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महानदी जल विवाद सुलझाने के लिए दिल्ली पहुंचे छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय

देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त जल संसाधन के बंटवारे और अंतर-राज्यीय विवादों को लेकर एक बहुत ही बड़ी, संवेदनशील और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) और पड़ोसी राज्य के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद (Mahanadi Water Dispute) को हमेशा के लिए खत्म करने और एक स्थायी समाधान निकालने की दिशा में अब निर्णायक कदम उठाए जाने शुरू हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) विशेष रूप से इसी गंभीर मुद्दे पर उच्च स्तरीय चर्चा करने और केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने के लिए राजधानी दिल्ली पहुंच चुके हैं। दिल्ली पहुंचते ही मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक बहुत ही संतुलित, परिपक्व और बड़ा बयान देते हुए यह स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के हितों, किसानों के अधिकारों और पड़ोसी राज्य के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और दोनों राज्यों के समग्र हित में जो भी न्यायसंगत फैसला होगा, उसे पूरी सहजता के साथ स्वीकार किया जाएगा। आज के इस विस्तृत, राजनीतिक विश्लेषणात्मक और जमीनी आलेख में हम आपको महानदी के पानी पर चल रहे इस वर्षों पुराने विवाद, मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के सियासी मायने और इसके संभावित समाधान के सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।महानदी जल विवाद का पूरा इतिहास और दोनों राज्यों के बीच क्यों है खींचतान?महानदी छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्य की जीवनदायिनी नदियां में से एक है, जिस पर लाखों किसानों की खेती-किसानी, पेयजल व्यवस्था और उद्योगों का भविष्य टिका हुआ है। पिछले कई वर्षों से इस बात को लेकर दोनों राज्यों के बीच लगातार वैचारिक और कानूनी खींचतान चली आ रही है कि नदी के पानी का भंडारण, बहाव और वितरण किस अनुपात में किया जाए ताकि किसी भी राज्य के किसानों या आम नागरिकों को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े। छत्तीसगढ़ का यह तर्क रहा है कि ऊपरी हिस्से में होने के कारण राज्य के जल स्रोतों और परियोजनाओं पर उसका भी न्यायसंगत अधिकार है, जबकि दूसरे पक्ष की अपनी तकनीकी और भौगोलिक चिंताएं रही हैं। इस मामले को सुलझाने के लिए पहले भी कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, ट्रिब्यूनल का गठन किया जा चुका है और कानूनी लड़ाइयां भी लड़ी गई हैं, लेकिन अब राजनीतिक इच्छाशक्ति और उच्च स्तरीय संवाद के जरिए इस जटिल पहेली को सुलझाने का एक नया प्रयास शुरू किया गया है।दिल्ली पहुंचे सीएम विष्णु देव साय की केंद्र सरकार के साथ उच्च स्तरीय बैठकेंराजधानी दिल्ली के अपने इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ मंत्रियों, अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ मैराथन बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। इन बैठकों का मुख्य एजेंडा महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (Mahanadi Water Disputes Tribunal) के समक्ष चल रहे मामलों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना और दोनों राज्यों के बीच एक आपसी सहमति (Consensus) का फॉर्मूला तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में यह संदेश दिया है कि टकराव की राजनीति से कभी किसी का भला नहीं होता, इसलिए संवाद के दरवाजे हमेशा खुले रखे जाने चाहिए ताकि विकास और सहयोग का नया रास्ता प्रशस्त हो सके। केंद्र सरकार की मध्यस्थता में हो रही इन बैठकों पर न केवल छत्तीसगढ़ के किसानों की निगाहें टिकी हैं, बल्कि पूरे देश के जल प्रबंधन विशेषज्ञों की पैनी नजर इस बात पर है कि यह ऐतिहासिक विवाद अब किस दिशा में आगे बढ़ता है।छत्तीसगढ़ के किसानों के हितों और जल सुरक्षा को लेकर सरकार का अडिग रुखकिसी भी नदी के पानी के बंटवारे के विवाद में सबसे अहम सवाल उस क्षेत्र के स्थानीय किसानों और आम जनता के अधिकारों का होता है जो अपनी फसल की सिंचाई के लिए पूरी तरह उसी पानी पर निर्भर होते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए इस बात का विशेष रूप से भरोसा दिलाया है कि छत्तीसगढ़ सरकार अपने किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी और राज्य के धान के कटोरे कहे जाने वाले मैदानी इलाकों में पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखा जाएगा। सरकार का यह प्रयास है कि एक तरफ जहां राज्य की जल सुरक्षा पूरी तरह से सुरक्षित रहे, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य के साथ भी भाईचारे और कानूनी दायरे के भीतर रहकर इस विवाद का ऐसा सर्वमान्य हल निकाला जाए जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।विवादों के दौर को पीछे छोड़कर समाधान की ओर बढ़ते कदम साबित होंगे मील का पत्थरभारत जैसे संघीय ढांचे वाले देश में अंतर-राज्यीय जल विवाद अक्सर लंबे समय तक अदालतों और आयोगों में उलझे रहते हैं, जिससे विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा दिखाई गई यह सकारात्मक राजनीतिक इच्छाशक्ति और खुलापन इस बात का प्रमाण है कि संवाद और सहयोग के जरिए बड़े से बड़े मतभेदों को भी आसानी से सुलझाया जा सकता है। आने वाले कुछ हफ्तों में इस दिशा में कुछ और ठोस कानूनी और प्रशासनिक परिणाम सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है, जो महानदी के पानी पर दशकों से चल रहे इस गतिरोध को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ की जनता और विशेष रूप से अन्नदाताओं को अब इस बात की उम्मीद बंधने लगी है कि कड़े संघर्ष और विवादों का यह दौर जल्द ही खत्म होगा और राज्य के विकास का रास्ता और अधिक प्रशस्त हो जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Oct 2026 2:20 pm

Chhattisgarh Guest Lecturer Policy: अतिथि व्याख्याता भर्ती में बड़ा बदलाव, समान अंक होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी को मिलेगी वरीयता

Chhattisgarh Guest Lecturer Policy: अतिथि व्याख्याता भर्ती में बड़ा बदलाव, समान अंक होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी को मिलेगी वरीयता

समाचार नामा 2 Oct 2026 10:30 am

Chhattisgarh Rain Alert: भारी बारिश से रायपुर-दुर्ग समेत कई जिलों में बाढ़, नदियां उफान पर; सड़क और रेल सेवाएं प्रभावित

Chhattisgarh Rain Alert: भारी बारिश से रायपुर-दुर्ग समेत कई जिलों में बाढ़, नदियां उफान पर; सड़क और रेल सेवाएं प्रभावित

समाचार नामा 2 Oct 2026 10:28 am

Chhattisgarh Weather: छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश से हालात बिगड़े, इंद्रावती नदी उफान पर; निचले इलाकों में अलर्ट

Chhattisgarh Weather: छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश से हालात बिगड़े, इंद्रावती नदी उफान पर; निचले इलाकों में अलर्ट

समाचार नामा 2 Oct 2026 10:26 am

CG Police Transfer: छत्तीसगढ़ पुलिस इंस्पेक्टर से कांस्टेबल तक बड़ी संख्या में ट्रांसफर, DGP ने जारी किए आदेश

Chhattisgarh Police Transfer: छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने 1 अक्टूबर 2026 को एक साथ 6 अलग-अलग ट्रांसफर आदेश जारी किए हैं।

दैनिक जागरण 2 Oct 2026 9:17 am

Mahanadi water dispute: ओडिशा और Chhattisgarh समाधान के करीब पहुंचे, बोले Mohan Charan Majhi

भुवनेश्वर, एक अक्टूबर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के साथ लंबे समय से जारी महानदी जल बंटवारे के विवाद के समाधान के करीब पहुंच रही है और यह अन्य राज्यों के लिए ‘विवाद समाधान का एक मॉडल’ होगा। माझी ने यह बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शामिल होने के बाद कही। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल भी शामिल हुए। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने मांग की कि बैठक में लिये गए फैसलों को सार्वजनिक किया जाए। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और तकनीकी विशेषज्ञ भी मौजूद थे। दोनों राज्यों के बीच महानदी के जल के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद है। महानदी का उद्गम मध्य प्रदेश में होता है और यह छत्तीसगढ़ से होकर बहने के बाद समुद्र में मिलती है। माझी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘आज की बैठक बहुत सकारात्मक रही और बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। हम समाधान के करीब पहुंच रहे हैं और जल्द ही एक अंतिम रूपरेखा की घोषणा किए जाने की उम्मीद है।’’उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने विवाद के समाधान के लिए केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा लिए जाने वाले किसी भी फैसले का पालन करने पर सहमति जताई है। ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक बयान में माझी ने उम्मीद जताई कि दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जायेगा। माझी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘डबल इंजन’ सरकार न केवल देश और राज्य के विकास में तेजी ला रही है, बल्कि अंतरराज्यीय विवादों के समाधान का रास्ता भी तैयार कर रही है। मुझे उम्मीद है कि यह समाधान अन्य राज्यों के लिए विवाद समाधान का एक मॉडल बनेगा।’’महानदी को ओडिशा की जीवनरेखा बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नदी का पानी राज्य में करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। माझी ने कहा, ‘‘बैठक में मैंने सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, जलविद्युत उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और पर्यावरण संबंधी चिंताओं समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए और ओडिशा के लिए पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की वकालत की।’’उन्होंने दावा किया कि 2024 में ओडिशा और 2023 में छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद दोनों राज्यों में महानदी विवाद के समाधान की प्रक्रिया तेज हुई है। उन्होंने कहा कि कानूनी कार्यवाही के साथ-साथ प्रशासनिक और राजनीतिक समाधान के रास्ते भी व्यापक हुए हैं। इस संबंध में किए गए प्रयासों का ब्योरा देते हुए माझी ने बताया कि जुलाई-अगस्त 2025 में दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच चर्चा हुई थी और इस दौरान दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों और जल संसाधन सचिवों के स्तर पर कई बैठकें हुई हैं। इस बीच, भुवनेश्वर में विपक्षी बीजद ने संवाददाता सम्मेलन में मांग की कि दिल्ली में हुई बैठक में लिये गए फैसलों को सार्वजनिक किया जाये। बीजद विधायक अरुण कुमार साहू ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘बैठक महज दिखावा नहीं होनी चाहिए। केंद्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार होने के बावजूद ढाई साल बाद भी विवाद वहीं का वहीं है।

प्रभासाक्षी 2 Oct 2026 8:23 am

RDA भूखंड आवंटन पर Chhattisgarh में विवाद, Congress ने मंत्री Kedar Kashyap का इस्तीफा मांगा

रायपुर, एक अक्टूबर छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने राजधानी रायपुर के बाहरी इलाके में प्रस्तावित नगर विकास योजना के तहत राज्य के मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी एक कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया है। कांग्रेस ने वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री कश्यप से इस्तीफे की मांग की और प्रस्तावित आवंटन की स्वतंत्र एवं उच्च-स्तरीय जांच कराने को कहा। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया। यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला और प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड, जिसमें कश्यप की पत्नी शांति कश्यप निदेशक हैं, को कचना में कंपनी के पास मौजूद जमीन के बदले सड्डू में 23,327 वर्ग फुट का भूखंड आवंटित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी की मूल जमीन कचना की नालापारा बस्ती में एक संकरी सड़क पर स्थित है, जहां आने-जाने का रास्ता मुश्किल से छह-सात फुट चौड़ा है और उस जमीन की कीमत कुछ लाख रुपये ही है। उन्होंने बताया कि एमआर-43 नगर विकास योजना के तहत आरडीए ने मालिकों से मूल जमीन लेकर उसके बदले मूल भूखंड के क्षेत्रफल के 40 प्रतिशत के बराबर विकसित भूखंड देने का प्रावधान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरडीए की वेबसाइट पर करीब 23,327 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले भूखंड संख्या 25 को कंपनी को उसकी मूल जमीन के बदले आवंटित किए जाने का उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क विकसित होने के बाद प्रस्तावित भूखंड की कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि कचना की जमीन के बदले सड्डू में भूखंड किस आधार पर दिया जा रहा है। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के प्रावधानों का भी हवाला दिया और सवाल उठाया कि कंपनी को दिया जाने वाला भूखंड उसकी मूल जमीन से सटा हुआ क्यों नहीं है। कांग्रेस ने इस आवंटन की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्च-स्तरीय जांच की मांग की। इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रदेश भाजपा प्रवक्ता शिवनारायण पांडेय ने कहा कि बड़े भूखंड ऐसी जगहों पर आवंटित करना नीतिगत फैसला है, जहां आमतौर पर आवागमन की बेहतर सुविधा हो। उन्होंने कहा कि आरडीए और वरिष्ठ मंत्री कश्यप पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद, मनगढ़ंत और राजनीतिक निराशा से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘नगर विकास योजना कोई नयी अवधारणा नहीं है। जमीन लेने के दो तरीके हैं। एक भूमि अधिग्रहण है, जिसके लिए मुआवजा दिया जाता है और दूसरा जमीन का विकास कर मूल जमीन के क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत हिस्सा जमीन मालिक को वापस देना है। बाकी जमीन का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए किया जाता है।’’पांडेय ने कहा कि बड़े भूखंड बेहतर आवागमन सुविधा वाले क्षेत्रों में देने का निर्णय नीतिगत है। उन्होंने कहा कि मंत्री को भाजपा ने जमीन आवंटित नहीं की है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस सदस्य रिकॉर्ड देखें तो उन्हें पता चलेगा कि कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को इसी योजना के तहत 80 हजार वर्ग फुट का भूखंड आवंटित किया गया था, जो इससे करीब तीन गुना बड़ा है। उन्होंने दावा किया कि नीति के तहत बड़े भूखंड सड़कों के किनारे दिए जाते हैं, जहां आवागमन की सुविधा बेहतर हो, ताकि यातायात संबंधी समस्या पैदा किए बिना व्यावसायिक परियोजनाएं विकसित की जा सकें। पांडेय ने कहा कि जमीन खास तौर पर मंत्री की पत्नी की कंपनी को आवंटित नहीं की गई है और ऐसे 17 लोग हैं जिनके बड़े भूखंडों को फिर से व्यवस्थित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि मंत्री की पत्नी की कंपनी की जमीन विकास योजना लागू होने से पहले से मौजूद थी और योजना तैयार होने के बाद नहीं खरीदी गई थी। आरडीए के उपाध्यक्ष डॉ. जे. पी. शर्मा ने भी पक्षपात के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘‘आवंटन नियमों के अनुसार और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किया गया है, न कि किसी व्यक्ति का चेहरा देखकर। जमीन मालिकों के अनियमित आकार वाले भूखंडों को नियमित आकार के भूखंडों में पुनर्गठित किया गया और अनियमित हिस्से आरडीए ने अपने पास रख लिए।

प्रभासाक्षी 1 Oct 2026 10:42 pm

'कच्चा बादाम' फेम Anjali Arora का बॉलीवुड डेब्यू! Mahakavya Shri Ramayan Katha में निभाएंगी माता सीता का किरदार, टीज़र और रिलीज़ डेट आउट!

'कच्चा बादाम' वायरल ट्रेंड से रातों-रात सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाली मशहूर पर्सनैलिटी अंजलि अरोड़ा (Anjali Arora) अब बड़े पर्दे पर अपनी अदाकारी का जादू चलाने के लिए तैयार हैं। अंजलि अरोड़ा रामायण पर आधारित आगामी फिल्म 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' के साथ अपना फीचर फिल्म डेब्यू करने जा रही हैं। इस फिल्म में वह माता सीता के मुख्य और पवित्र किरदार में नजर आएंगी। फिल्म के मेकर्स ने पहला पोस्टर और टीज़र जारी कर दिया है, जिसमें अंजलि अरोड़ा की माता सीता के रूप में पहली मनमोहक झलक दिखाई गई है। इसे भी पढ़ें: 23 साल बाद Emraan Hasmi की जबरदस्त वापसी, Awarapan 2 की सफलता पर पत्नी परवीन ने कही दिल छू लेने वाली बात फिल्म में देव शर्मा भगवान राम का किरदार निभा रहे हैं। यह फिल्म रामायण पर आधारित है और इसमें महाकाव्य की मुख्य घटनाओं को दिखाया गया है। टीज़र में राम और सीता की शादी, उनके वनवास की यात्रा और रावण की झलकियाँ दिखाई गई हैं। इसे भी पढ़ें: 15 साल बाद Zindagi Na Milegi Dobara के सीक्वल पर Zoya Akhtar का बड़ा खुलासा, स्क्रिप्ट पर शुरू हुआ काम अंजलि अरोड़ा माता सीता का किरदार निभाएंगी अंजलि अरोड़ा 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' में माता सीता का किरदार निभाएंगी। यह उनकी पहली फीचर फिल्म है और यह उस सोशल मीडिया कंटेंट से बिल्कुल अलग है जिससे उन्हें शुरुआती पहचान मिली थी। हाल ही में रिलीज़ हुए टीज़र में भगवान राम के रूप में देव शर्मा के साथ अरोड़ा की भूमिका की एक छोटी सी झलक दिखाई गई है। मेकर्स ने टीज़र में किरदारों की पूरी कहानी का खुलासा नहीं किया है, बल्कि मुख्य किरदारों और रामायण की अहम घटनाओं पर फोकस रखा है। देव शर्मा भगवान राम का किरदार निभाएंगे देव शर्मा को भगवान राम के किरदार के लिए चुना गया है। टीज़र में राम और सीता की शादी और उसके बाद उनके वनवास की यात्रा के दृश्य दिखाए गए हैं। टीज़र में रावण भी नज़र आ रहा है, जिससे पता चलता है कि फिल्म में राम और राक्षस राजा के बीच के संघर्ष को भी दिखाया जाएगा। इस समय रामायण पर आधारित कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, और 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' एक और आने वाली फिल्म है जो राम, सीता और रावण की कहानी को बड़े पर्दे पर लाएगी। 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' के मेकर्स 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' का निर्देशन अभिषेक सिंह ने किया है। फिल्म को प्रकाश महोबिया और संजय बुंदेला ने महोबिया फिल्म्स बैनर के तहत प्रोड्यूस किया है। अजय कनौजिया का AJ फिल्म एंटरटेनमेंट वर्ल्ड इस फिल्म को पेश कर रहा है। फिल्म की शूटिंग हिंदी और छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं में की गई है और इसे दोनों भाषाओं में रिलीज़ किया जाएगा। 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' की रिलीज़ डेट यह फिल्म 25 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। मेकर्स ने पहले पोस्टर और टीज़र के साथ ही रिलीज़ डेट की घोषणा की। इस फ़िल्म में अंजलि अरोड़ा माता सीता के तौर पर फ़ीचर फ़िल्म में डेब्यू करेंगी, जबकि देव शर्मा भगवान राम का किरदार निभाएंगे। फ़िल्म का टीज़र आ चुका है, और अब फ़िल्म की कास्ट, स्केल और रामायण को किस तरह दिखाया गया है, इस बारे में और जानकारी इसके थिएटर में रिलीज़ होने के आस-पास सामने आने की उम्मीद है। Entertainment News Hindi Todayonly at Prabhasakshi 'MAHAKAVYA SHRI RAMAYAN KATHA' FIRST POSTER + TEASER OUT NOW – 25 SEPT 2026 RELEASE IN HINDI & CHHATTISGARHI... The first poster and teaser of #MahakavyaShriRamayanKatha have been unveiled… The film features #DevSharma as Shri Ram and marks #AnjaliArora 's feature-film debut as… pic.twitter.com/oSa8mdBBXT — taran adarsh (@taran_adarsh) August 18, 2026

प्रभासाक्षी 19 Aug 2026 10:39 am

छत्तीसगढ़ 12वीं बोर्ड: पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट हुए जारी, cgbse.nic.in पर करें चेक

Chhattisgarh CGBSE 12th Revaluation Result 2024: छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन(CGBSE) ने छत्तीसगढ़ कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2024 के लिए पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट की घोषणा कर दी है। यहां देखें ड

लाइव हिन्दुस्तान 25 Jun 2024 12:50 pm