मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त बाधाएं होती हैं खत्म
भास्कर न्यूज | जालंधर इस समय मां दुर्गा के पवित्र नवरात्रि चल रहे है। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने का विधान है। 13 अक्टूबर को मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप परम शांितदायक और कल्याणकारी है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा और भक्ति करने से आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के तीसरे दिन जो भी श्रद्धालु माता के तीसरे रूप मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना करता है, उसे माता की कृपा प्राप्त होती है। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर के पं. गौतम भार्गव ने बताया कि नवरात्रि में तीसरे दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा का महत्व है। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप व बाधाएं खत्म हो जाती हैं। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक पराक्रमी व निर्भय हो जाता है। मां चंद्रघंटा की उपासना से मनुष्य समस्त सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाता है। तृतीया के दिन भगवती की पूजा में दूध की प्रधानता होनी चाहिए और पूजन के उपरांत वह दूध ब्राह्मण को देना उचित माना जाता है। इस दिन सिंदूर लगाने का भी रिवाज है। नवरात्रि के तीसरे दिन सर्वप्रथम जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें। फिर मां चंद्रघंटा का ध्यान करें और उनके समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। माता रानी को अक्षत, सिंदूर, पुष्प आदि वस्तुएं अर्पित करें। उपरांत मां को प्रसाद के रूप में फल और केसर-दूध से बनी मिठाइयों या खीर का भोग लगाएं। फिर मां चंद्रघंटा की आरती करें। पूजा के पश्चात किसी भी गलती के लिए क्षमा याचना करें। मां चंद्रघंटा की पूजा के समय सफेद, भूरा या स्वर्ण रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके साथ भक्त इस दिन दूध से बने मिष्ठान का भोग लगा सकते हैं। मान्यता है कि माता को शहद भी प्रिय है।
जम्मू कश्मीर में पंजाबी भाषा के लिए सीकेडी आगे आया
अमृतसर | चीफ खालसा दीवान ने जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने और स्कूलों में इसकी पढ़ाई दोबारा शुरू करवाने के लिए संघर्ष कर रहे जम्मू पंजाबी मोर्चा को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है। सीकेडी के प्रधान डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से अपील की है कि वे पंजाबी भाषा को उसका आधिकारिक दर्जा देने के लिए ठोस कदम उठाएं।
200 केवी ट्रांसफार्मर से 20 दिनों में दूसरी बार तेल चोरी
अमृतसर | श्री दुर्ग्याणा टेंपल सबडिवीजन के अंतर्गत कटड़ा शेर सिंह फीडर पर स्थित 200 केवी बिजली ट्रांसफार्मर का तेल चोरी होने के कारण ट्रांसफार्मर जल गया। जेई बख्शीश सिंह ने बताया कि पिछले 20 दिनों में इस ट्रांसफार्मर का दो बार तेल चोरी हो चुका है। तेल चोरी होने से ट्रांसफार्मर जलने के कारण विभाग को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। मामले की लिखित शिकायत पुलिस को दे दी गई है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पावरकॉम अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर से तेल चोरों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है।
अनिल ने राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता में जीता गोल्ड
अमृतसर | पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर 3 खासा की छात्रा अक्विला अनिल ने केंद्रीय विद्यालय संगठन की 55वीं राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। अक्विला ने अंडर-17 बालिका क्रिकेट वर्ग में यह पदक हासिल किया है। प्रतियोगिता का आयोजन केंद्रीय विद्यालय नंबर 1 दिल्ली में किया गया। इसमें अक्विला अनिल ने अपनी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए फाइनल मुकाबले में मुंबई रीजन की टीम को हराया। मैच में अक्विला ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 63 गेंदों में 72 रन बनाए और गेंदबाजी में एक विकेट भी हासिल किया। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर टीम ने जीत दर्ज की। छात्रा की इस सफलता पर स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षकों और स्टाफ ने खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
बिजली मंत्री के आश्वासन के बाद 14 का धरना टाला
अमृतसर | विजिलेंस द्वारा एक्सईएन मनदीप सिंह बमराह और एडिशनल एसडीओ दीपइंदर सिंह पर दर्ज मामले के विरोध में ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध से मुलाकात की। कमेटी ने 14 अक्टूबर को भंडारी पुल पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। बिजली मंत्री ने सीएमडी से बात कर आश्वासन दिया कि वे विजिलेंस को पत्र लिखकर बेकसूर अधिकारियों पर दर्ज मामला रद्द करवाएंगे। इसके बाद कमेटी ने 14 का प्रदर्शन फिलहाल स्थगित कर दिया है। हालांकि, रिहाई न होने पर नई तारीख का ऐलान करने की चेतावनी दी है।
नीशू कुमारी ने जिम्नास्टिक्स में जीता रजत पदक
अमृतसर | गुरदासपुर में आयोजित पंजाब राज्य अंतर-जिला स्कूल खेलों के तहत अंडर-17 वर्ग में आर्य गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल लोहगढ़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है। स्कूल की प्रतिभाशाली जिम्नास्ट नीशू कुमारी ने प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। नीशू को खेड्डां वतन पंजाब दीयां के अंतर्गत राज्य स्तर पर खेलने के लिए चुना गया है। इसके अलावा डीएवी स्पोर्ट्स द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में भी उन्हें बेस्ट जिम्नास्ट चुना गया। प्रिंसिपल मंजू, शिक्षिका रूपाली, खेल कोच रमेश कुमार और पूजा कपूर ने नीशू को बधाई दी।
पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा इलेक्शन से पहले चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेसिव रिवीजन के बाद फाइनल वोटर सूची जारी कर दी है। आयोग की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के मुकाबले फाइनल लिस्ट में साढ़े 13 लाख से ज्यादा वोटर कम हो गए हैं। आयोग ने अपनी वेबसाइट पर यह फाइनल लिस्ट अपडेट की है। सवाल-जवाब में जानिए, कैसे चेक करें, आपकी वोट बची या कट गई… सवाल: वोटर लिस्ट में मेरा नाम है या नहीं, कैसे चेक करूं? जवाब: इसके 4 स्टैप हैं (नोट: ये वोटर लिस्ट www.voters.eci.gov.in से भी डाउनलोड की जा सकती है।) सवाल: पार्ट नंबर या नाम पता नहीं तो फिर अपने इलाके की वोटर सूची कैसे ढूंढें? जवाब: www.ceopunjab.gov.in पर जाएं। यहां आपको नीचे Search Your Vote की ऑप्शन मिलेगी। इस पर क्लिक करेंगे तो नई विंडो खुलेगी। अब अपने वोटर कार्ड में EPIC नंबर देखें। उसे यहां भर दें, फिर स्टेट सिलेक्ट करें और कैप्चा भरकर सर्च करेंगे तो नीचे आपका पार्ट नाम व नंबर आ जाएगा। उसे नोट कर पिछले सवाल में दिया स्टैप इस्तेमाल करें और अपना नाम चैक करें। सवाल: अगर मेरा वोट कट गया तो मुझे कैसे पता चलेगा?जवाब: इसके लिए भी आपको पहले सवाल में दिए प्रोसेस को इस्तेमाल करते हुए वोटर लिस्ट डाउनलोड करनी होगी। अगर आपका नाम कटा है तो भी उस लिस्ट में दिख जाएगा लेकिन उसके ऊपर DELETED लिखा होगा। सवाल: ऑनलाइन चेक करने पर मेरा नाम नहीं आ रहा, अब कैसे चेक करूं? जवाब: इसके 2 तरीके हैं… सवाल: अगर आपका वोट कट गया तो क्या दोबारा बन सकता है?जवाब: हां, पंजाब की मुख्य चुनाव अफसर अनिंदिता मित्रा का कहना है कि ऐसा व्यक्ति ऑनलाइन, BLO या ERO को फॉर्म नंबर 6 भरकर दे सकता है। सवाल: क्या 2027 के चुनाव में इसी फाइनल वोटर लिस्ट के आधार पर वोटिंग होगी?जवाब: मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा का कहना है कि लोग नई वोट बनवा सकते हैं। वह वोटर भी चुनाव में वोट डाल सकेंगे।
गोरखपुर की रहने वाली नीतू सिंह इको फ्रेंडली प्रोडक्ट को प्रमोट करती हैं। उन्होंने एनवी रक्षा (Enviraksha) नाम का खुद का ब्रांड शुरू किया है। जिसके माध्यम से वे बांस के टूथब्रस, बॉटल, नीम की लकड़ी का कंघा, पेपर सीड की पेंसिल और रद्दी पेपर से तमाम तरह की घरेलू प्रोडक्ट्स तैयार करती हैं। नीतू का कहना है कि घर में रोज इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की चीजों को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता है लेकिन कुछ चीजों से रिप्लेस जरुर कर सकते हैं। इसीलिए हमने ये कोशिश शुरू की है और भाई के साथ मिलकर एक स्टार्टअप शुरू किया। उन्होंने बताया कि 90 दिनों के अंदर 1 लाख लोगों तक बैंबू टूथब्रश पहुंचाना उनका लक्ष्य है। अब तक उन्होंने 50 हजार लोगों तक पहुंचाई है और यह अभियान अभी भी जारी है। इसमें शहरवासियों ने उन्हें बहुत सपोर्ट किया। बेटी को प्रकृति से जोड़ना चाहती नीतू राजेंद्र नगर की रहने वाली 29 साल का कहना है कि नीतू का कहना है कि उनकी बड़ी बहन की 12 साल की एक बेटी अधीरा है, जो शुरू से ही उनके पास ही रह गई। नीतू अभी अविवाहित हैं लेकिन अधीरा को मां की ममता देते हुए उन्होंने ही बड़ा किया है। इसलिए उसकी भविष्य की चिंता भी सबसे ज्यादा उनको होती है। उन्होंने बेटी को ऐसा शिक्षा देना चाहा, जिससे कि वह प्रकृति से जुड़ी रहे और उसे बचाने का प्रयास भी करें। साथ ही ऐसी चीजों का इस्तेमाल न करें, जो आगे चलकर कहीं न कहीं उसके लिए परेशानी का कारण बने। यही सोचते हुए उन्होंने सबसे पहले रेगुलर इस्तेमाल होने वाली चीजों को आर्गेनिक चीजों से रिप्लेस करने का मन बनाया। जिसमें सबसे पहले दिन की शुरुआत करने वाली चीज ब्रश पर ध्यान गया। इसलिए हमने बांस और नीम की लकड़ी का टूथब्रश बनाया। उसके बाद नीम की कंघी, बांस की बॉटल, टंग क्लीनर पेन और अन्य चीजें तैयार किया। बच्चे समझ सकेंगे पेड़ों का महत्व नीतू ने बताया कि उसके बाद बच्चों के इस्तेमाल का पेपर सीड से पेंसिल भी बनाया। ताकि बचपन से ही वे नेचर से जुड़ सकें। जब वे देखेंगे कि एक पौधे को उगने और उसे पेड़ बनने में कितना समय लगता है तब वे कहीं जाकर प्रकृति के लिए पेड़ क्यों इतने जरुरी हैं समझ पाएंगे। काफी रिसर्च के बाद बांस को चुना नीतू ने बताया कि आर्गेनिक प्रोडक्ट्स बनाने के लिए उन्होंने बकायदा रिसर्च किया। ऑनलाइन माध्यम से कई क्लासेज लिए। कई साईट पर चेक किया। हर तरफ से जरुरी जानकारी जुटाई। जिससे पता चला कि बांस की लकड़ी से प्रोडक्ट बनाना सबसे फायदेमंद होगा। इसकी कटाई से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचेगा। वहीं नीम कई बीमारियों को दूर करता है इसलिए उसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी अच्छा रहेगा। रिसर्च के बाद उन्होंने सभी जरुरी मशीन और सामान जुटाएं और भाई नीरज की मदद से घर से ही स्टार्टअप शुरू किया। यूपी ट्रेड शो में फर्स्ट प्राइज मिलीनीतू ने बताया कि पिछले साल उन्होंने यूपी ट्रेड शो में अपना स्टॉल लगाया था जहां बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला। ईको फ्रेंडली प्रोडक्ट बनाने के लिए उन्हें फर्स्ट प्राइज भी मिली थी। ऑनलाइन सेल करती प्रोडक्ट्स नीतू और उनके भाई मिलकर यह बिजनेस चलाते हैं, जिसमें अधीरा भी पूरा सहयोग करती है। वे अपनी प्रोडक्ट इंस्टाग्राम के माध्यम से ऑनलाइन सेल करते हैं। साथ ही एग्जीबिशन में भी स्टॉल लगा कर प्रमोट करते हैं। 50 हजार से ज्यादा प्रोडक्ट सेल हुए उन्होंने बताया कि अबतक 50 हजार से ज्यादा प्रोडट्स सेल हो चुके हैं। जिसमें हमारे अभियान की वजह से सबसे ज्यादा टूथब्रश ही बिके हैं। नीतू के इस काम की शहर के कई अधिकारी और वरिष्ठ लोग तारीफ भी कर चुके हैं।
गुरुग्राम में सिविल अस्पताल के निर्माण को लेकर भाजपा के भीतर चल रही आपसी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। हरियाणा की स्वास्थ्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव ने बिना नाम लिए एक कैबिनेट मंत्री निशाना साधा है। उनके इस बयान के बाद सियासत गरमा गई है। आरती राव ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा गुरुग्राम के मौजूदा विधायक के सामने खुले तौर पर यह बोला जा चुका है कि मैं इस अस्पताल को बनने नहीं दूंगा। उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य और हितों से जुड़ी इतनी बड़ी परियोजना पर निम्न स्तर की राजनीति की जा रही है। आरती राव ने कहा कि सरकार की ओर से इस परियोजना के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से 70 करोड़ रुपये की राशि लेकर पहले ही हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) को ट्रांसफर की जा चुकी है। बजट और प्रशासनिक मंजूरी होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक द्वेष के चलते काम को आगे बढ़ने से रोका जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें इस जनहित परियोजना में अड़चनें पैदा कर रही हैं और इसका राजनीतिकरण करने का प्रयास कर रही हैं। बोलीं- राजनीति करना पूरी तरह गलत मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील और जनहित से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करना पूरी तरह गलत है। उनका मुख्य उद्देश्य शहर के गरीब और मध्यमवर्गीय नागरिकों को जल्द से जल्द किफायती एवं आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने यह भी साफ किया कि नया अस्पताल अपनी पुरानी जगह सिविल लाइन्स पर ही बनेगा। मुख्यमंत्री से मिलने की कही बात आरती राव ने खुले मंच से ये भी कि वह इस पूरे मामले को लेकर बहुत जल्द व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात करेंगी और अस्पताल का निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू कराने की मांग करेंगी। मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पताल निर्माण की जिम्मेदारी को लेकर उन्हें अब तक कोई भी आधिकारिक या रिटन में कुछ नहीं मिला है। वह यह पता लगाएंगी कि आखिर किसने मुख्यमंत्री को गुमराह कर हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम के माध्यम से काम करवाने पर रोक लगवाई है, ताकि जनता के हित का यह प्रोजेक्ट जल्द पूरा हो सके। सिविल लाइन में अस्पताल चाहते हैं मंत्री केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह सिविल लाइन में ही पुरानी जगह पर जिला अस्पताल बनाने पर अड़े हुए हैं। यहां नई आलीशान और आधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल की इमारत का निर्माण अधर में लटका हुआ है। रोजाना हजारों की संख्या में गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं। अब जब यह मामला पूरी तरह राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है, तो शहर के बुद्धिजीवियों और आम जनता का कहना है कि नेताओं की आपसी लड़ाई का खामियाजा सिर्फ और सिर्फ आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। जनता भुगत रही सियासत का खामियाजा गुरुग्राम में लंबे समय से जिला अस्पताल की दरकार है। फिलहाल सेक्टर-10 में अस्पताल चल रहा है। जहां वर्किंग डे में तीन हजार से ज्यादा की ओपीडी होती हैं। सिविल लाइन स्थित पुरानी इमारत को असुरक्षित घोषित करने के बाद गिराया जा चुका है। विधायक बोले- नो कमेंट्स इस बारे में गुरुग्राम के विधायक मुकेश शर्मा पहलवान ने बताया कि वे इस मामले पर कोई कमेंट्स नहीं करना चाहते। हालांकि उन्होंने ये कहा कि गुरुग्राम के सिविल अस्पताल का निर्माण अब पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा कराए जाने पर सहमति बनी है और उम्मीद है कि जल्द ही टेंडर लग जाएगा। निर्माण एजेंसियों का बार-बार बदलना सिविल अस्पताल के निर्माण कार्य को शुरू कराने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई बार एजेंसियां बदली जा चुकी हैं, जिससे काम में लगातार देरी हो रही है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग: सबसे पहले यह काम सीपीडब्ल्यूडी को दिया गया था, लेकिन उनकी डिजाइनिंग और काम की गति बहुत धीमी थी। लोक निर्माण विभाग: देरी के चलते काम पीडब्ल्यूडी को सौंपा गया, लेकिन उनके पास पहले से ही पटौदी और सोहना जैसे क्षेत्रों के कई अन्य प्रोजेक्ट होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया। एचएसआईआईडीसी: काम में तेजी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री से बात करके इसे एचएसआईआईडीसी को सौंप दिया और इसके लिए लगभग ₹70 करोड़ की राशि भी जारी कर दी गई। यह विभाग उद्योग मंत्री राव नरबीर के पास है। फेक्ट्स… -1054 करोड़ रुपये की परियोजना -एचएसआईआईडीसी को 70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके। -2021 में कंडम बिल्डिंग गिराई गई थी। -5 लाख आबादी को सीधा फायदा।
रविवार को सीहोर में आदिवासियों के 12 घर गिराए गए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे जुल्म की पराकाष्ठा बताया और प्रभावित परिवारों के साथ धरना स्थल पर बैठ गए। उसी दिन रायसेन के भोजपुर में उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना अब कोई सरकार बंद नहीं कर पाएगी। इसके ठीक बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि, ‘मोहन-मामा’ की आपसी खींचतान में आदिवासी परिवार उजड़ रहे हैं। शिवराज के मना करने के बाद भी बुलडोजर क्यों चला, अपनी ही पार्टी की सरकार में उन्हें धरने पर क्यों बैठना पड़ा, और क्या शिवराज और मोहन यादव के बीच खींचतान है? डिकोड करेंगे मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल 1: शिवराज पहले मना कर चुके थे, फिर भी बुलडोजर कैसे चल गया? जवाब: क्योंकि शिवराज के विरोध के बावजूद कार्रवाई रोकने का कोई लिखित आदेश सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, वन विकास निगम का कहना है कि बेदखली की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। सवाल 2: क्या पहली बार है जब शिवराज ने अपनी ही सरकार के सामने सवाल उठाए हों? जवाब: नहीं, यह पहली बार नहीं है। मोहन सरकार के कार्यकाल में कम से कम 3 बड़े मौकों पर शिवराज का रुख सरकार के फैसलों या बयानों से अलग दिखा। 1. खिवनी, जून 2025 2. मूंग खरीदी, जुलाई 2026 3. लाड़ली बहना, अक्टूबर 2026 सवाल 3: क्या शिवराज सच में नाराज हैं, या इसके पीछे कोई राजनीतिक रणनीति है? जवाब: शिवराज इसे गरीब आदिवासियों के साथ हुआ अन्याय बताते हैं। उनका कहना है कि ये परिवार भाजपा के वोटर हैं और कुछ अफसर पार्टी को बदनाम करना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसमें सधी हुई रणनीति के संकेत देखते हैं… 1. ऐसे मुद्दे, जिन पर विरोध करना मुश्किल हो 2. तरीका नया नहीं है 3. निशाने पर अफसर, मुख्यमंत्री नहीं सवाल 4: तो क्या शिवराज और मोहन यादव के बीच सब ठीक नहीं है? जवाब: सार्वजनिक तौर पर दोनों नेता एक-दूसरे के खिलाफ कुछ नहीं कहते, लेकिन कई मुद्दों पर दोनों का रुख अलग दिखा है। सार्वजनिक मंच पर सम्मान सीएम ने जांच की बात की, पर कार्रवाई को गलत नहीं ठहराया अंदरखाने खिंचाव की चर्चा विपक्ष ने बनाया 'मोहन-मामा' का मुद्दा आगे क्या होगा? मामले की अब दो जगह जांच होगी। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें OBC आरक्षण फैसला, 13% होल्ड पदों का क्या होगा- सामान्य वर्ग को नौकरी मिलेगी? 7 साल, 15 दिन की सुनवाई, 30 घंटे की बहस और 159 पेज का फैसला…हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने 9 अक्टूबर को तय कर दिया कि मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 27% नहीं, 14% ही रहेगा। आखिर विवाद शुरू कहां से हुआ, कोर्ट ने संशोधन को असंवैधानिक क्यों माना, 13% होल्ड पदों का अब क्या होगा, असर किन-किन भर्तियों पर पड़ेगा…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।
हरियाणा में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। सोमवार, 12 अक्टूबर को सुबह जींद, सोनीपत, गुरुग्राम व रेवाड़ी के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिला। भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश में 15 अक्टूबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग की मानें तो आज 13 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र और कैथल में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 14 और 15 अक्टूबर को प्रदेश के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुरुक्षेत्र व कैथल में चलेंगी तेज हवाएं मौसम विभाग के अनुसार 13 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र और कैथल में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। 12 अक्टूबर को भी कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना जताई गई थी। 14 और 15 अक्टूबर को बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं और प्रदेश में कई जगह बूंदाबांदी से लेकर मध्यम बारिश हो सकती है। अधिकतम तापमान में 1.5 डिग्री की बढ़ोतरी मौसम विभाग की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में औसत अधिकतम तापमान पिछले दिन की तुलना में 1.5 डिग्री बढ़ा। इसके बावजूद तापमान सामान्य से औसतन 2.9 डिग्री कम रहा। महेंद्रगढ़ में सबसे अधिक 33.3 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। बारिश की संभावना और बादलों की आवाजाही के बीच तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। 14-15 को बढ़ सकती है बारिश मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 14 और 15 अक्टूबर को प्रदेश में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। इससे दिन के तापमान में और बदलाव आ सकता है। खुले में जाने से बचें मौसम में बदलाव को देखते हुए किसानों और आमजन को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। तेज हवाओं और गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। मौसम विभाग की ओर से जारी होने वाले ताजा पूर्वानुमान और चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी है।
अमृतसर के गोल्डन टेंपल में रात के समय व्लॉग बनाने पहुंचे व्लॉगर के साथ पहरेदारों ने बदसलूकी की। व्लॉगर युवक का आरोप है कि पहरेदारों ने उसका कैमरा छीना, उसके साथ धक्कामुक्की की और हाथ मरोड़े। उसके कैमरे से वीडियो डिलीट कर दिए, जिन्हें उसने मेहनत और पैसे खर्च बनाया था। इतना ही नहीं, व्लॉगर युवक ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर वीडियो शेयर कर यह भी आरोप लगाया है कि पहरेदार उसे एक कमरे में ले गए, जहां सभी निहंगों ने उसे जबरन अपने पैरों में गिरवाया। सभी ने उसे पैर छूने को मजबूर किया। व्लॉगर ने वीडियो में इस घटना को गोल्डन टेंपल में अपना सबसे बुरा अनुभव बताया। अंत में उसने अमृतसर आने वाले टूरिस्टों को चेताया कि गोल्डन टेंपल बहुत खूबसूरत है, लेकिन यहां के पहरेदार बहुत खराब हैं। वहीं, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (SGPC) का कहना है कि गोल्डन टेंपल में वीडियोग्राफी की मनाही है। अगर कोई ऐसा करते हुए पाया जाता है तो पहरेदार उसे रोकते हैं, लेकिन मारपीट नहीं करते। जानिए, वीडियो में व्लॉगर ने क्या-क्या कहा गोल्डन टेंपल में श्रद्धालुओं के साथ ये घटनाएं हो चुकीं ---------- यह खबर भी पढ़ें… पंजाब पुलिस ने योगा गर्ल को भेजा नोटिस: मकवाना बोली- SGPC वापस ले FIR, अन्यथा फाइट के लिए तैयार पंजाब के गोल्डन टेंपल में योग करने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अर्चना मकवाना को पंजाब पुलिस ने नोटिस भेज दिया। वहीं, मकवाना ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) को FIR वापस लेने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अन्यथा उनकी लीगल टीम इसका जवाब देगी। पढ़ें पूरी खबर…
आर्सेनिक, पानी में मिले इस जहर से बिहार के 5 करोड़ लोगों को कैंसर का खतरा है। जमीन के नीचे मौजूद पानी में घुले आर्सेनिक की काट दो भाइयों के स्कूल प्रोजेक्ट से निकली है। इन्होंने ऐसी मशीन बनाई है जो हजारों लोगों की जान बचा रही है। बिना बिजली और मोटे खर्च के कैसे पानी से आर्सेनिक हटाने वाली मशीन काम कर रही है? इस मशीन को बनाने के पीछे की क्या कहानी है? आर्सेनिक क्यों खतरनाक है? आइए अर्पित की जुबानी समझते हैं…। सवाल-1: कौन हैं दो भाई जिनके स्कूल प्रोजेक्ट से बच रही हजारों जानें जवाब: मेरा नाम अर्पित और मेरे भाई का नाम और अभिजीत है। दोनों मूल रूप से बिहार के लखीसराय जिले के बड़हिया गांव के रहने वाले हैं। 2010 में हमारा परिवार गांव से पटना आ गया। पिताजी उपेंद्र कुमार एक प्राइवेट अस्पताल में ओटी असिस्टेंट हैं। उस समय उनकी तनख्वाह 6,000 रुपए महीना थी। मां रीता कुमारी साइंस बैकग्राउंड से हैं। आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते वह आगे पढ़ न सकीं। उनकी एक ही जिद थी कि बच्चे अच्छी पढ़ाई कर सकें। पांचवीं तक मैंने दिल्ली में संत निरंकारी मिशन के स्कूल में पढ़ाई की। इस स्कूल में मेरी मां को नौकरी मिल गई थी। फिर पटना लौटकर छठी से आठवीं तक सरकारी मिडिल स्कूल में पढ़ा। पिताजी की तनख्वाह करीब 20 हजार रुपए हुई तब मेरा दाखिला होली मिशन सेकेंडरी स्कूल में हुआ। आगे मैंने MAHE मणिपाल से फिजिक्स (ऑनर्स) में बी.एससी. की। आज मैं नवमार्ग रिसर्च एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड का फाउंडर और CEO हूं। मेरा छोटा भाई अभिजीत कुमार को-फाउंडर और CTO है। वह IIT पटना से कंप्यूटर साइंस पढ़ रहा है। सवाल- 2: क्लास 9 में आर्सेनिक हटाने वाली मशीन बनाने की क्या कहानी है? जवाब: उस समय मैं पटना के होली मिशन सेकेंडरी स्कूल में नौवीं क्लास में पढ़ रहा था। अभिजीत सातवीं क्लास में था। पानी से आर्सेनिक हटाने वाली मशीन से जुड़ा प्रोजेक्ट स्कूल में नहीं, बल्कि बिहार बाल भवन किलकारी में बना। हम 2017-18 बैच के छात्र थे। स्कूल के बाद रोज दोपहर 2 बजे के बाद और शनिवार-रविवार पूरे दिन वहीं रहते थे। किलकारी में हर बच्चे को दो-तीन महीने का एक प्रोजेक्ट मिलता है, जिस पर काम करके रिपोर्ट देनी होती है। जून 2018 में साइंस इंस्ट्रक्टर ने टॉपिक दिया, ‘बिहार में आर्सेनिक प्रदूषण कितना फैला है और बढ़ क्यों रहा है।’ सर्वे के साथ हमने रिसर्च पेपर पढ़ने शुरू किए। उसी दौरान टोक्यो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यामागुची का एक पेपर मिला, जिसमें धातुओं के मैग्नेटिक गुणों पर काम था। वहीं से हमारे मन में सवाल उठा कि क्या चुंबक की मदद से पानी से आर्सेनिक अलग किया जा सकता है। हमने पहले इलेक्ट्रोमैग्नेट और अलग-अलग आकार के चुंबक आजमाए, लेकिन जरूरत जितना तेज मैग्नेटिक फील्ड नहीं बन पाया। फिर हमने नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) के स्थायी चुंबक इस्तेमाल किए। ये 15-20 साल तक अपनी ताकत बनाए रखते हैं। असली काम चुंबकों को ऐसी बनावट में लगाने का था कि पानी के दबाव में भी आर्सेनिक के कण अलग हो जाएं। आर्सेनिक हटाने के लिए इसमें न बिजली लगती है, न केमिकल। सवाल- 3: आर्सेनिक और इसके असर के बारे में कैसे पता चला? जवाब: शुरुआत उसी सर्वे से हुई। गंगा के मैदानी इलाकों में जमीन के नीचे के पानी में आर्सेनिक प्राकृतिक रूप से घुला रहता है। WHO की सुरक्षित सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है, जबकि बिहार में हमें कई जगह इससे दस-बीस गुना ज्यादा आर्सेनिक मिला। महावीर कैंसर संस्थान पटना के डॉ. अरुण कुमार की टीम आर्सेनिक और कैंसर पर रिसर्च करती है। वे हमारे मेंटर हैं। जिन इलाकों में हमने यूनिट लगाई वहां के मरीजों के खून, बाल, नाखून और मां के दूध तक में आर्सेनिक मिला। सवाल- 4: कब लगा कि पानी में घुले आर्सेनिक को हटाने के लिए काम करना ही होगा? जवाब: बात 2018 की है। किलकारी में मुझे और अभिजीत को आर्सेनिक पर सर्वे का काम मिला था। हमें लगा था कि लोग पहले से इस पर काम कर रहे हैं। हम क्या नया करेंगे। सोचा कि चलकर देखते हैं, आर्सेनिक हटाने वाले जो प्लांट लगे हैं, उनका क्या हाल है। मैं बक्सर जिले के दुल्लहपुर गांव गया। यहां आर्सेनिक हटाने वाले प्लांट लगे तो थे, लेकिन टूटे और बंद पड़े थे। मैं गांव के सरकारी स्कूल में गया। देखा कि शिक्षक खरीदा हुआ पानी और बच्चे हैंडपंप का पानी पी रहे हैं। मैंने कई बच्चों के शरीर पर छोटे-छोटे दाग देखे। करीब 7 साल के एक बच्चे का शरीर बदरंग हो गया था। मैंने हेडमास्टर से पूछा, बच्चों की ऐसी हालत कैसे हो गई। उन्होंने बेबसी में कहा, 'हम क्या करें?' उस बच्चे का घर पास में ही था। स्कूल से निकलकर मैं उसके घर गया। उसके माता-पिता से बात की। टूटी-फूटी झोपड़ीनुमा घर। बच्चे के पिता ने अपने हाथ पांव पर मौजूद दाग दिखाए। बोले, 'डॉक्टर बोलते हैं कि पानी में जहर है। चापाकल का पानी पीते हैं। इसमें जहर है तो साफ पानी कहां से लाए। दो टाइम खाना तो किसी तरह जुटाते हैं पानी कैसे खरीदें।' हमने पटना के महावीर कैंसर संस्थान के डॉ. अरुण कुमार से इसके बारे में बात की। उन्होंने बताया कि हाथों और शरीर पर बारिश की बूंदों जैसे दाग आर्सेनिक जहर के शुरुआती लक्षण हैं। लंबे समय तक इसके संपर्क से त्वचा, मूत्राशय और फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। त्वचा के ये दाग आगे चलकर त्वचा के कैंसर में बदल सकते हैं। गर्भ में और बचपन में आर्सेनिक के संपर्क का असर बच्चों के दिमागी विकास, बुद्धि और याददाश्त पर भी पड़ता है। इसे ठीक करने की कोई दवा नहीं है। एकमात्र उपाय ऐसा पानी पीना बंद करना है। सवाल- 5: वाटर फिल्टर के आइडिया को हकीकत में बदलने तक का सफर कैसा रहा? जवाब: यह लंबा और मुश्किल रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत भरोसे की थी। एक स्कूली बच्चा कहे कि उसने आर्सेनिक हटाने की तकनीक बनाई है तो कोई आसानी से नहीं मानता। दिसंबर 2018 में हमारा प्रोजेक्ट भुवनेश्वर में आयोजित 26वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के लिए चुना गया। वहां हमें A+ ग्रेड मिला। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने अपने प्रशस्ति-पत्र में लिखा कि इस प्रोजेक्ट में आगे की संभावना है। इसके बाद किलकारी के निदेशक की पहल पर हम बिहार सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग पहुंचे। वहां से हमें पेटेंट फाइल करने और आगे रिसर्च के लिए 3 लाख रुपए मिले। हमारा लैब मॉडल PHED (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) की लैब में जांचा गया। 1,000 माइक्रोग्राम प्रति लीटर जैसे बहुत ज्यादा प्रदूषित पानी पर भी उसने काम किया। उसके बाद अफसरों का भरोसा बना। 2019 में मैंने CSIR-IICT हैदराबाद के तत्कालीन निदेशक को बिना किसी पहचान के एक ईमेल लिखा। अगले ही दिन जवाब आया कि आइए, हमारे वैज्ञानिक जांच करेंगे। वहां डॉ. एस. श्रीधर से मुलाकात हुई। वह 2019 से आज तक हमारे मेंटर हैं। दिसंबर 2020 में पटना के पास मनेर में PHED के साथ एक हैंडपंप पर पहली 3D-प्रिंटेड यूनिट लगी। एक महीने में करीब 29 हजार लीटर पानी साफ हुआ। कच्चे पानी में आर्सेनिक 141 माइक्रोग्राम प्रति लीटर था, जो घटकर 5 से भी नीचे आ गया। प्रोटोटाइप बनाने में BIT मेसरा से पढ़े इंजीनियर डॉ. जय मंगल सिंह और CIPET पटना ने बहुत मदद की। PHED ने 4.36 लाख रुपए देकर स्कूलों में पायलट शुरू करवाया। 2023 में यूनिसेफ बिहार ने 13 लाख रुपए दिए, जिससे हमने तकनीक को मॉलिक्यूलर स्तर पर समझा। उसी साल नवमार्ग कंपनी बनी। जल शक्ति मंत्रालय (राष्ट्रीय जल जीवन मिशन) ने हमारी तकनीक को इनोवेटिव टेक्नोलॉजी के रूप में पैनल में शामिल किया। आज भोजपुर के उदवंतनगर में एक बड़ा प्लांट चल रहा है जो घंटे में 4,500 लीटर पानी साफ करता है। अब तक कुल करीब 29 लाख लीटर आर्सेनिक-मुक्त पानी लोगों तक पहुंचा है। कर्नाटक में ग्रामीण पेयजल विभाग के साथ रायचूर और यादगीर जिलों में यूनिट लग रही हैं। साथ में हम SENSE नाम के IoT सेंसर पर काम कर रहे हैं जो पानी में आर्सेनिक और बैक्टीरिया पकड़ेगा और JalJyoti नाम का GIS डेटाबेस बना रहे हैं जिससे पता चलेगा कि किस इलाके का पानी कैसा है। सवाल-6: किस मशीन से पानी से अलग किया जा रहा आर्सेनिक? जवाब: हमने नवमार्ग नाम की मैग्नेटिक फिल्टर बनाई है। यह आर्सेनिक हटाने के लिए मैग्नेटिक सेपरेशन टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करती है। इसे आर्सेनिक से प्रभावित घरों, स्कूलों, कम्युनिटी पॉइंट्स और सार्वजनिक संस्थानों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके फिल्टर को बार-बार बदलने का झंझट नहीं है। यह पानी से आर्सेनिक और दूसरी भारी धातुओं को अलग कर देती है। सवाल-7: पानी से आर्सेनिक हटाने में कितना खर्च आता है? जवाब: हमारी मैग्नेटिक वाटर फिल्टर से 8 रुपए में 1000 लीटर पानी आर्सेनिक मुक्त किया जा सकता है। एक बार मैग्नेट डालने के बाद इसकी लाइफटाइम 10 साल से ज्यादा है। यह फिल्टर 3 स्टेज में काम करता है। सबसे पहले पानी कार्बन फिल्टर से छनता है, जिसमें डस्ट पार्टिकल अलग हो जाते हैं। इसके बाद पानी मैग्नेट में जाता है। यहां पानी से आर्सेनिक अलग होता है। तीसरा स्टेज ऑप्शनल है। यह तब अप्लाई होता है जब पानी में मिट्टी की मात्रा बहुत हो। हमने मैग्नेटिक आर्सेनिक फिल्टर का दो मॉडल तैयार किया है। इस फिल्टर का मार्केट कॉस्ट कम्युनिटी के लिए लगभग 50 हजार रुपए और वार्ड स्तर के लिए लगभग 5-6 लाख रुपए है। वार्ड स्तर वाले मशीन से 1 घंटे में 1.5 लाख लीटर पानी साफ कर सकते हैं। सवाल-8: क्यों चर्चा में आई आर्सेनिक हटाने वाली मशीन? जवाब: हमने अपने इनोवेशन को स्टार्टअप का रूप दिया है। हमें अडानी ग्रुप से वंदे विंग्स मेंटरशिप मिला है। देश-विदेश के करीब 26 हजार आवेदनों में से टॉप 54 को चुना गया। इसमें पानी से आर्सेनिक हटाने वाली मशीन भी थी। अडानी ग्रुप की मदद से हम दोनों भाई आर्सेनिक साफ करने वाली मशीन को बड़े पैमाने पर बनाने और घर-घर पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं। सवाल-9: आर्सेनिक क्या है, क्या नुकसान पहुंचाता है? जवाब: आर्सेनिक पृथ्वी की ऊपरी परत में मिलने वाला प्राकृतिक पदार्थ है। यह बहुत जहरीला होता है। लोग आर्सेनिक से दूषित पानी पीने, खाना बनाने और फसल की सिंचाई में इस्तेमाल करने पर संपर्क में आते हैं। पेयजल, भोजन एवं वायु के माध्यम से इंसान के शरीर में एक निर्धारित मात्रा (0.05 मिग्रा./ली.) से अधिक पहुंच जाने पर यह जहरीला हो जाता है। WHO के अनुसार, लंबे समय तक आर्सेनिक से दूषित पानी पीने से गंभीर विषाक्तता हो सकती है। आर्सेनिक प्वाइजनिंग के शुरुआती लक्षण त्वचा सम्बन्धी समस्याओं के रूप में सामने आते हैं। त्वचा के रंग में परिवर्तन तथा गहरे या हल्के धब्बे शरीर पर दिखाई देते हैं। हथेली और तलवों की त्वचा कठोर, खुरदरी तथा कटी-फटी हो जाती है। यदि आर्सेनिक प्रदूषित जल लेना बंद कर दिया जाए तो ऐसे लक्षणों का बढ़ना रुक सकता है तथा ये लक्षण खत्म हो सकते हैं। अधिक लंबे समय तक आर्सेनिक प्रदूषित जल पीने से त्वचा का कैंसर तथा अन्य आन्तरिक अंगों तथा फेफड़े, आमाशय तथा गुर्दे का कैंसर हो सकता है। सवाल- 10: बिहार के कितने लोग पी रहे आर्सेनिक मिला पानी? जवाब: भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, बिहार के 18 जिलों के लोगों को आर्सेनिक मिला पानी पीना पड़ता है। बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार 4,709 ग्रामीण वार्ड के ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक की मात्रा तय मानक से अधिक है। गंगा किनारे के 54 प्रखंड में आर्सेनिक की मात्रा अधिक है। केंद्र सरकार ने 22 मार्च, 2021 को संसद में एक सवाल के जवाब में माना कि देश के 21 राज्यों के कुल 150 जिलों में कई जगह आर्सेनिक सुरक्षित सीमा से अधिक है। यूपी के 75 में से 28 जिले, बिहार के 38 में से 22 जिले, असम के 33 में से 18 और पश्चिम बंगाल के 23 में से 9 जिलों में आर्सेनिक तय मानक से से अधिक है। जमीन के नीचे के पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक है तो इसे वाटर फिल्टर से कम किया जा सकता है। वाटर प्यूरीफायर कई तरह के होते हैं। आपको खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखना होगा कि कौन सा वाटर प्यूरीफायर आर्सेनिक कंट्रोल कर सकता है और कौन नहीं। आर्सेनिक हटाने वाले सिस्टम (सेंट्रलाइज्ड या घरेलू) लगाएं। हटाए गए आर्सेनिक का सही तरीके से निपटान करें। आर्सेनिक हटाने की तकनीकों में ऑक्सीडेशन, कोएगुलेशन-प्रेसिपिटेशन, अब्जॉर्प्शन, आयन एक्सचेंज और मेम्ब्रेन तकनीक शामिल हैं।
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रात में जबरन घर में घुसकर दीया बुझाना और महिला के ऊपर लेटकर मुंह दबाना अटेम्प्ट टू रेप नहीं, महिला की लज्जा भंग करने का मामला है। पटना हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए आरोपी पर से रेप के प्रयास की धारा को हटा दिया। पूरा मामला क्या है, कोर्ट ने क्या कहते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया, जानेंगे; बूझे की नाही में...। अटेम्प्ट टू रेप का पूरा मामला क्या है? 8 फरवरी 2020 की रात 10 बजे बेगूसराय की विधवा महिला अपने बच्चे के साथ छप्पर वाले घर में सो रही थी। आरोप है कि महिला पर अधेड़ पहले से गंदी नियत रखता था। उस दिन सुनसान पाकर वह जबरन घर में घुस गया। घर में घुसते ही उसने सबसे पहले दीया को बुझा दिया। फिर महिला के ऊपर लेट गया। महिला जब चिल्लाने लगी तो उसने उसका मुंह दबा दिया। तब तक आसपास के लोग जुट गए। लोगों ने आरोपी की जमकर पिटाई की। गांव वालों ने महिला को पंचायती में मामला सुलझाने का आश्वासन दिया। लेकिन पंचायती के दिन आरोपी नहीं गया। पटना हाईकोर्ट ने क्या कहते हुए अटेम्प्ट टू रेप के आरोप को हटाया? 8 अक्टूबर 2026 को पटना हाईकोर्ट की जस्टिस संदीप कुमार की बेंच ने कहा, ‘किसी व्यक्ति को रेप की कोशिश का दोषी ठहराने के लिए केवल गलत नीयत या अश्लील हरकत पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ऐसे ठोस सबूत होने चाहिए।’ जस्टिस संदीप कुमार ने रेप के प्रयास की धारा हटाकर आरोपी को सजा सुनाते वक्त 5 मुख्य बातें कही, जानिए… 1. घर में आरोपी की मौजूदगी साबित हुई हाईकोर्ट ने कहा कि महिला ने आरोपी को अपने घर में देखने और उसकी हरकतों के बारे में स्पष्ट और लगातार बयान दिया था। आरोपी उसी गांव का रहने वाला था और महिला उसे जानती थी। महिला के शोर मचाने पर गांव के लोग वहां पहुंचे और आरोपी को पकड़ लिया। 2. शिकायत दर्ज कराने में दो दिन की देरी से केस खारिज नहीं होगा घटना रात में हुई थी और शिकायत दो दिन के भीतर दर्ज कराई गई थी। इसे लेकर आरोपी के वकील ने महिला के केस दर्ज कराने की नियत पर सवाल उठाया था। इस हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले स्टेट ऑफ पंजाब बनाम गुरमीत सिंह (1996) का हवाला दिया। इस फैसले में कहा गया था- ‘यौन अपराधों के मामलों में शिकायत दर्ज कराने में देरी होना असामान्य नहीं है। सामाजिक बदनामी, शर्म और डर के कारण पीड़िता या उसका परिवार पुलिस के पास जाने से हिचक सकता है।’ पटना हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में विधवा ने पहले गांव के लोगों और पुलिस से संपर्क किया था। इसलिए शिकायत दर्ज कराने में दो दिन की देरी को न तो अस्पष्ट कहा जा सकता है और न ही इसे केस को खारिज करने का आधार बनाया जा सकता है। 3. हर केस में जांच अधिकारी की गवाही जरूरी नहीं इस मामले में जांच अधिकारी को गवाही के लिए पेश नहीं किया गया था। आरोपी ने इसे कोर्ट में आधार बनाया। इस पर हाईकोर्ट ने तखाजी हिराजी बनाम ठकोर कुबेरसिंह चमनसिंह (2001) के फैसले का हवाला देते हुए कहा, ‘यदि उपलब्ध गवाहों की विश्वसनीय गवाही से जरूरी तथ्य साबित हो रहे हों, तो हर अतिरिक्त गवाह को पेश करना अनिवार्य नहीं है।’ 4. महिला की गवाही पर भरोसा, लेकिन रेप की कोशिश का मामला नहीं हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पीड़िता की गवाही भरोसेमंद हो, तो केवल उसी के बयान के आधार पर भी सजा सुनाई जा सकती है। हर मामले में उसकी बात की पुष्टि के लिए दूसरे सबूत मांगना जरूरी नहीं है। इस संबंध में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख किया, जिनमें स्टेट ऑफ पंजाब बनाम गुरमीत सिंह (1996), राय संदीप उर्फ दीपु बनाम स्टेट (2012) और संतोष प्रसाद उर्फ संतोष कुमार बनाम बिहार राज्य (2020) शामिल हैं। 5. रेप की कोशिश साबित करने के लिए जरूरी है… हाईकोर्ट ने कहा कि रेप की कोशिश और अश्लील या आपत्तिजनक हरकत के बीच अंतर करना जरूरी है। हालांकि…,
जदयू के अंदर चल रही वर्चस्व की लड़ाई का फैसला अब सिर्फ बयानों से नहीं होगा। 23 अक्टूबर को होने वाला विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों का चुनाव भी तय करेगा कि पार्टी में किस नेता की राजनीतिक पकड़ कितनी मजबूत है। नतीजे 27 अक्टूबर को आएंगे। 8 सीटों पर होने वाला यह चुनाव बताएगा कि जदयू के अंदर असली बॉस कौन होगा। संजय झा ने सारण शिक्षक सीट से आनंद पुष्कर और दरभंगा शिक्षक सीट से घनश्याम राय को उम्मीदवार बनाया है। सबसे दिलचस्प मुकाबला पटना स्नातक सीट पर है। यहां नीरज कुमार और अनंत सिंह आमने-सामने हैं। अनंत ने जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह को समर्थन दिया है। MLC चुनाव में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की भूमिका कितनी अहम है? चुनावी नतीजों का दोनों नेताओं की राजनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा? पढ़िए रिपोर्ट… 8 सीटों के MLC चुनाव, दांव पर दिग्गजों की साख बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को अपने गढ़ में हारना पड़ा। अब 8 सीटों के MLC चुनाव को NDA के लिए अहम माना जा रहा है। इस चुनाव में तय होगा कि नीतीश कुमार के बाद JDU का असली बॉस कौन होगा। इस चुनाव में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और विधायक अनंत सिंह समेत कई दिग्गजों की साख दांव पर है। 6 पॉइंट में जानिए जदयू के नेताओं के लिए MLC चुनाव के क्या नतीजे होंगे। 1- संजय झा के लिए साख बचाने की चुनौती क्यों? जदयू में संजय झा की पिछले छह महीने में काफी प्रगति हुई है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर संगठन को मजबूत करना और नीतीश कुमार के राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाना उनकी जिम्मेदारियों में शामिल है। 2- चुनाव में ललन सिंह की भूमिका कितनी ललन सिंह की सक्रियता को इस चुनाव में अलग नजरिए से देखा जा रहा है। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सामने आने के बाद संजय झा ने ललन सिंह को मामला सुलझाने की जिम्मेदारी दी थी। 2 अक्टूबर को विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद 5 अक्टूबर को ललन सिंह का बयान आया, ‘क्रिया हुई है तो प्रतिक्रिया भी होगी।’ इस बयान ने विवाद को और राजनीतिक चर्चा में ला दिया। 3. चुनाव प्रचार में संजय झा कितने सक्रिय? संजय झा ने दरभंगा और मुजफ्फरपुर में एनडीए उम्मीदवारों के नामांकन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वह लगातार सक्रियता बनाए हुए हैं। 4. टिकट चयन में किसकी चली? जदयू ने 23 सितंबर को 4 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की। पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक से अभिषेक झा, सारण शिक्षक से आनंद पुष्कर और दरभंगा शिक्षक से घनश्याम राय को उम्मीदवार बनाया गया। सीट 1- पटना सीट पर नीरज कुमार को दोबारा मौका मिला, जबकि उनके नाम को लेकर अनंत सिंह का विरोध चर्चा में रहा। इस सीट पर टिकट ललन सिंह के सहमति मे नहीं दिया गया। सीट 2- सारण शिक्षक सीट से आनंद पुष्कर जदयू के प्रत्याशी हैं। वह ब्राह्मण समाज से आते हैं। बिहार के जाने-माने शिक्षक नेता और 5 बार के पूर्व विधान पार्षद दिवंगत केदारनाथ पांडेय के पुत्र हैं। कहा जाता है कि इन्हें टिकट दिए जाने में संजय झा ने अहम भूमिका निभाई। सीट 3- दरभंगा शिक्षक सीट से घनश्याम राय को टिकट मिला है। घनश्याम को संजय झा का करीबी माना जाता है। वह मुख्य रूप से मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलसचिव और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर थे। सीट 4- यहां से अभिषेक झा जदयू प्रत्याशी हैं। वह ललन सिंह और संजय झा दोनों के करीबी माने जाते हैं। दोनों से इनकी ट्यूनिंग अच्छी है। अभिषेक झा को सितंबर 2020 में जेडीयू में शामिल कराने में ललन सिंह की मुख्य भूमिका थी। ललन सिंह ने उन्हें जेडीयू की प्राथमिक सदस्यता दिलाई थी। 5. गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी अहम जदयू और भाजपा ने 4-4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। जदयू ने पटना और तिरहुत स्नातक के साथ सारण और दरभंगा शिक्षक सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। पिछली बार की सीटों से तुलना करने पर दो सीटों की अदला-बदली की गई है। 6. नए उम्मीदवारों के पीछे किसका भरोसा? आनंद पुष्कर और घनश्याम राय जैसे उम्मीदवारों की राजनीतिक स्थिति देखे तो वे संजय झा के करीबी कहे जाते हैं। सारण शिक्षक सीट से ई. आनंद पुष्कर वामदल छोड़कर जदयू में शामिल हुए। 8 फरवरी 2026 को यानी जदयू का दामन थामा। प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।
मौसम विभाग ने पश्चिमी यूपी के 15 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। ओले गिरने की भी आशंका जताई है। वहीं, लखनऊ लगातार 15वें दिन भी बाढ़ की चपेट में है। कॉलोनियों में तीन-तीन फीट तक पानी भरा हुआ है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में छिपलाकोट की ऊंची चोटियां अक्टूबर में ही बर्फ से ढक गई हैं। करीब एक दशक बाद अक्टूबर महीने में यहां बर्फबारी हो रही है। आमतौर पर इन चोटियों पर दिसंबर-जनवरी में बर्फबारी होती है। हिमाचल में वेस्टर्न डिस्टरबेंस कल से दोबारा एक्टिव हो रहा है। प्रदेश में इससे अगले चार दिन तक बारिश के आसार है। लाहौल स्पीति, किन्नौर और चंबा की अधिक ऊंची चोटियों पर इस दौरान बर्फबारी हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, मध्यप्रदेश में सोमवार से साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) का असर खत्म हो जाएगा। इसके बाद रात में ठंड बढ़ेगी, लेकिन पूरे अक्टूबर दिन में गर्मी का असर देखने को मिलेगा। राजस्थान में आज बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर और चूरू में बादल छाने के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर से मौसम की तस्वीरें…
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को हर हाल में जिताने के लिए भाजपा ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं 17 जिलों से आए शिक्षकों के सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे। इस मंच पर 'शिक्षक बनाम दलीय राजनीति' के मुद्दे से निपटने की तैयारी भी नजर आयी। पूरा मंच शिक्षकों और उनके संगठन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) को समर्पित नजर आया। इस संगठन के विभिन्न जिलों के बड़े पदाधिकारी मंच पर बैठे थे जबकि 5 दर्जन विधायकों की कुर्सी नीचे लगी थी। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने यह समझाने की कोशिश की कि शिक्षक नेता किसी दल के पीछे नहीं गया बल्कि भाजपा उनके पीछे आयी है। भाजपा से प्रत्याशी बनाए गए ध्रुव कुमार त्रिपाठी लगातार तीन बार इस सीट से शर्मा गुट के समर्थन से एमएलसी चुने जा रहे हैं। लेकिन इस बार उन्हें भाजपा ने अपना टिकट दे दिया। पार्टी सूत्रों की मानें तो ध्रुव कुमार त्रिपाठी लंबे समय से इस प्रयास में थे और उन्होंने पूरा जोर लगाकर टिकट हासिल कर लिया। लेकिन अब आम शिक्षक किसी दल में जाने को लेकर सवाल पूछ रहा है। उनके पुराने संगठन में भी इस तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी का जवाब देने की कोशिश भाजपा के शिक्षक सम्मेलन में नजर आयी। जानिए मुख्यमंत्री ने क्या कहा मुख्यमंत्री यागी आदित्यनाथ ने ध्रुव कुमार त्रिपाठी के टिकट पाने की पूरी कहानी सुनाई। सांसद रविकिशन शुक्ला ने भी काफी देर तक ध्रुव त्रिपाठी के सदन में सक्रियता का बखान करते रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चुनाव में भी भाजपा ने ध्रुव त्रिपाठी को टिकट की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया। सीएम ने कहा कि ध्रुव त्रिपाठी शिक्ष्कों के हित की बात सदा करते रहते हैं इसलिए भाजपा उनके विरोध में नहीं जा सकती थी। उस चुनाव में पार्टी ने उनको सपोर्ट किया था। इस बार के टिकट की कहानी बताते हुए सीएम ने कहा कि ध्रुव त्रिपाठी ने इस बार भी टिकट नहीं मांगा। भाजपा ने उनसे पूछा कि पार्टी के प्रत्याशी बनेंगे। उनके सामने दोनों शर्तें रखी गईं कि यदि वे टिकट नहीं लेंगे तो पार्टी उनका समर्थन करेगी। लेकिन अपने संगठन के नेताओं से बातचीत के बाद उन्होंने टिकट पर आपत्ति नहीं जताई। आखिर क्यों इतनी सफाई दी गई भाजपा के मंच से यह साबित किया गया कि शिक्षकों के हित ही ध्रुव त्रिपाठी के जीवन का लक्ष्य है। इतनी सफाई देने के पीछे दलीय राजनीति को लेकर शिक्षकों में बढ़ती नाराजगी कारण है। यहां तक कि शर्मा गुट से जुड़े शिक्षक भी इसकी आलोचना कर रहे हैं। भाजपा के मंच से ध्रुव के बारे में जो बताया गया, उसका उद्देश्य यही था कि ध्रुव त्रिपाठी पहले शिक्षकों के लिए हैं, बाद में किसी दल के लिए। यही दर्शाने का प्रयास हुआ कि ध्रुव का चयन ही इसीलिए किया गया है। ओमप्रकाश शर्मा व पंचानन राय को याद किया गया मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में शर्मा गुट के संस्थापक स्व. ओम प्रकाश शर्मा एवं स्व. पंचानन राय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पंचायनन राय का तो महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से पुराना संबंध है। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि जब स्व. पंचानन राय चुनाव लड़ने आते थे तो उनका कार्यालय महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्था में खुल जाता था, खुद से। उन्होंने शर्मा गुट से पुराने जुड़ाव की कहानी भी बताई। इन उदाहरणों से शिक्षकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि भले ही ध्रुव त्रिपाठी भाजपा में हैं लेकिन वह हमेशा शिक्षक हितों की बात करते रहेंगे। शिक्षकों को तवज्जो देने के लिए ही मंच पर शर्मा गुट के विभिन्न जिलों के प्रभावशाली नेताओं को जगह दी गई थी। भाजपा एमएलसी कार्यक्रम से बाहर गए मंच पर शिक्षक नेताओं की मौजूदगी के कारण ही किसी विधायक को वहां जगह नहीं मिली थी। सूत्रों की मानें तो इसी कारण एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह व क्षेत्रीय अध्यक्ष से कहासुनी भी हुई थी, जिसके बाद एमएलसी मौके से चले गए थे। यह बात पूरे दिन चर्चा में रही।
अग्रकुल प्रवर्तक महाराजा अग्रसेन की 5150वीं जयंती पर भव्य शोभायात्रा सोमवार देर शाम वृंदावन में धूमधाम के साथ निकाली गई। जिसका नगर वासियों तथा अग्र बंधुओं ने स्थान-स्थान पर पुष्पवर्षा एवं आरती उतारकर अभिनंदन किया। संपूर्ण धर्मनगरी महाराजा अग्रसेन के जयकारों से गुंजायमान हो उठी। गोपीनाथ बाजार से शुरू हुई शोभायात्रा सोमवार की देर शाम शोभायात्रा गोपीनाथ बाजार से प्रारंभ हुई। अग्र बंधुओं ने डोले में विराजित महाराजा अग्रसेन का माल्यार्पण कर नगर भर में आरती उतारी। शोभायात्रा में सर्वप्रथम भगवान गणेश का डोला, मॉ कैलादेवी, कुलदेवी मां महालक्ष्मी, राधाकृष्ण की झांकी तथा अग्र समाज की बालिकाएं मनमोहक डांडिया नृत्य करती चल रहीं थीं। वहीं घोड़ों पर सवार अट्ठारह राजकुमार भी शोभायमान हो रहे थे। जिनके पीछे महाराजा अग्रसेन की पत्नी नागकन्या माध्वी जी तथा स्वयं महाराजा अग्रसेन का डोला चल रहा था। यहां से होकर निकली शोभायात्रा शोभायात्रा नगर भ्रमण करती हुई गोपीनाथ बाजार से रंगजी मंदिर मार्केट, नगर निगम चौराहा, अनाज मंडी, पुराना बजाना, भट्टर भवन, सीएफसी चौराहा, प्रताप बाजार, रेतिया बाजार, लोई बाजार, बनखण्डी महादेव, अठखंभा, बांके बिहारी मंदिर मार्ग होती हुई मोर भवन पर सम्पन्न हुई। शोभायात्रा का प्रमुख आकर्षण अंतरराज्यीय ब्रास बैंड, नफीरी और बैंडबाजों की धुन पर अग्रबंधु थिरकते और जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा का नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। यह रहे मौजूद इस अवसर पर जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, बसेरा ग्रुप के चेयरमेन रामकिशन अग्रवाल, संरक्षक नरेंद्र अग्रवाल गया वाले, बाबू गणेश शरन अग्रवाल, आर के एजुकेशन हब के चेयरमैन डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, राधेश्याम अग्रवाल एडवोकेट, आलोक बंसल, गिरीश सर्राफ, अशोक अग्रवाल, कपिल मुकुटवाला, अखिल अग्रवाल, भीमसेन अग्रवाल, अंशु बजाज, सुनील अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, विकास अग्रवाल, कपिल अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
कभी दोस्तों के कपड़े, जूते और जैकेट पहनकर दिल्ली-गुरुग्राम में रैप शो करने जाने वाला सोनीपत का दक्ष उर्फ धड़कन पेंढरकर अब एक करोड़ रुपए जीतकर घर लौटा है। MTV हसल 0.5 का विजेता बनने के बाद सोमवार को सेक्टर-10 स्थित वर्धमान गार्डेनिया में उसके घर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। पैराडॉक्स की टीम की ओर से शो में हिस्सा लेने वाले धड़कन ने अपने ठेठ हरियाणवी अंदाज, दमदार रैप और लगातार शानदार परफॉर्मेंस से दर्शकों के साथ जजों का भी दिल जीता। आठवीं कक्षा में रैप लिखना और गाना शुरू करने वाले धड़कन ने म्यूजिक कंपोज करने से लेकर मिक्सिंग, मास्टरिंग और वीडियो एडिटिंग तक खुद सीखी। उसके संघर्ष में दोस्तों के कपड़े पहनकर स्टेज पर पहुंचना, बस और शेयरिंग टैक्सी से सफर करना, अपने खर्चे निकालने के लिए काम करना और रैप की बारीकियां सीखने के लिए रात ढाई बजे तक जागना शामिल रहा। सोनीपत के वर्धमान गार्डेनिया में रहता है परिवार पिता सुधीर कहते हैं कि पहले लोग उन्हें दक्ष के पिता के रूप में जानते थे, लेकिन अब बेटे की सफलता के कारण उनकी पहचान बन रही है। मां सरिता बताती हैं कि दक्ष को खाना बनाने और अलग-अलग व्यंजन तैयार करने का भी शौक है। परिवार के मुताबिक, उसने अपनी मेहनत, दोस्तों के सहयोग और हरियाणवी संस्कृति को समझने की लगन से यह मुकाम हासिल किया है। सुधीर पेंढरकर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। साल 2009 में पिता सुधीर ने सोनीपत के सेक्टर-10 स्थित वर्धमान गार्डेनिया में फ्लैट खरीदा और वर्ष 2015 में परिवार के साथ सोनीपत में रहने लगे। इसी दौरान दक्ष का दाखिला घर के सामने स्थित ब्राइट स्कॉलर स्कूल में चौथी कक्षा में कराया गया। इसी सफर के बीच उसे अपनी दादी को खोने का दर्द भी सहना पड़ा। दैनिक भास्कर से बातचीत में माता-पिता और बहन ने पूरी कहानी शेयर की। संघर्ष से लेकर ₹1 करोड़ जीतने तक की पूरी कहानी… दोस्तों के कपड़े पहनकर करता था शो: दक्ष उर्फ धड़कन पेंढरकर के पिता सुधीर पेंढरकर बताते हैं कि दिल्ली और गुरुग्राम में कॉलेज के बाद जब दक्ष को रैप शो करने जाना होता था, तो कई बार वह रात को अपने दोस्त के पास ही रुकता था। उसके पास स्टेज शो के लिए अच्छे कपड़े, जूते और जैकेट नहीं होते थे। ऐसे में दोस्त अपने कपड़े और जूते उसे पहनने के लिए देते थे। वह किराए की टैक्सी या दूसरे साधनों से शो करने पहुंचता था। मां सरिता बताती हैं कि दोस्तों ने उसके संघर्ष के दिनों में बहुत मदद की। दक्ष ने कभी इन परिस्थितियों को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया। वह लगातार अपने हुनर को निखारने और स्टेज पर बेहतर प्रदर्शन करने में जुटा रहा। गुरुग्राम जाकर समझा लोगों का म्यूजिक टेस्ट: सुधीर बताते हैं कि दक्ष ने रैपिंग को केवल गाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लोगों की पसंद को समझने के लिए भी मेहनत की। वह गुरुग्राम जाता था और वहां देखता था कि लोग किस तरह का म्यूजिक पसंद करते हैं। इसके बाद उसी हिसाब से अपने गानों और प्रस्तुति पर काम करता था। धीरे-धीरे उसके रैप सॉन्ग गुरुग्राम और दिल्ली यूनिवर्सिटी में लोकप्रिय होने लगे। वर्ष 2015 में सोनीपत आने के बाद उसने अपने दोस्तों के साथ रहकर हरियाणवी बोली और संस्कृति को समझना शुरू किया। पिता के अनुसार, दक्ष की खासियत है कि वह जहां भी जाता है, वहां की बोली सीखने और उसे अपने अंदाज में अपनाने की कोशिश करता है। दो साल तक किया इंतजार: परिवार के मुताबिक, दक्ष लंबे समय से MTV हसल में हिस्सा लेना चाहता था। इसके लिए उसे दो साल तक इंतजार करना पड़ा, क्योंकि शो में आवेदन करने की निर्धारित उम्र पूरी होने का इंतजार था। 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद उसने आवेदन किया और पहली बार में ही विजेता बन गया। पिता सुधीर बताते हैं कि दक्ष ने मार्च में ऑडिशन दिया था। उसे उसी महीने मुंबई जाना था, लेकिन शो की तारीख आगे बढ़ गई। इसके बाद 17 जून को वह शो में हिस्सा लेने के लिए मुंबई रवाना हुआ। उसके लिए यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि लंबे समय से देखे जा रहे सपने को पूरा करने का मौका था। ‘We Do It For Culture’ रैप से हुआ चयन:धड़कन के पिता बताते हैं कि उसने ‘We Do It For Culture’ नाम का रैप MTV हसल 0.5 के लिए भेजा था। इसी गाने की वजह से उसके चयन का रास्ता बना। शो में पैराडॉक्स की टीम की ओर से खेलते हुए उसने अपनी अलग पहचान बनाई। उसके हरियाणवी लहजे और प्रस्तुति ने उसे दूसरे प्रतिभागियों से अलग रखा। पिता के मुताबिक, एक एपिसोड में उसकी परफॉर्मेंस के आधार पर उसे सीधे टिकट टू फिनाले दिया गया। लगातार कड़े मुकाबलों के बीच उसने अपना प्रदर्शन बनाए रखा और आखिरकार शो जीतकर एक करोड़ रुपए अपने नाम कर लिए।रफ्तार के शो में जीती मैकबुक: धड़कन की सफलता के पीछे एक पुराना अनुभव भी अहम रहा। वर्ष 2024 में उसने बॉलीवुड स्टार रफ्तार के शो ‘ओ सीन चेंज’ के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। वहां रैप प्रतियोगिता में उसने एप्पल की मैकबुक जीती। परिवार के अनुसार, इसी मैकबुक से उसने म्यूजिक एडिटिंग, कंपोजिशन और तकनीकी काम सीखने शुरू किए। वह आज भी उस मैकबुक को संभालकर रखे हुए है। वर्ष 2025 में कॉलेज फर्स्ट में उसने प्रतियोगिता जीती और गुरुग्राम में आयोजित स्पीडो प्रतियोगिता में भी विजेता रहा। इन अनुभवों ने उसे अपने हुनर पर भरोसा करना सिखाया और आगे बढ़ने का हौसला दिया।हरियाणवी कलाकार सुनकर सीखी ठेठ हरियाणवी:बहन दीक्षा बताती हैं कि दक्ष रैप की बारीकियां सीखने के लिए दिन-रात अलग-अलग रैपर्स को सुनता था। इसके बाद खुद रिकॉर्डिंग करता और अपनी गलतियां पहचानकर उन्हें सुधारने की कोशिश करता था। वह अपना म्यूजिक कंपोज करने के साथ मिक्सिंग, मास्टरिंग और वीडियो एडिटिंग भी खुद करता था। मां सरिता के अनुसार, कई बार थकान होने के बावजूद वह रात दो से ढाई बजे तक हरियाणवी लोक गायकों, कलाकारों, स्टोरीटेलर्स और शायरों को सुनता रहता था। वह चाहता था कि उसके रैप में असली और ठेठ हरियाणवी लहजा सुनाई दे। किसी हिंदी शब्द को हरियाणवी में बदलने में परेशानी होती तो वह अपने दोस्तों से मदद लेता था। इसी लगातार अभ्यास का असर उसकी परफॉर्मेंस में दिखाई दिया। ‘फैन हो गई’ और ‘माहौल’ ने मचाया धमाल: परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, MTV हसल 0.5 के 20 एपिसोड रिलीज हुए और दक्ष ने शो में अपने 10 गाने प्रस्तुत किए। उसके गानों को अच्छी प्रतिक्रिया मिली। ‘फैन हो गई’ तीसरे एपिसोड में आया और शो के यूट्यूब चैनल पर इसे करीब 30 लाख बार देखा जा चुका है। दादी ने सिखाई हनुमान चालीसा: धड़कन के संगीत का सफर बचपन से शुरू हुआ। मां सरिता बताती हैं कि उसकी दादी आशा रानी ने बचपन में उसे हनुमान चालीसा याद कराई थी। इसके बाद उसे गाने का शौक लग गया। पिता सुधीर के अनुसार, दक्ष ने आठवीं कक्षा में रैप लिखना और गाना शुरू किया था। परिवार के अनुसार, वह बचपन से ही स्टेज शो और डिबेट सहित अलग-अलग गतिविधियों में आगे रहा है। मां उसे बचपन में लोरी सुनाती थीं ‘तुझे सूरज कहूं या चंदा, तुझे दीप कहूं या तारा, मेरा नाम करेगा रोशन, जग में मेरा राज दुलारा।’ आज बेटे की सफलता देखकर मां को लगता है कि उसने लोरी के शब्दों को सच कर दिखाया है। शो के दौरान दादी का निधन: धड़कन अपनी दादी के काफी करीब था। पिता सुधीर बताते हैं कि मुंबई जाने से पहले वह दादी को शो के बारे में पूरी जानकारी देकर गया था। उसने कहा था कि वह टीवी पर दिखाई देगा और दादी उसे देख सकेंगी। लेकिन 1 जुलाई को, मुंबई जाने के करीब 14 दिन बाद, दादी आशा रानी का निधन हो गया। परिवार के मुताबिक, दादी के निधन की सूचना मिलने पर धड़कन वापस आना चाहता था, लेकिन परिवार ने उसे शो जारी रखने के लिए कहा। उसने मुश्किल समय में भी हिम्मत नहीं हारी और मंच पर अपनी भावनाओं को संभालते हुए प्रदर्शन जारी रखा। अब जब वह एक करोड़ रुपए जीतकर घर लौटा है, तो परिवार को इस बात का मलाल है कि उसकी दादी उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं देख सकीं। जानिए, शुरुआत की कहानी… कॉलेज जाने के लिए बस-शेयरिंग टैक्सी का सहारा: बहन दीक्षा बताती हैं कि दक्ष के पास अपना निजी वाहन नहीं था। वह कभी शेयरिंग टैक्सी तो कभी बस से कॉलेज जाता था। कई बार रात नौ बजे तक कॉलेज से लौटने के बाद फ्लैट पहुंचने में परेशानी होती थी। इसके बावजूद वह अपनी पढ़ाई और संगीत दोनों को समय देता रहा। वह दीक्षा की कंपनी में वीडियो एडिटिंग करके भी पैसे कमाता था और शो में आने-जाने का खर्च निकालता था। पिता बताते हैं कि 12वीं के बाद उसने रैप पर और ज्यादा मेहनत शुरू की। दोस्त रचित के साथ लिखता था रैप: सुधीर बताते हैं कि दक्ष अपने दोस्त रचित के साथ मिलकर रैप लिखता था। दोनों ने साथ काम करते हुए अपने हुनर को निखारा और अब रचित उसके मैनेजर की भूमिका निभा रहे हैं। पिता के अनुसार, उनके बेटे ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। वह उसे आर्थिक रूप से ज्यादा मदद नहीं दे पाए, लेकिन दक्ष ने भी कभी पैसों की बड़ी मांग नहीं की। मां सरिता बताती हैं कि उनका बेटा शुरुआत से ही हर क्षेत्र में आगे रहने की कोशिश करता था। बहन दीक्षा के अनुसार, दक्ष में आत्मसम्मान की भावना है और वह अपने काम के दम पर आगे बढ़ना चाहता था।
उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान देवभूमि की जनता के दिलों पर एक अमिट छाप छोड़ी।
हरियाणा के झज्जर के रहने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नकुल ढुल उर्फ ‘मिट्ठू डॉन’ ने बिग बॉस-20 में वाइल्डकार्ड एंट्री ली है। हालांकि, घर में कदम रखते ही उनका महिलाओं पर की गई टिप्पणी का पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया, जिस पर उन्होंने सलमान खान के सामने सफाई दी। दरअसल, इसी साल फरवरी में नकुल का यह वीडियो सामने आया था, जिसमें वह कहते नजर आए थे- लड़कियों से डरते हो तुम, जो खुद तुमसे डरी पड़ी हैं, उनसे क्या डरना... लड़कियों से कौन डरता है यार? नीचा जेंडर है। लड़कियों से पहले मैं भी डरता था, पर बाद में मुझे पता लगा इनसे कौन डरे। ये खुद में से डरी पड़ी हैं। नकुल यहीं नहीं रुकते, वीडियो में वह आगे कहते हैं- किसी दिन लड़की के पीछे चल के देखोगे 11 बजे, तुमको पता लगेगा डर क्या होता है। चलना बस नॉर्मल, छेड़ना मत उसको, बस चल दो तेज-तेज, भाग लो एकदम से और आगे ओवरटेक कर लो। इतने में तो @@ निकल जाता है उनका। इस वीडियो के सामने आने के बाद नकुल की काफी आलोचना हुई थी। अब बिग बॉस-20 के घर में उन्होंने अपनी इीस पुरानी टिप्पणी पर सफाई दी। नकुल का कहना था कि उनकी बात को गलत संदर्भ में लिया गया। उन्होंने खुद को बहुत ज्यादा ‘प्रो-फेमिनिस्ट’ यानी 'महिलाओं को सम्मान करने वाला’ बताया। कौन हैं मिट्ठू डॉन और उनसे जुड़े विवाद जानिए…. अब बिग बॉस के घर में दी मामले में सफाई घर के अंदर आसिफ खान, काजी तौकीर और अन्य सदस्यों से बातचीत में नकुल ने कहा कि लोग उन्हें गलत समझते हैं। नकुल के मुताबिक लाइव स्ट्रीम के दौरान एक व्यक्ति ने सुपर चैट भेजकर कहा था कि उसे लड़कियों से बहुत डर लगता है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि लड़कियां खुद पुरुषों से इतनी डरी हुई हैं कि रात में चलते हुए कोई पीछे से दौड़कर निकल जाए तो भी वे सहम जाती हैं, ऐसे में पुरुष का लड़कियों से डरना कैसा? नकुल ने आगे कहा कि मेरा संदर्भ यह था कि तुमने ही उन्हें इतना डरा रखा है और तुम खुद डर रहे हो। महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उनका दावा है कि बात छोटी-सी थी, लेकिन लोगों ने इसे ऐसे फैलाया जैसे वे कह रहे हों कि लड़कियों के पीछे भागो। नकुल के अनुसार, जब यह वीडियो उन लोगों तक पहुंचा जो उन्हें नहीं देखते, तो मामला बिगड़ गया। उन्होंने खुद कोबहुत ज्यादा प्रो-फेमिनिस्ट बताया। नकुल ने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग उनके खिलाफ थे, उन्होंने इसे आगे बढ़ाकर नेगेटिव पीआर शुरू कर दिया। इसके बाद उन पर केस दर्ज हुआ, जिसकी सुनवाई अभी चल रही है। एविक्शन की खबरों पर सस्पेंस इस बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि घर में गुल्लू (कुशल तंवर) से कहासुनी के बाद नकुल की हाथापाई हुई और उन्हें शो से बाहर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि विवाद काजी तौकीर और स्काउट ओपी से जुड़े एक मुद्दे पर शुरू हुआ था। हालांकि, इन दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शो के मेकर्स या चैनल की ओर से भी कोई घोषणा नहीं की गई है। अब जानिए वे मीम्स, जिनसे नकुल मशहूर हुए… नकुल को ऑनलाइन असली पहचान जूस पिला दो मौसमी का वाले मीम से मिली। एक मजेदार वीडियो में वे सड़क किनारे जूस वाले के पास पहुंचकर नाटकीय अंदाज़ में मौसमी का जूस मांगते हैं और साथ में कहते हैं कि उनका मूड ठीक नहीं है। उनके बोलने का यह अनोखा अंदाज़ यूजर्स को खूब भाया। इस ऑडियो का इस्तेमाल मीम्स, रिएक्शन वीडियो और इंस्टाग्राम रील्स में खूब हुआ, जिससे वे इंटरनेट पर जाना-पहचाना चेहरा बन गए। इसके अलावा असला हम भी रखते हैं पहलवान, जब मर्जी फेट लिए वाला उनका डायलॉग भी उनके लोकप्रिय मीम्स में गिना जाता है। इन्हीं मीम्स की वजह से उनका नाम उन दर्शकों तक भी पहुंचा, जो उनके पूरे कंटेंट को नहीं देखते। --------------------- ये खबर भी पढ़ें…. हरियाणवी एक्ट्रेस की बिग बॉस में धमाकेदार एंट्री:सलमान खान ने देसी छोरी कहकर इंट्रोड्यूस कराया, बोले- अब असली ‘ड्रैगन मोड’ देखने को मिलेगा हरियाणा के पानीपत से निकलकर मनोरंजन की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस कनिका मान अब रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ के घर में पहुंच गई हैं। ग्रैंड प्रीमियर में सलमान खान ने उनका स्वागत किया। कनिका ने ‘शरारत’ गाने पर धमाकेदार परफॉर्मेंस के साथ शो की पहली कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री ली। (पूरी खबर पढ़ें)
पंचकूला ताऊ देवीलाल स्टेडियम के पीछे सोमवार रात पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। दोनों तरफ से 6 से 7 राउंड फायर हुए। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दो शार्प शूटरों के बाएं पैर में गोली लगी है, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को काबू कर लिया। घायल बदमाशों को इलाज के लिए पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान पंजाब के अमृतसर निवासी अर्शदीप (गांव बोरसी) और जुगराज (गांव रूमाणाचक) के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही डीसीपी क्राइम अमरिंदर सिंह मौके पर पहुंचे। सीन ऑफ क्राइम देखने के बाद वे सरकारी अस्पताल में पहुंचे। जहां पर बदमाशों के बारे में डिटेल जुटाई। अब समझिए, कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम
हरियाणा के पंचकूला में ससुराल की संपत्ति पर कब्जे के लिए एक बहू का हाई-वोल्टेज ड्रामा सामने आया है। मामला सेक्टर-21 का है, जहां बहू अपनी मां और दो युवकों के साथ जबरन 70 वर्षीय ससुर के घर में दाखिल हो गई। हैरानी की बात यह रही कि यह पूरी वारदात मौके पर मौजूद पुलिस के सामने ही होती रही। इस पूरी गुंडागर्दी का एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें में बहू पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद दरवाजा ढकेल कर जबरन अंदर घुसती दिखाई दे रही है। इस दौरान जब बीच-बचाव करने ननद आई, तो उनके साथ जमकर मारपीट और धक्का-मुक्की की गई। ननद को गंभीर हालत में सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस के चक्कर काटने और सीधे DCP से गुहार लगाने के बावजूद आरोपी बहू के खिलाफ अब तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई है। वहीं, जब इस मामले में आरोपी बहू से बात करने की कोशिश की गई, तो उसने शहर से बाहर होने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया। बहू-ससुर में धक्का-मुक्की के PHOTO यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… पीड़ित बुजुर्ग का आरोप, पुलिस ने नहीं दर्ज की एफआईआर पीड़ित राजेंद्र सैनी के अनुसार, उन्होंने पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत देकर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। लेकिन पुलिस का कहना है कि महज धक्का-मुक्की की एफआईआर दर्ज नहीं होती। उन्होंने लगातार अपनी पुत्रवधू से जान का खतरा बना हुआ है। चौकी इंचार्ज बोले- चल रही है मामले की जांच पंचकूला सेक्टर-21 चौकी इंचार्ज के अनुसार बुजुर्ग ने शिकायत देकर मारपीट के आरोप लगाए थे। जिसकी जांच चल रही है। पुलिस की मौजूदगी में मारपीट नहीं हुई थी। घटना की सूचना पर पुलिस भी पहुंची थी। जांच के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… बच्चों के विवाद में पति-पत्नी ने सास-बहू को पीटा, VIDEO:गुरुग्राम में 'भारत-पाकिस्तान' गेम में झगड़ा; पुलिस चौकी में समझौते का दबाव गुरुग्राम में बच्चों के बीच हुए छोटे झगड़े में दो परिवारों के बीच जमकर फाइट हुई। जिसमें पति-पत्नी ने दूसरे पक्ष की सास-बहू पर लात घूसों से हमला कर दिया। लड़ाई झगड़े की ये वारदात गली में लगे सीसीटीवी में कैद हो गई। पीड़ित परिवार ने जब पुलिस में इसकी शिकायत दी तो आरोपी ने समझौता का दबाव बनाया। (पूरी खबर पढ़ें)
हरियाणा के रहने वाले पूर्व भाजपा विधायक अतर सिंह भड़ाना की राजस्थान में हुई हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, पूर्व विधायक के शव का 2 घंटे तक पोस्टमार्टम चला। शुरुआती जांच में सिर पर किसी भारी वस्तु से चोट के निशान मिले हैं। हाथ-पैर टूटे हुए थे और शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें लगी थीं। भड़ाना के परिवार की ओर से इस मामले में 35 से 40 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करवाई गई है। इसमें पूरे विवाद का भी जिक्र है। बताया गया है कि खनन साइट के रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था। 2 महीने पहले ही हाईकोर्ट ने भड़ाना के पक्ष में फैसला दिया था। ग्रामीण पहले इसी रास्ते से अवैध तरीके से पत्थर निकालते थे, लेकिन भड़ाना ने उस पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। परिवार के मुताबिक, अतर सिंह इस वारदात के होने से चार दिन पहले अपने पैतृक गांव पाली में थे। वे यहां अपने पूरे परिवार के साथ राधा स्वामी सत्संग में भाग लेने के लिए आए थे। जब उन्हें क्रेशर खनन साइट पर कर्मचारियों और गांव के लोगों के झगड़े का पता चला, तो वह परिवार को लेकर वापस राजस्थान लौट गए। इसके बाद उन्होंने मामले को सुलझा दिया था, लेकिन अब इसी विवाद में उनकी हत्या कर दी गई। पोस्टमॉर्टम के बाद सोमवार की शाम को उनके पैतृक गांव में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके बेटे अर्जुन भड़ाना ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। परिवार ने राजस्थान पुलिस को हत्या के बारे में ये बातें बताई… अंतिम संस्कार के वक्त लोगों ने किया पूर्व विधायक को याद… पूर्व विधायकी की हत्या पर किस नेता ने क्या कहा…
जबलपुर जिला मुख्यालय से करीब 62 किलोमीटर दूर झलोन ग्राम पंचायत की महिला सरपंच लक्ष्मीबाई और उनके पति अशोक सिंह के घर नहीं लौटने से परिवार परेशान है। परिजनों के मुताबिक, दोनों 8 अक्टूबर को पंचायत में कथित गड़बड़ियों की शिकायत करने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के पास जबलपुर गए थे। 9 अक्टूबर को उन्होंने बरगी विधानसभा के पूर्व विधायक संजय यादव से भी मुलाकात कर शिकायत की। इसके बाद 10 अक्टूबर को बेटे ने फोन लगाया तो पिता का मोबाइल बंद मिला। सोमवार तक दोनों के घर नहीं लौटने से परिवार की चिंता बढ़ गई। हालांकि गांव से पता चला है कि सरपंच के बेटे ने उनके किसी रिश्तेदार के यहां होने की बात भी कही है। लक्ष्मीबाई ने पंचायत सचिव पुष्पराज सिंह पर विकास कार्यों में गड़बड़ी, राशि निकालने के लिए ओटीपी लेने और विरोध करने पर धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके पति का दावा है कि पंचायत से 30 से 40 लाख रुपए निकल चुके हैं, लेकिन गांव में विकास कार्य नहीं हुए। दैनिक भास्कर की टीम जब झलोन पहुंची तो परिवार ने बताया कि सरपंच और उनके पति अब तक घर नहीं लौटे हैं। जिला पंचायत के डिप्टी सीईओ पीएल यादव ने शिकायत को गंभीर बताते हुए जांच के लिए जनपद पंचायत शहपुरा की टीम भेजने की बात कही है। क्या है कथित घोटाला? इन बिंदुओं पर उठे सवाल 30 से 40 लाख रुपए निकालने का दावा: सरपंच के पति अशोक सिंह के मुताबिक, पंचायत से लाखों रुपए निकाले गए, लेकिन गांव में विकास कार्यों के नाम पर बहुत कम काम हुआ। फर्जी बिल बनवाने का आरोप: अशोक सिंह का आरोप है कि सचिव पुष्पराज सिंह ने गांव के व्यापारी संदीप जैन के साथ मिलकर सड़क, नाली और भवन निर्माण के लिए लोहा, सीमेंट व अन्य सामग्री खरीदने के फर्जी बिल तैयार कराए। ओटीपी लेकर राशि निकालने का आरोप: लक्ष्मीबाई और उनके पति का कहना है कि कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर सचिव पहले उनका मोबाइल लेकर ओटीपी हासिल करता था और फिर सरकारी राशि निकालता था। मोबाइल छीनने और धमकाने की शिकायत: परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने मोबाइल देना बंद किया तो सचिव ने कथित तौर पर जबरन मोबाइल छीनना शुरू कर दिया। विरोध करने पर धमकियां भी दी गईं। खर्च का हिसाब मांगा: सरपंच का कहना है कि पंचायत से राशि निकलने के बावजूद उन्हें यह जानकारी नहीं मिली कि पैसा कहां और किन कामों पर खर्च किया गया। ये सभी आरोप सरपंच और उनके परिवार की ओर से लगाए गए हैं। राशि के वास्तविक उपयोग, बिलों की सत्यता और कथित अनियमितताओं की पुष्टि जांच और पंचायत के रिकॉर्ड से होना बाकी है। साढ़े चार साल में सड़क के अलावा कोई बड़ा काम नहीं होने का दावा लक्ष्मीबाई वर्ष 2022 में पंचायत चुनाव के दौरान निर्विरोध सरपंच चुनी गई थीं। उनका कहना है कि पिछले साढ़े चार साल में गांव में एक लंबी सड़क के अलावा कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ। गांव में सड़क और पानी की समस्या बनी हुई है। पंचायत भवन की हालत भी जर्जर है, जबकि पानी की टंकी बनने के बावजूद घरों तक नियमित पानी नहीं पहुंच रहा। लक्ष्मीबाई के पति अशोक सिंह का कहना है कि गांव की स्थिति साढ़े चार साल पहले जैसी ही है। पंचायत से लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सचिव पंचायत के कामकाज पर नियंत्रण रखता है और सरपंच की आपत्तियों को नजरअंदाज करता है। बेटे ने कहा- माता-पिता शिकायत करने गए थे, अब तक नहीं लौटे लक्ष्मीबाई के बेटे अब्बू सिंह के मुताबिक, उनके माता-पिता 8 अक्टूबर को शिकायत करने जबलपुर गए थे। फोन पर आखिरी बार हुई बातचीत में उन्होंने बताया था कि कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को शिकायत दे दी है और कुछ देर बाद वापस निकलेंगे। लेकिन वे घर नहीं पहुंचे। अब्बू का कहना है कि उनकी मां मोबाइल नहीं रखती हैं और पिता का फोन बंद आ रहा है। परिवार को यह भी चिंता है कि पंचायत में कथित गड़बड़ियों को लेकर सचिव से विवाद चल रहा था और पहले धमकियां भी दी गई थीं। पंचायत भवन पर सालों से ताला, ग्रामीणों ने भी उठाए सवाल ग्रामीण राधे झारिया का कहना है कि पंचायत भवन सालों से बंद पड़ा है। भवन पर लगे ताले में जंग लग चुकी है और अंदर गंदगी है। उनके मुताबिक, गांव में विकास कार्यों को लेकर नियमित बैठकें भी नहीं होतीं और सचिव कभी-कभार ही दिखाई देते हैं। राधे झारिया का आरोप है कि महिला सरपंच के कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर सचिव पंचायत का कामकाज अपने हाथ में रखता है। उन्होंने बताया कि गांव में कई जगह सड़क नहीं है, नालियां नहीं बनी हैं और पानी की टंकी से घरों तक आपूर्ति नहीं होती। ऐसे में ग्रामीणों को मंदिर के बोर से पानी भरना पड़ता है। ग्रामीण अब सूचना के अधिकार के तहत पंचायत में हुए कार्यों, खर्च की गई राशि और निर्माण सामग्री की खरीदी का ब्योरा जुटाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पंचायत में कितना काम हुआ और राशि कहां खर्च की गई। पूर्व विधायक ने भी उठाया मामला बरगी विधानसभा के पूर्व विधायक संजय यादव ने लक्ष्मीबाई की शिकायत का समर्थन करते हुए कहा कि क्षेत्र की कई पंचायतों में महिला और आदिवासी सरपंचों के कामकाज में सचिवों के हस्तक्षेप की शिकायतें सामने आती हैं। उनका आरोप है कि जो सरपंच सचिव के तरीके से काम नहीं करते, उन्हें परेशान किया जाता है। उन्होंने झलोन के अलावा शहपुरा और बेलखेड़ा क्षेत्र की पंचायतों में भी ऐसी समस्याएं होने की बात कही। सचिव ने फोन नहीं उठाया, जांच के लिए टीम भेजेगा विभाग पंचायत सचिव पुष्पराज सिंह से आरोपों पर पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। जिला पंचायत के डिप्टी सीईओ पीएल यादव ने कहा कि शिकायत गंभीर है और इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने बताया कि जनपद पंचायत शहपुरा की टीम को मौके पर भेजा जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… महिला सरपंच की शिकायत...सचिव मोबाइल छीनकर OTP डालता है सचिव मेरा मोबाइल छीन लेता है। गांव के विकास का सरकारी पैसा कब आता है और कब निकल जाता है, मुझे पता ही नहीं चलता। वह घर आकर मोबाइल लेता है और उसमें आने वाला ओटीपी डालकर चला जाता है।यह कहना है झलौन गांव की महिला सरपंच लक्ष्मी बाई का। निर्विरोध चुनी गई लक्ष्मी बाई कहती हैं कि सरपंच बने चार साल से ज्यादा हो गए।पूरी खबर पढ़ें
मध्यप्रदेश के राजगढ़ शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे-52 के पास घने जंगलों के बीच ऊंची टेकरी पर मां जालपा विराजित हैं। माता का यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और मान्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां शादी के लिए शुभ मुहूर्त नहीं निकलने पर परिवार मां के दरबार में पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी ज्वार या गेहूं के दानों की विशेष पद्धति से गणना कर विवाह की तारीख निकालते हैं। मंदिर में मिलने वाली इस जानकारी को ‘पाती’ कहा जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि माता के दरबार से मिली पाती के अनुसार विवाह करना शुभ होता है। मां जालपा के मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के दौरान यहां विशेष भीड़ उमड़ती है। राजगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के भक्त पदयात्रा कर माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और चुनरी चढ़ाकर आशीर्वाद लेते हैं। मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलावा राजस्थान और गुजरात से भी श्रद्धालु यहां आते हैं। करीब एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़कर माता के दरबार तक पहुंचने वाले भक्तों के लिए मंदिर की आस्था और परंपराएं विशेष महत्व रखती हैं। ज्वार-गेहूं के दानों से निकलती है विवाह की पाती मां जालपा मंदिर की सबसे खास परंपराओं में विवाह की पाती निकालना शामिल है। कई बार परिवारों को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं मिल पाता। ऐसी स्थिति में वे माता के दरबार पहुंचकर पुजारी से पाती निकलवाते हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार, माता के चरणों में अर्पित ज्वार या गेहूं के दानों की विशेष तरीके से गणना की जाती है। इसी गणना के आधार पर विवाह का दिन तय किया जाता है। मुहूर्त निकलने के बाद पुजारी एक विशेष प्रपत्र पर विवाह की तारीख और उससे जुड़ी जानकारी लिखकर परिवार को देते हैं। इसे पाती या लग्नपत्री कहा जाता है। परिवार इसी के आधार पर विवाह की तैयारी करते हैं। मंदिर की मान्यता के अनुसार, यह पाती परिवार के लिए शुभ मुहूर्त मानी जाती है। यही वजह है कि विवाह का समय तय करने में परेशानी आने पर भी लोग मां जालपा के दरबार पहुंचते हैं। इस परंपरा में विवाह के बाद भी माता के प्रति श्रद्धा जताने का विधान है। शादी संपन्न होने के बाद नवदंपती दोबारा मंदिर पहुंचते हैं। वे विवाह के लिए मिली पाती माता के चरणों में अर्पित करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं। इस तरह पाती निकलवाने से लेकर विवाह के बाद माता के दर्शन करने तक की परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल तारीख तय करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि माता के प्रति आस्था और विश्वास से जुड़ी परंपरा है। 1100 साल पुरानी प्रतिमा, भक्त ज्वालानाथ की तपस्या से जुड़ी मान्यता मंदिर में स्थापित मां जालपा की प्रतिमा को लेकर मान्यता है कि यह करीब 1100 साल पुरानी है। प्रचलित कथा के अनुसार, भक्त ज्वालानाथ ने यहां तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें दर्शन दिए। इसके बाद यहां पीपल के पेड़ के नीचे माता की प्रतिमा मिलने की बात कही जाती है। बाद में जालपा पहाड़ी पर पत्थर से निर्मित सिंह पर सवार माता की प्रतिमा को चबूतरे पर स्थापित किया गया। मंदिर की प्रतिमा और उसके प्रकट होने से जुड़ी यह मान्यता पीढ़ियों से श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित है। माता के दर्शन के लिए आने वाले भक्त प्रतिमा के सामने पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। नवरात्र के दिनों में विशेष पूजा और दर्शन के लिए यहां भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। आसपास के क्षेत्रों के लोग भी माता के दर्शन को अपनी धार्मिक परंपरा का हिस्सा मानते हैं। मंदिर की देखरेख को लेकर भी समय के साथ व्यवस्था बदलती रही है। पुरानी जानकारी के अनुसार, प्रतिमा की स्थापना के बाद मंदिर की देखरेख राजगढ़ स्टेट के उमठवंशीय राजाओं के जिम्मे रही। बाद में प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने इसकी जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में मंदिर की देखरेख ट्रस्ट करता है। मंदिर से जुड़ी पुरानी मान्यताओं और परंपराओं के कारण यह स्थान राजगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। दिन में बनता था मंदिर, रात में गिर जाता था मां जालपा मंदिर से जुड़ी एक और प्रचलित कथा मंदिर निर्माण को लेकर है। मान्यता के अनुसार, पहले भील राजाओं ने माता को अपनी कुलदेवी मानकर यहां मंदिर बनवाने का प्रयास किया था। दिन में मंदिर का निर्माण कराया जाता, लेकिन रात में निर्माण गिर जाने की बात कही जाती है। इसके बाद राजपूत राजाओं के समय भी मंदिर निर्माण को लेकर ऐसी ही कथा प्रचलित रही। कहानी के अनुसार, कई प्रयासों के बाद भी मंदिर निर्माण नहीं हो सका। बाद में जनसहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया। यह कथा मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं का हिस्सा है और लंबे समय से लोगों के बीच सुनाई जाती रही है। हालांकि, इस कथा को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित घटना के बजाय प्रचलित मान्यता के रूप में ही देखा जाता है। मंदिर की सेवा परंपरा भी पुरानी है। मंदिर के सेवक विष्णुनाथ पंडा के अनुसार, उनका परिवार 11 पीढ़ियों से माता की सेवा करता आ रहा है। आज भी भीलवंशीय परिवार की पीढ़ियां माता की सेवा से जुड़ी हैं। इस परंपरा के चलते मंदिर में पूजा-अर्चना और सेवा का काम पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है। माता के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर की प्राचीनता के साथ यह सेवा परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। उल्टा सातिया बनाकर मांगते हैं मनोकामना मां जालपा मंदिर में मनोकामना मांगने की एक अलग परंपरा भी है। श्रद्धालु अपनी मुराद पूरी होने की कामना के साथ मंदिर परिसर में उल्टा स्वास्तिक यानी सातिया बनाते हैं। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर वे दोबारा माता के दरबार में पहुंचते हैं और गोबर से सीधा सातिया बनाकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में ऐसे सातिये दिखाई देते हैं। श्रद्धालु इन्हें अपनी मनोकामना और माता से जुड़े विश्वास के प्रतीक के रूप में बनाते हैं। मन्नत पूरी होने पर कई भक्त माता का विशेष श्रृंगार करवाते हैं, भंडारा कराते हैं और दान-पुण्य करते हैं। इस तरह माता के प्रति आभार जताने के लिए अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं। मंदिर में बने उल्टे और सीधे सातिये श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी इस परंपरा को दर्शाते हैं। यहां आने वाले भक्त पूजा-अर्चना के साथ अपनी मनोकामना व्यक्त करते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद दोबारा मंदिर पहुंचकर सातिया बनाने की परंपरा के कारण मंदिर परिसर में ऐसे निशान बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह माता के प्रति श्रद्धा जताने का एक तरीका है। नवरात्र में पदयात्रा कर चुनरी चढ़ाते हैं भक्त मां जालपा मंदिर में सामान्य दिनों में भी श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्र में यहां भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। राजगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पदयात्रा कर माता के दर्शन के लिए आते हैं। भक्त चुनरी चढ़ाते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में दर्शन करने आने वालों में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूसरे जिलों और राज्यों के लोग भी शामिल रहते हैं। मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान और गुजरात से भी श्रद्धालु मां जालपा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की प्रसिद्धि का एक कारण विवाह की पाती निकालने की परंपरा है, तो दूसरा कारण प्रतिमा और मंदिर से जुड़ी पुरानी मान्यताएं हैं। मनोकामना के लिए उल्टा सातिया बनाने और पूरी होने पर सीधा सातिया बनाने की परंपरा भी भक्तों को आकर्षित करती है। नवरात्र के दौरान राजगढ़ और आसपास के इलाकों में माता के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु पदयात्रा को विशेष महत्व देते हैं। भक्त माता के दरबार तक पहुंचकर चुनरी चढ़ाते हैं और पूजा करते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। सालभर चलने वाली पूजा-अर्चना और सेवा परंपरा नवरात्र में और अधिक दिखाई देती है। सड़क और सीढ़ियों से पहुंच सकते हैं मंदिर मां जालपा का मंदिर राजगढ़ शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे-52 के पास स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग के साथ सीढ़ियों का रास्ता भी है। टेकरी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। घने जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर आसपास के क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर की सुरक्षा के लिए यहां पुलिस चौकी भी स्थापित है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से मंदिर और पहुंच मार्ग पर लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। मंदिर की देखरेख ट्रस्ट के जिम्मे है। श्रद्धालु यहां दर्शन, पूजा-अर्चना और मनोकामना के लिए पहुंचते हैं। मां जालपा मंदिर की पहचान केवल इसकी प्राचीन प्रतिमा या नवरात्र में जुटने वाली भीड़ तक सीमित नहीं है। विवाह के लिए पाती निकलवाने की परंपरा, उल्टा और सीधा सातिया बनाने की मान्यता, मंदिर निर्माण की प्रचलित कथा और 11 पीढ़ियों से चली आ रही सेवा परंपरा इसे विशिष्ट बनाती हैं। यही वजह है कि राजगढ़ के साथ-साथ दूसरे जिलों और राज्यों से भी श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचते हैं। संबंधित खबर भी पढ़ें… देवास में तुलजा भवानी के 3 स्वरूप में दर्शन; चामुंडा को मीठे भजिए का भोग देवास के टेकरी मंदिर में यूं तो सालभर भीड़ रहती है, लेकिन नवरात्रि में भक्तों की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। मां तुलजा भवानी और चामुंडा के इस दरबार में कोई सुख-समृद्धि, तो कोई संतान की कामना लेकर आता है। लोगों का कहना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना मां जरूर स्वीकार करती हैं। पूरी खबर पढ़ें
इंदौर के विजयनगर क्षेत्र में फाइबर का माल सस्ते दाम पर देने का झांसा देकर दो ठगों ने एक व्यापारी से 25 लाख रुपए की हड़प लिए। उन्होंने व्यापारी के भाई से नकदी लेकर ब्रीफकेस में रखवाई और फिर उसे खाली बैग थमा दिया। होटल के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की है। उनकी तलाश में टीमें रवाना की गई हैं। विजयनगर पुलिस के मुताबिक, अंकित फाइबर के नाम से दुकान चलाने वाले अंकुर शर्मा की 16 सितंबर को रामचंद्र मालिक और अनिल कुमार नाम के व्यक्तियों से मोबाइल पर बातचीत हुई थी। आरोपियों ने उन्हें फाइबर का माल दिलाने का झांसा दिया। इसके बाद 27 सितंबर को अंकुर सौदे के सिलसिले में मुंबई के एक हाईवे स्थित होटल में आरोपियों से मिलने पहुंचे। वहां रेट तय होने के बाद आरोपियों ने 11 अक्टूबर को इंदौर में माल की डिलीवरी देने का वादा किया। होटल वॉव क्रिसेंट में दिया वारदात को अंजाम 10 अक्टूबर को दोनों आरोपी इंदौर पहुंचे और विजयनगर स्थित होटल वॉव क्रिसेंट के कमरा नंबर 617 में रुके। 11 अक्टूबर को तय सौदे के मुताबिक अंकुर शर्मा का भाई संतोष तिवारी 25 लाख रुपए नकद लेकर होटल के कमरे में पहुंचा। आरोपियों ने संतोष से रुपए लेकर ब्रीफकेस में रखे। इसके बाद उन्होंने कहा कि वे एक घंटे के भीतर ट्रांसपोर्ट नगर में माल की डिलीवरी देंगे और रुपए वहीं देने होंगे। रुपए सुरक्षित रखने का झांसा देकर उन्होंने ब्रीफकेस संतोष को वापस थमा दिया और खुद कमरे के अंदर चले गए। लेदर बैग और छोटी डायरियां मिलीं आरोपियों में से एक संतोष को होटल के बाहर तक छोड़ने भी आया। इसके बाद संतोष ब्रीफकेस दुकान पर रखकर ट्रांसपोर्ट नगर के लिए निकल गया। इंद्रप्रस्थ टावर के पास संदेह होने पर उसने आरोपियों के मोबाइल नंबर पर कॉल किया, लेकिन फोन बंद मिला। इसके बाद अंकुर ने परिजनों से ब्रीफकेस चेक करने को कहा। उसमें लेदर बैग और छोटी डायरियां मिलीं, जबकि 25 लाख रुपए गायब थे। इसके बाद अंकुर और संतोष होटल वॉव क्रिसेंट पहुंचे, लेकिन दोनों आरोपी वहां नहीं मिले। उन्होंने आसपास भी तलाश की। सोमवार को पीड़ित ने विजयनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने होटल के सीसीटीवी फुटेज निकलवाकर आरोपियों की पहचान की और उनकी तलाश में टीमें रवाना कीं। पुलिस ने दर्ज की FIR अंकुर शर्मा की शिकायत पर विजयनगर थाना पुलिस ने रामचंद्र मालिक और अनिल कुमार के खिलाफ 25 लाख रुपए की धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज किया है।
भोपाल में 5 दिवसीय अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव-2026 का आगाज मंगलवार से होगा। आयोजन से पहले ग्राउंड रिहर्सल में 4000 से ज्यादा प्रतिभागियों ने गरबा, डांडिया और तीन ताली की प्रैक्टिस की। गुजराती पारंपरिक गीतों की धुन पर प्रतिभागियों ने मास्टर्स की काउंटिंग के साथ डांस किया। इस दौरान उन्होंने लगातार डांस कर अपनी तैयारी और एंड्योरेंस भी परखा। खास बात यह है कि प्रतिभागियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए गरबा सर्किल का आकार बढ़ाया गया है। पहले यह 100 फीट का था, जिसे इस साल बढ़ाकर 110 फीट कर दिया है। गरबा, डांडिया और तीन ताली की प्रैक्टिस पहली ग्राउंड रिहर्सल में प्रतिभागियों ने गरबा के अलग-अलग स्टेप्स के साथ डांडिया और तीन ताली का अभ्यास किया। संगीत की बीट और मास्टर्स की गिनती के मुताबिक सभी ने एक साथ डांस किया। रिहर्सल के दौरान कुछ प्रतिभागी जल्दी थक गए, तो कुछ आखिरी बीट तक लगातार डांस करते रहे। इस अभ्यास के जरिए प्रतिभागियों ने महोत्सव के दौरान लंबे समय तक डांस करने की अपनी क्षमता को परखा। ग्राउंड रिहर्सल के दौरान प्रतिभागियों को गरबा महोत्सव में शामिल होने से जुड़े कायदे, नियम भी बताए गए। रिहर्सल के साथ प्रतिभागियों की तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। अब महोत्सव शुरू होने में एक दिन बाकी है। ऑनलाइन या निर्धारित दुकानों से ही खरीदें पास अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव में प्रवेश के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पास की व्यवस्था की गई है। आयोजन में प्रवेश केवल वैध पास के जरिए मिलेगा। एक कपल पास पर दो लोगों को प्रवेश दिया जाएगा, जिनमें एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। ऐसे में महोत्सव में शामिल होने की योजना बना रहे लोगों को पास खरीदते समय इन शर्तों का ध्यान रखना होगा। गरबा ग्राउंड पर भी 2 ऑफलाइन पास काउंटर जिन लोगों ने पहले से पास नहीं खरीदे हैं, उनके लिए अभिव्यक्ति गरबा ग्राउंड पर भी ऑफलाइन पास के दो स्टॉल बनाए जाएंगे। यहां से लोग मौके पर कपल पास खरीद सकेंगे। इसके अलावा क्यूआर कोड के माध्यम से ऑनलाइन भी एंट्री पास प्राप्त किए जा सकते हैं। महोत्सव में प्रवेश के लिए आयोजकों द्वारा निर्धारित पास व्यवस्था का पालन करना जरूरी होगा। असुविधा होने पर इन नंबरों पर करें संपर्क गरबा महोत्सव को लेकर नगरीय यातायात पुलिस ने वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और पुलिसकर्मियों के निर्देशों के अनुसार चलने की अपील की है। यातायात संबंधी परेशानी होने पर हेल्पलाइन नंबर 0755-2677340 और 0755-2443850 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा व्हाट्सएप नंबर 7587602055 पर भी समस्या की जानकारी दी जा सकती है। पूरी खबर यहां पढ़ें...
मध्य प्रदेश में 15 और 16 अक्टूबर को आंधी, गरज-चमक और बारिश की संभावना है। ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के 9 जिलों में असर देखने को मिलेगा। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहेगा। मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक- ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश का अनुमान है। भोपाल और इंदौर में रात में ठंडक बनी रहेगी, जबकि उज्जैन, जबलपुर समेत अन्य शहरों में भी ऐसा ही मौसम रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) का असर खत्म हो गया, लेकिन अब नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। उत्तरी हिस्से में एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) और नए चक्रवात की वजह से प्रदेश में असर देखने को मिलेगा। मानसून लौट चुका, बारिश जारी प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही मानसून लौट चुका है, लेकिन सिस्टम एक्टिव होने से बारिश का दौर फिर से शुरू हुआ। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी हिस्से के जिलों में आंधी-बारिश का असर देखा गया। हालांकि, रविवार और सोमवार को कहीं भी आंधी-बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम साफ हो गया और धूप खिल गई। वहीं, रात में ठंडक है। वहीं, कई जिलों में बारिश भी हो रही है। इस बार प्रदेश में 100 दिन तक दक्षिण-पश्चिम मानसून एक्टिव रहा है। इस साल सामान्य से कम हुई बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी, 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है। इन 25 जिलों में कोटा फुल भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर। बाकी 30 जिलों में कम बारिश हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम इस बार जून सूखा रहा, इस वजह से आंकड़ा कम मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। जुलाई, अगस्त और सितंबर का कोटा तो फुल रहा, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह है कि इस साल प्रदेश में 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। अब जानिए, अक्टूबर में कब, कैसा रहा 5 बड़े शहरों का मौसम… भोपाल: 2012 में रिकॉर्ड 38 डिग्री रहा था तापमान भोपाल में अक्टूबर का सामान्य औसत अधिकतम तापमान 32.7 और न्यूनतम तापमान 19.1 डिग्री सेल्सियस रहा है। पिछले 10 साल में तापमान 32 डिग्री के पार ही रहा। साल 2017 में 36.4 डिग्री तक पहुंच चुका है। 2012 में पारा रिकॉर्ड 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वहीं, न्यूनतम तापमान 11.7 डिग्री 12 अक्टूबर 2012 को रहा था। इस महीने बारिश का भी ट्रेंड है। साल 1955 में पूरे महीने साढ़े 7 इंच बारिश हुई थी। 6 अक्टूबर 2009 को 24 घंटे में रिकॉर्ड 5 इंच पानी गिरा था। पिछले साल पूरे महीने 3.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इंदौर: 25 साल पहले रिकॉर्ड 6.2 डिग्री रहा था न्यूनतम तापमान इंदौर में भी तीनों मौसम देखने को मिलते हैं। पिछले 10 साल 2016 से 2025 की बात करें, तो दिन में तीन बार 35 डिग्री सेल्सियस तापमान रह चुका है। रात का टेम्प्रेचर 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में रात में ठंड का असर बढ़ जाता है। इस महीने इंदौर में बारिश होने का ट्रेंड है। साल 2013 में सबसे ज्यादा 4 इंच बारिश दर्ज की गई थी। पिछले साल 1 इंच पानी गिरा। इंदौर में 22 अक्टूबर 2000 को दिन का तापमान 37.8 डिग्री तक पहुंच गया था। यह अब तक का रिकॉर्ड है। 25 साल पहले 22 अक्टूबर 1999 को रात का तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। यह अब तक की सबसे ठंडी रात रही थी। वर्ष 1985 में अक्टूबर महीने में 9 इंच से ज्यादा बारिश हो गई थी। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश 9 अक्टूबर 1985 को 6.19 इंच हुई थी। पिछले साल पूरे महीने 5.1 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी। ग्वालियर: 38 डिग्री पार पहुंच जाता है दिन का तापमान ग्वालियर में अक्टूबर महीने में भी दिन में तेज गर्मी पड़ती है। वर्ष 2015 में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। पिछले 10 साल में अमूमन तापमान 35 डिग्री से ज्यादा ही रहा। 27 अक्टूबर 1994 को दिन का तापमान 40.1 डिग्री दर्ज किया गया था, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। यहां का औसत अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री और औसत न्यूनतम तापमान 19.3 डिग्री सेल्सियस है। यहां जिस तरह से गर्मी पड़ती है, उसी तरह से ठंड का असर भी रहता है। 2018 में तापमान 11.9 डिग्री दर्ज किया गया था। 31 अक्टूबर 1952 को न्यूनतम तापमान 8.9 डिग्री रहा था। 10 में से 8 साल बारिश का दौर भी रहा। 2022 में 5 इंच, 2024 में 4.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी। सर्वाधिक मासिक बारिश वर्ष 1956 में 8.68 इंच हुई थी। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश 13 अक्टूबर 1955 को हुई थी। इस दिन 6 इंच पानी बरस गया था। जबलपुर: 74 साल पहले सबसे सर्द रही थी रात जबलपुर में अक्टूबर महीने में औसत अधिकतम तापमान 31.8 और औसत न्यूनतम तापमान 20.3 डिग्री सेल्सियस रहता है। हालांकि, पिछले 10 साल में दिन-रात का पारा इससे अधिक ही रहा। 5 अक्टूबर 1966 को अधिकतम तापमान 37.9 डिग्री दर्ज किया गया था, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। 30 अक्टूबर 1952 को न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री रहा था। वर्ष 1916 में सबसे ज्यादा 10.46 इंच मासिक बारिश हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 5 इंच बारिश 4 अक्टूबर 1977 को हुई थी। पिछले साल भी पूरे महीने 7 इंच बारिश हुई थी। उज्जैन: 10 में से 2 साल बारिश नहीं हुई उज्जैन में पिछले 10 में से 2 साल अक्टूबर महीने में बारिश नहीं हुई। वर्ष 2009 में सर्वाधिक मासिक बारिश 4.46 इंच हुई थी। 24 घंटे में सबसे ज्यादा 5 अक्टूबर 2009 को हुई थी। इस दिन 92 मिमी यानी 3.62 इंच बारिश हो गई थी। दूसरी ओर, 5 अक्टूबर 2002 को दिन का तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो अब तक का सबसे अधिक है। 29 अक्टूबर 1983 को न्यूनतम तापमान 8.1 डिग्री रहा था।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के चौथना गांव में जादू-टोने के शक में मां-बेटे की हत्या कर दी गई। बेटी पर भी जानलेवा हमला किया गया। इस मामले में पुलिस ने 3 आरोपियों को अरेस्ट किया है। मृतक और आरोपी एक ही परिवार के है। पुलिस के मुताबिक केशर सोनकर को शक था कि उसके देवर सुखी की पत्नी कमला सोनकर जादू-टोना करती है, जिसकी वजह से उसके परिवार में लोग बीमार हो रहे हैं। इसी शक में आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर कमला सोनकर और उनके बेटे खुमेन्द्र सोनकर की हत्या कर दी, जबकि बेटी ममता गंभीर रूप से घायल हो गई। वहीं आरोपियों ने वारदात के बाद सबूत मिटाने के लिए घटना के समय पहने गए कपड़े और हथियार के लकड़ी के बेंट को जलाने की कोशिश की थी। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल लोहे की कुल्हाड़ी और बाइक भी बरामद की है। यह मामला डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र का है। अब जानिए पूरा मामला जानकारी के मुताबिक कमला सोनकर का परिवार चौथना गांव में रहता है और सब्जी बेचने का काम करता है। शुक्रवार 9 अक्टूबर की रात आरोपी घर में घुस गए। इसके बाद आरोपियों ने कमला पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। फिर बेटे हमेंद्र सोनकर (21) पर भी हमला किया। मर्डर के बाद भागा आरोपी इस हमले में मां और बेटे की मौत हो गई, जबकि बेटी ममता सोनकर गंभीर रूप से घायल हो गई। वारदात के बाद आरोपी मौके से भाग निकला। ग्रामीणों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने घायल ममता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगढ़ में भर्ती कराया। वारदात के समय बाहर था पति उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उसे रायपुर रेफर कर दिया। वारदात के समय कमला सोनकर का पति घर से बाहर था। घर में मां-बेटे के शव मिले, बेटी गंभीर हालत में पड़ी थी 9 अक्टूबर को सुखी अपने घर पहुंचा। घर के अंदर उसकी पत्नी कमला सोनकर और बेटा खुमेन्द्र सोनकर मृत अवस्था में मिले। वहीं, बेटी ममता सोनकर गंभीर रूप से घायल पड़ी थी। घर का यह मंजर देखकर परिवार और गांव में हड़कंप मच गया। जांच के लिए बनाई गई संयुक्त टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच टीम बनाई। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और वहां से मिले सबूतों के आधार पर जांच शुरू की। इसके साथ ही परिवार से जुड़े लोगों और संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान पुलिस को परिवार में चल रहे विवाद और जादू-टोने के शक की बात पता चली। पुलिस ने घटना के बाद से फरार चल रहे बड़े भाई के बेटे हेमंत कुमार सोनकर (36) पर संदेह के आधार पर उसकी तलाश शुरू की। पूछताछ में सामने आई 2 अन्य आरोपियों की भूमिका पुलिस ने हेमंत कुमार सोनकर को 12 अक्टूबर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर उसके भाई सोनू सोनकर (34) और उसकी मां केशर सोनकर (55) की भूमिका भी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की जांच के अनुसार, परिवार में कुछ सदस्यों की तबीयत खराब रहने को लेकर जादू-टोना किए जाने का शक था। इसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। वारदात के बाद कपड़े और हथियार का बेंट जलाने की कोशिश पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने की भी कोशिश की। वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार लोहे की कुल्हाड़ी के लकड़ी के बेंट और घटना के समय पहने गए कपड़ों को जलाने का प्रयास किया। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल लोहे की कुल्हाड़ी और मोटरसाइकिल बरामद की। इसके अलावा, कपड़ों और हथियार के लकड़ी के बेंट को जलाने के प्रयास से जुड़े अवशेष भी मिले हैं। पुलिस का कहना है कि घटना के बाद सबूत मिटाने और आरोपियों के बीच साजिश से जुड़े तथ्यों के आधार पर मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) और 238 भी जोड़ी गई है। ………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… डोंगरगढ़ में घर में घुसकर मां-बेटे की हत्या:बेटी पर भी धारदार हथियार से हमला, हालत गंभीर; ग्रीन कॉरिडोर बनाकर रायपुर रेफर किया गया छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में डबल मर्डर का मामला सामने आया है। आरोपी ने घर में घुसकर मां और बेटे पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में दोनों की मौत हो गई, जबकि बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई। वारदात के बाद आरोपी भाग निकला। हमले में घायल बेटी को प्राइमरी ट्रीटमेंट दिया गया। इसके बाद ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उसे रायपुर रेफर किया गया। जहां उसका इलाज जारी है। पढ़ें पूरी खबर…
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और सहारनपुर के डीएम अरविंद चौहान को क्रिमिनल बोलने वाली हुदा जरीवाला फिर से विवादों में घिर गई है। उन्होंने अब अपने धर्म को लेकर हो बयान दे दिया है। जिसको लेकर देवबंदी उलेमा कारी इसहाक गोरा ने उनको नसीहत दी है। दरअसल, हुदा जरीवाला का एक पॉडकास्ट में दिया गया बयान धार्मिक चर्चा का विषय बन गया है। 9 अक्टूबर को दिए गए बयान में हूदा जरीवाला एंकर के सवाल का जवाब देते हुए कहती नजर आईं, “मर्द को जहां सत्तर हूरें मिलेंगी, तो औरतों को भी सत्तर मर्द मिलेंगे।” उनके इस बयान को लेकर दीन के मसलों पर जानकारी, धार्मिक मान्यताओं की समझ और बिना प्रमाणिक आधार के टिप्पणी करने की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। देवबंदी उलेमा कारी इसहाक गोरा ने कहा कि धार्मिक विषयों पर अपनी राय रखने से पहले उनके बारे में सही जानकारी हासिल करना जरूरी है। संदेश में कहा गया है कि दीन को व्यक्तिगत इच्छाओं, अनुमानों या अपनी सोच के आधार पर नहीं समझा जा सकता। इसके लिए सही ज्ञान और प्रमाणिक धार्मिक तर्कों की आवश्यकता होती है। ‘दीन के मसले में बोलने से पहले इल्म हासिल करना जरूरी’ कारी इसहाक गोरा ने हूदा जरीवाला के बयान को लेकर जारी संदेश में कहा गया है कि धार्मिक विषयों पर इस तरह की बातें कहना केवल एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि एक गंभीर विषय पर बिना पर्याप्त जानकारी के राय रखने का मामला है। किसी भी धार्मिक मान्यता पर बात करते समय उसके मूल आधार और प्रमाणों को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धर्म से जुड़े सवालों पर चर्चा करना गलत नहीं है। सवाल पूछने से जानकारी बढ़ती है और किसी विषय को समझने का अवसर मिलता है। हालांकि, जब किसी व्यक्ति को किसी धार्मिक मसले की सही जानकारी न हो, तो उसे निश्चित और अंतिम निष्कर्ष के रूप में अपनी बात रखने से बचना चाहिए। ‘बिना इल्म के जवाब देना गलतफहमी फैला सकता है’ संदेश में लोगों से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी धार्मिक विषय की प्रमाणिक जानकारी नहीं है, तो उस पर निर्णायक अंदाज में टिप्पणी करने से परहेज करें। बिना पर्याप्त ज्ञान के दिए गए जवाब लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं और किसी धार्मिक मान्यता को लेकर गलतफहमी बढ़ा सकते हैं। इसमें कहा गया है कि धार्मिक विषयों पर विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। किसी सवाल का जवाब देने से पहले उसके बारे में सही जानकारी जुटाना और प्रमाणिक आधार को समझना जरूरी है। केवल अनुमान या व्यक्तिगत सोच के आधार पर किसी धार्मिक विषय के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता। ‘हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं’ कारी इसहाक गोरा ने कहा कि हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं है। यदि किसी विषय की जानकारी नहीं है, तो उसे स्वीकार करना भी जिम्मेदारी का हिस्सा है। खासकर धर्म से जुड़े मामलों में किसी बात को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले उसके प्रमाण और संदर्भ को समझना चाहिए। हूदा जरीवाला के बयान के बाद सामने आए इस संदेश में लोगों को नसीहत दी गई है कि धार्मिक मामलों में बोलते समय सावधानी बरतें। किसी विषय पर सवाल उठाना या चर्चा करना गलत नहीं है, लेकिन बिना पर्याप्त जानकारी के जवाब देना गलतफहमी का कारण बन सकता है। धार्मिक विषयों पर चर्चा के बीच यह मामला इस सवाल को सामने लाता है कि सार्वजनिक मंचों और पॉडकास्ट में धर्म से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते समय जानकारी, संदर्भ और जिम्मेदारी का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए।
बरेली में एयर शो आज से: ध्रुव हेलिकॉप्टरों की गड़गड़ाहट से गूंजेगा आसमान, करतब दिखाएगी सारंग टीम
एयरफोर्स स्टेशन परिसर में आठ साल बाद करतब दिखाएगी सारंग टीम, 17 अक्तूबर तक चलेगा आयोजन
CBI ने बैंक भर्ती में 5 साल के पुराने डेटा की जांच के जरिए नौकरी पाने वाले फर्जी अभ्यर्थियों का खुलासा किया है। परीक्षा के दौरान जुटाए गए आंखों के स्कैन (आइरिस) से फर्जीवाड़े के जरिए नौकरी पाने वाले 257 संदिग्ध उम्मीदवार मिले। इनमें 172 अलग-अलग बैंकों में नौकरी कर रहे थे। सीबीआई अब देशभर में अन्य फर्जी अफसरों की तलाश में जुटी है। आईबीपीएस ने इन सभी कार्यरत लोगों के साथ-साथ अन्य संदिग्धों को भी आजीवन के लिए परीक्षा से डिबार कर दिया है। संबंधित बैंकों को उनके सर्विस रूल्स के तहत कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब इनकी नौकरी जाने के साथ गिरफ्तारी की भी तलवार लटक रही है। सीबीआई ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि, 135 लोगों को आरोपी बनाया है। इस संबंध में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में आरोपियों की धरपकड़ और कार्रवाई की गई है। मध्य प्रदेश में तो इस संबंध में जांच के बाद ग्रामीण बैंक के 19 कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। ऐसे सामने आई थी गड़बड़ी अधिकारियों ने 8 अक्टूबर को बताया कि CBI की स्पेशल टास्क ब्रांच, मुंबई ने कई राज्यों में एक साथ छापे मारे। यह कार्रवाई इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन (IBPS) की शिकायत पर दर्ज FIR के बाद की गई। आईबीपीएस बैंक भर्ती परीक्षाओं के उम्मीदवारों की फोटो और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की दोबारा जांच की थी। इसमें सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों ने परीक्षा दी थी। फोटो और बायोमेट्रिक पहचान में अंतर मिलने पर संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान की गई। आरोपियों ने बैंक भर्ती प्रक्रिया के कई चरणों में उम्मीदवार बनकर परीक्षा और इंटरव्यू दिए। पांच साल पुराने रिकॉर्ड से कैसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा इस जांच की खासियत है कि सिर्फ परीक्षा के समय पहचान जांचने के बजाय, पांच साल के पुराने रिकॉर्ड खंगालकर फर्जीवाड़े और नौकरी कर रहे उम्मीदवारों के बीच संबंध जोड़े गए। 2020 से 2024 तक की भर्ती परीक्षाओं के रिकॉर्ड दोबारा जांचे। इस बार परीक्षा के समय लिए उम्मीदवारों के आइरिस स्कैन (आंखों की पुतली की पहचान) का मिलान किया गया। जांच में कुछ स्कैन गिरफ्तार आरोपियों से मेल खाए, जबकि रिकॉर्ड में ये पहचान उन उम्मीदवारों की थी, जिन्हें बैंक में नौकरी मिली थी।
इगलास थाने में तैनात एक उपनिरीक्षक और एक आरक्षी को संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने और कर्तव्य पालन में लापरवाही के मामले में लाइन हाजिर कर दिया गया है। एसएसपी नीरज जादौन ने एसपी ग्रामीण की आख्या के आधार पर सोमवार रात दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ यह कार्रवाई की। मामले में विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, थाना इगलास में तैनात उपनिरीक्षक बद्रीराम और आरक्षी मोनू कश्यप के संदिग्ध क्रियाकलापों में लिप्त पाए जाने तथा ड्यूटी में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया था। इसके बाद एसएसपी ने दोनों को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन भेजने के आदेश दिए। साथ ही मामले की विभागीय जांच प्रचलित कर दी गई है। एसएसपी ने सभी अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए हैं कि वे पूरी निष्ठा और मनोयोग से जनहित में कार्य करें। ड्यूटी में लापरवाही और संदिग्ध गतिविधियों के मामलों में विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में 17 अक्टूबर को होने वाले सालाना आयोजन सर सैयद डे समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह मुख्य अतिथि होंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह और भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला के प्रिंसिपल रियर एडमिरल एसएम उरूज अथर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। गुजरात के केपी ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. फारूक जी. पटेल विशेष अतिथि होंगे। छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर कैंपस में चल रहे धरना-प्रदर्शन के समाप्त होने के बाद इंतजामिया ने सर सैयद डे की तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार देर शाम विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्य अतिथि समेत सभी प्रमुख मेहमानों के नामों की घोषणा की। अब 17 अक्टूबर को होने वाले सालाना समारोह को भव्यता के साथ आयोजित करने की तैयारियां अंतिम रूप ले रही हैं। गुलिस्तां-ए-सैयद में होगी स्मारक सभापीआरओ कार्यालय से जारी सूचना के अनुसार सर सैयद डे पर मुख्य कार्यक्रम एएमयू के गुलिस्तां-ए-सैयद में होगा। सुबह 10:45 बजे स्मारक सभा की शुरुआत विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. आसिम जफर के स्वागत भाषण से होगी। इसके बाद सर सैयद इंटरनेशनल और नेशनल अवार्ड प्रदान किए जाएंगे। समारोह में प्रतिष्ठित अतिथियों के साथ छात्र-छात्राएं और शिक्षक भी अपने विचार रखेंगे। अंत में कुलपति प्रो. नईमा खातून अध्यक्षीय भाषण देंगी, जबकि छात्र कल्याण संकाय के डीन प्रो. एम. अतहर अंसारी धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करेंगे। इनको दिए जाएंगे सर सैयद अवार्डइंटरनेशनल अवार्ड: अमेरिका के वाशिंगटन डीसी स्थित जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रो. हुसैन नसर को प्रदान किया जाएगा।नेशनल अवार्ड: कर्नाटक के गुलबर्गा स्थित ख्वाजा एजुकेशन सोसाइटी को दिया जाएगा।निबंध प्रतियोगिता पुरस्कार: एएमयू के जनसंपर्क कार्यालय की ओर से आयोजित अखिल भारतीय निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। अतिथियों के संबोधन भी होंगेसमारोह में विशेष अतिथि डॉ. फारूक जी. पटेल संबोधित करेंगे। इसके बाद विशिष्ट अतिथि रियर एडमिरल एसएम उरूज अथर और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह अपने विचार रखेंगे। अंत में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह का संबोधन होगा। छात्र प्रतिनिधियों के रूप में आयशा जमाल और अबू दाउद तथा शिक्षकों की ओर से प्रो. अजरा मुसावी और प्रो. मोहम्मद अली जौहर भी सभा को संबोधित करेंगे। सुबह छह बजे से शुरू होंगे कार्यक्रमसर सैयद डे के आयोजन की शुरुआत सुबह छह बजे विश्वविद्यालय की मस्जिद में कुरआन ख्वानी से होगी। सुबह सात बजे सर सैयद अहमद खान के मजार पर चादरपोशी की जाएगी। इसके बाद सुबह 9:30 बजे सर सैयद हाउस में उनकी लिखावट और पुस्तकों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसी दौरान पुस्तक विमोचन समारोह भी होगा। सुबह 10:45 बजे गुलिस्तां-ए-सैयद में मुख्य स्मारक सभा शुरू होगी।कैंपस में रहेगा उत्सव का माहौलएएमयू में सर सैयद डे हर साल बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। यह आयोजन विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की विरासत, आधुनिक शिक्षा के प्रसार, सामाजिक सुधार और बौद्धिक उन्नति के उनके विचारों को याद करने का अवसर है। इस दिन कैंपस में उत्सव जैसा माहौल रहता है और विश्वविद्यालय समुदाय के साथ देश-विदेश से जुड़े शिक्षाविद, पूर्व छात्र और प्रतिष्ठित मेहमान इसमें भाग लेते हैं। छात्र आंदोलन समाप्त होने के बाद अब इंतजामिया का पूरा जोर इस वार्षिक आयोजन की तैयारियों को समय से पूरा करने पर है।
सलाखों के पीछे की जिंदगी और जेल के बेस्वाद खाने की पुरानी छवि अब जम्मू-कश्मीर में बदलने जा रही है। जम्मू की केंद्रीय जेल कोट भलवाल और जिला जेल जम्मू में बंद कैदियों को अब अधिक पोषक, जायकेदार और कश्मीरी पारंपरिक स्वाद वाला खाना परोसा जाएगा।
Chandigarh News: गुप्तांग में छिपाकर लाया 470 ग्राम सोना, लेने पहुंचे दो साथी भी गिरफ्तार
470 grams of gold smuggled by concealing it in private parts; two accomplices who arrived to collect it also arrested.
Chandigarh News: बिजली कर्मचारियों का 19 अक्टूबर को धरना
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Chandigarh News: मेडिकल कैंप में 300 से अधिक मरीजों की जांच
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Chandigarh News: कैंसर की दवाओं पर विशेषज्ञ ने दी जानकारी
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Chandigarh News: मौली जांगरा से तीन लोग समर्थकों सहित कांग्रेस में शामिल
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Chandigarh News: पराली जलाने पर पीयू-पीजीआई की नजर
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Chandigarh News: टॉय पिस्टल लहराने वाले दो संदिग्ध राउंडअप
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Chandigarh News: पंजाब सीएम के ओएसडी घुम्मन की अर्जी खारिज, सीबीआई को राहत
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महिला आईटीआई में छात्राओं का प्रदर्शन, बोलीं- पौधों को दिया जाना वाला पानी पीने को मजबूर
Chandigarh News: निगम चुनाव में लागू होगी एसआईआर वाली मतदाता सूची
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क्लबों और पार्टियों तक कोकीन पहुंचाने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़, नाइजीरियन समेत गिरफ्तार
Chandigarh News: छह महीने बाद चंडीगढ़ जिला अदालत को मिले नए सेशंस जज
छह महीने बाद चंडीगढ़ जिला अदालत को मिले नए सेशंस जज
Chandigarh News: रामदरबार में टॉय पिस्टल से फायरिंग करने वाले दो युवक गिरफ्तार
रामदरबार में टॉय पिस्टल से फायरिंग करने वाले दो युवक गि
डॉक नहीं पहुंचने पर चयन से बाहर नहीं कर सकते:हाईकोर्ट ने कहा समय पर आवेदन, उम्मीदवार को मौका बनता है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करने के साथ विज्ञापन में निर्धारित अवधि के अंदर आवेदन की हार्ड कॉपी भी भेज देता है, तो डाक से दस्तावेज पहुंचने में देरी के आधार पर उसे चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थी की ओर से लापरवाही नहीं होने पर डाक विभाग की देरी का खामियाजा उसे नहीं भुगतना चाहिए। जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा कि डाक से जुड़ी ऐसी अप्रत्याशित परिस्थिति के कारण अभ्यर्थी की उम्मीदवारी समाप्त करना एक प्रक्रियागत शर्त को उसके मूल अधिकार से वंचित करने का जरिया बनाने जैसा होगा। यह कथित चूक की प्रकृति के अनुपात में भी नहीं होगा। क्या है मामला जानिये मामले के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत पदों पर भर्ती के लिए 18 अगस्त 2026 को विज्ञापन जारी किया गया। इन पदों पर चयन केवल साक्षात्कार के माध्यम से होना था। ऑनलाइन आवेदन और शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 1 सितंबर 2026 थी, जबकि आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी आवश्यक दस्तावेजों के साथ 15 सितंबर 2026 को शाम पांच बजे तक आयोग के कार्यालय पहुंचनी थी। विज्ञापन में हार्ड कॉपी भेजने के लिए रजिस्टर्ड डाक, स्पीड पोस्ट या व्यक्तिगत रूप से जमा करने की अनुमति दी गई। प्वाइंट टू प्वाइंट बताया याचिकाकर्ता अनुराधा ने 31 अगस्त 2026 को ऑनलाइन आवेदन करने के साथ शुल्क भी जमा कर दिया। इसके बाद उसने 8 सितंबर 2026 को रजिस्टर्ड डाक से आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी भेजी। हालांकि, यह दस्तावेज निर्धारित अंतिम तारीख के एक दिन बाद, 16 सितंबर को आयोग के इलाहाबाद स्थित कार्यालय पहुंचा। आयोग ने इसे स्वीकार करने से इनकार किया और लिफाफे पर इस संबंध में टिप्पणी दर्ज कर दी। आवेदन 21 सितंबर को याचिकाकर्ता को वापस मिला। याचिकाकर्ता को डाक विभाग से जानकारी मिली कि 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के कारण दिल्ली और नई दिल्ली के कार्यालय 11 से 13 सितंबर 2026 तक बंद रहे थे। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 30 सितंबर को आयोग के समक्ष अभ्यावेदन देकर अपनी स्थिति स्पष्ट की, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला। आयोग ने दी दलील आयोग की ओर से दलील दी गई कि अंतिम तारीख के बाद प्राप्त हार्ड कॉपी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने डाक की ट्रैकिंग रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता ने आवेदन निर्धारित समय के भीतर भेज दिया था और उसके बाद डाक के माध्यम से दस्तावेज पहुंचने की प्रक्रिया पूरी हुई। रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं था, जिससे यह साबित हो कि अभ्यर्थी ने अपनी ओर से कोई लापरवाही की थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अवलोकन अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आशुतोष अग्निहोत्री बनाम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। उस मामले में भी अभ्यर्थी ने स्पीड पोस्ट से आवेदन समय पर भेजा था, लेकिन वह अंतिम तारीख के एक दिन बाद संबंधित हाईकोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने देरी के आधार पर आवेदन खारिज किए जाने के फैसले को निरस्त करते हुए अभ्यर्थी को इसके लिए जिम्मेदार नहीं माना था। हाईकोर्ट ने कहा कि यही सिद्धांत सदफ इमरान बनाम उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग मामले में भी अपनाया गया। इसके अलावा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऋषिश प्रकाश बनाम उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, इलाहाबाद मामले में भी माना था कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित माध्यम से समय पर आवेदन भेजने वाले अभ्यर्थी को डाक विभाग की देरी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पीठ ने कहा कि जब समय पर आवेदन भेजने और अभ्यर्थी की ओर से लापरवाही नहीं होने की पुष्टि हो जाती है, तो डाक पहुंचने में बाद में हुई देरी अपने आप चयन प्रक्रिया से बाहर करने का वैध आधार नहीं बन सकती। उम्मीदवारी पर विचार किया जाए अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जब भर्ती प्राधिकरण स्वयं रजिस्टर्ड डाक और स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदन भेजने की अनुमति देता है तो वह उसी व्यवस्था से जुड़ी देरी के परिणामों से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकता। ऐसा करना एक सतर्क और नियमों का पालन करने वाले अभ्यर्थी को चयन से बाहर करने जैसा होगा। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि आयोग ने डाक से आवेदन पहुंचने में मामूली देरी के आधार पर हार्ड कॉपी लौटाकर गलती की। अदालत ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, इलाहाबाद को निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता 16 अक्टूबर 2026 को शाम पांच बजे तक हार्ड कॉपी प्रस्तुत करता है, तो उसे स्वीकार कर रिकॉर्ड पर लिया जाए। इसके बाद विज्ञापन की शर्तों और लागू नियमों के अनुसार उसकी उम्मीदवारी पर विचार किया जाए।
गोरखपुर में रोड चौड़ीकरण और लाइन शिफ्टिंग के चलते मंगलवार को सुबह 11 बजे से तीन बजे तक कई इलाकों में बिजली सप्लाई बाधित रहेगी। इस दौरान विद्युत उपकेंद्र दुर्गाबाड़ी के 11 केवी हनुमंत नगर, विद्युत उपकेंद्र राप्तीनगर न्यू के 11 केवी रेल विहार, करीम नगर फीडर, विद्युत उपकेंद्र रुस्तमपुर के 11 केवी शक्तिनगर फीडर, विद्युत उपकेंद्र रानीबाग के 11 केवी कठउर फीडर, विद्युत उपकेंद्र शाहपुर, विद्युत उपकेंद्र खोराबार, विद्युत उपकेंद्र हरपुर से जुड़े इलाके करीब 4 घंटे के लिए प्रभावित होंगे। बिजली विभाग से उपभोक्ताओं से अपील की है कि समय से पहले पानी भरने और बिजली से संबंधित अन्य जरुरी काम निपटा लें। ताकि किसी भी तरह की दिक्कत न हो। काम पूरा होते ही सप्लाई बहाल कर दी जाएगी।
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जेठानी की शिकायत पर चालक के खिलाफ केस दर्ज:सिविल हॉस्पिटल के सामने महिला को बस ने मारी थी टक्कर
रेवाड़ी में ट्रॉमा सेंटर के सामने स्कूटी को पीछे से टक्कर मारने वाली निजी बस के चालक के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। हादसे में स्कूटी पर पीछे बैठी 26 वर्षीय डिंपल की मौत हो गई। वह अपनी जेठानी पूजा के साथ बैंक के काम से जा रही थी। आरोप है कि तेज रफ्तार बस ने स्कूटी को पीछे से टक्कर मारी और गिरने के बाद डिंपल के ऊपर से बस का टायर गुजर गया। हादसे के बाद चालक बस को सड़क किनारे खड़ी कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने बस नंबर HR 63 F-2896 के आधार पर चालक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंक के काम से निकली थीं जेठानी-देवरानी साधुशाह नगर निवासी पूजा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 12 अक्टूबर को वह अपनी देवरानी डिंपल पत्नी दीपक के साथ इलेक्ट्रिक स्कूटी पर बैंक के काम से निकली थी। स्कूटी पूजा चला रही थी और डिंपल पीछे बैठी थी। दोपहर करीब 1:30 बजे ट्रॉमा सेंटर के सामने पीछे से आई निजी बस ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से दोनों सड़क पर गिर गईं। आरोप है कि बस का टायर डिंपल के शरीर के ऊपर से गुजर गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने डिंपल को ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर गोकल गेट चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बस को सड़क किनारे खड़ा करवाया और यातायात सुचारु कराया। शव को पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने पूजा की शिकायत और अस्पताल से मिली सूचना के आधार पर बस चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 और 106 के तहत केस दर्ज किया है। शिकायत के अनुसार, बस चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया था। मामले की जांच गोकल गेट चौकी पुलिस कर रही है।
प्रयागराज में रामलीला की शुरुआत हो चुकी है। कटरा रामलीला कमेटी की ओर से दूसरे दिन सीता स्वयंवर का भव्य मंचन किया गया। श्रीराम के शिव धनुष तोड़ने और माता सीता के उन्हें वरमाला पहनाने का दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे। इस दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। मंचन देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक पहुंचे। श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, सीता ने पहनाई वरमाला मंचन के अनुसार, जनकपुर में आयोजित सीता स्वयंवर में राजा जनक ने भगवान शिव के पिनाक धनुष को उठाने और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी थी। स्वयंवर में आए बड़े-बड़े राजा धनुष को हिला तक नहीं सके। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। धनुष टूटने की आवाज के साथ ही जनकपुर में खुशी की लहर दौड़ गई। माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी। इसके बाद श्रीराम और माता सीता के विवाह का मंचन किया गया। लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने बांधा समां शिव धनुष टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम क्रोधित होकर स्वयंवर सभा में पहुंचे। यहां लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखा और रोचक संवाद हुआ। दोनों के बीच हुए संवाद ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। अंत में श्रीराम ने विनम्रता से परशुराम का क्रोध शांत कराया। इसके बाद परशुराम श्रीराम को आशीर्वाद देकर वहां से चले गए। दीपोत्सव और गणेश वंदना से हुई शुरुआत कटरा रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित दूसरे दिन के मंचन का शुभारंभ भाजपा के जिला अध्यक्ष संजय गुप्ता ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीपोत्सव और गणेश वंदना के साथ हुई। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। कटरा की ऐतिहासिक रामलीला को करीब 137 वर्ष पुराना बताया जाता है। हर साल यहां रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं।
संगम नगरी प्रयागराज में आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। दारागंज में मां काली के रौद्र स्वरूप के दर्शन के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। हाथ में खप्पर, गले में मुंडमाला और भुजाली लिए मां काली की वेशभूषा में कलाकार जब सड़कों पर निकला तो लोगों की निगाहें उसी पर टिक गईं। ढोल-नगाड़ों की गूंज और जयकारों के बीच कलाकार ने पारंपरिक अंदाज में नृत्य कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। मां काली के दर्शन के लिए लोग सड़क किनारे घंटों खड़े रहे। दारागंज का काली स्वांग प्रयागराज की उन अनूठी धार्मिक परंपराओं में शामिल है, जिनमें लोक संस्कृति, पौराणिक मान्यताओं और भक्ति का मेल देखने को मिलता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह परंपरा करीब 200 साल पुरानी है। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा का श्रद्धालुओं को हर साल इंतजार रहता है। काली स्वांग के दौरान मां भगवती के काली स्वरूप को धारण कर कलाकार सड़कों पर निकलते हैं और नृत्य व अभिनय के जरिए धार्मिक प्रसंगों को जीवंत करते हैं। मान्यता है, भक्तों को दर्शन देने निकलती हैं मां काली काली स्वांग से जुड़ी धार्मिक मान्यता है कि मां काली स्वयं अपने भक्तों के बीच आती हैं और उन्हें दर्शन देती हैं। यही वजह है कि श्रद्धालु इस आयोजन को केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मां के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मानते हैं। मां काली के रौद्र रूप, पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य को देखने के लिए लोग देर रात तक जागते हैं। रौद्र रूप और पारंपरिक अभिनय है खास पहचान काली स्वांग की खासियत कलाकारों की वेशभूषा, चेहरे के भाव, नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियां हैं। खप्पर, मुंडमाला और भुजाली मां काली के रौद्र स्वरूप को प्रभावशाली बनाते हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच कलाकारों की प्रस्तुति लोगों को धार्मिक कथाओं से जोड़ती है। इस आयोजन में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ बाहर से आने वाले लोग भी शामिल होते हैं। अनूठी वेशभूषा और सदियों पुरानी लोक परंपरा विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करती है।
बेलघाट की ब्लाक प्रमुख पूजा सिंह कौशिक को भाजपा महिला मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रनेता रहे स्व. सूर्यप्रकाश सिंह कौशिक की पत्नी हैं। जबकि प्रीति शाही को महानगर अध्यक्ष की कमान दी गई है। इसी तरह कई बार पार्षद रहे जितेंद्र सैनी को गोरखपुर महानगर किसान मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। धर्मराज गोंड को अनुसूचित जनजाति (एसटी) मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया गया है। विनोद कुमार गोंड को गोरखपुर महानगर एसटी मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया गया है। सोमवार की शाम को भाजपा की ओर से कई मोर्चों के जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई। महिला मोर्चा की सूची का लंबे समय से इंतजार था। गोरखपुर जिला एवं गोरखपुर महानगर, दोनों जिलों में क्षत्रिय को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इस बार किसान मोर्चा में गोरखपुर जिले के जिलाध्यक्ष की घोषणा अब तक नहीं हुई है। जितेंद्र सैनी को गोरखपुर महानगर किसान मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया गया है। लंबे इंतजार के बाद भाजपा एसटी मोर्चा के अध्यक्षों की भी घोषणा हो गई। धर्मराज गोंड को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह विनोद कुमार गोंड को महानगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। नहीं खत्म हो रहा युवा मोर्चा का इंतजार भाजपा की ओर से लगभग सभी मोर्चों के अध्यक्षों की घोषणा कर दी गई है लेकिन अभी तक भाजपा युवा मोर्चा के क्षेद्धीय अध्यक्ष या जिला व महानगर के अध्यक्षों की घोषणा नहीं हो सकी है। भाजपा सूत्रों की मानें तो इन पदों के लिए कई युवा चेहरे गोररखपुर से लखनऊ व दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। कई जनप्रतिनिधि भी अपने पसंदीदा चेहरों को संगठन में समायोजित करने के प्रयास में लगे हैं।
मेरठ में दीपावली से पहले अवैध पटाखों के भंडारण के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। ब्रह्मपुरी पुलिस ने सोमवार रात माधवपुरम में एक मकान पर छापा मारकर भारी मात्रा में पटाखों का जखीरा बरामद किया है। पुलिस ने मौके से पटाखों के पुराने विक्रेता मनीष बंसल पुत्र स्व. ब्रजलाल बंसल को गिरफ्तार किया है। शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि पटाखों की यह खेप दशहरा से पहले बिक्री के लिए लाई गई थी। पुलिस की कार्रवाई के चलते पटाखों की सप्लाई होने से पहले ही जखीरा पकड़ लिया गया। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि माधवपुरम चौकी प्रभारी विकास रावत को सूचना मिली थी कि मनीष बंसल के मकान में भारी मात्रा में पटाखे रखे हुए हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पहले इसकी पुष्टि की। जानकारी सही पाए जाने पर पुलिस टीम ने संबंधित मकान पर छापा मारा। तलाशी के दौरान वहां पटाखों का जखीरा मिला। पुलिस ने पटाखों को कब्जे में लेकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। दशहरा पर बिक्री के लिए लाई गई थी खेपपुलिस की शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि पटाखों की यह खेप दशहरा पर बिक्री के लिए लाई गई थी। हालांकि, पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए पटाखों को बरामद कर लिया। दीपावली से पहले पटाखों के भंडारण और बिक्री को लेकर पुलिस की सतर्कता के बीच इस कार्रवाई ने कारोबारियों में खलबली मचा दी है। पुलिस बरामद पटाखों की मात्रा, भंडारण से जुड़े नियमों और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। एक महीने में तीसरी बड़ी कार्रवाईपटाखों के अवैध भंडारण के खिलाफ मेरठ पुलिस की यह एक महीने के भीतर तीसरी बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। इससे पहले देहलीगेट और रेलवे रोड थाना क्षेत्रों में पुलिस ने पटाखे बरामद किए थे। इसके बाद इंचौली पुलिस ने भी कार्रवाई की थी। अब ब्रह्मपुरी क्षेत्र में पुराने पटाखा विक्रेता के मकान पर छापा पड़ने से यह सवाल फिर उठने लगा है कि त्योहारों से पहले पटाखों का भंडारण और उनकी सप्लाई किन स्थानों पर की जा रही है। पुलिस ने और सतर्कता बढ़ाई दीपावली नजदीक आने के साथ ही पटाखों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में पुलिस के सामने अवैध भंडारण पर अंकुश लगाने के साथ-साथ आग और अन्य हादसों की आशंका को कम करने की चुनौती भी है। खासकर रिहायशी इलाकों में बड़ी मात्रा में पटाखे रखे जाने से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। ब्रह्मपुरी में हुई कार्रवाई के बाद पुलिस की निगरानी और सख्त होने की संभावना है।
मुरादाबाद के लाइनपार रामलीला मैदान में श्रीरामलीला महोत्सव के दौरान राजा दशरथ के श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा और कैकेयी-मंथरा संवाद का मंचन हुआ। कलाकारों ने इन प्रसंगों को अच्छे से प्रस्तुत किया। रामलीला में राजा दशरथ ने श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने का ऐलान किया। दर्शकों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। फिर मंथरा ने कैकेयी को बहकाकर भरत को राजा बनाने की इच्छा जगाई। उसने कैकेयी को दशरथ से दो पुराने वरदान मांगने को कहा। मंथरा के कहने पर कैकेयी ने भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 साल का वनवास मांगा। वह कोपभवन में चली गईं। जब राजा दशरथ उन्हें मनाने आए, तो कैकेयी ने अपने वरदानों की याद दिलाकर ये मांगें रखीं। कलाकारों ने इस घटनाक्रम को अभिनय से दिखाया। बड़ी संख्या में लोग रामलीला देखने मैदान में मौजूद थे। इस मौके पर श्रीरामलीला मैनेजिंग कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र अग्रवाल, मंत्री मयंक बंसल, रोहित बंसल, अतुल अग्रवाल और संदीप बंसल भी उपस्थित रहे।
प्रयागराज के छिवकी रेलवे स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने सोमवार को एक युवक को 11 बोतल अंग्रेजी शराब के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी उत्तर प्रदेश से शराब लेकर ट्रेन के जरिए बिहार जाता था। वहां इसे महंगे दाम पर बेचता था। बरामद शराब की कीमत करीब 11 हजार रुपये बताई गई है। प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध हालत में मिला युवक रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में तस्करी व आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत 12 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:35 बजे जीआरपी चौकी छिवकी के प्रभारी उपनिरीक्षक अजय यादव और आरपीएफ की संयुक्त टीम स्टेशन पर गश्त कर रही थी। इस दौरान प्लेटफॉर्म नंबर एक पर हावड़ा की ओर बने अंतिम छोर पर एक बेंच के पास युवक संदिग्ध हालत में दिखाई दिया। टीम ने उसे पकड़कर तलाशी ली तो उसके आसमानी रंग के बैग से अंग्रेजी शराब की 11 बोतलें बरामद हुईं। 750 एमएल की 11 बोतलें बरामद पकड़े गए युवक की पहचान शशांक जायसवाल (37), पुत्र स्वर्गीय संतोष जायसवाल, निवासी चक गरीब दास, मामा-भांजा का तालाब, नैनी, प्रयागराज के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, बैग से मिली बोतलों पर ‘8 पीएम स्पेशल ब्लेंड ऑफ स्कॉच एंड इंडियन ग्रेन व्हिस्की’ लिखा था। प्रत्येक बोतल 750 मिलीलीटर की थी। बोतलों पर केवल उत्तर प्रदेश में बिक्री के लिए होने का उल्लेख भी था। आबकारी अधिनियम के तहत केस दर्ज पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह ट्रेन से शराब लेकर बिहार जाता था और वहां ऊंचे दाम पर बेचता था। पुलिस ने शराब जब्त कर आरोपी के खिलाफ जीआरपी प्रयागराज थाने में मुकदमा दर्ज किया है। उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई रेलवे अधिकारियों के पर्यवेक्षण और जीआरपी प्रभारी निरीक्षक अकलेश कुमार सिंह के नेतृत्व में की गई। अभियान में जीआरपी और आरपीएफ की सीआईबी यूनिट के जवान भी शामिल रहे। रेलवे पुलिस के अनुसार, ट्रेनों के जरिए शराब तस्करी रोकने के लिए चेकिंग अभियान आगे भी जारी रहेगा।
प्रयागराज कमिश्नरेट के गंगानगर की लालगोपालगंज चौकी में तैनात प्रभारी अजय कुमार सिंह को सोमवार को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। उन पर एक जेसीबी को पकड़कर चौकी लाने और बाद में कथित तौर पर 70 हजार रुपये लेकर छोड़ने का आरोप है। इसी मामले से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद मामला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया।वायरल ऑडियो के बाद शुरू हुई जांचसूत्रों के मुताबिक, वायरल ऑडियो में चौकी प्रभारी और एक व्यक्ति के बीच कथित तौर पर लेनदेन को लेकर बातचीत सुनाई दे रही है। ऑडियो सामने आने के बाद अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और प्रारंभिक जांच कराई। जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही मिलने पर चौकी प्रभारी अजय कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया।जेसीबी पकड़ने के बाद हुई थी बातचीतबताया जा रहा है कि चौकी पुलिस ने एक जेसीबी को पकड़कर चौकी में खड़ा कराया था। इसके बाद अगले दिन जेसीबी छोड़ दिया गया। आरोप है कि इसके लिए 70 हजार रुपये वसूले गए। कुछ दिनों बाद जेसीबी मालिक ने अपने एक परिचित से इस घटना का जिक्र किया। उसने चौकी प्रभारी से फोन पर संपर्क किया। आरोप है कि इसी बातचीत के दौरान जेसीबी छोड़ने के एवज में लेनदेन को लेकर चर्चा हुई।रिकॉर्डिंग अधिकारियों तक पहुंचीआरोप है कि फोन पर हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग संबंधित व्यक्ति ने सुरक्षित रख ली। बाद में यही रिकॉर्डिंग पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई। ऑडियो की जांच के बाद अधिकारियों ने मामले की प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें शिकायत सही पाए जाने पर चौकी प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
लखनऊ के करोड़पति कारोबारी शिवा शर्मा का मॉडल गर्लफ्रेंड श्रद्धा दुबे के फ्लैट से गिरने का वीडियो सामने आया है। उसके नीचे गिरने की घटना बगल के अपार्टमेंट के एक CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में दिखाई दे रहा है कि कारोबारी जब गिरता है, तो उसी समय एक व्यक्ति उधर ही झोला लेकर जा रहा है। जैसे ही कारोबारी गिरता है तो वह व्यक्ति एकदम से रुक जाता है। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ते हैं। कुछ देर बाद उसे कार से हॉस्पिटल भेजा जाता है। ऊपर क्लिक कर देखिए VIDEO 2 तस्वीरें भी देखिए- इससे जुड़ी खबर भी पढ़िए- मॉडल श्रद्धा दुबे पुराने दोस्त के साथ नेपाल बॉर्डर पहुंची
प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों में प्राचार्य के 111 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का परिणाम सोमवार को घोषित कर दिया गया। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (यूपीईएसएससी), प्रयागराज ने साक्षात्कार के लिए 389 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया है। इन पदों के लिए 27 से 30 अक्टूबर तक इंटरव्यू होंगे। अभ्यर्थी 14 अक्टूबर से आयोग की वेबसाइट से कॉल लेटर डाउनलोड कर सकेंगे। 813 में से 722 अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा आयोग ने विज्ञापन संख्या 02/2022 के तहत प्राचार्य पदों पर चयन के लिए 24 सितंबर 2026 को लखनऊ के दो केंद्रों पर लिखित परीक्षा कराई थी। सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक हुई परीक्षा में पंजीकृत 813 अभ्यर्थियों में से 722 शामिल हुए थे। इस तरह 88.81 प्रतिशत उपस्थिति रही, जबकि 91 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा में महिला अभ्यर्थियों की उपस्थिति 90.36 प्रतिशत और पुरुष अभ्यर्थियों की 88.36 प्रतिशत दर्ज की गई। आपत्तियों के निस्तारण के बाद घोषित हुआ परिणाम लिखित परीक्षा के बाद आयोग ने 26 सितंबर को अनंतिम उत्तरकुंजी जारी कर ऑनलाइन आपत्तियां मांगी थीं। विषय विशेषज्ञों से आपत्तियों का निस्तारण कराने और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के बाद 389 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए सफल घोषित किया गया। अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in पर अपना परिणाम देख सकते हैं। अभिलेख अपलोड करने के बाद डाउनलोड करें कॉल लेटर आयोग के उप सचिव संजय कुमार सिंह के अनुसार, साक्षात्कार में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को अपने सभी शैक्षिक अभिलेख, कार्य अनुभव प्रमाण-पत्र और निर्धारित प्रारूप में शपथ-पत्र आयोग के पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसके बाद 14 अक्टूबर से साक्षात्कार-पत्र डाउनलोड किए जा सकेंगे। अभिलेख अपलोड करने से जुड़े दिशा-निर्देश, महत्वपूर्ण निर्देश और शपथ-पत्र का प्रारूप आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है। एआई कैमरों से हुई थी परीक्षा की निगरानी आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने परीक्षा की निगरानी के लिए प्रयागराज मुख्यालय में एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम स्थापित किए जाने की जानकारी दी थी। यहां से लखनऊ के दोनों परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी और आधुनिक एआई कैमरों के जरिए निगरानी की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव समेत 11 विपक्षी नेताओं की तरफ से दायर याचिका में करीब 14 खामियां बताई हैं। यह याचिका वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में बड़े पैमाने पर नाम हटाने और गड़बड़ियों के आरोपों से जुड़ी है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने वाले वकील से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आईडी कार्ड की साफ कॉपी मांगी। साथ ही कहा कि जमा किए दस्तावेजों के कुछ पन्ने पढ़ने लायक नहीं हैं। कुछ गायब हैं। कोर्ट फीस भी 220 रुपए कम जमा की गई है। 12 अक्टूबर को दायर याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है। 12 अक्टूबर के मार्च की 2 तस्वीरें… विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी नेता सोमवार को याचिका दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करके पहुंचे थे। याचिका में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को भी शामिल करने की मांग है। याचिका में कहा गया है कि यह समिति तय समय के भीतर SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों और किए गए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट करे। आज राहुल के घर विपक्षी सांसदों की चाय पे चर्चा राहुल ने आगे की रणनीति तय करने के लिए मंगलवार शाम को सभी विपक्षी सांसदों को अपने सुनहरी बाग रोड स्थित घर पर चाय पर बुलाया है। इस दौरान वोट चोरी के खिलाफ संयुक्त विरोध-प्रदर्शन की रणनीति और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग पर चर्चा होने की उम्मीद है। सूत्रों ने कहा कि 'हाई टी' के बाद विरोध-प्रदर्शन या संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हो सकती है, लेकिन इस योजना की जानकारी अभी गुप्त रखी गई है। सुप्रीम कोर्ट और विपक्ष का प्रदर्शन: अब तक क्या-क्या हुआ… 10 अक्टूबर: राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर लौटे विपक्षी सांसद, सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया सांसदों ने संसद से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया। राहुल, ममता, खड़गे समेत 10 सांसदों का डेलीगेशन राष्ट्रपति से मिला। बाकी सांसदों ने विजय चौक पर धरना दिया। मीटिंग से बाहर आकर राहुल ने कहा कि पूरा देश जानता है कि देश में वोट चोरी हो रही है। राष्ट्रपति ने भी इससे इनकार नहीं किया। अब हम सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। 11 अक्टूबर: CJI को लेटर लिखकर मुलाकात का समय मांगा, चीफ जस्टिस ने इनकार किया INDIA ब्लॉक के नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJI को लेटर लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 12 अक्टूबर की शाम अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी। हालांकि CJI सूर्यकांत ने विपक्षी सांसदों की मांग नहीं मानी और लेटर का जवाब लिखकर मिलने से इनकार कर दिया। साथ ही इस मसले पर कोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए कहा। 12 अक्टूबर: CJI बोले- दिल्ली में प्रदर्शन मेरा मुद्दा नहीं, विचाराधीन मामलों पर मुझसे चर्चा न्यायिक मर्यादा के खिलाफ दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और पाबंदियों पर CJI सूर्यकांत ने सोमवार को कहा- ये मेरा मुद्दा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि याचिका दाखिल कर सकता है। CJI ने विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्थापना दिवस कार्यक्रम में ये बातें कहीं। पढ़ें पूरी खबर… ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें… राहुल बोले- ज्ञानेश कुमार के मैसेज आते हैं: वह अपराधी नहीं, उनसे गड़बड़ी कराई जा रही; वे इस्तीफा देकर रास्ते से हटें राहुल ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने से पहले 30 मिनट प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसी में एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि लोग चुनाव आयोग की बात करते हैं, आप सीधा ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हैं। क्या कभी उन्होंने आप से बात करने की कोशिश की। इसके जवाब में राहुल गांधी ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनसे बात करने की कई बार कोशिश की है। पढ़ें पूरी खबर…
प्रदेश के 4 मेडिकल कॉलेजों (कन्नौज, अंबेडकरनगर, जालौन, सहारनपुर) में आरक्षण की निर्धारित सीमा से अधिक अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को प्रवेश दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय ने समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को संबंधित अभिलेखों के साथ मंगलवार को तलब किया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने पिछले वर्ष आश्वासन दिया था कि शैक्षिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के दौरान उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का पालन किया जाएगा। इसके बावजूद मौजूदा सत्र में निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण दिए जाने का मामला सामने आया है। अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए दो प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है। इस तरह कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि समाज कल्याण विभाग कोर्ट में दिए गए आश्वासन से सहमत नहीं था। इस पर खंडपीठ ने सवाल उठाया कि यदि सरकार के विभिन्न विभागों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद था तो न्यायालय को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई। साथ ही, सरकार ने पिछले शैक्षिक सत्र में न्यायालय के आदेश का लाभ क्यों लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार एक इकाई है और उसके अलग-अलग विभागों के मतभेद न्यायालय के आदेशों के पालन में बाधा नहीं बन सकते। खंडपीठ ने मामले से जुड़े पुराने अभिलेख भी पेश करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अर्बन लैंड सीलिंग के एक पुराने मामले में 24 साल की देरी से दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मूल भू-स्वामी को नोटिस की जानकारी थी, उसने कभी आपत्ति नहीं की। न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने टुनटुन की याचिका पर यह आदेश दिया। प्रयागराज का मामला जानिये प्रयागराज के ग्राम छतनाग, झूंसी, तहसील फूलपुर* की 3,483 वर्ग मीटर जमीन का मामला है।याची का कहना था कि उसके दादा मदन पुत्र महादेव मूल भू-स्वामी थे, जिन्होंने सीलिंग रिटर्न दाखिल किया था। आरोप था कि धारा 8(3) का नोटिस रजिस्टर्ड डाक से नहीं दिया गया, 25.मार्च 1983 को धारा 8(4) में जमीन को सरप्लस घोषित कर दिया गया, धारा 10(5) का नोटिस 22.फरवरी.1996 को तामील नहीं किया गया और धारा 10(6) की कार्रवाई कभी नहीं हुई। याची ने कहा कि वह कब्जे में है और धारा 4 के तहत अपील कार्यवाही समाप्त हो गई है। राज्य ने विरोध किया वहीं राज्य पक्ष ने रिकॉर्ड पेश कर बताया कि धारा 8(3) का नोटिस मूल भू-स्वामी मदन लाल को 31.अगस्त .1979 को तामील हुआ, 18 अक्टूबर 1984 को धारा 9 का फाइनल स्टेटमेंट भोला नाथ को मिला, गजट में धारा 10(1) व 10(3) की अधिसूचना 01.मार्च .1986 व 09.दिसंबर .1995 को प्रकाशित हुई, धारा 10(5) का नोटिस 22.फरवरी .1996 को जारी होकर 30.अप्रैल 1996 को मदन के हस्ताक्षर के साथ तामील हुआ। कोई विरोध न होने पर 30 दिन बाद कब्जा स्वतः राज्य को हस्तांतरित हो गया और राजस्व रिकॉर्ड में राज्य का नाम दर्ज हो गया। 11.दिसंबर 1996 के शासनादेश से कब्जा प्रयागराज विकास प्राधिकरण को दे दिया गया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि नोटिस तामील हुए थे और मूल भू-स्वामी को पूरी जानकारी थी। कहा लंबी अवधि बाद केवल प्रक्रियात्मक कमी के आधार पर कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याची को अपने कथित कब्जे के आधार पर दीवानी वाद दायर करने की छूट दी है।
गाजियाबाद के चर्चित गजेंद्र उर्फ गज्जी भाटी हत्याकांड में पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा समेत तीन आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है। गाजियाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में यह फैसला सुनाया। बरी होने वालों में अमरपाल शर्मा के अलावा राजू पहलवान और नरेंद्र उर्फ फौजी शामिल हैं। गज्जी भाटी की वर्ष 2017 में खोड़ा क्षेत्र में हत्या हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने बताया था कि वारदात के दौरान राजू पहलवान बाइक चला रहा था, जबकि नरेंद्र उर्फ फौजी ने गजेंद्र पर गोलियां चलाई थीं। पुलिस ने मामले में पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा को भी आरोपी बनाया था। कबड्डी में गोल्ड मेडल जीत चुका है राजू राजू पहलवान बीपीएड पासआउट है और कबड्डी का अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी रह चुका है। उसने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। वह 2007 में श्रीलंका में हुई कबड्डी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का सदस्य था। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद राजू ने कथित तौर पर हत्या की साजिश में पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा का नाम लिया था। पुलिस ने दावा किया था कि राजू करीब एक महीने पहले नरेंद्र उर्फ फौजी के साथ अमरपाल के घर गया था। इसके बाद वह लोनी स्थित फार्महाउस में हुई बैठक में भी शामिल हुआ था। बचाव पक्ष ने पुलिस की कहानी पर उठाए थे सवाल पुलिस के अनुसार, जब राजू से 10 लाख रुपये की सुपारी के बारे में पूछताछ की गई तो उसने इसकी जानकारी होने से इनकार किया था। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में पुलिस की जांच और खुलासे की कहानी पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पूर्व विधायक के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के जिला अध्यक्षों की सूची जारी कर दी गई है। इसमें शैलेंद्र सिंह को किसान मोर्चा का उत्तर जिले का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, अनुराग शुक्ला को कानपुर ग्रामीण और अजय प्रताप सिंह को कानपुर दक्षिण का जिलाध्यक्ष बनाया गया है। शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति पर भाजपा नेताओं ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। भाजपा जिला अध्यक्ष अनिल दीक्षित और जिला मीडिया प्रभारी एवं युवा नेता अंशु ठाकुर ने नई जिम्मेदारी मिलने पर प्रसन्नता जताई। इसी तरह से कानपुर भाजपा दक्षिण के जिलाध्यक्ष शिवराम सिंह ने अजय प्रताप सिंह को पद मिलने पर शुभकामनाएं दीं। ग्रामीम जिलाध्यक्ष ने अनुराग शुक्ला को बधाी दी। किसानों तक पहुंचाएंगे सरकार की योजनाएंभाजपा नेताओं ने विश्वास जताया कि शैलेंद्र सिंह संगठन की नीतियों और केंद्र व प्रदेश सरकार की किसान हितैषी योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके नेतृत्व में किसान मोर्चा संगठन को और अधिक मजबूती मिलेगी।
लखनऊ के डालीगंज की श्री मौसमगंज रामलीला एवं नाट्य समिति के 147वें वार्षिकोत्सव में सोमवार को अहिल्या उद्धार, गंगावतरण, जनक बाजार और फुलवारी लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को अभिनय के माध्यम से जीवंत किया। धार्मिक दृश्यों ने दर्शकों को रामकथा से जोड़ा। रामलीला में अहिल्या उद्धार के प्रसंग के माध्यम से भगवान श्रीराम की कृपा और करुणा का संदेश दिया गया। गंगावतरण की लीला में मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से जुड़ी कथा का मंचन किया। इसके बाद जनक बाजार और फुलवारी लीला के दृश्यों ने रामकथा को आगे बढ़ाया। कलाकारों ने संवाद और अभिनय के जरिए प्रसंगों को प्रस्तुत किया। श्रद्धालु भी घर बैठे देख सकते हैं मंचन रामलीला को अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए समिति ने इसके सीधे प्रसारण की व्यवस्था भी की है। फेसबुक पेज धर्म जिज्ञासा पर रामलीला का लाइव प्रसारण किया जा रहा है। इससे आयोजन स्थल तक नहीं पहुंच पाने वाले श्रद्धालु भी घर बैठे मंचन देख सकते हैं। 147वें वार्षिकोत्सव में श्रद्धालुओं में उत्साह समिति के अध्यक्ष घनश्याम दास अग्रवाल ने बताया कि रामलीला का मंचन प्रतिदिन रात नौ बजे शुरू होता है और मध्यरात्रि तक चलता है। उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखना तथा नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराना है। 147वें वार्षिकोत्सव को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में उत्साह है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत संचार निगम लिमिटेड को एक अहम मामले में राहत प्रदान की है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कमर्शियल कोर्ट आगरा में एमएसएमई फैसिलिटेशन काउंसिल के पंचाट (अवॉर्ड) के खिलाफ दायर धारा 34 की याचिका पर 75 फीसदी राशि पूर्व-जमा की शर्त के बिना शीघ्र सुनवाई पूरी की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने बीएसएनएल की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया है। क्या है मामला जानिये बीएसएनएल और विपक्षी पार्टी के बीच वर्ष 2017 में जयपुर क्षेत्र में हाउसकीपिंग व अन्य सेवाओं को लेकर अनुबंध हुआ था। विवाद होने पर मामला उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सुविधा परिषद आगरा के समक्ष गया। काउंसिल ने 15 फरवरी 2025 को विपक्षी के पक्ष में अवार्ड पारित कर दिया। इस अवार्ड को चुनौती देते हुए बीएसएनएल ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम1996 की धारा 34 के तहत कमर्शियल कोर्ट संख्या-1 आगरा में याचिका दाखिल की। कमर्शियल कोर्ट ने 4 जुलाई 2026 को आदेश दिया कि एमएसएमई एक्ट 2006 की धारा 19 के तहत कुल राशि का 75 प्रतिशत जमा करने के बाद ही याचिका पर विचार किया जाएगा। प्री-डिपॉजिट के आदेश के खिलाफ केस कमर्शियल कोर्ट के इस प्री-डिपॉजिट के आदेश के खिलाफ बीएसएनएल ने यह याचिका की। बीएसएनएल के अधिवक्ता ने एमटीएनएल बनाम एमएसएमई काउंसिल मामले में सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें धारा 34 की कार्यवाही बिना प्री-डिपॉजिट की बाध्यता के संचालित करने का निर्देश दिया गया था। क्लेमेंट के अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि उनके मुवक्किल 75 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट की शर्त पर जोर नहीं दे रहे हैं ताकि मामले के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो और कमर्शियल कोर्ट जल्द अंतिम निर्णय दे सके। निष्पक्ष फैसला सुनाने के लिए स्वतंत्र है कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों को संज्ञान में लेते हुए याचिकाओं को निस्तारित करते हुए निर्देश दिया कि कमर्शियल कोर्ट आगरा बिना 75 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट पर जोर दिए धारा 34 के तहत दायर याचिका पर त्वरित सुनवाई करे। यह भी कहा कि मामले में बेवजह तारीखें न दी जाएं। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही सुनवाई स्थगित की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की गई है इसलिए कमर्शियल कोर्ट विधि सम्मत निष्पक्ष फैसला सुनाने के लिए स्वतंत्र है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वकीलों को निर्धारित स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मौलिक अधिकार है। कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान वकीलों की गिरफ्तारी और पुलिस की कथित बर्बरता पर सुनवाई करेगा।
मेरठ में अरुणाचल प्रदेश के छात्रों के साथ मारपीट के मामले में परतापुर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना के बाद से ही मामला लगातार तूल पकड़ रहा था। सोमवार को दिल्ली से अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम का प्रतिनिधिमंडल मेरठ पहुंचा और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। अरुणाचल प्रदेश के एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ने भी पुलिस के आला अधिकारियों से बात की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि मामले में कुछ अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। सिगरेट मांगी, बीड़ी देने पर भिड़े युवकपुलिस के अनुसार, परतापुर क्षेत्र की सुशांत सिटी कॉलोनी के सेक्टर-3 स्थित एक फ्लैट में छात्र प्री-दशहरा के अवसर पर पार्टी कर रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ युवकों ने पूर्वोत्तर के छात्र संजू तबंग से सिगरेट मांगी। संजू ने सिगरेट नहीं होने की बात कहकर उन्हें बीड़ी दे दी। आरोप है कि बीड़ी को लाइटर से जलाने को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। कहासुनी देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इस दौरान लाठी-डंडे और कांच की बोतलें चलने का आरोप है। घटना में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जांच में जुटी पुलिसमारपीट की सूचना मिलने पर परतापुर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया। घटना में पूर्वोत्तर के छात्रों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई तेज की। सोमवार को प्रतिनिधिमंडल के मेरठ पहुंचने और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किए जाने के बाद मामले में हलचल बढ़ गई। पुलिस ने आरोपियों की तलाश कर तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों को जेल भेजागिरफ्तार आरोपियों की पहचान अविशु पुत्र आदेश कुमार निवासी जड़बड़ कटिया, थाना ककरौली ( मुजफ्फरनगर) हाल निवासी वेदव्यासपुरी (हास्टल), अटल डेढ़ा पुत्र देवेंद्र सिंह निवासी इब्राहिमाबाद गांवड़ी थाना सिंघावली ( बागपत) हाल निवासी भूड़बराल थाना परतापुर और शकांश पुत्र सेठपाल निवासी दयालपुर थाना शाहदरा (दिल्ली) हाल निवासी एफ-111, सेक्टर-3, सुशांत सिटी, थाना परतापुर मेरठ के रूप में हुई है। पुलिस ने तीनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। फरार आरोपियों की तलाश जारीएसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि मामले में अभी कुछ अन्य आरोपियों के फरार होने की बात सामने आई है। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर नजर है।
लखनऊ के ऐशबाग की ऐतिहासिक रामलीला में सोमवार को सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और चारों भाइयों के विवाह का मंचन किया गया। श्रीराम के धनुष तोड़ते ही पूरा रामलीला परिसर सियावर रामचंद्र की जय के जयकारों से गूंज उठा। वहीं, जनकपुर से सीता सहित चारों राजकुमारियों की विदाई के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। लीला के अनुसार, मिथिला नरेश राजा जनक ने सीता स्वयंवर के लिए शर्त रखी थी कि जो योद्धा भगवान शिव के धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में कई बलशाली राजा पहुंचे, लेकिन कोई भी धनुष को हिला नहीं सका। इससे राजा जनक निराश हो गए। धनुष टूटने पर भगवान परशुराम सभा में पहुंचे इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम ने धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया। इसी दौरान धनुष टूट गया। यह दृश्य देखते ही सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी और सभा जयकारों से गूंज उठी। धनुष टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम सभा में पहुंचे। वहां लक्ष्मण के साथ उनके तीखे संवाद हुए, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। बाद में श्रीराम ने अपने मधुर वचनों से परशुराम का क्रोध शांत किया। चारों भाइयों का विवाह, विदाई पर भावुक हुए दर्शक विवाह का संदेश अयोध्या पहुंचने पर खुशी का माहौल छा गया। अयोध्या नरेश दशरथ बारात लेकर जनकपुर पहुंचे। यहां श्रीराम का सीता, भरत का मांडवी, लक्ष्मण का उर्मिला और शत्रुघ्न का श्रुतकीर्ति के साथ विवाह संपन्न होने का मंचन किया गया। इसके बाद विदाई का दृश्य दिखाया गया। जनक की बेटियों की विदाई के जीवंत मंचन ने दर्शकों को भावुक कर दिया। सांस्कृतिक मंच पर कलाकारों ने दी प्रस्तुति रामलीला से पहले सांस्कृतिक मंच पर शहर के कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। घृताक्षी संगीत शाला के कलाकारों ने सीता स्वयंवर पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी। इसमें सीता की भूमिका अलंकृति राउत, श्रीराम की अक्षय लांबा और लक्ष्मण की भूमिका देवयांश त्रिवेदी ने निभाई।
मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया और 'वोट चोरी' के आरोपों के विरोध में सोमवार को इंडिया अलायंस ने दिल्ली में संसद से सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रमुख भूमिका में नजर आए। हाल के दिनों में कांग्रेस और सपा के बीच दिख रही दूरियों के कयासों को इस मार्च के दौरान विराम मिलता दिखा। जब अखिलेश यादव मार्च में पहुंचे, तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद उनका हाथ पकड़ा और अपनी खुली बस पर साथ बिठाया। वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अखिलेश को देखते ही आगे बढ़कर उन्हें गले लगा लिया। लखनऊ की तय बैठक रद्द कर पहुंचे दिल्ली अखिलेश यादव का सोमवार को लखनऊ में पार्टी के सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी चुनावों को लेकर बैठक का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम था। लेकिन जैसे ही राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान हुआ, अखिलेश ने लखनऊ के अपने सभी राजनीतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए। वे सुबह केवल डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर लोहिया पार्क पहुंचे, उन्हें श्रद्धांजलि दी और वहीं से सीधे दिल्ली के लिए रवाना हो गए। आइसा अध्यक्ष से काफी देर तक की बातचीत बाराखंबा रोड से निकली खुली बस में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, तेजस्वी यादव, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी, कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और आइसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा समेत तमाम प्रमुख विपक्षी नेता मौजूद थे। मार्च के दौरान हालिया प्रदर्शनों से सुर्खियों में आईं नेहा बोरा और अखिलेश यादव के बीच काफी देर तक बातचीत होती दिखी। इस दौरान नेहा ने प्रदर्शन के समय अपने हाथ में लगी चोट भी सपा प्रमुख को दिखाई। 'जहां बैठेंगे, वही जंतर-मंतर बन जाएगा' मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा- 'जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटा देने या बंद कर देने से जनता का विरोध करने का अधिकार खत्म नहीं होता। लोकतंत्र में हम अपनी बात रखने के लिए जहां भी बैठेंगे, वही धरने की जगह बन जाएगी। जगह बदलने से हमारा संघर्ष नहीं रुकने वाला।' अखिलेश ने आगे कहा कि जो लोग कमजोर होते हैं, वही पुलिस को आगे करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि वे गलत हैं। चुनाव आयोग-बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) चुनाव आयोग के साथ मिलकर देश के संविधान और लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश रच रही है ताकि हमेशा सत्ता में बनी रहे। 'जंतर-मंतर प्रतिबंधित करना सरकार की हार' मार्च खत्म होने के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट कर सरकार पर तंज कसा। उन्होंने लिखा, 'जंतर-मंतर को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित करना बीजेपी सरकार की सबसे बड़ी हार है। शुक्र मनाइए कि प्रदर्शन के लिए किसी भूमिगत जगह पर जाने को नहीं कहा गया, जहां बीजेपी और उनके संगी-साथी अपनी गुप्त बैठकें करते हैं।' उन्होंने आगे सुझाव देते हुए लिखा कि जनाक्रोश से डरने के बजाय सरकार को 'लोक कल्याण मार्ग' पर ही प्रदर्शन के लिए जगह दे देनी चाहिए, ताकि आम जनता की आवाज सीधे सर्वोच्च सत्ता तक पहुंचे और समस्याओं का तुरंत समाधान निकले। ------------- ये भी पढ़ें- ओवैसी के टारगेट पर पूर्वांचल की 37 सीटें:2022 में बिना तैयारी लड़े तो आजमगढ़ में 3% वोट मिले; क्या सपा को नुकसान होगा सपा से गठबंधन नहीं होने के बाद अब असदुद्दीन ओवैसी की नजर उन मुस्लिम बहुल सीटों पर है, जो सपा का गढ़ मानी जाती हैं। 11 अक्टूबर को ओवैसी आजमगढ़ में लोगों के बीच रहे। इससे पहले मुरादाबाद में भी जनसभा कर चुके हैं। 2027 विधानसभा चुनाव में इसका क्या असर हो सकता है, पढ़िए रिपोर्ट…
गाजियाबाद के स्विस होटल का अवैध निर्माण ढहाया:जीडीए ने चलाया बुलडोजर, संचालक-स्टाफ ने किया विरोध
गाजियाबाद के कोतवाली क्षेत्र स्थित मशहूर स्विस होटल पर सोमवार को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने बुलडोजर चलाया। स्वीकृत मानचित्र के विपरीत और तय सीमा से अधिक निर्माण किए जाने के मामले में प्राधिकरण की टीम कार्रवाई करने पहुंची। टीम ने होटल के अतिरिक्त बने हिस्से को ध्वस्त करना शुरू किया। कार्रवाई के दौरान होटल संचालक और कर्मचारियों ने विरोध जताया, लेकिन GDA की टीम ने ध्वस्तीकरण जारी रखा। चर्चित होटल पर बुलडोजर चलते ही इलाके में हलचल मच गई और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। नक्शे के विपरीत बने हिस्से को बनाया निशाना जानकारी के मुताबिक, स्विस होटल में स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप निर्माण नहीं किया गया था। भवन में निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण के मामले में GDA ने कार्रवाई की। टीम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची और मानचित्र के विपरीत बने हिस्से को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की। होटल पर ध्वस्तीकरण के दौरान संचालक और स्टाफ ने विरोध जताया। हालांकि, प्राधिकरण की टीम ने कार्रवाई नहीं रोकी। होटल पर बुलडोजर चलते देखने के लिए आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। इलाके में काफी देर तक कार्रवाई की चर्चा होती रही। अवैध निर्माण के खिलाफ GDA का अभियान गाजियाबाद में GDA समय-समय पर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करता है। भवन निर्माण के लिए स्वीकृत मानचित्र लेना और उसी के अनुसार निर्माण करना जरूरी है। मानचित्र से अलग या निर्धारित मानकों के विपरीत निर्माण पाए जाने पर संबंधित भवन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वर्ष 1999 के हत्या के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने अपने फैसले में निचली अदालत की ओर से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया। न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहा। मामला सुल्तानपुर के कोतवाली नगर थाने में दर्ज वर्ष 1999 के मुकदमे से जुड़ा है। इसमें दिनेश शुक्ला, राकेश शुक्ला, राजेश शुक्ला और जगदीश को आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि एक मार्च 1999 को दिनेश शुक्ला अजय शुक्ला को अपने साथ ले गए थे। बाद में अजय गोली लगने से घायल अवस्था में मिले और इलाज के दौरान 2 मार्च 1999 को लखनऊ में उनकी मृत्यु हो गई। आरोपियों ने उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी इस मामले में फैजाबाद की अपर सत्र अदालत ने 30 अप्रैल 2022 को दिनेश शुक्ला को हत्या और अपहरण के आरोप में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं, राकेश शुक्ला, राजेश शुक्ला और जगदीश को आपराधिक साजिश के तहत अपहरण और हत्या के आरोपों में उम्रकैद की सजा दी गई थी। चारों आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। ऐसी स्थिति में आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए सभी परिस्थितियों का आपस में जुड़ा होना और आरोपों को संदेह से परे साबित करना आवश्यक था। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की आवश्यक कड़ी साबित नहीं कर सका। साथ ही, अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप साबित करने के लिए भी स्वतंत्र साक्ष्य नहीं मिले।
हरदोई में भारतीय जनता पार्टी ने महिला मोर्चा के जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी अनुराधा मिश्रा को सौंपी है। उनकी नियुक्ति के बाद समर्थकों और शुभचिंतकों की ओर से बधाई और शुभकामनाएं दी जा रही हैं। महिला मोर्चा के जिलाध्यक्ष के रूप में उन्हें संगठन को मजबूत करने और महिलाओं के बीच पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। अनुराधा मिश्रा को यह जिम्मेदारी मिलने पर उनके समर्थकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और महिला कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देने वाला कदम बताया। शुभचिंतकों ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में महिला मोर्चा जिले में सक्रिय भूमिका निभाएगा और पार्टी की नीतियों तथा कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने का काम करेगा। भारतीय जनता पार्टी में महिला मोर्चा की भूमिका महिला कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने, केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित करने से जुड़ी है। ऐसे में जिलाध्यक्ष के रूप में अनुराधा मिश्रा के सामने महिला कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी होगी। महिला मोर्चा के माध्यम से महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने, विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय महिलाओं को पार्टी से जोड़ने और जनसंपर्क कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है। जिले में संगठन की मजबूती के लिए कार्यकर्ताओं के बीच संवाद, आपसी समन्वय और कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। अनुराधा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर बधाई संदेशों के माध्यम से उनके नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दी जा रही हैं। समर्थकों ने विश्वास जताया कि वह पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और महिला कार्यकर्ताओं के सहयोग से संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगी। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके नेतृत्व में महिला मोर्चा की आगामी गतिविधियां और संगठनात्मक कार्यक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे। कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि महिला मोर्चा जिले में महिलाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाएगा और पार्टी के अभियानों में सक्रिय योगदान देगा। फिलहाल, अनुराधा मिश्रा को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर उन्हें बधाई देने का सिलसिला जारी है। उनके समर्थकों ने उनके सफल कार्यकाल की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह नई जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएंगी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुलंदशहर के चर्चित यूरिया कालाबाजारी मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत की गई निरुद्धि आदेश को रद्द करते हुए सभी याचियों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश मोहम्मद हारून की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका तथा तीन अन्य सह-अभियुक्तों रामेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू, यश राघव और हरेंद्र प्रताप सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुनाया। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने दिया। क्या है मामला जानिये 10 मई 2026 को अनूपशहर (बुलंदशहर) पुलिस ने चेकिंग के दौरान तीन ट्रकों से इफको यूरिया की 525-525 बोरियाँ जब्त की थीं। आरोप था कि पीसीएफ बफर गोदाम के अधिकारियों की मिलीभगत से इस यूरिया को खुले बाजार में ऊँचे दामों पर बेचने और कालाबाजारी के उद्देश्य से ले जायी जा रही थी। इस आपराधिक मामले के आधार पर 23 मई 2026 को जिलाधिकारी बुलंदशहर ने रासुका के तहत निरुद्धि आदेश जारी किए थे। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि कालाबाजारी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा डालने के मामलों के लिए 'कालाबाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम,' एक विशेष कानून है। ऐसे में सामान्य कानून यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा 3(2) के तहत कार्रवाई करना कानूनी रूप से गलत है। यह विधिक सिद्धांत 'सामान्य कानून, विशेष कानून को बेअसर नहीं करता का हवाला देते हुए तर्क दिया कि जब किसी विशिष्ट अपराध के लिए विशेष कानून मौजूद है, तो उसी के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष अधिनियम के तहत अधिकतम निरुद्धि की अवधि केवल छह महीने होती है, जबकि रासुका में यह अवधि एक वर्ष है। सरकार ने महज छह महीने की जगह एक साल तक जेल में रखने की नीयत से रासुका के तहत गलत और दुर्भावनापूर्ण ढंग से कार्रवाई की है। कोर्ट ने कहा यह कानून का दुरुपयोग है कोर्ट ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी से जुड़े मामलों में विशेष कानून लागू होता है, न कि रासुका । अदालत ने माना कि यदि कालाबाजारी रोकने के विशेष कानून के बजाय रासुका का सहारा लेकर किसी व्यक्ति को एक साल तक बंद रखा जाता है, तो यह कानून का दुरुपयोग है।
जूनियर एनालिस्ट (फूड) के 417 पदों की भर्ती में खाद्य प्रौद्योगिकी, डेयरी प्रौद्योगिकी, ऑयल टेक्नोलॉजी और जैव प्रौद्योगिकी में बीटेक डिग्रीधारकों को शामिल करने की मांग हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को अपने विभागीय पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने का अधिकार है। इसी के साथ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की सेवा नियमावली में किए गए संशोधन को वैध ठहराया है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने पंकज कुमार व अन्य की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिका में वर्ष 2020 में संशोधित सेवा नियमावली के नियम 8(2) और भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार की दलील पर कोर्ट सहमत याचियों की ओर से दलील दी गई कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमावली, 2011 में खाद्य विश्लेषक पद के लिए विभिन्न विषयों की स्नातक डिग्रियों को मान्यता दी गई है। ऐसे में संबंधित विषयों में बीटेक करने वाले अभ्यर्थियों को जूनियर एनालिस्ट (फूड) की भर्ती से बाहर रखना उचित नहीं है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जूनियर एनालिस्ट (फूड) और खाद्य विश्लेषक अलग-अलग पद हैं। जूनियर एनालिस्ट राज्य सरकार के विभागीय संवर्ग का पद है, जबकि खाद्य विश्लेषक की नियुक्ति केंद्रीय कानून और उसके तहत निर्धारित नियमों के अनुसार होती है। खंडपीठ ने सरकार की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि खाद्य विश्लेषक पद के लिए केंद्रीय नियमों में निर्धारित योग्यताएं राज्य सरकार को जूनियर एनालिस्ट के पद पर सभी वैकल्पिक योग्यताएं स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं करतीं। राज्य सरकार संबंधित पद के कार्यों और जरूरतों के आधार पर शैक्षणिक योग्यता तय कर सकती है। न्यायालय ने कहा कि भर्ती नियमों में अतिरिक्त बीटेक डिग्रियों को शामिल करने का निर्देश देना नियमों को नए सिरे से लिखने जैसा होगा। इस आधार पर न्यायालय ने भर्ती नियमों में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
जहांगीरपुर में इमरान की मौत से सनसनी, परिजनों की तहरीर पर नामजदों पर हत्या का केस
जहांगीरपुर कस्बे में बुधवार को करीब 40 वर्षीय इमरान पुत्र शफी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद सनसनी फैल गई
लखनऊ के चारबाग स्थित होटल अम्बर में सोमवार को निपुण भारत मिशन संगोष्ठी एवं वंदे मातरम पर आधारित शैक्षिक संगोष्ठी और सम्मान समारोह-2026 का आयोजन किया गया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों सहित प्रदेश के 116 शिक्षकों को अभिनंदन पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि शिक्षकों के समर्पण से ही बच्चों का भविष्य संवरता है। शिक्षक बच्चों को अपने बच्चों की तरह तैयार कर उनके जीवन को दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि सम्मान भले ही किसी एक व्यक्ति को मिलता है, लेकिन उसका संदेश पूरे शिक्षक समाज तक पहुंचता है। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। देखिए 2 तस्वीरें… निपुण भारत मिशन की प्रगति पर चर्चा बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने विद्यालयों में शिक्षकों की ओर से किए जा रहे नवाचारों और निपुण भारत मिशन की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों को बेहतर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने शिक्षण संवर्धन, जबकि किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य प्रमिला गुप्ता ने बच्चों से जुड़े विषयों पर विचार रखे। नौ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा कार्यक्रम संयोजक मनीष देव ने बताया कि शिक्षकों की नौ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के प्रतिनिधि विनीत शर्मा को सौंपा गया। कार्यक्रम में पंकज कुमार वर्मा की लिखित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम गीत प्रस्तुत किया। कई शिक्षकों ने सहयोग किया कार्यक्रम में क्षेत्रीय उपाध्यक्ष विजय कुमार भुर्जी, आनंद द्विवेदी और विजय सोनी सहित अन्य अतिथि शामिल हुए। आयोजन में पंकज कुमार वर्मा, बिंबिसार बौद्ध, अजय कुमार पांडेय, कुंवरपाल गौतम, ओमवीर सिंह, विकास त्रिपाठी, मयंक गुप्ता और सेविन दीक्षित सहित कई शिक्षकों ने सहयोग किया।
बीजेपी महिला, अनुसूचित जनजाति मोर्चा के भी जिलाध्यक्ष घोषित, किस जिले में किसे मिली कमान
भाजपा ने मंगलवार को किसान मोर्चा के साथ ही महिला मोर्चा और अनूसूचित जनजाति मोर्चा के भी जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा कर दी है। यूपी में जनजातियां सीमित जिलों में ही हैं। ऐसे में केवल काशी, गोरखपुर और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में आने वाले जिलों में ही एसटी मोर्चा के अध्यक्ष घोषित किए गए हैं।
मुरादाबाद में सोमवार देर रात करीब 11 बजे एक युवक सोनपुर पुल के ऊपर से नीचे रेलवे लाइन पर जा गिरा। हादसा रोड क्रॉस करने की कोशिश के दौरान हुआ। जल्दबाजी में पुल पर रोड क्रॉस करने की कोशिश कर रहा युवक दोनों साइड पुलों के बीच का गैप नहीं देख सका। उसने जैसे ही छलांग लगाकर डिवाइडर के ऊपर से सड़क क्रॉस करने की कोशिश की वो डिवाइडरों के बीच में बने गैप से पुल के नीचे गिर गया। हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। इस बीच वहां से गुजर रहे कुछ राहगीरों ने युवक को नीचे गिरते हुए देख लिया। पुल के नीचे अंधेरा होने के बावजूद 2-3 युवकों ने साहस दिखाते हुए युवक को तुरंत मदद पहुंचाने की मंशा से नीचे जाकर ढूंढा। युवक की टांगों की हड्डियां बुरी तरह टूट चुकी थीं और उसके मुंह से खून बह रहा था। युवक किसी तरह उसे उठाकर नीचे से ऊपर पुल तक लेकर आए। इसके साथ ही तुरंत पुलिस को भी घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही सोनकपुर पुल के दूसरे छोर पर स्थित पुलिस चौकी से पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे। एंबुलेंस को भी कॉल कर लिया गया। युवक को तुरंत एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल भिजवा दिया गया। घायल युवक ने अपना नाम पवन बताया वह मझोला थाना क्षेत्र में सम्राट अशोक नगर का रहने वाला है।
इंदौर में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के बेटे मिलिंद महाजन के ऑटोमोबाइल शोरूम से जुड़े विवाद में पुलिस अधिकारियों को कोर्ट से राहत मिली है। विशेष एससी-एसटी न्यायालय ने सोमवार को सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया की ओर से दायर परिवाद खारिज कर दिया। इसमें पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह, तत्कालीन डीसीपी विनोद मीणा, एसीपी आशीष पटेल और आजादनगर थाने के तत्कालीन टीआई नीरज मेढ़ा सहित अन्य लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। आरोपों और बयानों में अंतर कोर्ट ने परिवाद में लगाए गए आरोपों, करोसिया के बयानों, पुलिस प्रतिवेदन और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया। सुनवाई के दौरान परिवाद में उल्लेखित कुछ आरोपों और करोसिया के बयानों के बीच अंतर सामने आया। इन तथ्यों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने परिवाद खारिज कर दिया। इससे संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों को राहत मिली है। शोरूम विवाद के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर मिलिंद महाजन की कंपनी मिडवेस्ट ऑटोमोबाइल प्राइवेट लिमिटेड के शोरूम और सर्विस सेंटर में 6 दिसंबर 2024 को हुए विवाद, हमले और तोड़फोड़ के मामले में प्रताप करोसिया के रिश्तेदार सौरभ करोसिया सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला बढ़ने के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराएं लगाई गईं और उनका जुलूस भी निकाला गया था। गारंटी में वाहन की सर्विसिंग के लिए राशि मांगने का आरोप करोसिया ने परिवाद में आरोप लगाया था कि वे अपने टैंकर की सर्विसिंग कराने शोरूम पहुंचे थे। वाहन गारंटी अवधि में होने के बावजूद उनसे राशि मांगी गई। इसका विरोध करने पर उन्हें घेरकर बंधक बनाया गया और बाद में उनके खिलाफ ही आजादनगर थाने में प्रकरण दर्ज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि 9 दिसंबर 2024 को करीब 300 लोगों ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर आरोपियों का जुलूस निकालने और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। करोसिया के मुताबिक इसके बाद पुलिस ने मामले में धाराएं बढ़ाईं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें हथकड़ी लगाकर शोरूम ले जाने की कार्रवाई भी पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह और तत्कालीन डीसीपी विनोद मीणा के निर्देश पर की गई थी। परिवाद में जातिसूचक शब्द कहने, गाली-गलौज करने और कमोड से मूत्र मिला पानी पीने के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। परिवाद और बयानों में अंतर को कोर्ट माना अहम सुनवाई के दौरान कोर्ट ने परिवाद में लगाए गए आरोपों की तुलना करोसिया के बयानों और पुलिस प्रतिवेदन से की। कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत सामग्री में कुछ गंभीर आरोपों का उल्लेख परिवाद और बयानों में एक समान नहीं पाया गया। जातिसूचक शब्द कहने और बंधक बनाने जैसे आरोपों को लेकर भी कोर्ट ने बयानों में सामने आए अंतर पर विचार किया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टिविस्ट को घर में नजरबंद करने के मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन रोकने का अधिकार है, पर किसी को घर में नजरबंद नहीं किया जा सकता।
रामलीला मैदान में इस साल केवल 3 तारीखें ही उपलब्ध, महंगी बुकिंग और एनओसी की शर्तों पर सियासत तेज
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर रोक लगाकर रामलीला मैदान सहित तीन नई जगहें तय की हैं। हालांकि, रामलीला मैदान की बुकिंग महंगी और जटिल होने के साथ-साथ अधिकांश समय उपलब्ध नहीं है।
नीमच के गांधी वाटिका परिसर में शारदीय नवरात्रि पर आयोजित डायमंड रोटरी डांडिया के दूसरे दिन करीब 300 प्रतिभागियों ने डांडिया रास किया। 10 हजार वर्गफीट के प्रांगण में 25 से ज्यादा गरबा ग्रुप्स ने नए भक्ति गीतों पर पारंपरिक परिधानों में प्रस्तुति दी। आयोजन में नीमच के अलावा मंदसौर, रतलाम, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ से भी लोग पहुंचे। मां भगवती की आरती के साथ कार्यक्रम कार्यक्रम के दूसरे दिन अतिथियों ने मां भगवती की आरती की। रोटरी डायमंड क्लब के पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। परिसर में रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में प्रतिभागियों ने डांडिया रास किया। पंडाल में ईको-फ्रेंडली प्रतिमा डांडिया संयोजक हेमंत भंडारी, कमल मंगल, दीपक मूंदड़ा, आशीष गर्ग और करणवीर सिंह ने बताया कि पंडाल में ईको-फ्रेंडली प्रतिमा स्थापित की गई है। दर्शकों के लिए पार्किंग, महिला सुरक्षाकर्मी और पीने के पानी की व्यवस्था की गई है। बच्चों के लिए झूले-चकरी भी लगाए गए हैं। क्लब के पदाधिकारियों ने संभाली जिम्मेदारी आयोजन में रोटरी डायमंड क्लब के अध्यक्ष गुणवंत जैन, सचिव धीरज गांधी और कोषाध्यक्ष अनुज माहेश्वरी सहित क्लब के सदस्यों ने व्यवस्था संभाली।

