डिजिटल समाचार स्रोत

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फरारी अमाल्फी स्पाइडर लॉन्च, कीमत ₹4.6 करोड़:3.3 सेकेंड में 100kmph की स्पीड, 15.6-इंच डिस्प्ले और ADAS जैसे फीचर्स

इटली की सुपरकार बनाने कंपनी फरारी ने आज भारत में नई कनवर्टिबल कार अमाल्फी स्पाइडर लॉन्च की है। ये 15.6 इंच डिजिटल डिस्प्ले और ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स के साथ आई है। कंपनी का दावा है कि यह 3.3 सेकेंड में 100kmph की स्पीड से दौड़ सकती है। कंपनी ने भारत में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 4.6 करोड़ रुपए रखी है। यह अपने कूपे मॉडल की तुलना में करीब 52 लाख रुपए महंगी है, जिसकी मौजूदा कीमत 4.08 करोड़ रुपए है। नई अमाल्फी स्पाइडर की बुकिंग शुरू हो चुकी है। सेफ्टी फीचर्स: एडवांस्ड ADAS से लैस फरारी अमाल्फी में सुरक्षा के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) दिया गया है। इसमें अडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट, ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग और ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा बेहतर ब्रेकिंग के लिए इसमें 296 GTB से इन्स्पायर्ड ABS इवो कंट्रोल यूनिट दी गई है।

दैनिक भास्कर 17 Jul 2026 2:29 pm

अमेरिका को टक्कर देने आया चीन का AI मॉडल:किमी K3 में इंसानों जैसी आंखें और दिमाग; कोडिंग और रिसर्च मिनटों में करेगा

चीनी कंपनी मूनशॉट AI ने अपना नया AI मॉडल किमी K3 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स वाला दुनिया का पहला ओपन मॉडल है। इसमें 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो दी गई है। पिछले मॉडल किमी K2 की तुलना में इसकी स्केलिंग दक्षता करीब 2.5 गुना बेहतर है। इसे एक सरल उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए एआई मॉडल एक इंसानी दिमाग की तरह है, जिसे एक बहुत बड़ी परीक्षा की तैयारी करनी है। 1. पैरामीटर्स क्या हैं? पैरामीटर्स को आप एआई का 'अनुभव' मान सकते हैं। एक बच्चा जब बड़ा होता है, तो वह जितनी ज्यादा बातें सीखता है, उसका दिमाग उतना ही तेज चलता है। एआई की दुनिया में जिस मॉडल के पास जितने ज्यादा पैरामीटर्स होते हैं, वह उतना ही समझदार माना जाता है। 28 लाख करोड़ पैरामीटर्स होने का मतलब है कि इस मॉडल का दिमाग बेहद विशाल है और यह बहुत ही पेचीदा और मुश्किल सवालों को इंसानों की तरह समझकर हल कर सकता है। 2. 3T क्लास क्या है? यहां 'T' का मतलब है ट्रिलियन। चूंकि इस मॉडल में 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स हैं, जो कि 3 ट्रिलियन (3.0T) के बेहद करीब है, इसलिए इसे '3T क्लास' का मॉडल कहा गया है। एआई की दुनिया में 3T क्लास में पहुंचना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इतने बड़े मॉडल अब तक सिर्फ अमेरिका की ओपन एआई जैसी चुनिंदा कंपनियों के पास ही थे। 3. 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो क्या है? कॉन्टेक्स्ट विंडो का मतलब है एआई की 'याददाश्त' या एक बार में पढ़ने की क्षमता। जब आप एआई से चैट करते हैं, तो वह एक बार में कितना लंबा पैराग्राफ या दस्तावेज याद रख सकता है, यही उसकी कॉन्टेक्स्ट विंडो है। उदाहरण: एक आम एआई मॉडल को अगर आप 5-10 पन्ने देंगे, तो वह उसे पढ़ लेगा, लेकिन पूरी किताब देने पर उसके हाथ-पैर फूल जाएंगे। किमी K3 की 10 लाख टोकन की क्षमता का मतलब है कि आप इसे पूरी की पूरी मोटी किताब, हजारों लाइनों का कंप्यूटर कोड या साल भर की बैंक स्टेटमेंट एक साथ दे दीजिए; यह एक सेकंड में उस पूरी जानकारी को दिमाग में रखकर आपको उसका सटीक विश्लेषण करके दे देगा। 4. स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर होने का क्या मतलब है? 'स्केलिंग दक्षता 2.5 गुना बेहतर' होने का मतलब है कि मूनशॉट कंपनी ने अपने सॉफ्टवेयर को इतना कुशल बना दिया है कि यह अपने पिछले मॉडल के मुकाबले ढाई गुना कम कंप्यूटर पावर और खर्चे में, उससे कहीं ज्यादा तेजी से और बड़ा काम कर सकता है। 5. 'ओपन मॉडल' होने का क्या फायदा है? अब तक अमेरिका की कंपनियां अपने इतने बड़े मॉडल्स को छुपाकर रखती हैं। इसे क्लोज्ड मॉडल कहते हैं। वे सिर्फ आपको इस्तेमाल करने देती हैं, लेकिन यह नहीं बतातीं कि इसे अंदर से कैसे बनाया गया है। चीन की कंपनी ने इसे 'ओपन मॉडल' रखा है। इसका मतलब है कि वह इस शक्तिशाली दिमाग की 'ब्लूप्रिंट' दुनिया भर के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और वैज्ञानिकों के लिए मुफ्त या खुले तौर पर जारी कर देगी। इससे दुनिया का कोई भी आम इंजीनियर इस एआई को लेकर अपने हिसाब से बदल सकता है, नया ऐप बना सकता है या अपने काम में इस्तेमाल कर सकता है। मूनशॉट 27 जुलाई को ओपन करेगा अपना सीक्रेट फॉर्मूला मूनशॉट AI ने ब्लॉग में बताया कि Kimi K3 को 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' पर बनाया गया है। इसमें नेटिव विजन क्षमताएं भी हैं। यह मॉडल कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग जैसे जटिल कामों के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसके फुल मॉडल वेट्स 27 जुलाई तक जारी कर दिए जाएंगे। 1. 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' क्या है? उदाहरण से समझिए: जब आप कोई बहुत मोटी किताब पढ़ते हैं, तो क्या आप हर एक शब्द पर बराबर ध्यान देते हैं? नहीं। आपका दिमाग केवल मुख्य शब्दों और जरूरी लाइनों पर 'अटेंशन' देता है और फालतू शब्दों को छोड़ देता है। फायदा: मूनशॉट AI ने 'किमी डेल्टा अटेंशन' और 'अटेंशन रेजिड्यूल्स' नाम का जो नया फॉर्मूला बनाया है, वह इस एआई को यही सुपर पावर देता है। जब आप इसे बहुत बड़ा काम या लाखों शब्दों की फाइल देते हैं, तो यह तकनीक एआई के दिमाग को भटकने नहीं देती। यह केवल सबसे जरूरी पॉइंट पर फोकस करती है और पुरानी पढ़ी हुई बातों का 'असर' (रेजिड्यूल्स) दिमाग में बनाए रखती है। इससे एआई बिना थके और बिना गलती किए बहुत तेजी से काम कर लेता है। 2. ‘नेटिव विजन क्षमताएं’ क्या हैं? उदाहरण से समझिए: पहले के एआई सिर्फ टेक्स्ट समझ सकते थे। अगर आप उन्हें फोटो दिखाते, तो उन्हें पहले उस फोटो को शब्दों में बदलना पड़ता था, तब वो समझ पाते थे। लेकिन 'नेटिव विजन' का मतलब है कि Kimi K3 के पास देखने की क्षमता है। फायदा: आप इसे कोई फोटो, कोई पेचीदा ग्राफ, मेडिकल स्कैन (जैसे एक्स-रे या एमआरआई) या कोई वीडियो दिखाएंगे, तो यह उसे इंसानी आंखों की तरह देखकर तुरंत समझ जाएगा और उस पर आपके सवालों के जवाब दे देगा। 3. कोडिंग, नॉलेज वर्क और रीजनिंग का क्या मतलब है? कंपनी का कहना है कि यह मॉडल तीन बड़े काम करेगा: लॉन्ग-होराइजन कोडिंग : इसका मतलब सिर्फ छोटा-मोटा कोड लिखना नहीं है। यह सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की तरह एक साथ हजारों लाइनों का पूरा का पूरा बड़ा कंप्यूटर प्रोग्राम या ऐप खुद लिख सकता है और उसमें कमियां ढूंढकर ठीक कर सकता है। नॉलेज वर्क: यह रिसर्चर्स, वैज्ञानिकों और बड़े वकीलों की तरह काम कर सकता है। सालों पुरानी फाइलों को खंगालना, बड़े कानूनी मामलों का विश्लेषण करना या किसी विषय पर पूरी रिसर्च रिपोर्ट तैयार करना इसके लिए चुटकियों का काम है। रीजनिंग: इसका मतलब है 'सोचने-समझने और तर्क करने की क्षमता'। यह सिर्फ रटी-रटाई बातें नहीं बताएगा, बल्कि इंसानों की तरह गणित के मुश्किल सवालों या बिजनेस की उलझनों में 'अगर-मगर' लगाकर सही फैसला लेने में मदद करेगा। अमेरिका के लेटेस्ट AI मॉडल्स से पीछे है Kimi K3 कंपनी ने माना कि Kimi K3 का प्रदर्शन अमेरिका के क्लॉड फेबल 5 और GPT 5.6 Sol जैसे मॉडल्स से पीछे है। हालांकि, कई बेंचमार्क टेस्ट में इसने अमेरिका के पुराने मॉडल्स को पीछे छोड़ दिया है। मूनशॉट AI को चीनी कंपनी अलीबाबा और टेनसेंट का समर्थन हासिल है। चीनी फर्मों ने 24 हजार फर्जी अकाउंट बनाकर चुराया डेटा इसी बीच, अमेरिकी कंपनियों ने चीनी फर्मों के सस्ते में मॉडल जारी करने पर चिंता जताई है। एंथ्रोपिक ने आरोप लगाया है कि डीपसीक, मूनशॉट और मिनीमैक्स ने उनके मॉडल की क्षमताओं को अवैध रूप से निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए। एंथ्रोपिक के मुताबिक, करीब 24,000 फर्जी खातों से 1.6 करोड़ बार क्लॉड का इस्तेमाल किया गया।

दैनिक भास्कर 17 Jul 2026 12:41 pm

एयर इंडिया का नया एप लॉन्च:फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर होम स्क्रीन पर फ्री होटल-कैब की डिटेल मिलेगी, पेमेंट भी आसान होगा

एअर इंडिया ने सफर आसान बनाने के लिए अपने मोबाइल एप को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। अब इस एप के जरिए न केवल टिकट बुकिंग पहले से कहीं ज्यादा तेजी से होगी, बल्कि फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर यात्रियों को एयरपोर्ट पर परेशान नहीं होना पड़ेगा। ऐसी किसी भी स्थिति में होटल में ठहरने और वहां तक जाने के लिए कैब की पूरी जानकारी सीधे एप की होम स्क्रीन पर ही मिलेगी। इसके साथ ही एप के पेमेंट सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है, जिससे टिकट बुक करना और पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इन-हाउस बुकिंग इंजन से तेजी से बुक होंगे टिकट हर दिन 1 लाख से ज्यादा लोग करते हैं एप का इस्तेमाल एअर इंडिया के मुताबिक, एप अब तक करीब 1.7 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसके साथ ही, रोजाना 1 लाख से ज्यादा यात्री अपनी यात्रा से जुड़े कामों के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी का मानना है कि नया अपग्रेड ग्राहकों की जरूरतों पर तुरंत रिस्पॉन्स देने में मदद करेगा। टाटा ने अब तक 140 से ज्यादा डिजिटल सिस्टम बदले घाटे में चल रही एअर इंडिया को जनवरी 2022 में टाटा ग्रुप ने खरीदा था। इसके बाद से ही एयरलाइन के कायाकल्प के लिए एक बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन प्लान चलाया जा रहा है। टाटा ग्रुप के टेकओवर करने के बाद से अब तक कंपनी के 140 से अधिक डिजिटल सिस्टम्स को पूरी तरह से आधुनिक और अपग्रेड किया जा चुका है। एप का यह नया अपडेट भी इसी डिजिटल सुधार प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया दुनिया की चौथी ऑन-टाइम एयरलाइन बनी: जून में 86.85% फ्लाइट्स टाइम पर पहुंचीं; सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा टाटा ग्रुप की एअर इंडिया दुनिया की चौथी सबसे पंक्चुअल (समय की पाबंद) एयरलाइंस बन गई है। एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एअर इंडिया की लगभग 86.85% फ्लाइट्स यानी 100 में से 87 उड़ानें बिल्कुल तय समय पर पहुंची हैं। टाटा ग्रुप की स्वामित्व वाली एयरलाइन ने जून महीने में अपनी कुल 15,135 उड़ानें ऑपरेट कीं। एअर इंडिया ने सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा है। एविएशन के नियमों के मुताबिक, कोई फ्लाइट अपने तय समय से 15 मिनिट में उड़ान भर लेती है, तो उसे राइट टाइम माना जाता है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 17 Jul 2026 9:57 am

इंस्टाग्राम पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक का खेल:एडिट फीचर से बैकडेट की जा रहीं पोस्ट; दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे दो डिजिटल क्रिएटर्स

इंस्टाग्राम पर ओरिजिनल कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स को निशाना बनाने के लिए मेटा के कॉपीराइट सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अज्ञात लोग फेसबुक के एडिट फीचर का इस्तेमाल कर पोस्ट की तारीख बैकडेट में कर देते हैं और फिर असली क्रिएटर्स के कंटेंट पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक भेज रहे हैं। इस खेल के खिलाफ दो बड़े डिजिटल क्रिएटर्स पुष्कर राज ठाकुर और नीरज जोशी ने दिल्ली हाई कोर्ट में कॉमर्शियल सूट फाइल किया है। क्रिएटर्स ने कोर्ट में क्या आरोप लगाए? फाइनेंशियल एजुकेटर पुष्कर राज ठाकुर और डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी ने अलग-अलग दायर याचिकाओं में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ अज्ञात लोग ओरिजिनल क्रिएटर्स को परेशान करने और उनके अकाउंट बंद कराने की धमकी देने के लिए फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक को हथियार बना रहे हैं। इस सिस्टम के चलते उनके ओरिजिनल कंटेंट को डिलीट करने या उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को सस्पेंड/डिलीट करने का खतरा पैदा हो गया है। मेटा के ऑटोमेटेड सिस्टम पर उठे सवाल क्रिएटर्स का तर्क है कि मेटा का ऑटोमेटेड कॉपीराइट सिस्टम बिना किसी गहन जांच के काम कर रहा है। यह सिस्टम वीडियो के असली क्रिएटर, मेटाडेटा, एडिट हिस्ट्री या वास्तविक पब्लिशिंग क्रोनोलॉजी (अपलोड करने का सही समय) की जांच किए बिना ही स्ट्राइक की शिकायतों पर एक्शन ले लेता है। पुष्कर राज ठाकुर ने बताया कि इस फर्जी खेल की वजह से उनके दर्जनों वीडियो को हटा दिया गया, डिसेबल किया गया या रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि मेटा ने ठाकुर को अपने 'राइट्स मैनेजर' टूल का एक्सेस देने से मना कर दिया, जबकि जालसाज इसी टूल का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ लगातार फर्जी स्ट्राइक भेजते रहे। नीरज जोशी के केस में कोर्ट का आदेश डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी के मामले में 9 जुलाई को जस्टिस ज्योति सिंह की कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मेटा के उस बयान को रिकॉर्ड किया, जिसमें कंपनी ने कहा कि अगर जोशी का अकाउंट अभी तक स्थायी रूप से बंद नहीं हुआ है, तो वे इन आरोपों की जांच करेंगे और उनके वेरिफाइड इंस्टाग्राम अकाउंट (@Neerajjoshi5014) को सुरक्षित रखेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने मेटा को निर्देश दिया है कि वह तीन हफ्ते के भीतर नीरज जोशी को संबंधित बेसिक सब्सक्राइबर इंफॉर्मेशन (BSI) और आईपी (IP) लॉग उपलब्ध कराए। इन जानकारियों से उन अज्ञात लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है जो उनके अकाउंट के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। मामले में समन जारी कर दिए गए हैं और जोशी की अंतरिम रोक वाली अर्जी पर अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी। पुष्कर राज ठाकुर के केस में क्या हुआ? जस्टिस तुषार राव गेडेला ने 29 मई को पुष्कर राज ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मेटा से पूछा था कि उसने अपने प्लेटफॉर्म के इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं या वह क्या उपाय कर सकती है। इसके बाद 1 जुलाई को यह मामला जस्टिस अनूप जयराम भंभानी के सामने आया। सुनवाई के दौरान मेटा ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक ठाकुर के वीडियो को कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर नहीं हटाया जाएगा। साथ ही बार-बार आ रही कॉपीराइट स्ट्राइक की वजह से उनका अकाउंट भी बंद नहीं किया जाएगा। मेटा ने यह भी सहमति दी कि जैसे ही ठाकुर उन्हें हटाए गए वीडियो के यूआरएल (URLs) सौंपेंगे, वे उन वीडियो को रिस्टोर कर देंगे। कोर्ट ने इन आश्वासनों को दर्ज करते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई तय की है। क्रिएटर्स ने मेटा से मांगा ₹2 करोड़ का मुआवजा पुष्कर राज ठाकुर ने कोर्ट से मांग की है कि मेटा को उनके ओरिजिनल कंटेंट को ऐसे फर्जी और बैकडेटेड दावों के आधार पर हटाने से रोका जाए। उन्होंने कंपनी को राइट्स मैनेजर टूल के भीतर केवाईसी (KYC) सुरक्षा उपाय, टाइमस्टैम्प सुरक्षा, मेटाडेटा वेरिफिकेशन और एंटी-मैनिपुलेशन प्रोटोकॉल लागू करने के निर्देश देने की भी मांग की है। इसके अलावा, ठाकुर ने उनके फॉलोअर्स घटने, मोनेटाइजेशन के मौके गंवाने, स्पॉन्सरशिप के नुकसान और उनकी कॉमर्शियल साख को ठेस पहुंचने के एवज में मेटा और अज्ञात जालसाजों से लगभग ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। इस तरह के मामलों ने डिजिटल क्रिएटर्स के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि ओरिजिनल कंटेंट की सुरक्षा के लिए बने कॉपीराइट टूल्स का इस्तेमाल अब खुद क्रिएटर्स को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इस विषय को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी पेंडिंग है। क्या है मेटा का राइट्स मैनेजर और कॉपीराइट स्ट्राइक ये खबर भी पढ़ें… IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च: सभी क्लास की सीटें एकसाथ दिखेंगी, फास्टर चेकआउट' फीचर मिलेगा; कैप्चा नहीं भरना होगा भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 16 Jul 2026 2:41 pm

IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च:सभी क्लास की सीटें एकसाथ दिखेंगी, फास्टर चेकआउट' फीचर मिलेगा; कैप्चा नहीं भरना होगा

भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। इस अपग्रेड का मुख्य मकसद हर दिन टिकट बुक करने वाले लाखों यात्रियों के अनुभव को आसान और तेज बनाना है। अभी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया गया है, यानी आम यात्रियों से फीडबैक के आधार पर इस वेबसाइट में बदलाव किया जाएगा। इस बड़े बदलाव को समझने के लिए पूरी खबर पढ़ें इस खास QA रिपोर्ट में… सवाल 1: IRCTC की इस नई वेबसाइट को लेकर क्या अपडेट आया है? जवाब: IRCTC की वेबसाइट का बीटा वर्जन 15 जुलाई 2026 को रात 9 बजे से लाइव हो गया है। पिछले महीने जयपुर के मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के दौरे पर गए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छात्रों से बातचीत के दौरान यह घोषणा की थी कि 15 जुलाई तक IRCTC की नई वेबसाइट लॉन्च कर दी जाएगी। सवाल 2: आम यात्रियों के लिए नई बीटा वेबसाइट में कौन से बड़े सुधार किए हैं? जवाब: रेलवे ने यात्रियों की सहूलियत के लिए मुख्य रूप से चार बड़े तकनीकी सुधार किए गए हैं: सवाल 3: बीटा वेबसाइट एक्सेस कैसे होगी और इसका लिंक कहां मिलेगा? जवाब: यात्री https://www.irctc.co.in/eticket/ पर जाकर नए पोर्टल का अनुभव ले सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग IRCTC की पुरानी या मौजूदा होमपेज वेबसाइट पर जा रहे हैं, उन्हें भी मुख्य पेज पर ही नई बीटा वेबसाइट पर जाने के लिए सीधा लिंक उपलब्ध करा दिया गया है। सवाल 4: बीटा वर्जन जारी करने के पीछे रेलवे का असली मकसद क्या है? जवाब: बीटा वर्जन लॉन्च करने का मुख्य उद्देश्य आम यात्रियों से फीडबैक और सुझाव लेना है। रेल यात्री नई वेबसाइट का इस्तेमाल करके इसके फीचर्स पर अपनी राय दे सकेंगे। इस फीडबैक के आधार पर आने वाले समय में वेबसाइट में और जरूरी सुधार किए जाएंगे, ताकि कस्टमर सेटिस्फेक्शन बढ़ सके। सवाल 5: IRCTC वेबसाइट पर कितना लोड है, जिसके चलते बदलाव की जरूरत पड़ी? जवाब: साल 2002 में लॉन्च की गई IRCTC वेबसाइट देश के सबसे व्यस्त ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है। पहले इसपर ट्राफिक कम था, लेकिन वर्तमान में इस वेबसाइट के जरिए रोजाना औसतन 14.5 लाख ट्रेन टिकट बुक किए जाते हैं। इतने बड़े यूजर बेस को बिना किसी रुकावट तेज सर्विस देने और तकनीकी रूप से अप-टू-डेट रखने के लिए इस वेबसाइट के पूरे ढांचे को अपग्रेड करना जरूरी हो गया था। सवाल 6: क्या यह बदलाव सिर्फ वेबसाइट के डिजाइन तक सीमित है? जवाब: नहीं, यह सिर्फ बाहरी डिजाइन का बदलाव नहीं है। भारतीय रेलवे इसके साथ ही अपने बैकएंड सिस्टम को भी बदल रहा है। दशकों पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन को समानांतर रूप से अपग्रेड किया जा रहा है। सवाल 7: पुराना पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन बदलने में क्या चुनौतियां आ रही हैं? जवाब: रेलवे के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस पूरे अपग्रेडेशन के दौरान ट्रेन टिकट बुकिंग की लाइव सर्विस को एक मिनट के लिए भी बंद नहीं किया जा सकता था। चालू सिस्टम के साथ ही बैकएंड में यह काम करना काफी चुनौतीपूर्ण था। नया पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन भी जल्द लॉन्च कर दिया जाएगा। सवाल 8: नई वेबसाइट पूरी तरह से फंक्शनल कब तक हो जाएगी? जवाब: चूंकि पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन और नई वेबसाइट दोनों पर एक साथ काम चल रहा है, इसलिए रेलवे ने स्पष्ट किया है कि बीटा वर्जन से यूजर फीडबैक लेने और इंजन का काम पूरा होने के बाद, अगले कुछ हफ्तों के भीतर पूरी तरह से फंक्शनल नया IRCTC पोर्टल सभी के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा। तब तक यात्री बीटा वर्जन का इस्तेमाल कर सकते हैं और पुराने पोर्टल से भी सामान्य बुकिंग जारी रख सकते हैं। रीडर्स के लिए टिप्स: नई वेबसाइट पर फीडबैक कैसे दें?

दैनिक भास्कर 16 Jul 2026 10:42 am

MG नई हाइब्रिड और EV टेक्नोलॉजी कल पेश करेगी:एसयूवी 69.2kWh बैटरी पैक के साथ 530km की रेंज, महिंद्रा XUV 7XO और टाटा सफारी से मुकाबला

MG मोटर्स 16 जुलाई को भारत में अपनी नई 'न्यू एनर्जी व्हीकल' टेक्नोलॉजी को पेश करने जा रही है। कंपनी इवेंट में अपनी नई प्लग-इन हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक व्हीकल तकनीक को शोकेस करेगी। इस नए पावरट्रेन का इस्तेमाल कंपनी अपनी अपकमिंग SUV में कर सकती है, जो वुलींग स्टारलाइट 560 का रीबैज्ड वर्जन होगी। भारत में '520' कोडनेम वाली यह SUV 1000km से ज्यादा की कुल रेंज और 7-सीटर ऑप्शन के साथ आ सकती है। कार 2026 के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकती है। एक्सटीरियर डिजाइन और डायमेंशन इंटीरियर और केबिन फीचर्स कार के अंदर डुअल-टोन थीम के साथ एक मिनिमलिस्टिक (साफ-सुथरा) डैशबोर्ड लेआउट दिया गया है। परफॉर्मेंस: इंजन, मोटर और ड्राइविंग रेंज अंतरराष्ट्रीय बाजार (इंडोनेशिया स्पेसिफिकेशन) के मुताबिक इस SUV को दो पावरट्रेन ऑप्शंस के साथ पेश किया गया है, जिसके भारत में भी आने की उम्मीद है: सेफ्टी फीचर्स सुरक्षा के मामले में इस SUV में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है। कार में पैसेंजर्स की सुरक्षा के लिए 6 एयरबैग्स, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), हिल-होल्ड असिस्ट और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे स्टैंडर्ड फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा, हादसे से बचाने के लिए इसमें एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) तकनीक भी शामिल की गई है। इन गाड़ियों से होगा मुकाबला भारतीय बाजार में लॉन्च होने के बाद इस कार के प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) मॉडल का मुकाबला महिंद्रा XUV 7XO और टाटा सफारी जैसी दमदार डीजल/पेट्रोल कारों से होगा। वहीं, इसका पूरी तरह से इलेक्ट्रिक (EV) वैरिएंट सीधे तौर पर अपकमिंग महिंद्रा XEV 9S को टक्कर देगा।

दैनिक भास्कर 15 Jul 2026 2:02 pm

मोटो G77 पावर 5G स्मार्टफोन लॉन्च, कीमत ₹23,999:50MP सोनी कैमरा और 24GB तक की रैम के साथ 7000mAh बैटरी, सिंगल चार्ज में 3 दिन चलेगा

मोटोरोला ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन मोटो G77 पावर लॉन्च कर दिया है। फोन में सबसे खास 7000mAh की बड़ी बैटरी और रैम बूस्ट टेक्नोलॉजी है, जो वर्चुअल रैम के जरिए फोन को 24GB रैम की ताकत देती है। मोटोरोला ने इसे 50 मेगापिक्सल सोनी कैमरा और मीडियाटेक डाइमेंसिटी 6400 प्रोसेसर के साथ उतारा है। मोटो G77 पावर को 8GB रैम और 128GB स्टोरेज के सिंगल वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी कीमत 25,999 रुपए है। कंपनी फोन पर लॉन्च ऑफर में 2 हजार रुपए का डिस्काउंट दे रही है, जिससे इसे 23,999 में खरीदा जा सकेगा। फोन ऑफिशियल वेबसाइट और ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए अवेलेबल है। डिजाइन और बिल्ड: प्रीमियम प्लास्टिक-पॉलीकार्बोनेट मटीरियल डिस्प्ले: 6.72-इंच का फुल HD+ स्क्रीन और 120Hz रिफ्रेश रेट फोन में 2400 1080 पिक्सल रेजोल्यूशन वाला 6.72-इंच का फुल HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 120Hz रिफ्रेश रेट और 1050nits की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती है, जिससे आउटडोर या तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देती है। डिस्प्ले की सेफ्टी के लिए इस पर गोरिल्ला ग्लास 7i का प्रोटेक्शन दिया गया है। परफॉर्मेंस: मीडियाटेक डायमेंसिटी 6400 ऑक्टाकोर प्रोसेसर कैमरा: 50 मेगापिक्सल का सोनी LYT600 सेंसर पावर बैकअप: 7000mAh के साथ 3 दिन का बैकअप अन्य फीचर्स: डुअल-बैंड वाई-फाई और GPS कनेक्टिविटी के लिए इसमें मजबूत 5G नेटवर्क सपोर्ट, लेटेस्ट ब्लूटूथ, डुअल-बैंड वाई-फाई, GPS और चार्जिंग व डेटा ट्रांसफर के लिए टाइप-C पोर्ट दिया गया है। बेहतर ऑडियो एक्सपीरियंस के लिए इसमें स्टीरियो स्पीकरों के साथ 3.5mm का ऑडियो जैक भी बरकरार रखा गया है।

दैनिक भास्कर 14 Jul 2026 6:17 pm

ओप्पो एनको एयर 5 रिव्यू:बजट सेगमेंट में 54 घंटे का बैकअप, 52dB नॉइज कैंसिलेशन और हाइब्रिड ANC जैसे फीचर

ओप्पो ने बजट सेगमेंट में नया इयरबड्स एनको एयर 5 लॉन्च किया है। जिन लोगों को कम प्राइस रेंज में एक अच्छा बेस, स्मार्टफोन के साथ अच्छी कनेक्टिविटी, डुअल पेयरिंग और इन-इयर डिटेक्शन जैसे फीचर्स चाहिए, तो उन्हें ये सभी इस इयरबड में मिल जाएंगी। हमने इसका ENC टेस्ट किया, बहुत सारे गाने सुने और मूवीज भी देखीं हैं, तो चलिए इसके साउंड प्रोफाइल के बारे में जानते हैं... केस, डिजाइन और कंफर्ट इसके केस का शेप काफी अच्छा है और हाथ में यह हल्का सा सॉफ्ट फील होता है, जिससे वह सस्ते प्लास्टिक वाली फील नहीं देता। फ्रंट में आपको एक LED लाइट है, नीचे टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट और एक रिसेट बटन दिया गया है। इयरबड्स काफी कॉम्पैक्ट और लाइटवेट हैं। पहनने पर इनका लुक बढ़िया आता है और इसकी इयरटिप कानों में कंफर्टेबली फिट हो जाती है। इसके साथ हमने पूरी मूवी देखी और गाने सुने लेकिन, कानों में जरा भी दर्द या चुभन महसूस नहीं हुई। शार्प मूवमेंट या अचानक सिर हिलाने पर भी ये कानों से गिरते नहीं हैं। यानी आप इसे जिम में वर्कआउट या रनिंग के दौरान आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। ये इयरबड्स IP55 की रेटिंग के साथ आते हैं, जो इसे पानी और पसीने से भी सेफ रखते हैं। एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन और माइक ओप्पो एनको एयर 5 में 12mm का ड्राइवर मिलता है। साथ ही इसमें 3+ 3 (टोटल 6) माइक्रोफोन्स दिए गए हैं, जिससे यह इयरबड अप टू 52dB तक का शोर कैंसिल कर देता है। साल 2026 के हिसाब से यह अच्छा नॉइज कैंसिलेशन है। यह सिर्फ नॉर्मल एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन के साथ नहीं आता, बल्कि इसमें हाइब्रिड एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन मिलता है। इसका फायदा यह है कि आप खुद सिलेक्ट कर सकते हैं कि आपको बाहर की आवाज को कितना कम करना है- हाई, मीडियम या लो। इसमें एक ऑटो ANC का फीचर भी है। इसे सेट करने के बाद आप चाहे घर पर हों, बाहर घूम रहे हों या ट्रेन में सफर कर रहे हों, यह 6 माइक्रोफोन्स की मदद से ऑटोमेटिकली बाहर के शोर को डिटेक्ट करके उसके हिसाब से नॉइज कैंसिलेशन को एडजस्ट कर लेता है। हमारी टेस्टिंग के दौरान हर स्टेज पर इसका नॉइज कैंसिलेशन साफ महसूस हो रहा था और यह बहुत अच्छी तरह काम करता है। कनेक्टिविटी, स्मार्ट फीचर्स और बैटरी लाइफ यह इयरबड AAC को सपोर्ट करता है और इसमें डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी मिलती है, यानी आप एक साथ दो डिवाइस को पेयर कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें इन-इयर डिटेक्शन का फीचर भी है, जो मूवीज या कोई भी कंटेंट देखते समय कान से निकालते ही वीडियो पॉज हो जाता है। इस बार ओप्पो ने बैटरी भी इंप्रूव की है। केस में 530mAh और हर एक इयरबड में 62mAh की बैटरी मिलती है। अगर पावर बैकअप की बात करें, तो बिना ANC यूज किए सिंगल इयरबड करीब 13 घंटे का बैकअप दे देता है और केस के साथ 54 घंटे का एप्रोक्सिमेट बैकअप मिलता है। अगर आप ANC ऑन करके भी यूज करते हैं, तो इयरबड करीब 6 घंटे चल जाता है, जिसमें आप बिना रुके दो मूवी देख सकते हैं। गेमर्स के लिए इसमें एक डेडिकेटेड गेम मोड भी है, जो शूटिंग गेम्स खेलते वक्त गनशॉट्स जैसी ऑडियो को एनहांस कर देता है। साउंड क्वालिटी और बेस अब बात करते हैं सबसे जरूरी चीज यानी इसके साउंड की। सबसे पहले वॉल्यूम की बात करें तो फुल वॉल्यूम पर भी आवाज बिल्कुल फटती नहीं है और कोई क्रैकलिंग साउंड सुनाई नहीं देती। ओप्पो ने इसकी ट्यूनिंग बहुत अच्ची की है। एप के प्रीसेट्स- जैसे अल्टीमेट साउंड, वोकल्स और बेस सभी अच्छे से काम करते हैं। 'अल्टीमेट साउंड' पर बाय-डिफॉल्ट ऑडियो काफी एनहांस होकर आती है। अगर आप न्यूज देख रहे हैं, तो वोकल्स प्रोफाइल सिलेक्ट कर सकते हैं, जिससे आवाज साफ हो जाती है। मूवी देखते समय 'थंडरिंग बेस' सिलेक्ट करने पर बेस का लेवल काफी बढ़ जाता है। इयरबड्स में आपको हैवी बेस मिलता है। इसके अलावा, जिन्हें अपना पर्सनल साउंड कस्टमाइज करना पसंद है, उनके लिए एप में इक्वलाइजर का ऑप्शन भी दिया गया है। कमियां: वॉल्यूम कंट्रोल फीचर इसमें सिर्फ एक चीज पसंद नहीं आई, वो है इसका वॉल्यूम कंट्रोल करने का तरीका। आमतौर पर प्रीमियम इयरबड्स में स्वाइप कंट्रोल होता है या फिर एक साइड टैप करने से वॉल्यूम कम और दूसरी साइड से बढ़ता है। लेकिन, इसमें वॉल्यूम कम या ज्यादा करने के लिए आपको इयरबड को लॉन्ग-प्रेस करके होल्ड रखना पड़ता है, जो मुझे थोड़ा टाइम-कंज्यूमिंग और अजीब लगा। निष्कर्षवॉल्यूम कंट्रोल के अलावा मुझे इस इयरबड में कोई कमी नहीं दिखी। जिस साउंड प्रोफाइल और बेहतरीन फीचर्स के साथ ओप्पो एनको एयर 5 आता है, वह इस बजट में वाकई टॉप-नॉच है।

दैनिक भास्कर 13 Jul 2026 7:25 pm

एआई का दौर; करियर की चिंता और हकीकत:सुरक्षित रहेंगी ये नौकरियां- डॉक्टर, टीचर, वकील और कारीगरों को खतरा नहीं

एआई के दौर में करियर सुरक्षित रखने की चिंता स्वाभाविक है। विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा, कानून, शिक्षा और निर्माण जैसे क्षेत्रों में जहां मानवीय निर्णय, संवेदनशीलता और कुशल कारीगरी की जरूरत है, वहां नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। इसके अलावा एआई को लेकर एक अलग ट्रेंड भी है। टॉप यूनिवर्सिटी के होनहार छात्र अब मोटी सैलरी वाली नौकरियों को छोड़कर खुद का बिजनेस शुरू करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के छात्र चार्ल्स म्यूलबर्गर ने बड़ी कंपनी में इंटर्नशिप करने के बजाय खुद का एआई स्टार्टअप शुरू किया है। एआई के चलते डेटा व तकनीक से जुड़ी नौकरियों में तेजी आएगी, जहां हाथों के हुनर की जरूरत है वहां नौकरी जाने का खतरा नहीं चिकित्सा - इलाज के फैसले लेने वाली नौकरियां सुरक्षित फार्मासिस्ट हीरा मलिक के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में दफ्तर का काम, दवाइयों की पर्ची बनाना और कॉल उठाना जैसे काम एआई से प्रभावित हो सकते हैं, पर डॉक्टरों और नर्सों की जरूरत बनी रहेगी। डॉ. रियाज आगा के मुताबिक प्लास्टिक सर्जरी सुरक्षित है। शिक्षा - पढ़ाई और बच्चों की देखभाल में इंसानी जरूरत शिक्षा में एआई टीचर्स की जगह लेने पर नहीं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जनरेशनल सक्सेस लैब के फाउंडर शरथ जीवन कहते हैं कि छात्रों को सीखने के लिए भरोसेमंद वयस्क रिश्तों की जरूरत हमेशा रहेगी। चाइल्डकेयर एक्सपर्ट विगडॉर्ट्ज के मुताबिक बच्चे की देखभाल के लिए लोग इंसान ही चाहते हैं। कारीगरी - हाथों से होने वाला काम हमेशा सुरक्षित रहेगा फेडरेशन ऑफ मास्टर बिल्डर्स के सीईओ ब्रायन बेरी का कहना है कि निर्माण क्षेत्र में एआई का असर सीमित है। राजमिस्त्री, बढ़ई और प्लास्टर जैसे हाथों के हुनर हमेशा सुरक्षित रहेंगे। हमें इस क्षेत्र के बारे में सोच बदलनी होगी क्योंकि ये काम एआई से ज्यादा भरोसेमंद हैं। बैंकिंग-फाइनेंस - रूटीन जॉब्स पर असर, डेटा और एआई रोल बढ़ेंगे ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के सीनियर बैंकिंग एनालिस्ट टोमाश नोएट्जेल के मुताबिक, बैंकिंग में ग्राहकों की सामान्य सेवा और दफ्तर के दोहराव वाले काम एआई की चपेट में आएंगे। हालांकि, डेटा और तकनीक से जुड़े रोल बढ़ेंगे। जोखिम परखने और फैसले लेने वाले काम सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि बैंकों को इन पर भी इंसान की निगरानी की जरूरत है।

दैनिक भास्कर 13 Jul 2026 1:12 pm

आइटेल A100 प्रो रिव्यू:मिलिट्री ग्रेड बॉडी के साथ ₹8,999 में रफ यूज के लिए बजट फ्रेंडली फोन, बिना सिग्नल कॉल कर सकेंगे

टेक ब्रांड आइटेल ने भारत में नया बजट स्मार्टफोन 'आइटेल A100 प्रो' लॉन्च किया है। यह इस साल फरवरी में आए A100 का अपग्रेडेड वर्जन है। फोन 100 दिन की फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट वारंटी के साथ आया है, जो कई महंगे फोन के साथ भी नहीं मिलती है। तो चलिए जानते हैं इसमें क्या खास है... डिजाइन: पत्थर पर भी गिरने के बाद फोन सेफ रहेगा सबसे पहले बात करें इसके डिजाइन की तो, पहली नजर में फोन प्रीमियम नजर आता है। बैक पैनल पर टेक्स्चर है, जिससे हाथ में सॉलिड ग्रिप बनती है। फोन मिलिट्री ग्रेड सर्टिफाइड है, यानी पत्थर पर भी गिरने के बाद ये सेफ रहेगा। पोर्ट्स और स्विच की बात करें, तो दाईं तरफ पावर और वॉल्यूम बटन्स हैं। ऊपर की तरफ आपको IR ब्लास्टर मिलता है, जिससे आप अपने घर का TV या एसी कंट्रोल कर सकते हैं। और हां, म्यूजिक लवर्स के लिए 3.5mm का ऑडियो जैक भी मौजूद है। डिस्प्ले: 90Hz रिफ्रेश रेट से स्क्रॉलिंग, एप ओपनिंग अच्छी बात करें इसके डिस्प्ले की तो। यहां 6.6-इंच की बड़ी HD+ IPS LCD स्क्रीन मिलती है, जो 90Hz के रिफ्रेश रेट के साथ आती है, जिससे स्क्रॉलिंग और एप ओपनिंग का एक्सपीरियंस काफी स्मूथ मिलता है। फ्रंट में वॉटरड्रॉप नॉच है। बेजल्स साइड से तो पतले हैं, लेकिन नीचे की तरफ थोड़े चौड़े हैं, जो इस बजट में नॉर्मल है। इसमें आईफोन की तरह एक डायनैमिक बार भी है। यानी जब भी आप फोन चार्जिंग पर लगाएंगे, कोई कॉल या नोटिफिकेशन आएगा, तो ऊपर कैमरे के पास एक पॉप-अप खुलेगी, जो देखने में बहुत कूल लगती है। परफॉर्मेंस: यूनिसोक का T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर बात करें परफॉर्मेंस की तो इसमें यूनिसोक का T7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर लगा है। फोन 3GB रैम और 64GB स्टोरेज के साथ सिंगल वैरिएंट में आता है। कंपनी ने इसमें 'मेमोरी फ्यूजन' तकनीक दी है, जिससे वर्चुअल रैम की मदद से आप इसकी रैम को 8GB तक बढ़ा सकते हैं। A100 प्रो लेटेस्ट एंड्रॉइड 15 गो एडिशन पर चलता है। गूगल के गो एप्स बहुत हल्के होते हैं, इसलिए कम रैम होने के बावजूद फोन हैंग नहीं होता, बहुत स्मूथ चलता है और आपकी बैटरी भी बचाता है। डेली यूज, सोशल मीडिया और नॉर्मल काम के लिए इसकी परफॉर्मेंस अच्छी है। फोन में सबसे खास अल्ट्रालिंक टेक्नोलॉजी दी गई है। इस फीचर से आप मोबाइल नेटवर्क नहीं होने पर भी बिना सिग्नल के कॉल कर पाएंगे। फोटोग्राफी: दिन की रोशनी में ठीक क्वालिटी कैमरे की बात करें तो बैक पैनल पर LED फ्लैश के साथ 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और फ्रंट में 5 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा है। बजट के हिसाब से यह एक बेसिक कैमरा है, जिससे आप दिन के उजाले में ठीक-ठाक फोटो खींच सकते हैं और वीडियो कॉलिंग का काम आराम से हो जाएगा। पावर बैकअप की बात करें तो, फोन में 5000mAh की बैटरी दी गई है। बॉक्स में 10W का चार्जर है। नॉर्मल यूज पर यह बैटरी आराम से डेढ़ से दो दिन तक का बैकअप देती है। फाइनल वर्डिक्ट: मजबूत फोन चाहने वालों के लिए बेस्ट ₹8,999 की कीमत में आइटेल A100 प्रो उन लोगों के लिए बेस्ट है जिन्हें एक मजबूत, टिकाऊ और बिना टूटने-फूटने के डर वाला फोन चाहिए। मिलिट्री ग्रेड बॉडी, फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट और बिना सिग्नल कॉल करने वाली तकनीक इसे इस बजट का पैसा वसूल फोन बनाती है।

दैनिक भास्कर 13 Jul 2026 10:33 am

मेडिकल साइंस में पहली बार दो रोबोट्स ने ऑपरेशन किया:सूअरों के पेट से गॉलब्लेडर बाहर निकाला, सर्जरी में इंसान की मदद नहीं ली गई

मेडिकल साइंस में पहली बार दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने सूअरों का सफल ऑपरेशन किया है। 'सर्जी' निकनेम वाले इन रोबोट्स ने सूअरों के पेट से गॉलब्लेडर को सुरक्षित बाहर निकाला। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों और इंजीनियर्स का यह प्रयोग मेडिकल दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए कोई स्पेशल रोबोट नहीं बनाया गया था। डॉक्टरों ने बाजार में मिलने वाले दो आम रोबोट्स का इस्तेमाल किया। इन रोबोट्स की लंबाई करीब 4 से 5 फीट है और इनकी कीमत 20,000 डॉलर यानी करीब ₹19 लाख से भी कम है। दो रोबोट्स ने अकेले पूरी की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी रोबोट्स ने लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी विधि से यानी सूअरों के पेट में बिना बड़ा चीरा लगाए गालब्लेडर निकालने का बेहद मुश्किल ऑपरेशन किया। रोबोट्स ने इंसानी डॉक्टरों की तरह बहुत ही सावधानी से अंदर के टिश्यूज हटाए, उसकी जांच की, नसों को क्लिप से बंद किया और लिवर से गालब्लैडर को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित बाहर निकाल दिया। दो तरीके से ऑपरेशन किया एडवांस्ड सॉफ्टवेयर और खास टूल से मदद मिली ह्यूमनॉइड रोबोट्स को इस सर्जरी के काबिल बनाने के लिए रिसर्च टीम ने खास फिजिकल एडॉप्टर तैयार किए, ताकि रोबोट्स सर्जिकल टूल्स को मजबूती और सटीकता से पकड़ सकें। इसके साथ ही एक खास सॉफ्टवेयर भी डेवलप किया गया। यह सॉफ्टवेयर इंसानी हाथों के इशारों और मूवमेंट को आसानी से ट्रांसलेट करके रोबोट की कलाई से जुड़े सर्जिकल टूल्स को कंट्रोल करता है। टेस्टिंग का मकसद डॉक्टरों की अनुपस्थिति में इलाज करना इस सफल सर्जरी की पूरी डिटेल 8 जुलाई को साइंस जर्नल 'नेचर' में पब्लिश की गई है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है। इस टेस्टिंग से भविष्य में दूरदराज के इलाकों या डॉक्टरों की अनुपस्थिति में भी मरीजों को तुरंत बेहतर इलाज और सर्जरी की सुविधा दी जा सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के 'सेंटर फॉर द फ्यूचर ऑफ सर्जरी' के अंतरिम निदेशक डॉ. रयान ब्रोडेरिक ने बताया कि एक 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' के रूप में यह एक्सपेरिमेंट पूरी तरह से सफल रहा है। नॉलेज पार्ट: गालब्लैडर रिमूवल: इस तरीके से लिवर के नीचे मौजूद गालब्लैडर को टिश्यूज से अलग करके, क्लिप लगाकर शरीर से सुरक्षित बाहर निकाला जाता है।

दैनिक भास्कर 11 Jul 2026 10:00 pm

बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी में सेंध:रिसर्च के मुताबिक- यूट्यूब-इंस्टाग्राम के प्राइवेसी फीचर टेस्ट में फेल, आपत्तिजनक कंटेंट से बचाने वाले फीचर नाकाम

इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में किशोरों के लिए दर्जनों नए सुरक्षा फीचर लॉन्च कर चुकी हैं। कंपनियों का दावा है कि इनके जरिए बच्चों को अनजान लोगों, आपत्तिजनक कंटेंट और सोशल मीडिया की लत से बचाया जा सकता है। लेकिन न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शोधकर्ताओं ने इन प्लेटफॉर्म के सुरक्षा फीचर की जांच की और पाया कि कई फीचर या तो ठीक से काम नहीं करते, कुछ को कुछ सेकंड में बायपास किया जा सकता है, जबकि कुछ सिर्फ दावों तक सीमित हैं। इन तीन प्लेटफॉर्म्स में सामने आईं बड़ी खामियां स्नैपचेट - अंजानों से बचाने का दावा, पर यूजरनेम से पहुंचे बच्चों तकस्नैपचैट ने 2023 में कहा था कि अब किशोर सिर्फ उन्हीं लोगों को दिखाई देंगे, जो उनके परिचित (Mutual Friends) हों। लेकिन रिचर्स में पाया गया कि यदि किसी को किशोर का यूजरनेम पता हो, तो वह आसानी से उसका अकाउंट खोज सकता है। स्नैपचैट खुद भी किशोरों को ऐसे वयस्कों की प्रोफाइल सुझा रहा था, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं था। इंस्टाग्राम - अकाउंट प्राइवेट, लेकिन एल्गोरिदम से अजनबी सुझावमेटा ने टीन अकाउंट लॉन्च करते समय कहा था कि किशोरों के अकाउंट डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रहेंगे और अनचाहे संपर्क कम हो जाएंगे। लेकिन जब शोधकर्ताओं ने एक बच्ची का नया अकाउंट बनाया, तो Suggested for You सेक्शन में लगभग सभी प्रोफाइल ऐसे वयस्क पुरुषों की थीं जिन्हें वह जानती भी नहीं थी। यूट्यूब - स्क्रीन टाइम लिमिट खुद बंद करने के सुझाव दे रहा यूट्यूब यूट्यूब किशोरों के लिए 60 मिनट की स्क्रीन टाइम लिमिट और ‘टेक अ ब्रेक’ रिमाइंडर देता है। रिसर्च में पाया गया कि समय पूरा होते ही यूट्यूब खुद ही Ignore limit for today और Change limit जैसे विकल्प दिखा देता है। यूट्यूब का कहना है कि यदि माता-पिता फैमिली लिंक के जरिए स्क्रीन टाइम तय करें, तो बच्चे उसे बदल नहीं सकते। सुरक्षा फीचर मौजूद, लेकिन उन्हें खोज पाना मुश्किल इन प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षा फीचर इतने जटिल मेन्यू में छिपे हुए हैं कि सामान्य अभिभावकों को उनके बारे में जानकारी ही नहीं होती। कुछ फीचर डिफॉल्ट रूप से चालू नहीं थे। मेटा ने कहा- टीन फीचर्स की वजह से स्क्रीन टाइम घटा मेटा ने कहा कि टीन अकाउंट लागू होने के बाद किशोर कम संवेदनशील कंटेंट देख रहे हैं, रात में Instagram पर कम समय बिता रहे हैं और अनचाहे संपर्क भी घटे हैं। विशेषज्ञ बोले- समस्या कमजोर सुरक्षा टूल मेटा की पूर्व मनोवैज्ञानिक एनेके बफोन का कहना है कि कई बार ये टूल या तो अधूरे होते हैं या इतने जटिल कि उनका पूरा फायदा मिल ही नहीं पाता। इन्हें और सख्त बनाने की जरूरत है।

दैनिक भास्कर 11 Jul 2026 3:49 pm

गूगल एआई:आपका डेटा इस्तेमाल कर रहा गूगल; प्राइवेसी सुरक्षित रखने तुरंत बदलें ये 5 सेटिंग्स

गूगल ने अपनी टर्म्स ऑफ सर्विस और एआई डेटा नीति में बदलाव किया है। अब जेमिनी, गूगल सर्च और लेंस जैसे एआई फीचर्स के साथ साझा किए गए फोटो, ऑडियो और अन्य फाइलों का इस्तेमाल एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। अगर आप नहीं चाहते कि आपका डेटा एआई ट्रेनिंग में इस्तेमाल हो, तो कुछ सेटिंग्स बदलकर इसे सीमित कर सकते हैं। गूगल के नए नियमों के तहत यदि आप जेमिनी से बातचीत करते हैं, गूगल लेंस में फोटो अपलोड करते हैं या एआई फीचर्स के साथ ऑडियो और फाइल साझा करते हैं, तो यह डेटा एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ मामलों में गुणवत्ता जांच के लिए प्रशिक्षित मानव समीक्षक भी इस डेटा को देख सकते हैं। हालांकि अभी जीमेल, गूगल ड्राइव और गूगल फोटोज का सामान्य डेटा इस एआई ट्रेनिंग कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। निजी जानकारी देने से बचें आज गूगल सिर्फ एक सर्च इंजन ही नहीं है। कई लोग इससे मेडिकल सलाह पूछते हैं। कानूनी दस्तावेज समझते हैं। ऑफिस फाइलों का विश्लेषण भी कराते हैं। निजी फोटो एडिट कराते हैं। आवाज से जेमिनी से बातचीत करते हैं। ऐसे में कई बार यूजर अनजाने में निजी जानकारी भी एआई के साथ साझा कर देते हैं। यही वजह है कि प्राइवेसी विशेषज्ञ संवेदनशील दस्तावेज एआई टूल्स पर अपलोड करने से बचने की सलाह देते हैं। कैसे रोकें एआई ट्रेनिंग के लिए डेटा का इस्तेमाल? 1. सर्च सेटिंग्स - Google अकाउंट में Search Services Settings पर जाएं। 2. सेव मीडिया बंद करें - Save Media विकल्प का टिक हटाएं। इससे एआई के लिए हिस्ट्री सेव नहीं होगी। 3. ऑटो डिलीट चालू करें - सर्च हिस्ट्री को 3, 6, 18 या 36 महीने बाद अपने-आप डिलीट होने के लिए सेट करें। 4. सर्च पर्सनलाइजेशन बंद करें - यदि आप नहीं चाहते कि गूगल आपकी पुरानी गतिविधि के आधार पर परिणाम दिखाए, तो सर्च पर्सनलाइजेशन बंद कर दें। 5. माय एक्टिविटी - My Activity में जाकर देखें कि किस-किस प्लेटफॉर्म से डेटा सेव हो रहा है। इसे रिव्यू करें। अगर सेटिंग्स बंद कर देंगे तो क्या बदलेगा? - गूगल सर्च, मैप्स, लेंस और जेमिनी पहले की तरह काम करेंगे, लेकिन वे कम व्यक्तिगत हो सकते हैं। उदाहरण के लिए: -आपके पसंदीदा रेस्तरां की सिफारिशें कम सटीक होंगी। - पुरानी सर्च जल्दी नहीं मिलेंगी। - गूगल मैप्स आपकी पसंद के हिसाब से स्थान कम सुझाएगा। - एआई को आपकी पिछली गतिविधि का कम संदर्भ भी मिलेगा। किन चीजों को एआई पर अपलोड करने से बचें? विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AI चैटबॉट्स पर यह जानकारी साझा न करें... - आधार-पैन-पासपोर्ट कॉपी - बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय दस्तावेज - पासवर्ड - मेडिकल रिपोर्ट - कानूनी अनुबंध - ऑफिस की गोपनीय फाइलें - ओटीपी

दैनिक भास्कर 11 Jul 2026 2:23 pm

एआई दिग्गजों के शौक:जकरबर्ग गायों को महंगे ड्राई-फ्रूट्स खिलाते हैं, मस्क के पास जेम्स बॉन्ड फिल्म की सबमरीन कार

दुनिया के सबसे अमीर टेक-अरबपतियों और एआई से नए-नए बने करोड़पतियों का ‘शौक’ और ‘फितूर’ आम रईसों से बिल्कुल अलग है। पुराने अमीर लोग जहां सोना, हीरे-जवाहरात या महंगी पेंटिंग्स खरीदते थे, वहीं आज के टेक दिग्गज कुछ बेहद अजीब और अप्रत्याशित चीजों पर पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग अपनी गायों को मैकडामिया नट्स खिलाते हैं, ये दुनिया का सबसे महंगा मेवा है। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन भविष्य में आने वाले प्रलय से बचने की तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने करोड़ों रु. खर्च कर बंदूकें, एंटीबायोटिक दवाएं, पानी और इजराइली डिफेंस फोर्स वाले ‘मिलिट्री-ग्रेड गैस मास्क’ रखे हैं। ऑल्टमैन ने न्यूक्लियर रेडिएशन से बचाने वाले पोटैशियम आयोडाइड का स्टॉक कर रखा है। उन्होंने कैलिफोर्निया में घने जंगलों के बीच जमीन ले रखी है, जहां वे संकट के समय प्राइवेट प्लेन से उड़कर जा सकते हैं। विज्ञान की चमत्कारिक कहानियों के क्रेजी इलॉन मस्क ने जेम्स बॉन्ड की फिल्म में इस्तेमाल हुई असली सबमरीन कार को करीब 9.2 करोड़ रु. में खरीदा। वे अपने घर में सजावट के लिए स्पेस रॉकेट्स का मलबा व कल-पुर्जे रखते हैं। वहीं, मस्क की ‘स्पेसएक्स’ के शेयरों से रातों-रात करीब 34 करोड़ रु. की मालकिन बनीं वियतनाम की 50 वर्षीय डेटा साइंटिस्ट ह्यूयेन चिप के गैरेज में कोई रोल्स रॉयल नहीं, बल्कि 4.2 लाख रु. का एक पुराना फायर ब्रिगेड ट्रक है। उनके घर की मेज पर 9 लाख रु. का उल्कापिंड (स्पेस रॉक्स) रखा है। चिप कहती हैं, ‘मुझे नहीं पता मैं इस फायर ट्रक का क्या करूंगी, शायद अपने 3 साल के बच्चे के जन्मदिन पर बच्चों को घुमाऊं। लेकिन इस नई दौलत ने मुझे अपने सपने पूरे करने की आजादी दी है।’ अनुभवों, व्यक्तिगत फितूरों पर निवेश का रुझान यूबीएस की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, केवल अमेरिका में पिछले साल 4.4 लाख लोग नए करोड़पति बने हैं। लेकिन पारंपरिक लग्जरी ब्रांडों (जैसे गुच्ची, अरमानी) के लिए ये नए रईस एक अनसुलझी पहेली बन गए हैं। कंसल्टेंसी फर्म ‘बैन एंड कंपनी’ की पार्टनर फेडेरिका लेवातो के अनुसार, आज का टेक-करोड़पति गुच्ची के लेदर बैग या अरमानी के सूट पर पैसे खर्च करने के बजाय ‘अनुभवों’ और ‘व्यक्तिगत फितूरों’ पर निवेश कर रहा है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप का डेटा बताता है कि पुराने अमीर लोगों की तुलना में नए टेक रईस कपड़ों और लेदर आइटम पर 33% कम खर्च करते हैं।

दैनिक भास्कर 10 Jul 2026 12:26 pm

BSNL सैटेलाइट फोन लॉन्च, बिना सिम-नेटवर्क के बात होगी:इमरजेंसी के लिए SOS सपोर्ट, खरीदने के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी; कीमत ₹1.34 लाख

सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने भारत में नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। इसकी कीमत टैक्स मिलाकर 1,34,166 रुपए रखी गई है। यह रेगुलर स्मार्टफोन से बिल्कुल अलग है, जो बिना सिम और नेटवर्क के बजाय सीधे सैटेलाइट की मदद से काम करता है। फोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नेटवर्क विहीन और ऑफ-ग्रिड जगहों पर भी बिना किसी रुकावट के वॉयस कॉल करने की सुविधा देता है, जबकि आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फोन नजदीकी मोबाइल टावर की मदद से काम करते हैं। सेटेलाइट फोन को खरीदने के लिए सरकार की मंजूरी लेना होगी। आपातकालीन स्थिति में कनेक्टिविटी आसान होगा इस फोन का फायदा उन सुदूर इलाकों में भी काम करेगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाते हैं। इससे आपदा या आपातकालीन स्थितियों में लोगों से संपर्क बनाए रखना आसान हो जाएगा। कंपनी ने बताया कि इस हैंडसेट को ग्लोबल सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर 'इनमारसैट' के साथ पार्टनरशिप में बनाया गया है। खरीदने के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य यह आम फोन या गैजेट की तरह सीधे दुकान पर नहीं मिलेगा। भारत में सैटेलाइट फोन को लेकर कड़े नियम हैं। इस फोन को खरीदने या इस्तेमाल करने से पहले यूजर को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) से मंजूरी या ऑथराइजेशन लेना अनिवार्य होगा। सरकार की बिना मंजूरी के सैटेलाइट फोन रखना या इसे ऑपरेट करना भारतीय नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। BSNL का यह सैटेलाइट फोन रोजमर्रा के स्मार्टफोन यूजर्स के लिए नहीं है। इसे उन लोगों और ऑर्गेनाइजेशन्स के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में भरोसेमंद कम्युनिकेशन की जरूरत होती है।

दैनिक भास्कर 10 Jul 2026 6:51 am

नथिंग फोन (4b) ट्रांसपेरेंट फोन लॉन्च, शुरुआती कीमत ₹29,999:ग्लिफ इंटरफेस और 50MP कैमरा के साथ 6000mAh बैटरी, 30 मिनट में 50% चार्जिंग

टेक कंपनी नथिंग ने भारत में अपनी नई 'b' सीरीज का पहला ट्रांसपेरेंट स्मार्टफोन नथिंग फोन (4b) लॉन्च कर दिया है। यह फोन अपने अनोखे डिजाइन, नथिंग के सिग्नेचर ग्लिफ इंटरफेस, 6000mAh बैटरी और क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 6 जेन 4 प्रोसेसर के साथ आया है। फोन में कई एडवांस्ड AI फीचर्स भी दिए गए हैं। नथिंग फोन (4b) को दो वैरिएंट में उतारा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 34,999 रुपए रखी गई है। कंपनी लॉन्च ऑफर में 7.5% का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस दे रही है। इसके बाद फोन की प्रभावी शुरुआती कीमत ₹29,999 हो जाती है। स्मार्टफोन की सेल 14 जुलाई 2026 से शुरू होगी। डिजाइन, बिल्ड क्वालिटी और कलर्स नथिंग ने अपने इस नए फोन में सिग्नेचर ट्रांसपेरेंट लुक को बरकरार रखा है, जो हाथ में प्रीमियम फील देता है। फोन के बैक पैनल पर नया 'ग्लिफ बार' दिया गया है। इसमें 45 अलग-अलग कंट्रोल होने वाली मिनी LED लाइट्स हैं। ये लाइट्स बिना स्क्रीन ऑन किए ही यूजर को चार्जिंग स्टेटस, नोटिफिकेशन, रिकॉर्डिंग और कस्टम अलर्ट की जानकारी देती हैं। डिस्प्ले और परफॉर्मेंस कैमरा और बैटरी बैकअप सॉफ्टवेयर और AI फीचर्स स्मार्टफोन एंड्रॉइड 16 पर बेस्ड नथिंग OS 4.1 पर चलता है। इसमें चैटजीपीटी इंटीग्रेशन, गूगल जेमिनी और 'सर्कल टू सर्च' जैसे कई एसेंशियल AI टूल्स इन-बिल्ट मिलते हैं। कंपनी फोन के साथ 3 साल के एंड्रॉएड अपडेट और 6 साल के सिक्योरिटी अपडेट देगी। मार्केट में इसका सीधा मुकाबला मोटोरोला एज 70 फ्यूजन और सैमसंग गैलेक्सी A27 5G जैसे स्मार्टफोन्स से होगा।

दैनिक भास्कर 9 Jul 2026 3:36 pm

अमेरिकी कॉमर्शियल पायलट बोले- डिजिटल वर्ल्ड में हड़बड़ी न दिखाएं:सिर्फ टेक्स्ट मैसेज से छिनी पहचान; आंखों के सामने पैसा जाता रहा, कुछ न कर सका

अगर आपके बच्चों की तस्वीरें, बैंक खातों के पासवर्ड और आपकी डिजिटल पहचान एक ही ‘की’ से सुरक्षित हो और वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए, तो सब खतरे में पड़ सकता है। कॉमर्शियल एयरलाइन पायलट रेयान पेटिट के साथ ऐसा ही हुआ। विमानन क्षेत्र में काम करने वाले पेटिट जानते हैं कि सुरक्षा के लिए हमेशा कई स्तरों पर बैकअप होता है, पर डिजिटल दुनिया में उनकी सुरक्षा एक कमजोर कड़ी पर टिक गई थी। एक साधारण-सा टेक्स्ट मैसेज आया और उनकी पूरी डिजिटल पहचान उनसे छिन गई। पढ़िए उनकी कहानी और एक्सपर्ट से जानिए किन गलतियों से बचना चाहिए... मुझे गोल्डमैन साक्स एपल कार्ड पर एक संदिग्ध लेन-देन का ‘फ्रॉड अलर्ट’ मैसेज मिला। मैसेज में सिर्फ ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देने को कहा गया था। सुरक्षा के लिए मैंने ‘ना’ लिखकर भेज दिया। कुछ ही मिनटों बाद कॉल आया। कॉलर आईडी पर एपल कार्ड सपोर्ट का नंबर दिख रहा था। मुझे शक नहीं हुआ, क्योंकि मैसेज भी उसी आधिकारिक i Message थ्रेड में एपल लोगो व ग्रे बबल के साथ आ रहे थे। कॉलर ने कहा कि मेरी पहचान सत्यापित करने के लिए कोड भेजा जा रहा है। जैसे ही कोड बताया, सब कुछ बदल गया। मैंने पहचान पूछी, तो उसने मेरा सोशल सिक्योरिटी नंबर व जन्मतिथि तक बता दी। तब लगा कि मैं ठगी का शिकार हो चुका हूं। आंखों के सामने मेरी पूरी डिजिटल दुनिया बिखरने लगी। मैं देख रहा था कि एपल वॉलेट से कैश एप, वीसा कार्ड और एपल कार्ड एक-एक करके गायब हो रहे थे। हैकर ने मेरे अकाउंट में अपना फोन नंबर जोड़ दिया और मेरा नंबर हटा दिया। कुछ ही देर बाद मैं अपने ही अकाउंट से बाहर हो गया। मेरा आईफोन रीसेट हो गया और बेकार डिवाइस बनकर रह गया। मैं बिना डिजिटल वॉलेट व पैसों के होनोलूलू पहुंचा। किसी तरह लैपटॉप पर वाई-फाई जोड़कर पत्नी को मैसेज किया। उन्होंने मेरे लिए उबर बुक की। एपल स्टोर पहुंचने पर पता चला कि हैकर ने फोन पर एक्टिवेशन लॉक लगा दिया है। पहचान व खरीद के सबूत दिखाने के बावजूद एपल कर्मचारी मदद नहीं कर सके। नुकसान सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं था। हैकर के हाथ मेरी एक लाख से ज्यादा फैमिली फोटो, पासवर्ड और मैसेज हिस्ट्री लग चुकी थी। उसने मेरे निवेश बेचकर नकदी निकाल ली। पत्नी को मेरे नाम पर मैसेज भेजकर हजारों डॉलर ठग लिए। मेरे अकाउंट खाली हो गए। स्मार्टवॉच का डेटा हटा दिया, इससे वह मुझे नहीं पहचान सकी। पुलिस भी मदद नहीं कर सकी।’- रेयान ऑथेंटिकेटर एप रखें साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट केविन मिटनिक सुझाव देते हैं,‘अपने डिजिटल वर्ल्ड की एक ‘मास्टर की’ न रखें। लॉगिन हैक होते ही बैंक, फोटो व डेटा खतरे में पड़ सकते हैं; सभी खाते अलग रखें। हार्डवेयर सिक्योरिटी की या ऑथेंटिकेटर एप इस्तेमाल करें, जिससे पासवर्ड व नंबर लीक होने पर भी अकाउंट सुरक्षित रहता है। कॉलर आईडी पर दिखने वाले नाम या नंबर पर भरोसा न करें। बैंक या संस्थान को कॉल करके जांच कर लें।

दैनिक भास्कर 9 Jul 2026 1:42 pm

इंडोनेशिया में रोबोट के हमले का VIDEO वायरल:10 करोड़ लोगों ने देखा; हैंडलर स्किल्स का डेमोंस्ट्रेशन दे रहा था, सेफ्टी पर बहस शुरू

सोशल मीडिया पर इंडोनेशिया के एक ऑफिस का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें एक ह्यूमनॉइड रोबोट अपने ही साथियों पर हमला करता दिख रहा है। ये वीडियो 10 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है। वीडियो में हैंडलर रोबोट के स्किल्स का डेमो दे रहा था, इसी दौरान उसने हमला कर दिया। वीडियो देख लोग रोबोट की खराबी मान रहे थे, लेकिन जांच में सामने आया कि यह वीडियो पूरी तरह स्क्रिप्टेड था। मार्शल आर्ट्स करता दिखा रोबोट यह वीडियो सबसे पहले 5 जुलाई को इंडोनेशिया के एक टिकटॉक यूजर 'जोको प्रबुवेसी' ने पोस्ट किया था, जिसके बाद यह दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल गया। वीडियो में रोबोट पहले मार्शल आर्ट्स जैसे मूव्स करता दिखता है। इसके बाद वह अपने पीछे खड़े हैंडलर की तरफ मुड़ता है और एक अन्य व्यक्ति को लात मारकर जमीन पर गिरा देता है। रोबोटिक्स के खतरों पर शुरू हुई बहस वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच डर और चिंता का माहौल बन गया। कई लोगों ने कयास लगाए कि रोबोट का सॉफ्टवेयर फेल हो गया है और वह आउट ऑफ कंट्रोल हो गया। वहीं, कुछ यूजर्स ने इस बात पर चिंता जताई कि भविष्य में एडवांस होते ह्यूमनॉइड रोबोट इंसानों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। रोबोट की फुर्ती दिखाने के लिए की गई थी कोरियोग्राफी 'इंटररेस्टिंग इंजीनियरिंग' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो कोई वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि रोबोट के हैंडलर्स ने एक डेमोंस्ट्रेशन तैयार किया था। रोबोट के फंक्शन और कंट्रोल को दिखाने के लिए पूरे सीक्वेंस को कोरियोग्राफ किया गया था। रोबोट की फुर्ती, बैलेंस और रिस्पॉन्सिवनेस दिखाने के लिए उसके हर मूवमेंट को पहले से प्रोग्राम किया गया था। रोबोटिक तकनीक के एडवांस होने पर छिड़ी चर्चा हालांकि इस वीडियो को सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाया गया था, लेकिन रोबोट के रियलिस्टिक मूवमेंट्स और वहां मौजूद लोगों के रिएक्शन इतने स्वाभाविक थे कि इसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी। लोग इस बात को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि आधुनिक ह्यूमनॉइड रोबोट अब कितने जीवंत और एडवांस हो चुके हैं। चीन में रोबोट ने बच्चे को मारी थी लात ह्यूमनॉइड रोबोट्स से जुड़ी वास्तविक घटनाएं भी हाल ही में सामने आई हैं। जून में चीन के शिनजियांग में एक इवेंट के दौरान 'यूनिट्री जी1' रोबोट जोकर की तरह परफॉर्म कर रहा था। इस दौरान रोबोट ने वहां मौजूद एक बच्चे के पेट में लात मार दी थी। कारण रोबोट ने छात्रा को गले लगाया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, अप्रैल में चीन के शांक्सी प्रांत की 'शीआन यूरेसिया यूनिवर्सिटी' में एक डांस परफॉर्मेंस के दौरान ह्यूमनॉइड रोबोट ने अचानक एक छात्रा को गले लगा लिया था। शुरुआत में यूनिवर्सिटी स्टाफ ने प्री-प्रोग्रामिंग से इनकार करते हुए इसे AI सॉफ्टवेयर की खराबी बताया था। हालांकि, बाद में रोबोट के सप्लायर ने साफ किया कि यह घटना कार्यक्रम स्थल पर सिग्नल ब्रेक होने से हुई थी।

दैनिक भास्कर 8 Jul 2026 10:39 pm

परफेक्ट कार कलर चुनने की 5-स्टेप प्रोसेस:करीब 50% भारतीय लोगों को पसंद है सफेद रंग; ग्रीन, बेज, ऑरेंज की डिमांड कम

नई कार खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कौन-सा कलर चुनें? सिर्फ पसंद का नहीं, बल्कि मेंटेनेंस, गर्मी, रीसेल वैल्यू और ट्रेंड का भी। BASF की जनवरी में आई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में बिकने वाली कुल कारों में 48% सफेद रहीं। यानी हर दो में से एक खरीदार सफेद कलर की कार खरीद रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह सफेद कलर का मेंटेनेंस अन्य कलर की तुलना में सबसे कम है, यानी सफेद कलर में स्क्रैच छुपाना सबसे आसान होता है। साथ ही सफेद कार की रीसेल वैल्यू भी सबसे ज्यादा होती है। हालांकि, अब ट्रेंड बदल रहा है और अलग लुक के लिए लोग ग्रे, ब्लैक, ब्लू और ग्रीन जैसे बोल्ड कलर वाली कार भी खरीद रहे हैं। परफेक्ट कार कलर चुनने की 5-स्टेप प्रोसेस स्टेप 1: अपना प्राइमरी यूज और इलाका देखें सबसे पहले यह तय करें कि आप गाड़ी कहां और कैसे चलाने वाले हैं: स्टेप 2: अपनी मेंटेनेंस की आदत पहचानें आप गाड़ी की साफ-सफाई को कितना वक्त दे सकते हैं, यह बहुत जरूरी है: मेंटेनेंस के लिए 'बेस्ट' VS 'वर्स्ट' कलर स्क्रैच ठीक करने में आसान 'स्पेशल एडिशन' रंग खरीदने के नुकसान स्टेप 3: रोड सेफ्टी और विजिबिलिटी को तवज्जो दें रात के समय होने वाले एक्सीडेंट्स से बचने के लिए कलर की विजिबिलिटी मायने रखती है: स्टेप 4: बजट और वेरिएंट की उपलब्धता चेक करें शोरूम जाने से पहले बजट का गणित समझें: कम बजट: अगर बजट टाइट है, तो फ्लैट वाइट चुनें। इसके लिए ज्यादातर कंपनियां एक्स्ट्रा पैसे नहीं लेतीं और स्क्रैच आने पर इसका री-पेंट भी सबसे सस्ता होता है। फ्लेक्सिबल बजट: अगर आप एक्स्ट्रा कॉस्ट उठाने को तैयार हैं, तभी मैट फिनिश, ट्रेंडी कलर्स या स्पेशल एडिशंस जैसे जेट या काजीरंगा एडिशन की तरफ कदम बढ़ाएं। स्टेप 5: फ्यूचर रिसेल वैल्यू का आकलन करें गाड़ी को 4-5 साल में बदलने का प्लान है या लंबे समय तक रखने का, यह सोच लें: शॉर्ट समरी गाइड

दैनिक भास्कर 8 Jul 2026 12:33 pm

एंड्रॉएड यूजर्स का फ्री स्टोरेज जल्दी फुल होगा:कॉल हिस्ट्री और SMS बैकअप 15GB में जुड़ेगा, एक्स्ट्रा स्टोरेज के लिए प्लान ₹59 से शुरू

अगर आप एंड्रॉएड स्मार्टफोन यूजर हैं और अपने फोन का बैकअप गूगल अकाउंट पर रखते हैं, तो अब अकाउंट का फ्री 15GB स्टोरेज जल्दी फुल हो सकता है। क्योंकि, गूगल ने अपनी स्टोरेज पॉलिसी बदल दी है। गूगल की अपडेटेड पॉलिसी के मुताबिक, आपके फोन के फोटो-वीडियो ही नहीं, बल्कि अब SMS, कॉल हिस्ट्री और एप डेटा का बैकअप भी आपकी इसी फ्री लिमिट में सेव होगा। यह नियम सबसे पहले नए एंड्रॉयड यूजर्स पर लागू होगा। अभी गूगल फोटोज पर अपलोड इमेज, वीडियो सेव होता है वहीं, मौजूदा यूजर्स के अकाउंट्स में आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब बाय डिफॉल्ट आपके गूगल अकाउंट की ज्यादा स्टोरेज खर्च होगी। अभी तक गूगल आपकी फ्री 15GB क्लाउड स्टोरेज में सिर्फ गूगल फोटोज पर अपलोड की गई इमेज, वीडियो और MMS डेटा में शामिल फोटो-वीडियो को ही काउंट करता था। एक्स्ट्रा स्पेस के लिए भारत में ₹59 से शुरू हैं प्लान गूगल अपनी स्टोरेज पॉलिसी में लगतार बदलाव कर रहा है। इससे पहले मई में कंपनी ने कुछ नए अकाउंट्स के लिए फोन नंबर लिंक न करने की स्थिति में डिफॉल्ट फ्री स्टोरेज लिमिट को 15GB से घटाकर 5GB करने की टेस्टिंग शुरू की थी। यदि आप अपने अकाउंट के लिए अतिरिक्त स्टोरेज खरीदना चाहते हैं, तो भारत में गूगल वन के प्लान ₹59 प्रति माह से शुरू होते हैं, जिसमें 30GB स्टोरेज मिलती है। इसके अलावा गूगल AI प्लान्स के साथ भी फ्री स्टोरेज दी जा रही है। आप चाहें तो ज्यादा लिमिट वाले पेड गूगल वन या गूगल AI प्लान भी चुन सकते हैं। स्पेस मैनेज करने के लिए नए ऑन-ऑफ टॉगल मिलेंगे इस बदलाव के साथ ही गूगल यूजर्स को बैकअप पर ज्यादा कंट्रोल देने के लिए नए फीचर्स भी जोड़ रहा है। अब तक मिलने वाले प्रति-एप कंट्रोल्स के साथ ही यूजर्स को SMS, MMS, कॉल हिस्ट्री और डिवाइस सेटिंग्स के लिए ऑन-ऑफ टॉगल मिलेंगे। इसकी मदद से आप खुद चुन सकेंगे कि किस डेटा का बैकअप लेना है और किसका नहीं। इसे सेट करने के लिए आप अपने डिवाइस की सेटिंग्स में 'गूगल बैकअप' पेज पर जा सकते हैं। गूगल का दावा- औसत सिर्फ 40MB डेटा बढ़ेगा हालांकि, इस बदलाव से यूजर्स की फ्री स्टोरेज लिमिट जल्दी खत्म होने का डर है, लेकिन कंपनी का कहना है कि इसका असर बेहद मामूली होगा। एक गूगल प्रवक्ता ने कहा, हमने अपनी पॉलिसी को अपडेट किया है, ताकि अब सभी एंड्रॉयड बैकअप डेटा गूगल अकाउंट स्टोरेज में काउंट हों। हमें उम्मीद है कि इससे औसतन केवल 40MB डेटा ही बढ़ेगा। हम यूजर्स को ज्यादा पारदर्शिता और नए कंट्रोल्स भी दे रहे हैं, जिससे वे खुद चुन सकें कि किस डेटा और ऐप का बैकअप लेना है। नॉलेज पार्ट: क्लाउड स्टोरेज और बैकअप डेटा क्या होता है?

दैनिक भास्कर 7 Jul 2026 11:19 pm

मारुति विक्टोरिस ₹39,000 तक सस्ती हुई:8 महीने में बिकी 1 लाख गाड़ियां, हाइब्रिड और CNG ऑप्शन के साथ लेवल-2 ADAS सेफ्टी फीचर

मारुति सुजुकी ने मिडसाइज एसयूवी विक्टोरिस के कुछ वैरिएंट्स ₹39,000 तक सस्ते कर दिए हैं। कार 6 वैरिएंट्स- LXI, VXI, ZXI, ZXI(O), ZXI प्लस और ZXI+ (O) के साथ आती है। कंपनी ने विक्टोरिस के ZXi (O) और ZXi+ (O) ट्रिम्स के मैनुअल ट्रांसमिशन (MT) और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन (AT) वैरिएंट्स के दाम घटाए हैं। कार के (O) यानी ऑप्शनल वैरिएंट्स पैनोरमिक सनरूफ के साथ आते हैं, यानी सनरूफ वाला ऑप्शन सस्ता हो गया है। हालांकि, इसके नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन वाले अन्य स्टैंडर्ड वैरिएंट्स की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विक्टोरिस की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 10.50 लाख रुपए है।विक्टोरिस 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग और लेवल-2 ADAS के साथ आती है स्लीक एक्सटीरियर ​डिजाइन और मॉर्डन इंटीरियर के साथ विक्टोरिस में बड़ी टचस्क्रीन, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले हाइब्रिड और CNG ऑप्शन के साथ लेवल-2 ADAS सेफ्टी फीचर भी शामिल है। कार को भारत एनकैप ने क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिल चुकी है। इसका डिजाइन इलेक्ट्रिक SUV ई-विटारा से लिया गया है। कार का मुकाबला हुंडई क्रेटा, किआ सेल्टोस, टोयोटा अर्बन क्रूजर हायराइडर, MG एस्टर और होंडा इलिवेट जैसी गाड़ियों से रहेगा। डिजाइन: मॉडर्न और बोल्ड लुक विक्टोरिस में सामने की तरफ चंकी एलईडी हेडलाइट्स हैं, जो एक पतली ग्रिल कवर से जुड़ी हुई हैं और ऊपर क्रोम स्ट्रिप है। बॉडी के चारों तरफ मोटी प्लास्टिक क्लैडिंग दी गई है, जो इसे रफ एंड टफ लुक देती है, साथ ही सिल्वर स्किड प्लेट भी लगी है। साइड प्रोफाइल में 18-इंच अलॉय व्हील्स, सिल्वर रूफ रेल्स और स्क्वेयर्स-ऑफ बॉडी क्लैडिंग है, जो इसे स्पोर्ट लुक देते हैं। पीछे की तरफ सेगमेंटेड एलईडी लाइट बार है और 'VICTORIS' की बैजिंग दी गई है। कुल मिलाकर, यह डिजाइन मॉडर्न और प्रीमियम लगता है, जो शहर की सड़कों से लेकर हाईवे तक सूट करेगा। इंटीरियर की बात करें तो डैशबोर्ड टेक-फोकस्ड है, जिसमें 10.25-इंच इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले और थ्री-स्पोक स्टीयरिंग व्हील है। यह 5-सीटर कैबिन देती है, जिसमें फैमिली के लिए काफी स्पेस है। लेदरेट सीट अपहोल्स्ट्री, एम्बिएंस लाइटिंग और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल जैसे फीचर्स इसे कम्फरटेबल बनाते हैं। इंजन और परफॉर्मेंस: तीन ऑप्शन मिलेंगे विक्टोरिस में तीन तरह के पावरट्रेन दिए गए हैं, जो हर तरह के ग्राहक की जरूरत पूरी करेंगे: ये सभी ऑप्शन्स फ्यूल-एफिशिएंट हैं, जो मारुति की खासियत है। डाइमेंशन्स की डिटेल्स अभी पूरी तरह कन्फर्म नहीं हैं, लेकिन यह मिड-साइज होने से ब्रेजा से बड़ी और ग्रैंड विटारा से कॉम्पैक्ट लगेगी। फीचर्स और सेफ्टी: पैनोरमिक सनरूफ और लेवल 2 ADAS विक्टोरिस फीचर्स के मामले में टॉप क्लास है। इंफोटेनमेंट में 10.25-इंच टचस्क्रीन है, जो वायरलेस एप्पल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो सपोर्ट करती है। 8-स्पीकर साउंड सिस्टम डॉल्बी एटमॉस के साथ आता है, साथ ही कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी भी है। कम्फर्ट फीचर्स में वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस चार्जर, 8-वे इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, हेड्स-अप डिस्प्ले, कैबिन एयर फिल्टर और पावर्ड टेलगेट शामिल हैं। सेफ्टी की बात करें तो यह मारुति की पहली कार है जिसमें लेवल 2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) है। स्टैंडर्ड फीचर्स में 6 एयरबैग्स, ABS विद EBD, ट्रैक्शन कंट्रोल, ब्रेक असिस्ट, हिल होल्ड कंट्रोल और ISOFIX चाइल्ड सीट एंकरेज हैं। हायर वैरिएंट्स में 360-डिग्री कैमरा, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम है। इस कार को भारत एनकैप क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग दी है।

दैनिक भास्कर 7 Jul 2026 8:02 pm

E10 गाड़ियों में E20 ईंधन से घट सकता है माइलेज:रबर पार्ट भी खराब हो सकते हैं; ARAI की इंजन टेस्टिंग रिपोर्ट में खुलासा

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक स्टडी में सामने आया है कि पुरानी E10 कंप्लायंट गाड़ियों में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। 10 सवालों के जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: ARAI की इस रिपोर्ट में सबसे मुख्य बात क्या निकलकर सामने आई है? जवाब: ARAI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, E10 गाड़ियों में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर फ्यूल-सिस्टम खराब हो सकता है। इससे गाड़ी के रबर पार्ट्स जैसे पाइप, गैस्केट्स, सील्स और ओ-रिंग्स को नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। सवाल 2: क्या रिपोर्ट को आम जनता के लिए जारी किया गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: नहीं, इस स्टडी रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, यह रिपोर्ट सरकार और देश के प्रमुख वाहन निर्माताओं (OEMs) के बीच इस पूरे मामले पर नीति बनाने और तकनीकी सुधार करने के लिए एक मुख्य रेफरेंस पॉइंट बनी हुई है। सवाल 3: चार पहिया वाहनों के इंजन पर E20 ईंधन के असर को लेकर क्या टेस्टिंग की गई थी? जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, दो OEMs ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए थे। इसमें एक निर्माता की गाड़ी के इंजन ने 400 घंटे की टेस्टिंग के बाद कोई समस्या नहीं दिखाई और उसका परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ सही पाया गया। लेकिन दूसरे निर्माता के मामले में स्थिति अलग रही। सवाल 4: दूसरे चार पहिया वाहन निर्माता की गाड़ी में क्या तकनीकी समस्या देखी गई? जवाब: दूसरे OEM के इंजन की जब 809 घंटे तक टेस्टिंग की गई, तो उसके एग्जॉस्ट वाल्व में 'थर्मोमैकेनिकल फेलियर' देखा गया। हालांकि, इस मामले के जानकारों का कहना है कि एग्जॉस्ट वाल्व के फेल होने के पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। सवाल 5: यह 'थर्मोमैकेनिकल फेलियर' क्या होता है और इससे इंजन को क्या नुकसान है? जवाब: थर्मोमैकेनिकल फेलियर तब होता है जब अत्यधिक गर्मी और तेज व बार-बार होने वाली हलचल (मैकेनिकल स्ट्रेस) एक साथ मिलती हैं। इन दोनों के संयुक्त दबाव के कारण इंजन का एग्जॉस्ट वाल्व मुड़ सकता है, उसमें दरार आ सकती है या वह पूरी तरह से टूट सकता है। सवाल 6: BS-IV और BS-VI इंजन वाली चार पहिया गाड़ियों की टेस्टिंग में क्या अंतर मिला? जवाब: रिपोर्ट में 4-व्हीलर इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के तहत बताया गया है कि टेस्टिंग के दौरान एक BS-IV इंजन का परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य रहा। इसके विपरीत, एक BS-VI टर्बो चार्ज्ड इंजन में 265 घंटे की ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग के बाद ही समस्या देखी गई। सवाल 7: दो पहिया वाहनों पर इस टेस्टिंग का क्या परिणाम रहा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, तीन दो पहिया वाहन निर्माताओं ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए गए थे। इन टेस्ट्स में इंजनों में कोई समस्या नहीं पाई गई। इन्हें E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य पाया गया है। सवाल 8: क्या E20 ईंधन से गाड़ियों के मैटेलिक पार्ट्स या उत्सर्जन पर बुरा असर पड़ता है? जवाब: नहीं, सभी टेस्ट किए गए वाहनों पर इस स्टडी में पाया गया कि E20 ईंधन का मैटेलिक कंपोनेंट्स पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा, E10-कंप्लायंट वाहनों में E20 ईंधन डालने पर भी साइलेंसर से होने वाला उत्सर्जन तय कानूनी सीमाओं के भीतर ही पाया गया। सवाल 9: गाड़ियों की माइलेज या ईंधन की खपत पर इससे क्या प्रभाव पड़ा? जवाब: ARAI की स्टडी में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E10 ईंधन की तुलना में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने पर वाहनों की ईंधन खपत 2% से 6% तक बढ़ जाती है। यानी गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है। हालांकि, ईंधन की खपत में होने वाली यह बढ़ोतरी अलग-अलग गाड़ियों के मॉडल और कैटेगरी के हिसाब से बदलती है। सवाल 10: गाड़ी के स्टार्ट होने, चलने और वाष्पीकरण उत्सर्जन पर क्या असर दिखा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, E20 ईंधन के साथ गाड़ियों का इवैपोरेटिव एमिशन भी पूरी तरह से कानूनी सीमा के भीतर पाया गया। इसके साथ ही, गाड़ियों की स्टार्टेबिलिटी (आसानी से स्टार्ट होना) और ड्राइवैबिलिटी (चलने की परफॉर्मेंस) भी E20 ईंधन के साथ बिल्कुल ठीक पाई गई। सरकार ने कहा था- टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान का सबूत नहीं मिला बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाड़ी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूद रहे थे। उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए थे। पेट्रोल में 25% एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला टाल सकती है सरकार E20 फ्यूल के विरोध के बीच सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। सरकार इस ट्रांजिशन को जल्दबाजी में करने के बजाय धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहती है। सरकार ने शुरुआत में साल 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्लान बनाया था। लेकिन इस टारगेट से बहुत पहले ही E20 फ्यूल (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) को पूरे देश में स्टैंडर्ड पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया है और अब हर जगह यही पेट्रोल मिल रहा है।

दैनिक भास्कर 7 Jul 2026 11:55 am

भूटान का भारत से E20 पेट्रोल लेने से इनकार:कहा- गाड़ियां खराब होने का खतरा, हमें नॉर्मल पेट्रोल ही दें

भारत सरकार के E20 यानी 20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के फैसले पर जहां देश में विवाद और विरोध चल रहा है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय ऑयल कंपनियों (OMCs) के E20 पेट्रोल लेने से मना कर दिया है। भूटानी मीडिया 'द भूटानीज' की रिपोर्ट के मुताबिक, भूटान ने भारत से अनुरोध किया है कि जब तक भारतीय बाजार में नॉर्मल पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उन्हें बिना मिलावट वाला पुराना पेट्रोल ही सप्लाई किया जाए। पुरानी स्टोरेज और वाटर लीकेज सबसे बड़ा कारण भूटान के अधिकारियों के मुताबिक, देश का फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर काफी पुराना है। वहां के पेट्रोल पंपों के फ्यूल टैंक जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बने हैं, जिनमें पानी रिसने यानी सीपेज का खतरा रहता है। नॉर्मल पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल में हाइड्रोक्सिल ग्रुप होता है, जो हवा या आसपास की नमी को बहुत तेजी से सोखता है (हाइग्रोस्कोपिक नेचर)। अगर E20 पेट्रोल को ऐसे टैंकों में रखा जाए जहां पानी का रिसाव हो, तो पेट्रोल में पानी मिल जाएगा। इस पानी को पेट्रोल से अलग करना बेहद मुश्किल होता है। इसके अलावा, टैंक में पानी होने से स्टील के टैंकों और पाइपलाइनों में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं। पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों के परफॉर्मेंस की चिंता भूटान का इलाका पूरी तरह से पहाड़ी और ऊंचा-नीचा है। ऐसी चढ़ाई वाले रास्तों पर गाड़ियों को चलने के लिए मैक्सिमम पावर यानी ज्यादा ताकत की जरूरत होती है। भूटानी अधिकारियों को डर है कि एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों को वो परफॉर्मेंस और पावर नहीं दे पाएगा, जो नॉर्मल पेट्रोल देता है। भारत में क्यों हो रहा है E20 पेट्रोल का विरोध? भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि एथेनॉल से माइलेज में मामूली कमी जरूर आती है, लेकिन इससे गाड़ी का पिकअप और इंजन परफॉर्मेंस बेहतर होता है। भूटान को कैसे पता चलेगा कि पेट्रोल में मिलावट है? भूटान अपनी जरूरत का पूरा ईंधन भारत से ही खरीदता है। फिलहाल भूटान भारत से महंगे और हाई-एक्सपोर्ट क्वालिटी वाले पेट्रोल-डीजल की खरीद करता है, जो भारतीय पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले फ्यूल से ज्यादा शुद्ध और महंगा होता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत गलती से E20 पेट्रोल भूटान भेज भी देता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकता है। एथेनॉल वाले पेट्रोल में जरा सा भी पानी मिलते ही उसका रंग दूधिया हो जाता है, जिससे टेस्ट के दौरान तुरंत पकड़ में आ जाएगा। एडवांस नोटिस और लीक-प्रूफ टैंक की मांग चुनौतियों को देखते हुए भूटान सरकार ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से कहा है कि अगर वे भविष्य में एथेनॉल का ब्लेंडिंग प्रतिशत बढ़ाते हैं या पूरी तरह एथेनॉल पेट्रोल ही सप्लाई करने का फैसला करते हैं, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। साथ ही भूटान ने भारत से लीक-प्रूफ टैंक उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।

दैनिक भास्कर 4 Jul 2026 1:49 pm

व्हाटसएप के यूजरनेम फीचर पर सरकार ने लगाई रोक:प्राइवेसी बढ़ाने वाला था फीचर, चैटिंग होती स्मार्ट ; जानें रोक की वजह

वॉट्सएप जल्द ही इंस्टाग्राम और टेलीग्राम की तरह यूजरनेम फीचर लाने वाला था। इसके जरिए लोग बिना मोबाइल नंबर शेयर किए एक-दूसरे को मैसेज कर सकते हैं। हालांकि, सुरक्षा चिंताओं के चलते सरकार ने फिलहाल इस फीचर की लॉन्चिंग पर रोक लगा दी है। दरअसल भारत में वॉट्सएप के करीब 90 करोड़ यूजर्स हैं। इसमें कई फीचर्स ऐसे भी हैं जिनके बारे में ज्यादातर यूजर्स नहीं जानते। ये प्राइवेसी बढ़ाने से लेकर चैट को ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाने में मदद कर सकते हैं। आज इन्हीं फीचर्स के बारे में जानते हैं। वॉइस नोट को अपने आप टेक्स्ट में कन्वर्ट करें, चैट को लॉक करने का भी विकल्प; जानें पूरी प्रक्रिया चैट लॉक - इससे चैट को छिपाया जा सकता है। इसके लिए पहले चैट लॉक करें। फिर लॉक्ड चैट्स फोल्डर में जाकर चैट लॉक सेटिंग्स में Hide Locked Chats ऑन करें और एक सीक्रेट कोड बना लें। अब चैट तब तक नहीं दिखेगी, जब तक सर्च बार में वही कोड टाइप नहीं होगा। यूजरनेम फीचर - इसके जरिए किसी को सीधे मैसेज नहीं भेजा जा सकेगा। बातचीत शुरू करने के लिए सामने वाले यूजर को अपना पिन साझा करना होगा। पिन मिलने के बाद ही दोनों के बीच चैट शुरू हो सकेगी। हालांकि भारत सरकार ने इस फीचर पर फिलहाल रोक लगाई है। वॉइस ट्रांसक्रिप्शन - वॉट्सएप अब वॉइस मैसेज ट्रांसक्रिप्ट फीचर देता है, जिससे वॉइस नोट टेक्स्ट में बदल सकते हैं। ऑन करने के लिए... Settings > Chats > Voice Message Transcripts| यह अभी अंग्रेजी-स्पेनिश जैसी कुछ भाषाओं में उपलब्ध है। चैट लिस्ट - अब ऑफिस, परिवार, दोस्तों या किसी प्रोजेक्ट से जुड़ी चैट्स को अलग-अलग लिस्ट्स में रखा जा सकता है। किसी चैट को दबाकर रखें, फिर Add to List चुनें और इसे नई या पुरानी लिस्ट में जोड़ दें। इससे जरूरी चैट्स ढूंढने में समय नहीं लगता है। मेटा एआई सपोर्ट - अब मेटा एआई को अलग चैट में खोलने की जरूरत नहीं है। चैट के दौरान ही एआई से जानकारी लेना, टेक्स्ट लिखवाना, ट्रांसलेट कराना या आइडिया बनाना संभव है। इससे किसी दोस्त से बात करते हुए भी बिना चैट छोड़े जानकारी हासिल की जा सकती है। बिना नंबर सेव के मैसेज - नए व्यक्ति को मैसेज भेजने के लिए नंबर सेव नहीं करना होगा। ब्राउजर में wa.me/91XXXXXXXXXX टाइप करें। यहां 91 भारत का कंट्री कोड है और उसके बाद व्यक्ति का मोबाइल नंबर लिखें। इससे सीधे उस व्यक्ति की वॉट्सएप चैट खुल जाएगी। क्लाउड बैकअप - वॉट्सएप चैट्स तो पहले से एंड-टु-एंड एन्क्रिप्टेड होती हैं, लेकिन गूगल ड्राइव या आई क्लाउड पर इनके सेव बैकअप अलग से सुरक्षित नहीं होता है। ऐसे में यह सेटिंग सक्रिय करना जरूरी हो जाता है। इसे सुरक्षित करने के लिए जाएं: Settings > Chats > Chat Backup > End-to-End Encrypted Backup चुनें। इसके बाद एक पासवर्ड सेट करें। ध्यान रखें कि पासवर्ड भूलने पर बैकअप वापस नहीं मिलेगा।

दैनिक भास्कर 4 Jul 2026 1:26 pm

आधार कार्ड में ईमेल-ID अब घर बैठे अपडेट कर सकेंगे:आधार एप पर 6 महीने के लिए फ्री सर्विस शुरू, सेंटर जाने की जरूरत नहीं; जानें प्रोसेस

अब आप आधार सेवा केंद्र जाए बिना मोबाइल से ही अपने आधार में ईमेल ID फ्री में लिंक और अपडेट कर सकते हैं। इसके लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने नए आधार एप में 1 जुलाई से 6 महीने के लिए नई सर्विस शुरू कर दी है। UIDAI के नोटिफिकेशन के मुताबिक, 31 दिसंबर तक यूजर नए आधार एप के जरिए ईमेल ID अपडेट कर सकेंगे। खास बात ये है कि, डिजिटल सर्विस के शुरू होने के सिर्फ दो दिन में ही देशभर में 2.5 लाख से ज्यादा लोग एप से अपना ईमेल ID अपडेट कर चुके हैं। नई सर्विस कैसे काम करेगी? UIDAI के मुताबिक एप के जरिए आधार में अपडेट की प्रोसेस काफी सिंपल है। इसके लिए कोई डॉक्यूमेंट या फिजिकल विजिट की जरूरत नहीं है। पूरी प्रोसेस कुछ मिनटों में हो जाएगी। अगर आपने एप डाउनलोड नहीं किया है तो इसे डाउनलोड करके सेटअप करना होगा। नया आधार एप Android और Apple iOS, दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। फायदा: ईमेल ID अपडेट होने से तुरंत अलर्ट मिलेगा आधार से ईमेल ID जोड़ने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब आपके आधार का इस्तेमाल कर ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट भेजी जाएगी, तो आपको तुरंत ईमेल पर इसका अलर्ट मिलेगा। इससे आपको हमेशा पता रहेगा कि आपका आधार कहां और कौन इस्तेमाल कर रहा है। इस तरह कोई भी आपके पीठ पीछे आपके आधार का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा और धोखाधड़ी का खतरा नहीं रहेगा। आधार के नए एप के फीचर्स 2009 में शुरू हुआ था आधार आधार 2009 में शुरू हुआ था। अब 1.3 अरब यानी 130 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास आधार हैं। पहले पेपर कार्ड था, फिर mAadhaar एप आया। अब डिजिटल इंडिया के तहत फुली डिजिटल एप लाया गया है। सरकार की कोशिश है कि हर सर्विस ऑनलाइन हो जाए।

दैनिक भास्कर 3 Jul 2026 8:38 pm

इंस्टाग्राम को बाल यौन शोषण वाले विज्ञापन पर नोटिस:केंद्र सरकार ने META से पूछा- ऐसे विज्ञापन कैसे चले, इन्हें कैसे रोका जाएगा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार ने पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) को समन जारी किया है। मंत्रालय मेटा से इस पूरे मामले पर जवाब मांगेगा। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों की निगरानी और रोकथाम के लिए कंपनी की क्या नीतियां और सुरक्षा व्यवस्था हैं। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की आपत्तिजनक या अवैध सामग्री को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार इस बात की जांच करेगी कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन कैसे प्रसारित हुए और उन्हें रोकने के लिए प्लेटफॉर्म की ओर से क्या कदम उठाए गए। केंद्र सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर अवैध, आपत्तिजनक और बच्चों के खिलाफ अपराध से जुड़ी सामग्री को तुरंत हटाएं और ऐसे मामलों को रोकने के लिए कदम उठाएं। 25 फरवरी: सरकार ने श्लील कंटेंट दिखाने पर 5 OTT प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया था इससे पहले सरकार ने 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT) को ब्लॉक किया था। इन प्लेटफॉर्म पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया जा रहा था। जिन प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हुई, उनमें मूडएक्सवीआईपी, कोयल प्लेप्रो, डिजी मूवीप्लेक्स, फील और जुगनू शामिल हैं।

दैनिक भास्कर 3 Jul 2026 5:25 pm

चलते ई-रिक्शा को बंद करने वाले चाइनीज एप बैन:बदमाश ब्लूटूथ के जरिए बैटरी ऑफ कर देते थे; इलेक्ट्रिक कार-स्कूटर को खतरा नहीं

दिल्ली समेत कई शहरों में ई-रिक्शा चालकों के लिए परेशानी बने 'BAT-BMS' समेत दो चीनी एप को सरकार ने एप स्टोर से हटाने के आदेश दिए हैं। आईटी मंत्रालय ने इसकी जानकारी शुक्रवार को दी। हालांकि, दोनों एप प्लेस्टोर पर अब भी मौजूद हैं। हाल ही में शिकायतें मिली थीं कि कुछ लोग BAT-BMS और इपोच ली-आयन एप से ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी को कंट्रोल कर रहे थे। इसके बाद वे चलते ई-रिक्शा को बंद कर देते थे। इससे चालकों को काफी परेशानी हो रही थी। इन घटनाओं के वीडियो भी वायरल हुए। दरअसल, कुछ ई-रिक्शा की लीथियम बैटरियों का ब्लूटूथ मैनेजमेंट सिस्टम बिना पासवर्ड या कमजोर सुरक्षा के था, इसलिए एप उससे कनेक्ट हो गया। हालांकि, कारों के बैटरी सिस्टम में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन होता है, इसलिए कोई सामान्य एप उनसे कनेक्ट नहीं हो सकता। सवाल 1: सोशल मीडिया पर वायरल BAT-BMS एप क्या है? जवाब: 'BAT-BMS' रियल टाइम बैटरी मैनेजमेंट टूल है। इसे चीनी कंपनी 'शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी' ने डेवलप किया है। इसका मुख्य काम ब्लूटूथ-इनेबल्ड लीथियम बैटरी की निगरानी करना है। यह एप बैटरी की ओवरऑल जानकारियां डिस्प्ले करता है। यानी, यह बैटरी का डिजिटल डैशबोर्ड जैसा है। सवाल 2: यह एप कैसे काम करता है और लोग इससे चलते हुए ई-रिक्शा कैसे रोक पा रहे हैं? जवाब: ई-रिक्शा की बैटरी में चार्जिंग, टेमप्रेचर, वोल्टेज और उसकी हेल्थ पर नजर रखने के लिए ब्लूटूथ वाला बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाता है। ड्राइवर या मैकेनिक BAT-BMS एप के जरिए इस सिस्टम से कनेक्ट हो जाते हैं और बैटरी की जानकारी देख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर उसकी सेटिंग्स मैनेज कर सकते हैं। यह 10 से 15 मीटर के दायरे में कनेक्ट हो सकता है। बदमाश इसी का फायदा उठा रहे हैं। सवाल 3: क्या देश के सभी ई-रिक्शा या इलेक्ट्रिक वाहन इस एप के जरिए रोके जा सकते हैं? जवाब: सोशल मीडिया पर यह वायरल हो रहा है। हकीकत में सभी ई-व्हीकल इसके जोखिम में नहीं हैं। यह एप केवल उन्हीं वाहनों पर असर डालता है जो कुछ खास शर्तों को पूरा करते हैं। सवाल 3: कौन से ई-रिक्शा इस एप के प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित हैं? जवाब: भारत में अभी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा पुरानी लेड-एसिड बैटरियों पर चलते हैं, जिनमें ब्लूटूथ या डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होता। इसलिए ये इन एप से पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके अलावा, जिन लीथियम बैटरियों के ब्लूटूथ सिस्टम में मैन्युफैक्चरर या डीलर ने मजबूत पासवर्ड सेट किया है, उन्हें भी इस एप के जरिए एक्सेस नहीं किया जा सकता। सवाल 4: चीनी कंपनी ने ये एप किस उद्देश्य से बनाए थे? क्या ये ई-रिक्शा के लिए थे? जवाब: नहीं, कंपनी ने इन एप को ई-रिक्शा को कंट्रोल करने के लिए नहीं बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा उपकरणों और नावों या जहाजों की बैटरी में लगी लीथियम बैटरियों की सेहत पर नजर रखना था। इन एप का डिस्चार्ज ऑन/ऑफ फीचर सुरक्षा और रखरखाव के लिहाज से दिया गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर बैटरी ओनर पावर कट कर सके। लेकिन भारत में इसका इस्तेमाल ई-रिक्शा की बैटरियों को रिमोटली बंद करने के लिए किया जाने लगा। सवाल 5: इससे ई-रिक्शा चालकों और सड़क सुरक्षा पर क्या असर पड़ रहा है? जवाब: लोगों का मानना है कि ई-रिक्शा की धीमी चाल के कारण ट्रैफिक जाम होता है। इससे परेशान होकर लोग इन्हें एप से बंद कर रहे हैं। कुछ लोग ऐसा मसखरी करने के लिए कर रहे हैं। यह चालकों के लिए मुसीबत बन गया है। सवाल 6: सुरक्षा की इस बड़ी चूक के लिए असल में जिम्मेदार कौन है? जवाब: स्थानीय स्तर पर बैटरी असेंबल करने वाले, डीलर्स और कुछ लो-कॉस्ट वाले लीथियम बैटरी मेकर्स जिम्मेदार हैं। भारत में सस्ते ई-रिक्शा पार्ट्स के बाजार में कई ऐसी लीथियम बैटरियां बेची जा रही हैं, जिनके ब्लूटूथ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को बिना किसी पासवर्ड के खुला छोड़ दिया जाता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी ने अपने घर का मुख्य दरवाजा खुला छोड़ दिया हो और कोई भी अंदर आ जाए। सवाल 7: इस सुरक्षा खामी को ठीक करने का क्या उपाय है? जवाब: वाहनों के डीलर्स और निर्माताओं को तय करना होगा कि वे वाहनों की बैटरी के मैनेजमेंट सिस्टम में मजबूत और यूनिक पासवर्ड सेट करें। इससे बाहरी व्यक्ति एप के जरिए बैटरी से कनेक्ट नहीं हो पाएगा। इसके अलावा, जिन ड्राइवरों के पास पहले से ऐसी बैटरियां हैं, वे डीलर के पास जाकर अपनी बैटरी के बीएमएस सेटिंग्स में पासवर्ड लॉक लगवा सकते हैं। ई-रिक्शा चालकों के लिए जरूरी टिप्स:

दैनिक भास्कर 3 Jul 2026 12:11 pm

यूजरनेम फीचर पर वॉट्सएप के बाद टेलीग्राम को नोटिस:सरकार ने पूछा- इससे साइबर अपराधों का खतरा, रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे

यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने वॉट्सएप के बाद गुरुवार 2 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से पूछा कि उसे यूजरनेम फीचर जारी रखने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। सरकार ने बुधवार को मेटा और वॉट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया था। सरकार ने आशंका जताई कि इससे ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और ठगी की घटनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार ने वॉट्सएप को फिलहाल यह फीचर लागू नहीं करने का निर्देश दिया है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। टेलीग्राम से पूछा- सुरक्षा के लिए क्या किया सरकार ने टेलीग्राम और सिग्नल जवाब मांगा कि इस फीचर के दुरुपयोग और साइबर ठगी रोकने के लिए कौन से सुरक्षा उपाय अपना रहे हैं। दोनों प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम फीचर पहले से उपलब्ध है। नीट पेपरलीक के बाद भी टेलीग्राम पर लगा था बैन पिछले महीने NEET पेपर लीक, फर्जी प्रश्न पत्रों के सर्कुलेशन और धोखाधड़ी के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के आरोप में सरकार ने टेलीग्राम और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। वॉट्सएप ने सरकार को जवाब दिया- हमारा फीचर सुरक्षित वॉट्सएप ने सरकार के नोटिस पर कहा था कि यूजरनेम फीचर में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल हैं, जो फर्जी पहचान, ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों से सुरक्षा करेंगे। भारत वॉट्सएप का सबसे बड़ा बाजार है। देश में इसके 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 2 Jul 2026 9:34 pm

ओप्पो रेनो 16 स्मार्टफोन सीरीज भारत में लॉन्च:50 मेगापिक्सल टेलीफोटो कैमरा के साथ 7000mAh बैटरी, शुरुआती कीमत ₹46,999

ओप्पो ने आज भारत में नई स्मार्टफोन सीरीज रेनो 16 लॉन्च की है। इसमें कंपनी ने रेनो 16 और रेनो 16C पेश किए हैं। दोनों ही मोबाइल को स्टा​इलिश लुक, 50 मेगापिक्सल टेलीफोटो और 50MP अल्ट्रा वाइड सेल्फी कैमरा और स्नैपड्रैगन 7 जेन 4 प्रोसेसर के साथ प्रीमियम मिड रेंज में उतारा गया है। ओप्पो रेनो 16C को तीन वैरिएंट में उतारा गया है। इसकी शुरुआती कीमत 46,999 रुपए है। वहीं, ओप्पो रेनो 16 को दो वैरिएंट में पेश किया गया है। इसकी कीमत 61,999 रुपए से शुरु होती है। इसके अलावा कंपनी ने ओप्पो एनको एयर 5 बड्स भी पेश किए हैं। स्मार्टफोन की सेल 9 जुलाई 2026 से शुरू होगी। लॉन्च ऑफर्स के में बैंक कार्ड्स पर 10% तक इंस्टेंट कैशबैक, एक्सचेंज बोनस, 180 दिन की स्क्रीन डैमेज प्रोटेक्शन और ओप्पो एनको बड्स 3 प्रो+ पर 50% तक की छूट भी दी जा रही है। डिजाइन: भारत में पहली बार होलोवर्स 3D डिजाइन ओप्पो रेनो 16 में दोनों स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसका नया होलोवर्स 3D डिजाइन है। जिसे कंपनी भारत में पहली बार लेकर आई है। स्टारी वाइट कलर वैरियंट में मिलने वाला यह डिजाइन अलग-अलग एंगल से देखने पर 3D इफेक्ट देता है, जिससे फोन का लुक प्रीमियम लगता है। दोनों फोन के डिजाइन को जानते हैं। बैक पैनल और मटीरियल डायमेंशन, वजन और इन-हैंड फील फ्रंट डिस्प्ले, बेजल्स और सेल्फी कैमरा पोर्ट्स और बटन्स कलर और वॉटरप्रूफिंग ओप्पो रेनो 16: स्पेसिफिकेशंस डिस्प्ले: फोन में 6.32 इंच की फुल HD+ एमोलेड स्क्रीन दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट पर काम करती है, जिससे फोन का इस्तेमाल और स्क्रॉलिंग बहुत स्मूद लगती है। ये 1800 निट्स की पीक ब्राइटनेस का सपोर्ट करती है, जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर: इस फोन में नया और पावरफुल क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 7 जेन 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो 4 नैनोमीटर तकनीक पर बना है। यह पुराने मॉडल के मुकाबले ज्यादा फास्ट है। बेहतर गेमिंग के लिए इसमें AI हाइपर बूस्ट 2.0 और मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी के लिए AI लिंक बूस्ट 4.0 तकनीक दी गई है। फोन लेटेस्ट एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड कलरOS 16 पर चलता है, जो इस्तेमाल करने में काफी आसान है। कैमरा सेटअप: इसके बैक पैनल पर 50-50 मेगापिक्सल के तीन कैमरे हैं। इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा, 50MP का 3.5x टेलीफोटो पोर्ट्रेट कैमरा और 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा शामिल है। वहीं, फ्रंट में भी 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा है, जो 100 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ आता है। इससे ग्रुप सेल्फी में सभी लोग आसानी से आ जाते हैं। फोन के सभी कैमरों से 60fps पर 4K HDR वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। साथ ही इसमें जूम फ्री वीडियो और ऑटो स्ट्रेटन वीडियो जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। स्मार्ट AI फीचर्स: यह फोन कई एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स से लैस है… बैटरी और चार्जिंग: फोन में 6700mAh की बहुत बड़ी और दमदार बैटरी दी गई है, जो आराम से लंबा बैकअप देती है। इस बड़ी बैटरी को तेजी से चार्ज करने के लिए 80W सूपरवूक फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। सेल्फी डिवाइस ओप्पो बबल भी लॉन्च ओप्पो ने रेनो 16 सीरीज के साथ नया स्मार्ट कैमरा एक्सेसरी ओप्पो बबल भी लॉन्च किया है। यह 27.5 ग्राम का डिवाइस है, इसमें 1.73-इंच एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो रियर कैमरे का लाइव प्रीव्यू शो करता है और बेहतर सेल्फी और कंटेंट क्रिएशन में मदद करता है। इसकी कीमत 7,999 रुपए है यह भी फोन के साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर मिलेगा।

दैनिक भास्कर 2 Jul 2026 2:39 pm

वॉट्सएप पर 'यूजरनेम की' के बिना मैसेज नहीं होंगे:सरकार के नोटिस के बाद कंपनी ने जारी की गाइडलाइन, जानें कैसे सुरक्षित रहेगा आपका डेटा

वॉट्सएप ने अपने आने वाले 'यूजरनेम' फीचर को लेकर एक डिटेल्ड FAQs यानी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की गाइडलाइन जारी की है। केंद्र सरकार ने हाल ही में वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस जारी कर इस फीचर से होने वाले संभावित फ्रॉड के खतरों पर चिंता जताई थी। सरकार ने चेतावनी दी थी कि जब तक इस मुद्दे पर पूरी संतुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इसे रोलआउट न किया जाए। इसके बाद वॉट्सएप ने स्पष्ट किया है कि वह सुरक्षा के क्या-क्या कदम उठा रहा है। तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। 9 आसान सवाल-जवाब में जानें वॉट्सएप की नई गाइडलाइन सवाल 1: वॉट्सएप पर यूजरनेम बनाना क्या सभी के लिए जरूरी होगा? जवाब: नहीं, यह बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं है। वॉट्सएप ने साफ किया है कि यूजरनेम बनाना पूरी तरह से ऑप्शनल होगा। अगर आप अपनी पहचान या फोन नंबर छिपाना चाहते हैं, तभी इसे बनाएं। सवाल 2. मुझे अपनी पसंद का यूजरनेम नहीं मिला, तो इसकी क्या वजह हो सकती है? जवाब: इसके तीन मुख्य कारण हो सकते हैं: सवाल 3. मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर फ्रॉड करने वालों को वॉट्सएप कैसे रोकेगा? जवाब: वॉट्सएप का कहना है कि अभी यूजरनेम से मैसेज भेजने का फीचर लाइव नहीं किया गया है, सिर्फ नाम रिजर्व हो रहे हैं। जब यह लाइव होगा और आपको किसी अनजान यूजरनेम से मैसेज आएगा, तो वॉट्सएप आपको उस अकाउंट के देश की जानकारी देगा। साथ ही पहली बार मैसेज आने पर एक वॉर्निंग भी स्क्रीन पर दिखेगी। इसके अलावा कंपनी ब्लॉक और रिपोर्ट करने वाले अकाउंट्स पर कड़ी नजर रखेगी ताकि स्कैमर्स पर तुरंत एक्शन लिया जा सके। सवाल 4. क्या कोई भी अनजान व्यक्ति मेरा यूजरनेम गेस करके मुझे मैसेज भेज सकता है? जवाब: जैसे आज आप वॉट्सएप पर किसी का भी फोन नंबर सर्च नहीं कर सकते, वैसे ही किसी का यूजरनेम भी सर्च नहीं किया जा सकेगा। अनजान लोगों से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप एक बिल्कुल अलग यूजरनेम चुनें और वॉट्सएप के नए सुरक्षा फीचर 'यूजरनेम की' को ऑन कर लें। सवाल 5. यह 'यूजरनेम की' क्या है और यह कैसे सुरक्षा देगी? जवाब: यह आपकी सुरक्षा की एक एक्स्ट्रा लेयर है। इसे एक्टिवेट करने के बाद अगर कोई नया व्यक्ति आपसे कनेक्ट होना चाहता है, तो उसे आपके 'यूजरनेम' के साथ-साथ आपकी 'यूजरनेम की' भी पता होनी चाहिए। इसके बिना वह आपको मैसेज नहीं भेज पाएगा। आप इस 'की' को कभी भी रिसेट कर सकते हैं, जिससे पुराने लोग आपके यूजरनेम के जरिए दोबारा नया संपर्क नहीं कर पाएंगे। सवाल 6. क्या यूजरनेम बनाने के लिए मुझे अपने फेसबुक या इंस्टाग्राम अकाउंट को लिंक करना पड़ेगा? जवाब: अगर आप वही यूजरनेम चाहते हैं जो आपके इंस्टाग्राम या फेसबुक पर है, तो आपको अकाउंट लिंक करना होगा। यह इसलिए किया गया है ताकि फ्रॉड को कम किया जा सके और पहचान वेरिफाई हो सके। हालांकि, एक बार यूजरनेम मिलने के बाद आप चाहें तो इन अकाउंट्स को अनलिंक कर सकते हैं या फिर वॉट्सएप के लिए बिल्कुल अलग यूजरनेम चुन सकते हैं। सवाल 7. क्या मैं अपना वॉट्सएप यूजरनेम बाद में बदल सकता हूं? जवाब: हां, आप इसे बाद में कभी भी बदल सकते हैं, बशर्ते आपका नया पसंदीदा नाम प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होना चाहिए। सवाल 8. इंटरनेट पर मशहूर नामों को एडवांस में बुक करने के दावे किए जा रहे हैं, क्या यह सच है? जवाब: वॉट्सएप ने इसे पूरी तरह अफवाह बताया है। कंपनी ने कहा कि जो लोग पॉपुलर या मशहूर नामों को रिजर्व करने का दावा कर रहे हैं, वे झूठे हैं। सेलिब्रिटीज और सरकारी संस्थाओं के नाम पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें सिर्फ उनके असली और लीगल मालिक ही क्लेम कर सकते हैं। सवाल 9. वॉट्सएप इस फीचर को इतनी जल्दी में क्यों लेकर आया और यह कब से शुरू होगा? जवाब: वॉट्सएप का कहना है कि उन्होंने यूजरनेम लॉन्च करने से काफी पहले ही नाम रिजर्व करने की प्रक्रिया इसलिए शुरू की क्योंकि लोग अपनी पसंद के नाम को लेकर काफी गंभीर होते हैं। कंपनी अभी सरकार और यूजर्स के फीडबैक को सुन रही है। इस साल के अंत में जब इसे पूरी तरह से रोलआउट किया जाएगा, तब तक इसे पूरी तरह सुरक्षित और परफेक्ट बना दिया जाएगा।

दैनिक भास्कर 2 Jul 2026 1:01 pm