अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता के पक्ष में फैसले से क्यों खुश हैं भारतीय
जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने अमेरिका में रह रहे भारतीय परिवारों की चिंताएं घटाई हैं
भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए कितनी अहम है गंगा जल संधि?
नदियों के पानी के बंटवारे पर संधि की भारत-बांग्लादेश संबंधों में अहम भूमिका रही है. अब 30 साल पुरानी गंगा जल संधि की मियाद दिसंबर में खत्म होने वाली है. क्या यह मुद्दा एक बार फिर आपसी संबंधों की राह में रोड़ा बनेगा
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य दिनांक 14 जुलाई, 2026 (मंगलवार) को राजधानी लखनऊ में आयोजित विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे। इन कार्यक्रमों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श के साथ-साथ समाज सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों के सम्मान समारोह में भी सहभागिता करेंगे।निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रातः 11:30 बजेश्री केशव प्रसाद मौर्यहोटल ताज, गोमती नगर, लखनऊ में एक राष्ट्र, एक चुनाव विषय के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति के साथ आयोजित विचार-विमर्श कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस अवसर पर समिति के माननीय सदस्यों एवं विभिन्न क्षेत्रों के आमंत्रित प्रतिनिधियों के साथ इस महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक चर्चा होगी तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनहितकारी बनाने के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।इसके उपरांत उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य जी सहकारिता भवन, लखनऊ में भारतीय तैलिक साहू राठौर युवा महासभा, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित वरिष्ठ सेवा सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं प्रेरणादायी योगदान देने वाले वरिष्ठजनों का सम्मान किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जी उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सामाजिक समरसता, सेवा, राष्ट्र निर्माण तथा युवा शक्ति की सकारात्मक भूमिका पर अपने विचार भी व्यक्त करेंगे।मा० उप मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक विमर्श, सामाजिक समरसता तथा समाज के वरिष्ठजनों के सम्मान के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
झारखंड के वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य-कर तथा संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य की पुलिस व्यवस्था और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं
आरएसएस मुस्लिम समुदाय की कुर्बानियों को नजरअंदाज कर रही है: सैयद आगा रूहुल्लाह
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह ने देश की आजादी में मुस्लिम समुदाय के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर मुस्लिम समुदाय के योगदान को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया।
केशव प्रसाद मौर्य उप मुख्यमंत्री ने राजनाथ सिंह एवं नितिन गडकरी ने लखनऊ के सरोजनी नगर स्थित सैनिक स्कूल मेंलगभग ₹4,200 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाला 63 किलोमीटर लंबा कानपुर–लखनऊ छह लेन एक्सप्रेस-वे प्रमुख परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया है, जो प्रदेश का नया विकास कॉरिडोर बनेगा। इसके अतिरिक्त लगभग ₹541 करोड़ की लागत से हरदोई–लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग के 32 किलोमीटर लंबे चार लेन निर्माण कार्य से सुरक्षित एवं तीव्र आवागमन सुनिश्चित होगा। वहीं लगभग ₹109 करोड़ की लागत से निर्मित इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा फ्लाईओवर राजधानी लखनऊ की यातायात व्यवस्था को और अधिक सुगम एवं व्यवस्थित बनाएगा।उन्होंने कहा कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ही विकसित भारत की मजबूत नींव है। उत्तर प्रदेश अब पिछड़ेपन की पहचान से निकलकर एक्सप्रेस-वे, आधुनिक हाईवे और तेज विकास वाले प्रदेश के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित कर चुका है। विकसित भारत का सपना विकसित उत्तर प्रदेश के माध्यम से ही साकार होगा, उत्तर प्रदेश की नई पहचान एक्सप्रेस-वे से एक्सप्रेस ग्रोथ बन चुकी है। प्रत्येक नई सड़क अनगिनत नए अवसरों का द्वार खोलती है। बेहतर सड़कें उद्योग, निवेश, पर्यटन और रोजगार को नई गति प्रदान करती हैं तथा किसान को बाजार, युवा को रोजगार और प्रदेश को निवेश से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनती हैं।उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने कहा कि पहले केवल परियोजनाओं की घोषणाएं होती थीं, लेकिन आज डबल इंजन सरकार समयबद्ध ढंग से परियोजनाओं का निर्माण कर उनका लोकार्पण एवं संचालन सुनिश्चित कर रही है। यही सुशासन की पहचान है, उत्तर प्रदेश अब संभावनाओं का नहीं, बल्कि उपलब्धियों का प्रदेश बन चुका है और आने वाले समय में देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों में अग्रणी भूमिका निभाएगा। इन परियोजनाओं से प्रदेश में कनेक्टिविटी मजबूत होगी, निवेश आकर्षित होगा तथा रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। विशेष रूप से नवाबों की नगरी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर के बीच विकास की नई रफ्तार स्थापित होगी, जिससे उद्योग, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को अभूतपूर्व गति मिलेगी।कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मा० मंत्रीगण, मा० संसदगण, मा० विधायकगण, महापौर लखनऊ, पार्टी पदाधिकारिगण, वरिष्ठ अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने सहभागिता कर प्रदेश के विकास के इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) दोबारा शुरू करेगा और अब से खुद को 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संरक्षक' के रूप में ...
लॉन्ग ड्राइव और हिल स्टेशन की ट्रिप अपनी जगह है, लेकिन ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए पार्टनर का हाथ थामकर खूबसूरत नजारों को निहारने का मजा ही कुछ और है. भारतीय रेलवे की हाई-स्पीड और अत्याधुनिक वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) ने न सिर्फ सफर के समय को कम किया है, बल्कि देश के कुछ सबसे खूबसूरत रेल मार्गों पर यात्रा को बेहद आरामदायक और रोमांटिक भी बना दिया है.अगर आप भी अपनी व्यस्त जिंदगी से ब्रेक लेकर किसी ऐसी रोमांटिक ट्रिप की प्लानिंग कर रहे हैं जहां आरामदायक सफर के साथ-साथ प्रकृति के जादुई नजारे भी देखने को मिलें, तो आपको वंदे भारत एक्सप्रेस के इन 5 सबसे शानदार रूट्स (Scenic Vande Bharat Routes) पर एक बार जरूर सफर करना चाहिए.1. मुंबई से मडगाँव (गोआ) वंदे भारत: कोंकण की हसीन वादियांअगर आपको हरियाली, ऊंचे पुल, गहरी खाइयां और पहाड़ों को चीरती हुई सुरंगे पसंद हैं, तो कोंकण रेलवे (Konkan Railway) के ट्रैक पर दौड़ने वाली यह ट्रेन आपके लिए सबसे बेस्ट है.नजारों की खूबी: यह रूट खासकर मानसून और उसके ठीक बाद के महीनों में किसी जन्नत जैसा दिखाई देता है. ट्रेन जब पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के बीच से गुजरती है, तो खिड़की के बाहर अनगिनत झरने, नदियां और घने जंगल दिखाई देते हैं. पार्टनर के साथ एग्जीक्यूटिव क्लास की रिवॉल्विंग चेयर (घूमने वाली सीट) पर बैठकर कॉफी की चुस्कियों के साथ इन नजारों को देखना लाइफटाइम एक्सपीरियंस बन जाता है.2. नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत: हिमालय की तलहटीधार्मिक यात्रा के साथ-साथ अगर आप पहाड़ों की ठंडी हवाओं और खूबसूरत वादियों का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो दिल्ली-कटरा रूट की वंदे भारत एक बेहतरीन विकल्प है.नजारों की खूबी: पंजाब के मैदानी इलाकों को पार करने के बाद जैसे ही यह ट्रेन जम्मू में प्रवेश करती है, वैसे ही शिवालिक पहाड़ियों का खूबसूरत सिलसिला शुरू हो जाता है. रास्ते में आने वाले ऊंचे रेलवे ब्रिज और घुमावदार ट्रैक से दिखने वाले पहाड़ों के नजारे बेहद सुकून देने वाले होते हैं.3. आनंद विहार (दिल्ली) से देहरादून वंदे भारत: शिवालिक के घने जंगलदिल्ली की भागदौड़ और प्रदूषण से दूर उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में वीकेंड बिताने के लिए यह सबसे पसंदीदा रूट है.नजारों की खूबी: यह ट्रेन उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों से होते हुए जैसे ही उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करती है, राजाजी नेशनल पार्क के घने जंगल और शिवालिक रेंज के पहाड़ आपका स्वागत करते हैं. ट्रेन की बड़ी-बड़ी शीशे वाली खिड़कियों से जंगल और प्राकृतिक नजारों को देखना आंखों को बेहद सुकून देता है.4. कासरगोड से तिरुवनंतपुरम वंदे भारत: केरल के खूबसूरत बैकवॉटर्स'गॉड्स ओन कंट्री' कहे जाने वाले केरल के तटीय इलाकों की खूबसूरती को अगर करीब से देखना है, तो इस रूट की वंदे भारत ट्रेन सबसे मुफीद है.नजारों की खूबी: केरल को उत्तर से दक्षिण तक जोड़ने वाला यह रूट बेहद लाजवाब है. सफर के दौरान आपको खिड़की के बाहर नारियल के ऊंचे-ऊंचे पेड़, पारंपरिक केरल के घर, धान के हरे-भरे खेत और बीच-बीच में केरल के मशहूर बैकवॉटर्स (नदियों और झीलों का जाल) के अद्भुत विजुअल्स देखने को मिलते हैं.5. हावड़ा से न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत: उत्तर बंगाल के चाय के बागानकोलकाता से दार्जिलिंग या सिक्किम की वादियों की तरफ रोमांटिक ट्रिप प्लान करने वाले कपल्स के लिए यह रूट पहली पसंद बन चुका है.नजारों की खूबी: जैसे-जैसे यह ट्रेन मालदा को पार करके उत्तर बंगाल की तरफ बढ़ती है, मैदानी इलाकों की जगह दूर-दूर तक फैले हरे-भरे चाय के बागान (Tea Gardens) दिखाई देने लगते हैं. धुंध और बादलों के बीच से गुजरती हुई यह ट्रेन आपको पहाड़ों के बेहद करीब होने का अहसास कराती है.स्मार्ट ट्रैवल टिप (Travel Tip)इन सभी रूट्स पर सफर का असली मजा लेने के लिए कोशिश करें कि आप एग्जीक्यूटिव चेयर कार (EC) की टिकट बुक करें. इसकी सीटें 180 डिग्री तक घूम जाती हैं, जिससे आप सीधे खिड़की की तरफ मुंह करके बिना अपनी गर्दन को तकलीफ दिए बाहर के मनमोहक दृश्यों का पूरा आनंद ले सकते हैं.
शादी के बाद हनीमून (Honeymoon) पर जाना हो या पार्टनर के साथ किसी रोमांटिक ट्रिप (Romantic Trip) की प्लानिंग करनी हो, पहाड़ों की हसीन वादियां हमेशा कपल्स की पहली पसंद होती हैं. भारत में कई खूबसूरत हिल स्टेशन्स (Hill Stations) हैं जहां की प्राकृतिक सुंदरता और सुहाना मौसम रोमांस को दोगुना कर देता है. लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में कपल्स कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनकी खूबसूरत ट्रिप एक बुरे सपने या आफत में बदल जाती है.म्यूचुअल फंड की तरह ही ट्रिप की प्लानिंग में भी अनुशासन और सावधानी जरूरी है. आज हम आपको देश के 5 सबसे चुनिंदा और लोकप्रिय हिल स्टेशनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां जाने से पहले कपल्स को विशेष तौर पर सावधान रहना चाहिए और वहां कुछ गलतियां करने से बिल्कुल बचना चाहिए.1. मनाली (हिमाचल प्रदेश) – एडवेंचर के चक्कर में न लें बड़ा रिस्कमनाली (Manali) कपल्स का ऑल-टाइम फेवरेट डेस्टिनेशन है. यहां आकर कपल्स अक्सर जोश में आकर बिना किसी सर्टिफाइड गाइड के ऊंचे ट्रैकिंग रूट्स पर निकल जाते हैं या बर्फबारी के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्रों में चले जाते हैं.क्या न करें गलती: मनाली या सोलांग वैली में पैराग्लाइडिंग, रिवर राफ्टिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स करते समय केवल सरकारी मान्यता प्राप्त (Government Approved) ऑपरेटरों को ही चुनें. सस्ते के चक्कर में लोकल अनट्रेंड वेंडर्स के झांसे में न आएं, क्योंकि यहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी भारी पड़ सकती है. साथ ही, रोहतांग पास जाते समय वेदर फोरकास्ट और परमिट का पहले से ध्यान रखें.2. लेह-लद्दाख – एक्यूट माउंटेन सिकनेस (AMS) को हल्के में न लेंलद्दाख की खूबसूरत पैंगोंग झील और बर्फीले पहाड़ हर रोमांटिक कपल को आकर्षित करते हैं. लेकिन यहां की सबसे बड़ी भौगोलिक चुनौती है— कम ऑक्सीजन का स्तर.क्या न करें गलती: लद्दाख पहुंचते ही पहले ही दिन घूमने निकल जाना सबसे बड़ी बेवकूफी साबित हो सकती है. आपकी बॉडी को वहां के ऊंचे वातावरण के अनुकूल (Acclimatize) होने के लिए कम से कम 24 से 48 घंटे के पूरे आराम की जरूरत होती है. बिना आराम किए ऊंचाई पर जाने से 'एक्यूट माउंटेन सिकनेस' (AMS) हो सकती है, जिससे तेज सिरदर्द, उल्टी और चक्कर आने लगते हैं और पूरी ट्रिप खराब हो जाती है.3. ऊटी (तमिलनाडु) – स्थानीय संस्कृति और ड्रेस कोड का रखें ध्यानदक्षिण भारत का यह बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन अपनी हरियाली और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है. यहां बड़ी संख्या में नवविवाहित जोड़े आते हैं.क्या न करें गलती: ऊटी (Ooty) और उसके आसपास के कई प्राचीन मंदिरों या पवित्र धार्मिक स्थलों पर जाते समय कपड़ों के चयन में विशेष सावधानी बरतें. सार्वजनिक स्थानों पर अत्यधिक इंटिमेसी (PDA) या अभद्र व्यवहार से बचें, क्योंकि यहां की स्थानीय संस्कृति काफी पारंपरिक है. इसके अलावा, नीलगिरी टॉय ट्रेन (Toy Train) की बुकिंग हफ्तों पहले हो जाती है, इसलिए ऐन वक्त पर टिकट काउंटर पर जाकर समय बर्बाद न करें.4. शिमला (हिमाचल प्रदेश) – पानी का संकट और नो-पार्किंग जोन का नियमशिमला का मॉल रोड और रिज मैदान कपल्स को शाम के वक्त एक बेहतरीन रोमांटिक वॉक का अहसास कराते हैं. लेकिन पीक सीजन में यहां कुछ व्यावहारिक दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं.क्या न करें गलती: गर्मियों और शादियों के सीजन में शिमला में अक्सर पानी की किल्लत हो जाती है. होटल बुक करते समय हमेशा रिव्यूज पढ़ें कि वहां 24 घंटे पानी की सुविधा है या नहीं. इसके अलावा, यदि आप अपनी पर्सनल कार से जा रहे हैं, तो शिमला के नो-पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ी करने की गलती बिल्कुल न करें. यहां का ट्रैफिक प्रशासन बेहद सख्त है और आपकी गाड़ी तुरंत क्रेन से उठा ली जाएगी, जिससे आपकी रोमांटिक शाम पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने में बीत सकती है.5. मुन्नार (केरल) – ऑफ-रोडिंग और जंगली रास्तों से रहें दूरकेरल का मुन्नार (Munnar) अपने घुमावदार रास्तों, घने कोहरे और खूबसूरत वाटरफॉल्स के लिए कपल्स के बीच बेहद लोकप्रिय है.क्या न करें गलती: मुन्नार के जंगलों और चाय के बागानों के बीच शाम 6 बजे के बाद कोहरा बहुत तेजी से गहरा जाता है. ऐसे में अनजान या सुनसान रास्तों पर पार्टनर के साथ लॉन्ग ड्राइव पर निकलने की गलती न करें. कई इलाकों में जंगली हाथियों का मूवमेंट होता है. सेल्फी लेने के चक्कर में प्रतिबंधित जंगली क्षेत्रों या गहरी खाइयों के करीब जाना जानलेवा साबित हो सकता है.कपल्स के लिए 3 गोल्डन टिप्स (Smart Travel Tips)मेडिकल किट हमेशा रखें साथ: पहाड़ों पर ऊंचाई, ठंड और घुमावदार रास्तों के कारण मोशन सिकनेस (उल्टी आना), सिरदर्द और सर्दी-खांसी होना आम बात है. अपनी जरूरी दवाइयां हमेशा बैग में रखें.होटल बुकिंग में एडवांस रहें: पीक सीजन में सीधे हिल स्टेशन जाकर कमरा ढूंढने की गलती न करें. इससे आपको या तो बहुत महंगे दाम पर खराब कमरे मिलेंगे या भटकना पड़ेगा, जिससे ट्रिप का मूड खराब होगा.मौसम का अपडेट: पहाड़ों का मौसम पल भर में बदलता है. लैंडस्लाइड (भूस्खलन) या भारी बारिश के अलर्ट को हमेशा चेक करते रहें.
त्योहारों, स्कूल की छुट्टियों या किसी आपातकालीन स्थिति (जैसे प्राकृतिक आपदा) के समय हवाई जहाजों का किराया (Airfare) अचानक आसमान छूने की समस्या से हर आम मुसाफिर कभी न कभी जरूर परेशान हुआ है. इस समस्या को दूर करने और विमानन कंपनियों (Airlines) की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार अब एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है.विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) एक नए नियामक ढांचे (Regulatory Framework) पर काम कर रहा है, जिसके तहत त्योहारों और छुट्टियों के सीजन में हवाई किराए में होने वाली अप्रत्याशित बढ़ोतरी (Dynamic Pricing Cap) पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी.क्यों जरूरी हुआ सरकार का यह कड़ा दखल?वर्तमान में एयरलाइंस कंपनियां 'डायनेमिक प्राइसिंग' (Dynamic Pricing) एल्गोरिद्म पर काम करती हैं. इसका सीधा नियम है— 'जैसे-जैसे मांग (Demand) बढ़ेगी, वैसे-वैसे किराया भी बढ़ता जाएगा.'त्योहारों पर लूट: दिवाली, छठ, ईद, क्रिसमस या गर्मियों की छुट्टियों के दौरान जब लाखों लोग अपने घर जाने के लिए टिकट बुक करते हैं, तो कुछ रूटों का किराया सामान्य से 300% से 400% तक महंगा हो जाता है.पारदर्शिता का अभाव: कई बार 2 घंटे की घरेलू उड़ान का किराया अंतरराष्ट्रीय उड़ान से भी महंगा हो जाता है. आम उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती शिकायतों और संसदीय समितियों के सुझावों के बाद सरकार ने इस 'फेयर गॉजिंग' (मनमानी वसूली) पर कानूनी लगाम लगाने का मन बनाया है.कैसा होगा सरकार का नया 'एयरफेयर कैपिंग' फॉर्मूला?सूत्रों के मुताबिक, सरकार विमानन कंपनियों के बिजनेस में सीधा दखल दिए बिना यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए एक 'अपर कैपिंग' (Upper Cap) यानी अधिकतम किराए की सीमा तय करने की योजना बना रही है:सीजनल फेयर इंडेक्स (Seasonal Fair Index): त्योहारों के महीनों के लिए हर रूट का एक अधिकतम किराया (Maximum Ceiling Price) पहले से तय कर दिया जाएगा. एयरलाइंस चाहकर भी टिकट की कीमत उस तय सीमा से ₹1 भी ऊपर नहीं ले जा सकेंगी.इकोनॉमी क्लास के लिए विशेष सुरक्षा: यह नियम मुख्य रूप से इकोनॉमी क्लास (Economy Class) की सीटों पर लागू होगा, ताकि मध्यमवर्गीय और नौकरीपेशा यात्रियों को सीधे तौर पर राहत मिल सके.आपातकालीन स्थितियों में नो-प्रॉफिट जोन: यदि देश के किसी हिस्से में प्राकृतिक आपदा (बाढ़, भूकंप) आती है या कोई संकट खड़ा होता है, तो वहां की उड़ानों के लिए किराए को तुरंत सामान्य बेस-प्राइस (Base Price) पर लॉक कर दिया जाएगा.म्यूचुअल फंड की तरह बजट प्लानिंग होगी आसानजैसे म्यूचुअल फंड में एक अनुशासित एसआईपी (SIP) के जरिए आपका बजट कभी नहीं बिगड़ता, ठीक वैसे ही इस नियम के आने के बाद आम नागरिकों के लिए अपने होम-टाउन जाने की प्लानिंग करना बेहद आसान हो जाएगा. यात्रियों को अब इस डर से 6 महीने पहले टिकट बुक करने की मजबूरी नहीं होगी कि ऐन वक्त पर किराया ₹25,000 हो जाएगा.विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से हालांकि शॉर्ट-टर्म में एयरलाइंस के प्रॉफिट मार्जिन पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में इससे हवाई यात्रियों की संख्या (Passenger Traffic) में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे अल्टीमेटली एविएशन सेक्टर को ही फायदा पहुंचेगा. उम्मीद की जा रही है कि आगामी आगामी फेस्टिव सीजन से इस नए रेगुलेशन को देश भर में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा.
दिल्ली में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है. दिल्ली सरकार ने महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद देने वाली अपनी बेहद महत्वाकांक्षी 'महिला समृद्धि योजना' (Mahila Samridhi Yojna) को लेकर दो बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं.पहला बदलाव यह कि इस सरकारी योजना का नाम अब बदलकर 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' (Delhi Lakshmi Yojna) कर दिया गया है. दूसरा यह कि इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता को बढ़ाकर अब ₹2,500 प्रति माह करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे दिल्ली की करीब 17 लाख महिलाओं के जीवन स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.कब शुरू होगी 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' और किसे मिलेगा लाभ?शुरुआती दौर में इस कल्याणकारी योजना की घोषणा आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार द्वारा की गई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से उस समय इसे जमीन पर नहीं उतारा जा सका. इसके बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी साल 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान अपने 'संकल्प पत्र' (घोषणा पत्र) में महिलाओं को प्रति माह वित्तीय सहायता देने का प्रमुख वादा किया था. वर्तमान में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार अब इस योजना को धरातल पर उतारने की अंतिम तैयारियों में जुट गई है.संभावित शुरुआत: मीडिया रिपोर्ट्स और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली सरकार इस योजना को अगस्त 2026 में रक्षाबंधन के पावन पर्व के आसपास लागू करने का बड़ा लक्ष्य लेकर चल रही है, ताकि त्योहार के मौके पर महिलाओं को यह विशेष उपहार दिया जा सके. हालांकि, अभी तक इसकी सटीक लॉन्चिंग डेट की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है.योग्यता और पात्रता के नियम: इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित बुनियादी शर्तें तय की जा सकती हैं:महिला आवेदक की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए.महिला कम से कम पिछले 10 वर्षों से दिल्ली की स्थायी निवासी होनी चाहिए और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से ताल्लुक रखती हो.महिला के परिवार की कुल सालाना आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए.जरूरी दस्तावेजों को लेकर क्या है सरकार का रुख?कई महिलाएं इस उलझन में हैं कि इस योजना के ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन के लिए कौन-कौन से कागजात तैयार रखने होंगे. दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग ने अभी तक आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों (Documents List) की कोई भी आधिकारिक या फाइनल सूची जारी नहीं की है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि रक्षाबंधन से ठीक पहले जब योजना की लॉन्चिंग डेट का एलान होगा, उसी समय विस्तृत गाइडलाइन और आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट भी पोर्टल पर लाइव कर दी जाएगी.1 अगस्त से अनिवार्य होगा 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड'; बंद हो जाएंगे पुराने पेपर टिकटदिल्ली में रोजाना सफर करने वाली महिला यात्रियों के लिए डीटीसी (DTC) बसों से जुड़ी एक बेहद जरूरी और कड़क चेतावनी सामने आई है. दिल्ली सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना के नियमों में बड़ा फेरबदल करते हुए 1 अगस्त 2026 से 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' (Pink Saheli Smart Card) को पूरी तरह अनिवार्य करने का फैसला किया है.31 जुलाई है आखिरी तारीख: वर्तमान में जो कागज वाले (Paper) पिंक टिकट महिलाओं को मुफ्त यात्रा के लिए कंडक्टर द्वारा दिए जाते हैं, वे केवल 31 जुलाई 2026 तक ही मान्य रहेंगे. 1 अगस्त के बाद यदि किसी महिला के पास डिजिटल पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड नहीं होगा, तो वे बसों में मुफ्त सफर का लाभ नहीं ले पाएंगी और उन्हें सामान्य टिकट खरीदना होगा.वन नेशन, वन कार्ड से लिंकेज: यह नया डिजिटल कार्ड केंद्र सरकार की महा-योजना 'वन नेशन, वन कार्ड' (One Nation, One Card) के अंतर्गत तैयार किया जा रहा है. इस कार्ड की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि इसके जरिए केवल और केवल दिल्ली की वैध महिला निवासी ही डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा का लाभ उठा सकेंगी, जिससे फर्जीवाड़े और राजस्व के नुकसान पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकेगी.
देश के अधिकांश हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon 2026) पूरी तरह रफ्तार पकड़ चुका है, जिसके चलते आगामी 24 घंटे कई राज्यों के लिए बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 14 जुलाई के लिए ताजा वेदर बुलेटिन जारी करते हुए बिहार और ओडिशा में अत्यंत भारी बारिश का रेड/ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत (North-East), झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ समेत देश के 10 से अधिक राज्यों में मूसलाधार बारिश, वज्रपात (Lightning) और 50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी दी गई है.बिहार और ओडिशा के लिए बड़ी चेतावनी: बाढ़ जैसे हालात की आशंकामौसम विभाग के मुताबिक, 14 जुलाई को बिहार और ओडिशा के अलग-अलग जिलों में मूसलाधार से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है.शहरी और ग्रामीण इलाकों में संकट: लगातार हो रही इस भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में गंभीर जलजमाव (Waterlogging), प्रमुख सड़कें डूबने और स्थानीय स्तर पर अचानक बाढ़ (Flash Floods) जैसी स्थिति बन सकती है.प्रशासन की सलाह: मौसम वैज्ञानिकों ने इन दोनों राज्यों के नागरिकों को बेहद जरूरी काम न होने पर घरों से बाहर न निकलने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सख्त हिदायत दी है.इन 10 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्टआईएमडी (IMD) ने 14 जुलाई को देश के जिन 10 राज्यों में भारी बारिश का अनुमान जताते हुए लोगों को सतर्क रहने को कहा है, वे निम्नलिखित हैं:पूर्वी और मध्य भारत: झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और सिक्किम.पूर्वोत्तर भारत (North-East): अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा.वज्रपात का खतरा: इन सभी राज्यों में तेज बौछारों के साथ बड़े पैमाने पर आकाशीय बिजली चमकने और बादलों की भीषण गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है.50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, गिरेगी बिजलीमौसम विभाग के अनुसार, कई राज्यों में बारिश के साथ-साथ तेज अंधड़ चलने की भी आशंका है:बिहार, झारखंड, ओडिशा, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल: इन राज्यों के कुछ हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं.अंडमान-निकोबार, आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर: इन क्षेत्रों में हवा की रफ्तार और अधिक खतरनाक रुख अपनाते हुए 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. इन इलाकों में आंधी के साथ बिजली गिरने की भी गंभीर आशंका है.उत्तर भारत के मौसम का हाल: यूपी में 17 जुलाई से बदलेगा मिजाजपहाड़ी राज्य: उत्तराखंड में अगले कई दिनों तक लगातार बारिश का दौर जारी रहेगा. वहीं हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ चुनिंदा स्थानों पर भारी भूस्खलन (Landslides) की चेतावनी दी गई है.मैदानी राज्य (दिल्ली-एनसीआर): हरियाणा, पंजाब और देश की राजधानी दिल्ली में फिलहाल छिटपुट या हल्की बूंदाबांदी का अनुमान है.उत्तर प्रदेश: यूपी में इस समय हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहेगा, लेकिन मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि 17 से 19 जुलाई के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में मानसून दोबारा विकराल रूप ले सकता है, जिससे वहां भारी बारिश होगी.मध्य, दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत की स्थितिलगातार आफत: पूर्वोत्तर के राज्यों (असम-मेघालय) में कई दिनों से जारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा चरम पर है. मेघालय के कुछ हिस्सों में अत्यधिक वर्षा का अनुमान है.मध्य भारत: छत्तीसगढ़ में 14 और 15 जुलाई को भारी बारिश होगी, जबकि मध्य प्रदेश और विदर्भ में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ेंगी.दक्षिण भारत: आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में हल्की से मध्यम बारिश होगी. हालांकि, तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ स्थानों पर स्थानीय कूटनीतिक कारणों से लू (Heatwave) चलने की भी विसंगतिपूर्ण चेतावनी दी गई है, जबकि ओडिशा और तमिलनाडु में उमस (Humidity) का प्रकोप बना रहेगा.मछुआरों के लिए समंदर में जाने पर पाबंदीआईएमडी ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में मौसम के बेहद खराब रहने की चेतावनी दी है. समुद्र के ऊपर हवा की रफ्तार 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों के साथ 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. समंदर में उठने वाली ऊंची लहरों को देखते हुए मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक गहरे पानी में न जाने की सख्त सलाह दी गई है.
जब बात बेटियों के सुरक्षित और सुनहरे भविष्य के लिए निवेश करने की आती है, तो आज के समय में दो विकल्प सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं— पहला, सरकार की भरोसेमंद सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana - SSY) और दूसरा, म्यूचुअल फंड की सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP).दोनों ही निवेश के माध्यमों की अपनी-अपनी खूबियां और सुरक्षा के मापदंड हैं. अक्सर माता-पिता इस उलझन में रहते हैं कि अपनी लाडली के लिए हर महीने ₹2,000 की बचत कहां लगाएं, ताकि भविष्य में उसकी पढ़ाई या शादी के समय सबसे बड़ा फंड तैयार हो सके. आज हम इन दोनों विकल्पों का ए टू जेड (A to Z) कैलकुलेशन समझने वाले हैं, जिससे आपके लिए सही फैसला लेना पानी की तरह साफ हो जाएगा.1. सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) का पूरा गणितसुकन्या समृद्धि योजना केंद्र सरकार द्वारा संचालित एक स्मॉल सेविंग्स स्कीम है, जो पूरी तरह सुरक्षित और टैक्स-फ्री (EEE कैटगरी) है.वर्तमान ब्याज दर: वर्तमान में सरकार इस योजना पर 8.2% की सालाना चक्रवृद्धि (Compounding) ब्याज दे रही है.निवेश के नियम: इस स्कीम में बेटी की उम्र 10 वर्ष होने से पहले खाता खुलवाना होता है. आपको खाता खोलने के दिन से लगातार 15 वर्षों तक हर महीने ₹2,000 का निवेश करना होगा. इसके बाद अगले 6 साल (जब तक खाता 21 साल का न हो जाए) आपको कोई पैसा नहीं जमा करना होता, लेकिन उस पर ब्याज जुड़ता रहता है.कुल निवेश (15 साल में): $2,000 imes 12 imes 15 = ₹3,60,000$ (3.60 लाख रुपए)21 साल बाद मिलने वाला कुल फंड (SSY Maturity): 8.2% की मौजूदा ब्याज दर के हिसाब से 21 साल पूरे होने पर आपकी बेटी को लगभग ₹11,32,000 (11.32 लाख रुपए) प्राप्त होंगे.2. म्यूचुअल फंड SIP का पूरा गणितSIP बाजार के जोखिमों के अधीन है, लेकिन लंबी अवधि (Long Term) में यह किसी भी सरकारी स्कीम की तुलना में दोगुना-तिगुना रिटर्न देने का दम रखती है.अनुमानित सालाना रिटर्न: अगर आप किसी अच्छे डायवर्सिफाइड या लार्ज-कैप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो पिछले 15-20 सालों के ट्रैक रिकॉर्ड के अनुसार औसतन 12% से 15% तक का सालाना रिटर्न आसानी से मिल जाता है. हम यहां एक व्यावहारिक 12% का रिटर्न मानकर चलते हैं.निवेश के नियम: एसआईपी में आप 21 सालों तक लगातार हर महीने ₹2,000 का निवेश जारी रख सकते हैं (SSY की तरह इसमें 15 साल बाद निवेश रोकने की कोई पाबंदी नहीं है).कुल निवेश (21 साल में): $2,000 imes 12 imes 21 = ₹5,04,000$ (5.04 लाख रुपए)21 साल बाद मिलने वाला कुल फंड (SIP Wealth Generation): 12% के अनुमानित औसत रिटर्न के आधार पर 21 वर्षों के बाद आपके पास लगभग ₹22,78,000 (22.78 लाख रुपए) का विशाल फंड तैयार हो सकता है.(नोट: यदि यही रिटर्न 15% बैठता है, तो यह फंड ₹41 लाख के पार भी जा सकता है).तुलनात्मक चार्ट: दोनों में मुख्य अंतर क्या है?फीचर्स / लाभसुकन्या समृद्धि योजना (SSY)म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP)निवेश का प्रकारसरकारी योजना (100% सुरक्षित)मार्केट लिंक्ड (व्यावहारिक जोखिम)वर्तमान/अनुमानित रिटर्न8.2% (फिक्स्ड, सरकार द्वारा तय)12% से 15% (अनुमानित लॉन्ग टर्म)हर महीने निवेश₹2,000₹2,000पैसा जमा करने की अवधि15 वर्ष21 वर्षमैच्योरिटी की अवधि21 वर्ष21 वर्ष21 साल बाद कुल फंड~ ₹11.32 लाख~ ₹22.78 लाख (12% रिटर्न पर)टैक्स में छूटपूरी तरह टैक्स फ्री (80C के तहत)लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स देयआपके लिए कौन सा विकल्प है सबसे बेहतर?SSY किनके लिए बेस्ट है: यदि आप बिल्कुल भी रिस्क (Risk) नहीं लेना चाहते, मार्केट के उतार-चढ़ाव से दूर रहना पसंद करते हैं, और आपका एकमात्र लक्ष्य गारंटीड रिटर्न के साथ 100% सरकारी सुरक्षा है, तो सुकन्या समृद्धि योजना आपकी बेटी के लिए सर्वोत्तम है.SIP किनके लिए बेस्ट है: यदि आप महंगाई (Inflation) को मात देकर अपनी बेटी की उच्च शिक्षा के लिए एक बहुत बड़ा कॉर्पस तैयार करना चाहते हैं और 20-21 साल की लंबी अवधि के लिए बाजार के आंशिक जोखिम को उठाने के लिए तैयार हैं, तो एसआईपी (SIP) में निवेश करना आपके पैसे को तेजी से बढ़ाने का सबसे स्मार्ट जरिया है.एक्सपर्ट टिप: यदि आपका बजट अनुमति देता है, तो सबसे बेहतर रणनीति यह होगी कि आप ₹2,000 के बजट को दो हिस्सों में बांट दें— ₹1,000 सुकन्या योजना में (सुरक्षा के लिए) और ₹1,000 किसी अच्छे म्यूचुअल फंड की एसआईपी में (हाई रिटर्न के लिए) लगाएं.
सनातन धर्म में साल में चार बार नवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. इनमें से दो चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रत्यक्ष रूप से बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, जबकि दो नवरात्रि गुप्त होती हैं— माघ और आषाढ़ माह की नवरात्रि. तांत्रिक साधना, तंत्र-मंत्र की सिद्धि और मां दुर्गा के 10 दिव्य स्वरूपों (10 महाविद्याओं) की गुप्त रूप से आराधना करने के लिए आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है.इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि (Ashadha Gupt Navratri 2026) का त्योहार एक बेहद दुर्लभ और चमत्कारी संयोग लेकर आ रहा है. इस बार नवरात्रि के प्रारंभ पर 'शश महालक्ष्मी योग' (Shash Mahalakshmi Yoga) का निर्माण हो रहा है, जो कि ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों की किस्मत बदलने और साधकों को अथाह सुख-समृद्धि देने वाला माना जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस साल गुप्त नवरात्रि कब से शुरू हो रही है और कलश (घट) स्थापना का सबसे उत्तम और फलदायी मुहूर्त क्या है.कब से शुरू हो रही है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026?हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होता है.प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: इस साल आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 15 जुलाई 2026 को हो रही है.उदया तिथि और व्रत: उदया तिथि के नियमों के अनुसार, गुप्त नवरात्रि का व्रत और कलश स्थापना 15 जुलाई 2026, बुधवार को की जाएगी.नवरात्रि का समापन: इस बार गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि 23 जुलाई 2026 को पड़ेगी, जिसके बाद दशमी तिथि को व्रत का पारण किया जाएगा.कलश स्थापना (घटस्थापना) का सबसे शुभ मुहूर्त (Kalash Sthapana Shubh Muhurat)गुप्त नवरात्रि में कलश स्थापना हमेशा प्रतिपदा तिथि के दिन सूर्योदय के बाद शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त में की जाती है. 15 जुलाई 2026 को घटस्थापना के दो सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त निम्नलिखित हैं:प्रथम मुहूर्त (प्रातः काल): सुबह 05:35 बजे से लेकर सुबह 07:22 बजे तक (यह समय देवी आराधना के संकल्प और कलश स्थापना के लिए सर्वोत्तम है).द्वितीय मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त): दोपहर 11:59 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक (यदि आप सुबह किसी कारणवश कलश स्थापित नहीं कर पाते हैं, तो इस सर्वदोषनाशक अभिजीत मुहूर्त में स्थापना कर सकते हैं).क्या है 'शश महालक्ष्मी योग' का खास महत्व?इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत के समय आकाश मंडल में ग्रहों का एक अद्भुत राजा-योग बन रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब शनि देव अपनी स्वराशि (कुंभ) में गोचर करते हैं, तो 'शश पंचमहापुरुष योग' बनता है. वहीं, इस समय चंद्रमा और गुरु की अनुकूल स्थिति के कारण इसके साथ 'महालक्ष्मी योग' की जुगलबंदी हो रही है.साधना का मिलेगा हजार गुना फल: इस महासंयोग में मां दुर्गा की गुप्त रूप से की गई पूजा और 10 महाविद्याओं (जैसे मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला) की साधना का फल कई गुना बढ़कर मिलता है.आर्थिक तंगी से मुक्ति: 'शश महालक्ष्मी योग' के प्रभाव से जो साधक इन 9 दिनों में मां लक्ष्मी के 'कमला' स्वरूप की पूजा करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता और पुराने कर्ज का हमेशा के लिए नाश हो जाता है.मनोकामना पूर्ति: इस शुभ योग में घर में कलश स्थापित करने से सुख-शांति का वास होता है, नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं और साधक को हर कार्य में सफलता मिलती है.गुप्त नवरात्रि की पूजा के 3 जरूरी नियम (Puja Niyam)गोपनीयता सबसे बड़ी शर्त: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, गुप्त नवरात्रि की पूजा पूरी तरह गुप्त होनी चाहिए. आपके मंत्र, आपकी साधना और मनोकामना की जानकारी आपके अलावा किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं होनी चाहिए. यहां तक कि पूजा का प्रसाद भी परिवार के सदस्यों में ही वितरित किया जाता है.सात्विकता का पालन: इन 9 दिनों के दौरान साधक को पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. घर में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होना चाहिए.मंत्र जाप की प्रधानता: गुप्त नवरात्रि में शारीरिक पूजा (आरती, भोग) से कहीं ज्यादा मानसिक पूजा और मंत्र जाप को अधिक शक्तिशाली माना गया है.डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह सामग्री पारंपरिक धार्मिक पंचांगों, ज्योतिषीय मान्यताओं एवं प्रचलित लोक परंपराओं पर आधारित है. स्थानीय पंचांगों, भौगोलिक स्थिति और विद्वानों के मत के अनुसार कलश स्थापना के समय में कुछ मिनटों का अंतर संभव है. पाठक इसे केवल एक सामान्य आध्यात्मिक जानकारी के रूप में स्वीकार करें.
भारत और इंग्लैंड के बीच 14 जुलाई से शुरू हो रही 3 मैचों की वनडे इंटरनेशनल सीरीज केवल एक द्विपक्षीय सीरीज नहीं है, बल्कि यह टीम इंडिया के मिशन 'वनडे विश्व कप 2027' (ODI World Cup 2027) की तैयारियों का शंखनाद भी है. इस हाई-प्रोफाइल सीरीज में भारतीय टीम के दो सबसे अनुभवी महायोद्धा— रोहित शर्मा और विराट कोहली की मैदान पर वापसी हो रही है.बर्मिंघम में होने वाले पहले वनडे मुकाबले से ठीक पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय वनडे टीम के युवा कप्तान शुभमन गिल (Shubman Gill) ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा किया है. गिल ने साफ किया कि भारतीय टीम ने अगले साल होने वाले मेगा आईसीसी इवेंट (ICC Event) के लिए अभी से ब्लूप्रिंट तैयार करना शुरू कर दिया है, और इस पूरे मिशन के केंद्र में कोई और नहीं बल्कि किंग विराट कोहली हैं.प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान गिल का एलान: विराट के साथ चल रही है गुप्त रणनीतिकप्तान शुभमन गिल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वह और विराट कोहली (Virat Kohli) मिलकर भविष्य की टीम इंडिया की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं:भविष्य के खिलाड़ियों पर नजर: गिल ने कहा, महज दो दिन पहले ही मेरी और विराट भाई की 2027 विश्व कप के रोडमैप को लेकर लंबी और गंभीर बातचीत हुई थी. हमने विस्तार से चर्चा की कि टीम का परफेक्ट कॉम्बिनेशन क्या होना चाहिए. हम उन खिलाड़ियों को भी चिन्हित कर रहे हैं जो आने वाले समय में भारत के लिए मैच-विनर बन सकते हैं, भले ही वे खिलाड़ी मौजूदा समय में मुख्य टीम का हिस्सा न हों.भूमिकाओं का निर्धारण: कप्तान ने स्पष्ट किया कि वे अभी से यह तय कर रहे हैं कि किस खिलाड़ी को किस नंबर और किस रोल में आजमाया जाए, ताकि विश्व कप के आते-आते टीम का हर विभाग पूरी तरह सेट हो सके.उम्र के सवाल पर दिया करारा जवाब: रोहित-विराट आज भी हैं सबसे मजबूत कड़ीपिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और खेल गलियारों में रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और विराट कोहली की बढ़ती उम्र को लेकर उठ रहे सवालों पर शुभमन गिल ने बेहद परिपक्वता से जवाब दिया. उन्होंने दोनों दिग्गजों का बचाव करते हुए कहा:10 साल का दबदबा: रोहित भाई और विराट भाई पिछले एक दशक से अधिक समय से भारतीय क्रिकेट और हमारी बल्लेबाजी की सबसे मजबूत रीढ़ रहे हैं. आज भी टीम में उनका स्थान और महत्व रत्ती भर कम नहीं हुआ है.अनुभव की कोई कीमत नहीं: गिल ने आगे कहा कि इन दोनों खिलाड़ियों के पास मुश्किल परिस्थितियों से मैच निकालने का जो बेजोड़ अनुभव और खेल की गहरी समझ है, वह टीम के युवा खिलाड़ियों के लिए किसी मार्गदर्शक से कम नहीं है.हाल ही में विराट कोहली ने एक बयान में कहा था कि वे करियर के इस पड़ाव पर ऐसी टीम का हिस्सा नहीं बनना चाहते जहां उन्हें हर मैच में खुद को बार-बार साबित करना पड़े. ऐसे में कप्तान गिल द्वारा उनके अनुभव को इतनी तवज्जो देना और टीम की कोर रणनीतियों में उन्हें शामिल करना यह साफ दिखाता है कि टीम मैनेजमेंट और सिलेक्टर्स विराट को भविष्य की योजनाओं का सबसे अहम स्तंभ मान रहे हैं.म्यूज़ियम ऑफ रिकॉर्ड्स: बतौर कप्तान किंग कोहली का बेमिसाल रिकॉर्डभले ही विराट कोहली ने भारतीय टीम की कप्तानी छोड़ दी हो, लेकिन मैदान पर उनकी लीडरशिप क्वालिटी आज भी कूट-कूट कर भरी है. वनडे क्रिकेट में बतौर कप्तान उनका ट्रैक रिकॉर्ड बेहद शानदार और ऐतिहासिक रहा है:कुल मैच (बतौर कप्तान): 95 मुकाबलेजीत: 65 मैचों में भारत को विजयी बनायाजीत का प्रतिशत (Winning Percentage): 68.42%ऐतिहासिक फैक्ट:कम से कम एक या उससे अधिक वनडे मैचों में भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी करने वाले सभी कप्तानों की सूची में विराट कोहली का यह 68.42% का जीत प्रतिशत सबसे सर्वश्रेष्ठ और टॉप पर है.विराट कोहली का यह विशाल अनुभव अब कप्तान शुभमन गिल के लिए मैदान पर सही फैसले लेने और 2027 की चैंपियन टीम तैयार करने में सबसे बड़ा हथियार साबित होने वाला है.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों खाताधारकों के लिए एक बेहद जरूरी और काम की खबर है. ईपीएफओ ने अपने सभी सदस्यों को एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए सलाह दी है कि वे बिना किसी देरी के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर जाकर अपनी प्रोफाइल फोटो (Profile Photo) को तुरंत अपडेट कर लें.यह फोटो ऑनलाइन पीएफ फंड क्लेम (Online PF Claim) के निपटारे और ई-नॉमिनेशन (e-Nomination) की महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरा करने के दौरान पहचान सत्यापित (Identity Verification) करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है. ईपीएफओ का स्पष्ट कहना है कि यदि आपकी प्रोफाइल फोटो अपडेटेड नहीं है, तो आपको कई ऑनलाइन डिजिटल सेवाओं का लाभ लेने में भारी देरी या परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.ई-नॉमिनेशन (e-Nomination) के लिए क्यों सबसे जरूरी है फोटो?ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, सभी पीएफ खाताधारकों की प्रोफाइल में हाल ही की खींची गई पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड होना अनिवार्य है, विशेष रूप से ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए.परिवार की सुरक्षा: ई-नॉमिनेशन के जरिए सदस्य अपने परिवार के किसी भी सदस्य या पात्र व्यक्ति को आधिकारिक रूप से नामांकित (Nominee) कर सकते हैं.आसानी से मिलेंगे 3 बड़े लाभ: यदि किसी खाताधारक के साथ कोई अनहोनी या मृत्यु हो जाती है, तो वैध ई-नॉमिनेशन होने की स्थिति में नामित व्यक्ति को ईपीएफ (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) का पैसा बिना किसी कानूनी या कागजी बाधा के बेहद आसानी से मिल जाता है.पीएफ क्लेम के निपटारे में मिलेगी रॉकेट जैसी रफ्तारजब किसी सदस्य की प्रोफाइल फोटो और पूरा डेटा पोर्टल पर शत-प्रतिशत अपडेट रहता है, तो ईपीएफओ के एडवांस सेंट्रलाइज्ड सिस्टम को ऑनलाइन विजुअल पहचान सत्यापित करने में आसानी होती है. इससे पीएफ निकासी (PF Withdrawal) या एडवांस क्लेम के निपटारे में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है और मैन्युअल कागजी प्रक्रिया भी पूरी तरह घट जाती है.फोटो के अलावा इन 5 जानकारियों को भी रखें पूरी तरह अपडेटईपीएफओ ने सदस्यों को आगाह किया है कि केवल फोटो ही नहीं, बल्कि एक निर्बाध डिजिटल अनुभव के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों और जानकारियों को भी पोर्टल पर सही तरीके से लिंक और वैरीफाई (Verify) करके रखें:आधार कार्ड (Aadhar Card)पैन कार्ड (PAN Card)बैंक खाता विवरण (Bank Account Details - IFSC Code के साथ)सक्रिय मोबाइल नंबर (Active Mobile Number - आधार लिंक्ड)ईमेल आईडी (Email ID)इन सभी पहचान प्रमाण दस्तावेजों और वित्तीय जानकारियों को पूरी तरह सही रखने से ऑनलाइन पीएफ निकासी, पेंशन संबंधी दावों और अन्य सभी ई-सेवाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के सबसे तेज गति से मिलता है.EPFO पोर्टल पर प्रोफाइल फोटो अपडेट करने का आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीकाआप घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से इन 5 आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपनी प्रोफाइल फोटो बदल या अपलोड कर सकते हैं:स्टेप 1 (लॉगिन करें): सबसे पहले ईपीएफओ के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (unifiedportal-mem.epfindia.gov.in) पर जाएं. यहां अपना 12 अंकों का यूएएन (UAN), पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करके सफलता पूर्वक लॉग इन करें.स्टेप 2 (प्रोफाइल सेक्शन): मुख्य डैशबोर्ड ओपन होने के बाद ऊपर दिए गए मेनू बार में 'View' सेक्शन पर जाएं और वहां 'Profile' के विकल्प को चुनें.स्टेप 3 (फोटो का चयन): यहां आपको प्रोफाइल फोटो अपलोड/चेंज करने का ऑप्शन दिखाई देगा. अपनी एक हालिया पासपोर्ट साइज साफ फोटो (जिसका बैकग्राउंड हल्का या सफेद हो) का चयन करें. ध्यान रखें कि फोटो पोर्टल द्वारा तय किए गए फाइल साइज और फॉर्मेट (JPEG/JPG) के नियमों के अनुकूल हो.स्टेप 4 (अपलोड और सेव): चुनी गई फोटो को प्रीव्यू करने के बाद 'Upload' बटन पर क्लिक करें और बदलावों को सुरक्षित (Save) कर दें.स्टेप 5 (वेरीफाई करें): प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोबारा लॉग इन करके या पेज रिफ्रेश करके यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी नई फोटो प्रोफाइल पर सही तरीके से दिखाई दे रही है या नहीं. इसके बाद ही ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं.
EPFO का बड़ा अपडेट, नौकरी बदलने पर अब 2 तरीकों से करें PF ट्रांसफर, मिनटों में होगा पूरा प्रोसेस
अगर आपने हाल ही में नौकरी बदली है, तो अब आपका Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) में जमा Provident Fund (PF) बैलेंस ट्रांसफर करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। EPFO के नए सदस्य पोर्टल पर कर्मचारियों को अपने पुराने नियोक्ता ...
श्रीगंगानगर : गत्ता गोदाम में भीषण आग लगने से लाखों का नुकसान
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ रोड पर स्थित एक बड़े गत्ता गोदाम में सोमवार को तड़के आग लगने से लाखों रुपए का नुकसान हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह तड़के चार बजे आग लगने की सूचना मिलने पर एक के बाद एक तीन दमकल गाड़ियों मौके पर आई। कई दमकल कर्मी और अन्य […] The post श्रीगंगानगर : गत्ता गोदाम में भीषण आग लगने से लाखों का नुकसान appeared first on Sabguru News .
जैसलमेर में पशुधन चिकित्सक एवं पशुधन निरीक्षक 3000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट
जैसलमेर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार को जैसलमेर जिले में राजकीय प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय मोहनगढ़ के पशुधन चिकित्सक डॉ राघव डोई एवं पशुधन निरीक्षक सोनू रैगर को तीन हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ब्यूरो की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि इन दोनों ने […] The post जैसलमेर में पशुधन चिकित्सक एवं पशुधन निरीक्षक 3000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
मेरठ ललिता गौतम हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रोका
ललिता गौतम हत्याकांड की पीड़िता के परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को काशी टोल प्लाजा पर रोक दिया गया। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी शामिल थे। इस बारे में एसपी सिटी विनायक भोसले ने पत्रकारों से बातचीत में पूरी जानकारी दी।
prashant kishor net worth: बिहार की राजनीति में इस समय पटना की हाईप्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बना हुआ है। वजह हैं चुनावी रणनीतिकार से नेता बने जन सुराज पार्टी (JSP) के प्रमुख प्रशांत किशोर यानी पीके।
भरतपुर में सेवर की खुली जेल से फरार तीन कैदियों ने जयपुर में की अपने ही दोस्त की हत्या
भरतपुर। राजस्थान में भरतपुर के सेवर की खुली जेल से फरार होकर तीन कुख्यात कैदियों द्वारा रविवार देर रात जयपुर में मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास आतिश मार्केट के एक क्लब में बर्थ-डे पार्टी के दौरान चाकू घोंपकर अपने ही दोस्त की हत्या कर देने के बाद भरतपुर जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। […] The post भरतपुर में सेवर की खुली जेल से फरार तीन कैदियों ने जयपुर में की अपने ही दोस्त की हत्या appeared first on Sabguru News .
अभिनेता शाहरुख, अजय देवगन, टाइगर श्रॉफ की ओर से जवाब प्रस्तुत
बारां। राजस्थान में विमल पान मसाला विज्ञापन से जुड़े मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण्यो ग (उपभोक्ता न्यायालय) बारां में वीरेंद्र सिंह बनाम विमल अग्रवाल परिवाद पर सोमवार को सुनवाई हुई। मामले में अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन एवं टाइगर श्रॉफ की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने न्यायालय में लिखित जवाब प्रस्तुत किया। अभिनेताओं की […] The post अभिनेता शाहरुख, अजय देवगन, टाइगर श्रॉफ की ओर से जवाब प्रस्तुत appeared first on Sabguru News .
झुंझुनूं : चलती ट्रेन से तीन करोड़ रुपए का गोल्ड चोरी प्रकरण का खुलासा
झुंझुनूं/जयपुर/जींद। राजस्थान की झुंझुनूं जिला पुलिस और हरियाणा पुलिस की विशेष अनुसंधान टीम (एसआईटी) ने चलती ट्रेन से तीन करोड़ रुपए के सोने के जेवरात चोरी होने की सनसनीखेज वारदात का खुलासा करते हुए नवलगढ़ इलाके से तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर जमीन […] The post झुंझुनूं : चलती ट्रेन से तीन करोड़ रुपए का गोल्ड चोरी प्रकरण का खुलासा appeared first on Sabguru News .
योगी सरकार का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर गिफ्ट, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू, 45 मिनट में होगा सफर
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तेजी से विकसित हो रहे आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में 13 जुलाई सोमवार को एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर को जोड़ने वाला 63 किलोमीटर लंबा ...
कालीचरण दास खण्डेलवाल सीनियर सिटीजन सोसायटी के संरक्षक मनोनीत
अजमेर। सीनियर सिटीजन सोसायटी अजमेर अधिशासी परिषद की द्विमासिक मीटिंग हरि भाऊ उपाध्याय नगर विस्तार स्थित जय अंबे सेवा समिति के वृद्धाश्रम में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश रवि प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई।विशिष्ट अतिथि चिरंजी लाल शर्मा रहे। मीडिया प्रभारी डॉ एसडी मिश्रा ने बताया कि कार्यकारणी ने सर्वसम्मति से समाजसेवी कालीचरण दास खण्डेलवाल […] The post कालीचरण दास खण्डेलवाल सीनियर सिटीजन सोसायटी के संरक्षक मनोनीत appeared first on Sabguru News .
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम के कथित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि कई मामलों में जब किशोर-किशोरियां आपसी सहमति से घर छोड़कर चले जाते हैं, तो माता-पिता अपने तथाकथित 'सम्मान' की रक्षा ...
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के राजस्थान क्षेत्र की दो दिवसीय बैठक संपन्न
जयपुर। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (ABAP) के राजस्थान क्षेत्र की दो दिवसीय बैठक रविवार को अधिवक्ता भवन में संपन्न हुई। बैठक में संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों ने भाग लिया तथा आगामी वर्ष की कार्ययोजना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में संगठन के उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्रीहरि बोरिकर एवं संयुक्त महामंत्री रणबीर सिंह […] The post अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के राजस्थान क्षेत्र की दो दिवसीय बैठक संपन्न appeared first on Sabguru News .
भदरसा अब 'भरत नगर', मुख्यमंत्री योगी के फैसले से भरत जी की तपोभूमि को मिला सम्मान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने अयोध्या जिले के भदरसा कस्बे का नाम बदलकर 'भरत नगर' कर दिया है। सरकार के इस निर्णय के बाद से ...
अमरनाथ यात्रा पर जा रहे गुजरात के सैनी समाज प्रतिनिधिमंडल से मिले राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतम सिंह सैनी
जम्मू। गणमान्य समाज संगठन (सैनी समाज) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतम सिंह सैनी ने अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू पहुंचे गुजरात के सैनी समाज के प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। गुजरात से आए प्रतिनिधिमंडल ने सैनी से मुलाकात कर सामाजिक, सांस्कृतिक और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुलाकात के दौरान सैनी समाज […] The post अमरनाथ यात्रा पर जा रहे गुजरात के सैनी समाज प्रतिनिधिमंडल से मिले राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीतम सिंह सैनी appeared first on Sabguru News .
tu-214pu tehran deployment: क्या ईरान और अमेरिका के युद्ध में रूस की भी एंट्री हो गई है? दरअसल, पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के ...
सावन मास पर हिन्दी में बेहतरीन कविता
सावन के पावन महीने, शिव भक्ति और प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य को समेटती एक विशेष कविता जो सावन के दोनों रूपों को दर्शाती है-पहला, जब बारिश की बूंदें सूखी धरती को हरा-भरा कर देती हैं और चारों तरफ लोकगीतों की गूंज होती है; और दूसरा, जब कांवड़िए और ...
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 जुलाई को दतिया में उप-चुनाव के मद्देनजर हुंकार भरी। उन्होंने पहले वहां से बीजेपी के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का नामांकन भरवाया, उसके बाद जनसभा और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा आज का यह अभियान ...
कल्याणपुरी हत्याकांड: दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल निकला 'कातिल', घरेलू विवाद में पत्नी को मारी थी गोली
पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुरी इलाके में एक महिला की हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मृतक महिला दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल की पत्नी थी। कथित तौर पर कांस्टेबल ने ही पत्नी की गोली मारकर हत्या की।
पश्चिम बंगाल: सुंदरबन तट के पास डूबी नाव में नौ मछुआरे मृत पाए गए, छह अभी भी लापता
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में सुंदरबन के पास बंगाल की खाड़ी से बड़ी घटना सामने आई है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि इस महीने की शुरुआत में एक मछली पकड़ने वाली लापता हुई नाव में नौ मछुआरे मृत पाए गए हैं, जबकि छह मछुआरे लापता हो गए हैं।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्म्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन सभा में पूर्व गृहमंत्री और दतिया से 15 साल विधायक रहे नरोत्तम मिश्रा रो दिए। टिकट कटने के बाद पहली बार दतिया में चुनावी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पहले नरोत्तम मिश्रा ने दतिया ...
अयोध्या राम मंदिर में सीईओ पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। 18 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और कॉर्पोरेट शैली की कार्यप्रणाली लागू की जाएगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन दिनों चलती ट्रेन में पूजा का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक पुजारी ट्रेन के अंदर भगवान की मूर्ति के सामने अभिषेक और पूजा करते नजर आ रहे हैं। इसे देखकर कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या ट्रेन में इस तरह पूजा करना ...
दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल ने पत्नी की गोली मारकर की हत्या
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल ने रविवार देर रात पूर्वी दिल्ली के विनोद नगर इलाके में पत्नी की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना पत्नी के जन्मदिन पर दोनों के बीच हुए विवाद के बाद हुई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस के अनुसार […] The post दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल ने पत्नी की गोली मारकर की हत्या appeared first on Sabguru News .
रांची। झारखंड के पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के रबदा गांव में सोमवार सुबह चाचा ने अपने ही 12 वर्षीय भतीजे की चाकू मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की पहचान रबदा गांव निवासी साधु बैठा के 12 वर्षीय पुत्र रोशन बैठा के […] The post झारखंड के पलामू जिले में अंधविश्वास की भेंट चढ़ा 12 वर्षीय मासूम, चाचा ने चाकू मारकर की भतीजे की हत्या appeared first on Sabguru News .
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल मदरसा स्टाफ की नियमतीकरण की याचिका खारिज की
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मदरसों में अपनी नियुक्ति के लिए मान्यता की मांग करने वाले 350 शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ की याचिका सोमवार को खारिज कर दी। पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम 2008 को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने असंवैधानिक करार दिया था, जिसके बाद इन सभी […] The post सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल मदरसा स्टाफ की नियमतीकरण की याचिका खारिज की appeared first on Sabguru News .
तमिलनाडु के मदुरै में दो बसों की टक्कर से 5 लोगों की मौत, 42 घायल
चेन्नई। तमिलनाडु में मदुरै जिले के कोट्टमपट्टी के पास सोमवार तड़के एक निजी बस और तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम की बस की टक्कर से पांच लोगों की मौत हो गई और 42 अन्य घायल हो गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार मृतकों में चार पुरुष और एक महिला शामिल है। सभी घायलों को इलाज के लिए […] The post तमिलनाडु के मदुरै में दो बसों की टक्कर से 5 लोगों की मौत, 42 घायल appeared first on Sabguru News .
SEBI का सख्त फरमान: नौकरी छोड़ने के बाद 2 साल तक नहीं कर सकेंगे यह काम, कर्मचारियों के लिए बदले नियम
पूंजी बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) ने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सेबी के कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बाद एक 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' (Cooling-off Period) से गुजरना होगा। नई गाइडलाइन के तहत, कोई भी कर्मचारी इस्तीफा देने या सेवा निवृत्त होने के अगले 2 वर्षों तक बाजार से जुड़ी किसी भी ऐसी निजी संस्था या फर्म में काम नहीं कर पाएगा, जिसे सेबी ने विनियमित (Regulate) किया हो। यह कदम संस्था की पारदर्शिता बनाए रखने और हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?सेबी का मानना है कि कर्मचारियों के पास बाजार की काफी संवेदनशील और गोपनीय जानकारी होती है। अक्सर यह देखा गया है कि नियामक संस्था में काम करने वाले अधिकारी नौकरी छोड़ने के बाद तुरंत उन कंपनियों में उच्च पदों पर जुड़ जाते हैं, जिनकी वे पहले निगरानी कर रहे थे। इससे बाजार की निष्पक्षता प्रभावित होने का खतरा रहता है। अब इन दो वर्षों की अवधि के दौरान पूर्व कर्मचारी किसी भी लिस्टेड कंपनी, ब्रोकरेज हाउस, या सेबी द्वारा रेगुलेट की जाने वाली वित्तीय संस्था में किसी भी सलाहकार या कर्मचारी के रूप में कार्य नहीं कर पाएंगे।कर्मचारियों पर क्या होगा असर?इस नए नियम से सेबी के मौजूदा और भविष्य के कर्मचारियों की करियर रणनीति पर गहरा असर पड़ने वाला है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम संस्था की विश्वसनीयता को बढ़ाने वाला है। 'कूलिंग-ऑफ' के इन दो सालों में पूर्व कर्मचारी बाजार से जुड़े उन मामलों पर न तो कोई सलाह दे सकेंगे और न ही उन कंपनियों के साथ किसी तरह का व्यावसायिक संबंध रख सकेंगे, जो सेबी के दायरे में आती हैं। इस सख्त नियम से यह भी सुनिश्चित होगा कि संस्था के अंदर की कोई भी गोपनीय जानकारी बाजार की चाल बदलने में इस्तेमाल न हो।क्या हैं सेबी के अन्य निर्देश?सेबी ने केवल कूलिंग-ऑफ पीरियड ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के निजी निवेश और स्टॉक ट्रेडिंग को लेकर भी पहले से सख्त नियम बना रखे हैं। हर कर्मचारी को समय-समय पर अपने और परिवार के नाम पर मौजूद संपत्तियों और शेयरों का ब्यौरा देना अनिवार्य है। नई गाइडलाइन के बाद, सेबी ने अपने आंतरिक निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत कर दिया है। संस्था का स्पष्ट संदेश है कि बाजार की ईमानदारी से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। जो भी कर्मचारी इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर न केवल कानूनी कार्रवाई होगी, बल्कि उनके सेवानिवृत्ति लाभों (Retirement Benefits) पर भी गाज गिर सकती है।
अमरीकी हमलों के जवाब में ईरान ने तीन देशों में सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
तेहरान। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने दक्षिणी ईरान पर रविवार रात हुए अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में सोमवार तड़के जॉर्डन, बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि अमरीका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर कथित हमलों को आधार बनाकर दक्षिणी […] The post अमरीकी हमलों के जवाब में ईरान ने तीन देशों में सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना appeared first on Sabguru News .
पंजाब के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने राज्य में 'प्रोजेक्ट उड़ान' का आधिकारिक आगाज कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक समय में शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी कौशल की नितांत आवश्यकता है, और 'प्रोजेक्ट उड़ान' युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का काम करेगा।युवाओं को मिलेगा इंडस्ट्री-रेडी ट्रेनिंग का मौका'प्रोजेक्ट उड़ान' का मुख्य उद्देश्य पंजाब के युवाओं को नई तकनीक और इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करना है। इस केंद्र के माध्यम से युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी। पीएचडीसीसीआई की यह पहल न केवल युवाओं के कौशल को निखारेगी, बल्कि उन्हें कॉर्पोरेट जगत और स्थानीय उद्योगों के लिए तैयार करेगी। राज्यपाल ने कहा कि यह केंद्र युवाओं के लिए रोजगार का एक सशक्त माध्यम बनेगा, जिससे पंजाब की आर्थिक उन्नति में भी मदद मिलेगी।पंजाब में रोजगार सृजन पर जोरउद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 'प्रोजेक्ट उड़ान' का मॉडल ऐसा है जो इंडस्ट्री की मांग और युवाओं की प्रतिभा के बीच के अंतर को कम करेगा। यह केंद्र विशेष रूप से उन युवाओं के लिए वरदान साबित होगा जो कम समय में कुशल बनकर अपने करियर की शुरुआत करना चाहते हैं। राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि पंजाब के अन्य जिलों में भी इसी तरह के कौशल केंद्र खोले जाएंगे ताकि राज्य का कोई भी युवा पीछे न छूटे।कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनेगा पंजाबपीएचडीसीसीआई के प्रतिनिधियों ने बताया कि 'प्रोजेक्ट उड़ान' के तहत न केवल ट्रेनिंग दी जाएगी, बल्कि युवाओं को प्लेसमेंट में भी सहयोग प्रदान किया जाएगा। इस केंद्र में अत्याधुनिक उपकरण और अनुभवी प्रशिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो। इस पहल ने पंजाब में स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में एक नई प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा पैदा कर दी है। राज्यपाल ने सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं और अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नए कौशल जरूर सीखें।
पंजाब की राजनीति में फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म में दिखाए गए दावों पर सवाल उठाते हुए फिल्म निर्माताओं को सीधे चुनौती दी है। फिल्म में 25 हजार लोगों के लापता होने का जो दावा किया गया है, उस पर कड़ा रुख अपनाते हुए बिट्टू ने मेकर्स से इसके पुख्ता सबूत और आधिकारिक रिकॉर्ड की मांग की है। इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या फिल्म में दिखाई गई सामग्री ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है या इसे जानबूझकर सनसनीखेज बनाया गया है।फिल्म के दावों पर उठे गंभीर सवालरवनीत बिट्टू का कहना है कि फिल्म में जिस तरह से 25 हजार लोगों के लापता होने का आंकड़ा पेश किया गया है, वह न केवल बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है, बल्कि इससे समाज में गलत संदेश भी जा रहा है। बिट्टू ने तर्क दिया कि यदि इतने बड़े पैमाने पर लोग लापता हुए हैं, तो उनका रिकॉर्ड कहां है? उन्होंने फिल्म निर्माताओं से सवाल किया कि वे अपनी फिल्म के दावों को साबित करने के लिए दस्तावेज पेश करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब की छवि को किसी भी फिल्म में गलत ढंग से पेश करने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'सतलुज' बनाम राजनीतिइस विवाद ने अब एक राजनीतिक रंग ले लिया है। एक तरफ जहाँ फिल्म मेकर्स अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रवनीत बिट्टू जैसे नेताओं का कहना है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब यह नहीं है कि आप इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करें। बिट्टू ने चेतावनी दी है कि अगर फिल्म निर्माताओं के पास इन आंकड़ों का कोई आधार नहीं है, तो उन्हें फिल्म से ये विवादास्पद अंश हटाने चाहिए। यह टकराव अब सेंसर बोर्ड और कानूनी विशेषज्ञों की राय के बीच फंसता नजर आ रहा है, जिससे फिल्म की रिलीज को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है।क्या अब सेंसर बोर्ड करेगा हस्तक्षेप?इस चुनौती के बाद अब सबकी नजरें सेंसर बोर्ड (CBFC) पर टिकी हैं कि क्या वह इस फिल्म की दोबारा समीक्षा करेगा। स्थानीय लोग भी इस बात को लेकर दो हिस्सों में बंट गए हैं। जहाँ कुछ लोग इसे पंजाब के एक दर्दनाक अतीत की सच्चाई बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे राज्य को बदनाम करने का जरिया मान रहे हैं। रवनीत बिट्टू की इस 'डेटा चुनौती' ने फिल्म के कंटेंट पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म के निर्माता इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे वास्तव में इन लापता लोगों का कोई ठोस सबूत सार्वजनिक कर पाते हैं।
झारखंड की सड़कों पर बेलगाम रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़ों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। साल 2025 के दौरान सड़क हादसों में 527 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि इन मृतकों में सबसे बड़ी संख्या 18 से 30 वर्ष के युवाओं की है। प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट बताती है कि लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण हर दिन राज्य के किसी न किसी कोने में कोई परिवार अपना चिराग खो रहा है।युवाओं पर टूटा दुखों का पहाड़सड़क सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट के अनुसार, कुल मौतों में से करीब 60 प्रतिशत हिस्सा युवाओं का है। करियर की शुरुआत करने वाले या अपने सुनहरे भविष्य के सपने देख रहे 18 से 30 साल के युवा सड़क हादसों का मुख्य शिकार बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोपहिया वाहनों पर बिना हेलमेट के स्टंट करना, नशे में गाड़ी चलाना और सड़क नियमों की अनदेखी करना इस आयु वर्ग में मौतों का सबसे बड़ा कारण है। यह आंकड़ा न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि परिवार के पालन-पोषण में लगे युवाओं की कमी से एक बड़ा सामाजिक संकट भी पैदा हो गया है।क्यों जानलेवा साबित हो रहे हैं झारखंड के हाईवे?झारखंड के प्रमुख राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की पहचान के बावजूद हादसों में कमी नहीं आ रही है। तेज रफ्तार के अलावा, सड़कों पर आवारा पशुओं का घूमना, गड्ढे और रात के समय खराब स्ट्रीट लाइटें भी हादसों को न्योता देती हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण और उपनगरीय सड़कों पर मौत का आंकड़ा अधिक है, क्योंकि वहां चिकित्सा सुविधाएं तुरंत उपलब्ध नहीं हो पातीं। 'गोल्डन आवर' यानी हादसे के एक घंटे के भीतर इलाज न मिल पाने के कारण भी कई घायलों की जान सड़क पर ही चली जाती है।अब प्रशासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीतिमौतों का यह भयावह ग्राफ देखकर अब परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस ने कमर कस ली है। आगामी दिनों में राज्यभर में विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें ओवरस्पीडिंग पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सभी जिला मुख्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे ब्लैक स्पॉट्स पर तत्काल प्रभाव से साइन बोर्ड लगाएं और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी बढ़ाएं। इसके साथ ही, युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षण संस्थानों में विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। सड़क पर अपनी जान बचाने के लिए अब नियमों का पालन करना विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुका है।
झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision - SIR 2026) के बीच राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अभियान की समय-सीमा को 15 अगस्त तक बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। इस प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं में चल रहे संशय को दूर करते हुए झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।नाम कटने के डर पर CEO का बड़ा बयानमतदाता सूची में नाम जुड़ने या कटने की खबरों के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य त्रुटिहीन और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, यदि कोई मतदाता 'अनमैप्ड' (Unmapped) भी रह जाता है, तो भी उसका नाम मतदाता सूची से नहीं काटा जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि ऐसे मतदाताओं को बाद में निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के नोटिस पर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।क्या है SIR 2026 अभियान?झारखंड में 30 जून 2026 से शुरू हुआ 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अभियान 29 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं। इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि 1.63 करोड़ से अधिक मौजूदा मतदाताओं को किसी भी प्रकार का नया दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल BLO द्वारा उपलब्ध कराए गए प्री-फिल्ड फॉर्म पर हस्ताक्षर कर उसे जमा करना है।समय-सीमा बढ़ाने पर मंथनराज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने अभियान की गति और पहुँच को देखते हुए इसकी अवधि को 15 अगस्त तक विस्तारित करने की मांग की है। उनका तर्क है कि मानसून और दूरदराज के क्षेत्रों में आवागमन की कठिनाइयों के कारण कई मतदाता अब तक फॉर्म जमा नहीं कर पाए हैं। फिलहाल, चुनाव आयोग ने इस पर आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन BLOs को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर एक मतदाता तक पहुँच सुनिश्चित करें ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सूची से वंचित न रहे।मतदाताओं के लिए जरूरी टिप्सदस्तावेज की चिंता न करें: यदि आपका नाम पहले से सूची में है, तो आपको किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं है।BLO से संपर्क: अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी से मिलकर फॉर्म जमा करें और रसीद लें।फॉर्म 6 का उपयोग: जो नागरिक 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं।पारदर्शिता: यह प्रक्रिया पूरी तरह से सहभागी है और इसकी हर स्तर पर ऑडिटिंग की जा रही है, इसलिए किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
झारखंड के मौसम में आज बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के 14 जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। आसमान में घने काले बादल छाए रहने और गर्जना के साथ तेज बारिश की संभावना जताई गई है। राजधानी रांची से लेकर देवघर तक मौसम विभाग ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि इस दौरान वज्रपात (ठनका) गिरने का खतरा भी बना हुआ है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के तहत अलर्ट जारी किया है।इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरामौसम विभाग के अनुसार, आज रांची, देवघर, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम में भारी बारिश के आसार हैं। इन क्षेत्रों में दोपहर बाद से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल सकता है। कहीं-कहीं पर तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि की भी आशंका है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खुले खेतों में जाने से बचें और अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।वज्रपात से कैसे बचें?बारिश के साथ-साथ बादलों की गर्जना और बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें। यदि आप बाहर हैं, तो किसी भी बड़े पेड़ या बिजली के खंभे के नीचे शरण न लें। घर के भीतर रहें और बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल कम से कम करें। वज्रपात के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग करना भी खतरनाक हो सकता है, इसलिए सतर्क रहें। स्थानीय प्रशासन ने सभी जिला मुख्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पर नजर रखें।क्या है मौसम विभाग का ताजा अपडेट?मॉनसून की सक्रियता के कारण राज्य के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है, लेकिन आज की बारिश पहले से अधिक प्रभावी हो सकती है। यह बारिश का दौर अगले 24 से 48 घंटों तक जारी रहने का अनुमान है। तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। यदि आप आज बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं, तो अपने साथ रेनकोट या छाता जरूर रखें और मौसम के अपडेट्स पर नजर बनाए रखें।
हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले से एक बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। सरकारी भर्ती परीक्षा (SIR) का फॉर्म भरने और परीक्षा संबंधित काम से आई एक युवती को हवस का शिकार बनाया गया है। आरोप है कि ऑटो चालक ने अपने साथियों के साथ मिलकर महिला को सुनसान जगह ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) की वारदात को अंजाम दिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने ऑटो चालक समेत कुल 4 आरोपियों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कर लिया है और इलाके में हड़कंप मच गया है।परीक्षा की उम्मीदें और दरिंदों का जालपीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि वह परीक्षा से संबंधित जरूरी कार्य के लिए नूंह पहुंची थी। वहां से उसने गंतव्य तक जाने के लिए एक ऑटो को रोका। ऑटो चालक ने महिला को भरोसा दिलाया कि वह उसे सुरक्षित छोड़ देगा, लेकिन रास्ते में उसने गाड़ी को मुख्य मार्ग से हटाकर एक सुनसान इलाके की ओर मोड़ दिया। वहां पहले से ही उसके तीन अन्य साथी मौजूद थे। महिला के विरोध करने पर आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ बारी-बारी से दरिंदगी की।पुलिस की कार्रवाई और जांच पड़तालघटना की सूचना मिलते ही नूंह पुलिस सक्रिय हो गई है। पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है और पुलिस की अलग-अलग टीमें आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले से ही इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस ने ऑटो चालक की पहचान कर ली है और उसके साथियों को पकड़ने के लिए तकनीकी सर्विलांस की मदद ली जा रही है। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर भी अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।सुरक्षा पर उठे गंभीर सवालनूंह में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बाहर से परीक्षा देने आने वाली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा अब एक बड़ा मुद्दा बन गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे। इस जघन्य वारदात ने पूरे मेवात क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के आरोपों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं पर सोमवार को केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष […] The post राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी मामले में सीबीआई जांच की मांग पर केंद्र, उप्र सरकार, ट्रस्ट को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस appeared first on Sabguru News .
चंडीगढ़ की सड़कों पर रईसी और नशे में चूर एक युवा का घिनौना चेहरा सामने आया है। शहर के एक पॉश इलाके में स्थित क्लब के बाहर हुए इस हादसे ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। महज 21 साल के एक रईसजादे ने अपनी महंगी मर्सिडीज कार से दो युवकों को न केवल जोरदार टक्कर मारी, बल्कि क्रूरता की हदें पार करते हुए बैक गियर डालकर घायल युवकों के ऊपर से दोबारा गाड़ी चढ़ा दी। इस दर्दनाक घटना में दोनों पीड़ित गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।कैसे हुई यह दर्दनाक घटना?प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, क्लब से बाहर निकलते समय किसी बात को लेकर बहस हुई, जिसके बाद आरोपी युवक अपनी मर्सिडीज कार में सवार होकर तेजी से आया और वहां खड़े दो युवकों को निशाना बनाया। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक उछलकर दूर जा गिरे। लेकिन आरोपी यहीं नहीं रुका; उसने गाड़ी को बैक किया और घायल युवकों के ऊपर से दोबारा पहिए चढ़ा दिए। मौके पर मौजूद लोगों ने चिल्लाकर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने किसी की परवाह नहीं की। घायलों को इलाज के लिए आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।आरोपी रईसजादे की पहचान और पुलिस का एक्शनगिरफ्तार आरोपी की उम्र 21 साल बताई जा रही है, जो शहर के एक प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखता है। शुरुआती जांच में आरोपी के नशे में होने के संकेत मिले हैं, जिसके लिए ब्लड सैंपल्स जांच हेतु लैब भेजे गए हैं। पुलिस ने आरोपी की मर्सिडीज कार को कब्जे में ले लिया है और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत हत्या के प्रयास और लापरवाही से गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया है। चंडीगढ़ पुलिस ने साफ किया है कि किसी भी रसूखदार व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं रहने दिया जाएगा और मामले की फास्ट-ट्रैक जांच की जाएगी।प्रशासन और शहरवासियों में गहरा रोषचंडीगढ़ के क्लब कल्चर और देर रात तक खुले रहने वाले इलाकों में बढ़ती ऐसी घटनाओं को लेकर शहरवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि महंगी गाड़ियों में सवार युवा अब कानून को खिलौना समझने लगे हैं। प्रशासन अब क्लबों के बाहर सुरक्षा कड़ी करने और नशे में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने पर विचार कर रहा है। घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई आरोपी की इस बर्बरता पर स्तब्ध है। अब देखना यह है कि कानून इस रईसजादे को क्या सजा देता है।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में मंदिर के पुजारी पर हुए दिल दहला देने वाले जानलेवा हमले के मुख्य आरोपी पंकज के खिलाफ प्रशासन ने अब सख्त एक्शन लिया है। कानून को हाथ में लेने और पुजारी को बेरहमी से प्रताड़ित करने के आरोप में आरोपी के अवैध निर्माण को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया है। इस कार्रवाई ने इलाके में साफ संदेश दे दिया है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने आरोपी की अवैध संपत्ति को चिह्नित कर आज सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्यवाही को अंजाम दिया।क्या थी वह खौफनाक वारदात?बता दें कि कुछ दिन पहले कुरुक्षेत्र में एक मंदिर के पुजारी पर जानलेवा हमला हुआ था। आरोपी पंकज और उसके साथियों ने न केवल पुजारी की टांगें तोड़ दी थीं, बल्कि उन्हें मफलर डालकर जमीन पर बेरहमी से घसीटा था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था। पुजारी को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। इस अमानवीय घटना के बाद से ही स्थानीय लोग लगातार आरोपी की गिरफ्तारी और उसकी संपत्ति पर बुलडोजर चलाने की मांग कर रहे थे।प्रशासन का सख्त रुख: अपराध पर 'बुलडोजर मॉडल'कुरुक्षेत्र प्रशासन ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा कि किसी भी अपराधी को सभ्य समाज में आतंक फैलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। बुलडोजर की कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई थी, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ की गई है। आरोपी पंकज पर पहले भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से इलाके के अपराधियों में दहशत का माहौल है और लोग पुलिस के इस त्वरित एक्शन की सराहना कर रहे हैं।कुरुक्षेत्र पुलिस की आगे की रणनीतिफिलहाल आरोपी पंकज न्यायिक हिरासत में है और पुलिस उसके अन्य साथियों की तलाश में जुटी है जो इस घटना में शामिल थे। पुलिस ने दावा किया है कि इस केस में आरोपियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट में पैरवी की जाएगी ताकि पुजारी को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। इलाके में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस पिकेट बढ़ा दी गई है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। कुरुक्षेत्र की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराध और अपराधियों के लिए हरियाणा में कोई जगह नहीं है।
अब इस तरह होगी अयोध्या राम मंदिर में CEO की नियुक्ति, कौन कर सकता है इस पद के लिए आवेदन
ayodhya ram mandir ceo: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के लिए जल्द ही एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति होने जा रही है। शनिवार को दिल्ली में संपन्न हुई चयन समिति (Search Committee) की ...
‘जुरासिक पार्क’अभिनेता सैम नील का 78 वर्ष की उम्र में निधन
वेलिंगटन। हॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता और जुरासिक पार्क तथा द पियानो जैसी चर्चित फिल्मों में अपनी दमदार अभिनय क्षमता के लिए चर्चित सैम नील का निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे। नील का सोमवार को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में निधन हो गया। उनके आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर जारी बयान में कहा गया […] The post ‘जुरासिक पार्क’ अभिनेता सैम नील का 78 वर्ष की उम्र में निधन appeared first on Sabguru News .
Male Fertility Crisis Facts: क्या दुनिया सच में एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां पुरुषों की प्रजनन क्षमता (Fertility) हमेशा के लिए गंभीर संकट में पड़ जाएगी? हाल के वर्षों में सामने आए कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस सवाल को दुनिया भर में बहस का ...
आज के दौर में बेदाग और चमकदार त्वचा पाने की होड़ में हम न जाने कितने महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और केमिकल युक्त क्रीम्स पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी खूबसूरती का असली राज आपके किचन में ही छिपा है? बाजार में मिलने वाले महंगे प्रोडक्ट्स अक्सर त्वचा को लंबे समय में नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि प्राकृतिक और देसी नुस्खे आपकी स्किन को गहराई से पोषण देते हैं। अगर आप भी ग्लोइंग स्किन की तलाश में हैं, तो आज हम आपको एक ऐसे असरदार और बेहद सस्ते देसी नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपकी त्वचा में नई जान फूंक देगा।क्यों छोड़ें महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स?बाजार में बिकने वाले अधिकांश ब्यूटी प्रोडक्ट्स में पैराबेन, सल्फेट और अन्य आर्टिफिशियल केमिकल्स होते हैं, जो शुरुआत में तो त्वचा को निखारते हैं, लेकिन धीरे-धीरे स्किन का नेचुरल ऑयल छीन लेते हैं। इसके विपरीत, देसी नुस्खे पूरी तरह से नेचुरल होते हैं और इनका कोई साइड-इफेक्ट नहीं होता। आज हम बात कर रहे हैं 'बेसन और दही' के लेप की, जो सदियों से भारतीय सुंदरता का आधार रहा है। बेसन त्वचा की डेड स्किन सेल्स को साफ करता है और दही में मौजूद लैक्टिक एसिड स्किन को नेचुरली ब्लीच कर उसे एक खूबसूरत चमक प्रदान करता है।ऐसे तैयार करें अपना जादुई फेस पैकइस चमत्कारी फेस पैक को बनाना बेहद आसान है। एक कटोरी में दो चम्मच बेसन लें और उसमें एक चम्मच ताजा दही मिलाएं। अगर आपकी स्किन बहुत ज्यादा ड्राई है, तो आप इसमें आधा चम्मच शहद और एक चुटकी हल्दी भी डाल सकते हैं। इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें। चेहरे को साफ पानी से धोने के बाद इस लेप को अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इसे करीब 15 से 20 मिनट तक सूखने दें। जब यह हल्का सूख जाए, तो गुनगुने पानी से धीरे-धीरे मसाज करते हुए अपना चेहरा धो लें।त्वचा पर दिखेगा शानदार असरहफ्ते में मात्र दो बार इस नुस्खे को अपनाने से आपको फर्क साफ नजर आने लगेगा। बेसन जहां आपकी त्वचा के रोमछिद्रों (pores) में जमा गंदगी को खींचकर बाहर निकालता है, वहीं दही त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइजर करता है। इससे न केवल पिंपल्स और दाग-धब्बे कम होते हैं, बल्कि चेहरे पर एक कुदरती चमक (Natural Glow) आ जाती है। यह नुस्खा सभी प्रकार की त्वचा (Skin Types) के लिए सुरक्षित है। तो देर किस बात की? आज ही महंगे ब्रांड्स को छोड़ें और अपनी रसोई से निकली इस प्राकृतिक खूबसूरती को अपनाएं, ताकि आपकी त्वचा दिखे हमेशा जवां और बेदाग।
ज्योतिष शास्त्र में अंकों (Numerology) का हमारे जीवन पर गहरा असर माना जाता है। हम अक्सर देखते हैं कि कुछ लोग स्वभाव से बेहद कोमल और प्यार करने वाले होते हैं, लेकिन बावजूद इसके वे अपने प्रेम संबंधों में हमेशा ठगा हुआ महसूस करते हैं। लाख कोशिशों के बाद भी उनके नसीब में प्यार के बजाय धोखा ही आता है। अंक ज्योतिष के विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ विशेष तिथियों में जन्मे लोगों के ग्रहों की चाल उन्हें प्यार के मामले में 'अनलकी' बना देती है। अगर आप भी बार-बार रिश्तों में असफल हो रहे हैं, तो हो सकता है कि आपकी जन्मतिथि के अंक इसके पीछे का कारण हों।किन तारीखों के लोग होते हैं प्यार में 'अनलकी'?अंक ज्योतिष के अनुसार, जो लोग किसी भी महीने की 8, 17 और 26 तारीख को जन्मे होते हैं, उन पर शनि देव का विशेष प्रभाव होता है। ये लोग स्वभाव से बहुत गंभीर और वफादार होते हैं, लेकिन यही गंभीरता कभी-कभी उनके रिश्तों के लिए घातक साबित होती है। शनि के प्रभाव के कारण इन्हें अपने प्रेम जीवन में अक्सर गलतफहमियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, 4, 13 और 31 तारीख को जन्मे लोग राहु के प्रभाव में होते हैं। राहु इन्हें रिश्तों में भ्रम (Confusion) की स्थिति में रखता है, जिसके चलते ये लोग अक्सर ऐसे पार्टनर का चुनाव कर लेते हैं जो इनकी भावनाओं की कद्र नहीं करते, और अंत में इन्हें केवल विश्वासघात ही मिलता है।क्यों नसीब में लिखा होता है धोखा?इन तारीखों में जन्मे लोग आमतौर पर 'इमोशनल इंटेलिजेंस' के मामले में थोड़े कमजोर हो सकते हैं। वे अपने पार्टनर पर बहुत जल्दी और आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। इन लोगों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वे प्यार में पड़ने के बाद 'रियलिटी चेक' करना भूल जाते हैं। ग्रहों की स्थिति के चलते, इनके जीवन में ऐसे लोग ज्यादा आकर्षित होते हैं जो केवल अपना मतलब निकालना जानते हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि इनके जीवन में 'सच्चे प्यार' को मिलने में काफी समय लगता है और इन्हें अपनी भावनाओं को काबू में रखना सीखना बहुत जरूरी है।कैसे बदलें अपनी लव लाइफ की तकदीर?अगर आपकी जन्मतिथि भी इन्हीं अंकों के आसपास है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। ज्योतिष शास्त्र में इसके लिए कुछ उपाय सुझाए गए हैं। सबसे पहले, अपने पार्टनर का चयन करने में जल्दबाजी न करें। किसी भी रिश्ते की शुरुआत में थोड़ा समय लें और सामने वाले के व्यवहार को बारीकी से समझें। अपनी जन्मकुंडली के अनुसार ग्रहों के रत्नों या मंत्रों का जाप करना भी आपके रिश्तों में स्थिरता ला सकता है। प्यार में 'अनलकी' होने का मतलब यह नहीं है कि आप कभी खुश नहीं रह सकते; इसका बस यह अर्थ है कि आपको अपना जीवनसाथी चुनने में औरों के मुकाबले थोड़ी अधिक सावधानी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
कर्ज और बीमारी से हैं परेशान? ज्योतिष शास्त्र के इन अचूक उपायों से जीवन में आएगी खुशहाली और राहत
क्या आप भी कर्ज के बोझ तले दबे हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आपका पीछा नहीं छोड़ रही हैं? अक्सर जीवन में आर्थिक तंगी और बिगड़ती सेहत एक साथ दस्तक देती हैं, जो इंसान को मानसिक रूप से तोड़ देती हैं। कई लोग इसे केवल मेहनत की कमी मानते हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इसके पीछे ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति और नकारात्मक ऊर्जा का बड़ा हाथ हो सकता है। आज हम आपको उन सरल लेकिन प्रभावशाली ज्योतिषीय उपायों के बारे में बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप कर्ज के चक्रव्यूह और बीमारी के जाल से बाहर निकल सकते हैं।कर्ज मुक्ति के लिए अचूक ज्योतिषीय उपायज्योतिष के अनुसार, मंगलवार का दिन कर्ज मुक्ति के लिए सबसे शुभ माना जाता है। यदि आप भारी कर्ज से परेशान हैं, तो 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ करें। यह उपाय न केवल आर्थिक स्थिति को सुधारता है, बल्कि आत्मविश्वास में भी वृद्धि करता है। इसके अलावा, बुधवार के दिन गणेश जी को गुड़ और चने का भोग लगाने और उसे गाय को खिलाने से रुके हुए धन की प्राप्ति होती है और कर्ज का भार कम होने लगता है। याद रखें, हमेशा कर्ज की पहली किस्त मंगलवार को चुकाने का प्रयास करें, इससे कर्ज के दोबारा न चढ़ने की मान्यता है।स्वास्थ्य में सुधार के लिए ग्रहों का संतुलनबीमारी का कारण अक्सर कुंडली में राहु या शनि का कमजोर होना होता है। यदि आप लंबे समय से बीमार हैं, तो हर शनिवार को काले तिल का दान करें और जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सकारात्मक सुधार महसूस होने लगता है। साथ ही, सोमवार को भगवान शिव की उपासना करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी है। स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए अपने सोने की दिशा बदलें और हमेशा सिर उत्तर की ओर रखकर सोने से बचें, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का महत्वज्योतिष केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सकारात्मक आदतों का भी विज्ञान है। कर्ज और बीमारी की स्थिति में मन का शांत रहना अनिवार्य है। घर के मुख्य द्वार पर नियमित रूप से शुद्ध जल में नमक मिलाकर पोंछा लगाने से घर की नकारात्मकता खत्म होती है, जिससे आर्थिक रास्ते खुलते हैं। अपनी दिनचर्या में थोड़ा समय ध्यान (Meditation) के लिए निकालें। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि जब आपका मन शांत होता है, तो आपके निर्णय सटीक होते हैं, जो सीधे तौर पर आपके कर्ज कम करने और स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में मददगार साबित होते हैं। इन उपायों को पूरी श्रद्धा के साथ करें, निश्चित ही आपको सुखद बदलाव देखने को मिलेंगे।
आषाढ़ अमावस्या पर अद्भुत महासंयोग: सोमवती-भौमवती का दुर्लभ संगम, क्या खाएं और किन चीजों से रहें दूर
ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से इस बार की आषाढ़ अमावस्या बेहद खास होने जा रही है। सोमवार और मंगलवार के बीच पड़ने वाली यह अमावस्या 'सोमवती' और 'भौमवती' का एक दुर्लभ महासंयोग लेकर आ रही है। शास्त्रों में इस विशेष तिथि को पितृ दोष मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए सबसे उत्तम माना गया है। ऐसे में इस दिन की शुद्धता और सात्विकता का पालन करना न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। आइए जानते हैं कि इस दुर्लभ दिन पर आपको किन चीजों से परहेज करना है और किन चीजों का सेवन करना फलदायी रहेगा।इन चीजों के सेवन से बनाएं दूरी (क्या न खाएं)आषाढ़ अमावस्या की इस विशेष तिथि पर तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन आलू, गाजर, मूली और शलजम जैसी जमीन के अंदर पैदा होने वाली (कंदमूल) चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें अशुद्ध ऊर्जा का वास माना जाता है। इसके अलावा, प्याज और लहसुन का प्रयोग तो भूलकर भी न करें। मांस, मदिरा और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन इस दिन पूर्णतः वर्जित है। यदि आप पितरों का आशीर्वाद चाहते हैं, तो दिन की सात्विकता को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।इन चीजों का सेवन है अमृत समान (क्या खाएं)इस दिन सात्विक आहार का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आप अपने भोजन में ताजे मौसमी फल, दूध, दही, घी और सात्विक अनाजों को शामिल कर सकते हैं। विशेष रूप से गाय के दूध और उससे बनी खीर का सेवन करना इस दिन बहुत शुभ माना गया है। इसके अलावा, हरी सब्जियां (जो जमीन के ऊपर उगती हैं), जैसे लौकी, तरोई, और पालक का सेवन करना स्वास्थ्य और मन की शांति के लिए उत्तम है। इस दिन अन्न दान करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है, इसलिए हो सके तो किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं।कैसे उठाएं इस दुर्लभ महासंयोग का लाभसोमवती और भौमवती के इस संगम पर सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष की पूजा करें और पितरों के नाम से तर्पण करें। यह समय आपके जीवन से आर्थिक संकटों और नकारात्मकता को दूर करने के लिए विशेष है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं, इससे पितृदेव प्रसन्न होते हैं। याद रखें, इस दुर्लभ अवसर पर आपकी एकाग्रता और श्रद्धा ही आपको इस महासंयोग का पूर्ण फल दिलाएगी।
गदर के बाद फिर 'बंटवारा': सनी देओल-राजकुमार संतोषी की नई फिल्म का पोस्टर आउट, मचाएगा ऐतिहासिक तहलका
बॉलीवुड के 'एक्शन किंग' सनी देओल और दिग्गज निर्देशक राजकुमार संतोषी की जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर इतिहास दोहराने के लिए तैयार है। लंबे समय से चर्चाओं में बनी फिल्म 'बंटवारा 1947' का नया पोस्टर आज आउट हो गया है, जिसने फैंस के बीच खलबली मचा दी है। इस पोस्टर में सनी देओल का रौद्र अवतार एक बार फिर 'गदर' वाली यादों को ताजा कर रहा है। निर्देशक राजकुमार संतोषी की यह फिल्म न केवल एक भावनात्मक यात्रा होगी, बल्कि इसमें एक्शन और देशभक्ति का वह तड़का भी देखने को मिलेगा, जिसके लिए यह जोड़ी पूरे विश्व में मशहूर है।'बंटवारा 1947' का नया पोस्टर: क्या दिखा खास?फिल्म का नया पोस्टर काफी इंटेंस और रोंगटे खड़े करने वाला है। इसमें सनी देओल एक बेहद गंभीर मुद्रा में नजर आ रहे हैं, जो देश के विभाजन के दर्द और उससे उपजी आग को बखूबी दर्शाता है। पोस्टर में बैकग्राउंड का माहौल 1947 के उस दौर की याद दिलाता है, जो फिल्म की कहानी को और भी प्रभावशाली बनाता है। सोशल मीडिया पर आते ही यह पोस्टर ट्रेंड करने लगा है। फैंस का कहना है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फिर से 'गदर' मचाने की पूरी तैयारी में है।कब रिलीज होगी 'बंटवारा 1947'?फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट का ऐलान भी कर दिया है। यह फिल्म आने वाले 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के आसपास सिनेमाघरों में दस्तक देगी, जो देशभक्ति के माहौल में रिलीज के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जा रहा है। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी यह फिल्म 'घायल' और 'घातक' जैसी फिल्मों की तरह ही दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ने की पूरी क्षमता रखती है। सनी देओल का एग्रेसिव लुक और संतोषी की बेहतरीन डायरेक्शन का कॉम्बिनेशन इस साल की सबसे बड़ी हिट साबित हो सकता है।क्या इस बार भी बॉक्स ऑफिस टूटेगा?सनी देओल और राजकुमार संतोषी का इतिहास गवाह है कि जब भी ये साथ आए हैं, सिनेमाघरों में 'गदर' मचा है। 'बंटवारा 1947' केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़े बजट का इमोशनल ड्रामा है। फिल्म से जुड़ी छोटी-छोटी डिटेल्स को बहुत गुप्त रखा गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक फिल्म के एक्शन सीन्स को हॉलीवुड लेवल पर फिल्माया गया है। अगर आप सनी देओल के सच्चे प्रशंसक हैं, तो यह फिल्म आपके लिए साल का सबसे बड़ा सिनेमैटिक अनुभव होने वाली है। तो तैयार हो जाइए, क्योंकि सिनेमाघरों में अब फिर से उसी पुराने 'गदर' वाले शोर की गूंज सुनाई देने वाली है।
'लॉक अप 2' (Lock Upp 2) के घर में इस समय रिश्तों की गरमाहट के साथ-साथ तीखी नोकझोंक भी बढ़ गई है। खेल के सबसे चर्चित चेहरों में से एक, शिल्पा शिंदे ने हाल ही में शिवांगी जोशी को सरेआम फटकार लगाई है। शिल्पा के कड़े तेवर और सीधे सवाल सुनकर शिवांगी जोशी की आंखों में आंसू आ गए। शिल्पा ने न केवल शिवांगी की गेमिंग रणनीति पर सवाल उठाए, बल्कि उन्हें हर्षद चोपड़ा से अपनी बातचीत कम करने की सख्त हिदायत भी दे डाली। इस घटना ने शो के माहौल को पूरी तरह बदल दिया है और दर्शक भी हैरान हैं कि आखिर शिल्पा ने ऐसा कड़ा फैसला क्यों लिया।शिल्पा शिंदे का गुस्सा: क्या है असली वजह?शिल्पा शिंदे, जो अपने बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती हैं, ने शिवांगी को उनके खेल पर फोकस करने की नसीहत दी। शिल्पा का मानना है कि शिवांगी का ध्यान खेल के बजाय निजी बातचीत और हर्षद के साथ बॉन्डिंग में ज्यादा लग रहा है, जो उनके गेम के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। शिल्पा ने जब उनसे कहा कि तुम यहां गेम खेलने आई हो या दोस्ती निभाने?, तो शिवांगी स्तब्ध रह गईं। शिल्पा की यह खरी-खोटी वहां मौजूद बाकी कंटेस्टेंट्स के लिए भी एक चेतावनी की तरह थी, जिससे घर में शिल्पा का दबदबा और भी बढ़ गया है।शिवांगी और हर्षद का रिश्ता और घर का दबावशिवांगी और हर्षद के बीच की बढ़ती नजदीकियों पर घर के कई सदस्य पहले भी दबी जुबान में चर्चा कर चुके थे, लेकिन शिल्पा ने पहली बार इस पर खुलकर निशाना साधा है। शिल्पा ने साफ शब्दों में शिवांगी से कहा कि हर्षद के साथ बातचीत कम करो, वरना यह तुम्हारे एलिमिनेशन का कारण बन सकता है। शिल्पा की इस 'परामर्श' या 'फटकार' के बाद शिवांगी काफी परेशान दिखीं और उन्हें इमोशनल होते देखा गया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शिल्पा की इस चेतावनी का शिवांगी के खेल पर क्या असर पड़ता है।क्या अब बदलेगा लॉक अप का समीकरण?इस पूरी घटना के बाद से ही फैन्स के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ लोग शिल्पा के इस 'गुरु' जैसे व्यवहार की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ को लगता है कि शिल्पा दूसरों के निजी जीवन में ज्यादा दखल दे रही हैं। लॉक अप के इस सीजन में अब समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हर्षद के साथ शिवांगी की दोस्ती अब शिल्पा के निशाने पर है, और यह देखने वाली बात होगी कि क्या शिवांगी शिल्पा की बात मानती हैं या फिर अपने स्टैंड पर कायम रहती हैं। शो में आने वाले एपिसोड्स में इस बात की पूरी संभावना है कि यह मुद्दा एक बड़े झगड़े का रूप ले ले।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में दयाल सिंह कॉलेज बना छात्रों की पहली पसंद, टॉपर लिस्ट में कैसे बनाई जगह
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में प्रवेश की प्रक्रिया हर साल छात्रों के बीच एक नई जंग की तरह होती है, लेकिन इस बार 'दयाल सिंह कॉलेज' ने सभी को चौंका दिया है। एक समय बैकअप के तौर पर देखे जाने वाले इस कॉलेज ने अब कैंपस का 'क्रेज' बदल दिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय की टॉपर्स लिस्ट में दयाल सिंह कॉलेज के छात्रों का दबदबा बढ़ने के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। आखिर क्या वजह है कि अब छात्र नॉर्थ कैंपस के कुछ पुराने कॉलेजों को छोड़कर दयाल सिंह की ओर रुख कर रहे हैं?बढ़ती लोकप्रियता और एकेडमिक ग्राफदयाल सिंह कॉलेज की सफलता का सबसे बड़ा कारण उसका बदलता एकेडमिक ग्राफ और फैकल्टी की गुणवत्ता है। कॉलेज ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेसमेंट सेल को इतना मजबूत किया है कि अब यह डीयू के टॉप संस्थानों की कतार में खड़ा हो गया है। विशेष रूप से आर्ट्स और कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए यहाँ का माहौल बेहद प्रतिस्पर्धी और सीखने योग्य बनाया गया है। कॉलेज की ओर से दी जा रही विशेष गाइडेंस और टॉपर्स के लिए चलाए जा रहे मेंटरशिप प्रोग्राम ने इसे मेरिट होल्डर्स की पहली पसंद बना दिया है।कैसे बनी टॉपर लिस्ट में जगह?दयाल सिंह कॉलेज के टॉपर लिस्ट में जगह बनाने का राज कॉलेज की 'स्मार्ट स्टडी' नीति में छिपा है। यहाँ की एडमिशन कमेटी और विभाग ने इस बार ऐसे कोर्स स्ट्रक्चर पर फोकस किया है जो इंडस्ट्री की डिमांड के हिसाब से हैं। इसके अलावा, कॉलेज की लाइब्रेरी और डिजिटल रिसोर्सेज ने छात्रों को घर बैठे बेहतर पढ़ाई करने का मौका दिया है। टॉपर्स का मानना है कि कॉलेज का सपोर्ट सिस्टम उन्हें न केवल डिग्री दिलाने में, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में भी मदद करता है, जो इसे अन्य कॉलेजों से अलग खड़ा करता है।क्या आपको यहाँ एडमिशन लेना चाहिए?अगर आप डीयू में एडमिशन का प्लान बना रहे हैं, तो दयाल सिंह कॉलेज निश्चित रूप से आपकी सूची में टॉप पर होना चाहिए। साउथ कैंपस की बेहतरीन कनेक्टिविटी और कॉलेज का बढ़ता एक्सपोजर इसे एक आदर्श संस्थान बनाता है। यदि आप चाहते हैं कि आपको एक ऐसा माहौल मिले जहाँ पढ़ाई के साथ-साथ प्लेसमेंट और ऑल-राउंड डेवलपमेंट पर ध्यान दिया जाए, तो दयाल सिंह कॉलेज आपके सपनों को उड़ान देने के लिए पूरी तरह तैयार है। छात्रों का बढ़ता भरोसा इस बात का सबूत है कि आने वाले दिनों में यह डीयू का नया 'पावरहाउस' बनने की राह पर है।
प्रमोशन ठुकराकर 'डिमोशन' ले रहे कर्मचारी: आखिर क्या है वर्क-लाइफ बैलेंस की यह नई कड़वी सच्चाई
कॉर्पोरेट जगत और सरकारी दफ्तरों में अक्सर प्रमोशन को कामयाबी की सीढ़ी माना जाता है। लेकिन इन दिनों एक नया ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है, जहाँ कर्मचारी प्रमोशन लेने के बजाय डिमोशन (पदोंन्नति के बजाय पदावनति) को चुन रहे हैं। यह कोई फैसला हार या असफलता का नहीं, बल्कि 'वर्क-लाइफ बैलेंस' के लिए उठाया गया एक सोची-समझी रणनीति वाला कदम है। बढ़ती जिम्मेदारियां, लगातार ट्रांसफर-पोस्टिंग का दबाव और परिवार के प्रति जवाबदेही ने पेशेवर लोगों को इस कदर मजबूर कर दिया है कि वे अपनी खुशी और मानसिक शांति के लिए बड़ी पोस्ट छोड़ने को तैयार हैं।क्यों प्रमोशन के बजाय डिमोशन बन रहा पहली पसंद?प्रमोशन के साथ बड़ी जिम्मेदारी और अक्सर अन्य शहरों में ट्रांसफर-पोस्टिंग का बोझ भी आता है। जो कर्मचारी अपने शहर या परिवार से जुड़े रहना चाहते हैं, उनके लिए प्रमोशन का मतलब अक्सर अपनों से दूर होना होता है। कई बार काम का इतना अधिक दबाव (Work Pressure) बढ़ जाता है कि व्यक्ति की व्यक्तिगत जिंदगी लगभग खत्म हो जाती है। ऐसे में, कर्मचारी कम जिम्मेदारी वाली लेकिन तनावमुक्त भूमिका (Stress-free Role) को चुनना बेहतर समझते हैं ताकि वे अपने बच्चों, बुजुर्ग माता-पिता और स्वास्थ्य को पर्याप्त समय दे सकें।ट्रांसफर-पोस्टिंग का मानसिक और सामाजिक बोझसरकारी और मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले लोगों के लिए ट्रांसफर-पोस्टिंग सबसे बड़ा सिरदर्द है। बच्चों की पढ़ाई में रुकावट और बार-बार घर बदलने का तनाव किसी भी परिवार के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। जब कोई कर्मचारी किसी ऊंचे पद पर होता है, तो उसे अक्सर अपनी मर्जी के खिलाफ दूरस्थ इलाकों में भेजा जाता है। ऐसे में, डिमोशन का रास्ता अपनाकर वे एक ही जगह टिके रहने का विकल्प चुन लेते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 'तनाव-रहित जीवन' की चाहत ने इस 'रिवर्स प्रमोशन' ट्रेंड को जन्म दिया है, जो आने वाले समय में वर्क कल्चर में बड़ा बदलाव ला सकता है।क्या कॉर्पोरेट जगत को अब संभलने की जरूरत है?इस ट्रेंड ने कंपनियों के एचआर (HR) विभाग के लिए भी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जब कोई काबिल कर्मचारी बड़ी जिम्मेदारी लेने से इनकार करता है, तो इसका सीधा असर कंपनी की उत्पादकता (Productivity) पर पड़ता है। कंपनियां अब महसूस कर रही हैं कि केवल ऊंचा वेतन या बड़ा पद ही पर्याप्त नहीं है; कर्मचारियों को लचीलापन (Flexibility) और 'स्थायित्व' की जरूरत है। यदि संगठन अपने कर्मचारियों को एक ही स्थान पर काम करने की सुविधा और बेहतर कार्य-जीवन संतुलन प्रदान करें, तो शायद उन्हें अपने सबसे होनहार टैलेंट को खोने या डिमोशन की अर्जी देखने की नौबत न आए।
विदेशी यूनिवर्सिटी के भारतीय कैंपस या विदेश की पढ़ाई? एडमिशन लेने से पहले इन 5 बड़े अंतरों को समझें
आज के समय में जब विदेशी शिक्षण संस्थान तेजी से अपने भारतीय कैंपस खोल रहे हैं, तो छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत में रहकर विदेशी डिग्री लेना बेहतर है या विदेश जाकर वहां की संस्कृति और माहौल में पढ़ाई करना? दोनों ही विकल्पों के अपने फायदे और चुनौतियां हैं। यदि आप भी अपने भविष्य को लेकर उलझन में हैं और यह तय नहीं कर पा रहे कि अपना करियर कहां से संवारें, तो यह गाइड आपके लिए ही है।फीस और आर्थिक भार का गणितसबसे पहला और महत्वपूर्ण अंतर 'लागत' का है। विदेश में पढ़ाई करने का मतलब है न केवल भारी फीस, बल्कि रहने-सहने का खर्च और हवाई यात्रा का खर्च भी उठाना। इसके विपरीत, विदेशी यूनिवर्सिटी के भारतीय कैंपस में पढ़ाई करने पर आपको लगभग उसी स्तर की गुणवत्ता वाली शिक्षा बहुत कम खर्च में मिल जाती है। हॉस्टल और अन्य खर्चों में भी आप लाखों रुपये की बचत कर सकते हैं। अगर आपका बजट सीमित है, तो भारतीय कैंपस एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरता है।पढ़ाई का अनुभव और ग्लोबल एक्सपोजरविदेश जाने का मुख्य उद्देश्य केवल डिग्री लेना नहीं, बल्कि वहां के वैश्विक माहौल, विविधता और नई कार्य-संस्कृति को समझना है। वहां आप दुनिया भर के छात्रों के साथ रहते हैं, जिससे नेटवर्किंग और पर्सनल डेवलपमेंट की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। भारतीय कैंपस में भी शिक्षा का स्तर वैसा ही होता है, लेकिन आप वहां विदेशी माहौल का अनुभव (Global Exposure) मिस कर सकते हैं। हालांकि, भारतीय कैंपस अब इंटर-कैंपस एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिए छात्रों को कुछ समय विदेश में बिताने का मौका भी दे रहे हैं।नौकरी और प्लेसमेंट के मौकेआजकल कंपनियां उन छात्रों को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास व्यावहारिक ज्ञान (Practical Knowledge) है। विदेश में पढ़ाई करने से आपको वहां के स्थानीय जॉब मार्केट में काम करने का मौका मिल सकता है, जो भविष्य में आपके करियर के लिए एक बड़ा एसेट बनता है। भारतीय कैंपस में पढ़ाई के दौरान आप भारत के बड़े कॉर्पोरेट्स के साथ नेटवर्क बनाने में सक्षम होते हैं। अंत में, यह आपके करियर लक्ष्यों पर निर्भर करता है—अगर आप वैश्विक स्तर पर करियर बनाना चाहते हैं तो विदेश जाना बेहतर है, और यदि आप भारत में ही कॉर्पोरेट जगत में नाम कमाना चाहते हैं, तो भारतीय कैंपस एक स्मार्ट विकल्प है।एडमिशन से पहले खुद से पूछें ये सवालनिर्णय लेने से पहले खुद से पूछें कि क्या आप घर से दूर जाने के लिए तैयार हैं? क्या आप सांस्कृतिक बदलाव के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं? और सबसे जरूरी, क्या आपकी वित्तीय स्थिति विदेश के भारी खर्चों को लंबे समय तक झेल सकती है? विदेशी डिग्री की मान्यता दोनों ही स्थितियों में समान होगी, इसलिए कैंपस का चयन करते समय अपनी प्राथमिकता और भविष्य की योजनाओं को सबसे ऊपर रखें। सही चुनाव ही आपके करियर को नई दिशा दे सकता है।
भारत में फिर बढ़ने लगे कोरोना के मामले: कुमार सानू के बेटे जान अस्पताल में भर्ती
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में एक बार फिर कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती नजर आ रही है। मशहूर सिंगर कुमार सानू के बेटे जान को कोरोना संक्रमण की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई राज्यों में कोरोना संक्रमित मिलने के बाद स्वास्थ्य ...
ग्रेटर नोएडा : डीएम कार्यालय को ई-मेल से बम की धमकी, घंटों चली सघन जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला
गौतमबुद्धनगर के जिला अधिकारी (डीएम) कार्यालय को सोमवार (13 जुलाई 2026) को ई-मेल के माध्यम से बम होने की धमकी मिलने से प्रशासनिक महकमे में कुछ समय के लिए सतर्कता बढ़ गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता (बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड), फायर ब्रिगेड, एंटी सबोटाज (ए.एस.) चेकिंग टीम तथा डॉग स्क्वाड मौके पर पहुंच गए और पूरे परिसर की गहन तलाशी शुरू कर दी गई।
अजमेर कलेक्ट्रेट पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका, नगर निगम में फहराता रहा
अजमेर। कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी के निधन पर केन्द्र सरकार द्वारा घोषित एक दिवसीय राष्ट्रीय शोक के तहत अजमेर कलेक्ट्रेट में सोमवार को राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा। वहीं प्रशासनिक अनदेखी के चलते नगर निगम की भव्य इमारत पर ध्वज यथावत फहराता रहा। सामान्य प्रशासन (प्रोटोकॉल) विभाग द्वारा जारी आदेश […] The post अजमेर कलेक्ट्रेट पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका, नगर निगम में फहराता रहा appeared first on Sabguru News .
सारण : खेत में काम करने गई युवती से सामूहिक दुष्कर्म, 4 आरोपी अरेस्ट
छपरा। बिहार में सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र में खेत में अकेली काम करने गयी एक युवती से दुष्कर्म करने वाले चार युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि डुमरी गांव की एक युवती अकेले अपने खेत में काम कर रही थी। इसी दौरान उसे खेत में […] The post सारण : खेत में काम करने गई युवती से सामूहिक दुष्कर्म, 4 आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, मांगी एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के मामले में केंद्र सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी कर यूपी एसआईटी से जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
बद्रीनाथ दान प्रकरण: 32 दिन की CCTV रिकॉर्डिंग गायब, जांच में अहम सबूत मानी जा रही थी फुटेज
उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा और दान राशि में कथित हेराफेरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। दावा है कि जांच के लिए अहम सबूत मानी जा रही 32 दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग गायब है।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध के हाई कोर्ट आदेश पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया।
वाराणसी में होटल पर पुलिस का छापा, देह व्यापार का भंडाफोड़
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सिगरा थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में रविवार शाम को पुलिस ने छापेमारी कर देह व्यापार का भंडाफोड़ करते हुए पांच युवतियों, दो ग्राहकों तथा होटल के दो संचालकों समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सोमवार को बताया कि अनैतिक देह व्यापार की सूचना पर […] The post वाराणसी में होटल पर पुलिस का छापा, देह व्यापार का भंडाफोड़ appeared first on Sabguru News .
बैंकॉक के बार में भीषण आग, 27 लोगों की मौत, 22 की हालत गंभीर
बैंकॉक। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के मनोरम चतुचक जिले में रविवार देर रात एक बार में भीषण आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। बैंकॉक पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार 63 से अधिक घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। […] The post बैंकॉक के बार में भीषण आग, 27 लोगों की मौत, 22 की हालत गंभीर appeared first on Sabguru News .
उत्तराखंड और हिमाचल मे भारी बारिश की चेतावनी, तटीय आंध्रप्रदेश में हीटवेव की आशंका
weather update: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय बेहद अजीब और असमान व्यवहार कर रहा है। वर्तमान में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्य भारी से अत्यंत भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे हैं, जबकि देश के कुछ हिस्सों में अभी भी मानसून की भारी ...
कोचिंग विवाद में खान सर को बड़ी राहत, 2 बॉर्डगार्ड और 3 कर्मचारियों को भी जमानत
पटना सिविल कोर्ट ने सोमवार को कोचिंग विवाद में फैसल खान उर्फ खान सर (Khan Sir) को अग्रीम जमानत दे दी। बेऊर जेल में बंद उनके दोनों बॉडीगार्ड और 3 कर्मचारियों को भी जमानत मिल गई है।
महाराष्ट्र की सियासत में 'किंगमेकर' माने जाने वाले शरद पवार इस समय एक बेहद जटिल स्थिति का सामना कर रहे हैं। उनके सामने स्थिति 'आगे कुआं और पीछे खाई' जैसी हो गई है, जहाँ एक तरफ पार्टी का भविष्य है तो दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी के भीतर का दबाव। इसी बीच, शरद पवार ने हर बार की तरह इस बार भी अपनी चुप्पी साध ली है, जिससे सियासी कयासों का बाजार और गर्म हो गया है। मगर इस सस्पेंस के बीच बीजेपी के एक कद्दावर नेता ने एनसीपी-एसपी (NCP-SP) के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।क्या शरद पवार की चुप्पी से बढ़ रहा है सस्पेंस?शरद पवार की चुप्पी का अपना एक राजनीतिक अर्थ होता है, जिसे समझना विरोधियों के लिए भी हमेशा से कठिन रहा है। फिलहाल एनसीपी-एसपी (NCP-SP) के भीतर और बाहर जिस तरह की चर्चाएं हैं, उनसे साफ है कि पवार अपनी अगली चाल बहुत सोच-समझकर चलने के मूड में हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे न तो महाविकास अघाड़ी को पूरी तरह से छोड़ने की स्थिति में हैं और न ही अपने पुराने सहयोगियों के साथ वैचारिक टकराव मोल लेना चाहते हैं। यही वह जगह है जहाँ पवार का अनुभव और उनकी 'साइलेंस' विपक्ष को परेशान कर रही है।बीजेपी नेता के बयान ने खोली एनसीपी-एसपी की पोलबीजेपी नेता ने सस्पेंस को तब खत्म कर दिया जब उन्होंने दावा किया कि एनसीपी-एसपी के भीतर एक बड़ा वर्ग अब पवार की वर्तमान नीतियों से नाखुश है। बीजेपी नेता के मुताबिक, आने वाले समय में एनसीपी-एसपी में टूट या बदलाव की खबरें सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत हो सकती हैं। बीजेपी की ओर से किए गए इस दावे ने शरद पवार के सामने एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है। क्या यह वास्तव में एनसीपी-एसपी को तोड़ने की रणनीति का हिस्सा है या फिर महज एक मनोवैज्ञानिक दबाव, यह आने वाले कुछ ही दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।पवार के सामने विकट 'धर्मसंकट'शरद पवार के सामने एक तरफ महाविकास अघाड़ी में अपना सम्मान बचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ पार्टी के उन नेताओं को संभालने की जो बीजेपी के बढ़ते प्रभाव से डरे हुए हैं। बीजेपी का यह दावा कि उन्होंने एनसीपी-एसपी के सस्पेंस को समझ लिया है, शरद पवार की रणनीति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बनाता है। पवार अगर बोलते हैं, तो गठबंधन टूटने का खतरा है और यदि चुप रहते हैं, तो पार्टी में बिखराव की आशंका बनी हुई है। राजनीति के इस महाकुंभ में शरद पवार का अगला कदम क्या होगा, यह देखना
आगामी चुनावों की आहट के बीच कांग्रेस पार्टी एक बार फिर गहरे सियासी भंवर में फंसी नजर आ रही है। हालिया घटनाक्रमों और राजनीतिक विश्लेषणों की मानें तो पार्टी के सामने तीन बड़े मुद्दे—नेतृत्व की सक्रियता, संगठन में समन्वय की कमी और जनता के बीच बढ़ती दूरी—बड़ी बाधा बनकर उभरे हैं। पार्टी के रणनीतिकार और जमीनी कार्यकर्ता इस बात से खासे परेशान हैं कि महत्वपूर्ण राजनीतिक दौरों के दौरान राहुल गांधी की विदेश यात्राओं ने पार्टी के नैरेटिव को कमजोर कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन दौरों की भारी कीमत कांग्रेस को चुनावी नतीजों और जनसमर्थन के रूप में चुकानी पड़ रही है।आखिर क्यों खाली हाथ रह गई कांग्रेस?राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब देश में महंगाई, बेरोजगारी और स्थानीय शासन जैसे बड़े मुद्दों पर विपक्ष को आक्रामक रुख अपनाकर सरकार को घेरना चाहिए था, तब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का नदारद होना कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने का काम कर रहा है। कांग्रेस के अंदरखाने भी इस बात की चर्चा है कि 'वैक्यूम' की स्थिति ने विपक्षी स्पेस को पूरी तरह खाली छोड़ दिया है, जिसे अन्य क्षेत्रीय दल भरने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस जिस तरह से इन मुद्दों को भुनाने में नाकाम रही, उसने एक बार फिर संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।नेतृत्व और सक्रियता का बड़ा संकटकिसी भी चुनाव में नेतृत्व की मौजूदगी सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे समय में जब जनता सड़क पर है और कई महत्वपूर्ण मसले सरकार के खिलाफ जा रहे हैं, राहुल गांधी का विदेश दौरा पार्टी की प्राथमिकता को लेकर संदेह पैदा करता है। यही कारण है कि पार्टी के सीनियर नेता और समर्थक भी असमंजस में हैं। जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि पार्टी गंभीर मुद्दों पर संघर्ष करने के बजाय 'ऑप्शनल पॉलिटिक्स' कर रही है। कांग्रेस की यह विफलता अब पार्टी के लिए एक अस्तित्व का सवाल बनती जा रही है, क्योंकि लगातार चुनावी हार के बाद भी पार्टी अपनी कार्यशैली में अपेक्षित सुधार नहीं ला पाई है।क्या अब भी संभलने का है मौका?सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपनी इन गलतियों से सबक लेगी? यदि पार्टी को अपनी खोई हुई साख वापस लानी है, तो उसे अपनी प्राथमिकताएं फिर से तय करनी होंगी। जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करना और नेतृत्व का हरदम सक्रिय रहना ही एकमात्र रास्ता बचा है। यदि पार्टी ने इसी तरह से महत्वपूर्ण मौकों पर अपने नेतृत्व की अनुपस्थिति के कारण मुद्दों को हाथ से फिसलने दिया, तो आने वाले समय में कांग्रेस के लिए और भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में कांग्रेस अपने संगठन को फिर से चुस्त-दुरुस्त कर पाती है या फिर वह इन्ही पुराने चक्रव्यूह में फंसकर रह जाएगी।
संसद के आगामी सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस बार इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए एक अचूक रणनीति तैयार कर ली है। विपक्ष, खासकर कांग्रेस की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए सरकार ने सदन के भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर तैयारी पूरी कर ली है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कदम न केवल देश की आधी आबादी को साधने का प्रयास है, बल्कि विपक्षी दलों को पूरी तरह से मात देने का एक बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' भी है।क्या है सरकार का 'फुल प्रूफ' प्लान?इस बार सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—किसी भी सूरत में महिला आरक्षण बिल को संवैधानिक दर्जा दिलाना। सरकार ने इस बिल को व्यापक समर्थन के साथ पेश करने का प्लान बनाया है, ताकि विपक्ष के पास विरोध के लिए कोई ठोस आधार न बचे। इसके साथ ही परिसीमन (Delimitation) बिल को जोड़ना सरकार की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों विधेयकों को एक साथ लाकर सरकार न केवल जनसांख्यिकीय बदलावों को प्रतिबिंबित करना चाहती है, बल्कि सीटों के नए समीकरणों के जरिए अपनी राजनीतिक स्थिति को और अधिक मजबूत करना चाहती है।कांग्रेस के लिए खड़ी होगी बड़ी चुनौतीकांग्रेस समेत विपक्षी दल अक्सर इन बिलों पर तकनीकी पेच और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाकर गतिरोध पैदा करते रहे हैं। हालांकि, इस बार सरकार ने हर संभावित विरोध का काट तैयार कर लिया है। सरकार की रणनीति है कि बिल को इस तरह से पेश किया जाए कि विरोध करने वाला दल खुद को 'महिला विरोधी' साबित करने के जोखिम में पड़ जाए। अगर कांग्रेस या अन्य दल इस बार बाधा डालने की कोशिश करते हैं, तो सरकार इसे जनता के बीच ले जाने और विपक्ष की 'अड़ंगा नीति' को उजागर करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे कांग्रेस के लिए बैकफुट पर आना तय है।देश की राजनीति में आएंगे बड़े बदलावमहिला आरक्षण बिल का पारित होना भारतीय राजनीति के इतिहास में एक युगान्तकारी घटना होगी, जिससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी। साथ ही, परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी नक्शा बदल जाएगा, जिससे आने वाले चुनावों में नए वोट बैंक का उदय होगा। सत्ता पक्ष को उम्मीद है कि इन सुधारों से उन्हें आगामी चुनावों में भारी बढ़त मिलेगी। कुल मिलाकर, यह सरकार का वह राजनीतिक दांव है जिसे नकारा जाना विपक्ष के लिए मुश्किल होगा और जो आने वाले दशकों तक भारतीय राजनीति की दिशा तय करेगा।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अभिषेक मनु सिंघवी की दलील काम आई, 'गाय-बछड़ा' प्रतीक चिह्न पर लगी मुहर
सुप्रीम कोर्ट में चल रही एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप हो गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी की प्रभावी दलीलों के बाद शीर्ष अदालत ने एक अहम आदेश जारी किया है। इस फैसले के साथ ही अब राजनीतिक गलियारों में 'गाय-बछड़ा' प्रतीक चिह्न के उपयोग का रास्ता साफ हो गया है। यह जीत न केवल कानूनी मोर्चे पर महत्वपूर्ण है, बल्कि विजय सरकार और उनसे जुड़े समर्थकों की लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी मांग को भी पूरा करती है।कोर्ट में सिंघवी की धारदार दलीलेंसुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा को उसके चुनाव चिह्न या सांस्कृतिक प्रतीक से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपनी दलीलों में कानूनी बारीकियों और ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए अदालत को समझाया कि इस प्रतीक की अनुमति न देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे को सीमित करने जैसा है। सिंघवी ने तर्क दिया कि यह प्रतीक किसी विशेष समुदाय की भावना को ठेस नहीं पहुँचाता, बल्कि यह एक राजनीतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ा हुआ है। उनकी इन तर्कों ने अंततः पीठ को प्रभावित किया और कोर्ट ने इसकी अनुमति प्रदान कर दी।क्या थी विजय सरकार की मांग?विजय सरकार और उनके सहयोगियों का तर्क था कि 'गाय-बछड़ा' का प्रतीक ग्रामीण भारत और भारतीय कृषि संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। लंबे समय से वे चुनाव आयोग और अदालतों के सामने यह दलील देते आए थे कि उनकी राजनीतिक विचारधारा इस प्रतीक के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद, विजय सरकार की इस मांग को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस जीत के बाद आने वाले चुनावों में इसका असर सीधे मतदाताओं पर पड़ेगा और पार्टी इसे एक बड़े 'विक्ट्री पॉइंट' के रूप में पेश करेगी।फैसले का राजनीतिक असर क्या होगा?कोर्ट के इस फैसले ने न केवल कानूनी बहस पर विराम लगा दिया है, बल्कि इसे एक बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। अब जबकि अदालत ने इसे काटने या रोकने के बजाय इसकी वैधता पर मुहर लगा दी है, तो उम्मीद है कि आगामी अभियानों में यह प्रतीक चिह्न पूरी मजबूती के साथ दिखाई देगा। यह फैसला विपक्षी दलों के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है, क्योंकि अब विजय सरकार इसे अपनी सांस्कृतिक और वैचारिक जीत के रूप में भुनाने की तैयारी में है। देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस फैसले को किस नजरिए से लेती है और यह राजनीतिक समीकरणों में कितना बदलाव लाता है।
सुप्रीम कोर्ट से 27 लोगों को बड़ी राहत, असम में ‘विदेशी’ घोषित करने के आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने असम में ‘विदेशी’ घोषित किए गए 27 लोगों को राहत देते हुए फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट के आदेश रद्द कर मामलों की नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया है।
CBSE Class 10th Phase 2 Result 2026 Live Updates: क्या आज खत्म होगा इंतजार? सीबीएसई 10वीं के दूसरे बोर्ड रिजल्ट (Phase II) को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है और छात्र इंटरनेट पर लगातार एक ही सवाल पूछ रहे हैं— रिजल्ट कब आएगा?
सोचा था 1100 रुपए की बुढ़ापा पेंशन निकालेंगे, लेकिन जैसे ही पासबुक प्रिंट हुई, अकाउंटेंट के हाथ-पांव फूल गए... बिहार के समस्तीपुर जिले के सरायरंजन से एक ऐसा हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जिसने बैंक अधिकारियों से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं। ...
दिल्ली-भोपाल शताब्दी ट्रेन में एक्सपायर्ड ब्रेड परोसे जाने पर आईआरसीटीसी ने कैटरर पर जुर्माना लगाया
शनिवार को नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस में सफर कर रहे यात्रियों को नाश्ते में एक्सपायर्ड ब्रेड परोसे जाने के बाद भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने एक कैटरिंग सेवा प्रदाता पर जुर्माना लगाया है।
1000 रुपये के जुर्माने ने फूंक दी बारूद, बालेन शाह सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरा नेपाल का जेन-Z
नेपाल की राजधानी काठमांडू इन दिनों भारी तनाव की चपेट में है। सड़कों पर केवल भीड़ नहीं, बल्कि सत्ता के खिलाफ एक नया आक्रोश दिख रहा है। इसकी शुरुआत महज 1000 रुपये के एक मामूली जुर्माने से हुई, लेकिन अब यह आग पूरे नेपाल में फैल चुकी है। काठमांडू के मेयर बालेन शाह के फैसलों और उनकी कार्यशैली के खिलाफ अब नेपाल का 'जेन-Z' (युवा पीढ़ी) लामबंद हो गया है। एक प्रदर्शनकारी की दुखद मौत के बाद स्थिति और भी विस्फोटक हो गई है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।जुर्माने से शुरू हुआ विरोध, कैसे बनी बड़ी जंग?सब कुछ तब शुरू हुआ जब प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के उल्लंघन के नाम पर 1000 रुपये का भारी जुर्माना वसूलना शुरू किया। आम जनता और छोटे कारोबारियों ने इसे 'तानाशाही' करार दिया। काठमांडू के मेयर बालेन शाह, जो अक्सर अपने कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं, इस बार जनता के निशाने पर हैं। सड़कों पर चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व अब नेपाल का युवा कर रहा है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से एकजुट होकर सरकार को जवाबदेही के लिए मजबूर कर रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवक की मौत ने आग में घी डालने का काम किया है।सत्ता बनाम जनता: क्यों गुस्से में है जेन-Z?नेपाल के युवा वर्ग का मानना है कि मेयर बालेन शाह की नीतियां बुनियादी समस्याओं को हल करने के बजाय आम आदमी पर आर्थिक बोझ डाल रही हैं। बालेन शाह, जो पहले एक रैपर थे और युवाओं में बेहद लोकप्रिय थे, अब अपनी ही 'यूथ बेस' के विरोध का सामना कर रहे हैं। जेन-Z का कहना है कि सरकार को भ्रष्टाचार और महंगाई पर लगाम लगानी चाहिए, न कि गरीब जनता की जेब पर जुर्माना लगाकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता और जुर्माने के तुगलकी फरमान वापस नहीं लिए जाते, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।नेपाल के लिए बड़े संकट की आहटसड़कों पर बढ़ती यह भीड़ अब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। काठमांडू के मुख्य चौराहों पर सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है, लेकिन युवाओं का जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने समय रहते युवाओं की मांगों पर गौर नहीं किया, तो यह विरोध नेपाल के अन्य शहरों में भी फैल सकता है। मेयर शाह की साख और बालेन सरकार की कार्यप्रणाली इस वक्त अपनी सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रही है। क्या नेपाल की सरकार युवाओं के गुस्से को शांत कर पाएगी या यह आंदोलन किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की नींव रखेगा?
ट्रंप का बड़ा दावा, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान फिर आमने-सामने
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह समुद्री मार्ग कमर्शियल जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खुला और सुरक्षित है। हालांकि, उनके इस दावे के ठीक उलट धरातल पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से हवाई हमलों का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रूट पर फिर से संकट के बादल मंडराने लगे हैं।अमेरिका के नए हमलों से बढ़ी तनातनीट्रंप के दावों के बावजूद, पेंटागन ने पुष्टि की है कि होर्मुज के पास ईरान समर्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर अमेरिकी सेना ने नए हवाई हमले किए हैं। इन हमलों का मकसद क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को सुरक्षित रखना और ईरानी आक्रामकता पर लगाम लगाना बताया गया है। वहीं, तेहरान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसे एक 'खतरनाक कदम' करार दिया है। जानकार मानते हैं कि ट्रंप का बयान घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को शांत रखने की एक कोशिश हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव गहराता जा रहा है।ग्लोबल सप्लाई चेन पर क्या होगा असर?होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह रास्ता है जहाँ से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल की आपूर्ति होती है। यदि अमेरिका और ईरान का यह संघर्ष और आगे बढ़ा, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। अमेरिका का कहना है कि वह जहाजों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ईरान की ओर से दी गई धमकियां वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए बड़ा सिरदर्द बनी हुई हैं। तेल के दामों में होने वाली कोई भी बढ़ोत्तरी भारत सहित दुनिया भर के उन देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगी, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी खाड़ी मार्ग पर निर्भर हैं।निवेशकों और आम आदमी के लिए क्या है संकेत?वर्तमान में होर्मुज के आसपास की स्थिति 'हाई अलर्ट' पर है। जहां एक ओर अमेरिका सैन्य शक्ति के दम पर रास्ते को सुरक्षित करने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान की आक्रामक नीति ने पूरे इलाके को एक बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों और कमोडिटी बाजार में आने वाली हलचल पर नजर रखें। आम आदमी के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इन हवाई हमलों का असर आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आता है, क्योंकि खाड़ी के देशों में अस्थिरता का सीधा कनेक्शन आम जनता की जेब से जुड़ा होता है।
समुद्री सुरक्षा पर खतरा! भारतीय जहाज पर हमला, 11 नाविकों में से एक लापता होने से हड़कंप
अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में एक भारतीय जहाज पर हुए अचानक हमले ने वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। मिली जानकारी के अनुसार, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दौरान जहाज पर सवार 11 भारतीय नाविकों में से एक के लापता होने की खबर है, जिससे नाविकों के परिवारों और सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है। भारत सरकार ने इस घटना को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए मामले पर सख्त रुख अपनाया है।क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ हमला?समुद्री लुटेरों या अज्ञात हमलावरों द्वारा जहाज को निशाना बनाए जाने की यह घटना बेहद सुनियोजित नजर आती है। हमले के दौरान जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और अफरा-तफरी के बीच एक भारतीय नाविक लापता हो गया। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलाका पहले भी ऐसी घटनाओं के लिए संवेदनशील रहा है। हमले के तुरंत बाद, संबंधित शिपिंग कंपनियों और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन (SAR) तेज कर दिया है, ताकि लापता नाविक का पता लगाया जा सके और बाकी 10 भारतीय सुरक्षित वापस लौट सकें।भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रियाभारत ने इस हमले को समुद्री सुरक्षा के वैश्विक नियमों का उल्लंघन बताते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय लगातार संबंधित देशों की सरकारों और दूतावासों के संपर्क में हैं ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। भारत का स्पष्ट संदेश है कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में भारतीय जहाजों और भारतीय नाविकों को निशाना बनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने प्रभावित नाविकों के परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।समुद्री सुरक्षा और नाविकों के लिए बड़ा सबकइस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। आए दिन समुद्री व्यापारिक मार्गों पर होते ऐसे हमले न केवल जान-माल का नुकसान करते हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को भी बाधित करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जहाजों पर सुरक्षा के आधुनिक उपकरणों और सशस्त्र गार्ड्स की तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए। भारतीय नाविक जो अपनी जान जोखिम में डालकर दुनिया भर में व्यापार को गति दे रहे हैं, उनकी सुरक्षा अब शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए।
LTIMindtree Q1 Results: नतीजों के बाद शेयर में सुस्ती, क्या निवेश का यह सही मौका
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी LTIMindtree (अब LTM Limited) ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 17% की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो 1,468.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। वहीं, परिचालन से राजस्व (Revenue) भी 18% बढ़कर 11,608 करोड़ रुपये रहा है। इसके बावजूद, बाजार में आज शेयर की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशक असमंजस में हैं कि इस स्तर पर क्या रणनीति अपनाई जाए।नतीजों में क्या रहा खास?LTIMindtree के प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी के मार्जिन में भी सुधार देखने को मिला है। Q1 FY27 में EBIT मार्जिन बढ़कर 15.5% हो गया है, जो पिछली तिमाही में 15.1% था। कंपनी का 'बुक-टू-बिल' अनुपात 1.4x रहा है, जो भविष्य में मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन और रेवेन्यू विजिबिलिटी की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का डिजिटल और AI-आधारित सर्विस सेगमेंट काफी तेजी से बढ़ रहा है, जो इसे मौजूदा चुनौतियों के बीच अन्य आईटी कंपनियों से अलग खड़ा करता है।ब्रोकरेज का क्या है नजरिया?नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज हाउसेस ने LTIMindtree पर अपना बुलिश रुख बरकरार रखा है। हालांकि बाजार में कुछ प्रॉफिट बुकिंग देखी जा रही है, लेकिन लंबी अवधि के जानकारों का मानना है कि स्टॉक में 53% तक का अपसाइड (Upside) संभव है। वर्तमान में, DAM Capital जैसे ब्रोकरेज ने शेयर पर 'न्यूट्रल' रेटिंग बनाए रखते हुए इसे 4,050 रुपये का टारगेट दिया है, जो इसके मौजूदा प्राइस के आसपास है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर शेयर इस स्तर पर खुद को संभाल लेता है, तो आने वाले महीनों में इसमें और तेजी देखी जा सकती है।निवेशकों के लिए क्या होनी चाहिए रणनीति?अगर आप LTIMindtree में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट घबराने के लिए नहीं बल्कि 'सही एंट्री पॉइंट' खोजने के लिए हो सकती है। आईटी सेक्टर में AI को लेकर जो बदलाव आ रहे हैं, उसका सीधा फायदा LTIMindtree को मिल रहा है। सलाह यह है कि एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करें। यदि आप पहले से ही इसमें निवेशित हैं, तो बाजार में अभी बनी अस्थिरता (Volatility) को देखते हुए धैर्य रखना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय होगा। कंपनी का कर्ज-मुक्त होना और डिजिटल पर फोकस इसे भविष्य के लिए एक मजबूत दांव बनाता है।
बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, निवेशकों की बढ़ी चिंता
शेयर बाजार में आज भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। सप्ताह के शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजार सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह से लड़खड़ा गए हैं। सेंसेक्स 100 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है, वहीं निफ्टी 24,150 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गया है। बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण एशियाई बाजारों में आई बड़ी सुनामी है, विशेषकर कोरियाई इंडेक्स 'कोस्पी' (KOSPI) में आई 8% की ऐतिहासिक गिरावट ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है।क्यों गिर रहा है बाजार? जानिए बड़ी वजहबाजार के जानकारों का मानना है कि घरेलू बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से 'इफेक्ट ऑफ ग्लोबल सेंटीमेंट्स' है। कोस्पी में आई भारी बिकवाली का असर अन्य एशियाई बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजारों पर भी दिख रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से हो रही बिकवाली और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के माहौल ने निवेशकों का कॉन्फिडेंस कम कर दिया है। इसके अलावा, तकनीकी स्तर पर निफ्टी के 24,150 के स्तर को होल्ड न कर पाने के कारण बाजार में और भी बिकवाली का दबाव बढ़ा है।निवेशकों के लिए क्या है सलाह?बाजार में आई इस गिरावट को देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि घबराहट में आकर बिकवाली (Panic Selling) करना घाटे का सौदा हो सकता है। फिलहाल बाजार 'अति-संवेदनशील' (Hyper-sensitive) मोड में है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लंबी अवधि के निवेशक इस गिरावट को एक अवसर की तरह देखें और अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों पर नजर रखें। हालांकि, इंट्राडे ट्रेडर्स को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि अगले कुछ घंटों में बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकते हैं।अब आगे क्या होगा?भारतीय बाजार की नजरें अब अमेरिकी बाजार के संकेतों और ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों पर टिकी हैं। यदि निफ्टी 24,100 के निचले स्तर को डिफेंड कर लेता है, तो बाजार में रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो में ज्यादा रिस्क न लें और बाजार की स्थिरता का इंतजार करें। इस समय ग्लोबल मार्केट का दबाव घरेलू निवेशकों के लिए परीक्षा की घड़ी जैसा है, जहां धैर्य और सही स्टॉप-लॉस का उपयोग ही आपको बड़े नुकसान से बचा सकता है।
Gold ETF में निवेश का सही मौका: एक्सपर्ट्स से जानें सुरक्षित मुनाफा कमाने की सटीक रणनीति
सोने में निवेश करना भारतीय निवेशकों की पहली पसंद रही है, लेकिन आज के डिजिटल युग में फिजिकल गोल्ड के बजाय 'Gold ETF' (गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में निवेश करना अधिक सुरक्षित और फायदेमंद माना जा रहा है। क्या अभी Gold ETF में पैसा लगाना सही है? बाजार के जानकारों और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की कीमतों में जारी उठा-पटक के बीच यह एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है, बशर्ते आपके पास निवेश की सही समझ और रणनीति हो।Gold ETF में निवेश क्यों है समझदारी भरा फैसला?फिजिकल गोल्ड खरीदने में सबसे बड़ी चुनौती उसकी शुद्धता और सुरक्षित रखने का खर्च होता है, लेकिन Gold ETF इन दोनों समस्याओं का समाधान है। यह पूरी तरह से डिजिटल है और स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होता है, जिसे आप अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी खरीद या बेच सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब सोना एक सुरक्षित 'हेवन' की तरह काम करता है। मौजूदा बाजार स्थितियों में, गोल्ड को पोर्टफोलियो में शामिल करने से रिस्क कम होता है और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना बनी रहती है।निवेश के लिए अपनाएं यह खास रणनीतिविशेषज्ञों के अनुसार, Gold ETF में एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय 'सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान' (SIP) का तरीका अपनाना सबसे बेहतर रणनीति है। इससे आप बाजार के उतार-चढ़ाव (Volatility) का फायदा उठा सकते हैं और खरीदारी की औसत लागत कम कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा ही सोने में रखें। यह आवंटन आपको बाजार की अस्थिरता के दौरान सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। साथ ही, सोने की कीमतों पर नजर रखें और हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाते रहना एक स्मार्ट अप्रोच है।कैसे करें सही समय का चुनावनिवेश का सही समय वह है जब आप अनुशासित होकर लंबे नजरिए के साथ निवेश करें। हालांकि, सोने की कीमतों में गिरावट के दौरान इसे खरीदना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। एक्सपर्ट्स निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव और डॉलर की मजबूती पर नजर बनाए रखें, क्योंकि इनका सीधा असर गोल्ड ईटीएफ की कीमतों पर पड़ता है। यदि आप लंबी अवधि (3-5 वर्ष से अधिक) का लक्ष्य लेकर चलते हैं, तो वर्तमान समय निवेश के लिए एक अच्छा प्रवेश बिंदु (Entry Point) हो सकता है।

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