कानून तोड़ने वाले बच्चों के नाम Internet पर सार्वजनिक न हों: प्रधान न्यायाधीश
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि ‘कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों’ के नाम समाचारों एवं इंटरनेट पर सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए, क्योंकि यह वाक्यांश उसकी परिस्थिति को दर्शाता है, न कि उसकी पहचान को। प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय की किशोर न्याय समिति द्वारा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के सहयोग से आयोजित ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के 10 वर्ष: प्रगति, चुनौतियां और अगले दशक की प्राथमिकताएं’ विषय पर राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद कहा कि किसी कानून के लिए 10 वर्ष का समय कम होता है लेकिन यह किसी बच्चे के बचपन के आधे से भी अधिक समय के बराबर है। उन्होंने कहा कि 2015 का यह अधिनियम इस सोच पर आधारित है कि किसी बच्चे पर अपराधी का ठप्पा लगाने के बजाय उसे दूसरा मौका दिया जाए तो उसके समाज का एक उपयोगी सदस्य बनने की संभावना कहीं अधिक होती है। उन्होंने कहा, ‘‘यह यात्रा वास्तव में तभी पूरी होती है, जब अतीत की छाया भविष्य पर पड़नी बंद हो जाए। इसके लिए हमें पुराने रिकॉर्ड समय पर नष्ट करने होंगे और कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों के नाम समाचारों और इंटरनेट पर सार्वजनिक होने से रोकने होंगे, क्योंकि एक बार इंटरनेट पर आने के बाद ये नाम वर्षों तक वहां बने रह सकते हैं।’’प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जनवरी 2016 में जब यह अधिनियम लागू हुआ था, तब किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किए गए 15 वर्षीय बच्चे की उम्र आज लगभग 25 वर्ष होगी और इस अधिनियम ने उस बच्चे से जो पहला वादा किया था, वह इसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों में ही निहित है। उन्होंने कहा, ‘‘ ‘कानून का उल्लंघन करने वाला बच्चा’ वाक्यांश उस बच्चे की परिस्थिति को दर्शाता है, न कि उसकी पहचान को।’’प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे बच्चों की परिस्थितियां आमतौर पर कठिन होती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कहानियों में अक्सर पढ़ाई बीच में छूटने, परिवारों के मुश्किल हालात से गुजरने और गरीबी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि किसी बच्चे से बातचीत करने और उसकी ओर से बोलने वाला कोई नहीं है, तो उसे अपनी बात रखने का अधिकार देने का कोई विशेष मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि इसी कारण राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की 2024 की बाल-अनुकूल विधिक सेवा योजना में पुलिस थानों में बच्चों के लिए वकील और प्रत्येक किशोर न्याय बोर्ड में विधिक सेवा क्लिनिक की व्यवस्था की गई है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इसके बावजूद कई बोर्ड में अब भी ऐसे क्लिनिक नहीं हैं। इनके अभाव में बच्चे की देखभाल और कल्याण से जुड़े शुरुआती फैसले उचित कानूनी प्रतिनिधित्व के बिना लिए जाने की संभावना है।’’उन्होंने विधिक सेवा संस्थानों से बच्चों के लिए प्रशिक्षित बचाव पक्ष के वकीलों का एक अलग प्रकोष्ठ बनाने पर भी विचार करने का आग्रह किया, ताकि प्रत्येक बच्चे को शुरुआत से ही एक समर्पित वकील मिल सके। प्रधान न्यायाधीश ने नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि निजता का उचित ध्यान रखते हुए यह पता लगाया जा सके कि कितने बच्चे दोबारा विद्यालय गए, कितनों को रोजगार मिला और कितनों को फिर कभी किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश नहीं होना पड़ा। उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी. वी. नागरत्ना ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह परामर्श कार्यक्रम इस महत्वपूर्ण कानून की समीक्षा करने और यह समझने का अवसर है कि पिछले 10 वर्ष में इस कानून का उन बच्चों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है, जिनके लिए इसे बनाया गया था। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय बोर्ड का उद्देश्य किसी ‘‘छोटी आपराधिक अदालत’’ की तरह काम करना नहीं है। उन्होंने कहा कि इसकी भूमिका एक अलग सोच पर आधारित है, जो यह स्वीकार करती है कि बच्चों में विकास करने और बदलने की क्षमता होती है तथा न्याय व्यवस्था को उनके विकास से जुड़ी इस वास्तविकता को गंभीरता से लेना चाहिए। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यह अधिनियम अंततः भविष्य से जुड़ा कानून है। उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई बच्चा कानून तोड़ता है, तो कानून को उस बच्चे को नहीं तोड़ना चाहिए।
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के तहत लखनऊ के यूपी-112 परिसर में 450 छात्रों और शिक्षकों के लिए साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें प्रतिभागियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और साइबर अपराधों की पहचान के बारे में जानकारी दी गई।
Shashi Tharoor ने Delhi में Internet और Metro बंदी पर केंद्र को घेरा, CJP सदस्यों की मांगी रिहाई
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) विवाद को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में लागू किए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों और पाबंदियों पर केंद्र सरकार से सवाल किया। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने राजधानी में 22,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती को युद्ध जैसी तैनाती करार दिया। उन्होंने 250 ट्रेनों के रद्द होने और मेट्रो सेवाओं के बंद किए जाने पर भी चिंता जताई। कांग्रेस नेता ने लिखा कि मैं रात 2 बजे के बाद राजधानी लौटा और मैंने शायद ही कभी ऐसा कुछ देखा हो जैसा दिल्ली में अभी हो रहा है—हर कुछ सौ मीटर पर चेकपॉइंट, सड़कों पर कंक्रीट बैरियर और स्पाइक स्ट्रिप्स, शहर भर में 22,000 पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों की युद्ध जैसी तैनाती, 250 ट्रेनें रद्द और 45 मेट्रो स्टेशन बंद, और दिल्ली व उसके आस-पास के इलाकों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरें—और यह सब इसलिए ताकि नागरिक हमारे चुनावों की निष्पक्षता पर शांतिपूर्ण ढंग से सवाल न उठा सकें। इसे भी पढ़ें: EC के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन बेअसर साबित होगा, Himanta Biswa Sarma ने साधा निशाना शशि थरूर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोगों की आवाजाही पर रोक लगी हुई है और जंतर-मंतर जाने वाली सड़कें बंद हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा दमनकारी (और लोगों की आवाज़ दबाने वाला) कदम राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच इंटरनेट बंद करना है। लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। जंतर-मंतर को खास तौर पर इसलिए तय किया गया था ताकि नागरिक दिल्ली के बीचों-बीच अपनी असहमति ज़ाहिर कर सकें, और आज वहाँ जाने वाली सड़कों को भी बंद कर दिया गया है। इसे भी पढ़ें: युवाओं को रोकना सरकार की बड़ी भूल साबित होगी, Delhi में सुरक्षा पर Akhilesh Yadav की BJP को चेतावनी CJP सदस्यों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाते हुए थरूर ने आगे कहा कि यह पूछना जायज़ है कि जब हमारी राजधानी में महिलाओं को सुरक्षा की ज़रूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और तत्परता कहाँ गायब हो जाती है? हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करना होगा। और अगर प्रदर्शनकारी सोमवार को फिर से लौटते हैं, तो क्या अधिकारी राष्ट्रीय राजधानी में फिर से लॉकडाउन लगा देंगे? हमारी GenZ (नई पीढ़ी) 'अघोषित इमरजेंसी' से बेहतर की हकदार है।
आईपीएस अधिकारियों के लिए नई तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और डिजिटल साधनों से जुड़े प्रशिक्षण पाठ्यक्रम अनिवार्य किए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने का रिकॉर्ड उनकी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट में शामिल होगा।
साइबर अपराधों से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ में जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में साइबर जागृति अभियान और ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के अभिनंदन समारोह में कहा कि साइबर सुरक्षा केवल सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। 7 सप्ताह का अभियान खत्म होना समापन नहीं, बल्कि शुरुआत है। साइबर जागरूकता को जनआंदोलन बनाना होगा। छत्तीसगढ़ पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चले अभियान में 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए और करीब 1.70 करोड़ लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया। सोशल मीडिया पर 3,100 से अधिक पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले। स्कूल-कॉलेज, ग्राम पंचायतों और हाट-बाजारों में लोगों को ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और यूपीआई से जुड़े अपराधों के प्रति जागरूक किया गया। ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पुलिस साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है। ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों और फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इन प्रयासों से साइबर अपराधों से जुड़ी एफआईआर में कमी आई है और ठगी की रकम वापस मिलने की दर बढ़ी है। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। अनजान लिंक खोलने, ओटीपी-पासवर्ड साझा करने और ऑनलाइन निवेश के नाम पर आने वाले संदिग्ध प्रस्तावों से बचें। ट्रैफिक सुधारने युवाओं ने दिए सुझाव ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 में युवाओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने रायपुर के टाटीबंध चौक, तेलीबांधा, आमापारा और शंकर नगर जैसे व्यस्त इलाकों की यातायात समस्याओं के समाधान सुझाए। इनमें पार्किंग व्यवस्था सुधारने, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते बनाने, लेन मार्किंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ट्रैफिक प्रबंधन जैसे सुझाव शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपयोगी और व्यावहारिक सुझावों पर विचार कर उन्हें लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। कार्यक्रम में साइबर जागरूकता के लिए बेहतर पहल करने वाले जिलों और ट्रैफिक हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया गया। समारोह में विधायक राजेश मूणत, महापौर मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और विद्यार्थी मौद थे। मुख्यमंत्री ने युवाओं से साइबर सुरक्षा के प्रति खुद जागरूक रहने और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की।
Delhi Internet Shutdown:चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच Cockroach Janata Party (CJP) दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन की तैयारी में है। इसी को देखते हुए मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में आज रात 10 बजे से सभी इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।बता दें कि, दिल्ली पुलिस ने CJP और कुछ छात्र संगठनों को 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। नई दिल्ली रेंज की जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नूपुर प्रसाद ने बताया कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, आवेदन देर से दिया गया था और दूसरा, CJP के पिछले प्रदर्शन के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ था।नूपुर प्रसाद ने कहा, “हमें Cockroach Janata Party के सह-संयोजक सौरव दास की ओर से आवेदन मिला है। इसमें 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की सूचना दी गई थी।”4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट नहींगृह मंत्रालय के आदेश के बाद, नई दिल्ली में जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के 4 किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी।इस रोक में सभी तरह की मोबाइल इंटरनेट टेक्नोलॉजी शामिल होगी। दिल्ली पुलिस ने टेलीकॉम कंपनियों एयरटेल, वोडाफोन आइडिया, जियो और MTNL को इस आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है। बता दें कि यह आदेश टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 और टेलीकॉम सेवाओं के अस्थायी निलंबन नियम, 2024 के तहत जारी किया गया है। दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन बंद रहेंगेदिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजधानी में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इन स्टेशनों पर ट्रेनों की फ़्रीक्वेंसी कम करने का ऐलान किया है। पुलिस की जानकारी के मुताबिक, ये उपाय शुक्रवार रात 9 बजे से शुरू होंगे और 10 अक्टूबर को हालात सामान्य होने तक लागू रहेंगे। इस अनुरोध में दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के 57 स्टेशन शामिल हैं।यह कदम तब उठाया गया है जब ट्रांसपोर्ट रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस ने DMRC से चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों पर ज़रूरी उपाय करने का अनुरोध किया। उन्होंने नई दिल्ली जिले में जंतर-मंतर और दूसरी जगहों पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों और संवेदनशील इलाकों की ओर बेकाबू भीड़ के बढ़ने की आशंका का हवाला दिया।गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कथित वोट चोरी को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।यह भी पढ़ें:Delhi Protest: नमो भारत के सराय काले खां और न्यू अशोक नगर स्टेशन रहेंगे बंद, जानिए आनंद विहार से मेरठ रूट पर क्या पड़ेगा असर
Maharajganj News: साइबर सुरक्षा की क्लास, विशेषज्ञ बोले- क्लिक करने से पहले सोचो
सोशल मीडिया पर मिले संदिग्ध मैसेज से सतर्क रहने का भी सुझाव दिया गया।
India Mobile Congress 2026: पीएम मोदी ने किया उद्घाटन.. 6G, AI और साइबर सुरक्षा पर दिया बड़ा बयान!
पीएम मोदी ने नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण का आज उद्घाटन किया।
Lucknow News: साइबर सुरक्षा में छात्रों के लिए काफी संभावनाएं
साइबर सुरक्षा में छात्रों के लिए काफी संभावनाएं
Almora News: बीटीकेआईटी में सेमीकंडक्टर तकनीक और साइबर सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने दिए व्याख्यान
बीटीकेआईटीमेंसेमीकंडक्टरतकनीक और साइबर सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने दिए व्याख्यान
लखनऊ के राजेंद्र नगर स्थित नवयुग कन्या महाविद्यालय में अभाविप लखनऊ पश्चिम, अवध प्रांत की ओर से ‘क्षितिजा : आंगन से अंतरिक्ष तक’ युवती सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें छात्राओं को महिला अधिकार, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और स्वामी विवेकानंद के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। महाविद्यालय की प्राचार्या एवं अभाविप प्रांत उपाध्यक्ष प्रो. मंजुला उपाध्याय ने कहा कि युवाओं को वैचारिक भटकाव से बचाकर राष्ट्र निर्माण से जोड़ना जरूरी है। लखनऊ महानगर छात्रा प्रमुख डॉ. प्रतिमा घोष ने ‘पंच परिवर्तन’ अपनाने का आह्वान किया। इसमें स्वदेशी, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। देखिए 2 तस्वीरें… साइबर ठगी होने पर 1930 पर करें शिकायत मुख्य वक्ता प्रो. सीमा पांडेय ने ‘परंपरा व आधुनिकता, साइबर सजग : स्क्रीन के उस पार’ विषय पर छात्राओं को जागरूक किया। उन्होंने इसरो की महिला वैज्ञानिकों, शीतल देवी और मनु भाकर का उदाहरण देते हुए संस्कारों के साथ तकनीक अपनाने की बात कही। उन्होंने एआई डीपफेक, वॉइस क्लोनिंग, डिजिटल अरेस्ट, फेक जॉब और पब्लिक चार्जिंग से जुड़े साइबर अपराधों से सावधान रहने की अपील की। साइबर ठगी होने पर 1930 और cybercrime.gov.in पर शिकायत की जानकारी दी।महिला सुरक्षा के लिए 1090 और 181 हेल्पलाइन के बारे में भी बताया गया। मोबाइल से दूरी, खेलों से जुड़ने की अपील प्रो. पांडेय ने मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से होने वाली ‘टेक नेक’ समस्या पर भी जागरूक किया। उन्होंने रोज एक घंटे ‘डिजिटल उपवास’ रखने और खेलों से जुड़ने का संकल्प दिलाया। मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. प्रियंका मौर्या ने छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़ी भारतीय न्याय संहिता की धाराओं की जानकारी दी। उन्होंने अन्याय के खिलाफ निडर होकर आवाज उठाने की अपील की। जिला प्रमुख डॉ. शालिनी साहनी ने छात्राओं को हर क्षेत्र में नेतृत्व के लिए प्रेरित किया।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है।

