दिल्ली हाई कोर्ट को मिलेंगे 7 नए जज, सोमवार को लेंगे शपथ
दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को सात नए जजों की नियुक्ति हुई है, जिनमें निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा, भारत पाराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज शामिल हैं.
वीकेंड का वार में रोहिद खान हुए घर से बेघर, नियम तोड़ना पड़ा भारी
रोहिद खान बिग बॉस 20 से बाहर हो गए हैं और इस सीजन में सलमान खान के रियलिटी शो से बाहर होने वाले पहले कंटेस्टेंट बन गए हैं. खबरों के मुताबिक, तीनों में से रोहेड को सबसे कम वोट मिले.
K Annamalai ने पेरियार के सुधारों को सराहा, नास्तिकता और ब्राह्मण विरोधी विचारों को नकारा
(फोटो सहित)मदुरै (तमिलनाडु), 20 सितंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने द्रविड़ नेता ई.वी. रामासामी पेरियार के इतिहास में ‘‘कई विरोधाभास’’ का रविवार को उल्लेख करते हुए सशक्तीकरण और जाति-प्रथा खत्म करने में उनके योगदान को तो माना, लेकिन उनकी नास्तिक और ब्राह्मण-विरोधी विचारधारा को पूरी तरह से खारिज किया। अन्नामलाई ने वैगई नदी से जुड़े सफाई अभियान में शामिल स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए पेरियार के सामाजिक सुधारों और उनके मुख्य वैचारिक सिद्धांतों के बीच एक स्पष्ट अंतर बताया। उन्होंने कहा, ‘‘हम स्वीकार करते हैं कि उन्होंने महिलाओं की मुक्ति के लिए आवाज उठाई। हम यह भी स्वीकार करते हैं कि उन्होंने जाति उन्मूलन की बात की।’’उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, मैं पेरियार की नास्तिक विचारधारा को बिल्कुल स्वीकार नहीं करता और न ही उनकी ब्राह्मण-विरोधी विचारधारा को स्वीकार करता हूं।’’द्रविड़ नेता के रुख में कथित ऐतिहासिक विरोधाभासों को रेखांकित करते हुए अन्नामलाई ने कहा, ‘‘पेरियार ने 1935 में हिंदी का विरोध किया था, लेकिन 1965 में उन्होंने हिंदी का विरोध करने वालों को गोली मारने की बात कही थी।’’उन्होंने यह भी दावा किया कि पेरियार ने हमेशा द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘‘1961 में उन्होंने लोगों से ‘पच्चै तमिझन’ कामराज को वोट देने की अपील की थी।’’ (पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज को पेरियार ने ‘पच्चै तमिझन’ कहकर संबोधित किया था, जिसका अर्थ है ‘सच्चा तमिल’।)अपनी पार्टी के राजनीतिक एजेंडे के बारे में अन्नामलाई ने दोहराया कि अगर तमिलनाडु में उनकी पार्टी सत्ता में आती है, मंदिरों में लगी ऐसी प्रतिमाओं को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा, जिनपर नास्तिकता से जुड़ी बातें उत्कीर्ण की गई हैं। अन्नामलाई ने कहा कि मंदिर के ठीक बाहर यह लिखा जाना कि ‘कोई भगवान नहीं है’, हमारे लिए ठीक नहीं होगा।’’उन्होंने तर्क दिया कि मंदिर आने वाले श्रद्धालु आस्थावान होते हैं और उन्हें प्रवेश द्वार पर इस तरह के संदेश देखने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। अन्नामलाई ने कहा, ‘‘हम इसे सम्मानपूर्वक वहां से हटाकर किसी नए स्थान पर स्थापित करेंगे।’’ अन्नामलाई ने यह भी कहा कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए इन मूर्तियों को किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने अपने ‘वी द लीडर्स’ अभियान के स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि तीन अगस्त से शुरू हुए सात सप्ताह के सफाई अभियान के दौरान मदुरै में वैगई नदी के 33 एकड़ क्षेत्र से 163 टन कचरा हटाया गया। अन्नामलाई ने अपनी मुहिम के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि पांच जून से अब तक 20 लाख से अधिक सत्यापित सदस्य बनाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सदस्यों का सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए आठ मिनट की ओटीपी आधारित पंजीकरण प्रक्रिया अपनाई जाती है। उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों पर सदस्य संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का आरोप लगाया।
चीन के आगे क्यों झुका अमेरिका? बदल गए ट्रंप के सुर!
डोनाल्ड ट्रंप के चीन को लेकर रुख में बदलाव की चर्चा तेज है. कभी अमेरिकी नौकरियों और कारखानों पर असर के लिए बीजिंग को जिम्मेदार ठहराने वाले ट्रंप अब शी जिनपिंग की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान राजकीय रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे. दोनों नेताओं की बातचीत में व्यापार, टैरिफ, दुर्लभ खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे मुद्दे शामिल होंगे. विश्लेषकों के मुताबिक, चीन पर शुरुआती दबाव की रणनीति के बाद ट्रंप का रुख बदला है.
लव-कुश सम्मान समारोह में CM सम्राट ने दिया 'पांच पांडव' का मंत्र
पटना के लव-कुश सम्मान समारोह में बिहार के सामाजिक समीकरण और गठबंधन की राजनीति दोनों की झलक दिखी. उपेंद्र कुशवाहा ने एकता का संदेश दिया, जबकि सीएम सम्राट चौधरी ने पांच दलों की एकजुटता को चुनावी आंकड़ों से जोड़कर समझाया.
UDAN Scheme: Purulia में हवाई अड्डा बनाने के लिए Bengal सरकार 28 सितंबर को केंद्र संग करेगी समझौता
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार केंद्र की उड़ान योजना के तहत पुरुलिया जिले में एक हवाई अड्डे बनाने के लिए 28 सितंबर को केंद्र के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करेगी। केंद्र सरकार की प्रमुख योजना ‘उड़ान’ (उड़े देश का आम नागरिक) का मकसद कम सेवा वाले इलाकों को जोड़ना और ‘लास्ट-माइल’ हवाई संपर्क को मजबूत करना है। यहां सर्किट हाउस में प्रशासनिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शुभेंदु ने कहा कि हवाई अड्डा स्थापित करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और राज्य सरकार ने आवश्यक लाइसेंस के लिए पहले ही आवेदन कर दिया है। उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई संपर्क पुरुलिया के लिए व्यापक विकास योजना का हिस्सा होगा, जिसमें पर्यटन, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार भी शामिल है। अधिकारी ने पत्रकारों से कहा कि राज्य सरकार की पुरुलिया को उद्योग के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि अगले एक साल में जिले में करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। रक्षा, इस्पात, सीमेंट और सौर ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़े प्रस्तावों पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमें यहां विमानों का परिचालन शुरू करना है। उड़ान योजना के तहत हवाई अड्डे के लिए 28 सितंबर को केंद्र के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसी वजह से परिवहन सचिव आज मेरे साथ यहां आए थे। सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नागरिक उड्डयन विभाग के एक प्रतिनिधि भी यहां मौजूद थे।’’उन्होंने कहा, “एक साल के भीतर यहां कुल एक लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। मैंने रघुनाथपुर में 5,000 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए भूमि पूजन किया है। यहां रक्षा, इस्पात, सीमेंट और अन्य उद्योग स्थापित करने के प्रस्ताव हैं।” उन्होंने कहा कि सबसे अधिक मांग सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों के विकास के लिए सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हर परिवार को रोजगार मिले और सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले।
केमिकल वाले शैंपू छोड़ें, घर पर रीठा-आंवला से बनाएं नेचुरल शैंपू
Homemade Reetha Amla Shampoo: अगर आपके बाल भी बाजार के महंगे और केमिकल वाले शैंपू की वजह से खराब हो रहे हैं तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. यहां हम आपको घर पर ही रीठा-आंवला से नेचुरल शैंपू बनाने का तरीका बता रहे हैं.
बकरियों के लिए घास काटने गए, अचानक हुआ धमाका... दो सगे भाई झुलसे
Bijnor Sherkot Blast News: बिजनौर के शेरकोट में पटाखा फैक्ट्री के कचरे में धमाका होने से घास काटने गए दो सगे भाई गंभीर रूप से झुलस गए. पुलिस मामले की जांच में जुटी. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...
Bibek Debroy: दिल्ली मतदाता सूची पुनरीक्षण में दिवंगत अर्थशास्त्री का नाम, चुनाव आयोग हटाएगा
दिल्ली में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत दिए गए विवरणों में ‘‘विसंगतियों’’ के लिए मतदाताओं को नोटिस जारी करने की सूची में दिवंगत अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व अध्यक्ष विवेक देबरॉय का नाम भी शामिल है। देबरॉय नयी दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता थे और नवंबर 2024 में उनका निधन हो गया था। देबरॉय का नाम 33 लाख मतदाताओं की उस सूची में शामिल है, जिन्हें गणना प्रपत्रों के माध्यम से दिए गए विवरणों में ‘‘विसंगतियों’’ के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें देबरॉय के निधन की जानकारी है और अब उनका नाम अंतिम सूची से हटा दिया जाएगा।’’दिल्ली के चुनाव अधिकारियों ने कहा कि देबरॉय का नाम नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सूची में निर्वाचन आयोग के निर्देश के कारण शामिल था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने कहा कि निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार, चुनावी डेटाबेस में पहले से चिह्नित न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, विशेष पदों पर आसीन व्यक्तियों तथा कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल व सार्वजनिक सेवाओं के क्षेत्र की हस्तियों के नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल किए जाने हैं। कार्यालय ने कहा कि यह निर्देश इसलिए जारी किया गया था ताकि दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज भी एकत्र किए जा सकें। एक चुनाव अधिकारी ने कहा कि बीएलओ ने देबरॉय के निधन की जानकारी दर्ज की थी, लेकिन निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार उनका नाम हटाया नहीं जा सका और वह मसौदा मतदाता सूची का हिस्सा है।
आडवाणी से जयशंकर तक, चुनाव आयुक्त भी लिस्ट में... दिल्ली SIR में कई दिग्गजों को नोटिस
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत कई दिग्गजों के नाम गड़बड़ी के कारण नोटिस जारी किए गए हैं. इसमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, चुनाव आयुक्त एसएस संधू सहित कई अन्य शामिल हैं.
ओडिशा में भारी बारिश की चेतावनी, IMD के अलर्ट के बाद 20 जिलों में प्रशासन मुस्तैद
बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे दबाव के क्षेत्र के दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने और भारी बारिश तथा तेज हवाएं चलने के भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के बाद ओडिशा सरकार ने रविवार को तैयारियां तेज कर दीं। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने दक्षिणी और तटीय ओडिशा के 20 जिलों के जिलाधिकारियों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने को कहा है, जबकि 10 अन्य जिलों के जिलाधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। आईएमडी के अनुसार, गहरा दबाव, कम दबाव वाली प्रणाली का अधिक तीव्र चरण होता है और यह आगे चलकर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा, ‘‘आईएमडी ने हमें बताया है कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव वाला क्षेत्र धीरे-धीरे तीव्र हो रहा है और 23 सितंबर को गहरे दबाव के रूप में दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट पर पहुंचने का अनुमान है। हम इसके अनुसार तैयारियां कर रहे हैं।’’विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रवाकर पाटिल ने कहा कि जिलों और अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे सतर्क रहें और बदलते मौसम पर नजर रखें। आईएमडी ने शाम के बुलेटिन में बताया कि रविवार शाम 5.30 बजे कम दबाव वाला क्षेत्र पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना हुआ था और इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने तथा सोमवार को दबाव वाले क्षेत्र में और 22 सितंबर को पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर गहरे दबाव में बदलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने बताया कि यह प्रणाली 23 सितंबर की सुबह उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट के पास पश्चिम-मध्य और उससे सटी उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक पहुंच सकती है। आईएमडी ने इस प्रणाली के प्रभाव से राज्य में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है और 23 तथा 24 सितंबर के लिए दक्षिणी जिलों में कई स्थानों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा, ओडिशा में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने का अनुमान है, जबकि कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि सोमवार तक गरज के साथ बूंदाबांदी और मध्यम बारिश जारी रहेगी, जबकि 22 सितंबर से बारिश की तीव्रता बढ़ने का अनुमान है। दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर ‘ऑरेंज अलर्ट’ भी जारी किया गया है। आईएमडी ने 27 सितंबर तक अलग-अलग जिलों के लिए रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए हैं।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार 28 सितंबर को केंद्र के साथ एक समझौता करेगी। इसके तहत केंद्र की उड़ान योजना में पुरुलिया जिले में नया हवाई अड्डा बनेगा।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बद्रीनाथ के पास बमनी का दौरा किया, स्थानीय महिलाओं के साथ चाश्हणि नृत
बुजुर्ग किसान की ट्रक से कुचलकर मौत, ग्रामीण बोले- इस जगह 5 जानें गईं
बांदा के माटा गांव में तेज रफ्तार ट्रक ने खेत जा रहे 70 वर्षीय किसान को कुचल दिया. हादसे के बाद शव ट्रक में फंस गया और चालक उसे काफी दूर तक घसीटता चला गया. ग्रामीणों ने हाईवे जाम कर स्पीड ब्रेकर की मांग की. उनका दावा है कि इस जगह अब तक पांच लोगों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है.
क्रांति या उथल-पुथल नहीं, बुद्ध के मध्यम-मार्ग और स्थिरता के उपासक हैं नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में 25 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले हैं. उनकी अब तक की यात्रा का विश्लेषण कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल.
महुआ मोइत्रा से हुमायूं कबीर तक... रेजीनगर में ये होंगे ममता के स्टार प्रचार
रेजीनगर उपचुनाव के लिए ममता तृणमूल ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है. इस चुनाव में प्रचार की जिम्मेदारी खुद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी संभालेंगे. इस सूची में कल्याण बनर्जी, सोवनदेब चट्टोपाध्याय, सौगत रॉय भी शामिल हैं.
पाकिस्तान में शांति पर होनी थी चर्चा, 2 भारतीयों को था न्योता; क्यों रद्द करना पड़ा कार्यक्रम?
संस्थान के मुताबिक, बाद में एक व्यक्ति ने खुद को पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय का अधिकारी बताते हुए भारतीय नाम कार्यक्रम से हटाने को कहा। इसके बाद भारतीय प्रतिभागी का नाम कार्यक्रम से हटा दिया गया था।
समर्पण और सत्य के मार्ग पर चलना ही सच्ची भक्ति : संत एसएस चांवला
अजमेर। संत निरंकारी मिशन के केंद्रीय प्रचारक एवं प्रचारक विभाग के वाइस चेयरमैन संत एसएस चांवला ने कहा कि समर्पण, प्रेम और निराकार प्रभु के प्रति अटूट विश्वास ही वास्तविक भक्ति का आधार है। ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद जब भक्त का हृदय परमात्मा से जुड़ता है, तभी सच्ची भक्ति का आरंभ होता है। भक्ति […] The post समर्पण और सत्य के मार्ग पर चलना ही सच्ची भक्ति : संत एसएस चांवला appeared first on Sabguru News .
यूपी में 10 सीनियर IAS के तबादले, कहां किसे मिली नई तैनाती, देखें लिस्ट
यूपी में 10 सीनियर IAS अफसरों के तबादले किए गए हैं. आशीष गोयल और अनिल कुमार को हटाया गया. जानिए किस अधिकारी को कौन-सी नई जिम्मेदारी मिली...
रोहित और विराट खेलेंगे 2027 विश्व कप? जयसूर्या ने तोड़ी चुप्पी
सनथ जयसूर्या ने 2027 वनडे विश्व कप में रोहित शर्मा और विराट कोहली की मौजूदगी का समर्थन किया है. गुरुग्राम में उन्होंने कहा कि भारतीय टीम को युवाओं और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलन से फायदा मिलेगा. रोहित और विराट फिलहाल केवल वनडे क्रिकेट खेल रहे हैं. दोनों का हालिया प्रदर्शन और विश्व कप रिकॉर्ड मजबूत रहा है. हालांकि, 2027 तक उनकी फिटनेस और फॉर्म को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं.
अजमेर रेल मंडल में 141 बच्चों ने रंगों से सजाए सपने, ड्राइंग-पेंटिंग प्रतियोगिता में दिखी प्रतिभा
अजमेर। रेल कर्मचारियों के बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से उत्तर पश्चिम रेलवे महिला कल्याण संगठन, अजमेर मंडल की ओर से रविवार को ऑन-द-स्पॉट ड्राइंग एवं पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में अजमेर मंडल के विभिन्न केंद्रों पर कुल 141 बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी कल्पनाओं […] The post अजमेर रेल मंडल में 141 बच्चों ने रंगों से सजाए सपने, ड्राइंग-पेंटिंग प्रतियोगिता में दिखी प्रतिभा appeared first on Sabguru News .
फ़्लाइट लेफ्टिनेंट अल्फ्रेड टायरोन कुक ने कम से कम एक सेबर विमान को मार गिराया और आधिकारिक तौर पर उन्हें दूसरे विमान को गिराने का श्रेय भी दिया गया. उनके बयान के अनुसार, गोला-बारूद खत्म होने से पहले उन्होंने एक तीसरे विमान का भी मुकाबला किया था.
भारी बारिश के बीच केरलम के इडुक्की में लैंडस्लाइड, भाई-बहन की मौत
केरल के इडुक्की में भारी बारिश के बीच लैंडस्लाइड से एक परिवार पर मुसीबत टूट पड़ी. वट्टावडा में सगे भाई-बहन की मौत हुई है, जबकि एक महिला घायल है. सरकार ने इलाज और पीड़ित परिवारों की मदद का भरोसा दिया है.
'अनसेफ PGs में रहने को क्यों मजबूर हैं छात्र?', राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला
राहुल गांधी ने सवाल किया है कि नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे, छात्रों को असुरक्षित PG में रहने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है. इसके साथ ही उन्होंने पूछा है कि सत्य निकेतन हादसे की जांच कहां तक पहुंची.
West Bengal: पुलिस पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में AJUP नेता नसीम शेख गिरफ्तार
हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (एजेयूपी) के एक प्रखंड स्तरीय नेता को मई में पुलिस के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। इसके साथ ही इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या चार हो गई है। अधिकारी ने बताया कि नसीम शेख को शनिवार रात रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र के मियांग्राम से गिरफ्तार किया गया। रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव छह अक्टूबर को होना है। यह सीट एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, क्योंकि उन्होंने नवादा सीट अपने पास रखने का फैसला किया था। पार्टी ने उपचुनाव के लिए कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है। पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘यह मामला सात मई को शक्तिपुर में एजेयूपी की ओर से आयोजित कार्यकर्ता बैठक से जुड़ा है। पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर समेत कई नेताओं पर मंच से पुलिस के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है, जिसके बाद शक्तिपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था।’’एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘जांच के दौरान इस मामले में नसीम शेख की संलिप्तता सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। हम बयानों की जांच कर रहे हैं और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।’’ उन्होंने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। हालांकि, कबीर ने दावा किया कि शेख को फंसाया गया है। एजेयूपी प्रमुख ने कहा, ‘‘वह मेरा दूर का रिश्तेदार है, पूर्व सैन्यकर्मी और एक कारोबारी है। उसे फंसाया जा रहा है।’’पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के एक निर्दलीय उम्मीदवार को शनिवार को 2021 के राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान दो समूहों के बीच हुई झड़प के पांच साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार उम्मीदवार सैफुल इस्लाम एजेयूपी जुड़े हुए हैं।
गुरुग्राम के PG में कथित सेक्स रैकेट का खुलासा, विदेशी महिलाओं समेत 21 अरेस्ट
गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम में पीजी (पेइंग गेस्ट) की आड़ में कथित रूप से संचालित देह व्यापार के नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। सेक्टर-38 स्थित गांव झाड़सा के एक पीजी में शनिवार रात पुलिस और हरियाणा राज्य महिला आयोग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 21 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें 13 पुरुष […] The post गुरुग्राम के PG में कथित सेक्स रैकेट का खुलासा, विदेशी महिलाओं समेत 21 अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन 21-22 सितंबर को पश्चिमी यूपी के मेरठ और सहारनपुर जिले के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वे युवा सम्मेलन और बैठकों में शामिल होंगे. साथ ही, पार्टी के नेताओं के साथ मुलाकात कर यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति धार देंगे.
बिना मशीन घर पर निकालें 100% शुद्ध बादाम का तेल, आसान है तरीका
Homemade Almond Oil: क्या आप बिना किसी मिलावट और बिना किसी मशीन के घर पर ही शुद्ध बादाम का तेल बनाना चाहते हैं? अगर हां, तो ये खबर आपके काम आ सकती है. आज हम आपको बादाम का तेल निकालने के 2 आसान तरीके बताने वाले हैं. ये आपकी स्किन से लेकर बालों तक के लिए वरदान साबित हो सकता है.
महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार पर दीपके के तेवर तल्ख, MPSC आयोग का मांगा इस्तीफा; फडणवीस पर भी आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने एमपीएससी परीक्षाओं में कथित धांधली और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग की।
Manoj Sinha ने SMVDSB बैठक में कटरा के International Museum of Goddess की समीक्षा की
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) की एक विशेष बैठक की अध्यक्षता की और रियासी जिले के कटरा (श्रद्धालुओं के आधार शिविर का स्थल) में बनने वाले ‘इंटरनेशनल म्यूजियम ऑफ गॉडेस’ की प्रगति की समीक्षा की। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। यहां लोक भवन में हुई इस बैठक में एसएमवीडीएसबी के सदस्यों ने हिस्सा लिया। बैठक में परियोजना के विभिन्न पहलुओं, जिसमें कार्य का दायरा और अनुमानित लागत शामिल है, पर चर्चा की गई। प्रवक्ता ने कहा कि बैठक में मुख्य रूप से संग्रहालय के निर्माण की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसकी परिकल्पना मंदिर से जुड़ी समृद्ध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, कलात्मक और सभ्यतागत विरासत को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से की गई है। एसएमवीडीएसबी ने आठ फरवरी, 2026 को हुई अपनी 76वीं बैठक में इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा करने के वास्ते 21 मई को जम्मू स्थित लोक भवन में एक बैठक आयोजित की गई थी। उपराज्यपाल श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। रविवार को उपराज्यपाल की अध्यक्षता में हुई बोर्ड की बैठक में संग्रहालय परियोजना के लिए एक सलाहकार की नियुक्ति को मंजूरी दी गई। साथ ही बोर्ड ने प्रस्तावित संग्रहालय के प्रारंभिक अवधारणा डिजाइन पर भी चर्चा की, जिसे मेसर्स बातुल राज मेहता एंड एसोसिएट्स (बीआरएमए) और मेसर्स टाटा इकोफर्स्ट सर्विसेज लिमिटेड ने प्रस्तुत किया था। प्रवक्ता ने कहा कि बोर्ड ने कटरा स्थित खेल स्टेडियम के पास बने नौ प्रीमियम अतिथि गृहों के लाइसेंस, संचालन, रखरखाव और प्रबंधन की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। प्रवक्ता ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस इन अतिथि गृहों में पूरी तरह सुसज्जित दो-बेडरूम वाले आवास हैं और इनका उद्देश्य बेहतर आतिथ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
4 टुकड़ों में बंटेगा उत्तर प्रदेश! OP राजभर का बड़ा दावा!
देवरिया की सामाजिक समरसता महारैली में ओम प्रकाश राजभर ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की बात कही. उन्होंने दावा किया कि अलग पूर्वांचल राज्य बनने पर राजभर का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा. राजभर ने पिछड़ों के 27 प्रतिशत आरक्षण में आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग भी उठाई. उन्होंने सपा, बसपा और कांग्रेस पर निशाना साधा. फिलहाल प्रदेश विभाजन को लेकर कोई नया सरकारी फैसला नहीं हुआ है.
ChatGPT ने गुमशुदा को अपनों से मिलाया... बुजुर्ग की हैरान करने वाली कहानी
अमृतसर से गलती से बिहार पहुंच गए बुजुर्ग चमन लाल को एक स्थानीय निवासी नीरज ने अपने घर में रखा और उनकी मदद के लिए ChatGPT के जरिये उनके गांव का पता लगाया.
चीन पर तीखे हमले करने वाले ट्रंप के सुर क्यों बदले? शी जिनपिंग बने खास दोस्त
डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग की मेजबानी करेंगे और उनसे व्यापार, टेक्नोलॉजी, रेयर अर्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बातचीत करेंगे. यह उस ट्रंप से बिल्कुल अलग है, जिन्होंने कभी चीन को अमेरिका की आर्थिक गिरावट के लिए मुख्य विलेन बताया था.
Mahabharat Bheem Saurav Gurjar Arrested:
'2027 में सरकार बनी तो मंत्री बनने से कोई नहीं रोक पाएगा', बोले SP नेता
कौशांबी के सिराथू में समाजवादी पार्टी के बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. वीडियो में सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज 2027 में पार्टी की सरकार बनने पर मंत्री बनने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं. इसी दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं, जिले के विकास और जेसीबी-डंपर से बालू निकालने को लेकर भी टिप्पणी की.
नवी मुंबई के फर्नीचर गोदाम में भीषण आग, दमकल की कई गाड़ियां मौजूद
नवी मुंबई के दिघा इलाके में फर्नीचर गोदाम में भीषण आग लग गई. आग पर काबू पाने के लिए दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. फिलहाल आग बुझाने का काम जारी है.
तेलंगाना में डिवाइडर से टकराकर आग का गोला बनी वोल्वो, मशहूर न्यूरोसर्जन की जिंदा जलकर मौत
हैदराबाद। तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में हैदराबाद के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. कासकुर्ती जगदीश की मौत हो गई। खम्मम-हैदराबाद हाईवे पर उनकी वोल्वो कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर के बाद कार में भीषण आग लग गई और देखते ही देखते पूरी गाड़ी आग की लपटों में […] The post तेलंगाना में डिवाइडर से टकराकर आग का गोला बनी वोल्वो, मशहूर न्यूरोसर्जन की जिंदा जलकर मौत appeared first on Sabguru News .
यूपी में आंबेडकर की 151 मूर्तियां क्षतिग्रस्त, केवल 14 गिरफ्तारियां: Akhilesh Yadav
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासनकाल में उत्तर प्रदेश के 72 जिलों में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की 151 मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया लेकिन अब तक इन मामलों में केवल 14 गिरफ्तारियां ही हुई हैं। सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यह तोड़फोड़ जानबूझकर की गई क्योंकि भाजपा संविधान बदलना चाहती थी लेकिन ऐसा कर नहीं सकी। भाजपा ने इस पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यादव ने लखनऊ में पार्टी मुख्यालय पर संवाददाताओं से कहा, भाजपा राज में बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की मूर्तियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया गया है। भाजपा सरकार के तहत 72 जिलों में 151 से ज्यादा मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया या तोड़ा-फोड़ा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘ यह जानबूझकर किया गया क्योंकि वे (भाजपा) संविधान बदलना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं कर पाए। इसीलिए जब भी भाजपा और उसकी विचारधारा वाले लोग हमला करते हैं, तो वे सबसे पहले संविधान की प्रति को निशाना बनाते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘ कुल मिलाकर, हम 151 मामलों का रिकॉर्ड जुटा पाए हैं। अगर हम औसत निकालें, तो इस सरकार के शासनकाल में हर साल 15 से ज्यादा मूर्तियां क्षतिग्रस्त की गयी हैं। हो सकता है कि कुछ मामले ऐसे भी हों जिनका रिकॉर्ड न हो और जिनकी गिनती न की गई हो।’’यादव ने सरकारी आंकड़ों को आधार बताते हुए दावा किया कि आंबेडकर प्रतिमाओं को खंडित किये जाने के केवल 14 मामलों में ही गिरफ्तारियां हुई हैं और 45 मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये गये, आठ मामलों में नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई और 84 मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार न तो आंबेडकर का सम्मान करती है न ही उनकी मूर्तियों का और न ही उनके लोगों का। बाद में, सपा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जिलेवार ब्योरा पोस्ट किया और कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले कार्यकाल में आंबेडकर की 46 मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था जबकि दूसरे कार्यकाल में 105 मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया गया। सपा प्रमुख ने भाजपा की सनातन धर्म की विचारधारा का जिक्र करते हुए कहा, सच्चाई का रास्ता सनातन है, प्यार का रास्ता सनातन है, भाईचारे का रास्ता सनातन है और ईमानदारी का रास्ता सनातन है। भगवान श्री राम को चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी न होने देना... यही सनातन का रास्ता है। भगवान श्री राम को दिए गए दान की चोरी रोकना सनातन का रास्ता है। हत्या की साजिश रचना सनातन का रास्ता नहीं हो सकता। झूठे आरोप गढ़ना सनातन का रास्ता नहीं हो सकता। यादव ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में परीक्षा के सबसे ज्यादा संख्या में पेपर लीक हुए। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकारी नौकरी देने की जरूरत से बचने के लिए ऐसा किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने बार-बार न सिर्फ लोगों को दुख पहुंचाया है बल्कि उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करने के लिये भी सक्रिय रूप से काम किया है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया, यह सरकार न्याय दिलाने में नाकाम रही है, एक ऐसी सरकार जिसके अपने मंत्रियों को धरने पर बैठना पड़ रहा है। जरा सोचिए, इलाज और न्याय पाने के लिए या यहां तक कि पोस्टमार्टम करवाने के लिए भी विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है। यह इस सरकार की हालत है। यादव ने यह भी कहा कि भाजपा सिर्फ ‘कंटेंट क्रिएटर्स’ को नौकरियां दे रही है।
भारतीय रेलवे के वातानुकूलित यानी एसी कोच (AC Coaches) में सफर करते समय कई यात्रियों के साथ यह समस्या अक्सर देखने को मिलती है कि रात के वक्त बोगी का तापमान जरूरत से ज्यादा ठंडा हो जाता है। खासकर 3rd AC और 2nd AC में खिड़की या एसी वेंट के पास वाली बर्थ पर सोने वाले यात्रियों, बच्चों और बुजुर्गों को दिए गए एक कंबल में भी कंपकंपी महसूस होने लगती है। ऐसे में अधिकांश मुसाफिरों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या कोच अटेंडेंट से दूसरा कंबल मांगा जा सकता है और क्या इसके लिए कोई अतिरिक्त पैसा या चार्ज चुकाना पड़ता है।क्या एक्स्ट्रा कंबल के लिए देना होगा कोई अतिरिक्त पैसा?इसका सीधा और स्पष्ट उत्तर है: नहीं, आपको एक्स्ट्रा कंबल के लिए एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं देना होता है।भारतीय रेलवे के आधिकारिक नियमों के मुताबिक, जब आप एसी कोच (1st AC, 2nd AC, 3rd AC और 3E) का कन्फर्म टिकट बुक करते हैं, तो उस किराए में बेडरोल (बिस्तर, चादर, तकिया और कंबल) का शुल्क पहले से ही शामिल होता है। यदि यात्रा के दौरान आपको ज्यादा ठंड लग रही है, आपकी तबीयत खराब लग रही है या आपको दिए गए कंबल की मोटाई पर्याप्त नहीं लग रही है, तो आप अपने कोच अटेंडेंट से अतिरिक्त कंबल की मांग कर सकते हैं।यह सुविधा पूरी तरह से मुफ्त होती है। रेलवे का कोई भी कोच अटेंडेंट या स्टाफ अतिरिक्त कंबल या चादर देने के एवज में आपसे टिप या अतिरिक्त चार्ज की मांग कानूनी रूप से नहीं कर सकता।अतिरिक्त कंबल मिलने की शर्तें और रेलवे का प्रोटोकॉलमुफ्त सुविधा होने के बावजूद एक्स्ट्रा कंबल मिलना पूरी तरह से ट्रेन में कंबल की उपलब्धता (Availability) पर निर्भर करता है। रेलवे का लिनेन प्रबंधन निम्नलिखित व्यवस्था के तहत काम करता है:बेडरोल का कोटा: प्रत्येक एसी कोच में यात्रियों की कुल संख्या के हिसाब से बेडरोल के पैकेट लोड किए जाते हैं। इसके साथ ही आपातकालीन या अतिरिक्त जरूरत के लिए कुछ एक्स्ट्रा सेट (बफर स्टॉक) भी कोच में रखे जाते हैं।उपलब्धता के आधार पर वितरण: यदि बोगी में अतिरिक्त कंबल उपलब्ध हैं, तो अटेंडेंट बिना किसी हिचकिचाहट के आपको दूसरा कंबल दे देता है। हालांकि, यदि ट्रेन पूरी तरह पैक है और अतिरिक्त कंबल सीमित हैं, तो अटेंडेंट पहले बीमार व्यक्तियों, छोटे बच्चों या बुजुर्ग यात्रियों को प्राथमिकता देते हैं।अतिरिक्त चादर का विकल्प: कई बार जब अतिरिक्त कंबल उपलब्ध नहीं होते, तो कोच अटेंडेंट यात्री को एक अतिरिक्त सूती चादर (Bedsheet) उपलब्ध करा देते हैं, जिसे कंबल के ऊपर डालकर ठंड के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।कोच का तापमान बहुत कम हो तो क्या करें?सिर्फ कंबल मांगना ही समाधान नहीं है; रेलवे नियमों के अनुसार एसी कोच का तापमान भी तय मानकों के भीतर होना चाहिए।भारतीय रेलवे के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, एसी कोच के भीतर का तापमान सामान्यतः 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच नियंत्रित रखा जाना चाहिए। यदि कोच में बहुत ज्यादा ठंड लग रही है और तापमान इस सीमा से काफी नीचे चला गया है, तो आप कोच अटेंडेंट या ऑन-ड्यूटी एसी तकनीशियन (AC Mechanic/Escorting Staff) से तापमान को री-एडजस्ट (बढ़ाने) का अनुरोध कर सकते हैं। तकनीशियन कंट्रोल पैनल से तापमान को सामान्य स्तर पर सेट कर देते हैं जिससे बोगी में सभी यात्रियों को राहत मिलती है।अटेंडेंट मना करे या पैसे मांगे तो कहां करें शिकायत?यदि कोच अटेंडेंट आपके पास अतिरिक्त कंबल होने के बावजूद देने से मना करता है, बदतमीजी करता है या एक्स्ट्रा कंबल के बदले पैसों की मांग करता है, तो आप तुरंत इन आधिकारिक माध्यमों से शिकायत दर्ज करवा सकते हैं:रेल मदद हेल्पलाइन (RailMadad 139): अपने मोबाइल से 139 डायल करें और अपनी सीट, कोच नंबर व पीएनआर साझा करते हुए शिकायत दर्ज कराएं। यह 24x7 सक्रिय सेवा है जिस पर तुरंत एक्शन लिया जाता है।रेल मदद ऐप या वेबसाइट: 'RailMadad' ऐप या पोर्टल (railmadad.indianrailways.gov.in) पर जाकर 'Coax Linen/Bedroll' श्रेणी में शिकायत दर्ज करें।सोशल मीडिया (X / ट्विटर): अपने पीएनआर नंबर, ट्रेन नंबर और कोच नंबर के साथ @RailMinIndia और संबंधित जोनल रेलवे को टैग करते हुए पोस्ट करें। रेलवे की सोशल मीडिया विंग चलती ट्रेन में ही अटेंडेंट तक समस्या पहुंचाकर उसका समाधान करवाती है।
मां बगलामुखी मंदिर में रात 8 बजे के बाद हवन पर रोक, आदेश जारी
Agar Malwa Baglamukhi Temple Hawan Ban: आगर मालवा में कार बहने से 8 श्रद्धालुओं की मौत के बाद शासन का बड़ा फैसला. प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में रात 8 बजे के बाद हवन पर लगा पूर्ण प्रतिबंध. पढ़ें पूरी खबर...
364 दिनों की FD पर तगड़ा रिटर्न: आम नागरिक, सीनियर और सुपर सीनियर सिटीजन का पूरा गणित
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसे निवेश करने वाले अधिकांश लोग आमतौर पर 1 वर्ष, 3 वर्ष या 5 वर्ष की पारंपरिक मैच्योरिटी अवधि चुनते हैं। बहुत कम निवेशकों को यह जानकारी होती है कि बैंक अक्सर 'स्पेशल टेन्योर' यानी विशेष अवधियों पर सामान्य से कहीं बेहतर ब्याज की पेशकश करते हैं। ऐसा ही एक बेहद लोकप्रिय और रणनीतिक टेन्योर है 364 दिन की एफडी (यानी ठीक 1 साल से 1 दिन कम)।शॉर्ट-टर्म से मीडियम-टर्म के लिए सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे लोगों के लिए यह बकेट बेहद आकर्षक बन चुका है। आइए समझते हैं कि इस टेन्योर पर सबसे तगड़ा रिटर्न कहां मिल रहा है और अलग-अलग उम्र के निवेशकों के लिए इसका गणित कैसे काम करता है।364 दिनों की FD पर कहां मिल रहा है सबसे अधिक रिटर्न?364 दिन की मैच्योरिटी पर ब्याज दरें बैंक की श्रेणी के आधार पर तय होती हैं। आमतौर पर स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) और कुछ चुनिंदा प्राइवेट बैंक बड़े सरकारी बैंकों की तुलना में इस अवधि पर 0.50% से लेकर 1.25% तक ज्यादा ब्याज ऑफर करते हैं।स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs): सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, उत्कर्ष और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक इस श्रेणी में सबसे आगे रहते हैं। यहां आम ग्राहकों को 7.75% से 8.25% तक, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को 8.25% से 8.75% तक वार्षिक ब्याज मिल रहा है।प्रमुख प्राइवेट बैंक: एचडीएफसी बैंक (HDFC), आईसीआईसीआई (ICICI) और एक्सिस बैंक इस अवधि (1 वर्ष से ठीक पहले के ब्रैकेट) के लिए आम जनता को 6.70% से 7.10% और सीनियर सिटीजंस को 7.20% से 7.60% तक का ब्याज दे रहे हैं।सरकारी बैंक: भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा और पीएनबी जैसे सरकारी बैंक 364 दिनों के ब्रैकेट में सामान्य ग्राहकों को लगभग 6.50% से 6.80% और सीनियर सिटीजंस को 7.00% से 7.30% के आसपास रिटर्न देते हैं।आम ग्राहक, सीनियर और सुपर सीनियर सिटीजन का पूरा गणितभारतीय बैंकिंग प्रणाली में निवेशकों को उनकी उम्र के हिसाब से तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जहां ब्याज दरों में सीधा अंतर देखने को मिलता है:आम नागरिक (60 वर्ष से कम): इन्हें बैंक की बेस यानी मानक ब्याज दर मिलती है। स्मॉल फाइनेंस बैंकों में 364 दिनों के लिए यह दर औसतन 7.75% से 8.00% बैठती है।सीनियर सिटीजन (60 से 80 वर्ष): अधिकांश बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य दर से 0.50% (50 बेसिस प्वाइंट्स) का अतिरिक्त प्रीमियम देते हैं। इससे उनका रिटर्न बढ़कर 8.25% से 8.50% तक हो जाता है।सुपर सीनियर सिटीजन (80 वर्ष से अधिक): कई बैंक (जैसे पीएनबी, आरबीएल और कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक) 80 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों के लिए 'सुपर सीनियर सिटीजन' स्कीम चलाते हैं, जिसमें सीनियर सिटीजन दर से भी 0.20% से 0.25% अतिरिक्त ब्याज मिलता है (यानी सामान्य दर से कुल 0.75% से 0.80% अधिक)।₹5 लाख के निवेश पर 364 दिनों में संभावित कमाई का उदाहरण:श्रेणीअनुमानित ब्याज दर (SFBs में)364 दिन बाद कुल ब्याजमैच्योरिटी पर मिलने वाली कुल रकमआम नागरिक8.00%~ ₹40,000₹5,40,000सीनियर सिटीजन8.50%~ ₹42,500₹5,42,500सुपर सीनियर सिटीजन8.75%~ ₹43,750₹5,43,750(नोट: वास्तविक रिटर्न बैंक के तिमाही/मासिक कंपाउंडिंग चक्र और दिन-आधारित ब्याज गणना के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।)क्यों खास होती है 364 दिन की एफडी?बैंक 364 दिन की अवधि को अपने लिक्विडिटी मैनेजमेंट और एसेट-लायबिलिटी मिसमैच को संतुलित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। 365 दिन (पूरा 1 साल) होते ही कई नियामक और तकनीकी मानक बदल जाते हैं, इसलिए बैंक 1 दिन कम (364 दिन) की अवधि पर अक्सर आक्रामक ब्याज दरें तय करते हैं ताकि वे एक साल के भीतर अल्पकालिक पूंजी जुटा सकें।निवेशकों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि उनका पैसा लंबे समय के लिए लॉक नहीं होता। एक साल से भी कम समय में पूंजी ब्याज सहित वापस मिल जाती है, जिसे बाजार के रुख के हिसाब से दोबारा री-इन्वेस्ट किया जा सकता है।निवेश से पहले सुरक्षा और टैक्स के नियम जरूर जान लेंज्यादा ब्याज के चक्कर में किसी भी बैंक में पैसा लगाने से पहले सुरक्षा और टैक्स के नियमों को समझना बेहद जरूरी है:₹5 लाख तक की सरकारी गारंटी: चाहे सरकारी बैंक हो, प्राइवेट बैंक या फिर स्मॉल फाइनेंस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक संस्था DICGC के तहत हर बैंक के प्रत्येक जमाकर्ता का ₹5 लाख तक का मूलधन और ब्याज पूरी तरह बीमित (सुरक्षित) होता है। इसलिए किसी एक स्मॉल फाइनेंस बैंक में ₹5 लाख तक का निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।TDS और टैक्स नियम: एफडी से होने वाली ब्याज आय निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है।आम नागरिकों के लिए एक वित्तीय वर्ष में सभी एफडी से मिलने वाला ब्याज ₹40,000 से अधिक होने पर बैंक TDS काटते हैं।सीनियर और सुपर सीनियर सिटीजंस के लिए आयकर कानून के सेक्शन 80TTB के तहत ₹50,000 तक की ब्याज आय पर पूरी कर-छूट मिलती है, और TDS भी ₹50,000 से अधिक ब्याज पर ही कटता है।यदि आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो TDS से बचने के लिए आम नागरिक फॉर्म 15G और वरिष्ठ नागरिक फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं।
शादी का झांसा देकर यौन शोषण के आरोप में Sourav Gurjar गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा
अभिनेता एवं पहलवान सौरव गुर्जर को कथित तौर पर विवाह का झांसा देकर 29 वर्षीय महिला का यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। महिला ने अगस्त में गाचीबोवली थाने में दर्ज कराई गई एक शिकायत में आरोप लगाया था कि वह पांच साल से अधिक समय से सौरव के साथ रिश्ते में थी। महिला ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि सौरव ने उससे विवाह करने का वादा किया था, लेकिन बाद में ‘‘धोखा दिया और शारीरिक एवं यौन उत्पीड़न किया।’’पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर सौरव के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया और उसे 18 सितंबर को मुंबई हवाई अड्डे पर हिरासत में लेकर हैदराबाद लाया गया। अधिकारी ने कहा, ‘‘उसे गिरफ्तार करके यहां एक अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।’’अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपी उसके साथ अमेरिका और भारत में अलग-अलग स्थानों पर रहा और इस दौरान उसके भविष्य एवं विवाह को लेकर उसे आश्वासन देता रहा। अधिकारी के अनुसार महिला ने बताया कि जब आरोपी अमेरिका में था, तब उसने उससे कहा था कि दोनों को भारत में बसकर अपने कारोबार में साथ काम करना चाहिए। अधिकारी के अनुसार महिला ने बताया कि उस पर भरोसा करते हुए उसने अमेरिका में अपनी नौकरी छोड़ दी और उसके साथ रहने के इरादे से अलग-अलग स्थानों पर गई। अधिकारी के अनुसार महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी के व्यवहार के कारण उसे मानसिक उत्पीड़न, भावनात्मक परेशानी और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। अधिकारी के अनुसार महिला ने बताया कि आरोपी अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक फिर उसके साथ रहा, जिसके बाद आरोपी ने उससे संपर्क करना बंद कर दिया। अधिकारी के अनुसार महिला ने बताया कि बाद में सौरव ने उसे हैदराबाद जाने में मदद की, लेकिन फिर अपने वादे पूरे नहीं किए, जिसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया।
नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ (EPFO) लंबे समय से सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाला सबसे पसंदीदा जरिया रहा है। ज्यादातर संगठित क्षेत्र के कामगार केवल अनिवार्य योगदान तक ही सीमित रहते हैं और यह मान लेते हैं कि रिटायरमेंट के समय जो रकम मिलेगी वह बुढ़ापे के लिए काफी होगी। वास्तविकता यह है कि महंगाई की लगातार बढ़ती रफ्तार भविष्य के खर्चों को कई गुना बढ़ा रही है। वित्तीय विश्लेषकों का नया आकलन बताता है कि अपनी नियमित सैलरी से हर महीने महज ₹1,200 का अतिरिक्त अंशदान जोड़कर आप रिटायरमेंट के समय अपने खाते में सीधे ₹37 लाख से अधिक का अतिरिक्त फंड जोड़ सकते हैं। यह छोटी बचत का वह चक्रवर्ती जादू है जिसे समय रहते समझ लेना हर वेतनभोगी के हित में है।ईपीएफ योगदान की बुनियादी संरचना और अनिवार्य सीमाईपीएफओ नियमों के अनुसार वर्तमान में संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए मूल वेतन (Basic Pay) और महंगाई भत्ते (DA) का 12 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ खाते में जमा होता है। न्यूनतम अनिवार्य सीमा के तहत ₹15,000 के बेसिक वेतन पर यह योगदान ₹1,800 प्रति माह तय किया गया है। इतना ही हिस्सा कंपनी या नियोक्ता की ओर से भी जमा कराया जाता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस (EPS) में और शेष ईपीएफ में जाता है। अधिकांश कर्मचारी अपनी सेवा के शुरुआती दिनों में इसी न्यूनतम ₹1,800 के स्तर पर योगदान बनाए रखते हैं और कभी यह विचार नहीं करते कि थोड़ा सा अतिरिक्त योगदान उनके भविष्य की पूरी तस्वीर बदल सकता है।जब कोई कर्मचारी अनिवार्य ₹1,800 के बजाय अपने मासिक अंशदान को बढ़ाकर ₹3,000 कर देता है, तो उसकी जेब से जाने वाली अतिरिक्त राशि केवल ₹1,200 प्रति माह होती है। यह ₹1,200 का अंतर आज के दैनिक जीवन में दो-तीन कप कॉफी या बाहर एक सामान्य नाश्ते के बराबर लग सकता है, लेकिन प्रोविडेंट फंड के खाते में यही छोटा सा कदम दशकों के दौरान एक मजबूत वित्तीय ढाल बनकर उभरता है।₹1,800 बनाम ₹3,000 का सटीक गणितीय विश्लेषणइस तुलना को स्पष्ट रूप से समझने के लिए एक 25 से 30 वर्ष के युवा कर्मचारी का उदाहरण लेते हैं, जो अपने करियर के 30 साल तक सक्रिय रूप से नौकरी में योगदान जारी रखता है। मान लेते हैं कि ईपीएफओ द्वारा दी जाने वाली मौजूदा वार्षिक ब्याज दर लगभग 8.25 प्रतिशत के आसपास स्थिर रहती है और कर्मचारी हर महीने नियमित रूप से अपना अंशदान जमा करता है।केस 1 में, यदि कर्मचारी केवल न्यूनतम अनिवार्य ₹1,800 प्रति माह जमा करता है, तो 30 वर्षों में उसका कुल जमा किया गया मूलधन लगभग ₹6,48,000 होता है। 8.25 प्रतिशत की चक्रवृद्धि ब्याज दर के साथ 30 साल बाद इस राशि पर बनने वाला कुल मैच्योरिटी कॉर्पस लगभग ₹27.6 लाख से ₹28 लाख के बीच पहुंचता है। यह रकम सामान्य जरूरतों के लिए ठीक लग सकती है, लेकिन तीस साल बाद की महंगाई के सामने यह बहुत बड़ी नहीं रह जाती।केस 2 में, यदि वही कर्मचारी अपने हिस्से का योगदान बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह कर देता है, यानी पहले से ₹1,200 अधिक, तो 30 वर्षों में उसके द्वारा जमा किया गया कुल मूलधन ₹10,80,000 होगा। इस ₹3,000 मासिक निवेश पर समान 8.25 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर के हिसाब से रिटायरमेंट पर बनने वाला कुल फंड लगभग ₹65 लाख से अधिक हो जाता है।अब दोनों परिणामों के अंतर को देखें। ₹1,800 के साथ रिटायरमेंट फंड लगभग ₹28 लाख था, जबकि ₹3,000 के साथ यह लगभग ₹65 लाख बनता है। दोनों के बीच का सीधा अंतर लगभग ₹37 लाख से ₹37.5 लाख का बैठता है। आपने अपनी जेब से 30 वर्षों में अतिरिक्त जमा किए सिर्फ ₹4,32,000 (यानी ₹1,200 गुणा 360 महीने), और इसके बदले आपके खाते में अतिरिक्त जुड़ गए लगभग ₹37 लाख। यही पावर ऑफ कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धिकरण की असली ताकत है, जहां समय के साथ ब्याज पर मिलने वाला ब्याज मूलधन से कई गुना बड़ा हो जाता है।वीपीएफ यानी स्वैच्छिक भविष्य निधि का सशक्त विकल्पकई कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठता है कि वे अपने मासिक योगदान को ₹1,800 से बढ़ाकर ₹3,000 या उससे अधिक कैसे कर सकते हैं। इसके लिए ईपीएफओ ने वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) का बेहद सरल और पारदर्शी विकल्प दिया हुआ है। वीपीएफ के तहत कोई भी कर्मचारी अपने बेसिक और डीए का 100 प्रतिशत तक स्वैच्छिक रूप से ईपीएफ खाते में जमा करने का अनुरोध अपनी कंपनी के एचआर या पेरोल विभाग से कर सकता है।वीपीएफ में जमा की जाने वाली राशि पर भी ठीक वही ब्याज मिलता है जो सामान्य ईपीएफ खाते पर सरकार तय करती है। इसके लिए किसी नए खाते या अलग प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह आपके मौजूदा यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से ही सीधे जुड़ जाता है। यदि आपका नियोक्ता आपकी बेसिक सैलरी के आधार पर ₹1,800 ही काट रहा है, तो आप एक साधारण फॉर्म भरकर ₹1,200 का वीपीएफ शुरू करवा सकते हैं। इससे आपका कुल मासिक अंशदान तुरंत ₹3,000 हो जाएगा।टैक्स लाभ और सरकारी गारंटी का दोहरा सुरक्षा चक्रईपीएफओ में अतिरिक्त निवेश का एक सबसे बड़ा आकर्षण इसकी सुरक्षा और टैक्स दक्षता है। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की तरह इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई जोखिम नहीं होता। भारत सरकार द्वारा समर्थित होने के कारण इसमें मूलधन और ब्याज दोनों की शत-प्रतिशत गारंटी रहती है।आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत ईपीएफ और वीपीएफ में जमा की गई राशि पर ₹1.5 लाख तक की वार्षिक कर छूट मिलती है। इसके अलावा, एक वित्तीय वर्ष में ₹2.5 लाख तक के कुल कर्मचारी योगदान पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से कर-मुक्त रहता है। यदि आप हर महीने ₹3,000 जमा करते हैं, तो सालभर में आपका कुल योगदान केवल ₹36,000 होता है, जो ₹2.5 लाख की कर-मुक्त सीमा के काफी अंदर है। इसका मतलब है कि मिलने वाले ₹37 लाख के अतिरिक्त मुनाफे पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा और पूरी मैच्योरिटी राशि सीधे आपके हाथ में आएगी।युवा कर्मचारियों के लिए तुरंत शुरुआत करने की अहमियतकंपाउंडिंग का यह गणित तभी पूरी क्षमता से काम करता है जब आप इसे पर्याप्त समय देते हैं। अगर कोई कर्मचारी 40 या 45 साल की उम्र में यह अतिरिक्त ₹1,200 शुरू करता है, तो उसे 15-20 साल ही मिलेंगे और वह ₹37 लाख के अंतर तक नहीं पहुंच पाएगा। जो युवा 22 से 28 वर्ष की आयु में अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं, उनके पास 30 से 35 साल का लंबा समय होता है। करियर की शुरुआत में ₹1,200 का अतिरिक्त बोझ बजट पर बिल्कुल महसूस नहीं होता, लेकिन रिटायरमेंट की उम्र में यही छोटा फैसला आपको दूसरों की तुलना में कहीं अधिक आर्थिक रूप से स्वतंत्र और तनावमुक्त बना देता है।अपनी कंपनी के एचआर से संपर्क करके वीपीएफ का विकल्प चुनना या अपने ईपीएफ योगदान को रिवाइज करवाना महज दस मिनट का काम है। रिटायरमेंट प्लानिंग को कल पर टालने के बजाय आज ही इस ₹1,200 के मामूली अंतर को अपनी आदत में शामिल करना आपके भविष्य के लिए सबसे समझदारी भरा वित्तीय निर्णय साबित होगा।
काशी का पिशाच मोचन कुंड, जहां श्राद्ध व तर्पण से पितरों को मिलता है मोक्ष
पितृपक्ष के समय पिशाच मोचन कुंड पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि पिशाच मोचन कुंड में किए गए श्राद्ध से पितरों को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.
स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) पॉलिसी का नवीनीकरण (रिन्यूअल) कराते समय अधिकांश पॉलिसीधारकों के सामने सबसे बड़ा असमंजस यह होता है कि क्या वे अपनी मौजूदा पॉलिसी का बेस कवर (Base Sum Insured) बढ़ाएं या फिर गंभीर बीमारियों और कंज्यूमेबल्स जैसे राइडर्स (Add-on Riders) जोड़ें।अस्पतालों में इलाज के खर्च में सालाना 12 से 14 प्रतिशत की मेडिकल इन्फ्लेशन (चिकित्सा महंगाई) दर्ज की जा रही है। ऐसे में 5 लाख या 10 लाख का पुराना बेस कवर किसी बड़ी बीमारी या सर्जरी की स्थिति में नाकाफी साबित हो सकता है। पॉलिसी रिन्यूअल की तारीख आने से पहले दोनों विकल्पों के वित्तीय और व्यावहारिक पहलुओं का विश्लेषण आवश्यक है।बेस कवर और राइडर्स में क्या है बुनियादी अंतरफैसला लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि दोनों विकल्प पॉलिसी को किस प्रकार मजबूत करते हैं:बेस सम इंश्योर्ड (Base Cover): यह आपकी मुख्य पॉलिसी की कुल कवरेज सीमा है। अस्पताल में भर्ती होने पर रूम रेंट, डॉक्टर फीस, आईसीयू, सर्जरी, दवाओं और प्री-पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन के सभी खर्च इसी लिमिट से चुकाए जाते हैं। यह बिना किसी अतिरिक्त शर्त के सभी इन-पेशेंट दावों पर लागू होता है।राइडर्स / एड-ऑन (Riders): ये मुख्य पॉलिसी के साथ जोड़े जाने वाले पूरक सुरक्षा कवर हैं। जैसे—क्रिटिकल इलनेस राइडर (कैंसर, हार्ट अटैक पर एकमुश्त राशि), कंज्यूमेबल्स कवर (दस्ताने, पीपीई किट, सिरिंज के बिल), रूम रेंट वेवर (कमरे के किराए पर लगी कैपिंग हटाना) और नो-क्लेम बोनस प्रोटेक्टर।वित्तीय तुलना: बेस कवर बढ़ाना बनाम राइडर्स जोड़ना35 वर्षीय व्यक्ति के ₹5 लाख के मौजूदा बेस प्लान के आधार पर दोनों विकल्पों के प्रीमियम और सुरक्षा का तुलनात्मक ढांचा:पैरामीटरविकल्प A: बेस कवर ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख करनाविकल्प B: ₹5 लाख बेस + कंज्यूमेबल्स + क्रिटिकल इलनेस राइडरविकल्प C: ₹5 लाख बेस + ₹20 लाख का सुपर टॉप-अप (Deductible ₹5 लाख)अनुमानित वार्षिक प्रीमियम₹14,000 – ₹16,500₹12,000 – ₹13,500₹10,500 – ₹12,000कुल उपलब्ध कवरेज₹15 लाख (व्यापक)₹5 लाख बेस + ₹10 लाख क्रिटिकल इलनेस₹25 लाख (₹5 लाख बेस + ₹20 लाख टॉप-अप)कंज्यूमेबल्स का क्लेमअगर इन-बिल्ट नहीं है तो जेब से कटेगा100% भुगतान (राइडर के तहत)अगर बेस में नहीं है तो डिडक्टिबल में कटेगागंभीर बीमारी पर कवरेजवास्तविक अस्पताल बिल के अनुसारअस्पताल बिल + एकमुश्त नकद पेआउटवास्तविक बिल के अनुसार ₹25 लाख तकअस्पताल में क्लेम का वास्तविक गणित: कहां काम आते हैं राइडर्सअस्पताल में भर्ती होने पर सबसे ज्यादा जेब पर भार गैर-चिकित्सीय खर्चों (Non-Medical Expenses / Consumables) का पड़ता है:मान लीजिए किसी प्रमुख अस्पताल में 7 दिन के इलाज का कुल बिल ₹4,50,000 आता है। इस बिल में लगभग ₹45,000 से ₹60,000 (कुल बिल का 10% से 15%) ग्लव्स, मास्क, सर्जिकल टेप, डिस्पोजेबल किट और प्रशासनिक शुल्क का होता है।बिना राइडर के: यदि आपके पास ₹15 लाख का बड़ा बेस कवर भी है, लेकिन कंज्यूमेबल्स कवर नहीं है, तो बीमा कंपनी ₹3,90,000 पास करेगी और ₹60,000 आपको अपनी जेब से भरने होंगे।कंज्यूमेबल्स राइडर होने पर: यदि आपके पास ₹5 लाख का बेस कवर है और साथ में मात्र ₹600 से ₹800 सालाना का 'कंज्यूमेबल्स राइडर' जुड़ा है, तो कंपनी पूरे ₹4,50,000 का भुगतान करेगी।सुपर टॉप-अप (Super Top-Up): कम प्रीमियम में बड़े बेस कवर का स्मार्ट विकल्पयदि आपका उद्देश्य ₹20 लाख से ₹50 लाख तक का बड़ा फंड सुरक्षित करना है, तो बेस कवर सीधे बढ़ाने के बजाय सुपर टॉप-अप पॉलिसी लेना सबसे किफायती तरीका साबित होता है।सुपर टॉप-अप में एक 'डिडक्टिबल' (Deductible) सीमा होती है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी मुख्य पॉलिसी ₹5 लाख की है, तो आप ₹5 लाख के डिडक्टिबल के साथ ₹20 लाख का सुपर टॉप-अप ले सकते हैं। सालभर में जब भी कुल मेडिकल बिल ₹5 लाख को पार करेंगे, सुपर टॉप-अप तुरंत सक्रिय होकर शेष ₹20 लाख तक का क्लेम चुका देगा। इसका वार्षिक प्रीमियम सीधे बेस कवर बढ़ाने की तुलना में 50% से 60% तक कम होता है।रिन्यूअल के समय क्या चुनना चाहिए: चेकलिस्टअपनी उम्र, पारिवारिक इतिहास और बजट के अनुसार यह रणनीति अपनाएं:कम से कम ₹10 लाख का बेस कवर बनाएं: आज के समय में महानगरों और बड़े निजी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ₹5 लाख का बेस कवर अपर्याप्त है। प्राथमिक रूप से बेस कवर को कम से कम ₹10 लाख तक ले जाएं।कंज्यूमेबल्स राइडर जरूर शामिल करें: यह सबसे सस्ता (₹500-₹1,000) एड-ऑन है, लेकिन क्लेम के समय अस्पताल के बिल से होने वाली 10-15% की अनचाही कटौती को पूरी तरह खत्म कर देता है।पारिवारिक इतिहास में गंभीर बीमारी हो तो क्रिटिकल इलनेस लें: यदि परिवार में कैंसर, किडनी या दिल की बीमारी का इतिहास रहा है, तो एक निश्चित पेआउट वाला क्रिटिकल इलनेस राइडर या स्टैंडअलोन पॉलिसी जोड़ना समझदारी है।रूम रेंट कैपिंग की जांच करें: सुनिश्चित करें कि आपकी पॉलिसी में 'नो रूम रेंट कैपिंग' की सुविधा हो। यदि पुराने बेस प्लान में 1% की सीमा लगी है, तो राइडर लेकर या बेस अपग्रेड करके इसे तुरंत हटाएं, ताकि आनुपातिक कटौती (Proportionate Deduction) से बचा जा सके।
क्रेडिट कार्ड का 30% वाला नियम: समय पर बिल भरने के बाद भी क्यों गिरता है CIBIL? समझें पूरा गणित
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय अधिकांश लोग केवल एक ही बात पर ध्यान देते हैं—बिल की आखिरी तारीख (Due Date) से पहले पूरा भुगतान करना। बहुत से कार्डधारक यह मानकर चलते हैं कि यदि वे हर महीने अपने क्रेडिट कार्ड का 100% बिल समय पर भर रहे हैं, तो उनका सिबिल (CIBIL) स्कोर हमेशा मजबूत रहेगा। लेकिन जब अचानक लोन या नए कार्ड के लिए आवेदन करते समय उनका क्रेडिट स्कोर गिरा हुआ दिखता है, तो वे हैरान रह जाते हैं।इस अनचाही गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण होता है क्रेडिट कार्ड का 30% वाला नियम, जिसे वित्तीय भाषा में क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (Credit Utilization Ratio - CUR) कहा जाता है। क्रेडिट ब्यूरो और बैंकों के मूल्यांकन मॉडल में यह नियम सीधे तौर पर दर्शाता है कि आप कर्ज पर कितने निर्भर हैं।क्या है क्रेडिट कार्ड का 30% वाला नियम (Credit Utilization Ratio)?क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो का सीधा अर्थ है कि आपको बैंकों द्वारा मिली कुल क्रेडिट लिमिट में से आप हर महीने कितने प्रतिशत सीमा का उपयोग कर रहे हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां (जैसे TransUnion CIBIL, Experian, CRIF High Mark) इसे आपके वित्तीय स्वास्थ्य का प्रमुख पैमाना मानती हैं।फाइनेंशियल प्लानिंग का स्वर्णिम नियम कहता है कि किसी भी स्थिति में आपके कार्ड का मासिक खर्च आपकी कुल क्रेडिट लिमिट के 30 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।यदि आपकी क्रेडिट लिमिट ₹1,00,000 है और आप हर महीने ₹70,000 से ₹80,000 खर्च कर रहे हैं, तो भले ही आप बिल आने पर पूरा भुगतान कर दें, क्रेडिट ब्यूरो की नजर में आपका CUR 70% से 80% दर्ज होगा। अत्यधिक लिमिट का इस्तेमाल करना बैंकिंग सिस्टम में 'क्रेडिट हंग्री' (Credit Hungry) यानी पैसे की तंगी और कर्ज पर अत्यधिक निर्भरता का संकेत माना जाता है, जिससे स्कोर 20 से 50 अंक तक नीचे खिसक सकता है।सटीक कैलकुलेशन: सिंगल कार्ड और मल्टीपल कार्ड का गणितक्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो की गणना दो स्तरों पर की जाती है—प्रति कार्ड (Per-Card CUR) और कुल लिमिट (Aggregate CUR)। इसे दो व्यावहारिक उदाहरणों से समझें:उदाहरण 1: सिंगल क्रेडिट कार्डकार्ड की कुल क्रेडिट लिमिट: ₹1,00,00030% की सुरक्षित सीमा: ₹30,000यदि मासिक खर्च ₹25,000 रहा:$$ ext{CUR} = left(frac{25,000}{1,00,000} ight) imes 100 = 25\% quad ext{(सुरक्षित - CIBIL बढ़ेगा)}$$यदि मासिक खर्च ₹75,000 रहा:$$ ext{CUR} = left(frac{75,000}{1,00,000} ight) imes 100 = 75\% quad ext{(खतरनाक - CIBIL गिरेगा)}$$उदाहरण 2: यदि आपके पास 3 अलग-अलग क्रेडिट कार्ड हैंक्रेडिट ब्यूरो आपके सभी सक्रिय कार्डों की संयुक्त सीमा को जोड़कर भी समग्र अनुपात देखता है:कार्डबैंकस्वीकृत लिमिटमासिक उपयोग (खर्च)यूटिलाइजेशन (%)स्थितिकार्ड AHDFC Bank₹1,50,000₹30,00020%सुरक्षितकार्ड BICICI Bank₹1,00,000₹25,00025%सुरक्षितकार्ड CSBI Card₹50,000₹40,00080%अत्यधिक (रेड फ्लैग)कुल योग—₹3,00,000₹95,00031.6%सीमा के करीबयहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि भले ही कुल मिलाकर खर्च लगभग 31% है, लेकिन अकेले 'कार्ड C' पर 80% का यूटिलाइजेशन उस व्यक्तिगत खाते के लिए नकारात्मक संकेत पैदा कर देता है। इसलिए प्रत्येक कार्ड पर अलग-अलग 30% की सीमा का पालन करना सबसे सुरक्षित रहता है।लोग कहां फंसते हैं: बिल जनरेशन डेट बनाम पेमेंट डेट का खेलअधिकांश उपभोक्ता इसी तकनीकी बिंदु पर मात खाते हैं। आमतौर पर लोगों को लगता है कि पेमेंट ड्यू डेट पर पूरा पैसा चुका दिया, तो CIBIL में बैलेंस शून्य रिपोर्ट होगा। वास्तविकता इसके विपरीत है:बैंक डेटा कब भेजते हैं? बैंक आपका बकाया बैलेंस पेमेंट की आखिरी तारीख पर नहीं, बल्कि बिलिंग साइकिल (Statement Generation Date) के दिन रिकॉर्ड करते हैं और उसे सिबिल को रिपोर्ट करते हैं।गलती का उदाहरण: मान लीजिए आपकी लिमिट ₹1,00,000 है। आपका बिल हर महीने की 20 तारीख को बनता है और ड्यू डेट अगले महीने की 8 तारीख है। यदि 19 तारीख तक आपने कार्ड से ₹85,000 खर्च कर लिए, तो 20 तारीख को बना स्टेटमेंट ₹85,000 का दिखेगा। बैंक तुरंत CIBIL को रिपोर्ट भेज देगा कि इस ग्राहक का यूटिलाइजेशन 85% है। भले ही आप 25 तारीख को पूरा ₹85,000 भर दें, उस महीने के आधिकारिक रिकॉर्ड में आपका CUR 85% दर्ज हो चुका होगा।CIBIL स्कोर को 750+ बनाए रखने के 4 कारगर उपाययदि आपके खर्चे अधिक हैं और लिमिट कम है, तो इन रणनीतियों को अपनाकर आप अपने सिबिल स्कोर को सुरक्षित रख सकते हैं:बिल बनने से पहले करें आंशिक भुगतान (Pre-Payment Technique): यदि किसी महीने बड़ा घरेलू सामान, यात्रा या गैजेट खरीदने के कारण आपका खर्च 30% की सीमा पार कर रहा है, तो बिलिंग स्टेटमेंट की तारीख से 2-3 दिन पहले ही 50% से 60% राशि का भुगतान अपने नेट बैंकिंग या यूपीआई से कर दें। इससे स्टेटमेंट केवल बची हुई कम राशि का बनेगा और ब्यूरो को 30% से कम का CUR ही रिपोर्ट होगा।क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का अनुरोध करें: अपने मौजूदा बैंक से क्रेडिट लिमिट बढ़ाने (Limit Enhancement) की मांग करें। यदि आपकी लिमिट ₹1,00,000 से बढ़कर ₹2,00,000 हो जाती है, तो ₹40,000 का खर्च पहले के 40% के मुकाबले घटकर स्वतः मात्र 20% रह जाएगा, जिससे आपका स्कोर मजबूत बना रहेगा।खर्चों को एकाधिक कार्डों में बांटें: यदि आपके पास दो या तीन कार्ड हैं, तो सारा खर्च एक ही कार्ड पर लोड करने के बजाय अलग-अलग कार्डों पर 15-20% के अनुपात में विभाजित करें।पुराने क्रेडिट कार्ड को कभी बंद न करें: कई लोग नया कार्ड मिलने पर पुराना कार्ड बंद करा देते हैं। ऐसा करने से आपकी कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट घट जाती है, जिससे शेष खर्चों का समग्र अनुपात (CUR) अचानक बढ़ जाता है। पुराने कार्ड को सक्रिय रखकर केवल छोटे-मोटे सब्सक्रिप्शन या बिल भुगतान के लिए इस्तेमाल करें।यदि बड़ा खर्च अनिवार्य हो तो क्या करें?मेडिकल इमरजेंसी या शादी-विवाह जैसे अवसरों पर कार्ड की 80% से 90% लिमिट इस्तेमाल करना मजबूरी हो सकता है। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। जैसे ही संकट टले, अगले 1 से 2 महीनों के भीतर बड़े हिस्से का प्री-पेमेंट करके यूटिलाइजेशन को वापस 20-30% के दायरे में ले आएं।क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो का प्रभाव गतिशील (Dynamic) होता है—जैसे ही अगले बिलिंग चक्र में आपका उपयोग कम रिपोर्ट होगा, आपका CIBIL स्कोर अगले 30 से 60 दिनों में दोबारा तेजी से रिकवर कर जाएगा।
इमरान खान के इलाज पर बवाल, PTI करेगी 27 सितंबर को प्रदर्शन
पाकिस्तान की अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का मेडिकल चेकअप किया गया है. पीआईएमएस की विशेष टीम ने जेल पहुंचकर उनका रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और आंखों की जांच की. इसी बीच उनकी बहन अलीमा खान को लाहौर में हिरासत में लिया गया है. यह कार्रवाई 27 सितंबर को प्रस्तावित पीटीआई प्रदर्शन से पहले हुई है. पार्टी इमरान खान की सेहत और इलाज को लेकर लगातार चिंता जता रही है.
हर माता-पिता का सबसे बड़ा सपना होता है कि उनके बच्चों का भविष्य आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित, आत्मनिर्भर और स्थिर रहे। आमतौर पर लोग बच्चों के नाम पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सुकन्या समृद्धि योजना (बालिकाओं के लिए) या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, लेकिन पेंशन और दीर्घकालिक वेल्थ क्रिएशन का कोई संगठित ढांचा नाबालिग बच्चों के लिए पहले उपलब्ध नहीं था।इसी कमी को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई 'एनपीएस वात्सल्य' (NPS Vatsalya Scheme) योजना देश के अभिभावकों के बीच बेहद लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरी है। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा संचालित यह योजना माता-पिता को अपने बच्चों के नाम पर शुरुआती उम्र से ही पेंशन और निवेश का मजबूत आधार तैयार करने की सुविधा देती है। संशोधित नियमों के बाद अब मात्र ₹250 के न्यूनतम वार्षिक अंशदान से इस खाते को शुरू किया जा सकता है।क्या है एनपीएस वात्सल्य योजना और कौन कर सकता है निवेश?एनपीएस वात्सल्य वास्तव में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) का ही बच्चों के लिए तैयार किया गया विशेष विस्तार है। इसके मुख्य पात्रता मानदंड और विशेषताएं इस प्रकार हैं:पात्रता (Eligibility): भारत का कोई भी नागरिक, अनिवासी भारतीय (NRI) या ओसीआई (OCI) कार्डधारक जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम है, उसके नाम पर यह खाता खोला जा सकता है।खाता संचालक: माता-पिता या कानूनी अभिभावक नाबालिग बच्चे की ओर से खाता खोलते और संचालित करते हैं।एकमात्र लाभार्थी (Sole Beneficiary): खाते का एकमात्र लाभार्थी और मालिक बच्चा ही होता है।न्यूनतम अंशदान: खाता खोलने और उसे सक्रिय रखने के लिए न्यूनतम योगदान मात्र ₹250 प्रति वर्ष तय किया गया है। अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है।गिफ्ट कंट्रीब्यूशन: परिवार के रिश्तेदार या शुभचिंतक भी बच्चे के विशेष मौकों (जैसे जन्मदिन या त्योहार) पर उसके एनपीएस वात्सल्य खाते में गिफ्ट के रूप में अंशदान दे सकते हैं।कम्पाउंडिंग का जादू: ₹250 या ₹1,000 महीने की बचत कैसे बनेगी करोड़ों का फंडएनपीएस वात्सल्य की सबसे बड़ी ताकत है इसका लंबा निवेश क्षितिज (Investment Horizon) और चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding) की शक्ति। जब बच्चा 0 से 5 साल की उम्र में होता है, तब से लेकर उसके 60 वर्ष के होने तक लगभग 50 से 60 साल का लंबा समय मिलता है।एनपीएस के तहत फंड्स को इक्विटी (शेयर बाजार), सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) और कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से एनपीएस ने दीर्घकाल में 9.5% से 12% तक का औसत वार्षिक रिटर्न प्रदान किया है।उदाहरण के तौर पर:यदि कोई अभिभावक बच्चे के जन्म से हर महीने मात्र ₹1,000 (सालाना ₹12,000) इस खाते में जमा करता है, और इस पर औसतन 10% से 11% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो जब बच्चा 18 वर्ष का वयस्क होगा, तब तक उसके पास ₹6.5 लाख से ₹7 लाख से अधिक का फंड तैयार हो जाएगा।यदि 18 वर्ष के बाद वह बच्चा नौकरी की शुरुआत में इसी खाते में योगदान जारी रखता है, तो रिटायरमेंट की उम्र तक यही छोटा सा मासिक अंशदान कई करोड़ रुपये के विशाल पेंशन फंड में तब्दील हो जाता है।बच्चे के 18 वर्ष का होने पर क्या होगा?जब बच्चा 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तो खाता स्वतः बंद नहीं होता, बल्कि उसे कई बेहतरीन विकल्प मिलते हैं:रेगुलर NPS में कन्वर्जन: 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर आवश्यक ई-केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी करके यह खाता सामान्य 'NPS टियर-1 (All Citizen Model)' खाते में बदल जाता है। इसके बाद बच्चा खुद अपने खाते का संचालन करता है।21 वर्ष तक जारी रखने की छूट: बच्चा चाहे तो 18 से 21 वर्ष की आयु तक वात्सल्य प्रारूप में ही इसे जारी रख सकता है।एग्जिट और विड्रॉल नियम: यदि 18 वर्ष की आयु पर कोई खाताधारक योजना से बाहर निकलना (Exit) चाहता है:यदि कुल जमा कॉर्पस ₹8 लाख से कम है, तो पूरी राशि एकमुश्त (100% Lumpsum) नकद निकाली जा सकती है।यदि कुल फंड ₹8 लाख या उससे अधिक है, तो कम से कम 20% राशि से अनिवार्य रूप से एन्युइटी (पेंशन प्लान) खरीदनी होगी और शेष 80% राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है।पढ़ाई या बीमारी के समय आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) के नियमबच्चों की अनिवार्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पीएफआरडीए ने इस योजना में आंशिक निकासी की सुविधा भी दी है:खाता खुलने के 3 वर्ष पूरे होने के बाद ही आंशिक निकासी की अनुमति मिलती है।बच्चे की उच्च शिक्षा (Higher Education), गंभीर बीमारी के इलाज या 75% से अधिक दिव्यांगता की स्थिति में फंड निकाला जा सकता है।कुल निकासी केवल अभिभावक द्वारा जमा किए गए मूल योगदान (बिना रिटर्न जोड़े) के अधिकतम 25% तक ही सीमित होती है।18 वर्ष की आयु तक कुल 2 बार आंशिक निकासी की अनुमति है, जबकि 21 वर्ष तक जारी रखने पर कुल 4 बार निकासी की जा सकती है।लखनऊ, दिल्ली, कानपुर समेत देश भर में कैसे खोलें खाता?एनपीएस वात्सल्य खाता खोलना बेहद आसान है और इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पूरा किया जा सकता है:ऑनलाइन तरीका:एनएसडीएल (Protean CRA) या केफिनटेक (KFintech) के आधिकारिक ई-एनपीएस पोर्टल पर जाएं।'NPS Vatsalya' विकल्प चुनें।अभिभावक और बच्चे का विवरण दर्ज करें।आवश्यक पहचान दस्तावेज (अभिभावक का पैन, आधार व बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र/पासपोर्ट) अपलोड करें।₹250 का न्यूनतम प्रारंभिक भुगतान करें। सत्यापन पूरा होते ही बच्चे का विशिष्ट 'PRAN' (Permanent Retirement Account Number) जारी कर दिया जाएगा।ऑफलाइन तरीका:अपने नजदीकी सरकारी या निजी बैंक (जैसे SBI, PNB, HDFC, ICICI, Bank of Baroda) या डाकघर के पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (POP) केंद्र पर जाएं।एनपीएस वात्सल्य आवेदन फॉर्म भरकर केवाईसी दस्तावेजों के साथ जमा करें।अन्य बाल योजनाओं की तुलना में क्यों बेहतर है NPS वात्सल्य?पारंपरिक बाल बीमा योजनाओं या बैंक आरडी/एफडी में जहां रिटर्न 6% से 7% के आसपास सीमित रहता है, वहीं एनपीएस वात्सल्य में बाजार-आधारित इक्विटी आवंटन का लाभ मिलता है। सबसे खास बात यह है कि यह योजना बच्चों को कम उम्र से ही वित्तीय अनुशासन, निवेश और बचत की अहमियत सिखाती है। माता-पिता द्वारा लगाया गया यह छोटा सा पौधा बड़े होकर उनके बच्चे के लिए एक विशाल और सुरक्षित वित्तीय वटवृक्ष बन सकता है।
देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए टोल कलेक्शन सिस्टम एक नए और बड़े तकनीकी बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। हाल ही में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की पहलों के बीच 'OneTag' (वनटैग) की चर्चा तेजी से शुरू हुई है।इस नई व्यवस्था की घोषणा के बाद से आम वाहन चालकों के मन में कई सवाल और भ्रम हैं—क्या मौजूदा फास्टैग पूरी तरह बेकार हो जाएगा? पुराने बैंक वॉलेट में पड़े पैसों का क्या होगा? क्या नई चिप या स्टीकर खरीदना पड़ेगा? यदि आप भी इसी पशोपेश में हैं, तो यहां आसान और सीधी भाषा में समझिए OneTag का पूरा गणित और इसका जमीनी असर।आखिर क्या है OneTag और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?वर्तमान में देश में फास्टैग (FASTag) व्यवस्था लागू है, जिसे विभिन्न बैंक (जैसे SBI, ICICI, HDFC, Paytm Bank आदि) जारी करते हैं। इस व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या यह देखने को मिली कि कई लोग एक ही फास्टैग को कई गाड़ियों में इस्तेमाल करने की कोशिश करते थे, या फिर एक ही गाड़ी पर कई बैंकों के अलग-अलग फास्टैग जारी करवा लेते थे। इससे टोल प्लाजा पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) रीडर्स में एरर आते थे और गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती थीं।इसे पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने 'वन व्हीकल, वन फास्टैग' (One Vehicle, One FASTag) नियम को अपग्रेड करते हुए OneTag का एकीकृत ढांचा तैयार किया है।सरल शब्दों में कहें तो, OneTag कोई अलग से रॉकेट साइंस नहीं है, बल्कि यह एक केंद्रीकृत (Centralized) और सुव्यवस्थित पहचान प्रणाली है। इसमें प्रत्येक वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर (RC), चेसिस नंबर, वाहन मालिक का आधार/पहचान और बैंक खाता सीधे एक ही केंद्रीय राष्ट्रीय डेटाबेस से स्थायी रूप से मैप (लिंक) रहेगा। यानी एक गाड़ी पर सिर्फ एक ही एक्टिव टैग काम करेगा और उसमें दोहराव की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।सबसे बड़ा सवाल: पुराने FASTag वॉलेट में बचे पैसों का क्या होगा?अधिकांश वाहन चालकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके मौजूदा फास्टैग वॉलेट में जमा ₹500, ₹1000 या सिक्योरिटी डिपॉजिट का क्या होगा।इसको लेकर भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और बैंकों के दिशा-निर्देश पूरी तरह स्पष्ट हैं:पैसा कहीं नहीं डूबेगा: आपके पुराने FASTag वॉलेट या लिंक्ड बैंक अकाउंट में मौजूद बैलेंस 100% सुरक्षित है।ऑटोमैटिक माइग्रेशन / लिंकेज: नए OneTag आर्किटेक्चर के तहत यदि आपका मौजूदा फास्टैग पूरी तरह अपडेटेड और सिंगल बैंक से लिंक्ड है, तो आपका वही बैलेंस नए सिस्टम में स्वतः दिखने लगेगा।वॉलेट क्लोजर और रिफंड: यदि किसी तकनीकी बदलाव के कारण आपको अपना पुराना फास्टैग निष्क्रिय (Deactivate) करके नया OneTag लेना पड़ता है, तो पुराने जारीकर्ता बैंक के ऐप या पोर्टल पर जाकर 'Close Fastag' का विकल्प चुनते ही वॉलेट का शेष बैलेंस और सिक्योरिटी डिपॉजिट आपके प्राथमिक बैंक खाते (Savings Account) में 3 से 7 कार्यदिवसों के भीतर वापस क्रेडिट कर दिया जाएगा।OneTag की पूरी प्रक्रिया: वाहन चालकों को क्या करना होगा?OneTag सिस्टम में स्विच करने या नए वाहन के लिए इसे एक्टिवेट करने की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है:स्टेप 1: सिंगल टैग वेरिफिकेशन: सबसे पहले यह जांच लें कि आपकी गाड़ी की विंडशील्ड पर सिर्फ एक ही बैंक का एक्टिव फास्टैग लगा हो। यदि पुराने किसी बैंक का अमान्य या ब्लैकलिस्टेड टैग चिपका है, तो उसे तुरंत हटा दें।स्टेप 2: सेंट्रल व्हीकल मैपिंग: वाहन स्वामी का रजिस्ट्रेशन नंबर सीधे 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल के डेटाबेस से OneTag आईडी के साथ लिंक हो जाएगा।स्टेप 3: बैंक अकाउंट से सीधा लिंकेज: OneTag में अलग से बार-बार वॉलेट रिचार्ज करने के झंझट को खत्म करने के लिए इसे सीधे आपके मुख्य बैंक खाते या यूपीआई (UPI) ऑटो-पे से जोड़ने का विकल्प मिलेगा। जैसे ही आप टोल पार करेंगे, निर्धारित राशि सीधे खाते से कट जाएगी।स्टेप 4: जीपीएस/सैटेलाइट टोलिंग के लिए रेडी: यह नया वनटैग ढांचा भविष्य में लागू होने वाले 'ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम' (GNSS) आधारित बैरियर-लेस टोल कलेक्शन के लिए भी बेस प्लेटफॉर्म का काम करेगा।लखनऊ, नोएडा, दिल्ली-एनसीआर और एक्सप्रेसवे पर क्या बदलेगा?उत्तर प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे—जैसे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे—और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तथा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों को OneTag से बड़ा फायदा मिलेगा।अक्सर देखा जाता है कि लखनऊ के चिनहट या इटौंजा टोल प्लाजा, या फिर नोएडा-गाजियाबाद के बॉर्डर टोल बूथों पर स्कैनर द्वारा टैग रीड न किए जाने के कारण विवाद की स्थिति बनती है और दोगुना टोल कटने का डर रहता है। OneTag के हाई-स्पीड डेटा सिंकिंग के जरिए टोल बूथ पर वाहन के रुकने का समय घटकर शून्य से 2 सेकंड तक रह जाएगा, जिससे त्योहारों और पीक ऑवर्स में जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।अभी आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?यदि आप किसी भी प्रकार के असमंजस या टोल प्लाजा पर जुर्माने से बचना चाहते हैं, तो इन 3 बातों की जांच आज ही कर लें:केवाईसी (KYC) स्टेटस चेक करें: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के पोर्टल या अपने संबंधित बैंक के ऐप पर जाकर देखें कि आपके मौजूदा टैग का 'Fastag KYC' पूरा है या नहीं। अधूरा केवाईसी होने पर टैग तुरंत इनएक्टिव हो सकता है।मल्टीपल टैग हटाएं: यदि आपने पुरानी कार खरीदी है या पहले किसी अन्य बैंक का टैग लिया था, तो सुनिश्चित करें कि पुराना टैग बैंक स्तर पर स्थायी रूप से बंद (Surrendered) हो चुका हो।विंडशील्ड पर सही प्लेसमेंट: टैग हमेशा रियर-व्यू मिरर के ठीक पीछे शीशे के बीचों-बीच अंदर की तरफ लगाएं, जिससे टोल प्लाजा के नए सेंसर्स उसे पहली बार में ही स्कैन कर सकें।
यमन के हूती विद्रोहियों की ताकत का राज हथियार और पैसा ही नहीं है, बल्कि एक ऐसी पत्ती है जिसे चबाने से उनकी ताकत बढ़ जाती है.
Karnataka FDA ने फर्जी दवा गिरोह पर कसा शिकंजा, 16 विक्रेताओं के लाइसेंस किए रद्द
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने रविवार को बताया कि नकली दवाओं के कथित रूप से वितरण और बिक्री के मामले में 16 खुदरा एवं थोक विक्रेताओं के दवा लाइसेंस रद्द कर दिए गए जबकि आठ अन्य दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिये गये। यह कार्रवाई प्रशासन के औषधि प्रवर्तन दल की 18 अगस्त को की गई जांच के बाद हुई। जांच के दौरान बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी स्थित कुरुबरकेरनहल्ली में एक फार्महाउस पर बिना लाइसेंस वाली दवाओं की दोबारा पैकिंग और लेबल बदलने की गतिविधि का खुलासा हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान करीब 5.05 करोड़ रुपये मूल्य की नकली दवाएं, मशीनरी और प्रिंटिंग सामग्री जब्त की गई। विभाग ने एक विज्ञप्ति में बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला कि पड़ोसी राज्यों से खरीदी गई कम कीमत वाली दवाओं को नई शीशियों में कथित रूप से दोबारा पैक किया गया और उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों की महंगी जीवनरक्षक दवाओं के रूप में नए लेबल के साथ बेचा गया। विभाग के मुताबिक, इनमें ‘फाइजर’ ब्रांड के नाम वाले कथित रूप से उत्पाद भी शामिल थे। विभाग ने बताया कि नकली लेबल पर क्यूआर या स्कैनिंग कोड भी लगाए गए थे लेकिन सत्यापन के दौरान ये काम नहीं कर रहे थे। विभाग के मुताबिक, जब्त किए गए उत्पाद सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकते हैंविभाग ने बताया कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। अधिनियम की धारा 17बी के तहत नकली दवाओं को मिलावटी (स्प्यूरियस) दवाओं की श्रेणी में रखा गया है। विभाग ने बताया कि ऐसी दवाओं के निर्माण, बिक्री, भंडारण या वितरण से जुड़े अपराधों के लिए धारा 27 के तहत कठोर सजा का प्रावधान है, जिसमें कठोर कारावास और जुर्माना शामिल है।
यहां कदम रखते ही हो जाती है मौत, ये है धरती की सबसे खतरनाक जगह
धरती पर एक ऐसी भी जगह है, जहां कदम रखते ही मौत हो जाती है. यह स्थान कहीं और नहीं हमारे भारत में ही है. चलिए जानते हैं भारत में कहां ऐसी खतरनाक जगह है और वहां जाते ही लोगों की मौत क्यों हो जाती है?
तमन्ना भाटिया के बाद अब शरवरी वाघ ने की छठी मैया की पूजा, Photos
बॉलीवुड सिनेमा में अक्सर त्योहारों के बड़े-बड़े सीक्वेंस देखने को मिलते हैं, लेकिन लोक आस्था का महापर्व 'छठ' हिंदी फिल्मों की मुख्यधारा में बेहद कम देखने को मिला है. हालांकि, अब हिंदी सिनेमा का रुख बदलता नजर आ रहा है.
किन्नरों के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प... चलीं चाकू-लाठियां-VIDEO
पश्चिम बंगाल के आसनसोल में इलाके में कलेक्शन के अधिकार को लेकर दो किन्नर गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई. पांडवेश्वर में हुई घटना में करीब 8 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर है. एक पक्ष ने चाकू-लाठी से हमला, नकदी और आभूषण छीनने का आरोप लगाया है. पुलिस ने 4 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है.
देश के सबसे प्रतिष्ठित और 150 साल से अधिक पुराने औद्योगिक घराने टाटा समूह (Tata Group) की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) के शीर्ष नेतृत्व को लेकर एक बार फिर बड़ा कानूनी और प्रशासनिक टकराव सामने आ गया है। 17 सितंबर 2026 को हुई बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए दोबारा चेयरमैन पद पर नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत की निर्णायक हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) ने इस फैसले को सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह 'अवैध' और 'कानूनी रूप से शून्य' (Legal Nullity) करार दिया है।टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस पुनर्नियुक्ति का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट किया है कि यह फैसला कंपनी के आंतरिक संविधान यानी आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) के अनिवार्य प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। इस घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट जगत को वर्ष 2016 के साइरस मिस्त्री विवाद की याद दिला दी है।17 सितंबर की बोर्ड बैठक में क्या हुआ: 4-1 की वोटिंग का पूरा गणितटाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन का मौजूदा दूसरा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने वाला है। इससे पहले अगस्त महीने में उन्होंने संकेत दिया था कि वे अगला कार्यकाल नहीं लेना चाहते। हालांकि, बाद में नॉमिनेशन एवं रेम्यूनरेशन कमेटी के आग्रह पर वे पद पर बने रहने के लिए सहमत हुए और 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में उनके कार्यकाल को 2032 तक यानी 5 साल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया।बोर्ड बैठक में मतदान के दौरान कुल 5 निदेशकों ने हिस्सा लिया। प्रस्ताव के पक्ष में 4 वोट पड़े, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और नॉमिनी डायरेक्टर नोएल टाटा ने इसके विरोध में वोट डाला। इसके बाद बोर्ड ने सामान्य बहुमत के आधार पर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दे दी, जिसे अब टाटा ट्रस्ट्स ने नियमों के खिलाफ बताकर चुनौती दी है।आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) का नियम: क्यों अमान्य बता रहा है टाटा ट्रस्ट्सटाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस कोई सामान्य सूचीबद्ध कंपनी नहीं है, बल्कि इसके गवर्नेंस नियम इसके विशेष 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' (AoA) से बंधे हैं।ट्रस्ट्स की ओर से पेश किए गए कानूनी तर्कों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:नॉमिनी डायरेक्टर्स का बहुमत अनिवार्य: एओए के नियमों (विशेष रूप से आर्टिकल 104B और 121) के तहत, टाटा संस के चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति जैसे बड़े नीतिगत फैसले के लिए बोर्ड में मौजूद टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों (Nominee Directors) के बहुमत का सकारात्मक समर्थन (Affirmative Vote) होना अनिवार्य है।दो में से बहुमत यानी दोनों के वोट: वर्तमान में टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के दो नॉमिनी डायरेक्टर हैं—नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन। ट्रस्ट्स का तर्क है कि जब केवल दो प्रतिनिधि हैं, तो बहुमत का मतलब दोनों का सहमत होना है। चूंकि नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया, इसलिए अनिवार्य शर्त पूरी नहीं हुई।कास्टिंग वोट से नियम को बाईपास नहीं किया जा सकता: ट्रस्ट्स ने साफ किया कि चेयरमैन या चेयरिंग डायरेक्टर के स्पेशल/कास्टिंग वोट का इस्तेमाल केवल तब होता है जब सामान्य वोटों में बराबरी (टाई) हो, इसका इस्तेमाल ट्रस्ट के विशेष वीटो या सहमति के नियम को पलटने के लिए नहीं किया जा सकता।पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय का लिया सहाराइस मामले में अपने रुख को पुख्ता करने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से कानूनी सलाह ली है।रिपोर्ट्स के अनुसार, प्राप्त कानूनी राय में यह स्पष्ट किया गया है कि टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की सहमति एक स्वतंत्र और पूर्व-शर्त (Independent Condition) है। यदि यह शर्त पूरी नहीं होती है, तो सामान्य बोर्ड का कोई भी बहुमत या कास्टिंग वोट इस प्रस्ताव को वैध नहीं बना सकता। टाटा ट्रस्ट्स ने यह भी याद दिलाया कि साइरस मिस्त्री केस के समय सुप्रीम कोर्ट में खुद टाटा संस ने ट्रस्ट्स के इन विशेष वोटिंग अधिकारों का जोरदार बचाव किया था, ऐसे में कंपनी अब अपने ही पुराने विधिक रुख से पीछे नहीं हट सकती।विवाद की अन्य अंतर्निहित वजहें: एयर इंडिया घाटा और बाजार लिस्टिंगसूत्रों और उद्योग जानकारों के मुताबिक, यह टकराव केवल चेयरमैन के पद तक सीमित नहीं है, बल्कि समूह के संचालन को लेकर गहरे नीतिगत मतभेद भी इसकी जड़ में हैं:टाटा संस की शेयर बाजार लिस्टिंग: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 'अपर-लेयर NBFC' नियमों के तहत टाटा संस पर लिस्टिंग का दबाव रहा है। टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि पब्लिक लिस्टिंग से टाटा समूह के धर्मार्थ (Charitable) चरित्र और स्वायत्तता को नुकसान पहुंचेगा।एयर इंडिया का वित्तीय प्रदर्शन: जनवरी 2022 में सरकार से एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद से एयरलाइन विस्तार में हो रहे भारी खर्च और संचित वित्तीय घाटे को लेकर भी ट्रस्ट्स और बोर्ड के बीच असंतोष की खबरें रही हैं।सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स में भारी निवेश: समूह के नए पूंजी-गहन प्रोजेक्ट्स और रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट को लेकर शेयरधारकों के स्तर पर अलग-अलग राय सामने आई है।आगामी एजीएम (AGM) पर टिकी निगाहें: क्या होगा अगला कदम?बोर्ड द्वारा पारित इस प्रस्ताव को अंतिम रूप से प्रभावी होने के लिए आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की औपचारिक मंजूरी मिलना आवश्यक है।चूंकि टाटा ट्रस्ट्स के पास कंपनी के 66% शेयर हैं, इसलिए एजीएम के मंच पर यह शक्ति-संतुलन बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए कोई सर्वसम्मत समाधान नहीं निकलता है, तो यह मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) या अदालती चौखट तक भी पहुंच सकता है।
21 या 22 सितंबर, परिवर्तिनी एकादशी कब है? जानें सही तिथि और मुहूर्त
Parivartini Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात 8:01 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर की रात 9:43 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा.
कभी पैसे को तरसा, अब USA में PhD के लिए मिले 2.6 करोड़, बिहार के नीरज की सफलता की कहानी
बिहार के सारण जिले में पान विक्रेता के बेटे नीरज कुमार सिंह ने अमेरिका में 2.6 करोड़ रुपये की पूर्ण वित्तपोषित पीएचडी छात्रवृत्ति हासिल की है. नेहरू युवा केंद्र से शुरू हुए सफर से लेकर 'यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स' तक, जानिए उनकी संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी.
IPS केके बिश्नोई की टीम ने पकड़ी हनीट्रैप गैंग, पुलिस के सामने फूट-फूटकर रोने लगी महिला
IPS केके विश्नोई की टीम ने बिजनौर में बब्बू लंगड़ा हनीट्रैप गैंग का भंडाफोड़ कर 4 महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक आरोपी महिला फूट-फूटकर रोने लगी और पुलिस से गुहार लगाने लगी. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
PM Modi के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर Vadnagar और Varanasi के बीच दो बाइक रैलियां
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 25 साल की जनसेवा के उपलक्ष्य में दो बाइक रैलियां (वडनगर से वाराणसी और वाराणसी से वडनगर) अलग-अलग ज़िलों, कस्बों और गांवों से गुजर रही हैं तथा सेवा की भावना को जमीनी स्तर तक पहुंचा रही हैं। दोनों रैलियों से जुड़े लोगों ने बताया कि यात्रा में शामिल लोग स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने वाले कामों में शामिल होकर ‘सेवा’ भी कर रहे हैं। इन रैलियों का एक मुख्य उद्देश्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों, युवाओं और महिलाओं से बातचीत करके कल्याण एवं सशक्तीकरण की पहल से आए बदलावों को समझना है। आयोजकों ने कहा कि प्रतिभागी एक ऐसी यात्रा पर निकले हैं जिसका मोटरसाइकिल रैलियों से कहीं अधिक महत्व है। दोनों बाइक रैलियों के प्रतिभागी ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पेड़ लगाने के साथ-साथ तालाबों, मंदिरों, स्कूलों, पार्क, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक जगहों पर सफाई अभियानों में भी हिस्सा ले रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को जन-सेवा और समाज-सेवा तथा राष्ट्र-निर्माण से जोड़ना तथा सेवा एवं देशभक्ति की भावना को मज़बूत करना है। पीएम श्री स्कूलों में, दोनों रैलियों में शामिल लोग परिसरों की सफ़ाई कर रहे हैं, छात्रों से बातचीत कर रहे हैं और किताब-कॉपी बांट रहे हैं। मामले की जानकारी रखने वालों ने बताया कि अस्पतालों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में वे जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि यह यात्रा ‘संपर्क’ और ‘संवाद’ दोनों के बारे में है। युवाओं से बातचीत, गांवों में बैठकें, ग्राम स्तर के नेताओं, महिलाओं और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से बातचीत की वजह से सीधे संवाद करने, लोगों की उम्मीदों को समझने और जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने के अवसर बन रहे हैं। अंगदान का संकल्प त्याग की भावना को बढ़ावा देता है, जबकि शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को दी जाने वाली श्रद्धांजलि समुदायों को देश के इतिहास और नायकों से जोड़ रही है। दो बाइक रैलियों को प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर 17 सितंबर को क्रमशः वडनगर और वाराणसी से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया तथा ये सात अक्टूबर को गंतव्य पर पहुंचेंगी। गुजरात का वडनगर मोदी का जन्मस्थान है, जबकि उत्तर प्रदेश का वाराणसी 2014 से उनका लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है। मोदी 7 अक्टूबर 2001 से 22 मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। वह 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री बने और तब से लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर इस पद पर बने हुए हैं। भाजपा ने मोदी की 25 साल की जन-सेवा को दर्शाने के लिए एक अभियान शुरू किया है, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर उनके सफ़र से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री बनने तक का सफर शामिल है। रैली के राष्ट्रीय प्रभारी वी.डी. शर्मा ने बताया कि वडनगर से वाराणसी तक की रैली लगभग 40,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और 10 राज्यों के 193 ज़िलों तथा लगभग 1,159 गांवों से होकर गुज़रेगी। लगभग 1,000 युवा इस दोतरफ़ा यात्रा में भाग ले रहे हैं। बाइक रैलियां झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के उन इलाकों से गुजरेंगी जो पहले नक्सलवाद से प्रभावित थे।
'महाभारत' के 'भीम' सौरव को जेल, महिला को दिया शादी का झांसा
एक्टर और प्रोफेशनल रेसलर सौरव गुर्जर के खिलाफ एक महिला ने शादी का झूठा वादा कर धोखा देने और उत्पीड़न का आरोप लगाया है. महिला ने बताया कि गुर्जर ने इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क बनाया और शादी का वादा किया.
देशभर के कारोबारियों, प्रोफेशनल्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) के लिए सितंबर का यह अंतिम पखवाड़ा अत्यंत व्यस्त और महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। वित्तीय वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 44AB के तहत टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (Form 10B/3CA/3CB के साथ Form 3CD) दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 तय है।इस बार टैक्स ऑडिट प्रक्रिया पिछले वर्षों की तरह सामान्य 'रोल-फॉरवर्ड' या कॉपी-पेस्ट आधारित नहीं रहने वाली है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा अधिसूचित संशोधनों के तहत फॉर्म 3CD के विवरणों में 8 बड़े और कड़े बदलाव लागू किए जा चुके हैं। यदि करदाता या टैक्स ऑडिटर पुराने फॉर्मेट के आधार पर ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करते हैं, तो पोर्टल पर त्रुटि (Defective Return) आ सकती है या आयकर विभाग की तरफ से भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।1. क्लॉज 12: प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन में सेक्शन 44BBC की नई एंट्रीफॉर्म 3CD के क्लॉज 12 में प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट (P&L) में शामिल उन लाभों की रिपोर्टिंग की जाती है जो अनुमानित कराधान (Presumptive Taxation) के आधार पर कर योग्य होते हैं।इस संशोधन के तहत क्लॉज 12 में अब सेक्शन 44BBC को अनिवार्य रूप से जोड़ दिया गया है। यह सेक्शन विशेष रूप से कुछ निर्दिष्ट क्रूज जहाजों के संचालन से होने वाले लाभ के विशेष कराधान से जुड़ा है। यदि किसी निर्धारिती के खाते में इस श्रेणी की आय शामिल है, तो उसे अब पुराने सेक्शन (44AD, 44ADA, 44AE) के साथ अलग से कोडिफाई करके दिखाना होगा।2. क्लॉज 19: चार पुराने डिडक्शन रो (Legacy Deductions) को हटाया गयाआयकर कानूनों के सरलीकरण और अप्रासंगिक हो चुके प्रावधानों को हटाने के क्रम में क्लॉज 19 से चार पुरानी कटौती पंक्तियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है:सेक्शन 32AC (मैन्युफैक्चरिंग में नए प्लांट व मशीनरी में निवेश पर कटौती)सेक्शन 32AD (अधिसूचित पिछड़े क्षेत्रों में निवेश पर कटौती)सेक्शन 35AC (सामाजिक व आर्थिक कल्याणकारी परियोजनाओं पर खर्च)सेक्शन 35CCB (पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों पर व्यय)कर सलाहकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ऑडिट वर्किंग पेपर्स में इन निरस्त वर्गों के कॉलम हटा दें ताकि ई-फाइलिंग यूटिलिटी में एक्सएमएल/जेसन (JSON) एरर न आए।3. क्लॉज 21: सेटलमेंट और कानूनी उल्लंघन खर्चों की अलग रिपोर्टिंगक्लॉज 21(a) के दायरे को अत्यधिक सख्त बनाया गया है। पहले केवल किसी कानून के उल्लंघन के लिए लगाए गए दंड या जुर्माने (Penalties) को डिसअलो (Disallow) श्रेणी में दिखाया जाता था।अब केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी भी कानून के तहत शुरू की गई दंडात्मक या नियामक कार्यवाहियों को निपटाने (Settlement) के लिए किए गए खर्चों को अलग से रिपोर्ट करना अनिवार्य कर दिया गया है। यानी यदि किसी कंपनी ने सेबी (SEBI), फेमा (FEMA) या अन्य नियामक जांच से बचने के लिए कोई सेटलमेंट फीस या कंपाउंडिंग चार्ज चुकाया है, तो उसे अब व्यापारिक खर्च मानकर क्लेम नहीं किया जा सकेगा और ऑडिटर को इसकी स्पष्ट जानकारी देनी होगी।4. क्लॉज 22: MSME भुगतान और ब्याज का बदला हुआ ढांचायह बदलाव पूरे व्यापार जगत के लिए सबसे अधिक संवेदनशील है। संशोधित क्लॉज 22 के तहत अब एमएसएमई (सूक्ष्म और लघु उद्यम) अधिनियम के सेक्शन 15 और 23 के अंतर्गत लेन-देन की त्रिस्तरीय रिपोर्टिंग मांगी गई है:एमएसएमईडी एक्ट के सेक्शन 23 के तहत अमान्य घोषित ब्याज की राशि।वित्त वर्ष के दौरान सूक्ष्म या लघु उद्यमों को सेक्शन 15 के तहत देय कुल राशि।निर्धारित समय सीमा (15 या अधिकतम 45 दिन) के भीतर चुकाई गई कुल राशि।तय समयसीमा के भीतर न चुकाई गई और कर योग्य आय में जोड़ी जाने वाली (Inadmissible) बकाया राशि।5. क्लॉज 26: सेक्शन 43B(h) के लिए विशेष रिपोर्टिंग व्यवस्थासेक्शन 43B के अंतर्गत क्लॉज 26 को अद्यतन करते हुए 'Allowed' शब्द के स्थान पर 'Allowable' किया गया है और इसमें सेक्शन 43B(h) को स्पष्ट रूप से अलग किया गया है।साधारण सेक्शन 43B खर्चों (जैसे टैक्स, ड्यूटी, बैंक ब्याज) में छूट यह होती है कि यदि उनका भुगतान इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की नियत तारीख से पहले कर दिया जाए, तो कटौती मिल जाती है। लेकिन एमएसएमई के भुगतान यानी 43B(h) पर यह रिटर्न फाइलिंग तक की छूट लागू नहीं होती। 31 मार्च तक जो राशि बकाया रह गई और समय सीमा पार हो चुकी है, वह सीधे उसी वर्ष के मुनाफे में जुड़ जाएगी। फॉर्म 3CD में अब इसे अलग से उजागर करना अनिवार्य है।6. क्लॉज 28 और 29 को फॉर्म 3CD से किया गया बाहरऑडिट रिपोर्ट को आधुनिक कर प्रणाली के अनुरूप बनाने के लिए फॉर्म 3CD से क्लॉज 28 और क्लॉज 29 को पूरी तरह हटा (Omit) दिया गया है।क्लॉज 28 में बिना प्रतिफल या अपर्याप्त प्रतिफल पर प्राप्त शेयरों से संबंधित पुराने नियमों की रिपोर्टिंग होती थी, जबकि क्लॉज 29 में फेयर मार्केट वैल्यू से अधिक पर शेयर जारी करने पर विचार किया जाता था। इन दोनों क्लॉजों के हटने के बाद अब ऑडिटर्स को इस सेक्शन में कोई डेटा फीड नहीं करना है।7. क्लॉज 31: लोन, डिपॉजिट और रीपेमेंट के लिए नेचर कोड्स अनिवार्यकैश ट्रांजैक्शन और हवाला लेन-देन पर रोक लगाने के लिए क्लॉज 31 को अत्यधिक विस्तृत बना दिया गया है। सेक्शन 269SS और 269T के तहत 20,000 रुपये या उससे अधिक के लोन, डिपॉजिट और उनके पुनर्भुगतान की रिपोर्टिंग में अब केवल राशि और नाम देना पर्याप्त नहीं होगा।अब ऑडिटर को प्रत्येक लेन-देन के लिए निर्दिष्ट नेचर और मोड कोड (Nature and Mode Codes) दर्ज करने होंगे। इसमें स्पष्ट करना होगा कि लेन-देन:नकद में हुआ,गैर-अकाउंट पेयी चेक/ड्राफ्ट से हुआ,संपत्ति या देनदारी के ट्रांसफर/कन्वर्जन के जरिए हुआ,या केवल जर्नल एंट्री (खाता समायोजन) के जरिए डेबिट/क्रेडिट किया गया।8. नया क्लॉज 36B: शेयर बायबैक पर मिली राशि का खुलासाफॉर्म 3CD में जोड़ा गया सबसे नया क्लॉज Clause 36B है। यह क्लॉज शेयर बायबैक (Share Buyback) से जुड़ी प्राप्तियों पर नजर रखने के लिए लाया गया है।यदि करदाता को आयकर अधिनियम के सेक्शन 2(22)(f) के अंतर्गत कवर होने वाले शेयरों के बायबैक पर कोई राशि प्राप्त हुई है, तो ऑडिटर को इस नए क्लॉज में दो मुख्य जानकारियां दर्ज करनी होंगी:बायबैक पर कुल कितनी धनराशि प्राप्त हुई।उन बायबैक किए गए शेयरों की वास्तविक अधिग्रहण लागत (Cost of Acquisition) क्या थी।लखनऊ, दिल्ली, मुंबई समेत देश भर के व्यापारिक हब में हलचलउत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों—जैसे लखनऊ (अमीनाबाद, ट्रांसपोर्ट नगर, हजरतगंज), कानपुर (माल रोड, फजलगंज इंडस्ट्रियल एरिया), नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी और आगरा—से लेकर दिल्ली-एनसीआर और मुंबई तक चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के कार्यालयों में काम का भारी दबाव देखा जा रहा है।विशेष रूप से एमएसएमई क्लॉज (क्लॉज 22 और 26) के कारण छोटे विनिर्माताओं और थोक व्यापारियों को अपने सभी सप्लायर्स के उद्यम आधार (Udyam Aadhar) सर्टिफिकेट और 31 मार्च की इनवॉइस-वार पेंडेंसी का मिलान करना पड़ रहा है। जिन कारोबारियों ने एमएसएमई सप्लायर्स को समय पर भुगतान नहीं किया है, उन्हें भारी टैक्स असेसमेंट का सामना करना पड़ सकता है।30 सितंबर की समयसीमा चूके तो क्या होगा नुकसानटैक्स ऑडिट रिपोर्ट 30 सितंबर तक ऑनलाइन फाइल न करने की स्थिति में आयकर अधिनियम के सेक्शन 271B के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इसके तहत:कुल कारोबार/टर्नओवर का 0.5%, याअधिकतम ₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये)—जो भी कम हो, पेनल्टी के रूप में करदाता पर ठोका जा सकता है।इसके अतिरिक्त, ऑडिट रिपोर्ट समय पर न जाने से 31 अक्टूबर तक भरी जाने वाली अंतिम इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भी प्रभावित हो सकती है और करदाता को नुकसान (Losses) को आगे ले जाने (Carry Forward) की अनुमति नहीं मिलेगी। इसलिए कारोबारी तुरंत अपने सीए से संपर्क कर इन 8 नए क्लॉजों के अनुरूप अपने खाते फाइनल करें।
वैश्विक भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए सितंबर 2026 का अंतिम सप्ताह ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों—अमेरिका और चीन—के बीच वाशिंगटन डीसी में सर्वोच्च स्तर की सीधी वार्ता होने जा रही है। 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्हाइट हाउस में बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय शिखर बैठक (Trump-Xi Summit) निर्धारित है।इसके ठीक दो दिन बाद, 26 सितंबर को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें उच्च-स्तरीय सत्र में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर दुनिया के 193 देशों के सामने भारत और 'ग्लोबल साउथ' की दमदार आवाज बुलंद करेंगे। इन दोनों वैश्विक आयोजनों के संयोग ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा, व्यापार और राजनयिक हलकों में भारी उत्सुकता पैदा कर दी है।24 सितंबर: वाशिंगटन में ट्रंप और शी जिनपिंग की आमने-सामने वार्ता24 सितंबर को वाशिंगटन में होने वाली ट्रंप-शी बैठक वर्ष 2026 में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच दूसरी सीधी मुलाकात होगी, इससे पहले दोनों नेता मई में बीजिंग में मिले थे। इस शिखर वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक, तकनीकी और सामरिक तनावों के बीच एक नाजुक स्थिरता स्थापित करना है।व्हाइट हाउस और चीनी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस वार्ता में कई ज्वलंत मुद्दे केंद्र में रहने वाले हैं:टैरिफ, व्यापार और निवेश बोर्ड: मई में तय किए गए द्विपक्षीय व्यापार बोर्ड (Board of Trade) के क्रियान्वयन, अमेरिकी कृषि उत्पादों और बोइंग विमानों की चीनी खरीद पर प्रगति की समीक्षा।क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर: रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ पृथ्वी खनिजों) की वैश्विक सप्लाई चेन और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप्स पर अमेरिकी निर्यात प्रतिबंधों को लेकर चर्चा।ताइवान और दक्षिण चीन सागर: ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी सैन्य दबाव और अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की आपूर्ति पर दोनों पक्षों का कड़ा रुख।मिडिल ईस्ट और ईरान प्रतिबंध: मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और ईरान के परमाणु कार्यक्रम व तेल व्यापार को लेकर चीनी भूमिका पर अमेरिकी चिंताओं का निपटारा।26 सितंबर: यूएन महासभा में भारत की दमदार आवाज बनेंगे एस जयशंकरवाशिंगटन में अमेरिका-चीन वार्ता के तुरंत बाद दुनिया का ध्यान न्यूयॉर्क पर केंद्रित होगा। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर 81वें यूएन महासभा सत्र के 'हाई-लेवल वीक' में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और 26 सितंबर की दोपहर आम बहस (General Debate) को संबोधित करेंगे।यूएन के इस वैश्विक मंच से भारत के संबोधन में कई प्रमुख प्राथमिकताएं उभर कर सामने आने की उम्मीद है:यूएनएससी (UNSC) में सुधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता और विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व देने की पुरानी मांग को पूरी ताकत से दोहराना।ग्लोबल साउथ की आवाज: रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व के तनाव के चलते बढ़ती खाद्य, उर्वरक और ईंधन की कीमतों से प्रभावित विकासशील व अविकसित देशों के अधिकारों की वकालत।सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा संदेश: बिना किसी दोहरे मापदंड के आतंकवाद को पनाह देने वाले मुल्कों और उनके प्रायोजकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करना।द्विपक्षीय व बहुपक्षीय कूटनीति: इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री 'क्वॉड' (Quad), ब्रिक्स (BRICS), आईबीएसए (IBSA) और जी20 साझेदार देशों के अपने समकक्षों के साथ दर्जनों उच्च-स्तरीय बैठकें भी करेंगे।भारत, नई दिल्ली और स्थानीय सुरक्षा परिदृश्य पर इसका रणनीतिक असरवाशिंगटन से लेकर न्यूयॉर्क तक चलने वाली इस कूटनीतिक कवायद का सीधा सरोकार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ा है। नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में बैठे रक्षा नीति विशेषज्ञ ट्रंप-शी वार्ता के हर बारीक पहलू पर नजर रखे हुए हैं।वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच जारी सैन्य गतिरोध और सीमा प्रबंधन के संदर्भ में अमेरिका-चीन के बीच बनने वाली किसी भी सामरिक समझ का हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र के शक्ति संतुलन पर असर पड़ना तय है। यदि अमेरिका और चीन के बीच कारोबारी मोर्चे पर कोई समझौता बनता है, तो भारतीय विनिर्माण और आईटी निर्यातकों के लिए आपूर्ति श्रृंखला के नए समीकरण बन सकते हैं।वहीं दूसरी ओर, 26 सितंबर को यूएन में भारत का भाषण यह साफ करेगा कि भारत किसी भी गुटबाजी का हिस्सा बने बिना अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) पर अडिग रहेगा और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने की दिशा में अपनी वैश्विक भूमिका को मजबूती से आगे बढ़ाएगा।सुपरपावर कूटनीति का आने वाले महीनों पर क्या होगा प्रभाव24 और 26 सितंबर की ये दो घटनाएं इस बात का फैसला करेंगी कि आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति टकराव की ओर जाएगी या बातचीत के जरिए नए नियम गढ़े जाएंगे। जहां एक तरफ वाशिंगटन शिखर सम्मेलन अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक शीत युद्ध में अचानक आने वाले झटकों को रोकने की कवायद है, वहीं दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत का संबोधन यह सिद्ध करेगा कि विकासशील दुनिया की आवाज को नजरअंदाज करके कोई भी वैश्विक व्यवस्था स्थाई नहीं हो सकती।
घर के बाहर सो रहा था युवक, सुबह मिली सिर कटी लाश; इलाके में मचा कोहराम
मृतक की पहचान 25 साल के इसाक बागवान के रूप में हुई है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इसाक अपने घर के बाहर खाट पर सो रहा था.
नेताजी पर टिप्पणी को लेकर Ranchi में BJP सांसद Nagendranath Roy के खिलाफ प्रदर्शन
बंगाली समुदाय के सदस्यों ने यहां विरोध प्रदर्शन किया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए पश्चिम बंगाल से भाजपा के राज्यसभा सदस्य नागेंद्रनाथ रॉय के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की। झारखंड मुक्ति मोर्चा की राज्यसभा सदस्य महुआ मांझी ने रांची के लालपुर चौक से थारपाखना रोड स्थित यूनियन क्लब तक निकाली गई विरोध रैली में हिस्सा लिया और कहा कि बंगाली समुदाय नेताजी का कोई भी अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा। अनंत महाराज के नाम से भी चर्चित रॉय ने नेताजी को “युद्ध अपराधी” बताते हुए भारत की आजादी की लड़ाई में उनके नेतृत्व और आजाद हिंद फौज की भूमिका पर सवाल उठाए थे। रॉय पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में कूच बिहार से हैं और राजबंशी समुदाय के नेता हैं। इन टिप्पणियों से नाराज, ‘बांग्ला सांस्कृतिक कर्मिब्रिंदो’ के बैनर तले बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के लोगों ने रवींद्रनाथ टैगोर के गीत गाते हुए एक रैली निकाली। इस विरोध मार्च का मुख्य आकर्षण एक विंटेज कार थी, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर बोस ने 1940 में झारखंड के रामगढ़ जिले में एक बैठक में शामिल होने के लिए किया था। मांझी ने कहा, “भाजपा के राज्यसभा सदस्य अनंत महाराज ने बार-बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं, उन्हें युद्ध अपराधी कहा और आजाद हिंद फौज पर सवाल उठाए। रांची का बंगाली समुदाय नेताजी का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।”रैली के संयोजक सुबीर लाहिड़ी ने कहा कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक रॉय को गिरफ्तार नहीं किया जाता और वह सांसद पद से इस्तीफा नहीं दे देते। अपमानजनक टिप्पणियों के बाद, पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने रॉय को दिए गए राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ को पिछले महीने वापस ले लिया और रद्द कर दिया। बंगाल के मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया था कि वे सोशल मीडिया पर नेताजी के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ गिरफ्तारी समेत सख्त कार्रवाई करें और उनका कहना था कि कानून सांसदों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होगा।
'UP के होंगे चार हिस्से, पूर्वांचल राज्य बना तो राजभर का बेटा होगा CM', ओपी राजभर का बड़ा बयान
देवरिया की रैली में ओम प्रकाश राजभर ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की बात कही. उन्होंने अलग पूर्वांचल राज्य बनने पर राजभर का बेटा पहला मुख्यमंत्री बनने का दावा किया. साथ ही 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण में हिस्सेदारी की मांग भी उठाई.
देश की राजधानी दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस सत्यापन प्रक्रिया के तहत केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और उनकी पत्नी समेत कई दिग्गजों को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है।इस सूची में केवल राजनीतिक हस्तियां ही नहीं, बल्कि देश के कई शीर्ष नौकरशाह, जांच एजेंसियों के प्रमुख और पूर्व सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं। नोटिस जारी होने की खबर सामने आते ही राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में व्यापक चर्चा छिड़ गई है।विदेश मंत्री एस जयशंकर को क्यों मिला SIR नोटिसचुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको एस जयशंकर नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सुंदर बाग पोलिंग स्टेशन के तहत पंजीकृत मतदाता हैं। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान उनके मौजूदा वोटर रिकॉर्ड को दिल्ली में वर्ष 2002 में हुए पिछले सघन पुनरीक्षण (Last SIR) के डेटा से सीधे लिंक (मैप) नहीं किया जा सका।इस तकनीकी वजह से उन्हें 'अनमैप्ड विद लास्ट एसआईआर' (Unmapped with last SIR) श्रेणी में रखा गया है। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल दस्तावेजों के पुनर्सत्यापन और डेटाबेस को अद्यतन (अपडेट) करने के लिए उठाया गया एक सामान्य प्रक्रियात्मक कदम है।लिस्ट में शामिल अन्य दिग्गज राजनेता और उनके परिवारविदेश मंत्री के अलावा दिल्ली की राजनीति और विपक्ष के कई बड़े चेहरों को भी इस सत्यापन प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी हुए हैं:मनीष सिसोदिया और परिवार: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया और उनके बेटे मीर सिसोदिया को भी नोटिस मिला है। परिजनों के रिकॉर्ड में नाम और अभिभावक के विवरण (Mismatch) से जुड़ी विसंगतियों की बात सामने आई है।अरविंद केजरीवाल का परिवार: इससे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल और उनके परिजनों को भी पिछले रिकॉर्ड से डेटा का पूर्ण मिलान न होने के कारण 'अनमैप्ड' श्रेणी में रखते हुए नोटिस जारी किया गया था।लालकृष्ण आडवाणी परिवार: वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की पुत्री प्रतिभा आडवाणी का नाम भी इस प्रक्रिया के तहत सत्यापन सूची में शामिल रहा है।जॉन ब्रिटास का परिवार: माकपा (CPM) सांसद जॉन ब्रिटास की पत्नी शेबा ब्रिटास और बेटे आनंद ब्रिटास को नाम और संबंध विवरण में विसंगति के चलते नोटिस जारी किया गया है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का रिकॉर्ड: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी आयु संबंधी तकनीकी विसंगति के कारण पूर्व में नोटिस मिला था, लेकिन बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद उनके सभी दस्तावेजों की पुष्टि कर ली गई है और उनका नाम अंतिम सूची के लिए मान्य कर दिया गया है।शीर्ष नौकरशाह, पूर्व जज और सुरक्षा प्रमुख भी जांच के दायरे मेंचुनावी डेटाबेस के इस गहन पुनरीक्षण की जद में देश के प्रशासनिक ढांचे के कई प्रमुख चेहरे भी आए हैं:सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक प्रवीण सूद, उनकी पत्नी वनिता सूद और उनकी मां कमलेश सूद को भी 'अनमैप्ड' श्रेणी के तहत नोटिस मिला है।पूर्व थलसेना प्रमुख: पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी का नाम भी पिछली मतदाता सूची से लिंक न होने की वजह से इस प्रक्रिया में शामिल है।पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज: उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई और उनके परिवार के सदस्यों को भी इस श्रेणी में रखा गया है।वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी: विदेश सचिव विक्रम मिस्री, सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद, स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव और कैग (CAG) के संजय मूर्ति जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के रिकॉर्ड भी सत्यापन प्रक्रिया के दायरे में हैं।'अनमैप्ड' और SIR नोटिस का क्या है असली मतलबमतदाता सूची के इस बड़े अभियान को लेकर लोगों के मन में कई प्रकार के भ्रम हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि नोटिस मिलने का मतलब मतदाता सूची से नाम कटना या किसी को वोट देने से वंचित करना बिल्कुल नहीं है।दरअसल, जब किसी नागरिक का मौजूदा मतदाता पहचान पत्र पिछले डिजिटल रिकॉर्ड्स (विशेष रूप से 2002 की एसआईआर सूची) से तकनीकी रूप से मेल नहीं खाता, या नाम, पिता के नाम व जन्मतिथि की स्पेलिंग में अंतर होता है, तो सिस्टम स्वतः उसे सत्यापन के लिए चिह्नित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य चुनावी रिकॉर्ड को पारदर्शी, त्रुटिरहित और शत-प्रतिशत सटीक बनाना है।कब तक होगा निस्तारण और कब जारी होगी अंतिम वोटर लिस्टनिर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार, जिन भी मतदाताओं (चाहे वे आम नागरिक हों या वीवीआईपी) को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) या बीएलओ के समक्ष जरूरी पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।नोटिस निस्तारण की अंतिम तिथि: आयोग ने प्राप्त दावों और आपत्तियों के निस्तारण के लिए 29 अक्टूबर की समयसीमा तय की है।अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: सभी आवश्यक भौतिक सत्यापनों और सुधारों को शामिल करते हुए 4 नवंबर को दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
Gandhi Sagar अभयारण्य में छोड़ी गई बोत्सवाना से आई मादा चीता CCB-2, MP में संख्या 56 पार
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में बोत्सवाना से लाई गई एक मादा चीता को छोड़ा और इसे राज्य की समृद्ध जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति मध्यप्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण करार दिया। इसके साथ ही नीमच जिले के इस अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है, जिनमें दो नर एवं दो मादा चीते शामिल हैं जबकि शावकों से इतर मध्यप्रदेश में अब 56 से अधिक चीते हो गए हैं। चीता परियोजना के तीसरे चरण में आज गांधीसागर अभयारण्य में छोड़ी गई मादा चीता को सीसीबी-2 नाम दिया गया है। यादव ने कहा, इसके साथ ही हम इस परियोजना की पूर्णता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यहां गत वर्ष छोड़े गए चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुई चीता परियोजना सफलता के नए मानदंड स्थापित कर रहा है, वहीं मध्यप्रदेश में विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को पुनर्स्थापित करने का कार्य निरंतर जारी है। उन्होंने कहा, हम पहले से ही टाइगर स्टेट हैं, अब घड़ियाल, गिद्ध और चीते के साथ चीता स्टेट के रूप में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। असम से जंगली भैंसे लाए गए हैं और प्रदेश में गजराजों की संख्या भी लगभग 100 हो गई है। उन्होंने कहा कि इनसे मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छोड़ी गई मादा चीते के साथ ही मध्यप्रदेश में अब 56 से अधिक चीते हो गए हैं। उन्होंने कहा, यह मध्यप्रदेश की समृद्ध जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार चीता संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रभावी प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, यह केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि एशिया की भी एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परियोजना है। एक समय एशिया से चीते विलुप्त हो गए थे और मध्यप्रदेश में भी इनकी उपस्थिति समाप्त हो गई थी। आज यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि मध्यप्रदेश की धरती पर एक बार फिर चीते स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीता संरक्षण की यह उपलब्धि वन्यजीवों के प्रति जियो और जीने दो की भावना को दर्शाती है और यह हमारे वन विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।
देशभर के करोड़ों बैंक खाताधारकों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण और जरूरी अलर्ट है। यदि आपको चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट बनवाने, नकदी जमा करने, केवाईसी अपडेट या शाखा में जाकर कोई जरूरी दस्तावेज जमा करने जैसा काम निपटाना है, तो उसे समय रहते पूरा कर लें। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने ग्राहकों के लिए आधिकारिक सूचना और एडवाइजरी जारी करते हुए आगाह किया है कि 28 सितंबर से 30 सितंबर तक बैंक शाखाओं का कामकाज व्यापक रूप से प्रभावित रह सकता है।सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस प्रस्तावित हड़ताल से ठीक पहले 26 सितंबर को महीने का चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार का साप्ताहिक अवकाश है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश के कई हिस्सों में लगातार 5 दिनों (26 से 30 सितंबर) तक शाखा आधारित सामान्य बैंकिंग सेवाएं ठप हो सकती हैं।28 से 30 सितंबर तक क्यों प्रभावित रहेंगी बैंक शाखाएंबैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के 90 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधित्व वाले सात प्रमुख यूनियनों के शीर्ष संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।बैंक यूनियनों की मुख्य मांगों में बैंकिंग क्षेत्र में 5-डे वर्क वीक (सप्ताह में पांच कार्यदिवस) को पूरी तरह लागू करना, पर्याप्त नई भर्तियां करना, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और संविदा कर्मचारियों के नियमन जैसे ज्वलंत मुद्दे शामिल हैं। कर्मचारियों की भारी भागीदारी के चलते सरकारी और पुराने निजी बैंकों की शाखाओं में पब्लिक डीलिंग का काम पूरी तरह रुकने या गंभीर रूप से प्रभावित होने की प्रबल आशंका है।SBI ने ग्राहकों से क्या कहा: जारी की विशेष एडवाइजरीदेश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने नियामक फाइलिंग और सार्वजनिक नोटिस जारी कर कहा है कि वह हड़ताल की अवधि के दौरान आवश्यक बैंकिंग सेवाएं बनाए रखने के हरसंभव प्रयास कर रहा है। हालांकि, कर्मचारियों और अधिकारियों की भागीदारी के अनुपात के अनुसार शाखाओं में कामकाज पर असर पड़ सकता है।एसबीआई ने अपने ग्राहकों से स्पष्ट अपील की है:शाखा से जुड़े सभी आवश्यक लेन-देन और कागजी काम 26 सितंबर से पहले ही अनिवार्य रूप से निपटा लें।किसी भी प्रकार के चेक क्लीयरेंस या डिमांड ड्राफ्ट की औपचारिकताएं समय से पहले पूरी कर लें ताकि सेटलमेंट न लटके।नकदी की जरूरतों के लिए एटीएम (ATMs) और ऑटोमेटेड डिपॉजिट कम विड्रॉल मशीनों (ADWMs) का उपयोग करें।ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में कस्टमर सर्विस पॉइंट्स (CSPs/ग्राहक सेवा केंद्रों) की मदद लें।उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और बिहार में क्या पड़ेगा असरउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, नोएडा, गाजियाबाद से लेकर दिल्ली-एनसीआर और बिहार (पटना, गया) जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में लगातार 5 दिनों के बैंकिंग व्यवधान का गहरा असर देखा जा सकता है।कारोबारियों और थोक व्यापारियों को दैनिक कैश कलेक्शन जमा करने और थोक आपूर्ति के लिए चेक जारी करने में भारी असुविधा हो सकती है। 25 सितंबर (शुक्रवार) के बाद जमा किए जाने वाले किसी भी चेक का क्लीयरेंस चक्र सीधे अक्टूबर के पहले हफ्ते में जा सकता है। इसलिए स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी अपने सदस्यों से डिजिटल माध्यमों से लेन-देन करने की सलाह दी है।एटीएम में कैश किल्लत की संभावना से कैसे बचेंलगातार 5 दिनों तक बैंक शाखाएं और करेंसी चेस्ट बंद रहने के कारण एटीएम मशीनों में नकदी की भारी कमी (Cash Crunch) होने का जोखिम बढ़ जाता है। खासकर रिहायशी इलाकों और बाजारों में स्थित एटीएम शनिवार और रविवार को ही खाली हो सकते हैं।ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने परिवार के जरूरी घरेलू खर्च, मेडिकल इमरजेंसी और दैनिक खरीदारी के लिए आवश्यक नकद राशि 25 सितंबर तक ही निकाल कर सुरक्षित रख लें। आपातकालीन स्थिति में आप पेट्रोल पंपों, बड़े रिटेल स्टोर्स या सीएसपी केंद्रों पर उपलब्ध माइक्रो-एटीएम और आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) का सहारा ले सकते हैं।हड़ताल के दौरान 24 घंटे चालू रहेंगी ये डिजिटल सेवाएंबैंक शाखाओं में ताले लटकने के बावजूद ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि डिजिटल इंडिया का ऑनलाइन बैंकिंग तंत्र बिना रुके चौबीसों घंटे काम करता रहेगा:UPI सेवाएं: Google Pay, PhonePe, Paytm और BHIM ऐप के जरिए एक खाते से दूसरे खाते में तत्काल धन हस्तांतरण और दुकानों पर क्यूआर कोड भुगतान सामान्य रूप से चलता रहेगा।नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग: YONO SBI, PNB One, HDFC NetBanking और iMobile के जरिए आईएमपीएस (IMPS) और एनईएफटी (NEFT) ट्रांसफर 24x7 उपलब्ध रहेंगे।कार्ड ट्रांजैक्शन: ऑनलाइन शॉपिंग, पीओएस (POS) स्वाइप मशीनों और ई-कॉमर्स पेमेंट पर डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग पूरी तरह चालू रहेगा।शाखा में जाकर पासबुक प्रिंट कराना, नया खाता खुलवाना, लॉकर ऑपरेट करना या काउंटर पर नकदी जमा/निकासी जैसी सेवाएं केवल हड़ताल समाप्त होने और शाखाएं दोबारा खुलने पर ही संभव हो सकेंगी।
करेले का कड़वापन भूल जाएंगे! ऐसे बनाएं बेसन-सौंफ वाली करेला भुर्जी
Karela Ki Bhurji: अगर आपके घर में भी बच्चे और बुजुर्ग करेले का नाम सुनकर मुंह बनात हैं तो अब उन्हें बेसन और सौंफ वाली चटपटी करेले की भुर्जी बनाकर खिलाएं. ये बनाने में सिंपल है और खाने में बहुत ही स्वादिष्ट.
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम से पहले वायु प्रदूषण पर कड़ा प्रहार करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। 1 अक्टूबर 2026 से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अंतर्गत आने वाले उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों—नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) और गाजियाबाद—में स्थित सभी पेट्रोल पंपों पर 'नो PUCC, नो फ्यूल' (No PUCC, No Fuel) नियम अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।इस नई नीति के तहत यदि आपके दोपहिया, चारपहिया या व्यावसायिक वाहन का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) एक्सपायर हो चुका है, तो ईंधन भराने के लिए लाइन में लगने के बावजूद पंप कर्मचारी आपको पेट्रोल, डीजल या सीएनजी देने से साफ मना कर देंगे। प्रशासन का उद्देश्य हवा में जहर घोलने वाले धुआं छोड़ते अनफिट वाहनों को सड़कों से बाहर करना और वायु गुणवत्ता में 30 से 35 फीसदी तक सुधार लाना है।पेट्रोल पंपों पर कैसे होगी PUCC की जांच: ANPR कैमरे और मोबाइल ऐपइस व्यवस्था को शत-प्रतिशत पारदर्शी और फुलप्रूफ बनाने के लिए पेट्रोल पंपों पर आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है:ANPR कैमरों से ऑटोमैटिक ट्रैकिंग: एनसीआर के जिलों में स्थित 1,000 से अधिक ईंधन स्टेशनों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं। जैसे ही कोई वाहन पेट्रोल पंप की लेन में प्रवेश करेगा, कैमरा तुरंत उसकी नंबर प्लेट को स्कैन कर लेगा।परिवहन पोर्टल से लाइव मिलान: यह सिस्टम सीधे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के 'वाहन' और 'परिवहन PUC पोर्टल' से जुड़ा होगा। स्क्रीन पर चंद सेकंड में वाहन के प्रदूषण प्रमाण पत्र की वैधता (Valid / Expired) प्रदर्शित हो जाएगी।सेल्समैन ऐप और मैनुअल चेकिंग: जब तक सभी छोटे-बड़े पंपों पर हाई-टेक कैमरे पूरी तरह सक्रिय नहीं होते, तब तक पेट्रोल पंप कर्मियों (सेल्समैन) को विशेष मोबाइल ऐप दिए गए हैं। पंप पर गाड़ी का नंबर दर्ज करते ही पॉल्यूशन स्टेटस सामने आ जाएगा और अमान्य पाए जाने पर नोजल लॉक कर दिया जाएगा।बिना PUCC पकड़े जाने पर ₹10,000 का भारी जुर्मानायदि आपका वाहन बिना वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र के सड़क पर दौड़ता हुआ या चेकिंग में पकड़ा जाता है, तो मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा 190(2) के तहत चालक या वाहन मालिक पर सीधे ₹10,000 का दंडात्मक चालान लगाया जा सकता है। इसके अलावा गंभीर मामलों में तीन महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने और कारावास का भी विधिक प्रावधान है।गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर परिवहन विभाग के अनुसार, वर्तमान में दोनों जिलों में 50,000 से अधिक ऐसे वाहन पंजीकृत हैं जिनका पीयूसीसी लंबे समय से रिन्यू नहीं हुआ है। इनमें निजी कारों और बाइकों के अलावा पुराने ऑटो, मालवाहक गाड़ियां और स्कूल बसें भी शामिल हैं। 1 अक्टूबर की समयसीमा से पहले इन सभी वाहन स्वामियों को अपना प्रमाण पत्र अपडेट कराने की चेतावनी दी गई है।नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में क्यों बढ़ाई गई सख्तीगाजियाबाद और नोएडा सर्दियों के महीनों में देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में अक्सर शीर्ष पर रहते हैं। यहां चलने वाले लाखों दैनिक वाहनों का उत्सर्जन (Vehicular Emission), निर्माणाधीन परियोजनाओं की धूल और पराली का धुआं मिलकर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को 400 के पार 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा देते हैं।इस संकट से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू होने से पहले ही अग्रिम कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। गाजियाबाद में लगभग 135 और नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सभी पेट्रोल, डीजल और सीएनजी स्टेशनों को इस सख्त प्रोटोकॉल के दायरे में लाया गया है।घर बैठे या नजदीकी केंद्र से कैसे बनवाएं नया PUCCअंतिम समय की अफरातफरी और पंपों पर ईंधन न मिलने की परेशानी से बचने के लिए वाहन चालक तत्काल अपना पीयूसीसी रिन्यू करा सकते हैं:नजदीकी अधिकृत टेस्टिंग सेंटर: नोएडा, गाजियाबाद या दिल्ली के किसी भी पेट्रोल पंप पर स्थित अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र पर जाएं।टेस्टिंग प्रक्रिया: केंद्र संचालक आपके वाहन के साइलेंसर में सेंसर पाइप लगाकर कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोकार्बन के स्तर की जांच करेगा और वाहन का लाइव फोटो खींचेगा।ऑनलाइन जनरेशन: जांच सफल होते ही डेटा सीधे सरकारी परिवहन सर्वर पर अपलोड हो जाएगा और आपको एक अधिकृत डिजिटल रसीद मिल जाएगी।डिजिटल डाउनलोड: आप परिवहन सेवा की आधिकारिक वेबसाइट (parivahan.gov.in) पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और चेसिस नंबर के अंतिम 5 अंक दर्ज करके डिजिटल PUCC डाउनलोड कर सकते हैं या इसे अपने 'mParivahan' और 'DigiLocker' ऐप में सुरक्षित रख सकते हैं।वैधता अवधि: बीएस-4 (BS-IV) और बीएस-6 (BS-VI) मानकों वाले नए चारपहिया वाहनों के लिए पीयूसीसी सामान्यतः 1 वर्ष के लिए वैध होता है, जबकि पुराने व अन्य वाहनों के लिए यह अवधि 6 महीने की होती है।वाहन चालकों के लिए जरूरी सुझावयदि आप दैनिक रूप से दिल्ली से नोएडा, ग्रेटर नोएडा या गाजियाबाद आवागमन (कम्यूट) करते हैं, तो अपनी गाड़ी के दस्तावेजों की जांच आज ही कर लें।केवल फिजिकल कार्ड पर निर्भर रहने के बजाय यह सुनिश्चित करें कि आपका पीयूसीसी रिकॉर्ड सरकारी परिवहन पोर्टल पर 'एक्टिव' दिख रहा हो।1 अक्टूबर के बाद बिना पीयूसीसी के पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक बहस करने से बचें, क्योंकि कैमरे की फुटेज के आधार पर ट्रैफिक पुलिस सीधे ऑनलाइन ई-चालान भी जारी कर सकती है।
देशभर के करोड़ों घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। 1 अक्टूबर से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और सरकारी सब्सिडी के नियमों में बदलाव प्रभावी होने जा रहा है। नए नियमों के तहत अब केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को नियमित खुदरा विक्रय मूल्य (RSP) और लागू सब्सिडी के साथ 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर बुक करने की अनुमति होगी, जिन्होंने अपनी बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (BAA / e-KYC) प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।सरकार का स्पष्ट कहना है कि इस कदम का उद्देश्य किसी भी वास्तविक लाभार्थी का गैस कनेक्शन काटना नहीं है, बल्कि सरकारी खजाने से दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ सही और पात्र परिवारों तक सीधे पहुंचाना है।1 अक्टूबर से लागू होने वाले बदलाव के मुख्य बिंदुपेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 19 सितंबर तक देश भर के लगभग 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ता (करीब 89.9 प्रतिशत) पहले ही अपना बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा करा चुके हैं।जिन्होंने ऑथेंटिकेशन करा लिया है: उन उपभोक्ताओं को कुछ भी नया करने की जरूरत नहीं है। वे पहले की तरह सामान्य रूप से सब्सिडी वाले सिलेंडर की बुकिंग जारी रख सकेंगे।जिन्होंने ऑथेंटिकेशन नहीं कराया है: 1 अक्टूबर के बाद ऐसे उपभोक्ता रियायती दर पर सब्सिडी वाला 14.2 किलो का सिलेंडर तब तक बुक नहीं कर पाएंगे जब तक कि वे अपनी ई-केवाईसी पूरी नहीं कर लेते। प्रमाणीकरण पूरा होते ही उनकी सब्सिडी युक्त बुकिंग फिर से तुरंत शुरू हो जाएगी।जो ऑथेंटिकेशन नहीं कराना चाहते: यदि कोई उपभोक्ता बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराना चाहता, तो उसे तेल कंपनियों के डिजिटल पोर्टल, ऐप या आईवीआरएस पर जाकर यह विकल्प दर्ज करना होगा। ऐसे ग्राहकों को बिना सब्सिडी के बाजार दर (मार्केट प्राइस) पर 5 किलोग्राम या 10 किलोग्राम वाले सिलेंडर की आपूर्ति की जाएगी।सरकार ने बायोमेट्रिक आधार सत्यापन क्यों बनाया अनिवार्यघरेलू एलपीजी सिलेंडरों पर सरकार और तेल विपणन कंपनियों द्वारा भारी सब्सिडी वहन की जाती है। सितंबर में 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर पर अंतर्निहित सब्सिडी करीब ₹210 प्रति सिलेंडर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की घरेलू एलपीजी पर संचित अंडर-रिकवरी अगस्त के अंत तक ₹62,000 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है।ऐसी स्थिति में सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है:फर्जी व डुप्लीकेट कनेक्शनों की समाप्ति: एक ही नाम या पते पर चल रहे अवैध और दोहरे गैस कनेक्शनों को व्यवस्था से बाहर करना।व्यावसायिक दुरुपयोग पर रोक: घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाले सस्ते और सब्सिडी युक्त सिलेंडरों को होटलों, ढाबों और उद्योगों में अवैध रूप से डायवर्ट होने से बचाना।लक्षित सब्सिडी वितरण: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और मध्यमवर्गीय वैध परिवारों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को शत-प्रतिशत पारदर्शी बनाना।घर बैठे या बाहर: कैसे पूरी करें बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (e-KYC)उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए तेल कंपनियों ने सत्यापन की प्रक्रिया को बेहद सरल और बहुआयामी बनाया है, जिसे निम्नलिखित तरीकों से पूरा किया जा सकता है:1. मोबाइल ऐप के जरिए खुद घर बैठे (Self e-KYC):सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से UIDAI का आधिकारिक 'AadhaarFaceRd' ऐप डाउनलोड करें।इसके बाद अपनी संबंधित गैस कंपनी का आधिकारिक ऐप डाउनलोड करें:इंडेन (Indane) उपभोक्ता: IndianOil ONEभारत गैस (Bharatgas) उपभोक्ता: HelloBPCLएचपी गैस (HP Gas) उपभोक्ता: HP PAYऐप में अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉगिन करें और प्रोफाइल सेक्शन में जाकर 'e-KYC' या 'Aadhaar Verification' विकल्प चुनें।मोबाइल कैमरे के सामने अपना चेहरा स्कैन (Face Authentication) करके तुरंत घर बैठे सत्यापन पूरा करें।2. सिलेंडर डिलीवरी के समय:जब डिलीवरी बॉय आपके घर पर एलपीजी सिलेंडर देने आए, तो आप उसके पास मौजूद हैंडहेल्ड मोबाइल ऐप के माध्यम से फिंगरप्रिंट या फेस-स्कैनिंग करवाकर मौके पर ही ऑथेंटिकेशन पूरा करा सकते हैं।3. अपनी नजदीकी गैस एजेंसी (Distributor Showroom) पर जाकर:उपभोक्ता अपने नजदीकी गैस वितरक के कार्यालय में जाकर बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर या आइरिस स्कैनर के जरिए मात्र 2 मिनट में अपनी ई-केवाईसी पूरी करा सकते हैं।लखनऊ, दिल्ली, कानपुर समेत विभिन्न शहरों में जागरूकता अभियानउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (गोमती नगर, अलीगंज, इंदिरानगर, चौक), कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, नोएडा और दिल्ली-एनसीआर समेत देश भर के ग्रामीण व शहरी इलाकों में गैस एजेंसियों द्वारा विशेष कैंप लगाए गए हैं। तेल कंपनियों ने अब तक 12 करोड़ से अधिक एसएमएस और व्हाट्सएप संदेश भेजकर ग्राहकों को जागरूक किया है।यदि आपको सत्यापन कराने या गैस सेवा से संबंधित किसी प्रकार की तकनीकी सहायता की आवश्यकता है, तो उपभोक्ता आधिकारिक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकते हैं। 1 अक्टूबर की समयसीमा से पहले सभी छूटे हुए उपभोक्ताओं को अपनी ई-केवाईसी पूरी करने की सलाह दी गई है ताकि उनकी मासिक गैस आपूर्ति और सब्सिडी में कोई व्यवधान न आए।
देश के अन्नदाताओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मौसम विभाग से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) की देश से आधिकारिक वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पश्चिमी राजस्थान के फलौदी, रामगढ़ और खाजूवाला से मानसून की वापसी रेखा गुजर रही है और आने वाले दिनों में यह पंजाब, हरियाणा और गुजरात के कच्छ क्षेत्र से भी विदा हो जाएगा।हालांकि, इस बार मानसून का जाना राहत भरा नहीं, बल्कि गहरी चिंता का सबब बन रहा है। देश के 14 बड़े राज्यों में सामान्य से 20 प्रतिशत से भी अधिक कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि 30 सितंबर को जब 4 महीने का यह मानसूनी सीजन समाप्त होगा, तो समूचे भारत में बारिश का कुल घाटा (Overall Deficit) 10% से अधिक दर्ज हो सकता है—मौसम विज्ञान की परिभाषा में 10% से अधिक की अखिल भारतीय कमी को सूखे (Drought) की स्थिति के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।14 राज्यों में गहराया जल संकट, 200 से अधिक जिलों में सूखे की आहटआईएमडी के संचयी वर्षा आंकड़ों के अनुसार देश भर में 1 जून से लेकर अब तक कुल बारिश में लगभग 14% से 15% की कमी बनी हुई है। सबसे खराब स्थिति देश के 14 राज्यों में है जहां वर्षा की कमी 20 फीसदी के खतरे के निशान को पार कर चुकी है। इनमें उत्तर भारत के पंजाब (लगभग 40% की कमी), हरियाणा (23% की कमी) और राजस्थान (25% की कमी) शामिल हैं।पूर्वी भारत में बिहार राज्य सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है, जहां सामान्य से 35% कम बारिश हुई है। वहीं पूर्वोत्तर के मेघालय (59% डेफिसिट) और अरुणाचल प्रदेश (42% डेफिसिट) में नदियां और जलस्रोत सूखने की कगार पर हैं। इसके अलावा प्रायद्वीपीय भारत के सभी पांचों राज्य—आंध्र प्रदेश (43% की भारी कमी), कर्नाटक (29%), केरल (27%), तमिलनाडु (26%) और तेलंगाना (20%)—कमजोर मानसून की दोहरी मार झेल रहे हैं। देश भर के 218 से अधिक कृषि जिलों में भूजल स्तर में भारी गिरावट और सूखे जैसी गंभीर परिस्थितियां बन गई हैं।अल-नीनो का कहर और मानसून की चाल क्यों हुई सुस्तइस वर्ष मानसूनी हवाओं के असमान और कमजोर रहने का सबसे मुख्य कारण प्रशांत महासागर में सक्रिय अल-नीनो (El Nio) मौसमी परिघटना को माना जा रहा है। अल-नीनो के प्रभाव से भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र की समुद्री सतह असामान्य रूप से गर्म हो जाती है, जिससे भारत की ओर नमी खींचने वाली मानसूनी ट्रफ लाइन कमजोर पड़ जाती है।जून के महीने में देश में 40% तक की भारी कमी देखी गई थी, हालांकि जुलाई में आए पश्चिमी विक्षोभों के चलते बारिश में सुधार हुआ था। लेकिन अगस्त और सितंबर के महीनों में लंबे 'मॉनसून ब्रेक' (Monsoon Break) के कारण बादलों की आवाजाही ठप पड़ गई। भले ही बंगाल की खाड़ी में हाल ही में बने निम्न दबाव और डिप्रेशन के चलते पूर्वी तटीय राज्यों (ओडिशा, बंगाल, आंध्र प्रदेश) में अंतिम समय में कुछ बौछारें देखने को मिल रही हैं, लेकिन यह बारिश पूरे चार महीने के इस संचयी घाटे की भरपाई करने के लिए नाकाफी साबित होगी।उत्तर प्रदेश, लखनऊ, बिहार और पंजाब के कृषि अंचल पर संकटउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और बुंदेलखंड के जनपदों से लेकर सीमावर्ती बिहार (पटना, गया, मुजफ्फरपुर) तक किसानों की नजरें आसमान की ओर टिकी हुई हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के वे जिले जो पूरी तरह वर्षा आधारित खेती (Rainfed Farming) पर निर्भर हैं, वहां सिंचाई की लागत बेतहाशा बढ़ चुकी है।किसानों को ट्यूबवेल और डीजल पंपों के जरिए पानी देने पर भारी खर्च करना पड़ रहा है, जिससे उनकी उत्पादन लागत दोगुनी हो गई है। पंजाब और हरियाणा जैसे सिंचित राज्यों में भी भूजल स्तर (Water Table) पाताल में पहुंच रहा है और बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जिन जिलों में नहरों और बांधों में पानी का भंडारण सामान्य क्षमता से 30 से 40 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है, वहां आने वाले महीनों में पीने के पानी और सिंचाई के लिए कड़ा जल संकट खड़ा हो सकता है।खरीफ की धान फसल और आने वाले रबी सीजन पर क्या होगा असरमानसून की इस 10% से 15% की कमी का सीधा प्रभाव देश की खाद्य सुरक्षा और फसलों की पैदावार पर पड़ना तय है:धान (Paddy) की पैदावार पर मार: पानी की सबसे अधिक खपत करने वाले धान के रकबे में पिछले साल की तुलना में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जिन इलाकों में फूल आने और दाना भरने के नाजुक समय पर बारिश नहीं हुई, वहां उपज (Yield) में 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।दालें और तिलहन: कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में तुअर (अरहर), उड़द, मूंग और सोयाबीन की फसलों को समय पर नमी न मिलने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, जिससे आने वाले दिनों में दालों की खुदरा कीमतों में तेजी आ सकती है।रबी बुवाई की तैयारी (Soil Moisture Deficit): सबसे बड़ी चिंता अक्टूबर-नवंबर से शुरू होने वाले रबी सीजन (गेहूं, सरसों, चना) को लेकर है। यदि विदाई के समय मिट्टी में अवशिष्ट नमी (Soil Moisture) पर्याप्त नहीं रही और जलाशयों में पानी की कमी रही, तो किसानों के लिए गेहूं और सरसों की समय पर बुवाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।सरकार की आकस्मिक योजनाएं (Contingency Plans) और किसानों के लिए सलाहकमजोर मानसून के शुरुआती संकेतों को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्रालय और राज्य सरकारों ने देश के 315 से अधिक संवेदनशील जिलों के लिए कृषि आकस्मिक योजनाएं (Contingency Plans) सक्रिय की हैं। विशेष रूप से उन 111 जिलों पर नजर रखी जा रही है जहां सिंचाई का कवरेज 25% से भी कम है।कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को यह व्यावहारिक सलाह दी है:जहां धान की फसल सूखने की कगार पर है, वहां ड्रिप या स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों का उपयोग करें।आने वाले रबी सीजन के लिए लंबी अवधि वाली किस्मों के बजाय कम समय और कम पानी में पकने वाली दलहनी और तिलहनी फसलों (जैसे चना, मसूर और राई/सरसों) की बुवाई को प्राथमिकता दें।खेतों में जैविक मल्चिंग (Mulching) का प्रयोग करें ताकि जमीन में मौजूद नमी लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
फॉल्स सीलिंग करवाना फायदे का सौदा है या नुकसान?
फॉल्स सीलिंग घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ तार और पाइप छिपाने में मदद करती है, लेकिन इसे लगवाने से पहले कमरे की ऊंचाई, नमी और रखरखाव जैसी जरूरी बातों को जान लेना चाहिए.
आगामी त्योहारी सीजन यानी दशहरा, दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ महापर्व पर घर जाने की योजना बना रहे लाखों यात्रियों और कामकाजी पेशेवरों को विमानन कंपनियों ने बड़ा झटका दिया है। ट्रेनों में बुकिंग खुलते ही सीटें फुल होने और 'रिग्रेट' (Regret) दिखने के बाद जब लोगों ने हवाई सफर का रुख किया, तो फ्लाइट टिकटों के बेतहाशा बढ़े हुए दाम देखकर उनके होश उड़ गए हैं। दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, पटना और कोलकाता जैसे प्रमुख महानगरों और क्षेत्रीय रूट्स पर हवाई किराया सामान्य दिनों की तुलना में 50 फीसदी से लेकर 300 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ चुका है।देश के सबसे व्यस्त और आईटी पेशेवरों के पसंदीदा रूट दिल्ली-बेंगलुरु (Delhi-Bengaluru) पर टिकटों के दाम में आए अप्रत्याशित उछाल ने यात्रियों के पूरे यात्रा बजट को बिगाड़ कर रख दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और किराए पर लगाम लगाने की गुहार लगाई है।दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर टिकटों में आग: राउंड ट्रिप 35,000 रुपये के पारसामान्य दिनों में दिल्ली से बेंगलुरु का एक तरफा नॉन-स्टॉप हवाई टिकट अमूमन ₹5,000 से ₹6,500 के बीच मिल जाता है, जबकि दोनों तरफ (Round Trip) का किराया ₹11,000 से ₹14,000 के दायरे में रहता था। लेकिन दशहरा और दिवाली के पीक फेस्टिव दिनों के लिए यह किराया बेकाबू हो चुका है।सीटीआई (CTI) द्वारा नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर आने-जाने का किराया बढ़कर ₹30,000 से ₹35,000 तक पहुंच गया है। वहीं पीक तिथियों पर अंतिम समय के लिए एक तरफ का किराया ही ₹18,000 से ₹20,000 का आंकड़ा पार कर रहा है। दक्षिण भारत से उत्तर भारत और दिल्ली-एनसीआर में काम करने वाले युवाओं के लिए यह खर्च किसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के बजट के बराबर बैठ रहा है।अन्य प्रमुख रूट्स का भी हाल बेहाल: मुंबई, पटना, कोलकाता के दाम आसमान परकेवल दिल्ली-बेंगलुरु ही नहीं, बल्कि देश के अन्य सभी प्रमुख घरेलू रूट्स पर भी डायनेमिक फेयर सिस्टम के चलते किराए में आग लगी हुई है:दिल्ली-मुंबई रूट: पहले जहां इस रूट पर दोनों तरफ का किराया ₹10,000 के आसपास रहता था, अब त्योहारी दिनों में यह ₹18,000 से ₹25,000 तक पहुंच चुका है।दिल्ली-पटना और दरभंगा: पूर्वांचल और बिहार जाने वाले प्रवासियों के लिए यह रूट सबसे व्यस्त रहता है। आम दिनों में ₹3,500 से ₹4,500 में मिलने वाला टिकट दिवाली और छठ से पहले ₹12,500 से ₹16,000 के बीच बिक रहा है।दिल्ली-कोलकाता: दुर्गा पूजा और दिवाली के मद्देनजर दिल्ली-कोलकाता का किराया ₹11,000 से बढ़कर ₹20,000 तक पहुंच गया है।दिल्ली-अहमदाबाद: नवरात्रि और दिवाली के सीजन में इस रूट पर आने-जाने का टिकट ₹18,000 से ₹20,000 के स्तर पर पहुंच गया है, जो पहले ₹10,000 के आसपास उपलब्ध था।क्षेत्रीय और टियर-2 रूट्स: जहां केवल एक ही एयरलाइन की सीधी उड़ान है, वहां हालत और भी बदतर है। कोलकाता से देवघर का टिकट ₹2,800 से उछलकर ₹12,500 और बेंगलुरु से झारसुगुड़ा का टिकट ₹4,200 से बढ़कर ₹16,200 तक पहुंच गया है।सीटें घटाकर किराया बढ़ाने का आरोप: CTI ने खोला मोर्चाहवाई किराए में अचानक आई इस तेजी पर व्यापारियों के संगठन सीटीआई (CTI) ने एयरलाइन कंपनियों के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का आरोप है कि त्योहारों में मांग बढ़ने के बावजूद विमानन कंपनियों ने अपनी क्षमता (सीटों) में जानबूझकर कटौती की है ताकि आर्टिफिशियल किल्लत पैदा कर महंगे टिकट बेचे जा सकें।वैश्विक एविएशन डेटा एजेंसी ओएजी (OAG) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि हाल के हफ्तों में घरेलू विमानन क्षमता में करीब 5.6% की कमी देखी गई है, जिसमें प्रमुख घरेलू एयरलाइनों ने 4.5% से लेकर 8.8% तक सीटें कम की हैं। इसके अलावा, एयरलाइंस द्वारा 3 दिन से 2 वर्ष तक के शिशुओं (Infants) की यात्रा फीस को ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 किए जाने पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है, क्योंकि शिशुओं के लिए अलग सीट भी आवंटित नहीं की जाती।लखनऊ, कानपुर, नोएडा और पूरे यूपी-बिहार के यात्रियों पर क्या पड़ रहा असरउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट), कानपुर (चकेरी एयरपोर्ट), वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह त्योहार भारी आर्थिक संकट लेकर आया है। दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में कार्यरत यूपी और बिहार के लाखों युवा दिवाली और छठ पर अपने घर लौटते हैं।कानपुर से मुंबई और बेंगलुरु आने-जाने के टिकट पीक दिनों में ₹15,000 से ₹22,000 तक पहुंच रहे हैं। लखनऊ और वाराणसी आने वाली उड़ानों में भी सभी इकोनॉमी सीटें लगभग पूरी तरह भर चुकी हैं और जो बची हैं वे प्रीमियम दामों पर उपलब्ध हैं। चूंकि लंबी दूरी की नियमित एक्सप्रेस और राजधानी ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट महीनों पहले ही बंद हो चुकी है, इसलिए आम नौकरीपेशा परिवार या तो अपने घर जाने का कार्यक्रम रद्द करने पर मजबूर हो रहे हैं या फिर निजी बसों और टैक्सियों के महंगे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।विमानन कंपनियों की दलील: क्यों महंगे हो रहे हैं टिकट?विमानन क्षेत्र के जानकारों और एयरलाइंस का कहना है कि हवाई किराए पूरी तरह एल्गोरिदम और 'डायनेमिक प्राइसिंग' (Dynamic Pricing) प्रणाली पर आधारित होते हैं। जैसे-जैसे किसी उड़ान की शुरुआती सस्ती बकेट की सीटें बुक होती जाती हैं, बची हुई सीटों के दाम अपने आप ऊपर चढ़ते चले जाते हैं।इसके अलावा कंपनियों ने विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का भी हवाला दिया है। तेल कंपनियों द्वारा एटीएफ के दामों में 5% से अधिक की वृद्धि की गई है। चूंकि किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) में 35 से 40 फीसदी हिस्सा अकेले ईंधन का होता है, इसलिए बढ़ती परिचालन लागत और नए विमानों के इंजनों की वैश्विक मेंटेनेंस समस्याओं को किराए में वृद्धि का बड़ा कारण बताया जा रहा है।सीटीआई और यात्रियों की मांग: किराए पर लगे अपर कैपयात्री संगठनों और ट्रेड एसोसिएशनों ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और केंद्र सरकार से मांग की है कि त्योहारों के दौरान एयरलाइंस की मनमानी पर लगाम लगाई जाए। यात्रियों का कहना है कि जब कोरोना महामारी या आपात स्थितियों में सरकार किराए की अधिकतम सीमा (Airfare Upper Cap) तय कर सकती है, तो त्योहारी सीजन में आम जनता को लूट से बचाने के लिए भी ऐसी ही मूल्य सीमा तय की जानी चाहिए।यदि सरकार ने जल्द ही एयरलाइंस के साथ समीक्षा बैठक कर अतिरिक्त उड़ानों का संचालन नहीं बढ़ाया या किराए पर नियंत्रण नहीं लगाया, तो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इस बार दिवाली पर अपनों के पास पहुंचना और भी कठिन हो जाएगा।
देश में एक तरफ जहां दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ समुद्र में बन रहे एक शक्तिशाली मौसमी सिस्टम ने कई राज्यों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बंगाल की खाड़ी में तीव्र चक्रवाती दबाव और डिप्रेशन (Depression) बनने को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मौसमी उथल-पुथल मॉनसून के विदाई चरण में तटीय और मध्य भारत के राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश ला सकती है।पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी की रेखा आगे बढ़ रही है, लेकिन पूर्व और दक्षिण भारत में सक्रिय हो रहे इस नए वेदर सिस्टम के चलते अगले चार से पांच दिनों तक भयंकर गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज तूफानी हवाओं का दौर चलने का अनुमान है।बंगाल की खाड़ी में कैसे बना यह सिस्टम और कब बनेगा डीप डिप्रेशनमौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण अब पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र (Low-Pressure Area) में तब्दील हो चुका है।यह सिस्टम लगातार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। मौसम विज्ञानियों का आकलन है कि 21 सितंबर तक यह पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक सशक्त डिप्रेशन (अवदाब) बन जाएगा और 22 सितंबर तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में 'डीप डिप्रेशन' (गहरे अवदाब) का रूप ले लेगा। इसके बाद 23 सितंबर की सुबह तक यह सिस्टम उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा तटों के करीब पहुंचेगा, जिससे तटीय इलाकों में समुद्र अशांत रहेगा और हवाओं की गति 70 से 75 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी तबाही की आशंका: रेड और ऑरेंज अलर्टइस गहरे दबाव का सबसे सीधा और विनाशकारी असर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों पर पड़ने वाला है।ओडिशा: दक्षिण ओडिशा के जिलों (जैसे गंजम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी) में 23 और 24 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) होने की चेतावनी जारी की गई है। कई जगहों पर 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है।तटीय आंध्र प्रदेश: उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और यानम के इलाकों में 22 से 24 सितंबर के दौरान मूसलाधार बारिश का अलर्ट है। निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय नालों के उफान पर आने और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में कैसा रहेगा मौसमपूर्वी भारत के अन्य राज्यों में भी इस समुद्री सिस्टम का व्यापक असर देखने को मिलेगा:पश्चिम बंगाल: गांगेय पश्चिम बंगाल (कोलकाता, हावड़ा, दक्षिण व उत्तर 24 परगना, मेदिनीपुर) में 22 से 25 सितंबर के बीच रुक-रुक कर भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 23-24 सितंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है।झारखंड: राज्य के कई हिस्सों में 21 और 22 सितंबर को बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली गिरने (Severe Lightning) की चेतावनी है, जबकि 23 से 25 सितंबर तक अधिकांश जिलों में भारी बारिश दर्ज हो सकती है।बिहार: उत्तर और दक्षिण बिहार के जिलों में 24 से 26 सितंबर के दौरान बादलों की सक्रियता बढ़ेगी और कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश का दौर शुरू होगा।मध्य भारत और दक्षिण के राज्यों में भी असर: छत्तीसगढ़, विदर्भ और तेलंगानाजैसे-जैसे यह मौसमी सिस्टम समुद्र से निकलकर जमीनी इलाकों की ओर बढ़ेगा, मध्य भारत के मौसम में भी भारी बदलाव आएगा:छत्तीसगढ़: दक्षिणी छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे जिलों में 24 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश का पूर्वानुमान है। 23 से 25 सितंबर के दौरान पूरे राज्य में व्यापक बारिश और आकाशीय बिजली की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।महाराष्ट्र और विदर्भ: विदर्भ क्षेत्र में 24 और 25 सितंबर को भारी बारिश होने के आसार हैं। वहीं कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में 22-23 सितंबर को तेज बारिश की संभावना बनी हुई है।तेलंगाना और कर्नाटक: तेलंगाना में 23 से 25 सितंबर के बीच भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कर्नाटक के तटीय और आंतरिक हिस्सों तथा केरल में भी स्थानीय स्तर पर बादलों की आवाजाही के साथ बारिश जारी रहेगी।उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत: विदाई के बीच क्या होगी बारिश?उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह अलग है। पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) से मानसून की आधिकारिक विदाई शुरू हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में यह पंजाब, हरियाणा और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ और हिस्सों से भी पीछे हट जाएगा।उत्तर प्रदेश (लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, नोएडा) और दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में वर्तमान में आसमान साफ या आंशिक रूप से बादलों वाला रहेगा। हालांकि, बंगाल की खाड़ी के इस डिप्रेशन के आगे बढ़ने पर 24-25 सितंबर के आसपास पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ तराई और सीमावर्ती जिलों में हल्की से मध्यम बारिश या बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। फिलहाल इन मैदानी इलाकों में दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी और उमस का असर बना रहेगा।मछुआरों के लिए रेड अलर्ट और सुरक्षा प्रोटोकॉलसमुद्र में उठती ऊंची लहरों और तूफानी परिस्थितियों को देखते हुए मौसम विभाग ने एक सख्त समुद्री चेतावनी जारी की है:21 सितंबर को पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी में हवा की गति 45 से 55 किमी प्रति घंटे से लेकर 65 किमी प्रति घंटे के झोंकों तक पहुंच सकती है।22 से 24 सितंबर के दौरान मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में हवाएं 55 से 65 किमी प्रति घंटे तथा अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार पकड़ सकती हैं।मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे 20 से 25 सितंबर तक मध्य व उत्तर बंगाल की खाड़ी तथा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के तटीय समुद्र में बिल्कुल न जाएं। जो नावें पहले से समुद्र में हैं, उन्हें तुरंत निकटतम तट पर लौटने का निर्देश दिया गया है।
मशहूर Cardiologist पद्मश्री डॉ. G Vijayaraghavan का 84 साल की उम्र में निधन
प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. जी. विजय राघवन का रविवार को यहां निधन हो गया। उनके रिश्तेदारों ने यह जानकारी दी। वह 84 वर्ष के थे। रिश्तेदारों ने बताया कि विजय राघवन का उम्र संबंधी बीमारियों को लेकर इलाज हो रहा था। वह तिरुवनंतपुरम स्थित केआईएमएस अस्पताल के उपाध्यक्ष थे। कोल्लम के पेरुमपुझा के रहने वाले विजय राघवन ने 1964 में तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और 1969 में सामान्य चिकित्सा में एमडी की उपाधि हासिल की। उन्होंने बाद में वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज से हृदय रोग विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस पर केंद्रित था। रिश्तेदारों ने बताया कि उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में शोध कार्य किया और हृदय रोग विज्ञान पर कई पुस्तकें लिखीं। उन्होंने बताया कि विजय राघवन को दुनियाभर के कई प्रमुख संस्थानों और संगठनों की ओर से मानद फेलोशिप प्रदान की गई थी। विजयराघवन और उनकी टीम ने तिरुवनंतपुरम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में पहली 2डी इकोकार्डियोग्राफी प्रयोगशाला स्थापित की थी। उन्हें वर्ष 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। रिश्तेदारों ने बताया कि विजयराघवन का अंतिम संस्कार 22 सितंबर को किया जाएगा। केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने डॉ. विजय राघवन के निधन पर शोक व्यक्त किया। सतीशन ने एक बयान में कहा कि विजय राघवन ने हजारों मरीजों की जान बचाई और उन्हें जीन की नयी उम्मीद दी। उन्होंने कहा कि विजय राघवन में बिना स्टेथोस्कोप की मदद के भी मरीजों की धड़कन पहचान लेने की क्षमता थी। सतीशन ने कहा कि उनका उपचार करने का तरीका करुणा और दिव्यता से भरा हुआ था। मुख्यमंत्री ने विजय राघवन के शोक संतप्त परिवार के सदस्यों और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
यूक्रेनी ड्रोन्स के वार से दहल उठा रूस, अब क्या करेंगे पुतिन? देखें विशेष
यूक्रेन ने मॉस्को पर बहुत बड़ा हमला किया है. जानकारी के मुताबिक यूक्रेन ने रूस पर 1,000 से ज़्यादा ड्रोन दागे. साथ ही यूक्रेन ने पेलिकन बैलिस्टिक मिसाइल भी दागे हैं. ताजा हमला मॉस्को पर हुए अब तक के सबसे बड़े हमले में से एक है. यूक्रेन ने मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला किया. देखें विशेष.
ट्रंप को मिला ईरान का संदेश, क्या रुकेगा अमेरिका-ईरान युद्ध?
ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं. ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई के मुताबिक, तेहरान सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने, विदेशों में जमा ईरानी धन मुक्त कराने और नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की मांग कर रहा है. कतर और पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहे हैं और ईरान अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है.
योगी सरकार काशी के पारंपरिक हुनर को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से दिला रही वैश्विक बाजार
वाराणसी, 20 सितंबर । अध्यात्म और संस्कृति की नगरी काशी की पहचान केवल धर्म और परंपराओं तक सीमित नहीं है। सदियों पुरानी हस्तशिल्प और बुनकरी की समृद्ध परंपरा के साथ काशी ने अपने पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों के दम पर देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई है। योगी सरकार द्वारा 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित किए जा रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस बार काशी की इसी समृद्ध विरासत, हुनर और उत्पादों को एक बार फिर वैश्विक मंच मिलने जा रहा है। जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि वाराणसी से 8 निर्यातकों ने ट्रेड शो में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा कि यूपीआईटीएस में काशी के पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों का संगम देखने को मिलेगा। सहायक आयुक्त उद्योग केशव यादव ने बताया कि योगी सरकार यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने के साथ ही इसमें प्रतिभाग करने वाले निर्यातकों को सब्सिडी भी प्रदान कर रही है। ॐ और मंत्र मुद्रित योग शॉल और गाउन से लेकर सजावट के सामान तक होंगे प्रदर्शितकाशी की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूमि एक बार फिर अपने अनूठे और पारंपरिक उत्पादों के साथ वैश्विक पटल पर चमकने के लिए तैयार है। यहां के उद्यमी अपनी सदियों पुरानी कला और परंपरा को आधुनिक बाजार की जरूरतों के साथ खूबसूरती से जोड़ते नजर आयेंगे। शिवम् आर्ट्स एक्सपोर्ट के निदेशक अभिषेक केशरी ने बताया कि योगी सरकार द्वारा एक बड़ा प्लेटफार्म दिया जा रहा है। ट्रेड शो में विशेष रूप से डिजाइन किए गए ॐ और मंत्र मुद्रित योग शॉल ,स्कार्फ़ और गाउन भी प्रदर्शित किए जाएंगे। इन शॉल को योग और ध्यान के अनुभव को अधिक आध्यात्मिक एवं सहज बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसके अलावा निर्यातक सिल्क ब्रोकेड कुशन कवर, टेबल रनर, वाल हैंगिंग और आकर्षक बेड कवर भी प्रदर्शित करेंगे, जो घर की सजावट और पारंपरिक परिधान प्रेमियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा।अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाले 100 प्रतिशत रिसाइकिल बैग उत्पादों की भी होगी प्रदर्शनीआर.ए.एस पॉलीटेक्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से फ्लेक्सिबल इंटरमीडिएट बल्क कंटेनर्स (एफ.आई.बी.सी) बैग ,मल्टीफिलामेंट यार्न और अन्य उत्पादों प्रदर्शित किए जायेंगे। एफ.आई.बी.सी को जंबो बैग, बल्क बैग,बिग बैग या टनल बैग के नाम से भी जाना जाता है। यह पी.पी. कपड़े से बना औद्योगिक बैग है, जिसका उपयोग विभिन्न वस्तुओं के भंडारण और परिवहन के लिए किया जाता है। यह उत्पाद लगभग 100 प्रतिशत रिसाइकिल उपयोग करके उत्पाद तैयार किया जाता है।वर्जनपिछले वर्ष यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में कंपनी को अच्छा व्यवसाय और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। इसी अनुभव के कारण इस वर्ष भी कंपनी ने ट्रेड शो में भाग लेने का निर्णय लिया है। योगी सरकार यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के द्वारा काशी के उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अपने उत्पादों को देश-दुनिया के खरीदारों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच बना रही है।आर.के. चौधरी, डायरेक्टर, आर.ए.एस पॉलीटेक्स प्राइवेट लिमिटेडवर्जनयूपीआईटीएस में पहले भाग ले चुके निर्यातकों ने बताया कि इस आयोजन से अच्छा व्यापार मिलता है। हम पहली बार इस ट्रेड शो में शामिल होंगे, यहां स्टॉल किफायती है और खरीदारों से सीधे संपर्क का अवसर मिलेगा। बिचौलियों के न होने से लाभ अधिक होगा। योगी सरकार हम जैसे उद्यमियों को अपने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का अवसर दे रही है।असरार अहमद, निदेशक, असरार अहमद साड़ीज़
तहलका की क्रिकेट फिक्सिंग पड़ताल पर X में चर्चा तेज, ‘Tehelka BigCricket Operations’ ट्रेंडिंग
तहलका SIT की रिपोर्ट में दिल्ली प्रीमियर लीग से जुड़ी कथित अंदरूनी जानकारी और फिक्सिंग नेटवर्क के दावे सामने आने के बाद खेल की साख, सट्टेबाजी और जवाबदेही को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हुई। नई दिल्ली, 20 सितंबर। क्रिकेट में कथित फिक्सिंग नेटवर्क और मैच से पहले प्लेइंग इलेवन की अंदरूनी जानकारी सट्टेबाजों […]
Quockerwodger... शशि थरूर ने X फिर लिखी ऐसी इंग्लिश, इस शब्द के जरिए सरकार पर कसा तंज, मतलब भी बताया
कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपनी टफ अंग्रेजी के लिए जाने जाते हैं। वह एक्स पर कम बोले जाने वाले अंग्रेजी के कठिन शब्दों का इस्तेमाल करते रहते हैं। इस बार थरूर ने एक्स पर 'क्वॉकरवॉजर' (Quockerwodger) शब्द लिखा है।
सपा सत्ता में आई तो Remote Sensing से होगी विकास दुबे एनकाउंटर की जांच: Akhilesh Yadav
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे से जुड़ी कथित मुठभेड़ की तरफ इशारा करते हुए तंज किया कि उनकी पार्टी अगर उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आती है तो वह रिमोट सेंसिंग विभाग (दूर संवेदी विभाग) से कार पलटने वाली घटना की जांच कराएंगे। कानपुर देहात के बिकरू इलाके में दो-तीन जुलाई 2020 की रात को आठ पुलिसकर्मियों की घात लगाकर छत से गोलियां चलाते हुए हत्या किये जाने की वारदात के मुख्य आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे की 10 जुलाई को उज्जैन से कानपुर लाते समय पुलिस की गाड़ी कथित रूप से दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गयी थी और पुलिस का दावा है कि हादसे के बाद भागने की कोशिश में दुबे पुलिस से हुई मुठभेड़ में मारा गया था। सपा प्रमुख ने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि रिमोट सेंसिंग के साथ-साथ सभी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल मुख्य रूप से किसानों के फायदे के लिए और साथ ही स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि के क्षेत्रों में किया जाएगा। यादव ने किसी का नाम लिये बगैर गैंगस्टर विकास दुबे की कथित मुठभेड़ में हुई मौत की ओर इशारा करते हुए कहा, रिमोट सेंसिंग विभाग एक बहुत पुराना विभाग है। हम निश्चित रूप से इस विभाग को उस घटना की जांच का काम सौंपेंगे कि आखिर गाड़ी कैसे पलटी थी। उन्होंने कहा, हम उन्हें अलग से फंड देंगे... चाहे वह 50 करोड़ रुपये हो या 100 करोड़ रुपये... और उन्हें उन गाड़ियों की आवाजाही का पता लगाने का निर्देश देंगे कि वे कहां से चली थी और उस जगह तक कैसे पहुंचीं? इसके अलावा, हम अपराध से निपटने के लिए रिमोट सेंसिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करेंगे, जिससे फर्जी एनकाउंटर जैसी घटनाओं पर भी रोशनी डालने में मदद मिलेगी। सपा प्रमुख ने गैंगस्टर विकास दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि कार पलटी नहीं थी, बल्कि यह सरकार को गिरने से बचाने की कोशिश थी ताकि सच सामने न आए। पुलिस ने दावा किया था कि उज्जैन से कानपुर ले जाई जा रही पुलिस की गाड़ी के 10 जुलाई को दुर्घटनाग्रस्त होने और विकास दुबे के मौके से भागने की कोशिश करने के बाद हुई मुठभेड़ में वह मारा गया था।
रूसी चुनाव के बीच यूक्रेन का मॉस्को पर बड़ा हमला, दागे 1000 से ज्यादा ड्रोन
रूस में चल रहे संसदीय चुनावों के आखिरी दिन यूक्रेन ने मॉस्को पर अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी हमला किया है. खबरों के अनुसार, यूक्रेन ने रूस की सीमा में एक हजार से भी अधिक ड्रोन और खतरनाक पेलिकन बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. इस अप्रत्याशित हमले ने मॉस्को की प्रसिद्ध ऑयल रिफाइनरी को अपना निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई और भारी तबाही हुई है.
'क्या किसी के रंग-रूप, कद-काठी और बालों से होगा जाति का फैसला?', हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
विवाद मुख्य रूप से इस बात पर था कि व्यक्ति का हिंदू धर्म में लौटना वास्तविक था या नहीं और क्या समुदाय ने उन्हें स्वीकार किया था। रविकुमार के पिता मूल रूप से हिंदू आदि द्रविड़ थे, लेकिन 1960 में ईसाई धर्म अपना लिया था।
2027 के चुनाव से पहले CM योगी ने चल दिया 'रोजगार' वाला दांव? देखें 7 तक
यूपी की चुनावी राजनीति में रोजगार बड़ा मुद्दा बन रहा है. सीएम योगी का जेन-जी से जुड़ने का सेल्फी कनेक्शन जारी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौकरी महाकुंभ के दूसरे दिन 912 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया. सीएम योगी ने इस दौरान समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधा, दूसरी ओर अखिलेश यादव रोजगार पर ही सरकार को घेर रहे हैं. देखें 7 तक.
हैदराबाद में गणेश उत्सव के दौरान सातवीं मंजिल से फेंका मीट, 3 लोग डिटेन
हैदराबाद में गणेश उत्सव के दौरान 7वीं मंजिल के अपार्टमेंट से कथित तौर पर मीट फेंके जाने के बाद 3 लोगों को डिटेन किया गया है. डिटेन किए गए लोगों की पहचान मोहम्मद इमरान कुरैशी, अर्शिया बेगम और सबीना के रूप में हुई है.
Optical Illusion: लड़की का सही नाम बताओ! 99% लोग हो रहे कन्फ्यूज
Optical Illusion: सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वाली पहेली वायरल हो रही है, जिसमें चाबी, 100 रुपये का नोट और पेन दिखाई दे रहे हैं. इन तीनों संकेतों को देखकर लड़की का सही नाम बताना है.
'जेलर 2' में रजनीकांत के साथ धमाल मचाएंगी विद्या बालन, पहला लुक आउट
जेलर 2 का इंतजार अब और भी रोमांचक हो गया है क्योंकि मेकर्स ने फिल्म के पहले नए कैरेक्टर के बारे में बता दिया है. रजनीकांत सीक्वल में विद्या बालन, 'कांथा' के किरदार में नजर आएंगी.
बालकनी में नहीं घुस पाएंगे मच्छर! लगवाएं ये स्टाइलिश चीज, जानें खर्च
Balcony Covering Ideas: बालकनी को मच्छर, मक्खियों और कबूतरों से बचाने के लिए अक्सर लोग जाली लगाते हैं, लेकिन वो भद्दी लगती है. अगर आप भी अपनी बालकनी को कवर करना चाहते हैं और स्टाइलिश भी दिखाना चाहते हैं, तो स्लाइडिंग मेश डोर अच्छा ऑप्शन हो सकता है. जानें इसकी खासियत, फायदे और इसे लगवाने में कितना खर्चा आता है.

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