UP और पंजाब में चुनाव लड़ेगी LJP, चिराग बोले- NDA में बात न बनी तो अकेले उतरेंगे
चिराग पासवान की अध्यक्षता में हुई एलजेपी (रामविलास) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संगठन विस्तार और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा हुई. पार्टी ने उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव लड़ने का फैसला किया है. एनडीए में सम्मानजनक सीट बंटवारा होने पर गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा जाएगा.
संसद के मानसून सत्र में तीन सप्ताह से ज्यादा समय से जारी गतिरोध सोमवार को भी खत्म नहीं हो सका। सरकार की ओर से छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई पर लोकसभा में चर्चा कराने तथा गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की पेशकश के बावजूद कांग्रेस ने इसे स्वीकार नहीं ...
अलवर के सरकारी अस्पताल में महिला ने एक साथ तीन बेटियों को जन्म दिया
अलवर। राजस्थान में अलवर के सरकारी अस्पताल में सोमवार को एक महिला ने एक साथ तीन बेटियों को जन्म दिया। खास बात यह रही कि तीनों बच्चियों का जन्म सामान्य प्रसव के जरिए हुआ। जन्म के समय तीनों का वजन कम होने के कारण चिकित्सकों ने एहतियात के तौर पर उन्हें नर्सरी वार्ड में मशीन […] The post अलवर के सरकारी अस्पताल में महिला ने एक साथ तीन बेटियों को जन्म दिया appeared first on Sabguru News .
चित्तौड़गढ़ : क्लीनिक से शिशु चुराने के आरोप में महिला अरेस्ट
चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बड़ीसादड़ी थाना क्षेत्र में रविवार को एक निजी क्लीनिक से नौ महीने का शिशु चुराकर ले जाने के मामले में पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों ने सोमवार को बताया कि एक महिला अपनी तबीयत खराब होने पर बड़ीसादड़ी कस्बे के एक निजी क्लीनिक पर […] The post चित्तौड़गढ़ : क्लीनिक से शिशु चुराने के आरोप में महिला अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
साफ-सुथरे सिस्टम के बदले झारखंड के युवाओं को मिली लाठियां, देखें खबरदार
झारखंड में छात्रों का आंदोलन 17वां दिन भी जारी है. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन करते छात्रों ने सरकार से तीन दौर की बातचीत की, लेकिन सारी मांगें नहीं मानी गईं तो सोमवार को विधानसभा का घेराव करने निकले. जहां पुलिस ने कंटीले तारों वाले बैरीकेड से लेकर लाठी, आंसू गैस के गोले, वॉटर कैनन का इस्तेमाल छात्रों पर किया. देखें खबरदार.
राम मंदिर CEO की रेस में 18 उम्मीदवार, 11 अगस्त से इंटरव्यू, 2 सितंबर को फैसला
राम मंदिर की व्यवस्था संचालन के लिए CEO की भर्ती प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है. सूत्रों के मुताबिक 11 और 12 अगस्त को 18 चयनित आवेदकों का अंतिम इंटरव्यू राम मंदिर परिसर में होगा. सेवानिवृत्त जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपेगी. 2 सितंबर की बैठक में CEO के नाम पर फैसला होगा.
सिरोही निकाय चुनावों की मतदाता सूचियां आते ही खुली भाजपा-कांग्रेस नेतृत्व की पोल
सिरोही/आबूरोड। राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की दस्तक हो चुकी है। मतदाता सूचियां भी सार्वजनिक हो गई हैं। मतदाता सूचियों के बाहर आते ही पांचों नगर निकायों में हडकम्प मच गया है। इस मतदाता सूचि ने दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बूथ मैनेजमेंट की पोल खोल दी है। कांग्रेस मतदाता सूचि के मैनेजमेंट में […] The post सिरोही निकाय चुनावों की मतदाता सूचियां आते ही खुली भाजपा-कांग्रेस नेतृत्व की पोल appeared first on Sabguru News .
कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, 47 से ज्यादा की मौत
कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के जोरदार भूकंप से कम से कम 47 लोगों की मौत हो गई और कई इमारतें ढह गईं. कैली में कम से कम 20 इमारतों के ढहने और लोगों के फंसे होने की जानकारी मिली. भूकंप के कारण कई हवाई अड्डों पर उड़ानें भी प्रभावित हुईं.
बच्चों के स्कूलों की निगरानी वाली जनहित याचिका, सुप्रीम कोर्ट में खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल तक के बच्चों के धार्मिक और पंथनिरपेक्ष स्कूलों की निगरानी की मांग वाली याचिका सुनने से इनकार कर दिया।
आतंकी-ड्रग सिंडिकेट सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए लगातार अपनी रणनीति बदल रहे हैं, अब हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी एक साथ हो रही है।
अर्चना कल्पती अब मंदिर ट्रस्ट में शामिल, थलपति विजय की फिल्मों की प्रोड्यूसर निभाएंगी ये जिम्मेदारी
फिल्म निर्माता अर्चना कल्पती अघोरम को हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग की पुनर्गठित राज्य स्तरीय समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। इस समिति का काम उन मंदिरों में गैर-वंशानुगत ट्रस्टी नियुक्त करना है, जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से अधिक है।
Nano EV होगी अगली सस्ती कार? चर्चा में Tata का बयान
Tata Nano की वापसी को लेकर चर्चा तेज हो गई है. Tata Motors के इंडिया डिजाइन हेड अजय जैन ने Nano को दोबारा तैयार करने की संभावना के संकेत दिए हैं. इलेक्ट्रिक वर्जन संभावित विकल्प हो सकता है, हालांकि कंपनी ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. इसलिए फिलहाल इसकी वापसी को लेकर सिर्फ संभावनाएं और अटकलें हैं
18 साल की एक्ट्रेस के हाथों पर गिराया मोम, देख भड़के लोग
रोहित शेट्टी के शो में पैलेट गन वाला टास्क कंटेस्टेंट्स पर काफी भारी पड़ा था. सोशल मीडिया पर उसकी काफी आलोचना हुई थी. अब नए एपिसोड में कंटेस्टेंट्स के ऊपर गरमा-गरम मोम डाली गई, जिसके बाद लोगों का गुस्सा और भी बढ़ गया.
पवित्र सावन (श्रावण) मास केवल भगवान शिव की आराधना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह महीना आदिशक्ति माता पार्वती की कृपा पाने का भी सबसे उत्तम अवसर माना जाता है। सनातन परंपरा में सावन के महीने के हर सोमवार को भगवान भोलेनाथ के लिए 'सावन सोमवार व्रत' रखा जाता है, तो वहीं इस महीने में आने वाले हर मंगलवार को माता पार्वती के स्वरूप को समर्पित 'मंगला गौरी व्रत' रखने का विधान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो सुहागिन महिलाएं या अविवाहित कन्याएं निष्ठापूर्वक यह व्रत रखती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, सुयोग्य जीवनसाथी और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि आपके विवाह में बाधाएं आ रही हैं या दांपत्य जीवन में अनबन चल रही है, तो सावन के मंगला गौरी व्रत का पालन करने से सभी ग्रह दोष और समस्याएं दूर हो जाती हैं।क्या है मंगला गौरी व्रत और सावन के मंगलवार को क्यों है इसका खास महत्व?शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि सावन का पूरा महीना शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। जहां सोमवार का दिन शिवजी के पूजन के लिए समर्पित है, वहीं मंगलवार का दिन देवी मंगला गौरी यानी माता पार्वती के मंगलकारी रूप की पूजा के लिए अति फलदायी होता है। 'मंगला' का अर्थ है कल्याण करने वाली और 'गौरी' माता पार्वती का पावन नाम है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और इस व्रत के प्रभाव से ही उन्हें महादेव प्राप्त हुए थे। इसीलिए जो महिलाएं सावन के सभी मंगलवारों को मंगला गौरी का व्रत रखती हैं, उनके पति की आयु लंबी होती है, घर में खुशहाली आती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।मंगला गौरी व्रत की प्रामाणिक पूजा विधि: स्टेप-बाय-स्टेप समझें पूजन प्रक्रियामंगला गौरी व्रत की पूजा विधि बेहद विशेष और भक्तिमयी होती है। इस व्रत को पूरे विधान से करने पर ही इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। पूजा की सही प्रक्रिया इस प्रकार है:प्रातःकाल की तैयारी: व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हों। साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इस दिन लाल, हरे, पीले या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना बेहद शुभ माना जाता है। काले या सफेद वस्त्र पहनने से बचें।व्रत का संकल्प: स्नान के बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर माता मंगला गौरी के समक्ष अपनी मनोकामना बोलते हुए व्रत का संकल्प लें।चौकी की स्थापना: पूजा स्थान पर एक लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल रंग का नया कपड़ा बिछाएं। चौकी पर माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। आप मिट्टी से बनी मंगला गौरी की प्रतिमा भी स्थापित कर सकते हैं।कलश और गणेश पूजन: किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी का पूजन किया जाता है। चौकी पर चावल की ढेरी बनाकर गणेश जी को विराजमान करें और कलश की स्थापना करें। सबसे पहले गणेश जी का जलाभिषेक करें और उन्हें दूर्वा, रोली व मोदक अर्पित करें।मां पार्वती का अभिषेक और श्रृंगार: माता मंगला गौरी को जल, दूध, पंचामृत और पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाएं और रोली, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत व चंदन लगाएं।16 श्रृंगार और भोग समर्पित करें: माता रानी को सुहाग की सामग्री और 16 प्रकार की वस्तुएं अर्पित करें। इसके बाद फल, मिठाई और विशेष रूप से आटे व गुड़ से बने मोदक या हलवे का भोग लगाएं।कथा और आरती: धूप-दीप प्रज्वलित करें और हाथ में 16 दाने गेहूं या चावल के लेकर 'मंगला गौरी व्रत कथा' का पाठ करें। कथा समाप्त होने के बाद 16 बत्तियों वाले दीये से माता गौरी की आरती उतारें।पूजा में 16 चीजों का विशेष महत्व: अर्पित करें ये 16 वस्तुएंमंगला गौरी व्रत की पूजा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें '16' अंक का विशेष महत्व माना गया है। माता गौरी को प्रसन्न करने के लिए हर एक पूजा सामग्री की संख्या 16 होनी चाहिए।पूजा के दौरान माता पार्वती को 16 श्रृंगार की वस्तुएं (जैसे- सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, आलता, काजल, शीशा, कंघी, चुनरी, बिछिया, पेयल, लिपस्टिक, नथ, रिबन, तेल और इत्र) अर्पित करें। इसके अलावा 16 फल, 16 फूल (जैसे लाल गुलाब या कमल), 16 मालाएं, 16 सुपारी, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 पान के पत्ते, 16 मेवे और 16 जीरा या धनिया के दाने चढ़ाने का विधान है। माना जाता है कि माता रानी को 16 चीजें अर्पित करने से साधक के जीवन के 16 प्रकार के कष्ट हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं और घर में धन-धान्य के भंडार भरे रहते हैं।मंगला गौरी व्रत के अनिवार्य नियम: भूलकर भी न करें ये गलतियांशास्त्रों में मंगला गौरी व्रत को अत्यंत पवित्र और नियमनिष्ठ माना गया है। इसका पालन करते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए:भोजन और फलाहार का नियम: इस व्रत में केवल एक समय ही अन्न या फलाहार ग्रहण करने का नियम होता है। कई जगहों पर महिलाएं केवल एक बार फलाहार करती हैं और शाम की पूजा व आरती के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। भोजन में नमक का प्रयोग करने से बचें या केवल सेंधा नमक का ही सीमित उपयोग करें।नकारात्मक विचारों से दूरी: व्रत के दिन मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, क्रोध या द्वेष की भावना न लाएं। अपने जीवनसाथी या परिवार के सदस्यों से वाद-विवाद न करें।तामसिक चीजों का त्याग: सावन के महीने में और विशेषकर व्रत के दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा या किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन न बनने दें।सुहाग सामग्री का दान: पूजा के बाद माता गौरी को चढ़ाई गई 16 सुहाग सामग्रियों में से कुछ वस्तुएं किसी सौभाग्यवती ब्राह्मणी या जरूरतमंद विवाहित महिला को दान कर दें और उनका आशीर्वाद लें।शीघ्र विवाह और अखंड सौभाग्य के लिए करें ये विशेष उपाययदि किसी कन्या के विवाह में लगातार देरी हो रही हो या कोई योग्य जीवनसाथी न मिल रहा हो, तो सावन के मंगला गौरी व्रत के दिन कुछ खास ज्योतिषीय उपाय करने से तुरंत लाभ मिलता है। व्रत के दिन पूजा के समय माता पार्वती को हलदी की 16 गांठें और 16 लाल गुलाब के फूल अर्पित करें। इसके साथ ही 'ॐ ह्रीं मंगला गौर्यै नमः' या 'हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम॥' मंत्र का 108 बार जाप करें। शादीशुदा महिलाएं इस दिन अपनी सास या किसी वरिष्ठ महिला के चरण छूकर उन्हें सुहाग का सामान भेंट करें। इन उपायों से कुंडली में मंगल ग्रह के दोष शांत होते हैं और दांपत्य जीवन में सदैव प्रेम और सामंजस्य बना रहता है।सावन का मंगला गौरी व्रत श्रद्धा, समर्पण और भक्ति का प्रतीक है। जो भी भक्त सच्चे हृदय से माता मंगला गौरी की उपासना करते हैं, देवी पार्वती उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं और उनके जीवन को सुख, शांति व समृद्धि से भर देती हैं।
दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में 10 अगस्त 2026 की सुबह 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े इलाके को हिला दिया। भूकंप के कारण कई शहरों में इमारतों को नुकसान पहुंचा और लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे में कम से कम 47 लोगों ...
अपनी रणनीति में जुटी सरकार, विपक्ष विरोध पर अड़ा... मानसून सत्र के आखिरी तीन में दिन क्या होगा?
संसद में गतिरोध अमित शाह के जंतर-मंतर मामले पर चर्चा के प्रस्ताव के बावजूद जारी है, अब कांग्रेस राम मंदिर चंदा चोरी पर बहस की मांग कर रही है।
किसानों के लिए लोन लेना होगा आसान, लोकसभा में पेश हुआ NCDC बिल; पूरी डिटेल
लोकसभा में एनसीडीसी संशोधन विधेयक पेश किया गया है, जिससे सहकारी समितियों से जुड़े किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज लेना आसान हो जाएगा।
वंदे मातरम् की तर्ज पर तमिलनाडु में लागू होगा 'तमिल थाई वाझ्थु', विधानसभा में प्रस्ताव पारित
तमिलनाडु विधानसभा ने सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में 'तमिल थाई वाझ्थु' गाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया है।
हर साल करोड़ों करदाता आखिरी तारीख से पहले अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करके राहत की सांस लेते हैं। ज्यादातर लोगों को लगता है कि एक बार आईटीआर फाइल हो गया और रिफंड की प्रोसेस शुरू हो गई, तो आयकर विभाग से उनका काम खत्म हो गया। लेकिन कई बार समय पर और पूरी जिम्मेदारी के साथ रिटर्न दाखिल करने के बावजूद टैक्सपेयर्स के इनबॉक्स या ई-फाइलिंग पोर्टल पर इनकम टैक्स का नोटिस आ धमकता है। अचानक नोटिस मिलने से कोई भी करदाता घबरा सकता है। असल में, आधुनिक टेक्नोलॉजी और एआई-संचालित (AI Analytics) डेटा प्रोसेसिंग की वजह से आयकर विभाग अब हर छोटे-बड़े वित्तीय लेनदेन पर बारीक नजर रखता है। केवल समय पर रिटर्न दाखिल कर देना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके द्वारा दी गई जानकारी का विभाग के पास मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड से 100% मेल खाना भी अनिवार्य है। आइए जानते हैं कि समय पर आईटीआर भरने के बाद भी नोटिस क्यों आता है और इससे बचने के सही तरीके क्या हैं।समय पर ITR भरने के बावजूद क्यों आता है इनकम टैक्स नोटिस?आयकर विभाग का सिस्टम अब अत्यधिक डिजिटल और ऑटोमेटेड हो चुका है। जब आप अपना आईटीआर सबमिट करते हैं, तो कंप्यूटर एल्गोरिदम आपके द्वारा दी गई जानकारी को विभिन्न वित्तीय संस्थानों द्वारा भेजे गए डेटा से मिलाता है। जरा सा भी अंतर दिखने पर सिस्टम अपने आप नोटिस जेनरेट कर देता है।AIS और Form 26AS का डेटा मैच न होना: आयकर विभाग के पास आपके पैन (PAN) से जुड़े हर लेनदेन का पूरा ब्योरा 'एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट' (AIS) और 'टैक्स इनफॉर्मेशन समरी' (TIS) के रूप में होता है। अगर आपके ITR में दिखाई गई कुल आय या टीडीएस (TDS) का आंकड़ा फॉर्म 26AS या AIS में दर्ज आंकड़ों से मेल नहीं खाता, तो सिस्टम तुरंत सेक्शन 143(1) के तहत मिसमैच का नोटिस जारी कर देता है।ब्याज और अन्य स्रोतों से हुई आय को छिपाना: अक्सर लोग केवल अपनी सैलरी या मुख्य बिजनेस की इनकम ही आईटीआर में दिखाते हैं। वे सेविंग्स अकाउंट से मिलने वाले ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज, शेयर बाजार से मिले डिविडेंड या म्यूचुअल फंड के शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन को दर्ज करना भूल जाते हैं। बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा यह डेटा सीधे आईटी विभाग को भेजा जाता है, जिससे अंतर पकड़े जाने पर नोटिस आ जाता है।हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन (SFT) का खुलासा न करना: अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान क्रेडिट कार्ड से भारी-भरकम बिल का भुगतान किया है, लाखों का कैश जमा या निकाला है, बड़ी प्रॉपर्टी खरीदी या बेची है, या शेयर मार्केट व क्रिप्टो (VDA) में बड़ा निवेश किया है, तो बैंक और कंपनियां इसकी जानकारी 'स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस' (SFT) के जरिए सरकार को देती हैं। यदि यह खर्च आपकी घोषित आय के अनुपात में सही नहीं बैठता, तो विभाग आपकी आय के स्रोत की जानकारी मांगने के लिए नोटिस भेज सकता है।बिना सबूत भारी डिडक्शन (कटौती) का दावा करना: कई करदाता टैक्स बचाने के चक्कर में एचआरए (HRA), धारा 80C, 80D या पॉलिटिकल डोनेशन का ऐसा दावा पेश कर देते हैं, जो उनके फॉर्म 16 या नियोक्ता को दी गई जानकारी से मेल नहीं खाता। फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों की समीक्षा के लिए आयकर विभाग सबूतों की मांग का नोटिस (Section 142(1)) भेज सकता है।ITR का ई-वेरिफिकेशन न करना: यदि आपने समय पर रिटर्न फाइल तो कर दिया, लेकिन 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) नहीं किया, तो आपका आईटीआर अमान्य (Invalid) मान लिया जाता है। इसके बाद विभाग आपको डिफ़ॉल्ट या रिटर्न न भरने का नोटिस जारी कर सकता है।आयकर विभाग से आने वाले प्रमुख नोटिसों के प्रकार और उनका मतलबआयकर विभाग द्वारा अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग धाराओं के तहत नोटिस भेजे जाते हैं। इन्हें समझना हर करदाता के लिए जरूरी है:सेक्शन 143(1) का नोटिस (Intimation): यह एक स्वचालित सूचना होती है। इसमें आपके द्वारा दिए गए टैक्स कैलकुलेशन और आयकर विभाग के कैलकुलेशन का तुलनात्मक विवरण होता है। यदि इसमें टैक्स की अतिरिक्त देनदारी (Demand) बनती है या रिफंड में कटौती होती है, तो कारण दर्ज होता है।सेक्शन 139(9) डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस: यदि आपके फॉर्म में कोई तकनीकी त्रुटि है—जैसे गलत आईटीआर फॉर्म चुनना, ऑडिट रिपोर्ट न लगाना या बैलेंस शीट न देना—तो विभाग इसे 'त्रुटिपूर्ण रिटर्न' घोषित कर 15 दिनों के भीतर गलती सुधारने का मौका देता है।सेक्शन 142(1) जांच और दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस: यह नोटिस तब आता है जब एसेसिंग ऑफिसर (AO) को आपके दावों, बैंक खातों या खर्चों पर संदेह होता है और वह आपसे बिल, रसीदें या बैंक स्टेटमेंट जमा करने को कहता है।सेक्शन 148 एसेसमेंट से छूटी हुई आय का नोटिस: यदि विभाग के पास यह पुख्ता जानकारी होती है कि आपने अपनी बड़ी आय को जानबूझकर छिपाया है, तो कर निर्धारण को दोबारा खोलने के लिए यह गंभीर नोटिस भेजा जाता है।इनकम टैक्स नोटिस से बचने के लिए तुरंत अपनाएं ये 6 गोल्डन रूल्सटैक्स मामलों में थोड़ी सी सतर्कता आपको किसी भी तरह की कानूनी या वित्तीय परेशानी से बचा सकती है। ITR दाखिल करते समय और उसके बाद नीचे दिए गए नियमों का पालन जरूर करें:फाइलिंग से पहले AIS और Form 26AS का मिलान करें: आईटीआर दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अपना AIS, TIS और Form 26AS डाउनलोड करें। अपने पास मौजूद कागजातों (जैसे फॉर्म 16 और बैंक सर्टिफिकेट) का इनसे 100% मिलान करें।ब्याज की हर एक पाई का हिसाब दें: सेविंग्स बैंक अकाउंट, एफडी, आरडी या किसी भी पोस्ट ऑफिस स्कीम से प्राप्त कुल ब्याज को 'Income from Other Sources' में अनिवार्य रूप से दर्ज करें। याद रखें कि सेविंग्स अकाउंट ब्याज पर धारा 80TTA के तहत 10,000 रुपये तक की छूट मिलती है, लेकिन इसे पहले कुल आय में जोड़ना और फिर डिडक्शन में क्लेम करना सही तरीका है।कर-मुक्त आय (Exempt Income) को भी दर्ज करें: पीपीएफ (PPF) ब्याज, कृषि आय, या एलआईसी मैच्योरिटी जैसी कर-मुक्त आय को भी ITR के 'Exempt Income' वाले सेक्शन में दिखाना जरूरी होता है। इसे छिपाने से आपकी संपत्ति का विवरण गड़बड़ा सकता है।फॉर्म 16 और क्लेम किए गए डिडक्शन में पारदर्शिता रखें: यदि आप फॉर्म 16 के अलावा अलग से कोई अतिरिक्त कटौती क्लेम कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके पास उसके वैध बिल, इन्वेस्टमेंट प्रूफ और बैंक रिसिप्ट सुरक्षित रखे हों।समय सीमा के भीतर ई-वेरिफाई करें: ITR सबमिट करने के तुरंत बाद आधार ओटीपी (Aadhaar OTP) या नेट बैंकिंग के जरिए उसका ई-वेरिफिकेशन पूरा करें। जब तक वेरिफिकेशन नहीं होगा, आपका रिटर्न प्रोसेस नहीं होगा।बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट रखें: अपने सभी चालू और बचत बैंक खातों की जानकारी ITR में दें और जिस खाते में रिफंड पाना चाहते हैं उसे पोर्टल पर प्री-वैलिडेट (Pre-validate) करके पैन से लिंक रखें।अगर आ जाए इनकम टैक्स का नोटिस, तो भूलकर भी न करें ये गलतियांयदि किसी कारणवश आपको आयकर विभाग का नोटिस मिल भी जाता है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।सबसे पहले इनकम टैक्स पोर्टल (incometax.gov.in) पर 'e-Proceeding' टैब में जाकर नोटिस की प्रामाणिकता जांचें। नोटिस में दी गई समय-सीमा (सामान्यतः 15 से 30 दिन) का ध्यान रखें। यदि नोटिस में विभाग का कैलकुलेशन सही है और आपने कोई गलती की थी, तो आप रिवाइज्ड रिटर्न (Section 139(5)) दाखिल कर सकते हैं या बकाये टैक्स का भुगतान कर सकते हैं।यदि आप विभाग के नोटिस से असहमत हैं, तो साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ समय पर अपना जवाब (Response) पोर्टल पर ऑनलाइन ही सबमिट करें। नोटिस को अनदेखा करने की गलती कभी न करें, क्योंकि जवाब न देने पर भारी जुर्माना, पेनल्टी या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यदि मामला जटिल है, तो किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स एक्सपर्ट की मदद जरूर लें। सही जानकारी और सतर्कता ही इनकम टैक्स के नोटिस से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
क्या अरुणाचल प्रदेश में 60 किमी अंदर घुस आई चीनी सेना? वायरल वीडियो का Fact Check
फैक्ट चेक में साफ हुआ कि वायरल वीडियो पुराना है। इसे हाल की भारत-बांग्लादेश सीमा की घटना बताकर शेयर किया जा रहा है, जो कि गलत है। इसलिए यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे वीडियो देखकर तुरंत किसी नतीजे पर न पहुंचें।
देशभर में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत से सक्रिय हो चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मौसम को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अगले सात दिनों तक बारिश का यह दौर थमने वाला नहीं है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वोत्तर भारत तक के 20 से अधिक राज्यों में मूसलाधार बारिश, आंधी-तूफान और बिजली कड़कने का पूर्वानुमान जताया गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसूनी द्रोणिका (Monsoon Trough) और बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से वायुमंडल में अत्यधिक नमी आ गई है, जिसके कारण मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ी राज्यों तक अगले एक हफ्ते में भारी वर्षा होने वाली है।विशेष रूप से दो पहाड़ी राज्यों—हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड—के लिए आगामी दिन बेहद चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं, जहां अत्यधिक भारी बारिश, भूस्खलन (Landslides) और फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।अगले 7 दिनों तक थमने नहीं वाली बारिश: IMD का 20 से ज्यादा राज्यों में व्यापक अलर्टमौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, देश के उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर हिस्सों में अगले पूरे सप्ताह के दौरान व्यापक रूप से मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जाएगी। मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति में बना हुआ है और दक्षिणी-पूर्वी हवाएं लगातार मैदानी इलाकों तक नमी पहुंचा रही हैं। जिन 20 से अधिक राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया गया है, उनमें दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं।मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से जहां एक तरफ तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ निचले इलाकों में जलभराव, नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।पहाड़ों पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए रेड व ऑरेंज अलर्टमौसम विभाग ने जिन दो राज्यों के लिए सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है, वे हैं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड। इन दोनों पहाड़ी राज्यों में अगले 7 दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा (Extremely Heavy Rainfall) और बादल फटने की घटनाएं हो सकती हैं।उत्तराखंड का हाल: चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, देहरादून और नैनीताल जिलों में भूस्खलन और पहाड़ों से मलबे गिरने का खतरा काफी बढ़ गया है। अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी और गंगा नदियां उफान पर हैं। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को मौसम का मिजाज देखकर ही यात्रा शुरू करने की सलाह दी गई है।हिमाचल प्रदेश में आफत: मंडी, कुल्लू, शिमला, कांगड़ा और सिरमौर जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ब्यास और सतलुज नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच सकता है। पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को नदी-नालों से दूर रहने और अनावश्यक यात्रा न करने की हिदायत दी है।दिल्ली-एनसीआर और यूपी-बिहार का मौसम: मैदानी इलाकों में जलभराव और झमाझम बौछारेंदेश की राजधानी दिल्ली और इससे सटे एनसीआर के इलाकों (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद) में अगले सात दिनों तक आसमान में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। कुछ स्थानों पर एक-दो स्पेल में तेज आंधी के साथ भारी बौछारें भी पड़ सकती हैं। बारिश की वजह से दिल्ली के तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। हालांकि, बारिश के चलते मिंटो रोड, आईटीओ और धौला कुआं जैसे निचले इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई गई है।उत्तर प्रदेश के मौसम की बात करें तो पूर्वांचल (गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, देवरिया) और पश्चिमांचल (मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, आगरा) दोनों ही हिस्सों में अगले सात दिनों तक मानसून मेहरबान रहेगा। ज्यादातर जिलों में आकाशीय बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान है। वहीं बिहार और झारखंड में भी मानसून ट्रफ की सक्रियता की वजह से उत्तरी और पूर्वी जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होगी। कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियों में उफान आने से बिहार के तराई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी दिखेगा मानसून का विकराल रूपमध्य भारत और पश्चिमी भारत के राज्यों में भी अगले सात दिनों के दौरान मौसमी गतिविधियां काफी तेज रहने वाली हैं।राजस्थान: पूर्वी राजस्थान के जयपुर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर संभागों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी।मध्य प्रदेश: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का नया दौर शुरू हो रहा है। मालवा और निमाड़ अंचल में नदियां-नाले उफान पर आ सकते हैं।महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र: मुंबई, ठाणे, पालघर और रत्नागिरी में अगले कुछ दिनों के दौरान समुद्र तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।प्रशासन की अलर्ट मोड पर तैयारी: आपदा प्रबंधन और नागरिकों के लिए सुरक्षा गाइडलाइनबारिश के इस सात दिवसीय लंबे स्पेल को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीमों को संवेदनशील और बाढ़ संभावित जिलों में अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया गया है। संबंधित राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों ने कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम नागरिकों, यात्रियों और किसानों के लिए जरूरी सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं:आकाशीय बिजली से बचाव: बारिश और कड़कने के दौरान खुले खेतों, ऊंचे पेड़ों या लोहे के खंभों के नीचे बिल्कुल खड़े न हों। पक्के मकानों में शरण लें।यात्रा से पहले जांचें रूट: पहाड़ी इलाकों में जाने वाले यात्री स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और रास्ते की स्थिति का जायजा लेने के बाद ही घर से निकलें।जलभराव वाले रास्तों से बचें: जलमग्न अंडरपास और बहते हुए बरसाती नालों को पार करने का जोखिम न उठाएं।किसानों के लिए सलाह: खेतों में जल निकासी (Drainage) का उचित प्रबंध रखें ताकि खड़ी फसलों को जलभराव से नुकसान न पहुंचे।मौसम विभाग के इस सात दिवसीय अलर्ट के अनुसार, आने वाला हफ्ता देश के एक बड़े हिस्से के लिए बारिश और नमी लेकर आ रहा है। सतर्कता और सही जानकारी के साथ ही इस मौसमी आफत के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
देश की राजधानी दिल्ली और इससे सटे पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मानसून का उग्र रूप देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली-एनसीआर के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ घंटों में अत्यधिक भारी बारिश, तेज हवाओं और आंधी-तूफान की आशंका जताई है। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई सीमावर्ती जिलों में भी गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है। सोमवार सुबह से ही आसमान में काले-घने बादलों का डेरा जमा हुआ था और दोपहर होते-होते पूरी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में तेज गर्जना के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया। बारिश की वजह से राजधानी की मुख्य सड़कों और अंडरपासों में घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे दफ्तरों से लौटने वाले लोगों और आम राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।दिल्ली-एनसीआर में बदला मौसम का मिजाज: बादलों की गड़गड़ाहट और मुसलाधार बारिश ने रोकी रफ्तारदिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए सोमवार का दिन आफत भरी बारिश लेकर आया। सुबह से ही बादलों की आवाजाही जारी थी, लेकिन दोपहर के समय अचानक अंधेरा छा गया और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश शुरू हो गई। पालम, सफदरजंग, नजफगढ़, मयूर विहार, पूसा और आईजीआई एयरपोर्ट इलाके में तेज झोंकों के साथ मूसलाधार पानी बरसा। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की द्रोणिका (Monsoon Trough) और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर के वायुमंडल में अत्यधिक नमी और अस्थिरता बन गई है। इसके चलते बादलों के निर्माण की रफ्तार बहुत तेज रही, जिससे थोड़े ही समय में कई मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण शहर के तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की बड़ी गिरावट आई है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से तो राहत मिली, लेकिन जलभराव ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।यूपी और हरियाणा में आंधी-तूफान का अलर्ट: तेज हवाओं के साथ गिर सकती है बिजलीमौसम विभाग ने केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बड़े हिस्से में भी मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जताया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और मुरादाबाद में तेज बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर, रोहतक, सोनीपत और अंबाला जिलों में बारिश के साथ-साथ तेज बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तेज आंधी-तूफान के कारण कच्चे मकानों, पेड़ों की टहनियों और विज्ञापन होर्डिंग्स को नुकसान पहुंच सकता है। कई स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है, इसलिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे शरण न लेने की सख्त हिदायत दी गई है।सड़कों पर घुटनों तक भरा पानी: जलभराव और भीषण ट्रैफिक जाम से बेहाल हुए राहगीरतेज बारिश शुरू होते ही दिल्ली-एनसीआर के निचले इलाकों और मुख्य चौराहों पर जलभराव की स्थिति विकराल हो गई। दिल्ली के मिंटो रोड, धौला कुआँ, आईटीओ, आईटीओ अंडरपास, मोती बाग, पीरागढ़ी और महरौली-बदरपुर रोड पर पानी भर जाने से वाहनों के पहिए थम गए। गुरुग्राम के दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48), इफ्को चौक, राजीव चौक और हीरो होंडा चौक पर घुटनों तक पानी जमा होने से गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। नोएडा और गाजियाबाद के निचले इलाकों में भी नालियों का पानी सड़कों पर बहने लगा, जिससे दोपहिया वाहन चालकों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और नोएडा ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर यात्रियों को जलभराव वाले रास्तों से बचने और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। कई जगहों पर गाड़ियां पानी में बंद हो जाने के कारण घंटों जाम लगा रहा।मौसम विभाग (IMD) का अलर्ट और एडवाइजरी: घर से निकलने से पहले जान लें ये जरूरी बातेंमौसम विभाग (IMD) ने अपने रेड और ऑरेंज अलर्ट बुलेटिन में नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है। आईएमडी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश और तेज आंधी के समय बहुत जरूरी काम न होने पर घर से बाहर निकलने से बचें।बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर और पुराने पेड़ों से दूर रहें, क्योंकि तेज हवाओं में इनके गिरने का खतरा अधिक रहता है।वाहन चलाते समय स्पीड धीमी रखें और आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, क्योंकि गीली सड़कों पर अचानक ब्रेक लगाने से फिसलन हो सकती है।जलभराव वाले अंडरपास और जलमग्न सड़कों को पार करने की कोशिश न करें, क्योंकि पानी की गहराई का सही अंदाजा न होने से बड़ा हादसा हो सकता है।किसानों और खेत में काम करने वाले मजदूरों को बिजली कड़कने के दौरान खुले खेतों से निकलकर पक्के मकानों में शरण लेने की सलाह दी गई है।अगले 48 घंटों में कैसा रहेगा मौसम? बारिश का दौर कब तक जारी रहने की उम्मीदमौसम पूर्वानुमान एजेंसियों के मुताबिक, मानसून ट्रफ की स्थिति अभी अगले दो दिनों तक दिल्ली-एनसीआर और उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर बनी रहने वाली है। इसके चलते अगले 24 से 48 घंटों तक रुक-रुक कर मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। मंगलवार और बुधवार को भी दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ इलाकों में बादल छाए रहेंगे और कुछ स्पेल (Spells) में तेज बारिश दर्ज की जा सकती है।प्रशासनिक स्तर पर दिल्ली नगर निगम (MCD), पीडब्ल्यूडी और एनडीआरएफ की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि जलभराव की जगह से तुरंत पंप लगाकर पानी निकाला जा सके और फंसे हुए लोगों को त्वरित सहायता दी जा सके। नगर निगमों ने कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए हैं ताकि जलभराव या पेड़ गिरने की स्थिति में नागरिक तुरंत संपर्क कर सकें। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर की जनता को इस आफत भरी मूसलाधार बारिश और ट्रैफिक की समस्याओं से तुरंत निजात मिलती नहीं दिख रही है।
'बैगर दीदी 10 वोट भी नहीं...', TMC से अलग हुए 3 विधायकों की जागी 'ममता'!
ऋतब्रत गुट के 3 बागी विधायक तौसीफ-उर-रहमान,अब्दुल खालिक मोल्लाह और बिभास सरदार ने ममता बनर्जी पर हमले की निंदा की. ये तीनों कालीघाट टीएमसी के बड़े नेताओं सोवनदेब चट्टोपाध्याय और कुणाल घोष के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए. यहां उनकी मौजूदगी ने ममता बनर्जी के खेमे में उनकी'घर वापसी' की अटकलों को हवा दे दी है.
दो पत्नियां, एक पति... सड़क पर घंटों चली खींचतान
बिहार के कटिहार में एक पति को लेकर उसकी दो पत्नियों के बीच सड़क पर हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ. दोनों महिलाएं विक्की पर अपना-अपना हक जताती रहीं और उसे अपनी तरफ खींचती नजर आईं. काफी देर बाद मोहल्ले के लोगों ने समझाकर मामला शांत कराया. घंटों चले इस विवाद के बाद मोहल्ले के लोगों ने तीनों को समझाकर मामला शांत कराया.
भोपाल के VVIP इलाके में चोरी... Ex मंत्री के बंगले से टोटियां ले गए चोर
भोपाल के हाई सिक्योरिटी इलाके चार इमली में बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई के बंगले में चोरी हुई. चोर ताले तोड़कर अंदर घुसे और नलों की टोटियां चुरा ले गए, पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है.
छात्र आंदोलनों पर संसद में चर्चा को तैयार सरकार, गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब: किरेन रिजिजू
नई दिल्ली। संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने की सहमति जताई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार इस विषय पर संसद में विस्तार से चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह […]
'बलवान' से पहले क्रिकेट था पहला प्यार, आखिर एक्टर क्यों बन गए सुनील शेट्टी
सुनील शेट्टी का जन्म 11 अगस्त 1961 को कर्नाटक के मुल्की में हुआ था. उनका परिवार बाद में मुंबई आ गया और यहीं उन्होंने पढ़ाई पूरी की. उनका बचपन साधारण माहौल में बीता.
'तुम्हें खत्म कर देंगे...', सौरव गांगुली को मिली जान से मारने की धमकी
पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली और उनकी पत्नी डोना गांगुली को धमकी भरा पत्र मिला है. परिवार की शिकायत के बाद ठाकुरपुकुर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है.
कोलंबिया में भूकंप का महा-तांडव, अब तक 47 की गई जान; दर्जनों बिल्डिंगें धराशायी
दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में भूकंप की शक्ल में मौत का महा-तांडव आया है। सोमवार को 7.4 की तीव्रता से आए इस भूकंप में 47 लोगों की जान चली गई। वहीं, इस बात की आशंका है कि बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।
दाऊद और मुंबई अंडरवर्ल्ड पर नई फिल्म बनाएंगे RGV, किया ऐलान
राम गोपाल वर्मा ने अपनी नई हिंदी फिल्म हर्षवर्धन राणे के साथ अनाउंस की है, जिसकी कहानी भी उन्होंने रिवील कर दी. ये फिल्म मोस्ट वॉन्टेड डॉन दाऊद इब्राहिम की गैंग पर आधारित होगी, जिसे टी-सीरीज प्रोड्यूस करेगी.
कुछ महीनों में होनी थी शादी, अकेले ट्रेक पर निकला सॉफ्टवेयर इंजीनियर अब लापता
पुलिस जांच में अद्वैत के गायब होने की कड़ियों को इस तरह जोड़ा गया है। अद्वैत ने अपनी मंगेतर को ट्रेकिंग पर जाने की जानकारी दी और एक रेंटेड मोटरसाइकिल से शिवगंगे पहुंचे।
सावन शिवरात्रि से 4 राशियों के अच्छे दिन शुरू! घर में लगेगा धन का अंबार
Sawan Shivratri 2026: 11 अगस्त का सावन शिवरात्रि है. ज्योतिषविदों का कहना है कि सावन शिवरात्रि के दिन चार राशियों पर महादेव की विशेष कृपा होने वाली है. बहुत जल्द इन राशियों के अच्छे दिन शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं.
24 घंटे में 161 लोगों को कुत्तों ने काटा, 11 साल की बच्ची गंभीर
कल्याण पश्चिम में 24 घंटे में 161 से ज्यादा लोगों को आवारा कुत्तों ने काटने का दावा. 11 साल की बच्ची गंभीर घायल, रुक्मिणीबाई अस्पताल में डॉग बाइट मरीजों की भीड़ और KDMC की व्यवस्था पर सवाल.
इस हफ्ते IPO ही IPO, 9 कंपनियों के खुलेंगे, कमाई का शानदार मौका
IPO Details: अगर आप आईपीओ में पैसे लगाने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके पास बेहतरीन मौका है. प्राइमरी मार्केट में इस हफ्ते 9 नए IPO निवेश के लिए खुलेंगे. इनमें 5 मेनबोर्ड और 4 SME सेगमेंट के इश्यू शामिल हैं.
पति को लेकर भिड़ीं दो पत्नियां, कोई खींचती रही तो कोई जान देने पर अड़ी
कटिहार में एक पति को लेकर उसकी दो पत्नियों के बीच घंटों हाई वोल्टेज ड्रामा चला. पहली पत्नी प्रियंका ने पति विक्की को दूसरी महिला मुन्नी के साथ पकड़ लिया. दोनों महिलाएं पति पर अपना हक जताती रहीं. प्रियंका ने विरोध में जान देने तक की बात कही. बाद में मोहल्ले के लोगों ने तीनों को समझाकर मामला शांत कराया.
कृषि से अंतरिक्ष तक तकनीक की नई उड़ान, युवा बदल रहे भारत की तस्वीर
भारत के युवा इनोवेटर कृषि और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी समाधान विकसित कर रहे हैं, जिससे लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और अंतरिक्ष अभियानों को सुरक्षित बनाने में मदद मिल रही है।
मेडिकल कॉलेज में लड़के को पीटता दिखा पुलिसकर्मी
UP के ललितपुर मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी वार्ड का वीडियो वायरल है, जिसमें एक पुलिसकर्मी युवक को लगातार थप्पड़ मारता दिख रहा है. पुलिस के मुताबिक युवक को शराब के नशे में गाली-गलौज के मामले में पकड़ा गया था. वीडियो की जांच के बाद पुलिसकर्मी पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है.
तलाक के बाद भी गुजारा भत्ता देना होगा, हिमाचल HC बोला- दूसरी शादी तक की जिम्मेदारी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दूसरी शादी नहीं करने वाली तलाकशुदा महिला को भी पूर्व पति से भरण-पोषण पाने का अधिकार है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…
पिता ने होटल रूम में किया दो मासूम बेटियों का कत्ल, अपना भी गला काटा, पत्नी पर था शक
बेंगलुरु के एक होटल में एक पिता ने अपनी दो बेटियों की गला घोंटकर हत्या कर दी और खुद आत्महत्या की कोशिश की. आरोपी एसजी इमरान ने सुसाइड नोट में पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
उत्तर प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मानसून की रफ्तार कुछ समय के लिए धीमी पड़ने के कारण राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण उमस और चुभने वाली गर्मी ने लोगों का पसीना छुड़ा दिया है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले दो दिनों तक प्रदेश के मध्य, पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बादलों की आवाजाही के बावजूद बारिश के आसार काफी कम हैं। इस दौरान तेज धूप और हवा में अत्यधिक नमी होने के कारण दिन का तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, यह राहत की बात है कि दो दिनों के इस शुष्क और चिपचिपे दौर के बाद मानसून ट्रफ एक बार फिर सक्रिय होगा, जिससे लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश की बौछारें पड़ेंगी और लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।लखनऊ और आसपास के जिलों में पसीने छुड़ाएगी उमस: 35 डिग्री तक पहुंचेगा पाराराजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी और रायबरेली समेत आसपास के मध्यवर्ती इलाकों में सुबह से ही आसमान साफ रहने और कड़क धूप खिलने की वजह से तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिन चढ़ने के साथ ही पसीने छुड़ाने वाली उमस बढ़ जाती है, जिससे सड़कों और बाजारों में चहल-पहल कम नजर आ रही है। लखनऊ में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हवा की गति धीमी होने और पारे में उछाल आने से 'रियल फील' यानी महसूस होने वाली गर्मी का अहसास 40 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक लग रहा है। यही स्थिति कानपुर और आसपास के मैदानी इलाकों में भी बनी हुई है, जहां लोग पसीने और चिपचिपाहट से परेशान हैं।हवा में बढ़ी आर्द्रता बनेगी परेशानी की वजह: जानिए क्यों बढ़ रही है बेहाल करने वाली गर्मीमानसून के सीजन में जब बारिश की गतिविधियां अचानक थम जाती हैं, तो वातावरण में पहले से मौजूद नमी और धूप का संगम भयंकर उमस पैदा करता है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाएं धरातल के ऊपरी हिस्से में नमी बनाए हुए हैं, लेकिन ऊपरी वायुमंडल में कोई मजबूत वेदर सिस्टम न बनने के कारण मेघ गर्जन और भारी बारिश के अनुकूल परिस्थितियां नहीं बन पा रही हैं। हवा में रिलेटिव ह्यूमिडिटी (सापेक्षिक आर्द्रता) का स्तर 75 से 85 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जब हवा में नमी इतनी अधिक होती है, तो शरीर से निकलने वाला पसीना आसानी से वाष्पीकृत (सूखता) नहीं होता, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है और लोग अत्यधिक थकावट व बेचैनी महसूस करते हैं।मौसम विभाग का पूर्वानुमान: दो दिनों बाद बदलेगा हवाओं का मिजाज, मानसून पकड़ेगा रफ्तारआंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार, उमस और गर्मी का यह दौर ज्यादा लंबा नहीं चलने वाला है। उत्तर-पश्चिम भारत और नेपाल से सटे तराई इलाकों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी ट्रफ लाइन पुनः सक्रिय हो रही है। अगले 48 घंटों यानी दो दिनों के बाद प्रदेश के वायुमंडल में मानसूनी हवाओं का दबाव फिर से बढ़ेगा। इसके प्रभाव से लखनऊ, पूर्वांचल और पश्चिमांचल के जिलों में बादलों की काली घटाएं छाएंगी और मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला शुरू होगा। बारिश शुरू होते ही तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे हवा में ठंडक घुल जाएगी और लोगों को राहत मिलेगी।यूपी के इन पूर्वी और पश्चिमी जिलों में बारिश का अलर्ट जारीमौसम विभाग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि दो दिन बाद जब नया सिस्टम एक्टिव होगा, तो प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश होगी।पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल): गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, मऊ, बलिया, वाराणसी, गाजीपुर, प्रयागराज और जौनपुर में दो दिनों बाद गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बौछारें पड़ने का अनुमान है। तराई के जिलों जैसे सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और बलरामपुर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश: मेरठ, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़ और आगरा में भी दो दिनों तक मौसम शुष्क व उमस भरा रहेगा, जिसके बाद झमाझम बारिश से राहत मिलेगी।बुंदेलखंड और मध्य यूपी: झांसी, बांदा, चित्रकूट, महोबा, ललितपुर और फतेहपुर में भी हवाओं की दिशा बदलने से हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।उमस भरी गर्मी और मौसमी बदलाव के बीच सेहत का रखें खास ख्याल: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाहमौसम के इस उतार-चढ़ाव, अचानक बढ़ती उमस और फिर संभावित बारिश के बीच बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। लखनऊ के वरिष्ठ चिकित्सकों ने इस बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:डिहाइड्रेशन से बचें: दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी, शिकंजी, नारियल पानी और लस्सी का सेवन करें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे।धूप में जाने से परहेज करें: दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बिना वजह तेज धूप में निकलने से बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सूती कपड़े पहनें और सिर को ढककर रखें।खान-पान में सतर्कता: उमस के मौसम में पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इसलिए बासी और अत्यधिक तैलीय या मसालेदार भोजन खाने से बचें। कटे हुए फल और खुले में बिकने वाले स्ट्रीट फूड का सेवन न करें।बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन: इस मौसम में फंगल इंफेक्शन, घमौरियां और पेट से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ जाते हैं। शरीर की साफ-सफाई का ध्यान रखें और पसीने वाले कपड़ों को तुरंत बदलें।मौसम विभाग की मानें तो दो दिनों की यह असहनीय उमस भरी गर्मी जल्द ही विदा होगी और झमाझम बारिश के साथ पूरे प्रदेश में सुहावने मौसम की वापसी होगी। तब तक लोगों को सतर्क रहने और धूप-उमस से बचाव करने की आवश्यकता है।
यूपी में गठबंधन पक्का? राहुल ने किसे देख कर किया 'टॉप' वाला इशारा, अखिलेश भी हंस पड़े
किसी नेता की मुस्कान, इशारे या सार्वजनिक गर्मजोशी को गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। फिर भी राजनीतिक संकेतों के लिहाज से यह दृश्य महत्वपूर्ण है
अवैध बांग्लादेशियों पर बेंगलुरु पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन, 105 को हिरासत में लिया
बेंगलुरु पुलिस ने 'ऑपरेशन मुक्त' के तहत 105 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है।
राहुल गांधी ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष की तीन मुख्य मांगें हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं होगा।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसून की भारी बारिश और कुदरत का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के सीमांत जिले चमोली में तड़के अचानक बादल फटने से भयानक तबाही मच गई। उफनते नाले और पहाड़ों से मलबा-पत्थर बहकर आने के कारण देखते ही देखते बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) का एक वैली ब्रिज खिलौने की तरह बह गया। इस अचानक आए सैलाब में कई वाहन बह गए हैं और सीमा सड़क संगठन के कुछ कर्मचारियों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग कई जगहों पर पूरी तरह से बाधित हो गया है, जिससे सैकड़ों यात्री और स्थानीय लोग फंसे हुए हैं। प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने में जुटे हुए हैं।तड़के 3 बजे आया सैलाब: ताश के पत्तों की तरह ढह गया बीआरओ का मजबूत पुलस्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा तड़के उस समय हुआ जब ज्यादातर लोग सो रहे थे। पहाड़ी के ऊपरी इलाके में बादल फटने के कारण नालों का जलस्तर अचानक कई फीट बढ़ गया। पानी के साथ भारी मात्रा में भारी-भरकम बोल्डर और मलबा तेजी से नीचे की ओर आया। सैलाब का वेग इतना प्रचंड था कि मार्ग को जोड़ने वाला बीआरओ का लोहे का वैली ब्रिज ताश के पत्तों की तरह ढह गया और पानी के तेज बहाव में बह गया। पुल के बह जाने से सीमांत इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पानी का शोर और पत्थरों की गड़गड़ाहट इतनी भयानक थी कि पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।कई गाड़ियां मलबे में बहीं, सीमा सड़क संगठन के कर्मचारी हुए लापताघटना के समय सड़क किनारे और बीआरओ कैंप के पास खड़े कई वाहन, जिनमें भारी डंपर, जेसीबी और स्थानीय लोगों की कारें शामिल थीं, पानी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह गए। कई गाड़ियां मलबे के नीचे दब गई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि आपदा के बाद से बीआरओ के कुछ कर्मचारी और स्थानीय मजदूर लापता बताए जा रहे हैं, जो घटना के समय पास के शेड या वाहनों में मौजूद थे। जिला प्रशासन और पुलिस बल मलबे में दबे और लापता हुए लोगों की खोजबीन के लिए युद्धस्तर पर तलाशी अभियान चला रहे हैं। हालांकि, लगातार गिर रहे पत्थरों और खराब मौसम के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह ठप: सैकड़ों तीर्थयात्री और वाहन फंसेबादल फटने और भूस्खलन के कारण प्रसिद्ध बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-539) कई स्थानों पर पूरी तरह से बंद हो गया है। पुल ढहने और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के कारण वाहनों की आवाजाही ठप पड़ गई है। इसके चलते बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जा रहे सैकड़ों तीर्थयात्री और पर्यटक बीच रास्ते में सुरक्षित स्थानों पर फंसे हुए हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर तीर्थयात्रियों को जोशीमठ, पीपलकोटी और चमोली में बने राहत शिविरों व सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया है। हाईवे को दोबारा खोलने के लिए बीआरओ की भारी मशीनरी और पोकलैंड मशीनों को मलबे की सफाई में लगाया गया है, लेकिन लगातार हो रही बारिश से काम में बाधा आ रही है।राहत और बचाव कार्य में जुटीं एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमेंआपदा की सूचना मिलते ही चमोली के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भारी पुलिस बल और आपदा प्रबंधन टीमों के साथ मौके पर पहुंच गए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की कई टीमें आधुनिक उपकरणों और स्निफर डॉग्स के साथ मलबे में जिंदगी की तलाश कर रही हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन के पैकेट और पीने का पानी पहुंचाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। घायलों को त्वरित इलाज देने के लिए एंबुलेंस और मेडिकल टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पहाड़ी इलाकों में मोबाइल नेटवर्क बाधित होने की वजह से भी सूचनाएं जुटाने और रेस्क्यू टीम से संपर्क साधने में परेशानियां आ रही हैं।मौसम विभाग की चेतावनी: अगले 48 घंटे चमोली समेत कई जिलों के लिए भारीमौसम विभाग ने चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ सहित उत्तराखंड के कई संवेदनशील पहाड़ी जिलों के लिए अगले 48 घंटों का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने भारी से अत्यधिक भारी बारिश और कई जगहों पर भूस्खलन व बादल फटने जैसी घटनाओं की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए आपदा नियंत्रण कक्ष से पल-पल की रिपोर्ट ली है और सभी जिलाधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे उफनती नदियों, बरसाती नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास बिल्कुल न जाएं और केवल बहुत जरूरी होने पर ही यात्रा करें।
लाल किला कार्यक्रम को लेकर आया राहुल गांधी का सिटिंग प्लान
इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल गांधी को केंद्रीय मंत्रियों के ठीक बाद बैठाया जाएगा. रक्षा सचिव आरके सिंह के मुताबिक, उनकी सीट आधिकारिक वरीयता क्रम के आधार पर तय होगी. 2024 में पांचवीं पंक्ति में सीट मिलने पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई थी.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 22 अगस्त तक बढ़ी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 22 अगस्त तक बढ़ा दी गई है. बचाव पक्ष ने आरोपियों पर लगी धाराओं को चुनौती दी है, जिस पर अदालत 12 अगस्त को सुनवाई करेगी.
एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधन का विरोध क्यों?
भारत सरकार संसद में एफसीआरए में संशोधन का प्रस्ताव पेश करने जा रही है, जिसका विरोध गैर-सरकारी संगठनों और धार्मिक संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। ये संगठन चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि संशोधन से उनकी...
Gen-Z जुड़वां बहनों ने पकड़ा मोबाइल लुटेरा, मारे थप्पड़ ही थप्पड़
ग्वालियर की दो Gen-Z जुड़वां बहनों ने अपनी बहादुरी से यह साबित कर दिया है कि बेटियां अब अबला नहीं, बल्कि अपराधियों के लिए काल हैं. लॉ की दो छात्राओं ने मोबाइल छीनकर भाग रहे बाइक सवार लुटेरे का 80 की स्पीड में पीछा किया, उसे टक्कर मारकर गिराया और बीच सड़क पर पीट-पीटकर पुलिस के हवाले कर दिया.
Monsoon Hair Care: बारिश के मौसम में क्या आपके बाल भी हो गए हैं झाड़ू जैसे रूखे और बेजान?
गर्मी के थकाऊ मौसम के बाद मानसून की फुहारें हर किसी के मन को सुकून से भर देती हैं। लेकिन जहां बारिश का यह मौसम मिजाज को सुहाना बनाता है, वहीं हमारे बालों के लिए यह किसी परीक्षा से कम नहीं होता। मानसून की शुरुआत होते ही वातावरण में आर्द्रता यानी ह्यूमिडिटी का स्तर काफी ज्यादा बढ़ जाता है। हवा में मौजूद यह अतिरिक्त नमी जब बालों की बाहरी परत (क्यूटिकल) के संपर्क में आती है, तो बालों की अंदरूनी संरचना सूज जाती है और वे अनियंत्रित रूप से फ्रिजी, उलझे हुए और झाड़ू की तरह रूखे दिखने लगते हैं। इसके साथ ही स्कैल्प पर चिपचिपाहट और पसीना जमने से बालों का कुदरती तेल और मॉइश्चर असंतुलित हो जाता है। इसके चलते बाल न सिर्फ अपनी चमक खो देते हैं, बल्कि बेजान होकर तेजी से टूटने भी लगते हैं। अगर इस मौसम में बालों की सही देखभाल न की जाए, तो वे गंभीर रूप से डैमेज हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस मानसून में आप अपने रूखे और बेजान बालों की खोई हुई कुदरती चमक और नरमी कैसे वापस पा सकते हैं।डीप मॉइश्चराइजेशन और डीप कंडीशनिंग: बालों का रूखापन मिटाने की पहली शर्तमानसून के दिनों में साधारण कंडीशनर कई बार बालों के रूखेपन को पूरी तरह खत्म करने में नाकाफी साबित होता है। इस मौसम में बालों के कटिकल्स को गहराई से पोषण देने के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार 'डीप कंडीशनिंग' या हेयर मास्क का इस्तेमाल करना बेहद आवश्यक है। बाजार के केमिकल युक्त हेयर मास्क के बजाय आप घर पर ही मौजूद प्राकृतिक सामग्रियों से बेहतरीन हेयर मास्क तैयार कर सकते हैं।केला, शहद और दही का मास्क: एक पके हुए केले को अच्छी तरह मैश कर लें। अब इसमें दो चम्मच ताजा दही और एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएं। इस स्मूथ पेस्ट को बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक अच्छी तरह लगाएं और 30 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद किसी माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें। केला बालों को इलास्टिसिटी प्रदान करता है, दही स्कैल्प को साफ करती है और शहद नमी को लॉक करने का काम करता है।एलोवेरा और नारियल तेल मास्क: ताजा एलोवेरा जेल में दो चम्मच नारियल का तेल मिलाकर बालों पर लगाएं। यह मिश्रण फ्रिजी बालों को तुरंत शांत करता है और उन्हें रेशमी व चमकदार बनाता है।हॉट ऑयल मसाज और सही ऑयलिंग: जड़ों से लेकर सिरों तक पोषण का सही तरीकाअक्सर लोग मानसून में स्कैल्प पर चिपचिपाहट महसूस होने के कारण बालों में तेल लगाना पूरी तरह से बंद कर देते हैं। यह एक बहुत बड़ी भूल है। मानसून में हवा बालों से उनका प्राकृतिक मॉइश्चर खींच लेती है, जिसे बनाए रखने के लिए सही तरीके से ऑयलिंग करना बेहद जरूरी है। भारी या चिपचिपे तेलों के बजाय मानसून में हल्के तेलों (Lightweight Oils) का चयन करें, जैसे कि जोजोबा ऑयल, आर्गन ऑयल या बादाम का तेल।हफ्ते में दो बार किसी हल्के तेल को हल्का गुनगुना (Warm) कर लें। उंगलियों के पोरों से स्कैल्प पर हल्के हाथों से 10-15 मिनट तक सर्कुलर मोशन में मसाज करें। ध्यान रहे कि तेल लगाने के बाद स्कैल्प को जोर-जोर से न रगड़ें। इसके बाद एक तौलिए को गर्म पानी में भिगोकर निचोड़ लें और उसे अपने बालों पर 15 मिनट के लिए लपेटें (स्टीम लें)। यह प्रक्रिया बालों के पोर्स को खोलती है और तेल को गहराई तक अवशोषित होने में मदद करती है, जिससे रूखापन पूरी तरह दूर हो जाता है।सही शैम्पू और पानी का तापमान: स्ट्रिपिंग से बचाएं बालों की नमीमानसून में बाल धोते समय सही शैम्पू और सही तकनीक का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इस मौसम में कठोर सल्फेट और पैराबेन युक्त शैम्पू का इस्तेमाल बालों को और अधिक शुष्क और सख्त बना देता है। हमेशा हाइड्रेटिंग, सल्फेट-फ्री और हर्बल शैम्पू का ही चुनाव करें। बाल धोते समय एक और बात का खास ध्यान रखें कि कभी भी बहुत गर्म पानी से सिर न धोएं। गर्म पानी बालों के प्राकृतिक तेल को पूरी तरह से छीन लेता है, जिससे बाल अत्यधिक रूखे हो जाते हैं। बाल धोने के लिए हमेशा सामान्य ताजे पानी या हल्के गुनगुने पानी का ही प्रयोग करें। शैम्पू करने के बाद बालों की लंबाई (Length) पर लीव-इन कंडीशनर या हेयर सीरम लगाना न भूलें। सीरम बालों की बाहरी परत पर एक सुरक्षात्मक शील्ड बना देता है, जो हवा में मौजूद नमी को बालों के अंदर घुसकर उन्हें फ्रिजी बनाने से रोकता है।सुखाने और उलझन सुलझाने की सही तकनीक: गीले बालों की देखभालमानसून में बाल सबसे ज्यादा तब डैमेज होते हैं जब वे गीले होते हैं। गीले बालों में खिंचाव ज्यादा होता है, जिससे वे आसानी से टूट जाते हैं। बाल धोने के बाद उन्हें सूती (Cotton) तौलिए से बहुत जोर-जोर से न रगड़ें। इसके बजाय माइक्रोफाइबर टॉवल या किसी पुरानी सूती टी-शर्ट से बालों को थपथपाकर (Pat dry) अतिरिक्त पानी सोखें। ब्लो ड्रायर या स्ट्रेटनर जैसे हीटिंग टूल्स का इस्तेमाल इस मौसम में कम से कम करें, क्योंकि इनकी गर्मी बालों के बचे-कुचे मॉइश्चर को भी खत्म कर देती है। बालों को प्राकृतिक हवा में ही सूखने दें। जब बाल 80% तक सूख जाएं, तब चौड़े दांतों वाली लकड़ी की कंघी (Wide-tooth wooden comb) से बालों की उलझन सुलझाएं। हमेशा नीचे के सिरों से कंघी करना शुरू करें और धीरे-धीरे ऊपर जड़ों की तरफ बढ़ें।डाइट, हाइड्रेशन और बारिश के पानी से सुरक्षा: अंदरूनी चमक के लिए जरूरी टिप्सबाहरी देखभाल के साथ-साथ आपके खान-पान का असर भी सीधे आपके बालों की सेहत पर दिखता है। मानसून में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी होने से बाल सबसे पहले रूखे और बेजान होने लगते हैं। इसलिए दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीएं। अपनी दैनिक खुराक में ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और विटामिन-ई से भरपूर चीजें शामिल करें जैसे अखरोट, अलसी के बीज, आंवला, पालक, अंकुरित अनाज और दालें। ये पोषक तत्व बालों को अंदर से मजबूती और कुदरती चमक देते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि आप कभी बारिश के पानी में भीग जाते हैं, तो घर आते ही बालों को तुरंत सादे पानी और माइल्ड शैम्पू से जरूर धोएं। बारिश का पानी एसिडिक और दूषित हो सकता है, जो बालों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। इन आसान और असरदार आदतों को अपने मानसून रूटीन का हिस्सा बनाकर आप पूरे सीजन अपने बालों को रेशमी, मुलायम और सेहतमंद बनाए रख सकते हैं।
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फाइटर जेट के बाद अब भारत मिसाइलों और ड्रेन के लिए बना रहा इंजन की नई सीरीज, मजबूत होगा सुरक्षा कवच
भारत क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के लिए छोटे जेट इंजनों की एक नई श्रृंखला विकसित कर रहा है, जिसमें DRDO ने 350kg क्लास के इंजन का सफल विकास किया है।
Hotel Room Freebies vs Theft: होटल का कमरा छोड़ते समय गलती से भी बैग में न डालें ये 5 सामान
जब भी हम किसी होटल या रिसॉर्ट में ठहरते हैं, तो कमरे में रखी खूबसूरत और उपयोगी चीजें देखकर अक्सर हमारा मन ललचा जाता है। छोटी-छोटी शैम्पू की बोतलें, साबुन, आरामदायक चप्पलें से लेकर बड़े-बड़े तौलिए और चाय-कॉफी की किट तक, कमरे की हर चीज हमें आकर्षित करती है। चेकआउट करते समय कई लोग अनजाने में या जानबूझकर कमरे में मौजूद कुछ सामान अपने बैग में पैक कर लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होटल के कमरे की हर चीज आपके ले जाने के लिए नहीं होती? होटल इंडस्ट्री में कुछ चीजों को 'कॉम्प्लीमेंट्री' यानी मुफ्त माना जाता है, जिन्हें आप खुशी-खुशी अपने साथ घर ले जा सकते हैं। वहीं, कुछ चीजों को अपने साथ ले जाना सीधे तौर पर चोरी की श्रेणी में आता है, जिसके लिए होटल आपसे भारी हर्जाना वसूल सकता है या आपको ब्लैकलिस्ट भी कर सकता है।ये चीजें हैं पूरी तरह मुफ्त: बिना किसी हिचकिचाहट के अपने बैग में रख सकते हैं आपहोटल के कमरे में कुछ सामान ऐसा होता है जो केवल मेहमानों के व्यक्तिगत उपयोग के लिए ही रखा जाता है। होटल प्रबंधन खुद यह मानकर चलता है कि मेहमान इन चीजों का इस्तेमाल करेंगे या इन्हें अपने साथ ले जाएंगे:टॉयलेट्रीज और बाथ प्रोडक्ट्स: बाथरूम में रखी छोटी शैम्पू की बोतलें, कंडीशनर, शावर जेल, बॉडी लोशन, साबुन, शावर कैप, टॉयलेटरी किट (पेस्ट और ब्रश) और शेविंग किट पूरी तरह से कॉम्प्लीमेंट्री होती हैं। एक बार जब किसी गेस्ट के लिए इन बोतलों को खोल दिया जाता है, तो होटल इन्हें दोबारा किसी नए गेस्ट को इस्तेमाल करने के लिए नहीं देता। इसलिए इन्हें आप बेझिझक अपने बैग में रख सकते हैं।टी और कॉफी किट: कमरे में रखी चाय की पत्ती के बैग (Tea Bags), इंस्टेंट कॉफी के पाउच, चीनी या शुगर-फ्री के पाउच और मिल्क पाउडर आपके इस्तेमाल के लिए ही होते हैं। इन्हें आप जितना चाहें इस्तेमाल करें या बचे हुए पाउच साथ ले जाएं।डिस्पोजेबल स्लीपर्स: कई अच्छे होटलों में मिलने वाली कपड़े की पतली डिस्पोजेबल चप्पलें (Disposable Slippers) वन-टाइम यूज के लिए होती हैं। कोई दूसरा गेस्ट इनका इस्तेमाल नहीं कर सकता, इसलिए इन्हें साथ ले जाना पूरी तरह लीगल है।स्टेशनरी और नोटपैड: कमरे की स्टडी टेबल पर रखा होटल के लोगो वाला पेन, पेंसिल, नोटपैड, पोस्टकार्ड और लिफाफे होटल की ब्रांडिंग का हिस्सा होते हैं। होटल प्रबंधन खुद चाहता है कि आप इनका इस्तेमाल करें ताकि उनकी मुफ्त पब्लिसिटी हो सके।कॉम्प्लीमेंट्री वाटर बॉटल्स: कमरे में रखी वे पानी की बोतलें जिन पर 'Complimentary' या 'Free' का टैग लगा होता है, आप बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ले जा सकते हैं।इन्हें गलती से भी न उठाएं: माना जाएगा सीधा अपराध और कटेगा भारी जुर्मानाबहुत से लोग सोचते हैं कि जब उन्होंने कमरे का भारी-भरकम किराया दिया है, तो वे कमरे में मौजूद किसी भी सामान के मालिक बन गए हैं। यह सोच पूरी तरह गलत है। नीचे दी गई चीजों को होटल की स्थाई संपत्ति माना जाता है और इन्हें उठाना सीधे तौर पर चोरी की श्रेणी में आता है:तौलिए और बाथरोब: होटल के कमरों से सबसे ज्यादा चोरी होने वाला सामान तौलिए और बाथरोब हैं। लेकिन यह जान लें कि तौलिए और बाथरोब काफी महंगे होते हैं और होटल इन्हें धोकर बार-बार इस्तेमाल करता है। इन्हें अपने बैग में डालना सीधे तौर पर चोरी माना जाता है।इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स: कमरे में रखी इलेक्ट्रॉनिक केतली (Electric Kettle), हेयर ड्रायर, प्रेस (Iron), टीवी का रिमोट, टेबल लैंप या ब्लूटूथ स्पीकर जैसी चीजें होटल की फिक्स्ड एसेट्स होती हैं। इन्हें ले जाने की गलती भूलकर भी न करें।बेडशीट, पिलो और कंबल: कमरे में बिछी हुई प्रीमियम बेडशीट, तकिए या रजाई/कंबल को अपने साथ ले जाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।क्रोकरी और कटलरी: कांच के ग्लास, मग, प्लेट्स, चम्मच या वाइन ग्लास को बैग में पैक करना पूरी तरह मना है।आर्ट पीसेज और डेकोरेशन का सामान: कमरे की दीवारों पर लगी पेंटिंग्स, एशट्रे, अलार्म क्लॉक या कोई भी सजावटी सामान होटल की खूबसूरती बढ़ाने के लिए होता है, आपके घर ले जाने के लिए नहीं।अगर चेकआउट के वक्त पकड़ी गई चोरी, तो क्या हो सकता है अंजाम?आजकल के आधुनिक होटलों में चेकआउट की प्रक्रिया के दौरान हाउसकीपिंग स्टाफ तुरंत कमरे की चेकिंग करता है। इसके अलावा, कई प्रीमियम होटलों में तौलियों और बाथरोब के अंदर माइक्रोचिप या आरएफआईडी (RFID) ट्रैकर लगे होते हैं, जो मुख्य द्वार पर बजने वाले अलार्म को ट्रिगर कर देते हैं। अगर आप किसी होटल से कोई प्रतिबंधित सामान चुराते पकड़े जाते हैं, तो:क्रेडिट कार्ड से कटेगा एक्स्ट्रा चार्ज: होटल आपके दिए गए क्रेडिट या डेबिट कार्ड से उस सामान की बाजार कीमत से 2 से 3 गुना ज्यादा कीमत बिना आपसे पूछे काट सकता है।सार्वजनिक शर्मिंदगी: चेकिंग के दौरान लॉबी में सबके सामने बैग से चुराया हुआ सामान निकलना अत्यधिक शर्मिंदगी का कारण बन सकता है।ब्लैकलिस्टिंग: होटल चेन आपको अपनी ग्लोबल लिस्ट में ब्लैकलिस्ट कर सकती है, जिससे भविष्य में आप उस ग्रुप के किसी भी होटल में कभी कमरा बुक नहीं कर पाएंगे।पुलिस कार्रवाई: यदि चुराया गया सामान अत्यधिक महंगा या कीमती है, तो होटल प्रबंधन सीधे पुलिस में एफआईआर दर्ज करा सकता है।एक जिम्मेदार और स्मार्ट ट्रैवलर बनने के लिए ध्यान रखें ये बातेंअगर आपको होटल के कमरे में रखी कोई चीज जैसे बाथरोब, मग या कोई खास तौलिया बहुत ज्यादा पसंद आ जाता है, तो उसे चुराने के बजाय होटल के रिसेप्शन पर बात करें। लगभग सभी बड़े होटलों में 'गिफ्ट शॉप' या मर्चेंडाइज काउंटर होता है, जहां से आप ब्रांडेड बाथरोब या मग खरीद सकते हैं। इसके अलावा, कमरे में रखी मिनी-बार (छोटा फ्रिज) की चीजों को इस्तेमाल करने से पहले उनके प्राइस टैग को जरूर देख लें, क्योंकि वे कभी भी फ्री नहीं होतीं। हमेशा एक समझदार और सभ्य मेहमान की तरह व्यवहार करें ताकि आपका ट्रैवल एक्सपीरियंस यादगार और तनावमुक्त बना रहे।
Undergarments Care Tips: जानिए अंडरगारमेंट्स की सफाई और सही हाइजीन से जुड़े 6 जरूरी गोल्डन रूल्स
जब बात पर्सनल हाइजीन और सेहत की आती है, तो हम अपने चेहरे, बालों और बाहरी कपड़ों की सफाई पर तो बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन अंडरगारमेंट्स (अंतरवस्त्रों) की सही सफाई और रख-रखाव की अक्सर अनदेखी कर देते हैं। अंडरगारमेंट्स हमारी त्वचा के सबसे संवेदनशील और नाजुक हिस्से यानी इंटीमेट एरिया के सीधे संपर्क में रहते हैं। दिनभर का पसीना, नमी, मृत कोशिकाएं (डेड स्किन सेल्स) और डिस्चार्ज इनमें जमा होते रहते हैं। यदि अंडरगारमेंट्स को सही तरीके से न धोया जाए या वे ठीक से न सूखें, तो वे बैक्टीरिया और फंगस का बहुत बड़ा अड्डा बन जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप स्किन पर रैशेज, दाने, खुजली, जांघों के बीच कालापन और महिलाओं में यीस्ट या बैक्टीरियल वेजाइनल इन्फेक्शन जैसी गंभीर समस्याएं होने लगती हैं। अपनी सेहत और ताजगी को बनाए रखने के लिए अंडरगारमेंट्स की सफाई से जुड़े कुछ बुनियादी नियमों का पालन करना बेहद अनिवार्य है।1. डिटर्जेंट का सही चुनाव: कठोर केमिकल्स और खुशबूदार पाउडर से बनाएं दूरीअंडरगारमेंट्स को धोने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला साबुन या डिटर्जेंट आपकी त्वचा की सेहत तय करता है। आमतौर पर हम जिन हैवी डिटर्जेंट पाउडर या ब्लीच का इस्तेमाल घर के बाकी कपड़ों के लिए करते हैं, उनमें अत्यधिक मात्रा में केमिकल्स और सिंथेटिक सुगंध (Fragrance) होती है। अगर कपड़ों से यह डिटर्जेंट पूरी तरह नहीं निकलता, तो इसके अवशेष कपड़ों के रेशों में फंसे रहते हैं और इंटीमेट स्किन के संपर्क में आते ही जलन और एलर्जी पैदा करते हैं। अंडरगारमेंट्स धोने के लिए हमेशा माइल्ड, हाइपोअल्र्जेनिक, लिक्विड डिटर्जेंट या बेबी शैम्पू का इस्तेमाल करें। अगर स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, तो अनसेंटेड डिटर्जेंट ही चुनें।2. गुनगुने पानी और एंटीसेप्टिक लिक्विड का इस्तेमाल: बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करने की ट्रिकअंडरगारमेंट्स को सामान्य ठंडे पानी से धोने के बजाय हल्के गुनगुने पानी में धोना अधिक फायदेमंद होता है। गुनगुना पानी कपड़ों में छिपे पसीने के दाग, तेल और बैक्टीरिया को आसानी से ढीला कर देता है। धोने की प्रक्रिया के दौरान पानी में कुछ बूंदें किसी अच्छे एंटीसेप्टिक लिक्विड (जैसे डेटॉल या सैवलोन) की जरूर मिलाएं। एंटीसेप्टिक पानी में अंडरगारमेंट्स को 10 से 15 मिनट के लिए भिगोकर रखने से उनमें मौजूद हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं, जिससे फंगल इंफेक्शन का खतरा न के बराबर रह जाता है।3. हाथ से धोना या वॉशिंग मशीन: अंडरगारमेंट्स धोने का सही तरीकाअंडरगारमेंट्स को हमेशा बाकी कपड़ों से अलग धोना चाहिए। इन्हें कभी भी गंदे मोजे, तौलिए या बाहरी कपड़ों के साथ वॉशिंग मशीन में न डालें, क्योंकि इससे मोजों या अन्य कपड़ों के बैक्टीरिया अंडरगारमेंट्स में ट्रांसफर हो जाते हैं। संभव हो तो अपने अंडरगारमेंट्स को हाथ से ही हल्के हाथों से रगड़कर साफ करें। अगर आप वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसके लिए एक अलग 'मेष वॉश बैग' (Mesh Wash Bag) का उपयोग करें और मशीन का 'जेंटल साइकिल' (Gentle Cycle) मोड चुनें। इससे कपड़ों की इलास्टिक और फैब्रिक खराब नहीं होते और कपड़े लंबे समय तक चलते हैं।4. धूप में सुखाना है सबसे जरूरी: प्राकृतिक सैनिटाइजर का जादूअंडरगारमेंट्स को धोने के बाद सुखाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई लोग झिझक या शर्म के कारण अपने अंडरगारमेंट्स को घर के अंदर, बाथरूम में या छांव वाले कमरे में सुखाते हैं। यह आदत आपकी सेहत के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। नमी वाले माहौल में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे कपड़ों में से अजीब सी बदबू आने लगती है। अंडरगारमेंट्स को हमेशा सीधी और कड़क धूप (Direct Sunlight) में सुखाएं। सूरज की पराबैंगनी किरणें (UV Rays) एक नैचुरल सैनिटाइजर की तरह काम करती हैं और बचे हुए सभी बैक्टीरिया को खत्म कर देती हैं।5. फैब्रिक का चुनाव और बदलने का सही समय: कॉटन ही है सबसे बेस्टहाइजीन केवल धोने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही फैब्रिक का चुनाव करना भी इसका मुख्य हिस्सा है। दैनिक उपयोग के लिए हमेशा 100% शुद्ध कॉटन (सूती) अंडरगारमेंट्स का ही चयन करें। कॉटन फैब्रिक सांस लेने योग्य (Breathable) होता है, जो पसीने को सोख लेता है और इंटीमेट एरिया को सूखा रखता है। सिंथेटिक, नायलॉन या सैटिन फैब्रिक का इस्तेमाल रोजाना करने से बचें क्योंकि ये हवा की आवाजाही को रोकते हैं और नमी जमा करते हैं। इसके अलावा, एक ही अंडरगारमेंट को दिनभर से ज्यादा न पहनें और हर 6 से 9 महीने के अंतराल पर अपने पुराने अंडरगारमेंट्स को फेंककर नए खरीद लें।अंडरगारमेंट्स की सही सफाई और देखभाल कोई मुश्किल काम नहीं है, बस इसके लिए सही आदतों को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की जरूरत है। इन आसान और असरदार टिप्स को अपनाकर आप स्किन एलर्जी, दाद-खुजली और किसी भी तरह के इंटीमेट इंफेक्शन से खुद को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं।
यूपी में भी जेन-Z प्रोटेस्ट? परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ बनाया जस्टिस मोर्चा
उत्तर प्रदेश में पेपर लीक, लंबित भर्तियों, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ छात्रों और छात्र नेताओं ने 'जस्टिस मोर्चा' नामक नया संगठन बनाया है.
'रांची और जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को एक तराजू पर तौलकर देखें', विपक्ष की चुप्पी पर भाजपा की चुटकी
भाजपा ने रांची में परीक्षा और नियुक्तियों में गड़बड़ी को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।
कांवड़ की जगह हाथ में 'तेजस' का हैंडल, बीटेक छात्र ने बनाया अनोखा इलेक्ट्रिक वाहन, वीडियो वायरल
अक्सर कहा जाता है कि 'मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है'। ऐसा ही नया कुछ कर दिखाने का चाह में मेरठ के एक युवा ने मात्र 45 हजार रूपये में एक अनोखी बाइक तैयार की और उससे हरिद्वार ...
आज के समय में पर्सनल ग्रूमिंग और बॉडी हाइजीन को लेकर लोगों में जागरूकता काफी तेजी से बढ़ी है। चेहरे और शरीर के बाकी हिस्सों की देखभाल की तरह ही इंटीमेट एरिया यानी प्राइवेट पार्ट्स की सफाई भी हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्यूबिक हेयर (प्राइवेट पार्ट के बाल) को साफ करना या ट्रिम करना पूरी तरह से एक व्यक्तिगत पसंद है। कई लोग साफ-सफाई, आराम या बेहतर लुक्स के लिए इन्हें हटाना पसंद करते हैं। हालांकि, प्यूबिक एरिया की त्वचा शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में अत्यधिक संवेदनशील, पतली और नाजुक होती है। अक्सर लोग जल्दबाजी में या सही जानकारी न होने के कारण गलत तरीकों से बाल हटाने लगते हैं। नतीजा यह होता है कि स्किन पर रेजर बम्प्स (लाल दाने), कट्स, जलन, इनग्रोन हेयर (त्वचा के अंदर उगने वाले बाल) और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। अगर आप भी बिना किसी परेशानी और जलन के स्मूथ और हाइजीनिक स्किन चाहते हैं, तो प्यूबिक हेयर क्लीन करते समय कुछ बुनियादी और जरूरी नियमों का पालन करना बेहद अनिवार्य है।ट्रिमिंग, शेविंग या वैक्सिंग: प्यूबिक हेयर साफ करने का कौन सा तरीका है सबसे सुरक्षित?प्यूबिक हेयर हटाने के लिए बाजार में कई विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन हर तरीका हर किसी की स्किन को सूट नहीं करता। सबसे पहला विकल्प है 'ट्रिमिंग', जिसे डर्मेटोलॉजिस्ट सबसे सुरक्षित और हाइजीनिक तरीका मानते हैं। छोटी कैंची या इलेक्ट्रिक ट्रिमर की मदद से बालों को छोटा करने से त्वचा पर कोई घर्षण नहीं होता और कट्स या इंफेक्शन का खतरा शून्य रहता है।दूसरा विकल्प है 'शेविंग', जो सबसे लोकप्रिय और आसान तरीका है। हालांकि, अगर शेविंग गलत तरीके से की जाए तो रेजर बम्प्स और जलन की समस्या सबसे ज्यादा इसी से होती है। तीसरा विकल्प 'वैक्सिंग' या 'हेयर रिमूवल क्रीम' का है। संवेदनशील इंटीमेट एरिया पर केमिकल युक्त हेयर रिमूवल क्रीम का इस्तेमाल करने से कैमिकल बर्न और एलर्जी हो सकती है। वहीं वैक्सिंग से त्वचा के छिलने और फॉलिकुलाइटिस (बालों की जड़ों का इंफेक्शन) होने का डर रहता है। इसलिए यदि आप शेविंग या ट्रिमिंग चुन रहे हैं, तो सही तकनीक अपनाना सबसे ज्यादा जरूरी है।शेविंग से पहले स्किन प्रेप है बेहद जरूरी: एक्सफोलिएशन और गुनगुने पानी की जादुई ट्रिकअधिकांश लोग रेजर उठाते ही सीधे सूखी त्वचा पर शेविंग शुरू कर देते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती है। सूखी स्किन पर रेजर चलाने से घर्षण बढ़ता है, जिससे त्वचा छिल सकती है। शेविंग शुरू करने से पहले प्यूबिक एरिया की त्वचा को सही तरीके से तैयार (Prep) करना जरूरी है।सबके पहले, अगर बाल बहुत लंबे हैं तो उन्हें कैंची या ट्रिमर की मदद से थोड़ा छोटा कर लें। इसके बाद गुनगुने पानी से नहाएं या प्राइवेट पार्ट पर 5 मिनट के लिए गुनगुने पानी में भीगा तौलिया रखें। गुनगुने पानी से स्किन के पोर्स खुल जाते हैं और बालों की जड़ें नरम हो जाती हैं, जिससे रेजर आसानी से फिसलता है। शेविंग से एक दिन पहले या ठीक पहले किसी बहुत ही माइल्ड एक्सफोलिएटर या वॉशक्लॉथ से त्वचा को हल्के हाथों से साफ करें। इससे जमा हुई मृत कोशिकाएं (डेड स्किन सेल्स) हट जाती हैं और इनग्रोन हेयर का खतरा काफी हद तक टल जाता है।सही रेजर, शेविंग जेल और सही दिशा का चुनाव: बम्प्स और कट्स से बचने के 3 नियमप्यूबिक एरिया में शेविंग करते समय आपको तीन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि किसी भी तरह का कट या इन्फेक्शन न हो:साफ और शार्प रेजर का इस्तेमाल: कभी भी पुराने, जंग लगे या सुस्त (Dull) ब्लेड वाले रेजर का इस्तेमाल न करें। सुस्त ब्लेड बालों को काटने के बजाय खींचता है, जिससे त्वचा में सूजन आ जाती है। हमेशा 3 से 5 ब्लेड वाले नए और साफ रेजर का उपयोग करें और इसे केवल इंटीमेट एरिया के लिए ही अलग रखें।साबुन की जगह अनसेंटेड शेविंग जेल: चेहरे या शरीर पर इस्तेमाल होने वाले कठोर साबुन से प्राइवेट पार्ट पर शेविंग न करें। साबुन स्किन को रूखा बना देता है। इसके बजाय एलोवेरा युक्त, फ्रैग्रेंस-फ्री (बिना खुशबू वाला) शेविंग जेल या क्रीमी इंटीमेट वॉश लगाएं, जो रेजर को आसानी से स्लाइड होने में मदद करे।बालों के उगने की दिशा में शेव करें: ज्यादातर लोग एकदम क्लीन लुक के लिए बालों की उल्टी दिशा (Against the grain) में रेजर चलाते हैं। ऐसा करने से रेजर बम्प्स, कट और इनग्रोन हेयर सबसे ज्यादा होते हैं। रेजर को हमेशा बालों के उगने की दिशा (In the direction of hair growth) में ही धीरे-धीरे चलाएं।हेयर रिमूवल के बाद पोस्ट-केयर और मॉइश्चराइजेशन: इनग्रोन हेयर और जलन को कहें बाय-बायप्यूबिक हेयर क्लीन करने के बाद की देखभाल (Post-care) उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि शेविंग की प्रक्रिया। जैसे ही आप शेविंग या ट्रिमिंग पूरी कर लें, पूरे एरिया को ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें। ठंडा पानी खुले हुए पोर्स को तुरंत बंद करने में मदद करता है और जलन को शांत करता है।त्वचा को सूती तौलिए से थपथपाकर (Pat dry) सुखाएं, कभी भी जोर से न रगड़ें। इसके बाद त्वचा को नमी देने के लिए कोई भी खुशबूदार बॉडी लोशन या अल्कोहल-युक्त आफ्टरशेव न लगाएं, क्योंकि इससे तेज जलन हो सकती है। इसके बजाय शुद्ध एलोवेरा जेल, नारियल तेल या कोई माइल्ड अनसेंटेड मॉइश्चराइजर लगाएं। एलोवेरा में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो किसी भी तरह की रेडनेस या जलन को तुरंत ठीक कर देते हैं। शेविंग के तुरंत बाद कम से कम कुछ घंटों तक ढीले सूती (Cotton) अंडरगार्मेंट्स पहनें ताकि हवा मिलती रहे और घर्षण न हो।इंटीमेट हाइजीन से जुड़ी ये 4 बड़ी गलतियां जो बढ़ा सकती हैं इंफेक्शन का खतराप्यूबिक हेयर हटाने के साथ-साथ रोजाना की इंटीमेट हाइजीन का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। पहली गलती यह है कि लोग गंदे या इस्तेमाल किए गए रेजर को बिना सुखाए बाथरूम की नमी में छोड़ देते हैं, जिससे उस पर बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। हमेशा इस्तेमाल के बाद रेजर को गर्म पानी से धोकर सुखाएं।दूसरी गलती है वजाइना या प्राइवेट पार्ट्स के अंदरूनी हिस्से को कठोर इंटीमेट वॉश या साबुन से धोना। प्राइवेट पार्ट्स में कुदरती सेल्फ-क्लीनिंग मैकेनिज्म होता है, इसलिए अंदरूनी सफाई की जरूरत नहीं होती। बाहरी हिस्से (वल्वा) की सफाई के लिए केवल सादे पानी या माइल्ड पीएच-बैलेंस्ड वॉश का ही प्रयोग करें। तीसरी गलती है पसीने वाले या नम कपड़ों में लंबे समय तक रहना। वर्कआउट के बाद या बारिश में भीगने के तुरंत बाद अंडरगार्मेंट्स बदलें। चौथी गलती यह है कि यदि आपको शेविंग के बाद लगातार खुजली, मवाद वाले दाने या दर्द महसूस हो रहा है, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी डर्मेटोलॉजिस्ट या डॉक्टर से परामर्श लें। सही जानकारी और सतर्कता ही आपकी त्वचा को हमेशा सुरक्षित, साफ और स्वस्थ रख सकती है।
मासिक धर्म यानी पीरियड्स हर महिला के स्वस्थ शरीर और प्रजनन तंत्र (Reproductive System) की एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। हर महीने होने वाले इस ब्लीडिंग चक्र के दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। हालांकि, कई बार महिलाएं पीरियड्स के दौरान होने वाली कुछ असहज समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। पीरियड ब्लड में से गाढ़े थक्के (Clots) निकलना और उसमें से अत्यधिक तेज या सड़न जैसी बदबू आना ऐसी ही दो समस्याएं हैं, जो केवल खराब हाईजीन का नतीजा नहीं होतीं, बल्कि शरीर में पनप रही किसी गंभीर अंदरूनी बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकती हैं। अगर इन लक्षणों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर ये बांझपन (Infertility) या गर्भाशय से जुड़ी बड़ी जटिलताओं का कारण बन सकती हैं।पीरियड्स में खून के थक्के और बदबू आने के 5 मुख्य कारणपीरियड्स में कभी-कभी छोटे थक्के (सिक्के जितने छोटे) आना सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर इनका आकार बड़ा हो और साथ में दुर्गंध भी आ रही हो, तो इसके पीछे कई चिकित्सीय कारण हो सकते हैं:बैक्टीरियल वेजिनोसिस और वजाइनल इन्फेक्शन: अगर पीरियड ब्लड से तेज मछली जैसी (Fishy Odor) या सड़न जैसी बदबू आ रही है, तो इसका सबसे बड़ा कारण बैक्टीरियल वेजिनोसिस (Bacterial Vaginosis) या यीस्ट इन्फेक्शन हो सकता है। यह वजाइना में गुड और बैड बैक्टीरिया के संतुलन बिगड़ने पर होता है।गर्भाशय में गांठ या फाइब्रॉएड (Uterine Fibroids): गर्भाशय की दीवारों में बनने वाली गैर-कैंसर ट्यूमर या गांठें (Fibroids) अत्यधिक ब्लीडिंग और बड़े-बड़े खून के थक्कों का मुख्य कारण होती हैं। जब यह थक्का गर्भाशय में ज्यादा देर तक रुका रहता है, तो बैक्टीरिया के संपर्क में आकर इसमें से बदबू आने लगती है।हार्मोनल असंतुलन (PCOS / PCOD): एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में उतार-चढ़ाव होने पर गर्भाशय की अंदरूनी परत (Endometrium) बहुत मोटी बन जाती है। जब यह परत झड़ती है, तो भारी मात्रा में ब्लीडिंग होती है और बड़े-बड़े क्लॉट्स बनते हैं।पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID): यह महिलाओं के प्रजनन अंगों में होने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। पीआईडी होने पर पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द, बदबूदार डिस्चार्ज और बड़े थक्के आने लगते हैं।एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis): जब गर्भाशय की अंदरूनी परत के टिश्यूज गर्भाशय के बाहर (जैसे फैलोपियन ट्यूब या ओवरी पर) उगने लगते हैं, तो यह भयंकर दर्द, हैवी फ्लो और थक्कों का कारण बनता है।नॉर्मल और एब्नॉर्मल क्लॉट्स में अंतर कैसे पहचानें?हर महिला को यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन से थक्के सामान्य हैं और कौन से खतरनाक। जब पीरियड फ्लो बहुत तेज होता है, तो शरीर में मौजूद नेचुरल एंटी-कोगुलेंट्स (रक्त को पतला करने वाले तत्व) पूरा काम नहीं कर पाते, जिससे खून जमने लगता है और छोटे-मोटे क्लॉट्स बाहर निकलते हैं। अगर क्लॉट्स का आकार 1 रुपये के सिक्के से छोटा है, उनका रंग गहरा लाल या मैरून है और वे केवल भारी फ्लो वाले दिनों (जैसे पहले या दूसरे दिन) आते हैं, तो यह सामान्य बात है।लेकिन, अगर थक्कों का आकार गोल्फ की बॉल या नींबू जितना बड़ा है, उनका रंग बहुत डार्क या काला है, और वे पीरियड्स के सभी दिनों में लगातार आ रहे हैं, तो यह एक एब्नॉर्मल स्थिति है। इसके साथ ही अगर आपको हर 1-2 घंटे में पैड बदलना पड़ रहा है, तो इसे मेडिकल भाषा में 'मेनोरेजिया' (Menorrhagia) कहा जाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी गायनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करना चाहिए।पीरियड्स में तेज बदबू आने का कारण और हाइजीन से जुड़ी गलतियांपीरियड ब्लड में लोहे (Iron) और टिश्यूज की हल्की गंध होना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह गंध बहुत तेज और असहनीय हो जाए, तो यह इन्फेक्शन की ओर इशारा करती है। खराब पर्सनल हाइजीन भी इसका बड़ा कारण होती है। कई महिलाएं एक ही सेनेटरी पैड को 8 से 10 घंटे तक लगाए रखती हैं। पैड पर जमा पसीना और खून बैक्टीरिया के पनपने का सबसे बड़ा ठिकाना बन जाता है, जिससे तेज दुर्गंध आने लगती है।इसके अलावा, वजाइना के अंदरूनी हिस्से को कठोर साबुन या केमिकल युक्त इंटीमेट वॉश से बार-बार धोना भी हानिकारक होता है। इससे वजाइना का प्राकृतिक पीएच (pH) लेवल बिगड़ जाता है, जिससे इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। टाम्पोन या पैड को सही समय पर न बदलना और सुखाए बिना नमी वाले अंडरगार्मेंट्स पहनना भी दुर्गंध और क्लॉट्स का मुख्य कारण बनता है।इन गंभीर समस्याओं से बचने के लिए जरूर फॉलो करें ये 5 हाइजीन रूल्सहर 4-6 घंटे में पैड बदलें: चाहे फ्लो हल्का ही क्यों न हो, 4 से 6 घंटे के भीतर सेनेटरी पैड या टाम्पोन जरूर बदलें। मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल कर रही हैं, तो उसे 8-12 घंटे में खाली कर अच्छे से साफ करें।केवल सादे पानी का करें इस्तेमाल: प्राइवेट पार्ट की सफाई के लिए केवल हल्के गुनगुने या सादे पानी का इस्तेमाल करें। किसी भी तेज खुशबूदार साबुन या केमिकल वॉश से बचें।कॉटन और ब्रीदेबल अंडरगार्मेंट्स पहनें: सिंथेटिक कपड़ों की जगह सूती (Cotton) अंडरवियर पहनें ताकि त्वचा सांस ले सके और पसीना न जमे।सही डाइट और भरपूर पानी: पीरियड्स में खुद को हाइड्रेटेड रखें। पर्याप्त पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और इन्फेक्शन का खतरा कम होता है। डाइट में विटामिन-सी, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और प्रोबायोटिक्स (जैसे दही) शामिल करें।इंटीमेट एरिया को सूखा रखें: वॉशरूम इस्तेमाल करने के बाद हमेशा आगे से पीछे की तरफ (Front to Back) सफाई करें और एरिया को पूरी तरह सूखा रखें ताकि बैक्टीरिया न पनपें।कब तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाना है अनिवार्य?अगर आपको पीरियड्स के दौरान खून के थक्कों और बदबू के साथ-साथ नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी नजर आए, तो बिना किसी देरी के डॉक्टर की सलाह लें:थक्कों का आकार 1-2 इंच से बड़ा होना और हर घंटे पैड बदलने की नौबत आना।पीरियड साइकिल खत्म होने के बाद भी लगातार बदबूदार वजाइनल डिस्चार्ज होना।पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में तेज और असहनीय दर्द होना।पीरियड्स के साथ-साथ तेज बुखार, ठंड लगना या चक्कर आना।पीरियड्स 7 से 8 दिनों से ज्यादा समय तक खिंचना।मासिक धर्म महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य का आईना होता है। पीरियड्स में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को शर्म या झिझक के कारण छिपाना आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। खून के बड़े थक्के और तेज बदबू शरीर द्वारा दिए जाने वाले चेतावनी के संकेत हैं। समय पर सही डॉक्टरी जांच, अल्ट्रासाउंड और सही हाइजीन रूटीन अपनाकर आप गर्भाशय और इन्फेक्शन से जुड़ी गंभीर बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित रह सकती हैं।
40 की उम्र पार करते ही शरीर में चुपचाप दस्तक देने लगती हैं ये गंभीर बीमारियां
उम्र का 40वां पड़ाव जिंदगी का एक बेहद खूबसूरत और परिपक्व मोड़ होता है। इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लोग आमतौर पर अपने करियर, परिवार और जिम्मेदारियों में अच्छी तरह सेटल हो जाते हैं। हालांकि, यही वह उम्र भी होती है जहां हमारा शरीर अंदरूनी रूप से धीमे-धीमे बदलने लगता है। 40 की उम्र के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने लगता है, मसल मास कम होने लगता है और हार्मोनल स्तर में कई तरह के उतार-चढ़ाव आने लगते हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, खराब कोलेस्ट्रॉल और थायराइड जैसी कई गंभीर बीमारियां शुरुआत में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के 'साइलेंट किलर' की तरह शरीर में पनपने लगती हैं। ऐसे में बीमारियों के गंभीर रूप लेने से पहले उनकी समय पर पहचान करना ही लंबे और सेहतमंद जीवन की सबसे बड़ी कुंजी है। नियमित प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप्स और सही मेडिकल टेस्ट करवाकर आप समय रहते गंभीर बीमारियों के जोखिम से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।1. ब्लड शुगर प्रोफाइल और HbA1c टेस्ट: डायबिटीज के खतरे को वक्त रहते पहचानेंआज के समय में गलत खान-पान और तनावभरी जीवनशैली की वजह से डायबिटीज एक बेहद आम समस्या बन चुकी है। 40 की उम्र के बाद शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता घटने लगती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके लिए केवल सामान्य फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट करवाना ही काफी नहीं होता, बल्कि HbA1c (ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन) टेस्ट करवाना बेहद जरूरी है। HbA1c टेस्ट से पिछले 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल का सटीक पता चलता है। अगर आपका शुगर लेवल प्री-डायबिटीज स्टेज में पाया जाता है, तो आप केवल डाइट और एक्सरसाइज में बदलाव करके डायबिटीज का मरीज बनने से बच सकते हैं। इसके अलावा फास्टिंग और पोस्ट-प्रैंडियल (खाना खाने के बाद) शुगर टेस्ट भी नियमित रूप से कराते रहना चाहिए।2. लिपिड प्रोफाइल और कार्डिएक हेल्थ चेकअप: दिल को रखें हमेशा मजबूत और सुरक्षित40 की उम्र के बाद दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। धमनियों में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स जमा होने से ब्लॉकेज की समस्या हो सकती है, जिससे आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा रहता है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए आपके खून में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL), बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर की जांच की जाती है। यदि आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारी का इतिहास रहा है, तो लिपिड प्रोफाइल के साथ-साथ डॉक्टर की सलाह पर ECG (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम) और TMT (ट्रेडमिल टेस्ट) भी जरूर करवाएं। ये टेस्ट समय रहते आपके दिल की सेहत और उसकी कार्यक्षमता का सटीक अंदाजा दे देते हैं।3. बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan) और विटामिन प्रोफाइल: मजबूत हड्डियों का राज40 की उम्र के बाद पुरुषों और महिलाओं दोनों में हड्डियों का घनत्व (Bone Density) तेजी से घटने लगता है। खासकर महिलाओं में मेनोपॉज के करीब पहुंचते ही एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से हड्डियां कमजोर और खोखली होने लगती हैं, जिसे ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। इसके लिए DEXA स्कैन या बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट करवाना चाहिए, जिससे हड्डियों की मजबूती का पता चलता है। इसके अलावा, विटामिन D3 और विटामिन B12 टेस्ट करवाना भी बेहद जरूरी है। भारत में बड़ी आबादी विटामिन D और B12 की कमी से जूझ रही है। इनकी कमी से जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, नसों की कमजोरी और लगातार थकान महसूस होती है।4. किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट (KFT & LFT): डिटॉक्स अंगों की सेहत का रखें ख्याललिवर और किडनी हमारे शरीर के दो सबसे मुख्य अंग हैं जो शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करते हैं। 40 की उम्र के बाद अनहेल्दी डाइट, शराब, धूम्रपान और नियमित दवाओं के सेवन से इन अंगों पर दबाव बढ़ता है। लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) से फैटी लिवर, लिवर एंजाइम्स में गड़बड़ी और पीलिया जैसी समस्याओं का पता चलता है। वहीं किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) में क्रिएटिनिन, यूरिया और यूरिक एसिड के स्तर की जांच की जाती है। अगर किडनी या लिवर में कोई छोटी-मोटी समस्या भी शुरू हो रही हो, तो इन ब्लड टेस्ट्स के जरिए शुरुआती चरण में ही उसका इलाज संभव हो जाता है।5. थायराइड प्रोफाइल (TSH, Free T3 & T4): मेटाबॉलिज्म और वजन पर रखें कंट्रोलथायराइड ग्रंथि हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर और वजन को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाती है। 40 के बाद पुरुषों और विशेष रूप से महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म की समस्या बहुत सामान्य हो जाती है। अचानक वजन बढ़ना या घटना, अत्यधिक बाल झड़ना, मूड स्विंग्स, थकावट और ज्यादा ठंड या गर्मी लगना थायराइड में गड़बड़ी के लक्षण हो सकते हैं। TSH (थायराइड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन), Free T3 और Free T4 टेस्ट करवाकर थायराइड के स्तर की जांच कराना बहुत आसान है। सही समय पर दवा शुरू करने से थायराइड को पूरी तरह से कंट्रोल में रखा जा सकता है।6. जेंडर-स्पेसिफिक कैंसर स्क्रीनिंग्स: महिलाओं और पुरुषों के लिए खास टेस्ट40 की उम्र के बाद कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय से स्क्रीनिंग करवाना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। महिलाओं के लिए 40 के बाद हर साल या दो साल में एक बार मैमोग्राफी (Mammogram) टेस्ट करवाना चाहिए, जो ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों की शुरुआती पहचान में मदद करता है। इसके अलावा गर्भाशय के ग्रीवा के कैंसर (Cervical Cancer) की जांच के लिए हर 3 साल में पैप स्मियर (Pap Smear) टेस्ट करवाना बेहद अनिवार्य है। वहीं पुरुषों के लिए 40-45 की उम्र के बाद प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम बढ़ने लगता है। इसके लिए PSA (Prostate-Specific Antigen) टेस्ट करवाना चाहिए। यह एक साधारण ब्लड टेस्ट है जो प्रोस्टेट ग्रंथि में किसी भी तरह की सूजन या कैंसर के जोखिम को समय रहते बता देता है।7. कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) और आई चेकअप: सेहत की बेसिक लेकिन जरूरी जांचेंकम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) एक बेसिक ब्लड टेस्ट है जो आपके शरीर में हीमोग्लोबिन, रेड ब्लड सेल्स (RBC), वाइट ब्लड सेल्स (WBC) और प्लेटलेट्स के स्तर की जानकारी देता है। इससे एनीमिया (खून की कमी), किसी भी तरह के इंफेक्शन और इम्युनिटी लेवल का पता चलता है। इसके साथ ही, 40 की उम्र के बाद आंखों की रोशनी में बदलाव आना स्वाभाविक है। प्रेसबायोपिया (पास की नजर कमजोर होना) और मोतियाबिंद या ग्लूकोमा (काला मोतिया) के खतरे से बचने के लिए साल में एक बार आंखों का कॉम्प्रिहेंसिव आई एग्जाम और इंट्राऑकुलर प्रेशर (आंखों का प्रेशर) टेस्ट जरूर करवाएं।40 की उम्र के बाद सेहत का ख्याल रखना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस आपको अपनी प्राथमिकताओं में थोड़ा बदलाव करने की जरूरत है। इन जरूरी टेस्ट्स को अपने इयरली हेल्थ रूटीन का हिस्सा बनाकर, संतुलित आहार लेकर और रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करके आप बीमारियों को कोसों दूर रख सकते हैं और जीवन के हर पड़ाव को ऊर्जा और उत्साह के साथ जी सकते हैं।
मेकअप का मुख्य उद्देश्य हमारी प्राकृतिक सुंदरता को उभारना और चेहरे के नैन-नक्श को निखारना होता है। सही तरीके से किया गया मेकअप न केवल आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है, बल्कि आपको भीड़ में एक अलग और आकर्षक पहचान भी देता है। हालांकि, कई बार हम अनजाने में कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जो हमारे पूरे लुक को बिगाड़ देती हैं। गलत तरीके से मेकअप लगाने की वजह से चेहरा निखरने के बजाय पैची, केक जैसा या फिर उम्र से ज्यादा बड़ा और थका हुआ दिखने लगता है। अक्सर महिलाएं महंगे से महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स तो खरीद लेती हैं, लेकिन उन्हें अप्लाई करने की सही तकनीक न जानने के कारण मनचाहा रिजल्ट नहीं पा पातीं। अगर आप भी चाहती हैं कि आपका मेकअप दिनभर फ्रेश, नैचुरल और फ्लॉलेस दिखे, तो आपको तुरंत इन 5 सबसे आम मेकअप मिस्टेक्स को सुधार लेना चाहिए।1. स्किन प्रेप की अनदेखी करना: बिना मॉइश्चराइजर और प्राइमर के मेकअप लगानामेकअप की दुनिया का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम है अपनी त्वचा को मेकअप के लिए तैयार करना। ज्यादातर महिलाएं चेहरा धोते ही सीधे फाउंडेशन या कंसीलर लगाना शुरू कर देती हैं। यह सबसे बड़ी गलती है। जब आपकी त्वचा रूखी या डिहाइड्रेटेड होती है, तो मेकअप प्रोडक्ट स्किन के सूखे पैचेज में फंस जाते हैं। इससे कुछ ही देर बाद चेहरा फटा-फटा और केक जैसा दिखने लगता है। मेकअप शुरू करने से पहले चेहरे को अच्छे क्लींजर से साफ करें, फिर अपनी स्किन टाइप के अनुसार एक बढ़िया मॉइश्चराइजर लगाएं। इसके बाद प्राइमर लगाना कभी न भूलें। प्राइमर आपके पोर्स को फिल करता है, त्वचा के टेक्सचर को स्मूथ बनाता है और मेकअप को लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए एक परफेक्ट बेस तैयार करता है।2. गलत फाउंडेशन शेड और टेक्सचर का चुनाव करनाफाउंडेशन चुनते समय की गई गलती आपके पूरे लुक को सेकंडों में बर्बाद कर सकती है। अक्सर महिलाएं अपने हाथ की कलाई या गर्दन पर फाउंडेशन लगाकर शेड टेस्ट करती हैं, जो पूरी तरह से गलत तरीका है। हाथ की त्वचा और चेहरे की रंगत में काफी अंतर होता है। सही शेड चुनने के लिए फाउंडेशन को हमेशा अपनी जॉ-लाइन (Jawline) पर लगाकर जांचना चाहिए। ऐसा शेड चुनें जो आपकी गर्दन और चेहरे की रंगत से पूरी तरह मैच करे। इसके अलावा, अपनी स्किन टाइप का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। ऑयली स्किन वालों को मैट और ऑयल-फ्री फाउंडेशन चुनना चाहिए, जबकि ड्राई स्किन वालों को हाइड्रेटिंग या ड्यूई फिनिश वाला लिक्विड फाउंडेशन इस्तेमाल करना चाहिए। गलत शेड का चुनाव करने से चेहरा कुछ देर बाद काला या एशी (Ashy) दिखने लगता है।3. कंसीलर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और गलत शेड लगानाआंखों के नीचे के काले घेरों (Dark Circles) और चेहरे के दाग-धब्बों को छिपाने के लिए कंसीलर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कई बार महिलाएं कंसीलर को बहुत ज्यादा मात्रा में लगा लेती हैं या फिर अपनी स्किन टोन से बहुत ज्यादा लाइट (सफेद) शेड चुन लेती हैं। इससे आंखों के नीचे का हिस्सा चमकने लगता है और चेहरा अस्वाभाविक दिखता है। जरूरत से ज्यादा कंसीलर लगाने से आंखों के नीचे बारीक रेखाएं (Fine Lines) और क्रीज बनने लगती हैं, जिससे आप अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी दिखने लगती हैं। कंसीलर हमेशा अपनी स्किन टोन से केवल एक शेड हल्का ही चुनें और इसे बहुत ही हल्की मात्रा में लगाकर उंगलियों या स्पंज की मदद से डैब करते हुए ब्लेंड करें।4. ब्लेंडिंग में जल्दबाजी करना और सूखे ब्यूटी ब्लेंडर का इस्तेमालमेकअप में 'ब्लेंडिंग' ही वह जादुई चाबी है जो आपको नैचुरल और एअरब्रश लुक देती है। अगर आप फाउंडेशन या कंटूर को ठीक से ब्लेंड नहीं करेंगी, तो चेहरे पर साफ रेखाएं (Harsh Lines) नजर आएंगी जो देखने में बहुत खराब लगती हैं। दूसरी सबसे बड़ी गलती है सूखे मेकअप स्पंज (Beauty Blender) से मेकअप ब्लेंड करना। सूखा स्पंज आपके आधे से ज्यादा महंगे प्रोडक्ट को खुद ही सोख लेता है और चेहरे पर पैच छोड़ देता है। स्पंज का इस्तेमाल करने से पहले उसे पानी में अच्छी तरह भिगोएं और फिर सारा पानी निचोड़ लें। डैम्प (हल्का नम) स्पंज से मेकअप को रगड़ने के बजाय हल्के हाथों से थपथपाते हुए (Dabbing Motion) स्किन में सेट करें। इससे मेकअप एकदम सीमलेस दिखता है।5. हैवी कॉम्पैक्ट पाउडर की ओवर-लेयरिंग करनामेकअप को सेट करने और चेहरे का एक्स्ट्रा ऑयल कम करने के लिए पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन पूरे चेहरे पर कॉम्पैक्ट पाउडर की मोटी परत थप-थपा लेना एक बहुत बड़ी भूल है। जरूरत से ज्यादा पाउडर लगाने से चेहरे का सारा कुदरती ग्लो खत्म हो जाता है और स्किन अत्यधिक ड्राई व बेजान दिखने लगती है। पाउडर को कभी भी पूरे चेहरे पर केक की तरह न लगाएं। इसके बजाय, केवल उन हिस्सों पर हल्का सा लूस पाउडर (Translucent Powder) लगाएं जहां तेल ज्यादा आता है, जैसे कि टी-जोन (माथा, नाक और ठुड्डी) और आंखों के नीचे। पूरे चेहरे का मेकअप लॉक करने के लिए हैवी पाउडर के बजाय एक अच्छे हाइड्रेटिंग सेटिंग स्प्रे मिस्ट का इस्तेमाल करें, जो चेहरे को कुदरती चमक भी देगा।इन 5 बेसिक मेकअप गलतियों से बचकर और सही तकनीकों को अपनाकर आप बिना किसी प्रोफेशनल की मदद के, अपने घर पर ही मिनटों में एक गॉर्जियस, फ्लॉलेस और ग्लोइंग अवतार पा सकती हैं।
PG में रेप, CCTV फुटेज और पुलिस की 10 टीम... ऐसे पकड़ा गया आरोपी
अहमदाबाद के आनंदनगर में PG की छत पर इंटीरियर डिजाइनिंग की छात्रा से रेप का मामला सामने आया है. इस वारदात को पीजी के सिक्योरिटी गार्ड धर्म सिंह ने अंजाम दिया. आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने जो एक्शन लिया, उसकी चर्चा हो रही है. पढ़ें पूरी कहानी.
Monsoon Pimple Control Tips: जानिए मानसून में पिंपल्स रोकने के 5 सबसे असरदार तरीके और होममेड उपाय
गर्मी के मौसम से राहत दिलाने वाली बारिश हर किसी के मन को भाती है, लेकिन हवा में बढ़ी हुई नमी हमारी त्वचा के लिए तरह-तरह की मुश्किलें खड़ी कर देती है। मानसून की शुरुआत होते ही वातावरण में ह्यूमिडिटी (आर्द्रता) का स्तर काफी ज्यादा हो जाता है। यह नमी हमारी त्वचा में मौजूद सीबेशियस ग्लैंड्स (तेल ग्रंथियों) को अत्यधिक सक्रिय कर देती है, जिससे चेहरे पर सीबम यानी प्राकृतिक तेल का उत्पादन दोगुना होने लगता है। जब यह अतिरिक्त तेल हवा में मौजूद धूल-मिट्टी, पसीने और डेड स्किन सेल्स के साथ मिलता है, तो त्वचा के छोटे-छोटे पोर्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि चेहरे पर अचानक लाल, दर्दनाक और जिद्दी मुंहासे (Breakouts) निकलने लगते हैं। इस मौसम में अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए, तो पिंपल्स की यह समस्या पूरे चेहरे पर फैल सकती है।मानसून में मुंहासों का मुख्य कारण: जानिए क्यों बारिश में अचानक बेकाबू हो जाते हैं पिंपल्स?बारिश के मौसम में पिंपल्स बढ़ने की सबसे बड़ी वजह नमी वाले माहौल में बैक्टीरिया और फंगस का तेजी से पनपना है। इस मौसम में 'क्यूटिबैक्टीरियम एक्नेस' (Cutibacterium acnes) नाम का बैक्टीरिया बहुत तेजी से ग्रोथ करता है। बंद पोर्स के अंदर फंसा पसीना और सीबम इस बैक्टीरिया के लिए एक मुफीद जगह बना देता है, जिससे त्वचा में सूजन (Inflammation), रेडनेस और मवाद वाले पिंपल्स उभर आते हैं। इसके साथ ही, बारिश के दूषित पानी में मौजूद केमिकल्स और पॉल्यूशन स्किन के नेचुरल बैरियर को नुकसान पहुंचाते हैं। कई लोग चेहरे की चिपचिपाहट से घबराकर बार-बार कड़े साबुन से चेहरा धोने लगते हैं। ऐसा करने से त्वचा का जरूरी मॉइश्चर छिन जाता है और स्किन खुद को बचाने के लिए और अधिक तेल बनाने लगती है, जिससे समस्या घटने के बजाय बढ़ जाती है।डबल क्लींजिंग और सैलिसिलिक एसिड: मुंहासों का काम तमाम करने वाले पावरफुल हथियारमानसून में पिंपल्स को रोकने के लिए सबसे पहला और प्राथमिक नियम है एक सही क्लींजिंग रूटीन को फॉलो करना। इस मौसम में दिन में दो बार अपने चेहरे को किसी जेंटल और एक्टिव-बेस्ड फेसवॉश से जरूर साफ करें। अगर आपकी स्किन ऑयली और एक्ने-प्रोन है, तो सैलिसिलिक एसिड (Salicylic Acid), टी-ट्री ऑयल या नीम युक्त फेसवॉश का इस्तेमाल करना सबसे फायदेमंद होता है। सैलिसिलिक एसिड ऑयल-सोल्यूबल होता है, जो पोर्स के गहराई में जाकर जमा हुए तेल और बैक्टीरिया को बाहर निकालता है। रात को सोने से पहले मिसेलर वाटर से चेहरे की 'डबल क्लींजिंग' जरूर करें ताकि दिनभर का पसीना, सनस्क्रीन और धूल-मिट्टी पूरी तरह साफ हो जाए।ऑयल-फ्री और जेल मॉइश्चराइजर: पोर्स को बंद किए बिना त्वचा को दें सही हाइड्रेशनमानसून में लोग अक्सर यह सोचकर मॉइश्चराइजर लगाना बंद कर देते हैं कि चेहरा तो पहले से ही ऑयली और चिपचिपा है। यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है जो मुंहासों को और ज्यादा बढ़ावा देती है। जब आप त्वचा को बाहर से मॉइश्चराइज नहीं करते, तो स्किन डिहाइड्रेट होकर अतिरिक्त सीबम बनाने लगती है। इस मौसम में भारी क्रीम या गाढ़ी कोल्ड क्रीम के बजाय लाइटवेट, वॉटर-बेस्ड या जेल-बेस्ड मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें। हयालूरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid), एलोवेरा जेल और नियासिनामाइड (Niacinamide) युक्त मॉइश्चराइजर पोर्स को ब्लॉक किए बिना त्वचा में नमी को सील करते हैं और पिंपल्स के दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करते हैं।एंटी-बैक्टीरियल फेस पैक: नीम, मुल्तानी मिट्टी और टी-ट्री ऑयल का चमत्कारी असरअगर मानसून में आपके चेहरे पर छोटे-छोटे पिंपल्स या दाने निकलने लगे हैं, तो प्राकृतिक और एंटी-बैक्टीरियल घरेलू नुस्खे आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी चेहरे के अत्यधिक तेल को सोखने में माहिर होती है, वहीं नीम में शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में एक चम्मच नीम का पाउडर और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं। इसे हफ्ते में 2 बार चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं। इसके अलावा, शुद्ध टी-ट्री ऑयल की 1-2 बूंदों को एलोवेरा जेल में मिलाकर सीधे पिंपल के ऊपर (Spot Treatment) लगाने से मुंहासे की सूजन और दर्द रातभर में काफी कम हो जाता है।खान-पान, तकिए का कवर और छोटी गलतियां: पिंपल्स से बचने के लिए तुरंत बदलें ये आदतेंकेवल बाहरी प्रोडक्ट्स लगाने से ही पिंपल्स नहीं रुकते, बल्कि आपकी दैनिक लाइफस्टाइल का भी इस पर सीधा असर पड़ता है। मानसून के सुहाने मौसम में अक्सर समोसे, पकौड़े और डीप-फ्राई स्ट्रीट फूड खाने की इच्छा होती है। अत्यधिक तैलीय और मसालेदार खाना पचने में भारी होता है और शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाता है, जिससे सीधे चेहरे पर पिंपल्स निकलने लगते हैं। इसलिए अपनी डाइट में ताजा नारियल पानी, खीरा, तरबूज और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करें। इसके साथ ही अपने तकिए के कवर (Pillow Cases) और तौलिए को हर 2-3 दिन में धोएं, क्योंकि इनमें जमा नमी बैक्टीरिया का घर बन जाती है। अपने चेहरे को बार-बार गंदे हाथों से न छुएं और पिंपल्स को कभी भी फोड़ने की गलती न करें।
सरकार ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल गांधी की बैठने की व्यवस्था पर उठे विवाद को स्पष्ट किया है।
वनडे वर्ल्ड कप के नए फॉर्मेट पर मचा बवाल, लगा बड़ा आरोप
वनडे वर्ल्ड कप 2027 से पहले आईसीसी ने एक हैरान करने वाला फैसला लिया है. आईसीसी के इस फैसले पर क्रिकेट फैन्स से लेकर एसोसिएट देश तक लगातार सवाल उठा रहे हैं. आइए जानते हैं आखिर पूरा मामला क्या है?
सुंदर और चमकदार त्वचा पाना हर किसी की चाहत होती है। इसके लिए लोग अक्सर महंगे से महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स, सीरम और महंगे ब्यूटी ट्रीटमेंट्स पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं। लेकिन कई बार तमाम कोशिशों और महंगे प्रोडक्ट्स के बावजूद त्वचा पर वो निखार नजर नहीं आता जिसकी उम्मीद की जाती है। इसका कारण हमारे प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि हमारी वे रोजमर्रा की अनजानी आदतें होती हैं जिन्हें हम बिना सोचे-समझे दोहराते रहते हैं। हमारी छोटी-छोटी 'ब्यूटी मिस्टेक्स' धीरे-धीरे त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षात्मक परत (स्किन बैरियर) को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे समय से पहले झुर्रियां, पिंपल्स, डार्क स्पॉट्स और बेजानपन आने लगता है। अगर आप भी अपनी रंगत को लंबे समय तक जवान और चमकदार बनाए रखना चाहते हैं, तो आपको तुरंत इन 9 ब्यूटी हैबिट्स को अलविदा कह देना चाहिए।1. मेकअप लगाकर सो जाना: त्वचा के श्वसन चक्र में सबसे बड़ी रुकावटदिनभर की थकावट के बाद रात को बिना मेकअप उतारे सो जाना स्किनकेयर की सबसे गंभीर गलतियों में से एक है। दिनभर में मेकअप के साथ-साथ चेहरे पर धूल-मिट्टी, पसीना और पर्यावरण में मौजूद फ्री-रेडिकल्स चिपक जाते हैं। जब आप रात में चेहरा धोए बिना सो जाते हैं, तो ये कण आपके रोमछिद्रों (पोर्स) के अंदर समा जाते हैं और उन्हें पूरी तरह बंद कर देते हैं। रात के समय त्वचा खुद को रिपेयर करती है और नए सेल्स बनाती है, लेकिन मेकअप की परत इस प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डालती है। इसके परिणामस्वरूप चेहरे पर मुहासे, ब्लैकहेड्स और समय से पहले बारीक रेखाएं (फाइन लाइन्स) उभरने लगती हैं। हमेशा सोने से पहले क्लींजिंग बाम या मिसेलर वाटर से मेकअप साफ करें और फिर एक माइल्ड क्लींजर से चेहरा धोएं।2. पिंपल्स को बार-बार छूना और जबरदस्ती फोड़ना: दाग-धब्बों को दावत देनाचेहरे पर एक छोटा सा पिंपल निकलते ही अधिकांश लोगों का हाथ बार-बार उसी पर जाता है और लोग उसे फोड़ने की कोशिश करने लगते हैं। यह आदत आपकी त्वचा के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। पिंपल को फोड़ने से उसके अंदर मौजूद बैक्टीरिया और मवाद त्वचा के आसपास के हिस्सों में फैल जाते हैं, जिससे वहां भी नए पिंपल्स निकलने लगते हैं। इसके अलावा, पिंपल को दबाने से स्किन के अंदरूनी टिश्यूज डैमेज हो जाते हैं, जिससे चेहरे पर जिद्दी गड्ढे और काले दाग-धब्बे बन जाते हैं जो महीनों तक नहीं जाते। जब भी पिंपल निकले, तो उस पर पिंपल पैच लगाएं या सैलिसिलिक एसिड युक्त स्पॉट ट्रीटमेंट का इस्तेमाल करें और उसे खुद से ठीक होने दें।3. घर के अंदर या बादलों के मौसम में सनस्क्रीन न लगाना: फोटो-एजिंग का मुख्य कारणज्यादातर लोग मानते हैं कि सनस्क्रीन सिर्फ कड़क धूप में बाहर निकलते समय ही लगानी चाहिए। यह सोच पूरी तरह से गलत है। सूरज की हानिकारक यूवी-ए (UVA) और यूवी-बी (UVB) किरणें बादलों को पार करके और खिड़कियों के कांच से छनकर भी हमारी त्वचा तक पहुंचती हैं। इसके अलावा, हमारे लैपटॉप और स्मार्टफोन से निकलने वाली 'ब्लू लाइट' भी स्किन को डैमेज करती है। सनस्क्रीन न लगाने से स्किन का कोलाजन तेजी से टूटने लगता है, जिससे स्किन पिगमेंटेशन, टैनिंग और उम्र से पहले झुर्रियां आने लगती हैं। मौसम चाहे कोई भी हो और आप घर के अंदर हों या बाहर, रोज सुबह कम से कम SPF 30 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाने की आदत डालें।4. अत्यधिक एक्सफोलिएशन और जोर से स्क्रब करना: स्किन बैरियर का दुश्मनत्वचा से डेड सेल्स को हटाने के लिए एक्सफोलिएशन जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा स्क्रबिंग करना नुकसानदेह हो सकता है। कई लोग हफ्ते में 4-5 बार कड़े दानों वाले स्क्रब से चेहरा रगड़ते हैं, यह सोचकर कि इससे स्किन ज्यादा साफ होगी। हालांकि, अत्यधिक एक्सफोलिएशन से त्वचा की प्राकृतिक ऑयल लेयर और सुरक्षात्मक परत पूरी तरह छिल जाती है। इससे स्किन में लालिमा, जलन, रूखापन और अत्यधिक ऑयल का उत्पादन होने लगता है, जिससे पिंपल्स की समस्या और बढ़ जाती है। हफ्ते में सिर्फ 1 या 2 बार ही किसी माइल्ड फिजिकल स्क्रब या केमिकल एक्सफोलिएटर (जैसे AHA/BHA) का इस्तेमाल करें और हमेशा हल्के हाथों से गोलाकार मोशन में मसाज करें।5. गंदे मेकअप ब्रश और स्पंज का इस्तेमाल करना: बैक्टीरिया का घरक्या आपको याद है कि आपने आखिरी बार अपने मेकअप ब्रश और ब्यूटी ब्लेंडर कब धोए थे? अगर इसका जवाब हफ्तों या महीनों पहले है, तो आपकी स्किन प्रॉब्लम्स की वजह यही हो सकती है। इस्तेमाल किए गए मेकअप ब्रश में पुराना प्रोडक्ट, चेहरे का तेल, मृत कोशिकाएं और हवा में मौजूद बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। जब आप हर रोज उन्हीं गंदे ब्रश को अपने चेहरे पर लगाते हैं, तो वे बैक्टीरिया सीधे आपकी त्वचा के पोर्स में प्रवेश कर जाते हैं। इससे चेहरे पर अचानक ब्रेकआउट्स और स्किन इंफेक्शन होने लगता है। अपने मेकअप स्पंज और ब्रश को हर हफ्ते माइल्ड शैम्पू या ब्रश क्लींजर से जरूर धोएं और उन्हें धूप में अच्छी तरह सुखाएं।6. बहुत गर्म पानी से चेहरा धोना या नहाना: कुदरती नमी का छिन जानाखासकर सर्दियों में या थकावट उतारने के लिए बहुत गर्म पानी से चेहरा धोना या नहाना बहुत आरामदायक लगता है, लेकिन यह आदत आपकी स्किन और बालों का प्राकृतिक तेल पूरी तरह छीन लेती है। अत्यधिक गर्म पानी त्वचा के लिपिड बैरियर को नुकसान पहुंचाता है, जिससे स्किन अत्यधिक ड्राई, पपड़ीदार और संवेदनशील हो जाती है। जब त्वचा बहुत ज्यादा सूख जाती है, तो वह खुद को बचाने के लिए अधिक मात्रा में सीबम बनाने लगती है, जिससे चेहरा ऑयली दिखने लगता है। चेहरा धोने के लिए हमेशा सामान्य ताजे पानी या हल्के गुनगुने पानी का ही उपयोग करें ताकि स्किन का मॉइश्चर बैलेंस बना रहे।7. गर्दन और हाथों की अनदेखी करना: बढ़ती उम्र के पहले संकेतहम अपना सारा ध्यान, सीरम और मॉइश्चराइजर केवल चेहरे पर ही लगाते हैं और गर्दन व हाथों को पूरी तरह भूल जाते हैं। सच्चाई यह है कि चेहरे की तुलना में गर्दन और हाथों की त्वचा अधिक पतली और संवेदनशील होती है। बढ़ती उम्र के सबसे पहले लक्षण—जैसे ढीली त्वचा, झुर्रियां और फाइन लाइन्स—गर्दन पर ही दिखाई देते हैं। जब भी आप अपना स्किनकेयर रूटीन फॉलो करें, तो जो भी क्लींजर, मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन आप चेहरे पर लगा रहे हैं, उसे नीचे गर्दन और हाथों तक जरूर लगाएं। इससे पूरे ऊपरी हिस्से की रंगत और टेक्सचर एक समान बना रहता है।8. पेट के बल या करवट लेकर सोना: पिलो-केस झुर्रियां और एक्नेसोने का तरीका भी आपकी सुंदरता पर सीधा असर डालता है। अगर आप पेट के बल या गालों को तकिए में दबाकर करवट लेकर सोते हैं, तो रातभर आपके चेहरे पर खिंचाव और दबाव बनता है। इससे समय के साथ चेहरे पर 'स्लीप लाइन्स' बनने लगती हैं जो बाद में स्थायी झुर्रियों में बदल जाती हैं। इसके अलावा, तकिए के कवर पर पसीना, बालों का तेल और बैक्टीरिया जमा होते हैं, जो रातभर गालों के संपर्क में रहने से पिंपल्स का कारण बनते हैं। पीठ के बल (Straight on back) सोने की कोशिश करें और अपने सूती तकिए के कवर की जगह सिल्क या सैटिन पिलो-केस का इस्तेमाल करें जो त्वचा पर घर्षण कम करता है।9. कम पानी पीना और खराब जीवनशैली: अंदरूनी डिहाइड्रेशन का प्रभावकोई भी बाहरी क्रीम या सीरम तब तक काम नहीं कर सकता जब तक कि शरीर अंदर से स्वस्थ और हाइड्रेटेड न हो। दिनभर में पर्याप्त पानी न पीने से त्वचा डिहाइड्रेटेड हो जाती है, जिससे चेहरा सुस्त, डल और थका हुआ नजर आता है। इसके साथ ही, देर रात तक जागना, तनाव लेना, अत्यधिक चीनी व जंक फूड का सेवन करना और एक्सरसाइज न करना आपकी हार्मोनल साइकिल को बिगाड़ देता है। पर्याप्त नींद (7-8 घंटे की ब्यूटी स्लीप) न लेने से आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स और पफीनेस आ जाती है। अपनी डाइट में पानी से भरपूर फल, नारियल पानी, हरी सब्जियां शामिल करें और नियमित रूप से योग या वर्कआउट करें।खूबसूरत और सेहतमंद त्वचा पाना कोई एक दिन का चमत्कार नहीं है, बल्कि यह आपकी दैनिक आदतों का परिणाम है। इन 9 आम ब्यूटी मिस्टेक्स को पहचानकर अपने डेली रूटीन में थोड़ा सा बदलाव लाएं। सही स्किनकेयर आदतों और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर आप बिना किसी ज्यादा खर्चे के लंबे समय तक बेदाग, निखरी और जवां रंगत का आनंद ले सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस दावे को खारिज किया, जिसमें उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित तौर पर पैलेट गन चलाने और फायरिंग का आरोप ...
कानपुर में महिला डॉक्टर से 'दोस्ती' के लिए नौशाद ने किए 700 कॉल!
कानपुर में महिला डॉक्टर को परेशान करने, 700 बार फोन करने और पति की हत्या, रेप, तेजाब डालने व बेटी के अपहरण की धमकियां देने वाले मनचले नौशाद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. फीलखाना थाना पुलिस ने केवल शांति भंग की कार्रवाई की है, जिससे पीड़ित डॉक्टर खुद को असुरक्षित मान रही हैं.
मौसम का चक्र जब भी बदलता है, चाहे गर्मी से बरसात की शुरुआत हो या पतझड़ के बाद सर्दियों का आगमन, इसका सबसे पहला और सीधा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। हवा में नमी का स्तर, तापमान का उतार-चढ़ाव और वातावरण में धूल-मिट्टी के कण हमारी स्किन बैरियर यानी त्वचा की सुरक्षात्मक परत को प्रभावित करते हैं। अक्सर देखा जाता है कि लोग सालभर एक ही तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स और स्किनकेयर रूटीन का इस्तेमाल करते रहते हैं। यह एक बहुत बड़ी भूल साबित हो सकती है, क्योंकि जो मॉइश्चराइजर या क्लींजर कड़कड़ाती गर्मी में काम करता है, वही बदलते मौसम या सर्दियों में त्वचा को अत्यधिक रूखा और बेजान बना सकता है। अगर आप चाहते हैं कि हर मौसम में आपकी रंगत खिली-खिली और बेदाग दिखे, तो मौसम के मिजाज को समझते हुए अपने डेली स्किनकेयर रूटीन में कुछ जरूरी बदलाव करना बेहद आवश्यक हो जाता है।मौसम के बदलाव के साथ क्यों जरूरी है स्किनकेयर रूटीन में बदलाव?बदलते मौसम में वातावरण का आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) स्तर और तापमान अचानक बदल जाता है। उदाहरण के लिए, जब मौसम गर्मी या मानसून से ठंड की तरफ बढ़ता है, तो हवा में नमी की कमी होने लगती है, जिससे त्वचा का प्राकृतिक तेल तेजी से सूखने लगता है। इसके विपरीत, जब सर्दी से गर्मी का मौसम आता है, तो त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स (सीबेशियस ग्रंथि) अत्यधिक सक्रिय हो जाती हैं, जिससे चेहरे पर सीबम का उत्पादन बढ़ जाता है। इन अचानक होने वाले बदलावों के कारण त्वचा का पीएच संतुलन (pH balance) बिगड़ जाता है। नतीजा यह होता है कि कुछ लोगों की स्किन अचानक बहुत ज्यादा रूखी और पपड़ीदार हो जाती है, तो कुछ लोगों को मुहासे, लालिमा (रेडनेस) और खुजली जैसी संवेदनशील समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसीलिए, अपने स्किन टाइप और मौसम की मांग के अनुसार रूटीन को एडजस्ट करना ही स्वस्थ त्वचा की असली कुंजी है।माइल्ड क्लींजिंग और पीएच बैलेंस: त्वचा की सही सफाई का पहला कदमस्किनकेयर रूटीन की शुरुआत हमेशा सही क्लींजिंग से होती है। मौसम बदलते ही अपने फेसवॉश का चुनाव बहुत समझदारी से करना चाहिए। अगर मौसम में ठंडक या रूखापन बढ़ रहा है, तो फोमिंग या सैलिसिलिक एसिड वाले कड़े फेसवॉश का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें। ये फेसवॉश त्वचा के प्राकृतिक तेल को छीन लेते हैं। इसके बजाय हाइड्रेटिंग, क्रीम-बेस्ड या सोप-फ्री जेंटल क्लींजर अपनाएं जो बिना सुखाए त्वचा को अंदर से साफ करे। वहीं, अगर मौसम गर्मी या नमी की ओर बढ़ रहा है, तो जेल-बेस्ड या फोमिंग क्लींजर का उपयोग करें ताकि एक्स्ट्रा ऑयल और पोर्स में फंसी गंदगी आसानी से निकल सके। दिन में दो बार से ज्यादा चेहरा न धोएं, क्योंकि बार-बार चेहरा धोने से स्किन बैरियर कमजोर हो जाता है और त्वचा में जलन होने लगती है।लेयरिंग और सही मॉइश्चराइजर का चुनाव: हाइड्रेशन का गोल्डन रूलबदलते मौसम में त्वचा को पर्याप्त नमी यानी हाइड्रेशन देना सबसे महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, मॉइश्चराइजर का चयन मौसम के अनुसार ही होना चाहिए। अगर मौसम में रूखापन बढ़ रहा है, तो केवल एक साधारण लोशन काम नहीं करेगा। ऐसे में सिरामाइड्स (Ceramides), शेया बटर, ग्लिसरीन और फैटी एसिड युक्त हैवी या रिच मॉइश्चराइजर क्रीम लगाएं जो नमी को लॉक कर सके। इसके विपरीत, जब मौसम में चिपचिपाहट या गर्मी बढ़ रही हो, तो लाइटवेट, ऑयल-फ्री और हयालूरोनिक एसिड युक्त जेल मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें। हयालूरोनिक एसिड अपने वजन से 1000 गुना अधिक पानी को आकर्षित करता है, जो बिना चिपचिपाहट दिए त्वचा को प्लम्प और फ्रेश बनाए रखता है। मॉइश्चराइजर हमेशा चेहरा थोड़ा नम होने पर ही लगाएं ताकि नमी त्वचा के अंदर सील हो जाए।सनस्क्रीन का इस्तेमाल: हर मौसम के लिए अनिवार्य सुरक्षा शील्डअधिकांश लोग यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि सनस्क्रीन सिर्फ तेज धूप वाली गर्मियों में ही लगानी चाहिए। जबकि सच्चाई यह है कि मौसम चाहे कोई भी हो—बदली छाई हो, बारिश हो रही हो या कड़ाके की ठंड पड़ रही हो—सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणें (UVA और UVB) हमेशा वातावरण में मौजूद रहती हैं। ये किरणें त्वचा के कोलाजन को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे समय से पहले झुर्रियां, डार्क स्पॉट्स और पिगमेंटेशन की समस्या पैदा होती है। बदलते मौसम में अपनी त्वचा के अनुकूल ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन (कम से कम SPF 30 या 50) का चुनाव करें। रूखे मौसम के लिए मॉइश्चराइजिंग सनस्क्रीन और चिपचिपे मौसम के लिए मैट-फिनिश या वाटर-बेस्ड सनस्क्रीन सबसे सही विकल्प होती है। घर से बाहर निकलने से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन जरूर लगाएं।सीरम, एक्सफोलिएशन और नाइट केयर: अंदरूनी पोषण के अचूक उपायदिन के समय सुरक्षा और रात के समय रिपेयर—यही स्किनकेयर का मूल मंत्र है। बदलते मौसम में जब त्वचा ढल रही होती है, तब इसे अतिरिक्त पोषण देने के लिए फेस सीरम का इस्तेमाल करें। सुबह के समय विटामिन-सी सीरम लगाएं, जो एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और त्वचा को फ्री रेडिकल्स व पॉल्यूशन से बचाता है। रात के समय नियासिनामाइड (Niacinamide) या रेटिनॉल सीरम का उपयोग करें जो स्किन बैरियर को रिपेयर करते हैं। इसके अलावा, हफ्ते में एक बार माइल्ड एक्सफोलिएटर का इस्तेमाल करें ताकि जमा हुई मृत कोशिकाएं (डेड स्किन सेल्स) हट सकें और नए सेल्स बन सकें। रात को सोने से पहले अपनी त्वचा को अच्छी तरह साफ करके नाइट क्रीम या फेशियल ऑयल जरूर लगाएं, क्योंकि रात में सोते समय स्किन रिपेयरिंग की प्रक्रिया सबसे तेज होती है।डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव: प्राकृतिक निखार के लिए अंदरूनी देखभालकेवल बाहरी प्रोडक्ट्स लगाने से त्वचा तब तक पूरी तरह स्वस्थ नहीं रह सकती जब तक कि आप अंदर से हाइड्रेटेड और पोषित न हों। बदलते मौसम में अपनी डाइट में मौसम के अनुसार ताजे फल और हरी सब्जियों को शामिल करें। जैसे ही मौसम बदले, शरीर में पानी की कमी न होने दें। प्रतिदिन कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीएं। इसके अलावा, डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें जैसे अखरोट, अलसी के बीज और चिया सीड्स शामिल करें, जो त्वचा में कुदरती चमक बनाए रखते हैं। अत्यधिक गर्म पानी से नहाने या चेहरा धोने की गलती न करें, क्योंकि गर्म पानी त्वचा का प्राकृतिक ऑयल खत्म कर देता है। पर्याप्त नींद लें, तनाव से दूर रहें और नियमित रूप से योग या व्यायाम करें। जब आपका शरीर अंदर से डिटॉक्स रहेगा, तो बदलते मौसम का नकारात्मक प्रभाव आपकी त्वचा पर बिल्कुल नहीं दिखेगा।
Monsoon Skin Care Tips: बारिश के मौसम में ऑयली स्किन, पिंपल्स और चिपचिपाहट से पाएं मुक्ति
भीषण गर्मी के बाद मानसून की पहली बारिश हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ले आती है। मौसम का सुहाना मिजाज और ठंडी हवाएं जहां मन को सुकून देती हैं, वहीं दूसरी ओर वातावरण में बढ़ी हुई नमी हमारी त्वचा के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर देती है। बारिश के मौसम में हवा में ह्यूमिडिटी (आर्द्रता) का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इसके कारण पसीना और तेल (सिबम) त्वचा की सतह पर जमा होने लगते हैं। जब यह तेल वातावरण में मौजूद धूल-मिट्टी और प्रदूषण के संपर्क में आता है, तो रोमछिद्र (पोर्स) बंद हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि चेहरा हर वक्त चिपचिपा दिखने लगता है और मुहासे, ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स व फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं अचानक उभरने लगती हैं।हालांकि, मानसून का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपको अपनी खूबसूरत और दमकती त्वचा से समझौता करना पड़े। अगर आप मौसम के बदलाव के अनुसार अपने स्किनकेयर रूटीन में सही बदलाव लाते हैं और अपनी त्वचा की खासियतों को समझते हैं, तो इस नमी वाले मौसम में भी आपकी रंगत निखरी और तरोताजा बनी रह सकती है।मानसून में त्वचा को क्यों झेलनी पड़ती हैं समस्याएं? जानिए नमी और पिंपल्स का संबंधबारिश के मौसम में स्किन प्रॉब्लम्स बढ़ने का मुख्य वैज्ञानिक कारण हमारी स्वेट ग्लांड्स (पसीने की ग्रंथियां) और सेबेशियस ग्लांड्स (ऑयल ग्रंथियां) का अत्यधिक सक्रिय होना है। ह्यूमिडिटी की वजह से पसीना आसानी से सूखता नहीं है, जिससे त्वचा की ऊपरी परत पर बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बन जाता है। इस मौसम में रूखी त्वचा वाले लोगों को खिंचाव और पैची स्किन का सामना करना पड़ता है, जबकि ऑयली स्किन वालों का चेहरा अतिरिक्त तेल से भर जाता है। इसके अलावा, गंदे पानी या बारिश में भीगने से चेहरे पर लाल चकत्ते, खुजली और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में त्वचा को सिर्फ बाहरी रूप से ही नहीं, बल्कि अंदरूनी रूप से भी स्वस्थ रखना बेहद आवश्यक हो जाता है।डबल क्लींजिंग और सही फेसवॉश: त्वचा की गहरी सफाई का पहला कदममानसून के दौरान त्वचा को साफ रखना सबसे महत्वपूर्ण चरण है। दिन में कम से कम दो से तीन बार अपने चेहरे को धोना बेहद जरूरी है, लेकिन सही क्लींजर का चुनाव करना उससे भी ज्यादा जरूरी है। अगर आप भारी या साबुन युक्त फेसवॉश का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे त्वचा का प्राकृतिक मॉइश्चर खत्म हो सकता है और आपकी स्किन प्रतिक्रियास्वरूप और अधिक तेल बनाने लगेगी।ऑयली और पिंपल-प्रोन स्किन वाले लोगों को सैलिसिलिक एसिड, नीम, टी-ट्री ऑयल या ग्लाइकोलिक एसिड युक्त फोमिंग फेसवॉश का चयन करना चाहिए। ये तत्व पोर्स के अंदर जाकर जमा हुए तेल और बैक्टीरिया को बाहर निकालते हैं। वहीं, सेंसिटिव या रूखी त्वचा वाले लोगों को माइल्ड, सोप-फ्री और जेंटल क्लींजर का उपयोग करना चाहिए। रात को सोने से पहले मेकअप और दिनभर की गंदगी को हटाने के लिए मिसेलर वाटर से 'डबल क्लींजिंग' जरूर करें, ताकि आपकी त्वचा रातभर खुलकर सांस ले सके।लाइटवेट और जेल-बेस्ड हाइड्रेशन: मॉइश्चराइजर छोड़ना हो सकता है भारीएक आम धारणा यह है कि मानसून में चेहरा पहले से ही ऑयली और चिपचिपा रहता है, इसलिए मॉइश्चराइजर लगाने की जरूरत नहीं है। यह सोच पूरी तरह से गलत है। जब आप फेसवॉश से चेहरा धोते हैं, तो त्वचा की नमी कम हो जाती है। यदि आप मॉइश्चराइजर नहीं लगाएंगे, तो त्वचा हाइड्रेशन की कमी को पूरा करने के लिए ज्यादा सीबम का उत्पादन करेगी, जिससे चेहरा और अधिक ऑयली दिखेगा।मानसून में भारी क्रीम या ऑयल-बेस्ड मॉइश्चराइजर के बजाय वाटर-बेस्ड, जेल-बेस्ड या नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइश्चराइजर का चुनाव करें। हयालूरोनिक एसिड, एलोवेरा जेल और नियासिनामाइड युक्त मॉइश्चराइजर इस मौसम के लिए सबसे बेस्ट माने जाते हैं। ये त्वचा को बिना चिपचिपा बनाए गहराई से नमी प्रदान करते हैं और स्किन बैरियर को मजबूत बनाते हैं।बादलों के पीछे भी छिपा है खतरा: मानसून में सनस्क्रीन लगाना क्यों है बेहद जरूरी?बारिश के मौसम में अक्सर आसमान में काले बादल छाए रहते हैं और धूप नजर नहीं आती। ऐसे में ज्यादातर लोग सनस्क्रीन लगाना पूरी तरह छोड़ देते हैं। यह आपकी त्वचा के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। सूरज से निकलने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणें (UVA और UVB) बादलों को पार करके हमारी त्वचा तक पहुंच सकती हैं। ये किरणें त्वचा में समय से पहले झुर्रियां, टैनिंग, डार्क स्पॉट्स और पिगमेंटेशन का कारण बनती हैं।मानसून में कम से कम SPF 30 या SPF 50 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन जरूर लगाएं। इस मौसम के लिए मैट फिनिश, वॉटर-रेजिस्टेंट और जेल-बेस्ड सनस्क्रीन सबसे उपयुक्त होते हैं, जो पसीने से धुलते नहीं हैं और त्वचा को चिकना भी नहीं बनाते। यदि आप घर के अंदर हैं या खिड़की के पास काम कर रहे हैं, तब भी सनस्क्रीन लगाना न भूलें।घर में मौजूद सामग्रियों से बनाएं हर्बल फेस पैक: बेदाग निखार के लिए आसान नुस्खेबाजार के महंगे केमिकल्स वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स के बजाय रसोई में मौजूद प्राकृतिक सामग्रियां मानसून में त्वचा को शांत और चमकदार बनाने का सबसे सुरक्षित उपाय हैं।मुल्तानी मिट्टी और नीम पैक: दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में एक चम्मच नीम का पाउडर और आवश्यकतानुसार गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे पर 15 मिनट लगाएं। मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त तेल को सोख लेती है और नीम अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों से पिंपल्स को खत्म करता है।बेसन, हल्दी और दही का उबटन: एक चम्मच बेसन में चुटकीभर हल्दी और एक चम्मच ताजा दही मिलाकर लगाने से टैनिंग दूर होती है और चेहरे पर तुरंत नैचुरल ग्लो आता है।खीरे और एलोवेरा का कूलिंग पैक: खीरे का रस और ताजा एलोवेरा जेल मिलाकर चेहरे पर लगाने से मानसून की चिपचिपाहट और जलन से तुरंत राहत मिलती है।खान-पान, खान-पान की आदतें और स्वच्छता: अंदरूनी ग्लो के लिए लाइफस्टाइल में करें बदलावसुंदर और स्वस्थ त्वचा केवल बाहरी प्रोडक्ट्स से नहीं मिलती, बल्कि आपकी जीवनशैली का भी इस पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मानसून के मौसम में पाचन तंत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है, जिससे पेट की खराबी का असर सीधे चेहरे पर पिंपल्स के रूप में दिखाई देता है।भरपूर पानी पीएं: भले ही इस मौसम में प्यास कम लगे, लेकिन दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पीएं ताकि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें।तला-भुना खाने से बचें: बारिश में पकौड़े और स्ट्रीट फूड खाने की इच्छा प्रबल होती है, लेकिन अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन पिंपल्स का मुख्य कारण बनता है। इसके बजाय ताजे फल, हरी सब्जियां और सूप का सेवन करें।स्वच्छता का रखें ध्यान: अपने तौलिए, पिलो कवर और चादरों को नियमित रूप से धोएं। गंदे तकिए के कवर पर मौजूद बैक्टीरिया चेहरे पर ट्रांसफर होकर मुंहासे बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, अपने चेहरे को बार-बार गंदे हाथों से छूने की आदत से बचें।मानसून के सुहाने मौसम का आनंद लेते हुए यदि आप इन छोटी-छोटी बातों और आसान स्किनकेयर आदतों को अपने दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो आपकी त्वचा पूरे सीजन चिपचिपाहट से मुक्त, बेदाग और प्राकृतिक रूप से चमकदार बनी रहेगी।
'जंतर-मंतर पर कोई गोली नहीं चली', देखें नड्डा का राहुल गांधी पर पलटवार
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गृहमंत्री अमित शाह पर हमला बोला. उन्होंने पूछा, जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? इस पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पलटवार करते हुए कहा, राहुल गांधी अराजकता फैला रहे हैं. नड्डा ने कहा कि जंतर-मंतर पर कोई गोली नहीं चली. गृहमंत्री हर बात का जवाब देने को तैयार हैं. देखें वीडियो.
12 घंटे में 7 इंच बारिश, 50 से ज़्यादा इलाके जलमग्न
MP के भोपाल में 12 घंटे में 7 इंच से ज्यादा बारिश से शहर बेहाल हो गया. निशातपुरा समेत 50 से अधिक इलाके जलमग्न हैं, घरों में पानी घुस गया और सड़कें डूब गईं. भारी बारिश के चलते प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद कर दिए. नर्सरी से 12वीं तक की क्लास बंद रहेंगी.
क्या किसी वरदान से बनी थी बीयर? सबसे पहली बार किसने पी थी
बीयर से एक मजेदार किस्सा जुड़ा है. कहा जाता है कि एक देवी के वरदान से इंसानों ने बीयर बनाना सीखा था. उस देवी की प्रार्थना से जुड़े एक गीत में बीयर बनाने का पूरा प्रोसेस बताया गया है. चलिए जानते हैं क्या है पूरा किस्सा.
दिल्ली विधानसभा में सोमवार को स्कूली बच्चों को दी जाने वाली साइकिलों की खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने कथित ‘साइकिल घोटाले’ पर विधानसभा में चर्चा कराने की मांग की। इस दौरान सदन की कार्यवाही के बीच 'आप' विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। चर्चा की अनुमति नहीं मिलने और विरोध करने पर कुछ 'आप' विधायकों को सदन से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने सरकार और विधानसभा अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए।
घर पर आटे-गुड़ से बनाएं क्रिस्पी कुकीज, बच्चों को आएंगी खूब पसंद
Aata Gud Cookies: बाजार के मैदे वाले बिस्किट की जगह बच्चों के लिए घर पर आटा-गुड़ से कुकीज बनाएं. ये कुकीज बिना मैदा और चीनी के बनती है, जिसकी वजह से बच्चों की सेहत के लिए नुकसानदायक नहीं बनती हैं. जानें गेहूं के आटे, गुड़ और ड्राई फ्रूट्स से ओवन या एयर फ्रायर में क्रिस्पी और हेल्दी बिस्किट बनाना का आसान तरीका क्या है.
‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ में छात्रों के द्वारा रांची में किए जा रहे प्रदर्शन पर चर्चा की गई। इसके साथ ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की आगे की योजना पर भी चर्चा की गई।
क्या FCRA विधेयक किसी खास समुदाय के खिलाफ है? जानिए झूठे दावों में कितनी सच्चाई
भारत सरकार ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को लेकर वैश्विक समुदाय में फैली भ्रांतियों को दूर किया है, स्पष्ट किया है कि यह किसी समुदाय के खिलाफ नहीं और पारदर्शिता के लिए है।
'संसद में आइए, चर्चा से मत भागिए', जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को दिया चैलेंज
जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा. जेपी नड्डा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोई गोली नहीं चली और राहुल गांधी को संसद में चर्चा के लिए आने का चैलेंज दिया.
ऑल इंडिया कोटा और स्टेट काउंसलिंग में क्या है अंतर? जानें कौन-सी सीट के लिए कहां करना होगा आवेदन
All India Quota and State Counseling : NEET UG काउंसलिंग में ऑल इंडिया कोटा की 15% सीटों का आवंटन एमसीसी करता है, जबकि बाकी 85% सीटें राज्य काउंसलिंग से मिलती हैं. दोनों की पात्रता, आरक्षण, रजिस्ट्रेशन और नियम अलग होते हैं.
मानसून सत्र: परिसीमन की हलचल के बीच एनसीपी-एसपी के 8 सांसदों संग पीएम मोदी से मिलीं सुप्रिया सुले
परिसीमन बिल पर समर्थन जुटाने की अटकलों के बीच, एनसीपी-एसपी की सुप्रिया सुले ने अपने आठ सांसदों के साथ प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की।
पुल को जैसे उठाकर रख दिया! तेज रफ्तार पानी का कहर; उत्तराखंड से आया वायरल VIDEO
उत्तराखंड के चमोली जिले में भारी बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ने से एक लोहे का पुल तेज बहाव में बह गया. घटना का वीडियो सामने आया है.
वहां कोई गोली नहीं चली, विपक्ष गुमराह कर रहा; जंतर-मंतर प्रोटेस्ट पर जेपी नड्डा का दावा
जेपी नड्डा ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही को बाधित करने का आरोप लगाया। नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी संसद और राष्ट्रीय विमर्श में रोजाना अपना मुद्दा बदलते रहते हैं। उनका उद्देश्य संवाद करना नहीं, बल्कि अराजकता पैदा करना है।
51 साल पहले फिल्म 'गीत गाता चल' में सुनाई दी एक चौपाई आज भी लोगों के बीच उतनी ही लोकप्रिय है. जसपाल सिंह की आवाज से लेकर रामानंद सागर की 'रामायण' और प्रभास की 'आदिपुरुष' तक, इस भक्ति गीत ने कई दौर देखे. लेकिन इसका जादू आज भी कायम है.
पढ़ें 10 अगस्त 2026 की शाम की बड़ी खबरें और अन्य समाचार
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने झारखंड में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है.
यूपी के मदरसों में फहराया जाएगा तिरंगा, फोटो-वीडियो भेजना भी जरूरी
उत्तर प्रदेश के सभी मदरसों में ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत तिरंगा यात्रा, राष्ट्रगान, देशभक्ति गीत, भाषण, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उनके योगदान पर परिचर्चा भी होगी.
UPI ने भारत में कैसे लगाई VISA और MasterCard को चपत?
आज के समय में हर छोटा-बड़ा लेन-देन UPI के जरिए ही हो रहा है. 10 साल में UPI ने सबसे बड़ी चोट डेबिट कार्ड को पहुंचाई है. आज डेबिट कार्ड सिर्फ ATM से कैश निकालने में हो रहा है.
अभिजीत दीपके रांची में पुलिस लाठीचार्ज पर बोले, पर दिल्ली जैसी तल्खी नहीं
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि बार-बार प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ ही इतनी बेरहमी क्यों की जाती है? विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…
रांची: विधानसभा गेट पर पुलिस का फिर लाठीचार्ज, छात्रों को खदेड़ा, VIDEO
रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस ने फिर लाठीचार्ज किया. झारखंड विधानसभा के बाहर डटे छात्रों जब नहीं हटे तो उन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजीं. लेकिन छात्र अभी भी विधानसभा गेट के पास धरना दे रहे हैं. छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद उन पर लाठीचार्ज हुआ. देखें वीडियो.
OPS पर सरकार का बड़ा जवाब, पुरानी पेंशन होगी बहाल?
पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति साफ कर दी है. सरकार फिलहाल OPS लागू करने पर विचार नहीं कर रही. साथ ही NPS में जमा राज्यों की रकम वापस करने का भी कोई कानूनी प्रावधान नहीं है. संसद में दिए जवाब से स्पष्ट है कि केंद्र फिलहाल NPS जारी रखने के पक्ष में है और OPS बहाली का कोई प्रस्ताव नहीं है.
पिता ने मोबाइल में गेम खेलने रोका तो बच्चे ने उठाया खौफनाक कदम, खत्म कर ली जीवन लीला
पिता ने अपने 11वीं में पढ़ने वाले बेटे को मोबाइल चलाने से रोका तो बेटे काफी गुस्सा हो गया. इसके बाद उसने खौफनाक कदम उठाते हुए अपनी जान दे दी.

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