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वास्तविक मुद्दों से युवाओं का ध्यान हटाना चाह रही केंद्र और यूपी सरकार: डिंपल यादव
वास्तविक मुद्दों से युवाओं का ध्यान हटाना चाह रही केंद्र और यूपी सरकार: डिंपल यादव
राजनीतिक अनिश्चितता, सीमा पार से बढ़ता आतंकवाद और सड़कों पर भड़कता जन-आक्रोश पाकिस्तान इस वक्त एक साथ कई मोर्चों पर गंभीर संकट से जूझ रहा है। तस्वीर साफ़ है। एक कब्जे वाले इलाके में कराया गया दिखावटी चुनाव, खून-खराबे में तब्दील होते सड़कों के विरोध-प्रदर्शन, पुलिस थानों पर बरसाती गोलियों वाले सिरफिरे आतंकी, और सेना के इशारों पर नाचती सरकार की धज्जियां उड़ाते विद्रोही! गजब की बात तो यह है कि कभी जिनके दम पर पाकिस्तान उछलता था, आज वही पुराने दोस्त उसके सबसे बड़े दुश्मन बन बैठे हैं। सोने पर सुहागा यह कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री की एक आवाज पर आज भी सड़कों पर हुजूम उमड़ पड़ता है और हालत यह आ चुकी है कि खुद सरकार भी मान रही है कि सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। कहानी की शुरुआत करते हैं पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) से करते हैं। इस्लामाबाद की सरकार ने सोचा था कि 10 अगस्त तक निपटाने के लिए यहाँ एक ढर्रे वाला लोकल इलेक्शन करा देंगे। लेकिन नेताओं की रैलियों की जगह, पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे में पिस रही जनता ने यह पूरी गर्मी सड़कों के उग्र आंदोलनों में बिता दी। इस पूरे बवाल के केंद्र में 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAC) खड़ा है। शुरुआत बहुत सीधी-सादी मांगों सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला आटा, टैक्स में छूट और शासन में सही नुमाइंदगी से हुई थी। लेकिन अब यह चिंगारी पूरे पाकिस्तान के लिए ऐसा नासूर बन चुकी है, जिसे बुझाना इस्लामाबाद के बस के बाहर की बात दिख रही है! इसे भी पढ़ें: Tewolde Gebremariam बनने वाले थे PIA चीफ, लेकिन Tata Group ने मारी बाजी, अब संभालेंगे Air India बगावत की आवाज को गोलियों से दबाने की कोशिश समय के साथ, इसकी मांगें एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गईं। सबसे विस्फोटक मांग थी। स्थानीय विधानसभा में बाहरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना। JAC का तर्क है कि इन सीटों से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रहने वाले लोगों की राजनीतिक आवाज़ कमजोर होती है। बढ़ते गुस्से पर इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया मजबूरी में आई है। सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर स्नाइपर से गोलीबारी की है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कम से कम 90 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। हाल के हफ्तों में कर्फ्यू, रास्ते बंद करने और कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों के साथ सख्ती और बढ़ गई है। अशांति और सख्ती के इसी माहौल में इस्लामाबाद अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थानीय चुनाव करा रहा है। लेकिन वोटिंग पूरी होने से पहले ही, स्थानीय कार्यकर्ता इन चुनावों को धांधली वाला बता रहे हैं। वे JAC को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने को गलत कदम मानते हैं। लेकिन सड़कों पर उतरे आम लोगों के लिए, सरकार के रवैये ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को अब आतंकवादी बताया जा रहा है। उनका कहना है कि इस लेबल का इस्तेमाल उनके विरोध को आपराधिक ठहराने के लिए किया जा रहा है। बलूचिस्तान का एक तिहाई हिस्सा पाक ने गंवाया पाकिस्तान के सबसे बड़े सूबे क्वेटा बलूचिस्तान का इलाका वैसे तो लगभग 45% क्षेत्र में फैला है। ईरान से इसकी सीमा भी लगती है। बलूचिस्तान में दूर दूर तक खाली मैदान और रेगिस्तान हैं। यहां की वीरानगी में इन दिनों बागी तेवर और तेज हो गए हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाके अलग देश की मांग कर रहे हैं। हालात ये हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का बलूचिस्तान सूबे के लगभग 70% हिस्से पर कब्जा है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल कितने विद्रोहियों को ढेर करते हैं या गिरफ्तार करते हैं। असली सवाल यह है कि क्या पाकिस्तानी सरकार पुलिस स्टेशन खुले रख सकती है, हाईवे पर यातायात चला सकती है, बाजार और कारोबार सामान्य रख सकती है और लोगों को बिना डर के यात्रा करने की सुरक्षा दे सकती है? बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके क्वेटा, खुजदार और मसतुंग जैसे शहरों में घुसकर पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। बीएलए के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अस्थायी चौकियां बना रहे हैं और वाहनों की तलाशी लेते हैं। खुलेआम वसूली भी होती है। इसे भी पढ़ें: UK Police से ज़मानत लेकर फरार Grooming Gang का आरोपी, Rushkar Ahmed अब PoK Assembly में बैठेगा खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा बलूचिस्तान को पाकिस्तान की खनिजों की खदान भी कहते हैं। बात शुरू की तो खुजदार शहर के युवक मोमिन का पाक सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। मोमिन कहते हैं यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का कब्जा है। चीन ने सीपैक के नाम पर यहां लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीन की फिशिंग बोट्स का कब्जा है। स्थानीय बलूच मछुआरों को चीनी बोट्स खदेड़ देती हैं। इनकी बोट्स बड़ी और ज्यादा पावर वाली होती हैं। ज्यादातर बलूच मछुआरों के पास अब भी पालदार नौकाएं हैं। बलूच बेरोजगार हो रहे हैं। 55 साल के असलम का कहना है कि यहां के रेअर अर्थ मिनरल पर अमेरिका का कब्जा है। पाक आर्मी चीफ मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने मिनरल की नुमाइश करते हैं। इस खजाने पर केवल बलूचों का हक है। खैबर पर तालिबानी शरिया वाली सरकार ने जमाया कब्जा खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का फ्रंटियर यानी सरहदी इलाका है। डूरंड लाइन पाक और अफगानिस्तान को अलग करती है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के पांच साल में खैबर के अधिकांश इलाके में इन्हीं का दबदबा है। 2 अगस्त को पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में आतंकवाद-विरोधी रैली के दौरान हुए आत्मघाती बम धमाके में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन से ज़्यादा लोग घायल हो गए। मरने वालों में ज़्यादातर आम नागरिक और पुलिस अधिकारी थे। यह हमला प्रांत की स्वात घाटी के काबल शहर में हुआ, जहाँ प्रदर्शनकारी एक पुलिस स्टेशन के पास जमा होकर नारे लगा रहे थे और घाटी में शांति और अमन की मांग कर रहे थे। 'स्वात पीस रैली' नाम की इस रैली का आयोजन स्थानीय आदिवासी परिषद 'स्वात अमन जिरगा' ने किया था। यह बम धमाका पाकिस्तान के लिए आंतरिक सुरक्षा और जान-माल के नुकसान के लिहाज़ से बेहद गंभीर रहे साल की एक और घटना है। 'डॉन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सशस्त्र बलों के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार (31 जुलाई) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 2026 में पाकिस्तान में आतंकवाद की 3,145 घटनाएं हुईं, जिनमें से 1,971 घटनाएं KP में हुईं। जुलाई 2026 तक, आतंकवादी घटनाओं में 800 से ज़्यादा पाकिस्तानी मारे जा चुके हैं, जिनमें 300 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। खैबर में पाक सरकार के कानून नहीं तालिबान का शरिया चलता है। दरअसल, इस इलाके में विभाजन के समय से ही कबिलाई व्यवस्था लागू रही है। स्वात, सैदू, मिंगोरा और मर्दन में 'लोया जिरगा' के जरिए ही कानून चलता है। ये जिस जगह असल में शरिया कानून को लागू करती है। अफगान तालिबान इसका है। इमरान खान की सरकार ने 2021 में टीटीपी के साथ सुलह की कोशिश की, लेकिन इमरान की गद्दी जाते ही टीटीपी ने खैबर में अपने दबदबे को और बढ़ा लिया है। खैबर के वजीरिस्तान में पाकिस्तान सेना कई सैन्य ऑपरेशन कर चुकी है, लेकिन यहां अब टीटीपी काबिज है। आए दिन टीटीपी के हमलों के कारण स्कूल और कॉलेज बंद रहते हैं। खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के आए दिन होने वाले हमलों से पाक सेना में खौफ है। इस साल टीटीपी फौज पर 145 से ज्यादा हमले कर चुकी है, इनमें 48 सैनिक मारे गए। खैबर में डूरंड लाइन पर अभी पाक सेना की 50 फौजी चौकियां खाली हैं। 22 पोस्ट पर ही पाक फौज तैनात है।
भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में बंद
मुंबई, भारतीय शेयर बाजार दिन के उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ।
उद्योग जगत: आरबीआई की नीतिगत स्थिरता और बेहतर विकास
नई दिल्ली, उद्योग जगत के नेताओं और अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने और तटस्थ (न्यूट्रल) नीतिगत रुख बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया।
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, असम के बाढ़ प्रभावितों के लिए तीन करोड़ की मदद मंजूर
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केरल : ईडी टीम पर हमला करने के मामले में पुलिस ने सीपीआईएम के कई नेताओं को भेजा नोटिस
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24 घंटे ग्रीन एनर्जी देने को प्रतिबद्ध है मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव
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राज्यसभा में गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग, सभापति ने रिजिजू से कहा-विपक्ष की भावना सरकार तक पहुंचाएं
राजनीतिक फायदे के लिए मुसलमानों और मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है: अरशद मदनी
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अभिषेक बनर्जी के फरार पीए को सुप्रीम कोर्ट से राहत, गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक
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आज जब पूरा देश पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, तब हर भारतीय के मन में उनकी मुस्कुराती छवि, ओजस्वी आवाज़ और मानवीय संवेदनाओं से भरा व्यक्तित्व एक बार फिर जीवंत हो उठता है। देखा जाये तो भारतीय राजनीति में ऐसे नेता विरले ही हुए हैं, जिनकी लोकप्रियता केवल अपनी पार्टी तक सीमित न रहकर राजनीतिक सीमाओं को भी पार कर गई हो। सुषमा स्वराज उन्हीं असाधारण नेताओं में थीं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, संसद हो या अंतरराष्ट्रीय मंच, उनके शब्दों में दृढ़ता थी, विचारों में स्पष्टता थी और व्यवहार में ऐसी आत्मीयता थी, जिसने उन्हें हर दल के नेताओं और करोड़ों भारतीयों का सम्मान दिलाया। छह अगस्त 2019 को 67 वर्ष की आयु में उनके निधन ने भारतीय राजनीति को एक ऐसी आवाज़ से वंचित कर दिया, जिसकी कमी आज भी महसूस की जाती है। सुषमा स्वराज का अंतिम सार्वजनिक संदेश भी उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी वैचारिक प्रतिबद्धताओं में से एक का प्रतीक बन गया। छह अगस्त 2019 की शाम 7:23 बजे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए ट्वीट लिखा था, धन्यवाद प्रधानमंत्री जी। मैं अपने जीवनकाल में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी। यह संदेश जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के ऐतिहासिक निर्णय पर उनकी प्रतिक्रिया थी। भारतीय जनता पार्टी वर्षों से जिस संकल्प को लेकर आगे बढ़ रही थी, उसे पूरा होते देखना उनके जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक इच्छाओं में शामिल था। विडंबना देखिए कि इस ऐतिहासिक क्षण पर खुशी व्यक्त करने के कुछ ही घंटों बाद उन्हें हृदयाघात हुआ और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। यह संयोग उनके जीवन को एक भावनात्मक पूर्णविराम देता है। इसे भी पढ़ें: आखिर बांकीपुर उपचुनाव भाजपा क्यों, कैसे और किसके चलते हारी? पूछता है बिहार! हरियाणा के एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी सुषमा स्वराज ने ऐसे दौर में राजनीति में अपनी पहचान बनाई, जब यह क्षेत्र लगभग पूरी तरह पुरुषों के वर्चस्व वाला माना जाता था। हरियाणा में मात्र 25 वर्ष की आयु में वह भारत की सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनीं और 27 वर्ष की उम्र में राज्य में जनता पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभाला। बाद के वर्षों में वह लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं, लोकसभा में विपक्ष की दूसरी महिला नेता रहीं और भारत की पहली पूर्णकालिक महिला विदेश मंत्री बनने का गौरव भी हासिल किया। उनका राजनीतिक सफर केवल पदों की सूची नहीं था, बल्कि उन तमाम सामाजिक और राजनीतिक बाधाओं को तोड़ने की कहानी था, जिन्हें लंबे समय तक महिलाओं के सामने अजेय माना जाता रहा। सुषमा स्वराज की सबसे बड़ी पहचान उनकी अद्भुत वक्तृत्व कला थी। संसद में उनके भाषण केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं होते थे, बल्कि उनमें इतिहास, संस्कृति, तर्क और संवेदना का अनूठा संगम दिखाई देता था। वर्ष 1996 में लोकसभा में दिया गया उनका धर्मनिरपेक्षता पर भाषण आज भी भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे चर्चित भाषणों में गिना जाता है। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास से कहा था कि यदि वंदे मातरम् का सम्मान करना, राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा की रक्षा करना, अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की मांग करना और समान नागरिक संहिता की वकालत करना सांप्रदायिकता है, तो वे स्वयं को सांप्रदायिक कहने से नहीं हिचकेंगी। लेकिन इसी भाषण में उन्होंने धर्मनिरपेक्षता की अपनी परिभाषा भी दी कि एक अच्छा हिंदू, अच्छा मुसलमान, अच्छा सिख और अच्छा ईसाई वही है, जो अपने धर्म का पालन करते हुए दूसरे धर्मों का भी समान सम्मान करे। उनके इस दृष्टिकोण ने वैचारिक बहस को नई दिशा दी और विरोधी दलों के कई नेताओं ने भी उनकी तार्किक क्षमता की सराहना की। भारतीय संस्कृति की उनकी व्याख्या भी उतनी ही प्रभावशाली थी। जब संसद में भारतीयता की अवधारणा पर प्रश्न उठे, तब उन्होंने भांगड़ा से भरतनाट्यम तक, राजमा-चावल से इडली-दोसा तक और अमरनाथ से रामेश्वरम तक की सांस्कृतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि विविधताओं के बीच यही एकता भारत की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि यही वह संस्कृति है, जिसमें कश्मीर का श्रद्धालु अमरनाथ का जल लेकर रामेश्वरम में भगवान शिव का अभिषेक करता है। उनके इन शब्दों ने भारतीय सांस्कृतिक एकता की ऐसी तस्वीर प्रस्तुत की, जिसे आज भी याद किया जाता है। हालांकि सुषमा स्वराज की सबसे अलग पहचान विदेश मंत्री के रूप में बनी। वर्ष 2014 में जब उन्होंने विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली, तब कई लोगों को लगा कि विदेश नीति का पूरा केंद्र प्रधानमंत्री कार्यालय ही रहेगा। लेकिन उन्होंने अपने काम और संवेदनशीलता से यह धारणा बदल दी। उन्होंने विदेश मंत्रालय को आम भारतीय के जीवन से जोड़ दिया। सोशल मीडिया मंच ट्विटर को उन्होंने केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संकट में फंसे भारतीयों के लिए जीवनरेखा बना दिया। दुनिया के किसी भी कोने में कोई भारतीय मुश्किल में होता, तो लोग सीधे उन्हें टैग करते और कुछ ही समय में उनकी ओर से प्रतिक्रिया आ जाती। चाहे जर्मनी के शरणार्थी शिविर में फंसी गुरप्रीत कौर हों, पाकिस्तान में जबरन विवाह का शिकार बनी उज्मा हों, मूक-बधिर गीता की स्वदेश वापसी हो या पाकिस्तान में फंसे हमीद अंसारी का मामला, हर जगह सुषमा स्वराज ने मानवीय संवेदनाओं के साथ हस्तक्षेप किया। उनकी कार्यशैली इतनी सक्रिय थी कि उन्होंने स्वयं कहा था, मैं न सोती हूँ और न ही भारतीय दूतावासों के अधिकारियों को सोने देती हूँ। उनके एक संदेश पर दुनिया के किसी भी देश में भारतीय दूतावास तत्काल सक्रिय हो जाता था। यही कारण था कि भारतीय राजनयिक अपने मोबाइल फोन हर समय चालू रखते थे। विदेश मंत्रालय को उन्होंने पहली बार ऐसा मानवीय चेहरा दिया, जहां फाइलों से पहले इंसान की पीड़ा को महत्व मिला। उनकी हाजिरजवाबी भी लोगों को बेहद पसंद थी। एक बार किसी व्यक्ति ने ट्विटर पर खराब रेफ्रिजरेटर की शिकायत कर दी, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, भाई, मैं रेफ्रिजरेटर के मामले में आपकी मदद नहीं कर सकती। मैं इस समय संकट में फंसे इंसानों की मदद में बहुत व्यस्त हूँ। विदेश नीति के स्तर पर भी उनके कार्यकाल में भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भारत की कानूनी सफलता, डोकलाम विवाद के दौरान संतुलित कूटनीति, मालदीव संकट और नेपाल से जुड़े चुनौतीपूर्ण हालात का प्रबंधन, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व तथा पाकिस्तान के विरोध के बावजूद वहां भारत की प्रभावशाली उपस्थिति, ये सभी उपलब्धियां उनके नेतृत्व की गवाही देती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख विदेश यात्राओं की पृष्ठभूमि तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन से लेकर चीन और किर्गिस्तान तक, उन्होंने परदे के पीछे रहकर भारतीय कूटनीति को मजबूती प्रदान की। देखा जाये तो सुषमा स्वराज को केवल एक सफल राजनेता या कुशल प्रशासक के रूप में याद करना उनके व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं होगा। वह ऐसी जननेता थीं, जिन्होंने राजनीति को मानवीय संवेदना से जोड़ा। उनकी वाणी में ओज था, विचारों में स्पष्टता थी, निर्णयों में राष्ट्रहित सर्वोपरि था और व्यवहार में ऐसी आत्मीयता थी कि राजनीतिक विरोधी भी उनका सम्मान करते थे। शायद यही कारण था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी उन्हें भारत की सबसे लोकप्रिय नेताओं में शुमार किया। आज उनकी पुण्यतिथि पर देश उन्हें केवल एक पूर्व विदेश मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि उस जननेता के रूप में याद कर रहा है, जिसने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया और करोड़ों भारतीयों के दिलों में हमेशा के लिए अपनी जगह बना ली। -नीरज कुमार दुबे
तमिलनाडु के कृषि बजट पेश करने के दौरान डीएमके विधायकों का काली शर्ट पहनकर विरोध प्रदर्शन
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ईओ विमल कुमार हत्याकांड में स्पीडी ट्रायल के बाद दोषियों को जल्द मिले सजा: राजद विधायक
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मिलावटखोरों के खिलाफ भी करना पड़ेगा देशव्यापी आंदोलन
संसद भवन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार जारी है और वहीं देश के तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों पर भी मीडिया में काफी चर्चा हो रही है। लेकिन इस बीच कई ऐसी खबरें भी लगातार निकल कर सामने आ रही है, जिसपर बड़े पैमाने पर चर्चा, वाद-संवाद और कार्रवाई की जरूरत है। लेकिन इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि देश के सभी लोगों के जीवन से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मसले पर चर्चा करने का समय किसी के पास नहीं है। सत्ता में बैठने वाली किसी भी सरकार ( चाहे वो किसी भी राजनीतिक दल की हो) के पास इसके समाधान का कोई स्थायी फॉर्मूला या विज़न नहीं है, विपक्ष के पास भी इस पर बात करने की फुर्सत नहीं है और सरकारी अधिकारी अपने में ही मस्त है। मिलावटखोरी की समस्या अब हमारे देश की सबसे बड़ी भयावह समस्या बनती जा रही है, जिस पर रोक लगाने के लिए अब बड़े स्तर पर कदम उठाए बिना कोई बात नहीं बनेगी। देश में कानून भी है, नियम भी है, निगरानी के लिए विभाग भी है और अधिकारी भी है लेकिन फिर भी ऐसा लगता है कि मिलावटखोरों को किसी भी बात का कोई डर ही नहीं है। इसे भी पढ़ें: उन्नत बचपन की पहली शर्त- स्वस्थ भोजन, स्वस्थ भविष्य हाल ही में देश के एक बड़े अखबार ने इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में जो दावा किया है, उसने सबकी नींदे उड़ा दी है। इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश की कई आटा मिलों में गेंहू के आटे में सफेद पत्थर का चूरा यानी स्टोन पाउडर मिलाया जा रहा है। मुनाफाखोरी के लालच में ये मिलावटखोर हमें पत्थर वाले आटे से बनी रोटी खाने को मजबूर कर रहे हैं। जबकि ये भी जानते हैं कि इस मिलावटी आटे से बनी रोटी को खाने से लोगों के शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेंगे। आजकल लोगों के घरों से लेकर, फ़ास्ट फ़ूड, शादी-ब्याह और पार्टियों तक में सबसे ज्यादा पनीर का इस्तेमाल किया जाता है। कई एक्सपर्ट/ जिम ट्रेनर तो बॉडी को मजबूत बनाने के लिए भी पनीर खाने की सलाह देते हैं। लेकिन पनीर में मैदा या अरारोट मिलाना और स्किम्ड मिल्क पाउडर एवं वनस्पति तेल का इस्तेमाल कर सिंथेटिक या नकली पनीर बनाना तो आम बात हो गई है। बल्कि ऐसे गंभीर मामले भी कई बार सामने आए हैं, कि डिटर्जेंट या यूरिया से बने दूध का भी इस्तेमाल कर पनीर बनाया और बेचा जाता है। महाराष्ट्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही, राज्य में एनालॉग पनीर यानी नॉन डेयरी पनीर के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया कि असली पनीर बताकर इसे बेचना उपभोक्ताओं को गुमराह करना है। महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अपने आदेश में सख्त शब्दों में कहा कि नियम तोड़ने वालों पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। अपराध की गंभीरता के आधार पर 6 महीने तक की जेल और एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे पहले छत्तीसगढ़ सरकार भी एनालॉग पनीर यानी नॉन डेयरी पनीर को लेकर ऐसा ही फैसला कर चुकी है। सबसे अधिक दुःखद और परेशानी में डालने वाला तथ्य तो यह है कि देश की नामी-गिरामी कंपनियां भी उपभोक्ताओं को धोखा देने का कोई मौका नहीं चूकती है। रोजमर्रा की जरूरत का कई सामान बेचने वाली एफएमसीजी कंपनी डाबर को लेकर भी चौंकाने वाली ख़बर सामने आई है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने डाबर द्वारा किए जा रहे ' 100% प्योर', '100% ऑर्गेनिक' और '100% नेचुरल' जैसे दावों को भ्रामक बताते हुए ऐसे प्रोडक्ट्स की बिक्री को तुरंत रोकने का आदेश दे दिया है। इन प्रोडक्ट्स में शहद, गाय का देसी घी, तिल का तेल और नारियल पानी जैसी कई चीजें शामिल हैं। डाबर को 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी जमा करने को कहा गया है। इससे पहले भी कई नामी-गिरामी और बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर गंभीर सवाल उठ चुके हैं। सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि यही कंपनियां जब विदेश खासकर अमेरिका या यूरोपीय देशों में कोई सामान बेचती है तो उसकी क्वालिटी का खास ध्यान रखती है लेकिन भारतीयों के लिए इनका एटीट्यूड 'सब चलता है टाइप' ही होता है। लोग पैसे खर्च करने को तैयार हैं ताकि उन्हें शुद्ध आटा, दाल, चावल, मसाले, चीनी, दूध, घी, खाद्य तेल, सब्जियां, पनीर, शहद, पानी और अन्य सामान मिल सके। लेकिन ज्यादा खर्च के बाद भी उनके साथ न केवल ठगी की जा रही है बल्कि लोग गंभीर बीमारियों के भी शिकार होकर मरते भी जा रहे हैं। लेकिन क्या सिर्फ कानून बना देने से इस भयावह समस्या का समाधान हो जाएगा, कतई नहीं। इसके लिए युद्धस्तर पर एक मिशन के तहत कई मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ेगा। नकली सामानों को बनने के स्तर पर ही रोकना होगा, इसके लिए उत्तरदायी विभाग में मैन पावर बढ़ाने के साथ ही उनकी जिम्मेदारी भी तय करनी होगी। इससे जुड़े विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हर महीने अपनी संपत्ति का ब्यौरा भी ऑनलाइन भरना चाहिए। ऐसे मामलों को निपटाने के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर फैसले की समय सीमा भी तय करनी होगी। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर कई अन्य कदम भी उठाने होंगे। लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि क्या हमारी सरकार, अधिकारी, अदालत और नेता..ये सब इसके लिए तैयार हैं? - संतोष कुमार पाठक लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं
कांग्रेस सांसदों ने संसद में निकाला मार्च, गृह मंत्री अमित शाह के सदन में न आने पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसदों ने संसद में निकाला मार्च, गृह मंत्री अमित शाह के सदन में न आने पर उठाए सवाल
राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र से पहले दिल्ली में अमित शाह से मिले सीएम भजनलाल
राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र से पहले दिल्ली में अमित शाह से मिले सीएम भजनलाल
जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड डिजिटल करने से क्या बदलेगा
Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill 2026: मानसून सत्र में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पेश हुआ, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह बिल सदन में रखा। इस विधेयक का उद्देश्य देशभर में जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को डिजिटल करना और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना है। आइए समझते हैं कि ये बिल क्या है, इससे क्या क्या नियम बदलेंगे और आम लोगों के लिए क्या लाभ होंगे। इस कानून के तहत अब पूरे देश में भारत सरकार नागरिक पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System) को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल बनाने के लिए नए संशोधन लागू कर रही है। विलंबित पंजीकरण के लिए सख्त प्रावधान नए प्रावधान के अनुसार, अगर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 2 साल से अधिक देर से कराया जाता है, तो अब DM या SDM इसकी मंजूरी नहीं दे सकेंगे. ऐसे मामलों में रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First-Class Judicial Magistrate) के आदेश के बाद ही हो सकेगा। इससे फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है। जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नए नियम 1. नाम दर्ज कराने और सुधार के नियम - 12 महीने की सीमा: यदि जन्म के समय बच्चे का नाम दर्ज नहीं कराया गया है, तो माता-पिता या अभिभावक को 12 महीने के भीतर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा। - मानक प्रारूप (Standard Format): जन्म प्रमाण पत्र में नाम केवल फर्स्ट नेम, मिडिल नेम और लास्ट नेम के प्रारूप में ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी प्रकार का शॉर्ट फॉर्म मान्य नहीं होगा। - विलंब शुल्क (Late Fee): 1 वर्ष के बाद से लेकर 15 वर्ष की आयु तक नाम दर्ज कराने पर विलंब शुल्क देय होगा। - त्रुटि सुधार (Correction): स्पेलिंग या अन्य मामूली गलती होने पर जिला रजिस्ट्रार को आवेदन देकर सुधार करवाया जा सकता है। - आवश्यक दस्तावेज: इस पूरी प्रक्रिया के लिए माता-पिता के पहचान पत्र (स्व-प्रमाणित दस्तावेज) और पते का सही सत्यापन जमा करना अनिवार्य होगा। इसे भी पढ़ें: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के सुप्रीमो प्रशांत किशोर की जीत के सियासी मायने चौंकाने वाले 2. देरी से पंजीकरण के लिए प्रस्तावित नए नियम - वर्तमान व्यवस्था में 1 वर्ष से अधिक की देरी पर जिला मजिस्ट्रेट (DM), SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होती है। - नए विधेयक के तहत इस प्रक्रिया को दो श्रेणियों में बांटा गया है: - देरी की अवधि - स्वीकृत करने वाली अथॉरिटी प्रक्रिया व शर्तें - 1 से 2 वर्ष की देरी जिला मजिस्ट्रेट (DM), SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट, मौजूदा प्रक्रिया के तहत ही क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट से मंजूरी और निर्धारित शुल्क। - 2 वर्ष से अधिक की देरी प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट - कड़े नियम: मामला कार्यपालिका से न्यायपालिका के पास जाएगा। गहन जांच के बाद ही अनुमति मिलेगी। | - ध्यान दें: अनुमति देने से पहले नामित अधिकारी के लिए जन्म या मृत्यु की सत्यता का सत्यापन (Verification) करना अनिवार्य होगा। 3. विधेयक लाने का उद्देश्य और जरूरत a. फर्जी रिकॉर्ड पर रोक: असत्यापित या फर्जी दावों के आधार पर बनने वाले जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्रों पर पूरी तरह से अंकुश लगाना। b. सटीक राष्ट्रीय डेटा: स्कूल दाखिले, मतदाता सूची, राशन कार्ड, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं के डेटाबेस को अधिक विश्वसनीय बनाना। c. समय पर सूचना को बढ़ावा: लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जन्म व मृत्यु की जानकारी दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करना। d. अस्पताल के बाहर हुई मृत्यु: इसके पंजीकरण के लिए मान्यता प्राप्त डॉक्टर का मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य करना। 4. पंजीकरण का कानूनी महत्व - जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। - जन्म प्रमाण पत्र की उपयोगिता: स्कूल/कॉलेज में प्रवेश, पासपोर्ट बनवाने, आधार नामांकन, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, सरकारी नौकरियों और विवाह पंजीकरण आदि के लिए प्राथमिक दस्तावेज। - मृत्यु प्रमाण पत्र की उपयोगिता: संपत्ति के हस्तांतरण, विरासत के दावों, बीमा क्लेम, पेंशन लाभ और बैंक खाते बंद कराने के लिए आवश्यक। 5. कानून के संभावित प्रभाव - पारदर्शिता और विश्वसनीयता: न्यायिक निगरानी (Judicial Oversight) लागू होने से प्रशासनिक दुरुपयोग और फर्जीवाड़ा रुकेगा। - सत्यनिष्ठ आवेदकों के लिए रास्ता खुला: जिनके पास पंजीकरण में देरी के वैध और ठोस कारण हैं, वे न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे। - संतुलन: यह संशोधन प्रत्येक नागरिक का रिकॉर्ड सुरक्षित करने और प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के बीच एक प्रभावी संतुलन स्थापित करता है। केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जुड़ेगा रिकॉर्ड इस कानून के तहत अब पूरे देश के जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। इससे देश के किसी भी हिस्से में होने वाले जन्म या मृत्यु की जानकारी एक ही जगह ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इस डेटाबेस को मतदाता सूची, राशन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य राष्ट्रीय पहचान पत्रों से भी जोड़ा जाएगा। कोई नागरिक 18 वर्ष का होगा, उसका नाम स्वतः मतदाता सूची में जुड़ जाएगा। वहीं, किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर सरकारी रिकॉर्ड से उसका नाम आसानी से हटाया जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों और फर्जी लाभ उठाने की घटनाओं पर रोक लगेगी। नए कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र सबसे मुख्य दस्तावेज बन जाएगा। अब तक स्कूल में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस या सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन इस बिल के पास होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र ही उम्र और पहचान का एकमात्र आधिकारिक दस्तावेज माना जाएगा। जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड डिजिटल कर देने से जो सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा वह देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले घुसपैठियों की पहचान करने हेतु एक व्यवस्थित एवं मजबूत सिस्टम डेवलप होगा। यह बात किसी से नहीं छुपी हुई है कि घुसपैठ करने वाले लगातार देश की सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं उनके मंसूबों को काफी हद तक रोकने में यह कानून मददगार सिद्ध होगा। फ़र्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र तथा उसके द्वारा आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, बैंक अकाउंट और मतदाता सूची में जुड़ जाने तक का कार्य हो जाता है। यह न सिर्फ अनधिकृत रूप से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बल्कि भारत देश में रहकर इसकी एकता और अखंडता को तोड़ने का काम करने वालों को रोकने के लिए एक ठोस और सशक्त उपाय सिद्ध होगा। - डॉ ऋतु दुबे तिवारी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ वर्तमान में गाजियाबाद में NISCORT कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया
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टीवीके सरकार ने पेश किया पहला कृषि बजटः मिट्टी की सेहत, उत्पादकता बढ़ाने और एआई-आधारित सेवाओं को विस्तार करने की घोषणा
लोकसभा में गतिरोध जारी, विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित
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अरविंद केजरीवाल ने मेटा पर लगाया अपने इंस्टाग्राम अकाउंट की पहुंच सीमित करने का आरोप
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मोहन भागवत के 'जेन जी संवाद' कार्यक्रम पर बिहार भाजपा अध्यक्ष बोले- 'यह स्वागत योग्य कदम'
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नीट पेपर लीक केस : सुप्रीम कोर्ट में 19 अगस्त को अगली सुनवाई, केंद्र के हलफनामे पर मांगा जवाब
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कांवड़ियों पर मौलाना रशीदी का विवादित बयान, आतंकवादियों से की शिवभक्तों की तुलना
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सोने में लगातार तेजी देखी जा रही है और गुरुवार को सत्र की शुरुआत के साथ ही वायदा बाजार में सोने का दाम 1.49 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया।
प्रतापगढ़ में घर गिरने से छह लोगों की मौत पर सीएम योगी ने जताया दुख
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कैबिनेट बैठक में जनता के अनुरूप कई फैसले लेगी पश्चिम बंगाल सरकार: दिलीप घोष
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'राहुल गांधी से डर रही है सरकार', प्रयागराज के कार्यक्रम की बुकिंग रद्द किए जाने पर बोले कांग्रेस नेता
कुछ साल पेट्रोल-डीजल की गाड़ियां खरीदने से बचें, ई20 नीति पर केजरीवाल ने उठाए सवाल
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गुजरात सरकार का ऐतिहासिक कदम, पंचायतों में ऑडिट के बाद 'एग्जिट कॉन्फ्रेंस' अनिवार्य
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'हम छात्रों की हर नैतिक मांग के साथ', झारखंड में प्रदर्शन पर कांग्रेस नेताओं ने किया सरकार का बचाव
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'सिर्फ जेपीएससी नहीं, झारखंड की पिछली परीक्षाओं में भष्टाचार से भी निराश हैं छात्र', रांची प्रोटेस्ट पर बोले जदयू प्रवक्ता
'तोड़ा भरोसा...' सोनम वांगचुक का सरकार पर बड़ा हमला, बोले- किए गए वादे अब तक...'
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तमिलनाडु सरकार का बड़ा कदम, 22500 लोगों को दी जाएगी इलेक्ट्रिक वाहन सर्विसिंग की ट्रेनिंग
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तमिलनाडु: टीवीके सरकार के पहले कृषि बजट में किसानों को ऋण माफी और MSP पर बड़ी घोषणाओं की उम्मीद
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मुख्यमंत्रियों ने पुण्यतिथि पर पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को किया याद और दी श्रद्धांजलि
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बिहार युवा कांग्रेस सदस्यता अभियान – 05 अगस्त से 04 सितंबर तक चलेगा
बिहार युवा कांग्रेस के प्रदेश निर्वाचन पदाधिकारी रामाश्रय चौहान एवं जोनल निर्वाचन पदाधिकारी देवराज यादव ने बुधवार को बताया कि बिहार युवा कांग्रेस का डिजिटल सदस्यता अभियान 05 अगस्त से 04 सितंबर तक चलेगा
राजस्थान विधानसभा में सर्वदलीय बैठक – 18 अगस्त को होगी अहम चर्चा
राजस्थान की सोलहवीं विधानसभा के षष्ठम सत्र से पहले 18 अगस्त को सर्वदलीय बैठक आयोजित की जायेगी
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बयान – किसान की आवाज दबाई जा रही
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि आज किसान और मजदूर सबसे अधिक परेशान हैं, लेकिन उनकी आवाज को दबाया जा रहा है
मोहन भगवत मुंबई में जेन जी और जेन अल्फा से करेंगे बातचीत, विश्व को एकजुट करने में भारत की भूमिका पर होगी चर्चा
राहुल गांधी मानहानि केस – हाईकोर्ट जाने के लिए वादी को मिला समय
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर स्थित एमपी/एमएलए कोर्ट में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई बुधवार को हुई
जम्मू-कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा मिले : कांग्रेस
कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य के दर्जे को तत्काल बहाल करने की मांग करते हुए कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 370 हटाए जाने और तत्कालीन राज्य के पुनर्गठन के सात वर्ष बाद भी केंद्र सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेटफ्लिक्स के सह-सीईओ टेड सारंडोस से मुलाकात के बाद कहा कि भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र अपार संभावनाओं से भरा है। उन्होंने कहा कि देश की समृद्ध कहानी कहने की परंपरा और रचनात्मक प्रतिभा भारत को वैश्विक कंटेंट निर्माण का प्रमुख केंद्र बना सकती है।
मुंबई: आदित्य ठाकरे ने सीएम फडणवीस को लिखा पत्र, सार्वजनिक जमीन संस्था को आवंटित करने का किया विरोध
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। इस पत्र में आदित्य ठाकरे ने मुंबई की लगभग 16 एकड़ सार्वजनिक खुली जमीन एक संस्था को आवंटित किए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है।
नई दिल्ली में 7-8 अगस्त को दो दिवसीय निवेश अभियान का नेतृत्व करेंगे ओडिशा सीएम मोहन चरण माझी
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी 7-8 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रम (इन्वेस्टमेंट आउटरीच प्रोग्राम) का नेतृत्व करेंगे। इस पहल का उद्देश्य राज्य में बड़े निवेश आकर्षित करना और औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करना है
ये लोग बदले की भावना से कर रहे काम: जयराम ठाकुर
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भाजपा नेताओं के खिलाफ मामलों को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा।
भागवत का 'जेनजी संवाद' देश को सही दिशा देगा, नशा, कट्टरता और प्रदूषण की चुनौती : इंद्रेश कुमार
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हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा अधिकारियों के वेतन में वृद्धि
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बिहार विधान परिषद के लिए मनोनीत होने पर दीपक प्रकाश बोले- जिम्मेदारी को प्रतिबद्धता के साथ निभाऊंगा
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त्रिपुरा में नशे और अपराध पर जीरो टॉलरेंस, सीएम माणिक साहा ने दिए कड़े निर्देश
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नितिन गडकरी के ई20 डीपफेक वीडियो मामला: मुंबई कोर्ट ने 'मेटा' और 'एक्स' से मांगी अपलोडर्स की जानकारी
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बंगाल: 'बांग्लार बारी परियोजना' का नाम बदलकर 'पश्चिम बंगाल आवास' रखा जाएगा
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भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग पर बैठक, संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास पर जोर
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जीआईडीसी जमीन घोटाला: शक्ति सिंह गोहिल का आरोप, ताक पर रखे गए नियम
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छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले 66 माओवादियों को 6.60 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी
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जम्मू-कश्मीर को उसका हक मिले, सदन चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की ज्यादा : सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी
असम में बाढ़ पीड़ित छात्रों को राहत, मुफ्त किताबों के लिए सरकार देगी पैसे: सीएम सरमा
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मुंबई, 5 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेएवाई) के तहत वर्ष 2024 से 2026 के बीच दर्ज 15,407 संदिग्ध चिकित्सा उपचार दावों की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
जेनजी से संवाद जरूरी, कृषि में रोजगार और बिजनेस के लिए युवाओं को मिले सही दिशा : बीएयू के वाइस-चांसलर
अरुणाचल प्रदेश ने विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है: राज्यपाल परनाइक
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‘कांग्रेस एकजुट’: मुलाकात के बाद शिवकुमार ने असहमति की आशंका को खारिज किया
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का सर्वांगीण विकास हुआ: नरेश बंसल
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बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, पूर्वांचल की राजनीति में शोक की लहर
बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, पूर्वांचल की राजनीति में शोक की लहर
विधानसभा में संभल हिंसा आयोग की रिपोर्ट पेश, 24 नवंबर की घटना को बताया पूर्व नियोजित साजिश
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच संभल हिंसा की न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट बिना चर्चा के सदन के पटल पर रख दी गई
कावेरी जल विवाद पर डीएमके का आरोप, पी. विल्सन ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्नाटक नहीं छोड़ रहा पानी
फसल बीमा के दायरे में 1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक भूमि के साथ राजस्थान देश में अग्रणी
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मेघालय की प्रारूप मतदाता सूची में फिर महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक, सत्यापन के बाद 1.8 लाख से ज्यादा नाम हटे
यूपी बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, मायावती समेत कई नेताओं ने जताया दुख
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तेजस्वी यादव अगर सीरियस होते तो बांकीपुर में 14,000 की जगह 74,000 वोट मिलते : साधु यादव
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कर्नाटक सरकार 34,000 ग्रामीण मंदिरों में पुजारियों की ट्रेनिंग में मदद करेगी: सीएम शिवकुमार
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छत्तीसगढ़ सीएम ने वन महोत्सव 2026 का किया शुभारंभ, ‘पीपल सिटी’ विकसित करने की घोषणा
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'वे नेहरू और इंदिरा गांधी की पूजा करते हैं': भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला
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सीएम फडणवीस को सिद्धि विनायक मंदिर प्रकरण पर एसआईटी से जांच करानी चाहिए: महेश तपासे
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दीपक प्रकाश का विधान परिषद मनोनीत होना पहले से तय था: उपेंद्र कुशवाहा
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पंजाब मंत्रिमंडल ने 'ग्रीन कवर' बनाए रखने के विधेयक को मंजूरी दी
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जम्मू-कश्मीर: लश्कर आतंकी की गिरफ्तारी पर 15 लाख का इनाम, पुलिस ने की घोषणा
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सरकार सदन में देशहित के मुद्दों पर चर्चा के बजाय ध्यान भटका रही: सपा
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मिजोरम और असम के बीच शांति और आपसी समझ को प्राथमिकता देना अनिवार्य: मुख्यमंत्री लालदुहोमा
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यूपी की जनता अखिलेश यादव के कार्यकाल में माफिया राज को नहीं भूली है: रोहन गुप्ता
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