टेक कंपनी ओप्पो ने एनको एयर 5 प्रो' लॉन्च कर दिए हैं। इस नए डिवाइस में 55dB का ANC यानी, एक्टिव नॉइस कंट्रोल है। ये बाहर के भारी शोर को गायब कर देता है। बिना ANC के यह डिवाइस 54 घंटे तक नॉन-स्टॉप प्लेबैक टाइम देता है। इसकी कीमत ₹5000 के आसपास है। अनबॉक्सिंग: बॉक्स से टाइप-सी चार्जिंग केबल नहीं इस डिवाइस की बॉक्स पैकेजिंग काफी सिंपल है। बॉक्स को ओपन करते ही सबसे ऊपर एक्चुअल हेडफोन्स मिलते हैं। इसके ठीक नीचे एडिशनल ईयर टिप्स और एक यूजर मैनुअल है। हालांकि, कंपनी ने यहां पर थोड़ी कॉस्ट कटिंग की है। इसमें टाइप-सी चार्जिंग केबल नहीं है। डिजाइन और फिटिंग: मैट ब्लैक कलर वेरिएंट में प्रीमियम लुक बिल्ड क्वालिटी के मामले में इसका मैट ब्लैक कलर वेरिएंट काफी प्रीमियम फील देता है। इसके केस पर आगे की तरफ OPPO की बैजिंग और ठीक नीचे एक एलईडी लाइट इंडिकेटर दिया गया है। बॉटम सरफेस पर टाइप-सी पोर्ट के साथ में ही एक रिसेट बटन मिलता है। ये ईयरबड्स वैक्यूम टाइप डिजाइन के साथ आते हैं, जिससे कानों में इनकी फिटिंग बढ़िया बैठती है। इसमें IP55 की रेटिंग दी गई है, यानी वर्कआउट के दौरान पसीना आने या पानी के कुछ छीटें पड़ने पर भी यह खराब नहीं होगा। इसे आउटडोर जॉगिंग या वॉकिंग में आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। स्पेसिफिकेशन्स: 12mm के टाइटेनियम कोटेड ड्राइवर्स इसमें 12mm के टाइटेनियम कोटेड ड्राइवर्स दिए गए हैं। यह ब्लूटूथ वर्जन 6.0 पर बेस्ड है। इसमें LHDC 5.0, AAC और SBC कोडेक्स के साथ गूगल फास्ट पेयर का सपोर्ट मिलता है। इसका साउंड आउटपुट बेस लवर्स के लिए बेहतरीन है। इसके मिड्स और ट्रेबल भी काफी बैलेंस्ड हैं। कनेक्टिविटी: 6 माइक्स से क्लियर कॉलिंग और बिना लैग का गेम मोड डिवाइस में डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी का फीचर है। इससे इसे एक ही समय पर लैपटॉप और स्मार्टफोन दोनों से कनेक्ट रखा जा सकता है। कॉलिंग के लिए इसके दोनों बड्स को मिलाकर कुल 6 माइक्स मिलते हैं। गेमर्स के लिए इसमें एक डेडिकेटेड गेम मोड दिया गया है, जिसमें फुटस्टेप्स और फायरिंग की आवाज़ बिना किसी लैग के काफी एक्यूरेट सुनाई देती है। एडवांस टच कंट्रोल्स: स्टेम से वॉल्यूम कंट्रोल और लाइव ट्रांसलेटर इन ईयरबड्स की स्टेम पर ही टच कंट्रोल्स दिए गए हैं। सिंगल टैप से म्यूजिक प्ले/पॉज और डबल टैप से नेक्स्ट ट्रैक पर स्विच कर सकते हैं। इसके अलावा, स्टेम पर ऊपर या नीचे स्लाइड करके सीधे वॉल्यूम को भी एडजस्ट किया जा सकता है। इसमें एक 'AI ट्रांसलेटर' भी दिया गया है। बैटरी लाइफ और एप फीचर्स: 54 घंटे का बैकअप और वियर डिटेक्शन ईयरबड में 62mAh और चार्जिंग केस में 530mAh की बैटरी है। ANC ऑन रखने पर 29 घंटे और ANC ऑफ रखने पर यह पूरे 54 घंटे तक का बैटरी बैकअप देता है । इसे 'HeyMelody' एप्लीकेशन से मैनेज किया जाता है, जहां केस और बड्स की बैटरी परसेंटेज दिखती है। एप के जरिए ANC/ट्रांसपेरेंसी मोड, डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी, 3D सराउंड साउंड के लिए 'OPPO Alive Audio', इक्वलाइज़र (EQ) प्रीसेट्स, हाई-रेज मोड, लो-लेटेंसी गेमिंग मोड, स्पॉटिफाई टैप और 'Find My Earbuds' जैसे फीचर्स को कस्टमाइज किया जा सकता है। इसमें वियर डिटेक्शन फीचर भी है, जिससे कान से ईयरबड निकालते ही गाना या वीडियो अपने आप पॉज हो जाता है और दोबारा लगाने पर प्ले हो जाता है। फाइनल वर्डिक्ट: क्या आपको इसे खरीदना चाहिए? अगर आपका बजट ₹5000 के आसपास है और आप एक ऐसे ईयरबड्स की तलाश में हैं जिसमें दमदार साउंड, हैवी बेस और कमाल का एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन मिले, तो ये 'वैल्यू फॉर मनी' डील है। ध्यान रखने वाली बात: कंपनी ने कॉस्ट कटिंग के चक्कर में बॉक्स से टाइप-सी चार्जिंग केबल हटा दी है, इसलिए आपके पास पहले से एक टाइप-सी केबल होनी चाहिए। साथ ही, बहुत ज्यादा प्रोफेशनल गेमिंग करने वालों को अब भी वायर्ड हेडफोन्स की तरफ ही देखना चाहिए। इन छोटी बातों को छोड़ दें तो फीचर्स के मामले में इस बजट में इसका कोई मुकाबला नहीं है।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स के टेक्नोलॉजी पॉडकास्ट ‘हार्ड फोर्क’ के होस्ट्स के साथ बातचीत की। इस दौरान गूगल सर्च के भविष्य, एआई एजेंट्स के इस्तेमाल और कॉलेज ग्रेजुएट्स को लेकर चर्चाएं हुईं। पिचई ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बेहद तेजी से दुनिया को बदल रहा है। ऐसे में लोगों का चिंतित होना स्वाभाविक है। दरअसल लोग इतने बड़े तकनीकी बदलाव को समझने और उसके अनुरूप ढलने के लिए अभी तैयार नहीं हैं। एक आंकड़ा सामने आया कि केवल 16% लोग ही एआई को ज्यादातर अच्छा मानते हैं, जबकि 35% लोग इसे खराब मानते हैं। इस पर पिचई ने कहा कि टेक कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे एआई के फायदे लोगों तक पहुंचाएं और दिखाएं कि यह तकनीक जीवन को कैसे बेहतर बना सकती है। एआई से नौकरियां खत्म होने और काम बदलने की आशंकाओं पर उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति उतनी गंभीर नहीं होगी, जितना अनुमान है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर पीढ़ी में भविष्य को लेकर चिंताएं होती हैं, लेकिन आखिरकार वही पीढ़ी बेहतर दुनिया बनाती है। एंट्री लेवल के युवाओं की क्षमताएं बढ़ेंगी एंट्री-लेवल युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए पिचई ने कहा कि एआई लोगों की क्षमताओं को बढ़ाएगा। जैसे स्प्रेडशीट आने से काम करने का तरीका बदला था, वैसे ही एआई भी कई लोगों के लिए नई शुरुआत का रास्ता खोलेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया में पहले से कहीं ज्यादा लोग कोडिंग कर पाएंगे। पिचई के मुताबिक एआई डॉक्टरी जैसे पेशों में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अभी डॉक्टरों का बहुत ज्यादा समय कागजी कार्रवाई और तकनीकी प्रक्रियाओं में चला जाता है,एआई से इस समय की बचत होगी, जिससे डॉक्टर बचे हुए समय को मरीजों के साथ बिता पाएंगे। एआई से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ की मांग बढ़ी, यूएस में 76 करोड़ तक का पैकेज एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। जॉब सर्च प्लेटफॉर्म ग्लासडोर के मुताबिक इस साल की पहली तिमाही में साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी जॉब में 11% की बढ़ोतरी हुई है। बड़ी वजह एआई आधारित कोडिंग टूल्स का तेजी से इस्तेमाल माना जा रहा है, जिससे सिस्टम में बग्स व सुरक्षा खामियों का खतरा बढ़ रहा है।टेक कंपनियों के कर्मचारी अब बड़े पैमाने पर एआई से कोड जनरेट कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे काम की गति तो बढ़ती है, लेकिन कई बार सॉफ्टवेयर में कमजोरियां भी पैदा हो जाती हैं। प्रमुख एआई कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि एंथ्रोपिक के ‘मायथोस’ जैसे मॉडल का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए किया जा सकता है। लिंक्डइन की चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी अफसर ली किसनर के मुताबिक सिक्योरिटी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। एआई का असर केवल साइबर सिक्योरिटी तक सीमित नहीं है। प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल और एआई इंडस्ट्री में भी नई नौकरियां पैदा हो रही हैं। नए कॉलेज ग्रेजुएट्स के लिए एआई इंजीनियर की मांग सबसे ज्यादा बताई जा रही है। गूगल के वाइस प्रेसिडेंट निक फॉक्स का कहना है कि पहले की तुलना में अब ज्यादा सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जरूरत है। हालांकि दूसरी तरफ टेक इंडस्ट्री में छंटनी भी हो रही है। मेटा ने पिछले सप्ताह करीब 8 हजार कर्मचारियों की छंटनी की। अमेजन हाल में 16 हजार नौकरियां खत्म कर चुकी है। स्ट्राइप, स्नैप और ब्लॉक जैसी कंपनियों ने भी हजारों कर्मचारियों को निकाला है। एंथ्रोपिक के ‘मायथोस’ और बाद में ओपनएआई के जीपीटी 5.4 साइबर मॉडल के आने के बाद साइबर सिक्योरिटी हायरिंग में और तेजी आई है। सिक्योरिटी एग्जीक्यूटिव्स का पैकेज 66से 76 करोड़ तक पहुंच गया है
लग्जरी स्पोर्ट्स कार बनाने इटली की कंपनी फरारी ने आज 26 मई को अपनी पहली इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार लॉन्च की है। यह एक 4-डोर, 5-सीटर इलेक्ट्रिक GT कार है, जिसे रफ्तार के साथ लग्जरी भी चाहने वाले लोगों के लिए बनाया गया है। खास बात ये है कि लूस फरारी की पहली EV के अलावा पहली 5 सीटर कार भी है। इसे एपल के पूर्व डिजाइन चीफ जॉनी इव की कंपनी 'LoveFrom' ने डिजाइन किया है। कंपनी का दावा है कि कार फुल चार्ज पर 530km चलेगी और इसकी टॉप स्पीड 310kmph है। फरारी लूस की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 5.50 लाख यूरो (6.10 करोड़ रुपए) है। कार की बुकिंग दुनियाभर में शुरू कर दी गई है। भारतीय बाजार में इसकी लॉन्चिंग को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन उम्मीद है कि इसे आने वाले समय में इम्पोर्ट रूट के जरिए भारत लाया जा सकता है। एक्सटीरियर: फरारी का अब तक का सबसे अलग डिजाइन लूस का डिजाइन फरारी की अन्य कारों जैसा नहीं है। इसे 'क्लीन शीट' यानी बिल्कुल नए सिरे से डिजाइन किया गया है। इंटीरियर: एपल की झलक और रेट्रो थीम का कॉम्बिनेशन कार के अंदर जोनी इव की 'एपल एस्थेटिक्स' साफ नजर आती है। इसमें एनोडाइज्ड एल्यूमीनियम और कोर्निंग ग्लास का इस्तेमाल किया गया है। परफॉर्मेंस: 1050hp की पावर और क्वाड मोटर सेटअप लूस एक परफॉर्मेंस बीस्ट है। इसमें चार इलेक्ट्रिक मोटर्स (हर पहिये पर एक) दी गई हैं। बैटरी और रेंज: सिंगल चार्ज पर 530km चलेगी फरारी ने इस कार की बैटरी को मारानेलो में ही डिजाइन और तैयार किया है। सेफ्टी फीचर्स: एडवांस्ड सस्पेंशन और टॉर्क वेक्टरिंग लूस को केवल तेज ही नहीं, बल्कि आरामदायक और सुरक्षित भी बनाया गया है।
बीते दो वर्षों से टेक इंडस्ट्री में नारा गूंज रहा है...‘एआई जल्द ही सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जगह ले लेगा और कंपनियों का खर्च आधा हो जाएगा।’ इस वादे ने शेयर बाजार को आसमान पर पहुंचा दिया, कंपनियों ने बड़े पैमाने पर छंटनी की और करोड़ों रुपए एआई इन्फ्रा खर्च कर दिए। पर, जब इन टूल्स को काम पर लगाया गया, तो जो इनवॉइस सामने आई उसने दिग्गज कंपनियों को हिला दिया। सबसे बड़ा झटका माइक्रोसॉफ्ट को लगा। कंपनी ने एंथ्रोपिक में 48 हजार करोड़ रु. निवेश किए और अपने 1 लाख इंजीनियरों को ‘क्लॉड कोड’ का एक्सेस दे दिया। उम्मीद थी कि उत्पादकता बढ़ेगी, पर हर शब्द पर भुगतान की मजबूरी ने लागत को बेकाबू कर दिया। इस वजह से जून तक सभी लाइसेंस रद्द कर दिए गए व इंजीनियरों को माइक्रोसॉफ्ट के इन-हाउस टूल पर शिफ्ट करना पड़ा। उबर ने दिसंबर 2025 में अपने 5,000 इंजीनियरों को क्लॉड कोड दिया। 84% डेवलपर्स इसका इस्तेमाल करने लगे और 70% कोड एआई से आने लगा। नतीजा यह हुआ कि इंजीनियर हर महीने 47 हजार से 1.9 लाख रुपए का व्यक्तिगत बिल बनाने लगे। एक सीटीओ ने तो दो घंटे के डेमो में 1.1 लाख रु. खर्च कर दिए। अप्रैल तक ही उबर ने 2026 का पूरा एआई बजट खत्म कर दिया। एनवीडिया ने भी माना कि उनकी टीम के लिए कंप्यूटिंग की लागत कर्मचारियों की सैलरी से ज्यादा हो गई है। दरअसल, साधारण एआई लगभग मुफ्त हो चुका है, पर गंभीर कोडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले टॉप-टियर एआई के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ओपनएआई ने नया मॉडल दोगुने दाम पर उतारा, जबकि एंथ्रोपिक ने टेक्स्ट गिनने का तरीका बदल दिया, जिससे बिल बढ़ने लगा। बेजोस बोले- यह संकट नहीं ‘एआई बबल’ के डर को खारिज करते हुए अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस ने कहा कि यह संकट नहीं, बल्कि ‘सदी में एक बार मिलने वाला सबसे बड़ा अवसर’ है। वहीं, सॉफ्टबैंक के प्रमुख मासायोशी सन 9.5 लाख करोड़ रु. का नया एआई फंड ‘प्रोजेक्ट इजा नागी’ लॉन्च कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस कुछ वर्षों में इंसानी दिमाग से 10 गुना ज्यादा स्मार्ट हो जाएगा। एआई में बिग टेक का महा निवेश...एंथ्रोपिक की बादशाहत माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा व अमेजन इस साल एआई इन्फ्रा पर रिकॉर्ड 69 लाख करोड़ रु. खर्च कर रहे हैं। गार्टनर के अनुसार, वैश्विक एआई खर्च 240 लाख करोड़ रु. हो जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट का एआई बिजनेस 3.53 लाख करोड़ के रन रेट (अनुमानित लाभ) पर है, जबकि गूगल का क्लाउड बैकलॉग 43.93 लाख करोड़ रु. पार कर चुका है। एंथ्रोपिक ने इस साल 2.86 लाख करोड़ के दो फंडिंग राउंड पूरे किए, जिससे वैल्यूएशन 86 लाख करोड़ हो गई है। वहीं रिलायंस ग्रुप 7 वर्षों में भारत के एआई इन्फ्रा पर ₹10 लाख करोड़ निवेश करेगा। एक कॉल और एआई कानून ध्वस्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ऐसे सरकारी आदेश पर साइन करने वाले थे, जिसके तहत सरकार को शक्तिशाली एआई मॉडल के लॉन्च से पहले 90 दिनों तक उसकी सुरक्षा जांच का हक मिलता। इसके लिए टेक दिग्गज (ऑल्टमैन, पिचाई, नडेला) वॉशिंगटन पहुंच चुके थे। लेकिन ऐन वक्त पर, ट्रम्प के पूर्व सलाहकार और 449 एआई कंपनियों में भागीदार डेविड साक्स ने राष्ट्रपति को फोन किया और तर्क दिया कि नियमों से एआई डेवलपमेंट धीमा होगा व चीन बाजी मार ले जाएगा। मस्क-जुकरबर्ग ने भी यही दबाव बनाया। नतीजतन ट्रम्प ने आदेश रद्द कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि कानून स्वैच्छिक था, फिर भी टेक दिग्गजों ने महज 12 घंटे में महीनों की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पलटवा दी।
भास्कर नॉलेज:क्या ईयरबड्स से भी डेटा चोरी और निजता में सेंधमारी हो सकती है?
आज के स्मार्ट हेडफोन और ईयरबड्स सिर्फ म्यूजिक सुनने के उपकरण नहीं रहे। इनमें हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर, माइक्रोफोन, लोकेशन, एआई ट्रांसक्रिप्शन और ट्रांसलेशन जैसे फीचर जुड़ चुके हैं। 10 साल में 2,000 से ज्यादा हेडफोन और ईयरबड्स टेस्ट कर चुकीं लॉरेन ने बताया कि इनसे सेंधमारी कैसे होती है और बचने के उपाय क्या हैं? हेडफोन अब कौन-कौन सा डेटा जुटाते हैं? टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए ईयरबड्स में ब्लूटूथ चिप, माइक्रोफोन, सेंसर और एप कनेक्टिविटी होती है। ये डिवाइस हार्ट रेट, चलने-फिरने का पैटर्न, आवाज, लोकेशन और सुनने की क्षमता रिकॉर्ड कर सकते हैं। यह डेटा फोन के जरिए कंपनी के एप तक पहुंचता है। क्या हेल्थ डेटा अपने आप सुरक्षित होता है? डिजिटल प्राइवेसी विशेषज्ञ बताते हैं कि हेल्थ डेटा हमेशा कानून से सुरक्षित नहीं होता। अमेरिका का कानून डॉक्टर और मरीज के बीच की जानकारी पर लागू होता है। लेकिन अगर वही डेटा किसी हेडफोन या फिटनेस एप से इकट्ठा हुआ है, तो वह मार्केटिंग या एनालिटिक्स में इस्तेमाल हो सकता है। क्या कंपनियां यह डेटा बेच सकती हैं? अधिकांश कंपनियां प्राइवेसी पॉलिसी में डेटा शेयरिंग की बात लिखती हैं। यूजर को ऑप्ट-आउट का विकल्प मिल सकता है, लेकिन अक्सर शर्तें जटिल भाषा में होती हैं। टेक एनालिस्ट्स के अनुसार, कुछ डेटा एआई ट्रेनिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। ब्लूटूथ और एप से खतरा कितना है? टेक कंपनियों के ब्लूटूथ की खामियां सामने आ चुकी हैं। हालांकि बड़ा खतरा एप से होता है। अगर एप अपडेट न हो या जरूरत से ज्यादा परमिशन हो, तो डेटा आसानी से चोरी हो सकता है। यूजर अपनी प्राइवेसी कैसे बचाए? गैर-जरूरी परमिशन बंद रखें। डेटा शेयरिंग से ऑप्ट-आउट करें। एप और फर्मवेयर अपडेट रखें। संवेदनशील बातचीत में ईयरबड्स दूर रखें। ध्यान रहे कि स्मार्ट हेडफोन सुविधा देते हैं, लेकिन डेटा भी लेते हैं। इसलिए इनके उपयोग में सतर्कता जरूरी है। भारत के यूजर के लिए जोखिम क्या है? भारत में ईयरबड्स और फिटनेस एप तेजी से आम हो रहे हैं। लोग इन्हें फोन से जोड़कर लोकेशन, माइक्रोफोन, हेल्थ और फिटनेस परमिशन दे देते हैं। ईयरबड्स शरीर और व्यवहार से जुड़ा डेटा पढ़ सकते हैं। यदि एप को माइक्रोफोन, लोकेशन और हेल्थ डेटा की अनुमति है, तो वह चलने-फिरने, बातचीत, फिटनेस और आदतों से जुड़ी जानकारी जुटा सकता है। इसलिए हेडफोन खरीदते समय प्राइवेसी पॉलिसी भी देखनी चाहिए।
टेक ब्रांड आइटेल ने भारतीय बाजार में अपना नया स्मार्टफोन 'आइटेल A100 प्रो' लॉन्च किया है। यह इस साल फरवरी में आए A100 का अपग्रेडेड वर्जन है। फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती और फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट का ऑफर है। कंपनी इस बजट फोन के साथ 100 दिन की फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट वारंटी दे रही है, जो आमतौर पर महंगे फोन के साथ ही देखने को मिलती है। आइटेल A100 प्रो को सिंगल वैरिएंट में पेश किया गया है। इसमें 3GB रैम के साथ 64GB की इंटरनल स्टोरेज मिलती है। कंपनी ने इसमें 'मेमोरी फ्यूजन' तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिससे वर्चुअल रैम की मदद से इसे 8GB (3GB+5GB) तक बढ़ाया जा सकता है। इसकी कीमत ₹8,999 रखी गई है। डिजाइन और बिल्ड: मिलिट्री ग्रेड मजबूती के साथ प्रीमियम लुक स्पेसिफिकेशन्स: एंड्रॉइड 15 गो एडिशन और डायनैमिक बार खास तकनीक: बिना सिग्नल के भी होगी कॉल इस फोन में अल्ट्रालिंक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि इस फीचर की मदद से 'नो नेटवर्क' वाले इलाकों में भी मोबाइल सिग्नल के बिना कॉल की जा सकती है। यह तकनीक उन लोगों के लिए काम की है जो बेसमेंट या पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। क्या होता है 'मिलिट्री ग्रेड' सर्टिफिकेशन? MIL-STD-810H अमेरिका का एक खास पैमाना (स्टैंडर्ड) है, जो किसी चीज की मजबूती जांचने के लिए बनाया गया है। जिस फोन के पास यह सर्टिफिकेट होता है, उसे कई मुश्किल हालातों से गुजारा जाता है—जैसे ऊंचाई से जमीन पर पटकना, बहुत ज्यादा गर्मी और नमी (उमस) में रखकर देखना। आइटेल का दावा है कि इस सर्टिफिकेट की वजह से यह फोन अपनी कीमत वाली कैटेगरी में सबसे ज्यादा टिकाऊ और मजबूत है।
मोबाइल, टैबलेट और स्मार्ट टीवी अब बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लोकल सर्कल के सर्वे के अनुसार, 37% पैरेंट्स ने बताया कि उनके बच्चे सबसे ज्यादा वीडियो और ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसे प्राइम वीडियो या नेटफ्लिक्स देखते हैं। समस्या यह है कि कई घरों में पूरा परिवार एक ही अकाउंट का इस्तेमाल करता है। बच्चों के सामने कई बार एडल्ट कंटेंट भी आ जाता है। ऐसे में जानें कि हर ओटीटी प्लेटफॉर्म में कौन सी सेटिंग्स बंद करें। नेटफ्लिक्स... उम्र के हिसाब से कंटेंट सीमा तय करें - बच्चों के लिए अलग प्रोफाइल बनाएं, इसके लिए Netflix → Manage Profiles - सभी नेटफ्लिक्स प्रोफाइल पर पिन जरूर लगाएं। इसके लिए नेटफ्लिक्स के अकाउंट सेक्शन में जाकर प्रोफाइल लॉक करने का विकल्प चुनें। - तीसरा जरूरी स्टेप है ‘पैरेंटल कंट्रोल्स’। अकाउंट सेटिंग्स में इस विकल्प को चुनिए। यहां पर अभिभावक बच्चों की उम्र के हिसाब से ‘मैच्योरिटी रेटिंग’ चुन सकते हैं। इसमें बच्चों से लेकर वयस्कों तक के लिए अलग-अलग विकल्प मिलते हैं। अमेजन प्राइम वीडियो में ये 3 सेटिंग्स जरूर बदलें - सबसे जरूरी है पैरेंटल कंट्रोल्स चालू करें। इसे अकाउंट सेक्शन में एक्टिव करें। - यहां ‘परचेज रेस्ट्रिक्शन’ भी लगाएं। बच्चे गलती से किराये वाली फिल्में खरीद सकते हैं। इसलिए पिन आधारित खरीदारी सुरक्षा जरूरी है। - उम्र के हिसाब से कंटेंट चुनें। यहां U, U/A 13+, U/A 16+ और A जैसे विकल्प मिलते हैं। बच्चे की उम्र के अनुसार सही श्रेणी चुनें। जियो हॉटस्टार, पैरेंटल लॉक का विकल्च चुनिए - घरों में बच्चों को कार्टून या क्रिकेट दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन उसी खाते पर एडल्ट वेब सीरीज के सुझाव भी दिख सकते हैं। ये दो बदलाव जरूरी हैं... - माय स्पेस सेक्शन में जाएं। बच्चों को एप किड्स मोड में खोलकर दें। - पैरेंटल लॉक का विकल्प चुनें। इससे बच्चे पैरेंट्स के अकाउंट को लॉगिन नहीं कर पाएंगे। यूट्यूब, रिमाइंडर और डेली लिमिट जैसे फीचर्स उपयोगी यूट्यूब पर फैमिली सेंटर नाम का विकल्प है। इसे चुनिए। यहां पर बच्चे का अलग अकाउंट बना सकते हैं। इससे उन्हें उनकी उम्र के हिसाब से ही कंटेंट दिखाया जाएगा। इन दो विकल्पों को भी चुनें - रिमांडर: इसमें हर आधे या 1 घंटे में ब्रेक लेने का कहा जाता है। - डेली लिमिट: यूट्यूब शॉर्ट्स देखने की तय समय सीमा चुन सकते हैं। डिजिटल सेफ्टी गाइड 37% बच्चे ओटीटी इस्तेमाल कर रहे हैं... यहां एडल्ट कंटेंट की भरमार, इन एप्स पर पिन और पैरेंटल कंट्रोल सेट करना चाहिए
दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट 'स्टारशिप' के नए और बड़े वर्जन (V3) का पहला लॉन्च सफलताओं और नाकामियों का मिला-जुला सफर रहा। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित 'स्टारबेस' लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरने के बाद इंजन में खराबी आ गई। इस कारण रॉकेट के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद लगभग एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा। स्टारशिप सीरीज के पहले भी कई लॉन्च हो चुके हैं, लेकिन इस तीसरी पीढ़ी (V3) के अपग्रेड रॉकेट का पहला ही टेस्ट था और स्टारशिप का 12वां टेस्ट था। इसे भारतीय समय के अनुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली 'स्टारशिप' कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। ये पूरी तरह से रीयूजेबल है। बूस्टर नहीं कर पाया कंट्रोल्ड लैंडिंग, फेल हुआ बर्न टेस्ट रॉकेट का पहला हिस्सा यानी 'सुपर हैवी बूस्टर' अपना 'बूस्ट बैक' बर्न पूरा नहीं कर सका। यह वह प्रक्रिया होती है जिसकी मदद से बूस्टर वापस आकर जमीन पर या समुद्र में एक नियंत्रित लैंडिंग करता है। बर्न पूरा न होने की वजह से यह बूस्टर पूरी तरह नियंत्रित तरीके से पानी में नहीं गिर सका। स्टारशिप का छठा इंजन स्टार्ट नहीं हुआ बूस्टर से अलग होने के बाद जब मुख्य स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट को आगे बढ़ना था, तब उसके छह में से केवल पांच इंजन ही चालू हो पाए। एक इंजन स्टार्ट न होने के कारण यह पूरी तरह से सटीक ऑर्बिटल पाथ पर नहीं पहुंच पाया। इसके बावजूद इसकी ट्रेजेक्टरी इतनी सुरक्षित सीमा के भीतर थी कि यह एक 'सबऑर्बिटल' फ्लाइट को पूरा कर सका। इस तकनीकी खराबी के चलते टीम अंतरिक्ष में दोबारा इंजन स्टार्ट करने का टेस्ट नहीं कर पाई। इस टेस्ट का मुख्य मकसद रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च करना, उसे ऊपर ले जाना, ऊपर के हिस्से (स्टारशिप) से अलग करना और फिर इंजन को दोबारा चालू करके समुद्र (गल्फ ऑफ अमेरिका) में तय जगह पर सुरक्षित लैंड कराना था। अब स्टारशिप के पहले हुए 11 टेस्ट के बारे में जानें…. 11वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई। वहीं स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट का मकसद भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े टेस्ट करना था। 10वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त 2025 को किया गया था, जो कामयाब रहा था। रॉकेट को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से लॉन्च किया गया। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। इस मिशन में स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए। स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी हैं। इनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया जाता है। 29 जून स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था इससे पहले ये टेस्ट 29 जून 2025 को होना था, लेकिन स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके। टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया था। नौवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए 9वें टेस्ट में लॉन्चिंग के करीब 30 मिनट बाद स्टारशिप ने कंट्रोल खो दिया था, जिस कारण पृथ्वी के वातावरण में एंटर करने पर ये नष्ट हो गया था। ये लगातार तीसरी बार था जब स्टारशिप आसमान में ही नष्ट हुआ था। हालांकि, बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। आठवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ब्लास्ट हो गई थी स्टारशिप का आठवां टेस्ट भारतीय समयानुसार 7 मार्च 2025 को हुआ था। लॉन्चिंग के 7 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया। लेकिन 8 मिनट बाद शिप (ऊपरी हिस्सा) के छह इंजनों में से 4 ने काम करना बंद कर दिया जिससे शिप ने कंट्रोल खो दिया। इसके बाद ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने शिप को ब्लास्ट कर दिया। गिरते मलबे की वजह से मियामी, ऑरलैंडो, पाम बीच और फोर्ट लॉडरडेल के हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं थी। सातवां टेस्ट: बूस्टर वापस आया; लेकिन स्पेसक्राफ्ट आसमान में ही ब्लास्ट हुआ 17 जनवरी 2025 को भी स्टारशिप का सातवां टेस्ट पूरी तरह से कामयाब नहीं रहा था। लॉन्चिंग के 8 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया था, लेकिन शिप (ऊपरी हिस्सा) में ऑक्सीजन लीक से ब्लास्ट हो गया था। छठा टेस्ट: लॉन्चपैड पर उतरने में दिक्कत दिखी तो पानी पर लैंड कराया, ट्रम्प भी मौजूद रहे स्टारशिप का छठा टेस्ट 20 नवंबर 2024 को सुबह 03:30 बजे किया गया था। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी टेस्ट देखने के लिए स्टारबेस पहुंचे थे। इस टेस्ट में बूस्टर को लॉन्च करने के बाद वापस लॉन्चपैड पर कैच किया जाना था, लेकिन सभी पैरामीटर ठीक नहीं होने के कारण इसे पानी में लैंड कराने का फैसला लिया गया। स्टारशिप के इंजन को स्पेस में फिर से चालू किया गया। इसके बाद हिंद महासागर में लैंडिंग हुई। पांचवां टेस्ट: पहली बार बूस्टर को लॉन्चपैड पर कैच किया था स्टारशिप का पांचवां टेस्ट 13 अक्टूबर 2024 को किया गया था। इस टेस्ट में पृथ्वी से 96 Km ऊपर भेजे गए सुपर हैवी बूस्टर को लॉन्चपैड पर वापस लाया गया, जिसे मैकेजिला ने पकड़ा। मैकेजिला दो मेटल आर्म हैं जो चॉपस्टिक्स की तरह दिखाई देती हैं। वहीं स्टारशिप की पृथ्वी के वायुमंडल में री-एंट्री कराकर हिंद महासागर में कंट्रोल्ड लैंडिंग कराई गई। स्टारशिप ने जब पृथ्वी के वातावरण में एंट्री की तब उसकी रफ्तार 26,000 किलोमीटर प्रति घंटे थी और तापमान 1,430C तक पहुंच गया था। चौथा टेस्ट: स्टारशिप को स्पेस में ले जाया गया, फिर पानी में लैंडिंग हुई स्टारशिप का चौथा टेस्ट 6 जून 2024 को हुआ था, जो सक्सेसफुल रहा था। 1.05 घंटे के इस मिशन को बोका चिका से शाम 6.20 बजे लॉन्च किया गया था। इसमें स्टारशिप को स्पेस में ले जाया गया, फिर पृथ्वी पर वापस लाकर पानी पर लैंड कराया गया। टेस्ट का मेन गोल यह देखना था कि स्टारशिप पृथ्वी के वातावरण में एंट्री के दौरान सर्वाइव कर पाता है या नहीं। टेस्ट के बाद कंपनी के मालिक इलॉन मस्क ने कहा था, 'कई टाइल्स के नुकसान और एक डैमेज्ड फ्लैप के बावजूद स्टारशिप ने समुद्र में सॉफ्ट लैंडिंग की।' तीसरा टेस्ट: रीएंट्री के बाद स्टारशिप से संपर्क टूटा था ये टेस्ट 14 मार्च 2024 को हुआ था। स्पेसएक्स ने बताया था कि स्टारशिप रीएंट्री के दौरान सर्वाइव नहीं कर पाया, लेकिन उसने उड़ान के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। वहीं इलॉन मस्क ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल आधा दर्जन स्टारशिप उड़ान भरेंगे। दूसरा टेस्ट: स्टेज सेपरेशन के बाद खराबी आ गई थी स्टारशिप का दूसरा टेस्ट 18 नवंबर 2023 को शाम करीब 6:30 बजे किया गया था। लॉन्चिंग के करीब 2.4 मिनट बाद सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप का सेपरेशन हुआ। बूस्टर को वापस पृथ्वी पर लैंड होना था, लेकिन 3.2 मिनट बाद 90 Km ऊपर यह फट गया। वहीं स्टारशिप तय प्लान के अनुसार आगे बढ़ गया। करीब 8 मिनट बाद पृथ्वी से 148 Km ऊपर स्टारशिप में भी खराबी आ गई, जिस कारण उसे नष्ट करना पड़ा। फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम के जरिए इसे नष्ट किया गया था। दूसरे टेस्ट में रॉकेट और स्टारशिप को अलग करने के लिए पहली बार हॉट स्टैगिंग प्रोसेस का इस्तेमाल किया गया था, जो पूरी तरह सक्सेसफुल रही थी। सभी 33 रैप्टर इंजनों ने भी लॉन्च से सेपरेशन तक ठीक से फायर किया था। पहला टेस्ट: लॉन्चिंग के 4 मिनट बाद विस्फोट हो गया था 20 अप्रैल 2023 को स्टारशिप का पहला ऑर्बिटल टेस्ट किया गया था। इस टेस्ट में बूस्टर 7 और शिप 24 को लॉन्च किया गया था। उड़ान भरने के 4 मिनट बाद ही मेक्सिको की खाड़ी के पास 30 किलोमीटर ऊपर स्टारशिप में विस्फोट हो गया था। स्टारशिप के फेल होने के बाद भी इलॉनमस्क और एम्प्लॉइज खुशी मना रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि रॉकेट का लॉन्च पैड से उड़ना ही बड़ी सफलता थी। मस्क ने लॉन्चिंग से दो दिन पहले कहा था- सफलता शायद मिले, लेकिन एक्साइटमेंट की गारंटी है। स्पेसएक्स ने कहा था- सेपरेशन स्टेज से पहले ही इसका एक हिस्सा अचानक अलग हो गया, जबकि यह तय नहीं था। इस तरह के एक टेस्ट के साथ हम जो सीखते हैं, उससे सफलता मिलती है। आज का टेस्ट हमें स्टारशिप की रिलायबिलिटी में सुधार करने में मदद करेगा। टीमें डेटा को रिव्यू करना जारी रखेंगीं और अगले फ्लाइट टेस्ट की दिशा में काम करेंगीं।
होंडा कार्स इंडिया ने आखिरकार भारत में अपनी पॉपुलर सेडान कार सिटी का अपडेटेड वर्जन लॉन्च कर दिया है। इसकी शुरुआती कीमत ₹12 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है। कंपनी ने इस कार के लुक और फीचर्स में कई जरूरी बदलाव किए हैं, ताकि बाजार में मिल रही कड़ी टक्कर के बीच इसे बिल्कुल फ्रेश लुक दिया जा सके। बाहर से कितनी बदली कार: रिवाइज्ड ग्रिल और नए अलॉय व्हील्स डिजाइन की बात करें तो होंडा ने कार के लुक को पहले से थोड़ा और शार्प बनाया है। इसके फ्रंट में रिवाइज्ड ग्रिल, नया बंपर डिजाइन और नए अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। कार के LED लाइटिंग एलिमेंट्स में भी बदलाव किया गया है, जिससे इसका लुक काफी क्लीन नजर आता है। हालांकि, कंपनी ने इसके पुराने सिग्नेचर लुक को बरकरार रखा है। केबिन और फीचर्स: टचस्क्रीन और एडवांस कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी कार के अंदर का लेआउट पहले जैसा ही रखा गया है, लेकिन फीचर्स की लिस्ट में नए अपडेट्स जोड़े गए हैं। इसमें स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के साथ बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, कनेक्टेड कार टेक और सनरूफ जैसे फीचर्स मिलेंगे। सुरक्षा में क्या है खास: होंडा सेंसिंग सुइट के साथ ADAS कार को सुरक्षित बनाने के लिए होंडा ने अपनी प्रेजेंटेशन के दौरान ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) पैकेज पर खास जोर दिया है। नई अपडेटेड सिटी में ग्राहकों को पहले की तरह 'होंडा सेंसिंग सुइट' का सपोर्ट मिलता रहेगा, जो सफर के दौरान सेफ्टी को बेहतर बनाता है। इंजन और गियरबॉक्स: पुराना 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन ही मिलेगा मैकेनिकल तौर पर कार में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। अपडेटेड सिटी में पुराना ही 1.5-लीटर नेचुरल एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन मैनुअल (MT) और CVT गियरबॉक्स दोनों ऑप्शन्स के साथ आता है। कंपनी ने इस बार पावरट्रेन में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे साफ है कि उनका पूरा फोकस कार के लुक और अपील को बढ़ाने पर था। इन गाड़ियों से होगा सीधा मुकाबला: वरना और स्लाविया को टक्कर मिडसाइज सेडान सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए कंपनी ने इसमें रिफ्रेश्ड फ्रंट-एंड स्टाइलिंग, नए अलॉय व्हील्स और एडवांस कनेक्टेड फीचर्स दिए हैं। भारतीय बाजार में लॉन्च होने के बाद इस अपडेटेड होंडा सिटी का सीधा मुकाबला हुंडई वरना, फॉक्सवैगन वर्चूस और स्कोडा स्लाविया जैसी कारों से होगा।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी की ओर से बढ़ाई गई ये नई कीमतें जून 2026 से प्रभावी होंगी। लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत के कारण कंपनी ने यह फैसला किया है। मारुति के अनुसार, पोर्टफोलियो के सभी मॉडल्स पर कीमतों में यह बढ़ोतरी लागू होगी। हालांकि, किस कार के दाम कितने बढ़ेंगे, यह उसके मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करेगा। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में यह जानकारी दी है। एरिना-नेक्सा के सभी मॉडल्स के प्राइस बढ़ेंगे कंपनी अपने वाहनों की बिक्री दो अलग-अलग डीलरशिप चैनल्स के जरिए करती है, जिनमें एरिना और नेक्सा शामिल हैं। जून से इन दोनों ही चैनल्स से बिकने वाली कारें महंगी हो जाएंगी। कंपनी के लागत कम करने के प्रयास विफल ग्राहकों पर कम से कम असर डालने की कोशिश कंपनी ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के कारण बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा बाजार पर डालना अब जरूरी हो गया था। इसके बावजूद कंपनी ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि इस प्राइस हाइक का आम ग्राहकों पर कम से कम असर पड़े। 1 साल से ज्यादा समय बाद बढ़ रहे हैं दाम मारुति सुजुकी ने इससे पहले आखिरी बार अप्रैल 2025 में अपनी कारों की कीमतें बढ़ाई थीं। उस समय कंपनी ने अलग-अलग मॉडल्स के दाम में ₹62,000 तक की बढ़ोतरी की थी। अब करीब 1 साल से भी ज्यादा समय के अंतराल के बाद कंपनी ने दोबारा कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। इस बीच मास-मार्केट और लग्जरी सेगमेंट की कई अन्य कार कंपनियां जनवरी 2026 में ही अपने वाहनों के दाम बढ़ा चुकी हैं चौथी तिमाही में मुनाफा ₹3,659 करोड़ रहा मारुति सुजुकी इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 52,946 करोड़ रुपए की कुल कमाई की। यह पिछले साल के मुकाबले 25% बढ़ी है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 42,431 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इसी तिमाही में कंपनी ने 6.76 लाख कारें बेचीं। कुल कमाई में से सैलरी, टैक्स, कच्चे माल की कीमत जैसे खर्चे निकाल दें तो कंपनी के पास 3,659 करोड़ रुपए शुद्ध मुनाफे (नेट प्रॉफिट) के रूप में बचे। यह 2025 की जनवरी-मार्च तिमाही से 6.44% कम रहा है। पिछले साल कंपनी को 3,911 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। रेवेन्यू 28.20% बढ़कर ₹52,462 करोड़ रहा चौथी तिमाही में कंपनी को प्रोडक्ट और सर्विस बेचकर 52,462 करोड़ रुपए का राजस्व यानी रेवेन्यू हासिल हुआ। सालाना आधार पर यह 28.20% बढ़ा है। जनवरी-मार्च 2025 में कंपनी ने 40,920 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया था। चौथी तिमाही में गाड़ियों की बिक्री 11.8% बढ़ी चौथी तिमाही में मारुति सुजुकी ने कुल 6,76,209 गाड़ियां बेचीं। घरेलू मार्केट में कंपनी की सेल इस दौरान सालाना आधार पर 3.7% बढ़ी, जबकि एक्सपोर्ट 61.3% ज्यादा रहा। इसके चलते कंपनी की सालाना आधार पर ओवरऑल सेल्स ग्रोथ 11.8% रही। डोमेस्टिक मार्केट में कंपनी ने 5,38,994 गाड़ियां बेचीं, जबकि 1,37,215 गाड़ियों को एक्सपोर्ट किया। यह कंपनी का ऑल-टाइम-हाई एक्सपोर्ट है। 1982 में बनी थी मारुति सुजुकी इंडिया मारुति सुजुकी की स्थापना 24 फरवरी 1981 को भारत सरकार के स्वामित्व में मारुति इंडस्ट्रीज लिमिटेड रूप में हुई थी। 1982 में कंपनी ने जापान की सुजुकी कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर 'मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड' बनाई। भारतीयों के लिए पहली बजट कार 1983 में मारुति 800 लॉन्च हुई। 47,500 रुपए की एक्स शोरूम कीमत पर कंपनी ने देश के एक बड़े तबके को कार खरीदने के लिए सक्षम बनाया था। मारुति सुजुकी पिछले 40 साल में देश में 3 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां बेच चुकी है। रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है? ये खबर भी पढ़ें… ओप्पो रेनो 15 प्रो मिनी रिव्यू: छोटे साइज के फोन में 200MP कैमरा और 6200mAh बैटरी; जानें सभी फीचर्स ओप्पो ने मार्केट में अपनी नई रेनो 15 सीरीज के साथ कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप रेनो 15 प्रो मिनी पेश किया है, जिसमें प्रीमियम डिजाइन और जबरदस्त पावर है. इसमें 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और फ्लैगशिप डाइमेंसिटी 8450 प्रोसेसर दिया गया है जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूथ बनाता है। इसके 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत ₹62,999 जबकि 512GB मॉडल की कीमत ₹67,999 है। चलिए जानते हैं इसमें और क्या खास है… पूरी खबर पढ़ें…
टेक्नोलॉजी की दुनिया में कुछ साल पहले तक ‘स्मार्ट’ शब्द जादू जैसा लगता था। स्मार्ट फोन, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट वॉच, स्मार्ट होम... हर नई चीज भविष्य के और करीब ले जाने का दावा करती। सपना ये था कि फ्रिज खुद दूध ऑर्डर करेगा, दरवाजा मोबाइल से खुलेगा और माइक्रोवेव जवाब देगा। लेकिन, अब ‘स्मार्ट’ के उलट ‘बेसिक’ चीजों का ट्रेंड उभर रहा है। यानी ऐसे फोन, टीवी और उपकरण, जो सिर्फ अपना काम करें। हर वक्त इंटरनेट या एप से जुड़े न रहें। अमेरिका सहित पश्चिमी बाजारों में युवा बेसिक फोन की ओर लौट रहे हैं। इनमें सिर्फ कॉल, मैसेज और कुछ जरूरी फीचर होते हैं। गजेल की रिपोर्ट के मुताबिक 2021-24 के बीच जेन-जी में ऐसे फोन की बिक्री 148% बढ़ी। 16% जेन जी वयस्कों के पास ऐसे फोन थे। 28% खरीदने के इच्छुक थे। भारत में स्मार्ट गैजेट्स की हाइप ठंडी पड़ने का संकेत वियरेबल मार्केट में दिखा। आईडीसी के मुताबिक, 2024 में भारत का वियरेबल मार्केट 11.3% घटकर 11.9 करोड़ यूनिट रहा। स्मार्टवॉच शिपमेंट 34.4% गिरी। लोग ‘बेसिक टीवी’ खोज रहे हैं। ऐसी स्क्रीन, जो सिर्फ वही दिखाए जो आप चलाना चाहें, न कि आपके देखने की आदतें ट्रैक करे। इस बदलाव की वजह अतीत की कसक नहीं, बल्कि डिजिटल थकान है। प्यू रिसर्च के अनुसार, अमेरिका के आधे किशोर लगभग हर वक्त ऑनलाइन रहते हैं। ये ट्रेंड प्रौद्योगिकी विरोधियों में नहीं, बल्कि टेक सेवी युवाओं में दिख रहा है। वे टेक्नोलॉजी का अपनी शर्तों पर प्रयोग चाहते हैं। उनके लिए स्मार्टनेस हर चीज को कनेक्ट करना नहीं, बल्कि ये चुनना है कि कौनसी चीज कनेक्ट करनी है और कौनसी नहीं। बेसिक चीजें पिछड़ेपन का नहीं, बल्कि सुकून, प्राइवेसी और अपने वक्त पर नियंत्रण का प्रतीक हैं। शायद अगली टेक क्रांति यही हो- कम बोलने वाली, लेकिन ज्यादा समझदार। भारत में स्मार्ट होम का बाजार अभी बढ़ने के ट्रेंड में है अमेरिका में कोपलैंड के 2024 के सर्वे में 27% लोगों ने स्मार्ट डिवाइसेज में डेटा सुरक्षा पर चिंता जताई थी, जबकि 2022 में ये आंकड़ा 23% था। हालांकि, भारत में स्मार्ट होम अभी बढ़ने वाला बाजार है। यह 2024 में 3.23 अरब डॉलर (करीब 31 हजार करोड़ रु.) था, जो 2030 तक 16.39 अरब डॉलर (करीब 1.57 लाख करोड़ रु.) तक पहुंच सकता है।
ओप्पो रेनो 15 प्रो मिनी रिव्यू:छोटे साइज के फोन में 200MP कैमरा और 6200mAh बैटरी; जानें सभी फीचर्स
ओप्पो ने मार्केट में अपनी नई रेनो 15 सीरीज के साथ कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप रेनो 15 प्रो मिनी पेश किया है, जिसमें प्रीमियम डिजाइन और जबरदस्त पावर है. इसमें 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और फ्लैगशिप डाइमेंसिटी 8450 प्रोसेसर दिया गया है जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूथ बनाता है। इसके 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत ₹62,999 जबकि 512GB मॉडल की कीमत ₹67,999 है। चलिए जानते हैं इसमें और क्या खास है… डिजाइन: रिबन पैटर्न और दमदार मजबूती पहली नजर में रेनो 15 प्रो मिनी अपने फ्लैट मेटल फ्रेम और मैट ग्लास बैक की वजह से बहुत प्रीमियम दिखता है। इसके बैक पैनल पर दिया गया रिबन पैटर्न डिजाइन इसे दूसरे फोन्स से अलग और क्लासी लुक देता है। खास बात यह है कि यह फोन IP69 रेटिंग के साथ आता है, जिसका मतलब है कि यह पानी और धूल के प्रति बेहद सख्त है। 4.55mm की मोटाई (ओपन होने पर) के साथ यह हाथ में काफी सॉलिड और कंफर्टेबल महसूस होता है। डिस्प्ले और परफॉर्मेंस: छोटा पैकेट, बड़ा धमाका फोन में 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दी गई है। 120Hz रिफ्रेश रेट की वजह से स्क्रॉलिंग काफी स्मूथ है। छोटे साइज के कारण इसे एक हाथ से चलाना बहुत आसान है। कैमरा: 200MP का पावरफुल सेंसर कैमरा डिपार्टमेंट में ओप्पो ने कोई कसर नहीं छोड़ी है: बैटरी और स्मार्ट फीचर्स: कॉम्पैक्ट साइज में 'जम्बो' पावर अक्सर छोटे फोंस में बैटरी लाइफ की समस्या होती है, लेकिन यहां ओप्पो ने चौंका दिया है। इतने कॉम्पैक्ट साइज में भी 6200mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जिसे चार्ज करने के लिए 80W का फास्ट चार्जर मिलता है। स्मार्ट फीचर्स के तौर पर इसमें गूगल जेमिनी एआई का फुल सपोर्ट है। 'AI माइंड स्पेस' जैसे फीचर्स स्क्रीन के कंटेंट को तुरंत समराइज कर देते हैं। साथ ही, ओप्पो का अपना डायलर है जिससे आप बिना सामने वाले को पता चले (बिना अनाउंसमेंट) कॉल रिकॉर्डिंग कर सकते हैं।
पेटीएम ने टीनेजर्स के लिए 'पेटीएम पॉकेट मनी' फीचर लॉन्च किया है, जिसके जरिए वे बिना खुद का बैंक अकाउंट खोले सुरक्षित डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे। इस नए फीचर में पैरेंट्स को बच्चों के खर्च पर नजर रखने, मंथली लिमिट तय करने और रीयल-टाइम ट्रैकिंग करने की पूरी सुविधा मिलेगी। फिनटेक फर्म वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (पेटीएम) ने 18 मई, सोमवार को आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान किया है। पैरेंट्स के पास रहेगा खर्च का पूरा कंट्रोल कंपनी के बयान के मुताबिक, पैरेंट्स और परिवार के भरोसेमंद सदस्य अपने बच्चों को सुरक्षित और रेगुलेटेड पेमेंट एक्सेस दे सकते हैं। वे अपने पेटीएम एप के जरिए बच्चों के लिए एक तय खर्च सीमा निर्धारित कर सकेंगे। इससे पैरेंट्स अपने बच्चों के हर ट्रांजैक्शन को लगातार ट्रैक कर पाएंगे और उनका कंट्रोल हमेशा बना रहेगा। रोजमर्रा के खर्चों को डिजिटल बनाने की कोशिश भारत में टीनेजर्स हर दिन शॉपिंग, मोबाइल रिचार्ज, मेट्रो किराया, कैब बुकिंग और स्कूल-कॉलेज की कैंटीन जैसे जरूरी कामों के लिए लगातार डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। वर्तमान में कई बच्चे इन खर्चों के लिए पूरी तरह पैरेंट्स या कैश पर निर्भर हैं। 'पेटीएम पॉकेट मनी' के जरिए बच्चों को एक सुरक्षित माध्यम मिलेगा, जिससे परिवारों में छोटी उम्र से ही जिम्मेदार वित्तीय आदतें विकसित करने में मदद मिलेगी। अब ओटीपी मांगने की जरूरत नहीं होगी इस फीचर के एक्टिवेट होने के बाद टीनेजर्स अपने खुद के फोन में पेटीएम एप का इस्तेमाल करके ऑनलाइन और ऑफलाइन मर्चेंट्स को सुरक्षित यूपीआई पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए अब उन्हें पेमेंट करते समय पैरेंट्स से ओटीपी मांगने, उनका फोन उधार लेने या पैरेंट्स को वॉट्सएप पर क्यूआर कोड भेजने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। 15 हजार का मंथली कैप तय किया गया पेटीएम पॉकेट मनी के तहत पैरेंट्स एनपीसीआई के 'यूपीआई सर्कल' के माध्यम से बच्चों को इनवाइट कर सकते हैं। इसके तहत पूरे यूपीआई नेटवर्क पर मंथली लिमिट अधिकतम 15,000 रुपए और एक बार में इंडिविजुअल पेमेंट की लिमिट 5,000 रुपए तक सेट की जा सकती है। यह सर्विस सेविंग्स और करंट दोनों तरह के अकाउंट्स पर अवेलेबल है, लेकिन इससे इंटरनेशनल पेमेंट्स और कैश विड्रॉल करने पर पाबंदी रहेगी। स्पेंड समरी से पूरा बजट ट्रैक होगा यह नया फीचर पेटीएम स्पेंड समरी के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट है, जो हर एक पेमेंट को ऑटोमैटिकली अलग-अलग कैटेगरीज में बांट देता है। इससे परिवार आसानी से अपने कुल खर्चों पर नजर रख सकते हैं, पॉकेट मनी के बजट को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं और बच्चों को पैसों के सही इस्तेमाल की सीख दे सकते हैं। एप में पेमेंट हिस्ट्री देखने का भी पूरा ऑप्शन मिलेगा। सुरक्षा के लिए इन-बिल्ट सेफ्टी मेजर्स पेटीएम ने इसमें सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। फीचर एक्टिवेट होने के शुरुआती 30 मिनट में केवल 500 रुपए और पहले 24 घंटों में अधिकतम 5,000 रुपए तक का ही ट्रांजैक्शन किया जा सकेगा। किसी भी समय जरूरत पड़ने पर पैरेंट्स अपने पेटीएम यूपीआई पिन का इस्तेमाल करके खर्च की लिमिट को बदल सकते हैं या बच्चों का एक्सेस तुरंत कैंसल कर सकते हैं। इसके अलावा डिवाइस लॉक होना भी अनिवार्य है। क्या होता है यूपीआई सर्कल और इन-बिल्ट सेफ्टी?
टेक कंपनी वनप्लस ने अपने फ्लैगशिप फोन वनप्लस 15R की कीमत 7 हजार रुपए बढ़ा दी है। वनप्लस ने फोन को दिसंबर-2025 में 47,999 रुपए की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया था। अब इसकी कीमत 54,999 रुपए हो गई है। वनप्लस 15R दो वैरिएंट में स्नैपड्रैगन 8 जेन-5 प्रोसेसर, 7400mAh बैटरी और 32 मेगापिक्सल कैमरा के साथ आता है। वनप्लस 15R: वैरिएंट वाइस प्राइस वनप्लस 15R: स्पेसिफिकेशंस परफॉर्मेंस: वनप्लस 15R में परफॉर्मेंस के लिए स्नैपड्रैगन 8 जेन-5 प्रोसेसर दिया गया है। यह मोबाइल चिपसेट 3 नैनोमीटर प्रोसेस पर बना ऑक्टा-कोर प्रोसेसर है, जो 3.8 गीगाहर्ट्ज तक की क्लॉक स्पीड पर रन कर सकता है। ये पावरफुल और लैगफ्री प्रोसेसिंग देता है। वहीं, ग्राफिक्स के लिए फोन में एड्रेनो 830 GPU दिया गया है। हैवी गेमिंग के दौरान फोन को हीट होने से बचाने के लिए इसमें 360 डिग्री क्रेयो वेलोसिटी कूलिंग सिस्टम भी लगाया गया है। फोन एंड्रॉएड 15 पर बेस्ड ColorOS 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। इसमें LPDDR5X रैम दी गई है, जो स्मूथ मल्टीटास्किंग करने में मदद करती है। मोबाइल में UFS 4.1 स्टोरेज लगी है, जिससे फास्ट डाटा ट्रांसफर होता है। इसके अलावा फोन में NFC, वाई-फाई 7 और ब्लूटूथ 5.4 का सपोर्ट दिया गया है। बैटरी: पावरबैकअप के लिए वनप्ल्स 15R में 7400mAh की बैटरी दी गई है। इसे चार्ज करने के लिए 80W सुपरवूक चार्जिंग तकनीक मिलेगी। इससे पहले वनप्लस का कोई भी फोन इतनी बड़ी बैटरी के साथ नहीं आया है। हाल ही में लॉन्च हुआ वनप्लस 15 स्मार्टफोन 7300mAh बैटरी पर लॉन्च हुआ था। वनप्लस 15R की बैटरी को सिलीकॉन नेनोस्टेक टेक्नोलॉजी पर बनाया गया है। कंपनी का दावा है कि 4 साल बाद भी इसकी बैटरी हेल्थ 80% से कम नहीं जाएगी। कैमरा: फोटोग्राफी के लिए वनप्लस 15R डिटेलमैक्स इंजन वाला डुअल रियर कैमरा सपोर्ट करता है। इसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेब्लाइजेशन के साथ 50 मेगापिक्सल का सोनी IMX906 मेन रियर सेंसर और 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड एंगल लेंस शामिल है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन में अल्ट्रा क्लीयर मोड, क्लीयर बर्स्ट और क्लियर नाइट इंजन जैसे एडवांस फीचर्स मिलेंगे। डिस्प्ले: वनप्लस 15R में 28001272 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.83-इंच की 1.5K स्क्रीन दी गई। यह एमोलेड पैनल पर बनी डिस्प्ले 165Hz तक के हाई रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है। इसके साथ 1800 निट्स की पीक ब्राइटनेस और 450PPI ऑटो डिमिंग मिलेगी। कंपनी ने बताया कि मोबाइल TUV राइनलैंड इंटेलीजेंट आई केयर 5.0 सर्टिफाइड है, जो अंधेरे में फोन चलाने पर भी आंखों को नुकसान से बचाने में मदद करेगा। स्क्रीन में इन-डिस्प्ले अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर भी है।
दिल्ली-NCR में आज यानी 17 मई से CNG के दाम 1 रुपए बढ़ गए हैं। दिल्ली में अब CNG 80.09 रुपए किलो में मिलेगी। वहीं नोएडा-गाजियाबाद में इसके दाम 88.70 रुपए हो गए हैं। 2 दिनों में कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को CNG के दाम 2 रुपए प्रति किलो बढ़ाए थे। पेट्रोल-डीजल ₹3-3 महंगे हुए 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़ी थीं। इससे दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं, कंपनियों ने प्रमुख शहरों में CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी कर दी। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए ₹79.09 खर्च करने पड़ रहे हैं। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रही है तो पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। क्या अभी और बढ़ेंगे दाम? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹3 की यह बढ़ोतरी काफी नहीं है। अपना घाटा पूरी तरह खत्म करने और 'ब्रेक-ईवन' यानी नो प्रॉफिट-नो लॉस की स्थिति में आने के लिए इन कंपनियों को अभी पेट्रोल के दाम ₹28 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹32 प्रति लीटर तक बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल पेट्रोल पर 29.5% और डीजल पर 36.5% की कमी बनी हुई है। अगर ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई इसी तरह प्रभावित रही, तो आने वाले दिनों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है। -------------------------------------------------------
गूगल ने इस हफ्ते आयोजित ‘एंड्रॉइड शो 2026’ में कई बड़े बदलावों का ऐलान किया। कंपनी अब एंड्रॉइड को एआई आधारित पर्सनल असिस्टेंट प्लेटफॉर्म में बदलना चाहती है। नए अपडेट्स में जेमिनी एआई, गूगल क्रोम में ऑटोमेशन और एआई कीबोर्ड जैसे नए फीचर्स आएंगे। इसके साथ ही क्रोमबुक लैपटॉप के बाद अब कंपनी नया गूगलबुक भी पेश करेगी। कंपनी के मुताबिक जून 2026 तक एंड्रॉइड-17 रोलआउट होगा, लेकिन अन्य एआई फीचर्स पूरे साल अलग-अलग समय पर आएंगे। गूगल इन मोर्चों पर कर रहा काम फ्रॉड - फर्जी कॉल खुद पहचानकर काट देगा स्कैमर्स अक्सर बैंक कर्मचारी बनकर कॉल करते हैं और लोगों से ओटीपी या अकाउंट डिटेल मांगकर ठगते हैं। अब एंड्रॉइड का नया ‘वेरिफाइड फाइनेंशियल कॉल’ फीचर्स आ रहा है। अगर फोन में बैंक का आधिकारिक एप है और कोई फेक कॉल आए, तो सिस्टम खुद जांच करेगा कि बैंक सच में कॉल कर रहा है या नहीं। अगर बैंक से कॉल नहीं की गई, तो एआई की मदद से आपका फोन कॉल कट कर देगा। स्क्रॉलिंग - रील्स की लत कम करेगा नया फीचर रील्स की लत लगी है, तो ‘पॉज पॉइंट’ फीचर भी आ रहा है। इसमें ध्यान भटकाने वाले एप्स चुने जा सकेंगे। ये एप्स तुरंत नहीं खुलेंगे, इसमें 10 सेकंड का ‘पॉज’ रहेगा। इन 10 सेकंड में यूजर उस एप के इस्तेमाल की समय सीमा तय कर सकेगा, जैसे- सिर्फ 5 मिनट चलाने का विकल्प चुन सकेंगे। गूगलबुक- एंड्रॉइड वाला नया लैपटॉप लाएगा गूगल अब क्रोमबुक के बाद गूगलबुक नाम की नई श्रेणी पर काम कर रहा है। यह एंड्रॉइड आधारित लैपटॉप होगा, विंडोज जैसा इंटरफेस जरूर देगा, पर एंड्रॉइड एप्स विंडो मोड में चलेंगे। इसमें जेमिनी एआई, मल्टीकलर एलईडी स्ट्रिप, हल्का डिजाइन… और लंबी बैटरी लाइफ जैसे फीचर्स होंगे। एआई - जेमिनी बनेगा पर्सनल असिस्टेंट जेमिनी फोन पर आपके कई काम खुद कर सकेगा। अगर आप खाना ऑर्डर करना चाहते हैं, तो यह आपकी पसंद, लोकेशन और बजट के हिसाब से रेस्टोरेंट ढूंढ सकेगा, खाना चुन सकेगा और ऑर्डर प्रक्रिया पूरी करने में मदद करेगा। हालांकि सुरक्षा के लिए भुगतान का अंतिम चरण यूजर को ही पूरा करना होगा। टाइपिंग - अब बोलकर लिखना आसान होगा गूगल अपने की-बोर्ड ‘गूगल बोर्ड’ में रैमब्लर नाम का नया एआई वॉइस टाइपिंग फीचर ला रहा है। यह फीचर बिखरी हुई बातों को व्यवस्थित टेक्स्ट में बदलेगा। आपकी बात समझेगा और उसके हिसाब से टाइप करेगा। यह लगभग हर एंड्रॉइड एप में काम करेगा जहां टाइपिंग की सुविधा है।
हर साल टेक कंपनियां नए स्मार्टफोन लॉन्च करती हैं। यूजर्स को अपग्रेड करने के लिए आकर्षित किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर आपका मौजूदा फोन ठीक चल रहा है, तो क्या हर दो-तीन साल में नया फोन लेना जरूरी है? ज्यादातर लोग हर 2-3 साल में फोन बदल देते हैं, जबकि सही देखभाल की जाए तो स्मार्टफोन कहीं ज्यादा समय तक चल सकता है। आज ऐसे 5 तरीके जानें, जिससे फोन की लाइफ बढ़ सकती है। चार्जिंग से स्टोरेज तक... ये टिप्स अपनाएं 1. बार-बार फोन को ‘ओवरहीटिंग’ से बचाएं एपल, गूगल और सैमसंग जैसी कंपनियां सलाह देती हैं कि फोन को बहुत ज्यादा गर्म या बहुत ज्यादा ठंडे तापमान में इस्तेमाल न करें। 35 डिग्री से ज्यादा गर्मी बैटरी को नुकसान पहुंचाती है। धूप में फोन छोड़ना, कार की धूप में ज्यादा गर्म होने देना, लगातार ओवरहीटिंग बैटरी लाइफ कम कर सकता है। 2. हर बार 100% चार्ज करना जरूरी नहीं फोन को रोज 100% तक चार्ज करना बैटरी की उम्र घटा सकता है। अगर फोन की बैटरी 20% से 80% के बीच रखी जाए, तो उसकी लाइफ बढ़ सकती है। आईफोन व सैमसंग जैसे फोन ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग फीचर देते हैं, जो बैटरी को जरूरत से ज्यादा चार्ज होने से बचाते हैं। 3. बैटरी बचाने के लिए ये 6 सेटिंग्स बदलें अगर बैटरी जल्दी खत्म होती है, तो कुछ छोटे बदलाव मदद कर सकते हैं।- डार्क मोड इस्तेमाल करें - ऑटो ब्राइटनेस चालू रखें -स्क्रीन टाइमआउट 60 सेकेंड से कम - लो पावर मोड ऑन करें -जरूरत न हो तो जीपीएस आधारित एप्स कम ही इस्तेमाल करें 4. फोन में 20% तक स्टोरेज खाली रखें फोन की स्टोरेज लगभग भर जाने पर उसका परफॉर्मेंस भी धीमा होने लगता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आपके फोन में कम से कम 10% और आदर्श रूप में 20% स्टोरेज खाली होना चाहिए। अगर फोन की कुल स्टोरेज 128 जीबी है तो 24 जीबी तक फोन में खाली स्पेस होना परफॉर्मेंस तेज करता है। 5. सॉफ्टवेयर अपडेट्स को नजरअंदाज न करें अपडेट्स सिक्योरिटी के लिए बेहद जरूरी होते हैं। फोन को नए सिक्योरिटी अपडेट्स न मिले तो… - हैकिंग रिस्क बढ़ सकता है - एप्स ठीक से काम नहीं करते - प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है -एपल लगभग हर 4-6 हफ्ते में सिक्योरिटी अपडेट्स देता है, इन्हें जरूर अपडेट रखना चाहिए।
शाओमी का सब-ब्रांड रेडमी अपनी परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड 'टर्बो' सीरीज भारत में पहली बार लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसका टीजर जारी किया है। फोन मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट के साथ आएगा। ये फोन चीन में लॉन्च हो चुका है, जहां इसकी शुरुआती कीमत युआन1,999 (करीब ₹28,200) है। भारत में इसकी कीमत 45 हजार रुपए के आसपास रह सकती है और इसे 5 जून को पेश किया जा सकता है। यह वनप्लस नॉर्ड 6 और वीवो V70 FE जैसे स्मार्टफोन्स को टक्कर देगा। मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट से होगा लैस परफॉर्मेंस के लिए फोन में मीडियाटेक डाइमेंसिटी 8500-अल्ट्रा चिपसेट दिया गया है। यह फोन खास तौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो गेमिंग और हैवी टास्क करते हैं। फोन में बेहतरीन थर्मल स्टेबिलिटी और गेमिंग परफॉर्मेंस मिलने की उम्मीद है। मजबूती के लिए मिली है IP69K रेटिंग फोन में मेटल फ्रेम के साथ ग्लास बैक दिया गया है। ड्यूरेबिलिटी के मामले में भी यह फोन काफी एडवांस है। इसे धूल और पानी से बचाव के लिए IP66, IP68 और IP69K जैसी हाई रेटिंग्स मिली हैं। स्टोरेज की बात करें तो इसमें 16GB तक LPDDR5X रैम और 512GB तक की UFS 4.1 इंटरनल स्टोरेज दी गई है। 7560mAh बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग रेडमी टर्बो 5 की सबसे बड़ी खूबी इसकी 7560mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बैटरी क्षमता 9000mAh तक भी हो सकती है। फोन को चार्ज करने के लिए 100W की वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 27W की रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा। 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और 50MP कैमरा रेडमी टर्बो 5 में 6.59-इंच का 1.5K एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। फोटोग्राफी के लिए इसके बैक पैनल पर ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन (OIS) के साथ 50MP का सोनी IMX882 प्राइमरी कैमरा मिलता है।
ब्रुकलिन की 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेनोर लुई की कहानी आज हर दूसरे शख्स की कहानी है। एलेनोर हर महीने ऐसे वीडियो गेम के लिए भुगतान कर रही हैं, जिसमें उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। वह कहती हैं, ‘मैंने 5 साल से यह गेम नहीं खेला है। पर समझ नहीं आ रहा कि इससे पीछा कैसे छुड़ाऊं...।’ यह तो सिर्फ बानगी है। अगर आप क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट या यूपीआई की ऑटो-डेबिट हिस्ट्री खंगालेंगे, तो हैरान रह जाएंगे। वहां लंबी फेहरिस्त मिलेगी- स्ट्रीमिंग एप, क्लाउड स्टोरेज, ई-कॉमर्स साइट्स की प्राइम मेंबरशिप, जिम व फिटनेस एप्स और यहां तक कि आरओ मशीन भी... सबकुछ सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आ गया है। और तो और अब ‘सब्सक्रिप्शन’ के अंदर भी एक और सब्सक्रिप्शन छिपा होता है। किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म का बेस पैक लीजिए, फिर उसमें बिना एड के कंटेंट या लाइव स्पोर्ट्स देखने के लिए ‘प्रीमियम’ का खर्च अलग। और यह याद रखने के लिए कि कौन सा रीचार्ज कब खत्म हो रहा है- सारे सब्सक्रिप्शन ट्रैक करने वाले एक और एप की मेंबरशिप लेनी पड़ती है। ब्रिटिश प्लेटफॉर्म ‘बैंगो’ की स्टडी के मुताबिक ब्रिटेन व अमेरिका में एक औसत व्यक्ति हर माह करीब 5,700 से 16 हजार रु. खर्च कर रहा है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की रिपोर्ट के अनुसार सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाली 75% कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल अपना चुकी हैं। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रो. गिल एपल कहते हैं, कंपनियां चालाकी से चीजें अलग-अलग बेचती हैं। जैसे दही खरीदें पर चम्मच सब्सक्रिप्शन पर लें। सामान्य रूप से यह संभव नहीं है, पर एप्स की दुनिया में यह आम है। इसका सबसे पेचीदा पहलू ‘कैंसिलेशन’ है। कंपनियों के एप्स में ‘सब्सक्राइब’ करना आसान होता है, पर उसे बंद करना बेहद कठिन। इसकी प्रक्रिया लंबी और उलझी होती है या कस्टमर केयर पर लंबा इंतजार करना पड़ता है। प्रो. एपल कहते हैं,‘अगली बार जब किसी एप पर ‘स्टार्ट सब्सक्रिप्शन’ पर क्लिक करें, तो ध्यान रखें- शुरुआत आसान दिखेगी, पर हर महीने कटने वाला छोटा हिस्सा कंपनियों को ताकतवर और आपको लाचार बना देगा।’ स्टेटमेंट का ऑडिट करें, सालाना के बजाय मंथली प्लान बेहतर अमेरिकी फाइनेंस एक्सपर्ट व ‘आई विल टीच यू टू बी रिच’ के लेखक रमित सेठी के अनुसार, सब्सक्रिप्शन के चक्रव्यूह से निकलने का सबसे प्रभावी तरीका सचेत होकर खर्च करना है। अपने बैंक स्टेटमेंट का ‘निर्दयी ऑडिट’ करें, जिस सेवा का इस्तेमाल 30 दिनों में नहीं किया है, उसे बिना सोचे तुरंत कैंसल कर देना चाहिए। किसी भी ‘फ्री ट्रायल’ के लिए साइन-अप करते ही उसे तुरंत कैंसल कर दें, ताकि ट्रायल अवधि का फायदा भी उठा सकें और भविष्य में भूलवश कटने वाले पैसों से भी बच जाएं। सालाना डिस्काउंट के बजाय मासिक प्लान बेहतर है क्योंकि हर महीने जेब से कटने वाला पैसा आपको सचेत रखता है।
सरकार देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां तेजी से सड़क पर उतारना चाहती है, लेकिन यह प्लान अब ' पहले मुर्गी आई या अंडे' वाली उलझन में फंस गया है। ऑटोमोबाइल कंपनियां बड़े पैमाने पर तब तक हाई-एथेनॉल ब्लेंड वाली गाड़ियां बनाने को तैयार नहीं हैं, जब तक बाजार में पर्याप्त मात्रा में फ्लैक्स फ्यूल उपलब्ध न हो। वहीं, तेल कंपनियां तब तक E85 और E100 जैसे फ्यूल के स्टोरेज और सप्लाई में निवेश करने से कतरा रही हैं, जब तक सड़कों पर इन्हें चलाने वाली गाड़ियां न आ जाएं। अब सरकार दोनों पक्षों से बात कर रही है। क्या है फ्लेक्स-फ्यूल और भारत की जरूरत? फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां सामान्य गाड़ियों से अलग होती हैं, क्योंकि ये पेट्रोल के साथ किसी भी मात्रा में एथेनॉल-मिक्स पेट्रोल पर चल सकती हैं। अभी भारत में 20% एथेनॉल वाले (E20) पेट्रोल अनिवार्य है। सरकार अब E85 (85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल) और E100 यानी 100% एथेनॉल जैसे फ्लैक्स फ्यूल की ओर बढ़ना चाहती है, ताकि कच्चे तेल के आयात को कम किया जा सके। एथेनॉल को गन्ने के रस, मक्का और सड़े हुए अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। ये फ्यूल पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करता है। 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। तेल कंपनियों की चिंता: एथेनॉल स्टॉक खराब होने का डर तेल कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि हाई-एथेनॉल ब्लेंड वाले फ्यूल को लंबे समय तक स्टोर करना जोखिम भरा है। अगर स्टॉक का उपयोग तुरंत नहीं हुआ, तो एथेनॉल नमी सोख लेता है, जिससे इंजन खराब या कोरोड (जंग लगना) हो सकता है। कंपनियों का मानना है कि जब तक मांग सुनिश्चित नहीं होती, तब तक स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना घाटे का सौदा है। ऑटो सेक्टर की मांग: फ्यूल सप्लाई पर मिले स्पष्टता दूसरी तरफ, ऑटो कंपनियों का तर्क है कि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां सामान्य पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले महंगी होंगी। ऐसे में ग्राहक इन्हें तभी खरीदेंगे जब उन्हें देशभर में फ्यूल की उपलब्धता का भरोसा मिले। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक फ्यूल सप्लाई पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक इन गाड़ियों की डिमांड पैदा करना मुश्किल है। क्रूड इम्पोर्ट घटाना है सरकार की प्राथमिकता अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल आयात करता है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में तेल आयात बिल पिछले साल के $137 बिलियन से घटकर $123 बिलियन रहा है, लेकिन सरकार इसे और कम करना चाहती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ऊर्जा संकट को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन अपनाने पर जोर दिया है। एथेनॉल उत्पादकों के पास सरप्लस स्टॉक, सरकार से लगाई गुहार देश के एथेनॉल उत्पादक फिलहाल ओवरकैपेसिटी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (Aida) के मुताबिक, उन्होंने करीब 20 अरब लीटर एथेनॉल बनाया है, जबकि सरकार के 20% ब्लेंडिंग टारगेट से केवल 11 अरब लीटर के ऑर्डर मिले हैं। एथेनॉल मेकर्स ने सरकार को पत्र लिखकर फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए इंसेंटिव और ऊंचे ब्लेंडिंग टारगेट की मांग की है। ब्राजील मॉडल से सीख और पायलट प्रोजेक्ट का सुझाव एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को ब्राजील से सीखना चाहिए, जहां 2003 में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां आईं और आज वहां 90% से ज्यादा नई गाड़ियां इसी तकनीक पर चलती हैं। टेरी (TERI) की एसोसिएट डायरेक्टर संयुक्ता सुबुद्धि ने सुझाव दिया है कि एक छोटे लेवल पर 'पायलट प्रोजेक्ट' शुरू करना चाहिए। इससे तेल और ऑटो कंपनियों को जरूरी डेटा मिलेगा और बड़े स्तर पर रोलआउट करना आसान होगा। विदेशी मुद्रा की बचत: मंत्री ने गिनाए फायदे पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, साल 2025 में E20 ब्लेंडिंग की वजह से भारत ने लगभग $19.3 बिलियन (करीब 1.6 लाख करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा बचाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों और ईंधन, दोनों पर खरीदारी की छूट देती है, तो इस डेडलॉक को तोड़ा जा सकता है। टोयोटा, मारुति इथेनॉल वाले वाहन पेश कर चुके टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां पहले ही हाई इथेनॉल ब्लेंड से चलने वाले वाहन पेश कर चुकी हैं। टीवीएस मोटर के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी संकेत दिए हैं कि कंपनी अपाचे सहित अपने कई सेगमेंट में इथेनॉल से चलने वाले वाहन लाने की योजना बना रही है। इन 4 मोर्चों पर चुनौतियों से निपटना होगा SP ग्लोबल के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता का कहना है कि E85 को अपनाने के लिए बड़े इकोसिस्टम की जरूरत होगी। इसमें 4 मुख्य चुनौतियां हैं: माइलेज और कीमत बन सकती है रुकावट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीक से ज्यादा बड़ी चुनौती फ्यूल की कीमत और माइलेज है। इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का माइलेज 20 से 30% तक गिर सकता है। इस कमी की भरपाई के लिए फ्यूल की कीमत कम रखनी होगी ।
टेक कंपनी मोटोरोला ने भारत में अपना सबसे प्रीमियम फोल्डेबल स्मार्टफोन मोटोरोला रेजर फोल्ड लॉन्च किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 8.1-इंच का फोल्डेबल डिस्प्ले और लेटेस्ट स्नैपड्रैगन 8 जेन 5 प्रोसेसर है। फोन 50 मेगापिक्सल के तीन रियर कैमरे के साथ आया है। मोटोरोला ने इस रेजर फोल्ड को दो स्टोरेज वैरिएंट और एक स्पेशल एडिशन के साथ उतारा है। इसकी कीमत ₹1.50 लाख से शुरू होती है। मोटोरोला रेजर फोल्ड: वैरिएंट वाइस प्राइस लॉन्च ऑफर में 10,000 रुपए का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट या एक्सचेंज बोनस मिलेगा। साथ ही 18 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का भी ऑप्शन है। 20 जून तक फोन खरीदने वालों को 1 साल के लिए 'फ्री वन-टाइम स्क्रीन रिप्लेसमेंट' की सुविधा मिलेगी। फोन के प्री-ऑर्डर शुरू हो चुके हैं। डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी: फोल्ड होने पर भी काफी स्लिम मोटोरोला रेजर फोल्ड का डिजाइन काफी प्रीमियम और स्लीक है। ओपन होने पर इसकी मोटाई सिर्फ 4.55mm रह जाती है, जिससे यह पकड़ने में काफी हल्का महसूस होता है। स्पेसिफिकेशंस: डिस्प्ले से लेकर परफॉर्मेंस तक सब 'एक्सट्रीम' 1. डिस्प्ले: दो स्क्रीन और 120Hz रिफ्रेश रेट 2. कैमरा: ट्रिपल 50MP सेटअप 3. परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर 4. पावरबैकअप: 6000mAh की बड़ी बैटरी
नासा के 2028 तक इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजने के मिशन को झटका लग सकता है। अमेरिकी ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एक्जिओम स्पेस’ के नए स्पेस सूट तैयार होने में 2031 तक की देरी हो सकती है। हालांकि, नासा एडमिनिस्ट्रेटर जेरड इसाकमैन ने भरोसा जताया है कि 2028 तक अंतरिक्ष यात्री इन्हीं सूट्स में चांद पर उतरेंगे। जानें स्पेस सूट की खासियतें। - इटली की फैशन कंपनी ‘प्राडा’ भी नासा के नए स्पेस सूट को बनाने के प्रोजेक्ट में जुड़ी है। उसने सूट के फैब्रिक व डिजाइन पर काम किया है। नासा के नए एक्सईएमयू की 7 खास बातें - लिक्विड कूलिंग सिस्टम - सूट के अंदर ‘लिक्विड कूलिंग’ सिस्टम वाला खास अंडरगारमेंट होगा, जो शरीर का तापमान नियंत्रित रखेगा।- स्मार्ट शूज - खास ‘स्मार्ट’ जूते चांद की सतह पर अच्छी ग्रिप देंगे। पिछले मिशन की तरह उछलकर चलने की जरूरत नहीं होगी।- वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम - 8 घंटे का टॉयलेट बैकअप रहेगा। यानी सूट उतारे बिना काम कर सकेंगे। माइनस 2000 तक ठंड में भी सुरक्षित रखेगा। - फैब्रिक - चंद्रमा की धूल कांच के टुकड़ों की तरह नुकीली और चिपकने वाली होती है। सूट का बाहरी फैब्रिक चांद की महीन धूल को कम चिपकने देगा। - रियर एंटी सिस्टम - नए सूट में ‘रियर एंट्री’ सिस्टम होगा। यानी अंतरिक्ष यात्री पीछे की तरफ से सूट में प्रवेश करेंगे। इसे पहनना और उतारना आसान होगा। - विशेष सूट - अपोलो मिशन के समय सूट पुरुषों के हिसाब से ही बने थे। नए सूट को पुरुष और महिला दोनों अंतरिक्ष यात्री पहन सकेंगे। - स्मार्ट हेलमेट - हेलमेट में एचडी कैमरा, लाइट्स और 4जी/एलटीई कम्युनिकेशन सिस्टम होगा, जिससे संपर्क और रिकॉर्डिंग बेहतर होगी। आर्टेमिस-3 मिशन के लिए सूट बनने में देरी क्यों हो रही? नया स्पेस सूट ऐसा बनाना है, जो चंद्रमा की सतह व अंतरिक्ष की भारहीन स्थिति में काम कर सके। 2022 में नासा ने ‘एक्सिओम स्पेस’ और ‘कॉलिन्स एयरोस्पेस’ को यह प्रोजेक्ट दिया था, लेकिन बाद में कॉलिन्स इससे अलग हो गई। अब ‘एक्सिओम स्पेस’ कंपनी पर पूरे प्रोजेक्ट का भार है, जिसकी वजह से टेस्टिंग और डेवलपमेंट में देरी हो रही है। क्या है आर्टेमिस-3 मिशन इसमें अंतरिक्ष यात्रियों को पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। उद्देश्य वहां स्थायी बेस बनाना है।
टाटा मोटर्स ने आज (12 मई) अपनी प्रीमियम हैचबैक अल्ट्रोज के CNG मॉडल को AMT (ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन) गियरबॉक्स के साथ भारत में लॉन्च किया है। इसी के साथ टाटा अल्ट्रोज iCNG भारत में CNG के साथ ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन वाली पहली प्रीमियम हैचबैक बन गई है। टाटा ने इसे 5 वैरिएंट्स- प्योर, प्योर S, क्रिएटिव, क्रिएटिव S और अकम्प्लिश्ड S में पेश किया है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 8.70 लाख रुपए है, जो टॉप मॉडल में ₹10.77 लाख तक जाती है। वैरिएंट के आधार पर AMT मॉडल्स मैनुअल से ₹55,000 से ₹60,000 तक महंगे हैं। मारुति बलेनो और टोयोटा ग्लाजा से मुकाबला अल्ट्रोज का सीधा मुकाबला मारुति बलेनो, टोयोटा ग्लाजा और हुंडई i20 से है। बलेनो और ग्लैंजा में भी CNG का ऑप्शन मिलता है, लेकिन इनमें सिर्फ मैनुअल गियरबॉक्स ही आता है। ऐसे में अल्ट्रोज उन ग्राहकों को अपनी ओर खींचेगी जो लग्जरी के साथ ऑटोमैटिक CNG कार ढूंढ रहे हैं। अल्ट्रोज कई सेगमेंट फर्स्ट फीचर के साथ आती है। एक्सटीरियर: ट्विन पॉड प्रोजेक्टर LED हेडलैंप्स और फ्लश डोर हैंडल्स अल्ट्रोज के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी ने इसके उसी आइकोनिक 'एरो-डायनेमिक' लुक को जारी रखा है इंटीरियर: बैज कलर थीम के साथ 10.25-इंच के दो डिस्प्ले टाटा अल्ट्रोज 2025 में डुअल-टोन डैशबोर्ड और बैज कलर की नई प्रीमियम अपहोल्स्ट्री दी गई है। कैबिन में अब नेक्सन की तरह 'टू-स्पोक इल्लुमिनेटेड स्टीयरिंग व्हील' और टच-बेस्ड AC कंट्रोल पैनल मिलता है। ऑटोमैटिक वैरिएंट में अपडेटेड गियर लिवर और डैशबोर्ड पर ग्लॉस ब्लैक फिनिश के साथ एम्बिएंट लाइटिंग दी गई है। कार में सेगमेंट फर्स्ट 10.25-इंच का फुली डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें मैप्स और कस्टमाइजेशन के विकल्प मिलते हैं। सेंटर में भी 10.25-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मौजूद है। इसके अलावा वॉइस कमांड सनरूफ, ऑटो AC, क्रूज कंट्रोल, एयर प्यूरीफायर, 8-स्पीकर साउंड सिस्टम और कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। परफॉर्मेंस: पेट्रोल इंजन के साथ CNG का भी ऑप्शन मिलेगा अपडेटेड मॉडल में मैकेनिकली कोई बदलाव नहीं किया गया है। टाटा अल्ट्रोज इस सेगमेंट की पहले की तरह एकमात्र हैचबैक है, जो 3 इंजन ऑप्शन- पेट्रोल, टर्बो पेट्रोल और डीजल ऑफर करती है। इसके अलावा, पेट्रोल इंजन के साथ CNG का ऑप्शन भी मिलता है। 1.2-लीटर का नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 88hp की पावर और 113Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन और 6-स्पीड DCA (ऑटोमैटिक) का ऑप्शन मिलता है। यह इंजन रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए अच्छा है, लेकिन टर्बो की तुलना में कम पावरफुल है। इसके साथ कार 19.05-19.33 kmpl का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। DCA गियरबॉक्स, आमतौर पर प्रीमियम कारों में देखा जाता है, इस सेगमेंट में AMT या CVT की तुलना में ज्यादा रिफाइंड एक्सपीरियंस ऑफर करता है। 1.2-लीटर का नेचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन CNG में 73.5hp की पावर और 103Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए इसमें 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ अब ऑटोमेटिक गियरबॉक्स भी मिलेगा। इसके साथ कार 26.2 km/kg का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। CNG वैरिएंट किफायती रनिंग कॉस्ट के लिए है, लेकिन पावर थोड़ी कम हो जाती है। अल्ट्रोज में 1.2-लीटर का टर्बो-पेट्रोल इंजन का ऑप्शन भी मिलता है, जिसमें 110hp की पावर और 170Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए इसमें सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलती है। इसके साथ कार 18.5kmpl का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। यह स्पोर्टी ड्राइविंग के लिए बेहतर है, खासकर हाईवे पर अच्छी पावर देता है। अल्ट्रोज में चौथा और आखिरी पावरट्रेन ऑप्शन 1.5-लीटर के डीजल इंजन का मिलता है, जो 90hp की पावर और 200Nm का टॉर्क जनरेट करता है। गियरबॉक्स के लिए इसमें सिर्फ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलती है। इसके साथ कार 23.64 - 25.11kmpl का माइलेज (ARAI सर्टिफाइड) देती है। डीजल इंजन कम rpm पर हाई टॉर्क देता है, जो लंबी दूरी की ड्राइविंग और माइलेज के लिए अच्छा ऑप्शन है। सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग्स के साथ 360-डिग्री कैमरा टाटा अल्ट्रोज भारत की सबसे सुरक्षित हैचबैक है, जिसे ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार रेटिंग मिली है। यह इस सेगमेंट में एकमात्र हैचबैक है जो इस रेटिंग को हासिल करने में सफल रही है। इसकी मजबूत बिल्ड क्वालिटी और सेफ्टी फीचर्स इसे अलग बनाते हैं। सेफ्टी फीचर्स में शामिल हैं: CNG वेरिएंट में टैंक की सुरक्षा के लिए एडिशनल फीचर्स भी मिलते हैं, जो इस सेगमेंट में रेयर है। ड्यूल क्लच ऑटोमेटिक (DCA) गियरबॉक्स में भी सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं, जैसे कि ड्राइव मोड में गलती से डोर खोलने पर गाड़ी का आगे न बढ़ना, जो नए ड्राइवर्स के लिए खास तौर पर उपयोगी है।
होंडा ने अपनी ई-क्लच टेक्नोलॉजी के साथ नई NX500 को भारत में लॉन्च कर दिया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹7.44 लाख है। इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब राइडर को गियर बदलते समय क्लच लीवर का इस्तेमाल नहीं करना होगा। क्लच का मैनुअल कंट्रोल भी अपने ले सकते हैं होंडा की ई-क्लच तकनीक में इलेक्ट्रॉनिक एक्चुएटर्स का इस्तेमाल किया गया है। यह गियर शिफ्ट करते समय या बाइक को रोकते और शुरू करते समय क्लच को अपने आप ऑपरेट करता है। खास बात यह है कि राइडर जब चाहे क्लच का मैनुअल कंट्रोल अपने हाथ में ले सकता है। बाइक में क्लच लीवर और गियर पैडल दोनों दिए गए हैं। ई-क्लच मैकेनिज्म काफी कॉम्पैक्ट है, जिससे बाइक का वजन केवल 3 किलो बढ़ा है और अब इसका कुल वजन 199 किलो हो गया है। पुराने मॉडल के मुकाबले ₹1.11 लाख महंगी कीमत के मामले में नई NX500 पहले के मुकाबले काफी महंगी हो गई है। ई-क्लच वेरिएंट की कीमत पुराने मॉडल (कन्वेंशनल क्लच) से ₹1.11 लाख ज्यादा है। मार्केट में इसका सीधा मुकाबला BMW F 450 GS ट्रॉफी (कीमत ₹5.30 लाख) और कावासाकी वर्सिस 650 (कीमत ₹8.63 लाख) से होगा। होंडा की यह बाइक अपनी मजबूती और कम मेंटेनेंस खर्च के लिए जानी जाती है। इंजन और परफॉर्मेंस में कोई बदलाव नहीं ई-क्लच के अलावा बाइक के बाकी मैकेनिकल फीचर्स पहले जैसे ही हैं। इसमें वही पुराना 471cc का ट्विन-सिलेंडर, लिक्विड-कूल्ड इंजन दिया गया है। इंजन 8,500 rpm पर 47hp की पावर जनरेट करता है। बाइक में 6-स्पीड गियरबॉक्स दिया गया है। सस्पेंशन के लिए फ्रंट में USD फोर्क और रियर में मोनोशॉक दिए गए हैं। ब्रेकिंग के लिए फ्रंट में 296mm के दो डिस्क ब्रेक और रियर में 240mm का सिंगल डिस्क ब्रेक मिलता है। सुरक्षा के लिए इसमें डुअल चैनल ABS दिया गया है। बुकिंग शुरू, दो रंगों में उपलब्ध NX500 ई-क्लच को दो रंगों - व्हाइट और ब्लैक में पेश किया गया है। सभी ऑथोराइज्ड होंडा बिगविंग डीलरशिप पर इसकी बुकिंग शुरू हो गई है। बाइक में 5-इंच की TFT स्क्रीन और स्विचेबल ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स मिलते हैं। हालांकि, इसमें राइडिंग मोड नहीं दिए गए हैं। नॉलेज पार्ट ई-क्लच: यह एक ऐसी तकनीक है जो क्लच के काम को ऑटोमेट कर देती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो ट्रैफिक में बार-बार क्लच दबाने से परेशान होते हैं।
स्कोडा ऑटो इंडिया ने प्रीमियम फुल साइज SUV स्कोडा कोडिएक का 2026 मॉडल भारत में लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने अपडेटेड मॉडल में सबसे बड़ा बदलाव सेफ्टी को लेकर किया है, जिसमें अब लेवल-2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) फीचर शामिल किया गया है। कंपनी का दावा है कि कार 14.86kmpl का माइलेज देती है। अपडेटेड मॉडल की एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत 36.99 लाख रुपए रखी गई है। खास बात यह है कि इसके बेस वैरिएंट 'लाउंज' की कीमत 3 लाख रुपए घटाई गई है। हालांकि, अन्य वैरिएंट्स नए फीचर्स जुड़ने से महंगे हुए हैं। कार में मैकेनिकली कोई बदलाव नहीं है। यह पहले की तरह टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ 3 वैरिएंट्स और 5 कलर ऑप्शंस में मिलेगी। भारत में इसका मुकाबला फॉक्सवैगन टिगुआन आर-लाइन, टोयोटा फॉर्च्यूनर, MG ग्लोस्टर, जीप मेरिडियन, हुंडई टूसॉन और निसान एक्स-ट्रेल से रहेगा। एक्सटीरियर और इंटीरियर: इल्यूमिनेटेड ग्रिल और लग्जरी कैबिन लुक की बात करें तो 2026 मॉडल का डिजाइन पहले जैसा ही रखा गया है। हालांकि, अब 'स्पोर्टलाइन' वैरिएंट में भी इल्यूमिनेटेड फ्रंट ग्रिल मिलेगी, जो पहले सिर्फ टॉप मॉडल LK में आती थी। कार 5 और 7-सीटर कॉन्फिगरेशन के साथ 5 कलर ऑप्शंस में अवेलेबल है। इंटीरियर: 12.9-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम केबिन में नया लेयर्ड डैशबार्ड और 12.9-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो और एपल कारप्ले सपोर्ट करता है। इसमें फिजिकल कंट्रोल्स भी हैं, जिनसे क्लाइमेट कंट्रोल और इंफोटेनमेंट कई काम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ड्राइवर के लिए 10.25-इंच का डिजिटल क्लस्टर मौजूद है। गियर सिलेक्टर स्टीयरिंग कॉलम में है और सेंटर कंसोल के नीचे कई स्टोरेज स्पेस दिए गए हैं। इसमें दो केबिन कलर थीम: स्पोर्टलाइन के साथ ब्लैक और सिलेक्शन LK के साथ ब्लैक/टेन दी गई है। कंफर्ट के लिए कार में वेंटिलेटेड और मसाज फंक्शन वाली 12-वे पावर्ड फ्रंट सीटें, थ्री-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, दो वायरलेस फोन चार्जर, मल्टी-कलर एम्बिएंट लाइटिंग, पैनोरमिक सनरूफ और 13-स्पीकर वाला कैंटन साउंड सिस्टम मिलता है। परफॉरमेंस: 2-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन और 14.86kmpl माइलेज इंजन की बात करें तो इसमें कोई बदलाव नहीं है। कार में पहले वाला ही 2-लीटर टर्बो पेट्रोल TSI इंजन मिलता है। सेफ्टी: अब लेवल-2 ADAS के साथ 9 एयरबैग्स स्कोडा ने 2026 कोडिएक में सेफ्टी को अगले लेवल पर पहुंचा दिया है। अब इसके स्पोर्टलाइन और LK वैरिएंट में लेवल-2 ADAS फीचर्स मिलेंगे।
बढ़ती उम्र में नई टेक्नोलॉजी सीखना बुजुर्गों की मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद है। बशर्ते इसमें स्क्रीन टाइम का ध्यान रखने के साथ इसका उपयोग पूरी जागरूकता से किया जाए। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास का एक शोध कहता है कि डिजिटल स्किल सीखने से सीनियर सिटीजन की याददाश्त 30 फीसदी तक बढ़ सकती है। मस्तिष्क की सीखने की क्षमता बढ़ाती है नई टेक्नोलॉजी टेक्सास यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि जब आप नई तकनीक सीखते हैं तो याददाश्त मजबूत होती है। रिसर्च में पाया गया कि जो बुजुर्ग नई एप्स खुद सीखते, वीडियो ट्यूटोरियल देखकर प्रैक्टिस करते, या ग्रुप क्लासेज जॉइन करते हैं, उनकी मेंटल हेल्थ पर सकारात्मक असर दिखा। मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है। एआई ट्यूटर्स का इस्तेमाल करें, आत्मविश्वास बढ़ेगा जब आप एआई ट्यूटर्स से नई भाषा, संगीत अथवा स्किल सीखते हैं तो दिमाग व्यस्त और सक्रिय रहता है। नया सीखने और समस्या सुलझाने की इस प्रक्रिया में मस्तिष्क में 'डोपामाइन' रिलीज होता है, जिससे आपके जीवन में खुशी का स्तर और आत्मविश्वास बढ़ता है। टेक्नोलॉजी पर्सनल ब्रेन कोच की तरह काम करती है एआई आधारित एप्स बुजुर्गों की मानसिक क्षमता का आकलन करते हैं। और फिर उनकी याददाश्त के स्तर के हिसाब से पहेलियां और चुनौतियां डिजाइन करके उनके समक्ष पेश करते हैं। इससे निरंतर सीखने की प्रक्रिया (न्यूरोप्लास्टिसिटी) को बढ़ावा मिलता है। इससे अल्जाइमर जैसे रोगों का खतरा कम होता है। गैजेट्स, हेल्थ डिवाइस बीमारी का समय पर संकेत देते हैं टेक्नोलॉजी उपयोगी साबित हो रही है, क्योंकि कई स्मार्टवॉच और हेल्थ डिवाइस का डेटा सीधे एआई आधारित एल्गोरिदम तक पहुंचता है। यह दिल की धड़कन, सांसों की गति या नींद के पैटर्न में आए मामूली बदलावों को भी पहचान लेता है, जो बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ऐसे मजबूत करता है मेमोरी अकेलेपन में कमी आती है शोध में पाया कि ऑनलाइन ग्रुप, वीडियो कॉल, मेल या व्हाट्सएप पर रिश्तेदार‑दोस्तों से जुड़े रहने वाले बुजुर्गों में अकेलापन और तनाव कम होता, क्योंकि टेक्नोलॉजी की मदद से उन में रिश्तों का डिजिटल ब्रिज बन जाता है। चीजें सीखने को प्रेरित होते हैं जब बुजुर्ग नई तकनीक जैसे-ऑनलाइन बैंकिंग, यूट्यूब पर वीडियो आदि खुद बनाते हैं तो उनके मस्तिष्क के न्यूरल नेटवर्क एक्टिवेट रहते हैं, जिससे डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा घटता है। सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है यूरोप-अमेरिका में 60-80 वर्ष तक के लोगों पर हुई रिसर्च में पाया गया कि जो बुजुर्ग स्मार्टफोन, इंटरनेट आदि खुद चलाते हैं उनमें समस्याएं हल करने और सोचने-समझने की क्षमता दूसरों से बेहतर होती है। (एक्सपर्ट पैनल: ∙ डॉ. मंजरी त्रिपाठी, एचओडी, न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट, एम्स नई दिल्ली ∙ डॉ. अर्चना वर्मा, सीनियर न्यूरो फिजिशियन ∙ डॉ. राहुल माथुर, साइकेट्रिस्ट, एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर)

