JSSC CGL Exam Cancelled: JSSC-CGL रद्द होने चयनित अभ्यर्थियों मार्च, सरकार की बढ़ी टेंशन!
JSSC CGL Exam Cancelled: JSSC-CGL रद्द होने चयनित अभ्यर्थियों मार्च, सरकार की बढ़ी टेंशन!
गाजा की तबाही पर भारत ने जताई चिंता, मदद जारी रखने का किया वादा
भारत ने गाजा की गंभीर मानवीय स्थिति पर चिंता जताई है. रामल्लाह में भारत की सचिव और राजदूत श्रीप्रिया रंगनाथन ने फिलिस्तीन के विदेश मामलों और प्रवासी मामलों के मंत्री डॉ. वारसेन अगाबेकियन शाहिन से मुलाकात की. बातचीत में गाजा के घटनाक्रम, मानवीय जरूरतों, दो-राज्य समाधान और भारत-फिलिस्तीन विकास साझेदारी पर चर्चा हुई.
उच्च न्यायाजय की समयसीमा खत्म, फिर भी कर्मचारियों को डीए नहीं मिला: ढिल्लों
पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का भुगतान नहीं करने तथा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने में देरी करने का आरोप लगाया है
इमरान खान के इलाज पर पाक सरकार को आपत्ति, SC के आदेश को देगी चुनौती
पाकिस्तान की सरकार इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करेगी. कानून मंत्री आजम नजीर तरड़ ने कहा कि जेल में इलाज को लेकर मेडिकल बोर्ड यह तय करता है कि कैदी का इलाज जेल के अंदर हो सकता है या उसे अस्पताल भेजने की जरूरत है.
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Odisha Flood: पांच दिन तक पेड़ से चिपका रहा शख्स, नदी में बहने के बावजूद बचाव दल ने कैसे सुनंदा की जान बाचाई?
Bareilly में Law Student पर 'हलाला' का दबाव बनाने और मारपीट पर FIR
उत्तर प्रदेश के बरेली में विधि की एक छात्रा ने आरोप लगाया कि उसके भाई और भाभी ने तलाकशुदा पति के पास लौटने के लिए उस पर ‘हलाला’ करने का दबाव बनाया और इनकार करने पर उसे पीटा। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। महिला एलएलबी की पढ़ाई कर रही है और बरेली अदालत में एक अधिवक्ता के चैंबर में प्रशिक्षु के तौर पर काम भी करती है। पुलिस के मुताबिक, महिला ने इज्जतनगर थाने में अपने भाइयों मोहम्मद आरिफ व मोहम्मद अरशद, अपनी भाभी ताहिरा व सना उर्फ वली तथा एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इज्जतनगर थाना प्रभारी सुरेश गौतम ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 351(3) (आपराधिक धमकी) समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। महिला ने शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनकी मांग नहीं मानने पर उसे घर से निकालने और नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रविवार को हुए विवाद के दौरान एक आरोपी ने उसका गला दबाया जबकि दूसरे ने लात-घूंसे बरसाए। महिला ने बताया कि उसने अपने पूर्व पति से अदालत के जरिए तलाक लिया है और वह ‘हलाला’ नहीं कराना चाहती। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के कुछ सदस्य उस पर कानून की पढ़ाई और वकालत छोड़ने के लिए भी दबाव बना रहे हैं। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसका पूर्व पति भी उस पर ‘हलाला’ के लिए दबाव डाल रहा है।
Mahua Moitra विवाद में सांसद अरविंद सावंत ने Om Birla को पत्र लिखा
शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना-उबाठा) सांसद अरविंद सावंत ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उन अधिकारियों के आचरण की जांच की मांग की, जिन्होंने पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर जिले में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा से 14 अगस्त की रात को एक सर्किट हाउस को कथित तौर पर खाली करने के लिए कहा था। पत्र में सावंत ने कहा कि महुआ से जुड़ी इस घटना ने एक सांसद के विशेषाधिकार, गरिमा और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा, “मौजूदा सांसद के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई बेहद आपत्तिजनक है और इससे विशेषाधिकार, गरिमा और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। मैं आपसे इस सम्मानित सदन के सदस्यों की गरिमा, अधिकारों और विशेषाधिकारों के संरक्षक के तौर पर मामले में तुरंत दखल देने और संबंधित अधिकारियों को महुआ मोइत्रा की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देने का आग्रह करता हूं।”सावंत ने उन अधिकारियों के आचरण की जांच की भी मांग की, जिन्होंने महुआ से कथित तौर पर सर्किट हाउस से खाली करने के लिए कहा था। उन्होंने अधिकारियों के आचरण को “प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन” करार देते हुए इसके लिए जवाबदेही तय करने की भी मांग की। महुआ ने इस घटना को लेकर बिरला को नादिया के जिलाधिकारी श्रीकांत पल्ली, अपर जिलाधिकारी नृपेंद्र सिंह और नाजरेथ की उपजिलाधिकारी अनामिका बेरा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। तृणमूल सांसद ने आरोप लगाया है कि उन्हें सर्किट हाउस में कमरा आवंटित किए जाने और रात का खाना परोसे जाने के बावजूद देर रात यह कहते हुए कमरा खाली करने के लिए कहा गया कि परिसर वार्षिक रखरखाव और सफाई के लिए बंद है। सावंत ने सर्किट हाउस के बाहर उस समय भीड़ जुटने का भी जिक्र किया, जब महुआ से वहां से जाने के लिए कहा गया था। उन्होंने लिखा, “और भी गंभीर बात यह है कि जब महुआ से देर रात सर्किट हाउस से जाने के लिए कहा जा रहा था, तब परिसर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई, जिसने भड़काऊ नारे लगाए और माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। इससे उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।”मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सांसद के राधाकृष्णन ने भी इस घटना को लेकर बिरला को पत्र लिखा है और मामले की औपचारिक जांच कराने या इसे विशेषाधिकार समिति के पास भेजने की मांग की है।
NGT ने PPCB को जालंधर नगर निगम से 8.4 करोड़ जुर्माना वसूली में ढिलाई पर फटकारा
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) को कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने के लिए जालंधर नगर निगम से 8.4 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूलने में लापरवाही बरतने को लेकर फटकार लगाई है। अधिकरण जालंधर जिले के वारियाना गांव में कचरा निपटान स्थल पर अवैज्ञानिक तरीके से कचरा फेंकने और वहां जमा हुए पुराने कचरे के ढेर से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने 12 अगस्त को दिये गये फैसले में कहा कि पीपीसीबी ने एक रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का पालन न करने के लिए जालंधर नगर निगम पर 9.3 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है। इस आदेश की प्रति मंगलवार को उपलब्ध कराई गई। आदेश में कहा गया है कि कुल जुर्माने की रकम में से, स्थानीय प्रशासन ने पंजाब निगम अवसंरचना विकास कंपनी के ज़रिये सिर्फ़ 90 लाख रुपये जमा किए हैं। अधिकरण ने कहा, ‘‘आठ करोड़ 40 लाख रुपये की वसूली अब भी बाकी है, लेकिन प्रतिवादी संख्या-पांच (पीपीसीबी) के जवाब से इस रकम को वसूलने की किसी गंभीर कोशिश का पता नहीं चलता है।’’अधिकरण ने बोर्ड के वकील की इस बात का संज्ञान लिया कि दो हफ़्ते के अंदर उपायुक्त को एक सूचना भेजी जाएगी, ताकि बचा हुआ जुर्माना ज़मीन के लगान की बकाया राशि के तौर पर वसूला जा सके। एनजीटी ने बोर्ड को यह भी निर्देश दिया कि वह संबंधित स्थल पर मौजूद पुराने कचरे की मात्रा का पता लगाने के लिए मौके पर जांच करे। इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की गयी है।
CM Mohan Charan Majhi ने Odisha flood राहत के लिए 1000 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज की घोषणा की
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बाढ़ से प्रभावित इलाकों के लिए मंगलवार को 1,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज तथा स्थिति सुधरने तक जलमग्न क्षेत्रों से बाहर निकाले गये लोगों के लिए मुफ्त रसोईघर चलाने की घोषणा की। राज्य में एक माह के भीतर दो बार बाढ़ आई है। मुख्यमंत्री ने इसका कारण ‘जून से अब तक हुई 1,100 मिमी बारिश’ को बताया, जबकि अल नीनो मौसम पैटर्न के कारण कम बारिश का अनुमान लगाया गया था। माझी ने कहा, ‘‘ओडिशा में पिछले 25 वर्षों में बारिश की यह मात्रा सबसे अधिक है।’’उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्थिति से सफलतापूर्वक निपट रही है। माझी ने प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘भारत मौसम विज्ञान विभाग की अल नीनो चेतावनी के आधार पर, हम सभी को राज्य में कम बारिश की उम्मीद थी। इसलिए, जलाशयों में पानी जमा करके रखने का निर्देश दिया गया था, ताकि मॉनसून के दौरान कम बारिश होने पर पानी की कमी न हो।’’उन्होंने कहा कि लेकिन मॉनसून की शुरुआत के बाद से राज्य में लगभग 1100 मिमी बारिश हुई है जो राज्य में सामान्य से 34 प्रतिशत ज़्यादा वर्षा है। उन्होंने बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, क्योंझर और केंद्रपाड़ा जिलों में बाढ़ की वर्तमान स्थिति की समीक्षा भी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बाढ़ के दूसरे दौर से छह जिलों में अब तक लगभग 9.40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता है कि ऐसे में भी कोई हताहत न हो। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में करीब 100 लोगों को सांप ने काटा, लेकिन एंटी-वेनम इंजेक्शन आसानी से उपलब्ध होने के कारण वे सभी बच गए।’’जहां बाढ़ के पहले दौर में कम से कम छह लोगों की मौत हुई थी, वहीं सरकार ने इस बार मरने वालों की संख्या की पुष्टि नहीं की थी। माझी ने कहा, ‘‘शुरुआती अनुमान के आधार पर 1,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की गई है। बाढ़ प्रभावित जिलों से नुकसान का विस्तृत आकलन मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध करायी जाएगी।’’मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पैकेज में फसल के नुकसान को लेकर किसानों को खेती से जुड़ी सब्सिडी, बीज की आपूर्ति, ‘लिफ्ट’ सिंचाई परियोजनाओं की मरम्मत और अपनी आजीविका गंवाने वालों को मदद देना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश के कारण राज्य में बाढ़ का यह दूसरा दौर आया है।
Congress नेताओं ने CM Hemant Soren से की मुलाकात, JSSC परीक्षा रद्द करने पर जताया आभार
झारखंड में कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की और ‘‘आंदोलनकारी छात्रों के हित में फैसले लेने’’ के लिए उनका आभार जताया। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। राज्य सरकार ने सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जेएसएससी-संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी, जिसकी आंदोलनकारी छात्र मांग कर रहे थे। इसके साथ ही आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और परिणामों को भी रद्द करने की घोषणा की गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और झारखंड के कांग्रेस प्रभारी के. राजू के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रिमंडल के फैसले की सराहना की और इसे निष्पक्ष भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों व अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। बयान में कहा गया है कि कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री से कहा कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले से प्रभावित छात्रों और अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी और उनके भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होगी। बयान के अनुसार कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य झारखंड के युवाओं और छात्रों के हितों की रक्षा करना है। सोरेन ने कहा, ‘‘राज्य सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर लगातार पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ फैसले लेती रही है और आगे भी ऐसा करती रहेगी।’’प्रतिनिधिमंडल में मंत्री इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह, शिल्पी नेहा तिर्की और विधायक रामेश्वर उरांव, प्रदीप यादव, कुमार जयमंगल, राजेश कच्छप, रामचंद्र सिंह, नमन बिक्सल कोंगाड़ी, भूषण बाड़ा और ममता देवी शामिल थे।
Election Commission ने जारी किए 100 करोड़ Voter ID कार्ड, अमेरिकी राष्ट्रपति ने की प्रशंसा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की चुनाव प्रणाली की तारीफ किए जाने के बाद निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि भारत में करीब 100 करोड़ मतदाताओं को ‘विशेष’ निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने कहा कि भारत में मतदान फोटो पहचान पत्र के आधार पर कराया जाता है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने करीब एक अरब मतदाताओं सहित सभी मतदाताओं को विशेष ईपीआईसी जारी किए हैं। मतदाता एक विशिष्ट वेबसाइट के जरिए अपना ई-ईपीआईसी भी डाउनलोड कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि भारत में करीब 12 लाख मतदान केंद्रों के लिए मतदाता सूचियां तैयार की जाती हैं। इन सूचियों को राज्य सरकार के कर्मचारी बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा तैयार किया जाता है और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) इनका समानांतर रूप से ऑडिट करते हैं। उनके अनुसार, मतदान केंद्रों पर उम्मीदवारों द्वारा नियुक्त मतदान एजेंट भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। इसी तरह, मतगणना के दौरान उम्मीदवारों द्वारा नियुक्त मतगणना एजेंट भी पूरी प्रक्रिया का समानांतर रूप से ऑडिट करते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका में बिना वैध फोटो पहचान पत्र के चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने चुनावी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए अमेरिका में प्रत्येक मतदाता के लिए अनिवार्य फोटो पहचान पत्र की वकालत की। ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत में हाल के आम चुनाव में एक प्रतिशत से भी कम मतदाताओं ने डाक मतपत्र के जरिए मतदान किया और प्रत्येक मतदाता के पास वैध फोटो पहचान दस्तावेज था।
'भैया रोक दो...', लखनऊ में झूला टूटने से 3 भाई-बहन समेत 5 घायल - VIDEO
लखनऊ के इंदिरानगर में सावन महोत्सव के दौरान एक झूले का बकेट अचानक टूटकर गिर गया, जिससे तीन सगे भाई-बहनों समेत 5 लोग घायल हो गए. हादसा उस वक्त हुआ जब अंकिता सिंह अपने भाई सूर्या और बहन नैंसी के साथ झूला झूल रही थीं. घायलों को पास के सुषमा अस्पताल में भर्ती कराया गया.
पेपर लीक पर बड़ी स्ट्राइक, एनटीए ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाले 600 विशेषज्ञ हटाए
नीट-यूजी और यूजीसी-नेट पेपर लीक व गड़बड़ियों के बाद एनटीए ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाले 600 विशेषज्ञों को हटा दिया है।
कैसे हुआ राजीव गांधी से प्यार, सियासत का सफर; संस्मरण में सोनिया गांधी खोलेंगी कई राज
इस साल नवंबर में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की एक किताब आ रही है। इस किताब में वह भारत के नेहरू-गांधी राजनीतिक परिवार का हिस्सा बनने से जुड़ी बातों और त्रासदियों के साथ-साथ सरकार में अपने कामकाज के बारे में स्मृतियों को साझा करेंगी।
सूरत में एक ही परिवार पर फूड पॉइजनिंग का कहर, 5 साल के मासूम की मौत, 4 की हालत गंभीर
सूरत में एक ही परिवार के पांच लोगों की तबीयत फूड पॉइजनिंग के बाद बिगड़ गई. इलाज के दौरान 5 साल की मासूम आर्या की मौत हो गई.
केरलम में iPhone और बाइक के शौक में 13 साल की पोती बनी कातिल, दोस्तों के साथ मिलकर की दादा की हत्या
केरल के अलाप्पुझा में एक 65 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या के मामले में उनकी 13 साल की पोती संदिग्ध है।
अतीक अहमद के करीबी बिल्डर जेपी दुबे पर एक्शन, 25 करोड़ की जमीन कुर्क
प्रयागराज कमिश्नरेट पुलिस ने माफिया अतीक अहमद के करीबी बिल्डर जेपी दुबे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी करीब 25 करोड़ रुपये कीमत की अवैध संपत्ति गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कुर्क कर ली है.
घाघरा नदी खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर, गोंडा के 5 गांवों में बाढ़
गोंडा में घाघरा नदी खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. तरबगंज तहसील के ऐली, गढ़ी और बहादुरपुर समेत पांच गांव बाढ़ की चपेट में हैं. करीब 9 हजार की आबादी के सामने संकट खड़ा हो गया है. घरों में पानी भर गया है और खेतों में खड़ी फसलें डूब गई हैं. रोजमर्रा के कामों के लिए ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.
शिक्षकों की भर्ती निकली, फिर भी बिहार में छात्रों का आंदोलन जारी, तेजस्वी करेंगे राजभवन मार्च
बिहार में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं. इसलिए नौकरी, परीक्षा और पेपर लीक का मुद्दा आने वाले समय में भी बड़ा रह सकता है. फिलहाल छात्र आंदोलन के मंच पर राजनीतिक नेता पहुंच चुके हैं.
वैश्विक वित्तीय संस्था JP Morgan से जुड़ी एक चेतावनी के मुताबिक, वर्ष 2027 में दुनिया को बड़े खाद्य आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ सकता है। भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया उन देशों में शामिल हो सकते हैं, जहां इसका असर सबसे गंभीर रहने की आशंका है। इस ...
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर आरोपियों की पहचान उजागर करने या अपमानजनक तरीके से दिखाने वाले पोस्ट के खिलाफ केंद्र, राज्यों और सोशल मीडिया कंपनियों से जवाब मांगा है।
लखनऊ सावन मेले में बड़ा हादसा, झूला टूटकर गिरा; कई घायल, दो युवतियों की हालत गंभीर
लखनऊ में बड़ा हादसा हुआ है. इलाके में चल रहे सावन महोत्सव में एक झूला टूटकर गिर गया. इस हादसे में कई लोग घायल हो गए.
भारत में ओवर-स्टे कर मुसीबत में फंसी महिला, 27 साल US में रही, अब दवाइयों को भी तरसी
वेंकट वासमसेट्टी, जो 27 साल से अमेरिका में रह रही हैं और नॉर्थ कैरोलिना की पब्लिक स्कूल में विशेष जरूरतों वाले बच्चों की टीचर हैं, को ICE ने हिरासत में लिया है.
आजादी के बाद से लगातार बढ़ा भारत का वोटिंग ट्रेंड, चुनाव आयोग ने जारी किए आंकड़े
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, आजादी के बाद से भारत में मतदान प्रतिशत और डाले गए मतों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जो मजबूत लोकतांत्रिक भागीदारी दर्शाती है।
गोवा सरकार ने पत्रकार तरुण तेजपाल की 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में सजा बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
पीएम मोदी 17 सितंबर को करेंगे सेमीकॉन इंडिया के पांचवें संस्करण का उद्घाटन
मंत्रालय ने बताया कि 'सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम' थीम वाली तीन दिन की कॉन्फ्रेंस और प्रदर्शनी 17 से 19 सितंबर के बीच आयोजित की जाएगी.
PNG कनेक्शन को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, नई योजना के तहत बढ़ेगी पाइपलाइन गैस
सरकार ने घरों में पीएनजी कनेक्शन तेजी से पहुंचाने के लिए एक प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इसके तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को अतिरिक्त एपीएम गैस मिलेगी।
राजस्थान में रिश्वत लेने पहुंच गए अयोध्या के 4 पुलिसवाले, सस्पेंड
राजस्थान के एक पीड़ित को साइबर फ्रॉड केस में जेल भेजने की धमकी देकर अयोध्या पुलिस के जवानों ने 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी. 2.80 लाख रुपये में सौदा तय होने के बाद अयोध्या पुलिस की टीम खुद पैसे लेने सीकर पहुंच गई.
'सुप्रीम कोर्ट को सूची नहीं दे रही केंद्र सरकार', छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों पर CJP का आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के प्रयासों का विरोध करने का आरोप लगाया है।
6 साल की बच्ची को बेलन और तार से पीटने का आरोप
गुजरात के जूनागढ़ में 6 साल की बच्ची के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है. आरोप है कि मां ने उसे बेलन और बिजली के तार से पीटा. पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस और बाल सुरक्षा टीम पहुंची. बच्ची को सुरक्षित स्थान पर रखा गया और मां के खिलाफ केस दर्ज किया गया.
अबू अल-दुहुर एयरबेस पर हमले के बाद इजरायल पर बरसा अमेरिका, बोला- इसकी कोई जरूरत ही नहीं थी
इजरायली सेना ने हमलों पर कोई बयान नहीं दिया है. जबकि सीरिया के रक्षा मंत्रालय ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया.
360 डिग्री कैमरा, मसाज वाली सीट्स, नई Skoda Slavia की एंट्री
स्कोडा ने अपनी सबसे सस्ती सेडान का फेसलिफ्ट इंट्रोड्यूस कर दिया है. कंपनी स्कोडा स्लाविया के फेसलिफ्ट से पर्दा उठाया है, जिसमें 360 डिग्री कैमरा, मसाज वाली रियर सीट्स के साथ एक नया गियरबॉक्स भी जोड़ा गया है. कार के एक्सटीरियर में भी कई बदलाव किए गए हैं, जिससे ये और भी ज्यादा आकर्षक बन गई है. आइए जानते हैं इसकी खास बातें.
भारत-जापान की साझेदारी से यूपी में बढ़ेगा निवेश और रोजगार, बोले CM योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में आयोजित इंडिया-जापान बिजनेस कॉन्क्लेव में जापानी उद्योगपतियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत की है. उन्होंने यूपी में ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, ग्रीन टेक्नोलॉजी और हाइड्रोजन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर जोर दिया.
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी से दिल्ली में सियासी संग्राम, केजरीवाल बोले- BJP के पाप का घड़ा भरा
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सियासी टकराव तेज हो गया है. अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह ने कार्रवाई को बीजेपी की दबाव की राजनीति बताया, जबकि बीजेपी नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार के मामले में जवाबदेही की कार्रवाई करार दिया.
NTA Reform: प्रश्नपत्रों में चूक रोकने के लिए 4-Tier Security और 600 नए Experts का मास्टरप्लान
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने परीक्षाओं की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव शुरू कर दिए हैं। एजेंसी ने अपने विशेषज्ञ पैनल से करीब 600 विशेषज्ञों को हटाकर नए विशेषज्ञों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही अब हर प्रश्नपत्र को परीक्षा से पहले चार अलग-अलग स्तरों पर जांचने का फैसला किया गया है। मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक में एनटीए के महानिदेशक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एजेंसी की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि अगले दो से तीन सप्ताह में एनटीए में 20 से 25 नए अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा एजेंसी के कार्यालयों को भी नए परिसरों में स्थानांतरित करने का काम तेजी से किया जा रहा है। संवेदनशील परीक्षा संबंधी कामकाज की सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की टीमें भी तैनात की जा रही हैं। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए जरूरी सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था समय पर पूरी की जाए। बैठक में एनटीए की व्यापक भर्ती योजना की भी समीक्षा की गई है। प्रश्नपत्रों की चार स्तरों पर जांच का फैसला परीक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इसके तहत प्रश्नपत्र तैयार होने के अलग-अलग चरणों में उनकी दोबारा जांच की जाएगी। इसमें सवालों की तथ्यात्मक शुद्धता, भाषा, अनुवाद और छपाई से जुड़ी गलतियों को देखा जाएगा। अंतिम रूप देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रश्नों में कोई गंभीर त्रुटि या अनावश्यक दोहराव न रह जाए। गौरतलब है कि यह बदलाव जून 2026 में यूजीसी-नेट की अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र की परीक्षाओं में सामने आई गंभीर गड़बड़ियों के बाद किए जा रहे हैं। इन तीन प्रश्नपत्रों को रद्द करके दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया था। परीक्षार्थियों की ओर से कई शिकायतें मिलने के बाद गठित समिति ने प्रश्नपत्रों की जांच की थी। जांच में तथ्यात्मक, टंकण और अनुवाद संबंधी कई गलतियां मिली थीं। कुछ सवाल गलत तरीके से तैयार किए गए थे, जबकि कई प्रश्न दोहराए भी गए थे। समिति ने माना था कि गलतियां इतनी अधिक थीं कि केवल विवादित सवाल हटाकर उत्तर कुंजी की प्रक्रिया के जरिए समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता था। बता दें कि शिक्षा मंत्री की सोमवार को हुई पहली समीक्षा बैठक में एनटीए की पूरी परीक्षा प्रक्रिया का व्यापक लेखा-परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके साथ ही गोपनीय कामकाज की व्यवस्था में भी बदलाव करने को कहा गया था। संवेदनशील कार्यों के लिए अलग कमरे, बाहरी नेटवर्क से अलग कंप्यूटर प्रणाली और कर्मचारियों के लिए उपकरण जमा करने की अनिवार्य व्यवस्था पर जोर दिया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, एनटीए में पहले ही 50 से अधिक कर्मचारियों को व्यापक पुनर्गठन के तहत हटाया जा चुका है। यह कार्रवाई तीन यूजीसी-नेट प्रश्नपत्रों में मिली गलतियों से सीधे जुड़ी नहीं बताई गई है। एनटीए अब तकनीक और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पद भी भर रहा है। इनमें मुख्य तकनीकी अधिकारी, मुख्य वित्त अधिकारी, मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी और परीक्षा सुरक्षा, शोध तथा मनोमिति से जुड़े महाप्रबंधक के पद शामिल हैं। साइबर सुरक्षा, मनोमिति और प्रश्नपत्र तैयार करने जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी जोड़ा जा रहा है। इन बदलावों का उद्देश्य देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में भरोसा और पारदर्शिता बढ़ाना है।
अमेरिका से दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन लेगा भारत, बढ़ेगी समुद्री निगरानी क्षमता
रिटायर्ड कैप्टन डीके शर्मा ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच एक डील साइन हुई है, जिसके तहत अमेरिका से दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन लीज पर लिए जाएंगे। इससे समुद्र में हो रही किसी भी हरकत पर निगरानी रख सकते हैं।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने परीक्षा टीम के 600 विशेषज्ञों को हटाया
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा टीम में बदलाव करते हुए 600 विशेषज्ञों को हटाया है और इसमें नए विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से मंगलवार को बताया गया है कि परीक्षा व्यवस्था में सरकार ने बड़े बदलावों की घोषणा की है। नई व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्रों […] The post राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने परीक्षा टीम के 600 विशेषज्ञों को हटाया appeared first on Sabguru News .
दुल्हन ने दूल्हे को देखते ही किया इनकार, लौटी बारात
पंजाब के फिरोजपुर के गुरुहरसहाय में मंडप में दूल्हे को देखने के बाद दुल्हन ने शादी से इनकार कर दिया है. दुल्हन का आरोप है कि उसे पहले किसी दूसरे लड़के की फोटो दिखाई गई थी. दोनों पक्षों के विवाद के बाद शादी नहीं हुई और बारात वापस लौट गई.
सोनिया गांधी का संस्मरण 'बिलोंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव' 10 नवंबर को रिलीज होगा, जिसमें उनके जीवन के अनछुए पहलू और मानवीय संघर्षों का भावनात्मक चित्रण है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने संसद के मानसून सत्र में गतिरोध के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया।
सोशल मीडिया पर रील और वीडियो बनाने का शौक किस कदर भारी पड़ सकता है, इसका ताजा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आया है। यहाँ एक महिला दारोगा का आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की ...
कठिन रास्ता चुनने वाले ज्ञानेश कुमार संभालेंगे 2029 के लोकसभा चुनाव की कमान
ज्ञानेश कुमार, जिन्होंने हमेशा कठिन रास्ता चुना, अब भारत के भावी मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।
'अदालतों का बार-बार हस्तक्षेप बिगाड़ रहा मध्यस्थता की गति', संसद में पेश रिपोर्ट में खुलासा
संसद की एक समिति ने कहा है कि अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप मध्यस्थता प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित करता है और इसमें अनावश्यक देरी करता है।
वैश्विक स्तर पर कुशल पेशेवरों (Skilled Professionals) और तकनीकी विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए रूस ने एक नया और आकर्षक 'टैलेंट वीजा' (Talent Visa) प्रोग्राम आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिशा-निर्देशों पर तैयार किए गए इस विशेष 'इम्पैट्रिएशन' (Impatriation) प्रोग्राम के तहत भारत सहित दुनिया भर के प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों, कलाकारों और खिलाड़ियों को रूस में बसने और काम करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसके तहत आने वाले योग्य प्रोफेशनल्स को पारंपरिक कोटा सिस्टम और शुरुआती रूसी भाषा की अनिवार्य परीक्षा से पूरी तरह छूट दी गई है।क्या है रूस का नया टैलेंट वीजा और इसके प्रमुख फायदे?यह नया वीजा सिस्टम सामान्य वर्क वीजा या टूरिस्ट वीजा से पूरी तरह अलग है। इसके तहत चयनित प्रोफेशनल्स और उनके परिवार के सदस्यों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं:मल्टीपल-एंट्री वीजा: चयनित आवेदकों को 1 से 3 साल तक की वैधता वाला मल्टीपल-एंट्री वीजा प्रदान किया जाता है।बिना कोटा 3 साल का TRP: आवेदक को बिना किसी वार्षिक कोटा सीमा और बिना रूसी भाषा, इतिहास या कानून की परीक्षा पास किए सीधे 3 वर्ष का अस्थायी निवास परमिट (Temporary Residence Permit - TRP) मिलता है।सीधे परमानेंट रेजिडेंसी (PRP) का विकल्प: यदि आवेदक रूसी भाषा में बुनियादी दक्षता साबित कर देता है, तो वह 8 महीने के अनिवार्य टीआरपी कार्यकाल को छोड़कर सीधे स्थायी निवास परमिट (PRP) के लिए भी आवेदन कर सकता है।अलग से वर्क परमिट की जरूरत नहीं: टैलेंट वीजा धारक और उनके परिवार के सदस्य रूस में बिना किसी अतिरिक्त वर्क परमिट या पेटेंट के सीधे किसी भी कंपनी में नौकरी या व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।नागरिकता की आसान राह: विशेष उपलब्धियों या सरकारी समर्थन के आधार पर भविष्य में रूसी नागरिकता प्राप्त करने का सरलीकृत रास्ता भी खुलता है।किन क्षेत्रों के लोगों को मिलेगा टैलेंट वीजा? (पात्रता मापदंड)रूस के आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी विकास में योगदान देने वाले निम्नलिखित क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स इस वीजा के लिए पात्र माने गए हैं:साइंस एवं टेक्नोलॉजी: शोधकर्ता, डेटा साइंटिस्ट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विशेषज्ञ, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर इंजीनियर।विनिर्माण एवं ऊर्जा (Manufacturing & Energy): भारी उद्योग, माइनिंग, तेल एवं गैस, ग्रीन एनर्जी और टेलीकॉम सेक्टर के उच्च कुशल तकनीकी प्रोफेशनल्स।उद्यमी और निवेशक: ऐसे स्टार्टअप फाउंडर्स या इन्वेस्टर्स जो नए तकनीकी प्रोजेक्ट्स में निवेश करने या रूस में अपना बिजनेस सेटअप करने की योजना बना रहे हैं।शीर्ष विश्वविद्यालयों के ग्रेजुएट्स: दुनिया की शीर्ष 100 रैंक वाली प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज या प्रमुख भारतीय संस्थानों (जैसे IITs, NITs, IISc) से डिग्री धारक प्रतिभाशाली छात्र।कला, संस्कृति और खेल: अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत कलाकार, डिजाइनर, मीडिया प्रोफेशनल्स और खिलाड़ी।शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा: उच्च योग्यता प्राप्त प्रोफेसर्स, विशेषज्ञ डॉक्टर और बायोमेडिकल साइंटिस्ट।आवेदन की चयन प्रक्रिया: नई एजेंसी करेगी टैलेंट की पहचानइस प्रोग्राम की आवेदन और मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया है:ऑनलाइन आवेदन: आवेदक आधिकारिक इम्पैट्रिएशन पोर्टल पर जाकर अपना विस्तृत रिज्यूमे (CV), शैक्षणिक डिग्रियां, कार्य अनुभव प्रमाण पत्र, पेटेंट या शोध प्रकाशन जमा करते हैं।विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा स्क्रूटनी: रूस की विशेष एजेंसी 'एजेंसी फॉर अट्रैक्टिंग फॉरेन टैलेंट्स' (Agency for Attracting Foreign Talents) आवेदक की योग्यता और रूस की अर्थव्यवस्था के लिए उसकी उपयोगिता का प्राथमिक तकनीकी मूल्यांकन करती है।ऑनलाइन इंटरव्यू: प्राथमिक रूप से चयनित उम्मीदवारों का एजेंसी के साथ ऑनलाइन वीडियो इंटरव्यू होता है, जिसमें उनकी उपलब्धियों और योजनाओं पर चर्चा की जाती है।इमिग्रेशन और वीजा जारी होना: एजेंसी की सकारात्मक सिफारिश के बाद आवेदन को रूसी आंतरिक मंत्रालय (Ministry of Internal Affairs) को भेजा जाता है, जहां से आधिकारिक वीजा और संबंधित दस्तावेज जारी कर दिए जाते हैं।भारत और रूस के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और भारतीय तकनीकी प्रतिभा की वैश्विक साख को देखते हुए यह नया टैलेंट वीजा प्रोग्राम भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों और युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय करियर बनाने का एक बेहतरीन अवसर बनकर उभरा है।
डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दायरे और लगातार सामने आ रहे साइबर वित्तीय अपराधों, म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) तथा मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों से निपटने के लिए भारत की कानूनी और बैंकिंग प्रणाली में ऐतिहासिक विधायी बदलाव किए गए हैं। संसद द्वारा पुराने 1891 के कानून की जगह नया 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026' पारित किए जाने और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) तथा गृह मंत्रालय (MHA) के नए दिशा-निर्देशों के बाद जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह आधुनिक बनाया गया है। इन नए प्रावधानों के तहत गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधों की जांच कर रहे अधिकृत पुलिस अधिकारियों को संदिग्ध बैंक खातों के बहीखातों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स और ट्रांजैक्शन डेटा की जांच करने के सीधे अधिकार दिए गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल फ्रॉड में शामिल अपराधियों तक तुरंत पहुंचना और ठगी की रकम को बाहर निकलने से पहले ही फ्रीज करना है।1. डिजिटल रिकॉर्ड्स और क्लाउड डेटा तक सीधी कानूनी पहुंच1891 का पुराना कानून उस दौर में बना था जब बैंकों के रिकॉर्ड कागजी रजिस्टरों और बहीखातों में दर्ज होते थे। नए 2026 के कानून में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) डेटा, क्लाउड सर्वर पर सुरक्षित लेन-देन और डिजिटल ऑडिट ट्रेल्स को कानूनी रूप से मान्यता दी गई है। अब जांच अधिकारी साइबर फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवाद से जुड़े मामलों में बिना किसी लंबी और जटिल अदालती औपचारिकताओं के, निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत बैंक से सीधे प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड्स की मांग कर सकते हैं। इससे जांच में लगने वाले हफ्तों का समय बचकर कुछ ही घंटों में आवश्यक वित्तीय साक्ष्य जुटाए जा सकेंगे।2. साइबर फ्रॉड और म्यूल अकाउंट्स पर तत्काल रोक (Lien Marking & Freeze)साइबर ठगों द्वारा आम लोगों से ठगी गई रकम को जिन फर्जी या किराए के खातों (Mule Accounts) में ट्रांसफर किया जाता है, उन पर अब तत्काल रोक लगाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 और पुलिस के निर्देश पर बैंक अब संदिग्ध लेन-देन वाले खातों पर तुरंत 'डेबिट फ्रीज' या 'लीन मार्क' (Lien Mark) लगा सकेंगे। इससे पीड़ितों का पैसा ठगों द्वारा एटीएम से निकाले जाने या विदेशी वॉलेट्स में भेजे जाने से पहले ही सुरक्षित कर लिया जाएगा।3. खाताधारकों के लिए नोटिस और पारदर्शी अपील प्रक्रियाखाताधारकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए नियमों में संतुलन बनाया गया है। यदि किसी वैध खाताधारक का खाता किसी साइबर शिकायत के चलते गलत तरीके से संदिग्ध सूची में आकर फ्रीज हो जाता है, तो बैंकों को खाते पर रोक लगाने के साथ ही तुरंत खाताधारक को एसएमएस और ईमेल के जरिए कारण सहित सूचना देनी होगी। ग्राहक अपने वैध आय स्रोत और दस्तावेजों का स्पष्टीकरण बैंक और संबंधित साइबर सेल को प्रस्तुत कर सकता है, जिस पर बैंक को निर्धारित समय-सीमा के भीतर विचार कर अनावश्यक फ्रीज को हटाना होगा।4. वास्तविक समय पर लेन-देन अलर्ट और डिजिटल ऑडिट ट्रेलनए नियमों के अनुसार, बैंकों को अपने आंतरिक निगरानी तंत्र को और मजबूत करना अनिवार्य किया गया है। सभी डिजिटल भुगतानों के लिए रियल-टाइम ट्रैकिंग, डिवाइस फिंगरप्रिंटिंग और आईपी लॉग्स का सुरक्षित भंडारण आवश्यक है। यदि किसी खाते में सामान्य से हटकर अचानक बड़े पैमाने पर तेज लेन-देन (High Velocity Transactions) होते हैं, तो बैंक का ऑटोमेटेड एआई सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा और आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियों के साथ सुरक्षित एपीआई (API) के माध्यम से जानकारी साझा करेगा।5. डिजिटल अरेस्ट और संगठित सिंडिकेट्स के खिलाफ कड़ा शिकंजापिछले कुछ समय में 'डिजिटल अरेस्ट' और फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए अरबों रुपये की ठगी करने वाले गिरोहों ने भारतीय बैंकिंग तंत्र को निशाना बनाया है। इस नए कानूनी ढांचे के तहत पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खातों की पूरी मनी-ट्रेल को शुरुआत से अंत तक तेजी से ट्रैक कर सकेंगी। यह त्वरित कार्रवाई न केवल वित्तीय अपराधों की रोकथाम में गेम-चेंजर साबित होगी, बल्कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था में आम जनता के विश्वास को भी मजबूत करेगी।
रियल एस्टेट लेन-देन को पूरी तरह पारदर्शी, बिचौलिया-मुक्त और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में तमिलनाडु सरकार के पंजीकरण विभाग ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व नीतिगत फैसला लिया है। नए नियमों के अनुसार, राज्य भर में अनुमोदित लेआउट प्लॉट्स (Approved Layout Plots) और नवनिर्मित बहुमंजिला इमारतों के फ्लैट्स की पहली बिक्री यानी पहले पंजीकरण (First Registration) की पूरी प्रक्रिया अब अनिवार्य रूप से ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएगी। इस क्रांतिकारी कदम के बाद घर खरीदारों और निवेशकों को दस्तावेज जमा करने, फोटो खिंचवाने और लंबी कागजी औपचारिकताओं के लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों (SRO) के चक्कर काटने और कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी।पहले पंजीकरण को ऑनलाइन करने के पीछे क्या है उद्देश्य?तमिलनाडु में रियल एस्टेट परियोजनाओं के विकास के दौरान अक्सर देखा गया है कि लेआउट या अपार्टमेंट्स की पहली बिक्री के समय डेवलपर्स और खरीदारों को भारी प्रशासनिक जटिलताओं का सामना करना पड़ता था। कई बार एक ही संपत्ति के दोहरे पंजीकरण या अनधिकृत लेआउट्स की अवैध बिक्री जैसी समस्याएं भी सामने आती थीं। सीएमडीए (CMDA) और डीटीसीपी (DTCP) जैसे आधिकारिक योजना प्राधिकरणों के डेटाबेस को सीधे राज्य के पंजीकरण पोर्टल से जोड़कर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि केवल वैध, स्वीकृत और कानूनी रूप से प्रमाणित संपत्तियों की ही पहली बिक्री दर्ज हो सके। इससे न केवल धोखाधड़ी पर शत-प्रतिशत लगाम लगेगी, बल्कि आम जनता के समय और धन की भी बड़ी बचत होगी।'TN Star' पोर्टल और ऑनलाइन प्रक्रिया का स्वरूपइस पूरी डिजिटल व्यवस्था को तमिलनाडु सरकार के उन्नत पंजीकरण पोर्टल (STAR 2.0 / 3.0 Platform) के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इस नई प्रणाली के तहत प्रक्रिया कुछ इस प्रकार काम करेगी:डेवलपर द्वारा प्रोजेक्ट का प्री-वेरिफिकेशन: बिल्डर या प्रमोटर अपने प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी, लेआउट अप्रूवल, रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन और डीड का ड्राफ्ट पहले से पोर्टल पर अपलोड करेंगे।ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन और डीड ड्राफ्टिंग: खरीदार और विक्रेता घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से बिक्री विलेख (Sale Deed) तैयार कर सकेंगे।डिजिटल ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन: खरीदार, विक्रेता और गवाहों की पहचान का सत्यापन सुरक्षित डिजिटल ई-केवाईसी और फेस या ओटीपी ऑथेंटिकेशन के जरिए किया जाएगा।ऑनलाइन स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क: स्टांप शुल्क (Stamp Duty) और पंजीकरण फीस का भुगतान नेट बैंकिंग, यूपीआई या अधिकृत पेमेंट गेटवे के जरिए सीधे ऑनलाइन किया जाएगा।डिजिटल हस्ताक्षरित दस्तावेज: आवेदन के डिजिटल सत्यापन के बाद सब-रजिस्ट्रार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरयुक्त आधिकारिक पंजीकरण प्रमाणपत्र और विलेख सीधे खरीदार के डिजिटल लॉकर या ईमेल पर जारी कर दिया जाएगा।घर खरीदारों और निवेशकों को मिलने वाले प्रमुख लाभबिचौलियों और रिश्वतखोरी का अंत: पूरी प्रक्रिया फेसलेस और पेपरलेस होने के कारण सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में अनधिकृत दलालों और अतिरिक्त अवैध वसूली की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।तत्काल एनकंबरेंस सर्टिफिकेट (EC): ऑनलाइन पंजीकरण पूरा होते ही संपत्ति का भार-मुक्त प्रमाणपत्र (Encumbrance Certificate - EC) स्वतः अपडेट हो जाएगा, जिससे भविष्य में संपत्ति पर लोन लेना या दोबारा बेचना बेहद आसान होगा।अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए बड़ी सुविधा: विदेश या अन्य राज्यों में रहने वाले खरीदारों को पहली बिक्री के पंजीकरण के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बाध्यता से बड़ी राहत मिलेगी।रीयल-टाइम अप्रूवल: फाइलों के भौतिक सत्यापन में लगने वाले दिनों के समय की जगह अब कुछ ही घंटों में अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ेगा निवेशकों का भरोसातमिलनाडु सरकार के इस आधुनिक कदम का क्रेडाई (CREDAI) और रियल एस्टेट उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों ने स्वागत किया है। पहली बिक्री के ऑनलाइन होने से चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और त्रिची जैसे प्रमुख टियर-1 और टियर-2 शहरों में संपत्ति का कारोबार और अधिक संगठित होगा। जब संपत्तियों की खरीद-बिक्री की कानूनी प्रक्रिया इतनी सहज और सुरक्षित हो जाती है, तो घरेलू और संस्थागत निवेशकों का भरोसा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और राजस्व दोनों को नई गति मिलना तय है।
बिजनौर: छोटी बेटी के गायब होने से मचा हड़कंप
यूपी के बिजनौर में नाबालिग युवती के घर से जाने के साथ बड़ी बहन की शादी के लिए रखे करीब 4 लाख रुपये भी गायब हो गए. पिता ने पड़ोसी युवक समीर पर बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने और धमकी देने का आरोप लगाया. पुलिस ने युवती को बरामद कर लिया है.
'मैं विदेश से पढ़ा इंजीनियर हूं', MLA ने इंजीनियर को गिना दीं डिग्रियां
Maihar News: गोविंदगढ़ तालाब में रिसाव की खबर पर पहुंचे अमरपाटन विधायक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह की इंजीनियर से हुई तीखी बहस, विदेश से पढ़ाई की डिग्रियां गिनाकर सिखाया सबक...
देश भर में रसोई गैस उपभोक्ताओं को एलपीजी (LPG) सिलेंडर की बार-बार बुकिंग करने, डिलीवरी के इंतजार और अचानक गैस खत्म होने की परेशानी से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी (PNG) नेटवर्क के विस्तार की रफ्तार तेज कर दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (PNGRB) के सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) विज़न के तहत सितंबर महीने से देश के कई नए शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में पाइपलाइन के जरिए 24 घंटे निर्बाध गैस सप्लाई शुरू करने की व्यापक योजना तैयार की गई है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से लाखों परिवारों को न केवल सिलेंडर ढोने और बार-बार रीफिल बुक करने के झंझट से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यह पारंपरिक एलपीजी के मुकाबले सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और बेहद किफायती भी साबित होगा।पीएनजी गैस कनेक्शन क्या है और सिलेंडर से कैसे है बेहतर?पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस (मीथेन) होती है, जिसे विशेष भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए सीधे उपभोक्ताओं के रसोईघर तक पहुंचाया जाता है। यह सुविधा पानी के नल या बिजली के कनेक्शन की तरह काम करती है, जिसमें गैस का प्रवाह चौबीसों घंटे बना रहता है।सिलेंडर बुकिंग का कोई झंझट नहीं: महीने के अंत में सिलेंडर बुक करने, ओटीपी शेयर करने या डिलीवरी बॉय के आने का इंतजार करने की कोई आवश्यकता नहीं होती।इस्तेमाल के बाद भुगतान (Postpaid Billing): बिजली और पानी के बिल की तरह इसमें भी हर महीने या दो महीने में केवल उतनी ही गैस का बिल आता है जितनी आपने इस्तेमाल की है।किफायती और बचतकारी: पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर की तुलना में पीएनजी का उपयोग आर्थिक रूप से 15 से 20 प्रतिशत तक सस्ता पड़ता है क्योंकि इसमें किसी प्रकार का ट्रांसमिशन वेस्टेज या लीकेज चार्ज नहीं होता।सुरक्षित और सुविधाजनक: प्राकृतिक गैस हवा से हल्की होती है, इसलिए किसी आकस्मिक लीकेज की स्थिति में यह बंद जगह में जमा होने के बजाय तेजी से हवा में उड़ जाती है, जिससे आग लगने का खतरा काफी कम हो जाता है।नए क्षेत्रों में नेटवर्क का विस्तार और स्मार्ट गैस मीटरिंगसरकार के सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के तहत देश की प्रमुख गैस वितरण कंपनियों जैसे इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL), महानगर गैस लिमिटेड (MGL), गेल गैस (GAIL Gas), गुजरात गैस और टोरेंट गैस ने अपने-अपने अधिकृत भौगोलिक क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर का काम पूरा कर लिया है। नए आवासीय सोसायटियों, कॉलोनियों और टाउनशिप्स में पाइपलाइन बिछाने और टेस्टिंग का काम अंतिम चरण में है। इस चरण में अत्याधुनिक स्मार्ट डिजिटल मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे गैस की खपत की रीयल-टाइम ऑटोमैटिक रीडिंग सीधे कंपनी के सर्वर पर दर्ज होगी और बिलिंग में किसी प्रकार की मानवीय गलती की संभावना नहीं रहेगी।घरेलू PNG कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन का आसान तरीकानए उपभोक्ता अपने क्षेत्र की अधिकृत गैस वितरण कंपनी के पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे नए कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं:कंपनी के पोर्टल या ऐप पर जाएं: अपने शहर की अधिकृत गैस एजेंसी (जैसे IGL, MGL, Adani Total Gas, GAIL आदि) की वेबसाइट या ऐप पर 'New Domestic Connection' विकल्प चुनें।स्थान की उपलब्धता जांचें: अपना पिन कोड, सोसाइटी/मोहल्ला और मकान नंबर दर्ज करके जांचें कि आपकी गली या बिल्डिंग में गैस पाइपलाइन सक्रिय है या नहीं।व्यक्तिगत विवरण और दस्तावेज: आवेदन फॉर्म में नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और पते का विवरण भरें। इसके साथ पहचान प्रमाण (जैसे वोटर कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट) और निवास प्रमाण (बिजली बिल, सेल डीड या रेंट एग्रीमेंट) की डिजिटल कॉपी अपलोड करें।कनेक्शन शुल्क का भुगतान: निर्धारित सिक्योरिटी डिपॉजिट और इंस्टॉलेशन शुल्क का ऑनलाइन माध्यम (UPI, नेट बैंकिंग या कार्ड) से भुगतान करें।साइट विजिट और इंस्टॉलेशन: आवेदन और भुगतान सत्यापित होने के बाद अधिकृत तकनीकी टीम आपके घर का निरीक्षण करेगी, पाइपलाइन व मीटर लगाएगी और आपके मौजूदा गैस चूल्हे (Stove) को पीएनजी नोजल के अनुसार कस्टमाइज करके गैस सप्लाई शुरू कर देगी।पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर कदमघरेलू स्तर पर पीएनजी का विस्तार भारत के 'क्लीन एनर्जी' और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के राष्ट्रीय संकल्प से सीधे जुड़ा हुआ है। प्राकृतिक गैस के दहन से हानिकारक धुंआ या कार्बन कण बहुत कम मात्रा में निकलते हैं, जिससे घर के अंदर का वायु प्रदूषण कम होता है। इसके साथ ही, देश में भारी मात्रा में आयात होने वाली एलपीजी पर निर्भरता घटेगी, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर कीमती विदेशी मुद्रा की बचत होगी। सरकार का लक्ष्य आगामी कुछ वर्षों में देश के शत-प्रतिशत पात्र शहरी परिवारों को पाइपलाइन आधारित स्वच्छ और सुरक्षित गैस नेटवर्क से जोड़ना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारत का हवाला देकर सख्त मतदाता पहचान नियमों की वकालत पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है।
'Gen Z की तरह OBC सड़कों पर आ गया तो...', राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला
लोकसभा में राहुल गांधी ने जाति जनगणना और OBC अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने शुरू में जाति जनगणना से इनकार किया था.
करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद सबसे बड़ा इंतजार अपने टैक्स रिफंड का होता है। कई बार तकनीकी त्रुटियों, मिसमैच या स्क्रूटनी के कारण रिफंड मिलने में हफ्तों और महीनों का समय लग जाता है, जिससे आम नौकरीपेशा और छोटे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी अटक जाती है। इस समस्या के स्थायी समाधान और टैक्स प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल व निर्बाध बनाने के उद्देश्य से आयकर विभाग अपने बहुप्रतीक्षित तकनीकी अपग्रेड 'प्रोजेक्ट इनसाइट 2.0' (Project Insight 2.0) को लागू करने की तैयारी में है। अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स से लैस यह नया सिस्टम न केवल कर चोरी पर सटीक नजर रखेगा, बल्कि ईमानदार करदाताओं के रिफंड को कुछ ही दिनों के भीतर प्रोसेस कर सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर करना सुनिश्चित करेगा।प्रोजेक्ट इनसाइट 2.0 क्या है और यह कैसे काम करेगा?प्रोजेक्ट इनसाइट आयकर विभाग का एक प्रमुख डेटा-ड्रिवन तकनीकी ढांचा है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य देश भर में वित्तीय लेनदेन की निगरानी करना और टैक्स अनुपालन को सुगम बनाना है। इसके दूसरे चरण यानी इनसाइट 2.0 में सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) की क्षमता को कई गुना अपग्रेड किया जा रहा है। नया सिस्टम टैक्सपेयर के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) और फॉर्म 26AS के डेटा का रिटर्न में दिए गए दावों के साथ रीयल-टाइम ऑटो-क्रॉस वेरिफिकेशन करेगा। यदि रिटर्न में कोई विसंगति नहीं पाई जाती है, तो सिस्टम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप (Zero Manual Intervention) के तुरंत रिफंड को मंजूरी दे देगा, जिससे प्रोसेसिंग टाइम घटकर मात्र कुछ घंटों से लेकर 2-3 दिनों तक सीमित हो जाएगा।करदाताओं को मिलने वाले प्रमुख फायदेरिफंड में न्यूनतम समय: सिस्टम ऑटोमेशन के चलते सामान्य और सही रिटर्न की प्रोसेसिंग में लगने वाला हफ्तों का समय समाप्त हो जाएगा।पारदर्शी और त्रुटिहीन जांच: उन्नत एल्गोरिदम के जरिए सटीक डेटा मैचिंग होगी, जिससे अनावश्यक नोटिस या बेवजह रिफंड रोके जाने की घटनाएं लगभग खत्म होंगी।त्वरित सूचना और अलर्ट: यदि टैक्स गणना या टीडीएस (TDS) क्लेम में कोई मामूली अंतर पाया जाता है, तो सिस्टम तुरंत पोर्टल और ईमेल के जरिए करदाता को सूचित करेगा ताकि समय रहते ई-वेरिफिकेशन या सुधार किया जा सके।डिजिटल ट्रैकिंग: करदाता अपने ई-फाइलिंग डैशबोर्ड पर रिफंड जारी होने से लेकर बैंक खाते में क्रेडिट होने तक के हर चरण को रीयल-टाइम ट्रैक कर सकेंगे।रिफंड जल्दी पाने के लिए करदाताओं के लिए जरूरी सावधानियांप्रोजेक्ट इनसाइट 2.0 की तेज गति का पूरा लाभ उठाने के लिए करदाताओं को अपनी तरफ से कुछ बुनियादी औपचारिकताएं सही रखनी होंगी:बैंक खाता प्री-वैलिडेट (Pre-Validated) होना: ई-फाइलिंग पोर्टल पर दर्ज बैंक खाता अनिवार्य रूप से सक्रिय और प्री-वैलिडेट होना चाहिए, साथ ही उस पर 'इलेक्ट्रॉनिक रिफंड क्रेडिट' (EVC) इनेबल्ड होना जरूरी है।नाम और व्यक्तिगत विवरण का सटीक मिलान: पैन कार्ड, बैंक खाते और आयकर रिटर्न में दर्ज नाम, जन्मतिथि और पिता के नाम की स्पेलिंग में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।तुरंत ई-सत्यापन (e-Verification): रिटर्न दाखिल करने के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या ईवीसी के जरिए ई-वेरिफिकेशन पूरा करना अनिवार्य है, क्योंकि वेरिफिकेशन के बिना रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू नहीं होती।टीडीएस और आय का सही मिलान: अपने फॉर्म 16, 26AS और AIS में दर्ज सभी आय स्रोतों (जैसे बचत खाते का ब्याज, डिविडेंड आदि) को रिटर्न में सही-सही घोषित करें।पारदर्शी और आधुनिक टैक्स व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदमफेसलेस असेसमेंट और ई-फाइलिंग 2.0 के बाद 'प्रोजेक्ट इनसाइट 2.0' का आगमन भारतीय प्रत्यक्ष कर प्रणाली को वैश्विक मानकों के समकक्ष ले जाने का एक ठोस प्रयास है। सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि ईमानदार करदाताओं को उनके हक का पैसा बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के तुरंत वापस मिले, जबकि डेटा इंटेलिजेंस के जरिए टैक्स चोरी के मामलों की पहचान पूरी तरह स्वचालित तरीके से हो। यह तकनीकी सुधार न केवल करदाताओं के अनुभव को बेहतर बनाएगा बल्कि देश के टैक्स इकोसिस्टम में विश्वास और अनुपालन को भी मजबूती प्रदान करेगा।
Gen Z की भावनाओं से खेलने नहीं देंगे, अब किस बात पर भड़के कॉकरोच; सरकार को बड़ी चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर सरकार को चेतावनी दे डाली है। सीजेपी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की लिस्ट मांग रही है। लेकिन केंद्र सरकार यह लिस्ट शीर्ष अदालत में पेश करने में आनाकानी कर रही है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन लेने वाले ग्राहकों के हितों की रक्षा करने और बैंकों की मनमानी पर लगाम कसने के उद्देश्य से लोन और ईएमआई (EMI) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। अक्सर देखा गया है कि रेपो रेट या बेंचमार्क दरों में बढ़ोतरी होने पर बैंक ग्राहकों की बिना स्पष्ट सहमति के लोन की अवधि (Tenure) कई सालों तक बढ़ा देते थे या ईएमआई में भारी इजाफा कर देते थे। कई मामलों में तो स्थिति 'नेगेटिव अमॉर्टाइजेशन' तक पहुंच जाती थी, जहां चुकाई जाने वाली ईएमआई महीने के कुल ब्याज से भी कम हो जाती थी और मूलधन घटने के बजाय बढ़ने लगता था। इन समस्याओं को खत्म करने के लिए केंद्रीय बैंक ने फ्लोटिंग रेट लोन, अवधि विस्तार, फिक्स्ड रेट में स्विचिंग और प्री-पेमेंट चार्जेस को लेकर सख्त व पारदर्शी दिशा-निर्देश लागू किए हैं।ईएमआई और लोन अवधि रीसेट पर स्पष्ट विकल्पआरबीआई के नए नियमों के तहत अब कोई भी बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) ब्याज दर बढ़ने पर एकतरफा तरीके से लोन की अवधि नहीं बढ़ा सकती। जब भी बेंचमार्क दर में बदलाव होगा, तो बैंकों को ग्राहक को स्पष्ट विकल्प देने होंगे:ईएमआई बढ़ाने या अवधि बढ़ाने का चयन: ग्राहक यह तय कर सकेगा कि वह बढ़ी हुई दर के अनुसार अपनी मासिक ईएमआई बढ़ाना चाहता है या लोन की अवधि (Tenure) को लंबा करना चाहता है।आंशिक प्री-पेमेंट का विकल्प: ग्राहक के पास यह अधिकार होगा कि वह लोन अवधि और ईएमआई को सामान्य स्तर पर बनाए रखने के लिए कुछ राशि का एकमुश्त आंशिक पूर्व-भुगतान (Part-Payment) कर सके।समय पूर्व सूचना: किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले बैंक को ग्राहक को संशोधित ईएमआई, शेष बची किस्तों की संख्या और नई प्रभावी ब्याज दर (APR) की लिखित या डिजिटल सूचना देना अनिवार्य होगा।फ्लोटिंग से फिक्स्ड रेट में स्विच करने की पूरी आजादीअस्थिर ब्याज दरों के दौर में अनिश्चितता से बचने के लिए आरबीआई ने ग्राहकों को फ्लोटिंग रेट लोन से फिक्स्ड रेट लोन (Fixed Rate Loan) में स्विच करने का अधिकार दिया है। लोन की पूरी अवधि के दौरान बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार तय किए गए अवसरों पर उधारकर्ता अपने फ्लोटिंग लोन को फिक्स्ड ब्याज दर में बदल सकते हैं। इसके लिए यदि बैंक कोई न्यूनतम प्रशासनिक शुल्क (Switching Charges) लेते हैं, तो उसका पूरा विवरण लोन अनुबंध के पहले पन्ने (Key Fact Statement - KFS) में पहले से दर्ज होना आवश्यक है।प्री-पेमेंट और फोरक्लोज़र पेनल्टी पर पूरी तरह रोकव्यक्तिगत उपयोग (Non-Business Purposes) के लिए लिए गए फ्लोटिंग रेट रिटेल लोन्स—जैसे होम लोन और पर्सनल लोन—पर किसी भी प्रकार का प्री-पेमेंट या फोरक्लोज़र चार्ज लगाने पर आरबीआई ने सख्त पाबंदी लगा रखी है। यदि कोई ग्राहक अपनी बचत या अतिरिक्त आय से लोन का समय से पहले भुगतान करता है या बेहतर ब्याज दर के लिए लोन को किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर (Balance Transfer) करता है, तो बैंक उस पर कोई जुर्माना या पेनल्टी नहीं लगा सकते।त्रैमासिक स्टेटमेंट और पूर्ण पारदर्शिता अनिवार्यऋणदाताओं को प्रत्येक तिमाही (Quarter) के अंत में अपने सभी ग्राहकों को एक सरल और पारदर्शी लोन स्टेटमेंट भेजना अनिवार्य किया गया है। इस स्टेटमेंट में स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि अब तक कितना मूलधन और ब्याज चुकाया जा चुका है, कितनी ईएमआई बाकी हैं, और लोन पर लागू वार्षिक प्रतिशत दर (APR) क्या है। इससे उधारकर्ताओं को अपने लोन की वास्तविक स्थिति का सटीक पता रहेगा और किसी भी प्रकार के अप्रत्यक्ष या छिपे हुए शुल्कों पर पूरी तरह रोक लगेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई को इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की बेंच ने सिटीजन्स व्हिसलब्लोअर फोरम की एक याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।
दिल्ली-एनसीआर के सबसे प्रमुख और तेजी से विकसित हो रहे आवासीय हब नोएडा स्पोर्ट्स सिटी (सेक्टर-150 और 152) के लगभग 50 हजार निवासियों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक राहत भरी खबर सामने आई है। नोएडा प्राधिकरण ने इन सेक्टरों में रहने वाले लोगों को रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के साथ-साथ यमुना एक्सप्रेसवे तक सीधी व सुगम कनेक्टिविटी देने के लिए एक आधुनिक 'क्लोवर लीफ' (Cloverleaf Interchange) इंटरचेंज के निर्माण की योजना तैयार की है। आठ (8) के आकार में बनने वाला यह विशेष क्लोवर लीफ सेक्टर-148 और सेक्टर-153 के बीच स्थापित किया जाएगा, जो सीधे तौर पर एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों की सर्विस रोड को आपस में जोड़ देगा। इस बुनियादी ढांचा परियोजना के पूरा होने के बाद स्थानीय नागरिकों, आईटी प्रोफेशनल्स और दिल्ली-जेवर आवागमन करने वाले यात्रियों को संकरे अंडरपास के जाम से स्थायी निजात मिल सकेगी।मौजूदा छोटे अंडरपास और भीषण जाम से मिलेगी मुक्तिवर्तमान समय में सेक्टर-150, सेक्टर-152 और आसपास की बहुमंजिला सोसायटियों से निकलने वाले वाहनों को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पार करने अथवा दूसरी दिशा में मुड़ने के लिए एक्सप्रेसवे के नीचे बने सीमित क्षमता वाले अंडरपास का सहारा लेना पड़ता है। सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान इस छोटे अंडरपास पर अचानक वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है, जिसके चलते वहां वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार निवासियों को मात्र कुछ सौ मीटर की दूरी पार करने में 20 से 30 मिनट तक का समय गंवाना पड़ता है। नया आठ आकार का क्लोवर लीफ बनने के बाद वाहनों को बिना किसी रुकावट के सीधे विभिन्न दिशाओं में जाने का स्वतंत्र मार्ग मिल जाएगा और उन्हें किसी संकरे अंडरपास पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट का सफर होगा सुपरफास्टइस परियोजना का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ यह होगा कि सेक्टर-150 और 152 के निवासियों को अब यमुना एक्सप्रेसवे की ओर जाने के लिए सीधा, सिग्नल-फ्री और चौड़ा रास्ता मिल जाएगा। आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर), फिल्म सिटी, फॉर्मूला-1 ट्रैक और आगरा की तरफ जाने वाले वाहन बिना किसी आंतरिक ट्रैफिक में फंसे सीधे हाई-स्पीड कॉरिडोर पर चढ़ सकेंगे। इससे न केवल यात्रा के समय में भारी बचत होगी बल्कि ईंधन की बर्बादी और प्रदूषण के स्तर में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की जाएगी।आईआईटी जैसी तकनीकी संस्था से पास होगा डिजाइनपरियोजना की गुणवत्ता और तकनीकी मजबूती को सुनिश्चित करने के लिए नोएडा प्राधिकरण विशेष सतर्कता बरत रहा है। प्राधिकरण के सिविल विंग द्वारा वर्तमान में क्लोवर लीफ का विस्तृत इंजीनियरिंग डिजाइन तैयार किया जा रहा है। डिजाइन का कार्य पूरा होते ही इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय तकनीकी संस्था के पास गहन तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा विश्लेषण और स्ट्रक्चरल अप्रूवल के लिए भेजा जाएगा। आईआईटी से औपचारिक अनुमोदन प्राप्त होते ही परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप देकर प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति जारी की जाएगी।टेंडर जारी होने के 6 महीने के भीतर पूरा होगा निर्माणप्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार, डीपीआर की औपचारिक मंजूरी मिलते ही निर्माण एजेंसी के चयन के लिए पारदर्शी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्राधिकरण का लक्ष्य है कि टेंडर आवंटित होने की तारीख से लगभग छह महीने की निर्धारित समय-सीमा के भीतर क्लोवर लीफ का निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर इसे जनता के लिए खोल दिया जाए। स्पोर्ट्स सिटी क्षेत्र में आने वाले वर्षों में आबादी का घनत्व और तेजी से बढ़ने का अनुमान है, ऐसे में यह समयबद्ध इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भविष्य के ट्रैफिक लोड को संभालने में रीढ़ की हड्डी साबित होगा।रियल एस्टेट और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गतिसेक्टर-150 और 152 को एनसीआर का प्रमुख स्पोर्ट्स-सेंट्रिक और ग्रीन रेजिडेंशियल सेक्टर माना जाता है। निर्बाध सड़क संपर्क और क्लोवर लीफ के निर्माण से इस पूरे क्षेत्र के रियल एस्टेट बाजार, वाणिज्यिक परिसरों, स्पोर्ट्स अकादमियों और आईटी पार्कों को नई जीवनरेखा मिलेगी। दैनिक आवागमन में होने वाली सुगमता से यहां संपत्तियों के मूल्य और किराए की मांग में सकारात्मक सुधार आएगा, जिससे हजारों घर खरीदारों और निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।
संगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों के वेतन से हर महीने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में अंशदान कटता है। ईपीएफओ (EPFO) के नियमों के अनुसार, कर्मचारी के मूल वेतन (Basic Pay) और महंगाई भत्ते (DA) का 12 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ में जाता है, जबकि नियोक्ता (कंपनी) के 12 प्रतिशत अंशदान में से 8.33 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) में और शेष 3.67 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ खाते में जमा होता है। रिटायरमेंट के बाद सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा के रूप में मिलने वाली यह मासिक पेंशन बुढ़ापे का बड़ा सहारा बनती है।ईपीएस पेंशन के लिए पात्रता के बुनियादी नियमईपीएस के तहत नियमित मासिक पेंशन पाने के लिए कर्मचारी को कुछ अनिवार्य शर्तों को पूरा करना होता है:कर्मचारी का ईपीएफओ का सक्रिय सदस्य होना अनिवार्य है।पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की नियमित सेवा (Pensionable Service) पूरी होनी चाहिए।नियमित पेंशन प्राप्त करने की मानक आयु 58 वर्ष तय की गई है।यदि कोई सदस्य 50 वर्ष की आयु के बाद और 58 वर्ष से पहले पेंशन लेना चाहता है, तो वह 'अगेती पेंशन' (Early Pension) ले सकता है, जिसमें 58 वर्ष की आयु से जितने वर्ष पहले पेंशन ली जाती है, प्रति वर्ष 4 प्रतिशत की दर से कटौती की जाती है।पेंशन गणना का आधिकारिक फॉर्मूलाईपीएफओ के नियमानुसार मासिक ईपीएस पेंशन की गणना निम्नलिखित मानक फॉर्मूले के आधार पर की जाती है:$$ ext{मासिक पेंशन} = frac{ ext{पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service)} imes ext{पेंशन योग्य वेतन (Pensionable Salary)}}{70}$$इस फॉर्मूले के दो सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं:पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service): कर्मचारी द्वारा नौकरी में बिताए गए कुल वर्ष। यदि किसी कर्मचारी ने 20 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी कर ली है, तो ईपीएफओ के नियमों के तहत उसे 2 वर्ष का अतिरिक्त सर्विस वेटेज (बोनस) दिया जाता है।पेंशन योग्य वेतन (Pensionable Salary): नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट से पहले के पिछले 60 महीनों के औसत मूल वेतन और डीए को पेंशन योग्य वेतन माना जाता है। वर्तमान नियमों के अनुसार, ईपीएस में वेतन की वैधानिक सीमा (Wage Ceiling) अधिकतम ₹15,000 प्रति माह तय है (जब तक कि कर्मचारी ने 'हायर पेंशन' का विकल्प न चुना हो)।25 वर्ष की सेवा पर पेंशन की गणना (विस्तृत उदाहरण)मान लीजिए किसी कर्मचारी ने निजी क्षेत्र में लगातार 25 वर्षों तक काम किया है और उसका मासिक मूल वेतन ₹15,000 की वैधानिक सीमा या उससे अधिक रहा है:कुल वास्तविक सेवा: 25 वर्ष20 वर्ष से अधिक सेवा का बोनस: + 2 वर्षकुल पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service): 25 + 2 = 27 वर्षपेंशन योग्य वेतन (अधिकतम सीमा): ₹15,000 प्रति माहफॉर्मूले में मान रखने पर:$$ ext{मासिक पेंशन} = frac{27 imes 15,000}{70}$$$$ ext{मासिक पेंशन} = frac{4,05,000}{70} approx mathbf{₹5,785.71}$$यानी, ₹15,000 की मानक वेतन सीमा के तहत 25 साल की सेवा पूरी करने पर कर्मचारी को लगभग ₹5,786 प्रति माह की पेंशन जीवनभर मिलेगी।यदि हायर पेंशन (Higher Pension) का विकल्प चुना गया होसुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद जिन पात्र कर्मचारियों ने वास्तविक वेतन (Actual Salary) पर हायर पेंशन का विकल्प चुना है, उनके लिए ₹15,000 की सीमा लागू नहीं होती। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी के पिछले 60 महीनों का औसत मूल वेतन ₹50,000 रहा है, तो 25 साल की सेवा (27 साल पेंशन योग्य सेवा) पर उसकी मासिक पेंशन इस प्रकार होगी:$$ ext{मासिक पेंशन} = frac{27 imes 50,000}{70} approx mathbf{₹19,285.71 ext{ प्रति माह}}$$ईपीएस पेंशन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्यन्यूनतम पेंशन गारंटी: ईपीएस-95 के तहत सरकार द्वारा वर्तमान में न्यूनतम ₹1,000 प्रति माह पेंशन की गारंटी दी जाती है।पारिवारिक पेंशन (Family Pension): पेंशनभोगी की मृत्यु होने की स्थिति में उसकी विधवा/विधुर को पेंशन की 50 प्रतिशत राशि आजीवन मिलती है और अधिकतम 2 बच्चों को 25 वर्ष की आयु तक 25-25 प्रतिशत पेंशन दी जाती है।10 वर्ष से कम सेवा पर विकल्प: यदि किसी कर्मचारी की कुल सेवा 10 वर्ष से कम है, तो वह पेंशन के लिए पात्र नहीं होता, लेकिन वह ईपीएफओ पोर्टल से फॉर्म 10C भरकर ईपीएस में जमा पूरी राशि एकमुश्त निकाल (Scheme Certificate / Withdrawal Benefit) सकता है।
देश के मध्य और पूर्वी राज्यों में मानसूनी हवाओं की सक्रियता एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से उठे गहरे दबाव (Depression) और झारखंड व उससे सटे गंगा के मैदानी इलाकों के ऊपर बने मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के चलते उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। इस मौसमी प्रणाली के प्रभाव से अगले 48 घंटों के दौरान तीनों राज्यों के अधिकांश जिलों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश, आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है।उत्तर प्रदेश: पूर्वी और तराई बेल्ट में मूसलाधार बारिश का अलर्टउत्तर प्रदेश में मानसून ट्रफ लाइन और चक्रवाती परिसंचरण के संयुक्त प्रभाव के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और तराई के जिलों में बारिश का दायरा बढ़ गया है। मौसम विभाग के अनुसार, सोनभद्र, मिर्जापुर, वाराणसी, प्रयागराज, चंदौली, गाजीपुर, गोरखपुर और बस्ती सहित आसपास के इलाकों में अगले दो दिनों तक कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की संभावना है। राजधानी लखनऊ, कानपुर और मध्य यूपी के क्षेत्रों में भी घने बादलों की आवाजाही के साथ रुक-रुक कर तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। भारी बारिश के चलते शहरी इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।मध्य प्रदेश: 20 से अधिक जिलों में अलर्ट, नदी-नाले उफान परमध्य प्रदेश में मानसूनी सिस्टम का सबसे गहरा असर देखने को मिल रहा है। रीवा, सतना, पन्ना, अनूपपुर, बालाघाट, सागर, दमोह, छतरपुर, जबलपुर और ग्वालियर-चंबल संभाग के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश से नर्मदा, बेतवा, चंबल और तवा जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने बांधों के कैचमेंट एरिया में जलभराव को देखते हुए कई बांधों के गेट खोलने की तैयारी की है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और पिकनिक स्पॉट व नदी तटों से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं।झारखंड: गहरे दबाव से कई इलाकों में लगातार बारिशझारखंड के ऊपर बने मानसूनी दबाव के चलते राज्य के रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, संताल परगना और कोल्हान प्रमंडल में व्यापक वर्षा दर्ज की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और वज्रपात की आशंका बनी हुई है। कई पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में कच्ची सड़कों और खेतों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। प्रशासन ने लोगों से आंधी-बारिश और बादलों की गड़गड़ाहट के समय खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे शरण न लेने की सख्त अपील की है।सावधानी और प्रशासनिक दिशा-निर्देशमौसम विभाग ने किसानों और आम नागरिकों के लिए जरूरी एडवाइजरी जारी की है। यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक मौसम बुलेटिन और ट्रैफिक अपडेट जरूर जांच लें। बिजली के खंभों, पुराने व जर्जर मकानों तथा जलमग्न सड़कों और अंडरपास से दूरी बनाए रखें। राज्य आपदा प्रबंधन टीमों (SDRF व NDRF) को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील जिलों में अलर्ट मोड पर रखा गया है।
दुनिया के सबसे बड़े वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) ने अपने व्यूज काउंटिंग सिस्टम में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। अब तक किसी भी लॉन्ग-फॉर्म वीडियो को व्यू मानने के लिए प्लेटफॉर्म द्वारा तय की गई एक न्यूनतम अवधि तक देखना जरूरी होता था। लेकिन अब 24 अगस्त 2026 से यूट्यूब सभी वीडियो फॉर्मेट्स (लॉन्ग वीडियो, शॉर्ट्स और लाइव स्ट्रीम) के लिए एक समान पैमाना लागू करने जा रहा है, जिसके तहत जैसे ही यूजर वीडियो प्ले करेगा यानी पहले ही फ्रेम (First Frame) से उसे एक व्यू के रूप में गिन लिया जाएगा। गूगल के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म के इस फैसले से इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की तरह यूट्यूब पर भी पब्लिक व्यू काउंट काफी तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई देगा।यूट्यूब ने व्यू काउंटिंग नियम में क्यों किया यह बड़ा बदलाव?यूट्यूब के अनुसार, पहले अलग-अलग फॉर्मेट्स के लिए व्यूज गिनने के अलग-अलग नियम थे। शॉर्ट्स (Shorts) के लिए पहले से ही इंस्टेंट प्ले व्यू सिस्टम लागू था, जबकि सामान्य लॉन्ग वीडियो के लिए व्यू दर्ज होने में थोड़ा समय लगता था। इस अलग-अलग मैट्रिक्स के कारण कई क्रिएटर्स के बीच भ्रम की स्थिति बनी रहती थी कि उनके कंटेंट को कुल कितना एक्सपोजर मिल रहा है। पूरे प्लेटफॉर्म पर एकरूपता (Parity) लाने और क्रिएटर्स को अपने कंटेंट की सही रीच मापने का सीधा साधन देने के उद्देश्य से कंपनी ने यह एकीकृत प्रणाली लागू करने का फैसला किया है।'Engaged Views' मेट्रिक रहेगा बरकरार: कैसे ट्रैक होगी असली ऑडियंस?पब्लिक व्यूज की संख्या तेजी से बढ़ने के बावजूद यूट्यूब ने असली एंगेजमेंट को ट्रैक करने की व्यवस्था को खत्म नहीं किया है। पुराने तरीके से गिने जाने वाले वास्तविक व्यूज अब YouTube Analytics के Advanced Mode में 'Engaged Views' के नाम से उपलब्ध रहेंगे। इसका मतलब यह है कि क्रिएटर यह आसानी से देख सकेंगे कि कितने लोगों ने केवल वीडियो पर क्लिक किया और कितने लोगों ने वाकई वीडियो को आगे तक देखा। इससे कंटेंट की क्वॉलिटी और दर्शकों के ठहराव (Retention) को गहराई से समझने में कोई बाधा नहीं आएगी।क्रिएटर्स और चैनल्स को क्या होंगे बड़े फायदे?इस नए नियम से क्रिएटर्स को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है:तेजी से बढ़ेगा पब्लिक व्यू काउंट: वीडियो अपलोड होते ही शुरुआती क्लिक्स सीधे पब्लिक काउंटर में जुड़ेंगे, जिससे वीडियो तेजी से ट्रेंडिंग और रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में दिखने की संभावना बढ़ेगी।ब्रांड डील्स और स्पॉन्सरशिप में मदद: ब्रांड्स और स्पॉन्सर को अपने कंटेंट का वास्तविक स्केल और कुल एक्सपोजर दिखाना अब क्रिएटर्स के लिए अधिक आसान और पारदर्शी हो जाएगा।प्लेटफॉर्म्स के बीच तुलना आसान: इंस्टाग्राम रील्स और टिकटॉक के मुकाबले यूट्यूब के व्यूज का तुलनात्मक आंकड़ा अब एक ही पैमाने पर परखा जा सकेगा।क्या मोनेटाइजेशन और YPP की कमाई पर पड़ेगा कोई असर?यूट्यूब ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव का क्रिएटर्स की कमाई या यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम (YPP) की पात्रता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। विज्ञापन से होने वाला रेवेन्यू और पेआउट्स पहले की तरह 'Engaged Views' और 'Engaged Watch Hours' के आधार पर ही तय किए जाएंगे। मोनेटाइजेशन के लिए जरूरी शर्तों को अब 'Qualified Watch Hours' और 'Qualified Shorts Views' के रूप में जाना जाएगा। संक्षेप में कहें तो, पब्लिक स्क्रीन पर दिखने वाले आंकड़े जरूर बड़े और आकर्षक होंगे, लेकिन वास्तविक कमाई वीडियो की वास्तविक गुणवत्ता और वॉच-टाइम पर ही निर्भर रहेगी।
दिग्गज टू-व्हीलर निर्माता कंपनी रॉयल एनफील्ड ने अपनी सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित रेट्रो रोडस्टर बाइक क्लासिक 350 का नया 'गोरखा एडिशन' (Classic 350 Gorkha Edition) भारतीय बाजार में आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। भारतीय सेना की जांबाज गोरखा रेजिमेंट के अदम्य साहस, शौर्य और गौरवशाली परंपरा को समर्पित यह स्पेशल एडिशन ₹2,10,684 (एक्स-शोरूम, नई दिल्ली) की शुरुआती कीमत पर पेश किया गया है। मिलिट्री-प्रेरित विशिष्ट डिजाइन और ऐतिहासिक प्रतीकों से सजी इस मोटरसाइकिल की आधिकारिक बुकिंग्स भी देश भर के डीलरशिप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शुरू कर दी गई हैं।गोरखा ग्रीन पेंट स्कीम और आइकॉनिक खुकरी इंसिग्नियाक्लासिक 350 गोरखा एडिशन का सबसे बड़ा आकर्षण इसका एक्सक्लूसिव 'गोरखा ग्रीन' (Gorkha Green) कलर शेड है, जो इसे स्टैंडर्ड मॉडल से पूरी तरह अलग और प्रीमियम बनाता है। बाइक के फ्यूल टैंक और साइड पैनल्स पर गोरखा रेजिमेंट की पहचान मानी जाने वाली पारंपरिक दोहरी खुखरी (Crossed Khukris) का विशेष बैज लगाया गया है। इसके साथ ही टैंक पर विशेष 'Gorkha Edition' ब्रांडिंग भी दी गई है। क्लासिक 350 के पारंपरिक टियर-ड्रॉप फ्यूल टैंक, राउंड हेडलैंप, चौड़े मडगार्ड और अपराइट राइडिंग पोस्चर के साथ-साथ इंजन केसिंग, वायर-स्पोक व्हील्स और एग्जॉस्ट पर क्रोम की फिनिशिंग दी गई है, जो हरे रंग के बैकग्राउंड पर बेहद आकर्षक कॉन्ट्रास्ट पेश करती है।असिस्ट एंड स्लिपर क्लच और यूएसबी टाइप-सी फास्ट चार्जरराइडिंग अनुभव को और अधिक आधुनिक व सहज बनाने के लिए रॉयल एनफील्ड ने गोरखा एडिशन में कुछ उपयोगी तकनीकी फीचर्स शामिल किए हैं। बाइक में अब असिस्ट एंड स्लिपर क्लच दिया गया है, जो अचानक गियर डाउनशिफ्ट करते समय रियर व्हील के लॉक होने या स्किड होने के खतरे को रोकता है और क्लच लीवर को बेहद हल्का बनाता है। इसके अलावा, लंबी दूरी के सफर और दैनिक आवागमन के दौरान स्मार्टफोन को चार्ज रखने के लिए हैंडल पर वेदर-प्रूफ USB Type-C फास्ट चार्जिंग पोर्ट भी दिया गया है।दमदार जे-सीरीज 349cc इंजन और परफॉर्मेंसमैकेनिकल मोर्चे पर गोरखा एडिशन में कंपनी के भरोसेमंद और रिफाइंड 349cc, सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड जे-सीरीज (J-Series) इंजन का इस्तेमाल जारी रखा गया है। यह इंजन 6,100 आरपीएम पर लगभग 20.2 बीएचपी की पावर और 4,000 आरपीएम पर 27 एनएम का पीक टॉर्क जनरेट करता है। 5-स्पीड गियरबॉक्स से लैस यह इंजन अपने लो-एंड टॉर्क और स्मूद थंप के लिए जाना जाता है, जिससे हाईवे क्रूज़िंग और सिटी ट्रैफिक दोनों में एक शांत और तनावमुक्त राइडिंग अनुभव मिलता है।एक्सक्लूसिव गोरखा राइडिंग गियर और लाइफस्टाइल कलेक्शनमोटरसाइकिल के लॉन्च के साथ ही रॉयल एनफील्ड ने समर्पित 'गोरखा कलेक्शन' (Gorkha Collection) की भी घोषणा की है। इस लाइफस्टाइल और राइडिंग गियर रेंज में ड्यूल-सर्टिफाइड जेट और क्वेस्ट हेलमेट्स, हाई-एंकर डिस्ट्रेस्ड लेदर राइडिंग बूट्स, मल्टी-फंक्शनल हेडगियर, खास अपैरल और कलेक्टिबल्स शामिल हैं। इन सभी मर्चेंडाइज में सैन्य वर्दी, रेजिमेंटल रंगों और खुकरी मोटिफ्स का उपयोग किया गया है, जो बाइक के साथ राइडर को एक संपूर्ण और विशिष्ट मिलिट्री लुक प्रदान करता है।
महिला डॉक्टर की मौत, ससुराल पर दहेज उत्पीड़न का आरोप
UP के मेरठ में 26 वर्षीय महिला डॉक्टर खुशहाली का शव उनके क्लिनिक में फंदे से लटका मिला है. 7 महीने पहले मैट्रिमोनियल साइट से शादी हुई थी. परिवार ने पति और ससुराल पर दहेज उत्पीड़न व हत्या का आरोप लगाया है. पुलिस दोनों पहलुओं से जांच कर रही है.
क्या होता है एक्जिम ऑपरेशन, भारत को कैसे मिलेगा बड़ा फायदा?
विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट पर आयात-निर्यात (एक्जिम) परिचालन शुरू हो गया है, जिससे विदेशी ट्रांसशिपमेंट पोर्ट पर भारत की निर्भरता कम होगी।
देश भर में त्योहारों, छुट्टियों और आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान विमानन कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने हवाई किराए और अचानक की जाने वाली मूल्य वृद्धि (Surge Pricing) पर देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद सख्त और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने निजी एयरलाइंस की मनमानी पर लगाम कसने में ढिलाई बरतने को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि एयरलाइंस सरकारी दिशा-निर्देशों और मूल्य नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनकी उड़ानों को तुरंत रोक दिया जाए यानी उन्हें 'ग्राउंड' (Grounded) कर दिया जाए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत एयरफेयर, बैगेज चार्ज, कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े अंतिम नियमों को आगामी 3 सप्ताह के भीतर तैयार कर पेश करने का समय दिया है।याचिका में मनमानी वसूली और स्वतंत्र नियामक की मांगशीर्ष अदालत सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने, यात्रियों के उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करने और टिकट दरों में होने वाले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र वैधानिक नियामक (Independent Aviation Regulator) गठित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि जब तक नए नियम पूरी तरह लागू नहीं हो जाते, तब तक पुरानी व्यवस्था ही प्रभावी है, लेकिन मौजूदा तंत्र की निष्क्रियता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण विमानन कंपनियां यात्रियों का आर्थिक शोषण कर रही हैं। अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस द्वारा ₹8,000 से लेकर ₹18,000 तक का भारी विसंगतिपूर्ण किराया वसूला जा रहा है।'अगर एयरलाइंस नियम नहीं मानतीं तो उड़ानें रोक दो': सुप्रीम कोर्टसुनवाई के दौरान जब केंद्र सरकार की ओर से यह कहा गया कि मंत्रालय द्वारा समय-समय पर एयरलाइंस को ऑफिस मेमोरेंडम (OM) जारी किए जाते रहे हैं, तो खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि क्या इन ज्ञापनों का ज़मीनी स्तर पर कोई व्यावहारिक प्रभाव हुआ है। पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पुराने नियमों का क्या मूल्य रह गया है और क्या वे केवल कागजी दस्तावेज बनकर रह गए हैं। अदालत ने कड़े शब्दों में निर्देश दिया कि यदि निजी विमानन कंपनियां सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य और यात्री सुरक्षा नियमों की अनदेखी करती हैं, तो सरकार को कड़ा रुख अपनाना चाहिए और ऐसी एयरलाइंस को उड़ान भरने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। अदालत ने इस बात पर बल दिया कि यात्रियों के शोषण को रोकने के लिए सख्त और बाध्यकारी प्रवर्तन तंत्र का होना अनिवार्य है।सीलबंद लिफाफे में सौंपा गया मसौदा, 3 हफ्ते में अंतिम रूप देने का भरोसाकेंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल कौशिक ने पीठ को अवगत कराया कि भारतीय विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लाए गए नए 'भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024' के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। सरकार ने प्रस्तावित नियमों का मसौदा एक सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया और बताया कि कुछ तकनीकी व नीतिगत पहलुओं पर अंतिम दौर की चर्चाएं चल रही हैं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार तीन सप्ताह के भीतर सभी हितधारकों के साथ परामर्श पूरा करके अंतिम अधिसूचना को अदालत के अवलोकन के लिए रिकॉर्ड पर रख देगी। शीर्ष अदालत ने सरकार की इस दलील को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय की है।सर्ज प्राइसिंग, कैंसिलेशन और बैगेज चार्ज पर बनेगा सख्त फ्रेमवर्कअदालत में चल रही इस कानूनी प्रक्रिया का मुख्य केंद्र बिंदु केवल बेस फेयर को नियंत्रित करना ही नहीं है, बल्कि टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों पर थोपे जाने वाले विभिन्न छुपे हुए शुल्कों (Ancillary Charges) को पारदर्शी बनाना भी है। नए नियमों के मसौदे में अत्यधिक सर्ज प्राइसिंग पर एक तार्किक सीमा (Fare Capping or Rationalisation), सीट चयन के नाम पर अतिरिक्त वसूली, अतिरिक्त बैगेज चार्ज, फ्लाइट कैंसिलेशन और ऑटोमैटिक रिफंड के लिए सख्त समय-सीमा तय करने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह ढांचा वैधानिक रूप ले लेता है, तो प्राकृतिक आपदाओं, त्योहारों जैसे दिवाली, छठ पूजा या गर्मियों की छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दामों में होने वाली अचानक चार से पांच गुना बढ़ोतरी पर कानूनी रूप से अंकुश लग जाएगा।उपभोक्ता संरक्षण और विमानन क्षेत्र की विश्वसनीयताभारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते घरेलू विमानन बाजारों में से एक है, जहां मध्यम वर्ग का एक बड़ा हिस्सा यात्रा के लिए उड़ानों का उपयोग कर रहा है। ऐसे में बाजार में प्रतिस्पर्धा के नाम पर अनियंत्रित मूल्य निर्धारण से आम यात्रियों के हितों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था। सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा हस्तक्षेप न केवल नीति-निर्माताओं पर जवाबदेही तय करता है, बल्कि एयरलाइंस को भी यह स्पष्ट संदेश देता है कि मुनाफाखोरी की आड़ में उपभोक्ता अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 7 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि देश के करोड़ों हवाई यात्रियों को मनमाने किराए से राहत दिलाने के लिए सरकार किस प्रकार का ठोस और प्रभावी तंत्र पेश करती है।
होर्मुज स्ट्रेट पर आमने-सामने, ट्रंप ने बताया नया इलाका; ईरान ने दिया जवाब
ट्रंप ने ईरान से बातचीत से इनकार करते हुए होर्मुज स्ट्रेट को 'नया अमेरिकी इलाका' बताया, जिस पर ईरान ने कड़ा जवाब दिया और अपने नियंत्रण का दावा किया।
मध्य प्रदेश ने सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूल के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की उपस्थिति, आव
बिना लहसुन-प्याज बनाएं बाजार जैसा मसाला, डालते ही खाना बनेगा टेस्टी
मानसून में बिना प्याज-लहसुन का खाना भी अब स्वादिष्ट बनेगा. कढ़ी पत्ता, मूंगफली, नारियल और मसालों से बना यह ऑल-राउंडर सात्विक मसाला आपकी सब्जियों, खिचड़ी, पराठों और स्नैक्स का स्वाद दोगुना कर देगा. इसे घर पर बनाना बेहद आसान है और एयरटाइट जार में लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है.
PRD जवानों को CM योगी की डबल सौगात, ₹600 मानदेय और कैशलेस इलाज की सुविधा
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पीआरडी जवानों को डबल सौगात दी' पहली प्रतिवर्ष कैशलेस इलाज की सुविधा जिसके अंतर्गत जवानो को पांच लाख तक के इलाज मुफ्त मे होंगे और दूसरी जवानों का ड्यूटी भत्ता बढ़ाकर 600 रुपए कर दिया गया।
आज के समय में वित्तीय स्वतंत्रता और रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करना हर नौकरीपेशा और पेशेवर का सबसे बड़ा सपना होता है। आम तौर पर लोग म्यूचुअल फंड में एक निश्चित राशि की सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू कर देते हैं और सालों तक उसी तय रकम को जमा करते रहते हैं। हालांकि, मुद्रास्फीति (Inflation) की बढ़ती दर और हर साल बढ़ने वाली सैलरी को देखते हुए सामान्य एसआईपी की तुलना में 'स्टेप-अप एसआईपी' (Step-Up SIP) वेल्थ क्रिएशन का सबसे अचूक और शक्तिशाली माध्यम साबित हो रहा है। मात्र 10% की मामूली वार्षिक बढ़ोतरी आपके सामान्य रिटर्न में करोड़ों रुपये का अतिरिक्त अंतर पैदा कर सकती है।क्या है Step-Up SIP और यह सामान्य SIP से कैसे अलग है?सामान्य एसआईपी में निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि (जैसे ₹10,000) पूरे निवेश कार्यकाल के लिए जमा करता है। इसके विपरीत, स्टेप-अप एसआईपी (जिसे टॉप-अप एसआईपी भी कहा जाता है) में आप अपने फंड हाउस को निर्देश देते हैं कि हर साल आपकी मासिक किस्त में एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 10%) या निश्चित राशि (जैसे ₹1,000) की बढ़ोतरी अपने आप कर दी जाए। चूंकि हर वित्तीय वर्ष में आपकी सैलरी, इंक्रीमेंट या व्यापारिक मुनाफे में वृद्धि होती है, इसलिए उसी अनुपात में निवेश को बढ़ाना आपकी बचत क्षमता को स्वाभाविक रूप से गति देता है और लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन से बचाता है।गणित से समझें: सामान्य SIP बनाम स्टेप-अप SIP का फर्कमान लीजिए दो दोस्त, 'अमित' और 'रोहित', 25 वर्ष की आयु में ₹10,000 प्रति माह से 20 वर्षों के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करते हैं और दोनों को सालाना औसतन 12% का अनुमानित सीएजीआर (CAGR) रिटर्न मिलता है।सामान्य SIP (अमित का मामला):मासिक निवेश: ₹10,000 (स्थिर)निवेश अवधि: 20 वर्ष20 वर्षों में कुल जमा पूंजी: ₹24,00,000 (₹24 लाख)12% की दर से 20 साल बाद कुल कॉर्पस: लगभग ₹99.91 लाख (करीब ₹1 करोड़)Step-Up SIP (रोहित का मामला - 10% वार्षिक बढ़ोतरी):शुरुआती निवेश: ₹10,000 प्रति माहवार्षिक बढ़ोतरी: हर साल 10%20 वर्षों में कुल जमा पूंजी: लगभग ₹68.70 लाख12% की दर से 20 साल बाद कुल कॉर्पस: लगभग ₹2.30 करोड़ (₹2,30,00,000)₹1.30 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त फायदा कैसे?ऊपर दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि रोहित ने अपने मासिक निवेश को सैलरी इंक्रीमेंट के साथ सिर्फ 10% सालाना बढ़ाया। इसके परिणामस्वरूप, जहां अमित को 20 साल बाद ₹1 करोड़ का फंड मिला, वहीं रोहित का कुल फंड ₹2.30 करोड़ तक पहुंच गया। यानी रोहित को शुद्ध रूप से लगभग ₹1.30 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त कॉर्पस प्राप्त हुआ। यह जादुई अंतर सिर्फ इसलिए संभव हुआ क्योंकि बाद के वर्षों में बढ़ा हुआ पैसा कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) के शीर्ष चक्र में तेजी से मल्टीप्लाई हुआ।स्टेप-अप एसआईपी के प्रमुख फायदेवेतन वृद्धि के साथ तालमेल: जैसे-जैसे आपकी आय बढ़ती है, आपकी बचत का हिस्सा भी अपने आप उसी अनुपात में बढ़ता जाता है।महंगाई को मात देने की क्षमता: स्थिर एसआईपी की क्रय शक्ति समय के साथ घटती है, जबकि स्टेप-अप निवेश महंगाई दर से कहीं अधिक तेजी से बढ़ता है।वित्तीय लक्ष्यों की त्वरित प्राप्ति: बच्चों की उच्च शिक्षा, सपनों का घर या 45-50 की उम्र में रिटायरमेंट जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्य तय समय से कई साल पहले पूरे हो जाते हैं।वित्तीय अनुशासन: ऑटो-डेबिट के जरिए टॉप-अप होने से निवेशक गैर-जरूरी खर्चों में पैसा बर्बाद करने से बच जाता है।स्टेप-अप एसआईपी कैसे शुरू करें?यदि आप पहले से एसआईपी चला रहे हैं, तो अपने म्यूचुअल फंड पोर्टल, ब्रोकर ऐप या डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से मौजूदा एसआईपी में 'Top-up / Step-up' विकल्प को सक्रिय कर सकते हैं। नई एसआईपी शुरू करते समय सीधे 'Annual Step-Up' का विकल्प चुनें, जिसमें 5%, 10% या अपनी सुविधानुसार राशि निर्धारित करें। यदि कभी आर्थिक तंगी या नौकरी में बदलाव आए, तो अधिकांश फंड हाउस में स्टेप-अप फीचर को पॉज या संशोधित करने की सुविधा भी उपलब्ध होती है। समय पर शुरुआत और लगातार थोड़ा-सा अतिरिक्त निवेश ही वित्तीय रूप से अमीर बनने का सबसे सरल और सुरक्षित फॉर्मूला है।
आज के आधुनिक दौर में वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए लोन या क्रेडिट की सुविधा हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बन चुकी है। आम तौर पर समाज में यह धारणा रही है कि किसी भी प्रकार का कर्ज लेना गलत होता है और इससे बचना चाहिए। हालांकि, आधुनिक वित्तीय प्रबंधन और अर्थशास्त्र के सिद्धांत इस सोच से पूरी तरह अलग हैं। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, कर्ज अपने आप में न तो अच्छा होता है और न ही बुरा; यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि उस पैसे का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। यदि सही तरीके से योजना बनाकर लोन लिया जाए तो वह आपकी संपत्ति (Net Worth) और आय को कई गुना बढ़ा सकता है, जिसे 'गुड डेट' कहा जाता है। इसके विपरीत, बिना सोचे-समझे गैर-जरूरी खर्चों के लिए लिया गया लोन आपको कर्ज के भंवरजाल में फंसा सकता है, जिसे 'बैड डेट' के रूप में जाना जाता है।गुड डेट (Good Debt) क्या है और यह कैसे बनाता है अमीर?गुड डेट वह वित्तीय साधन है जिसे भविष्य में आय अर्जित करने, पूंजीगत मूल्य में वृद्धि करने या किसी उत्पादक संपत्ति (Appreciating Asset) के निर्माण के लिए लिया जाता है। ऐसा कर्ज लंबी अवधि में अपनी मूल लागत और ब्याज से कहीं अधिक रिटर्न उत्पन्न करता है।गुड डेट के अंतर्गत मुख्य रूप से निम्नलिखित ऋण आते हैं:होम लोन (Home Loan): रियल एस्टेट या घर खरीदने के लिए लिया गया लोन एक क्लासिक गुड डेट माना जाता है। समय के साथ जमीन और मकान के बाजार मूल्य में वृद्धि होती है। इसके अलावा, आयकर अधिनियम की धारा 80C और धारा 24(b) के तहत होम लोन के मूलधन व ब्याज भुगतान पर महत्वपूर्ण टैक्स छूट मिलती है। साथ ही, यदि मकान किराए पर दिया जाए तो नियमित रेंटल इनकम का जरिया भी बनता है।एजुकेशन लोन (Education Loan): खुद की या बच्चों की उच्च शिक्षा, तकनीकी डिग्री या वोकेशनल कोर्स के लिए लिया गया लोन सीधे तौर पर भविष्य की कमाई क्षमता (Earning Potential) को बढ़ाता है। अच्छी शिक्षा बेहतर करियर, उच्च सैलरी पैकेज और वित्तीय सुरक्षा की नींव रखती है। इसके ब्याज पर इनकम टैक्स की धारा 80E के तहत 8 वर्षों तक असीमित टैक्स डिडक्शन का लाभ भी मिलता है।बिजनेस लोन (Business / MSME Loan): नए स्टार्टअप, दुकान के विस्तार या कंपनी की कार्यशील पूंजी (Working Capital) के लिए लिया गया कर्ज उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है। जब बिजनेस का मुनाफा (ROI) लोन की ब्याज दर से अधिक होता है, तो यह लेवरेजिंग के जरिए व्यापार को तेजी से स्केल करने में मदद करता है।बैड डेट (Bad Debt) क्या है और यह क्यों बनता है भारी बोझ?बैड डेट वह कर्ज है जो ऐसी वस्तुओं या सेवाओं के उपभोग (Consumption) के लिए लिया जाता है जिनका मूल्य समय के साथ तुरंत घटता है (Depreciating Assets) या जिनसे कोई वित्तीय रिटर्न नहीं मिलता। इस प्रकार का कर्ज आपकी जेब से लगातार पैसा बाहर निकालता है और किसी भी प्रकार की संपत्ति का निर्माण नहीं करता।बैड डेट की प्रमुख श्रेणियां इस प्रकार हैं:क्रेडिट कार्ड का बकाया (Credit Card Outstanding): क्रेडिट कार्ड का न्यूनतम देय (Minimum Due) चुकाकर रोलओवर करना सबसे खतरनाक बैड डेट है। इस पर सालाना 36% से 48% तक का अत्यधिक चक्रवर्ती ब्याज और लेट फीस लगती है, जो देखते ही देखते व्यक्ति को बड़े कर्ज के जाल में धकेल देती है।लाइफस्टाइल व पर्सनल लोन (Personal Loans for Lifestyle): महंगे गैजेट्स, लग्जरी छुट्टियां (Vacation), शादियों में दिखावा या ब्रांडेड कपड़ों की खरीदारी के लिए लिया गया अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन बैड डेट की श्रेणी में आता है। इन खर्चों का कोई रीसेल वैल्यू नहीं होता, जबकि 12% से 18% तक का भारी ब्याज हर महीने आपकी सैलरी से कटता रहता है।महंगे ऑटो लोन (Car Loans for Depreciating Cars): कार शोरूम से बाहर निकलते ही अपनी 10-15% वैल्यू खो देती है। यदि क्षमता से अधिक महंगी लग्जरी कार खरीदने के लिए 7-8 साल का भारी ब्याज वाला लोन लिया जाए, तो यह वित्तीय स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होता है।इंस्टेंट पे-डे लोन और लोन ऐप्स (Payday / Easy Micro-Loans): बिना किसी जांच-पड़ताल के मिलने वाले अल्पकालिक लोन ऐप्स अक्सर अत्यधिक प्रोसेसिंग फीस और भारी ब्याज वसूलते हैं, जो आपातकालीन स्थिति से उबारने के बजाय मानसिक तनाव का कारण बनते हैं।गुड डेट और बैड डेट में अंतर कैसे पहचानें? तीन सुनहरे नियमकिसी भी प्रकार का लोन लेने से पहले प्रत्येक व्यक्ति को तीन बुनियादी सवालों के आधार पर उसका मूल्यांकन करना चाहिए:क्या यह एसेट बना रहा है या लायबिलिटी? यदि खरीदे जा रहे सामान की कीमत भविष्य में बढ़ने वाली है (जैसे जमीन, डिग्री), तो वह सुरक्षित है। यदि उसकी कीमत दिन-प्रतिदिन घटने वाली है (जैसे मोबाइल, टीवी), तो वह जोखिम भरा है।कर्ज की ब्याज दर कितनी है? गुड डेट सामान्यतः कम और रियायती ब्याज दरों (जैसे 7% से 9%) पर उपलब्ध होता है, जबकि बैड डेट पर ब्याज दरें 15% से लेकर 40% तक अत्यंत उच्च होती हैं।क्या इस पर कोई टैक्स लाभ मिल रहा है? सरकारी नियमों के तहत शिक्षा और होम लोन जैसे उत्पादक ऋणों पर आयकर में छूट मिलती है, जिससे लोन की प्रभावी लागत (Effective Cost) काफी कम हो जाती है, जबकि पर्सनल या क्रेडिट कार्ड लोन पर कोई टैक्स रिलीफ नहीं मिलता।कर्ज को स्मार्ट तरीके से मैनेज करने की व्यावहारिक रणनीतिवित्तीय स्वतंत्रता की राह में पहला कदम बैड डेट को पूरी तरह खत्म करना और गुड डेट का विवेकपूर्ण उपयोग करना है। सबसे पहले अपने सभी उच्च-ब्याज वाले कर्जों की पहचान करें और 'डेट स्नोबॉल' या 'डेट एवलांच' तकनीक अपनाकर क्रेडिट कार्ड व पर्सनल लोन का भुगतान प्राथमिकता से करें।वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए आपका कुल डेट-टू-इनकम रेश्यो (DTI - कुल मासिक कमाई के मुकाबले सभी ईएमआई का अनुपात) 35 से 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। हमेशा 6 महीने के अनिवार्य खर्चों के बराबर एक इमरजेंसी फंड बनाकर रखें ताकि किसी आकस्मिक जरूरत के समय तुरंत कोई नया हाई-इंटरेस्ट लोन न लेना पड़े। जब आप कर्ज को अपनी वित्तीय योजना में एक रणनीतिक टूल की तरह इस्तेमाल करना सीख जाते हैं, तो वही कर्ज बोझ बनने के बजाय आपकी संपत्ति सृजन का सबसे बड़ा माध्यम बन जाता है।
दैनिक आवागमन और लंबी दूरी की यात्रा को एक ही मंच पर लाने की दिशा में ऑनलाइन राइड-हेलिंग दिग्गज उबर (Uber) ने भारतीय बाजार में एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब तक केवल कैब, ऑटो, बाइक और मेट्रो टिकट बुकिंग के लिए पहचानी जाने वाली यह कंपनी अब भारतीय रेल यात्रियों को भी सीधे अपनी ऐप से ट्रेन टिकट बुक करने की सुविधा दे रही है। इसके लिए उबर इंडिया ने ऑनलाइन ट्रैवल और टिकटिंग प्लेटफॉर्म इक्सिगो (ixigo) के साथ आधिकारिक रणनीतिक साझेदारी की है। इस नई पहल के बाद अब यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने के लिए कैब बुक करने और फिर ट्रेन टिकट के लिए अलग-अलग ऐप्स पर भटकने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि पूरी यात्रा की प्लानिंग एक ही जगह से संभव हो सकेगी।एक ही ऐप पर पूरी यात्रा: कैब से लेकर ट्रेन टिकट तकइस नई सेवा का सबसे बड़ा आकर्षण 'फर्स्ट-माइल और लास्ट-माइल' कनेक्टिविटी का एकीकरण है। अक्सर ट्रेन से यात्रा करने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि वे समय पर स्टेशन कैसे पहुंचेंगे और गंतव्य स्टेशन पर उतरने के बाद अपने होटल या घर तक सुरक्षित कैसे जाएंगे। उबर ने अपनी कोर कैब सर्विस को ट्रेन टिकटिंग के साथ जोड़कर इस समस्या का सटीक समाधान निकाला है। जब कोई यात्री उबर ऐप के जरिए ट्रेन टिकट बुक करेगा, तो उसी समय वह अपनी ट्रेन के समय के अनुसार स्टेशन जाने के लिए पहले से राइड शेड्यूल कर सकेगा। यात्रा पूरी होने पर गंतव्य शहर के स्टेशन से बाहर निकलते ही कनेक्टिंग राइड भी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी।Uber ऐप से ट्रेन टिकट बुक करने का आसान प्रोसेसउबर ऐप के जरिए ट्रेन टिकट बुक करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है:सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में Uber App को गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर से लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करके खोलें।होम स्क्रीन पर दिख रहे 'Services' या 'Travel' सेक्शन में जाएं और वहां दिए गए 'Trains' (या Train & Bus) आइकन पर टैप करें।अपनी यात्रा का शुरुआती रेलवे स्टेशन (From), गंतव्य स्टेशन (To), और यात्रा की तारीख (Date of Journey) दर्ज करें।स्क्रीन पर उपलब्ध सभी ट्रेनों की सूची (जैसे वंदे भारत, राजधानी, सुपरफास्ट व एक्सप्रेस ट्रेनें) और विभिन्न श्रेणियों (1A, 2A, 3A, SL आदि) में सीट उपलब्धता (Seat Availability) दिख जाएगी।अपनी पसंद की ट्रेन और क्लास का चयन करने के बाद यात्री का विवरण (नाम, आयु, बर्थ प्राथमिकता) भरें।अपना आधिकारिक IRCTC User ID दर्ज करें और आगे बढ़ें।भुगतान के लिए यूपीआई (UPI), क्रेडिट/डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या उबर वॉलेट का उपयोग करके ट्रांजैक्शन पूरा करें।पेमेंट सफल होने के बाद IRCTC का पासवर्ड डालकर ऑथेंटिकेशन पूरा करें, जिसके बाद तुरंत आपका कन्फर्म्ड टिकट जेनरेट हो जाएगा और एसएमएस व ईमेल पर पीएनआर (PNR) प्राप्त हो जाएगा।यात्रियों को मिलने वाले प्रमुख फायदे और फीचर्सइक्सिगो के साथ साझेदारी के चलते उबर ऐप पर ट्रेन टिकटिंग का अनुभव बेहद समृद्ध और भरोसेमंद होगा। यात्री ऐप के भीतर ही अपने टिकट का रियल-टाइम PNR स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे। इसके अलावा ट्रेन की लाइव रनिंग स्थिति (Live Train Running Status) और प्लेटफॉर्म लोकेटर जैसी आवश्यक जानकारियां भी मिलेंगी। टिकटिंग के शुरुआती चरण में उबर द्वारा यूजर्स को जीरो एजेंट सर्विस फीस और पहले टिकट पर आकर्षक कैशबैक या उबर क्रेडिट्स जैसे ऑफर्स भी दिए जा रहे हैं। किसी कारणवश यात्रा रद्द होने पर डिजिटल माध्यम से त्वरित रिफंड की सुविधा भी सुनिश्चित की गई है।IRCTC और ixigo के मजबूत नेटवर्क का लाभभारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क पर रोजाना करोड़ों यात्री सफर करते हैं। टिकट बुकिंग के पीक ऑवर्स के दौरान विभिन्न पोर्टल्स पर लोड बढ़ जाता है। आईआरसीटीसी के अधिकृत टिकटिंग पार्टनर इक्सिगो की उन्नत तकनीक के माध्यम से उबर प्लेटफॉर्म सुरक्षित, तेज और बिना रुकावट के टिकट बुकिंग अनुभव प्रदान करेगा। टिकट कैंसिलेशन और रिफंड की नीतियां पूरी तरह से भारतीय रेलवे (IRCTC) के आधिकारिक नियमों के तहत ही संचालित होंगी, जिससे यात्रियों की वित्तीय सुरक्षा शत-प्रतिशत सुनिश्चित रहेगी।एक संपूर्ण सुपर-ऐप बनने की दिशा में कदमभारत के प्रमुख शहरों में दिल्ली मेट्रो की क्यूआर-कोड टिकट बुकिंग को अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़ने के बाद, भारतीय रेलवे का इंटीग्रेशन उबर को एक संपूर्ण 'मल्टी-मॉडल मोबिलिटी सुपर-ऐप' बनाता है। मेट्रो, लोकल कैब, ऑटो, इंटरसिटी राइड्स और अब नेशनल ट्रेन नेटवर्क को एक साथ लाकर कंपनी ने देश के परिवहन तंत्र को अत्यधिक सुगम और आधुनिक बना दिया है। आने वाले समय में यह सुविधा देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले उन लाखों यात्रियों के लिए वरदान साबित होगी जो सरल और सुरक्षित तरीके से अपनी संपूर्ण यात्रा एक ही क्लिक पर प्लान करना चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने वाले आरोपियों और उनके परिवार की संपत्ति जब्त करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है।
'संघीय ढांचे का सम्मान करें', तीन शिकारियों की मौत मामले पर तमिलनाडु के नेताओं पर बरसे डीके शिवकुमार
कर्नाटक के चामराजनगर में वनकर्मियों से मुठभेड़ में तीन शिकारियों की मौत पर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच तकरार बढ़ गया है।
फांसी की सजा के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, सरकार को विशेषज्ञ समिति बनाने की छूट
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा के तरीके को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है, जिससे यह कानूनी प्रावधान जारी रहेगा।
आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले घरेलू बाजार में चीनी की आसमान छूती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं और केंद्र सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दिवाली और शादियों के सीजन के दौरान पारंपरिक मिठाइयों, पेय पदार्थों और पैकेज्ड फूड की खपत अपने चरम पर पहुंच जाती है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और खुदरा महंगाई पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार आयात शुल्क में भारी कटौती करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। वर्तमान में चीनी के आयात पर 100 प्रतिशत का भारी-भरकम सीमा शुल्क (Customs Duty) लागू है, जिसे घटाने या पूरी तरह समाप्त करने के प्रस्तावों पर अंतर-मंत्रालयी स्तर पर मंथन जारी है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहारों के उल्लास के बीच आम आदमी की जेब पर मिठास का अतिरिक्त बोझ न पड़े।रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची चीनी की थोक और खुदरा कीमतेंहाल के हफ्तों में घरेलू मंडियों में चीनी की दरों में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। देश के प्रमुख गन्ना और चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में एक्स-मिल (Ex-mill) कीमतें लगभग ₹46 प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। वहीं कोल्हापुर और उत्तर भारत की प्रमुख थोक मंडियों में थोक भाव ₹5,300 से ₹5,500 प्रति क्विंटल के पार निकल चुके हैं। थोक बाजार में आई इस तेजी का सीधा असर खुदरा दुकानों पर दिखाई दे रहा है, जहां कई शहरों में चीनी ₹50 से ₹55 प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के आंकड़ों के मुताबिक, कीमतों का यह स्तर पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ रहा है।100% आयात शुल्क हटाने या घटाने का क्या होगा असर?भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। ऐतिहासिक रूप से भारत घरेलू जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर चीनी आयात पर निर्भर नहीं रहा है और आखिरी बार वर्ष 2017-18 में उल्लेखनीय मात्रा में आयात किया गया था। 100 प्रतिशत आयात शुल्क का मुख्य उद्देश्य घरेलू मिलों और स्थानीय गन्ना किसानों को सस्ते विदेशी माल के अनुचित डंपिंग से बचाना रहा है। हालांकि, मौजूदा आपूर्ति दबाव को देखते हुए यदि सरकार सीमित मात्रा में शुल्क-मुक्त (Duty-Free) या कम शुल्क पर कच्ची और रिफाइंड चीनी के आयात की अनुमति देती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार से अतिरिक्त स्टॉक तुरंत घरेलू बंदरगाहों पर पहुंच जाएगा। इससे स्थानीय सट्टेबाजी और कृत्रिम कमी पर तत्काल रोक लगेगी और मिलों पर एक्स-मिल कीमतें घटाने का स्वाभाविक दबाव बनेगा।मानसून की चाल और गन्ना उत्पादन से जुड़ी चुनौतियांघरेलू बाजार में आपूर्ति पर दबाव का एक बड़ा कारण मौसम की अनिश्चितता रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में मानसून की बारिश कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में लंबी अवधि के औसत से लगभग 13 प्रतिशत तक कम रही है। जून के शुरुआती चरण में बारिश की कमी 40 प्रतिशत से अधिक थी, जिससे कुछ इलाकों में बुआई और फसल के विकास की गति धीमी रही। कृषि मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में गन्ने का रकबा लगभग 5.83 मिलियन हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर अल-नीनो के प्रभाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार (जैसे न्यूयॉर्क शुगर फ्यूचर्स) में भी कीमतों में मजबूती देखी गई है, जिसका मनोवैज्ञानिक असर घरेलू व्यापार पर पड़ा है।जमाखोरी पर लगाम और गन्ने की अगेती पेराई की रणनीतिसिर्फ आयात शुल्क कटौती ही नहीं, बल्कि सरकार घरेलू स्तर पर आपूर्ति बढ़ाने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने थोक व्यापारियों, रिफाइनरों और बड़े खुदरा विक्रेताओं पर सख्त स्टॉक लिमिट (Stockholding Limits) लागू कर दी है ताकि कोई भी व्यापारी बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने के लिए चीनी की जमाखोरी न कर सके। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की चीनी मिलों से बातचीत के बाद नए पेराई सत्र को सामान्य समय (नवंबर के पहले सप्ताह) से करीब 10 से 15 दिन पहले, यानी अक्टूबर के मध्य से ही शुरू करने की योजना बनाई गई है। इससे त्योहारी सीजन के चरम पर नई चीनी का ताजा स्टॉक बाजार में उतर जाएगा और आपूर्ति का संकट पूरी तरह टल जाएगा।खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता हित सर्वोपरिसरकार के सामने वर्तमान में दोहरी चुनौती है—एक तरफ एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की गति को बनाए रखना और दूसरी तरफ खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखते हुए आम उपभोक्ता को सस्ती दरों पर आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना। केंद्र सरकार ने पहले ही चीनी के अनियंत्रित निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं ताकि घरेलू बफर स्टॉक सुरक्षित रहे। यदि आयात शुल्क में रियायत की आधिकारिक अधिसूचना जारी होती है, तो यह स्पष्ट संदेश होगा कि सरकार आम नागरिकों की रसोई के बजट और खाद्य महंगाई को लेकर पूरी तरह सतर्क है। आने वाले कुछ दिनों में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है, जिससे उपभोक्ताओं को त्योहारी सीजन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
देश में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लाखों मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए एक बेहद उत्साहवर्धक और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग (सस्ते आवास) के दायरे को गति देने और बैंकों की जोखिम उठाने की क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से होम लोन पर मिलने वाली क्रेडिट गारंटी की सीमा को दोगुना करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इस नीतिगत फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो अपनी सीमित आय, अनौपचारिक रोजगार या क्रेडिट इतिहास के अभाव में बैंकों से आसानी से होम लोन प्राप्त नहीं कर पाते थे। हाउसिंग सेक्टर में लिक्विडिटी बढ़ाने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) तथा निम्न आय वर्ग (LIG) के लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए यह फैसला मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।क्रेडिट गारंटी दोगुनी होने का क्या है मतलब और कैसे मिलेगा लाभ?क्रेडिट गारंटी योजना का मुख्य सिद्धांत यह होता है कि यदि कोई उधारकर्ता किसी विपरीत परिस्थिति में लोन चुकाने में असमर्थ हो जाता है, तो बैंक को होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई सरकार द्वारा समर्थित ट्रस्ट (जैसे क्रेडिट रिस्क गारंटी फंड ट्रस्ट) द्वारा की जाती है। अब तक सस्ते घरों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली क्रेडिट गारंटी की एक निश्चित सीमा तय थी। इस सीमा को दोगुना किए जाने से बैंकों को सुरक्षा का एक बड़ा सुरक्षा कवच (क्रेडिट शील्ड) मिल जाएगा। जब बैंक का जोखिम कवर दोगुना हो जाता है, तो बैंक बिना किसी अतिरिक्त संपत्ति को गिरवी रखे या अत्यधिक कागजी औपचारिकताओं के बिना होम लोन स्वीकृत करने में संकोच नहीं करते। इससे पहली बार घर खरीदने वाले ग्राहकों के लिए लोन अप्रूवल की दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।अफोर्डेबल हाउसिंग सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्टपिछले कुछ वर्षों में निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, स्टील और लेबर कॉस्ट में हुई बढ़ोतरी के कारण किफायती मकानों की कीमतों में भी इजाफा देखा गया है। ऐसे में पुरानी क्रेडिट गारंटी सीमा आज के बाजार मूल्य के अनुरूप पर्याप्त नहीं पड़ रही थी। गारंटी कवर के दोगुना होने से रियल एस्टेट डेवलपर्स को भी सस्ते मकानों के नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने का प्रोत्साहन मिलेगा। जब बाजार में खरीदारों की क्रय शक्ति और लोन पात्रता में सुधार होता है, तो मांग में स्वतः तेजी आती है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ बड़े महानगरों के उपनगरीय इलाकों में अफोर्डेबल हाउसिंग की रुकी हुई परियोजनाओं को नई गति मिलेगी, जिससे रियल्टी सेक्टर में लंबे समय से बना गतिरोध दूर होगा।बैंकों की हिचकिचाहट होगी दूर, कम ब्याज पर मिलेगा लोनकम आय वर्ग और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को होम लोन देते समय वाणिज्यिक बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) को हमेशा नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बढ़ने का डर रहता था। इस डर के कारण बैंक या तो लोन आवेदन खारिज कर देते थे या फिर जोखिम के एवज में बहुत अधिक ब्याज दर वसूलते थे। बढ़ी हुई क्रेडिट गारंटी से बैंकों का यह वित्तीय जोखिम न्यूनतम हो जाएगा। जोखिम कम होने से वित्तीय संस्थान न केवल अधिक से अधिक फाइलों को मंजूरी देंगे, बल्कि प्रतिस्पर्धी और कम ब्याज दरों पर लोन की पेशकश भी कर सकेंगे। इसके अलावा प्रोसेसिंग फीस और अन्य आकस्मिक शुल्कों में भी रियायत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे लोन की कुल ईएमआई का बोझ कम होगा।किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा? पात्रता और शर्तेंइस संशोधित व्यवस्था का प्राथमिक लाभ समाज के उन वर्गों को लक्षित करता है जिन्हें वास्तव में वित्तीय सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत है।आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG): ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय निर्धारित सरकारी स्लैब के भीतर आती है और जो पहली बार पक्का मकान खरीद रहे हैं या बना रहे हैं।अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिक व स्वरोजगारी: छोटे दुकानदार, दैनिक वेतनभोगी, डिलीवरी प्रोफेशनल्स, ऑटो चालक और फ्रीलांसर्स जिनके पास आईटीआर (ITR) या नियमित सैलरी स्लिप जैसे औपचारिक दस्तावेज नहीं होते।टियर-2, 3 और 4 शहरों के खरीदार: छोटे शहरों और कस्बों में जमीन खरीदकर मकान बनाने वाले स्थानीय निवासी, जहां संपत्ति के मूल्यांकन को लेकर बैंक पहले कड़े नियम लागू करते थे।महिला खरीदार और सह-आवेदक: महिलाओं के नाम पर या महिला को सह-आवेदक बनाकर लोन लेने पर अतिरिक्त ब्याज छूट और प्राथमिक आवंटन का लाभ जारी रहेगा।रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र में आएगी नई तेजीरियल एस्टेट सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है, जो स्टील, सीमेंट, पेंट, ग्लास, केबल और सैनिटरी वेयर जैसे 250 से अधिक सहायक उद्योगों से सीधे जुड़ा हुआ है। जब अफोर्डेबल हाउसिंग में पूंजी का प्रवाह बढ़ता है, तो इसका सीधा सकारात्मक असर निर्माण गतिविधियों और दैनिक मजदूरी पर पड़ता है। बढ़ी हुई क्रेडिट गारंटी से हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में नई जान फूंकी जाएगी, जिससे पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम में नकदी का प्रवाह सुगम होगा। स्थानीय स्तर पर बिल्डरों, कांट्रैक्टरों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं के लिए व्यापार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे समग्र आर्थिक विकास दर (GDP) को भी सहारा मिलेगा।'सबके लिए आवास' और समावेशी विकास को नई दिशाभारत सरकार के दीर्घकालिक 'हाउसिंग फॉर ऑल' मिशन को साकार करने में होम लोन गारंटी का यह विस्तार एक रणनीतिक भूमिका निभाएगा। तेजी से हो रहे शहरीकरण के दौर में शहरों की ओर पलायन कर रहे लोगों के लिए किराए के मकानों से मुक्ति पाकर अपनी निजी संपत्ति बनाना अब अधिक व्यावहारिक हो जाएगा। यह पहल न केवल लोगों को सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करती है, बल्कि संपत्ति के रूप में परिवार के पास एक ठोस पूंजीगत आधार भी तैयार करती है। जो ग्राहक लंबे समय से होम लोन की जटिल शर्तों के कारण अपना घर नहीं ले पा रहे थे, उनके लिए आने वाला समय सबसे उपयुक्त अवसर लेकर आ रहा है।
कृषि प्रधान भारत ने वैश्विक मंच पर एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। आधिकारिक सरकारी आंकड़ों और केंद्रीय कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश बन गया है। दुनिया भर में पैदा होने वाले कुल नारियल में अकेले भारत की हिस्सेदारी 31.24 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं, खेती के कुल क्षेत्रफल के मामले में भारत 17.90 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ वैश्विक स्तर पर तीसरे पायदान पर काबिज है। इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे पारंपरिक नारियल उत्पादक देशों को पीछे छोड़ते हुए भारत ने न केवल उत्पादन में बाजी मारी है, बल्कि नारियल आधारित वैल्यू-एडेड उत्पादों के वैश्विक निर्यात में भी नया रिकॉर्ड कायम किया है। देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और तटीय आजीविका में 'कल्पवृक्ष' कहलाने वाला नारियल आज लाखों किसानों की आय का मुख्य आधार बन चुका है।नारियल उत्पादन और क्षेत्रफल में कौन-सा राज्य है सबसे आगे?भारत के भीतर नारियल के कुल उत्पादन, खेती के रकबे और उत्पादकता को लेकर राज्यों के बीच एक बेहद दिलचस्प और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। कुल उत्पादन (Total Production) के मामले में तमिलनाडु देश का सबसे अग्रणी राज्य बना हुआ है। तमिलनाडु की उपजाऊ जलवायु, उन्नत सिंचाई तकनीक और किसानों द्वारा आधुनिक सस्य पद्धतियां अपनाने से वहां नारियल का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। दूसरी तरफ, कर्नाटक भी शीर्ष उत्पादक राज्यों की दौड़ में तमिलनाडु को कड़ी टक्कर दे रहा है।खेती के कुल क्षेत्रफल (Cultivation Area) की बात करें तो 'नारियल की भूमि' कहे जाने वाले केरल (केरलम) के पास सबसे बड़ा रकबा है। केरल में करीब 7.54 लाख हेक्टेयर भूमि पर नारियल के बागान फैले हुए हैं, जहां से सालाना 5,149 मिलियन से अधिक नारियल प्राप्त होते हैं। वहीं, प्रति हेक्टेयर सबसे ज्यादा पैदावार यानी उत्पादकता (Productivity) के मामले में आंध्र प्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर है, जिसके बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का नंबर आता है।देश में 20,300 मिलियन से अधिक नारियल की बंपर पैदावारहालिया कृषि आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल से 20,301 मिलियन से अधिक नारियल का वार्षिक उत्पादन दर्ज किया गया है। इस दौरान देश की औसत उत्पादकता 9,249 नारियल प्रति हेक्टेयर रही है। सरकार ने नारियल विकास बोर्ड (CDB) के जरिए पारंपरिक तटीय राज्यों से इतर गैर-पारंपरिक क्षेत्रों जैसे छत्तीसगढ़, पूर्वोत्तर राज्यों और ओडिशा के नए इलाकों में भी नारियल की खेती का विस्तार किया है। बागानों के पुनरुद्धार और नई पौध रोपण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है, जिससे सीधे तौर पर हजारों छोटे और सीमांत किसानों को लाभ मिला है।3 करोड़ लोगों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़भारत का नारियल क्षेत्र केवल एक कृषि फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विशाल सामाजिक-आर्थिक तंत्र को संचालित करता है। देश के लगभग 1 करोड़ किसान सीधे तौर पर इसकी खेती से जुड़े हैं, जबकि प्रसंस्करण, ढुलाई, पैकेजिंग और खुदरा कारोबार को मिलाकर 3 करोड़ से अधिक लोगों की रोजी-रोटी नारियल उद्योग पर निर्भर करती है। नारियल का हर हिस्सा—चाहे वह फल हो, नारियल पानी, रेशा (कॉयर), या खोल (शेल)—किसी न किसी उद्योग में कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होता है, जिससे ग्रामीण स्तर पर बड़े पैमाने पर सूक्ष्म और लघु उद्यम फल-फूल रहे हैं।पारंपरिक कोपरा से आगे: वर्जिन कोकोनट ऑयल और एक्टिवेटेड कार्बन का जलवावैश्विक व्यापार में भारत की पहचान अब केवल कच्चे नारियल या सूखे कोपरा (Copra) के आपूर्तिकर्ता की नहीं रही। भारत ने अपनी निर्यात टोकरी का आधुनिकीकरण करते हुए उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया है। आज अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय वर्जिन कोकोनट ऑयल (VCO), पैकेज्ड नारियल पानी, कोकोनट मिल्क पाउडर, नारियल का आटा और नारियल के खोल से बनने वाले 'एक्टिवेटेड कार्बन' की भारी मांग है। एक्टिवेटेड कार्बन का उपयोग वैश्विक स्तर पर जल शोधन, वायु फिल्टर और औद्योगिक प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिसमें भारत एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक के रूप में उभरा है।निर्यात में 62% की छलांग: ₹7,000 करोड़ के पार पहुंचा विदेशी कारोबारमूल्य संवर्धन (Value Addition) पर दिए गए जोर का सीधा असर भारत के निर्यात आंकड़ों पर साफ दिखाई दे रहा है। नारियल और इसके सह-उत्पादों का वार्षिक निर्यात ₹7,038 करोड़ (लगभग 794 मिलियन डॉलर) के स्तर को पार कर गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62 प्रतिशत की शानदार वृद्धि को दर्शाता है। वर्ष 2001-02 में जहां भारत का नारियल निर्यात मात्र ₹25 करोड़ के आसपास था, वहीं अब यह 8,700 से अधिक पंजीकृत निर्यातकों के साथ एक संगठित और तीव्र गति से बढ़ता उद्योग बन चुका है। भारत सरकार का लक्ष्य देश के समग्र कृषि और विनिर्माण निर्यात के साथ तालमेल बिठाते हुए नारियल क्षेत्र के वैश्विक व्यापार को आने वाले वर्षों में नए शिखरों तक पहुंचाना है।'नारियल संवर्धन योजना' और नीतिगत समर्थनकिसानों की आय को दोगुना करने और बागानों को कीट-रोगों से बचाने के लिए सरकार ने केंद्रीय बजट में 'नारियल संवर्धन योजना' की शुरुआत की है। इस योजना के तहत पुराने और कम उपज देने वाले पेड़ों को हटाकर उच्च गुणवत्ता वाली संकर (Hybrid) किस्मों के पौधे लगाने, जल संरक्षण के लिए ड्रिप सिंचाई अपनाने और किसानों के उत्पादक संगठन (FPO) बनाकर सीधे प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा, कोपरा को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के दायरे में बनाए रखकर किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जा रही है। निरंतर नीतिगत सहयोग, मजबूत वैज्ञानिक अनुसंधान और वैश्विक मांग के चलते भारत का नारियल क्षेत्र आने वाले समय में देश की कृषि जीडीपी में और भी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए संचालित केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत मेडिकल क्लेम रीइंबर्समेंट से जुड़ी प्रक्रियाओं पर सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। अक्सर रीइंबर्समेंट क्लेम प्रोसेस करते समय बिल रिजेक्ट होने या रेफरल को लेकर लाभार्थियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इन तकनीकी बाधाओं और विसंगतियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और सीजीएचएस ने नए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें ओपीडी परामर्श, टेस्ट लिमिट, आंखों की जांच और विशेष जांचों के नियम तय किए गए हैं।₹3,000 तक और उससे अधिक की जांचों के लिए नियमअक्सर लाभार्थियों में यह भ्रम रहता था कि क्या ₹3,000 की सीमा रीइंबर्समेंट की अधिकतम कैपिंग है। सीजीएचएस ने साफ किया है कि ₹3,000 कोई अधिकतम रीइंबर्समेंट कैप नहीं है, बल्कि यह रेफरल और जांच केंद्र के चयन से जुड़ा एक पैमाना है। यदि किसी सूचीबद्ध (Empanelled) अस्पताल का विशेषज्ञ डॉक्टर ₹3,000 तक की कोई सामान्य जांच या माइनर प्रोसीजर लिखता है, तो लाभार्थी को वह जांच उसी अस्पताल में करानी होगी जहां उसने प्रारंभिक परामर्श लिया था। इसके लिए अलग से वेलनेस सेंटर से रेफरल लेने की जरूरत नहीं है।यदि मरीज उसी परामर्श के आधार पर किसी दूसरे पैनल अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच कराना चाहता है, तो उसे सीजीएचएस वेलनेस सेंटर से पूर्व रेफरल या एंडोर्समेंट लेना अनिवार्य होगा। वहीं दूसरी ओर, ₹3,000 से अधिक लागत वाली बड़ी व विशेष जांचों जैसे एमआरआई (MRI), सीटी स्कैन (CT Scan) और पेट स्कैन (PET Scan) के लिए पहले से सीजीएचएस वेलनेस सेंटर का आधिकारिक रेफरल होना अनिवार्य है, अन्यथा क्लेम स्वीकार नहीं किया जाएगा।OPD पर्चे की 7 दिन की वैधता अवधिदिशानिर्देशों के अनुसार, किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा जारी किया गया ओपीडी परामर्श पर्चा उसी विशेषज्ञता (Same Speciality) के भीतर केवल 7 दिनों के लिए वैध माना जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि किसी लाभार्थी ने सोमवार को कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लिया है, तो वह उसी परामर्श के आधार पर अगले 7 दिनों तक फॉलो-अप परामर्श, संबंधित दवा या जांच करवा सकता है। 7 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद फॉलो-अप के लिए नया परामर्श या री-वेरिफिकेशन आवश्यक होगा।आंखों की जांच और कंसल्टेशन फीस के नए मानकआंखों के इलाज और जांच को लेकर निजी अस्पतालों द्वारा अलग-अलग प्रक्रियाओं के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने की शिकायतों पर भी कड़ा रुख अपनाया गया है। नए नियमों के तहत आई स्पेशलिस्ट की कंसल्टेशन फीस में तीन प्राथमिक जांचें अनिवार्य रूप से शामिल रहेंगी। इनमें रिफ्रैक्शन (Refraction - चश्मे के नंबर की जांच), टोनोमेट्री (Tonometry - आंख के दबाव की जांच) और फंडस परीक्षण (Fundus Examination - रेटिना की जांच) शामिल हैं। सूचीबद्ध अस्पताल इन तीन जांचों के लिए मरीज से अलग से कोई शुल्क नहीं ले सकते।फॉलो-अप इलाज और अनलिस्टेड जांचों की प्रक्रियायदि कोई विशेषज्ञ डॉक्टर ऐसी जांच या चिकित्सा प्रक्रिया की सिफारिश करता है जो सीजीएचएस की अनुमोदित दर सूची (CGHS Rate List) में सूचीबद्ध नहीं है (Unlisted Investigation), तो मरीज को सीधे जांच कराने के बजाय संबंधित विभाग या प्रशासनिक कार्यालय से पूर्व अनुमति (Prior Permission) प्राप्त करनी होगी। इसके अतिरिक्त, मरीज की प्राथमिक चिकित्सा जिस अस्पताल में शुरू हुई है, उसी अस्पताल में फॉलो-अप इलाज जारी रखने की सलाह दी गई है ताकि उपचार के रिकॉर्ड में निरंतरता बनी रहे और क्लेम सेटलमेंट बिना किसी आपत्ति के तेजी से पूरा हो सके।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित आवागमन करने वाले स्थानीय वाहन स्वामियों के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक बड़ी राहत दी है। टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले गैर-व्यावसायिक निजी वाहन चालकों के लिए शुरू की गई 'डिजिटल लोकल मंथली पास' की सुविधा का दायरा बढ़ाते हुए अब इसे देश भर के 121 टोल प्लाजा पर लागू कर दिया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के डिजिटल इंडिया विज़न के तहत उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य टोल प्लाजा पर कागजी सत्यापन की झंझट और कतारों को खत्म करके पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, संपर्क रहित और त्वरित बनाना है।डिजिटल लोकल पास सुविधा के प्रमुख लाभघर बैठे ऑनलाइन आवेदन: अब स्थानीय निवासियों को पास बनवाने या रिन्यू कराने के लिए टोल प्लाजा के दफ्तर में जाकर लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं है।रियायती मासिक दर: टोल नियमों के अनुसार निर्धारित 20 किमी के दायरे में रहने वाले पात्र गैर-व्यावसायिक वाहनों को बेहद किफायती मासिक शुल्क पर असीमित यात्रा की सुविधा मिलती है।सीधे फास्टैग (FASTag) से जुड़ाव: पास जारी होते ही यह वाहन पर लगे एक्टिव फास्टैग से लिंक हो जाता है, जिससे टोल लेन से गुजरते समय स्वचालित रूप से रियायती दर लागू हो जाती है।त्वरित अप्रूवल व नवीनीकरण: डिजिटल माध्यम से सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के कारण आवेदन का निपटारा बहुत कम समय में हो जाता है और अगले महीने के लिए रिन्यूअल भी सिंगल क्लिक में संभव है।ऑनलाइन डिजिटल पास बनाने की चरणबद्ध प्रक्रियास्थानीय वाहन स्वामी अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से कुछ ही मिनटों में पास के लिए आवेदन कर सकते हैं:पोर्टल या ऐप पर जाएं: NHAI के आधिकारिक 'राजमार्गयात्रा' (Rajmargyatra) मोबाइल ऐप या IHMCL के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाएं।टोल प्लाजा का चयन: संबंधित राज्य और उस विशिष्ट टोल प्लाजा को चुनें जिसके 20 किलोमीटर के दायरे में आपका निवास स्थित है।वाहन व फास्टैग विवरण दर्ज करें: अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर (RC Number) और वाहन से जुड़ा सक्रिय फास्टैग आईडी/बैंक विवरण दर्ज करें।दस्तावेज अपलोड करें: निवास प्रमाण पत्र (जैसे बिजली बिल, वोटर आईडी, या राशन कार्ड) और वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) की वैध डिजिटल कॉपी अपलोड करें। ध्यान रहे कि RC में दर्ज पता और निवास प्रमाण का पता एक ही होना चाहिए।सत्यापन व ऑनलाइन भुगतान: सिस्टम द्वारा दस्तावेजों के त्वरित डिजिटल सत्यापन के बाद निर्धारित मासिक शुल्क का ऑनलाइन (UPI, नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड से) भुगतान करें। भुगतान सफल होते ही डिजिटल पास सक्रिय हो जाएगा।पात्रता और आवश्यक नियमयह रियायती पास केवल निजी (सफेद नंबर प्लेट) और गैर-व्यावसायिक वाहनों जैसे कार, जीप या वैन के लिए ही मान्य है।कमर्शियल वाहनों (पीली नंबर प्लेट), टैक्सियों या व्यावसायिक गतिविधियों में प्रयुक्त वाहनों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।वाहन का पंजीकरण और स्वामी का निवास प्रमाण टोल प्लाजा के निर्धारित भौगोलिक दायरे (सामान्यतः 20 किलोमीटर) के भीतर का होना अनिवार्य है।वाहन पर एक वैध और ब्लैकलिस्ट-मुक्त (Active) फास्टैग लगा होना जरूरी है।यातायात में सुगमता और पारदर्शिताडिजिटल पास व्यवस्था के 121 टोल प्लाजा तक विस्तार से स्थानीय निवासियों और टोल कर्मचारियों के बीच होने वाले विवादों पर पूरी तरह रोक लगेगी। मैनुअल पर्चियों और फिजिकल पास के स्थान पर डिजिटल ट्रैकिंग होने से टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी और यात्रियों के समय व ईंधन की बचत होगी। किसी भी तकनीकी सहायता या पास से जुड़ी जानकारी के लिए नागरिक NHAI के हेल्पलाइन नंबर 1033 पर 24 घंटे संपर्क कर सकते हैं।
UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने का रास्ता साफ, राष्ट्रपति से मिली बिल को मंजूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी दी है।
रक्षा मंत्रालय ने 405 सैन्य वस्तुओं की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की है, जिसका उद्देश्य रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
Manipur में KCP के 46 militants ने किया surrender, CM वाई खेमचंद सिंह ने दिया पुनर्वास का भरोसा
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने मंगलवार को कहा कि प्रतिबंधित संगठन केसीपी (ताइबांगनबा) के 46 उग्रवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को मदद देने का आश्वासन दिया ताकि वे अपनी आजीविका चला सकें। इंफाल में फर्स्ट मणिपुर राइफल्स के परेड मैदान में राज्य सरकार की ओर से आयोजित ‘घर वापसी समारोह’ में प्रतिबंधित कांगलेईपाक कम्युनिस्ट पार्टी (ताइबांगनबा) के सदस्यों ने अपने हथियार डाले। वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि तीन साल पहले शुरू हुए संघर्ष के कारण कई लोगों ने हथियार उठा लिए थे। मैं केसीपी (ताइबांगनबा) और उन सदस्यों का दिल से स्वागत करता हूं जिन्होंने हथियार डाल दिए हैं। उन्हें यह समझ आ गया है कि हथियारों से प्रगतिशील विकास नहीं हो सकता।’’मुख्यमंत्री 3 मई, 2023 को राज्य में मेइती और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा का उल्लेख कर रहे थे। इन झड़पों में कम से कम 260 लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग बेघर हो गए, जिससे उन्हें पूरे इलाके में बने राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिबंधित संगठन के 46 सदस्यों ने संशोधित आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति, 2018 के तहत आत्मसमर्पण किया। सरकार उन्हें आजीविका के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए भी सहायता करेगी। सिंह ने कहा, ‘‘कोई राज्य तभी प्रगति कर सकता है जब वहां शांति और सुरक्षा हो और पुलिस प्रशासन मजबूत हो। शांतिपूर्ण माहौल तभी बन सकता है जब लोग हथियार उठाने की इच्छा छोड़ दें।’’पिछले महीने मणिपुर में सुरक्षा बलों के सामने प्रतिबंधित कांगलेईपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपल्स वॉर ग्रुप) के 46 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी)मुकेश सिंह ने आत्मसमर्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उग्रवादियों ने हथियारबंद गतिविधियों को छोड़कर अपने परिवारों, और समुदायों में लौटने और एक नागरिकों के तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का रास्ता चुना है। उन्होंने कहा कि मणिपुर पुलिस मजबूती के साथ अपने संवैधानिक कर्तव्यों का अनुपालन करती रहेगी। डीजीपी ने कहा कि साथ ही, जो लोग वास्तव में हिंसा छोड़कर समाज में वापस लौटना चाहते हैं, उन्हें पुलिस आत्मसमर्पण, सत्यापन और पुनर्वास की कानूनी प्रक्रिया में मदद करेगी। उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों से अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग रहने की अपील करते हुए कहा कि ‘‘उनकी घर वापसी की सफलता का आकलन आज के कार्यक्रम से नहीं, बल्कि भविष्य में उनके व्यवहार से किया जाएगा’’।
Supreme Court में Uddhav Thackeray गुट की मांग, अयोग्यता पर फैसला होने के बाद तय हो असली Shiv Sena
शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि निर्वाचन आयोग को यह तय करने से पहले कि कौन सा गुट मूल शिवसेना है, उन विधायकों को अयोग्य ठहराने की कार्यवाही पर फैसला करना चाहिए, जो उनका (उद्धव) गुट छोड़कर चले गए। उद्धव गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष ये दलीलें रखीं। यह पीठ उद्धव गुट की उन याचिकाओं पर छठे दिन आखिरी दलीलें सुन रही थी, जिनमें निर्वाचन आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके तहत एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना माना गया और पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ उन्हें (शिंदे गुट को) सौंप दिया गया। सिब्बल ने दलील दी कि निर्वाचन आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने विधायी बहुमत को ही राजनीतिक दल मानकर बुनियादी रूप से कानून की गलत व्याख्या की है। उन्होंने निर्वाचन आयोग के दखल के समय को लेकर एक अहम प्रक्रियात्मक मुद्दा उठाया और कहा कि आयोग को बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही पूरी होने के बाद ही यह तय करना चाहिए कि कौन सा गुट ‘मूल’ पार्टी है। सिब्बल ने कहा, ‘‘अगर उन विधायकों को आखिरकार अयोग्य ठहराया जाता है, तो विधानसभा में उनकी संख्या को नजरअंदाज किया जाना चाहिए।’’उन्होंने दलील दी, ‘‘यह तय करने की प्रक्रिया कि कौन सा गुट असली राजनीतिक दल है, अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले के बाद ही होनी चाहिए, अन्यथा हर बार जब कोई गुट अयोग्यता से बचने के लिए निर्वाचन आयोग के पास जाएगा, तो यह समस्या खड़ी होगी।’’उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के चुनाव और उसके बाद हुए शक्ति परीक्षण के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने समेत कई वजहों से अयोग्यता का नोटिस पाने वाले बागी विधायकों की संख्या 16 से बढ़कर 22 और अंतत: 39 हो गई। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के 10 जनवरी, 2024 के उस फ़ैसले की आलोचना की, जिसमें अयोग्यता की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था और विधानसभा में बहुमत के आधार पर शिंदे गुट को ‘मूल’ शिवसेना माना गया था। सिब्बल ने कहा कि शिवसेना के 2018 के नेतृत्व ढांचे को नजरअंदाज़ करके अध्यक्ष ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया। अध्यक्ष ने कहा था कि पार्टी का 2018 का संविधान शिवसेना के असल ढांचे के ‘अनुरूप नहीं’ था; सिब्बल ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने अध्यक्ष के इस निष्कर्ष पर सवाल उठाया कि ‘‘पक्षप्रमुख’’ (पार्टी प्रमुख) की इच्छा पार्टी की इच्छा के बराबर नहीं है। उन्होंने पूछा, ‘‘सच्चाई यह है कि उद्धव पक्षप्रमुख हैं... उन्होंने उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा। अब अध्यक्ष कैसे कह सकते हैं कि उन्हें मान्यता देने की ज़रूरत नहीं है?’’सुभाष देसाई मामले में शीर्ष अदालत के फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए सिब्बल ने कहा कि ‘‘विधायी पार्टी में बंटवारे’’ का मतलब अपने आप ‘राजनीतिक पार्टी में बंटवारा’ नहीं होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ विधायी बहुमत को ही पैमाना मानकर अध्यक्ष ने शिवसेना के संगठनात्मक ढांचे को नज़रअंदाज़ किया है। इस मामले में बहस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है और यह बुधवार को जारी रहेगी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से आंध्र प्रदेश के हर गांव और बूथ तक पार्टी को ले जाने की अपील की। यहां भाजपा की एक बैठक को संबोधित करते हुए नवीन ने आंध्र प्रदेश में भाजपा के लिए भविष्य की कार्ययोजना तय की और कार्यकर्ताओं से कहा, ‘‘भाजपा को हर गांव और बूथ तक ले जाएं। हमेशा लोगों के बीच रहें और कल्याणकारी सेवाएं प्रदान करके उनका विश्वास जीतें।’’बैठक में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पीवीएन माधव भी मौजूद थे। भाजपा अध्यक्ष ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में काम करने का निर्देश देते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश की जनता द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को दी गई प्रचंड जीत को विकास और जनसेवा के मंच के रूप में बदला जाना चाहिए। नवीन ने वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान 25 में से 21 लोकसभा सीट और 175 में से 164 विधानसभा सीट पर मिली शानदार जीत का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह जीत न केवल गर्व का अहसास कराने वाली होनी चाहिए बल्कि जनता द्वारा जताए गए विश्वास को बनाए रखने वाली भी होनी चाहिए। नवीन ने इस बात पर बल दिया कि भाजपा का गठन केवल राजनीतिक सत्ता हासिल करने के लिए नहीं हुआ, बल्कि इसके मूलभूत सिद्धांतों में त्याग और ‘राष्ट्र प्रथम’ का दृष्टिकोण शामिल है।
₹40 करोड़ की स्मार्ट सिटी सड़क में बड़ा गड्ढा
इंदौर के गोराकुंड में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 40 करोड़ रुपये से बनी सड़क पानी की पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान धंस गई. CCTV में सड़क के नीचे से पानी फूटने का वीडियो सामने आया है. निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की गई है.
मां-बहन की हत्या का गवाह बना 8 साल का बच्चा
एमपी के इंदौर डबल मर्डर केस में 8 साल के अजय का वीडियो सामने आया है. बच्चे के मुताबिक, पिता ने पहले मां अनीता और फिर बहन माही पर हमला किया. बाद में उसे तालाब में फेंक दिया गया, जहां झाड़ियों को पकड़कर उसने अपनी जान बचाई. अजय का बयान पुलिस की जांच में अहम माना जा रहा है.
UIDAI ने अनिवार्य MBU के लिए राष्ट्रव्यापी मिशन-मोड अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. इसके तहत देश भर के स्कूली बच्चों के लिए 2 करोड़ से अधिक MBU पूरे किए जा चुके हैं.
GTB Hospital की आपातकालीन सेवाएं RGSSH के ब्लॉक-4 में स्थानांतरित, 200 बेड की सुविधा
पूर्वी दिल्ली स्थित गुरु तेग बहादुर अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं को राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल (आरजीएसएसएच) के ब्लॉक-4 में स्थानांतरित कर दिया गया है। हालांकि स्त्री रोग-प्रसूति और बाल चिकित्सा आपातकालीन सेवाएं इसमें शामिल नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। नव संचालित आपातकालीन सेवाओं का औपचारिक उद्घाटन मंगलवार को गुरु तेग बहादुर अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने किया। मुख्य आपातकालीन विभाग ब्लॉक-4 के भूतल पर स्थित है, जिसमें चिकित्सा, सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, हड्डीरोग और संबद्ध विशिष्टताओं के लिए आपातकालीन वार्ड हैं। प्रशासन ने कहा कि इस विभाग में लगभग 200 बिस्तर और छह ऑपरेशन थिएटर हैं और इसे आरजीएसएसएच में उपलब्ध मौजूदा डायग्नोस्टिक और सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं की मदद भी मिलेगी। उद्घाटन के बाद, कुमार ने आपातकालीन विभाग का निरीक्षण किया और बुनियादी ढांचे, रोगी देखभाल सुविधाओं, कर्मचारियों की व्यवस्था और नई सुविधा की समग्र तैयारियों की समीक्षा की। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि इस स्थानांतरण का उद्देश्य मरीजों के लिए निरंतर और त्वरित आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है और व्यापक सार्वजनिक हित में सुविधा के सुचारू संचालन की आवश्यकता पर बल देना है।
Hisar डेयरी संचालक का 14 दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार, Haryana सरकार ने मानी मांगें
हिसार के एक डेयरी संचालक का अंतिम संस्कार हत्या के 14 दिन बाद मंगलवार को किया गया। हरियाणा सरकार परिवार की मांगों पर सहमत हो गई है। सूर्य नगर निवासी जीवन कुंडू (26) पर चार अगस्त को 10-12 लोगों ने हमला कर दिया था। बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद उनके परिवार और समर्थकों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। किसान संगठनों के सदस्यों और समर्थकों ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर 15 अगस्त को हांसी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह की ओर मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस द्वारा रोके जाने के दौरान उनकी झड़प हो गई। झड़प के बाद, हिसार में एक महापंचायत ने सरकार के साथ बातचीत करने के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई। कुंडू का अंतिम संस्कार किनाला गांव में किया गया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। कुंडू के 11 वर्षीय बेटे रिशु ने चिता को मुखाग्नि दी। खापों, किसान संगठनों, कर्मचारी संघों, संयुक्त किसान मोर्चा (हिसार) और अखिल भारतीय किसान सभा (हरियाणा) के कई प्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि दी। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद सोमवार को गतिरोध समाप्त हो गया। इनमें 15 अगस्त को हांसी में समर्थकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लेना, कुंडू के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना और परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करना शामिल हैं। मामले वापस लेने की मांग माने जाने के बाद सभी 10 किसान कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया। हत्याकांड के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी का भी आश्वासन दिया गया। प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से किसान संगठनों के कार्यकर्ता शामिल थे। विपक्षी दलों और संयुक्त किसान मोर्चा ने डेयरी संचालक की हत्या के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज की निंदा की थी। मुख्य आरोपी रमेश की गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
Satyendar Jain और पूर्व IAS अधिकारी समेत 6 गिरफ्तार, DJB tender केस में ACB का एक्शन
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और डीजेबी के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) व आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एसीबी द्वारा जारी बयान के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा तथा पंकज वर्मा शामिल हैं। यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के मलजल शोधन संयंत्रों के संवर्धन और उन्नयन से जुड़ी निविदा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, निविदाओं की शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश के आरोपों को लेकर सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर 11 मई 2024 को दर्ज किया गया था।

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