अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 2020 के चुनाव के दौरान 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डाटा चुराने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। ट्रंप इन आरोपों से जुड़े खुफिया दस्तावेज जल्द सार्वजनिक करने वाले हैं। उन्होंने इसे इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी डाटा ...
आधुनिक जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और प्रोसेस्ड फूड्स पर अत्यधिक निर्भरता के कारण हाई कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol) की समस्या आज एक गंभीर वैश्विक महामारी का रूप ले चुकी है। कोलेस्ट्रॉल मूल रूप से हमारे खून में पाया जाने वाला मोम (Wax) जैसा एक वसायुक्त (Fat) पदार्थ है, जो नई कोशिकाओं (Cells) के निर्माण, आवश्यक हार्मोन और विटामिन डी बनाने में शरीर की मदद करता है।लेकिन जब शरीर में इसकी मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती है, तो यह एक साइलेंट किलर (Silent Killer) साबित हो सकता है। खून में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL Cholesterol) का स्तर बढ़ने पर यह नसों की दीवारों पर जमा (Plague) होने लगता है। इससे नसें संकरी हो जाती हैं और हृदय (Heart) तक होने वाला रक्त का प्रवाह (Blood Flow) बुरी तरह बाधित होता है, जिससे हार्ट अटैक (Heart Attack), कोरोनरी आर्टरी डिजीज और ब्रेन स्ट्रोक (Stroke) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि हमारी कौन सी रोजमर्रा की आदतें नसों में इस गंदगी को बढ़ा रही हैं और इससे बचाव के क्या वैज्ञानिक उपाय हैं:बैड कोलेस्ट्रॉल को रॉकेट की रफ्तार से बढ़ाती हैं ये 4 आदतें (Major Causes)नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) की रिपोर्ट्स के अनुसार, हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या के लिए काफी हद तक हमारी दैनिक दिनचर्या और खानपान जिम्मेदार होता है:सेचुरेटेड और ट्रांस फैट का अत्यधिक सेवन: समोसे, कचौरी, पिज्जा, बर्गर, पैकेट बंद चिप्स, बेकरी प्रोडक्ट्स (केक, पेस्ट्री) और बार-बार गर्म किए गए तेल में बनी चीजों में ट्रांस फैट (Trans Fat) प्रचुर मात्रा में होता है। यह सीधे तौर पर नसों में एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को बढ़ाता है।शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle): घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करना, वॉक न करना और किसी भी तरह की एक्सरसाइज से दूरी बनाने के कारण शरीर में फैट का दहन (Burn) नहीं हो पाता, जिससे वजन बढ़ने लगता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बिगड़ जाता है।धूम्रपान और नशा (Smoking): सिगरेट या तंबाकू का सेवन करने से हमारे शरीर में मौजूद गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL Cholesterol) का स्तर तेजी से घटने लगता है। एचडीएल का काम नसों में जमा अतिरिक्त बैड कोलेस्ट्रॉल को साफ करके लिवर तक पहुंचाना होता है, इसके कम होने से नसों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है।अन्य स्वास्थ्य स्थितियां व जेनेटिक्स: बढ़ती उम्र, मोटापा, अनियंत्रित डायबिटीज (High Sugar) और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा, यदि परिवार में पहले से ही किसी को दिल की बीमारी या हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास (Family History) रहा है, तो यह जेनेटिक कारणों से भी आपको प्रभावित कर सकता है।नसों की सफाई और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के 5 अचूक उपाय (Lifestyle Changes)यदि आप बिना दवाओं के या दवाओं के साथ प्राकृतिक रूप से अपने लिपिड प्रोफाइल (Lipid Profile) को सामान्य रखना चाहते हैं, तो लाइफस्टाइल में ये 5 बड़े बदलाव तुरंत लागू करें:हफ्ते में 150 मिनट की एक्सरसाइज: शारीरिक रूप से एक्टिव होना सबसे जरूरी है। रोजाना कम से कम 30 मिनट या हफ्ते में 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम जैसे—तेज चलना (Brisk Walking), साइकिल चलाना, स्विमिंग या योग जरूर करें। इससे गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है।हार्ट-फ्रेंडली डाइट अपनाएं: अपने दैनिक भोजन में फाइबर से भरपूर चीजें जैसे ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज (ओट्स, दलिया), दालें और बीन्स शामिल करें। भोजन पकाने के लिए रिफाइंड तेल की जगह सीमित मात्रा में हेल्दी फैट (जैसे जैतून का तेल या सरसों का तेल) और मुट्ठी भर मेवे (बादाम, अखरोट) का सेवन करें।वजन और शुगर को रखें नियंत्रित: यदि आपका वजन सामान्य से अधिक है, तो उसे कैलोरी डेफिसिट डाइट और कसरत के जरिए कम करने का प्रयास करें। वजन में 5 से 10% की कमी भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को आश्चर्यजनक रूप से सुधार देती है। साथ ही ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल को नियमित मॉनिटर करें।धूम्रपान से पूरी तरह दूरी: यदि आप स्मोकिंग करते हैं, तो इसे आज ही छोड़ दें। धूम्रपान छोड़ने के कुछ ही हफ्तों के भीतर शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर वापस सुधरने लगता है और हार्ट अटैक का खतरा आधा हो जाता है।लक्षणों को न करें नजरअंदाज: कब सीधे भागें डॉक्टर के पास?हाई कोलेस्ट्रॉल को चिकित्सा विज्ञान में 'साइलेंट समस्या' कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके कोई भी बाहरी या स्पष्ट लक्षण शरीर पर दिखाई नहीं देते। लाखों लोगों को इसका पता तब चलता है जब वे किसी अन्य बीमारी के लिए रूटीन ब्लड टेस्ट (लिपिड प्रोफाइल) करवाते हैं।हालांकि, यदि नसों में ब्लॉकेज गंभीर स्तर पर पहुंच जाए, तो शरीर में नीचे दिए गए लक्षण दिखने लगते हैं, जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:सीने में भारीपन, जकड़न या अचानक तेज दर्द होना (एंजाइना)।थोड़ा सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर ही सांस फूलने लगना।अचानक शरीर के किसी एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नता महसूस होना।बिना किसी कारण के अत्यधिक पसीना आना और चक्कर आना।विशेषज्ञों की सलाह: यदि आपकी उम्र 30 वर्ष से अधिक है और आप मोटापा, डायबिटीज, या हाई बीपी से पीड़ित हैं, अथवा आपके परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है, तो हर 6 महीने या 1 साल में अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test) जरूर करवाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही अपनी डाइट व उपचार का निर्धारण करें।
RO Water Purifier Myths & Facts: क्या वाकई सेहत के लिए नुकसानदेह है आरओ का पानी?
RO Water Purifier Myths & Facts: आजकल आधुनिक जीवनशैली में अधिकांश घरों में पीने के पानी को साफ करने के लिए RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) वॉटर प्यूरीफायर का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य पानी में मौजूद अशुद्धियों, भारी धातुओं और हानिकारक बैक्टीरिया को छानकर उसे पीने योग्य बनाना है।लेकिन पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और इंटरनेट पर आरओ के पानी को लेकर कई तरह के दावे और भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जिसने आम लोगों को गहरे भ्रम में डाल दिया है। कुछ लोग इसे सेहत के लिए अमृत मानते हैं, तो कुछ इसे गंभीर बीमारियों की वजह बताने लगे हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है। आइए जानते हैं आरओ के पानी से जुड़े 4 सबसे बड़े मिथक (Myths), उनकी ग्राउंड रियलिटी और इसके सही इस्तेमाल के तरीके:RO के पानी से जुड़े 4 बड़े मिथक और उनका वैज्ञानिक सचमिथक 1: आरओ का पानी पीने से शरीर में मिनरल्स की भारी कमी हो जाती हैसच्चाई (WHO का पक्ष): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह सच है कि रिवर्स ऑस्मोसिस की प्रक्रिया के दौरान पानी में मौजूद कुछ प्राकृतिक मिनरल्स (जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम) छनकर कम हो जाते हैं। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इसे पीने से आपके शरीर में इन मिनरल्स की पूरी कमी हो जाएगी। मानव शरीर को आवश्यक मिनरल्स का 90% से अधिक हिस्सा एक संतुलित और पौष्टिक आहार (Diet) से मिलता है, न कि केवल पीने के पानी से। यदि आपकी डाइट अच्छी है, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है।मिथक 2: हर घर और हर इलाके में RO लगाना अनिवार्य हैसच्चाई: यह पूरी तरह गलत धारणा है। हर घर में आरओ प्यूरीफायर की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपके क्षेत्र में आने वाले पानी का टीडीएस (TDS - Total Dissolved Solids) कितना है और उसमें किस तरह के केमिकल मौजूद हैं। यदि आपके घर में आने वाला नल का पानी पहले से ही साफ, मीठा और सुरक्षित है, तो वहां साधारण यूवी (UV) या यूएफ (UF) फिल्टर से भी काम चल सकता है। हमेशा पानी की जांच कराने के बाद ही प्यूरीफायर चुनें।मिथक 3: आरओ का पानी 100% शुद्ध होता है, इसलिए इसे कैसे भी स्टोर कर सकते हैंसच्चाई (CDC की गाइडलाइन): अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताबिक, पानी चाहे कितना भी शुद्ध क्यों न हो, यदि उसे स्टोर करने का तरीका गलत है, तो वह दोबारा दूषित हो सकता है। आरओ से निकले पानी को हमेशा पूरी तरह से साफ, सूखे और ढक्कन बंद कंटेनर (जैसे कांच या अच्छी क्वालिटी के स्टील/मिट्टी के बर्तन) में ही रखना चाहिए। पानी को लंबे समय तक खुला छोड़ने या गंदे हाथों से निकालने पर उसमें दोबारा बैक्टीरिया पनप सकते हैं।मिथक 4: आरओ का पानी पीने से पेट की आंतें (Gut Health) कमजोर हो जाती हैंसच्चाई: इंटरनेट पर चल रहे इस दावे का समर्थन करने के लिए वर्तमान में कोई भी आधिकारिक वैश्विक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस में भी ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की गट हेल्थ (पाचन तंत्र की मजबूती) मुख्य रूप से उसकी पूरी लाइफस्टाइल, भोजन में फाइबर की मात्रा, शारीरिक सक्रियता, संक्रमण और दवाओं के इस्तेमाल पर निर्भर करती है, केवल आरओ के पानी पर नहीं।किन परिस्थितियों में आपके घर के लिए जरूरी है RO प्यूरीफायर?आरओएस सिस्टम मुख्य रूप से तब सबसे ज्यादा उपयोगी और अनिवार्य माना जाता है जब:आपके घर के पानी का TDS लेवल 500 mg/L से अधिक हो और पानी का स्वाद खारा या भारी हो।आपके इलाके के भूजल (Groundwater) में आर्सेनिक, फ्लोराइड, सीसा (Lead), या क्रोमियम जैसी खतरनाक और जहरीली भारी धातुएं घुली हुई हों, जिन्हें साधारण फिल्टर नहीं हटा पाते।इसके विपरीत, यदि पानी का टीडीएस सामान्य है और पानी सुरक्षित है, तो बिना वजह हाई-एंड आरओ लगाने से पानी की बर्बादी (Water Wastage) भी ज्यादा होती है।RO का पानी इस्तेमाल करते समय इन 4 बातों का रखें विशेष ख्यालयदि आप अपने घर में आरओ का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसकी शुद्धता और अपनी सेहत बनाए रखने के लिए इन टिप्स को जरूर फॉलो करें:नियमित सर्विसिंग और फिल्टर चेंज: आरओ प्यूरीफायर की समय-समय पर अधिकृत मैकेनिक से सर्विसिंग जरूर कराएं। इसके भीतर लगी मेम्ब्रेन (Membrane) और कार्बन फिल्टर को तय समय सीमा के भीतर बदलवाएं, ताकि पानी की गुणवत्ता खराब न हो।टीडीएस (TDS) को सही सेट करें: आरओ लगवाते समय टेक्नीशियन से कहकर उसके TDS को 100 से 300 के बीच ही सेट करवाएं। बहुत कम टीडीएस (जैसे 50 से कम) का पानी पीने में पूरी तरह बेस्वाद और मिनरल-विहीन हो जाता है।संतुलित आहार लें: चूंकि पानी से मिनरल्स कम होते हैं, इसलिए अपने दैनिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, दही, सूखे मेवे और ताजे फलों को शामिल करें ताकि शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा बनी रहे।कांच या तांबे के बर्तन का विकल्प: आरओ के पानी को रिस्टोर करने के लिए प्लास्टिक की बोतलों या कंटेनरों के बजाय कांच के जग या तांबे/मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा लाभकारी माना जाता है।
बरसात का सुहावना मौसम अपने साथ जितनी राहत लेकर आता है, उतनी ही स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी खड़ी करता है। मानसून के इस दौर में होने वाली एक बेहद सामान्य समस्या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई (UTI - Urine Infection) को कई बार लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर बहुत भारी पड़ सकता है।शुरुआत में यह समस्या पेशाब करते समय हल्की जलन, बार-बार टॉयलेट जाने की इच्छा होना या पेट के निचले हिस्से में दर्द तक ही सीमित लगती है। लेकिन यदि समय रहते इसका सही डॉक्टरी इलाज न कराया जाए, तो यह साधारण सा दिखने वाला संक्रमण ब्लैडर से ऊपर उठकर सीधे आपकी किडनी (Kidney Infection) को गंभीर रूप से डैमेज कर सकता है। खासकर कम उम्र की बच्चियों और महिलाओं के मामले में इस बीमारी को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए देश के बड़े डॉक्टरों और विशेषज्ञों से समझते हैं कि मानसून में यूटीआई क्यों बढ़ जाता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है:बरसात के मौसम में क्यों बढ़ जाते हैं UTI के मामले? (Key Causes)अक्सर लोग मानते हैं कि बारिश के पानी में भीगने से यूरिन इंफेक्शन होता है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण की असली वजह इस मौसम में पनपने वाली कुछ आदतें और परिस्थितियां हैं:लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना: डॉ. मनीषा अरोड़ा (डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, सीके बिरला हॉस्पिटल) के मुताबिक, मानसून के दौरान बारिश में भीगने के बाद या पसीने की वजह से लंबे समय तक गीले कपड़ों या अंडरगारमेंट्स में रहना बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल (नमी और गर्माहट) बनाता है।कम पानी पीने की आदत: डॉ. सी. एस. मिथ्रयी (सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी) का कहना है कि बारिश के मौसम में तापमान थोड़ा कम होने से लोगों को प्यास कम लगती है। पानी कम पीने के कारण शरीर में पेशाब (Urine) कम बनता है। नतीजतन, यूरिनरी ट्रैक्ट में मौजूद बैक्टीरिया फ्लश आउट नहीं हो पाते और वहीं टिककर अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं।मुख्य जिम्मेदार बैक्टीरिया: डॉ. विक्रम कालरा (प्रिंसिपल डायरेक्टर, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट, आकाश हेल्थकेयर) के अनुसार, अधिकांश यूटीआई मामलों के लिए ई. कोलाई (E. coli) नामक बैक्टीरिया मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है, जो गंदगी और नमी के कारण तेजी से शरीर में प्रवेश कर जाता है।शुरुआती लक्षणों से लेकर किडनी इंफेक्शन तक का सफर (UTI Symptoms)यूटीआई के लक्षणों को दो चरणों में समझा जा सकता है। पहला शुरुआती संक्रमण और दूसरा गंभीर स्थिति जब इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाता है:शुरुआती सामान्य लक्षण:पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द होना।बार-बार पेशाब आने का अहसास होना, लेकिन खुलकर न आना।यूरिन से अत्यधिक तीखी बदबू आना।यूरिन का रंग धुंधला (Cloudy) होना या कभी-कभी उसमें खून के अंश (Hematuria) दिखना।पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में लगातार हल्का दर्द रहना।किडनी में संक्रमण फैलने के गंभीर लक्षण:यदि लापरवाही के कारण इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाता है, तो शरीर ये अलार्म बजाने लगता है:अचानक तेज बुखार आना और शरीर का कांपना (ठंड लगना)।पीठ के निचले हिस्से या कमर में एक तरफ असहनीय तेज दर्द होना।लगातार मतली (जी मिचलाना) या उल्टियां होना।अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना और थकान महसूस होना।इन्हें है सबसे ज्यादा खतरा:गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women), डायबिटीज के मरीजों, बुजुर्गों और जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन के लक्षण दिखते ही तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए, क्योंकि इनमें जटिलताएं बहुत तेजी से बढ़ती हैं।सही समय पर जांच और इलाज है जरूरीडॉक्टरों के अनुसार, अच्छी बात यह है कि शुरुआती अवस्था में अधिकांश यूटीआई का इलाज बेहद आसान और सटीक होता है।लैब टेस्ट: संक्रमण की पुष्टि के लिए डॉक्टर सबसे पहले यूरिन रूटीन टेस्ट (Urine Routine) और यूरिन कल्चर (Urine Culture) टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। कल्चर टेस्ट से यह पता चलता है कि इंफेक्शन किस विशिष्ट बैक्टीरिया की वजह से हुआ है।एंटीबायोटिक्स: टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर कुछ दिनों का एंटीबायोटिक (Antibiotics) कोर्स प्रिसक्राइब करते हैं। ध्यान रहे कि खुद से कोई भी दवा या पेनकिलर लेने की गलती बिल्कुल न करें और डॉक्टर द्वारा दिए गए एंटीबायोटिक के कोर्स को बीच में अधूरा न छोड़ें।मानसून में यूटीआई से सुरक्षित रहने के 5 अचूक उपाय (Prevention Tips)यदि आप बरसात के इस मौसम में यूरिन इंफेक्शन की परेशानी से कोसों दूर रहना चाहते हैं, तो इन 5 बातों का कड़ाई से पालन करें:भरपूर पानी पिएं (Hydration): प्यास न लगने पर भी दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास (2-3 लीटर) पानी जरूर पिएं। जितना ज्यादा यूरिन पास होगा, बैक्टीरिया उतनी ही आसानी से शरीर से बाहर निकल जाएंगे।गीले कपड़ों को तुरंत बदलें: यदि आप बारिश में भीग गए हैं या वर्कआउट के कारण कपड़े पसीने से गीले हो गए हैं, तो बिना देर किए तुरंत नहाकर सूखे और साफ सूती (Cotton) कपड़े पहनें।पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखें: वॉशरुम का इस्तेमाल करने के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर (Front to Back) सफाई करें, ताकि मल मार्ग के बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट तक न पहुंच सकें। सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें।पेशाब को रोककर न रखें: जब भी टॉयलेट जाने की इच्छा हो, उसे दबाएं नहीं। लंबे समय तक यूरिन को ब्लैडर में रोककर रखने से बैक्टीरिया को बढ़ने का पूरा समय मिल जाता है।क्रैनबेरी जूस का सेवन: डॉक्टरों की सलाह पर आप क्रैनबेरी जूस (Cranberry Juice) या इसके सप्लीमेंट्स ले सकते हैं। क्रैनबेरी में मौजूद तत्व बैक्टीरिया को ब्लैडर की दीवारों पर चिपकने से रोकते हैं।
बदलते मौसम और लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान (Global Warming) का असर अब सिर्फ खेती, पर्यावरण या ग्लेशियरों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह हमारे बेडरूम तक पहुंच चुका है और हमारी सेहत की सबसे जरूरी कड़ी यानी 'नींद' (Sleep) को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत के बड़े शहरों में न केवल दिन का पारा चढ़ा है, बल्कि रात की गर्मी (Nighttime Warming) में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।हाल ही में पर्यावरण अनुसंधान से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्था 'क्लाइमेट सेंट्रल' (Climate Central) ने एक बेहद चौंकाने वाली स्टडी जारी की है। इस स्टडी में साल 2020 से 2025 के बीच दुनिया के 1,300 से ज्यादा शहरों और भारत के 100 से अधिक प्रमुख शहरों के तापमान और इंसानी नींद के आंकड़ों का गहन विश्लेषण (Analysis) किया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि भारत के महानगरों में रहने वाले लोग हर साल कई घंटों की जरूरी नींद सिर्फ रात की बढ़ती गर्मी के कारण खो रहे हैं।नींद खोने के मामले में चेन्नई और मुंबई सबसे आगे (Metros Data)Climate Central की रिपोर्ट के मुताबिक, तटीय और अत्यधिक आबादी वाले महानगरों में रात का तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा बना रहता है, जिसके कारण वहां के नागरिकों की सालाना नींद में भारी कटौती दर्ज की गई है:प्रभावित भारतीय शहर (Cities)प्रति वर्ष कम होने वाली अनुमानित नींद (घंटे)चेन्नई (Chennai - सबसे प्रभावित)93 घंटे प्रति वर्षमुंबई (Mumbai)84 घंटे प्रति वर्षकोलकाता (Kolkata)80 घंटे प्रति वर्षअहमदाबाद (Ahmedabad)78 घंटे प्रति वर्षहैदराबाद (Hyderabad)75 घंटे प्रति वर्षबेंगलुरु (Bengaluru)67 घंटे प्रति वर्षदिल्ली (Delhi)66 घंटे प्रति वर्षपुणे (Pune)65 घंटे प्रति वर्षक्लाइमेट चेंज का सीधा कनेक्शन:विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी शहरों में हर साल नींद कम होने के कुल समय में से करीब 5 से 8 घंटे की सीधी कमी सीधे तौर पर 'क्लाइमेट चेंज' (जलवायु परिवर्तन) की वजह से बढ़े हुए रातों के तापमान से जुड़ी हुई है।गर्म रातें हमारी नींद और शरीर को कैसे प्रभावित करती हैं? (Scientific Reason)चिकित्सा विज्ञान और इस स्टडी के अनुसार, एक आरामदायक और गहरी नींद (Deep Sleep) में जाने के लिए मानव शरीर का आंतरिक तापमान (Core Body Temperature) स्वाभाविक रूप से थोड़ा कम होना बेहद जरूरी होता है।शरीर को ठंडा होने में दिक्कत: जब रात के समय बाहरी वातावरण या कमरे का तापमान बहुत गर्म और उमस भरा होता है, तो शरीर को खुद को प्राकृतिक रूप से ठंडा करने में बहुत मशक्कत करनी पड़ती है।बार-बार नींद टूटना: इस थर्मल स्ट्रेस (Thermal Stress) के कारण व्यक्ति को या तो जल्दी नींद नहीं आती, या फिर रात में बार-बार उसकी आंख खुलती है।लंबे समय तक नींद की कमी से सेहत को 4 बड़े नुकसानलगातार अच्छी और पर्याप्त नींद न मिलने का असर केवल अगले दिन की थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर में कई गंभीर बीमारियों को जन्म देता है:मानसिक स्वास्थ्य पर असर: नींद पूरी न होने से सुबह उठते ही भारीपन, दिनभर चिड़चिड़ापन, तनाव और किसी भी काम में ध्यान (Concentration) लगाने में भारी परेशानी होती है।हार्ट और नसों की बीमारियां: लंबे समय तक (Chronic) नींद की कमी रहने से शरीर में ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो सकता है, जिससे दिल के दौरे (Heart Attack) और नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।कार्यक्षमता में गिरावट: ऑफिस या कार्यस्थल पर नींद आने के कारण परफॉर्मेंस खराब होती है और मानवीय गलतियां (Human Errors) होने की आशंका बढ़ जाती है।दुर्घटनाओं का जोखिम: ड्राइव करते समय या सड़क पर चलते वक्त झपकी आने के कारण जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं (Road Accidents) का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।भीषण गर्मी और उमस में भी अच्छी नींद पाने के 6 बेहतरीन टिप्सयदि आप भी बदलते मौसम के इस दौर में अपनी रातों की नींद को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो हेल्थ एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए इन उपायों को जरूर आजमाएं:कमरे का तापमान नियंत्रित रखें: सोने से पहले कमरे को जितना हो सके ठंडा और हवादार बनाएं। एयर कंडीशनर (AC) या पंखे को एक आरामदायक तापमान (24C से 26C) पर सेट करें।सोने का फिक्स रूटीन: रोजाना रात को एक ही निश्चित समय पर सोने जाएं और सुबह एक ही तय समय पर उठें। इससे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) मजबूत होती है।गैजेट्स से दूरी बनाएं: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन देखना बिल्कुल बंद कर दें। इनकी नीली रोशनी (Blue Light) नींद लाने वाले 'मेलाटोनिन' हार्मोन को बनने से रोकती है।हल्का भोजन और कैफीन से परहेज: रात को सोने से ठीक पहले भारी या अत्यधिक मसालेदार भोजन न करें। साथ ही शाम के बाद चाय, कॉफी या सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसे कैफीन युक्त पदार्थों के सेवन से बचें।ढीले सूती कपड़े और हाइड्रेशन: सोते समय हमेशा हल्के, ढीले और सूती (Cotton) कपड़े पहनें ताकि पसीना आसानी से सूख सके। दिनभर और सोने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।दिन में शारीरिक गतिविधि: रोजाना सुबह या शाम को नियमित रूप से व्यायाम, योग या वॉक (Physical Activity) करें। इससे शरीर की ऊर्जा का सही इस्तेमाल होता है और रात में जल्दी व गहरी नींद आती है।ध्यान दें: यदि तमाम उपायों के बाद भी आपको लंबे समय से अनिद्रा (Insomnia), बार-बार नींद टूटने या सुबह उठने पर अत्यधिक थकान रहने की समस्या बनी हुई है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है।
मौसम में बदलाव आते ही हमारी त्वचा का मिजाज भी बदलने लगता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि मानसून (Monsoon) के दिनों में चेहरे पर निकलने वाले कील-मुंहासे और पिंपल्स (Pimple & Acne) का एकमात्र कारण हवा में मौजूद उमस (Humidity) है। लेकिन स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बारिश के मौसम में उमस और पॉल्यूशन (प्रदूषण) का खतरनाक कॉम्बिनेशन हमारी स्किन की सेहत को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।उत्तर भारत में अप्रैल से लेकर सितंबर तक के महीनों में भीषण गर्मी और उमस पड़ती है। इस दौरान पसीना, धूल-मिट्टी और हवा में मौजूद प्रदूषण के महीन कण मिलकर त्वचा के रोमछिद्रों (Skin Pores) को ब्लॉक कर देते हैं। त्वचा की देखरेख में जरा सी भी लापरवाही पिंपल्स को तेजी से बढ़ा देती है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में एक्ने निकलने के पीछे क्या वैज्ञानिक कारण (Scientific Reasons) हैं और इससे बचने के लिए आप किन आसान व असरदार तरीकों को अपना सकते हैं:क्यों निकलते हैं बारिश में ज्यादा पिंपल्स? जानिए इसके 4 वैज्ञानिक कारण1. मॉइस्चर (नमी) और स्वेट ग्लैंड्स का कनेक्शनएक सामान्य इंसान के शरीर में लगभग 20 से 40 लाख स्वेट ग्लैंड्स (पसीने की ग्रंथियां) होती हैं। गर्मी और अत्यधिक उमस के कारण ये ग्रंथियां सामान्य से कहीं ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं। हालांकि, पसीने में मुख्य रूप से केवल पानी और नमक होता है, जो सीधे तौर पर स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाता; लेकिन जब हवा में नमी ज्यादा होने के कारण यह पसीना जल्दी सूख नहीं पाता, तब समस्या शुरू होती है। पसीने के त्वचा पर लंबे समय तक टिके रहने से त्वचा की बाहरी परत (Stratum Corneum) कमजोर होने लगती है और पोर्स बंद हो जाते हैं।2. डेड सेल्स और पोर्स का ब्लॉक होनाएक्सपर्ट्स के अनुसार, जब त्वचा के रोमछिद्र (Pores) बंद हो जाते हैं, तो त्वचा के भीतर बनने वाले डेड सेल्स (मृत कोशिकाएं) बाहर नहीं निकल पाते। ये डेड सेल्स और गंदगी पोर्स के अंदर ही फंस जाते हैं, जिससे वे इन्फेक्टेड हो जाते हैं। यही प्रक्रिया आगे चलकर ब्लैकहेड्स (Blackheads), वाइटहेड्स (Whiteheads) और लाल दर्दनाक पिंपल्स का रूप ले लेती है।3. हवा में मौजूद प्रदूषण (PM 2.5 कण) का हमलाबारिश के दिनों में हवा में मौजूद पीएम 2.5 (PM 2.5 Particles) जैसे सूक्ष्म कण, धूल और धुआं हमारी त्वचा की सतह पर चिपक जाते हैं। ये विषैले कण त्वचा के प्राकृतिक तेल (सीबम) के साथ मिलकर पोर्स के अंदर गहराई तक चले जाते हैं। इन कणों के साथ पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAH) और हानिकारक धातुएं भी त्वचा में प्रवेश कर जाती हैं, जिससे स्किन बैरियर तेजी से डैमेज होता है।4. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और 'कटीबैक्टीरियम एक्नीस' बैक्टीरियाजब प्रदूषण के कण त्वचा में जाते हैं, तो वे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) और इन्फ्लेमेशन (सूजन) को बढ़ा देते हैं। मानसून की उमस और सीबम (ऑयल) के बढ़े हुए प्रोडक्शन के कारण त्वचा पर 'कटीबैक्टीरियम एक्नीस' (Cutibacterium Acnes) नामक बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। यही बैक्टीरिया मुख्य रूप से चेहरे पर मवाद वाले दानों और एक्ने को जन्म देते हैं।मानसून में बेदाग और निखरी त्वचा पाने के 5 अचूक उपाय (Skin Care Tips)यदि आप इस उमस और गर्मी वाले मौसम में अपनी त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और एक्ने-फ्री रखना चाहते हैं, तो अपने डेली रूटीन में इन आदतों को जरूर शामिल करें:सैलिसिलिक एसिड क्लींजर का उपयोग करें: दिन में दो बार सैलिसिलिक एसिड (Salicylic Acid) युक्त फेस वॉश या क्लींजर से चेहरा साफ करें। यह एसिड पोर्स के भीतर जमी गंदगी, प्रदूषण और अतिरिक्त ऑयल को गहराई से बाहर निकालता है और सीबम प्रोडक्शन को कंट्रोल करता है।नॉन-कॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन चुनें: बारिश के बाद बादलों के बीच भी यूवी (UV) किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए हमेशा लाइटवेट और नॉन-कॉमेडोजेनिक (Non-Comedogenic) सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। ये सनस्क्रीन बेहद हल्के होते हैं और त्वचा के रोमछिद्रों को ब्लॉक नहीं करते।बाहर से आते ही करें 'डबल क्लींजिंग': जब भी आप धूप, धूल या प्रदूषण वाले माहौल से घर वापस आएं, तो सबसे पहले अपनी त्वचा को अच्छी तरह साफ करें। ऐसा करने से पॉल्यूशन के हानिकारक कण त्वचा पर लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगे और डैमेज का खतरा टल जाएगा।हफ्ते में एक बार माइल्ड स्क्रबिंग: त्वचा के भीतर फंसे डेड सेल्स और ब्लैकहेड्स को हटाने के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार हल्के हाथों से स्क्रबिंग (Scrubbing) जरूर करें। ध्यान रहे कि यदि चेहरे पर एक्टिव (बड़े और लाल) पिंपल्स हैं, तो कठोर स्क्रब का इस्तेमाल करने से बचें।विटामिन सी और नियासिनामाइड का इस्तेमाल: त्वचा पर विटामिन सी (Vitamin C) और नियासिनामाइड (Niacinamide) युक्त सीरम लगाना बेस्ट रिजल्ट देता है। विटामिन सी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाता है और सूजन कम करता है। साथ ही, अपनी डाइट में खट्टे फलों (जैसे नींबू, संतरा, आंवला) को शामिल करें।
बजट में बराक घाटी के विकास को प्राथमिकता दी गई: हिमंता बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले एक दशक से बराक घाटी के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं को पूरा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह क्षेत्र अब असम के विकास पथ में पीछे नहीं रहेगा।
भाजपा की बैठक में शामिल होने पर असम विधानसभा अध्यक्ष पर कांग्रेस का निशाना
असम विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता और कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास पर निशाना साधा
बिहार: एआई आधारित सुशासन को बढ़ावा, सीएम ने 'सर्वम एआई-भारत जीपीटी' के साथ समझौते की घोषणा की
बिहार सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुशासन, नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जानकारी दी कि बिहार सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सर्वम एआई-भारत जीपीटी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी के जरिए राज्य में एआई आधारित तकनीकों के विकास, अनुसंधान और जनसेवाओं को नई दिशा मिलेगी।
भारत-श्रीलंका रक्षा अधिकारियों की अहम बैठक, रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर दिया जोर
भारत और श्रीलंका के रक्षा अधिकारियों ने नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम बैठक की। इस दौरान आपसी सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की और भविष्य में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारतीय भोजन में चटनी (Chutney) का स्थान बेहद खास और अपरिहार्य माना जाता है। यह न केवल खाने का स्वाद और तीखापन बढ़ाती है, बल्कि साधारण से साधारण भोजन की थाली को भी पूरी तरह से कंप्लीट और जायकेदार बना देती है। चाहे दोपहर का दाल-चावल हो, सुबह के गरमा-गरम पराठे, या फिर दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे इडली-डोसा—हर डिश का असली मजा सही चटनी के बिना अधूरा है।स्वाद के अलावा चटनियां स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद गुणकारी होती हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्रियों जैसे हरी मिर्च, धनिया, पुदीना, लहसुन और नींबू में प्रचुर मात्रा में विटामिन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन क्रिया (Digestion) को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं भारतीय रसोई की ऐसी ही 4 सदाबहार और टेस्टी चटनियों के बारे में, जिन्हें आप मिनटों में घर पर तैयार कर सकते हैं:हर खाने की जान हैं ये 4 बेहतरीन चटनियां (Easy Chutney Recipes)1. पुदीना-धनिया चटनी (The Perfect All-Rounder)बनाने की विधि: ताजी पुदीने की पत्तियां, हरा धनिया, हरी मिर्च, लहसुन की कलियां, स्वादानुसार नमक और थोड़ा सा ताजा नींबू का रस मिलाकर ब्लेंडर में अच्छी तरह पीस लें।फायदे और पेयरिंग: पुदीना और धनिया में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर पेट को ठंडक देते हैं। यह हरी चटनी समोसे, कचोरी, सैंडविच, ढोकला और हर तरह के स्टफ्ड पराठों के साथ लाजवाब स्वाद देती है।2. टमाटर-लहसुन की तीखी चटनी (Fiery Tomato-Garlic)बनाने की विधि: पके हुए टमाटर, लहसुन की कलियां और सूखी लाल मिर्च को थोड़े से तेल में हल्का सा भून लें। जब यह मिश्रण ठंडा हो जाए, तो इसमें नमक डालकर मिक्सी में पीस लें।फायदे और पेयरिंग: टमाटर में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और लाइकोपीन पाया जाता है, जबकि लहसुन रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है। यह चटनी सादे दाल-चावल, पूरी, लच्छा पराठा और मैसूर मसाला डोसा के साथ खूब पसंद की जाती है।3. नारियल की क्लासिक चटनी (South Indian Coconut Chutney)बनाने की विधि: ताजा कद्दूकस किया हुआ नारियल, भुनी हुई चना दाल (दलिया), हरी मिर्च, थोड़ा सा अदरक और नमक डालकर एक महीन पेस्ट बना लें। स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से तेल में राई (सरसों के दाने), सूखी लाल मिर्च और ताजे करी पत्ते का कड़क तड़का लगाएं।फायदे और पेयरिंग: नारियल में मौजूद हेल्दी फैट्स और डाइटरी फाइबर शरीर को ऊर्जा देते हैं। यह चटनी इडली, डोसा, उत्तपम, वड़ा और अप्पम के लिए सबसे उत्तम कॉम्बिनेशन है।4. कच्चे आम की खट्टी-मीठी चटनी (Raw Mango Chutney)बनाने की विधि: कच्चे आम (कैरी) के छोटे टुकड़ों में पुदीना, हरा धनिया, हरी मिर्च, जीरा और नमक डालकर पीस लें। यदि आप खट्टा-मीठा स्वाद पसंद करते हैं, तो पीसते समय इसमें थोड़ा सा गुड़ (Jaggery) भी मिला सकते हैं।फायदे और पेयरिंग: कच्चा आम विटामिन सी का एक बेहतरीन और प्राकृतिक स्रोत है जो गर्मियों में लू से बचाता है। यह चटनी पूरी, पराठे, और समर-स्पेशल लंच के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है।चटनी को लंबे समय तक ताजा रखने और स्टोर करने के 5 जरूरी टिप्सअक्सर घर पर बनाई गई चटनियां सही रखरखाव न होने के कारण बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं या अपना मूल रंग खो देती हैं। इसकी ताजगी बनाए रखने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:साफ-सफाई सबसे जरूरी: चटनी बनाने के लिए हमेशा फ्रेश और अच्छी क्वालिटी की हरी सब्जियों का ही चुनाव करें। पीसने से पहले धनिया, पुदीना और मिर्च को पानी से 2-3 बार अच्छी तरह जरूर धो लें।एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल: तैयार चटनी को हमेशा कांच या प्लास्टिक के साफ और पूरी तरह से सूखे एयरटाइट कंटेनर (Air-Tight Container) में ही भरकर फ्रिज में रखें। खुला छोड़ने पर इसका रंग काला पड़ सकता है।गीले चम्मच से बचें: फ्रिज से चटनी निकालते समय कभी भी गीले या पहले से इस्तेमाल किए गए चम्मच का प्रयोग न करें। नमी के संपर्क में आते ही चटनी में फंगस लगने या उसके खराब होने का खतरा दोगुना हो जाता है।नींबू या सिरका: हरी धनिया-पुदीने की चटनी को पीसते समय नींबू का रस या थोड़ा सा सिरका (Vinegar) मिलाने से उसका हरा रंग बरकरार रहता है और वह एक प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव का काम करता है।उपयोग की समय-सीमा: यद्यपि फ्रिज में चटनी कुछ दिनों तक सुरक्षित रह सकती है, लेकिन इसके असली स्वाद, पोषक तत्वों और ताजगी का आनंद लेने के लिए इसे 2 से 3 दिनों के भीतर ही बनाकर कंज्यूम (इस्तेमाल) कर लेना चाहिए।
मानव जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां या परेशानियां आकर खड़ी हो जाती हैं, जब इंसान बेबस होकर कह उठता है— पता नहीं किस जन्म के पापों या कर्मों की सजा मिल रही है। हिंदू धर्म और दर्शन में पुनर्जन्म (Reincarnation) पर गहरा विश्वास व्यक्त किया गया है। सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों, विशेषकर गरुड़ पुराण (Garuda Purana) में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, उसके कर्मों के हिसाब और पुनर्जन्म के सिद्धांतों का अत्यंत विस्तार से वर्णन मिलता है।धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, आत्मा कभी नहीं मरती, वह केवल शरीर बदलती है। अक्सर पिछले जन्म की कुछ स्मृतियां और अधूरी भावनाएं हमारी आत्मा के साथ नए जन्म में भी यात्रा करती हैं। आज हम आपको 5 ऐसे रहस्यमयी और मानसिक लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें यदि आप अपने व्यावहारिक जीवन में महसूस करते हैं, तो यह इस बात का साफ इशारा हो सकता है कि आपकी आत्मा का कोई न कोई पिछला जन्म जरूर रहा है:पिछले जन्म का संकेत देने वाले 5 मुख्य लक्षण (Signs of Past Life)1. एक ही स्वप्न का बार-बार दिखाई देना (Recurring Dreams)यदि आपको सोते समय एक ही सपना बार-बार आता है, जिसमें आप खुद को किसी खास कालखंड (Ancient Time), अनजान ऐतिहासिक जगहों या अजीब वेशभूषा वाले लोगों के बीच देखते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह कि सपने में आप उन चेहरों और जगहों से पूरी तरह परिचित महसूस करते हैं, लेकिन जागने के बाद लाख कोशिशों के बावजूद यह याद नहीं कर पाते कि इस वर्तमान जीवन में आपने उन्हें कहां देखा है। गरुड़ पुराण के नजरिए से यह आत्मा के अवचेतन मन में दबी पिछले जन्म की कोई गहरी स्मृति हो सकती है।2. पहली ही मुलाकात में अजनबी से गहरा अपनापन (Instant Connection)कई बार हमारे जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति की एंट्री होती है, जिससे हम पहले कभी नहीं मिले होते (वह पूरी तरह अजनबी होता है)। लेकिन पहली ही नजर या चंद मिनटों की बातचीत में ही हमें ऐसा महसूस होने लगता है जैसे हम उस व्यक्ति को सदियों या कई वर्षों से जानते हैं। उसके साथ एक अटूट और गहरा मानसिक व भावनात्मक जुड़ाव (Soul Connection) स्थापित हो जाता है। आध्यात्मिक विद्वानों के अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि वह व्यक्ति आपके पिछले जन्म के किसी करीबी रिश्ते या परिवार से जुड़ा रहा है।3. बिना कारण किसी वस्तु, स्थान या व्यक्ति से गहरा लगावअक्सर देखा जाता है कि कुछ लोगों को बिना किसी तार्किक कारण के किसी खास शहर, ऐतिहासिक इमारत, पुरानी वस्तुओं या किसी अजनबी व्यक्ति से बहुत ज्यादा लगाव या खिंचाव महसूस होने लगता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति का भारत के किसी ऐसे शहर के प्रति आकर्षित होना जहां वह कभी गया ही न हो। शास्त्रों के अनुसार, इस तरह का अकारण लगाव सीधे तौर पर आत्मा के पिछले जीवन के निवास स्थान या उसकी प्रिय वस्तुओं से संबंधित होता है।4. भविष्य की घटनाओं का पहले से आभास होना (Dj Vu / Intuition)क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि कोई घटना आपके सामने घट रही हो और आपको अचानक लगे कि यह सब आपके साथ पहले भी हो चुका है? या फिर कुछ लोगों के पास एक गजब की छठी इंद्री (Sixth Sense) होती है, जिससे उन्हें भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास हो जाता है और उनकी कही बातें सच हो जाती हैं। माना जाता है कि ऐसी स्थिति में वह आत्मा पिछले जन्मों के अनुभवों से इतनी परिपक्व (Mature Soul) हो चुकी होती है कि उसे आने वाले समय के इशारे पहले ही मिलने लगते हैं।5. अनजाना डर या अकारण उदासी (Unexplained Phobias)कुछ लोगों के भीतर बचपन से ही किसी खास चीज को लेकर एक गहरा और अनजाना डर (Phobia) होता है, जैसे पानी से डर, ऊंचाई से डर, अंधेरे या आग से डर। भले ही वर्तमान जीवन में उनके साथ ऐसी कोई दुर्घटना न हुई हो, फिर भी वे भयभीत रहते हैं। इसके अलावा कई बार व्यक्ति बिना किसी बाहरी कारण के गहरी उदासी या ऐसा व्यवहार करने लगता है जो उसके वर्तमान जीवन की परिस्थितियों से मेल नहीं खाता। इसे भी पिछले जन्म की किसी अधूरी इच्छा, आघात या मृत्यु के समय के डर का साया माना जाता है।गरुड़ पुराण क्या संदेश देता है?गरुड़ पुराण के अनुसार, हमारी आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में जाते समय अपने साथ संचित कर्मों (अच्छे और बुरे कार्य) का एक सूक्ष्म ब्योरा लेकर चलती है। यही वजह है कि हर मनुष्य का स्वभाव, उसकी रुचियां और उसका भाग्य एक-दूसरे से पूरी तरह अलग होता है। इन संकेतों को समझकर मनुष्य को अपने वर्तमान जीवन में केवल अच्छे और धर्मसम्मत कार्य करने चाहिए ताकि उसकी आत्मा की आगामी यात्रा सुखद और मोक्ष की ओर अग्रसर हो सके।
हिंदू धर्म में सावन (Shravan Month) का महीना बेहद पवित्र और चमत्कारी माना जाता है। यह हिंदी पंचांग का पांचवां महीना है, जो पूरी तरह से देवों के देव महादेव की भक्ति, साधना और आराधना को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से भोलेनाथ अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उनकी झोली खुशियों से भर देते हैं।द्रिक पंचांग (Drik Panchang) के अनुसार, इस साल सावन का पावन महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है, जिसका समापन 30 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के साथ होगा।शास्त्रों में सावन के दौरान शिवलिंग पर कुछ विशेष सामग्रियां और फूल अर्पित करने का विधान है। इन्हीं में से एक है अपराजिता का फूल (Aparajita Flower)। नीले रंग का यह खूबसूरत फूल महादेव को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि सावन में अपराजिता के फूल से जुड़े कुछ खास उपाय करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में:सावन में अपराजिता के फूल के 3 चमत्कारी उपाय (Sawan Aparajita Totke)1. धन लाभ और सकारात्मकता के लिए (सोमवार का विशेष उपाय)सावन के प्रत्येक सोमवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद किसी भी शिव मंदिर (शिवालय) जाएं। वहां शिवलिंग पर अपराजिता के 5 फूल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि इस उपाय को करने से भगवान शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है। जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और अचानक से धन लाभ (Financial Gain) के नए योग बनने शुरू हो जाते हैं।2. तिजोरी को हमेशा भरा रखने के लिए (आर्थिक तंगी से मुक्ति)सावन के महीने में किसी भी दिन सुबह के समय शिवालय जाएं। भोलेनाथ की पूजा करें और शिवलिंग पर अपराजिता का एक ताजा फूल चढ़ाएं। इसके बाद, शिवलिंग पर पहले से चढ़ा हुआ कोई दूसरा अपराजिता का फूल (आशीर्वाद स्वरूप) अपने साथ घर ले आएं।क्या करें: इस फूल को घर के स्वच्छ स्थान पर सुखा लें। पूरी तरह सूख जाने के बाद इसे एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी, अलमारी या पैसे रखने वाले स्थान पर रख दें। माना जाता है कि यह उपाय धन को आकर्षित करता है, जिससे घर में बरकत बनी रहती है।3. सुख-समृद्धि और वैभव के लिए (विशेष पंचामृत अभिषेक)सावन में रोजाना या सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने की लोटे में एक विशेष विधि अपनाएं। तांबे या पीतल के लोटे में जल भरें और उसमें अपराजिता के फूल डाल दें। इसके साथ ही जल में थोड़ा सा कच्चा दूध, दही, शहद और अक्षत (बिना टूटे हुए चावल के दाने) मिला लें। अब इस पवित्र जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।क्यों इतना खास है अपराजिता का फूल?शास्त्रों के अनुसार, अपराजिता के फूल का धार्मिक दृष्टिकोण से अति उच्च स्थान है। 'अपराजिता' का अर्थ ही है जिसे कोई पराजित न कर सके। यह फूल वैसे तो सभी देवी-देवताओं को प्रिय है, लेकिन नीले रंग का होने के कारण यह नीलकंठ यानी भगवान शिव को बेहद प्रिय है। सावन के दुर्लभ संयोग में इस फूल के जरिए की गई पूजा का फल कई गुना अधिक होकर मिलता है।
भारतीय क्रूजर बाइक सेगमेंट की बेताज बादशाह रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) ने अपनी सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा बाइक क्लासिक 350 (Classic 350) को साल 2026 के लिए कुछ बेहद उपयोगी और शानदार अपडेट्स के साथ पेश किया है। कंपनी ने राइडर्स की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस बाइक में दो नए आधुनिक फीचर्स जोड़े हैं, जो आपके राइडिंग एक्सपीरियंस को कई गुना बेहतर बना देंगे।हालांकि, इन बदलावों को लेकर कंपनी ने एक शर्त रखी है। ये दोनों नए फीचर्स केवल डुअल-चैनल ABS (Dual-Channel ABS) वाले मॉडल्स में ही देखने को मिलेंगे। बेस सिंगल-चैनल ABS वेरिएंट खरीदने वाले ग्राहकों को इन नई सुविधाओं से वंचित रहना पड़ेगा। आइए जानते हैं क्या हैं ये नए बदलाव और अब कितनी है इस बाइक की नई कीमत:कीमत और वेरिएंट्स का पूरा विवरण (Ex-Showroom Prices)2026 रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 के नए अपग्रेड्स के बाद अलग-अलग वेरिएंट्स की एक्स-शोरूम कीमतें कुछ इस प्रकार हैं:वेरिएंट और मॉडल (Classic 350 Variants)चैनल टाइप (ABS)नए फीचर्स (Clutch & USB-C)संभावित एक्स-शोरूम कीमतRedditch Red (बेस मॉडल)सिंगल-चैनल ABSउपलब्ध नहीं₹1.87 लाखस्टार्टिंग डुअल-चैनल मॉडलडुअल-चैनल ABSउपलब्ध है₹1.95 लाख से शुरूEmerald Green (टॉप मॉडल)डुअल-चैनल ABSउपलब्ध है₹2.24 लाख तकये 2 नए फीचर्स कैसे बदल देंगे आपकी राइडिंग?असिस्ट और स्लिपर क्लच (Assist & Slipper Clutch):यह फीचर खासकर भारी शहरी ट्रैफिक (City Traffic) में रोजाना सफर करने वाले राइडर्स के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। असिस्ट क्लच मिलने से क्लच लीवर बेहद हल्का हो जाता है, जिससे बार-बार गियर बदलने पर भी हाथों में थकावट नहीं होती। वहीं, स्लिपर क्लच तेज रफ्तार के दौरान अचानक गियर डाउन करने पर (Downshifting) पिछले पहिए को लॉक होने या झटका खाने से बचाता है। इससे राइडर को बाइक पर बेहतरीन कंट्रोल और एक बेहद स्मूद राइड मिलती है।फास्ट USB Type-C चार्जिंग पोर्ट:कंपनी ने पुराने और धीमे USB पोर्ट को हटाकर अब आधुनिक USB Type-C पोर्ट दे दिया है। यह फीचर उन राइडर्स के लिए बेहद मददगार साबित होगा जो लंबी दूरी की यात्रा (Touring) करते समय या रोजाना ऑफिस जाते वक्त मोबाइल नेविगेशन का इस्तेमाल करते हैं। इससे आपका स्मार्टफोन बाइक चलते-चलते बेहद तेजी से चार्ज हो जाएगा।इंजन और मैकेनिकल पार्ट में कोई बदलाव नहींइन दो नए फीचर्स के अलावा रॉयल एनफील्ड ने क्लासिक 350 के ओरिजिनल मैकेनिकल स्ट्रक्चर या लुक से कोई छेड़छाड़ नहीं की है। बाइक का वो आइकॉनिक और विंटेज लुक पहले की तरह ही बरकरार रहेगा:दमदार J-Series इंजन: बाइक में पहले की तरह ही भरोसेमंद 349cc का J-Series सिंगल-सिलेंडर, एयर-ऑयल कूल्ड इंजन मिलता रहेगा। यह इंजन 20.2 bhp की अधिकतम पावर और 27 Nm का टॉर्क जनरेट करता है।सस्पेंशन और व्हील्स: आरामदेह राइडिंग पोजीशन के साथ इसमें आगे की तरफ टेलिस्कोपिक फोर्क और पीछे ट्विन शॉक एब्जॉर्बर सस्पेंशन सेटअप दिया गया है। बाइक में पुराने क्लासिक स्टाइल वाले 19-18 इंच के स्पोक व्हील्स (Spoke Wheels) का कॉम्बिनेशन जारी रहेगा।छोटे लेकिन बेहद सटीक अपडेट्स के साथ आई 2026 Royal Enfield Classic 350 अब रोजाना के इस्तेमाल और लंबी टूरिंग दोनों के लिए पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक, आधुनिक और आरामदायक बाइक बन चुकी है।
यदि आप कॉलेज स्टूडेंट हैं, पैरेंट्स हैं या फिर एजुकेटर (शिक्षक) हैं, और अपने लिए एक नया मैकबुक या आईपैड खरीदने का मन बना रहे हैं, तो एपल (Apple) आपके लिए एक बेहद शानदार मौका लेकर आया है। एपल की ऑफिशियल वेबसाइट और आधिकारिक रिटेल स्टोर्स पर 'बैक टू स्कूल' (Back to School Sale 2026) सेल लाइव हो चुकी है।यह सेल 16 जुलाई से शुरू होकर 27 अगस्त 2026 तक चलेगी। इस धमाकेदार ऑफर के तहत पात्र ग्राहकों को न केवल डिवाइस पर भारी डिस्काउंट मिल रहा है, बल्कि कंपनी ₹12,900 तक की कीमत वाली प्रीमियम एक्सेसरी बिल्कुल फ्री में दे रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सेल Apple द्वारा भारत में मैकबुक और आईपैड की कीमतें बढ़ाए जाने के कुछ ही हफ्तों बाद आई है, जिससे स्टूडेंट्स को बढ़ी हुई कीमतों से बड़ी राहत मिलेगी।Apple MacBook Air और Pro पर मिल रही हैं ये टॉप डील्सयदि आप पढ़ाई या प्रोफेशनल काम के लिए मैकबुक (MacBook) खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो एजुकेशन सेविंग्स के तहत आपको डिवाइस के डिस्काउंट के साथ AirPods 4 या AirTag 4-Pack बिल्कुल फ्री चुनने का मौका मिलेगा।यदि आप फ्री वाले नॉर्मल एयरपोड्स के बजाय अपग्रेड करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए विकल्पों के अनुसार एक्स्ट्रा चार्ज देकर ऐसा कर सकते हैं:AirPods 4 (Active Noise Cancellation - ANC): इसके लिए आपको ₹5,000 अतिरिक्त चुकाने होंगे।AirPods Pro 3: इस प्रीमियम मॉडल के लिए आपको ₹13,000 अतिरिक्त देने होंगे।कीमतों में बम्पर कटौती (MacBook Price Comparison):मैकबुक मॉडल (MacBook Models)सामान्य भारतीय कीमत (Standard Price)एजुकेशन ऑफर कीमत (Education Price)सीधी बचत (Net Savings)13-इंच MacBook Air M5₹1,49,900₹1,37,900₹12,00014-इंच MacBook Pro M5₹2,39,900₹2,27,900₹12,000iPad Air और iPad Pro पर पाएं Apple Pencil Pro बिल्कुल मुफ्त!टैबलेट लवर्स और डिजाइनर्स के लिए भी यह सेल किसी वरदान से कम नहीं है। यदि आप इस सेल के दौरान नया आईपैड (iPad) खरीदते हैं, तो आपको ₹12,900 की कीमत वाली Apple Pencil Pro बिल्कुल फ्री मिल सकती है।इसके अलावा, ग्राहक पेंसिल के बदले दूसरे विकल्प भी चुन सकते हैं, जिसके लिए उन्हें मामूली एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा:AirTag 4-Pack या नॉर्मल AirPods: इसके लिए केवल ₹2,000 अतिरिक्त देने होंगे।AirPods 4 (ANC वेरिएंट): इसके लिए ₹7,000 अतिरिक्त चुकाने होंगे।AirPods Pro 3: इस टॉप-एंड मॉडल के लिए ₹15,000 अतिरिक्त देने होंगे।आईपैड पर मिल रहा डिस्काउंट (iPad Price Comparison):आईपैड मॉडल और वेरिएंट (iPad Variant)सामान्य भारतीय कीमत (Standard Price)एजुकेशन ऑफर कीमत (Education Price)सीधी बचत (Net Savings)11-इंच iPad Air M4 (128GB)₹89,900₹83,900₹6,00011-इंच iPad Pro M5 (256GB)₹1,39,900₹1,27,900₹12,000कैसे उठाएं इस ऑफर का लाभ और कहां चेक करें एलिजिबिलिटी?चूंकि यह एक विशेष एजुकेशन ऑफर है, इसलिए इसका लाभ केवल कॉलेज में पढ़ रहे छात्र, उनके माता-पिता और किसी भी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान के टीचर्स व स्टाफ ही उठा सकते हैं।एलिजिबिलिटी चेक: इस ऑफर का फायदा लेने के लिए आपको एपल की आधिकारिक वेबसाइट (Apple India Official Website) पर जाकर UNiDAYS के जरिए अपनी स्टूडेंट या एजुकेटर आईडी को वेरिफाई करना होगा।रिटेल स्टोर्स: इसके अलावा आप दिल्ली या मुंबई स्थित एपल के ऑफिशियल रिटेल स्टोर्स (Apple BKC / Apple Saket) पर जाकर भी अपने जरूरी दस्तावेज दिखाकर इस छूट और फ्री गिफ्ट्स का सीधे लाभ उठा सकते हैं।
टेक दिग्गज गूगल (Google) ने अपने आगामी स्मार्टफोन लवर्स के लिए उत्साह को दोगुना कर दिया है। 12 अगस्त को आयोजित होने वाले अपने बहुप्रतीक्षित 'मेड बाय गूगल' (Made by Google) इवेंट से ठीक पहले कंपनी ने अपनी नेक्स्ट जेनरेशन स्मार्टफोन सीरीज का पहला ऑफिशियल टीज़र वीडियो जारी कर दिया है।इस शॉर्ट टीज़र में गूगल पिक्सल 11 प्रो (Google Pixel 11 Pro) की शुरुआती झलक दिखाई गई है, जो एक बेहद खूबसूरत और नए गोल्ड फिनिश (Gold Finish) कलर में नजर आ रहा है। इसके साथ ही गूगल स्टोर पर एक डेडिकेटेड लैंडिंग पेज लाइव करके लॉन्चिंग डेट पर भी मुहर लगा दी गई है। इस बार कंपनी का मुख्य फोकस हार्डवेयर अपग्रेड के साथ-साथ Gemini Intelligence पर रहने वाला है, यानी AI एक बार फिर पिक्सल इकोसिस्टम के केंद्र में होगा।क्या है 'Pixel Glow' तकनीक जो LED फ्लैश की लेगी जगह?इस बार पिक्सल 11 सीरीज के डिजाइन में सबसे बड़ा और अनोखा बदलाव इसके रियर कैमरा बार में देखने को मिला है, जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींचा है:सर्कुलर लाइट रिंग: टीज़र के मुताबिक, कैमरा सेंसर्स के ठीक बगल में एक चमकदार गोल लाइट रिंग (Circular Light Ring) को इंटीग्रेटेड किया गया है, जिसे कंपनी ने 'Pixel Glow' नाम दिया है।मल्टी-पर्पज फीचर: टेक एक्सपर्ट्स और रिपोर्ट्स का मानना है कि यह नया हार्डवेयर एलिमेंट स्मार्टफोन में मिलने वाले पारंपरिक LED फ्लैश को पूरी तरह रिप्लेस कर सकता है।विजुअल नोटिफिकेशन: फ्लैश के अलावा यह एक एडवांस विजुअल नोटिफिकेशन सिस्टम की तरह भी काम करेगा। दिलचस्प बात यह है कि इस रिंग का कलरफुल लाइटिंग इफेक्ट हूबहू Google के Gemini AI इंटरफ़ेस में इस्तेमाल होने वाले एनिमेटेड रंगों से मेल खाता है, जो फोन को एक बेहद प्रीमियम और फ्यूचरिस्टिक लुक देता है।पिक्सल 11 सीरीज में शामिल हो सकते हैं ये 4 धांसू मॉडल्सलीक्स और रिपोर्ट्स की मानें तो इस बार गूगल अपनी फ्लैगशिप सीरीज के तहत एक साथ चार अलग-अलग वेरिएंट्स बाजार में उतारने की तैयारी कर रहा है:Google Pixel 11 (वैनिला मॉडल)Google Pixel 11 Pro (प्रो फीचर्स के साथ)Google Pixel 11 Pro XL (बड़ी स्क्रीन के साथ)Google Pixel 11 Pro Fold (नेक्स्ट जेनरेशन फोल्डेबल फोन)पहली बार दिखेगा 2nm चिपसेट का दम (संभावित स्पेसिफिकेशन)गूगल पिक्सल 11 सीरीज सिर्फ लुक के मामले में ही नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस के मामले में भी एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाली है।हार्डवेयर / फीचर्ससंभावित डिटेल्स और अपग्रेडप्रोसेसर / चिपसेटइन सभी स्मार्टफोन्स में गूगल का नेक्स्ट-जेन Tensor G6 चिपसेट देखने को मिलेगा, जो अत्याधुनिक 2nm फैब्रिकेशन प्रोसेस पर तैयार किया गया है। यह फोन की स्पीड और बैटरी एफिशिएंसी को बेमिसाल बनाएगा।नेटवर्क मॉडेमबेहतर कनेक्टिविटी, फास्ट इंटरनेट स्पीड और कॉलिंग के लिए इसमें MediaTek M90 5G मॉडेम दिए जाने की पूरी उम्मीद है।एआई (AI) क्षमताएंGemini Intelligence के जरिए फोन में कई ऐसे ऑन-डिवाइस एआई फीचर्स मिलेंगे जो फोटोग्राफी, वॉयस असिस्टेंस और रोजमर्रा के टास्क को बेहद आसान बना देंगे।भारतीय समय के अनुसार कब और कहां देखें लाइव इवेंट?गूगल ने वैश्विक मीडिया को Gemini Intelligence की ब्रांडिंग के साथ इनविटेशन भेजना शुरू कर दिया है। इस बड़े कीनोट इवेंट की ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी।भारतीय दर्शकों (Indian Audience) के लिए यह इवेंट 13 अगस्त 2026 को सुबह 3:30 बजे लाइव देखा जा सकेगा। यदि आप भी एआई और प्रीमियम स्मार्टफोन के शौकीन हैं, तो इस तारीख को अपने कैलेंडर में जरूर मार्क कर लें।
देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) के पोस्टपेड ग्राहकों के लिए एक बड़ा झटका देने वाली खबर सामने आ रही है। एयरटेल ने अपने रीटेल पोर्टफोलियो से ₹549 वाला लोकप्रिय इंडिविजुअल पोस्टपेड प्लान (Individual Postpaid Plan) पूरी तरह से डिस्कंटीन्यू (बंद) कर दिया है।कंपनी की तरफ से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा (Official Announcement) नहीं की गई है, लेकिन एयरटेल की आधिकारिक वेबसाइट और 'एयरटेल थैंक्स ऐप' (Airtel Thanks App) से इस प्लान को चुपचाप हटा दिया गया है। कंपनी के इस कदम को सीधे तौर पर एक 'हिडन टैरिफ हाइक' (Tariff Hike) यानी कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उन मध्यम वर्गीय ग्राहकों का बजट बिगड़ना तय है जिनका काम एंट्री-लेवल प्लान से नहीं चल पाता था।अब ग्राहकों के पास बचे केवल ये 2 मुख्य विकल्प (Airtel New Postpaid Portfolio)₹549 वाले प्लान के बंद होने के बाद, अब एयरटेल के पोस्टपेड पोर्टफोलियो में ग्राहकों के लिए विकल्प काफी सीमित हो गए हैं:₹449 का प्लान (अब एकमात्र इंडिविजुअल एंट्री-लेवल ऑप्शन): जो ग्राहक केवल अपने अकेले के लिए नया एयरटेल पोस्टपेड कनेक्शन लेना चाहते हैं, उनके लिए अब सबसे सस्ता विकल्प ₹449 प्रति महीना (प्लस जीएसटी) का रह गया है।₹699 का प्लान (अगला सीधा विकल्प): जिन ग्राहकों की डेटा जरूरतें ₹449 वाले प्लान से पूरी नहीं हो पाती थीं और वे ₹549 वाला प्लान चुनते थे, उन्हें अब मजबूरी में सीधे ₹699 प्रति महीना (प्लस जीएसटी) वाले प्लान पर शिफ्ट होना पड़ेगा।जानिए अब पोर्टफोलियो में बचे इन दोनों प्लान्स के फायदे (Benefits Comparison)यदि आप एयरटेल का नया पोस्टपेड कनेक्शन लेने की सोच रहे हैं, तो वर्तमान में उपलब्ध दोनों प्लान्स के बेनेफिट्स की तुलना नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:फीचर्स और बेनिफिट्सएयरटेल ₹449 प्लान (इंडिविजुअल)एयरटेल ₹699 प्लान (फैमिली प्लान)मासिक शुल्क (Rent)₹449/महीना (+ GST)₹699/महीना (+ GST)कनेक्शन / SIM संख्याकेवल 1 (प्राइमरी यूजर)2 SIM (1 प्राइमरी + 1 फ्री ऐड-ऑन)कॉलिंग और SMSअनलिमिटेड (लोकल, STD, रोमिंग) + 100 SMS/दिनअनलिमिटेड (दोनों मेंबर्स के लिए) + 100 SMS/दिनडेटा बेनिफिट्सअनलिमिटेड 4G और 5G डेटाअनलिमिटेड 4G और 5G डेटा (सभी मेंबर्स के लिए)नेटवर्क टेक्नोलॉजी5G स्लाइसिंग के साथ फास्ट लेन एक्सेस5G स्लाइसिंग के साथ फास्ट लेन एक्सेसक्लाउड व डिजिटल ऐप्सGoogle One (100GB) - 6 महीने, Airtel Xstream Play Premium - 3 महीनेGoogle One (100GB) - 6 महीने, Airtel Xstream Play Premium - 3 महीनेक्रिएटिव बेनिफिट्सAdobe Express Premium - 12 महीनेAdobe Express Premium - 12 महीनेअतिरिक्त OTT ऐप्सउपलब्ध नहींAmazon Prime Mobile (6 महीने) + JioHotstar Mobile (1 साल)सुरक्षा और अन्य फीचर्सफ्रॉड लिंक ब्लॉकिंग, स्पैम प्रोटेक्शन, OTP अलर्ट, हेलो ट्यून्स, ब्लू रिबन बैग ट्रैकिंगफ्रॉड लिंक ब्लॉकिंग, स्पैम प्रोटेक्शन, OTP अलर्ट, हेलो ट्यून्स, ब्लू रिबन बैग ट्रैकिंग₹699 वाला फैमिली प्लान क्यों साबित हो सकता है फायदे का सौदा?भले ही ₹549 वाला इंडिविजुअल प्लान बंद होने से सिंगल यूजर्स को झटका लगा हो, लेकिन दो लोगों के इस्तेमाल के लिए ₹699 वाला फैमिली प्लान काफी किफायती बैठता है।प्रति मेंबर खर्च: चूंकि इस प्लान में 2 सिम कार्ड (1 प्राइमरी और 1 ऐड-ऑन) मिलते हैं, इसलिए प्रति व्यक्ति का मासिक खर्च लगभग ₹350 के करीब आता है, जो एंट्री-लेवल इंडिविजुअल प्लान से भी सस्ता है।अतिरिक्त प्राइम सब्सक्रिप्शन: इस प्लान में ₹449 वाले प्लान के मुकाबले अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime) और जियोहॉटस्टार (JioHotstar) का बंडल सब्सक्रिप्शन अतिरिक्त मिलता है, जो मनोरंजन के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन वैल्यू-फॉर-मनी डील साबित हो सकता है।
NEET UG 2026 Result : 11.21 लाख अभ्यर्थी सफल, 58% से ज्यादा बेटियां पास, NTA ने जारी किया रिजल्ट
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) यानी NEET UG 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। एजेंसी ने तय समय के भीतर रिजल्ट जारी किया है, ताकि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश और काउंसलिंग की प्रक्रिया निर्धारित शेड्यूल के ...
भारत में लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) को हमेशा से भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित साधन माना जाता रहा है। लेकिन हाल के दिनों में देश के इंश्योरेंस सेक्टर में एक बेहद हैरान करने वाला और चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। बड़ी संख्या में लोग अपनी बीमा पॉलिसी को उसकी मैच्योरिटी (अवधि पूरी होने) से पहले ही बंद यानी सरेंडर कर रहे हैं।भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट 2026 (FSR 2026) के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में बीमा कंपनियों ने मैच्योरिटी पर जितना कुल भुगतान किया, उससे कहीं अधिक रकम लोगों ने पॉलिसी को बीच में ही सरेंडर करके और आंशिक निकासी (Withdrawal) के रूप में कंपनियों से वापस निकाल ली। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति ग्राहकों के असंतोष, गलत तरीके से पॉलिसी बेचने (Mis-selling) और अवास्तविक उम्मीदों का सीधा परिणाम है।RBI की रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े (FY 2025-26)केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा किए गए कुल क्लेम सेटलमेंट और भुगतानों का गणित पूरी तरह बदल गया है:भुगतान का प्रकार (Payout Type)कुल भुगतान में हिस्सेदारी (Share %)पॉलिसी सरेंडर और निकासी (Surrender & Withdrawal)38.3%मैच्योरिटी बेनिफिट (Maturity Benefit)36.9%आरबीआई ने इस ट्रेंड पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि लगातार बढ़ती सरेंडर दर (Surrender Rate) इस बात का साफ इशारा है कि या तो ग्राहक अपने इंश्योरेंस प्रॉडक्ट से संतुष्ट नहीं हैं, या उन्हें पॉलिसी बेचते समय सही और पारदर्शी जानकारी नहीं दी गई, अथवा वे बाजार में मौजूद अन्य आकर्षक निवेश विकल्पों (जैसे म्यूचुअल फंड या इक्विटी) की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।हर दो में से एक ग्राहक 5 साल से पहले तोड़ देता है दम; IRDAI की रिपोर्टबीमा नियामक आईआरडीएआई (IRDAI) के आंकड़े इस संकट की गंभीरता को और बढ़ा देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में केवल करीब आधी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियां ही अपने 5 साल (60 महीने) का सफर पूरा कर पाती हैं। इसका मतलब है कि देश का हर दूसरा पॉलिसीधारक अपनी पॉलिसी की पांचवीं वर्षगांठ आने से पहले ही या तो प्रीमियम भरना बंद कर देता है या भारी नुकसान उठाकर पॉलिसी सरेंडर कर देता है।वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में देश की प्रमुख निजी बीमा कंपनियों के 61वें महीने के पर्सिस्टेंसी रेशियो (Persistency Ratio - ग्राहकों के टिके रहने की दर) के आंकड़े कुछ इस प्रकार रहे:ICICI Prudential Life: 58.8% (बाजार में सबसे आगे)Bandhan Life: 57.6%Canara HSBC Life: 57.1%Tata AIA Life: 56.7%Kotak Mahindra Life: 55.3%आखिर मैच्योरिटी से पहले क्यों दम तोड़ रही हैं पॉलिसियां? (मुख्य कारण)सुरक्षा के बदले 'रिटर्न' का लालच (Mis-selling): 'इंश्योरेंस समाधान' की सीओओ शिल्पा अरोड़ा के अनुसार, लाइफ इंश्योरेंस को अक्सर सुरक्षा (Protection) के बजाय एक शुद्ध निवेश उत्पाद (Investment Product) की तरह आक्रामक रूप से बेचा जाता है। ग्राहकों को मैच्योरिटी पर मिलने वाले भारी रिटर्न का सपना दिखाया जाता है, जबकि उन्हें यह नहीं समझाया जाता कि यह मूल रूप से लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा के लिए बनाया गया साधन है।ग्राहकों के भरोसे में भारी कमी: '1 फाइनेंस' की पार्टनर मंजू ढाके का मानना है कि इतनी ऊंची सरेंडर दर सीधे तौर पर ग्राहकों के भरोसे में कमी को दर्शाती है। जब लोग शुरुआती 2-3 वर्षों में ही पॉलिसी छोड़ते हैं, तो साफ है कि उन्हें वह उत्पाद नहीं मिला जिसकी एजेंट द्वारा उम्मीद जगाई गई थी।बदलती आर्थिक प्राथमिकताएं और इमरजेंसी: कोटक लाइफ इंश्योरेंस के चीफ डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर पीयूष त्रिवेदी के मुताबिक, हर मामले में मिस-सेलिंग ही जिम्मेदार नहीं होती। कई बार जीवन में अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी छूटना, बच्चों की उच्च शिक्षा, अचानक नकदी की जरूरत या भारी कर्ज चुकाने जैसी बदलती परिस्थितियों के कारण भी लोग विवश होकर पॉलिसी बंद कर देते हैं।कंपनियों को भी दोहरा झटका: जल्दी पॉलिसी बंद होने से सिर्फ ग्राहकों का ही पैसा नहीं डूबता, बल्कि बीमा कंपनियों को भी भारी वित्तीय नुकसान होता है। नए नियामक नियमों के तहत कंपनियों को एजेंटों और बैंकों को शुरुआती कमीशन ज्यादा देना पड़ता है। ऐसे में अगर ग्राहक कुछ ही वर्षों में पॉलिसी छोड़ देता है, तो कंपनियों की ऑपरेशनल लागत (Cost) बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।नई पॉलिसी खरीदने से पहले इन 4 बातों का रखें विशेष ध्यानयदि आप भी अपने या परिवार के लिए नई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने का विचार कर रहे हैं, तो विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई इन बातों को गांठ बांध लें:उद्देश्य साफ रखें: सबसे पहले यह समझें कि इंश्योरेंस निवेश नहीं, बल्कि जोखिम से सुरक्षा का माध्यम है। निवेश के लिए म्यूचुअल फंड या पीपीएफ (PPF) जैसे विकल्प बेहतर हैं।पर्सिस्टेंसी रेशियो जरूर जांचें: पॉलिसी लेने से पहले उस कंपनी का पर्सिस्टेंसी रेशियो जरूर देखें। यह रेशियो जितना अधिक होगा, इसका मतलब है कि उस कंपनी के ग्राहक उतने ही लंबे समय तक जुड़े रहते हैं और संतुष्ट हैं।नियम और शर्तें पढ़ें: प्रीमियम भरने की कुल अवधि, लॉक-इन पीरियड और बीच में पॉलिसी छोड़ने पर मिलने वाली 'सरेंडर वैल्यू' के नियमों को एजेंट के भरोसे छोड़ने के बजाय खुद दस्तावेज में अच्छी तरह पढ़ें।अवास्तविक रिटर्न से बचें: यदि कोई एजेंट आपको 3 से 4 साल में पैसा दोगुना करने या गारंटीड असाधारण रिटर्न का दावा करता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।बीमा उद्योग के जानकारों का मानना है कि अब समय आ गया है जब इंश्योरेंस कंपनियों को सिर्फ नए टारगेट और पॉलिसियां बेचने के पीछे भागने के बजाय, ग्राहकों को उनकी वास्तविक जरूरत के हिसाब से सही सलाह देने और पूरी पारदर्शिता बरतने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
केंद्र सरकार के 50 लाख से ज्यादा कर्मचारियों और 69 लाख से अधिक पेंशनर्स के लिए आने वाला समय बड़ी आर्थिक सौगात लेकर आ सकता है। आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के बाद से ही सरकारी गलियारों में सैलरी (Salary) और भत्तों में होने वाले इजाफे को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हैं।इस बीच, सबसे ज्यादा उत्सुकता हाउस रेंट अलाउंस (HRA - मकान किराया भत्ता) को लेकर देखी जा रही है। ताजा वित्तीय अनुमानों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि सरकार नए वेतन आयोग में 2.0 का फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) लागू करने के फॉर्मूले को हरी झंडी दे देती है, तो पे-मैट्रिक्स के लेवल-1 से लेकर लेवल-5 तक के कर्मचारियों के HRA में बंपर उछाल देखने को मिल सकता है। अलग-अलग शहरों के आधार पर यह भत्ता अधिकतम ₹10,800 से लेकर ₹17,520 प्रति माह तक पहुंच सकता है।आखिर कैसे तय होता है केंद्रीय कर्मचारियों का HRA?हाउस रेंट अलाउंस (HRA) केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी (मूल वेतन) का वह महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो उन्हें किराए के मकान का खर्च उठाने के लिए सरकार द्वारा दिया जाता है। इसका एक बड़ा फायदा यह भी है कि किराए के घर में रहने वाले कर्मचारी इनकम टैक्स एक्ट के नियमों के तहत इस भत्ते पर टैक्स छूट (Tax Exemption) का दावा भी कर सकते हैं।सरकार ने देश के सभी शहरों को वहां की जनसंख्या (Population) के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया है, जिसके आधार पर HRA की दरें तय होती हैं:X श्रेणी (Metros): दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु जैसे 50 लाख से अधिक की आबादी वाले बड़े महानगर।Y श्रेणी (Tier-2 Cities): 5 लाख से लेकर 50 लाख तक की आबादी वाले बड़े और विकसित शहर।Z श्रेणी (Tier-3/Rural): 5 लाख से कम आबादी वाले छोटे शहर, कस्बे या ग्रामीण इलाके।लेवल 1 से 5 के कर्मचारियों को कितना मिलेगा HRA? (संभावित कैलकुलेशन)यदि आगामी 8वें वेतन आयोग में 2.0 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो निचले और मध्यम स्तर (लेवल 1 से 5) के कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। संभावित सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शहरों की श्रेणी के मुताबिक मिलने वाला मासिक HRA इस प्रकार हो सकता है:पे-मैट्रिक्स लेवल (Pay Level)X श्रेणी के महानगर (अधिकतम)Y श्रेणी के शहर (मध्यम)Z श्रेणी के छोटे शहर (न्यूनतम)लेवल-1 (शुरुआती स्तर)₹10,800 / महीना₹7,200 / महीना₹3,600 / महीनालेवल-5 (मध्यम स्तर)₹17,520 / महीना₹11,680 / महीना₹5,840 / महीनानोट: यह इजाफा फिटमेंट फैक्टर 2.0 के आधार पर अनुमानित है, जो कर्मचारियों के मासिक बजट को बड़ी राहत देगा।कर्मचारी संगठनों की क्या हैं सरकार से बड़ी मांगें?देश के विभिन्न शहरों में लगातार बढ़ती कमरतोड़ महंगाई को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारी संगठन सरकार पर अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं। ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने सरकार को सौंपे अपने सुझावों में कहा है कि वर्तमान में मिलने वाले भत्ते बढ़ती महंगाई के सामने नाकाफी हैं।संगठन की मुख्य मांगें:HRA की प्रतिशत दर में वृद्धि: संगठन की सीधी मांग है कि HRA की दरों को संशोधित कर X श्रेणी के शहरों में 36 प्रतिशत, Y श्रेणी में 24 प्रतिशत और Z श्रेणी में 12 प्रतिशत कर दिया जाए।महंगाई भत्ते (DA) से जुड़ाव: संगठनों की यह भी मजबूत दलील है कि जैसे ही सरकार द्वारा महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की जाए, ठीक उसी अनुपात और समय पर HRA भी अपने आप (Automatically) रिवाइज हो जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों की जेब पर महंगाई का कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।कब तक धरातल पर लागू होंगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?आपको बता दें कि 8वें वेतन आयोग ने अपनी आधिकारिक कार्यप्रणाली और समीक्षा का काम 3 नवंबर 2025 से शुरू कर दिया है। हालांकि, पिछले वेतन आयोगों के इतिहास और काम करने के जटिल तरीके को देखें तो सभी विभागों से डेटा जुटाने और अंतिम मसौदा (Draft Report) तैयार करने में काफी लंबा वक्त लगता है।आर्थिक और बाजार के जानकारों का मानना है कि आठवां वेतन आयोग अपनी अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट फरवरी से अप्रैल 2027 के बीच केंद्र सरकार को सौंप सकता है। इसके बाद इस रिपोर्ट को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद ही नई बढ़ी हुई दरें और एरियर कर्मचारियों के खातों में आना शुरू होंगे।
बिहार में रहने वाले आम नागरिकों, नौकरीपेशा परिवारों और छोटे व्यापारियों के लिए बीता एक महीना भारी-भरकम आर्थिक बदलावों वाला रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) की अगुवाई में बिहार कैबिनेट ने एक के बाद एक ऐसे कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर राज्य की जनता की जेब और उनके मासिक बजट पर पड़ने जा रहा है।सरकार ने जमीन के सर्किल रेट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी करने से लेकर होल्डिंग टैक्स, मोटर वाहन टैक्स, स्टेट हाईवे टोल और यहाँ तक कि ग्रामीण इलाकों के लिए 'पंचायत टैक्स' को भी मंजूरी दे दी है। इसका मतलब साफ है कि यदि आप बिहार में जमीन खरीदने की सोच रहे हैं, नया वाहन (बाइक या ऑटो) लेने वाले हैं, पटना में अपना मकान रखते हैं या गांवों में रहते हैं—तो सरकार का कोई न कोई नया नियम आपको आर्थिक रूप से प्रभावित जरूर करेगा। आइए इन 5 बड़े फैसलों को विस्तार से समझते हैं:1. जमीन खरीदना हुआ दोगुना महंगा, सर्किल रेट (MVR) में भारी उछालबिहार सरकार ने मिनिमम वैल्यू रजिस्टर (MVR) यानी जमीन के सरकारी सर्किल रेट में बड़ा संशोधन लागू कर दिया है। चूंकि किसी भी जमीन की रजिस्ट्री की फीस और स्टांप ड्यूटी उसके सर्किल रेट के आधार पर ही तय होती है, इसलिए इस फैसले से जमीन खरीदना अब बहुत महंगा हो गया है:शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ोतरी: नई व्यवस्था के तहत शहरी इलाकों में जमीन की न्यूनतम सरकारी कीमतों में सीधे 100 प्रतिशत (दोगुनी) तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। वहीं, ग्रामीण और पेरिफेरल (शहर से सटे) क्षेत्रों में सर्किल रेट को 1.6 गुना तक बढ़ा दिया गया है।इन शहरों पर सबसे ज्यादा असर: पटना और रक्सौल जैसे प्रमुख शहरों के कई प्राइम लोकेशंस पर जमीन की सरकारी कीमतें रातों-रात दोगुनी हो चुकी हैं, जिससे आम आदमी के लिए घर बनाने का सपना और महंगा हो गया है।2. पटना में 30 साल बाद बढ़ा होल्डिंग टैक्स (Holding Tax)राजधानी पटना के मकान मालिकों पर भी सरकार ने अतिरिक्त टैक्स का बोझ डाल दिया है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने होल्डिंग टैक्स की गणना के लिए उत्तरदायी वार्षिक किराया मूल्य (Annual Rental Value - ARV) में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी को हरी झंडी दे दी है।1995 के बाद पहला बड़ा बदलाव: पटना में होल्डिंग टैक्स के ढांचे में वर्ष 1995 के बाद यानी पूरे 30 साल बाद इतना बड़ा संशोधन किया गया है।दायरा: मुख्य सड़क, प्रधान मुख्य सड़क और अन्य लिंक रोड पर स्थित सभी आवासीय (Residential), व्यावसायिक (Commercial) और अन्य संपत्तियां इसके दायरे में आएंगी। टैक्स का यह नियम पक्के मकानों के साथ-साथ एस्बेस्टस और कच्चे मकानों पर भी प्रभावी होगा।3. बिहार के स्टेट हाईवे (SH) और बड़े पुलों पर भी देना होगा टोल टैक्सअब तक बिहार के लोगों को मुख्य रूप से केवल नेशनल हाईवे (NH) पर ही टोल टैक्स देना पड़ता था, लेकिन अब राज्य सरकार अपनी सड़कों से भी राजस्व वसूलने की तैयारी में है। कैबिनेट ने ‘पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली-2026’ को मंजूरी दे दी है।इसके तहत बिहार के स्टेट हाईवे, बड़े पुलों और नए बायपास पर सफर करने के लिए वाहन श्रेणी के अनुसार प्रति किलोमीटर की दर से नीचे दिए गए चार्ट के मुताबिक टोल देना होगा:वाहन की श्रेणी (Vehicle Type)प्रस्तावित टोल दर (प्रति किलोमीटर)कार, जीप और हल्के वाहन₹1.25 / किमीछोटे कमर्शियल वाहन (Mini Trucks)₹2.00 / किमीबस और दो एक्सल वाले ट्रक₹4.25 / किमीभारी व्यावसायिक वाहन (Heavy Trucks)₹6.65 / किमीसात एक्सल वाले विशाल वाहन₹8.10 / किमीनोट: फिलहाल इस नियमावली को केवल कैबिनेट की मंजूरी मिली है और इसे धरातल पर लागू किया जाना बाकी है। लागू होने के बाद माल ढुलाई (Freight) महंगी होगी, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।4. नई बाइक, स्कूटर और ऑटो रिक्शा खरीदना भी हुआ महंगायदि आप अपने लिए नई मोटरसाइकिल या ऑटो खरीदने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए भी आपको पहले से अधिक पैसे चुकाने होंगे। सरकार ने मोटर वाहन कर (Motor Vehicle Tax) में निम्नलिखित संशोधन किए हैं:दोपहिया वाहन: नया बाइक या स्कूटर खरीदने पर अब 1 प्रतिशत अतिरिक्त मोटर वाहन टैक्स देना होगा, जिससे गाड़ियों की ऑन-रोड कीमत बढ़ जाएगी।तिपहिया वाहन: ऑटो रिक्शा या अन्य तीनपहिया व्यावसायिक वाहन खरीदने वालों पर सीधा ₹1,000 का अतिरिक्त टैक्स फिक्स कर दिया गया है।सरकार का तर्क: इस अतिरिक्त टैक्स से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल राज्य के सड़क बुनियादी ढांचे (Road Infrastructure) को दुरुस्त करने और विकास कार्यों में किया जाएगा।5. अब गांवों में भी लगेगा 'पंचायत टैक्स'; हर घर से होगी वसूलीबिहार सरकार ने ग्रामीण विकास के ढांचे को बदलने के लिए 'ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली-2026' को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब ग्राम पंचायतों को अपने स्तर पर ₹50 से लेकर ₹5,000 तक के विभिन्न टैक्स और यूजर चार्ज वसूलने की कानूनी शक्ति मिल गई है।किस पर कितना लगेगा सालाना टैक्स:पक्के मकान पर: ₹100 वार्षिक टैक्स।अर्ध-पक्के मकान पर: ₹50 वार्षिक टैक्स।प्रधानमंत्री आवास योजना के घर: ₹25 वार्षिक टैक्स।सफाई और जलापूर्ति शुल्क: हर घर से ₹30 सफाई शुल्क और ₹30 जलापूर्ति (Water Supply) शुल्क मासिक/वार्षिक आधार पर तय किया गया है।कमर्शियल यूनिट्स पर भी शिकंजा:गांवों में स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों जैसे पेट्रोल पंप, रसोई गैस एजेंसी (LPG Agency), ईंट भट्ठा (Brick Kiln) और सिनेमा हॉल पर प्रतिवर्ष ₹5,000 तक का भारी व्यावसायिक शुल्क लगाया जाएगा। इसके अलावा, पंचायत क्षेत्रों में लगने वाले होर्डिंग्स और विज्ञापनों पर भी पंचायतें टैक्स वसूल सकेंगी।आखिर क्यों टैक्स बढ़ा रही है बिहार सरकार?इन सभी ताबड़तोड़ फैसलों पर सरकार का कहना है कि राज्य के विकास की गति को तेज करने के लिए राजस्व (Revenue) बढ़ाना बेहद अनिवार्य हो गया है। पंचायत टैक्स जैसे नियमों से स्थानीय ग्रामीण निकाय (Local Bodies) आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे और उन्हें छोटी-छोटी विकास योजनाओं के लिए सीधे राज्य या केंद्र सरकार के फंड पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।हालांकि, ग्राउंड रियलिटी और आम आदमी के नजरिए से देखें तो पिछले एक महीने के भीतर बैक-टू-बैक लिए गए इन फैसलों ने आम जनता, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों के घरेलू बजट को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। यदि आप भी किसी निजी या सरकारी संस्थान में काम करते हैं और 10 साल की सेवा पूरी करने से पहले ही नौकरी छोड़ चुके हैं या बदलने का मन बना रहे हैं, तो यह खबर सीधे तौर पर आपकी जेब और वित्तीय भविष्य से जुड़ी है।श्रम और रोजगार मंत्रालय ने पुरानी पेंशन योजना (EPS 1995) के स्थान पर अब पूरी तरह से नई ‘कर्मचारी पेंशन योजना, 2026’ (EPS 2026) को मंजूरी देकर लागू कर दिया है। 29 जून 2026 से प्रभावी हो चुके इस नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बाद अपनी पेंशन का एकमुश्त पैसा (Lump-sum Amount) तुरंत नहीं मिलेगा, बल्कि इसके लिए एक अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि (Waiting Period) तय कर दी गई है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह नया नियम क्या है और आपकी जमा-पूंजी पर इसका क्या असर पड़ने वाला है।मासिक पेंशन का बुनियादी नियम: 10 साल की नौकरी आज भी जरूरीईपीएफओ के मूल ढांचे के अनुसार, रिटायरमेंट के बाद जीवनभर मासिक पेंशन (Monthly Pension) का लाभ उठाने के लिए किसी भी कर्मचारी की कुल सेवा अवधि (Service Period) कम से कम 10 वर्ष होनी अनिवार्य है। जो लोग 10 साल से पहले नौकरी छोड़ देते हैं, वे हर महीने मिलने वाली रेगुलर पेंशन के हकदार नहीं होते। नई ईपीएस 2026 योजना में भी इस बुनियादी नियम को यथावत रखा गया है।हालांकि, 10 साल से कम काम करने वाले कर्मचारियों का पैसा डूबता नहीं है, सरकार उन्हें दो मजबूत विकल्प देती है:विड्रॉल बेनिफिट (Withdrawal Benefit): कर्मचारी अपनी पेंशन फंड में जमा राशि को एकमुश्त ब्याज सहित निकाल सकता है।स्कीम सर्टिफिकेट (Scheme Certificate): यदि कर्मचारी कुछ समय बाद दोबारा किसी ईपीएफओ कवर वाली कंपनी में नई नौकरी शुरू करता है, तो इस सर्टिफिकेट की मदद से उसकी पुरानी नौकरी का कार्यकाल नई नौकरी में जोड़ दिया जाता है। इससे भविष्य में 10 साल की कुल सर्विस पूरी करना और मासिक पेंशन का हकदार बनना बेहद आसान हो जाता है।क्या है नया 36 महीने (3 साल) का नियम? (New Waiting Period)नई कर्मचारी पेंशन योजना 2026 का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव इसके विड्रॉल नियम में है। अब कोई भी कर्मचारी रिटायरमेंट की उम्र से पहले नौकरी छोड़ने पर तत्काल अपनी पेंशन राशि की निकासी के लिए क्लेम नहीं कर सकेगा।3 साल का लंबा इंतजार: नए नियम के मुताबिक, कर्मचारी के ईपीएफ खाते में जिस तारीख को आखिरी पेंशन योगदान (Last Contribution) जमा हुआ था, उस तिथि से लेकर पूरे 36 महीने (3 वर्ष) बीत जाने के बाद ही वह विड्रॉल बेनिफिट के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकेगा।नियम में एक विशेष छूट: इस 36 महीने के कड़े नियम में सरकार ने एक मानवीय छूट भी शामिल की है। यदि इन 36 महीनों के वेटिंग पीरियड के दौरान ही कर्मचारी की आधिकारिक रिटायरमेंट (Superannuation) की उम्र पूरी हो जाती है, तो उसे 3 साल का समय पूरा होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में वह अपनी उम्र पूरी होते ही तुरंत पूरी राशि की निकासी कर सकता है।विड्रॉल बेनिफिट का पूरा गणित: जानिए कितना मिलेगा पैसा (Table IV Factor Calculation)जब आप 36 महीनों का अनिवार्य इंतजार पूरा कर लेंगे, तो आपको मिलने वाली एकमुश्त रकम की गणना नई योजना के तहत जारी की गई 'टेबल IV' (Table IV Factor) के आधार पर की जाएगी। आपकी अंतिम विड्रॉल राशि तय करने के लिए आपकी ‘पेंशन योग्य सैलरी’ (Pensionable Salary) को आपके कार्यकाल के अनुसार तय ‘टेबल IV फैक्टर’ से गुणा (Multiply) किया जाता है।आइए इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से बेहद आसान तरीके से समझते हैं:उदाहरण 1 (2 साल की नौकरी पर):मान लीजिए आपकी पेंशन योग्य सैलरी ₹15,000 है और आपने केवल 24 महीने (2 साल) काम करने के बाद नौकरी छोड़ दी।टेबल IV के अनुसार 24 महीने की सर्विस का फैक्टर 1.99 तय किया गया है।गणना: ₹15,000 1.99 = ₹29,850 (आपको ₹29,850 का एकमुश्त भुगतान मिलेगा)।उदाहरण 2 (5 साल की नौकरी पर):मान लीजिए आपकी पेंशन योग्य सैलरी वही ₹15,000 है, लेकिन आपने कुल 60 महीने (5 साल) तक कंपनी में काम किया है।60 महीने की लंबी सर्विस होने के कारण टेबल का फैक्टर बढ़कर 5.02 हो जाता है।गणना: ₹15,000 5.02 = ₹75,300 (आपको ₹75,300 का एकमुश्त भुगतान मिलेगा)।इस फॉर्मूले से साफ स्पष्ट है कि कर्मचारी जितने अधिक महीनों तक ईपीएफओ के दायरे में रहकर नौकरी करेगा, उसका टेबल IV फैक्टर उतना ही बड़ा होगा और अंत में मिलने वाला एकमुश्त आर्थिक लाभ भी उतना ही ज्यादा बढ़ जाएगा।
रेलवे में नौकरी करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी आर्थिक राहत देने वाली खबर सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘हाउस बिल्डिंग एडवांस’ (House Building Advance - HBA) की नई ब्याज दरों की आधिकारिक घोषणा कर दी है।हाल ही में जारी किए गए नए सरकारी आदेश के तहत रेलवे कर्मियों को अब अपना आशियाना बनाने के लिए महज 7.1 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर पर एडवांस पैसा मिल जाएगा। बाजार में मौजूद अन्य कमर्शियल बैंकों के होम लोन की तुलना में यह दर बेहद कम है, जिससे सीधे तौर पर कर्मचारियों की हर महीने जाने वाली ईएमआई (EMI) का बोझ काफी घट जाएगा।1 अप्रैल 2026 से लागू हुईं नई दरें; पिछली बार से इतनी आई कमीरेलवे बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह नई ब्याज दर 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी और 31 मार्च 2027 तक मंजूर होने वाले सभी HBA लोन पर लागू रहेगी।ब्याज दरों में कटौती: इससे पिछले वित्तीय वर्ष (FY 2025-26) में हाउस बिल्डिंग एडवांस पर ब्याज दर 7.44% वार्षिक थी, जिसमें अब 0.34% की बड़ी कटौती कर इसे 7.1% कर दिया गया है।मंत्रालय का आदेश: दरअसल, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने 13 मई 2026 को इस संबंध में एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया था। रेलवे बोर्ड ने उसी सरकारी गाइडलाइन को अपनाते हुए इसे अपने रेल कर्मचारियों के लिए भी तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है।आखिर क्या है ‘हाउस बिल्डिंग एडवांस’ (HBA) योजना?सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए 'हाउस बिल्डिंग एडवांस' (HBA) केंद्र सरकार और रेलवे द्वारा दी जाने वाली एक विशेष कल्याणकारी वित्तीय सुविधा है।आज के दौर में जहां प्राइवेट और सरकारी बैंक होम लोन (Home Loan) पर 8.5% से लेकर 9.5% तक का भारी-भरकम ब्याज वसूल रहे हैं, वहीं सरकार अपने स्टाफ को बाजार से कहीं ज्यादा रियायती और सस्ती दर पर यह एडवांस उपलब्ध कराती है। इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि रेल कर्मचारी बिना किसी बड़े मानसिक और आर्थिक तनाव के पूरी सुरक्षा के साथ अपने और अपने परिवार के लिए एक पक्के मकान का सपना पूरा कर सकें।इन 4 प्रमुख कामों के लिए निकाल सकते हैं एडवांस का पैसारेलवे कर्मचारी अपनी आवश्यकता के अनुसार इस एडवांस राशि का उपयोग केवल एक जगह नहीं, बल्कि कई अलग-अलग विकल्पों के लिए कर सकते हैं:प्लॉट और कंस्ट्रक्शन: यदि आप कोई खाली प्लॉट (जमीन) खरीदकर उस पर अपनी मर्जी से नया मकान बनवाना चाहते हैं।रेडी-टू-मूव फ्लैट: किसी प्राइवेट बिल्डर या डेवलपर से सीधे तैयार फ्लैट या घर खरीदने के लिए।सरकारी योजनाएं: केंद्र सरकार, राज्य सरकार या किसी भी रजिस्टर्ड कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की आवासीय योजनाओं में घर आवंटित होने पर।मकान का विस्तार (Extension): यदि आपके पास पहले से ही अपना एक मकान है और परिवार बड़ा होने पर आप उसमें नए कमरे, एक और मंजिल या घर का कोई अन्य हिस्सा जुड़वाना (Extending Space) चाहते हैं।बाकी नियमों और पात्रता में क्या हुआ बदलाव?रेलवे बोर्ड ने अपने इस नए सर्कुलर में स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि बदलाव केवल और केवल सालाना ब्याज दर (7.1%) में किया गया है। इसके अलावा योजना से जुड़े अन्य किसी भी पुराने नियम, कानून या शर्तों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।शर्तें यथावत: लोन के लिए जरूरी न्यूनतम सर्विस पीरियड (नौकरी का समय), रीपेमेंट की अवधि (पैसा चुकाने का समय) और पात्रता की सभी शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।कितना मिलेगा लोन: किसी भी रेल कर्मचारी को अधिकतम कितना एडवांस पैसा स्वीकृत किया जाएगा, यह पूरी तरह से उसकी वर्तमान बेसिक सैलरी, उसके सर्विस रिकॉर्ड और खरीदी या बनाई जा रही प्रॉपर्टी की कुल वैल्यू के आधार पर तय किया जाएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता हुआ भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और तेल सप्लाई के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' की एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) को एक बेहद आक्रामक और गुप्त संदेश भेजा है।ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिका ने उसके बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर (Power Infrastructure) या तेल ठिकानों पर किसी भी तरह का सैन्य हमला किया, तो हूती विद्रोही अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले लाल सागर (Red Sea) के समुद्री रास्ते को पूरी तरह से ब्लॉक करने के लिए तैयार रहें। यदि ऐसा होता है, तो इतिहास में पहली बार दुनिया के दो सबसे बड़े तेल रूट एक साथ बंद हो जाएंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।तेहरान में बनी खुफिया रणनीति, बाब-अल-मंदेब पर मिसाइलें तैनातरॉयटर्स ने ईरान और मध्य-पूर्व (Middle East) के तीन उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस खतरनाक योजना पर तेहरान में एक उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा हो चुकी है और इसका अंतिम संदेश हूती नेतृत्व तक सुरक्षित पहुंचा दिया गया है।अंतिम आदेश का इंतजार: इस संदेश के मिलते ही हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab-al-Mandeb Strait) के पास अपने सबसे आधुनिक ड्रोन और घातक एंटी-शिप मिसाइलें तैनात कर दी हैं। यह वही संकरा समुद्री रास्ता है जो लाल सागर को अरब सागर और स्वेज नहर से जोड़ता है। विद्रोही अब केवल ईरान के अंतिम सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं।सन्नाटे में अधिकारी: हालांकि, इस संवेदनशील रिपोर्ट के सामने आने के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय और हूती प्रवक्ताओं ने अभी तक कोई भी आधिकारिक (Official) प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया है।दो सबसे बड़े लाइफलाइन रूट एक साथ होंगे ठप (The Supply Chain Threat)अगर लाल सागर में हूती विद्रोही जहाजों को निशाना बनाते हैं या रास्ता रोकते हैं, तो दुनिया के दो सबसे प्रमुख मैरीटाइम चेकपॉइंट्स (Maritime Checkpoints) एक साथ ब्लॉक हो जाएंगे:समुद्री रास्ता (Strait)इसका महत्व और प्रभावहोर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)यह पहले से ही ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का मुख्य केंद्र बना हुआ है। दुनिया का 20% से अधिक कच्चा तेल (Crude Oil) इसी संकरे रास्ते से गुजरता है।बाब-अल-मंदेब (Red Sea Route)यह यूरोप, एशिया और अमेरिका को जोड़ने वाला सबसे छोटा समुद्री व्यापार मार्ग है। इसके बंद होने से जहाजों को अफ्रीका का चक्कर लगाकर जाना होगा, जिससे किराया और समय दोगुना हो जाएगा।यमन में मौजूद IRGC के प्रतिनिधि लेंगे अंतिम फैसलारिपोर्ट के अनुसार, बाब-अल-मंदेब को किस दिन और किस समय पूरी तरह बंद करना है, इसका रिमोट कंट्रोल यमन में मौजूद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडरों और प्रतिनिधियों के हाथ में होगा।इसी बीच, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) पर भी ताबड़तोड़ मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। हूतियों का आरोप है कि सऊदी सेना ने उनके नियंत्रण वाले एयरपोर्ट पर बमबारी की है। इस ताजा गोलाबारी के कारण दोनों पक्षों के बीच पिछले चार साल से चला आ रहा शांतिपूर्ण युद्धविराम (Ceasefire) भी पूरी तरह टूट गया है, जिसने मिडिल ईस्ट को एक भीषण युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।अमेरिका पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति; भारत समेत दुनिया पर क्या होगा असर?अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान इस आत्मघाती रणनीति के जरिए सीधे तौर पर अमेरिका और उसके मित्र देशों पर चौतरफा आर्थिक दबाव (Economic Pressure) बनाना चाहता है।सऊदी अरब का तेल ब्लॉक होगा: सऊदी अरब अपने कच्चे तेल के एक्सपोर्ट का एक बहुत बड़ा हिस्सा रेड सी में स्थित यानबू बंदरगाह (Yanbu Port) के जरिए करता है। इस रास्ते में बाधा आने का मतलब है कि कच्चे तेल की कीमतें रातों-रात $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।अमेरिका का पुराना आरोप: अमेरिका हमेशा से यह दावा करता रहा है कि ईरान हूतियों को घातक हथियार, भारी-भरकम फंड और मिलिट्री ट्रेनिंग प्रदान करता है। हालांकि, तेहरान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। आने वाले दिन दुनिया के समुद्री व्यापार और ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं।
नेटफ्लिक्स (Netflix) पर प्रसारित हो रहा रियलिटी शो ‘लॉकअप सीजन 2’ (Lock Upp Season 2) इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त तहलका मचा रहा है। 27 जून से शुरू हुए इस शो को फराह खान और रितेश देशमुख होस्ट कर रहे हैं। शो में शामिल कई नामी हस्तियों में से सबसे ज्यादा सुर्खियां टीवी के दिग्गज अभिनेता राम कपूर (Ram Kapoor) बटोर रहे हैं।शो के भीतर राम कपूर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर लगातार कई हैरान करने वाले खुलासे कर रहे हैं। इसी बीच, उनकी पत्नी और मशहूर एक्ट्रेस गौतमी कपूर (Gautami Kapoor) ने राम कपूर के बयानों और शो में अपनी वाइल्ड कार्ड एंट्री की खबरों पर पहली बार खुलकर बात की है।क्या 'लॉकअप 2' में एंट्री करेंगी गौतमी कपूर? (वाइल्ड कार्ड पर बड़ा बयान)हाल ही में मुंबई में एक रेस्टोरेंट के बाहर पैपराजी (Paparazzi) ने गौतमी कपूर को स्पॉट किया। जब मीडिया ने उनसे पूछा कि क्या वे शो में राम कपूर को जॉइन करेंगी या वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री लेंगी, तो उन्होंने हंसते हुए कहा:नहीं, नहीं... वाइल्ड कार्ड एंट्री बिल्कुल नहीं! अगर मैं भी शो के अंदर चली जाऊंगी, तो बाहर मेरे बच्चों की देखभाल कौन करेगा? वैसे मैं राम को पूरा सपोर्ट कर रही हूं। वह शो के अंदर बहुत मजे कर रहे हैं और उन्हें इस अंदाज में देखना बेहद मजेदार है।जब पैपराजी ने उनसे दोबारा पूछा कि क्या वे भविष्य में कभी इस शो का हिस्सा बनेंगी, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए सारा फैसला पति पर छोड़ते हुए कहा— राम की मर्जी।राम कपूर का चौंकाने वाला खुलासा: 'शादी से पहले प्लेबॉय था मैं'दरअसल, ‘लॉकअप 2’ के हालिया एपिसोड में राम कपूर ने अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर एक बड़ा कबूलनामा किया था, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। शो की को-कंटेस्टेंट श्रेया कालरा ने जब राम कपूर से उनकी पुरानी लव-लाइफ और अफेयर्स को लेकर सवाल पूछा, तो राम ने बेहद बेबाकी से जवाब दिया:प्लेबॉय इमेज: राम कपूर ने स्वीकार किया कि गौतमी से शादी करने से पहले इंडस्ट्री और समाज में उनकी छवि एक 'प्लेबॉय' (Playboy) की तरह थी।एकता कपूर की वो चेतावनी: राम ने आगे बताया कि जब उन्होंने और गौतमी ने साल 2003 में शादी करने का फैसला किया, तो उनकी इस इमेज की वजह से करीबी लोग काफी चिंतित थे। यहां तक कि मशहूर प्रोड्यूसर एकता कपूर (Ekta Kapoor) ने खुद गौतमी को फोन किया था और पूछा था कि वह राम से शादी क्यों कर रही हैं? एकता ने गौतमी को सलाह दी थी कि शादी का कदम उठाने से पहले कम से कम दो बार जरूर सोच लें। हालांकि, गौतमी ने राम पर भरोसा किया और आज दोनों एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिता रहे हैं।लॉकअप सीजन 2 का पूरा समीकरण (Host & Show Details)शो का नामरिलीज प्लेटफॉर्म और डेटशो के होस्ट (Hosts)मुख्य चर्चित कंटेस्टेंटलॉकअप सीजन 2नेटफ्लिक्स (Netflix) - 27 जून से जारीफराह खान और रितेश देशमुखराम कपूर, श्रेया कालरा व अन्य
कारसेवा के ऐलान के बीच स्वामी सच्चिदानंद नजरबंद, 9 अगस्त का कार्यक्रम स्थगित
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के बीच 9 अगस्त को प्रस्तावित कारसेवा के ऐलान के बाद मथुरा पुलिस-प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज को गुरुवार को उनके आश्रम में नजरबंद कर दिया। पुलिस ने उन्हें नोटिस भी सौंपा है। इस बीच स्वामी सच्चिदानंद ने 9 अगस्त को प्रस्तावित […] The post कारसेवा के ऐलान के बीच स्वामी सच्चिदानंद नजरबंद, 9 अगस्त का कार्यक्रम स्थगित appeared first on Sabguru News .
गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियां तेज, राजगढ़ धाम पर प्रशासनिक बैठक आयोजित
50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना नसीराबाद। राजगढ़ स्थित श्री मसाणिया भैरव धाम में आगामी 29 जुलाई को आयोजित होने वाले गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियों को लेकर गुरुवार को प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई। बैठक चम्पालाल महाराज (मुख्य उपासक, भैरव धाम) के सान्निध्य तथा उपखंड अधिकारी नसीराबाद कल्पित शिवरान की अध्यक्षता […] The post गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियां तेज, राजगढ़ धाम पर प्रशासनिक बैठक आयोजित appeared first on Sabguru News .
धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए : केजरीवाल
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचकर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन किया और केंद्र सरकार से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग की। केजरीवाल ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे कथित […] The post धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए : केजरीवाल appeared first on Sabguru News .
कोटपुतली : बालिका से रेप करने के दोषी को मृत्यु होने तक का कारावास
अलवर। राजस्थान में कोटपुतली के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत बालिका से दुष्कर्म करने के दोषी को मृत्यु होने तक के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने अभियुक्त सुमित (18) को बालिका से दुष्कर्म करने का दोषी मानते हुए उस पर एक लाख रुपए […] The post कोटपुतली : बालिका से रेप करने के दोषी को मृत्यु होने तक का कारावास appeared first on Sabguru News .
भिवाड़ी में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तीन आरोपी अरेस्ट
खैरथल-तिजारा। राजस्थान में खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि यह गिरोह भिवाड़ी की पॉश आशियाना टाउन सोसायटी में गुमनाम तरीके से रहकर भारत ही नहीं, बल्कि अमरीका, कनाडा और अफ्रीका के […] The post भिवाड़ी में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तीन आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे 21 जुलाई से पहले छोड़ दें : ममता बनर्जी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को उन नेताओं को कड़ा संदेश दिया जो पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे पार्टी छोड़ना चाहते हैं, तो 21 जुलाई को होने वाली शहीद दिवस रैली से पहले ही ऐसा कर […] The post जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे 21 जुलाई से पहले छोड़ दें : ममता बनर्जी appeared first on Sabguru News .
नई मंडी घड़साना में स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक रिश्वत लेते पकड़ा गया
श्रीगंगानगर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने श्रीगंगानगर जिले में नई मंडी घड़साना के सरकारी अस्पताल में गुरुवार को एक स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक को 3500 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। ब्यूरो के सूत्रों ने बताया कि परिवादी ने ब्यूरो की गंगानगर इकाई में शिकायत की थी कि उसकी गर्भवती पत्नी को पेट […] The post नई मंडी घड़साना में स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक रिश्वत लेते पकड़ा गया appeared first on Sabguru News .
Medanta Doctor Negligence Case: चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाली एक बेहद सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां मेदंता अस्पताल के डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण एक महिला मरीज की जान आफत में पड़ गई है। डॉक्टरों द्वारा समय पर सही निर्णय न लिए जाने के कारण अस्पताल से लौटते वक्त रास्ते में ही महिला का सर्जिकल घाव अचानक जोर से फट गया। इस खौफनाक मंजर के बाद पीड़ित परिवार ने मेदंता अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (Medical Superintendent) से लिखित में जवाब तलब करते हुए दोषी मेडिकल टीम पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।जानिए कैसे शुरू हुआ यह पूरा मामला और लापरवाही का सफरयह दर्दनाक मामला पीड़ित महिला मरीज (UHID: ML10526989) से जुड़ा है, जो पिछले एक महीने से अधिक समय से मेदंता के सर्जन डॉ. रोमा प्रधान और डॉ. अमित अग्रवाल की देखरेख में अपना इलाज करवा रही थीं। हाल ही में हुए एक बड़े ऑपरेशन के बाद मरीज को हैवी एंटीबायोटिक्स पर रखा गया था और संक्रमण से बचाव के लिए नियमित रूप से ड्रेसिंग की जा रही थी। शनिवार, 11 जुलाई 2026 को शाम लगभग 6:00 बजे जब मरीज अपनी तय ड्रेसिंग के लिए मेदंता अस्पताल पहुंची, तो डॉक्टरों ने उनके घाव की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान डॉक्टरों ने खुद यह नोट किया कि घाव के अंदर भारी मात्रा में तरल पदार्थ और मवाद (Pus) जमा हो रहा है, जिसे बिना वक्त गंवाए तुरंत चीरा (Incision) लगाकर बाहर निकालना बेहद जरूरी था।इमरजेंसी को किया नजरअंदाज, रास्ते में लहूलुहान हुई मरीजघाव में तेजी से बढ़ रहे एक्टिव इन्फेक्शन और गंभीर आपातकालीन स्थिति को पूरी तरह समझने में डॉक्टरों की सूझबूझ फेल साबित हुई। मेदंता की मेडिकल टीम ने इस अत्यंत संवेदनशील और तत्काल किए जाने वाले प्रोसीजर को उसी वक्त करने के बजाय बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए दो दिन बाद यानी सोमवार, 13 जुलाई 2026 तक के लिए टाल दिया। डॉक्टरों के इस लापरवाह फैसले का खामियाजा मरीज को कुछ ही मिनटों में भुगतना पड़ा। अस्पताल परिसर से निकलकर घर वापस लौटते समय रास्ते में ही महिला का सर्जिकल घाव अचानक फट गया। देखते ही देखते पूरी गॉज ड्रेसिंग खून और मवाद से लथपथ हो गई। अगले दिन रविवार होने की वजह से पीड़ित को समय पर इमरजेंसी ट्रीटमेंट मिलना दूभर हो गया, जिससे अब मरीज के पूरे शरीर में जानलेवा सिस्टेमिक इन्फेक्शन फैलने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।नौकरी छूटी और पैसा भी डूबा, परिजनों ने मांगा जवाबदेही का हिसाबपीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल के सभी प्रोटोकॉल का पूरी ईमानदारी से पालन किया और महंगे इलाज के लिए मेदंता द्वारा मांगे गए एक-एक पैसे का समय पर भुगतान किया। इसके बावजूद डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने मरीज को शारीरिक और मानसिक रूप से अपंगता की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। लगातार बिगड़ती तबीयत के कारण महिला को अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा है। पीड़ित परिवार ने मेदंता अस्पताल प्रशासन को एक कड़ा औपचारिक शिकायत पत्र भेजकर सीधे सवाल किया है कि इस गंभीर शारीरिक शोषण, समय की बर्बादी, भारी-भरकम आर्थिक नुकसान और मानसिक आघात की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि अस्पताल ने तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए और दोषी डॉक्टरों पर एक्शन नहीं लिया, तो वे इस मामले को उपभोक्ता अदालत और मेडिकल काउंसिल तक लेकर जाएंगे।
वाराणसी मेंइस सम्मेलन का उद्देश्य 'वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025' के प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना तथा जमीनी स्तर पर विकास योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित एवं जागरूक करना था। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड एवं उत्तराखंड के लगभग 500 ग्राम पंचायत प्रधानों ने भाग लिया। इनमें उत्तर प्रदेश से 350, बिहार से 75, झारखंड से 50 तथा उत्तराखंड से 25 ग्राम पंचायत प्रधान सम्मिलित हुए।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पुस्तक का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूहों की सफलताओं को समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। पीएम गति शक्ति पोर्टल पर गांवों की सड़कें, तालाब, सार्वजनिक परिसंपत्तियां और विकास कार्यों का पूरा विवरण उपलब्ध रहेगा। इससे किसी भी विकास कार्य में दोबारा भुगतान या अनियमितता की संभावना समाप्त होगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से समूह की दीदियों को सीधे 20 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे अपने स्वरोजगार और लघु उद्योगों का विस्तार कर सकेंगी। डबल इंजन सरकार प्रत्येक गांव में उपलब्ध सरकारी भूमि पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए लघु उत्पादन इकाइयों एवं फैक्टरियों की स्थापना का प्रस्ताव भी ला रही है,उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना गरीब, मजदूर एवं ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। इस योजना के माध्यम से श्रमिकों की मजदूरी पूर्ण पारदर्शिता के साथ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में समयबद्ध रूप से पहुंचेगी, जिससे किसी भी प्रकार की बिचौलिया व्यवस्था अथवा भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीबों के सम्मान, आत्मनिर्भरता एवं आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगी। ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के वैतनिक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी आय एवं आजीविका सुरक्षा को और अधिक मजबूती मिलेगी। रोजगार की मांग के लिए आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर कार्य उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा यदि निर्धारित अवधि में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित पात्र व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने का कानूनी अधिकार होगा। मजदूरी का भुगतान निर्धारित समयसीमा में न होने की स्थिति में श्रमिकों को विलंबित भुगतान पर 0.05 प्रतिशत की दर से मुआवजा प्रदान किया जाएगा, जिससे समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो सके। यदि श्रमिकों को अपने गांव से 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर कार्य करना पड़ता है, तो उन्हें निर्धारित मजदूरी के अतिरिक्त 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। योजना के अंतर्गत जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि जल संसाधनों का संरक्षण एवं सतत उपयोग सुनिश्चित हो सके। ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित कार्यों, जैसे ग्रामीण सड़कें, सार्वजनिक परिसंपत्तियां एवं सामुदायिक सुविधाओं का पक्के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। आजीविका संबंधी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर विशेष बल दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, कृषि एवं स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। चरम मौसम एवं जलवायु परिवर्तन से बचाव के लिए आवश्यक संरचनाओं एवं संरक्षण कार्यों को भी योजना में शामिल किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की आपदा सहनशीलता एवं पर्यावरणीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाया जा सके।
प्रधानमंत्री को 35 देशों सर्वोच्च सम्मान दिया यह 140 करोड भारतीयों का सम्मान है, केशव मौर्य
वाराणसी में उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश के विकास के लिए बिना अवकाश लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं, आज विश्व के लगभग 35 देशों ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट संदेश है— न खाऊँगा, न खाने दूँगा। भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटका देंगे, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकारें गांव, गरीब, किसान, महिला एवं युवा को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। आज ग्राम पंचायतों को केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास के सबसे मजबूत स्तंभ के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने ग्राम प्रधानों का आह्वान किया कि वे नई व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता, ईमानदारी एवं जनभागीदारी के साथ लागू करें तथा प्रत्येक पात्र परिवार तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करें।अपने अध्यक्षीय संबोधन में उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ग्रामीण भारत के विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक गरीबों की मेहनत की कमाई पर सेंध लगाने वाली व्यवस्थाओं को समाप्त कर गरीबों के हितों की रक्षा करने का ऐतिहासिक कार्य किया गया है।सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान श्री हंसराज विश्वकर्मा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार उ0प्र0, सदस्य विधान परिषद श्री धर्मेन्द्र सिंह, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, श्री त्रिभुवन राम, डा सुनील पटेल, ग्राम्य विकास आयुक्त श्री जीएस प्रियदर्शी तथा ग्रामीण विकास विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री रोहिणी आर. भाजीभाकरे सहित पार्टी पदाधिकारी, भारी संख्या ग्राम प्रधान एवं अधिकारीगण सम्मिलित हुए।
पाली : नगरपालिका सोजत रोड में दलाल 25000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट
पाली। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार को पाली जिले में नगरपालिका सोजत रोड में दलाल परमानन्द शर्मा को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ब्यूरो की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि एसीबी चौकी पाली द्वितीय को शिकायत मिली कि परिवादी के बडे पिताजी के नाम का […] The post पाली : नगरपालिका सोजत रोड में दलाल 25000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
World Plastic Surgery Day 2026:खूबसूरत दिखना, आत्मविश्वास (Confidence) बढ़ाना और बढ़ती उम्र के असर को कम करना आज के दौर में बेहद आम हो चुका है। यही वजह है कि कॉस्मेटिक और प्लास्टिक सर्जरी अब सिर्फ फिल्मी सितारों या सेलिब्रिटीज तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आम लोग भी धड़ल्ले से इन प्रोसीजर्स की मदद ले रहे हैं।हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के चकाचौंध भरे विज्ञापनों, सेलिब्रिटी ट्रेंड्स या सिर्फ कम कीमत के लालच में आकर किसी भी सर्जरी का फैसला लेना सेहत के लिए बेहद जोखिम भरा हो सकता है। हर साल 15 जुलाई को वर्ल्ड प्लास्टिक सर्जरी डे (World Plastic Surgery Day) मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को इन सर्जरी से जुड़ी सही जानकारियों के प्रति जागरूक करना है।शारदाकेयर हेल्थसिटी के प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. तन्मय रॉय के अनुसार, कॉस्मेटिक सर्जरी एक गंभीर मेडिकल प्रक्रिया है, इसे कोई आसान ब्यूटी ट्रीटमेंट समझने की भूल न करें। सेफ और बेहतरीन रिजल्ट्स पाने के लिए सर्जरी टेबल पर लेटने से पहले आपको अपने सर्जन से ये 10 महत्वपूर्ण सवाल जरूर पूछने चाहिए:सर्जरी से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें ये 10 जरूरी सवालक्या आप इस विशिष्ट प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षित और बोर्ड-सर्टिफाइड प्लास्टिक सर्जन हैं?सबसे पहले डॉक्टर की मेडिकल डिग्री, उनके अनुभव और उस पर्टिकुलर सर्जरी में उनकी विशेषज्ञता (Specialization) की पुष्टि करें।मेरे शारीरिक ढांचे और स्किन टाइप के अनुसार यह प्रोसीजर क्यों उपयुक्त है?अपनी त्वचा की बनावट, उम्र और वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर समझें कि क्या वाकई आपको इस सर्जरी की जरूरत है या कोई अन्य नॉन-सर्जिकल विकल्प भी मौजूद है।इस सर्जरी के साथ क्या जोखिम (Risks) और संभावित साइड-इफेक्ट्स जुड़े हैं?हर सर्जिकल प्रक्रिया के अपने कुछ खतरे या कॉप्लिकेशंस होते हैं। इनके बारे में पहले से मानसिक रूप से तैयार रहना बेहद जरूरी है।रिकवरी (ठीक होने) में कितना समय लगेगा?यह स्पष्ट कर लें कि सर्जरी के बाद आप कब से अपने काम पर लौट सकते हैं, वर्कआउट शुरू कर सकते हैं और अपनी नॉर्मल रूटीन लाइफ में आ सकते हैं।क्या इस सर्जरी के परिणाम (Results) परमानेंट यानी स्थायी होंगे?कुछ कॉस्मेटिक प्रोसीजर्स का असर सीमित समय (जैसे कुछ साल) के लिए ही होता है, जिसके बाद टच-अप की जरूरत पड़ती है। इसकी जानकारी पहले ही लें।क्या मैं आपके पिछले मरीजों की 'बिफोर एंड आफ्टर' (पहले और बाद की) तस्वीरें देख सकता हूँ?इससे आपको सर्जन के काम की क्वालिटी, उनकी कलात्मकता और संभावित परिणामों का एक वास्तविक अंदाजा मिल सकेगा।अगर सर्जरी का रिजल्ट मेरी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो मेरे पास क्या विकल्प होंगे?भविष्य में रिवीजन सर्जरी (संशोधन प्रक्रिया) या किसी अन्य सुधारात्मक उपचार की संभावना और उसके खर्चों के बारे में पहले ही बात कर लें।यह सर्जरी किस अस्पताल या सर्जिकल सेंटर में परफॉर्म की जाएगी?सुनिश्चित करें कि जहां आपकी सर्जरी हो रही है, वह एक मान्यता प्राप्त (Accredited) अस्पताल हो, जहां आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए आईसीयू और एडवांस लाइफ सपोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों।इस पूरी प्रक्रिया का कुल खर्च (Total Cost) कितना होगा?सिर्फ ऑपरेशन की फीस ही नहीं, बल्कि दवाइयों, प्री-सर्जरी टेस्ट, एनेस्थीसिया, अस्पताल के रूम रेंट और फॉलो-अप विजिट्स सहित छिपे हुए सभी खर्चों की लिखित जानकारी लें।सर्जरी से पहले और बाद में मुझे किन सावधानियों का पालन करना होगा?अपनी डाइट, लाइफस्टाइल, स्मोकिंग (धूम्रपान), अल्कोहल (शराब) के सेवन और वर्तमान में चल रही दवाइयों को लेकर डॉक्टर के निर्देशों को विस्तार से समझें।सेफ सर्जरी के लिए डॉ. तन्मय रॉय की 2 सबसे जरूरी सलाह:अपनी मेडिकल हिस्ट्री कभी न छुपाएं: यदि आपको डायबिटीज (मधुमेह), हाई बीपी (उच्च रक्तचाप), दिल की कोई बीमारी है, या आपको किसी विशिष्ट दवा या एनेस्थीसिया से एलर्जी है, तो इसके बारे में सर्जन को पहली ही कंसल्टेशन में स्पष्ट बता दें। इससे डॉक्टर आपके लिए एक सुरक्षित और कस्टमाइज्ड सर्जिकल प्लान तैयार कर सकेंगे।सेकंड ओपिनियन (Second Opinion) जरूर लें: यदि प्रोसीजर बहुत बड़ा, खर्चीला या जटिल है, तो किसी दूसरे अनुभवी प्लास्टिक सर्जन से भी राय लेने में बिल्कुल न हिचकिचाएं। यह आपके फैसले को अधिक सुरक्षित बनाएगा।
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रोजाना चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित करे। न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वांगचुक की बिगड़ती सेहत को सुधारने के लिए आवश्यक कोई भी चिकित्सकीय हस्तक्षेप सरकार […] The post दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सोनम वांगचुक की रोजाना चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया appeared first on Sabguru News .
भारतीय रसोई में नींबू का एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। दाल-सब्जी का स्वाद बढ़ाना हो, सलाद को चटपटा बनाना हो या गर्मियों में ताज़ा शिकंजी तैयार करनी हो—नींबू हमेशा काम आता है। विटामिन सी, साइट्रिक एसिड, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर नींबू हमारी इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाता है। यही वजह है कि अधिकांश घरों में नींबू को थोक में खरीदकर स्टॉक कर लिया जाता है।लेकिन, कई बार देखने में आता है कि फ्रिज में रखने के बावजूद नींबू बहुत जल्दी सूखने, सिकुड़ने या पत्थर जैसे सख्त होने लगते हैं। ऐसा फ्रिज के अत्यधिक ठंडे तापमान, हवा में नमी की कमी, या उन्हें गलत तरीके से स्टोर करने की वजह से होता है। सूखे हुए नींबू में रस बेहद कम निकलता है और उनका स्वाद भी कड़वा हो जाता है। आइए जानते हैं नींबू को 3 से 4 हफ़्तों तक बिल्कुल रसीला और ताजा रखने के कुछ जादुई स्टोरेज टिप्स:नींबू को फ्रेश रखने के 5 सबसे असरदार तरीके (Lemon Storage Hacks)पूरी तरह सुखाकर ही करें स्टोर: बाजार से नींबू लाने के बाद यदि आप उन्हें धोते हैं, तो स्टोर करने से पहले किसी सूती कपड़े से पोंछकर उन्हें अच्छी तरह सुखा लें। यदि नींबू की सतह पर थोड़ी भी नमी (Moisture) रह गई, तो फ्रिज में उन पर फफूंदी (Fungus) लग सकती है और वे सड़ सकते हैं।जिप-लॉक बैग या एयरटाइट कंटेनर का जादू: नींबू को कभी भी फ्रिज की शेल्फ पर खुला न छोड़ें। इन्हें किसी एयरटाइट डिब्बे (Air-tight Container) या जिप-लॉक पॉलीबैग में बंद करके रखें। ऐसा करने से नींबू के अंदर की प्राकृतिक नमी बरकरार रहती है, जिससे वे सिकुड़ते नहीं हैं। साथ ही फ्रिज में रखी अन्य चीजों की महक भी नींबू में नहीं जाती।सब्जी वाले ड्रॉअर (Crisper Drawer) का करें इस्तेमाल: नींबू को हमेशा फ्रिज के सबसे ठंडे हिस्से में रखने के बजाय नीचे दिए गए 'क्रिस्पर ड्रॉअर' (सब्जी रखने वाले कंपार्टमेंट) में रखें। इस हिस्से का तापमान और मॉइस्चर लेवल खट्टे फलों की ताजगी बनाए रखने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।कटे हुए नींबू को स्टोर करने का सही नियम: यदि आपने आधा नींबू इस्तेमाल कर लिया है और आधा बच गया है, तो उसे खुला छोड़ने की गलती कतई न करें। कटे हुए हिस्से को एल्युमिनियम फॉयल या प्लास्टिक रैप से अच्छी तरह लपेटकर (Wrap) या किसी छोटे एयरटाइट डिब्बे में बंद करके रखें, जिससे उसका रस सूखेगा नहीं।अतिरिक्त नमी को साफ करते रहें: यदि आपने नींबू को जिप-लॉक बैग में रखा है, तो 3-4 दिनों में एक बार खोलकर जांच लें। अगर बैग के अंदर पानी की बूंदें (इवेपोरेशन के कारण) जमी दिखें, तो उन्हें साफ कपड़े से पोंछ दें। जरूरत से ज्यादा नमी भी नींबू को समय से पहले खराब कर देती है।कितने दिनों तक सुरक्षित रहते हैं नींबू?अगर आप सही स्टोरेज तकनीकों का पालन करते हैं, तो नींबू की शेल्फ-लाइफ काफी बढ़ जाती है:साबुत नींबू (Whole Lemons): फ्रिज में सही तरीके से पैक करके रखने पर ये 3 से 4 सप्ताह (लगभग एक महीना) तक पूरी तरह ताजे और रसीले बने रह सकते हैं।कटे हुए नींबू (Cut Lemons): कटे हुए नींबू को रैप करके रखने पर भी उसका इस्तेमाल 3 से 4 दिनों के भीतर ही कर लेना सेहत और स्वाद दोनों के लिहाज से बेहतर होता है।भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां (Common Mistakes to Avoid)गीले नींबू फ्रिज में रखना: ऐसा करने से फंगस बहुत तेजी से पनपती है।खराब और अच्छे नींबू एक साथ रखना: यदि स्टॉक में कोई एक नींबू भी सड़ने लगा है या उस पर दाग आ गया है, तो उसे तुरंत बाकी नींबुओं से अलग कर दें। वरना, उसका संक्रमण दूसरे अच्छे नींबुओं को भी एक-दो दिन में खराब कर देगा।कटे नींबू को खुला छोड़ना: फ्रिज की ठंडी हवा कटे हुए नींबू के सारे रस को सोख लेती है और वह काला पड़ने लगता है।बिना छँटाई के लंबे समय तक छोड़ना: हर 4-5 दिन में अपने नींबू के स्टॉक को एक बार पलटकर जरूर देखें ताकि खराब हो रहे पीस को समय रहते निकाला जा सके।
बच्चों को मफिन, कपकेक और पेस्ट्री जैसी बेक्ड चीजें बेहद पसंद आती हैं। लेकिन बाजार में मिलने वाले ज्यादातर मफिन में रिफाइंड मैदा, प्रिजर्वेटिव्स और चीनी (Sugar) की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में अगर आप बच्चों को कुछ टेस्टी और हेल्दी खिलाना चाहते हैं, तो रागी और सेब से बना मफिन केक (Ragi Apple Muffin) एक बेहतरीन विकल्प है।रागी को पोषण का पावरहाउस माना जाता है, जिसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन, फाइबर और प्रोटीन पाया जाता है। वहीं सेब विटामिन सी, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा सोर्स है। इन दोनों का कॉम्बिनेशन बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने, पाचन तंत्र (Digestion) को दुरुस्त रखने और उन्हें दिनभर एनर्जेटिक बनाए रखने में मदद करता है। आइए जानते हैं इसे घर पर बनाने की आसान विधि और कुछ जरूरी टिप्स:रागी और सेब का मफिन केक बनाने की सामग्री (Ingredients)रागी का आटागेहूं का आटा (थोड़ी मात्रा में)बेकिंग पाउडरदालचीनी पाउडर (एक चुटकी)कद्दूकस किया हुआ ताजा सेबमैश किया हुआ पका केला या शहद (प्राकृतिक मिठास के लिए)दूधघी या रिफाइंड तेलबारीक कटे बादाम और अखरोट (वैकल्पिक)बनाने की आसान विधि (Step-by-Step Recipe)सूखी सामग्री को मिलाएं: सबसे पहले एक साफ बाउल में रागी का आटा, थोड़ा सा गेहूं का आटा, बेकिंग पाउडर और एक चुटकी दालचीनी पाउडर डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें।गीली सामग्री तैयार करें: अब एक दूसरे बाउल में मैश किया हुआ पका केला या शहद, कद्दूकस किया हुआ सेब, दूध और आवश्यकतानुसार थोड़ा सा घी या तेल डालकर अच्छी तरह फेंट लें।घोल (Batter) बनाएं: इसके बाद सूखी सामग्री वाले बाउल में गीली सामग्री का मिश्रण धीरे-धीरे डालें और दोनों को कट-एंड-फोल्ड मेथड से मिलाकर एक गाढ़ा घोल तैयार कर लें। अगर आप चाहें तो इसी स्टेज पर बारीक कटे बादाम या अखरोट भी मिला सकते हैं।बेकिंग प्रक्रिया: ओवन को पहले से प्री-हीट (Pre-heat) कर लें। अब तैयार गाढ़े घोल को मफिन मोल्ड्स (Muffin Moulds) में डालें। इसे ओवन में लगभग 20 से 25 मिनट तक बेक करें।चेक और सर्व करें: एक टूथपिक डालकर चेक करें, अगर टूथपिक साफ बाहर आती है तो मफिन तैयार है। इसे ओवन से निकालकर पूरी तरह ठंडा होने दें। तैयार मफिन बेहद नरम, स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है।बच्चों के लिए मफिन बनाते समय ध्यान रखने योग्य 5 जरूरी बातें (Expert Tips)प्राकृतिक मिठास को दें प्राथमिकता: बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मफिन में रिफाइंड सफेद चीनी डालने से बचें। इसकी जगह सेब की अपनी मिठास, मैश किए हुए पके केले या ऑर्गेनिक शहद का इस्तेमाल करना सबसे बेस्ट रहता है।सामग्री की गुणवत्ता: बच्चों के लिए बेकिंग करते समय हमेशा ताजी और अच्छी क्वालिटी की रागी और सेब का ही चुनाव करें।उम्र के हिसाब से नट्स का इस्तेमाल: यदि बच्चे बहुत छोटे हैं, तो मफिन में ड्राई फ्रूट्स के बड़े टुकड़े डालने की बजाय उन्हें मिक्सी में पीसकर पाउडर के रूप में मिलाएं, ताकि गले में फंसने (Choking Hazard) का खतरा न रहे। बड़े बच्चों के लिए इन्हें बारीक काटकर डाला जा सकता है।ओवर-बेकिंग से बचें: मफिन को ओवन में सिर्फ तब तक ही पकाएं जब तक वह अंदर से अच्छी तरह पक न जाए। जरूरत से ज्यादा बेक करने (Over-bake) से मफिन सख्त और सूखा हो सकता है, जिससे बच्चे इसे खाना पसंद नहीं करेंगे।स्टोरेज का सही तरीका: तैयार मफिन को पूरी तरह से ठंडा होने के बाद ही बच्चों को खाने के लिए दें। अगर मफिन बच जाते हैं, तो उन्हें किसी साफ एयरटाइट कंटेनर (Air-tight Box) में बंद करके रखें और 1 से 2 दिन के भीतर ही इस्तेमाल कर लें।
Monsoon Car Driving Tips: मानसून का मौसम जहां एक तरफ तपती गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं दूसरी तरफ कार चालकों के लिए कई बड़ी चुनौतियां भी खड़ी कर देता है। मूसलाधार बारिश, सड़कों पर पानी का जमाव, कीचड़ की वजह से होने वाली फिसलन और विंडशील्ड पर धुंध जमने के कारण विजिबिलिटी (दृश्यता) का कम होना—ये सभी कारक सड़क दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ा देते हैं।ऐसी कठिन परिस्थितियों में आपकी कार में दिए गए कुछ आधुनिक और सेफ्टी फीचर्स आपके सफर को न सिर्फ सुगम बनाते हैं, बल्कि आपकी और आपके परिवार की जान की रक्षा भी करते हैं। हालांकि, जागरूकता की कमी के कारण कई लोग इन फीचर्स के सही उपयोग से अनजान रहते हैं। आइए जानते हैं कार के उन 6 सबसे जरूरी फीचर्स के बारे में, जो बारिश के दिनों में आपके बेहद काम आ सकते हैं:1. ABS (एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम) - फिसलन में गाड़ी को रखे कंट्रोलबारिश के दौरान सड़कों पर पानी की एक पतली परत बन जाती है, जिसे हाइड्रोप्लेनिंग (Hydroplaning) कहते हैं। इस स्थिति में यदि आप अचानक तेज ब्रेक लगाते हैं, तो गाड़ी के पहिए जाम (Lock) हो जाते हैं और कार बेकाबू होकर फिसलने लगती है।कैसे करता है काम: एबीएस (ABS) अचानक ब्रेक लगने पर पहियों को लॉक होने से रोकता है और उन्हें रुक-रुक कर ब्रेक लगाता है।सही इस्तेमाल: बारिश में पैनिक ब्रेकिंग (घबराकर जोर से ब्रेक दबाना) के समय पैडल से पैर न हटाएं। एबीएस को अपना काम करने दें और इस दौरान केवल गाड़ी के स्टीयरिंग व्हील को सही दिशा में मोड़कर कंट्रोल बनाए रखने पर ध्यान दें।2. ESC या ESP (इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल) - मोड़ों पर पलटने से बचाएगीली सड़कों पर जब आप किसी तीखे मोड़ (Sharp Turn) पर गाड़ी को घुमाते हैं, तो कार के ओवरस्टीयर या अंडरस्टीयर होने यानी संतुलन खोकर पलटने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।कैसे करता है काम: ईएससी (ESC) कंप्यूटर सेंसर की मदद से यह भांप लेता है कि गाड़ी आपकी तय दिशा से भटक रही है। यह तुरंत एक्टिव होकर व्यक्तिगत रूप से किसी एक या दो पहियों पर अपने आप ब्रेक लगा देता है, जिससे कार वापस सही ट्रैक पर आ जाती है।महत्व: यह फीचर विशेष रूप से एक्सप्रेसवे या हाईवे पर तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते समय जानलेवा हादसों को टालने में मदद करता है।3. रेन-सेंसिंग वाइपर्स (Rain-Sensing Wipers) - सड़क से नहीं भटकेगा ध्यानतेज बारिश में बार-बार वाइपर की स्पीड को मैनुअली (हाथ से) कम या ज्यादा करना ड्राइवर का ध्यान भटका सकता है, जो कि हाईवे पर खतरनाक हो सकता है।कैसे करता है काम: विंडशील्ड पर लगे सेंसर बारिश की बूंदों की तीव्रता को भांप लेते हैं। जैसे ही बारिश शुरू होती है, वाइपर अपने आप ऑन हो जाते हैं और बारिश तेज या धीमी होने पर अपनी गति को स्वतः एडजस्ट कर लेते हैं। इससे ड्राइवर का पूरा ध्यान केवल ड्राइविंग पर केंद्रित रहता है।4. रियर डिफॉगर और ORVM डिफॉगर - धुंध को मिनटों में करे साफबारिश के मौसम में कार के अंदर और बाहर के तापमान में अंतर होने के कारण अंदरूनी शीशों और बाहर के साइड मिरर्स (ORVM) पर नमी यानी धुंध जम जाती है।सही इस्तेमाल: डैशबोर्ड पर दिए गए 'डिफॉगर' बटन को दबाएं। रियर डिफॉगर पीछे के शीशे पर लगी पतली तारों को गर्म करके धुंध हटाता है, जबकि ओआरवीएम डिफॉगर साइड मिरर्स को साफ रखता है, ताकि आपको पीछे से आ रहे वाहन साफ दिखाई दे सकें।5. ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम (TCS) - कीचड़ और पानी में पहियों को घूमने से रोकेजब आप कार को किसी कीचड़ वाले रास्ते, चढ़ाई या अत्यधिक पानी से भरी सड़क पर आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, तो इंजन की ज्यादा पावर के कारण पहिए एक ही जगह पर तेजी से गोल-गोल घूमने (Wheel Spin) लगते हैं, जिससे गाड़ी फंस जाती है।कैसे करता है काम: टीसीएस (TCS) पहियों के अत्यधिक स्पिन को पहचानकर उस विशेष पहिये को मिलने वाली इंजन पावर को कम कर देता है या वहां आंशिक ब्रेक लगाता है। इससे टायर को सड़क पर बेहतर ग्रिप मिलती है और कार आसानी से आगे बढ़ जाती है।6. रियर पार्किंग कैमरा और 360-डिग्री कैमरा - संकरी जगहों में मददगारभारी बारिश और धुंध के चलते जब पीछे का शीशा पूरी तरह ब्लॉक हो जाता है, तब कार को पार्क करना या किसी तंग गली से रिवर्स करना नामुमकिन हो जाता है।जरूरी सलाह: ऐसे समय में इंफोटेनमेंट स्क्रीन पर दिखने वाला 360-डिग्री व्यू या रियर कैमरा आपका सबसे बड़ा मददगार बनता है। हालांकि, यात्रा शुरू करने से पहले एक बार बाहर निकलकर कैमरे के लेंस को साफ कपड़े से जरूर पोंछ लें, क्योंकि उस पर जमा कीचड़ या पानी की बूंदें आपको स्क्रीन पर गलत या धुंधली तस्वीर दिखा सकती हैं।
Income Tax Return (ITR) Filing Tips: यदि आपने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के दौरान 10 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत की कोई नई कार (Car) खरीदी है, तो टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय आपके पास मोटी बचत करने का एक शानदार मौका है। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय आप कम से कम ₹10,000 या अपनी कार की कीमत के अनुसार उससे भी ज्यादा का टैक्स रिफंड (Tax Refund) हासिल कर सकते हैं।अक्सर जानकारी के अभाव में कई लोग कार खरीदते समय कटे 1% TCS (Tax Collected at Source) का दावा करना भूल जाते हैं, जिससे उनका यह पैसा सरकार के पास ही ब्लॉक रह जाता है। आइए जानते हैं कि यह 1% TCS क्या होता है और आईटीआर भरते समय आप इसे कैसे वापस पा सकते हैं।क्या होता है गाड़ियों पर कटने वाला 1% TCS?आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के नियमों के अनुसार, जब भी कोई ग्राहक ₹10 लाख से अधिक मूल्य की नई पैसेंजर कार खरीदता है, तो कार डीलर (Automobile Dealer) के लिए वाहन की कुल एक्स-शोरूम कीमत का 1% TCS वसूलना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है।यह कोई एक्स्ट्रा टैक्स नहीं है: ध्यान रहे कि यह कोई अतिरिक्त जेबखर्च या जुर्माना नहीं है। यह अग्रिम टैक्स (Advance Tax) की तरह ही होता है, जिसे डीलर आपके पैन कार्ड (PAN Card) के अगेंस्ट सरकार के खाते में जमा करता है।गणित समझिए: यदि आपने ₹10 लाख की कार खरीदी है, तो आपका ₹10,000 का TCS कटेगा। ठीक इसी तरह, यदि कार की कीमत ₹20 लाख है, तो ₹20,000 और ₹50 लाख की लक्जरी कार होने पर ₹50,000 का TCS जमा होगा। इस पूरी रकम को आप ITR दाखिल करते समय अपनी अंतिम टैक्स देनदारी (Tax Liability) के साथ एडजस्ट या रिफंड करा सकते हैं।ITR दाखिल करते समय कैसे करें TCS का दावा? (Step-by-Step Claim Process)अपने इस पैसे को वापस पाने या टैक्स में छूट लेने के लिए आपको नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करना होगा:Form 26AS और AIS की जांच: ITR फॉर्म भरने से पहले अपने इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें। वहाँ अपने Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) को डाउनलोड करके चेक करें कि कार डीलर ने आपके PAN पर वह 1% TCS रिफ्लेक्ट (अपडेट) किया है या नहीं। यदि एंट्री नहीं दिख रही है, तो तुरंत कार डीलर से संपर्क कर इसे अपडेट करवाएं।ITR में सही सेक्शन चुनें: जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म भर रहे हों, तब ‘Taxes Paid’ या ‘TCS Credit’ वाले कॉलम में जाएं। वहां कार खरीद पर कटे इस टैक्स क्रेडिट की सटीक जानकारी दर्ज करें।रिफंड या एडजस्टमेंट: यदि वित्त वर्ष के अंत में आपकी कुल टैक्स देनदारी आपके कटे हुए कुल टीडीएस/टीसीएस से कम बनती है, तो यह ₹10,000 या इससे अधिक की अतिरिक्त राशि सीधे रिफंड के रूप में आपके बैंक खाते में क्रेडिट कर दी जाएगी। यदि आपकी टैक्स देनदारी बनती है, तो यह राशि उतने रुपये से आपका टैक्स कम (Adjust) कर देगी।क्लेम करते समय अपने पास रखें ये 4 जरूरी दस्तावेजआयकर विभाग (Income Tax Department) से रिफंड क्लेम करते समय किसी भी प्रकार के नोटिस या अड़चन से बचने के लिए आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए:कार खरीद का इनवॉइस (Purchase Invoice): जिसमें कार की मूल कीमत और कटे हुए 1% TCS का स्पष्ट जिक्र हो।Form 27D (TCS Certificate): यह सर्टिफिकेट कार डीलर द्वारा ग्राहक को जारी किया जाता है, जो टैक्स जमा होने का पुख्ता प्रमाण है।Form 26AS और AIS कॉपी: ऑनलाइन मिलान और रिकॉर्ड के लिए।टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह:रिटर्न फाइल करने की जल्दबाजी में कभी भी अपने टैक्स क्रेडिट (TDS/TCS) को नजरअंदाज न करें। फॉर्म सबमिट करने से पहले हमेशा AIS और Form 26AS का डेटा अपने इनवॉइस से मैच कर लें। एक छोटी सी चूक के कारण आपकी मेहनत की कमाई का रिफंड रुक सकता है।
तृणमूल कांग्रेस की रुक्मिणी मल्लिक का राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस से नेताओं का मोह भंग होने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा और इनमें नया नाम बंगला फिल्मों की अभिनेत्री और सांसद रुक्मिणी मल्लिक का जुड़ गया है जिन्होंने गुरुवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। तृणमूल कांग्रेस ने मल्लिक को करीब तीन महीने पहले ही सांसद […] The post तृणमूल कांग्रेस की रुक्मिणी मल्लिक का राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा appeared first on Sabguru News .
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव में देरी पर जताई नाराजगी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराने में हो रही देरी पर गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से पांच दिन के भीतर चुनाव कार्यक्रम और संभावित तिथि बताने के निर्देश दिये। साथ ही राज्य चुनाव आयुक्त से पूछा कि आखिर वह क्यों चाहते हैं कि […] The post राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव में देरी पर जताई नाराजगी appeared first on Sabguru News .
केशव प्रसाद मौर्य ने वाराणसी में आयोजित पंच सम्मेलन के दौरान विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों एवं प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की सराहना की। उन्होंने काशी प्रेरणा कैण्टीन का निरीक्षण करते हुए वहां उपलब्ध कराए जा रहे खाद्य पदार्थों एवं संचालन व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। इसके उपरांत उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा रबर की चप्पलें तैयार करने की पूरी निर्माण प्रक्रिया को विस्तार से देखा और महिलाओं से उत्पादन, विपणन तथा आय के संबंध में जानकारी प्राप्त की।उप मुख्यमंत्री स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित महिला सूट स्टॉल पर भी पहुंचे, जहां उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार किए गए परिधानों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए उनके आत्मनिर्भरता के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने वाराणसी लाल भरवा मिर्च के स्टॉल का भी निरीक्षण किया तथा उत्पादों की बिक्री, बाजार की मांग और समूह की महिलाओं की बढ़ती आय के विषय में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
अलवर में 12वीं कक्षा के छात्र तुषार की गोली मारकर हत्या
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के रामगढ़ के नौगांवा थाना क्षेत्र में बारहवीं कक्षा के छात्र की हत्या का मामला सामने आया है। दो दिन से लापता छात्र तुषार कुमार का शव बुधवार सुबह रामगढ़ क्षेत्र के नौगांवा थाना क्षेत्र में नेवाड़ी गांव के पास पहाड़ी की तलहटी में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवक […] The post अलवर में 12वीं कक्षा के छात्र तुषार की गोली मारकर हत्या appeared first on Sabguru News .
वाराणसी प्रवास पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में वाराणसी के लिए कुल ₹25,445.96 करोड़ की लागत वाली दो महत्त्वपूर्ण मेगा हाईवे एवं एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान किए जाने पर हृदय से आभार एवं अभिनंदन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने काशी के सर्वांगीण विकास को सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उनके नेतृत्व में वाराणसी विश्वस्तरीय धार्मिक, सांस्कृतिक, पर्यटन एवं आर्थिक केंद्र के रूप में निरंतर विकसित हो रही है। अब इन दोनों महत्त्वपूर्ण एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं के निर्माण से वाराणसी की यातायात व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा तथा शहर को जाम की गंभीर समस्या से स्थायी राहत मिलेगी।उन्होंने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं में पहली परियोजना ₹10,998.32 करोड़ की लागत से वरुणा नदी कॉरिडोर का निर्माण है, जिसके अंतर्गत वरुणा नदी के किनारे-किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने वाला आधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर शहर के भीतर यातायात के दबाव को कम करेगा तथा तेज, सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करेगा। दूसरी महत्त्वपूर्ण परियोजना ₹14,447.64 करोड़ की लागत से गंगा नदी कॉरिडोर के रूप में विकसित की जाएगी। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) तथा वाराणसी रिंग रोड के मध्य गंगा नदी के किनारे छह लेन का आधुनिक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसमें एक अत्याधुनिक केबल-स्टे ब्रिज का भी निर्माण शामिल है। यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण होगी तथा वाराणसी की परिवहन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
पौधरोपण महायज्ञ-2026 के अंतर्गत वन विभाग कई विशिष्ट वन स्थापित कर रहा है। इसी क्रम में आषाढ़ मास यानी गुरुपूर्णिमा (29 जुलाई) से पहले कई विशिष्ट वन स्थापित करेगा। 18 जुलाई से 27 जुलाई के मध्य पूरे प्रदेश में कई विशिष्ट वन स्थापित किए जाएंगे। 18 ...
नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉईज यूनियन के 22वें रक्तदान शिविर में 1192 यूनिट रक्तदान
अजमेर। नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉईज यूनियन के 22वें रक्तदान शिविर में 1192 यूनिट रक्तदान का नया रिकार्ड बन गया। गत वर्ष 1068 यूनिट रक्तदान हुआ था। यूनियन के जोनल कार्यकारी अध्यक्ष मोहन चेलानी ने बताया कि लायन्स क्लब अजमेर प्रिमियम एवं सतगुरु स्कूल के सहयोग से रेलवे ऑफिसर्स क्लब में आयोजित रक्तदान शिविर का उद्घाटन […] The post नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉईज यूनियन के 22वें रक्तदान शिविर में 1192 यूनिट रक्तदान appeared first on Sabguru News .
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने कहा कि देवाधिदेव महादेव की नगरी वाराणसी में बनकटी हनुमान मंदिर में प्रभु हनुमंत लाल जी महाराज के दिव्य दर्शन व पूजन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। संकटमोचन प्रभु श्री हनुमान जी के श्रीचरणों में प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमयता की प्रार्थना करता हूं।दर्शन-पूजन के उपरांत उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने कहा कि आज वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम में देवाधिदेव महादेव भगवान शिव के पावन ज्योतिर्लिंग के दर्शन व पूजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। काशीपति बाबा विश्वनाथ जी से प्रदेशवासियों के सर्वकल्याण की प्रार्थना करता हूं।उन्होंने कहा कि भगवान शिव एवं प्रभु श्री हनुमान की असीम कृपा से उत्तर प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रहे, समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो तथा प्रत्येक परिवार सुख, शांति और समृद्धि के साथ जीवनयापन करे, यही उनकी हार्दिक कामना है।
साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी, अधिवक्ताओं को दिए सुरक्षा के टिप्स
जयपुर। अधिवक्ता परिषद राजस्थान जयपुर प्रांत एवं आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) जयपुर बैंच इकाई के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ‘साइबर अपराध एवं जागरूकता’ विषय पर विशेष स्टडी सर्किल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिवक्ताओं और विधि विद्यार्थियों को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना तथा उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की […] The post साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी, अधिवक्ताओं को दिए सुरक्षा के टिप्स appeared first on Sabguru News .
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र-छात्राओं को उच्च ...
मिलिट्री इंटेलिजेंस और GRP की संयुक्त कार्रवाई में अयोध्या में सेना का फर्जी हवलदार गिरफ्तार
Fake Army Soldier Arrested from Ayodhya: अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन से सेना की वर्दी पहनकर घूम रहे एक शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया गया है। मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) की इस संयुक्त कार्रवाई में आरोपी के पास से सेना की वर्दी, ...
MSP पर रिकॉर्ड खरीद से UP के किसानों को मिल रहा बड़ा लाभ, अनाज की खरीद में बना कीर्तिमान
Chief Minister Yogi Adityanath : उत्तर प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में योगी सरकार की सरकारी खरीद नीति ने पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पारदर्शी खरीद व्यवस्था, ...
क्या E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान हो सकता है, आयोग के फैसले से शुरू हुई नई बहस
देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर से एक बड़ा मामला सामने आया है। इसने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दावे, कार कंपनियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस E20 पेट्रोल को लेकर वायरल हो रहे वीडियो के बीच नई बहस शुरू कर दी है।
दतिया विधाानसभा उपचुनाव में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के जबरदस्त बवाल और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई का मामला गुरुवार को फिर गर्मा गया। दतिया भाजपा कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नरोत्तम ...
TRAI का Data Service से जुड़ा नया अलर्ट, कीपैड फोन यूजर्स को भेजा नया मैसेज
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की ओर से देशभर के कई कीपैड (Feature Phone) मोबाइल यूजर्स को एक नया संदेश भेजा गया है। इस संदेश में बताया गया है कि अब ग्राहक 1925 नंबर पर कॉल करके या SMS भेजकर अपनी मोबाइल डेटा सेवा (Data Services) को ...
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स-2026 में सम्मिलित हुए। उन्होंने यहां देश-विदेश के प्रमुख टेक्सटाइल निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों और वैश्विक ब्रांड्स के साथ राउंड टेबल बैठक की। ...
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (चढ़ावे और चंदे) में हेराफेरी का मामले में गिरफ्तारी और जांच का मामला अभी गर्माया हुआ है। इस बीच तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को नई डोनर (दाता) नीति लागू होने से ठीक एक दिन ...
MoU मानो तभी खुलेगा Hormuz Strait, दुनिया के सबसे बड़े समुद्री रास्ते के लिए ईरान की नई शर्त
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर ईरान ने नया रुख अपनाया है। ईरान ने साफ कहा है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग को दोबारा पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिका को पहले समझौता ज्ञापन ...
Sanwaliya Seth Temple: सांवलिया सेठ के दरबार में जयपुर के भक्त ने चढ़ाई 20 लाख की सोने की बांसुरी
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह रूप श्री सांवलिया सेठ मंदिर (Sanwaliya Seth Temple) में आस्था और समर्पण का एक और अद्भुत उदाहरण सामने आया है। देश के सबसे अमीर और चमत्कारी मंदिरों में शुमार सांवलिया जी के दरबार में आए दिन करोड़ों रुपये का गुप्त दान और सोने-चांदी के आभूषण चढ़ना आम बात है, लेकिन गुरुवार 16 जुलाई 2026 को जयपुर से आए एक श्रद्धालु परिवार ने ठाकुर जी को एक ऐसी अनोखी और भव्य भेंट अर्पित की है, जिसकी चर्चा पूरे राजस्थान और सोशल मीडिया पर तेजी से हो रही है। इस श्रद्धालु ने भगवान सांवलिया सेठ को शुद्ध सोने से निर्मित एक बेहद खूबसूरत बांसुरी भेंट की है।137 ग्राम सोने से बनी है दिव्य बांसुरी: मौजूदा बाजार भाव के अनुसार 20 लाख रुपये है कीमतमंदिर प्रशासन से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जयपुर के इस बिजनेसमैन श्रद्धालु परिवार ने अपनी एक विशेष मन्नत पूरी होने के बाद ठाकुर जी के प्रति आभार प्रकट करने के लिए इस दिव्य बांसुरी का निर्माण करवाया था। इस बांसुरी को बनाने में लगभग 137 ग्राम शुद्ध सोने (Pure Gold) का इस्तेमाल किया गया है। वर्तमान समय में सोने के रिकॉर्ड तोड़ बाजार भाव को ध्यान में रखते हुए इस सोने की बांसुरी की अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी जा रही है। इस कलात्मक बांसुरी को जयपुर के कुशल कारीगरों ने बेहद बारीकी से तैयार किया है, जिसे देखने के लिए मंदिर परिसर में मौजूद अन्य श्रद्धालु भी लालायित नजर आए।भगवान कृष्ण और बांसुरी का पावन नाता: सिर्फ कीमती धातु नहीं, अटूट श्रद्धा का है प्रतीकसनातन धर्म और पौराणिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण और उनकी बांसुरी का रिश्ता अत्यंत गहरा और अलौकिक माना गया है। बांसुरी को केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि निष्काम प्रेम, निश्छल भक्ति और परम शांति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। जयपुर के भक्त परिवार का कहना है कि जब उनकी बरसों पुरानी मनोकामना सांवलिया सेठ की कृपा से पूरी हुई, तो उन्होंने भगवान के सबसे प्रिय आभूषण को ही स्वर्ण रूप में अर्पित करने का संकल्प लिया। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, इस प्रकार के बड़े दान को सिर्फ एक कीमती उपहार के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच के अटूट विश्वास और समर्पण की पराकाष्ठा को दर्शाता है।मंदिर की रसीद प्रक्रिया और सम्मान परंपरा: ऊपरना पहनाकर भक्त परिवार का हुआ स्वागतइस नायाब स्वर्ण बांसुरी को अर्पित करने के लिए भक्त परिवार ने पूरी धार्मिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया। सबसे पहले उन्होंने मुख्य गर्भगृह में सांवलिया सेठ के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की। इसके बाद, वे मंदिर के आधिकारिक भेंट कक्ष (Donation Room) पहुंचे, जहां मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष इस 137 ग्राम वजनी बांसुरी को कानूनी प्रक्रिया के तहत सुपुर्द किया गया। मंदिर ट्रस्ट ने नियमों के अनुसार सोने की शुद्धता की जांच कर श्रद्धालु को इसकी आधिकारिक रसीद (Donation Receipt) सौंपी। सांवलिया जी मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार, इतनी बड़ी भेंट चढ़ाने के बाद मंदिर के मुख्य पुजारी और पदाधिकारियों ने जयपुर के श्रद्धालु को भगवान का पवित्र ऊपरना (दुपट्टा) पहनाकर सम्मानित किया, साथ ही उन्हें ठाकुर जी का विशेष महाप्रसाद और सांवलिया सेठ की एक सुंदर तस्वीर स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की।देश-विदेश में प्रसिद्ध है सांवलिया सेठ का दरबार: हर महीने निकलता है करोड़ों का चढ़ावाराजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में स्थित सांवलिया सेठ मंदिर की ख्याति केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी फैली हुई है। ऐसी दृढ़ मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त सच्चे और साफ मन से आकर झोली फैलाता है, सांवलिया सेठ उसकी हर मुराद निश्चित रूप से पूरी करते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर को 'व्यापार का साझीदार' (Business Partner) भी कहा जाता है और कई बड़े कारोबारी अपने मुनाफे का एक निश्चित हिस्सा यहां आकर चढ़ाते हैं। हर महीने जब मंदिर का दानपात्र खोला जाता है, तो उसमें से 10 से 15 करोड़ रुपये की नकदी के साथ-साथ भारी मात्रा में सोने के मुकुट, छत्र, बांसुरी और हीरे-जवाहरात निकलते हैं, जो इस मंदिर के प्रति जन-जन की अगाध श्रद्धा को प्रमाणित करता है।
वैदिक ज्योतिष और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, 16 जुलाई 2026 को ब्रह्मांड के राजा सूर्य देव ने मिथुन राशि की अपनी यात्रा पूरी कर जल तत्व की कर्क राशि (Cancer) में प्रवेश कर लिया है। सूर्य देव अब आगामी एक महीने तक इसी राशि में गोचर करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, मान-सम्मान, उच्च पद-प्रतिष्ठा, सरकारी नौकरी, पिता और नेतृत्व क्षमता का मुख्य कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में सूर्य के इस बड़े राशि परिवर्तन का सीधा प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन पर देखने को मिलेगा। ज्योतिषीय विश्लेषण के मुताबिक, यह गोचर वैसे तो सभी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन 5 विशेष राशियां ऐसी हैं जिनकी किस्मत के सितारे इस अवधि में बुलंद होने जा रहे हैं और उन्हें करियर से लेकर धन लाभ तक के मोर्चे पर बंपर सफलता मिलने वाली है।मेष राशि (Aries): पारिवारिक सुख और आत्मविश्वास में होगी भारी वृद्धिसूर्य का यह गोचर मेष राशि के जातकों के लिए मानसिक शांति और खुशियां लेकर आने वाला है। पिछले काफी समय से आपके घर-परिवार में जो भी कलह या परेशानियां चल रही थीं, वे अब धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी। नौकरीपेशा जातकों को कार्यस्थल पर कोई नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिससे आपका प्रभाव बढ़ेगा। यदि आपका कोई महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय से प्रशासनिक कारणों से रुका हुआ था, तो अब उसमें गति आएगी। इस अवधि में आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर रहेगा और आपको हर मोड़ पर जीवनसाथी व परिवार का पूरा सहयोग प्राप्त होगा।सिंह राशि (Leo): आय के नए स्रोतों के साथ कारोबार में होगा बड़ा मुनाफाचूंकि सूर्य देव सिंह राशि के ही स्वामी (Ruler) हैं, इसलिए उनके इस गोचर काल को आपके लिए बेहद कल्याणकारी और भाग्यशाली माना जा रहा है। कार्यस्थल पर आपके बॉस और उच्च अधिकारी आपकी कार्यशैली से बेहद प्रभावित रहेंगे, जिससे पदोन्नति (Promotion) के योग बनेंगे। आपकी पुरानी मेहनत का अब आपको मीठा और मनमुताबिक फल मिलने वाला है। आर्थिक मोर्चे पर आपको आय बढ़ाने के कई नए और शानदार अवसर प्राप्त होंगे। जो जातक खुद का व्यापार या स्वतंत्र कारोबार चला रहे हैं, उन्हें इस एक महीने की अवधि में कोई बड़ी डील हाथ लग सकती है, जिससे मुनाफा दोगुना होने की उम्मीद है।वृश्चिक राशि (Scorpio): अटके काम होंगे पूरे और प्रतियोगी परीक्षाओं में मिलेगी सफलतावृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का कर्क राशि में आना भाग्य के द्वार खोलने जैसा साबित होगा। किस्मत का भरपूर साथ मिलने से आपके जो काम सालों से अटके हुए थे, वे अब बिना किसी बाधा के फटाफट पूरे होने लगेंगे। यदि आप लंबे समय से नौकरी बदलने की योजना बना रहे थे या किसी बेहतर पैकेज की तलाश में थे, तो इस दौरान आपको कोई बड़ी और अच्छी खबर मिल सकती है। शिक्षा, उच्च शिक्षा और सरकारी या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे विद्यार्थियों के लिए यह समय स्वर्ण काल की तरह रहेगा। इस अवधि में की गई व्यावसायिक यात्राएं आपके लिए भविष्य में बेहद लाभकारी और धनदायक साबित होंगी।धनु राशि (Sagittarius): सरकारी अटके काम होंगे पूरे और सामाजिक मान-सम्मान में होगा इजाफाधनु राशि के जातकों के लिए सूर्य देव का यह राशि परिवर्तन जीवन के कई मोर्चों पर बड़ी राहत लेकर आ रहा है। यदि आपका कोई सरकारी टेंडर, टैक्स संबंधी मामला या कोर्ट-कचहरी का काम फंसा हुआ था, तो वह अब आपके पक्ष में सुलझता हुआ दिखाई देगा। व्यापारिक दृष्टिकोण से आपको बाजार में नए निवेश और विस्तार के बेहतरीन मौके मिलेंगे, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति पहले के मुकाबले काफी ज्यादा सुदृढ़ और मजबूत हो जाएगी। समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लोग आपकी सलाह को महत्व देंगे।मीन राशि (Pisces): करियर में ऊंचाइयों को छुएंगे और नए काम की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ समयमीन राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर करियर और व्यक्तिगत जीवन दोनों में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा। नौकरीपेशा लोगों को उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है, जिससे उनकी सामाजिक स्थिति मजबूत होगी। पारिवारिक जीवन में मधुरता बनी रहेगी और जीवनसाथी के साथ आपके संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत होंगे। प्रेम संबंधों में चल रही दूरियां भी इस दौरान समाप्त हो जाएंगी। यदि आप लंबे समय से कोई नया स्टार्टअप, बिजनेस या नया काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो यह एक महीना आपके लिए सबसे ज्यादा अनुकूल और भाग्यशाली रहने वाला है, इस समय किया गया निवेश आपको दीर्घकालिक लाभ देगा।
मेजर लीग क्रिकेट (MLC 2026) के एलिमिनेटर मुकाबले में क्रिकेट जगत ने एक ऐसा ऐतिहासिक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर देखा, जिसने T20 क्रिकेट के इतिहास की सभी पुरानी किताबों को पलट कर रख दिया है। ओकलैंड कोलिज़ीयम के मैदान पर खेले गए इस महामुकाबले में वॉशिंगटन फ्रीडम और एमआई न्यूयॉर्क (MI New York) की टीमें आमने-सामने थीं। इस मैच को दुनिया के सबसे छोटे फॉर्मेट के सबसे रोमांचक और रिकॉर्ड-तोड़ मुकाबलों में से एक मान लिया गया है, जहां रनों की ऐसी सुनामी आई जिसने हर किसी को हैरान कर दिया।ओकलैंड का रनबाजार: निकोलस पूरन और कीरोन पोलार्ड की आक्रामक बैटिंग से MI न्यूयॉर्क का विशाल स्कोरमैच की शुरुआत में एमआई न्यूयॉर्क ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मैदान के चारों ओर चौकों और छक्कों की बरसात कर दी। सलामी बल्लेबाज मोनंक पटेल और क्विंटन डी कॉक भले ही बड़ी पारी खेलने से चूक गए हों, लेकिन इसके बाद क्रीज पर आए विस्फोटक बल्लेबाज निकोलस पूरन ने मैदान पर तबाही मचा दी। पूरन ने महज 33 गेंदों का सामना करते हुए ताबड़तोड़ 106* रनों की नाबाद शतकीय पारी खेली, जिसके दम पर टीम ने स्कोरबोर्ड पर रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया। उनका साथ देते हुए अनुभवी कीरोन पोलार्ड ने भी महज़ 25 गेंदों में 64 रनों की तेजतर्रार पारी खेली। एमआई न्यूयॉर्क ने पहली पारी में कुल 266 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो टी20 इतिहास के सबसे बड़े स्कोर में शुमार हो गया। इस पारी के दौरान एमआई न्यूयॉर्क के बल्लेबाजों ने कुल 29 छक्के जड़े, जो किसी भी टी20 पारी में किसी टीम द्वारा लगाए गए सबसे ज्यादा छक्कों का नया रिकॉर्ड है। पहली पारी के बाद हर किसी को यह लग रहा था कि वॉशिंगटन फ्रीडम के लिए इस लक्ष्य को छूना नामुमकिन होगा, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है।स्टीव स्मिथ और एंड्रीज़ गौस का चमत्कारी तूफान: जब रनों के पहाड़ के सामने बौने पड़ गए गेंदबाज267 रनों के असंभव से दिखने वाले लक्ष्य का पीछा करने उतरी वॉशिंगटन फ्रीडम की शुरुआत बेहद खराब रही और पारी के शुरुआती ओवर में ही मिचेल ओवेन मात्र 1 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद क्रीज पर आए पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ और एंड्रीज़ गौस ने मोर्चा संभाला और मैच का नक्शा ही बदल दिया। अनुभवी स्टीव स्मिथ ने कप्तानी पारी खेलते हुए न्यूयॉर्क के गेंदबाजों के होश उड़ा दिए और 48 गेंदों में नाबाद 110* रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जिसमें 7 चौके और 9 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। उनका साथ निभाया एंड्रीज़ गौस ने, जिन्होंने मैदान के हर कोने में शॉट लगाते हुए मात्र 51 गेंदों में 132 रनों की ऐतिहासिक पारी खेल डाली। इन दोनों बल्लेबाजों की आंधी के आगे दुनिया का कोई भी गेंदबाज टिक नहीं सका।T20 क्रिकेट के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त: 51 छक्कों वाला मुकाबला और सबसे बड़ा सफल रन चेज़जब क्रिकेट पंडितों ने मान लिया था कि मैच पूरी तरह से हाथ से निकल चुका है, तब वॉशिंगटन फ्रीडम के बल्लेबाजों ने करिश्मा कर दिखाया। टीम ने नामुमकिन दिख रहे 267 रनों के इस पहाड़ जैसे लक्ष्य को मात्र 18.4 ओवर में ही हासिल कर लिया और 6 विकेट शेष रहते ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली। इस मैच में कुल 51 छक्के लगे, जो किसी भी टी20 मुकाबले में 50 से अधिक छक्के लगने का पहला और एकमात्र वर्ल्ड रिकॉर्ड है। यह T20 क्रिकेट के संपूर्ण इतिहास का सबसे बड़ा सफल रन चेज़ भी बन गया है, जिससे वॉशिंगटन फ्रीडम का खिताब जीतने का सपना अभी भी जिंदा है। इस सनसनीखेज जीत के बाद अब वॉशिंगटन फ्रीडम का मुकाबला दूसरे एलिमिनेटर मैच में 17 जुलाई को सैन फ्रांसिस्को यूनिकॉर्न्स के खिलाफ होगा, जहां फैंस एक बार फिर रोमांचक मुकाबले की उम्मीद कर रहे हैं।
भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही तीन मैचों की हाई-प्रोफाइल वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला वेल्स के कार्डिफ स्थित ऐतिहासिक सोफिया गार्डन्स (Sophia Gardens, Cardiff) मैदान पर खेला जाना है। लगातार सात मैचों की करारी हार के सिलसिले को तोड़ते हुए टीम इंडिया ने कप्तान शुभमन गिल (Shubman Gill) की अगुवाई में पहले वनडे में इंग्लैंड पर एक शानदार और धमाकेदार जीत दर्ज की थी। इस दूसरे मैच में मेहमान भारतीय टीम के पास सीरीज को अपने नाम कर इतिहास रचने का एक सुनहरा मौका होगा। लेकिन इस महामुकाबले से ठीक पहले करोड़ों क्रिकेट फैंस की नजरें कप्तान शुभमन गिल की फिटनेस और उनकी चोट की चिंताओं पर टिकी हुई थीं, जिस पर अब एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत देने वाला आधिकारिक अपडेट सामने आया है।बर्मिंघम थ्रिलर का फ्लैशबैक: जब 80 रनों की तूफानी पारी के बाद रिटायर्ड हर्ट हुए गिलबर्मिंघम में खेले गए सीरीज के पहले एकदिवसीय मैच में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर शानदार रणनीति के तहत इंग्लैंड को 6 विकेट से करारी शिकस्त दी थी। मेजबान इंग्लैंड के 258 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए कप्तान शुभमन गिल ने सामने से टीम का नेतृत्व किया और महज 26वें ओवर तक 80 रनों की आक्रामक पारी खेल डाली। हालांकि, इसी ओवर के दौरान गिल अचानक गंभीर शारीरिक ऐंठन (Cramps) से जूझते नजर आए और उन्हें मजबूरन 'रिटायर्ड हर्ट' होकर मैदान से बाहर जाना पड़ा। गिल के जाने के बाद ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल ने मोर्चा संभाला, दोनों ने बेहतरीन अर्धशतक जमाते हुए 109 रनों की अटूट साझेदारी की और भारत को 4 ओवर शेष रहते ही एक ऐतिहासिक जीत दिला दी।चोटों का पुराना इतिहास: जब-जब क्रैम्प और गर्दन की समस्या ने बढ़ाई भारतीय खेमे की धड़कनेंदाएं हाथ के इस होनहार ओपनिंग बल्लेबाज के लिए चोट और क्रैम्प्स की समस्या कोई नई बात नहीं है। इससे पहले साल 2023 के वनडे वर्ल्ड कप के हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में भी शुभमन गिल 79 रन के स्कोर पर गंभीर क्रैम्प्स के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गए थे। इसके अलावा, गिल को करियर में लगातार गर्दन की चोट (Neck Injury) से भी जूझना पड़ा है। साल 2024 में इसी गर्दन की समस्या के कारण वह श्रीलंका के खिलाफ एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच और न्यूजीलैंड के खिलाफ एक महत्वपूर्ण टेस्ट मैच से बाहर हो गए थे। इसके बाद साल 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान भी उनकी गर्दन की तकलीफ दोबारा उभर आई थी, जहां उन्हें फिर से रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा था। यही वजह थी कि पहले वनडे में उनके मैदान छोड़ने के बाद दूसरे वनडे में उनकी उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।सोफिया गार्डन्स से राहत की खबर: दूसरे वनडे की प्लेइंग इलेवन में कप्तानी संभालेंगे शुभमन गिलभारतीय क्रिकेट प्रशंसकों और टीम प्रबंधन के लिए सोफिया गार्डन्स के खेल गलियारों से बेहद सकारात्मक रिपोर्ट आ रही है। सूत्रों और मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, शुभमन गिल की मांसपेशियों का खिंचाव अब पूरी तरह ठीक हो चुका है और वह पूरी तरह से फिट घोषित कर दिए गए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि वह न केवल प्लेइंग इलेवन (Playing XI) का हिस्सा होंगे, बल्कि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज पर कब्जा करने के इरादे से मैदान पर भारतीय टीम की कप्तानी भी संभालेंगे। उनके फिट होने से भारतीय बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ एक बार फिर बेहद मजबूत नजर आ रही है।अभिषेक नायर ने की विराट कोहली से तुलना: 'जुनूनी खिलाड़ी की तरह रन बना रहे हैं गिल'दूसरे वनडे मैच की पूर्व संध्या पर भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर और मौजूदा सपोर्ट स्टाफ के सदस्य अभिषेक नायर (Abhishek Nayar) ने कप्तान शुभमन गिल के मौजूदा शानदार फॉर्म पर खुलकर बात की। नायर ने गिल की तकनीकी श्रेष्ठता की जमकर तारीफ करते हुए उनके इस सुनहरे दौर (Purple Patch) की तुलना दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली (Virat Kohli) के शुरुआती अंतरराष्ट्रीय करियर के सालों से कर दी। नायर ने कहा, शुभमन गिल को क्रीज पर बल्लेबाजी करते देखकर मुझे विराट कोहली का वह शुरुआती दौर याद आ गया जब वे अपनी मर्जी से हर मैच में रन बनाते थे। गिल इस वक्त बिल्कुल परफेक्ट दिख रहे हैं। चाहे इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी हो या सोफिया गार्डन्स की सीम लेती पिच, ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि वे किसी भी मोड़ पर संघर्ष कर रहे हैं। वे एक जुनूनी क्रिकेटर की तरह खेल रहे हैं।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के दूसरे हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को एक बेहद रोमांचक और सांसें रोक देने वाले मैच में 1-2 से शिकस्त दे दी है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही तीन बार की विश्व चैंपियन अर्जेंटीना अब अपने चौथे सुनहरे खिताब से महज एक कदम दूर है। मैच के असली हीरो एक बार फिर सर्वकालिक महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी (Lionel Messi) साबित हुए, जिन्होंने अपने जादुई खेल की बदौलत मैच में दो टर्निंग असिस्ट देकर पासा पलट दिया। फाइनल का टिकट पक्का करने के तुरंत बाद, भावुक मेसी ने दुनिया भर में फैले अर्जेंटीना के करोड़ों फैंस के नाम एक बेहद दिल छू लेने वाला संदेश जारी किया है।यह टीम कभी निराश नहीं करेगी: मेसी ने कतर की यादें ताजा करते हुए फैंस को दिया खास संदेशइंग्लैंड पर मिली इस जादुई जीत के बाद पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन और मीडिया से बात करते हुए कप्तान लियोनेल मेसी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने फैंस के अटूट विश्वास की सराहना करते हुए कहा, मैं अपने देश के हर एक प्रशंसक से आज ठीक वही बात कहना चाहता हूं जो मैंने 2022 में कतर वर्ल्ड कप के दौरान कही थी—इस ऐतिहासिक पल का पूरा आनंद लें (Enjoy it)। यह टीम आपके भरोसे को कभी टूटने नहीं देगी और आपको कभी निराश नहीं करेगी। यह पूरा वर्ल्ड कप अभियान हमारे लिए बेहद क्रेज़ी और भावनाओं से भरा रहा है। लगातार दूसरी बार विश्व कप के फाइनल में पहुंचना किसी अविश्वसनीय सपने जैसा है। भले ही यह मैदान पर खेला जाने वाला एक फुटबॉल मैच था, लेकिन जैसे ही राष्ट्रगान की धुन बजी, हम सभी खिलाड़ियों ने अपने भीतर एक अद्भुत और खास ऊर्जा महसूस की। यह सिर्फ एक और जीत नहीं है; अर्जेंटीना का हर नागरिक इसे पूरे दिल से चाहता था।अटलांटा स्टेडियम में थ्रिलर ड्रामा: इंग्लैंड की एक रणनीतिक चूक और अर्जेंटीना का ऐतिहासिक पलटवार16 जुलाई 2026 को अटलांटा के खचाखच भरे स्टेडियम में खेले गए इस दूसरे सेमीफाइनल मैच के पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली और कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं हो सकी। दूसरे हाफ में खेल ने करवट ली जब 55वें मिनट में इंग्लैंड के स्टार फारवर्ड एंथनी गॉर्डन ने एक शानदार फील्ड गोल दागकर अपनी टीम को 0-1 की बढ़त दिला दी। इस शुरुआती झटके के बाद इंग्लैंड की टीम ने आक्रामक खेल जारी रखने के बजाय पीछे हटकर रक्षात्मक (Defensive Mode) रणनीति अपनाई, जो अंततः उन पर भारी पड़ गई। मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना ने दबाव का फायदा उठाया और खेल के 85वें मिनट में एंजो फर्नांडीज ने मेसी के बेहतरीन पास पर गोल कर स्कोर 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया।92वें मिनट में लुटारो मार्टिनेज का विनिंग गोल: एक्स्ट्रा टाइम में टूटा इंग्लैंड का दिलमैच जब पेनल्टी शूटआउट की तरफ बढ़ता हुआ दिख रहा था, तभी इंजरी टाइम (92वें मिनट) में अर्जेंटीना के स्ट्राइकर लुटारो मार्टिनेज ने लियोनेल मेसी के एक और जादुई असिस्ट को गोल पोस्ट के भीतर भेजकर इतिहास रच दिया। इस विनिंग गोल के साथ ही अर्जेंटीना ने मुकाबला 1-2 से अपने नाम कर लिया। अब अर्जेंटीना की टीम 20 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क न्यू जर्सी के भव्य स्टेडियम में होने वाले महा-मुकाबले में 2010 की विश्व चैंपियन स्पेन (Spain) से भिड़ेगी। स्पेन इस वक्त अपने सबसे खतरनाक फॉर्म में चल रही है और उसने हाल ही में पुर्तगाल और फ्रांस जैसी दिग्गज टीमों को हराकर फाइनल में जगह बनाई है, जिससे फुटबॉल प्रेमियों को एक ऐतिहासिक फाइनल देखने को मिलने वाला है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में हाल के महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफा देने की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेष रूप से गगनयान (Gaganyaan) और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशनों से ...
बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगेगा ताला! बिना माता-पिता की इजाजत नहीं खुलेगा खाता
डिजिटल युग में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया जा रहा है। पाकिस्तान के सबसे बड़े और प्रभावशली पंजाब प्रांत की विधानसभा में एक ऐसा अभूतपूर्व प्रस्ताव पेश किया गया है, जो अगर कानून में बदलता है तो 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अपने माता-पिता या कानूनी अभिभावकों की लिखित अनुमति के बिना किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना अकाउंट नहीं खोल पाएंगे। इस कदम के बाद अब पड़ोसी देश में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल लत को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) की विधायक का मास्टरस्ट्रोक: सारा अहमद ने पेश किया देश का पहला अनोखा प्रस्तावपंजाब विधानसभा में यह ऐतिहासिक और अपनी तरह का पहला अनूठा प्रस्ताव सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रमुख सहयोगी पार्टी 'इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी' (IPP) की विधायक सारा अहमद द्वारा मंगलवार 14 जुलाई 2026 को पेश किया गया। सारा अहमद, जो पंजाब बाल संरक्षण ब्यूरो (Punjab Child Protection Bureau) की अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को पटल पर रखा। सारा अहमद ने प्रांतीय सरकार से न केवल अपने राज्य में इसे लागू करने की मांग की है, बल्कि प्रांतीय प्रशासन के जरिए देश की संघीय (केंद्र) सरकार से भी पूरे पाकिस्तान में बच्चों के लिए समान रूप से डिजिटल सुरक्षा कानून बनाने की पुरजोर सिफारिश की है।क्यों पड़ी इस कड़े कानून की जरूरत? साइबर उत्पीड़न और डिजिटल एडिक्शन से बचाने की राज्य की नैतिक जिम्मेदारीप्रस्ताव के मसौदे में इस बात को बेहद गंभीरता से रेखांकित किया गया है कि देश के बच्चों का शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक विकास सुनिश्चित करना किसी भी कल्याणकारी राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। आधुनिक समय में सोशल मीडिया तक बच्चों की अनियंत्रित और अनियंत्रित पहुंच के कारण वे लगातार साइबर बुलिंग (Cyber Bullying), ऑनलाइन यौन शोषण, अनुचित एवं अश्लील सामग्री, भारी मानसिक तनाव, गंभीर अवसाद और खतरनाक डिजिटल एडिक्शन (Digital Addiction) का शिकार हो रहे हैं। इन बढ़ते खतरों को रोकने के लिए सिर्फ पारिवारिक समझ नहीं, बल्कि एक मजबूत और प्रभावी कानूनी संरक्षण चक्र की तत्काल आवश्यकता है।पीटीए (PTA) से सख्त ऐज वेरिफिकेशन की मांग: सोशल मीडिया कंपनियों को लागू करना होगा कड़ा सुरक्षा तंत्रइस नए कानून के प्रस्ताव में सिर्फ प्रतिबंध लगाने की बात नहीं की गई है, बल्कि इसे धरातल पर कड़ाई से लागू करने के लिए एक तकनीकी ढांचा तैयार करने की भी मांग की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA - Pakistan Telecommunication Authority) को देश में संचालित होने वाले सभी वैश्विक सोशल मीडिया दिग्गजों (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और एक्स) के लिए एक बेहद प्रभावी और अनिवार्य ऐज वेरिफिकेशन सिस्टम (Age Verification System) लागू करना होगा। इस मजबूत तकनीकी फिल्टर के लागू होने के बाद ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी कम उम्र का बच्चा अपनी सही उम्र छुपाकर या फर्जी प्रोफाइल बनाकर इन प्लेटफॉर्म्स का गलत इस्तेमाल न कर सके।वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है बच्चों पर पहरा: ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ की तर्ज पर तैयारीपाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आया यह प्रस्ताव किसी एक देश की सोच नहीं है, बल्कि वर्तमान में पूरी दुनिया की सरकारें बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार को लेकर बेहद गंभीर हो चुकी हैं। चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक शोधों में लगातार यह साबित हो रहा है कि अत्यधिक सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह बर्बाद कर रहा है। इसी के मद्देनजर हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (EU) के कई सदस्य देशों ने अपने यहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक बच्चों की पहुंच को सीमित करने के लिए सख्त आयु-आधारित प्रतिबंध और कानून लागू किए हैं। इसी राह पर चलते हुए अब पड़ोसी देश भी बच्चों के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य के लिए इस कड़े नियमन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
नेपाल के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त एक नया और बेहद आक्रामक वैचारिक मोड़ देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया और युवा पीढ़ी (Gen-Z) के अभूतपूर्व समर्थन के दम पर पारंपरिक राजनीतिक दलों को पछाड़कर सत्ता के केंद्र में स्थापित हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह (Balen Shah) की शासन शैली अब गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। नेपाल की संसद की उच्च सदन यानी नेशनल असेंबली (National Assembly) में बुधवार 15 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री के खिलाफ विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया। जनता समाजवादी पार्टी (JSP) के कद्दावर नेता और वरिष्ठ सांसद महंथ ठाकुर ने सदन के भीतर प्रधानमंत्री बालेन शाह की तुलना सीधे दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाह एडॉल्फ हिटलर से करते हुए देश में तानाशाही शासन व्यवस्था थोपने का गंभीर आरोप मढ़ दिया है।नेपाली हिटलर बन चुके हैं पीएम: महंथ ठाकुर ने संसद में दागे तीखे सियासी बाणसंसद की रणनीतिक बैठक के दौरान महंथ ठाकुर ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बालेन शाह के नेतृत्व वाले पूरे प्रशासनिक तंत्र को अक्षम, दिशाहीन और पूरी तरह विफल करार दिया। उन्होंने स्पीकर के सामने जोर देते हुए कहा, आज हम देश के मुखिया को किस नाम से पुकारें? क्या उन्हें नेपाली तानाशाह कहा जाए या फिर नेपाली हिटलर? वे वास्तव में नेपाल के हिटलर बन चुके हैं। उनके मुंह से निकला हर शब्द परम सत्य मान लिया जाता है और उनका हर मनमाना आदेश देश का कानून बन जाता है। इस निरंकुश रवैये के कारण आज पूरा नेपाल तबाही और प्रशासनिक अराजकता के मुहाने पर जाकर खड़ा हो गया है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह सरकार पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है और इसमें जनता को दिए गए लोक-लुभावन आश्वासनों को धरातल पर उतारने की कोई राजनीतिक प्रतिबद्धता नहीं बची है, जिससे देश के युवाओं में हताशा बढ़ रही है।प्रशासनिक तंत्र और संस्थाओं पर हमला: राजनीतिक दलों के दफ्तरों में तोड़फोड़ का आरोपविपक्षी नेताओं ने सरकार पर लोकतांत्रिक ढांचे को जानबूझकर ध्वस्त करने का एक बड़ा और संगठित आरोप लगाया है। संसद में दी गई दलीलों के अनुसार, बालेन शाह के प्रशासन ने स्थापित कर्मचारी तंत्र को डराने के लिए अधिकारियों को उनके संवैधानिक पदों से बिना किसी ठोस कानूनी आधार के मनमाने ढंग से हटाना शुरू कर दिया है, जिसके कारण काठमांडू सहित कई हिस्सों में प्रशासनिक स्तर पर भारी विरोध-प्रदर्शन भड़क उठे हैं। यही नहीं, महंथ ठाकुर ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा सत्ता के इशारे पर स्थापित राजनीतिक दलों के प्रांतीय कार्यालयों में जबरन हस्तक्षेप किया जा रहा है, वहां के फर्नीचर सरेआम जलाए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक संगठनों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि यह सरकार संगठित ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों की वैचारिक ताकत का सामना करने की हिम्मत नहीं रखती।शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में हाहाकार: कठोर नीतियों से निजी क्षेत्र में भारी असंतोषनेपाल के बुनियादी सामाजिक ढांचे का विशेष उल्लेख करते हुए वरिष्ठ सांसद ने चेतावनी दी कि बोर्डिंग स्कूलों (निजी शिक्षण संस्थानों) और नर्सिंग होम के प्रति सरकार का अत्यधिक आक्रामक और कठोर दृष्टिकोण देश के विकास चक्र को पूरी तरह रोक देगा। उन्होंने तार्किक रूप से स्पष्ट किया कि नेपाल जैसा विकासशील देश अपनी पूरी आबादी को केवल सरकारी सहायता और सीमित बजट के भरोसे विश्वस्तरीय शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे सकता; इसके लिए निजी निवेश और कॉर्पोरेट क्षेत्र का सक्रिय सहयोग अनिवार्य है। सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण लाखों होनहार छात्रों, पेशेवर शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों का भविष्य पूरी तरह से अंधकार में डूबता नजर आ रहा है, जो अंततः देश की आर्थिक रीढ़ को और कमजोर कर देगा।लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की मांग: गलत दिशा में जा रहा है हिमालयी राष्ट्रअपने संसदीय संबोधन के समापन सत्र में महंथ ठाकुर ने वैश्विक बिरादरी और देश की न्यायपालिका का ध्यान आकर्षित करते हुए चेतावनी दी कि बालेन शाह की यह स्वेच्छाचारी शासन शैली नेपाल को एक बेहद खतरनाक और आत्मघाती रास्ते पर ले जा रही है। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने और देश की पुरानी सार्वजनिक संस्थाओं को लगातार कमजोर करने की सरकारी नीतियों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की। इस बड़े संसदीय टकराव के बाद अब काठमांडू की सड़कों पर बालेन शाह के समर्थक युवाओं और पारंपरिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच वैचारिक जंग और तेज होने की संभावना है, जिस पर भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया के राजनयिकों की पैनी नजर बनी हुई है।
मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के संबंध अब तक के सबसे खतरनाक और हिंसक दौर में पहुंच चुके हैं। युद्ध की विभीषिका के बीच ईरान की राजधानी तेहरान से एक ऐसी सनसनीखेज तस्वीर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के नीति-नियंताओं और खुफिया एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया है। तेहरान के सबसे व्यस्त और मशहूर एंगेलाब चौराहे (Enghelab Square) पर एक विशालकाय आधिकारिक बिलबोर्ड लगाया गया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक काले रंग के ताबूत में मृत अवस्था में लेटे हुए दिखाया गया है। इस विवादित होर्डिंग के जरिए ईरान ने सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति को जान से मारने की खौफनाक धमकी दी है, जिससे दोनों परमाणु-सम्पन्न और सैन्य महाशक्तियों के बीच जारी जंग के और ज्यादा भड़कने के आसार पैदा हो गए हैं।बिलबोर्ड की इनसाइड स्टोरी: बंद आंखें, लाल टाई और 'मिनाब स्कूल' के नरसंहार का बदलाईरान की अर्ध-सरकारी मीडिया द्वारा जारी की गई ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस विशालकाय प्रोपेगैंडा बिलबोर्ड में डोनाल्ड ट्रंप की आंखें और मुंह पूरी तरह बंद दिखाए गए हैं। ताबूत के भीतर उनकी पहचान बन चुकी प्रसिद्ध लाल टाई के ऊपर उनके दोनों हाथ मुड़े हुए हैं और पैर हवा में लटके नजर आ रहे हैं। इस ग्राफिक तस्वीर के ठीक नीचे अंग्रेजी और फारसी (Persian) भाषाओं में साफ शब्दों में लिखा गया है— 'हम ट्रंप को मारेंगे'। इसके साथ ही होर्डिंग पर 'मिनाब की याद में' (In memory of Minab) अंकित है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीधा संकेत हाल ही में अमेरिकी और इजरायली संयुक्त हवाई हमलों में तबाह हुए 'मिनाब स्कूल' की ओर है, जिसमें कई बेकसूर ईरानी बच्चों की मौत हो गई थी, और ईरान अब इसे एक व्यक्तिगत मोर्चे के रूप में देख रहा है।युद्ध का दैनिक चक्र: रात में अमेरिका की बमबारी, सुबह ईरान का बारूदी पलटवारयह खौफनाक बिलबोर्ड ऐसे नाजुक समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच पूर्णकालिक युद्ध (US-Iran War 2026) छिड़ चुका है। इस इलाके में जंग का एक बेहद खतरनाक दैनिक चक्र स्थापित हो चुका है; अमेरिकी वायुसेना हर रात ईरान के रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी करती है, तो सुबह होते-होते ईरान और उसके समर्थित लड़ाके पलटवार करते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दाग देते हैं। इस बारूदी संघर्ष के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) एक बार फिर पूरी तरह से ठप और धुआं-धुआं हो चुका है। ईरान ने इस समुद्री रास्ते की सख्त नाकेबंदी कर दी है, जिसके जवाब में अमेरिकी नौसेना ने भी जवाबी घेराबंदी कर दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पूरी तरह चरमरा गया है।'डेथ टू ट्रंप' के नारों से गूंजा तेहरान: खामेनेई के अंतिम संस्कार में भड़की थी आगईरान में अमेरिकी नेतृत्व के खिलाफ नफरत की यह आग हाल ही में और ज्यादा भड़क गई थी। इसी साल 28 फरवरी को दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद, भीषण युद्ध के चलते उनके अंतिम संस्कार को टाल दिया गया था। जुलाई 2026 के पहले हफ्ते में जब कड़ी सुरक्षा के बीच उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, तो वहां उमड़े लाखों लोगों के सैलाब ने 'डेथ टू अमेरिका' (Death to America) और 'डेथ टू ट्रंप' के गगनभेदी नारे लगाए थे। ईरान का कट्टरपंथी धड़ा और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) अपने शीर्ष नेताओं और बच्चों की मौत का सीधा जिम्मेदार सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीतियों को मान रहे हैं।डोनाल्ड ट्रंप की दोटूक चेतावनी: अगर मुझे कुछ हुआ, तो हजारों मिसाइलें ईरान को दुनिया के नक्शे से मिटा देंगीईरान की तरफ से लगातार मिल रही इन हत्या की धमकियों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बेहद सख्त और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के किसी भी आत्मघाती या खुफिया प्रयास से डरने वाले नहीं हैं और अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे तैयार है। ट्रंप ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक का हवाला देते हुए कहा, मैंने अपनी सैन्य कमान और शीर्ष नेतृत्व को पहले ही स्पष्ट लिखित आदेश दे दिए हैं कि अगर किसी भी ईरानी हमले में मेरी जान जाती है, तो उसके तुरंत बाद क्या कार्रवाई करनी है। हमारी हजारों अत्याधुनिक मिसाइलें पहले से ही ईरान के ठिकानों पर लॉक हैं; अगर अमेरिका के राष्ट्रपति को खरोंच भी आई, तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर दुनिया के नक्शे से मिटा दिया जाएगा।
Balochistan Declares Independence: बलूचिस्तान के आजादी के दावे से भारत के सामने आया बड़ा धर्मसंकट
दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक मंच पर इस वक्त का सबसे बड़ा और संवेदनशील घटनाक्रम सामने आ रहा है। पाकिस्तान के सबसे बड़े, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और लंबे समय से अशांत प्रांत बलूचिस्तान ने खुद को पाकिस्तान से पूरी तरह आजाद करने और एक नए संप्रभु राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का एकतरफा ऐलान कर दिया है। खुद को बलोच आंदोलन का प्रतिनिधि बताने वाले मीर यार बलूच द्वारा सोशल मीडिया (X) पर किए गए इस अप्रत्याशित दावे ने इस्लामाबाद प्रशासन के पैरों तले जमीन खिसका दी है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन बलूच प्रतिनिधियों द्वारा वैश्विक स्तर पर और विशेषकर भारत से मांगी गई कूटनीतिक मदद ने नई दिल्ली को एक अभूतपूर्व त्रिकोणीय धर्मसंकट में डाल दिया है।85 फीसदी इलाके पर नियंत्रण का दावा: नई मुद्रा 'बलूची फालुस' और राष्ट्रगान भी जारीसोशल मीडिया पर वायरल हो रहे आधिकारिक बलोच दस्तावेजों और घोषणाओं के अनुसार, स्वयंभू 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' की रक्षा और सुरक्षा बलों ने प्रांत के लगभग 85 प्रतिशत भूभाग पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है। मीर यार बलूच के मुताबिक, इस नए देश ने अपना नया राष्ट्रीय ध्वज और शासन प्रणाली तैयार करने के साथ-साथ अपना आधिकारिक राष्ट्रगान 'मा चुकेन बलोचानी' भी अपना लिया है। यही नहीं, आर्थिक स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में उन्होंने अपनी नई राष्ट्रीय मुद्रा 'बलूची फालुस' को भी बाजार में उतारने का ऐलान किया है। बलोच प्रशासन का दावा है कि पाकिस्तानी सेना के जुल्मों से तंग आकर उनके कई स्थानीय कर्मियों ने इस्तीफा दे दिया है और अब लगभग 5 लाख कर्मियों की एक बड़ी फौज साल 2026 के अंत तक पाकिस्तानी सेना को इस क्षेत्र से पूरी तरह खदेड़ने के लिए तैयार है।प्राकृतिक संसाधनों और माइंस पर कब्जे का दावा: CPEC और चीनी शोषण के खिलाफ फूटा गुस्साइस ऐतिहासिक बगावत और स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे बड़ी वजह इस क्षेत्र के समृद्ध प्राकृतिक संसाधन और उन पर चीन-पाकिस्तान का कथित अवैध कब्जा है। बलूचिस्तान का यह पूरा इलाका दुनिया के सबसे समृद्ध सोने, चांदी, हीरे और तांबे की खदानों के साथ-साथ विशाल गैस क्षेत्रों से भरा हुआ है। स्थानीय बलोच नागरिकों का आरोप है कि अरबों डॉलर की 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा' (CPEC) परियोजना और ओमान की खाड़ी के पास स्थित ग्वादर गहरे समुद्र के बंदरगाह (Gwadar Port) के जरिए बीजिंग और इस्लामाबाद मिलकर उनके संसाधनों का बेरहमी से शोषण कर रहे हैं, जबकि वहां की मूल जनता आज भी अत्यधिक गरीबी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर है। बलूच विद्रोहियों का दावा है कि उन्होंने अब इन सभी रणनीतिक खदानों और गैस क्षेत्रों को अपने सीधे नियंत्रण में ले लिया है।भारत से बलूचों की विशेष भावुक अपील: हमें पाकिस्तान का हिस्सा कहना बंद करेंइस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू भारत से जुड़ा हुआ है। बलूचिस्तान के शीर्ष प्रतिनिधियों ने भारतीय मीडिया, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से एक बेहद भावुक और कड़क अपील की है। उन्होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बलोच लोगों को पाकिस्तान के अपने लोग या पाकिस्तान का आंतरिक हिस्सा कहना तुरंत बंद किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नस्लीय, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से बलोच और पाकिस्तानी (विशेषकर बहुसंख्यक पंजाबी समुदाय) पूरी तरह अलग हैं। बलूच प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि वे दशकों से पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे बर्बर हवाई हमलों, जबरन गायब किए जाने (Forced Disappearances) और मानवाधिकारों के घोर हनन का शिकार होते आ रहे हैं और अब वे किसी भी कीमत पर पाकिस्तान के साथ नहीं रहेंगे।भारतीय विदेश नीति की त्रिकोणीय अग्निपरीक्षा: तीन मोर्चों पर फंसा कूटनीतिक पेंचबलूचिस्तान ने भारत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता मांगी है। यह स्थिति नई दिल्ली के लिए किसी लिटमस टेस्ट से कम नहीं है, क्योंकि यहां लिया गया एक भी कदम भारत को तीन तरफा कूटनीतिक संकट में डाल सकता है:पाकिस्तान को नैरेटिव गढ़ने का मौका: यदि भारत बलूचिस्तान को एक अलग देश के रूप में मान्यता देता है, तो इसे पाकिस्तान को तोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जाएगा। इससे इस्लामाबाद को संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे वैश्विक मंचों पर भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव गढ़ने और कश्मीर के आंतरिक मामले में नई दिल्ली पर हस्तक्षेप का पलटवार करने का सीधा बहाना मिल जाएगा।चीन के साथ सीधे टकराव का खतरा: बलूचिस्तान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेहद महत्वाकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और सीपेक (CPEC) का दिल है। वहां चीन एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और भारी खनन परियोजनाओं में शामिल है। भारत द्वारा बलूच स्वतंत्रता का समर्थन करने से भारत-चीन सीमा और रणनीतिक संबंधों में तनाव का एक बेहद खतरनाक और नया दौर शुरू हो सकता है।ईरान के साथ रणनीतिक संबंधों में कड़वाहट: बलूच आबादी का एक बड़ा हिस्सा पड़ोसी देश ईरान में भी रहता है, और तेहरान ने हमेशा बलोच अलगाववाद को किसी भी बाहरी समर्थन के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। भारत के रणनीतिक हित ईरान के चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) से सीधे जुड़े हैं, जो मध्य एशिया का प्रवेश द्वार है। ऐसे में ईरान को नाराज करना भारत के आर्थिक और भू-राजनीतिक हितों के लिए बहुत बड़ा जोखिम होगा।क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद की गहरी पैठ वाले इस अशांत इलाके में बलूचिस्तान के इस कदम ने पूरी दुनिया के नीति-नियंताओं को अलर्ट मोड पर ला दिया है, और अब देखना होगा कि भारतीय विदेश मंत्रालय इस बेहद पेचीदा अंतरराष्ट्रीय संकट पर क्या रुख अख्तियार करता है।
भारत की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरु शहर से एक बेहद चौंकाने वाला और क्रांतिकारी प्रशासनिक फैसला सामने आया है। विभिन्न फूड और क्विक-कॉमर्स डिलीवरी ऐप्स (Delivery Apps) के लिए काम करने वाले हजारों गिग वर्कर्स (Gig Workers) को बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने एक बड़ी राहत देते हुए चालान (Fine) की पारंपरिक व्यवस्था से मुक्त कर दिया है। हालांकि, इसे किसी भी तरह की खुली छूट नहीं समझा जाना चाहिए; बल्कि पुलिस ने इसकी जगह एक ऐसा अनोखा मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीका अपनाया है, जो इन डिलीवरी पार्टनर्स को सड़कों पर लापरवाही बरतने से पूरी तरह रोक देगा।4 घंटे का अनिवार्य लेक्चर: चालान के पैसों से ज्यादा कीमती समय की होगी सजाबेंगलुरु के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर एमएन कार्तिक रेड्डी (MN Anucheth / Kartik Reddy) द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शहर के सभी 53 ट्रैफिक पुलिस थानों में इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अब से यदि कोई भी डिलीवरी बॉय सिग्नल जंप करता है, रॉन्ग साइड गाड़ी चलाता है या रैश ड्राइविंग करता पकड़ा जाता है, तो पुलिस उस पर कोई नकद जुर्माना नहीं ठोकेगी। इसके बजाय, पकड़े गए राइडर को सीधे थाने ले जाया जाएगा, जहां उसे पूरे 4 घंटे की एक अनिवार्य क्लास (Traffic Rules Lecture) अटेंड करनी होगी। इस विशेष सत्र में उन्हें सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों और मानवीय जीवन के महत्व के बारे में विस्तार से शिक्षित किया जाएगा। पुलिस का मानना है कि जल्दी डिलीवरी करने के चक्कर में समय बचाने वाले इन राइडर्स के लिए 4 घंटे का नुकसान किसी भी आर्थिक जुर्माने से कहीं ज्यादा बड़ा सबक साबित होगा, क्योंकि इस दौरान वे एक भी ऑर्डर डिलीवर नहीं कर पाएंगे।3 दिन में 4,000 मामले दर्ज: छोटे शहरों से आए युवाओं पर भारी पड़ता था भारी-भरकम फाइनट्रैफिक पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने इस कड़े फैसले के पीछे के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को भी उजागर किया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो बेंगलुरु की व्यस्त सड़कों पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने में डिलीवरी ऐप्स से जुड़े राइडर्स सबसे आगे पाए गए हैं, जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महज तीन दिनों के भीतर शहर में ऐसे करीब 4,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, इन ऐप्स में काम करने वाले अधिकांश युवा देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से आकर सिर्फ आजीविका कमाने के लिए दिन-रात एक करते हैं। ऐसे में उन पर बार-बार भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना लगाना उनकी रीढ़ तोड़ने जैसा था और इससे समस्या का कोई स्थायी समाधान भी नहीं निकल रहा था। इस नई व्यवस्था से उन पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा, लेकिन समय गंवाने का डर उन्हें नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करेगा।यूलू (Yulu) बाइक का लूपहोल: बिना लाइसेंस और नंबर प्लेट वाले राइडर्स पर पुलिस का नया शिकंजाइस विशेष नीति को तैयार करने के पीछे एक बहुत बड़ा तकनीकी कारण भी छिपा है। इन दिनों बेंगलुरु में अधिकांश डिलीवरी बॉयज किराए पर मिलने वाली बेहद लोकप्रिय इलेक्ट्रिक 'यूलू बाइक' (Yulu Electric Bikes) का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। इन कम गति वाले दोपहिया वाहनों को चलाने के लिए किसी भी प्रकार के वैध ड्राइविंग लाइसेंस (DL) की आवश्यकता नहीं होती और न ही इन पर पारंपरिक कमर्शियल नंबर प्लेट लगी होती है। समय सीमा के भीतर पार्सल पहुंचाने के दबाव में यूलू राइडर्स अक्सर फुटपाथ पर गाड़ी चढ़ा देते हैं या ट्रैफिक सिग्नल की परवाह नहीं करते। नंबर प्लेट और लाइसेंस न होने की वजह से डिजिटल कैमरों के जरिए इन पर ऑनलाइन ई-चालान (E-Challan) जारी करना तकनीकी रूप से असंभव हो जाता था। इसी कानूनी लूपहोल को बंद करने के लिए अब पुलिस इन्हें ऑन-स्पॉट पकड़कर सीधे 4 घंटे के लेक्चर रूम में बिठाने जा रही है, जिससे बेंगलुरु की सड़कों पर चलने वाले आम राहगीरों की सुरक्षा काफी हद तक सुनिश्चित हो सकेगी।
भारतीय रेलवे के गौरवशाली इतिहास में 17 जुलाई 2026 का दिन एक बड़े और क्रांतिकारी युग की शुरुआत करने जा रहा है। देश की पहली 100 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से निर्मित हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन (Hydrogen-Powered Train) हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच पटरियों पर दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक ट्रेन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह अभूतपूर्व कदम न केवल भारतीय रेल का कायाकल्प करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर शून्य-कार्बन उत्सर्जन (Net-Zero Carbon Emission) के क्षेत्र में भारत को सबसे अगली कतार में लाकर खड़ा कर देगा।ट्रेन की मुख्य विशेषताएं और बेजोड़ क्षमता: ICF चेन्नई का एक और नायाब शाहकारपूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' (Make in India) मिशन के तहत तैयार की गई इस ग्रीन ट्रेन को चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के इंजीनियरों ने विकसित किया है। यह ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर संचालित होने वाली दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन है। इस आधुनिक ट्रेन की तकनीकी क्षमताएं इस प्रकार हैं:विशाल यात्री क्षमता: यह 10 कोच वाली एक डेमू (DEMU) स्टाइल ट्रेन है, जिसमें 682 बैठने की सीटों सहित एक बार में लगभग 2,600 यात्री आसानी से सफर कर सकेंगे।पावरफुल इंजन ग्रिड: इस ट्रेन में 1200 kW की दो ड्राइविंग पावर कार (DPC) लगाई गई हैं, जो संयुक्त रूप से इसे 2400 kW की बेजोड़ शक्ति प्रदान करती हैं।रफ्तार की सीमा: हालांकि बेहद जटिल और सफल सुरक्षा ट्रायल्स के दौरान इस ट्रेन ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार दर्ज की थी, लेकिन नियमित वाणिज्यिक संचालन के दौरान यात्रियों की सुरक्षा हेतु इसे 75 किमी प्रति घंटा की नियंत्रित गति से ट्रैक पर दौड़ाया जाएगा।जींद-सोनीपत रूट और टाइम टेबल: मात्र 5 रुपये में शुरू होगा देश का सबसे हाई-टेक सफरउत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन के अंतर्गत आने वाले 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रेलवे सेक्शन को इस ऐतिहासिक पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। स्थानीय यात्रियों को ध्यान में रखते हुए इसका किराया और समय सारणी बेहद आकर्षक रखी गई है:यात्रा का विवरणआधिकारिक जानकारी एवं शेड्यूलट्रेन नंबर (अप / डाउन)74010 (जींद से सोनीपत) / 74009 (सोनीपत से जींद)प्रस्थान का समयप्रतिदिन सुबह 07:40 बजे (जींद रेलवे स्टेशन से)आगमन का समयप्रतिदिन सुबह 09:40 बजे (सोनीपत रेलवे स्टेशन)प्रमुख ठहराव (स्टॉपेज)रास्ते में पांडू पिंडारा और गोहाना सहित 12-13 छोटे स्टेशनों पर हॉल्टटिकट की दरें (किराया)आम पैसेंजर ट्रेनों के बराबर (न्यूनतम ₹5 से अधिकतम ₹25 के बीच)कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन? प्रदूषण की जगह साइलेंसर से निकलेगा शुद्ध पानी और भापपारंपरिक डीजल इंजन जहां भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर और पीएम 2.5 जैसे जहरीले कण वातावरण में छोड़ते हैं, वहीं यह नई ट्रेन 'हाइड्रोजन फ्यूल सेल' (Hydrogen Fuel Cell Technology) नामक अत्याधुनिक तकनीक पर काम करती है। ट्रेन की छत पर लगे विशेष फ्यूल सेल के भीतर स्टोर की गई हाइड्रोजन गैस और वायुमंडल की ऑक्सीजन के बीच एक नियंत्रित रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) कराई जाती है। इस प्रक्रिया से सीधे हाई-वोल्टेज बिजली (Electricity) पैदा होती है, जिससे ट्रेन की हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक मोटरें काम करती हैं। इस पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया का सबसे जादुई और शानदार पहलू यह है कि इसमें प्रदूषण के नाम पर धुआं नहीं, बल्कि केवल शुद्ध जल वाष्प (Water Vapor) और हल्की गर्मी ही बाहर निकलती है, जिसे आम भाषा में 'पानी से चलने वाली ट्रेन' कहा जा रहा है। ईंधन की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए जींद स्टेशन पर एक स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और हाई-प्रेशर रिफ्यूलिंग प्लांट स्थापित किया गया है, जिसे भारत सरकार के पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से सुरक्षा अनापत्ति और संचालन की मंजूरी मिल चुकी है।वैश्विक एलीट क्लब में भारत की एंट्री: जर्मनी, जापान और चीन को मिलेगी सीधी टक्करइस बेहद जटिल, महंगी और संवेदनशील तकनीक को सफलतापूर्वक ट्रैक पर उतारते ही भारत ने वैश्विक पटल पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। अब भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों के सबसे एलीट क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी सक्रिय हाइड्रोजन रेल तकनीक है:जर्मनी: दुनिया की पहली वाणिज्यिक और कमर्शियल हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन लॉन्च करने का गौरव इसके नाम है।चीन: एशिया महाद्वीप की पहली शहरी हाइड्रोजन ट्रेन विकसित करने का दावा कर चुका है।भारत: ब्रॉड गेज (Broad Gauge) रेल लाइनों के लिए दुनिया की सबसे शक्तिशाली 2400 kW क्षमता की स्वदेशी ट्रेन बनाकर भारत ने अपनी तकनीकी श्रेष्ठता साबित की है।भविष्य का मेगा प्लान: 2030 तक सभी गैर-विद्युतीकृत रूट्स से हटेंगे पुराने डीजल इंजनभारतीय रेलवे ने साल 2030 तक खुद को पूर्ण रूप से 'नेट-जीरो कार्बन एमीटर' (Net-Zero Carbon Emitter) बनाने का एक बड़ा राष्ट्रीय संकल्प लिया है। जींद-सोनीपत रूट पर शुरू हो रहा यह ऑपरेशन एक शुरुआती टेस्ट बेड है। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होते ही देश के उन सभी ऐतिहासिक, पहाड़ी और दूरदराज के गैर-विद्युतीकृत रेलवे रूट्स (जैसे दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, कालका-शिमला टॉय ट्रेन, नीलगिरि माउंटेन रेलवे) पर चल रहे पुराने डीजल इंजनों को हमेशा के लिए सेवा से हटा दिया जाएगा। इस मास्टर प्लान से न केवल विदेशों से आने वाले महंगे कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी, बल्कि दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर पटरियों के ऊपर लाखों-करोड़ों की लागत से बिछने वाले बिजली के भारी-भरकम तारों (OHE Lines) का खर्च भी पूरी तरह बच जाएगा।
देश की सर्वोच्च अदालत में आज शिक्षा नीति और भाषाई विवाद को लेकर एक बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले पर तीखी कानूनी तकरार देखने को मिली। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार 16 जुलाई 2026 को तमिलनाडु सरकार की उस विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें उसने मद्रास उच्च न्यायालय के हर जिले में नवोदय विद्यालय (Navodaya Vidyalaya) स्थापित करने के ऐतिहासिक आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ के सामने जैसे ही यह मामला आया, कोर्ट रूम का माहौल पूरी तरह गरमा गया। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि जब सारा खर्च केंद्र सरकार उठाने को तैयार है, तो तमिलनाडु के मेधावी ग्रामीण छात्रों को इस अधिकार से क्यों वंचित रखा जा रहा है।तमिलनाडु को क्यों रख रहे हैं वंचित? सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सख्त फटकारसुनवाई की शुरुआत होते ही तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने मामले को फिलहाल टालने का अनुरोध किया और कोर्ट को एक आधिकारिक पत्र सौंपा। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने मौखिक टिप्पणी की, आपके राज्य में नवोदय विद्यालय होने ही चाहिए। जब पूरा वित्तीय भार केंद्र सरकार वहन कर रही है और आपको सिर्फ आवश्यक जमीन उपलब्ध करानी है, तो आप अड़ंगा क्यों लगा रहे हैं? भारत के बाकी सभी राज्यों में ये स्कूल सफलतापूर्वक चल रहे हैं, फिर तमिलनाडु को इससे दूर क्यों रखा जा रहा है? इस पर एएसजी ने दलील दी कि इस विषय पर उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है, इसलिए सरकार अभी अंतिम बयान देने से बच रही है।कोर्ट की नई TVK सरकार को दोटूक: केंद्र सरकार के स्कूलों को मत रोकेंनवोदय विद्यालय समिति के कानूनी प्रतिनिधि ने पीठ को बताया कि पिछले न्यायिक आदेश के तहत राज्य को 6 हफ्ते में जमीन आवंटित करनी थी, लेकिन अब वे 12 हफ्ते का अतिरिक्त समय मांग रहे हैं। इस पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 तय करते हुए तमिलनाडु सरकार को निर्देश प्राप्त करने के लिए 3 सप्ताह की मोहलत दी। पीठ का नेतृत्व कर रही जस्टिस नागरत्ना ने तमिलनाडु के नए राजनीतिक समीकरणों का जिक्र करते हुए कहा, हमें निर्देश लेने की अनुमति देनी होगी। अब वहां एक नई सरकार (तमिलगा वेत्री कड़गम - TVK) सत्ता में है। हमें अभी उनकी आधिकारिक शिक्षा नीति के बारे में जानकारी नहीं है। हो सकता है कि आपकी अपनी स्थानीय शिक्षा प्रणाली हो, लेकिन तमिलनाडु में केंद्र सरकार के उत्कृष्ट स्कूलों के प्रवेश को पूरी तरह न रोकें।40 साल पुराना विवाद: राजीव गांधी का ड्रीम प्रोजेक्ट और त्रि-भाषा नीति का विरोधनवोदय विद्यालयों का इतिहास सीधे तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) से जुड़ा हुआ है। यह उनकी एक अति-महत्वाकांक्षी योजना थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की छिपी हुई प्रतिभाओं को मुफ्त और उच्च स्तरीय आवासीय शिक्षा प्रदान करना था। पूरे देश ने इसे अपनाया, लेकिन तमिलनाडु पिछले 40 वर्षों से एकमात्र ऐसा राज्य बना हुआ है जहां एक भी नवोदय विद्यालय नहीं है। इसके पीछे का मुख्य कारण राज्य की पारंपरिक दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) है, जबकि नवोदय विद्यालय हिंदी सहित त्रि-भाषा प्रणाली (Three-Language Formula) को लागू करते हैं। सालों तक सूबे की सत्ता पर काबिज रहीं द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) सरकारों ने हिंदी विरोध के चलते इन स्कूलों को राज्य की सीमाओं में घुसने नहीं दिया।राहुल गांधी की साख दांव पर: मुख्यमंत्री थलपति विजय का क्या होगा अगला कदम?वर्तमान में तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। थलपति विजय के नेतृत्व वाली नई टीवीके (TVK) सरकार सत्ता में है, जिसे कांग्रेस पार्टी का सीधा और मजबूत समर्थन हासिल है, और कांग्रेस भी सरकार का हिस्सा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री विजय पुरानी लीक से हटकर हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने की अनुमति देते हैं, तो यह गांधी परिवार, विशेष रूप से राहुल गांधी के लिए एक बड़ी वैचारिक और भावनात्मक जीत होगी, क्योंकि तमिलनाडु की धरती पर उनके पिता का सपना सच हो जाएगा। इसके विपरीत, यदि मुख्यमंत्री विजय भी क्षेत्रीय दलों के पुराने रुख पर अड़े रहते हैं, तो यह गठबंधन में शामिल कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। अब 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में मिली करारी और अप्रत्याशित हार के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है। पार्टी के भीतर मचे इस अभूतपूर्व आंतरिक घमासान के बीच, गुरुवार 16 जुलाई 2026 को ममता बनर्जी को एक और तगड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की नवनियुक्त राज्यसभा सांसद और मशहूर अभिनेत्री कोयल मलिक ने अपने पद से आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, कोयल मलिक ने करीब एक महीने पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे, लेकिन आज उन्होंने अपना त्यागपत्र औपचारिक रूप से भेजकर टीएमसी खेमे में खलबली मचा दी है।महज चंद महीनों में कोयल मलिक का मोहभंग: अप्रैल में ही भेजी गई थीं संसदराजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि ममता बनर्जी ने कोयल मलिक पर बड़ा भरोसा जताते हुए इसी साल अप्रैल 2026 के महीने में उन्हें राज्यसभा का प्रतिनिधित्व सौंपकर संसद भेजा था। लेकिन महज कुछ ही महीनों के भीतर उनका पार्टी से पूरी तरह मोहभंग हो गया। कोयल मलिक का यह कदम तृणमूल कांग्रेस के डूबते जहाज की कहानी बयां कर रहा है। कोयल से पहले सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर जैसे कद्दावर राज्यसभा सांसद भी पार्टी आलाकमान से तंग आकर इस्तीफा दे चुके हैं और दिलचस्प बात यह है कि ये सभी नेता बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामकर दोबारा राज्यसभा के उम्मीदवार बन गए। इस सिलसिले से यह साफ है कि ममता बनर्जी के सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार एक-एक कर उनका साथ छोड़ रहे हैं।लोकसभा से विधानसभा तक ऐतिहासिक टूट: 20 सांसद और 60 से ज्यादा विधायक बागीइस चुनावी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर जो बगावत शुरू हुई, उसने अब एक ऐतिहासिक विभाजन का रूप ले लिया है। पार्टी के अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधि अब ममता बनर्जी के नेतृत्व से दूरी बना चुके हैं। लोकसभा में स्थिति यह है कि 20 से अधिक सांसदों ने काकोली के नेतृत्व वाले धड़े के साथ मिलकर खुद को राष्ट्रीय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCPI) में विलय कर लिया है। वहीं, राज्य विधानसभा के भीतर भी ममता बनर्जी की जमीन पूरी तरह खिसक चुकी है, जहां 60 से अधिक विधायकों ने आधिकारिक तौर पर बागी रुख अख्तियार कर लिया है। नेता अपनी सहूलियत के हिसाब से या तो नया गुट बना रहे हैं या फिर दूसरे बड़े राजनीतिक दलों के साथ विलय की राह तलाश रहे हैं।मदन मित्रा ने भी बदला पाला: ममता बनर्जी के सबसे करीबी ने थामा ऋतब्रत का हाथकोयल मलिक के इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले, बुधवार को ममता बनर्जी के बेहद वफादार और पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन मित्रा ने भी टीएमसी के आधिकारिक धड़े को तगड़ा झटका दे दिया। कामरहाटी से मौजूदा विधायक मदन मित्रा ने नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले शक्तिशाली बागी गुट से हाथ मिला लिया है। मित्रा ने मीडिया के सामने आकर घोषणा की कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के गरिमामयी पद को भी त्याग दिया है, जो ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक नुकसान है।मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं: बागी तेवरों के साथ चारपाई को चुनाइस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मदन मित्रा ने बेहद शायराना और राजनीतिक रूप से चतुर बयान दिया। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद कहा, मैंने सिर्फ अपना कमरा बदला है, अपना मकान नहीं बदला। मैं तकनीकी रूप से आज भी तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हूं। अपनी बात को आगे समझाते हुए उन्होंने कहा कि शायद ममता बनर्जी वाले कमरे में बेहद आरामदायक और आलीशान बिस्तर था, जबकि ऋतब्रत बनर्जी वाले बागी कमरे में सिर्फ एक साधारण चारपाई है, और उन्होंने जनता की आवाज के रूप में इस चारपाई को चुनना बेहतर समझा। मित्रा ने साफ कर दिया कि वह ममता गुट में कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं लेंगे, लेकिन वह सदन में विधायक बने रहेंगे। इस सिलसिलेवार बगावत ने ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) ने अपनी लोकप्रिय Classic 350 मोटरसाइकिल को 2026 मॉडल ईयर के लिए अपडेट कर दिया है। कंपनी ने इस बार बाइक में दो उपयोगी फीचर्स जोड़े हैं, जिनमें Assist & Slipper Clutch और फास्ट USB Type-C चार्जिंग पोर्ट शामिल हैं। हालांकि, ...
महाराष्ट्र के धुले में डीज़ल टैंकर में भीषण आग; सूरत-नागपुर हाईवे पर जाम
धुले। महाराष्ट्र में सूरत-नागपुर हाईवे पर नेर गांव के पास गुरुवार सुबह एक डीज़ल टैंकर में भीषण आग लग गई। अचानक लगी इस आग से राजमार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। घटना की जानकारी मिलने पर धुले नगर निगम के अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने आग बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत की। लेकिन आग […] The post महाराष्ट्र के धुले में डीज़ल टैंकर में भीषण आग; सूरत-नागपुर हाईवे पर जाम appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ में बीएससी नर्सिंग छात्रा ने छत से कूद कर आत्महत्या की
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जंक्शन में परीक्षा परिणाम से निराशा और अवसाद में डूबी बीएससी नर्सिंग की 22 वर्षीय छात्रा ने छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। यह घटना बुधवार शाम करीब साढ़े बजे हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में हुई, जहां वह अन्य छात्राओं के साथ पूजा जाट (22) किराए के मकान में रह रही थी। […] The post हनुमानगढ़ में बीएससी नर्सिंग छात्रा ने छत से कूद कर आत्महत्या की appeared first on Sabguru News .
आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर चलेगा बुलडोजर, 40 में से 38 कमरे अवैध
रामपुर विकास प्राधिकरण ने वरिष्ठ सपा नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के बना हुआ अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार को भी ...
बीकानेर के छत्तरगढ़ में परस्पर झगड़े में 3 लोगों की मौत, एक घायल
बीकानेर। राजस्थान में बीकानेर जिले के छत्तरगढ़ थाना क्षेत्र में गुरुवार को परस्पर झगड़े में तीन लोगों की मौत हाे गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ग्राम पंचायत खारवाली के सुरजनवाली गांव में किसी लड़की के रिश्ते को लेकर हो रही पंचायत में दो पक्षों में कहासुनी हो गई, […] The post बीकानेर के छत्तरगढ़ में परस्पर झगड़े में 3 लोगों की मौत, एक घायल appeared first on Sabguru News .
Narendra Modi Ahmedabad Rathyatra: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूं ही सबसे अलग नहीं हैं। 12 साल से अधिक समय तक वे गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पीएम मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद भी भगवान जगन्नाथ के लिए शुरू की गई परंपरा को निभा रहे हैं। उन्होंने ...
नालंदा दौरे पर अचानक लगा 'ब्रेक', सुधा डेयरी के दही प्लांट का शिलान्यास कार्यक्रम स्थगित
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आज प्रस्तावित नालंदा दौरा आखिरी समय में स्थगित कर दिया गया है। उनके इस दौरे में नालंदा स्थित सुधा डेयरी परिसर में अत्याधुनिक 'दही प्लांट' का शिलान्यास कार्यक्रम मुख्य रूप से शामिल था। इस खबर के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, अपरिहार्य कारणों से उप मुख्यमंत्री का कार्यक्रम फिलहाल के लिए टाल दिया गया है और अब नई तारीखों का ऐलान जल्द ही किया जाएगा।क्यों टला महत्वपूर्ण शिलान्यास कार्यक्रम?सम्राट चौधरी के नालंदा आगमन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर थीं। सुधा डेयरी के इस दही प्लांट को लेकर स्थानीय दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों में भारी उत्साह था। हालांकि, अचानक आए इस बदलाव ने पूरे कार्यक्रम पर विराम लगा दिया है। सूत्रों की मानें तो कुछ व्यस्तताओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों के चलते दौरे को आगे खिसकाया गया है। सुरक्षा और प्रोटोकॉल के लिहाज से भी प्रशासन इस बदलाव को सामान्य मान रहा है, लेकिन क्षेत्र के लोगों में इस देरी को लेकर चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म है।सुधा डेयरी और नालंदा के लिए क्या हैं मायने?यह दही प्लांट परियोजना नालंदा के दुग्ध उद्योग के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही थी। इस प्लांट के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने थे और दुग्ध उत्पादकों को अपनी उपज का और बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद थी। उप मुख्यमंत्री के दौरे का मुख्य एजेंडा भी इसी क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। अब जब कार्यक्रम टल गया है, तो स्थानीय जनता और डेयरी से जुड़े लोगों को अपनी नई उम्मीदों को साकार करने के लिए कुछ और समय तक इंतजार करना होगा।प्रशासन ने दी कार्यक्रम स्थगित होने की जानकारीनालंदा जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को कार्यक्रम के स्थगित होने की आधिकारिक सूचना दे दी है। आयोजन स्थल पर की गई सजावट और सुरक्षा व्यवस्थाओं को फिलहाल हटा लिया गया है। वहीं, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह एक अस्थायी बदलाव है और उप मुख्यमंत्री जल्द ही नालंदा आकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखेंगे। नई तारीख के संबंध में जैसे ही प्रोटोकॉल से दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। तब तक के लिए डेयरी प्लांट का काम अभी कागजों में ही आगे बढ़ेगा।
ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद कोएल मल्लिक ने दिया इस्तीफा
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गुरुवार को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। TMC की राज्यसभा सांसद कोएल मल्लिक ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
समस्तीपुर में 'पानी के लिए जंग' खत्म! नई जलापूर्ति परियोजना को मिली मंजूरी, घर-घर पहुँचेगा शुद्ध जल
समस्तीपुर के निवासियों के लिए एक अत्यंत सुखद खबर सामने आई है। लंबे समय से पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे इस क्षेत्र के लिए सरकार ने एक बड़ी और महत्वाकांक्षी जलापूर्ति परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही शहर और ग्रामीण इलाकों में पानी के लिए होने वाली स्थानीय जंग पर पूर्ण विराम लगने की उम्मीद जग गई है। इस परियोजना के धरातल पर उतरते ही समस्तीपुर की न केवल बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर में भी व्यापक बदलाव आएगा।क्या है समस्तीपुर का वाटर मास्टर प्लान?प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत समस्तीपुर के विभिन्न वार्डों और आसपास के इलाकों में पाइपलाइन का जाल बिछाया जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, ताकि लोगों को जल स्रोतों के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि पानी की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित की जा सके। यह परियोजना न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी की जल सुरक्षा को भी ध्यान में रखकर तैयार की गई है।कैसे बदलेगी समस्तीपुर की तस्वीर?समस्तीपुर में जलापूर्ति की समस्या एक गंभीर मुद्दा बनी हुई थी, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इस परियोजना के कार्यान्वयन से न केवल पानी की बर्बादी कम होगी, बल्कि भूजल स्तर को बचाने में भी मदद मिलेगी। बेहतर जल बुनियादी ढांचे के साथ, शहर के विकास की गति भी तेज होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह परियोजना निर्धारित समय के भीतर पूरी होती है, तो यह समस्तीपुर के इतिहास में विकास का एक मील का पत्थर साबित होगी।जल्द शुरू होगा काम, प्रशासन की है पैनी नजरपरियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य को लेकर प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री और संबंधित विभागीय मंत्री ने स्थानीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि निर्माण की गुणवत्ता में किसी भी तरह का समझौता न हो। अगले कुछ महीनों में निर्माण कार्य का भूमि पूजन होने की संभावना है। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे इस कार्य में सहयोग करें। अब देखना यह है कि यह 'समस्तीपुर जलापूर्ति मिशन' जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।
जन सुराज को बड़ा झटका! केसी सिन्हा के बाद इन दिग्गज नेताओं ने भी छोड़ा साथ, BJP में हुए शामिल
बिहार की सियासत में 'जन सुराज' अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केसी सिन्हा के पार्टी छोड़ने के बाद अब जन सुराज के कई और बड़े चेहरों ने प्रशांत किशोर का साथ छोड़ दिया है। इन नेताओं ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। एक के बाद एक वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़ने से न केवल जन सुराज के कैडर में हड़कंप मचा है, बल्कि प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति और पार्टी गठन की कवायद पर भी कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।केसी सिन्हा के बाद 'एग्जिट' का सिलसिला जारीजन सुराज की स्थापना और उसे जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जिन नेताओं की भूमिका अहम थी, अब वही नेता प्रशांत किशोर के विजन से किनारा कर रहे हैं। केसी सिन्हा का जाना पार्टी के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा था, लेकिन अब अन्य दिग्गज नेताओं के बीजेपी में शामिल होने ने इस झटके को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह केवल नेताओं का पलायन नहीं है, बल्कि बिहार में बदल रहे राजनीतिक समीकरणों का संकेत है, जहाँ नेता अब अपनी भविष्य की राजनीति को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय पार्टियों की ओर रुख कर रहे हैं।बीजेपी ने किया 'डिजिटल' और 'जमीनी' वारबीजेपी में शामिल होने वाले इन नेताओं का स्वागत करते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। इन नेताओं के बीजेपी में आने से पार्टी को न केवल जन सुराज की अंदरूनी रणनीति समझने में मदद मिलेगी, बल्कि उन इलाकों में भी पकड़ मजबूत होगी जहां प्रशांत किशोर बीते काफी समय से मेहनत कर रहे थे। जन सुराज के इन नेताओं ने बीजेपी ज्वाइन करते समय वर्तमान नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री के विजन को बिहार के विकास के लिए बेहतर बताया।प्रशांत किशोर की चुनावी चुनौती और आगे की राहइन इस्तीफों के बाद प्रशांत किशोर के सामने अब अपनी टीम को एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि, प्रशांत किशोर हमेशा से कहते आए हैं कि जन सुराज कोई पारंपरिक पार्टी नहीं बल्कि एक 'आंदोलन' है और इसमें आने-जाने वालों से संगठन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन धरातल की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी है, वे जन सुराज के उन क्षेत्रों में प्रभावशाली थे जहाँ पीके अपनी सबसे मजबूत नींव तैयार करना चाहते थे। क्या जन सुराज इस बिखराव से उबर पाएगा, या आने वाले दिनों में और भी बड़े नेता किनारा करेंगे? यह आने वाला समय ही बताएगा।
सियासत में 'स्लिप ऑफ टंग' का खेल! फिसली जुबान तो सत्ता के गलियारों में खड़े हुए सौ सवाल
राजस्थान की राजनीति इन दिनों बयानों के तीर और 'स्लिप ऑफ टंग' के इर्द-गिर्द घूम रही है। सियासत के मैदान में कब क्या बोल दिया जाए, इसका असर सीधे सत्ता के समीकरणों पर पड़ता है। पिछले कुछ समय में प्रदेश के बड़े नेताओं की जुबान तीन बार ऐसी फिसली कि विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया और सत्ता पक्ष के लिए बचाव करना मुश्किल हो गया। जुबान से निकले ये शब्द महज गलतफहमी हैं या फिर सोची-समझी सियासी चाल, यह सवाल आज राजस्थान की हर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।जुबान का खेल और सियासी बवंडरराजनीति में शब्द ही हथियार होते हैं और जब वही शब्द गलत तरीके से बाहर आते हैं, तो वे विवाद का रूप ले लेते हैं। हाल ही में हुए तीन अलग-अलग बयानों ने राजस्थान की राजनीति को गरमा दिया है। कभी किसी ने विकास के दावों को गलत शब्दों में पेश किया, तो कभी किसी ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए मर्यादा की सीमा लांघ दी। इन 'स्लिप ऑफ टंग' के बाद नेताओं के खेमों में खलबली मची है और हर बयान का अलग-अलग अर्थ निकालकर उसे जनता के बीच पेश किया जा रहा है। सत्ता के गलियारों में अब इन बयानों के पीछे के असली मकसद पर सौ सवाल खड़े हो रहे हैं।सत्ता के गलियारों में बढ़ी बेचैनीजब भी कोई बड़ा नेता बयान देता है, तो उसकी 'बॉडी लैंग्वेज' और 'टाइमिंग' को बहुत बारीकी से परखा जाता है। इन तीन चर्चित मामलों ने पार्टी की छवि को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। जानकार मानते हैं कि ये बयान भले ही 'फिसलन' लग रहे हों, लेकिन इनके जरिए किसी न किसी गुट को संदेश देने की कोशिश जरूर होती है। क्या ये गलतियां चुनावी साल में भारी पड़ेंगी? या फिर जनता इन बयानों को नजरअंदाज कर देगी? नेताओं की ये फिसलती जुबान अब सीधे तौर पर वोट बैंक के आंकड़ों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।क्या ये वाकई 'स्लिप ऑफ टंग' है?सियासी गलियारों में एक पुरानी कहावत है कि राजनेता कभी अनजाने में कुछ नहीं बोलते। विश्लेषकों का मानना है कि जुबान का फिसलना अक्सर दबी हुई भावनाओं को बाहर लाता है। इन बयानों के बाद विरोधियों ने न केवल आक्रामक रुख अपनाया है, बल्कि सोशल मीडिया पर मीम्स और वीडियो के जरिए इन बयानों को बार-बार वायरल किया जा रहा है। दूसरी तरफ, संबंधित पार्टी के समर्थक इसे महज एक मानवीय गलती बताकर बचाव कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या यह जुबानी खेल आगामी राजनीति में कोई नया मोड़ लाएगा या फिर वक्त के साथ इन विवादों की धूल जम जाएगी।
राजधानी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 42 थानों के SHO बदले; 82 इंस्पेक्टरों की सूची जारी
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। कमिश्नर सचिन मित्तल ने देर रात एक आदेश जारी कर 82 पुलिस निरीक्षकों (इंस्पेक्टर्स) का तबादला कर दिया है, जिनमें से 42 थानों के एसएचओ (SHO) भी शामिल हैं। इस बड़े फेरबदल को राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और अपराध नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। कई ऐसे अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है जिनके पास फील्ड का लंबा अनुभव है।कमिश्नर सचिन मित्तल का 'मास्टरस्ट्रोक'जयपुर में क्राइम कंट्रोल और जनता से जुड़ाव को मजबूत करने के लिए कमिश्नर सचिन मित्तल ने यह बड़ा निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से एक ही थाने में जमे और कार्यकुशलता के आधार पर अधिकारियों का आकलन करने के बाद यह फेरबदल किया गया है। तबादला सूची में उन इंस्पेक्टरों को प्रमुख थानों की जिम्मेदारी दी गई है, जो पूर्व में चुनौतीपूर्ण मामलों को सुलझाने में अपनी दक्षता साबित कर चुके हैं। कमिश्नर का साफ संदेश है कि राजधानी में पुलिसिंग का स्तर और अधिक पारदर्शी और त्वरित होना चाहिए।42 थानों में नए कप्तान, अपराधियों में खौफराजधानी के 42 प्रमुख थानों के एसएचओ बदले जाने के बाद से पुलिसिंग में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। जिन थानों में लंबे समय से अपराधों का ग्राफ बढ़ा था या जनता से जुड़ी शिकायतों का निपटारा धीमा था, वहां नए और अनुभवी अफसरों को तैनात किया गया है। यह फेरबदल न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से जरूरी था, बल्कि स्थानीय जनता और पुलिस के बीच भरोसे को बहाल करने के लिए भी देखा जा रहा है। नए एसएचओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने थाना क्षेत्रों में सक्रिय अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसें।क्या होगा जयपुर की सुरक्षा पर असर?इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद पुलिस मुख्यालय में भी हलचल तेज है। जयपुर पुलिस के इस बदलाव को आगामी समय के लिए एक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि नए चेहरों के साथ पुलिस का कार्य करने का तरीका और अधिक सक्रिय होगा। विशेष रूप से संवेदनशील थाना क्षेत्रों में तैनात किए गए नए प्रभारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और त्वरित कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है। यह सूची जारी होने के साथ ही संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपना पदभार संभालने के निर्देश भी दिए गए हैं।
भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) अपने यात्रियों को एक बेहतर और निर्बाध अनुभव देने के लिए कमर कस चुका है। हाल ही में IRCTC की नई वेबसाइट का खाका तैयार किया गया है, जिसे और भी अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए जयपुर स्थित MNIT (मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के छात्रों की मदद ली गई है। इन छात्रों के नवीन तकनीकी सुझावों और रिसर्च को नए पोर्टल में शामिल किया गया है। बड़ी बात यह है कि इस नई वेबसाइट को आम यूजर्स से मिले फीडबैक के आधार पर डिजाइन किया गया है, जिससे टिकट बुकिंग से लेकर कैंसिलेशन तक की प्रक्रिया अब चुटकियों में पूरी हो सकेगी।MNIT छात्रों की रिसर्च से बदली वेबसाइट की तस्वीरइस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एकेडमिक इनोवेशन का तड़का लगाया गया है। MNIT के छात्रों ने एक विस्तृत अध्ययन किया था कि एक आम यात्री को टिकट बुक करते समय किन-किन तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। छात्रों ने न केवल इन समस्याओं को चिन्हित किया, बल्कि उनके प्रभावी समाधान भी सुझाए। IRCTC के अधिकारियों ने इन सुझावों को सराहा और उन्हें नए पोर्टल के 'यूजर इंटरफेस' (UI) और 'यूजर एक्सपीरियंस' (UX) में पूरी तरह से ढाल दिया है। अब वेबसाइट का नेविगेशन पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सरल और तेज होगा।यूजर्स के फीडबैक का रखा गया खास ध्यानकिसी भी बड़े प्लेटफॉर्म के लिए यूजर्स का फीडबैक सबसे महत्वपूर्ण होता है। नया पोर्टल तैयार करने से पहले लाखों यात्रियों से मिले सुझावों का बारीकी से विश्लेषण किया गया। अक्सर शिकायत रहती थी कि पीक ऑवर में वेबसाइट स्लो हो जाती है या पेमेंट गेटवे पर अटक जाती है। इन तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए नए पोर्टल को अधिक 'स्केलेबल' बनाया गया है। अब बुकिंग के दौरान लोड पड़ने पर भी वेबसाइट क्रैश नहीं होगी, जिससे टिकट बुकिंग का अनुभव और भी सहज और भरोसेमंद हो जाएगा।कब से मिलेगी आम यात्रियों को नई सुविधा?सूत्रों के अनुसार, वेबसाइट का बीटा टेस्टिंग चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अंतिम रूप देने से पहले सुरक्षा मानकों और सर्वर स्टेबिलिटी की जांच की जा रही है। जल्द ही इसे आम जनता के लिए पूरी तरह से लॉन्च कर दिया जाएगा। IRCTC का यह आधुनिक 'जेनरेटिव' और 'आंसर इंजन' फ्रेंडली पोर्टल न केवल टिकट बुकिंग में मदद करेगा, बल्कि यात्रा से जुड़ी अन्य जानकारी भी एक क्लिक पर उपलब्ध कराएगा। रेल यात्रियों के लिए यह किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है, जो डिजिटल इंडिया के सफर को एक नई रफ्तार देगा।
पंजाब के पब्बियां इलाके में आवारा कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि अब लोगों का अपने घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया है। हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक पूर्व सरपंच को उनके ही खेत में कुत्तों के झुंड ने घेर लिया और बेरहमी से नोच-नोच कर उनकी जान ले ली। हैरत की बात यह है कि कुत्तों ने उनके शरीर के अंगों, विशेषकर बाजू और टांग को बुरी तरह खा लिया। पब्बियां में पिछले महज 15 दिनों के भीतर यह दूसरी मौत है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।खेत में काम करते समय हुआ 'मौत' का सामनामिली जानकारी के अनुसार, पूर्व सरपंच रोजाना की तरह अपने खेत में काम करने गए थे। तभी अचानक आक्रामक कुत्तों के एक झुंड ने उन पर हमला बोल दिया। बुजुर्ग होने के कारण वे खुद को बचा नहीं पाए और कुत्तों ने उन पर टूट पड़ते हुए शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया। जब काफी देर तक वे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने तलाश शुरू की, जहाँ उनका शव बेहद दयनीय स्थिति में मिला। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में गहरा रोष है और लोग अब सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।15 दिनों में दो मौतें: क्या पब्बियां में प्रशासन सो रहा है?पब्बियां इलाके में कुत्तों के हमले का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मात्र दो सप्ताह के भीतर यह दूसरी जान गई है। पहली घटना के बाद ग्रामीणों ने स्थानीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होने का नतीजा एक और निर्दोष की मौत के रूप में सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद और प्रशासन की लापरवाही के कारण ये आवारा कुत्ते अब आदमखोर होते जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासन पर दबावइस खूनी वारदात के बाद गांव के लोगों में दहशत का माहौल है। बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं और किसान खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन आवारा कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया, तो वे बड़े आंदोलन की राह अपनाएंगे। वहीं, प्रशासन का कहना है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और डॉग कैचर टीम को मौके पर तैनात किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह महज एक खानापूर्ति होगी या इस खूनी आतंक से लोगों को वाकई आजादी मिलेगी?
पंजाब के सीमावर्ती जिलों पठानकोट और फिरोजपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज सुबह से ही बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईडी की टीमों ने एक साथ कई ठिकानों पर दबिश देकर हड़कंप मचा दिया है। शुरुआती कार्रवाई एक प्रमुख प्रॉपर्टी डीलर के घर से शुरू हुई, जिसके बाद जांच की आंच सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे अवैध खनन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े स्टोन क्रशरों तक पहुंच गई है। इस कार्रवाई को लेकर इलाके के रसूखदार लोगों में भारी खलबली मची हुई है।प्रॉपर्टी डीलर के घर से शुरू हुई जांच की कड़ीईडी की टीम ने तड़के पठानकोट और फिरोजपुर में एक बड़े प्रॉपर्टी डीलर के आवास पर अचानक दस्तक दी। सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के एक पुराने मामले और बेनामी संपत्ति के निवेश से जुड़ी हुई है। प्रॉपर्टी डीलर के वित्तीय दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है, और माना जा रहा है कि इस रेड में कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद हुए हैं, जो सीधे तौर पर अन्य बड़े नामों से जुड़े हो सकते हैं। ईडी के अधिकारी पूरी रेड के दौरान काफी गोपनीय तरीके से काम कर रहे हैं।सीमावर्ती क्षेत्रों के स्टोन क्रशर पर ईडी की पैनी नजरप्रॉपर्टी डीलर के घर के बाद, ईडी की टीमों ने अपना रुख सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित स्टोन क्रशरों की ओर किया। पिछले काफी समय से इन क्रशरों के संचालन में वित्तीय धांधली और अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थीं। माना जा रहा है कि इन क्रशरों के जरिए भारी मात्रा में काला धन सफेद किया जा रहा था। ईडी की यह कार्रवाई अवैध खनन माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने के लिए एक बड़े 'स्ट्राइक' के रूप में देखी जा रही है। मौके पर सुरक्षा बल तैनात हैं और किसी को भी अंदर-बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।पंजाब की सियासत और प्रशासन पर असरपठानकोट और फिरोजपुर जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में ईडी की सक्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस छापेमारी से न केवल व्यापारिक गलियारों में हलचल है, बल्कि स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का कहना है कि अगर ईडी को इन स्टोन क्रशरों से जुड़े बेहिसाब नकदी और निवेश के दस्तावेज मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कई और बड़े लोगों पर कानूनी शिकंजा कस सकता है। ईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन पैसों का इस्तेमाल कहीं राष्ट्रविरोधी गतिविधियों या तस्करी के लिए तो नहीं किया जा रहा था। फिलहाल, पूरे पंजाब में ईडी की यह रेड चर्चा का विषय बनी हुई है।
केरल हाई कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड के कामकाज को निलंबित किया
कोच्चि। केरल हाई कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड के कामकाज को निलंबित करने का अंतरिम आदेश जारी किया है। भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई के उपाध्यक्ष एवं अधिवक्ता शॉन जॉर्ज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया गया। अदालत ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के इस तर्क को स्वीकार किया कि वर्तमान […] The post केरल हाई कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड के कामकाज को निलंबित किया appeared first on Sabguru News .

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