'छात्र हितों पर कांग्रेस का असली चेहरा बेनकाब', कर्नाटक परीक्षा विवाद पर सुधांशु त्रिवेदी
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पंजाब विधानसभा ने बार-बार पेपर लीक होने के खिलाफ प्रस्ताव पास किया
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मिल्मा ने सबरीमाला घी घोटाले में किसी भी भूमिका को किया खारिज, कथित मिलावट पर उठाए सवाल
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संसद कार्यवाही के बाद जदयू कार्यालय पहुंचे नीतीश कुमार, बोले- पार्टी की ताकत समर्पित कार्यकर्ता
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चुनौतियों के बावजूद मणिपुर में शांति लौट रही है: सीएम खेमचंद सिंह
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भाजपा की आत्मनिर्भर भारत संकल्प जनसभा में विधानसभा चुनाव का भरा गया बिगुल, पंकज चौधरी ने विपक्ष पर साधा निशाना
'जॉब नहीं मिलेगा तो सिंहासन हिलेगा....'8 अगस्त को प्रयागराज में छात्रों से मिलेंगे राहुल गांधी, जानें पूरा प्लान
पेपर लीक के खिलाफ 5 अगस्त को पंजाब विधानसभा का घेराव: एबीवीपी
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दिल्ली: सीएम रेखा गुप्ता ने पंजाबी बाग मेट्रो स्टेशन पर पुराने कपड़े दान केंद्र का किया उद्घाटन
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कांग्रेस की कथनी-करनी में फर्क, महिलाओं, छात्रों और सनातन पर दोहरा रवैया : रोहन गुप्ता
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संसद में दो बिल पास हुए, मुझे दुख है कि विपक्ष ने कुछ नहीं कहा और सिर्फ हंगामा किया : किरेन रिजिजू
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कर्नाटक : कैबिनेट विस्तार से कांग्रेस में फिर असंतोष, सीएम शिवकुमार की धैर्य रखने की अपील
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ओडिशा सरकार ने बाढ़ राहत के काम तेज किए, 8 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
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असम में बाढ़ से बर्बाद हुए गांवों को फिर से बसाना पड़ सकता है: हिमंत बिस्वा सरमा
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‘भाजपा के बुरे दिन का दौर शुरू’, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत पर विपक्ष
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सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल लोकसभा में हुआ पारित
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बार-बार बाधा डाले जाने से परेशान हनुमान बेनीवाल चूरू के कार्यक्रम से बाहर निकले
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गुरु पूर्णिमा के अवसर नाना पटोले का पैर धोते वीडियो वायरल, संजय निरुपम ने बताया 'बेहद शर्मनाक'
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महाराष्ट्र: जाति-आधारित जनगणना जरूरी: विजय वडेट्टीवार
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पीएम मोदी और अमित शाह सदन में आकर चढ़ावा चोरी और छात्रों पर की गई बर्बरता पर जवाब दें: खड़गे
पीएम मोदी और अमित शाह सदन में आकर चढ़ावा चोरी और छात्रों पर की गई बर्बरता पर जवाब दें: खड़गे
पैलेट गन आदेश और 20 जुलाई की बर्बरता पर सरकार दे जवाब, कोर्ट का आदेश छात्रों की जीत : सीजेपी
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नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने टीएमसी से दिया इस्तीफा, चार महीने पहले जॉइन की थी पार्टी
नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने टीएमसी से दिया इस्तीफा, चार महीने पहले जॉइन की थी पार्टी
Chai Par Sameeksha: PM ने गाली देने वालों को किया माफ, क्या Gen Z भी अब मोदी मोदी के नारे लगाएंगे?
प्रभासाक्षी की साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में हमने इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माफी वाले वीडियो और संसद में जारी हंगामे पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। नीरज कुमार दुबे से हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा जिन लोगों ने उन्हें गाली दिया था उनको माफ किए जाने पर सवाल पूछा। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री ने बड़ा दिल दिखाते हुए इन बच्चों को माफ किया। बच्चे इस देश के भविष्य हैं। लेकिन बच्चों को भी अपने संस्कार खुद के भीतर रखना चाहिए। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजकल आधी रात को इंस्टाग्राम पर वीडियो डाल रहे हैं। नीरज दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री को पता है कि जो जेन जी हैं, वह किस समय सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव होते है। इसलिए वह रात को 11:00 बजे अपना वीडियो डालते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरीके से इस प्रदर्शन के बाद जो विशाल हृदय दिखाया है, वह अपने आप में काबिले तारीफ है। प्रधानमंत्री ने सभी को माफ कर दिया। हालांकि उनके मां तक को गाली दिया गया था। इसे भी पढ़ें: PM Modi को अपशब्द कहने वाली नाबालिग पर नहीं दर्ज हुई रेगुलर FIR, दिल्ली पुलिस का खुलासा, पीएम की माफी के बाद मिली नई जिंदगी नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जिस तरीके से छात्रों पर जो लाठी चार्ज हुआ या फिर जो पैलेट गन चला, उसको लेकर जो हंगामा हो रहा है इस पर भी सोचने की जरूरत है। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि जिस तरीके से छात्र संसद तक पहुंच गए थे, अगर यह प्रवेश कर जाते तो पूरे विश्व में किस तरीके का भारत की तस्वीर जाती। यह अपने आप में शर्मनाक रहता। उन्होंने कहा कि जो लोग आज लाठी चार्ज या फिर पैलेट गन को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं, वह उस दिन साफ तौर पर कहते कि इस देश का सुरक्षा व्यवस्था खत्म हो गया है तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। लेकिन कहीं ना कहीं इसको लेकर सियासत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी मौके पर मौजूद होता है, वही पैलेट गन या फिर किसी तरीके के कार्यवाही का आदेश देता है। उससे गृह मंत्री या प्रधानमंत्री का कोई लेना देना नहीं होता है। हमने संसद में जारी हंगामे को लेकर भी नीरज दुबे से सवाल पूछा। नीरज दुबे ने कहा कि देखिए ऐसा है कि हम बार-बार कहते रहे हैं कि संसद सत्र में विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेरने की कोशिश करता है और उसमें उसे कामयाबी भी मिलती है। फिलहाल जो छात्र आंदोलन हुआ, उसमें विपक्ष को बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलता दिख रहा है। इसलिए वह संसद को बार-बार डिस्टर्ब करने की कोशिश कर रहे हैं। संसद को डिस्टर्ब करने का एक बड़ा मकसद डीलिमिटेशन बिल आना है।
लोकसभा की कार्यवाही फिर बाधित, विपक्ष ने मांगा जवाब, सत्ता पक्ष ने लगाया सदन नहीं चलने देने का आरोप
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संघ प्रमुख मोहन भागवत 6 अगस्त को मुंबई में 'जेन जी' से बातचीत करेंगे
मुंबई, 3 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत 6 अगस्त को मुंबई में 'जेन जी' और 'जेनरेशन अल्फा' के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे।
केरल में तेज हुआ एलपी रैंक होल्डर्स का विरोध-प्रदर्शन; भाजपा और फिल्मी हस्तियों ने आंदोलन का किया समर्थन
दिल्ली लक्ष्मी योजना: 1.54 लाख महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया, 10,723 आवेदन जमा
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16वें भारतीय अंग दान दिवस पर अनुप्रिया पटेल बोलीं- 'अंग दान करुणा का सबसे बड़ा उदाहरण'
नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। देश में 16वां 'भारतीय अंग दान दिवस' सोमवार को नई दिल्ली में धूमधाम से मनाया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत 'नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन' (एनओटीटीओ) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
कई सालों की सेवा के बाद भी कैबिनेट में जगह नहीं मिलना निराशाजनक : दिनेश गुंडू राव
कई सालों की सेवा के बाद भी कैबिनेट में जगह नहीं मिलना निराशाजनक : दिनेश गुंडू राव
मद्रास हाईकोर्ट ने सीएम विजय को धमकी देने वाले डीएमके विधायक मार्कंडेयन को दी जमानत
मद्रास हाईकोर्ट ने सीएम विजय को धमकी देने वाले डीएमके विधायक मार्कंडेयन को दी जमानत
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, भाजपा उम्मीदवार को 6000 से ज्यादा वोटों से दी शिकस्त
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, भाजपा उम्मीदवार को 6000 से ज्यादा वोटों से दी शिकस्त
किसी भी धर्म से जुड़ी धार्मिक गतिविधि में सरकारी मशीनरी शामिल नहीं होनी चाहिए: टीएस सिंह देव
किसी भी धर्म से जुड़ी धार्मिक गतिविधि में सरकारी मशीनरी शामिल नहीं होनी चाहिए: टीएस सिंह देव
कर्नाटक: मुख्यमंत्री की मौजूदगी में राज्यपाल ने 20 विधायकों को दिलाई मंत्री पद की शपथ
कर्नाटक: मुख्यमंत्री की मौजूदगी में राज्यपाल ने 20 विधायकों को दिलाई मंत्री पद की शपथ
पुणे में नॉर्थ-ईस्ट के छात्रों के लिए बनेगा हॉस्टल, मणिपुर के उपमुख्यमंत्री ने रखी आधारशिला
पुणे में नॉर्थ-ईस्ट के छात्रों के लिए बनेगा हॉस्टल, मणिपुर के उपमुख्यमंत्री ने रखी आधारशिला
विपक्ष को मिला चर्चा के लिए पर्याप्त समय, फिर भी नहीं हुई चर्चा: जगदंबिका पाल
विपक्ष को मिला चर्चा के लिए पर्याप्त समय, फिर भी नहीं हुई चर्चा: जगदंबिका पाल
राम मंदिर पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष के नेता प्रायश्चित करें: दयाशंकर सिंह
राम मंदिर पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष के नेता प्रायश्चित करें: दयाशंकर सिंह
मांजलपुर में कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को जनता ने पूरी तरह नकार दिया : अनिलभाई पटेल
मांजलपुर में कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को जनता ने पूरी तरह नकार दिया : अनिलभाई पटेल
वैश्विक ऊर्जा और वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से बढ़ी थोक महंगाई: सरकार
वैश्विक ऊर्जा और वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से बढ़ी थोक महंगाई: सरकार
'वंदे मातरम' से विधानसभा सत्र का शुरुआत होना ऐतिहासिक कदम: दानिश आजाद
'वंदे मातरम' से विधानसभा सत्र का शुरुआत होना ऐतिहासिक कदम: दानिश आजाद
जांच में कमियां रही होंगी, जिसकी वजह से बृजभूषण सिंह को किया गया बरीः प्रियंका चतुर्वेदी
जांच में कमियां रही होंगी, जिसकी वजह से बृजभूषण सिंह को किया गया बरीः प्रियंका चतुर्वेदी
हंगामा करने के बजाय चर्चा में विपक्षी सांसदों को हिस्सा लेना चाहिए : नकवी
हंगामा करने के बजाय चर्चा में विपक्षी सांसदों को हिस्सा लेना चाहिए : नकवी
बांकीपुर में बढ़त के बीच प्रशांत किशोर का बीजेपी पर हमला, बोले- 'अपराधी को CM बनाएंगे तो तरक्की नहीं होगी'
बृजभूषण शरण सिंह को बरी करने से गलत संदेश गया है : हर्षवर्द्धन सपकाल
बृजभूषण शरण सिंह को बरी करने से गलत संदेश गया है : हर्षवर्द्धन सपकाल
गुजरात उपचुनाव: भाजपा के सतीश पटेल ने मांजलपुर सीट 30,000 से ज्यादा वोटों से जीती
गुजरात उपचुनाव: भाजपा के सतीश पटेल ने मांजलपुर सीट 30,000 से ज्यादा वोटों से जीती
बिहार से गुजरात तक उपचुनाव के नतीजे, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बढ़त; MP में कांग्रेस मजबूत
बिहार से गुजरात तक उपचुनाव के नतीजे, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बढ़त; MP में कांग्रेस मजबूत
वित्त मंत्रालय ने EPF वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद लाखों कर्मचारियों को EPF और EPS का लाभ मिलेगा।
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: कांग्रेस ने अनुभव और नए चेहरों के बीच बनाया संतुलन, नागेंद्र को शामिल करना चौंकाने वाला फैसला
भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर संसद का 'मजाक उड़ाने' का लगाया आरोप, कहा- 'वो सदन नहीं चलने दे रहे'
भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर संसद का 'मजाक उड़ाने' का लगाया आरोप, कहा- 'वो सदन नहीं चलने दे रहे'
पप्पू यादव पर हुए हमले की सच्चाई जल्द आएगी सामने, इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिएः नीरज कुमार
पप्पू यादव पर हुए हमले की सच्चाई जल्द आएगी सामने, इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिएः नीरज कुमार
पाकिस्तान: पीओके में हालात नियंत्रण से बाहर, आधी रात को प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग
पाकिस्तान: पीओके में हालात नियंत्रण से बाहर, आधी रात को प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग
गुजरात के वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के सतीश गोविंदभाई पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को 30,630 वोटों से हराया।
हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को 15 दिनों के अंदर महंगाई भत्ते का बकाया चुकाने का निर्देश दिया
हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को 15 दिनों के अंदर महंगाई भत्ते का बकाया चुकाने का निर्देश दिया
केरल के सीएम बोले- 'बाढ़ से निपटने में कोई कोताही नहीं', हेलीकॉप्टर यात्रा विवाद पर भी मुख्यमंत्री ने दिया जवाब
शिक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा उठेगा, हमारा संगठन छात्रों के साथ खड़ा रहेगा: अभिजीत दिपके
शिक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा उठेगा, हमारा संगठन छात्रों के साथ खड़ा रहेगा: अभिजीत दिपके
भारत के खिलाफ चीन और पाकिस्तान की सैन्य तैयारियां अब किसी अनुमान का विषय नहीं रह गई हैं, बल्कि जमीन और आसमान दोनों मोर्चों पर उनकी रणनीतिक तैनाती खुलकर दिखाई देने लगी है। एक ओर पाकिस्तान ने चीन से प्राप्त अत्याधुनिक SH-15 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोपों को जम्मू-कश्मीर और पंजाब सेक्टर में भारत के सामने बड़ी संख्या में तैनात कर दिया है, वहीं दूसरी ओर चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के सामने अपने सबसे आधुनिक J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमानों की बड़ी तैनाती कर दी है। यह घटनाक्रम भारत पर निरंतर दबाव बनाए रखने की चीन-पाकिस्तान की साझा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि भारत भी अपनी सैन्य क्षमताओं का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है और स्पष्ट संकेत दे चुका है कि उसकी सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती देने की किसी भी कोशिश की कीमत बेहद भारी होगी। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान ने वर्ष 2019 में चीन की सरकारी रक्षा कंपनी नोरिन्को से 236 SH-15 पहिएदार सेल्फ-प्रोपेल्ड तोपों का सौदा किया था। इनकी आपूर्ति 2022 से शुरू हुई और 2023 में दूसरी खेप भी पाकिस्तान पहुंच गई। इतना ही नहीं, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) समझौते के तहत पाकिस्तान ने टैक्सिला स्थित हेवी इंडस्ट्रीज प्लांट में इन तोपों के स्थानीय उत्पादन का लाइसेंस भी प्राप्त कर लिया है। यह कदम पाकिस्तानी सेना की तोपखाना क्षमता को आधुनिक और मानकीकृत बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसे भी पढ़ें: बीजिंग Embassy के ओपन हाउस में भारतीय समुदाय ने उठाए वीजा और सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दे इन SH-15 तोपों की तैनाती मुख्य रूप से भारत से सटे गुजरांवाला, सियालकोट और जलालपुर जट्टन क्षेत्रों में की गई है, जो रणनीतिक रूप से शकरगढ़ बल्ज के पीछे स्थित हैं। शकरगढ़ बल्ज जम्मू के दक्षिण और अमृतसर के उत्तर के बीच का वह संवेदनशील इलाका है, जिसके पूर्व में पठानकोट स्थित है। रक्षा सूत्रों के अनुसार इन्हीं आधुनिक तोपों का उपयोग पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी किया था। उत्तरी पंजाब और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में SH-15 तैनात हैं, जबकि राजस्थान और गुजरात के रेगिस्तानी मोर्चों पर अमेरिका से प्राप्त M-109 ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड गनों को लगाया गया है। रेगिस्तानी इलाकों में M-109 अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं, जबकि SH-15 मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में तेज गति से संचालन के लिए डिजाइन की गई है। हम आपको बता दें कि 52 कैलिबर वाली SH-15 पाकिस्तान की पहली ऐसी आधुनिक तोप प्रणाली है, जो 155 मिमी गोले दागने में सक्षम है। रॉकेट-सहायता प्राप्त प्रोजेक्टाइल के साथ इसकी मारक क्षमता 50 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। लंबी दूरी, बेहतर सटीकता और तेज गतिशीलता इसे पारंपरिक तोपों की तुलना में अधिक प्रभावी बनाती है। स्पष्ट है कि पाकिस्तान अपनी पारंपरिक तोपखाना क्षमता को चीन की तकनीक के सहारे अगले स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है। उधर, चीन ने भी भारत के सामने अपने सैन्य दबाव को और बढ़ाने के संकेत दिए हैं। व्यावसायिक उपग्रह चित्रों से पता चला है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) ने कम से कम 12 J-20 माइटी ड्रैगन स्टील्थ लड़ाकू विमानों को भारत के निकट दो अग्रिम एयरबेस पर तैनात किया है। 9 जुलाई को लिए गए चित्रों में शिनजियांग के होतान एयरबेस पर आठ J-20 दिखाई दिए, जबकि 25 जून के उपग्रह चित्रों में तिब्बत के दामशुंग एयरबेस पर चार अन्य J-20 सुरक्षात्मक शेल्टरों के नीचे खड़े नजर आए। हम आपको बता दें कि होटान एयरबेस भारत के दौलत बेग ओल्डी एयरबेस से लगभग 245 किलोमीटर तथा लेह से करीब 389 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं दामशुंग एयरबेस अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर से लगभग 344 किलोमीटर दूर है। इतने कम समय में दो अलग-अलग अग्रिम एयरबेस पर J-20 की इतनी बड़ी संख्या में मौजूदगी हाल के वर्षों में भारत के सामने चीन की सबसे बड़ी ज्ञात स्टील्थ फाइटर तैनातियों में से एक मानी जा रही है। हम आपको बता दें कि J-20 चीन का सबसे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे कम रडार पहचान क्षमता, लंबी दूरी की मारक क्षमता और उन्नत सेंसर प्रणाली के साथ विकसित किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों की लगातार बढ़ती अग्रिम तैनाती अब किसी अस्थायी अभ्यास का हिस्सा नहीं, बल्कि चीन की स्थायी सैन्य नीति का संकेत है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 2020 की गलवान झड़प के बाद से सैन्य तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के बावजूद अग्रिम मोर्चों पर सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों और आधुनिक हवाई संसाधनों की भारी तैनाती बनी हुई है। हालांकि इन चुनौतियों के समानांतर भारत भी अपनी सैन्य शक्ति को तेज़ी से आधुनिक बना रहा है। फील्ड आर्टिलरी रैशनलाइजेशन प्लान के तहत भारतीय सेना अपनी अधिकांश तोपों को 155 मिमी प्रणाली में परिवर्तित कर रही है। M777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर, K-9 वज्र और स्वदेशी धनुष तोप पहले ही सेना में शामिल हो चुकी हैं। इसके अलावा 307 स्वदेशी एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) का ऑर्डर दिया जा चुका है। SH-15 जैसी स्वदेशी पहिएदार माउंटेड गन सिस्टम (MGS) भी विकास के अंतिम चरण में है और इसके प्रारंभिक परीक्षण सफल रहे हैं। वायु शक्ति के क्षेत्र में भी भारत अपनी क्षमताओं के विस्तार पर काम कर रहा है, भले ही तेजस Mk1A कार्यक्रम में देरी और नए बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया अभी जारी है। सामरिक दृष्टि से यह पूरा घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और उत्तरी सीमा पर चीन की समानांतर सैन्य सक्रियता इस बात का संकेत है कि दोनों देश भारत पर निरंतर रणनीतिक दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। आधुनिक तोपों, स्टील्थ लड़ाकू विमानों और सीमा क्षेत्रों में सैन्य ढांचे के विस्तार का उद्देश्य केवल रक्षा तैयारियां नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामरिक बढ़त हासिल करना भी है। लेकिन भारत ने हालिया वर्षों में स्पष्ट कर दिया है कि वह आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक जवाब देने की क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों रखता है। ऐसे में यदि कोई भी शक्ति भारत की सुरक्षा, संप्रभुता या सीमाओं को हल्के में लेने की भूल करती है, तो उसे इसकी कीमत केवल सामरिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी चुकानी पड़ सकती है। - नीरज कुमार दुबे
'दोगले विचार नहीं चलेंगे'... कंगना रनौत का नया वीडियो वायरल, GenZ को दी ये बड़ी सलाह
'दोगले विचार नहीं चलेंगे'...कंगना रनौत का नया वीडियो वायरल, GenZ को दी ये बड़ी सलाह
केरल में लगातार बारिश से बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति, मुख्यमंत्री सतीशन ने बुलाई आपातकालीन बैठक
केरल में लगातार बारिश से बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति, मुख्यमंत्री सतीशन ने बुलाई आपातकालीन बैठक
भाजपा सांसदों का विपक्ष पर तंज, कहा-विपक्ष नियमों और संसदीय मर्यादा के खिलाफ कर रहा काम
भाजपा सांसदों का विपक्ष पर तंज, कहा-विपक्ष नियमों और संसदीय मर्यादा के खिलाफ कर रहा काम
कांग्रेस सांसदों ने सदन में अमित शाह का मांगा जवाब, कहा-गृह मंत्री उपस्थित होकर हर मामले पर दें जवाब
कांग्रेस सांसदों ने सदन में अमित शाह का मांगा जवाब, कहा-गृह मंत्री उपस्थित होकर हर मामले पर दें जवाब
बांकीपुर उपचुनाव : प्रशांत किशोर की बढ़त बरकरार, जन सुराज कार्यालय में जश्न शुरू
बांकीपुर उपचुनाव : प्रशांत किशोर की बढ़त बरकरार, जन सुराज कार्यालय में जश्न शुरू
केरल: मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल पर राजनीतिक विवाद, विपक्ष ने साधा निशाना
केरल: मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल पर राजनीतिक विवाद, विपक्ष ने साधा निशाना
संसद परिसर में प्रदर्शन के दौरान भगवा पहनने पर पप्पू यादव बोले-'इसमें अपमान की क्या बात है?'
संसद परिसर में प्रदर्शन के दौरान भगवा पहनने पर पप्पू यादव बोले-'इसमें अपमान की क्या बात है?'
जम्मू-कश्मीर: सरकार ने अनंतनाग में धार्मिक स्थलों के संरक्षण और सुधार के लिए 10.95 करोड़ की मंजूरी दी
बेटी की दूसरी बरसी से पहले आरजी कर दुष्कर्म पीड़िता की मां विधायक रत्ना देबनाथ सात दिन एकांतवास में रहेंगी
'आईएसआई बिल' पर चर्चा के लिए संसदीय स्थायी समिति के पास भेजने की मांग, सांसद राजा राम सिंह ने मंत्री राव इंद्रजीत को लिखा पत्र
भारत द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK/PoJK) में कथित सरकारी दमन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही की अपील केवल एक मानवीय बयान नहीं, बल्कि एक बहु-स्तरीय कूटनीतिक रणनीति भी मानी जा रही है। हाल के दिनों में भारत ने पाकिस्तान से क्षेत्र में नागरिकों के साथ हुए कथित दमन पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। दरअसल किसी भी तानाशाह देश में जब चुनाव भरोसे का संकट बन जाए, तो जनता का उद्वेलित होना स्वाभाविक है। पाक अधिकृत कश्मीर/जम्मू-कश्मीर में आजकल यही हो रहा है।वहां पर इन दिनों एक ही नारा गूंज रहा है, वह यह कि Justice for PoJK, End Our Exile! अर्थात POJK के लिए न्याय, हमारा निर्वासन समाप्त करो! यही वजह है कि भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK/PoJK) में सरकारी दमन रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है। इसे भी पढ़ें: Dhurandhar Style में Lyari की सड़कों पर बहा खून, Gangster Uzair Baloch के भाई Zubair को गोलियों से भून डाला भारत की यह अपील वहां के हालात के मद्देनजर बिल्कुल सही वक्त पर उठाया हुआ उचित कदम है। इससे वहां के आंदोलनकारियों को कूटनीतिक ऑक्सीजन मिली है। यदि बलूच विद्रोहियों का उन्हें साथ मिल जाये तो सोने पर सुहागा समझिए। भारत की सहानुभूति दोनों पक्षों से है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक मर्यादा के चलते भारत खुलकर इनका साथ नहीं दे सकता है, जबकि मानवता और लोकतंत्र के नाम पर वह पाकिस्तानी हुक्मरानों को घेर सकता है। इसलिए भारत ने वही किया है, जो सबके लिए उचित है। वैश्विक दुनियादारी के नकाबपोशों के नकाब उतारने के लिए भारत ने अंतर्राष्ट्रीय विरादरी से साफ कहा है कि पाकिस्तानी सरकार की कार्रवाई में PoK में 40 नागरिकों की मौत हुई है, जबकि वहां लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि यह मामला वहां हो रहे चुनावों से जुड़ा है। पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में 45 सीटों के लिए असेंबली इलेक्शन हो रहे हैं। ये चुनाव तीन चरणों में कराए जा रहे हैं, जो 10 अगस्त को पूरे होंगे। यहां विधानसभा की 53 सीटें हैं। इनमें से 45 पर सीधा चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रैट्स और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित हैं। इसी चुनाव में हुई जबरदस्त धांधली के बाद पीओके की जनता भड़क गई है। गत 27 जुलाई को पहले चरण का चुनाव हुआ, जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) ने 13 में से 9 सीटें जीतीं, बाकी 4 सीटें पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को मिलीं। इस चरण में जबरदस्त धांधली हुई। यह बात भी किसी से छिपी हुई नहीं है कि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र की हमेशा से ही उपेक्षा की है। लिहाजा वहां प्रदर्शन हो रहे हैं। दरअसल, ये प्रदर्शन उन 12 सीटों को लेकर हो रहे हैं, जो प्रवासियों के लिए आरक्षित हैं। इसकी अगुआई जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) नाम का सिविल सोसाइटी ग्रुप कर रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) का कहना है कि इस्लामाबाद सरकार इन सीटों पर धांधली कर अपने लोग बिठाती है ताकि पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) असेंबली पर उसका कंट्रोल बना रहे। इस आरोप में दम है क्योंकि जो पार्टी पाकिस्तान पर हुकूमत करती है, वही अक्सर पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) चुनाव जीतती है। ,चूंकि पिछले दो महीने से पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में जबरदस्त आर्थिक परेशानी बढ़ी। इसलिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लोगों के गुस्से बढ़े हुए हैं। वास्तव में, इसकी वजहें सिर्फ चुनावी धांधली ही नहीं हैं, बल्कि आर्थिक दुश्वारियों की वजह से भी उनका गुस्सा परवान चढ़ा हुआ है। चूंकि स्थानीय लोगों के अधिकार और भी सीमित किए जा रहे हैं, इसलिए भी लोग बौखलाए हुए हैं। खबरें तो ये भी हैं कि सरकारी बंदिशों की वजह से ही इलाके में लोगों को सब्सिडाइज्ड गेहूं और जरूरी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। वहीं, बिजली कटौती को लेकर भी लोगों में गुस्सा है। पाक अधिकृत कश्मीर की नदियों पर बने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जो बिजली बनती है, वह यहां के लिए जरूरी 400 मेगावॉट से कहीं अधिक है। इसके बावजूद इलाके में 15-20 घंटों तक बिजली काटी जाती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत दखल देकर पाकिस्तान सरकार के दमन पर रोक लगानी चाहिए। # भारत के इस कदम के प्रमुख कूटनीतिक मायने इस प्रकार हैं:- पहला, नैरेटिव का पलटवार: पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है। भारत अब PoK में मानवाधिकार और शासन के प्रश्नों को प्रमुखता देकर यह संदेश दे रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्र की स्थिति पर भी जाना चाहिए। दूसरा, मानवाधिकार आधारित कूटनीति: भारत अपनी बात को केवल क्षेत्रीय दावे तक सीमित न रखकर मानवाधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे से जोड़ रहा है। इससे उसकी अपील व्यापक अंतरराष्ट्रीय विमर्श में अधिक स्वीकार्य बनाने का प्रयास दिखता है। तीसरा, पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव: यदि प्रमुख देश, संयुक्त राष्ट्र या मानवाधिकार संस्थाएं इस मुद्दे पर अधिक सक्रिय होती हैं, तो पाकिस्तान पर राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय कदम की संभावना कई देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी। चौथा, PoK के लोगों के प्रति संदेश: भारत यह संकेत भी देता है कि वह PoK के निवासियों के अधिकारों और उनकी स्थिति पर सार्वजनिक रूप से आवाज उठा रहा है। इससे वहां के घटनाक्रम को लेकर भारत की आधिकारिक रुचि प्रदर्शित होती है। पांचवां, द्विपक्षीय से वैश्विक विमर्श की ओर: यह रुख दर्शाता है कि भारत केवल भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय संदर्भ में नहीं, बल्कि वैश्विक मानवाधिकार और जवाबदेही के मानकों के आधार पर भी इस विषय को प्रस्तुत करना चाहता है। हालांकि, इस रणनीति की सीमाएं भी हैं। कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर अधिकांश देश संतुलित रुख अपनाते हैं और दोनों पक्षों से संयम की अपेक्षा करते हैं। इसलिए भारत की अपील से तत्काल कोई अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई होना निश्चित नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव और वैश्विक चर्चा अवश्य बढ़ सकती है। सुलगता सवाल है कि आखिर इस मसले पर दुनिया दखल क्यों दे, क्योंकि यह तो पहले ब्रिटिश और अब अमेरिकी शासकों द्वारा रचा गया और प्रोत्साहित किया गया खेल है, ताकि एशियाई देश परस्पर संघर्षरत रहें और अमेरिकी-यूरोपीय दाल यहां गलती रहे। पहले सोवियत संघ और अब रूस-चीन से अमेरिकी-यूरोपीय देशों को जो संयुक्त चुनौती मिल रही है, उसके दृष्टिगत भारत जैसे तटस्थ देश की नहीं, बल्कि पाकिस्तान जैसे दोगले देश की जरूरत अमेरिका को है, जो चीन के साथ मिलकर रूस/भारत के खिलाफ भी उसे भड़काता रहता है, क्योंकि यही अमेरिकी-यूरोपीय एजेंडा है। खासबात यह है कि भारत भले ही खुद को गुटनिरपेक्ष बताए, लेकिन अमेरिका-यूरोपीय देश उसे रूस का वफादार मित्र तथा चीन का चिर शत्रु समझते हैं। शायद इसी चीनी शत्रुता को भड़काकर वो अपना मकसद भी साधना चाहते हैं। लेकिन यहां भी भारत सधी चाल चलकर सबको हैरत में डाल देता है। इसलिए अब भारत को पीओके के बहाने घेरने की दुनियावी चाल चली गई है, जिसका अमेरिका-चीनी कुचक्र से गहरा नाता है। इस समस्या का समाधान अनुनय विनय से नहीं बल्कि शौर्य प्रदर्शन से किया जाना ही श्रेयस्कर होगा, ताकि पाकिस्तान-बंगलादेश से विदेशी खूंटों को उखाड़ फेंका जा सके। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
विपक्ष के सांसदों ने भाजपा पर जनता को मुद्दे से भटकाने का लगाया आरोप, कहा-सरकार लोगों को कर रही गुमराह
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हंगामे के बीच शुरू हुआ यूपी विधानसभा का मानसून सत्र, आलम बदी को श्रद्धांजलि के बाद सदन मंगलवार तक स्थगित
कमजोर डॉलर का असर : सोने और चांदी एक प्रतिशत तक महंगे
मुंबई, सोने और चांदी की शुरुआत सोमवार को तेजी के साथ हुई। इस दौरान दोनों कीमती धातुओं में करीब एक प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली।
संसद में फिर हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित; FCRA संशोधन विधेयक पेश होने की संभावना
संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। विपक्ष ने राम मंदिर दान विवाद, पुलिस कार्रवाई और नए दल-बदल कानून पर चर्चा की मांग उठाई। FCRA संशोधन विधेयक भी पेश होने की संभावना है।
जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकी की महिला सहायक के जरिए बंगाल के 6 मंत्रियों के परिवारों को बनाया गया निशाना : एसटीएफ
अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज
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जर्सी का रंग बदलने से बदलेगी भारतीय हॉकी की तस्वीर?
भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को बदलकर 15 अगस्त से शुरू हो रहे एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 में केसरिया रंग की मुख्य जर्सी पहनाने के निर्णय ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। यह बहस केवल खेल तक सीमित नहीं रही है बल्कि राजनीति, संस्कृति, राष्ट्रीय पहचान और खेल परंपरा तक पहुंच गई है। एक पक्ष इसे खिलाड़ियों की सुविधा और तकनीकी आवश्यकता से जुड़ा निर्णय बता रहा है तो दूसरा पक्ष इसे भारतीय खेलों के कथित ‘भगवाकरण’ के रूप में देख रहा है। सवाल यह है कि क्या वास्तव में जर्सी का रंग बदलना इतना बड़ा मुद्दा है या यह विवाद मूल प्रश्नों से ध्यान भटका रहा है? सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि हॉकी इंडिया ने जर्सी का रंग बदलने का निर्णय किन आधारों पर लिया। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी रहे दिलीप तिर्की के अनुसार, आज अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मुकाबले नीले सिंथेटिक एस्ट्रो टर्फ पर खेले जाते हैं। ऐसे में नीली जर्सी कई बार मैदान की पृष्ठभूमि में घुल-मिल जाती है, जिससे तेज गति वाले खेल में खिलाड़ियों को अपने साथी खिलाड़ियों की पहचान करने में कठिनाई होती है। आधुनिक हॉकी में खेल की गति अत्यंत तेज हो चुकी है, जहां एक सैकेंड का निर्णय मैच का परिणाम बदल सकता है। पासिंग, पोजिशनिंग और त्वरित निर्णय के लिए खिलाड़ियों की स्पष्ट दृश्यता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण खिलाड़ियों, कप्तानों, कोचों और सहयोगी स्टाफ से विचार-विमर्श के बाद अधिक स्पष्ट दिखाई देने वाले रंग के रूप में केसरिया को चुना गया। यदि यही वास्तविक कारण है तो इसे केवल तकनीकी दृष्टि से देखने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। विश्व खेलों में जर्सी के रंग समय-समय पर बदले जाते रहे हैं। फुटबॉल, रग्बी, क्रिकेट, बास्केटबॉल और हॉकी जैसी लगभग सभी खेल प्रतियोगिताओं में टीमें प्रतियोगिता, दृश्यता, प्रायोजकों, प्रसारण गुणवत्ता और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुसार अपनी जर्सियों में परिवर्तन करती रहती हैं। भारतीय हॉकी टीम इससे पहले 2014 विश्व कप में पीली तथा 2018 में हल्के नीले रंग की जर्सी पहन चुकी है। इसलिए रंग परिवर्तन स्वयं में कोई असाधारण घटना नहीं है। विवाद इसलिए बढ़ा है क्योंकि भारतीय हॉकी की पहचान पिछले कई दशकों से नीली जर्सी के साथ जुड़ चुकी है। जैसे ब्राजील की फुटबॉल टीम पीली जर्सी, अर्जेंटीना आसमानी-सफेद धारियों, न्यूजीलैंड ‘ऑल ब्लैक्स’ और ऑस्ट्रेलिया हरे-पीले रंग से पहचाने जाते हैं, उसी प्रकार भारतीय हॉकी की पहचान भी नीली जर्सी रही है। ओलंपिक स्वर्णिम इतिहास, विश्व कप की उपलब्धियां और अनेक ऐतिहासिक मुकाबलों की स्मृतियां इसी नीली जर्सी से जुड़ी रही हैं। यही कारण है कि पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै, परगट सिंह और वीरेन रासकिन्हा जैसे खिलाड़ियों ने चिंता व्यक्त की कि कहीं यह परिवर्तन भारतीय हॉकी की स्थापित पहचान को कमजोर न कर दे। इसे भी पढ़ें: PR Sreejesh ने हॉकी जर्सी विवाद को नकारा, टीम से 50 साल बाद पदक जीतने पर फोकस को कहा पूर्व दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों की चिंता को भी खारिज नहीं किया जा सकता। खेल केवल तकनीक नहीं, भावनाओं और विरासत का भी विषय होता है। जर्सी केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं बल्कि करोड़ों प्रशंसकों की स्मृतियों, खिलाड़ियों के गौरव और राष्ट्रीय खेल संस्कृति का प्रतीक होती है। इसलिए ऐसे किसी भी बड़े परिवर्तन से पहले व्यापक संवाद और पारदर्शिता अपेक्षित थी। यदि हॉकी इंडिया खिलाड़ियों और विशेषज्ञों के साथ-साथ पूर्व खिलाड़ियों तथा खेल समुदाय को भी इस निर्णय प्रक्रिया से जोड़ती तो शायद विवाद की तीव्रता कम होती। दूसरी ओर इस पूरे विवाद का राजनीतिक स्वरूप भी कम चिंताजनक नहीं है। विपक्षी दलों ने इसे ‘खेलों का भगवाकरण’ करार दिया है जबकि कई समर्थकों ने इसे राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक बताया। वस्तुतः दोनों अतिवादी दृष्टिकोण खेल भावना के अनुकूल नहीं हैं। किसी भी रंग का अपना कोई धर्म नहीं होता। रंग प्रतीकों का अर्थ समय, संस्कृति और संदर्भ के अनुसार बदलता रहता है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया रंग त्याग, साहस और समर्पण का प्रतीक है। भारतीय सेना, राष्ट्रीय ध्वज, अनेक विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक परंपराओं तथा आध्यात्मिक जीवन में भी केसरिया का सम्मानजनक स्थान है। वहीं इस्लामी परंपराओं, सूफी परंपरा और अनेक एशियाई संस्कृतियों में भी यह रंग विभिन्न रूपों में प्रयुक्त होता रहा है। इसलिए किसी रंग को किसी एक धर्म या विचारधारा का स्थायी प्रतीक मान लेना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। हालांकि यह भी उतना ही सत्य है कि वर्तमान राजनीतिक वातावरण में रंगों के प्रतीकात्मक अर्थ अत्यधिक संवेदनशील हो चुके हैं। इसलिए जब किसी राष्ट्रीय टीम की दशकों पुरानी पहचान बदली जाती है तो राजनीतिक प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठते हैं। ऐसी परिस्थितियों में खेल संस्थाओं का दायित्व और बढ़ जाता है कि वे अपने निर्णयों के पीछे के सभी तथ्य, वैज्ञानिक अध्ययन और खिलाड़ियों की राय सार्वजनिक करें ताकि अनावश्यक विवाद की गुंजाइश कम हो। इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि क्या वास्तव में नीली जर्सी खिलाड़ियों के प्रदर्शन में बाधा बन रही थी? कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने इस तकनीकी तर्क पर प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि कई वर्षों से नीले एस्ट्रो टर्फ पर प्रतियोगिताएं हो रही हैं और कभी ऐसी गंभीर समस्या सामने नहीं आई। यदि वास्तव में दृश्यता का प्रश्न था तो क्या इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ का कोई वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध है? यदि हॉकी इंडिया इस विषय में विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे तो बहस अधिक तथ्यपरक हो सकती है। हालांकि आधुनिक खेल विज्ञान यह स्वीकार करता है कि रंगों का खिलाड़ियों की दृश्य पहचान, प्रतिक्रिया समय और निर्णय क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है। कई खेलों में उच्च कंट्रास्ट वाले रंगों का चयन इसी कारण किया जाता है। प्रसारण तकनीक, कैमरा एंगल और दर्शकों की दृश्य सुविधा भी अब जर्सी डिजाइन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए तकनीकी आधार को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। पूरे विवाद का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष यह है कि चर्चा खिलाड़ियों की तैयारी, रणनीति और पदक की संभावनाओं से हटकर जर्सी के रंग तक सीमित हो गई है। भारत की पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमें पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार कर चुकी हैं। टोक्यो ओलंपिक में पुरुष टीम ने कांस्य पदक जीतकर चार दशक का सूखा समाप्त किया जबकि महिला टीम ने भी शानदार प्रदर्शन कर विश्व का ध्यान आकर्षित किया। अब जब विश्व कप जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट सामने हैं, तब खिलाड़ियों का ध्यान केवल अपने प्रदर्शन पर केंद्रित रहना चाहिए, किसी भी प्रकार का राजनीतिक या वैचारिक विवाद खिलाड़ियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डाल सकता है। बहरहाल, वास्तविक प्रश्न यह नहीं है कि नीली हो या केसरिया बल्कि यह है कि क्या भारतीय हॉकी विश्व विजेता बनने की तैयारी कर रही है? क्या हमारे खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, फिटनेस सुविधाएं, खेल विज्ञान, मनोवैज्ञानिक सहयोग, आधुनिक विश्लेषण तकनीक और मजबूत घरेलू प्रतियोगिताएं उपलब्ध हैं? क्या जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं? यदि इन प्रश्नों के उत्तर सकारात्मक नहीं हैं तो केवल जर्सी बदल देने से भारतीय हॉकी का भविष्य नहीं बदल सकता। इतिहास बताता है कि महान टीमें अपने रंग से नहीं, अपने खेल से अमर होती हैं। खेल में पहचान रंग से नहीं, उपलब्धियों से बनती है। यदि भारतीय टीम केसरिया जर्सी पहनकर विश्व कप जीतती है तो यही जर्सी नई गौरवगाथा का प्रतीक बन जाएगी। और यदि प्रदर्शन निराशाजनक रहा तो रंग चाहे कोई भी हो, आलोचना फिर भी होगी। खेल का सबसे बड़ा धर्म राष्ट्र का सम्मान है। मैदान पर खिलाड़ी न किसी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं और न किसी दल का; वे केवल भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए जर्सी का रंग चाहे नीला हो, केसरिया हो या कोई और, देश की अपेक्षा केवल यही है कि भारतीय तिरंगा विश्व हॉकी के सर्वोच्च मंच पर सबसे ऊंचा लहराना चाहिए। वही किसी भी रंग की सबसे बड़ी सार्थकता होगी। - योगेश कुमार गोयल (लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं)
संसद में फिर हंगामा, राज्यसभा में नहीं हो सका प्रश्नकाल, दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित
संसद में फिर हंगामा, राज्यसभा में नहीं हो सका प्रश्नकाल, दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित
कांग्रेस सांसदों ने पप्पू यादव पर हमले को गलत बताया, कहा-सरकार लोगों को डरा रही
कांग्रेस सांसदों ने पप्पू यादव पर हमले को गलत बताया, कहा-सरकार लोगों को डरा रही
E20 पेट्रोल के खिलाफ नागपुर में गडकरी के घर के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन, कई कार्यकर्ता हिरासत में
कांग्रेस ने कहा है कि संसद में नितिन गडकरी के बयान से जवाब मिलने के बजाय और ज़्यादा सवाल खड़े हो गए। इसने कहा कि पुराने वाहनों के 44 हजार मालिकों के सर्वे में पता चला कि E20 लागू होने के बाद कई वाहनों पर बुरा असर महसूस हुआ।
पहलवानों से जुड़े यौन शोषण मामले में बृजभूषण शरण सिंह को राहत, अदालत के फैसले से बदला पूरा मामला
पहलवानों से जुड़े यौन शोषण मामले में बृजभूषण शरण सिंह को राहत, अदालत के फैसले से बदला पूरा मामला
आखिर क्यों पूरा नहीं कर पाते शिक्षा मंत्री अपना कार्यकाल
कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन ने भारत की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और सरकार की प्राथमिकताओं पर एक नई बहस छेड़ दी है। सवाल सिर्फ़ इस्तीफा देने वाले शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान पर नहीं, बल्कि मोदी सरकार के दौरान शिक्षा मंत्रालय की पूरी दिशा को लेकर भी उठ रहे हैं। साल 2014 से केंद्र में सत्ता में आने के बाद से अब तक मोदी सरकार में शिक्षा मंत्री रही स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल 'निशंक' और धर्मेंद्र प्रधान को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किए बिना इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा। पांचवा शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी को बनाया गया है, हालांकि जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। मोदी सरकार को तय करना है कि जोशी ही पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री रहेंगे या किसी नए चेहरे की तलाश करके उसको स्वतंत्र रूप से शिक्षा मंत्री के पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जोशी भी विवादों में रहे हैं। साल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो गैंग रेप और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या के मामले में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई पर जब चौतरफ़ा सवाल उठ रहे थे, तब प्रल्हाद जोशी ने इसका बचाव किया था। सवाल यही है कि आखिरकार कोई भी शिक्षा मंत्री अपना कार्यकाल क्यों नहीं पूरा कर पाया। मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय ही ऐसा प्रमुख मंत्रालय रहा, जिसकी कमान पांच अलग-अलग मंत्रियों ने संभाली वहीं, गृह, विदेश, वित्त, रक्षा और स्वास्थ्य जैसे मंत्रालयों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही। शिक्षा, संस्कृति और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (आईएनबी) ऐसे कुछ चुनिंदा मंत्रालय हैं, जिन्हें सॉफ्ट पावर की तरह देखा जाता है और जो संघ की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए अहम रहे हैं। यही कारण है कि यहां विवाद ज़्यादा हुए और अस्थिरता भी उतनी ही दिखती है। गौरतलब है कि आईएनबी में 12 साल के भीतर सात केंद्रीय मंत्री और संस्कृति मंत्रालय में पांच केंद्रीय मंत्री बने हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में स्मृति ईरानी और प्रकाश जावड़ेकर ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय संभाला मोदी के दूसरे कार्यकाल में यह ज़िम्मेदारी रमेश पोखरियाल 'निशंक' को मिली। मगर 2021 में हुए कैबिनेट विस्तार के दौरान धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री बना दिया गया, जिनके इस्तीफ़े की मांग को लेकर एक महीने तक कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक जंतर-मंतर पर बैठे रहे और आख़िरकार केंद्र सरकार दबाव में आई और प्रधान को इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा। नीट परीक्षा के लीक होने का मामला अलग कर दें, तो संघ से जुड़े उन सभी प्रमुख लक्ष्यों को धर्मेंद्र प्रधान बिना शोर-शराबा किए लागू करा पाने में सफल रहे हैं, जिनकी कोशिश उनके पूर्ववर्तियों ने ज़ोर लगाते हुए की और विवादों में फंसते गए। ग़ौरतलब है कि 2014 में बनी पहली मोदी कैबिनेट में धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम मंत्री बनाया गया, फिर मोदी के दूसरे कार्यकाल में वे शिक्षा मंत्री बने और मोदी के तीसरे कार्यकाल में भी यह ज़िम्मेदारी जारी रही। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को बढ़ावा मिला। मातृभाषा और कई भाषाओं में शिक्षा को उन्होंने बढ़ावा दिया। मगर तीन-भाषा फ़ॉर्मूला पर तमिलनाडु राज्य सरकार के साथ लंबे समय तक वे विवाद के केंद्र में भी रहे। विरोधियों ने उन पर राजनीतिक हस्तक्षेप और हिंदी थोपने का आरोप लगाया, जिससे शिक्षा नीति केंद्र बनाम राज्य के विवाद का मुद्दा बन गई। मोदी सरकार के कार्यकाल के चारों शिक्षा मंत्रियों में से एक भी अपना विज़न लागू करने के लिए स्वतंत्र नहीं था। रणनीतियां ऊपर से बनती थीं। ये ज़रूर है कि हर मंत्री का उसे लागू करने का तरीक़ा अलग हो सकता है जैसे, स्मृति ईरानी ज़्यादा मुख़र थीं, जावड़ेकर रणनीतिक चुप्पी वाले व्यक्ति थे। मोदी के शासन में शिक्षा विभाग में जो भी नीतियां अपनाई गईं, वे सभी वाम विचारधारा को हटाने के मक़सद से लागू हुईं। संघ का मक़सद भारत की शिक्षा व्यवस्था से वाम विचारधारा वाली शिक्षा-पद्धति को हटाना है, क्योंकि संघ मानता है कि वे मुग़लों के समर्थक रहे हैं। संघ की नज़र में, मुग़ल घुसपैठिए हैं और देश की मुस्लिम आबादी उनकी वंशज है। संघ पर आरोप लगते रहें कि इस एजेंडे को पूरा मोदी सरकार के जरिए कराया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: NEET Protest पर Smriti Irani का बड़ा बयान, कहा- GenZ और PM Modi के बीच नहीं है कोई दूरी इसी लक्ष्य को साधने के लिए मोदी सरकार के चार शिक्षा मंत्रियों के चयन का पैमाना रहा है। स्मृति ईरानी को छोड़ दें, तो नवनियुक्त शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल 'निशंक' और धर्मेंद्र प्रधान संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं। वाजपेयी के ज़माने में भी संघ से आने वाले मुरली मनोहर जोशी को शिक्षा मंत्री बनाया गया था, जो दर्शाता है कि संघ इस मंत्रालय में अपना दख़ल हमेशा चाहता रहा है। स्मृति ईरानी के साथ उनके नाम पर डिग्री विवाद, जेएनयू विवाद और रोहित वेमुला की आत्महत्या जैसे विवाद जुड़ चुके थे। स्मृति ईरानी संघ की पृष्ठभूमि से नहीं थीं। नई शिक्षा नीति तैयार करने और उसे लागू करने में देरी से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्मृति से बहुत खुश नहीं था। संघ के संदेशों को समझना आसान नहीं है। संघ शोर-शराबा नहीं करता। यही कारण है कि फिलाहल संघ की पृष्ठभमि वाले प्रकाश जोशी को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है। मंत्रालय में स्मृति ईरानी के कार्यकाल के दौरान नई शिक्षा नीति पर काम की शुरुआत हुई। मोदी के कार्यकाल के तीसरे शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' के समय इसे लागू किया गया। शिक्षा मंत्री रहे निशंक की पहचान संघ से आने वाले एक विद्वान की रही है, जो संघ के मक़सद को आगे ले जा सकते थे। हालांकि, अपने अवैज्ञानिक बयानों को लेकर भी वे विवादों में आए। उन्होंने यहां तक कहा कि चरक ऋषि ने अणु-परमाणु की खोज की थी। कोविड के समय जेईई-नीट की परीक्षा कराए जाने की घोषणा के बाद निशंक के ख़िलाफ़ काफ़ी ऑनलाइन विरोध हुआ था। विरोध में लोग कोर्ट भी गए, जहां सरकार के पक्ष में फ़ैसला आया। हालांकि, तब बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा देने से रह गए, जिसे लेकर विवाद हुआ। उनके समय भी आरोप लगे कि नई शिक्षा नीति के ज़रिए केंद्र सरकार शिक्षा पर नियंत्रण अपने हाथों में लेने की कोशिश कर रही है, जिसे उन्होंने नकार दिया था। शिक्षा मंत्रालय के जरिए मोदी सरकार का सारा जोर संघ को साधने में रहा है, किन्तु शिक्षा के उत्थान के लिए बजट को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। इसी कारण शिक्षा मंत्रालय में बजट घटता गया और विवाद बढ़ते गए। केंद्रीय बजट में शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी पिछले 12 वर्षों में तेज़ी से घटी हैै यह हिस्सा 2013-14 में कांग्रेस-नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में 4.6% था, जो 2025-26 में घटकर 2.5% रह गया। शिक्षा का घटता बजट ही दर्शाता है कि मोदी सरकार शिक्षा में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है। चारों शिक्षा मंत्रियों के समय में लगभग हर विश्वविद्यालय में बड़े स्तर पर फ़ैकल्टी के चयन में संघ की विचारधारा को प्राथमिकता दी गई है। शिक्षा में सुधार के लिए आवश्यक रोजगारपरक, रचनात्मक, सकारात्मक और शोधपरक वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित मुद्दे खास स्थान नहीं ले सके। पेपर लीक के केंद्र ही नहीं राज्यों की सरकारों ने कठोर कानून बनाए हैं, सजा और जुर्माने को बढ़ाया है, किन्तु देश में जब तक मौजूद सिस्टम ठीक नहीं होगा, तब तक चाहे कितने ही मंत्री बदल दिए जाएं, पेपर लीक की घटनाएं रुकने की कोई गारंटी नहीं है। - योगेन्द्र योगी
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