मीडिया तक इस पर मंथन शुरू हो गया है।जानिए किस सेक्शन में हुआ है बड़ा फेरबदल और क्या है नया मार्किंग फॉर्मूलाकर्मचारी चयन आयोग के आधिकारिक नोटिफिकेशन और आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार टियर-1 और टियर-2 दोनों ही चरणों के प्रश्नों के स्तर और विषयवार वेटेज में बदलाव किया गया है। नए पैटर्न के तहत तार्किक क्षमता (Reasoning) और सामान्य ज्ञान (General Awareness) के सेक्शन को और अधिक विश्लेषणात्मक (Analytical) बनाया गया है, जबकि गणित और अंग्रेजी के प्रश्नों के पैटर्न में कुछ नए विषयों को जोड़ा गया है। इसके साथ ही नेगेटिव मार्किंग के नियमों को भी कड़ा कर दिया गया है। आयोग का मानना है कि इस नए बदलाव से रट्टा मारने वाले छात्रों के बजाय कूटनीतिक और व्यावहारिक समझ रखने वाले योग्य उम्मीदवारों का चयन आसान हो सकेगा।12,256 पदों के लिए 30 लाख दावेदार, दिल्ली से लेकर पटना तक ऐतिहासिक मुकाबलाइस बार की एसएससी सीजीएल (SSC CGL) परीक्षा में प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है। केवल 12,256 सीटों के लिए 30 लाख से अधिक आवेदन आना यह दर्शाता है कि देश के युवाओं में केंद्र सरकार की ग्रुप 'बी' और 'सी' जैसी प्रतिष्ठित नौकरियों (जैसे इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, सीबीआई सब-इंस्पेक्टर, और एएसओ) के लिए कितना जबरदस्त क्रेज है। भौगोलिक (Geographical) और लोकल ऑप्टिमाइजेशन के नजरिए से देखें तो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, बिहार के पटना, दिल्ली के मुखर्जी नगर और राजस्थान के जयपुर जैसे प्रमुख एजुकेशनल हब में छात्रों ने नए पैटर्न के अनुसार टेस्ट सीरीज और मॉक टेस्ट के जरिए अपनी रणनीतियां बदलनी शुरू कर दी हैं।एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन (GEO) के अनुसार क्या होगी आगे की कट-ऑफआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और एआई सर्च के डेटा एनालिसिस के अनुसार, परीक्षा पैटर्न में बदलाव और आवेदकों की इस रिकॉर्ड तोड़ संख्या के कारण इस बार की कट-ऑफ (Cut-Off) पिछले कई वर्षों की तुलना में बेहद अप्रत्याशित रह सकती है। परीक्षा के दौरान डिजिटल हैकिंग और रिमोट एक्सेस जैसी धांधलियों को रोकने के लिए आयोग इस बार एडवांस एआई-बेस्ड प्रोक्टरिंग और बायोमेट्रिक सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल करने जा रहा है। दिल्ली, लखनऊ और मुंबई जैसे बड़े परीक्षा केंद्रों पर जैमर्स की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। उम्मीदवारों को सलाह दी जा रही है कि वे तुरंत आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाकर नए सिलेबस का बारीकी से अध्ययन कर लें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 3:13 pm

UPTET Admit Card 2026 जारी! इस डायरेक्ट लिंक से तुरंत डाउनलोड करें अपना एडमिट कार्ड, जानें किस दिन होगी यूपी टीईटी की परीक्षा

उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए एक बेहद बड़ी और खुशखबरी वाली खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2026) के एडमिट कार्ड आधिकारिक तौर पर जारी कर दिए हैं। परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी लंबे समय से अपने प्रवेश पत्र का इंतजार कर रहे थे, जो अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना एडमिट कार्ड ऑनलाइन चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। एडमिट कार्ड जारी होने के साथ ही परीक्षा को लेकर राज्य भर के सभी परीक्षा केंद्रों पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।upessc.up.gov.in पर लाइव हुआ एडमिट कार्ड का लिंक, ऐसे करें आसानी से डाउनलोडउत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अभ्यर्थियों की सहूलियत के लिए एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का डायरेक्ट लिंक अपनी ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in पर एक्टिव कर दिया है। अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को वेबसाइट के होमपेज पर दिए गए 'UPTET Admit Card 2026' के लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद अपने क्रेडेंशियल्स जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्म तिथि (Date of Birth) और कैप्चा कोड दर्ज करके सबमिट करना होगा। भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट में आने वाली किसी भी तकनीकी समस्या से बचने के लिए अभ्यर्थियों को सलाह दी जा रही है कि वे समय रहते अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें।जानें किस तारीख को होगी यूपी टीईटी की परीक्षा, दो पालियों में होगा आयोजनएडमिट कार्ड जारी होने के साथ ही आयोग ने परीक्षा की तारीखों और समय सारणी को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। इस बार यूपी टीईटी की परीक्षा का आयोजन बेहद कड़े सुरक्षा मानकों के बीच तयशुदा तारीखों पर दो अलग-अलग पालियों (Shifts) में किया जाएगा। पहली पाली में प्राथमिक स्तर (Class 1 to 5) के लिए परीक्षा होगी, जबकि दूसरी पाली में उच्च प्राथमिक स्तर (Class 6 to 8) के लिए अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा कक्ष में प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड के साथ-साथ एक वैध फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी) और आवेदन के समय अपलोड किए गए दस्तावेजों की मूल प्रति ले जाना अनिवार्य किया गया है।लखनऊ से लेकर प्रयागराज तक परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, AI से होगी निगरानीजियोपॉलिटिकल और लोकल (Geographical) ऑप्टिमाइजेशन के नजरिए से देखें तो उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों जैसे लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और कानपुर में परीक्षा केंद्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया जा रहा है। एआई सर्च, आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस बार परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली या पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और सीसीटीवी कैमरों से लाइव निगरानी की व्यवस्था की गई है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की टीमें भी सभी केंद्रों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 3:12 pm

1.5 करोड़ में बिक रहा था TET का पेपर! बिहार से हरियाणा तक फैला सॉल्वर गैंग का जाल

देश के लाखों युवाओं के भविष्य और शिक्षक बनने के सपने के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बहुत बड़े सॉल्वर गैंग और पेपर लीक माफिया का भंडाफोड़ हुआ है। साल 2026 की शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी (TET Paper Leak 2026) का प्रश्नपत्र परीक्षा से ठीक पहले लीक करने और उसे मोटी रकम में बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच एजेंसियों की शुरुआती कार्रवाई में यह खुलासा हुआ है कि इस बार के टीईटी पेपर को लीक करने के लिए माफियाओं के बीच पूरे 1.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम डील तय हुई थी। इस खुलासे के बाद शिक्षा जगत से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक में हड़कंप मच गया है।बिहार से हरियाणा तक फैला है माफियाओं का सिंडिकेट, हाई-टेक तरीके से लीक हुआ पेपरइस महा-घोटाले की जांच में जुटे अधिकारियों के मुताबिक, इस पेपर लीक नेटवर्क का मुख्य केंद्र बिंदु बिहार और हरियाणा राज्य बनकर उभरे हैं। बिहार के कूटनीतिक और शातिर सॉल्वर गैंग ने परीक्षा केंद्र के भीतर से पेपर को लीक करवाया और इसे तुरंत हरियाणा में बैठे अपने आकाओं और डीलरों तक डिजिटल माध्यम से पहुंचा दिया। इस रैकेट में कई बड़े कोचिंग संचालकों, प्रिंटिंग प्रेस के संदिग्ध कर्मचारियों और हाई-टेक हैकर्स के शामिल होने की बात सामने आ रही है। पुलिस ने बिहार के पटना, गया और हरियाणा के रोहतक, जींद जैसे प्रमुख शहरों में एक साथ छापेमारी कर कई मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है।आखिर कितने राज्यों में फैले हैं तार, जांच एजेंसियों की रडार पर देश भर के सेंटरसॉल्वर गैंग के पकड़े गए गुर्गों से की जा रही कड़े दौर की पूछताछ में जो बातें सामने आ रही हैं, उसने जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। इस रैकेट के तार सिर्फ बिहार और हरियाणा तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश (UP), राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में भी इसके फैले होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। इन राज्यों के कुछ चिन्हित परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों से एडवांस में मोटी रकम और उनके मूल दस्तावेज जमा करा लिए गए थे ताकि उन्हें पास कराने की 100% गारंटी दी जा सके। पुलिस अब इन सभी राज्यों की एसटीएफ (STF) टीमों के साथ मिलकर एक बड़ा ज्वाइंट ऑपरेशन चला रही है।एआई सर्च और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर इस लीक का क्या होगा असरजियोपॉलिटिकल और लोकल (Geographical) ऑप्टिमाइजेशन के नजरिए से देखें तो इस पेपर लीक ने देश भर के लाखों योग्य और दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को गहरे सदमे और आक्रोश में डाल दिया है। छात्र सड़कों पर उतरकर इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने और मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग कर रहे हैं। एआई सर्च, आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और शिक्षा क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा प्रणालियों में एआई और आधुनिक सुरक्षा तकनीकों की भारी कमी के कारण ही ये सिंडिकेट बार-बार देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में सेंध लगाने में कामयाब हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस लीक के बाद क्या बड़ा फैसला लेती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 3:10 pm

इंतज़ार की घड़ियां खत्म: जानें कब आएगा NEET UG री-एग्जाम का रिजल्ट, पिछले 5 सालों के ट्रेंड से समझें तारीखों का पूरा गणित!

देशभर के लाखों मेडिकल एस्पिरेंट्स के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG) सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि डॉक्टर बनने के उनके सुनहरे सपने का पहला पड़ाव है. इस साल 3 मई 2026 को आयोजित हुई मुख्य परीक्षा के बाद 'नीट पेपर लीक' के बड़े विवाद ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा को दोबारा कराने का एक बड़ा फैसला लिया. तमाम कड़े सुरक्षा इंतजामों और खुफिया निगरानी के बीच बीते 21 जून 2026 को री-नीट (NEET UG Re-Exam) का सफल आयोजन किया गया. अब परीक्षा हॉल से बाहर निकलने के बाद देश के लाखों परीक्षार्थी और उनके अभिभावक केवल एक ही सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं कि आखिर री-एग्जाम का रिजल्ट कब घोषित होगा और मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की काउंसलिंग प्रक्रिया कब से पटरी पर लौटेगी.49 दिनों की भारी देरी: इस बार पूरी तरह बदल जाएगा परीक्षा का वार्षिक शेड्यूलआमतौर पर एनटीए के तय कैलेंडर के मुताबिक नीट यूजी परीक्षा हर साल मई महीने के पहले रविवार या पहले हफ्ते में आयोजित कर ली जाती है और जून के मध्य तक नतीजे भी घोषित हो जाते हैं. लेकिन इस बार पेपर लीक स्कैम और री-एग्जाम के चलते पूरा शेड्यूल बुरी तरह प्रभावित हुआ है. 3 मई के बाद दोबारा 21 जून को परीक्षा होने से पूरे सत्र में लगभग 49 दिनों की भारी देरी हो चुकी है. इस अभूतपूर्व लेटलतीफी के कारण इस साल देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों (MBBS/BDS) में नया शैक्षणिक सत्र भी देर से शुरू होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे छात्र और पेरेंट्स दोनों ही मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं.पिछले 5 वर्षों का विश्लेषण: जानिए परीक्षा के कितने दिन बाद जारी होता है नीट का रिजल्टएनटीए के पिछले पांच सालों के कामकाज और रिजल्ट डिक्लेरेशन की टाइमलाइन पर नजर डालें, तो परीक्षा संपन्न होने से लेकर रिजल्ट जारी होने के बीच औसतन 30 से 52 दिनों का समय लगता है. आइए टेबल के जरिए समझते हैं पिछले वर्षों का पूरा ट्रेंड:परीक्षा का वर्षNEET परीक्षा की तिथिरिजल्ट घोषित होने की तिथिएग्जाम से कितने दिनों बाद आया रिजल्ट?साल 20254 मई 202514 जून 202541 दिनसाल 20245 मई 20244 जून 202430 दिन (सबसे तेज)साल 20237 मई 202313 जून 202337 दिनसाल 202217 जुलाई 20227 सितंबर 2022 (कोविड के प्रभाव के कारण)52 दिनसाल 202112 सितंबर 20211 नवंबर 202150 दिनजुलाई के इस हफ्ते में आ सकता है रिजल्ट: एनटीए की अंदरूनी तैयारी और संभावित तारीखरी-नीट परीक्षा संपन्न कराने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने अपनी आगे की प्रक्रिया को काफी तेज कर दिया है. एनटीए ने 28 जून 2026 तक नीट यूजी री-एग्जाम की 'प्रोविजनल आंसर-की' (Provisional Answer Key) जारी कर उस पर छात्रों से ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज करने की विंडो को क्लोज कर दिया है. अब एक्सपर्ट्स की टीम इन आपत्तियों की बारीकी से जांच कर रही है, जिसके तुरंत बाद 'फाइनल आंसर-की' और रिजल्ट कंपाइलेशन का काम शुरू होगा. इस पूरी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम 12 से 15 दिनों का वक्त बेहद आराम से लग जाता है.पिछले 5 सालों के आंकड़ों और एनटीए के मौजूदा वर्किंग पैटर्न को देखें, तो इस बार रिजल्ट 20 जुलाई 2026 के आस-पास या फिर जुलाई के तीसरे या चौथे सप्ताह में किसी भी दिन आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव किया जा सकता है. छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे रिजल्ट से जुड़े हर लेटेस्ट और पुख्ता अपडेट के लिए केवल एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट (exams.nta.ac.in/NEET) पर ही भरोसा करें.

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 4:47 pm

4 साल में बनते हैं टेक जीनियस! जानें कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) का पूरा सिलेबस और IIT बनाम लोकल कॉलेजों का असली अंतर

आज के इस डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) छात्रों के बीच सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा करियर विकल्प बना हुआ है। हर साल लाखों युवा इस उम्मीद के साथ बीटेक कंप्यूटर साइंस (B.Tech CSE) में दाखिला लेते हैं कि वे टेक इंडस्ट्री में अपना शानदार करियर बना सकें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के इन 4 सालों के दौरान कॉलेजों में असल में क्या पढ़ाया जाता है? क्या आईआईटी (IIT) जैसे देश के शीर्ष संस्थानों और आपके शहर के अन्य स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेजों के सिलेबस में कोई बड़ा अंतर होता है? आइए देश के इस सबसे डिमांडिंग इंजीनियरिंग कोर्स के पूरे रोडमैप और इन संस्थानों के बीच के बुनियादी अंतर को विस्तार से समझते हैं।पहले और दूसरे साल का सफर: प्रोग्रामिंग की एबीसीडी से लेकर कोडिंग के कोर कॉन्सेप्ट्स तककंप्यूटर साइंस के पहले साल का सिलेबस लगभग सभी इंजीनियरिंग ब्रांचों के लिए एक जैसा होता है, जिसमें बेसिक इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स, फिजिक्स और 'सी' (C) या पायथन (Python) जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं की बुनियादी जानकारी दी जाती है। असली कंप्यूटर साइंस की शुरुआत दूसरे साल यानी थर्ड और फोर्थ सेमेस्टर से होती है। इस दौरान छात्रों को डेटा स्ट्रक्चर्स एंड एल्गोरिद्म्स (DSA), ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग (OOPs), डिजिटल लॉजिक और कंप्यूटर आर्किटेक्चर जैसे बेहद महत्वपूर्ण कोर विषय पढ़ाए जाते हैं। यह वही समय होता है जब छात्र कोडिंग की दुनिया में गहराई से उतरते हैं और लॉजिक बिल्डिंग की कला सीखते हैं, जो आगे चलकर प्लेसमेंट (Placements) के समय सबसे ज्यादा काम आती है।तीसरे और चौथे साल में एडवांस टेक: सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से लेकर AI और डेटा साइंस का धमाकातीसरे साल में कदम रखते ही सिलेबस काफी एडवांस और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड हो जाता है। इस फेज में ऑपरेटिंग सिस्टम (OS), डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (DBMS), कंप्यूटर नेटवर्क और कंपाइलर डिजाइन जैसे भारी-भरकम विषय पढ़ाए जाते हैं। इसके साथ ही छात्रों को क्लाउड कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग (ML), और साइबर सिक्योरिटी जैसे वैकल्पिक विषय (Electives) चुनने की आजादी मिलती है। चौथे और आखिरी साल में पढ़ाई का दबाव थोड़ा कम होता है क्योंकि इस दौरान पूरा फोकस लाइव प्रोजेक्ट्स, समर इंटर्नशिप और कैंपस प्लेसमेंट पर होता है। आखिरी साल में छात्र अपनी पसंद की टेक्नोलॉजी में एक मेजर प्रोजेक्ट तैयार करते हैं, जो उनके प्रैक्टिकल ज्ञान का सबसे बड़ा प्रमाण होता है।IIT बनाम अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज: सिलेबस और पढ़ाई के तौर-तरीकों का असली अंतरअब बात करते हैं उस बड़े अंतर की जो आईआईटी (IIT) और अन्य सामान्य या रीजनल कॉलेजों के बीच होता है। सरकारी और एआईसीटीई (AICTE) के नियमों के मुताबिक बुनियादी थ्योरी सिलेबस दोनों जगह लगभग एक जैसा ही होता है, लेकिन असली अंतर इसे लागू करने के तरीके (Curriculum Flexibility) में आता है। आईआईटी का सिलेबस हर साल इंडस्ट्री की लेटेस्ट डिमांड (जैसे- जेनेरेटिव एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग) के हिसाब से अपडेट होता रहता है, जबकि कई अन्य यूनिवर्सिटीज आज भी सालों पुराना ट्रेडिशनल सिलेबस चला रही हैं। इसके अलावा आईआईटी में थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल लैब, रिसर्च पेपर्स और प्रॉब्लम-सॉल्विंग एप्रोच पर जोर दिया जाता है, जबकि सामान्य कॉलेजों में परीक्षाओं में नंबर लाने और किताबी ज्ञान पर ज्यादा फोकस रहता है। यही वजह है कि आईआईटीयंस को ग्लोबल टेक कंपनियों में करोड़ों रुपये के पैकेज आसानी से मिल जाते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 9:06 am

10वीं में झेली भयानक बॉडी शेमिंग, CA की पढ़ाई के बीच छूटे 70 लेक्चर्स; जब टॉपर लिस्ट में आया यति का नाम तो उड़ गए सबके होश

सफलता की कहानियां अक्सर संघर्ष की भट्टी में तपकर ही निखरती हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पास करना ही अपने आप में बड़ी बात है, लेकिन तमाम व्यक्तिगत और मानसिक चुनौतियों को पार करते हुए ऑल इंडिया टॉपर लिस्ट में जगह बनाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। ऐसी ही एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है यति की। यति ने न केवल इस मुश्किल सफर को तय किया, बल्कि समाज के तानों और पढ़ाई के बीच आई बड़ी बाधाओं को मात देकर यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी की कहानी आज देश के लाखों सीए एस्पिरेंट्स के लिए एक मिसाल बन चुकी है।स्कूली दिनों का वो काला दौर: जब सताती थी बॉडी शेमिंग और गिर गया था आत्मविश्वासयति के मुताबिक, उनका सफर हमेशा से इतना चमकदार नहीं था। जब वह 10वीं कक्षा में थीं, तो उन्हें अपने लुक्स और वजन को लेकर गंभीर रूप से बॉडी शेमिंग का सामना करना पड़ा था। किशोरावस्था के उस नाजुक दौर में सहपाठियों और समाज के कुछ लोगों द्वारा की गई कड़वी टिप्पणियों ने उनके मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया था। यति बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब वह लोगों से बात करने और घर से बाहर निकलने में भी कतराने लगी थीं। लेकिन उन्होंने इस दर्द को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदलने का फैसला किया और अपना पूरा ध्यान करियर को संवारने में लगा दिया।सीए की तैयारी का सबसे कठिन फेज: जब छूट गए एक साथ 70 से ज्यादा लेक्चर्सइंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की सीए परीक्षा के मुश्किल सिलेबस के बीच यति के सामने एक नया संकट आ खड़ा हुआ। तैयारी के सबसे महत्वपूर्ण समय में कुछ अपरिहार्य पारिवारिक और व्यक्तिगत कारणों की वजह से उनके मुख्य विषयों के लगभग 70 से अधिक वीडियो लेक्चर्स छूट गए। सीए जैसे कोर्स में जहां एक दिन की पढ़ाई छूटने पर छात्र बैकफुट पर आ जाते हैं, वहां 70 लेक्चर्स का बैकलॉग होना किसी दुःस्वप्न जैसा था। यति ने बिना हिम्मत हारे दिन-रात एक कर दिए, नींद का त्याग किया और एक सख्त टाइम-टेबल बनाकर न केवल उस छूटे हुए सिलेबस को कवर किया, बल्कि कई बार उसका रिवीजन भी पूरा किया।जब जारी हुए नतीजे: टॉपर लिस्ट में अपना नाम देख खुद यति के भी उड़ गए होशपरीक्षा देने के बाद यति को पास होने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन जब आईसीएआई ने आधिकारिक तौर पर रिजल्ट और मेरिट लिस्ट घोषित की, तो नजारा कुछ और ही था। ऑल इंडिया रैंकर्स की सूची में जैसे ही यति ने अपना नाम और रोल नंबर देखा, वह पूरी तरह चौंक गईं। शुरुआत में तो उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ और उन्होंने दो-तीन बार रिजल्ट को री-चेक किया। उनके परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं रहा और जो लोग कभी उन्हें कमतर आंकते थे, आज वे उनकी सफलता की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। यति की यह कहानी सिखाती है कि बाधाएं कितनी भी बड़ी क्यों न हों, दृढ़ संकल्प से हर चक्रव्यूह को भेदा जा सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 9:05 am

Teaching Jobs Abroad: विदेश में टीचर बनने का सपना होगा पूरा, जानें जरूरी योग्यता, चयन प्रक्रिया और सैलरी पैकेज

भारत में हजारों ऐसे शिक्षक हैं जो सात समंदर पार जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छात्रों को पढ़ाने का सपना देखते हैं। आकर्षक सैलरी पैकेज, शानदार वर्क-लाइफ बैलेंस और ग्लोबल एक्सपोजर इस करियर को बेहद लोकप्रिय बनाते हैं। अगर आप भी विदेश जाकर अपने शिक्षण करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं, तो यह समझ लें कि इसके लिए सिर्फ एक सामान्य डिग्री होना ही काफी नहीं है। बेहतरीन कम्यूनिकेशन स्किल्स, मजबूत प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन और फील्ड का जमीनी अनुभव भी उतना ही जरूरी है। हर देश के अपने कड़े नियम और पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) हैं। यदि आप सही दिशा में तैयारी करें, तो ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन (UK) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे शीर्ष देशों में एक बेहतरीन करियर बना सकते हैं।अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ है पहली शर्त, देने होंगे ये इंटरनेशनल एग्जाम्सविदेश में पढ़ाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है अंग्रेजी भाषा पर असाधारण पकड़ होना। दुनिया के लगभग सभी प्रतिष्ठित इंटरनेशनल स्कूल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले उम्मीदवार की भाषाई दक्षता को बारीकी से परखते हैं। इसके लिए आपको IELTS, PTE Academic या TOEFL जैसी मान्य अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी परीक्षाओं को पास करना होता है और उनका स्कोरकार्ड दिखाना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही, आपका स्पष्ट उच्चारण (Pronunciation), प्रभावी शिक्षण शैली और पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स आपके चयन की संभावना को कई गुना बढ़ा देते हैं। इसलिए, विदेश में नौकरी तलाशने से पहले इन परीक्षाओं की तैयारी पर विशेष ध्यान दें।इन जरूरी प्रोफेशनल डिग्रियों और लाइसेंस के बिना नहीं मिलेगी एंट्रीग्लोबल मार्किट में केवल विषय विशेषज्ञ होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपके पास सही प्रोफेशनल क्रेडेंशियल्स भी होने चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्कूल आमतौर पर उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता देते हैं जिन्होंने अपने संबंधित विषय में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन (स्नातकोत्तर) किया हो। इसके अलावा:अनिवार्य योग्यता: अधिकांश देशों में B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की डिग्री और कम से कम 1 से 3 साल का शिक्षण अनुभव अनिवार्य माना जाता है।ऑस्ट्रेलिया के नियम: यहां पढ़ाने के लिए आपको NESA रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो सकती है, साथ ही AITSL या ACECQA द्वारा तय की गई पात्रता शर्तों को पूरा करना होता है।ब्रिटेन (UK) के नियम: ब्रिटेन के स्कूलों में QTS (Qualified Teacher Status) और PGCE (Postgraduate Certificate in Education) जैसी प्रोफेशनल योग्यताओं को अत्यधिक महत्व दिया जाता है।अमेरिका, कनाडा और UAE: इन देशों में भी विषय विशेषज्ञता के साथ-साथ स्थानीय शिक्षा बोर्ड के नियमों के अनुसार वैलिड टीचिंग लाइसेंस या सर्टिफिकेट होना बेहद जरूरी है।जॉब सर्च के सही तरीके: इन प्लेटफॉर्म्स पर करें अप्लाईअगर आपके पास ऊपर बताई गई सभी योग्यताएं हैं, तो आप विदेश में नौकरी पाने के लिए सही स्ट्रेटेजी अपना सकते हैं। शिक्षक मुख्य रूप से LinkedIn, अंतरराष्ट्रीय स्कूलों की ऑफिशियल करियर वेबसाइट्स, ग्लोबल जॉब पोर्टल्स और इंटरनेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसियों (जैसे Search Associates या ISS) के माध्यम से सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, कई बड़े ग्लोबल स्कूल चेन समय-समय पर भारत के महानगरों में डायरेक्ट वॉक-इन इंटरव्यू और रिक्रूटमेंट ड्राइव भी आयोजित करते हैं, जिन पर आपको नजर रखनी चाहिए।लाखों में होता है सालाना पैकेज, जानें किस देश में मिलती है कितनी सैलरीविदेशों में शिक्षकों को मिलने वाला सैलरी पैकेज और सुविधाएं बेहद शानदार होती हैं। अनुभव, पढ़ाए जाने वाले विषय और संस्थान के स्तर पर सैलरी का यह ग्राफ और भी ऊपर जा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक प्रमुख देशों में सालाना औसत पैकेज कुछ इस प्रकार है:देश (Country)औसत सालाना सैलरी पैकेज (अनुमानित)ऑस्ट्रेलिया (Australia)85,000 से 125,000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर ($AUD)अमेरिका (USA)55,000 से 100,000 अमेरिकी डॉलर ($USD)कनाडा (Canada)65,000 से 105,000 कैनेडियन डॉलर ($CAD)

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 9:02 am

PM Rashtriya Bal Puraskar: बच्चों के लिए देश का सबसे बड़ा सम्मान, पीएम राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए आवेदन शुरू; ऐसे करें अप्लाई

हर बच्चे के अंदर एक अनोखी और खास प्रतिभा छिपी होती है। कोई विज्ञान की दुनिया में नए अविष्कार करता है, कोई खेल के मैदान में तिरंगा लहराता है, तो कोई छोटी सी उम्र में ही समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण या कला-संस्कृति के क्षेत्र में मिसाल कायम कर देता है। ऐसे ही होनहार और असाधारण बच्चों को राष्ट्रीय पटल पर सम्मानित करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए 5 से 18 वर्ष तक के बच्चे पात्र हैं। सबसे खास बात यह है कि योग्य बच्चे खुद भी अपना नामांकन (Self-Nomination) कर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है। आइए जानते हैं इस पुरस्कार से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी।राष्ट्रपति के हाथों मिलता है यह गौरवशाली सम्मान, खुद बच्चे भी कर सकते हैं नामांकनभारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' देश का एक ऐसा सर्वोच्च सम्मान है, जो कम उम्र में असाधारण और प्रेरणादायक उपलब्धियां हासिल करने वाले बच्चों को दिया जाता है। इस पुरस्कार के लिए निर्धारित आयु सीमा 5 से 18 वर्ष है। नामांकन की प्रक्रिया बेहद लचीली रखी गई है; कोई भी व्यक्ति, स्कूल, सामाजिक संस्था, शिक्षक, माता-पिता या कोई संगठन किसी होनहार बच्चे का नाम आगे बढ़ा सकता है। इसके साथ ही, बच्चे स्वयं भी अपना फॉर्म भर सकते हैं। यह गौरवशाली पुरस्कार देश के राष्ट्रपति द्वारा एक भव्य समारोह में प्रदान किया जाता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य देश के सुदूर इलाकों में छिपी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें एक बड़ा राष्ट्रीय मंच देना है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ सके।इन 6 प्रमुख श्रेणियों में अद्वितीय कार्य करने वालों को मिलेगा मौकाप्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026 मुख्य रूप से छह अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बच्चों को दिया जाएगा। इन श्रेणियों में बहादुरी (Bravery), समाज सेवा (Social Service), पर्यावरण संरक्षण (Environment), खेल (Sports), कला एवं संस्कृति (Art & Culture) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) शामिल हैं। यदि किसी बच्चे ने इनमें से किसी भी क्षेत्र में ऐसा काम किया है जिसका समाज या देश पर एक सकारात्मक और बड़ा प्रभाव पड़ा हो, तो वह नामांकन के लिए योग्य है। आवेदन करते समय उम्मीदवार को अपनी उपलब्धि का अधिकतम 1,000 शब्दों में विस्तृत विवरण देना होगा। सरकार का मानना है कि यह पुरस्कार बच्चों के लिए सिर्फ एक मेडल या सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि जीवनभर की एक अमूल्य राष्ट्रीय पहचान है।ऑनलाइन आवेदन का स्टेप-बाय-स्टेप पूरा तरीका समझेंइस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रखा गया है, जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से पूरा किया जा सकता है:सबसे पहले आधिकारिक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल awards.gov.in पर जाएं और वहां अपना अकाउंट बनाकर लॉगिन करें।लॉगिन करने के बाद रजिस्ट्रेशन फॉर्म में पूछी गई जरूरी व्यक्तिगत जानकारियां जैसे नाम, जन्मतिथि, पहचान पत्र का विवरण, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को ध्यानपूर्वक भरें।इसके बाद वेबसाइट के 'Ongoing Nominations' सेक्शन में जाकर 'Pradhan Mantri Rashtriya Bal Puraskar 2026' के विकल्प को चुनें।अब 'Nominate/Apply Now' पर क्लिक करें और संबंधित पुरस्कार की श्रेणी का चयन करें। यहाँ आपको यह भी चुनना होगा कि आप खुद के लिए आवेदन कर रहे हैं या किसी दूसरे बच्चे को नामांकित कर रहे हैं।अगले चरण में बच्चे की असाधारण उपलब्धि का पूरा विवरण लिखें और उससे जुड़े सभी जरूरी प्रामाणिक दस्तावेज, सर्टिफिकेट्स और हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो (JPG, JPEG या PNG फॉर्मेट में) अपलोड करें।आवेदन को अंतिम रूप से सबमिट करने से पहले आप इसे 'ड्राफ्ट' के रूप में सेव करके दोबारा चेक भी कर सकते हैं। फाइनल सबमिशन के बाद कंफर्मेशन पेज को डाउनलोड कर अपने पास सुरक्षित रख लें।31 जुलाई 2026 है आखिरी तारीख, समय रहते उठाएं इस मौके का फायदामंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। इस तय समय सीमा के बाद पोर्टल पर किसी भी नए आवेदन या अधूरी प्रोफाइल को स्वीकार नहीं किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सभी अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि वे अंतिम तारीखों में होने वाली तकनीकी दिक्कतों (सर्वर डाउन होना) का इंतजार किए बिना समय रहते योग्य बच्चों का आवेदन पूरा कर लें। यदि आपके आसपास, स्कूल में या परिवार में कोई ऐसा बच्चा है जिसने अपनी उम्र से बढ़कर समाज या देश के लिए कोई असाधारण काम किया है, तो उसे इस सुनहरे अवसर के जरिए राष्ट्रीय मंच पर लाने में उसकी मदद जरूर करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 8:49 am

NEET UG Re-Exam: आंसर की पर आपत्ति जताने का आखिरी मौका, आज बंद हो जाएगी विंडो

देशभर के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आज, 28 जून 2026 को री-नीट यूजी 2026 की प्रोविजनल आंसर की (Provisional Answer Key) पर आपत्ति दर्ज करने की ऑनलाइन प्रक्रिया को समाप्त कर रही है। अगर आपको परीक्षा के किसी भी प्रश्न या उत्तर पर कोई संदेह है, तो चुनौती देने के लिए अब आपके पास केवल कुछ ही घंटों का समय शेष बचा है। उम्मीदवार केवल NTA की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाकर ही अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी माध्यम से आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी, इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी कर लें।प्रति प्रश्न देनी होगी 200 रुपये फीस, सही साबित होने पर मिलेगी रिफंडNTA के नियमों के मुताबिक, उम्मीदवारों को प्रत्येक प्रश्न पर आपत्ति दर्ज करने के लिए 200 रुपये की प्रोसेसिंग फीस का भुगतान करना होगा। यह शुल्क पूरी तरह ऑनलाइन मोड में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई (UPI) के जरिए जमा किया जा सकता है। वैसे तो यह फीस नॉन-रिफंडेबल (Non-Refundable) होती है, लेकिन यदि विषय विशेषज्ञों की समिति आपकी उठाई गई आपत्ति को सही और वैध पाती है, तो उस विशेष प्रश्न के लिए जमा की गई 200 रुपये की राशि आपके खाते में वापस यानी रिफंड कर दी जाएगी। एजेंसी ने साफ किया है कि आपत्तियों की समीक्षा केवल ठोस तथ्यों और प्रामाणिक सबूतों के आधार पर ही होगी, इसलिए उम्मीदवारों को केवल प्रमाणित दस्तावेज ही अपलोड करने चाहिए।स्टेप-बाय-स्टेप समझें ऑनलाइन ऑब्जेक्शन दर्ज करने का पूरा तरीकारी-नीट यूजी आंसर की पर ऑनलाइन चुनौती दर्ज करने की प्रक्रिया बेहद आसान है। सबसे पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर विजिट करना होगा। होमपेज पर दिखाई दे रहे 'NEET UG Re-Exam Answer Key Challenge' लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद अपने एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड या जन्मतिथि की मदद से अकाउंट में लॉगिन करें। लॉगिन करने के बाद अपने प्रश्नपत्र का सीरीज कोड दर्ज करें और उन प्रश्नों को सिलेक्ट करें जिन्हें आप चुनौती देना चाहते हैं। अपने दावे को मजबूत करने के लिए उम्मीदवारों को NCERT या अन्य प्रामाणिक शैक्षणिक किताबों की संदर्भ सामग्री को PDF फॉर्मेट में अपलोड करना होगा। सभी विवरणों को अच्छी तरह जांचने के बाद फीस का भुगतान करें और फॉर्म सबमिट कर दें, क्योंकि फाइनल सबमिशन के बाद इसमें कोई बदलाव नहीं हो सकेगा।NTA की सख्त गाइडलाइन: ऑफलाइन माध्यमों पर नहीं होगा कोई विचारनेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि आपत्तियां केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार की जाएंगी। ईमेल, डाक, फैक्स या किसी भी अन्य ऑफलाइन माध्यम से भेजे गए आवेदनों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा। उम्मीदवार केवल उसी प्रश्नपत्र सीरीज कोड के प्रश्नों पर आपत्ति उठा सकते हैं, जो उन्हें 21 जून को आयोजित हुई री-नीट परीक्षा के दौरान आवंटित किया गया था। यदि किसी प्रश्न पर उठाई गई आपत्ति सही पाई जाती है, तो संशोधित उत्तर को सभी प्रश्नपत्र सेटों पर समान रूप से लागू किया जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञों की समिति की देखरेख में फाइनल आंसर की तैयार होगी, जिसके आधार पर मुख्य परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया जाएगा। एक बार फाइनल आंसर की या परिणाम जारी होने के बाद किसी भी नई शिकायत पर विचार नहीं किया जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 8:40 am

कंप्यूटर साइंस का क्रेज खत्म? JEE एडवांस्ड 179 रैंक वाले टॉपर ने ठुकराया CSE, सिविल इंजीनियरिंग चुनकर सबको चौंकाया

आईआईटी (IIT) में एडमिशन के लिए चल रही जोसा (JoSAA) काउंसलिंग के दौरान इस साल एक बेहद हैरान करने वाला और बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सालों से टॉप रैंकर्स की पहली और इकलौती पसंद रहने वाली कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (BTech CSE) को लेकर छात्रों का नजरिया बदलता दिख रहा है। देश के सबसे कठिन एग्जाम में से एक जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) में ऑल इंडिया 179 रैंक हासिल करने वाले एक टॉप स्टूडेंट ने सबको चौंकाते हुए आईआईटी बॉम्बे या दिल्ली के कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के बजाय सिविल इंजीनियरिंग (Civil Engineering) को चुना है। इस बड़े फैसले के बाद अब शिक्षा जगत और इंजीनियरिंग के गलियारों में यह बहस तेज हो गई है कि क्या वाकई आईटी सेक्टर की चमक अब फीकी पड़ने लगी है।आखिर क्यों बदला स्टूडेंट का मूड और सिविल की तरफ बढ़ा झुकावपिछले एक दशक से भारतीय छात्रों के बीच यह धारणा बन चुकी थी कि अच्छी सैलरी और सुरक्षित भविष्य के लिए सिर्फ कंप्यूटर साइंस ही एकमात्र रास्ता है। लेकिन इस साल जोसा काउंसलिंग के शुरुआती ट्रेंड्स कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर हो रही छंटनी (Layoffs) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व चैटजीपीटी जैसी आधुनिक तकनीकों के आने से कोडिंग और सॉफ्टवेयर जॉब्स को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। वहीं दूसरी तरफ, देश में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, बुलेट ट्रेन, एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटी मिशन के कारण कोर सेक्टर, खासकर सिविल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में नौकरियों और सरकारी नौकरियों (PSU) के शानदार अवसर पैदा हो रहे हैं।केवल पैकेज नहीं, अब करियर की स्टेबिलिटी और पैशन को प्राथमिकताकाउंसिलिंग में हिस्सा ले रहे करियर काउंसलर्स और आईआईटी प्रोफेसर्स का मानना है कि अब छात्र केवल शुरुआती पैकेज या भेड़चाल को देखकर अपनी ब्रांच नहीं चुन रहे हैं। जेईई के टॉपर्स अब लॉन्ग-टर्म करियर स्टेबिलिटी और अपने पर्सनल पैशन को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। 179 रैंक लाने वाले छात्र का यह फैसला इस बात का सबूत है कि आने वाले समय में देश के विकास में सिविल इंजीनियरों की भूमिका सबसे अहम होने वाली है। यूपीएससी (UPSC) और सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी सिविल इंजीनियरिंग हमेशा से एक बेहद मजबूत और पसंदीदा बैकग्राउंड रहा है, जिससे उन्हें आगे चलकर प्रशासनिक सेवाओं में बड़ी मदद मिलती है।जोसा काउंसलिंग में इस साल दिख रहे हैं कई बड़े बदलावजोसा काउंसलिंग के विभिन्न राउंड्स की चॉइस फिलिंग को देखें तो इस बार आईआईटी और एनआईटी (NIT) में दाखिला लेने वाले छात्रों का रुझान कोर ब्रांचेज की तरफ पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर हुआ है। केवल आईआईटी बॉम्बे या आईआईटी दिल्ली ही नहीं, बल्कि आईआईटी मद्रास, खड़गपुर और कानपुर में भी सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की सीटों के लिए तगड़ा कॉम्पिटिशन देखने को मिल रहा है। अगर आप भी इस साल काउंसलिंग में शामिल हो रहे हैं, तो केवल कंप्यूटर साइंस के पीछे भागने के बजाय अपनी रुचि, भविष्य की संभावनाओं और कोर सेक्टर्स में आ रहे नए बदलावों को ध्यान में रखकर ही अपनी मनपसंद चॉइस लॉक करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 4:05 am

हिम्मत को सलाम! NEET में 3 बार फेल, JEE में भी नहीं आई रैंक, फिर भी नहीं मानी हार, अब IIT से पढ़कर बने धाकड़ Data Scientist

कहते हैं कि मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) और इंजीनियरिंग की जेईई (JEE) परीक्षा में असफल होने के बाद अक्सर छात्र पूरी तरह टूट जाते हैं और अपना रास्ता बदल लेते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जांबाज छात्र की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे तीन बार नीट परीक्षा में असफलता का स्वाद चखा। इसके बाद जब किस्मत आजमाने के लिए जेईई की परीक्षा दी, तो वहां भी निराशा ही हाथ लगी। लेकिन इस युवा ने अपनी हिम्मत और जिद के दम पर ऐसा बाउंस बैक किया कि आज वह देश के नंबर वन संस्थान आईआईटी (IIT) से पढ़ाई पूरी कर एक बेहद सफल और हाई-पेड डेटा साइंटिस्ट (Data Scientist) बन चुका है।तीन साल का कड़ा संघर्ष और नीट परीक्षा में मिली लगातार नाकामीमध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस होनहार छात्र का सपना शुरुआत में एक डॉक्टर बनने का था। बारहवीं के बाद उसने पूरी शिद्दत से नीट की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, तो उसने हार नहीं मानी और दूसरा ड्रॉप लिया। जब दूसरे और फिर लगातार तीसरे प्रयास में भी कुछ नंबरों से सिलेक्शन रुक गया, तो आसपास के लोगों और रिश्तेदारों ने ताने मारना शुरू कर दिया। मानसिक तनाव और करियर के खत्म होने के डर के बीच उसने महसूस किया कि शायद उसका असली टैलेंट मेडिकल लाइंस के बजाय टेक्नोलॉजी और नंबर्स के खेल में छिपा है।जेईई की खराब रैंक ने भी नहीं रोका रास्ता, वैकल्पिक मार्ग की खोजनीट के बाद उसने इंजीनियरिंग की तरफ रुख किया और जेईई (JEE) की परीक्षा दी। लेकिन लंबे समय से बायोलॉजी पढ़ने के कारण मैथ्स पर उतनी मजबूत पकड़ नहीं थी, जिसके चलते जेईई में भी कोई खास रैंक नहीं मिल पाई। दो-दो बड़ी परीक्षाओं में लगातार असफल होने के बाद भी इस छात्र ने खुद पर से भरोसा नहीं उठने दिया। उसने इंटरनेट, करियर गाइडेंस पोर्टल्स और नए जमाने के एजुकेशनल एवेन्यूज को खंगालना शुरू किया और उसे पता चला कि देश के कुछ चुनिंदा आईआईटी (IITs) अब गैर-जेईई (Non-JEE) रूट्स के जरिए भी डेटा साइंस और आधुनिक कोर्सेज में एडमिशन का मौका दे रहे हैं।आईआईटी (IIT) में एंट्री और नए जमाने की हॉट टेक्नोलॉजी 'डेटा साइंस' पर फोकसउसने बिना कोई समय गंवाए आईआईटी के विशेष डेटा साइंस एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी की और अपनी मजबूत लॉजिकल क्षमता के बल पर वहां एडमिशन हासिल कर लिया। कैंपस में कदम रखते ही उसने कोडिंग, स्टेटिस्टिक्स, मशीन लर्निंग और पायथन जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं को सीखने में दिन-रात एक कर दिया। जो छात्र कभी बायोलॉजी के डायग्राम्स में उलझा रहता था, उसने एआई (AI) और डेटा मॉडल्स के जटिल एल्गोरिदम को इतनी तेजी से मास्टर किया कि कॉलेज के प्रोफेसर भी दंग रह गए।असफलता से सफलता का सफर: कोटा से लेकर पटना-लखनऊ के छात्रों के लिए प्रेरणाइस युवा की यह शानदार कामयाबी आज कोटा, दिल्ली, पटना, लखनऊ और प्रयागराज जैसे देश के बड़े कोचिंग हब्स में पढ़ रहे लाखों निराश छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। करियर काउंसलर्स का कहना है कि यह कहानी साबित करती है कि अगर आप नीट या जेईई जैसी पारंपरिक परीक्षाओं में फेल भी हो जाते हैं, तो भी आपके लिए दुनिया खत्म नहीं होती। आज के टेक-ड्रिवन और एआई के दौर में करियर के सैकड़ों ऐसे नए रास्ते खुल चुके हैं, जहां डिग्रियों से ज्यादा आपकी स्किल्स और मेहनत मायने रखती है। आज यह छात्र न केवल एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर डेटा साइंटिस्ट काम कर रहा है, बल्कि युवाओं को लीक से हटकर सोचने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jun 2026 9:52 am

यूपीएससी में अब नहीं चलेगी चालाकी! पूजा खेड़कर विवाद के बाद आयोग का ऐतिहासिक फैसला, नए डिजिटल चक्रव्यूह में फसेंगे फर्जी उम्मीदवार

देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा 'UPSC' (संघ लोक सेवा आयोग) की परीक्षाओं में धोखाधड़ी और फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे एंट्री पाने की कोशिश करने वालों के लिए एक बहुत बड़ी और बुरी खबर है। हाल ही में देश भर में सुर्खियां बटोरने वाले चर्चित पूजा खेड़कर मामले से कड़ा सबक लेते हुए आयोग ने अपनी पूरी चयन और सत्यापन प्रणाली (Verification System) को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। अब यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में चालाकी या फर्जीवाड़े का सहारा लेने वाले उम्मीदवारों का बचना नामुमकिन होगा। आयोग एक ऐसा आधुनिक और फुलप्रूफ डिजिटल मैकेनिज्म तैयार कर रहा है, जो आवेदन के पहले चरण से लेकर अंतिम चयन तक हर उम्मीदवार के दावों की बारीकी से कुंडली खंगालेगा।पूजा खेड़कर केस के बाद क्यों पड़ी इस बड़े कायाकल्प की जरूरत?पूर्व ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेड़कर पर दिव्यांगता (Disability) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के नॉन-क्रीमी लेयर कोटे का गलत इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद आयोग ने उनके चयन को निरस्त कर दिया था। इस हाई-प्रोफाइल विवाद ने यूपीएससी के पारंपरिक वेरिफिकेशन सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया था। इसके बाद से ही देश के ईमानदार उम्मीदवारों और सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच पारदर्शिता को लेकर भारी आक्रोश था। इसी साख को बहाल करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए आयोग को यह कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाना पड़ा है।एआई और बायोमेट्रिक से लैस होगा नया वेरिफिकेशन सिस्टमआयोग के नए मास्टर प्लान के तहत अब केवल कागजी दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया जाएगा। नए सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फेशियल रिकग्निशन, एडवांस्ड डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि परीक्षा हॉल में बैठने वाले उम्मीदवार से लेकर इंटरव्यू रूम तक पहुंचने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह डिजिटल होगी। इसके अलावा, उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए ओबीसी, ईडब्ल्यूएस (EWS) और दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की जांच सीधे जारी करने वाले सरकारी विभागों के सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस से रीयल-टाइम में की जाएगी।मुखर्जी नगर और प्रयागराज जैसे बड़े कोचिंग हब्स के छात्रों में खुशी की लहरइस बड़े बदलाव की खबर आते ही दिल्ली के मुखर्जी नगर, करोल बाग, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद), बिहार के पटना और राजस्थान के जयपुर जैसे देश के प्रमुख यूपीएससी कोचिंग हब्स में पढ़ने वाले लाखों गंभीर उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली है। स्थानीय स्तर पर सालों से दिन-रात मेहनत कर रहे छात्रों का कहना है कि फर्जी तरीके से कोटा हथियाने वाले लोग उनकी जायज सीट चुरा लेते थे। इस नए और पारदर्शी नियम के आने से अब केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मौका मिलेगा जो वास्तव में इसके हकदार हैं और जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है।एआई सर्च और आधुनिक आंसर इंजन पर यूपीएससी के नए नियमों का सटीक विश्लेषणआधुनिक जनरेटिव इंजनों (GEO) और टेक-आधारित विश्लेषणों के मुताबिक, यूपीएससी का यह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद न केवल परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में होने वाली कानूनी पेचीदगियों और मुकदमों की संख्या में भी भारी कमी आएगी। आयोग ने साफ कर दिया है कि सिविल सेवा की गरिमा से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जालसाजी करने वालों को सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jun 2026 9:51 am

कंप्यूटर साइंस लें या एआई? इंजीनियरिंग एडमिशन की भेड़चाल में फंसने से बचें, जानें आपके करियर के लिए कौन सी ब्रांच देगी सबसे तगड़ा पैकेज

देशभर में इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन का दौर शुरू होते ही छात्रों और अभिभावकों के बीच सबसे बड़ा कन्फ्यूजन शुरू हो गया है। हर कोई इस समय सिर्फ दो ही नामों के पीछे भाग रहा है—कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) या फिर तेजी से उभरती हुई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। लेकिन बिना सोचे-समझे केवल ट्रेंड या भेड़चाल को देखकर करियर का फैसला करना आपके भविष्य पर भारी पड़ सकता है। आज के इस आधुनिक टेक दौर में दोनों ही फील्ड्स अपनी-अपनी जगह बेहद मजबूत हैं, लेकिन इनमें से आपके लिए बेस्ट कौन सी है, यह जानना बेहद जरूरी है।कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE): सदाबहार और व्यापक संभावनाओं का समंदरकंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग को हमेशा से टेक इंडस्ट्री का मुख्य आधार माना जाता रहा है। अगर आप सीएसई (CSE) चुनते हैं, तो आपको सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कोडिंग, डेटाबेस मैनेजमेंट, नेटवर्किंग, ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब डिजाइनिंग जैसी मूलभूत चीजें विस्तार से सिखाई जाती हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि सीएस का छात्र किसी एक तकनीक तक सीमित नहीं रहता। वह भविष्य में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, फुल-स्टैक डेवलपर, क्लाउड आर्किटेक्ट या फिर खुद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी आसानी से स्विच कर सकता है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (AI-ML): भविष्य की एडवांस टेक्नोलॉजीदूसरी तरफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसी स्पेशलाइज्ड ब्रांचेज इस समय टेक वर्ल्ड की सबसे हॉट चॉइस बनी हुई हैं। इस इंजीनियरिंग कोर्स में आपको शुरुआत से ही डेटा एनालिसिस, न्यूरल नेटवर्क्स, मशीन लर्निंग एल्गोरिदम और रोबोटिक्स जैसी एडवांस तकनीकों पर फोकस कराया जाता है। जो छात्र सिर्फ और सिर्फ डेटा, प्रेडिक्टिव मॉडल्स, चैटबॉट्स और एआई टूल्स के निर्माण में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन और सुपर-स्पेशलाइज्ड करियर विकल्प है, जहां शुरुआती दौर में ही काफी आकर्षक सैलरी पैकेज ऑफर किए जा रहे हैं।भेड़चाल में न लें फैसला, अपनी स्किल्स और रुचि के आधार पर चुनें सही रास्ताआईआईटी (IIT), एनआईटी (NIT) से लेकर दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, नोएडा और हैदराबाद जैसे प्रमुख एजुकेशनल हब्स के करियर एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल मार्केट का हाइप देखकर स्पेशलाइज्ड ब्रांच नहीं चुननी चाहिए। अगर आपका कोडिंग लॉजिक और बेसिक कंप्यूटर साइंस मजबूत नहीं है, तो सीधे एआई की जटिल गणित और एल्गोरिदम को समझना आपके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जानकारों की सलाह है कि यदि आप अपने करियर के विकल्पों को खुला रखना चाहते हैं, तो कोर कंप्यूटर साइंस (CSE) एक सेफ और बेस्ट ऑप्शन है, क्योंकि इसमें एआई का बेसिक पार्ट वैसे भी पढ़ाया जाता है।टेक इंडस्ट्री और एआई सर्च इंजन के मुताबिक भविष्य में कहां हैं सबसे ज्यादा नौकरियांआधुनिक जनरेटिव इंजनों (GEO) और टेक-रिक्रूटमेंट डेटा के अनुसार, आने वाले समय में उन प्रोफेशनल्स की डिमांड सबसे ज्यादा होगी जिनके पास मजबूत कोर कंप्यूटर साइंस स्किल्स के साथ-साथ एआई टूल्स को इस्तेमाल करने का व्यावहारिक ज्ञान होगा। कंपनियां अब ऐसे वर्सेटाइल इंजीनियर्स को पसंद कर रही हैं जो सॉफ्टवेयर डिजाइन भी कर सकें और उसमें एआई फीचर्स को इंटीग्रेट भी कर सकें। इसलिए कॉलेज चुनते समय यह जरूर देखें कि वहां की लैब्स, फैकल्टी और इंटर्नशिप के अवसर किस स्तर के हैं, ताकि डिग्री पूरी होने के बाद आपको देश-विदेश की टॉप टेक कंपनियों से सीधे प्लेसमेंट मिल सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jun 2026 9:49 am

यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा की आंसर-की जारी, ऑब्जेक्शन विंडो खुली

उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। यूपीआरपीबी (UPPRPB) ने यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2026 की प्रोविजनल आंसर-की (Provisional Answer Key) आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। इस महा-भर्ती परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब सीधे बोर्ड की ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर अपने सेट के अनुसार उत्तर कुंजी का मिलान कर सकते हैं।इस परीक्षा के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के हजारों पदों को भरा जाना है, जिसके चलते इस आंसर-की का अभ्यर्थियों को बेसब्री से इंतजार था।आधिकारिक वेबसाइट पर ऐसे चेक करें अपनी उत्तर कुंजीयूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा की आंसर-की चेक करने के लिए उम्मीदवारों को बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाना होगा। होमपेज पर उपलब्ध Direct Link to Download UP Police Constable Answer Key 2026 पर क्लिक करने के बाद एक नया लॉगिन पेज खुलेगा। यहाँ अभ्यर्थियों को अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, रोल नंबर और जन्म तिथि (Date of Birth) दर्ज करनी होगी। लॉगिन करते ही स्क्रीन पर प्रश्न पत्र के साथ मास्टर आंसर-की प्रदर्शित हो जाएगी, जिसे भविष्य के लिए डाउनलोड या प्रिंट किया जा सकता है।गलत उत्तरों पर आपत्ति दर्ज कराने का मिला मौका, जानें प्रक्रियायदि किसी उम्मीदवार को बोर्ड द्वारा जारी किए गए किसी उत्तर या प्रश्न पर कोई संदेह है, तो वे इसके खिलाफ अपनी ऑनलाइन आपत्ति (Objection) दर्ज करा सकते हैं। बोर्ड ने इसके लिए एक निश्चित समय सीमा तय की है, जिसके भीतर उम्मीदवारों को उचित दस्तावेजों या साक्ष्यों के साथ ऑब्जेक्शन सबमिट करना होगा। प्रत्येक आपत्ति के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। इस तय अवधि के बाद प्राप्त होने वाली किसी भी चुनौती पर विचार नहीं किया जाएगा।फाइनल आंसर-की के बाद जारी होगा लिखित परीक्षा का रिजल्टप्राप्त हुई सभी आपत्तियों की समीक्षा यूपीआरपीबी के विषय विशेषज्ञों की एक विशेष कमेटी द्वारा की जाएगी। यदि उम्मीदवारों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति सही पाई जाती है, तो उत्तर कुंजी में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। इसके बाद बोर्ड अंतिम उत्तर कुंजी (Final Answer Key) और लिखित परीक्षा का परिणाम (UP Police Constable Result 2026) एक साथ जारी करेगा। लिखित परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को अगले चरण यानी शारीरिक मानक परीक्षण (PST) और शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jun 2026 12:47 am

NEET Answer Key 2026: NTA ने जारी की री-NEET आंसर-की, आपत्ति दर्ज करने की विंडो खुली

नीट परीक्षा को लेकर चल रहे विवादों और चर्चाओं के बीच मेडिकल उम्मीदवारों के लिए एक बेहद जरूरी और बड़ा अपडेट सामने आया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने री-NEET 2026 परीक्षा की प्रोविजनल आंसर-की (Provisional Answer Key) आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी है। इसके साथ ही छात्रों के रिस्पॉन्स शीट और OMR आंसर शीट भी अपलोड कर दिए गए हैं।जो भी उम्मीदवार इस स्पेशल री-एग्जाम में शामिल हुए थे, वे अब NTA की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर अपनी उत्तर कुंजी चेक और डाउनलोड कर सकते हैं।28 जून तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति, ये रही समय सीमाअगर आपको NTA द्वारा जारी की गई किसी उत्तर पर कोई संदेह है या आप उसे चुनौती देना चाहते हैं, तो एजेंसी ने इसके लिए बकायदा मौका दिया है। उम्मीदवार 28 जून 2026 (रात 11:50 बजे तक) अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। ध्यान रहे कि तय समय सीमा के बाद किसी भी चुनौती को स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रत्येक आपत्ति दर्ज कराने के लिए उम्मीदवारों को प्रति प्रश्न 200 रुपये की नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग फीस ऑनलाइन जमा करनी होगी।री-NEET आंसर-की ऐसे करें डाउनलोड (Step-by-Step Guide)उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपनी आंसर-की और OMR शीट चेक कर सकते हैं:सबसे पहले NTA NEET की आधिकारिक वेबसाइट exams.nta.ac.in/NEET पर जाएं।होमपेज पर NEET 2026 Re-Exam Answer Key Challenge वाले लिंक पर क्लिक करें।अब अपना एप्लीकेशन नंबर, जन्म तिथि (Date of Birth) और सिक्योरिटी पिन दर्ज करके लॉगिन करें।लॉगिन होते ही आपकी स्क्रीन पर आंसर-की और आपकी OMR रिस्पॉन्स शीट दिखाई देगी।इसे अच्छी तरह चेक करें और भविष्य के संदर्भ के लिए इसका प्रिंटआउट या PDF सेव कर लें।एक्सपर्ट्स की राय और फाइनल रिजल्ट का काउंटडाउनएजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस आंसर-की के आने के बाद अब फाइनल रिजल्ट का रास्ता साफ हो गया है। 28 जून तक मिलने वाली आपत्तियों की समीक्षा NTA के विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) द्वारा की जाएगी। यदि कोई आपत्ति सही पाई जाती है, तो आंसर-की को संशोधित किया जाएगा और उसी के आधार पर फाइनल आंसर-की और री-NEET 2026 का फाइनल रिजल्ट तैयार होगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि जुलाई के पहले हफ्ते में फाइनल परिणाम घोषित किए जा सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jun 2026 12:41 am

स्कॉलरशिप नियमों में मोदी सरकार का ऐतिहासिक बदलाव, अब नहीं पड़ेगी डोमिसाइल की जरूरत, 1.2 करोड़ छात्रों की मौज

देश के करोड़ों छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा और छात्रवृत्ति (Scholarship) को लेकर इस वक्त की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों को मिलने वाली पोस्ट-मैट्रिक और अन्य स्कॉलरशिप योजनाओं के नियमों में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव कर दिया है। नए आधिकारिक आदेश के मुताबिक, अब इन दोनों वर्गों के छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप का लाभ उठाने के लिए डोमिसाइल यानी मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate) जमा करने की कोई जरूरत नहीं होगी। सरकार के इस सिंगल फैसले से देश भर के करीब 1.2 करोड़ से ज्यादा जरूरतमंद छात्रों को सीधे तौर पर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और कागजी लेटलतीफी से मुक्ति मिल जाएगी।कागजी झंझटों और लेटलतीफी से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्तिपुराने नियमों के तहत स्कॉलरशिप का आवेदन करते समय छात्रों के लिए अपने संबंधित राज्य का डोमिसाइल सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होता था। कई बार स्थानीय स्तर पर तहसील और सरकारी दफ्तरों की लेटलतीफी के कारण समय पर यह प्रमाण पत्र नहीं बन पाता था, जिससे हजारों योग्य छात्र आवेदन की आखिरी तारीख निकल जाने के कारण वजीफे से वंचित रह जाते थे। सरकार ने इस जमीनी समस्या को गंभीरता से समझते हुए इस नियम को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। अब केवल आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र के जरिए ही स्कॉलरशिप की प्रक्रिया को बेहद आसान और डिजिटल मोड में पूरा किया जा सकेगा।नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) को किया जाएगा पूरी तरह अपग्रेडइस ऐतिहासिक बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) को आधुनिक और पूरी तरह से अपग्रेड करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। अब पोर्टल पर आवेदन करते समय डोमिसाइल अपलोड करने का विकल्प हटा दिया जाएगा। इसके बजाय डिजिलॉकर (DigiLocker) और आधार सीडिंग के जरिए छात्र के डेटा को सीधे वेरीफाई कर लिया जाएगा। इस नई पारदर्शी व्यवस्था से न सिर्फ स्कॉलरशिप का पैसा सीधे छात्रों के बैंक खातों में (DBT के जरिए) बेहद तेजी से ट्रांसफर होगा, बल्कि बिचौलियों और फर्जीवाड़े की गुंजाइश भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।यूपी, बिहार, एमपी और राजस्थान जैसे राज्यों के लोकल छात्रों को बंपर फायदाभौगोलिक और स्थानीय स्तर (Geographical Optimization) पर देखा जाए तो इस नियम के बदलने का सबसे बड़ा और सीधा लाभ उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों को मिलेगा। इन राज्यों में अक्सर स्थानीय निवास प्रमाण पत्र बनवाने में छात्रों को हफ्तों का समय और काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। इसके अलावा, जो छात्र अपने गृह राज्य से बाहर दूसरे राज्यों (जैसे दिल्ली, बेंगलुरु या पुणे) में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें भी अब अपने घर वापस जाकर डोमिसाइल बनवाने की मजबूरी से हमेशा के लिए निजात मिल गई है।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक एजुकेशन सर्च पर क्यों छाया हुआ है यह मुद्दाआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल सर्च इंजन के युग में देश भर के छात्र और अभिभावक इस नए स्कॉलरशिप नियम और आवेदन की पात्रता को लेकर लगातार सर्च कर रहे हैं। इंटरनेट पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि इस नए नियम का लाभ शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कैसे उठाया जाए। शिक्षा जगत के विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह कदम देश के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने और डिजिटल इंडिया के विजन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jun 2026 2:01 pm

UPSC में AI का पहला महा-एक्शन: इंटरव्यू से ठीक पहले 569 आवेदन किए खारिज, आयोग ने खंगाला 15 साल का पूरा डिजिटल डेटा

देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा परीक्षा आयोजित करने वाले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और आधुनिक कदम उठाया है। यूपीएससी ने अपनी चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक डेटा एनालिटिक्स टूल्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस नई एआई तकनीक के पहले ही महा-एक्शन में आयोग ने इंटरव्यू (Personality Test) के मुहाने पर खड़े 569 उम्मीदवारों के आवेदनों को तत्काल प्रभाव से खारिज (Cancel) कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद देश भर के सिविल सेवा अभ्यर्थियों और कोचिंग गलियारों में हड़कंप मच गया है।पिछले 15 सालों का पूरा डेटा खंगालकर एआई ने पकड़ी गड़बड़ीयूपीएससी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इस बार आयोग ने उम्मीदवारों द्वारा दी गई जानकारियों को क्रॉस-चेक करने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय एडवांस्ड एआई सॉफ्टवेयर का सहारा लिया। इस अत्याधुनिक सिस्टम ने पिछले 15 वर्षों के ऐतिहासिक डेटाबेस को खंगाला और उम्मीदवारों के नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और क्रीमी लेयर से जुड़े दस्तावेजों का बारीकी से मिलान किया। जांच में पाया गया कि इन 569 अभ्यर्थियों ने या तो अपनी पहचान छुपाई थी, प्रयासों (Attempts) की संख्या को लेकर गलत जानकारी दी थी या फिर आरक्षण के नियमों का लाभ लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था।इंटरव्यू के दरवाजे पर पहुंचने के बाद भी नहीं बच पाए फर्जी उम्मीदवारआयोग की यह कार्रवाई इसलिए भी बेहद चौंकाने वाली है क्योंकि ये सभी 569 उम्मीदवार प्रीलिम्स और मेन्स जैसी कठिन परीक्षाओं को पास कर इंटरव्यू के बेहद करीब पहुंच चुके थे। पुराने सिस्टम में कई बार ऐसी गड़बड़ियां अंतिम चयन के बाद या ट्रेनिंग के दौरान सामने आती थीं, लेकिन इस बार एआई तकनीक ने इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इन संदिग्ध प्रोफाइल को फिल्टर कर बाहर का रास्ता दिखा दिया। यूपीएससी ने साफ किया है कि योग्यता और ईमानदारी से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी इस एआई ट्रैकिंग सिस्टम को और ज्यादा कड़ा किया जाएगा।दिल्ली के करोल बाग-मुखर्जी नगर से लेकर राज्यों के स्थानीय सेंटर्स तक भारी खलबलीभौगोलिक और स्थानीय कोचिंग हब (Geographical Educational Hubs) जैसे दिल्ली के मुखर्जी नगर, करोल बाग, राजेंद्र नगर के साथ-साथ प्रयागराज, पटना और जयपुर जैसे प्रमुख शहरों में इस खबर के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय स्तर पर सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच इस नए एआई फिल्टर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और चिंताएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आयोग के इस कड़े रुख से उन ईमानदार और दिन-रात मेहनत करने वाले जमीनी छात्रों को बहुत बड़ा फायदा मिलेगा, जो अक्सर फर्जीवाड़ा करने वाले तत्वों के कारण मेरिट लिस्ट से बाहर हो जाते थे।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है यूपीएससी का यह फैसलाआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल सर्च इंजन के युग में देश भर के छात्र यूपीएससी के इस नए एआई स्क्रूटनी नियम और रिजेक्शन लिस्ट को लगातार सर्च कर रहे हैं। इंटरनेट पर लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि एआई किस तरह से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को बदल रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपीएससी का यह आधुनिक प्रयोग देश की अन्य बड़ी भर्ती परीक्षाओं (जैसे SSC, State PSCs) के लिए भी एक नजीर बनेगा और आने वाले दिनों में सरकारी परीक्षाओं से भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का पूरी तरह से खात्मा करने में मददगार साबित होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jun 2026 1:58 pm

सस्ते ऑनलाइन कोर्स के जाल में फंसने से बचें, डिजिटल कोचिंग चुनने से पहले खुद से जरूर पूछें ये 3 जरूरी सवाल

आज के डिजिटल युग में देश भर के छात्रों के लिए पढ़ाई बेहद आसान और सुलभ हो गई है। घर बैठे एक क्लिक पर देश-दुनिया के बेहतरीन शिक्षकों से सीखने का मौका मिल रहा है। लेकिन इस डिजिटल क्रांति के बीच ऑनलाइन कोचिंग और ई-लर्निंग मार्केट्स में एक बड़ा फर्जीवाड़ा और भ्रामक विज्ञापनों का जाल भी तेजी से फैल रहा है। इंटरनेट पर 'मात्र 99 रुपये में सीखें' या '90% डिस्काउंट पर सरकारी नौकरी की गारंटी' जैसे लुभावने ऑफर्स की बाढ़ आई हुई है। ऐसे में सस्ते ऑनलाइन कोर्स के जाल में फंसकर अपना समय और पैसा बर्बाद करने से बचने के लिए छात्रों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसे लगाने से पहले आपको खुद से तीन बेहद महत्वपूर्ण सवाल जरूर पूछने चाहिए।पहला सवाल: कोर्स बेचने वाली फैकल्टी की असली योग्यता और क्रेडिबिलिटी क्या हैसस्ते ऑनलाइन कोर्स का विज्ञापन देखकर आकर्षित होने से पहले पहला और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह पूछें कि जो आपको पढ़ाने वाला है, उसका खुद का ट्रैक रिकॉर्ड कैसा है। कई बार बड़े-बड़े विज्ञापनों के पीछे अप्रशिक्षित और अनुभवहीन लोग होते हैं, जो केवल पीपीटी (PPT) पढ़कर खानापूर्ति करते हैं। कोर्स खरीदने से पहले उस संस्थान के पुराने छात्रों के रिव्यू देखें, फैकल्टी के डेमो वीडियो को ध्यान से परखें और यह सुनिश्चित करें कि शिक्षक को उस विषय का जमीनी और व्यावहारिक अनुभव है या नहीं।दूसरा सवाल: क्या कोर्स का कंटेंट आधुनिक और लाइव डाउट सॉल्विंग सपोर्ट के साथ आता हैअक्सर बहुत कम कीमत वाले कोर्सेस में सालों पुराना रिकॉर्डेड वीडियो थमा दिया जाता है, जिसका वर्तमान परीक्षा पैटर्न या आधुनिक सिलेबस से कोई लेना-देना नहीं होता। इसलिए खुद से यह सवाल पूछें कि क्या इस कोर्स में आपको लाइव क्लासेज मिलेंगी? क्या आपके मन में उठने वाले सवालों और शंकाओं को दूर करने के लिए 'लाइव डाउट सॉल्विंग' या मेंटरशिप का कोई विकल्प मौजूद है? अगर कोई कोचिंग केवल रिकॉर्डेड वीडियो दे रही है और आपकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है, तो ऐसा कोर्स आपके लिए बिल्कुल बेकार साबित हो सकता है।तीसरा सवाल: क्या कोर्स के नाम पर छिपी हुई फीस या कोई अन्य हिडन चार्ज भी हैऑनलाइन एडु-टेक (Edu-Tech) इंडस्ट्री में कई बार शुरुआती कीमत बहुत कम दिखाई जाती है, लेकिन कोर्स ज्वाइन करने के बाद स्टडी मटेरियल, टेस्ट सीरीज, मॉक टेस्ट या सर्टिफिकेट के नाम पर अलग से पैसे मांगे जाते हैं। एडमिशन लेने से पहले संस्थान की नियम और शर्तों (Terms & Conditions) को अच्छी तरह पढ़ लें। इसके साथ ही यह भी पता करें कि यदि आपको कोर्स पसंद नहीं आता है, तो क्या वहां रिफंड पॉलिसी (Refund Policy) का कोई प्रावधान है या नहीं।स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर सरकारी गाइडलाइंस का पालन करना है जरूरीभारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और शिक्षा विभाग ने हाल ही में भ्रामक विज्ञापनों और कोचिंग सेंटरों के खिलाफ सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। चाहे आप दिल्ली, पटना, जयपुर, लखनऊ या देश के किसी भी छोटे-बड़े शहर या ग्रामीण इलाके में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हों, आपको यह जानना बेहद जरूरी है कि कोई भी कोचिंग संस्थान आपको शत-प्रतिशत चयन या नौकरी की झूठी गारंटी नहीं दे सकता। यदि कोई प्लेटफॉर्म ऐसा दावा करता है, तो वह कानूनन गलत है और आप इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर भी दर्ज करा सकते हैं।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक सर्च के दौर में कैसे चुनें सर्वश्रेष्ठ ऑनलाइन कोचिंगआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल टूल्स के दौर में सही और भरोसेमंद कोचिंग का चुनाव करना काफी आसान भी हो गया है। छात्र किसी भी कोर्स को खरीदने से पहले विभिन्न एआई सर्च इंजनों पर उस संस्थान की निष्पक्ष रेटिंग, कमियों और खूबियों के बारे में सर्च कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा में निवेश आपके भविष्य का सवाल है, इसलिए केवल सस्ते दाम के लालच में आकर किसी भी अनवेरिफाइड ऐप या वेबसाइट पर अपनी मेहनत की कमाई और कीमती समय को बिल्कुल भी दांव पर न लगाएं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jun 2026 1:57 pm

CBSE 10th Second Board Result 2026: आज जारी हो सकता है कक्षा 10वीं का रिजल्ट; 6.8 लाख छात्रों का इंतजार होगा खत्म, ऐसे करें डाउनलोड

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जुड़े कक्षा 10वीं के लाखों छात्रों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। बोर्ड आज कक्षा 10 सेकेंड बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट आधिकारिक तौर पर जारी कर सकता है। इस साल 15 मई से 21 मई 2026 के बीच आयोजित हुई इस विशेष परीक्षा में देश भर से 6.8 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे, जो अब बेहद बेसब्री से अपने स्कोरकार्ड का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, सीबीएसई बोर्ड ने अभी तक रिजल्ट जारी करने की सटीक तारीख और समय को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन तकनीकी सूत्रों के अनुसार आधिकारिक वेबसाइट पर रिजल्ट का लिंक किसी भी वक्त एक्टिव किया जा सकता है।जैसे ही नतीजे घोषित होंगे, सभी परीक्षार्थी सीबीएसई की मुख्य प्राधिकृत वेबसाइटों cbseresults.nic.in और results.cbse.nic.in पर जाकर अपना फाइनल परिणाम ऑनलाइन चेक और डाउनलोड कर सकेंगे। रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को अपने पास रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड आईडी जैसी जरूरी जानकारियां तैयार रखनी होंगी, जिनके बिना पोर्टल पर लॉगिन करना संभव नहीं होगा।स्टेप-बाय-स्टेप समझें: ऑनलाइन मार्कशीट डाउनलोड करने का आसान तरीकारिजल्ट लिंक लाइव होने के बाद छात्रों को अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड करने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए वे नीचे दी गई आसान प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं:स्टेप 1: सबसे पहले सीबीएसई (CBSE) की आधिकारिक वेबसाइट cbseresults.nic.in या results.cbse.nic.in पर जाएं।स्टेप 2: होमपेज पर आपको 'CBSE Class 10 Second Board Result 2026' का मुख्य एक्टिव लिंक दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।स्टेप 3: अब आपके सामने एक नया लॉगिन पेज खुलेगा। यहां निर्धारित कॉलम में अपना सही रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड आईडी दर्ज करें।स्टेप 4: सभी क्रेडेंशियल्स को एक बार ध्यान से जांचने के बाद नीचे दिए गए 'सबमिट' (Submit) बटन पर क्लिक कर दें।स्टेप 5: बटन दबाते ही आपका पूरा स्कोरकार्ड और विषयवार नंबर स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएंगे।स्टेप 6: भविष्य के संदर्भ और आगे की कक्षाओं में एडमिशन के लिए इस ऑनलाइन मार्कशीट को डाउनलोड कर लें और इसका एक साफ प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।आधिकारिक वेबसाइट क्रैश होने पर इन 4 वैकल्पिक प्लेटफॉर्म का करें इस्तेमालअक्सर देखा जाता है कि रिजल्ट घोषित होते ही लाखों छात्र एक साथ ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉग इन करने की कोशिश करते हैं, जिससे हैवी ट्रैफिक के कारण सर्वर डाउन या क्रैश हो जाता है। ऐसी स्थिति में छात्रों को परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। वे निम्नलिखित वैकल्पिक और सुरक्षित डिजिटल माध्यमों से भी अपना रिजल्ट तुरंत प्राप्त कर सकते हैं:DigiLocker (डिजिलॉकर): छात्र अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की मदद से डिजिलॉकर ऐप या वेबसाइट पर लॉगिन करके अपनी ओरिजिनल कम प्रोविजनल मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट सीधे हासिल कर सकते हैं।UMANG App (उमंग ऐप): केंद्र सरकार के इस आधिकारिक ऐप पर भी सीबीएसई रिजल्ट का सीधा एक्सेस दिया जाता है, जहां से स्कोरकार्ड देखा जा सकता है।cbse.nic.in: मुख्य रिजल्ट पोर्टल के अलावा इस मुख्य प्रशासनिक वेबसाइट पर भी नतीजों के अल्टरनेटिव लिंक्स उपलब्ध कराए जाते हैं।SMS सेवा और आईवीआरएस: इंटरनेट न होने की स्थिति में छात्र बोर्ड द्वारा जारी किए जाने वाले विशिष्ट नंबरों पर एक तय फॉर्मेट में एसएमएस (SMS) भेजकर भी अपना परिणाम अपने फोन पर पा सकते हैं।पहले चरण (First Board) का कैसा रहा था प्रदर्शन?सीबीएसई द्वारा इस शैक्षणिक सत्र में आयोजित की गई पहले चरण की मुख्य परीक्षा के नतीजों पर नजर डालें, तो कुल पास प्रतिशत शानदार 93.70 फीसदी दर्ज किया गया था। इस परीक्षा में भी हर बार की तरह छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए लड़कों को पछाड़ दिया था। पहले चरण में लड़कियों का पास प्रतिशत 94.99 फीसदी रहा था, जो कि लड़कों के कुल पास प्रतिशत के मुकाबले काफी बेहतर था। अब देखना होगा कि इस दूसरे चरण की परीक्षा में छात्र सफलता का क्या नया रिकॉर्ड बनाते हैं। अभिभावकों और शिक्षकों की नजरें भी इस नए पैटर्न के नतीजों पर टिकी हुई हैं।रिजल्ट स्क्रीन पर आने के बाद इन 5 बातों की जरूर कर लें जांचजब आपका रिजल्ट आपकी स्क्रीन पर आ जाए, तो केवल पास या फेल देखने के बजाय अपनी मार्कशीट में दर्ज निम्नलिखित व्यक्तिगत जानकारियों का मिलान अपने एडमिट कार्ड से गहराई से जरूर कर लें:आपका नाम और उसकी स्पेलिंग (Student's Name)माता और पिता का नाम (Parents Name)आपका रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबरस्कूल का नाम और स्कूल कोडप्रत्येक विषय के सामने दर्ज अंक और कुल ग्रेड/प्रतिशतयदि डाउनलोड की गई ऑनलाइन मार्कशीट में किसी भी प्रकार की स्पेलिंग की गलती, नंबरों का मिलान न होना या कोई अन्य तकनीकी त्रुटि दिखाई देती है, तो बिना समय गंवाए तुरंत अपने संबंधित स्कूल प्रशासन या सीधे सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करें ताकि समय रहते इसमें सुधार किया जा सके। जब तक स्कूल से मूल (ओरिजिनल) हार्डकॉपी अंकपत्र नहीं मिल जाता, तब तक इस डिजिटल कॉपी को ही संभालकर रखें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jun 2026 9:20 am

यूपी में शिक्षा सुधार की बड़ी पहल: अब हर साल 25 जून से खुलेंगे स्कूल, शिक्षकों को मिलेगी ₹5 लाख की कैशलेस चिकित्सा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख (Result-oriented) बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव ( ACS), बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने एक विशेष यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से सीधा संवाद किया और सरकार की आगामी प्राथमिकताओं को साझा किया।इस संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों (सरकारी स्कूलों) के संचालन, शिक्षकों के कल्याण और छात्र नामांकन को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा की गई है।गर्मी के कारण पढ़ाई के नुकसान की भरपाई: अब हर साल 25 जून से खुलेंगे स्कूलअपर मुख्य सचिव ने बताया कि अक्सर अत्यधिक गर्मी और लू के कारण बार-बार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होता है।220 शिक्षण दिवस का लक्ष्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानदंडों के अनुरूप बच्चों के लिए न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना अनिवार्य है।नया नियम: इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब उत्तर प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे (यानी आज से स्कूल खुल चुके हैं)। उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि वे स्कूल आने वाले बच्चों का आत्मीय स्वागत करें और भीषण गर्मी को देखते हुए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा का विशेष प्रबंध करें।1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण: ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोरराज्य में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (Dropout) बच्चों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए सरकार नई रणनीति अपना रही है:स्थानीय डेटा की मदद: 1 जुलाई से शुरू हो रहे 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण में स्कूल से बाहर (Out of School) रह गए बच्चों की पहचान की जाएगी। इसके लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय सूचनाओं की मदद ली जाएगी।निर्बाध प्रवेश: कक्षा 5 पास करने वाले प्रत्येक छात्र का कक्षा 6 में निर्बाध और अनिवार्य दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। जो बच्चे सीखने में पीछे रह गए हैं, उनके लिए विशेष 'कैच-अप शिक्षण' (Catch-up Classes) संचालित किए जाएंगे।निपुण भारत मिशन का कक्षा 5 तक विस्तार: 6 जुलाई को 'निपुण संकल्प'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने वाले 'निपुण भारत मिशन' को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है:दायरा बढ़ा: पहले यह मिशन शुरुआती कक्षाओं के लिए था, लेकिन अब इसका दायरा कक्षा 5 तक बढ़ा दिया गया है। अब कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के स्पष्ट लर्निंग आउटकम (अधिगम लक्ष्य) तय किए गए हैं।शिक्षकों की ट्रेनिंग: इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है, जो ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को ट्रेंड करेंगे। आगामी 6 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में 'निपुण संकल्प कार्यशाला' का आयोजन होगा, जिसमें पूरे प्रशासनिक और अकादमिक तंत्र को झोंककर 'निपुण जनपद' बनाने का संकल्प लिया जाएगा।'DEAR' अभियान और वर्ष में दो बार मिलेगी होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्टअपर मुख्य सचिव ने स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर करने के लिए कई नए निर्देश दिए हैं:DEAR अभियान: स्कूलों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ (DEAR) जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां एक निश्चित समय के लिए सभी काम रोककर सिर्फ किताबें पढ़ने की संस्कृति विकसित की जाएगी।अभिभावक सहभागिता: बच्चों की 'होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट' (Holistic Progress Report) को अब और अधिक प्रभावी बनाकर वर्ष में दो बार अभिभावकों (Parents) के साथ अनिवार्य रूप से साझा किया जाएगा ताकि वे भी बच्चे की प्रगति का हिस्सा बन सकें।शिक्षकों के लिए बड़ी सौगात: ₹5 लाख की कैशलेस इलाज सुविधा और 21,000 नई भर्तियांमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षा विभाग के मानव संसाधन को मजबूत करने और शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:श्रेणी / योजनामुख्य विवरण और लाभकैशलेस चिकित्सा सुविधासभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा।नगरीय क्षेत्रों में नई भर्तीशहरी क्षेत्रों के स्कूलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।मुंशी प्रेमचंद का संदेश: संवाद के अंत में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए सभी शिक्षकों से निरंतर अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक बेहतर शिक्षक वही है जो खुद हमेशा पढ़ता रहता है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षकों की निष्ठा के दम पर उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jun 2026 9:05 am

अंडरगारमेंट्स में मोबाइल छिपाकर लाने वाली लड़की का क्या हुआ? तीसरी बार दे रही थी परीक्षा

देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील परीक्षाओं में से एक नीट (NEET Re-Exam) के दौरान एक ऐसा हैरान करने वाला वाकया सामने आया है जिसने परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों की हताशा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। री-एग्जामिनेशन के दौरान कड़ी सुरक्षा और आधुनिक मेटल डिटेक्टर चेकिंग को धता बताते हुए एक छात्रा अपने अंडरगारमेंट्स में मोबाइल फोन छिपाकर परीक्षा हॉल के भीतर ले जाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मुस्तैद महिला सुरक्षाकर्मियों की पैनी नजर और चेकिंग डिवाइस की बीप ने इस शातिर हाई-टेक चोरी को रंगे हाथों पकड़ लिया। मेडिकल की इस प्रतिष्ठित परीक्षा में तीसरी बार बैठ रही इस छात्रा की इस अजीबोगरीब और हैरान करने वाली हरकत के बाद अब हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर उस लड़की के खिलाफ प्रशासन ने क्या बड़ा एक्शन लिया है।तीसरी बार की कोशिश और शॉर्टकट अपनाने की खौफनाक जिदएक वरिष्ठ क्राइम और एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर इस मामले की तह में जाने पर पता चलता है कि आरोपी छात्रा पिछले दो सालों से नीट की परीक्षा क्रैक करने की लगातार कोशिश कर रही थी। दो बार असफलता हाथ लगने के बाद उस पर इस तीसरी बार की परीक्षा में पास होने का मानसिक और पारिवारिक दबाव बहुत अधिक था। शायद इसी दबाव या फिर किसी सॉल्वर गैंग के बहकावे में आकर उसने परीक्षा में पास होने के लिए यह आत्मघाती और अवैध शॉर्टकट रास्ता चुना। उसने सोचा था कि कड़े नियमों और फ्रिस्किंग (बॉडी सर्च) के बावजूद वह इस संवेदनशील जगह पर फोन छिपाकर ले जाने में कामयाब हो जाएगी, लेकिन परीक्षा केंद्र के मुख्य दरवाजे पर ही उसकी यह चालाकी पूरी तरह धरी की धरी रह गई।रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद केंद्र पर मचा हड़कंपजैसे ही महिला सुरक्षाकर्मियों ने जांच के दौरान छात्रा के पास से मोबाइल फोन और कुछ संदिग्ध डिजिटल डिवाइस बरामद किए, परीक्षा केंद्र पर हड़कंप मच गया। केंद्र व्यवस्थापक (Centre Superintendent) ने तुरंत इस गंभीर मामले की जानकारी स्थानीय पुलिस और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के फ्लाइंग स्क्वाड को दी। पकड़े जाने के बाद छात्रा रोने लगी और अपनी तीसरी कोशिश का हवाला देते हुए माफी मांगने लगी। लेकिन एंटी-चीटिंग और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए अधिकारियों ने नियमों में किसी भी तरह की ढील देने से साफ इनकार कर दिया।अब क्या हुआ उस लड़की का और कितनी गंभीर होगी कानूनी कार्रवाईइस हाई-प्रोफाइल नकल के मामले में छात्रा के खिलाफ एंटी-चीटिंग एक्ट (नकल विरोधी कानून) और धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं के तहत स्थानीय पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह परीक्षा हॉल के भीतर किससे संपर्क करने वाली थी या क्या इसके पीछे कोई संगठित सॉल्वर गैंग काम कर रहा है। इसके साथ ही, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने छात्रा को 'अनफेयर मींस' (UFM) श्रेणी में डालते हुए परीक्षा से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। जानकारों की मानें तो इस गंभीर अपराध के बाद अब उस पर भविष्य में होने वाली सभी सरकारी और मेडिकल परीक्षाओं में बैठने के लिए आजीवन प्रतिबंध (Lifetime Ban) भी लग सकता है, जिसने उसकी तीसरी बार की मेहनत और पूरे करियर को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jun 2026 2:09 pm

CBSE 12th Result: कॉपियों की दोबारा जांच ने बदला भाग्य, री-इवैल्यूएशन के बाद रांची की अवनी केजरीवाल बनीं ऑल इंडिया टॉपर, मिले 100% मार्क्स

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) के नतीजे घोषित कर दिए हैं, जिसके साथ ही छात्रों का फाइनल रिजल्ट भी सामने आ गया है। इस बार के नतीजों ने एक ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है जिसने पूरे देश को चौंका दिया है। झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली अवनी केजरीवाल ने री-इवैल्यूएशन के बाद ऑल इंडिया स्तर पर टॉप किया है। अवनी ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 500 में से पूरे 500 नंबर हासिल कर इतिहास रच दिया है। कॉमर्स स्ट्रीम की छात्रा अवनी इस शानदार स्कोर के साथ न सिर्फ अपने विषय की बल्कि पूरे देश की ओवरऑल टॉपर बन गई हैं। अवनी रांची के प्रतिष्ठित स्कूल डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) की होनहार छात्रा हैं।कॉपियों की दोबारा जांच में बढ़े पूरे 24 नंबरअवनी केजरीवाल की ऑल इंडिया टॉपर बनने की यह कहानी बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायी है, क्योंकि मुख्य परीक्षा के नतीजों में वह टॉपर्स की लिस्ट से दूर थीं। सीबीएसई के मुख्य रिजल्ट में अवनी को 95.2 प्रतिशत यानी 476 अंक मिले थे। अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा होने के कारण अवनी इस स्कोर से संतुष्ट नहीं हुईं और उन्होंने बोर्ड के मूल्यांकन को चुनौती देते हुए री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया। जब कॉपियों की दोबारा बारीकी से जांच हुई, तो अवनी के पूरे 24 नंबर बढ़ गए। इस जादुई बढ़ोतरी के बाद उनके अकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडीज, इकोनॉमिक्स, इंग्लिश कोर और एप्लाइड मैथमेटिक्स जैसे सभी मुख्य विषयों में 100 में से पूरे 100 नंबर हो गए।पसंदीदा विषय इंग्लिश में मिले थे कम नंबर, ऐसे पलटी बाजीअवनी केजरीवाल को 12वीं के मुख्य रिजल्ट में इंग्लिश कोर में केवल 81 नंबर मिले थे, जबकि इंग्लिश उनका सबसे पसंदीदा सब्जेक्ट रहा है। वहीं बिजनेस स्टडीज में भी उन्हें 95 अंक मिले थे। अवनी को यकीन था कि उनके नंबर कहीं न कहीं काटने में गलती हुई है। री-इवैल्यूएशन के बाद बोर्ड ने अपनी गलती सुधारी और उन्हें इंग्लिश व बिजनेस स्टडीज दोनों में ही 100 में से 100 अंक दिए। इसके अलावा उनके एडिशनल सब्जेक्ट 'ग्राफिक्स' में भी 99 नंबर आए हैं। यह वाकया देश के लाखों स्टूडेंट्स के लिए एक मिसाल है कि अगर आपको अपनी तैयारी और मेहनत पर पूरा भरोसा है, तो अपने हक के लिए कदम जरूर उठाना चाहिए।साधारण कारोबारी परिवार से है नाता, स्कूल में जश्न का माहौलसीबीएसई 12वीं की इस नेशनल टॉपर की पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो अवनी एक बेहद संस्कारी और साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता मितेश केजरीवाल रांची के एक बिजनेसमैन हैं, जबकि उनकी मां पूनम केजरीवाल एक हाउसवाइफ हैं। अवनी की इस अभूतपूर्व सफलता पर डीपीएस रांची की प्राचार्या (प्रिंसिपल) डॉ. जया चौहान ने पूरे स्कूल स्टाफ की तरफ से बेहद खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि अवनी ने 500 में से 500 नंबर लाकर इतिहास रचा है, जो डीपीएस रांची के लिए अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक क्षण है। यह सफलता अवनी के असाधारण समर्पण, दिन-रात की पढ़ाई और स्कूल की उत्कृष्ट शिक्षा संस्कृति का एक खूबसूरत परिणाम है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jun 2026 2:07 pm

सीबीएसई का ऐतिहासिक फैसला: 'No Change' वाले छात्रों की चमकी किस्मत, अब खुद बोर्ड ऑफिस जाकर चेक कर सकेंगे अपनी आंसर शीट

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं और 12वीं के लाखों छात्र-छात्राओं के हित में एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों के बाद री-इवैल्युएशन यानी पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में जिन छात्रों के नंबरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था और उन्हें 'नो चेंज' (No Change) का रिजल्ट मिला था, उन्हें अब निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। सीबीएसई ने ऐसे सभी छात्रों को अपनी कॉपियों की जांच से पूरी तरह संतुष्ट करने के लिए एक बेहद अनूठा और पारदर्शी मौका देने का ऐलान किया है। इस नए ऐतिहासिक फैसले के तहत अब छात्र खुद संबंधित बोर्ड ऑफिस जाकर विशेषज्ञों की मौजूदगी में अपनी आंसर शीट को करीब से देख और जांच सकेंगे।री-इवैल्युएशन प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए बोर्ड का बड़ा कदमसीबीएसई के इस कदम को स्कूली शिक्षा व्यवस्था और मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बहुत बड़ा माइलस्टोन माना जा रहा है। आमतौर पर देखा गया है कि री-इवैल्युएशन के बाद भी कई छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते और उनके मन में कॉपियों की चेकिंग को लेकर कई तरह के संदेह रह जाते हैं। दिल्ली, प्रयागराज, मुंबई, बेंगलुरु और पटना जैसे देश के विभिन्न रीजनल सेंटर्स के अंतर्गत आने वाले स्कूलों के प्रिंसिपलों और अभिभावकों ने बोर्ड के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है। इस नई व्यवस्था से छात्रों का बोर्ड के प्रति भरोसा और ज्यादा मजबूत होगा।जानिए कैसे मिलेगा बोर्ड ऑफिस में आंसर शीट देखने का मौकासीबीएसई द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन छात्रों ने री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन किया था और उनके परिणाम में कोई अंक नहीं बढ़े यानी 'नो चेंज' रहा, वे अब एक निश्चित प्रक्रिया के तहत बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) में उपस्थित होने के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। वहां छात्रों को उनकी मूल उत्तर पुस्तिका दिखाई जाएगी। छात्र यह खुद देख सकेंगे कि उनके किस प्रश्न का मूल्यांकन किस तरह किया गया है और क्या किसी प्रश्न को जांचने में कोई तकनीकी चूक तो नहीं रह गई है। इस दौरान बोर्ड के विषय विशेषज्ञ भी वहां मौजूद रहेंगे जो छात्रों की शंकाओं का समाधान करेंगे।कॉपियों की हार्ड कॉपी जांचने के नियम और तारीखों का रखें खास ख्यालइस विशेष सुविधा का लाभ उठाने के लिए सीबीएसई जल्द ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक विस्तृत टाइमलाइन और गाइडलाइन जारी करने जा रहा है। बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक, छात्रों को इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल के जरिए एक निर्धारित समय सीमा के भीतर ही रजिस्ट्रेशन करना होगा। यह सुविधा केवल उन्हीं छात्र-छात्राओं को मिलेगी जिन्होंने पुनर्मूल्यांकन के सभी चरणों का पहले चरणबद्ध तरीके से पालन किया है। बोर्ड का मानना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद छात्रों को अदालतों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनके समय तथा पैसे दोनों की बड़ी बचत होगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jun 2026 2:51 pm

नीट रिजल्ट पर बड़ा फैसला: कब जारी होंगे NEET UG 2026 के नतीजे? NTA महानिदेशक अभिषेक सिंह ने खुद बताया पूरा प्लान

देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) 2026 की परीक्षा में शामिल हुए लाखों परीक्षार्थियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। पेपर लीक के विवादों के बाद 21 जून को देश और विदेश के हजारों केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच सफलतापूर्वक दोबारा आयोजित हुई NEET UG परीक्षा संपन्न हो चुकी है। इस परीक्षा के ठीक बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नवनियुक्त महानिदेशक अभिषेक सिंह ने रिजल्ट जारी करने की तारीख और आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर खुद सामने आकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।बेहद कम समय में परीक्षा कराना था चुनौतीपूर्ण, अब मूल्यांकन की बारीएनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पुरानी परीक्षा रद्द होने के बाद महज 37 दिनों के रिकॉर्ड समय में 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए दोबारा इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, दिल्ली, मुंबई और पटना समेत देश के सभी राज्यों और प्रशासनिक विभागों का शुक्रिया अदा किया, जिनकी मदद से यह पूरी परीक्षा त्रुटिहीन और पूरी तरह से सुरक्षित माहौल में संपन्न कराई गई। डीजी ने स्पष्ट किया कि अब एजेंसी का पूरा ध्यान मूल्यांकन (Evaluation Process) की ओर ट्रांसफर हो चुका है।जानें कब आएगा NEET UG 2026 का फाइनल रिजल्टछात्रों और अभिभावकों के सबसे बड़े सवाल यानी 'रिजल्ट कब आएगा' का जवाब देते हुए महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि एजेंसी इस बार परीक्षा चक्र को काफी छोटा कर चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नीट यूजी 2026 का रिजल्ट उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से और बहुत जल्द (As soon as possible) घोषित कर दिया जाएगा। अधिकारियों के संकेतों के मुताबिक, मूल्यांकन प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है ताकि मेडिकल कॉलेजों की काउंसलिंग प्रक्रिया में कोई देरी न हो और देश के होनहार मेडिकल छात्रों का कीमती शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने से बचाया जा सके।सोशल मीडिया की अफवाहों से बचें, एनटीए ने जारी की सख्त चेतावनीइस बीच, इंटरनेट और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पेपर लीक या फर्जी आंसर की को लेकर चल रही खबरों पर भी एनटीए प्रमुख ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी बहकावे या अनौपचारिक स्रोतों पर भरोसा न करें। एनटीए ने स्पष्ट किया है कि जून के अंत तक प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी जाएगी, जिस पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए छात्रों को समय मिलेगा। इसके तुरंत बाद फाइनल आंसर की और परिणाम की आधिकारिक घोषणा एनटीए की मुख्य वेबसाइट neet.nta.nic.in पर की जाएगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jun 2026 2:50 pm

JEE में हुए फेल, माइक्रोसॉफ्ट ने भी कर दिया था रिजेक्ट, अब गूगल और मेटा से आया बंपर जॉब ऑफर

देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक आईआईटी-जेईई (IIT-JEE) में असफल होने के बाद अक्सर कई छात्र हताश हो जाते हैं और अपने सपनों को छोड़ देते हैं। लेकिन इस वक्त सोशल मीडिया और टेक जगत में एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी तेजी से सुर्खियां बटोर रही है, जिसने साबित कर दिया है कि किसी एक परीक्षा में फेल होना आपके भविष्य का फैसला नहीं कर सकता। जेईई क्रैक न कर पाने और शुरुआती करियर में दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) द्वारा रिजेक्ट किए जाने के बाद भी एक भारतीय युवा ने हार नहीं मानी। अपनी कोडिंग स्किल और अटूट मेहनत के दम पर आज इस होनहार ने ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां गूगल (Google) और मेटा (Meta) दोनों ही उसे अपने साथ जोड़ने के लिए आमने-सामने आ गईं और आखिरकार उसे करोड़ों रुपये का ड्रीम सैलरी पैकेज ऑफर किया गया है।जेईई का झटका और माइक्रोसॉफ्ट का रिजेक्शन भी नहीं डिगा सका हौसलाइस युवा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। स्कूल के दिनों से ही कंप्यूटर और कोडिंग में दिलचस्पी रखने वाले इस छात्र का सपना आईआईटी (IIT) से पढ़ाई करने का था। इसके लिए उसने दिन-रात एक करके तैयारी की, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और वह जेईई की परीक्षा पास करने में असफल रहा। आईआईटी न मिलने के बाद उसने एक सामान्य टियर-3 इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। कॉलेज के दौरान जब टेक जायंट माइक्रोसॉफ्ट ने कैंपस प्लेसमेंट और ऑफ-कैंपस ड्राइव का आयोजन किया, तो वहां भी उसे रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। लगातार मिले इन दो बड़े झटकों ने उसे तोड़ा नहीं, बल्कि अपनी कमियों को सुधारने और ओपन-सोर्स कोडिंग व डेटा स्ट्रक्चर्स पर पकड़ मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।गूगल और मेटा में छिड़ी जंग, दोनों दिग्गजों ने दी एक से बढ़कर एक डीलकॉलेज के आखिरी सालों में इस युवा ने लिंक्डइन और विभिन्न कोडिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स में योगदान देना शुरू किया। उसकी असाधारण कोडिंग क्षमताओं और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स को देखते हुए दुनिया के दो सबसे बड़े प्रतिस्पर्धियों यानी गूगल और मेटा के रिक्रूटर्स की नजर उस पर पड़ी। दोनों ही कंपनियों ने उसके कई राउंड के कड़े और जटिल टेक्निकल इंटरव्यू लिए। उसकी प्रतिभा से प्रभावित होकर गूगल और मेटा दोनों ने ही उसे एक साथ जॉब ऑफर सौंप दिए। स्थिति यह बन गई कि इस टैलेंटेड सॉफ्टवेयर इंजीनियर को अपने साथ बनाए रखने के लिए दोनों टेक दिग्गजों के बीच होड़ मच गई और दोनों ने एक से बढ़कर एक सैलरी पैकेज और भत्तों की पेशकश कर दी।करोड़ों के इंटरनेशनल पैकेज के साथ रचा इतिहास, युवाओं के लिए बने रोल मॉडलस्थानीय स्तर (Geographical Impact) पर देखें तो भारत के छोटे शहर से निकलकर बिना किसी आईआईटी टैग के ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में अपनी धाक जमाने वाले इस युवा की सफलता पर उसके पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है। आखिरकार उसने दुनिया की सबसे बेहतरीन कार्यसंस्कृति और हाईएस्ट पैकेज के लिए जाने जाने वाले ऑफर को स्वीकार किया, जहां उसे सालाना करोड़ों रुपये का अंतरराष्ट्रीय पैकेज (International Package) दिया गया है। डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, एआई सर्च इंजनों (AEO & AI Search) और गूगल डिस्कवर पर यह सक्सेस स्टोरी इस वक्त टॉप ट्रेंड में बनी हुई है। यह कहानी देश के उन लाखों छात्र-छात्राओं और इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है जो किसी एक असफलता से निराश हो जाते हैं; यह साबित करता है कि डिग्री या कॉलेज का टैग नहीं, बल्कि आपका हुनर और आपकी जिद ही आपको सफलता के शिखर पर पहुंचाती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 20 Jun 2026 9:31 am

दोनों मेडिकल कोर्सेज में से किसमें लें एडमिशन? जानिए किसका है सबसे तगड़ा करियर स्कोप और हाईएस्ट सैलरी

मेडिकल और साइंस स्ट्रीम से 12वीं (पीसीबी/पीसीएम) पास करने के बाद अक्सर छात्र इस बात को लेकर भारी असमंजस में रहते हैं कि वे अपने भविष्य के लिए फार्मेसी (Pharmacy) का रास्ता चुनें या फिर बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) के क्षेत्र में कदम रखें। ये दोनों ही कोर्सेज आज के आधुनिक हेल्थकेयर और रिसर्च सेक्टर के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। लेकिन इन दोनों की पढ़ाई का तरीका, काम का दायरा और करियर की राहें एक-दूसरे से काफी अलग हैं। यदि आप भी अपने करियर को लेकर किसी बड़े फैसले पर पहुंचना चाहते हैं, तो एडमिशन लेने से पहले इन दोनों कोर्सेज के बीच का मुख्य अंतर, भविष्य का स्कोप और मिलने वाली सैलरी पैकेज को विस्तार से समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।जानिए क्या है फार्मेसी और इसमें पढ़ाई का मुख्य फोकसफार्मेसी मुख्य रूप से दवाओं के विज्ञान (Science of Medicines) से संबंधित क्षेत्र है। इस कोर्स के तहत छात्रों को दवाओं के निर्माण, उनकी खोज, रासायनिक संयोजन (Chemical Composition), खुराक के निर्धारण और मानव शरीर पर उनके होने वाले असर के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता है। इसमें एडमिशन के लिए छात्र 2 साल का डिप्लोमा (D.Pharma) या 4 साल की डिग्री (B.Pharma) चुन सकते हैं। इस फील्ड में पढ़ाई पूरी करने के बाद आप एक प्रमाणित और रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट बन जाते हैं। इसका मुख्य फोकस मौजूदा चिकित्सा प्रणाली के तहत मरीजों तक सही और सुरक्षित दवाएं पहुंचाना होता है।क्या है बायोटेक्नोलॉजी और क्यों बढ़ रहा है इसका क्रेजदूसरी तरफ बायोटेक्नोलॉजी एक बेहद आधुनिक और रिसर्च-ओरिएंटेड (Research-Oriented) क्षेत्र है, जिसमें जीव विज्ञान (Biology) और उन्नत तकनीक (Technology) का एक अनूठा मेल देखने को मिलता है। इस कोर्स के भीतर छात्रों को जीवित जीवों, कोशिकाओं (Cells) और जैविक प्रणालियों का उपयोग करके मानव जीवन को बेहतर बनाने वाले नए प्रोडक्ट्स विकसित करना सिखाया जाता है। इसमें आप 3 साल की डिग्री (B.Sc Biotechnology) या 4 साल का इंजीनियरिंग कोर्स (B.Tech Biotechnology) कर सकते हैं। इसका मुख्य फोकस जेनेटिक्स, वैक्सीन निर्माण, डीएनए मैपिंग, कैंसर रिसर्च और कृषि क्षेत्र में नए वैज्ञानिक बदलाव लाना होता है।करियर स्कोप की जंग: कहां हैं नौकरी के सबसे ज्यादा मौकेकरियर के अवसरों (Career Opportunities) के लिहाज से दोनों ही क्षेत्रों का अपना एक विशाल बाजार है। फार्मेसी पूरी करने के बाद आपके पास हॉस्पिटल फार्मासिस्ट, क्लिनिकल रिसर्च एसोसिएट, ड्रग इंस्पेक्टर, क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर बनने या खुद की फार्मास्युटिकल कंपनी और मेडिकल स्टोर शुरू करने का एक सुरक्षित और सदाबहार विकल्प होता है। वहीं बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आपके लिए बड़ी-बड़ी रिसर्च लैबोरेट्रीज, बायो-फार्मा कंपनियां, जेनेटिक इंजीनियरिंग फर्म्स और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज के दरवाजे खुलते हैं, जहां आप बायोकेमिस्ट, मेडिकल साइंटिस्ट या लैब तकनीशियन के रूप में काम कर सकते हैं। हालांकि बायोटेक्नोलॉजी में बेहतर ग्रोथ के लिए ग्रेजुएशन के बाद मास्टर डिग्री (M.Sc / M.Tech) या पीएचडी (PhD) करना लगभग अनिवार्य माना जाता है।सैलरी पैकेज की हकीकत: कौन सा कोर्स कराएगा सबसे मोटी कमाईस्थानीय स्तर (Geographical Impact) और वैश्विक मार्केट दोनों जगह इन दोनों कोर्सेज का सैलरी स्ट्रक्चर इनके काम की प्रकृति पर निर्भर करता है। एक फ्रेशर बी.फार्मा ग्रेजुएट को शुरुआत में भारत की फार्मा कंपनियों में औसतन ₹2.5 लाख से ₹4.5 लाख सालाना का पैकेज आसानी से मिल जाता है, जो अनुभव और ड्रग इंस्पेक्टर जैसे सरकारी पदों पर पहुंचने के बाद ₹8 से ₹12 लाख तक जा सकता है। दूसरी तरफ बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शुरुआती सैलरी थोड़ी कम यानी ₹3 लाख से ₹4.5 लाख सालाना हो सकती है, लेकिन यदि आप रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में आगे बढ़ते हैं या वैश्विक स्तर पर किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) से जुड़ते हैं, तो आपका पैकेज ₹15 से ₹25 लाख सालाना से भी ऊपर जा सकता है। अगर आपकी रुचि दवाओं और बिजनेस में है तो फार्मेसी बेहतर है, और यदि आपकी रुचि नई खोजों और प्रयोगशालाओं में है, तो बायोटेक्नोलॉजी आपके लिए बेस्ट चॉइस साबित होगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 20 Jun 2026 9:30 am

NEET 2026: परीक्षा के दिन भूलकर भी न करें ये 4 बड़ी गलतियां, जरा सी भी चूक से बर्बाद हो सकता है पूरा साल

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी (NEET UG 2026) का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, छात्र-छात्राओं की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। लाखों छात्रों का डॉक्टर बनने का सपना इस बात पर निर्भर करता है कि वे परीक्षा के उन 3 घंटे 20 मिनट के भीतर कैसा प्रदर्शन करते हैं। सालों की कड़ी मेहनत के बाद भी कई बार छात्र परीक्षा के दिन घबराहट या अनजाने में कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनका पूरा साल और करियर दांव पर लग जाता है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के सख्त नियमों के बीच, इस बार परीक्षा केंद्र पर जाने से पहले आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं परीक्षा के दिन की उन 4 बड़ी गलतियों के बारे में, जिनसे आपको हर हाल में बचना चाहिए।1. ड्रेस कोड की अनदेखी और प्रतिबंधित चीजें साथ ले जानानीट परीक्षा में एनटीए का ड्रेस कोड बेहद सख्त होता है और इसमें जरा सी भी कोताही भारी पड़ सकती है। अक्सर छात्र पूरी आस्तीन (Full Sleeves) के कपड़े, बड़े बटन वाले शर्ट, या भारी कढ़ाई वाले आउटफिट पहनकर पहुंच जाते हैं, जिन्हें केंद्र पर अनुमति नहीं मिलती। इसके अलावा जूते पहनकर जाने की सख्त मनाही होती है, केवल चप्पल या कम हील वाले सैंडल ही मान्य हैं। परीक्षा हॉल में किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, डिजिटल घड़ी, कैलकुलेटर, ब्लूटूथ डिवाइस, यहां तक कि कोई भी कागज का टुकड़ा या ज्योमेट्री बॉक्स ले जाने की कोशिश न करें। सुरक्षा जांच (Frisky Process) के दौरान ऐसी चीजें मिलने पर आपको परीक्षा से डिबार (Debar) भी किया जा सकता है।2. एडमिट कार्ड और वैलिड आईडी प्रूफ घर पर भूल जानापरीक्षा के तनाव में कई छात्र सबसे जरूरी दस्तावेज यानी एडमिट कार्ड (NEET UG Admit Card) ही बैग में रखना भूल जाते हैं। केंद्र पर जाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके पास एडमिट कार्ड की पूरी तरह साफ प्रिंटेड कॉपी (पासपोर्ट साइज फोटो चिपकी हुई के साथ), पोस्टकार्ड साइज फोटो और एक वैध मूल पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी) जरूर हो। ध्यान रहे कि फोटोकॉपी या मोबाइल में दिखाई गई आईडी को केंद्र के मुख्य द्वार पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बिना आपको परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।3. ओएमआर (OMR) शीट भरने में जल्दबाजी या लापरवाही करनानीट परीक्षा में सबसे ज्यादा नंबरों का नुकसान ओएमआर शीट (OMR Sheet) को गलत तरीके से भरने की वजह से होता है। कई अभ्यर्थी पूरा पेपर हल करने के बाद आखिरी के 10-15 मिनट में जल्दबाजी में गोले काले करते हैं, जिससे क्रम बदलने (Serial Mismatch) की गंभीर गलती हो जाती है और आते हुए सवाल भी गलत हो जाते हैं। इसके साथ ही, रोल नंबर, बुकलेट कोड और सिग्नेचर वाले कॉलम को बहुत ध्यान से भरें। ओएमआर शीट पर व्हाइटनर, इरेज़र या ब्लेड का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित है; ऐसा करने पर आपकी पूरी आंसर शीट अमान्य (Invalid) घोषित हो सकती है।4. रिपोर्टिंग टाइम को हल्के में लेना और परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचनास्थानीय स्तर (Geographical Impact) पर ट्रैफिक जाम, मौसम की खराबी या रास्ता भटकने जैसी अनपेक्षित समस्याओं के कारण हर साल सैकड़ों छात्र परीक्षा देने से वंचित रह जाते हैं। एनटीए के नियमों के मुताबिक, एडमिट कार्ड पर दिए गए गेट क्लोजिंग टाइम (Gate Closing Time) के बाद एक सेकंड की भी देरी होने पर किसी भी कीमत पर एंट्री नहीं दी जाती, चाहे आपकी परिस्थिति कितनी भी गंभीर क्यों न हो। इसलिए, अपने शहर या नजदीकी परीक्षा केंद्र की दूरी और ट्रैफिक का आकलन पहले ही कर लें और रिपोर्टिंग समय से कम से कम एक से डेढ़ घंटे पहले केंद्र पर पहुंचने का लक्ष्य रखें ताकि अंतिम समय की भागदौड़ और मानसिक तनाव से बचा जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 20 Jun 2026 9:29 am

SBI PO Notification 2026: भारतीय स्टेट बैंक ने निकाली पीओ के 1500 पदों पर बंपर भर्ती; ₹21.97 लाख का सालाना CTC, जानें योग्यता, सैलरी और आवेदन की पूरी प्रक्रिया

बैंकिंग क्षेत्र में अपना करियर बनाने और देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक में अधिकारी बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India - SBI) ने प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के पदों पर भर्ती के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तृत नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।लंबे समय से इस प्रतिष्ठित भर्ती का इंतजार कर रहे देश भर के योग्य उम्मीदवारों के लिए एसबीआई ने 1,500 पदों पर नियुक्तियों की घोषणा की है। यह आधिकारिक नोटिफिकेशन 18 जून 2026 को बैंक की वेबसाइट sbi.co.in पर लाइव किया गया है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 8 जुलाई 2026 तक बैंक के आधिकारिक करियर पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म जमा कर सकते हैं।कैटिगरी वाइज वैकेंसी डिटेल्स (SBI PO Vacancy Breakdown)इस साल एसबीआई कुल 1500 प्रोबेशनरी ऑफिसर्स की भर्ती करने जा रहा है। विभिन्न श्रेणियों (वर्गों) के तहत पदों का विवरण निम्नलिखित है:वर्ग / श्रेणीकुल पदों की संख्याअनारक्षित (General/UR)588ओबीसी (Other Backward Class)390एससी (Scheduled Caste)234एसटी (Scheduled Tribe)144ईडब्ल्यूएस (Economically Weaker Section)144कुल पद (Total Openings)1,500सर्विस बॉन्ड (Service Bond): एसबीआई पीओ के पद पर अंतिम रूप से चयनित होने वाले सभी उम्मीदवारों को कार्यभार ग्रहण करते समय (At the time of joining) बैंक के साथ एक अनिवार्य एग्रीमेंट करना होगा। इसके तहत चयनित अभ्यर्थियों को न्यूनतम 3 साल की अवधि के लिए ₹2.00 लाख का सर्विस बॉन्ड साइन करना होगा।सैलरी स्ट्रक्चर: शानदार पैकेज और ₹21.97 लाख का सालाना CTCभारतीय स्टेट बैंक अपने प्रोबेशनरी ऑफिसर्स को बैंकिंग इंडस्ट्री में सबसे शानदार सैलरी पैकेज और भत्ते प्रदान करता है:शुरुआती बेसिक पे (Basic Pay): नया ज्वाइन करने वाले पीओ का शुरुआती मूल वेतन ₹48,480/- प्रति माह होगा, जिसमें बैंक की तरफ से 4 एडवांस इंक्रीमेंट पहले से शामिल किए गए हैं।पे-स्केल (Pay Scale): 48480-2000/7-62480-2340/2-67160-2680/7-85920अतिरिक्त भत्ते: बेसिक सैलरी के अलावा अधिकारियों को महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), लीज्ड अकोमोडेशन, चिकित्सा सहायता, और पेट्रोल अलाउंस सहित कई अन्य वीआईपी भत्ते मिलते हैं।सालाना सीटीसी (Gross CTC): इन सभी भत्तों और वित्तीय लाभों को मिलाकर, मुंबई जैसे ए-ग्रेड सेंटर पर एक एसबीआई पीओ का शुरुआती सकल सीटीसी (Cost to Company) लगभग ₹21.97 लाख प्रति वर्ष तक बैठता है।पात्रता मापदंड (SBI PO Eligibility Criteria 2026)1. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification)उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या भारत सरकार द्वारा अनुमोदित संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक (Graduation Degree) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।अंतिम वर्ष के छात्र: जो छात्र अपने ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर में हैं, वे भी इस भर्ती के लिए इस शर्त के साथ प्रोविजनल रूप से आवेदन कर सकते हैं कि इंटरव्यू के समय उन्हें अपनी डिग्री या पास होने का प्रामाणिक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।2. आयु सीमा (Age Limit)आवेदकों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए।आयु में छूट: केंद्र सरकार के मौजूदा आरक्षण नियमों और बैंकिंग गाइडलाइंस के अनुसार, आरक्षित श्रेणियों (OBC, SC, ST, और PwD) के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार विशेष छूट दी जाएगी।तीन कड़े चरणों में होगी चयन प्रक्रिया (Selection Process)एसबीआई पीओ की परीक्षा अपनी उच्च स्तरीय चयन प्रक्रिया के लिए जानी जाती है। उम्मीदवारों को अंतिम मेरिट लिस्ट में जगह बनाने के लिए निम्नलिखित तीन चरणों को पार करना होगा:चरण-I: प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam)यह 100 अंकों की एक ऑनलाइन ऑब्जेक्टिव (MCQ) परीक्षा होगी, जिसके लिए उम्मीदवारों को कुल 1 घंटे का समय दिया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से तीन सेक्शन्स शामिल होंगे: अंग्रेजी भाषा (English Language), क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड (Maths), और रीजनिंग एबिलिटी (Reasoning)।चरण-II: मुख्य परीक्षा (Mains Exam)प्रारंभिक परीक्षा में शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवार मुख्य परीक्षा में बैठेंगे। यह चरण दो हिस्सों में बंटा होगा:ऑब्जेक्टिव टेस्ट: 200 अंकों की ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा।डिस्क्रिप्टिव टेस्ट: 30 अंकों का एक वर्णनात्मक टेस्ट होगा, जिसमें कंप्यूटर पर ही टाइप करके निबंध (Essay) और पत्र लेखन (Letter Writing) करना होगा।नेगेटिव मार्किंग नोट: प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) दोनों ही परीक्षाओं के ऑब्जेक्टिव टेस्ट में प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 1/4 (0.25) अंक की नेगेटिव मार्किंग का कड़ा प्रावधान लागू रहेगा।चरण-III: इंटरव्यू और साइकोमेट्रिक टेस्ट (Interview Round)मुख्य परीक्षा के कट-ऑफ को पार करने वाले अभ्यर्थियों को अंतिम चरण के लिए बुलाया जाएगा। इसमें शामिल हैं:साइकोमेट्रिक टेस्ट: व्यक्तित्व और मानसिक क्षमता के मूल्यांकन के लिए।ग्रुप एक्सरसाइज (GE): कुल 20 अंकों की सामूहिक चर्चा।व्यक्तिगत साक्षात्कार (Personal Interview): कुल 30 अंकों का आमने-सामने का इंटरव्यू।ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड (How to Apply Online)यदि आप सभी पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, तो 8 जुलाई 2026 से पहले नीचे दिए गए चरणों का पालन करते हुए अपना आवेदन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं:वेबसाइट खोलें: सबसे पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट sbi.co.in पर जाएं।करियर सेक्शन: होमपेज के टॉप राइट कॉर्नर में दिख रहे Careers विकल्प पर क्लिक करें।करंट ओपनिंग्स: करियर पोर्टल के खुलने पर Current Openings के टैब को चुनें।लिंक ढूंढें: यहाँ Recruitment of Probationary Officers (PO) 2026 वाले लिंक पर क्लिक करें और पीडीएफ नोटिफिकेशन को डाउनलोड कर ध्यान से पढ़ें।रजिस्ट्रेशन: फॉर्म भरने के लिए Apply Online पर क्लिक करें और बुनियादी विवरण (नाम, फोन नंबर, ईमेल) भरकर नया रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड जनरेट करें।डिटेल्स भरें: अपने लॉगिन क्रेडेंशियल से लॉग इन करें और फॉर्म में अपनी शैक्षणिक योग्यता और व्यक्तिगत जानकारी को पूरी शुद्धता के साथ भरें।दस्तावेज अपलोड: अपनी नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर और नोटिफिकेशन में मांगे गए जरूरी डॉक्यूमेंट्स की स्कैन कॉपी को निर्धारित साइज में अपलोड करें।फीस भुगतान: अपनी कैटिगरी के अनुसार आवेदन शुल्क का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग या यूपीआई (UPI) के माध्यम से ऑनलाइन जमा करें।फाइनल सबमिट: फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करने से पहले 'प्रीव्यू' विकल्प का उपयोग कर सभी जानकारियों को री-चेक कर लें। इसके बाद सबमिट बटन दबाएं और भरे हुए एप्लीकेशन फॉर्म का एक प्रिंट आउट अपने पास सुरक्षित रख लें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 19 Jun 2026 3:23 am

RBI में यंग प्रोफेशनल्स के लिए बंपर वैकेंसी, हर महीने मिलेगी 1.5 लाख रुपये सैलरी, 6 जुलाई तक करें आवेदन

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में काम करने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक शानदार मौका आया है। आरबीआई ने देश के प्रतिभावान युवाओं से 'यंग प्रोफेशनल' (YP) के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस विशेष भर्ती के तहत चयनित होने वाले उम्मीदवारों को केंद्रीय बैंक हर महीने 1.5 लाख रुपये का फिक्स स्टाइपेंड (सैलरी) देगा। जो युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अपना करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन अवसर है।12 अलग-अलग क्षेत्रों में होगी भर्ती, मुंबई में मिलेगी पोस्टिंगआरबीआई द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञापन संख्या (RBI/TMD1/YP/06/2026-27/01) के मुताबिक, कुल 12 अलग-अलग डोमेन में एक-एक पद के लिए नियुक्तियां की जाएंगी। यह भर्ती पूरी तरह से फुल-टाइम कॉन्ट्रैक्ट बेसिस (अनुबंध) पर होगी। शुरुआत में यह कॉन्ट्रैक्ट 3 साल के लिए होगा, जिसे उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है। सभी चयनित प्रोफेशनल्स की पोस्टिंग मुंबई स्थित आरबीआई के केंद्रीय कार्यालय में होगी, जहां उन्हें डाटा एनालिटिक्स, नीति विश्लेषण, शोध और नियामकीय ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम करने का मौका मिलेगा। इन 12 प्रमुख क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध हैं:साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security)आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence)क्वांटम टेक्नोलॉजी (Quantum Technology)क्लाइमेट चेंज रिस्क एंड सस्टेनेबल फाइनेंस (Climate Change Risk)क्रेडिट रिस्क एनालिटिक्स (Credit Risk Analytics)पेमेंट सिस्टम्स (Payment Systems)डाटा एनालिटिक्स और पॉलिसी रिसर्च (Data Analytics & Policy Research)फाइनेंशियल मार्केट्स (Financial Markets)आवेदन के लिए क्या है योग्यता और उम्र सीमा?आरबीआई यंग प्रोफेशनल भर्ती 2026 के लिए केवल भारतीय नागरिक ही आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और अधिकतम उम्र 30 वर्ष (6 जुलाई 2026 तक) होनी चाहिए। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो अलग-अलग पदों के लिए संबंधित विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG), एमटेक (M.Tech), पीएचडी (Ph.D) की डिग्री मांगी गई है। उम्मीदवारों के पास डाटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, फाइनेंस, इकोनॉमिक्स या स्टैटिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्च डिग्री और प्रासंगिक अनुभव होना अनिवार्य है।ईमेल के जरिए ऐसे करें आवेदन, जानें शर्तें और नियमइच्छुक और योग्य उम्मीदवारों को 6 जुलाई 2026 तक केवल ईमेल के माध्यम से ही अपना आवेदन भेजना होगा। इसके लिए आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन फॉर्म डाउनलोड करके उसे भरना होगा। भरे हुए फॉर्म के साथ अपना अपडेटेड सीवी (CV), शैक्षणिक दस्तावेज, स्टेटमेंट ऑफ इंटरेस्ट, राइटिंग सैंपल और रेफरेंस लेटर को एक सिंगल पीडीएफ (PDF) फॉर्मेट में अटैच करके निर्धारित ईमेल आईडी पर भेजना होगा। यदि आप एक से अधिक पदों के लिए योग्य हैं, तो आपको हर पद के लिए अलग-अलग ईमेल से आवेदन करना होगा।नियमों के मुताबिक, इन यंग प्रोफेशनल्स को हर कैलेंडर वर्ष में 15 दिनों की छुट्टियां मिलेंगी। तय सीमा से ज्यादा छुट्टी लेने पर स्टाइपेंड में कटौती की जाएगी। इसके अलावा, अगर कोई बीच में कॉन्ट्रैक्ट खत्म करना चाहता है, तो दोनों पक्षों को 3 महीने का नोटिस पीरियड देना होगा। हालांकि, जॉइनिंग के शुरुआती 6 महीनों के भीतर बिना किसी नोटिस के भी अनुबंध समाप्त किया जा सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 17 Jun 2026 3:58 am

UKMSSB Nursing Officer Recruitment: उत्तराखंड में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर निकली भर्ती, ₹1.42 लाख तक मिलेगी सैलरी; जानें योग्यता और चयन प्रक्रिया

उत्तराखंड में सरकारी नौकरी (Government Jobs) की तलाश कर रहे और विशेष रूप से मेडिकल क्षेत्र (Medical Sector) में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड (UKMSSB) ने राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत नursing ऑफिसर (Nursing Officer) के पदों पर सीधी भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।इस भर्ती अभियान के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 12 जून 2026 से शुरू हो चुकी है। योग्य और इच्छुक अभ्यर्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर समय रहते अपना फॉर्म सबमिट कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस वैकेंसी की महत्वपूर्ण तारीखें, पदों का विवरण, शैक्षणिक योग्यता और चयन प्रक्रिया से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी।महत्वपूर्ण तारीखें (Important Dates)भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन 3 जून 2026 को जारी किया गया था। उम्मीदवार नीचे दी गई समय-सीमा के भीतर अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं:ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तिथि: 12 जून 2026आवेदन करने की अंतिम तिथि: 02 जुलाई 2026 (शाम 5:00 बजे तक)ऑनलाइन करेक्शन विंडो (Correction Window): 04 जुलाई से 07 जुलाई 2026 तक (इस दौरान अभ्यर्थी अपने फॉर्म में हुई गलतियों को सुधार सकेंगे)।पदों का पूरा विवरण (Vacancy Details)इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 196 पदों को भरा जाएगा, जिसमें महिला और पुरुष दोनों वर्ग के उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं। महिलाओं के लिए कुल पदों का लगभग 80% हिस्सा आरक्षित किया गया है।पद का नामकुल पदयोग्यता वर्गीकरण (डिप्लोमा / डिग्री)महिला नर्सिंग ऑफिसर157 पदडिग्री धारक: 126 पदडिप्लोमा धारक: 31 पदपुरुष नर्सिंग ऑफिसर39 पदडिप्लोमा धारक: 31 पदडिग्री धारक: 8 पदसैलरी पैकेज: ₹1.42 लाख प्रति माह तक मिलेगा वेतनयूकेएमएसएसबी नर्सिंग अधिकारी के पदों पर अंतिम रूप से चयनित होने वाले उम्मीदवारों को शानदार सैलरी पैकेज मिलेगा। सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के नियमों के तहत इन्हें पे-मैट्रिक्स लेवल-7 (Level-7) का लाभ दिया जाएगा।मूल वेतनमान (Pay Scale): ₹44,900 से लेकर ₹1,42,400 प्रति माह तक रहेगा।अतिरिक्त भत्ते: मूल वेतन के अलावा राज्य सरकार के नियमानुसार महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य क्लिनिकल चिकित्सा सुविधाएं भी देय होंगी।कौन कर सकता है आवेदन? पात्रता और नियमइस सरकारी भर्ती का हिस्सा बनने के लिए उम्मीदवारों को निम्नलिखित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा:1. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification)उम्मीदवार के पास किसी भी भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (GNM) डिप्लोमा होना चाहिए, या फिर बीएससी नर्सिंग (B.Sc. Nursing) / बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग / पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग की डिग्री होनी अनिवार्य है।काउंसिल रजिस्ट्रेशन: अभ्यर्थी के पास 'उत्तराखंड नर्सिंग एवं दाई परिषद, देहरादून' का वैध (Valid) और स्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र (Registration Certificate) होना अनिवार्य है।भाषाई ज्ञान: अभ्यर्थी को देवनागरी लिपि में हिंदी भाषा का अच्छा व्यावहारिक ज्ञान होना चाहिए।विशेष वरीयता (Incentive): बोर्ड के नियमों के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों के पास प्रांतीय सेना (Territorial Army) में न्यूनतम 2 वर्ष की सेवा का अनुभव है या राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) का 'B' या 'C' सर्टिफिकेट है, उन्हें चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी।2. आयु सीमा (Age Limit)न्यूनतम आयु: 21 वर्षअधिकतम आयु: 42 वर्षआयु की गणना की तिथि: आयु सीमा का निर्धारण 1 जुलाई 2025 को आधार मानकर किया जाएगा। उत्तराखंड राज्य के नियमों के अनुसार आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC/PwD) के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार विशेष छूट मिलेगी।चयन प्रक्रिया: 200 अंकों की होगी लिखित परीक्षानर्सिंग ऑफिसर के पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह से लिखित परीक्षा (Written Exam) में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा:1.लिखित परीक्षा (Written MCQ Test):3 घंटे का समय.सबसे पहले उम्मीदवारों को 200 अंकों की एक ऑफलाइन/ऑनलाइन लिखित परीक्षा देनी होगी। इसमें सभी प्रश्न मल्टीपल चॉइस (MCQ) आधारित होंगे। परीक्षा का आयोजन मुख्य रूप से देहरादून, श्रीनगर, हल्द्वानी और ऋषिकेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा।2.दस्तावेज सत्यापन (Document Verification):लिखित परीक्षा की मेरिट लिस्ट में आने वाले सफल अभ्यर्थियों को उनके शैक्षणिक ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स, नर्सिंग काउंसिल रजिस्ट्रेशन और जाति/आरक्षण प्रमाणपत्रों की जांच के लिए बोर्ड के समक्ष उपस्थित होना होगा।3.मेडिकल परीक्षण (Medical Examination):दस्तावेजों की सही पुष्टि होने के बाद शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों का राजकीय अस्पतालों के मेडिकल बोर्ड द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा, जिसमें पूर्ण रूप से फिट पाए जाने के बाद ही अंतिम नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा।आवेदन शुल्क (Application Fee)उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार निम्नलिखित निर्धारित शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम (नेट बैंकिंग/क्रेडिट कार्ड/यूपीआई) से करना होगा:सामान्य (General) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): ₹300अनुसूचित जाति (SC) / अनुसूचित जनजाति (ST) / EWS / दिव्यांग (PwD): ₹150ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?इच्छुक और पात्र उम्मीदवार अंतिम तारीख (2 जुलाई 2026) का इंतजार किए बिना उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट ukmssb.org पर जाकर 'Apply Online' के लिंक पर क्लिक करें। वहां अपना रजिस्ट्रेशन करने के बाद सभी आवश्यक दस्तावेज, पासपोर्ट फोटो और सिग्नेचर सही साइज में अपलोड करें और अंत में आवेदन शुल्क का भुगतान कर फॉर्म का एक प्रिंटआउट अपने पास सुरक्षित रख लें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Jun 2026 3:33 am

क्या आपको पता है BTech और MBBS का असली फुल फॉर्म? यहाँ जानिए देश के 10 सबसे लोकप्रिय कोर्सेस की हर छोटी-बड़ी डिटेल

12वीं की परीक्षा पास करने के बाद देश के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा सवाल सही करियर और सही कोर्स के चुनाव का होता है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में हम रोज़ाना बीटेक, एमबीबीएस, एमबीए जैसे भारी-भरकम शब्द सुनते हैं। ये कोर्सेस जितने लोकप्रिय हैं, अक्सर इनके पूरे नाम और इनके पीछे की शैक्षणिक बारीकियों को लेकर लोग उतने ही अनजान होते हैं। करियर के इस अहम मोड़ पर किसी भी कोर्स में दाखिला लेने से पहले उसकी पूरी और सटीक जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के पछतावे से बचा जा सके।इंजीनियरिंग और मेडिकल के दो सबसे बड़े महारथी: BTech और MBBS का पूरा सच विज्ञान वर्ग के छात्रों के बीच सबसे ज्यादा क्रेज इन्हीं दो कोर्सेस का देखा जाता है। जब बात इंजीनियरिंग की आती है, तो 'BTech' का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है, जिसका फुल फॉर्म 'बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी' (Bachelor of Technology) है। यह चार साल का एक तकनीकी स्नातक कोर्स है, जिसमें व्यावहारिक ज्ञान और कोडिंग-इंजीनियरिंग स्किल्स पर जोर दिया जाता है। दूसरी तरफ, चिकित्सा के क्षेत्र में भगवान का दर्जा पाने वाले डॉक्टरों का मुख्य कोर्स 'MBBS' है। दिलचस्प बात यह है कि इसका फुल फॉर्म लैटिन भाषा के शब्द 'Medicinae Baccalaureus Baccalaureus Chirurgiae' से लिया गया है, जिसे अंग्रेजी में 'Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery' कहा जाता है। यह कोर्स साढ़े पांच साल का होता है, जिसमें एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप भी शामिल है।मैनेजमेंट और कंप्यूटर वर्ल्ड के बादशाह: MBA, BBA और BCA की पूरी डिटेल कॉर्पोरेट की चमचमाती दुनिया में कदम रखने और बिजनेस लीडर बनने की चाह रखने वालों के लिए 'MBA' सबसे लोकप्रिय मास्टर डिग्री है, जिसका फुल फॉर्म 'मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन' (Master of Business Administration) है। इस दो साल के पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स को करने के बाद देश-विदेश की बड़ी कंपनियों में ऊंचे पदों पर नौकरियां मिलती हैं। मैनेजमेंट की शुरुआत करने के लिए छात्र ग्रेजुएशन स्तर पर 'BBA' यानी 'बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन' (Bachelor of Business Administration) चुनते हैं। वहीं, आईटी (IT) और सॉफ्टवेयर की दुनिया में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए 'BCA' यानी 'बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस' (Bachelor of Computer Applications) एक बेहतरीन तीन साल का स्नातक कोर्स है, जो बीटेक के एक बेहतरीन विकल्प के रूप में उभरा है।पारंपरिक और एवरग्रीन कोर्सेस: BA, BSc, BCom, MA और PhD का महत्व तकनीकी कोर्सेस के इस दौर में भी कुछ पारंपरिक कोर्सेस का जलवा आज भी बरकरार है, विशेषकर सरकारी नौकरी और सिविल सर्विसेज (UPSC) की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच। कला वर्ग (Arts) के छात्रों के लिए 'BA' यानी 'बैचलर ऑफ आर्ट्स' (Bachelor of Arts) और विज्ञान वर्ग के लिए 'BSc' यानी 'बैचलर ऑफ साइंस' (Bachelor of Science) सबसे आम और भरोसेमंद ग्रेजुएशन डिग्री हैं। कॉमर्स के क्षेत्र में अकाउंटिंग और फाइनेंस की समझ के लिए 'BCom' यानी 'बैच勒 ऑफ कॉमर्स' (Bachelor of Commerce) को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्र ग्रेजुएशन के बाद 'MA' यानी 'मास्टर ऑफ आर्ट्स' (Master of Arts) करते हैं और फिर शिक्षा जगत के सर्वोच्च शिखर 'PhD' जिसे 'डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी' (Doctor of Philosophy) कहा जाता है, की मानद उपाधि हासिल करते हैं।सही कोर्स का चुनाव कैसे करें: जनरेटिव एआई के दौर में एक्सपर्ट्स की खास सलाह आज के आधुनिक और तकनीकी युग में जब एआई (AI) और आधुनिक मशीनें इंसानी काम को आसान बना रही हैं, तब कोर्सेस की प्रासंगिकता भी बदल रही है। करियर काउंसलर्स और विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को केवल कोर्स की लोकप्रियता या उसके फुल फॉर्म को देखकर ही फैसला नहीं लेना चाहिए, बल्कि अपनी व्यक्तिगत रुचि, कौशल और भविष्य में उस सेक्टर की मांग (Market Demand) का भी बारीकी से आकलन करना चाहिए। किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले कॉलेज की रेटिंग, प्लेसमेंट रिकॉर्ड और कोर्स की फीस जैसी बुनियादी जानकारियों को जुटा लेना समझदारी का पहला कदम है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jun 2026 9:31 am

भारतीय रेलवे : जानें बीते एक साल में कितने युवाओं को मिली सरकारी नौकरी और आगे आने वाली हैं कितनी बंपर भर्तियां

भारतीय रेलवे में नौकरी पाने का सपना देखने वाले देश के लाखों युवाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और उत्साहजनक रिपोर्ट सामने आई है। रोजगार के मोर्चे पर लगातार उठते सवालों के बीच रेल मंत्रालय ने अपने भर्ती अभियानों के ताजा आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय रेलवे ने पिछले एक साल के भीतर रिकॉर्ड स्तर पर मानव संसाधन को मजबूत किया है और देश के कोने-कोने से आए हजारों योग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी की सौगात दी है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब रेलवे अपने नेटवर्क का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है और सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिए नए स्टाफ की तैनाती को प्राथमिकता दे रहा है।बीते एक साल में रिकॉर्ड तोड़ नियुक्तियां, इन विभागों में मिले सबसे ज्यादा रोजगार रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) और रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (RRC) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल के दौरान विभिन्न श्रेणियों में हजारों उम्मीदवारों की भर्ती प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपे गए हैं। इस बड़े भर्ती अभियान में सबसे ज्यादा नियुक्तियां सेफ्टी कैटेगरी यानी सुरक्षा से जुड़े विभागों में हुई हैं, जिनमें असिस्टेंट लोको पायलट (ALP), तकनीशियन (Technicians), स्टेशन मास्टर, और ट्रैक मेंटेनर्स शामिल हैं। इसके अलावा गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियों (NTPC) और ग्रुप डी के तहत भी बड़ी संख्या में युवाओं को भारतीय रेल परिवार का हिस्सा बनने का मौका मिला है, जिससे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्री सेवाओं में सुधार देखा जा रहा है।आने वाले समय में कितनी होंगी भर्तियां, नई वैकेंसियों को लेकर आया बड़ा अपडेट उन युवाओं के लिए भी राहत की खबर है जो इस समय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं। रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, भर्ती की यह रफ्तार आगे भी थमने वाली नहीं है। रेलवे में वर्तमान खाली पदों की समीक्षा पूरी कर ली गई है और आने वाले महीनों में एक और मेगा भर्ती अभियान शुरू करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सुरक्षा मानकों को और कड़ा करने तथा नए रूटों पर वंदे भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन के लिए हजारों नए पदों को मंजूरी दी गई है। बहुत जल्द आधिकारिक वेबसाइट्स पर नई अधिसूचनाएं जारी कर योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समयबद्ध परीक्षाओं पर रेलवे का विशेष फोकस रेलवे प्रशासन इस बार भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध (Time-bound) तरीके से आयोजित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए आधुनिकतम तकनीक और सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रेलवे की इस सक्रियता से न केवल बेरोजगारी की दर को कम करने में मदद मिल रही है, बल्कि युवाओं का सरकारी परीक्षाओं के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक आरआरबी वेबसाइट्स पर जारी होने वाले नोटिफिकेशन्स पर ही भरोसा करें और अपनी तैयारी को और तेज कर दें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jun 2026 9:29 am

Salary Transparency Debate: 4 राउंड इंटरव्यू और 3 हफ्ते की मेहनत बेकार, उम्मीदवार ने ठुकराया ₹20 लाख का पैकेज; स्टार्टअप फाउंडर ने मानी अपनी गलती

आज के दौर में नौकरी बदलने या नई जॉब तलाशने वालों के लिए सैलरी (CTC Package) सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक होती है। कोई भी उम्मीदवार किसी कंपनी का हिस्सा बनने से पहले यह जरूर सुनिश्चित करना चाहता है कि उसे मिलने वाला पैकेज उसकी योग्यताओं और उम्मीदों के मुताबिक है या नहीं। लेकिन कॉरपोरेट जगत में अक्सर कंपनियां जॉब वैकेंसी पोस्ट करते समय सैलरी रेंज का खुलासा नहीं करतीं, जिससे अंत में उम्मीदवार और कंपनी दोनों का कीमती समय और संसाधन बर्बाद होते हैं।ऐसा ही एक दिलचस्प और आंखें खोलने वाला मामला सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसने कॉर्पोरेट जगत में सैलरी ट्रांसपेरेंसी (सैलरी की साफ जानकारी) को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। एक स्टार्टअप फाउंडर ने सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए बताया कि उनकी कंपनी में लंबी भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक क्वालिफाइड उम्मीदवार ने ₹20 लाख सालाना के जॉब ऑफर को सीधे खारिज कर दिया। वजह थी—उम्मीदवार की उम्मीद और कंपनी के बजट के बीच का एक बड़ा फासला।तीन हफ्ते की लंबी दौड़, 4 इंटरव्यू राउंड और अंत में 'नो डील'इस पूरे घटनाक्रम की इनसाइड स्टोरी साझा करते हुए स्टार्टअप फाउंडर अभिषेक अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट लिखी। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने एक विशिष्ट पद के लिए हायरिंग शुरू की थी। एक योग्य उम्मीदवार ने आवेदन किया और वह कंपनी के कड़े सिलेक्शन प्रोसेस का हिस्सा बना।कड़ी परीक्षा: उम्मीदवार ने एक-एक करके कुल 4 कठिन इंटरव्यू राउंड्स को सफलतापूर्वक पास किया।समय की बर्बादी: यह पूरी भर्ती प्रक्रिया करीब तीन सप्ताह (21 दिन) तक लगातार चलती रही। दोनों ही पक्षों ने इसमें काफी समय, ऊर्जा और मेहनत लगाई।सैलरी का पेंच: जब सारे राउंड क्लियर होने के बाद आखिरी चरण में फाइनल सैलरी ऑफर करने की बात आई, तो दोनों पक्षों के होश उड़ गए। कंपनी ने अपने निर्धारित बजट के अनुसार उम्मीदवार को ₹20 लाख सालाना का पैकेज ऑफर किया, जबकि उम्मीदवार अपनी मार्केट वैल्यू के हिसाब से ₹28 लाख सालाना की उम्मीद कर रहा था। ₹8 लाख के इसी बड़े अंतर (Gap) के कारण उम्मीदवार ने ऑफर स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।'कंपटीटिव सैलरी' शब्द पर फाउंडर ने मानी अपनी बड़ी चूकअभिषेक अग्रवाल ने अपनी लिंक्डइन पोस्ट में बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि इस निराशाजनक स्थिति के लिए पूरी तरह उनकी कंपनी की नीतियां जिम्मेदार थीं। उन्होंने अपनी चूक को डिकोड करते हुए दो मुख्य बातें कहीं:भ्रामक शब्द: जॉब विज्ञापन (Job Description) में सैलरी को लेकर कोई स्पष्ट आंकड़ा या रेंज नहीं दी गई थी। विज्ञापन में सिर्फ इतना लिखा था कि कंपनी 'कंपटीटिव सैलरी' (Competitive Salary) देगी। फाउंडर ने माना कि इस शब्द का पैमाना हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। उम्मीदवार ने अपने पिछले क्रेडेंशियल्स और अनुभव के आधार पर इसे ₹28 लाख समझ लिया, जबकि कंपनी के लिए ₹20 लाख ही कंपटीटिव था।शुरुआत में स्पष्टता जरूरी: फाउंडर ने माना कि अगर उन्होंने हायरिंग के पहले दिन या जॉब पोस्टिंग के समय ही सैलरी की एक तय सीमा (Salary Range) लिख दी होती, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। ऐसा करने से तीन सप्ताह तक चला यह लंबा नाटक रुक जाता और दोनों पक्षों का कीमती समय बच जाता।रोल एक, पर सैलरी अलग: क्यों पैदा होती है यह गलतफहमी?अभिषेक ने अपनी पोस्ट में नौकरी बाजार के एक कड़वे सच को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि एक ही पद (Designation) के लिए अलग-अलग कंपनियों में सैलरी स्ट्रक्चर पूरी तरह भिन्न हो सकता है।किसी शुरुआती स्टेज के स्टार्टअप या छोटी कंपनी में किसी मैनेजर या डेवलपर का पैकेज ₹15-20 लाख हो सकता है।वहीं, किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) या फंडेड स्टार्टअप में उसी समान रोल और जिम्मेदारी के लिए ₹30-40 लाख तक की सैलरी मिल सकती है।यही कारण है कि सिर्फ पद का नाम (Job Title) देखकर किसी भी नौकरी की वास्तविक सैलरी का सटीक अंदाजा लगाना नामुमकिन होता है। उम्मीदवार हमेशा अपनी मौजूदा स्किल, अनुभव और मार्केट की डिमांड के हिसाब से उम्मीदें ऊंची रखते हैं, जबकि कंपनियों के आंतरिक बजट की अपनी सीमाएं होती हैं।सोशल मीडिया पर फूटा यूजर्स का गुस्सा; ट्रांसपेरेंसी की बढ़ती मांगफाउंडर की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गई और नौकरीपेशा युवाओं ने कमेंट सेक्शन में अपनी भड़ास और राय निकालनी शुरू कर दी।यूजर्स की राय: अधिकांश वर्किंग प्रोफेशनल्स ने फाउंडर के स्टैंड का समर्थन किया और कहा कि कंपनियों को अपनी जॉब पोस्टिंग में सैलरी का दायरा छुपाना बंद करना चाहिए।निराशाजनक अनुभव: एक यूजर ने लिखा, 4 राउंड के मैराथन इंटरव्यू के बाद सिर्फ सैलरी बजट मैच न होने के कारण ऑफर का रुक जाना किसी भी उम्मीदवार के लिए बेहद मानसिक तनाव और निराशा से भरा होता है।बेस्ट प्रैक्टिस: कई एचआर एक्सपर्ट्स ने सलाह दी कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में पहले राउंड की एचआर स्क्रीनिंग कॉल के दौरान ही सैलरी की उम्मीदों (Expected CTC) और कंपनी के बजट पर खुलकर बात कर लेनी चाहिए, ताकि आगे का सफर पारदर्शी रहे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 15 Jun 2026 3:59 am

OSSSC Nursing Officer Recruitment 2026: ओडिशा में नर्सिंग ऑफिसर के 5989 पदों पर बंपर भर्ती, आज ही से करें आवेदन

ओडिशा में सरकारी नौकरी (Govt Jobs 2026) की तलाश कर रहे नर्सिंग प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। ओडिशा अधीनस्थ चयन आयोग (OSSSC) ने राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत नर्सिंग ऑफिसर्स के पदों पर भर्ती के लिए एक बड़ा नोटिफिकेशन जारी किया है। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के जरिए डिस्ट्रिक्ट कैडर ग्रुप-C के कुल 5,989 पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्तियां की जाएंगी।यह भर्ती ओडिशा के सभी 30 जिला प्रतिष्ठानों के लिए निकाली गई है। इस प्रतिष्ठित सरकारी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आयोग के ऑफिशियल पोर्टल के माध्यम से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं।OSSSC Nursing Officer 2026: महत्वपूर्ण तारीखें (Important Dates)ओडिशा नर्सिंग ऑफिसर भर्ती से जुड़ी सभी जरूरी तिथियां नीचे दी गई हैं, ताकि आपका कोई भी जरूरी स्टेप मिस न हो:ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन/री-रजिस्ट्रेशन शुरू होने की तिथि: 13 जून 2026ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख: 6 जुलाई 2026ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म भरने की शुरुआत: 13 जून 2026एप्लीकेशन फॉर्म फाइनल सबमिट करने की लास्ट डेट: 13 जुलाई 2026एडमिट कार्ड और लिखित परीक्षा की तिथि: आयोग द्वारा बाद में घोषित की जाएगीक्या है योग्यता और उम्र सीमा? (Eligibility Criteria)इस भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए उम्मीदवारों को आयोग द्वारा तय निम्नलिखित मापदंडों को पूरा करना होगा:शैक्षिक योग्यता: आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से मान्यता प्राप्त किसी भी संस्थान से जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी (GNM) डिप्लोमा या B.Sc. Nursing की डिग्री होनी अनिवार्य है।रजिस्ट्रेशन: उम्मीदवारों के पास ओडिशा नर्सिंग काउंसिल या देश के किसी भी राज्य की नर्सिंग काउंसिल द्वारा जारी किया गया वैलिड रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट होना चाहिए।भाषा ज्ञान: कैंडिडेट को ओडिया (Odia) भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। उसने कम से कम 7वीं कक्षा या उससे ऊपर की पढ़ाई ओडिया विषय के साथ पास की हो।आयु सीमा: इस पद के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 38 वर्ष तय की गई है। सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र सीमा में छूट दी जाएगी।चयन प्रक्रिया: जानिए कैसा होगा परीक्षा का पैटर्न (Selection Process)OSSSC नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर अंतिम चयन लिखित परीक्षा (Written Exam) और उसके बाद होने वाले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV) के आधार पर किया जाएगा।परीक्षा का मोड: यह परीक्षा ऑफलाइन (OMR शीट आधारित) पेन-पेपर मोड में आयोजित की जाएगी।प्रश्नों का प्रकार: परीक्षा में कुल 100 बहुविकल्पीय (MCQs) सवाल पूछे जाएंगे। हर सही जवाब के लिए 1 अंक मिलेगा।समय अवधि: परीक्षा को हल करने के लिए उम्मीदवारों को कुल 2 घंटे (120 मिनट) का समय दिया जाएगा।नेगेटिव मार्किंग: इस परीक्षा में 0.25 अंकों की नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है, इसलिए उत्तर देते समय सावधानी बरतें।सिलेबस का पूरा गणित (Exam Syllabus):नर्सिंग विषय (GNM/B.Sc. कोर्स): 60 सवालप्रैक्टिकल नर्सिंग स्किल्स: 25 सवालअरिथमेटिक (अंकगणित): 10 सवालइंग्लिश: 05 सवालशानदार सैलरी पैकेज: लेवल 8 पे-रूल्स के तहत मिलेगा वेतनइस भर्ती के माध्यम से चयनित होने वाले नर्सिंग अधिकारियों को ओडिशा रिवाइज्ड स्केल्स ऑफ पे रूल्स के लेवल-8 (Level 8 Pay Matrix) के तहत बेहतरीन सैलरी पैकेज दिया जाएगा। इनका पे-स्केल 29,200 रुपये से लेकर 92,300 रुपये तक होगा। इसके साथ ही राज्य सरकार के नियमानुसार मिलने वाले सभी भत्ते (Allowances) और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।OSSSC पोर्टल पर ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन (Step-by-Step Application Process)इच्छुक उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना आवेदन फॉर्म भर सकते हैं:सबसे पहले ओडिशा अधीनस्थ चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.osssc.gov.in पर जाएं।होमपेज पर दिए गए 'Apply Online' लिंक पर क्लिक करें और अपना रजिस्ट्रेशन या री-रजिस्ट्रेशन पूरा करें।रजिस्ट्रेशन सफल होने के बाद अपने रजिस्टर्ड क्रेडेंशियल्स (ID और पासवर्ड) का उपयोग करके लॉग इन करें।अब स्क्रीन पर दिख रहे एप्लीकेशन फॉर्म में अपनी सभी व्यक्तिगत और शैक्षणिक डिटेल्स सही-सही भरें।मांगे गए जरूरी डॉक्यूमेंट्स, फोटो और सिग्नेचर को निर्धारित साइज में अपलोड करें।फॉर्म को फाइनल सबमिट करने से पहले एक बार सभी जानकारियों को ध्यान से री-चेक कर लें और फिर सबमिट बटन दबाएं।भविष्य के संदर्भ के लिए भरे गए एप्लीकेशन फॉर्म का एक प्रिंटआउट निकालकर अपने पास सुरक्षित रख लें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Jun 2026 3:52 am

12वीं के बाद बिना डिग्री के कमाएं लाखों! इन शॉर्ट टर्म कोर्सेज की सैलरी देख डॉक्टर-इंजीनियर भी रह जाएंगे हैरान

आज के बदलते दौर में करियर बनाने और लाखों का पैकेज पाने के लिए अब 3 से 4 साल की लंबी और महंगी कॉलेज डिग्री होना ही एकमात्र रास्ता नहीं रह गया है। 12वीं पास करने के बाद अगर आप पारंपरिक पढ़ाई के बजाय कुछ नया और स्किल्स-बेस्ड (कौशल आधारित) करना चाहते हैं, तो आपके लिए ऐसे कई शानदार विकल्प मौजूद हैं जो आपको बेहद कम समय में आत्मनिर्भर बना सकते हैं। कॉर्पोरेट जगत और ग्लोबल मार्केट में इस समय स्किल सेट की मांग इतनी तेजी से बढ़ी है कि इन क्षेत्रों में शुरुआती सैलरी देखकर बड़े-बड़े डॉक्टर्स और इंजीनियर्स भी हैरान हैं। आइए जानते हैं उन हाई-डिमांड सेक्टर्स के बारे में जहां सिर्फ आपके हुनर की कद्र होती है, डिग्री की नहीं।एआई प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स में है पैसों की बारिश मॉर्डन जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में नए जमाने के करियर ऑप्शन्स तेजी से उभरे हैं। इनमें सबसे ऊपर नाम आता है 'AI Prompt Engineer' और 'Data Analyst' का। 12वीं के बाद आप महज 3 से 6 महीने के शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेशन कोर्स के जरिए इन स्किल्स को सीख सकते हैं। टेक कंपनियां आज उन युवाओं को हाथों-हाथ ले रही हैं जो एआई टूल्स से सटीक काम करवा सकते हैं या डेटा को समझकर बिजनेस ग्रोथ में मदद कर सकते हैं। इस फील्ड में शुरुआत से ही लाखों रुपये का सालाना पैकेज मिलना बेहद आम बात हो चुकी है।डिजिटल मार्केटिंग और एसईओ एक्सपर्ट्स की हर शहर में भारी डिमांड अगर आपकी रुचि इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट में है, तो डिजिटल मार्केटिंग और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) आपके लिए एक परफेक्ट करियर साबित हो सकता है। आज दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े मेट्रो शहरों से लेकर लखनऊ, इंदौर और जयपुर जैसे टियर-2 शहरों के छोटे-बड़े बिजनेस भी ऑनलाइन आ रहे हैं। उन्हें अपने ब्रांड को गूगल और बिंग सर्च के टॉप पर लाने के लिए एक्सपर्ट्स की जरूरत होती है। मात्र कुछ महीनों की लाइव ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के बाद आप बतौर फ्रीलांसर या फुल-टाइम रिमोट एम्प्लॉई बनकर विदेशी क्लाइंट्स के साथ काम कर सकते हैं और घर बैठे डॉलर में मोटी कमाई कर सकते हैं।यूआई/यूएक्स डिजाइनिंग और कोडिंग: बिना डिग्री के सीधे एमएनसी में एंट्री स्मार्टफोन और ऐप्स के इस युग में किसी भी वेबसाइट या एप्लिकेशन का लुक और उसका यूजर एक्सपीरियंस (UI/UX) सबसे ज्यादा मायने रखता है। यूआई/यूएक्स डिजाइनर बनने के लिए आपको किसी आईआईटी या बड़े कॉलेज की डिग्री की जरूरत नहीं है, बल्कि आपका क्रिएटिव माइंड और फिग्मा (Figma) जैसे टूल्स पर पकड़ होना काफी है। इसके अलावा, यदि आप कोडिंग और फुल-स्टैक वेब डेवलपमेंट में रुचि रखते हैं, तो कई ऑनलाइन बूटकैंप्स आपको चंद महीनों में कोडिंग मास्टर बना देते हैं। एक मजबूत पोर्टफोलियो के दम पर युवा सीधे बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) में हाई-पेइंग जॉब्स हासिल कर रहे हैं।कैसे शुरू करें यह सफर और कहां से करें पढ़ाई इन क्षेत्रों में कदम रखने के लिए आपको किसी बड़े शहर में जाकर लाखों रुपये खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। गूगल, आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट और कौरसेरा (Coursera), उडेमी (Udemy) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इन कोर्सेज के वैश्विक स्तर पर मान्य सर्टिफिकेशन्स बेहद कम फीस या मुफ्त में उपलब्ध हैं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि 12वीं के बाद भेड़चाल का हिस्सा बनने के बजाय अपनी रुचि के अनुसार किसी एक स्किल को चुनें, उस पर लगातार 6 महीने तक मेहनत करें और अपने काम का एक बेहतरीन ऑनलाइन पोर्टफोलियो तैयार करें। इस तरह आप डिग्री धारकों की तुलना में बहुत कम उम्र में वित्तीय स्वतंत्रता हासिल कर सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Jun 2026 9:33 am

खत्म होने वाला है इंतजार, जानें कब आएगा सीबीएसई 10वीं फेज 2 का रिजल्ट और कैसे करें चेक

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 10वीं कक्षा के फेज 2 परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्र-छात्राओं के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आ रहा है। लंबे समय से चल रहा इंतजार अब समाप्त होने की कगार पर है। बोर्ड के करीबी सूत्रों और हालिया हलचलों से संकेत मिल रहे हैं कि सीबीएसई किसी भी क्षण फेज 2 का रिजल्ट घोषित कर सकता है। बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन और डेटा अपलोडिंग की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है, जिसके बाद अब तकनीकी पहलुओं की अंतिम जांच चल रही है। छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी मार्कशीट और रोल नंबर तैयार रखें क्योंकि आधिकारिक घोषणा बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक की जा सकती है।वेबसाइट पर बढ़ा ट्रैफिक, बोर्ड ने सर्वर को किया अपडेट रिजल्ट की संभावित तारीखों को लेकर सोशल मीडिया पर मची हलचल के बीच सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर ट्रैफिक काफी बढ़ गया है। इसे देखते हुए आईटी टीम ने सर्वर को अपडेट किया है ताकि रिजल्ट जारी होने के बाद भारी लोड की वजह से साइट क्रैश न हो। छात्र अपना परिणाम देखने के लिए आधिकारिक पोर्टल cbse.gov.in और cbseresults.nic.in के साथ-साथ उमंग ऐप और डिजिलॉकर का भी उपयोग कर सकते हैं। इस साल फेज 2 की परीक्षाओं में अंकों के प्रतिशत और पासिंग रेश्यो को लेकर भी काफी सकारात्मक उम्मीदें जताई जा रही हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच उत्साह और बढ़ गया है।रिजल्ट चेक करने के लिए इन स्टेप्स को करें फॉलो जैसे ही सीबीएसई रिजल्ट का लिंक एक्टिव होगा, छात्र सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां होमपेज पर 'CBSE Class 10th Phase 2 Result 2026' के लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड आईडी दर्ज करें। सबमिट बटन दबाते ही आपकी डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगी। भविष्य के संदर्भ के लिए इसका प्रिंटआउट या पीडीएफ सुरक्षित रखना न भूलें। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मूल मार्कशीट कुछ दिनों बाद संबंधित स्कूलों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी, तब तक डिजिलॉकर से डाउनलोड किए गए दस्तावेज पूरी तरह मान्य होंगे।एआई सर्च और फ्यूचर एडमिशन के लिए महत्वपूर्ण है यह परिणाम यह फेज 2 का परिणाम न केवल छात्रों की शैक्षणिक प्रगति को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय में ग्यारहवीं कक्षा में स्ट्रीम चुनने और प्रोफेशनल कोर्सेज में प्रवेश के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) के दौर में छात्र करियर काउंसलिंग के लिए एआई टूल्स का भी सहारा ले रहे हैं, जिसमें इस मार्कशीट के अंक एक निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सीबीएसई ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती है ताकि छात्रों को उनकी मेहनत का सटीक परिणाम मिल सके। किसी भी तरह की विसंगति होने पर छात्र स्क्रूटनी और अंकों के सत्यापन के लिए भी आवेदन कर सकेंगे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Jun 2026 9:28 am

अब फेल होने पर भी नहीं छूटेगी पढ़ाई! दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों को रोकने के लिए शिक्षा विभाग का ऐतिहासिक फैसला

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को बीच में ही पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) से रोकने के लिए केजरीवाल सरकार के शिक्षा निदेशालय ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब परीक्षाओं में असफल या फेल होने वाले छात्रों को स्कूल से बाहर नहीं निकाला जाएगा और न ही उनकी पढ़ाई अधूरी छूटेगी। अक्सर देखा जाता था कि नौवीं या ग्यारहवीं कक्षा में फेल होने के बाद छात्र निराश होकर स्कूल छोड़ देते थे या स्कूल प्रशासन उन्हें दोबारा दाखिला देने में आनाकानी करता था। इस गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने अब नीतिगत स्तर पर बड़ा बदलाव कर दिया है।क्लास में फेल होने वाले हर बच्चे को मिलेगा दोबारा रेगुलर एडमिशन दिल्ली शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) द्वारा जारी किए गए नए सर्कुलर के अनुसार, अब राजधानी के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रिंसिपलों को यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे फेल होने वाले किसी भी छात्र को री-एडमिशन (दोबारा दाखिला) देने से मना नहीं कर सकते। इन बच्चों को भी अन्य नियमित छात्रों की तरह ही स्कूल आने, कक्षाओं में बैठने और सभी शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने का पूरा अधिकार होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन से असफलता का डर निकालना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़े रखना है।कमजोर छात्रों के लिए स्कूलों में चलेंगी स्पेशल रेमेडियल क्लासेज सिर्फ दोबारा दाखिला देना ही इस नियम का हिस्सा नहीं है, बल्कि फेल हुए छात्रों की पढ़ाई को मजबूत करने के लिए स्कूलों को विशेष रणनीति बनाने को कहा गया है। इन बच्चों के लिए स्कूल के समय के दौरान या बाद में स्पेशल रेमेडियल क्लासेज (अतिरिक्त कक्षाएं) आयोजित की जाएंगी। इसमें शिक्षकों द्वारा उन विषयों पर खास ध्यान दिया जाएगा जिनमें छात्र कमजोर हैं या फेल हुए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यक्तिगत ध्यान और अतिरिक्त सहयोग से छात्र न केवल अपनी कमियों को सुधार सकेंगे, बल्कि अगली परीक्षा में बेहतर अंकों के साथ पास भी हो सकेंगे।ड्रॉपआउट रेट को जीरो पर लाने के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली सरकार का यह फैसला नई शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा के अधिकार (RTE) के मूल सिद्धांतों को जमीन पर उतारने जैसा है। अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे एक बार फेल होने के बाद मजदूरी या अन्य कामों में लग जाते थे, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता था। इस नए नियम के आने के बाद दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। दिल्ली के अभिभावकों और शिक्षक संगठनों ने सरकार के इस छात्र-हितैषी फैसले का स्वागत किया है और इसे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला कदम बताया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 13 Jun 2026 9:26 am