बिश्केक में मिले मोदी-पेजेशकियन, भारत ने उठाया नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से द्विपक्षीय बैठक की. दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हालिया संघर्षों पर चर्चा की.
सर्दी हो या गर्मी, नीम करोली बाबा हमेशा क्यों ओढ़े रहते थे कंबल?
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड एलपर्ट बाद में राम दास के नाम से प्रसिद्ध हुए. उन्होंने 1979 में Miracle of Love नाम की किताब लिखी थी. इसमें उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ का जिक्र किया है. उन्होंने लिखा कि नीम करोली बाबा हमेशा कंबल ओढ़ते थे, इसलिए आज भी लोग कैंची धाम जाकर कंबल चढ़ाते हैं.
बिहारी स्टाइल आलू चोखा का स्वाद है लाजवाब, जानें आसान रेसिपी
Bihari Aloo Chokha Recipe: अगर आप रोज-रोज एक जैसी सब्जी खाकर बोर हो गए हैं और कुछ देसी, स्वादिष्ट और झटपट बनने वाली डिश ट्राई करना चाहते हैं तो बिहारी स्टाइल आलू चोखा आपके लिए बढ़िया ऑप्शन है. आज हम आपको इसे बनाने की आसान रेसिपी बताएंगे.
तमिलनाडु में महिला का हुआ मर्डर, टंकी में मिले शव के टुकड़े
तमिलनाडु के सलेम में इलाके की पानी की टंकियों से महिला के शरीर के टुकड़े मिलने से सनसनी फैल गई. परिवार घर लौटने पर नल से पानी आने के बाद टंकियों की जांच करने पहुंचा, जहां तीन बोरियों में मानव अंग मिले. पुलिस ने शव के हिस्सों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. हाथ पर मिला ‘Ganapathy’ टैटू महिला की पहचान का सुराग माना जा रहा है.
ढाबे से रेस्तरां तक, खाने में कहीं भी दिखे गड़बड़ी; FSSAI से डायरेक्ट यहां करें शिकायत
एफएसएसएआई के 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' ऐप के जरिए अब उपभोक्ता खाने में दुर्गंध, गलत लेबलिंग या रेस्टोरेंट की गंदगी की शिकायत आसानी से कर सकते हैं।
'भीड़ कम होते ही टूटने लगा था CJP नेताओं का हौसला', प्रोटेस्ट पर सोनम वांगचुक का खुलासा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 45 दिनों तक चले आंदोलन को लेकर सोनम वांगचुक ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया है कि भीड़ घटने पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं की हिम्मत टूटने लगी थी. ऐसे में CJP के कुछ नेता आंदोलन को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं थे और कई बार हाथ जोड़कर आंदोलन खत्म करने के लिए कह चुके थे.
बिना इंटरनेट होगा UPI पेमेंट! PhonePe ने लॉन्च किया 123Pay
स्मार्टफोन और इंटरनेट के बिना UPI पेमेंट करना अब आसान है. PhonePe ने फीचर फोन यूजर्स के लिए 123UPI सर्विस लॉन्च की है, जिससे बिना इंटरनेट पैसे भेजने, रिसीव करने और बैंक बैलेंस चेक करने जैसी सुविधाएं मिलेंगी.
मुंबई को क्यों कहा जाता है 7 टापुओं का शहर? जानें मायानगरी की कहानी
Seven Islands of Mumbai: मुंबई आज देश की मायानगरी और आर्थिक राजधानी के तौर पर जानी जाती है लेकिन कभी यह सात अलग-अलग टापुओं का समूह थी. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि कैसे ये सात टापू आपस में जुड़े और आधुनिक मुंबई का निर्माण हुआ.
'STF का मतलब स्वजाति टॉर्चर फोर्स', देखें अखिलेश यादव का वार
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर बड़ा हमला बोला. अखिलेश ने STF को लेकर CM योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा, “मुख्यमंत्री की STF का मतलब स्वजाति टॉर्चर फोर्स है.” सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि पीडीए समाज का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है. देखें वीडियो.
ग्राउंड रिपोर्ट: नेपाल में तबाही के बीच 'ऑपरेशन जिंदगी' की चुनौती
नेपाल में तबाही के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है, लेकिन जिन इलाकों में ये तबाही सबसे ज्यादा हुई है, वहां पहुंचना ही सबसे बड़ी चुनौती है. सड़कें टूट चुकी हैं, संपर्क के साधन ठप हैं और दुर्गम पहाड़ों तक पहुंचने का एकमात्र सहारा हेलिकॉप्टर हैं. नुवाकोट एयरबेस से लगातार उड़ानें भर रही हैं. कहीं लोगों को निकालने के लिए, कहीं राहत पहुंचाने के लिए. देखिए, इन पहाड़ों में जिंदगी बचाने की जंग कैसे लड़ी जा रही है.
एक्सप्रेसवे पर अनियंत्रित होकर कंटेनर में घुसी मर्सिडीज कार
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अलवर के गोविंदगढ़ इलाके में तेज रफ्तार मर्सिडीज कंटेनर से टकरा गई, जिसमें 22 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र प्रियांशु की मौत हो गई. सीसीटीवी फुटेज में कंटेनर का टायर फटने के बाद उसके रुकने और पीछे से आ रही कार के टकराने का दृश्य कैद हुआ है. हादसे में मर्सिडीज के परखच्चे उड़ गए. पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रही है और आसपास के फुटेज खंगाल रही है.
चांद जैसा खिलेगा चेहरा! घर पर चंदन से बनाएं ये 3 नेचुरल फेस पैक
Homemade Chandan Face Pack: गर्मियों में धूप और पसीने की वजह से अगर चेहरा बेजान और ऑयली नजर आने लगा है तो चंदन से बने फेस पैक ट्राई कर सकते हैं. गुलाबजल, शहद और हल्दी के साथ चंदन मिलाकर घर पर आसानी से फेस पैक तैयार किया जा सकता है.
दिल्ली: बाथरूम में मिली 22 साल की महिला की लाश, पति फरार
दिल्ली के प्रहलादपुर बांगर गांव में 22 साल की सबीला खातून की लाश उनके बाथरूम में मिलने से सनसनी फैल गई. जबकि सबीला का पति फरार है. पुलिस ने FIR दर्ज कर लिया है. इस मामले में हत्या समेत सभी पहलुओं की जांच हो रही है. पढ़ें पूरी कहानी.
'NHAI का सड़कों का खराब रखरखाव जिम्मेदार', सोनापुर सड़क हादसे पर बोले असम सीएम
गुवाहाटी के सोनापुर में NH-27 पर हुए भीषण सड़क हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जिसके लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने NHAI के खराब रखरखाव को जिम्मेदार ठहराया है।
Kaushambi Blast : कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट, 10 से ज्यादा की मौत
उत्तरप्रदेश के कौशांबी जिले में सोमवार को कथित अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट से इलाके में हड़कंप मच गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्टरी की पूरी इमारत जमींदोज हो गई और आसपास के कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा। हादसे में करीब 11 लोगों ...
नौकरियां कहां हैं? Pawan Khera ने 7.8% GDP ग्रोथ पर PM Modi को घेरा
सोमवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की। यह आलोचना वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ के 7.8 प्रतिशत रहने की घोषणा के बाद की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस आर्थिक विस्तार से युवाओं के लिए रोज़गार और अवसर पैदा हो रहे हैं। प्रधानमंत्री के 'X' (ट्विटर) पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि 7.8% की एक तिमाही की ग्रोथ कोई 'आर्थिक बहार' नहीं है। उन्होंने आर्थिक प्रगति के सरकारी दावे को चुनौती दी और बेरोज़गारी, परीक्षा के पेपर लीक होने और बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था जैसी लगातार बनी हुई समस्याओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश अभी पूरी तरह से खिला नहीं है। इसे भी पढ़ें: Chai Par Sameeksha: UP में किसे मिलेगा जाटों का साथ? Rahul Gandhi की 2024 वाली रणनीति! उन्होंने आगे कहा कि GDP की ग्रोथ का मतलब हमेशा नौकरियों, वेतन या मौकों में सुधार नहीं होता। खेड़ा ने कहा कि GDP राष्ट्रीय उत्पादन को मापती है – न कि नौकरियों, वेतन या मौकों को। अगर यह इनमें से किसी चीज़ को मापती, तो भारत के युवाओं का भविष्य इतना निराशाजनक नहीं दिखता। खेड़ा ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि भले ही प्रधानमंत्री सुर्खियों में बने रहने में माहिर हों, लेकिन भारत के युवाओं के लिए मुख्य सवाल यही है: नौकरियां कहां हैं? इसे भी पढ़ें: Haldwani FIR: Jairam Ramesh का BJP-RSS पर हमला, दलितों के अपमान पर चुप क्यों सरकार? इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन में रुकावट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों के बावजूद 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ को एक बड़ी उपलब्धि बताया था। मोदी ने इस ग्रोथ का श्रेय हमारे लोगों की सामूहिक ताकत को दिया और मुश्किल हालात के बावजूद भारत की मज़बूती पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह भी कहा, निराशावादी लोग गलत साबित हुए और भारत ने फिर से तरक्की की... एक बार फिर! देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
कौन थीं अहिल्याबाई होलकर? जिनके नाम पर यूपी में 60+ महिलाओं को मिली मुफ्त बस यात्रा
उत्तर प्रदेश सरकार ने लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत 60 साल या उससे ज्यादा उम्र की महिलाएं यूपी की सभी बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा कर सकेंगी. अहिल्याबाई होलकर के नाम पर शुरू हुई इस मुफ्त बस यात्रा के लिए आधार कार्ड या मतदाता पहचान-पत्र मान्य होगा. आइए जानते हैं कि अहिल्याबाई होलकर कौन थीं, जिनके नाम पर ये योजना शुरू की गई है.
देश की राजधानी दिल्ली में चलती बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोप बस के चालक और कंडक्टर पर है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना ने एक बार फिर 2012 के निर्भया कांड की याद दिला दी है, जब दिल्ली में […] यह लेख दिल्ली में चलती बस में 16 साल की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, चालक-कंडक्टर गिरफ्तार; फिर चर्चा में निर्भया कांड सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
रामलला से धोखा! चेन्नई की महिला ने 4 करोड़ का दिया था चेक, खाते में सिर्फ 3 रुपए
Ayodhya Ram Mandir fraud: तमिलनाडु के चेन्नई की एक महिला श्रद्धालु ने हाल ही में अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 4 करोड़ रुपए का चेक सौंपा था। महिला की इच्छा थी कि इस राशि का उपयोग विशेष रूप से मंदिर परिसर में तैनात कर्मचारियों ...
'देश में लागू होगा शरिया, तभी सुरक्षित होंगी महिलाएं', केरल के मौलवी के समर्थन में इमाम एसोसिएशन!
मौलाना साजिद रशीदी ने स्वतंत्रता और समानता के नाम पर महिलाओं को वर्कफोर्स में शामिल करने पर सवाल उठाए और दावा किया कि इससे समाज में नैतिक पतन और बर्बादी बढ़ी है।
झीरम घाटी हमला: जगदलपुर एनआईए अदालत अब 5 सितंबर को सुनाएगी फैसला
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने वर्ष 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में सोमवार को अपना फैसला पांच सितंबर तक के लिए टाल दिया। फैसला, सोमवार को सुनाया जाना था। बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया कि मामले में अंतिम सुनवाई 10 से 12 अगस्त के बीच हुई थी, जिसके बाद अदालत ने 31 अगस्त के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने अब फैसला सुनाने की तारीख बदलकर पांच सितंबर कर दी है। चौधरी ने बताया कि मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी थी और सुनवाई के दौरान उनमें से एक की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इनके अलावा, एनआईए के आरोपपत्र में नामजद 33 अन्य आरोपियों को फरार बताया गया था। अधिकारियों ने बताया कि एनआईए द्वारा नामजद और फरार बताए गए कुछ आरोपियों ने मुख्यधारा में शामिल होने के लिए पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। माओवादियों ने 25 मई 2013 को बस्तर जिले में दरभा थाना क्षेत्र की झीरम घाटी में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर ‘परिवर्तन यात्रा’ के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस नेताओं, आम नागरिकों और 10 सुरक्षाकर्मियों समेत कम से कम 27 लोग मारे गए थे तथा 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। मारे गए लोगों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, विपक्ष के पूर्व नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे। यह रैली उस वर्ष के अंत में होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित की गई थी। घटना के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया था लेकिन रमन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार ने हमले के दो दिन के भीतर ही जांच एनआईए को सौंप दी थी। राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग भी गठित किया था। एनआईए ने 25 सितंबर 2014 को जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में गिरफ्तार नौ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। एनआई ने 28 सितंबर 2015 को 35 आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था, जिनमें से दो आरोपियों को बाद में गिरफ्तार किया गया था। जनवरी 2019 में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हमले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। सरकार का कहना था कि एनआईए ने हमले के पीछे की बड़ी साजिश की जांच नहीं की थी। इसके बाद, 25 मई 2020 को पुलिस ने दरभा थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत एक नई प्राथमिकी दर्ज की। यह प्राथमिकी हमले में मारे गए कांग्रेस नेता उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार की शिकायत पर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि साजिश रचने वाले अब भी फरार हैं और एनआईए की जांच में साजिश के पहलू को शामिल नहीं किया गया था। एनआईए ने जांच, एजेंसी को सौंपने का अनुरोध करते हुए 16 जून 2020 को विशेष अदालत में अर्जी दाखिल की थी। अदालत ने यह अर्जी खारिज कर दी हालांकि बाद में एजेंसी ने मामला स्थानांतरित कराने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया लेकिन न्यायालय ने मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। तब से यह मुद्दा छत्तीसगढ़ में राजनीति का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री बघेल बार-बार आरोप लगाते रहे हैं कि हमले के पीछे की बड़ी साजिश की जांच नहीं की गई। बघेल ने यह भी आरोप लगाया था कि साजिश के सिलसिले में एनआईए की प्राथमिकी में शुरुआत में माओवादी नेताओं गणपति और रमन्ना के नाम शामिल थे लेकिन आरोपपत्र में उनके नाम नहीं थे। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया था कि 2014 में केंद्र में राजग सरकार के सत्ता में आने के बाद एनआईए की जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई थी। इस बीच, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार ने छह नवंबर 2021 को तत्कालीन राज्यपाल अनुसुइया उइके को झीरम घाटी जांच आयोग की रिपोर्ट सौंपी थी। उस समय मुख्यमंत्री रहे बघेल ने बाद में राज्यपाल को रिपोर्ट सौंपने के तरीके पर सवाल उठाए और कहा कि राज्य सरकार को राजभवन से इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी। बाद में कांग्रेस सरकार ने एक नए अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति कर न्यायिक आयोग का पुनर्गठन किया और उसका कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पुनर्गठित आयोग की कार्यवाही पर रोक लगा दी, क्योंकि 2013 के हमले की जांच के लिए उसके अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया गया था। यह रोक भाजपा के वरिष्ठ विधायक और तत्कालीन विपक्ष के नेता धर्मलाल कौशिक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान लगाई गई थी।
रसोई की स्लैब हो जाएगी काली-खुरदुरी! सफाई में न करें ये 6 गलतियां
Kitchen Hacks Tips: किचन की मार्बल, ग्रेनाइट या किसी दूसरे पत्थर की स्लैब को साफ करते समय हर क्लीनिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना सही नहीं होता. कुछ चीजें धीरे-धीरे स्लैब की चमक कम करने के साथ उसकी प्रोटेक्टिव सीलेंट लेयर को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं.
भारतीय टेलीविजन और फिल्म जगत से एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली खुशखबरी सामने आई है। छोटे पर्दे के सबसे लोकप्रिय और चर्चित धारावाहिक 'अंबर धारा' से घर-घर में अपनी एक खास पहचान बनाने वाली प्रतिभाशाली अभिनेत्री कश्मीरा ईरानी (Kashmira Irani) ने अपने जीवन के एक नए और बेहद खूबसूरत पड़ाव में कदम रखने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। अभिनेत्री ने अपने पति अक्षत सक्सेना के साथ अपनी पहली प्रेग्नेंसी का एलान सोशल मीडिया के जरिए किया है। जैसे ही कश्मीरा ने यह खुशखबरी अपने फैंस के साथ साझा की, वैसे ही इंटरनेट पर बधाइयों का तांता लग गया और उनके तमाम चाहने वाले तथा मनोरंजन जगत के बड़े-बड़े सितारे उन्हें इस नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं देने लगे।इंस्टाग्राम पर बेहद अनोखे अंदाज में दी प्रेग्नेंसी की खुशखबरीअभिनेत्री कश्मीरा ईरानी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं और अक्सर अपनी खूबसूरत तस्वीरें व जीवन के अहम पल फैंस के साथ साझा करती रहती हैं। अपनी प्रेग्नेंसी की इस बड़ी खबर को भी उन्होंने बेहद रचनात्मक और प्यारे अंदाज में दुनिया के सामने रखा है। कश्मीरा ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी छुट्टियों के दौरान की एक बेहद खूबसूरत और प्यारी सी तस्वीर शेयर की है।इस तस्वीर में दो नारियल रखे हुए हैं, जिन पर 'मॉम' (Mom) और 'डैड' (Dad) लिखी हुई छोटी-छोटी और बेहद आकर्षक टोपियां पहनाई गई हैं। इस तस्वीर को साझा करते हुए कश्मीरा ने इसके कैप्शन में बहुत ही प्यारे शब्दों में लिखा, 'अभी का स्टेटस: कमिंग सून' (Coming Soon)। इस अनूठे और क्यूट अंदाज में दिए गए प्रेग्नेंसी के ऐलान ने पलभर में सोशल मीडिया पर सबका ध्यान खींच लिया। प्रशंसक इस क्रिएटिव अंदाज की जमकर तारीफ कर रहे हैं और कपल को आने वाले नन्हे मेहमान के लिए ढेर सारा प्यार भेज रहे हैं।मनोरंजन जगत के तमाम सेलेब्स ने दी कपल को जमकर बधाइयाँकश्मीरा ईरानी और उनके पति अक्षत सक्सेना द्वारा अपनी प्रेग्नेंसी की खबर सार्वजनिक करते ही बॉलीवुड और टेलीविज़न जगत के कई जाने-माने सितारों ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी खुशी जाहिर की और कपल को दिल से बधाइयां दीं। जानी-मानी अभिनेत्री गौहर खान (Gauahar Khan) ने पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, 'आप दोनों को ढेरों बधाइयां, ईश्वर आपको सुरक्षित, स्वस्थ और खुश रखे।' इसके अलावा अभिनेत्री अंजलि नंदकिशन ने लिखा, 'अरे वाह, आप दोनों को बहुत-बहुत बधाई।' लोकप्रिय गायक और अभिनेता मियांग चांग (Meiyang Chang) ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'आप दोनों को इस खूबसूरत सफर की बहुत-बहुत बधाई।'केवल यही नहीं, बल्कि टीवी और फिल्म उद्योग की कई अन्य मशहूर हस्तियों ने भी इस पोस्ट पर प्यार बरसाया। अभिनेता और निर्माता सैम खान ने कई सारे लाल दिल (Heart) वाले इमोजी के साथ इस जोड़े को अपनी शुभकामनाएं दीं। वहीं लोकप्रिय अभिनेत्रियां रिधिमा पंडित और दृष्टि धामी ने भी हार्ट इमोजी भेजकर अपनी खुशी का इजहार किया। सह-कलाकारों और दोस्तों की इन शुभकामनाओं से कश्मीरा का कमेंट बॉक्स पूरी तरह भर चुका है।कश्मीरा और अक्षत की प्रेम कहानी और शादी का सफरकश्मीरा ईरानी और अक्षत सक्सेना की निजी जिंदगी की बात करें तो दोनों ने पिछले कुछ वर्षों में एक बेहद खूबसूरत रिश्ता साझा किया है। कश्मीरा और अक्षत की शादी 10 फरवरी, 2024 को एक भव्य और पारंपरिक समारोह में हुई थी। हाल ही में इस जोड़े ने अपनी शादी की दूसरी सालगिरह बेहद रोमांटिक अंदाज में मनाई थी।शादी की उस दूसरी सालगिरह के खास मौके पर अक्षत सक्सेना ने अपनी जीवनसंगिनी कश्मीरा के लिए एक बहुत ही प्यारा और भावुक नोट लिखकर अपने प्यार का इजहार किया था। अब शादी के इस मुकाम पर पहुंचने के बाद दोनों अपने परिवार के इस नए सदस्य के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो उनके रिश्ते को और अधिक मजबूत और परिपूर्ण बना देगा।टेलीविजन से लेकर फिल्मों तक का रहा है शानदार वर्कफ्रंट सफरकश्मीरा ईरानी के पेशेवर करियर यानी वर्कफ्रंट पर नजर डालें तो उन्होंने अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता के दम पर छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक एक लंबी और सफल यात्रा तय की है। कश्मीरा को असली और जबरदस्त पहचान साल 2008 में आए लोकप्रिय टीवी सीरियल 'अंबर धारा' से मिली थी, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री सुलगना पाणिग्रही के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी। इस अनोखे शो में उन्होंने जुड़ी हुई जुड़वां बहनों (conjoined twins) में से एक का बेहद जटिल और यादगार किरदार निभाया था, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा था।टेलीविजन के अलावा कश्मीरा ने कई बड़ी और चर्चित फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। उन्होंने 'पीके' (PK), 'टाइगर जिंदा है' (Tiger Zinda Hai), 'रंगून' (Rangoon), 'भारत' (Bharat), 'मॉडर्न लव मुंबई' (Modern Love Mumbai) और 'डिटेक्टिव शेरदिल' जैसे प्रोजेक्ट्स में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अलावा, इम्तियाज अली की हालिया चर्चित फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' में भी उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है। पेशेवर मोर्चे पर लगातार सफलता हासिल करने के बाद अब कश्मीरा अपने जीवन के इस नए और सबसे खूबसूरत मातृत्व सफर (Motherhood Journey) की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
टिश्यू पेपर पर ‘BOMB’ लिखा मिला, दमाम-दिल्ली Air India फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग
सऊदी अरब के दमाम से नई दिल्ली जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट में टिश्यू पेपर पर ‘BOMB’ लिखा संदिग्ध नोट मिलने से हड़कंप मच गया. क्रू मेंबर ने नोट देखकर पायलट को जानकारी दी. इसके बाद ATC ने फ्लाइट को अहमदाबाद डायवर्ट किया. करीब शाम 4.30 बजे विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाले गए.
भारतीय सिनेमा का इतिहास अनगिनत ऐसी शानदार कहानियों, अनसुने किस्सों और जादुई धुनों से भरा पड़ा है, जो आज भी दर्शकों के दिलों पर राज करते हैं। बॉलीवुड में कई ऐसे सदाबहार गाने बने हैं, जिन्हें लोग आज भी बड़े चाव से सुनते हैं, लेकिन उनके पीछे छिपे दिलचस्प इतिहास से अनजान रहते हैं। ऐसा ही एक बेहद रोमांचक किस्सा करीब 47 साल पुराने एक ऐसे आइकॉनिक गाने का है, जो मूल रूप से उस फिल्म की स्क्रिप्ट या योजना का हिस्सा ही नहीं था। मेकर्स ने जब अचानक इस गाने को फिल्म में शामिल करने का फैसला किया, तो समय की भयंकर कमी के बीच इसे महज एक दिन के रिकॉर्ड समय में शूट किया गया था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि बिना किसी पूर्व योजना के तैयार किया गया यह ट्रैक भारतीय संगीत जगत का एक ऐसा कल्ट क्लासिक बन जाएगा, जिसके दीवाने आज भी देश-दुनिया में मौजूद हैं।मूल फिल्म की योजना का हिस्सा नहीं था यह सुपरहिट गानाइस दिलचस्प कहानी की शुरुआत होती है साल 1979 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर म्यूजिकल ड्रामा फिल्म 'सरगम' (Sargam) से। इस फिल्म का निर्देशन जाने-माने फिल्ममेकर के. विश्वनाथ ने किया था, जिन्होंने इससे पहले अपनी ही सुपरहिट तेलुगु फिल्म 'सिरी सिरी मुव्वा' (1976) बनाई थी। उस तेलुगु फिल्म में भी मुख्य भूमिका निभाने वाली खूबसूरत अभिनेत्री जया प्रदा ने ही काम किया था और उसी फिल्म ने उन्हें दक्षिण भारत में एक बड़ा स्टार बना दिया था। जब के. विश्वनाथ ने इसी कहानी को हिंदी सिनेमा में रीमेक करने का फैसला किया, तो उन्होंने जया प्रदा को ही बॉलीवुड में लॉन्च करने के लिए चुना।फिल्म की शूटिंग और निर्माण के दौरान 'डफली वाले, डफली बजा' (Dafliwale Dafli Baja) नाम का यह गीत मूल पटकथा का हिस्सा नहीं था। फिल्म की टीम जब शूटिंग में आगे बढ़ रही थी, तब संगीत के स्तर पर कुछ नया और धमाकेदार जोड़ने का विचार आया। मेकर्स के अचानक लिए गए इस फैसले के बाद इस गाने को तैयार किया गया और समय की भारी कमी के चलते इसे सिर्फ एक ही दिन में फिल्माया गया था। उस समय किसी को यह अंदाजा नहीं था कि एक दिन में शूट किया गया यह ट्रैक सिनेमाघरों में इतिहास रच देगा।थिएटर्स में सिक्के फेंकते थे दर्शक, बीच में रुकवाकर दोबारा चलवाते थे गानाजब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो इस गाने ने पर्दे पर आते ही दर्शकों के होश उड़ा दिए। इस आइकॉनिक ट्रैक को सदाबहार अभिनेता ऋषि कपूर और बॉलीवुड में कदम रखने वाली नई अभिनेत्री जया प्रदा पर बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया था। फिल्म रिलीज होने के बाद सिनेमाघरों का जो नजारा था, वह आज के दौर में कल्पना से भी परे है।कहा जाता है कि दर्शक इस गाने की ऊर्जा और इसकी सुरीली धुन पर इतने ज्यादा मुग्ध हो जाते थे कि वे अपनी कुर्सियों से उठकर नाचने लगते थे और परदे की तरफ खुशी से सिक्के फेंका करते थे। कई सिनेमाघरों में तो दीवानगी इस हद तक बढ़ जाती थी कि दर्शक शो को बीच में ही रुकवाकर प्रोजेक्टर ऑपरेटर से उस गाने को दोबारा चलाने की जिद करते थे। इस एक ही गाने ने अभिनेत्री जया प्रदा को हिंदी सिनेमा में रातों-रात सुपरस्टार बना दिया और उनकी मासूमियत व नृत्य कला ने पूरे देश को अपना दीवाना बना लिया।लीजेंडरी सिंगर्स रफी और लता की आवाज में हमेशा के लिए अमर हुआ गीतकिसी भी गाने को कल्ट बनाने में उसके संगीतकारों, गीतकार और गायकों का बहुत बड़ा योगदान होता है। इस मास्टरपीस गीत को भारतीय संगीत जगत के दो सबसे बड़े और लीजेंडरी कलाकारों—महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) और स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar)— ने अपनी जादुई आवाजों से सजाया था। इन दोनों दिग्गजों की सुरीली जुगबंदी ने इस गाने में ऐसी जान फूंक दी कि आज भी इसे सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।इस गाने का बेहतरीन, जीवंत और थिरकने पर मजबूर करने वाला संगीत उस दौर की सबसे सफल संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल (Laxmikant-Pyarelal) ने तैयार किया था। वहीं, इसके दिल को छू लेने वाले और सरल बोल हिंदी सिनेमा के महान गीतकार आनंद बख्शी (Anand Bakshi) ने लिखे थे। इन सभी दिग्गजों का यह संगम इतना जबरदस्त था कि यह गाना आज से 47 साल पहले जितना लोकप्रिय था, आज भी उतना ही तरोताजा और सदाबहार बना हुआ है। पिछले दशकों में बॉलीवुड की कई अन्य फिल्मों और रीक्रिएटेड वर्जन में भी इस धुन को अलग-अलग अंदाज में प्रस्तुत किया जा चुका है, जो इस गाने की अमरता को साबित करता है।जया प्रदा का शानदार बॉलीवुड डेब्यू और मूक डांसर की यादगार भूमिकाफिल्म 'सरगम' केवल अपने गानों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी अनूठी कहानी और अभिनय के लिए भी जानी जाती है। के. विश्वनाथ द्वारा निर्देशित इस फिल्म में जया प्रदा ने एक मूक (बोझ न सकने वाली) नर्तकी की बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील भूमिका निभाई थी। अपनी आवाज के बिना केवल अपने भावों, आंखों के इशारों और शानदार नृत्य से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर जो गहरी छाप छोड़ी, उसने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक गंभीर और स्थापित अभिनेत्री के रूप में खड़ा कर दिया।साउथ से आकर बॉलीवुड की मुख्यधारा में अपनी पहली ही हिंदी फिल्म से इस तरह का इतिहास रचना हर किसी के बस की बात नहीं होती, लेकिन 'सरगम' और उसके इस जादुई गाने ने जया प्रदा के करियर को आसमान की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। आज इतने साल बीत जाने के बाद भी जब 'डफली वाले, डफली बजा' की धुन कानों में गूंजती है, तो 70 के दशक के उस सुनहरे सिनेमाई दौर की यादें ताजा हो जाती हैं, जब संगीत और कला का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता था।
कल का मौसम, 1 सितंबर: मंगलवार को यूपी-बिहार में होगी झमाझम बारिश, इन इलाकों में भी IMD अलर्ट
1 सितंबर को बिहार में मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है। IMD के अनुसार, राज्य में 31 अगस्त से 2 सितंबर तक कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। खासतौर पर मंगलवार को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश की आशंका है।
Video: खाली सुरंग, ना ही कोई सिग्नल... नेपाल टनल से 93 वर्कर लापता, थर्मल ड्रोन में नहीं दिखा कोई
नेपाल के रसुवा जिले में रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे होने की आशंका वाले 93 मजदूरों की तलाश में बचाव दल आखिरी छोर तक पहुंचा, लेकिन थर्मल ड्रोन से किसी इंसान की मौजूदगी का संकेत नहीं मिला.
सनातन धर्म और हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हलषष्ठी का पावन व्रत अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व को भारत के विभिन्न हिस्सों में हल छठ, हर छठ, ललई छठ, चंदन छठ, कमर छठ और खामर छठ जैसे तमाम नामों से जाना जाता है। भले ही इसे मनाने के तौर-तरीके क्षेत्रीय परंपराओं के आधार पर थोड़े भिन्न हो सकते हैं, लेकिन इस व्रत की मूल भावना और इसका महत्व हर जगह एक समान रहता है। माताएं अपनी संतान की उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं। इस वर्ष यह पवित्र पर्व बुधवार, 2 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। यह विशेष दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भैया और हल-मूसल धारण करने वाले भगवान बलदाऊ यानी भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करना और कड़े निषेधों का ध्यान रखना अनिवार्य माना गया है।हलषष्ठी व्रत के दिन क्यों वर्जित है हल से जोता हुआ अन्न खाना?हल छठ या हलषष्ठी के व्रत का सबसे प्रमुख और कड़ा नियम इससे जुड़े खान-पान से जुड़ा हुआ है। इस दिन व्रती महिलाओं को ऐसा कोई भी अन्न या खाद्य पदार्थ खाने की सख्त मनाही होती है जो खेत में हल चलाकर या जमीन जोतकर उगाया गया हो। चूंकि इस पर्व का सीधा संबंध भगवान बलराम और उनके आयुध 'हल' से है, इसलिए इस दिन जमीन की जुताई करके पैदा किए जाने वाले अनाज, सब्जियां या कंदमूल खाने की पूरी तरह से पाबंदी होती है।मान्यता के अनुसार, इस दिन केवल वही फल और अनाज खाए जाते हैं जो बिना जुताई के प्राकृतिक रूप से पैदा होते हैं, जैसे कि तालाबों या पानी में उगने वाले सिंघाड़े, मतीरा या अन्य जलीय फल। इसके अलावा, व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के मांसाहारी भोजन या तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। यदि आप इस नियम का पालन पूरी निष्ठा से करती हैं, तभी आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।गाय के दूध और उससे बनी चीजों का सेवन माना गया है पूरी तरह निषेधहलषष्ठी का यह पावन पर्व भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें गौ माता और पशुधन से अत्यधिक प्रेम था। भगवान बलराम को समर्पित इस व्रत में गाय के दूध और उससे बनी किसी भी चीज का उपयोग करना पूरी तरह वर्जित माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गाय के स्तनों से निकलने वाले संपूर्ण दूध पर केवल उसके बछड़े का अधिकार माना जाता है, क्योंकि बछड़ा ही उसका वास्तविक हकदार होता है।यही कारण है कि हल छठ के दिन दूध, दही, मक्खन या घी जैसी गोवंश से जुड़ी किसी भी वस्तु का सेवन या उसका उपयोग पूजा-पाठ में भी नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि गलती से भी गाय के दूध का प्रयोग भोजन या किसी अन्य कार्य के लिए न हो, अन्यथा व्रत खंडित हो सकता है।बाल और नाखून काटने के साथ इन कार्यों से भी बनाएं दूरीधार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है, लेकिन हलषष्ठी के दिन कुछ विशेष कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है। यदि कोई महिला इस दिन अपने बाल या नाखून काटती है, तो उसे इस उपवास का पूरा और संपूर्ण पुण्य प्राप्त नहीं होता है। इसलिए व्रत के दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए।इसके अलावा, इस दिन किसी भी हरे-भरे पेड़ या पौधे को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए, बल्कि इसके विपरीत इस शुभ दिन पर नया पौधा लगाना बहुत ही कल्याणकारी माना गया है। व्रती महिलाओं को इस दिन कपड़ों की सिलाई करने या सुई-धागे से जुड़े कार्य करने से भी परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत के नियमों पर असर पड़ता है।झूठ बोलने और अपशब्दों के प्रयोग से व्रत का फल होता है क्षीणव्रत और उपवास केवल खान-पान पर नियंत्रण रखने का नाम नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और कर्म की पवित्रता की भी परीक्षा है। हलषष्ठी व्रत के दिन किसी भी प्रकार का झूठ बोलने से बचना चाहिए। यदि आप व्रत के दौरान असत्य बोलते हैं या किसी को धोखा देते हैं, तो न केवल आपकी पूजा का पूरा फल निष्फल हो जाता है, बल्कि इसका प्रतिकूल प्रभाव आपकी संतान के स्वास्थ्य और जीवन पर भी पड़ सकता है।इस पवित्र दिन पर किसी भी व्यक्ति के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करने, गुस्सा करने या किसी को अपमानित करने से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके विपरीत, इस दिन किसी भी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को सताने के बजाय अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसकी मदद करनी चाहिए। यदि आप इन सभी आवश्यक नियमों और सावधानियों का पालन करते हुए पूरी श्रद्धा के साथ हलषष्ठी का व्रत संपन्न करती हैं, तो भगवान बलराम और माता षष्ठी की कृपा से आपकी संतान को दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली का वरदान प्राप्त होता है।
सनातन धर्म और पौराणिक कथाओं में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का हर एक प्रसंग गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक संदेश समेटे हुए है। जब भी हम कान्हा के बालपन के प्रसंगों का स्मरण करते हैं, तो पूतना राक्षसी का वध हमारी स्मृति में स्वतः आ जाता है। कंस के दुष्ट आदेश पर गोकुल आई इस क्रूर राक्षसी का वध भगवान श्री कृष्ण ने किया था, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने उसे ऐसा उच्च स्थान प्रदान किया जो बड़े-बड़े योगियों और ऋषियों को भी दुर्लभ होता है। यह सवाल अक्सर श्रद्धालुओं के मन में उठता है कि जो राक्षसी बालकृष्ण को विष पिलाकर मारने आई थी, उसे प्रभु ने मां का स्थान और मोक्ष क्यों दिया। श्रीमद्भागवत महापुराण में इस अद्भुत और रहस्यमयी प्रसंग का बहुत ही सुंदर और तार्किक वर्णन मिलता है, जो मानव मन के भावों और भगवान की अतुट करुणा को उजागर करता है।कौन थी पूतना और क्या था उसका पूर्व जन्म का रहस्यपूतना वध की कथा को गहराई से समझने के लिए हमें इसके पूर्व जन्म के प्रसंग में जाना पड़ता है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, यह क्रूर राक्षसी अपने पूर्व जन्म में दैत्यराज और भक्त प्रहलाद के पोते राजा बलि की पुत्री हुआ करती थी, और उसका नाम रत्नमाला था। त्रेता युग या उससे पूर्व जब भगवान विष्णु ने त्रयोदशी के दिन 'वामन अवतार' धारण किया था और राजा बलि के यज्ञ में भिक्षा मांगने पहुंचे थे, तब उस छोटे से ब्राह्मण बालक रूपी भगवान को देखकर राजकुमारी रत्नमाला मंत्रमुग्ध हो गई थी। उसके मन में वात्सल्य भाव जाग उठा था और उसने विचार किया था कि यदि यह सुंदर और अलौकिक बालक उसका पुत्र होता, तो वह उसे बड़े प्रेम से स्तनपान कराती।हालांकि, इसके ठीक विपरीत जब वामन देव ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगकर उनके अहंकार को तोड़ा और पूरे ब्रह्मांड को दो पगों में नापते हुए बलि को पाताल लोक में भेज दिया, तब उसी रत्नमाला के मन में परमेश्वर के प्रति अत्यधिक क्रोध और प्रतिशोध की भावना भी उत्पन्न हो गई। उस समय उसके मन में दूसरा विचार यह आया कि 'यदि यह बालक मेरा पुत्र होता, तो मैं इसे विष देकर मार डालती।' भगवान की लीला देखिए कि उसने रत्नमाला के दोनों ही संकल्पों—वात्सल्य और विषपान कराने की इच्छा—को स्वीकार करते हुए 'तथास्तु' कह दिया था। वही रत्नमाला द्वापर युग में कंस की दासी और पूतना राक्षसी के रूप में जन्मी, ताकि भगवान अपने द्वारा दिए गए वचन और संकल्प को पूरा कर सकें।श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित पूतना वध का संपूर्ण प्रसंगभगवान श्रीकृष्ण द्वारा पूतना के उद्धार और वध की यह पावन कथा श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के छठे अध्याय में विस्तार से वर्णित है। उस समय मथुरा के सिंहासन पर कंस बैठा हुआ था, जो देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के हाथों अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी से भयभीत था। कंस ने अपनी बहन के जन्म लेने वाले सभी बालकों को मौत के घाट उतार दिया था, लेकिन योगमाया और भगवान की दिव्य शक्ति से कान्हा सुरक्षित रूप से गोकुल में नंद बाबा के यहां पहुंचा दिए गए थे। जब कंस को यह गुप्त सूचना मिली कि देवकी का वह काल जीवित है और गोकुल में पल रहा है, तब उसने अपनी सबसे शक्तिशाली, कपटी और मायावी राक्षसी पूतना को गोकुल में जाकर सभी नवजात शिशुओं और विशेषकर कृष्ण का वध करने का गुप्त आदेश दिया।पूतना के पास यह असीम शक्ति थी कि वह आकाश में अपनी इच्छा से उड़ सकती थी और कोई भी सुंदर रूप धारण कर सकती थी। गोकुल पहुंचते ही उसने एक अत्यंत सुंदर, मनमोहक और सुडौल युवती का रूप बना लिया, जिसके बालों में सुगंधित फूल सजे हुए थे और शरीर पर उत्तम वस्त्र थे। ब्रज की गलियों में घूमते हुए उसने बच्चों की तलाश की और अंततः माता यशोदा के आंगन में प्रवेश कर गई। बाहर से उसका रूप इतना सौम्य और शांत था कि किसी को भी उस पर संदेह नहीं हुआ। उसने बालक कृष्ण को अपनी गोद में उठाया और उन्हें अपना विषैला स्तनपान कराने लगी, ताकि वह अपने दुष्ट उद्देश्य को पूरा कर सके।भगवान कृष्ण ने क्यों दिया पूतना को मां का उच्च स्थान और मोक्ष?यह इस कथा का सबसे महत्वपूर्ण और दार्शनिक पहलू है। जब पूतना श्री कृष्ण को अपना विषयुक्त दूध पिलाने लगी, तो भगवान ने उसके कपट और जहर को तो दूर कर दिया, बल्कि उसके भीतर छिपे उस मार्मिक भाव को स्वीकार कर लिया जो उसने पूर्व जन्म में 'माता' के रूप में सोचा था। भगवान की नजर मनुष्य की बाहरी दुष्टता या नीयत से ज्यादा उसके द्वारा अर्पित किए गए समर्पण और भाव पर होती है। पूतना ने भले ही मारने के दुर्भाव से उसे स्तनपान कराया हो, लेकिन उसने अपने स्तन से वह अमृत रूपी दूध (और साथ में प्राण) भगवान को समर्पित कर दिया, जो एक मां अपने बच्चे को देती है।कृष्ण ने उसे मातृत्व का वही भाव प्रदान किया जिसके लिए वह पूर्व जन्म में तरसी थी। जब पूतना ने श्री कृष्ण को दूध पिलाना शुरू किया, तो उस बाल गोपाल के स्पर्श मात्र से उसके शरीर का सारा विष और पाप नष्ट होने लगा। कन्हा ने उसके प्राणों को खींचते हुए उसे ऐसा असहनीय दर्द दिया कि वह अपना मायावी रूप छिपा नहीं सकी और अपने विशाल राक्षसी स्वरूप में आ गई। गोकुल की सीमा से बाहर खेतों में गिरकर उसका अंत हुआ। लेकिन भगवान की यह कृपा देखिए कि जिस राक्षसी का आगमन बच्चों को मारने के लिए हुआ था, उसे प्रभु ने अपनी शरण में लेकर अपने धड़ से लगाया और उसे 'माता' का दर्जा देते हुए बैकुंठधाम का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इससे यह संदेश मिलता है कि प्रभु की शरण में आने वाले के पूर्वकृत समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और सच्चा भाव ही भगवान को रिझाने का एकमात्र साधन है।
1 सितंबर का इतिहास: भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना और फादर कामिल बुल्के का जन्मदिन
‘जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’ की असरदार टैगलाइन के साथ देश के लाखों लोगों को बीमा की सेवाएं देने वाले भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की स्थापना आजादी के नौ साल बाद एक सितंबर के दिन ही की गई थी। यह दिन एक और कारण से भी इतिहास में दर्ज है। आज भले शब्दकोश के नाम पर ढेरों ऑनलाइन सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन एक समय पढ़ने लिखने वाले लोगों के लिए शब्दकोश या डिक्शनरी के नाम पर मोटी-मोटी किताबें हुआ करती थीं और शब्दकोश को तैयार करना बहुत मुश्किल काम माना जाता था। भारत में शब्दकोश का जिक्र आते ही फादर कामिल बुल्के का नाम जेहन में आता है। बुल्के का जन्म भी एक सितंबर को ही हुआ था। देश दुनिया के इतिहास में एक सितंबर की तारीख पर दर्ज कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-1858 : ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों की अंतिम बैठक लंदन के ईस्ट इंडिया हाउस में आयोजित की गई। 1878 : एम्मा एम नट्ट अमेरिका में पहली महिला टेलीफोन ऑपरेटर बनी। 1909 : प्रसिद्ध साहित्यकार और शब्दकोश तैयार करने वाले फ़ादर कामिल बुल्के का जन्म। 1923 : ग्रेट कैंटो भूकंप ने जापान के तोक्यो और योकोहामा शहरों में भारी तबाही मचायी। 1942 : रास बिहारी बोस ने इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना की। 1947 : भारतीय मानक समय की शुरूआत की गई। 1956 : भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की स्थापना। 1964 : इंडियन ऑयल रिफ़ाइनरी और इंडियन ऑयल कम्पनी को विलय करके इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन बनाई गयी। 1965 : पाकिस्तानी फौज ने कश्मीर में संघर्षविराम रेखा को पार किया। 2000 : चीन ने तिब्बत होते हुए नेपाल जाने वाले अपने एकमात्र रास्ते को बंद किया। 2018 : जकार्ता एशियाई खेलों में मुक्केबाज अमित पंघाल ने 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले ओवरऑल आठवें भारतीय मुक्केबाज बने। 2018 : प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार ने जकार्ता एशियाई खेलों की पुरुषों की ब्रिज प्रतियोगिता की युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। 2020 : भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का दिल्ली में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कई दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 31 अगस्त की शाम उनका निधन हो गया था। 2023: सिंगापुर में भारतीय मूल के पूर्व मंत्री थरमन शणमुगारत्नम ने राष्ट्रपति चुनाव जीता2025: यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में तेल टैंकर पर मिसाइल दागी।
बच्चों को मीठा खिलाना चाहिए या नहीं, AIIMS डॉक्टर से जानें
नई स्टडी में पाया गया है कि बचपन में कम मीठा खाने वाले लोगों में लिवर और इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट कैंसर का खतरा कम होता है. यह रिसर्च 64,761 ब्रिटेन के लोगों पर की गई, जिसमें शुरुआती 1,000 दिनों के खानपान का प्रभाव दिखाया गया है.
16 वर्षीय नाबालिग के साथ बस में गैंगरेप,हैवानियत की उस रात सुरक्षा के कैसे थे हालात?
NDTV ने अपनी पड़ताल में इसी 43 किलोमीटर के स्ट्रेच की सुरक्षा व्यवस्था को जमीन पर उतरकर चेक किया है. NDTV के संवाददाताओं ने परी चौक, दिल्ली-नोएडा बॉर्डर और कश्मीरी गेट पर सुरक्षा के इंतजामों का जायजा लिया है.
Bihar Teacher Recruitment: TRE 4.0 के 32,388 पदों के आवेदन में देरी, जानिए कब होंगी नई तारीखें घोषित
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE) 4.0 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को रोक दिया है। बिहार शिक्षा विभाग के तहत स्कूल शिक्षकों के 32,388 खाली पदों को भरने के लिए यह भर्ती प्रक्रिया 1 सितंबर, 2026 को शुरू होनी थी। आयोग ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक नोटिस के ज़रिए इसे टालने की घोषणा की। नोटिस के अनुसार, प्रक्रिया में बदलाव के कारण आवेदन का शेड्यूल टाल दिया गया है। हालाँकि, BPSC ने इन बदलावों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। आयोग ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया के लिए नई तारीखों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। तब तक, उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए नए शेड्यूल का इंतज़ार करना होगा। इसे भी पढ़ें: Amit Shah की पहल, Bihar-Jharkhand में Son River जल बंटवारे पर हुआ ऐतिहासिक MoU यह ताज़ा नोटिस विज्ञापन संख्या 14/2026 से संबंधित है और इसे बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के परीक्षा नियंत्रक ने जारी किया है। इसमें साफ़ तौर पर कहा गया है कि 32,388 पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया टाल दी गई है और आगे की तारीखों की जानकारी बाद में दी जाएगी। इसका मतलब है कि पहले घोषित 1 सितंबर से आवेदन शुरू होने की तारीख अब लागू नहीं होगी। इसलिए, जिन उम्मीदवारों ने 1 सितंबर से आवेदन करने की तैयारी पूरी कर ली थी, उन्हें पुराने शेड्यूल के आधार पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। TRE 4.0 भर्ती प्रक्रिया में बिहार के शिक्षा विभाग के तहत स्कूल टीचर के 32,388 खाली पद शामिल हैं। इस देरी की वजह से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होने में रुकावट आई है, और इसलिए उम्मीदवारों को आयोग द्वारा अगली तारीखों की घोषणा का इंतज़ार करना होगा। फिलहाल, BPSC ने यह नहीं बताया है कि प्रक्रिया में किए गए बदलावों का भर्ती की समय-सीमा के किसी और हिस्से पर असर पड़ेगा या नहीं। बाद के चरणों में होने वाले किसी भी बदलाव के बारे में तभी पता चलेगा जब आयोग संशोधित शेड्यूल जारी करेगा। इसे भी पढ़ें: Weather Update: देश के कई हिस्सों में फिर सक्रिय हुआ मानसून, Delhi-NCR समेत कई राज्यों में बदलेगा मौसम आवेदन की प्रक्रिया अभी कुछ समय के लिए रोक दी गई है, इसलिए उम्मीदवारों को अगली जानकारी के लिए सितंबर की पुरानी समय-सीमा के बजाय BPSC के आधिकारिक भर्ती नोटिस पर निर्भर रहना चाहिए। आवेदन की नई तारीखों की जानकारी आयोग के आधिकारिक माध्यमों से दिए जाने की उम्मीद है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने ज़रूरी दस्तावेज़ और आवेदन से जुड़ी अन्य जानकारी तैयार रखें, लेकिन आवेदन जमा करने या पुराने शेड्यूल के आधार पर कोई योजना बनाने से पहले नए नोटिफ़िकेशन का इंतज़ार करें। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
बुध का कन्या राशि में गोचर, 7 सितंबर से इन 4 राशियों के आएंगे अच्छे दिन
बुध 7 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे और 26 सितंबर तक यहीं रहेंगे. ज्योतिषविदों के अनुसार, कन्या बुध की अपनी राशि है. ऐसे में बुध के इस राशि परिवर्तन को चार राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है.
गर्मी के मौसम में या चटक धूप के संपर्क में आने पर त्वचा का हल्का-फुल्का काला पड़ना या टैन होना एक बेहद सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, जिसे अधिकांश लोग नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि धूप में निकलते ही उनकी त्वचा पर केवल पसीना ही नहीं आता, बल्कि स्किन एक अलग और असामान्य तरीके से रिएक्ट करने लगती है। यदि आपको भी ऐसा महसूस होता है कि धूप में थोड़ी देर भी बाहर निकलने पर आपकी त्वचा पर मामूली जलन से कहीं ज्यादा गंभीर परेशानी, खुजली और रैशेज होने लगते हैं, तो इसे बिल्कुल भी सामान्य टैनिंग समझकर नजरअंदाज न करें। यह इस बात का स्पष्ट संकेत हो सकता है कि आपकी त्वचा को सूर्य की किरणों से एक खास प्रकार की एलर्जी है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में पीएमएलई (PMLE) कहा जाता है। ऐसी स्थिति में बाहर निकलते वक्त अपनी त्वचा की अतिरिक्त देखभाल और सुरक्षा करने की सख्त जरूरत होती है। आइए इस लेख के माध्यम से विस्तार से जानते हैं कि सनलाइट से होने वाली यह एलर्जी क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।क्या है पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (PMLE)? जानिए इसके पीछे की वजहपॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन (Polymorphous Light Eruption) सूरज से निकलने वाली पराबैंगनी यानी यूवी (UV) किरणों के सीधे संपर्क में आने के बाद त्वचा पर होने वाली एक आम लेकिन परेशान करने वाली एलर्जी का नाम है। इस एलर्जी की एक खास बात यह होती है कि इसका रिएक्शन सूरज की रोशनी के संपर्क में आते ही तुरंत नजर नहीं आता, बल्कि यह त्वचा पर यूवी किरणों के पड़ने के कुछ घंटों बाद या फिर एक-दो दिन के अंतराल पर दिखाई देना शुरू होता है।जिन लोगों को यह स्वास्थ्य समस्या होती है, उनके शरीर में एक खास प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Immune Response) देखी जाती है। दरअसल, जब ऐसे लोगों की संवेदनशील त्वचा धूप के संपर्क में आती है, तो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम गलती से त्वचा के अंदर बनने वाले कुछ सामान्य अणुओं (Molecules) को हानिकारक मान बैठता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर उसके खिलाफ आक्रामक रूप से प्रतिक्रिया करना शुरू कर देता है, जिससे त्वचा पर तेज खुजली, जलन और लाल रंग के असहज चकत्ते उभरने लगते हैं।पीएमएलई (PMLE) के प्रमुख लक्षण और इसके जोखिम कारकपॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन के शुरुआती और स्पष्ट लक्षण आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों पर सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं जो सीधे धूप के संपर्क में आते हैं, जैसे कि बाजू, छाती का ऊपरी हिस्सा, गर्दन, पैर और पीठ की त्वचा। इसके मुख्य लक्षणों में निम्नलिखित स्थितियां शामिल हैं:त्वचा पर छोटे-छोटे और उभरे हुए दाने होना।लाल या सफेद रंग की अत्यधिक खुजलीदार पित्ती (Hives) का उभरना।त्वचा पर एक्जिमा जैसे सूखे और खुरदरे पैच बन जाना।धूप के संपर्क में आने वाली जगह पर छोटे-छोटे पानी भरे छाले होना।दानों के आसपास तेज लालिमा और असहनीय खुजली का बने रहना।जोखिम कारकों की बात करें तो यह समस्या आमतौर पर 20 से 40 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं में अधिक देखी जाती है, विशेष तौर पर उन महिलाओं में जिनकी त्वचा की बनावट पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील (Sensitive Skin History) रही हो।पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन से खुद को सुरक्षित रखने और बचाव के उपायचूंकि यह स्किन एलर्जी मुख्य रूप से सूरज की तेज किरणों के कारण होती है, इसलिए इससे बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका धूप से दूरी बनाना या उचित सावधानी बरतना है। यह एलर्जी आमतौर पर सुबह 11 बजे से लेकर शाम के 3 बजे के बीच की तेज धूप के संपर्क में आने से सबसे ज्यादा ट्रिगर होती है। हालांकि यह समस्या कुछ समय बाद अपने आप भी ठीक हो जाती है, लेकिन यदि आप कुछ एहतियाती कदम उठाएं तो इससे समय रहते बचा जा सकता है:हाई एसपीएफ और ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल: घर से बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले अच्छी क्वालिटी का सनस्क्रीन लगाएं जो यूवीए और यूवीबी दोनों किरणों से सुरक्षा देता हो।फुल बाजू के कपड़े पहनें: धूप में निकलते समय ऐसे कपड़े पहनने का प्रयास करें जो आपके शरीर के अधिकांश हिस्से को पूरी तरह से ढक कर रखें, जिससे सीधी धूप त्वचा पर न पड़े।फोटोथेरेपी का सहारा: गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह से फोटोथेरेपी यानी नेचुरल या आर्टिफिशियल यूवी लाइट के नियंत्रित संपर्क के जरिए त्वचा को सहनशील बनाया जाता है।डॉक्टर से परामर्श कब लेना जरूरी है?पॉलीमॉर्फस लाइट इरप्शन आमतौर पर एक हल्की और स्वतः ठीक होने वाली एलर्जी है, जिसे विशेष चिकित्सीय उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, यदि आपकी स्थिति सामान्य से अधिक गंभीर हो जाए तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। यदि स्किन रैश और दानों के साथ-साथ आपको असहनीय दर्द, सूजन या तेज बुखार जैसी समस्याएं महसूस होने लगें, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। इस तरह के लक्षण किसी अन्य गंभीर त्वचा रोग या संक्रमण का संकेत हो सकते हैं, जिसके लिए समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से उचित इलाज कराना बेहद आवश्यक है।
टेलर की जरूरत नहीं, जैकेट-बैग की अटकी चेन इस देसी चीज से होगी ठीक
How To Fix Stuck Zip: जैकेट, जींस या बैग की चेन अचानक अटक गई है तो उसे जोर से खींचने की गलती न करें, वरना चेन के साथ कपड़ा भी खराब हो सकता है. घर में रखे नारियल तेल की मदद से जाम चेन को आसानी से ठीक किया जा सकता है. जानिए अटकी चेन खोलने का आसान तरीका और इसे इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
नो जिम, नो इक्यूपमेंट: दिनभर बैठे रहने से सुस्त हो चुकी बॉडी को घर पर ही ऐसे करें टोंड
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और डेस्क जॉब्स की वजह से अधिकांश लोगों का दिन का अधिकांश समय कुर्सी पर बैठे-बैठे ही गुजरता है। दिनभर लगातार बैठे रहने के कारण शरीर में सुस्ती छाने लगती है, मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और बॉडी की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर को सक्रिय और स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां या व्यायाम करना एक अनिवार्य शर्त है। हालांकि, आधुनिक समय में व्यस्तता इतनी बढ़ चुकी है कि कई लोगों के पास जिम जाने के लिए समय या ऊर्जा दोनों ही नहीं बचती हैं। ऐसे में यदि आप बिना जिम जाए, बिना किसी भारी-भरकम उपकरण या इक्यूपमेंट के अपनी पूरी बॉडी को घर पर ही टोंड और मजबूत बनाना चाहते हैं, तो कुछ बेहद प्रभावी बॉडीवेट एक्सरसाइज को अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करके शानदार नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।सिटअप्स से मजबूत करें पेट और कोर की मांसपेशियांयदि आपका मुख्य लक्ष्य अपने पेट के फैट को कम करना, एब्डोमिनल मसल्स को मजबूत बनाना और अपने कोर (Core) को ताकतवर करना है, तो सिटअप्स (Sit-ups) आपके लिए सबसे बेहतरीन और असरदार एक्सरसाइज साबित हो सकती है। सिटअप्स न केवल पेट की मांसपेशियों पर सीधा असर डालते हैं, बल्कि यह पूरे शरीर की सहनशक्ति और स्टेमिना को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसे घर पर बिना किसी उपकरण के आसानी से किया जा सकता है।सिटअप्स करने का सही तरीका यह है कि सबसे पहले आप योग मैट पर अपनी पीठ के बल सीधे लेट जाएं। इस दौरान आपके घुटने पूरी तरह मुड़े हुए और आपके दोनों पैर जमीन पर सपाट होने चाहिए। अब अपने दोनों हाथों को अपनी छाती के सामने क्रॉस करके रख लें। इसके बाद, सांस छोड़ते हुए अपने सिर, कंधों और शरीर के ऊपरी हिस्से को जमीन से ऊपर की ओर उठाएं। ऐसा करते समय आपके शरीर का धड़ आपके घुटनों की तरफ आना चाहिए। इस एक्सरसाइज को करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उठते वक्त शरीर को कोई झटका न लगे, बल्कि यह पूरी मूवमेंट आपके पेट की आंतरिक ताकत (Core Strength) से होनी चाहिए, तभी इसका पूरा फायदा आपको मिल पाएगा।वॉल सिट एक्सरसाइज से पैरों और जांघों को दें मजबूतीलोअर बॉडी यानी पैरों की ताकत बढ़ाने और जांघों की मांसपेशियों को टोंड करने के लिए वॉल सिट (Wall Sit) एक बेहद शानदार और सरल एक्सरसाइज है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए किसी भी जिम मशीन या डम्बल की कोई जरूरत नहीं पड़ती है, बल्कि इसे केवल एक सादी दीवार के सहारे या हवा में कुर्सी की तरह बैठकर आसानी से किया जा सकता है। यह आपके घुटनों और पैरों के निचले हिस्से की सहनशक्ति को मजबूत करती है।वॉल सिट करने के लिए सबसे पहले अपनी पीठ को किसी मजबूत दीवार के सहारे सीधा लगाकर खड़े हो जाएं। इस दौरान आपके दोनों पैर आपके कंधों की चौड़ाई के बराबर की दूरी पर होने चाहिए। अब धीरे-धीरे अपने पैरों को आगे की तरफ रखते हुए घुटनों से इस तरह मुड़ें कि आप ठीक वैसे बैठने की पोजीशन में आ जाएं जैसे कोई व्यक्ति किसी अदृश्य कुर्सी पर बैठता है। आपके घुटने 90 डिग्री के एंगल पर होने चाहिए। इस स्थिति में आपको लगभग 20 से 30 सेकंड्स तक लगातार होल्ड करके रखना है, जिससे आपकी जांघों और कूल्हों की मांसपेशियों पर सकारात्मक दबाव पड़े।प्लैंक्स: फुल बॉडी स्ट्रेंथ और कोर को मजबूत करने का अचूक उपायप्लैंक (Planks) को फिटनेस की दुनिया में एक संपूर्ण और सबसे प्रभावी फुल बॉडी एक्सरसाइज माना जाता है। यह एक उत्कृष्ट कोर-स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज है, जो न केवल आपके पेट और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करती है, बल्कि आपके पूरे शरीर का संतुलन और पोश्चर सुधारने में भी मदद करती है। बिना किसी इक्यूपमेंट के की जाने वाली यह एक्सरसाइज कम समय में ज्यादा कैलोरी बर्न करती है।प्लैंक करने के लिए आपको पेट के बल जमीन पर लेटना होता है और फिर अपनी कोहनी और पंजों के बल पर अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाना होता है। इस दौरान आपका पूरा शरीर सिर से लेकर पैर की एड़ी तक एक सीध में होना चाहिए। पेट की मांसपेशियों को अंदर की तरफ खींचकर टाइट रखें और सामने की जमीन पर नजर रखें। इस पोजीशन में कुछ सेकंड से लेकर एक मिनट तक बने रहने से शरीर की काया में तेजी से कसाव आने लगता है और मसल्स मजबूत बनती हैं।जंपिंग जैक्स से बढ़ाएं स्टेमिना और करें फुल बॉडी वार्म-अपकार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को सुधारने और शरीर का स्टेमिना तेजी से बढ़ाने के लिए जंपिंग जैक्स (Jumping Jacks) एक बेहतरीन फुल बॉडी वार्म-अप एक्सरसाइज है। यह कैलोरी बर्न करने और वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करती है, साथ ही शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाती है। इसे घर के किसी भी कोने में आसानी से किया जा सकता है।जंपिंग जैक्स करने की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों हाथों को अपनी जांघों के पास सटाकर एकदम सीधे खड़े हो जाएं। इस दौरान आपके दोनों पैर आपस में जुड़े होने चाहिए। अब एक हल्का सा जंप करते हुए अपने पैरों को कंधों की चौड़ाई से थोड़ा बाहर की तरफ खोल लें। ठीक उसी समय अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर हवा में ले जाकर आपस में मिलाएं। इसके बाद तुरंत दोबारा जंप करते हुए वापस अपनी शुरुआती पोजीशन में आ जाएं। इस लयबद्ध प्रक्रिया को लगातार दोहराने से शरीर एक्टिव हो जाता है और सुस्ती पूरी तरह गायब हो जाती है।
नल से आ रहा था गंदा पानी, टंकी खोली तो अंदर पड़ी थी कटी हुई लाश
सलेम के अरीसिपालयम इलाके में पानी की टंकियों से महिला के शरीर के टुकड़े मिलने से सनसनी फैल गई है. पुलिस ने तीन बोरियों में महिला के अलग-अलग अंग बरामद किए हैं.
आधार कार्ड में कितनी बार बदल सकते हैं नाम समेत ये जानकारी? जानें UIDAI की तय सीमा और फीस
Aadhar Card में कोई भी बदलाव करने से पहले UIDAI के इन नियमों को जानना बेहद जरूरी है. जानिए आप अपने आधार कार्ड में नाम, मोबाइल नंबर, एड्रेस और डेट ऑफ बर्थ को कितनी बार अपडेट करा सकते हैं और इसके लिए कितना शुल्क (Fees) देना होता है.
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने को लेकर सदियों पुरानी और पारंपरिक धारणाएं अब तेजी से बदल रही हैं। अभी तक लोगों के मन में यही आम धारणा और फिटनेस का पारंपरिक फॉर्मूला रहा है कि कोई व्यक्ति जितनी ज्यादा देर तक पसीना बहाएगा, जितनी लंबी कसरत करेगा या जितनी मध्यम गति से लगातार व्यायाम करेगा, उसका शरीर उतना ही अधिक स्वस्थ और फिट रहेगा। हालांकि, आधुनिक विज्ञान और स्वास्थ्य जगत से जुड़े हालिया शोधों ने इन पुरानी मान्यताओं को एक बहुत बड़ी चुनौती दी है। हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली वैज्ञानिक स्टडी ने यह साबित कर दिया है कि फिटनेस के मामले में अब समय की लंबाई नहीं, बल्कि वर्कआउट की तीव्रता (Intensity) सबसे ज्यादा मायने रखती है। इस नई स्टडी के अनुसार, महज कुछ सेकंड की तीव्र गति की स्प्रिंट यानी तेज दौड़ शरीर पर पारंपरिक एक्सरसाइज के मुकाबले कई गुना ज्यादा और सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।30 सेकंड की स्प्रिंट के 6 सेट और 90 मिनट की साइकिलिंग की तुलनास्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका 'सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन' में हाल ही में एक नया शोध प्रकाशित हुआ है, जिसने फिटनेस एक्सपर्ट्स को भी हैरान कर दिया है। इस शोध के परिणामों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति केवल 30 सेकंड तक अपनी पूरी ताकत लगाकर तेज दौड़ (स्प्रिंट) के कुल छह सेट करता है, तो इससे शरीर में आश्चर्यजनक शारीरिक बदलाव देखने को मिलते हैं। शोध में पाया गया कि इन छोटे लेकिन बेहद तीव्र स्प्रिंट के तुरंत बाद मापे गए प्लाज्मा प्रोटीन में से लगभग एक चौथाई हिस्से यानी करीब 25 प्रतिशत प्रोटीन में सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए।इसके उलट, जब इसी शोध के तहत लोगों को 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे तक मध्यम गति से लगातार साइकिल चलाने के लिए कहा गया, तो उनके शरीर में एक प्रतिशत के एक चौथाई हिस्से से भी कम प्रोटीन में बदलाव नजर आया। अमेरिका की प्रसिद्ध 'राकफेलर यूनिवर्सिटी' के शोधकर्ताओं ने अपने इस अध्ययन में यह भी पाया कि हालांकि ट्रेडमिल पर मध्यम गति से दौड़ना साइकिल चलाने की तुलना में थोड़े अधिक प्रोटीन्स को प्रभावित करता है, फिर भी वह प्रभाव भी 30 सेकंड की तीव्र स्प्रिंट के सामने बहुत कम और नगण्य साबित होता है।शरीर के प्लाज्मा प्रोटीन पर तीव्र एक्सरसाइज का क्रांतिकारी असरवैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस विस्तृत अध्ययन में यह बात सामने आई है कि स्प्रिंट इंटरवल एक्सरसाइज (Sprint Interval Exercise) ने पहचाने गए प्लाज्मा प्रोटीन के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को सक्रिय और परिवर्तित कर दिया। इसका सीधा और सरल मतलब यह है कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ 30 सेकंड के अंतराल वाले स्प्रिंट के 6 सेट पूरी क्षमता के साथ पूरे कर लेता है, तो उसके शरीर के लगभग 25% प्लाज्मा प्रोटीन तुरंत एक्टिव हो जाते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, इन सक्रिय होने वाले प्रोटीन्स में कई ऐसे महत्वपूर्ण जैविक कारक और घटक शामिल होते हैं जो हमारे शरीर के अंदरूनी तंत्र को मजबूत बनाते हैं। इनमें मुख्य रूप से एंजियोजेनेसिस (नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण), एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स रीमॉडलिंग (ऊतकों की मरम्मत और संरचना), गट सिग्नलिंग (पाचन तंत्र के संकेत) और संभावित न्यूरो-रेगुलेशन से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण शारीरिक कारक शामिल हैं, जो संपूर्ण स्वास्थ्य को एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।दिल और मेटाबॉलिक बीमारियों के कम जोखिम से है सीधा संबंधयह क्रांतिकारी स्टडी केवल कुछ प्रयोगशाला के नमूनों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह बेहद व्यापक आंकड़ों का परिणाम है। यह पूरी रिसर्च लगभग 53,000 लोगों पर किए गए विशाल डेटा और उनके स्वास्थ्य परिणामों पर आधारित है। इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 'ब्रिटेन बायोबैंक' में 53,000 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया और व्यायाम से शरीर में सक्रिय होने वाले प्रोटीन्स की आपस में तुलना की।अध्ययन के दौरान यह एक बहुत बड़ा और सुखद निष्कर्ष सामने आया कि स्प्रिंटिंग के दौरान सक्रिय होने वाले कई प्रमुख प्रोटीन्स का सीधा संबंध हमारे हृदय (Heart) और मेटाबॉलिक से जुड़ी गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम करने से था। आधुनिक जीवनशैली में होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे कि मोटापा (Obesity), टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) और अन्य जटिल मेटाबॉलिक बीमारियां आज के समय में दुनिया भर के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। इस शोध में पाया गया कि मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियों के कम जोखिम से जुड़े कुल 33 विशिष्ट प्रोटीन्स में से लगभग 32 प्रोटीन्स में बदलाव अकेले तीव्र स्प्रिंटिंग (Sprinting) के माध्यम से देखे गए, जबकि पारंपरिक और सामान्य एक्सरसाइज करने से इनमें से केवल तीन प्रोटीन्स में ही कोई बदलाव दर्ज किया जा सका।फिटनेस के पारंपरिक तरीकों को अलविदा कहने का वक्तइस पूरी वैज्ञानिक खोज से यह साफ हो जाता है कि अब घंटों जिम में बिताने या लंबी और थका देने वाली मध्यम गति की कसरतों के दिन लदने वाले हैं। यदि आपके पास अपने व्यस्त दिनचर्या में घंटों का समय नहीं है, तो भी आप केवल कुछ मिनटों की हाई-इंटेंसिटी या तीव्र स्प्रिंट वर्कआउट के जरिए अपनी सेहत को बेहतरीन रख सकते हैं। यह अध्ययन स्पष्ट रूप से यह संदेश देता है कि कम समय में अधिक तीव्रता वाला व्यायाम शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त रखने और गंभीर बीमारियों को कोसों दूर रखने में पारंपरिक लंबी कसरतों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और शक्तिशाली साबित हो सकता है।
तुकाराम मुंडे की रेड का असर! ट्विंकल खन्ना ने अपने किचन की जांच की, निकला सदियों पुराना मसाला
FDA की सख्ती पर ट्विंकल खन्ना का मजेदार पोस्ट वायरल, पनीर टिक्का से बनी 'मुंडेज़ मार्टिनी' ने खींचा सबका ध्यान.
भारतीय वित्तीय बाजार और हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए एक बहुत बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। बाजार बंद होने के ठीक बाद, देश की जानी-मानी और प्रतिष्ठित हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में से एक आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (Aadhaar Housing Finance Limited) ने अपनी क्रेडिट रेटिंग से जुड़ा एक बड़ा अपडेट शेयर बाजारों के साथ साझा किया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को भेजी गई अपनी आधिकारिक फाइलिंग में जानकारी दी है कि प्रतिष्ठित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड (India Ratings and Research) ने कंपनी के प्रदर्शन और वित्तीय साख को परखते हुए इसकी रेटिंग में बड़ा अपग्रेड किया है। इस अपग्रेड के बाद कंपनी का मनोबल काफी ऊंचा हुआ है और निवेशकों के बीच भी इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।कंपनी की रेटिंग में हुआ बड़ा सुधार, 'IND AA' से बढ़कर हुई 'IND AA+'क्रेडिट रेटिंग के मोर्चे पर आधार हाउसिंग फाइनेंस के लिए यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने कंपनी की मौजूदा रेटिंग को पहले के स्तर 'IND AA' से अपग्रेड करके 'IND AA+' कर दिया है। इसके साथ ही, कंपनी के कारोबार के भविष्य को लेकर आउटलुक को भी 'पॉजिटिव' से बदलकर 'स्टेबल' (Stable) यानी स्थिर कर दिया गया है।यह महत्वपूर्ण विनियामक जानकारी कंपनी की ओर से देश के प्रमुख शेयर बाजारों—बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) लिमिटेड और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के तहत दी गई है। एक्सचेंज को भेजी गई यह सूचना कंपनी की कंपनी सचिव और अनुपालन अधिकारी (Compliance Officer) हर्षदा पाठक के माध्यम से प्रेषित की गई है, जो इस बात की पुष्टि करती है कि कंपनी सभी कानूनी और वित्तीय मानकों पर पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।किन-किन वित्तीय इंस्ट्रूमेंट्स को मिली है यह नई अपग्रेडेड रेटिंग?इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने आधार हाउसिंग फाइनेंस के दो मुख्य और बड़े वित्तीय इंस्ट्रूमेंट्स (Financial Instruments) की रेटिंग में यह संशोधन किया है। कुल मिलाकर 12,250 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से जुड़े इन वित्तीय साधनों पर यह नई रेटिंग तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। रेटिंग एजेंसी द्वारा जिन प्रमुख इंस्ट्रूमेंट्स को यह शानदार रेटिंग दी गई है, उनका विवरण इस प्रकार है:नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD): कंपनी के 7,250 करोड़ रुपये के एनसीडी को 'IND AA+' रेटिंग दी गई है, जिसका आउटलुक स्थिर है। उल्लेखनीय है कि पहले यह स्वीकृत राशि 10,000 करोड़ रुपये थी, जिसे संशोधित करके अब 7,250 करोड़ रुपये कर दिया गया है।बैंक लोन फैसिलिटीज (Bank Loan Facilities): कंपनी की 5,000 करोड़ रुपये की कुल बैंक लोन सुविधा को भी 'IND AA+' रेटिंग से नवाजा गया है और इसका आउटलुक भी पूरी तरह स्थिर रखा गया है।बैंक लोन का विस्तृत ब्यौरा और विभिन्न वित्तीय संस्थानों से जुड़ा सहयोगकंपनी की ओर से जारी किए गए आधिकारिक रेटिंग लेटर के अनुसार, आधार हाउसिंग फाइनेंस के विभिन्न बैंक लोन पोर्टफोलियो में कई बड़े बैंक और वित्तीय संस्थान शामिल हैं। इस ब्यौरे के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित बैंक ऋण शामिल हैं:देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाताओं में शुमार एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) से लिए गए तीन महत्वपूर्ण टर्म लोन, जिनकी कुल राशि लगभग 1,973 करोड़ रुपये है।साउथ इंडियन बैंक (South Indian Bank) से लिया गया एक टर्म लोन, जिसकी कुल राशि 707.35 करोड़ रुपये है।इसके अलावा, कंपनी के पास लगभग 2,319.44 करोड़ रुपये की एक बड़ी अनयूज्ड बैंक लोन लिमिट (Unused Bank Loan Limit) भी सुरक्षित है, जो जरूरत पड़ने पर वित्तीय तरलता (Liquidity) को बनाए रखने में मदद करती है।इन सभी अलग-अलग बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्थाओं को रेटिंग एजेंसी द्वारा सामूहिक रूप से 'IND AA+/Stable' रेटिंग प्रदान की गई है, जो कंपनी के वित्तीय प्रबंधन की मजबूती को दर्शाता है। यह संपूर्ण रेटिंग एक्शन एजेंसी द्वारा 28 अगस्त 2026 को लिया गया था।रेटिंग एजेंसी के निदेशक का बयान और इसका तकनीकी मूल्यांकनइस पूरी रेटिंग प्रक्रिया को लेकर इंडिया रेटिंग्स के डायरेक्टर करण गुप्ता की ओर से एक आधिकारिक रेटिंग लेटर कंपनी के चीफ ट्रेजरी Officer अनमोल गुप्ता को भेजा गया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह उच्च रेटिंग पूरी तरह से कंपनी द्वारा मुहैया कराई गई वित्तीय जानकारियों, बाजार की स्थिति और उसकी साख की बेहद विश्वसनीय समीक्षा के आधार पर तय की गई है।इसके साथ ही, रेटिंग एजेंसी ने निवेशकों के लिए यह भी स्पष्ट किया है कि यह रेटिंग किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष निवेश सलाह (Investment Advice) नहीं है, बल्कि यह केवल कंपनी की वित्तीय सेहत, समय पर कर्ज चुकाने की आंतरिक क्षमता और उसके समग्र कारोबारी जोखिम का एक स्वतंत्र और पेशेवर आकलन है।निवेशकों और शेयर बाजार के लिए इस अपग्रेड का क्या है सीधा मतलब?कारोबारी जगत और शेयर बाजार के नियमों के मुताबिक, किसी भी वित्तीय संस्थान या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के लिए क्रेडिट रेटिंग का अपग्रेड होना एक बेहद सकारात्मक संकेत माना जाता है। इस अपग्रेड का सीधा और आसान मतलब यह है कि रेटिंग एजेंसी को अब कंपनी की वित्तीय स्थिति, उसकी पूंजी की पर्याप्तता (Capital Adequacy) और उसके द्वारा लिए गए कर्ज को समय पर चुकाने की क्षमता पर पहले से कहीं अधिक भरोसा हो गया है।जब किसी कंपनी को 'IND AA+' जैसी उच्च श्रेणी की रेटिंग मिलती है, तो उसे भविष्य में देश के बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बेहद कम ब्याज दरों पर आसानी से कर्ज या फंड मिल जाता है। इससे कंपनी की फंड जुटाने की लागत (Cost of Borrowing) कम हो जाती है, जिसका सीधा फायदा कंपनी के मुनाफे और उसके शेयरधारकों को मिलता है। आधार हाउसिंग फाइनेंस के लिए यह उपलब्धि आने वाले समय में उसके होम लोन पोर्टफोलियो के विस्तार और व्यावसायिक वृद्धि में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में ABVP की बड़ी जीत, जेन जी आंदोलन के बाद ऐतिहासिक सफलता
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को बड़ी जीत हासिल हुई है. आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन की यह जीत अहम है.
देश के करोड़ों नौकरीपेशा और सेवानिवृत्ति की योजना बना रहे निवेशकों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा अपडेट सामने आया है। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने एनपीएस (National Pension System) और एनपीएस लाइट (NPS Lite) के निवेशकों के लिए सेवा प्रदाताओं के शुल्क ढांचे (Charge Structure) में कुछ बड़े बदलाव करने का आधिकारिक ऐलान किया है। इन नए बदलावों के लागू होने के बाद अब एनपीएस से जुड़े वित्तीय लेनदेन और नए खाते खुलवाने की प्रक्रिया में शुल्क से जुड़े नियम बदल जाएंगे। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर नियामक द्वारा क्या बदलाव किए गए हैं, ये नए चार्जेस कब से प्रभावी होंगे और इससे आम निवेशकों की जेब पर कितना आर्थिक असर पड़ने वाला है।PFRDA द्वारा एनपीएस नियमों में किए गए प्रमुख बदलाव और नई फीस संरचनापेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) द्वारा जारी किए गए ताजा नोटिस के अनुसार, यदि कोई नया निवेशक अपना एनपीएस खाता खुलवाता है, तो उसे अब एकमुश्त या किस्तों में वन-टाइम ऑनबोर्डिंग फीस के रूप में कुल 200 रुपये प्रति प्राण (PRAN - Permanent Retirement Account Number) का भुगतान करना होगा। इस शुल्क की वसूली की प्रक्रिया को भी थोड़ा अलग रखा गया है। यह पूरा पैसा एक साथ निवेशक के खाते से नहीं काटा जाएगा, बल्कि इसे 50 रुपये प्रति तिमाही (Quarterly) के हिसाब से यूनिट्स काटकर केंद्रीय रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) द्वारा वसूला जाएगा और इसे संबंधित पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) को ट्रांसफर किया जाएगा।हालांकि, डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने और ऑनलाइन प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए नियामक ने इसमें एक राहत का प्रावधान भी किया है। यदि कोई ग्राहक अपनी एनपीएस ऑनबोर्डिंग की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से करता है और उसमें किसी भी प्रकार की भौतिक (फिजिकल) प्रक्रिया या कागजी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं होती है, तो उस स्थिति में उन्हें केवल 100 रुपये ही देने होंगे। हालांकि, यह रियायत हर ऑनलाइन खाते पर स्वतः लागू नहीं होगी, बल्कि इसका निर्धारण PoP के पंजीकरण के समय तय किए गए नियमों और माध्यम के आधार पर किया जाएगा।सक्रिय एनपीएस खातों पर कितना देना होगा वार्षिक निवेश शुल्क?वन-टाइम रजिस्ट्रेशन फीस के अलावा PFRDA ने सक्रिय खातों के लिए वार्षिक रख-रखाव और सेवा शुल्क के नियमों को भी स्पष्ट किया है। नियामक के निर्देशानुसार, वैसे सभी खाते जो निष्क्रिय (Inactive) श्रेणी में नहीं आते हैं और पूरी तरह से सक्रिय (Active) हैं, उनसे कुल निवेश राशि का 0.20 प्रतिशत हिस्सा सालाना चार्ज के रूप में काटा जाएगा। यह राशि सीधे तौर पर नेट एसेट वैल्यू (NAV) के माध्यम से समायोजित की जाएगी और हर तिमाही के अंत में PoP को भुगतान की जाएगी।इसे एक आसान उदाहरण के जरिए समझा जा सकता है। मान लीजिए कि आपके एनपीएस खाते में कुल 5 लाख रुपये जमा हैं, तो नए 0.20 प्रतिशत के वार्षिक शुल्क नियम के अनुसार आपको सालाना लगभग 1,000 रुपये का चार्ज देना होगा। इसके अलावा, इस शुल्क राशि पर जीएसटी (GST) और अन्य लागू कर (Taxes) भी जोड़े जाएंगे, जिससे यह राशि थोड़ी और बढ़ सकती है। यह चार्ज उन निवेशकों के लिए विशेष रूप से मायने रखता है जो पारंपरिक या मध्यस्थ चैनलों के माध्यम से अपने खातों का संचालन करते हैं।किन निवेशकों को मिलेगा चार्जेस से पूरी तरह छुटकारा?खुशखबरी की बात यह है कि सभी एनपीएस निवेशकों पर ये नए चार्जेस अनिवार्य रूप से लागू नहीं होंगे। यदि आपने बिचौलियों या ऑफलाइन माध्यमों को छोड़कर सीधे तौर पर 'e-NPS' पोर्टल के माध्यम से अपना खाता खुलवाया है और आप भविष्य में भी केवल e-NPS या D-Remit के जरिए ही अपने खाते में नियमित रूप से पैसे जमा करते हैं, तो आपको किसी भी प्रकार के PoP चार्ज से पूरी तरह छूट मिलेगी। यानी ऐसे डिजिटल और डायरेक्ट निवेशकों को इन नए सेवा शुल्कों का कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ेगा और वे पूरी तरह शुल्क-मुक्त सेवा का लाभ उठा सकेंगे।कब से लागू होंगे एनपीएस के ये नए नियम और शर्तें?पेंशन नियामक द्वारा तय की गई समय सीमा के मुताबिक, एनपीएस और एनपीएस लाइट से जुड़े ये सभी नए चार्जेस आगामी 1 अक्टूबर 2026 से देश भर में प्रभावी हो जाएंगे। केंद्रीय रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर की अवधि के दौरान इन शुल्कों की रिकवरी और कटौती का काम शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रेगुलेशन 4A के दायरे में आने वाली कुछ विशेष योजनाओं पर ये नए PoP चार्ज लागू नहीं होंगे, क्योंकि उनके संचालन और शुल्क प्रक्रिया के लिए अलग से नियम निर्धारित किए गए हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने निवेश को प्रबंधित करने के लिए इन नए बदलावों को ध्यान में रखें और डिजिटल माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग करके अतिरिक्त शुल्कों से बचें।
सफेद, पीली और हरी तो पता होगी, लेकिन काली नंबर प्लेट किन गाड़ियों की होती है?
Vehicles Number Plate Colour : भारत में नंबर प्लेट का रंग गाड़ी की कैटेगरी और इस्तेमाल की जानकारी देता है. सफेद, पीली, हरी, काली और नीली प्लेट के अलावा लाल अक्षरों वाली प्लेट भी खास कैटेगरी की जानकारी देती है.
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3 जुलाई 2026 को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई ये फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हुई थी. कहां तो इसे लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे थे लेकिन दर्शकों ने अपने रिएक्शन से साफ दिखा दिया कि असल में फिल्म है क्या. अब ये फिल्म ओटीटी पर आई है.
पहले NEET PG, अब AIIMS भर्ती Re-Exam; बिजली गुल होने से 24 घंटे में 2 बड़ी परीक्षा रद्द
जयपुर के एक सेंटर पर रविवार को NEET-PG रद्द होने के बाद सोमवार को एम्स (AIIMS CRE-5) की री-एग्जाम परीक्षा भी सर्वर डाउन और बिजली गुल होने से रद्द कर दी गई.
जिसे समझते हैं टूटता तारा, वो असल में क्या होता है?
क्या आपने भी कभी टूटता तारा देखकर विश मांगी है? लेकिन जिसे आप तारा समझते हैं, वह असल में एक खगोलीय घटना है. जानिए इसके पीछे का विज्ञान और सदियों पुरानी विश मांगने की परंपरा की पूरी कहानी.
युद्धों के साए में बिश्केक में जुटेंगे SCO के नेता, कौन हैं वे मुद्दे जिन पर हो सकती है चर्चा
एससीओ के नाम से मशहूर शंघाई सहयोग संगठन का दो दिन का शिखर सम्मेलन आज से किर्गिस्तान के बिश्केक में शुरू हुआ.यहां पढ़िए, इस साल इस सम्मेलन के मुद्दे क्या हो सकते हैं और कौन कौन से नेता आ सकते हैं.
भारत की शानदार जीडीपी ग्रोथ पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, कहा- निराशावादी हुए गलत साबित
भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर देश के लिए एक बेहद उत्साहजनक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और तमाम बाहरी अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास दर 7.8 प्रतिशत के शानदार स्तर पर दर्ज की गई है। इस मजबूत और अप्रत्याशित वृद्धि ने देश-विदेश के तमाम बड़े अर्थशास्त्रियों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है और यह साबित कर दिया है कि घरेलू मोर्चे पर भारत की आर्थिक गतिविधियां कितनी मजबूत और लचीली बनी हुई हैं।अर्थशास्त्रियों के अनुमान को पीछे छोड़ते हुए भारत की जीडीपी में आई जबरदस्त तेजीकिसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए तिमाही आंकड़े उसकी सेहत का सबसे बड़ा पैमाना होते हैं। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर वास्तविक GDP का यह अनुमान 81.36 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि ठीक एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 75.46 लाख करोड़ रुपये पर था। इसके अलावा, यदि नॉमिनल GDP की बात करें तो इसमें 10.3 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह बढ़कर 88.27 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले वर्ष इसी तिमाही में 80 लाख करोड़ रुपये थी।यह शानदार प्रदर्शन इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा देश और दुनिया के 58 जाने-माने अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए एक बड़े सर्वेक्षण में अप्रैल-जून तिमाही के लिए GDP विकास दर महज 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। भारतीय अर्थव्यवस्था ने इस पूर्व निर्धारित अनुमान को काफी पीछे छोड़ते हुए आलोचकों को चौंका दिया है और यह दिखा दिया है कि तमाम बाहरी दबावों के बावजूद देश का आंतरिक बाजार, खपत और औद्योगिक गतिविधियां किस रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं।पीएम मोदी का बड़ा बयान: 'निराशावादी गलत साबित हुए, भारत ने हासिल की नई बुलंदी'देश की इस शानदार आर्थिक प्रगति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी गहरी संतुष्टि व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक प्रेरक संदेश साझा किया है। पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में देशवासियों को बधाई देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारे देश के लोगों की सामूहिक ताकत और अदम्य साहस ने यह पूरी तरह सुनिश्चित कर दिया है कि वैश्विक स्तर पर छाई अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की तमाम दिक्कतों के बावजूद भारत ने इस असाधारण ग्रोथ को हासिल किया है।प्रधानमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि देश की प्रगति को लेकर हमेशा नकारात्मक आकलन करने वाले निराशावादी एक बार फिर से पूरी तरह गलत साबित हुए हैं और भारत ने अपनी मेहनत के दम पर विकास की एक नई और ऊंची छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री का यह बयान न केवल देश के भीतर एक नया आत्मविश्वास जगाने वाला है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को भी यह संदेश देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था किसी भी वैश्विक संकट का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।जीवीए (GVA) में भी शानदार 8.2% की बढ़ोतरी, मजबूत रही घरेलू गतिविधियांकेवल GDP के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) के आंकड़ों ने भी अर्थव्यवस्था के मजबूत स्वास्थ्य की गवाही दी है। बेसिक कीमतों पर रियल GVA वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 8.2 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी के साथ बढ़कर 73.82 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 68.21 लाख करोड़ रुपये था। वहीं, नॉमिनल GVA भी 11.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 80.53 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।इन नए आंकड़ों से यह साफ हो जाता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था के भीतर उत्पादन और सेवाओं से जुड़ी गतिविधियां उम्मीद से कहीं अधिक मजबूत रही हैं। जानकारों का मानना है कि यदि ऊर्जा की बढ़ती लागत और भू-राजनीतिक उथल-पुथल का थोड़ा बहुत असर उत्पादन पर पड़ने की जो आशंकाएं जताई जा रही थीं, उन्हें घरेलू मांग और सरकारी नीतियों ने पूरी तरह बेअसर कर दिया। आंकड़े सामने आने से पहले अर्थशास्त्रियों ने उपभोक्ता मांग, सरकार द्वारा किए जाने वाले पूंजीगत खर्च (Capex), मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण गतिविधियों और निर्यात को इस वृद्धि का मुख्य आधार बताया था।नई नेशनल अकाउंट्स सीरीज और आधार वर्ष में बदलाव का प्रभावइस बार जारी किए गए पहली तिमाही के ये आंकड़े इसलिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि इन्हें भारत की बिल्कुल नई नेशनल अकाउंट्स सीरीज के तहत तैयार किया गया है। इस नई व्यवस्था में वर्ष 2022-23 को आधिकारिक तौर पर नया बेस ईयर (आधार वर्ष) माना गया है।सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) ने इसी साल फरवरी महीने में अपनी इस नई सालाना और तिमाही GDP सीरीज की शुरुआत की थी। इन अपडेटेड और आधुनिक अनुमानों में कई प्रकार के संशोधित डेटा और उन्नत वैज्ञानिक तरीकों को शामिल किया गया है, जिसमें नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, संशोधित इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और व्यापक प्रशासनिक डेटासेट शामिल हैं। इन अत्याधुनिक पैमानों के कारण अब देश की आर्थिक विकास दर का आकलन पहले की तुलना में और अधिक सटीक और पारदर्शी हो गया है।वैश्विक जोखिमों और कच्चे तेल के दबाव के बीच भारत का मजबूत आर्थिक चक्रयह पूरी आर्थिक मजबूती ऐसे समय में सामने आई है जब पूरी दुनिया कई गंभीर और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे कड़े टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ग्लोबल ऑयल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है, जिसके चलते घरेलू मुद्रा यानी रुपया भी दबाव का सामना कर रहा है। हाल ही में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुकी हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बदलाव की संभावनाओं ने वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ा दी है।ऐसी तमाम वैश्विक चुनौतियों और विपरीत परिस्थितियों के बीच भारत की 7.8% की यह जीडीपी ग्रोथ यह साबित करती है कि देश की नींव आर्थिक रूप से कितनी मजबूत हो चुकी है। यह शानदार प्रदर्शन आने वाले तिमाहियों में निवेशकों के भरोसे को और अधिक मजबूत करेगा तथा भारत को दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक स्थाई बनाने में मदद करेगा।
जितना पैसा मनी लॉन्ड्रिंग होता है, उससे सबके लिए लैपटॉप खरीदा जा सकता है: CJI सूर्यकांत
सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि भारतीय न्यायपालिका ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम जैसी नई धोखाधड़ी वाली स्कीमों पर संसद के आने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही कार्रवाई की है।
घर में शादी, जेब खाली... नागा साधु बने और हाईवे पर दंपती से लूट लिए गहने
बिजनौर में शादी के खर्च के लिए पैसे जुटाने के आरोप में दो लोगों ने नागा साधु का भेष धारण कर हाईवे पर पति-पत्नी को निशाना बनाया. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने दंपती को डराकर और झांसे में लेकर सोने की चेन, मंगलसूत्र और अंगूठियां ले लीं. नजीबाबाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर गहने और वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद की.
सिंधु जल समझौते पर भारत ने खारिज किया हेग कोर्ट का फैसला, अदालत को बताया अवैध
भारत ने सिंधु जल संधि पर वर्ल्ड बैंक की बनाई आर्बिट्रेशन कोर्ट के फ़ैसले को मानने से इनकार कर दिया है. भारत का तर्क है कि यह कोर्ट गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई थी और भारत के सॉवरेन फैसलों पर इसका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है.
LPG से दूध और एयरपोर्ट तक के लिए 1 सितंबर से होंगे बड़े बदलाव, देखें लिस्ट
सितंबर महीने से देश में कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो आम आदमी की रसोई से लेकर यात्रा और बैंकिंग तक को प्रभावित करेंगे।
बिना ओवन, बिना मैदा, जन्माष्टमी पर बनाएं बाजार जैसा शाही मेवा चीजकेक
कृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर कान्हा के भोग के लिए इस साल टेस्टी और पौष्टिक नो-बेक मेवा चीजकेक बनाकर सभी को खुश कर दीजिए. सबसे खास बात यह है कि इसे सिर्फ मखाना, मेवों और केसर-इलायची से तैयार किया जाता है और यह पूरी तरह रिफाइंड शुगर-फ्री और व्रत-फ्रेंडली होता है. इस आसान और शाही फलाहारी डेज़र्ट के साथ अपने त्योहार को खास बनाएं.
सोन नदी पर बिहार-झारखंड में समझौता, 53 साल पुराना विवाद भी सुलझा
बिहार और झारखंड के बीच दशकों से चला आ रहा सोन नदी जल विवाद नई दिल्ली में हुई बैठक में सुलझ गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों ने 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी के बंटवारे पर MoU पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के बाद इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है, जो पिछले 53 सालों से अटका हुआ था.
IAS दिव्या मित्तल के इस्तीफे पर UP में गरमाई राजनीति
2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने स्वैच्छिक इस्तीफा देकर 13 साल के प्रशासनिक सफर को खत्म कर दिया है. देवरिया, मिर्जापुर और संतकबीरनगर में जिलाधिकारी रह चुकीं दिव्या ने परिवार, बेटियों की जिम्मेदारी और लेखन-शिक्षण के शौक को फैसले की वजह बताया. आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर से पढ़ाई के बाद उन्होंने लंदन की नौकरी छोड़ी थी. इस्तीफे के बाद उनके फैसले पर यूपी की राजनीति गरमा उठी.
स्कैमर्स से बचने का आसान तरीका! इन 3 फोन नंबर सीरीज को जानें
अनजान नंबर से आने वाली हर कॉल स्कैम नहीं होती, लेकिन सही नंबर सीरीज पहचानना जरूरी है. 140, 1600 और 1601 जैसी सीरीज अलग-अलग तरह की कॉल के बारे में संकेत देती हैं. जानिए इनका पूरा मतलब.
पंजाब में भाजपा का फिर से 'एकला चलो' राग, अकाली दल से गठबंधन पर साधी चुप्पी
अकाली दल के साथ गठबंधन होगा या नहीं. सतीश पूनिया ने इस पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना स्पष्ट कहा कि भाजपा सभी 117 सीटों पर उतरेगी.
कहानी : आख़िरी उम्र का इश्क़ | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
ये कहानी है एक ऐसे अमीर रईस की जो चालीस साल के बाद अपने उस इश्क़ की तरफ लौटता है जिसे वो जवानी में छोड़ आया था... वो इश्क़ जो उसे इसलिए छोड़ना पड़ा क्योंकि वो बगावत नहीं कर पाया था अपने वालिद से... पर अब जब वो उम्र के उस मोड़ पर है जहां वो तन्हा है, अकेला है तो वो उस आफ़रीन को ढूंढता है जिसे छोड़कर आया था... अब आफ़रीन कैसी है, कहां है... क्या हुआ था उसके साथ... क्या वो अपनाएगी खां साहब को.. दोबारा? देखिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'आख़िरी उम्र का इश्क़' स्टोरीबॉक्स में
पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव में ABVP की बड़ी जीत, अंकित बिढान बने अध्यक्ष
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष पद पर बड़ी जीत हासिल की है. जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के बाद हुए इस चुनाव में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के Gen Z मतदाताओं की बड़ी भागीदारी रही.
NEET प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR होंगी रद? SC पहुंची केंद्र सरकार, 1 सितंबर को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करने की केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है।
MP की 10 जगहें घूमने के लिए हैं बेस्ट! परिवार के साथ बनाएं प्लान
Best Tourist Places in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है, जहां हर तरह के यात्रियों के लिए कुछ न कुछ खास है. धार्मिक यात्रा हो, वाइल्डलाइफ सफारी, ऐतिहासिक धरोहरों की सैर या प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेना हो, यहां हर सफर यादगार बन जाता है.
9 साल बड़े सलमान की मां बनी एक्ट्रेस, बोली- पैसे अच्छे मिले
सलमान खान की फिल्म भारत में मराठी एक्ट्रेस सोनाली कुलकर्णी ने एक्टर की मां का रोल निभाया था. ये रोल काफी अहम था, मगर इसके लिए उन्हें ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा. अब सालों बाद सोनाली ने उस फिल्म में निभाए अपने रोल का बचाव किया है.
चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी। और इस लिस्ट ने सबको चौंका दिया। दि
फुटपाथ वाहनों के लिए नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क किनारे बाल काट रहे नाई का मुआवजा बढ़ाया
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी कि फुटपाथ पवित्र और सुरक्षित स्थान है और ये वाहनों के लिए नहीं हैं इसलिए, तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाए जा रहे ट्रक की चपेट में आए एवं सड़क किनारे बाल काटने का काम करने वाले नाई को ‘लापरवाही में साझेदारी’ के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने 19 अगस्त को दिये फैसले में दिल्ली के आनंद पर्वत औद्योगिक क्षेत्र में फुटपाथ पर अपनी दुकान चलाने वाले नाई को मिलने वाले मुआवज़े की राशि बढ़ा दी। उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के 2022 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें ‘‘ लापरवाही में साझेदार’’ होने के कारण मुआवजे की रकम 30 प्रतिशत कम कर दी गई थी। अदालत ने साथ साथ ही बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह अपीलकर्ता नाई को 1.71 लाख रुपये और उस पर सालाना छह प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करे। अपीलकर्ता फुटपाथ पर ही कुर्सी लगाकर बाल काटने का काम करता था और सितंबर 2019 में तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। न्यायमूर्ति दयाल ने टिप्पणी की कि भले ही फुटपाथ पर कुर्सी लगाकर नाई का काम करने के कारण अपीलकर्ता को अनधिकृत उपयोगकर्ता माना जा सकता है, लेकिन यह नागरिक जिम्मेदारी या नगर निकाय की कार्रवाई का मामला होगा, न कि किसी तरह की लापरवाही में साझेदारी का। अदालत ने व्यवस्था दी कि मोटर वाहन चालकों को पैदल चलने वालों के लिए बनी जगहों का ‘सम्मान’ करना चाहिए और कोई व्यक्ति फुटपाथ या पैदल चलने वालों की जगह पर क्यों है, इस आधार पर उस पर ‘लापरवाही में साझेदार’ का आरोप नहीं लगाया जा सकता। एकल पीठ ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘‘लापरवाही में साझेदार तब साबित किया जा सकता है कि घायल या मृतक ने खुद दुर्घटना होने में योगदान दिया था।’अदालतने कहा, ‘‘इस मामले में, दुर्घटना मुख्य रूप से इसलिए हुई क्योंकि वाहन को फुटपाथ पर चलाया गया या वह फुटपाथ से टकराया और इससे इनकार नहीं किया जा सकता। फुटपाथ और पैदल चलने वालों के लिए बनी जगहें पवित्र और सुरक्षित होती हैं। ये ऐसी जगहें नहीं हैं जहां वाहन चलाए जाएं या उनसे टकराएं।
पढ़ें 31 अगस्त 2026 की शाम की बड़ी खबरें और अन्य समाचार
FY2026-27 की पहली तिमाही में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई है. वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में नॉमिनल जीडीपी में 10.3% का इजाफा हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के गलियारों से पाकिस्तान क्रिकेट टीम (Pakistan Cricket Team) को लेकर एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। इंग्लैंड के दौरे पर वर्तमान में खेली जा रही चुनौतीपूर्ण तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में गातार दो शर्मनाक हार का सामना करने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) एक्शन मोड में आ गया है। सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबलों में करारी शिकस्त झेलने के बाद अब पाकिस्तानी खेमे में हड़कंप मचा हुआ है। सीरीज का अंतिम और तीसरा टेस्ट मुकाबला आगामी 9 सितंबर से ऐतिहासिक मैदान बर्मिंघम (Birmingham) में खेला जाना है, लेकिन इस महत्वपूर्ण मुकाबले से ठीक पहले टीम के भीतर बड़े पैमाने पर फेरबदल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, न केवल पाकिस्तानी टीम की प्लेइंग इलेवन में कई बड़े खिलाड़ियों की छुट्टी तय मानी जा रही है, बल्कि टीम के कोचिंग स्टाफ और हेड कोच पद को लेकर भी बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।शुरुआती दोनों टेस्ट मैच हारकर पाकिस्तान ने गंवाई सीरीजइंग्लैंड की मुश्किल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खेली जा रही इस टेस्ट सीरीज में पाकिस्तानी टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक और खराब रहा है। मेहमान टीम शुरुआती दोनों टेस्ट मुकाबलों में मेजबान इंग्लैंड के सामने टिक नहीं पाई और सीरीज पहले ही अपने हाथों से गंवा चुकी है। अब पाकिस्तानी टीम के पास इस पूरी सीरीज का अंत कम से कम 1-2 के सम्मानजनक अंतर के साथ करने का आखिरी मौका बचा है। अगर दोनों मुकाबलों के अंतर पर नजर डालें तो पाकिस्तान को बेहद भारी अंतर से हार झेलनी पड़ी है। श्रृंखला का पहला टेस्ट मैच पाकिस्तानी टीम एक पारी और 103 रनों के विशाल अंतर से हार गई थी। इसके बाद जब लॉर्ड्स (Lords) के ऐतिहासिक मैदान पर दूसरा टेस्ट मुकाबला खेला गया, तो हार का अंतर थोड़ा जरूर कम हुआ, लेकिन मैच का परिणाम नहीं बदला और पाकिस्तान को इस बार भी 194 रनों की एक और करारी हार का सामना करना पड़ा। इस लचर प्रदर्शन ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और चयनकर्ताओं को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है।माइक हेसन संभाल सकते हैं टेस्ट टीम की कमान, सरफराज अहमद की स्थिति पर संकटसामने आ रही मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बर्मिंघम में खेले जाने वाले श्रृंखला के अंतिम और तीसरे मुकाबले से पहले पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कोचिंग सेटअप में बहुत बड़ा बदलाव हो सकता है। वर्तमान में लाल गेंद की क्रिकेट यानी टेस्ट फॉर्मेट में हेड कोच की मुख्य जिम्मेदारी पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सरफराज अहमद के पास है। हालांकि, अंदरखाने से आ रही खबरों के मुताबिक, सरफराज खान भले ही इंग्लैंड में पाकिस्तानी टीम के साथ बने रहेंगे, लेकिन हेड कोच के रूप में उनके पद का भविष्य फिलहाल पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। उनकी जगह वर्तमान में पाकिस्तान की व्हाइट-बॉल (सीमित ओवरों) टीमों के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे अनुभवी माइक हेसन (Mike Hesson) को बर्मिंघम टेस्ट से पहले टेस्ट टीम के हेड कोच के रूप में भी अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि, अब तक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की ओर से इन तमाम बदलावों को लेकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि बोर्ड जल्द ही इस पर बड़ा फैसला ले सकता है।खराब बल्लेबाजी और लचर प्रदर्शन के चलते कई सीनियर खिलाड़ियों की होगी छुट्टीपाकिस्तान टीम की बल्लेबाजी इस पूरे दौरे पर इतनी ज्यादा फिसड्डी और कमजोर साबित हुई है कि टीम इंग्लैंड दौरे की शुरुआती चारों पारियों में एक बार भी 200 रनों के सम्मानजनक आंकड़े तक को नहीं छू सकी है। इस लचर प्रदर्शन का खामियाजा कई सीनियर और स्टार खिलाड़ियों को अपनी जगह गंवाकर भुगतना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले टेस्ट मैच के दौरान चोटिल होने वाले ओपनिंग बल्लेबाज इमाम-उल-हक (Imam-ul-Haq) को वापस स्वदेश भेजा जा सकता है, जिन पर सोशल मीडिया और खेल गलियारों में 'फेक इंजरी' (नकली चोट) के गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं। सिर्फ इमाम-उल-हक ही नहीं, बल्कि खराब फॉर्म से जूझ रहे अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान की भी टेस्ट टीम से छुट्टी होना लगभग तय माना जा रहा है। चयनकर्ताओं के इस सख्त रुख से साफ है कि अब टीम में प्रदर्शन के आधार पर ही खिलाड़ियों को जगह मिलेगी।युवा खिलाड़ियों की एंट्री: सैम अयूब और अराफात मिन्हास को मिल सकता है बुलावासीनियर खिलाड़ियों के लचर प्रदर्शन और बाहर होने की अटकलों के बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अब युवा प्रतिभाओं को मौका देने की योजना पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी सैम अयूब और ऑलराउंडर अराफात मिन्हास को इंग्लैंड की परिस्थितियों में टीम के साथ जुड़ने के लिए हरी झंडी दे दी गई है और उन्हें तत्काल इंग्लैंड बुलाए जाने के संकेत मिल चुके हैं। इसके अलावा, श्रृंखला से बाहर होने वाले अन्य खिलाड़ियों के आधिकारिक रिप्लेसमेंट की घोषणा भी बहुत जल्द किए जाने की उम्मीद है। पाकिस्तान टीम प्रबंधन अब यह चाहता है कि युवा खून को मैदान पर उतारकर इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम टेस्ट में टीम के संयोजन को मजबूत किया जाए, ताकि सीरीज का अंत कम से कम एक सकारात्मक प्रदर्शन के साथ किया जा सके।पीसीबी अधिकारियों की लंदन यात्रा और डिनर की राजनीतिक चर्चाएंकोच बदलने और टीम में अचानक इस तरह के बड़े बदलावों की खबरें ऐसे समय में सामने आई हैं जब पाकिस्तानी क्रिकेट हलकों में पहले से ही काफी गर्मागर्म माहौल है। दिलचस्प बात यह है कि माइक हेसन और पाकिस्तान क्रिकेट के हाई-परफॉरर्मेंस डायरेक्टर आकिब जावेद (Aaqib Javed) लॉर्ड्स टेस्ट का नतीजा आने से पहले ही लंदन पहुंच चुके थे। इस यात्रा को लेकर जब सवाल उठे तो पीसीबी ने सफाई देते हुए इसकी मुख्य वजह किंग चार्ल्स द्वारा आयोजित किए जाने वाले एक विशेष डिनर की मेजबानी को बताया था, जो आगामी 2 सितंबर को निर्धारित है। बताया जा रहा है कि पीसीबी के चेयरमैन मोहसिन नकवी, मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) सुमैर अहमद और पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) के चीफ सलमान नसीर भी इस शाही डिनर का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस हाई-प्रोफाइल लंदन दौरे के पीछे केवल डिनर नहीं, बल्कि पाकिस्तानी क्रिकेट के भविष्य को लेकर बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों की बंद कमरे में चल रही अहम बैठकें और रणनीतिक मंथन भी मुख्य रूप से शामिल हैं।
जब फोन नहीं थे, तब पहाड़ों पर आई आपदा का अलर्ट नीचे कैसे भेजते थे
पहले के जमाने में जब कम्युनिकेशन के इतने साधन नहीं थे. तब पहाड़ों पर आने वाली आपदाओं जैसे लैंड स्लाइडिंग, एवेलांच और फ्लैश फ्लड की सूचना नीचे के गांवों तक कैसे पहुंचाई जाती थी.
उज्बेकिस्तान की सफल यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए किर्गिस्तान पहुंचे। बिश्केक में भारतीय समुदाय ने 'वंदे मातरम' के नारों के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान पीएम मोदी ने महात्मा गांधी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
एग्जाम रिफॉर्म्स के बाद स्कूल ठीक करो अभियान, क्या CJP बदल रही देश की सियासत का एजेंडा?
CJP का 'स्कूल ठीक करो अभियान' सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर कर रहा है, जिससे छात्रों के विरोध प्रदर्शन बढ़ रहे हैं।
नेपाल की बाढ़ में डूबे बैंक से निकला 50 करोड़ का सोना, VIDEO
नेपाल के नुवाकोट से तबाही के बीच एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई. भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के उफान में कृषि विकास बैंक की शाखा पूरी तरह जलमग्न हो गई थी. पुलिस ने 8 घंटे के कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद इस डूबे हुए बैंक से करीब 50 करोड़ नेपाली रुपए का सोना और डेढ़ करोड़ की नकदी सुरक्षित बाहर निकाली. देखें वीडियो.
नेपाल आपदा के बाद भारत ने बढ़ाई हिमालय पर निगरानी, उत्तराखंड के ग्लेशियरों और झीलों पर विशेष नजर
नेपाल और तिब्बत की सीमा पर हाल ही में घटी भीषण प्राकृतिक आपदा और ग्लेशियर धंसने की भयावह घटना के बाद भारत ने कड़े सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। इस बड़े हादसे से सबक लेते हुए भारत सरकार और पड़ोसी पर्वतीय राज्यों ने चीन तथा नेपाल से लगते अपने संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में निगरानी तंत्र को बेहद मजबूत कर दिया है। अधिकारियों ने शनिवार को इस बात की पुष्टि की कि सीमावर्ती पर्वतीय इलाकों में स्थित सभी महत्वपूर्ण ग्लेशियरों और हिमनदीय झीलों (Glacial Lakes) की अब विशेष और सतत निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते भांपा जा सके।अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट और नेपाल आपदा के आंकड़ेअमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की ओर से जारी शुरुआती और विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा पर जो विनाशकारी आपदा आई थी, वह असल में एक विशाल ग्लेशियर के अचानक ध्वस्त होने से पैदा हुई थी। इस भयानक घटना के बाद अचानक भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और चट्टानों का एक महाकाय प्रवाह नीचे की मैदानी और घाटी वाले इलाकों की तरफ बढ़ा, जिसने रास्ते में आने वाले गांवों और कस्बों को नेस्तनाबूद कर दिया। आधिकारिक और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस अप्रत्याशित आपदा में अब तक 633 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 3,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में राहत एजेंसियां जुटी हुई हैं।उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, संवेदनशील क्षेत्रों में हाई अलर्टभारत के सबसे खूबसूरत और भौगोलिक रूप से संवेदनशील हिमालयी राज्यों में शुमार उत्तराखंड ने नेपाल की इस त्रासदी के बाद तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने प्रमुख समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि नेपाल के साथ हमारी साझा सीमा और लगभग एक जैसी चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने एहतियातन निगरानी बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने दो-टूक कहा कि चूंकि हमारी भौगोलिक स्थिति काफी हद तक नेपाल से मिलती-जुलती है, इसलिए हमने अपने आपदा प्रबंधन और संबंधित विभागों को क्षेत्र के सभी सक्रिय ग्लेशियरों और खतरनाक हिमनदीय झीलों की बारीक निगरानी करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य की प्रशासनिक और राहत टीमों को पूरी तरह सतर्क रहने और मौसम तथा भू-गर्भीय गतिविधियों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति की पहचान शुरुआती चरण में ही करके जनजीवन को सुरक्षित बचाया जा सके।उत्तराखंड की भौगोलिक संवेदनशीलता और हजारों हिमनदीय झीलों का खतराविशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के अनुसार, उत्तराखंड भारत के सबसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील (Ecologically Sensitive) क्षेत्रों में प्रमुख स्थान रखता है। सरकारी आंकड़ों और वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के मुताबिक, अकेले इस पर्वतीय राज्य में करीब 1,266 हिमनदीय झीलें मौजूद हैं, जो समय के साथ और वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण लगातार बदल रही हैं। देश-विदेश के वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से यह चेतावनी देते रहे हैं कि पूरा हिमालयी क्षेत्र ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। हिमालय के ये विशाल ग्लेशियर, जो एशिया की प्रमुख नदियों के स्रोत हैं और लगभग दो अरब लोगों को जीवनदायिनी पानी उपलब्ध कराते हैं, अब इतिहास की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पिघल रहे हैं। इसके चलते पर्वतीय समुदायों और बस्तियों के सिर पर हमेशा एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का तलवार लटकती रहती है।पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना और पहाड़ों की कमजोरी से बढ़ता भूस्खलन का जोखिमवैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ते तापमान के कारण केवल ग्लेशियर ही नहीं पिघल रहे, बल्कि पहाड़ों की चट्टानों के भीतर सदियों से स्थायी रूप से जमी बर्फ यानी पर्माफ्रॉस्ट (Permafrost) भी पिघल रही है। पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से पर्वतीय ढलानों की अंदरूनी स्थिरता और पकड़ बेहद कमजोर हो जाती है, जिससे अचानक बड़े पैमाने पर भूस्खलन (Landslides) और चट्टानें खिसकने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इस तरह की भौगोलिक उथल-पुथल किसी भी समय भारी तबाही का कारण बन सकती है, और नेपाल की घटना इसका सबसे ताज़ा और दर्दनाक उदाहरण है।अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की राय: भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका से इनकार नहींइस बीच, दुनिया भर के वैज्ञानिक नेपाल-तिब्बत आपदा के सटीक और संभावित कारणों का गहराई से अध्ययन करने में जुटे हैं। एएफपी से बातचीत करते हुए कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की भयावह घटनाएं भविष्य में अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी दोहराई जा सकती हैं। न्यूजीलैंड के प्रतिष्ठित जीएनएस साइंस शोध संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक साइमन कॉक्स ने स्पष्ट किया कि जब पहाड़ का कोई विशाल हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर जाता है, तो उसके आसपास के भू-भाग भी अस्थिर हो जाते हैं। उनके अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया से उसी क्षेत्र में दोबारा बड़े पैमाने पर ध्वंस या हिमस्खलन की आशंका हमेशा बनी रहती है।अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) का यह भी कहना है कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर हुआ ग्लेशियर का यह ध्वंस इतना अधिक शक्तिशाली था कि उससे निकलने वाली ऊर्जा रिक्टर पैमाने पर लगभग 5.2 तीव्रता के एक जोरदार भूकंप के बराबर आंकी गई, जिसके झटकों और कंपन के कारण क्षेत्र में कई क्रमिक भूस्खलन दर्ज किए गए। फ्रांस के राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (CNRS) के प्रमुख ग्लेशियर विशेषज्ञ एतियां बेर्तिये ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी ऐसी अप्रत्याशित घटनाओं की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि हिमालय क्षेत्र की जटिल और युवा भूगर्भीय बनावट इन आपदाओं के प्रभाव को और अधिक व्यापक बना देती है।जलवायु परिवर्तन और आपदा के बीच संबंध पर वैज्ञानिकों की सतर्कताकार्डिफ विश्वविद्यालय के पर्यावरणीय जोखिम और आपदा विशेषज्ञ ट्रिस्ट्रम हेल्स ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले एक दशक के दौरान दुनियाभर के पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, और उन्होंने इसके लिए हिमालय के साथ-साथ स्विट्जरलैंड जैसे यूरोपीय क्षेत्रों का भी उदाहरण दिया। हालांकि, इन सबके बावजूद कई जाने-माने वैज्ञानिकों ने इस विशेष आपदा को सीधे तौर पर जल्दबाजी में जलवायु परिवर्तन से जोड़ने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।एकीकृत पर्वतीय विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र (ICIMOD) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि जलवायु परिवर्तन हिमालयी ग्लेशियरों, बर्फ, पर्माफ्रॉस्ट और पर्वतीय ढलानों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, लेकिन यह निष्कर्ष निकालना अभी बहुत जल्दबाजी होगी कि इस विशेष घटना में केवल ग्लोबल वार्मिंग की क्या भूमिका रही। विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे मामले पर पुख्ता मुहर लगाने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अनुसंधान और वैज्ञानिक भाषा में तथाकथित एट्रिब्यूशन स्टडी (Attribution Study) की आवश्यकता है, जिसके पूरा होने के बाद ही जलवायु परिवर्तन और इस विशिष्ट आपदा के बीच के प्रत्यक्ष और वैज्ञानिक संबंधों पर ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। तब तक भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए यही बुद्धिमत्ता है कि वे अपनी निगरानी प्रणालियों को अत्याधुनिक और चौकस रखें।
एसिड की खुदरा बिक्री पर लगा दें पूरी तरह रोक, SC ने सरकार की राय मांगी
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि SC के लक्ष्मी मामले में दिए गए निर्देशों के बाद केंद्र ने राज्यों के लिए परामर्श जारी किए थे, लेकिन कई राज्यों ने जरूरी समितियां तक गठित नहीं कीं और नियमों को सही ढंग से लागू नहीं किया।
कंटेनर में घुसी तेज रफ्तार Mercedes, 22 साल के इंजीनियरिंग छात्र की मौत
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अलवर के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र में रविवार शाम भीषण हादसा हुआ. सिरमौर पुलिया के पास तेज रफ्तार मर्सिडीज आगे चल रहे कंटेनर से टकराकर उसमें जा घुसी. हादसे में नोएडा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे 22 वर्षीय प्रियांशु की मौत हो गई. CCTV में कंटेनर का टायर फटना और पीछे से मर्सिडीज के टकराने की घटना कैद हुई.
ट्रंप का ईरान के खर्ग द्वीप पर तबाही का बड़ा दावा, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भड़का अमेरिका-ईरान तनाव
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भू-राजनीतिक मोर्चे पर एक बार फिर मध्य पूर्व (Middle East) से बड़ी और तनावपूर्ण खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खर्ग द्वीप को लेकर किए गए एक बड़े दावे ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ट्रंप के इस दावे के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से सुलग रहा तनाव एक बार फिर से भड़क उठा है। इस ताजा घटनाक्रम ने न केवल खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को खतरे में डाल दिया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी उथल-पुथल मचा दी है।ट्रंप का खर्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह करने का दावा और एआई फुटेज की चर्चाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट शेयर करते हुए दावा किया कि ईरान का प्रमुख खर्ग द्वीप धुएं में उड़ाया जा रहा है और उसे पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खर्ग फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में ईरान का मुख्य तेल-निर्यात केंद्र और देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। हालांकि, रक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप द्वारा शेयर किया गया यह वीडियो क्लिप वास्तविक लाइव स्ट्राइक का फुटेज न होकर एआई-जनरेटेड (AI-generated) प्रतीत होता है। इसके बावजूद, ट्रंप पिछले कई महीनों से खर्ग द्वीप को लगातार धमकियां देते रहे हैं और उनका यहतर्क रहा है कि अमेरिकी बलों ने पहले भी वहां की तेल सुविधाओं को आंशिक रूप से बख्शते हुए विशिष्ट सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।लारक द्वीप पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का हमला और जवाबी कार्रवाईयह पूरा तनाव तब और अधिक गहरा गया जब अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप (Larak Island) पर एक सुनियोजित हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के उन जवानों को रोकना था जो होर्मुज स्ट्रेट में खतरनाक समुद्री माइंस (Sea Mines) बिछाने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिकी सेना का दावा है कि ये रॉकेट लॉन्चर और माइंस अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नौवहन के लिए बड़ा खतरा बन सकते थे। इस अमेरिकी हमले के परिणामस्वरूप कई ईरानी सैनिकों और नागरिकों के हताहत होने की खबरें सामने आईं, जिसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागकर अपनी नाराजगी जाहिर की।खर्ग द्वीप क्यों है ईरान का 'काला खजाना' और इसकी रणनीतिक स्थितिखर्ग द्वीप को अक्सर भू-राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा ईरान का 'काला खजाना' कहा जाता है, क्योंकि यह देश के पेट्रोलियम उद्योग का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण टर्मिनल है। उत्तरी फारस की खाड़ी में स्थित यह छोटा सा प्रवाल द्वीप (Coral Island) मुख्य ईरानी तट से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर और सामरिक रूप से संवेदनशील स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग 483 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। महज 6 किलोमीटर की लंबाई वाले इस द्वीप से ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशों में भेजा जाता है। यही कारण है कि इसे ईरान के तेल उद्योग की असली जीवनरेखा और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के लिए राजस्व का सबसे बड़ा प्राथमिक स्रोत माना जाता है।खर्ग द्वीप से चीन का गहरा कनेक्शन और वैश्विक भू-राजनीति पर असरखर्ग द्वीप के सामरिक महत्व का दायरा केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध वैश्विक महाशक्ति चीन से भी जुड़ा हुआ है। इस द्वीप से निर्यात होने वाले भारी मात्रा में कच्चे तेल का सबसे बड़ा और प्रमुख खरीदार चीन है। इस तेल व्यापार के जरिए ईरान को न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए भारी-भरकम वित्तीय राजस्व प्राप्त होता है, बल्कि पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बीच एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में चीन का मजबूत कूटनीतिक और रणनीतिक साथ भी मिलता है। ऐसे में, यदि अमेरिका या उसके सहयोगी दल खर्ग द्वीप की तेल सुविधाओं पर कोई बड़ा सैन्य हमला करते हैं, तो इससे चीन का नाराज होना स्वाभाविक है, जो इस पूरे क्षेत्रीय संघर्ष को एक बड़े वैश्विक शीत युद्ध में बदल सकता है।अमेरिकी हमले के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगी आगसैन्य संघर्ष और तनाव के इस माहौल का सबसे पहला और सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा है। अमेरिकी हमले और उसके बाद ईरान की प्रतिक्रिया सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भयंकर उछाल दर्ज किया गया। सोमवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें उछलकर 90.3 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गईं, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) भी बढ़कर 84.98 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा। इसके अलावा, भारत जैसे विकासशील देशों के लिए प्रासंगिक मानी जाने वाली इंडियन बास्केट में भी कच्चे तेल की कीमतें चढ़कर 89.52 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर के देशों में महंगाई का खतरा एक बार फिर बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव गहराता जा रहा है।
तेजाब की खुदरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा कि क्या तेजाब की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए या इसे सख्त नियमों के दायरे में रखा जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने 2013 में तेजाब की खुदरा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए दिए गए निर्देशों के बावजूद इसकी आसान उपलब्धता जारी रहने पर चिंता जताई। न्यायालय ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छह सप्ताह के भीतर ‘‘तेजाब हमले के पीड़ितों के लिए उचित पुनर्वास कदम’’ उठाने का भी निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से एक मॉडल योजना तैयार करने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर भी विचार करने को कहा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि पुनर्वास योजनाओं में तेजाब हमले के पीड़ितों को मुआवजा देने, पुनर्वास, चिकित्सा सहायता और उच्च स्तर तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान होने चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘हमें बताया गया है कि 2013 में कुछ दिशा-निर्देश तय किए गए थे, जो कमोबेश अब अप्रासंगिक हो गए हैं और उनका पालन भी नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अब हमें केंद्र सरकार की ओर देखना होगा।’’पीठ ने केंद्र सरकार से बाजार में तेजाब की खुदरा बिक्री को सख्ती से नियंत्रित करने के लिए एक योजना तैयार करने पर विचार करने को कहा। पीठ ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार यह भी बताए कि तेजाब की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए या वैकल्पिक रूप से, क्या ऐसी बिक्री को सख्त नियामक उपायों के अधीन अनुमति दी जानी चाहिए। जिन राज्य सरकारों ने नियम नहीं बनाए हैं, उन्हें नियम बनाने होंगे।’’पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह जानकारी भी मांगी कि तेजाब हमलों की कितनी घटनाएं सामने आई हैं, उन मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं या नहीं और कितने मामले अभी सुनवाई या अपील के स्तर पर लंबित हैं। पीठ ने तेजाब की खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के अनुरोध वाली एक नयी अर्जी पर नोटिस जारी किया। अदालत यह सुनवाई तेजाब हमले की पीड़िता शाहीन मलिक की ओर से दायर जनहित याचिका पर कर रही थी। उन्होंने केंद्र सरकार को कानून में संशोधन संबंधी निर्देश देने का भी अनुरोध किया, ताकि उन लोगों के मामलों को भी इसके दायरे में शामिल किया जा सके, जिन्हें जबरन तेजाब पिलाया गया हो या जिनके शरीर के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचा हो, लेकिन बाहर से कोई विकृति न दिखती हो। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 14 जुलाई को कहा था कि सरकार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में बदलाव किए हैं, ताकि जबरन तेजाब पिलाए जाने के कारण अंदरूनी नुकसान से पीड़ित तेजाब हमले के पीड़ितों को भी इस कानून का लाभ मिल सके। सोमवार को सुनवाई के दौरान मामले में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल ने पीठ को बताया कि कार्यकर्ताओं के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 2013 में अपने पिछले फैसले में शीर्ष अदालत द्वारा तय सुरक्षा उपायों के बावजूद तेजाब अब भी आसानी से खरीदा जा सकता है और इस पर ‘‘लगभग कोई नियामकीय निगरानी नहीं’’ है। तेजाब हमले की पीड़िता शाहीन मलिक ने भी अदालत के समक्ष अपनी बात रखी और खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अदालतों के बार-बार निर्देश देने के बावजूद 2013 में जारी दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है।
बिना इंटरनेट के भी करें UPI पेमेंट, PhonePe ने शुरू की सर्विस, ऐसे करें इस्तेमाल
PhonePe की UPI 123Pay सर्विस अब चुनिंदा फीचर फोन पर उपलब्ध है. यूजर्स बिना इंटरनेट के मनी ट्रांसफर, मर्चेंट पेमेंट और बैंक बैलेंस जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे.
नेपाल में क्यों आई भयानक बाढ़? वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, जानें तबाही की असली वजह
आम तौर पर हिमालयी क्षेत्रों में आने वाली ऐसी अचानक बाढ़ के लिए भारी मानसूनी बारिश या बादल फटने की घटनाओं को जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन इस बार वैज्ञानिकों की रिपोर्ट ने इन सभी पारंपरिक धारणाओं को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में आई यह आपदा सामान्य से बेहद ज्यादा बारिश या क्लाउडबर्स्ट की वजह से नहीं आई थी। इसके पीछे हिमालयी क्षेत्र की ऊंचाई पर स्थित पर्वतीय श्रृंखलाओं में बड़े पैमाने पर बर्फ, विशाल चट्टानों और भारी मलबे के अचानक खिसकने की घटना को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया है। वैज्ञानिकों के प्रारंभिक अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि यह आपदा किसी एक कारण से नहीं, बल्कि एक जटिल भूगर्भीय प्रक्रिया का परिणाम थी, जिसने चंद मिनटों में हजारों जिंदगियों को संकट में डाल दिया।लांगटांग-लिरुंग क्षेत्र में 5200 मीटर की ऊंचाई से टूटा बर्फ और चट्टानों का विशाल हिस्सावैज्ञानिकों द्वारा किए गए गहन अध्ययन और उपग्रह (सैटेलाइट) तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि इस आपदा की शुरुआत रसुवा जिले के लांगटांग-लिरुंग क्षेत्र में लगभग 5,200 मीटर की अत्यधिक ऊंचाई से हुई। 26 अगस्त की सुबह करीब 8:37 बजे उस क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों का एक अति विशाल हिस्सा अचानक अपनी जगह से टूटकर भारी गति के साथ नीचे की ओर आ गिरा। यह भारी-भरकम मलबा सीधे ल्हेंदे नदी में जा गिरा और वहां से इसका तेज बहाव भोटेकोशी नदी होते हुए त्रिशूली नदी तक पहुंच गया। अपने रास्ते में इस बहाव ने पानी के साथ-साथ भारी मात्रा में चट्टानें, मिट्टी, कीचड़ और नदी की तलछट को भी समेट लिया, जिससे पानी की विनाशकारी शक्ति कई गुना बढ़ गई और नदी के तटवर्ती इलाके मलबे के ढेर में तब्दील हो गए।ग्लेशियल झील फटने का कोई सबूत नहीं मिला, वैज्ञानिकों ने खारिज की थ्योरीआपदा के शुरुआती घंटों में यह अंदेशा जताया जा रहा था कि शायद यह तबाही किसी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) यानी हिमनदीय झील के अचानक फटने की वजह से आई होगी, लेकिन वैज्ञानिकों की विस्तृत जांच ने इस संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। शोधकर्ताओं ने उपग्रह तस्वीरों, मौसम विभाग के आंकड़ों, जल विज्ञान से जुड़ी रिपोर्टों, भू-भाग की भौगोलिक संरचना तथा नदी तंत्र में ऊंचाई और ढलान के बदलावों का बारीकी से अध्ययन किया। इस वैज्ञानिक विश्लेषण में किसी भी ग्लेशियल झील के फटने के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले हैं। उपग्रह से ली गई तस्वीरों में लगभग 10 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बड़े भू-आकृतिक बदलाव साफ दिखाई दिए हैं, साथ ही यह भी संकेत मिले हैं कि करीब 0.56 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला एक ग्लेशियर का हिस्सा अपनी मूल जगह से टूटकर अलग हुआ था।महज 7 मिनट में 22 किलोमीटर का सफर, 167 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ा मलबाइस बाढ़ की सबसे डरावनी विशेषता इसकी असाधारण और भयानक गति थी, जिसने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक, बर्फ, चट्टानों और मलबे का यह विशाल सैलाब मात्र सात मिनट से कुछ अधिक समय में लगभग 22 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके रसुवागढ़ी जा पहुंचा। इस दौरान इस बहाव की औसत गति करीब 46.3 मीटर प्रति सेकंड यानी लगभग 167 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई, जो किसी एक्सप्रेस ट्रेन से भी ज्यादा तेज थी। हालांकि, जैसे-जैसे यह मलबा आगे बढ़ा, इसकी गति में कुछ कमी जरूर आई; उदाहरण के लिए, रसुवागढ़ी से बेत्रावती के बीच इसकी रफ्तार घटकर लगभग 73 किलोमीटर प्रति घंटा रह गई और आगे बढ़ते हुए मैदानी इलाकों के पास यह बहाव करीब 22 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गया। रफ्तार कम होने के बावजूद इस मलबे की विशाल मात्रा ने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को नेस्तनाबूद कर दिया।भारी बारिश की थ्योरी पर उठे सवाल, जलस्तर घटने के मिले अजीब संकेतअध्ययन में यह भी सामने आया है कि घटना वाले दिन ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में असाधारण रूप से भारी बारिश होने के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं, जिससे यह संभावना और कमजोर हो जाती है कि पूरी आपदा केवल अत्यधिक बारिश की वजह से आई थी। इसके उलट, वैज्ञानिकों ने पाया कि आपदा आने से ठीक कुछ घंटे पहले रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी में नदी का जलस्तर और उसका सामान्य बहाव अचानक घट गया था। रिपोर्ट के अनुसार, रसुवागढ़ी में सुबह 5 बजे से 8 बजे के बीच पानी का औसत स्तर कम हुआ था, जबकि स्याफ्रुबेसी में नदी का बहाव करीब सात बजे से घटने लगा था। विशेषज्ञ अभी भी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या ऊपरी पर्वतीय क्षेत्र में भूस्खलन के कारण नदी का पानी कुछ समय के लिए कहीं अस्थायी रूप से रुक गया था और बांध टूटने जैसी स्थिति बनने के बाद एक साथ भारी मात्रा में नीचे गिरा।नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को हुआ भारी आर्थिक नुकसान, 13 परियोजनाएं प्रभावितइस विनाशकारी बाढ़ ने केवल मानवीय जीवन और बस्तियों को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि नेपाल के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र को भी भारी क्षति पहुंचाई है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के शुरुआती आंकड़ों का हवाला देते हुए अध्ययन में बताया गया है कि इस आपदा की चपेट में आने से कुल 13 जलविद्युत परियोजनाएं और एक सौर ऊर्जा परियोजना गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। इन महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं के ठप होने से करीब 431 मेगावाट की बिजली उत्पादन क्षमता फिलहाल पूरी तरह से बिजली व्यवस्था से बाहर हो गई है, जिससे देश के ऊर्जा संकट और आर्थिक विकास पर भी गहरा असर पड़ा है। वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि इस भीषण आपदा से हुए पर्यावरणीय, आर्थिक और संरचनात्मक नुकसान का वास्तविक और पूरा आकलन आने वाले समय में होने वाली विस्तृत जांच के बाद ही पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगा।
'कोर्ट ही गलत तरीके से बनाया गया है...', सिंधु जल संधि पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत को दिखाया आईना
भारत ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि पर लगाई गई रोक अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी और इस मामले में किसी बाहरी संस्था को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है.
क़िस्सा पुरानी कार का | STORYBOX WITH JAMSHED
ज़िंदगी में सब कुछ कीजिएगा लेकिन कभी पुरानी कार मत ख़रीदियेगा. क्योंकि जिस दिन आप पुरानी कार ख़रीद लेंगे उसी दिन से आपके बुरे दिन शुरु हो जाएंगे. हमने भी अपनी ज़िंदगी में एक बार ये ग़लती की थी. एक पुरानी सी खटारा हमें पसंद आ गयी क्योंकि बड़ी सस्ती थी. कार खरीद ली गयी लेकिन उस दिन के बाद से हम भूल गए कि चैन की नींद क्या होती है. ऐसा कोई महीना नहीं गुज़रा जब गाड़ी को उसके ससुराल यानि कारखाने न ले जाना पड़ा हो. कारख़ाने वाला जो आदमी था वो हर महीने मेरी तनख्वाह में बराबर का हिस्सेदार हो गया था. सुनिये स्टोरीबॉक्स में इस हफ्ते कॉमेडी कहानी 'मैंने पुरानी कार क्यों ख़रीदी' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
साल 1987 में सनी देओल और मीनाक्षी शेषाद्री के लीड रोल वाली फिल्म डकैत में सनी देओल ने अपनी सेहत के साथ एक बड़ा रिस्क लिया था. इंजरी के बावजूद उन्होंने एक स्टंट को असली दिखाने के लिए जान जोखिम में डाल ली.
'कॉकरोच पार्टी ने मुझसे प्रदर्शन खत्म करने को कहा था'... सोनम वांगचुक का बड़ा खुलासा!
सोनम वांगचुक ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के नेताओं का मनोबल भीड़ के हिसाब से घटता-बढ़ता रहता था, लेकिन छात्रों के जज्बे ने आंदोलन को दोबारा जिंदा कर दिया।
भारतीय राजनीति के गलियारों में बयानों के तीर अक्सर तीखे और अप्रत्याशित होते हैं, और इस बार का मामला अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़ा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान की ओर से मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर एक बड़ा और कटाक्ष से भरा राजनीतिक हमला बोला है। ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव द्वारा देश के सर्वोच्च मित्रता सम्मान 'ओली दराजाली दोस्तलिक' से नवाजा गया है। इस सम्मान के मिलने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है, जिसमें ओवैसी की टिप्पणी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गई है।उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान पर ओवैसी का तीखा तंज और बाबर का जिक्रताशकंद में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके देश के सर्वोच्च नागरिक मित्रता सम्मान 'ओली दराजाली दोस्तलिक' से सम्मानित किया। इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर जहां एक ओर पूरा देश और सत्ताधारी दल प्रधानमंत्री को बधाई दे रहा था, वहीं दूसरी ओर ओवैसी ने इस मौके पर बीजेपी और आरएसएस को आड़े हाथों लिया।असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी तीखी शैली में तंज कसते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी को इस बात के लिए मुबारकबाद दी जानी चाहिए कि जिस बाबर के नाम पर वे देश के भीतर राजनीति करते हैं, हमें गालियां देते हैं और लगातार ताने मारते हैं, उसी बाबर के देश ने आज देश के प्रधानमंत्री को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया है। ओवैसी ने कहा कि अब संघ परिवार और बीजेपी के नेताओं को बैठकर इस बात पर गंभीरता से सोचना चाहिए कि वे एक तरफ इतिहास के पन्नों में मुगलों और बाबर को लेकर तीखी बयानबाजी करते हैं, वहीं दूसरी ओर उसी क्षेत्र से आने वाले देश के साथ कूटनीतिक और सौहार्दपूर्ण संबंध रखते हुए अवार्ड स्वीकार करते हैं।प्रधानमंत्री मोदी जहां भी जाते हैं, कोई न कोई बड़ा अवार्ड लेकर आते हैंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया भर के विभिन्न देशों द्वारा मिलने वाले सर्वोच्च सम्मानों पर कटाक्ष करते हुए AIMIM प्रमुख ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री की यह विशेषता रही है कि वे दुनिया के जिस भी देश के दौरे पर जाते हैं, वहां से कोई न कोई बड़ा राजकीय सम्मान या अवार्ड लेकर ही लौटते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को इस नए अंतरराष्ट्रीय सम्मान की बहुत-बहुत मुबारकबाद हो।ओवैसी ने जनसभा या मीडिया से बात करते हुए इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक मंचों पर मुगल शासकों और विशेषकर बाबर के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने वाले लोगों को यह देखना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और द्विपक्षीय संबंध पूरी तरह से अलग भू-राजनीतिक वास्तविकताओं पर काम करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस घटना के बाद राजनीतिक विमर्श में बाबर के नाम का इस्तेमाल करने के तौर-तरीकों में कुछ बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि जिस संस्कृति और भूगोल से मुगल ताल्लुक रखते थे, आज आधुनिक भारत सरकार उसी क्षेत्र के देशों के साथ मजबूत दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी निभा रही है।'दोस्तलिक' शब्द और प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया का कूटनीतिक पहलूइस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए अपनी भावनाएं देश और दुनिया के सामने रखीं। पीएम मोदी ने लिखा कि उज्बेकिस्तान का यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान यानी 'ओली दराजाली दोस्तलिक' प्राप्त करके वे बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह प्रतिष्ठित सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सदियों से चले आ रहे स्थाई संबंधों और दोनों देशों की जनता की अटूट मित्रता को समर्पित किया।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से 'दोस्तलिक' शब्द का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के लोग इस शब्द से पूरी तरह परिचित हैं और हमारे देश में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जहां यह शब्द दिन में कई बार न बोला जाता हो। 'दोस्तलिक' का शाब्दिक अर्थ मित्रता होता है और यह शब्द दोनों देशों के संबंधों के केंद्र में मौजूद भावनाओं को खूबसूरती से बयां करता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि यह भारत के 1.4 अरब नागरिकों का सामूहिक सम्मान है, जो दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और मजबूत होते सांस्कृतिक व आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाइयां प्रदान करता है।अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, घरेलू राजनीति और भविष्य के कयासराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान जैसे मध्य एशियाई देश से मिला यह सर्वोच्च सम्मान कूटनीतिक दृष्टि से भारत की बढ़ती वैश्विक साख और सेंट्रल एशिया के साथ मजबूत होते रणनीतिक संपर्कों का परिचायक है। भारत मध्य एशिया को अपनी 'कनेक्टिविटी' और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानता है, और उज्बेकिस्तान के साथ रक्षा, व्यापार, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग तथा फार्मास्यूटिकल सेक्टर में लगातार समझौते हो रहे हैं।हालांकि, घरेलू राजनीतिक गलियारों में ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को भी विपक्षी दल अपने तरीके से तसवीर का दूसरा पहलू दिखाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। असदुद्दीन ओवैसी का यह बयान इसी घरेलू राजनीतिक परिदृश्य का एक हिस्सा है, जहां वे वैचारिक मुद्दों और चुनावी भाषणों में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के आईने में रखकर सत्ता पक्ष से सवाल पूछते नजर आते हैं। बहरहाल, उज्बेकिस्तान के साथ भारत के कूटनीतिक संबंध इन राजनीतिक बहसों से परे लगातार मजबूत हो रहे हैं और 'दोस्तलिक' की यह भावना आने वाले समय में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाने का काम करेगी।
नीम करोली बाबा का अस्थि कलश, 53 साल से इस जगह पर रखा सुरक्षित
नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को अनंत चतुर्दशी के दिन वृंदावन में समाधि ली थी. देह त्यागने के बाद उनकी अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित किया गया था. हालांकि, अस्थियों का एक हिस्सा उनके बड़े बेटे अपने साथ भोपाल ले आए थे.
घर में आए जुड़वा बेटों के लिए ढूंढ रहे हैं खास नाम? आज हम आपके जुड़वा बेटों के लिए नामों की लिस्ट लेकर आए हैं, जो आपको बेहद पसंद आएंगे और इनका अर्थ भी बेहद खास है.
'जैसे रामायण में था रूप बदलने वाला राक्षस...', सीएम फडणवीस ने CJP-कांग्रेस पर बोला हमला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में बीजेपी की महाराष्ट्र प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में कांग्रेस और राहुल गांधी पर कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने CJP को कांग्रेस जिताओ प्रोग्राम करार देते हुए इसे भारत जोड़ो यात्रा से जुड़े संगठनों से जोड़ा.
शहर-शहर भारी बारिश, बाढ़ और सैलाब; मचा हाहाकार
मानसून का शहर-शहर में असर दिख रहा है. मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ जाने से चित्रकूट में सैलाबी संकट दिख रहा है. लोग संकट में घिरे हैं. वहीं, प्रयागराज में गंगा और यमुना का रौद्र के चलते बाढ़ जैसे हालात बने हुए है. नदी के किनारे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के घरों में पानी घुस गया है. यहीं नहीं, यूपी के कई शहरों में ऐसे ही हाल हैं. बाराबंकी में सरयू नदी में उफान है तो वाराणसी में गंगा घाट डूब चुके हैं. आलम ये है कि गलियों में दाह संस्कार किया जा रहा है.

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