IRDAI Insurance Reforms: बीमा में बड़ा बदलाव क्यों चाहती है IRDAI? आपकी पॉलिसी, प्रीमियम और एजेंट पर क्या होगा असर भारत में बीमा कारोबार के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है। बीमा नियामक IRDAI ने एक चर्चा पत्र के जरिए बीमा कंपनियों की ओर से बैंकों, ब्रोकरों और एजेंटों को पॉलिसी बेचने के लिए […] यह लेख IRDAI Insurance Overhaul: कमीशन पर लगाम से क्या सस्ती होगी आपकी बीमा पॉलिसी? समझिए पूरा बदलाव सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
आपका मामला तो 'आया राम, गया राम' जैसा है; कांग्रेस में शामिल हुए MLA से SC ने ऐसा क्यों कहा?
खैराताबाद के विधायक नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से तेलंगाना विधानसभा के सदस्य के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया था। BRS विधायक रहते हुए उन्होंने 2024 में कांग्रेस के टिकट पर सिकंदराबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
क्यों दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर हुए विकास दिव्यकीर्ति? क्या है पूरा मामला?
Vikas Divyakirti Moves Delhi High Court:
PM के इन खास उपहारों की हो रही नीलामी, ऐसे लगाएं बोली
पीएम मोदी को मिले खास उपहारों की नीलामी जारी है. आइए जानते हैं कि इन उपहारों में क्या-क्या खास है और आप किस तरह इस ई-नीलामी में शामिल हो सकते हैं.
तावड़े के 4 सिपहसालार... यूपी में बीजेपी की हैट्रिक के लिए कितने उपयोगी?
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में 'मिशन 2027' की कमान विनोद तावड़े और उनके चार नए सह-प्रभारियों को सौंपी है. गुजरात, महाराष्ट्र और झारखंड से आए इन रणनीतिकारों के जरिए पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग और 403 सीटों के माइक्रो-मैनेजमेंट पर फोकस कर सत्ता की हैट्रिक लगाने का बड़ा दांव चला है.
सीएम योगी का लॉ&ऑर्डर पर सपा पर तंज, अखिलेश यादव ने किया पलटवार
आज हम बात करेंगें यूपी की सियासत के साथ. जहां योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज है. कल योगी आदित्यनाथ ने law and order के मुद्दे पर अखिलेश पर तंज किया तो अखिलेश यादव ने बुलडोजर और अयोध्या को लेकर योगी सरकार पर सवाल खड़े किए.
Asian Games: हॉकी में भारत का धमाका, साउथ कोरिया को 8-2 से रौंदा
भारत ने एशियन गेम्स 2026 के ग्रुप चरण में लगातार तीसरी जीत दर्ज करते हुए चार बार की चैम्पियन दक्षिण कोरिया को 8-2 से करारी शिकस्त दी. भारत के लिए अभिषेक और दिलप्रीत सिंह ने दो-दो गोल किए, जबकि शिलानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह और राजिंदर सिंह ने एक-एक गोल दागा.
जायका रेस्टोरेंट पर बुलडोजर चला, सड़क चौड़ीकरण के बीच VDA का एक्शन
वाराणसी के कचहरी चौराहे पर जायका रेस्टोरेंट के अवैध निर्माण को लेकर VDA ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की है. पहले नोटिस के बावजूद निर्माण नहीं हटाए जाने पर पुलिस सुरक्षा के बीच कार्रवाई की जा रही है. यह कार्रवाई सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत की जा रही है. दरअसल, कचहरी से संदहा चौराहे तक सड़क चौड़ी की जाएगी.
तुर्की में फिर आया बड़ा भूकंप, 5.8 तीव्रता से हिली धरती
तुर्की के दियारबाकिर, अदियामान और सानलिउर्फा समेत आसपास के कई इलाकों में गुरुवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. शुरुआती अनुमान में इसकी तीव्रता 5.8 बताई गई है.
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से 9 की मौत, ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार
ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर एक दिल दहला देने वाला बस हादसा सामने आया है. दिल्ली से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में अचानक भयानक आग लग गई. इस दर्दनाक हादसे में नौ यात्रियों की जलकर मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. घायल महिला को नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
आसमान छूती मोबाइल की कीमतें, अब स्क्रीन प्रोटेक्टर भी होगा महंगा
स्मार्टफोन की स्क्रीन को बचाने के लिए लगाया जाने वाला सस्ता स्क्रीन प्रोटेक्टर अब आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है. खराब क्वालिटी के ग्लास से टच, फिंगरप्रिंट और स्क्रीन विजिबिलिटी में दिक्कत हो सकती है. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने स्क्रीन प्रोटेक्टर की क्वालिटी को लेकर नया नियम लागू किया है.
IAS हो या IPS दोनों को कर दिया कलंकित': अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार पर बोला तीखा हमला
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा भजनलाल शर्मा सरकार पर बेहद गंभीर और तीखे हमले किए हैं। एक प्रशासनिक फैसले को लेकर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए अशोक गहलोत ने कहा है कि राज्य की मौजूदा सरकार ने आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) जैसे प्रतिष्ठित और जिम्मेदार प्रशासनिक पदों को कलंकित करने का काम किया है, जिसकी उनसे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। पूर्व मुख्यमंत्री के इस आक्रामक बयान के बाद से राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और ब्यूरोक्रेसी तथा राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर से नई बहस छिड़ गई है।अशोक गहलोत का तीखा बयान और भजनलाल सरकार पर प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करने का आरोपराजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में जिस प्रकार से प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले और कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप किया जा रहा है, उसने सिस्टम की साख पर बट्टा लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक मुख्यमंत्री से यह अपेक्षा की जाती है कि वह नौकरशाही को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दे, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रशासनिक अमले का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। गहलोत का यह भी आरोप है कि जिन अधिकारियों पर जनता की सेवा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, उन्हें राजनीतिक दबाव के चलते विवादों में घसीटा जा रहा है, जिससे संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र की छवि धूमिल हो रही है।आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दबाव का बढ़ता सायाकिसी भी लोकतांत्रिक राज्य की रीढ़ उसकी नौकरशाही यानी ब्यूरोक्रेसी होती है, जिसमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी सर्वोच्च पदों पर रहकर नीति निर्माण और कानून व्यवस्था को संभालते हैं। लेकिन जब राजनीतिक दल सत्ता में आने के बाद प्रशासनिक फेरबदल को अपने राजनीतिक हितों के हिसाब से संचालित करने लगते हैं, तो अधिकारियों के लिए निष्पक्षता से काम करना मुश्किल हो जाता है। अशोक गहलोत ने इसी संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए कहा कि जब काबिल और ईमानदार अफसरों को दरकिनार कर खास लोगों को प्राथमिकता दी जाती है, तो इससे पूरे सिस्टम का मनोबल गिरता है। पूर्व सीएम का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि राजस्थान में ब्यूरोक्रेट्स और सरकार के बीच का यह टकराव आने वाले दिनों में और अधिक गहरा सकता है।भजनलाल सरकार के फैसलों पर विपक्ष का चौतरफा हमला और सियासी सरगर्मी तेजअशोक गहलोत के इस कड़े प्रहार के बाद प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के अन्य नेता भी सरकार के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भजनलाल सरकार न केवल प्रशासनिक मोर्चे पर विफल साबित हो रही है, बल्कि वह राज्य के उच्च अधिकारियों को अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए मोहरा बना रही है। दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार और पक्षपात की हदें पार हो चुकी थीं, और मौजूदा सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ प्रदेश में सुशासन स्थापित करने के लिए काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाजी आने वाले दिनों में और आक्रामक रूप ले सकती है।प्रशासनिक सुधार और जनता के हितों पर पड़ने वाला इस सियासी घमासान का असरराजनीतिक दलों की इस खींचतान और बयानबाजी के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इसका असर आम जनता के विकास कार्यों पर किस रूप में पड़ रहा है। जब राज्य का नेतृत्व और विपक्ष प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर आमने-सामने आ जाते हैं, तो नीतिगत फैसले और जनहित की योजनाएं अक्सर ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। आम जनता हमेशा एक ऐसा शासन चाहती है जहां अफसरशाही पारदर्शी हो और बिना किसी राजनीतिक दबाव के जनता के हितों में फैसले ले सके। अशोक गहलोत के इस बयान ने एक बार फिर से यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या राजस्थान की राजनीति में ब्यूरोक्रेसी हमेशा से राजनेताओं के हाथों की कठपुतली बनकर रह जाएगी या फिर कभी पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था देखने को मिलेगी।
ऑटो चलाते-चलाते बनी लेडी डॉन: डेढ़ साल से लापता महिला अपराधी का कुएं से मिला कंकाल
उत्तर प्रदेश के अपराध जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और फिल्मी कहानी जैसी डरावनी खबर सामने आ रही है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। कभी सड़कों पर आम लोगों की तरह ऑटो रिक्शा चलाकर अपनी आजीविका चलाने वाली एक महिला कब अपराध की दुनिया की अंधेरी गलियों में उतरकर 'लेडी डॉन' बन गई, किसी को भनक तक नहीं लगी। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले करीब डेढ़ साल से पुलिस और उसके परिजनों की नजरों से लापता चल रही इस महिला का शव आखिरकार एक सूखे कुएं से बरामद हुआ है। इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है। आइए जानते हैं ऑटो चलाने से लेकर लेडी डॉन बनने और फिर इस खौफनाक अंत तक की पूरी दास्तान।कैसे शुरू हुई थी साधारण ऑटो ड्राइवर से जुर्म की दुनिया तक की खौफनाक सफर की कहानीशुरुआती जिंदगी में इस महिला ने अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए बेहद संघर्षपूर्ण रास्ता चुना था और पुरुष प्रधान माने जाने वाले क्षेत्र में ऑटो रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालती थी। लोग उसकी इस मेहनत की दाद देते थे, लेकिन धीरे-धीरे उसकी जिंदगी में कुछ ऐसे लोग शामिल हुए जो आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे। पैसों की चमक, आसान तरीके से अमीर बनने की चाह और गलत संगति ने उसे धीरे-धीरे जुर्म की दलदल में धकेल दिया। देखते ही देखते वह छोटे-मोटे विवादों से आगे बढ़कर अवैध वसूली, जबरन कब्जा और स्थानीय स्तर पर आपराधिक वारदातों को अंजाम देने वाले गैंग का अहम हिस्सा बन गई। लोगों के बीच उसकी दहशत इतनी बढ़ गई थी कि अपराधी उसे 'लेडी डॉन' के नाम से बुलाने लगे थे और पुलिस के रिकॉर्ड में भी उसका नाम चमकने लगा था।अचानक रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई थी लेडी डॉन, डेढ़ साल से चल रही थी तलाशअपराध की दुनिया में तेजी से उभरने वाली यह महिला अचानक एक दिन इस तरह गायब हुई कि किसी को उसके जीवित या मृत होने का कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों ने जब उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, तो पुलिस ने भी अपनी तफ्तीश शुरू की, लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं चल सका। कभी कहा गया कि वह पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए किसी दूसरे राज्य में छिप गई है, तो कभी यह चर्चा उड़ी कि किसी पुरानी रंजिश के चलते उसे रास्ते से हटा दिया गया है। करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी जब इस मामले का कोई पर्दाफाश नहीं हुआ, तो फाइलें लगभग ठंडे बस्ते में जाने लगी थीं, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।वीरान इलाके के कुएं में मिला कंकाल, इस तरह खुला हत्या का सबसे बड़ा राजबीते दिनों जब कुछ ग्रामीण किसी काम से एक सूने और वीरान इलाके में स्थित पुराने कुएं के पास पहुंचे, तो वहां से उठ रही दुर्गंध ने उनका ध्यान खींचा। जब उन्होंने झांककर देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि कुएं के अंदर एक मानव कंकाल और कुछ कपड़े पड़े हुए थे। तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जब उस कंकाल और कपड़ों की शिनाख्त कराई, तो यह साबित हो गया कि यह अवशेष उसी लापता 'लेडी डॉन' के हैं। इस खुलासे के बाद पुलिस के भी होश उड़ गए और मामले की नए सिरे से तफ्तीश शुरू कर दी गई।आपसी रंजिश और गैंगवार की आशंका, पुलिस जांच के दायरे में कई संदिग्ध चेहरेइस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद पुलिस अब इस एंगल से जांच कर रही है कि आखिर डेढ़ साल पहले उसे किसने और किन कारणों से मौत के घाट उतारा था। चूंकि वह अपराध की दुनिया से जुड़ी हुई थी, इसलिए अंदेशा जताया जा रहा है कि वर्चस्व की लड़ाई, पैसे के लेनदेन या किसी अपने ही करीबी द्वारा रची गई साजिश के तहत उसकी हत्या कर शव को कुएं में फेंका गया होगा। पुलिस अब उसके कॉल डिटेल्स, पुराने सहयोगियों और उस डेढ़ साल के दौरान संपर्क में आए संदिग्धों की कुंडली खंगाल रही है। इस खौफनाक अंत ने यह साबित कर दिया है कि अपराध की दुनिया का रास्ता भले ही कितना भी चमकदार लगे, उसका अंत हमेशा बर्बादी और दर्दनाक मौत पर ही जाकर खत्म होता है।आम जनता और युवाओं के लिए अपराध की दुनिया से दूर रहने की एक बड़ी सीखऑटो चलाने वाली महिला से लेकर लेडी डॉन बनने और अंततः एक वीरान कुएं में कंकाल मिलने की यह दर्दनाक कहानी आज की युवा पीढ़ी और समाज के लिए एक बड़ा सबक है। यह घटना हमें यह सिखाती है कि शॉर्टकट तरीके से पैसे कमाने और गलत रास्ते पर चलने का अंजाम हमेशा भयानक होता है। मेहनत और ईमानदारी की रोटी भले ही छोटी लगे, लेकिन वह सुरक्षित और सुकून भरी होती है। पुलिस इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और जल्द ही इस ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री के मुख्य आरोपियों को बेनकाब करने का दावा कर रही है, जिससे इस रहस्य से पूरी तरह पर्दा उठ सके।
कौन हैं Gen-Z पार्षद पलक यादव? दिग्गजों को पछाड़कर बन सकती हैं जयपुर की डिप्टी मेयर
भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक ऐसे नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है जिसने अपनी कम उम्र और तेज राजनीतिक सूझबूझ से सभी बड़े दिग्गजों को चौंका दिया है। राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया और बेहद ऊर्जावान चेहरा उभरकर सामने आया है, जिनका नाम पलक यादव है। जेन-ज़ी (Gen-Z) पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाली युवा पार्षद पलक यादव अब जयपुर नगर निगम में डिप्टी मेयर के पद की सबसे मजबूत दावेदार के रूप में देखी जा रही हैं। पारंपरिक राजनीति के स्थापित समीकरणों को दरकिनार करते हुए एक युवा महिला का इस मुकाम तक पहुंचना देश भर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन हैं पलक यादव और कैसे वे इस शीर्ष पद की रेस में सबसे आगे चल रही हैं।कौन हैं पलक यादव? छात्र राजनीति से लेकर पार्षद बनने तक का प्रेरणादायक सफरजयपुर की राजनीति में हलचल मचाने वाली पलक यादव ने बहुत ही कम उम्र में सार्वजनिक जीवन में अपनी एक खास पहचान बना ली है। उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत कॉलेज के दिनों में छात्र राजनीति और सामाजिक गतिविधियों से हुई थी। युवा वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता और जन समस्याओं को बेबाकी से उठाने की उनकी शैली ने उन्हें जल्द ही पार्टी नेतृत्व के करीब ला दिया। स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान जब उन्हें मैदान में उतारा गया, तो उन्होंने अपनी मेहनत और जनता के साथ सीधे जुड़ाव के बल पर शानदार जीत दर्ज की। एक युवा और पढ़ी-लिखी महिला होने के नाते वे हमेशा से स्थानीय विकास के मुद्दों पर मुखर रही हैं और यही वजह है कि आज वे जयपुर की राजनीति का एक जाना-पहचाना चेहरा बन चुकी हैं।दिग्गजों को पीछे छोड़कर डिप्टी मेयर की रेस में कैसे सबसे आगे निकलीं पलक यादव?राजनीति में अमूल्य अनुभव रखने वाले कई वरिष्ठ पार्षदों और दिग्गजों के रहते हुए पलक यादव का डिप्टी मेयर पद की रेस में सबसे आगे निकलना किसी बड़े राजनीतिक चमत्कार से कम नहीं है। जानकारों का मानना है कि पार्टी हाईकमान इस बार संगठन में युवाओं और खासकर महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के पक्ष में है। जेन-ज़ी जनरेशन की होने के कारण पलक की डिजिटल विजन, आधुनिक शहरी प्रबंधन की समझ और आम जनता विशेषकर युवाओं से जुड़ने की कला उन्हें अन्य उम्मीदवारों से बिल्कुल अलग खड़ा करती है। इसके अलावा, पार्टी के भीतर उनकी स्वच्छ छवि और विवादों से दूर रहने की कार्यशैली ने उन्हें वरिष्ठ नेताओं का भी चहेता बना दिया है, जिसके चलते उनका पलड़ा लगातार भारी बना हुआ है।जयपुर के स्थानीय विकास और शहरी मुद्दों पर क्या है पलक यादव का विजन?यदि पलक यादव जयपुर नगर निगम में डिप्टी मेयर पद की कमान संभालती हैं, तो शहर के विकास को एक नई और आधुनिक दिशा मिलने की पूरी उम्मीद है। आधुनिक शहरी प्लानिंग, ट्रैफिक प्रबंधन, हेरिटेज सिटी जयपुर की स्वच्छता व्यवस्था और पार्कों के सौंदर्यीकरण जैसे मुद्दों पर उनका विजन बेहद स्पष्ट रहा है। वे मानती हैं कि आज के दौर में शहर के विकास के लिए केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय स्मार्ट गवर्नेंस और तकनीक का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के लिए खेल मैदानों का विकास और डिजिटल नगर निगम सेवाओं की पहुंच को हर नागरिक तक सुगम बनाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।राजस्थान की राजनीति में युवा नेतृत्व के बढ़ते कदम और इसके व्यापक सियासी मायनेपलक यादव का यह राजनीतिक उभार इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब भारतीय राजनीति में वंशवाद या केवल उम्र के अनुभव के बजाय योग्यता, कार्यकुशलता और जनसमर्थन को प्राथमिकता दी जाने लगी है। राजस्थान जैसे राज्य में जहां राजनीतिक समीकरण हमेशा से जातिगत और पारंपरिक आधार पर बनते रहे हैं, वहां एक युवा जेन-ज़ी महिला का इतने बड़े पद की दौड़ में शामिल होना एक क्रांतिकारी बदलाव है। यह नियुक्ति न केवल पार्टी के भीतर युवाओं को आगे आने के लिए प्रेरित करेगी, बल्कि आने वाले समय में अन्य राजनीतिक दलों को भी अपने सांगठनिक ढांचे में युवाओं को तरजीह देने के लिए मजबूर करेगी। जयपुर के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा आम हो चुकी है कि पलक यादव का यह सफर आने वाली पीढ़ी के कई युवाओं के लिए राजनीति में आने का रास्ता साफ करेगा।
मंगल-गुरु ने बनाया शक्तिशाली नीचभंग राजयोग! 4 राशियों को मिलेगा धन
Neechbhang Rajyog 2026: कर्क राशि में मंगल और उच्च के देवगुरु बृहस्पति की युति से दुर्लभ 'नीचभंग राजयोग' बन रहा है. इस राजयोग के शुभ प्रभाव से कई जातकों को धन, करियर और व्यापार में शानदार सफलता हासिल होगी. तो आइए जानते हैं कि किन राशियों को लाभ होगा.
अगर आप सुरक्षित और बेहतर रिटर्न के लिए पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी पीपीएफ में निवेश करते हैं, तो आम तौर पर यही धारणा रहती है कि यह पैसा 15 साल के लिए पूरी तरह ब्लॉक हो चुका है। कई बार जीवन में अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों के करियर का पड़ाव या घर का कोई बड़ा खर्च सामने आ जाता है, जहां तुरंत नकदी की जरूरत महसूस होती है। ऐसे समय में ज्यादातर लोग बैंक से महंगा पर्सनल लोन लेने या सोने के गहने गिरवी रखने की सोचने लगते हैं। बहुत कम निवेशकों को यह सटीक जानकारी होती है कि भारत सरकार के पब्लिक प्रॉविडेंट फंड स्कीम नियमों के तहत खाताधारक 15 साल की समय सीमा पूरी होने से पहले भी वैध तरीके से अपना पैसा निकाल सकते हैं।डाकघर और देश के सभी प्रमुख सरकारी व निजी बैंकों में संचालित होने वाले पीपीएफ खातों के संचालन नियम बेहद पारदर्शी हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा तय किए गए प्रावधानों के तहत निवेशकों को लिक्विडिटी यानी जरूरत पर फंड उपलब्ध कराने के लिए तीन खास व्यवस्थाएं दी गई हैं। इनमें आंशिक निकासी, खाते के बदले सस्ता लोन और बेहद गंभीर परिस्थितियों में खाते को समय से पहले बंद करने का विकल्प शामिल है। अगर आप भी पीपीएफ के इन नियमों से अनजान हैं, तो इन आसान तरीकों को समझकर अपनी वित्तीय योजना को और भी मजबूत बना सकते हैं।पीपीएफ आंशिक निकासी नियम: सातवें वित्तीय वर्ष से बिना किसी जुर्माने के निकालें रकमपब्लिक प्रॉविडेंट फंड में निवेश करने वाले खाताधारकों के लिए सबसे सुरक्षित और फायदे का सौदा आंशिक निकासी की सुविधा है। सरकार के नियमों के मुताबिक, जिस वित्तीय वर्ष में आपने अपना पीपीएफ खाता खोला है, उसके समाप्त होने के बाद पांच वित्तीय वर्ष पूरे होते ही आप आंशिक निकासी के पात्र बन जाते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि सातवें वित्तीय वर्ष की शुरुआत होते ही आप अपने खाते में जमा रकम का एक बड़ा हिस्सा निकाल सकते हैं। इस निकासी की सबसे खास बात यह है कि इस पर कोई जुर्माना या ब्याज दर में कटौती नहीं की जाती और यह पैसा आपके हाथ में पूरी तरह टैक्स-फ्री पहुंचता है।आंशिक निकासी की अधिकतम सीमा तय करने का एक स्पष्ट गणितीय फॉर्मूला है। आवेदन करने वाले वित्तीय वर्ष से ठीक पहले के वर्ष के अंत में मौजूद बैलेंस, या फिर चालू वर्ष से चार वर्ष पहले के अंत में मौजूद बैलेंस—इन दोनों में से जो भी रकम कम होगी, उसका अधिकतम 50 प्रतिशत तक पैसा खाताधारक निकाल सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपको बच्चों की स्कूली फीस या किसी छोटे प्रोजेक्ट के लिए रकम की दरकार है, तो आपको पूरा खाता तोड़ने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आप एक वित्तीय वर्ष में एक बार इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं और शेष रकम पर पहले की तरह ही सरकारी ब्याज मिलता रहेगा।प्री-मैच्योर क्लोजर का विकल्प: 5 साल पूरे होते ही इन खास वजहों पर बंद हो सकता है खातायदि किसी परिवार पर अचानक कोई बड़ा वित्तीय संकट आ जाए और आंशिक निकासी की 50 प्रतिशत रकम से काम न चल पा रहा हो, तो सरकार खाता समय से पहले बंद करने यानी प्री-मैच्योर क्लोजर की भी अनुमति देती है। पब्लिक प्रॉविडेंट फंड योजना के तहत खाता पांच वित्तीय वर्ष तक सक्रिय रहने के बाद इसे स्थायी तौर पर बंद करके सारा पैसा ब्याज सहित वापस लिया जा सकता है। हालांकि, यह सुविधा सामान्य खर्चों के लिए नहीं बल्कि केवल तीन विशेष और गंभीर परिस्थितियों में ही दी जाती है।पहला आधार यह है कि खाताधारक, उसके जीवनसाथी, आश्रित बच्चों या माता-पिता को कोई गंभीर या जानलेवा बीमारी हो गई हो। इलाज के भारी खर्च को वहन करने के लिए मेडिकल अथॉरिटी के प्रमाण पत्र के आधार पर खाता बंद किया जा सकता है। दूसरा आधार उच्च शिक्षा का खर्च है, जिसमें खाताधारक या उसके बच्चों के भारत या विदेश के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में उच्च अध्ययन के दाखिले के दस्तावेज दिखाने पर राहत मिलती है। तीसरा आधार खाताधारक के आवासीय दर्जे में परिवर्तन होना है, यानी अगर कोई व्यक्ति एनआरआई बन जाता है तो वह अपना खाता बंद करवा सकता है। समय से पहले खाता बंद करने पर एक छोटी सी शर्त यह होती है कि खाता खुलने की तारीख से लेकर बंद करने की तारीख तक मिले कुल ब्याज पर 1 प्रतिशत की मामूली कटौती की जाती है।तीसरे साल से मिलता है सबसे सस्ता लोन: बिना खाता तोड़े पूरी करें तात्कालिक जरूरतेंअगर आपके पीपीएफ खाते को अभी पांच या छह साल पूरे नहीं हुए हैं और आप आंशिक निकासी के लिए पात्र नहीं हैं, तब भी आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। सरकार शुरुआती वर्षों में खाताधारकों को लोन की शानदार सुविधा देती है। यह लोन सुविधा तीसरे वित्तीय वर्ष से लेकर छठे वित्तीय वर्ष के अंत तक उपलब्ध रहती है। बाजार में मिलने वाले महंगे पर्सनल लोन की तुलना में यह बेहद किफायती विकल्प है क्योंकि इसमें न तो कोई लंबी कागजी कार्रवाई होती है और न ही भारी भरकम ब्याज चुकाना पड़ता है।पीपीएफ पर मिलने वाले लोन का ब्याज दर केवल तत्कालीन पीपीएफ ब्याज दर से 1 प्रतिशत अधिक होता है। यानी अगर पीपीएफ पर वर्तमान में ब्याज दर 7.1 प्रतिशत चल रही है, तो आपको मात्र 8.1 प्रतिशत के सालाना ब्याज पर लोन मिल जाता है। लोन की रकम आवेदन वाले वर्ष से ठीक दो साल पहले के वित्तीय वर्ष के क्लोजिंग बैलेंस की अधिकतम 25 प्रतिशत तक हो सकती है। इस लोन की मूल राशि को 36 महीनों के भीतर आसान किस्तों में चुकाया जा सकता है। मूलधन चुकता होने के बाद ही ब्याज की वसूली की जाती है, जिससे निवेशक पर एकमुश्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता और खाता भी सुचारू रूप से चलता रहता है।ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लेम प्रक्रिया: डाकघर और बैंक से कैसे मिलेगा आपका पैसापीपीएफ से पैसा निकालना अब पहले की तरह जटिल नहीं रह गया है। अगर आपका खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई जैसे बैंकों में है और आपकी नेट बैंकिंग सक्रिय है, तो कई बैंक आंशिक निकासी के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा अपने पोर्टल पर ही दे रहे हैं। इसके लिए आपको नेट बैंकिंग में लॉगिन करके पीपीएफ सर्विसेज सेक्शन में जाना होता है, फॉर्म भरकर जरूरी जानकारी दर्ज करनी होती है और ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद मंजूर की गई राशि सीधे आपके सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।डाकघर या जिन बैंकों में ऑनलाइन निकासी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां खाताधारक को संबंधित होम ब्रांच में जाकर एक साधारण फॉर्म भरना होता है। आंशिक निकासी के लिए फॉर्म-सी (या नए प्रारूप में फॉर्म-2) भरकर देना होता है। इसके साथ पीपीएफ पासबुक की फोटोकॉपी और मूल पासबुक सत्यापन के लिए दिखानी होती है। अगर आप बीमारी या पढ़ाई के आधार पर पूरा खाता बंद कर रहे हैं, तो फॉर्म के साथ अस्पताल के बिल, डॉक्टर का पर्चा, कॉलेज का अलॉटमेंट लेटर या फीस की रसीद लगाना अनिवार्य होता है। बैंक या डाकघर के अधिकारी दस्तावेजों की जांच के बाद कुछ ही कार्य दिवसों में पूरी राशि खाताधारक के बचत खाते में जमा कर देते हैं।पीपीएफ निकासी के दौरान टैक्स लाभ और इन सावधानियों का रखें विशेष ध्यानपीपीएफ की सबसे बड़ी यूएसपी इसका एग्जम्प्ट-एग्जम्प्ट-एग्जम्प्ट यानी ट्रिपल ई (EEE) टैक्स स्टेटस है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इसमें जमा की जाने वाली रकम पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है, इस पर हर साल जुड़ने वाला ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त होता है और 15 साल बाद या आंशिक निकासी के जरिए निकाली गई पूरी रकम पर भी किसी तरह का इनकम टैक्स नहीं लगता। इसलिए जब आप सातवें साल में आंशिक निकासी करते हैं, तो उस रकम पर आपको एक भी रुपया टैक्स के रूप में नहीं चुकाना होता, जो इसे किसी भी फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य बचत योजना से कहीं अधिक फायदेमंद बनाता है।हालांकि, निवेशकों को यह सलाह दी जाती है कि जब तक कोई बहुत बड़ी मजबूरी न हो, पीपीएफ के फंड को बीच में निकालने से बचना चाहिए। पीपीएफ पर मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज (कंपाउंडिंग) लंबी अवधि में एक बहुत बड़ा कॉर्पस तैयार करता है। यदि आप बीच में बड़ी रकम निकाल लेते हैं, तो अंतिम मैच्योरिटी पर मिलने वाले फंड में काफी कमी आ जाती है। इसलिए पहले लोन के विकल्प पर विचार करें, यदि लोन से काम न चले तभी आंशिक निकासी करें और खाते को स्थायी तौर पर बंद करने का फैसला केवल अंतिम उपाय के रूप में ही अपनाएं।
पंजाब में बीजेपी रचेगी इतिहास या सतीश पूनिया का दावा साबित होगा हवा हवाई
पंजाब की सियासत में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रणनीतिक कदमों और बयानों ने बड़े राजनीतिक भूचाल ला दिया है। पंजाब भाजपा के प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सतीश पूनिया ने यह ऐलान करके सभी को चौंका दिया है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में किसी भी क्षेत्रीय दल के साथ गठबंधन करने के बजाय राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी। पारंपरिक रूप से शहरी हिंदू बहुल सीटों तक सिमटी रहने वाली भाजपा यदि पूरे सूबे में अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रही है, तो इसके पीछे पार्टी की क्या सोची-समझी रणनीति है और इस दावे में आखिर कितना दम है, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में मंथन का दौर तेज हो गया है।सतीश पूनिया का बड़ा एलान: क्या पंजाब में अपने दम पर चमत्कार कर पाएगी बीजेपी?जब से भाजपा ने पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है, तब से राजनीतिक विश्लेषक इसके नफा-नुकसान का हिसाब लगाने में जुट गए हैं। पहले के दशकों में अकाली दल के साथ गठबंधन के तहत भाजपा अमूमन 23 सीटों के आसपास ही चुनाव लड़ती थी, जिससे पार्टी का दायरा मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित रह जाता था। लेकिन अब पार्टी नेतृत्व ने इस पुरानी परिपाटी को तोड़कर पूरे राज्य में अपनी सियासी जमीन तलाशने का बीड़ा उठाया है। प्रभारी सतीश पूनिया का साफ कहना है कि पार्टी का कैडर अब मजबूत हो रहा है और बूथ स्तर तक संगठन को खड़ा किया जा रहा है, जिससे आने वाले चुनाव में अप्रत्याशित परिणाम देखने को मिल सकते हैं।जमीनी हकीकत और लोकसभा चुनावों के आंकड़ों पर आधारित सीटों के समीकरणयदि पिछले चुनावी आंकड़ों और ट्रेंड्स पर गहरी नजर डाली जाए, तो भाजपा के लिए सभी 117 सीटों पर सीधी जीत हासिल करना आसान नहीं होगा, लेकिन पार्टी अपनी स्थिति को काफी मजबूत जरूर कर रही है। हालिया लोकसभा चुनावों में भाजपा का वोट शेयर बढ़कर लगभग 18.5% के आसपास पहुंच गया था, जो कि पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में एक बड़ी छलांग थी। लोकसभा नतीजों के दौरान के विधानसभा वार विश्लेषण को देखें तो पार्टी करीब दो दर्जन से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त की स्थिति में नजर आई थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़, रवनीत सिंह बिट्टू और मनप्रीत सिंह बादल जैसे कद्दावर जाट सिख चेहरों के पार्टी में होने से भाजपा ने अब ग्रामीण इलाकों और सिख बहुल सीटों पर भी अपनी सेंधमारी तेज कर दी है।नशा मुक्ति अभियान और जनता के बीच सीधी पैث बनाने की नई रणनीतिपंजाब की वर्तमान आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को घेरने के लिए भाजपा ने केवल बयानों की राजनीति तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि जमीनी स्तर पर जनता के बीच उतरने का प्लान तैयार किया है। राज्य में बढ़ती नशाखोरी, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर पार्टी लगातार मुखर बनी हुई है। राज्यभर में चलाई जा रही नशा मुक्ति यात्रा और जनसंपर्क अभियानों के जरिए पार्टी का पूरा जोर आम जनता, युवाओं और महिलाओं से सीधा संवाद स्थापित करने पर है। बूथ स्तर पर पन्नों प्रमुखों की नियुक्ति और संगठन को मजबूत करने की यह रणनीति आने वाले दिनों में चुनावी नतीजों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।क्या 2027 के रण में मुख्य विपक्षी ताकत बन पाएगी भारतीय जनता पार्टी?पंजाब के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कमजोर पड़ते अकाली दल के बीच मुकाबला बहुकोणीय बनता जा रहा है। ऐसे में यदि भाजपा अपने दम पर सभी सीटों पर ताल ठोकती है, तो वह पारंपरिक क्षेत्रीय समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर सकती है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भले ही पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पाना अभी एक लंबी चुनौती हो, लेकिन सांगतिक विस्तार और आक्रामक रुख के बल पर पार्टी राज्य में एक मजबूत तीसरी या मुख्य विपक्षी ताकत के रूप में उभरने का पूरा माद्दा रखती है। सतीश पूनिया का यह दावा पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ-साथ विरोधियों को यह संदेश देने के लिए काफी है कि पंजाब का राजनीतिक भविष्य अब बेहद रोमांचक होने वाला है।
ड्रग्स तस्करी मामले में पंजाब पुलिस के पूर्व AIG राजजीत सिंह ने किया सरेंडर
पंजाब की राजनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जहां ड्रग्स और पुलिस-तस्कर गठजोड़ के बहुचर्चित मामले में लंबे समय से फरार चल रहे पंजाब पुलिस के पूर्व एआईजी (AIG) राजजीत सिंह हुंडूर ने आखिरकार अदालत या पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया है। ड्रग्स तस्करी के इस हाई-प्रोफाइल मामले में पिछले करीब 6 वर्षों से कानून की आंख में धूल झोंक रहे पूर्व पुलिस अधिकारी की इस नाटकीय गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कभी कानून की रखवाली करने वाली वर्दी पहनने वाले एक सीनियर आईपीएस स्तर के अधिकारी का इस तरह ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़ना और फिर गिरफ्तारी से बचने के लिए वर्षों तक छुपते फिरना देश भर के सुरक्षा तंत्र पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर से पंजाब के पुराने और संवेदनशील ड्रग्स नेटवर्क की परतों को खोलकर रख दिया है, जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।क्या था पूरा ड्रग्स और पुलिस गठजोड़ मामला जिसमें फंसे पूर्व AIG राजजीत सिंहयह पूरा हाई-प्रोफाइल मामला उस समय उजागर हुआ था जब पंजाब में ड्रग्स तस्करी के एक बड़े नेटवर्क की जांच के दौरान स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कुछ सनसनीखेज खुलासे किए थे। एसटीएफ की शुरुआती जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि राज्य के कई रसूखदार पुलिस अधिकारियों और तस्करों के बीच गहरी मिलीभगत थी, जिसके संरक्षण में अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार फल-फूल रहा था। इस पूरे सिंडिकेट में पूर्व एआईजी राजजीत सिंह की भूमिका को बेहद संदिग्ध और मुख्य बताया गया था। आरोप यह था कि उन्होंने तस्करों को बचाने और उनके अवैध कारोबार को फलने-फूलने में मदद करने के एवज में भारी मात्रा में काली कमाई की थी। जैसे ही इस मामले की आंच उन तक पहुंची, वे जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर होने के लिए भूमिगत हो गए और अदालत द्वारा उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया। पिछले छह सालों से उनकी तलाश में राज्य और केंद्रीय एजेंसियां लगातार दबिश दे रही थीं, लेकिन वे हर बार चकमा देने में कामयाब हो रहे थे।गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई और आखिरकार सरेंडर करने की मजबूरीपिछले छह वर्षों के दौरान राजजीत सिंह और उनके वकीलों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक कई कानूनी दांव-पेंच आजमाए। उनकी तरफ से लगातार अग्रिम जमानत और मामलों को खारिज कराने की कोशिशें की जाती रहीं, ताकि उन्हें पुलिस हिरासत में न जाना पड़े। हालांकि, अदालत के कड़े रुख और जांच एजेंसियों द्वारा लगातार कसे जा रहे शिकंजे के कारण उनके पास कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो चुके थे। जब उन्हें यह महसूस हुआ कि अब कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है और कभी भी उनकी संपत्ति की जब्ती या और अधिक कठोर कार्रवाई हो सकती है, तो उन्होंने बेहद नाटकीय ढंग से आत्मसमर्पण करने का रास्ता चुना। इस आत्मसमर्पण के बाद अब जांच एजेंसियों को उनसे पूछताछ करने और इस पूरे ड्रग्स रैकेट के अन्य छिपे हुए चेहरों और काले राजों का पर्दाफाश करने का सुनहरा मौका मिल गया है।पंजाब में ड्रग्स माफिया और खाकी के रिश्ते पर उठते रहे हैं गंभीर सवालपंजाब राज्य पिछले कई दशकों से ड्रग्स की समस्या से जूझ रहा है, और इस सामाजिक अभिशाप के खिलाफ कई सरकारें और एजेंसियां लड़ती आई हैं। लेकिन जब पुलिस विभाग के भीतर से ही कोई जिम्मेदार अधिकारी तस्करों का संरक्षक बन जाए, तो आम जनता का सिस्टम पर से भरोसा उठने लगता है। राजजीत सिंह का यह मामला इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण पाकर कुछ भ्रष्ट अधिकारी अपने ही देश और समाज की पीढ़ी को नशे की आग में झोंकने का काम करते हैं। इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से इस बात की मांग जोर पकड़ने लगी है कि ड्रग्स तस्करी से जुड़े जितने भी अन्य सफेदपोश और अधिकारी छिपे हुए हैं, उनके खिलाफ भी बिना किसी देरी के सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी कानून के साथ इस तरह का खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके।आगामी कानूनी प्रक्रिया और एसआईटी की पूछताछ से खुलने वाले हैं कई बड़े राजपूर्व एआईजी राजजीत सिंह के सरेंडर करने के बाद अब इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) और अन्य केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई हैं। उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके। जांच एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन छह सालों की फरारी के दौरान उन्हें किन-किन लोगों ने शरण दी थी, उनकी आर्थिक मदद किसने की थी और इस ड्रग्स सिंडिकेट के तार देश के बाहर किन-किन बड़े माफियाओं से जुड़े हुए थे। इस पूछताछ में कई और बड़े पुलिस अधिकारियों, नेताओं और कारोबारियों के नाम सामने आने की प्रबल संभावना है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को एक नया मोड़ दे दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।
ED Raids के विरोध में मोहाली के GMADA दफ्तर पर AAP कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
धनशोधन जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से की जा रही छापेमारी की कार्रवाई के बीच आम आदमी पार्टी (आप) कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को यहां जीएमएडीए कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे आप कार्यकर्ता पुलिस बैरिकेड तोड़कर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमएडीए) परिसर में प्रवेश कर गये, जबकि वहां पंजाब पुलिस के जवान तैनात थे। पंजाब में सत्तारूढ़ आप ने ईडी की कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। पार्टी ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। पंजाब आप के कार्यकारी अध्यक्ष अमनशेर सिंह शेरी कलसी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने भाजपा नीत केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय के खिलाफ नारे लगाए। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई मंगलवार को शुरू हुई थी और बृहस्पतिवार को भी जारी रही। ईडी ने मंगलवार को धनशोधन जांच के तहत मोहाली स्थित पंजाब के जीएमएडीए कार्यालयों, आवासन एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव विकास गर्ग तथा दिल्ली स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी के परिसरों पर सर्वे और तलाशी अभियान चलाया था। सूत्रों के अनुसार, ईडी के अधिकारियों ने चंडीगढ़ स्थित एक आवास पर भी छापेमारी की, जहां दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन अक्सर रहते हैं। जब ईडी की टीम यहां सेक्टर-39 स्थित आवास पर पहुंची, तब जैन वहां मौजूद नहीं थे और अधिकारियों ने आवास में प्रवेश के लिए ताले तोड़ दिए। एजेंसी ने बुधवार को लुधियाना के साहनेवाल में पंजाब के मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के भतीजे के आवास की भी छापेमारी की। ईडी की कार्रवाई के बाद पंजाब की सत्तारूढ़ आप ने भाजपा पर पंजाब के लोगों और आप नेताओं को डराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और दावा किया कि पार्टी ने राज्य में ‘‘राजनीतिक जमीन खो दी है।’’आप ने कहा कि केंद्र जीएमएडीए के कामकाज में बाधा डालने और भगवंत मान सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में अड़चन पैदा करने की कोशिश कर रहा है। आप ने कहा, ‘‘भाजपा राजनीतिक तरीके से कल्याणकारी योजनाओं को रोकने में असमर्थ है, इसलिए अब प्रशासनिक दबाव और बाधाएं पैदा करने की कोशिश की जा रही है। पंजाब के लोग इन हथकंडों को सफल नहीं होने देंगे।’’पार्टी ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियां पंजाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के लिए राजनीतिक समर्थन तैयार नहीं कर सकतीं।
अकाली दल की कमान: रूठे पक्के वोटरों को साधने के लिए शुरू किया मेगा जनसंपर्क अभियान
पंजाब की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है और शिरोमणि अकाली दल ने अपनी खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने एक बार फिर मोर्चा संभालते हुए सूबे के कोने-कोने में अपने पारंपरिक और पक्के वोटरों तक सीधे पहुंचने के लिए एक बेहद बड़ा और रणनीतिक जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अकाली दल के लिए यह अभियान अस्तित्व और पुनरुत्थान की लड़ाई जैसा है, जिसे लेकर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जमीन पर उतरकर जनता से सीधा संवाद स्थापित कर रहा है। इस महाअभियान के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नए जोश का संचार देखा जा रहा है।हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में अकाली दल का मास्टरस्ट्रोक और नया सियासी प्लानपंजाब के राजनीतिक पटल पर शिरोमणि अकाली दल (SAD) पिछले कुछ समय से कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा था, जिसके चलते पार्टी के कैडर और पारंपरिक मतदाताओं में मायूसी का माहौल बन गया था। इस स्थिति से पार पाने के लिए पार्टी हाईकमान ने अब आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। हरसिमरत कौर बादल ने खुद कमान संभालते हुए ग्रामीण इलाकों और शहरी बूथों तक सीधे संपर्क साधने की रणनीति बनाई है। इस मेगा अभियान के तहत वे खुद अलग-अलग जिलों का दौरा कर रही हैं, बुजुर्गों, महिलाओं, किसानों और युवाओं से आमने-सामने बैठकर उनकी समस्याओं को सुन रही हैं और अकाली सरकार के पुराने विकास कार्यों की याद दिलाकर पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुंचा रही हैं।पारंपरिक वोटबैंक में पैठ मजबूत करने की रणनीति और जमीनी हकीकतकिसी भी क्षेत्रीय राजनीतिक दल के लिए उसका कोर वोटर या पक्का मतदाता ही उसकी असली ताकत होता है। अकाली दल इस बात को अच्छी तरह समझ चुका है कि जब तक उसके पारंपरिक पंथक और ग्रामीण वोट बैंक की नाराजगी दूर नहीं होगी, तब तक पार्टी मजबूत वापसी नहीं कर सकती। हरसिमरत कौर बादल के इस नए अभियान का मुख्य फोकस इसी वर्ग को फिर से पार्टी के साथ जोड़ना है। गांवों की चौपालों और स्थानीय बैठकों के माध्यम से वे जनता को यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि केवल अकाली दल ही पंजाब के क्षेत्रीय हितों, किसानों के अधिकारों और धार्मिक भावनाओं की सच्ची रक्षा कर सकता है। इस संवाद शैली से लोगों के बीच सकारात्मक संदेश जा रहा है और वर्करों का उत्साह भी काफी बढ़ गया है।विपक्षी दलों पर तीखे प्रहार और पंजाब के मौजूदा मुद्दों पर अकाली दल का आक्रामक रुखइस जनसंपर्क अभियान के दौरान हरसिमरत कौर बादल मौजूदा सत्ताधारी दल और विपक्षी पार्टियों पर भी लगातार हमलावर मुद्रा में नजर आ रही हैं। उन्होंने पंजाब में बिगड़ती कानून व्यवस्था, नशाखोरी के बढ़ते मामलों और किसानों से किए गए अधूरे वादों को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि आज पंजाब का हर वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और राज्य की खुशहाली केवल और केवल अकाली दल के शासनकाल में ही संभव थी। सभाओं और रैलियों के दौरान वे जनता से सीधे संवाद करते हुए यह अपील कर रही हैं कि वे राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए क्षेत्रीय ताकतों को मजबूत करें और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पंजाब के विकास में अपनी हिस्सेदारी निभाएं।आगामी राजनीतिक भविष्य और इस मेगा अभियान के संभावित सियासी परिणामराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरसिमरत कौर बादल का यह धुआंधार दौरा और जनता के बीच सीधी मौजूदगी आने वाले दिनों में पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है। भले ही चुनाव में अभी वक्त हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इतनी जल्दी और आक्रामक तरीके से मोर्चेबंदी करना यह साबित करता है कि अकाली दल इस बार किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। पार्टी का यह महाअभियान न सिर्फ कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर रहा है बल्कि विरोधी दलों की नींद भी उड़ा रहा है। यदि यह जनसंपर्क अभियान इसी गति से जारी रहा, तो अकाली दल एक बार फिर पंजाब की मुख्य धारा की राजनीति में अपनी पुरानी और मजबूत स्थिति हासिल करने में कामयाब हो सकता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंसी की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने जनवरी 2027 सत्र के लिए सीए फाउंडेशन और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की आधिकारिक समय सारिणी जारी कर दी है। परीक्षा में शामिल होने की तैयारी में जुटे अभ्यर्थी अब संस्थान के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर पूरा शेड्यूल देख सकते हैं। नए एजुकेशन एंड ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत यह परीक्षाएं जनवरी के पहले सप्ताह से ही देश भर के विभिन्न निर्धारित केंद्रों के साथ-साथ विदेशी परीक्षा केंद्रों पर भी आयोजित की जाएंगी।सीए इंटरमीडिएट ग्रुप-1 और ग्रुप-2 के पेपर 2 जनवरी 2027 से शुरू होकर विभिन्न तिथियों पर चलेंगे, जबकि सीए फाउंडेशन पाठ्यक्रम की परीक्षाएं 3 जनवरी 2027 से शुरू होंगी। परीक्षा नियामक संस्था ने छात्रों को सलाह दी है कि वे जारी समय सारिणी के अनुसार अपनी अंतिम चरण की रिवीजन रणनीति तैयार करें ताकि समय रहते पूरा पाठ्यक्रम दोहराया जा सके।ICAI CA Exam Date Sheet: जनवरी 2027 फाउंडेशन और इंटरमीडिएट परीक्षा का पूरा शेड्यूलआईसीएआई द्वारा जारी विस्तृत अधिसूचना के अनुसार, सीए इंटरमीडिएट पाठ्यक्रम के तहत ग्रुप वन और ग्रुप टू की परीक्षाएं वैकल्पिक तिथियों पर आयोजित की जाएंगी। ग्रुप वन की परीक्षाएं 2 जनवरी से शुरू होंगी, जिसके बाद 4 जनवरी और 6 जनवरी को अगले प्रश्नपत्र होंगे। इसी प्रकार ग्रुप टू की परीक्षाएं 8 जनवरी, 10 जनवरी और 12 जनवरी 2027 को संपन्न कराई जाएंगी। छात्रों को प्रत्येक पेपर के बीच एक दिन का अंतराल दिया गया है ताकि वे पाठ्यक्रम की जटिलताओं को समझकर दोहरा सकें।सीए फाउंडेशन पाठ्यक्रम की बात करें तो इसके चारों प्रमुख प्रश्नपत्र 3 जनवरी, 5 जनवरी, 7 जनवरी और 9 जनवरी 2027 को निर्धारित किए गए हैं। फाउंडेशन स्तर पर प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए यह शेड्यूल बेहद अहम है क्योंकि यह उनके पेशेवर चार्टर्ड अकाउंटेंसी करियर का पहला पड़ाव होता है। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यदि परीक्षा तिथियों के दौरान कोई सार्वजनिक अवकाश घोषित होता है, तब भी परीक्षा कार्यक्रम में तब तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा जब तक कि परिषद की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा न की जाए।परीक्षा का समय और पेपर प्रारूप: छात्रों को मिलेंगे अतिरिक्त 15 मिनट का रीडिंग टाइमआईसीएआई की गाइडलाइन के अनुसार इंटरमीडिएट और फाउंडेशन के विभिन्न प्रश्नपत्रों के लिए समय सीमा अलग-अलग निर्धारित की गई है। इंटरमीडिएट पाठ्यक्रम के सभी प्रश्नपत्र दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित किए जाएंगे। इन पेपरों को हल करने के लिए छात्रों को पूरे 3 घंटे का समय मिलेगा। साथ ही छात्रों को प्रश्नपत्र का विश्लेषण करने और प्रश्नों के चयन के लिए दोपहर 1:45 बजे से 2:00 बजे तक यानी 15 मिनट का अनिवार्य रीडिंग टाइम भी दिया जाएगा।फाउंडेशन पाठ्यक्रम के मामले में पेपर 1 और पेपर 2 की अवधि दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक (3 घंटे) होगी, जिसमें 15 मिनट का पढ़ने का समय शामिल रहेगा। हालांकि, फाउंडेशन के पेपर 3 और पेपर 4 जो कि वस्तुनिष्ठ यानी एमसीक्यू आधारित होते हैं, उनकी समयावधि दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक (2 घंटे) निर्धारित की गई है। इन दो वस्तुनिष्ठ पेपरों के लिए छात्रों को कोई अतिरिक्त रीडिंग समय नहीं दिया जाएगा, जिसका विशेष ध्यान उम्मीदवारों को परीक्षा हॉल में रखना होगा।ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और आवेदन प्रक्रिया: कब और कैसे भरें परीक्षा फॉर्मसीए जनवरी 2027 परीक्षाओं में सम्मिलित होने के लिए योग्य उम्मीदवारों को आईसीएआई के सेल्फ सर्विस पोर्टल (SSP Portal) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन खिड़की निर्धारित तिथियों पर खुलेगी, जहां छात्रों को अपने यूजर आईडी और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करके अपनी पात्रता, ग्रुप का चयन और पसंदीदा परीक्षा केंद्र चुनना होगा।आवेदन भरते समय उम्मीदवारों को अपने सभी जरूरी दस्तावेज, हालिया पासपोर्ट साइज फोटो और डिजिटल हस्ताक्षर पहले से तैयार रखने चाहिए ताकि तकनीकी दिक्कतों का सामना न करना पड़े। परीक्षा शुल्क का भुगतान भी केवल ऑनलाइन माध्यम जैसे नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई के माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। बिना विलंब शुल्क के फॉर्म भरने की अंतिम तिथि के बाद छात्रों को सीमित समय के लिए लेट फीस के साथ आवेदन करने का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा।देश-विदेश में परीक्षा केंद्र और स्थानीय भाषा का विकल्पआईसीएआई देश के सभी प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीए परीक्षाओं का आयोजन बड़े पैमाने पर करता है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात समेत देश के सैकड़ों छोटे-बड़े शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय छात्रों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। इसके अतिरिक्त अबू धाबी, बहरीन, दोहा, दुबई, मस्कट, काठमांडू और कुवैत जैसे विदेशी शहरों में रहने वाले भारतीय मूल के छात्रों के लिए भी ओवरसीज केंद्र स्थापित किए जाएंगे।उम्मीदवारों के पास इंटरमीडिएट और फाउंडेशन के पेपर हिंदी या अंग्रेजी माध्यम में हल करने का विकल्प मौजूद रहेगा। हालांकि, छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि वे जिस माध्यम का चयन अपने परीक्षा फॉर्म में करेंगे, पूरे पेपर का उत्तर उसी भाषा में लिखना होगा। केवल कुछ विशिष्ट तकनीकी शब्दों को छोड़कर भाषा के मिश्रण की अनुमति नहीं दी जाएगी, अन्यथा मूल्यांकन में इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।एडमिट कार्ड और परीक्षा हॉल संबंधी महत्वपूर्ण दिशानिर्देशपरीक्षा शुरू होने से लगभग दो सप्ताह पहले आईसीएआई अपने पोर्टल पर एडमिट कार्ड लाइव करेगा। संस्थान किसी भी छात्र को डाक या कूरियर के जरिए हार्ड कॉपी नहीं भेजेगा, इसलिए सभी छात्रों को डिजिटल हॉल टिकट डाउनलोड करके उसका स्पष्ट प्रिंटआउट सुरक्षित रखना होगा। एडमिट कार्ड में छात्र का नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र का पता, फोटो और हस्ताक्षर दर्ज होंगे, जिनकी जांच परीक्षा केंद्र पर की जाएगी।परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के समय एडमिट कार्ड के साथ भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एक मूल फोटो पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट या वोटर आईडी कार्ड साथ ले जाना अनिवार्य होगा। परीक्षा कक्ष के अंदर किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, स्मार्ट वॉच, मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस या अनुचित सामग्री ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल संस्थान द्वारा स्वीकृत बेसिक कैलकुलेटर ले जाने की छूट दी जाएगी।अंतिम तैयारी के लिए एक्सपर्ट टिप्स और रणनीतिअब जबकि आधिकारिक समय सारिणी जारी हो चुकी है, सीए उम्मीदवारों को अपनी तैयारी को गति देने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के बचे हुए समय में नए विषयों को शुरू करने के बजाय आईसीएआई के स्टडी मटेरियल, रिवीजन टेस्ट पेपर्स (RTP), मॉक टेस्ट पेपर्स (MTP) और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का नियमित अभ्यास करना चाहिए। लिखित अभ्यास से छात्रों की लिखने की गति, शुद्धता और समय प्रबंधन में सुधार होता है, जो तीन घंटे की मुख्य परीक्षा में सफलता का सबसे बड़ा आधार बनता है।
दोनों देश किसी समझौते पर पहुंचते हैं तो व्यापार में स्थिरता बढ़ सकती है और सप्लाई चेन में रुकावट कम हो सकती है। इससे भारत को फायदा हो सकता है। लेकिन इसमें भारत के लिए एक नुकसान भी है।
खनिजों पर सेस लगाने का अधिकार खत्म होने के खिलाफ आर-पार की लड़ाई
देश के खनिज संपदा से समृद्ध राज्य झारखंड में इन दिनों केंद्र सरकार के एक फैसले को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद जिसमें राज्यों को खनिजों और खनिज भूमि पर उपकर यानी सेस लगाने का अधिकार समाप्त कर दिया गया है, राज्य की हेमंत सरकार बेहद सख्त रुख अपना चुकी है। इसी कड़ी में झारखंड सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए आगामी 5 और 6 अक्तूबर को झारखंड विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र आहूत करने का आधिकारिक ऐलान किया है। इस विशेष सत्र के दौरान राज्य के खनिज अधिकारों, वित्तीय स्वायत्तता और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की जाएगी और केंद्र के इस फैसले के खिलाफ सदन में कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा।सुप्रीम कोर्ट के फैसले और खनिज सेस पर अधिकारों की समाप्ति का पूरा मामलायह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में यह स्पष्ट कर दिया कि खनिज अधिकारों पर कर लगाने का विशेष अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है और राज्य सरकारें इस पर अलग से सेस या टैक्स नहीं वसूल सकती हैं। झारखंड जैसे राज्य के लिए यह निर्णय एक बहुत बड़ा आर्थिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा खनिज संपदा और उस पर मिलने वाले राजस्व पर निर्भर करता है। राज्य सरकार का यह तर्क है कि खनिज उत्खनन के कारण होने वाले पर्यावरणीय नुकसान, स्थानीय विस्थापन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त राजस्व की सख्त आवश्यकता होती है। सेस लगाने का अधिकार छिन जाने से राज्य के खजाने को भारी भरकम वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ सकता है, जिसे लेकर प्रशासनिक हलकों में गहरी चिंता का माहौल बना हुआ है।झारखंड सरकार का आक्रामक रुख और विधानसभा के विशेष सत्र की खास तैयारियांखनिज संपदा के मामले में राज्य के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट ने बेहद आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और उसकी सहयोगी पार्टियों का मानना है कि यह फैसला राज्यों के संघीय ढांचे और उनके वित्तीय अधिकारों पर सीधा प्रहार है। इसी गंभीर मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श और कानूनी तथा संवैधानिक विकल्पों पर मुहर लगाने के लिए 5 और 6 अक्तूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। इस दो दिवसीय सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के पास इस अहम मुद्दे पर अपनी बात रखने का पूरा मौका होगा। जानकारों का मानना है कि इस सत्र में राज्य सरकार कोई कड़ा प्रस्ताव या विशेष विधेयक भी पेश कर सकती है ताकि केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके और झारखंड के आर्थिक हितों को सुरक्षित किया जा सके।खनिज राजस्व घटने से राज्य के विकास कार्यों और स्थानीय योजनाओं पर पड़ने वाला असरझारखंड जैसे आदिवासी बहुल और पिछड़े राज्यों के लिए खनिज रॉयल्टी और सेस आय का सबसे बड़ा जरिया होते हैं। यदि राज्यों से सेस वसूलने का अधिकार पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाता है, तो राज्य सरकार के पास विकास कार्यों, कल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड की भारी कमी हो जाएगी। पिछले कई वर्षों से झारखंड सरकार खनन क्षेत्रों के विकास और वहां के प्रदूषण से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए इसी राजस्व का उपयोग करती आई है। इस अधिकार के खत्म होने से राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी, जिसका सीधा असर आम जनता के जीवन स्तर और रोजगार सृजन की योजनाओं पर पड़ सकता है। यही कारण है कि झारखंड की राजनीति में यह मुद्दा इस समय सबसे बड़ा और संवेदनशील विषय बन चुका है।राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं और आगामी सत्र को लेकर सरगर्मी तेजविधानसभा के विशेष सत्र की घोषणा के साथ ही झारखंड की राजधानी रांची से लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि वे राज्य के हक और अधिकार के लिए अंतिम दम तक लड़ाई लड़ेंगे, चाहे इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़े या संसद से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन करना पड़े। वहीं, विपक्षी दलों की ओर से भी इस सत्र को लेकर अपनी रणनीति बनाई जा रही है ताकि यह देखा जा सके कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है। 5 और 6 अक्तूबर को होने वाला यह विशेष सत्र झारखंड की राजनीति की दिशा तय करने में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
पेड़ से लटका मिला 10 दिन पुराना शव... बिजनौर में हड़कंप, पहचान नहीं
बिजनौर में गांव वालों को पेड़ से लटका एक शव मिला, जिसे पुलिस ने करीब 10 दिन पुराना बताया. मृतक की पहचान अब तक नहीं हुई है और मौत की वजह जानने के लिए शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है.
रिटायरमेंट तैयार! चहल के पोस्ट से हलचल, लेने वाले हैं संन्यास?
Yuzvendra Chahal The Last Dance Post: युजवेंद्र चहल चर्चा में हैं, इसकी वजह है उनका हालिया एक पोस्ट. चहल ने सोशल मीडिया पर इस पोस्ट में लिखा कि 'द लास्ट डांस'. अमूमन लास्ट डांस से आशय निकाला जाता है कि खिलाड़ी बड़ी घोषणा या रिटायरमेंट लेने वाला है.
यदि आपका भी बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम, चेक क्लियरिंग या नकदी निकालने की योजना है, तो इसे तुरंत निपटा लें। 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल से ठीक पहले केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है।
Tejashwi Yadav का Samrat Govt पर वार, बिहार में अपराध चरम पर और पुलिस अवैध वसूली में व्यस्त
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार को बिहार सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और पुलिस थानों में फैले भ्रष्टाचार से जनता परेशान है। तेजस्वी यादव ने 'X' पर एक पोस्ट में दावा किया कि राज्य में बेकाबू अराजकता का माहौल है, जहाँ हर दिन हत्या, लूट, अपहरण और फिरौती की घटनाएं हो रही हैं। तेजस्वी यादव ने लिखा कि बिहार में रोज़ाना हत्याएं हो रही हैं। लूट, अपहरण और फिरौती की घटनाएं हो रही हैं। छोटी बच्चियों और महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहे हैं। कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है; अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Maithili Thakur बोलीं- बिहार में सुरक्षित हूं, तो भड़के लेखक Neeraj Pandey ने याद दिला दी जमीनी हकीकत! महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों का ज़िक्र करते हुए यादव ने कहा कि अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं, जबकि पुलिस थानों और प्रशासनिक ब्लॉकों में गहरे तक फैले भ्रष्टाचार के कारण जनता की परेशानी बढ़ रही है। तेजस्वी यादव ने कहा कि पुलिस थानों और ब्लॉकों में फैले भ्रष्टाचार से जनता त्रस्त है। पुलिस शराबबंदी के नाम पर अवैध वसूली में व्यस्त है। इन सभी मुद्दों पर बड़बोले मुख्यमंत्री से किसी सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती। बिहार के जमुई ज़िले में 10वीं क्लास की एक लड़की पर हमले के कुछ ही दिनों बाद, गुरुवार को चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया। यह गिरफ़्तारी समस्तीपुर ज़िले का एक नया वीडियो सामने आने के बाद हुई, जिसमें कुछ बदमाश दिन-दहाड़े एक युवती के साथ मारपीट और बदसलूकी करते दिख रहे हैं। हालांकि वायरल वीडियो की सच्चाई की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन फ़ुटेज के बड़े पैमाने पर फैलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार संदिग्धों को गिरफ़्तार कर लिया। यह घटना कर्पूरी ग्राम पुलिस स्टेशन के इलाके में जगत सिंह तटबंध (embankment) के पास हुई। वीडियो किस तारीख का है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन पुलिस ने फ़ुटेज के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसे भी पढ़ें: Bihar Cabinet: गांधी जयंती पर रिहा होंगे पात्र कैदी, विशेष सजा माफी को मिली मंजूरी JD(U) नेता राजीव रंजन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अगर अपराधी ऐसे अपराधों के नतीजों और जमुई में की गई कार्रवाई से सबक नहीं लेते हैं, तो वे जेल जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे अपराधों में शामिल अपराधी जमुई की घटना में की गई कार्रवाई से चेतावनी नहीं लेते हैं, तो वे जेल की सलाखों के पीछे होंगे। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग ऐसे वीडियो बनाते हैं और ऐसी गतिविधियों के लिए अपने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले की जांच चल रही है और आगे की जानकारी का इंतज़ार है।
Meerut: Axis Bank के करेंसी चेस्ट में मिले 4.63 लाख के जाली नोट, अज्ञात के खिलाफ FIR
मेरठ में एक्सिस बैंक के करेंसी चेस्ट में विभिन्न शाखाओं से भेजी गई नकदी की जांच के दौरान 4,63,650 रुपये मूल्य के 1,323 जाली नोट मिलने के मामले में सिविल लाइंस थाना में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। बैंक के करेंसी चेस्ट प्रबंधक सरताज सिंह की शिकायत के अनुसार, एक दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच विभिन्न शाखाओं से भेजी गई धनराशि की जांच के दौरान जाली नोट पाए गए। प्राथमिकी के मुताबिक, इनमें 500, 200, 100 और 50 रुपये के नोट शामिल हैं। इनकी कुल संख्या 1,323 और कुल मूल्य 4,63,650 रुपये बताई गई है। पुलिस ने बुधवार को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 178, 179, 180, 181 और 182 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक दिलीप सेंगर को सौंपी गई है। पुलिस अधीक्षक (नगर) विनायक गोपाल भोसले ने बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि किन-किन बैंकों में किस तरह से नकली नोट पहुंचे, इसका पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई है। बैंक सूत्रों के मुताबिक, सरताज सिंह ने 16 सितंबर को इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति से शिकायत की थी। बैंक प्रबंधक का कहना है कि वह थाना मेडिकल क्षेत्र स्थित मंगल पांडेय नगर स्थित बैंक शाखा में कार्यरत हैं और उनकी चेस्ट से एक्सिस बैंक की कई शाखाएं जुड़ी हुई हैं।
एक ही दुकान, एक ही चाल... पैसों की माला बनवाकर भागे चोरों की कहानी
सोनीपत में पैसों की माला बनवाने के बहाने चोरी करने का अनोखा मामला सामने आया है. गोहाना रोड स्थित एक ही दुकान को एक सप्ताह के भीतर दो बार निशाना बनाया गया. पहली बार कार सवार तीन युवक 12 हजार रुपये की पैसों की माला लेकर फरार हुए, जबकि दूसरी बार स्कूटी सवार दो युवक करीब 3 हजार रुपये की माला लेकर भाग गए. दोनों वारदातें सीसीटीवी में कैद हैं और सिटी थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है.
गोरखपुर में गजनवी का उदाहरण देकर गरजे CM योगी
गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विदेशी आक्रांताओं पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने महमूद गजनवी और सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों का मकसद केवल लूटपाट करना नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा और ज्ञान को नष्ट करना था.
9 लोगों की जान गई, फिर वही सवाल... स्लीपर बस में आग लगते ही क्यों फंस जाते हैं यात्री?
हाल ही में संसद में दिए गए एक जवाब के मुताबिक, बीते तीन सालों में चलती बसों में आग लगने की 45 घटनाओं में कम से कम 64 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
डायरेक्टर ने फ्री-प्रोड्यूसर ने लाखों लगा बनाई हनुमान अंश, अब कमाए करोड़ों
सिर्फ 1.5 करोड़ रुपये से थोड़े ज्यादा बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने 47 दिनों में 366.45 करोड़ रुपये ग्रॉस कमा लिए हैं. प्रोड्यूसर अनूप्रिया नागर ने 50 लाख लगाए थे और उन्हें 50 करोड़ रुपये तक मिलने की उम्मीद है.
ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर धू-धू कर जली स्लीपर बस, 9 यात्रियों की मौत
जेवर के दयानतपुर के पास देर रात हुआ हादसा, खिड़कियों से कूदकर कई यात्रियों ने बचाई जान; चालक और परिचालक अरेस्ट ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात एक स्लीपर बस में अचानक भीषण आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई। हादसा जेवर थाना क्षेत्र में […] The post ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर धू-धू कर जली स्लीपर बस, 9 यात्रियों की मौत appeared first on Sabguru News .
Raebareli पहुंची Akhilesh Yadav की PDA Rath यात्रा, कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम जुटा
गुरुवार को उत्तर प्रदेश के रायबरेली पहुँचने पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के ‘PDA रथ’ के काफिले को पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ के कारण कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। लाल समाजवादी टोपी पहने समर्थकों ने जोश के साथ पार्टी के झंडे लहराए और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थन में नारे लगाए। यादव अपनी प्रचार बस के खुले हिस्से में खड़े होकर भीड़ का अभिवादन कर रहे थे और हाईवे पर कई सौ मीटर तक जमा हुए समर्थकों के उत्साहपूर्ण नारों का जवाब दे रहे थे। रायबरेली में लोगों की यह भारी भीड़ - जो गांधी परिवार का गढ़ है और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की संसदीय सीट है - समाजवादी पार्टी के लिए ताकत के एक बड़े प्रदर्शन के तौर पर देखी जा रही है। इसे भी पढ़ें: Yamuna Expressway Bus Fire | कश्मीरी गेट से महोबा जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, महिला समेत 9 यात्रियों की जलकर मौत बछरावां इलाके के चुरुआ गांव में यादव के ‘PDA रथ’ पर सवार होने के साथ ही उनके स्वागत का कार्यक्रम हुआ, जिससे 2027 के राज्य विधानसभा चुनावों के लिए उनके प्रचार अभियान की आधिकारिक शुरुआत हुई। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लाल रंग की प्रचार बसें गुरुवार को लखनऊ से रवाना हुईं। ‘PDA रथ’ का यह दौरा मध्य उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की व्यापक लामबंदी कोशिशों का हिस्सा है। 2027 के चुनावों से पहले पार्टी का ध्यान पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के गठबंधन पर है। इसे भी पढ़ें: इधर विपक्ष चुनाव आयोग पर हमला करता रह गया, उधर भाजपा ने बड़ा खेल कर दिया, जारी हो गयी BJP Pradesh Prabharis List 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत, यादव ने हर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के वोटों की संख्या 27,000 बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। हाल ही में हुई राज्य कार्यकारिणी की बैठक में, उन्होंने पार्टी की रणनीति बताई, राज्य की कानून-व्यवस्था के प्रबंधन की आलोचना की, और मुस्लिम समुदाय का धन्यवाद करते हुए बीजेपी और गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हमने तय किया है कि 2027 के विधानसभा चुनावों में हम हर विधानसभा सीट पर 27,000 वोट बढ़ाने के लिए काम करेंगे। इसका मतलब है कि हम बीजेपी के 27,000 वोट कम करेंगे, जिससे पार्टी के चुनावी नज़रिए का संकेत मिलता है।
TMC सिंबल फ्रीज केस... SC ने EC से पूछा- फैसला सुनाने में कितने दिन लगेंगे?
पूर्व CM ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. उन्होंने TMC पार्टी के नाम-चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद पर EC के फैसले को चुनौती दी है. वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाए है.
'गंदी बातें, गाली-गलौज और फिर...', बिहार जैसा कांड दिल्ली के मुखर्जी नगर में
दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक छात्रा ने आरोप लगाया कि सफारी गाड़ी में सवार युवकों ने उसके साथ बदतमीजी की और उसे गाड़ी में खींचने की कोशिश की. घटना 23-24 सितंबर की रात हकीकत पार्क के पास हुई. पुलिस ने कार नंबर के आधार पर जांच की तो पता चला कि गाड़ी नमन नाम का युवक चला रहा था, जिसके साथ दो-तीन और लोग भी थे.
जैम खाते हैं तो सावधान! हार्ट अटैक का बढ़ सकता है खतरा
हालिया रिसर्च में पाया गया है कि जैम और च्युइंग गम खाने से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और मौत का खतरा 57% तक बढ़ा देता है. जैम और च्युइंग गम खाने से दिल की बीमारियां होने का क्या कारण है इस बारे में भी बताया गया है.
TMC के नाम-चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI ने चुनाव आयोग से पूछा- कब तक आएगा फैसला?
TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम फैसला लेने की समयसीमा बताने को कहा है। ममता बनर्जी के गुट और दूसरे गुट के बीच जारी विवाद पर SC ने सोमवार तक EC से जवाब मांगा है।
राधिका अंबानी के भांजे ने बप्पा के आगे झुकाया सिर, जीता दिल; VIDEO
राधिका अंबानी की बहन अंजलि मर्चेंट अपने बेटे आर्यन के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचीं. मां की गोद में बैठे आर्यन ने हाथ जोड़कर नमस्ते किया और बप्पा के सामने सिर झुकाया. राधिका के नन्हे भांजे की मासूमियत ने सबका दिल जीत लिया.
गृह मंत्रालय ने States और UTs को भेजा पत्र, BNS की धारा 111 से टूटेगा तस्करों का सिंडिकेट
गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को निर्देश दिया है कि वे मानव तस्करी से निपटने को प्राथमिकता दें। इसके लिए उन्हें तीन नए आपराधिक कानूनों वाले 'नवीन न्याय संहिता' को पूरी तरह लागू करना होगा और कानून लागू करने की कोशिशों में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना होगा। मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र सरकार की इस अहम प्राथमिकता से निपटने में राज्य के नेतृत्व और ज़िम्मेदारी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इसे भी पढ़ें: MHA का राज्यों को निर्देश, मानव तस्करी के सरगनाओं पर BNS Section 111 के तहत हो सख्त कार्रवाई MHA के महिला सुरक्षा विभाग ने 28 अगस्त को राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को एक विस्तृत पत्र भेजा। इसमें अधिकारियों से कहा गया कि वे 'भारतीय न्याय संहिता, 2023', 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' और 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023' के प्रावधानों को पूरी प्रशासनिक तत्परता के साथ अधिकतम क्षमता तक लागू करें। पत्र में कहा गया है कि इन कानूनों को लागू करने का चरण पूरा हो चुका है, और अब नई आपराधिक न्याय प्रणाली के तहत इन्हें लागू करना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मुख्य ज़िम्मेदारी है। नोट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि भले ही केंद्र सरकार ने एक व्यापक कानूनी और डिजिटल ढांचा तैयार किया है, लेकिन इन सुधारों की सफलता राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मज़बूत नेतृत्व और उपलब्ध साधनों के सही इस्तेमाल पर निर्भर करती है। डिजिटल साधनों से समर्थित यह आधुनिक कानूनी ढांचा, आपराधिक न्याय प्रणाली में हुए बदलावों के बाद शोषण के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ज़रूरी सटीकता प्रदान करता है। इसे भी पढ़ें: 2019 में Sonam Mhaskar ने शुरू किया था शूटिंग का सफर, अब Asian Games 2026 में भारत के लिए जीता सिल्वर MHA ने मानव तस्करी करने वालों पर मुक़दमा चलाने और उनके गिरोहों को खत्म करने के कानूनी प्रावधानों पर ज़ोर दिया। इसमें 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' की धारा 111 का ज़िक्र किया गया, जो आपराधिक नेटवर्क को निशाना बनाती है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि मानव तस्करी शायद ही कभी कोई अलग-थलग अपराध हो; इसे आम तौर पर संगठित गिरोह चलाते हैं। जांच अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नेटवर्क को खत्म करने के लिए इस धारा का इस्तेमाल करें। उन्हें सिर्फ़ छोटे-मोटे अपराधियों तक सीमित न रहकर, गिरोह की संपत्ति ज़ब्त करने और मुख्य आयोजकों व फाइनेंसरों को बेअसर करने की दिशा में भी कार्रवाई करनी चाहिए, जो अक्सर वैध कारोबार की आड़ में छिपकर काम करते हैं।
अमेरिका ने बनाया ड्रोन फाइटर जेट MQ-20, बिना पायलट मचाएगा तबाही
अमेरिकी नौसेना ने MQ-20 एवेंजर से ऑटोनॉमस मिशन परीक्षण किया. यह बिना पायलट वाला ड्रोन फाइटर जेट है, जो दुश्मन इलाके में घुसकर भयानक तबाही मचाएगा.
Elon Musk का नया फीचर, बिना फोन नंबर शेयर किए होगी बात
एलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नया X नंबर फीचर आया है. इसकी मदद से बिना अपना फोन नंबर साझा किए किसी से चैट और कॉल की जा सकती है. यह एक प्राइवेट कोड है, जिसे सामने वाले के साथ शेयर करना होगा. खास बात यह है कि बातचीत के लिए दोनों का एक-दूसरे को फॉलो करना जरूरी नहीं है. कोड बदलते ही पुराना कोड काम करना बंद कर देता है.
LPG की न हो किल्लत... Plan-B पर अभी से काम करने लगी सरकार
LPG Production Rise In India: देश में फेस्टिव सीजन पर डिमांड बढ़ने को लेकर सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने घरेलू स्तर पर एलपीजी प्रोडक्शन अभी से बढ़ाना शुरू कर दिया है.
जमशेदपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी समेत 4 की मौत
मरीन ड्राइव पर तड़के सड़क किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी कार, गैस कटर से निकाले गए शव जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर में गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में चार युवाओं की मौत हो गई। मृतकों में राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा सिंह भी शामिल […] The post जमशेदपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी समेत 4 की मौत appeared first on Sabguru News .
अभिषेक बनर्जी ने गुस्से में पुलिसवाले को सस्पेंड कराया, पर जज नहीं माने; बहाल
कलकत्ता हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। साल 2023 में गाड़ी गेट से टकराने के बाद सस्पेंड हुए एक पुलिस चालक को उच्च न्यायालय ने बहाल करने के आदेश दिए हैं। खास बात है कि गेट लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के घर का था।
Justice certainly served Rahul Gandhi hold press conference 4 PM says enemies Constitution have been exposed.
क्या कम हुए हैं गैस के दाम... क्यों 600 रुपये सस्ता मिल रहा सिलेंडर?
सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि सिलेंडर 600 रुपये सस्ता मिल रहा है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर इस बात में कितनी सच्चाई है?
Jamshedpur के Marine Drive पर खड़े ट्रक से टकराई कार, मंत्री की बेटी समेत 4 की मौत
गुरुवार तड़के सोनारी पुलिस स्टेशन इलाके के मरीन ड्राइव पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में चार युवाओं की मौत हो गई। मरने वालों में झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह की बेटी त्रिशा सिंह भी शामिल थीं। यह हादसा सुबह करीब 3 बजे हुआ, जब चार युवाओं से भरी एक स्विफ्ट कार सड़क किनारे खड़े एक ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि कार बुरी तरह पिचक गई और उसमें सवार चारों लोग अंदर ही फंस गए। इसे भी पढ़ें: Yamuna Expressway हादसे में 9 की मौत के बाद FIR, थिनर और बस बनावट की जांच तेज स्थानीय लोगों और पुलिस ने गैस कटर की मदद से कार को काटकर चारों पीड़ितों को बाहर निकाला। यह हादसा सोनारी पुलिस स्टेशन इलाके में डोमुहानी मरीन ड्राइव के पास हुआ। मरने वालों की पहचान त्रिशा सिंह, सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता और वंशिका खंडेलवाल के तौर पर हुई है। ये चारों 12वीं क्लास के स्टूडेंट थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बुधवार रात करीब 10 बजे खराब होने के बाद एक भारी ट्रक मरीन ड्राइव के बीच में बिना किसी देखरेख के छोड़ दिया गया था। गुरुवार तड़के, तेज़ रफ़्तार एक कार, जो बताया जा रहा है कि बेकाबू हो गई थी, खड़े ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और ट्रक के नीचे फंस गया। गाड़ी को भारी नुकसान पहुंचा और उसमें सवार सभी लोग अंदर ही फंस गए। हादसे की जानकारी मिलने पर पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुँचे और बचाव अभियान शुरू किया। पीड़ितों के शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त गाड़ी में फँसे हुए थे और उन्हें बचाव उपकरणों की मदद से बाहर निकालना पड़ा। जमशेदपुर के DSP मनोज ठाकुर ने कहा कि एक स्विफ्ट कार के खराब होने के बाद सड़क पर खड़े एक ट्रक से टकराने से हुए हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। यह हादसा गुरुवार को तड़के करीब 2 से 2:30 बजे के बीच हुआ। उन्होंने कहा कि हादसे की विस्तृत जानकारी के लिए आगे की जाँच चल रही है। इसे भी पढ़ें: Yamuna Expressway Bus Fire | कश्मीरी गेट से महोबा जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, महिला समेत 9 यात्रियों की जलकर मौत इस बीच, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर में NH हाईवे पर हुई सड़क दुर्घटना में मेरी सहयोगी और बहन, मंत्री दीपिका पांडे सिंह की बेटी और अन्य लोगों की मौत की बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर से मैं बहुत दुखी हूँ। अपनी संतान को खोने का दुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता और किसी भी माता-पिता या परिवार के लिए यह असहनीय होता है। इस बेहद मुश्किल घड़ी में, मेरी गहरी संवेदनाएं बहन दीपिका और पीड़ित परिवारों के साथ हैं। इस कभी न पूरी होने वाली क्षति के लिए कोई शब्द नहीं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और पीड़ित परिवारों को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दें।
BJP ने Bengal polls में खर्च किए ₹286.99 करोड़, पांच राज्यों में Congress के कुल व्यय से भी अधिक
भारतीय जनता पार्टी ने अकेले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 286.99 करोड़ रुपये खर्च किए, जो इस साल की शुरुआत में हुए चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनावों में कांग्रेस के कुल 248.55 करोड़ रुपये के खर्च से अधिक है। निर्वाचन आयोग को सौंपे गए खर्च संबंधी विवरण में इसकी जानकारी मिली है। पांच राज्यों (असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी) के चुनावों में भाजपा के कुल 529.38 करोड़ रुपये के खर्च में आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम बंगाल का रहा। पार्टी ने बंगाल में सामान्य प्रचार पर 217.16 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 69.83 करोड़ रुपये खर्च किए। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सत्ता से हटाकर पहली बार सरकार बनाई। घोषित किए गए 293 सीटों के परिणामों में भाजपा ने 207 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी को 80 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने राज्य में हाशिये की ताकत होने के बावजूद 293 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा और दो सीटें जीतीं। पार्टी ने बताया कि उसने अपने केंद्रीय मुख्यालय और राज्य इकाई के माध्यम से बंगाल में 42.08 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें 12.96 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 29.12 करोड़ रुपये उम्मीदवारों तथा उनसे जुड़े खर्चों पर व्यय किए गए। प्रदेश में 2011 में सत्ता गंवाने से पहले कई दशकों तक बंगाल पर शासन करने वाली माकपा ने 197 सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट जीती। उसकी राज्य इकाई ने उम्मीदवारों पर किए गए खर्च समेत कुल 8.23 करोड़ रुपये के व्यय की जानकारी दी। बंगाल में भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी रही तृणमूल कांग्रेस का खर्च विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। पार्टियों द्वारा घोषित खर्च के आधार पर केरल की स्थिति अलग रही। यहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने माकपा के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे को सत्ता से हटाया। कांग्रेस ने 63 सीटें और माकपा ने 26 सीटें जीतीं। भाजपा को तीन सीटें मिलीं। कांग्रेस ने केरल में अपने मुख्यालय और राज्य इकाई के माध्यम से 105.34 करोड़ रुपये खर्च किए, जो भाजपा के 82.67 करोड़ रुपये से अधिक है। कांग्रेस के खर्च में 71.30 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 34.05 करोड़ रुपये उम्मीदवारों तथा उनसे जुड़े व्यय शामिल हैं। भाजपा ने केरल में सामान्य प्रचार पर 54.93 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 27.74 करोड़ रुपये खर्च किए। केरल में प्रमुख राजनीतिक दल माकपा की राज्य इकाई ने 28.60 करोड़ रुपये खर्च करने की जानकारी दी। इसमें 26.30 करोड़ रुपये सामान्य प्रचार और 2.31 करोड़ रुपये उम्मीदवारों पर खर्च किए गए। पांचों चुनावों में कांग्रेस ने प्रचार पर 143 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 105.55 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे उसका कुल खर्च 248.55 करोड़ रुपये रहा। माकपा का कुल संयुक्त खर्च 39.04 करोड़ रुपये रहा। भाजपा ने बंगाल और केरल के अलावा असम में 96.27 करोड़ रुपये, तमिलनाडु में 51.56 करोड़ रुपये और पुडुचेरी में 11.90 करोड़ रुपये खर्च किए। इससे पहले दाखिल किए गए विवरणों के अनुसार, चुनाव अवधि के दौरान भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय को 1,472.8 करोड़ रुपये मिले, जबकि कांग्रेस ने अपने मुख्यालय और पांच राज्य इकाइयों में कुल 207.17 करोड़ रुपये की प्राप्तियां दर्ज कीं। चुनाव अवधि समाप्त होने पर भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में 7,627.2 करोड़ रुपये की राशि थी, जो चुनावों की घोषणा के समय 6,722.6 करोड़ रुपये थी। इसी अवधि में कांग्रेस के मुख्यालय और पांच राज्य इकाइयों की संयुक्त शेष राशि करीब 169.06 करोड़ रुपये से घटकर 103.2 करोड़ रुपये रह गई।
कब है दिवाली? धनतेरस से भाई दूज तक नोट करें तारीखें
Diwali 2026: इस साल दिवाली कब है? जानें धनतेरस, छोटी दिवाली, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की पूरी तारीखें और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त.
मारुति से सीधे भिड़ेगी TATA, ला रही नई कार, क्या छीन पाएगी ताज
Tata Aeris Launch: टाटा भारतीय बाजार में एक नई कार लेकर आ रहा है. ये एक कॉम्पैक्ट सेडान होगी, जिसका सीधा मुकाबला मारुति सुजुकी डिजायर से होगा. जहां डिजायर की हर महीने 18 से 20 हजार यूनिट्स बिक जाती है. वहां टाटा टिगोर की सेल्स बहुत कम है. यही वजह है कि कंपनी टिगोर को टाटा एरिस से रिप्लेस कर रही है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.
ग्रेनो से नोएडा-दिल्ली जाने वाले रास्ते पर 5KM लंबा जाम
ग्रेटर नोएडा से नोएडा-दिल्ली की तरफ जाने वाले मार्ग पर जाम लगा हुआ है, जिसमें हजारों वाहन फंसे हुए हैं. दलित प्रेरणा स्थल और महामाया फ्लाईओवर के सामने चक्का-जाम जैसी स्थिति बनी हुई है.
जब संसद में बन रहा था CEC चुनने वाला कानून तब कहां था विपक्ष? सिर्फ ओवैसी ने किया विरोध
विपक्षी बेंच लगभग पूरी तरह खाली थी। महज 1 घंटे 40 मिनट चली बहस में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ही एकमात्र विपक्षी सांसद थे जिन्होंने इस बिल के खिलाफ सदन में अपनी बात रखी।
साहिल वाकोडे केस: अपने पुराने बयान पर आईआईटी बॉम्बे ने मांगी माफी, कहा- जल्दबाजी में कोई दावा करना अनुचित
पीएम मोदी ने 'सेवा यात्रियों' से की बातचीत, देखें देश की बड़ी खबरें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सेवा यात्रा के सभी प्रतिभागियों से खास बातचीत की. उन्होंने पुरानी कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा मुख्य मकसद हमेशा जनता की सेवा करना ही होना चाहिए. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि हमारा व्यवहार लोगों को यह दिखाना चाहिए कि चाहे हमें कितनी भी बड़ी राजनीतिक शक्ति क्यों न मिल जाए, हमारा मार्ग केवल सेवा का ही रहेगा.
मैच हारकर भी जापान उड़ा रहा गर्दा, अब अफगानिस्तान संग किया 'खेला'
एशियन गेम्स 2026 में जापान को अफगानिस्तान के खिलाफ 48 रन से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन जापानी गेंदबाजों ने अपने शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है. जापान ने अफगानिस्तान को 20 ओवर में 130 रन के अंदर ही रोक दिया.
45 की उम्र में ज़बरन रिटायरमेंट? समझिए कॉर्पोरेट का ये नया ट्रेंड!
Oracle और Adidas में हुई हालिया छंटनी ने कॉर्पोरेट जगत के उस कड़वे सच से पर्दा उठा दिया है, जहां पुराना स्किल-सेट और भारी भरकम पैकेज ही कर्मचारियों की सबसे बड़ी कमजोरी बन रहे हैं. जानिए क्यों 45 की उम्र में री-स्किलिंग और 'FIRE' मॉडल अपनाना अब ऑप्शन नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुका है.
Mau में अनीश हत्याकांड का 25 हजार का इनामी नीरज मुठभेड़ के बाद अरेस्ट
मऊ जिले के चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के सार्सेना में 14 सितंबर के अनीश हत्याकांड में फरार एक और आरोपी को पुलिस ने बृहस्पतिवार की सुबह मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी नीरज उर्फ टाइगर पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस ने बताया कि बृहस्पतिवार तड़के आसलपुर पुलिया के पास घेराबंदी के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलीबारी कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में नरीज के पैर में गोली लग गई जिसके बाद उसे गिरफ्तार करके अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अनीश हत्याकांड में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किया गया नीरज उर्फ टाइगर शातिर अपराधी है और उसके खिलाफ लूट और हत्या समेत करीब 10 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने उसके कब्जे से 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा कारतूस और बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल बरामद की है। उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर को शाम पांच बजे मऊ के थाना चिरैयाकोट के अंतर्गत सरसेना पेट्रोल पंप के पास 21 वर्षीय अनीश कुमार को मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने घेरकर गोली मार दी थी।
अहमदाबाद को 584 करोड़ की सौगात: सीएम भूपेंद्र पटेल ने नए ब्रिजों और विकास कार्यों का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 23 सितंबर को अहमदाबाद में 584 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का ई-लोकार्पण और शिलान्यास किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत वाडज जंक्शन और मकरबा रेलवे ओवरब्रिज का उद्घाटन किया गया, जिससे लगभग 3 लाख वाहन चालकों को ट्रैफिक ...
ओडिशा में डीप डिप्रेशन का असर, पुरी बना रेड जोन, भारी बारिश का अलर्ट
बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन ने ओडिशा का मौसम बिगाड़ दिया है. तट पार करने के बाद भी बारिश और तेज हवाओं का असर जारी है. पुरी में समुद्र से दूरी बनाने को कहा गया है, जबकि प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है.
एक बस, 6 राज्यों का कनेक्शन! हादसे वाली BUS पर गजब का फर्जीवाड़ा
ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के बाद व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. जिस बस में आग लगी, उस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान है. बस का मालिक छतरपुर का रहने वाला है और संचालन मध्य प्रदेश से होता है. रजिस्ट्रेशन बिहार में है, फिटनेस राजस्थान और पॉल्यूशन प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी हुआ है. बस दिल्ली से महोबा चलती थी और हादसा यूपी में हुआ.
कांग्रेस के गढ़ में अखिलेश, बस पर सवार होकर PDA यात्रा के लिए रवाना
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आज रायबरेली से रथ यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं. वह सपा विधायक राहुल लोधी के घर जाएंगे और छात्रसभा के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे.
पार्ट टाइम डिलीवरी पार्टनर बनकर हज़ारों की कमाई! ये है तरीका
डिलीवरी ऐप्स हो या फिर बाइक टैक्सी, दोनों ही प्लेटफॉर्म आपको फुल टाइम और पार्ट टाइम रोज़गार देने का ऑप्शन देते हैं. अलग-अलग प्लेटफॉर्म ने अपने हिसाब से कुछ नियम तय किए हैं, जिनका पालन करना ज़रूरी हो जाता है.
एफआईपिक बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने समझाई प्रधानमंत्री मोदी की विजन रणनीति
भारतीय कूटनीति के मोर्चे पर पिछले कुछ वर्षों में एक ऐसा अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है जिसने दुनिया भर के छोटे और विकासशील देशों का ध्यान भारत की ओर खींचा है। विशेष रूप से प्रशांत महासागर में फैले छोटे-छोटे द्वीप राष्ट्रों के साथ भारत के रिश्ते अब एक नई और मजबूत ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। हाल ही में आयोजित फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC) के विदेश मंत्रियों की उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पूरी दुनिया के सामने यह स्पष्ट किया कि भारत किस प्रकार इन दूरदराज के द्वीपीय देशों के विकास, आपदा प्रबंधन और उनकी संप्रभुता की रक्षा में लगातार एक भरोसेमंद साझीदार की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को आगे बढ़ाते हुए भारत ने इन देशों के साथ अपने संबंधों को एक नई दिशा दी है। आइए इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक, प्रशांत क्षेत्र में भारत की सहायता नीति और इसके भू-राजनीतिक निहितार्थों की पूरी और गहरी समीक्षा करते हैं।प्रशांत द्वीप समूह के देशों के लिए भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता और एफआईपिक मंचप्रशांत महासागर के ये छोटे द्वीप राष्ट्र भौगोलिक रूप से भले ही क्षेत्रफल में छोटे हों, लेकिन वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर इनका सामरिक महत्व बहुत अधिक है। लंबे समय तक इन क्षेत्रों को वैश्विक महाशक्तियों द्वारा नजरअंदाज किया जाता रहा था, लेकिन जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'ग्लोबल साउथ' (Global South) की आवाज को बुलंद करने की कमान संभाली है, तब से भारत ने इन देशों के साथ सीधे संवाद के द्वार खोले हैं। FIPIC यानी फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन का यह मंच इसी दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हुआ है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया कि भारत केवल वादे करने में विश्वास नहीं रखता, बल्कि जमीन पर उतरकर इन देशों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए ठोस और पारदर्शी परियोजनाएं चला रहा है, जिससे वहां के आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और 'सागर' अवधारणा का असरविदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन के दौरान विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दूरदर्शी दृष्टिकोण का जिक्र किया जिसके तहत भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) की नीति पर काम कर रहा है। प्रशांत द्वीप देशों को जब भी स्वास्थ्य संकट, प्राकृतिक आपदा या आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा है, भारत ने एक सच्चे और विश्वसनीय मित्र की तरह सबसे पहले आगे बढ़कर मदद का हाथ बढ़ाया है। चाहे कोविड-19 महामारी के दौरान जीवनरक्षक दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराने की बात हो, या फिर चक्रवातों और सुनामी जैसी आपदाओं के समय त्वरित राहत सामग्री पहुंचाने का काम हो, भारत ने हमेशा इन राष्ट्रों की प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रखा है। पीएम मोदी के इसी व्यक्तिगत जुड़ाव और कूटनीतिक इच्छाशक्ति के कारण आज प्रशांत महासागर के ये देश भारत को एक सच्चे और निस्वार्थ मित्र के रूप में देखते हैं।जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के मोर्चे पर भारत का साझा सहयोगइन द्वीपीय देशों के सामने आज के समय में यदि कोई सबसे बड़ा और अस्तित्वगत संकट है, तो वह ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र के जलस्तर का लगातार बढ़ना है। जलवायु परिवर्तन के कारण इन छोटे देशों के डूबने का खतरा मंडरा रहा है, और वे लंबे समय से विकसित देशों से न्याय की गुहार लगा रहे थे। FIPIC की इस बैठक में एस जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि भारत इन देशों के साथ मिलकर नवीकरणीय ऊर्जा, सोलर प्रोजेक्ट्स, पर्यावरण अनुकूल बुनियादी ढांचे और आपदा-रोधी तकनीकों के विकास में पूरी मदद कर रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के जरिए इन देशों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई वित्तीय और तकनीकी सहायता पैकेज प्रदान किए हैं। इससे न केवल उनकी ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं, बल्कि वे पर्यावरण संकट से निपटने के लिए अधिक सक्षम भी बन रहे हैं।वैश्विक भू-राजनीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत का बढ़ता रणनीतिक कदआज के दौर में जब हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र दुनिया की महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक और सामरिक अखाड़ा बनता जा रहा है, तब भारत की यह समावेशी और विकास-केंद्रित नीति इस क्षेत्र में एक संतुलन स्थापित करने का काम कर रही है। चीन जैसी विस्तारवादी ताकतों द्वारा इन छोटे देशों को कर्ज के जाल में फंसाने की रणनीतियों के विपरीत, भारत की यह साझेदारी पूरी तरह से संप्रभुता के सम्मान, आपसी पारदर्शिता और जन-कल्याण पर आधारित है। FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक में एस जयशंकर के इस बेबाक और स्पष्ट संदेश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत केवल अपनी सीमाओं तक सीमित रहने वाली महाशक्ति नहीं है, बल्कि वह पूरी दुनिया के साथ मिलकर साझा समृद्धि और वैश्विक शांति का मार्ग प्रशस्त करने वाला एक जिम्मेदार राष्ट्र है। आने वाले समय में भारत और प्रशांत द्वीप समूहों के यह मजबूत होते रिश्ते वैश्विक कूटनीति का एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिखने वाले हैं।
बिजनौर में 10 दिन पुरानी लाश का क्या है रहस्य? 10 दिन बाद पड़ी नजर
बिजनौर के हल्दौर थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव में एक अज्ञात व्यक्ति का शव पेड़ से लटका मिला. ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. लेकिन शव 10 दिन पुराना होने के कारण मृतक की पहचान अभी नहीं हो पाई है. पुलिस आसपास के इलाकों में पूछताछ कर रही है. पुलिस आगे की जांच कर रही है.
नई दिल्ली में चीनी राजदूत का बड़ा बयान, जानिए द्विपक्षीय संबंधों पर क्या कही अहम बात
भारत और चीन के बीच कूटनीतिक गलियारों से इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण और कूटनीति के लिहाज से कड़े संदेश देने वाला बयान सामने आया है। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च-स्तरीय कार्यक्रम के दौरान भारत में तैनात चीन के राजदूत ने दोनों एशियाई महाशक्तियों के रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। चीनी राजदूत ने स्पष्ट रूप से यह रेखांकित किया है कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी या दुश्मन के रूप में देखने के बजाय एक-दूसरे के विकास में साझीदार और रणनीतिक सहयोगी के तौर पर देखना चाहिए। वैश्विक राजनीति और एशिया के भविष्य को तय करने वाले इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से जमी कूटनीतिक बर्फ को पिघलाने और आपसी व्यापारिक तथा राजनीतिक संवाद को नए सिरे से पटरी पर लाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। आइए इस हाई-प्रोफाइल बयान, इसके भू-राजनीतिक निहितार्थों और दोनों देशों के रिश्तों के वर्तमान समीकरणों की पूरी और गहरी समीक्षा करते हैं।चीनी राजदूत का यह बयान और कूटनीतिक मोर्चे पर इसके मायनेजब भी भारत और चीन के संबंधों की बात आती है, तो पिछले कुछ वर्षों के दौरान सीमा विवाद, सैन्य गतिरोध और व्यापारिक असंतुलन के कारण दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण दौर से गुजरे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में चीनी राजदूत का नई दिल्ली की धरती से यह कहना कि दोनों राष्ट्र प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार हैं, एक सोची-समझी कूटनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कूटनीतिक जानकारों का यह मानना है कि चीन अब यह भली-भांति समझ चुका है कि भारत जैसे विशाल बाजार और बढ़ती हुई वैश्विक आर्थिक महाशक्ति को नजरअंदाज करके बीजिंग अपने लंबे समय के आर्थिक हितों को सुरक्षित नहीं रख सकता। इस बयान के जरिए चीन ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करने और एशिया की शताब्दी को साकार करने के लिए दोनों पड़ोसी देशों का साथ मिलकर चलना अनिवार्य है।सीमा विवाद और आपसी अविश्वास के बीच संवाद की अनिवार्यताभले ही चीनी राजदूत ने साझेदारी और सहयोग की बड़ी-बड़ी बातें की हों, लेकिन जमीन पर हकीकत यह है कि जब तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बहाल नहीं होती, तब तक दोनों देशों के बीच वास्तविक विश्वास कायम होना असंभव है। भारत सरकार ने हमेशा से अपनी विदेश नीति में यह स्पष्ट रुख अपनाया है कि सीमा पर शांति और सौहार्द ही द्विपक्षीय संबंधों के विकास की पहली शर्त है। पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों में चल रहे गतिरोध और सैन्य तनातनी को पूरी तरह से सुलझाने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडरों और राजनयिकों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं। चीनी राजदूत के इस बयान के बाद यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि बीजिंग केवल जुबानी जमाखर्च कर रहा है या फिर जमीनी स्तर पर सैनिकों के पीछे हटने और आपसी विश्वास को बढ़ाने के लिए कोई ठोस और ईमानदार कदम उठाने को तैयार है।आर्थिक interdependence और व्यापारिक मोर्चे पर दोनों देशों की मजबूरियांभारत और चीन के रिश्ते केवल सामरिक और रणनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाएं कई मायनों में एक-दूसरे पर निर्भर करती हैं। भारत को अपनी औद्योगिक वृद्धि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई तरह के कच्चे माल, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और सोलर पैनल्स के आयात के लिए चीन पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर, चीनी कंपनियों और टेक दिग्गजों के लिए भारतीय बाजार मुनाफे का एक बहुत बड़ा जरिया है। हालांकि, भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए चीनी निवेश पर कड़ी नजर रखी है और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 'मेक इन इंडिया' और पीएलआई (PLI) योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया है। इसके बावजूद, दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार इस बात का गवाह है कि चाहकर भी दोनों देश पूरी तरह से एक-दूसरे से मुंह नहीं मोड़ सकते।वैश्विक मंच पर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और चीन का बदलता दृष्टिकोणआज का भारत वर्ष 1962 वाला भारत नहीं है, बल्कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक आत्मविश्वासी और वैश्विक पटल पर स्वतंत्र निर्णय लेने वाली महाशक्ति के रूप में उभर चुका है। भारत ने अपनी विदेश नीति में 'मल्टी-अलाइनमेंट' यानी बहु-संरेखण की नीति को अपनाया है, जिसके तहत वह अमेरिका, यूरोप, रूस और जापान के साथ अपने सामरिक संबंधों को मजबूत करते हुए भी अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेता है। चीन इस बात को अच्छी तरह समझता है कि भारत को दबाया या नियंत्रित नहीं किया जा सकता, इसलिए अब कूटनीतिक भाषा में नरमी लाकर साझेदारी और संवाद की बात की जा रही है। यदि बीजिंग वास्तव में इन शब्दों के पीछे की नीول को साफ रखता है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों तथा भारत की संप्रभुता का सम्मान करता है, तो आने वाले समय में एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल सकता है और दोनों देश मिलकर वैश्विक विकास में एक नया इतिहास रच सकते हैं।
कार-ट्रक की जोरदार भिड़ंत, मंत्री दीपिका की बेटी की हुई मौत
झारखंड के जमशेदपुर जिले के दोमुहानी इलाके में कार और ट्रक की जोरदार टक्कर में चार लोगों की मौत हो गई. मृतकों में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह की बेटी भी शामिल हैं. हादसा बुधवार देर रात हुआ और टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. पुलिस और राहत बचाव टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की. घटना की परिस्थितियों की जांच जारी है.
घर की रजिस्ट्री के कागज गुम हो जाए तो क्या होगा? क्या वापस बन जाएंगे
Property Paper Lost: प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के ओरिजिनल कागज खो जाएं तो घबराने की जरूरत नहीं है. पुलिस शिकायत से लेकर रजिस्ट्रार ऑफिस में आवेदन तक, जानिए डुप्लीकेट या प्रमाणित कॉपी हासिल करने का तरीका.
पीएम मोदी ने बताई अपनी ताकत, बोले- लोगों का आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी ऊर्जा
पीएम मोदी ने कहा कि लोगों का आशीर्वाद उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी ऊर्जा रहा है। उन्होंने राजनीति और चुनाव से अलग राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत पर जोर दिया।
क्या सच में तबाही मचाने आ रहा है 'चक्रवात अर्नब'? IMD ने बताई सच्चाई
सोशल मीडिया की आभासी और तेज रफ्तार दुनिया इन दिनों एक बार फिर सनसनीखेज दावों और फर्जी खबरों की गिरफ्त में नजर आ रही है। पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा आग की तरह फैल रहा है कि देश के तटीय इलाकों में 'चक्रवात अर्नब' (Cyclone Arnab) नाम का एक बेहद खतरनाक और विनाशकारी तूफान तबाही मचाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस खबर के वायरल होने के बाद से आम नागरिकों, विशेषकर समुद्र के किनारे बसे राज्यों के लोगों के मन में भारी डर और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। लोग लगातार यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वाकई उनकी जान-माल पर कोई बहुत बड़ा प्राकृतिक संकट मंडरा रहा है। इस सनसनीखेज माहौल के बीच देश की सर्वोच्च मौसम विज्ञान संस्था यानी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आगे आकर इस पूरे मामले पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है और सोशल मीडिया पर चल रही इन تمام अटकलों का सच देश के सामने रखा है। आइए इस वायरल अफवाह, आईएमडी के खुलासे और मौसम से जुड़ी इस बड़ी खबर की पूरी गहराई से समीक्षा करते हैं।सोशल मीडिया पर कैसे फैली 'चक्रवात अर्नब' के आने की झूठी अफवाह?आज के डिजिटल युग में किसी भी झूठी खबर या सनसनीखेज दावों को वायरल होने में चंद मिनटों का समय भी नहीं लगता है। सोशल मीडिया के कुछ पेजों और वीडियो चैनलों पर व्यूज और लाइक्स बटोरने के लिए यह मनगढ़ंत कहानी गढ़ी गई कि 'चक्रवात अर्नब' नाम का एक भयानक चक्रवाती तूफान तेजी से भारत के समुद्री तटों की ओर बढ़ रहा है। इस फर्जी दावे में यह तक कहा गया कि यह तूफान अपने साथ भारी तबाही, मूसलाधार बारिश और तेज रफ्तार हवाएं लेकर आ रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। इस तरह की डरावनी हेडलाइंस और एडिटेड तस्वीरों को देखकर आम लोग बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के डर के साये में जीने लगे। इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें न केवल समाज में अनावश्यक पैनिक पैदा करती हैं, बल्कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों के लिए भी झूठी अफवाहों से निपटना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।भारतीय मौसम विभाग (IMD) का आधिकारिक बयान और सचाई का खुलासाजैसे ही यह फर्जी खबर सोशल मीडिया के जरिए जंगल की आग की तरह फैली, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने तुरंत इस पर संज्ञान लिया और अपनी तकनीकी निगरानी के आधार पर स्पष्ट किया कि इस नाम का कोई भी चक्रवात न तो बना है और न ही भविष्य में इसके आने की कोई वैज्ञानिक संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने साफ शब्दों में देशवासियों को आश्वस्त किया है कि आईएमडी की रडार प्रणालियां और उपग्रह (Satellites) बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखते हैं, और समुद्र में उठने वाली किसी भी हलचल की जानकारी समय से पहले मिल जाती है। विभाग ने यह भी बताया कि चक्रवातों के नामकरण की एक तय अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया और सूची होती है, जिसमें 'अर्नब' नाम का कोई भी चक्रवात शामिल नहीं है। मौसम विभाग के इस स्पष्टीकरण के बाद उन तमाम लोगों ने राहत की सांस ली जो सोशल मीडिया की इन डरावनी अफवाहों से बुरी तरह घबराए हुए थे।सोशल मीडिया के इस दौर में फेक न्यूज और वायरल दावों से कैसे बचें?'चक्रवात अर्नब' जैसी यह घटना इस बात का सबसे बड़ा और करारा उदाहरण है कि आज के समय में सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है। लोग अक्सर बिना यह सोचे-समझे कि खबर का स्रोत क्या है, सनसनीखेज वीडियो और पोस्ट को आगे शेयर करना शुरू कर देते हैं, जिससे समाज में डर का माहौल बनता है। जब भी मौसम, आपदा या किसी बड़ी राष्ट्रीय घटना से जुड़ा कोई दावा आपके सामने आए, तो सबसे पहले भारतीय मौसम विभाग (IMD), प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) फैक्ट चेक या देश के प्रतिष्ठित और विश्वसनीय समाचार संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट पर उसकी सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए। इंटरनेट पर फैलाई जाने वाली ऐसी भ्रामक सूचनाओं के खिलाफ आम जनता को जागरूक होना बेहद जरूरी है ताकि वे इस तरह के डिजिटल प्रोपेगेंडा का शिकार बनने से खुद को बचा सकें।भविष्य के मौसम पूर्वानुमान और प्रशासनिक सतर्कता का महत्वभले ही 'चक्रवात अर्नब' की यह खबर पूरी तरह से एक अफवाह साबित हुई हो, लेकिन देश के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम के प्रति हमेशा सतर्क और तैयार रहना एक बेहद जरूरी आदत है। भारत का भौगोलिक ढांचा ऐसा है कि साल के अलग-अलग महीनों में यहां मानसून, प्री-मोनसून गतिविधियां और कई वास्तविक चक्रवातों का सामना करना पड़ता है। आईएमडी और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) हमेशा किसी भी वास्तविक खतरे से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और पुख्ता तैयारियों के साथ मुस्तैद रहते हैं। सरकार और मौसम विभाग के आधिकारिक बुलेटिन ही एकमात्र ऐसे प्रामाणिक स्रोत हैं जिन पर जनता को भरोसा करना चाहिए। सोशल मीडिया की अनर्गल अफवाहों से दूर रहकर वैज्ञानिक और तथ्यात्मक जानकारियों पर भरोसा करना ही समझदारी है, ताकि हम बिना किसी मानसिक तनाव के सुरक्षित जीवन जी सकें।
इस 'आक्रामक खतरे' ने रख दिए हैं कदम, दिवाली से पहले घुट सकता है राजधानी का दम
जैसे-जैसे साल के आखिरी महीने नजदीक आ रहे हैं और मौसम में हल्की ठंडक घुलने लगी है, वैसे-वैसे देश के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को लेकर एक बेहद डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आने लगी है। सर्दियों के आधिकारिक आगमन से ठीक पहले देश के कई प्रमुख हिस्सों में एक ऐसा 'आक्रामक खतरा' दस्तक दे चुका है, जिसने वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है। इस खतरनाक पर्यावरणीय संकट के कारण आने वाले कुछ ही हफ्तों में विशेषकर दीपावली के पावन पर्व के आसपास हवा की गुणवत्ता इतनी ज्यादा खराब होने वाली है कि लोगों का सांस लेना तक दूभर हो सकता है। मौसम और प्रदूषण के जानकारों का यह मानना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो इस बार का त्योहारी सीजन खुशियों की जगह एक बड़े स्वास्थ्य आपातकाल में बदल सकता है। आइए इस गंभीर खतरे, इसके कारणों और आने वाले दिनों में देश की हवा पर पड़ने वाले घातक असर की पूरी और गहरी समीक्षा करते हैं।सर्दी की आहट के साथ ही क्यों मंडराने लगता है यह आक्रामक खतरा?हर साल जैसे ही मानसून विदा होता है और उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदलने लगता है, वैसे ही प्रदूषण के मोर्चे पर हालात बेकाबू होने शुरू हो जाते हैं। इसे केवल आम प्रदूषण नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह एक ऐसा 'आक्रामक खतरा' है जो हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों (PM 2.5 और PM 10), जहरीली गैसों, पराली के धुएं और मौसमी बदलाव का एक घातक मिश्रण होता है। ठंडी हवाओं की भारी प्रकृति के कारण जमीन के पास मौजूद ये जहरीले तत्व ऊपर नहीं उठ पाते और एक मोटी चादर के रूप में वायुमंडल में फंस जाते हैं। इस साल भी मौसम विभाग और वायु गुणवत्ता निगरानी एजेंसियों ने संकेत दे दिए हैं कि हवा की गति धीमी होने के कारण यह प्रदूषणकारी परत बहुत तेजी से अपनी जड़ें जमा रही है। यही वजह है कि सर्दी शुरू होने से पहले ही आसमान में धुंध और स्मॉग का असर साफ तौर पर महसूस किया जाने लगा है।दिवाली और त्योहारी सीजन पर प्रदूषण का सबसे खतरनाक वारभारत में दिवाली का त्योहार रोशनी, उमंग और आतिशबाजी का प्रतीक है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह पर्व पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बन चुका है। इस साल सर्दी की शुरुआत के साथ ही जिस तरह का आक्रामक खतरा पैदा हुआ है, उससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि दिवाली के आसपास स्थिति बेहद भयावह हो सकती है। त्योहारों के दौरान जलाए जाने वाले पटाखों से निकलने वाला धुआं, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन और पहले से ही प्रदूषित हवा मिलकर एक ऐसा ज़हरीला कॉकटेल तैयार करते हैं जो फेफड़ों को अंदर से झकझोर कर रख देता है। अस्पतालों में सांस के मरीजों, दमा (Asthma) के पीड़ितों और बुजुर्गों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया जाने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि लोगों ने अभी से सावधानी नहीं बरती और प्रशासन ने सख्त पाबंदियां नहीं लगाईं, तो दिवाली की रात कई इलाकों में दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।प्रशासनिक तैयारियां और प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमइस आसन्न खतरे की गंभीरता को भांपते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की पर्यावरण एजेंसियों ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। निर्माण कार्यों पर रोक, धूल नियंत्रण के उपायों, पुराने वाहनों पर नकेल कसने और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि, कागजी नीतियों और ज़मीनी हकीकत के बीच का अंतर अक्सर इन उपायों को बेअसर साबित कर देता है। जब तक किसानों के पास पराली प्रबंधन के लिए व्यावहारिक और सस्ते विकल्प नहीं पहुंचेंगे और आम जनता इसके प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं होगी, तब तक इस आक्रामक खतरे से पूरी तरह से निपटना असंभव सा प्रतीत होता है। स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों को युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है ताकि आने वाले हफ्तों में हवा की गुणवत्ता को एक तय सीमा से ज्यादा गिरने से रोका जा सके।आम नागरिक के रूप में हमारी सुरक्षा और स्वास्थ्य की प्राथमिकताइस गंभीर परिस्थिति में केवल सरकारों और संस्थाओं पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा, बल्कि एक जागरूक नागरिक के रूप में हमें भी अपनी और अपने परिवार की सेहत की रक्षा के लिए खुद आगे आना होगा। सुबह की सैर पर निकलते समय सावधानी बरतें, अत्यधिक प्रदूषण वाले दिनों में एन-95 मास्क का उपयोग करें, और अपने घर के आस-पास वायु शोधक पौधे लगाएं। बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क में आने से बचाना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि हम सब मिलकर इस खतरे की गंभीरता को समझेंगे और त्योहारों के दौरान थोड़े संयम का परिचय देंगे, तो इस जहरीले संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आने वाला यह हफ्ता हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा है, जिसमें हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी ही हमारा सबसे बड़ा कवच बनेगी।
चावल में उड़द दाल और पोहा मिलाकर बनाएं फूली-फूली थट्टे इडली
रोज-रोज वही छोटी और सादी इडली खाकर ऊब चुके हैं तो अब अपने नाश्ते में साउथ इंडिया का स्पेशल तड़का लगाइए और थट्टे इडली ट्राई कीजिए. कन्नड़ भाषा में 'थट्टे' का मतलब 'प्लेट' होता है, इसलिए कर्नाटक की ये इडली प्लेट के आकार के लिए जानी जाती है और साधारण इडली से ज्यादा सॉफ्ट होती है. यकीन मानिए थट्टे इडली को खाकर आप साधारण इडली भूल जाएंगे.
CEC Gyanesh Kumar पर चले देशद्रोह का केस, Congress MP Priyanka Gandhi ने की मांग
वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को कहा कि CEC ज्ञानेश कुमार पर 'अनुचित' चुनाव कराने के लिए 'देशद्रोह' का आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जो कोई भी चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करता है, वह देश के खिलाफ देशद्रोह करता है; साथ ही, वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना और 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ एक आपराधिक कृत्य है। इसे भी पढ़ें: CEC और EC चयन पैनल में LoP की मौजूदगी महज दिखावा, Supreme Court में बोले Justice Datta उन्होंने कहा कि जो कोई भी हमारे चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करता है, वह देश के साथ गद्दारी कर रहा है। हमारा रुख़ बिल्कुल साफ़ है। मुझे नहीं लगता कि ऐसे पद पर बैठे किसी व्यक्ति को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करना और 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना लोकतंत्र, संविधान और देश के ख़िलाफ़ एक आपराधिक काम है... अगर चुनाव आयुक्त ने कोई ग़ैर-कानूनी काम किया है, तो मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें सुरक्षा क्यों मिलनी चाहिए। उन्हें पूरी तरह पता था कि यह सब उनकी नाक के नीचे हो रहा है; उनके साथियों ने इस ओर उनका ध्यान भी दिलाया था, लेकिन उन्होंने इसे नज़रअंदाज़ किया और जान-बूझकर एक निष्पक्ष न होने वाले चुनाव को होने दिया। उन पर भी किसी दूसरे अपराधी की तरह ही आपराधिक मुक़दमा चलना चाहिए। प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने की कोई भी कोशिश संविधान और देश के ख़िलाफ़ एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि मेरा जवाब बिल्कुल साफ़ है। जो कोई भी हमारे चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करता है, वह देश के साथ गद्दारी कर रहा है। हमारा रुख़ बिल्कुल साफ़ है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि अगर गैर-कानूनी काम साबित हो जाते हैं, तो CEC को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का क्या होगा। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि उस पद पर बैठे किसी व्यक्ति को—यानी मुख्य चुनाव आयुक्त को—तब भी कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए, जब उन्होंने गैर-कानूनी काम किए हों। इसे भी पढ़ें: इस्तीफा, गिरफ्तारी और दोबारा चुनाव की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लामबंद हुआ विपक्ष, पढ़ें 10 बड़े नेताओं के तीखे हमले इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना और बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाना एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना, 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना... लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ एक आपराधिक काम है। प्रियंका गांधी ने आगे आरोप लगाया कि अगर CEC को गड़बड़ियों के बारे में पता था, या साथी आयुक्तों ने उन्हें इसकी जानकारी दी थी और फिर भी उन्होंने इसे जारी रहने दिया, तो उन पर आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए। प्रियंका गांधी का यह बयान 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद मचे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान वोटर लिस्ट की प्रक्रियाओं और SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
ओमान में सूरज की मौत से घर में मातम, मां-दादी का रो-रोकर बुरा हाल
देवरिया जिले के करमाजीतपुर गांव के 23 साल के सूरज यादव की ओमान के पूर्वी तट पर एक जहाज पर हुए हवाई हमले में मौत हो गई. वे डेढ़ महीने पहले ही परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ओमान गए थे. सूरज अपने माता पिता की चार संतानों में सबसे बड़े थे और अविवाहित थे.
5 दिन, मगर 1 भी गोल्ड नहीं... शूटिंग में भारत के निशाने क्यों भटक रहे?
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय शूटिंग का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. पांच दिन बाद भी भारत को शूटिंग में एक भी गोल्ड नहीं मिला है. गुरुवार को पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल टीम भी फाइनल में जगह नहीं बना सकी. कमलजीत सिर्फ एक अंक से फाइनल चूक गए, जबकि केदारलिंग उचागनवे के खराब प्रदर्शन के कारण भारत टीम ब्रॉन्ज से भी हाथ धो बैठा. इससे एक दिन पहले मनु भाकर, ईशा सिंह और सुरुचि सिंह की महिला टीम भी फाइनल में नहीं पहुंच पाई थी.
जनरल असीम मुनीर संग गुप्त बैठक ने बढ़ाई भारत की चिंता, जानिए क्या है पेइचिंग का नया खेल
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा गलियारों से इस समय एक बेहद चौंकाने वाली और भारत के सामरिक हितों को झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहां भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंधों, अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों की डील और रणनीतिक साझेदारी को दुनिया का सबसे मजबूत रिश्ता माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ फ्रांस की तरफ से पाकिस्तान के साथ चुपचाप बढ़ाए जा रहे रक्षा संपर्क ने नई दिल्ली में हलचल पैदा कर दी है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांसीसी सैन्य नेतृत्व और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के बीच हाल ही में एक उच्च-स्तरीय गुप्त बैठक संपन्न हुई है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद रक्षा विश्लेषकों के बीच यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि आखिर भारत का सदाबहार और भरोसेमंद दोस्त कहा जाने वाला फ्रांस, पाकिस्तानी सेना के साथ ऐसा कौन सा नया रक्षा संबंध या गुप्त खिचड़ी पकाने में लगा है। आइए इस हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक ड्रामे, रक्षा समीकरणों और इसके भू-राजनीतिक निहितार्थों की पूरी गहराई से समीक्षा करते हैं।भारत और फ्रांस के बीच ऐतिहासिक रक्षा सौदों का स्वर्ण कालइसमें कोई दो राय नहीं है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और फ्रांस के बीच के कूटनीतिक और रक्षा संबंध अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी नेतृत्व के बीच व्यक्तिगत और रणनीतिक तालमेल के चलते भारतीय वायुसेना और नौसेना के लिए राफेल विमानों, पनडुब्बियों और अत्याधुनिक जेट इंजन तकनीक के क्षेत्र में ऐतिहासिक समझौते हुए हैं। फ्रांस ने हमेशा से भारत को एक भरोसेमंद और प्राथमिक रणनीतिक साझीदार माना है, जो मेक इन इंडिया पहल और रक्षा आत्मनिर्भरता में लगातार मदद कर रहा है। ऐसे मजबूत और अटूट विश्वास वाले रिश्ते के बीच जब पेरिस की तरफ से पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ किसी सैन्य सहयोग या बैठक की खबरें आती हैं, तो स्वाभाविक रूप से भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान और रणनीतिकारों की भौहें तन जाती हैं कि आखिर कूटनीति की इस बिसात पर पेरिस क्या नया खेल खेल रहा है।जनरल आसिम मुनीर की फ्रांस यात्रा और गुप्त बैठकों के कड़वे सचपाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर अक्सर अपनी पश्चिमी देशों की यात्राओं के दौरान वहां के सैन्य अधिकारियों और रक्षा कंपनियों के चक्कर काटते रहते हैं ताकि किसी तरह अपनी कंगाल हो चुकी सेना के लिए आधुनिक हथियार और वित्तीय मदद हासिल कर सकें। फ्रांस जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश के साथ पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की यह बैठक इस बात का संकेत देती है कि पाकिस्तान अपनी रक्षा जरूरतों के लिए पश्चिमी देशों में नए विकल्प तलाश रहा है। हालांकि, फ्रांस जैसे लोकतांत्रिक और जिम्मेदार देश के लिए यह सोचना लाजिमी है कि वह एक ऐसे देश की सेना के साथ किस तरह के रक्षा संबंध बना रहा है जो आतंकवाद का वैश्विक केंद्र रहा है और जिसके खुद के अधिकारी आर्थिक बदहाली के दौर में भी अपनी ताकत बढ़ाने के लिए हथियारों की खरीद-फरोख्त में लगे हैं। फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय और कूटनीतिक सूत्रों से सामने आई इन जानकारियों ने भारत के रक्षा गलियारों में चिंता की लहर दौड़ा दी है।क्या फ्रांस दो नावों पर सवार होकर खेल रहा है कोई बड़ा कूटनीतिक खेल?अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई भी देश केवल भावनाओं के आधार पर संबंध नहीं चलाता, बल्कि वहां राष्ट्रहित और व्यापारिक लाभ सर्वोपरि होते हैं। फ्रांस दुनिया का एक बहुत बड़ा हथियार निर्यातक देश है, और उसकी रक्षा कंपनियां चाहती हैं कि वे ग्लोबल मार्केट में अपने हथियारों की अधिक से अधिक बिक्री करें। जानकारों का मानना है कि फ्रांस का यह रुख दोहरी कूटनीति का हिस्सा हो सकता है, जहां वह एक तरफ भारत के साथ अरबों डॉलर के मेगा डिफेंस प्रोजेक्ट्स जारी रखना चाहता है, तो दूसरी तरफ छोटे-मोटे रक्षा कलपुर्जे, तकनीकी रखरखाव या द्विपक्षीय वार्ताओं के जरिए अन्य देशों के साथ भी अपने व्यापारिक दरवाजे खुले रखना चाहता है। लेकिन भारत जैसे रणनीतिक साझीदार के लिए यह स्थिति कतई सहज नहीं हो सकती, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नीति हमेशा से शून्य सहनशीलता की रही है।नई दिल्ली का सख्त रुख और फ्रांस के साथ भविष्य के कूटनीतिक समीकरणभारतीय विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के स्तर पर इन तमाम गतिविधियों पर बेहद पैनी नजर रखी जा रही है। भारत ने अतीत में भी कई बार पश्चिमी देशों को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उनके द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली किसी भी प्रकार की सैन्य सहायता या कूटनीतिक तवज्जो का सीधा असर दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ता है। फ्रांस के साथ भारत के रिश्ते इतने गहरे हैं कि नई दिल्ली इस मुद्दे को उचित राजनयिक चैनलों के माध्यम से पेरिस के सामने मजबूती से उठाने की पूरी क्षमता रखती है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में भारत और फ्रांस के बीच होने वाली आगामी उच्च-स्तरीय बैठकों में इस गुप्त मुलाकात का क्या असर पड़ता है, और क्या फ्रांस अपने सबसे भरोसेमंद एशियाई साझीदार भारत के हितों को प्राथमिकता देते हुए पाकिस्तान के साथ इन संदिग्ध रक्षा संपर्कों पर लगाम कसता है या नहीं।
ग्रेटर नोएडा के बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हादसा, धू-धू कर जली बस, VIDEO
ग्रेटर नोएडा के बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर पुणे जाने वाली बस में अचानक आग लग गई. इसमें 14 यात्री सवार थे. दमकल विभाग और नगर निगम की फायर ब्रिगेड की टीमों ने समय रहते आग पर काबू पाया. हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ.
यूएनजीए के बीच अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो का बड़ा बयान, जानिए क्यों कही यह बात
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठकों के दौरान दुनिया भर का ध्यान खींचने वाला एक बेहद स्पष्ट और दो टूक बयान सामने आया है। अमेरिकी राजनीति और कूटनीतिक गलियारों में एक प्रभावशाली पहचान रखने वाले सीनेटर मार्को रुबियो ने यूएनजीए केサイドलाइन पर एक बड़ा बयान देते हुए यह स्वीकार किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने द्विपक्षीय झगड़ों या विवादों को सुलझाने के लिए कोई भी प्रभावी या काम करने वाला अंतरराष्ट्रीय सिस्टम या तंत्र मौजूद नहीं है। वैश्विक मंचों पर अक्सर कश्मीर और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने की कोशिश करने वाले तत्वों के बीच अमेरिका के इस वरिष्ठ नेता का यह बयान एक बहुत बड़ा और यथार्थवादी संदेश माना जा रहा है। आइए इस हाई-प्रोफाइल बयान, इसके भू-राजनीतिक निहितार्थों और दक्षिण एशिया की राजनीति पर पड़ने वाले इसके असर की पूरी और गहरी समीक्षा करते हैं।मार्को रुबियो का यह बड़ा बयान और इसके भू-राजनीतिक मायनेजब भी संयुक्त राष्ट्र या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और पाकिस्तान का जिक्र होता है, तो पारंपरिक रूप से मध्यस्थता या बाहरी दखल की बातें सामने आती रही हैं। हालांकि, अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने बहुत ही साफगोई के साथ यह बात कही है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच के जटिल मामलों को हल करने का काम किसी बाहरी वैश्विक संगठन या अंतरराष्ट्रीय सिस्टम के बस का नहीं है। वाशिंगटन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों के अनुसार, इस बयान का सीधा मतलब यह है कि अमेरिका और पश्चिमी देश अब इस सच्चाई को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार की मध्यस्थता सफल नहीं हो सकती। जब तक दोनों देश खुद आमने-सामने बैठकर आपसी संवाद के जरिए अपने मुद्दों को नहीं सुलझाते, तब तक कोई भी तीसरा पक्ष इसमें कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल सकता है।भारत का हमेशा से रहा है स्पष्ट रुख: तीसरे पक्ष की मध्यस्थता मंजूर नहींभारत सरकार ने अपनी विदेश नीति के इतिहास में हमेशा से इस बात पर दृढ़ता बनाए रखी है कि भारत और पाकिस्तान के तमाम द्विपक्षीय मुद्दे केवल शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत आपसी बातचीत से ही हल किए जा सकते हैं। नई दिल्ली ने कभी भी किसी भी बाहरी देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन को कश्मीर या अन्य मामलों में मध्यस्थता करने की अनुमति नहीं दी है। मार्को रुबियो का यह बयान भारत के उसी पारंपरिक और कूटनीतिक रुख की एक तरह से वैश्विक पुष्टि करता है, जिसमें यह माना गया है कि इस क्षेत्र की शांति और स्थिरता केवल दोनों देशों के सीधे राजनीतिक संवाद पर निर्भर करती है। जब अमेरिका जैसे देश का कोई प्रमुख नेता इस वास्तविकता को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है, तो यह पाकिस्तान के उन तमाम प्रोपेगेंडा प्रयासों को करारा झटका देता है जो वह हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तीसरे पक्ष को खींचने के लिए करता रहता है।संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थाओं की सीमाओं का यथार्थमार्को रुबियो के इस बयान ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य वैश्विक सुरक्षा संगठनों की सीमाओं और कार्यप्रणाली पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित किए गए ये अंतरराष्ट्रीय निकाय आज के दौर के क्षेत्रीय संघर्षों, आतंकवाद और द्विपक्षीय दुश्मनों को पूरी तरह से शांत करने में अक्सर असमर्थ साबित होते रहे हैं। जब दो परमाणु-सशस्त्र देश आपस में उलझे हों, तो केवल प्रस्ताव पारित करने या बयानबाजी करने से जमीन पर कोई बदलाव नहीं आ सकता। रुबियो ने इसी जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए यह संकेत दिया है कि दुनिया को अब यह मान लेना चाहिए कि भारत और पाकिस्तान के मामलों में कोई जादुई अंतरराष्ट्रीय समाधान उपलब्ध नहीं है, और इसका एकमात्र रास्ता कूटनीतिक परिपक्वता और द्विपक्षीय बातचीत ही है।दक्षिण एशिया की शांति और भविष्य का राजनीतिक परिदृश्यइस बड़े बयान के बाद दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों पर इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। एक तरफ जहां भारत अपनी स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति के दम पर वैश्विक मंचों पर लगातार आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि उसे अपनी आंतरिक और बाहरी असफलताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहानुभूति मिलने वाली नहीं है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्तियां अब भारत के साथ अपने सामरिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को सबसे ऊपर रख रही हैं, और वे क्षेत्रीय स्थिरता के नाम पर किसी भी ऐसे झंझट में नहीं पड़ना चाहतीं जिसका कोई व्यावहारिक अंत न हो। यूएनजीए के मंच से आया यह बयान दक्षिण एशिया की राजनीति में भारत के बढ़ते कूटनीतिक कद और पश्चिमी देशों की बदलती सोच का एक सबसे स्पष्ट प्रमाण बनकर उभरा है।
जमशेदपुर में भीषण सड़क हादसा, मंत्री दीपिका पांडेय की बेटी समेत 4 की मौत
जमशेदपुर के नेशनल हाईवे पर भीषण सड़क हादसे में झारखंड की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा सिंह समेत चार लोगों की मौत हो गई।
मक्का पैक्ट का पहला कमांडर कौन? इस्लामाबाद से हुआ बड़ा ऐलान
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मध्य पूर्व के सुरक्षा समीकरणों में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से एक ऐसा आधिकारिक ऐलान किया गया है जिसने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस घोषणा के बाद से यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि आखिर बहुचर्चित 'मक्का पैक्ट' (Mecca Pact) का पहला कमांडर किसे नियुक्त किया गया है और क्या आने वाले समय में तुर्की और पाकिस्तान मिलकर सऊदी अरब जैसी महाशक्तिशाली खाड़ी देश की सैन्य सुरक्षा का जिम्मा उठाने जा रहे हैं। भू-राजनीतिक उथल-पुथल के इस दौर में इस्लामाबाद से आए इस बयान की गूंज वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक सुनाई दे रही है। आइए इस रणनीतिक समझौते, सैन्य नेतृत्व की घोषणा और इस्लामिक दुनिया के बदलते रक्षा ढांचे की पूरी गहराई से समीक्षा करते हैं।मक्का पैक्ट और इस्लामाबाद से हुए इस चौंकाने वाले ऐलान के मायनेजब से इस्लामिक देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक समझौतों की सुगबुगाहट शुरू हुई है, तब से 'मक्का पैक्ट' को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। अब पाकिस्तान के उच्च सैन्य और राजनीतिक हलकों से यह बात साफ कर दी गई है कि इस बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचे के तहत पहले कमांडर के रूप में किसे चुना गया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों और विशेषकर पवित्र स्थलों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करना बताया जा रहा है। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पैक्ट के जरिए पाकिस्तान और तुर्की मिलकर मध्य पूर्व के सुरक्षा बाजार में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस्लामाबाद से किया गया यह ऐलान इस बात का संकेत है कि पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व खुद को इस्लामिक जगत के सुरक्षा ठेकेदार के रूप में स्थापित करने की अपनी पुरानी महत्वकांक्षा को अमलीजामा पहनाने में जुट गया है, भले ही इसके आंतरिक आर्थिक परिणाम कुछ भी क्यों न हों।क्या सच में सऊदी अरब की सैन्य सुरक्षा संभालेंगे तुर्की और पाकिस्तान?इस पूरे समझौते का सबसे बड़ा और संवेदनशील पहलू यह है कि क्या रियाद जैसे समृद्ध और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी वाकई तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों के हाथों में सौंपी जा रही है। पारंपरिक रूप से सऊदी अरब अपनी रक्षात्मक जरूरतों के लिए पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय रक्षा कंपनियों पर निर्भर रहा है। ऐसे में, यदि तुर्की के सामरिक प्रभाव और पाकिस्तानी थल सेना की क्षमता को इस पैक्ट के जरिए जोड़ा जाता है, तो यह मध्य पूर्व के पारंपरिक पावर बैलेंस में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। हालांकि, विश्लेषकों का यह भी कहना है कि सऊदी अरब अपनी संप्रभुता और रक्षा नीतियों को लेकर बेहद सतर्क रहता है, और वह किसी भी बाहरी देश को अपनी मुख्य सैन्य कमान पूरी तरह नहीं सौंपेगा। इसके बावजूद, इस तरह के सांकेतिक समझौतों से खाड़ी देशों के बीच एक नया कूटनीतिक ब्लॉक जरूर तैयार होता दिख रहा है।तुर्की की आक्रामक रणनीतिक नीतियां और पाकिस्तान की भागीदारीइस पूरे सुरक्षा ताने-बाने में तुर्की की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि राष्ट्रपति एर्दोगन लंबे समय से ओटोमन साम्राज्य के दौर के प्रभाव को आधुनिक मध्य पूर्व में फिर से जीवित करने की फिराक में रहे हैं। तुर्की के पास अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक, मजबूत रक्षा उद्योग और आक्रामक सैन्य रणनीति का अनुभव है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के पास बड़ी संख्या में प्रशिक्षित सैनिक और सैन्य बल उपलब्ध हैं, जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे अपने देश के लिए विदेशी मुद्रा कमाने का जरिया तलाश रहे हैं। जब तुर्की की तकनीक और पाकिस्तान के मानव संसाधन का यह मिश्रण 'मक्का पैक्ट' के बैनर तले सामने आता है, तो इसे पश्चिम एशिया के अन्य देशों जैसे ईरान और इजराइल के सामरिक हितों के संदर्भ में भी बहुत बारीकी से परखा जा रहा है।क्षेत्रीय स्थिरता पर इस रक्षा समझौते का क्या होगा दूरगामी असर?मक्का पैक्ट और इसके पहले कमांडर की नियुक्ति से जुड़े इस घटनाक्रम का असर आने वाले समय में पूरे विश्व की भू-राजनीति और तेल बाजारों पर पड़ सकता है। यदि पाकिस्तान और तुर्की मिलकर खाड़ी देशों की सुरक्षा में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं, तो इससे क्षेत्रीय मोर्चे पर नए समीकरण बनेंगे। हालांकि, ईरान और अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों की तरफ से इस सैन्य गठबंधन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आने की पूरी संभावना है, क्योंकि वे इसे अपने खिलाफ एक सुन्नी सैन्य धड़े के रूप में देख सकते हैं। भारत और अन्य वैश्विक महाशक्तियां भी इस बात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं कि यह समझौता कागजी घोषणाओं तक सीमित रहता है या वास्तव में जमीन पर कोई बड़ा सामरिक बदलाव लेकर आता है। कुल मिलाकर, इस्लामाबाद से हुआ यह ऐलान आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एक सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बनने वाला है।
Yamuna Expressway हादसे में 9 की मौत के बाद FIR, थिनर और बस बनावट की जांच तेज
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में लगी आग में नौ यात्रियों की मौत हो गई। इसकी शुरुआती जांच में कोई इमरजेंसी एग्जिट न होना, बनावट से जुड़े नियमों का उल्लंघन और सामान रखने की जगह (लगेज कम्पार्टमेंट) में पेंट थिनर का मिलना जैसी मुख्य बातें सामने आई हैं। राज कल्पना ट्रैवल्स की यह बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही थी, तभी गुरुवार तड़के ग्रेटर नोएडा के जेवर इलाके में 33-किमी माइलस्टोन के पास इसमें आग लग गई। इसे भी पढ़ें: Yamuna Expressway Bus Fire | FIR में बड़ा खुलासा, यात्रियों की चेतावनी के बावजूद स्लीपर बस दौड़ाता रहा ड्राइवर, एक गलती निगल गयी 9 लोगों की जिंदगी सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला है कि इमरजेंसी एग्जिट के ऊपर स्लीपर कम्पार्टमेंट बनाने की वजह से उस तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। बनावट से जुड़ी अन्य कमियां भी पाई गई हैं; बस के परमिट और तय सुरक्षा नियमों के पालन की जांच के लिए आगे और भी निरीक्षण किए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि इमरजेंसी एग्जिट के ऊपर स्लीपर कम्पार्टमेंट बनाए जाने के कारण वह रास्ता बंद हो गया था। शुरुआती जांच में कुछ कमियां मिली हैं। परमिट को लेकर और भी जांच की जाएगी। जांच करने वालों को सामान रखने वाली जगह (लगेज कम्पार्टमेंट) में पेंट थिनर भी मिला है। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इसे ले जाना यात्री बसों में ज्वलनशील तरल पदार्थ ले जाने से जुड़े नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सामान रखने की जगह पर पेंट थिनर भी मिला। हम यह देख रहे हैं कि क्या ज्वलनशील तरल पदार्थ ले जाने से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ है। FIR के मुताबिक, जब बस एक्सप्रेसवे पर चल रही थी, तो यात्रियों को जलने की गंध और धुआं महसूस हुआ। उन्होंने ड्राइवर और हेल्पर को इस बारे में बताया, लेकिन उन्होंने तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की। इसे भी पढ़ें: DU Internship: जापानी कंपनी Sprix Learning में मौका, मिलेगा ₹60,000 स्टाइपेंड FIR में यह आरोप भी लगाया गया है कि ड्राइवर और स्टाफ़ ड्राइवर के केबिन में धूम्रपान कर रहे थे। जांच करने वाले अधिकारी आग लगने की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या धुएं और गंध से आग लगने का पहले ही पता चल सकता था। मामले में दर्ज जानकारी के अनुसार, बस रात करीब 11:30 बजे नोएडा एक्सप्रेसवे पर आई थी और लगभग 33 किलोमीटर चलने के बाद ड्राइवर के केबिन से धुआं निकलता देखा गया।
इमरान खान की पार्टी के मार्च से पहले इस्लामाबाद सील, लगाए गए 2000 कंटेनर
पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के 27 सितंबर को होने वाले लॉन्ग मार्च को लेकर राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं. सरकार और प्रशासन इस मार्च को लेकर बेहद सतर्क हैं, जिसके चलते इस्लामाबाद की पूरी तरह से किलेबंदी कर दी गई है.
हैदराबाद में 12वीं पास बना फर्जी डॉक्टर
हैदराबाद के गोलकोंडा में पुलिस ने बिना चिकित्सकीय डिग्री मरीजों का इलाज करने के आरोप में 23 वर्षीय मोहम्मद अदनान को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, वह हिकमा सेहत केयर सेंटर में मरीजों को देख रहा था. छापेमारी में बिना लेबल वाली दवाइयां, पाउडर, पर्ची किताब और अन्य दस्तावेज बरामद हुए. पुलिस सेंटर की गतिविधियों, सोशल मीडिया प्रचार और एक योग्य यूनानी डॉक्टर की भूमिका की भी जांच कर रही है.
यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती स्लीपर बस में लगी भीषण आग, 9 लोग जिंदा जले
दिल्ली से महोबा जा रही एक चलती स्लीपर बस में ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण आग लग गई. इस दर्दनाक हादसे में नौ यात्रियों की मौत हो गई है. आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बस लपटों से घिर गई. बस में लगभग 40 से 50 लोग सवार थे. आग लगते ही बस के अंदर चीख-पुकार मच गई. यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए बस की खिड़कियों के शीशे तोड़े और बाहर कूदने की कोशिश की.
ग्रेटर नोएडा में दर्दनाक हादसा, लापरवाही से बस में लगी आग, 9 लोगों की दर्दनाक मौत
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में नोएडा से आगरा जा रही स्लीपर बस में अचानक आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। हालांकि, कुछ लोगों ने बस से कूदकर अपनी जान बचाई। बताया जा रहा है ...
पटना में जनसुराज नेता पर जानलेवा हमला, देखें हेडलाइंस
बिहार के पटना से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां दिन-दहाड़े जन सुराज के एक कार्यकर्ता को बदमाशों ने 5 गोलियां मार दीं. सीसीटीवी फुटेज में तीन संदिग्ध नजर आ रहे हैं. इस घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सेवा तीर्थ में आयोजित चिंतन बैठक के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेवा यात्रा के प्रतिभागियों के साथ विशेष संवाद किया. देखें हेडलाइंस.
CEC और EC चयन पैनल में LoP की मौजूदगी महज दिखावा, Supreme Court में बोले Justice Datta
प्रधानमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता (LoP) के पैनल द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून की वैधता पर विचार करते हुए, जस्टिस दीपांकर दत्ता ने बुधवार को इसकी कमियां बताईं। उन्होंने कहा कि इससे सरकार (एग्जीक्यूटिव) को बहुत ज़्यादा ताकत मिलती है और विपक्ष के नेता की मौजूदगी सिर्फ़ दिखावे की रह जाती है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की आज़ादी पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज़ादी के बाद से ही सरकारें चुनाव आयोग को अपने कंट्रोल में रखने की कोशिश करती रही हैं। इसे भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें: चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी पर Congress का बड़ा हमला जस्टिस दत्ता ने कहा कि सात दशकों से ज़्यादा समय में, सत्ता में आने वाली हर सरकार को उन संस्थाओं को अपने कंट्रोल में रखना सुविधाजनक लगा, जिन्हें संविधान ने आज़ाद रखने की कल्पना की थी। आर्टिकल 324(2) के तहत कानून बनाने का मतलब होता ECI को सरकार के पूरी तरह से कंट्रोल से आज़ाद करना और सत्ताधारी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी करना। इस कोर्ट की राय में, यह किसी एक पार्टी या एक दौर की नाकामी नहीं रही है। दशकों से राजनीतिक सत्ता की एक लगातार दिखने वाली बात यह रही है कि वह उसी संस्था पर अपना दबदबा बनाए रखना चाहती है, जिसे सत्ता पर उसके दावे को परखने का काम सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने हैं, तो यह ज़रूरी है कि चुनाव आयोग (EC) न सिर्फ़ एक स्वतंत्र संस्था हो, बल्कि स्वतंत्र रूप से काम करता हुआ भी दिखे। साथ ही, यह दुखद है कि सत्ता में रही किसी भी पार्टी ने—जिसे भारत के लोगों ने इस महान देश पर शासन करने की ज़िम्मेदारी सौंपी थी—उस तरह का कानून बनाने की पहल नहीं की, जैसा कानून बनाने का काम अनुच्छेद 324(2) ने देश की सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था, यानी संसद, पर छोड़ा था। जस्टिस दत्ता ने कहा कि साफ़ वजहों से, कोई भी राजनीतिक पार्टी अपनी चुनावी किस्मत को पूरी तरह से स्वतंत्र मध्यस्थ के हाथों में नहीं सौंपना चाहती थी। सत्ता में बने रहने के लिए, कार्यकारी कार्रवाई के ज़रिए लगातार यही कोशिश की जाती रही है—चुनाव आयोग के गठन को प्रभावित करना, CEC और EC की नियुक्ति की प्रक्रिया को नियंत्रित करना और इस तरह, चुनाव के प्रतिकूल नतीजों को अपने पक्ष में करना। इसे भी पढ़ें: ममता बनर्जी ने CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और बंगाल में दोबारा चुनाव की मांग उठाई कानून के ख़िलाफ़ उठाए गए तर्कों का सारांश देते हुए उन्होंने कहा कि इस तर्क का मूल सार यह है: यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर क्रिकेट मैच में अंपायर को एक टीम का कप्तान चुनता है और उसकी टीम जीत जाती है, तो भले ही अंपायर के फ़ैसले सही हों, उन पर शक की गुंजाइश बनी रहती है, क्योंकि आख़िरकार अंपायर को जीतने वाले कप्तान ने ही चुना होता है। जस्टिस दत्ता ने आगे कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि निष्पक्ष चुनाव काफ़ी हद तक एक पूरी तरह से स्वतंत्र चुनाव आयोग पर निर्भर करते हैं। चुनाव आयोग का स्वतंत्र होना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि उसका स्वतंत्र दिखना भी ज़रूरी है।
1951 में सजा था पहला मंच... AI के दौर में गांव के उत्सव की कहानी
मध्य प्रदेश में आगर मालवा में गणेशोत्सव के साथ 75 साल से ज्यादा पुरानी रामलीला की परंपरा आज भी कायम है. 1951 में शुरू हुई यह रामलीला गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक चलती है. राम, लक्ष्मण, रावण, मेघनाथ से लेकर रामायण के कई प्रमुख किरदार स्थानीय लोग और शिक्षक निभाते हैं. बदलते दौर और AI के जमाने में भी हर साल रामलीला चौक पर लोगों की भीड़ जुटती है.
₹10 लाख महीना किराया! न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में घर लेना कितना महंगा
इस पूरे मामले ने न्यूयॉर्क में किराए की ऊंची कीमतों को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है. जहां कुछ लोग 10 हजार डॉलर के किराए को मैनहट्टन के खास अपार्टमेंट के संदर्भ में सही मान रहे हैं, वहीं दूसरे यूजर्स का कहना है कि अलग-अलग इलाकों और सुविधाओं के हिसाब से किराए में काफी अंतर हो सकता है.
26 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष! किस दिन किस पितर का होगा श्राद्ध?
Pitru Paksha 2026: वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर (पूर्णिमा श्राद्ध) से हो रही है, जो 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगी. चलिए जानते हैं हर दिन का महत्व.

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