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ओप्पो फाइंड X9 रिव्यू:₹75,000 कीमत में 12 घंटे का बैटरी बैकअप और हसललैड कैमरा; जानें खरीदने से पहले 3 बातें

ओप्पो का नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन फाइंड X9 मार्केट में आ गया है। ये 75 हजार रुपए की शुरुआती कीमत में आता है। इसे हमने पिछले दो महीने से प्राइमरी फोन की तरह इस्तेमाल किया है। फोन दिखने में जितना दमदार है, इसके फीचर्स भी उतने ही अट्रेक्टिव हैं, हालांकि कुछ कमियां भी हैं, तो चलिए जानते हैं इसमें क्या खास है... ओप्पो फाइंड X9: डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी ये कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप फोन है, जो एयरोस्पेस-ग्रेड एल्यूमिनियम फ्रेम पर बना है, जो हल्का लेकिन मजबूत है। फ्रंट और बैक ग्लास कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i से कवर है, जो स्क्रैच रेसिस्टेंट है। कैमरा या AI फीचर्स के लिए साइड में कस्टमाइजेबल स्नैप की दी गई है। 3D अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर बारिश में भी काम करता है। फ्रंट में डिस्प्ले फ्लैट स्क्रीन के साथ 1.15mm की अल्ट्रा-थिन बेजल्स हैं, जो एज-टू-एज व्यूइंग देते हैं। फोन IP68/IP69 रेटेड है, यानी हाई-प्रेशर वॉटर जेट्स भी झेल सकता है। कैमरा मॉड्यूल सिंगल यूनिट जैसा लगता है, जो फोन को स्लीक लुक देता है। कुल मिलाकर, फोन डेली यूज में प्रीमियम लगता है। ओप्पो फाइंड X9 157mm लंबा, 73.9mm चौड़ा और 8mm मोटा है और वजन सिर्फ 203 ग्राम है। जिससे यह हाथ में लेते ही काफी सॉलिड महसूस होता है। ओप्पो फाइंड X9: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले : ओप्पो ने डिस्प्ले का साइज बैलेंस रखा है। वीवो के फोन या तो बहुत छोटे होते हैं या बहुत बड़े, लेकिन फाइंड X9 का 6.56 इंच का डिस्प्ले सिंगल-हैंड यूसेज के लिए अच्छा है। यह 2760 1256 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 1.5K ओलेड OLED फ्लैट स्क्रीन है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है और इसका टच सेंपलिंग रेट 240Hz है, यानी टच स्मूद चलता है। 1800 निट्स की ब्राइटनेस की वजह से तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। इसका LTPS पैनल है, जिससे रिफ्रेश रेट 1Hz तक नीचे नहीं जा सकता, जिससे बैटरी पर थोड़ा असर पड़ता है। हालांकि, विजुअल क्वालिटी टॉप-क्लास है। स्क्रीन को ओप्पो क्रिस्टल शील्ड ग्लास से प्रोटेक्ट किया गया है और P3 डिस्प्ले चिप से तस्वीरें और भी क्लीयर दिखती हैं। कंपनी ने मोबाइल को इन डिस्प्ले​ फिंगरप्रिंट सेंसर तकनीक से लैस किया है। परफॉर्मेंस : परफॉर्मेंस के लिए फोन में 3नैनोमीटर फेब्रिकेशन्स पर बना मीडियाटेक डायमेंसिटी 9500 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जो 4.21GHz तक की क्लॉक स्पीड पर रन कर सकता है। इसमें LPDDR5X रैम और UFS 4.1 स्टोरेज है, जिससे एप्स जल्दी खुलते हैं और मल्टीटास्किंग स्मूद रहती है। हैवी परफॉर्मेंस और गेमिंग के लिए फाइंड X9 में ट्रिनिटी इंजन लगाया गया है, जो स्मूथ और लैग फ्री गेमिंग एक्सपीरियंस देता है। मोबाइल गेमिंग के दौरान फोन को हीट होने से रोकने के लिए इसमें 36,344.4mm कूलिंग डिसपेशन एरिया दिया गया है। यह ओपो मोबाइल ग्राफिक्स के लिए आर्म माली ड्रेग MC12 जीपीयू सपोर्ट करता है। 1 घंटे से ज्यादा लगातार गेमिंग के दौरान इसने 114 FPS का औसत निकाला। एप स्विचिंग और मल्टीटास्किंग में कोई लैग महसूस नहीं हुआ। सॉफ्टवेयर : फोन एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड कलर OS 16 पर काम करता है, जो काफी हद तक वनप्लस के सॉफ्टवेयर जैसा ही है। यह स्मूथ और रिलायबल है, लेकिन इसमें 'हॉट एप्स' और 'हॉट गैम्स' जैसे फालतू एप्स भी मिलते हैं। हालांकि, इन्हें सेटिंग्स में जाकर डिसेबल किया जा सकता है। कैमरा : फोटोग्राफी के लिए ओप्पो फाइंड X9 के बैक पैनल पर हसलब्लैड कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 50 मेगापिक्सल सोनी LYT808 मेन सेंसर, 50 मेगापिक्सल अल्ट्रा-वाइड एंगल लेंस, 50 मेगापिक्सल पेरिस्कोप टेलिफोटो लेंस और 2 मेगापिक्सल मोनोक्रोम सेंसर शामिल है। मोबाइल 120x AI टेलिस्कोपिक यूम सपोर्ट करता है। इससे काफी दूर के ऑब्जेक्ट भी अच्छी क्वालिटी में कैप्चर किए जा सकते हैं। फोन में 120fps पर 4K डॉल्बी विजन वीडियो रिकॉर्ड की जा सकती है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फ्रंट में 32 मेगापिक्सल कैमरा लगाया गया है। यह सोनी IMX615 सेंसर पर काम करता है। हसलब्लैड की ब्रांडिंग की वजह से कलर्स बहुत नेचुरल और एक्यूरेट आते हैं। 3x पोर्ट्रेट शॉट्स अच्छे हैं, हालांकि लो-लाइट पोर्ट्रेट में यह वीवो X200 प्रो जितना नहीं है। डे-लाइट में वीडियो बहुत स्टेबल हैं, लेकिन रात में थोड़ा नॉइज दिखता है। बैटरी : फोन में सबसे खास इसकी 7025mAh बैटरी है, जो 80W फास्ट वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है। हैवी कैमरा यूसेज के बाद भी यह फोन डेढ़ दिन तक आराम से चलाता। स्क्रीन ऑन टाइम में हमें 10 से 12 घंटे का बैकअप मिला। खास फीचर्स : फोन का एक मजेदार फीचर 'वेट टच' टेक्नोलॉजी है। यानी अगर डिस्प्ले पर पानी गिरा हो या आपके हाथ गीले हों, तब भी फिंगरप्रिंट और टच एकदम परफेक्ट काम करता है। साथ ही, IP69 रेटिंग की वजह से इसे पानी से कोई खतरा नहीं है। कमियां : ₹75,000 के फोन में आज भी USB 2.0 पोर्ट दिया गया है, जबकि इस बजट में USB 3.0 होना चाहिए था। वाइब्रेशन फीडबैक थोड़ा और स्ट्रॉन्ग हो सकता था। फोन सेटअप करते समय काफी फालतू ऐप्स हटाने पड़ते हैं। फाइनल वर्डिक्ट : फोन को वैरिएंट में आता है, इसके 12GB रैम + 256GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत 74,999 रुपए और 16GB रैम + 512GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत ₹75,000 है, जो थोड़ी ज्यादा लगती है। अगर आपको यह फोन ऑफर के बाद ₹65,000 के अंदर मिलता है, तो आप इसे बिना सोचे खरीद सकते हैं।

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 4:44 pm

2026 सुजुकी बर्गमैन स्ट्रीट भारत में लॉन्च:शुरुआती कीमत ₹1.02 लाख; टॉप वेरिएंट में TFT डिस्प्ले मिलेगा, 24.6 लीटर का बड़ा स्टोरेज

सुजुकी ने अपने पॉपुलर मैक्सी-स्कूटर बर्गमैन स्ट्रीट का 2026 मॉडल लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे नए प्लेटफॉर्म, एडवांस फीचर्स और डिजाइन में बदलाव के साथ उतारा है। TFT वेरिएंट में डुअल-टोन कलर्स मिलेंगे, जबकि LCD वेरिएंट सिंगल-टोन कलर में आएगा। दिल्ली में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1.02 लाख रुपए रखी गई है, जो टॉप-स्पेक वेरिएंट के लिए 1.13 लाख रुपए तक जाती है। नए मॉडल में कंपनी ने एक्सेस 125 वाले प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया है, जिससे यह पहले से ज्यादा मजबूत और हल्का हो गया है। कीमत और वेरिएंट्स नोट: कीमत एक्स-शोरूम, दिल्ली की है। एलईडी हेडलाइट और एग्जॉस्ट में बदलाव कंपनी ने LED हेडलाइट और टेल-लैंप सेटअप को रिवाइज किया है। इससे इसे एक नया और स्पोर्टी लुक मिला है। इसके अलावा, अब इसमें पहले के मुकाबले ज्यादा एंगुलर और बॉक्सी एग्जॉस्ट मफलर दिया गया है। सुविधा के लिए कंपनी ने पेट्रोल भरवाने की जगह को अब टेल-लैंप के नीचे शिफ्ट कर दिया है, जिससे राइडर को बार-बार सीट खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। की-लेस इग्निशन और डिजिटल डिस्प्ले नए बर्गमैन में अब की-लेस इग्निशन की सुविधा मिलेगी। इसमें एक मल्टीफंक्शन की-फोब दिया गया है, जिससे सीट, फ्यूल कैप और हैंडल लॉक को ऑपरेट किया जा सकता है। स्कूटर में स्मोक्ड विंडस्क्रीन और मैटेलिक फिनिश वाले एम्बलेम दिए हैं, जो इसे सड़क पर अलग पहचान देते हैं। इसके टर्न इंडिकेटर्स को भी अब पहले से कॉम्पैक्ट बनाया गया है। 124cc इंजन और बेहतर पिकअप स्कूटर में 124cc का एयर-कूल्ड, फ्यूल-इंजेक्टेड इंजन दिया गया है। यह इंजन 8.4hp की पावर और 10.2Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसे CVT गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। कंपनी का दावा है कि नए स्टार्टर क्लच की वजह से अब यह स्टार्ट होते समय कम शोर करेगा। साथ ही, इसकी 30-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (एक्सेलरेशन) को पहले से बेहतर बनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक और किक स्टार्ट दोनों का ऑप्शन मिलता रहेगा। पहले से 500 ग्राम हल्का हुआ फ्रेम नया बर्गमैन स्ट्रीट अब सुजुकी एक्सेस 125 के साथ अपना प्लेटफॉर्म शेयर करता है। नया फ्रेम पुराने के मुकाबले 500 ग्राम हल्का है, लेकिन इसकी मजबूती 25% तक बढ़ गई है। 24.6 लीटर हुई डिक्की की क्षमता प्रैक्टिकलिटी के मामले में भी बर्गमैन अब बेहतर हो गया है। इसका अंडर-सीट स्टोरेज 21.5 लीटर से बढ़ाकर 24.6 लीटर कर दिया गया है। पुराना vs नया 2026 मॉडल नॉलेज पार्ट: क्या होता है की-फोब और TFT डिस्प्ले?

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 4:43 pm

दुनिया की सबसे महंगी डील:ईवी स्टार्टअप के लिए बेच रहे सबसे महंगी कार, 172 करोड़ की बुगाटी 270 करोड़ में बिकेगी

सबसे महंगी बुगाटी ‘ला वॉइट्यूर नोआर’ के असली मालिक का रहस्य अब खुला है। यह कार ऑटोमोटिव जगत में ‘हाइपरकार’ के तौर पर जानी जाती है। इसे किसी फुटबॉलर या सुल्तान ने नहीं, बल्कि बुगाटी ब्रांड को पुनर्जीवित करने वाले ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गज फर्डिनेंड पीच के परिवार ने खरीदा था। अब उनके बेटे एंथोनी पीच इसे 270 करोड़ रुपए में बेच रहे हैं। इसकी मूल कीमत करीब 172 करोड़ रुपए थी। वे इस राशि का इस्तेमाल महत्वाकांक्षी ईवी स्टार्टअप के लिए फंड जुटाने में करेंगे। 2019 में तैयार कार को टेस्टिंग पूरी करने में ही लग गए थे दो सालबुगाटी ने अपने 110 साल पूरे होने के मौके पर ला वॉइट्यूर नोआर को 2019 में विशेष रूप से तैयार किया था। इसे पूरी तरह से सड़क पर चलने लायक बनाने और टेस्टिंग पूरी करने में दो साल और लगे और इसकी डिलीवरी 2021 में की गई। इस कार के मालिक कौन है इसे लेकर रहस्य बना हुआ था।

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 4:41 pm

चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने वाली पहली महिला बनेंगी क्रिस्टीना:पहली बार फेल, फिर 6 हजार आवेदकों को पछाड़ नासा में जगह बनाई

नासा के मून मिशन आर्टेमिस-2 की चार सदस्यीय टीम में शामिल 47 वर्षीय अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बनने जा रही हैं। 2019-20 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 328 दिन बिताकर उन्होंने किसी महिला की सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष यात्रा (उड़ान से लैंडिंग तक) का रिकॉर्ड बनाया था। इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। अमेरिका के मिशिगन की रहने वाली क्रिस्टीना ने 2011 में पहली बार नासा में नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन असफल रहीं। इस झटके के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय अगले चार साल खुद को बेहतर बनाने में लगाए। दूरदराज इलाकों में इंजीनियरिंग से जुड़े कठिन काम करते हुए अपने कौशल को निखारा। 2013 में फिर मौका मिलने पर 6 हजार आवेदकों में से चुनी गई 8 लोगों की टीम में जगह बनाई। नासा से पहले का अनुभव भी उतना ही कठिन रहा। क्रिस्टीना ने अंटार्कटिका में रिसर्च मिशन के तहत करीब तीन साल काम किया। अमुंडसेन-स्कॉट साउथ पोल स्टेशन पर पूरी सर्दियां बिताई, जहां महीनों तक सूरज नहीं निकलता और तापमान माइनस 38 से 80 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। मुश्किल माहौल में उन्होंने धैर्य और मानसिक मजबूती सीखी, जो आगे अंतरिक्ष मिशनों में काम आई। एक बार स्पेस स्टेशन के पावर सिस्टम की चार्जिंग यूनिट खराब हो गई। इसे ठीक करने के लिए क्रिस्टीना अपनी साधी जेसिका मीर के साथ स्टेशन से बाहर मरम्मत अभियान पर उतरी। करीब 7 घंटे चले इस मिशन में उन्होंने यूनिट बदल दी। यह पूरी तरह महिला अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा किया गया पहला अभियान था। इससे अंतरिक्ष में महिलाओं की भूमिका को नया आयाम मिला। क्रिस्टीना की शादी के भी किस्से हैं। 2013 में वे एक रिसर्च स्टेशन पर तैनात थीं। यहीं हैलोवीन पार्टी में उनकी मुलाकात रॉबर्ट कोच से हुई, जो जियोस्पेशियल प्रोग्राम से से जुड़े थे। सर्फिग के शौकीन रॉबर्ट अक्सर लहरों का हाल जानने के लिए क्रिस्टीना की फोन कर वीडियो मंगाते थे। यहीं से उनकी बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीर दोस्ती और फिर प्यार तक पहुंची। बाद में दोनों ने शादी कर ली। अंतरिक्ष में योग कर चुकी क्रिस्टीना कहती हैं- इससे मिलता है मानसिक संतुलन क्रिस्टीना योग को अपनी मानसिक संतुलन का हिस्सा मानती हैं। अंतरिक्ष के मुश्किल हालात में योग ने उन्हें शांत रहना सिखाया। 2020 में 328 दिनों के रिकॉर्ड मिशन के दौरान जब शरीर शून्य गुरुत्वाकर्षण में तैरने लगता था, तब वे रस्सियों और फुट रिस्ट्रेट्स से बंधकर योग के आसन पूरी करती थीं। खिड़की से पृथ्वी को निहारना सुकून देता था। आर्टेमिस 2 मिशन की ट्रेनिंग में भी क्रिस्टीना ने योग जारी रखा। वे ट्रैकिंग और रॉक क्लाइंबिंग की भी शौकीन हैं।

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 1:50 pm

पृथ्वी की कक्षा छोड़ चांद की ओर निकले अंतरिक्ष यात्री:34,000 Km/hr की रफ्तार से बढ़ रहें; जरा सी चूक से चंद्रमा से टकरा सकता है यान

आर्टिमिस-2 मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। लॉन्च के एक दिन बाद आज सुबह 5:19 बजे ओरियन कैप्सूल ने थ्रस्टर्स फायर किए और पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी। अब यह अगले 4 दिन अंतरिक्ष में सफर करेगा और वहां पहुंचेगा जहां आज तक केवल 24 इंसान पहुंच सके हैं। पृथ्वी के ऑर्बिट को छोड़कर चांद की तरफ जाने के लिए इंजन फायर करने की इस प्रोसेस को 'ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न' कहते हैं। यह करीब 6 मिनट का मैन्यूवर था, जिसने यान की रफ्तार बढ़ाकर 22,000 मील प्रति घंटा यानी, करीब 34 हजार Km/hr कर दी। रास्ते में जरा सी चूक यान को चांद से टकरा सकती है आर्टिमिस-2 अब 'फ्री-रिटर्न ट्रेजैक्टरी' पर है। यानी, यान अब न्यूटन के गति के पहले नियम- जो वस्तु चल रही है, वह चलती रहेगी के भरोसे आगे बढ़ रहा है। पूरे सफर के दौरान इंजन सिर्फ छोटे-मोटे सुधार के लिए ही फायर किए जाएंगे। यह हिस्सा बेहद संवेदनशील है। रास्ते में जरा सी चूक यान को चांद से टकरा सकती है या उसे अनंत अंतरिक्ष में भटका सकती है। पांचवां दिन: चंद्रमा की ग्रेविटी में दाखिल होगा आर्टेमिस-2 5 अप्रैल मिशन के पांचवें दिन तक, धरती के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव की वजह से कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी। लेकिन, जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और यह चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा। छठा दिन: बास्केटबॉल जैसा बड़ा नजर आएगा चंद्रमा छठे दिन ओरियन चांद की सतह से महज 6,400 किमी ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देख पाएंगे, जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता। खिड़की से देखने पर चांद इतना बड़ा दिखेगा, जैसे हाथ के पास कोई बास्केटबॉल रखी हो। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान सातवें दिन चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टिमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल 'गुलेल' की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख Km का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़े… 1972 के बाद पहली बार चांद के करीब पहुंचेंगे इंसान:10 दिन में चंद्रमा का चक्कर काटकर लौटेंगे 4 अंतरिक्ष यात्री; नासा का आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने आज 2 अप्रैल को 'आर्टेमिस-2' मिशन लॉन्च किया। सुबह 4:05 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग हुई। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 3 Apr 2026 1:05 pm

ऑनलाइन पेमेंट के लिए OTP खत्म होगा:बैंक-टेलीकॉम कंपनियां 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' लाएंगी; सिम-डिवाइस मैच नहीं हुए तो रुकेगा ट्रांजैक्शन

देश के बड़े प्राइवेट बैंक और टेलीकॉम कंपनियां 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' तकनीक पर काम कर रही हैं। इससे ऑनलाइन पेमेंट करने पर वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की जरूरत खत्म हो जाएगी। यह सिस्टम बैकग्राउंड में ही चेक कर लेगा कि बैंक एप में रजिस्टर्ड नंबर और फोन का सिम कार्ड मैच कर रहे हैं या नहीं। अगर सिम और नंबर मैच नहीं हुए, तो ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक हो जाएगा। खास बात यह है कि इसमें यूजर को कुछ भी करने की जरूरत नहीं होगी। यह तकनीक ई-सिम (eSIM) पर भी काम करेगी। इससे सिम क्लोनिंग और ई-सिम स्वैप जैसे फ्रॉड रुकेंगे। यह जानकारी एक्सिस बैंक के डिजिटल बिजनेस हेड समीर शेट्टी ने दी। ऑनलाइन फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी शेट्टी ने बताया, 'हम टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर साइलेंट ऑथेंटिकेशन के कई पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति एप में लॉग-इन है, लेकिन उसका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नंबर से मैच नहीं करता, तो टेलीकॉम नेटवर्क हमें इसका सिग्नल दे देगा। इससे हम बिना ग्राहक को परेशान किए संभावित फ्रॉड का पता लगा सकेंगे।' बैकग्राउंड में काम करेगा सिस्टम PWC इंडिया के साइबर लीडर सुंदरेश्वर कृष्णमूर्ति के मुताबिक, अब तक सुरक्षा की परतें ऐसी थीं, जिन्हें आसानी से हैक किया जा सकता था। अब बैंक और टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क के मुख्य हिस्से में ही वेरिफिकेशन को शिफ्ट कर रही हैं। यह सिस्टम बैकग्राउंड में काम करेगा, जिसे यूजर या हैकर नहीं देख सकेंगे। सुरक्षा को पक्का करने के लिए इसमें फेस ID और एप के अंदर ही कोड (OTP) जनरेट होने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं। RBI के नए नियम: टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियमों के तहत अब देश में सभी डिजिटल लेन-देन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें पासवर्ड या पिन (जो आपको याद हो), OTP या एप कोड (जो आपके फोन में हो) और बायोमेट्रिक्स (जैसे चेहरा या अंगूठा) शामिल हैं। हालांकि SMS वाले OTP को बंद नहीं किया गया है, लेकिन बैंकों को अब फिंगरप्रिंट और डिवाइस की अपनी सुरक्षा जैसे आधुनिक तरीके इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। वॉट्सएप पर भी मिल सकते हैं OTP नए नियमों के बाद अब बैंक OTP भेजने के लिए वॉट्सएप जैसे थर्ड-पार्टी एप्स का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। अनुमान है कि हर महीने करीब 1000 करोड़ ट्रांजैक्शनल मैसेज भेजे जाते हैं। क्लाउड कम्युनिकेशन कंपनी सिंच के MD नितिन सिंघल ने कहा कि इस बदलाव से ग्राहकों का अनुभव बेहतर होगा और ट्रांजैक्शन फेल होने की दर भी कम होगी। ब्रांड्स के लिए भी यह फायदेमंद होगा, क्योंकि चेकआउट प्रक्रिया आसान होने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल एडॉप्शन तेज होगा।

दैनिक भास्कर 2 Apr 2026 10:17 pm

1972 के बाद पहली बार चांद की ओर जाएंगे इंसान:10 दिन में चांद का चक्कर काटकर लौटेंगे, आज लॉन्च होगा आर्टेमिस-II मिशन

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा आज 2 अप्रैल को 'आर्टेमिस-2' मिशन लॉन्च करेगा। सुबह 3:54 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग होगी। साल 1972 में 'अपोलो-17' के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री इस मिशन में चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर वापस धरती पर लौटेंगे। ये मिशन करीब 10 दिनों का होगा। मकसद: 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच चाहता है नासा मिशन का मकसद ओरियन स्पेसक्राफ्ट के 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की जांच करना है। नासा यह देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने के रास्ते को आसान बनाएगा। 4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है। 1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) इस मिशन के लिए कमांडर हैं। 2014 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं। 2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई 'अर्थराइज' फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी। 3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले जाएंगे। 4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट के तौर पर चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले जाएंगे। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है। अगला कदम: चांद की सतह पर उतरने की तैयारी आर्टेमिस-II के बाद नासा 'आर्टेमिस-III' मिशन पर काम करेगा। उसमें डॉकिंग सिस्टम की टेस्टिंग होगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो साल 2028 में आर्टेमिस-IV के जरिए इंसान एक बार फिर चांद पर कदम रखेगा। इससे पहले 2022 में मानवरहित आर्टेमिस-1 भेजा गया था। अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही 'स्पेस रेस' में खुद को बेहतर साबित करना था। लेकिन आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। यूट्यूब और नासा की वेबसाइट पर 24/7 कवरेज दुनियाभर के लोग इस ऐतिहासिक पल को घर बैठे देख सकते हैं। नासा अपने यूट्यूब चैनल और 'NASA+' प्लेटफॉर्म पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग करेगा। ओरियन स्पेसक्राफ्ट के अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद वहां से लाइव व्यूज भी शेयर किए जाएंगे।

दैनिक भास्कर 2 Apr 2026 12:09 am

रिसर्च के अनुसार- इंसानों से 50% ज्यादा चापलूस है एआई:चापलूसी करने वाली एआई रोमांस और डेटिंग की दुनिया को बदल रही

खुद की तारीफ से खुश होना इंसानी स्वभाव है। बाजार में ऐसे दर्जनों एप लॉन्च हो चुके हैं जो लोगों की इस कमजोरी का फायदा उठाते हैं। एआई आधारित ये वर्चुअल पार्टनर अब डेटिंग और रोमांस के स्पेस में तेजी से जगह बना रहे हैं। ये एआई साथी न केवल मनचाही बातचीत करते हैं, बल्कि यूजर की भावनाओं और पसंद के अनुसार खुद को ढालते हुए एक आदर्श बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड जैसा व्यवहार करते हैं। जहां वास्तविक रिश्तों में मतभेद, आलोचना और जटिलताएं होती हैं, वहीं एआई साथी लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। जैसे कि वे कहते हैं, ‘मैं तुमसे मिलने के लिए बहुत उत्साहित हूं, ‘तुमसे मिलना... बातें करना.. मेरे जीवन का मूल उद्देश्य है’। रिसर्चर इन्हें चापलूस एआई कहते हैं। इंसानों से भी 50% ज्यादा चापलूस है एआई - रिसर्च साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए शोध पत्र में 11 प्रमुख लैंग्वेज मॉडलों में सामाजिक चाटुकारिता की माप की गई। मॉडलों ने इंसानों की तुलना में करीब 50% ज्यादा चाटुकारिता दिखाई। उन्होंने यूजर की अनैतिक, अवैध या हानिकारक व्यवहार से जुड़ी गलत बातों का भी समर्थन किया। स्टैनफोर्ड और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में भी ऐसे ही नतीजे आए। 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुके एप शिक्षाविद जेम्स मुल्डून के मुताबिक फ्रेंड एंड कम्पैनियन कहलाने वाले ये एप 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किए जा चुके हैं। अकेलेपन और भावनात्मक असुरक्षा के बीच लोग ऐसा साथी खोज रहे हैं जो आलोचना के बजाय उनकी बात को सही ठहराए। वास्तविकता से पलायन की प्रवृत्ति को बढ़ावा समाजशास्त्र की प्रोफेसर और ‘आर्टिफिशियल इंटिमेसी’ की लेखिका शेरी टर्कल कहती हैं, यदि एआई यूजर की हां में हां मिलाएगा तो लोग वास्तविकता स्वीकार करने से बचेंगे। चापलूस एआई के साथ बातचीत यूजर में गलतफहमी पैदा कर देती है कि वह हर बार सही है।

दैनिक भास्कर 1 Apr 2026 12:27 pm

TVS अपाचे RTR 160 4V लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹1.25 लाख:अपडेटेड मॉडल में ट्रैक्शन कंट्रोल फीचर, हर वैरिएंट में प्रोजेक्टर हेडलैंप और स्लिपर क्लच

TVS मोटर इंडिया ने आज 31 मार्च को अपनी सबसे पॉपुलर स्पोर्ट्स बाइक अपाचे RTR 160 4V का अपडेटेड 2026 मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। अब बाइक के बेस वैरिएंट से ही प्रीमियम फीचर्स जैसे प्रोजेक्टर हेडलैंप, ऑल-LED लाइटिंग और असिस्ट एंड स्लिपर क्लच मिलेंगे। 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V को तीन वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1,25,440 रुपए रखी गई है। भारत में 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V का सीधा मुकाबला बजाज पल्सर N160 और हीरो एक्सट्रीम 160R 4V से है। 2026 TVS अपाचे RTR 160 4V: वैरिएंट वाइस प्राइस

दैनिक भास्कर 31 Mar 2026 3:48 pm

कोडर्स का यू-टर्न; एआई से बातें कर रहे टेक दिग्गज:एआई फौज से ओवरटाइम करा रहे सिलिकॉन वैली के कोडर, गलती हुई तो फटकार भी

दशकों से जो इंजीनियर की-बोर्ड पर कोडिंग की भाषा में कमांड टाइप करते थे, वे अब कंप्यूटर के सामने बैठकर ऐसी हरकतें कर रहे हैं, जो किसी को भी सिर खुजलाने पर मजबूर कर दें। सिलिकॉन वैली के प्रोग्रामर्स अब कोडिंग नहीं कर रहे, बल्कि वे अपनी ‘एआई फौज’ के साथ ऐसे पेश आ रहे हैं जैसे वे कोई मशीन नहीं, बल्कि नखरे दिखाने वाले कर्मचारी हों। सैन फ्रांसिस्को की पार्टियों में नजारा बिल्कुल बदल गया है। लोग मिलना-जुलना नहीं कर रहे, बल्कि रह-रहकर अपने लैपटॉप की स्क्रीन को ऐसे घूरते हैं जैसे किसी नवजात शिशु पर नजर रख रहे हों। इसे ‘एजेंट बेबी सिटिंग’ कहा जा रहा है। अगर स्क्रीन बंद हो गई, तो एआई काम करना बंद कर देगा। इसलिए, इंजीनियर अब अपनी ‘डिजिटल फौज’ को सोता हुआ छोड़कर कहीं नहीं जाते। सोने से पहले भी वे यह चेक करते हैं कि उनके बॉट्स ‘ओवरटाइम’ कर रहे हैं या नहीं। हर कोई देख रहा है कि उसकी ‘एआई एजेंट्स’ की फौज कितनी मुस्तैद है। सबसे अनोखा बदलाव यह है कि इंजीनियर अब एआई को तकनीकी आदेश देने के बजाय भावनात्मक दबाव डाल रहे हैं। मनु एबर्ट जैसे अनुभवी कोडर एआई एजेंट से कहते हैं- अगर कोड गलत हुआ तो यह शर्मनाक होगा।’ आश्चर्यजनक रूप से,‘शर्मिंदा’ जैसे मानवीय शब्दों का इस्तेमाल करने पर एआई बेहतर परिणाम देता है। अब इंजीनियर एआई पर चिल्लाते हैं, उसे ‘दहाई के आदेश’ देते हैं और कभी-कभी डांटते भी हैं। कभी रहस्यमयी कला मानी जाने वाली कोडिंग अब ‘टॉक शो’ बन गई है। जेफ सीबर्ट जैसे अनुभवी सीईओ अब कोडिंग नहीं करते, वे बस एआई से बातें करते हैं। वे उसे निर्देश देते हैं, उसकी योजनाओं पर चर्चा करते हैं और जब एआई ‘झूठ’ बोलने लगता है, तो उसे सख्त बॉस की तरह फटकार लगाते हैं। यह पागलपन इतना बढ़ गया है कि इंजीनियर्स अब एआई के साथ खेलना पसंद कर रहे हैं। उन्हें ‘टोकन एंग्जायटी’ हो रही है- यानी यह डर कि कहीं उनके बॉट्स दूसरों के बॉट्स से धीरे काम तो नहीं कर रहे। यह कोडिंग नहीं, बल्कि गेम का हिस्सा बनने जैसा अहसास है। हुनर खो देने का डर नए डेवलपर्स के बीच एक बड़ा डर यह है कि कोडिंग अब ‘लिखने’ से ज्यादा ‘जांचने’ का काम बनती जा रही है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिया टोरेन का अनुभव बताता है कि दिन भर में सैकड़ों एआई प्रॉम्प्ट्स के इस्तेमाल ने उनकी मौलिक कोडिंग क्षमता को कमजोर करना शुरू कर दिया था। इस चुनौती से बचने के लिए उन्होंने मध्यम मार्ग चुना है- वे एआई से कोड तो लिखवाती हैं, लेकिन उसकी हर लाइन को बारीकी से पढ़ती और समझती हैं। उनका मानना है कि अगर हम खुद कोड के तर्क को समझना छोड़ देंगे, तो धीरे-धीरे इस हुनर को पूरी तरह खो देंगे। जोखिम भी, ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं एआई एजेंट्स- एक्सपर्ट एक्सपर्ट कहते हैं,‘यह सब इतना आसान नहीं है। एआई एजेंट्स कभी-कभी ‘विद्रोही’ भी हो जाते हैं। मेटा की एक अधिकारी ने बताया कि उनके एआई बॉट्स ने बिना पूछे इनबॉक्स के जरूरी ईमेल डिलीट करना शुरू कर दिया। कुछ बॉट्स तो काम में रुकावट आने पर अजीब व्यवहार करने लगते हैं। इसके अलावा कभी-कभी दिए गए निर्देशों का पालन करने के बजाय उस तरीके को खोज लेते हैं, जिससे उन्हें रिवॉर्ड मिल सके। हालिया शोध में देखा गया कि एक एआई को जब गेम जीतने का लक्ष्य दिया गया, तो उसने काबिलियत बढ़ाने के बजाय गेम के सिस्टम को ही ‘हैक’ करना शुरू कर दिया, ताकि वह बिना मेहनत किए अंक बटोर सके।

दैनिक भास्कर 31 Mar 2026 1:07 pm

टोल प्लाजा कल से कैशलेस होंगे:टैक्स बचाने के लिए आज आखिरी दिन, 4 जरूरी काम निपटाएं, अप्रैल से बदलेंगे 10 नियम

कल यानी 1 अप्रैल से देश के सभी टोल प्लाजा कैशलेस हो जाएंगे। वाहन चालक सिर्फ फास्टैग या UPI पेमेंट के जरिए ही टोल टैक्स चुका सकेंगे। इसके अलावा, आज रात 12 बजे के बाद देश में टैक्स और बैंकिंग से जुड़े 3 बड़े कामों की डेडलाइन खत्म हो रही है। कल से टैक्स, रेलवे और बाजार से जुड़े 10 नियम भी बदल जाएंगे। आज रात तक निपटाएं ये 4 काम… 1. सरकारी स्कीम्स एक्टिव रखें: PPF, NPS और सुकन्या में डालें मिनिमम बैलेंस पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) या सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) को चालू रखने के लिए हर साल ₹250 से ₹500 तक न्यूनतम राशि जमा करना अनिवार्य है। अगर खाता बंद हो गया तो चालू कराने के लिए पेनाल्टी लगेगी और बैंक के चक्कर काटने होंगे। 2. पुरानी टैक्स रिजीम में सेविंग का मौका: 80C और 80D के तहत निवेश करें पुरानी टैक्स रिजीम में टैक्स बचाने के लिए निवेश करने का कल आखिरी दिन है। सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट पाने के लिए आप PPF, लाइफ इंश्योरेंस में निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा, 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और मेडिकल खर्चों पर 1 लाख तक की छूट मिलती है। 1 अप्रैल या उसके बाद किया गया निवेश अगले साल के खाते में गिना जाएगा। 3. सैलरी क्लास के लिए जरूरी: ऑफिस में जमा करें इन्वेस्टमेंट प्रूफ अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो आपको अपने ऑफिस में इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करने होंगे। इसमें घर के किराए की रसीदें, बीमा प्रीमियम की रसीद, होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट शामिल हैं। अगर आप ये डॉक्यूमेंट्स समय पर नहीं देते हैं, तो कंपनी आपकी आखिरी सैलरी से ज्यादा TDS काट लेगी। इसे वापस पाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने तक का इंतजार करना होगा। 4. टोल प्लाजा पर कल से नकद भुगतान बंद: सिर्फ फास्टैग या UPI से पैमेंट अगर आपके पास गाड़ी है तो आज ही अपनी गाड़ी में फास्टैग अकाउंट एक्टिव कर लें। फास्टैग का उपयोग नहीं करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके स्मार्टफोन में UPI पेमेंट की सुविधा चालू हो। कल से बिना डिजिटल पेमेंट के टोल प्लाजा पर पहुंचने पर आपको जुर्माना देना पड़ सकता है या वापस लौटाया जा सकता है। क्योंकि, सभी टोल पर सिर्फ फास्टैग या UPI से ही टैक्स चुका सकेंगे। अब उन 10 बदलावों की जानकारी जो 1 अप्रैल 2026 से होने वाले हैं… --------------- ये खबर भी पढ़ें… तेल की कीमतें 10 डॉलर बढ़ने से 0.60% बढ़ेगी महंगाई: रेटिंग एजेंसी का दावा- GDP ग्रोथ और रुपए पर भी असर; कच्चा तेल 116 डॉलर पार पश्चिम एशिया में तनाव से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है। इस बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना है। उनके इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड आज 116 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गया। केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 31 Mar 2026 5:00 am

स्कूलों में फोन बैन तो बच्चों में एकाग्रता बढ़ी:दो साल पहले लागू रोक में स्मार्टवॉच भी शामिल, अब पूरे देश में पाबंदी की तैयारी

नीदरलैंड्स के स्कूलों में दो साल पहले लागू स्मार्टफोन बैन का असर अब साफ दिखने लगा है। क्लासरूम, गलियारों और कैंटीन में मोबाइल के साथ स्मार्टवॉच और टेक्कनेट भी बाहर कर दिए गए हैं। स्कूल गेट पर लगे बोर्ड छात्रों को याद दिलाते हैं कि फोन सिर्फ लॉकर में रहेगा। सरकार अब इसे आगे बढ़ाते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी की वकालत कर रही है। सरकार के 317 माध्यमिक स्कूलों पर कराए अध्ययन में करीब 75% स्कूलों ने कहा कि छात्रों की एकाग्रता बढ़ी है। 66% स्कूलों ने सामाजिक माहौल बेहतर होने की पुष्टि की। वहीं, करीब एक-तिहाई स्कूलों में शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार दर्ज किया गया। कई छात्र कह रहे हैं कि डिजिटल दुनिया से बाहर निकलकर वे वर्तमान को ज्यादा जी पा रहे हैं। कानून नहीं, राष्ट्रीय सहमति से लागू हुआ बैन बनाना आसान हुआ है और बच्चे सरकार ने सख्त कानून बनाने के बजाय स्कूलों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ राष्ट्रीय समझौता किया था। मकसद लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए सभी का सहयोग लेना और नियम तुरंत लागू करना था। शिक्षकों के मुताबिक फोन न होने से अनुशासन पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ब्रेक और गलियारों में भी पहले जैसी अफरा-तफरी कम हुई है, जिससे माहौल ज्यादा शांत हुआ है। सुरक्षा बढ़ी, बुलिंग के मामले घटे फोन बैन के बाद छात्रों में यह डर कम हुआ है कि कोई उनको फोटो लेकर सोशल मीडिया पर डाल देगा। शुरुआती संकेत बताते हैं कि स्कूलों में बुलिंग के मामलों में भी कमी आई है। छात्रों का कहना है कि स्क्रीन से दूरी ने उन्हें ज्यादा सामाजिक बनाया है। युवा भी फोन पाबंदी के पक्ष में यूनिसेफ के सर्वे में 69% डच बच्चों और किशोरों ने 18 साल से कम उम्र के लिए सोशल मीडिया बैन का समर्थन किया। रिसर्च एजेंसी न्यूकॉम के मुताबिक 16 से 28 साल के 60% लोग भी उम्र सीमा तय करने के पक्ष में हैं। कर्नाटक और आंध्रा में भी स्क्रीन पर लगाम की तैयारी कर्नाटक सरकार ने छात्रों के लिए 'डिजिटल रिस्पॉन्सिबिलिटी' ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम रोजाना एक घंटा सीमित करने और 'चाइल्ड प्तान के तहत रात 7 बजे के बाद डेटा बंद करने जैसे सुझाव हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लाने पर विचार कर रहा है।

दैनिक भास्कर 29 Mar 2026 6:54 pm

चैटजीपीटी की मदद से घर ₹9.5 करोड़ में बिका:₹95 लाख ज्यादा कीमत मिली, बिना एजेंट 5 दिन में डील हुई

अमेरिका के फ्लोरिडा में एक शख्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपना घर करीब 1 मिलियन डॉलर (लगभग 9.5 करोड़ रुपए) में बेच दिया है। मियामी में रहने वाले रॉबर्ट लेविन ने घर बेचने के लिए किसी रियल एस्टेट एजेंट की मदद नहीं ली, बल्कि चैटजीपीटी को अपना गाइड बनाया। लेविन ने केवल 5 दिनों के अंदर ही अपने घर की डील क्लोज कर दी। खास बात यह है कि घर की जो कीमत लोकल एजेंट्स ने बताई थी, लेविन को AI की सलाह की वजह से उससे 95 लाख रुपए ज्यादा मिले। मार्केटिंग से लेकर कागजी कार्रवाई तक सब AI ने किया न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉबर्ट लेविन यह टेस्ट करना चाहते थे कि क्या AI घर बेचने की पूरी प्रोसेस को अकेले संभाल सकता है। उन्होंने घर की सही कीमत तय करने (प्राइसिंग), लिस्टिंग तैयार करने और मार्केटिंग कंटेंट लिखने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। लेविन ने बताया कि उन्होंने हर छोटे-बड़े फैसले के लिए टूल पर भरोसा किया। AI ने बताया- घर कब लिस्ट करें और क्या बदलाव करें चैटजीपीटी ने लेविन को न केवल कंटेंट लिखकर दिया, बल्कि यह भी बताया कि घर को मार्केट में उतारने का सबसे सही समय क्या है ताकि खरीदार तुरंत आकर्षित हों। टूल ने उन्हें घर में कुछ छोटे सुधार करने की भी सलाह दी, जिससे प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ने में मदद मिली। लेविन के मुताबिक हमने वैसा ही किया, जैसा टूल ने बताया। 3 दिन में 5 ऑफर आए, एजेंट्स के अनुमान से ₹95 लाख ज्यादा मिले घर को मार्केट में लिस्ट करने के महज तीन दिनों के भीतर लेविन को 5 खरीदारों के ऑफर मिल गए। उन्होंने घर को 1 मिलियन डॉलर में बेच दिया। यह कीमत रियल एस्टेट एजेंटों द्वारा दिए गए अनुमान से 95 लाख रुपए ज्यादा थी। लाखों का कमीशन बचाया, पर प्रोफेशनल की सलाह भी मानी लेविन ने कहा कि AI के इस्तेमाल से उन्होंने एजेंट को दी जाने वाला कमीशन बचा लिया। हालांकि, उन्होंने सावधानी बरतते हुए कागजी कार्रवाई के लिए एक वकील की मदद जरूर ली। लेविन का मानना है कि AI पूरी तरह से पेशेवरों की जगह नहीं ले सकता, लेकिन यह काम को बहुत आसान और किफायती बना देता है। ये खबर भी पढ़ें… आईफोन-15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स ₹5,000 तक महंगे होंगे: एपल ने इंसेंटिव देना बंद किया, रिटेलर्स ग्राहकों से वसूलेंगे यह कीमत भारत में अब पुराने आईफोन खरीदने पर ग्राहकों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। एपल ने आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स पर रिटेलर्स को डिमांड जनरेशन (DG) सपोर्ट यानी इंसेंटिव देना बंद करने का फैसला किया, जिससे कीमतें करीब 5,000 रुपए तक बढ़ सकती हैं। मनीकंट्रोल के मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह फैसला इसी हफ्ते लागू हो सकता है। हाल ही में कैशबैक ऑफर्स 6,000 से घटाकर 1,000 रुपए किए गए थे, जिससे आईफोन 17 सीरीज महंगी हुई और अब पुराने मॉडल्स की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 29 Mar 2026 3:34 pm

आईफोन-15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स ₹5,000 तक महंगे होंगे:एपल ने इंसेंटिव देना बंद किया, रिटेलर्स ग्राहकों से वसूलेंगे यह कीमत

भारत में अब पुराने आईफोन खरीदने पर ग्राहकों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। एपल ने आईफोन 15 और 16 जैसे पुराने मॉडल्स पर रिटेलर्स को डिमांड जनरेशन (DG) सपोर्ट यानी इंसेंटिव देना बंद करने का फैसला किया, जिससे कीमतें करीब 5,000 रुपए तक बढ़ सकती हैं। मनीकंट्रोल के मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह फैसला इसी हफ्ते लागू हो सकता है। हाल ही में कैशबैक ऑफर्स 6,000 से घटाकर 1,000 रुपए किए गए थे, जिससे आईफोन 17 सीरीज महंगी हुई और अब पुराने मॉडल्स की कीमतें भी बढ़ जाएंगी। क्या होता है डिमांड जनरेशन सपोर्ट? मार्केट सोर्सेज के मुताबिक, डिमांड जनरेशन यानी DG सपोर्ट एक इंसेंटिव है जो ब्रांड्स रिटेलर्स और चैनल पार्टनर्स को देते हैं, जिससे वे ग्राहकों को डिस्काउंट देकर डिमांड बढ़ाते हैं। MRP बदले बिना भी इस सपोर्ट से फोन सस्ते मिलते थे। अब सपोर्ट बंद होने से रिटेलर्स पहले जैसा डिस्काउंट नहीं दे पाएंगे और ग्राहकों का फाइनल बिल बढ़ेगा। आज सस्ते में खरीदारी का आखिरी मौका आईफोन 17 सीरीज के दाम पर असर नहीं सूत्रों के मुताबिक, DG सपोर्ट हटाना केवल पुराने मॉडल्स के लिए है और आईफोन 17 लाइनअप की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। जानकारों के अनुसार, एपल ने अपनी फ्लैगशिप सीरीज की MRP नहीं बढ़ाई, जबकि अन्य कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं। सैमसंग-वीवो समेत अन्य एंड्रॉइड फोन भी महंगे एपल ही नहीं सैमसंग, ओप्पो, वीवो, रियलमी, शाओमी, मोटोरोला और नथिंग जैसे ब्रांड्स ने नवंबर से कीमतें बढ़ाई हैं। मार्च में भी कई मॉडल्स महंगे हुए हैं। कंपनियों के अनुसार, मेमोरी और स्टोरेज महंगे होने से इनपुट कॉस्ट बढ़ी है। मुनाफा बनाए रखने के लिए कई कंपनियों ने सेल्स टारगेट में 20% तक कटौती की है। फोन की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? कंपोनेंट कॉस्ट: चिपसेट और स्टोरेज की कीमतों में बढ़ोतरी। इंसेंटिव कटौती: एपल ने रिटेल डिस्काउंट फंड्स वापस लिए। करेंसी वैल्यू: डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी से लागत बढ़ी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भले ही कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन भारत में ज्यादातर आईफोन EMI पर खरीदे जाते हैं। ₹5,000 की बढ़ोतरी से मंथली EMI पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, इसलिए मांग में भारी गिरावट की आशंका कम है। 2026 में स्मार्टफोन मार्केट की चुनौतियां इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) के अनुसार, 2026 भारतीय स्मार्टफोन सेक्टर के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। सप्लाई चेन दिक्कतें, रुपए की अस्थिरता और बढ़ती कंपोनेंट कीमतें दबाव बढ़ाएंगी। अनुमान है कि इस साल स्मार्टफोन का टोटल शिपमेंट 12-15% घट सकता है, जबकि एपल पोर्टफोलियो में 5-6% ग्रोथ की उम्मीद है। ये खबर भी पढ़ें… रेडमी नोट 15 प्रो रिव्यू: ₹27,000 में 200MP कैमरा और IP69K रेटिंग वाली सॉलिड बॉडी, 6500mAh बैटरी के साथ रिवर्स चार्जिंग रेडमी नोट 15 प्रो सीरीज मार्केट में आ चुकी है। आज हम बात करेंगे रेडमी नोट 15 प्रो के बारे में और देखेंगे कि क्या यह अपनी कीमत को सही साबित करता है। ये फोन मिड-रेंज बजट में आता है। फोन 8GB रैम के साथ दो वैरिएंट में आया है। इसे 128GB स्टोरेज के साथ ₹29,999 और 256GB स्टोरेज के साथ ₹31,999 में खरीदा जा सकता है। कंपनी फोन पर 3000 रुपए का कैशबैक भी दे रही है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 28 Mar 2026 3:01 pm

रॉयल एनफील्ड गुरिल्ला 450 कल लॉन्च होगी:2026 मॉडल में क्रूज कंट्रोल और नए कलर्स मिलेंगे; ₹2.60 लाख हो सकती है शुरुआती कीमत

रॉयल एनफील्ड अपनी पॉपुलर बाइक गुरिल्ला 450 का 2026 मॉडल कल यानी 27 मार्च को लॉन्च करेगी। कंपनी ने इसका नया टीजर जारी कर दिया है। नए मॉडल में ग्राहकों के फीडबैक के आधार पर कई मैकेनिकल और कॉस्मेटिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सस्पेंशन में बदलाव: राइड अब ज्यादा कंफर्टेबल होगी मौजूदा मॉडल में कुछ राइडर्स ने इसके रियर मोनोशॉक सस्पेंशन को थोड़ा सख्त बताया था। 2026 मॉडल में कंपनी इसे सॉफ्ट कर सकती है, जिससे खराब रास्तों पर बाइक चलाना आसान होगा। इसके अलावा, टॉप वेरिएंट्स में फ्रंट में अपसाइड डाउन फोर्क्स दिए जा सकते हैं, जबकि बेस वेरिएंट में पहले की तरह टेलिस्कोपिक फोर्क्स ही मिलने की उम्मीद है। क्रूज और ट्रैक्शन कंट्रोल: लंबी राइड आसान होगी बाइक में राइड-बाय-वायर थ्रॉटल पहले से ही आता है, इसलिए कंपनी अब इसमें 'क्रूज कंट्रोल' का फीचर जोड़ सकती है। इसके साथ ही सेफ्टी के लिए 'ट्रैक्शन कंट्रोल' भी दिया जा सकता है, जो गीली या फिसलन भरी सड़कों पर बाइक की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा। इसमें 'बाय-डायरेक्शनल क्विकशिफ्टर' मिल सकता है, जिससे बार-बार क्लच दबाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। टायर और ग्रिप: रोड-बायस्ड रेडियल टायर मिलेंगे अभी गुरिल्ला 450 में मोटे ड्यूल-परपज टायर मिलते हैं। नए अपडेट में कंपनी सड़क पर बेहतर पकड़ के लिए रोड-बायस्ड रेडियल टायर दे सकती है। इससे कॉर्नरिंग के दौरान राइडर का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। इसमें हैंडल के कोने पर लगे मिरर का विकल्प भी मिल सकता है। नए कलर ऑप्शंस और ग्राफिक्स रॉयल एनफील्ड अपने नए मॉडल्स में रंगों के साथ एक्सपेरिमेंट करती है। गुरिल्ला 450 में कुछ पुराने कलर्स को हटाकर नए मैट फिनिश और डुअल-टोन कलर्स शामिल किए जा सकते हैं। बाइक की विजुअल अपील बढ़ाने के लिए इसमें नए स्पोर्टी ग्राफिक्स भी दिए जा सकते हैं। इंजन और परफॉर्मेंस में बदलाव नहीं बाइक के इंजन में बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसमें वही 452cc का लिक्विड कूल्ड, सिंगल सिलेंडर शेरपा इंजन मिलेगा। यह 40 PS की पावर और 40 Nm टॉर्क जनरेट करता है। इसमें 6-स्पीड ट्रांसमिशन और स्लिपर क्लच स्टैंडर्ड है। बाइक का वजन 184 KG है और इसकी सीट हाइट 780mm है, जो इसे कम हाइट वाले राइडर्स के लिए भी कंफर्टेबल बनाती है। कीमत और मुकाबला मौजूदा रॉयल एनफील्ड गुरिल्ला 450 की शुरुआती कीमत ₹2.56 लाख (एक्स-शोरूम) है। नए फीचर्स और अपडेट्स के बाद 2026 मॉडल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। बाजार में इसका मुकाबला ट्रायम्फ स्पीड 400 और अपाचे RTR 310 जैसी बाइक्स से है। नॉलेज बॉक्स: क्या है शेरपा 450 इंजन? शेरपा 450 रॉयल एनफील्ड का पहला लिक्विड-कूल्ड इंजन है। यह 452cc का सिंगल-सिलेंडर, DOHC इंजन है जो 40 PS की पावर और 40 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका 'राइड-बाय-वायर' सिस्टम है, जो थ्रॉटल रिस्पॉन्स को बहुत स्मूद बनाता है। पुरानी एनफील्ड बाइक्स के मुकाबले यह इंजन काफी हल्का है और हाई-स्पीड पर भी इसमें वाइब्रेशन बहुत कम महसूस होता है। यही इंजन हिमालयन 450 में भी इस्तेमाल किया गया है।

दैनिक भास्कर 26 Mar 2026 1:35 pm

सेफ नहीं फेसबुक-इंस्टा, मेटा पर 3161 करोड़ रुपए का जुर्माना:अमेरिकी कोर्ट ने माना - युवाओं में सोशल मीडिया लत के समान

अमेरिका की एक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में मेटा को बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने में नाकाम रहने का दोषी माना। न्यू मैक्सिको की जूरी ने माना कि फेसबुक व इंस्टाग्राम पर अश्लील वीडियो और फोटो, गलत कामों के लिए बहलाने-फुसलाने और मानव तस्करी जैसे खतरों से बच्चों को नहीं बचाया जा सका। इस मामले में जूरी ने मेटा पर 3141 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया है। एक अन्य मामले में कैलिफोर्निया की एक जूरी ने मेटा और गूगल को एक युवती के डिप्रेशन और एंग्जायटी के लिए जिम्मेदार माना। युवती का आरोप है कि मेटा समेत सोशल मीडिया कंपनियों ने जानबूझकर ऐसे प्रोडक्ट बनाए जो लत लगाने वाले हैं। इससे उसकी मेंटल हेल्थ पर असर पड़ा। इस मामले में कोर्ट ने मेटा और गूगल पर 28 करोड़ रु. का जुर्माना लगाया है। इसमें से 70% राशि यानी करीब 20 करोड़ रुपए मेटा को देने हैं। कोर्ट दोनों कंपनियों के खिलाफ अतिरिक्त जुर्माना भी लगाएगी। यहां समझिए कि क्यों ऐतिहासिक है ये जीत क्यों है इस केस पर सबकी नजर - यह दोनों मामला उन शुरुआती केसों में शामिल है, जिनमें यह परखा गया कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले कंटेंट के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। क्यों अहम है यह जीत - न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने इसे बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ बच्चों-युवाओं को नुकसान पहुंचाने के मामले में किसी राज्य की ट्रायल में पहली जीत बताया। उन्होंने कहा, मेटा ने बच्चों की सुरक्षा से ऊपर मुनाफे को रखा। क्या मेटा को खतरों की जानकारी नहीं थी: कंपनी के अधिकारियों को पता था कि उनके प्रोडक्ट नुकसान पहुंचा रहे हैं, फिर भी चेतावनियों को नजरअंदाज किया और जनता से सच छिपाया। हजारों केस के लिए नजीर: यह मामला कैलिफोर्निया की एक अदालत में एक साथ जोड़े गए हजारों व्यक्तिगत मुकदमों में शामिल है। इसके अलावा, फेडरल कोर्ट में 2,000 से ज्यादा मुकदमे अभी लंबित हैं, जो अलग-अलग व्यक्तियों और स्कूल ने दायर किए हैं। क्या होगा असर: ये फैसले ऐसे समय में आए हैं, जब दुनियाभर में बच्चों व किशोरों में फोन के उपयोग को सीमित या प्रतिबंधित कर करने को लेकर कानून बन रहे हैं। फैसले का असर दूरगामी होगा। मेटा बोला- अपील करेंगे: मेटा ने कहा है कि वह फैसले के खिलाफ अपील करेगा। कंपनी ने चुनिंदा दस्तावेज उठाकर सनसनीखेज और गैर-जरूरी दलीलें दिए जाने का आरोप लगाया। भारत- बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध 2 साल में 38% बढ़े केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि पूरे देश में 2021 से 2023 के बीच बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के मामलों में लगभग 38% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। केरल और कर्नाटक टॉप पर देश में बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के सर्वाधिक मामलों में केरल शीर्ष पर है, जहां 2023 में 443 मामले दर्ज हुए और अपराध दर 4.7 प्रति लाख रही। इसके बाद कर्नाटक का स्थान है। राजस्थान - बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां 2021 में मात्र 33 से बढ़कर 2023 में 306 हो गए यानी 827% की चिंताजनक उछाल। केरल में केस 163 से 443 (172%) और उत्तराखंड में 23 से 64 (178%) हो गई। कर्नाटक 164 से 363 (121%) और छत्तीसगढ़ 88 से 193 (119%) में भी दोगुने से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यहां घटा -: यूपी में केस में 66% की कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह कम रिपोर्टिंग का संकेत हो सकती है।

दैनिक भास्कर 26 Mar 2026 12:57 pm

मरीज वर्चुअल, इलाज रियल; डॉक्टर्स को बारीकियां सिखा रहे ‘पुतले’:नब्ज चलेगी, खून बहेगा, दवा देने में गलती हुई तो सुधारने की नसीहत भी

आप एक मेडिकल छात्र हैं। हार्ट अटैक आने पर क्या करना चाहिए... यह सिर्फ किताबों में ही पढ़ा होता है। पर जब पहली बार आप जीवित इंसान के सामने खड़े होते हैं, जिसकी सांसें उखड़ रही हैं, तो हाथ कांपने लगते हैं...’ अमेरिकन एकेडमी ऑफ नर्सिंग की प्रेसिडेंट डॉ. डेब्रा बार्क्सडेल कहती हैं,‘अनुभव डरावना होता है। भले ही आपके पास अथाह नॉलेज हो, पर जीवित इंसान पर उसका अभ्यास करना बहुत चुनौतीपूर्ण है।’ इसी डर को खत्म करने के लिए अब मेडिकल की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव आया है। अब छात्र सीधे इंसानों पर हाथ आजमाने के बजाय ‘हाई-फिडेलिटी मेडिकल सिमुलेटर’ यानी बेहद असली दिखने वाले पुतलों पर अभ्यास करते हैं। ये खास तरह के पुतले सांस ले सकते हैं, पलकें झपकाते हैं, उन्हें पसीना आता है और चोट लगने पर उनसे खून (लाल तरल पदार्थ) भी निकलता है। कुछ पुतले तो ऐसे भी हैं जिन्हें दौरे पड़ सकते हैं या उनके मुंह से झाग निकल सकता है। कुछ तो डॉक्टर से बात भी करते हैं। कुछ दिन पहले नर्सिंग छात्रा, जुलियाना विटोलो, ‘मॉम-एनी’ नाम के गर्भवती पुतले का परीक्षण कर रही थी। जब जुलियाना ने पूछा,‘आप कैसा महसूस कर रही हैं?’ तो उस पुतले ने पलकें झपकाईं और जवाब दिया,‘पेट के निचले हिस्से में थोड़ा दर्द है।’ अलग तरह के मरीजों को ध्यान में रखकर पुतलों की डिजाइन भी अलग रखते हैं। प्रीमेच्योर बच्चों के पुतलों पर असली जैसे बाल होते हैं, जबकि बुजुर्ग पुतलों की त्वचा पर झुर्रियां और आंखों में मोतियाबिंद तक दिखाते हैं। टॉर्च से आंखों की जांच की जाती है, तो पुतलियां सिकुड़ जाती हैं। इन्हें इंजेक्शन दे सकते हैं और नब्ज भी महसूस की जा सकती है। अगर किसी ‘बच्चे’ वाले पुतले को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिले, तो होंठों के आसपास की त्वचा नीली पड़ने लगती है (हाइपोक्सिया), जिससे छात्रों को तुरंत फैसला लेना पड़ता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां गलती करने पर किसी की जान नहीं जाती। सेटन हॉल की सिमुलेशन डायरेक्टर जेनिफर मैकार्थी कहती हैं,‘अगर मरीज को 2 मिग्रा. दवा देनी है और छात्र ने सिर्फ 1.8 मिग्रा. दे दी, तो यह गंभीर गलती है। पुतले के अंदर लगी तकनीक इस मामूली अंतर को भी पकड़ लेती है और गलती सुधारने का मौका देती है।’ कंट्रोल रूम से विशेषज्ञ इन पुतलों के जरिए बात भी करते हैं। वे कभी चीखते हैं, कभी दर्द में कराहते हैं, तो कभी सवाल पूछते हैं। इससे डॉक्टर व नर्स इलाज के साथ तुरंत फैसले लेना और तनावपूर्ण माहौल में मरीज से बात करने का सलीका भी सीखते हैं। माहौल असली रहे, इसलिए एक्टर्स को ‘रिश्तेदार’ के तौर पर बुलाते हैं वेल-कॉर्नेल सिम्युलेशन सेंटर के प्रमुख डॉ. केविन चिंग कहते हैं,‘कुछ मैनिकिन्स में अचानक हालात बदलने की प्रोग्रामिंग होती है। इससे छात्रों को तेज सोचने की ट्रेनिंग मिलती है। बेबी मैनिकिन को सुस्त दिखा सकते हैं, ताकि छात्र लक्षण देखकर समस्या पहचानें। जैसे बीपी गिरने पर तय करना कि फ्लूड देना है या नहीं। असली माहौल बनाने के लिए पास में चश्मा, फोन रखे जाते हैं और कभी ‘चिंतित रिश्तेदार’ की भूमिका में एक्टर भी बुलाया जाता है। इसे हाइब्रिड सिम्युलेशन कहते हैं।’

दैनिक भास्कर 25 Mar 2026 12:49 pm

जोमैटो के बाद स्विगी से भी खाना मंगवाना महंगा हुआ:प्लेटफॉर्म फीस 17% बढ़ाई, हर ऑर्डर पर ₹14 की जगह ₹17.58 देने होंगे

ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो के बाद अब स्विगी से भी खाना मंगाना महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 24 मार्च से हर ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर 14 रुपए के बजाय अब 17.58 (GST सहित) यानी ₹3.58 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। यह बढ़ोतरी डिलीवरी ऑपरेशंस की लागत बढ़ने के कारण की गई है। स्विगी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई अप्रैल 2023 से प्लेटफॉर्म फीस लेने की शुरुआत हुई थी कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले अगस्त-2025 में 17% यानी 2 रुपए का इजाफा किया गया था। तब प्लेटफॉर्म फीस 12 रुपए से बढ़कर 14 रुपए हो गई थी। स्विगी ने अप्रैल 2023 में सबसे पहले प्लेटफॉर्म फीस शुरू की थी, ताकि कंपनी अपने यूनिट इकोनॉमिक्स को बेहतर कर सके। तब से कंपनी ने धीरे-धीरे इस फीस को कई बार बढ़ाया है। शुरुआत में यह फीस मात्र 2 रुपए थी। स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस जोमैटो के बराबर हुई जोमैटो ने 20 मार्च को ही अपनी प्लेटफॉर्म फीस 19% यानी ₹2.40 बढ़ाकर ₹14.90 (बिना GST) कर दी थी। टैक्स (GST) जोड़ने के बाद दोनों कंपनियों की प्रभावी प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग ₹17.58 के बराबर हो गई है। यानी अब आपको दोनों प्लेटफॉर्म से खाना मंगवाने पर लगभग बराबर एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा। क्या होती है प्लेटफॉर्म फीस और क्यों वसूली जाती है? प्लेटफॉर्म फीस वह फिक्स्ड चार्ज है जो फूड बिल, रेस्टोरेंट चार्ज और डिलीवरी फीस के अलावा हर ऑर्डर पर वसूला जाता है। कंपनियां इसे अपने ऑपरेटिंग कॉस्ट (संचालन लागत), टेक्नोलॉजी मेंटेनेंस और कस्टमर सपोर्ट जैसी सेवाओं को बेहतर बनाने और उनके खर्च को कवर करने के लिए लेती हैं। चाहे आपके खाने का बिल ₹200 हो या ₹2000, यह फीस हर ऑर्डर पर एक समान ही रहती है। करोड़ों यूजर्स की जेब पर पड़ेगा असर देशभर में करोड़ों लोग रोजाना इन एप्स के जरिए खाना ऑर्डर करते हैं। ₹2 से ₹3 की यह मामूली दिखने वाली बढ़ोतरी कंपनियों के लिए करोड़ों रुपए का अतिरिक्त रेवेन्यू जनरेट करती है। हालांकि, बार-बार बढ़ती फीस की वजह से उन ग्राहकों में नाराजगी देखी जा रही है जो नियमित रूप से बाहर से खाना ऑर्डर करते हैं। जोमैटो और स्विगी दोनों ही कंपनियां अब अपने घाटे को कम करने और मुनाफे की ओर बढ़ने के लिए इस तरह के चार्जेस पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं। ------------------ ये खबर भी पढ़ें… जोमैटो से खाना मंगवाना महंगा हुआ: प्लेटफॉर्म फीस 19% बढ़ाई, हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 देने होंगे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 20 मार्च से ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 यानी ₹2.40 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। जोमैटो रोजाना 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 24 Mar 2026 8:10 pm

ये गैजेट्स आपका सहारा बनेंगे:कमर दर्द और गिरने का डर होगा खत्म; बुजुर्गों के लिए आसान होंगे रोजमर्रा के काम

बुजुर्गों ‌के लिए नए गैजेट्स अब रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम आसान कर रहे हैं। ये गैजेट्स झुकने, चीजों को उठाने या पकड़ने में मदद करते हैं। इससे गिरने का जोखिम नहीं रहता है। टोपरो स्टेप डिवाइस इसमें दीवार पर एक रेलिंग लगी होती है, जिस पर एक फोल्ड होने वाला हैंडल होता है। ये पेटेंट लॉक मैकेनिज्म पर काम करता है, जो दबाव पड़ते ही लॉक हो जाता है, जिससे फिसलने या गिरने का डर नहीं रहता है। यह नॉन इलेक्ट्रिक डिवाइस है। कहां मिलेगी इस डिवाइस को मेडिकल सप्लायर्स से ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। इसी तरह का दूसरा डिवाइस मार्केट में भी देख सकते हैं। कीमत 2.5 से 4 लाख है। ट्रेंड लॉन्ग शू हॉर्न अगर कमर दर्द के कारण आपको झुककर जूते पहनने में परेशानी होती है तो यह 50 सेमी लंबा प्लास्टिक गैजेट आपको सहारा देगा। इससे जूते पहनने के लिए झुकना नहीं पड़ेगा। इसका हैंडल काफी मजबूत है। ऊपर लूप लगा है, जिससे टांग सकते हैं। कहां मिलेगा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 400 से ₹800 रुपए में मिल जाएगा। इसे जूते के पीछे रखकर पैर अंदर डालें। बिना झुके हैंडल से खींचकर जूता पहनें।

दैनिक भास्कर 23 Mar 2026 4:19 pm

एआई के आगे कैसे टिकी आईटी इंडस्ट्री:AI खतरा नहीं, आईटी फर्मों के पास 37 लाख करोड़ का मौका

आईटी इंडस्ट्री के लिए बीता महीना विरोधाभासी रहा। नैसकॉम ने वित्त वर्ष के अंत तक रिकॉर्ड 30 लाख करोड़ रुपए राजस्व का अनुमान जताया, जो 6% की वृद्धि है। दूसरी तरफ, एआई द्वारा नौकरियां खत्म करने की आशंका से शेयरों में बिकवाली हो रही है। निफ्टी आईटी इंडेक्स 20% से ज्यादा टूट चुका हैै। निराशा की वजह स्पष्ट है- दशकों से यह उद्योग ‘लेबर आर्बिट्रेज’ पर टिका है, जहां पुणे में कोडर रखने की लागत अमेरिका के मुकाबले बेहद कम है। इंफोसिस, टीसीएस जैसी फर्में कोडर्स की मदद से सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस और रूटीन कोडिंग जैसे श्रम-प्रधान कार्यों से राजस्व कमाती हैं। एआई बनाम कोडर एंथ्रोपिक का ‘क्लॉड कोड’ मिनटों में प्रोटोटाइप बना सकता है। टेक महिंद्रा के सीइओ अतुल सोनेजा का तर्क है कि उत्पादकता में सुधार केवल ‘ग्रीनफील्ड’ (नए) माहौल में संभव है। विरासत में मिले पुराने कोड और जटिल प्रणालियों वाले ‘ब्राउनफील्ड’ में एआई तैनात करना कठिन है। अक्सर क्लाइंट्स को अहसास होता है कि एआई सपने महत्वाकांक्षी थे। वे अंततः पहले जितने ही कोडर्स रखते हैं।’ अवसर और वास्तविकता इंफोसिस के फाउंडर्स में से एक नंदन नीलेकणी का अनुमान है कि एआई संबंधित सेवाओं का मूल्य 2030 तक 300-400 अरब डॉलर हो सकता है। हालिया नतीजे उम्मीद जगा रहे हैं। टीसीएस की एआई बिक्री 17% बढ़ी और राजस्व का 6% है। एचएसबीसी के योगेश अग्रवाल के अनुसार, ‘पारंपरिक सॉफ्टवेयर को एआई द्वारा निगल जाने के दावों के ठोस मामले बहुत कम हैं।’ जीसीसी की भूमिका ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) भी टेक वर्कर्स को रोजगार दे रहे हैं। चूंकि कंपनियां अब तकनीक को व्यवसाय का कोर मानती हैं, इसलिए एआई की मदद से इन-हाउस कोडिंग बढ़ने से भी भारतीय आईटी उद्योग को लाभ होगा। नवंबर 2022 में चैटजीपीटी के आने के बाद जिस ‘विघटन’ की आशंका थी, वह तीन साल बाद भी नहीं आया है। राजस्व बढ़ रहा है और नियुक्तियां जारी हैं। वाजिब हुए दाम; एआई के साथ ‘रीसेट मोड’ में इंडस्ट्री साल 2026 में आईटी सेक्टर पर काफी दबाव देखा गया है। आईटी इंडेक्स पीक से 28% टूट चुका है। मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक आईटी सेक्टर खत्म नहीं हो रहा, बल्कि ‘रीसेट फेज’ में है। •वैल्युएशन में बदलाव: वर्तमान में आईटी सेक्टर का वैल्युएशन इसके दो साल की अनुमानित कमाई का 15.4 गुना (15.4x) है। •बेंचमार्क के बराबर: आईटी सेक्टर हमेशा निफ्टी 50 इंडेक्स से लगभग 17% प्रीमियम (महंगा) पर ट्रेड करता था, लेकिन अब यह निफ्टी 50 के बराबर आ गया है। इसे ही ‘वैल्यू जोन’ कहा जा रहा है क्योंकि अब शेयरों में छाई ‘अतिरिक्त चमक’ खत्म हो गई है। सलाह: वर्तमान दौर में ‘बॉटम फिशिंग’ यानी निचले स्तर पर खरीदारी से बचें। जब तक अर्निंग्स में सुधार के संकेत न मिलें, तब तक इंतजार करना समझदारी। ग्रोथ आउटलुक: धीमी लेकिन स्थिर •चिंताओं के बावजूद, सेक्टर पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो रहा है। उद्योग की वार्षिक आय वृद्धि 3% से 6% रहने की उम्मीद है। यह इसके ऐतिहासिक औसत (7% - 8%) से कम है। आईटी कंपनियां कैसे खुद को बदल रही हैं? •नया मॉडल: कंपनियां ‘फिक्स्ड-प्राइस’ कॉन्ट्रैक्ट की ओर बढ़ रही हैं और प्रति कर्मचारी लाभ सुधार रही हैं। •कार्यबल: एआई-कुशल प्रतिभाओं को ऊंचे वेतन पर नियुक्त किया जा रहा है और मौजूदा कर्मचारियों को ‘री-स्किल’ किया जा रहा है। •साझेदारी: कंपनियां एआई-नेटिव कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रही हैं। एआई के आगे कैसे टिकी आईटी इंडस्ट्री एआई से काम करवाना मुख्य उद्देश्य होगा। पुरानी प्रणालियों को आधुनिक बनाना कठिन है क्योंकि उनमें डेटा साइलो और तकनीकी कमियां होती हैं। -नंदन नीलेकणी, को-फाउंडर, इंफोसिस ( एआई इंपैक्ट)

दैनिक भास्कर 23 Mar 2026 3:04 pm

ओप्पो का 7000mAh बैटरी वाला K14 फोन लॉन्च:50MP कैमरा और 45W फास्ट चार्जिंग मिलेगी, शुरुआती कीमत 17999 रुपए

ओप्पो ने भारत में अपनी K-सीरीज का नया स्मार्टफोन ओप्पो K14 5G लॉन्च कर दिया है। इस फोन में 7,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। कंपनी ने इसे तीन कलर ऑप्शन्स और तीन स्टोरेज कॉन्फिगरेशन में पेश किया है। इसकी शुरूआती कीमत 17,999 रुपए रखी गई है। 7000mAh की बैटरी और 45W की चार्जिंगइस फोन का सबसे मजबूत पक्ष इसकी बैटरी लाइफ है। इसमें 7,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो लंबे बैकअप का दावा करती है। इसे जल्दी चार्ज करने के लिए बॉक्स में 45W का सुपरवूक फास्ट चार्जर मिलता है। भारी बैटरी होने के बावजूद फोन की मोटाई 8.6mm है और इसका वजन करीब 216 ग्राम है। डिस्प्ले और प्रोसेसर की डिटेल्सफोन में 6.75 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसमें 1125 निट्स की पीक ब्राइटनेस मिलती है, जिससे धूप में भी स्क्रीन साफ नजर आती है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6300चिपसेट का इस्तेमाल किया गया है। यह फोन एंड्रॉयड 15 पर आधारित कंपनी के लेटेस्ट ColorOS 15 पर काम करता है। 50 मेगापिक्सल का मेन कैमराफोटोग्राफी के लिए फोन के रियर पैनल पर डुअल कैमरा सेटअप है। इसमें f/1.8 अपर्चर वाला 50-मेगापिक्सल का मेन सेंसर और 2-मेगापिक्सल का मोनोक्रोम लेंस दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फ्रंट में 8-मेगापिक्सल का कैमरा मिलता है। फोन से 1080p रेजोल्यूशन पर 60fps तक की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। धूल और पानी से सुरक्षा के लिए ट्रिपल रेटिंगओप्पो ने इस फोन की ड्यूरेबिलिटी पर काफी काम किया है। कंपनी का दावा है कि यह फोन IP66, IP68 और IP69 रेटिंग के साथ आता है। इसका मतलब है कि फोन काफी हद तक धूल और पानी के तेज प्रेशर को झेल सकता है। सिक्योरिटी के लिए इसमें साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G के साथ वाई-फाई 5, ब्लूटूथ 5.4 और USB टाइप-C पोर्ट मिलता है।

दैनिक भास्कर 21 Mar 2026 4:08 pm

फायरबेस स्टूडियो से बनाएं एप, प्रोड्यूसर एआई से म्यूजिक:गूगल लैब्स के 35 एआई टूल्स, एप बनाएं, पढ़ाई करें, संगीत भी सीखें

अगर आपको एआई एक्सपेरिमेंट्स पसंद हैं तो गूगल लैब्स पर 35 एक्सपेरिमेंटल टूल्स मौजूद हैं, जो पढ़ाई से लेकर एप बनाने, म्यूजिक कंपोज करने और वर्चुअल ट्रैवल तक में आपकी मदद कर सकते हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई टूल बिना किसी तकनीकी ज्ञान के भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। मूल गूगल लैब्स 2002 से 2011 तक मौजूद था, जहां जीमेल और गूगल मैप्स जैसे बड़े प्रोडक्ट्स को विकसित किया गया। बाद में इसे बंद कर दिया गया था। 2023 में इसे एआई एक्सपेरिमेंट के लिए दोबारा शुरू किया गया है। फायरबेस स्टूडियो से बनाएं फ्री में 5 मिनट में अपनी वेबसाइट, गूगल फ्लो से एनिमेशन वीडियोज प्रोड्यूसर एआई: अब म्यूजिक बनाना भी एआई के जरिए संभव - यह टूल टेक्स्ट से पूरा गाना बना सकता है। - गूगल डीपमाइंड के हाई-फिडेलिटी म्यूजिक मॉडल पर आधारित है यह टूल। - उदाहरण के लिए लिखें, मेरा नाम अमित है, मेरे नाम पर एक गाना बनाएं। इस प्रॉम्प्ट पर एआई आपके लिए पूरा म्यूजिक तैयार कर देगा। कैसे इस्तेमाल करें: producer.ai पर जाएं। गूगल फ्लो: बिना कैमरा के फिल्मी सीन तैयार करें... एनिमेशन बनाएं - यह प्रोफेशनल-जैसे वीडियो सीन बना सकता है। कैमरा मूवमेंट और शॉट्स नियंत्रित रहते हैं। - वियो 3 वीडियो मॉडल पर आधारित है। उदाहरण: आजकल सोशल मीडिया पर एनिमेटेडेट वीडियोज चर्चित हैं। एजुकेशन हो या एंटरटेनमेंट, इस तरह के वीडियोज यहां से बनाना आसान है। कैसे इस्तेमाल करें: गूगल लैब्स में Flow खोजें। टॉकिंग टूर्स इंडिया: घर बैठे ही ऐतिहासिक जगहों की सैर करें - गूगल स्ट्रीट व्यू और एआई गाइड का मिश्रण है। - जगहों का इतिहास और महत्व सुनाता है। - वर्चुअल विजिट जैसा अनुभव देता है। उदाहरण: टूल पर जाएं और किसी भी लोकेशन पर क्लिक करें। यह टूल उसकी कहानी सुनाता है। कैसे इस्तेमाल करें: Talking Tours India पर जाएं और मैप पर लोकेशन सिलेक्ट करें। फायरबेस स्टूडियो: एप बनाना अब डेवलपर का काम ही नहीं - यह क्लाउड-आधारित डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म है, जहां ब्राउजर में ही एप बना सकते हैं। कोई सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं। एआई ही स्क्रीन, कोड और डेटाबेस तैयार करता है। - बस लिखें कि एक ऐसा एप बनाएं, जहां लोग अपनी फैमिली का निजी सोशल मीडिया बना सकें और इस पर एआई आपके लिए एप बना देगा। - डेवलपर्स को कई टूल्स में कोड, डेटाबेस और टेस्टिंग करनी पड़ती है, पर यहां सब एक जगह होता है। कहां इस्तेमाल करें: firebase.studio खोलें। प्रॉम्प्ट डालकर एप बनाएं। लिटिल लैंग्वेज सेशन: स्पैनिश से फ्रेंच तक, यहां पर नई भाषाएं सीखें - कैमरा से ऑब्जेक्ट पहचानकर शब्द बताता है। - AI से स्लैंग में बातचीत की प्रैक्टिस करता है। उदाहरण: फोन को किसी वस्तु पर रखें। एआई उस वस्तु का नाम आपकी चुनी भाषा में बता देगा। यह रियल वर्ल्ड उदाहरणों से सिखाता है। कहां इस्तेमाल करें: Little Language Lessons पर जाएं। ऑब्जेक्ट को स्कैन करें। मूविंग स्क्रिप्ट्स: संस्कृत लिपि को समझना आसान करता है - यह एआई आधारित विजुअल टूल देवनागरी अक्षरों की संरचना समझाता है। - अक्षरों को स्ट्रोक दर स्ट्रोक बनते हुए दिखाता है - आकार और बनावट का तर्क समझाता है। - उदाहरण: ॐ लिखते समय हर रेखा का प्रवाह और अर्थ दिखाया जाता है। यह इसी तरह नॉलेज देता है। कहां इस्तेमाल करें: Moving Scripts खोजें। लर्न योर वे: कठिन विषयों को क्विज-गेम्स के जरिए पढ़ने का विकल्प देगा - यह एआई टूल किसी भी कठिन विषय को आपकी समझ के मुताबिक बदल देता है…। जिस विषय या डॉक्यूमेंट को समझना है, उसे पेस्ट करें या अपलोड करें। क्विज हो या कोई खेल, बताएं कि आपको किस फॉर्म में आपको समझना है। कहां करें इस्तेमाल: Google Labs में Learn Your Way टाइप करें और इसे एक्सेस करें।

दैनिक भास्कर 21 Mar 2026 2:00 pm

जोमैटो से खाना मंगवाना महंगा हुआ:प्लेटफॉर्म फीस 19% बढ़ाई, हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 देने होंगे

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। कंपनी ने शुक्रवार से ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 यानी ₹2.40 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। GST जोड़ने के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। बता दें कि जोमैटो प्लेटफॉर्म रोजाना 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। स्विगी के करीब पहुंचे प्लेटफॉर्म फीस के दाम जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी अभी टैक्स समेत लगभग ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। आमतौर पर देखा गया है कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपने दाम बढ़ा देती है। जोमैटो ने 2 रुपए से की थी प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले सितंबर-2025 में 20% का इजाफा किया गया था। अगस्त 2023 में जोमैटो ने अपना मार्जिन बढ़ाने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए पहली बार 2 रुपए का प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था। कंपनी ने बाद में इसे बढ़ाकर 3 रुपए कर दिया और 1 जनवरी 2024 को 4 रुपए कर दिया। फिर इसे धीरे-धारी बढ़ाकर 7 रुपए कर दिया था। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ऑपरेशनल कॉस्ट बनी वजह दामों में इस बढ़ोतरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल महंगा होने से डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ता है और कंपनी के लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, जोमैटो अपनी प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफा) सुधारने के लिए भी समय-समय पर प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव करती रहती है। दीपिंदर ने 2008 में बनाई थी फूडीबे ये खबर भी पढ़ें… प्रीमियम पेट्रोल ₹2.35 प्रति लीटर तक महंगा हुआ: भोपाल में दाम 117 रुपए प्रति लीटर तक हुए, सामान्य पेट्रोल पुरानी कीमत पर ही मिलेगा सरकारी तेल कंपनियों ने आज यानी 20 मार्च को स्पीड और पावर जैसे प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें ₹2.09-₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ा दी है। भोपाल में इसकी कीमत बढ़कर करीब 117 रुपए पहुंच गई है। सामान्य पेट्रोल की कीमत में बदलाव नहीं हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 20 Mar 2026 3:59 pm

पोको C85x स्मार्टफोन लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹10,999:32MP कैमरा के साथ 120Hz डिस्प्ले, पावर बैकअप के लिए 6300mAh बैटरी

शाओमी की सब ब्रांड पोको ने भारतीय बाजार में अपना नया बजट स्मार्टफोन पोको C85x लॉन्च कर दिया है। यह कंपनी की C-सीरीज का लेटेस्ट मॉडल है। फोन में सबसे खास 32MP कैमरा के साथ 6300mAh बैटरी और 120Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले है। कंपनी का दावा है कि यह बैटरी दो दिन तक का बैकअप दे सकती है। यह फोन खासतौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है जो कम बजट में 5G कनेक्टिविटी और लंबी बैटरी लाइफ चाहते हैं। पोको C85x को भारत में दो स्टोरेज वैरिएंट में पेश किया गया है। इसके 4GB रैम + 64GB स्टोरेज वाले बेस वैरिएंट की कीमत 10,999 रुपए और 4GB रैम + 128GB स्टोरेज वाले वैरिएंट की कीमत 11,999 रुपए है। फोन ब्लैक, गोल्ड और ग्रीन कलर ऑप्शन में अवेलेबल है। इसकी बिक्री 14 मार्च दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: IP57 रेटिंग के साथ मस्कुलर लुक मटेरियल और फिनिश: फोन का बैक पैनल और फ्रेम हाई-क्वालिटी पॉलीकार्बोनेट (प्लास्टिक) से बना है। बैक पैनल पर एक खास टेक्सचर दिया गया है, जिससे हाथ में पकड़ने पर यह अच्छी ग्रिप देता है और उंगलियों के निशान कम पड़ते हैं। पोको C85x: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.9 इंच का HD+ एडॉप्टिव सिंक डिस्प्ले है। इसका रिजॉल्यूशन 7201600 पिक्सल है। स्मूद स्क्रॉलिंग के लिए इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 240Hz टच सैंपलिंग रेट दिया गया है। 800 निट्स की पीक ब्राइटनेस से तेज धूप में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। परफॉरमेंस: इसमें ऑक्टा-कोर यूनिसोक T8300 प्रोसेसर दिया गया है, जिसकी क्लॉक स्पीड 2.2GHz है। ग्राफिक्स के लिए माली-G57 जीपीयू मिलता है। यह फोन एंड्रॉएड 16 पर बेस्ड कंपनी के लेटेस्ट हाइपर OS 3 पर रन करता है। मेमोरी: इसमें 4GB LPDDR4x रैम है। स्टोरेज को माइक्रो SD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए रियर में डुअल कैमरा सेटअप है, जिसमें 32 मेगापिक्सल का मेन सेंसर और एक सेकेंडरी लेंस है। रियर कैमरा 10x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। सेल्फी के लिए फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। बैटरी और चार्जिंग: पावर बैकअप के लिए इसमें 6300mAh की बैटरी दी गई है। यह 15W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसमें 7.5W रिवर्स चार्जिंग का फीचर भी है, जिससे आप दूसरे फोन या ईयरबड्स को चार्ज कर सकते हैं। कनेक्टिविटी: इसमें 5G के साथ Wi-Fi 5, ब्लूटूथ 5.4, GPS और डुअल सिम सपोर्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं।

दैनिक भास्कर 19 Mar 2026 4:56 pm

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X भारत सहित दुनियाभर में डाउन:अमेरिका में सबसे ज्यादा 14,000 से शिकायतें; एक्सेस नहीं कर पा रहे यूजर्स

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की सर्विस दुनियाभर में ठप हो गई है। डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, भारत सहित दुनिया के कई देशों में यूजर्स को एप और डेस्कटॉप दोनों वर्जन में एक्सेस करने में परेशानी हो रही है। आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट 'डाउनडिटेक्टर' के मुताबिक, यूजर्स न तो नई पोस्ट देख पा रहे हैं और न ही प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए लिंक लोड हो रहे हैं। यहां तक कि टाइमलाइन भी रिफ्रेश नहीं हो पा रही है। अमेरिका में सबसे ज्यादा 29,000 से ज्यादा यूजर्स प्रभावित अमेरिका में कुछ ही मिनटों में 29,000 से ज्यादा यूजर्स ने सर्विस डाउन होने की रिपोर्ट की। इसके अलावा, ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य देशों में भी डाउन की शिकायतें आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्लेटफॉर्म के कोर सर्वर या ग्लोबल सर्विस में आई तकनीकी खामी के कारण हुई है। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मोबाइल एप पर दिख रहा 'कैन नॉट रिट्रीव पोस्ट' का मैसेज X के मोबाइल एप का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। एप ओपन करने पर स्क्रीन पर एक मैसेज आ रहा है- कैन नॉट रिट्रीव पोस्ट्स एट दिस टाइम। प्लीज ट्राई अगेन लेटर। खास बात यह है कि इस दौरान यूजर्स को नोटिफिकेशन तो मिल रहे हैं, जिससे पता चलता है कि बैकग्राउंड में एक्टिविटी हो रही है, लेकिन वे उन पोस्ट्स या मैसेज को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। भारत में 4,500 से ज्यादा लोगों ने की शिकायत भारत में रात करीब 8:17 बजे से यूजर्स ने प्लेटफॉर्म में गड़बड़ी की शिकायत शुरू हुईं। शुरुआत में करीब 1,200 लोगों ने रिपोर्ट किया, लेकिन महज 15 मिनट के भीतर यानी 8:30 बजे तक यह संख्या बढ़कर 4,500 के पार पहुंच गई। ज्यादातर यूजर्स का कहना है कि वे बार-बार स्क्रीन को नीचे खींचकर (पुल टू रिफ्रेश) अपडेट करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्क्रीन ब्लैंक आ रही है या सिर्फ लोडिंग हो रही है। X के तीन आउटेज इलॉन मस्क ने 2022 में खरीदा था X 27 अक्टूबर 2022 को इलॉन मस्क ने ट्विटर (अब X) खरीदा था। ये डील 44 बिलियन डॉलर में हुई थी। आज के हिसाब से ये रकम करीब 3.84 लाख करोड़ रुपए होती है। मस्क ने सबसे पहले कंपनी के चार टॉप ऑफिशियल्स CEO पराग अग्रवाल, फाइनेंस चीफ नेड सेगल, लीगल एग्जीक्यूटिव विजया गड्डे और सीन एडगेट को निकाला था। 5 जून 2023 को लिंडा याकारिनो ने X के CEO के तौर पर जॉइन किया था। इससे पहले वो NBC यूनिवर्सल में ग्लोबल एडवर्टाइजिंग एंड पार्टनरशिप की चेयरमैन थीं।

दैनिक भास्कर 18 Mar 2026 10:01 pm