चूड़ी, पेटीकोट और जूतों की माला: किसानों ने ठगों को सिखाया सबक
महोबा जिले के नटर्रा गांव में फसल सर्वे के नाम पर अवैध वसूली करने वाले दो सर्वेयरों को महिला किसानों ने चूड़ी, पेटीकोट पहनाकर और जूतों की माला डालकर गांव में घुमाया. किसानों से दो लाख रुपये ऐंठने के आरोप में ग्रामीणों ने दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया.
मोबाइल नेटवर्क नहीं आया तो ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, टावरकर्मी को खंभे से बांधा
फतेहपुर के हरदौली गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने टावर कर्मी को खंभे से बांध दिया. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस जांच में जुटी है. पढ़ें पूरी कहानी.
सपा और भाजपा की महिला नेताओं के बीच जमकर हुआ हाथापाई
हमीरपुर के कुरारा कस्बे में नाली निर्माण को लेकर सपा की पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष माया वाल्मीकि और भाजपा की वर्तमान अध्यक्ष आशारानी कबीर के बीच विवाद हो गया। दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद हाथापाई हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
गणेश पूजा में शराब की बिक्री पर रोक लगाने से भड़का HC, जज बोले- 10 दिनों में तो बीमार हो जाएंगे…
इन याचिकाओं में पुणे कलेक्टर के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेश उत्सव के दौरान 10 दिनों तक शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई थी।
लॉन्च हुआ आईफोन 18 और 18 प्रो मैक्स, जानें फीचर्स
एप्पल के नए आईफोन का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया .टेक दिग्गज एप्पल ने अपने नए स्मार्टफोन सीरीज आईफोन 18 और आईफोन 18 प्रो मैक्स को मार्केट में आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है. हर साल की तरह इस बार भी इस फोन को लेकर लोगों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है.
रास्ते में कार रोकी, मवेशी को उठाकर अंदर डाला और फरार हो गए चोर
पश्चिम बंगाल के आसनसोल में मवेशी चोरी की एक वारदात CCTV कैमरे में कैद हो गई। सालानपुर थाना क्षेत्र के पीठाकेयारी इलाके में चार पहिया वाहन से आए कुछ लोग घर के सामने बंधे मवेशी को कथित तौर पर कार में डालकर फरार हो गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
'पाकिस्तान में है क्या गुजरात?', भड़के परेश रावल, जानिए मामला
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह पहली बार दिल्ली से बाहर गुजरात में होने जा रहा है. इस पर एक्टर परेश रावल ने मेजबानी करने में गुजरात की भूमिका का बचाव किया है.
नकली पनीर पर तुकाराम मुंढे का बड़ा वार! 10 टन जब्त, 5000 किलो खोया भी पकड़ा
Pune Fake Paneer: पुणे के शुक्रवार पेठ में FDA ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 10 टन संदिग्ध नकली पनीर और 5 हजार किलो संदिग्ध मिलावटी खोया जब्त किया। खेप के कर्नाटक से आने का संदेह है। लैब रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
अचानक बदला दिल्ली का मौसम... कई इलाकों में झमाझम बारिश
राजधानी के कई हिस्सों में शुक्रवार को तेज बारिश हुई. लगातार हो रही बारिश से सड़कों पर पानी भरने और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से सावधानी से गाड़ी चलाने और अतिरिक्त समय लेकर निकलने की अपील की है.
iPhone 18 प्रो और iPhone 18 प्रो मैक्स की जानें कीमत
आईफोन-18 प्रो और आईफोन-18 प्रो मैक्स मॉडल्स की कीमतें सामने आ चुकी हैं. शुरुआती कीमत के तौर पर आईफोन प्रो के लिए लगभग 1,65,000 रुपये तैयार रखने होंगे. वहीं, अगर प्रो मैक्स वर्जन लेने का है, तो इसकी कीमत सीधे तौर पर 1,79,900 रुपये से लेकर 1,80,000 रुपये तक है.
मंगल-गुरु की युति, 6 राशियों को फायदा, 56 दिन तक तरक्की के योग
Mangal Gochar 2026: 18 सितंबर से कर्क राशि में मंगल का गोचर होगा। मंगल-गुरु की युति से मेष समेत 6 राशियों को 56 दिनों तक धन, करियर और कारोबार में लाभ मिल सकता है.
कौन हैं प्रिंस रहीम आगा खान पंचम, जिनकी भारत दौरे में काफी चर्चा हो रही?
स्विट्जरलैंड के जेनेवा में जन्मे और 1.5 करोड़ इस्माइली मुसलमानों के 50वें इमाम प्रिंस रहीम आगा खान पंचम इन दिनों भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी समेत शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर स्वास्थ्य, कृषि और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में भारत-AKDN साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की.
दीवारों की सीलन से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
बारिश में सीलन और लीकेज के कारण दीवारों का पेंट फूलने या उखड़ने लगता है। नया पेंट कराने से पहले नमी की वजह ठीक करें, फिर खराब पेंट और प्लास्टर हटाकर दरारें भरें। दीवार सूखने के बाद जरूरत अनुसार वॉटरप्रूफिंग और प्राइमर लगाएं।
सहारनपुर मस्जिद: ₹6.41 करोड़ की पेनाल्टी पर स्टे, HC ने सरकार से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में राज्य सरकार को तीन सप्ताह में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने मस्जिद पर लगाए गए ₹6.41 करोड़ के जुर्माने पर अंतरिम रोक लगाई. मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी.
हूतियों ने मोचा शहर के बाद अब एक आईलैंड पर किया कब्जा
यमन का मयून द्वीप अपनी बंजर रेत और चट्टानी ज़मीन की वजह से पुराने ज़माने जैसा लगता है. हालांकि बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में इसकी रणनीतिक स्थिति ने इसे चल रहे संघर्ष के केंद्र में ला खड़ा किया है.ये द्वीप बॉब अल मंदेब को दो भागों में बांटता है.
नंदीग्राम में शुभेंदु का इमोशनल कार्ड? मारे गए PA की मां को टिकट की चर्चा
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा, क्योंकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जीत के बाद भवानीपुर सीट रखने का फैसला किया. चर्चा है कि इस सीट से BJP उनके दिवंगत सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हासी रथ को उम्मीदवार बना सकती है. हासी रथ ने कहा कि वे मुख्यमंत्री को ही अपना अभिभावक मानती हैं और उनका जो भी फैसला होगा, वह उन्हें मंजूर होगा.
झारखंड में 11वीं की छात्रा का एकतरफा प्यार में हुआ अपहरण
झारखंड के गुमला में एकतरफा प्यार में 18 वर्षीय छात्रा के अपहरण का मामला सामने आया है. आरोप है कि सीनियर ने चार साथियों के साथ मिलकर बोलेरो से छात्रा को अगवा किया और अरंगी जंगल ले गया. छात्रा को रातभर वहां रखा गया. सूचना मिलते ही सिसई पुलिस ने सुबह चार बजे उसे सकुशल बरामद कर लिया. मुख्य आरोपी समेत पांच युवकों को गिरफ्तार कर बोलेरो जब्त की गई.
ऑनलाइन शॉपिंग में नहीं चलेगा फर्जी डिस्काउंट का खेल, बदल रहा नियम
भारत सरकार अब ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फर्जी डिस्काउंट दिखाकर लोगों को गुमराह करने वाले फेक डिस्काउंट पर लगाम लगाने वाली है. अब सरकार नए नियम लेकर आ रही है, जिसके बाद कस्टमर के लिए ट्रांस्पेरेंसी बेहतर होगी. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
महाराष्ट्र में हादसा: ट्रक और जीप की टक्कर, छत्तीसगढ़ के 9 लोगों की मौत
महाराष्ट्र के भंडारा जिले में शुक्रवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ के 9 लोगों की मौत हो गई. दरअसल, यहां लाखनी तालुका के पिंपलगाव के पास नेशनल हाइवे पर मजदूरों से भरी गाड़ी की ट्रक से टक्कर हो गई थी. पुलिस का कहना है कि मृतकों में 6 महिलाएं और 3 बच्चे शामिल हैं.
झारखंड की राजधानी रांची से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राज्य सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। रांची के जिला स्कूल परिसर में कोतवाली थाने के ठीक पीछे एक पुरानी और जर्जर पानी की टंकी को तोड़ने का काम चल रहा था, इसी दौरान वह अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। इस भयानक हादसे में मलबे के नीचे दबने से दो गरीब मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। लेकिन इस पूरी घटना के बाद जब मीडिया और स्थानीय लोगों की नजर घटनास्थल पर लगाए गए आधिकारिक 'इमरजेंसी कॉन्टैक्ट बोर्ड' (आपातकालीन संपर्क पट्ट) पर पड़ी, तो सरकारी तंत्र की लापरवाही का ऐसा नजारा देखने को मिला जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। जान जोखिम में डालकर काम कर रहे मजदूरों के लिए लगाए गए उस बोर्ड पर मोबाइल नंबरों के केवल शुरुआती 4 डिजिट ही लिखे हुए थे और बाकी के अंकों पर क्रॉस का निशान लगा हुआ था, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर ऐसी स्थिति में कोई मजदूर या आम नागरिक आपातकाल के दौरान मदद के लिए कैसे संपर्क करता?जर्जर पानी की टंकी ढहाने के दौरान हुआ हादसा और दो मजदूरों की गई जानप्राप्त जानकारी के अनुसार, रांची के व्यस्त इलाके में स्थित जिला स्कूल परिसर में पुरानी पानी की टंकी को ध्वस्त कर उसकी जगह नई संरचना का निर्माण कराया जाना था। इस खतरनाक काम को अंजाम देने के लिए जिन सुरक्षा मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए था, उन्हें पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया था। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा पहले ही संबंधित एजेंसी को कड़ी चेतावनी दी गई थी, लेकिन ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते बुधवार की शाम यह हादसा हो गया। टंकी का भारी-भरकम ढांचा जब अचानक नीचे गिरा, तो वहां काम कर रहे मजदूर मलबे के नीचे दब गए। इस दुर्घटना में पलामू जिले के रहने वाले दो मजदूरों सत्या भुइयां और मैथली शरण महतो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।इमरजेंसी बोर्ड बना महज दिखावा, अधिकारियों के नंबरों पर लगे थे क्रॉसहादसे के बाद जब घटनास्थल की पड़ताल की गई तो वहां टंगे उस सूचना बोर्ड ने सबका ध्यान खींचा जिसे किसी भी बड़ी निर्माण साइट पर सुरक्षा और आपातकालीन मदद के लिए अनिवार्य रूप से लगाया जाता है। उस बोर्ड पर कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer), साइट इंजीनियर, ठेकेदार के प्रतिनिधि और स्थानीय पुलिस स्टेशन तक के संपर्क नंबर अधूरे दर्ज थे। हैरानी की बात यह है कि सभी मोबाइल नंबरों के केवल शुरुआती चार अंक लिखकर बाकी के डिजिट्स पर क्रॉस का निशान लगा दिया गया था। बोर्ड पर केवल एम्बुलेंस के लिए '108' नंबर ही पूरा लिखा हुआ नजर आया। इस तरह के अधूरे और मजाक बन चुके इमरजेंसी बोर्ड को देखकर यह साफ हो गया कि प्रशासन कागजों पर तो सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट होती है।सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे बड़े सवालइस दर्दनाक हादसे के बाद झारखंड सरकार और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर आम जनता और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा तीखे सवाल दागे जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब जर्जर और खतरनाक ढांचे को गिराने का इतना बड़ा जोखिम भरा काम चल रहा था, तब वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था? यदि मौके पर काम कर रहे मजदूरों या किसी अन्य व्यक्ति को तुरंत किसी अधिकारी से मदद मांगनी पड़ती, तो वे इन अधूरे नंबरों के सहारे किससे संपर्क करते? इस तरह की लचर व्यवस्था यह साबित करती है कि कागजी निर्देशों के बाद जमीन पर उसकी मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है, जिसका खामियाजा अंततः गरीब और बेकसूर मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।जिला प्रशासन की जांच कमेटी और दोषियों पर कार्रवाई की मांगघटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और उपायुक्त (DC) स्तर पर हरकत में आते हुए एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर सुरक्षा नियमों की अनदेखी के लिए कौन जिम्मेदार था। स्थानीय लोगों और मजदूरों के परिजनों ने मांग की है कि इस लापरवाही के लिए दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। बहरहाल, यह हादसा सिर्फ दो मजदूरों की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है जो विकास और निर्माण के नाम पर इंसानी जिंदगियों को ताक पर रख देती है।
BRICS के लिए दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, देखें ट्रैफिक एडवाइजरी
दिल्ली में BRICS समिट के लिए यातायात व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं. सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने 22 मुख्य पॉइंट पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया है, जिसके कारण लगभग 35 सड़कें पूरी तरह बंद रहेंगी. इस दौरान दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है.
बाजार से क्यों खरीदना, घर पर बनाएं ताजा और कुरकुरी खट्टा-मीठा नमकीन
Khatta-Meetha Namkeen: अगर आप भी शाम की चाय के साथ खट्टा-मीठा नमकीन खाना पसंद करते हैं तो इसे बाजार से क्यों खरीदना. यहां हम आपको घर पर ही ताजी, कुरकुरी और शुद्ध नमकीन की रेसिपी बता रहे हैं.
'क्रेडिट ले लिया...', ईशान ने DRS पर उड़ाया वैभव का मजाक, VIDEO
दलीप ट्रॉफी 2026 का खिताब जीतने के बाद वैभव सूर्यवंशी और ईशान किशन का वीडियो वायरल हो रहा है. जिसे एक्स पर बीसीसीआई डोमेस्टिक अकाउंट से शेयर किया गया. इस वीडियो में वैभव से बात रही थी, लेकिन ईशान किशन की एंट्री ने इसे और मजेदार बना दिया है.
Bihar Medical Education Update: बिहार में PG Doctors का Stipend बढ़ा, जानिए हर साल कितना होगा फायदा
बिहार सरकार ने राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों और दंत चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई कर रहे प्रशिक्षु चिकित्सकों के मासिक मानदेय में वृद्धि की है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रथम वर्ष के स्नातकोत्तर छात्रों का मासिक मानदेय 82,000 रुपये से बढ़ाकर 92,800 रुपये, द्वितीय वर्ष के छात्रों का मानदेय 90,200 रुपये से बढ़ाकर 1,02,000 रुपये तथा तृतीय वर्ष के छात्रों का छात्रों का मानदेय 99,220 रुपये से बढ़ाकर 1,12,200 रुपये कर दिया गया है। बयान में कहा गया है कि संशोधित मानदेय दरें एक जनवरी, 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी और इसका लाभ पूर्व प्रभाव से मिलेगा।स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा, “पीजी छात्र भविष्य के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मानदेय में वृद्धि से उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा तथा चिकित्सा शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।” उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल चिकित्सा संस्थानों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसे विशेषज्ञ चिकित्सकीय मानव संसाधन का विकास करना है जो लोगों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सके।
DUSU Election: ABVP ने उतारा अपना 'केंद्रीय पैनल', Yash Dabas अध्यक्ष पद के प्रत्याशी घोषित
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव 2026-27 के लिए अपने पैनल का ऐलान कर दिया है, जिससे एक और अहम छात्र चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। संगठन ने X पर एक पोस्ट के ज़रिए अहम पदों के लिए चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। यश डबास को प्रेसिडेंट पद का उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि इशू मौर्य वाइस प्रेसिडेंट पद के लिए चुनाव लड़ेंगे। रिया छावड़ी सेक्रेटरी पद के लिए चुनाव लड़ेंगी और लक्ष्यराज सिंह को जॉइंट सेक्रेटरी पद का उम्मीदवार बनाया गया है। इसे भी पढ़ें: Dhirendra Shastri के बयान के बीच Suvendu Adhikari ने खाई मछली, BJP बोली- मांसाहार विवाद अब खत्म इस घोषणा से चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले ही ये चारों नाम चर्चा में आ गए हैं और उम्मीद है कि ये उम्मीदवार दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में छात्रों से संपर्क करेंगे। आने वाले दिनों में उनके अलग-अलग एकेडमिक, कैंपस और ऑर्गनाइज़ेशनल प्रोफ़ाइल इस कैंपेन को आकार दे सकते हैं। DUSU चुनाव देश के सबसे अहम छात्र चुनावों में से एक बने हुए हैं। इसमें शामिल राजनीतिक संगठनों की वजह से यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर भी इन पर लोगों का ध्यान रहता है। ABVP द्वारा अपना पूरा पैनल घोषित किए जाने के बाद, अब सारा ध्यान चुनाव प्रचार, छात्रों से जुड़े मुद्दों और विरोधी गुटों के साथ मुकाबले पर केंद्रित होगा।दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के चुनाव पास आ रहे हैं। ऐसे में सत्य निकेतन की घटना के बाद छात्रों की सुरक्षा और रहने की सुविधा जैसे मुद्दे कैंपेन के मुख्य विषय बन गए हैं। इसी बीच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आज सात संभावित उम्मीदवारों के लिए नॉमिनेशन फाइल किए। इसे भी पढ़ें: Karnataka में Shivakumar सरकार के 100 दिन बिना उपलब्धि के बीते: Vijayendra आलोक अत्री, इशू मौर्य, लक्ष्य राज सिंह, नितिन तंवर, रिया छावरी, तान्या मावी और यश डबास ने अपने नॉमिनेशन पेपर जमा किए। स्क्रूटनी के बाद, इन संभावित उम्मीदवारों में से ही प्रेसिडेंट, वाइस-प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी के लिए फाइनल उम्मीदवारों को चुना जाएगा। ABVP ने कैंपस से जुड़े मुद्दों पर छात्रों की राय जानने के लिए यूनिवर्सिटी में अपने PG से PG और क्लास से क्लास संपर्क अभियान को और तेज़ कर दिया है। अपने आखिर कब तक? अभियान के तहत, संगठन सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देते हुए पेइंग गेस्ट (PG) आवासों का सर्वे कर रहा है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
जानिए क्यों खास है शी जिनपिंग का भारत दौरा?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाना और आपसी विश्वास को बहाल करना है.
इन 681 सड़कों पर सबसे पहले भरेंगे गड्ढे, क्या योगी सरकार का नया प्लान
उत्तर प्रदेश में आगामी त्योहारों से पहले 681 महत्वपूर्ण मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त करने की तैयारी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बारिश और बाढ़ से खराब सड़कों को तत्काल मोटरेबल बनाने के निर्देश दिए हैं. बरसात खत्म होने के बाद जरूरत के अनुसार इनका स्थायी नवीनीकरण होगा. स्कूल, अस्पताल, बाजार और सरकारी कार्यालयों तक जाने वाली सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं.
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत की मेहमाननवाजी खास: दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधि सिखुलिले
नई दिल्ली, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचीं दक्षिण अफ्रीका की स्वाटेक डिफेंस एंड एयरोस्पेस की अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि सिखुलिले मत्सेत्फवा ने सम्मेलन और भारत की मेहमाननवाजी को लेकर खुशी जताई।
Shivraj Singh Chouhan ने Karnataka सरकार के Vande Mataram फैसले को असंवैधानिक बताया
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाने के कर्नाटक सरकार के फैसले की शुक्रवार को आलोचना की और इसे असंवैधानिक व देश का अपमान करार दिया। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने आदेश दिया है कि राज्य में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को छोड़कर अन्य सभी सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो अंतरे गाए जाएं। छत्तीसगढ़ के एक दिवसीय दौरे पर यहां स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पहुंचने के बाद चौहान ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करते-करते अब देश का विरोध करने लगी है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और दुनिया में बढ़ते सम्मान को पचा नहीं पा रहा है। चौहान ने कर्नाटक सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताया और कांग्रेस पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘संसद ने विधेयक पारित किया और इसे कानून बनाया। क्या कांग्रेस संविधान से ऊपर है? क्या वह संसद से ऊपर है? यह फैसला असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और अनुचित है।’’चौहान ने कर्नाटक सरकार के फैसले को ‘‘भारत माता’’ का अपमान बताते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने उन क्रांतिकारियों को प्रेरित किया था, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री द्वारा राष्ट्रीय गीत का पूरा संस्करण गाने की सराहना कराते हुए कहा कि कांग्रेस को ऐसे कदम पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘इसके लिए जनता कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेगी।’’कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर उठाए गए सवालों के बारे में पूछे जाने पर चौहान ने कहा कि कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग अक्सर भारत की उपलब्धियों पर सवाल उठाता है और ‘‘देश का अपमान करता है।’’उन्होंने कहा, ‘‘यह एक बहुत खास मौका है, जब दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों के नेता नयी दिल्ली में भारत की पवित्र धरती पर एकत्र हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में तैयारियां शानदार हैं और पूरी दुनिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देख रही है।’’चौहान ने कहा, ‘‘लेकिन जब भी देश का सम्मान और कद बढ़ता है, तो कांग्रेस और चिदंबरम जी बेचैन हो जाते हैं। कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग ऐसा है, जो भारत की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाता रहता है और देश का अपमान करता है।’’उन्होंने कांग्रेस नेताओं सैम पित्रोदा और मणिशंकर अय्यर पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि उन्होंने बार-बार ऐसे बयान दिए, जिनसे देश की बदनामी हुई। चौहान ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री का विरोध करते-करते वे देश का विरोध करने लगे हैं। वे भारत की प्रगति और विकास से कभी खुश नहीं हो सकते।’’उन्होंने छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने राज्य को ‘‘बर्बाद’’ कर दिया और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के घर बनाने के लिए केंद्र द्वारा भेजी गई राशि रोक दी। चौहान ने कहा, ‘‘कांग्रेस सरकार के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा गरीबों के घरों के लिए भेजा गया पैसा भी रोक दिया गया था। घर नहीं बन पाए। तब भाजपा ने ‘मोर आवास मोर अधिकार’ (मेरा आवास, मेरा अधिकार) आंदोलन शुरू किया। हमारे कार्यकर्ताओं को लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा और जेल जाना पड़ा, लेकिन हमारा संकल्प था कि हर गरीब व्यक्ति के पास घर हो।’’चौहान ने कहा कि वह शुक्रवार को बाद में सक्ती जिले में प्रस्तावित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को 3.65 लाख से अधिक घरों के लिए मंजूरी पत्र सौंपेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में गरीब परिवारों के लिए 17 लाख से अधिक घरों को मंजूरी दी गई है। हमारा संकल्प हर गरीब व्यक्ति को पक्का घर बनाने के लिए धन उपलब्ध कराना है। राज्य में हर दिन लगभग 1,600 नए घर बनाए जा रहे हैं।’’चौहान ने कहा कि विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी ‘विकसित भारत-जी राम जी’ के तहत केंद्र का हिस्सा 3,300 करोड़ रुपये से अधिक है और राज्य के योगदान को मिलाकर छत्तीसगढ़ में पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लोगों के कल्याण के लिए केंद्र ने लगभग 29 हजार करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।’’चौहान ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने संकल्प लिया था कि राज्य 31 मार्च तक नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। अब यह मुक्त हो चुका है। बस्तर में अब बारूदी सुरंगों का डर नहीं है और वहां विकास की नयी गंगा बह रही है।
ब्रिक्स सम्मेलन में व्यापार और तकनीक को मिलेगी नई गति: प्रवीण खंडेलवाल
नई दिल्ली, दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर बताया।
चांदी पर ‘सिल्वर’ नहीं, गिरावट का कहर! 2 दिन में ₹12,600 तक टूटी कीमत, सोना भी फिसला
अमेरिकी महंगाई के मजबूत आंकड़ों के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ गया। घरेलू वायदा बाजार में चांदी दो कारोबारी दिनों में करीब ₹12,600 प्रति किलो तक टूटी। 11 सितंबर को MCX पर दिसंबर चांदी वायदा कारोबार के दौरान ₹2.30 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया, जबकि अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स करीब ₹1.51-1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में फिसला। अमेरिकी PPI अगस्त में 0.4 प्रतिशत बढ़ा।
ST/SC विभाग के दो ऑडिटर लाखों रुपये के संदिग्ध कैश के साथ पकड़े गए, सामने आया नोटों के बंडल का Video
ओडिशा विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई ! ST/SC विभाग के दो ऑडिटर 14.38 लाख रुपये के संदिग्ध कैश के साथ पकड़े गए
जूडो में ब्लैक बेल्ट, जासूसी में माहिर, कितने पढ़े-लिखे हैं पुतिन?
BRICS समिट: लेनिनग्राद के एक तंग कम्यूनल अपार्टमेंट में पली-बढ़ी यह शख्सियत कैसे सड़कों की लड़ाई से जूडो की मैट, केजीबी (KGB) की अंडरकवर जासूसी और आखिरकार क्रेमलिन के तख्त तक पहुंची? आइए जानते हैं रूस के 'सुप्रीम लीडर' व्लादिमीर की एजुकेशन और उनके असाधारण सफर की पूरी असाधारण कहानी.
Psychology Facts: सुंदर नोटबुक देखते ही खरीदने का मन क्यों करता है?
Psychology Facts: सुंदर नोटबुक और पेन खरीदने की आदत सिर्फ स्टेशनरी के शौक से जुड़ी नहीं होती, इसके पीछे व्यक्ति की रचनात्मकता, पसंद, पहचान और भावनात्मक जुड़ाव भी हो सकता है.
BRICS पर सरकार का एकाधिकार नहीं: Salman Khurshid ने Delhi Summit में विपक्ष को शामिल करने की मांग की
सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने गुरुवार को कहा कि 18वें ब्रिक्स समिट में भारत का प्रतिनिधित्व सिर्फ़ केंद्र सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश का होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले इस समिट के लिए बातचीत में विपक्ष को भी शामिल किया जाए। ANI से बात करते हुए खुर्शीद ने ब्रिक्स के महत्व पर ज़ोर दिया और कहा कि यह समूह दुनिया की आबादी, व्यापार और उभरती हुई आर्थिक ताकत के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि हर कोई ब्रिक्स के महत्व को समझता और मानता है। जब दुनिया की आधी आबादी ब्रिक्स से जुड़ी हो, तो आप बस आँखें बंद करके उस आधी आबादी को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। इसे भी पढ़ें: Dhirendra Shastri के बयान के बीच Suvendu Adhikari ने खाई मछली, BJP बोली- मांसाहार विवाद अब खत्म खुर्शीद ने बताया कि BRICS उन उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है जिनके भविष्य में ग्लोबल इकॉनमी पर छा जाने की उम्मीद है, साथ ही यह छोटे विकासशील देशों और 'ग्लोबल साउथ' के देशों का भी प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि ये वे अर्थव्यवस्थाएं हैं जो आने वाले समय में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं बनेंगी। साथ ही, ये छोटे देशों और 'ग्लोबल साउथ' का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। BRICS को विकसित देशों और विकासशील देशों के बीच एक संभावित पुल बताते हुए खुर्शीद ने कहा कि BRICS को एक पुल के तौर पर भी देखा जा सकता है—ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच का पुल, और वह पुल BRICS है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह अत्यधिक विकसित, विकासशील और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को आपस में जोड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता मिलने से भारत की ज़िम्मेदारी बढ़ गई है और नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदें भी हैं। इसे भी पढ़ें: Karnataka में Shivakumar सरकार के 100 दिन बिना उपलब्धि के बीते: Vijayendra खुर्शीद ने कहा कि अगर हम इस भूमिका को पूरी तरह से निभाते हैं—और आज हमसे ऐसी उम्मीदें हैं; दुनिया चाहती है कि भारत इस भूमिका को निभाए—तो हमारी अध्यक्षता में यह भूमिका भारत के लिए और भी अहम हो जाती है। इसीलिए हर कोई बड़ी उम्मीदों के साथ भारत की ओर देख रहा है। कांग्रेस नेता ने आग्रह किया कि ब्रिक्स की अध्यक्षता को मौजूदा सरकार की पहल से आगे बढ़कर एक राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम विपक्ष में हैं और हमें उम्मीद है कि यह प्रतिनिधित्व सिर्फ़ सरकार का नहीं होगा; यह पूरे देश का, पूरे भारत का प्रतिनिधित्व होगा। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
कौन हैं नाजिया इलाही खान? नीशु आजाद के खिलाफ पुलिस से की शिकायत, पैसों को लेकर हो सकती बड़ी दिक्कत
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कार्यकर्ता नीशु आजाद की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। अब सुप्रीम कोर्ट की एडवोक
UP: सभी जिलों में लागू होगी दुग्ध योजना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी सरकार
यूपी में ग्रामीण महिलाओं को दुग्ध उत्पादन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है. 42 जिलों के 7,220 गांवों में 3.94 लाख महिलाएं इससे जुड़ी हैं और 72,669 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं. योजना को सभी 75 जिलों तक पहुंचाने और महिलाओं, किसानों व युवाओं को जोड़ने पर जोर है.
₹8 लाख लोन पर 4% सब्सिडी, ₹1.80 लाख का फायदा! काम की है ये योजना
शहर में किराये के मकान में रह रहे हैं और अपना घर खरीदना चाहते हैं? प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 आपके लिए मददगार हो सकती है. सरकार ने इस योजना के तहत करीब 1 करोड़ शहरी परिवारों को पक्का घर देने का लक्ष्य रखा है.
नागपुर: SBI में कर्मचारियों की आंखों में झोंका मिर्च, 4 लाख लूटकर भागा
महाराष्ट्र के नागपुर में SBI की शाखा में दिनदहाड़े लूट की वारदात सामने आई है. आरोपी ने कथित तौर पर बैंक कर्मचारी की आंखों में मिर्च पाउडर झोंककर करीब 4 लाख रुपये लूट लिए. CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपी को करीब 30 मिनट के भीतर पकड़ लिया. पुलिस का कहना है कि लूटी गई रकम बरामद कर ली गई है.
CM Yogi Adityanath ने बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत के दिए निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बारिश से खराब सड़कों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करें और बरसात के बाद नवीनीकरण का कार्य कराएं। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बारिश अभी जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि आगामी त्योहारों में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होगी और ऐसे में प्रमुख मार्गों पर आवागमन में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री ने त्योहारों से पहले आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण के काम पूरे करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का कार्य केवल खानापूर्ति न हो बल्कि आवगमन के लायक बनाया जाए और बरसात समाप्त होने के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए। बयान के मुताबिक बैठक में अधिकारियों ने बताया कि अतिवृष्टि के साथ ही एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग, रेलवे आदि की निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित कर गड्ढा मुक्त के विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे। बयान के मुताबिक प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। साथ ही मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया। बयान के मुताबिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि गड्ढा मुक्ति अभियान में नौ विभागों के मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। वर्तमान लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मांगों को गड्ढा मुक्त किया जाना है, जिसमें अब तक करीब 5,751 किलोमीटर पर काम पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब पांच हजार किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण में करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई। योगी ने कहा कि अधिक आवागमन वाली सड़कों पर प्राथमिकता से कार्य किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए। बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास विभाग जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद तथा राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम उपस्थित रहे।
आफ्टर-केयर युवाओं के सशक्तीकरण पर मंथन: स्वनाथ सम्मेलन-2026
नई दिल्ली, नई उड़ान ट्रस्ट, विश्व मांगल्य स्वनाथ परिषद, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय तथा दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त सहयोग से 'स्वनाथ सम्मेलन-2026: अनाथ से स्वनाथ की ओर' का आयोजन किया गया।
झारखंड के प्रशासनिक गलियारों से राज्य के युवाओं और नवनियुक्त अधिकारियों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है। झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) के कड़े रुख और स्पष्ट निर्देशों के बाद राज्य सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए आदेश जारी कर दिया है कि जेएसएससी-सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा के माध्यम से विभिन्न विभागों में चयनित हुए 1340 अधिकारी पहले की तरह ही अपने पदों पर कामकाज जारी रखेंगे। कुछ समय पहले राज्य सरकार द्वारा परीक्षा और विज्ञापनों को रद्द किए जाने के बाद इन अधिकारियों के भविष्य और करियर पर अचानक संकट के बादल मंडराने लगे थे, लेकिन अब प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद इन सभी अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। इस पूरे घटनाक्रम और अदालत के आदेश से जुड़े हर एक पहलू को आइए विस्तार से समझते हैं।क्या था पूरा मामला और क्यों रद्द की गई थी परीक्षा?यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL)-2023 के जरिए चयनित लगभग 1340 अधिकारियों को विभिन्न विभागों में नियुक्त किया गया था। बाद में परीक्षा प्रक्रिया, पेपर लीक के आरोपों और सीआईडी जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार और मंत्रिमंडल ने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द करने का बड़ा फैसला ले लिया था। सरकार के इस अचानक लिए गए फैसले के बाद न केवल इन 1340 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त होने की स्थिति पैदा हो गई थी, बल्कि कई विभागों में उनके वेतन भुगतान और प्रशासनिक कार्यों पर भी असमंजस की स्थिति बन गई थी। इस अप्रत्याशित कार्रवाई के खिलाफ प्रभावित अधिकारियों ने तुरंत झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सरकार के इस कदम को चुनौती दी।हाईकोर्ट का ऐतिहासिक दखल और 'प्राकृतिक न्याय' का सिद्धांतइस मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट की अदालत ने राज्य सरकार के उस फैसले पर गंभीर चिंता जताई जिसके तहत बिना पर्याप्त और पारदर्शी प्रक्रिया के इतनी बड़ी संख्या में नियमित नियुक्तियों को रद्द किया जा रहा था। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रथम दृष्टया किसी भी नियमित नियुक्ति को 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत' (Principles of Natural Justice) का पालन किए बिना और पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता। इस तार्किक और न्यायसंगत आधार पर हाईकोर्ट ने सरकार की उस अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी जिसके जरिए CGL-2023 का विज्ञापन और उससे जुड़ी नियुक्तियां रद्द की गई थीं। अदालत के इस सख्त और स्पष्ट निर्देश के बाद सरकार के लिए अपने फैसले को फौरी तौर पर लागू करना असंभव हो गया और प्रभावित कर्मियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगी।कार्मिक विभाग का आधिकारिक पत्र और सभी जिलों के डीसी को निर्देशअदालत के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग ने एक आधिकारिक और विस्तृत पत्र राज्य के सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, जेएसएससी के सचिव, प्रमंडलीय आयुक्तों और सभी जिलों के उपायुक्तों (DCs) को भेज दिया है। इस निर्देश में साफ कर दिया गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत ये 1340 CGL अधिकारी पहले की तरह ही अपने-अपने कार्यालयों में पूर्ववत कार्य करते रहेंगे। इस आधिकारिक आदेश के जारी होने से उन तमाम प्रशासनिक अड़चनों और संशय पर पूरी तरह विराम लग गया है, जो पिछले कुछ दिनों से विभागों के भीतर चर्चा का विषय बनी हुई थीं। अब इन अधिकारियों का रुका हुआ वेतन और अन्य प्रशासनिक कामकाज भी सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगा, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में स्थिरता लौट आई है।प्रशासनिक और कानूनी मोर्चे पर आगे की क्या है तैयारीयद्यपि हाईकोर्ट ने फिलहाल राज्य सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाते हुए इन अधिकारियों को अपने पदों पर काम जारी रखने की अनुमति दे दी है, लेकिन इस मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को सीआईडी जांच और अब तक की गई कार्रवाई से संबंधित विस्तृत ब्योरा देते हुए अपना जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस पूरे प्रकरण पर अगली सुनवाई की तारीख भी निर्धारित कर दी गई है, जहां दोनों पक्षों की दलीलों और सरकार के जवाब के आधार पर आगे की कानूनी दिशा तय होगी। तब तक के लिए इन 1340 अधिकारियों का अपने पदों पर बने रहना और पहले की तरह कार्य करना झारखंड के प्रशासनिक ढांचे के लिए एक बड़ी राहत की बात है।
झारखंड के जंगलों की हसीन वादियों और पहाड़ियों के बीच स्थित, देश भर में 'आईएएस-IPS की फैक्ट्री' के नाम से मशहूर ऐतिहासिक नेतरहाट आवासीय विद्यालय (Netarhat Residential School) इन दिनों अपनी किसी शानदार शैक्षणिक उपलब्धि या परीक्षा परिणामों के चलते नहीं, बल्कि भीतर मचे भारी घमासान के कारण सुर्खियों में आ गया है। इस प्रतिष्ठित आवासीय शिक्षण संस्थान में अचानक उपजे प्रशासनिक और प्रबंधकीय गतिरोध के चलते वहां पढ़ रहे मेधावी छात्रों से लेकर अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षक तक गहरी असमंजस की स्थिति में फंस गए हैं। अनुशासन, उत्कृष्टता और कड़े नियमों के लिए पहचाने जाने वाले इस स्कूल के गलियारों में इन दिनों केवल भविष्य की अनिश्चितता और प्रबंधन के फैसलों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। देश के कोने-कोने से चुनकर आए उन होनहार बच्चों के सपनों पर अचानक मंडराते इस संकट के पीछे आखिर क्या वजह है और क्यों इस ऐतिहासिक संस्थान की साख दांव पर लगी है, आइए इस पूरे विवाद के हर एक पहलू पर गहराई से नजर डालते हैं।नेतरहाट स्कूल का गौरवशाली इतिहास और देश निर्माण में इसका अतुलनीय योगदानइस घमासान के कारणों को टटोलने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर नेतरहाट आवासीय विद्यालय भारतीय शिक्षा जगत में इतना खास क्यों माना जाता है। ब्रिटिश काल के बाद स्थापित इस अनूठे गुरुकुल जैसी शैली वाले आवासीय संस्थान ने देश को एक से बढ़कर एक बेहतरीन नौकरशाह, वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। यहाँ की कठोर प्रवेश परीक्षा पास करके आने वाले छात्रों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। यही कारण है कि जब ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान के भीतर किसी प्रकार की प्रशासनिक उठापटक या विवाद की खबरें बाहर आती हैं, तो झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के बुद्धिजीवियों और एलुमिनाई (Alumni) के बीच चिंता की लहर दौड़ जाती है।प्रशासनिक फैसलों और प्रबंधन की नीतियों से उपजा वर्तमान गतिरोधहाल के दिनों में स्कूल के अंदर प्रशासनिक स्तर पर लिए गए कुछ ऐसे कड़े और अचानक फैसले सामने आए हैं, जिन्होंने शिक्षकों और स्कूल के संचालन तंत्र के बीच गहरी खटास पैदा कर दी है। बताया जा रहा है कि विद्यालय की स्वायत्तता, शिक्षकों की नियुक्तियों और छात्रों के दैनिक संचालन से जुड़े मामलों में बाहरी हस्तक्षेप और प्रबंधन के मनमाने रवैये के कारण यह विवाद धीरे-धीरे सुलगता हुआ अब सतह पर आ गया है। शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग इन नीतियों के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज करा रहा है, उनका मानना है कि इस तरह के फैसलों से संस्थान की मूल भावना और गुरुकुल जैसी परंपरा को भारी ठेस पहुंच रही है। दूसरी तरफ, शासी निकाय और प्रशासनिक अधिकारियों का अपना पक्ष है, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच संवादहीनता की स्थिति बन गई है।असमंजस के भंवर में फंसे छात्र और उनके उज्ज्वल भविष्य पर मंडराता संकटइस पूरे प्रशासनिक घमासान और खींचतान का सबसे बुरा असर नेतरहाट स्कूल के उन मासूम और प्रतिभाशाली छात्रों पर पड़ रहा है जो देश के कोने-कोने से अपना भविष्य संवारने के लिए इस दूरदराज इलाके में आए हैं। जब शिक्षक और प्रबंधन ही आपस में उलझे रहेंगे, तो उसका सीधा असर कक्षाओं की पढ़ाई, अनुशासन और छात्रों के मानसिक विकास पर पड़ना लाजिमी है। कई अभिभावकों ने भी इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि यदि समय रहते इस विवाद को नहीं सुलझाया गया, तो इस प्रतिष्ठित स्कूल का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह से प्रभावित हो जाएगा। छात्र खुद को इस बात को लेकर असमंजस में पा रहे हैं कि आखिर आने वाले दिनों में उनके पाठ्यक्रम, परीक्षाओं और स्कूल की व्यवस्थाओं का क्या होगा, जिससे उनके मन में असुरक्षा की भावना घर करती जा रही है।राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बढ़ रहा दबाव, जल्द समाधान की उम्मीदजैसे-जैसे नेतरहाट स्कूल का यह विवाद तूल पकड़ता जा रहा है, वैसे-वैसे झारखंड के राजनीतिक हलकों और सामाजिक संगठनों में भी इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। पूर्व छात्र संघ और कई बड़े प्रशासनिक अधिकारी जो खुद इसी स्कूल से पढ़कर निकले हैं, वे इस मामले में हस्तक्षेप करके संस्थान की गरिमा को बचाने की अपील कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के शिक्षा विभाग पर भी यह नैतिक दबाव बन गया है कि वे इस मामले में तुरंत संज्ञान लें और सभी पक्षों के साथ बैठक करके एक निष्पक्ष समाधान निकालें। नेतरहाट सिर्फ एक स्कूल नहीं बल्कि एक विचार है, और इसकी अस्मिता से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए, ताकि यह संस्थान भविष्य में भी देश को चमकते हुए सितारे देता रहे।
Dhirendra Shastri के बयान के बीच Suvendu Adhikari ने खाई मछली, BJP बोली- मांसाहार विवाद अब खत्म
पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कौशिकी अमावस्या के मौके पर कोलकाता के कालीघाट मंदिर में देवी काली की पूजा की और बाद में मंदिर का पारंपरिक भोग ग्रहण किया, जिसमें मछली और बसंती पुलाव शामिल था। कालीघाट मंदिर में अधिकारी ज़मीन पर बैठकर पारंपरिक भोग खाया, जिसमें मछली का सिर, तली हुई मछली और बसंती पुलाव शामिल था। कालीघाट में देवी काली को पारंपरिक रूप से मछली और मांस का भोग लगाया जाता है, और बाद में यह प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। इसे भी पढ़ें: BRICS पर Congress में मतभेद, Shashi Tharoor ने Chidambaram पर उठाए सवाल, BJP ने घेरा गुरुवार को पूजा-अर्चना करने के बाद अधिकारी ने कहा कि सनातन संस्कृति में कौशिकी अमावस्या एक महत्वपूर्ण अवसर है और पश्चिम बंगाल के प्रमुख मंदिरों, जिनमें कालीघाट और तारापीठ शामिल हैं, में इस त्योहार को विशेष पूजा के साथ मनाया जा रहा है। अधिकारी का यह दौरा बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणियों को लेकर हुए विवाद के बीच हुआ है, जिन्होंने बंगाली हिंदुओं से दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से बचने की अपील की थी और जो लोग इसे खाते रहे, उन्हें पाखंडी बताया था। शास्त्री की बातों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि धार्मिक उपदेशक को अपनी निजी राय रखने का हक है और लोग तय कर सकते हैं कि वे इसे मानें या नहीं। अधिकारी ने कहा कि एक संत ने अपनी राय रखी है। जो लोग इसे मानना चाहते हैं, वे मानेंगे; जो नहीं मानना चाहते, वे नहीं मानेंगे। उन्होंने अपनी धार्मिक आदतों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि महाअष्टमी और कार्तिक महीने के दौरान वे सात्विक भोजन करते हैं, लेकिन साथ ही वे मां काली को चढ़ाए जाने वाले मांसाहारी भोजन का भी सेवन करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक सनातनी हिंदू हूं। महाअष्टमी पर, जब मैं मां दुर्गा की पूजा करता हूं, तो सात्विक भोजन करता हूं। कार्तिक महीने में भी मैं सात्विक भोजन ही करता हूं। साथ ही, मैं मां काली को चढ़ाए जाने वाले मांसाहारी भोजन, जैसे कि बकरे का मांस, का भी सेवन करता हूं। बंगाली खान-पान की आदतों और धार्मिक परंपराओं को लेकर चल रही बहस के बीच इस घटना ने राजनीतिक महत्व ले लिया है। बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई ने भी इस बात को खारिज कर दिया है कि राज्य के लोगों को क्या खाना चाहिए, यह कोई बाहरी धार्मिक व्यक्ति तय करे। इसे भी पढ़ें: Karnataka में Shivakumar सरकार के 100 दिन बिना उपलब्धि के बीते: Vijayendra अधिकारी के वीडियो से संकेत लेते हुए, सत्ताधारी पार्टी ने सुझाव दिया कि शाकाहारी-मांसाहारी वाली बहस खत्म होनी चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि इस विवाद को वहीं खत्म होने दें जहां इसे खत्म होना चाहिए। कालीघाट में, सुवेंदु अधिकारी मां काली के पारंपरिक मछली भोग में शामिल होते हैं - जो बंगाल की आस्था, परंपराओं और जीवन शैली के प्रति सम्मान दिखाता है। उनके नेतृत्व में, बीजेपी हमेशा बंगाल के हितों, बंगाल की परंपराओं और बंगाल के लिए जो सही है, उसके लिए मजबूती से खड़ी रहेगी। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। Let the controversy end where it should. At Kalighat, CM @SuvenduWB takes part in Maa Kali’s traditional Fish Bhog — respecting Bengal’s faith, traditions and way of life. Under his leadership, the BJP will always stand firmly for Bengal’s interests, Bengal’s traditions and… pic.twitter.com/aFgTw0gzsb — Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी) (@pradip103) September 10, 2026
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के सियासी संग्राम को जीतने के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है और इस बार का मुकाबला सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल और वर्चुअल दुनिया के मंच पर भी बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव से ठीक पहले एक बहुत बड़ा और अचूक कदम उठाते हुए राज्यभर में हजारों की संख्या में 'साइबर वॉरियर्स' (Cyber Warriors) की एक प्रशिक्षित फौज तैयार करने का फैसला किया है। आज के इस आधुनिक और डिजिटल युग में जब हर आम नागरिक का स्मार्टफोन ही उसका सबसे बड़ा हथियार बन चुका है, राजनीतिक नैरेटिव (Narrative) सेट करना और सोशल मीडिया पर अपनी नीतियों का प्रचार करना जीत की सबसे बड़ी चाबी माना जाता है। इसी वास्तविकता को समझते हुए बीजेपी अब बूथ स्तर से लेकर प्रांतीय स्तर तक तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को जोड़ने और उन्हें सोशल मीडिया के गुर सिखाने के एक मेगा प्लान पर तेजी से काम कर रही है।डिजिटल युग में चुनाव प्रचार का बदलता स्वरूप और साइबर वॉरियर्स की जरूरतबीते कुछ वर्षों में भारतीय राजनीति का पूरा परिदृश्य तेजी से बदला है और पारंपरिक रैलियों के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और व्हाट्सएप चुनाव परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित करने लगे हैं। विपक्षी दलों द्वारा अक्सर सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार के खिलाफ फैलाए जाने वाले भ्रम, फर्जी खबरों (Fake News) और आक्रामक राजनीतिक हमलों का तुरंत और तथ्यों के साथ जवाब देना आज के समय की सबसे बड़ी मांग बन गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने तय किया है कि वह अपने समर्पित कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करके 'साइबर सेना' तैयार करेगी, जो विरोधी दलों के हर डिजिटल नैरेटिव की काट बेहद आक्रामक और तथ्यात्मक तरीके से कर सकेगी। यह रणनीति न केवल पार्टी के डिजिटल डिफेंस को मजबूत करेगी, बल्कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।जिला और विधानसभा स्तर पर होगी चयन प्रक्रिया और विशेष ट्रेनिंग कैंपपार्टी संगठन की योजना के अनुसार, इस डिजिटल अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से तकनीकी रूप से सक्रिय, युवाओं और सोशल मीडिया की समझ रखने वाले कार्यकर्ताओं का चयन किया जाएगा। चुने गए इन साइबर वॉरियर्स के लिए विशेष ट्रेनिंग वर्कशॉप और बूटकैंप आयोजित किए जाएंगे, जहाँ उन्हें वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक्स डिजाइनिंग, कंटेंट क्रिएशन और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर काम करने के तकनीकी गुर सिखाए जाएंगे। इन वॉरियर्स को यह भी सिखाया जाएगा कि कैसे बिना किसी उकसावे के शालीनता और तर्क के साथ पार्टी विरोधी दुष्प्रचार का पर्दाफाश करना है। इस प्रशिक्षित फौज को सीधे पार्टी के आईटी सेल और सोशल मीडिया हेडक्वार्टर से जोड़ा जाएगा, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दे पर पूरे राज्य में एक साथ एक ही समय पर एक जैसा डिजिटल नैरेटिव सेट किया जा सके।विपक्ष के हमलों और फेक न्यूज से निपटने की फुलप्रूफ रणनीतिचुनावी मौसम में अक्सर विरोधियों द्वारा जनता के बीच भ्रम फैलाने के लिए कई तरह के भ्रामक वीडियो और झूठी खबरें सोशल मीडिया पर वायरल की जाती हैं, जिनका समय पर खंडन न होने से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। बीजेपी के ये साइबर वॉरियर्स फैक्ट-चेकिंग (Fact-Checking) टूल्स और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस होंगे, जो हर पल सोशल मीडिया की गतिविधियों पर पैनी नजर रखेंगे। जैसे ही विपक्ष की तरफ से कोई भ्रामक नैरेटिव या प्रोपेगंडा फैलाने की कोशिश की जाएगी, ये वॉरियर्स तुरंत आधिकारिक आंकड़ों और विकास कार्यों के प्रमाण के साथ उसका माकूल जवाब देंगे। इस तरह की रियल-टाइम रिस्पांस टीम (Real-time Response Team) के मैदान में होने से पार्टी चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार के डिजिटल सरप्राइज से सुरक्षित रहेगी और वर्चुअल वॉर जोन में बढ़त बनाए रखेगी।विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को डिजिटल माध्यम से जनता तक पहुँचानाइस पूरी डिजिटल कवायद का मुख्य उद्देश्य केवल विपक्ष का मुकाबला करना ही नहीं है, बल्कि डबल इंजन सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में किए गए ऐतिहासिक विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था के सुधारों और जन-कल्याणकारी योजनाओं को रील्स, शॉर्ट्स और क्रिएटिव पोस्ट्स के जरिए आम जनता के मोबाइल तक पहुँचाना है। पार्टी मानती है कि आज की युवा पीढ़ी और पहली बार वोट डालने वाले मतदाता पारंपरिक भाषणों के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मिलने वाली जानकारियों से ज्यादा प्रभावित होते हैं। बीजेपी का यह साइबर वॉरियर्स प्लान यह साबित करने के लिए काफी है कि पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर मोर्चे पर पूरी तरह से तैयार है और तकनीकी रूप से सबसे आगे रहने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है और सभी राजनीतिक दल अभी से अपनी रणनीतियों को धार देने में जुट गए हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनावों में अप्रत्याशित झटके का सामना करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने के लिए पूरी तरह से 'हाइपर-लोकल' मोड में आ चुकी है। पार्टी के आंतरिक डेटा विश्लेषण और डेटा माइनिंग से यह बात सामने आई है कि राज्य के करीब 18,900 ऐसे मतदान केंद्र (Booths) हैं जहां 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को भारी जीत मिली थी, लेकिन 2024 के संसदीय चुनाव आते-आते वे पाला बदलकर विपक्ष के पक्ष में चले गए। इसी जमीनी नुकसान की भरपाई करने और अपनी खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने के लिए बीजेपी ने इन 18,900 कमजोर बूथों को केंद्र में रखकर एक अचूक और विशेष रणनीति तैयार की है।2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को क्यों लगा था बड़ा झटकाराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 के विधानसभा चुनावों में शानदार बहुमत हासिल करने वाली बीजेपी जब 2024 के आम चुनाव में उतरी, तो उसे उत्तर प्रदेश में सीटों और वोटों के मामले में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा। पार्टी द्वारा किए गए हालिया बूथ-वार विश्लेषण से पता चलता है कि यह गिरावट किसी एक पूरे क्षेत्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैली हुई थी। खासकर अवध और पूर्वांचल बेल्ट के कई इलाकों में पार्टी को बूथ स्तर पर तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा, जिससे कुल समीकरण बिगड़ गए। विपक्षी दलों द्वारा बुने गए सामाजिक और जातीय समीकरणों के जाल के आगे पार्टी के कई पारंपरिक वोटर छिटक गए, जिसके चलते जीत के अंतर वाले ये 18,900 बूथ पार्टी के हाथ से फिसलकर विरोधी पाले में चले गए।ग्रामीण इलाकों और मजहरों पर विशेष फोकस की रणनीतिबीजेपी के आंतरिक सर्वे और डेटा माइनिंग के मुताबिक, जिन 18,900 बूथों पर पार्टी को 2024 में हार का सामना करना पड़ा था, उनमें से लगभग 80 प्रतिशत बूथ ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे मजहरों (गांव की बस्तियों) से आते हैं। शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण मतदाताओं के बीच उपजे असंतोष और स्थानीय मुद्दों ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया था। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए अब पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए सीधे ग्रामीण स्तर के मतदाताओं तक पहुंचने का फैसला किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और रणनीतिकार अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर किन स्थानीय कारणों से ग्रामीण मतदाता छिटके और उन्हें वापस पार्टी के पाले में लाने के लिए कौन से लोकलुभावन और विकासात्मक मुद्दों को उठाया जाना चाहिए।माइक्रोमैनेजमेंट और बूथ स्तर पर वालंटियरों की फौज की तैयारीआगामी चुनावों में किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए बीजेपी ने माइक्रोमैनेजमेंट (Micro-management) का फार्मूला अपनाया है, जिसके तहत पार्टी के विभिन्न मोर्चों (जैसे युवा, महिला, किसान, ओबीसी और एससी-एसटी) को सक्रिय कर दिया गया है। योजना के अनुसार, हर एक बूथ पर पार्टी के पांचों मोर्चों के जरिए समर्पित वालंटियरों और कार्यकर्ताओं की फौज तैनात की जा रही है। इन कार्यकर्ताओं का चयन पूरी तरह से संबंधित बूथ की जातीय संरचना और स्थानीय प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। शीर्ष नेतृत्व खुद जिलों और मंडलों का दौरा कर इन कमजोर बूथों की समीक्षा कर रहा है और स्थानीय पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहा है ताकि चुनाव से पहले हर एक मतदाता को पार्टी के साथ जोड़ा जा सके।विपक्ष के नैरेटिव की काट और जीत की हैट्रिक का लक्ष्यएक तरफ जहां विपक्षी दल अपनी सोशल इंजीनियरिंग और स्थानीय मुद्दों के जरिए सत्ता में वापसी के सपने देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, मजबूत कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को आधार बनाकर जनता के बीच जा रही है। पार्टी का मानना है कि यदि इन 18,900 संघर्षपूर्ण बूथों पर संगठन की पकड़ को फिर से मजबूत कर लिया जाए, तो उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से भारी बहुमत के साथ जीत की हैट्रिक लगाई जा सकती है। बीजेपी का यह हाई-प्रोफाइल और डेटा-ड्रिवन चुनावी प्लान यह साबित करने के लिए काफी है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और हर एक वोट को सहेजने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
आकाश आनंद के ससुर पर भड़कीं मायावती! कहा-'पूरी रात अपनाए हथकंडे, वक्त आने पर सब बताऊंगी
बहुजन समाज पार्टी यानी बीएसपी (BSP) के भीतर राजनीतिक उठापटक और पारिवारिक सरगर्मी का दौर इस समय चरम पर पहुंच चुका है, और पार्टी सुप्रीमो मायावती के एक तीखे बयान ने पूरे राजनीतिक गलियारे में भूचाल ला दिया है। मायावती ने अपने उत्तराधिकारी और पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद के ससुर (अशोक सिद्धार्थ) पर सीधा निशाना साधते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मायावती के इन तेवरों से साफ जाहिर होता है कि पार्टी के भीतर कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है और अंदरूनी कलह अब खुलकर सतह पर आ चुकी है। पार्टी सुप्रीमो ने कड़े शब्दों में कहा कि कुछ लोगों ने पूरी रात अपने निजी स्वार्थ के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए, जिसके कारण पार्टी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। इस सनसनीखेज घटनाक्रम के बाद से उत्तर प्रदेश समेत देश भर के राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें बीएसपी के अगले कदमों पर टिक गई हैं।बीएसपी के भीतर आंतरिक कलह और पारिवारिक खींचतान का बढ़ता दायराराजनीतिक दलों में जब कभी पारिवारिक रिश्ते और राजनीतिक महत्वकांक्षाएं आपस में टकराती हैं, तो उसका अंजाम अक्सर पार्टी संगठन के बिखराव के रूप में सामने आता है, और बीएसपी वर्तमान में इसी दौर से गुजर रही है। आकाश आनंद को पार्टी का उत्तराधिकारी घोषित किए जाने के बाद से ही संगठन के भीतर और बाहर कई तरह के समीकरण बनने और बिगड़ने लगे थे, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे। मायावती ने अपने संबोधन और बयानों में जिस तरह से परोक्ष और अपरोक्ष रूप से आकाश आनंद के परिवार और विशेषकर उनके ससुर के हस्तक्षेप पर आपत्ति जताई है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी के फैसलों में बाहरी या पारिवारिक दखलंदाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीएसपी जैसी कैडर आधारित पार्टी के लिए, जहां अनुशासित फैसले सर्वोपरि माने जाते हैं, इस तरह की अंदरूनी कलह का बाहर आना पार्टी के जनाधार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।'वक्त आने पर सब बताऊंगी'- मायावती की चेतावनी के सियासी मायनेमायावती का यह कहना कि 'पूरी रात हथकंडे अपनाए गए और वक्त आने पर मैं सब कुछ खुलकर देश और पार्टी के सामने बताऊंगी', भारतीय राजनीति में एक बहुत बड़ा संकेत माना जा रहा है। अपने फैसलों की दृढ़ता और कड़े प्रशासनिक तथा राजनीतिक नियंत्रण के लिए पहचानी जाने वाली मायावती जब इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करती हैं, तो उसका मतलब होता है कि पर्दे के पीछे कुछ बहुत बड़ा चल रहा था जिसे समय आने पर सार्वजनिक किया जाएगा। इस प्रकार की चेतावनियों से उन सभी नेताओं और तत्वों में हड़कंप मच गया है जो पार्टी के भीतर रहकर अपने निजी या पारिवारिक हितों को साधने में जुटे हुए थे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मायावती का यह रुख यह साबित करने के लिए काफी है कि वे पार्टी पर अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देंगी और पार्टी के अनुशासन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।पार्टी को हुए बड़े नुकसान का जिक्र और कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थितिलोकसभा और विधानसभा चुनावों में लगातार मिल रही असफलताओं के बाद बीएसपी पहले से ही अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने के लिए कड़े संघर्ष के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में इस प्रकार का आंतरिक विवाद पार्टी की नैया को और डुबाने का काम कर सकता है। मायावती ने खुद इस बात का खुलकर जिक्र किया है कि इन चंद लोगों की स्वार्थी गतिविधियों और षड्यंत्रों के कारण पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस घटनाक्रम के बाद जमीन स्तर पर काम करने वाले आम बहुजन कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच गहरी निराशा और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है, क्योंकि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ खड़े रहें या इस पारिवारिक व राजनीतिक ड्रामे के बीच खुद को अलग कर लें। बीएसपी के लिए यह समय आत्ममंथन और संगठन को बचाने का सबसे नाजुक मोड़ साबित हो रहा है।आने वाले दिनों में बीएसपी की राजनीतिक दिशा और आकाश आनंद का भविष्यइस पूरे विवाद के केंद्र में रहे आकाश आनंद की राजनीतिक स्थिति और भविष्य पर भी अब बड़े सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं, जिन्हें मायावती ने कभी अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। पार्टी के भीतर इस प्रकार की बगावत और तीखी बयानबाजी के बाद यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आकाश आनंद इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वे पार्टी के अनुशासन के दायरे में रहते हुए अपनी भूमिका निभाते हैं या नहीं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित राजनीति के समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित करने वाली बीएसपी के लिए यह आंतरिक संघर्ष आने वाले चुनावों में उसकी राजनीतिक प्रासंगिकता को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। मायावती के इन कड़े तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि वे पार्टी की शुद्धता और अपने मिशन से समझौता करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपनों के खिलाफ ही कड़े फैसले क्यों न लेने पड़ें।
खाओ और बाल उगाओ! हेयर फॉल रोकने के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताईं आंवला-मेथी से बनी 5 जादुई रेसिपी
तेजी से झड़ते बाल, समय से पहले सफेद होती लटें और सिर पर बढ़ते गंजेपन की समस्या आज के समय में हर दूसरे युवा और महिला के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। महंगे शैंपू, तेल और तरह-तरह के केमिकल युक्त सीरम सिर पर मलने के बावजूद जब बालों का टूटना बंद नहीं होता, तो इंसान अंदर से निराश हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बालों को अंदरूनी मजबूती और पोषण देने का असली रास्ता आपकी रसोई और खानपान से होकर गुजरता है? आयुर्वेद के जानकारों और प्रसिद्ध आयुर्वेदिक डॉक्टरों का मानना है कि 'आप जैसा खाते हैं, आपके बाल भी वैसे ही बनते हैं।' बालों की जड़ों को मजबूत करने और नए बाल उगाने के लिए आयुर्वेद में कुछ ऐसी असरदार और प्राकृतिक रेसिपी बताई गई हैं जिनमें रसोई में मौजूद आंवला, मेथी और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। आइए आज जानते हैं उन पांच जादुई आयुर्वेदिक रेसिपी के बारे में जिन्हें अपनी डाइट में शामिल करके आप घर बैठे अपने बालों की सेहत को पूरी तरह से बदल सकते हैं।बालों के लिए आयुर्वेद का वरदान है आंवला और मेथी का अनूठा मेलआयुष और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में आंवला और मेथी को बालों के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं माना गया है। आंवला विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और आयरन का पावरहाउस है जो बालों के कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ाकर उन्हें जड़ से मजबूत करता है, जबकि मेथी के दानों में भरपूर मात्रा में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन पाया जाता है जो स्कैल्प के संक्रमण को दूर कर बालों की ग्रोथ को तेज करता है। जब आप इन दोनों प्राकृतिक चीजों को अपने दैनिक खानपान या विशेष रेसिपी के रूप में कंज्यूम करते हैं, तो यह आपके शरीर के भीतर जाकर हॉर्मोनल संतुलन को सुधारते हैं और बालों को झड़ने से रोकते हैं। बाजार में बिकने वाले महंगे प्रोडक्ट्स के मुकाबले ये घरेलू नुस्खे पूरी तरह से सुरक्षित, सस्ते और वैज्ञानिक रूप से बेहद प्रभावी साबित होते हैं।रेसिपी 1: मेथी और आंवला का डिटॉक्स वाटर – सुबह की शुरुआत के साथ करें बालों को मजबूतबालों की सेहत सुधारने की पहली और सबसे आसान आयुर्वेदिक रेसिपी है 'मेथी और आंवला का डिटॉक्स वाटर'। इसे बनाने के लिए एक चम्मच मेथी दाना और एक चम्मच सूखा हुआ आंवला पाउडर या एक कुचला हुआ ताजा आंवला रातभर एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। अगली सुबह उठकर इस पानी को छानकर खाली पेट पी लें, या फिर इसे हल्का उबालकर गुनगुना करके पिएं। यह ड्रिंक आपके शरीर की अंदरूनी गंदगी (Toxins) को बाहर निकालता है, पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है और आपके बालों की जड़ों तक सीधे पोषक तत्व पहुंचाता है, जिससे कुछ ही हफ्तों में हेयर फॉल में भारी कमी देखने को मिलने लगती है।रेसिपी 2: आंवला और करी पत्ता की चटनी – स्वाद के साथ बालों का संपूर्ण पोषणदैनिक भोजन में स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ यदि बालों को सेहतमंद रखना है, तो आंवला और करी पत्ते की यह विशेष आयुर्वेदिक चटनी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। ताजे आंवलों के टुकड़े, मुट्ठीभर फ्रेश करी पत्ते, थोड़ा सा भुना हुआ जीरा, सेंधा नमक और पुदीने की पत्तियों को मिलाकर मिक्सी में पीसकर एक स्वादिष्ट चटनी तैयार कर लें। करी पत्ता बीटा-कैरोटीन और प्रोटीन से भरपूर होता है जो बालों के समय से पहले सफेद होने की प्रक्रिया को रोकता है और उन्हें घना बनाता है। दोपहर या रात के खाने के साथ इस चटनी का सेवन आपके स्वाद को भी बढ़ाएगा और आपके बालों को अंदर से भरपूर पोषण भी प्रदान करेगा।रेसिपी 3: मेथी दाना और अंकुरित मूंग की पौष्टिक सलाद – बालों की ग्रोथ के लिए प्रोटीन का खजानाबालों की बनावट मुख्य रूप से 'केराटिन' नामक प्रोटीन से होती है, इसलिए यदि आपकी डाइट में प्रोटीन की कमी है तो बाल कमजोर होकर टूटने लगेंगे। इसके लिए आयुर्वेद में मेथी दाना और अंकुरित मूंग (Sprouted Mung) की सलाद को एक बेहतरीन हेयर ग्रोथ फूड माना गया है। रातभर भिगोई हुई मेथी को मूंग के साथ अंकुरित कर लें, फिर उसमें बारीक कटा हुआ टमाटर, खीरा, नींबू का रस और सेंधा नमक मिलाकर सुबह के नाश्ते में खाएं। यह रेसिपी आपके शरीर को जरूरी अमीनो एसिड्स और विटामिन्स देती है, जो नए बालों के रोम (Hair Follicles) को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।रेसिपी 4: आंवला और काले तिल का लड्डू – विंटर और समर दोनों के लिए सुपरफूडतिल और आंवले का संयोजन आयुर्वेद में बालों को काला, घना और मजबूत बनाए रखने के लिए सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है। काले तिल में कैल्शियम, मैग्नीशियम और हेल्दी फैटी एसिड्स प्रचुर मात्रा में होते हैं जो स्कैल्प को नमी प्रदान करते हैं। आंवला पाउडर, भुने हुए काले तिल और थोड़ा सा गुड़ या शहद मिलाकर छोटे-छोटे लड्डू तैयार कर लें। रोजाना सुबह एक लड्डू का सेवन करने से न केवल आपके बाल मजबूत होंगे बल्कि आपकी हड्डियों और आंखों की रोशनी को भी गजब की ताकत मिलेगी। यह पारंपरिक रेसिपी शरीर की कमजोरी को दूर करके बालों की चमक को नेचुरली वापस लाती है।रेसिपी 5: मेथी और भृंगराज की हर्बल चाय – मानसिक शांति और बालों की चमक का राजअक्सर अत्यधिक तनाव, चिंता और भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण भी लोगों के बाल तेजी से झड़ने लगते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए पांचवीं और आखिरी आयुर्वेदिक रेसिपी है 'मेथी और भृंगराज की हर्बल टी'। एक कप पानी में थोड़ी सी मेथी के दाने और भृंगराज के सूखे पत्ते डालकर अच्छी तरह उबाल लें और फिर छानकर इसमें थोड़ा सा शहद मिला लें। भृंगराज को आयुर्वेद का 'राज' कहा जाता है जो बालों के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है। इस हर्बल चाय को पीने से न केवल आपका मानसिक तनाव कम होता है बल्कि आपके बाल जड़ से मजबूत, काले और रेशमी बनने लगते हैं।
Gauhati High Court ने कहा: देश में Talaq-e-Hasan पर रोक नहीं, यह तलाक का वैध तरीका
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने तलाक के पंजीकरण से संबंधित एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए कहा है कि ‘तलाक-ए-हसन’ तलाक का एक वैध तरीका है और देश में इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने एक याचिकाकर्ता को अपने तलाक का पंजीकरण कराने के लिए असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024 के तहत बारपेटा क्षेत्र के विवाह एवं तलाक पंजीयक से संपर्क करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी ने ‘तलाक-ए-हसन’ के जरिए दिए गए तलाक के पंजीकरण से संबंधित एक रिट याचिका पर सुनवाई के बाद मंगलवार को यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता के अनुसार, उसकी शादी 2016 में हुई थी। बाद में दोनों के बीच मतभेद पैदा हो गए और उसकी पत्नी ने कथित तौर पर 2018 में अपना ससुराल छोड़ दिया। दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिशें भी सफल नहीं हुईं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 22 मार्च, 26 अप्रैल और 27 मई 2026 को तीन अलग-अलग तारीखों पर ‘तलाक-ए-हसन’ दिया और फिर कानून के तहत तलाक के पंजीकरण के लिए संबंधित प्राधिकारी से संपर्क किया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ‘तलाक-ए-हसन’ पर कोई प्रतिबंध नहीं है और उसने इसकी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तलाक दिया है। राज्य सरकार ने हालांकि अदालत से कहा कि 1935 के पुराने कानून को निरस्त किया जा चुका है और उसके तहत नियुक्त प्राधिकारी का पद भी समाप्त कर दिया गया है इसलिए उस व्यवस्था के तहत अब तलाक का पंजीकरण नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिया गया ‘तलाक-ए-हसन’, तलाक का वैध तरीका है और मौजूदा समय में देश में इस पर प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, अदालत ने 1935 के कानून के तहत बारपेटा में नियुक्त प्राधिकारी को तलाकनामा पंजीकृत करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह कानून निरस्त किया जा चुका है और उसके तहत सृजित पद भी समाप्त कर दिया गया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को 2024 के कानून के तहत संबंधित क्षेत्र के विवाह एवं तलाक पंजीयक से संपर्क करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पंजीयक को यह जांच करनी होगी कि याचिकाकर्ता ने वास्तव में तलाक दिया है या नहीं और उसे उसकी पहचान की पुष्टि करनी होगी। इसके बाद वह तय करेगा कि अधिनियम की धारा 12 के तहत तलाक का पंजीकरण किया जाना है या नहीं। अगर पंजीकरण से इनकार किया जाता है तो याचिकाकर्ता 2024 के अधिनियम की धारा 17 के तहत अपील कर सकता है। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की पत्नी को उचित मंच पर ‘तलाक-ए-हसन’ को चुनौती देने की स्वतंत्रता होगी। याचिकाकर्ता की पत्नी नोटिस दिए जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुई। अदालत ने इन निर्देशों के साथ रिट याचिका का निपटारा कर दिया।
गंजापन दूर करने के लिए मिनोक्सिडिल का इस्तेमाल पड़ा भारी! इंटरनेट पर वायरल हो रही तस्वीरें
तेजी से झड़ते बालों, कम होती डेंसिटी और सिर के बीचों-बीच उभरते गंजेपन के शिकार आज के दौर में केवल बुजुर्ग ही नहीं बल्कि कम उम्र के युवा भी बड़ी संख्या में हो रहे हैं। सिर के उड़ते बालों को बचाने और सिर पर दोबारा नए बाल उगाने के दावे के साथ इन दिनों सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में 'मिनोक्सिडिल' (Minoxidil) नाम का लोशन या स्प्रे एक जादुई समाधान के रूप में धड़ल्ले से वायरल हो रहा है। इंटरनेट और अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लोग मिनोक्सिडिल इस्तेमाल करने के बाद अपनी 'हेयर ग्रोथ' की चमत्कारी तस्वीरें और ट्रांसफॉर्मेशन वीडियो खुलकर शेयर कर रहे हैं, जिन्हें देखकर लाखों युवा बिना किसी डॉक्टर की सलाह के इसे तुरंत खरीदकर अपने सिर पर मलना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या वाकई मिनोक्सिडिल हर किसी के लिए सुरक्षित है और सोशल मीडिया पर दिख रहा यह चमकता हुआ सच पूरी तरह से सही है? आइए मिनोक्सिडिल के इस्तेमाल से जुड़े उन अनसुने पहलुओं, फायदों और गंभीर दुष्प्रभावों पर गहराई से नजर डालते हैं जो हर गंजेपन से जूझ रहे व्यक्ति को पता होना चाहिए।क्या है मिनोक्सिडिल और कैसे काम करता है यह हेयर ग्रोथ फॉर्मूलामिनोक्सिडिल मूल रूप से एक वैसोडिलेटर दवा है जिसका उपयोग शुरुआती दौर में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए किया जाता था, लेकिन इसके साइड इफेक्ट के रूप में मरीजों के शरीर और सिर पर बाल उगने की बात सामने आई, जिसके बाद इसे टोपिकल सॉल्यूशन के रूप में गंजापन दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। जब इसे सिर की त्वचा यानी स्कैल्प पर लगाया जाता है, तो यह वहां की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को चौड़ा कर देता है जिससे हेयर फॉलिकल्स (Hair Follicles) तक ऑक्सीजन, खून और जरूरी पोषक तत्वों की सप्लाई तेज हो जाती है। यह प्रक्रिया कमजोर हो चुके बालों की जड़ों को फिर से सक्रिय करती है और बाल झड़ने की रफ्तार को धीमा करके नए बाल उगाने में मदद करती है। यही वजह है कि एलोपेसिया या एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया से पीड़ित लोग इसे अपने बालों के लिए एक वरदान मानते हैं, बशर्ते इसे सही तरीके और वैज्ञानिक नियमों के तहत इस्तेमाल किया जाए।इंटरनेट पर वायरल ट्रांसफॉर्मेशन तस्वीरें और युवाओं में बढ़ता इसका क्रेजआजकल इंस्टाग्राम, यूट्यूब रील्स और रेडिट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मिनोक्सिडिल का इस्तेमाल करने वाले इन्फ्लुएंसर्स और आम लोग 'बिफोर एंड आफ्टर' की ऐसी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं जिन्हें देखकर रातों-रात बाल उगाने की चाहत रखने वाले युवा भ्रमित हो जाते हैं। इन वायरल पोस्ट्स में यह दिखाया जाता है कि कैसे कुछ ही हफ्तों या महीनों में गंजे सिर पर घने बाल उग आए हैं, जिससे लोग बिना सोचे-समझे मेडिकल स्टोर से मिनोक्सिडिल की बोतल खरीद लाते हैं। हालांकि, कई बार ये तस्वीरें या तो लाइक्स और व्यूज पाने के लिए एडिटेड होती हैं या फिर उनके पीछे की लंबी मेडिकल प्रक्रिया, शुरुआती दौर में बाल झड़ने (Shedding Phase) की समस्या और लगातार इस्तेमाल की मजबूरी को छिपा लिया जाता है। यही कारण है कि डर्मेटोलॉजिस्ट मानते हैं कि सोशल मीडिया के इस भ्रामक मायाजाल में फंसकर किसी भी दवा का अंधाधुंध इस्तेमाल करना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।मिनोक्सिडिल लगाने से पहले डर्मेटोलॉजिस्ट की चेतावनी और इसके बड़े साइड इफेक्ट्सत्वचा रोग विशेषज्ञों और हेयर ट्रांसप्लांट सर्जनों का कहना है कि मिनोक्सिडिल कोई कॉस्मेटिक तेल नहीं बल्कि एक शक्तिशाली मेडिकल दवा है, जिसे हमेशा डॉक्टर की पर्ची और सलाह के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए। डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार, मिनोक्सिडिल शुरू करने के शुरुआती दो से चार हफ्तों के भीतर बाल तेजी से झड़ने लगते हैं जिसे 'शेडिंग' कहा जाता है, और इस चरण को देखकर अक्सर लोग डरकर इसे लगाना बंद कर देते हैं, जिससे स्थिति और भी खराब हो जाती है। इसके अलावा, कई लोगों को इसके नियमित इस्तेमाल से स्कैल्प पर गंभीर खुजली, रूसी (Dandruff), लालिमा, और जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि यह दवा गलती से चेहरे या माथे पर लग जाए, तो वहां अनचाहे बाल उगने की समस्या भी हो सकती है, जो उपयोगकर्ताओं के लिए मानसिक तनाव का कारण बन जाती है।एक बार शुरू करने के बाद जिंदगीभर का बंधन और छोड़ने पर गंजापन वापसीमिनोक्सिडिल के इस्तेमाल से जुड़ा सबसे बड़ा सच और चेतावनी यह है कि यह किसी भी प्रकार के गंजेपन का कोई स्थायी इलाज नहीं है, बल्कि यह केवल तब तक काम करता है जब तक आप इसे नियमित रूप से लगा रहे हैं। डर्मेटोलॉजिस्ट बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति मिनोक्सिडिल का उपयोग करना शुरू कर देता है और कुछ महीनों या सालों बाद इसे अचानक बंद कर देता है, तो उसके सारे नए और पुराने बाल तेजी से झड़ने लगते हैं और सिर की स्थिति पहले से भी ज्यादा बदतर हो जाती है। इसका मतलब यह है कि मिनोक्सिडिल आपके जीवनभर का एक रूटीन बन जाता है जिसे आप बीच में छोड़ नहीं सकते। इसलिए, किसी भी महंगे या केमिकल युक्त उत्पाद को अपने सिर पर पोतने से पहले अपने बालों के झड़ने के असली कारणों—जैसे हॉर्मोनल असंतुलन, पोषण की कमी या तनाव—को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करवाकर समझना बेहद जरूरी है।
मशीनें और मानवता का Endgame... 27 साल के साइंटिस्ट ने AI में कैसे देखा इंसानों का विनाश!
आज जब कॉक्सन AI की होड़ को “ह्यूमैनिटी का एंडगेम” बता रहे हैं, तो इसके पीछे उन्होंने एआई एजेंटों के खतरनाक व्यवहार को देखा और समझा. क्या हो जब कोड, कमांड और प्राम्प्ट फेल हो जाएं, मशीनें अपने मन की करने लगें और मानवों को ही चुनौती देने लगें. ऐसे सीन हम फिल्मों में देख रोमांचित होते थे, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमता पर काम करने वाले इंजीनियरों को ऐसा ही डर सता रहा है.
सर्जरी के बाद दर्द से कराहती रही बहू और ससुराल वाले देखते रहे तमाशा! खाना तक देने से किया इनकार
हमारे समाज में आज के आधुनिक दौर में भी रूढ़िवादी सोच और मानवीय संवेदनाओं के पतन की ऐसी कई वीभत्स तस्वीरें सामने आती हैं, जिन्हें देखकर इंसानियत भी शर्मसार हो जाती है। एक ताजा और दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है जहाँ एक नवविवाहिता महिला की गंभीर सर्जरी (Surgery) होने के बाद जब उसका शरीर दर्द से तड़प रहा था, तब उसके ससुराल वालों ने न केवल उसकी सुध ली बल्कि उसे वक्त पर दो वक्त का खाना तक देने से साफ इनकार कर दिया। ऑपरेशन के बाद के उस नाजुक दौर में जहाँ मरीज को अत्यधिक देखभाल, दवाइयों और पौष्टिक आहार की सख्त जरूरत होती है, वहाँ उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का शिकार बनाया गया। इस अमानवीय घटना ने एक बार फिर से इस बेहद गंभीर और चुभने वाले सवाल को जन्म दे दिया है कि क्या हमारे समाज में बहुएं केवल घर का काम करने वाली मशीनें बनकर रह गई हैं, और क्या उनके भीतर का इंसान होना ससुराल वालों के लिए कोई मायने नहीं रखता?ऑपरेशन के बाद अस्पताल से सीधे घर लौटी बहू और शुरू हुआ प्रताड़ना का दौरघटना की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित बहू को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते डॉक्टरों की सलाह पर एक बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा। सर्जरी के बाद जब वह अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने ससुराल लौटी, तो उसके टांके अभी पूरी तरह से सूखे भी नहीं थे और उसे डॉक्टर ने पूरी तरह से बेड रेस्ट (Bed Rest) की सख्त हिदायत दी थी। लेकिन इंसानियत और संवेदनाओं को ताक पर रख चुके ससुराल के लोगों ने बहू की इस गंभीर शारीरिक स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। घर पहुंचते ही उससे उम्मीद की जाने लगी कि वह अपनी बीमारी और दर्द को भूलकर तुरंत रसोई संभाले और रोजमर्रा के घरेलू कामकाज में जुट जाए। जब उसने अपनी शारीरिक लाचारी और दर्द का हवाला देते हुए असमर्थता जताई, तो ससुराल वालों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने उसके साथ बेहद बुरा बर्ताव करना शुरू कर दिया।दर्द से तड़पती बहू को खाना तक देने से किया क्रूर इनकारइस अमानवीयता की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब सर्जरी के बाद दवाइयां खाने के समय उस महिला को भूखा रखा गया और घर के सदस्यों ने उसे खाना देने से साफ मना कर दिया। परिवार के लोगों का कहना था कि वह नाटक कर रही है और काम से बचने के लिए बीमारी का बहाना बना रही है, जबकि सच्चाई यह थी कि वह बिस्तर से उठने तक की स्थिति में नहीं थी। एक तरफ जहाँ डॉक्टर ने उसे समय पर हल्का और पौष्टिक भोजन खाने की सलाह दी थी, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने ही ससुराल वाले उसे प्रताड़ित करने के लिए भूखा रख रहे थे। इस तरह का मानसिक और शारीरिक टॉर्चर किसी भी इंसान को अंदर से तोड़ देने के लिए काफी होता है, और एक ऐसी लड़की के लिए तो यह किसी नरक से कम नहीं था जो अपने मायके से उम्मीदों का नया संसार बसाने ससुराल आई थी।समाज की दबी हुई आवाज और बहुओं के अधिकारों पर गंभीर सवालयह अकेली घटना इस बात का प्रमाण है कि आज भी कई घरों में पितृसत्तात्मक सोच और संवेदनहीनता कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है, जहाँ एक बहू को इंसान के रूप में नहीं बल्कि एक गुलाम या रोबोट समझा जाता है। जब एक महिला शादी करके किसी नए घर में प्रवेश करती है, तो वह अपने माता-पिता को छोड़कर नए रिश्तों को संवारने आती है, लेकिन बदले में उसे कई बार इस तरह का क्रूर और शोषक व्यवहार मिलता है जो उसकी अस्मिता को कुचल देता है। समाज के बुद्धिजीवियों, महिला संगठनों और हर संवेदनशील नागरिक का यह फर्ज बनता है कि वे इस तरह की अमानवीय घटनाओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें। यदि समय रहते इस प्रकार की घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो समाज में मानवीय मूल्यों का पूरी तरह से पतन हो जाएगा।न्याय की गुहार और इस मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ जरूरी कदमजब पानी सिर से ऊपर निकल गया और उस पीड़ित बहू के लिए वहां एक पल भी गुजारना असंभव हो गया, तो उसने हिम्मत जुटाकर अपने मायके वालों को इस पूरी घटना की जानकारी दी। मायके पक्ष के लोगों ने मौके पर पहुंचकर तुरंत पुलिस की मदद ली और उस बेटी को उस प्रताड़ना के घर से बाहर निकाला, जिसके बाद अब कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह मामला हम सबको यह सोचने पर मजबूर करता है कि बहुओं के प्रति हमारे समाज का यह रवैया कब बदलेगा और कब उन्हें एक इंसान के रूप में जीने का हक मिलेगा। परिवारों को यह समझना होगा कि रिश्ते प्यार, विश्वास और एक-दूसरे के सम्मान से चलते हैं, जुल्म और प्रताड़ना से नहीं।
शुभेंदु अधिकारी ने कालीघाट मंदिर में खाई मछली, खुद को बताया सनातनी हिंदू
आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में मछली की प्रधानता है। वहां दुर्गा पूजा के दौरान भी लोग मछली का खूब सेवन करते हैं। वहां मंदिरों में भोग के तौर पर मछली का इस्तेमाल होता है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने एक्टिंग के साथ-साथ अपनी जिंदगी के अलग-अलग किरदारों को भी बखूबी निभाया है। उन्होंने शादी और मां बनने के बाद फिल्मों से दूरी बनाई, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ के साथ-साथ बिजनेस पर भी ध्यान दिया।
असम की नागांव लोकसभा सीट पर BJP से पूर्व IAS देबाशीष शर्मा मैदान में, उपचुनाव की तारीखों का ऐलान
who is Debasish Sharma: असम की सियासत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने नागांव (Nagaon) लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। 6 अक्टूबर को होने वाले इस चुनाव के लिए भाजपा (BJP) ने पूर्व आईएएस ...
ABVP ने जारी किया DUSU सेंट्रल पैनल, यश हैं अध्यक्ष पद के दावेदार
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026-27 के लिए ABVP ने अपने चार केंद्रीय पदों के उम्मीदवारों का पैनल घोषित कर दिया है. यश डबास को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया है. चुनाव 18 सितंबर को होगा और नतीजे 19 सितंबर को घोषित किए जाएंगे. ABVP और NSUI के बीच यह मुकाबला सुरक्षा, हॉस्टल सुविधाओं और कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर केंद्रित है.
भारतीयों को बाहर निकालो, भारत की कंपनी बैन कर दो; अमेरिका में इतनी नफरत क्यों?
‘मिस्टर सिंह’ नाम के साथ पोस्टर जारी करना, भारत की कंपनियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई और अब एच1 बी वीजा पर कड़े नियमों का प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से किया गया है। खास बात है कि इन सभी कदमों से भारतीय खासे प्रभावित हो रहे हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कितने पढ़े-लिखे हैं?
शी जिनपिंग का जीवन राजनीतिक विशेषाधिकार से संघर्ष और सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की कहानी है. 15 साल की उम्र में उन्हें बीजिंग से शान्शी के लियांगजियाहे गांव भेजा गया, जहां उन्होंने किसानों के साथ करीब सात साल बिताए. इसके बाद छिंगहुआ विश्वविद्यालय में रासायनिक अभियांत्रिकी पढ़ी. नौकरी के दौरान उन्होंने मार्क्सवादी सिद्धांत और कानून की पढ़ाई की तथा डॉक्टरेट हासिल की. 2012 में वे पार्टी महासचिव बने भी.
25 साल बाद न्यूयॉर्क के आसमान में फिर दिखे ट्विन टावर
न्यूयॉर्क में 9/11 हमले में मारे गए लोगों को एक खास तरह से श्रद्धांजलि दी गई. मारे गए 2,977 लोगों के लिए उनकी संख्या के बराबर के ड्रोन से एक बार फिर ट्विन टावर का आकार बनाया गया. खास बात यह रही की पीड़ितों के परिवारों और हमले के बचाव दल में शामिल लोगों ने साथ मिलकर इस आयोजन की तैयारी की.
अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर क्यों बैठे योगी के मंत्री, सपा का भी मिला साथ, जानें क्या है मामला?
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने गुरुवार देर शाम लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मुर्दाघर में पार्टी कार्यकर्ता विनोद साहनी की मौत को लेकर धरना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गोंडा में साहनी पर गोली और चाकू से हमला किया गया था। एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, समाजवादी पार्टी के विपक्षी नेता भी निषाद — जो NDA के सहयोगी हैं — के साथ धरने में शामिल हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में एक मंत्री की बात भी नहीं सुनी जाती है। मंत्री ने बताया कि पीड़ित विनोद साहनी निषाद समुदाय से थे। इसे भी पढ़ें: BRICS पर Congress में मतभेद, Shashi Tharoor ने Chidambaram पर उठाए सवाल, BJP ने घेरा संजय निषाद गोंडा पहुंचे विनोद कुमार साहनी की हत्या के बाद मंत्री संजय निषाद गोंडा पहुंचे और स्थानीय पुलिस व प्रशासन द्वारा सुरक्षा बलों की भारी तैनाती पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। संजय निषाद ने कहा कि आपने पुलिस फ़ोर्स क्यों तैनात की? मैंने आपसे कहा था कि हम गाँव जाएँगे, वरना विपक्ष के लोग गाँव में आग लगा देंगे। मुझे बताइए, SP के मंत्री वहाँ कैसे पहुँचे? बताइए। आप सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। आपने इतनी ज़्यादा पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दी... मैंने आपसे यह भी कहा था कि लोग शांति से जाएँगे, पीड़ित परिवार को सांत्वना दी जाएगी। सरकार का एक्शन हालांकि, बाद में रात में पुलिस ने कहा कि सहनी को लाठियों से पीटा गया था और पोस्टमार्टम में गोली या चाकू का कोई घाव नहीं मिला। पुलिस ने नामजद तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और साहनी की मौत के मामले में तीन पुलिसकर्मियों के सस्पेंशन की भी पुष्टि की। निषाद पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर पहचाने गए विनोद कुमार साहनी की KGMU में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत की खबर मिलने के बाद मंत्री अस्पताल के पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे और परिवार के विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। इस मामले में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में SHO सहित 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। एसपी अभिषेक के मुताबिक, परसपुर के थानाध्यक्ष उप निरीक्षक कमला शंकर चतुर्वेदी, शाहपुर चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक अंकित सिंह और सिपाही अभिमन्यु भारती को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया है। इसे भी पढ़ें: AAP vs BJP: Satya Niketan में BJP MLA के कथित Illegal PG पर बरसे Saurabh Bhardwaj, गिराने की मांग अखिलेश का तंज समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूरे मामले को लेकर सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि भाजपा राज ‘अत्याचार, अन्याय, अहंकार’ का पर्यायवाची बन गया है, जिसके निशाने पर ‘पीडीए’ है। अगर कहीं कोई भी ‘धर्म-न्याय’ में विश्वास करनेवाला है तो इस क्रूर हत्या का संज्ञान ले अन्यथा पीडीए समाज मिलजुलकर अपनी लड़ाई ख़ुद लड़ लेगा। भाजपा में ‘निषाद’ को ‘विषाद‘ के सिवा कुछ नहीं मिलेगा। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
रश्मिका मंदाना ने हाइब इंडिया से मिलाया हाथ, बोलीं- 'हर लड़की को अपने सपने को एक मौका देना चाहिए'
अभिनेत्री रश्मिका मंदाना आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने का सफर उनके लिए आसान नहीं रहा।
Review: डकैत बने अरशद ने मचाया 'घमासान', क्लाइमैक्स ने किया निराश
Ghamasaan Film Review: अरशद वारसी और प्रतीक गांधी की इस बीहड़ थ्रिलर में डकैत, पुलिस और सियासत का जबरदस्त खेल देखने को मिलता है. जानिए फिल्म कैसी है और क्या यह आपको बांधकर रखती है.
Bihar Flood से 15 जिलों में भारी तबाही, 46.88 लाख लोग प्रभावित
बिहार और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति शुक्रवार को भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिलों के 46.88 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि कई नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आपदा प्रबंधन विभाग (डीएमडी) के शुक्रवार को जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, 15 जिलों के 88 प्रखंडों की 561 ग्राम पंचायतों की 46.88 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं। इनमें भागलपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया और बक्सर सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से हैं। बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार, सितंबर महीने में अब तक राज्य में 90.0 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक है। डीएमडी के अनुसार, भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर शुक्रवार को सुबह छह बजे 36.62 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 2.12 मीटर ऊपर है। हालांकि यहां जलस्तर में कमी आ रही है। बुलेटिन के अनुसार, गंडक नदी डुमरिया घाट, कोसी बलतरा और कुर्सेला में, बूढ़ी गंडक नदी खगड़िया, गंगा दीघा, गांधी घाट, हथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में, पुनपुन नदी श्रीपालपुर, बागमती बेनीबाद में तथा घाघरा नदी दरौली और गंगपुर सिसवन में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। विभाग ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में 1,194 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं। इसके अलावा 15 राहत शिविर संचालित हैं, जहां 11,255 बाढ़ पीड़ितों के लिए आवास, भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
बच्चे की टिकट को लेकर हुए बवाल, जानिए कब ले सकते हैं आधी टिकट
ट्रेन में बच्चे की टिकट को लेकर यात्री और टीटीई के बीच बहस का वीडियो वायरल हो रहा है. ऐसे में जानिए रेलवे के नियमों के मुताबिक किस उम्र के बच्चे की टिकट जरूरी है, कब आधी टिकट लगती है और कब बच्चे के लिए पूरी टिकट खरीदनी पड़ती है.
पहली बार मिला है नया क्रेडिट कार्ड? चंद मिनटों में घर बैठे ऐसे जनरेट करें अपना सीक्रेट पिन
नया क्रेडिट कार्ड हाथ में आते ही सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इसका इस्तेमाल आखिर कैसे शुरू किया जाए और इसका सीक्रेट पिन (Green PIN) घर बैठे कैसे जनरेट किया जाए। अगर आपने जीवन में पहली बार क्रेडिट कार्ड बनवाया है और आप बैंक केचक्कर काटने से बचना चाहते हैं, तो चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आज के डिजिटल दौर में आप बेहद आसान स्टेप्स को फॉलो करके चंद मिनटों के भीतर अपने कार्ड का पिन खुद सेट कर सकते हैं। इसके लिए आपको बैंक की किसी शाखा में जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आपके स्मार्टफोन या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए ही यह पूरा काम आसानी से हो जाता है।नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप का करें इस्तेमालक्रेडिट कार्ड का पिन बनाने का सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित तरीका बैंक की आधिकारिक नेट बैंकिंग या उनका मोबाइल एप्लीकेशन होता है। सबसे पहले अपने बैंक के नेट बैंकिंग पोर्टल पर लॉगिन करें या फिर उनके आधिकारिक मोबाइल ऐप को ओपन करें। इसके बाद 'क्रेडिट कार्ड सर्विसेज' या 'कार्ड मैनेजमेंट' वाले सेक्शन में जाएं। यहां आपको 'जेनरेट क्रेडिट कार्ड पिन' या 'सेट ग्रीन पिन' का एक विकल्प दिखाई देगा। उस पर क्लिक करने के बाद आपको अपना नया 4 अंकों का पसंदीदा पिन दर्ज करना होगा। इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक वन-टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी आएगा। उस ओटीपी को दर्ज करते ही आपका सीक्रेट पिन तुरंत एक्टिवेट हो जाएगा और आपका कार्ड इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा।एटीएम मशीन के जरिए पिन जनरेट करने का आसान तरीकायदि आप इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तो आप अपने नजदीki एटीएम (ATM) मशीन के जरिए भी बहुत आसानी से क्रेडिट कार्ड का पिन बना सकते हैं। इसके लिए अपने बैंक या किसी भी अधिकृत एटीएम केंद्र पर जाएं और वहां अपनी मशीन में क्रेडिट कार्ड स्वाइप करें या चिप रीडर में लगाएं। स्क्रीन पर दिए गए विकल्पों में से 'पिन जनरेशन' या 'ग्रीन पिन' के विकल्प को चुनें। इसके बाद बैंक खाते या कार्ड से जुड़ा अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें। आपके फोन पर एक ओटीपी भेजा जाएगा जिसे एटीएम स्क्रीन पर दर्ज करना होगा। ओटीपी वेरीफाई होने के बाद आप अपनी पसंद का कोई भी चार अंकों का सीक्रेट पिन दर्ज करके उसे कंफर्म कर सकते हैं।कस्टमर केयर कॉल और एसएमएस सेवा का विकल्पकई बैंक अपने ग्राहकों को फोन कॉल और एसएमएस के जरिए भी तुरंत पिन बनाने की सुविधा देते हैं। आप अपने बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके ऑटोमेटेड वॉयस रिस्पांस सिस्टम के निर्देशों का पालन करते हुए पिन जनरेट कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ बैंक एक विशेष फॉर्मेट में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से एसएमएस भेजकर भी पिन बनाने की अनुमति देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि अपना सीक्रेट पिन कभी भी किसी के साथ शेयर न करें, चाहे वह बैंक का कर्मचारी ही क्यों न हो। अपना पिन हमेशा ऐसा रखें जिसे कोई आसानी से अनुमान न लगा सके, ताकि आपका कार्ड पूरी तरह सुरक्षित रहे।
'हम अपने बाजार एक-दूसरे के लिए खोलें', BRICS समिट में बोले पीयूष गोयल
दिल्ली में होने जा रहे ब्रिक्स समिट 2026 के बिजनेस सेटअप में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने समूह के सभी सदस्य देशों से कहा कि हम अपने बाजार के एक-दूसरे के प्रोडक्ट्स समेत कच्चे माल और खनिज के लिए खोलें. आगे उन्होंने कहा कि हमें अपने अपनी सप्लाई चेन को और लचीला बनाना होगा. देखें उनका पूरा संबोधन.
बॉलीवुड की चुलबुली और डिंपल गर्ल के नाम से मशहूर अभिनेत्री प्रीति जिंटा एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपनी अदाकारी का जादू बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शादी के बाद लंबे समय तक सिनेमा की चकाचौंध से दूर रहने और विदेश में परिवार के साथ वक्त बिताने के बाद प्रीति ने हाल ही में बॉलीवुड में शानदार वापसी की है। जहां दर्शक उन्हें दोबारा स्क्रीन पर देखकर उत्साहित हैं, वहीं खुद प्रीति जिंटा इंडस्ट्री के बदले हुए तौर-तरीकों को देखकर हैरान हैं।अपनी आगामी स्पाई कॉमेडी फिल्म 'वाइब' (Vibe) के प्रमोशन के दौरान एक साक्षात्कार में प्रीति ने फिल्मों में वापसी के बाद मिले 'कल्चरल शॉक' (Cultural Shock) और आक्रामक पैपराजी कल्चर (Paparazzi Culture) पर खुलकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने बेबाकी से स्वीकार किया कि आज के दौर में एक एक्टर की जिंदगी सिर्फ कैमरे के सामने अभिनय करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उसके इर्द-गिर्द का तामझाम कई गुना ज्यादा तनावपूर्ण हो चुका है।पहले सिर्फ एक्टिंग करनी होती थी, अब एयरपोर्ट लुक संभालना पड़ता हैसाक्षात्कार में जब प्रीति जिंटा से पूछा गया कि इतने सालों बाद जब वह सेट पर लौटीं, तो उन्हें सबसे बड़ा सांस्कृतिक बदलाव क्या देखने को मिला, तो उन्होंने साफ कहा कि झटका फिल्मों के अंदर नहीं, बल्कि फिल्मों के इर्द-गिर्द खड़े किए गए माहौल में लगा है:सिर्फ सेट तक नहीं सीमित काम: प्रीति ने कहा, मेरे लिए सबसे बड़ा कल्चरल शॉक फिल्मों को लेकर नहीं है, बल्कि फिल्मों के बाहर की चीजों को लेकर है। पैपराजी की लगातार मौजूदगी और सोशल मीडिया का बेजा दखल सबसे बड़ी चुनौती है। पहले के समय में हम सीधे सेट पर जाते थे, अपना शॉट देते थे, एक्टिंग खत्म करते थे और घर लौट जाते थे।एयरपोर्ट लुक और बनावटी दिखावा: उन्होंने तंज कसते हुए कहा, आज के दौर में आप कैसे कपड़े पहनते हैं, यह अभिनय से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। आपका 'एयरपोर्ट लुक' कैसा है, इस पर सबका ध्यान रहता है। अगर आप दुखी हैं, तो भी आपको फैशनेबल तरीके से दुखी (Fashionably Sad) दिखना पड़ता है, और अगर खुश हैं, तो फैशनेबल तरीके से खुश होना पड़ता है।हर मुद्दे पर राय देने का दबाव: उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज देश में अगर कोई भी घटना घटती है, तो एक्टर्स से अपेक्षा की जाती है कि उन्हें पूरी जानकारी हो, वे उस पर टिप्पणी करें और बिल्कुल सही बात कहें। आज कलाकारों पर हर समय परफेक्ट और अद्भुत दिखने का भारी दबाव (Optics Pressure) बना रहता है।कुणाल खेमू की 'वाइब' में स्पाई अवतार: एक्शन करती नजर आएंगी प्रीतिसनी देओल के साथ फिल्म 'बंटवारा 1947' के बाद अब प्रीति जिंटा निर्देशक कुणाल खेमू की कॉमेडी-एक्शन फिल्म 'वाइब' (Vibe) में मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं। 18 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही इस फिल्म में प्रीति ने 'मैडम एच' (Madam H) नाम की एक तेजतर्रार जासूस का रोल निभाया है, जो दो अनाड़ी दोस्तों को एक सीक्रेट मिशन के लिए ट्रेन करती है:पहली बार एक्शन अवतार: प्रीति ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में कई लीक से हटकर किरदार निभाए हैं—चाहे वह 'क्या कहना' में बिन ब्याही मां का रोल हो, 'संघर्ष' की सीबीआई अफसर या 'चोरी चोरी चुपके चुपके' की कहानी हो। लेकिन एक्शन जॉनर में उन्होंने कभी हाथ नहीं आजमाया था।स्क्रिप्ट की ताकत: उन्होंने कहा कि आज महिला केंद्रित एक्शन फिल्मों का दौर है, लेकिन यह तभी सफल हो सकता है जब कहानी और पटकथा में दम हो। स्टंट डायरेक्टर परवेज शेख के मार्गदर्शन में उन्होंने फिल्म के मुश्किल एक्शन सीन्स को खुद अंजाम दिया है।अपनी शर्तों पर काम करने का फैसला: बॉक्स ऑफिस पर दिया सच्चा संदेश51 वर्षीय अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब वह किसी चूहा दौड़ (Rat Race) का हिस्सा नहीं हैं और अपनी गति और पसंद के प्रोजेक्ट्स पर ही काम करेंगी। बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों के उतार-चढ़ाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा:मेहनत पर भरोसा: प्रीति का मानना है कि किसी भी कलाकार का काम पूरी ईमानदारी से मेहनत करना और अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है, परिणाम जनता के हाथ में छोड़ देना चाहिए।दर्शकों से सिनेमाघरों में जाने की अपील: उन्होंने दर्शकों से अपील की कि अगर वे अच्छी फिल्मों की उम्मीद करते हैं, तो उन्हें सिनेमाघरों में जाकर फिल्में देखनी चाहिए। लोग अक्सर कहते हैं कि अच्छी फिल्में थिएटर्स में नहीं आतीं, लेकिन अगर दर्शक टिकट खरीदकर सिनेमाघर नहीं पहुंचेंगे, तो मेकर्स ऐसी फिल्में कैसे बनाएंगे?प्रीति जिंटा के इस बेबाक बयान ने सोशल मीडिया और बॉलीवुड गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। कई फैंस और सेलिब्रिटीज ने उनके इस रुख का समर्थन किया है कि पैपराजी और सोशल मीडिया ट्रोलिंग ने कलाकारों की निजी आजादी और मानसिक शांति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
‘कब तक निचोड़ोगे?’ गावस्कर का ICC से सवाल- खिलाड़ी मशीन नहीं
सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेटरों के लगातार व्यस्त शेड्यूल पर सवाल उठाते हुए ICC से 2027 से शुरू होने वाले नए चार साल के क्रिकेट कैलेंडर पर खिलाड़ियों के वर्कलोड को ध्यान में रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेटर न तो मशीन हैं और न गन्ना, जिन्हें लगातार निचोड़ा जाए.
बागी TMC का Mamata Banerjee को ऑफर: Nandigram से लड़ो, उम्मीदवार नहीं देंगे
बागी तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने बुधवार को उपचुनाव से पहले TMC प्रमुख ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो बागी गुट उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा। दत्ता ने कहा कि अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम से अपना नामांकन दाखिल करती हैं और वहां से चुनाव लड़ती हैं, तो बागी तृणमूल कांग्रेस उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इसे भी पढ़ें: BRICS पर Congress में मतभेद, Shashi Tharoor ने Chidambaram पर उठाए सवाल, BJP ने घेरा तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर पार्टी के दावे के बारे में दत्ता ने भरोसा जताया कि उन्हें भारत के चुनाव आयोग से चुनाव चिह्न मिल जाएगा, क्योंकि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का ठीक से पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के तौर पर हम बहुत उम्मीद लगाए हुए हैं क्योंकि हमने चुनाव आयोग के सभी कानूनी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया है। हमें उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में हमें चुनाव चिह्न मिल जाएगा। दत्ता ने कहा कि उपचुनाव की घोषणा के बाद, एक ही चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करके कई उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकते, और उन्होंने चिह्न मिलने को लेकर पार्टी की उम्मीद दोहराई। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी के पांच सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और आरोप लगाया कि उपचुनाव की घोषणा के बाद से उनके उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं और उन पर झूठे पुलिस मामले दर्ज किए गए हैं। इसे भी पढ़ें: AAP vs BJP: Satya Niketan में BJP MLA के कथित Illegal PG पर बरसे Saurabh Bhardwaj, गिराने की मांग दत्ता ने कहा कि हम चाहते हैं कि सबको बराबरी का मौका मिले और चुनाव निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के हों। जनता जिसे चुनेगी और वोट देगी, वही जीतेगा। अपनी पार्टी की जीत को लेकर भरोसा जताते हुए दत्ता ने दावा किया कि रेजीनगर में उनका उम्मीदवार जीतेगा और बागी तृणमूल कांग्रेस की बीजेपी द्वारा की जा रही आलोचना पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि रेजीनगर में हमारा उम्मीदवार जीतेगा। बीजेपी इतनी डरी हुई क्यों है? दत्ता ने चुनाव आयोग से निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की पार्टी की मांग को दोहराया और इस बात पर ज़ोर दिया कि चुनाव का नतीजा वोटरों द्वारा तय किया जाना चाहिए। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Mayawati ने SP पर कसा तंज, नीला रंग अपनाने से सोच नहीं बदलने वाली
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को विपक्षी दलों खासतौर पर समाजवादी पार्टी पर अपनी पार्टी के परंपरागत नीले रंग को अपनाने को लेकर तंज कसते हुए कहा कि इससे न तो इनकी संकीर्ण सामंती सोच बदलने वाली और न ही ये लोग दिल से आंबेडकरवादी होने वाले हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा था कि पार्टी की छात्र इकाई ‘छात्र सभा’ ने नीली टी-शर्ट और जींस को नये ‘ड्रेस कोड’ के तौर पर अपनाया है। मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के अपने आधिकारिक हैंडल पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘‘सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बसपा का शुरू से ही चला आ रहा नीला रंग अब इनके गले के गमछे व कपड़ों तथा स्टेज आदि में भी इस्तेमाल होने लगा है।’’विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि नीला रंग इस्तेमाल करने से सर्व समाज में से खासकर गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामंतवादी और पूंजीवादी सोच नहीं बदल सकती और न ही ये लोग दिल से अंबेडकरवादी हो सकते हैं। बसपा प्रमुख ने कहा कि बहुजन समाज के वास्तविक हित व कल्याण के लिए पहले वे (विपक्षी नेता) अपना दिल और दिमाग पाक-साफ करें। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं। मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) के ‘पीडीए’ फॉर्मूले पर भी निशानासाधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के मामले में सोच, चाल, चरित्र और चेहरा से बेईमान रही है और इसके कई उदाहरण हैं तथा वे भी यह जानते हैं। मायावती ने कहा कि इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी और आंबेडकरवादी पार्टी केवल बसपा ही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ‘छात्र सभा’ के नये ‘ड्रेस कोड’ के लिए नीले रंग को चुने जाने के पीछे की वजह बताते हुए कहा था कि नीला रंग विचारधारा, लोकतंत्र, संविधान, आकाश, ‘बहुजन समाज’ और बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़ा हुआ है। इससे पहले, सपा ‘छात्र सभा’ के कार्यकर्ता लाल शर्ट या कुर्ता पहनते थे।
नीम करोली बाबा को क्यों कहा जाने लगा था हनुमान जी का अंश?
नीम करोली बाबा को हनुमान जी का अंश मानने की धारणा ऐतिहासिक प्रमाणों के बजाय भक्तों की आस्था और उनसे जुड़ी कथाओं पर आधारित है। बाबा स्वयं को भगवान के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय राम नाम, हनुमान भक्ति और सेवा की प्रेरणा देते थे।
बच्चे ना होने पर इलाज कराने पहुंचा शख्स तो पेट में निकल आया गर्भाशय, डॉक्टर भी रह गए हैरान
दिल्ली में एक 24 साल का शख्स अपना इलाज कराने डॉक्टर के पास गया तो पता चला कि उसके पेट में गर्भाशय है। डॉक्टरों ने बताया कि यह बेहद दुर्लभ केस है। दुनियाभर में ऐसे 300 ही मामले सामने आए हैं।
अब आपकी जमीन का भी बनेगा आधार... सबकुछ डिजिटल, नई स्कीम लॉन्च!
अब आपके जमीन का भी अधार कार्ड जारी किया जा सकता है. सरकार ने एक नई स्कीम की शुरुआत की है, जिसके तहत जमीन का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल किया जाएगा. इसके लिए रजिस्टार कार्यालयों को भी मॉर्डन और डिजिटल किया जाएगा.
फेम गुरुकुल के विनर, अरिजीत के जिगरी यार, क्यों चर्चा में काजी?
काजी तौकीर, जो 2005 में फेम गुरुकुल जीतकर मशहूर हुए थे, बिग बॉस 20 से वापसी कर चुके हैं. अरिजीत सिंह के साथ उनकी पुरानी दोस्ती और संगीत की दुनिया में उनका योगदान दर्शकों का ध्यान खींच रहा है. जानते हैं कि बिग बॉस में वो क्या कमाल कर रहे हैं.
Delhi MACT ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों को ₹66.89 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश
दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने उस व्यक्ति के परिवार को 66.89 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है जिसकी दिसंबर 2023 में गुरुग्राम में एक ट्रक की चपेट में आने से 27 साल की उम्र में मौत हो गई थी। पीठासीन अधिकारी विक्रम, रमाकांत शर्मा के परिवार की ओर से दायर मुआवजा याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दावा दायर करने की तारीख से नौ प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। अधिकरण ने तीन सितंबर के अपने आदेश में कहा, “यह अभिलेख से साबित हो चुका है कि उक्त दुर्घटना प्रतिवादी संख्या दो (ट्रक चालक) द्वारा वाहन को तेज गति और लापरवाही से चलाने के कारण हुई।”अधिकरण के आदेश के अनुसार, छह दिसंबर, 2023 की रात शर्मा गुरुग्राम के सेक्टर 18 से मोटरसाइकिल पर अपने घर लौट रहे थे, तभी एक ट्रक ने उनकी मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी। उन्हें गुरुग्राम और दिल्ली के अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन आठ दिसंबर, 2023 को सफदरजंग अस्पताल में उनकी मौत हो गई। शर्मा की पत्नी, दो बेटियों, मां और पिता ने संयुक्त रूप से मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। उनकी 29,800 रुपये की मासिक आय के आधार पर अधिकरण ने आश्रितों को हुई क्षति की राशि 63.83 लाख रुपये तय की। अंतिम संस्कार और संपत्ति संबंधी खर्चों के लिए अतिरिक्त राशि जोड़कर कुल मुआवजा 66.89 लाख रुपये तय किया गया। अधिकरण ने कहा कि दुर्घटना के समय ट्रक वैध परमिट के बिना चलाया जा रहा था। अधिकरण ने बीमा कंपनी को यह अधिकार भी दिया कि वह मुआवजे की राशि वाहन के मालिक और चालक से वसूल कर सके। मुआवजे की राशि पांचों दावेदारों के बीच बांटने का निर्देश दिया गया। इनमें से कुछ राशि तत्काल जारी करने और शेष राशि को सावधि जमा में रखने का निर्देश दिया गया। बीमा कंपनी को 30 दिन के भीतर मुआवजे की राशि जमा करने का निर्देश दिया गया।
बच्चे-बुजुर्ग नहीं खाते चुकंदर? लंच में बनाएं चटपटे चुकंदर राइस
Beetroot Rice: अगर आपके घर में भी रोज एक तरह के सादे चावल बनते हैं तो इस बार कुछ अलग ट्राई करें. जी हां, अपने सादे चावलों में चुकंदर का टेस्टी ट्विस्ट दीजिए. इससे आपको अलग फ्लेवर तो मिलेगा ही, साथ ही चुकंदर के ढेरों पोषक तत्व भी मिलेंगे.
'किलर लुक' वाली नेहा की बेल पर टिकी नजर, जीजा ईशान संग कोर्ट में अर्जी
समस्तीपुर में 75 लीटर शराब के साथ गिरफ्तार हुई मॉडल लुक वाली नेहा झा और उसके जीजा ईशान की जमानत अर्जी कोर्ट में दाखिल हो गई है. दोनों फिलहाल जेल में हैं. सोशल मीडिया पर नेहा के जेल से बाहर आने की कई पोस्ट वायरल हो रही हैं, लेकिन अभी उसे बेल नहीं मिली है. दोनों की जमानत अर्जी पर 19 सितंबर को विशेष उत्पाद न्यायालय-2 में सुनवाई होगी.
कौन हैं देबाशीष शर्मा? 4 दिन पहले BJP में शामिल हुए, नौगांव लोकसभा सीट से बन गए उम्मीदवार
बाद में वे बीजेपी में शामिल हो गए और बीते विधानसभा चुनावों में दिसपुर सीट से जीत हासिल की थी। देबाशीष शर्मा रिटायर डीसी हैं और हाल ही में भाजपा में शामिल हुए थे। आपको बता दें कि इस सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा, जबकि वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी।
सोशल मीडिया पोस्ट, विवाद, घेरकर हमला... विनोद के कत्ल की पूरी डिटेल
गोंडा में बर्तन व्यापारी विनोद साहनी पर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद के बाद हमला किया गया. गंभीर हालत में KGMU लखनऊ में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार हैं. पढ़ें पूरी कहानी.
बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने ट्रैक्टर पर निकलीं CO मैडम, वीडियो वायरल
बिहार के भागलपुर में गंगा की बाढ़ ने कई गांवों का रास्ता मुश्किल बना दिया है. ऐसे में शाहकुंड की सीओ हर्षा कोमल ने राहत पहुंचाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया. जहां सरकारी गाड़ी नहीं पहुंच सकी, वहां वह ट्रैक्टर पर राहत सामग्री लेकर बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचीं. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
2026 में आएंगे साइक्लोन, 44 साल में सबसे ताकतवर, ISRO की चेतावनी
साल 2026 के आखिरी तीन महीने समंदर के लिहाज से अहम हो सकते हैं. अक्टूबर से दिसंबर के बीच 3 ट्रॉपिकल साइक्लोन बनने का अनुमान है. इसरो के मुताबिक इन तूफानों की ताकत सामान्य से काफी ज्यादा रह सकती है.
असम भाजपा ने नौगांव से देबाशीष शर्मा को बनाया उम्मीदवार: लोकसभा उपचुनाव
नई दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने असम में होने वाले लोकसभा उपचुनाव 2026 को लिए उम्मीदवार की घोषणा कर दी है।
गोंडा मर्डर केस: पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे BJP विधायक, वायरल वीडियो पर तोड़ी चुप्पी
गोंडा में बर्तन व्यापारी विनोद साहनी की हत्या के बाद मामला गरमा गया है. परिवार शव रखकर प्रदर्शन कर रहा है, जबकि निषाद पार्टी और सपा भी विरोध में सड़क पर उतरी हैं. वायरल वीडियो पर बीजेपी विधायक अजय सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि वह परिवार से मिलने और मामले में सहयोग के लिए पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे थे.
आकाश आनंद पर क्यों गिरी गाज? मायावती का UP चुनाव में क्या है प्लान, ईशान को मिलेगी कमान?
अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया, लेकिन इससे BSP में उनके दामाद आकाश आनंद की जगह नहीं बच पाई। गुरुवार को मायावती ने अपने भतीजे को पार्टी से निकाल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आनंद ने बहुजन आंदोलन से ज़्यादा परिवार के प्रति वफ़ादारी को अहमियत दी। यह फ़ैसला 3 सितंबर को आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटाए जाने के एक हफ़्ते बाद आया। मायावती ने पार्टी में उनकी सक्रिय भूमिका में वापसी को सिद्धार्थ के राजनीति से पूरी तरह हटने से जोड़ा था। जब यह घोषणा हुई, तो उन्होंने कहा कि यह बहुत देर से आया है। इसे भी पढ़ें: BRICS पर Congress में मतभेद, Shashi Tharoor ने Chidambaram पर उठाए सवाल, BJP ने घेरा बार-बार मौके, बार-बार झटके मायावती के नेतृत्व में आकाश के राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, और यह उनका सबसे ताज़ा झटका है। उन्हें पहली बार मई 2024 में और फिर मार्च 2025 में BSP से निकाला गया था। दोनों ही बार, उन्हें एक महीने के अंदर वापस ले लिया गया और बाद में अहम ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गईं। उन्हें संगठन की एक बड़ी भूमिका से हटाने का ताज़ा मामला 3 सितंबर को सामने आया, जब BSP ने उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटा दिया। इस घटनाक्रम से पता चलता है कि बार-बार मौके मिलने के बावजूद, आकाश BSP प्रमुख का भरोसा बनाए रखने में नाकाम रहे। ईशान पर भरोसा इस माहौल में, आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद द्वारा मायावती के बयान को तुरंत रीपोस्ट करने की खबर अहम हो जाती है। मायावती ने हाल ही में ईशान को पार्टी में अहम ज़िम्मेदारियाँ सौंपी हैं। जहाँ आकाश का पहले वाले पोस्ट को रीपोस्ट न करना आलोचना का विषय बना, वहीं मायावती के रुख का समर्थन करने के लिए ईशान की तत्परता दोनों भाइयों के बीच एक बड़ा अंतर दिखाती है। अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के सभी पदों से हटाने के चार दिन बाद, मायावती ने सोमवार को अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी के संगठन में एक अहम पद पर नियुक्त किया। BSP के पदाधिकारियों का कहना है कि लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद ईशान की बढ़ती भूमिका को लेकर अटकलें तेज़ हो गईं; इस बैठक में ईशान भी मौजूद थे। पार्टी के पदाधिकारियों का मानना है कि वह मायावती के उत्तराधिकारी हो सकते हैं और उनकी हालिया नियुक्ति इसी बात का संकेत है। उथल-पुथल और पार्टी BSP में चल रही उथल-पुथल और पार्टी के हालात काफी अहम हैं और यह मामला सिर्फ़ परिवार के झगड़े से कहीं बढ़कर है। पार्टी ने 2022 में उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से सिर्फ़ एक सीट जीती थी और 2024 में राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से एक भी सीट नहीं जीत पाई, जबकि उसका वोट शेयर गिरकर 9.39% रह गया। मायावती की पार्टी को उत्तर प्रदेश के 2022 के चुनाव में 12% के आसपास वोट मिले थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर आज़ाद एक युवा दलित नेता के तौर पर उभरकर सामने आए हैं जो पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं और आज़ाद, BSP के लिए कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। क्या पार्टी तोड़ने की हुई कोशिश मायावती बहुत ही कम लोगों पर भरोसा करती हैं। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से निकलते हुए आजाद शब्द का भी इस्तेमाल किया जिसके बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई की क्या बसपा को तोड़ने की भी कोशिश हुई है। मायावती की दलित राजनीति को लेकर चंद्रशेखर रावण और उनकी पार्टी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) काफी सक्रिय है। ऐसे में मीडिया में ऐसी अटकलें हैं कि शायद मायावती को इस बात का संदेह होने लगा था कि उनके कोर वोटर पर कोई सेंधमारी करने की कोशिश कर रहा है और इसमें पार्टी के ही लोग भूमिका निभा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: AAP vs BJP: Satya Niketan में BJP MLA के कथित Illegal PG पर बरसे Saurabh Bhardwaj, गिराने की मांग 2027 की रणनीति यह बात सही है कि पिछले चार चुनाव को देखकर तो मायावती को सियासी रूप से कुछ खास सफलता नहीं मिली है। 2027 के चुनाव में भी मायावती की पार्टी को कितनी सफलता मिलेगी, इस बात का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। क्या 2022 में 12% के आसपास उनकी पार्टी को जो वोट मिला था, उसे भी मायावती हासिल कर पाएगी या नहीं कर पाएगी इस पर भी संदेह है। मायावती आज भी पुरानी राजनीतिक तौर तारीको पर ज्यादा विश्वास कर रही हैं। जबकि राजनीति में कई बड़े बदलाव आ चुके हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक तो मायावती की पार्टी को उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगभग खत्म सा मान लिया है। वह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर आक्रामक रहती हैं लेकिन भाजपा पर शांत ही रही हैं। उनकी पार्टी फिलहाल अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि मायावती की पार्टी कितनी ताकत अपनी विधानसभा चुनाव में दिख पाती है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
महेश बाबू, राजामौली, लक्ष्मण से साइना नेहवाल तक... चुनाव आयोग की SIR नोटिस लिस्ट में कई VIPs
हैदराबाद में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के तहत महेश बाबू, एसएस राजामौली, वीवीएस लक्ष्मण और साइना नेहवाल समेत कई बड़ी हस्तियों को नोटिस भेजा गया है. इस लिस्ट में नम्रता, वेंकटेश दग्गुबाती, समांथा रुथ प्रभु, विजय देवरकोंडा, मिताली राज, पुलेला गोपीचंद और उपासना कोंडिडेला जैसे नाम भी शामिल हैं.
रेलवे ने जैन समाज के पवित्र पर्यूषण पर्व को ध्यान में रखते हुए भावनगर से बांद्रा टर्मिनस के बीच एक विशेष सुपरफास्ट ट्रेन चलाने का फैसला किया है। यह खास ट्रेन 16 सितंबर को शाम 5:40 बजे भावनगर से रवाना होगी और अगले दिन यानी 17 सितंबर को सुबह 7:25 बजे ...
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नई दिल्ली, भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 से ठीक पहले ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया।
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सिंगर सुनिधि चौहान ने अपनी आवाज से बॉलीवुड के गानों को तो कई यादगार पल दिए हैं, लेकिन इस बार उनकी अपनी जिंदगी में एक ऐसा पल आया, जिसे वह शायद लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगी। सुनिधि पहली बार कश्मीर पहुंचीं और घाटी की खूबसूरती देखकर पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गईं। जिस कश्मीर को उन्होंने अब तक फिल्मों और पर्दे पर देखा था, उसे जब उन्होंने अपनी आंखों के सामने देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
'कोहली पर सवाल क्यों, रोहित तो...', कोच का 'फ्यूचर' पर बड़ा बयान
विराट कोहली के 2027 वनडे वर्ल्ड कप खेलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन उनके बचपन के कोच राजकुमार शर्मा ने लेकर पूरी स्थिति साफ की है. विराट के हालिया प्रदर्शन, फिटनेस और क्रिकेट के प्रति भूख को देखते हुए उनकी जगह पर चर्चा ही नहीं होनी चाहिए. रोहित शर्मा पर भी उन्होंने बात की.
डस्टबिन की ये 3 गलतियां पड़ सकती हैं भारी, आते-आते रुक सकता है पैसा!
Dustbin Vastu: क्या आपके घर में भी गलत दिशा में रखा है डस्टबिन? जानिए वास्तु शास्त्र के अनुसार कूड़ेदान रखने की सही दिशा, सही रंग और सही शेप.

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