गॉल में DSP सिराज ने छक्का जड़ उड़ाए श्रीलंका के होश?
मोहम्मद सिराज इन दिनों गेंद से ज्यादा बल्ले से कमाल दिखा रहे हैं. श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट के दूसरे दिन सिराज ने अपनी बल्लेबाजी से फैन्स का ध्यान अपनी ओर खींचने का काम किया.
'टिकट उसे मिले जो जीते, न कि चाटुकारिता', 4 सीट मांगने वाले बयान से पलटे कांग्रेस सांसद
पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी विवाद के बीच, गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा चुनावों में टिकट दावेदारी को लेकर अपनी स्थिति साफ कर दी है. उन्होंने कहा कि टिकट सिर्फ डेरा बाबा नानक से ही लिया जाएगा और इसे जीतने वाले को दिया जाना चाहिए.
2027 चुनाव में अयोध्या जीतना BJP के लिए कितना बड़ा चैलेंज? देखें हल्ला बोल
2027 के यूपी विधानसभा चुनावों को लेकर सभी पार्टियां जोर-शोर से जुट गई हैं. इसी कड़ी में सीएम योगी अयोध्या पहुंचे. वही अयोध्या, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी हार गई थी. चढ़ावा चोरी पर भी बीजेपी को सपा लगातार घेर रही है. ऐसे में सवाल है कि क्या अयोध्या से ही 2027 चुनाव का रास्ता निकलेगा? देखें हल्ला बोल.
हरियाली अमावस्या पर राजगढ़ धाम में कल्पवृक्ष जोड़े की विधिवत पूजा
अजमेर। धार्मिक एवं पवित्र आस्था के पर्व हरियाली अमावस्या के अवसर पर राजगढ़ धाम स्थित चक्की वाले बाबा मंदिर परिसर में राजा-रानी के कल्पवृक्ष जोड़े की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। चम्पालाल महाराज ने सपरिवार मंत्रोच्चारण के साथ पूजा संपन्न कराई। इस दौरान राजा-रानी को वस्त्र धारण करवाकर रक्षासूत्र बांधा गया तथा प्रसाद का भोग लगाकर […] The post हरियाली अमावस्या पर राजगढ़ धाम में कल्पवृक्ष जोड़े की विधिवत पूजा appeared first on Sabguru News .
हत्या को हादसा बताने की कोशिश, ऐसे खुली हत्यारी पत्नी और दोस्त की पोल
महाराष्ट्र के नागपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पर 33 साल के एक व्यक्ति को उसकी पत्नी और दोस्त ने मिलकर मौत के घाट उतार दिया। बाद में दोनों ने इस हत्या को हादसे का रूप भी देने की कोशिश की।
मुंबई क्राइम ब्रांच ने गोवंडी, देवनार और बांद्रा में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने बिना वैध लाइसेंस और डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहे 5 डॉक्टरों पर शिकंजा कसा, जिनमें से कुछ के पास केवल होम्योपैथी की डिग्री थी या वे सिर्फ सातवीं-बारहवीं पास थे।
62 साल पुराना वो गाना, जिसने समाज को दिखाया था आईना, मजरूह के बोल और रफी की आवाज से बना सदाबहार
मोहम्मद रफी की जादुई आवाज और मजरूह सुल्तानपुरी के बोलों से सजा यह गाना समाज की असंवेदनशीलता पर गहरा प्रहार है. मजरूह सुल्तानपुरी के बोलों से सजा यह गाना आज भी फैंस को रुला देता है.
थलपति विजय पर 'मां से पूछना' वाले बयान को लेकर शिकायत दर्ज, तमिलनाडु BJP चीफ की बढ़ी मुश्किलें
नागेंद्रन ने विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय की ओर से पिता का जिक्र किए जाने पर तंज कसते हुए कहा, 'जिन लोगों को जानना है कि उनके पिता कहां हैं, उन्हें विधानसभा में जवाब तलाशने के बजाय घर जाकर अपनी मां से पूछना चाहिए।'
अजमेर में अग्रवाल समाज महिला समिति ने मनाया तीज महोत्सव
अजमेर। अग्रवाल समाज महिला समिति की ओर से वैशाली नगर स्थित लायंस भवन में तीज महोत्सव हर्षोल्लास और पारंपरिक रंग में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष संतोष बंसल ने की। मुख्य अतिथि नीलू गुप्ता ने महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संस्था की महासचिव सुषमा अग्रवाल […] The post अजमेर में अग्रवाल समाज महिला समिति ने मनाया तीज महोत्सव appeared first on Sabguru News .
सोनीपत में रील के चक्कर में 8 युवकों पर पुलिस का एक्शन
सोनीपत में स्वतंत्रता दिवस के दौरान सड़क पर कारों के काफिले के साथ स्टंट और हुड़दंग करने का वीडियो वायरल हुआ. सबसे आगे चल रही स्कॉर्पियो पर लालबत्ती लगी थी, जबकि पीछे कई लग्जरी वाहन शामिल थे. कुछ गाड़ियों की नंबर प्लेट भी गायब थी. वीडियो सामने आने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आठ युवकों को गिरफ्तार किया और स्टंट में इस्तेमाल सभी वाहनों को जब्त कर लिया.
IPS आशुतोष मिश्रा की 91 वर्षीय मां की संदिग्ध मौत, घर से जेवर गायब
अंबेडकर नगर में IPS आशुतोष मिश्रा की 91 वर्षीय मां की संदिग्ध मौत से हड़कंप मच गया. घर से जेवर गायब मिले. पुलिस हत्या, लूट और हार्ट अटैक के एंगल से जांच कर रही है.
दनादन निवेश... विदेशी निवेशक फिदा, 15 दिन में लगाए ₹16600Cr
Invest In Indian Stocks: चार महीने की तगड़ी निकासी करने के बाद जुलाई में भारतीय शेयर बाजार में वापस लौटे विदेशों निवेशकों के निवेश का सिलसिला लगातार जारी है. 15 दिन में उन्होंने 16,600 करोड़ रुपये से ज्यादा लगा दिए हैं.
JPSC-JSSC Protest: रांची में फिर बढ़ा बवाल, तेजस्वी-राहुल का पुतला क्यों फूंक रहे छात्र?
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों का आरोप है कि सत्ताधारी झामुमो-कांग्रेस गठबंधन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहा है.
घर में हो गई बहुत सारी छिपकलियां, इन 5 नेचुरल तरीके से भगाएं दूर
वैसे तो घरों में दिखने वाली छिपकलियां आमतौर पर नुकसान नहीं पहुंचाती और मच्छरों, मक्खियों व छोटे कीड़ों को खाकर घर को साफ रखने में मदद करती हैं, लेकिन फिर भी ज्यादातर लोग इन्हें अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते. अगर आप भी बिना किसी केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल किए इन्हें घर से दूर रखना चाहते हैं, तो कुछ आसान और प्राकृतिक उपाय आपकी मदद कर सकते हैं.
चरखी दादरी जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके चलते एक युवक को गोली मार दी गई। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के कब्जे से अवैध हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए हैं।
राज्यसभा सांसदों को मिलीं नई जिम्मेदारियां, एम्स समेत कई संस्थानों के बोर्ड में मिली जगह
राज्यसभा के दस सदस्यों को एम्स सहित विभिन्न वैधानिक निकायों में नियुक्त किया गया है, जिसमें पब्लिक अकाउंट्स और पब्लिक अंडरटेकिंग्स कमेटी के लिए भी चुनाव हुए।
सावन के तीसरे सोमवार पर नाग पंचमी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
हिंदू पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त की शाम 4:51 बजे होगी और इसका समापन 17 अगस्त की शाम 5 बजे होगा. ऐसे में नाग पंचमी की पूजा के लिए सबसे शुभ समय 17 अगस्त को सुबह 5:51 बजे से सुबह 8:29 बजे तक बताया गया है.
नींद में एक्ट्रेस का हुआ निधन, परिवार ने गुपचुप किया अंतिम संस्कार
साल 2019 में आई फिल्म घोस्ट में काम कर चुकीं एक्ट्रेस और मॉडल अनन्या राज के निधन की खबर सामने आई है. जुलाई में 35 साल की एक्ट्रेस नींद में ही चल बसी थीं, जिसकी जानकारी अब उनके परिवार ने दी है.
सावन व्रत में हरी चटनी संग बनाएं कुरकुरे साबूदाना-आलू वड़ा
Sabudana Vada: अगर आप भी सावन सोमवार के व्रत रख रहे हैं और हमेशा की इस बार भी आलू या मूंगफली खाकर काम चलाने की कोशिश कर रहे हैं तो यहां हम आपको साबूदाना के वड़े की रेसिपी बता रहे हैं. ये झटपट बनकर तैयार हो जाएंगे और आपके पेट को भी फुल रखेंगे.
कनाडा में पढ़ाई करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी! स्टूडेंट वीजा खत्म तो लौटना होगा घर...
कनाडा में PGWP और PR को लेकर चल रहे विवाद के बीच अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा है कि स्टूडेंट वीजा खत्म होने पर छात्रों को देश छोड़ देना चाहिए, यदि उन्हें स्थायी निवास नहीं मिला है.
'आंध्र प्रदेश में मिला दो मेरा इलाका...', कर्नाटक कांग्रेस विधायक ने क्यों रखी ऐसी मांग
कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के मोलकालमुरु विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक एनवाई गोपालकृष्ण ने क्षेत्र की उपेक्षा पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि अगर मोलकालमुरु को उचित ध्यान नहीं दिया जाता है.
उत्तर प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) की 85 प्रतिशत राज्य कोटे की सीटों पर दाखिले के लिए नीट यूजी 2026 (NEET UG 2026) काउंसलिंग प्रक्रिया अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय, उत्तर प्रदेश (DGME UP) द्वारा संचालित इस ऑनलाइन काउंसलिंग में राज्यभर के हजारों सफल मेडिकल अभ्यर्थी अपनी रैंक, पसंदीदा कॉलेज और सीट सुरक्षित करने की होड़ में जुटे हैं।काउंसलिंग के पहले चरण (Round-1) के तहत ऑनलाइन पंजीकरण, आवश्यक शैक्षिक व जाति प्रमाण पत्रों को पोर्टल पर अपलोड करने, पंजीकरण शुल्क और अनिवार्य धरोहर राशि (Security Money) जमा करने का विंडो आधिकारिक पोर्टल upneet.gov.in पर सक्रिय रहा है। महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं अभ्यर्थियों का नाम राज्य की आधिकारिक मेरिट सूची में शामिल किया जाएगा, जिनका ऑनलाइन पंजीकरण और फीस सत्यापन निर्धारित समय सीमा के भीतर सफलता पूर्वक पूर्ण हो चुका होगा। इस चरण के समाप्त होते ही स्टेट मेरिट लिस्ट जारी करने और चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।पंजीकरण और धरोहर राशि का गणित: सरकारी व निजी कॉलेजों के लिए तय नियमयूपी नीट यूजी काउंसलिंग में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को दो अलग-अलग प्रकार के शुल्कों का भुगतान ऑनलाइन मोड (नेट बैंकिंग/डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड/यूपीआई) के जरिए करना होता है:पंजीकरण शुल्क (Registration Fee): सभी श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए ₹2,000 का गैर-वापसी योग्य (Non-Refundable) पंजीकरण शुल्क निर्धारित है।सरकारी मेडिकल व डेंटल सीटों के लिए धरोहर राशि: जो अभ्यर्थी केवल उत्तर प्रदेश के राजकीय मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की सीटों पर प्रवेश चाहते हैं, उन्हें ₹30,000 की सिक्योरिटी मनी जमा करनी होती है।निजी मेडिकल कॉलेजों (Private Medical Colleges) के लिए धरोहर राशि: राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस सीटों के लिए काउंसलिंग में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) की सिक्योरिटी मनी जमा करना अनिवार्य है। इस राशि से अभ्यर्थी सरकारी और निजी दोनों प्रकार के मेडिकल कॉलेजों के विकल्प चुन सकते हैं।निजी डेंटल कॉलेजों (Private Dental Colleges) के लिए धरोहर राशि: केवल निजी क्षेत्र के बीडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए यह राशि ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) निर्धारित है।महानिदेशालय ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों को विशेष चेतावनी दी है कि वे सिक्योरिटी मनी का भुगतान केवल अपने या अपने माता-पिता के निजी बैंक खाते से ही करें। किसी साइबर कैफे या बाहरी एजेंट के खाते से भुगतान करने पर यदि अभ्यर्थी को सीट आवंटित नहीं होती है या वह रिफंड का पात्र बनता है, तो रिफंड राशि उसी मूल खाते में वापस भेजी जाती है, जिससे भविष्य में वित्तीय जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।स्टेट मेरिट लिस्ट और आरक्षण के कड़े नियम: 1 अप्रैल 2026 की कट-ऑफ डेट अनिवार्यपंजीकरण और शुल्क सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद डीजीएमई यूपी द्वारा 'यूपी स्टेट कंबाइंड मेरिट लिस्ट' जारी की जाएगी। इस मेरिट सूची में राज्य के मूल निवासी (Domicile) अभ्यर्थियों और अन्य राज्यों के पात्र उम्मीदवारों की ऑल इंडिया नीट रैंक के आधार पर राज्य स्तरीय रैंक तय की जाती है।आरक्षण के नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने बेहद कड़े दिशा-निर्देश तय किए हैं:ओबीसी (NCL) और ईडब्ल्यूएस (EWS) प्रमाण पत्र: उत्तर प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग (Non-Creamy Layer) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अंतर्गत आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों का जाति व आय प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा 1 अप्रैल 2026 को या उसके बाद जारी किया गया होना चाहिए। इस तिथि से पुराना प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर अभ्यर्थी को स्वतः ही अनारक्षित (General/Unreserved) श्रेणी में परिवर्तित कर दिया जाएगा।मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate): जिन अभ्यर्थियों ने अपनी हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) दोनों परीक्षाएं उत्तर प्रदेश से बाहर से उत्तीर्ण की हैं, उनके लिए राज्य का वैध डोमिसाइल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन (Horizontal Reservation): महिला अभ्यर्थियों (20%), दिव्यांगजन (5% PwD), स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित (2%), भूतपूर्व सैनिक (2%) और एनसीसी-सी सर्टिफिकेट धारकों (1%) को उनके संबंधित मूल वर्ग के भीतर ही क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।चॉइस फिलिंग और अनिवार्य 'चॉइस लॉकिंग': जरा सी लापरवाही से रद्द हो सकती है उम्मीदवारीस्टेट मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद काउंसलिंग का सबसे तकनीकी चरण 'चॉइस फिलिंग' (Choice Filling) शुरू होगा। पोर्टल पर लॉगिन करके अभ्यर्थियों को अपनी प्राथमिकता के अनुसार मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के विकल्पों का चयन करना होता है।चॉइस फिलिंग के दौरान ध्यान रखने योग्य मुख्य बातें:वरीयता क्रम (Order of Preference): कॉलेजों का चुनाव अपनी वास्तविक प्राथमिकता के आधार पर करें। सबसे पसंदीदा कॉलेज को पहले नंबर पर और उसके बाद अन्य विकल्पों को रखें।चॉइस लॉकिंग है अनिवार्य: विकल्पों को भरने के बाद उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर ओटीपी (OTP) के जरिए लॉक (Lock) करना अनिवार्य है। यदि कोई अभ्यर्थी केवल विकल्प सेव (Save) करके छोड़ देता है और उन्हें लॉक नहीं करता, तो उसका चॉइस डेटा सिस्टम द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा और वह सीट आवंटन प्रक्रिया से स्वतः बाहर हो जाएगा।लॉकिंग के बाद कोई संशोधन नहीं: एक बार चॉइस लॉक हो जाने के बाद उसमें किसी भी परिस्थिति में बदलाव, जोड़ना या हटाना संभव नहीं होगा।उत्तर प्रदेश में मेडिकल सीटों का परिदृश्य: केजीएमयू से लेकर नए स्वशासी मेडिकल कॉलेजों तकउत्तर प्रदेश में 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' (एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज) योजना के तहत सरकारी मेडिकल सीटों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। राज्य में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU Lucknow), डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS Lucknow), जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर, एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा, एमएलबी झांसी, एलएलआरएम मेरठ, बीआरडी गोरखपुर और एमएलएन प्रयागराज जैसे शीर्ष और प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के अलावा दर्जनों नए स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों (Autonomous State Medical Colleges) में एमबीबीएस की सीटें उपलब्ध हैं।निजी क्षेत्र में भी शारदा यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा, रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज बरेली, मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज, एरा मेडिकल कॉलेज लखनऊ और हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज जैसे संस्थानों में हजारों सीटें काउंसलिंग के माध्यम से भरी जाएंगी। इस विशाल सीट मैट्रिक्स के कारण इस वर्ष राज्य के मध्यम और उच्च दोनों रैंक वाले छात्रों के लिए सरकारी व मान्यता प्राप्त निजी कॉलेजों में प्रवेश की संभावनाएं काफी मजबूत हैं।सीट आवंटन परिणाम और नोडल केंद्रों पर रिपोर्टिंग का प्रोटोकॉलचॉइस लॉकिंग की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद कंप्यूटर आधारित एल्गोरिदम के माध्यम से पहले चरण का सीट आवंटन परिणाम (Round-1 Seat Allotment Result) घोषित किया जाएगा।आवंटन के बाद की प्रक्रिया इस प्रकार होगी:अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड: चयनित अभ्यर्थी upneet.gov.in पोर्टल से अपना सीट आवंटन पत्र डाउनलोड करेंगे।दस्तावेज सत्यापन और रिपोर्टिंग: राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीट पाने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित आवंटित सरकारी कॉलेज के परिसर में जाकर मूल अभिलेखों का सत्यापन और प्रवेश औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। वहीं निजी मेडिकल या डेंटल कॉलेजों में सीट पाने वाले अभ्यर्थियों को शासन द्वारा निर्धारित जिला नोडल केंद्रों (Nodal Centers) पर उपस्थित होकर अपने मूल प्रमाण पत्रों की जांच करानी होगी और निर्धारित शिक्षण शुल्क का ड्राफ्ट जमा करना होगा।अपग्रेडेशन का विकल्प (Free Exit & Upgrade): पहले राउंड में सीट पाने वाले अभ्यर्थी यदि संतुष्ट नहीं हैं, तो वे निर्धारित नियमों के तहत एडमिशन लेने के बाद दूसरे राउंड में अपग्रेडेशन का विकल्प चुन सकते हैं।अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक मूल दस्तावेजों की चेकलिस्टकॉलेज या नोडल केंद्र पर रिपोर्टिंग के समय अभ्यर्थियों को निम्नलिखित सभी मूल प्रमाण पत्रों के साथ उनकी 2-2 स्व-प्रमाणित छायाप्रतियां (Photocopies) और पासपोर्ट साइज फोटो ले जाना अनिवार्य है:नीट यूजी 2026 एडमिट कार्ड और मूल स्कोरकार्ड (रैंक कार्ड)।हाईस्कूल (10वीं) का अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र (जन्मतिथि सत्यापन हेतु)।इंटरमीडिएट (12वीं) का अंकपत्र एवं उत्तीर्ण प्रमाण पत्र।यूपी नीट यूजी 2026 पंजीकरण पर्ची (Registration Slip) और सिक्योरिटी मनी भुगतान की रसीद।सीट आवंटन पत्र (Allotment Letter)।सामान्य निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate - यदि लागू हो)।जाति प्रमाण पत्र (OBC/SC/ST) एवं EWS प्रमाण पत्र (1 अप्रैल 2026 के बाद का)।सब-कैटेगरी प्रमाण पत्र (NCC/FF/Ex-Army/PwD - यदि लागू हो)।आधार कार्ड, पैन कार्ड या कोई अन्य वैध फोटो पहचान पत्र।न्यूनतम 8 से 10 पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो (वही जो नीट आवेदन पत्र में प्रयुक्त हुई हो)।तकनीकी सहायता और आधिकारिक हेल्पलाइन: दलालों और भ्रामक दावों से रहें सावधानकाउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या, फीस ट्रांजैक्शन फेलियर या ओटीपी न आने की स्थिति में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने विशेष तकनीकी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:हेल्पलाइन नंबर: 8189011696, 8189011697, 8189011698, 8189011699, 8189011700ईमेल सपोर्ट: upneetcounseling2026@gmail.comआधिकारिक वेबसाइट्स: upneet.gov.in एवं dgme.up.gov.inमहानिदेशालय ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों को कड़ा परामर्श दिया है कि वे बैकडोर एंट्री, डोनेशन या सीधे दाखिले का झांसा देने वाले अनाधिकृत एजेंटों और दलालों के बहकावे में बिल्कुल न आएं। उत्तर प्रदेश की शत-प्रतिशत मेडिकल और डेंटल सीटों पर दाखिला केवल और केवल नीट यूजी मेरिट और पारदर्शी ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए ही संभव है। सभी उम्मीदवार समय रहते अपनी प्रक्रिया पूरी करें और किसी भी नवीनतम अपडेट के लिए नियमित रूप से आधिकारिक पोर्टल पर नजर बनाए रखें।
9 साल बाद श्रीलंकाई सरजमीं पर टीम इंडिया: शुभमन गिल की कप्तानी में नए युग का आगाज
दक्षिण एशियाई क्रिकेट की दो पारंपरिक महाशक्तियों—भारत और श्रीलंका—के बीच लाल गेंद का रोमांचक संग्राम शुरू हो चुका है। भारतीय क्रिकेट टीम पूरे 9 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद श्रीलंकाई धरती पर टेस्ट सीरीज खेलने उतरी है। इससे पहले भारत ने 2017 में विराट कोहली के नेतृत्व में श्रीलंका का दौरा किया था, जहां टीम इंडिया ने 3-0 से ऐतिहासिक क्लीन स्वीप दर्ज किया था। हालांकि, इस बार भारतीय खेमे का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। वरिष्ठ खिलाड़ियों के टेस्ट प्रारूप से हटने के बाद युवा बल्लेबाज शुभमन गिल को भारतीय टेस्ट टीम की कमान सौंपी गई है।इस दौरे पर भारतीय टीम की युवा ब्रिगेड के सामने न केवल एशियाई उपमहाद्वीप की टर्निंग पिचों पर अपनी तकनीक साबित करने की चुनौती है, बल्कि आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखने का भी बड़ा दारोमदार है। दूसरी ओर, अपने घरेलू मैदानों पर हमेशा खतरनाक साबित होने वाली श्रीलंकाई टीम, कप्तान धनंजय डी सिल्वा के नेतृत्व में गॉल और कोलंबो के स्पिन-अनुकूल मैदानों पर भारत को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है।गॉल और कोलंबो में महामुकाबला: जानिए टेस्ट सीरीज का शेड्यूल और लाइव प्रसारणद इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा जारी India vs Sri Lanka Test Series Schedule के अनुसार, इस टेस्ट सीरीज में दो मुकाबले तय किए गए हैं:पहला टेस्ट मैच (15 अगस्त - 19 अगस्त): गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, गॉल (सुबह 10:00 बजे IST से)।दूसरा टेस्ट मैच (23 अगस्त - 27 अगस्त): सिंहली स्पोर्ट्स क्लब (SSC), कोलंबो (सुबह 10:00 बजे IST से)।भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए इस पूरी टेस्ट सीरीज का सीधा प्रसारण टीवी पर सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क (Sony Sports Ten 3 हिंदी व Ten 5 अंग्रेजी) पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि डिजिटल स्ट्रीमिंग सोनी लिव (SonyLIV) ऐप पर लाइव देखी जा सकती है।हेड-टू-हेड में भारत का दबदबा: 46 टेस्ट का इतिहास और गॉल का चक्रव्यूहभारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट क्रिकेट का इतिहास 1982 से शुरू हुआ था, जब दोनों देशों के बीच पहला आधिकारिक टेस्ट मुकाबला खेला गया था। जागरण जोश के India vs Sri Lanka Test Head-to-Head Stats के विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक, दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 46 टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं:कुल टेस्ट मैच: 46भारत की जीत: 22 मैच (47.8% विनिंग रेट)श्रीलंका की जीत: 7 मैच (15.2% विनिंग रेट)ड्रॉ मुकाबले: 17 मैचश्रीलंकाई धरती पर रिकॉर्ड: भारत ने श्रीलंका में 9 टेस्ट जीते हैं, जबकि श्रीलंका ने अपने घर में भारत के खिलाफ 7 मैचों में जीत हासिल की है।हालांकि कुल आंकड़ों में भारत का पलड़ा काफी भारी नजर आता है, लेकिन गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम का मैदान हमेशा से मेहमान बल्लेबाजों के लिए एक अभेद्य किला रहा है। गॉल की पिच तीसरे दिन से भयानक टर्न लेना शुरू करती है, जहां श्रीलंकाई स्पिनर दुनिया की बड़ी से बड़ी बल्लेबाजी लाइनअप को ध्वस्त करने का माद्दा रखते हैं।वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की जंग: फाइनल की राह के लिए हर एक अंक है कीमतीलाइव मिंट की WTC Standings & Series Preview Report के अनुसार, यह द्विपक्षीय सीरीज केवल ट्रॉफी जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के चक्र में दोनों टीमों की साख का सवाल है।भारतीय टीम वर्तमान में डब्ल्यूटीसी अंक तालिका में 5वें स्थान पर है, जहां उसका पॉइंट्स पर्सेंटेज (PCT) करीब 48.15% है। वहीं श्रीलंका की टीम 41.67% पीसीटी के साथ छठे पायदान पर मौजूद है। लॉर्ड्स में होने वाले डब्ल्यूटीसी फाइनल की रेस में बने रहने के लिए भारत को इस 2-0 की सीरीज जीत की सख्त जरूरत है। किसी भी एक मैच में हार या ड्रॉ टीम इंडिया के पॉइंट्स पर्सेंटेज को भारी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे आगामी सीरीज में दबाव बढ़ जाएगा।सचिन के 1995 रन और मुरलीधरन के 105 विकेट: इस प्रतिद्वंद्विता के अमर रिकॉर्ड्सभारत और श्रीलंका के बीच हुए टेस्ट मुकाबलों ने क्रिकेट जगत को कई ऐतिहासिक व्यक्तिगत और टीम रिकॉर्ड्स दिए हैं:सर्वाधिक रन (सचिन तेंदुलकर): क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर इस राइवलरी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 25 टेस्ट मैचों में 9 शतकों और 6 अर्धशतकों की मदद से कुल 1,995 रन बनाए हैं।सर्वाधिक विकेट (मुथैया मुरलीधरन): जादुई ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने भारत के खिलाफ 22 टेस्ट मैचों में रिकॉर्ड 105 विकेट चटकाए हैं, जिसमें 7 बार एक पारी में 5 या उससे अधिक विकेट शामिल हैं।एक सीरीज में सबसे ज्यादा रन (विराट कोहली): 2017-18 में विराट कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ 3 टेस्ट मैचों की सीरीज में 152.50 की अविश्वसनीय औसत से 610 रन ठोके थे, जिसमें 3 शतक शामिल थे।सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर (सनथ जयसूर्या): 1997 के ऐतिहासिक कोलंबो टेस्ट में सनथ जयसूर्या ने भारत के खिलाफ 340 रनों की मैराथन पारी खेली थी।सबसे बड़ा टीम स्कोर: इसी 1997 के मुकाबले में श्रीलंका ने भारत के खिलाफ 6 विकेट पर 952 रन बनाकर पारी घोषित की थी, जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा टीम टोटल है।गिल, जायसवाल और पंत बनाम जयसूर्या की फिरकी: दोनों टीमों के मुख्य हथियारभारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ इस समय युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल, कप्तान शुभमन गिल, केएल राहुल और विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के कंधों पर टिकी है। स्पिन की मददगार पिचों पर ऋषभ पंत की आक्रामक बल्लेबाजी और रवींद्र जडेजा का ऑलराउंड अनुभव मैच का पासा पलटने में सबसे अहम साबित होगा। गेंदबाजी में भारत कुलदीप यादव की कलाई की स्पिन और मोहम्मद सिराज व प्रसिद्ध कृष्णा की रिवर्स स्विंग पर भरोसा कर रहा है।वहीं श्रीलंकाई खेमे में उनके मुख्य बाएं हाथ के स्पिनर प्रभात जयसूर्या और ऑफ स्पिनर रमेश मेंडिस गॉल की पिच पर सबसे बड़े खतरे हैं। बल्लेबाजी में कप्तान धनंजय डी सिल्वा, दिनेश चांदीमल और शानदार फॉर्म में चल रहे कामिंदु मेंडिस भारतीय गेंदबाजों के धैर्य की कड़ी परीक्षा ले रहे हैं।निष्कर्ष: क्या गॉल में इतिहास दोहरा पाएगी नई टीम इंडिया?गॉल की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों का स्पिन के खिलाफ फुटवर्क और भारतीय स्पिनरों द्वारा सही लाइन-लेंथ पर लगातार दबाव बनाना ही इस टेस्ट सीरीज का परिणाम तय करेगा। जहां श्रीलंका अपने घरेलू रिकॉर्ड के दम पर भारत को मात देने की फिराक में है, वहीं शुभमन गिल की युवा भारतीय टीम इस दौरे पर जीत हासिल कर यह साबित करना चाहेगी कि वे विदेशी पिचों पर भी भारतीय टेस्ट क्रिकेट के स्वर्णिम दौर को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों से भारत की विकास यात्रा का पता चलता है, जो बुनियादी सुविधाओं से लेकर उन्नत तकनीक तक फैली है।
मुरादाबाद और बिजनौर में तेंदुओं के बढ़ते हमलों से सैकड़ों गांवों के लोग दहशत के माहौल में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं. प्रशासन ड्रोन, पिंजरों और संयुक्त टीमों से अभियान चला रहा है.
दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री चोकपॉइंट: होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक और आर्थिक अहमियत
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला संकरा समुद्री गलियारा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) वैश्विक ऊर्जा व्यापार की रीढ़ माना जाता है। अपनी सबसे संकरी जगह पर महज 33 से 39 किलोमीटर चौड़ा यह जलमार्ग रणनीतिक दृष्टिकोण से दुनिया का सबसे बड़ा 'चोकपॉइंट' है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया भर में समुद्री मार्ग से होने वाले कुल कच्चे तेल (Crude Oil) और पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और कतर जैसे प्रमुख तेल व गैस निर्यातक देशों की अर्थव्यवस्थाएं पूरी तरह से इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। तेल के अलावा, यूरोप और एशिया को मिलने वाली कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा और दुनिया के 30 प्रतिशत से अधिक यूरिया व अमोनिया उर्वरक (Fertilizer) का निर्यात भी होर्मुज से ही होता है। इस जलमार्ग के उत्तरी हिस्से पर ईरान का और दक्षिणी हिस्से पर ओमान के मुसैंडम प्रायद्वीप का नियंत्रण है, जिसके चलते इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी सैन्य हलचल का सीधा असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था की नब्ज पर पड़ता है।टकराव की पृष्ठभूमि: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष और नाकेबंदीवर्तमान होर्मुज संकट की जड़ें अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच भड़के सीधे सैन्य टकराव से जुड़ी हुई हैं। ईरान के सामरिक व परमाणु प्रतिष्ठानों पर पश्चिमी हमलों के जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अपने रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। ईरान ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों पर प्रतिबंध लगाते हुए चेतावनी दी कि पश्चिमी देशों और उनके सहयोगी मुल्कों के किसी भी जहाज को यहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।इसके जवाब में अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने नौसैनिक युद्धपोतों, विध्वंसकों और विमानवाहक पोतों की भारी तैनाती कर दी, जिसे 'वॉल ऑफ स्टील' का नाम दिया गया। ईरानी तटों और बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी और दूसरी ओर समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने व ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस पूरे इलाके को बारूद के ढेर में तब्दील कर दिया। परिणाम यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और बीमा फर्मों ने भारी जोखिम के डर से अपने विशाल तेल टैंकरों को इस मार्ग पर भेजने से मना कर दिया, जिससे सामान्य दिनों में रोजाना गुजरने वाले 130 से अधिक जहाजों का आवागमन ठप होकर नगण्य हो गया।तेहरान की कड़ी शर्तें और वॉशिंगटन का अडिग रुख: कूटनीतिक गतिरोध के मुख्य बिंदुहोर्मुज जलडमरूमध्य को सामान्य नौवहन के लिए फिर से खोलने को लेकर दोनों पक्षों के बीच भारी राजनीतिक और कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है। ईरानी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी सैन्य आक्रामकता को पूरी तरह बंद नहीं करता और उनकी पूर्वशर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक यह रणनीतिक जलमार्ग बंद रहेगा।ईरान ने जलमार्ग को सुचारू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए मुख्य रूप से चार शर्तें रखी हैं:अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों और क्षेत्रीय जलक्षेत्र की नाकेबंदी को तत्काल और बिना शर्त समाप्त किया जाए।सैन्य टकराव के दौरान हुए नुकसान के एवज में ईरान को पूर्ण वित्तीय मुआवजा (War Compensation) दिया जाए।ईरान पर लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और विदेशों में फ्रीज की गई उसकी अरबों डॉलर की संपत्तियां जारी की जाएं।फारस की खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोतों के एकतरफा दबदबे को समाप्त कर तटीय देशों (ईरान और ओमान) के संप्रभु अधिकारों को मान्यता दी जाए।दूसरी तरफ, अमेरिकी प्रशासन का रुख यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत जलमार्गों में 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' (निर्बाध नौवहन की स्वतंत्रता) एक सार्वभौमिक अधिकार है और अमेरिका किसी भी कीमत पर होर्मुज पर ईरान के एकतरफा नियंत्रण या जहाजों से टैक्स वसूलने की मांग को स्वीकार नहीं करेगा।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मार: 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा ऊर्जा व्यवधानहोर्मुज जलडमरूमध्य की इस प्रभावी बंदी को ऊर्जा अर्थशास्त्रियों ने 1973 के तेल संकट के बाद दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा झटका (Supply Shock) करार दिया है। इस व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में कच्चा तेल (Brent Crude) तेजी से उछलकर $100 से $126 प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। ऊर्जा की आपूर्ति शृंखला टूटने से विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों में महंगाई की नई लहर पैदा हो गई है।कच्चे तेल के अलावा प्राकृतिक गैस का संकट भी गहरा गया है। कतर दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक है, जिसका सारा गैस उत्पादन होर्मुज के रास्ते ही दुनिया भर में भेजा जाता है। इस सप्लाई के बाधित होने से यूरोप और एशियाई देशों में बिजली उत्पादन, औद्योगिक विनिर्माण और रासायनिक कारखानों पर ताले लटकने की नौबत आ गई है। इसके साथ ही, दुनिया भर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) अपने दशकों के निचले स्तर पर आ गए हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति से निपटने की देशों की क्षमता भी सीमित हो चुकी है।वैकल्पिक मार्गों की तलाश और सीमाएं: क्या पाइपलाइंस बन सकती हैं होर्मुज का विकल्प?संकट के गहराने के साथ ही खाड़ी देशों और वैश्विक शक्तियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाईपास करने वाले वैकल्पिक भूमिगत मार्गों (Pipelines) को तेज करने पर विचार शुरू किया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी फुजैराह (Fujairah) तेल पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने पर काम तेज किया है, जो होर्मुज के बाहर सीधे ओमान की खाड़ी में तेल निर्यात करने की सुविधा देती है। इसी तरह सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पेट्रोलाइन (East-West Pipeline) लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक कुछ तेल पहुंचा सकती है, और इराक व तुर्की ने किरकुक-सीहान पाइपलाइन के जरिए निर्यात बढ़ाने के समझौते किए हैं।हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि ये तमाम पाइपलाइंस मिलकर भी होर्मुज से निकलने वाले प्रतिदिन के 2 करोड़ बैरल से अधिक तेल और भारी मात्रा में एलएनजी का विकल्प नहीं बन सकतीं। कुवैत और कतर जैसे देशों के पास होर्मुज को बाईपास करने वाली कोई सीधी पाइपलाइन मौजूद ही नहीं है। इसके अलावा गैस और एलएनजी को पाइपलाइनों के जरिए अचानक री-रूट करना तकनीकी और वित्तीय रूप से बेहद जटिल है, जिसके चलते होर्मुज की निर्भरता को निकट भविष्य में पूरी तरह खत्म करना असंभव है।भारत के लिए 'रेड अलर्ट': 85% तेल आयात और ऊर्जा सुरक्षा की अग्निपरीक्षाहोर्मुज संकट का सबसे ज्यादा संवेदनशील असर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं, विशेषकर भारत पर पड़ता है। भारत अपनी कुल घरेलू आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से आयात करता है। भारत के कुल तेल आयात का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा और कतर से आने वाली एलएनजी का एक विशाल हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचता है।भारत के लिए इस संकट के तीन बड़े खतरे हैं:चालू खाता घाटा (CAD) और मुद्रास्फीति: कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल अरबों डॉलर बढ़ जाता है, जिससे रुपये की विनिमय दर पर दबाव आता है और घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ता है।उर्वरक और कृषि पर असर: खाड़ी देशों से यूरिया और अमोनिया की खेप रुकने से खरीफ और रबी फसलों के लिए रासायनिक खादों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर कृषि पैदावार और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।सामरिक भंडार की सीमा: भारत के विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पादुर स्थित भूमिगत 'रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार' (SPR) केवल कुछ हफ्तों की आपातकालीन आपूर्ति ही संभाल सकते हैं। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा कूटनीति के तहत रूस, पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका से तेल आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधनों (जैसे एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन) के प्रयोग में तेजी लानी पड़ रही है।ओमान की मध्यस्थता और आगे की राह: क्या कूटनीति से निकलेगा कोई ठोस समाधान?इस विकराल संकट के बीच खाड़ी देश ओमान एक बार फिर एक निष्पक्ष और शांतिदूत की भूमिका में आगे आया है। मस्कट में ईरानी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के बीच जहाजों के लिए सुरक्षित 'ट्रांजिट कॉरिडोर' और तकनीकी नेविगेशन नियमों को तय करने के लिए गहन बातचीत जारी है। हाल ही में दोनों तटीय देशों के बीच एक नए शिपिंग रूट मैप को लेकर सहमति बनने के सकारात्मक संकेत भी मिले हैं।संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और समुद्र में फंसे हजारों निर्दोष नाविकों व जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर अपील की है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या अमेरिका और ईरान अपने कड़े रुख में नरमी लाकर एक व्यावहारिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं, या फिर होर्मुज का यह सामरिक गतिरोध 21वीं सदी के सबसे बड़े वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकट का रूप लेकर दुनिया को एक नई मंदी की ओर धकेलेगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार के सहयोग शिविरों ने 6,533 पंचायतों में 96% आवेदनों का 30 दिनों के भीतर समाध
इतिहास की साझी विरासत से वर्तमान की नई चुनौतियों तक: भारत-बांग्लादेश संबंधों का नया मोड़
भारत और बांग्लादेश के बीच के संबंध केवल दो पड़ोसी मुल्कों की औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह 1971 के मुक्ति संग्राम (Liberation War) के साझा बलिदान, भाषा, संस्कृति, भौगोलिक निकटता और 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा से बंधे हैं। 1971 में बांग्लादेश के जन्म के समय भारत द्वारा निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका ने दोनों देशों के बीच एक अटूट रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी थी। पिछले डेढ़ दशक में दोनों देशों के रिश्तों को कूटनीति की भाषा में 'सोनाली अध्याय' (स्वर्णिम अध्याय) कहा गया, जिसके दौरान 2015 का ऐतिहासिक भूमि सीमा समझौता (LBA), समुद्री सीमा विवाद का शांतिपूर्ण समाधान और पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाले विशाल रेल-सड़क कनेक्टिविटी नेटवर्क का विस्तार हुआ।अगस्त 2024 में ढाका में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद द्विपक्षीय संबंधों में कई अप्रत्याशित कूटनीतिक असहजताएं और जटिलताएं देखने को मिलीं। ढाका में शासन परिवर्तन के बाद से ही दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने, जन-केंद्रित विदेश नीति को बहाल करने और रणनीतिक संवाद को पटरी पर लाने के लिए बैक-चैनल और प्रत्यक्ष राजनयिक प्रयास लगातार जारी हैं। भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) और 'एक्ट ईस्ट' नीति के केंद्र में बांग्लादेश की केंद्रीय भूमिका आज भी उतनी ही अपरिहार्य बनी हुई है जितनी पहले थी।दिसंबर 2026 में गंगा जल संधि का 30-वर्षीय नवीनीकरण: नदी जल कूटनीति की सबसे बड़ी परीक्षाभारत और बांग्लादेश के बीच 54 ऐसी नदियां हैं जो दोनों देशों की सीमाओं को पार करती हैं। इनमें सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय ऐतिहासिक 'गंगा जल संधि' (Ganga Water Sharing Treaty 1996) का नवीनीकरण है। वर्ष 1996 में 30 वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षरित यह ऐतिहासिक संधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है। पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर जल के प्रवाह के बंटवारे को निर्धारित करने वाली इस संधि के भविष्य पर दोनों देशों के लाखों किसानों और पर्यावरणीय स्थिरता की निर्भरता है।गंगा जल समझौते के अतिरिक्त, उत्तर बंगाल और बांग्लादेश के उत्तरी जिलों के बीच बहने वाली 'तीस्ता नदी' (Teesta River) का जल बंटवारा दशकों से एक अनसुलझा राजनीतिक व रणनीतिक मुद्दा रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियों के चलते 2011 में तीस्ता समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी थी। वर्तमान में तीस्ता नदी पुनरुद्धार और प्रबंधन परियोजना में चीन की बढ़ती दिलचस्पी ने नई दिल्ली के रणनीतिक हलकों में सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा की हैं, जिसके कारण भारत ने इस क्षेत्र में तकनीकी और वित्तीय सहयोग की समानांतर पहल की है।सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' की भू-राजनीतिक संवेदनशीलताभारत और बांग्लादेश दुनिया की पांचवीं सबसे लंबी थल सीमा साझा करते हैं। सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच समन्वय सीमा पर शांति बनाए रखने का मुख्य आधार है:सीमा पार अवैध घुसपैठ और तस्करी पर रोक: असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम और पश्चिम बंगाल से सटी सीमा पर अवैध प्रवासियों की आवाजाही, पशु तस्करी और जाली भारतीय मुद्रा (FICN) के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग जरूरी है।पूर्वोत्तर उग्रवाद पर निगरानी: भारत के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है कि बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल उल्फा (ULFA) या नगा चरमपंथी समूहों जैसे भारत-विरोधी तत्वों द्वारा सुरक्षित पनाहगाह के रूप में न किया जा सके।सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की सुरक्षा: उत्तर बंगाल का यह संकरा 22 किलोमीटर चौड़ा गलियारा मुख्य भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है। बांग्लादेश के लालमोनिरहाट और उत्तरी क्षेत्रों में किसी भी तीसरे देश (विशेषकर चीन) की सैन्य या निगरानी मौजूदगी भारत के इस संवेदनशील कॉरिडोर के लिए सीधा रणनीतिक जोखिम मानी जाती है।व्यापार, पारगमन और ऊर्जा सहयोग: दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदारआर्थिक दृष्टिकोण से बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा और वैश्विक स्तर पर पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आकार 14 से 16 अरब डॉलर के स्तर पर बना हुआ है। भारत बांग्लादेश को कच्चा कपास, पेट्रोलियम उत्पाद, बिजली, अनाज और मशीनरी का निर्यात करता है, जबकि बांग्लादेश से तैयार वस्त्र (Readymade Garments), जूट उत्पाद और चमड़े का आयात किया जाता है।दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी सहयोग कई प्रमुख स्तंभों पर टिका है:बंदरगाह पारगमन (Transit Access): बांग्लादेश के चटगाँव और मोंगला बंदरगाहों के जरिए भारतीय मालवाहक जहाजों को असम, त्रिपुरा और मेघालय तक माल पहुंचाने की ट्रांजिट सुविधा से पूर्वोत्तर राज्यों की लॉजिस्टिक्स लागत और समय में भारी कमी आई है।रेल और सड़क संपर्क: अगरतला-अखाउरा रेल लिंक, पेट्रापोल-बेनापोल इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP), और मैत्री सेतु (सबरूम-रामगढ़) ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक आवागमन को अभूतपूर्व गति दी है।ऊर्जा और ग्रिड कनेक्टिविटी: भारत द्वारा 1,100 मेगावाट से अधिक बिजली की आपूर्ति और भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन (IBFP) के जरिए असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी से बांग्लादेश के पारबतीपुर डिपो तक हाई-स्पीड डीजल का परिवहन निर्बाध ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है।कूटनीतिक पेच: शेख हसीना का प्रत्यर्पण, आंतरिक राजनीति और अल्पसंख्यकों की सुरक्षाढाका में राजनीतिक बदलाव के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में कुछ तीखे विवाद भी सामने आए हैं। बांग्लादेश के वर्तमान प्रशासन और वहां की अदालतों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ दर्ज मामलों के आधार पर उनके औपचारिक प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग उठाई जा रही है। वर्ष 2013 की भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) में राजनीतिक अपराधों और मानवीय आधारों से जुड़े विशिष्ट अपवाद शामिल हैं, जिसके चलते यह मसला दोनों देशों के बीच एक अत्यंत जटिल कानूनी व कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है।इसके साथ ही, भारत ने बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई अल्पसंख्यक समुदायों के जान-माल और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर मानवीय चिंताएं लगातार राजनयिक स्तर पर उठाई हैं। भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट रहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया, कानून का शासन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा एक स्थिर और सुरक्षित पड़ोस के लिए अनिवार्य पूर्वशर्तें हैं।वैश्विक शक्तियों का त्रिकोण: चीन-पाकिस्तान का प्रभाव और भारत की रणनीतिबांग्लादेश की रणनीतिक अवस्थिति बंगाल की खाड़ी के शीर्ष पर है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। हाल के समय में बीजिंग ने बांग्लादेश में अपने 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, गहरे समुद्र बंदरगाहों (पायरा और कॉक्स बाजार) और रक्षा आपूर्ति के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने की पुरजोर कोशिश की है। वहीं पाकिस्तान के साथ भी समुद्री और कूटनीतिक संपर्कों में आई तेजी क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गई है।भारत इस रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का मुकाबला किसी टकराव के बजाय पारदर्शी विकास सहायता, तेज क्रियान्वयन और बहुपक्षीय मंचों—जैसे बिम्सटेक (BIMSTEC), सार्क (SAARC) और BBIN (भूटान-बांग्लादेश-भारत-नेपाल मोटर वाहन समझौता)—के जरिए अधिक व्यावहारिक और टिकाऊ विकल्प देकर कर रहा है। भारत की नीति यह सुनिश्चित करने की है कि बांग्लादेश की विदेश नीति किसी एक गुट के प्रभाव में न आकर क्षेत्रीय संतुलन और संप्रभु प्राथमिकताओं पर आधारित रहे।आगे की राह: व्यावहारिक कूटनीति और जन-केंद्रित साझेदारी का निर्माणभूगोल को बदला नहीं जा सकता; भारत और बांग्लादेश एक-दूसरे के विकास, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए परस्पर निर्भर हैं। आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों से अलग हटकर व्यावहारिक हितों को कितनी प्राथमिकता देते हैं।1996 की गंगा जल संधि पर समय रहते सहमति बनाना, व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रस्तावित 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते' (CEPA) पर बातचीत को आगे बढ़ाना, और दोनों देशों के युवाओं, छात्रों, व्यापारियों और मेडिकल पर्यटकों के लिए वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाना द्विपक्षीय विश्वास को दोबारा सुदृढ़ कर सकता है। नई दिल्ली और ढाका के बीच एक खुला, परिपक्व और पारदर्शी संवाद ही दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और साझा आर्थिक प्रगति की सबसे मजबूत गारंटी साबित होगा।
सक्रिय हुआ मॉनसून का विकराल रूप: देश के 15 राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी
देशभर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही अत्यधिक नमी युक्त हवाओं और मानसूनी ट्रफ रेखा के सामान्य स्थिति से गुजरने के चलते उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत के विशाल भूभाग पर बादलों का भारी जमावड़ा बन गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 48 से 72 घंटों के लिए देश के 15 से अधिक राज्यों में मूसलाधार से अति भारी बारिश (Heavy to Extremely Heavy Rainfall) की गंभीर चेतावनी जारी करते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान कई क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंके वाली हवाएं चल सकती हैं, निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) हो सकता है और पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) का गंभीर खतरा बना हुआ है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDRF) को हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है।पहाड़ी राज्यों में आफत की बारिश: उत्तराखंड और हिमाचल में भूस्खलन व बादल फटने का रेड अलर्टपहाड़ी राज्यों में मॉनसून का सबसे आक्रामक रूप देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में बादलों के फटने, नदियों के उफान और पहाड़ों से मलबा गिरने (Landslides) का अत्यधिक जोखिम बना हुआ है:उत्तराखंड: देहरादून, नैनीताल, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी और पिथौरागढ़ जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। अलकनंदा, भागीरथी और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई संवेदनशील जगहों पर भूस्खलन के चलते यात्रियों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित पड़ावों पर रुकने की सलाह दी गई है।हिमाचल प्रदेश: कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में भारी बारिश और अचानक बाढ़ का खतरा है। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को ब्यास, सतलुज और रावी नदी के किनारों तथा ऊंचे जलप्रपातों से पूरी तरह दूर रहने का कड़ा निर्देश दिया है।जम्मू-कश्मीर: जम्मू संभाग के डोडा, किश्तवाड़, रियासी और पुंछ के पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश के चलते हाईवे पर फिसलन और पत्थर गिरने (Shooting Stones) की चेतावनी दी गई है।मैदानी इलाकों का हाल: यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में आंधी-बिजली का तांडवउत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में भी बादलों का डेरा जमा हुआ है, जहां भारी बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली (ठनका/वज्रपात) का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है:उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल और तराई से सटे जिलों (गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, पीलीभीत और बरेली) में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं लखनऊ, कानपुर, अयोध्या और वाराणसी के आसपास गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बौछारें पड़ने का अनुमान है।बिहार: उत्तर और उत्तर-पश्चिमी बिहार के चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा और किशनगंज में तेज हवाओं और वज्रपात के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। किसानों को खुले खेतों में जाने से बचने की हिदायत दी गई है।मध्य प्रदेश: भोपाल, जबलपुर, रीवा, सागर, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में लगातार रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर जारी रहने से नर्मदा, बेतवा और चंबल नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। कई प्रमुख बांधों के गेट खोले जाने की संभावना है।राजस्थान: पूर्वी राजस्थान के कोटा, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, जयपुर और सवाई माधोपुर जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में पानी भरने का संकट पैदा हो सकता है।दिल्ली-एनसीआर: राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में आसमान में घने काले बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में रुक-रुक कर मध्यम से तेज बारिश के स्पेल देखने को मिलेंगे, जिससे तापमान में गिरावट आएगी लेकिन ट्रैफिक जाम की समस्या हो सकती है।पश्चिमी और तटीय भारत: महाराष्ट्र, कोंकण और गुजरात में तूफानी हवाओं का दौरअरब सागर में बने चक्रवातीय दबाव के चलते पश्चिमी तट पर मॉनसून की गति बेहद तेज बनी हुई है:महाराष्ट्र और कोंकण: मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मुंबई के तटीय इलाकों में ऊंची लहरें (High Tide) उठने की संभावना है, जिसके चलते नगर निगम (BMC) ने आपदा नियंत्रण कक्ष को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। पश्चिमी घाट के घाट क्षेत्रों (घाट सेक्शंस) में दृश्यता कम होने और सड़क फिसलन का अलर्ट है।गुजरात: दक्षिण गुजरात (सूरत, वलसाड, नवसारी) और सौराष्ट्र के कुछ तटीय जिलों में मूसलाधार बारिश के चलते जलभराव की स्थिति बन सकती है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी जारी की गई है।ओडिशा और पश्चिम बंगाल: बंगाल की खाड़ी के तटीय इलाकों में बने निम्न दबाव के चलते तटीय जिलों में तेज हवाओं के साथ रुक-रुक कर भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।भारी बारिश और आकाशीय बिजली से सुरक्षा: जरूरी सावधानियां और गाइडलाइंसआपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें:उफनते नालों और जलमग्न पुलों को पार न करें: सड़कों या रपटों पर 1-2 फीट पानी बहने की स्थिति में भी वाहन निकालने या पैदल चलने की कोशिश न करें; तेज बहाव में संतुलन बिगड़ सकता है।पेड़ों और जर्जर मकानों से दूर रहें: आंधी या बारिश शुरू होने पर कभी भी बड़े, पुराने या अकेले खड़े पेड़ों के नीचे आश्रय न लें। कच्चे मकानों और पुराने ढांचों के गिरने का खतरा रहता है।बिजली के उपकरणों और खंभों से दूरी: सड़कों पर जलभराव के दौरान बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर, खुले तारों और लोहे की रेलिंग को छूने से बचें ताकि करंट के झटके से बचा जा सके।वज्रपात से बचाव: खेत में काम करने वाले किसान बादल गरजने के समय तुरंत किसी पक्के भवन या शेड के भीतर चले जाएं। खुले मैदान में फंसे होने पर उकड़ूं (क्रॉच) बैठ जाएं, जमीन पर सीधे न लेटें।मौसम ऐप्स और हेल्पलाइन का उपयोग: अपने स्मार्टफोन में केंद्र सरकार का 'मौसम ऐप' (Mausam App), आकाशीय बिजली अलर्ट के लिए 'दामिनी ऐप' (Damini App) और बिहार के नागरिक 'इंद्रवज्र ऐप' को एक्टिव रखें। आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष या नेशनल इमरजेंसी नंबर 112 पर तुरंत संपर्क करें।आगामी दो से तीन दिनों तक सभी प्रभावित राज्यों के निवासियों को अनावश्यक यात्राओं से बचने, मौसम के ताजा बुलेटिन पर नजर बनाए रखने और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी गई है।
गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा अनावरण पर कांग्रेस और सोनिया गांधी पर वंदे मातरम के अपमान को लेकर तीखा हमला बोला।
66 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में आए 667 करोड़ रुपये, जानिए अमित शाह ने किन योजनाओं से भर दी झोली
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के अलवर में रविवार को 6.74 लाख किसानों के खातों में मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि की छठी किस्त के 667.40 करोड़ रुपये DBT के जरिए ट्रांसफर किए.
घर मरम्मत करते समय मिला सोने का खजाना, अब पता लगाया जा रहा मालिक कौन
सोना मिलने के बाद अब उसके मालिकाना हक को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सभी पक्ष फिलहाल अपनी-अपनी प्लानिंग कर रहे हैं कि वो इस सोने को कहां और किस तरह खर्च करेंगे.
आवारापन 2 की सक्सेस से गदगद प्रोड्यूसर, किया जन्नत 3 का ऐलान
आवारापन 2 दो दिनों में हिट साबित हो गई है, जिससे खुश होकर प्रोड्यूसर विशेष भट्ट ने जन्नत 3 का ऐलान कर दिया है. ये इमरान की एक और आइकॉनिक फिल्म रही, जिसका सीक्वल आया जरूर मगर उतना असर नहीं छोड़ पाया था.
फर्जी और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट से निपटने की तैयारी, क्विक रिस्पॉन्स टीम दूर करेगी भ्रम
सरकारी विभाग सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) बना रहे हैं।
इन 5 समस्याओं से हैं परेशान, तो गुनगुने पानी के साथ बासी मुंह चबाकर खा लें ये हरी पत्तियां
Neem Leave Benefits: आयुर्वेद में नीम को सेहत का खजाना कहा जाता है. अगर आप खाली पेट सुबह रोज नीम की पत्तियों का सेवन करते है, तो शरीर को कई समस्याओं से बचा सकते हैं.
पत्नी ने पति को बेहोश कर बैट से पीटा, मरा समझ घर में बनाई कब्र और...
महाराष्ट्र के बारामती में पत्नी ने पति को बेहोश कर बैट से पीटा. उसे लहूलुहान कर दिया. फिर उसे मरा समझकर घर की बालकनी में बनी अधूरी कब्र में डाल दिया. लेकिन इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि सारा राज खुल गया. जानें एक पत्नी की साजिश बेनकाब होने की पूरी कहानी.
सुपारी आयात में 2500 करोड़ रुपये की कस्टम धोखाधड़ी का भंडाफोड़, 9 गिरफ्तार
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने सुपारी के आयात में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की कस्टम ड्यूटी चोरी का भंडाफोड़ किया है।
कल का मौसम, 17 अगस्त: सोमवार को बंगाल, झारखंड समेत इन इलाकों में होगी बहुत भारी बारिश
छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में कई जगह बारिश होगी। 17 अगस्त को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। विदर्भ में भी बारिश और गरज-चमक की संभावना है। गोवा और महाराष्ट्र में सोमवार को भारी बारिश हो सकती है।
हैदराबाद की यूनिवर्सिटी में ABVP और NSUI से जुड़े छात्रों के बीच झड़प के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इस घटना में 7 छात्र घायल हो गए हैं।
'अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जंग में जीते हम', ईरान का दावा
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गलिबाफ ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ हालिया जंग में जीत का दावा किया है. उन्होंने कहा कि हमने अपने दुश्मनों के खिलाफ हर मोर्चे पर जीत हासिल की है.
चिप्स का पैकेट खोलते ही क्यों लगता है आधा खाली? जानिए असली वजह
Why Chips Packet Are Half Empty: चिप्स का पैकेट खोलते ही अगर आपको लगता है कि आधा पैकेट सिर्फ हवा से भरा है, तो इसकी असली वजह जान लीजिए. अगर आपको लगता है कि कंपनी ग्राहकों को बेवकूफ बना रही हैं, तो ऐसा नहीं है. आज इस खबर में हम जानेंगे कि आखिर कंपनियां पैकेट में नाइट्रोजन गैस क्यों भरती हैं, इससे चिप्स को क्या फायदा होता है और क्या सच में ग्राहकों को धोखा दिया जाता है? जानें पूरी सच्चाई.
कर्नाटक में वन विभाग ने किया 3 शिकारियों का एनकाउंटर, भड़के स्टालिन
कर्नाटक में तीन लोगों की कथित मुठभेड़ में मौत के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गया. पुलिस ने वन अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है. वहीं, एमके स्टालिन ने निष्पक्ष न्यायिक जांच, मुआवजे और पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देने की मांग की.
Asish Banerjee के निधन पर Mamata Banerjee का छलका दर्द, कहा- झूठे आरोपों से थे परेशान
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और पार्टी के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस दुखद खबर से वे बेहद आहत और व्यथित हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए ममता बनर्जी ने आशीष बनर्जी के लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन को याद किया। उन्होंने कहा कि आशीष दा ने अपना पूरा जीवन शिक्षा, जनसेवा और समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था। झूठे आरोपों से थे परेशान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अपने जीवन के अंतिम दिनों में आशीष बनर्जी को भारी मानसिक और भावनात्मक तनाव झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और निष्कलंक काम के बावजूद उन्हें बार-बार निशाना बनाया गया। ममता बनर्जी के मुताबिक, विरोधी दलों और मीडिया के एक वर्ग ने उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें लगातार बदनाम करने और उन पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की, जिससे वे काफी आहत थे। The passing of Asish Banerjee has left me deeply disturbed. He spent much of his life teaching and serving society with dedication, always known for his humble nature and close bond with the people of Rampurhat and Birbhum. What makes this tragedy even more painful is the… — Mamata Banerjee (@MamataOfficial) August 16, 2026 इसे भी पढ़ें: Asish Banerjee के परिवार से CM Suvendu Adhikari ने की बात, कहा- सच सामने लाएगी BJP सरकार बीरभूम के विकास में दिया बड़ा योगदान ममता बनर्जी ने आशीष बनर्जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि रामपुरहाट से पांच बार विधायक और विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए दिन-रात काम किया। वे अपने सौम्य स्वभाव और आम जनता के साथ गहरे जुड़ाव के लिए जाने जाते थे। टीएमसी प्रमुख ने कहा कि राजनीति में बढ़ती कटुता और उसके मानवीय नुकसान पर हम सभी को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: Asish Banerjee की मौत पर भड़के Abhishek Banerjee, मीडिया ट्रायल पर जताई कड़ी आपत्ति ममता ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की ममता बनर्जी ने आशीष बनर्जी के शोकाकुल परिवार, उनके समर्थकों, करीबियों और पूर्व छात्रों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आशीष दा की कमी पार्टी और पूरे बीरभूम क्षेत्र को हमेशा महसूस होगी। आपको बता दें कि बीरभूम जिले में पार्टी कार्यालय के भीतर आशीष बनर्जी का शव फंदे से लटका मिला था, जिसके बाद से ही राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
CJP समर्थक के पिता की पीट-पीटकर हत्या, CM शुभेंदु बोले- BJP का कनेक्शन नहीं
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समर्थक शेख अब्दुल हफीज के घर पर कुछ बदमाशों ने हमला कर दिया. इस हमले में उनके पिता शेख मोहम्मद मफीक गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. पुलिस ने इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इस मामले से BJP का कोई लेना-देना नहीं है.
सोनीपत में पिता के तेरहवीं में भी क्यों नहीं पहुंचीं बेटियां?
सोनीपत के गीता मंदिर में शिवचरण राम रतन गुप्ता की तेरहवीं की रस्में पूरी की गईं. हवन-यज्ञ के बाद उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए गए और प्रसाद बांटा गया. हालांकि, इस कार्यक्रम में भी उनकी तीनों बेटियां शामिल नहीं हुईं. इससे पहले अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन के दौरान भी बेटियों ने वीडियो कॉल और व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया था. वृद्धाश्रम प्रबंधन ने परिवार की सहमति से सभी रस्में पूरी कराईं.
समुद्र मंथन कराने वाले नाग का कैसा हो गया था हाल? जानें
पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया था, तब नागराज वासुकी को मंदराचल पर्वत पर रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया. ऐसी मान्यता है कि लंबे समय तक मंथन होने से नागराज वासुकी घायल और बुरी तरह लहूलुहान हो गए थे. तब भगवान विष्णु ने उन्हें प्रयागराज आकर विश्राम करने का आदेश दिया था.
झाझरा के Doon Sanskriti School में मना स्वतंत्रता दिवस, जनजातीय बच्चों की देशभक्ति ने जीता दिल
झाझरा स्थित जनजातीय गुरुकुल दून संस्कृति स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस खास मौके पर देश और समाज के कई मूर्धन्य विद्वान शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में साइंस सिटी के प्रमुख डॉ. दुर्गेश पंत, उत्तराखण्ड सब एरिया के डिप्टी जीओसी व कैंट बोर्ड प्रमुख ब्रिगेडियर आर. एस. थापा, मसूरी प्रशासनिक अकादमी के पूर्व निदेशक संजीव चोपड़ा, उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर, जर्मनी की प्रसिद्ध लेखिका मारिया वर्थ और दिव्यांग विकास संगठन सक्षम के उत्तराखंड अध्यक्ष श्री ललित पंत मौजूद रहे। जनजातीय बच्चों के देशभक्ति गीतों ने मोह लिया मन समारोह के दौरान उत्तराखण्ड की थारू और बुक्सा जनजाति के बच्चों के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश, असम और मणिपुर के छात्रों ने देशभक्ति से भरे लोकगीत और समूह नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दीं। विशेष रूप से अरुणाचल के बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए गढ़वाल रेजिमेंट के मशहूर गीत “बढ़े चलो गढ़वालियों” ने वहां मौजूद सभी अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में आए विद्वानों ने प्रतिभावान छात्रों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। विज्ञान और तकनीक का सीमांत युवाओं तक विस्तार: डॉ. दुर्गेश पंत साइंस सिटी के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विस्तार अब सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं तक तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि दूरदराज के जनजातीय बच्चों को तकनीक से जोड़कर ही देश और प्रदेश का सर्वांगीण विकास संभव है। जनजातीय युवा देश का प्रथम रक्षक: ब्रिगेडियर आर. एस. थापा उत्तराखण्ड सब एरिया के डिप्टी जी ओ सी और कैंट बोर्ड प्रमुख ब्रिगेडियर आर. एस. थापा ने अपने संबोधन में कहा कि देश की सीमाओं और संस्कृति का असली रक्षक जनजातीय युवा ही है। उन्होंने बच्चों के जज्बे और देशभक्ति की जमकर सराहना की। कार्यक्रम की शुरुआत में निदेशक ऋत्विक विजय ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, वहीं विद्यालय प्रबंध समिति के प्रमुख और संघ विचारक श्री नीरज मित्तल ने समारोह के अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
'तुम्हें मिस करूंगी'...भारत लौट रहे कपल पर रोई अमेरिकी पड़ोसी
अमेरिका में भारतीयों और स्थानीय लोगों के बीच रिश्तों को लेकर भले ही कई तरह की बातें होती हों, लेकिन एक भारतीय कपल की विदाई का वीडियो इंसानी रिश्तों की एक अलग तस्वीर दिखा रहा है. भारत लौट रहे कपल को विदा करते वक्त उनकी अमेरिकी पड़ोसी फूट-फूटकर रो पड़ीं.
'चीफ ने एक चिट दी, कहा- खोलना मत, कमांडर को दे देना', ऑपरेशन सिंदूर की सांस थमा देने वाली कहानी
एयरफोर्स चीफ एपी सिंह ने 6 मई 2025 की शाम को बताया कि वो बड़ौदा जा रहे हैं, DGMO राजीव घई के घर उनके बेटी दामाद आ चुके थे. नेवी चीफ ने घर में पहले ही कह दिया था कि वे बाहर जा रहे हैं और उनका इंतजार न किया जाए. आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी अपने असिस्टेंट की कार से निकले और घर के पीछे के दरवाजे से निकले. ये 6 जून देर शाम थी. इंडियन डिफेंस के इन सभी दिग्गज स्तंभों की मंजिल एक ही थी.
लोकसभा में छात्र विरोध-प्रदर्शनों पर सवाल खारिज, सीजेपी ने उठाई जवाबदेही पर चिंता
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास ने लोकसभा में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और नीट-यूजी 2026 परीक्षा से जुड़े तीन सवालों को खारिज किए जाने पर संसदीय जवाबदेही पर चिंता जताई।
बेसन, हल्दी, दही और शहद से बना यह आसान घरेलू फेस पैक त्वचा की गहराई से सफाई करने, नमी बनाए रखने और चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद कर सकता है.
भारत को मिलेंगी छह सबमरीन्स, पडिक्कल की बड़ी उपलब्धि; टॉप-5 खबरें
भारत की जर्मनी के साथ एक अहम डील अहम मुकाम पर पहुंचने वाली है। 70 हजार करोड़ की इस डील के साथ भारत को छह सबमरीन्स मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। वहीं, श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट मैच में देवदत्त पडिक्कल ने एक खास उपलब्धि हासिल की है। पढ़िए आज शाम की पांच बड़ी खबरें...
कर्नाटक में बर्बरता का वीडियो वायरल, नशे में रॉड से किया हमला; पुलिस कर रही मामले की जांच
कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में मंजूनाथ नामक व्यक्ति पर लोहे की रॉड से बेरहमी से हमला किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
मुंबई की पाव भाजी भूल जाएंगे, जब चखेंगे सूरत की 'हरियाली पाव भाजी'
सूरत की फेमस हरियाली पाव भाजी का स्वाद अब घर पर भी लें। पालक, धनिया, पुदीना और ढेर सारी सब्जियों से बनने वाली यह हरी पाव भाजी बेहद स्वादिष्ट और आसान है. जानें इसे बनाने की पूरी रेसिपी, जरूरी सामग्री और मक्खन को जलने से बचाने की खास कुकिंग ट्रिक भी.
दक्षिण गाजा में इजरायल ने फिर बरसाए बम, कई घायल
दक्षिण गाजा पट्टी के खान यूनिस इलाके में इजरायल ने फिर हमला किया है. इजरायली सेना ने एक संदिग्ध आतंकवादी को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई की. इस अचानक हमले में कई लोग घायल भी हो गए हैं.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब राज्य के पूर्व डिप्टी स्पीकर और पांच बार के टीएमसी विधायक रहे आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले में पार्टी कार्यालय के भीतर पंखे से लटकता हुआ मिला। इस सनसनीखेज घटना के बाद से राजनीतिक गलियारों में मातम और आक्रोश का माहौल है। अब इस पूरे मामले पर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनके वरिष्ठ नेता को लगातार मानसिक दबाव और झूठे आरोपों का सामना करना पड़ा था, जिसने उन्हें इस चरम कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।ममता बनर्जी ने जताया गहरा दुख, राजनीतिक दुश्मनी पर उठाए सवालसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी संवेदनाएं साझा करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि आशीष बनर्जी की अचानक और दर्दनाक मौत से वह बेहद आहत और परेशान हैं। उन्होंने आशीष बनर्जी को याद करते हुए उन्हें एक ऐसा समर्पित नेता बताया, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी जनता की सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में बिता दी थी।ममता बनर्जी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, यह दुखद घटना इसलिए और भी ज्यादा पीड़ादायक है क्योंकि अपने जीवन के अंतिम दिनों में उन्हें अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक तनाव सहना पड़ा। उन्होंने आगे लिखा कि जनता की सेवा का लंबा रिकॉर्ड रखने के बावजूद उन्हें लगातार बदनाम किया गया, उन पर झूठे आरोप मढ़े गए और मानसिक प्रताड़ना दी गई। ममता बनर्जी ने कहा कि इस घटना ने हम सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि लगातार बढ़ती राजनीतिक दुश्मनी की इंसानी कीमत समाज को कितनी चुकानी पड़ रही है।क्या था पूरा मामला और सुसाइड नोट में क्या लिखा?रविवार सुबह बीरभूम जिले के रामपुरहाट के हत्तालापाड़ा स्थित उनके पैतृक आवास से सटे टीएमसी कार्यालय के अंदर 74 वर्षीय आशीष बनर्जी का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया था। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके साथ ही पार्टी कार्यालय को सील कर वहां पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बीरभूम के पुलिस अधीक्षक विदित राज भुंदेश ने बताया कि पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर लिया है और मौके से बरामद हाथ से लिखे नोट (सुसाइड नोट) को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।सामने आई जानकारी के मुताबिक, उस कथित सुसाइड नोट में आशीष बनर्जी ने अपने लंबे राजनीतिक करियर का बचाव किया है और खुद पर लगे भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। नोट में लिखा है कि वह छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी किसी भ्रष्टाचार में हिस्सा नहीं लिया तथा कभी किसी काम के बदले पैसे नहीं लिए। पुलिस अब इस मामले से जुड़े हर एक पहलू और कॉल रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच कर रही है।
हांसी में सीएम के कार्यक्रम के विरोध पर 10 गिरफ्तार, कुमारी शैलजा ने उठाए सवाल
15 अगस्त को हरियाणा के हांसी में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव हुआ. मुख्यमंत्री के ध्वजारोहण कार्यक्रम का विरोध कर रहे 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया. कोर्ट ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. प्रदर्शनकारियों ने जीवन कुंडू हत्याकांड के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की थी. सांसद कुमारी सैलजा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गो संरक्षण और गो सेवा को एक नए और आधुनिक आयाम पर ले जाने की तैयारी कर ली है। अब गोवंश संरक्षण के इस पवित्र कार्य में नई पीढ़ी यानी Gen Z (Gen-Z) और युवाओं की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार गांव-गांव एक व्यापक जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान चलाने जा रही है, जिसके तहत करीब 10,000 'गो मित्र' तैयार किए जाएंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य गो संरक्षण को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रखकर इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, हरित ऊर्जा और रोजगार के अवसरों के साथ जोड़कर एक आत्मनिर्भर मॉडल विकसित करना है।युवाओं को जोड़ेगी सरकार, तैयार होंगे 10,000 'गो मित्र'उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस नए अभियान का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बच्चों और युवाओं को गोवंश संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। गांवों में विशेष अभियान चलाकर युवाओं को देसी गोवंश के महत्व, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण आर्थिकी में गाय की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए सबसे पहले मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा, जो आगे चलकर गांवों में अन्य लोगों को ट्रेनिंग देंगे। इस प्रकार गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों और 'गो मित्रों' का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में गो सेवा और संरक्षण से पहले से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।7,500 से अधिक गो आश्रय स्थलों में पल रहे 12 लाख से अधिक गोवंशप्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए योगी सरकार लगातार बड़े और कड़े कदम उठा रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश भर में 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल विकसित किए जा चुके हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक गोवंश पूरी सुरक्षा के साथ संरक्षित हैं। सरकार का यह कदम जहां एक ओर किसानों की फसलों को आवारा पशुओं से होने वाले नुकसान से बचा रहा है, वहीं दूसरी ओर गोवंश को सुरक्षित जीवन दे रहा है। गोवंश के बेहतर रखरखाव और चारे के लिए सरकार ने सहायता राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन कर दिया है। साथ ही, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अधिकांश गोशालाओं को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है।मुख्यमंत्री सहभागिता योजना से जुड़े लाखों पशुपालकआम नागरिकों और पशुपालकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए 'मुख्यमंत्री सहभागिता योजना' और पोषण मिशन को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। इसके तहत अब तक राज्य के करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। इससे एक तरफ जहां गोवंश को पारिवारिक और व्यक्तिगत स्तर पर बेहतरीन संरक्षण मिल रहा है, वहीं पशुपालकों की आजीविका को भी मजबूती मिल रही है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा पशुधन वाला राज्य होने के साथ-साथ दूध उत्पादन में भी देश में शीर्ष स्थान पर है। सरकार अब इसार मजबूत आधार का उपयोग ग्रामीण आय को और अधिक बढ़ाने के लिए कर रही है।हर जिले की गोशालाओं का होगा मूल्यांकन और विकासगो संरक्षण को स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेश की सभी गोशालाओं की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन करने का निर्णय लिया है। इसके तहत हर जिले की स्थानीय परिस्थितियों, भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर गो-आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। यदि किसी जिले में गोबर से बायोगैस बनाने कीार बेहतर संभावनाएं हैं, तो वहां उस पर फोकस किया जाएगा; वहीं अन्य जिलों में जैविक खाद, गो-काष्ठ (लकड़ी) या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इस अभिनव पहल से न केवल गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए और स्थायी स्रोत भी सृजित होंगे।
ओटीटी की दुनिया में तहलका मचाने के बाद अब कल्ट क्राइम थ्रिलर 'मिर्जापुर' (Mirzapur The Movie) बड़े पर्दे पर भौकाल काटने के लिए पूरी तरह तैयार है। हाल ही में फिल्म के धमाकेदार ट्रेलर ने दर्शकों के बीच उत्साह को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, और अब मेकर्स ने फैंस को एक और बड़ा सरप्राइज दे दिया है। साल 2018 में वेब सीरीज के दौरान सोशल मीडिया पर छा जाने वाला 'मिर्जापुर' का सबसे लोकप्रिय और रोमांटिक गाना एक बार फिर नए रंग-रूप में वापसी कर रहा है। 'गुड्डू भैया' यानी अली फजल के इश्क के इस सुरीले फरमान को सुनने के लिए फैंस अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।8 साल बाद नए वर्जन में आ रहा है 'वारुं' गानाजब साल 2018 में 'मिर्जापुर' का पहला सीजन रिलीज हुआ था, तो इसे एक खूंखार क्राइम थ्रिलर के रूप में न सिर्फ पसंद किया गया, बल्कि इसके गानों और डायलॉग्स ने भी फैंस के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी। इस सीरीज का रोमांटिक ट्रैक 'वारुं' (Vaaroon) सोशल मीडिया और रील्स की दुनिया में सालों तक ट्रेंडिंग लिस्ट में बना रहा था। अब मेकर्स इस कल्ट सॉन्ग का नया और बेहतरीन वर्जन लेकर आ रहे हैं, जिसका आधिकारिक टाइटल 'वारुं फॉरएवर' (Vaaroon Forever) रखा गया है।मेकर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर इस गाने के टीजर और फुल सॉन्ग की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही नए पोस्टर्स भी साझा किए गए हैं, जिसमें अभिनेता अली फजल के साथ-साथ श्रेया पिलगांवकर, श्वेता त्रिपाठी और जितेंद्र कुमार जैसे दमदार कलाकारों की झलक साफ नजर आ रही है। शेड्यूल के मुताबिक, इस गाने का टीजर 17 अगस्त को जारी किया जाएगा, जबकि पूरा गाना 18 अगस्त मंगलवार को रिलीज कर दिया जाएगा।सिनेमाघरों में कब दस्तक देगी 'मिर्जापुर द मूवी'?वेब सीरीज के रूप में 'मिर्जापुर' के तीनों सीजन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ब्लॉकबस्टर साबित हुए हैं और दर्शकों ने इसे सिर-आंखों पर बिठाया है। अब इस ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी को फिल्म के फॉर्मेट में बड़े पर्दे पर उतारने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। फिल्म के हालिया ट्रेलर ने रिलीज से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर माहौल गर्म कर दिया है। अगर बात करें इसकी रिलीज डेट की, तो बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मिर्जापुर द मूवी' आगामी 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी।
14 साल से BCI के मुखिया मनन कुमार मिश्रा पर उठे सवाल, पेशेवर आचरण और फैसलों को लेकर हो रही आलोचना
हैदराबाद की नालसार यूनिवर्सिटी के छात्रों के रजिस्ट्रेशन पर BCI के फैसले और फिर उसे वापस लेने से विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना ने BCI की कार्यप्रणाली और 14 साल से अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं, खासकर फर्जी वकीलों के मुद्दे पर।
गैस सिलेंडर ग्राहकों के लिए अलर्ट, घर बैठे करें ये जरूरी काम!
एलपीजी ग्राहकों के लिए ईकेवाईसी को लेकर 16 अगस्त की समयसीमा बताई जा रही है. दावा है कि तय समय तक ईकेवाईसी पूरी नहीं करने पर गैस कनेक्शन और घरेलू दर पर सिलेंडर मिलने में परेशानी हो सकती है. ग्राहक घर बैठे संबंधित गैस कंपनी के ऐप से प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं या वितरक और डिलीवरी कर्मचारी की मदद ले सकते हैं. समयसीमा से पहले केवाईसी पूरी करना जरूरी बताया गया है.
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और निर्माता सोहेल खान इन दिनों अपने नए और बदले हुए लुक को लेकर सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में बने हुए हैं। जब सोहेल खान हाल ही में प्राइम वीडियो के रियलिटी शो 'अलायंस' (Alliance) में नजर आए, तो उनके दुबले-पतले और फिट अंदाज को देखकर फैंस के साथ-साथ हर कोई हैरान रह गया। सोशल मीडिया पर उनके इस ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ फैंस ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई, तो कई लोगों ने यह कयास लगाने शुरू कर दिए कि उन्होंने वजन घटाने के लिए वजन कम करने वाली महंगी दवाओं जैसे 'ओजेम्पिक' (Ozempic) या फैट बर्नर्स का सहारा लिया है। अब इन सभी चर्चाओं पर विराम लगाते हुए खुद सोहेल खान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और इसके पीछे की असली सच्चाई सबके सामने रखी है।शो के दौरान बीमार पड़ गए थे सोहेल खानएक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान को दिए गए इंटरव्यू में सोहेल खान ने अपने इस वजन कम होने के सफर के बारे में खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि रियलिटी शो 'अलायंस' के शुरुआती हफ्ते उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहे थे। सोहेल ने साझा किया, शुरुआती कुछ दिनों में मुझे थोड़ी घबराहट (Claustrophobia) महसूस हुई, क्योंकि मैं पहली बार किसी रियलिटी शो का हिस्सा बना था और इस तरह के माहौल से अनभिज्ञ था। इसके अलावा, घर में कदम रखने के पहले ही हफ्ते में पेट में संक्रमण (Stomach Bug) और बीमारी ने मेरी परेशानी को और ज्यादा बढ़ा दिया।ओजेम्पिक और फैट बर्नर की खबरों को किया खारिजजब सोहेल खान से यह पूछा गया कि क्या उन्होंने वजन कम करने के लिए किसी तरह की दवाइयों का इस्तेमाल किया है, तो उन्होंने इन तमाम अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया। अभिनेता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी प्रकार की वेट लॉस मेडिसिन, ओजेम्पिक या फैट बर्नर का इस्तेमाल नहीं किया है।सोहेल ने आगे बताया कि शो के दौरान बाकी घरवालों ने उनका बहुत ख्याल रखा, जिसकी बदौलत वह शो में पांच हफ्ते और टिक पाए। उन्होंने हंसते हुए कहा, मुझे बस अपने खान-पान पर थोड़ा कंट्रोल करने की जरूरत महसूस हुई, क्योंकि मैं उन सभी टास्क और चैलेंजेस का हिस्सा बने रहना चाहता था। मैं आखिरी दिन तक और अपनी जिंदगी भर के लिए अपने इस नए परिवार और दोस्तों के साथ रहना चाहता था। इसलिए, न ओजेम्पिक और न ही कोई फैट बर्नर, मैं तो बस वहां से सबसे ढेर सारा प्यार, अपनापन और सकारात्मक ऊर्जा लेकर लौटा हूं।
सरकार ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आयातित रसोई गैस आपूर्ति में बाधा को देखते हुए घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए पहली बार रिफाइनरियों और तेल-गैस कंपनियों के लिए अधिकतम उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं।
बॉलीवुड के 'Gadar' स्टार सनी देओल आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। बड़े पर्दे पर अपने दमदार एक्शन और शानदार डायलॉग्स से दर्शकों का दिल जीतने वाले 'तारा सिंह' यानी सनी देओल की फैन फॉलोइंग पूरी दुनिया में है। हाल ही में एक्टर ने अपने जीवन से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प राज खोला है, जिसके बारे में शायद ही उनके फैंस को ज्यादा जानकारी होगी। सनी देओल ने एक रियलिटी शो के दौरान खुलासा किया कि अभिनेता बनने से पहले उनका एक अलग ही सपना था, जिसे वह पूरा करना चाहते थे, लेकिन उनके सुपरस्टार पिता धर्मेंद्र की वजह से उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया।फॉर्मूला 1 रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे सनी देओलएक लोकप्रिय क्विज रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' के मंच पर शिरकत करने के दौरान सनी देओल ने अपनी जिंदगी के अनसुने पन्नों को पलटा। शो के होस्ट और दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने बातचीत के दौरान सनी देओल से जुड़े एक राज से पर्दा उठाया। अमिताभ बच्चन ने सनी से पूछा कि उन्होंने सुना है कि वे अपने शुरुआती दिनों में एक पेशेवर रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे, क्या यह बात सच है? इस पर सनी देओल ने मुस्कुराते हुए अपने ड्राइविंग के प्रति प्रेम और पुराने दिनों को याद किया।पिता धर्मेंद्र की सख्ती और प्रोटेक्शन बनी वजहजब अमिताभ बच्चन ने सनी देओल से फॉर्मूला 1 रेसिंग में उनकी दिलचस्पी के बारे में पूछा, तो एक्टर ने स्वीकार किया कि उन्हें तेज ड्राइविंग और ऐसे तमाम शौक बहुत पसंद थे। हालांकि, उन्होंने बताया कि उनके पिता और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र अपने बच्चों को लेकर बहुत अधिक प्रोटेक्टिव हुआ करते थे। धर्मेंद्र किसी भी ऐसे खतरनाक खेल या एडवेंचरस एक्टिविटी की इजाजत नहीं देते थे, जिसे वे जोखिम भरा मानते थे।सनी देओल ने शो में साझा किया कि, हां, मुझे ऐसे बहुत शौक थे, ड्राइविंग का तो बहुत शौक था, जैसे आप जानते ही हैं, पापा हमारे घर में कहीं भी, कुछ भी ऐसे कुछ करना चाहें, चाहे हम स्पोर्ट्स करना चाहें या कुछ भी, उस समय प्रोटेक्शन की वजह से… इजाजत नहीं मिलती थी, तो मेरा वह सपना बीच में ही अधूरा रह गया।हाल ही में रिलीज हुई है सनी देओल की फिल्मबता दें कि इस शो के दौरान सनी देओल के साथ बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान और खूबसूरत अभिनेत्री प्रीति जिंटा भी मौजूद थीं। प्रीति जिंटा ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'बंटवारा 1947' में सनी देओल के साथ स्क्रीन शेयर की है, जबकि इस फिल्म के निर्माता आमिर खान हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई 'बंटवारा 1947' बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों का खूब प्यार बटोर रही है और शानदार प्रदर्शन कर रही है।
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' की रणनीतिक सोच और उसकी अंदरूनी कहानी का पहली बार विस्तार से खुलासा किया है। यह सैन्य अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस दर्दनाक आतंकी हमले के जवाब में महज 88 घंटों के भीतर चलाया गया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एनएसए डोभाल ने एक साक्षात्कार के दौरान उस तनावपूर्ण दौर को याद किया जब भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बनाते हुए आतंकवादियों और उनके साजो-सामान को नेस्तनाबूद करने की पुख्ता योजना बनाई थी।पहलगाम हमले के बाद पीएम मोदी की फौरन और सख्त प्रतिक्रियापहलगाम नरसंहार के तुरंत बाद का वह तनावपूर्ण माहौल याद करते हुए एनएसए अजीत डोभाल ने बताया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश यात्रा बीच में ही रद्द कर दी थी और दिल्ली उतरते ही एयरपोर्ट पर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। डोभाल ने प्रधानमंत्री की उस सख्त प्रतिक्रिया को साझा करते हुए बताया कि एयरपोर्ट पर उतरते ही पीएम मोदी का पहला सवाल था कि इस कायराना हमले के पीछे कौन लोग हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आतंकियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।एनएसए के मुताबिक, पीएम मोदी ने कड़े शब्दों में कहा था, चाहे वे जमीन पर हों, आसमान में हों या पाताल में... वे जहां भी छिपे हों, हमें उन्हें ढूंढकर खत्म करना है। खुफिया एजेंसियों की तारीफ करते हुए डोभाल ने बताया कि बेहद कम समय में देश की खुफिया मशीनरी ने सटीक इनपुट जुटाए, जिससे भारतीय सेना ने बिना एक पल गंवाए दोषियों की पहचान कर सटीक और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया।भारत की सहनशीलता को कमजोरी न समझेंअपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अजीत डोभाल ने दो टूक कहा कि जब देश की संप्रभुता और सुरक्षा की बात आती है, तो भारत किसी भी हद तक जाने के लिए पूरी तरह तैयार रहता है और इसके लिए कोई सीमा तय नहीं होती। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हम खून की आखिरी बूंद तक लड़ने का माद्दा रखते हैं, और भारत की उदारता व अत्यधिक सहनशीलता को कभी भी उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।डोभाल ने उस भयावह घटना का जिक्र किया जिसमें आतंकवादियों ने धर्म और आस्था के आधार पर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया था। आतंकियों ने हदें पार करते हुए यहां तक दुस्साहस दिखाया था कि उन्होंने पीड़ितों से कहा था कि जाकर मोदी से कह दें, वह जो कर सकते हैं कर लें। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस वीभत्स हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया था कि आतंकवाद को पनाह देना और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई न करना अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दही हांडी को UNESCO तक ले जाने की तैयारी, स्पेन भेजे जाएंगे महाराष्ट्र के गोविंदा
महाराष्ट्र सरकार दही हांडी उत्सव को UNESCO की हेरिटेज लिस्ट में शामिल कराने के प्रयास कर रही है. इसके साथ ही गोविंदाओं को स्पेन भेजने की योजना है, जहां वे इस पारंपरिक संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे.
पंखे से लटका मिला था पूर्व TMC विधायक का शव, ममता बनर्जी बोलीं- दबाव डाला गया और बदनाम किया गया
ममता बनर्जी ने कहा कि जनता की सेवा के अपने लंबे रिकॉर्ड के बावजूद आशीष को जिस परेशानी और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा, उससे हम सभी को रुककर लगातार राजनीतिक दुश्मनी की इंसानी कीमत पर सोचने पर मजबूर होना चाहिए।
नई पीढ़ी को नशे से दूर रखने के लिए यूजीसी अब शुरू करेगी कोर्स, मिलेंगे दो क्रेडिट अंक
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नई पीढ़ी को नशे से दूर रखने के लिए स्नातक व परास्नातक स्तर पर दो क्रेडिट का एक वैकल्पिक कोर्स शुरू करने का फैसला किया है।
बर्थडे केक खाते ही सीने में जलन और उल्टियां; 11 लोग बीमार, 3 बच्चे ICU में भर्ती
पुलिस अधिकारी ने बताया कि बच्चों ने केक के अंदर मरी हुई छिपकली मिलने की बात कही है। सभी बच्चों को विजयलक्ष्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर विद्या सावंत के अनुसार, बाकी बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर है।
अब जेन-जी से भी जुड़ेगी विद्यार्थी परिषद, भाजपा ने बनाई नई रणनीति
परीक्षाओं में अनियमितताओं से छात्रों की नाराजगी के बाद, भाजपा ने जेन-जी और जेन अल्फा से जुड़ने की नई रणनीति बनाई है।
गर्ल्स स्कूल में खाना खाने के बाद 7 छात्राएं बीमार, जांच के लिए कमेटी गठित
बदायूं के आवासीय बालिका स्कूल में खाना खाने के बाद 7 छात्राएं बीमार हो गई. छात्राओं को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है. हालांकि, इनमें से पांच छात्रों के परिवार वाले उन्हें घर लेकर चले गए हैं और कहा है कि किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करवाएंगे.
VIDEO: 3 बोतल पेट्रोल लेकर पहुंचे बदमाश, कैंटीन में छिड़का और लगा दी आग
लखनऊ के कैसरबाग इलाके में मामूली विवाद के बाद चाय कैंटीन को पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया गया. आरोपियों ने पहले शटर का ताला तोड़ा, फिर दुकान में पेट्रोल फैलाया और जलती माचिस अंदर फेंक दी. पूरी घटना वीडियो में कैद हुई है. पुलिस ने नामजद आरोपी सैफ को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है.
CCTV: दिल्ली में चाकू से ताबड़तोड़ वार कर सफाई कर्मचारी की हत्या, देखें
दिल्ली के कल्याणपुरी दिनदहाड़े एक सफाई कर्मचारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. बताया जा रहा है कि सफाई कर्मचारी रोज की तरह अपने काम में व्यस्त था, तभी अचानक एक व्यक्ति वहां पहुंचा और उस पर चाकू से कई वार कर दिए .पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया. देखें वीडियो.
TATA-रिलायंस के ₹66000Cr स्वाहा, LIC के निवेशक मालामाल
TCS-Reliance Big Loss: बीते सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट में रहे, तो रिलायंस और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों समेत HDFC, ICICI और SBI जैसे बैंकों में पैसे लगाने वालों का तगड़ा नुकसान हुआ. इस बीच LIC समेत पांच कंपनियों ने जोरदार कमाई कराई.
'हम PoK में तिरंगा...', अखिलेश के बयान पर केशव प्रसाद मौर्य का पलटवार
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कौशांबी दौरे के दौरान अखिलेश यादव और कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने पीओके में तिरंगा फहराने की बात कही और कांग्रेस से वंदे मातरम् के कथित अनादर पर देश से माफी मांगने की मांग की.
भारत को मिलेंगी छह सबमरीन्स, जर्मनी के साथ होने वाली है 70 हजार करोड़ की डील
भारत को बहुत जल्द एक नहीं, बल्कि छह सबमरीन्स मिलने वाली हैं। यह सबमरीन्स उस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जो काफी समय डिले हो रहा है। जानकारी के मुताबिक यह 75(आई) सबमरीन प्रोग्राम फिर से कैबिनेट कमेटी के सामने लाया जाना है।
एजेंडा मोदी को बचाना है, महिलाओं का आरक्षण नहीं; PM मोदी की अपील पर बोली कांग्रेस
जयराम रमेश ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि राजीव गांधी ने इसके लिए जमीनी स्तर पर काम किया था और संविधान में इस प्रावधान को शामिल कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
कौन हैं पिस्टल धारी कमलेश राय? वाराणसी एयरपोर्ट गोलीकांड में पूछताछ
Varanasi Airport Firing Update: आजमगढ़ के निवासी और मुंबई की राजनीति में सक्रिय कमलेश केदारनाथ राय अपनी पत्नी के साथ वाराणसी से मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे. वे अपनी लाइसेंसी पिस्टल जमा करवा रहे थे, उसी दौरान पिस्टल से अचानक एक राउंड फायर हो गया.
Sonia Gandhi पर FIR नहीं हुई तो कोर्ट जाएंगे BJP नेता, वंदे मातरम विवाद में दी लिखित शिकायत
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने सोनिया गांधी के खिलाफ कर्नाटक के मंगलोर स्थित उर्वा पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दी है। इसमें वंदे मातरम गीत का अपमान करने के आरोप में उनके खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। बीजेपी का आरोप, जानबूझकर रुकवाया गया वंदे मातरम शिकायत दर्ज कराने वाले बीजेपी नेता विकास पुत्तूर ने कहा कि 15 अगस्त को ध्वजारोहण के बाद जब वंदे मातरम गाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी ने बीच में रोक-टोक की। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया जी ने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं को गाना रोकने के लिए कथित तौर पर इशारा किया, जिसे पूरे देश ने देखा है। बीजेपी नेता ने दावा किया कि कांग्रेस का इतिहास हमेशा से वंदे मातरम का विरोध करने का रहा है और राष्ट्रगीत को इस तरह बीच में रुकवाना कानूनन एक अपराध है। इसे भी पढ़ें: इटली से आई हैं... BJP नेता सुमित्रो चटर्जी का Sonia Gandhi और Congress पर हमला अमित शाह ने भी मांगा था जवाब, अब कोर्ट जाने की तैयारी इससे पहले खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और सोनिया गांधी पर हमला बोलते हुए कहा था कि उन्हें इस हरकत के लिए पूरे देश और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से माफी मांगनी चाहिए। वहीं, शिकायतकर्ता विकास पुत्तूर ने साफ कर दिया है कि अगर पुलिस और राज्य सरकार इस शिकायत पर कोई सख्त एक्शन या FIR दर्ज नहीं करती है, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
JNU भर्ती विवाद पर VC का जवाब, आरोपों को बताया ‘प्रोपेगैंडा’
JNU में फैकल्टी भर्ती और प्रमोशन को लेकर विवाद दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. छात्र संघ और शिक्षक संघ जहां कुलपति को हटाने और कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि पिछले साढ़े चार साल में भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया पारदर्शी रही है.
नेपाल दौरे पर पहुंचे सेना प्रमुख धीरज सेठ, सैन्य संबंधों की मजबूती पर जोर
आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ 17 से 19 अगस्त 2026 तक नेपाल की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं. इस दौरान वे नेपाली सेना प्रमुख से मुलाकात करेंगे.सामरिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे. इसके साथ ही काठमांडू में नेपाल के राष्ट्रपति से 'नेपाली सेना के जनरल' की मानद रैंक से उन्हें सम्मानित किया जाएगा.
गॉल में पडिक्कल ने काटा गदर! 24 साल बाद हुआ ये करिश्मा!
गॉल में श्रीलंका के खिलाफ देवदत्त पडिक्कल ने अपनी बल्लेबाजी से फैन्स का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफलता हासिल की. उन्होंने 167 रनों की पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. इसके साथ ही कई बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए.
पान मसाला एड पर फंसे शाहरुख-अजय, सनी देओल का आया रिएक्शन
एक्टर सनी देओल ने एक पॉडकास्ट में कहा कि उन्हें पान मसाला और गुटखा के विज्ञापन के ऑफर मिलने के बावजूद वे इन्हें करने से मना कर देते हैं. जानिए उन्होंने और क्या कहा.
Kolkata के Asutosh College में स्वतंत्रता दिवस पर हिंसा, ABVP-TMC ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने रविवार को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस के दिन यहां आशुतोष कॉलेज में तृणमूल कांग्रेस समर्थित गुंडों ने उसके सदस्यों पर हमला किया, उनके झंडे और बैनर फाड़ दिए, पथराव किया तथा दो छात्रों की डंडों से पिटाई की। छात्र संगठन ने कहा कि उसके कार्यकर्ताओं ने भवानीपुर पुलिस थाने में विरोध दर्ज कराया और छात्रों मानस कुंडू तथा सौपर्णी सेन पर हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तृणमूल की युवा नेता उपासना चौधरी ने इससे पहले आरोप लगाया था कि स्वतंत्रता दिवस की सुबह कॉलेज में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रवेश करने से रोकते हुए अभाविप के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया। छात्र संगठन ने कहा कि किसी शैक्षणिक संस्थान में बाहरी राजनीतिक तत्वों को लाना और स्वतंत्रता दिवस के दिन हिंसा करना छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। संगठन ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल छात्रों पर राजनीतिक वर्चस्व कायम करने या उनके खिलाफ हिंसा के बहाने के तौर पर नहीं किया जा सकता। अभाविप की दक्षिण बंगाल इकाई के सचिव नीलकंठ भट्टाचार्य ने कहा कि यह हमला ‘‘तृणमूल की राजनीतिक असहिष्णुता और हताशा का स्पष्ट प्रतिबिंब’’ है। उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि स्वतंत्रता दिवस पर एक शैक्षणिक परिसर को हिंसा के केंद्र में बदल दिया गया। भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘तृणमूल को बताना चाहिए कि छात्रों पर हमला करने के लिए बाहरी लोगों को कॉलेज में क्यों लाया गया। शैक्षणिक परिसर राजनीतिक बाहुबल दिखाने की जगह नहीं हैं। पश्चिम बंगाल के छात्र डर और हिंसा की राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे।’’तृणमूल की युवा नेता उपासना चौधरी ने इससे पहले आरोप लगाया था कि स्वतंत्रता दिवस की सुबह कॉलेज में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रवेश करने से रोकते हुए अभाविप कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया था। पार्टी की आईटी प्रकोष्ठ की प्रभारी और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े की नेता चौधरी ने दावा किया कि उन पर अंडे फेंके गए और आरोप लगाया कि सुरक्षा कर्मियों द्वारा पहचान पत्रों की जांच किए बिना बाहरी लोगों को कॉलेज परिसर में प्रवेश दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें और तृणमूल के अन्य कार्यकर्ताओं को प्रवेश द्वार पर एकत्र होने से रोक दिया, जिसके बाद कहासुनी हुई। इसी दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन पर अंडे फेंके गए। चौधरी ने आरोप लगाया था, ‘‘अंडे फेंकने की घटना के पीछे आरएसएस से जुड़े अभाविप के सदस्य थे। पुलिस उनका समर्थन कर रही थी।
JNU VC ने शिक्षक भर्ती में धांधली के आरोप खारिज किए, दुष्प्रचार बताया
(इंट्रो में बदलाव के साथ)नयी दिल्ली, 16 अगस्त जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति में अनियमितताओं को लेकर जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) और जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें ‘दुष्प्रचार’ करार दिया। जेएनयू कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने एक बयान में कहा, “कुलपति के रूप में मेरे साढ़े चार साल के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए सबसे पारदर्शी एवं रिकॉर्ड संख्या में भर्तियां की गईं। इसके बावजूद जेएनयूएसयू और जेएनयूटीए ने मुझे एक दुर्भावनापूर्ण अभियान का निशाना बनाया है। कोई सबूत नहीं, सिर्फ झूठा दुष्प्रचार।”विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, जेएनयू ने फरवरी 2022 से अब तक 400 से अधिक साक्षात्कार किए और 200 से अधिक पदों पर नियुक्तियां कीं, इनमें करीब 70 प्रतिशत नियुक्तियां आरक्षित व वंचित वर्गों के उम्मीदवारों की हुई हैं। प्रशासन ने यह भी बताया कि साक्षात्कार को लेकर किसी अभ्यर्थी की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है। प्रशासन ने चयन समितियों की संरचना का भी बचाव किया। प्रशासन के मुताबिक, इन समितियों में तीन विषय विशेषज्ञ, विजिटर के एक नामित सदस्य, संबंधित डीन और कुलपति शामिल होते हैं। प्रशासन ने बताया कि इसके बाद अकादमिक परिषद चयन समिति द्वारा अंतिम रूप दिए गए नामों को मंजूरी देती है। विश्वविद्यालय ने बताया कि आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) स्क्रीनिंग प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और उनके प्रकाशनों से जुड़े दावों की जांच करता है हालांकि, साक्षात्कार के दौरान अंतिम चयन में इसकी कोई भूमिका नहीं होती। जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि हाल की मीडिया की खबरों में इस बात को लेकर चिंता जताई गई है कि अनिवार्य यूजीसी पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करने के कारण विषय विशेषज्ञों द्वारा खारिज किए गए कुछ अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में कथित तौर पर दोबारा शामिल किया गया। वहीं, जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी मांगों के एक अलग दस्तावेज में दावा किया कि आरटीआई से मिले जवाबों, आधिकारिक रिकॉर्ड और कार्यकारी परिषद की असहमति संबंधी टिप्पणियों के आधार पर की गई जांच में पाया गया कि कम से कम सात शिक्षकों की नियुक्तियां यूजीसी के मानदंडों का उल्लंघन करके की गईं।
(फोटो के साथ)जयपुर, 16 अगस्त केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ‘अजातशत्रु’ बताते हुए रविवार को कहा कि उनका कोई दुश्मन नहीं था और उन्होंने (वाजपेयी) अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। शाह ने कहा कि वाजपेयी विपक्ष में रहने के दौरान भी और सत्ता में रहते हुए भी अपनी विचारधारा को लेकर प्रतिबद्ध रहे। शाह ने चित्तौड़गढ़ के निम्बाहेड़ा में वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘अटल बिहारी वाजपेयी 40 साल तक विपक्ष में रहे, लेकिन उनकी विचारधारा हमेशा सर्वोपरि रही। उन्होंने अपना जीवन अपने सिद्धांतों के अनुसार जिया।’’शाह ने कहा कि वाजपेयी जेल गए, लाठियां खाईं और कांग्रेस के अत्याचार सहे, लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तो वह देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे और उन्होंने कई बड़े फैसले लिए। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘‘दुनिया के दबाव के बावजूद उन्होंने पोखरण परीक्षण के जरिए भारत को परमाणु शक्ति बनाया।’’उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने हर गांव को सड़कों से जोड़ने के लिए भी काम किया। शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना शुरू की, राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क का विस्तार किया और अपने कार्यकाल में कई अन्य पहल कीं। उन्होंने वाजपेयी को जनजातीय विकास के लिए अलग मंत्रालय स्थापित करने का श्रेय भी दिया। शाह ने कहा कि इससे पहले जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए कोई अलग मंत्रालय नहीं था। शाह ने कहा, ‘‘अटल जी ने जो शुरुआत की थी, उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरा किया है।’’उन्होंने यह बात जनजातीय कल्याण के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के संदर्भ में कही। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय से आने वाली द्रौपदी मुर्मू का भारत का राष्ट्रपति चुना जाना इस दिशा में हुई प्रगति का प्रमाण है। शाह ने कहा, ‘‘न तो उन्होंने (वाजपेयी) सत्ता में रहते हुए अपने सिद्धांत छोड़े और न ही विपक्ष में रहते हुए। इसलिए उन्हें ‘अजातशत्रु’ कहा जाता है-एक ऐसे महान व्यक्ति के रूप में, जिसका कोई दुश्मन नहीं था।
Manoj Sinha का बयान, Jammu Kashmir में शांति बनाए रखने को प्रशासन प्रतिबद्ध
जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में शांति भंग करने की कोशिशों को लेकर लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन और सुरक्षा बल शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। सिन्हा की यह टिप्पणी विस्थापित कश्मीरी पंडितों द्वारा एक कार्यक्रम में हाल की आतंकी घटनाओं के कारण घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा की मांग के बीच आई है। सिन्हा ने यहां कश्मीरी पंडित वॉलंटियर्स (केपीवी) के सालाना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘कई चुनौतियां हैं, जिनमें वह भी शामिल है जिसका आपने जिक्र किया। लेकिन मेरा मानना है कि इससे भी बड़ी चुनौतियां हैं जिनसे हमें निपटना है।’’उन्होंने कहा कि पहले सबसे बड़ी चुनौती यह सोच थी कि जम्मू-कश्मीर में कोई भी राष्ट्रीय ध्वज उठाने को तैयार नहीं होगा। सिन्हा ने कहा, ‘‘लेकिन आज आपने देखा है कि तिरंगे को उठाने के लिए कितने सारे कंधे और कितने मज़बूत कंधे तैयार हैं। आज आपने जो देखा, वह उसी बदलाव का एक सशक्त उदाहरण है।’उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर में हाल की आतंकी घटनाओं और शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिशों के बारे में स्वीकार किया कि ऐसी कोशिशें हो रही हैं, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सिन्हा ने कहा, ‘‘माहौल को फिर से खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। ज़रूरी मुद्दों पर ध्यान दिया जा रहा है और यह आज शुरू नहीं हुआ है, बल्कि ऐसी कोशिशें कुछ समय से चल रही हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग अफवाहें भी फैलाते हैं। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि प्रशासन और सुरक्षा बल शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जो कोई भी मौजूदा शांति को भंग करने की कोशिश करेगा, उसे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।’’कश्मीरी पंडितों द्वारा राहत राशि बढ़ाने की मांग पर उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा,‘‘मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहूंगा कि समाधान खोजने की कोशिशें की गई हैं और ये कोशिशें जारी हैं।’’सिन्हा ने कहा, ‘‘हालांकि कुछ मुद्दों का समाधान किया जा सकता है, लेकिन कुछ अन्य मुद्दों का तुरंत समाधान नहीं किया जा सकता। फिर भी, जिन मामलों को यथाशीघ्र सुलझाया जा सकता है, उन्हें हल करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।’’उप राज्यपाल की यह टिप्पणी केपीवी के संस्थापक विक्रम कौल के उस भाषण के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने सरकार और उपराज्यपाल से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं करने की अपील की थी। कौल ने सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और केंद्र शासित प्रदेश के सामने मौजूद चुनौतियों का हवाला देते हुए कहा कि आतंकी हमलों के मद्देनजर घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए मासिक राहत बढ़ाई जाए और उनकी लंबी अवधि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
Kerala में Vande Mataram न गाने पर BJP का आरोप, चंद्रशेखर बोले- भुगतने होंगे परिणाम
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने रविवार को आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस पर राज्य के आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाने का फैसला यूडीएफ सरकार ने ‘‘जानबूझकर’’ लिया था और चेतावनी दी कि इसके ‘‘राजनीतिक और कानूनी परिणाम’’ होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे यूं ही नहीं छोड़ सकते।’’चंद्रशेखर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस शासित कर्नाटक और तेलंगाना तथा गैर-भाजपा शासित हिमाचल प्रदेश में वंदे मातरम् गाया गया, लेकिन केरल में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी के ‘‘नियंत्रण’’ के कारण लिया गया। उन्होंने एक दिन पहले नयी दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की ओर से आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाए जाने का कथित रूप से कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा विरोध किए जाने की भी आलोचना की। नेमोम से भाजपा विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि वहां जो हुआ, उसे बयां करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जब इस देश द्वारा स्वीकार की गई एक महिला वंदे मातरम् का गायन रोकने की कोशिश करती है, तो इससे पता चलता है कि उनकी राजनीति, हित और लक्ष्य क्या हैं। हमें इसे समझने की जरूरत है। वे राजनीतिक लाभ के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं।’’माकपा के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने कांग्रेस द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाए जाने के लिए कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की। विश्वम ने संवाददाताओं से कहा कि भारत से प्रेम करने वाली कोई भी धर्मनिरपेक्ष पार्टी वंदे मातरम् को देश के राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, ‘‘जब भाजपा सरकार राष्ट्रगान की जगह वंदे मातरम् को लाने की कोशिश करती है, जो आरएसएस का पसंदीदा है, तो उसके खिलाफ रुख अपनाना चाहिए। भले ही यह आरएसएस या भाजपा का पसंदीदा हो, भारत इसे राष्ट्रगीत या राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता।’’उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मौजूदगी में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया और उनमें से किसी ने इसका विरोध नहीं किया।

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