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भागवत का 'जेनजी संवाद' देश को सही दिशा देगा, नशा, कट्टरता और प्रदूषण की चुनौती : इंद्रेश कुमार

भागवत का 'जेनजी संवाद' देश को सही दिशा देगा, नशा, कट्टरता और प्रदूषण की चुनौती : इंद्रेश कुमार

समाचार नामा 6 Aug 2026 12:00 am

हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा अधिकारियों के वेतन में वृद्धि

हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा अधिकारियों के वेतन में वृद्धि

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:57 pm

बिहार विधान परिषद के लिए मनोनीत होने पर दीपक प्रकाश बोले- जिम्मेदारी को प्रतिबद्धता के साथ निभाऊंगा

बिहार विधान परिषद के लिए मनोनीत होने पर दीपक प्रकाश बोले- जिम्मेदारी को प्रतिबद्धता के साथ निभाऊंगा

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:55 pm

त्रिपुरा में नशे और अपराध पर जीरो टॉलरेंस, सीएम माणिक साहा ने दिए कड़े निर्देश

त्रिपुरा में नशे और अपराध पर जीरो टॉलरेंस, सीएम माणिक साहा ने दिए कड़े निर्देश

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:55 pm

नितिन गडकरी के ई20 डीपफेक वीडियो मामला: मुंबई कोर्ट ने 'मेटा' और 'एक्स' से मांगी अपलोडर्स की जानकारी

नितिन गडकरी के ई20 डीपफेक वीडियो मामला: मुंबई कोर्ट ने 'मेटा' और 'एक्स' से मांगी अपलोडर्स की जानकारी

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:55 pm

आईजी विकास वैभव पर तेजस्वी यादव के आरोपों का लेट्स इंस्पायर बिहार ने किया खंडन, बताया- बदनाम करने की कोशिश

आईजी विकास वैभव पर तेजस्वी यादव के आरोपों का लेट्स इंस्पायर बिहार ने किया खंडन, बताया- बदनाम करने की कोशिश

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:54 pm

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग पर बैठक, संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास पर जोर

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग पर बैठक, संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास पर जोर

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:50 pm

जीआईडीसी जमीन घोटाला: शक्ति सिंह गोहिल का आरोप, ताक पर रखे गए नियम

जीआईडीसी जमीन घोटाला: शक्ति सिंह गोहिल का आरोप, ताक पर रखे गए नियम

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:49 pm

छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले 66 माओवादियों को 6.60 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी

छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले 66 माओवादियों को 6.60 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:45 pm

जम्मू-कश्मीर को उसका हक मिले, सदन चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की ज्यादा : सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी

जम्मू-कश्मीर को उसका हक मिले, सदन चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की ज्यादा : सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:45 pm

असम में बाढ़ पीड़ित छात्रों को राहत, मुफ्त किताबों के लिए सरकार देगी पैसे: सीएम सरमा

असम में बाढ़ पीड़ित छात्रों को राहत, मुफ्त किताबों के लिए सरकार देगी पैसे: सीएम सरमा

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:44 pm

आयुष्मान भारत और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना में संदिग्ध मामलों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाई एसआईटी

मुंबई, 5 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेएवाई) के तहत वर्ष 2024 से 2026 के बीच दर्ज 15,407 संदिग्ध चिकित्सा उपचार दावों की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:43 pm

जेनजी से संवाद जरूरी, कृषि में रोजगार और बिजनेस के लिए युवाओं को मिले सही दिशा : बीएयू के वाइस-चांसलर

जेनजी से संवाद जरूरी, कृषि में रोजगार और बिजनेस के लिए युवाओं को मिले सही दिशा : बीएयू के वाइस-चांसलर

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:41 pm

नागालैंड के साथ मजबूती से खड़ी केंद्र सरकार, बाढ़ प्रभावित परिवारों को दी जाएगी हर संभव मदद: जेपी नड्डा

नागालैंड के साथ मजबूती से खड़ी केंद्र सरकार, बाढ़ प्रभावित परिवारों को दी जाएगी हर संभव मदद: जेपी नड्डा

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:40 pm

‘कांग्रेस एकजुट’: मुलाकात के बाद शिवकुमार ने असहमति की आशंका को खारिज किया

‘कांग्रेस एकजुट’: मुलाकात के बाद शिवकुमार ने असहमति की आशंका को खारिज किया

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:33 pm

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का सर्वांगीण विकास हुआ: नरेश बंसल

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का सर्वांगीण विकास हुआ: नरेश बंसल

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:29 pm

बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, पूर्वांचल की राजनीति में शोक की लहर

बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, पूर्वांचल की राजनीति में शोक की लहर

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:24 pm

विधानसभा में संभल हिंसा आयोग की रिपोर्ट पेश, 24 नवंबर की घटना को बताया पूर्व नियोजित साजिश

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच संभल हिंसा की न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट बिना चर्चा के सदन के पटल पर रख दी गई

देशबन्धु 5 Aug 2026 11:21 pm

कावेरी जल विवाद पर डीएमके का आरोप, पी. विल्सन ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्नाटक नहीं छोड़ रहा पानी

कावेरी जल विवाद पर डीएमके का आरोप, पी. विल्सन ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्नाटक नहीं छोड़ रहा पानी

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:20 pm

फसल बीमा के दायरे में 1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक भूमि के साथ राजस्थान देश में अग्रणी

फसल बीमा के दायरे में 1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक भूमि के साथ राजस्थान देश में अग्रणी

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:19 pm

मेघालय की प्रारूप मतदाता सूची में फिर महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक, सत्यापन के बाद 1.8 लाख से ज्यादा नाम हटे

मेघालय की प्रारूप मतदाता सूची में फिर महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक, सत्यापन के बाद 1.8 लाख से ज्यादा नाम हटे

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:18 pm

शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने पीएम मोदी का जताया आभार, बोले- भारत ने दिया पूरा सम्मान

शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने पीएम मोदी का जताया आभार, बोले- भारत ने दिया पूरा सम्मान

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:11 pm

तेजस्वी यादव अगर सीरियस होते तो बांकीपुर में 14,000 की जगह 74,000 वोट मिलते : साधु यादव

तेजस्वी यादव अगर सीरियस होते तो बांकीपुर में 14,000 की जगह 74,000 वोट मिलते : साधु यादव

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:07 pm

कर्नाटक सरकार 34,000 ग्रामीण मंदिरों में पुजारियों की ट्रेनिंग में मदद करेगी: सीएम शिवकुमार

कर्नाटक सरकार 34,000 ग्रामीण मंदिरों में पुजारियों की ट्रेनिंग में मदद करेगी: सीएम शिवकुमार

समाचार नामा 5 Aug 2026 11:02 pm

छत्तीसगढ़ सीएम ने वन महोत्सव 2026 का किया शुभारंभ, ‘पीपल सिटी’ विकसित करने की घोषणा

छत्तीसगढ़ सीएम ने वन महोत्सव 2026 का किया शुभारंभ, ‘पीपल सिटी’ विकसित करने की घोषणा

समाचार नामा 5 Aug 2026 10:54 pm

'वे नेहरू और इंदिरा गांधी की पूजा करते हैं': भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला

'वे नेहरू और इंदिरा गांधी की पूजा करते हैं': भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला

समाचार नामा 5 Aug 2026 10:52 pm

सीएम फडणवीस को सिद्धि विनायक मंदिर प्रकरण पर एसआईटी से जांच करानी चाहिए: महेश तपासे

सीएम फडणवीस को सिद्धि विनायक मंदिर प्रकरण पर एसआईटी से जांच करानी चाहिए: महेश तपासे

समाचार नामा 5 Aug 2026 10:44 pm

दीपक प्रकाश का विधान परिषद मनोनीत होना पहले से तय था: उपेंद्र कुशवाहा

दीपक प्रकाश का विधान परिषद मनोनीत होना पहले से तय था: उपेंद्र कुशवाहा

समाचार नामा 5 Aug 2026 10:42 pm

पंजाब मंत्रिमंडल ने 'ग्रीन कवर' बनाए रखने के विधेयक को मंजूरी दी

पंजाब मंत्रिमंडल ने 'ग्रीन कवर' बनाए रखने के विधेयक को मंजूरी दी

समाचार नामा 5 Aug 2026 10:38 pm

जम्मू-कश्मीर: लश्कर आतंकी की गिरफ्तारी पर 15 लाख का इनाम, पुलिस ने की घोषणा

जम्मू-कश्मीर: लश्कर आतंकी की गिरफ्तारी पर 15 लाख का इनाम, पुलिस ने की घोषणा

समाचार नामा 5 Aug 2026 10:13 pm

मिजोरम और असम के बीच शांति और आपसी समझ को प्राथमिकता देना अनिवार्य: मुख्यमंत्री लालदुहोमा

मिजोरम और असम के बीच शांति और आपसी समझ को प्राथमिकता देना अनिवार्य: मुख्यमंत्री लालदुहोमा

समाचार नामा 5 Aug 2026 10:06 pm

यूपी की जनता अखिलेश यादव के कार्यकाल में माफिया राज को नहीं भूली है: रोहन गुप्ता

यूपी की जनता अखिलेश यादव के कार्यकाल में माफिया राज को नहीं भूली है: रोहन गुप्ता

समाचार नामा 5 Aug 2026 10:03 pm

सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहने पर एनसीपी उग्र, कांग्रेस के सामने रखी माफी की मांग

सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहने पर एनसीपी उग्र, कांग्रेस के सामने रखी माफी की मांग

समाचार नामा 5 Aug 2026 9:59 pm

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने छात्रों को एआई का बुद्धिमानी से उपयोग करने की सलाह दी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने छात्रों को एआई का बुद्धिमानी से उपयोग करने की सलाह दी

समाचार नामा 5 Aug 2026 9:39 pm

'परिसीमन पर विपक्ष का रुख साफ, सरकार फैला रही भ्रम', कांग्रेस का आरोप

'परिसीमन पर विपक्ष का रुख साफ, सरकार फैला रही भ्रम', कांग्रेस का आरोप

समाचार नामा 5 Aug 2026 9:27 pm

पंजाब के लोग आप सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस को विकल्प मानते हैं: भूपेश बघेल

पंजाब के लोग आप सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस को विकल्प मानते हैं: भूपेश बघेल

समाचार नामा 5 Aug 2026 9:09 pm

15 अगस्त तक केंद्र को सौंपेंगे मेकेदातु परियोजना की संशोधित डीपीआर, तमिलनाडु इसे नहीं रोक सकता: रामलिंगा रेड्डी

15 अगस्त तक केंद्र को सौंपेंगे मेकेदातु परियोजना की संशोधित डीपीआर, तमिलनाडु इसे नहीं रोक सकता: रामलिंगा रेड्डी

समाचार नामा 5 Aug 2026 9:02 pm

कांग्रेस के हित में सवाल उठाने पर पार्टी ने सस्पेंड कर दिया : शर्मिला सिद्दीकी

कांग्रेस के हित में सवाल उठाने पर पार्टी ने सस्पेंड कर दिया : शर्मिला सिद्दीकी

समाचार नामा 5 Aug 2026 8:59 pm

छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने 500 करोड़ रुपए के एआई मिशन, बीईएमएल संयंत्र को मंजूरी दी

छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने 500 करोड़ रुपए के एआई मिशन, बीईएमएल संयंत्र को मंजूरी दी

समाचार नामा 5 Aug 2026 8:47 pm

अखिलेश ने पीडीए को एक ऐसी पहेली में तब्दील कर दिया, जो गिरगिट की तरह रंग बदलती है: केशव प्रसाद मौर्य

अखिलेश ने पीडीए को एक ऐसी पहेली में तब्दील कर दिया, जो गिरगिट की तरह रंग बदलती है: केशव प्रसाद मौर्य

समाचार नामा 5 Aug 2026 8:46 pm

अनुच्छेद 370 हटाने के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग

अनुच्छेद 370 हटाने के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग

समाचार नामा 5 Aug 2026 8:45 pm

सिद्धिविनायक मंदिर चंदा विवाद पर शिवसेना नेता संजय निरुपम की मांग, 'दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए'

सिद्धिविनायक मंदिर चंदा विवाद पर शिवसेना नेता संजय निरुपम की मांग, 'दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए'

समाचार नामा 5 Aug 2026 8:35 pm

टीवीके सरकार का पहला बजट 'निराशाजनक', चुनावी वादों को किया नजरअंदाज: एमके स्टालिन

टीवीके सरकार का पहला बजट 'निराशाजनक', चुनावी वादों को किया नजरअंदाज: एमके स्टालिन

समाचार नामा 5 Aug 2026 8:28 pm

'यहां कोई जादू नहीं दिख रहा', जोधपुर दौरे पर पहुंचे गजेंद्र सिंह शेखावत का अशोक गहलोत पर तंज

'यहां कोई जादू नहीं दिख रहा', जोधपुर दौरे पर पहुंचे गजेंद्र सिंह शेखावत का अशोक गहलोत पर तंज

समाचार नामा 5 Aug 2026 8:20 pm

'आप सदन चलने कहां दे रहे हैं, जो गृह मंत्री संसद आएं', राहुल गांधी को भाजपा का जवाब

'आप सदन चलने कहां दे रहे हैं, जो गृह मंत्री संसद आएं', राहुल गांधी को भाजपा का जवाब

समाचार नामा 5 Aug 2026 8:13 pm

मानसून सत्र में हंगामे पर भाजपा का विपक्ष पर हमला, चर्चा से भागने का लगाया आरोप

मानसून सत्र में हंगामे पर भाजपा का विपक्ष पर हमला, चर्चा से भागने का लगाया आरोप

समाचार नामा 5 Aug 2026 8:11 pm

पहली तिमाही में केंद्र सरकार की शुद्ध प्राप्तियां 10.49 लाख करोड़ रुपए रहीं, जो पूरे साल के लक्ष्य का 28.7 प्रतिशत है

पहली तिमाही में केंद्र सरकार की शुद्ध प्राप्तियां 10.49 लाख करोड़ रुपए रहीं, जो पूरे साल के लक्ष्य का 28.7 प्रतिशत है

समाचार नामा 5 Aug 2026 7:42 pm

मणिपुर: मुख्यमंत्री और आईटीबीपी आईजी ने आंतरिक सुरक्षा और नागरिक कार्रवाई पर चर्चा की

मणिपुर: मुख्यमंत्री और आईटीबीपी आईजी ने आंतरिक सुरक्षा और नागरिक कार्रवाई पर चर्चा की

समाचार नामा 5 Aug 2026 7:41 pm

तमिलनाडु ने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के लिए दी जाने वाली राहत राशि बढ़ाकर 7000 रुपए की

तमिलनाडु ने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के लिए दी जाने वाली राहत राशि बढ़ाकर 7000 रुपए की

समाचार नामा 5 Aug 2026 7:30 pm

अनुच्छेद-370 हटने के सात साल : जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, निवेश, पर्यटन के क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव

अनुच्छेद-370 हटने के सात साल : जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, निवेश, पर्यटन के क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव

समाचार नामा 5 Aug 2026 7:24 pm

बेरोजगारी की वजह से मंदिरों में चोर चोरी करने पहुंचे, नौकरी मिलेगी तो अपराध कम होगा : किशोरी पेडनेकर

बेरोजगारी की वजह से मंदिरों में चोर चोरी करने पहुंचे, नौकरी मिलेगी तो अपराध कम होगा : किशोरी पेडनेकर

समाचार नामा 5 Aug 2026 6:48 pm

तमिलनाडु: एआईएडीएमके नेता पलानीस्वामी ने टीवीके के पहले बजट को 'शून्य' अंक दिए

तमिलनाडु: एआईएडीएमके नेता पलानीस्वामी ने टीवीके के पहले बजट को 'शून्य' अंक दिए

समाचार नामा 5 Aug 2026 6:47 pm

'मुझे उन युवाओं पर गर्व है', प्रदर्शनकारियों से मिलकर बोले राहुल गांधी

'मुझे उन युवाओं पर गर्व है', प्रदर्शनकारियों से मिलकर बोले राहुल गांधी

समाचार नामा 5 Aug 2026 6:46 pm

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने अग्निशमन विभाग मुख्यालय और पुलिस थानों का अचानक दौरा किया

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने अग्निशमन विभाग मुख्यालय और पुलिस थानों का अचानक दौरा किया

समाचार नामा 5 Aug 2026 6:38 pm

केंद्रीय गृह मंत्री पर राहुल गांधी के आरोप निराधार, प्रमाण है तो सामने लाएं: विक्रम सिंह

केंद्रीय गृह मंत्री पर राहुल गांधी के आरोप निराधार, प्रमाण है तो सामने लाएं: विक्रम सिंह

समाचार नामा 5 Aug 2026 6:19 pm

अभिषेक बनर्जी के आमतला पार्टी कार्यालय पर कार्रवाई को लेकर रोक 21 अगस्त तक बढ़ी, 18 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई

अभिषेक बनर्जी के आमतला पार्टी कार्यालय पर कार्रवाई को लेकर रोक 21 अगस्त तक बढ़ी, 18 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई

समाचार नामा 5 Aug 2026 6:12 pm

आखिर बांकीपुर उपचुनाव भाजपा क्यों, कैसे और किसके चलते हारी? पूछता है बिहार!

बांकीपुर उपचुनाव 2026 में भाजपा की हार अब हर किसी को नहीं पच रही है। इसलिए लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि भाजपा क्यों हारी? कैसे पराजित हुई? और किसके चलते यह राजनीतिक दुर्दिन देखना पड़ा? बिहार वासी जानना चाहते हैं! क्योंकि 9 माह पहले ही तो उन्होंने जदयू नीत एनडीए गठबंधन को अभूतपूर्व बहुमत दिया था! अटकलें हैं कि क्या जदयू नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ हुई 'सियासी बदतमीजी' के बाद भाजपा अआखिर ब अकेले नहीं चल पाएगी, क्योंकि टीम नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी के हवा-हवाई रणनीतिकारों को असली राजनीतिक जमीन पर तगड़ी पटकनी दिला डाली है! जानकारों की मानें तो चाहे चिराग पासवान हों, जीतनराम मांझी हों या उपेंद्र कुशवाहा हों, या मुंह फुलाए सवर्ण भाजपाई, सबकी खामोशी या राजनीतिक बकवास दोनों भाजपा पर भारी पड़ गई। वह हो गया, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी! इसलिए ज्वलंत प्रश्न उठता है कि क्या भाजपा केवल अपने सहयोगियों और सहयोगी दलों दोनों के भितरघात की वजह से हारी है? क्योंकि ऐसे मतदान केंद्र जहां सहयोगी दल परंपरागत रूप से मजबूत रहे हैं, फिर भी वहां भाजपा को असामान्य रूप से कम वोट मिले हैं। खुद पार्टी और गठबंधन के नेताओं द्वारा दबी जुबान में ये बातें कहीं जा रही हैं, ताकि उनका महत्व बढ़े। इसे भी पढ़ें: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के सुप्रीमो प्रशांत किशोर की जीत के सियासी मायने चौंकाने वाले लिहाजा, सुलगते सवाल उठने लगे कि आखिर बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री (CM) बनने के बाद हुए पहले ही बांकीपुर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार को जिस प्रकार की तगड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा, वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंतरिक युगलबंदी के खिलाफ किसी अंदरूनी राजनीतिक साजिश का द्योतक तो नहीं है! चर्चा तो यहां तक हो रही है कि आनन-फानन में जिस तरह से पार्टी उम्मीदवार बदला गया, उस साजिश के पीछे केंद्रीय मंत्री अमित शाह की टीम में उपजे अंतर्विरोधों और आरएसएस से जुड़े दिग्गजों की परोक्ष भूमिका तो कहीं नहीं है, जो कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अव्यवहारिक पैराशूट नियुक्ति के बाद से ही अंदर ही अंदर खफा चल रहे थे और मौका मिलते ही उन्हें, उनकी ही जमीन पर असली जातीय और पार्टीगत दोनों राजनीतिक औकात दिखा दी! ऐसा इसलिए कि जो पार्टी दुर्लभ से दुर्लभतम चुनाव जीत जाती है, वह आखिर अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा छोड़ी हुई इकलौती सीट, जिस पर गत 30 वर्षों से 'पिता-पुत्र' का कब्जा रहा हो, वह अचानक हार जाए। खुद पटना के पीढ़ी दर पीढ़ी वाले भाजपा समर्थक संभ्रांत लोग भी अचंभित रह गए हैं कि ये क्या हो गया? क्या 'लालू की नीति' दबे पांव वेश बदलकर उनके पुत्र तेज प्रताप यादव के शह पर पटना में आ गई? क्या सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं को अपेक्षित स्तर पर सक्रिय नहीं किया गया? क्या स्थानीय स्तर पर असंतोष या गुटबाजी को शांत नहीं किया गया? क्या उम्मीदवार चयन को लेकर नाराज़गी नहीं भांपी जा सकी? क्या विपक्ष के प्रभावी ध्रुवीकरण का अंदाजा भाजपा रणनीतिकार नहीं लगा पाए? क्या स्थानीय मुद्दे और सत्ता-विरोधी भावना प्रबल रही और मतदान प्रबंधन यानी बूथ मैनेजमेंट में कमी बरती गई? उनका सीधा सवाल यह भी है कि आखिर पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद, जदयू सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ सी पी ठाकुर (सांसद विवेक ठाकुर के पिता), राज्य सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव और अशोक चौधरी के मोहल्लों से जुड़े मतदान केंद्रों पर भी भाजपा प्रत्याशी कैसे पिछड़े और प्रशांत किशोर वहां भी बढ़त बनाए रहे। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बूथ की भी यही स्थिति रही। आखिर यह सब सियासी प्रपंच कैसे और क्यों संभव हुआ? क्या मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बदलने के लिए इतना बड़ा आत्मघाती षड्यंत्र सवर्णों के नेताओं ने अपने ही खिलाफ रच दिया? क्या किसी ने इस हेतु नई दिल्ली और नागपुर से इशारा भी किया था? बात पचने वाली तो बिल्कुल भी नहीं है। सवाल है कि क्या आरएसएस और भाजपा के जमीनी तालमेल की कमी ही भाजपा के खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण है। क्या भाजपा और उसके वैचारिक-संगठनात्मक नेटवर्क के बीच स्थानीय स्तर पर समन्वय में कमी रही? क्या उम्मीदवार चयन या स्थानीय असंतोष का प्रभाव पड़ा? क्या विपक्ष ने नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनाए? क्या कम मतदान का असर भाजपा के पारंपरिक मतदाता आधार पर पड़ा? सवाल यह भी है कि क्या जदयू के पूर्वमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने द्वारा ही बनवाए हुए भाजपाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सियासी बदला ले लिया गया है? या फिर पूर्वमुख्यमंत्री व कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, और पूर्व कानून मंत्री व सांसद रविशंकर प्रसाद के अलावा ऋतुराज सिन्हा और संजय मयूख जैसे दिग्गज कायस्थ नेताओं ने निजी कारणों से भितरघात किया/कराया है? क्या लोजपा रामविलास के नेता व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का भी भाजपा को दिली सहयोग नहीं मिला? क्या उपेंद्र कुशवाहा की चुप्पी और जीतनराम मांझी और नागमणि जैसों के विषैले बोलों की कीमत भाजपा ने चुकाई है। वहीं, राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यूजीसी बिल विवाद, ओबीसी/दलितों को ज्यादा कानूनी तरजीह दिए जाने, हिंदुत्व को गफलत में रखने और राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण के अलावा भरत तिवारी एनकाउंटर प्रकरण आदि ने सवर्णों के बीच भाजपा की राजनीतिक साख को गहरी चोट पहुंचाई है। आलम यह बताया गया है कि ओबीसी/दलित वोट बैंक भाजपा के साथ पूरी तरह से नहीं जुटा पाया है,जबकि सवर्णों का सजग तबका अपने बच्चों के भविष्य के खातिर भाजपा से दूर चला जा रहा है, या विकल्प ढूंढ रहा है। क्या जन सुराज पार्टी में वह विकल्प दिखाई दे चुकी है? क्या सवर्णों ने बीजेपी को धोखा दिया या ओबीसी और दलितों ने या फिर तीनों वर्गों के समृद्ध तबके ने? देखा जाए तो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने शोषित, दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यक समाज की राजनीति को धार देने की कोशिश तो की थी, पर कामयाबी नहीं मिली। लिहाजा, इस चुनाव में उन्होंने न केवल मुद्दे बदलते, बल्कि मोदी-शाह-सम्राट पर सीधे निशाना साधकर ही सफलता के इस मुकाम तक पहुंचे हैं। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, बिहार में भाजपा के लिए जन सुराज पार्टी अब एक वास्तविक चुनावी चुनौती बन चुकी है, जिसको राष्ट्रीय विस्तार पाते देर नहीं लगेगी। क्योंकि राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थिति यही चुगली कर रही है। बांकीपुर उपचुनाव को प्रशांत किशोर ने व्यक्तिगत अभियान में बदल दिया था। उनकी पार्टी जन सुराज ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया और प्रशांत किशोर ने स्वयं मैदान में उतरकर इसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला बना दिया। इससे विपक्षी वोटों का ध्रुवीकरण हुआ और भाजपा विरोधी मत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के राजद प्रत्याशी की ओर न जाकर अपेक्षाकृत अधिक एक दिशा में गए जिससे जनसुराज को विजयश्री मिली और भाजपा को नुकसान हुआ। जहां तक एंटी-इनकंबेंसी की बात है तो बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का गढ़ था, जहां लगातार एक ही दल के प्रतिनिधित्व से कुछ मतदाताओं में बदलाव की इच्छा पैदा हो गई प्रतीत होती है। इस चुनाव में स्थानीय मुद्दे भी हावी रहे। विपक्ष ने पूर्व घोषित उम्मीदवार के अकस्मात बदलाव, बूथ प्रबंधन, स्थानीय संगठन और मतदान प्रतिशत जैसे कारक को भी उछाला, जो निर्णायक भूमिका निभाए। जबकि शहरी मतदाता का बदलता रुझान भाजपा पर भारी पड़ गया। शिक्षित और युवा मतदाताओं ने परिवर्तन के पक्ष में मतदान किया, क्योंकि यूजीसी बिल का सर्वाधिक प्रभाव उन्हीं पर पड़ता। इसलिए इन बातों का प्रभाव परिणाम पर पड़ा है। पहले सीजेपी द्वारा केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे स्वीकार करवाना और अब जेएसपी के प्रशांत किशोर द्वारा भाजपा का मजबूत गढ़ तोड़ दिया जाना बहुत कुछ संकेत दे रहा है, जो यह साबित करता है कि उनकी पार्टी केवल वैचारिक मंच नहीं, बल्कि चुनाव जीतने की क्षमता भी रखती है। वहीं, अब बिहार और देश की राजनीति में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बढ़ चुकी है, क्योंकि जन सुराज पार्टी अब एक स्थायी ताकत बन चुकी है। भविष्य के चुनावों में मुकाबला केवल एनडीए बनाम महागठबंधन तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि तीसरा गुट भी बनेगा। यही नहीं, भाजपा को अब अपने पारंपरिक शहरी और सवर्ण वोट बैंक की समीक्षा भी करनी पड़ेगी, क्योंकि उसके शहरी गढ़ में ही सेंध लगी है। लिहाजा पार्टी यह जानने का प्रयास अवश्य करेगी कि क्या पराजय का कारण उम्मीदवार बदलने से उपजा अंदरूनी रोष, संगठन की अंदरूनी खींचातानी, स्थानीय मुद्दे या मतदाताओं की प्राथमिकताओं में बदलाव तो नहीं था। क्या बिहार में संगठन बनाम चेहरे की बहस तेज होगी। यहां पर यह चर्चा भी होगी कि क्या मजबूत संगठन हमेशा निर्णायक है, या प्रभावशाली स्थानीय नेतृत्व और अभियान भी स्थापित दलों को चुनौती दे सकते हैं? क्या भाजपा 2030 के विधानसभा चुनाव की रणनीतियाँ बदल सकती है? क्या सभी प्रमुख दल उम्मीदवार चयन, सामाजिक समीकरण, शहरी मतदाताओं और युवा वोटरों को लेकर अपनी अपनी रणनीति की समीक्षा करेंगे? इसलिए, बांकीपुर का परिणाम केवल एक सीट का परिणाम नहीं माना जाएगा; बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में भी देखा जाएगा। भाजपा की हार के पीछे निम्नलिखित संभावित कारण हो सकते हैं, जैसे: एक, परंपरागत भाजपा मतदाताओं के एक हिस्से का जन सुराज की ओर जाना। दो, शहरी, युवा और बदलाव चाहने वाले मतदाताओं का रुझान बदलना। तीन, कम मतदान प्रतिशत का भाजपा के संगठनात्मक लाभ को कम कर देना। और चार, उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे और चुनावी रणनीति का प्रभाव। चूंकि एग्जिट पोल और कुछ चुनाव-पूर्व विश्लेषणों में यह दावा किया गया था कि सवर्ण मतों का एक हिस्सा प्रशांत किशोर की ओर जाने के संकेत हैं, वह बात अब सच प्रतीत होती है। बताया जाता है राष्ट्रीय अध्यक्ष की सोच व समझ पर भी इस चुनाव का असर पड़ेगा, क्योंकि बांकीपुर जैसी लंबे समय से भाजपा की सीट के उनके हाथ से निकलते ही संगठन की चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और स्थानीय नेतृत्व पर सवाल उठ चुके हैं। लेकिन केवल एक उपचुनाव की हार से राष्ट्रीय अध्यक्ष की स्थिति पर बड़ा असर पड़ना तय नहीं माना जाता। पार्टी आमतौर पर कई चुनावों के समग्र प्रदर्शन के आधार पर ही संगठनात्मक निर्णय लेती है। जहाँ तक मुख्यमंत्री पर असर की बात है तो, चूँकि यह चुनाव राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ है, इसलिए विपक्ष इसे सरकार के कामकाज पर जनमत के रूप में पेश कर सकता है। चूंकि हार का अंतर बड़ा है और भाजपा के पारंपरिक क्षेत्रों में भी गिरावट दिखी है, इसलिए सरकार की रणनीति, संगठन और सामाजिक समीकरणों की समीक्षा हो सकती है। वहीं आगामी बिहार विधानसभा चुनाव पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि यह परिणाम व्यापक जनरुझान का संकेत प्रतीत होता है, जो भाजपा और एनडीए को उम्मीदवार चयन, सामाजिक गठबंधन, स्थानीय मुद्दों और चुनावी संदेश में बदलाव करने की जरूरत की चुगली कर रहा हैं। वहीं, यदि इसे केवल स्थानीय परिस्थितियों वाला परिणाम माना जाता है, तो इसका प्रभाव सीमित भी रह सकता है। इसलिए बांकीपुर के परिणाम ने राजनीतिक संदेश अवश्य दिया है, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष या मुख्यमंत्री की स्थिति पर उसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टी नेतृत्व इस हार के कारणों का क्या आकलन करता है और आने वाले चुनावों में उसका प्रदर्शन कैसा रहता है। इतना तय है कि भाजपा की चुनावी हार आमतौर पर कई सामाजिक, राजनीतिक और संगठनात्मक कारणों के संयुक्त प्रभाव के चलते हुई है। चूंकि भाजपा का पारंपरिक वोट अपेक्षा से कम निकला है, इसलिए संगठनात्मक समन्वय, बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर सवाल उठते हैं। भाजपा ने बूथ स्तर पर व्यापक संगठनात्मक तैयारी की थी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को लगाया था। फिर भी इस चुनाव में कम मतदान, त्रिकोणीय मुकाबला, युवा मतदाताओं का रुझान, स्थानीय मुद्दे और विपक्ष की रणनीति जैसे कई अन्य कारकों के चलते उसे पराजय का सामना करना पड़ा। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

प्रभासाक्षी 5 Aug 2026 6:10 pm

शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई गुरुवार दोपहर दो बजे होगी, कपिल सिब्बल ने रखी दलीलें

शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई गुरुवार दोपहर दो बजे होगी, कपिल सिब्बल ने रखी दलीलें

समाचार नामा 5 Aug 2026 6:03 pm

असम में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दे रही भारतीय जनता पार्टी: बदरुद्दीन अजमल

असम में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा दे रही भारतीय जनता पार्टी: बदरुद्दीन अजमल

समाचार नामा 5 Aug 2026 6:01 pm

पंजाब विधानसभा में विपक्ष से दुर्व्यवहार, दबाई जा रही है आवाज: प्रताप सिंह बाजवा

पंजाब विधानसभा में विपक्ष से दुर्व्यवहार, दबाई जा रही है आवाज: प्रताप सिंह बाजवा

समाचार नामा 5 Aug 2026 6:00 pm

राष्ट्रमंडल खेल 2026: चुनौतियों के बीच चमका भारत

राष्ट्रमंडल खेल केवल पदकों की प्रतियोगिता नहीं बल्कि किसी देश की खेल संस्कृति, प्रतिभा विकास, खेल विज्ञान, प्रशिक्षण व्यवस्था और दीर्घकालिक खेल नीति का दर्पण भी होते हैं। ग्लासगो (स्कॉटलैंड) में 23 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों का समापन भारत के लिए अनेक उपलब्धियों, कुछ अधूरी अपेक्षाओं और भविष्य की नई संभावनाओं के साथ हुआ। भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार प्रतियोगिता के कार्यक्रम में निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी, टेबल टेनिस इत्यादि भारत के कई पारंपरिक मजबूत खेल शामिल ही नहीं थे। इन खेलों में भारत सामान्यतः बड़ी संख्या में पदक जीतता रहा है। ऐसे में सीमित अवसरों के बावजूद चौथा स्थान बनाए रखना भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता और जुझारूपन का प्रमाण है। पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने 70 स्वर्ण सहित कुल 171 पदक जीतकर एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा। इंग्लैंड 110 पदकों के साथ दूसरे तथा कनाडा 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। मेजबान स्कॉटलैंड भी 39 पदकों के साथ प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए पांचवें स्थान पर रहा। भारत और स्कॉटलैंड के कुल पदक समान रहे लेकिन स्वर्ण पदकों की संख्या के आधार पर भारत चौथे स्थान पर रहा। यदि पिछले राष्ट्रमंडल खेलों के प्रदर्शन की तुलना करें तो एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। वर्ष 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य सहित कुल 66 पदक जीतकर तीसरा स्थान हासिल किया था। उस प्रतियोगिता में निशानेबाजी ने अकेले 16 पदक दिलाकर भारत की सफलता में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके अलावा मुक्केबाजी, भारोत्तोलन और कुश्ती में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था। 2022 में इंग्लैंड के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य सहित कुल 61 पदक जीतकर चौथा स्थान प्राप्त किया था। तब कुश्ती में भारत के सभी 12 पहलवानों ने पदक जीतकर इतिहास रचा था जबकि भारोत्तोलन और टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की थी। इन दोनों आयोजनों की तुलना में 2026 के ग्लासगो खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या घटकर 39 रह गई। पहली दृष्टि में यह गिरावट चिंताजनक लग सकती है किंतु यदि प्रतियोगिता के कार्यक्रम का विश्लेषण किया जाए तो स्पष्ट होता है कि भारत के अनेक पदक संभावित खेल इस बार आयोजित ही नहीं किए गए। इसलिए केवल पदकों की संख्या के आधार पर प्रदर्शन का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा। वास्तव में भारत ने उपलब्ध अवसरों का काफी प्रभावी उपयोग किया और जिन खेलों में उसने भाग लिया, उनमें उल्लेखनीय सफलता अर्जित की। इसे भी पढ़ें: Gujarat CM भूपेंद्र पटेल को सौंपा गया Commonwealth Games ध्वज, 2030 की तैयारियां शुरू इस बार भारतीय मुक्केबाजों ने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ अभियान चलाया। भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल दस पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। महिला मुक्केबाजों ने विशेष रूप से प्रभावित किया। जैस्मीन लम्बोरिया, प्रिया घनघस, साक्षी चौधरी और प्रीति पवार जैसी युवा खिलाड़ियों ने यह संकेत दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाजी का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन स्वर्ण से भले चूक गई लेकिन उनका अनुभव और प्रदर्शन भारतीय मुक्केबाजी की मजबूती का प्रमाण बना रहा। पुरुष वर्ग में भी सचिन सिवाच और अंकुश सहित अन्य मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की पदक संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह सफलता दर्शाती है कि भारतीय मुक्केबाजी अब केवल कुछ खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रही बल्कि उसके पास प्रतिभाओं की व्यापक श्रृंखला तैयार हो चुकी है। भारोत्तोलन ने भी भारत की प्रतिष्ठा बनाए रखी। पिछले एक दशक में इस खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने निरंतर प्रगति की है। ग्लासगो में भी उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि विश्व स्तर पर भारत अब एक मजबूत शक्ति बन चुका है। जूडो में भारतीय खिलाड़ियों ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया और कई महत्वपूर्ण पदक जीतकर यह संदेश दिया कि यह खेल भी भारत में तेजी से विकसित हो रहा है। हालांकि जूडो खिलाड़ी तूलिका मान का डोपिंग रोधी नियमों के अंतर्गत तीन बार ‘वेयरअबाउट्स’ संबंधी जानकारी देने में विफल रहने के कारण अस्थायी निलंबन और प्रतियोगिता से बाहर होना भारतीय दल के लिए एक बड़ा झटका था। यह घटना बताती है कि विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा में केवल खेल कौशल ही नहीं, डोपिंग रोधी नियमों के प्रति पूर्ण जागरूकता और अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है। एथलेटिक्स में भारत का प्रदर्शन इस बार विशेष चर्चा का विषय रहा। गुलवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए 10,000 मीटर दौड़ में रजत और 5,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे एक ही राष्ट्रमंडल खेल में ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धाओं में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। इससे पहले भारत को इन लंबी दूरी की स्पर्धाओं में कभी पदक नहीं मिला था। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के बदलते स्वरूप और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रणाली की सफलता का संकेत देती है। पैरा खेलों में भी भारत ने 3 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य सहित कुल सात पदक जीतकर नया इतिहास बनाया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राष्ट्रमंडल खेलों के पैरा वर्ग में भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बराबर है। यदि भारतीय दल के प्रदर्शन का गहन विश्लेषण किया जाए तो स्पष्ट होता है कि इस बार महिलाओं ने शानदार योगदान दिया। महिला खिलाड़ियों ने 8 स्वर्ण सहित कुल 16 पदक जीतकर भारतीय खेलों में बढ़ती महिला भागीदारी और उत्कृष्टता का परिचय दिया। दूसरी ओर पुरुष खिलाड़ियों ने कुल 23 पदक जीतकर संतुलित प्रदर्शन किया। फिर भी यह स्वीकार करना होगा कि 2026 का प्रदर्शन भारत के लिए संतोषजनक अवश्य है लेकिन ऐतिहासिक नहीं। वर्ष 2010 के नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल आज भी भारत के स्वर्णिम अध्याय बने हुए हैं, जब भारत ने 38 स्वर्ण सहित कुल 101 पदक जीतकर ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरा स्थान प्राप्त किया था। घरेलू मैदान का लाभ अपनी जगह है लेकिन वह प्रदर्शन यह भी दर्शाता है कि यदि मजबूत खेल अवसंरचना, व्यापक खिलाड़ी आधार और सुव्यवस्थित तैयारी हो तो भारत शीर्ष देशों को कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखता है। भारत की खेल यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष अब यह है कि देश अब कुछ चुनिंदा खेलों तक सीमित नहीं रह गया है। पहले भारत की अधिकांश सफलता निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन और भारोत्तोलन तक सीमित रहती थी जबकि अब मुक्केबाजी, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा खेलों में भी लगातार नए खिलाड़ी उभर रहे हैं। यह परिवर्तन भारत की खेल नीति, खेलो इंडिया जैसी योजनाओं, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं, खेल विज्ञान, पोषण और खिलाड़ियों को मिलने वाले आर्थिक सहयोग का सकारात्मक परिणाम है। हालांकि अभी भी प्रतिभा पहचान, जमीनी स्तर पर कोचिंग, खेल चिकित्सा, मानसिक प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रतिस्पर्धी अनुभव को और मजबूत करने की आवश्यकता बनी हुई है। अब भारतीय खेल जगत की निगाहें वर्ष 2030 पर टिक गई हैं, जब राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी अहमदाबाद करेगा। यह केवल एक खेल आयोजन नहीं बल्कि भारत के लिए विश्व के सामने अपनी खेल क्षमता, आधुनिक अवसंरचना और संगठनात्मक दक्षता प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर होगा। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों ने भारत को यह विश्वास अवश्य दिलाया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, भारतीय खिलाड़ी हर मंच पर देश का गौरव बढ़ाने का सामर्थ्य रखते हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन उपलब्धियों को अंतिम लक्ष्य न मानकर उन्हें ओलंपिक और वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जाए। जिन खेलों में भारत विश्वस्तरीय शक्ति बन चुका है, उन्हें और सशक्त किया जाए तथा एथलेटिक्स, तैराकी, जिम्नास्टिक और अन्य ओलंपिक खेलों में भी दीर्घकालिक निवेश बढ़ाया जाए। यदि भारत अपनी खेल नीतियों में निरंतरता बनाए रखता है, खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, विश्वस्तरीय सुविधाएं और दीर्घकालिक समर्थन उपलब्ध कराता है तो वह दिन दूर नहीं, जब राष्ट्रमंडल ही नहीं, ओलंपिक और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भी भारत पदक तालिका के शीर्ष देशों में नियमित रूप से दिखाई देगा। - योगेश कुमार गोयल (लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं)

प्रभासाक्षी 5 Aug 2026 5:58 pm

हर कोई जेनजी से बात करना चाहता है, लेकिन वे तब कहां थे, जब उन पर लाठियां बरस रही थी : आदित्य ठाकरे

हर कोई जेनजी से बात करना चाहता है, लेकिन वे तब कहां थे, जब उन पर लाठियां बरस रही थी : आदित्य ठाकरे

समाचार नामा 5 Aug 2026 5:56 pm

'महिला प्रदर्शनकारियों के घर भेजे गए गुंडे....' राहुल गांधी ने किया सनसनीखेज दावा, जानिए क्या है पूरा मामला

'महिला प्रदर्शनकारियों के घर भेजे गए गुंडे....' राहुल गांधी ने किया सनसनीखेज दावा, जानिए क्या है पूरा मामला

समाचार नामा 5 Aug 2026 5:40 pm

ब्राह्मण वोट बैंक के लिए योगी और अखिलेश आमने-सामने, अखिलेश के 'PD मतलब पंडित' वाले बयान ने बिछाई नई सियासी बिसात

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले योगी बनाम अखिलेश की सियासत अब सीधे जातीय समीकरणों के अखाड़े में उतर चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां समाजवादी पार्टी के PDA की नई-नई राजनीतिक व्याख्याएं गढ़ते हुए कभी इसे परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी तो कभी प्रोडक्शन हाउस ऑफ दंगाई एंड अपराधी बताते हैं, वहीं अब अखिलेश यादव ने उसी PDA का नया अर्थ निकालकर भाजपा को उसी के अंदाज में जवाब दिया है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि PDA में PD का मतलब पंडित है। यानी जिस नारे को भाजपा लगातार निशाने पर ले रही थी, उसे सपा प्रमुख ने ब्राह्मण राजनीति के नए दरवाजे में बदलने की कोशिश कर दी। दरअसल, समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर लखनऊ में आयोजित प्रबुद्ध समाज सम्मेलन श्रद्धांजलि से ज्यादा राजनीतिक संदेश का मंच बन गया। अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र को समाजवादी आंदोलन का बड़ा चेहरा बताते हुए ब्राह्मण समाज को सम्मान देने का संदेश दिया और साफ संकेत दिया कि 2027 की लड़ाई में सपा सिर्फ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ब्राह्मण मतदाताओं को भी अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। इसे भी पढ़ें: विधानसभा में बवाल पर भड़के योगी, बोले- सपा को संविधान पर भरोसा नहीं, राम मंदिर विवाद पर कही बड़ी बात अखिलेश ने योगी सरकार पर कई मोर्चों से हमला बोला। उन्होंने बिना नाम लिए विकास दुबे एनकाउंटर का जिक्र करते हुए कहा कि जिस दिन गाड़ी पलटी थी, उस दिन गाड़ी नहीं, सरकार पलटने से बच गई थी। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि समय आने पर सैटेलाइट इमेज सामने आएगी, जिससे पूरी कहानी साफ हो जाएगी। राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गड़बड़ी के मुद्दे को उठाते हुए भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि हिंदू धर्म में दान की रसीद नहीं मांगी जाती, लेकिन अब रसीदों की राजनीति हो रही है। स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को भी उन्होंने भाजपा सरकार के खिलाफ हथियार बनाया। हम आपको बता दें कि ब्राह्मणों को लेकर अखिलेश का यह नया दांव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह वर्ग लंबे समय तक सत्ता की धुरी रहा है। आजादी के बाद शुरुआती दशकों में ब्राह्मण मतदाता मुख्य रूप से कांग्रेस के साथ रहे। मंडल-कमंडल की राजनीति के दौर में उनका बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर चला गया और राम मंदिर आंदोलन ने इस रिश्ते को और मजबूत किया। हालांकि 2007 में मायावती ने ब्राह्मण-दलित सोशल इंजीनियरिंग के सहारे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर यह साबित कर दिया था कि ब्राह्मण वोट पूरी तरह किसी एक दल की स्थायी जागीर नहीं हैं। लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में मोदी के उभार के बाद से ही यह वर्ग भाजपा के साथ रहा लेकिन तमाम कारणों के चलते ब्राह्मण भाजपा से नाराज बताये जा रहे हैं जिसके चलते अब एक बार फिर यही वर्ग सभी राजनीतिक दलों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। यही वजह है कि बहुजन समाज पार्टी भी इस मुकाबले में पीछे नहीं है। मायावती पहले ही ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट देने और उन्हें सम्मानजनक भागीदारी देने की रणनीति का ऐलान कर चुकी हैं। उनका दावा है कि ब्राह्मणों सहित सवर्ण समाज के हित सबसे सुरक्षित बसपा में हैं और 2007 जैसा समीकरण दोबारा बन सकता है। ऐसे में साफ है कि 2027 के चुनाव में ब्राह्मण वोटों के लिए भाजपा, सपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। उधर, उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र भी इसी राजनीतिक तल्खी की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर लोकतंत्र और विकास विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अनुपूरक बजट, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने जैसे जनहित के मुद्दों पर चर्चा तक नहीं होने दी। योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने के साथ पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराई है, लेकिन विपक्ष का मकसद केवल व्यवधान पैदा करना था। बहरहाल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब नारे भी हथियार हैं और उनकी परिभाषाएं भी। योगी हर मौके पर PDA की नई व्याख्या गढ़कर सपा पर हमला बोल रहे हैं, तो अखिलेश उसी PDA में पंडित जोड़कर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। मायावती भी ब्राह्मण कार्ड खेल चुकी हैं। ऐसे में यह साफ है कि अगले साल का विधानसभा चुनाव सिर्फ विकास और कानून-व्यवस्था पर नहीं, बल्कि नारों, जातीय समीकरणों और राजनीतिक प्रतीकों की जंग पर भी लड़ा जाएगा। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 5 Aug 2026 5:29 pm

शशि थरूर ने एलजीबीटीक्यूएआईए-प्लस पैनल के काम में देरी पर सवाल उठाए

शशि थरूर ने एलजीबीटीक्यूएआईए-प्लस पैनल के काम में देरी पर सवाल उठाए

समाचार नामा 5 Aug 2026 5:27 pm

पाकिस्तान में गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान से सत्ता गठबंधन में हलचल, '70 साल पुरानी व्यवस्था विफल' बताने पर उठे सवाल

पाकिस्तान में गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान से सत्ता गठबंधन में हलचल, '70 साल पुरानी व्यवस्था विफल' बताने पर उठे सवाल

समाचार नामा 5 Aug 2026 5:18 pm

तिरंगा विवाद पर महबूबा के बचाव में उतरे उमर अब्दुल्ला, बोले- गलती से उल्टा पकड़ा होगा झंडा

तिरंगा विवाद पर महबूबा के बचाव में उतरे उमर अब्दुल्ला, बोले- गलती से उल्टा पकड़ा होगा झंडा

समाचार नामा 5 Aug 2026 5:18 pm

रेगिस्तान की इस आवाज ने दुनिया को बनाया अपना दीवाना, पढ़ें स्वरूप खान की सफलता की कहानी

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समाचार नामा 5 Aug 2026 5:17 pm

आतंकवाद पीड़ितों के परिजनों के लिए सरकारी नौकरियां, न्याय और पुनर्वास की दिशा में एक नया अध्याय : एलजी सिन्हा

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समाचार नामा 5 Aug 2026 5:16 pm

अयोध्या राम मंदिर में वीआईपी पास की व्यवस्था समाप्त, संतों ने फैसले का किया स्वागत

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समाचार नामा 5 Aug 2026 5:11 pm

कर्नाटक: मंत्री खंड्रे ने विकसित भारत-जी राम जी को लागू करने के दिशा-निर्देशों की समय सीमा तय की

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समाचार नामा 5 Aug 2026 5:09 pm

'पप्पू यादव की मानसिकता पाकिस्तान जैसी, संसद की सदस्यता निलंबित होनी चाहिए', साधु-संतों की मांग

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समाचार नामा 5 Aug 2026 4:49 pm

अदालती कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा : सुप्रीम कोर्ट

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समाचार नामा 5 Aug 2026 4:47 pm

अनुच्छेद 370 हटाते समय किया गया एक भी वादा पूरा नहीं हुआ : इमरान मसूद

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समाचार नामा 5 Aug 2026 4:37 pm

प्रबुद्धजन सम्मेलन में अखिलेश बोले, भाजपा ने राम मंदिर से लेकर जनता के भरोसे तक को नुकसान पहुंचाया

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समाचार नामा 5 Aug 2026 4:26 pm

ईडी ने चिट फंड घोटाले के मामले में वाईएसआर कांग्रेस के नेता से जुड़ी जगहों पर ली तलाशी

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समाचार नामा 5 Aug 2026 4:02 pm

भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर बिना वजह संसद की कार्यवाही बाधित करने और बहस से भागने का लगाया आरोप

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समाचार नामा 5 Aug 2026 3:53 pm

कोलकाता में स्वतंत्रता दिवस की झांकियों में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को दिखाया जाएगा

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समाचार नामा 5 Aug 2026 3:49 pm

गाड़ी का बीमा नहीं तो नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से करोड़ों वाहन मालिकों पर पड़ेगा असर, पढ़े पूरी खबर ​​​​​​

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समाचार नामा 5 Aug 2026 3:37 pm

मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई की जमानत की शर्तों में ढील दी

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समाचार नामा 5 Aug 2026 3:27 pm

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने से सुरक्षा में सुधार पर हालात पूरी तरह सामान्य नहीं : मोहम्मद हनीफा जान

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समाचार नामा 5 Aug 2026 3:24 pm

केरल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 26 हुई, राज्य सरकार ने राहत पैकेज का किया ऐलान

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समाचार नामा 5 Aug 2026 3:08 pm

मल्लिका शेरावत के साथ नजर आए तेज प्रताप यादव, सोशल मीडिया पर शेयर किया खास वीडियो

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समाचार नामा 5 Aug 2026 3:01 pm

झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से, छात्र आंदोलन का मुद्दा गूंजेगा, सर्वदलीय बैठक में वार्ता की मांग

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समाचार नामा 5 Aug 2026 2:58 pm

कैश-फॉर-वोट मामला: कोर्ट ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री को विदेश यात्रा की दी इजाजत

कैश-फॉर-वोट मामला: कोर्ट ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री को विदेश यात्रा की दी इजाजत

समाचार नामा 5 Aug 2026 2:49 pm

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, एनसी और पीडीपी के विरोध के बीच जनजीवन रहा सामान्य

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, एनसी और पीडीपी के विरोध के बीच जनजीवन रहा सामान्य

समाचार नामा 5 Aug 2026 2:46 pm

विधानसभा का मानसून सत्र एक दिन पहले ही समाप्त, सीएम योगी बोले- विपक्ष ने विकास और सामाजिक न्याय के एजेंडे का किया विरोध

विधानसभा का मानसून सत्र एक दिन पहले ही समाप्त, सीएम योगी बोले- विपक्ष ने विकास और सामाजिक न्याय के एजेंडे का किया विरोध

समाचार नामा 5 Aug 2026 2:38 pm

Article 370 पर बदजुबानी कर रहे थे जरदारी और शहबाज शरीफ, मोदी ने खुद आगे आकर दिया करारा जवाब

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ पर पाकिस्तान ने एक बार फिर पुराना राग अलापने की कोशिश की, लेकिन उसकी इस बदजुबानी का करारा जवाब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि 5 अगस्त 2019 का ऐतिहासिक फैसला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक निर्णायक नए युग की शुरुआत था। उन्होंने दो टूक कहा कि बीते सात वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों ने विकास, सुशासन और सामाजिक सशक्तिकरण के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया, जब पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने भारत के इस संवैधानिक फैसले को लेकर फिर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विवाद खड़ा करने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने संदेश में कहा कि सात वर्ष पहले आज ही के दिन अनुच्छेद 370 और 35ए इतिहास बन गए थे और इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के विकास का नया अध्याय शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि वर्षों तक अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रहे महिलाओं, अनुसूचित वर्गों और अन्य वंचित समुदायों को अब भारतीय संविधान का पूरा संरक्षण और अधिकार मिला है। शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, उद्यमिता और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है और केंद्र सरकार इन क्षेत्रों को विकसित भारत की यात्रा का मजबूत भागीदार बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसे भी पढ़ें: PM Modi का BJP सांसदों को Generation Z मंत्र: युवाओं की सुनो, समझो और संसद में बिताओ समय प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस वर्ष अनुच्छेद 370 हटाए जाने की वर्षगांठ इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के वर्ष में पड़ रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता के लिए डॉ. मुखर्जी ने जिस संकल्प का सपना देखा था, वह 5 अगस्त 2019 को साकार हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस दिन को भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता का स्वर्णिम दिवस बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने पिछले सात वर्षों में आतंकवाद से शांति, अलगाववाद से एकीकरण और अस्थिरता से विकास की ऐतिहासिक यात्रा तय की है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने एक बार फिर 5 अगस्त को तथाकथित 'यौम-ए-इस्तेहसाल' के रूप में मनाते हुए भारत के खिलाफ बयानबाजी की। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने दावा किया कि भारत ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त कर अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर के लोगों को अपना नैतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन जारी रखेगा तथा इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहेगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इसी सुर में बयान देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान पाकिस्तान की विदेश नीति का प्रमुख आधार बना रहेगा। उन्होंने भारत पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की। वहीं उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भी भारत के 5 अगस्त 2019 के फैसले को एकतरफा बताते हुए संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की मांग दोहराई। कुल मिलाकर देखें तो पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने एक बार फिर वही पुराने आरोप लगाए, जिन्हें भारत लगातार खारिज करता रहा है। हालांकि पाकिस्तान की यह बयानबाज़ी इसलिए भी खोखली और दोगली नजर आती है क्योंकि जो देश कश्मीरियों के अधिकारों की दुहाई देता है, वही पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में अपने ही कब्जे वाले इलाके के लोगों पर दमनचक्र चला रहा है। हाल ही में खुद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने पीओजेके में आंदोलन कर रहे स्थानीय लोगों को भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन तक करार दिया। पीओजेके में असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिन्हें दबाने के लिए बल प्रयोग किया जा रहा है। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं, बिजली की आपूर्ति बाधित की गई, राशन और आवश्यक सुविधाओं पर भी असर पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी आवाज को बलपूर्वक कुचला जा रहा है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जो पाकिस्तान अपने अवैध कब्जे वाले कश्मीर में रहने वाले लोगों के साथ न्याय नहीं कर पा रहा, वह जम्मू-कश्मीर के लोगों की चिंता जताने का नैतिक अधिकार कैसे रखता है? स्पष्ट है कि कश्मीर के नाम पर पाकिस्तान की राजनीति महज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रचार और दुष्प्रचार तक सीमित रह गई है। दूसरी ओर, अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास परियोजनाओं को तेज गति मिली है। श्रीनगर को यूनेस्को क्रिएटिव सिटी और वर्ल्ड क्राफ्ट सिटी जैसी वैश्विक पहचान मिली है। डल झील में संगीत फव्वारे पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हैं। वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने क्षेत्र में बढ़े विश्वास और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की पुष्टि की है। सड़क, रेल और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है, शिक्षा और उद्यमिता के नए अवसर पैदा हुए हैं तथा स्थानीय हस्तशिल्प और पर्यटन उद्योग को नई ऊर्जा मिली है। पत्थरबाजी खत्म हो गयी है, अलगाववादी टूट चुके हैं और आतंकवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। बहरहाल, सात वर्षों बाद तस्वीर बिल्कुल साफ है। एक ओर पाकिस्तान है, जो अपने अवैध कब्जे वाले कश्मीर में रहने वाले लोगों को ही दमन, इंटरनेट बंदी, बिजली कटौती और सैन्य कार्रवाई के साये में जीने को मजबूर कर रहा है, जबकि दूसरी ओर भारत का मुकुट जम्मू-कश्मीर है, जो विकास, निवेश, पर्यटन, रोजगार और सुशासन की नई पहचान बना रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिया गया 5 अगस्त 2019 का ऐतिहासिक निर्णय केवल एक संवैधानिक बदलाव नहीं था, बल्कि जम्मू-कश्मीर को अलगाववाद और पिछड़ेपन के दौर से निकालकर विकास और राष्ट्रीय एकीकरण की मुख्यधारा में लाने वाला निर्णायक मोड़ साबित हुआ। यही वजह है कि आज पाकिस्तान के आरोपों से अधिक प्रभावशाली वह बदली हुई तस्वीर है, जिसे जम्मू-कश्मीर की धरती पर विकास, शांति और जनविश्वास के रूप में पूरी दुनिया देख रही है। -नीरज कुमार दुबे

प्रभासाक्षी 5 Aug 2026 2:26 pm

जुबान बिगड़ी हुई थी उदयनिधि की, पहली बार मिला सवा शेर, सत्ता में आते ही विजय ने धरा थलापति अवतार

1989 की 25 मार्च को तमिलनाडु विधानसभा में बजट पेश किया जा रहा था। जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके ने हाल के ही विधानसभा चुनाव में 27 सीटें जीती थीं और तमिलनाडु की विधानसभा को विपक्ष में एक महिला नेता मिली थी। उस वक्त डीएमके सरकार में थी और मुख्यमंत्री थे एम करुणानिधी। सदन में जैसे ही बजट भाषण पढ़ा जाना शुरू हुआ जयललिता और उनकी पार्टी के नेताओं ने विधानसभा में हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा इतना बढ़ा कि एआईएडीएमके के किसी नेता ने करुणानिधी की तरफ फाइल फेंकी जिससे उनका चश्मा गिरकर टूट गया। जययलिता ने जब देखा कि हंगामा ज्यादा बढ़ रहा है तो वो सदन से बाहर जाने लगी। तभी मंत्री दुरई मुरगन आ गए और उन्होंने जयललिता को बाहर जाने से रोका और उनकी साड़ी खींची जिससे उनकी साड़ी फट गई और वो खुद भी जमीन पर गिर गईं। सत्ता पक्ष यानी डीएमके और विपक्ष यानी एआईएडीएमके के सदस्यों के बीच विधानसभा में हाथा-पाई हुई। अपनी फटी हुई साड़ी के साथ जयललिता विधानसभा से बाहर आ गईं। यही वो दिन था जब जयललिता ने सदन से निकलते हुए कहा था कि वो मुख्यमंत्री बनकर ही इस सदन में वापस आएंगी वरना कभी नहीं आएंगी।कई बार जिंदगी में हुई घटना बहुत कुछ बदलकर रख देती है। कई बार इतिहास की घटनाएं ऐसी होती हैं जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। अब एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति में एक महिला का नाम चर्चा में है। इस बार विवाद अभिनेत्री तृषा कृष्णन से जुड़ा है। बयान जो सीधे तौर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के लिए था लेकिन इसमें नाम जुड़ा है एक्ट्रेस त्रिशा कृष्णन का भी। पूरा मामला समझ लेते हैं। इसे भी पढ़ें: सिर्फ एक बंदा काफ़ी है: PK से ओवैसी तक...कैसे अकेले दम पर राजनीति का रुख बदलने में लगे ये 'लोन वॉरियर्स' 3 अगस्त 2026 यानी बीते सोमवार की बात है। जब सुर्खियों में बांकीपुर और दतिया के उपचुनाव के परिणामों की चर्चा थी तब तमिलनाडु के थंजाऊर में किसानों का एक प्रदर्शन चल रहा था। कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी को लेकर विवाद है। कावेरी नदी का पानी कर्नाटक से होकर तमिलनाडु पहुंचता है। तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक की सरकार पानी ही नहीं छोड़ती। जिसकी वजह से राज्य के किसानों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। यह है मुद्दा। इसे ही लेकर तमिलनाडु में किसान संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व किसान नेता अय्या कन्नू कर रहे हैं। इस समय प्रदर्शन तेज इसलिए हुआ है क्योंकि तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा वाले इलाके में कुरवाई फसल बोई गई है। यह धान की ही फसल होती है जिसकी बुवाई जून जुलाई और सितंबर अक्टूबर में होती है। बुवाई के वक्त चाहिए होता है भरपूर पानी क्योंकि कर्नाटक ने तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी नहीं छोड़ा है। तो प्रदर्शन शुरू हो गया है। द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक कन्नू ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करने और राज्य के किसानों के लिए ₹1 लाख करोड़ के मुआवजे की मांग करने की अपील की है। कन्नू का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को हर महीने तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। अब तक कर्नाटक के पास 80 टीएमसी यानी 1000 मिलियन क्यूबिक फीट से ज्यादा पानी है। कर्नाटक के सीएम डी के शिव कुमार ने तमिलनाडु के लिए 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने से इंकार कर दिया। अगर वे पानी नहीं छोड़ते हैं तो वे कर्नाटक में नुकसान करेंगे और वे अपने लोगों और राज्य को बचाने के लिए 25,000 क्यूसेक पानी छोड़ रहे हैं। हमारे सीएम जोसेफ विजय को सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करके कर्नाटक से ₹1 लाख करोड़ की मुआवजे की मांग करनी चाहिए। प्रोटेस्ट के निशाने पर कर्नाटक सरकार के साथ-साथ तमिलनाडु की विजय सरकार भी है। तो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके के नेता उदयनिधि स्टालिन पहुंच गए थपुर जहां प्रोटेस्ट जारी था। प्रोटेस्ट के दौरान उदयनिधि स्पीच देना शुरू करते हैं। उदयनिधि ने क्या कह दिया, जो पुलिस उठा ले गई? लगातार सरकार और सीएम विजय पर निशाना साधते हैं। जब उदयनिधि बोल रहे थे तब मंच के सामने मौजूद लोग एक्ट्रेस त्रिशा कृष्णन का नाम चिल्लाने लगते हैं। उदयनिधि चुप हो जाते हैं। फिर पानी के ही रेफरेंस से एक आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं। मंच पर मौजूद और सामने खड़े लोग हंसने लगते हैं। फिर उदयनिधि एक पॉज लेते हुए कहते हैं, मैं कावेरी नदी के पानी की बात कर रहा हूं। जिसने इस बात पर मुहर ही लगा दी कि उदयनिधि के बयान को जिस तरह से समझा जा रहा है, वह असल में वही कहना भी चाह रहे थे। बयान आया तो विवाद शुरू हुआ। विजय की पार्टी टीवी ने उदयनिधि को निशाने पर ले लिया। पूर्व बीजेपी नेता के अन्नामलई ने भी इस बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा जब मैं कल वैगई नदी की सफाई कर रहा था तो मैंने सोचा क्या इससे भी बुरा प्रदूषण कहीं हो सकता है। फिर मैंने उदयनिधि स्टालिन का भाषण सुना। उदयनिधि के बयान के खिलाफ तमिलनाडु पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक थवरुर ईस्ट पुलिस ने बीएएनएस की धारा 196, 192, 352, 79, 296 बी 61, 3512 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद 4 अगस्त को तमिलनाडु पुलिस की एक टीम उदयनिधि के आवास पर पहुंच गई। पहले उनकी लीगल टीम और पुलिस के बीच बातचीत होती रही। कारवाई टालने की कोशिश हुई। लेकिन आखिरकार पुलिस ने उदयनिधि को हिरासत में ले लिया। इसे भी पढ़ें: स्पेन में जबरन क्यों घुसे हजारों मुस्लिम? डरा देगी इसके पीछे की कहानी, मेलोनी ने दी धमकी, मोदी हुए अलर्ट उदयनिधि को पहली बार सवा शेर मिला दरअसल जब तमिलनाडु में डीएमके की सरकार थी तो उदयनिधि स्टालिन कुछ भी बोलकर निकल जाते थे। कभी सनातन को डेंगू-मलेरिया कहा और इसका खात्मा करने की बात की, तो कभी हिन्दी भाषा को लेकर विवादित बयान दिया। अपनी सरकारी मशीनरी और कानूनी पेचिदगियों का इस्तेमाल कर वे हर बार निकल जाते थे। लेकिन इस बार मामला उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के खिलाफ निजी टिप्पणी का था। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की जुबान एक बार फिर बिगड़ी और इस बार नतीजा पहले से कहीं ज्यादा कठोर निकला. चेन्नई स्थित उनके घर से पुलिस ने उन्हें उठा लिया। पूर्व सीएम के बेटे उदयनिधि को पहली बार 'सवा शेर' मिला। सीएम विजय ने इस पर तत्काल कार्रवाई की और 24 घंटे से कम समय में भी एक्शन लिया। उन्होंने साफ संदेश दे दिया कि बड़बोले बयानों का जवाब अब सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि पुलिस कार्रवाई भी हो सकती है। यह घटना सिर्फ कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है। विजय की सरकार ने साफ दिखाया कि विपक्ष के नेता होने के बावजूद कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत टिप्पणियों और अभद्र बयानों से ऊपर नहीं है। CM विजय पर गुस्साए स्टालिन डीएम के नेता उदयनधि स्टालिन की गिरफ्तारी के बाद उनके पिता और डीएम के प्रमुख एमके स्टालिन ने सीएम विजय और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा अहंकार हमेशा विनाश का रास्ता दिखाता है। एमके स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस वक्त उदयनिधि को हिरासत में लिया गया वो तंजाबुर में कावेरी नदी के पानी के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। उनके मुताबिक उदयनिधि किसानों के हक की बात उठा रहे थे और सरकार की नाकामी को लोगों के सामने रख रहे थे। शालिनी ने कहा कि सीएम विजय कावेरी जल विवाद का कोई समाधान नहीं निकाल पाए हैं। इतना ही नहीं मेघदातू बांध के मुद्दे पर भी सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी। इसका सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हो रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा किसान पानी के लिए परेशान हैं। उनकी फसलें सूख रही है। लेकिन मंत्री सीएम की फिल्म देखकर भावुक हो रहे हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया। एम के स्टालिन ने यह भी आरोप लगाया कि उदयनिधि की गिरफ्तारी का असली मकसद उन्हें विधानसभा के बजट सत्र से दूर रखना था। उनका कहना है कि 5 अगस्त को बजट सत्र शुरू होना है और सरकार नहीं चाहती कि उदयनिधि उसमें हिस्सा ले। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस को सिर्फ पूछताछ ही करनी थी तो चेन्नई में भी यह काम हो सकता था। फिर उदयनिधि को तंजाबुर क्यों ले जाया गया। स्टालिन का कहना है कि इससे साफ पता चलता है कि कारवाई राजनीतिक वजहों से की गई। एम के स्टालिन ने यह भी दावा किया कि मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि उदयनिधि को उसी दिन रिहा किया जाए। उनके मुताबिक अदालत का यह आदेश सरकार के रवैया पर बड़ा झटका है और दिखाता है कि गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने सीएम विजय पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद से उनकी सरकार विरोधियों को निशाना बनाने में ज्यादा व्यस्त है। स्टालिन का आरोप है कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से विरोध की आवाज सुनने की बजाय विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कराने का रास्ता अपना रही है। उदयनिधि के बयान को लेकर भी एम के स्टालिन ने उनका बचाव किया। उन्होंने कहा कि उदयनिधि ने अपने भाषण में किसी का नाम नहीं लिया था और ना ही कोई अश्लील बात कही थी। उनका कहना है कि बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। स्टालिन ने यह भी कहा कि अगर कभी उदयनिधि से कोई गलती होती है तो वो बिना देर किए माफी मांग लेते हैं। इसीलिए इस पूरे मामले को बेवजह बड़ा बनाया जा रहा है। मद्रास कोर्ट में क्या-क्या हुआ? इसके बाद मामला मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा जहां उनकी अग्रिम जमानत पर सुनवाई हुई। सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विजय नारायण ने अदालत को बताया कि उदयनिधि स्टालिन को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है और उन्हें तंजावुर ले जाया जाएगा, लेकिन उन्हें हिरासत में रखने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा। जमानत मिलने के बाद क्या बोले उदयनिधि? जमानत मिलने के बाद उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार मद्रास कोर्ट में कह रही थी कि मुझे गिरफ्तार करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन पूछताछ के नाम पर करीब 3,000 पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। मुझे चेन्नई से तंजावुर सड़क मार्ग से ऐसे ले जाया गया, जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं। महिलाओं को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं उदयनिधि तृषा कृष्णन को लेकर हुआ यह विवाद कोई पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन महिलाओं पर दिए गए बयानों से फंसे हों। इससे पहले भी वह कई बार ऐसे बयानों के कारण आलोचना झेल चुके हैं। कुछ समय पहले जब वह मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पर हमला बोल रहे थे, तब उन्होंने विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम का नाम भी बीच में घसीट लिया था। उन्होंने उनके निजी जीवन से जुड़ी खबरों को अपने राजनीतिक भाषण का मुख्य हिस्सा बनाया था। उस समय भी विपक्ष ने उन पर यह गंभीर आरोप लगाया था कि वह अपनी राजनीतिक लड़ाई जीतने के लिए परिवार की महिलाओं को बीच में लेकर आते हैं। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला था। परिस्थितियाँ भिन्न, मगर सोच वही पुरानी वर्ष 1989 में तमिलनाडु विधानसभा के भीतर जयललिता के साथ हुई बदसलूकी और हाल ही में तृषा कृष्णन पर हुई विवादित छींटाकशी—दिखने में ये दोनों घटनाएँ बिल्कुल अलग हैं। एक तरफ जहाँ लोकतांत्रिक सदन की मर्यादा तार-तार हुई थी और सीधा शारीरिक हमला हुआ था, वहीं दूसरी तरफ एक राजनीतिक मंच से सरेआम घटिया और अमर्यादित बयानबाज़ी की गई। इन दोनों घटनाओं के दौर, स्थान और तरीके भले बदल गए हों, लेकिन इनके पीछे की मानसिकता रत्ती भर नहीं बदली। ये दोनों मामले घूम-फिरकर एक ही कड़वे और गंभीर सवाल पर लाकर खड़ा करते हैं—आखिर तमिलनाडु के सियासी अखाड़े में बार-बार महिलाओं को ही सॉफ्ट टारगेट क्यों बनाया जाता है? अपनी राजनीतिक रंजिशों और गंदे शह-मात के खेल में आख़िर कब तक महिलाओं के सम्मान को ढाल बनाया जाता रहेगा?

प्रभासाक्षी 5 Aug 2026 2:24 pm

उन्नत बचपन की पहली शर्त- स्वस्थ भोजन, स्वस्थ भविष्य

विकसित भारत का स्वप्न केवल आधुनिक इमारतों, तेज अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और विश्वस्तरीय आधारभूत संरचनाओं से पूरा नहीं होगा। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे होते हैं। यदि बचपन स्वस्थ, संस्कारित, ऊर्जावान और मानसिक रूप से सुदृढ़ है, तो राष्ट्र का भविष्य स्वतः सुरक्षित हो जाता है। यदि बचपन ही अस्वस्थ, मोटापे, मधुमेह, कुपोषण और गलत खान-पान की आदतों से घिर जाए, तो विकास की पूरी अवधारणा खोखली सिद्ध होने लगती है। इसलिए बच्चों का स्वास्थ्य केवल स्वास्थ्य मंत्रालय का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य के सभी स्कूलों और उनके आसपास जंक फूड की बिक्री, वितरण तथा प्रचार पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय इसी व्यापक दृष्टि का परिचायक है। यह केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व का गंभीर संदेश है। यह स्वीकार करने का साहसिक प्रयास है कि बच्चों की सेहत बाजार के मुनाफे से कहीं अधिक मूल्यवान है। यदि यह निर्णय प्रभावी ढंग से लागू होता है तो यह पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है। आज सबसे बड़ी चिंता यह नहीं है कि बच्चे भोजन कम खा रहे हैं, बल्कि यह है कि वे पोषण कम और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ अधिक खा रहे हैं। रंग-बिरंगे पैकेट, आकर्षक विज्ञापन, कार्टून पात्रों की ब्रांडिंग, सोशल मीडिया का प्रभाव और हर गली-मोहल्ले में उपलब्ध फास्ट फूड ने बच्चों की स्वादेंद्रियों पर ऐसा कब्जा कर लिया है कि घर का पौष्टिक भोजन उन्हें फीका लगने लगा है। यह परिवर्तन केवल खान-पान की आदत का बदलाव नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे उनके शरीर, मस्तिष्क और व्यवहार को भी प्रभावित कर रहा है। वैज्ञानिक शोध लगातार यह बताते रहे हैं कि अधिक वसा, अधिक नमक और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ बच्चों में मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, हार्मोन असंतुलन तथा मानसिक एकाग्रता में कमी जैसी अनेक समस्याओं का कारण बन रहे हैं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि जो बीमारियां पहले चालीस-पचास वर्ष की आयु में दिखाई देती थीं, वे अब किशोरावस्था और बचपन में ही दस्तक देने लगी हैं। यह केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि आने वाले समय में देश की उत्पादक क्षमता और मानव संसाधन पर भी गहरा प्रभाव डालने वाला संकट है। इसे भी पढ़ें: FSSAI का Dabur India पर बड़ा एक्शन! '100% शुद्ध' और 'ऑर्गेनिक' के गुमराह करने वाले दावों पर लगी रोक, 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट बचपन की सबसे बड़ी आवश्यकता स्वाद नहीं, पोषण है। शरीर के विकास के साथ-साथ मस्तिष्क का तीव्र विकास भी बचपन में ही होता है। यदि इस अवस्था में बच्चों को संतुलित भोजन, ताजे फल, हरी सब्जियां, दूध, दालें, मोटे अनाज और प्राकृतिक खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में मिलें, तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास कहीं अधिक प्रभावी होता है। इसके विपरीत जंक फूड क्षणिक स्वाद तो देता है, लेकिन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं देता। परिणामस्वरूप बच्चा बाहर से स्वस्थ दिखाई देता है, किंतु भीतर से अनेक पोषण संबंधी कमियों का शिकार बनने लगता है। दुर्भाग्य यह है कि जंक फूड आज केवल भोजन नहीं रहा, बल्कि एक आक्रामक व्यावसायिक संस्कृति बन चुका है। विज्ञापनों के माध्यम से बच्चों के मन में यह धारणा बैठा दी गई है कि आधुनिकता का अर्थ पैकेटबंद भोजन है। लोकप्रिय खिलाड़ी, फिल्मी कलाकार और डिजिटल प्रभावक अनजाने में बच्चों को ऐसे उत्पादों की ओर आकर्षित करते हैं, जिनका अत्यधिक सेवन उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ऐसे में केवल परिवारों को दोष देना उचित नहीं होगा। सरकार, उद्योग, विद्यालय, अभिभावक और समाज-सभी को अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि जीवनशैली का निर्माण करने वाली प्रयोगशाला भी हैं। यदि स्कूल परिसर में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए, पोषण शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, विद्यालयों में रसोई बाग विकसित किए जाएं, बच्चों को स्वयं पौधे लगाने और प्राकृतिक भोजन के महत्व से जोड़ा जाए, तो यह परिवर्तन अधिक स्थायी होगा। केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। स्वस्थ विकल्पों को स्वादिष्ट, आकर्षक और सुलभ बनाना भी उतना ही आवश्यक है। भारत की पारंपरिक भोजन संस्कृति विश्व की सबसे संतुलित और वैज्ञानिक भोजन प्रणालियों में मानी जाती है। बाजरा, ज्वार, रागी, दालें, छाछ, दही, अंकुरित अनाज, मौसमी फल, सब्जियां और घर का ताजा भोजन हमारे पूर्वजों की स्वस्थ जीवनशैली की पहचान रहे हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम आधुनिकता के नाम पर अपनी इस समृद्ध खाद्य संस्कृति को त्यागने के बजाय उसे नए स्वरूप में बच्चों तक पहुंचाएं। यदि विद्यालयों की कैंटीन में स्थानीय और पारंपरिक पौष्टिक व्यंजन उपलब्ध कराए जाएं, तो बच्चे धीरे-धीरे उसी स्वाद के अभ्यस्त हो सकते हैं। यह भी समझना होगा कि जंक फूड का प्रश्न केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अस्वस्थ बचपन का अर्थ है भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता खर्च, कार्यक्षमता में कमी, उत्पादकता का ह्रास और राष्ट्रीय आय पर प्रतिकूल प्रभाव। आज यदि बच्चों के पोषण पर निवेश किया जाता है तो वह आने वाले दशकों में स्वस्थ, सक्षम और नवाचारी नागरिकों के रूप में अनेक गुना लाभ देता है। इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य पर खर्च को व्यय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सबसे लाभकारी निवेश माना जाना चाहिए। अभिभावकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि घर में ही पैकेटबंद स्नैक्स, शीतल पेय और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ नियमित रूप से उपलब्ध होंगे, तो बच्चे उनसे दूर नहीं रह पाएंगे। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने आसपास देखते हैं। यदि परिवार स्वयं संतुलित भोजन करेगा, साथ बैठकर भोजन करने की परंपरा विकसित करेगा और बच्चों को रसोई से जोड़कर भोजन बनाने की प्रक्रिया में सहभागी बनाएगा, तो उनमें स्वस्थ भोजन के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित होगी। सरकारों को भी केवल स्कूलों तक सीमित न रहकर व्यापक नीति अपनानी होगी। बच्चों को लक्षित करने वाले भ्रामक खाद्य विज्ञापनों पर नियंत्रण, पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी, अत्यधिक चीनी और नमक वाले उत्पादों की पहचान को सरल बनाना, खेल मैदानों की संख्या बढ़ाना, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण जागरूकता अभियान तथा स्थानीय स्तर पर सामुदायिक भागीदारी जैसे कदम समान रूप से आवश्यक हैं। यदि स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग मिलकर साझा रणनीति बनाएं तो परिणाम कहीं अधिक प्रभावी होंगे। आज समय की मांग है कि जंक फूड के विरुद्ध संघर्ष को केवल प्रतिबंध तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे स्वस्थ जीवनशैली के राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप दिया जाए। जिस प्रकार स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाया, उसी प्रकार स्वस्थ भोजन और पोषण को भी राष्ट्रीय जन-जागरण का विषय बनाया जाना चाहिए। बच्चों को यह समझाना होगा कि वास्तविक ऊर्जा किसी पैकेट में नहीं, बल्कि प्रकृति के निकट रहने वाले भोजन में छिपी है। महाराष्ट्र सरकार का निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने यह स्वीकार किया है कि बच्चों का स्वास्थ्य किसी भी राजनीतिक या आर्थिक हित से बड़ा है। अब आवश्यकता इस बात की है कि देश के सभी राज्य इस दिशा में समान साहस और दूरदर्शिता दिखाएं। विकसित भारत की आधारशिला स्मार्ट शहर नहीं, बल्कि स्वस्थ बच्चे हैं। यदि बचपन सुरक्षित रहेगा तो भविष्य सुरक्षित रहेगा। यदि बच्चों की थाली पौष्टिक होगी तो राष्ट्र की प्रगति भी संतुलित होगी। आने वाले भारत की पहचान केवल तकनीकी शक्ति से नहीं, बल्कि स्वस्थ, सशक्त, अनुशासित और जागरूक नई पीढ़ी से होगी। इसलिए आज का सबसे बड़ा राष्ट्रीय संकल्प यही होना चाहिए कि हर बच्चे को ऐसा वातावरण मिले, जहाँ स्वाद से पहले स्वास्थ्य, सुविधा से पहले पोषण और तात्कालिक आकर्षण से पहले दीर्घकालिक जीवन-सुरक्षा को महत्व दिया जाए। यही उन्नत बचपन का मार्ग है और यही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव। - ललित गर्ग लेखक, पत्रकार, स्तंभकार

प्रभासाक्षी 5 Aug 2026 2:22 pm