MG मोटर्स 16 जुलाई को भारत में अपनी नई 'न्यू एनर्जी व्हीकल' टेक्नोलॉजी को पेश करने जा रही है। कंपनी इवेंट में अपनी नई प्लग-इन हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक व्हीकल तकनीक को शोकेस करेगी। इस नए पावरट्रेन का इस्तेमाल कंपनी अपनी अपकमिंग SUV में कर सकती है, जो वुलींग स्टारलाइट 560 का रीबैज्ड वर्जन होगी। भारत में '520' कोडनेम वाली यह SUV 1000km से ज्यादा की कुल रेंज और 7-सीटर ऑप्शन के साथ आ सकती है। कार 2026 के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकती है। एक्सटीरियर डिजाइन और डायमेंशन इंटीरियर और केबिन फीचर्स कार के अंदर डुअल-टोन थीम के साथ एक मिनिमलिस्टिक (साफ-सुथरा) डैशबोर्ड लेआउट दिया गया है। परफॉर्मेंस: इंजन, मोटर और ड्राइविंग रेंज अंतरराष्ट्रीय बाजार (इंडोनेशिया स्पेसिफिकेशन) के मुताबिक इस SUV को दो पावरट्रेन ऑप्शंस के साथ पेश किया गया है, जिसके भारत में भी आने की उम्मीद है: सेफ्टी फीचर्स सुरक्षा के मामले में इस SUV में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है। कार में पैसेंजर्स की सुरक्षा के लिए 6 एयरबैग्स, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), हिल-होल्ड असिस्ट और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे स्टैंडर्ड फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा, हादसे से बचाने के लिए इसमें एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) तकनीक भी शामिल की गई है। इन गाड़ियों से होगा मुकाबला भारतीय बाजार में लॉन्च होने के बाद इस कार के प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) मॉडल का मुकाबला महिंद्रा XUV 7XO और टाटा सफारी जैसी दमदार डीजल/पेट्रोल कारों से होगा। वहीं, इसका पूरी तरह से इलेक्ट्रिक (EV) वैरिएंट सीधे तौर पर अपकमिंग महिंद्रा XEV 9S को टक्कर देगा।
टेक ब्रैंड Ai+ ने भारत में दो नए बजट-फ्रेंडली 5G स्मार्टफोन नोवा 2 प्रो और नोवा 2 नियो लॉन्च किए हैं। कंपनी ने दोनों ही हैंडसेट्स को 15 हजार रुपए की रेंज में उतारा है। इस सीरीज में सबसे खास नोवा 2 प्रो है, जिसके बैक पैनल पर कस्टमाइजेबल LED लाइट्स दी गई हैं, जो फोन में आने वाले कॉल, मैसेज और नोटिफिकेशन्स के हिसाब से अपना कलर बदलती हैं। इसके अलावा दोनों ही डिवाइसेज में हैवी पावर बैकअप के लिए 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। Ai+ ने दोनों स्मार्टफोन को दो-दो वैरिएंट्स में पेश किया है। नोवा 2 नियो की कीमत 12,999 रुपए से शुरू होती है। वहीं, नोवा 2 प्रो की शुरुआती कीमत 15,999 है। नोवा 2 प्रो पर ₹1000 का बैंक डिस्काउंट मिलेगा। Ai+ नोवा 2 प्रो: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: नोवा 2 प्रो में 2340x1080 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.9-इंच की फुल HD+ स्क्रीन दी गई है। यह डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट और 800nits की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करती है। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए इस पर 2.5D ग्लास की लेयर दी गई है। फोन की थिकनेस 8.2mm और वजन 213 ग्राम है। इसके बैक पैनल पर कस्टमाइजेबल LED लाइट्स लगी हैं, जो कॉल या मैसेज आने पर ब्लिंक करती हैं। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर डुअल रियर कैमरा सेटअप है। इसमें 48 मेगापिक्सल का मेन सोनी IMX582 सेंसर है, जो 8 मेगापिक्सल अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस के साथ मिलकर काम करता है। सेल्फी के लिए 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: फोन एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड नेक्स्ट क्वांटम OS पर चलता है। इसमें 6 नैनोमीटर फेब्रिकेशन पर बना मीडियाटेक डायमेंसिटी 7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जो 2.4 गीगाहर्ट्ज तक की क्लॉक स्पीड पर रन करता है। ग्राफिक्स के लिए माली-G610 जीपीयू है। बैटरी और अन्य फीचर्स: इसमें 33W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ 6000mAh की बैटरी दी गई है। फोन में स्टीरियो स्पीकर्स, 3.5mm हेडफोन जैक, FM रेडियो और साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर जैसी सुविधाएं हैं। पानी और धूल से बचाव के लिए इसे IP65 रेटिंग मिली है। Ai+ नोवा 2 नियो: स्पेसिफिकेशन्स डिस्प्ले: नोवा 2 नियो 5G में 720 x 1600 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.74-इंच की HD+ डिस्प्ले दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 600nits ब्राइटनेस सपोर्ट करती है। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए इसके रियर पैनल पर 48 मेगापिक्सल का सोनी IMX582 लेंस के साथ डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलता है, जबकि फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा लगा है। इस बजट फोन में भी सुरक्षा के लिए IP65 की रेटिंग दी गई है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: परफॉर्मेंस के लिए नोवा 2 नियो में 6 नैनोमीटर वाला मीडियाटेक डायमेंसिटी 6300 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर और आर्म माली-G57 MC2 जीपीयू दिया गया है। यह फोन भी एंड्रॉयड 16 बेस्ड नेक्स्ट क्वांटम OS पर काम करता है। बैटरी: पावर बैकअप के लिए इसमें भी 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। यह 18W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।
मोटोरोला ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन मोटो G77 पावर लॉन्च कर दिया है। फोन में सबसे खास 7000mAh की बड़ी बैटरी और रैम बूस्ट टेक्नोलॉजी है, जो वर्चुअल रैम के जरिए फोन को 24GB रैम की ताकत देती है। मोटोरोला ने इसे 50 मेगापिक्सल सोनी कैमरा और मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6400 प्रोसेसर के साथ उतारा है। मोटो G77 पावर को 8GB रैम और 128GB स्टोरेज के सिंगल वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी कीमत 25,999 रुपए है। कंपनी फोन पर लॉन्च ऑफर में 2 हजार रुपए का डिस्काउंट दे रही है, जिससे इसे 23,999 में खरीदा जा सकेगा। फोन ऑफिशियल वेबसाइट और ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए अवेलेबल है। डिजाइन और बिल्ड: प्रीमियम प्लास्टिक-पॉलीकार्बोनेट मटीरियल डिस्प्ले: 6.72-इंच का फुल HD+ स्क्रीन और 120Hz रिफ्रेश रेट फोन में 2400 1080 पिक्सल रेजोल्यूशन वाला 6.72-इंच का फुल HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 120Hz रिफ्रेश रेट और 1050nits की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती है, जिससे आउटडोर या तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देती है। डिस्प्ले की सेफ्टी के लिए इस पर गोरिल्ला ग्लास 7i का प्रोटेक्शन दिया गया है। परफॉर्मेंस: मीडियाटेक डायमेंसिटी 6400 ऑक्टाकोर प्रोसेसर कैमरा: 50 मेगापिक्सल का सोनी LYT600 सेंसर पावर बैकअप: 7000mAh के साथ 3 दिन का बैकअप अन्य फीचर्स: डुअल-बैंड वाई-फाई और GPS कनेक्टिविटी के लिए इसमें मजबूत 5G नेटवर्क सपोर्ट, लेटेस्ट ब्लूटूथ, डुअल-बैंड वाई-फाई, GPS और चार्जिंग व डेटा ट्रांसफर के लिए टाइप-C पोर्ट दिया गया है। बेहतर ऑडियो एक्सपीरियंस के लिए इसमें स्टीरियो स्पीकरों के साथ 3.5mm का ऑडियो जैक भी बरकरार रखा गया है।
ओप्पो ने बजट सेगमेंट में नया इयरबड्स एनको एयर 5 लॉन्च किया है। जिन लोगों को कम प्राइस रेंज में एक अच्छा बेस, स्मार्टफोन के साथ अच्छी कनेक्टिविटी, डुअल पेयरिंग और इन-इयर डिटेक्शन जैसे फीचर्स चाहिए, तो उन्हें ये सभी इस इयरबड में मिल जाएंगी। हमने इसका ENC टेस्ट किया, बहुत सारे गाने सुने और मूवीज भी देखीं हैं, तो चलिए इसके साउंड प्रोफाइल के बारे में जानते हैं... केस, डिजाइन और कंफर्ट इसके केस का शेप काफी अच्छा है और हाथ में यह हल्का सा सॉफ्ट फील होता है, जिससे वह सस्ते प्लास्टिक वाली फील नहीं देता। फ्रंट में आपको एक LED लाइट है, नीचे टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट और एक रिसेट बटन दिया गया है। इयरबड्स काफी कॉम्पैक्ट और लाइटवेट हैं। पहनने पर इनका लुक बढ़िया आता है और इसकी इयरटिप कानों में कंफर्टेबली फिट हो जाती है। इसके साथ हमने पूरी मूवी देखी और गाने सुने लेकिन, कानों में जरा भी दर्द या चुभन महसूस नहीं हुई। शार्प मूवमेंट या अचानक सिर हिलाने पर भी ये कानों से गिरते नहीं हैं। यानी आप इसे जिम में वर्कआउट या रनिंग के दौरान आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। ये इयरबड्स IP55 की रेटिंग के साथ आते हैं, जो इसे पानी और पसीने से भी सेफ रखते हैं। एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन और माइक ओप्पो एनको एयर 5 में 12mm का ड्राइवर मिलता है। साथ ही इसमें 3+ 3 (टोटल 6) माइक्रोफोन्स दिए गए हैं, जिससे यह इयरबड अप टू 52dB तक का शोर कैंसिल कर देता है। साल 2026 के हिसाब से यह अच्छा नॉइज कैंसिलेशन है। यह सिर्फ नॉर्मल एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन के साथ नहीं आता, बल्कि इसमें हाइब्रिड एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन मिलता है। इसका फायदा यह है कि आप खुद सिलेक्ट कर सकते हैं कि आपको बाहर की आवाज को कितना कम करना है- हाई, मीडियम या लो। इसमें एक ऑटो ANC का फीचर भी है। इसे सेट करने के बाद आप चाहे घर पर हों, बाहर घूम रहे हों या ट्रेन में सफर कर रहे हों, यह 6 माइक्रोफोन्स की मदद से ऑटोमेटिकली बाहर के शोर को डिटेक्ट करके उसके हिसाब से नॉइज कैंसिलेशन को एडजस्ट कर लेता है। हमारी टेस्टिंग के दौरान हर स्टेज पर इसका नॉइज कैंसिलेशन साफ महसूस हो रहा था और यह बहुत अच्छी तरह काम करता है। कनेक्टिविटी, स्मार्ट फीचर्स और बैटरी लाइफ यह इयरबड AAC को सपोर्ट करता है और इसमें डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी मिलती है, यानी आप एक साथ दो डिवाइस को पेयर कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें इन-इयर डिटेक्शन का फीचर भी है, जो मूवीज या कोई भी कंटेंट देखते समय कान से निकालते ही वीडियो पॉज हो जाता है। इस बार ओप्पो ने बैटरी भी इंप्रूव की है। केस में 530mAh और हर एक इयरबड में 62mAh की बैटरी मिलती है। अगर पावर बैकअप की बात करें, तो बिना ANC यूज किए सिंगल इयरबड करीब 13 घंटे का बैकअप दे देता है और केस के साथ 54 घंटे का एप्रोक्सिमेट बैकअप मिलता है। अगर आप ANC ऑन करके भी यूज करते हैं, तो इयरबड करीब 6 घंटे चल जाता है, जिसमें आप बिना रुके दो मूवी देख सकते हैं। गेमर्स के लिए इसमें एक डेडिकेटेड गेम मोड भी है, जो शूटिंग गेम्स खेलते वक्त गनशॉट्स जैसी ऑडियो को एनहांस कर देता है। साउंड क्वालिटी और बेस अब बात करते हैं सबसे जरूरी चीज यानी इसके साउंड की। सबसे पहले वॉल्यूम की बात करें तो फुल वॉल्यूम पर भी आवाज बिल्कुल फटती नहीं है और कोई क्रैकलिंग साउंड सुनाई नहीं देती। ओप्पो ने इसकी ट्यूनिंग बहुत अच्ची की है। एप के प्रीसेट्स- जैसे अल्टीमेट साउंड, वोकल्स और बेस सभी अच्छे से काम करते हैं। 'अल्टीमेट साउंड' पर बाय-डिफॉल्ट ऑडियो काफी एनहांस होकर आती है। अगर आप न्यूज देख रहे हैं, तो वोकल्स प्रोफाइल सिलेक्ट कर सकते हैं, जिससे आवाज साफ हो जाती है। मूवी देखते समय 'थंडरिंग बेस' सिलेक्ट करने पर बेस का लेवल काफी बढ़ जाता है। इयरबड्स में आपको हैवी बेस मिलता है। इसके अलावा, जिन्हें अपना पर्सनल साउंड कस्टमाइज करना पसंद है, उनके लिए एप में इक्वलाइजर का ऑप्शन भी दिया गया है। कमियां: वॉल्यूम कंट्रोल फीचर इसमें सिर्फ एक चीज पसंद नहीं आई, वो है इसका वॉल्यूम कंट्रोल करने का तरीका। आमतौर पर प्रीमियम इयरबड्स में स्वाइप कंट्रोल होता है या फिर एक साइड टैप करने से वॉल्यूम कम और दूसरी साइड से बढ़ता है। लेकिन, इसमें वॉल्यूम कम या ज्यादा करने के लिए आपको इयरबड को लॉन्ग-प्रेस करके होल्ड रखना पड़ता है, जो मुझे थोड़ा टाइम-कंज्यूमिंग और अजीब लगा। निष्कर्षवॉल्यूम कंट्रोल के अलावा मुझे इस इयरबड में कोई कमी नहीं दिखी। जिस साउंड प्रोफाइल और बेहतरीन फीचर्स के साथ ओप्पो एनको एयर 5 आता है, वह इस बजट में वाकई टॉप-नॉच है।
एआई के दौर में करियर सुरक्षित रखने की चिंता स्वाभाविक है। विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा, कानून, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्रों में जहां मानवीय निर्णय, संवेदनशीलता और कुशल कारीगरी की जरूरत है, वहां नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। इसके अलावा एआई को लेकर एक अलग ट्रेंड भी है। टॉप यूनिवर्सिटी के होनहार छात्र अब मोटी सैलरी वाली नौकरियों को छोड़कर खुद का बिजनेस शुरू करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के छात्र चार्ल्स म्यूलबर्गर ने बड़ी कंपनी में इंटर्नशिप करने के बजाय खुद का एआई स्टार्टअप शुरू किया है। एआई के चलते डेटा व तकनीक से जुड़ी नौकरियों में तेजी आएगी, जहां हाथों के हुनर की जरूरत है वहां नौकरी जाने का खतरा नहीं चिकित्सा - इलाज के फैसले लेने वाली नौकरियां सुरक्षित फार्मासिस्ट हीरा मलिक के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में दफ्तर का काम, दवाइयों की पर्ची बनाना और कॉल उठाना जैसे काम एआई से प्रभावित हो सकते हैं, पर डॉक्टरों और नर्सों की जरूरत बनी रहेगी। डॉ. रियाज आगा के मुताबिक प्लास्टिक सर्जरी सुरक्षित है। शिक्षा - पढ़ाई और बच्चों की देखभाल में इंसानी जरूरत शिक्षा में एआई टीचर्स की जगह लेने पर नहीं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जनरेशनल सक्सेस लैब के फाउंडर शरथ जीवन कहते हैं कि छात्रों को सीखने के लिए भरोसेमंद वयस्क रिश्तों की जरूरत हमेशा रहेगी। चाइल्डकेयर एक्सपर्ट विगडॉर्ट्ज के मुताबिक बच्चे की देखभाल के लिए लोग इंसान ही चाहते हैं। कारीगरी - हाथों से होने वाला काम हमेशा सुरक्षित रहेगा फेडरेशन ऑफ मास्टर बिल्डर्स के सीईओ ब्रायन बेरी का कहना है कि निर्माण क्षेत्र में एआई का असर सीमित है। राजमिस्त्री, बढ़ई और प्लास्टर जैसे हाथों के हुनर हमेशा सुरक्षित रहेंगे। हमें इस क्षेत्र के बारे में सोच बदलनी होगी क्योंकि ये काम एआई से ज्यादा भरोसेमंद हैं। बैंकिंग-फाइनेंस - रूटीन जॉब्स पर असर, डेटा और एआई रोल बढ़ेंगे ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के सीनियर बैंकिंग एनालिस्ट टोमाश नोएट्जेल के मुताबिक, बैंकिंग में ग्राहकों की सामान्य सेवा और दफ्तर के दोहराव वाले काम एआई की चपेट में आएंगे। हालांकि, डेटा और तकनीक से जुड़े रोल बढ़ेंगे। जोखिम परखने और फैसले लेने वाले काम सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि बैंकों को इन पर भी इंसान की निगरानी की जरूरत है।
टेक ब्रांड आइटेल ने भारत में नया बजट स्मार्टफोन 'आइटेल A100 प्रो' लॉन्च किया है। यह इस साल फरवरी में आए A100 का अपग्रेडेड वर्जन है। फोन 100 दिन की फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट वारंटी के साथ आया है, जो कई महंगे फोन के साथ भी नहीं मिलती है। तो चलिए जानते हैं इसमें क्या खास है... डिजाइन: पत्थर पर भी गिरने के बाद फोन सेफ रहेगा सबसे पहले बात करें इसके डिजाइन की तो, पहली नजर में फोन प्रीमियम नजर आता है। बैक पैनल पर टेक्स्चर है, जिससे हाथ में सॉलिड ग्रिप बनती है। फोन मिलिट्री ग्रेड सर्टिफाइड है, यानी पत्थर पर भी गिरने के बाद ये सेफ रहेगा। पोर्ट्स और स्विच की बात करें, तो दाईं तरफ पावर और वॉल्यूम बटन्स हैं। ऊपर की तरफ आपको IR ब्लास्टर मिलता है, जिससे आप अपने घर का TV या एसी कंट्रोल कर सकते हैं। और हां, म्यूजिक लवर्स के लिए 3.5mm का ऑडियो जैक भी मौजूद है। डिस्प्ले: 90Hz रिफ्रेश रेट से स्क्रॉलिंग, एप ओपनिंग अच्छी बात करें इसके डिस्प्ले की तो। यहां 6.6-इंच की बड़ी HD+ IPS LCD स्क्रीन मिलती है, जो 90Hz के रिफ्रेश रेट के साथ आती है, जिससे स्क्रॉलिंग और एप ओपनिंग का एक्सपीरियंस काफी स्मूथ मिलता है। फ्रंट में वॉटरड्रॉप नॉच है। बेजल्स साइड से तो पतले हैं, लेकिन नीचे की तरफ थोड़े चौड़े हैं, जो इस बजट में नॉर्मल है। इसमें आईफोन की तरह एक डायनैमिक बार भी है। यानी जब भी आप फोन चार्जिंग पर लगाएंगे, कोई कॉल या नोटिफिकेशन आएगा, तो ऊपर कैमरे के पास एक पॉप-अप खुलेगी, जो देखने में बहुत कूल लगती है। परफॉर्मेंस: यूनिसोक का T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर बात करें परफॉर्मेंस की तो इसमें यूनिसोक का T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर लगा है। फोन 3GB रैम और 64GB स्टोरेज के साथ सिंगल वैरिएंट में आता है। कंपनी ने इसमें 'मेमोरी फ्यूजन' तकनीक दी है, जिससे वर्चुअल रैम की मदद से आप इसकी रैम को 8GB तक बढ़ा सकते हैं। A100 प्रो लेटेस्ट एंड्रॉइड 15 गो एडिशन पर चलता है। गूगल के गो एप्स बहुत हल्के होते हैं, इसलिए कम रैम होने के बावजूद फोन हैंग नहीं होता, बहुत स्मूथ चलता है और आपकी बैटरी भी बचाता है। डेली यूज, सोशल मीडिया और नॉर्मल काम के लिए इसकी परफॉर्मेंस अच्छी है। फोन में सबसे खास अल्ट्रालिंक टेक्नोलॉजी दी गई है। इस फीचर से आप मोबाइल नेटवर्क नहीं होने पर भी बिना सिग्नल के कॉल कर पाएंगे। फोटोग्राफी: दिन की रोशनी में ठीक क्वालिटी कैमरे की बात करें तो बैक पैनल पर LED फ्लैश के साथ 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और फ्रंट में 5 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा है। बजट के हिसाब से यह एक बेसिक कैमरा है, जिससे आप दिन के उजाले में ठीक-ठाक फोटो खींच सकते हैं और वीडियो कॉलिंग का काम आराम से हो जाएगा। पावर बैकअप की बात करें तो, फोन में 5000mAh की बैटरी दी गई है। बॉक्स में 10W का चार्जर है। नॉर्मल यूज पर यह बैटरी आराम से डेढ़ से दो दिन तक का बैकअप देती है। फाइनल वर्डिक्ट: मजबूत फोन चाहने वालों के लिए बेस्ट ₹8,999 की कीमत में आइटेल A100 प्रो उन लोगों के लिए बेस्ट है जिन्हें एक मजबूत, टिकाऊ और बिना टूटने-फूटने के डर वाला फोन चाहिए। मिलिट्री ग्रेड बॉडी, फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट और बिना सिग्नल कॉल करने वाली तकनीक इसे इस बजट का पैसा वसूल फोन बनाती है।
इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में किशोरों के लिए दर्जनों नए सुरक्षा फीचर लॉन्च कर चुकी हैं। कंपनियों का दावा है कि इनके जरिए बच्चों को अनजान लोगों, आपत्तिजनक कंटेंट और सोशल मीडिया की लत से बचाया जा सकता है। लेकिन न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शोधकर्ताओं ने इन प्लेटफॉर्म के सुरक्षा फीचर की जांच की और पाया कि कई फीचर या तो ठीक से काम नहीं करते, कुछ को कुछ सेकंड में बायपास किया जा सकता है, जबकि कुछ सिर्फ दावों तक सीमित हैं। इन तीन प्लेटफॉर्म्स में सामने आईं बड़ी खामियां स्नैपचेट - अंजानों से बचाने का दावा, पर यूजरनेम से पहुंचे बच्चों तकस्नैपचैट ने 2023 में कहा था कि अब किशोर सिर्फ उन्हीं लोगों को दिखाई देंगे, जो उनके परिचित (Mutual Friends) हों। लेकिन रिचर्स में पाया गया कि यदि किसी को किशोर का यूजरनेम पता हो, तो वह आसानी से उसका अकाउंट खोज सकता है। स्नैपचैट खुद भी किशोरों को ऐसे वयस्कों की प्रोफाइल सुझा रहा था, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं था। इंस्टाग्राम - अकाउंट प्राइवेट, लेकिन एल्गोरिदम से अजनबी सुझावमेटा ने टीन अकाउंट लॉन्च करते समय कहा था कि किशोरों के अकाउंट डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रहेंगे और अनचाहे संपर्क कम हो जाएंगे। लेकिन जब शोधकर्ताओं ने एक बच्ची का नया अकाउंट बनाया, तो Suggested for You सेक्शन में लगभग सभी प्रोफाइल ऐसे वयस्क पुरुषों की थीं जिन्हें वह जानती भी नहीं थी। यूट्यूब - स्क्रीन टाइम लिमिट खुद बंद करने के सुझाव दे रहा यूट्यूब यूट्यूब किशोरों के लिए 60 मिनट की स्क्रीन टाइम लिमिट और ‘टेक अ ब्रेक’ रिमाइंडर देता है। रिसर्च में पाया गया कि समय पूरा होते ही यूट्यूब खुद ही Ignore limit for today और Change limit जैसे विकल्प दिखा देता है। यूट्यूब का कहना है कि यदि माता-पिता फैमिली लिंक के जरिए स्क्रीन टाइम तय करें, तो बच्चे उसे बदल नहीं सकते। सुरक्षा फीचर मौजूद, लेकिन उन्हें खोज पाना मुश्किल इन प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षा फीचर इतने जटिल मेन्यू में छिपे हुए हैं कि सामान्य अभिभावकों को उनके बारे में जानकारी ही नहीं होती। कुछ फीचर डिफॉल्ट रूप से चालू नहीं थे। मेटा ने कहा- टीन फीचर्स की वजह से स्क्रीन टाइम घटा मेटा ने कहा कि टीन अकाउंट लागू होने के बाद किशोर कम संवेदनशील कंटेंट देख रहे हैं, रात में Instagram पर कम समय बिता रहे हैं और अनचाहे संपर्क भी घटे हैं। विशेषज्ञ बोले- समस्या कमजोर सुरक्षा टूल मेटा की पूर्व मनोवैज्ञानिक एनेके बफोन का कहना है कि कई बार ये टूल या तो अधूरे होते हैं या इतने जटिल कि उनका पूरा फायदा मिल ही नहीं पाता। इन्हें और सख्त बनाने की जरूरत है।
गूगल एआई:आपका डेटा इस्तेमाल कर रहा गूगल; प्राइवेसी सुरक्षित रखने तुरंत बदलें ये 5 सेटिंग्स
गूगल ने अपनी टर्म्स ऑफ सर्विस और एआई डेटा नीति में बदलाव किया है। अब जेमिनी, गूगल सर्च और लेंस जैसे एआई फीचर्स के साथ साझा किए गए फोटो, ऑडियो और अन्य फाइलों का इस्तेमाल एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। अगर आप नहीं चाहते कि आपका डेटा एआई ट्रेनिंग में इस्तेमाल हो, तो कुछ सेटिंग्स बदलकर इसे सीमित कर सकते हैं। गूगल के नए नियमों के तहत यदि आप जेमिनी से बातचीत करते हैं, गूगल लेंस में फोटो अपलोड करते हैं या एआई फीचर्स के साथ ऑडियो और फाइल साझा करते हैं, तो यह डेटा एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ मामलों में गुणवत्ता जांच के लिए प्रशिक्षित मानव समीक्षक भी इस डेटा को देख सकते हैं। हालांकि अभी जीमेल, गूगल ड्राइव और गूगल फोटोज का सामान्य डेटा इस एआई ट्रेनिंग कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। निजी जानकारी देने से बचें आज गूगल सिर्फ एक सर्च इंजन ही नहीं है। कई लोग इससे मेडिकल सलाह पूछते हैं। कानूनी दस्तावेज समझते हैं। ऑफिस फाइलों का विश्लेषण भी कराते हैं। निजी फोटो एडिट कराते हैं। आवाज से जेमिनी से बातचीत करते हैं। ऐसे में कई बार यूजर अनजाने में निजी जानकारी भी एआई के साथ साझा कर देते हैं। यही वजह है कि प्राइवेसी विशेषज्ञ संवेदनशील दस्तावेज एआई टूल्स पर अपलोड करने से बचने की सलाह देते हैं। कैसे रोकें एआई ट्रेनिंग के लिए डेटा का इस्तेमाल? 1. सर्च सेटिंग्स - Google अकाउंट में Search Services Settings पर जाएं। 2. सेव मीडिया बंद करें - Save Media विकल्प का टिक हटाएं। इससे एआई के लिए हिस्ट्री सेव नहीं होगी। 3. ऑटो डिलीट चालू करें - सर्च हिस्ट्री को 3, 6, 18 या 36 महीने बाद अपने-आप डिलीट होने के लिए सेट करें। 4. सर्च पर्सनलाइजेशन बंद करें - यदि आप नहीं चाहते कि गूगल आपकी पुरानी गतिविधि के आधार पर परिणाम दिखाए, तो सर्च पर्सनलाइजेशन बंद कर दें। 5. माय एक्टिविटी - My Activity में जाकर देखें कि किस-किस प्लेटफॉर्म से डेटा सेव हो रहा है। इसे रिव्यू करें। अगर सेटिंग्स बंद कर देंगे तो क्या बदलेगा? - गूगल सर्च, मैप्स, लेंस और जेमिनी पहले की तरह काम करेंगे, लेकिन वे कम व्यक्तिगत हो सकते हैं। उदाहरण के लिए: -आपके पसंदीदा रेस्तरां की सिफारिशें कम सटीक होंगी। - पुरानी सर्च जल्दी नहीं मिलेंगी। - गूगल मैप्स आपकी पसंद के हिसाब से स्थान कम सुझाएगा। - एआई को आपकी पिछली गतिविधि का कम संदर्भ भी मिलेगा। किन चीजों को एआई पर अपलोड करने से बचें? विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AI चैटबॉट्स पर यह जानकारी साझा न करें... - आधार-पैन-पासपोर्ट कॉपी - बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय दस्तावेज - पासवर्ड - मेडिकल रिपोर्ट - कानूनी अनुबंध - ऑफिस की गोपनीय फाइलें - ओटीपी
दुनिया के सबसे अमीर टेक-अरबपतियों और एआई से नए-नए बने करोड़पतियों का ‘शौक’ और ‘फितूर’ आम रईसों से बिल्कुल अलग है। पुराने अमीर लोग जहां सोना, हीरे-जवाहरात या महंगी पेंटिंग्स खरीदते थे, वहीं आज के टेक दिग्गज कुछ बेहद अजीब और अप्रत्याशित चीजों पर पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग अपनी गायों को मैकडामिया नट्स खिलाते हैं, ये दुनिया का सबसे महंगा मेवा है। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भविष्य में आने वाले प्रलय से बचने की तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने करोड़ों रु. खर्च कर बंदूकें, एंटीबायोटिक दवाएं, पानी और इजराइली डिफेंस फोर्स वाले ‘मिलिट्री-ग्रेड गैस मास्क’ रखे हैं। ऑल्टमैन ने न्यूक्लियर रेडिएशन से बचाने वाले पोटैशियम आयोडाइड का स्टॉक कर रखा है। उन्होंने कैलिफोर्निया में घने जंगलों के बीच जमीन ले रखी है, जहां वे संकट के समय प्राइवेट प्लेन से उड़कर जा सकते हैं। विज्ञान की चमत्कारिक कहानियों के क्रेजी इलॉन मस्क ने जेम्स बॉन्ड की फिल्म में इस्तेमाल हुई असली सबमरीन कार को करीब 9.2 करोड़ रु. में खरीदा। वे अपने घर में सजावट के लिए स्पेस रॉकेट्स का मलबा व कल-पुर्जे रखते हैं। वहीं, मस्क की ‘स्पेसएक्स’ के शेयरों से रातों-रात करीब 34 करोड़ रु. की मालकिन बनीं वियतनाम की 50 वर्षीय डेटा साइंटिस्ट ह्यूयेन चिप के गैरेज में कोई रोल्स रॉयल नहीं, बल्कि 4.2 लाख रु. का एक पुराना फायर ब्रिगेड ट्रक है। उनके घर की मेज पर 9 लाख रु. का उल्कापिंड (स्पेस रॉक्स) रखा है। चिप कहती हैं, ‘मुझे नहीं पता मैं इस फायर ट्रक का क्या करूंगी, शायद अपने 3 साल के बच्चे के जन्मदिन पर बच्चों को घुमाऊं। लेकिन इस नई दौलत ने मुझे अपने सपने पूरे करने की आजादी दी है।’ अनुभवों, व्यक्तिगत फितूरों पर निवेश का रुझान यूबीएस की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, केवल अमेरिका में पिछले साल 4.4 लाख लोग नए करोड़पति बने हैं। लेकिन पारंपरिक लग्जरी ब्रांडों (जैसे गुच्ची, अरमानी) के लिए ये नए रईस एक अनसुलझी पहेली बन गए हैं। कंसल्टेंसी फर्म ‘बैन एंड कंपनी’ की पार्टनर फेडेरिका लेवातो के अनुसार, आज का टेक-करोड़पति गुच्ची के लेदर बैग या अरमानी के सूट पर पैसे खर्च करने के बजाय ‘अनुभवों’ और ‘व्यक्तिगत फितूरों’ पर निवेश कर रहा है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप का डेटा बताता है कि पुराने अमीर लोगों की तुलना में नए टेक रईस कपड़ों और लेदर आइटम पर 33% कम खर्च करते हैं।
मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने तीन साल से अधिक समय के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वापसी की है। उन्होंने कंपनी का सबसे नया और एडवांस AI मॉडल 'म्यूज स्पार्क 1.1' लॉन्च करने की घोषणा की है। जुकरबर्ग का यह कदम एआई मार्केट में OpenAI और एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज कंपनियों को टक्कर देने की मेटा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। कम कीमत में कोडिंग और एजेंटिक परफॉर्मेंस मार्क जुकरबर्ग ने अपनी पोस्ट में लिखा, आज हम म्यूज स्पार्क 1.1 रिलीज कर रहे हैं। यह बहुत ही कम कीमत पर एक मजबूत एजेंटिक और कोडिंग मॉडल है। यह हमारे नए मेटा मॉडल API और मेटा AI में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल टूल यूज, कंप्यूटर यूज और एजेंटिक परफॉर्मेंस में सबसे मजबूत है। यह 10 लाख टोकन कॉन्टेक्स्ट विंडो के साथ लंबे समय तक चलने वाले टास्क को आसानी से पूरा कर सकता है। यह समानांतर चलने वाले सब-एजेंट्स को काम सौंपने में सक्षम है और इसे डेस्कटॉप, मोबाइल या ब्राउज़र पर कंप्यूटर इंटरफेस का उपयोग करने के लिए ट्रेन किया गया है। म्यूज स्पार्क से डेवेलपर्स बना सकेंगे एप्लिकेशन्स जुकरबर्ग ने बताया कि डेवेलपर्स म्यूज स्पार्क का उपयोग करके नए एप्लिकेशन्स बना सकेंगे। कंपनी का पूरा फोकस बहुत कम लागत पर मजबूत एजेंटिक और मल्टीमॉडल मॉडल देने पर है। अमेरिका में डेवेलपर्स अब मेटा मॉडल API के पब्लिक प्रीव्यू के जरिए म्यूज स्पार्क 1.1 का एक्सेस पा सकते हैं। कम इंसानी दखल के पूरे होंगे जटिल काम मेटा ने इस अपग्रेडेड मॉडल को कोडिंग, एजेंटिक वर्कफ़्लो और सॉफ़्टवेयर ऑटोमेशन के लिए अपना अब तक का सबसे सक्षम एआई सिस्टम बताया है। यह मॉडल न केवल कोड लिख और डिबग कर सकता है, बल्कि सॉफ़्टवेयर टूल्स के साथ इंटरैक्ट भी कर सकता है। यह टेक्स्ट, इमेज और वीडियो को समझकर बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के बेहद जटिल और मल्टी-स्टेप टास्क को पूरा करने की क्षमता रखता है। सुपरइंटेलिजेंस लैब्स ने किया तैयार इस मॉडल को मेटा की 'सुपरइंटेलिजेंस लैब्स' ने डेवलप किया है। इससे पहले कंपनी ने अप्रैल में अपना ओरिजिनल म्यूज स्पार्क मॉडल पेश किया था, जिसका मकसद एआई के क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों के साथ अंतर को कम करना था। इस नए लॉन्च के साथ मेटा ने पेड एआई मॉडल API मार्केट में औपचारिक रूप से एंट्री कर ली है। 20 डॉलर का फ्री क्रेडिट और प्राइसिंग का गणित मेटा मॉडल API के लिए साइन अप करने वाले डेवेलपर्स को 20 डॉलर का फ्री क्रेडिट मिलेगा, जिसके बाद वे 'पे-एज-यू-गो' (जितना इस्तेमाल, उतना भुगतान) प्राइसिंग मॉडल पर शिफ्ट हो जाएंगे। मेटा ने इस सर्विस की कीमत 1.25 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट टोकन और 4.25 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन तय की है। यह कीमत OpenAI के एंट्री-लेवल 'GPT-5 mini' और एंथ्रोपिक के 'क्लॉड हायकू 4.5' से अधिक है, लेकिन एंथ्रोपिक के प्रीमियम 'क्लॉड सॉनेट 4.6' मॉडल से कम है। वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम के ल्लामा मॉडल्स बदलेंगे म्यूज स्पार्क 1.1 को फिलहाल मेटा AI एप और वेबसाइट के 'थिंकिंग मोड' में रोल आउट किया जा रहा है। आने वाले समय में यह मॉडल धीरे-धीरे वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक और मेटा के एआई-इनेबल्ड स्मार्ट ग्लासेस में मौजूद मौजूदा ल्लामा मॉडल्स की जगह लेगा। हाल ही में मेटा ने अपनी सुपरइंटेलिजेंस लैब्स द्वारा विकसित पहला इमेज-जनरेशन मॉडल 'म्यूज इमेज' भी पेश किया था, जिससे कंपनी का जेनरेटिव एआई पोर्टफोलियो और मजबूत हुआ है। नॉलेज पार्ट: क्या होते हैं एजेंटिक मॉडल और टोकन कॉन्टेक्स्ट विंडो?
सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने भारत में नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। इसकी कीमत टैक्स मिलाकर 1,34,166 रुपए रखी गई है। यह रेगुलर स्मार्टफोन से बिल्कुल अलग है, जो बिना सिम और नेटवर्क के बजाय सीधे सैटेलाइट की मदद से काम करता है। फोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नेटवर्क विहीन और ऑफ-ग्रिड जगहों पर भी बिना किसी रुकावट के वॉयस कॉल करने की सुविधा देता है, जबकि आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फोन नजदीकी मोबाइल टावर की मदद से काम करते हैं। सेटेलाइट फोन को खरीदने के लिए सरकार की मंजूरी लेना होगी। आपातकालीन स्थिति में कनेक्टिविटी आसान होगा इस फोन का फायदा उन सुदूर इलाकों में भी काम करेगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाते हैं। इससे आपदा या आपातकालीन स्थितियों में लोगों से संपर्क बनाए रखना आसान हो जाएगा। कंपनी ने बताया कि इस हैंडसेट को ग्लोबल सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर 'इनमारसैट' के साथ पार्टनरशिप में बनाया गया है। खरीदने के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य यह आम फोन या गैजेट की तरह सीधे दुकान पर नहीं मिलेगा। भारत में सैटेलाइट फोन को लेकर कड़े नियम हैं। इस फोन को खरीदने या इस्तेमाल करने से पहले यूजर को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) से मंजूरी या ऑथराइजेशन लेना अनिवार्य होगा। सरकार की बिना मंजूरी के सैटेलाइट फोन रखना या इसे ऑपरेट करना भारतीय नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। BSNL का यह सैटेलाइट फोन रोजमर्रा के स्मार्टफोन यूजर्स के लिए नहीं है। इसे उन लोगों और ऑर्गेनाइजेशन्स के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में भरोसेमंद कम्युनिकेशन की जरूरत होती है।
टेक कंपनी नथिंग ने भारत में अपनी नई 'b' सीरीज का पहला ट्रांसपेरेंट स्मार्टफोन नथिंग फोन (4b) लॉन्च कर दिया है। यह फोन अपने अनोखे डिजाइन, नथिंग के सिग्नेचर ग्लिफ इंटरफेस, 6000mAh बैटरी और क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 6 जेन 4 प्रोसेसर के साथ आया है। फोन में कई एडवांस्ड AI फीचर्स भी दिए गए हैं। नथिंग फोन (4b) को दो वैरिएंट में उतारा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 34,999 रुपए रखी गई है। कंपनी लॉन्च ऑफर में 7.5% का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस दे रही है। इसके बाद फोन की प्रभावी शुरुआती कीमत ₹29,999 हो जाती है। स्मार्टफोन की सेल 14 जुलाई 2026 से शुरू होगी। डिजाइन, बिल्ड क्वालिटी और कलर्स नथिंग ने अपने इस नए फोन में सिग्नेचर ट्रांसपेरेंट लुक को बरकरार रखा है, जो हाथ में प्रीमियम फील देता है। फोन के बैक पैनल पर नया 'ग्लिफ बार' दिया गया है। इसमें 45 अलग-अलग कंट्रोल होने वाली मिनी LED लाइट्स हैं। ये लाइट्स बिना स्क्रीन ऑन किए ही यूजर को चार्जिंग स्टेटस, नोटिफिकेशन, रिकॉर्डिंग और कस्टम अलर्ट की जानकारी देती हैं। डिस्प्ले और परफॉर्मेंस कैमरा और बैटरी बैकअप सॉफ्टवेयर और AI फीचर्स स्मार्टफोन एंड्रॉइड 16 पर बेस्ड नथिंग OS 4.1 पर चलता है। इसमें चैटजीपीटी इंटीग्रेशन, गूगल जेमिनी और 'सर्कल टू सर्च' जैसे कई एसेंशियल AI टूल्स इन-बिल्ट मिलते हैं। कंपनी फोन के साथ 3 साल के एंड्रॉएड अपडेट और 6 साल के सिक्योरिटी अपडेट देगी। मार्केट में इसका सीधा मुकाबला मोटोरोला एज 70 फ्यूजन और सैमसंग गैलेक्सी A27 5G जैसे स्मार्टफोन्स से होगा।
अगर आपके बच्चों की तस्वीरें, बैंक खातों के पासवर्ड और आपकी डिजिटल पहचान एक ही ‘की’ से सुरक्षित हो और वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए, तो सब खतरे में पड़ सकता है। कॉमर्शियल एयरलाइन पायलट रेयान पेटिट के साथ ऐसा ही हुआ। विमानन क्षेत्र में काम करने वाले पेटिट जानते हैं कि सुरक्षा के लिए हमेशा कई स्तरों पर बैकअप होता है, पर डिजिटल दुनिया में उनकी सुरक्षा एक कमजोर कड़ी पर टिक गई थी। एक साधारण-सा टेक्स्ट मैसेज आया और उनकी पूरी डिजिटल पहचान उनसे छिन गई। पढ़िए उनकी कहानी और एक्सपर्ट से जानिए किन गलतियों से बचना चाहिए... मुझे गोल्डमैन साक्स एपल कार्ड पर एक संदिग्ध लेन-देन का ‘फ्रॉड अलर्ट’ मैसेज मिला। मैसेज में सिर्फ ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देने को कहा गया था। सुरक्षा के लिए मैंने ‘ना’ लिखकर भेज दिया। कुछ ही मिनटों बाद कॉल आया। कॉलर आईडी पर एपल कार्ड सपोर्ट का नंबर दिख रहा था। मुझे शक नहीं हुआ, क्योंकि मैसेज भी उसी आधिकारिक i Message थ्रेड में एपल लोगो व ग्रे बबल के साथ आ रहे थे। कॉलर ने कहा कि मेरी पहचान सत्यापित करने के लिए कोड भेजा जा रहा है। जैसे ही कोड बताया, सब कुछ बदल गया। मैंने पहचान पूछी, तो उसने मेरा सोशल सिक्योरिटी नंबर व जन्मतिथि तक बता दी। तब लगा कि मैं ठगी का शिकार हो चुका हूं। आंखों के सामने मेरी पूरी डिजिटल दुनिया बिखरने लगी। मैं देख रहा था कि एपल वॉलेट से कैश एप, वीसा कार्ड और एपल कार्ड एक-एक करके गायब हो रहे थे। हैकर ने मेरे अकाउंट में अपना फोन नंबर जोड़ दिया और मेरा नंबर हटा दिया। कुछ ही देर बाद मैं अपने ही अकाउंट से बाहर हो गया। मेरा आईफोन रीसेट हो गया और बेकार डिवाइस बनकर रह गया। मैं बिना डिजिटल वॉलेट व पैसों के होनोलूलू पहुंचा। किसी तरह लैपटॉप पर वाई-फाई जोड़कर पत्नी को मैसेज किया। उन्होंने मेरे लिए उबर बुक की। एपल स्टोर पहुंचने पर पता चला कि हैकर ने फोन पर एक्टिवेशन लॉक लगा दिया है। पहचान व खरीद के सबूत दिखाने के बावजूद एपल कर्मचारी मदद नहीं कर सके। नुकसान सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं था। हैकर के हाथ मेरी एक लाख से ज्यादा फैमिली फोटो, पासवर्ड और मैसेज हिस्ट्री लग चुकी थी। उसने मेरे निवेश बेचकर नकदी निकाल ली। पत्नी को मेरे नाम पर मैसेज भेजकर हजारों डॉलर ठग लिए। मेरे अकाउंट खाली हो गए। स्मार्टवॉच का डेटा हटा दिया, इससे वह मुझे नहीं पहचान सकी। पुलिस भी मदद नहीं कर सकी।’- रेयान ऑथेंटिकेटर एप रखें साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट केविन मिटनिक सुझाव देते हैं,‘अपने डिजिटल वर्ल्ड की एक ‘मास्टर की’ न रखें। लॉगिन हैक होते ही बैंक, फोटो व डेटा खतरे में पड़ सकते हैं; सभी खाते अलग रखें। हार्डवेयर सिक्योरिटी की या ऑथेंटिकेटर एप इस्तेमाल करें, जिससे पासवर्ड व नंबर लीक होने पर भी अकाउंट सुरक्षित रहता है। कॉलर आईडी पर दिखने वाले नाम या नंबर पर भरोसा न करें। बैंक या संस्थान को कॉल करके जांच कर लें।
सोशल मीडिया पर इंडोनेशिया के एक ऑफिस का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें एक ह्यूमनॉइड रोबोट अपने ही साथियों पर हमला करता दिख रहा है। ये वीडियो 10 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो में हैंडलर रोबोट के स्किल्स का डेमो दे रहा था, इसी दौरान उसने हमला कर दिया। वीडियो देख लोग रोबोट की खराबी मान रहे थे, लेकिन जांच में सामने आया कि यह वीडियो पूरी तरह स्क्रिप्टेड था। मार्शल आर्ट्स करता दिखा रोबोट यह वीडियो सबसे पहले 5 जुलाई को इंडोनेशिया के एक टिकटॉक यूजर 'जोको प्रबुवेसी' ने पोस्ट किया था, जिसके बाद यह दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल गया। वीडियो में रोबोट पहले मार्शल आर्ट्स जैसे मूव्स करता दिखता है। इसके बाद वह अपने पीछे खड़े हैंडलर की तरफ मुड़ता है और एक अन्य व्यक्ति को लात मारकर जमीन पर गिरा देता है। रोबोटिक्स के खतरों पर शुरू हुई बहस वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच डर और चिंता का माहौल बन गया। कई लोगों ने कयास लगाए कि रोबोट का सॉफ्टवेयर फेल हो गया है और वह आउट ऑफ कंट्रोल हो गया। वहीं, कुछ यूजर्स ने इस बात पर चिंता जताई कि भविष्य में एडवांस होते ह्यूमनॉइड रोबोट इंसानों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। रोबोट की फुर्ती दिखाने के लिए की गई थी कोरियोग्राफी 'इंटररेस्टिंग इंजीनियरिंग' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो कोई वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि रोबोट के हैंडलर्स ने एक डेमोंस्ट्रेशन तैयार किया था। रोबोट के फंक्शन और कंट्रोल को दिखाने के लिए पूरे सीक्वेंस को कोरियोग्राफ किया गया था। रोबोट की फुर्ती, बैलेंस और रिस्पॉन्सिवनेस दिखाने के लिए उसके हर मूवमेंट को पहले से प्रोग्राम किया गया था। रोबोटिक तकनीक के एडवांस होने पर छिड़ी चर्चा हालांकि इस वीडियो को सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाया गया था, लेकिन रोबोट के रियलिस्टिक मूवमेंट्स और वहां मौजूद लोगों के रिएक्शन इतने स्वाभाविक थे कि इसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी। लोग इस बात को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि आधुनिक ह्यूमनॉइड रोबोट अब कितने जीवंत और एडवांस हो चुके हैं। चीन में रोबोट ने बच्चे को मारी थी लात ह्यूमनॉइड रोबोट्स से जुड़ी वास्तविक घटनाएं भी हाल ही में सामने आई हैं। जून में चीन के शिनजियांग में एक इवेंट के दौरान 'यूनिट्री जी1' रोबोट जोकर की तरह परफॉर्म कर रहा था। इस दौरान रोबोट ने वहां मौजूद एक बच्चे के पेट में लात मार दी थी। कारण रोबोट ने छात्रा को गले लगाया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, अप्रैल में चीन के शांक्सी प्रांत की 'शीआन यूरेसिया यूनिवर्सिटी' में एक डांस परफॉर्मेंस के दौरान ह्यूमनॉइड रोबोट ने अचानक एक छात्रा को गले लगा लिया था। शुरुआत में यूनिवर्सिटी स्टाफ ने प्री-प्रोग्रामिंग से इनकार करते हुए इसे AI सॉफ्टवेयर की खराबी बताया था। हालांकि, बाद में रोबोट के सप्लायर ने साफ किया कि यह घटना कार्यक्रम स्थल पर सिग्नल ब्रेक होने से हुई थी।
अगर आप एंड्रॉएड स्मार्टफोन यूजर हैं और अपने फोन का बैकअप गूगल अकाउंट पर रखते हैं, तो अब अकाउंट का फ्री 15GB स्टोरेज जल्दी फुल हो सकता है। क्योंकि, गूगल ने अपनी स्टोरेज पॉलिसी बदल दी है। गूगल की अपडेटेड पॉलिसी के मुताबिक, आपके फोन के फोटो-वीडियो ही नहीं, बल्कि अब SMS, कॉल हिस्ट्री और एप डेटा का बैकअप भी आपकी इसी फ्री लिमिट में सेव होगा। यह नियम सबसे पहले नए एंड्रॉयड यूजर्स पर लागू होगा। अभी गूगल फोटोज पर अपलोड इमेज, वीडियो सेव होता है वहीं, मौजूदा यूजर्स के अकाउंट्स में आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब बाय डिफॉल्ट आपके गूगल अकाउंट की ज्यादा स्टोरेज खर्च होगी। अभी तक गूगल आपकी फ्री 15GB क्लाउड स्टोरेज में सिर्फ गूगल फोटोज पर अपलोड की गई इमेज, वीडियो और MMS डेटा में शामिल फोटो-वीडियो को ही काउंट करता था। एक्स्ट्रा स्पेस के लिए भारत में ₹59 से शुरू हैं प्लान गूगल अपनी स्टोरेज पॉलिसी में लगतार बदलाव कर रहा है। इससे पहले मई में कंपनी ने कुछ नए अकाउंट्स के लिए फोन नंबर लिंक न करने की स्थिति में डिफॉल्ट फ्री स्टोरेज लिमिट को 15GB से घटाकर 5GB करने की टेस्टिंग शुरू की थी। यदि आप अपने अकाउंट के लिए अतिरिक्त स्टोरेज खरीदना चाहते हैं, तो भारत में गूगल वन के प्लान ₹59 प्रति माह से शुरू होते हैं, जिसमें 30GB स्टोरेज मिलती है। इसके अलावा गूगल AI प्लान्स के साथ भी फ्री स्टोरेज दी जा रही है। आप चाहें तो ज्यादा लिमिट वाले पेड गूगल वन या गूगल AI प्लान भी चुन सकते हैं। स्पेस मैनेज करने के लिए नए ऑन-ऑफ टॉगल मिलेंगे इस बदलाव के साथ ही गूगल यूजर्स को बैकअप पर ज्यादा कंट्रोल देने के लिए नए फीचर्स भी जोड़ रहा है। अब तक मिलने वाले प्रति-एप कंट्रोल्स के साथ ही यूजर्स को SMS, MMS, कॉल हिस्ट्री और डिवाइस सेटिंग्स के लिए ऑन-ऑफ टॉगल मिलेंगे। इसकी मदद से आप खुद चुन सकेंगे कि किस डेटा का बैकअप लेना है और किसका नहीं। इसे सेट करने के लिए आप अपने डिवाइस की सेटिंग्स में 'गूगल बैकअप' पेज पर जा सकते हैं। गूगल का दावा- औसत सिर्फ 40MB डेटा बढ़ेगा हालांकि, इस बदलाव से यूजर्स की फ्री स्टोरेज लिमिट जल्दी खत्म होने का डर है, लेकिन कंपनी का कहना है कि इसका असर बेहद मामूली होगा। एक गूगल प्रवक्ता ने कहा, हमने अपनी पॉलिसी को अपडेट किया है, ताकि अब सभी एंड्रॉयड बैकअप डेटा गूगल अकाउंट स्टोरेज में काउंट हों। हमें उम्मीद है कि इससे औसतन केवल 40MB डेटा ही बढ़ेगा। हम यूजर्स को ज्यादा पारदर्शिता और नए कंट्रोल्स भी दे रहे हैं, जिससे वे खुद चुन सकें कि किस डेटा और ऐप का बैकअप लेना है। नॉलेज पार्ट: क्लाउड स्टोरेज और बैकअप डेटा क्या होता है?
मारुति सुजुकी ने मिडसाइज एसयूवी विक्टोरिस के कुछ वैरिएंट्स ₹39,000 तक सस्ते कर दिए हैं। कार 6 वैरिएंट्स- LXI, VXI, ZXI, ZXI(O), ZXI प्लस और ZXI+ (O) के साथ आती है। कंपनी ने विक्टोरिस के ZXi (O) और ZXi+ (O) ट्रिम्स के मैनुअल ट्रांसमिशन (MT) और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन (AT) वैरिएंट्स के दाम घटाए हैं। कार के (O) यानी ऑप्शनल वैरिएंट्स पैनोरमिक सनरूफ के साथ आते हैं, यानी सनरूफ वाला ऑप्शन सस्ता हो गया है। हालांकि, इसके नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन वाले अन्य स्टैंडर्ड वैरिएंट्स की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विक्टोरिस की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 10.50 लाख रुपए है।विक्टोरिस 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग और लेवल-2 ADAS के साथ आती है स्लीक एक्सटीरियर डिजाइन और मॉर्डन इंटीरियर के साथ विक्टोरिस में बड़ी टचस्क्रीन, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले हाइब्रिड और CNG ऑप्शन के साथ लेवल-2 ADAS सेफ्टी फीचर भी शामिल है। कार को भारत एनकैप ने क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिल चुकी है। इसका डिजाइन इलेक्ट्रिक SUV ई-विटारा से लिया गया है। कार का मुकाबला हुंडई क्रेटा, किआ सेल्टोस, टोयोटा अर्बन क्रूजर हायराइडर, MG एस्टर और होंडा इलिवेट जैसी गाड़ियों से रहेगा। डिजाइन: मॉडर्न और बोल्ड लुक विक्टोरिस में सामने की तरफ चंकी एलईडी हेडलाइट्स हैं, जो एक पतली ग्रिल कवर से जुड़ी हुई हैं और ऊपर क्रोम स्ट्रिप है। बॉडी के चारों तरफ मोटी प्लास्टिक क्लैडिंग दी गई है, जो इसे रफ एंड टफ लुक देती है, साथ ही सिल्वर स्किड प्लेट भी लगी है। साइड प्रोफाइल में 18-इंच अलॉय व्हील्स, सिल्वर रूफ रेल्स और स्क्वेयर्स-ऑफ बॉडी क्लैडिंग है, जो इसे स्पोर्ट लुक देते हैं। पीछे की तरफ सेगमेंटेड एलईडी लाइट बार है और 'VICTORIS' की बैजिंग दी गई है। कुल मिलाकर, यह डिजाइन मॉडर्न और प्रीमियम लगता है, जो शहर की सड़कों से लेकर हाईवे तक सूट करेगा। इंटीरियर की बात करें तो डैशबोर्ड टेक-फोकस्ड है, जिसमें 10.25-इंच इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले और थ्री-स्पोक स्टीयरिंग व्हील है। यह 5-सीटर कैबिन देती है, जिसमें फैमिली के लिए काफी स्पेस है। लेदरेट सीट अपहोल्स्ट्री, एम्बिएंस लाइटिंग और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल जैसे फीचर्स इसे कम्फरटेबल बनाते हैं। इंजन और परफॉर्मेंस: तीन ऑप्शन मिलेंगे विक्टोरिस में तीन तरह के पावरट्रेन दिए गए हैं, जो हर तरह के ग्राहक की जरूरत पूरी करेंगे: ये सभी ऑप्शन्स फ्यूल-एफिशिएंट हैं, जो मारुति की खासियत है। डाइमेंशन्स की डिटेल्स अभी पूरी तरह कन्फर्म नहीं हैं, लेकिन यह मिड-साइज होने से ब्रेजा से बड़ी और ग्रैंड विटारा से कॉम्पैक्ट लगेगी। फीचर्स और सेफ्टी: पैनोरमिक सनरूफ और लेवल 2 ADAS विक्टोरिस फीचर्स के मामले में टॉप क्लास है। इंफोटेनमेंट में 10.25-इंच टचस्क्रीन है, जो वायरलेस एप्पल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो सपोर्ट करती है। 8-स्पीकर साउंड सिस्टम डॉल्बी एटमॉस के साथ आता है, साथ ही कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी भी है। कम्फर्ट फीचर्स में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस चार्जर, 8-वे इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, हेड्स-अप डिस्प्ले, कैबिन एयर फिल्टर और पावर्ड टेलगेट शामिल हैं। सेफ्टी की बात करें तो यह मारुति की पहली कार है जिसमें लेवल 2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) है। स्टैंडर्ड फीचर्स में 6 एयरबैग्स, ABS विद EBD, ट्रैक्शन कंट्रोल, ब्रेक असिस्ट, हिल होल्ड कंट्रोल और ISOFIX चाइल्ड सीट एंकरेज हैं। हायर वैरिएंट्स में 360-डिग्री कैमरा, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम है। इस कार को भारत एनकैप क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग दी है।
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक स्टडी में सामने आया है कि पुरानी E10 कंप्लायंट गाड़ियों में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। 10 सवालों के जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: ARAI की इस रिपोर्ट में सबसे मुख्य बात क्या निकलकर सामने आई है? जवाब: ARAI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, E10 गाड़ियों में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर फ्यूल-सिस्टम खराब हो सकता है। इससे गाड़ी के रबर पार्ट्स जैसे पाइप, गैस्केट्स, सील्स और ओ-रिंग्स को नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। सवाल 2: क्या रिपोर्ट को आम जनता के लिए जारी किया गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: नहीं, इस स्टडी रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, यह रिपोर्ट सरकार और देश के प्रमुख वाहन निर्माताओं (OEMs) के बीच इस पूरे मामले पर नीति बनाने और तकनीकी सुधार करने के लिए एक मुख्य रेफरेंस पॉइंट बनी हुई है। सवाल 3: चार पहिया वाहनों के इंजन पर E20 ईंधन के असर को लेकर क्या टेस्टिंग की गई थी? जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, दो OEMs ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए थे। इसमें एक निर्माता की गाड़ी के इंजन ने 400 घंटे की टेस्टिंग के बाद कोई समस्या नहीं दिखाई और उसका परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ सही पाया गया। लेकिन दूसरे निर्माता के मामले में स्थिति अलग रही। सवाल 4: दूसरे चार पहिया वाहन निर्माता की गाड़ी में क्या तकनीकी समस्या देखी गई? जवाब: दूसरे OEM के इंजन की जब 809 घंटे तक टेस्टिंग की गई, तो उसके एग्जॉस्ट वाल्व में 'थर्मोमैकेनिकल फेलियर' देखा गया। हालांकि, इस मामले के जानकारों का कहना है कि एग्जॉस्ट वाल्व के फेल होने के पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। सवाल 5: यह 'थर्मोमैकेनिकल फेलियर' क्या होता है और इससे इंजन को क्या नुकसान है? जवाब: थर्मोमैकेनिकल फेलियर तब होता है जब अत्यधिक गर्मी और तेज व बार-बार होने वाली हलचल (मैकेनिकल स्ट्रेस) एक साथ मिलती हैं। इन दोनों के संयुक्त दबाव के कारण इंजन का एग्जॉस्ट वाल्व मुड़ सकता है, उसमें दरार आ सकती है या वह पूरी तरह से टूट सकता है। सवाल 6: BS-IV और BS-VI इंजन वाली चार पहिया गाड़ियों की टेस्टिंग में क्या अंतर मिला? जवाब: रिपोर्ट में 4-व्हीलर इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के तहत बताया गया है कि टेस्टिंग के दौरान एक BS-IV इंजन का परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य रहा। इसके विपरीत, एक BS-VI टर्बो चार्ज्ड इंजन में 265 घंटे की ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग के बाद ही समस्या देखी गई। सवाल 7: दो पहिया वाहनों पर इस टेस्टिंग का क्या परिणाम रहा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, तीन दो पहिया वाहन निर्माताओं ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए गए थे। इन टेस्ट्स में इंजनों में कोई समस्या नहीं पाई गई। इन्हें E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य पाया गया है। सवाल 8: क्या E20 ईंधन से गाड़ियों के मैटेलिक पार्ट्स या उत्सर्जन पर बुरा असर पड़ता है? जवाब: नहीं, सभी टेस्ट किए गए वाहनों पर इस स्टडी में पाया गया कि E20 ईंधन का मैटेलिक कंपोनेंट्स पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा, E10-कंप्लायंट वाहनों में E20 ईंधन डालने पर भी साइलेंसर से होने वाला उत्सर्जन तय कानूनी सीमाओं के भीतर ही पाया गया। सवाल 9: गाड़ियों की माइलेज या ईंधन की खपत पर इससे क्या प्रभाव पड़ा? जवाब: ARAI की स्टडी में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E10 ईंधन की तुलना में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने पर वाहनों की ईंधन खपत 2% से 6% तक बढ़ जाती है। यानी गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है। हालांकि, ईंधन की खपत में होने वाली यह बढ़ोतरी अलग-अलग गाड़ियों के मॉडल और कैटेगरी के हिसाब से बदलती है। सवाल 10: गाड़ी के स्टार्ट होने, चलने और वाष्पीकरण उत्सर्जन पर क्या असर दिखा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, E20 ईंधन के साथ गाड़ियों का इवैपोरेटिव एमिशन भी पूरी तरह से कानूनी सीमा के भीतर पाया गया। इसके साथ ही, गाड़ियों की स्टार्टेबिलिटी (आसानी से स्टार्ट होना) और ड्राइवैबिलिटी (चलने की परफॉर्मेंस) भी E20 ईंधन के साथ बिल्कुल ठीक पाई गई। सरकार ने कहा था- टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान का सबूत नहीं मिला बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाड़ी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूद रहे थे। उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए थे। पेट्रोल में 25% एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला टाल सकती है सरकार E20 फ्यूल के विरोध के बीच सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। सरकार इस ट्रांजिशन को जल्दबाजी में करने के बजाय धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहती है। सरकार ने शुरुआत में साल 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्लान बनाया था। लेकिन इस टारगेट से बहुत पहले ही E20 फ्यूल (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) को पूरे देश में स्टैंडर्ड पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया है और अब हर जगह यही पेट्रोल मिल रहा है।
अब टेलीग्राम एप पर फ्री पायरेटेड फिल्में और वेब सीरीज नहीं मिल पाएंगी। केंद्र सरकार ने टेलीग्राम से फिल्मों और OTT कंटेंट के पायरेटेड वर्जन देने वाले चैनल्स और ग्रुप्स को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने को कहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज कंपनी को नोटिस भेजा। मंत्रालय ने कहा कि टेलीग्राम अगले 15 दिन में पायरेटेड कंटेंट पर लिए एक्शन की रिपोर्ट सौंपे। एप को 3 दिन में सरकार का दूसरा नोटिस मिला है। इससे पहले टेलीग्राम को 2 जुलाई को एक नोटिस भेजा गया था, जिसमें आईटी मिनिस्ट्री ने यूजरनेम फीचर और यूजर्स की प्राइवेसी पर सवाल पूछे थे। टेलीग्राम पर 3000 से ज्यादा चैनल ब्लॉक हो चुके नीट पेपर लीक के बाद भी टेलीग्राम पर बैन लगा था इससे पहले जून में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की सिफारिश पर सरकार ने पेपर लीक मामले में टेलीग्राम पर 16 जून से 22 जून तक बैन लगा दिया था। इसके अलावा, 21 जून को हुई NEET 2026 की दोबारा परीक्षा को देखते हुए सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक अपना 'मैसेज-एडिटिंग' फीचर बंद रखने का भी आदेश दिया था। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूजरनेम फीचर पर वॉट्सएप के बाद टेलीग्राम को नोटिस: सरकार ने पूछा- इससे साइबर अपराधों का खतरा, रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने वॉट्सएप के बाद गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से पूछा कि उसे यूजरनेम फीचर जारी रखने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। सरकार ने बुधवार को मेटा और वॉट्सएप के यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…
भारत सरकार के E20 यानी 20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के फैसले पर जहां देश में विवाद और विरोध चल रहा है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय ऑयल कंपनियों (OMCs) के E20 पेट्रोल लेने से मना कर दिया है। भूटानी मीडिया 'द भूटानीज' की रिपोर्ट के मुताबिक, भूटान ने भारत से अनुरोध किया है कि जब तक भारतीय बाजार में नॉर्मल पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उन्हें बिना मिलावट वाला पुराना पेट्रोल ही सप्लाई किया जाए। पुरानी स्टोरेज और वाटर लीकेज सबसे बड़ा कारण भूटान के अधिकारियों के मुताबिक, देश का फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर काफी पुराना है। वहां के पेट्रोल पंपों के फ्यूल टैंक जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बने हैं, जिनमें पानी रिसने यानी सीपेज का खतरा रहता है। नॉर्मल पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल में हाइड्रोक्सिल ग्रुप होता है, जो हवा या आसपास की नमी को बहुत तेजी से सोखता है (हाइग्रोस्कोपिक नेचर)। अगर E20 पेट्रोल को ऐसे टैंकों में रखा जाए जहां पानी का रिसाव हो, तो पेट्रोल में पानी मिल जाएगा। इस पानी को पेट्रोल से अलग करना बेहद मुश्किल होता है। इसके अलावा, टैंक में पानी होने से स्टील के टैंकों और पाइपलाइनों में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं। पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों के परफॉर्मेंस की चिंता भूटान का इलाका पूरी तरह से पहाड़ी और ऊंचा-नीचा है। ऐसी चढ़ाई वाले रास्तों पर गाड़ियों को चलने के लिए मैक्सिमम पावर यानी ज्यादा ताकत की जरूरत होती है। भूटानी अधिकारियों को डर है कि एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों को वो परफॉर्मेंस और पावर नहीं दे पाएगा, जो नॉर्मल पेट्रोल देता है। भारत में क्यों हो रहा है E20 पेट्रोल का विरोध? भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि एथेनॉल से माइलेज में मामूली कमी जरूर आती है, लेकिन इससे गाड़ी का पिकअप और इंजन परफॉर्मेंस बेहतर होता है। भूटान को कैसे पता चलेगा कि पेट्रोल में मिलावट है? भूटान अपनी जरूरत का पूरा ईंधन भारत से ही खरीदता है। फिलहाल भूटान भारत से महंगे और हाई-एक्सपोर्ट क्वालिटी वाले पेट्रोल-डीजल की खरीद करता है, जो भारतीय पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले फ्यूल से ज्यादा शुद्ध और महंगा होता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत गलती से E20 पेट्रोल भूटान भेज भी देता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकता है। एथेनॉल वाले पेट्रोल में जरा सा भी पानी मिलते ही उसका रंग दूधिया हो जाता है, जिससे टेस्ट के दौरान तुरंत पकड़ में आ जाएगा। एडवांस नोटिस और लीक-प्रूफ टैंक की मांग चुनौतियों को देखते हुए भूटान सरकार ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से कहा है कि अगर वे भविष्य में एथेनॉल का ब्लेंडिंग प्रतिशत बढ़ाते हैं या पूरी तरह एथेनॉल पेट्रोल ही सप्लाई करने का फैसला करते हैं, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। साथ ही भूटान ने भारत से लीक-प्रूफ टैंक उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।
वॉट्सएप जल्द ही इंस्टाग्राम और टेलीग्राम की तरह यूजरनेम फीचर लाने वाला था। इसके जरिए लोग बिना मोबाइल नंबर शेयर किए एक-दूसरे को मैसेज कर सकते हैं। हालांकि, सुरक्षा चिंताओं के चलते सरकार ने फिलहाल इस फीचर की लॉन्चिंग पर रोक लगा दी है। दरअसल भारत में वॉट्सएप के करीब 90 करोड़ यूजर्स हैं। इसमें कई फीचर्स ऐसे भी हैं जिनके बारे में ज्यादातर यूजर्स नहीं जानते। ये प्राइवेसी बढ़ाने से लेकर चैट को ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाने में मदद कर सकते हैं। आज इन्हीं फीचर्स के बारे में जानते हैं। वॉइस नोट को अपने आप टेक्स्ट में कन्वर्ट करें, चैट को लॉक करने का भी विकल्प; जानें पूरी प्रक्रिया चैट लॉक - इससे चैट को छिपाया जा सकता है। इसके लिए पहले चैट लॉक करें। फिर लॉक्ड चैट्स फोल्डर में जाकर चैट लॉक सेटिंग्स में Hide Locked Chats ऑन करें और एक सीक्रेट कोड बना लें। अब चैट तब तक नहीं दिखेगी, जब तक सर्च बार में वही कोड टाइप नहीं होगा। यूजरनेम फीचर - इसके जरिए किसी को सीधे मैसेज नहीं भेजा जा सकेगा। बातचीत शुरू करने के लिए सामने वाले यूजर को अपना पिन साझा करना होगा। पिन मिलने के बाद ही दोनों के बीच चैट शुरू हो सकेगी। हालांकि भारत सरकार ने इस फीचर पर फिलहाल रोक लगाई है। वॉइस ट्रांसक्रिप्शन - वॉट्सएप अब वॉइस मैसेज ट्रांसक्रिप्ट फीचर देता है, जिससे वॉइस नोट टेक्स्ट में बदल सकते हैं। ऑन करने के लिए... Settings > Chats > Voice Message Transcripts| यह अभी अंग्रेजी-स्पेनिश जैसी कुछ भाषाओं में उपलब्ध है। चैट लिस्ट - अब ऑफिस, परिवार, दोस्तों या किसी प्रोजेक्ट से जुड़ी चैट्स को अलग-अलग लिस्ट्स में रखा जा सकता है। किसी चैट को दबाकर रखें, फिर Add to List चुनें और इसे नई या पुरानी लिस्ट में जोड़ दें। इससे जरूरी चैट्स ढूंढने में समय नहीं लगता है। मेटा एआई सपोर्ट - अब मेटा एआई को अलग चैट में खोलने की जरूरत नहीं है। चैट के दौरान ही एआई से जानकारी लेना, टेक्स्ट लिखवाना, ट्रांसलेट कराना या आइडिया बनाना संभव है। इससे किसी दोस्त से बात करते हुए भी बिना चैट छोड़े जानकारी हासिल की जा सकती है। बिना नंबर सेव के मैसेज - नए व्यक्ति को मैसेज भेजने के लिए नंबर सेव नहीं करना होगा। ब्राउजर में wa.me/91XXXXXXXXXX टाइप करें। यहां 91 भारत का कंट्री कोड है और उसके बाद व्यक्ति का मोबाइल नंबर लिखें। इससे सीधे उस व्यक्ति की वॉट्सएप चैट खुल जाएगी। क्लाउड बैकअप - वॉट्सएप चैट्स तो पहले से एंड-टु-एंड एन्क्रिप्टेड होती हैं, लेकिन गूगल ड्राइव या आई क्लाउड पर इनके सेव बैकअप अलग से सुरक्षित नहीं होता है। ऐसे में यह सेटिंग सक्रिय करना जरूरी हो जाता है। इसे सुरक्षित करने के लिए जाएं: Settings > Chats > Chat Backup > End-to-End Encrypted Backup चुनें। इसके बाद एक पासवर्ड सेट करें। ध्यान रखें कि पासवर्ड भूलने पर बैकअप वापस नहीं मिलेगा।
अब आप आधार सेवा केंद्र जाए बिना मोबाइल से ही अपने आधार में ईमेल ID फ्री में लिंक और अपडेट कर सकते हैं। इसके लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने नए आधार एप में 1 जुलाई से 6 महीने के लिए नई सर्विस शुरू कर दी है। UIDAI के नोटिफिकेशन के मुताबिक, 31 दिसंबर तक यूजर नए आधार एप के जरिए ईमेल ID अपडेट कर सकेंगे। खास बात ये है कि, डिजिटल सर्विस के शुरू होने के सिर्फ दो दिन में ही देशभर में 2.5 लाख से ज्यादा लोग एप से अपना ईमेल ID अपडेट कर चुके हैं। नई सर्विस कैसे काम करेगी? UIDAI के मुताबिक एप के जरिए आधार में अपडेट की प्रोसेस काफी सिंपल है। इसके लिए कोई डॉक्यूमेंट या फिजिकल विजिट की जरूरत नहीं है। पूरी प्रोसेस कुछ मिनटों में हो जाएगी। अगर आपने एप डाउनलोड नहीं किया है तो इसे डाउनलोड करके सेटअप करना होगा। नया आधार एप Android और Apple iOS, दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। फायदा: ईमेल ID अपडेट होने से तुरंत अलर्ट मिलेगा आधार से ईमेल ID जोड़ने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब आपके आधार का इस्तेमाल कर ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट भेजी जाएगी, तो आपको तुरंत ईमेल पर इसका अलर्ट मिलेगा। इससे आपको हमेशा पता रहेगा कि आपका आधार कहां और कौन इस्तेमाल कर रहा है। इस तरह कोई भी आपके पीठ पीछे आपके आधार का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा और धोखाधड़ी का खतरा नहीं रहेगा। आधार के नए एप के फीचर्स 2009 में शुरू हुआ था आधार आधार 2009 में शुरू हुआ था। अब 1.3 अरब यानी 130 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास आधार हैं। पहले पेपर कार्ड था, फिर mAadhaar एप आया। अब डिजिटल इंडिया के तहत फुली डिजिटल एप लाया गया है। सरकार की कोशिश है कि हर सर्विस ऑनलाइन हो जाए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार ने पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) को समन जारी किया है। मंत्रालय मेटा से इस पूरे मामले पर जवाब मांगेगा। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों की निगरानी और रोकथाम के लिए कंपनी की क्या नीतियां और सुरक्षा व्यवस्था हैं। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की आपत्तिजनक या अवैध सामग्री को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार इस बात की जांच करेगी कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन कैसे प्रसारित हुए और उन्हें रोकने के लिए प्लेटफॉर्म की ओर से क्या कदम उठाए गए। केंद्र सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर अवैध, आपत्तिजनक और बच्चों के खिलाफ अपराध से जुड़ी सामग्री को तुरंत हटाएं और ऐसे मामलों को रोकने के लिए कदम उठाएं। 25 फरवरी: सरकार ने श्लील कंटेंट दिखाने पर 5 OTT प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया था इससे पहले सरकार ने 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT) को ब्लॉक किया था। इन प्लेटफॉर्म पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया जा रहा था। जिन प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हुई, उनमें मूडएक्सवीआईपी, कोयल प्लेप्रो, डिजी मूवीप्लेक्स, फील और जुगनू शामिल हैं।
यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने वॉट्सएप के बाद गुरुवार 2 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से पूछा कि उसे यूजरनेम फीचर जारी रखने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। सरकार ने बुधवार को मेटा और वॉट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया था। सरकार ने आशंका जताई कि इससे ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और ठगी की घटनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार ने वॉट्सएप को फिलहाल यह फीचर लागू नहीं करने का निर्देश दिया है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। टेलीग्राम से पूछा- सुरक्षा के लिए क्या किया सरकार ने टेलीग्राम और सिग्नल जवाब मांगा कि इस फीचर के दुरुपयोग और साइबर ठगी रोकने के लिए कौन से सुरक्षा उपाय अपना रहे हैं। दोनों प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम फीचर पहले से उपलब्ध है। नीट पेपरलीक के बाद भी टेलीग्राम पर लगा था बैन पिछले महीने NEET पेपर लीक, फर्जी प्रश्न पत्रों के सर्कुलेशन और धोखाधड़ी के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के आरोप में सरकार ने टेलीग्राम और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। वॉट्सएप ने सरकार को जवाब दिया- हमारा फीचर सुरक्षित वॉट्सएप ने सरकार के नोटिस पर कहा था कि यूजरनेम फीचर में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल हैं, जो फर्जी पहचान, ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों से सुरक्षा करेंगे। भारत वॉट्सएप का सबसे बड़ा बाजार है। देश में इसके 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। पूरी खबर पढ़ें…
ओप्पो ने आज भारत में नई स्मार्टफोन सीरीज रेनो 16 लॉन्च की है। इसमें कंपनी ने रेनो 16 और रेनो 16C पेश किए हैं। दोनों ही मोबाइल को स्टाइलिश लुक, 50 मेगापिक्सल टेलीफोटो और 50MP अल्ट्रा वाइड सेल्फी कैमरा और स्नैपड्रैगन 7 जेन 4 प्रोसेसर के साथ प्रीमियम मिड रेंज में उतारा गया है। ओप्पो रेनो 16C को तीन वैरिएंट में उतारा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 46,999 रुपए है। वहीं, ओप्पो रेनो 16 को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी कीमत 61,999 रुपए से शुरु होती है। इसके अलावा कंपनी ने ओप्पो एनको एयर 5 बड्स भी पेश किए हैं। स्मार्टफोन की सेल 9 जुलाई 2026 से शुरू होगी। लॉन्च ऑफर्स के में बैंक कार्ड्स पर 10% तक इंस्टेंट कैशबैक, एक्सचेंज बोनस, 180 दिन की स्क्रीन डैमेज प्रोटेक्शन और ओप्पो एनको बड्स 3 प्रो+ पर 50% तक की छूट भी दी जा रही है। डिजाइन: भारत में पहली बार होलोवर्स 3D डिजाइन ओप्पो रेनो 16 में दोनों स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसका नया होलोवर्स 3D डिजाइन है। जिसे कंपनी भारत में पहली बार लेकर आई है। स्टारी वाइट कलर वैरियंट में मिलने वाला यह डिजाइन अलग-अलग एंगल से देखने पर 3D इफेक्ट देता है, जिससे फोन का लुक प्रीमियम लगता है। दोनों फोन के डिजाइन को जानते हैं। बैक पैनल और मटीरियल डायमेंशन, वजन और इन-हैंड फील फ्रंट डिस्प्ले, बेजल्स और सेल्फी कैमरा पोर्ट्स और बटन्स कलर और वॉटरप्रूफिंग ओप्पो रेनो 16: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.32 इंच की फुल HD+ एमोलेड स्क्रीन दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है, जिससे फोन का इस्तेमाल और स्क्रॉलिंग बहुत स्मूद लगती है। ये 1800 निट्स की पीक ब्राइटनेस का सपोर्ट करती है, जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: इस फोन में नया और पावरफुल क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 7 जेन 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो 4 नैनोमीटर तकनीक पर बना है। यह पुराने मॉडल के मुकाबले ज्यादा फास्ट है। बेहतर गेमिंग के लिए इसमें AI हाइपर बूस्ट 2.0 और मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी के लिए AI लिंक बूस्ट 4.0 तकनीक दी गई है। फोन लेटेस्ट एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड कलरOS 16 पर चलता है, जो इस्तेमाल करने में काफी आसान है। कैमरा सेटअप: इसके बैक पैनल पर 50-50 मेगापिक्सल के तीन कैमरे हैं। इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा, 50MP का 3.5x टेलीफोटो पोर्ट्रेट कैमरा और 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा शामिल है। वहीं, फ्रंट में भी 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा है, जो 100 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ आता है। इससे ग्रुप सेल्फी में सभी लोग आसानी से आ जाते हैं। फोन के सभी कैमरों से 60fps पर 4K HDR वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। साथ ही इसमें जूम फ्री वीडियो और ऑटो स्ट्रेटन वीडियो जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। स्मार्ट AI फीचर्स: यह फोन कई एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स से लैस है… बैटरी और चार्जिंग: फोन में 6700mAh की बहुत बड़ी और दमदार बैटरी दी गई है, जो आराम से लंबा बैकअप देती है। इस बड़ी बैटरी को तेजी से चार्ज करने के लिए 80W सूपरवूक फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। सेल्फी डिवाइस ओप्पो बबल भी लॉन्च ओप्पो ने रेनो 16 सीरीज के साथ नया स्मार्ट कैमरा एक्सेसरी ओप्पो बबल भी लॉन्च किया है। यह 27.5 ग्राम का डिवाइस है, इसमें 1.73-इंच एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो रियर कैमरे का लाइव प्रीव्यू शो करता है और बेहतर सेल्फी और कंटेंट क्रिएशन में मदद करता है। इसकी कीमत 7,999 रुपए है यह भी फोन के साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर मिलेगा।
वॉट्सएप ने अपने आने वाले 'यूजरनेम' फीचर को लेकर एक डिटेल्ड FAQs यानी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की गाइडलाइन जारी की है। केंद्र सरकार ने हाल ही में वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस जारी कर इस फीचर से होने वाले संभावित फ्रॉड के खतरों पर चिंता जताई थी। सरकार ने चेतावनी दी थी कि जब तक इस मुद्दे पर पूरी संतुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इसे रोलआउट न किया जाए। इसके बाद वॉट्सएप ने स्पष्ट किया है कि वह सुरक्षा के क्या-क्या कदम उठा रहा है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। 9 आसान सवाल-जवाब में जानें वॉट्सएप की नई गाइडलाइन सवाल 1: वॉट्सएप पर यूजरनेम बनाना क्या सभी के लिए जरूरी होगा? जवाब: नहीं, यह बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं है। वॉट्सएप ने साफ किया है कि यूजरनेम बनाना पूरी तरह से ऑप्शनल होगा। अगर आप अपनी पहचान या फोन नंबर छिपाना चाहते हैं, तभी इसे बनाएं। सवाल 2. मुझे अपनी पसंद का यूजरनेम नहीं मिला, तो इसकी क्या वजह हो सकती है? जवाब: इसके तीन मुख्य कारण हो सकते हैं: सवाल 3. मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर फ्रॉड करने वालों को वॉट्सएप कैसे रोकेगा? जवाब: वॉट्सएप का कहना है कि अभी यूजरनेम से मैसेज भेजने का फीचर लाइव नहीं किया गया है, सिर्फ नाम रिजर्व हो रहे हैं। जब यह लाइव होगा और आपको किसी अनजान यूजरनेम से मैसेज आएगा, तो वॉट्सएप आपको उस अकाउंट के देश की जानकारी देगा। साथ ही पहली बार मैसेज आने पर एक वॉर्निंग भी स्क्रीन पर दिखेगी। इसके अलावा कंपनी ब्लॉक और रिपोर्ट करने वाले अकाउंट्स पर कड़ी नजर रखेगी ताकि स्कैमर्स पर तुरंत एक्शन लिया जा सके। सवाल 4. क्या कोई भी अनजान व्यक्ति मेरा यूजरनेम गेस करके मुझे मैसेज भेज सकता है? जवाब: जैसे आज आप वॉट्सएप पर किसी का भी फोन नंबर सर्च नहीं कर सकते, वैसे ही किसी का यूजरनेम भी सर्च नहीं किया जा सकेगा। अनजान लोगों से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप एक बिल्कुल अलग यूजरनेम चुनें और वॉट्सएप के नए सुरक्षा फीचर 'यूजरनेम की' को ऑन कर लें। सवाल 5. यह 'यूजरनेम की' क्या है और यह कैसे सुरक्षा देगी? जवाब: यह आपकी सुरक्षा की एक एक्स्ट्रा लेयर है। इसे एक्टिवेट करने के बाद अगर कोई नया व्यक्ति आपसे कनेक्ट होना चाहता है, तो उसे आपके 'यूजरनेम' के साथ-साथ आपकी 'यूजरनेम की' भी पता होनी चाहिए। इसके बिना वह आपको मैसेज नहीं भेज पाएगा। आप इस 'की' को कभी भी रिसेट कर सकते हैं, जिससे पुराने लोग आपके यूजरनेम के जरिए दोबारा नया संपर्क नहीं कर पाएंगे। सवाल 6. क्या यूजरनेम बनाने के लिए मुझे अपने फेसबुक या इंस्टाग्राम अकाउंट को लिंक करना पड़ेगा? जवाब: अगर आप वही यूजरनेम चाहते हैं जो आपके इंस्टाग्राम या फेसबुक पर है, तो आपको अकाउंट लिंक करना होगा। यह इसलिए किया गया है ताकि फ्रॉड को कम किया जा सके और पहचान वेरिफाई हो सके। हालांकि, एक बार यूजरनेम मिलने के बाद आप चाहें तो इन अकाउंट्स को अनलिंक कर सकते हैं या फिर वॉट्सएप के लिए बिल्कुल अलग यूजरनेम चुन सकते हैं। सवाल 7. क्या मैं अपना वॉट्सएप यूजरनेम बाद में बदल सकता हूं? जवाब: हां, आप इसे बाद में कभी भी बदल सकते हैं, बशर्ते आपका नया पसंदीदा नाम प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होना चाहिए। सवाल 8. इंटरनेट पर मशहूर नामों को एडवांस में बुक करने के दावे किए जा रहे हैं, क्या यह सच है? जवाब: वॉट्सएप ने इसे पूरी तरह अफवाह बताया है। कंपनी ने कहा कि जो लोग पॉपुलर या मशहूर नामों को रिजर्व करने का दावा कर रहे हैं, वे झूठे हैं। सेलिब्रिटीज और सरकारी संस्थाओं के नाम पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें सिर्फ उनके असली और लीगल मालिक ही क्लेम कर सकते हैं। सवाल 9. वॉट्सएप इस फीचर को इतनी जल्दी में क्यों लेकर आया और यह कब से शुरू होगा? जवाब: वॉट्सएप का कहना है कि उन्होंने यूजरनेम लॉन्च करने से काफी पहले ही नाम रिजर्व करने की प्रक्रिया इसलिए शुरू की क्योंकि लोग अपनी पसंद के नाम को लेकर काफी गंभीर होते हैं। कंपनी अभी सरकार और यूजर्स के फीडबैक को सुन रही है। इस साल के अंत में जब इसे पूरी तरह से रोलआउट किया जाएगा, तब तक इसे पूरी तरह सुरक्षित और परफेक्ट बना दिया जाएगा।
भारतीय रेलवे अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को पूरी तरह से अपग्रेड कर रहा है। इस बड़े बदलाव के बाद रेलवे का नया बुकिंग सिस्टम हर मिनट 1.25 लाख टिकट बुक कर सकेगा। यह मौजूदा क्षमता से पूरे 5 गुना ज्यादा है। अभी रेलवे का सिस्टम एक मिनट में सिर्फ 25 हजार टिकट ही प्रोसेस कर पाता है, जिससे तत्काल बुकिंग या भारी लोड के समय यात्री परेशान होते हैं। सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) ने बुधवार को अपने 41वें स्थापना दिवस पर यह जानकारी दी। बढ़ती डिमांड पूरा करेगा नया सिस्टम, हैंग होने की समस्या कम होगी CRIS के मुताबिक, टिकट बुकिंग क्षमता में 5 गुना बढ़ोतरी से सिस्टम की परफॉर्मेंस में बड़ा सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे यात्रियों की रिजर्वेशन की बढ़ती मांग को तेजी से पूरा कर सकेगा। आम यात्रियों को अब तत्काल टिकट बुक करते समय एप या वेबसाइट के बार-बार हैंग होने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। सुपर रेलवन एप: 4.35 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल लॉन्च हुए रेलवे के सुपर एप 'रेलवन' को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। इसका आसान डिजाइन यात्रियों को बेहतर अनुभव देता है। अब तक इसे 4.35 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और इस एप से हर दिन औसतन 10 लाख ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। रेलवे में AI तकनीक से क्या बदलेगा रेलवे अब कामकाज को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इसके आने से ट्रेनों के मेंटेनेंस का काम खराबी आने से पहले ही हो जाएगा, जिससे हादसे रुकेंगे और सुरक्षा मजबूत होगी। CRIS के MD जीवीएल सत्य कुमार ने कहा कि चाहे नया ऐप हो या AI तकनीक, हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि तकनीक का पूरा फायदा देश के आम नागरिकों को मिले।
केंद्र सरकार वॉट्सएप के नए यूजरनेम फीचर की जांच करेगी। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक इस फीचर से पहचान छिपाकर धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड का खतरा काफी बढ़ सकता है। पेरेंट कंपनी मेटा ने अपने इंस्टेंट मैसेजिंग एप में मोबाइल नंबर बताए बिना चैट करने वाला फीचर लॉन्च किया था। इसमें लोग सिर्फ यूजरनेम के जरिए किसी नए व्यक्ति से चैट कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, सरकार वॉट्सएप के इस अपकमिंग यूजरनेम फीचर की बारीकी से जांच करेगी। चिंता इस बात को लेकर है कि जब यूजर्स को फोन नंबर छिपाने की आजादी मिल जाएगी, तो जालसाजों के लिए किसी दूसरे के नाम का फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है। भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। इतने बड़े यूजर बेस की सुरक्षा और फेक प्रोफाइल से होने वाले फ्रॉड रोकने के लिए सरकार नए फीचर के सेफ्टी स्टैंडर्ड्स परखना चाहती है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। सबसे पहले जानें, जल्दी यूजरनेम बुक करना क्यों जरूरी है दुनियाभर में करोड़ों यूजर्स एक जैसे या मिलते-जुलते यूजरनेम चुन सकते हैं। ऐसे में जो लोग पहले अपना यूजरनेम रिजर्व करेंगे, उन्हें अपनी पसंद का यूजरनेम मिलने की संभावना ज्यादा होगी। WhatsApp के हेड कुणाल शाह ने X पर लिखा सही समय ही सब कुछ है। दुनिया भर में यह फीचर जारी होने से पहले ही WhatsApp से जुड़ें और अपना यूजरनेम सुरक्षित कर लें। अब अपनी पसंद का यूजरनेम लेने का समय है। लोगों से जुड़ने का एक अधिक निजी (प्राइवेट) तरीका जल्द ही आपके WhatsApp पर आने वाला है। इस नए फीचर से क्या बदलेगा यूजरनेम फीचर आने के बाद कुछ स्थितियों में फोन नंबर अपने-आप दिखाई नहीं देगा। इनमें शामिल हैं: जब आपको किसी बड़े ग्रुप चैट में जोड़ा जाएगा। जब आप पहली बार किसी व्यक्ति को मैसेज करेंगे। इस बदलाव से आपका फोन नंबर निजी (प्राइवेट) रहेगा। वह तभी दिखाई देगा, जब आप खुद उसे साझा करना चाहेंगे। वॉट्सएप Username फीचर से जुड़े 8 सवाल-जवाब, जो आपको जानना जरूरी है वॉट्सएप यूजरनेम फीचर क्यों लाया: वॉट्सएप का कहना है कि कई बार लोग किसी नए व्यक्ति से बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन अपना मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना चाहते। जैसे किसी नेटवर्किंग इवेंट में मिले व्यक्ति, नए क्लासमेट, पड़ोसी या बच्चों के स्कूल/स्पोर्ट्स ग्रुप के दूसरे पैरेंट्स से बात करते समय प्राइवेसी बनाए रखना जरूरी होता है। ऐसे में अब मोबाइल नंबर की जगह सिर्फ यूजरनेम शेयर किया जा सकेगा। यूजरनेम बनाने के नियम क्या हैं: यूजरनेम 3 से 35 कैरेक्टर का होगा। इसमें केवल a-z (छोटे अंग्रेजी अक्षर), 0-9 (अंक), डॉट (.) और अंडरस्कोर (_) का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा। जरूरत पड़ने पर इसे बदला, हटाया या अपडेट किया जा सकेगा। क्या मोबाइल नंबर पूरी तरह नहीं दिखेगा: हां, लेकिन केवल उन लोगों के लिए जो पहली बार आपसे संपर्क करेंगे। अगर आपने यूजरनेम सेट किया है, तो नया व्यक्ति आपका मोबाइल नंबर नहीं देख पाएगा। हालांकि वॉट्सएप अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर सेव है, वे पहले की तरह ही आपसे चैट कर सकेंगे। क्या कोई भी यूजरनेम सर्च करके नंबर ढूंढ सकेगा: नहीं। वॉट्सएप कोई सार्वजनिक यूजरनेम डायरेक्टरी नहीं बनाएगा। कंपनी किसी दूसरे यूजर को आपका यूजरनेम सुझाव (Suggest) भी नहीं देगी। कोई व्यक्ति तभी आपको मैसेज भेज सकेगा, जब उसे आपका सही यूजरनेम पता होगा। Username Key क्या है: वॉट्सएप Username Key नाम का एक नया ऑप्शनल सुरक्षा फीचर भी ला रहा है। यह सिक्योरिटी कोड एक पिन की तरह काम करेगा। अगर यूजर इसे चालू करता है, तो कोई अनजान व्यक्ति सिर्फ आपका यूजरनेम जानकर आपको मैसेज नहीं कर सकेगा। पहली बार मैसेज भेजने वाले व्यक्ति को पहले यह Key दर्ज करनी होगी। इसके बाद ही चैट शुरू हो सकेगी। यूजर जब चाहें इस Key को बदल भी सकेंगे। इसका उद्देश्य स्पैम और अनचाहे मैसेज कम करना है। पुराने चैट्स और कॉन्टैक्ट्स पर क्या असर पड़ेगा: मौजूदा चैट, कॉन्टैक्ट और ग्रुप पहले की तरह ही काम करेंगे। जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर है, उनके लिए कुछ नहीं बदलेगा। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, ब्लॉक और रिपोर्ट जैसे सभी सुरक्षा फीचर्स पहले की तरह ही काम करते रहेंगे। इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा क्या होगा: नए लोगों से बात करने के लिए मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना पड़ेगा। यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी। स्पैम और अनचाहे मैसेज कम करने में मदद मिलेगी। क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए Meta के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक जैसी डिजिटल पहचान बनाए रखना आसान होगा। इन लोगों को आपसे संपर्क करने के लिए यूजरनेम की जरूरत नहीं होगी जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर पहले से सेव है। जिन लोगों से आप पहले चैट कर चुके हैं। जो आपके साथ किसी जॉइंट ग्रुप में हैं। जिन्होंने आपका क्यूआर कोड स्कैन किया है। जिन्हें आपने पहले मैसेज किया है। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने 'सिम बाइंडिंग' के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
‘चार दिन में सामने वाले को प्यार में उलझाओ।’ यह फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि म्यांमार के साइबर स्कैम सेंटर्स में काम करने वालों को दिया जाने वाला आदेश है। डिजिटल दुनिया में भरोसे और भावनाओं को हथियार बनाकर चल रही साइबर महाठगी फैक्ट्री में नौकरी का झांसा देकर भारत समेत कई देशों से तस्करी कर लाए गए युवक-युवतियां शामिल हैं। म्यांमार के ऐसे ही एक स्कैम सेंटर से बचाए गए केरल निवासी सफीर मोहम्मद कूरीमन्निल भी हैं। वे घर लौट चुके हैं, लेकिन यादें अब भी उनका पीछा करती हैं। कूरीमन्निल बताते हैं कि म्यांमार के एक स्कैम कंपाउंड में उनसे जबरन ऑनलाइन ठगी कराई गई। वे 28 साल की सिंगापुर की युवती बनकर दर्जनों फर्जी प्रोफाइल चलाते थे। हर शिफ्ट में 100 से ज्यादा लोगों से चैट, चार दिन में भरोसा और प्यार जीतने का लक्ष्य। रिकॉर्ड बताते हैं कि सिर्फ एक महीने में उन्होंने 17 देशों के 50 हजार से ज्यादा लोगों को निशाना बनाया। एपी और फ्रंटलाइन की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर ठगी का पूरा खेल अमेरिकी टेक्नोलॉजी और एआई के सहारे चलता है। चैटजीपीटी और जेमिनाई से बने सॉफ्टवेयर स्कैमर्स को 100 से ज्यादा भाषाओं में बातचीत, पीड़ितों की कमजोरी पहचानने में मदद करते हैं। कूरीमन्निल बताते हैं कि उनकी और उनकी तरह झांसे से यहां आए लोगों की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती थी। डर इतना था कि कई कर्मचारी रात में सो भी नहीं पाते थे। युगांडा, केन्या समेत कई देशों की महिलाओं को सोशल मीडिया मैनेजर या फैक्ट्री की नौकरी का झांसा देकर लाया गया और बाद में स्कैम सेंटरों में बेच दिया गया। उनसे 18-18 घंटे काम कराया जाता था। फर्जी वीडियो कॉल के जरिए लोगों को प्रेमजाल में फंसाकर क्रिप्टो निवेश के नाम पर ठगी कराई जाती। अगर कोई महिला जालसाजी का ‘टारगेट’ पूरा नहीं कर पाती, तो सजा के रूप में उसके साथ मारपीट और सामूहिक दुष्कर्म तक किया जाता है। कुछ के जबरन गर्भपात और गर्भावस्था के दौरान भी यातनाएं दी जाती हैं। डार्क रूम - सफल स्कैमर्स को इनाम- ‘यौन शोषण’ महिला पीड़ितों के अनुसार कई स्कैम सेंटरों में ‘डार्क रूम’ बनाए गए हैं। यहां टारगेट पूरा नहीं करने वाली महिलाओं को ले जाकर पिटाई, इलेक्ट्रिक शॉक और दुष्कर्म किया जाता है। वहीं, कुछ मामलों में बड़ी ठगी कराने वाले पुरुष स्कैमर्स को महिलाओं का यौन शोषण करने की छूट ‘इनाम’ के रूप में दी जाती थी। संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी ऐसे मामलों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है।
एआई नियमों और कागजी डेटा को तो आसानी से रट लेता है, लेकिन इंसानों के उस हुनर को नहीं सीख पाता जो बरसों के अनुभव, अंतःप्रेरणा और सूझबूझ से आता है। उदाहरण के लिए, एक अनुभवी डॉक्टर को रिपोर्ट देखने से पहले ही मरीज की सांसें देखकर बीमारी का अंदाजा हो जाता है, या कोडर बिना किसी नियम के भी पेचीदा बग ढूंढ लेता है। इंसान इस हुनर को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। इस हुनर को चुराने के लिए कंपनियां कर्मचारियों के कंप्यूटर के हर क्लिक व हरकत पर नजर रख रही हैं, हेड कैमरे लगाकर एआई को ट्रेंड किया जा रहा है जिससे कर्मचारी नाराज हैं और जानकारी छिपा रहे हैं, जानिए कर्मचारियों की इन्हीं तरकीबों के बारे में... रफ पेपर पर लिख रहे लॉजिक सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स जानते हैं कि उनके की स्ट्रोक्स और कोडिंग पैटर्न एआई मॉडल द्वारा ट्रैक किए जा रहे हैं। इससे बचने के लिए वे अब शैडो थिंकिंग करते हैं। इसमें डेवलपर्स कंप्यूटर पर सीधे सोचने के बजाय कोड का लॉजिक और एल्गोरिदम रफ कागज या डायरी पर लिखते हैं। सिस्टम पर वे सिर्फ फाइनल कोड टाइप करने आते हैं। एआई को भ्रमित करने के लिए वे जानबूझकर जंक कोड डालते हैं और बाद में उसे हटा देते हैं। इस रणनीति से एआई उनके सोचने की सटीक क्रोनोलॉजी पकड़ नहीं पाता। चैट बॉक्स से दूरी कॉल सेंटर्स और कंसल्टिंग फर्म्स में एआई चैट और वॉयस को ट्रैक करता है। इससे बचने के लिए कर्मचारियों ने ‘बिटवीन द लाइन्स’ (बातों के बीच की बात) का तरीका निकाला है। जब कोई पेचीदा केस आता है, तो वे एआई-निगरानी वाले आधिकारिक चैट बॉक्स के बजाय आपस में बात करने के लिए कोडवर्ड्स या पर्सनल फोन इस्तेमाल करते हैं। समाधान आपस में ‘ऑफ-द-रिकॉर्ड’ तय करते हैं और स्क्रीन पर औपचारिक उत्तर लिखते हैं, जिससे एआई नहीं सीख पाता कि कठिन ग्राहक को किस मानवीय सूझबूझ से मनाया गया। माउस जिटरर्स का इस्तेमाल मेटा जैसे टेक दिग्गज माउस क्लिक और कर्सर की स्पीड तक को एआई ट्रेनिंग के लिए ट्रैक करते हैं। डिजाइनर्स ने इसे चकमा देने के लिए ‘माउस जिटरर्स’ या ऐसे हार्डवेयर टूल्स का इस्तेमाल शुरू किया है जो बैकग्राउंड में कर्सर को स्क्रीन पर रैंडम तरीके से घुमाते रहते हैं। जब डिजाइनर असल में डिजाइन की बारीकियों पर सोच रहा होता है, तब यह टूल एआई को नकली डेटा फीड कर रहा होता है। इससे एआई एल्गोरिदम असली क्रिएटिव चॉइस व नकली मूवमेंट में फर्क नहीं कर पाता और कन्फ्यूज हो जाता है। एआई पॉइजनिंग कलाकार अब फाइनल वर्क सबमिट करने या स्क्रीन पर प्रोसेस करने से पहले ‘नाइटशेड’ व ‘ग्लैज’ जैसे एंटी-एआई टूल्स का इस्तेमाल बैकग्राउंड में कर रहे हैं। शिकागो यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए ये टूल डिजिटल पेंटिंग के पिक्सल में ऐसे बदलाव कर देते हैं जो सामान्य रूप से नहीं दिखते, पर जब एआई इस डेटा को चुराता है, तो उसका दिमाग खराब हो जाता है। उदाहरण के लिए, आर्टिस्ट बना रहा होगा ‘कुत्ता’, पर एआई ट्रैकर उसे ‘बिल्ली’ समझकर फीड कर लेगा, जिससे पूरी एआई ट्रेनिंग का कबाड़ा हो जाता है।
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब ग्रीस में भी लाइव हो गया है। ग्रीस इस डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ने वाला नया देश बन गया है। एथेंस में यूरोबैंक के हेडक्वार्टर में यूरोबैंक और NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड की पार्टनरशिप से शुरू हुई इस सर्विस का लाइव डेमो भी देखा गया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में डेमो हुआ केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एथेंस की अपनी ऑफिशियल विजिट के दौरान इस सर्विस के लाइव डेमो को देखा। उन्होंने कहा कि UPI को मिल रही वैश्विक स्वीकार्यता से यह साबित होता है कि भारत की टेक्नोलॉजी पर दुनिया का भरोसा बढ़ रहा है। यह तकनीक सीमाओं के पार भी बेहतरीन तरीके से काम कर सकती है। अब 10 देशों में मिलेगी UPI की सुविधा ग्रीस के इस नेटवर्क में शामिल होने के बाद अब दुनिया के 10 देशों में अलग-अलग रूपों में UPI का इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह भारतीय यात्रियों के लिए QR-कोड आधारित मर्चेंट पेमेंट से लेकर क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस सर्विसेज (पैसे ट्रांसफर करने) तक की सुविधा देता है। ग्रीस से पहले कंबोडिया में शुरू हुआ था UPI ग्रीस से ठीक पहले कंबोडिया इस लिस्ट में शामिल होने वाला 9वां देश बना था। इसके लिए NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड ने वहां के ACLEDA बैंक के साथ पार्टनरशिप की थी। इसके तहत कंबोडिया के नेशनल QR कोड 'KHQR' के जरिए क्रॉस-बॉर्डर UPI पेमेंट्स की शुरुआत की गई थी। इससे पहले सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर और श्रीलंका को उन आठ देशों के रूप में लिस्ट किया था, जहां UPI को स्वीकार किया जा रहा है। फ्रांस के एफिल टॉवर से हुई थी शुरुआत यूरोप में UPI के विस्तार में फ्रांस एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। साल 2024 में पेरिस के एफिल टॉवर से UPI को लॉन्च किया गया था। इसके बाद इस सर्विस का विस्तार वहां के बड़े रिटेल डेस्टिनेशंस जैसे नीस में स्थित 'गैलरीज लाफायेट' तक किया गया। क्या है UPI और इसके ग्लोबल विस्तार का भविष्य कैसे काम करता है विदेशी धरती पर UPI? भारतीय यात्री विदेशों में इंटरनेशनल रोमिंग या एक्टिवेटेड UPI एप के जरिए वहां के स्थानीय QR कोड (जैसे कंबोडिया में KHQR या ग्रीस में यूरोबैंक मर्चेंट नेटवर्क) को स्कैन करके सीधे अपने भारतीय बैंक अकाउंट से पेमेंट कर सकते हैं। इससे उन्हें विदेशी करेंसी एक्सचेंज कराने के झंझट से मुक्ति मिलती है। ये खबर भी पढ़ें… अब यूजरनेम से भी होगी WhatsApp पर चैट: 29 जून से बुकिंग शुरू; बिना मोबाइल नंबर बताए बातचीत भी कर सकेंगे अब तक वॉट्सएप पर किसी नए व्यक्ति से बात करने के लिए मोबाइल नंबर देना जरूरी होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सएप ने यूजरनेम फीचर लॉन्च करने का ऐलान किया है। इसके बाद लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट कर सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

