आजादी के 80 साल: भारत की वैश्विक छवि कैसी? अमेरिका-ब्रिटेन समेत दुनिया के 36 देशों की राय सामने आई
प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे के अनुसार, भारत की वैश्विक छवि श्रीलंका में सबसे सकारात्मक (79%) और पाकिस्तान में सबसे नकारात्मक (91%) पाई गई।
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे|Trump
Iran America War में अमेरिका के MQ9 Reaper drone का भारी नुकसान,कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे
चीन पर निशाना, भारत पर आरोप... अमेरिकी रिपोर्ट ने 40 देशों पर उठाए सवाल
अमेरिकी व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट ने भारत सहित 40 से अधिक देशों पर चीनी उत्पादों को तीसरे देश के रास्ते अमेरिकी बाजारों में भेजने का आरोप लगाया है, जिससे अमेरिका को भारी नुकसान हो रहा है। भारत ने आरोपों पर कहा है कि वह रिपोर्ट की पद्धति की जांच कर रहा है और उसके पास निर्यात नियमों के मजबूत प्रावधान हैं।
भारत-पाकिस्तान की दुश्मनी पर अमेरिकी सर्वे का बड़ा खुलासा! 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को मानते है बड़ा खतरा
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान पर नकेल कसने के लिए आर्थिक दबाव को और अधिक बढ़ाने की चेतावनी दी है। इस बीच, दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो टैंकरों को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर एक बार फिर बड़ा संकट मंडराने लगा है।अमेरिका की कड़ी चेतावनी और ईरान पर वित्तीय चोट की तैयारीअमेरिकी प्रशासन ने आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वह ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह झकझोरने के लिए तैयार है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अमेरिकी नौसेना के पास क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखने और ईरान की आर्थिक नाकेबंदी को लंबे समय तक जारी रखने की पूरी क्षमता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जहाजों की रोटेशन के जरिए इस नाकेबंदी को अनिश्चितकाल तक बनाए रख सकता है। वहीं, ट्रेजरी सेक्रेट्री स्कॉट बेसेंट ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान पर वित्तीय रूप से अब तक की सबसे बड़ी चोट पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है और आने वाले दिनों में कुछ ऐतिहासिक आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की जा सकती है।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर घरेलू मोर्चे पर भारी दबावदूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह पूरा भू-राजनीतिक घटनाक्रम घरेलू राजनीति के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। देश के भीतर ट्रंप पर लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि वे ईरान के साथ चल रहे तनाव और संघर्ष का कोई स्थायी समाधान निकालें। देश में लगातार बढ़ रही ईंधन की कीमतों ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता पर पड़ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आगामी मध्यावधि चुनावों में उनकी पार्टी को अमेरिकी कांग्रेस में राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर ड्रोन हमलेताजा हमलों की बात करें तो यूएई ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अबू धाबी की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी 'एडीएनओसी' (ADNOC) के स्वामित्व वाले दो टैंकरों पर होर्मुज क्षेत्र से गुजरते वक्त ड्रोन से हमले किए गए। यूएई ने इन हमलों को स्पष्ट रूप से 'समुद्री डकैती' करार दिया है। हालांकि, गनीमत यह रही कि इन हमलों में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने फारस की खाड़ी से खुले समुद्र तक जाने वाले इस अहम जलमार्ग की सुरक्षा पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रिटिश सेना के मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने भी जहाजों को मामूली नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर ईरान के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर' को जिम्मेदार ठहराया है और इसे अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन बताया है।
ईरान की कमर तोड़ने की योजना, अमेरिका का इरादा क्या? होर्मुज में रुक नहीं रहे हमले
अमेरिका ने ईरान को फिर से धमकी दी है कि वह आर्थिक दबाव और ज्यादा बढ़ाएगा। इस बीच होर्मुज से गुजरने वाले दो और जहाजों पर हमला हुआ है। दावा किया जा रहा है कि यह बिना इजाजत के होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे थे।
कई अमेरिकी राज्यों ने इंडिया डे मनाया, भारतीय और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की
अमेरिका के कई राज्यों और शहरों ने 15 अगस्त को 'इंडिया डे' घोषित किया है। इसके जरिए भारत के स्वतंत्रता दिवस का सम्मान किया गया और देश की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और नागरिक जीवन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बढ़ते योगदान को मान्यता दी गई है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक बार फिर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अमेरिका की ओर से जारी की गई एक नई रिपोर्ट में भारत पर सीधा आरोप लगाया गया है कि वह चीन को अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) से बचने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रहा है। व्हाइट हाउस के शीर्ष व्यापार सलाहकार पीटर नवारो द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट का नाम ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ रखा गया है, जिसमें दावा किया गया है कि अवैध नेटवर्क के जरिए भारी मात्रा में चीनी सामान को तीसरे देशों के रास्ते अमेरिकी बाजार में खपाया जा रहा है।क्या है 'शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क' और कैसे होता है खेल?व्हाइट हाउस की इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत समेत दुनिया के 40 से अधिक देश चीन के लिए एक 'शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क' की तरह काम कर रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस अवैध नेटवर्क के माध्यम से सालाना 40 अरब डॉलर से लेकर 303 अरब डॉलर तक का चीनी सामान दूसरे देशों के रास्ते अमेरिका पहुंच रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले कई सालों से यह बड़ा घोटाला कम्युनिस्ट चीन को अपने एक्सपोर्ट्स को री-रूट या लॉन्ड्रिंग करने का मौका दे रहा है, जिससे चीनी कंपनियां अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ से आसानी से बच निकलती हैं।भारत को लेकर रिपोर्ट में क्या लगाए गए हैं आरोप?इस रिपोर्ट में विशेष तौर पर यह आरोप लगाया गया है कि चीन तीसरे देशों में अपने सामान की मामूली प्रोसेसिंग, री-पैकेजिंग, लेबल बदलने या उत्पाद के रूट में बदलाव करके उसे वहां का स्थानीय उत्पाद दिखाने की कोशिश करता है। रिपोर्ट में भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई जैसे प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन बेल्ट का भी खास जिक्र किया गया है। अमेरिका का आरोप है कि इन इलाकों में चीन से आए पंप, कंप्रेसर और अन्य कलपुर्जों को भारतीय उत्पाद के रूप में री-लेबल करके अमेरिकी बाजार तक पहुंचाया जाता है, जिससे चीनी सामान पर लगने वाले भारी आयात शुल्क से बचा जा सके। भारत के अलावा इस लिस्ट में मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देशों के नाम भी शामिल हैं।टैरिफ चोरी रोकने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का होगा इस्तेमालइस तरह की टैरिफ चोरी और अवैध माल की आवाजाही पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका अब बेहद सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ऐसे संदिग्ध शिपमेंट की सटीक पहचान के लिए एक उन्नत AI आधारित ‘डिटेक्टिव बॉर्डर’ सिस्टम का उपयोग करने जा रहा है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम शिपमेंट के बड़े डेटा, सामान के आने-जाने के रूट, उत्पाद की कैटेगरी, कंपनियों के मालिकाना हक और उनकी उत्पादन क्षमता जैसे तमाम आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य संदिग्ध उत्पादों की पहचान करना और जरूरत पड़ने पर भारी शुल्क वसूली, जुर्माना लगाने या अमेरिकी बाजार में उनके प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाना है।
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जंग में ईरान ने गिराए अमेरिका के 45 रीपर ड्रोन, हथियारों पर संकट
ईरान से जंग में अमेरिका के लिए सिर्फ मैदान पर लड़ाई मुश्किल नहीं हो रही, हथियारों का हिसाब भी बिगड़ रहा है. 45 रीपर ड्रोन खोने के साथ मिसाइलों का बड़ा स्टॉक भी खर्च हो चुका है.
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा गलियारों में इन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसी लगातार अमेरिका को आगाह कर रही है कि ईरान राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की खतरनाक साजिश रच रहा है। इजरायल का दावा है कि ईरान कभी स्नाइपर, कभी चाकू तो कभी मिसाइल के जरिए ट्रंप को निशाना बना सकता है। हालांकि, इजरायल द्वारा दी जा रही इन तमाम चेतावनियों और खुफिया इनपुट्स के बावजूद अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) और अन्य अमेरिकी अधिकारी इन दावों पर पूरी तरह आंख मूंदकर भरोसा करने से बच रहे हैं।तुर्की दौरे के दौरान क्यों बदलना पड़ा था ट्रंप का विमानइजरायल की तरफ से दी गई सबसे खतरनाक चेतावनियों में से एक वाकया जुलाई महीने में तुर्की में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आया था। इजरायली खुफिया एजेंसी ने सीधे व्हाइट हाउस को अलर्ट भेजा था कि जब डोनाल्ड ट्रंप अपने आधिकारिक विमान 'एयर फोर्स वन' से उड़ान भरेंगे, तो ईरान शोल्डर मिसाइल के जरिए उस पर हमला कर सकता है। हालांकि अमेरिकी एजेंसियों को इस इनपुट पर पूरा भरोसा नहीं था, फिर भी सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सीक्रेट सर्विस ने कोई जोखिम नहीं उठाया। एक गुप्त ऑपरेशन के तहत ट्रंप को एयरफोर्स वन से निकालकर चुपचाप दूसरे विमान में शिफ्ट किया गया। वहीं दूसरी तरफ, जब तुर्की की खुफिया एजेंसियों ने इन दावों की अपने स्तर पर जांच की, तो उन्हें ट्रंप पर हमले की साजिश का कोई भी पुख्ता सबूत नहीं मिला।इजरायली खुफिया इनपुट्स पर CIA को क्यों है संदेहसवाल यह उठता है कि आखिर अमेरिका इन चेतावनियों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त क्यों नहीं हो पा रहा है? रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी इन खुफिया जानकारियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि (Independent Verification) नहीं कर पा रहे हैं, जिसके चलते सीआईए का इजरायली इनपुट्स पर भरोसा थोड़ा कमजोर है। अमेरिका का यह भी मानना है कि साल 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद से ईरान बदला लेने की फिराक में जरूर है, लेकिन परमाणु हथियारों और अन्य सुरक्षा मामलों में भी अमेरिका और इजरायल के आकलन अक्सर अलग रहे हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना था कि ईरान सक्रिय रूप से परमाणु बम नहीं बना रहा है, जबकि इजरायल इसके उलट लगातार दावे करता रहा है।क्या अमेरिका को युद्ध में घसीटने की है कोई बड़ी चालराजनीतिक विश्लेषकों और आलोचकों का मानना है कि इजरायल इस तरह की सनसनीखेज और डरावनी खुफिया जानकारियां साझा करके अमेरिका को ईरान के खिलाफ और अधिक आक्रामक तथा कड़े सैन्य कदम उठाने के लिए मजबूर करना चाहता है। यही वजह है कि ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के रास्तों को खुला रखने वाले अमेरिकी अधिकारी अब हर कदम बहुत ही फूंक-फूंक कर रख रहे हैं, ताकि किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया को समय से पहले पटरी से उतरने से बचाया जा सके।
पंजाब के बठिंडा, संगरूर और अमृतसर जिलों में भारतीय किसान यूनियन उगराहां (बीकेयू उगराहां) द्वारा 20 अगस्त को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में धरने दिए जाएंगे। इन धरनों को सफल बनाने के लिए किसानों द्वारा बैठकों का सिलसिला जारी है। मानसा में बीकेयू उगराहां के जिला प्रधान राम सिंह भैणी बाघा ने जानकारी देते हुए बताया कि किसान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करवाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह तीन कृषि कानूनों को किसानों ने रद्द करवाया था, उसी तरह इस समझौते को भी रद्द करवाने के लिए देश की संघर्षशील जत्थेबंदियां एकजुट हो चुकी हैं। लैंड पूलिंग नीति को लेकर किसानों में रोष इन धरनों की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता वार्ता रद्द करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, दोबारा लाई जा रही लैंड पूलिंग नीति की योजना को रद्द करने की भी मांग की गई है। किसानों की अन्य मांगों में आबादकारों, पूर्व मुजारों सहित दशकों से खेती करते आ रहे किसानों और खेत मजदूरों को जमीनों के मालिकाना हक देना और इन जमीनों से उनका उजाड़ा तुरंत बंद करना शामिल है। वे किसानों, खेत मजदूरों और अन्य दिहाड़ीदार श्रमिकों के सभी कर्ज माफ करने की भी मांग कर रहे हैं। आत्महत्या पीड़ित परिवारों को नौकरी और मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई है। किसानों और खेत मजदूरों के हितों की रक्षा और विकास के लिए पर्यावरण हितैषी तथा कॉरपोरेटों और जागीरदारों के विरोध वाली पंजाब की कृषि नीति बनाने और लागू करने की भी मांग की गई है। कार्यकर्ताओं पर दर्ज झूठे मामले रद्द करने की मांग संघर्षों के दौरान किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज सभी झूठे मामले रद्द करने तथा गिरफ्तारी के सभी वारंट तुरंत रद्द करने की मांग की गई है। पराली जलाने के सभी मामले तत्काल वापस लेने की भी मांग शामिल है। राम सिंह भैणी बाघा ने कहा कि राज्य में संघर्ष कर रहे लोगों पर अत्याचार करना बंद किया जाए और संघर्ष करने के लोकतांत्रिक अधिकार की गारंटी दी जाए। उन्होंने कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों के जरिए लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों का दमन बंद करने की भी मांग की।
अमेरिका में नई कार की पूजा, पंडित जी ने 'ॐ' बना दिया, लेकिन 'स्वस्तिक' बनाने से इनकार कर दिया
Indians In America: अमेरिका में नई कार की पूजन के दौरान पंडित जी के 'ओम' पर 'स्वस्तिक' बनाने से इनकार न करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
चीनी समान पर भारत से भिड़ा अमेरिका, ट्रंप के सलाहकार अब कौन सी रिपोर्ट लेकर आ गए?
अमेरिका ने भारत को लेकर एक बड़ा आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट में भारत को शैडो ट्रांसिपमेंट नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है। जिसके जरिए कथित तौर पर चीन के ऊंचे अमेरिकी टैरिफ वाले सामान को तीसरे देशों के रस्ते अमेरिकी बाजार तक पहुंचाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन देशों में कम टेरिफ का फायदा उठाकर चीनी सामान को इस तरह दोबारा रूट किया गया कि उसकी असली उत्पत्ति छिपी रहे और अमेरिकी शुल्क से बचाया जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो की तैयार रिपोर्ट द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम में संभावित अवैध ट्रांसशिप का अनुमान करीब 60 अरब डॉलर लगाया गया है। इस रिपोर्ट का दावा है कि इस व्यवस्था के कारण अमेरिकी सरकार को टेरिफ से मिलने वाले राजस्व में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ और रिपोर्ट में कहा गया कि जिन देशों पर चीनी सामान की री-रूटिंग के जरिए अमेरिकी कानून से बचने में मदद करने का आरोप है उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। इनमें तत्काल माल रोकना, दंडनात्मक टेरिफ लगाना, प्रतिबंध और जरूरत पड़ने पर अमेरिकी बाजार तक पहुंच खत्म करने जैसे कदम शामिल है। इसे भी पढ़ें: सीधे रास्ते पर नहीं चला तो...सिंधु जल संधि पर शहबाज ने भारत को दी खुली धमकी व्हाइट हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 देश इस शैडो ट्रांसिपमेंट नेटवर्क में किसी ना किसी तरह अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इन्हें चीनी मूल के सामान को कम टैरिफ वाले रास्ते से अमेरिका पहुंचाने में उनकी भूमिका के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। भारत को टिए वन में रखा गया है। इस श्रेणी में कनाडा, जापान, यूरोपीय संघ, इजराइल और मेक्सिको जैसे अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदार शामिल। रिपोर्ट में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के हवाले से एक अनुमान दिया गया कि 2025 में चीन से अमेरिका जाने वाला करीब 67 अरब डॉलर का सामान मेक्सिको, भारत और वियतनाम जैसे प्रमुख हब के जरिए ट्रांसिप किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इससे करीब 28 अरब डॉलर के टेरिफ राजस्व का नुकसान हुआ। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस कथित नेटवर्क की शुरुआत 2018 से जोड़ी गई। इसे भी पढ़ें: Delhi Police ने Cyber Fraud गिरोह से जुड़े 4 आरोपियों को यूपी और हरियाणा से पकड़ा उस समय ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ बढ़ते अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने के लिए चुनिंदा चीनी उत्पादों पर सेक्शन 301 के तहत टेरिफ लगाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद चीनी निर्यातकों ने सामान को सीधे चीन से अमेरिका भेजने के बजाय तीसरे देशों के रास्ते भेजना शुरू किया। इन जगहों पर सीमित असेंबली, फिनिशिंग, रिककैपिंग, रीलेबलिंग या दस्तावेजों में बदलाव के जरिए सामान का मूल देश अलग दिखने की स्थिति बनाई जा सकती थी। इस रिपोर्ट में भारत के पुणे, गुजरात चेन्नई कॉरिडोर का जिक्र किया गया। इसमें दावा किया गया कि इलेक्ट्रिक पंप और कंप्रेसर जैसी चीनी सामान की ट्रांसिपमेंट से इस कॉरिडोर को आर्थिक फायदा हुआ। जबकि अमेरिका के ओहायो राज्य के डेटन और कोलंबस जैसे शहर में मौजूद निर्माताओं को नुकसान हुआ। इस रिपोर्ट का सामने आना ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार को लेकर तनाव बना हुआ है। इसे भी पढ़ें: Vishwakhabram: Putin के Kuril Islands पहुँचते ही भड़क उठीं Sanae Takaichi, Japan-Russia के बीच जोरदार भिड़ंत से दुनिया हैरान रिपोर्ट जारी होने से छ दिन पहले अमेरिकी सेनेट ने एक ऐसा बिल को 8611 वोटों से मंजूरी दी थी जिसमें रूस से तेल, गैस और अन्य निर्यात खरीदने वाले देशों पर 100% टेरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। इस बिल में भी चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़र-बैजान को संभावित निशाने के तौर पर शामिल किया गया। इसके प्रायोजकों ने कहा कि इसकी दर इतनी ऊंची होनी चाहिए कि चीन और भारत रूसी तेल खरीद ना पाएं। हालांकि भारत अमेरिका का तनाव और भी वजहों से बढ़ा हुआ है।
अमेरिका के सामने झुक रहा है भारत, केंद्र सरकार की विदेश नीति से देश को नुकसान : जेबी माथर
कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने केंद्र की केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर तीखा हमला बोला है।
अमेरिका ने भारत समेत 40 देशों पर लगाया बड़ा आरोप
अमेरिका ने भारत समेत करीब 40 देशों पर चीन के उत्पादों को अमेरिकी टैरिफ से बचाने के लिए कथित ‘गुप्त माल ढुलाई नेटवर्क’ का हिस्सा होने का आरोप लगाया है।
अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी ने इंफ्लुएंसर बनने की चाह रखने वाले लोगों के लिए कंटेंट क्रिएशन डिग्री कोर्स की शुरुआत की है।
दावा- अमेरिकी जंगी जहाज़ से कुछ सैनिकों ने समंदर में कूदने की कोशिश की, पेंटागन क्या बोला - BBC
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दावा- अमेरिकी जंगी जहाज़ से कुछ सैनिकों ने समंदर में कूदने की कोशिश की, पेंटागन क्या बोला
खबरों के मुताबिक, 250 दिनों से समंदर में मौजूद यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात हजारों नाविकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. कुछ ने तो जहाज़ से कूदने की भी कोशिश की.
हैकर्स को हैक करेगा अमेरिका! ट्रंप ने कंपनियों को दी साइबर हमले की छूट- चीन और रूस को कर रहे कॉपी?
अबतक साइबर हमले करने जैसा काम आम तौर पर अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों तक ही सीमित था. अब डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को भी इसकी अनुमति दे दी है. जानिए उन्हें क्या शर्तें माननी पड़ेगी.
Trump Tariff पर US का बड़ा दावा: भारत समेत 40 से ज्यादा देश चीन के सामान को अमेरिकी टैक्स से बचाने में मदद कर रहे?
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कीमती धातुओं में दबाव, सोने-चांदी की कीमतों में 1.6 प्रतिशत तक की गिरावट
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कीमती धातुओं में दबाव, सोने-चांदी की कीमतों में 1.6 प्रतिशत तक की गिरावट
मध्य पूर्व के सुलगते हालात और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक रणनीतिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आ रही है. दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माने जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अब अमेरिकी सेना और विशेषकर रक्षा साजो-सामान के लिए आधुनिक समय का 'बर्मूडा ट्रायंगल' साबित होता दिखाई दे रहा है. डिफेंस एक्सपर्ट्स और खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के साथ चल रहे अप्रत्यक्ष और सामरिक संघर्ष के दौरान अमेरिका को इस रणनीतिक क्षेत्र में भारी-भरकम और अपूरणीय क्षति उठानी पड़ी है. ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियानों और निगरानी मिशनों के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक और बेहद महंगे लगभग 45 ड्रोन रहस्यमयी और खतरनाक परिस्थितियों में जमीनी या समुद्री हमलों का शिकार होकर लील लिए गए हैं. तकनीकी रूप से बेहद उन्नत और अचूक माने जाने वाले इन मानवरहित विमानों के इस तरह अचानक नेस्तनाबूद हो जाने से पेंटागन और अमेरिकी रक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह इलाका अब अमेरिकी सैन्य शक्ति के लिए एक ऐसा चक्रव्यूह बन चुका है जिससे पार पाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है.1.2 लाख करोड़ रुपये की चपत और अत्याधुनिक तकनीक का नुकसानइस पूरे सैन्य संघर्ष में अमेरिका को केवल रणनीतिक मोर्चे पर ही शिकस्त नहीं मिल रही है, बल्कि उसे वित्तीय रूप से भी एक हजार या दो हजार करोड़ नहीं बल्कि कुल 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की जबर्दस्त चपत लगी है. होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जिन 45 ड्रोनों को ईरान या उसके समर्थित प्रॉक्सी समूहों द्वारा निशाना बनाया गया है, वे कोई साधारण ड्रोन नहीं थे बल्कि अत्याधुनिक जासूसी तकनीक, रडार जैमिंग क्षमताओं और मिसाइल डिफेंस प्रणालियों से लैस बेहद महंगे एयरक्राफ्ट थे. एक रिपोर्ट के अनुसार, इन ड्रोनों की कुल लागत और उनके साथ नष्ट हुए संवेदनशील सैन्य उपकरणों का बाजार मूल्य भारतीय मुद्रा के अनुसार करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये बैठता है. अमेरिकी रक्षा बजट और टैक्सपेयर्स के पैसे से तैयार की गई इस आधुनिक सैन्य संपत्ति का यूं पानी में समा जाना या दुश्मन के हाथों तबाह हो जाना अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है. वाशिंगटन के रणनीतिकारों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर महंगे हथियारों का नुकसान किसी भी देश की रक्षा तैयारियों को अंदर से खोखला कर सकता है.ईरान की अचूक सामरिक रणनीति और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताआखिर ऐसा क्या कारण है कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेना माने जाने वाली अमेरिकी सेना के ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य के इस भू-भाग में लगातार धराशायी हो रहे हैं? रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इस क्षेत्र में पारंपरिक युद्ध लड़ने के बजाय एक बेहद खतरनाक और आधुनिक 'इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर' यानी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का जाल बिछा रखा है. ईरानी सेना और उसके रक्षा इंजीनियरों ने ऐसे उन्नत जैमर्स और साइबर हथियार विकसित कर लिए हैं जो अमेरिकी ड्रोनों के सैटेलाइट नेविगेशन और जीपीएस सिग्नलों को आसानी से जाम कर देते हैं या उन्हें भटका देते हैं. जब एक बार इन ड्रोनों का संपर्क अपने कमांड सेंटर से टूट जाता है, तो वे या तो खुद क्रैश हो जाते हैं या फिर ईरानी सेना के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सुरक्षित उतरने के लिए मजबूर हो जाते हैं. इसके अलावा, ईरान के पास कम ऊंचाई पर उड़ने वाले इन ड्रोनों को हवा में ही नेस्तनाबूद करने वाली स्वदेशी एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों का एक मजबूत जखीरा भी मौजूद है. होर्मुज का यह संकीर्ण समुद्री गलिवार भौगोलिक रूप से भी ऐसा है जहां दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना और छुपकर हमला करना बहुत आसान हो जाता है, जिसका पूरा फायदा ईरानी सुरक्षा तंत्र उठा रहा है.वैश्विक तेल आपूर्ति और अमेरिकी साख पर मंडराता गंभीर संकटहोर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी ड्रोनों की इस बड़े पैमाने पर हुई बर्बादी और 1.2 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का असर केवल सैन्य क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. दुनिया का कुल कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, और इस इलाके में लगातार जारी तनाव के कारण वैश्विक एनर्जी सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है. यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह सैन्य संघर्ष और अधिक बढ़ता है, तो दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका असर भारत सहित तमाम विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है. इसके अलावा, जिस प्रकार से सुपरपॉवर अमेरिका के सबसे अत्याधुनिक हथियार ईरान के इस चक्रव्यूह में फंसकर तबाह हो रहे हैं, उससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी सैन्य साख और उसकी मारक क्षमता की धमक को करारा झटका लगा है. दुनिया के दूसरे देश अब यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या आधुनिक तकनीक भी हर जगह काम आ सकती है या फिर स्थानीय भूगोल और अचूक रणनीति किसी महाशक्ति को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर सकती है.
अमेरिका का बड़ा दावा: चीन पर टैरिफ से बचाने वाले 40 से ज्यादा देशों पर नजर, भारत भी सूची में
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत, कनाडा और यूरोपीय संघ समेत 40 से ज्यादा व्यापारिक साझेदारों को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन देशों के रास्ते चीन का सामान अमेरिका तक पहुंच सकता है और इस तरह चीन पर लगाए गए भारी टैरिफ से बचने की कोशिश हो […] यह लेख अमेरिका का बड़ा दावा: चीन पर टैरिफ से बचाने वाले 40 से ज्यादा देशों पर नजर, भारत भी सूची में सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
15 महीनों से अमेरिकी बॉर्डर पर कोई रिहाई नहीं: ट्रंप प्रशासन
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रिपब्लिकन जांच में आरोपः हार्वर्ड ने अमेरिकी सुरक्षा से अधिक चीन के साथ संबंधों को प्राथमिकता दी
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अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से प्रतिदिन 80 लाख से 90 लाख बैरल तेल का आवागमन हो रहा है। साथ ही, उन्होंने उन दावों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से यातायात में भारी गिरावट आई है।
ट्रंप की जान को खतरा! इजराइल ने अमेरिका को दी थी चेतावनी, स्नाइपर से लेकर मिसाइल तक से हो सकती है US प्रेसिडेंट की हत्या
Tariff: 'चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचने में मदद कर रहे भारत समेत 40 देश', अमेरिका ने लगाया गंभीर आरोप
40 countries, including India, are helping China evade tariffs US makes serious allegation.
JD Vance का बड़ा बयान, ईरान युद्ध में अब परमाणु से ज्यादा तेल पर फोकस? अमेरिका की रणनीति में आया बड़ा बदलाव
'होर्मुज से रोज गुजर रहा 80-90 लाख बैरल तेल', अमेरिका ऊर्जा मंत्री ने जलमार्ग से कम आवाजाही के दावों को किया खारिज
सैनिकों की परेशानी के चलते अमेरिका बदल रहा एयरक्राफ्ट कैरियर
अमेरिका मिडिल ईस्ट में USS अब्राहम लिंकन की जगह USS जॉर्ज वॉशिंगटन भेजने की तैयारी कर रहा है. लिंकन 250 दिनों से ज्यादा तैनात है. ईरान युद्ध के तनाव और जहाज पर रहने की खराब स्थितियों से सैनिकों पर दबाव बढ़ रहा है.
अमेरिका छोड़ भारत इलाज कराने आई महिला, हॉस्पिटल को बताया 5-स्टार, बोली- क्या इसी देश में बस जाऊं
American woman on Indian hospital: भारत के एक प्राइवेट अस्पताल में स्टारबक्स और शानदार सुविधाएं देखकर एक अमेरिकी महिला के होश उड़ गए. अमेरिका के महंगे इलाज से तुलना करने वाला उसका वीडियो वायरल हो गया.
एच-1बी वीजा फीस से अमेरिका की नौकरियां जा सकती हैं विदेश : लॉमेकर राजा कृष्णमूर्ति
वॉशिंगटन, 14 अगस्त . भारतीय-अमेरिकी लॉमेकर राजा कृष्णमूर्ति ने चेतावनी दी है कि नए एच-1बी वीजा पर 100,000 डॉलर की फीस से अमेरिकी कंपनियों को अपना काम विदेश ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे देश की कुशल पेशेवरों को आकर्षित करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता पर बुरा ... Read more
चीन को टैरिफ से बचने में मदद कर रहा भारत, अमेरिका का गंभीर आरोप
अमेरिका ने भारत समेत 40 देशों पर गंभीर आरोप लगाया है. अमेरिका के शीर्ष व्यापार सलाहकार का कहना है कि ये देश चीन को टैरिफ से बचाने में मदद कर रहे हैं. इस कारण अब अमेरिका इन देशों से आने वाले खेपों की निगरानी करेगा.
अमेरिका ने ईरानी ब्लॉकेड की और सख्त, देखें US TOP-10
अमेरिका ने ईरान की नाकेबंदी और सख्त कर दी है. CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी सेनाओं ने ईरान से जुड़े 59 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदलवाया. ये कार्रवाई होर्मुज में अमेरिकी स्टील वॉल ब्लॉकेड का हिस्सा है. लेकिन ईरान ने इस दावे को ख़ारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के शर्तें माने जाने तक होर्मुज पूरी तरह नहीं खुलेगा. देखें यूएस टॉप-10.
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद बदमाशों की विदेशों में बैठे आकाओं से बात करवाने वाले जेल प्रहरी धारा सिंह के खुलासे चौंकाने वाले हैं। आरोपी ने 15 से ज्यादा बार लॉरेंस, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा जैसी गैंग के कई बदमाशों की विदेश में बात करवाई थी। इस मदद के बदले जेल प्रहरी को फैमिली सहित विदेश (अमेरिका-दुबई) में सैटल करने का लालच दिया था। भरोसा दिलाया था कि पकड़े जाने पर गैंग का वकील सुप्रीम कोर्ट में उसका केस लड़ेगा। हर मदद के बदले पैसे भी मिलते रहेंगे। इसी लालच में आकर जेल प्रहरी धारा सिंह बदमाशों की मदद में जुट गया। उसने 3 बार में 50 हजार, 30 हजार और 20 हजार रुपए कैश में लिए। वहीं एक दूसरे की दुश्मन गैंग को भी कई अहम जानकारियां लीक कर दी। जयपुर में नाकाबंदी के दौरान हथियारों सहित पकड़े गए बदमाश की निशानदेही पर धारा सिंह को 7 अगस्त को गिरफ्तार किया था। इस स्टोरी में पढ़िए- जेल प्रहरी कैसे हाई सिक्योरिटी को मात देता था? कैसे बदमाशों की बात करवाता था? फैमिली सहित विदेश में सैटल करने का लालच जेल प्रहरी धारा सिंह चौहान ने दौलतपुरा थाना पुलिस को बताया कि अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की कुछ बैरकों की जिम्मेदारी उसके पास थी। उनमें लॉरेंस, रोहित गोदारा, शिवराज सिंह जैसी गैंग के कई बदमाश बंद हैं। मार्च 2026 में गैंग के कुछ बदमाशों ने उससे संपर्क किया। मोबाइल नंबर देते हुए कहा- इन नंबरों पर कॉल करके बस इतना मैसेज कर देना कि हम लोग यहां सब ठीक हैं। इस पर धारा सिंह ने उन नंबरों पर फोन लगाए और मैसेज पहुंचाया। लेकिन कुछ दिनों बाद ही विदेशी नंबरों से फोन आने लगे। विदेश में बैठे गैंगस्टरों ने धारा सिंह को लालच दिया- तुम तो हमारे जाति भाई हो, कोई परेशानी नहीं आने देंगे। मैं खुद इस जेल में काफी समय बिता कर निकला हूं। आप मेरे साथियों का ध्यान रखना, जो भी जरूरत हो, वह समय-समय पर उपलब्ध करवा देना। समय-समय पर पैसा आ जाएगा। विदेश में बैठे गैंग के सरगना ने लालच दिया कि आपको भविष्य में कोई परेशानी आई तो उसकी पूरी जिम्मेदारी हम लेंगे। नौकरी नहीं रही तो फैमिली सहित विदेश बुलवा लेंगे। परिवार को भी पूरी सिक्योरिटी देंगे। जरूरत पड़ी तो केस लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट के बड़े वकील भी खड़े कर देंगे। इसी लालच में फंस कर धारा सिंह बदमाशों की मदद करने जुट गया। 15 बार से ज्यादा गैंगस्टरों की बात करवाई चौंकाने वाली बात ये है कि प्रदेश की सबसे हाई सिक्योरिटी जेल जैमर से लैस है। जेल के भीतर किसी भी रेंज का मोबाइल काम नहीं करता। लेकिन धारा सिंह जेल प्रहरी होने के कारण सारे लूपहोल जानता था। उसने 15 से ज्यादा बार गैंग के बदमाशों की अपने मोबाइल से बात करवाई। नियमानुसार जेल में कोई भी व्यक्ति मोबाइल लेकर प्रवेश नहीं कर सकता। जेल में एंटर होने से पहले स्टाफ के हर सदस्य की भी जांच होती है। नियमानुसार जेलकर्मी को भी ड्यूटी के दौरान मोबाइल जमा करवाना पड़ता है। फिर धारा सिंह कैसे 15 बार फोन लेकर अंदर घुसा। पुलिस को इस खेल में कई जेलकर्मियों की मिलीभगत की आशंका है। गैंगस्टरों से बात के लिए खरीदा की-पैड वाला फोन, पेमेंट कैश में धारा सिंह चौहान ने बदमाशों की आपस में बात कराने के लिए अलग से की-पैड फोन खरीदा था, जो 2जी टेक्नोलॉजी का है। सिक्योरिटी को चकमा देकर वह दूसरा फोन जेल की बैरकों तक ले जाता था। बात करवाने के बदले कैश में पैसा लेता था। धारा सिंह ने 3 बार पैसों का लेनदेन कबूला है। पुलिस के अनुसार उसने तीन बार में 50 हजार, 30 हजार और 20 हजार रुपए लिए थे। ये सारा लेनदेन कैश में हुआ ताकि कभी जांच हो तो पकड़ में नहीं आए। दुश्मन गैंग को लीक की एक दूसरे की जानकारियां पूछताछ में सामने आया है कि वह जेल में बंद कैदियों की पूरी जानकारी रखता था। परिवारों से बात कराने के अलावा एक दूसरे के दुश्मन को भी अहम जानकारियां लीक करता था। जैसे- गैंगस्टर को कब पैरोल मिलेगी, जेल शिफ्टिंग कब होगी, कौन कैदी जेल में नया आया है, उसे किस वार्ड में रखा गया है, उससे कौन-कौन मिलने आ रहे हैं। इस तरह की गोपनीय जानकारी भी शेयर करता था। नाकाबंदी में पकड़े गए बदमाश से हुआ खुलासा दरअसल, 6 अगस्त को जयपुर के दौलतपुरा थाने के पास पुलिस ने नाकाबंदी में एक कार को पकड़ा था। तलाशी के दौरान कार में दो कारतूस और एक चाकू मिला था। पुलिस ने कार सवार संदीप सिंह निर्वाण (30) निवासी बबाई (झुंझुनूं) को अरेस्ट किया। संदीप जयपुर में कालवाड़ रोड पर करधनी में रहता था। उसके कब्जे से अवैध हथियार और कार को जब्त कर आगे की कार्रवाई की गई। आरोपी संदीप ने पूछताछ में बताया कि वह अवैध वसूली गैंग से जुड़ा हुआ है। दो-तीन दिन पहले ही उसे अवैध वसूली के 1.50 लाख रुपए मिले थे। इनमें से उसने 20 हजार रुपए का पेमेंट सोहन सिंह को किया था। पुलिस ने सोहन सिंह को राउंडअप कर पूछताछ की। उसने बताया कि गांव के साथी और अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में प्रहरी धारा सिंह के कहने पर उसने संदीप से 20 हजार रुपए कैश लिए थे। इन पैसों को बाद में उसने धारा सिंह के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर किया था। इसके बाद 7 अगस्त को एक टीम अजमेर गई और धारा सिंह को जेल में ड्यूटी के दौरान गिरफ्तार किया। कई जिलों में छापेमारी डीसीपी पश्चिम प्रशांत किरण ने बताया- जेल प्रहरी धारा सिंह की निशानदेही पर पुलिस टीम ने अलग-अलग जिलों में दबिश देकर कई बदमाशों को डिटेन किया है। धारा सिंह का कनेक्शन कई गैंगस्टरों और उनके गुर्गों से सामने आया है। हालांकि अभी तक ये पुष्टि नहीं हुई है कि वह कौन-कौन सी गैंग के टच में था। धारा सिंह ने कबूल किया है कि वह बदमाशों के लालच में आकर जेल में बंद गैंग के बदमाशों की मदद करता था। उसका मोबाइल जब्त कर FSL जांच के लिए भिजवाया गया है। इसके बाद कई और राज खुलने की संभावना है। धारा सिंह की 7 साल पहले हुई थी नियुक्ति धारा सिंह मूल रूप से दौसा जिले का रहने वाला है। वह साल 2018 बैच का जेल प्रहरी है। साल 2019 में उसको पोस्टिंग मिली थी। वर्ष 2022 से अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में तैनात हुआ। मार्च महीने से पैसों के लालच में गैंग से जुड़कर काम कर रहा था। पैसे लेने के एवज में गैंग के जेल में बंद गुर्गों को सुविधाएं पहुंचाता था। …. अजमेर जेल से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… 100 रेप के मास्टरमाइंड को जेलर ने किया वीडियो कॉल:अजमेर सेंट्रल जेल के कैदियों से कराई बात, खुद भी बोला- ओके चाचा; सस्पेंड अजमेर सेंट्रल जेल से जेलर सद्दाम हुसैन ने वीडियो कॉल करके 100 रेप के मास्टरमाइंड नफीस चिश्ती से कैदियों की बात करवाई। यह सब सद्दाम हुसैन के ऑफिस में और उनके फोन से हुआ। पूरी खबर पढ़िए…
US Iran War: अमेरिका का जंगी जहाज यूएसएस अब्राहम लिंकन पिछले 9 महीने से समुद्र में है, 250 दिनों से अमेरिका के इन सैनिकों ने जमीन पर कदम नहीं रखा है.
तीस साल के बाद गुजरात का सीएम अमेरिका जाएगा
पिछले करीब 30 साल में गुजरात का कोई भी मुख्यमंत्री अमेरिका नहीं गया है।
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अमेरिकी नौसैनिकों ने USS अब्राहम लिंकन से कूदने की कोशिश की थी? भेजा गया नया एयरक्राफ्ट
अमेरिकी जंगी जहाज अब्राहम लिंकन पर सवार परेशान नौसैनिकों की आत्महत्या की कोशिश की खबरें मिलने के बाद अमेरिका ने नया एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती करने की बात कही है। जानें नौसैनिक क्यों समुंदर में कूदना चाहते थे?
समुद्र में कूदकर सुसाइड कर रहे अमेरिकी सैनिक? CENTCOM ने बताया क्या है सच
अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को लेकर 7 सैनिकों की मौत और आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी के दावे सामने आए हैं. हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड और रक्षा अधिकारियों ने इन दावों को गलत बताया है. वहीं, एक नाविक के समुद्र में गिरने की घटना की पुष्टि हुई है, जिसे बचाकर इलाज के लिए ले जाया गया.
अमेरिका मनममाने तरीके से देशों पर कुछ भी आरोप लगा देता है। इसी क्रम में उसने भारत समेत 40 से ज्यादा देशों पर आरोप लगाया है कि वे चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचने में मदद कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये देश चीन के सामान को दूसरे रास्ते से भेजकर […]
अदाणी समूह ने अमेरिकी कानूनी कार्रवाई के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में 2.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। जानें कैसे समूह ने बुनियादी ढांचे में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की और बाजार का भरोसा फिर से जीता।
टैरिफ चोरी में चीन की मदद कर रहा भारत, अमेरिका ने लगाया बड़ा आरोप; किस स्कैम का जिक्र?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अवैध नेटवर्क के जरिए सालाना 40 अरब डॉलर से लेकर 303 अरब डॉलर तक के चीनी सामान को दूसरे देशों के रास्ते अमेरिका में खपाया जा रहा है। इन देशों की लिस्ट में भारत को भी रखा गया है।
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AI से पूछकर परिवार की हत्या: अमेरिका में भारतवंशी ने की मां और भाई की हत्या; सर्च हिस्ट्री में क्या मिला?
लंबे वक्त तक जारी रह सकता है अमेरिकी ब्लॉकेड, होर्मुज पर हेगसेथ की चेतावनी
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने गुरुवार को पनामा सिटी में कहा कि अमेरिकी नौसेना जहाजों को रोटेट करके ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी अनिश्चितकाल तक जारी रख सकती है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज पर 'पूरे कंट्रोल' का दावा किया है, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया है.
अमेरिका में बर्थ टूरिज्म पर शिकंजा, मार्को रुबियो बोले 'नागरिकता बिकाऊ नहीं'
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बर्थ टूरिज्म के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 600 से ज्यादा वीजा रद्द किए हैं. विदेश विभाग, होमलैंड सुरक्षा विभाग और अन्य एजेंसियों ने मिलकर बर्थ टूरिज्म प्रिवेंशन टास्क फोर्स का गठन किया है.
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Kangra News: अमेरिका में कैंसर की दवाई के लिए शोध करेंगी हिमाचल की अमिता
जिला कांगड़ा की तहसील देहरा के नगरोटा सूरियां की रहने वाली अमिता शर्मा ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन में साइंटिस्ट के पद पर नियुक्ति हासिल की है।
ईरान के आगे झुक गया अमेरिका का यह साथी, 2 टन सोना और 3 बिलियन डॉलर भेजे, 15 प्लेन भी बेचे
अमेरिका के सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान की बिलियन्स डॉलर की संपत्तियों को जारी कर दिया है। इसके अलावा युद्ध के पहले से ही यूएई के बैंकों में पड़ा 2 टन ईरानी सोने को भी तेहरान भेज दिया गया है।
‘चाइना स्क्वीज सिद्धांत’ एक काल्पनिक राजनीतिक भ्रम है : अमेरिकी विद्वान
बीजिंग, 13 अगस्त . हाल ही में, कुछ पश्चिमी मीडिया और थिंक टैंक ने तथाकथित ‘चाइना स्क्वीज सिद्धांत’ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, उनका दावा है कि चीन का औद्योगिक निर्यात वैश्विक बाजार में जगह कम कर रहा है और विकासशील देशों की औद्योगीकरण प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है. इस कथन के जवाब में, अमेरिका ... Read more
क्या जल्द फाइनल होगी भारत-अमेरिका मेगा 'ट्रेड डील'? वाणिज्य सचिव के इस बयान ने बढ़ाई हलचल!
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार (India US Trade Deal) समझौते पर नियमित संपर्क बना हुआ है, दोनों देश फरवरी के रूपरेखा समझौते के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
भारत का वस्तु निर्यात जुलाई में 44.2 अरब डॉलर के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल से 19.63% अधिक है।
भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध: वाणिज्य सचिव
भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध: वाणिज्य सचिव
Iran America War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान | Trump | Putin
Iran America War Update:ईरान के खिलाफ अमेरिकी तैयारियों पर Russia से बड़ा ऐलान|Trump | Putin अमेरिका के इस खतरनाक प्लान की भनक रूसी एजेंसियों को लग चुकी है...तभी रुस से एक बेहद सख्त धमकी आई है जो अमेरिका को भी परेशान कर रही होगी.
पूर्व राजनयिक विद्या भूषण सोनी ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हाल ही में घोषित त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यह इस क्षेत्र में वॉशिंगटन के घटते प्रभाव को दिखाता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भले ही यह समझौता मुख्य रूप से पश्चिम एशिया से जुड़ा है, लेकिन नई दिल्ली को स्थिति पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में ऐसी स्थिति बन सकती है जब वे अपनी नीति बदल लें। उन्होंने ANI को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हाल ही में घोषित 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के बारे में बात करते हुए ये बातें कहीं। सोनी ने इस समझौते के समय को दिलचस्प बताया। उन्होंने कहा कि इस समूह की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब एक वैश्विक सुरक्षा प्रदाता के तौर पर अमेरिका की स्थिति की परीक्षा हो रही है, खासकर पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण। इसे भी पढ़ें: सेना की वर्दी में आए पुतिन, उठाया कागज, भारत पर बड़ा खुलासा पूर्व राजदूत ने कहा मुझे लगता है कि यह डिफेंस पैक्ट दिलचस्प है और खासकर इसका समय। यह अमेरिका की डगमगाती स्थिति को दिखाता है, क्योंकि अमेरिका दुनिया भर में अलग-अलग इलाकों की सुरक्षा और हिफ़ाज़त का गारंटर रहा है। पिछले डेढ़ साल में हालात बदले हैं... लोगों को अब अमेरिका के क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के वादे पर ज़्यादा भरोसा नहीं रहा है। इसलिए इस मामले में पश्चिम एशिया की कुछ क्षेत्रीय ताकतें, खासकर सऊदी अरब, इसे लेकर बहुत चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ईरान के हमले पश्चिम एशिया के कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं, जिससे उन पर असर पड़ा है। अब उन देशों को लगता है कि चूंकि अमेरिका का वादा पूरा नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें ऐसी क्षेत्रीय व्यवस्था के बारे में सोचना चाहिए जिसमें शामिल ताकतें इस तरह की सुरक्षा में योगदान दे सकें। इसे भी पढ़ें: अब कैंची अटैक की तैयारी में हूती, सऊदी पर होगा दो तरफा हमला? उन्होंने कहा कि इस समझौते का बनना अमेरिका की कमज़ोरी को दिखाता है और यह इस इलाके में अमेरिका के घटते असर और दिलचस्पी को भी दर्शाता है। और इसीलिए ये तीन ताकतें और उनकी खासियतें एक साथ आ सकती हैं और यह पक्का कर सकती हैं कि कोई बाहरी ताकत आकर कुछ न कर सके।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि जब ईरान युद्ध को सुलझाने की कोशिशों में पाकिस्तान एक मध्यस्थ के तौर पर उभरा, तो वे बस तमाशबीन बने रहे। उन्होंने कहा कि भारत ने ईरान और अमेरिका के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल करने का एक बहुत बड़ा मौका गंवा दिया। रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि भारत ईरान और अमेरिका के साथ अपने संबंधों का फायदा उठाकर महीनों से चल रहे इस संघर्ष को खत्म करने में कोई सार्थक भूमिका नहीं निभा सका। उन्होंने कहा एक तरफ ईरान युद्ध चल रहा है। अगर भारत अपनी ताकत को समझता और हमारे पास इंदिरा गांधी जैसा कोई मज़बूत नेता होता, तो यह भारत के लिए दुनिया का सबसे बड़ा मौका होता। इसे भी पढ़ें: CBI-ED जांच से बचने का दांव? Rahul Gandhi ने High Court के आदेश को SC में चुनौती, केस ट्रांसफर की मांग उन्होंने आगे कहा फिर क्या हुआ? पाकिस्तान मध्यस्थ बन गया, जबकि भारत और मोदी जी बस किनारे से देखते रहे। ऐसा कैसे हुआ? विपक्ष के नेता ने कहा कि ईरान भारत का पुराना दोस्त है, जबकि रूस और अमेरिका भी भारत के दोस्त हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नई दिल्ली युद्ध को सुलझाने की कोशिशों में अपनी अहमियत बढ़ाने के लिए इन रिश्तों का इस्तेमाल कर सकती थी। उन्होंने कहा ईरान हमारा पुराना दोस्त है और रूस और अमेरिका भी हमारे दोस्त हैं। हमें अहम भूमिका निभानी चाहिए और दोस्त बने रहना चाहिए... लेकिन पाकिस्तान ने हमारी जगह ले ली। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध फरवरी में तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए। इससे इलाके में बड़े पैमाने पर संघर्ष छिड़ गया और रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग में रुकावट आई। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi का बड़ा हमला: BJP थोप रही अपना सिस्टम, कांग्रेस देगी India को बोलने का मौका महीनों की लड़ाई के बाद, अप्रैल में पाकिस्तान की अहम मध्यस्थता से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कुछ समय के लिए युद्धविराम हुआ था। हालाँकि, शांति समझौते को फिर से शुरू करने की कोशिशें रुक गई हैं, क्योंकि ईरान और अमेरिका अभी भी स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर एकमत नहीं हैं। भारत इस टकराव में सीधे तौर पर शामिल नहीं रहा है और न ही उसने कोई औपचारिक मध्यस्थता की है। नई दिल्ली ने दोनों पक्षों के साथ कूटनीतिक बातचीत बनाए रखी है और बार-बार बातचीत और तनाव कम करने की अपील की है। इस क्षेत्र में भारत के बड़े आर्थिक और ऊर्जा हित भी जुड़े हैं, जिनमें स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ की सुरक्षा और भारतीय नागरिकों व जहाजों की सुरक्षा शामिल है।
एक तरफ जहां पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और भुखमरी की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसकी सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ताक पर रखकर सेना पर जमकर पैसे लुटाने का फैसला किया है। पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी करते हुए इसे सीधे 1.33 लाख करोड़ रुपये घोषित कर दिया है, जो देश के कुल 6.38 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय बजट का लगभग बीस प्रतिशत से भी अधिक यानी 20.84 प्रतिशत हिस्सा है। अपनी डगमगाती और दिवालिया होती अर्थव्यवस्था के बीच सेना के साजो-सामान पर पानी की तरह पैसा बहाने की इस हैरान करने वाली नीति ने न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया है, बल्कि अमेरिका ने भी इस भारी-भरकम सैन्य आवंटन पर अपनी गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त करते हुए कड़ा रुख अपनाया है।अमेरिका की फिस्कल ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट ने खोली पोलअमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी फिस्कल ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट 2025 में पाकिस्तान के रक्षा खर्चों की निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बेहद कड़े सवाल खड़े किए गए हैं। इस रिपोर्ट में बहुत स्पष्ट शब्दों में यह बात कही गई है कि पाकिस्तान के रक्षा बजट पर न तो संसद में कभी पर्याप्त और खुली समीक्षा होती है और न ही इस पर किसी प्रकार की कोई प्रभावी नागरिक निगरानी व्यवस्था उपलब्ध है। अमेरिका ने पाकिस्तान सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए आग्रह किया है कि वह अपने बढ़ते सरकारी कर्ज, सार्वजनिक उपक्रमों की देनदारियों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े तमाम खर्चों की सटीक और पारदर्शी जानकारी समय पर सार्वजनिक करे। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के दौरान ही पाकिस्तान के रक्षा बजट में इकतालीस प्रतिशत की अप्रत्याशित और चौंकाने वाली वृद्धि दर्ज की गई है, जो क्षेत्र की शांति के लिए खतरनाक है।चीन से हथियारों की अंधाधुंध खरीद और ‘मुस्लिम नाटो’ का एंगलस्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान के हथियार आयात में सीधे छियासठ प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी और चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान द्वारा आयात किए गए कुल हथियारों में से अकेले अस्सी प्रतिशत हथियारों की आपूर्ति कम्युनिस्ट देश चीन द्वारा की जा रही है, जिसकी वजह से पाकिस्तान आज दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन गया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका की ओर से आई यह चेतावनी राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम है, क्योंकि हाल ही में मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच एक नया त्रिपक्षीय रणनीतिक समझौता हुआ है, जिसे दुनिया ‘मुस्लिम नाटो’ के रूप में देख रही है। इस समझौते के ठीक कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी रिपोर्ट का सामने आना यह बताता है कि पश्चिमी देश पाकिस्तान की संदिग्ध सैन्य गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।गरीबी के गर्त में डूबती जनता और अमेरिकी सहायता पर मंडराता खतरारक्षा बजट में की गई इस अंधाधुंध और गैर-जरूरी बढ़ोतरी का सबसे भयंकर और सीधा असर पाकिस्तान की आम गरीब जनता पर पड़ रहा है। देश में गरीबी की दर वर्ष 2018-19 के इक्कीस प्रतिशत से बढ़कर अब अट्ठाइस प्रतिशत के पार पहुंच चुकी है, जिसकी वजह से आज सात करोड़ से भी अधिक पाकिस्तानी नागरिक अत्यधिक गरीबी और भुखमरी के साये में जीने को मजबूर हैं। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा किए गए वैश्विक मूल्यांकन में भारत, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों ने वित्तीय पारदर्शिता के सभी मानकों को सफलतापूर्वक पास कर लिया है, जबकि पाकिस्तान सहित दुनिया के पैंसठ से ज्यादा देश न्यूनतम मानकों पर भी खरे नहीं उतर सके हैं। हालांकि अमेरिका ऐसे मामलों में सीधे तौर पर कोई आर्थिक प्रतिबंध नहीं लगाता है, लेकिन यदि अमेरिकी सहायता राशि के दुरुपयोग के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं, तो वाशिंगटन कभी भी अपनी सीधी सरकारी आर्थिक मदद पर बड़ा प्रतिबंध लगा सकता है।
अमेरिकी राजनीतिक गलियारों से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सबसे भरोसेमंद और बेहद करीबी सहयोगियों में गिनी जाने वाली वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने अपना पद छोड़ने का फैसला किया है। लेविट इसी महीने के अंत में अपने इस पद से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे देंगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद मंगलवार को इस बात की घोषणा करते हुए सभी को हैरान कर दिया है। आपको बता दें कि कैरोलिन लेविट ने जब वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी का कार्यभार संभाला था, तब वह इस प्रतिष्ठित पद को संभालने वाली इतिहास की सबसे कम उम्र की व्यक्ति बनी थीं। साल 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही वह लगातार इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही थीं और मीडिया के तीखे सवालों का बहुत ही आक्रामक और बेबाक अंदाज में जवाब देने के लिए जानी जाती थीं।क्यों लेविट ने उठाया यह बड़ा कदम और क्या है पारिवारिक वजहआखिरकार कैरोलिन लेविट जैसी ताकतवर और प्रमुख हस्ती ने वाइट हाउस का यह बड़ा पद छोड़ने का फैसला क्यों किया, इसको लेकर खुद राष्ट्रपति ट्रंप और लेविट ने स्थिति स्पष्ट की है। दरअसल, हाल ही में कैरोलिन लेविट ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया है, जिसके बाद उन्होंने अपने बच्चों और परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताने का निर्णय लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वह लेविट के इस व्यक्तिगत फैसले को पूरी तरह समझते हैं और उनके इस जज्बे का पूरा सम्मान करते हैं। लेविट ने अपने एक आधिकारिक बयान में भी यह बात साझा की थी कि दुनिया की सबसे मुश्किल और तनावपूर्ण नौकरियों में से एक को संभालना और साथ ही एक कामकाजी मां की जिम्मेदारी को निभाना उनके जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन संतोषजनक दौर रहा है। बेटी के जन्म के बाद जब वह वाइट हाउस लौटीं, तो उन्हें यह अहसास हुआ कि वह अपने दोनों छोटे बच्चों को वह समय और मां का प्यार नहीं दे पा रही हैं जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है, क्योंकि प्रेस सेक्रेटरी के पद पर चौबीसों घंटे ऊर्जा और ध्यान देना पड़ता है।ट्रंप ने बताया ‘रियल लीडर’, आगे क्या होगी उनकी भूमिकाडोनाल्ड ट्रंप ने कैरोलिन लेविट की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें अपना सबसे भरोसेमंद सहयोगी और एक ‘रियल लीडर’ करार दिया है। ट्रंप ने कहा कि लेविट ने वाइट हाउस में रहते हुए बेहद शानदार और सराहनीय काम किया है और वह साल 2018 से ही देश में न्याय, स्वतंत्रता और नागरिकों के अधिकारों के लिए लगातार मुखर होकर आवाज उठाती रही हैं। इसके अलावा 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी ट्रंप के चुनावी अभियान में उनकी भूमिका बेहद अहम और सराहनीय रही थी। अपने बेबाक अंदाज और तेज बोलने की शैली के कारण ट्रंप पहले भी कई मौकों पर उनकी तुलना ‘मशीन गन’ जैसे चलने वाले होंठों से कर चुके हैं। हालांकि, वाइट हाउस छोड़ने के बावजूद लेविट राजनीतिक परिदृश्य से पूरी तरह दूर नहीं जा रही हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि कैरोलिन लेविट भविष्य में उनकी शीर्ष बाहरी सलाहकारों (Top External Advisors) की टीम का अहम हिस्सा बनी रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी उनकी बेहद प्रभावशाली भूमिका बरकरार रहेगी। हालांकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है कि लेविट के जाने के बाद वाइट हाउस के इस महत्वपूर्ण पद की कमान अगला कौन संभालेगा।
इजरायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी खुद वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को बसाने के मजबूत समर्थक रहे हैं. लेकिन अब उन्होंने ही इजरायली सेटलर्स की घेराबंदी को आतंक बताया है.
अमेरिका के इस शहर में भारत का डंका, 15 अगस्त को बनाया खास दिन
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले अमेरिका के कई राज्यों में 15 अगस्त को 'इंडिया डे' या 'इंडिया इंडिपेंडेंस डे' के तौर पर मान्यता दी जा रही है. अब डेलावेयर भी इस सूची में शामिल हो गया है. इससे पहले न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी समेत कई राज्यों ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को सम्मान देते हुए ऐसी घोषणाएं की हैं.
23 साल बाद इराक से अमेरिकी सैनिकों की होगी विदाई! सद्दाम हुसैन से शुरू हुआ मिशन अब होगा खत्म
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वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मजबूत शुरुआत के बाद फिसले भाव, निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर
250 दिनों से समुद्र में यूएसएस अब्राहम लिंकन, अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पूछे सवाल
अमेरिकी नौसेना की लंबी तैनाती को लेकर घरेलू स्तर पर सवाल पूछे जाने लगे हैं। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ से यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीवीएन-72) में तैनात नौसैनिकों की खराब परिस्थितियों, आपूर्ति की कमी, प्लंबिंग समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को लेकर रक्षा अधिकारियों से जवाब मांगा है।
Donald Trump का दावा: नाकेबंदी से Strait of Hormuz पर अमेरिका का नियंत्रण है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि नाकेबंदी से अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका के ‘‘पूर्ण नियंत्रण’’ का दावा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘मुझे लगता है कि हम इसे बनाए रखेंगे!’’ ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी के संदर्भ में थी। युद्ध से पहले दुनिया में कारोबार किए जाने वाले तेल का पांचवां हिस्सा इस महत्वपूर्ण मार्ग से होकर गुजरता था, लेकिन ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य अन्य यातायात के लिए काफी हद तक बंद है। इसे भी पढ़ें: हत्या की साजिश के खतरे के बीच Donald Trump ने चुपके से बदला Air Force One विमान ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान जहाजों पर हमले करता है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt महीने के अंत में छोड़ेंगी अपना पद, बनीं रहेंगी सलाहकार
अमेरिका की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा बदलाव सामने आया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट महीने के अंत में अपने पद से हट जाएंगी। लेविट ने यह फैसला अपने छोटे बच्चों और परिवार को ज्यादा समय देने के लिए लिया है। हालांकि, व्हाइट हाउस से उनकी विदाई पूरी तरह राजनीतिक दूरी बनाने वाली नहीं होगी। ट्रंप के मुताबिक, वह आगे भी उनकी बाहरी सलाहकार टीम का अहम हिस्सा बनी रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखेंगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लेविट की तारीफ करते हुए उन्हें अपनी सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि लेविट के फैसले को वह पूरी तरह समझते हैं और उसका सम्मान करते हैं।राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद लेविट की राजनीतिक भूमिका खत्म नहीं होगी। वह उनके शीर्ष बाहरी सलाहकारों में शामिल रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक प्रभावशाली आवाज के तौर पर काम करती रहेंगी। ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन आने वाले मध्यावधि चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है और इस दौरान लेविट की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। इसे भी पढ़ें: हत्या की साजिश के खतरे के बीच Donald Trump ने चुपके से बदला Air Force One विमान ट्रंप ने लेविट के काम की तारीफ करते हुए उन्हें व्हाइट हाउस के इतिहास की बेहतरीन प्रेस सचिवों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि लेविट ने 2018 से ही न्याय, स्वतंत्रता और आजादी के मुद्दों पर शानदार काम किया है और 2024 के उनके ऐतिहासिक चुनाव अभियान में भी अहम योगदान दिया। इसे भी पढ़ें: ट्रंप मीडिया को $238 Million का भारी घाटा, Bitcoin और Crypto बाजार में गिरावट ने बढ़ाई Donald Trump की टेंशन कैरोलिन लेविट ने भी सोशल मीडिया पर अपने फैसले के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले करीब डेढ़ साल तक व्हाइट हाउस प्रेस सचिव के रूप में काम करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। लेविट ने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार जताते हुए कहा कि इस जिम्मेदारी ने उन्हें ऐसे अनुभव दिए, जिन्हें वह जिंदगी भर याद रखेंगी। वेस्ट विंग में काम करने से लेकर ओवल ऑफिस में लंबे घंटे बिताने, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करने और विदेशी नेताओं से मिलने तक, उन्होंने इस कार्यकाल को बेहद खास बताया। उनके मुताबिक, इस भूमिका का सबसे बड़ा सम्मान व्हाइट हाउस के प्रेस पोडियम से राष्ट्रपति की ओर से अमेरिकी जनता को संबोधित करना था। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशासन की कई बड़ी उपलब्धियों के बारे में बात करने और ट्रंप की नीतियों व कामकाज को जनता के सामने रखने पर गर्व रहा। लेविट ने मीडिया को लेकर भी अपनी भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशासन के नजरिए को सामने रखने, उदारवादी मीडिया को जवाब देने और अमेरिकी लोगों तक ट्रंप की उपलब्धियों की जानकारी पहुंचाने में कोई झिझक नहीं रही। मां की जिम्मेदारी और हाई-प्रेशर नौकरी के बीच मुश्किल फैसला लेविट के बयान का सबसे निजी हिस्सा उनके परिवार और बच्चों को लेकर था। उन्होंने माना कि मां बनने के साथ दुनिया की सबसे कठिन और व्यस्त राजनीतिक नौकरियों में से एक को संभालना आसान नहीं रहा। उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म के बाद जब वह व्हाइट हाउस लौटीं, तभी से उनके मन में यह सवाल बना रहा कि क्या वह प्रेस सचिव की नौकरी के लिए जरूरी समय, ऊर्जा और ध्यान देने के साथ अपने दोनों छोटे बच्चों की जरूरतों के मुताबिक एक अच्छी मां बन पा रही हैं। यही सवाल आखिरकार उनके फैसले की वजह बना। लेविट ने माना कि व्हाइट हाउस छोड़ने का निर्णय उनके लिए भावुक भी था और मुश्किल भी, लेकिन अब वह अपनी जिंदगी के एक नए अध्याय की शुरुआत करना चाहती हैं। इसे भी पढ़ें: FIFA World Cup की सफलता का हवाला देकर Donald Trump ने Infantino को बताया 'शानदार व्यक्तित्व' राजनीति से दूरी नहीं बनाएंगी लेविट हालांकि, व्हाइट हाउस से विदाई के बाद लेविट पूरी तरह राजनीतिक पर्दे के पीछे नहीं जाने वाली हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें बाहर से अपने शीर्ष सलाहकारों में से एक के तौर पर काम जारी रखने को कहा है, जिसे लेविट ने स्वीकार किया है। उन्होंने साफ किया कि वह 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' और रिपब्लिकन पार्टी के लिए अपनी आवाज उठाती रहेंगी। लेविट ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पार्टी लगातार ज्यादा कट्टरपंथी होती जा रही है और अमेरिका के लिए गंभीर खतरा बन रही है। लेविट ने कहा कि देश की चिंता करने वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे इस चुनौती के खिलाफ अपनी भूमिका निभाएं। उनके शब्दों में, उनकी राजनीतिक लड़ाई खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब वह एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। इस तरह लेविट का व्हाइट हाउस से जाना एक सामान्य प्रशासनिक बदलाव से कुछ ज्यादा नजर आता है। एक तरफ वह अपने परिवार और छोटे बच्चों को प्राथमिकता देने जा रही हैं, तो दूसरी तरफ ट्रंप के साथ उनकी राजनीतिक साझेदारी जारी रहेगी। यानी व्हाइट हाउस का पोडियम जरूर छूटेगा, लेकिन अमेरिकी राजनीति में कैरोलिन लेविट की आवाज फिलहाल सुनाई देती रहेगी।
अमेरिका में 'बर्थ टूरिज्म' के खिलाफ अभियान तेज, 600 से ज्यादा विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द
अमेरिका ने 'बर्थ टूरिज्म' के खिलाफ एक नए अभियान के तहत 600 से ज्यादा विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अमेरिका में ‘बर्थ टूरिज्म’ के खिलाफ अभियान तेज, 600 से ज्यादा विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द
वॉशिंगटन, 13 अगस्त . अमेरिका ने ‘बर्थ टूरिज्म’ के खिलाफ एक नए अभियान के तहत 600 से ज्यादा विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं. अमेरिकी विदेश विभाग ने Wednesday को यह जानकारी दी. विदेश विभाग ने बताया कि उसने ‘बर्थ टूरिज्म प्रिवेंशन टास्क फोर्स’ नाम की एक विशेष टीम बनाई है. इसका काम ... Read more
कार्गो जहाज पर अमेरिकी नौसेना ने क्यों किया अटैक? देखें US TOP-10
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे एक कार्गो जहाज पर कार्रवाई की. CENTCOM के मुताबिक, पनामा फ्लैग वाला जहाज ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था, जिस पर अमेरिकी नौसेना के हेलिकॉप्टर ने मिसाइलें दागीं. इस अटैक से जहाज में आग लग गई. देखें यूएस टॉप-10.
अपनी मां और छोटे भाई पर जानलेवा हमला करने के बाद 17 वर्षीय युवक फरार हो गया। पुलिस की टीम जब घर पहुंची तो दोनों के शव मृत अवस्था में पाए गए। पुलिस की टीम ने नाबालिग युवक को गिरफ्तार कर लिया।
अमेरिकी सीनेटरों ने ‘स्पेस फोर्स’ की तैयारी मजबूत करने को पेश किया बिल, गार्डियंस की ट्रेनिंग बढ़ेगी
वॉशिंगटन, 13 अगस्त . अमेरिका के दो सीनेटरों ने दोनों पार्टियों के समर्थन वाला एक बिल पेश किया, जिसका उद्देश्य ‘स्पेस फोर्स’ की तैयारियों को मजबूत करना है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब चीन अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी सैन्य और व्यावसायिक क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है. अलबामा की ... Read more
अमेरिकी सीनेटरों ने 'स्पेस फोर्स' की तैयारी मजबूत करने को पेश किया बिल, गार्डियंस की ट्रेनिंग बढ़ेगी
अमेरिकी सीनेटरों ने 'स्पेस फोर्स' की तैयारी मजबूत करने को पेश किया बिल, गार्डियंस की ट्रेनिंग बढ़ेगी
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अमेरिका-ईरान तनाव और ग्लोबल डिमांड घटने की आशंका से लुढ़के क्रूड ऑयल के दाम, जानिए बाजार पर असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर तेल की मांग कमजोर होने की आशंका और प्रमुख एजेंसियों द्वारा डिमांड के अनुमानों में कटौती किए जाने के कारण क्रूड ऑयल के दाम फिसल गए हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि मांग घटने के इन अनुमानों से कीमतों पर दवाब बढ़ा है, हालांकि भू-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण बाजार में अभी भी जोरदार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।वैश्विक मांग घटने की आशंका और प्रमुख रिपोर्टअंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में सुस्ती और आर्थिक सुस्ती के संकेतों के चलते विभिन्न रिपोर्टों में कच्चे तेल की मांग के अनुमानों को कम किया गया है। ओपेक (OPEC) और इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) जैसी बड़ी संस्थाओं ने आने वाले महीनों में वैश्विक तेल खपत की रफ्तार धीमी रहने की बात कही है। विश्लेषकों का कहना है कि दुनिया भर में ईंधन की ऊंची कीमतों और सप्लाई चेन की बाधाओं के कारण खपत प्रभावित हुई है, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) के दामों में एक डॉलर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड फिसलकर करीब 87-88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है, जबकि WTI क्रूड भी गिरकर 82-83 डॉलर के दायरे में कारोबार कर रहा है।अमेरिका-ईरान तनाव और सप्लाई का संकटदूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अनिश्चितता का दौर जारी है। पश्चिम एशिया के इस संवेदनशील मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति को लेकर निवेशकों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। हालांकि अमेरिका में कमर्शियल क्रूड इन्वेंट्री (कच्चे तेल के भंडार) में हुई बढ़ोतरी के आंकड़ों ने भी कीमतों पर दबाव बनाने का काम किया है। जानकारों का कहना है कि एक तरफ जहां भू-राजनीतिक तनाव कीमतों को नीचे गिरने से रोक रहा है, वहीं दूसरी कमजोर मांग के अनुमान दामों को नीचे खींच रहे हैं।आम जनता और बाजार पर इसका क्या होगा असरकच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत की उम्मीद बंधती है, जो अपनी कुल जरूरत का अधिकांश हिस्सा विदेशों से आयात करते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम लंबे समय तक कम बने रहते हैं, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि मिडिल ईस्ट के हालात इतनी जल्दी सामान्य होने के आसार नहीं हैं, इसलिए तेल बाजार में यह उतार-चढ़ाव आगे भी बना रह सकता है।
अर्जुन अरविंद पर आरोप है कि उसने 45 साल की मां सुधा वेंकटेशन और 14 साल के भाई सिद्धार्थ अरविंद की हत्या की है. इस क्रिमिनल केस में पुलिस के दावे डराते हैं.
Gujarat CM Bhupendra Patel अमेरिका और कनाडा में Vibrant Gujarat का आमंत्रण देंगे
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल 17 से 24 अगस्त तक अमेरिका और कनाडा की यात्रा करेंगे तथा उद्योगपतियों, निवेशकों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गजों को वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन 2027 में भाग लेने के लिए आमंत्रित करेंगे। मंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघाणी ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बुधवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल आगामी शिखर सम्मेलन के लिए विदेशी निवेश आकर्षित करने के राज्य के प्रयासों की शुरुआत करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन 2027 के माध्यम से अधिकतम निवेश आकर्षित करना है और मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा इसी दिशा में उठाया गया कदम है। वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन की शुरुआत 2003 में हुई थी। उस समय नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। यह सम्मेलन राज्य में निवेश के अवसरों को प्रदर्शित करने और देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने के प्रमुख मंच के रूप में विकसित हुआ है।
ट्रंप का बड़ा दावा - होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का 'पूरा नियंत्रण' है। उन्होंने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है
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भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ी है। वहीं, अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी शुल्क लगाने का अधिकार देने वाला लिंडसे ग्राहम अधिनियम पारित किया है, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
Bareilly News: बाजार में छाईं स्पाइडरमैन और अमेरिकन डायमंड राखियां
बाजार में छाईं स्पाइडरमैन और अमेरिकन डायमंड राखियां
तेल से लेकर UPI तक... भारत पर अमेरिकी दबाव के खिलाफ एसजेएम ने क्यों उठाए सवाल?
अमेरिकी टैरिफ धमकी पर स्वदेशी जागरण मंच ने कड़ा विरोध जताया है, इसे एकतरफा दबाव बताया और अमेरिकी कंपनियों के बहिष्कार का आह्वान किया है।
गौतम अडाणी ने कहा कि अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद लीगल सिस्टम पर उनका भरोसा और भी ज्यादा मजबूत हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा, होर्मुज स्ट्रेट पर हमारा 'पूरा नियंत्रण'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा, होर्मुज स्ट्रेट पर हमारा 'पूरा नियंत्रण'
USS अब्राहम लिंकन से कूदने की कोशिश कर रहे अमेरिकी सैनिक, ईरान युद्ध से हालत हुई खराब
ईरान युद्ध में फंसे अमेरिका के लिए सिरदर्द बढ़ गया है। USS अब्राहम लिंकन पर तैनात सैनिक अब तनाव से गुजर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक सैनिक पिछले 230 से ज्यादा दिनों से जहाज पर हैं और कैरियर भी लगातार पानी में ही है। ईरानी हमलों की आशंका ने चीजें और खराब कर दी हैं।
बीजिंग, 12 अगस्त . चीनी निरस्त्रीकरण राजदूत ली चीच्यांग ने 11 अगस्त को जेनेवा निरस्त्रीकरण सम्मेलन पर अमेरिकी प्रतिनिधि के चीन संबंधी तथाकथित बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण अधिसूचना के संयुक्त भाषण की कड़ा निंदा की. उन्होंने बल दिया कि चीनी प्रतिरक्षा आधुनिकीकरण का युक्तियुक्त और जायज निर्माण अविवादित है. चीन मुट्ठी भर देशों द्वारा निरस्त्रीकरण मंच ... Read more
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा आपराधिक मामला खारिज होने के बाद गौतम अदाणी ने कहा कि इस पूरी यात्रा ने कानून के शासन में उनके विश्वास को मजबूत किया है।
गौतम अदाणी ने कहा, यह एक ऐसी यात्रा जो कठिन थी, लेकिन जिसने मुझे बहुत कुछ सिखाया, बहुत कुछ समझाया. और सबसे बढ़ कर जीवन, लोगों और रिश्तों को एक नई दृष्टि से देखने का अवसर दिया.
ईरान ने इराक के उत्तरी एरबिल प्रांत में ईरानी कुर्द विपक्षी समूहों के ठिकानों पर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे। अल जज़ीरा ने 'रुदाव' से बात करने वाले एक पेशमर्गा कमांडर के हवाले से बताया कि इन हमलों में एरबिल प्रांत की अलामा घाटी में कोमाला पार्टी और कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ ईरान (KDPI) के लड़ाकों को निशाना बनाया गया। इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इसके बाद ईरान के चार ड्रोन प्रांत के कई ज़िलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गए, जिनमें सोरान, खलीफ़ान और हरीर शामिल हैं। स्थानीय मीडिया के हवाले से अल जज़ीरा ने बताया कि दो ड्रोन खलीफ़ान के एक गाँव के पास गिरे, एक सोरान में एक रिहायशी घर से टकराया और चौथा बनी हरीर पहाड़ पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे आस-पास की घास में आग लग गई। पेशमर्गा स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र की सैन्य बल के तौर पर काम करते हैं, जबकि कोमाला पार्टी और KDPI ईरानी कुर्द विपक्षी समूह हैं जिनका मुख्यालय उत्तरी इराक के सीमावर्ती इलाके में है। इसे भी पढ़ें: Pannun Case में Nikhil Gupta की सज़ा पर सस्पेंस बरकरार, US Court ने 20 नवंबर तक टाला Sentencing फैसला इससे पहले मंगलवार को, ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि अमेरिका के साथ हालिया युद्ध के दौरान ईरान ने दुनिया के सामने खुद को एक 'मज़बूत और अजेय शक्ति' के तौर पर साबित किया और आखिरकार दुश्मन को बातचीत के लिए मजबूर किया। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय में 'कूटनीति और स्वास्थ्य के बीच सहयोग और तालमेल' पर हुई बैठक में अरागची ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल के साथ संघर्ष के दौरान ईरान की सेना ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं। ISNA के अनुसार, अरागची ने कहा कि हमारी सेना ने अपनी जान की बाज़ी लगाई और दुनिया की सबसे बड़ी दिखने वाली सेना को हराया। यह कोई नारा नहीं है; यह एक सच्चाई है जिसे पूरी दुनिया मानती है। उन्होंने कहा कि हालिया युद्ध के दौरान पूरे देश में कुर्बानी और बहादुरी के नज़ारे देखने को मिले, जहाँ लोग संघर्ष के बावजूद अपने कर्तव्य निभाते रहे। उन्होंने कहा किसी ने नहीं सोचा था कि ईरान, अमेरिका और ज़ायोनी शासन [इज़राइल] के सहयोग—जिसमें सभी पश्चिमी देशों और कुछ अन्य देशों का समर्थन शामिल था जिन्हें हम सब जानते हैं—के ख़िलाफ़ इस तरह डटकर मुकाबला कर पाएगा और आखिरकार दुश्मन को बातचीत के लिए मजबूर कर देगा।
करंट वाले दस्ताने पहनकर घूमेंगे अफसर! अमेरिका खर्च करेगा ₹191 करोड़
अमेरिका में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) जल्द ही अपने अधिकारियों को इलेक्ट्रिक शॉक देने वाले स्पेशल दस्ताने देने जा रही है. ये दस्ताने विरोध करने वालों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे. इस योजना पर 20 मिलियन डॉलर खर्च होंगे और अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
खेल शुरु! अचानक NSA डोभाल के साथ अमेरिकी राजदूत की सीक्रेट मीटिंग
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ दिनों में बैठकों का सिलसिला तेज हो गया। इसी कड़ी में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने 11 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। वहीं इस बैठक के बाद सर्जियो गौर ने इससे सार्थक मुलाकात बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच करीबी साझेदारी वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक दोनों देशों के कई लक्ष्य एक जैसे हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। लेकिन इस मुलाकात की असली अहमियत सिर्फ एक बयान में नहीं बल्कि उस समय में है जब यह बैठक हुई क्योंकि अमेरिकी राजदूत की एनएसए डोभाल के साथ बातचीत से एक दिन पहले उनकी विदेश सचिव विक्रम मिश्री से भी मुलाकात हुई थी। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi ने PM Modi पर लगाया देश के हित बेचने का आरोप, Adani केस का दिया हवाला इसके अलावा अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बातचीत के ठीक बाद गौर की डोभाल के साथ यह बैठक हुई। यानी पिछले कुछ दिनों में भारत अमेरिका के शीर्ष स्तर पर संपर्क लगातार बना हुआ है। वहीं विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि अमेरिकी राजदूत और एनएससी डोभाल के बीच दो बैठकें हुई। हालांकि बातचीत के खास मुद्दों को सार्वजनिक नहीं किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों बैठकों में भारत अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और दूसरे रणनीतिक क्षेत्रों में प्रगति हो रही है और दोनों पक्ष साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सर्जियो गौर की भूमिका अभी इस बैठक को खास बनाती है। वो सिर्फ भारत में अमेरिका के राजदूत नहीं बल्कि दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसका मतलब ये हुआ कि भारत के साथ-साथ कई और क्षेत्र में अमेरिकी नीति में उनकी भूमिका काफी बड़ी है। इसे भी पढ़ें: PM Modi ने युवाओं से कहा: Ram Nath Kovind की आत्मकथा पढ़ें, रील के दौर में शॉर्टकट से बचें आपको बता दें भारत और अमेरिका के रिश्ते इस समय सिर्फ सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है। व्यापार भी दोनों देशों के एजेंडे में एक बड़ा मुद्दा रहा है। पिछले साल अमेरिका ने भारत पर 50% का टैरिफ लगाया था। जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ा। बाद में बातचीत के दौरान टैरिफ को 18% तक लाने पर सहमति बनी। लेकिन व्यापार समझौते को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। भारत की कोशिश है कि अगर कोई व्यापार समझौता होता है तो उसमें टैरिफ को लेकर लंबे समय की स्पष्टता और स्थिरता हो ताकि भविष्य में किसी नए अमेरिकी फैसले से अचानक भारतीय उत्पादों पर शुल्क ना बढ़ जाए और यही वजह है कि एनएसए डोभाल और गौर की लगातार बैठकों को सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक मुलाकात मानना आसान नहीं होगा क्योंकि कई चीजें पिछले कुछ वक्त में देखने को मिली हैं। एक तो ट्रेड को लेकर खींचतान है। उसके अलावा रूसी तेल को लेकर रूसी तेल को लेकर अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा है। इसे भी पढ़ें: NEET-UG विवाद के बाद बदला PM Modi का अंदाज़, Gen Z को Influencers और 'Shortcuts' की होड़ से बचने की दी सलाह ऐसे में ये बैठकें अपने आप में बहुत अहमियत रखती हैं। हालांकि भारत के साथ अमेरिका का जो तनाव है उसे अगर किनारे कर भी दिया जाए तो वैश्विक सुरक्षा का बदलता माहौल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा की चिंता और दक्षिण एशिया में बदलते समीकरण भी अपने आप में बहुत से सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे समय में भारत और अमेरिका के बीच उच्च स्तर पर लगातार बातचीत यह संकेत देती है कि दोनों देश अपने रणनीतिक हितों को लेकर संपर्क बढ़ा रहे हैं। भारत अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वायता बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ सुरक्षा तकनीक, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहा है और अमेरिका के लिए भारत सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं बल्कि हिंद प्रशांत और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा साझेदार बन चुका है। यानी एनएसए डोवाल और अमेरिकी राजदूत की लगातार दो दिन की मुलाकात भले ही बंद कमरे में हुई हो लेकिन संदेश काफी साफ है।
अमेरिका का पूरा कंट्रोल, छेड़ा तो छोड़ेंगे नहीं; होर्मुज पर ट्रंप की ईरान को खुली धमकी
Iran America Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज में किसी भी तरह की कार्रवाई के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने दावा किया कि इस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है…
अमेरिकी अदालत द्वारा न्याय विभाग (Department of Justice - DoJ) के आपराधिक मामले को खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद, अदाणी ग्रुप के चेय
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन की यात्रा किसी दिलचस्प जासूसी फिल्म के घटनाक्रम से कम नहीं थी। राष्ट्रपति सार्वजनिक तौर पर अपने पारंपरिक एयरफोर्स वन विमान में सवार हुए थे, लेकिन उनके साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों और व्हाइट हाउस के चुनिंदा अधिकारियों को भी इस बात की भनक तक नहीं लगी कि ट्रंप रास्ते में चुपचाप विमान बदल चुके हैं। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति को गुपचुप तरीके से एक छोटे सैन्य विमान में शिफ्ट किया गया था, जिसके जरिए उन्होंने अपनी ब्रिटेन की यात्रा पूरी की। अब खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरे वाकये और विमान बदलने के राज से पर्दा उठा दिया है।सीक्रेट सर्विस के निर्देशों पर उठाया गया कदमविमान बदलने की इस पूरी घटना पर बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया को बताया कि यह फैसला पूरी तरह से सीक्रेट सर्विस (सुरक्षा एजेंसी) के दिशा-निर्देशों पर आधारित था। ट्रंप ने कहा, यह सब सीक्रेट सर्विस पर निर्भर करता है। वे जो भी करना चाहते हैं, मैं बस वही करता हूं। मैं अपनी सुरक्षा एजेंसियों और सेना के फैसलों के हिसाब से चलता हूं। वे चाहते थे कि मैं एक अलग उड़ान और एक अलग विमान से यात्रा करूं। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि सुरक्षा का स्तर हर जगह एक समान था, लेकिन सुरक्षा बलों की इच्छा थी कि यह बदलाव किया जाए इसलिए उन्होंने वैसा ही किया। ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे वही करते हैं जो उनकी सुरक्षा टीम कहती है, क्योंकि उन्हें अक्सर भारी धमकियां मिलती रहती हैं और उन्हें लगता है कि कोई गंभीर खतरा जरूर रहा होगा।ईरान की धमकियों और सुरक्षा एजेंसियों की खुफिया रिपोर्टमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की ओर से डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की लगातार मिल रही गंभीर धमकियों के बाद यह असाधारण और अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई थी। तुर्किये एयरपोर्ट पर ट्रंप को बेहद गोपनीय तरीके से एक कैटरिंग वैन के जरिए एयरफोर्स वन से निकालकर छोटे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया था। इससे पहले उन्होंने कैमरों के सामने एयरफोर्स वन में प्रवेश किया था ताकि किसी को कोई संदेह न हो। ब्रिटेन पहुंचने के बाद ट्रंप वापस पुराने एयरफोर्स वन विमान से ही बाहर उतरते हुए दिखाई दिए, जिससे पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि आखिर यात्रा के बीच में यह अदला-बदली कैसे की गई।अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सुरक्षा के लिए इस तरह की गोपनीय रणनीतिक अदला-बदली का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी भारत से पाकिस्तान की यात्रा के दौरान इस्लामाबाद के संक्षिप्त ठहराव के लिए एयरफोर्स वन के बजाय एक साधारण और बिना पहचान वाले गल्फस्ट्रीम विमान का इस्तेमाल किया था।यात्रा के दौरान जब पत्रकारों ने ट्रंप से सवाल किया कि क्या ईरान की तरफ से एयरफोर्स वन को कोई सीधा और विश्वसनीय खतरा था, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि उन्हें हर समय धमकियों का सामना करना पड़ता है और वे हिट लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। गौरतलब है कि ट्रंप के तुर्किये में ठहराव के दौरान अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में मालवाहक जहाजों पर ईरान समर्थित हमलों के जवाब में जवाबी कार्रवाई करते हुए कई कड़े कदम उठाए थे, जिसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क मोड पर थीं।
टेक जगत से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जकरबर्ग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उनका साफ तौर पर कहना है कि एआई अब केवल एक साधारण तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भविष्य की ग्लोबल सुपरपावर तय करने वाला एक नया और बेहद शक्तिशाली हथियार बन चुका है। जकरबर्ग ने चिंता जताई है कि यदि अमेरिका ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति और डेटा सेंटर के बुनियादी ढांचे को विकसित करने में तेजी नहीं दिखाई, तो चीन इस अत्याधुनिक एआई की दौड़ में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है।लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर होगा गहरा असरअपने एक आंतरिक नोट और हालिया बयानों में मार्क जकरबर्ग ने स्पष्ट किया है कि एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास और उसे व्यापक स्तर पर अपनाने वाले देशों का वैश्विक शक्ति संतुलन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह तकनीक भविष्य में लोकतंत्र, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रसार को सीधे तौर पर तय करेगी। जकरबर्ग के अनुसार, चीन जिस रफ्तार से एआई को सपोर्ट करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा और ऊर्जा क्षमता तैयार कर रहा है, वह वाशिंगटन के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है।ऊर्जा क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन से पिछड़ रहा अमेरिकामार्क जकरबर्ग ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि सिलिकॉन डिजाइन के मामले में अमेरिका को अभी भी फायदा और बढ़त हासिल है, लेकिन एआई के लिए जरूरी विशाल भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के मामले में वह काफी पीछे छूट रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि चीन जैसे देश हर दूसरे हफ्ते एक गीगावॉट से भी ज्यादा परमाणु क्षमता ऑनलाइन ला रहे हैं। यही वजह है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए अमेरिका को ऊर्जा उत्पादन और डेटा सेंटर के निर्माण में भारी तेजी लानी होगी।इतिहास की सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री है एआईएआई तकनीक की तेज रफ्तार पर बात करते हुए जकरबर्ग ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शायद मानव इतिहास की सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री बन चुकी है। यहाँ नवाचार (Innovation) को बहुत तेजी से कॉपी किया जाता है और कुछ ही महीनों के भीतर उसे अपना भी लिया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में मात्र दो महीने की लीड (बढ़त) भी बहुत मायने रखती है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की अपील की जो घरेलू एआई मॉडल के रिलीज को धीमा न करें, क्योंकि ऐसा होने पर विदेशी मॉडलों को आगे निकलने का सुनहरा मौका मिल सकता है।ओपन-सोर्स एआई में अमेरिकी नेतृत्व की वकालतराष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर बात करते हुए जकरबर्ग ने बड़ी एआई कंपनियों के साथ सरकारी एजेंसियों के बीच और अधिक करीबी सहयोग की मांग की है। उन्होंने अमेरिका से यह भी अपील की कि वह ओपन-सोर्स एआई (Open-Source AI) की दुनिया पर अपना दबदबा बनाए रखे। उनका मुख्य लक्ष्य यह होना चाहिए कि दुनिया भर में अमेरिकी ओपन-सोर्स मॉडल ही सबसे बेहतरीन और भरोसेमंद साबित हों, ताकि वैश्विक स्तर पर तकनीक का नेतृत्व अमेरिका के हाथों में सुरक्षित रह सके।
'अमेरिकी टेक कंपनियों का करो बहिष्कार' 100% टैरिफ लगाने पर RSS से जुड़ा संगठन भड़का
इसके साथ ही स्वदेशी जागरण मंच ने देश की जनता से अमेरिकी कंपनियों के बहिष्कार की अपील की है और भारत सरकार से अमेरिकी टेक और सोशल मीडिया दिग्गज कंपनियों पर एकतरफा प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है।
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) अपने पूरे इमिग्रेशन ढांचे को आधुनिक बनाने और कागजी प्रक्रियाओं को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठा रही है। दशकों पुराने भारी-भरकम फाइलों, कूरियर के जरिए दस्तावेज भेजने और भौतिक दस्तावेजों के खो जाने या अटक जाने के ढर्रे को अब अलविदा कहा जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे आवेदन दाखिल करने से लेकर अंतिम फैसले तक की प्रक्रिया ऑनलाइन मोड में संपन्न होगी। यह फैसला न केवल अमेरिकी प्रशासनिक प्रणाली को रफ्तार देगा, बल्कि वहां बसने का सपना देखने वाले लाखों अंतरराष्ट्रीय पेशेवरों, विशेषकर भारतीय समुदाय के जीवन में एक बड़ा सकारात्मक मोड़ लाएगा।अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों, छात्रों और अपने परिवारों के साथ रह रहे प्रवासियों के लिए यह खबर बेहद राहत भरी मानी जा रही है। अब तक ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) या नागरिकता (नेचुरललाइजेशन) की अर्जी देने के लिए आवेदकों को दर्जनों पन्नों के फॉर्म, टैक्स रिटर्न, पहचान पत्र और कई अन्य कागजी साक्ष्य डाक के जरिए USCIS के केंद्रों पर भेजने पड़ते थे। इसमें कई बार पते की गलती, कूरियर में देरी या दस्तावेजों के गुम होने की वजह से आवेदनों में महीनों की देरी हो जाती थी। अब संपूर्ण फाइलिंग डिजिटल होने से डेटा सीधे सेंट्रल सर्वर पर अपडेट होगा, जिससे मानवीय गलतियों की गुंजाइश न के बराबर रह जाएगी।डिजिटल फाइलिंग से ग्रीन कार्ड और वीजा प्रक्रिया में कैसे आएगा सुधार?ग्रीन कार्ड की लंबी प्रतीक्षा सूची झेल रहे भारतीय नागरिकों के लिए नया डिजिटल सिस्टम एक नई उम्मीद लेकर आया है। वर्तमान में भारत से आने वाले अत्यधिक कुशल पेशेवरों को ग्रीन कार्ड पाने के लिए दशकों का इंतजार करना पड़ता है। यद्यपि देश-वार कोटा (Country-cap) की नीतियां अपनी जगह बरकरार हैं, लेकिन आवेदनों की प्रोसेसिंग में होने वाली प्रशासनिक देरी अब काफी हद तक घट जाएगी। USCIS का नया ई-फाइलिंग सिस्टम ऑटोमेटेड डेटा वेरिफिकेशन तकनीक से लैस है, जिससे आवेदन जमा होते ही शुरुआती जांच कुछ ही घंटों में पूरी हो जाएगी।इसके अलावा, H-1B वीजा धारक और उनके आश्रित (H-4 वीजा धारक) अब अपने स्टेटस एक्सटेंशन, वर्क परमिट (EAD) और एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस (Form I-485) के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। सिस्टम में आवेदक के पिछले रिकॉर्ड्स पहले से ही डिजिटल फॉर्मेट में सहेजे रहेंगे, जिससे बार-बार एक ही दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि USCIS को किसी अतिरिक्त जानकारी या सबूत की आवश्यकता (RFE - Request for Evidence) होती है, तो उसे भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से तुरंत मांगा और जमा किया जा सकेगा, जिससे समय की भारी बचत होगी।नागरिकता की राह होगी आसान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन से बढ़ेगी रफ्तारअमेरिकी नागरिकता (Form N-400) के लिए आवेदन करने वाले लोगों के लिए भी यह बदलाव बेहद फायदेमंद साबित होने वाला है। डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद आवेदक अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर से पूरी प्रक्रिया को ट्रैक कर सकेंगे। साक्षात्कार (Interview) की तारीखों का आवंटन, बायोमेट्रिक अपॉइंटमेंट की ट्रैकिंग और फीस का भुगतान सब कुछ एक ही एकीकृत पोर्टल के जरिए संचालित होगा। इससे पहले आवेदकों को भौतिक डाक द्वारा नोटिस मिलने का इंतजार करना पड़ता था, जिसमें कभी-कभी कई सप्ताह का समय लग जाता था।नए सिस्टम में आधुनिक जनरेटिव एआई (AI) और डेटा एनालिटिक्स टूल्स का भी सीमित उपयोग किया जा रहा है ताकि बैकलॉग (लंबित आवेदनों की भारी संख्या) को तेजी से निपटाया जा सके। एआई तकनीक का मुख्य काम आवेदनों की शुरुआती छंटनी करना, जरूरी दस्तावेजों की मौजूदगी की पुष्टि करना और संदिग्ध या धोखाधड़ी वाले पैटर्न की पहचान करना होगा। इससे जो वैध और सही आवेदन हैं, उन्हें अधिकारियों के अंतिम अनुमोदन के लिए तुरंत आगे बढ़ा दिया जाएगा। नतीजतन, नागरिकता और ग्रीन कार्ड मिलने की समय-सीमा में काफी कमी आने का अनुमान है।धोखाधड़ी पर कसेगा शिकंजा और लोकल भारतीय आव्रजकों के लिए नई चुनौतियांजहां एक तरफ डिजिटल इमिग्रेशन से ईमानदार और योग्य आवेदकों को सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ फर्जी कागजात या गलत जानकारी के दम पर अमेरिका में प्रवेश करने या वीजा अवधि बढ़ाने की कोशिश करने वालों पर शिकंजा कसेगा। डिजिटल डेटाबेस सीधे अमेरिकी सीमा सुरक्षा (CBP), विदेश विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियों से जुड़ा होगा। इससे एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग नामों या फर्जी कंपनियों के जरिए आवेदन दाखिल करने की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।हालांकि, इस नई व्यवस्था के साथ कुछ तकनीकी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। साइबर सुरक्षा को मजबूत रखना USCIS के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी ताकि लाखों आवेदकों का संवेदनशील व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा सुरक्षित रहे। इसके अतिरिक्त, जो आवेदक डिजिटल तकनीकों के प्रति बहुत अधिक सहज नहीं हैं या जिनके पास उच्च गति वाले इंटरनेट और स्कैनिंग सुविधाओं की कमी है, उन्हें शुरुआती चरण में थोड़ी कठिनाई हो सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सहायता केंद्रों और यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस के जरिए इस समस्या का समाधान भी जल्द निकाल लिया जाएगा।ओवरऑल देखा जाए तो अमेरिका का यह कदम न केवल उनके आव्रजन विभाग को आधुनिक बनाएगा, बल्कि भारत के दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और पंजाब जैसे क्षेत्रों से अमेरिका गए लाखों प्रवासियों के लिए पारदर्शिता और गति का नया युग लेकर आएगा। कागजी सिस्टम के खत्म होने से समय, धन और पर्यावरण तीनों की रक्षा होगी और इमिग्रेशन की लंबी अनिश्चितता के दौर में कमी आएगी।
Ahmedabad, 12 अगस्त . अमेरिका की न्यूयॉर्क ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) के आपराधिक मामले को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के दो दिन बाद अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा कि पिछले लगभग दो वर्षों के अनुभव ने उन्हें और अधिक विनम्र बनाया है. उन्होंने कहा कि इस ... Read more
अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर और IIT BHU के पूर्व छात्र आकाश सम्पूर्णानंद पांडेय ने हाल ही अपने करियर की यात्रा का एक किस्सा शेयर किया है। ये बात उस वक्त की है जब वो स्ट्रगल कर रहे थे।
OpenAI ऑफिस में घुसे प्रोटेस्टर्स, अमेरिका-यूरोप में AI के खिलाफ प्रोटेस्ट
भारत में भले ही सरकार और यहां के लोग AI के कशीदे गढ़ रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका और यूरोप में इसके खिलाफ जम कर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. कभी गूगल के फाउंडर की स्पीच रोक दी जाती है तो कहीं बड़े इवेंट में Amazon के टॉप ऑफिशियल को बुरा भला कहा जाता है. वजह है AI.
अमेरिका में लोग फ्रिज में दूध रखते हैं, फिर यूरोप में ऐसा क्यों नहीं होता
अमेरिका और यूरोप में दूध को स्टोर करने का तरीका अलग- अलग है. अमेरिका में हमेशा डिब्बाबंद दूध फ्रीज में रखा जाता है. वहीं यूरोप के किसी भी देश में दूध के डिब्बे को फ्रिज के बाहर रखते हैं. आखिर दूध को स्टोर करने का दोनों जगह अलग- अलग क्यों है? चलिए जानते इसके पीछे की दिलचस्प वजह.
ट्रंप ने बच्चों के जेंडर बदलने वाली सर्जरी पर कसा शिकंजा, अब इसके लिए अमेरिकी सरकार नहीं देगी पैसा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ साफ कहा- मेडिकेड अब नाबालिगों की जेंडर बदलने वाली सर्जरी और हार्मोन का खर्च नहीं उठाएगा
मध्य पूर्व (Middle East) के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर इस वक्त युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। दुनिया के सबसे बड़े तेल व्यापार मार्ग पर ईरान और अमेरिका एक बार फिर सीधे तौर पर आमने-सामने आ गए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी खलबली मच गई है। इस बीच, इस भयंकर कूटनीतिक संकट के बीच एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है, जहां पाकिस्तान के हाई-प्रोफाइल मंत्री मोहसिन नकवी (Mohsin Naqvi) अचानक तेहरान पहुंच गए हैं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है।क्यों सुलग रहा है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का यह सामरिक मार्ग?स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे बड़ा और अहम धमनियों में से एक माना जाता है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा की आपूर्ति प्राप्त करता है। हालिया दिनों में ईरान और अमेरिकी नौसेना के बीच बढ़ती तनातनी और सैन्य गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में सुरक्षा संकट गहरा गया है। ईरान की तरफ से दी गई चेतावनियों और अमेरिका की आक्रामक सैन्य तैनाती ने इस समुद्री रास्ते को दुनिया का सबसे खतरनाक जोन बना दिया है। यदि यहां कोई भी बड़ा संघर्ष छिड़ता है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दाम आसमान छू सकते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा बुरा असर पड़ सकता है।अचानक तेहरान क्यों पहुंचे मोहसिन नकवी?इस मची भगदड़ और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी का तेहरान दौरा बेहद संदिग्ध और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साये में पाकिस्तान अपने पारंपरिक क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश कर रहा है। तेहरान की इस अचानक यात्रा के पीछे गुप्त राजनीतिक संदेश और पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव से निपटने की रणनीतियां बताई जा रही हैं। इस हाई-लेवल विजिट पर अब अमेरिका सहित तमाम वैश्विक ताकतों की पैनी नजर टिकी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक गलियारों से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां महाशक्ति अमेरिका ने अपनी सामरिक सख्ती दिखाते हुए पाकिस्तान के रक्षा बजट और खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के गुप्त खर्चों पर करारा हथौड़ा चलाया है। अमेरिका ने कड़े शब्दों में शहबाज शरीफ सरकार से पूछा है कि वह अपनी सेना और खुफिया तंत्र पर पानी की तरह बहने वाले पैसे का पूरा और पारदर्शी हिसाब दे। इस अमेरिकी कदम से इस्लामाबाद की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से अपने गुप्त सैन्य खर्चों और विदेशी कर्जों के असली आंकड़ों को दुनिया से छुपाता आया है।अमेरिकी सख्ती के पीछे की असली वजह और आर्थिक संकटपाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी से जूझ रहा है। देश की जनता दो वक्त की रोटी और महंगाई के बोझ से त्रस्त है, जबकि दूसरी ओर हुक्मरान अपनी फौज और खुफिया तंत्र को मजबूत करने के नाम पर अरबों-खरबों रुपये झोंक रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक से मिलने वाले बेलआउट पैकेजों के बावजूद पारदर्शिता की कमी को देखते हुए अब अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। वाशिंगटन का साफ कहना है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों या वैश्विक वित्तीय सहायता का इस्तेमाल क्षेत्रीय अस्थिरता या मनमाने गुप्त अभियानों के लिए नहीं होना चाहिए, जिसके चलते पाकिस्तान से पाई-पाई का हिसाब मांगा गया है।रक्षा तंत्र और आईएसआई के गुप्त खर्चों पर कसेगा शिकंजापाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सेना और आईएसआई का प्रभाव जगजाहिर है, जो अक्सर बिना किसी जवाबदेही के भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल करते हैं। अमेरिकी प्रशासन के इस सीधे दखल के बाद अब पाकिस्तान के नीति-निर्माताओं पर अंतरराष्ट्रीय दबाव काफी बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि यदि पाकिस्तान इस गुप्त बजट का संतोषजनक विवरण देने में नाकाम रहता है, तो उसे भविष्य में मिलने वाली अमेरिकी और पश्चिमी देशों की वित्तीय सहायता या अंतरराष्ट्रीय ऋणों से भी हाथ धोना पड़ सकता है। इस हाई-वोल्टेज कूटनीतिक ड्रामे ने एक बार फिर पाकिस्तानी हुक्मरानों की कलई खोलकर रख दी है।
स्वदेशी जागरण मंच ने Pepsi-Coke और अमेरिकी ऐप्स के बहिष्कार को कहा, 100% टैरिफ की धमकी से बढ़ा विवाद
स्वदेशी जागरण मंच ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी टैरिफ धमकी का कड़ा विरोध किया है। मंच ने पेप्सी, कोका-कोला और अमेरिकी ऐप्स सहित विदेशी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान किया है।
अमेरिका जाने का शॉर्टकट पड़ा भारी, फर्जी डिग्री और बैंक बैलेंस लेकर US Embassy पहुंचा शख्स, FIR दर्ज
नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026 । अमेरिका जाने की चाहत में एक शख्स ने कथित तौर पर वीजा प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया, लेकिन उसका यह शॉर्टकट भारी पड़ गया। अमेरिकी वीजा हासिल करने के लिए वह फर्जी डिग्री और बैंक बैलेंस से जुड़े दस्तावेज लेकर US Embassy पहुंचा। जांच के दौरान दस्तावेजों […] The post अमेरिका जाने का शॉर्टकट पड़ा भारी, फर्जी डिग्री और बैंक बैलेंस लेकर US Embassy पहुंचा शख्स, FIR दर्ज appeared first on Rashtriya Ujala .
जियो क्रेडिट और बैंक ऑफ अमेरिका में डील: अंबानी की कंपनी में खरीदेगा 49.9% हिस्सा, कितने करोड़ में हुआ सौदा?bank of america jio credit stake deal Mukesh Ambani Brian Moynihan
अमेरिका ने चीन के खिलाफ उठाए सख्त कदम, एआई क्षमताओं पर नजर रखने के लिए पेश किए बिल
वॉशिंगटन, 12 अगस्त . अमेरिका के दो सीनेटरों ने चार बिलों का एक द्विदलीय पैकेज पेश किया है, जिसका मकसद निर्यात नियंत्रण को और कड़ा करना, चीन की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षमताओं पर नजर रखना और विदेशी जासूसी से अमेरिकी तकनीक की रक्षा करना है. ओहायो के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड और वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक ... Read more
अमेरिकी वीजा के लिए दिखाई फर्जी डिग्री और बैंक बैलेंस, आंध्र प्रदेश के युवक के खिलाफ FIR दर्ज
अमेरिकी दूतावास की शिकायत पर पुलिस ने आंध्र प्रदेश के एक युवक पर गैर-आप्रवासी वीजा के लिए फर्जी दस्तावेज जमा करने का मामला दर्ज किया है।
होर्मुज को लेकर कहां फंसा ईरान-अमेरिका में पेंच? देखें US TOP-10
होर्मुज को लेकर अमेरिकाृ और ईरान एक बार फिर आमने-सामने है. ईरान ने जहां अमेरिका को अपना रवैया सुधारने की चेतावनी दी वहीं ट्रंप ने 100 प्रतिशत होर्मुज पर नियंत्रण का दावा किया है. यही नहीं युद्ध से हुए नुकसान पर ईरान के मुआवजे की शर्तों के बदले ट्रंप ने अपने मारे गए सैनिकों और घायलों के लिए मुआवजे की मांग भी की है.
अमेरिकी सीनेटरों ने स्टूडेंट वीजा में देरी को दूर करने का किया आग्रह
वॉशिंगटन, 12 अगस्त . अमेरिकी सीनेटरों के एक समूह ने विदेश विभाग से छात्र और एक्सचेंज विजिटर वीजा में हो रही देरी को दूर करने का आग्रह किया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आवेदक नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले देश में प्रवेश नहीं कर पाएंगे. सीनेट की ज्यूडिशियरी इमिग्रेशन ... Read more
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water System Hack, ईरान से क्या कनेक्शन?| Trump
Iran US War Update: 7 अमेरिकी राज्यों का Water system हैक,ईरान कनेक्शन क्या?| Trump ईरान अमेरिका जंग...हथियारों से तो लड़ी ही जा रही है..लेकिन खुफिया तौर पर भी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो अमेरिका रुस कोल्डवॉर की याद दिलाता है..
'सेना और ISI पर कितना खर्च, हिसाब दो', पाकिस्तान के सीक्रेट बजट पर अमेरिका ने मांगा जवाब
अमेरिका ने पाकिस्तान के सीक्रेट बजट को लेकर सवाल पूछा है और जवाब मांगा है कि आप सेना और आईएसआई पर कितना खर्च करते हैं, बताएं।
25 अगस्त से 3 देशों के दौरे पर मोहन भागवत, अमेरिका-कनाडा-UK में प्रवासी भारतीयों से करेंगे संवाद|
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत प्रवासी भारतीयों के संगठनों के निमंत्रण पर 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की तीन देशों की यात्रा पर जाएंगे।
Petrol Diesel Price: हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा वैट बढ़ाने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे आम जनता और ट्रांसपोर्टर्स पर सीधा असर पड़ा है।
US: अमेरिकी कोर्ट में पन्नू केस के आरोपी निखिल गुप्ता की सजा की तारीख बदली, अब कब होगा फैसला?
US: Sentencing date of Pannu case accused Nikhil Gupta changed in US court, when will the decision be made? US: अमेरिकी कोर्ट में पन्नू केस के आरोपी निखिल गुप्ता की सजा की तारीख बदली, अब कब होगा फैसला?
अमेरिकी चुनाव में ट्रंप दे रहे दखल? भारतीय मूल की जज ने लगा दी लिमिट
जज इंदिरा तलवानी ने साफ कहा कि चुनाव रेगुलेट करने का अधिकार एग्जीक्यूटिव ब्रांच के पास नहीं है, इसलिए यह फैसला ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश के लिए बड़ा झटका है, जिसमें वह मिडटर्म चुनाव से पहले नियम बदलवाना चाहता था.
अमेरिका-ईरान तनाव का असर! लगातार पांचवें दिन चढ़ा क्रूड ऑयल, 89 डॉलर के पार पहुंची कीमत
अमेरिका-ईरान तनाव का असर! लगातार पांचवें दिन चढ़ा क्रूड ऑयल, 89 डॉलर के पार पहुंची कीमत
अमेरिकी सीनेटर ने तिब्बत का भविष्य सुरक्षित करने के लिए पेश किया कानून
अमेरिकी सीनेटर ने तिब्बत का भविष्य सुरक्षित करने के लिए पेश किया कानून
अमेरिका ने लॉन्च किया ‘गोल्डन डोम’ पोर्टल, रक्षा कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को मिलेगा फायदा
वॉशिंगटन, 12 अगस्त . अमेरिका ने Tuesday को एक डिजिटल पोर्टल शुरू किया है, जिसका मकसद रक्षा कंपनियों, टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप्स, निवेशकों और शोधकर्ताओं को अपने प्रस्तावित 185 अरब डॉलर के ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा सिस्टम के विकास से जोड़ना है. अमेरिका के लिए ‘गोल्डन डोम’ के निदेशक जनरल माइक गुएटलीन ने सालाना ‘स्पेस एंड मिसाइल ... Read more
अमेरिका के प्रीस्कूल की फीस सुनकर चौंक जाएंगे आप! महिला ने बताया एक महीने का खर्च, वीडियो वायरल
अमेरिका के प्रीस्कूल की फीस सुनकर चौंक जाएंगे आप! महिला ने बताया एक महीने का खर्च, वीडियो वायरल
अमेरिका ने लॉन्च किया 'गोल्डन डोम' पोर्टल, रक्षा कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को मिलेगा फायदा
अमेरिका ने लॉन्च किया 'गोल्डन डोम' पोर्टल, रक्षा कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को मिलेगा फायदा
सेना-ISI के खर्च का हिसाब दो! पाकिस्तान की 'गुप्त' फंडिंग पर अमेरिका सख्त
अमेरिका ने पाकिस्तान की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सैन्य और खुफिया एजेंसियों के बजट को संसदीय या नागरिक निगरानी के दायरे में लाने की सिफारिश की है. अमेरिकी रिपोर्ट में पाकिस्तान से सरकारी कर्ज, सरकारी कंपनियों की देनदारियों और बजट प्रस्ताव को लेकर भी ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया है.
तिब्बत को लेकर अमेरिका का बड़ा फैसला: सीनेट में पेश किया नया विधेयक, क्या चीन को घेरने की है तैयारी?
Major US move on Tibet: New bill introduced in the Senate; is there a plan to corner China?
US-Iran Tension: 'ईरान पर भरोसा नहीं, होर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण'; ट्रंप ने तेहरान को लेकर क्या कहा?
भारत‑अमेरिका टैरिफ विवाद - ट्रंप और मोदी बातचीत से निकालेंगे समाधान
व्हाइट हाउस ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद और अमेरिका की ओर से प्रस्तावित ऊंचे टैरिफ के मुद्दे पर आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालेंगे
Mohsin Naqvi ने Tehran में अराघची से वार्ता की, अमेरिका-ईरान संघर्ष रोकने की कोशिश
ईरान-अमेरिका संघर्ष को खत्म कराने के लिए जारी मध्यस्थता प्रयासों के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन रजा नकवी ने मंगलवार को तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से वार्ता की। ईरानी मीडिया ने यह जानकारी दी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया था कि नकवी मंगलवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान के लिए रवाना हुए थे। बाद में ‘आईआरएनए’ ने ‘एक्स’ पर नकवी की अराघची से मुलाकात की तस्वीर पोस्ट की। पाकिस्तानी एवं ईरानी अधिकारियों ने अबतक इस बारे में कोई ब्योरा नहीं दिया है। इससे एक महीने पहले ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान के दौर पर आए थे। मोमेनी ने अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तानी समकक्ष के साथ बातचीत की थी। कतर जैसे खाड़ी देशों के समर्थन से पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई कारणों से संघर्ष अब भी जारी है। इस समय संघर्ष जारी रहने का मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का अवरुद्ध होना है। जून में अमेरिका और ईरान ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से आगे की बातचीत के लिए 60 दिनों का समय मिला था। अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद स्विट्जरलैंड में एक शिखर वार्ता भी हुई थी, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद बातचीत विफल हो गई और अमेरिका तथा ईरान दोनों ने फिर से एक-दूसरे पर सैन्य हमले शुरू कर दिए।
Trump: रूस ने चार साल से हिरासत में रखे पूर्व अमेरिकी मरीन रॉबर्ट गिलमैन को छोड़ा, ट्रंप ने कैसे कराई रिहाई?
US-Iran Blockade: होर्मुज में अमेरिकी कार्रवाई तेज, ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी तोड़ने वाले जहाज पर किया हमला
रूस से तेल खरीदने पर 100 फीसदी टैरिफ का खतरा? ट्रंप-मोदी का नाम क्या बोले अमेरिकी अधिकारी
वाइट हाउस के एक वरिष्ठ सलाहकार ने मंगलवार को कहाकि भारत द्वारा रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी शुल्क की धमकी से उत्पन्न मुद्दे को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आपस में सुलझा लेंगे।
Mecca Joint Defense Agreement के पीछे अमेरिका की चाल, अंदर की खबर Turkiye | Saudi | Iran | Trump
तीन ताकतवर मुस्लिम देश अमेरिका के हाथ की कठपुतली बन गए और दुनिया इसे डील समझती रही....चर्चा जोर शोर से जारी है कि इस्लामिक नाटो के पीछे अमेरिका की चाल है...और पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के टेंशन में बुरा घसीटा गया है..अब इसमें अमेरिका की मर्जी से कई और देश जुड़ेंगे
हो गया खेल! भारत को रोककर खुद रूसी तेल खरीद रहा अमेरिका?
कुछ दिन पहले यूएस सेनेट में एक बिल पास हुआ। बिल था अगर कोई देश रूसी से तेल खरीदेगा तो उस पर अमेरिका 100% तक का टेरिफ लगाने का अधिकार रखेगा। भारत और चीन के लिए यह सीधा थ्रेट था क्योंकि यह दो देश रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदते हैं। लेकिन अब अगर हम कहें कि यह बिल बस मजाक है। अमेरिका और यूरोप रशियन ऑयल खरीद को लेकर दुनिया के दूसरे देशों पर टेरिफ और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे रहे हैं, वही देश दूसरी ओर खुद रशिया के तेल से बने रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: तातारस्तान की Oil Refinery पर भीषण ड्रोन हमला, 12 की मौत और 39 घायल हुए जुलाई के महीने में भारत ने रशिया से करीब 5.5 बिलियन यूरो यानी लगभग 55000 करोड़ का कच्चा तेल खरीदा। रशियन क्रूड की भारत को सप्लाई जुलाई में बढ़कर करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गई। यानी इंडिया जितना कच्चा तेल दुनिया के दूसरे देशों से खरीद रहा है, उसमें अकेले रशिया की हिस्सेदारी करीब 55% की हो गई। ये आंकड़े सामने आए। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर यानी सीआरए की रिपोर्ट से। यहीं से अमेरिका और यूरोप की नीति को लेकर डबल स्टैंडर्ड की बहस भी शुरू हुई। क्योंकि सीआरए की एक रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा किया। इस रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में भारत, टर्की, ब्रूनोई और जॉर्जिया की रिफाइनरीज ने जुलाई में कुल 633 मिलियन यूरो के ऑयल प्रोडक्ट्स का निर्यात किया। इनमें 214 मिलियन यूरो के उत्पाद यूरोपीय संघ उस यूरोप को गए जो रशियन ऑयल पर प्रतिबंध लगाने की लगातार धमकी देते आया है और यहां तक कि भारत के खिलाफ कई बार बयानबाजी भी की। इसके अलावा 184 मिलियन यूरो के ऑयल प्रोडक्ट ऑस्ट्रेलिया और 234 मिलियन यूरो के ऑयल प्रोडक्ट अमेरिका भेजे गए और अनुमान है कि इनमें से करीब 284 मिलियन यूरो के रिफाइंड उत्पाद रूसी कच्चे तेल से तैयार किए गए थे। इसे भी पढ़ें: Global Oil Crisis: होर्मुज संकट से $84 के पार पहुंचा Brent Crude, ईरान-अमेरिका में बढ़ी तकरार तमाम बयानबाजी और धमकियों के बाद भी अमेरिका और यूरोप कहीं ना कहीं किसी ना किसी तरीके से रशियन ऑयल प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं और एक तरह से जो वो बार-बार धमकी दे रहे हैं कि जो देश रशिया से तेल खरीदेंगे उन पर वो टेरेफ लगाएंगे तो कायदे से देखा जाए तो पहले तो उन्हें इस पर रोक लगानी होगी। फिर दूसरे देशों से रशियन ऑयल को लेकर बात करनी होगी। देखिए अब बात उन कारगो की जो जुलाई में भारतीय रिफाइनरियों से निकलकर यूरोपीय संघ के बंदरगाहों तक पहुंचे। इन कारगोस में ऐसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद थे जिन्हें तैयार करने में रशियन कच्चे ऑयल का इस्तेमाल हुआ था। यानी आसान भाषा में समझिए कच्चा तेल रूस से आया। भारत की रिफाइनरी में उसकी प्रोसेसिंग हुई। उससे पेट्रोलियम प्रोडक्ट तैयार हुए और फिर उसका एक हिस्सा यूरोपीय बाजार तक पहुंचा। इसी तरह जामनगर रिफाइनरी से अमेरिका को भी रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की शिपमेंट भेजी गई। इसे भी पढ़ें: MEA Briefing: Balochistan Independence, Russian Oil Purchase, Doval Sergio Gor Meeting, China, Nepal, Bangladesh और Pakistan संबंधी मुद्दों पर आया India का जवाब सीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई से पहले के तीन महीनों में जामनगर रिफाइनरी के फीड स्टॉक का करीब 35% हिस्सा रूसी क्रूड था। यानी भारत सिर्फ रूसी तेल खरीद नहीं रहा बल्कि उस तेल को रिफाइंड करके तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है और यही पेट्रोलियम उत्पाद यह देश अमेरिका यूरोप के बाजार में जा रहे हैं और देखा जाए तो सीधे तौर पर नहीं लेकिन घुमा फिराकर रशिया के प्रोडक्ट अमेरिका और यूरोप के बाजार में बेचे जा रहे हैं। तो देखा जाए तो एक तरह से अमेरिका यूरोप खुद रशियन प्रोडक्ट लेने में पीछे नहीं है। मगर वो ये भी नहीं चाहते कि भारत रशिया से कोई व्यापार करे।
मिसाइल नहीं अब नया हथियार: निशाने पर अमेरिका के 7 राज्यों के वाटर सिस्टम, ईरान का नाम क्यों जुड़ा?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव बीच अमेरिका के जल सिस्टम निशाने पर आ गए हैं। मिनेसोटा समेत कम से कम सात राज्यों के पेयजल और वाटर प्लांट पर कोऑर्डिनेटेड साइबर अटैक की रिपोर्ट सामने आई है, जिसने सार्वजनिक सेवाओं की सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पिछले दिनों तुर्की (Trkiye) में एक गंभीर और पुख्ता जानलेवा खतरे (Assassination Threat) का सामना करना पड़ा था। इस खतरनाक खतरे से बचाने के लिए अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद गोपनीय और फिल्मी प्लान तैयार किया, जिसके तहत ट्रंप को एयर फोर्स वन (Air Force One) से चुपचाप एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (Food/Catering Truck) के जरिए निकालकर दूसरी सीक्रेट मिलिट्री फ्लाइट में शिफ्ट करना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दुनिया और यहां तक कि उनके साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को भी यही लगता रहा कि राष्ट्रपति मुख्य विमान में ही मौजूद हैं।क्या था पूरा मामला और क्यों पड़ी फूड ट्रक में छुपने की जरूरत?यह पूरी घटना तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल नाटो (NATO) समिट के दौरान की है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ईरान की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप पर हमले का एक बेहद खतरनाक और गंभीर इनपुट मिला था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए व्हाइट हाउस और सुरक्षा अधिकारियों ने तुर्की से उनकी सुरक्षित वापसी के लिए एक चालाक कूटनीतिक चाल (Ruse) चली। योजना के अनुसार, मीडिया और आम लोगों की नजरों के सामने डोनाल्ड ट्रंप को आधिकारिक एयर फोर्स वन विमान में चढ़ते हुए दिखाया गया ताकि हमलावरों या किसी भी बाहरी शख्स को उनकी असली लोकेशन का पता न चल सके।कैसे दिया गया इस सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम?जैसे ही कैमरे के सामने ट्रंप मुख्य विमान के अंदर गए, उसके तुरंत बाद उन्हें विमान के दूसरे हिस्से से एक हाइड्रोलिक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक (खाने-पीने का सामान लोड करने वाली गाड़ी) के जरिए चुपचाप नीचे उतारा गया। इस फूड ट्रक के भीतर ट्रंप और उनके चुनिंदा करीबी सहयोगी छिपे हुए थे। इसके बाद उस ट्रक ने मुख्य विमान से दूर खड़े एक छोटे और सुरक्षित मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (C-32A) तक का सफर तय किया। उधर, पुराना एयर फोर्स वन विमान एक 'डिकॉय' (Decoy/धोखा देने वाला विमान) की तरह इस्तेमाल किया गया, जिसमें सिर्फ पत्रकार और कुछ व्हाइट हाउस के कर्मचारी सवार थे। इस तरह ट्रंप ने सीक्रेट मिलिट्री फ्लाइट से ब्रिटेन का सफर तय किया और उनकी सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक नहीं होने दी गई।
अमेरिकी अदालत ने गौतम अदाणी और भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज किया
अमेरिकी अदालत ने अडानी समूह के नेताओं के खिलाफ DoJ धोखाधड़ी का मामला खारिज किया, दो साल के कानूनी मामले का अंत हुआ, जिस
अमेरिकी अदालत ने रिश्वतखोरी और सिक्योरिटीज़-फ्रॉड के कथित मामले में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के पूर्व CEO विनीत जैन के खिलाफ आपराधिक आरोपों को 'विद प्रिजुडिस' (हमेशा के लिए) खारिज कर दिया है। इससे लगभग दो साल से चल रही कानूनी कार्यवाही खत्म हो गई है। न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र (indictment) को खारिज करने के लिए जस्टिस डिपार्टमेंट की 'रूल 48(a)' याचिका को मंज़ूरी दे दी। इन आरोपों में सिक्योरिटीज़-फ्रॉड करने की साज़िश, वायर फ्रॉड और सिक्योरिटीज़-फ्रॉड करने की साज़िश शामिल थी। इसे भी पढ़ें: Gautam Adani मामला: US Court ने आपराधिक आरोपपत्र खारिज किया, कार्यवाही समाप्त जज निकोलस गारौफिस ने केस छोड़ने के फैसले के बारे में फेडरल प्रॉसिक्यूटर से अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगने के बाद इस बर्खास्तगी को मंज़ूरी दी। 'विद प्रिजुडिस' बर्खास्तगी का मतलब है कि आपराधिक कार्यवाही हमेशा के लिए खत्म हो गई है और इन आरोपों को दोबारा दायर नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने यह तय कर दिया है कि मूल आरोप साबित हो गए थे या गलत साबित हुए थे। गौतम अडानी ने केस खारिज होने का स्वागत किया इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, गौतम अडानी ने एक्स पर एक पोस्ट में अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मैं अमेरिकी अदालत के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करता हूं। इस मुश्किल दौर में भी सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा भरोसा अटूट रहा। मैं उन सभी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने हम पर, सिस्टम पर और न्याय दिलाने की भारत की क्षमता पर कभी भरोसा नहीं खोया। हम वही काम करते रहेंगे जो मायने रखता है: अपने देश के लिए निर्माण करना, ऐसी वैल्यू बनाना जो हमारे बाद भी बनी रहे और खुद से भी बड़े मकसद के लिए काम करना। क्या है पूरा मामला यह आपराधिक मामला नवंबर 2024 में दर्ज किया गया था, जब अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडानी, सागर अडानी, विनीत जैन और अन्य पर सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को लगभग 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की योजना में शामिल होने का आरोप लगाया था। अभियोजकों का आरोप था कि इन कॉन्ट्रैक्ट्स से दो दशकों की अवधि में टैक्स के बाद 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा का मुनाफ़ा होने की उम्मीद थी। उन्होंने आरोपियों पर अमेरिकी बाज़ारों में लोन और बॉन्ड के ज़रिए 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की रक़म जुटाते समय निवेशकों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को लगातार बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया और कहा कि उसने लागू कानूनों और रेगुलेटरी ज़रूरतों का पालन किया है। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के एक अलग सिविल मामले का भी गौतम अडानी के ख़िलाफ़ अंतिम फ़ैसले के ज़रिए निपटारा हो गया है। उन्होंने आरोपों को स्वीकार किए बिना ही इस फ़ैसले को मान लिया। इस आदेश के तहत, अडानी को 30 दिनों के भीतर SEC को 6 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना देना होगा।
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अमेरिका की चाल है इस्लामिक नाटो? मक्का समझौते में अभी कई देशों की होगी एंट्री
तुर्की ने संकेत दिया है कि यह समझौता केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहेगा। तुर्की की ओर से कहा गया है कि इस समझौते का विस्तार किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर कई देशों को इसके दायरे में लाया जाना चाहिए। क्या यह अमेरिका की चाल है?
अमेरिकी सीनेट ने रूस के साथ तेल खरीद जारी रखने के चलते भारत पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले विधेयक को पारित कर दिया है। हालांकि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह अंतिम रूप से लागू होगा लेकिन इसका असर दिखने लगा है।
होर्मुज संकट गहराया: अमेरिका-ईरान तनाव से तेल कीमतें ऊंचे स्तर पर, WTI 82 डॉलर के पार
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के मध्य चल रहे युद्ध के चलते खाड़ी में संकट लगातार गहराता जा रहा है। इसका असर ये हो रहा है कि तेल की सप्लाई बाधित हो गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें एक हफ्ते के ऊंचे स्तर के करीब बनी हुई हैं। निकट समय में […]
'हम अकेले बोझ नहीं उठाएंगे': चीन के बढ़ते दबदबे का असर, क्या एशिया को भी बेसहारा छोड़ रहा अमेरिका?
'हम अकेले बोझ नहीं उठाएंगे': चीन के बढ़ते दबदबे का असर, क्या एशिया को भी यूरोप की तरह बेसहारा छोड़ रहा अमेरिका?
Donald Trump प्रशासन में अमेरिका ने 1.75 लाख से अधिक US Visa रद्द किए
(सागर कुलकर्णी)वाशिंगटन, 10 अगस्त अमेरिका ने सोमवार को घोषणा की कि उसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में लापरवाही से वाहन चलाने से लेकर यौन उत्पीड़न तक कई तरह के अपराधों के कारण 1.75 लाख से अधिक वीजा रद्द किए हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि ये वीजा लगातार की जाने वाली जांच के तहत रद्द किए गए, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वीजा पाने वाले लोग इसकी शर्तों का पालन करें और अमेरिकियों के लिए खतरा न बनें। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका के विदेश विभाग ने ऐसे विदेशी नागरिकों के 1,75,000 से अधिक वीजा रद्द किए हैं, जिन्होंने अपने वीजा की शर्तों का उल्लंघन किया, अपराध किए, अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ हिंसा का आह्वान किया, अमेरिकियों के साथ धोखाधड़ी की, हमारी आव्रजन व्यवस्था का दुरुपयोग किया या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला।’’देशवार वीजा रद्द किए जाने का ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं था। बयान में कहा गया, ‘‘अमेरिकी वीजा अधिकार नहीं, बल्कि विशेषाधिकार है। विभाग उन लोगों से हमारे समुदायों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध हर उपाय का इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो इसका दुरुपयोग करते हैं।
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
बिहार के खगड़िया से पकड़ा गए फर्जी IAS की कुंडली अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। 41 साल के मनीष गुप्ता ने शादी नहीं की थी। उसने 5 कट्ठे की कोठी को अपना ऐसा ठिकाना बनाया था, जिसमें से वो सब पर नजर रख सके, लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी बाहर नहीं आए। दिल्ली से लौटने के बाद वो अपने बचपन के दोस्तों से भी कट गया। वो किसी को भी अपने घर के अंदर तक नहीं आने देता था। बताया जाता है कि उसने अपने कोठी में जो स्वीमिंग पुल बना रखा था, उसमें कछुआ पाल रखा था। लोग बताते हैं कि वो मानता था कि कछुआ रखने से धन में बढ़ोत्तरी होती है। अब पुलिस के इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर फर्जी IAS ने 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति कैसे कमाई। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मनीष कनाड़ा और अमेरिका से ट्रांजेक्शन करता था। पुलिस उसके पास से बरामद 5 आईफोन और आईपैड से उसके नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। इस पूरी खबर में पढ़िए फर्जी IAS मनीष की कहानी, क्लासमेट और पुलिस की जुबानी… पहले फर्जी IAS के घर रेड की तस्वीरें देखिए 10वीं क्लास का टॉपर था मनीष गुप्ता मनीष गुप्ता अपना रौब ऐसा रखता था कि उसके पड़ोसी उससे दूर ही रहते थे। वो खुद को PMO में काम करने वाला अधिकारी बताता था। वो कहता था कि उसकी बात सीधे पीएम मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से होती है। लिहाजा आसपास के लोग भी उससे दूरी बनाकर रहते थे। मनीष के बारे में जानने के लिए भास्कर की टीम ने उसके बचपन के दोस्तों की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद हमें मनीष का एक क्लासमेट मिला। उसने बताया कि मनीष का जन्म 1975 में हुआ था। उसके पिता खगड़िया के केडीएस कॉलेज में हिन्दी के प्रोफेसर थे। मनीष की शुरुआती पढ़ाई जमालपुर-गोगरी इलाके के सरकारी स्कूल में हुई। 1991 में मैट्रिक के एग्जाम में मनीष ने टॉप किया था। वो बचपन से ही पढ़ने में तेज था। इंटर तक उसने अपनी पढ़ाई यहीं पर पूरी की। इसके बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए अपने बड़े भाई के पास दिल्ली चला गया। उसके बाद हमलोगों की बात मनीष से कम हो गई। बेटे की पैरवी के लिए दो साल चक्कर लगाया, काम नहीं हुआ फर्जी IAS के दोस्त ने बताया कि मैं अपने बेटे से जुड़े एक काम की पैरवी के लिए मनीष के पास गया था। मुझे लगा कि बचपन का दोस्त बड़ा अधिकारी है। वो मेरी मदद कर सकता है। उस समय मुझे यह अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति को मैं बड़ा सरकारी अधिकारी समझ रहा हूं, उसकी पहचान ही पुलिस जांच में फर्जी निकल सकती है। अब जब मनीष की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई की खबर सामने आई तो पहले मुझे भरोसा नहीं हुआ। मनीष गुप्ता के दोस्त ने बताया कि एक बार किसी विवाद को लेकर मध्य विद्यालय जमालपुर कचहरी के एक शिक्षक को मनीष ने दूर से ही अपना ID कार्ड दिखाया था। उसने खुद को CBI का अधिकारी बताकर टीचर को भी धमकाया था। सरकारी बोर्ड वाली दो गाड़ियां, एक ड्राइवरलेस टेस्ला भी खगड़िया के गोगरी पुलिस को सूचना मिली थी कि जमालपुर में रहने वाला मनीष अपनी गाड़ियों पर ‘GOVT OF INDIA’ का बोर्ड लगाकर खुद को IAS बताता है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने 8 अगस्त की रात उसके घर पर छापेमारी की। घर के सामने दो गाड़ियां खड़ी थीं और दोनों पर सरकारी बोर्ड लगा था। घर के बाहर एक आदमी हाफ पैंट-टी शर्ट में घूम रहा था। पुलिस ने जब उससे उसके बारे में पूछा तो उसने कहा कि 'मेरे नाम मनीष गुप्ता है। मैं सीनियर IAS हूं। मैं अजित डोभाल की टीम में काम करता हूं। तुमलोग की हिम्मत कैसे हुई मेरे घर तक आने की। मनीष गुप्ता ने अपने मोबाइल पर आई कार्ड भी दिखाया। आई कार्ड और उसका कॉन्फिडेंस देखकर पुलिस भी कुछ देर के लिए बैकफुट पर आ गई। लेकिन पुलिस के अधिकारी ने आईकार्ड की जांच की तो पता चला ये फर्जी है।' जब तक रेड चली पुलिस से तू-तड़ाक करता रहा फर्जी IASपुलिस सूत्रों के मुताबिक मनीष गुप्ता के घर पर करीब 7 घंटे तक रेड चली। रेड के दौरान वो पुलिस से सीनियर ऑफिसर को भी तू-तड़ाक करता रहा। वो बार बार खुद को बड़ा अधिकारी बताकर पुलिस वालों को सस्पेंड करवाने की धमकी देता रहा। फोन-आईपैड का पासवर्ड नहीं बता रहा फर्जी IAS पुलिस ने आरोपी के पास से 5 Apple मोबाइल फोन, MacBook, iPad और 4 TB की हार्ड डिस्क बरामद की है। इन डिवाइस में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, चैट, ई-मेल, सोशल मीडिया अकाउंट, फोटो, वीडियो, दस्तावेज और बैंकिंग गतिविधियों से पुलिस को पूरे नेटवर्क की जानकारी मिल सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि मनीष किन लोगों से संपर्क में था। लेकिन फर्जी IAS फोन और आईपैड का पासवर्ड नहीं बता रहा है। पुलिस अब एक्सपर्ट से मनीष का फोन-आईपैड अनलॉक करवा सकती है। 20 क्रेडिट कार्ड और 8 डेबिट कार्ड का डिटेल खंगाल रही पुलिस तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस ने 20 क्रेडिट कार्ड, 8 डेबिट कार्ड और 4 चेकबुक बरामद किए हैं। कुछ कार्डों पर दूसरे नाम दर्ज होने की बात भी FIR में है। इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग कार्ड मिलने के बाद पुलिस अब इनके खातों और लेनदेन की जांच कर सकती है। किस कार्ड का इस्तेमाल किसने किया, किन खातों से पैसा आया और कहां गया, यह जानकारी बैंक स्टेटमेंट और KYC रिकॉर्ड से सामने आएगी। मनीष के घर में CCTV की व्यवस्था भी मिली है। पुलिस ने CCTV का DVR जब्त किया है। इससे घर पर आने-जाने वाले लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। अमेरिका-कनाडा से लेनदेन की बात, अभी पुष्टि बाकी मनीष के नेटवर्क से अमेरिका और कनाडा से ट्रांजेक्शन होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध FIR में विदेशी लेनदेन की स्पष्ट पुष्टि दर्ज नहीं है। इसलिए फिलहाल यह पुलिस जांच का विषय है। अगर बैंक खातों की जांच में अमेरिका, कनाडा या किसी अन्य देश से जुड़े लेनदेन मिलते हैं तो पुलिस को यह पता लगाना होगा कि पैसा किसके खाते से आया, किस खाते में गया और उसका उद्देश्य क्या था। विदेशी लेनदेन मिलने की स्थिति में जांच का दायरा स्थानीय स्तर की ठगी से बढ़कर अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल लेनदेन तक पहुंच सकता है। विदेशी शराब, बारहसिंगा के सींग और कछुआ भी बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस को 31 लीटर विदेशी शराब भी मिली है। इसके अलावा बारहसिंगा के दो सींग औक एक कछुआ भी बरामद किया गया है। मनीष जानवरों के सिगों का क्या करता था, पुलिस उसके बारे में भी पता लगा रही है। घर में स्वीमिंग पूल- पर्सनल थियेटर, 25 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे पड़ोसी के मुताबिक, करीब पांच कट्ठे की जमीन पर बने परमेश्वरी भवन में ऐशो-आराम की हर चीजें मौजूद है। जब से गाजियादबाद से मनीष पहुंचा, तब से लगातार कोठी को और बेहतर बना रहा था। घर में स्वीमिंग पुल-थियेटर भी है। कोठी के अंदर महंगी इटैलियन टाइल्स का इस्तेमाल किया गया है। पूरे परिसर की सुरक्षा के लिए 25 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। मनीष का एक भाई कनाडा में रहता है मनीष कुमार गुप्ता का परिवार शिक्षित और प्रतिष्ठित रहा है। मनीष के पिता परमेश्वर प्रसाद गुप्ता गोगरी-जमालपुर के केडीएस कॉलेज में प्रोफेसर थे। परिवार का यहां पुश्तैनी घर है। उनके बड़े भाई संजय कुमार गुप्ता दिल्ली में प्रोफेसर हैं, जबकि एक अन्य भाई डंपी कुमार कनाडा में रहते हैं। परिवार के अन्य भाई भी अलग-अलग शहरों में प्राइवेट कंपनियों में जॉब करते हैं।
Rohtak News: अमेरिका में हरविंदर मलिक की हरियाणवी पेंटिंग प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
अमेरिका में हरविंदर मलिक की हरियाणवी पेंटिंग प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
Pratapgarh News: अमेरिका में कांस्य, शाहनवाज ने बढ़ाया तिरंगे का मान
एथलेटिक्स कोच शोभनाथ यादव ने बताया कि इससे पहले दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चोट के कारण शाहनवाज को सफलता नहीं मिल सकी थी।
Sirmour News: अमेरिका के साथ कृषि समझौते के विरोध में किसानों और मजदूरों ने किया प्रदर्शन
अमेरिका के साथ किए गए कृषि समझौते और चार लेबर कोड के विरोध में सोमवार को हिमाचल किसान सभा के बैनर तले किसानों और मजदूरों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
Yamuna Nagar News: भारत-अमेरिका डील का विरोध कर रहे 250 किसानों को हिरासत में लेकर छोड़ा
भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को किसानों ने जेल भरो आंदोलन किया।
Udham Singh Nagar News: अमेरिका से ट्रेड डील के विरोध में सांकेतिक चक्का जाम
अमेरिका से ट्रेड डील के विरोध में सांकेतिक चक्का जाम
एशिया में ईरान और रूस के दांवपेंच से निपटने के लिए या फिर अमेरिका और चीन की शह पर पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच और अब तुर्किये के साथ भी मक्का में जो रक्षा समझौते हुए हैं, उसके दृष्टिगत भारतवासियों के दिलोदिमाग में बस एक ही सवाल कौंध रहा है कि क्या कथित 'इस्लामिक नाटो' से भारत की कूटनीतिक चुनौतियां बढ़ेंगी? क्या इससे निपटने में रूस-ईरान से रक्षा सम्बन्धों को और मजबूती दी जानी चाहिए? या फिर अमेरिका या चीन या फिर दोनों के इशारे पर हुए इस गठबंधन के पीछे कोई परोक्ष चाल तो नहीं है? तो जवाब होगा कि हाँ—भारत की कूटनीतिक चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं, लेकिन इसे अभी सीधे-सीधे “इस्लामिक NATO” कहना जल्दबाजी होगी। दरअसल, गत 7 अगस्त 2026 को मक्का में सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने एक संयुक्त रक्षा समझौता किया है, जिसमें एक पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। यह पहले के सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते का विस्तार है। लिहाजा भारत के लिए असली चिंता यह है कि- इसे भी पढ़ें: तीन तिगाड़ा काम...पाक-सऊदी-तुर्किये की यारी क्या भारत पर पड़ेगी भारी? 'सुन्नी NATO' से हम कितने मजबूत, इस रिपोर्ट में जानें पहली, पाकिस्तान को नया रणनीतिक ऑक्सीजन मिल सकता है: पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता, तुर्किये के पास मजबूत रक्षा उद्योग/सैन्य क्षमता और सऊदी अरब के पास वित्तीय व ऊर्जा शक्ति है। इन तीनों का संयोजन पाकिस्तान को भारत के मुकाबले कूटनीतिक और सैन्य दबाव बनाने के नए साधन दे सकता है। दूसरा, तुर्किये का शामिल होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है: भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान तुर्किये ने कई बार इस्लामाबाद के पक्ष में राजनीतिक रुख अपनाया है। अब यदि वह किसी औपचारिक सामूहिक रक्षा व्यवस्था का हिस्सा है, तो भविष्य के भारत-पाकिस्तान संकट में उसका वजन और बढ़ सकता है। तीसरा, सऊदी अरब को पाकिस्तान का “स्थायी सैन्य सहयोगी” मान लेना भी गलत होगा: रियाद के भारत के साथ बड़े आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक हित हैं। इसलिए सऊदी नेतृत्व के लिए पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग और भारत के साथ रणनीतिक संबंध—दोनों को साथ लेकर चलना संभवतः अधिक उपयोगी है। यक्ष प्रश्न : क्या इसके पीछे रूस विरोधी अमेरिका की चाल हो सकती है? जवाब: संभावना को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन अभी इसका प्रमाण नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि जनवरी 2026 में ही रणनीतिक विश्लेषण में यह कहा जा रहा था कि तुर्किये इस तरह के गठबंधन का इस्तेमाल NATO के भीतर अपनी bargaining power बढ़ाने और “hedging” के लिए कर सकता है। चूंकि अमेरिका के लिए ऐसा ढांचा कुछ परिस्थितियों में उपयोगी भी हो सकता है, क्योंकि ईरान के विरुद्ध क्षेत्रीय deterrence बढ़ाना, पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य बोझ कम करना, सऊदी सुरक्षा को वैकल्पिक रूप से मजबूत करना, तुर्किये को पश्चिमी सुरक्षा ढांचे से पूरी तरह दूर जाने से रोकना और पाकिस्तान को चीन के पूर्ण प्रभाव में जाने से रोकना उसका असली मकसद है। इसलिए इसे “अमेरिका के खिलाफ गठबंधन” मानना उतना ही गलत होगा जितना इसे निश्चित रूप से “अमेरिकी परियोजना” मान लेना। सुलगता सवाल: और जहाँ तक चीन की बात है? यहाँ मामला और दिलचस्प है। जवाब: चीन के पाकिस्तान के साथ अत्यंत गहरे रक्षा संबंध हैं और सऊदी अरब के साथ उसके आर्थिक संबंध लगातार बढ़े हैं। यदि यह त्रिकोण आगे चलकर विस्तृत होता है, तो बीजिंग को पश्चिम एशिया–पाकिस्तान–हिंद महासागर के बीच अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। लेकिन चीन के लिए भी समस्या है: सऊदी अरब अमेरिका से पूरी तरह अलग नहीं होना चाहता और तुर्किये NATO का सदस्य है। इसलिए इसे अभी चीन-नेतृत्व वाला गठबंधन कहना वास्तविकता से आगे निकलना होगा। # आखिर भारत को किस बात से सबसे ज्यादा सावधान रहना चाहिए? मेरे आकलन में “इस्लामिक NATO” शब्द से ज्यादा महत्वपूर्ण इसके संभावित नेटवर्क प्रभाव हैं। यदि भविष्य में इसमें कतर, अजरबैजान, मिस्र या अन्य मुस्लिम-बहुल देश किसी रूप में जुड़ते हैं, तो तस्वीर बदल सकती है। मई में पाकिस्तान की ओर से तुर्किये और कतर के संभावित जुड़ाव की बात भी सामने आई थी। तब भारत को तीन मोर्चों पर चुनौती मिल सकती है: पश्चिम एशिया → पाकिस्तान → तुर्किये, यानी पाकिस्तान को पहली बार भारत के विरुद्ध केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि बहु-देशीय कूटनीतिक समर्थन तंत्र बनाने का अवसर मिल सकता है। लेकिन भारत की स्थिति भी कमजोर नहीं है, क्योंकि भारत को प्रतिक्रिया में किसी “anti-Islamic bloc” में जाने की जरूरत नहीं है। उलटे भारत की ताकत उसकी multi-alignment diplomacy है। चूंकि भारत को एक साथ सऊदी अरब और UAE से रणनीतिक संबंध है, इजरायल से रक्षा एवं तकनीकी सहयोग है, मिस्र और ग्रीस से समुद्री सहयोग है, ईरान से चाबहार संपर्क है, अमेरिका से Indo-Pacific साझेदारी है, रूस से रक्षा संबंध है और खाड़ी देशों में विशाल भारतीय प्रवासी समुदाय है, जिसका लाभ भारत को उठाना चाहिए। यही भारत का सबसे बड़ा जवाब होगा—किसी एक धुरी में शामिल होना नहीं, बल्कि इतनी मजबूत बहुध्रुवीय स्थिति बनाना कि कोई धुरी भारत को घेर न सके। निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि अभी इसे “भारत को घेरने की साजिश” कहना अतिशयोक्ति होगी। लेकिन पाकिस्तान–तुर्किये–सऊदी रक्षा समझौता भारत के लिए एक वास्तविक strategic signal जरूर है। और सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि “इसके पीछे अमेरिका है या चीन?”, बल्कि यह है कि क्या दोनों महाशक्तियाँ अपने-अपने हित के लिए इस नए क्षेत्रीय समीकरण का इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगी? इसकी संभावना काफी अधिक है। और एक महत्वपूर्ण बात: इस गठबंधन को “इस्लामिक NATO” कहना स्वयं इन देशों की आधिकारिक भाषा नहीं है; विश्लेषकों ने भी इस लेबल को भ्रामक बताया है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। इस आंदोलन के तहत देशभर के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ मानसा के माल गोदाम में भी बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और कर्मचारी एकत्रित हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए रोष जताया। यह प्रदर्शन संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा शुरू किए गए 'जेल भरो आंदोलन' का हिस्सा है। मानसा में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में राम सिंह, राजविंदर सिंह, कृष्ण चौहान, कुलविंदर सिंह, लखबीर सिंह और मक्खन सिंह सहित कई प्रमुख किसान-मजबूर नेता शामिल हुए। ट्रेड डील से कृषि और डेयरी क्षेत्र पर मंडराया संकट प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश में किसान, मजदूर और व्यापारी वर्ग पहले से ही गंभीर आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं। ऐसे संकट के समय में केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की जा रही ट्रेड डील से देश का आम नागरिक और उत्पादक बुरी तरह प्रभावित होगा। किसान नेताओं ने गंभीर आशंका व्यक्त की कि यदि यह समझौता लागू होता है, तो डेयरी कारोबार, मछली पालन और कृषि क्षेत्र पर इसका सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा। छोटे और स्थानीय कारोबारियों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच जाएगा। किसान नेताओं का कहना है कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते अमेरिका के साथ इस ट्रेड डील को रद्द नहीं किया, तो आने वाले दिनों में इस जन-आंदोलन को और अधिक उग्र एवं तेज किया जाएगा। कर्मचारियों की लंबित मांगें भी प्रमुखता से उठीं प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन केवल भारत-अमेरिका ट्रेड डील तक सीमित नहीं है। वे लंबे समय से लंबित अपनी अन्य बुनियादी मांगों को लेकर भी सरकार के खिलाफ संघर्षरत हैं। इन मांगों में प्रमुख रूप से सभी विभागों में कार्यरत अस्थाई कर्मियों को स्थायी रोजगार देना। कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के अधिकार को बहाल करना। मजदूर व कर्मचारी वर्ग की अन्य जायज मांगों को तुरंत पूरा करना। रोष मार्च निकालकर देंगे गिरफ्तारी माल गोदाम में एकत्रित हुए प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की है कि वे अपनी मांगों के समर्थन में शहर में एक विशाल रोष मार्च निकालेंगे। रोष मार्च के समापन पर किसान और मजदूर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर अपनी गिरफ्तारी देंगे। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सरकार को जनविरोधी नीतियों को वापस लेना ही होगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ जेल भरो आंदोलन में संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर आज 10 अगस्त को सभी संगठन एकजुट होना शुरू हो गए हैं। इसे लेकर सभी संगठनों ने शहीद भगत सिंह स्टेडियम में पड़ाव डाल दिया हुआ है और धरना प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध किया जा रहा है। इस आंदोलन में किसान यूनियन से किसान नेता जसवीर भाटी, हरजिंद्र सिंह, दिवान सहारण भूपेंद्र सिंह वैदवाला, सफाई कर्मचारी यूनियन, आशा वर्कर यूनियन, आंगनवाड़ी वर्कर, बिजली कर्मचारी यूनियन व अन्य सामाजिक संगठन समर्थन करने पहुंचे। संगठन नेताओं ने मंच से संबोधन में कहा, सरकार बहकाने का काम कर रही है। किसान को हर फसल बेचने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है और यूरिया के लिए लिमिट कर दी है। कॉरपोरेट से ज्यादा टैक्स दे रहे बाद में किसान को मिलती नहीं और महंगे दामों पर यूरिया खरीदनी पड़ रही है। फसल के पूरे दाम नहीं मिलते। फिर सरकार कहती है कि टैक्स पेयर का पैसा आप पर खर्च नहीं होगा। किसान-मजदूर और देश की आधी आबादी इन कॉरपोरेट से ज्यादा टैक्स दे रही है। देश की एक प्रतिशत कारपोरेट वाले 40 प्रतिशत धन पर कब्जा किए हुए हैं। संयुक्त मोर्चा बोला-नीतियों को आगे बढ़ा रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार देश के किसानों और मजदूरों को प्रभावित करने वाली नीतियों को लगातार आगे बढ़ा रही है। सरकार द्वारा अमेरिका सहित अन्य विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में बढ़ाए जा रहे कदमों से भारतीय कृषि और किसानों के हितों पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को यमुनानगर में किसानों ने जेल भरो आंदोलन किया। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर के नेतृत्व में किसान सुबह करीब 11 बजे जगाधरी अनाज मंडी के गेट पर एकत्रित हुए। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भारत-अमेरिका ट्रेड डील को तत्काल रद्द करने की मांग की। आंदोलन को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से मंडी गेट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। किसानों की गिरफ्तारी के लिए तीन सरकारी बसें भी मौके पर मंगवाई गई थीं। डेढ़ घंटा चला प्रदर्शन करीब डेढ़ घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान किसान मंडी गेट पर ही बैठे रहे और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की। पुलिसकर्मी गिरफ्तारी दर्ज करने के लिए कागजात लेकर मौके पर बैठे रहे। किसान एक-एक करके पुलिस के पास पहुंचे और अपनी गिरफ्तारी दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें बसों में बैठाकर मौके से ले गई। ट्रेड डील से छोटे किसानों पर पड़ेगा असर किसान नेता सुभाष गुर्जर ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लागू होने की स्थिति में छोटे और मध्यम किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है। इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र भी प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मौजूदा नीतियां किसानों के हित में नहीं हैं। गुर्जर ने कहा कि किसानों की मांग है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को तत्काल रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि सोमवार को देशभर में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर जेल भरो आंदोलन किया गया है। यमुनानगर में भी किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी गिरफ्तारी दी है। गिरफ्तारी के लिए पहले से तैयार था प्रशासन किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन पहले से अलर्ट था। मंडी गेट पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तीन सरकारी बसें भी मौके पर खड़ी कराई गई थीं। पुलिस ने किसानों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया के लिए मौके पर ही दस्तावेज तैयार किए। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद किसानों को बसों में बैठाकर ले जाया गया। सुभाष गुर्जर ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में किसान परेशान और बर्बाद हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो किसान आंदोलन को और व्यापक करने की रणनीति तैयार करेंगे।
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सुधर जाए अमेरिका... ईरान ने खुली धमकी देकर होर्मुज पर रखी 4 शर्तें!
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है! ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सेना वापस नहीं बुलाता और धमकियां देना बंद नहीं करता, 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा।
अखिल भारतीय किसान महासभा के तत्वावधान में रविवार को अगस्त क्रांति के मौके पर कार्यकर्ताओं ने अमेरिका के साथ हुए कृषि समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में जुटे वामपंथी संगठन से जुड़े किसानों ने प्रतिरोध मार्च निकाला और स्टेशन चौराहे पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। कार्यक्रम का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष महावीर पोद्दार ने किया। झंडा-बैनर लेकर निकाला प्रतिरोध मार्चइससे पूर्व भाकपा माले के जिला कार्यालय से जिला सचिव ललन कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने झंडा-बैनर और पुतला लेकर नारेबाजी करते हुए प्रतिरोध मार्च निकाला। इस दौरान लोग अमेरिका के साथ कृषि व्यापार समझौता रद्द करने, परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण बंद करने, सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने और सस्ते दामों पर खाद-बीज मुहैया कराने की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। प्रतिरोध मार्च शहर के स्टेशन रोड, जीआरपी थाना होते हुए स्टेशन चौराहे पहुंचा, जहां लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया। इस दौरान मौके पर सभा भी आयोजित की गई। कृषि समझौते को लेकर सरकार पर निशानासभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष महावीर पोद्दार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिका के साथ किया गया कृषि व्यापार समझौता किसानों की मौत का सौदा करने के बराबर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कृषि उत्पाद अब भारत के बाजारों में खुलेआम बेचे जाएंगे, जिससे भारत की कृषि और किसान बदहाल और बर्बाद हो जाएंगे। सभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव ललन कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट कंपनियों के माध्यम से कृषि योग्य भूमि को बड़ी-बड़ी परियोजनाओं के नाम पर अधिग्रहित कर रही है। इससे किसानों के सामने संकट गहरा रहा है। उन्होंने कहा कि नया बीज विधेयक स्वदेशी बीज प्रणाली को खत्म करने की साजिश है। इसके जरिए बीज बाजार में मॉन्सेंटो, बायर और सिंजेंटा जैसी विदेशी बीज कंपनियों को भारत के बाजारों में बिक्री की खुली छूट दे दी गई है। इन लोगों ने भी सभा को किया संबोधित सभा को सुनील कुमार राय, नंद किशोर यादव, दिलीप कुमार राय, मो. उस्मान, अनिल कुमार चौधरी, राजेश्वर राय, विजय कुमार, रमेश कुमार सहित अन्य लोगों ने संबोधित किया।
भागलपुर के सुप्रियो मुखर्जी की बंगाली लघु फिल्म 'प्रायश्चित्त' रिलीज के लिए तैयार है, जो मां-बेटे के भावनात्मक रिश्ते और सामाजिक उत्तरदायित्व पर आधारित है। वहीं, कहलगांव की अदिति अरोड़ा का राष्ट्रीय संगीत ऑडिशन के पहले राउंड के लिए चयन हुआ है, जिससे भागलपुर का मान बढ़ा है।
Bhadohi News: अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ को लेकर कालीन उद्यमी चिंतित
Carpet entrepreneurs concerned about additional US tariffs
अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ से भारतीय निर्यातकों, खासकर कानपुर के उद्यमियों को भारी झटका लगा है। इससे निर्यात लागत बढ़ने और अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा घटने से वे नए बाजारों की तलाश में हैं।
अमेरिकी टैरिफ का झटका: क्या सुरक्षित है आपका निवेश? जानें बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने के तरीके
The US Senate's new tariff bill on Russian oil buyers could impact Indian markets.
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
उर्स-ए-रजवी: बरेलवी उलमा बोले- अमेरिका-ईरान की जंग सियासी है; बेटियों की तालीम और तरबियत पर जोर
उर्स-ए-रजवी में आयोजित तहफ्फुज मजहब ओ मसलक कॉन्फ्रेंस में बेटियों की तालीम और तरबियत पर जोर
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
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Meta और भारत सरकार के बीच बढ़ी तकरार! 'भारत में नहीं चलेगा अमेरिकी कानून', एल्गोरिदम को लेकर बड़ा विवाद
अमेरिका में टैरिफ पर बड़ा फैसला! सरकार को लौटाने पड़े लाखों करोड़ रुपये, जानिए क्या कस्टमर को मिलेगा लाभ ?
अमेरिका को मिलेगा दूसरा ममदानी? जीते तो अब्दुल होंगे पहले मुस्लिम सांसद
अब्दुल अल-सईद की डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रोग्रेसिव धड़े को नई ताकत दी है. मुस्लिम और मिस्र मूल के अब्दुल अब नवंबर में रिपब्लिकन माइक रोजर्स के खिलाफ मैदान में होंगे. माना जा रहा है कि वह अमेरिका के लिए दूसरे जोहरान ममदानी साबित हो सकते हैं.
'आधे इंडियन-आधे अमेरिकन', जुड़वा बच्चों को भारतीय संस्कार दे रहीं प्रीति
प्रीति जिंटा सालों बाद बॉलीवुड में अपना कमबैक करने जा रही हैं. एक्ट्रेस ने अपने कमबैक पर बात की है. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रायोरिटी उनके बच्चे और पति हैं.
विचार: हर मोर्चे पर नाकाम अमेरिकी राष्ट्रपति
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज जलमार्ग पर गतिरोध, यूरोप में जारी युद्ध और गाजा में अधूरी शांति दी है।
अमेरिका में भारत से ₹30 हजार सस्ता होगा iPhone 18 Pro Max, कहां से खरीदने में फायदा
अगर आप iPhone 18 Pro Max खरीदने की सोच रहे हैं, तो अमेरिका से खरीदना आपकी जेब के लिए फायदेमंद हो सकता है। जानिए खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
'होर्मुज स्ट्रेट खुला', ईरान-ओमान में वार्ता के बीच अमेरिकी सेना का दावा
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का दक्षिणी समुद्री रास्ता सभी कारोबारी जहाजों के लिए खुला है, जबकि ईरान और ओमान के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बढ़ाने को लेकर बातचीत और मोलभाव में प्रगति हुई है.
भारत के FCRA बिल पर ट्रंप के सांसद को लगी मिर्ची, बोले- ये ईसाइयों पर हमला
भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर 'सीधा हमला' बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
पाकिस्तान से मुंह मोड़ता अमेरिका
ईरान युद्ध को रोकने के लिए जो नए प्रयास शुरू किए गए हैं, क्या उससे पाकिस्तान को बाहर कर दिया गया है? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ नई शांति-वार्ता का जिक्र करते…
Iran Attacks US Bases से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान,170 फौजियों के सिर पर चोट| Trump | Khamenei
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अमेरिका के ट्रैफिक जाम का वीडियो वायरल! भारतीय युवक बोला- यहां शांति है, भारत में तो हंगामा हो जाता
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पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
क्या ईरान पर काम करेगी नई अमेरिकी रणनीति
ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला किसी बड़े क्रांतिकारी बदलाव का संकेत नहीं है। अलबत्ता, यह इस संकट के एक ही चक्र में घूमते रहने का संकेत जरूर दे रहा है…
Iran America War: Trump के No War वाले बयान पर Iran ने लिए मजे, अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया मूर्ख
ईरान पर बड़े सैन्य हमले की धमकी देने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीछे हटने के फैसले पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उनका मजाक उड़ाया। ट्रंप ने दावा किया था
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर! ट्रंप की वॉर्निंग के बाद ईरान बोला- 'US ने हिमाकत की तो....'
अमेरिका में रेस्टोरेंट के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी, देखें US TOP-10
बड़ी अमेरिका के इडाहो से है,. जहां एक रेस्स्रां में गोलीबारी हुई है, जिसमें संदिग्ध हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई. और कम से कम दो अन्य लोग घायल हो गए. पुलिस चीफ ने कहा कि अधिकारी अब हमलावर की पहचान करने और घटना की मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे है.
अमेरिका में ट्रंप की पकड़ ढीली? अर्थव्यवस्था पर घटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप पर आए नए सर्वे में उनकी ताकत और कमजोरियों दोनों की तस्वीर दिखी है. रिपोर्ट बताती है कि किन मुद्दों पर उन्हें झटका लगा और किस मुद्दे पर अब भी उनका दबदबा कायम है.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला अमेरिका का इडाहो, देखें दुनिया आजतक
अमेरिका में अंधाधुंध फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए. इडाहो में भीड़भाड़ वाले शॉपिंग एरिया के एक रेस्टोरेंट में ये वारदात हुई. हमलावर भी मारा गया. पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की. देखें दुनिया आजतक.
भारत अमेरिका को पछाड़ दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला सोलर एनर्जी मार्केट बना
नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 2014 में सिर्फ 3 गीगावाट से बढ़कर 30 जून, 2026 तक 162.15 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई है, जो देश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को दी गई।
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
अमेरिका के एक शॉपिंग एरिया में हुई गोलीबारी, हमलावर ढेर
अमेरिका में Gun Violence का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है.इडाहो राज्य स्थित ट्विन फॉल्स के एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में 1 अगस्त की दोपहर एक सिरफिरे ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस दिल दहला देने वाली घटना में कम से कई लोगों के मारे जाने की आशंका है.
अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के कौन-से इलाके? देखें US TOP-10
अमेरिका और इजरायल ईरान पर नए हमलों की तैयारी कर रहे है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले वीकेंड तक जारी रह सकते है. ईरान के पावर प्लांटस और ऑयर रिफाइनरीज को निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक हमलों का फाइनल र्डर नहीं दिया है.
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में मतभेद? देखें दुनिया आजतक
ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन में रणनीति को लेकर मतभेद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान पर नए हमलों की तैयारी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय है. कुछ अधिकारी ईरान पर अधिक कार्रवाई के पक्ष में है जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे कदम से तनाव और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है.
अमेरिका के शॉपिंग सेंटर में अंधाधुंध गोलीबारी, 3 लोगों की मौत और कई घायल
अमेरिका के इडाहो राज्य के ट्विन फॉल्स में शनिवार को एक व्यस्त शॉपिंग इलाके में गोलीबारी की घटना सामने आई. हमलावर ने एक कमर्शियल एरिया में लोगों पर फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ईरानी हमले से बहरीन में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान, देखें तस्वीरें
बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान के हालिया हमलों की तस्वीर आई है. इन हमलों में अमेरिकी अड्डों पर धमाके की तस्वीर सामने आई है जिसमें बड़ा धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है. ये अटैक एक ड्रोन के जरिए ईरान ने किया. देखें वीडियो.
अमेरिका में F-35B स्टील्थ फाइटर जेट क्रैश, बाल-बाल बचा पायलट
अमेरिका के सैन डिएगो में मरीन कॉर्प्स के F-35B स्टील्थ फाइटर जेट का मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया. पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर लिया और सुरक्षित बच गया. मौके पर दमकल और बचाव दल सक्रिय थे और आग पर काबू पाया गया. इस हादसे को 'क्लास ए मिसहैप' घोषित किया गया है.
पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया सबसे बड़ा धोखा, क्या US करेगा पलटवार?
पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से आई एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मचा दिया है. खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, चीन से ईरान को भेजी जा रही 400 आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलों और रॉकेट लॉन्चर्स की खेप किसी और रास्ते से नहीं... बल्कि पाकिस्तान की सरजमीं से होकर गुजर रही है! ये खबर सुनकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पैरों तले की जमीन खिसक गई है. देखें...
विचार: अमेरिका से भी सतर्क रहने की जरूरत
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।
विदेश जाने का सपना देखने वालों के लिए जरूरी VIDEO! अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया की लाइफस्टाइल की असली तस्वीर आई सामने
ईरानी ठिकानों पर किस कदर टूटा अमेरिकी कहर, देखें US Top-10
ईरान पर ताजा हमलों में अमेरिका ने 2 दर्जन से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में IRGC के सैन्य ठिकाने और निगरानी केंद्र निशाना बने. 2 घंटे तक जारी हमलों को लेकर अमेरिकी CENTCOM ने मध्य-पूर्व में अपने मिलिट्री बेस पर हुए ईरानी अटैक का पलटवार बताया. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता संदेह में
वाशिंगटन और रियाद के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित असैन्य परमाणु समझौते को अमेरिकी अप्रसार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में प्रचारित किया गया था।
दुनियाभर में लोग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं, लेकिन इन बढ़े हुए वर्षों का बड़ा हिस्सा लोग बीमारी और शारीरिक परेशानियों के साथ बिता रहे हैं। यह बात 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित अध्ययन 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) में सामने आई है।
अमेरिका-ईरान टकराव और विश्व शांति की नई चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद बड़ी कठिनाई से बना संघर्ष विराम अपनी निर्धारित अवधि पूरी करने से पहले ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की भीषण बमबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ... Read more
भारत के आर्थिक विकास को रोकने के लिए अमेरिका सब कुछ करेगा
सूद के मुताबिक लैंडाऊ ने उस नई दिल्ली बैठक में कहा था, 'हमने चीन को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद करके गलती की।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराता इज़रायली खतरा!
वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक नाजुक कूटनीतिक सफलता सीधे लेबनान में इज़रायल की सैन्य आक्रामकता से टकरा गई है
अमेरिकी और यूरोपीय अमीर करते हैं धरती का सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शीर्ष 10 फीसदी लोग पर्यावरण का सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं
अमेरिका-ईरान समझौता: शांति या अस्थायी विराम?
इस समझौते को संकट का अंत नहीं, बल्कि एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।
मशहूर अमेरिकी सिंगर ओलिवर ट्री का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन, 5 और लोगों की गई गान
इंटरनेशनल म्यूजिक इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने अनूठे संगीत और अतरंगी अंदाज के लिए दुनिया भर में मशहूर 32 वर्षीय अमेरिकी सिंगर-सॉन्गराइटर ओलिवर ट्री की ब्राजील में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। इस हादसे में ओलिवर के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
अमेरिका के सामने भारत इतना दब्बू पहले कभी नहीं रहा
आम तौर पर किसी देश का विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आता है या भारत के विदेश मंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं तो उनकी बात अपने समकक्ष से होती है।
पेट काटकर जनता बचाए, मोदीशाही अमेरिका की भेंट चढ़ाए!
नरेंद्र मोदी के राज ने जिस एक चीज में सबसे ज्यादा महारत हासिल की है, वह यह है कि वास्तव में यह सरकार जो करती है, उससे ठीक उल्टा करने का ढोल पीटती है।
अमेरिकी घेराबंदी में क्यूबा, लेकिन शी जिनपिंग और पुतिन भी चुप
क्यूबा में राष्ट्रपति स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी भी अपनी सीमाएं हैं।
राम चरण की 'पेड्डी' ने नॉर्थ अमेरिका में रचा इतिहास, 4 घंटे में किया इतने डॉलर का प्री-सेल्स
'पेड्डी', भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक, जिसका निर्देशन बुची बाबू सना ने किया है और जिसे वृद्धि सिनेमाज और मैत्री मूवी मेकर्स का साथ मिला है। इस फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ने 4 जून 2026 को अपनी ...
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान अभिनेत्री ईशा गुप्ता अबू धाबी में फंस गई थीं। एयरपोर्ट बंद होने और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच उन्होंने भयावह हालात देखे। सुरक्षित लौटने के बाद ईशा ने यूएई प्रशासन और भारत सरकार का आभार जताया।
रणवीर सिंह ने रचा इतिहास, नॉर्थ अमेरिका में यह रिकॉर्ड बनाने वाले बने पहले भारतीय अभिनेता
रणवीर सिंह ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है और ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक कोई भी भारतीय अभिनेता नहीं कर पाया। वह अब नॉर्थ अमेरिका में 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाई करने वाली तीन फिल्मों वाले अकेले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
अमेरिका में खुली 'बाहुबली द एपिक' की बुकिंग, सभी प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट्स में होगी रिलीज
एसएस राजामौली की बाहुबली फ्रैंचाइज़ी पहली और सबसे बड़ी अखिल भारतीय फिल्म है जिसने भारतीय सिनेमा को नया रूप दिया और इतिहास रचा। दुनिया भर के दर्शकों द्वारा पसंद की गई इस महाकाव्य गाथा ने न केवल दिलों पर कब्ज़ा किया, बल्कि बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड भी ...
'किंग' के सेट पर एक्शन करते वक्त घायल हुए शाहरुख खान, इलाज के लिए अमेरिका रवाना!
बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शाहरुख अपनी अगली फिल्म 'किंग' की शूटिंग के दौरान घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक एक्शन सीन करने के दौरान उन्हें चोट लग गई है, जिसके बाद शाहरुख को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
कौन हैं असम की अर्चिता फुकन? अमेरिकी एडल्ड स्टार संग तस्वीर शेयर करके मचाई सनसनी
असम की रहने वाली अर्चिता फुकन इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। बीते दिनों अर्चिता ने एक अमेरिकी एडल्ड स्टार केंड्रा लस्ट के साथ तस्वीर शेयर की थी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इसके बाद से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अर्चिका फुकन है कौन? ...
द बंगाल फाइल्स के अमेरिका में होंगे 10 बड़े प्रीमियर, विवेक रंजन अग्निहोत्री ने रखी अपनी राय
इंडियन सिनेमा के सबसे साहसी फिल्ममेकर्स में से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री अपने बेबाक अंदाज और दबी हुई सच्चाइयों को सामने लाने वाले कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं। 'द ताशकंद फाइल्स' और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर 'द कश्मीर फाइल्स' के बाद अब वह अपनी ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्ममेकर तनिष्ठा चटर्जी इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। तनिष्ठा ने कुछ समय पहले ही अपने पिता को खोया था और अब वो कैंसर की शिकार हो गई हैं। तनिष्ठा को स्टेज 4 ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। एक्ट्रेस को कैंसर के बारे में चार महीने ...
मोनाली ठाकुर ने की अमेरिका टूर की घोषणा, इन शहरों में करेंगी लाइव शो
नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली सिंगर मोनाली ठाकुर आज देश की सबसे पसंदीदा आवाज़ों में से एक हैं। उनकी गायकी में ऐसा जादू है जो हर किसी के दिल को छू जाता है, फिर चाहे वो फिल्मी गाना हो, लाइव शो हो या कोई कॉन्सर्ट। मोनाली की सुरीली आवाज़ हर बार सुनने वालों के ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिनेमा टैरिफ के विरोध के साथ शुरू हुआ 78वां कान फिल्म समारोह
फिल्मकार क्वेंतिन तारंतीनों ने दुनिया भर से आए फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में ग्रैंड थिएटर लूमिएर में 78वें कान फिल्म समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे 78वें कान फिल्म समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर रहे हैं। राबर्ट डिनिरो ...
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने अपनी दमदार अदाकारी से दुनियाभर में पहचान बनाई है। लेकिन इतनी लोकप्रियता के बावजूद भी सुनील शे्टी को बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा था। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुनील शेट्टी ने 2001 में अमेरिका में हुए अपने एक ...
भारतीय-अमेरिकी संगीतकार और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड, देखिए विनर्स की पूरी लिस्ट
67वें ग्रैमी अवॉर्ड्स के विनर का ऐलान हो गया है। इस इवेंट का आयोजन लॉस एंजेलिस के डाउनटाउन में क्रिप्टो टाउन एरिना में हुआ। ट्रेवर नोआ ने ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 को होस्ट किया। भारतीय-अमेरिकी गायिका और उद्यमी चंद्रिका टंडन ने एल्बम 'त्रिवेणी' के लिए ...
अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुए टॉम क्रूज, हॉलीवुड स्टार ने जताई खुशी
हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज की दुनियाभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। टॉम क्रूज अपनी फिल्मों में जबरदस्त एक्शन सीन्स के लिए जाने जाते हैं। वह खतरनाक से खतरनाक स्टंट सीन खुद ही करते हैं। वहीं अब टॉम क्रूज को अमेरिकी नौसेना के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से ...
मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन, अमेरिका में ली अंतिम सांस
मनोरंजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की पहली पत्नी हेलेना ल्यूक का निधन हो गया है। उन्होंने अमेरिका में आखिरी सांस ली। हेलेना के निधन की खबर मशहूर डांसर और एक्ट्रेस कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। खबरों ...
Devara Part 1 advance booking: साउथ सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की फिल्म 'देवरा : पार्ट 1' का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म के जरिए जाह्नवी कपूर भी साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रही हैं। 'देवरा : पार्ट 1' की रिलीज में अब केवल एक महीना बचा ...
बचपन से एक्टर बनना चाहते थे सैफ अली खान, अमेरिका से पढ़ाई पूरी करने के बाद रखा इंडस्ट्री में कदम
Saif Ali Khan Birthday: बॉलीवुड के अभिनेता सैफ अली खान 54 वर्ष के हो गए हैं। 16 अगस्त 1970 को दिल्ली में जन्में सैफ अली खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनकी मां शर्मिला टैगोर फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी अभिनेत्री रही जबकि पिता नवाब पटौदी ...
अमेरिका में प्रभास की फिल्म 'कल्कि' का रिलीज से पहले जलवा, देखें मूवी मसाला
प्रभास, अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और कमल हासन स्टारर फिल्म 'कल्कि 2898 AD' का फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज है. हालांकि फिल्म के ट्रेलर को लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. वहीं, फिल्म अमेरिका में एडवांस बुकिंग के मामले में रिकॉर्ड बना रही है. देखें 'मूवी मसाला'.
अमेरिकाज गॉट टैलेंट में जम्मू की रहने वालीArshiya Sharma ने बजाय डंका, किया ऐसा कमाल किखड़े होकर तालियां बजाने लगे जजेस
Cannes में स्क्रीनिंग के बाद विवादों में घिरी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रम्प की बायोपिक, फिल्म के इस सीन पर मचा हंगामा
कियारा आडवाणी शनिवार को कान्स फिल्म फेस्टिवल से इतर एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके खूबसूरत पिंक और ब्लैक गाउन के अलावा कुछ और भी था जिसने सबका ध्यान खींचा। रेड सी फिल्म फाउंडेशन के वीमेन इन सिनेमा गाला डिनर के रेड कार्पेट पर मीडिया को दिया गया उनका एक साक्षात्कार ऑनलाइन सामने आया है। इसमें कियारा को कान्स में पहली बार बोलने के बारे में दिखाया गया है, लेकिन उनका नया लहजा थोड़ा ध्यान भटकाने वाला है। इसे भी पढ़ें: Cannes Film Festival 2024 | पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने अपने कान्स डेब्यू में सफेद पंजाबी सूट-सलवार में बिखेरा जलवा कियारा का ताज़ा लहजा? कियारा वीडियो में कहती हैं कि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाना 'बहुत ही विनम्र' है, खासकर जब वह एक अभिनेता के रूप में 10 साल पूरे कर रही हैं। वह कहती हैं, यह बहुत खास पल पर भी आता है। उनके विशेष रूप से 'बहुत' और 'पर' कहने के अमेरिकी तरीके ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या वह एक नया उच्चारण करने का प्रयास कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: वोट डालने पहुंचे Deepika Padukone और Ranveer Singh, एक्ट्रेस का दिखा बेबी बंप, पर वह भीड़ से खुद को छुपाती दिखी | Viral Video ट्विटर क्या कहता है? एक व्यक्ति ने ट्विटर पर भविष्यवाणी की, “बॉलीवुड ट्विटर आपके उच्चारण के बारे में बात करने आ रहा है… भागो, कियारा भागो।” और निश्चित रूप से, ऐसा हुआ। मंच पर कई ट्वीट्स में कियारा के नए लहजे पर हैरानी जताई गई। एक प्रशंसक ने लिखा, मैं उससे प्यार करता हूं, लेकिन वह लहजा क्यों। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इसकी तुलना में उनका अपना उच्चारण वास्तव में अच्छा है।” एक अन्य व्यक्ति ने पूछा, भारतीय लहजा किसी भी तरह से बुरा या अपमानजनक नहीं है, फिर इन लोगों ने इसे क्यों नहीं चुना और पूरी चीज़ को बर्बाद कर दिया। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा “क्या कियारा आडवाणी सोचती हैं कि जब वह इस तरह की बातें करती हैं तो वह किम कार्दशियन हैं? कृपया उस ऐंठन वाले लहजे को रोकें। आप इसके लिए कूल या मजाकिया नहीं हैं। कियारा इससे पहले वेरायटी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने अपने करियर और फिल्मों के बारे में बात की, मनोरंजन उद्योग की अन्य महिलाओं के एक पैनल में शामिल हुईं। कान्स और कियारा पर कान्स फिल्म महोत्सव मंगलवार रात क्वेंटिन डुपिएक्स के ले ड्यूक्सिएम एक्ट (द सेकेंड एक्ट) के विश्व प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जिसमें ली सेडौक्स, विंसेंट लिंडन, लुइस गैरेल और राफेल क्वेनार्ड ने अभिनय किया। कियारा राम चरण-स्टारर गेम चेंजर में दिखाई देने की तैयारी कर रही हैं, जो एस. शंकर द्वारा निर्देशित एक राजनीतिक एक्शन थ्रिलर है। तेलुगु फिल्म जल्द ही स्क्रीन पर आने के लिए तैयार है। वह ऋतिक रोशन-स्टारर वॉर 2 में वाईआरएफ जासूस ब्रह्मांड में शामिल होने के लिए भी तैयार हैं, जिसमें आरआरआर स्टार जूनियर एनटीआर भी होंगे। इसके अलावा कियारा के पास डॉन 3 भी है, जिसमें वह रणवीर सिंह के साथ अभिनय करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो टॉक्सिक में यश के साथ आडवाणी भी नजर आएंगे। Kiara Advani's accent pic.twitter.com/A5WFyGzdkC — bebo (@bollypopgossip) May 19, 2024
'अगर मैं अमेरिका का जासूस होता तो...' जान की बाजी लगाने पर भी रवीन्द्र कौशिक को नहीं मिला सम्मान, आखिरी चिट्ठी में बयां किया था दर्द
सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहाGoldy Brar के शूटआउट का CCTV फुटेज, गैंगस्टरको लेकरअमेरिकी पुलिस ने किया बड़ा दावा
जिंदा हैSidhu Moose Wala की ह्त्या करने वालाGoldy Brar! मास्टरमाइंड को लेकर अमेरिकी पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा
कौन हैGrammys और Oscar जीतने वाले मशहूर हॉलीवुड अमेरिकन आइकॉन Frank Sinatra? बायोपिक में ये फेमस एक्टर निभाएगा लीड रोल
अमेरिका में रची गई साजिश! सलमान खान के घर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा?
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हुई फायरिंग मामले को लेकर अब अपडेट सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने शूटिंग में इस्तेमाल बाइक को कुछ दिन पहले रायगढ़ के एक शोरूम से खरीदी थी. मामले में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं. देखें.
क्या सच में अमेरिका में रहती है दिलजीत की पत्नी-बेटा? मॉडल ने खोली पोल
दिलजीत दोसांझ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहे हैं. दिलजीत ने हाल ही में अपने पेरेंट्स के साथ रिलेशंस को लेकर खुलासा किया, जिसने सबको हैरानी में डाल दिया था. हालांकि वह अपनी पत्नी और बच्चे के बारे में अटकलों पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने हाल ही में दावा किया कि दिलजीत शादीशुदा हैं और उनका एक बेटा भी है.
अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ नेटफ्लिक्स और इम्तियाज अली की अमर सिंह चमकीला के लिए तैयारी कर रहे हैं। फिल्म 12 अप्रैल से बड़े पैमाने पर प्रसारित होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट, जिसमें गुमनामी के तहत उनके करीबी दोस्तों के उद्धरण शामिल हैं, से पता चलता है कि दिलजीत दोसांझ वास्तव में शादीशुदा हैं। एक इंडो-अमेरिकन महिला के साथ उनकी शादी हुई थी और उनका एक बेटा भी है। प्रकाशन में अभिनेता की प्रोफ़ाइल में लिखा है, एक अत्यंत निजी व्यक्ति, उनके परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन दोस्तों का कहना है कि उसकी पत्नी एक अमेरिकी-भारतीय है और उनका एक बेटा है, और उनके माता-पिता लुधियाना में रहते हैं। दिलजीत दोसांझ , जो अमर सिंह चमकीला की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं, ने खुलासा किया कि उनके माता-पिता ने उन्हें 11 साल की उम्र में लुधियाना में एक रिश्तेदार के साथ रहने के लिए भेज दिया था। दिलजीत ने रणवीर इलाहाबादिया से बात करते हुए कहा “मैं ग्यारह साल का था जब मैंने अपना घर छोड़ दिया और अपने मामाजी के साथ रहने लगा। मैं अपना गाँव छोड़कर शहर आ गया। मैं लुधियाना शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा 'उसे मेरे साथ शहर भेज दो' और मेरे माता-पिता ने कहा 'हां, उसे ले जाओ।' मेरे माता-पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं। इसे भी पढ़ें: Thor फेम Chris Hemsworth के फैंस के लिए खुशखबरी! Furiosa-Mad Max में योद्धा के अवतार में दिखे जबरदस्त, जानें फिल्म कब होगी रिलीज उड़ता पंजाब के अभिनेता ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनके माता-पिता के साथ उनके रिश्ते में तनाव आ गया है, लेकिन वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। दिलजीत ने खुलासा किया “मैं एक छोटे से कमरे में अकेला रहता था। मैं बस स्कूल जाता था और वापस आ जाता था, वहां कोई टीवी नहीं था। मेरे पास बहुत समय था. इसके अलावा, उस समय हमारे पास मोबाइल फोन नहीं थे, यहां तक कि अगर मुझे घर पर फोन करना होता था या अपने माता-पिता का फोन रिसीव करना होता था, तो इसके लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ते थे। इसलिए मैं अपने परिवार से दूर होने लगा। इसे भी पढ़ें: 'Ramayana' के लिए Ranbir Kapoor ले रहे हैं जमकर ट्रेनिंग, गांव में कभी साइकिलिंग तो कभी जॉगिंग करते दिखे एक्टर | VIDEO गायक ने कहा “मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ। मेरे पिता बहुत प्यारे इंसान हैं। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा। उन्होंने यह भी नहीं पूछा कि मैंने किस स्कूल में पढ़ाई की है। लेकिन मेरा उनसे नाता टूट गया।
Marvel 1943: Rise Of Hydra का धमाकेदार ट्रेलर हुआ लॉन्च,ब्लैक पैंथर और कैप्टन अमेरिका में छिड़ी घमासान जंग

