जिले के आरोन थाना इलाके के भूपमढ़ी गांव में डकैती के प्रयास के तीन और आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले एक आरोपी और उन्हें मुखबिरी देने वाले को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लगभग दस बदमाश डकैती डालने के उद्देश्य से गांव में पहुंचे थे। मकान मालिक के जाग जाने पर वह भाग खड़े हुए थे। एक बदमाश को ग्रामीणों ने पकड़ लिया था। आरोन पुलिस ने बताया कि 4-5 जनवरी की दरम्यानी रात जिले के आरोन थाना क्षेत्र के ग्राम भूपमढ़ी में कुछ हथियारबंद बदमाशों द्वारा ग्रामीण महावीर सिंह रघुवंशी के घर में घुसकर डकैती की वारदात का प्रयास किया गया था। इस दौरान ग्रामीणों की सतर्कता से बदमाश अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सके और मौके से फरार हो गए। इस बीच ग्रामीणों द्वारा एक बदमाश शेर सिंह पुत्र विक्रम पारदी उम्र 20 साल निवासी ग्राम खेजरा चक थाना धरनावदा को पकड़ लिया था। साथ ही बदमाशों की एक बाइक भी मौके से बरामद हुई थी। 7-8 अज्ञात लोगों पर की FIR इस घटना की रिपोर्ट पर से आरोपी शेर सिंह पारदी सहित 7-8 अन्य अज्ञात के विरूद्ध आरोन थाने में मामला दर्ज किया गया। साथ ही आरोपी शेर सिंह पारदी को गिरफ्तार कर मौके से बाइक को जप्त किया गया। बाइक के संबंध में जानकारी पता करने पर वह राजस्थान के कोटा से चोरी होना पाई गई। गिरफ्तार आरोपी शेर सिंह पारदी को न्यायालय से पुलिस रिमांड लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में उसके अन्य अज्ञात साथियों और डकैती कराने वाले स्थानीय सूत्रधारों के नाम चिन्हित किए गए। इसके बाद पुलिस द्वारा प्रकरण में चिन्हित अन्य आरोपियों की तलाश शुरू की गई। इसके लिए अपना मुखिबर तंत्र सक्रिय किया। इसी क्रम में डकैती कराने वाले स्थानीय सूत्रधार दिमान सिंह पुत्र स्व तोफान सिंह केवट उम्र 60 साल निवासी ग्राम भूपमढ़ी को 9 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। तीन और बदमाश पकड़ाए आरोन पुलिस द्वारा बाकी आरोपियों की तलाश में लगातार दबिशें दी गईं। इसी क्रम में मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन और आरोपी वीरेंद्र उर्फ बीरन पुत्र नारायण सिंह यादव उम्र 53 साल निवासी ग्राम खिरिया कुसमान थाना आरोन, संजू पुत्र श्यामबाबू यादव उम्र 24 साल निवासी ग्राम खेजरा गुरूजी थाना धरनावदा और विरमाल उर्फ मंटू पुत्र अमर सिंह यादव उम्र 29 साल निवासी ग्राम मोतीपुरा चौकी थाना जैपला जिला बारां राजस्थान को गिरफ्तार कर लिया गया। उनसे घटना में इस्तेमाल बिना नंबर की एक मोटर सायकिल और 3 मोबाईल फोन जप्त किये गये हैं।
बरसाना की प्रसिद्ध लट्ठमार होली की तैयारियां शुरू हो गयी हैं। लट्ठमार होली और लड्डू-मार होली को सकुशल, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। होली पर की जाने वाली व्यवस्थाओं को लेकर बरसाना स्थित पीडब्ल्यूडी सभागार में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर रोडमैप तैयार किया गया। वन वे रहेगी मंदिर में एंट्री बैठक में निर्णय लिया गया कि सीसीटीवी कैमरा और लाउडस्पीकर सिस्टम का मुख्य कंट्रोल रूम पीडब्ल्यूडी सभागार में स्थापित किया जाएगा, जिससे पूरे आयोजन पर रियल-टाइम निगरानी रखी जा सके। श्रद्धालुओं के लिए तय रूट, बिना भटके होंगे दर्शन सभी श्रद्धालुओं का प्रवेश केवल श्रीजी गेट से होगा। श्रद्धालु कटरा पार्क,सुदामा चौक,दादी बाबा मंदिर,सिंहपौर गेट होते हुए श्रीजी के दर्शन करेंगे, जबकि जयपुर मंदिर की ओर से निकास मार्ग निर्धारित किया गया है। भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग कर छोटे-छोटे बॉक्स बनाए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को बॉक्स फॉर्मेशन में आगे बढ़ाया जाएगा। रंगीली चौक के आने-जाने वाले मार्गों पर आवागमन अत्यंत प्रतिबंधित रहेगा। 60 पार्किंग, बॉक्स फॉर्मेशन, CCTV कंट्रोल रूम वाहनों के लिए कुल 60 बड़ी पार्किंग चिह्नित की गई हैं। पार्किंग के बाद श्रद्धालुओं को पैदल ही मंदिर दर्शन के लिए जाना होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जूता-चप्पल स्टैंड रोडवेज बस स्टैंड से पहले ही बनाए जाएंगे, ताकि दर्शन के बाद किसी को वापस मंदिर क्षेत्र में लौटना न पड़े। पूरे बरसाना–नंदगांव क्षेत्र को 7 जोन और 18 सेक्टर में विभाजित कर पुलिस व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। यह रहे मौजूद बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन डॉ.अमरेश कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत, उप जिलाधिकारी प्राजक्ता त्रिपाठी, क्षेत्राधिकार गोवर्धन अनिल कुमार सिंह, नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि, ईओ नगर पंचायत, सभासद, मंदिर कमेटी के पदाधिकारी एवं संभ्रांत नागरिक उपस्थित रहे। बसंत पंचमी से शुरू होगी ब्रज में होली ब्रज में होली का उत्साह बंसत पंचमी से शुरू होकर भगवान रंगनाथ के होली खेलने तक 40 दिन तक चलेगा। बरसाना में लड्डू होली 25 फरवरी को तो लट्ठमार होली 26 फरवरी को खेली जाएगी। यह है कार्यक्रम 23 जनवरी 2026 शुक्रवार – बसंती होली, बाँके बिहारी मंदिर 25 फरवरी 2026 बुधवार – बरसाना लड्डू होली, श्री जी मंदिर बरसाना 26 फरवरी 2026 गुरुवार – बरसाना लठमार होली, श्री जी मंदिर बरसाना 27 फरवरी 2026 शुक्रवार – नंदगाँव होली, नंद भवन में लठमार होली 28 फरवरी 2026 शनिवार – वृन्दावन रंगभरी होली, बाँके बिहारी मंदिर 28 फरवरी 2026 शनिवार – मथुरा श्री कृष्ण जन्मस्थान पर हुड़ंगा 1 मार्च 2026 रविवार – द्वारकाधीश मंदिर होली, मथुरा 1 मार्च 2026 रविवार – गोकुल छड़ीमार होली, रमण रेती 2 मार्च 2026 सोमवार – बाँके बिहारी मंदिर में होली 2 मार्च 2026 सोमवार – चतुर्वेदी समाज का डोला 5 मार्च 2026 गुरुवार – दाऊजी हुड़ंगा, बलदेव 6 मार्च 2026 शुक्रवार – नंदगाँव वाला हुड़ंगा 7 मार्च 2026 शनिवार – जाँव का हुड़ंगा 8 मार्च 2026 रविवार – मुखराई का चरकुला नृत्य 9 मार्च 2026 सोमवार – वटेन का परंपरागत हुड़ंगा 10 मार्च 2026 मंगलवार – गिड़ोह का परंपरागत हुड़ंगा 11 मार्च 2026 बुधवार – रंगभरी खायरा का हुड़ंगा 12 मार्च 2026 गुरुवार – रंगनाथ जी वृन्दावन होली
जोधपुर शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त रुख जारी है। इसी से जुड़े मामले में राज्य सरकार और नगर निगम ने कोर्ट को बताया है कि वे शहर को साफ रखने के लिए 'डूंगरपुर मॉडल' के सूत्रधार के.के. गुप्ता की मदद ले रहे हैं। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई की। सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वस्त किया गया है कि शहर से गंदगी और मलबा हटाने के लिए एक ठोस योजना तैयार की जा रही है। कोर्ट ने सरकार के आग्रह पर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय की है। डूंगरपुर से बुलाए गए एक्सपर्ट, मीटिंग हुई सुनवाई के दौरान सरकार और निगम की ओर से पैरवी कर रहे AAG वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश पंवार ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट द्वारा गत 14 नवंबर को दिए गए निर्देशों की पालना में विभाग सक्रिय हुआ है। उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में डूंगरपुर नगर परिषद के पूर्व सभापति और स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर रहे के.के. गुप्ता को विशेष रूप से जोधपुर बुलाया गया था। एएजी ने कोर्ट को जानकारी दी कि एक्सपर्ट गुप्ता के साथ सक्षम अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई है, जिसमें जोधपुर की सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है। हर वार्ड में बनेगी निगरानी कमेटी कोर्ट को बताया गया कि सफाई व्यवस्था को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। AAG ने सबमिशन दिया कि शहर की स्वच्छता का ध्यान रखने के लिए अब 'वार्ड-वाइज कमेटियां' गठित की जा रही हैं। ये कमेटियां अपने-अपने क्षेत्र में कचरा प्रबंधन और सफाई कार्यों की निगरानी करेंगी। सरकार ने कहा- अभी थोड़ा समय और चाहिए राज्य सरकार की ओर से कोर्ट से अनुरोध किया गया कि सफाई को लेकर उठाए गए कदमों और प्रोग्रेस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाने के लिए उन्हें कुछ और समय दिया जाए। खंडपीठ ने इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए मामले को 3 फरवरी तक के लिए टाल दिया। गौरतलब है कि जोधपुर निवासी महेश गहलोत ने जनहित याचिका दायर कर शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था का मुद्दा उठाया था, जिस पर कोर्ट लगातार निगरानी रख रहा है।
गुना में सीएम राइज स्कूल में नौकरी दिलाने के नाम पर युवक-युवतियों से ठगी करने वाले कोचिंग संचालक को कैंट पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने आउटसोर्सिंग के तहत कंप्यूटर ऑपरेटर की भर्ती का झांसा देकर प्रत्येक अभ्यर्थी से 25-25 हजार रुपए वसूले और उन्हें फर्जी जॉइनिंग लेटर थमा दिए। एनएफएल पालिका बाजार विजयपुर निवासी मुस्कान (21) पुत्री हरिओम रजक ने कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि राघौगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम डोंगर निवासी रवि मीणा पुत्र श्रीलाल मीणा, जो कोचिंग क्लासेस संचालक है, से उसकी करीब एक साल पहले पहचान हुई थी। आरोपी ने उसे सीएम राइज स्कूल में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर की भर्ती होने की जानकारी दी और कहा कि लैपटॉप, ड्रेस और आईडी कार्ड के नाम पर 29 हजार रुपए जमा करने होंगे, जो जॉइनिंग के दिन लौटा दिए जाएंगे। रुपए लेने के बाद फर्जी जॉइनिंग लेटर थमाया मुस्कान ने 23 जुलाई को आरोपी के खाते में 25 हजार रुपए और 2 अगस्त 2025 को ड्रेस के लिए 4 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए। राशि लेने के बाद आरोपी ने उसे फर्जी जॉइनिंग लेटर दिया, जिसमें जॉइनिंग की तारीख 18 अक्टूबर 2025 अंकित थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब मुस्कान ने यह जानकारी अपने चचेरे भाई और दोस्तों को दी। जांच में सामने आया कि आरोपी रवि मीणा ने अन्य युवक-युवतियों से भी इसी तरह 25-25 हजार रुपए लेकर फर्जी जॉइनिंग लेटर जारी किए थे। जॉइनिंग की तय तारीख आने पर पीड़ितों ने संपर्क किया तो आरोपी बहाने बनाने लगा और बाद में उसने फोन उठाना बंद कर दिया। शिकायत के बाद आरोपी पर FIR शिकायत की जांच के बाद कैंट थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी के निर्देशन और सीएसपी प्रियंका मिश्रा के नेतृत्व में कैंट थाना प्रभारी टीआई अनूप भार्गव व उनकी टीम ने आरोपी की तलाश शुरू की। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपी रवि मीणा (24) निवासी ग्राम डोंगर, थाना विजयपुर को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
शहर में क्राइम को कंट्रोल व निगरानी के लिए पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इसके लिए यूपी पुलिस के एआई आधारित यक्ष ऐप के लिए अपराध और अपराधियों के लिए हर थाने में डिजिटल कुंडली तैयार की जा रही है। थाने स्तर पर चौकी व बीट इंचार्ज से अपराधियों व अपराध से जुड़े डेटा की फीडिंग करवाई जा रही है। अपराधी, अपराध, अपराध के हॉटस्पॉट व अन्य ब्यौरा फीड होने के बाद एआई के जरिए पुलिस छोटी सी छोटी जानकारी आसानी से मिलनी शुरू हो जाएगी। अभी तक जितने डेटा की फीडिंग हो गई है उससे पुलिस ने ट्रायल के तौर पर मदद लेनी शुरू कर दी है। इसके परिणाम सकारात्मक रहे हैं। नोएडा पुलिस दिल्ली के उन अपराधियों व गैंग का भी ब्यौरा ऐप के लिए डिजिटली तैयार कर रही है जिनकी शहर में सक्रियता रहती है। अपराध के पैटर्न को किया जा रहा फीडपुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐप को लेकर बीट स्तर तक पर प्रशिक्षण दिया गया है। एआई आधारित इस ऐप पर जितना ज्यादा डेटा फीड किया जाएगा उतना ही मददगार होगा। अपराधियों के साथ उनके क्षेत्र, अपराध के पैटर्न को भी फीड किया जा रहा है। ऐसे में अगर किसी क्षेत्र में कोई अपराध होता है तो उस पैटर्न से जुड़े अपराधियों का ब्यौरा पुलिस के पास होगा। थानों से पकड़े अपराधियों की फोटो अपलोडफिर कौन सा अपराधी जेल में है और कौन बाहर इस हिसाब से पुलिस के लिए छटनी आसान होगी। सभी 26 थानों में जो अपराधी पकड़े जा रहे हैं और जो फरार हैं उनके फोटो की फीडिंग भी की जा रही है। बीट कॉन्स्टेबल अपने क्षेत्र में संदिग्ध लोगों की गतिविधि व उनके फोटो को भी रखेंगे और ऐप के जरिए रिपोर्ट करेंगे। लखनऊ से होगी ऐप की निगरानीजल्द ही हर थाने के हिस्ट्रीशीटर, वांछित अपराधी, सक्रिय अपराधी, गैंग इस ऐप पर दिखने लगेंगे। अगर अपराधी नोएडा से ठिकाना बदल कर गाजियाबाद या प्रदेश के किसी दूसरे जिले में जाकर रहने लगता है। सत्यापन में यह बात सामने आने पर बीट प्रभारी इसे रिपोर्ट करेंगे तो उस जिले की पुलिस उस अपराधी की निगरानी शुरू कर देगी। ऐप की पूरी निगरानी लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय से की जा रही है। ऐप में चेहरे और आवाज से होगी पहचान अगर कोई भी व्यक्ति संदिग्ध व अपराधी है तो इस ऐप पर उसके फोटो के जरिए उसके अपराधी होने का ब्यौरा सामने आ जाएगा। इसके लिए एआई पावर्ड फेसियल रिकग्निशन व एआई पावर्ड वायस सर्च की सुविधा भी है। पुलिस इसके लिए बड़े अपराधियों के वाइस सैंपल भी सुरक्षित कर रही है।
युवा पीढ़ी को बर्बादी की तरफ धकेल नशे का साम्राज्य खड़ा करने वाला 5 राज्यों का वांछित आरोपी रमेश अब पुलिस के हाथ लगा है। राजस्थान का टॉप-10 बदमाश तस्कर व एक लाख रुपए का इनामी है। एएनटीएफ और एटीएस की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन विषाणु बाहु के तहत इस एमडी किंग को गिरफ्तार किया है। ये बीते 8 साल से देश के कई राज्यों में एमडी ड्रग्स का जाल फैला रहा था। राजस्थान के बाड़मेर, सिरोही सहित कई राज्यों में पिछले 2 साल में 5 एमडी फैक्ट्री खोल अरबों रुपए की कमाई कर फरार था। बाड़मेर के सेड़वा में पकड़ी गई एमडी फैक्ट्री का मुख्य सरगना था। मादक पदार्थ विरोधी कार्यबल राजस्थान की टीम ने बाड़मेर के धोरीमन्ना क्षेत्र के नेडी नाडी निवासी 31 वर्षीय रमेश कुमार उर्फ अनिल उर्फ रामलाल पुत्र सोहनलाल विश्नोई को गिरफ्तार किया है। आरोपी रमेश पर एनडीपीएस, लूट, मारपीट, वाहन चोरी, शराब तस्करी, फिरौती और अपहरण जैसे 31 मुकदमे हैं। सेड़वा एमडी फैक्ट्री का भी मास्टर माइंड रमेश एमडी बनाने का मुख्य सरगना रहा है। जोधपुर के कुड़ी भगतासनी इलाके में पकड़ी गई एमडी फैक्ट्री रमेश ने लगाई थी। बाड़मेर के सेड़वा में 23 जुलाई 2025 को एमडी फैक्ट्री पकड़ी गई थी, उसमें रमेश मुख्य सरगना था। सिरोही में भी पकड़ी गई फैक्ट्री का कर्ता-धर्ता रमेश ही था। इसके अलावा 2-3 अन्य जगह एमडी फैक्ट्री रमेश द्वारा लगाई थी। इस फॉर्मूला में ब्रोमो, कास्टिक सोडा, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, टार्लबन और एथिल अल्कोहल को मिलाकर केमिकल प्रक्रिया से एमडी बनाता था। फैक्ट्री लगा कर एमडी बनाने में महज 5-7 दिन ही लगते थे। महाराष्ट्र जेल में सरगना डॉ. बिरजू से संपर्क में आने के बाद रमेश एमडी के कारोबार में उतरा था। शुरूआत महाराष्ट्र से एमडी बनाकर राजस्थान में बेचने से की। इसके बाद इसको राजस्थान के अलग-अलग जिलों में स्थापित कर एमडी को गुजरात व महाराष्ट्र में बेचने लगा। एमडी के लिए मुंबई, पुणे और गुजरात से केमिकल मंगवाता था। सहयोगी डॉ. बिरजू के माध्यम से एमडी बनाने के एक्सपर्ट आते थे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर पार्टनर बनाकर उनके ही घरों में फैक्ट्री सेटअप करवाता था। 1 लाख के केमिकल से 30 लाख की एमडी बनती थी रमेश के खिलाफ राजस्थान में 15-17, गुजरात में 8, तेलंगाना में 3, महाराष्ट्र में 2 और कर्नाटक में 1 मुकदमे खुद ने स्वीकार किया है। इसके अलावा आसाम, मणिपुर में भी खुद के बदले हुए नाम से मुकदमे दर्ज होने की सूचना है। 8 वर्षों से फरार रह कर नशे का काला कारोबार कर रहा था। एक किलो एमडी बनाने में जहां करीब एक लाख रुपए का खर्च आता था, वहीं बाजार में वही जहर 30 लाख रुपए तक में बेचता था। आरोपी रमेश खुद का नाम बदलता रहता था, कभी अनिल तो कभी रामलाल भी नाम रखे। जिस राज्य में जाता था, वैसा ही भेष बदल देता। मजदूर बने पुलिसवाले, ट्रेवल एजेंट से मिला सुराग एटीएस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि एएनटीएफ की टीम कोलकाता में हुलिया बदलकर मजदूर बनी और हावड़ा की एक स्टील की दुकान पर काम करने वाले युवकों से दोस्ती की। वहीं से पता चला कि रमेश आजकल धार्मिक हो गया है और गंगासागर जाने की तैयारी में है। टीम ने गंगासागर के ट्रेवल एजेंट को विश्वास में लिया, एजेंट की पत्नी रमेश के घर खाना बनाती थी। यहीं से पुलिस ने दबोच लिया। रमेश कुमार खुद को केमिस्ट्री का टीचर बताता था। पिछले कुछ सालों में 12 ज्योतिर्लिंगों और चारों धाम की यात्राएं कर चुका है। ज्यादातर सफर फ्लाइट से करता था। पहले पार्टनर बनाए, फिर उन्हीं के घर फैक्ट्रियां लगाई रमेश इतना शातिर था कि उसने अपनों को भी नहीं बख्शा। उसने अलग-अलग जिलों में पार्टनर बनाए, उन्हीं के घर-जमीन पर फैक्ट्रियां लगवाई और खुद पर्दे के पीछे रहकर करोड़ों कूट लिए। भंवरी देवी हत्या कांड के आरोपी बिशनाराम का यह पूर्व सहयोगी भी रहा है। रमेश ने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद शुरूआत गाड़ी चोरी से की। सैकड़ों गाड़ियां चोरी कर तस्करों को बेची। धोरीमन्ना में मार्बल की फैक्ट्री, कार डेकोर की दुकान भी लगाई। शानदार मकान, फार्म हाउस, प्लॉट सहित करोड़ों की संपत्ति अर्जित की।
प्रदेश में कृषि के साथ पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने में कारगर साबित हे रहा है। राजस्थान में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार जहां भारत का दूध उपलब्धता में राष्ट्रीय औसत 471 ग्राम प्रति दिन है। जबकि राजस्थान में यह आंकड़ा बढ़कर 1171 ग्राम प्रति दिन पहुंच गया है। अन्य राज्यों की तुलना में जहां पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति उपलब्धता 450 ग्राम और मध्य प्रदेश में 673 ग्राम है। वहीं राजस्थान 1171 ग्राम के साथ, पंजाब 1271 ग्राम के साथ देश के शीर्ष राज्यों में शुमार है। यह उपलब्धि 15 वर्षों में मिली है। जहां वर्ष 2009-10 में राज्य में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 509 ग्राम थी। वहीं, 2013-14 तक आंकड़ा 572 ग्राम तक पहुंचा। इसके अगले साल यह 645 ग्राम हुआ और 2018-19 तक 850 ग्राम के स्तर को छू लिया। जबकि हाल ही के पांच वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2019-20 में 904 ग्राम से बढ़कर 2021-22 में एक किलो का आंकड़ा पार किया। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अब उपलब्धता 1171 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के स्तर पर है। कई जिलों में पशुधन की संख्या और उत्पादन इतना है कि यह राज्य के औसत से भी ज्यादा है। इनमें जैसलमेर में सर्वाधिक लगभग 1650 ग्राम है। इसी तरह बीकानेर में 1580 ग्राम, बाड़मेर में 1450 ग्राम, जोधपुर में 1320 ग्राम, नागौर में 1280 ग्राम और हनुमानगढ़ में 1210 ग्राम के साथ राज्य के औसत से भी ऊपर वाले जिलों की श्रेणी में है। जबकि कम औसत वाले जिलों में बारां में 580 ग्राम, राजसमंद में 550 ग्राम, सिरोही में 520 ग्राम, उदयपुर में 500 ग्राम, प्रतापगढ़ में 460 ग्राम, बांसवाड़ा में 430 ग्राम व डूंगरपुर में सबसे कम लगभग 410 ग्राम प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता है। जयपुर, अलवर, भरतपुर, श्रीगंगानगर, अजमेर, सीकर, झुंझुनूं, पाली अधिक उत्पादन वाले जिलों में शामिल है। यहां भी दूध की उपलब्धता राज्य के औसत के आसपास है। जबकि भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, टोंक, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, कोटा, बूंदी और झालावाड़ आदि जिलों में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 600 ग्राम से 900 ग्राम है। राज्य में दूध उत्पादन में हर वर्ष बढ़ोतरी दर्ज हुई राजस्थान में दूध का उत्पादन बढ़ रहा है। वर्ष 2001-02 में उत्पादन 7758 हजार टन था लेकिन दो दशकों की निरंतर वृद्धि के बाद 38 हजार टन के स्तर पर पहुंच गया है। इस दौरान उत्पादन में लगभग 5 गुना की बढ़ोतरी हुई है और उत्पादन में राज्य पहले पायदान पर है। वहीं, उत्तर प्रदेश करीब 35 हजार टन के साथ दूसरे स्थान पर है। मध्य प्रदेश तीसरे, गुजरात चौथे और आंध्र प्रदेश पांचवें पायदान पर है। राज्य में पशु नस्ल सुधार और पशुपालकों को बिना ब्याज ऋण सुविधा से भी पशुपालन को बढ़ावा मिल रहा है।
मिजोरम की अदरक प्रसंस्करण इकाई को मिली चंचल कुमार की सराहना
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय में सचिव चंचल कुमार ने मिजोरम में हाल ही में स्थापित अदरक प्रसंस्करण इकाई (जिंजर प्रोसेसिंग यूनिट) की प्रशंसा की है
इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। आईसीयू में एडमिट 6 मरीजों में से 1 को वार्ड में रेफर किया गया है, जबकि तीन मरीज लंबे समय से वेंटिलेटर पर ही हैं। वार्ड में 11 मरीज एडमिट हैं। इनके सहित अभी 16 मरीजों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। शुक्रवार को डायरिया के तीन मरीज आए, जिन्हें अस्पताल रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ी। शुक्रवार को मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने भागीरथपुरा क्षेत्र में जलप्रदाय की स्थिति का अवलोकन किया। इस दौरान नर्मदा जलप्रदाय के दौरान नल से ग्लास में पानी भरकर स्वयं पीकर उसकी गुणवत्ता की जांच की। उनके साथ क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने भी पानी पीकर लोगों को विश्वास हासिल करने का प्रयास किया। इस दौरान मेयर ने कहा कि नगर निगम, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भागीरथपुरा क्षेत्र में विगत दिनों से लगातार राहत एवं सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। इनमें क्षेत्र के नागरिकों का भी सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में जलप्रदाय कर लगातार जल के सैंपल लिए गए। इस दौरान सभी आवश्यक जांच और निर्धारित मापदंडों के अनुरूप पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित की गई। 30% हिस्से में जल सुरक्षित सभी जांचों में जल सुरक्षित पाए जाने के बाद शुक्रवार को भागीरथपुरा क्षेत्र के लगभग 30% हिस्से में, जिसमें लगभग 15 हजार की आबादी है, नर्मदा जलप्रदाय को पुनः प्रारंभ किया गया है। मेयर ने भागीरथपुरा क्षेत्र के नागरिकों से अपील की कि जलप्रदाय प्रारम्भ होने के बाद भी सावधानी के तौर पर पानी को उबालकर ही उपयोग में लें। साथ ही नगर निगम, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का पूर्ण रूप से पालन करें। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की समस्या या असुविधा उत्पन्न होती है तो लोग तत्काल नगर निगम या जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके। जानिए कब किसकी मौत हुई
भोपाल के जिंसी स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस से निकले मीट में गोमांस के मुद्दे पर 'शहर सरकार' अपनों से ही घिर गई हैं। स्लॉटर हाउस शुरू करने और जिम्मेदारों की भूमिका पर सांसद आलोक शर्मा ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। वहीं, पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के खास समर्थक और 'शहर सरकार' में ही मंत्री (एमआईसी मेंबर) जगदीश यादव ने जिम्मेदारों को निशाने पर लिया है। एमआईसी मेंबर यादव ने भास्कर से चर्चा में कहा, स्लॉटर हाउस बंद करना विषय नहीं है। बड़ा मसला तो यह है कि स्लॉटर हाउस में गोमांस कटा कैसे? इसे निगम कैसे चला रहा था? अफसर उदित गर्ग क्या देख रहे थे? क्या एई गर्ग मीट को एक्सपोर्ट करने की परमिशन दे सकते हैं? 24 अक्टूबर-25 को जब मेयर इन कौंसिल की बैठक हुई थी, तब सिर्फ निर्माण कार्य में समय वृद्धि दिए जाने का ही विषय था, लेकिन एई गर्ग ने इसे संकल्प बताते हुए नोटशीट दी। जिसमें असलम चमड़ा को स्लॉटर हाउस का संचालन 20 साल के लिए सौंप दिया गया। यह पूरा खेल इस तरह से खेला गया कि किसी को भनक भी नहीं लगे। दूसरी ओर, तब कुकर्मी समेत अन्य मामलों में अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चल जाता है तो स्लॉटर हाउस मामले में बुलडोजर शांत क्यों है? पुलिस एफआईआर में साफ लिखा है कि मीट में गोमांस था। इस मामले में असलम चमड़ा की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन उसके विरुद्ध रासुका की कार्रवाई नहीं की गई। न ही दोषी अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई। मैंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि वे असलम चमड़ा के घर पर बुलडोजर चलाने के आदेश दें, या फिर मुझे आदेशित करें। हम सब बुलडोजर चला देंगे। कमिश्नर की भूमिका भी सवालों के घेरे मेंनिगम कमिश्नर संस्कृति जैन की तरफ से अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने के सवाल पर एमआईसी मेंबर यादव ने कहा, स्लॉटर हाउस का संचालन गलत तरीके से शुरू किया गया। इसमें भी भैंस की स्लॉटिंग करने की ही अनुमति दी गई थी, लेकिन यहां तो गायें कट रही थीं। क्या निगम ने गायें कटने का एग्रीमेंट किया था? साफ है कि असलम चमड़ा ने एग्रीमेंट का उल्लंघन किया है। फिर भी कमिश्नर केस दर्ज क्यों नहीं करा रही? सांसद बोले- सरकार और प्रशासन हर बिंदू पर जांच कर रहाइस मामले में सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि संगठन स्तर पर चर्चा हुई है। सारी चीजों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। किसी भी दोषी को नहीं छोड़ा जाएगा। दूध का दूध और पानी का पानी होगा। सांसद शर्मा ने कहा कि जिन्होंने ये सब किया, उनकी भूमिका की जांच हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भी आग्रह किया है। सरकार और प्रशासन एक-एक बिंदू के ऊपर जांच कर रहा है। स्लॉटर हाउस शुरू नहीं करने पर हटाने तक का नोटिस दे दिया थासांसद शर्मा ने कहा कि जब मैं भोपाल का महापौर था, तब भी कई बार प्रस्ताव आए, लेकिन मैंने स्लॉटर हाउस चलाने की अनुमति नहीं दी। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल) ने मुझ पर नाराजगी जताई। लताड़ भी लगाई।दूसरी ओर, नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन एक सीनियर अधिकारी ने मुझे महापौर पद से हटाने तक का नोटिस दे दिया, लेकिन मैं डरा नहीं। स्लॉटर हाउस को खोलने की अनुमति नहीं दी। हाल ही में आए मामले से मैं दुखी और व्यथित हूं। गुस्सा भी है। मैं फाइल का अध्ययन कर रहा हूं। क्या गायें यही काटी गई? सीसीटीवी कैमरे भी खंगाल रहे हैं। जो दोषी पाया जाएगा, कानून-प्रशासन अपना काम करेगा। जिनके नाम आएंगे, उसे भोपाल का बेटा भी नहीं छोड़ेगा। दूसरी ओर, कांग्रेस ने मेयर मालती राय के विरुद्ध एफआईआर की मांग की है। इससे जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए... 1. लैब में हो गई थी गोमांस की पुष्टि:भोपाल मेयर-कमिश्नर पुलिस जांच का हवाला देती रहीं भोपाल के आधुनिक स्लॉटर हाउस में मिले गोमांस मामले में नगर निगम के जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मेयर मालती राय और कमिश्नर संस्कृति जैन 265 क्विंटल मांस में गोमांस की पुष्टि को लेकर पुलिस जांच का हवाला देती रहीं, लेकिन 8 जनवरी को हुई एफआईआर में ही पुलिस ने गोमांस की पुष्टि कर दी थी। दूसरी ओर, निगम की तरफ से अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में जिम्मेदार भी जांच के दायरे में आ रहे हैं। काफी दबाव आने के बाद वेटनरी डॉक्टर बेनीप्रसाद गौर समेत 9 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। वहीं, 3 कर्मचारियों को नोटिस थमाए गए हैं। एक अन्य कार्रवाई में स्लॉटर हाउस को सील किया गया है। देखे पूरी लिस्ट 2. स्लॉटर हाउस का मकसद-शर्तें क्या? हर कड़ी की पड़ताल:100 करोड़ की सरकारी जमीन पर बनाया भोपाल में गोमांस मिलने के मामले में अब आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़ी पूरी फाइल की गहन जांच की तैयारी है। नगर निगम के उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया है कि टेंडर की शर्तें तय होने से लेकर टेंडर आवंटन और अंत में कमिश्नर के हस्ताक्षर तक की हर कड़ी की पड़ताल होगी। पढ़ें पूरी खबर... 3. जहां गोमांस मिला… उसे नामंजूर कर चुके गौर और शर्मा, प्रशासक पर फोड़ा ठीकरा भोपाल के आधुनिक स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के बाद नगर निगम की मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) ने पूरा ठीकरा प्रशासक, वेटनरी डॉक्टर और 11 कर्मचारियों पर फोड़ा है। वेटनरी डॉक्टर, 8 कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा चुका है, जबकि 3 कर्मचारियों को नोटिस दिए गए। पढ़ें पूरी खबर...
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत एडमिशन को लेकर अहम व्यवस्था दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं (PP1, PP2, PP3) संचालित हैं, वहां एंट्री लेवल पर ही वंचित वर्ग को 25 फीसदी आरक्षण देना होगा। स्कूल अब केवल कक्षा-1 से मान्यता का तर्क देकर बच नहीं सकेंगी। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने 16 जनवरी को राज्य सरकार की 7 स्पेशल अपीलों का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। इस आदेश का असर जोधपुर और भीलवाड़ा सहित प्रदेश की 52 निजी स्कूलों पर पड़ेगा। जिन्हें उन सभी निचली कक्षाओं में आरटीई के तहत 25% एडमिशन देना होगा, जिसमें वे नॉन-आरटीई बच्चों को प्रवेश देती हैं। रुकमणि बिड़ला केस बना आधार सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता राज्य सरकार और प्रतिवादी निजी स्कूलों के वकीलों ने कोर्ट में सहमति जताई कि यह विवाद पूरी तरह से 'रुकमणि बिड़ला मॉडर्न हाई स्कूल बनाम राजस्थान राज्य' के मामले से कवर होता है, जिसका फैसला 8 जनवरी को आया था। इसी आधार पर खंडपीठ ने वर्तमान अपीलों को भी उसी फैसले के नियमों और शर्तों के तहत निस्तारित किया। 52 स्कूलों से जुड़ा है मामला यह आदेश केवल एक या दो स्कूलों तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर 7 अलग-अलग अपीलों पर सुनवाई की। इनमें शाह गोवर्धन लाल काबरा ज्ञान पीठ (जोधपुर), मयूर चौपासनी स्कूल, दिल्ली पब्लिक अपर प्राइमरी स्कूल और भीलवाड़ा जिले के करीब 45 स्कूल (जैसे सेंट डी पब्लिक स्कूल, वैदिक एकेडमी आदि) शामिल हैं। हर लेवल पर 25% का अनुपात जरूरी: कोर्ट कोर्ट ने फैसले में आरटीई एक्ट के तहत आने वाले स्कूलों के लिए प्रवेश की स्थिति पूरी तरह साफ की है: मान्यता का तर्क खारिज: बच्चों को पीछे नहीं छोड़ सकते निजी स्कूलों की ओर से तर्क दिया गया था कि राज्य सरकार केवल कक्षा-1 से मान्यता देती है, प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए नहीं। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। फैसले में कहा गया, मान्यता का संबंध स्कूल की स्थापना से है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि PP1, PP2 और PP3 स्तर पर प्रवेश को मनमाने तरीके से छोड़ दिया जाए। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- देश तरक्की कर रहा है और बच्चों का आईक्यू लेवल बढ़ गया है। अगर वंचित वर्ग के बच्चे प्री-प्राइमरी शिक्षा से महरूम रह गए, तो वे संपन्न परिवारों के बच्चों से पिछड़ जाएंगे। ऐसा होने पर आरटीई एक्ट का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह निर्देशों की पालना के लिए फैसले के अनुरूप नए सर्कुलर जारी करे। कोर्ट ने अपने फैसले में इस सर्कुलर का पूरा खाका भी स्पष्ट किया है, जिसे लागू करना होगा। सर्कुलर में यह सुनिश्चित करना होगा कि जिन स्कूलों में पीपी-1, 2 या 3 कक्षाएं हैं, वहां प्रवेश का एंट्री लेवल वहीं से माना जाएगा।
मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। 'बात खरी है' मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। सीएम ने दूर की पंचायत सचिवों की नाराजगीकोई सचिव अगर काम नहीं करेगा तो हटा देंगे। सचिव हैं, सहायक सचिव हैं, इनकी क्या औकात... करीब दो महीने पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में सरपंच सम्मेलन में ये बयान दिया तो पंचायत सचिव नाराज हो गए थे। लेकिन, अब सीएम डॉ. मोहन यादव ने इन्हें खुश करने का काम किया है। सीएम ने भगवान हनुमान जी से इनकी तुलना की। भोपाल में पंचायत सचिव सम्मेलन में उन्होंने कहा- भगवान राम के सारे असंभव से असंभव काम करने के लिए जो हनुमान जी करते थे, वही काम हमारे पंचायत सचिव कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की इस तारीफ पर पंचायत सचिव भी गदगद नजर आए और कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। खुद मुख्यमंत्री भी इस जोशीले स्वागत से खुश दिखाई दिए। उन्होंने कहा- इतनी बढ़िया तालियां तो यहीं बजती हैं, आनंद आ गया। हालांकि जिस संविलियन की मांग को लेकर पंचायत सचिव तालियां बजा रहे थे, उस पर उन्हें फिलहाल ठोस फैसला नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने जरूर भरोसा दिलाया, लेकिन फैसला भविष्य पर छोड़ दिया। उन्होंने कहा- हम आपके साथ हैं, इसके रिजल्ट आएंगे, मैं आपको अग्रिम बधाई देता हूं। जीतू पटवारी ने ताई सुमित्रा से लिया आशीर्वादराहुल गांधी के इंदौर दौरे को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भले ही कोरी राजनीति करार दे रहे हों, लेकिन पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और भाजपा की सीनियर नेता सुमित्रा महाजन का नजरिया कुछ और ही है। सुमित्रा महाजन ने राहुल गांधी के दौरे और विपक्ष की भूमिका को लेकर साफ कहा कि लोकतंत्र में विरोधी पक्ष का जो काम है, उसे वो करना चाहिए, अच्छे से करना चाहिए, ताकत से करना चाहिए। दरअसल, राहुल गांधी के दौरे से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सुमित्रा महाजन से मिलने पहुंचे थे। यहां जीतू पटवारी ने उनसे भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और इस समस्या को लेकर चर्चा की। पटवारी ने ताई का आशीर्वाद भी लिया। ताई ने जीतू पटवारी की तारीफ करते हुए कहा- जीतू पटवारी अच्छा काम करने वाला लड़का है, आते हैं बीच-बीच में मिलने के लिए, आज भी आए थे। मंच से भाजपा विधायक ने अफसरों को दी गालीडिंडौरी के शहपुरा से भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें वह मंच से अधिकारियों को गाली देते नजर आ रहे हैं। खास बात ये है कि मंच पर सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते भी बैठे हैं। वीडियो करीब एक महीने पहले का बताया जा रहा है। मंच से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के बाद जब विधायक को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत बात को संभालने की कोशिश की। माइक पर ही कहते सुने गए कि इसे गोल कर दो, कभी-कभी निकल जाता है। हालांकि अब विधायक इस पूरे मामले पर सफाई दे रहे हैं। कह रहे हैं कि ये एडिटेड वीडियो है। लेकिन, वीडियो सामने आने के बाद उनकी और पार्टी दोनों की किरकिरी हो रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या जनप्रतिनिधियों को मंच से इस तरह की भाषा शोभा देती है? शराब के नशे में ट्राला लेकर शहर में घुसा युवक गुना में शराब के नशे में धुत एक ट्रक ड्राइवर ने जमकर हंगामा खड़ा कर दिया। भारी-भरकम ट्रक लेकर वह शहर में घुस आया। पुलिस ने उसे रोका और पकड़ा, तो उसने कहा कि यह गाड़ी अखिलेश यादव की है। सैफई, मैनपुरी वाले अखिलेश यादव की। नशे की हालत में ड्राइवर पुलिस को अखिलेश यादव का नाम लेकर धमकाने लगा। उसकी हालत इतनी खराब थी कि उसे यह तक होश नहीं रहा कि वह उत्तर प्रदेश में है या मध्य प्रदेश में। वह लगातार पुलिस से अभद्रता करता रहा। रौब दिखाते हुए बार-बार यही दोहराता रहा कि गाड़ी अखिलेश यादव की है और उसे छुड़ाने खुद अखिलेश यादव आ रहे हैं। ड्राइवर का यह ड्रामा मौके पर मौजूद लोगों के लिए कुछ देर तक तमाशा बना रहा, लेकिन पुलिस के लिए यह कानून-व्यवस्था का सवाल बन गया। बाद में पुलिस ने ड्राइवर को काबू में किया और थाने ले गई। इनपुट सहयोग - विजय सिंह बघेल (भोपाल), अभिषेक दुबे (इंदौर), अभिमन्यु सिंह (डिंडौरी), आशीष रघुवंशी (गुना)ये भी पढ़ें -मंत्री विजयवर्गीय ने सांसद को सौंपी अपनी कुर्सी:दिग्विजय के सवाल पर चिढ़े सिंधिया दिग्विजय सिंह के राज्यसभा सीट खाली करने के ऐलान पर जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से सवाल किया गया तो वह भड़क गए। सिंधिया ने तंज करते हुए कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि दिग्विजय सिंह क्या चाहते हैं। उन्होंने कहा- जब मैं कांग्रेस में था, तब भी मैं नहीं जानता था कि वो क्या चाहते थे। पूरी खबर पढ़ें
नमस्कार, कानपुर में कल (शुक्रवार) की बड़ी खबरें… यूपी में सबसे ठंडा कानपुर रहा। यहां का पारा 4C दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले हफ्ते बारिश की संभावना जताई है। सेंट्रल स्टेशन पर चलती ट्रेन में अपने बच्चे के साथ चढ़ते समय महिला गिर गई। इस दौरान मौजूद हेड कॉन्स्टेबल की सतर्कता से उसकी जान बची। अब मेयर-पार्षद विवाद को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सुलझाएंगे। भाजपा पार्षद लखनऊ पहुंच गए हैं। नाबालिग किशोरी के साथ युवक ने रेप करने के बाद न्यूड वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। पीड़िता की मां ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। जुमे की नमाज के बाद भाजपा विधायक राहुल बच्चा सोनकर के खिलाफ मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया। साथ ही जाजमऊ स्थित मदीना मस्जिद के बाहर नमाजियों ने विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। शीशूपुर नौगवां से रामादेवी तक हर 20 मिनट में इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी। इससे लोगों को सफर में राहत मिलेगी। कानपुर की ऐसी ही 10 बड़ी खबरों से गुजरने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें…। अब सिलसिलेवार पढ़िए 10 खबरें... 1. BJP विधायक के बोटी वाले बयान पर हंगामा:कानपुर में जुमे की नमाज के बाद प्रदर्शन, कहा था- मस्जिदों के बाहर बोटियां मिलेंगी कानपुर में 'मस्जिदों के सामने सुअर की बोटियां मिलेंगी', बोलने वाले बीजेपी विधायक के खिलाफ मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया। कहा- राहुल बच्चा सोनकर ने हेट स्पीच दी है। इसलिए उन पर भी आजम खान की तरह ही केस दर्ज होना चाहिए। साथ ही भाजपा को ऐसा गंदा शब्द बोलने वाले विधायक को पार्टी से बाहर करना चाहिए। दरअसल, 12 जनवरी की रात दुर्गा मंदिर के पास खेत में 100 गोवंश के अवशेष मिले थे। इस पर विधायक राहुल बच्चा सोनकर बिल्हौर थाने पहुंचे थे। उन्होंने ADCP कपिल देव सिंह और पुलिस स्टाफ के सामने कहा कि अगर आरोपियों को 48 घंटे के अंदर अरेस्ट नहीं किया तो बिल्हौर की सभी मस्जिदों के सामने बोटियां फिंकवा दूंगा। पढ़िए पूरी खबर 2. कानपुर में चलती ट्रेन से गिरी महिला; बच्चे के साथ कोच में चढ़ने की कर रही थी कोशिश, हेड कॉन्स्टेबल ने बचाई जान कानपुर रेलवे स्टेशन पर एक महिला चलती ट्रेन में चढ़ते समय फिसलकर गिर गई। इस दौरान मौके पर मौजूद जीआरपी हेड कॉन्स्टेबल की सतर्कता से महिला की जान बच गई। यह घटना कानपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर शाम 5:31 बजे हुई। ट्रेन संख्या 12179 आगरा फोर्ट इंटरसिटी रवाना हो रही थी। एक महिला अपने बच्चे के साथ चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही थी। उसने बच्चे को तो बोगी में चढ़ा दिया, लेकिन खुद सामान सहित प्लेटफॉर्म पर गिर गई। जीआरपी हेड कॉन्स्टेबल मुकेश यादव ने तुरंत कार्रवाई करते हुए महिला को सुरक्षित बचा लिया। पढ़िए पूरी खबर 3. कानपुर में थाने से धक्का देकर भागा चोर; पुलिसवाले दौड़े, लेकिन पकड़ नहीं पाए; ज्वेलरी शॉप से 3 किलो चांदी चुराई थी कानपुर में थाने से चोर होमगार्ड को धक्का देकर फरार हो गया। पुलिसकर्मी पीछे-पीछे भागे, लेकिन उसे पकड़ नहीं पाए। मामले का पता चलते ही DCP ने महिला कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही महिला कॉन्स्टेबल, होमगार्ड और आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। चोर कल्लू उर्फ विशाल ने 14 दिसंबर को बालाजी ज्वेलर्स से 3 किलो चांदी चोरी की थी। गुरुवार को पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद उसे जेल भेजने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान वह भाग गया। पूरा मामला गुजैनी थाने का है। पढ़िए पूरी खबर 4. कानपुर यूपी में सबसे ठंडा, पारा 4 डिग्री; अगले हफ्ते बारिश का अलर्ट; 61 को हार्ट और छह को ब्रेन स्ट्रोक कानपुर में शुक्रवार सुबह कहीं घना तो कहीं कम कोहरा रहा। गलन भरी सर्दी से लोगों की कंपकपी छूटी। सुबह से ही ठंडी हवा ने सड़कों पर चल रहे लोगों को बेहाल कर दिया। पिछले छह दिनों की तुलना में शुक्रवार सुबह विजिबिलिटी कम रही। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड अभी कुछ दिन और सताएगी, वहीं अगले सप्ताह बारिश की भी संभावना जताई गई है। कानपुर यूपी में सबसे ठंडा रहा, न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सीजन की सबसे ठंडी रात रही। पढ़िए पूरी खबर 5. सतीश महाना सुलझाएंगे मेयर-पार्षद विवाद; कानपुर के जिलाध्यक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष को दी जानकारी, 26 दिसंबर से चल रहा है विवाद कानपुर में मेयर और पार्षदों के बीच चल रहा विवाद अब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना तक पहुंच गया है। जिलाध्यक्ष ने लखनऊ जाकर सतीश महाना से मुलाकात की है और उसने कानपुर नगर निगम में चल रहे इस विवाद के बारे में जानकारी दी है। यह उम्मीद की जा रही है कि सतीश महाना के हस्तक्षेप के बाद इस मामले का हल निकाला जा सकता है। 24 जनवरी को कानपुर में बैठक होनी है, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ पराधिकारी और शीर्ष नेतृत्व के लोग मौजूद रहेंगे। जिसके बाद इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाएगी। पढ़िए पूरी खबर 6. बिठूर में अवैध प्लाटिंग पर चला बुलडोजर; कानपुर में KDA ने की कार्रवाई, बिना नक्शा पास कराए 6 बीघा में हो रही थी प्लाटिंग कानपुर के बिठूर में अवैध रूप से डेवलप हो रही सोसाइटी पर शुक्रवार को कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) बुलडोजर चला। KDA की टीम ने बिठूर के हिंदूपुर गांव में हो रही अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कराया और प्लाटिंग करने वालों को नोटिस भी जारी किया है। पुलिस बल और केडीए के सचल दल की मौजूदगी में अधिकारियों ने बुलडोजर चलाकर पूरी प्लाटिंग को ध्वस्त कराया। जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने बताया कि बिना मानचित्र स्वीकृत कराए अवैध रूप से कालोनी डेवलप की जा रही थी और लोगों को प्लाट बेचे जा रहे थे। पढ़िए पूरी खबर 7. GSVM बना ग्लोबल रिसर्च हब; विदेशी वैज्ञानिकों संग बनेंगी 'मेड इन इंडिया' दवाइयां, यूपी में पहला ड्रग पार्क होगा कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) अब सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर दवा अनुसंधान का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्पेन, इटली, पोलैंड, पुर्तगाल, स्लोवानिया और चेक रिपब्लिक के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर जीएसवीएम के डॉक्टर दवाइयों के निर्माण और रिसर्च में जुटेंगे। इस पहल से आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी और उत्तर प्रदेश को फार्मास्युटिकल रिसर्च के अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर नई पहचान मिलेगी। पढ़िए पूरी खबर 8. स्टेनो नेहा सुसाइड- 3 महीने बाद भी रहस्य बरकरार; कॉल डिटेल और चैट में नहीं मिला कोई सुराग, कानपुर पुलिस जल्द दाखिल करेगी रिपोर्ट कानपुर कोर्ट की 6वीं मंजिल से कूद कर जान देने वाली स्टेनो की आत्महत्या का रहस्य 3 महीने के बाद भी नहीं खुल सका। पुलिस की जांच में पेशकार और चपरासी पर हैरेसमेंट की बात गलत साबित हो चुकी है। दोनों के खिलाफ पुलिस को ऐसे कोई भी साक्ष्य नहीं मिल सके है, जिससे यह साबित किया जा सके कि उन्होंने स्टेनो का हैरेसमेंट किया था। कॉल डिटेल रिकॉर्ड में चपरासी और पेशकार के स्टेनों से बातचीत के कोई सबूत नहीं मिले है और न ही मृतका की वॉट्सऐप चैट और ईमेल में ऐसा कुछ मिला है, जिसपर संदेह जताया जा सके। अब पुलिस जल्द ही मामले में फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करेगी। पढ़िए पूरी खबर 9. कानपुर को मिली 6 इलेक्ट्रिक बसें; शीशूपुर से रामादेवी तक सफर करिए, हर 20 मिनट में मिलेगी बस कानपुर के ग्रामीण क्षेत्रों को शहर से जोड़ने के लिए छह नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का शुक्रवार को शुभारंभ किया गया। शीशूपुर नौगवां से रामादेवी तक चलने वाली इन बसों से ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। अब हर 20 मिनट में बस सेवा उपलब्ध होगी। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के निर्देश पर इलेक्ट्रिक बस अधिकारियों ने शीशूपुर नौगवां (अहिरवां) से इस सेवा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर भाजपा किसान मोर्चा कानपुर दक्षिण के जिला महामंत्री अजय प्रताप सिंह ने बसों का पूजन किया। पढ़िए पूरी खबर 10. 'मेरी बेटी का न्यूड VIDEO बनाया'; कानपुर में महिला बोली- नाबालिग बेटी का युवक ने किया अपहरण, अब धमका रहा मेरी बेटी का युवक ने अपहरण कर लिया और उसका न्यूड वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया है। हम लोग बहुत डरे हुए हैं। मानसिक रूप से परेशान हैं। थाने से भी बेटी के बरामदगी को आश्वासन मिल रहा है। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यह कहना है पीड़िता की मां का। मां ने पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पूरा मामला रावतपुर थाना क्षेत्र का है। पढ़िए पूरी खबर
सामूहिक धर्म परिवर्तन की धमकी का असर:पुलिस के पहरे में शुरू हुआ 70 साल पुराने मंदिर का निर्माण
बरेली शहर के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के भूड़ मोहल्ले में पिछले तीन महीनों से चला आ रहा मंदिर निर्माण का गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया। शुक्रवार को स्थानीय 50 परिवारों द्वारा सामूहिक धर्म परिवर्तन की चेतावनी के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में संतोषी माता मंदिर का भूमि पूजन संपन्न हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 70 साल पुराने मंदिर के अस्तित्व पर था संकटभूड़ मोहल्ले में स्थित संतोषी माता का मंदिर करीब 70 वर्ष पुराना है। समय के साथ मंदिर का ढांचा काफी जर्जर हो चुका था, जिसके बाद स्थानीय निवासियों ने आपसी चंदा एकत्रित कर इसे नए सिरे से बनवाने का निर्णय लिया। पुराने ढांचे को हटाकर जैसे ही नींव रखने की तैयारी शुरू हुई, पड़ोस के ही कुछ दबंगों ने जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए काम रुकवा दिया। विवाद इतना बढ़ा कि जब भी निर्माण शुरू होता, विपक्षी पक्ष पुलिस बुलाकर काम बंद करवा देता था। धर्म परिवर्तन की चेतावनी से लखनऊ तक मचा हड़कंपस्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने चौकी से लेकर जिले के उच्चाधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन महीनों तक कोई सुनवाई नहीं हुई। थक-हारकर पीड़ित परिवारों ने सामूहिक धर्म परिवर्तन का ऐलान कर दिया। यह खबर जैसे ही सुर्खियां बनी, बरेली से लेकर लखनऊ तक शासन-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। तत्काल अधिकारियों ने संज्ञान लिया और मौके पर भारी पुलिस बल के साथ राजस्व टीम को भेजा गया। पैमाइश में खुला झूठ, अपनी जमीन बताने वाले बैकफुट परविवाद सुलझाने के लिए जब लेखपाल ने मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश की, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। जांच में सामने आया कि जिस जमीन को विपक्षी अपना बता रहे थे, वह असल में नगर निगम की संपत्ति है। सरकारी जमीन पर अवैध दावा ठोकने वालों को जब पुलिस ने कानूनी कार्रवाई की घुड़की दी, तो उनके तेवर ठंडे पड़ गए। शिकंजे में फंसता देख विवाद करने वाले पक्ष ने खुद ही मंदिर निर्माण के पक्ष में सहमति दे दी। थाना प्रभारी ने खुद खड़े होकर शुरू कराया निर्माणमामला शांत होते ही थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार और चौकी इंचार्ज मोहम्मद सरताज ने अपनी मौजूदगी में भूमि पूजन करवाया। पुलिस अधिकारियों ने खुद खड़े होकर निर्माण कार्य की ईंट रखवाई और क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम की। महीनों के संघर्ष के बाद जीत मिलने पर मोहल्लेवासियों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि यह उनकी आस्था और एकता की जीत है, जो प्रशासन के सहयोग से संभव हो पाई।
ढाई साल की बच्ची से दुष्कर्म, आरोपी को आजीवन कारावास:इटावा कोर्ट ने 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
इटावा में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विनीता विमल ने ढाई साल की बच्ची से रेप के आरोपी को साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाया। दोषी पाए जाने पर कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने उस पर दो लाख एक हजार रुपया का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर उसे एक साल का अतिरिक्त कारावास भोगना पडेगा। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि बसरेहर क्षेत्र के एक गांव की ढाई साल की बच्ची 26 अगस्त 2023 को अपने घर के दरवाजे पर खेल रही थी तभी गांव का युवक जितेंद्र चौहान उर्फ पूत पुत्र रतन सिंह उसे बहला फुसलाकर अपने घर ले गया। यहां बच्ची से गंदी हरकत की, तभी पीड़िता की मां अपने पड़ोसी के साथ वहां पहुंच गई। उन्हें देखकर आरोपी ने बच्ची को छोड़ दिया और पीड़िता को जान से मारने की धमकी देता हुआ भाग निकला। बाद में पीड़िता का पिता बच्ची को लेकर थाने पहुंचा और पुलिस को घटना की जानकारी दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी जितेंद्र के खिलाफ दुष्कर्म का पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। छानबीन के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट व दुष्कर्म की धाराओं में आरोप पत्र कोर्ट में पेश कर दिए। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की कोर्ट में हुई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष तिवारी ने पैरवी की । उसके द्वारा पेश किए साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने जितेंद्र चौहान को दोषी पाया।दोषी पाए जाने पर कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने उस पर दो लाख एक हजार रुपया का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर उसे एक साल का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।
सोनीपत के गांव बेगा से चार दिन पहले गायब हुए 29 वर्षीय युवक सोनू शर्मा उर्फ टिटा की बेरहमी से हत्या की गई। शराब पीने के दौरान पुराने झगड़े को लेकर हुई कहासुनी के बाद तीन दोस्तों ने लोहे की रॉड से सिर पर कई वार कर सोनू की जान ले ली। हत्या के बाद दोस्तों ने शव को बेगा गांव में यमुना नदी के किनारे करीब तीन से चार फुट नीचे मिट्टी में दबा दिया। युवक के शव पर मुंह, ठुड्डी, होंठ, माथे और सिर पर 7 से 8 गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार कर शव बरामद कर लिया है, जबकि दो अभी फरार हैं। यमुना किनारे मिट्टी में दबा मिला शव थाना गन्नौर क्षेत्र के गांव बेगा से लापता सोनू शर्मा का शव शुक्रवार सुबह यमुना नदी के किनारे मिट्टी में दबा मिला। पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट और एफएसएल टीम की मौजूदगी में शव को बाहर निकलवाया। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए खानपुर मेडिकल भेजा गया, जहां प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। 12 जनवरी को दवाई लेने की बात कहकर निकला था सोनू गांव बेगा निवासी सोनू शर्मा उर्फ टिटा 12 जनवरी की शाम दवाई लेने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद सोनू के भाई मोनू ने थाना गन्नौर में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। सीसीटीवी फुटेज से मिले सुराग पुलिस ने शिकायत पर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। पता लगा कि सोनू मेडिकल स्टोर से लौटने के बाद राकसेड़ा-बुढ़नपुर रोड पर कई युवकों के साथ शराब पार्टी करने लगा। नशे की हालत में उसकी युवकों के साथ कहासुनी हो गई। इसके बाद झगड़ा बढ़ गया और आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी। हालांकि अभी यह सामने नहीं आया कि हत्या में कितने लोग शामिल थे। गुप्त सूचना पर हिरासत में लिया गया फिरोज सोनू की तलाश के दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि गांव के ही फिरोज, संजय और कुलदीप ने मिलकर उसकी हत्या कर शव यमुना नदी के किनारे दबा दिया है। सूचना के आधार पर पुलिस ने फिरोज को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जिसमें उसने हत्या की वारदात कबूल कर ली। पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजहपुलिस जांच में सामने आया है कि सोनू, फिरोज, संजय और कुलदीप ने यमुना नदी के पास शराब पी थी। इसी दौरान पुराने झगड़े को लेकर कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गई। आरोप है कि तीनों ने मिलकर लोहे की रॉड से सोनू के सिर पर कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शव को 3–4 फुट गड्ढा खोदकर दबाया हत्या के बाद आरोपित सोनू के शव को यमुना नदी के किनारे ले गए और हाथों से गड्ढा खोदकर करीब तीन से चार फुट नीचे मिट्टी में दबा दिया। इसके बाद तीनों मौके से फरार हो गए। एक आरोपित गिरफ्तार, दो फरारपुलिस ने इस मामले में गांव बेगा निवासी फिरोज, संजय और कुलदीप के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। फिरोज को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। संजय और कुलदीप की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है।मृतक सोनू पर दर्ज थे चार आपराधिक मामलेपुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक सोनू का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। उसके खिलाफ थाना गन्नौर में अवैध हथियार रखने और गवाह को धमकाने के दो मामले दर्ज थे। वहीं खरखौदा थाना में भी अवैध हथियार और लूट के दो केस दर्ज थे।मृतक सोनू खेती-बाड़ी करता था और अविवाहित था। परिवार में माता-पिता और दो भाई हैं। चार दिन से लापता सोनू के शव मिलने की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शुक्रवार को गांव में गमगीन माहौल के बीच सोनू का अंतिम संस्कार किया गया। रिमांड में हथियार बरामद करने की कोशिशएसीपी ऋषिकांत ने बताया कि रिमांड अवधि के दौरान पुलिस आरोपी फिरोज से हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद करने का प्रयास करेगी। साथ ही फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
रेवाड़ी जिले में पुलिस को बहाला निवासी मोहन हत्याकांड के मुख्य आरोपी सोनीपत के इनामी बदमाश सोनू महाल के अस्पताल से डिस्चार्ज होने का इंतजार है। अस्पताल में पूछताछ के दौरान आरोपी पुलिस को उसके सवालों के सही जवाब नहीं दे रहा है। पुलिस अब अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सोनू को रिमांड पर लेने की तैयारी में है। जिससे व्यापारी हत्याकांड की टूटी हुई कड़ियों को सही ढंग से जोड़ सके। पुलिस बीज-दवा व्यापारी हत्याकांड में हिसार की एग्रो कंपनी के एमडी जयबीर सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। जयबीर से पैसे के विवाद के बाद मोहन ने कंपनी की डीलरशिप छोड़ी थी। जयवीर और मोहन के बीच पैसे के लेनदेन का विवाद था। मोहन की हत्या के पीछे अब तक इसी विवाद का हाथ माना जा रहा है। इन सवालों के चाहिए जवाब व्यापारी हत्याकांड में पुलिस मुख्य आरोपी सोनू और हत्या करवाने वाले जयबीर को गिरफ्तार कर चुकी है। हत्याकांड में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है। जयबीर से सोनू की मुलाकात किसने करवाई, मोहन की हत्या के लिए जयबीर और सोनू के बीच डील कितने पैसे में हुई। सोनू के पास पैसे किसने और कैसे पहुंचाएं। सोनू ने हत्याकांड को अंजाम देने के लिए किस-किस को अपने साथ जोड़ा। क्या हत्याकांड के पीछे की असली वजह मोहन और जयबीर के बीच चला आ रहा पैसों का विवाद ही जिम्मेदार है। हत्याकांड के लिए गाड़ी और हथियार किसने दिए। हत्या के बाद गिरफ्तार होने तक आरोपियों ने कहां-कहां अपना ठिकाना बनाया अथवा किस-किस ने शरण दी। 21 में से हत्या के 10 मामले सोनीपत के पिनाना निवासी जयभगवान उर्फ सोनू महाल के खिलाफ हरियाणा और दिल्ली में 21 केस दर्ज हैं। जिनमें से 10 केस हत्या के हैं। धारूहेड़ा सीआईए और गुरुग्राम एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई में भटसाना-खरखड़ा रोड पर 12-13 जनवरी की रात सोनू का एनकाउंटर किया था। पुलिस की तरफ से जवाबी कार्रवाई में चलाई गई, दो गोलियां सोनू के दोनों पैरों में लगने से वह घायल हो गया था। सोनू ने भी पुलिस टीम पर पांच राउंड फायरिंग की थी। जिसमें से एक गोली सीआईए प्रभारी और एक एसटीएफ के एसआई विवेक को लगी थी। जठड़ी गैंग से रहा नाता, 2003 में पहला केस सोनू महाल के खिलाफ 2003 में पहला केस दर्ज हुआ था। 2021 तक जठेड़ी गैंग से जुड़ा रहा। 2021 मे छत्रसाल स्टेडियम में सागर धनखड़ की पिटाई के बाद गैंग के मुखिया से सोनू के संबंध बिगड़ गए। हत्याकांड में ओलंपियन पहलवान सुशील का नाम आया था और सोनू इसका गवाह था। जठेड़ी ने सोनू से गवाही से मुकरने को कहा तो सोनू ने पैसे की डिमांड रख दी थी। जिससे विवाद बढ़ने पर सोनू ने गैंग छोड़ दिया और इसके बाद कोई दूसरा गैंग ज्वाइन नहीं किया। हालांकि अपराध की दुनिया में सोनू पहले की तरह सक्रिय रहा। 23 दिसंबर को हुई थी हत्या गांव बहाला में खाद दवा विक्रेता मोहन की 23 दिसंबर को हत्या हुई थी। कार सवार दो बदमाशों ने दवा खरीदने के बहाने दुकान में गोली मारी थी। हत्याकांड के पीछे हिसार की एग्रो कंपनी के साथ लेनदेन का विवाद सामने आया था। जिसमें पुलिस ने कंपनी के एमडी जयवीर सिंह को गिरफ्तार किया था। जिससे पूछताछ में बदमाश सोनू मान का नाम सामने आया था। जानिए कहां-कहां केस दर्जगोहाना थाने में पहला केस जुलाई 2003 में दर्ज हुआ था। सोमवार-मंगलवार की रात पुलिस मुठभेड़ से पहले अंतिम मामला रेवाड़ी में दर्ज हुआ था। सोनू मान की क्राइम हिस्ट्री हरियाणा के साथ दिल्ली तक फैली हुई है। सोनीपत के गोहाना थाना में 4, गोहाना सदर में एक, मोहाना में एक, जींद के जुलाना में एक, सिरसा के खेड़ा चौपटा में एक, बहादुरगढ़ और झज्जर में एक-एक केस दर्ज है। दिल्ली के नरेला में दो, बेगमपुर और साउथ रोहिणी में भी एक-एक केस दर्ज है। 21 मामलों में 10 केस हत्या और बाकी हत्या प्रयास और लूट जैसे मामले हैं। डिस्चार्ज होने के बाद होगी पूछताछडीएसपी सुरेंद्र श्योराण ने कहा कि अभी सोनू अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं हुआ है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद पुलिस व्यापारी हत्याकांड को लेकर पूछताछ करेगी। अभी तक अस्पताल में उपचाराधीन होने के कारण पूछताछ नहीं हो पा रही है।
पिछले पंचायत चुनाव में खर्चे का ब्योरा नहीं देने वाले पंच-सरपंचों के दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। राज्य चुनाव आयोग ऐसे प्रत्याशियों की सूची मंगाने के लिए जल्द ही जिला कलेक्टरों के दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। आयोग के नियमों के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को खर्च का विवरण देना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर 3 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जा सकती है। प्रदेश में मार्च-अप्रैल में पंचायती राज चुनाव प्रस्तावित हैं। हाल ही में आयोग ने चुनावी खर्च सीमा बढ़ाई भी थी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट... जिला कलेक्टर्स को जारी हो सकते हैं निर्देशसाल 2020 में 21 जिलों की 636 जिला परिषद सदस्यों व 4371 पंचायत समिति सदस्यों के लिए चुनाव कराए गए थे। पंचायत समिति सदस्य के लिए 12,663 व जिला परिषद सदस्य के लिए 1778 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। राज्य चुनाव आयोग के सूत्र बताते हैं कि उस चुनाव में जिन प्रत्याशियों ने रिजल्ट आने के बाद खर्च का ब्योरा नहीं दिया है, उनकी लिस्ट तैयार की जाएगी। नियमानुसार जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंच और वार्ड सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशियों को रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपने खर्च का विवरण आयोग को देना होता है। अनुमान है कि हजारों प्रत्याशियों ने यह ब्योरा नहीं दिया था। अब आयोग जिला निर्वाचन अधिकारियों को जल्द ही ऐसे प्रत्याशियों की लिस्ट तैयार करने के लिए आदेश जारी कर सकता है। जिला निर्वाचन अधिकारी यह लिस्ट आयोग को भेजेंगे। इसके बाद चुनाव आयोग ही यह तय करेगा कि चुनावी खर्च नहीं बताने वालों पर क्या कार्रवाई की जाए। नियमानुसार आयोग 3 साल तक चुनाव लड़ने की पाबंदी लगा सकता है। राज्य चुनाव आयुक्त बोले- 3 साल की पाबंदी लगाने का है नियमराज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह का कहना है कि खर्च का ब्योरा नहीं देने पर 3 साल के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रावधान है। आयोग इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी करेगा। जिला कलेक्टर्स से विवरण लिया जाएगा। आयोग ने हाल ही में बढ़ाई थी खर्च सीमाराज्य चुनाव आयोग ने 23 दिसंबर 2025 को पंचायती चुनाव में खर्च सीमा बढ़ाने की अधिसूचना जारी की थी। नए नियमों के मुताबिक, पंचायती राज के चुनाव में सरपंच 1 लाख, पंचायत समिति सदस्य 1.5 लाख, जिला परिषद सदस्य 3 लाख ही खर्च कर पाएंगे। पहले सरपंच 50 हजार, पंचायत समिति सदस्य 75 हजार, जिला परिषद सदस्य केवल 1.5 लाख खर्च कर सकते थे। यानी तीनों ही पद के लिए आयोग ने खर्च की सीमा दोगुनी कर दी है। सूत्र बताते हैं कि प्रत्याशियों को नामांकन से लेकर परिणाम घोषित होने तक के अपने चुनावी खर्च का विस्तृत ब्योरा परिणाम की घोषणा के 15 दिन के भीतर देना होगा। इस ब्योरे की पुष्टि के लिए संबंधित बिल या वाउचर जमा करना भी अनिवार्य है। इस बार आयोग ने खर्च सीमा क्यों बढ़ाई?राज्य चुनाव आयोग का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी चुनाव प्रचार के साधन, यात्रा, सभाएं और डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ा है। ऐसे में पुरानी खर्च सीमा वास्तविक खर्च से मेल नहीं खा रही थी। संशोधित सीमा से उम्मीदवारों को वैध दायरे में रहते हुए प्रचार करने की सुविधा मिलेगी। राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह का कहना है कि राज्य हम चुनाव में पारदर्शिता चाहते हैं। जनप्रतिनिधि खर्च सीमा बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में आयोग ने खर्च सीमा दोगुनी की है। तांगा, ऊंटगाड़ी या बैलगाड़ी का उपयोग प्रचार में नहीं कर सकेंगेआयोग ने चुनाव प्रचार में इस्तेमाल वाहनों की संख्या से लेकर गाड़ियों के प्रकार तक कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं। बड़े वाहनों और पशुओं से चलने वाली कार्ट (गाड़ी) का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। उम्मीदवार बस, ट्रक, मिनी बस, मेटाडोर और पशुओं से चलाई जाने वाली कोई भी कार्ट जैसे तांगा, ऊंटगाड़ी या बैलगाड़ी का उपयोग चुनाव प्रचार में नहीं कर सकेंगे। इनका उपयोग करने पर राज्य निर्वाचन आयोग कार्रवाई करेगा। चुनाव खर्च की जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी को देना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंचायत परिसीमन के एक मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया था। याचिका में कहा था कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर, 2025 को परिसीमन प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए 31 दिसंबर तक इसे पूरा करने और 15 अप्रैल तक पंचायतों के चुनाव कराने को कहा। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी थी। 14 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों के चुनाव एक साथ होंगेराज्य में 14 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों के चुनाव एक साथ होंगे। प्रदेश में सभी पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। सभी पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव एक साथ होने पर फिलहाल संशय की स्थिति है। 12 जिलों की पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है। जानकारों का कहना है कि सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत यदि एक साथ चुनाव कराना चाहती है तो इन 12 जिलों में बोर्ड भंग करने होंगे। चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक, एक बूथ पर 1100 से ज्यादा वोटर नहीं होने चाहिए। पंचायत के एक वार्ड में औसतन 300 से 400 वोटर होते हैं, इसलिए एक बूथ पर एक से ज्यादा वार्ड के वोटर होंगे। राजस्थान सरपंच के कार्यकारी अध्यक्ष बोले- चुनाव खर्च का ब्योरा नहीं मांगा थाराजस्थान सरपंच संघ के कार्यकारी अध्यक्ष नेमीचंद का कहना है कि गत चुनाव में हमसे चुनावी खर्च का ब्योरा नहीं मांगा गया। मांगा जाता तो जरूर देते। चल-अचल संपत्ति का ब्योरा दिया था। निवर्तमान सरपंच और वर्तमान प्रशासक ग्राम पंचायत अलेई राजगढ़ अलवर राजेश कुमार ने बताया कि चुनाव के निर्देशों का पालन करेंगे। चुनावी खर्च का ब्योरा मांगा जाता है तो दिया जाएगा। पहले भी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा दिया है। हम खुद चाहते हैं कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। --- पंचायत चुनाव की यह खबर भी पढ़िए... 12 जिलों के परिषद-पंचायत समिति बोर्ड भंग करने की तैयारी:पंचायत चुनाव एक साथ कराने के संकेत, राज्य चुनाव आयोग ने पूछा था- स्थिति स्पष्ट करे सरकार राज्य सरकार ने ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जयपुर-जोधपुर सहित प्रदेश के 12 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समितियों के बोर्ड समय से पहले भंग भी कर सकती है। हाल ही में राज्य चुनाव आयोग ने चिट्ठी लिखकर सरकार से ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था...(CLICK कर पढ़ें)
हमें यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। यहां के लोग बहुत वेलकमिंग हैं। CM योगी ने अपने राज्य में बहुत अच्छा काम किया है। यहां तक आएं हैं, तो ट्रॉफी जीत कर ही जाएंगे।'' यह कहना है नागालैंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से गोरखपुर आई उन बास्केटबॉल खिलाड़ियों का जिन्होंने डीडीयू में चल रहे ईस्ट जोन इंटर यूनिवर्सिटी वुमेन बास्केटबॉल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है। गोरखपुर पहुंचने पर दैनिक भास्कर ने उन खिलाड़ियों से बातचीत की और गोरखपुर को लेकर उनका राय जानने की कोशिश की। इस दौरान किसी ने सीएम योगी के कामों की तारीफ की तो किसी ने यहां के छोले भटूरे को बेस्ट बताया। इसके अलावा शहर में साफ-सफाई की भी तारीफ की गई। वहीं अधिकतर टीमों ने ट्रॉफी जीतने की बात कही है। इतना ही नहीं टूर्नामेंट जीतने के लिए सभी टीमें बास्केटबॉल कोर्ट पर दम लगाते नजर आई। यह हमारे लिए बेहतरीन अवसर नागालैंड से आई नूने ने कहा कि यह हमारे लिए बेहतरीन अवसर है। इतनी मेहनत करके हम यहां तक आए हैं तो ट्रॉफी जीतने की पूरी कोशिश करेंगे। यहां पर इतने राज्यों के खिलाड़ियों से मिलने का मौका मिला। हम उनके कल्चर भी जान सकेंगे। यहां के लोग बहुत वेलकमिंग वहीं नागालैंड से ही आई हृरल ने कहा- हमें यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। यहां के लोग बहुत वेलकमिंग हैं। माहौल भी अच्छा है। उन्होंने बताया कि ग्रेजुएशन में ही उन्होंने कॉलेज में बास्केटबॉल खेलना शुरू किया था। आगे सब कुछ अच्छा रहा तो यह खेल जारी रखेंगी। साफ- सफाई की तारीफ की छत्तीसगढ़ से आई दीप्ति तिर्की ने कहा- यूनिवर्सिटी बहुत अच्छा है। बास्केटबॉल कोर्ट को देखकर सुकून मिलता है। सबसे खास बात यह है कि यहां सड़कों बहुत साफ- सफाई है। हम गेम जीतने की पूरी तैयारी में हैं। स्ट्रीट फूड आया पसंद चांदनी कुर्राम का कहना है कि सीएम योगी बहुत अच्छे हैं। उन्होंने राज्य के लिए बहुत कुछ किया है। खेलों को इतना बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं उन्होंने यहां की स्ट्रीट फूड की तारीफ करते हुए कहा कि यहां के छोले भटूरे मुझे बहुत पसंद आए। काफी ज्यादा टेस्टी है। 19 जनवरी तक होगा आयोजन इस प्रतियोगिता की शुरुआत 15 जनवरी को हुआ जो 19 जनवरी तक चलेगा। विश्वविद्यालय के क्रीड़ा परिसद के बास्केटबॉल कोर्ट में यह मुकाबला खेला जा रहा है। CM ने किया उद्घाटन खास बात यह है कि शुक्रवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका औपचारिक उद्घाटन भी किया। इस दौरान खिलाडियों का उत्साहवर्धन किया। इस टूर्नामेंट में 14 राज्यों के 31 विश्वविद्यालयों से 26 टीमें हिस्सा लेंगी। जिसके लिए सभी टीमें गोरखपुर पहुंच चुकी हैं। इन राज्यों की टीमें लेंगी हिस्सा इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली टीमों में नागालैंड, बिहार, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, असम, मिजोरम, यूपी, त्रिपुरा, सिक्किम, मणिपुर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मेघालय, पूर्वी यूपी और आंशिक मध्य प्रदेश के अलग- अलग यूनिवर्सिटी की टीमें शामिल हैं।
अजमेर विद्युत वितरण निगम (एवीवीएनएल) उदयपुर ने बकाया बिलों के भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ पिछले 10 माह से वसूली अभियान चला रखा है। इसके तहत उपभोक्ताओं को नोटिस देकर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा रही है। एवीवीएनएल उदयपुर दिसंबर 2025 तक ही 1786 करोड़ वसूली लक्ष्य के मुकाबले 1770 करोड़ यानी 99 प्रतिशत से ज्यादा की वसूली कर चुका है। लेकिन, अब शेष 1 प्रतिशत की वसूली में सबसे ज्यादा पसीने छूट रहे हैं। क्योंकि, बाकायेदार कोई और नहीं, सरकारी विभाग ही हैं। यूडी टैक्स जमा नहीं कराने पर लोगों के मकान-दुकान सीज करने वाले नगर निगम पर सबसे बड़ा 20.54 करोड़ बकाया है। ऐसे ही पीएचईडी विभाग उदयपुर पर 1.04 करोड़ और लोगों को बात-बात पर नियमों का पाठ पढ़ाने वाले प्रशासनिक कार्यालयों पर 11.35 लाख बकाया है। 15 सरपंचों पर 50.82 लाख, जनता जल योजना की जिला परिषद पर 13.33 लाख, पुलिस विभाग पर 6.15 लाख रुपए की बाकीयात चल रही है। एवीवीएनएल इन सभी सरकारी विभागों को पिछले 6 माह से बार-बार नोटिस भेजकर बकाया बिलों के भुगतान की गुहार लगा रहा है। लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हो रही है। नगर निगम उदयपुर ने तो अगस्त 2025 से अभी तक किसी भी माह के बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सभी सरकारी विभागों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर प्राथमिकता से लगाकर इस समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है? जबकि, एवीवीएनएल उदयपुर अकेले उदयपुर में ही 1 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगा चुका है। एसई बोले- प्रयास जारी, विभाग रेस्पोंस नहीं दे रहे एसई केआर मीना का कहना है कि सरकारी विभागों से बकाया वसूली के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अच्छा रिस्पोंस नहीं मिल रहा है। वहीं, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि वे स्वायत्त शासन विभाग को पत्र भेजकर बकाया बिलों के भुगतान कराने के लिए बजट देने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला है। बता दें कि बिजली निगम बकाया बिलों की वसूली के लिए सख्ती कर रही है। हाल ही में निगम ने बकाया पर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल तक का कनेक्शन काट दिया था। भास्कर एक्सपर्ट- यशवंत कुमार बोल्या, एवीवीएनएल के सेवानिवृत्त एसई समस्या क्यों... राजस्थान में कई सरकारी विभागों द्वारा बिजली बिल समय पर जमा नहीं कराने के पीछे मुख्य कारण प्रदेश सरकार के स्तर पर बजट आवंटन में देरी है। विभागीय स्वीकृति की लंबी प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय न होना भी एक कारण है। अधिकांश विभागों में बिजली बिल का भुगतान एक नियमित प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि अतिरिक्त बोझ मानने की प्रवृत्ति भी है। वित्तीय वर्ष के अंत तक बजट खर्च की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। इससे बिजली जैसे अनिवार्य खर्च भी लंबित रह जाते हैं। कानून सबके लिए समान की बात जनतंत्र में सबके लिए आवश्यक समाधान यह... राज्य सरकार को विभागवार बिजली बिलों के लिए अलग से मासिक बजट का प्रावधान करना चाहिए। ऑनलाइन ऑटो-डेबिट सिस्टम लागू कर ट्रेजरी से सीधे भुगतान की व्यवस्था हो। लंबे समय तक बकाया रखने वाले विभाग प्रमुखों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय हो और आवश्यकता पड़ने पर गैर-आवश्यक कनेक्शनों को अस्थायी रूप से काटने का प्रावधान भी लागू किया जाए। सभी सरकारी विभागों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर प्राथमिकता से लगाकर इस समस्या का स्थायी समाधान करने की जरूरत है। तभी कानून सबके लिए समान की बात व्यवहार में उतर सकेगी, जो जनतंत्र में आवश्यक है।
बड़गांव प्राथमिक स्कूल परिसर में अंदर तक अतिक्रमण के मामले में प्रशासन की सुस्ती नहीं टूट रही है। दूसरी ओर, अतिक्रमियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। शुक्रवार को भास्कर फिर मौके पर पहुंचा। सामने आया कि स्कूल के ठीक सामने कुछ वर्ष पहले यहां एक या दो कच्ची झोपड़ियां थी। धीरे-धीरे ये पक्के निर्माण में बदलती गईं। अब यहां 15 से 17 कच्चे-पक्के निर्माण हैं। स्कूल स्टाफ का कहना है कि हैंडपंप खराब होने से फिलहाल यहां नहाने-कपड़े धोने जैसे काम बंद हैं। लेकिन, कबाड़ व प्लास्टिक के ढेर, इन्हें जलाने जैसे काम जारी हैं। इससे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है। चर्म रोग भी बढ़ रहे हैं। पहले यहां 50 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन दो साल में ये घटकर 17 रह गए। दूसरी ओर, अतिक्रमियों की दलील है कि ये बीते 80 वर्षों से यहां पर काबिज हैं। हमें यहां से कोई नहीं हटा सकता है। हम मजदूरी कर अपना व परिवार का पेट पाल रहे हैं। यहां रहने का कारण माताजी का मंदिर है। अतिक्रमियों ने कहा कि नेता चुनाव के दौरान उन्हें हर बार पट्टा देने का वादा करते हैं। हमें दूसरी जगह, जमीन दे दो, चले जाएंगे। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है 80 साल का दावा झूठा है। ये अतिक्रमण कुछ सालों में ही हुए हैं। इन परिवारों को विस्थापित करें : प्रशासक ये कालबेलिया परिवार हैं। इन्हे यहां से हटाकर किसी दूसरी जगह विस्थापित किया जाए। कुछ वर्ष पहले एक दो परिवार आएं थे। बाद में इन्होंने धीरे-धीरे स्कूल की जमीन पर ही पक्के भवन और झोपड़ियां खड़ी कर दीं। अब ये यहां से हटने को तैयार नहीं है। -संजय शर्मा, प्रशासक, बड़गांव
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के लिए भी इको सेंसिटिव जोन तय कर दिया गया है। अब संभाग की 6 सेंचुरी की तरह इस अभयारण्य की सीमा के चारों तरफ शून्य से एक किलोमीटर दायरे में नए होटल-रिसॉर्ट, खनन तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली अन्य किसी भी गतिविधि को नई स्वीकृति नहीं मिलेगी। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना 16 जनवरी को ही राजपत्र में प्रकाशित की है। इससे राजसमंद, पाली और उदयपुर के 94 गांव प्रभावित होंगे। इनमें उदयपुर की गोगुंदा तहसील के 23 गांव शामिल हैं। अरावली पर्वतमाला में अवस्थित कुंभलगढ़ अभयारण्य को देश के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में गिना जाता है। यह बनास और लूणी नदी प्रणालियों के जलग्रहण क्षेत्रों के बीच प्राकृतिक विभाजक रेखा के रूप में कार्य करता है। यहां तेंदुए, लकड़बग्घे, सियार, नीलगाय, पैंगोलिन जैसे जीवों के साथ सैकड़ों प्रजातियों की वनस्पतियां पाई जाती हैं। खनन-ईंट भट्टे-नए उद्योग व नए होटल-रिसॉर्ट पर रहेगी रोक गोगुंदा के ये दायरे में : कड़ेच, रिछवाड़ा, पीपलसारी, चित्रावास, हेयला, बलबेरा, बरवाड़ी, मीठी बोर, सकरिया, भमरावद, मामादेव, गोदारा, ज्वारा का वाला, नेवार, चावड़ावास, बौखड़ा, मग्गा, कोलाजी चौतरा, दुदानी, राठौडों का गुड़ा, बागड़ के फले, भानपुरा के फले, बरावली, टोकरी आदि। अधिसूचना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति गठित की गई है। इको-सेंसिटिव जोन में खनन एवं पत्थर उत्खनन, ईंट भट्टे और आरा मिल, नए प्रदूषणकारी उद्योग, बड़े पनबिजली प्रोजेक्ट, 1 कमी की परिधि में नए होटल-रिसॉर्ट तथा नई पवन चक्कियों के निर्माण जैसी गतिविधियों पर रोक रहेगी। सरकार पर्यावरण अनुकूल विकास को बढ़ावा देगी। इसके अंतर्गत वर्षा जल संचयन, जैविक खेती एवं कृषि-वनीकरण, सौर ऊर्जा और बायोगैस का उपयोग, कुटीर एवं ग्राम उद्योग, हरित प्रौद्योगिकी तथा कौशल विकास जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।ये काम करवा सकेंगे, लेकिन लेनी होगी मंजूरीस्थानीय निवासियों के लिए आवास निर्माण, सड़क चौड़ीकरण एवं अन्य बुनियादी ढांचा विकास, खेती, बागवानी और पशुपालन, क्षमता अध्ययन के बाद इको-टूरिज्म, नियंत्रित वाहन आवागमन और पर्यटन गतिविधियों जैसे काम हो सकेंगे। लेकिन इनके लिए निर्धारित शर्तों के तहत अनुमति दी जाएगी। भास्कर एक्सपर्ट- 10 साल पहले योजना, तब घोषणा होती तो बड़ा क्षेत्र संरक्षित होतासेवानिवृत्त मुख्य वन संरक्षक और एनटीसीए सदस्य राहुल भटनागर का कहना है कि यदि 10 वर्ष पहले ही कुंभलगढ़ अभयारण्य का इको-सेंसिटिव जोन निर्धारित कर दिया गया होता तो आसपास के बड़े क्षेत्र को संरक्षित किया जा सकता था। आज अभयारण्य के आसपास कई जगह होटल और दूसरे निर्माण हो चुके हैं। वर्ष 2017 में सज्जनगढ़ अभयारण्य का इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था। तब कुंभलगढ़ के लिए भी प्रस्ताव भेजा था, लेकिन सभी अभयारण्यों के क्षेत्र तय होने के बाद अंततः यहां का जोन अधिसूचित किया गया है। अब आवश्यक है कि सभी विभाग विशेष निगरानी रखें, ताकि एक किलोमीटर दायरे में कोई नया निर्माण न हो सके।
जितनी तेजी से डिजिटल की तरफ बढ़ रहे, खतरे भी उतने ही : सुनील प्रसाद
हाल के वर्षों में भारत की संचार व्यवस्था में कई बड़े बदलाव हुए हैं, जिनमें मुख्य रूप से 5जी तकनीक की शुरुआत, ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का विस्तार और साइबर सुरक्षा पर सरकारी पहल शामिल हैं। प्रमुख बदलाव के तहत 5जी सेवाएं देश के लगभग सभी जिलों में पहुंच चुकी हैं, जिससे हाई-स्पीड इंटरनेट और नई तकनीकों के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह कहना है दूरसंचार विभाग के निर्देशक सुनील प्रसाद का। उन्होंने यह बात दूरसंचार विभाग द्वारा शुक्रवार को संचार मित्र ओरिएंटेशन प्रोग्राम में यह बात कही। कार्यक्रम में एमिटी यूनिवर्सिटी और ट्रिपल आईटी के छात्रों का ध्यान आकृष्ट करते हुए दूरसंचार विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित प्रोग्राम में उन्होंने कहा कि हम जितनी तेजी से डिजिटल की तरफ बढ़ रहे हैं, खतरे भी उतने ही बढ़ रहे हैं। एक जमाने में इनपुट हमारे हाथ में था और आउटपुट विभाग के हाथ में। आज दोनों हमारे ही हाथ में है और कब खतरे भी उतने तेजी से ही बड़े हैं। सरकार की डिजिटल इंडिया पहल और भारतनेट' परियोजना के तहत ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में ब्रॉडबैंड और 4जी/5जी नेटवर्क पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। विभाग के डिप्टी डायरेक्टर देव शंकर प्रसाद ने बताया कि झारखंड में तीन शहरों रांची में बीआईटी, जमशेदपुर में एनआईटी और धनबाद में आईआईटी में 5जी लैब की स्थापना की गई है। इनके माध्यम से दूरसंचार तकनीक और साइबर सुरक्षा के व्यवहारिक ज्ञान के साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है। युवाओं को अपने समुदायों में डिजिटल लीडर बनने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का अवसर मिलता है। उन्होंने प्रतिभागियों को संचार साथी एप के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
स्पोर्ट्स रिपोर्टर| रांची मरांग गोमके जयपाल सिंह एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम में खेले गए मेंस हॉकी इंडिया लीग 2025-26 के शुक्रवार के मुकाबले में रांची रॉयल्स ने दमदार प्रदर्शन करते हुए जेएसडब्ल्यू सूरमा हॉकी क्लब को 4-1 से पराजित कर दिया। इस जीत के साथ रॉयल्स ने रांची के अपने होम ग्राउंड में लगातार तीसरी जीत दर्ज की और अंक तालिका में तीसरे स्थान पर पहुंच गए। घरेलू मैदान पर आखिरी मुकाबले में मिली इस जीत ने टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। रांची रॉयल्स की जीत के सबसे बड़े नायक बेल्जियम के स्टार खिलाड़ी टॉम बून रहे, जिन्होंने 20वें और 22वें मिनट में लगातार दो गोल दागकर मुकाबले को एकतरफा बना दिया। उनके अलावा मनमीत सिंह राय (14’), और मंदीप सिंह (47’) ने भी गोल कर टीम की मजबूत जीत सुनिश्चित की। जेएसडब्ल्यू सूरमा हॉकी क्लब की ओर से जीतपाल (52’) ने एकमात्र गोल किया, लेकिन वह केवल सांत्वना गोल साबित हुआ। मैच की शुरुआत काफी रोमांचक रही। सूरमा हॉकी क्लब ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए पहले पांच मिनट में ही पेनाल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया और पहले क्वार्टर में कुल तीन पेनाल्टी कॉर्नर मिले। हालांकि रांची के गोलकीपर सूरज करकेरा ने शानदार बचाव करते हुए सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया। दोनों टीमों ने पहले क्वार्टर में आठ-आठ बार सर्किल में एंट्री की, लेकिन गोल रॉयल्स ने किया। 14वें मिनट में सैम लेन के शानदार रिकोशे पास पर मनमीत सिंह राय ने मौके का फायदा उठाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया और रॉयल्स को 1-0 की बढ़त दिला दी। बढ़त मिलने के बाद रांची रॉयल्स का आत्मविश्वास बढ़ गया। टीम ने तेज पासिंग गेम के जरिए सूरमा की डिफेंस को लगातार दबाव में रखा। 20वें मिनट में लैकलन शार्प के शॉट के बाद मिले रिबाउंड पर टॉम बून ने क्लोज रेंज से गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। इसके महज दो मिनट बाद 22वें मिनट में रॉयल्स को पेनाल्टी कॉर्नर मिला, जिस पर टॉम बून ने बेहतरीन ड्रैग फ्लिक के जरिए गोल दागते हुए स्कोर 3-0 कर दिया। पहले हाफ के अंत तक मुकाबला पूरी तरह रांची रॉयल्स के पक्ष में झुक चुका था। तीसरे क्वार्टर में जेएसडब्ल्यू सूरमा हॉकी क्लब ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और वापसी की कोशिश की। एक मौके पर तो उनका शॉट लगभग गोल लाइन पार कर चुका था, लेकिन जोशुआ बेल्ट्ज ने शानदार गोल लाइन क्लीयरेंस कर रॉयल्स की बढ़त को बरकरार रखा। रांची की ओर से भी सैम लेन ने एक बेहतरीन शॉट ऑन टारगेट लगाया, लेकिन गोलकीपर ने बचाव कर लिया। इसके बावजूद मैच की रफ्तार और नियंत्रण रांची के हाथ में ही रहा। मंदीप सिंह का शानदार गोल, जीत पर मुहर चौथे क्वार्टर की शुरुआत में ही रांची रॉयल्स ने मुकाबले को पूरी तरह खत्म कर दिया। 47वें मिनट में अराइजित सिंह हुंडाल के शानदार पास पर मंदीप सिंह ने गोलकीपर को चकमा देते हुए गेंद को जाल में डाल दिया और स्कोर 4-0 कर दिया। इसके बाद सूरमा की टीम ने अंतिम प्रयास करते हुए 52वें मिनट में जीतपाल के जरिए गोल कर स्कोर 4-1 किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पंडरा में भाई-बहन हत्याकांड : आरोपी के बरी होने पर जांच अधिकारी की भूमिका पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
पंडरा ओपी क्षेत्र के जनकनगर में भाई-बहन की हत्या करने के आरोपी अर्पित अर्णव के बरी होने के बाद पुलिस की जांच पर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर तत्कालीन जांच अधिकारी मृत्युंजय पांडेय की भूमिका पर, जिससे कोर्ट में यह केस कमजोर हो गया। वर्तमान में मृत्युंजय पांडेय साहेबगंज में पदस्थापित हैं। चौंकाने वाला तथ्य है कि इस घटना में गंभीर रूप से घायल दोनों बच्चों की मां चंदा देवी को जांच अधिकारी ने न तो चार्जशीट में गवाह बनाया और न ही कोर्ट में पेश किया। जबकि इस मामले की सबसे अहम चश्मदीद और पीड़िता थीं। मालूम हो कि सिविल कोर्ट रांची स्थित अपर न्यायायुक्त बीके श्रीवास्तव की अदालत में 12 जनवरी 2026 को उक्त भाई-बहन हत्याकांड के आरोपी अर्पित अर्णव को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। इतनी बड़ी वारदात में मात्र चार चार्जशीटेड गवाह बनाए गए। जब्ती सूची पर हस्ताक्षर करने वाले दो लोगों को भी गवाह नहीं बनाया गया। इसके अलावा हत्या के साथ-साथ जानलेवा हमले का मामला भी दर्ज था। लेकिन जिस पीड़िता पर जानलेवा हमला हुआ, उसे सिर्फ बयान तक सीमित कर दिया गया । घटना के बाद 18 जून 2022 को रिम्स में इलाज के दौरान मजिस्ट्रेट ने अस्पताल में चंदा देवी का बयान लिया था। अपने बयान में चंदा देवी ने तीन नामजद आरोपियों में से एक लाल बादशाह उर्फ रोशन की पहचान की बता कही थी। इसके बावजूद न तो उसे आरोपी बनाया गया और न ही चंदा देवी को अभियोजन गवाहों की सूची में शामिल किया गया। जबकि हत्या के साथ जानलेवा हमला का भी केस चल रहा था। जांच अधिकारी ने चार्जशीट में दावा किया कि मृतका और आरोपी के बीच मोबाइल पर बातचीत होती थी और इसके लिए तीन मोबाइल नंबरों का उल्लेख किया गया। लेकिन ये नंबर किसके नाम से जारी थे, इसका कोई दस्तावेजी प्रमाण कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया गया। इतना ही नहीं, जिस हथौड़े से हत्या किए जाने का आरोप था, उसकी फॉरेंसिक जांच तक नहीं कराई गई। अदालत में पेश साक्ष्यों और सामने आई खामियों के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या इतनी बड़ी लापरवाही एक जांच अधिकारी से अनजाने में हो सकती है? या फिर यह मामला जांच की गंभीर चूक का उदाहरण बन गया है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सका।
आदेश का पालन नहीं हुआ तो डीजीपी को कोर्ट में हाजिर होकर गैर-अनुपालन का कारण बताना पड़ सकता है
रांची झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को एक एलपीए पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस मुख्यालय की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रार्थी कर्मी की नियुक्ति 20 जनवरी 2026 तक सुनिश्चित करें। दरअसल, हाईकोर्ट ने प्रार्थी सैमुअल डुंगडुंग को 8 फरवरी 2023 को बिना बकाया वेतन के बहाल करने का निर्देश दिया गया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने अदालत में एलपीए दाखिल की थी। करीब तीन साल बीत जाने के बावजूद सरकार ने बहाली का आदेश लागू नहीं किया। साथ ही अपीलीय अदालत से इस आदेश पर कोई स्टे भी नहीं लिया था। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि 20 जनवरी 2026 तक सैमुअल डुंगडुंग को बहाल किया जाए। 21 जनवरी 2026 को अदालत में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो झारखंड के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर गैर-अनुपालन का कारण बताना पड़ सकता है। झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को दी जाने वाली सुविधाओं से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से सुविधाओं को लेकर बनाए जा रहे नियम के स्टेटस की जानकारी मांगी है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने यह निर्देश सेवानिवृत्त जस्टिस अमरेश्वर सहाय की याचिका पर दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि झारखंड में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े नियम अंतिम चरण में हैं। इस संबंध में फाइल मुख्यमंत्री के पास लंबित है। मुख्यमंत्री के राज्य से बाहर होने के कारण विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। अदालत ने सरकार को समय देते हुए अगली सुनवाई फरवरी के प्रथम सप्ताह में निर्धारित की और तब तक नियमों की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। सूत्रों के अनुसार, झारखंड में बनाए जा रहे नियम आंध्र प्रदेश मॉडल के अनुरूप हैं, जैसा सुप्रीम कोर्ट ने अन्य राज्यों के लिए सुझाव दिया है। इस मॉडल के तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं में पेंशन, चिकित्सा सुविधा और अन्य भत्ते शामिल हैं। इस फैसले से राज्य में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सुविधाओं के नियम स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है। झारखंड हाई कोर्ट में शुक्रवार को साहिबगंज में पाइपलाईन से जलापूर्ति की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद साहिबगंज जिला विधिक प्राधिकार के सचिव को निर्देश दिया कि कार्यपालक अभियंता और प्रार्थी के साथ घरों में जाकर जलापूर्ति का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करें। मामले में अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि साहिबगंज में पेयजल आपूर्ति का कार्य प्रगति पर है। कनेक्शन के लिए आवेदन देने वाले 8,700 लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करा दिया गया है। राज्य सरकार के इस जवाब पर अदालत ने स्थल निरीक्षण के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। इससे पहले हाईकोर्ट ने साहिबगंज जलापूर्ति योजना को पूरा करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से प्रगति रिपोर्ट मांगी थी।
गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र में मकर संक्रांति के दिन पतंगबाजी का शौक मासूम की मौत का कारण बन गया। पेड़ पर कार्टून वाली पतंग देखकर 10 साल के बच्चे का मन उसे पाने के लिए ललच गया। पेड़ पर चढ़कर जैसे ही उसने कार्टून वाली पतंग निकालने के लिए पकड़ी। पेड़ से सटे बिजली के तार के संपर्क में आ गया। हाथ में पतंग लिए ही वह झुलस गया। पेड़ पर एक घंटे तक उसकी लाश लटकी रही। घटना के बाद वहां आस-पास के लोग एकत्रित हुए लेकिन कोई भी उसे उतारने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। बिजली विभाग से लाइट कटवाकर पुलिस को सूचना दी गई। जिसके बाद पुलिस ने किसी तरह पेड़ से लाश नीचे उतारी। इस दौरान वहां परिवार के लोगों की चीख पुकार मच गई थी। किसी तरह परिवार को समझाकर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। अब विस्तार से जानें पूरा मामला गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र के सरया महुलिया निवासी रामश्रय गौड़ दो बच्चे एक बेटा और बेटी है। रामश्रय मछली पालन का काम करते हैं। घर से करीब 4 किमी दूर बड़हलगंज थाना क्षेत्र में ही तीहा मुहम्मदपुर में रामश्रय का ससुराल है। जहां पर सास ससुर रहते हैं। ससुर ने 10 साल के नाती अनिल गौड़ उर्फ कान्हा को गोद लिया था। दामाद रामश्रय से बातचीत करके नाती की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई थी। कान्हा अपने ननिहाल में ही स्थित प्राथमिक स्कूल में क्लास 3 में पढ़ता था। डेली उसे नाना स्कूल पहुंचाने और लाने जाते थे। इधर लगातार स्कूलों में ठंड की छुटि्टयां चल रही थी। मकर संक्रांति के दिन 15 जनवरी को वह दोस्तों के साथ गांव के ही खाली मैदान में पतंग उड़ा रहा था। दोपहर करीब 1:30 बजे एक कार्टून वाली पतंग कटकर एक आम के पेड़ में जाकर फंस गई। जिसे पाने के लिए कान्हा परेशान हो गया। गांव के दोस्तों ने बताया कि सभी लोगों ने उसे रोका था कि ऊंचे पेड़ से पतंग उतारना आसान नहीं है। पतंग पर कार्टून बना था। इसलिए कान्हा उस पतंग को पाने के लिए परेशान हो गया। पतंग उतारने के लिए वह घने आम के पेड़ पर चढ़ गया। जैसे ही उसने पतंग को हाथ में पकड़ा, उसका चेहरा पेड़ से होते हुए हाई टेंशन तार से सट गया। जिसके बाद वह वहीं पर झुलसने लगा। थोड़ी देर में उसकी मौत हाे गई। मौत के बाद उसकी लाश पेड़ पर ही लटकी हुई थी। मरने के बाद भी उसके दाएं हाथ में कार्टून वाली पतंग थी। करीब एक घंटे तक उसकी लाश पेड़ पर ही लटकी रही। इसके बाद पुलिस ने लाश नीचे उतरवाई। इस दौरान कान्हा के पिता रामश्रय और मां संध्या देवी भी वहां पहुंच गईं। दोनों चीखने चिल्लाने लगे। बच्चे की लाश पुलिस को सौंपने को भी तैयार नहीं थे। किसी तरह पुलिस ने उन्हें समझाया तब जाकर लाश कब्जे में ली, उसे पोस्टमार्टम के लिए गाड़ी से भिजवाया। इस दौरान सैकड़ों लोग वहां जुट गए। नाराज ग्रामीण बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने लगे। उनका कहना था कि बिजली विभाग की लापरवाही की वजह से ही बच्चे की जान गई है। मुक्तिधाम में किया गया दाह संस्कार शुक्रवार को शाम करीब 4 बजे पोस्टमार्टम कराने के बाद एंबुलेंस से कान्हा का शव उसके घर सरया महुलिया लाया गया। जहां पर सैकड़ों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ गए थे। वहीं मां संध्या देवी अपने बेटे की लाश पकड़कर रोने लगीं। वहां से किसी तरह महिलाओं ने उन्हें हटाया। तब जाकर शव को बड़हलगंज मुक्तिधाम ले जाया गया। जहां पुलिस की मौजूदगी में पिता ने दाह संस्कार किया। इस दौरान पुलिस के साथ ही बिजली विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने भी दुखी परिवार को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।
भाजपा के दबाव से निकाय चुनाव कराने को सरकार विवश : आदित्य
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के आंदोलन और पार्टी के दबाव से राज्य सरकार नगर निकाय चुनाव कराने को विवश हुई। अब हमारा लक्ष्य सभी निकाय सीटों पर विजय प्राप्त करना है। महानगर भाजपा कार्यालय में हुए स्वागत समारोह में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह उनका नहीं, कार्यकर्ताओं का सम्मान है। यदि भाजपा ने एसएसपी कार्यालय का घेराव नहीं किया होता, तो धुर्वा से अपहृत मासूम बच्चों की बरामदगी संभव नहीं होती। अध्यक्षीय संबोधन में महानगर अध्यक्ष वरुण साहू ने कहा कि आदित्य साहू के नेतृत्व में पार्टी जन-जन तक पहुंचेगी। वहीं, रांची विधायक सीपी सिंह ने कहा कि आदित्य साहू संघर्ष से निकले नेता हैं। उनके नेतृत्व में संगठन और अधिक मजबूत होगा। हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि आदित्य साहू का प्रदेश अध्यक्ष बनना कार्यकर्ता आधारित राजनीति की जीत है। समारोह में प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, सत्यनारायण सिंह, मनोज मिश्रा, बलराम सिंह, रमेश सिंह, मुकेश मुक्ता, कृपाशंकर सिंह, हरबिंदर सिंह बेदी, रोशनी खलखो, लक्ष्मी चंद्र दीक्षित, अनिता वर्मा आदि मौजूद थे।
ईडी अफसरों के खिलाफ पुलिस जांच पर रोक, CISF-BSF तैनात होगी
ईडी ऑफिस में रांची पुलिस की छापेमारी का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने शुक्रवार को इस पर सख्त आदेश जारी किया। कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ रांची पुलिस की जांच और कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव को प्रतिवादी बनाया। ईडी ऑफिस की सुरक्षा में सीआईएसएफ ओर बीएसएफ के जवानों को तैनात करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर ईडी कार्यालय में कोई भी अप्रिय घटना हुई तो इसके लिए रांची एसएसपी जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने इस मामले में ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले संतोष कुमार और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई अब नौ फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार दास, शिवम यू.सहाय और सौरव कुमार ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कपिल सिब्बल (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से) व मनोज कुमार, केंद्र सरकार की ओर से एएसजीआई प्रशांत पल्लव और संतोष कुमार की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया व रितेश कुमार गुप्ता ने पक्ष रखा। गौरतलब है कि पेयजल स्वच्छता प्रमंडल के क्लर्क संतोष कुमार की ओर से 13 जनवरी को एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस एफआईआर के आधार पर एयरपोर्ट थाने की पुलिस ने सिटी डीएसपी के नेतृत्व में 15 जनवरी को अहले सुबह ईडी कार्यालय में छापेमारी की थी। ईडी ने की थी पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने व सीबीआई जांच की मांगछापेमारी के बाद ईडी के सहायक निदेशक विनय कुमार सिंह और सहायक प्रवर्तन अधिकारी शुभम भारती ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की है। इसमें एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 के मामले में पुलिस की कार्यवाही पर रोक लगाने और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी। संतोष कुमार ने एयरपोर्ट थाना में दर्ज एफआईआर में ईडी अफसरों पर पूछताछ के लिए बुलाकर डंडे से मारकर सिर फोड़ने, जान से मारने की धमकी देने और डॉक्टर व अधिकारियों को सच्चाई बताने पर पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी देने का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने ईडी कार्यालय में छापेमारी की थी। हाईकोर्ट : हम मूकदर्शक नहीं रह सकते...जांच पर तुरंत रोक लगाएं दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा- कोर्ट एफआईआर के प्रारंभिक चरण में अंतरिम संरक्षण प्रदान करने में अत्यंत सावधानी बरतता है। लेकिन ईडी द्वारा जो मामला कोर्ट के समक्ष लाया गया है, ऐसे मामले में हाईकोर्ट मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता है। हालांकि, इस मामले का निष्कर्ष अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही दी जा सकती है। फिलहाल पुलिस द्वारा शुरू की गई जांच और कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है। केंद्रीय गृह सचिव को ईडी कार्यालय की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ या बीएसएफ के जवानों को तैनात करने का निर्देश दिया जाता है। ईडी को निदेशालय के परिसर में लगाए गए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाता है। जानिए...हाईकोर्ट में किसने क्या दी दलील ईडी: झारखंड में बंगाल जैसे हालात, जांच बाधित करने की पूर्व नियोजित रणनीति ईडी की ओर से कहा गया कि रांची जोनल कार्यालय कई हाई प्रोफाइल और संवेदनशील मामले की जांच कर रही है। इसमें मुख्यमंत्री व पूर्व मंत्री सहित कई प्रभावशाली राजनेता और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शामिल हैं। शिकायत करने वाला पेयजल विभाग का कर्मचारी संतोष कुमार भी 23 करोड़ रुपए के सरकारी धन के गबन का मुख्य आरोपी है। संतोष के खिलाफ इसीआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने भी उसे हिरासत में लिया था और बाद में उसे जमानत मिल गई थी। रांची पुलिस की यह कार्रवाई ईडी की ओर से की जा रही जांच को बाधित करने की पूर्व नियोजित रणनीति है। झारखंड में बंगाल जैसे हालात बन रहे हैं। इसमें राज्य के हाई प्रोफाइल लोग भी शामिल हैं। इसलिए संरक्षण जरूरी है। आरोपी संतोष कुमार : ईडी के अधिकारियों ने फोन करके ईडी ऑफिस में बुलाया था ईडी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने वाले पेयजल विभाग के क्लर्क संतोष कुमार के वकील सुमित गाड़ोदिया ने कहा कि संतोष को ईडी अधिकारियों ने फोन कर अपने कार्यालय में बुलाया था। कार्यालय में प्रवेश करते समय रजिस्टर में उसका नाम भी दर्ज किया गया था। इसके बाद ही उसे कार्यालय में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी। ईडी : कोई समन नहीं, खुद आया था संतोष को कोई समन जारी नहीं किया गया था। वह खुद 12 जनवरी को दोपहर 1:20 बजे ईडी कार्यालय पहुंचा। जब उससे गबन मामले में बातचीत की जा रही थी, तभी वह उत्तेजित हो गया। उसने मेज पर रखे कांच के जग को उठाकर खुद के सिर पर मार लिया। उससे उसके सिर में हल्की चोट आई।
JAC अलर्ट से बदली तस्वीर: एक दिन पहले 56 हजार गैप, अब सिर्फ 2 हजार
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) का समय पर जारी अलर्ट ने आठवीं बोर्ड परीक्षा 2026 की आवेदन प्रक्रिया को पटरी पर ला दिया। गुरुवार तक जहां पिछले वर्ष की तुलना में करीब 56 हजार कम फॉर्म भरने से चिंता गहराने लगी थी, वहीं शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। नतीजतन, एक दिन में ही अधिकांश अंतर पाट दिया गया और अंतिम आंकड़ों में अब पिछले साल से महज करीब 2 हजार कम आवेदन रह गए। देर रात तक और आवेदन आने की संभावना है। वर्ष 2025 में 5,18,023 छात्रों ने आठवीं बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन किया था, जबकि 2026 में 5,16,610 फॉर्म भरे गए। जैक द्वारा गुरुवार को जारी अलर्ट के बाद शिक्षा तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गया। जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड कार्यालय और स्कूल स्तर पर त्वरित समन्वय स्थापित किया गया। तत्काल समीक्षा हुई। स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि कोई भी पात्र छात्र फॉर्म से वंचित न रहे। इसका सीधा असर शुक्रवार को देखने को मिला। कम आवेदन वाले 5 जिले
बड़ी कंपनियों में काम दिलाने का झांसा देकर 4 आरोपियों ने पीड़ित कानाराम के नाम से फर्म रजिस्टर्ड करवाई। उसी फर्म की आड में आरोपियों ने 90 करोड़ के फर्जी जीएसटी के ई-बिल भी काट दिए। पीड़ित कानाराम को फर्जीवाड़े का पता तब चला, जब उसके नाम से जीएसटी ऑफिस से नोटिस आया। आखिरकार मामला विवेक विहार थाना पुलिस तक पहुंचा। फर्जीवाड़े में निलेश हर्ष, आनंद व्यास, फिरोज खान और प्रफुल्ल के शामिल होने का आरोप है। बावजूद इसके अभी तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को पूछताछ के लिए भी नहीं बुलाया है। पीड़ित कानाराम रेलवे में छोटे काम लेता था। तब आरोपियों ने विश्वास में लेकर फर्म बनाने के नाम पर फर्जीवाड़ा कर दिया। इसी फर्जीवाड़े के चलते उसका रेलवे में 50 लाख रुपए का बॉन्ड भी अटका हुआ है। पिछले साल 18 जुलाई को राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश कुलदीप माथुर ने मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के आदेश दिए थे। सरकारी अधिवक्ता की ओर से कोर्ट मामले की जांच जल्द ही पूरी करने के लिए आश्वस्त किया गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अधीनस्थ कोर्ट ने भी गत 12 अगस्त को इस मामले को गंभीरता से लिया था। एसीजेएम ने विवेक विहार थाना पुलिस को निर्देश दिए कि वे मामले की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। कानाराम रेलवे में ठेकेदारी का काम करता था। उसकी साल 2019-20 में निलेश हर्ष से मुलाकात हुई। उसने कानाराम को रेलवे में बड़े काम दिलाने के लिए बड़ी फर्म होने का कहकर रजिस्टर्ड फर्म बनाने का झांसा दिया। इसके बाद कानाराम के नाम और दस्तावेजों से जीके ट्रांसपोर्ट फर्म बनाई। उसे रेलवे का काम भी दिलाया। जिसका आज तक कानाराम को भुगतान नहीं हुआ। आरोपियों ने कानाराम का ऑफिस भी जसवंत सराय में अपने मिलने वाले के यहां होना बताया। आरोपी कानाराम के कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर कई विभागों में काम लेने का झांसा देकर एप्लीकेशन फॉर्म पर उसके साइन करवाते। बाद में आरोपियों ने ऑफिस का पता बदलकर कुड़ी भगतासनी का 14 एफ 14 कर दिया। परिवादी ने इस्तगासे के जरिए विवेक विहार थाने में मामला दर्ज करवाया था। जिसकी जांच थानाधिकारी दिलीप खदाव को सौंपी गई साल 2021 में आरोपियों ने परिवादी कानाराम को रिलायंस कंपनी में वेंडर बनाने का झांसा देकर फिर से साइन करवाए। मगर आरोपियों ने कानाराम को किसी तरह का वेंडर का लाइसेंस नहीं दिलाया। बल्कि वेंडर लाइसेंस के नाम पर 1 लाख रुपए अलग-अलग मदों में प्राप्त कर लिए। हैरानी तो तब हुई जब कानाराम के मोबाइल पर जीएसटी विभाग का नोटिस आया। जिसमें उसके पैनकार्ड और फर्म के नाम से फर्जी जीएसटी के करीब 90 करोड़ के बिल काटकर फर्जीवाड़ा करना सामने आया। विवेक विहार थाने में 90 करोड़ के जीएसटी के फर्जी ई-बिल का मामला सामने आया था। इस मामले की फाइल मंगवाकर देखी। कुछ पॉइंट बनाकर दिए हैं। जिन पर एसएचओ को जांच करनी है। परिवादी को बुलाकर उसका पक्ष भी सुना था। -आनंद सिंह राजपुरोहित, एसीपी (बोरानाडा)
झारखंड में 27 जनवरी को होगी नगर निकाय चुनाव की घोषणा
झारखंड के 48 नगर निकायों में चुनाव की घोषणा 27 जनवरी को होगी। अधिसूचना जारी होते ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही इन निकाय क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। फरवरी के अंत में मतदान होगा। राज्य चुनाव आयोग के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने 12 जनवरी को ही स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही चुनाव आयोग अब तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। चुनाव को लेकर शुक्रवार को आयोग में सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारियों का प्रशिक्षण हुआ। करीब साढ़े चार घंटे चले प्रशिक्षण में राज्य चुनाव आयुक्त और आयोग के सचिव ने उन्हें बूथ गठन से लेकर नामांकन, नाम वापसी, स्क्रूटनी, चुनाव प्रचार, मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि चुनाव के लिए उन्हें अपने-अपने क्षेत्र में किस तरह की व्यवस्था करनी है। गौरतलब है कि झारखंड में नौ नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में चुनाव होना है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह हर हाल में 31 मार्च तक चुनाव कराकर रिपोर्ट सौंपे। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है यहां होना है नगर निकाय चुनाव एक ही बैलेट बॉक्स में डाले जाएंगे मेयर और पार्षद के लिए वोट: निकाय चुनाव में एक ही बैलेट बॉक्स में मेयर-अध्यक्ष और वार्ड पार्षद के लिए वोट डाले जाएंगे। मेयर और अध्यक्ष का बैलेट पेपर गुलाबी रंग का होगा। वहीं वार्ड पार्षद का मत पत्र सफेद रंग का होगा। गिनती के क्रम में दोनों वोटों को अलग-अलग छांटा जाएगा, फिर उसकी गिनती शुरू होगी। मतदान के तीसरे दिन होगी मतगणना: सभी निकाय क्षेत्रों में एक ही दिन बैलेट पेपर से वोट डाले जाएंगे। मतदान के तीसरे दिन मतगणना होगी। यानी अगर 25 फरवरी को चुनाव हुआ, तो 27 फरवरी को मतगणना होगी। पर यदि 26 फरवरी को मतदान हुआ, तो फिर 28 फरवरी को मतगणना होगी। होली के पूर्व प्रत्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। मतगणना के 20 दिनों के भीतर मेयर-अध्यक्ष का होगा चुनाव: निकाय चुनाव की मतगणना के 20 दिनों के भीतर नगर निगम के मेयर और नगर पंचायत व नगर परिषदों के अध्यक्ष पद का चुनाव होगा। इस चुनाव में वार्ड पार्षद भाग लेंगे। उनके बीच का ही कोई वार्ड पार्षद इस पद के लिए चुनाव लड़ेगा। चुनाव के पूर्व वार्ड पार्षदों को पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिर वे वोट करेंगे। आधे से अधिक निकायों में 2020 से लंबित है चुनाव: राज्य में आधे से अधिक निकायों में 2020 से ही चुनाव लंबित है। कोरोना महामारी के कारण उस समय सरकार ने निकायों के चुनाव को स्थगित कर दिया था। बाद में एक साथ सभी निकायों में चुनाव कराने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई, लेकिन ओबीसी आरक्षण और ट्रिपल टेस्ट को लेकर फिर मामला उलझा और चुनाव की प्रक्रिया बाधित हुई।
खिलाड़ी पलक, प्रिंसी का राष्ट्रीय खो-खो प्रतियोगिता में चयन
हरदा| जिले की दो खो-खो खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाई है। खो-खो कल्याण संघ के संयुक्त सचिव भूपेंद्र सिंह तोमर ने बताया, हरदा की पलक उइके और प्रिंसी उइके का चयन राष्ट्रीय खो-खो प्रतियोगिता के लिए हुआ है। पलक उइके 58वीं राष्ट्रीय ओपन सीनियर नेशनल खो-खो प्रतियोगिता में खेलेंगी। यह प्रतियोगिता तेलंगाना के काजीपेट में होगी। वहीं प्रिंसी उइके का चयन अंडर-14 शालेय राष्ट्रीय खो-खो प्रतियोगिता के लिए हुआ है। यह प्रतियोगिता राजस्थान के टेकरी में होगी। इस उपलब्धि पर कोच मोनिका मेहता, पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल, जिला खेल अधिकारी रामनिवास जाट, जिला खेल अधिकारी उमा पटेल, सलमा खान समेत अन्य ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी।
राजू व पूनम की बैल जोड़ी ने जीती प्रतियोगिता
हरदा| संत श्री कालू बाबा मेले में हुई बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता में छोटी हरदा और नीमगांव की बैलजोड़ी ने पहला स्थान हासिल किया। राजू जेवल्या और पूनम गीला की जोड़ी ने तेज रफ्तार और संतुलन से दर्शकों को प्रभावित किया। उन्हें 51 हजार रुपए का प्रथम पुरस्कार मिला। प्रतियोगिता में खंडवा सहित आसपास के जिलों से बैलगाड़ी मालिक शामिल हुए। दौड़ प्रेमी विजय जेवल्या ने बताया कि मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। दूसरा पुरस्कार 31 हजार रुपए राजू जेवल्या (छोटी हरदा) और रोहित सिरोही (भोनखेड़ी) की जोड़ी को मिला। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण और खेल प्रेमी पहुंचे। विजेताओं को आयोजकों ने सम्मानित किया।
खूंटी में पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों ने शनिवार को झारखंड बंद का आह्वान किया है। इसे देखते हुए राजधानी के अधिकतर स्कूलों ने शनिवार को छुट्टी की घोषणा कर दी है। शहर के प्रमुख स्कूल सरला बिरला पब्लिक स्कूल, केरली धुर्वा, संत कोलंबस स्कूल, जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल, लोयला कॉन्वेंट, बिशप वेस्टकॉट स्कूल, ब्रिजफोर्ड स्कूल, टेंडर हार्ट स्कूल, सेक्रेड हार्ट स्कूल, डीएवी पब्लिक स्कूल हेहल, संत जेवियर्स स्कूल और अचार्यकुलम स्कूल समेत कई स्कूलों ने अभिभावकों को एसएमएस के माध्यम से स्कूलों में छुट्टी की सूचना दे दी है। इसके अलावा कई अन्य स्कूलों ने भी बंद रखने की घोषणा की है। बंद को लेकर आदिवासी संगठनों ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। लोगों से बंद को सफल बनाने की अपील की गई है। वहीं बंद समर्थकों से निपटने के लिए पुलिस ने भी सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए हैं। बंद के दौरान शहर के हर प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। ताकि वे जबरन बंद न करा सके। वहीं आने-जाने वाले लोगों को बेवजह परेशान न कर सके। इस हत्या के विरोध में आठ जनवरी को खूंटी जिला बंद रखा गया था। लेकिन सभी हत्यारों की गिरफ्तारी न होने पर झारखंड बंद का आह्वान किया गया। इन संगठनों ने दिया समर्थन इस बंद को आदिवासी महासभा, आदिवासी जनपरिषद, आदिवासी समन्वय समिति, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, केंद्रीय सरना समिति, संपूर्ण आदिवासी समाज, सोगोम तमाड़ समिति, एदेश सांगा पड़हा, संयुक्त बाइस पड़हा मुंडा, राजी पड़हा समिति, जिला परिषद अध्यक्ष मसीही गुड़िया, पड़हा समिति, आदिवासी अधिकार समिति, झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा, केंद्रीय महिला सरना समिति, आमया संगठन ने समर्थन दिया है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी और झारखंड छात्र संघ ने भी बंद को समर्थन देने की घोषणा की है। बंद की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को आदिवासी संगठनों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला। लोगों से बंद को सफल बनाने की अपील की। आदिवासी जनपरिषद के अध्यक्ष प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि सोमा मुंडा समाजसेवी के साथ 56 गांवों के पारंपरिक ‘एदेल संगा पड़हा राजा’ थे। उन्होंने जल-जंगल, जमीन की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। सात जनवरी को भू-माफिया ने उनकी हत्या कर दी। पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, पर मुख्य साजिशकर्ता, शूटर और भू-माफिया अभी भी फरार है। यह आदिवासी समाज के लिए गंभीर चुनौती है। इसीलिए इन आरोपियों की गिरफ्ताारी के लिए झारखंड बंद का आह्वान किया गया है।
अवैध शराब पर कार्रवाई, 64 हजार की शराब जब्त
हरदा| कलेक्टर सिद्धार्थ जैन के निर्देश पर जिला आबकारी अधिकारी सुनील भोजने ने कार्रवाई के आदेश दिए। आबकारी विभाग की टीम ने रामपुरा, नयापुरा, उंढाल, चिराखान, साल्याखेड़ी, करणपुरा, लोटिया, जामली दमामी, खेड़ीपुरा और टंकी मोहल्ला में दबिश दी। टीम ने 42 पाव देशी प्लेन शराब, 24 लीटर हाथ भट्टी कच्ची महुआ शराब और 560 किलोग्राम महुआ लहान जब्त किया। जब्त माल की बाजार कीमत 64 हजार 910 रुपए आंकी गई।
अयोध्या-वाराणसी तीर्थ यात्रा पर जाएंगे बुजुर्ग
हरदा| मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत अब वरिष्ठ नागरिक 1 मार्च को अयोध्या और वाराणसी की यात्रा करेंगे। पहले यात्रा 1 से 6 मार्च तक मां वैष्णो देवी के लिए तय थी। लेकिन भारी बारिश से कटरा से श्री माता वैष्णो देवी धाम रेलवे स्टेशन के बीच ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया। इसी कारण यात्रा का स्थान बदला गया। संयुक्त कलेक्टर सतीश राय ने बताया सभी तहसीलदारों, जनपद सीईओ और सीएमओ को निर्देश दिए हैं ।
गोरखपुर के चौरीचौरा क्षेत्र में 29 मार्च 2025 की देर रात गंडासे से गला रेतकर मां-बेटी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना के 10 माह बाद भी पुलिस हत्यारे का पता नहीं लगा पाई। इस मामले में नामजद तीन आरोपियों सहित छह संदिग्ध का गाजियाबाद स्थित संस्थान में पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी महीने इसकी रिपोर्ट भी आ जाएगी। इस रिपोर्ट से डबल मर्डर के पर्दाफाश में मदद मिल सकती है। पुलिस का ऐसा दावा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वादी मुकदमा मृतका पूनम की बड़ी बेटी खुशबू, गांव के कोटेदार सूरज, उसके बेटे सुरेंद्र व संजय के साथ ही दो अन्य संदिग्ध सदानंद और अजय कुमार का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। करीब एक सप्ताह तक गाजियाबाद में यह प्रक्रिया चली है। इस दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। 100 से अधिक लोगों से पूछताछ के बाद भी खाली हाथ पुलिस का कहना है कि अभी तक 100 से अधिक लोगों से इस केस में पूछताछ हुई, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। जांच पड़ताल के बाद इस केस से जुड़े 6 संदिग्ध सवालों के घेरे में आए। जिनका कोर्ट से आदेश मिलने के बाद पॉलीग्राफ टेस्ट गाजियाबाद में कराया गया है। हत्यारा जो भी है, वह बहुत ही शातिर है। उसने कोई साक्ष्य घटना स्थल पर नहीं छोड़ा, जिसकी मदद से उस तक पहुंचा जा सके। पुलिस की 8 टीमें कई महीने जांच करने के बाद भी कोई साक्ष्य एकत्रित नहीं कर पाई। अब पुलिस को पाॅलीग्राफ टेस्ट रिपोर्ट से काफी उम्मीद है। अगर टेस्ट रिपोर्ट से भी मदद नहीं मिली, तब इस केस का पर्दाफाश कर पाना बेहद मुश्किल होगा। 29 मार्च को मां-बेटी की गंडासे से की गई थी हत्या चौरीचौरा थाना क्षेत्र के शिवपुर चकदह गांव 29 मार्च की देर रात करीब 1:30 बजे पूनम (45) और उनकी बेटी अनुष्का (13) की गंडासे से मारकर हत्या की गई थी। सूचना पर पहुंची चौरीचौरा पुलिस ने घटना स्थल पर छानबीन की थी। तब पूनम का एंड्रॉयड मोबाइल वहां नहीं मिला था। जांच में पता चला था कि घटना को अंजाम देने के बाद हत्यारे पूनम का मोबाइल लेकर भाग गए थे। बाद में वह मोबाइल भी गांव के एक खेत में मिल गया था। घटना के समय आरोपियों ने पूनम की बड़ी बेटी खुशबू को दूसरे कमरे में बंद कर दिया था। खुशबू ने अपने कमरे की दरवाजे के छेद से आरोपियों को देखा था। उसकी तहरीर पर गांव के ही कोटेदार संजय उर्फ शैलेंद्र व उसके पिता और भाई के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। शैलेंद्र को घटना के बाद ही घर से सोते समय गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भिजवाया था। 90 दिन में नहीं लगी चार्जशीट, छूट गया कोटेदार हत्या की घटना 29 मार्च की देर को हुई थी। इसके 90 दिन बाद भी चौरीचौरा पुलिस इस मामले में चार्जशीट नहीं दाखिल कर पाई। इस कारण मुख्य आरोपी संजय उर्फ शैलेंद्र को तीन महीने में ही सिविल कोर्ट से जमानत मिल गई। वह जेल से बाहर आ गया। पुलिस का कहना था कि संजय के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिल पा रहे थे, इसलिए चार्जशीट नहीं दाखिल की गई थी। हत्या के बाद जब पुलिस कोटेदार संजय के घर पहुंची थी, तब वह कमरे में सोया मिला था। सीसीटीवी कैमरे में भी उसके बाहर जाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला था। इस संबंध में एसपी उत्तरी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि मां-बेटी हत्या प्रकरण में कुछ संदिग्ध का पॉलीग्राफ टेस्ट करा लिया गया है। इस माह गाजियाबाद से इसकी रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इससे काफी मदद मिल सकती है। रिपोर्ट आने के बाद उसी दिशा में जांच पड़ताल की जाएगी।
वासुपूज्य भगवान का महा मस्तकाभिषेक आज
सागर| जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के निर्वाणोत्सव पर नगर के रामपुरा में स्थित मूलनायक पंचबालयति श्री वासुपूज्य भगवान का महामस्तकाभिषेक का कार्यक्रम मुनि श्री निष्काम सागर महाराज और मुनि श्री निष्काम सागर महाराज के सानिध्य में सुबह 8 बजे से किया जाएगा। मुकेश जैन ढाना ने बताया कि मुनि संघ का प्रवास रामपुरा में चल रहा है आदिनाथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा के बाद मूलनायक वासुपूज्य भगवान का महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। शनिवार को कुंडलपुर के बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान का विहार पुराने मंदिर से नए मंदिर की वेदी पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ससंघ के सानिध्य में हुआ था। सागर नगर के सभी जैन मंदिरों में प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का निर्वाणोत्सव कार्यक्रम मनाया जाएगा।
पेंशनर्स की बैठक में ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य योजना पर हुआ मंथन
भास्कर संवाददाता | सागर संजय ड्राइव रोड स्थित श्री सरोवर सरकार हनुमान मंदिर परिसर में शुक्रवार को विद्युत पेंशनर्स हित रक्षक संघ की बैठक आयोजित हुई। बैठक की शुरुआत श्री हनुमान जी की पूजा-अर्चना से हुई, जिसमें विद्युत पेंशनर्स बड़ी संख्या में उपस्थित थे। बैठक को संबोधित करते हुए संघ के प्रदेश विधिक सलाहकार डॉ. नवनीत धगट ने बताया कि 1 जनवरी 2024 से ग्रेच्युटी की सीमा 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख किए जाने का लाभ पात्र पेंशनर्स को मिलना चाहिए, लेकिन विद्युत कंपनियों द्वारा अब तक इस संबंध में आदेश जारी नहीं किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिन पेंशनर्स को यह लाभ नहीं मिला है, वे संघ के माध्यम से हाईकोर्ट में प्रकरण दायर कर सकते हैं। इसके लिए इच्छुक पेंशनर्स को निर्धारित फार्म में आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर 20 जनवरी तक जमा करना होगा। इस संबंध में आवेदन लेने के लिए शाम 5 बजे बैठक स्थल पर संघ पदाधिकारी उपलब्ध रहेंगे। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा घोषित तारीख से महंगाई राहत (डीआर) का भुगतान करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। साथ ही अंशदायी केशलैस हेल्थ इंश्योरेंस योजना को ट्रांसमिशन, पूर्व, पश्चिम एवं मध्य क्षेत्र की बाकी विद्युत कंपनियों में भी शीघ्र लागू करने की मांग की गई। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश की विद्युत कंपनियों के पेंशनर्स को ट्रेजरी के माध्यम से पेंशन भुगतान किए जाने की मांग को भी सर्वसम्मति से समर्थन मिला। बैठक में निर्णय लिया गया कि विद्युत पेंशनर्स हित रक्षक संघ की बैठक प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को आयोजित की जाएगी, जिसकी सूचना संघ के वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से दी जाएगी।
सीएम हेमंत सोरेन 23 को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में देंगे व्याख्यान
सीएम हेमंत सोरेन 23 जनवरी को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में व्याख्यान देंगे। इस दौरान वे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में टिकाऊ विकास के अनुभवों और चुनौतियों पर बात रखेंगे। मुख्यमंत्री संसाधन-समृद्ध राज्यों में टिकाऊ और हरित औद्योगीकरण, खनिज-आधारित उद्योग व समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के मॉडल पर विचार साझा करेंगे। चर्चा का आधार प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास रहेगा, जिसे झारखंड के विकास मॉडल की वैश्विक प्रस्तुति के रूप में देखा जा रहा है। इस संवाद में अल्पा शाह (ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में सामाजिक मानवशास्त्र की प्रोफेसर व ऑल सोल्स कॉलेज की फेलो) और माया ट्यूडर (ब्लावटनिक स्कूल में राजनीति एवं लोक नीति की प्रोफेसर) भी शामिल होंगी। ज्यूरिख में भारत के राजदूत से मुलाकात शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में भारत के राजदूत मृदुल कुमार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 से जुड़ी तैयारियों और एजेंडे पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड में डब्ल्यूईएफ और इसके बाद यूनाइटेड किंगडम यात्रा के दौरान ऊर्जा क्षेत्र के वैश्विक निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और नीति-निर्माण से जुड़े संस्थानों से संवाद करेगा।
एकता कॉलोनी में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ आज से
सागर| एकता कॉलोनी वृंदावन वार्ड के मंगल भवन में 17 से 23 जनवरी तक श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से छतरपुर के पं. रमाकांत महाराज सुनाएंगे। आयोजक एवं मुख्य यजमान प्रेमारानी एवं इन्दु इंद्राज ठाकुर ने बताया कि 23 जनवरी को शाम 4 से प्रसादी वितरण किया जाएगा।
शहर में रोज 90 लोग डॉग बाइट के हो रहे शिकार, सदर में एंटी रेबीज सुई लेने वालों की कतार
देश की शीर्ष अदालत ने आवारा कुत्तों के काटने के मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि हर डॉग बाइट, मौत पर भारी जुर्माना लगाएंगे। वहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने भी रांची सहित राज्य के सभी शहरों में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण का आदेश दिया है। कोर्ट ने रांची नगर निगम को साफ कहा है कि किसी भी हाल में अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, एयरपोर्ट, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित बाजारों में आवारा कुत्ते न दिखें। पर निगम कुत्तों को नियंत्रित करने की कागजी योजना बनाने में ही जुटा है। जबकि, दूसरी ओर शहर में रोजाना औसतन 90 लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं। रांची सदर अस्पताल के एंटी रेबीज डिपोर्टमेंट के आंकड़े को मानें तो रोजाना 200 से अधिक लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। इसमें 80 से 100 नए मामले शामिल हैं। भास्कर की टीम ने दो दिनों तक शहर के विभिन्न स्थानों की पड़ताल की तो कोर्ट के आदेश का कोई असर नहीं दिखा। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है ऐसे समझिए क्यों बढ़ रहे डॉग बाइट लाख आवारा कुत्ते थे 2010 तक कुत्तों को रखने के लिए जगह नहीं नगर निगम द्वारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन का काम होप फॉर एनिमल संस्था को दिया गया है। लेकिन एक कुत्ते के बदले मात्र 380 रुपए दिए जाते हैं। संसाधन भी पर्याप्त नहीं हैं। चुटिया में एक डॉग अस्पताल बनाया गया है, जहां कुत्तों की नसबंदी और बीमार कुत्तों का इलाज किया जाता है। लेकिन वहां अधिक कुत्तों को नहीं रखा जा सकता। इसलिए नसबंदी के बाद कुत्तों को छोड़ दिया जाता है। कुत्ता काटने से बने घाव साबुन से धोएं कुत्ते के काटने पर बने घाव को कपड़े धोने वाले साबुन और चलते नल के पानी से साफ करें। घाव पर एंटीबायोटिक क्रीम लगाएं। 24 घंटे में एंटी रेबीज वैक्सीन लें। देसी दवा के चक्कर में न पड़ें। शरीर के ऊपरी हिस्से में काटना गंभीर डॉक्टर ने बताया कि किसी व्यक्ति के ऊपरी हिस्से जैसे गर्दन, चेहरे या मुंह के करीब कुत्ता काटता है तो रेबीज का खतरा अधिक होता है। ऐसे में रेबीज के इंजेक्शन के सभी चार डोज लेना चाहिए। झुंड में रहकर आक्रमक हो रहे, हल्की शरारत पर कर दे रहे हमला ठंड से बचने के लिए कुत्ते अकेले रहने के बजाय झुंड बनाकर रहना पसंद करते हैं। इससे उन्हें एक-दूसरे के शरीर की गर्मी मिलती है। झुंड में होने पर वे अधिक ताकतवर समझते हैं। ऐसे में उनके सामने हल्की शरारत होने पर भी वे हमला कर देते हैं। कई बार रात में दो पहिया वाहन सवारों पर भी वे हमला करते हैं। ठंड में कुत्ते चिड़चिड़े हो जाते हैं, इसलिए काटते हैं पशु चिकित्सक डॉ. एसके तिवारी ने बताया कि ठंड में भोजन की उपलब्धता कम हो जाती है। कुत्तों में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है। भूख और ठंड की वजह से कुत्ते चिड़चिड़े हो जाते हैं। ऐसे में कोई व्यक्ति उसके आसपास आता है तो वे उसे खतरे के रूप में देखते हैं और हमला कर देते हैं। निगम प्रशासक बोले... आश्रय गृह बनाकर कुत्तों को रखने की होगी व्यवस्था 30 हजार से अधिक कुत्तों का रजिस्ट्रेशन नहीं। निगम के प्रशासक ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आवरा कुत्तों को रखने के लिए आश्रय गृह बनाने का निर्देश दिया है। इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है। वहां नसबंदी और टीकाकरण की पूरी व्यवस्था होगी। इसके अलावा शहर के विभिन्न जोन में कुत्तों के लिए फीडिंग जोन भी बनाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का आदेश नहीं मानता रांची नगर निगम, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज से लेकर सड़कों पर आवारा कुत्तों का जमघट
सेन समाज सम्मान समारोह को लेकर विधायक जैन से भेंट
सागर | भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की जन्म शताब्दी पर प्रस्तावित सेन समाज सम्मान समारोह को लेकर प्रदेश व जिला पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक शैलेंद्र जैन से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए सहयोग व मार्गदर्शन का अनुरोध किया। बताया गया कि आयोजन का उद्देश्य सामाजिक समरसता, पिछड़े वर्गों के उत्थान और कर्पूरी ठाकुर के विचारों का प्रसार है। विधायक जैन ने कार्यक्रम की सराहना की और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस दौरान राजेश्वर सेन, श्रीकांत सेन, डॉ. जीवन लाल सेन, महेश सेन, संतोष सेन, विनोद सेन आदि मौजूद रहे।
राजस्थान में खेलों को बढ़ावा देने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत एक बार फिर उजागर हो गई है। उदयपुर में खेली जा रही राष्ट्रीय विद्यालय अंडर-19 हॉकी प्रतियोगिता बिना बजट के ही आयोजित की जा रही है। शिक्षा विभाग बीकानेर की ओर से 15 लाख रु. का बजट स्वीकृत होने के बावजूद प्रतियोगिता शुरू हुए 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आयोजन स्कूल पीएम श्री फतह को अब तक एक भी रुपया नहीं मिला है। हालात ये हैं कि देशभर से आई टीमों की मेजबानी, आवास, भोजन, मैदान, बिस्तर और पुरस्कार तक की व्यवस्थाएं उधार पर की जा रही हैं। मैदान, होटल, धर्मशाला, इनाम… सब उधार पर... पीएम श्री फतह स्कूल के प्राचार्य गजेंद्र आवोत ने बताया कि आयोजन मिलते ही मैदान, होटल, धर्मशाला, टेंट, बिस्तर, पुरस्कारों की व्यवस्था अपने स्तर पर कर दी गई थी। लेकिन बजट नहीं मिलने से भुगतान करने का दबाव है। इधर, तीन माह बाद भी जूडो प्रतियोगिता का भुगतान नहीं वहीं, सितंबर-अक्टूबर में कालारोही स्कूल द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय जूडो प्रतियोगिता के 3 माह बाद भी 25 हजार का बजट अब तक जारी नहीं हुआ है। आयोजन समिति के किशन सोनी ने बताया कि कई बार विभाग को अवगत कर चुके हैं।
बांग्लादेश में कत्लेआम के विरोध में कैंडल मार्च
उज्जैन | बांग्लादेश में हो रहे मानवता के कत्लेआम के विरोध में सर सैयद अहमद वेलफेयर सोसायटी द्वारा शहीद पार्क से कैंडल मार्च निकाला गया। कट्टरपंथियों द्वारा निर्दोष नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा की। सर सैयद अहमद वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष पंकज जायसवाल एवं संरक्षक सैयद आबीद अली मीर ने बताया कि संस्था द्वारा बांग्लादेश में निर्दोष नागरिकों की हत्या के विरोध में शहीद पार्क पर से कैंडल मार्च निकाला गया एवं दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। सैयद उस्मान हसन एवं धर्मेंद्र राठौर ने बताया कैंडल मार्च में डॉ. शकील अंसारी, अनुदीप गंगवार, जहीर नागोरी, सादिक मंसूरी, बाबर खान, इरफान खान, सद्दाम हुसैन आदि उपस्थित थे। जानकारी चेतन ठक्कर ने दी।
30 स्लीपर बस के फिटनेस निरस्त, 10 के परमिट सस्पेंड
चैकिंग अभियान और परिवहन आयुक्त मध्यप्रदेश ग्वालियर से प्राप्त निर्देशों के चलते आरटीओ संतोषकुमार मालवीय के नेतृत्व में स्लीपर बस की जांच के लिए चैकिंग अभियान चलाया गया। कार्यालयीन स्टाफ नरेंद्र ढडेरवाल ने अमले के साथ 189 स्लीपर बस की जांच की। कई बस में बस बॉडी निर्माता द्वारा बस बॉडी कोड कंडक्ट के निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने और बस बॉडी का निर्माण मोटरयान अधिनियम के विपरीत करने पर कार्रवाई की गई। कार्रवाई के अंतर्गत 30 स्लीपर बसों के फिटनेस निरस्त किए गए। वहीं 10 स्लीपर बसों के पंजीयन निलंबन के अलावा 10 अन्य बस के परमिट निलंबन की कार्रवाई की गई। स्लीपर बस की जांच करते हुए आरटीओ मालवीय।
इंतजार खत्म... क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में आधुनिक मशीनों से होगा नेत्र व ईएनटी मरीजों का इलाज
आखिरकार वो दिन आ गया, जब रिम्स में नेत्र संबंधित रोगों का इलाज अपनी बिल्डिंग में होगा। 11 साल से रिम्स परिसर में बन रहे क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। 18 जनवरी के बाद से यहां रोगियों का उपचार शुरू हो जाएगा। शुक्रवार को रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक ने पत्राचार कर नेत्र व ईएनटी के विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि 18 जनवरी तक अपना विभाग डिस्ट्रीब्यूशन प्लान के अनुरूप नई आरआईओ बिल्डिंग में शिफ्ट कर लें। पत्र में कहा गया है कि झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा निर्मित क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का संयुक्त निरीक्षण निदेशक व अन्य अधिकारियों द्वारा किया गया था। साथ ही पुराने भवन का भी रेनोवेशन किया जाना है। इसके लिए नेत्र व ईएनटी विभाग को जल्द से जल्द आरआईओ बिल्डिंग में शिफ्ट कराने का निर्देश दिया गया है। जिसके बाद चिकित्सा अधीक्षक ने 18 जनवरी की तिथि तक विभाग शिफ्ट करने की बात कही है। हालांकि, सूचना है कि अभी भवन को उपयोग में लाया जाएगा, लेकिन इसका विधिवत उद्घाटन बाद में कराया जाएगा। 103 पद स्वीकृत, विशेषज्ञ डॉक्टरों की होगी नियुक्तिसंस्थान के संचालन के लिए रिम्स प्रशासन ने विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मियों समेत कुल 103 पद स्वीकृत किए हैं। रोस्टर क्लीयरेंस के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संस्थान के शुरू होने से मोतियाबिंद, कॉर्निया ट्रांसप्लांट, रेटिना, ग्लूकोमा और बच्चों की आंखों की जटिल बीमारियों का अत्याधुनिक इलाज संभव होगा। 11 साल तक बार-बार टलता रहा उद्घाटन, अब मिलेगा लाभ झारखंड के नेत्र रोगियों के लिए यह संस्थान 11 साल तक एक अधूरा सपना बना रहा। इस दौरान 10 से अधिक बार उद्घाटन की संभावित तिथियां तय की गईं, लेकिन हर बार कार्य अधूरा रह गया। मार्च 2020 की पहली डेडलाइन कोविड-19 के कारण टल गई। इसके बाद 2021, 2023 और 2024 में भी समय सीमा में काम पूरा नहीं हो सका। मुख्यमंत्री ने फरवरी 2025 तक निर्माण पूरा करने का निर्देश दिया था, वह भी नहीं हुआ। 2014 में 39.5 करोड़ से शुरू हुआ था निर्माण क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का निर्माण वर्ष 2014 में स्टेडियम के समीप करीब तीन एकड़ भूमि पर शुरू किया गया था। भवन निर्माण विभाग को इसे दो साल में पूरा कर रिम्स को सौंपना था। शुरुआत में इसकी लागत 39.5 करोड़ रुपए आंकी गई थी, लेकिन समय के साथ अनुमान बढ़कर लगभग 85 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। इसके बाद दोबारा डीपीआर तैयार की गई और पुनरीक्षित प्राक्कलन में करीब 45 करोड़ रुपए अतिरिक्त जोड़े गए। आठ मंजिला अत्याधुनिक भवन नेत्र संस्थान की आठ मंजिला इमारत को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। पहली मंजिल पर रिसेप्शन और ओपीडी, दूसरी मंजिल पर निदेशक कक्ष और माइनर ओटी, तीसरी मंजिल पर मेजर ओटी, चौथी और पांचवीं मंजिल पर वार्ड, जबकि ऊपरी मंजिल पर सेमिनार हॉल और लेक्चर थिएटर बनाए गए हैं। संस्थान के शुरू होने से झारखंड ही नहीं, आसपास के राज्यों के नेत्र रोगियों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।वह सब जो आपके लिए जानना जरूरी है... मरीजों को मिलेगा एक छत के नीचे संपूर्ण इलाज क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के शुरू होने के बाद रेटिना, डायबिटिक रेटिनोपैथी और बाल नेत्र रोगों का इलाज एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगा। यहां आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे और पुराने, अनुपयोगी उपकरण हटाए जाएंगे। रिम्स आई बैंक के अनुसार, फिलहाल हो रहे कॉर्निया ट्रांसप्लांट की संख्या संस्थान शुरू होने के बाद दोगुनी तक बढ़ सकती है।
किसान को 1 किलो टमाटर के मिले 14 रुपए, बिक्री 40 तक
मौसम सर्दी का है, इसलिए इन दिनों टमाटर की मांग ज्यादा है। चूंकि लोकल टमाटर की आवक कम है, इसलिए दूसरे शहर, प्रदेश से सप्लाई हो रही है। बात यदि टमाटर पैदा करने वाले किसानों को मिलने वाले और ग्राहक के भाव की करें तो इसमें जमीन आसमान का अंतर है। आरोन के किसान अनिल चौहान ने लगभग 300 किलो टमाटर थोक मंडी भेजा। उन्होंने कहा कि भाव मिला 25 किलो की क्रेट का 350 रुपए। मतलब एक किलो के 14 रुपए। वहीं सब्जी विक्रेता कप्तान सिंह ने कहा कि भाव कुछ दिन से 40 रुपए चल रहे हैं। सब्जी विक्रेता फूल सिंह ने कहा कि गांव से शहर टमाटर आने पर ट्रांसपोर्ट खर्च, थोक खरीदार-विक्रेता का कमीशन 6-7 रुपए किलो तक बढ़ जाता है। इसके बाद खैरिज और फुटकर बिक्री के भाव में अधिक अंतर रहता है।
पीजी एग्जाम... शेड्यूल जारी, पर अब तक नहीं हुई मिड टर्म परीक्षा
रांची विश्वविद्यालय ने स्नातकोत्तर (पीजी) सेकेंड सेमेस्टर (सेशन 2024–26) की परीक्षा फॉर्म भरने का शेड्यूल जारी कर दिया है। लेकिन नियम के मुताबिक छात्र जब तक मिड सेमेस्टर के अंक पोर्टल पर अपलोड नहीं होते, तब तक स्टूडेंट्स एग्जाम फॉर्म जमा नहीं कर सकते। लेकिन अधिकतर पीजी विभागों और कॉलेजों में पीजी सेकेंड सेमेस्टर की मिड परीक्षा अभी तक आयोजित नहीं हुई है। परीक्षा आयोजित करने को लेकर तैयारी चल रही है। जिन छात्रों की अभी तक मिड परीक्षा नहीं हुई है, वे चाहकर भी एग्जाम फॉर्म जमा नहीं कर सकते हैं। शेड्यूल के अनुसार, शुक्रवार से स्टूडेंट्स एग्जाम फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लगभग 10 हजार छात्रों की अभी तक मिड सेमेस्टर की परीक्षा नहीं हुई है। जूलॉजी, कॉमर्स समेत कुछ अन्य विषयों की मिड परीक्षा आयोजित हुई है। तीन विभागों की स्थिति से समझें मिड सेमेस्टर का महत्व 1. साइकोलॉजी विभाग : विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज हसन ने कहा- दो दिनों में मिड सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित करा ली जाएगी। साथ ही मूल्यांकन कर अंक पोर्टल पर अपलोड कर दिए जाएंगे। मिड सेमेस्टर एग्जाम के लिए प्रोसेस शुरू कर दिया गया है। 26 के बाद फॉर्म जमा पर लगेगा लेट फाइन पीजी सेकेंड सेमेस्टर का एग्जाम फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 26 जनवरी है। इसके बाद 27 से 31 जनवरी तक 400 रुपए विलंब शुल्क के साथ एग्जाम फॉर्म जमा लिए जाएंगे। छात्रों ने कहा कि 26 जनवरी तक मिड सेमेस्टर की परीक्षा का अंक अपलोड नहीं किया गया तो विलंब शुल्क लगना तय है। अगर 31 जनवरी तक अंक अपलोड नहीं हुआ तो एग्जाम फॉर्म भरने से वंचित हो सकते हैं। 3. अंग्रेजी विभाग : इस विभाग में मिड सेमेस्टर की परीक्षा शुक्रवार से शुरू हो गई है। विभाग ने बताया कि शनिवार को भी परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर अंक अपलोड कर दिए जाएंगे। 2. सोशियोलॉजी विभाग : विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण ने बताया मिड सेमेस्टर परीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसकी तैयारी विभागीय स्तर पर चल रही है। शीघ्र ही परीक्षा आयोजित कर दी जाएगी और मूल्यांकन कर अंक अपलोड कर दिए जाएंगे। आरयू में एग्जाम फॉर्म जमा करने के नियम स्पष्ट हैं। कॉलेज या पीजी विभाग द्वारा मिड सेमेस्टर परीक्षा, उसके मूल्यांकन और अंक अपलोड होना अनिवार्य है। इसके बाद ही सेमेस्टर परीक्षा फॉर्म जमा किया जा सकता है। इसलिए इस बार फॉर्म भरने का शेड्यूल जारी होने के बाद छात्रों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। दूसरी ओर शेड्यूल जारी होने के बाद एग्जाम लेने की तैयारी शुरू हो गई है। एग्जाम फॉर्म जमा करने का क्या है नियम आरयू : पीजी सेकेंड सेमेस्टर... मिड एग्जाम के अंक आने पर ही भर सकते हैं फॉर्म
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर इंदौर आएंगे। वे यहां दूषित जलकांड से प्रभावित इलाकों में जाएंगे। पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे। राहुल गांधी 5 माह के अव्यान के घर जाएंगे। क्षेत्र की संकरी गलियों के कारण काफिला घर तक नहीं जा सकेगा, इसलिए गली के कोने से पैदल चलकर पीड़ित परिवार तक पहुंचेंगे। वे अशोक पंवार और गीता बाई धुपेकर के घर भी जाएंगे। इसके बाद वे प्रभावित परिवारों से भी संस्कार गार्डन में मुलाकात करेंगे। हालांकि, शुक्रवार रात को एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों की एक अहम बैठक हुई है। जिसमें सुरक्षा कारणों के चलते राहुल गांधी के भागीरथपुरा में जाने के लिए मनाही की गई है। तय किया गया है कि राहुल भागीरथपुरा पानी की टंकी के पास ही मृतकों के परिजन और पीड़ितों से मिलेंगे। मुलाकात का समय दोपहर 12.45 से दोपहर 1.45 तक रहेगा। इसके बाद यही राहुल मीडिया से बात करेंगे। इससे पहले 11 बजे एयरपोर्ट पर ही प्रदेश कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन भी होगा। यहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित कई बड़े नेता भी साथ में होंगे। शुक्रवार को प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले बता चुके हैं कि प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण बैठक को रद्द करना पड़ा है। रात में सुरक्षा एजेंसियों ने रूट का लिया जायजाराहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले शुक्रवार रात में सुरक्षा एजेंसियों ने उनके दौरे के रूट को देखा। सुरक्षा एजेंसियाें 5 माह के मृतक अव्यान साहू, गीता बाई, और अशोक पंवार के घर के रूट का जायजा लिया है। एक पीड़ित परिवार का घर मिला बंदइधर, शुक्रवार रात को सामने आया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी जिन पीड़ित परिवारों से मिलने वाले थे, उनमें से एक परिवार के घर पर ताला लगा है। परिवार गायब है। कांग्रेस की ओर से पहले ही यह व्यवस्था की गई थी कि प्रत्येक इलाके में हर चार-पांच घरों के लिए एक प्रभारी नियुक्त किया जाए, ताकि राहुल गांधी पीड़ितों से सीधे संवाद कर सकें। इसी क्रम में राहुल गांधी को 4 या 5 घरों में जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बाकी पीड़ित परिवारों से मुलाकात की तैयारी पूरी है और घटना की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जा रही है। कांग्रेस विधायक दल सौंपेगा अपनी रिपोर्टप्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राजेश चौकसे ने बताया प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा गठित जांच कमेटी के सज्जन सिंह वर्मा, प्रताप ग्रेवाल, महेश परमार अपनी रिपोर्ट देंगे। रिपोर्ट को लेकर कहा जा रहा है कि इसमें आरोप लगाया गया है कि रहवासियों को इंदौर नगर निगम ने दूषित जल सप्लाई किया है। इसी से ये हालात बने। इसमें तमाम तरह की तकनीकी डिटेल्स भी दी गई है। 17 से 31 जनवरी तक कांग्रेस का आंदोलनप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 17 से 31 जनवरी तक आंदोलन की घोषणा की है। यह आंदोलन मनरेगा में बदलाव कर कानूनी अधिकारों की बहाली, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतें और प्रदेश में बिगड़ती जल गुणवत्ता के विरोध में किया जाएगा। शहरी जिला कांग्रेस कमेटियां भागीरथपुरा की घटना और जल गुणवत्ता के मुद्दे पर जिला स्तर पर एक दिवसीय उपवास रखेंगी। यह उपवास सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा। ग्रामीण जिलों में भी मनरेगा और जल गुणवत्ता को लेकर उपवास आयोजित किए जाएंगे। दूसरा चरण 18 से 31 जनवरी तक चलेगा, जिसमें जनजागरूकता अभियान, जल गुणवत्ता से जुड़े तथ्य और साक्ष्य जुटाने, दूषित जल स्रोतों, सीवेज लाइनों और औद्योगिक अपशिष्ट क्षेत्रों के आसपास पानी की जांच जैसे कार्यक्रम किए जाएंगे। प्रत्येक मृतक के परिवार को एक करोड़ मुआवजा देने की मांगदूषित पेयजल से हुई 24 मौतों के मामले में प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने विस्तृत जांच कर रिपोर्ट राहुल गांधी को भेजी है। औपचारिक रूप से शनिवार को भी यह रिपोर्ट उन्हें दी जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जनवरी 2026 को पूर्व सांसद सज्जन सिंह वर्मा, विधायक महेश परमार और विधायक प्रताप ग्रेवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भागीरथपुरा पहुंचा और पीड़ित परिवारों, स्थानीय नागरिकों, सेवानिवृत्त जल विभाग अधिकारियों और मीडिया से बातचीत की। जांच में सामने आया कि क्षेत्र के लोग कई वर्षों से मल-मूत्र युक्त जहरीला पानी पीने को मजबूर थे, जिसके चलते सैकड़ों लोग बीमार पड़े और 23 से अधिक लोगों की असमय मौत हो गई। रिपोर्ट में बताया गया कि पुलिस चौकी के पास बने सार्वजनिक शौचालय के सेप्टिक टैंक की व्यवस्था नहीं होने से मानव अपशिष्ट जमीन में रिसता रहा और पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण पूरा जल नेटवर्क दूषित हो गया। यें गड़बड़िया भी गिनाईं ये खबर भी पढ़ें.. 1. इंदौर में राहुल गांधी की मीटिंग को नहीं मिली मंजूरी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण अब तक 24 लोगों की मौत के बाद हालात का जायजा लेने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार 17 जनवरी को इंदौर आ रहे हैं। हालांकि, इस दौरान इंदौर में कांग्रेस नेताओं और नगरीय जनप्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित बैठक को प्रशासन से अनुमति नहीं मिल पाई है। पढ़ें पूरी खबर... 2. इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी से 24वीं मौत इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के मामले में गुरुवार को एक और मौत हो गई। जिससे मृतकों की संख्या अब 24 हो गई है। भागीरथपुरा में रहने वाली सुभद्राबाई पति बसंतराव पंवार (78) की एक प्राइवेट हॉस्पिटल में सुबह मौत हो गई। बेटे मनीष ने बताया कि 26 दिसंबर को दूषित पानी पीने के बाद मां की हालत बिगड़ी थी। उन्हें काफी उल्टी-दस्त हुए थे। पढ़ें पूरी खबर...
कारोबारी अमित अग्रवाल को 02 से 18 फरवरी तक बांग्लादेश यात्रा की अनुमति
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी कोलकाता के कारोबारी अमित कुमार अग्रवाल को पीएमएलए कोर्ट से आंशिक राहत मिली है। अदालत ने व्यवसायिक उद्देश्य से उसे 02 से 18 फरवरी तक बांग्लादेश यात्रा की अनुमति दे दी है। लेकिन पासपोर्ट को 10 वर्षों के लिए नवीनीकरण कराने की मांग को खारिज कर दिया। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा और पासपोर्ट रखने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। लेकिन आरोपी पर लगे गंभीर आरोपों को देखते हुए उसे हर विदेशी यात्रा के लिए अदालत से अनुमति लेनी होगी। ईडी ने यात्रा की अनुमति का कड़ा विरोध करते हुए आशंका जताई थी कि आरोपी विदेश जाकर फरार हो सकता है और कथित तौर पर अपराध से जुड़ी कंपनी के व्यवसाय को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि कोर्ट ने माना कि प्रस्तावित यात्रा व्यवसायिक है और इससे ट्रायल पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी की जमानत की सभी शर्तें यथावत रहेंगी और यात्रा के बाद पासपोर्ट पुनः कोर्ट में जमा करना अनिवार्य होगा। वहीं, कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में लंबी अवधि के लिए पासपोर्ट नवीनीकरण का अलग निर्देश नहीं दिया जा सकता।
बेखौफ अवैध खनन:रक्कस पहाड़ी खोदने वालों को पकड़ा नहीं, सिर्फ मशीन-गाड़ी जब्त कर लाए
अवैध खनन-परिवहन करने वाले माफिया के हौंसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने अधिकारियों के गठजोड़ कर मोतीझील रक्कस पहाड़ी को एक तरफ से खोद डाला है। इस मामले में कई बार शिकायतें होने के बाद अंतत: शुक्रवार को खनिज विभाग की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर छापामार कार्रवाई की। जिसमें पहाड़ी खोदती 2 एलएंडटी, 5 ट्रेक्टर-ट्रॉली और एक मिनी लोडिंग ट्रक जब्त किया, लेकिन हर बार की तरह इस टीम के हाथ अवैध खनन करने और कराने वाले माफिया नहीं आए। यह पहाड़ी मोतीझील-गोल पहाड़िया बायपास के एंट्री प्वाइंट से 150 मीटर की दूरी पर है। यहां पुलिस का चेकिंग प्वाइंट है, लेकिन माफिया 2 वर्ष से पहाड़ खोदकर मुरम सप्लाई कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार यहां प्लॉटिंग कर रहे भाजपा नेता रघुवीर राय द्वारा अवैध खनन की जानकारी अफसरों को मिली है। लेकिन उनका नाम आने के बाद कार्रवाई को अज्ञात की दिशा में मोड़ दिया गया है। पेड़ उखाड़े, पहाड़ी खोदकर समतल कियामोतीझील बायपास से 150 मीटर अंदर रक्कस पहाड़ी का एक मुख्य सिरा है। जिसमें अकबरपुर गुजपता से सटे शंकरपुर के शासकीय सर्वे क्रमांक 1005 में मौजूद पहाड़ को माफिया ने पोकलेन व जेसीबी मशीन से खोदकर समतल कर दिया है। 2 वर्ष से यहां अवैध खनन में सैकड़ों पेड़ काट दिए गए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस पहाड़ को कई दशक से खोदकर समतलकर कई अवैध मकान पहाड़ की जमीन पर बन चुके हैं। जबकि, इस पहाड़ पर शहर को पानी सप्लाई करने वाली रक्कस टंकी मौजूद है और इस तरह के खनन से इस टंकी पर भी खतरा मंडराया हुआ है। 10 बार शिकायतें, अब कार्रवाई में दोषी छोड़ेमोतीझील निवासी मधु राय इस मामले को लेकर 16 जनवरी 2023 से 5 जनवरी 2026 तक 10 बार शिकायतें कर चुकी हैं। मधु ने बताया कि अकबरपुर गुजपता 15 बीघा 19 बिस्वा भूमि के 1/3 भाग रकवे पर मेरा नाम राजस्व में दर्ज है। जिस पर हरे-भरे वृक्ष थे। इनको रघुवीर राय (भाजपा नेता), सतीश राय, बाबू लाल, साधुराम, रामकृपाल, विष्णु, कल्बे राय जबरन मशीनों से पेड़ों को उखाड़कर मुरम का अवैध खनन कर रहे हैं। इस भूमि पर के क्रय विक्रय पर 5 दिसंबर 2024 को रोक लगाई है। मशीन-वाहन पकड़े, इनके जरिए माफिया तक पहुंचेेंगेमोतीझील पहाड़ी के एक हिस्से में कार्रवाई करते हुए 2 एलएंडटी मशीनें, 5 ट्रेक्टर-ट्रॉली व एक मिनी लोडर पकड़ा है। इनके जरिए पहाड़ से मुरम खोदी जा रही थी। मौके पर खनन करने या कराने वाले नहीं मिले, अब जो मशीनरी-गाड़ियां छुड़ाने आएंगे। उनके जरिए लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। - घनश्याम यादव, प्रभारी खनिज अधिकारी
किसान आत्महत्या केस में आरोपियों को हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऊधम सिंह नगर जिले के बहुचर्चित किसान आत्महत्या मामले में आरोपियों को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी
सोनीपत में सफाई एजेंसी ने बड़ा कारनामा कर दिखाया है। जहां एक शख्स ने खरखौदा नगर पालिका क्षेत्र के इलाके में गंदगी के फोटो ई-समाधान पोर्टल डालकर शिकायत दर्ज करवाई। जहां आधुनिक तकनीक AI का प्रयोग करके पोर्टल से फोटो डाउनलोड किया गया और उसको एआई से एडिट कर गंदगी को साफ कर दिया। खरखौदा नगर पालिका क्षेत्र में सरकार द्वारा अलॉट की गई सफाई एजेंसी पर गंभीर आरोप लगे हैं। यहां ई-समाधान पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के समाधान में एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल कर कागजों में सफाई दिखाने का मामला सामने आया है। डिजिटल व्यवस्था को पारदर्शी और जनता के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से सरकार जहां एआई आधारित प्रणालियों और ऑनलाइन शिकायत पोर्टलों को बढ़ावा दे रही है, वहीं जमीनी स्तर पर कुछ एजेंसियां इन्हीं तकनीकों का दुरुपयोग कर अपनी लापरवाही छिपाने में जुटी हैं। शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाए गए ई-समाधान पोर्टल पर सामने आए एक मामले ने न केवल सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि सरकारी निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ई-समाधान पोर्टल से जुड़ी जनता की उम्मीदेंई-समाधान पोर्टल के माध्यम से सरकार ने नागरिकों को यह सुविधा दी है कि वे अपने इलाके में गंदगी, स्ट्रीट लाइट खराब होने या अन्य समस्याओं की फोटो अपलोड कर सीधे शिकायत दर्ज कर सकें। शिकायत के बाद संबंधित विभाग या एजेंसी द्वारा मौके पर कार्रवाई कर समाधान की फोटो अपलोड की जाती है।दिल्ली रोड का मामला, 23 दिसंबर की शिकायतखरखौदा नगर पालिका क्षेत्र के दिल्ली रोड पर 23 दिसंबर को एक व्यक्ति ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठान योजना के तहत तसलों में भरी गंदगी की फोटो ई-समाधान पोर्टल पर अपलोड कर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कूड़ा उठवाने की मांग की गई थी। मौके पर सफाई नहीं, पोर्टल पर समाधानशिकायतकर्ता उस समय हैरान रह गया, जब कुछ समय बाद पोर्टल पर समस्या का समाधान दर्शाते हुए कूड़ा उठाने के बाद की फोटो अपलोड कर दी गई, जबकि हकीकत में न तो कोई सफाई कर्मचारी मौके पर आया और न ही कूड़ा उठाया गया।AI से फोटो एडिट कर दिखाई सफाईजांच करने पर सामने आया कि सफाई एजेंसी संत इंद्रमणि के सुपरवाइजर ने शिकायतकर्ता द्वारा अपलोड की गई फोटो को डाउनलोड कर एआई की मदद से केवल कूड़े को इरेज कर दिया और उसी फोटो को दोबारा पोर्टल पर अपलोड कर समाधान दिखा दिया। फोटो में तसले खाली नजर आ रहे थे, जबकि वास्तविकता में वे कूड़े से भरे हुए थे। इस पूरे मामले ने न केवल सफाई एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि बिना भौतिक सत्यापन के शिकायतों को निपटाया जा रहा है। यदि ऐसे ही एआई का दुरुपयोग होता रहा, तो डिजिटल शिकायत प्रणालियों पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।कार्रवाई की उठी मांगस्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित सुपरवाइजर और एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में तकनीक का उपयोग जनता को राहत देने के लिए हो, न कि कामचोरी छिपाने के लिए।
रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को देखते हुए बाड़मेर-हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेन का महेंद्रगढ़ स्टेशन पर ठहराव शुरू करने का निर्णय लिया है। वहीं दूसरी ओर, बीकानेर-मेड़ता रोड रेलखंड पर तकनीकी कार्य के चलते 18 जनवरी से 4 फरवरी तक रेल यातायात प्रभावित रहेगा। उत्तर पश्चिम रेलवे ने महेंद्रगढ़ क्षेत्र के यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी का तोहफा दिया है, जबकि खजवाना और मारवाड़ मुंडवा स्टेशनों के बीच लिए जा रहे ब्लॉक के कारण कुछ ट्रेनों को रेगुलेट और रीशड्यूल किया गया है। महेंद्रगढ़ में 2 मिनट रुकेगी बाड़मेर-हावड़ा एक्सप्रेस जोधपुर मंडल के अधिकारियों के अनुसार, बाड़मेर-हावड़ा-बाड़मेर द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट ट्रेन (12323/12324) को महेंद्रगढ़ स्टेशन पर प्रायोगिक आधार पर ठहराव दिया गया है। यह व्यवस्था आगामी आदेशों तक जारी रहेगी। ब्लॉक के कारण ये ट्रेनें रहेंगी प्रभावित उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण ने बताया कि बीकानेर-मेड़ता रोड रेलखंड के खजवाना-मारवाड़ मुंडवा स्टेशनों के बीच 18 जनवरी से 4 फरवरी तक तकनीकी कार्य किया जाएगा। इसका असर निम्न रेल सेवाओं पर पड़ेगा:
नमस्कार, कल की बड़ी खबर महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव से जुड़ी रही। मुंबई में पहली बार बीजेपी का मेयर बन सकता है। वहीं, दूसरी बड़ी खबर UP के सीएम योगी की नई शेर वाली कुर्सी को लेकर है। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... कल की बड़ी खबरें... 1. महाराष्ट्र नगर निगम रिजल्ट: 29 में 23 निगमों में बीजेपी+ आगे, मोदी बोले- थैंक्यू महाराष्ट्र महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में भाजपा गठबंधन एकतरफा जीत की ओर है। 29 नगर निगमों में से 23 में भाजपा गठबंधन को बढ़त है। मुंबई के BMC में भाजपा+शिवसेना (शिंदे) अलायंस कुल 227 सीटों में से 116 सीटों पर आगे चल रहा है। इसके अलावा नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी चिंचवाड और नासिक में भी भाजपा गठबंधन को बढ़त है। लातूर में कांग्रेस ने जीत हासिल की है। 70 में से 43 सीटें जीतीं। राउत बोले- आंकड़े गलत हैं: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा- मुंबई में जिस तरह गिनती जारी है, उसे देखते हुए फाइनल नतीजे आधी रात तक नहीं आएंगे। जारी आंकड़े गलत हैं। वहीं, PM मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'थैंक्यू महाराष्ट्र, विकास का विजन लोगों को पसंद आया।' 15 जनवरी को वोटिंग हुई थी: 893 वार्डों में कुल 15,931 उम्मीदवार मैदान में थे। नगर निगम की कुल 2869 सीटें हैं। इनमें से 68 उम्मीदवार निर्विरोध जीते थे। पढ़ें पूरी खबर... 2. BJP को 20 जनवरी को नया अध्यक्ष मिलेगा, चुनाव नोटिफिकेशन जारी भाजपा को 20 जनवरी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा। पार्टी ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया। 19 जनवरी को नामांकन भरा जाएगा और अगले दिन नए पार्टी अध्यक्ष का ऐलान होगा। अभी नितिन नबीन पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। पार्टी उन्हें ही निर्विरोध अध्यक्ष चुन सकती है। नितिन नबीन का चुना जाना लगभग तय: न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि नितिन नबीन 19 जनवरी को नामांकन भरेंगे। उनका अगला भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लगभग तय है। उन्हें 14 दिसंबर 2025 को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया गया था। इससे पहले जेपी नड्डा पार्टी के राष्ट्रीय थे। पढ़ें पूरी खबर... 3. यूपी के CM योगी अब शेरों वाली कुर्सी पर बैठेंगे, केदारनाथ से लाई गई भगवा गद्दी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अब शेरों वाली कुर्सी पर बैठेंगे। कुर्सी बेहद खास है। केदारनाथ प्रोजेक्ट में बची देवदार की लकड़ियों से कुर्सी बनाई गई है। इसमें उत्तराखंड के मंदिरों में बनी नक्काशी की झलक है। इससे सुगंधित खुशबू भी निकलती है। मतलब- जहां रखी जाएगी, वहां महकेगी। कुर्सी उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री (कर्नल रिटायर्ड) अजय कोठियाल ने भेंट की है। इसे 15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन गोरखपुर जाकर योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया। योगी को पसंद आई कुर्सी: योगी आदित्यनाथ सीएम होने के साथ गोरखपुर में स्थित गोरक्षनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर हैं। कुर्सी बतौर गोरक्षनाथ पीठाधीश्वर सौंपी गई है। सीएम को कुर्सी काफी पसंद आई। उन्होंने इसे गोरखनाथ मंदिर के मुख्य सभागार में स्थापित भी करवा दिया है। पढ़ें पूरी खबर... 4. जबरिया रिटायर्ड IPS को देवरिया जेल में मारने की धमकी:बैरक के बाहर पत्थर के नीचे दबा लेटर मिला यूपी के जबरिया रिटायर्ड IPS अफसर अमिताभ ठाकुर को देवरिया जेल में शुक्रवार को जान से मारने की धमकी मिली है। उन्हें बैरक के बाहर एक पत्थर के नीचे दबा लेटर मिला, जो कंप्यूटर से टाइप किया गया था। उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी जेल प्रशासन को दी। जेल अधीक्षक ने डीएम-एसपी को जानकारी देते हुए जांच शुरू कराई है। हालांकि जेल अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। अमिताभ ठाकुर धोखाधड़ी के मामले में 10 दिसंबर से जेल में बंद हैं। वे बीते दो दिनों से जेल में भूख हड़ताल पर हैं। पढ़ें पूरी खबर... 5. कांग्रेस का आरोप- भारत ने चाबहार पोर्ट से कंट्रोल छोड़ा, ट्रम्प के दबाव में ₹1100 करोड़ बर्बाद किए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि PM मोदी ने ट्रम्प के दबाव पर ईरान के चाबहार पोर्ट से कंट्रोल छोड़ दिया है। पार्टी ने एक्स पर लिखा- मोदी सरकार ने चाबहार प्रोजेक्ट में देश के 120 मिलियन डॉलर (करीब 1100 करोड़ रुपए) लगाए थे। अब ये बर्बाद हो चुके हैं। कांग्रेस ने सवाल किया कि आखिर मोदी जी अमेरिका के सामने क्यों झुक रहे हैं? विदेश मंत्रालय का आरोपों से इनकार: भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि ईरान के चाबहार पोर्ट से जुड़ी योजनाएं जारी हैं। इन्हें आगे बढ़ाने के लिए भारत, अमेरिका से बातचीत कर रहा है। भारत के लिए चाबहार पोर्ट खास क्यों है: इसके जरिए वह बिना पाकिस्तान से गुजरे सीधे अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंच पाता है। लेकिन अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं और चेतावनी दी है कि कोई भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा तो उस पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगा दिया जाएगा। हालांकि, अमेरिका ने भारत को ईरान के साथ व्यापार करने की छूट दी थी, लेकिन पिछले साल सितंबर में छूट को खत्म कर दिया। लेकिन भारत की बातचीत के बाद अमेरिका ने सैंक्शन की छूट को 26 अप्रैल 2026 तक आगे बढ़ा दी थी। पढ़ें पूरी खबर... 6. ICC ने जारी की कोहली की गलत रैंकिंग, पहले 825 दिन बताया था, अब कहा- 1547 दिन टॉप पर रहे ICC ने विराट कोहली की वनडे रैंकिंग के आंकड़ों में हुई गलती सुधार दी है। पहले कहा था कि कोहली 825 दिन नंबर-1 रहे, लेकिन अब ICC ने स्पष्ट किया कि वे कुल 1,547 दिनों तक टॉप पर रहे। सही आंकड़ों के साथ विराट अब वनडे रैंकिंग में सबसे ज्यादा दिन तक टॉप पर रहने वाले तीसरे प्लेयर बन गए हैं। उनसे आगे केवल वेस्टइंडीज के सर विवियन रिचर्ड्स (2,306 दिन) और ब्रायन लारा (2,079 दिन) हैं। पढ़ें पूरी खबर... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… खबर हटके... यूपी में कुत्ते की पूजा के लिए जुटे 50 हजार लोग यूपी के बिजनौर में एक कुत्ते की पूजा के लिए 50 हजार लोगों की भीड़ उमड़ी है। लोगों ने बताया कि ये कुत्ता चार दिन से मंदिर में बजरंगबली और मां दुर्गा की प्रतिमा की परिक्रमा कर रहा है। लोगों का मानना है कि कुत्ता भगवान भैरव का रूप है। फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… करेंट अफेयर्स ⏳आज के दिन का इतिहास बाजार का हाल ️ मौसम का मिजाज मकर राशि वालों की कोई बड़ी डील हो सकती है। मीन राशि के लोगों को मार्केटिंग से फायदा मिल सकता है। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
-25C टेम्प्रेचर...चारों ओर बर्फ ही बर्फ थी। हमारे सिवाय वहां कोई दूसरा नजर नहीं आ रहा था। हमने आवाजें लगाईं, गाड़ी का हॉर्न बजाया, बर्तन बजाए, चीखे चिल्लाए भी, लेकिन हमारी बात सुनने वाला वहां कोई नहीं था। 12 जनवरी को दिन का वक्त था, हमारे ऊपर से एक हेलिकॉप्टर निकला। हमने उसे लाल कपड़ा दिखाया, हाथ हिलाया, आवाज भी लगाई लेकिन हेलिकॉप्टर में बैठे लोगों ने हमें नहीं देखा। यह कहना है लेह से लौटे शिवम चौधरी का। गूगल मैप की वजह से रास्ता भटककर बर्फबारी के बीच फंसे आगरा के 4 दोस्तों ने 36 घंटे जिंदगी के लिए जंग लड़ी। इसमें आखिर के 3 घंटे बहुत खौफनाक रहे। वो कहते हैं कि एक पल को लगने लगा था कि अब नहीं बचेंगे। परिवार को याद करके आंखों से आंसू छलक रहे थे। काफी जद्दोजहद के बाद हम जिंदा घर लौट सके। दैनिक भास्कर ने शिवम चौधरी और यश मित्तल से बात की। खौफ में गुजारी 2 रातें और 3 दिन की कहानी जानी। पढ़िए रिपोर्ट… बर्फ में कार फिसली, खाई में 20 फीट नीचे गिरेशिवम के घर पर ही यश भी आ गए थे। उन्होंने बताया- हमारे साथ मधुनगर के रहने वाले जयवीर और सुधांशु भी थे। 9 जनवरी को कार से लेह के लिए निकल गए। 10 जनवरी को हम पंग में ही ठहर गए। 11 को मनाली के लिए निकले। नाकीला के पास बर्फ की वजह से रात करीब 2.30 बजे हमारी कार फिसलने लगी। खाई में 20 फीट नीचे तक गिर गए। हम समझ गए कि मदद नहीं मिल सकेगी, इसलिए बर्फ के बीच ही गाड़ी में हीटर चलाकर रात काटी। दिन निकलने के बाद हमने आसपास देखा, वहां दूर-दूर तक कोई इंसान नहीं था। थोड़ी दूर चलने के बाद हम कार के पास ही लौट आए, क्योंकि सर्दी बहुत ज्यादा थी। वो दिन भी हमने हीटर के सहारे ही गुजारा। शिवम ने बताया- भयंकर सर्दी के बीच 36 घंटे गुजार चुके थे। कार छोड़कर जाने से 3 घंटे पहले हमें लगा अब नहीं बचेंगे। क्योंकि लगातार कार स्टार्ट रहने की वजह से उसका डीजल खत्म हो चुका था। जिस हीटर का हमें सहारा था, वो भी चलना बंद हो गया। खाने को भी कुछ नहीं था। मेरी और सुधांशु फौजदार की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी थी। जय और यश भी ठीक नहीं थे। ठंड की वजह से शरीर अकड़ने लगा था। हमारे फोन भी बंद हो चुके थे। फिर हमने डिसाइड किया कि अब यहां रुकने से बेहतर है कि जिंदगी के लिए जंग लड़ी जाए। क्योंकि अगर यहीं फंसे रहे तो बचना मुश्किल होगा। रास्ता बंद होने की वजह से यहां न कोई आने वाला और न ही हमारी आवाज सुनने वाला। फिर हमने प्लान किया कि पैदल चलने के सिवा हमारे पास कोई चारा ही नहीं है। 20 Km चलते हुए 13 जनवरी की दोपहर करीब 12.30 बजे हमें व्हिस्की नाला के पास बंद फैक्ट्री दिखी। हमने रात वहीं गुजारी। हम अंदर ही थे, जब बाहर हमें कुछ लोगों की आहट सुनाई दी। बाहर देखने पर पता चला कि ये तो पुलिस वाले हैं, वो हमें तलाशते हुए वहां पर पहुंच गए थे। अब लगा जान बच जाएगी। उन्हें देखकर हमारे आंसू निकल आए। लगा...जैसे भगवान ने हमारी मदद को कोई दूत भेजे हैं। हम उनसे लिपट गए और रोने लगे। शिवम ने बताया- जिस बंद फैक्ट्री में हम रुके थे, वह सड़क से थोड़ा अंदर थी। बाहर एक साइन बोर्ड लगा था। हमने इसी पर लिख दिया था 'हेल्प अस'। इसके बाद हम फैक्ट्री में आकर खुद को सर्दी से बचाने का प्रयास करने लगे थे। सुधांशु की तबीयत ज्यादा खराब थी, इसलिए वो सो गया था। सड़क किनारे लगे साइन बोर्ड पर हमारा मैसेज देखकर दोपहर बाद न्यूमा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। जैसे ही हमने जीप की आवाज सुनी मैं, जयवीर और यश बाहर दौड़े। सामने पुलिसकर्मियों को देखकर हमारा दिल भर आया। हमारी आंखों से आंसू छलक आए। परिवार से वीडियो कॉल पर बात हुई, फिर संपर्क टूटाचारों के परिजन उन्हें तलाशते हुए लेह पहुंच गए थे। यश, शिवम और सुधांशु गुरुवार रात को, जबकि जयवीर शुक्रवार शाम को आगरा पहुंचे। उनकी कार लेह में ही है। रास्ता बंद होने के कारण नहीं आ सकी है। शिवम और उनके दोस्तों ने लद्दाख पहुंचने के बाद नया मोबाइल नंबर लिया। फिर परिवार से लगातार कनेक्ट रहे, बातचीत होती रही। 9 जनवरी को सभी लेह के पेंगोंग झील पर थे। वहां से उन्होंने वीडियो कॉल से घर पर बात भी की। इसके बाद से उनका संपर्क टूट गया। घर वालों ने कई बार उसी नंबर पर कांटेक्ट किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। परेशान होकर घर वालों ने 11 जनवरी को सदर थाना में मिसिंग शिकायत दर्ज कराई। सैटेलाइट से मिली गाड़ी की लोकेशनशिवम चौधरी, जयवीर सिंह, यश मित्तल और सुधांशु फौजदार आगरा से गुलमर्ग गए। वहां से सोनमर्ग होते हुए पैंगोंग झील पहुंचे। 9 जनवरी की शाम लगभग 5.30 बजे चारों ने वीडियो कॉल कर अपने परिजन को वहां का नजारा दिखाया। इसके बाद से उनका संपर्क टूट गया। शिवम के पिता दौलतराम कहते हैं- 2 दिन तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर हम सब परेशान हो गए। मैंने लोकल पुलिस के अलावा स्थानीय सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया। उसके बाद रक्षा और गृह मंत्रालय की मदद मांगी गई। सूचना पर सेना भी सक्रिय हो गई। सैटेलाइट से युवकों की गाड़ी की जानकारी मिली। गाड़ी लेह से 125 किलोमीटर दूर मनाली मार्ग के पास पांग में थी। फिर सेना और पुलिस इन युवकों तक पहुंच गई। अब जानिए 9 से 13 जनवरी के बीच क्या-क्या हुआ... 9 जनवरी: शाम 5 बजे चारों युवकों ने अपने परिजनों से बात की। इसके बाद ये लेह के लिए निकल गए। वहां पर खारू के पास इन्हें मनाली का बोर्ड दिखा। ये उस रास्ते पर चलने लगे। 10 जनवरी: पंग में ही रुक गए। 11 जनवरी: मनाली के लिए निकले। वहां आगे रास्ता बंद था। सरचू से आगे निकलकर फिर वापस लौटते। वहां पर नाकीला के पास बर्फ से रात करीब 2.30 बजे गाड़ी फिसल कर 20 फीट नीचे खाई में फंस गई। बर्फ के बीच ही गाड़ी में हीटर चलाकर रात काटी। 12 जनवरी: अगला दिन भी हीटर के सहारे ही गुजरा। गाड़ी का डीजल खत्म होने के बाद एकमात्र सहारा हीटर भी चलना बंद हो गया। फिर पैदल चलने का प्लान बनाया। 13 जनवरी: दोपहर को 12.30 बजे करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर व्हिस्की नाला के पास दिखी बंद फैक्ट्री तक पहुंचे। रातभर उसी में गुजारी। इस बीच लद्दाख पुलिस भी इनको तलाशते हुए वहां पर पहुंच गई। सभी को रेस्क्यू कर वापस लेह लाया गया। --------------------------- ये पढ़ें - सतुआ पीने वाले बाबा के पास 50 करोड़ का आश्रम:भाई का कत्ल; सतीश तिवारी के जगद्गुरु बनने की कहानी पीली पोशाक। चलने के लिए करोड़ों की लैंड रोवर डिफेंडर, पोर्श टर्बो जैसी गाड़ियां। आंखों पर रे-बैन जैसा ब्रांडेड चश्मा। जिसकी तारीफ अक्सर यूपी के सीएम योगी भी करते हैं। हम बात कर रहे हैं बुंदेलखंड के ललितपुर के छोटे से गांव मसौरा से निकले सतीश तिवारी की। सतीश पहली बार दीक्षा लेने के बाद संतोष दास बन गए। ये कोई और नहीं, माघ मेले में सुर्खियां बटोर रहे सतुआ बाबा हैं। पढ़िए पूरी खबर...
40 साल पहले निगम ने जमीन दी, ले रहा था रेंट, वह दुकान भी तोड़ा
रांची नगर निगम की ओर से शुक्रवार को किशोरी यादव चौक से पिस्का मोड़ तक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम ने सड़क के दोनों ओर नाली और सड़क के ऊपर किए गए अतिक्रमण को हटाया। कार्रवाई के दौरान अवैध दुकानों, ठेलों, गुमटियों और अन्य अस्थायी संरचनाओं को हटाकर मार्ग को अतिक्रमण मुक्त किया गया। अभियान के क्रम में किशोरी यादव चौक स्थित लगभग 40 वर्षों से बंदोबस्त की गई जमीन से भी अतिक्रमण हटाया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जुगेश्वर राम ने बताया कि वे बंदोबस्ती के आधार पर वर्षों से अपना व्यापार चला रहे थे और निगम में नियमित रूप से सालाना रेंट भी जमा करते थे। उन्होंने नगर निगम से पुनः स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रशासक ने अपर बाजार व कडरू का किया निरीक्षण, 11,000 रु. का जुर्माना भी लगाया शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में शुक्रवार को नगर निगम प्रशासक ने अपनी टीम के साथ कडरू व अपर बाजार क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान यातायात व्यवस्था, स्वच्छता, अतिक्रमण और अवैध संरचनाओं की स्थिति की समीक्षा की। प्रशासक ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण मुक्त अभियान चलता रहेगा। नियम उल्लंघन करने वालों पर ₹11,000 का जुर्माना भी लगाया गया। उन्होंने कहा कि बेहतर शहर निर्माण के लिए नागरिकों का सहयोग जरूरी है।
हाईकोर्ट ने सरकार से कहा- चार माह में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति की जाए
झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार अब तक बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं कर सकी है। राज्य सरकार ने नियुक्ति के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि चार माह के भीतर बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति की जाए और उसकी जानकारी अदालत को दी जाए। अवमानना याचिका याचिकाकर्ता प्रतीक शर्मा ने दायर की थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अध्यक्ष की नियुक्ति का आदेश दिया था, लेकिन अब तक पालन नहीं हुआ। अदालत का यह आदेश पर्यावरण निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए अहम माना जा रहा है। झिरी से रोजाना कितना कचरा हटाया जा रहा बताए निगम: कोर्टझारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को झिरी से कचरा हटाने के मामले की सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए रांची नगर निगम से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने निगम से पूछा है कि झिरी से रोजाना कितना कचरा हटाया जा रहा है। अब तक कितना कचरा हटाया गया और कब तक पूरा कचरा हटा दिया जाएगा। अदालत ने इसका टैबुलर चार्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 22 जनवरी को करेगी। मालूम हो कि हाईकोर्ट ने समाचार पत्र में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए इस मामले को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था।
एक्सपर्ट - डॉ. अंजलि पाटिल, ट्रैफिक प्लानर एमआईटीएस पुरानी छावनी क्षेत्र के निरावली चौराहे पर बना ‘Y-शेप’ जंक्शन हादसों का हॉट स्पॉट बन गया है। पिछले एक साल में यहां 17 सड़क हादसों में 4 लोगों की मौत हुई जबकि 13 गंभीर हुए। इसका कारण है पुल से उतरते समय भारी वाहन स्पीड कंट्रोल नहीं कर पातेऔर पुरानी छावनी की ओर से आने वाले वाहनों से टकरा जाते हैं। ‘Y-शेप’ जंक्शन हाईवे तो क्या सामान्य सड़कों पर भी खतरनाक माने जाते हैं। हादसे से बचने के लिए यहाँ वाहनों की क्रॉसिंग बंद कर बानमोर की ओर करीब आधा किमी आगे सड़क चौड़ी कर नया चौराहा बनाना चाहिए, ताकि वाहनों को संभलने का स्पेस मिले। दुर्घटना में मौतों का आंकड़ा बढ़ा, हादसे कम हुए जिम्मेदार बोले- हादसे रोकने प्रबंधन किए गए हैंजिले में हादसे व हादसों में मौतों को रोकने के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट पर हादसों को रोकने ट्रैफिक इंजीनियरिंग से प्रबंधन किए गए हैं। सिकरौदा पर भी काम किए जा रहे हैं। निरावली पर हुए हादसों की समीक्षा की जा रही है।-अनु बेनीवाल, एएसपी ट्रैफिक हाइवे के निरावली चौराहा के आसपास 2025 में 17 सड़क हादसों में 4 मौत व 14 गंभीर घायल हुए हैं। इस चौराहा के आसपास स्पीड कम करने के लिए उपाय भी किए गए हैं।-संतोष यादव, टीआई पुरानी छावनी
मेरठ के सुनीता हत्याकांड में पारस-रूबी की लवस्टोरी का सच सामने आया है। सुनीता की हत्या का आरोपी पारस सोम जेल में बंद है। 15 जनवरी को पारस के वकील उसके फूफाजी के साथ जिला जेल में उससे मिलने गए। 1 घंटे तक पारस से अकेले में पूरे घटनाक्रम को 3 पॉइंट के इर्द-गिर्द समझा। पहला- रूबी के साथ प्यार की कहानी शुरू कैसे हुई और क्यों भागने की नौबत आ गई? दूसरा- घर से भाग रहे थे तो सुनीता की मौत कैसे हो गई? तीसरा- अगर रूबी प्यार करती है, तो अब पारस के खिलाफ बयान क्यों दे रही है? जिला जेल से वापस आने के बाद दैनिक भास्कर टीम ने पारस के वकील बलराम सोम से पूरी लवस्टोरी को समझा। पढ़िए रिपोर्ट… जेल के मुलाकाती कमरे की बातचीत पढ़िए... स्कूल में साथ पढ़े, वो 12वीं में थी, मैं 9वीं का स्टूडेंट जिला जेल के मुलाकाती कमरे में वकील को पारस से मिलवाया गया। वकील ने पूछा- तुम रूबी से पहली बार कब मिले? पारस ने याद करते हुए बताया- मैं और रूबी, हम दोनों गांव के जनता इंटर कॉलेज में पढ़ते थे। कॉलेज में ही हमने एकदूसरे को देखा। स्कूल एक होने के कारण हम अक्सर एक दूसरे से टकरा जाते थे। एक बार मैं पानी पीने जा रहा था, सामने से रूबी आ रही थी। वो मुझे देखकर मुस्कुरा दी, तो मैं भी मुस्कुरा दिया। वो 12वीं में पढ़ती थी, मैं 9वीं का स्टूडेंट था। उस वक्त प्यार जैसा कुछ नहीं था। नॉर्मल बातचीत हो जाया करती थी, मैं उसकी पढ़ाई के बारे में पूछ लेता, वो मेरे बारे में बात कर लेती थी। स्कूल छूटा, तब मोबाइल पर बात होने लगी वकील ने पूछा- फिर प्यार कब हुआ? पारस ने कहानी आगे सुनाना शुरू किया- हमारा गांव एक ही था, एक ही स्कूल में पढ़ रहे थे। मेरा घर भी उसके घर से सिर्फ 1km दूर था। इसलिए गांव में आते-जाते भी हमारी मुलाकातें होने लगीं। करीब 3 साल पहले हम गांव की एक शादी में मिले। वहां रूबी भी आई थी। हम दोनों ने एकदूसरे को देखकर स्माइल की। बस उसी दिन से हमारी दोस्ती की नई कहानी शुरू हो गई। हम स्कूल में रोजाना मिलते और बातें करते। हमारी बातों का सिलसिला बढ़ता चला गया, हमें पता ही नहीं चला कि कब हम एकदूसरे को पसंद करने लगे। स्कूल तक हम रोजाना मिलते। काफी वक्त साथ बिताते। लंच भी साथ करते थे। हमारे स्कूल के तमाम बच्चे अक्सर हमें चिढ़ाते भी थे। वो सब जानते थे कि हमारी दोस्ती कुछ अलग टाइप की है। तभी हमने सोच लिया था कि अब जिंदगी भर साथ रहेंगे। रूबी मुझसे उम्र में बड़ी है। 12वीं पास करने के बाद वो ग्रेजुएशन करने कॉलेज में चली गई। स्कूल छूटने के बाद हमें मिलने में दिक्कत होने लगी। लेकिन हम फोन पर बात करते थे। रूबी के पास भी मोबाइल था, कभी वो मुझे कॉल करती, कभी मैं उसको कॉल कर लेता। हमने एक-दूसरे को कई मैसेज भी किए हैं। वो मैसेज भी मैंने सेव किए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर मैं वो मैसेज भी कोर्ट में दिखाऊंगा। हम फोन पर काफी देर तक बातें करते थे। पारस ने कहा- शादी तय होने से परेशान थी रूबी2024 में हमारे अफेयर के बारे में परिवारों को पता चल गया। उन्हें क्या… पूरे गांव को ही पता चल गया था। फिर हमारे परिवारों के बीच झगड़ा हुआ। रूबी के परिवार ने मेरे लिए कहा कि मैंने उनकी लड़की को बरगलाया है। मेरे परिवार वाले नाराज थे, उन्होंने मेरा मोबाइल छीन लिया। हमारा मिलना-जुलना भी मुश्किल हो गया। तब मैं अक्सर अपनी मम्मी के फोन से ही रूबी से बात करता था। कई बार दोस्तों के फोन से भी बात हो जाती थी। लेकिन तब रूबी ही मुझे कॉल करती थी। फिर एक दिन मुझे पता चला कि रूबी के घरवालों ने उसकी शादी तय कर दी थी, वो फोन पर बात करते हुए बहुत परेशान थी। वो कहती थी कि केवल मुझसे शादी करेगी और किसी दूसरे से शादी नहीं करना चाहती है। रूबी ने घरवालों से कहा- कहीं और शादी नहीं करूंगीमुझे अपने दोस्तों से पता चला कि रूबी ने अपने मम्मी-पापा से कह दिया था कि वो मेरे अलावा और किसी से शादी नहीं करेगी। उसके घरवाले इस बात से काफी नाराज भी हुए थे। वो कहते थे कि जहां हम कहेंगे, तुम्हें वहीं शादी करना पड़ेगी। रूबी ने कहा कि अगर जबरन शादी कराई तो मैं घर से भाग जाऊंगी। उसने मुझसे फोन पर बात कहते हुए कहा था कि मेरी फैमिली तुम्हारे साथ मेरी शादी नहीं करवाएगी, हमें घर से भागना ही होगा। मुझे अक्सर लव लेटर भी भेजती थीरूबी ने मुझे कई लेटर भी लिखे हैं। जब मोबाइल पर बात नहीं कर पाते थे तो रूबी गांव की दो सहेलियों की मदद से मुझे लेटर लिखकर भेजती थी। वो दोनों लड़कियां मुझे भी जानती थीं। इस तरह से लेटर के जरिए भी हम बात करने लगे थे। उसी लेटर के जरिए हम कभी-कभी मिल लेते थे। रूबी से आज भी शादी करना चाहता हूंवकील बलराम ने हमें बताया- जेल पहुंचने के बाद पारस अपनी कहानी के बीच-बीच में रूबी के बारे में भी पूछता रहता था। उसको हमने बताया कि रूबी की तबीयत ठीक नहीं थी। तब उसने कहा कि क्या मेरी रूबी से बात करवा सकते हैं। तब हम लोगों ने उसको बताया कि बात नहीं करवाई जा सकती है। उसने वकील से कहा- मैं आज भी रूबी से शादी करना चाहता हूं। हो सके तो रूबी से ही मेरी शादी करा दीजिए। क्योंकि जब हम घर वापस आ रहे थे तो रूबी ने कहा था कि मेरे घरवाले अब तुम्हें नहीं छोड़ेंगे। मुझे बंधक बनाकर घर में रख लिया जाएगा, बाद में जबरन शादी भी करा दी जाएगी। पारस के वकील बलराम सोम को पारस ने बताया- मैंने रूबी और अपनी बातचीत के काफी सारे रिकार्ड्स रखे हैं। वो मैसेज, चैट्स को सेव किया है। जो हमारा सच कोर्ट के सामने खोलकर रख देगा। उसने ये भी कहा कि उसके पास अपने और रूबी के कुछ फोटो भी हैं, जिसमें हम साथ हैं। पंचायत में समझौते के बाद छिन गया पारस का मोबाइलवकील का कहना ये भी है कि पिछले 3 महीने से पारस के पास मोबाइल नहीं था। 2024 में पारस-रूबी के परिवार के बीच जो विवाद हुआ था। उसके समझौते के कुछ दिन बाद पारस के घरवालों ने बेटे से मोबाइल फोन छीन लिया था। पारस पर कोई फोन न होने के कारण उसकी रूबी से बातचीत नहीं हो पा रही थी। तब पारस अपनी मम्मी के फोन से छिपकर रूबी से बात करता था। रूबी भी पारस को कॉल करती थी। जिसकी डिटेल भी वो अपने मुकदमे में शामिल करेंगे। हत्या वाले दिन क्या हुआ पारस ने कहा- मैंने उसकी मां को नहीं मारा वकील ने जब पारस से पूछा कि हत्या वाले दिन क्या हुआ था? तब पारस ज्यादा कुछ नहीं बोल पाया। उसने सिर्फ यही कहा कि मैंने हत्या नहीं की है… मैं निर्दोष हूं। उसने ये भी बताया कि मैंने रूबी को किडनैप नहीं किया है। रूबी खुद अपनी मर्जी से मेरे साथ आई थी। भागने की प्लानिंग भी रूबी ने की थी, मैंने तो ये सोचा था कहां जाएंगे, क्या करेंगे। इतना कुछ हो जाएगा, ये नहीं सोचा था। रूबी ने ही कहा था कि मेरे घरवाले कहीं और मेरी शादी करा रहे हैं, जो मुझे नहीं करनी है, इसलिए घर से भाग चलते हैं। पारस ने बताया- कपसाड़ से भागने के बाद हम रजवाहे (छोटी नहर) में कूद गए थे। इसमें मेरा जूता पानी में बह गया। मैं नंगे पैर हो गया। तब रूबी ने मुझे अपने जूते उतारकर दिए। बोली- तुम ये पहन लो। वो नंगे पांव ही मेरे साथ चलती रही। फिर आगे चलकर हमने एक ट्रक वाले से लिफ्ट ली थी। उस ट्रक में बैठकर हम सहारनपुर पहुंचे थे। उस ट्रक वाले ने एक चप्पल दी, जो रूबी ने पहन ली थी। जब रूबी और मैं पकड़े गए, तब भी पारस के पांव में रूबी के ही जूते थे। मेरठ से भागने के बाद हम ज्यादा कहीं नहीं रुके बस, ट्रेन में सफर करते हुए यहां वहां घूमते रहे, ताकि पुलिस ट्रेस न कर सके। पारस ने कहा- मुझे समझ नहीं आ रहा, वो झूठ क्यों बोल रहीवकील ने कहा कि पारस अभी बहुत कुछ बताने की हालत में नहीं है। वो तनाव में है, दुखी भी है। वो बार-बार यही कह रहा था कि रूबी झूठ नहीं बोल सकती। हम दोनों आपस में बहुत प्यार करते हैं। 3 साल का हमारा रिश्ता है। हम एकदूसरे के साथ रहना चाहते हैं। हत्या, मर्डर वेपन के बारे में पारस ज्यादा कुछ बता नहीं पा रहा। अभी पारस भी घबराया हुआ और परेशान है। अब धीरे-धीरे उसके घरवालों से उसकी मुलाकात कराएंगे। जब वो नॉर्मल हो जाएगा तब उससे और सारी जानकारियां मिलेंगी और रूबी-पारस की बातचीत, रिश्ते से जुड़े सबूत भी मिलेंगे। …… ये भी पढ़ें - यूपी में जीजा-साली हाथ पकड़कर ट्रेन के आगे कूदे:चीथड़े उड़े, तिल-कपड़ों से पहचान; 2 साल से चल रहा था अफेयर हरदोई में जीजा-साली ने सुसाइड कर लिया। दोनों हाथ पकड़कर ट्रेन के आगे खड़े हो गए। ऊपर से ट्रेन गुजर गई। हादसा इतना भयावह था कि शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए। अंग ट्रैक में फंस गए और मांस के लोथड़े आसपास बिखर गए। हादसे के कारण हावड़ा–काठगोदाम बाघ एक्सप्रेस को 45 मिनट तक रोकना पड़ा। पुलिस शवों को पॉलिथीन में भरकर ले गई। लापता लोगों की सूची से मिलान किया गया। पढ़िए पूरी खबर...
मौसम केन्द्र जयपुर के अनुसार शनिवार से पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने से तापमान में बढ़ोतरी होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम के जिलों में हल्के बादल छा सकते हैं। जिससे न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होगी। वहीं, 22 और 23 जनवरी को हल्की बूंदाबांदी की भी संभावना है। शुक्रवार को प्रदेश के 10 शहरों का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हुआ। हनुमानगढ़, अलवर के ग्रामीण इलाकों और आसपास के एरिया में पाला पड़ने से ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गईं। सीकर में तापमान 3 डिग्री के करीब करौली, अलवर, सीकर, फतेहपुर के एरिया में शुक्रवार सुबह तेज सर्दी रही। पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा ठंडा एरिया अलवर और फतेहपुर रहा, जहां का न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। बीकानेर, चूरू, सीकर, अलवर, जयपुर, झुंझुनूं, गंगानगर, नागौर के एरिया में कोल्ड-वेव का असर रहा। दिन में धूप से राहत, तापमान औसत से ऊपर दिन में निकली धूप से लोगों को राहत रही। प्रदेश के सभी शहरों का अधिकतम तापमान 21 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हुआ। सबसे अधिक अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री सेल्सियस जोधपुर और बाड़मेर जिले में दर्ज हुआ। प्रदेश में धूप निकलने और दिन में सर्द हवाओं का प्रभाव खत्म होने से तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज हुआ। अब आगे क्या? मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर ने राज्य में आज से एक हल्के प्रभाव का पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होने की संभावना जताई है। इस सिस्टम के असर से बीकानेर, जयपुर संभाग के एरिया में ऊंचाई पर हल्के बादल छाने और न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हाेने की संभावना जताई है। इसके असर से राज्य में सर्दी का प्रभाव सुबह-शाम कम होगा। जबकि 22 से 24 जनवरी के बीच एक दूसर पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय होने की संभावना जताई है। इस सिस्टम का असर राजस्थान में ज्यादा रहने की संभावना है, जिसके असर से कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी भी हो सकती है।
महाकुंभ से वायरल हर्षा रिछारिया ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा- ये सब पोस्ट करने वाले मौनी अमावस्या के बाद कोर्ट में नजर आएंगे। मैंने बहुत कुछ बर्दाश्त किया। मगर इस बार नहीं करूंगी। किसी भी मीडिया चैनल, इन्फ्लुएंसर ने मेरे करेक्टर को जस्टिफाई किया। किसी ने ऊल-जलूल डाला तो मैं उसके खिलाफ कड़ा एक्शन लूंगी। VIDEO में देखिए फुल स्टोरी...
उत्तर प्रदेश की मिट्टी ने सिर्फ फसलें नहीं, फौलादी नेता भी पैदा किए हैं। उन्हीं में एक नाम है मुलायम सिंह यादव। पिता की सीख थी- 'उड़ नहीं सकते तो दौड़ो, दौड़ नहीं सकते तो चलो, चल नहीं सकते तो रेंगो, लेकिन रुको नहीं।' मुलायम ने इस तरह राजनीति की। कांग्रेस के विरोध से उठे, लेकिन वक्त आने पर उससे कई बार हाथ मिलाया। राम मंदिर आंदोलन के खिलाफ लड़े, फिर उसके नायक कल्याण सिंह के साथ भी खड़े हुए। चौधरी चरण सिंह की विरासत से निकले, लेकिन उनके बेटे अजीत सिंह का विरोध कर मुख्यमंत्री बने। दैनिक भास्कर की सीरीज राजनीति की रंगभूमि में कहानी उस नेता की, जिसे ‘नन्हा नेपोलियन’ कहा गया। जो राजनीति में प्रयोगवाद का झंडाबरदार रहा और सियासी दांवपेंचों की वजह से हर दौर में प्रासंगिक बना रहा… साल 1980, इटावा का सैफई गांव जसवंतनगर की सियासी चौपाल पर कांग्रेस का झंडा लहरा चुका था। मुलायम सिंह चुनाव हार चुके थे। कांग्रेस के बलराम सिंह यादव ने उन्हें पटखनी दी थी। मुलायम तीन बार इस सीट से विधानसभा जा चुके थे। यही वजह थी कि वे इस हार से काफी निराश थे और चुनाव कार्यालय में अपने कुछ साथियों के साथ बैठे थे। वो अचानक उठे और बोले- कल मिलते हैं। एक साथी ने कहा- जो हुआ सो हुआ। बैठिए कुछ देर, फिर सभी निकलेंगे। मुलायम कुछ नहीं बोले बस उठे और निकल गए। घर पहुंचे और सीधे कमरे में जाकर खटिया पर लेट गए। इकलौती बहन कमला ने उन्हें आते देखा लेकिन कुछ बोली नहीं। घर में सभी उदास थे, खाने में खिचड़ी बनी थी। कुछ देर बाद कमला खाना लेकर मुलायम के कमरे में गई। मुलायम की आंखों में आंसू थे। कमरे के दरवाजे पर खड़ी कमला बोल पड़ी- जिंदगी खत्म हो गई क्या? मुलायम रुंधे गले से बोले- चौधरी साब का कितना भरोसा था मुझ पर… इस हार से कहीं टूट न जाए। कमला ने कहा- अरे कुछ अच्छा लिखा होगा। तुम जसवंतनगर नहीं, देश जितने की कोशिश करो। यहां खुद बखुद जीत जाओगे। कमला मुस्कुराई और रेडियो चालू कर दिया। समाचार आ रहे थे। कुछ देर बाद आवाज आई- चौधरी चरण सिंह ने मुलायम सिंह को लोकदल का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। कमला खुशी से उछल पड़ी, बोली- देखो कहा था, कुछ न कुछ अच्छा होगा। इधर यूपी की गद्दी पर कांग्रेस ने वीपी सिंह को बैठाया। यूपी में उस वक्त डाकुओं का भयंकर आतंक था। लोग अक्सर बिना चप्पल दिख जाते थे, लेकिन कंधे पर दुनाली टंगी रहती थी। वीपी सिंह ने सख्त प्रशासक की छवि बनाने के लिए डाकुओं पर नकेल कसनी शुरू कर दी। आए दिन एनकाउंटर होने लगे। मुलायम को ये बात पची नहीं, उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। वो चौधरी चरण सिंह के पास गए और बोले- चौधरी साब, वीपी सिंह का रवैया ठीक नहीं है। चरण सिंह समझ रहे थे मुलायम क्या कहना चाह रहे हैं। फिर भी कुछ सकुचाते हुए बोले- मैं तुम्हारी बात समझ रहा हूं, लेकिन विरोध करने से हमारा नुकसान तो नहीं होगा? मुलायम ने कहा- अपराधियों के नाम पर दलितों-पिछड़ों को परेशान किया जा रहा है। हम आवाज उठाएंगे तो फायदा ही होगा। चौधरी साहब चुप्पी साथ गए। मुलायम समझ गए कि चरण सिंह हिचक रहे हैं। उन्होंने जॉर्ज फर्नांडीज और कर्पूरी ठाकुर को ये बात बताई। दोनों ने मिलकर चौधरी चरण सिंह को समझाया। फिर क्या था, मुलायम ने वीपी सिंह की नीतियों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। वीपी सिंह फिर भी नहीं रुके, लेकिन पूरे प्रदेश में उनके खिलाफ माहौल बनने लगा। वीपी के विरोध से शुरू हुए आंदोलन ने पिछड़ी जातियों के बीच कांग्रेस विरोध की लहर पैदा कर दी। नतीजा, वीपी सिंह को इस्तीफा देना पड़ा। इंदिरा गांधी ने उन्हें दिल्ली बुला लिया। मुलायम की छवि मजबूत हो गई। इस बीच देश की राजनीति में कई बड़ी घटनाएं हुई। इंदिरा गांधी की हत्या हुई, सिख दंगों में पूरा देश झुलसा। राजीव गांधी को पीएम बनाया गया। वीपी सिंह को वित्त मंत्री बने लेकिन बोफोर्स मामले से शुरू हुई राजनीतिक अदावत कांग्रेस में टूट तक पहुंच गई। उधर यूपी में मुलायम सिंह ने राजीव और कांग्रेस के खिलाफ बिगुल फूंक रखा था। फिर वो दिन आया जब एक-दूसरे के धुर विरोधी वीपी और मुलायम सिंह एक साथ आए। 11 अक्टूबर, 1988 लोकदल, जनता पार्टी और कुछ अन्य समाजवादी धड़ों ने मिलकर नई पार्टी ‘जनता दल’ बनाया। वीपी इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। तमाम विरोध के बावजूद मुलायम सिंह यूपी के अध्यक्ष बन गए। देश में आम चुनाव और यूपी विधानसभा चुनाव एक साथ होने थे। पीएम बनने के लिए यूपी को साधना जरूरी था। यहां कांग्रेस का मुकाबला जनता दल से नहीं बल्कि ‘मुलायम सिंह’ से था। चौधरी साहब की मौत के बाद मुलायम यूपी में पिछड़ों के सबसे बड़े नेता बन चुके थे। एक दिन राजीव गांधी ने तब के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बलराम सिंह यादव को दिल्ली बुलाया। राजीव बोले- मुलायम सिंह को किसी भी तरह से रोकना होगा। बलराम में कहा- जब मैंने उसे हराया था, तब उम्मीद नहीं थी वो इतना बड़ा हो जाएगा। राजीव गांधी- क्या स्ट्रेटजी होनी चाहिए? उसे नहीं रोका तो हम हार जाएंगे। बलराम यादव- पिछड़ों में उसकी पकड़ बढ़ गई है। अजीत सिंह अभी कच्चे हैं और मुलायम चरण सिंह की जगह ले रहा है। हमें पिछड़ा कार्ड खेलना होगा। बैठक में हुए फैसले के तहत मुलायम सिंह यादव को काटने के लिए 'यादव ट्रिओ' यानी बलराम यादव, चंद्रजीत यादव और रामनरेश यादव को मैदान में उतारा गया। चंद्रजीत, इंदिरा और संजय गांधी के करीबी रहे थे। रामनरेश यादव जनता पार्टी के समय यूपी के सीएम रहे थे। वो जनता दल में शामिल हुए थे, लेकिन मुलायम सिंह प्रदेश अध्यक्ष बनने से नाराज होकर कांग्रेस में आ गए। फिर भी कांग्रेस की स्ट्रेटजी काम नहीं आई। पूरे प्रदेश में नारा गूंजने लगा- ठाकुर की बुद्धि, अहीर का बल, इसी का नाम जनता दल। मुलायम का कद और बढ़ गया। यूपी विधानसभा और लोकसभा दोनों में कांग्रेस को करारी हार मिली। वीपी सिंह पीएम बने, लेकिन मुलायम से खार खाए हुए थे। वो नहीं चाहते थे मुलायम सीएम बनें। वो पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह को सीएम बनाना चाहते थे। दिसंबर, 1989। लखनऊ का तिलक हॉल। जनता दल के विधायकों की बैठक चल रही थी। सीएम के नाम पर मुहर लगनी थी। हॉल के बाहर और भीतर अजीत और मुलायम के समर्थकों की नारेबाजी चल रही थी। तभी मुलायम उठे और बोले- शांत हो जाओ…। नारेबाजी और बढ़ गई- नाम मुलायम है, काम फौलादी है। मुलायम ने फिर कहा- अरे मेरी बात मानो। शांत हो जाओ। नारे लगाने के मौके मिलेंगे। नारेबाजी रुक गई। दिल्ली से आए दो ऑब्जर्वर मधु दंडवते और सुरेंद्र मोहन भी वहां मौजूद थे। मधु के जेब में एक पर्ची थी, जिस पर वीपी सिंह ने सीएम के लिए अजीत सिंह पर मुहर लगाई थी। मधु उठे, पॉकेट में हाथ डाला। मुलायम को शक हुआ। वो भी उठे और जोर से बोले- रुकिए,रुकिए…। हाल में कानाफूसी शुरू हो गई। मुलायम ने कहा- पर्ची मत निकालिए। आप यहां निष्पक्ष चुनाव कराने आए हैं। बस वही कीजिए। चुनाव हुआ तो ज्यादातर विधायकों ने मुलायम सिंह का समर्थन किया। इस तरह मुलायम सिंह यादव पहली बार उत्तर प्रदेश के सीएम बने। 1 जनवरी, 1990 इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आदेश दिया कि अयोध्या में विवादित जमीन मैपिंग फोटोग्राफी और ढांचागत सर्वे कराया जाए। केंद्र और प्रदेश दोनों जगह जनता दल की सरकार थी। भाजपा दोनों जगह सरकार को बाहर से समर्थन दे रही थी। बावजूद इसके रामजन्मभूमि आंदोलन के जरिए सरकार की नाक में दम कर रखा था। देश की राजनीति बदल रही थी। विश्व हिंदू परिषद (VHP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी राममंदिर का मुद्दा हर नुक्कड़ और चौराहे पर उठाने लगे। मुलायम सिंह परेशान थे। वो दिल्ली जाकर वीपी सिंह से मिले- प्रधानमंत्री जी, भाजपा वाले सांप्रदायिक राजनीति को हवा दे रहे हैं। मस्जिद की घेराबंदी कभी भी शुरू हो सकती है। आप उनसे बात क्यों नहीं करते? वीपी सिंह ने कोई खास रिएक्शन नहीं दिया। बस इतना कहा- ठीक है, मैं बात करता हूं। 7 अगस्त, 1990 प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू कर दीं। पिछड़ी जातियों के लिए 27% आरक्षण का प्रावधान किया गया। मुलायम प्रदेश में अपने लोगों के साथ बैठक की। किसी ने कहा- वीपी सिंह पिछड़ों के भगवान बन जाएंगे। हम पीछे रह जाएंगे। मुलायम ने कहा- कुछ नहीं होगा। मेरे पास एक दांव है। सब शांत हो गए। सबको पता था नेता जी कुछ ऐसा पासा फेकेंगे कि सबकी चालें ध्वस्त हो जाएंगी। मुलायम ने कहा- हम पंचायत लेवल पर रिजर्वेशन लागू करेंगे। मुलायम ऐसा करने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री बने। इससे पिछड़ी जातियों में मुलायम की छवि और पुख्ता हुई। इधर भाजपा बेचैन थी। मंडल के दांव से सबकुछ उल्टा पड़ गया था। देश का बड़ा हिस्सा विपक्ष की तरफ लामबंद होने लगा। दूसरी तरफ आरक्षण के खिलाफ देशभर में हिंसा की आग भड़क गई। 8 अगस्त 1990, पटना जनता दल की एक रैली में चल रही थी। मुलायम सिंह यादव के साथ लालू यादव और शरद यादव भी शामिल थे। पिछड़ों को अपने साथ करने के बाद अब बारी थी, अल्पसंख्यकों का भरोसा जितने की। मुलायम सिंह गरजे- अगर एक मुसलमान की जान को खतरा आएगा तो सौ यादव जान देने को तैयार हो जाएंगे। भाजपा बेचैन हो उठी। पूरा देश 'मंडल और कमंडल ' की राजनीति में फंस चुका था। 13 अगस्त को भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने मुस्लिम नेताओं के साथ बैठक की। प्रस्ताव दिया- रामजन्मभूमि से मुस्लिम दावा से हटा लें तो हम मथुरा, वाराणसी की अपनी मांग पर जोर नहीं देंगे। मुस्लिम नेताओं ने ये पेशकश ठुकरा दी। आडवाणी ने 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ मंदिर, गुजरात से रथयात्रा शुरू की। रथयात्रा को जबरदस्त समर्थन मिल रहा था। मुलायम ने अपने सहयोगियों के साथ फिर से मीटिंग की- बीजेपी के पक्ष में माहौल बन रहा है। मुसलमान डरे हुए हैं। मुस्लिम नेता मुझ पर कुछ करने का दबाव बना रहे हैं। किसी ने कहा- रथ अयोध्या तक पहुंचा तो अनहोनी हो जाएगी।मुलायम- अगर रथ मैं यूपी में न घुसने दूं तो? बैठक में सन्नाटा छा गया। एक ने कहा- ये कैसे होगा…?मुलायम बोले- मैं आडवाणी को गिरफ्तार करूंगा। और इस फैसले के साथ बैठक खत्म हो गई। वीपी जानते थे अगर मुलायम ने रथयात्रा रोकी तो अल्पसंख्यक भी उनके पीछे खड़े हो जाएंगे। पिछड़ी जातियां तो पहले ही मुलायम के पक्ष में हैं। इसकी काट के लिए वीपी ने बिहार के सीएम लालू यादव को फोन लगाया, बोले- रथयात्रा बिहार में रोक दीजिए। आडवाणी को गिरफ्तार कीजिए। लालू यादव ने 23 अक्टूबर को बिहार के समस्तीपुर में आडवाणी को गिरफ्तार करवा दिया। कई जगह छिटपुट हिंसा हुई। अयोध्या के आसपास के इलाकों में भी कर्फ्यू लग गया। मुलायम ने भी VHP के कई नेताओं को गिरफ्तार करवा दिया। मुलायम सिंह को देशभर में खलनायक की तरह पेश किया जाने लगा। भाजपा ने वीपी सिंह पर दबाव बनाया कि मुलायम VHP नेताओं को छोड़ें। वीपी सिंह ने अपने करीबी फर्रुखाबाद के सांसद संतोष भारतीय लखनऊ भेजकर मुलायम को समझाने भेजा। मुलायम सिंह भड़क उठे। उन्होंने गुस्से भरे लहजे में कहा- मैं नहीं छोड़ सकता। संतोष को ऐसी ही जवाब की उम्मीद थी। उन्होंने मुलायम को डराया- नहीं छोड़ेंगे तो भाजपा समर्थन वापस ले लेगी। सरकार गिर जाएगी। मुलायम ने कहा- मुझे इसकी चिंता नहीं है। 28 अक्टूबर, 1990 देश-विदेश की मीडिया लखनऊ में थी। अमेरिका की टाइम्स मैगजीन के पत्रकार रॉबर्ट निकल्सबर्ग ने मुलायम से पूछा- मस्जिद बचने के लिए आप क्या करेंगे? मुलायम ने कहा- सरकार बचे या न बचे, मस्जिद मेरी लाश पर गिरेगी। पत्रकार ने दूसरा सवाल दागा- क्या राम आपके लिए आस्था नहीं है?मुलायम ने जवाब दिया- मैं उस राम को मानता हूं जो सबको एक मानते हैं। मैं उस राम को मानता हूं जिसे गांधी मानते हैं। तभी दूसरे पत्रकार ने कहा- आडवाणी अयोध्या आ रहे हैं। मुलायम मुस्कुराकर कहा- वो आज तक अयोध्या नहीं आए। अचानक उन्हें अयोध्या प्रेम क्यों जाग गया? आएंगे तो देख लिया जाएगा। 30 अक्टूबर 1990 लखनऊ-फैजाबाद रोड पर 126 किलोमीटर के रास्ते में करीब 10 बैरिकेडिंग लगी थीं। सुबह-सुबह हजारों कारसेवकों की भीड़ बाबरी मस्जिद की तरफ बढ़ रही थी। भारी भीड़ देख सुरक्षा बल के पसीने छूटने लगे। मुलायम सिंह के ऑफिस में फोन घनघनाने लगे- भीड़ बढ़ रही है। मामला कंट्रोल से बाहर जा रहा है। देखते ही देखते कुछ कारसेवक मस्जिद की गुंबद पर चढ़कर भगवा झंडा लहराने लगे। दोपहर का वक्त था। एकाएक पुलिस ने फायरिंग कर दी। पलभर में हजारों की भीड़ से भरा मैदान खाली हो गया, लेकिन सामने का दृश्य भयावह था। हर तरफ खून के छींटे…। ऐसा ही मंजर 2 नवंबर को फिर सामने आया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दो दिनों में पुलिस फायरिंग से 16 कारसेवक मारे गए। नतीजा, भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया। केंद्र में वीपी सिंह की सरकार गिर गई। समाजवादी नेता चंद्रशेखर ने जनता दल से बगावत करके ‘समाजवादी जनता पार्टी’ बना ली। उनके साथ 64 सांसद थे। मुलायम भी चंद्रशेखर की पार्टी मे शामिल हो गए। कांग्रेस के बाहरी समर्थन से चंद्रशेखर पीएम बने। इधर यूपी में कांग्रेस के ही समर्थन से मुलायम सीएम बने रहे। जिस कांग्रेस का विरोध करके मुलायम सीएम बने, उसी के समर्थन से कुर्सी बचा ले गए। मगर ये सरकार भी ज्यादा दिन न टिक सकी। कांग्रेस ने चंद्रशेखर सरकार से समर्थन वापस ले लिया, तो यूपी में भी सरकार गिर गई। देश में फिर से चुनाव की तैयारी शुरू हुई। भाजपा ने राममंदिर का मुद्दा उठाया और मुलायम को खलनायक की तरह पेश किया। मुलायम की छवि पर हिंदू विरोधी होने की दाग लग चुका था। गृह जनपद इटावा में भी लोगों ने मुलायम को नापसंद करना शुरू कर दिया। मुलायम जानते थे, भाजपा के पक्ष में माहौल बन रहा है। उन्हें आभास हुआ कि पिछड़ों की राजनीति में भी डेंट लगा है। वो अब नए सिरे से अपने वोटबैंक को साधने लगे। 5 मार्च, 1991 मुलायम सिंह जमीयत-ए-उलेमा के एक प्रोग्राम में शामिल हुए। मुसलमान नेताओं ने उनसे कहा- भाजपा बढ़ रही है, क्या हमें डरना चाहिए? मुलायम बोले- मुलायम के रहते किसी से डरने की जरूरत नहीं।किसी ने कहा- लेकिन ऐसा लग रहा है इस बार यूपी पर भाजपा कब्जा कर लेगी। मुलायम- भाजपा सांप्रदायिक पार्टी है। मुझे जिताएं, मैं उस पर प्रतिबंध लगा दूंगा, लेकिन इसके लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए। चुनाव नतीजे आए तो भाजपा को 221 सीटें मिलीं। पहली बार यूपी में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। कल्याण सिंह सीएम बने। मुलायम सिंह की राजनीति के लिए ये बुरा दौर था। फ्रैंक हुजूर अपनी किताब ‘मुलायम सिंह यादव’ में लिखते हैं- भाजपा, VHP और RSS के लोगों ने आवारा कुत्तों और गधों पर मुलायम सिंह का नाम लिख दिया। उसी दौरान इटावा के जीआई मैदान में समाजवादी नेताओं का रैली हुई। रैली के बाद मुलायम सिंह एक साथी सीपी राय के साथ कचहरी जा रहे थे। शहर के दुकानदार रास्ते के किनारे खड़े हो गए और जैसे ही मुलायम की गाड़ी सामने से निकलती सब उस पर थूकने लगे। ये सब मुलायम के गृह जनपद में हो रहा था। मुलायम सिंह उदास हो गए। उन्होंने कहा- देख लो, सीपी लोगों को मुझसे कितनी घृणा हो गई है। सीपी राय ने कहा- नहीं भाई साब, आप उदास मत होइए। जिस दिन लोगों को संविधान के लिए आपकी वफादारी का एहसास हो जाएगा, यही लोग माला लेकर खड़े होंगे।” मुलायम समझ गए थे अब उन्हें अपने बल पर कुछ करना होगा। वो चंद्रशेखर की सरपरस्ती में उनकी पार्टी में थे। फिर भी चंद्रशेखर पर उनका विश्वास कमजोर हो रहा था। राजीव गांधी की मौत के बाद चंद्रशेखर तब के प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के करीब हो गए थे। मुलायम को लगा उन्हें अपनी पार्टी बनानी होगी। अक्टूबर, 1992 को मुलायम ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी बनाने की घोषणा कर दी। इधर यूपी में बहुत कुछ घट रहा था। भाजपा के शासन में ही 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद ढहा दी गई। कई जगह दंगे हुए। केंद्र ने यूपी की कल्याण सिंह सरकार बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लगा दिया। मध्यावधि चुनाव की घोषणा हुई। बदलते माहौल के बीच, बसपा सुप्रीमो कांशीराम का बयान आया- मुलायम की नीतियां दलित समर्थक हैं। वह धर्मनिरपेक्ष हैं। 1993 विधानसभा चुनाव के लिए बसपा-सपा में गठबंधन हुआ। दोनों की सरकार भी बन गई। 1995 में सपा-बसपा गठबंधन टूट गया और सरकार गिर गई। मुलायम जोड़तोड़ की राजनीति में माहिर थे। वो केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो गए। 1996 में मैनपुरी से लोकसभा चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंचे। गैर-कांग्रेस और गैर-भाजपाई विपक्षी दलों ‘यूनाइटेड फ्रंट’ के नाम से गठबंधन बनाया था। मुलायम की सपा भी उसमें शामिल थी। उनका प्रधानमंत्री बनना तय था, लेकिन लालू यादव और शरद यादव की वजह से ऐसा नहीं हो सका। साल 1990। मुलायम सिंह का यूपी में राजनीतिक एक्सपेरिमेंट मार खाता जा रहा था। चुनाव में मात खाने के बाद मुलायम सिंह दिल्ली गए। उन्हें यूपी भवन में रुकना था, लेकिन व्यवस्था नहीं हो पाई। उनके साथ आज के कांग्रेस नेता और तब के वरिष्ठ पत्रकार राजीव शुक्ला भी थे। मुलायम ने शुक्ला से कहा- कहीं रुकने की व्यवस्था नहीं हो रही है, क्या करूं? राजीव तुरंत अमर सिंह के पास गए। अमर सिंह ने कहा- मुलायम जी को सम्राट या अशोका होटल कहीं भी ले जाएं। मैं वहां बात करता हूं। अब मुलायम जब भी दिल्ली आते, अमर सिंह उनके रहने की व्यवस्था करा देते। एक बार किसी फ्लाइट में मुलायम सिंह और अमर सिंह की मुलाकात हो गई। अमर सिंह ने कहा- जनता पार्टी के चुनावी रणनीति पर फिर से वापस जाएं। पिछड़ों और दलितों के साथ जाट और ठाकुर वोट पर भी फोकस करें। अमर सिंह ने एक और बात कही- “कांग्रेस को लेकर कम आक्रामक रहें। उनकी जरूरत कभी भी पड़ सकती है।” फ्लाइट में हुई इस मुलाकात के बाद दोनों इतना करीब आए कि 1996 में सपा के टिकट पर अमर सिंह राज्यसभा पहुंच गए। देखते ही देखते अमर सिंह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बन गए। 1997 में यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। भाजपा ने राममंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे कल्याण सिंह को सीएम पद से हटा दिया। कल्याण सिंह ने भाजपा से बगावत करके ‘राष्ट्रीय क्रांति पार्टी’ नई पार्टी बना ली। यूपी में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं। मुलायम सभी जातियों को सपा के पाले में करने में जुट गए। 2002 के विधानसभा चुनाव में सपा 143 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। मुलायम, अमर सिंह के साथ सपा दफ्तर में बैठे थे। मुलायम ने कहा- सबसे बड़ी पार्टी होने का क्या फायदा, जब सरकार ने बने? अमर सिंह- सरकार बनेगी। मुलायम ने हैरत से अमर सिंह की तरफ देखा। अमर सिंह ने कहा- मैंने कांग्रेस में बात की है। हमें बाहर से समर्थन मिलेगा। मुलायम- फिर भी हम बहुमत से बहुत दूर रहेंगे। अमर सिंह- शिवपाल बसपा के एक दर्जन से ज्यादा विधायकों के संपर्क में हैं। आप सरकार बनाने की दावा कीजिए। वो हमें वोट देंगे। मुलायम ने सरकार बनाने की दावा ठोक दी। ये मुलायम की प्रयोगवादी राजनीति का उरूज ही था कि जो कल्याण सिंह, जो कभी मुलायम के मुख्य विरोधी थी। उन्होंने भी सपा का समर्थन किया। मुलायम ने जिन सोनिया गांधी को 'विदेशी मूल' का बताकर पीएम बनने से रोक था, वो भी सपा के साथ थीं। अजीत सिंह से बगावत करके मुलायम ने बड़ा कदम बढ़ाया था, वो सरकार में शामिल हुए। बसपा के करीब 40 विधायक भी मुलायम के समर्थन में आ गए। मुलायम ने तीसरी बार सीएम पद की शपथ ली। साल 2007-08 मुलायम पर कई तरह के आरोप लगे। पिछड़ा वोट बसपा की तरफ लामबंद होने लगा। सपा पर गुंडों को पार्टी होने के आरोप लगने लगे। मुलायम ने अमर सिंह से सलाह ली। अमर सिंह ने बिना लाग-लपेट के कहा- “हालात खराब हैं नेताजी। बसपा पिछड़ा वोट खींच रही है। मुसलमान असमंजस में हैं। किसान अजीत सिंह से साथ हैं। यही वक्त है एक और बड़ा दांव खेलने का।” कुछ दिन बाद मुलायम सिंह दिल्ली पहुंचे और कल्याण सिंह से मिले। मुलायम ने सीधे मुद्दे पर बात की- “कल्याण जी, बीजेपी ने आपको किनारे कर दिया, लेकिन आपकी जमीन आज भी यूपी में है। हम साथ मिलकर बीजेपी को रोक सकते हैं।” कल्याण सिंह मुस्कुराए, बोले- “हम दोनों की राजनीति अलग है, ये कैसे संभव है, नेता जी?” थोड़ी देर कुछ बात हुई और दोनों ने हाथ मिला लिया। बातचीत के बाद, मुलायम लखनऊ वापस आए। अब मुलायम और कल्याण रैलियों में एक साथ दिखने लगे, लेकिन चुनाव में दांव उल्टा पड़ गया। मुसलमानों में नाराजगी गहरी हो गई। कांग्रेस भी हमला करने लगी। मायावती ने इसे ‘धर्मनिरपेक्षता से धोखा’ कहा। नतीजा, सपा 2007 का चुनाव हार गई। मुलायम कैमरे के सामने आए। उनकी आवाज में थकान थी। उन्होंने कहा- “मैं मानता हूं कि बाबरी मस्जिद गिराने के आरोपी नेता से गठबंधन करना मेरी बड़ी गलती थी। मुझमें इतना साहस है कि मैं अपनी गलती स्वीकार करूं और पार्टी से माफी मांगूं।” ये कहानी थी मुलायम की, जिन्होंने अपनी राजनीतिक जीवन में कई प्रयोग किए। वो जोड़तोड़ की राजनीति के मास्टर थे। हवा का रुख भांपने में माहिर। उनकी आलोचना भी हुई, लेकिन मुलायम भारतीय राजनीति में हमेशा प्रासंगिक बने रहे। वो तीन बार यूपी के तीन बार सीएम बने। देश के रक्षा मंत्री रहे, सात बार सांसद और दस बार विधायक रहे। इसके अलावा दो बार पीएम बनते-बनते रह गए। *** रेफरेंस कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। ----------------------------------------------------------- सीरीज की ये स्टोरीज भी पढ़ें... 'कच्ची छोरी' ने खींची मुलायम की कुर्सी, 12 घंटे में ऐसे बदली UP की सियासत राजनीति में कई दिन ऐसे होते हैं, जो दशकों का भविष्य तय कर देते हैं। ये कहानी उस दौर की है, जब सत्ता साझेदारी नहीं, सौदेबाजी पर टिकी थी। एक तरफ मुलायम सिंह सत्ता को सीढ़ी मान रहे थे, दूसरी तरफ कांशीराम आंदोलन की चाबी। बीच में थीं मायावती… जिन्हें पहले दूर रखा गया, फिर कंट्रोल किया गया और आखिर में मिटाने की कोशिश की गई। पूरी स्टोरी पढ़ें... इंदिरा पर लगा था ‘वोट चोरी’ का आरोप; राज नारायण बोले- बैलेट पर जादुई स्याही थी, कांग्रेस निशान अपने आप उभर आता है दिसंबर, 1970 की वो रात दिल्ली की हड्डियों में कंपकंपी पैदा कर रही थी। राष्ट्रपति भवन के भीतर जो लावा उबल रहा था, उसने पूरे देश की राजनीति को झुलसा दिया। अचानक खबर आई- लोकसभा भंग हुई। वक्त से एक साल पहले चुनाव होंगे। विपक्ष ने कहा- मैडम ने मास्टरस्ट्रोक खेला है। पूरी स्टोरी पढ़ें...
'10 रुपए के 100 फ्रेश (नए) नोट की गड्डी 1370 रुपए की पड़ेगी… 20 रुपए की गड्डी महंगी है… वो 2480 रुपए की पड़ेगी… 1 रुपए के 100 नोटों की गड्डी 2700 रुपए की… 10 लाख चाहिए… 5 लाख चाहिए… आप बस पेमेंट दीजिए… अभी दे देंगे… बैंक में आपको नए नोट की गड्डी नहीं मिलेगी… बैंक अफसर यहीं दे जाते हैं… हम ज्यादा पैसा देकर उनसे खरीद रहे हैं…।' जो फ्रेश नोट आपको बैंकों से मिलने चाहिए, वे बैंक से ब्लैक होने के बाद यूपी की सड़कों पर बिक रहे हैं। इसका सेंटर पॉइंट है कानपुर का घंटाघर एरिया। यहां 1 रुपए के 100 फ्रेश नोट की गड्डी 2700 रुपए में बेची जा रही है। यानी 1 अमेरिकी डॉलर में 1 रुपए के केवल 3 फ्रेश नोट और 35 पैसे हाथ लगेंगे, जबकि डॉलर की कीमत 90 रुपए है। ऐसे ही 5, 10, 20 रुपए के फ्रेश नोटों पर एक्स्ट्रा चार्ज लगाकर बेचा जा रहा है। दरअसल, शादी का सीजन शुरू हो गया है। ऐसे में दूल्हे का हार और अन्य तरह की रस्म के लिए कड़क नोटों की डिमांड बढ़ गई हैं। जब आम लोग फ्रेश नोट लेने के लिए बैंकों में जाते हैं तो उन्हें नहीं मिलते। बैंक वाले यह कहकर लौटा देते हैं कि नए नोट नहीं हैं। जबकि RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) के सख्त आदेश हैं कि फ्रेश नोट होने पर बैंक इनकार नहीं कर सकते। RBI से बैंकों में पहुंचे फ्रेश नोट मार्केट में बिकने के लिए कैसे आ गए? इस सवाल के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने कानपुर में इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरा खुलासा… क्या बाजार में फ्रेश नोट हैं? हमारे इन्वेस्टिगेशन की शुरुआत इस सवाल से हुई। हम कानपुर के शास्त्रीनगर पहुंचे। यहां फ्रेश नोटों की माला बनाकर बेची जाती है। हमारी मुलाकात रूबी से हुई। उसने हमें बताया कि फ्रेश नोटों की गड्डी अगर हमसे लेंगे तो 500 रुपए एक्स्ट्रा चार्ज लिया जाएगा, क्योंकि वह भी फ्रेश नोट घंटाघर एरिया की दुकानों से महंगे दामों पर खरीदकर लाती हैं। रिपोर्टर: नोटों की माला बनवानी है…?रुबी: कौन सी… 10 वाली या 20 वाली…? रिपोर्टर: 10 वाले नोट की कितने की पड़ेगी…?रुबी: नोटों की गड्डी आप देंगे… या हमें अपने पास से लगाना होगा…? रिपोर्टर: दोनों का बता दो…।रुबी: एक माला में 500 रुपए के 10 वाले नोट लगते हैं…आप कितने नोट लगवाएंगे…? रिपोर्टर: मान लो… 10 के नोट की 1000 रुपए की गड्डी (100 नए नोट) लगवाएं तो…?रुबी: गड्डी आप देंगे तो हम 300 रुपए लगवाई लेंगे…। रिपोर्टर: गड्डी आप दो तो कितना लगेगा फिर…?रुबी: फिर टोटल 1800 रुपए पड़ेगा…। रिपोर्टर: मतलब… इतना ज्यादा क्यों लगेगा… 1000 रुपए की गड्डी… और 300 रुपए लगवाई… 1300 रुपए हुए… फिर 1800 रुपए क्यों…?रुबी: 500 रुपए कड़े (फ्रेश) नोट का चार्ज लगेगा…। रुबी की बात से साफ हो गया कि फ्रेश नोटों के नाम पर एक्स्ट्रा चार्ज लिया जाता है। अब हमें यह पता करना था कि नए नोट कहां बिक रहे हैं? इसके जवाब के लिए हमने बातचीत आगे बढ़ाई। ब्लैक में खरीदकर लाते हैं फ्रेश नोटों की गड्डियां रिपोर्टर: आप लोग नए नोटों की गड्डी कहां से लाते हैं…?रुबी: ब्लैक में खरीदकर लाते हैं…। रिपोर्टर: कहां से लाते हैं नए नोटों की गड्डी…?रुबी: घंटाघर में बिकती है… वहीं से खरीदकर लाते हैं…। रिपोर्टर: अगर हम लोग वहीं से खरीदकर लाएं तो कितने की मिल जाएगी…?रुबी: आप वहां जाकर पता कर लीजिए… कितने की है…? रिपोर्टर: फिर भी कितने की मिलेगी…?रुबी: वहां रोज का अलग-अलग रेट होता है… तुरंत रेट बदल जाता है…। रिपोर्टर: अच्छा… कोई फिक्स रेट नहीं होता वहां…?रुबी: नहीं… कोई फिक्स रेट नहीं है…। यहां से हमें पता चल गया कि कानपुर के घंटाघर एरिया में फ्रेश नोटों की गड्डियां ब्लैक में बिक रही हैं। यहां रोज रेट बदलते रहते हैं। अब चलिए फ्रेश नोटों की मंडी, यहां ब्लैक मार्केटिंग समझते हैं… इसके बाद हम घंटाघर पहुंचे। यहां सड़क किनारे दुकानें लगी थीं। ज्यादातर दुकानों के नाम नहीं थे। दुकानों पर बस यही लिखा था- यहां कटे-फटे, पुराने नोट बदले जाते हैं। हम अनिल ब्रदर्स पर पहुंचे। यहां हमें दुकानदार विजय मिले। विजय ने बताया कि बैंक वाले आते हैं और फ्रेश नोटों की गड्डियां हमें बेचकर जाते हैं, हम अपना परसेंटेज जोड़कर आपको बेच रहे हैं। रिपोर्टर: चाचा… हम लोग वेडिंग प्लानर हैं… नए नोटों की गड्डियां चाहिए…।विजय: हां तो आप लोगों को जरूरत पड़ती होगी… मिल जाएगा…। रिपोर्टर: 10 रुपए के नोटों की एक गड्डी (100 नोट) कितने की मिल जाएगी…?विजय: 10 रुपए वाली… आपको 1370 रुपए की पड़ेगी…। रिपोर्टर: 20 रुपए वाली कितने की पड़ेगी…?विजय: 20 वाली उससे महंगी है… 2480 रुपए (20 रुपए के 100 नोट) की पड़ेगी। रिपोर्टर: 1 रुपए के नोट वाली गड्डी भी मिल जाएगी क्या…?विजय: मिलेगी… यहां सबकुछ मिल जाएगा…। रिपोर्टर: 1 रुपए वाली पुरानी गड्डी (100 नोट) कितने की मिलेगी…?विजय: 1 रुपए वाली… आपको 1400 रुपए (1 रुपए के 100 नोट) में मिलेगी… और 5 रुपए वाली गड्डी 1300 रुपए (5 रुपए के 100 नोट) की मिलेगी…। रिपोर्टर: 100 रुपए और 50 रुपए की गड्डी भी मिल जाएगी क्या…?विजय: 100 रुपए वाली… आपको मिलेगी 120 रुपए एक्स्ट्रा देने पर… 50 रुपए वाली 5170 रुपए (50 रुपए के 100 नोट) की मिलेगी…। विजय की बातों से साफ हो गया कि इस बाजार में हर तरह के फ्रेश नोट हैं। बस, सबके लिए एक्स्ट्रा कीमत चुकानी होगी। अब हम जानना चाहते थे कि यहां कितने फ्रेश नोट हैं? ये यहां आते कैसे हैं? इसके जवाब के लिए जब हमने विजय से बात की तो उन्होंने बताया कि जितने चाहेंगे, मिल जाएंगे। बैंक वाले खुद आकर उन्हें देते हैं। 10 लाख… 5 लाख… जितने फ्रेश नोट चाहिए, सब मिलेंगे विजय: रेट रोज ऊपर-नीचे होते हैं… कम-ज्यादा…।रिपोर्टर: लेकिन हम लोगों को बल्क में चाहिए… मतलब ज्यादा चाहिए…। विजय: कितना ज्यादा चाहिए… 10 लाख चाहिए… 5 लाख चाहिए… अभी मिलेगा… बस आप पेमेंट गिनिए…।रिपोर्टर: दरअसल… हम लोग बैंक गए थे… अप्लीकेशन भी दिए… लेकिन उन लोगों ने कह दिया… अभी नहीं है…। विजय: बैंक में आपको नहीं मिलेगी गड्डी… बैंक में आपको 100 रुपए की गड्डी मिल सकती है…।रिपोर्टर: बैंक जाकर हम लोग बहुत परेशान हुए… लेकिन नहीं मिली… वहां बोले- आएंगे तब देंगे…। विजय: आएगा तब देंगे न… यहां बट्टा (कमीशन) लगेगा… सब मिल जाएगा… सा$@ वही सब दे जाते हैं… बैंक के सारे अधिकारी यहीं दे जाते हैं… कोई बाहरी तो दे नहीं जाता… जब यहां हम लोग बैंक वालों को अधिक पैसा देकर खरीद रहे हैं तो वो तुम्हें क्यों देगा…? दुकानदार विजय की बातों से बैंक वालों से उनकी मिलीभगत उजागर हो गई। अब हम यह जानना चाहते थे कि इस ब्लैक मेलिंग में बैंक वाले कितना कमाते हैं? जब हमने विजय से बातचीत आगे बढ़ाई तो उसने कहा- बैंक वाले भी अच्छी कमाई कर लेते हैं। उसने यह भी बताया कि यहां ऑनलाइन नहीं चलता, सारा लेनदेन कैश में होता है। 1000 फ्रेश नोटों पर 3500 रुपए एक्स्ट्रा चार्ज करते हैं बैंक वाले रिपोर्टर: 1 गड्डी (100 नए नोट) पर बैंक वालों को कितना मिलेगा…?विजय: बैंक वाला आपको कड़े (फ्रेश) नोटों का बंडल (10 गड्डी) देगा तो उसे कुछ नहीं मिलेगा… यहां 100 नोटों की 1 गड्डी पर उसको 350 रुपए मिलेंगे यानी कि 1 बंडल (10 गड्डी = 1000 नए नोट) पर 3500 रुपए बढ़कर मिल रहे हैं… तो आपको क्यों देगा…? रिपोर्टर: इसलिए हम लोगों को नहीं देते…?विजय: ग्राहकों को नहीं देते बैंक वाले… सब यहीं लेकर आते हैं…। रिपोर्टर: अच्छा… आपको पहले से बताना पड़ेगा या तत्काल मिल जाएगा…?विजय: तुरंत मिलेगा… अभी बताओ… क्या-क्या चाहिए… अभी दे देंगे… क्या करेंगे इतने नोट का…। रिपोर्टर: हम लोग शादी का ठेका लेते हैं… क्लाइंट मांगता है…।विजय: फिर क्या दिक्कत… उनसे 50 हजार बढ़ाकर ले लो… सब हो जाएगा…। रिपोर्टर: अच्छा… ऑनलाइन पैसा ले लेंगे आप…?विजय: कैश पेमेंट चलता है… यहां ऑनलाइन का कोई काम नहीं होता…। रिपोर्टर: माला में भी यूज होता है न…?विजय: माला… जयमाला… सब में यूज होता है नोट… रुपया दिखाओ… सब माल मिलेगा… जो चाहेंगे… वो मिलेगा…। विजय की बातों ने साफ कर दिया कि बाजार में फ्रेश नोटों की कमी नहीं है। अब हम यह जानना चाहते थे कि सबसे महंगा फ्रेश नोट कौन-सा है? इसके जवाब में विजय ने हमें 1 रुपए का नोट दिखाया। कहा- ये 100 नोट 2700 रुपए के आएंगे। 1 रुपए की पुरानी गड्डी 1500 रुपए, नई गड्डी 2700 रुपए की मिलेगी रिपोर्टर: 1 रुपए वाली… पुराने नोट की गड्डी मिलेगी… या नए नोट की…?विजय: दोनों मिलेगी… पुराने नोट की गड्डी 1500 रुपए की है… नए नोट की गड्डी 2700 रुपए की है…। रिपोर्टर: अरे… 2700 रुपए की… उसमें रहेंगे सिर्फ 100 नोट ही न…?विजय: हां… सिर्फ 100 नोट ही रहेंगे…। रिपोर्टर: अच्छा… अब नया आता नहीं होगा न…?विजय: बैंक में माल है ही नहीं… बाबू और अधिकारी सब अपने घर में रखते हैं…। रिपोर्टर: अच्छा… बैंक के बाबू घर में रखते हैं…?विजय: तमाम अधिकारी अपने घर में रखे हैं… जब उनको पैसा मिल रहा है तो किसी और को क्यों देंगे…? विजय का दावा है कि बैंक अफसर फ्रेश नोट बैंकों में न रखकर अपने घर में रखते हैं। वे मार्केट में लाकर इन्हें बेच रहे हैं। अब चलिए बैंक, यहां फ्रेश नोट मिलते हैं या नहीं?फ्रेश नोटों की मंडी से निकलकर हम बैंक पहुंचे। हम यह जानना चाहते थे कि यहां फ्रेश नोट मिलते हैं या नहीं? हम कानपुर के कल्याणपुर HDFC बैंक पहुंचे। यहां बैंक कर्मचारी को बताया कि घर में शादी है, फ्रेश नोट चाहिए। इस पर कैशियर ने कहा- अभी तत्काल में फ्रेश नोट नहीं है। शादी का कार्ड और एप्लिकेशन लेकर 14 जनवरी के बाद आइए। अगर गडि्डयां होंगी तो दे देंगे। बहुत ज्यादा तो नहीं मिल पाएंगी। कोशिश करेंगे कि एक गड्डी आपको दे दें। वहीं, जब भास्कर टीम ने भारतीय स्टेट बैंक स्वरूप नगर ब्रांच में जाकर कड़े नोटों के गड्डियों की डिमांड की तो बैंक कर्मचारी ने कहा, आप अपने होम ब्रांच पर जाकर इसके लिए बात कीजिए, अगर ब्रांच पर गड्डियां उपलब्ध होंगी तो मिल जाएंगी। बैंक दे रहे फ्रेश नोट, बैंककर्मी मार्केट में नोट बेच रहे तो कार्रवाई करेंगे कानपुर लीड बैंक मैनेजर आदित्य चंद्रा ने बताया- अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है, जिसमें बैंक कर्मियों द्वारा फ्रेश नोट मार्केट में बेचने की बात सामने आई हो। अगर मामला आएगा तो बैंककर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अगर ग्राहक शादी के लिए बड़ी रकम निकालते टाइम फ्रेश नोट की डिमांड करते हैं तो नए नोटों की गड्डियां दी जाती हैं। ग्राहक और बैंक के तालमेल पर डिपेंड है कि उसे कितने फ्रेश नोट मिलते हैं। ------------------ ये खबर भी पढ़ें... यूपी में पैसे लेकर कागजों में बढ़ा रहे दिव्यांगता:सरकारी नौकरी चाहिए या पेंशन… जैसा यूज, वैसा रेट; देखिए स्टिंग ‘देखिए… दिव्यांगता का परसेंटेज बढ़ाने के 20 हजार रुपए लगेंगे… इसी में डॉक्टर का हिस्सा रहेगा। उन्हें बता देते हैं- ये अपना जानने वाला है तो हो जाता है। वे 10 हजार लेते हैं… डिसेबिलिटी 5% बढ़ा देंगे…।’ ये सौदेबाजी स्वास्थ्य विभाग के सरकारी बाबू कर रहे हैं, ये रुपया लेकर कागजों पर दिव्यांगता (डिसेबिलिटी) का परसेंटेज बढ़ा देते हैं। दिव्यांगता बढ़ाकर लेने वाले सर्टिफिकेट का यूज क्या है? अगर दिव्यांग पेंशन के लिए चाहिए तो रेट कम लगेंगे। पढ़ें पूरी खबर
पहले 2 सवाल.... गोंडा में राष्ट्र कथा के बाद यूपी के राजनीतिक गलियारे में ये दो सवाल चर्चा में हैं। बाहुबली और कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, भाजपा के फायरब्रांड नेता विनय कटियार लंबे समय बाद अयोध्या में एक्टिव हुए हैं। भास्कर से खास बातचीत में कटियार ने कहा- पहले विधानसभा फिर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का प्रतीक मानी जाने वाली अयोध्या सीट क्या भाजपा बृजभूषण शरण सिंह के हाथ सौंपेगी। इस सब सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़िए… महिला पहलवानों से यौन शोषण का मामला अभी भी चल रहामहिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोप में घिरे गोंडा, बलरामपुर और कैसरगंज से छह बार सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह को भाजपा ने 2024 में टिकट नहीं दिया। उनकी जगह कैसरगंज से उनके छोटे बेटे करण भूषण शरण सिंह को चुनाव में उतारा। करण भूषण इस समय कैसरगंज से सांसद हैं। यौन शोषण के मामले में बृजभूषण पॉक्सो एक्ट की धारा से बरी हो चुके हैं, लेकिन यौन शोषण का मामला अभी भी विचाराधीन है। बृजभूषण शरण सिंह ने इसी महीने अपने नंदनी निकेतनम् में राष्ट्रकथा का भव्य आयोजन किया। राष्ट्रकथा में राजनीतिक, फिल्म, खेल और सामाजिक जगत की कई हस्तियों ने शिरकत की। बृजभूषण ने हाल ही में भावुक अंदाज में बयान दिया- मेरे खिलाफ षड़यंत्र किया गया, साजिश के तहत हटाया गया। 2029 तक यदि जिंदा रहा तो एक बार पूरे सम्मान के साथ संसद में अवश्य जाऊंगा। बृजभूषण सिंह के सांसद बेटे करण भूषण ने ऐलान किया कि 2029 में वे और उनके पिता दोनों संसद में जाएंगे। बृजभूषण ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा- ‘दोनों लोग लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, भाजपा टिकट देगी तो अच्छा नहीं तो कहीं और से लड़ेंगे।’ बृजभूषण के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि बृजभूषण अपनी कैसरगंज सीट से बेटे करण भूषण को ही लड़ाएंगे, खुद फैजाबाद सीट से चुनाव लड़ेंगे। जानिए फैजाबाद सीट चाहते हैं बृजभूषण?श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद भी 2024 में फैजाबाद से भाजपा के लल्लू सिंह चुनाव हार गए। यही वजह है कि बृजभूषण शरण सिंह वहां राजनीतिक संभावना तलाश रहे हैं। उनका और उनके करीबियों का मानना है कि भाजपा को 2029 में लल्लू सिंह के मुकाबले मजबूत विकल्प की तलाश होगी। ऐसे में बृजभूषण पार्टी की पसंद बन सकते हैं। बृजभूषण शरण सिंह की पढ़ाई अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से हुई है। वह महाविद्यालय में छात्रसंघ के महामंत्री भी रहे हैं। लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए वह सरयू पार गोंडा चले गए। राष्ट्रकथा के दौरान अयोध्या में होर्डिंग्स लगाए राष्ट्रकथा के दौरान बृजभूषण और उनके समर्थकों ने अयोध्या में बड़ी संख्या में होर्डिंग्स और बैनर लगाए। उनके समर्थक भी अंदर ही अंदर मानते हैं कि यदि मौका मिला तो नेताजी फैजाबाद लोकसभा सीट से किस्मत आजमा सकते हैं। खुद बृजभूषण भी कह चुके हैं कि समर्थकों के आग्रह को ध्यान में रखकर वह चुनाव लड़ सकते हैं। बृजभूषण के सामने विनय कटियार बड़ी चुनौती राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं- अयोध्या में बृजभूषण शरण सिंह की राह में लल्लू सिंह से बड़ी बाधा भाजपा के तेज तर्रार नेता विनय कटियार हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात के बाद कटियार ने भी खुलेआम ऐलान कर दिया है कि फैजाबाद उनकी सीट है, वह उसी सीट से चुनाव लड़ेंगे। फैजाबाद, अंबेडकर नगर सहित आस-पास की सीटों पर कुर्मी मतदाताओं की बड़ी संख्या है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कुर्मी वोट नहीं मिला था, नतीजतन अयोध्या और उसके आसपास की सीटों पर शिकस्त का सामना करना पड़ा था। 2024 से सबक लेते हुए भाजपा ने 2027 और उसके बाद 2029 में कुर्मी वोट बैंक को साधने की रणनीति बनाई है। विनय कटियार का राजनीति में सक्रिय होना भी उसी रणनीति का हिस्सा है। विनय कटियार ने यदि लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया तो जातीय समीकरण की वजह से भी अयोध्या से बृजभूषण को मौका मिलना मुश्किल होगा। जातीय समीकरण में फैजाबाद बृजभूषण को सौंपना भाजपा के लिए मुफीद नहीं होगा। दबाव की राजनीति कर रहे बृजभूषणराजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बृजभूषण और उनके बेटे ने 2029 में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दबाव की रणनीति अपनाई है। गोंडा के सांसद कीर्तिवर्धन सिंह के केंद्र में मंत्री बनने के बाद क्षेत्र में उनका राजनीतिक कद और प्रभाव बृजभूषण से अधिक हो गया है। उधर, सीएम योगी आदित्यनाथ से भी उनकी राजनीतिक अदावत चल रही है। ऐसे में 2027 और 2029 में उनके परिवार की राजनीति में कोई बाधा नहीं आए इसलिए वह अभी से बयानबाजी कर दबाव बना रहे हैं। ताकि वह कोई नई सीट हासिल करें या नहीं, लेकिन मौजूदा विरासत बची रहे। फैजाबाद के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालिएआजादी के बाद 1957 के आम चुनाव में फैजाबाद में कांग्रेस ने जीत का सिलसिला शुरू किया। फैजाबाद सीट पर अब तक 17 लोकसभा चुनाव हुए हैं, इनमें से 7 बार कांग्रेस ने परचम फहराया है। चार बार सपा, वहीं पांच बार भाजपा, एक बार सीपीआई ने जीत दर्ज की है। इस तरह देखा जाए तो आपातकाल के बाद फैजाबाद पर किसी भी एक राजनीतिक दल का ज्यादा दबदबा नहीं रहा। फैजाबाद की जनता ने समय और परिस्थितियों और जातीय समीकरण के हिसाब से अपना सांसद चुना है। वरिष्ठ पत्रकार त्रियुग नारायण तिवारी मानते हैं- बृजभूषण शरण सिंह का फैजाबाद से पुराना नाता है। वह साकेत महाविद्यालय से पढ़े हैं, यहीं से छात्र राजनीति शुरू की। हनुमानगढ़ी में कुश्ती सीखे हैं। उनके और उनके समर्थकों के जो हाव-भाव हैं, वह बताते हैं कि बृजभूषण आगामी लोकसभा चुनाव फैजाबाद से लड़ना चाहते हैं। वह यहां साधु-संतों के बीच भी काफी सक्रिय हैं, धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ उन्हें सहयोग भी करते हैं। लेकिन अयोध्या का टिकट आरएसएस ही तय करता है। आरएसएस अपने कैडर को ही चुनाव लड़ाना चाहेगा। ऐसी स्थिति में बृजभूषण को अयोध्या से टिकट मिलना मुश्किल होगा। सपा भी पीडीए के कारण अवधेश प्रसाद का टिकट काटकर बृजभूषण को टिकट देना उचित नहीं समझेगी। वहीं, निर्दलीय चुनाव लड़कर बृजभूषण का जीतना मुश्किल होगा। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें... सतुआ पीने वाले बाबा के पास 50 करोड़ का आश्रम:भाई का कत्ल; सतीश तिवारी के जगद्गुरु बनने की कहानी पीली पोशाक। चलने के लिए करोड़ों की लैंड रोवर डिफेंडर, पोर्श टर्बो जैसी गाड़ियां। आंखों पर रे-बैन जैसा ब्रांडेड चश्मा। जिसकी तारीफ अक्सर यूपी के सीएम योगी भी करते हैं। हम बात कर रहे हैं बुंदेलखंड के ललितपुर के छोटे से गांव मसौरा से निकले सतीश तिवारी की। सतीश पहली बार दीक्षा लेने के बाद संतोष दास बन गए। पढ़ें पूरी खबर
सब जू. राष्ट्रीय रग्बी बालिका में बिहार क्वार्टर फाइनल में
भुवनेश्वर के कलिंग स्टेडियम में आयोजित सब जूनियर राष्ट्रीय रग्बी बालिका प्रतियोगिता में बिहार की टीम शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई है। सबसे पहले झारखंड से मुकाबला हुआ। इसमें बिहार ने झारखंड को 67-0 से हराया। बिहार की खुशी 21 व रोशनी ने 22 स्कोर किए। दूसरा मैच मणिपुर से हुआ, जिसमें बिहार ने मणिपुर को 64-0 से हराया। प्री क्वार्टर फाइनल में झारखंड और बिहार का मुकाबला हुआ। बिहार ने झारखंड को 56-0 से हराया। खुशी ने 7, रौशनी ने 5, कोमल ने 7, खुशबू ने 7, आकांक्षा ने 10, अंगीता ने 05, स्कोर किए। इस जीत के साथ ही बिहार की टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई। क्वार्टर फाइनल शनिवार को दादर औैर नगर हवेली व दमन-दीव से होगा। ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री सह संरक्षक रग्बी फुटबॉल एसोसिएशन ऑफ बिहार के श्रवण कुमार, विधान परिषद सदस्य सह अध्यक्ष रग्बी फुटबॉल एसोसिएशन ऑफ बिहार संजय मयूख, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवींद्रन शंकरण, बिहार राज्य पथ विकास निगम के महानिदेशक शीर्षत कपिल अशोक, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक रविंद्र नाथ चौधरी, रग्बी फुटबॉल एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव पंकज कुमार ज्योति ने बधाई दी है।
रजिस्ट्रेशन से लेकर दवा वितरण तक सबकुछ ऑनलाइन होगा
प्रमंडलीय आयुक्त सह रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष अनिमेष कुमार पराशर ने शुक्रवार को एनएमसीएच की व्यवस्था को और अधिक हाईटेक और पारदर्शी बनाने का ब्लूप्रिंट तैयार किया। आयुक्त कार्यालय में आयोजित शासी निकाय की बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को पूरी प्रक्रिया को डिजिटल मोड पर लाने का कड़ा निर्देश दिया है। प्रमंडलीय आयुक्त ने अधीक्षक डॉ. रश्मि प्रसाद को निर्देश दिया कि मरीजों का निबंधन, भर्ती प्रक्रिया, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और विभिन्न विभागों के बीच दवा वितरण की पूरी चेन को ऑनलाइन किया जाए। इससे न केवल कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि जवाबदेही भी तय होगी। उन्होंने बीएमएसआईसीएल को अस्पताल के लंबित निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने को कहा। सालाना 12 लाख मरीजों के इलाज का टारगेट आयुक्त ने एनएमसीएच की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान में यहां सालाना लगभग 6.28 लाख मरीजों का ओपीडी में इलाज होता है। उन्होंने इस संख्या को दोगुना कर 12.57 लाख करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में 1 साल में 6,28,600+ ओपीडी, 81 हजार यूएसजी और 1 लाख से ज्यादा एक्स-रे हुआ है। इस पर अधीक्षक ने कहा िक एक महीने के भीतर इस लक्ष्य की दिशा में सकारात्मक प्रगति दिखेगी। स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़कर ही हम अंतिम व्यक्ति तक बेहतर इलाज पहुंचा सकते हैं। एनएमसीएच में मरीजों का भारी दबाव है, इसलिए यहां की व्यवस्थाओं को अधिक संवेदनशील और पारदर्शी बनाना जरूरी है। — अनिमेष कुमार पराशर, प्रमंडलीय आयुक्त
प्रदेश में झोला छाप डॉक्टर की अब खैर नहीं है। साथ ही निजी दंत अस्पताल में मरीज का गलत इलाज करने और अनुचित व्यवहार करना भारी पड़ सकता है। मरीज या परिजन की ओर से शिकायत करने पर जांच में मामला सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी। राजस्थान स्टेट डेंटल काउंसिल (आरएसडीसी) जयपुर ने 44 दंत चिकित्सक और एक विधि विशेषज्ञ समेत एथिक्स कमेटी का गठन किया है। जिसमें दस जिलों से अनुभवी और स्थानीय डेंटिस्ट को एथिक्स कमेटी में सदस्य नियु्क्त किया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में राजस्थान स्टेट डेंटल काउंसिल में 12 हजार से ज्यादा दंत चिकित्सक पंजीकृत हैं। राजस्थान स्टेट काउंसिल में 12 हजार से ज्यादा दंत चिकित्सक हैं पंजीकृत एथिक्स कमेटी के सदस्य डॉ. संदीप मीणा के अनुसार कमेटी का मुख्य कार्य पंजीकृत दंत चिकित्सक पेशेवर आचरण और नैतिकता के मानकों का पालन करें। डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया दिल्ली से मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही बीडीएस या एमडीएस की डिग्री लेकर प्रेक्टिस करने वाला ही योग्य दंत चिकित्सक माना जाता है। साथ ही जिस राज्य में प्रेक्टिस कर रहा है, उसकी स्टेट डेंटल काउंसिल में पंजीकृत व नवीनीकरण अनिवार्य है। अन्यथा वह झोलाछाप की श्रेणी में ही माना जाता है। ऐसे रहेगी नजर एथिक्स कमेटी में डॉ. एच.एल.गुप्ता (अध्यक्ष,आरएसडीसी),डॉ.संकल्प मित्तल, डॉ. कुलदीप तिवारी, डॉ. हरीश भारद्वाज, डॉ. जतिन्द्र सिंह वालिया, डॉ. आलोक भारद्वाज, डॉ. धर्मेन्द्र शर्मा, डॉ. उमेश हिमानी, डॉ. एसआर. चौधरी, डॉ.किशोर वर्मा, डॉ.अंशुल मोहन माथुर, डॉ.प्रदीप शर्मा समेत जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, भीलवाड़ा, भरतपुर, अलवर, जैसलमेर, दौसा, सीकर जिलों के 44 सदस्य नियुक्त हैं। इनकी स्थानीय स्तर पर नजर रहेगी। स्टेट काउंसिल को किसी तरह की शिकायत आने पर स्थानीय स्तर पर जांच करके आरएसडीसी को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। विशेषज्ञों से राय लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी। दंत चिकित्सकों की क्वालिटी मेंटेन रखने और झोलाछाप पर नियंत्रण के लिए एथिक्स कमेटी का गठन कर जिलों से 40 से अधिक दंत चिकित्सकों को शामिल किया है। इससे जांच करके कार्रवाई करना आसान होगा। -डॉ.संकल्प मित्तल, रजिस्ट्रार, राजस्थान स्टेट डेंटल काउंसिल
गरीबी और बाल विवाह जैसी बाधाओं से पढ़ाई छोड़ने वाली छात्राएं अब शिक्षा से रोशन होंगी
बेटियों को समाज की बंदिशें पढ़ने नहीं देती हैं। इससे हर साल सैकड़ों बेटियां बीच में पढ़ाई छोड़ देती हैं। लेकिन अब उनके सपनों को उड़ान देने के लिए सेकेंड चांस दिया जा रहा है। सेकंड चांस से मैट्रिक फेल करने या बीच में पढ़ाई छोड़ने वाली बेटियों को दोबारा मैट्रिक की परीक्षा दिलाई जा रही है। राज्य की कई संस्थाएं सेकेंड चांस कार्यक्रम चलाकर बेटियों की उच्च शिक्षा की राह आसान बना रही है। प्रथम और सेंटर डायरेक्ट की ओर से 1500 से अधिक बेटियां मैट्रिक की परीक्षा देने जा रही हैं। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, बी बॉस और एनआईओएस के माध्यम से ये बेटियां मैट्रिक की परीक्षा देंगी। इस साल रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित सफीना हुसैन द्वारा चलाए जा रहे अभियान एजुकेट गर्ल की ओर इस कार्यक्रम को सहायता दी जा रही है। घर-घर जाकर ऐसी बेटियों की तलाश की जाती है : सेंटर डायरेक्टर की स्नेहा बताती हैं कि इन बेटियों को तलाश करना आसान नहीं होता है। कई बेटियां कम उम्र में ब्याह दी जाती है, कई गर्भवती होती हैं और किसी को एक से दो बच्चे होते हैं। पढ़ाई के लिए इनके परिवार से बात की जाती है। मैट्रिक क्यों पास करना जरूरी है, यह भी बताया जाता है। जब परिवार वाले मानते हैं तो एक जगह ऐसी बेटियों को मैट्रिक परीक्षा की नि:शुल्क तैयारी कराई जाती है। इसमें कम्युनिटी स्तर पर काम करने वाले युवाओं की भूमिका सबसे अहम होती है। हर दिन घर जाकर अपडेट लेना। अंत में बी बॉस के सेंटर पर लाने से लेकर ठहराने की व्यवस्था की जाती है। वह बताती हैं कि सीतामढ़ी जिले की सामाजिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली 800 से अधिक छात्राओं ने बिहार बोर्ड ओपन स्कूल के अंतर्गत 10वीं की परीक्षा पिछले साल दिसंबर में दी थी। अगली परीक्षा जून में होने जा रही है। ये सभी छात्राएं कभी गरीबी, बाल विवाह, कम उम्र में गर्भधारण एवं अन्य सामाजिक बाधाओं के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हुई थीं।
भारत-न्यूजीलैंड एकदिवसीय क्रिकेट मैच रविवार को होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा। डे-नाइट मुकाबले के लिए पुलिस ने शुक्रवार को ट्रैफिक प्लान जारी किया। इसके मुताबिक दोपहर 12 बजे से रेसकोर्स रोड और स्टेडियम के आसपास 1 किमी में सभी प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग रहेगी। रेसकोर्स रोड पर ट्रैफिक की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। डीसीपी आनंद कलादगी ने बताया मैच शुरू होने के 2 घंटे पहले यानी दोपहर 12 बजे से ट्रैफिक प्लान लागू हो जाएगा। मैच शुरू हो जाने के बाद ट्रैफिक सुचारु रहेगा, लेकिन मैच खत्म होने से 1 घंटे पहले और खत्म होने के 1 घंटे बाद तक डायवर्शन प्लान फिर लागू रहेगा। हुकमचंद घंटाघर व पंचम की फैल की ओर से आने वाले दर्शकों का प्रवेश जंजीरावाला चौराहा से होगा। लैंटर्न तरफ से आने वाले दर्शक पैदल ही स्टेडियम आ सकते हैं। टिकट धारी वाहनों को छोड़कर किसी भी वाहन का प्रवेश स्टेडियम की ओर प्रतिबंधित लैंटर्न से जंजीरावाला रोड पर भी नहीं जा सकेंगे(केवल टिकटधारी/ इमरजेंसी वाहनों को छोड़कर) ट्रैफिक डायवर्शन यहां इन मार्गों से गुजरने से बचें पासधारकों की पार्किंग 1. यशवंत क्लब पार्किंग2. खेल प्रशाल व आईटीसी पार्किंग3. बास्केट बॉल कॉम्प्लेक्स पार्किंग4. विवेकानंद स्कूल पार्किंग5. आईडीए परिसर पार्किंग बगैर पासधारी के लिए1. बाल विनय मंदिर स्कूल2. एसजीएसआईटीएस कैंपस3. पंचम की फैल स्थित मैदान(यहां पहले आओ, पहले पाओ)
ब्लैक मनी को व्हाइट करने वाले गिरोह के 10 गिरफ्तार
पटना पुलिस ने ब्लैक मनी को व्हाइट करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े 10 शातिरों को दानापुर के पूर्वी गोला रोड स्थित होटल कियान रेसिडेंसी में छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया। यह गिरोह साइबर फ्रॉड भी करता है। गिरफ्तार 10 लोगों में पटना का एक युवक आदर्श भी था। कमीशन को लेकर आदर्श का इन लोगों से विवाद हो गया। उसके बाद आदर्श के साथ मारपीट की गई और उसे बोरिंग रोड में लाकर छोड़ दिया। आदर्श ने सबसे पहले एसकेपुरी थाने का यह सूचना दी कि उसका अपहरण हो गया है। उससे फिरौती के लिए 2.50 लाख की मांग की गई थी। 25 हजार देने पर छोड़ा गया। एसकेपुरी थानेदार जितेंद्र राणा को पूछताछ में बताया कि दानापुर में सभी अपहर्ता बैठे हैं। उसके बाद एसकेपुरी थाने की पुलिस उसे लेकर दानापुर गई और होटल में छापेमारी कर 10 शातिरों को गिरफ्तार कर लिया। उनमें चार केरल, दो पटना, दो गया और एक-एक गुजरात एवं बिहार के औरंगाबाद का है। होटल से पुलिस ने 38 एटीएम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, 14 आधार कार्ड, 8 सिम कार्ड, 7 पैन कार्ड, ओेमान की करेंसी, एक पासपोर्ट, एक वीजा समेत कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बरामद किए हैं। दानापुर एसडीपीओे वन शिवम धाकड़ ने बताया कि इनके पास से बरामद मोबाइल, एटीएम कार्ड, चेकबुक और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। केरल और गुजरात पुलिस को भी इसकी सूचना दी जाएगी। शेल कंपनियों से रकम निकाल करता था सफेद शातिरों का यह गिरोह पढ़ा-लिखा है। सभी इंटरनेट फ्रेंडली हैं। यह गिरोह शेल कंपनियों से रकम एटीएम और चेक बुक से निकालता है। फिर उस रकम को दूसरे के खाते में भेज सफेद करता है। बदमाशों ने 10-10 हजार देकर खाते खुलवाए। उनसे एटीएम कार्ड और चेकबुक ले लिया। इन्हीं खातों में शेल कंपनियों में रकम डालने के बाद निकाला जाता है। फिर कहीं और भेज दिया दिया जाता है। इन लोगों को शेल कंपनियां 10-15 प्रतिशत कमीशन देती है। इस गिरोह का देश के कई राज्यों में नेटवर्क है। ये पकड़े गए
कान्हा की नगरी वृन्दावन में ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के भक्तों के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर' के निर्माण की दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए भूमि की पहली रजिस्ट्री सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर गठित हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से कॉरिडोर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस परियोजना से न केवल दर्शन सरल होंगे, बल्कि समूचे ब्रज क्षेत्र के विकास को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। स्थानीय परिवार ने की रजिस्ट्री श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर निर्माण के लिए आज बिहारी पुरा क्षेत्र की संपत्ति संख्या- 25 के एक भाग (69.26 वर्ग मीटर) की रजिस्ट्री तहसीलदार सदर के पक्ष में की गई। यति गोस्वामी, अभिलाष गोस्वामी और अनिकेत गोस्वामी ने इस कार्य हेतु सहर्ष अपनी भूमि का विक्रय- विलेख (सेल डीड) निष्पादित किया। जिला मजिस्ट्रेट चन्द्र प्रकाश सिंह और अपर जिलाधिकारी डॉ पंकज कुमार वर्मा के प्रयासों से यह पहली रजिस्ट्री हुई। परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मेल उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार गठित इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक कुमार की अध्यक्षता में प्रशासन, पुलिस, पुरातत्व विभाग और गोस्वामी समाज के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति ने मंदिर के गोस्वामियों, सेवायतों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों के साथ निरंतर बैठक कर सभी के सुझावों को इस योजना में शामिल किया है। यह कॉरिडोर वृंदावन की प्राचीन दिव्यता को बनाए रखते हुए आधुनिक जरूरतों को पूरा करेगा। इस भव्य निर्माण से ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान मिलेगी और ठाकुर जी के भक्तों के लिए दर्शन की राह आसान हो जाएगी। प्रस्तावित कॉरिडोर में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित वातावरण, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और सुगम प्रवेश- निकासी द्वार बनाए जाएंगे, जिससे संकरी गलियों में होने वाली भीड़ का दबाव कम होगा। धार्मिक पर्यटन और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार कॉरिडोर के निर्माण से वृन्दावन में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को होगा। नए होटलों, रेस्टोरेंटों और दुकानों के खुलने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। समिति ने यह भी घोषणा की है कि जो लोग स्वेच्छा से कॉरिडोर हेतु अपनी जमीन पहले प्रदान करेंगे, उन्हें भविष्य में दी जाने वाली सुविधाओं में वरीयता दी जाएगी। सुरक्षित और सुविधाजनक होंगे ठाकुर जी के दर्शन अभी तक श्रद्धालुओं को वृंदावन की संकरी गलियों के कारण भारी परेशानी और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ता था। कॉरिडोर बनने के बाद श्री बांके बिहारी जी के दर्शन अत्यंत सुलभ हो जाएंगे। यह प्रोजेक्ट न केवल वृन्दावन की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखेगा, बल्कि आधुनिक तीर्थयात्रियों की जरूरतों को भी पूरा करेगा। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि इस पवित्र कार्य में सभी अपना सहयोग दें ताकि ब्रज की महिमा वैश्विक पटल पर और अधिक चमके। स्थानीय निवासी जता रहे विरोध बांके बिहारी कॉरिडोर और मंदिर न्यास को लेकर मंदिर के गोस्वामी और स्थानीय निवासी अपना विरोध जता रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है मामला सर्वोच्च न्यायालय में है ऐसे शाशन और प्रशासन कैसे निर्णय ले सकता है। वहीँ स्थानीय निवासियों ने बताया कि जिस यति गोस्वामी नाम की महिला ने अपनी भूमि दी है उनका बांके बिहारी मंदिर गोस्वामी परिवार और मंदिर की सेवा पूजा से कोई लेना देना नहीं है।
कंबोडिया दूतावास को बताएंगे युवक की प्रताड़ना की कहानी
कंबोडिया से जान बचाकर लौटे युवक अतुल कुमार के मामले की जांच साइबर थाने की पुलिस ने शुरू कर दी है। उसके परिवार और उससे पूरी जानकारी ली गई है। पुलिस पूरी डिटेल एसएसपी और पुलिस मुख्यालय के माध्यम से थाईलैंड और कंबोडिया के दिल्ली स्थित दूतावास को भेजेगी। अतुल 5 माह बंधक रहने और मानिसक रूप से प्रताड़ित होने के बाद कंबोडिया से पटना लौटा। वापस होने से पहले उसने 3.16 लाख रुपए सरगना को किसी तरह दिए थे। सरगना चीन का रहने वाला है। अतुल अनीसाबाद में रहता है। साइबर थाना के डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि अतुल को मुंबई के कल्याण स्थित एक प्लेसमेंट एजेंसी ने सिंगापुर में जॉब दिलाने का झांसा दिया था। अतुल उसके झांसे में आ गया। सिंगापुर जाने की बजाय उसे थाईलैंड भेज दिया। थाईलैंड में साइबर अपराधियों ने उसे कब्जे में लेकर कंबोडिया के साइबर अपराधियों को 3.16 लाख रुपए में बेच दिया और फिर वहीं उससे साइबर फ्रॉड कराने लगे। विरोध करने पर मारपीट, बिजली का करंट समेत अन्य तरह से प्रताड़ित किया जाने लगा। किसी तरह उसने चीन के साइबर सरगना से अपने कैंप में संपर्क किया और 3.16 लाख देकर वहां से छूटा। अतुल का मोबाइल भी वहीं रख लिया गया। पुलिस कल्याण के एजेंसी का सुराग लगाने में जुटी है। अब भी फंसे हैं कई युवक अतुल वहां अकेला नहीं फंसा नहीं था। इसके अलावा बिहार और देश के कई लोग थाईलैंड, कंबोडिया और दक्षिण एशिया पूर्वी देशों में फंसे हुए हैं। भारत सरकार की मदद से आर्थिक अपराध ईकाई इन देशों में फंसे 44 लोगों का साइबर स्लेवरी से निकालकर घर तक पहुंचा चुकी है। जिस थाने के युवक थे, वहां केस भी दर्ज किया गया। दलाल ही युवकों को फंसा का प्लेसमेंट एजेंसी के यहां ले जाता है। पासपोर्ट समेत अन्य दस्तावेज भी बनवाता है।
जुगाड़... उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं होगा तब भी बोर्ड-निगम में स्कीम का पैसा नहीं रुकेगा
पटना बोर्ड, निगम, सोसाइटी और आयोग में योजनाओं के खर्च का पैसा उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा किए बिना भी नहीं रुकेगा। वित्त विभाग ने इसका जुगाड़ निकाला है। इसके तहत योजनाओं के लिए पैसे का लेन-देन बैंक की जगह पीएल खातों से करने के लिए कहा गया है। जिन बोर्ड, निगम, आयोग और सोसाइटी के पास किसी खास स्कीम के लिए पीएल खाता नहीं है, उन्हें जल्द पीएल खाता खोलने के लिए कहा गया है। राज्य सरकार की ओर से अनुदान के रूप मेंं प्राप्त राशि या वित्तीय सहायता अब पीएल खाते के माध्यम से ही वितरण के लिए इन एजेंसियों को कहा गया है। वित्त विभाग के विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल की ओर से सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव को जारी पत्र में कहा गया है कि बैंक के बजाय पीएल खाते से वित्तीय व्यवहार करने से कैश बैलेंस की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखेगा। इससे उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं होने की स्थिति में सहायता राशि नहीं रुकेगी। सहायता राशि के लिए उपयोगिता प्रमाणपत्र पर निर्भरता भी कम होगी। विशेष सचिव ने लिखा है कि बोर्ड, निगम, सोसाइटी और आयोग को राज्य सरकार की ओर से समय-समय पर अनुदान एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। समीक्षा के क्रम में यह पता चला है कि कई संस्थानों द्वारा राज्य सरकार से प्राप्त राशि को विभिन्न बैंक खातों में जमा कर उसका व्यय किया जाता है। इस स्थिति में सुधार कर बैंक खातों की जगह पीएल एकाउंट में ले जाने की जरूरत है।
नए वाहनों की खरीद को बढ़ावा देने के लिए परिवहन विभाग की ओर से लागू की गई स्क्रैप पॉलिसी ‘स्क्रैप’ में है। नई पॉलिसी में पुराने वाहनों के स्क्रैप के बदले नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन में छूट 25 फीसदी से 50 फीसदी करने को कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। विभाग ने इस छूट को तो लागू नहीं किया, उल्टा अधिकतम छूट 1 लाख रुपए तक ही कर दी। ऐसे में वाहन खरीदने वालों को नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि नई स्क्रैप पॉलिसी में न लग्जरी और न ही छोटी कार खरीदने वालों को फायदा हुआ। इसमें दोनों को ही तरह के वाहन मालिकों को नुकसान हो रहा है। इधर, विभाग का कहना है कि छूट को विचार किया जा रहा है। छूट बढ़ाने पर विचार चल रहा है नई स्क्रैप पॉलिसी लागू हो गई है। वन टाइम रोड टैक्स छूट अभी 25 प्रतिशत ही है। इसमें कुछ बदलाव नहीं किया है। इसमें बढ़ोतरी को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है। पॉलिसी में वन टाइम रोड टैक्स में छूट अप-टू 50 प्रतिशत है। वहीं अब रोड टैक्स पर मिलने वाली अधिकतम छूट 1 लाख रुपए होगी।-ओम प्रकाश बुनकार, अति. परिवहन आयुक्त इधर, स्क्रैप सेंटर संचालक और फोर्टी अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने बताया कि नई पॉलिसी के बाद से वाहनों काे स्क्रैप कराने काे लेकर पूछताछ बढ़ी है। पॉलिसी अधिसूचित हाेने के बाद पुराने वाहनों के स्क्रैपिंग बढ़ने की उम्मीद है।
कांग्रेस विधायकों की रिपोर्ट:जहरीला पानी पीने को मजबूर थे भागीरथपुरा के रहवासी
भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई 24 मौतों के मामले में प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने विस्तृत जांच कर रिपोर्ट कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भेजी है। औपचारिक रूप से शनिवार को भी यह रिपोर्ट उन्हें दी जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जनवरी 2026 को पूर्व सांसद सज्जन सिंह वर्मा, विधायक महेश परमार और विधायक प्रताप ग्रेवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भागीरथपुरा पहुंचा और पीड़ित परिवारों, स्थानीय नागरिकों से बातचीत की। जांच में सामने आया कि क्षेत्र के लोग कई वर्षों से मल-मूत्र युक्त जहरीला पानी पीने को मजबूर थे। पुलिस चौकी के पास बने सार्वजनिक शौचालय के सेप्टिक टैंक की व्यवस्था नहीं होने से मानव अपशिष्ट जमीन में रिसता रहा और पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण पूरा जल नेटवर्क दूषित हो गया। यह गड़बड़ियां भी बताईं
22 साल से एमपी की सत्ता में काबिज बीजेपी अब अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए एक नई व्यवस्था शुरू करने जा रही है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश कार्यालय में सहयोग सेल की व्यवस्था शुरू की है। हेमंत खंडेलवाल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी प्रदेश कार्यालय में नेताओं कार्यकर्ताओं की भीड़ लग रही थी। इनमें कई ऐसे कार्यकर्ता भी भोपाल आ रहे थे जिनकी समस्याओं का निराकरण जिला स्तर पर ही हो सकता है। प्रदेश स्तर पर लगने वाली भीड़ को कम करने और कार्यकर्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए खंडेलवाल के निर्देश पर सहयोग सेल बनाने की शुरुआत की गई है। इस सहयोग सेल में प्रदेश संयोजक और जिला संयोजक नियुक्त किए जाएंगे। सहयोग सेल में रिटायर्ड आईएएस अफसर भी शामिल करने पर विचार चल रहा है। जिला कार्यालयों में पदाधिकारियों के बैठने के दिन तयखंडेलवाल के निर्देश पर भाजपा के जिला पदाधिकारियों के जिला कार्यालय में बैठने के दिन तय किए जा रहे हैं। जिला अध्यक्ष के लिए भी दिन तय किया जा रहा है कि जिला अध्यक्ष से लेकर कौन से जिला पदाधिकारी किस दिन कार्यालय में बैठकर आम लोगों और कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे। ऐसे काम करेगी सहयोग सेलजिला कार्यालय में आने वाली समस्याएं यदि प्रशासनिक हैं तो उन्हें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों में भेजकर समाधान कराया जाएगा। यदि किसी कार्यकर्ता की समस्या पार्टी संगठन से संबंधित है तो जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी उसका समाधान कराएंगे। जिन मामलों का निराकरण जिला स्तर पर नहीं हो पा रहा है तो ऐसे मामलों को प्रदेश कार्यालय की सहयोग सेल के पास भेजा जाएगा। इनमें प्रशासनिक समस्याएं और संगठन दोनों तरह के मामलों का निराकरण किया जाएगा। प्रदेश कार्यालय में रोज बैठ दो घंटे बैठ रहे मंत्रीबीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मप्र सरकार के मंत्रियों के प्रदेश कार्यालय में बैठने का रोस्टर बनाया है। इस व्यवस्था में सोमवार से शुक्रवार तक एक मंत्री दोपहर एक बजे से तीन बजे तक प्रदेश कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं से संवाद करके उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। अब सहयोग सेल के जरिए आने वाले मामलों को सुलझाने के लिए संबंधित विभागों के मंत्रियों और प्रदेश पदाधिकारियों की जवाबदारी तय की जाएगी। पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच का माध्यम बनेगी सहयोग सेलप्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन द्वारा इस संबंध में सभी भाजपा जिला अध्यक्षों को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह सहयोग सेल पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद, समन्वय एवं समस्याओं के समाधान का एक स्थायी माध्यम बनेगा। किन मामलों को मिलेगा सहयोग सेल के माध्यम से समाधानपत्र के अनुसार, सहयोग सेल के अंतर्गत वही विषय प्रस्तुत किए जाएंगे जिनका समाधान जिला अथवा संभाग स्तर पर संभव न हो और जिनमें मंत्रीगण अथवा प्रदेश पदाधिकारियों के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। भोपाल आने वाले आगंतुकों के प्रशासनिक, विभागीय, जनहित से जुड़े एवं संगठनात्मक विषयों को निर्धारित प्रारूप, संक्षिप्त और तथ्यपरक रूप में संकलित किया जाएगा। समय-सारणी और अनुशासन पर जोरनिर्देशों में कहा है कि मंत्रीगण एवं प्रदेश पदाधिकारी प्रदेश कार्यालय में अपनी घोषित उपलब्धता, दिन और समय का अनिवार्य रूप से पालन करेंगे। किसी कार्यक्रम की तिथि या समय में परिवर्तन होने की स्थिति में पार्टी द्वारा सोशल मीडिया माध्यम से सूचना दी जाएगी। जिला स्तर पर समन्वय की नई व्यवस्थासभी जिला अध्यक्षों को निर्देशित किया गया है कि वे “सहयोग सेल” से संबंधित संपूर्ण जानकारी जिला पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों, मोर्चा एवं प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों तथा सक्रिय कार्यकर्ताओं तक सुनिश्चित रूप से पहुंचाएं। इसके साथ ही प्रत्येक जिला अध्यक्ष अपने जिले से एक जिला सहयोग समन्वयक नामांकित करेंगे, जो प्रदेश कार्यालय से संपर्क, विषय निर्धारण, समन्वय एवं अनुवर्ती कार्यवाही का दायित्व निभाएगा।
एमआईसी बैठक:सराफा में 69 दुकानें ही रहेंगी, 550 किमी पुरानी पेयजल लाइनें बदलेंगे
भागीरथपुरा में दूषित जल से बीमारी फैलने की गंभीर घटना के बाद नगर निगम पानी वितरण व सीवरेज व्यवस्था सुधारने पर जोर दे रहा है। शुक्रवार को महापौर परिषद की बैठक में इस संबंध में अहम निर्णय लिए गए। पानी की शुद्धता जांच के लिए लैब में केमिस्ट भर्ती की जाएगी। जलप्रदाय और सीवरेज नेटवर्क को बढ़ाने के लिए अमृत-2 पर नगर निगम 1530 करोड़ रुपए का लोन लेगा। कुत्तों के रखने व पालन पोषण के लिए योजना व मेट्रो स्टेशन के लिए शिवाजी मार्केट पार्किंग की बिल्डिंग तोड़ने का प्रस्ताव व 60 करोड़ से ज्यादा के निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए। सराफा पर तय हुआ कि यहां चौपाटी में 69 दुकानें ही रहेंगी। बाकी दुकानों के लिए जांच के बाद निर्णय लेंगे। 40 नई टंकियों का निर्माण करेंगे बैठक में तय हुआ कि अमृत-2 योजना में पानी व सीवरेज व्यवस्था के नेटवर्क व इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाएंगे। यह 50 साल तक पानी की आपूर्ति के लिए पर्याप्त होगी। जलूद में नया इंटेकवेल, मुख्य लाइनें, वितरण पाइप, 40 नई टंकियां बनाएंगे। विकसित हो रहे शहर में नया नेटवर्क डालेंगे। 550 किमी से ज्यादा पुरानी लाइनों को भी बदला जाएगा। यह योजना 2400 करोड़ की है। अध्यक्षता महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने की। बैठक में निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर, राजेश उदावत, निरंजनसिंह चौहान, अश्विनी शुक्ल, अभिषेक शर्मा, नंदकिशोर पहाड़िया, राकेश जैन, मनीष शर्मा मामा व प्रिया डांगी मौजूद रहे। सौंदर्यीकरण के लिए रोटरी बनाएंगे, ग्रीन बेल्ट सुधारेंगे
ममता बनर्जी के ईडी की जांच रोकने, फाइल छीनने पर विपक्ष मौन क्यों : रविशंकर प्रसाद
सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जिस तरह से पश्चिम बंगाल सरकार ने ईडी को जांच में रोकने की कोशिश की, उससे गंभीर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा कार्यालय में प्रेसवार्ता में रविशंकर ने कहा कि ईडी की यह छापेमारी ममता बनर्जी के आवास, दफ्तर, टीएमसी के कार्यालय या किसी नेता के घर पर नहीं हो रही थी। यह छापेमारी आई पैक कंपनी के कार्यालय में हो रही थी। यह पहली बार हुआ कि कोई मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों के साथ भ्रष्टाचार, कोयला घोटाला के मामले में ईडी जांच कर रही हो और उसे रोके और फाइल छीनकर ले आए। सांसद ने विपक्ष पर तंज कसा- संविधान की रक्षा करने की बात करने वाले मौन क्यों हैं? राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, स्टालिन या वामपंथी दल रोज संविधान की बात करते हैं तो भ्रष्टाचार के मामले में जांच के दौरान एक मुख्यमंत्री फाइल छीन ले तो वे कब बोलेंगे?
मुन्नाचक के हॉस्टल में रह कर नीट की तैयारी करने वाली छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान हैं। ब्लीडिंग पाई गई है। गाल, गर्दन, माथा, बाईं भौंह के ऊपर, बाएं कंधे के ऊपरी हिस्से, बाईं बांह के अंदरूनी हिस्से (कोहनी के नीचे) और दाहिनी कलाई के ऊपर 2 सेमी तक नाखून से नोचने के निशान थे। इसके अलावा शरीर पर चोट के गहरे नीले-हरे रंग के निशान पाए गए हैं। उसके साथ जबर्दस्ती गई। वह खुद को बचाने के लिए लड़ती रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके साथ सेक्सुअल असॉल्ट से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौत के कारण का खुलासा नहीं किया गया है। इस बीच, डीजीपी विनय कुमार ने एसआईटी गठित कर दी है। सात सदस्यीय एसआईटी का नेतृत्व सिटी एसपी पूर्वी परिचय कुमार करेंगे। इसमें एससपी सदर वन अभिनव, एसडीपीओे सचिवालय वन डॉ. अनु कुमारी, एसडीपीओ टू सचिवालय साकेत कुमार, परसा बाजार की थानेदार मेनका रानी, जक्कनपुर के थानेदार ऋतुराज कुमार सिंह, रामकृष्णानगर थानेदार राजीव कुमार, कदमकुआं थानेदार जन्मेजय राय को शामिल किया गया है। डीजीपी ने बताया कि इस केस का सुपरविजन सेंट्रल रेंज के आईजी जितेंद्र राणा इस केस की रोज समीक्षा करेंगे। परिजनों ने कहा-गैंगरेप हुआ, सीबीआई जांच हो छात्रा के मामा और अन्य परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस की जांच पर सवाल उठाया। कहा-उसके साथ गैंगरेप हुआ। सीबीआई जांच हो। कहा-प्राइवेट अस्पताल की रिपोर्ट पर पुलिस ने कैसे कह दिया कि नींद की गोली खाने से मौत हुई? उसके कंधे, हाथ समेत 8-10 जगहों पर खरोंच के निशान हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रभात अस्पताल के एक डॉक्टर भी इस मामले की लीपापोती कर रहे हैं। केस मैनेज करने के लिए हमें हॉस्टल की ओर से 10 लाख रुपए दिए जा रहे थे। छात्रा ने इसी साल नीट क्वालिफाई की थी, पर उसे डेंटल मिला था। एम्स के एक डॉक्टर को पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिखाई गई तो उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट अस्पष्ट है। सेक्सुअल असॉल्ट से इनकार नहीं किया जा सकता...यह कहना अपने आप में क्लियर नहीं है कि उसके साथ रेप हुआ या नहीं? एम्स की ओपिनियन के लिए पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, छात्रा के इलाज का सारा पुर्जा, जहां इलाज हुआ वहां के डॉक्टरों की रिपोर्ट, इन डॉक्टरों के बयान की रिकॉर्डिंग भेजी गई है। वहीं एफएसएल जांच के लिए वेजाइना का स्वाब, विसरा, उसके कपड़े, बेडशीट और अन्य साक्ष्य भेजे गए हैं। एसएसपी ने पहले कहा-नींद की गोली खाने से मौत, अब कह रहे-जांच का दायरा बढ़ाया एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि अबतक की जांच में छात्रा के साथ हॉस्टल में कोई घटना होने की बात नहीं सामने नहीं आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। जहानाबाद भी पुलिस की टीम गई है। छात्रा के पटना जंक्शन से हॉस्टल पहुंचने तक का सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पास है। उनके परिजन चाहें तो हम उन्हें दिखा सकते हैं। एक और एक्सपर्ट ओपिनियन के लिए एम्स भेजा गया है। एफएसएल जांच हो रही है। इससे पहले एसएसपी ने कहा था-नींद की गोली के ओवरडोज से छात्रा की मौत हुई है। सीडीआर में एक का कॉल कई बार पुलिस का यू-टर्न पटना पुलिस ने अपने बयान से यू-टर्न ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही जांच शुरू कर दी गई है। एम्स ने भी पीएमसीएच की रिपोर्ट पर मुहर लगा दी तो पटना पुलिस की जांच पटना से लेकर जहानाबाद तक उलझ जाएगी। इसलिए पुलिस की टीम जहानाबाद गई। पुलिस छात्रा के मोबाइल की सीडीआर खंगाल चुकी है। उसके मोबाइल से एक ही नंबर से कई बार बात हुई है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कहीं हॉस्टल के बाहर या जहानाबाद में उसके साथ कोई घटना तो नहीं हुई?
दानापुर-गांधी मैदान की हवा प्रदूषित
धूप निकलते ही हवा में धूल-कण की मात्रा से तेजी से बढ़ने लगी है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ गया है। दानापुर में एक्यूआई लेवल 214 और गांधी मैदान इलाके में 210 रहा। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानक के मुताबिक, 200 से अधिक एक्यूआई लेवल स्वास्थ्य के लिए खराब है। पीएम 2.5 और पीएम 10 भी मानक से तीन गुना दर्ज किया गया है। वायु प्रदूषण विशेषज्ञों ने कहा कि धूप निकलने से सड़कों पर जमा धूल-कण सूख जाते हैं। हल्की हवा या वाहनों के चलने से हवा में उड़ने लगते हैं। इससे वातावरण में पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ जाती है। इससे वायु प्रदूषण का स्तर अधिक हो जाता है। जनरल फिजिशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने कहा-वायु प्रदूषण से फेफड़े और दिल के मरीजों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा होता है। सांस लेने में दिक्कत, खांसी, गले में जलन, थकान जैसी समस्याएं होती हैं। इसलिए मास्क पहनना और बाहर निकलने से बचना जरूरी है। पटना में इलाकावार एक्यूआई लेवल
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को इंदौर आएंगे। वे सुबह 9.30 बजे दिल्ली से रवाना होकर सुबह 11 बजे स्पेशल फ्लाइट से इंदौर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। 11.45 बजे बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचेंगे और मरीजों से मुलाकात के बाद 12.45 बजे भागीरथपुरा पहुंचेंगे। यहां दूषित पानी से प्रभावित परिवारों से मिलेंगे। यहीं पर मीडिया से चर्चा करने के बाद 1.45 बजे रवाना होंगे और 2.15 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। 2.30 बजे इंदौर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। हालांकि अब जनप्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित बैठक में वे शामिल नहीं होंगे। इसकी अनुमति नहीं मिली है। 11 बजे एयरपोर्ट पर ही प्रदेश कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन भी होगा। यहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित कई बड़े नेता भी साथ में होंगे। आज से 31 जनवरी तक कांग्रेस का आंदोलन प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने बताया कि प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण बैठक को रद्द करना पड़ा है। पीसीसी ने 17 से 31 जनवरी 2026 तक आंदोलन की घोषणा की है। यह आंदोलन मनरेगा में बदलाव कर कानूनी अधिकारों की बहाली, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और प्रदेश में बिगड़ती जल गुणवत्ता के विरोध में किया जाएगा। शहरी जिला कांग्रेस कमेटियां भागीरथपुरा की घटना और जल गुणवत्ता के मुद्दे पर जिला स्तर पर एक दिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक उपवास रखेगी। दूसरा चरण 18 से 31 जनवरी तक चलेगा, जिसमें जनजागरूकता अभियान, जल गुणवत्ता से जुड़े तथ्य और साक्ष्य जुटाने, दूषित जल स्रोतों, सीवेज लाइनों और औद्योगिक अपशिष्ट क्षेत्रों के आसपास पानी की जांच जैसे कार्यक्रम किए जाएंगे। अपनी रिपोर्ट देगा कांग्रेस विधायक दल प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राजेश चौकसे के मुताबिक भागीरथपुरा मामले में प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने जांच कमेटी बनाई थी। सज्जन सिंह वर्मा, प्रताप ग्रेवाल, महेश परमार जांच रिपोर्ट राहुल गांधी को देंगे।
अप्रैल से दीघा-कंगन घाट के बीच गंगा में चलेगी वाटर मेट्रो
शहर के लोग अप्रैल से गंगा में वाटर मेट्रो का लुत्फ उठा सकेंगे। पर्यटन निगम द्वारा चार्जिंग स्टेशन निर्माण एजेंसी का चयन करने के लिए टेंडर निकाला गया है। फरवरी से दीघा, गांधी घाट और कंगन घाट पर चार्जिंग स्टेशन का निर्माण होगा। दीघा से चलने के बाद गांधी घाट पर वाटर मेट्रो रुकेगी। वहां से कंगन घाट जाएगी। टिकट बुकिंग की सुविधा पर्यटन निगम की बेवसाइट पर मिलेगी। साथ ही मोबाइल एप भी लांच होगा। न्यूनतम किराया 50 और अधिकतम 100 रुपए हो सकता है। क्रूज की तरह यह सुबह 10 से रात 8 बजे तक चलेगी। वाटर मेट्रो बोट पर करीब 100 लोग सवार हो सकेंगे। पटना और सोनपुर के बीच भी परिचालन की योजना है। वाटर मेट्रो की खास बातें
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में गईं दोनों महिला पार्षदों पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है। सुमन की भाभी कमला शर्मा पर आपराधिक मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके बाद पार्षद पूनम ने आरोप लगाया है कि उसे भी धमकियां दी जा रही हैं कि तुम्हें या फिर तुम्हारे पति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। इसी कारण दोनों पर पुलिस का पहरा लगाया गया है। पार्षद पूनम ने दैनिक भास्कर एप से बातचीत करते हुए कहा कि, पूरे चार साल किसी बड़े नेता ने हमारी कोई सुध नहीं ली है। यही कारण है कि वह पार्टी छोड़कर भाजपा में गई हैं। वह अकेली ऐसी पार्षद नहीं हैं, जो AAP छोड़कर दूसरी पार्टी में गईं हैं। पहले भी कई पार्षद इस तरह से पार्टी छोड़ चुके हैं, मगर हमें ही टारगेट बनाया जा रहा है। पूनम बोलीं- किसी हालत में वापसी नहीं, भाजपा प्रत्याशी को वोट देंगीं सवाल - आपने आम आदमी पार्टी छोड़ भाजपा जॉइन की, क्या कोई मनाने आया हैं ?जवाब- मैंने पार्टी छोड़ी है, इसका कारण यह था कि हमारी किसी ने कोई सुध बुध नहीं ली है, मैंने भाजपा इसलिए जॉइन की है, क्योंकि मुझे अपने एरिया के काम करवाने हैं। सवाल- आपने पार्टी छोड़ी तो कोई मनाने आया, यह बात सामने आ रही थी कि आपराधिक मामला दर्ज होगा?जवाब- जब मैंने बीजेपी जॉइन की थी, तीन चार दिन तक पार्षद आते रहे, उनके योगेश धींगड़ा, जसविंदर, हरदीप समेत कुछ अन्य पार्षद मुझसे बात करने आए थे और पार्टी में वापसी करने के लिए कह रहे थे। सवाल- आपकी दूसरी साथी सुमन के परिजनों पर मामला दर्ज किया गया, क्या आपको भी ऐसी कोई धमकी आई?जवाब- मेरे पति सेक्टर 25 के कम्युनिटी सेंटर में बैठे हुए थे, मैं अपने घर पर थी, योगेश धींगड़ा आए और सीधा ऊपर चले गए और मुझे कहने लगे कि मैं आपको लेने आया हूं। वह कह रहे थे कि मैंने धोखा दिया है, जबकि धोखा उनकी तरफ से दिया गया है, मेरे साथ खड़े होने की बात तो करते रहे, मगर किया कुछ नहीं। अब जब मेयर पद का चुनाव आया है तो मुझे पूछ रहे हो, तब तो आप कहते थे कि मुझे कुछ पता नहीं है। उनकी तरफ से मेरे पति को इस संबंधी धमकाया गया था, वैसा हो सकता है जैसा सुमन के साथ किया है। सवाल- अभी क्या इरादा है आपका, आगे चुनाव हैं मेयर पद के, वापसी हो सकती है ?जवाब- बिल्कुल भी नहीं, इंसान बार बार धोखे नहीं खाएगा, मैंने बहुत कुछ देख लिया, अब उस पार्टी में वापस नहीं जाना है, हां वह मुझे इसके लिए हरेश कर रहे हैं। सवाल- आपको पुलिस की सुरक्षा कब से दी गई है?जवाब- जॉइनिंग के दो- तीन दिन बाद तो ठीक रहा है, मगर जैसे ही सुमन जी के साथ हुआ, तो मैंने सुरक्षा मांगी थी और मेरे साथ एक पुलिस मुलाजिम को चौबीस घंटे के लिए लगाया गया है। भाजपा में शामिल हुई हैं AAP की दो पार्षद आम आदमी पार्टी की दो महिला पार्षद सुमन व पूनम 25 दिसंबर 2025 को आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई थीं। इसके कुछ ही समय बाद पुलिस ने सुमन की भाभी कोमल शर्मा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। तभी से भाजपा को डर है कि कहीं पूनम पर दबाव न बना दिया जाए, या पुलिस किसी केस में उन्हें गिरफ्तार न कर ले। इसलिए उन्हें पुलिस का पहरा दिया गया है। 22 को होने हैं मेयर पद के नामांकन, 29 को वोटिंग 29 जनवरी को होने वाले मेयर पद के चुनाव के लिए 22 जनवरी को नामांकन होगा। इस समय भाजपा के पास 18 वोट हैं, जबकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के कुल वोट मिलाकर 18 वोट बनते हैं। एक पार्षद की वोट से मेयर पद चुना जाना है। इसलिए ही यह जोड़-तोड़ की नीति चल रही है।
दिल्ली की ट्रेनों में 22 से पार्सल बुकिंग नहीं, सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर उठाया कदम
गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा के मद्देनजर 22 जनवरी से पटना जंक्शन सहित पूर्व मध्य रेल के सभी स्टेशनों से दिल्ली के लिए पार्सल बुकिंग अस्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। रेलवे के अनुसार, 26 जनवरी तक दिल्ली के किसी भी रेलवे स्टेशन पर पार्सल भेजने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। यह निर्णय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर यह कदम उठाया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके और गणतंत्र दिवस समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। रेल अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि 26 जनवरी के बाद सुरक्षा स्थिति सामान्य होते ही दिल्ली के लिए पार्सल बुकिंग फिर से शुरू कर दी जाएगी। रेलवे ने यात्रियों और व्यापारियों से अपील की है कि वे इस अवधि के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था करें और रेलवे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। व्यापारियों को असुविधा इस अवधि में किसी भी प्रकार का पार्सल चाहे वह व्यावसायिक हो या व्यक्तिगत दिल्ली के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्सल सेवा पर रोक लगने से पटना और आसपास के क्षेत्रों के व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और छोटे व्यवसायियों को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। बड़ी संख्या में व्यापारी दिल्ली के बाजारों में माल भेजने के लिए रेलवे पार्सल सेवा पर निर्भर रहते हैं।
न्यूजीलैंड के साथ सीरीज का आखिरी मैच खेलने इंदौर पहुंची टीम इंडिया बहुत ही सख्त डाइट फॉलो करती है। होटल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कप्तान शुभमन गिल अपने साथ तीन लाख रुपए की एक मशीन लेकर आए हैं, जिसमें आर-ओ और पैक्ड वॉटर को और प्यूरीफाई किया जाता है। यह मशीन उनके कमरे में ही रखी है, जिसके बारे में होटल स्टाफ को भी ज्यादा जानकारी नहीं है। खिलाड़ियों की डाइट को देखते हुए बीसीसीआई ने होटल में स्पेशल शेफ भेजा है। सुबह जिम से लेकर लंच और डिनर में भारतीय खिलाड़ी अलग-अलग तरह की डाइट लेते हैं। शेफ हर खिलाड़ी की डाइट के हिसाब से भोजन बनाता है। शुक्रवार को भारतीय खिलाड़ियों ने रेस्ट किया, न्यूजीलैंड ने प्रैक्टिस की। शनिवार को भारतीय टीम भी प्रैक्टिस करेगी। विराट की डाइट में हरी ग्रिल्ड सब्जियां, स्प्राउट्स और सूप विराट कोहली की डाइट में उबला और स्टीम्ड खाना शामिल रहता है। उनके नाश्ते में स्प्राउट, नींबू के साथ ग्रीन टी और खाने में हरी ग्रील्ड सब्जियां, दाल, रायता और सूप शामिल होता है। रोहित शर्मा की डाइट में बादाम, स्प्राउट, ओट्स, फ्रूट, पनीर, सब्जी, दाल और चावल शामिल रहता है। इसके साथ ही अन्य खिलाड़ी भोजन में चिकन, मछली, अंडे, ब्राउन राइस, दालें, नट्स के साथ हाइड्रेट रहने के लिए नारियल पानी और ग्रीन टी लेते हैं। एमपीसीए को फीस के रूप में ही मिलेंगे डेढ़ करोड़ रुपए होलकर स्टेडियम में वनडे इंटरनेशनल मैच की मेजबानी के लिए एमपीसीए को बीसीसीआई करीब 1.5 करोड़ फीस देता है। इसके अलावा टिकट बिक्री, कॉर्पोरेट बॉक्स, स्पॉन्सरशिप, स्टेडियम में ब्रांडिंग और विज्ञापन से भी आय होती है। यही फंड बाद में संभागीय क्रिकेट की गतिविधियों, ग्राउंड मेंटेनेंस, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण आदि पर खर्च किया जाता है।
राज्य के 4000 और पटना के 1200 से ज्यादा सरकारी डॉक्टर कर रहे निजी प्रैक्टिस
बिहार सरकार ने सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ में की है। इस फैसले से निजी प्रैक्टिस कर रहे 4000 से अधिक डॉक्टरों की परेशानी बढ़ सकती है। विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों के मुताबिक, राज्य में 4,000 से अधिक, जबकि राजधानी में 1200 से अधिक सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हैं। वर्ष 2011-12 में भी निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की घोषणा की गई थी, लेकिन डॉक्टरों के भारी विरोध के कारण वापस लेना पड़ा था। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और गरीब मरीज सरकारी व्यवस्था पर भरोसा करेंगे। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की अक्सर शिकायत रहती है कि सीनियर डॉक्टर सुबह में हाजिरी लगाकर दोपहर बाद अपनी निजी क्लिनिक में व्यस्त हो जाते हैं। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने कहा-नॉन प्रैक्टिस अलाउंस मिले : सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस बंद करने के निर्णय का बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने स्वागत किया है। संघ की बैठक में डॉक्टरों ने सरकार के इस कदम को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, संघ ने कहा कि निजी प्रैक्टिस पर रोक के साथ डॉक्टरों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है। सरकारी चिकित्सकों को कम से कम 25 प्रतिशत नॉन प्रैक्टिस अलाउंस देने की मांग की। साथ ही महंगाई भत्ता पर भी एनपीए लागू करने और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों के लिए विशेष ग्रामीण भत्ता देने की मांग रखी। संघ ने यह भी आग्रह किया कि सरकार इस नियम को फरवरी-मार्च से सख्ती से लागू करे, ताकि व्यवस्था में स्पष्टता बनी रहे।
बिहार में फार्मासिस्ट के लिए सिर्फ ‘डिप्लोमा इन फार्मेसी’ मान्य, 2473 पदों का रास्ता साफ
बिहार में फार्मासिस्ट नियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पटना हाईकोर्ट के 72 पन्नों के आदेश पर मुहर लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य में फार्मासिस्ट पद पर नियुक्ति के लिए अनिवार्य योग्यता केवल ‘डिप्लोमा इन फार्मेसी’ होगी। इसके साथ ही बी.फार्म, एम.फार्म और फार्म-डी डिग्रीधारियों की छह अपीलें खारिज कर दी गईं। इससे बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा 2473 फार्मासिस्ट पदों पर नियमित नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। दरअरसल, बिहार में फार्मासिस्ट भर्ती को लेकर 2019 से विवाद चल रहा था। बिहार सरकार ने फार्मासिस्ट पद के लिए डिप्लोमा इन फार्मेसी को अनिवार्य माना था। विरोध में पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के 72 पन्नों के आदेश पर मुहर लगाई

