मार्केट पर इन 4 कंपनियों का कब्जा, 15 लाख ने खरीदे ई-स्कूटर
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट के लिए 2026 अब तक शानदार रहा है. इस सेगमेंट में जितनी गाड़ियां पिछले पूरे साल में बिकी हैं, उससे 2.19 लाख ज्यादा यूनिट्स सिर्फ 9 महीनों में ही इस साल बिक चुकी हैं. अगर मार्केट पर नजर डालें, तो टीवीएस, बजाज, एथर एनर्जी और हीरो मोटोकॉर्प का लगभग 76 परसेंट मार्केट पर कब्जा है. आइए जानते हैं इस सेगमेंट का हाल.
Mahua Moitra को दौरे पर दें सुरक्षा, कलकत्ता HC ने Krishnanagar SP को दिया 30 नवंबर तक का निर्देश
कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को TMC सांसद महुआ मोइत्रा को उनकी कृष्णानगर संसदीय क्षेत्र की यात्राओं के दौरान दो सुरक्षाकर्मी मुहैया कराने का आदेश 30 नवंबर तक बढ़ा दिया। यह आदेश वहां पिछली यात्राओं के दौरान उन पर अंडे फेंकने और परेशान किए जाने के आरोपों को देखते हुए दिया गया है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि मोइत्रा की इस याचिका को चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के सामने पेश किया जाए। यह निर्देश पश्चिम बंगाल में अंडे फेंकने की घटनाओं से जुड़ी एक PIL (जनहित याचिका) मामले में उनके आदेश के अनुसार दिया गया। जस्टिस भट्टाचार्य ने 1 सितंबर के पिछले आदेश के तहत कृष्णानगर के SP को दिए गए निर्देश के अनुसार, सांसद को दी गई सुरक्षा को 30 नवंबर तक बढ़ा दिया। इसे भी पढ़ें: 83 की उम्र में भी महानायक का अटूट जज़्बा! KBC 18 के सेट पर फिसले Amitabh Bachchan, घुटने में चोट के बावजूद काम जारी कोर्ट ने 1 सितंबर को कृष्णानगर के SP को निर्देश दिया था कि जब भी मोइत्रा अपने चुनाव क्षेत्र में आएं, तो उन पर अंडे फेंकने और अन्य तरह से परेशान करने की कथित घटनाओं को रोकने के लिए दो पुलिसकर्मियों को तैनात करके उन्हें सुरक्षा दी जाए। मोइत्रा के वकील अर्का नाग ने बताया कि कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश के बाद, उनके चुनाव क्षेत्र के दौरे के दौरान उन पर अंडे फेंकने और भीड़ के हमले की घटनाएं हुईं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इस याचिका को 27 नवंबर को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीज़न बेंच के सामने पेश किया जाए। एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने बताया कि चीफ जस्टिस घुगे की अध्यक्षता वाली डिवीज़न बेंच ने 23 सितंबर को एक PIL पर आदेश दिया था। इसमें हाई कोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया था कि वे ऐसे मामलों की याचिकाएं खोजें जिनमें लोगों या सार्वजनिक हस्तियों पर अंडे फेंकने की घटना हुई हो, ताकि उन्हें 27 नवंबर को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जा सके।
फ्लाईदुबई विमान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले Pilot Smit Machhar के साहस की नेताओं ने की तारीफ
नयी दिल्ली, एक अक्टूबर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत पार्टी के कई नेताओं ने बृहस्पतिवार को भारतीय पायलट स्मित मच्छार के साहस की सराहना की जिन्होंने ‘फ्लाईदुबई’ की एक उड़ान को दुर्घटनाग्रस्त करने की अपने सह-पायलट की कोशिश को नाकाम कर दिया था। विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे। दुबई से तेल अवीव जा रही ‘फ्लाईदुबई’ की उड़ान एफजेड1073 ने बुधवार को आपात संकेत भेजे थे। इसके बाद विमान 34,000 फुट की ऊंचाई से तेजी से 17,000 फुट से अधिक नीचे आ गया। बाद में उसका मार्ग सऊदी अरब के तबूक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्देल अजीज हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया। सह-पायलट के हमले में गंभीर रूप से घायल मच्छार का सऊदी अरब के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राष्ट्र कैप्टन स्मित मच्छार के साथ खड़ा है और उनके असाधारण साहस पर बेहद गर्व महसूस कर रहा है। अपनी जान जोखिम में डालकर उन्होंने कर्तव्य और सेवा की सर्वोच्च परंपराओं को कायम रखा और विमान में सवार सभी लोगों की जान बचाने में मदद की।’’सिंह ने कहा, ‘‘मच्छार का साहस, संयम और कर्तव्य के प्रति निष्ठा राष्ट्र के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। मैं उनके शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करता हूं।’’नवीन ने कहा कि मच्छार ने दुनिया को दिखाया कि ‘‘सच्चा साहस’’ कैसा होता है और उनकी कार्रवाई से सैकड़ों लोगों की जान बचाने में मदद मिली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘चाकू से हमला किए जाने और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। उन्होंने अपनी सुरक्षा से ऊपर दूसरों की सुरक्षा को रखा। भारत को उनकी बहादुरी पर गर्व है और सेवा तथा जिम्मेदारी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देश हमेशा याद रखेगा।’’भाजपा नेता नितिन गडकरी ने कहा कि गंभीर खतरे के बीच कैप्टन मच्छार का असाधारण साहस राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मच्छार को ‘‘सच्चा नायक’’ बताया। गोयल ने कहा, ‘‘मौत के खतरे के सामने मच्छार का साहस एक भारतीय पायलट के बेहतरीन जज्बे को दर्शाता है। आज 140 करोड़ भारतीय गर्व से उनके साथ खड़े हैं। उनके असाधारण शौर्य को सलाम और उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना।’’केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मच्छार का साहस ‘‘भारत के सर्वोत्तम मूल्यों’’ को दर्शाता है। चौहान ने कहा कि अपनी जान खतरे में होने और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने सबसे पहले दूसरों की सुरक्षा का ख्याल किया।
वेब सीरीज: दुपहिया सीजन 2 (Dupahiya Season 2)स्टारकास्ट: गजराज राव, स्पर्श श्रीवास्तव, रेणुका शहाणे, शिवानी रघुवंशी, भुवन अरोड़ा
प्रयागराज में बहन ने भाई को ही बना लिया पति!
प्रयागराज में शादी से जुड़ा एक मामला चर्चा में है, जहां 20 साल की युवती ने उस युवक से शादी की, जिसे परिवार के मुताबिक वह करीब 15 साल से भाई मानकर राखी बांधती थी. शादी की जानकारी मिलने के बाद पिता ने बेटी को मृत मानते हुए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया. वहीं युवती का दावा है कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और वह पति के साथ खुश है. दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं.
मासिक राशिफल अक्टूबर 2026: तुला राशि को महीने के अंत में मिलेगा बंपर लाभ
नया महीना यानी अक्टूबर 2026 अपने साथ जीवन के विभिन्न पहलुओं में कई नए बदलाव, चुनौतियां और सुनहरे अवसर लेकर आ चुका है। ज्योतिषीय गणनाओं और ग्रहों की चाल के अनुसार, इस माह कई बड़े ग्रहों का गोचर होने जा रहा है, जिसका सीधा प्रभाव देश-दुनिया के साथ-साथ सभी बारह राशियों के जातकों के जीवन पर पड़ने वाला है। जहाँ एक तरफ कुछ राशियों के लिए यह महीना करियर और कारोबार में अपार सफलता लेकर आया है, वहीं दूसरी तरफ कुछ जातकों को सेहत और पारिवारिक मामलों में थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से तुला राशि के जातकों के लिए इस महीने के अंत में जबरदस्त लाभ मिलने के योग बन रहे हैं, जिससे उनकी पुरानी आर्थिक तंगी दूर हो सकती है। आइए बेहद गहराई, विस्तार और रिपोर्टर की संवादात्मक शैली में इस पूरे मासिक राशिफल का विश्लेषण करते हैं कि अक्टूबर 2026 का यह महीना आपकी राशि के लिए क्या कुछ खास लेकर आया है।मेष, वृषभ और मिथुन राशि के जातकों के लिए अक्टूबर 2026 का महीना लेकर आ रहा है कौन से बड़े बदलावराशिचक्र की पहली तीन राशियों यानी मेष, वृषभ और मिथुन के जातकों के लिए अक्टूबर का यह महीना मिश्रित फल देने वाला साबित होने वाला है। मेष राशि के जातकों को इस महीने अपने कार्यक्षेत्र में सीनियर अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा, हालांकि जल्दबाजी में कोई भी बड़ा वित्तीय निर्णय लेने से बचना होगा। वृषभ राशि के लोगों के लिए यह महीना व्यापार विस्तार और पारिवारिक सुख-शांति के लिहाज से बेहद अनुकूल रहने की संभावना है, जिससे लंबे समय से रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे। मिथुन राशि के विद्यार्थियों और नौकरीपेशा युवाओं को अपनी मेहनत का पूरा परिणाम मिलेगा, लेकिन सेहत के मोर्चे पर खानपान का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा ताकि किसी भी तरह की मौसमी बीमारी से बचा जा सके। ग्रहों की यह चाल इन तीनों राशियों के जीवन में एक नया संतुलन स्थापित करने का काम करेगी।कर्क, सिंह और कन्या राशि के जातकों को इस माह करियर, धन और स्वास्थ्य के मामले में क्या रखनी होगी सावधानीकर्क, सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए अक्टूबर 2026 का यह समय आत्ममंथन और रणनीतिक रूप से आगे बढ़ने का है। कर्क राशि के जातकों को इस महीने निवेश करते समय किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह अवश्य लेनी चाहिए, अन्यथा धन हानि की आशंका बन सकती है। सिंह राशि के जातक अपने आत्मविश्वास के बल पर कार्यक्षेत्र में कोई बड़ा मुकाम हासिल करेंगे, लेकिन वैवाहिक जीवन में अहं के टकराव से बचने की सलाह दी जाती है। कन्या राशि के लोगों के लिए विदेश यात्रा या नई नौकरी के अवसर खुल सकते हैं, बशर्ते वे अपनी वाणी और गुस्से पर थोड़ा नियंत्रण रखें। इन तीनों राशियों के जातकों को यदि अपने लक्ष्यों को पाना है, तो उन्हें अपनी प्राथमिकताओं को बहुत स्पष्ट रूप से तय करना होगा।तुला, वृश्चिक और धनु राशि के जातकों का भविष्यफल, तुला राशि को महीने के अंत में होगा बंपर धन लाभअब बात करते हैं उस राशि की जिसका इस महीने सबसे ज्यादा जिक्र हो रहा है, यानी तुला राशि। तुला राशि के जातकों के लिए अक्टूबर 2026 की शुरुआत भले ही सामान्य गति से हो, लेकिन महीने के अंत तक आते-आते इन्हें व्यापार, नौकरी और पैतृक संपत्ति के मामलों में बंपर लाभ मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं। वृश्चिक राशि के जातकों को इस महीने गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने की जरूरत है, हालांकि धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ने से मानसिक शांति बनी रहेगी। धनु राशि के लोगों के लिए यह महीना भाग्य का पूरा साथ लेकर आया है, जिससे उनके लंबे समय से अटके हुए सरकारी या कानूनी काम आसानी से पूरे हो जाएंगे। तुला राशि के जातकों की चमक इस महीने के आखिरी हफ्तों में सबसे ज्यादा देखने को मिलेगी।मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए कैसा रहेगा यह माह, जानिए आर्थिक और पारिवारिक स्थिति का पूरा हालराशिचक्र की अंतिम तीन राशियों यानी मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए अक्टूबर 2026 का महीना आर्थिक सुदृढ़ता और नए रिश्तों की शुरुआत लेकर आ रहा है। मकर राशि के जातकों को नौकरी में प्रमोशन या मनचाही जगह ट्रांसफर का शुभ समाचार मिल सकता है, जिससे उनका मन प्रसन्न रहेगा। कुंभ राशि के लोगों को इस महीने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी, साथ ही आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे। मीन राशि के जातकों के लिए पारिवारिक जीवन में सुखद माहौल रहेगा और संतान पक्ष से कोई बहुत ही encouraging खबर सुनने को मिल सकती है। इन सभी राशियों के जातकों को इस पूरे महीने सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है, ताकि वे हर अवसर का भरपूर लाभ उठा सकें।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे मिनटों में वायरल होती हैं मासिक राशिफल और ज्योतिष से जुड़ी खबरेंआज का यह आधुनिक डिजिटल दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का युग बन चुका है जहाँ मासिक राशिफल, ग्रह गोचर और भविष्यफल से जुड़ी कोई भी जानकारी कुछ ही सेकंड में इंटरनेट की दुनिया में छा जाती है। जब भी किसी नए महीने की शुरुआत होती है, तो डिजिटल सर्च इंजन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग अपनी राशि के अनुसार भविष्य जानने के लिए बड़ी संख्या में सर्च करते हैं। भारत और दुनिया भर के ज्योतिष प्रेमी गूगल के माध्यम से यह जानने का प्रयास करते हैं कि आने वाले दिनों में उनके जीवन में क्या सकारात्मक या नकारात्मक बदलाव आने वाले हैं। तकनीक और सोशल मीडिया के इस पारदर्शी दौर में अब ज्योतिषीय आकलन और राशिफल की ये जानकारियां हर व्यक्ति की पहुंच में आसानी से आ जाती हैं, जिससे उन्हें अपने भविष्य की योजनाएं तय करने में बहुत बड़ी मदद मिलती है।
मनोज तिवारी का पत्नी से हुआ पंगा, अर्चना पूरन बोलीं- मंत्रीजी...
कलर्स टेलीविजन के लोकप्रिय शो पति, पत्नी और पंगा का दूसरा सीजन जल्द आ रहा है. इस बार शो में टेलीविजन के कई पावर कपल्स जैसे अर्चना पूरन सिंह-परमीत सेठी, राहुल वैद्य-दिशा परमार और मनोज तिवारी-सुरभि तिवारी नजर आएंगे.
जानिए दुनिया की टॉप-10 यूनिवर्सिटी में हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड का क्या रहा स्थान
वैश्विक शिक्षा और उच्च शिक्षण संस्थानों के मूल्यांकन के क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित और बहुप्रतीक्षित 'टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027' (THE World University Rankings 2027) आधिकारिक रूप से जारी कर दी गई है। इस नई वैश्विक रैंकिंग के सामने आते ही दुनियाभर के академиक गलियारों, छात्रों और शिक्षाविदों के बीच इस बात को लेकर भारी चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर इस बार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में कौन सी यूनिवर्सिटी किस पायदान पर काबिज हुई है। हर साल की तरह इस बार भी अमेरिका और ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों ने अपनी पारंपरिक बादशाहत को कायम रखते हुए टॉप-10 की सूची पर पूरा कब्जा जमाया हुआ है। हालांकि, अलग-अलग मापदंडों, शिक्षण गुणवत्ता, शोध (Research Quality) और उद्योग जगत के सहयोग के आधार पर इस बार रैंकिंग के आंकड़ों में कुछ दिलचस्प उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले हैं। हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, ऑक्सफोर्ड और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) जैसे दुनिया के दिग्गज संस्थान इस बार भी शीर्ष स्थानों के लिए एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देते नजर आए हैं। आइए बेहद गहराई, विस्तार और रिपोर्टर की संवादात्मक शैली में इस नई ग्लोबल रैंकिंग के हर एक पहलू का विश्लेषण करते हैं कि आखिर 2027 की इस सूची में कौन सी यूनिवर्सिटी दुनिया के नक्शे पर सबसे ऊपर है।क्या है टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) रैंकिंग 2027 और किन कड़े पैमानों पर तय होती है दुनिया की सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटीकिसी भी विश्वविद्यालय की वैश्विक साख को मापने के लिए 'टाइम्स हायर एजुकेशन' की यह रैंकिंग दुनिया भर में सबसे प्रामाणिक मानी जाती है, जिसे तैयार करने में शिक्षण का माहौल, अनुसंधान की गुणवत्ता, उद्धरण (Citations), अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और इंडस्ट्री इनकम जैसे कड़े पैमाने शामिल होते हैं। इस वर्ष जारी की गई 2027 की रैंकिंग के लिए दुनिया के हजारों संस्थानों के आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण किया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन सा संस्थान छात्रों को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए सबसे बेहतर तरीके से तैयार कर रहा है। आज के इस आधुनिक तकनीकी और एआई (AI) के दौर में यूनिवर्सिटीज के सामने फंडिंग से लेकर रिसर्च तक की नई चुनौतियां खड़ी हैं, और ऐसे में जो संस्थान लगातार उच्च मानकों पर खरे उतर रहे हैं, उन्होंने ही इस सूची में अपनी शीर्ष जगह बनाई है। शिक्षा प्रेमियों और विदेशों में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले लाखों छात्रों के लिए यह रैंकिंग एक बहुत बड़ा मार्गदर्शन साबित होती है, क्योंकि इसके जरिए उन्हें यह पता चलता है कि दुनिया के किस कोने में कौन सा संस्थान किस विषय के लिए सबसे ज्यादा उत्कृष्ट है।यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने फिर मारी बाजी, अमेरिका और ब्रिटेन का टॉप-10 पर रहा दबदबाइस ताजा 2027 की रैंकिंग में ब्रिटेन की प्रतिष्ठित 'यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड' (University of Oxford) ने एक बार फिर से दुनिया भर में पहला स्थान हासिल करते हुए अपनी ऐतिहासिक बादशाहत को लगातार बरकरार रखा है। ऑक्सफोर्ड की रिसर्च क्वालिटी और ग्लोबल एकेडमिक रिप्यूटेशन ने उसे एक बार फिर से नंबर वन की कुर्सी पर काबिज रखा है। वहीं दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रतिष्ठित संस्थान 'मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी' (MIT) दूसरे स्थान पर मजबूती के साथ खड़ा है। इस बार की सूची की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी ने भी शीर्ष स्थानों पर अपनी शानदार पकड़ बनाई है, हालांकि कुछ पुराने संस्थानों के पायदान में मामूली फेरबदल भी देखने को मिला है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जैसे नाम भी इस शीर्ष फेहरिस्त का अहम हिस्सा बने हुए हैं, जो यह साबित करते हैं कि एंग्लो-अमेरिकन शिक्षा प्रणाली का प्रभाव आज भी वैश्विक उच्च शिक्षा पर सबसे गहरा है।हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड का क्या रहा स्थान, जानिए टॉप-10 विश्वविद्यालयों की पूरी और विस्तृत सूचीदुनियाभर के छात्रों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालयों की स्थिति को लेकर इस बार भी लोगों में खासी उत्सुकता थी। टाइम्स हायर एजुकेशन की 2027 की इस नई रैंकिंग के अनुसार, दुनिया के शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की पूरी तस्वीर इस प्रकार सामने आई है:यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड (University of Oxford) - यूनाइटेड किंगडम (लगातार शीर्ष स्थान पर काबिज)मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) - संयुक्त राज्य अमेरिका (दूसरा स्थान)प्रिंसटन यूनिवर्सिटी (Princeton University) - संयुक्त राज्य अमेरिका (संयुक्त रूप से तीसरा स्थान)स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) - संयुक्त राज्य अमेरिका (संयुक्त रूप से तीसरा स्थान)यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज (University of Cambridge) - यूनाइटेड किंगडम (पांचवां स्थान)हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) - संयुक्त राज्य अमेरिका (छठा स्थान)कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) - संयुक्त राज्य अमेरिका (सातवां स्थान)इंपीरियल कॉलेज लंदन (Imperial College London) - यूनाइटेड किंगडम (आठवां स्थान)यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले (UC Berkeley) - संयुक्त राज्य अमेरिका (संयुक्त रूप से नौवां स्थान)येल यूनिवर्सिटी (Yale University) - संयुक्त राज्य अमेरिका (संयुक्त रूप से नौवां स्थान)एशिया के बढ़ते कदम और ग्लोबल शिक्षा के नक्शे पर आ रहे नए बदलावों के क्या हैं गहरे मायनेइस रैंकिंग के विश्लेषण से एक बात बहुत स्पष्ट हो जाती है कि जहां एक तरफ अमेरिका और ब्रिटेन के शीर्ष संस्थान अभी भी टॉप-10 की सूची पर पूरी तरह काबिज हैं, वहीं दूसरी तरफ एशियाई देशों के विश्वविद्यालय भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। चीन और सिंगापुर के कई प्रमुख विश्वविद्यालय अब दुनिया के शीर्ष संस्थानों को कड़ी टक्कर देते हुए टॉप-20 और टॉप-50 के दायरे में मजबूती से अपनी जगह बना रहे हैं। एशिया में अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा के स्तर में सुधार आने के कारण अब छात्रों को पढ़ाई के लिए केवल पश्चिमी देशों की तरफ ही नहीं देखना पड़ रहा है, बल्कि एशियाई महाद्वीप में ही विश्व स्तर के शिक्षण केंद्र विकसित हो चुके हैं। आने वाले समय में यह वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अधिक रोमांचक होने वाली है क्योंकि तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इनोवेशन के इस युग में हर देश अपने उच्च शिक्षा ढांचे को दुनिया का सबसे बेहतरीन बनाने के लिए जी-जान से जुटा हुआ है।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे मिनटों में वायरल होती हैं ग्लोबल यूनिवर्सिटी रैंकिंग की खबरेंआज का यह आधुनिक डिजिटल दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का युग बन चुका है जहाँ शिक्षा और वैश्विक यूनिवर्सिटी रैंकिंग से जुड़ी कोई भी बड़ी रिपोर्ट पलक झपकते ही इंटरनेट की दुनिया में छा जाती है। जब से टाइम्स हायर एजुकेशन की 2027 की यह नई रैंकिंग जारी हुई है, डिजिटल सर्च इंजन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दुनिया भर के छात्रों और अभिभावकों द्वारा टॉप यूनिवर्सिटीज की सूचियों को बड़े पैमाने पर खंगाला जा रहा है। भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों से छात्रों ने गूगल के माध्यम से हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और ऑक्सफोर्ड के स्कोर, एडमिशन क्राइटेरिया और ग्लोबल करियर स्कोप को बहुत गहराई से पढ़ना शुरू कर दिया है। तकनीक और सोशल मीडिया के इस पारदर्शी दौर में अब वैश्विक शिक्षा की ऐसी बड़ी रिपोर्ट्स कुछ ही पलों में हर विद्यार्थी की पहुंच में आ जाती हैं, जिससे उन्हें अपने उच्च अध्ययन और भविष्य के करियर को गढ़ने में बहुत बड़ी मदद मिलती है।
नीट-जेईई या यूपीएससी नहीं, बल्कि ब्राजील की ये परीक्षा है दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एग्जाम
जब भी दुनिया भर में आयोजित होने वाली सबसे बड़ी, कठिन और विशाल प्रतियोगी परीक्षाओं की बात होती है, तो आम तौर पर हमारे जेहन में भारत की नीट (NEET), जेईई (JEE) या यूपीएससी (UPSC) जैसी परीक्षाओं का ही नाम आता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर शिक्षा और परीक्षाओं के आंकड़े जुटाने वाली एक ताजा और बेहद चौंकाने वाली ग्लोबल रैंकिंग सामने आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। इस नई रैंकिंग के मुताबिक, भारत की कोई भी परीक्षा दुनिया की शीर्ष सबसे बड़ी परीक्षाओं में दूसरे स्थान पर नहीं है, बल्कि दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की 'ENEM' परीक्षा ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा होने का यह बड़ा खिताब अपने नाम कर लिया है। वहीं दूसरी ओर, दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं की इस फेहरिस्त में भारत की लोकप्रिय राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नेट (NET) को चौदहवां (14वां) स्थान मिला है। शिक्षा जगत और ग्लोबल एकेडमिक्स के गलियारों में इस नई रैंकिंग के जारी होने के बाद से ही इस बात पर बहुत बड़ी चर्चा छिड़ गई है कि आखिर किस देश की परीक्षा में कितने लाख परीक्षार्थी हिस्सा लेते हैं और पैमानों के लिहाज से कौन सी परीक्षा किस पायदान पर खड़ी है। आइए बेहद विस्तार, गहराई और रिपोर्टर की संवादात्मक शैली में इस पूरी ग्लोबल रैंकिंग के हर एक पहलू का विश्लेषण करते हैं कि आखिर ब्राजील की इस परीक्षा में ऐसा क्या खास है और भारत की परीक्षाएं वैश्विक मंच पर कहां ठहरती हैं।क्या है ब्राजील की 'ENEM' परीक्षा और कैसे इसने बनाई दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के रूप में अपनी धाकब्राजील में आयोजित होने वाली 'ENEM' (Exame Nacional do Ensino Mdio) परीक्षा पिछले कुछ वर्षों में छात्रों के बीच दुनिया की सबसे बड़ी शैक्षणिक परीक्षाओं में से एक के रूप में उभरी है। इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य ब्राजील के माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा यानी विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए उनकी योग्यताओं का मूल्यांकन करना है। प्रत्येक वर्ष इस परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले और इसमें शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या इतनी विशाल होती है कि यह दुनिया के कई देशों की कुल आबादी को भी पीछे छोड़ देती है। ब्राजील जैसे बड़े भौगोलिक और जनसांख्यिकीय देश में राष्ट्रीय स्तर पर एक ही समय पर इस प्रकार की विशाल परीक्षा का सफल आयोजन करना अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी चमत्कार माना जाता है। यही कारण है कि ग्लोबल रिसर्च और एजुकेशन रिपोर्ट्स में इसे चीन की गाओकाओ (Gaokao) के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई है, जहाँ लाखों की तादाद में युवा अपने सुनहरे भविष्य की उम्मीद के साथ परीक्षा केंद्रों पर पहुंचते हैं।ग्लोबल रैंकिंग में भारत की स्थिति, नीट-जेईई और यूपीएससी के बीच नेट (NET) परीक्षा को मिला 14वां स्थानजब बात भारत की विशाल प्रतियोगी परीक्षाओं की आती है, तो हमारे देश में हर साल मेडिकल प्रवेश के लिए नीट, इंजीनियरिंग के लिए जेईई और प्रशासनिक सेवाओं के लिए यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में कोहराम मच जाता है, जहाँ बैठने वाले उम्मीदवारों की संख्या भी कई बार बीस-पच्चीस लाख को पार कर जाती है। हालांकि, इस वैश्विक परीक्षा रैंकिंग में भारत की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नेट (UGC NET) को चौदहवें (14वें) स्थान पर जगह दी गई है, जो प्रोफेसर बनने और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए आयोजित की जाती है। भारत के विशाल जनमानस और युवाओं के बीच परीक्षाओं के प्रति क्रेज को देखते हुए यह रैंकिंग कई मायनों में बेहद दिलचस्प हो जाती है, क्योंकि यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले युवाओं का हुजूम दुनिया के कई छोटे देशों की कुल आबादी से भी ज्यादा बड़ा होता है। जानकारों का यह मानना है कि भारत में परीक्षाओं का यह पैमाना केवल चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं की आजीविका और उनके सपनों की उड़ान का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है।परीक्षा के पैमाने, परीक्षार्थियों की संख्या और प्रशासनिक जटिलता के आधार पर कैसे तय होती है यह वैश्विक सूचीदुनिया भर में होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की इस नई रैंकिंग को तैयार करने वाली संस्थाओं ने इसमें भाग लेने वाले कुल उम्मीदवारों की संख्या, परीक्षा के भौगोलिक प्रसार, विषयों की विविधता और आयोजन की प्रशासनिक जटिलता जैसे कड़े मानदंडों को आधार बनाया है। उदाहरण के लिए, चीन की 'गाओकाओ' परीक्षा को दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है, क्योंकि वहां एक साथ करोड़ों छात्र एक ही पैटर्न पर इस परीक्षा को देते हैं। इसके बाद अब ब्राजील की 'ENEM' परीक्षा ने अपने विशाल उम्मीदवार आधार के बल पर दूसरा स्थान हासिल कर लिया है, जो यह दर्शाता है कि दक्षिण अमेरिका में शिक्षा के प्रति युवाओं का रुझान किस हद तक बढ़ रहा है। भारत जैसे देशों में जहाँ परीक्षाओं का आयोजन कई चरणों, ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड तथा विभिन्न भाषाओँ में किया जाता है, वहां उम्मीदवारों की कुल संख्या तो बहुत ज्यादा होती है, लेकिन वैश्विक रैंकिंग के मानकों के हिसाब से विभिन्न श्रेणियों का विभाजन अलग तरीके से तय किया जाता है। इस रिपोर्ट के आने के बाद से ही यह बहस छिड़ गई है कि आने वाले समय में तकनीक के जरिए इन विशाल परीक्षाओं के प्रबंधन को और अधिक सुगम कैसे बनाया जाए।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे मिनटों में वायरल होती हैं वैश्विक शिक्षा और परीक्षा की ऐसी रैंकिंग्सआज का यह आधुनिक डिजिटल दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का युग बन चुका है जहाँ शिक्षा, ग्लोबल रैंकिंग और दुनिया भर की परीक्षाओं से जुड़े रोचक आंकड़े पलक झपकते ही इंटरनेट पर छा जाते हैं। जब से ब्राजील की 'ENEM' के दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा होने और भारत की नेट परीक्षा के 14वें स्थान पर रहने की यह रिपोर्ट सामने आई है, डिजिटल सर्च इंजन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इससे जुड़े आंकड़े तेजी से ट्रेंड करने लगे हैं। भारत और दुनिया भर के छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा प्रेमियों ने गूगल के माध्यम से इस ग्लोबल रैंकिंग के हर एक बिंदु, देशों के परीक्षा पैमानों और अपनी तैयारी के तरीकों को बहुत गहराई से खंगालना शुरू कर दिया है। तकनीक और सोशल मीडिया के इस पारदर्शी दौर में अब दुनिया के किसी भी कोने में जारी होने वाली शिक्षा से जुड़ी ऐसी रिपोर्ट्स छिपी नहीं रह सकती हैं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उनका तुरंत विश्लेषण सामने आ जाता है, जहाँ हर कोई यह देखता है कि वैश्विक शिक्षा के नक्शे पर कौन सा देश किस पायदान पर खड़ा है।
Gurugram में शादी का झांसा देकर इटली की महिला से 1000 यूरो की ठगी, FIR दर्ज
गुरुग्राम, एक अक्टूबर इटली की एक महिला ने गुरुग्राम साइबर पुलिस से शिकायत की है कि गुरुग्राम के एक व्यक्ति ने कथित तौर पर प्यार का झांसा देकर उससे 1,000 यूरो ठग लिए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। महिला ने आरोप लगाया कि व्यक्ति ने उससे शादी करने का झूठा इरादा जताया था और पैसे मिलने के बाद उससे सारे संपर्क तोड़ लिए।। अधिकारी ने बताया कि इटली में दर्ज शिकायत पर समय पर कार्रवाई नहीं होने से निराश महिला पाओला बर्तोलिनी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंची और गुरुग्राम साइबर पुलिस से संपर्क किया। बर्तोलिनी ने साइबर सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) गौरव फोगाट से मुलाकात की और उन्हें अपनी आपबीती बताई, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। उन्होंने गुरुग्राम पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर पुलिस अधिकारियों से अपनी मुलाकात का विवरण भी साझा किया। उन्होंने लिखा, ‘‘मैं एक अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी की शिकायत करने इटली से आई हूं। शिकायत में एक एनआरआई (अनिवासी भारतीय) खाते के साथ विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) का उल्लंघन, प्रेम संबंध का झांसा देकर ठगी करना, इंस्टाग्राम पर मादक पदार्थों का प्रचार और फर्जी ईमेल का इस्तेमाल कर लोगों के बैंक खातों को खाली करने का आरोप शामिल हैं। महिला ने दावा किया कि व्यक्ति गुरुग्राम में ही रहता है।’’बर्तोलिनी ने कहा, ‘‘मैं एसीपी गौरव फोगाट से बात करने के बाद इटली से उड़ान भरकर गुरुग्राम साइबर थाने पहुंची। उन्होंने तुरंत मेरी मदद की और अपनी शानदार टीम को इसकी जानकारी दी। पूरी साइबर टीम बहुत पेशेवर और मददगार थी।’’महिला ने कहा कि उसने इटली में भी अपराध की शिकायत की थी, लेकिन वहां इस मामले में लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई क्योंकि दोनों सरकारों को समन्वय करना होता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इटली में इस तरह के अपराध को कमतर आंका जाता है, जबकि यह बहुत बड़ा और गंभीर अपराध है। पुलिस अधिकारी का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि वह आरोपी के पकड़े जाने का इंतजार कर रही हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि गुरुग्राम पुलिस देश और विदेश से मिलने वाली साइबर अपराध की शिकायतों को गंभीरता से लेने और पीड़ितों को समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ऐसे मामलों में उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसीपी फोगाट ने कहा, ‘‘तकनीकी निगरानी और बैंक खाते के विवरण के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई है। आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सिविल सेवा परीक्षा की शताब्दी पर पीएम मोदी ने देश के सामने रखीं 10 बड़ी बातें
भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस और आईपीएस जैसी देश की सबसे प्रतिष्ठित और टफ सिविल सेवा परीक्षाओं के इतिहास में एक नया मील का पत्थर उस वक्त जुड़ गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन परीक्षाओं की पूरी शताब्दी (100 वर्ष पूरे होने) के अवसर पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दूरदर्शी संबोधन दिया। नई दिल्ली में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट शब्दों में यह बात कही कि बदलते हुए आधुनिक भारत की आकांक्षाओं और वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप अब यूपीएससी (UPSC) की चयन प्रक्रिया, कार्यप्रणाली और पूरे पैटर्न में बड़े पैमाने पर सुधार किए जाने की सख्त जरूरत है। देश के भावी नीति-निर्माताओं और प्रशासनिक अधिकारियों का चयन करने वाली इस सर्वोच्च संस्था के 100 साल पूरे होने के मौके पर पीएम मोदी द्वारा रखी गई इन दस बड़ी बातों ने पूरे देश के राजनीतिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक गलियारों में एक नया वैचारिक मंथन छेड़ दिया है। आइए बेहद गहराई, विस्तार और रिपोर्टर की संवादात्मक शैली में प्रधानमंत्री मोदी के इस ऐतिहासिक संबोधन और उनके द्वारा बताई गई उन 10 बड़ी बातों का सिलसिलेवार विश्लेषण करते हैं जो आने वाले समय में देश के प्रशासनिक ढांचे की रूपरेखा तय करने वाली हैं।क्या है यूपीएससी की शताब्दी का यह ऐतिहासिक अवसर और क्यों पीएम मोदी ने बदलाव पर दिया इतना जोरकिसी भी लोकतांत्रिक देश की रीढ़ उसकी प्रशासनिक व्यवस्था होती है, और भारत में ब्रिटिश काल से लेकर आज़ादी के बाद तक सिविल सेवा परीक्षाओं ने देश को चलाने में एक केंद्रीय भूमिका निभाई है। यूपीएससी की इन परीक्षाओं को सफलतापूर्वक सौ साल पूरे हो चुके हैं, और इस ऐतिहासिक शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने उन तमाम अधिकारियों और संस्थानों के योगदान को सराहा जिन्होंने पिछले एक सदी में देश के निर्माण में अपना अहम योगदान दिया है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी बहुत कड़े शब्दों में रेखांकित किया कि इक्कीसवीं सदी का भारत अब बदल चुका है, जहाँ तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा ड्रिवन गवर्नेंस और आम जनता की उम्मीदें बहुत तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में यदि हमारी चयन प्रक्रियाएं पुरानी और घिसी-पिसी पद्धतियों पर ही टिकी रहेंगी, तो हम भविष्य की चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएंगे। यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने यूपीएससी के पैटर्न, सिलेबस और मूल्यांकन प्रणालियों में समय के साथ आधुनिक सुधार लाने की सख्त आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।पीएम मोदी के संबोधन की वे 10 बड़ी बातें जो आने वाले प्रशासनिक सुधारों की दशा और दिशा तय करेंगीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इस बहुचर्चित भाषण के दौरान देश के प्रशासनिक तंत्र और सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली को लेकर कुल दस ऐसे प्रमुख बिंदु रखे जो भविष्य के भारत के निर्माण का ब्लूप्रिंट तैयार करते हैं। आइए इन दसों बिंदुओं को बेहद गहराई से समझते हैं:बदलते समय के साथ परीक्षा पैटर्न में आधुनिक सुधार: पीएम ने कहा कि जैसे-जैसे तकनीक और दुनिया बदल रही है, सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम और प्रश्नों के स्वरूप में भी ऐसा बदलाव होना चाहिए जो केवल रटने की क्षमता नहीं बल्कि व्यावहारिक समझ को परखे।सहानुभूति और जन-कल्याण की भावना: अधिकारियों के चयन के दौरान केवल बौद्धिक योग्यता ही नहीं, बल्कि उनके भीतर समाज के सबसे अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति का पैमाना भी होना चाहिए।टेक्नोलॉजी और एआई का प्रशासनिक उपयोग: आधुनिक युग की चुनौतियों से निपटने के लिए भावी अधिकारियों को डिजिटल टूल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स की गहरी समझ होनी चाहिए।नीति निर्माण बनाम ज़मीनी क्रियान्वयन का संतुलन: कागजी नीतियों को केवल फाइलों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ज़मीन पर उतारने और जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने वाले नेतृत्व की आवश्यकता है।पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता: यूपीएससी की पूरी चयन प्रणाली में पूरी तरह से पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण को और अधिक मजबूत करने पर बल दिया गया।टैलेंट हंट और छोटे शहरों के युवाओं की पहुंच: देश के दूरदराज और छोटे गांवों से आने वाले प्रतिभाशाली युवाओं के लिए संसाधनों की कमी बाधा न बने, इसके लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुलभ बनाया जाए।नौकरशाही के पुराने ढर्रे और 'बाबूशाही' सोच में बदलाव: प्रशासनिक अधिकारियों को खुद को हुक्म चलाने वाला 'बाबू' मानने के बजाय देश का 'प्रथम सेवक' और जन-भागीदार बनने की मानसिकता अपनानी होगी।ग्लोबल विजन और भारत की बढ़ती भूमिका: अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बदलते भारत के रसूख और वैश्विक कूटनीति को समझने वाले विजनरी अधिकारियों की फौज तैयार करनी होगी।पर्यावरण और सतत विकास (Sustainable Development) पर फोकस: विकास के नाम पर प्रकृति से खिलवाड़ न हो, बल्कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए दीर्घकालिक नीतियां बनाने वाले नेतृत्व को बढ़ावा दिया जाए।युवाओं की ऊर्जा और देश का अमृतकाल: देश की आज़ादी के अमृतकाल और विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने में इन सिविल सेवकों की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है।देश भर के युवाओं और शिक्षाविदों के बीच छिड़ी बहस, क्या सचमुच बदलने वाला है यूपीएससी का भविष्यप्रधानमंत्री मोदी द्वारा यूपीएससी में सुधार की बात कहे जाने के बाद से ही देश भर के उन लाखों-करोड़ों युवाओं के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है जो दिन-रात एक करके इस सबसे कठिन परीक्षा की तैयारी में जुटे रहते हैं। कोचिंग संस्थानों, विश्वविद्यालयों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस बात का विश्लेषण किया जा रहा है कि आखिर आने वाले समय में यूपीएससी के सिलेबस में किस तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कई शिक्षाविदों का यह मानना है कि यदि परीक्षा में मेस और इंटरव्यू के दौरान व्यावहारिक और तकनीकी दक्षता को और अधिक वेटेज दिया जाता है, तो देश को और अधिक गतिशील और आधुनिक सोच वाले प्रशासनिक अधिकारी मिल सकेंगे। दूसरी तरफ, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बदलाव चाहे जितने भी आएं, लेकिन परीक्षा की निष्पक्षता और पवित्रता से कभी भी समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि यही इस संस्था की सबसे बड़ी ताकत रही है।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे तेजी से वायरल होती हैं नीतिगत और परीक्षा से जुड़ी बड़ी खबरेंआज का यह आधुनिक डिजिटल दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का युग बन चुका है जहाँ देश के प्रधानमंत्री द्वारा किसी संवैधानिक या राष्ट्रीय संस्था को लेकर दिया गया बयान कुछ ही सेकंड में इंटरनेट की दुनिया में छा जाता है। जब पीएम मोदी ने यूपीएससी की शताब्दी पर सुधारों की ये 10 बड़ी बातें कहीं, तो डिजिटल सर्च इंजन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मिनटों के भीतर इससे जुड़े अपडेट्स ट्रेंड करने लगे। देश के कोने-कोने से छात्रों, अभ्यर्थियों और शिक्षा प्रेमियों ने गूगल के माध्यम से प्रधानमंत्री के इस भाषण के मुख्य बिंदुओं, यूपीएससी के इतिहास और भविष्य के बदलावों को बहुत गहराई से खंगालना शुरू कर दिया। तकनीक और सोशल मीडिया के इस पारदर्शी दौर में अब देश की नीतियों और सुधारों से जुड़ी हर एक बड़ी घोषणा का डिजिटल विश्लेषण तुरंत सामने आ जाता है, जहाँ हर कोई यह देखता है कि कैसे देश का नेतृत्व भविष्य की चुनौतियों के लिए प्रशासनिक तंत्र को तैयार कर रहा है।
खूंटी में रिफाइनरी सेंटर के बाहर तेल टैंकर के केबिन में लगी भीषण आग
झारखंड के खूंटी जिले से एक बेहद डरावनी और सनसनीखेज घटना सामने आई है जहाँ एक रिफाइनरी सेंटर के ठीक बाहर खड़े तेल के एक बड़े टैंकर के केबिन में अचानक भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लपटें आसमान छूने लगीं, जिससे आसपास के पूरे इलाके में भारी अफरातफरी और खौफ का माहौल पैदा हो गया। गनीमत यह रही कि समय रहते टैंकर के चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए जलते हुए केबिन से छलांग लगा दी, जिससे उसकी जान बाल-बाल बच गई। यदि आग की यह लपटें तेल टैंकर के मुख्य टैंक तक पहुँच जातीं, तो एक बहुत बड़ा और भीषण धमाका हो सकता था जिससे आसपास के कई किलोमीटर के दायरे में भारी तबाही मच सकती थी। स्थानीय लोगों की सूचना पर तुरंत मौके पर पहुँची दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। आइए बेहद गहराई, विस्तार और रिपोर्टर की संवादात्मक शैली में इस पूरी दुर्घटना के हर एक पहलू का विश्लेषण करते हैं कि आखिर कैसे खूंटी के इस रिफाइनरी सेंटर के बाहर यह भयंकर आग लगी।क्या है खूंटी के रिफाइनरी सेंटर के बाहर घटी इस तेल टैंकर अग्निकांड की पूरी और खौफनाक दास्तानघटना की शुरुआत तब हुई जब खूंटी जिले में स्थित एक प्रमुख रिफाइनरी सेंटर या फ्यूल स्टोरेज प्लांट के बाहर ईंधन ढोने वाला एक भारी-भरकम तेल टैंकर खड़ा हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टैंकर के केबिन के हिस्से से अचानक धुआं निकलता हुआ दिखाई दिया और कुछ ही सेकंड के भीतर वहां से आग की तेज लपटें उठने लगीं। इस तरह के वाहनों में ईंधन, वायरिंग या शॉर्ट सर्किट के कारण होने वाली तकनीकी खराबी अक्सर इस तरह के भीषण हादसों को न्योता दे देती है। जब तक वहां मौजूद लोग या अन्य चालक कुछ समझ पाते, तब तक आग ने पूरे केबिन को अपनी चपेट में ले लिया था और उसका तापमान इतनी तेजी से बढ़ा कि आसपास खड़े लोगों के होश उड़ गए। रिफाइनरी सेंटर के आसपास का इलाका होने के कारण जरा सी चूक भी सैंकड़ों लोगों की जान पर भारी पड़ सकती थी, और यही कारण था कि इस आग को देखते ही पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।चालक की तत्परता और सूझबूझ से बची जान, जलते वाहन से कूदकर सुरक्षित स्थान पर भागा ड्राइवरइस पूरी घटना का सबसे राहत भरा पहलू यह रहा कि जिस समय टैंकर के केबिन में आग की लपटें भड़कनी शुरू हुईं, उस वक्त चालक वहीं मौजूद था और उसने अपनी जान बचाने के लिए एक पल की भी देरी नहीं की। जैसे ही ड्राइवर को यह महसूस हुआ कि केबिन के भीतर आग नियंत्रण से बाहर हो रही है और उसका दम घुट रहा है, उसने बिना घबराए चलती या खड़ी गाड़ी के केबिन से बाहर छलांग लगा दी। जमीन पर गिरने के कारण उसे हल्की-फुल्की चोटें जरूर आईं, लेकिन उसकी इस समय पर दिखाई गई बहादुरी ने उसकी जिंदगी बचा ली। यदि चालक थोड़ी सी भी देर कर देता या केबिन के अंदर ही फंसा रहता, तो इस भीषण आग और धुएँ के गुबार के बीच उसका बचना लगभग नामुमकिन हो जाता। घटना के बाद सदमे में आए चालक को स्थानीय लोगों और मौके पर मौजूद अन्य कर्मियों ने पानी पिलाया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, जहाँ उसने राहत की सांस ली।फायर ब्रिगेड की मुस्तैदी और स्थानीय लोगों की मदद से पाया गया आग पर काबू, टला बड़ा धमाकाजैसे ही रिफाइनरी सेंटर के बाहर तेल टैंकर में आग लगने की सूचना स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग को मिली, वैसे ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। बिना एक भी सेकंड गंवाए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सायरन बजाते हुए तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गईं और कुछ ही देर में मौके पर पहुंच कर मोर्चा संभाल लिया। दमकल कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना टैंकर के चारों तरफ पानी और फोम की बौछार करनी शुरू कर दी ताकि आग को मुख्य तेल टैंक तक पहुँचने से पूरी तरह रोका जा सके। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत और लगातार पानी डालने के बाद दमकल की टीम ने आग पर पूरी तरह काबू पा लिया, जिसके बाद वहां मौजूद अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने चैन की सांस ली। यदि दमकल की टीम पहुँचने में थोड़ी भी और देरी हो जाती, तो टैंकर का टैंक फटने से जो तबाही मचती, उसकी कल्पना करना भी सिहरन पैदा कर देता है।औद्योगिक और फ्यूल परिवहन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को लेकर खड़े हुए गंभीर और बड़े सवालखूंटी की इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को सतह पर ला खड़ा किया है कि औद्योगिक और ईंधन परिवहन से जुड़े परिसरों के आसपास सुरक्षा के कितने कड़े इंतजाम होने चाहिए। क्या तेल टैंकरों की नियमित रूप से फिटनेस और इलेक्ट्रिकल वायरिंग की जांच नहीं कराई जाती है? रिफाइनरी सेंटरों के बाहर इस तरह के वाहनों के खड़े होने के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया जाता है? स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस प्रकार के खतरनाक केमिकल और ईंधन ढोने वाले वाहनों में सभी सुरक्षा मानक दुरुस्त हों ताकि भविष्य में ऐसी डरावनी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। इस हादसे ने प्रशासन को एक बार फिर से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का कड़ा संदेश दे दिया है।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे मिनटों में वायरल होती हैं सड़क और औद्योगिक दुर्घटनाओं की खबरेंआज का यह आधुनिक डिजिटल दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का युग बन चुका है जहाँ किसी भी जिले या औद्योगिक क्षेत्र में होने वाली ऐसी दुर्घटनाओं और आगजनी की खबरें पलक झपकते ही इंटरनेट पर छा जाती हैं। जब खूंटी के रिफाइनरी सेंटर के बाहर तेल टैंकर में आग लगने का वीडियो और खबरें सामने आईं, तो डिजिटल सर्च इंजन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मिनटों के भीतर इससे जुड़े अपडेट्स ट्रेंड करने लगे। झारखंड और देश भर के पाठकों ने गूगल के माध्यम से इस दुर्घटना के कारणों, चालक की स्थिति और दमकल विभाग की कार्रवाई को बहुत गहराई से खंगालना शुरू कर दिया। तकनीक और सोशल मीडिया के इस पारदर्शी दौर में अब इस तरह की घटनाएं छिपी नहीं रह सकती हैं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उनका पूरा ब्योरा सामने आ जाता है, जहाँ हर कोई यह देखता है कि कैसे समय पर उठाए गए कदमों से एक बड़ा हादसा टल गया।
झारखंड भवन की लिफ्ट में फंसी पूर्व सांसद घूरन राम की फैमिली! दम घुटने से 6 लोग हुए बेहोश
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित सरकारी भवनों और परिसरों में सुरक्षा तथा सुविधाओं के दावों की पोल खोलने वाली एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है। झारखंड के पूर्व सांसद घूरन राम का पूरा परिवार उस वक्त एक भीषण हादसे का शिकार होते-होते बच गया जब वे झारखंड भवन की एक लिफ्ट के अंदर अचानक तकनीकी खराबी के चलते फंस गए। लिफ्ट के भीतर हवा का आवागमन रुकने और अत्यधिक उमस तथा घुटन के कारण स्थिति इतनी भयानक हो गई कि अंदर फंसे छह लोग एक-एक करके बेहोश हो गए। इस गंभीर आपात स्थिति के दौरान समय पर तकनीकी मदद न मिलने के कारण परिजनों की सांसे अटक गई थीं और वहां भारी अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया था। वीआईपी और सरकारी मेहमानों के ठहरने वाले परिसरों में इस तरह की घोर लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आइए बेहद गहराई, विस्तार और रिपोर्टर की संवादात्मक शैली में इस पूरी हृदयविदारक घटना के हर एक पहलू का विश्लेषण करते हैं कि आखिर कैसे झारखंड भवन के भीतर यह बड़ा हादसा टल गया।क्या है झारखंड भवन की लिफ्ट में फंसे पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार की इस खौफनाक घटना की पूरी कहानीघटना की शुरुआत तब हुई जब झारखंड के जाने-माने राजनीतिक चेहरे और पूर्व सांसद घूरन राम का परिवार किसी जरूरी काम से नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन पहुंचा था। भवन के भीतर आवागमन के लिए जब परिवार के सदस्य और अन्य लोग लिफ्ट के अंदर सवार हुए, तो कुछ ही पलों में लिफ्ट तकनीकी खराबी के कारण बीच के फ्लोर पर जाकर अचानक रुक गई। शुरुआत में किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह तकनीकी खराबी इतनी खतरनाक साबित होने वाली है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, लिफ्ट के भीतर का तापमान और हवा की कमी गंभीर रूप से डरावनी होने लगी। आधुनिक और हाई-प्रोफाइल परिसरों में बनी इन लिफ्टों के भीतर अक्सर वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था न होने या समय पर मेंटेनेंस न किए जाने के कारण ऐसी आपात स्थितियां पैदा हो जाती हैं। पूर्व सांसद का परिवार जब उस बंद और अंधेरे डिब्बे के अंदर फंस गया, तो उनके भीतर घबराहट बढ़ने लगी और मदद के लिए की गई शुरुआती कोशिशें भी तुरंत काम नहीं आ पाईं।दम घुटने से छह लोग हुए बेहोश, मची चीख-पुकार और कैसे बाहर निकाला गया फंसे हुए लोगों कोजैसे-जैसे लिफ्ट के अंदर ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगा, उसमें फंसे लोगों का दम घुटने लगा और स्थिति तेजी से बेकाबू होने लगी। पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के छह सदस्य जिनमें महिलाएं और अन्य रिश्तेदार भी शामिल थे, घुटन और अत्यधिक घबराहट के कारण एक-एक करके अचेत होकर बेहोश होने लगे। बंद डिब्बे के अंदर जब लोगों की सांसें टूटने लगीं और चीख-पुकार मच गई, तब बाहर मौजूद अन्य लोगों और कर्मचारियों को इस बात की भनक लगी कि अंदर कुछ बहुत बड़ा अनर्थ हो गया है। आनन-फानन में भवन के तकनीकी कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को सूचित किया गया, जिन्होंने भारी मशक्कत के बाद लिफ्ट के दरवाजों को जबरन खोलने या तकनीकी रूप से अनलॉक करने का प्रयास किया। जब काफी देर की जद्दोजहद के बाद लिफ्ट के दरवाजे खुले, तो अंदर का दृश्य बेहद खौफनाक था क्योंकि छह लोग बेहोशी की हालत में फर्श पर गिरे हुए थे। तुरंत बिना किसी देरी के उन सभी बेहोश सदस्यों को बाहर निकालकर ताजी हवा में लाया गया और प्राथमिक उपचार तथा मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी।प्रशासनिक लापरवाही और मेंटेनेंस पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल, क्या वीआईपी भवनों में भी सुरक्षित नहीं हैं लोगइस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद से ही झारखंड भवन के प्रबंधन और वहां की मेंटेनेंस व्यवस्था पर बहुत बड़े और तीखे सवाल खड़े हो गए हैं। आम नागरिकों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि जब देश की राजधानी में स्थित इस तरह के हाई-प्रोफाइल और सरकारी भवनों में आने वाले वीआईपी मेहमानों और पूर्व सांसदों के परिवारों की सुरक्षा का यह हाल है, तो आम जनता की सुरक्षा की तो बात ही क्या की जाए। क्या झारखंड भवन के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर लिफ्टों और अन्य बुनियादी उपकरणों की तकनीकी जांच (मेंटेनेंस) नहीं कराई जाती है? यदि समय रहते लिफ्ट के दरवाजे न खोले जाते और ऑक्सीजन पूरी तरह खत्म हो जाती, तो यह घटना किसी बड़े हादसे या जनहानि में भी बदल सकती थी। इस गंभीर मामले के तूल पकड़ने के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों को भी यह जवाब देते नहीं बन रहा है कि आखिर इस प्रकार की तकनीकी चूक कैसे और किसकी लापरवाही के कारण हुई है।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे तेजी से वायरल होती हैं ऐसी प्रशासनिक और दुर्घटना से जुड़ी खबरेंआज का यह आधुनिक डिजिटल दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का युग बन चुका है जहाँ किसी भी वीआईपी परिसर में होने वाली ऐसी गंभीर दुर्घटनाओं या प्रशासनिक लापरवाही की खबरें कुछ ही सेकंड में इंटरनेट पर छा जाती हैं। जब पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के साथ घटी इस लिफ्ट दुर्घटना की खबर बाहर आई, तो डिजिटल सर्च इंजन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मिनटों के भीतर इससे जुड़े अपडेट्स ट्रेंड करने लगे। दिल्ली और झारखंड के पाठकों ने गूगल के माध्यम से झारखंड भवन की सुरक्षा व्यवस्था, लिफ्ट मेंटेनेंस के नियमों और घायलों की स्वास्थ्य स्थिति को बहुत गहराई से खंगालना शुरू कर दिया। तकनीक और सोशल मीडिया के इस पारदर्शी दौर में अब सरकारी और प्रशासनिक संस्थानों की कोई भी बड़ी लापरवाही छिपी नहीं रह सकती है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उसका पूरा ब्योरा सामने आ जाता है, जहाँ जनता खुद यह सवाल पूछती है कि इस तरह की घटनाओं के लिए आखिरकार जिम्मेदारी किसकी तय होनी चाहिए।
झारखंड एसआईआर : 63 लाख लोगों को नोटिस के बाद अब क्या होगा अगला कदम
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) अभियान को लेकर राज्यभर में सरगर्मी काफी तेज हो गई है। मतदाता सूची को पूरी तरह से त्रुटिरहित, पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने की निर्धारित समयसीमा आखिरकार समाप्त हो चुकी है। चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के निर्देशों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राज्यभर में लगभग 63 लाख से अधिक मतदाताओं को विभिन्न विसंगतियों और तकनीकी कारणों के चलते नोटिस जारी किए गए हैं। समयसीमा के खत्म होने के बाद अब आम जनता से लेकर राजनीतिक दलों के बीच यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि जिन लाखों लोगों को नोटिस मिले हैं, उनके मामलों का निपटारा कैसे होगा और इसके बाद मतदाता सूची की अंतिम तस्वीर कैसी होगी। आइए बेहद गहराई, विस्तार और रिपोर्टर की संवादात्मक शैली में इस पूरी प्रक्रिया के हर एक पहलू का विश्लेषण करते हैं कि आखिर एसआईआर के इस दौर के बाद आगे क्या होने वाला है।क्या है झारखंड में एसआईआर (SIR) अभियान और क्यों करीब 63 लाख मतदाताओं को थमाए गए हैं नोटिसचुनावी लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई यानी मतदाता सूची को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखने के लिए चुनाव आयोग समय-समय पर विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाता है। इसी कड़ी में झारखंड में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की जांच की गई, तो बड़े पैमाने पर तकनीकी और तार्किक विसंगतियां सामने आईं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 63 लाख से अधिक ऐसे मतदाता सामने आए जिनके रिकॉर्ड में या तो 'नो मैपिंग' की समस्या थी, या फिर डेमोग्राफिकल सिमिलर एंट्री (DSE) और अन्य तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इन सभी कमियों को दूर करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी वास्तविक और पात्र भारतीय नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे, निर्वाचन विभाग ने इन सभी श्रेणियों के अंतर्गत करीब 63 लाख लोगों को औपचारिक नोटिस जारी किए। इन नोटिसों के जरिए संबंधित मतदाताओं से उनके वैध दस्तावेज और पात्रता से जुड़े प्रमाण मांगे गए हैं ताकि उनका सत्यापन किया जा सके।दावा-आपत्ति की डेडलाइन खत्म और समयसीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर क्या रहा चुनाव आयोग का अंतिम रुखएसआईआर के इस पूरे अभियान के तहत मतदाताओं से दावे और आपत्तियां प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की गई थी, जो अब पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है। हालांकि इस बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर से आम जनता और विभिन्न राजनीतिक दलों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इस समयसीमा को 60 दिन और बढ़ाने का एक प्रस्ताव निर्वाचन आयोग को भेजा गया था। लेकिन चुनाव आयोग की तरफ से इस डेडलाइन को आगे बढ़ाने को लेकर कोई नया संशोधन या मंजूरी नहीं दी गई, जिसके चलते तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार ही अब आगे की प्रशासनिक कार्रवाई को बढ़ाया जा रहा है। डेडलाइन खत्म होने के अंतिम दिनों में राज्यभर के विभिन्न अंचल कार्यालयों और निर्वाचन केंद्रों पर अपने कागजात और फॉर्म जमा कराने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती हुई दिखाई दी। बुजुर्गों, किराएदारों और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के मन में अपने दस्तावेजों को लेकर एक अलग ही चिंता और असमंजस की स्थिति बनी रही।अब आगे क्या होगा? बीएलओ की घर-घर दस्तक और दस्तावेजों के सत्यापन की पूरी कार्यप्रणालीदावा-आपत्ति की मियाद पूरी होने के बाद अब निर्वाचन मशीनरी का पूरा फोकस उन 63 लाख नोटिस प्राप्तकर्ताओं के मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण पर टिक गया है। चूंकि समयसीमा आगे नहीं बढ़ाई गई है, इसलिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पहले के निर्देशों के मुताबिक अब बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ (BLO) सीधे मैदान में उतर चुके हैं। बीएलओ व्यक्तिगत रूप से नोटिस पाने वाले मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके जरूरी दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके द्वारा दी गई जानकारियां सही हैं या नहीं। यदि किसी मतदाता के दस्तावेज संतोषजनक पाए जाते हैं, तो उनके नाम को मतदाता सूची में सुरक्षित रख लिया जाएगा, अन्यथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग के तय शेड्यूल के मुताबिक 14 अक्टूबर तक इन सभी दावों और आपत्तियों का विधिवत निपटारा पूरा कर लिया जाएगा, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से बाहर न रहने पाए।19 अक्टूबर को होगा अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की बढ़ गई हैं धड़कनेंझारखंड में एसआईआर की इस पूरी लंबी और संवेदनशील कसरत का अंतिम चरण अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। बीएलओ स्तर की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगामी 19 अक्टूबर को राज्य की अंतिम और अद्यतन मतदाता सूची (Final Electoral Roll) का आधिकारिक प्रकाशन किया जाएगा। इस अंतिम सूची के आने से यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि कितने मतदाताओं के नाम सफलतापूर्वक जोड़े गए और कितने लोग अपनी औपचारिकताएं पूरी न करने के कारण सूची से बाहर हुए हैं। आगामी राजनीतिक सरगर्मी और चुनावों के लिहाज से यह अंतिम मतदाता सूची सभी राजनीतिक दलों के लिए भी बेहद मायने रखती है, क्योंकि इसी के आधार पर भविष्य के चुनावी रण की रूपरेखा तय होनी है। प्रशासन की तरफ से लगातार यह अपील की जा रही है कि सभी नागरिक इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग करें ताकि लोकतंत्र की यह सूची पूरी तरह से त्रुटिरहित बन सके।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे मिनटों में वायरल होती हैं प्रशासनिक और चुनावी अपडेट्सआज का यह आधुनिक डिजिटल दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का युग बन चुका है जहाँ मतदाता सूची के पुनरीक्षण और नोटिस से जुड़ी कोई भी प्रशासनिक खबर पलक झपकते ही इंटरनेट पर छा जाती है। जब से झारखंड में 63 लाख लोगों को नोटिस जारी होने और एसआईआर की डेडलाइन खत्म होने की खबरें सामने आई हैं, डिजिटल सर्च इंजन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इससे जुड़े आंकड़े और अपडेट्स लगातार ट्रेंड कर रहे हैं। झारखंड और देश भर के पाठकों ने गूगल के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया के नियमों, बीएलओ के कार्यों और अंतिम सूची की तारीखों को बहुत गहराई से खंगालना शुरू कर दिया है। तकनीक और सोशल मीडिया के इस पारदर्शी दौर में अब चुनाव आयोग और प्रशासन के हर एक कदम का डिजिटल विश्लेषण जनता के सामने तुरंत आ जाता है, जहाँ हर कोई यह देखता है कि कैसे प्रशासनिक पारदर्शिता के साथ चुनावी सुधारों को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
बीजेपी और सपा ने नई रणनीतियों और नए खिलाड़ियों के साथ झोंकी पूरी ताकत
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सरगर्मी अपने चरम पर है क्योंकि राज्य की 10 खाली हो रही राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो चुका है। आगामी 16 अक्टूबर को होने वाले इस मतदान को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है और विधानसभा के संख्या बल के आधार पर अपने-अपने समीकरण बिठाने शुरू कर दिए हैं। इस बार का यह ऊपरी सदन का चुनाव केवल संसद में जाने भर की औपचारिकता नहीं रह गया है, बल्कि इसे आने वाले साल 2027 के बड़े विधानसभा चुनावों से पहले के एक कड़े सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों ही इस मुकाबले में अपने पासे बेहद सावधानी से फेंक रहे हैं, जहाँ जातीय समीकरणों से लेकर नए चेहरों और जोड़-तोड़ की राजनीति तक हर पैंतरा आजमाया जा रहा है। आइए बेहद गहराई, विस्तार और रिपोर्टर की संवादात्मक शैली में इस पूरी राजनीतिक बिसात के हर एक पहलू का विश्लेषण करते हैं कि आखिर किस तरह पार्टियां नए खिलाड़ियों के साथ इस रण में उतरी हैं।क्या है यूपी की 10 राज्यसभा सीटों का पूरा गणित और किस पार्टी के पास है कितना संख्या बलउत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों में से मौजूदा समय में विभिन्न कारणों से कुछ सीटें खाली हैं, जिसके बाद प्रभावी संख्या बल के आधार पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान विधानसभा के आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाए तो बीजेपी और उसके सहयोगी दलों (एनडीए) के पास कुल मिलाकर पर्याप्त विधायक हैं, जिससे वे आसानी से अपनी सीटें सुरक्षित कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के पास भी इतने विधायक मौजूद हैं कि वे अपनी तय सीटों पर आराम से जीत दर्ज कर सकें। लेकिन सारा पेंच और रोमांच इस चुनाव की बची हुई सीटों और विशेषकर अंतिम यानी 10वीं सीट पर आकर अटक गया है। दोनों ही बड़े दल यह अच्छी तरह जानते हैं कि यदि वे अपने अतिरिक्त उम्मीदवारों को मैदान में उतारते हैं, तो उन्हें केवल अपने दम पर नहीं बल्कि दूसरे दलों या बागी विधायकों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ेगा, और यहीं से असली सियासी खेल की शुरुआत होती है।बीजेपी की नई रणनीति और उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक समीकरणों के साथ भविष्य के संकेतभारतीय जनता पार्टी के खेमे में राज्यसभा की इन सीटों को लेकर मंथन का दौर बहुत तेजी से चल रहा है। पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई ने केंद्रीय नेतृत्व को संभावित उम्मीदवारों का एक बड़ा पैनल भेजा है, जिसमें पुराने दिग्गजों के साथ-साथ कई नए और प्रभावशाली चेहरों के नाम भी शामिल हैं। बीजेपी की पूरी रणनीति इस बात पर टिकी है कि किसे दोबारा मौका दिया जाए और किसे संगठन या अन्य क्षेत्रों में नई जिम्मेदारी सौंपी जाए ताकि समाज के हर वर्ग, विशेषकर ओबीसी, दलित और अन्य जातियों में एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश जाए। पार्टी यह भी सुनिश्चित कर रही है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी प्रकार की आंतरिक नाराजगी को दरकिनार करते हुए मजबूत समन्वय बनाया जा सके। यही कारण है कि उम्मीदवारों के नामों की घोषणा से पहले हर एक नाम के नफा-नुकसान का बहुत बारीकी से आकलन किया जा रहा है ताकि सदन से लेकर जमीन तक उसका पूरा लाभ मिल सके।समाजवादी पार्टी का आक्रामक रुख, रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी और तीसरी सीट का दिलचस्प पेंचदूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने इस बार के चुनाव में अपनी रणनीतिक चालें चलते हुए अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं और पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करना भी शुरू कर दिया है। सपा ने अपने वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव को एक बार फिर मैदान में उतारा है, जिससे पार्टी के भीतर यह संदेश साफ है कि वह अपने सबसे भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों पर पूरा भरोसा बनाए हुए है। इसके साथ ही, सपा द्वारा अतिरिक्त सीटों या संभावित तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, अतिरिक्त उम्मीदवार को जिताने के लिए पार्टी को जिस अतिरिक्त संख्या बल की आवश्यकता होगी, उसके लिए उसे दूसरे दलों के विधायकों या बागी नेताओं के समर्थन की दरकार होगी। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और अन्य छोटे दलों के भीतर चल रही हलचल भी इस चुनाव के समीकरणों को और अधिक रोचक बना रही है।2027 के 'रण' से पहले क्रॉस वोटिंग और जोड़-तोड़ की आशंका, क्या कोई बड़ा उलटफेर कर पाएगा हैरानराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब-जब उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के चुनाव नजदीक आते हैं, तब-तब क्रॉस वोटिंग और विधायकों की निष्ठा बदलने के किस्से सियासत का पारा बढ़ा देते हैं। पिछले कुछ चुनावों में जिस प्रकार से दलों की सीमा लांघकर वोटिंग करने के मामले सामने आए थे, उससे इस बार भी सभी दल बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, हर कोई अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और बाड़ेबंदी या रणनीतिक बैठकों के जरिए स्थिति को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहा है। 16 अक्टूबर को होने वाला मतदान और उसी दिन होने वाली वोटों की गिनती यह तय कर देगी कि किस पार्टी की रणनीति सटीक बैठी और किसने इस सियासी खेल बाजी मार ली।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में कैसे मिनटों में वायरल होते हैं राज्यसभा चुनाव के समीकरणआज का यह आधुनिक डिजिटल दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का युग बन चुका है जहाँ चुनाव आयोग की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों के जोड़-तोड़ और उम्मीदवारों की सूचियां इंटरनेट पर छा जाती हैं। जब से यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए सरगर्मी तेज हुई है, डिजिटल सर्च इंजन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इससे जुड़े आंकड़े, वोटों का गणित और राजनीतिक अपडेट्स टॉप ट्रेंड्स में बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश और देश भर के पाठकों ने गूगल के माध्यम से इस चुनाव के हर एक पहलू और 2027 के चुनावों पर पड़ने वाले प्रभाव को बहुत गहराई से खंगालना शुरू कर दिया है। तकनीक और सोशल मीडिया के इस पारदर्शी दौर में अब राजनीतिक दलों की बंद कमरों की रणनीति छिपी नहीं रह सकती है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उसका पूरा विश्लेषण जनता के सामने आ जाता है, जहाँ हर कोई यह देखता है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति किस दिशा में करवट लेने वाली है।
लोकसभा मे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज मध्यप्रदेश के बालाघाट में है। राहुल गांधी बालाघाट में आदिवासी बाहुल्य बैहर में पिछले दिनों बीमारी से हुई बच्चों की मौत के मामले में पीड़ित परिजनों से मिलेगें। इसके साथ राहुल गांधी बैहह और जालगा पहुंच कर जमीनी ...
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मध्य प्रदेश के बालाघाट का दौरा कर रहे हैं। वे उन आदिवासी परिवारों से मिलेंगे जिनके बच्चों की हाल ही में बीमारी, कुपोषण और खराब स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण मौत हो गई थी। गांधी ने X पर अपने दौरे की जानकारी देते हुए कहा कि मैं आज बालाघाट आ रहा हूँ। उन आदिवासी परिवारों से मिलने, जिन्होंने बीमारी और BJP सरकार की लापरवाही के कारण अपने मासूम बच्चों को खो दिया है। उनके साथ समय बिताकर मैं उन्हें यह बताना चाहता हूँ कि वे इस दुख में अकेले नहीं हैं—मैं उनके साथ हूँ। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi ने ECI और TCS पर उठाए सवाल, Form 6 में बदलाव पर पूछा किसने दिया आदेश उन्होंने केन-बेतवा प्रोजेक्ट से प्रभावित आदिवासी परिवारों से जुड़े मुद्दों पर भी बात की और आरोप लगाया कि गांवों को बिना सही पुनर्वास या मुआवज़े के ही डुबोया जा रहा है। गांधी ने कहा कि कुछ दिन पहले मैं केन-बेतवा आंदोलन से जुड़े आदिवासी भाई-बहनों से भी मिला था। आज इस प्रोजेक्ट की वजह से उनके गांव डूब रहे हैं, लेकिन सरकार से उन्हें न तो पुनर्वास मिला और न ही मुआवज़ा—उन्हें सिर्फ़ उत्पीड़न, सरकारी दमन और हिंसा का सामना करना पड़ा है। इंदौर में अपने हालिया छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान आदिवासी छात्रों की चिंताओं का ज़िक्र करते हुए, गांधी ने शिक्षण संस्थानों, हॉस्टलों और खाने-पीने की सुविधाओं में कमियों, परीक्षा में गड़बड़ियों और आरक्षण के अधिकारों से जुड़े मुद्दों की बात की। उन्होंने इन समस्याओं के लिए आदिवासी समुदायों के प्रति बीजेपी-आरएसएस की सोच को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने आदिवासी आबादी को भरोसा दिलाया, मैं हर संघर्ष में आपके साथ खड़ा हूँ—आपकी आवाज़ को बुलंद करना मेरी ज़िम्मेदारी है, और मैं इस बहरी सरकार को पूरी ताक़त के साथ यह आवाज़ सुनाऊँगा। इसे भी पढ़ें: INDIA bloc का मतपत्र से चुनाव कराने पर जोर, Election Commission मुख्यालय तक निकालेंगे मार्च गांधी का यह दौरा बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की कथित मौतों को लेकर हुए राजनीतिक विवाद के बाद हो रहा है। मरने वालों की सही संख्या और मेडिकल कारणों को लेकर सरकारी अनुमान अलग-अलग रहे हैं। केंद्र की अगुवाई में हुई जांच में किसी एक कारण के बजाय कई स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान की गई, जिनमें खसरा, मलेरिया, एक साथ कई संक्रमण (co-infections), सांस लेने में तकलीफ़, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक शामिल हैं।
यूपी: सोशल मीडिया कमेंट पर भिड़े सपा नेता, जमकर चले लात-घूंसे
यूपी के मुजफ्फरनगर में सोशल मीडिया टिप्पणी को लेकर सपा छात्र सभा के नेता नदीम मलिक और कार्यकर्ता इसरार अल्वी के बीच सड़क पर मारपीट हो गई. मीनाक्षी चौक पर हुई इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया, वहीं सपा जिलाध्यक्ष ने दोनों को नोटिस जारी किया है.
हार्ट के फंक्शन में 80% सुधार कर सकता है ये एक फल, रिसर्च में दावा
किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने हार्ट फेलियर विथ प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन के मरीजों पर एक रिसर्च की है. इसमें बताया गया है कि एक फल में खास तरह का कम्पाउंड होता है जो इस बीमारी के मरीजों में हार्ट के फंक्शन को बेहतर कर सकता है.
स्मित मछार ने कैसे रोकी प्लेन हाईजैकिंग, देखें जांबाजी की पूरी कहानी
दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाई दुबई के विमान में सह-पायलट ने अचानक मुख्य भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार पर चाकू से हमला कर दिया और विमान को क्रैश करने की कोशिश की. विमान तेजी से 30 हजार फीट की ऊंचाई से गिरकर 17 हजार फीट पर आ गया. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, कैप्टन स्मित मछार ने हार नहीं मानी और गजब का साहस दिखाते हुए 174 जिंदगियों को बचा लिया. देखें इस जांबाजी की पूरी कहानी.
'आज तुम नहीं मरोगे' घायल कैप्टन स्मित से बोला इजरायली यात्री, सुनाई खौफनाक कहानी
फ्लाईदुबई की तेल अवीव जा रही फ्लाइट में हिंसक हमले की आंखों देखी कहानी इजरायली यात्री ने सुनाई है. घायल भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की मदद करने वाले इजरायली यात्री यानिव हयून ने घटना का आंखों देखा हाल बताया है. हयून ने कहा कि उन्होंने घायल पायलट से कहा, 'तुम आज नहीं मरोगे.'
EVMs और SIR विवाद पर ECI के खिलाफ एकजुट हुआ INDIA गठबंधन, मुंबई में 4 अक्टूबर को बड़ा मार्च
सहयोगी पार्टियां - नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार (NCP-SP) और कांग्रेस - मुंबई में 4 अक्टूबर को होने वाले उस विरोध मार्च में शामिल होंगी, जिसे शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया है। यह विरोध 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के कथित गलत प्रबंधन को लेकर किया जा रहा है। बुधवार को विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) की बैठक में शिवसेना (UBT) नेता उद्धव ठाकरे के वर्चुअल रूप से शामिल होने और गठबंधन के सहयोगियों से 4 अक्टूबर के मार्च में शामिल होने की अपील करने के बाद, NCP-SP की सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी इसमें हिस्सा लेने की घोषणा की। इसे भी पढ़ें: Voter List से फर्जी तरीके से नाम हटाने पर दर्ज हो FIR, SIR सर्वे के बाद DK Shivakumar की मांग उद्धव ठाकरे और MNS नेता राज ठाकरे ने विपक्षी दलों और आम लोगों से भारत के चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज और SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि वे चाहते हैं कि यह विरोध प्रदर्शन राजनीतिक पार्टियों से आगे बढ़कर एक जन-आंदोलन बने। पटोले ने कहा, दिन-दहाड़े लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। ज्ञानेश कुमार [सत्ताधारी] बीजेपी [भारतीय जनता पार्टी] को फायदा पहुंचा रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि लोकतंत्र की रक्षा होनी चाहिए। जो भी लोकतंत्र में विश्वास करता है, वह अब सड़कों पर उतर रहा है। बुधवार को, INDIA गठबंधन ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) की जगह पेपर बैलेट लाने की मांग फिर से उठाई और कुमार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए छह-सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की, जिसमें जन-रैलियां और राष्ट्रपति को याचिका सौंपना शामिल है। इसे भी पढ़ें: AAP नेता Saurabh Bharadwaj का आरोप, BJP राज में Delhi की Forest Land पर हो रहा अवैध कब्जा गठबंधन ने कुमार और सरकार पर चुनावी निष्पक्षता को कमजोर करने के लिए SIR (विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण) के दौरान मतदाता सूची में हेरफेर करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ECI (चुनाव आयोग) को अपनी कठपुतली की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि वे चाहते हैं कि यह विरोध प्रदर्शन राजनीतिक पार्टियों से आगे बढ़कर एक जन-आंदोलन बने। पटोले ने कहा दिन-दहाड़े लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। ज्ञानेश कुमार बीजेपी को फायदा पहुंचा रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि लोकतंत्र की रक्षा होनी चाहिए। जो भी लोकतंत्र में विश्वास करता है, वह अब सड़कों पर उतर रहा है। इसे भी पढ़ें: UNHRC Session: Sardar Nasir Aziz Khan ने PoJK में पाकिस्तान के अत्याचारों पर उठाई आवाज बुधवार को, INDIA गठबंधन ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) की जगह पेपर बैलेट लाने की मांग फिर से उठाई और कुमार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए छह-सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की, जिसमें जन-रैलियां और राष्ट्रपति को याचिका सौंपना शामिल है। गठबंधन ने कुमार और सरकार पर चुनावी निष्पक्षता को कमजोर करने के लिए SIR (विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण) के दौरान मतदाता सूची में हेरफेर करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ECI (चुनाव आयोग) को अपनी कठपुतली की तरह इस्तेमाल कर रहे थे।
लड़की से बदसलूकी के आरोपी पर बुलडोजर एक्शन, घर की बाउंड्री तोड़ी
बिहार के समस्तीपुर में नाबालिग लड़की से बदसलूकी के आरोपी के घर पर प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया. अफसरों का कहना है कि उसके परिजनों ने सरकारी जमीन के करीब दो फीट हिस्से पर पक्की बाउंड्री वॉल बना रखी थी. अतिक्रमण हटाने के लिए तीन नोटिस दिए गए, लेकिन निर्माण नहीं हटाया गया. इसके बाद बुलडोजर से बाउंड्री तोड़ दी गई. वहीं, नाबालिग से जुड़े पॉक्सो केस में पुलिस की जांच अभी जारी है.
Flydubai Hero : इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मिड-एयर हाइजैकिंग की कोशिश के दौरान हमलावर पायलट को काबू करने में मदद करने वाले यानिव हायून से मुलाकात कर उनकी जमकर सराहना की। उन्होंने यानिव को हीरो का 'सम्मान' भी दिया।
नीच राशि में सूर्य की एंट्री, 4 राशियों पर बरसेगा पैसा!
Surya Gochar 2026: सूर्य 17 अक्टूबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे सूर्य की नीच राशि माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस गोचर से 4 राशियों के जीवन में करियर, धन और तरक्की से जुड़े बदलाव आ सकते हैं.
कूड़ा नहीं, खजाना हैं घिसे साबुन के छोटे टुकड़े! ऐसे करें इस्तेमाल
Leftover Soap Resue: रोजाना इस्तेमाल के बाद बचे साबुन के छोटे-छोटे टुकड़ों को बेकार समझकर फेंकने के बजाय उनसे बेहद काम की चीजें बनाई जा सकती हैं. लिक्विड हैंडवॉश, नया साबुन बनाने से लेकर अलमारी की बदबू दूर करने तक, आज हम आपको बचे साबुन का इस्तेमाल करने के 5 आसान और असरदार घरेलू तरीके बताने वाले हैं.
AI और साइबर रिसर्च पर चीन की नजर? MI5 ने ब्रिटिश सरकार को चेताया
ब्रिटेन में चीन से जुड़े एक रिसर्च संस्थान को लेकर सुरक्षा चिंता बढ़ गई है. खुफिया एजेंसी MI5 ने दावा किया है कि संस्थान के जरिए चीनी खुफिया एजेंसियों ने ब्रिटिश शिक्षाविदों के रिसर्च प्रोजेक्ट्स को गुप्त रूप से फंड किया. अब सरकार ने यूनिवर्सिटीज़ से सहयोग खत्म करने को कहा है. चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें मनगढ़ंत बताया है.
धार्मिक कट्टरता या इजराइल से नफरत? को-पायलट ने क्यों किया कैप्टन पर हमला? वजह जानकर दुनिया हैरान!
Flydubai FZ1073 Attack Reason:
TV एक्ट्रेस लवीना टंडन ने खोले कास्टिंग काउच के राज
टीवी एक्ट्रेस लवीना टंडन ने एक पुराने इंटरव्यू में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने कास्टिंग काउच अनुभव का खुलासा किया था. एक्ट्रेस के मुताबिक, साउथ की एक फिल्म के लिए उन्हें 5 लाख रुपये का ऑफर मिला था, लेकिन कंप्रोमाइज की शर्त पर रकम बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने की बात कही गई. लवीना ने इस प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया और कहा कि वे सिर्फ क्लीन वर्क के लिए ही तैयार हैं.
POCO का बड़ा धमाका, सस्ते में मिलेगा 10000mAh बैटरी वाला फोन
POCO ने अपने स्मार्टफोन्स पर कई तरह के ऑफर्स का ऐलान किया है. Flipkart Big Billion Days सेल में कंपनी अपने कई बैटरी सेंट्रिक स्मार्टफोन्स को सस्ते में बेचेगी. आइए देखते हैं कौन से स्मार्टफोन्स इस सेल में सस्ते होंगे.
उज्जैन में मस्जिद हादसे में कोई जनहानि नहीं, सड़क चौड़ीकरण का कार्य जारी: उज्जैन कलेक्टर
महाकाल की नगरी उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का कार्य जारी है। इस बीच उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा है कि उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के कार्य के दौरान छतरी चौक स्थित मस्जिद के सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्यवाही की जा रही है। इसी ...
Voter List से फर्जी तरीके से नाम हटाने पर दर्ज हो FIR, SIR सर्वे के बाद DK Shivakumar की मांग
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटाने के लिए दर्ज आपत्तियों का निर्वाचन क्षेत्र-वार ब्योरा मांगा है। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के सिविल सोसाइटी ऑडिट में आरोप लगाया गया था कि हज़ारों वोटरों को गलत तरीके से अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत घोषित कर दिया गया था। शिवकुमार ने बुधवार रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा हर असली वोटर के वोट देने के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुख्य चुनाव अधिकारी से 'फॉर्म 7' के तहत की गई आपत्तियों की जानकारी मांगी है। इसमें बड़ी संख्या में दिए गए आवेदन और वे आवेदन भी शामिल हैं जिनमें वोटर का नाम हटाने के लिए ज़रूरी कारण या जानकारी नहीं दी गई थी। शिवकुमार ने आपत्तियों में पहले से छपी हुई वोटर की जानकारी के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, पहले से छपी हुई वोटर की जानकारी के आधार पर आपत्तियां दर्ज करने से यह शक पैदा होता है कि SIR प्रक्रिया को खराब करने की कोई सोची-समझी कोशिश हो रही है। इसे भी पढ़ें: UNHRC Session: Sardar Nasir Aziz Khan ने PoJK में पाकिस्तान के अत्याचारों पर उठाई आवाज शिवकुमार ने कहा कि वोटर लिस्ट में बदलाव से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने कहा मैंने ऐसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की भी मांग की है, क्योंकि वोटर लिस्ट में हेरफेर करने और इस प्रक्रिया को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ऐसी FIR की कॉपी मुख्य सचिव को भेजी जानी चाहिए। इसे भी पढ़ें: AAP नेता Saurabh Bharadwaj का आरोप, BJP राज में Delhi की Forest Land पर हो रहा अवैध कब्जा शिवकुमार का यह बयान उस दिन आया जब एक्टर और एक्टिविस्ट प्रकाश राज की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें उनके बेंगलुरु आवास पर SIR प्रक्रिया से जुड़ा एक सर्वे सौंपा। यह रिपोर्ट 'एंटी SIR अलायंस' और 'सिटिजन्स वोट प्रोटेक्शन कमिटी' ने तैयार की थी। 23 पेज का यह सर्वे 25 जिलों के 100 पोलिंग बूथों पर घर-घर जाकर किए गए वेरिफिकेशन पर आधारित है। इसमें आरोप लगाया गया है कि जो वोटर अपने रजिस्टर्ड पते पर ही रह रहे थे, उन्हें भी अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके या मृत घोषित कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नामों के हटाए जाने से गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों जिनमें दलित, आदिवासी, खानाबदोश समूह और मुस्लिम शामिल हैं - के साथ-साथ महिलाओं पर भी असर पड़ा है। इसमें नामों को हटाने की प्रक्रिया की दोबारा जांच करने और गलत तरीके से हटाए गए नामों को फिर से जोड़ने की मांग की गई। ऑडिट में बेंगलुरु के एक इलाके का उदाहरण दिया गया, जहां 1,300 निवासियों में से 826 को दूसरी जगह शिफ्ट हो चुका बता दिया गया, जबकि वे उसी पते पर रह रहे थे और उन्होंने अपने एन्यूमरेशन फॉर्म भी जमा किए थे। इसमें ऐसे मामले भी दर्ज किए गए जिनमें जीवित वोटरों को मृत बता दिया गया था।
ताबड़तोड़ बिक रही ये इलेक्ट्रिक कारें! इस ब्रांड ने बेच डाली 1 लाख गाड़ियां
Mahindra Vehicle Sales: महिंद्रा ने सितंबर में शानदार प्रदर्शन करते हुए घरेलू बाजार में कुल 64,092 यूटिलिटी व्हीकल यानी SUV बेचीं हैं. इसके अलावा कंपनी के इलेक्ट्रिक व्हीकल्स ने भी बिक्री में नया माइलस्टोन टच किया है. Tata को चुनौती देते हुए कंपनी ने ईवी बिक्री में 1 लाख यूनिट सेल्स का आंकड़ा पार कर लिया है.
'EC के फैसले में कोई असहमति नहीं', SIR पर विपक्ष के सवालों पर EC की सफाई
चुनाव आयोग ने विपक्ष के एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा के तहत वैध और पारदर्शी है. 19 फरवरी 2025 से अब तक सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं. मतदाता सूची में मृत, डुप्लीकेट और फर्जी नाम हटाने के साथ-साथ पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखने का लक्ष्य है.
'लात मारी-बाल खींचकर पटका,' Ex ने किया टॉर्चर, रोई एक्ट्रेस
काजल ने शो में अपने एक्स रिलेशनशिप पर बात की है. एक्ट्रेस ने बताया उनके साथ मारपीट हुई थी. उन्होंने रिश्ते में काफी टॉर्चर झेला.
Akhilesh Yadav के दावे पर बोले UP Deputy CM Brajesh Pathak, BJP का एक भी MLA नहीं टूटेगा
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि बीजेपी विधायक उनकी पार्टी के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी का एक भी विधायक विपक्ष में शामिल नहीं होगा। गुरुवार को बात करते हुए पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी को अपने ही परिवार पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें भारतीय जनता पार्टी से एक भी विधायक नहीं मिलने वाला है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बीजेपी, अपने कार्यकर्ताओं और कैडर के मामले में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते, दूसरी पार्टियों के विधायकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसे भी पढ़ें: DK Shivakumar ने Karnataka में Form 7 के दुरुपयोग पर मांगी आपराधिक जांच पाठक ने कहा कि दूसरी पार्टियों के कई विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के इच्छुक हैं। सही समय आने पर, भारतीय जनता पार्टी निश्चित रूप से ऐसे सभी सम्मानित विधायकों के बारे में सोचेगी और उन पर काम करेगी। उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि बीजेपी 2027 में उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि मैं फिर से कहता हूं, भारतीय जनता पार्टी 2027 में भारी बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बारे में पूछे जाने पर पाठक ने धैर्य रखने को कहा कि आप थोड़ा इंतज़ार करें, भारतीय जनता पार्टी के सभी उम्मीदवार... हम जल्द ही आपके सामने सूची पेश करेंगे। ये बयान अखिलेश यादव के उस दावे के एक दिन बाद आए हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी के कई विधायक समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं, लेकिन उन्हें शामिल करने में कुछ दिक्कतें हैं। इसे भी पढ़ें: Punjab में BJP सरकार बनने पर 2029 तक खत्म होगा नशा, Amit Shah का वादा मीडिया से बातचीत के दौरान, यादव ने संकेत दिया कि पार्टी अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव में ज़्यादातर उन्हीं सहयोगियों के साथ उतरेगी जिनके साथ उसने हाल के चुनावों में गठबंधन किया था, और जल्द ही गठबंधन की घोषणा करने की योजना है। उन्होंने कहा कि हम जल्द ही ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं, और गठबंधन वैसा ही रहेगा जैसा पहले था। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर भी बीजेपी की आलोचना की और कहा कि चंदा चोरी करके कोई बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं बनाई जा सकती।
Supreme Court ने Ahmedabad Blast मामले में इंडियन मुजाहिदीन दोषी की फांसी पर लगाई रोक
नयी दिल्ली, एक अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में इंडियन मुजाहिदीन के एक सदस्य की मौत की सजा के अमल पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी की याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया। बरेलवी ने अपनी याचिका में उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा गया था। शीर्ष अदालत ने मामले से संबंधित निचली अदालत के रिकॉर्ड तलब किए और फांसी की सजा पर रोक लगा दी। मामले में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। उच्च न्यायालय ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाका मामले में इंडियन मुजाहिदीन के 38 दोषियों की मौत की सजा सात जुलाई को बरकरार रखी थी। अदालत ने बड़ी संख्या में हुई मौतों, ‘बहुत बड़ी साजिश’ और व्यापक स्तर पर आतंक फैलाने की मंशा को सजा बरकरार रखने के प्रमुख कारणों में शामिल किया था। उसने 11 अन्य दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा भी बरकरार रखी थी और माना था कि गुजरात और केरल में आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में उनकी भूमिका तथा साजिश के लिए रसद संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की बात अभियोजन पक्ष ने साबित की थी। अहमदाबाद के विभिन्न इलाकों में 26 जुलाई 2008 को करीब 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इनमें 56 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। धमाकों के बाद घायलों को इलाज के लिए ले जाए जा रहे अस्पतालों में भी विस्फोट हुए थे। यह भारत में किसी आतंकवादी हमले के दौरान चिकित्सा केन्द्रों को निशाना बनाए जाने की पहली ऐसी घटना थी। दोषियों में प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के पूर्व नेता सफदर नागौरी और गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल तथा उत्तर प्रदेश समेत 11 राज्यों के उसके सहयोगी शामिल हैं। इस मामले में 35 पुलिस मामलों को एक साथ मिलाए जाने के बाद 78 लोगों पर मुकदमा चला था। इनमें अहमदाबाद धमाकों से संबंधित 20 प्राथमिकी और सूरत में बरामद किए गए बिना फटे बमों से जुड़े 15 मामले शामिल थे। विशेष अदालत ने इनमें से 49 लोगों को दोषी ठहराया था। विशेष अदालत का फरवरी 2022 का फैसला इस लिहाज से ऐतिहासिक था कि किसी एक मामले में एक साथ 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी।
अल-नीनो का असर, मॉनसून बेअसर! 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर सीजन
अल-नीनो के असर से इस बार मॉनसून कमजोर रहा और बारिश में बड़ी कमी दर्ज हुई. 2001 के बाद यह चौथा सबसे कमजोर मॉनसून रहा. महाराष्ट्र में कम बारिश ने खेती और पानी, दोनों पर संकट बढ़ा दिया.
SIR पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- ‘कानून के ऊपर सॉफ्टवेयर नहीं चल सकता’
SIR प्रक्रिया में मतदाता नाम हटाने के मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि सॉफ्टवेयर कानून और नियमों से ऊपर नहीं हो सकता।
क्या ईरान ने कराई फ्लाइट में चाकूबाजी? नेतन्याहू ने दिया ये जवाब
फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट में कॉकपिट हमले के पीछे ईरान कनेक्शन के सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. सऊदी अरब में हमलावर को-पायलट से पूछताछ जारी है और इजरायल भी जांच में शामिल हो सकता है.
केरल: सबरीमाला के 'हलाल गुड़' पर हाईकोर्ट सख्त, टीडीबी को प्रसाद की शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर दिए निर्देश Kerala High Court takes stance Sabarimala Halal jaggery issues directives TDB purity and quality of Prasad
संजय लीला भंसाली की मोस्ट अवेटेड फिल्म लव एंड वॉर रिलीज से पहले ही चर्चा में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल स्टारर इस फिल्म ने बिना ट्रेलर रिलीज के ही करोड़ों की कमाई कर ली है.
NEET-PG के 258 अभ्यर्थी जीरो या माइनस नंबर से फेल, 2.66 लाख ने दी थी परीक्षा
NEET-PG 2026 परीक्षा में कुल 2,65,960 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें से 258 को शून्य या उससे कम अंक प्राप्त हुए. इनमें से 64 अभ्यर्थियों को शून्य अंक मिले जबकि 194 के अंक माइनस में थे. मिनिमम नंबर -59 रहे. क्वालिफाइंग कट-ऑफ सामान्य वर्ग के लिए 262 अंक, अनुसूचित जाति और अन्य वर्गों के लिए 226 अंक निर्धारित किया गया था.
e-Challan बकाया होने पर नहीं बनेगा PUC, बार-बार नियम तोड़े तो Driving License होगा सस्पेंड
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को निर्देश दिया कि वे उन मामलों में ऑनलाइन और वाहन से जुड़ी अन्य सेवाओं को रोक दें, जहां ट्रैफिक जुर्माना नहीं भरा गया है। इन सेवाओं में रजिस्ट्रेशन का रिन्यूअल, फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट (PUC) जारी करना, मालिकाना हक का ट्रांसफर और ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल भी शामिल है। यह कदम सड़क सुरक्षा कानूनों के इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पालन को और असरदार बनाने की देशव्यापी कोशिश का हिस्सा है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि जिन गाड़ियों पर ई-चालान बकाया हैं, उन्हें सेंट्रल परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जाए, ताकि उनकी बिक्री या ट्रांसफर को रोका जा सके। साथ ही, जब तक ट्रैफिक से जुड़े बकाया जुर्माने नहीं भरे जाते, तब तक किसी भी सेंटर को PUC सर्टिफिकेट जारी करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। एक से ज़्यादा उल्लंघन के मामलों में, अधिकारियों से कहा गया है कि वे ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूअल को रोक दें और मौजूदा लाइसेंस को सस्पेंड करने के लिए कदम उठाएं। इसे भी पढ़ें: UP पुलिस SI भर्ती पर हाई कोर्ट का बड़ा चाबुक! नियुक्ति पत्र बांटने पर रोक, आंसर की के 'खेल' से फंसा 12 हजार युवाओं का भविष्य! बेंच ने कहा कि हज़ारों या लाखों ई-चालान जारी करने का तब तक कोई खास फ़ायदा नहीं है, जब तक अधिकारी जुर्माना वसूल न कर लें। कोर्ट को बताया गया कि कुछ समय के दौरान जारी किए गए ई-चालान के तहत लगभग ₹49,194.05 करोड़ बकाया थे, जिनमें से अब तक ₹26,175.05 करोड़ वसूल किए जा चुके हैं। इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि अधिकारियों को ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए ज़मीनी स्तर पर काम करना होगा। इसमें कहा गया जुर्माने वगैरह की वसूली को असरदार ढंग से लागू करने के लिए अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे उन गाड़ियों की ऑनलाइन सेवाओं को रोक दें जिन पर बकाया राशि है। अधिकारी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को रिन्यू करने या डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने से रोकेंगे और मालिक का पता वगैरह अपडेट करने की किसी भी रिक्वेस्ट पर विचार नहीं करेंगे। जब तक सभी पेंडिंग ट्रैफिक जुर्माने पूरी तरह से चुका नहीं दिए जाते, तब तक अधिकारी फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं देंगे और साथ ही संबंधित गाड़ी को 'परिवहन पोर्टल' पर ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि कई बार नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल रोक दिया जाएगा और जो लाइसेंस अभी चालू हैं, उन्हें भी सस्पेंड करने के उपाय किए जाएंगे। आदेश में यह भी कहा गया, सबसे ज़रूरी बात यह है कि किसी भी सेंटर को PUC सर्टिफ़िकेट जारी करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। यह आदेश 2012 के सड़क सुरक्षा मामले में आया है, जिसमें बेंच लगभग 14 सालों से मोटर व्हीकल एक्ट और सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स को लागू करने की निगरानी कर रही है। जजों ने चिंता जताई कि अगर अधिकारी ज़मीनी स्तर पर निर्देशों को लागू करने में नाकाम रहते हैं, तो ये निर्देश सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित रह सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Special NIA Court का आदेश, यासीन मलिक समेत 6 अन्य लोगों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया कि वे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 28 अक्टूबर, 2025 को तैयार की गई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को तुरंत लागू करें और मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 136A तथा सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 167A का पालन करें। इन नियमों के तहत स्पीड कैमरे, CCTV कैमरे और स्पीड गन जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और नियमों को लागू करना ज़रूरी है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे ई-एनफोर्समेंट साइट्स की जानकारी दें और एनफोर्समेंट डिवाइस की खरीद, उन्हें लगाने और कैलिब्रेशन का काम पूरा करें। साथ ही, नेशनल रोड सेफ्टी बोर्ड को इसके लागू होने की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। यह बात ज़ोर देकर कही गई कि इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट सिर्फ़ ई-चालान जारी करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए; इसलिए गाड़ियों की रैंडम चेकिंग का निर्देश दिया गया। साथ ही कहा गया कि अगर किसी गाड़ी पर ऐसा ई-चालान बकाया पाया जाता है जिसका भुगतान नहीं किया गया है, तो अधिकारियों को उसे ज़ब्त करने के लिए ज़रूरी कदम उठाने चाहिए। बेंच ने संशोधित नियम 21(25) पर भी ध्यान दिया, जो 2026 में लागू हुआ था। इसके तहत, एक साल के अंदर मोटर व्हीकल एक्ट या नियमों के तहत पाँच या उससे ज़्यादा अपराध या उल्लंघन करना जनता के लिए परेशानी या ख़तरे का कारण माना जाता है।
महबूबा नहीं मां की तारीफ में लिखा गया था 58 साल पुराना ये गाना, लता मंगेशकर की आवाज नम कर देगी आंखें
1968 में 'राजा और रंक' नाम से एक फिल्म आई थी. इस फिल्म में निरूपा रॉय और फिल्म का चाइल्ड स्टार पर एक गाना फिल्माया गया था. लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड हुआ ये गाना आज भी मां और बच्चे के रिश्ते की गहराई बयां करता है.
Long Weekend Trip: दिल्ली-NCR से वीकेंड ट्रिप के लिए मुक्तेश्वर, औली और बिनसर खूबसूरत विकल्प हैं. पहाड़, शांति और एडवेंचर के बीच कम बजट में घूमने की प्लानिंग की जा सकती है. ग्रुप ट्रैवल और बजट स्टे से खर्च नियंत्रित रहेगा.
UPSC Centenary पर PM Modi बोले, युवाओं के भविष्य के लिए समय पर पूरी हों भर्ती परीक्षाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) से कहा है कि वह अपनी परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में चल रहे सुधारों को लागू करे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि परीक्षाओं का युवा उम्मीदवारों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है और चेतावनी दी कि देरी से बड़ी मुश्किलें आ सकती हैं। 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में UPSC के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए, PM मोदी ने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को देश की बदलती ज़रूरतों के हिसाब से खुद को ढालना चाहिए और समय की निश्चितता के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। इसे भी पढ़ें: Flydubai Flight में टली 9/11 जैसी त्रासदी, PM Modi बोले- Captain Smit पर देश को गर्व मोदी ने कहा कि परीक्षा को सिर्फ़ एक आयोजन नहीं माना जाना चाहिए। यह हमारे युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। कुछ महीनों की देरी भी युवाओं के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। इसलिए, परीक्षा प्रणाली को समय की निश्चितता के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। UPSC की 100 साल की विरासत को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने लाखों युवा भारतीयों के बीच इस संस्था के प्रति अटूट भरोसे का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि आज का यह मौका UPSC के 100 साल पूरे होने और इसकी शानदार विरासत का जश्न मनाने का है। यह जश्न हर साल लाखों युवाओं की उम्मीदों और सपनों को दर्शाता है। यह जश्न उस भरोसे को भी दिखाता है जो हर भारतीय इस संस्था पर करता है। PM मोदी ने कहा कि पिछली एक सदी में पीढ़ियों, सरकारों, टेक्नोलॉजी और सिलेबस में बदलाव के बावजूद UPSC पर लोगों का भरोसा मज़बूत बना हुआ है और यह एक बड़ी संपत्ति है। उन्होंने भारत के विकास के लिए आने वाले 20 से 25 सालों को बहुत अहम बताया और कहा कि UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों की भूमिका ऐसे युवाओं को चुनने में बहुत ज़रूरी है जो एक विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भर्ती प्रक्रिया दो मुख्य पैमानों पर आधारित होनी चाहिए: राष्ट्र पहले और नागरिक पहले। उन्होंने कहा कि ये वे दो पैमाने हैं जिनके आधार पर हर चयन को परखा जाना चाहिए। इसके अलावा, पीएम मोदी ने ऐसी परीक्षाओं की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो उम्मीदवारों को न सिर्फ़ एकेडमिक जानकारी के आधार पर परखें, बल्कि पब्लिक सर्विस में आने के उनके मकसद को भी देखें। उन्होंने कहा कि हमें पब्लिक सर्विस में ऐसे युवाओं को लाने की ज़रूरत है जो पब्लिक सर्विस की ओर आकर्षित हों, न कि सिर्फ़ सरकारी पद की ओर। इसलिए, यह ज़रूरी है कि भर्ती परीक्षा में न सिर्फ़ यह देखा जाए कि उम्मीदवार को कितनी जानकारी है, बल्कि यह भी देखा जाए कि युवा सिविल सर्विस में क्यों शामिल होना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें: PM Narendra Modi ने Donald Trump से की फोन पर बात, व्यापार और रक्षा सहयोग की समीक्षा उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नागरिकों की उम्मीदें बदल रही हैं और इसके लिए सिविल सर्विस के कामकाज के तरीके में बदलाव की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि 2047 का भारत आज के भारत से बहुत अलग होगा। आज की तुलना में भारत ज़्यादा शहरी होगा और गांवों और शहरों के बीच का अंतर कम हो जाएगा। हमारे नागरिकों, खासकर युवाओं की उम्मीदें और आकांक्षाएं कहीं ज़्यादा होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पब्लिक सर्विस को आज की 'इंस्टेंट-डिलीवरी' वाली दुनिया की रफ़्तार के साथ तालमेल बिठाना होगा।
फ्लाईदुबई को क्रैश से बचाने वालों को वीरता पदक, इजरायल का बड़ा ऐलान
फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट में पायलट पर हमले के बाद विमान को बचाने में मदद करने वाले चार इजरायलियों को सम्मानित किया जाएगा. राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने उन्हें सिविलियन हीरोइज्म के लिए प्रेसिडेंट मेडल देने की सिफारिश करने की बात कही है.
SIR में नाम काटने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने इलेक्शन कमीशन को लगाई फटकार
गोवा में बॉम्बे हाईकोर्ट ने SIR के दौरान बिना सुनवाई के नाम हटाए जाने को लेकर इलेक्शन कमीशन (EC) को कड़ी फटकारलगाई है. कोर्ट ने कहा कि तकनीक के बजाय कानून का पालन करें.
एक नेत्रहीन व्यक्ति ने दुनिया के सबसे नामी म्यूजियम पर मुकदमा क्यों कर दिया?
ब्रिटिश म्यूजियम को दुनिया के सबसे बेहतरीन और सबसे व्यापक म्यूजियम में से एक माना जाता है. हालांकि यहां मौजदू अधिकतर आर्टिफैक्ट्स उन देशों से चुराए हुए हैं जहां अंग्रेजों ने शासन किया था.
Success Story: डेल्ही बेली की वो बिंदास पत्रकार याद है आपको जिसे बॉलीवुड ने भुलाया और हॉलीवुड ने गले लगाया. इन दिनों जियोहॉटस्टार की वेब सीरीज में एलियन अवतार में OTT पर धूम मचा रखी है. इसके बाद एपल की वेब सीरीज से भी वह दिल जीतने को तैयार हैं.
स्कूटी पर युवक का शव देखकर लोग हैरान, पुलिस ने जताई ये आशंका
मेरठ में रोहटा रोड फ्लाईओवर के पास स्कूटी पर 26 वर्षीय रजत यादव का शव मिला है. पुलिस को नशे के ओवरडोज की आशंका है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह साफ होगी. पढ़ें पूरी कहानी.
तीन महीने बाद खुले रणथंभौर के दरवाजे, पहले दिन ही जंगल सफारी के लिए उमड़े पर्यटक
राजस्थान के रणथंभौर में तीन महीने बाद रणथंभौर नेशनल पार्क के द्वार पर्यटकों के लिए खुल गए. पहले दिन गणेश धाम मुख्य द्वार पर तिलक-माला से राजस्थानी अंदाज में स्वागत हुआ. रंगोली से सजा मुख्य प्रवेश द्वार और लोक कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं. कलेक्टर व वन अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर पर्यटक वाहनों को रवाना किया. पहली पारी में सैकड़ों देशी-विदेशी पर्यटक जंगल सफारी के लिए रणथंभौर पहुंचे.
चाहे चपरासी हो या प्रमुख सचिव कानून की नजर में सब बराबर, पूर्व जज की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक पूर्व जिला जज की याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कानून की नजर में सब बराबर हैं.
कपूर, भजन, शंख और कलश... इन्हें इंग्लिश में क्या कहते हैं?
कपूर, बाती, अगरबत्ती से लेकर घूरना, हिचकी, डकार और जम्हाई तक, इन रोजमर्रा के शब्दों के इंग्लिश नाम शायद आप भी नहीं जानते होंगे. जानिए इन शब्दों के सही इंग्लिश मीनिंग.
3 अक्टूबर से संभलकर रहें 5 राशियां, केतु की चाल बढ़ाएगी मुश्किलें!
Ketu Nakshatra Parivartan 2026: 3 अक्टूबर 2026 को छाया ग्रह केतु मघा नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश करने जा रहे हैं. केतु के अपने ही नक्षत्र के इस संवेदनशील पद में आने से कई जातकों को मानसिक तनाव, धन हानि और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
86,000 करोड़ रुपये का रोज का बिल ! एक कप कॉफी की कीमत तुम क्या जानो; आंकड़े देखकर उड़ जाएंगे होश
क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में रोज 86,000 करोड़ रुपये की कॉफी पी ली जाती है? भारत में रोजाना 263 टन खपत से लेकर फिनलैंड के नंबर-1 बनने तक, पढ़िए वर्ल्ड कॉफी डे पर इंटरनेशनल कॉफी संगठन के चौंकाने वाले आंकड़े.
ठाणे में शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रदीप पूर्णेकर की हत्या मामले में उनके बेटे ने पूर्व मेयर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति पर साजिश का आरोप लगाया है। इसके बाद शिवसेना नेता संजय राउत और आदित्य ठाकरे ने विरोध-प्रदर्शन किया।
फ्रिज को कितने दिन में साफ करना चाहिए? पहले करें इस हिस्से को साफ, छिपी होती है सबसे ज्यादा गंदगी
क्या आपने अपने फ्रिज को महीनों से क्लीन नहीं किया है? अगर हां, तो इसका असर आपकी सेहत पर पड़ सकता है. यहां जानते हैं फ्रिज को कितने दिनों को अंदर क्लीन करना जरूरी होता है?
यूपीएससी के शताब्दी समारोह के दौरान भारत मंडपम में PM मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार को याद किया. उन्होंने कहा कि स्मित के धैर्य-साहस-पराक्रम पर हमें गर्व है.
अमेरिकी जासूसी सैटेलाइट अंतरिक्ष में टूटा, 200 उपग्रहों पर खतरा
कोल्ड वॉर समय का अमेरिकी जासूसी सैटेलाइट USA-32 सितंबर 2026 में बिना चेतावनी टूट गया. इससे लोअर अर्थ ऑर्बिट में मलबा फैला. स्पेस फोर्स निगरानी कर रही है. इसी दौरान नासा SR-71 ब्लैकबर्ड को फिर उड़ाने की की खबरें आईं है.
आज हम आपके लिए गौर गोपाल दास के कुछ मोटिवेशनल कोट्स लेकर आए हैं, जो आपको जीवन में आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट कर सकते हैं.
Assam के कछार में 8000 Yaba Tablets बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार
गुवाहाटी, एक अक्टूबर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि कछार जिले में दो लोगों के कब्जे से करीब एक करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त किए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने विशेष सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए जिले के बिद्यारत्नपुर इलाके में 8,000 याबा टैबलेट जब्त कीं। शर्मा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मुझे पकड़ सकते हो तो पकड़ो? कछार पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया। विशेष सूचना के आधार पर बिद्यारत्नपुर में एक करोड़ रुपये मूल्य की संदिग्ध याबा की 8,000 टैबलेट जब्त की गईं और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।’’उन्होंने कहा, ‘‘असम पुलिस लगातार इस दिशा में काम कर रही है। शानदार काम।’’याबा टैबलेट को थाई में ‘‘क्रेजी मेडिसिन’’ के नाम से जाना जाता है। यह अत्यधिक नशे की लत लगाने वाला मादक पदार्थ है, जिसमें मेथामफेटामाइन और कैफीन का मिश्रण होता है। भारत में इस पर प्रतिबंध है।
World Coffee Day: इस कॉफी को दुनिया बड़े चाव से पीती है, लेकिन दुनिया की सबसे महंगी कॉफी बनने की प्रोसेस से अनजान है. आखिर इस जानवर में ऐसा क्या है जिसकी पूप से निकले कॉफी बींस इतने स्वादिस्ट हो जाते हैं.
बुमला पास, अरुणाचल प्रदेश में तवांग से लगभग 37 किलोमीटर भारत-चीन सीमा पर 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक सीमावर्ती दर्रा है.
शिखर धवन ने सोफी संग पहली मुलाकात का खोला राज
पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन ने इसी साल फरवरी में सोफी शाइन से शादी की थी. ये शिखर की दूसरी शादी है. सोफी और धवन हाल ही में शो 'फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा' में गेस्ट बने. यहां शिखर ने लेडीलव पर प्यार लुटाया
AAP नेता Saurabh Bharadwaj का आरोप, BJP राज में Delhi की Forest Land पर हो रहा अवैध कब्जा
दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने BJP के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी में कई सौ करोड़ रुपये की वन भूमि पर कब्ज़ा होने देने का आरोप लगाया है। उन्होंने 1 अक्टूबर को X पर एक पोस्ट में ये आरोप लगाए। भारद्वाज ने दावा किया कि वन क्षेत्रों में हरी और नीली टिन-शीट की दीवारों के पीछे अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई हो रही थी। उन्होंने लिखा कि रेखा गुप्ता सरकार की शह पर कई सौ करोड़ की वन भूमि पर कब्ज़ा किया जा रहा है। ज़ोर-ज़ोर से DJ बजाने की आड़ में, इन अवैध हरी/नीली टिन-शीट दीवारों के पीछे अवैध रूप से पेड़ काटे जा रहे हैं और रातों-रात अवैध दीवारें खड़ी करके सैकड़ों करोड़ की वन भूमि पर कब्ज़ा किया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: DK Shivakumar ने Karnataka में Form 7 के दुरुपयोग पर मांगी आपराधिक जांच उन्होंने खास तौर पर छतरपुर 100-फुट रोड के आस-पास 'बिल्डर माफिया' की गतिविधियों की ओर इशारा किया और कहा कि ये सब राजनीतिक संरक्षण में हो रहा है। भारद्वाज ने कहा कि छतरपुर 100-फुट रोड पर राजनीतिक संरक्षण में बिल्डर माफिया सक्रिय है। इस इलाके में कुछ लग्ज़री मॉल बनने के बाद नेताओं का लालच जंगल की आग की तरह बढ़ रहा है। AAP नेता ने प्रदूषण पर भाषण देने के बावजूद पेड़ों की अवैध कटाई को रोकने में नाकाम रहने के लिए BJP सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह आपके फेफड़ों की कीमत पर हो रहा है। BJP सरकार प्रदूषण और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे मुद्दों पर भाषण तो देती है, लेकिन असल में इस वन क्षेत्र में हज़ारों पेड़ अवैध रूप से काटे जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Punjab में BJP सरकार बनने पर 2029 तक खत्म होगा नशा, Amit Shah का वादा भारद्वाज ने मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व वाले पर्यावरण और वन विभाग पर भी आरोप लगाया और कहा कि ऐसा लगता है कि यह वन भूमि हड़पने की आपराधिक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मंत्री के अधीन पर्यावरण और वन विभाग जंगलों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह वन भूमि को लूटने की आपराधिक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कई एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दिल्ली पुलिस, दिल्ली नगर निगम (MCD), मुख्यमंत्री कार्यालय और उपराज्यपाल कार्यालय को टैग किया।
Neem Karoli Baba Serial Promo: नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनीं हनुमान अंश 2026 की सबसे ज्यादा प्रॉफिट कमाने वाली फिल्म बन गई है. जबकि 55 दिनों की कमाई के साथ साल की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का खिताब भी अपने नाम कर चुकी है.
Stree 3 Release: स्त्री 3 का ऐलान हो गया है. दरअसल, प्रोड्यूसर दिनेश विजान ने हाल ही में स्त्री 3 को कंफर्म करते हैं, जिसमें राजकुमार राव नजर आएंगे. इसके 2028 में आने का ऐलान कर दिया है.
Rise and Fall 2: राजनीति के मैदान के बाद अब तेज प्रताप यादव रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल सीजन 2' में अपना गेम खेलते नजर आ रहे हैं. शो में तेज प्रताप कभी हाथ में बांसुरी लिए दिखाई देते हैं, तो कभी रेड रूम में डांस करते हुए माहौल को मजेदार बनाते हैं. व
भारतीय हीरो पायलट की अद्भुत बहादुरी पर इजरायल से उमड़े तारीफों के सैलाब
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा जगत के पन्नों में जब भी दो देशों के बीच अटूट विश्वास, संकट के समय एक-दूसरे का साथ देने की प्रतिबद्धता और असाधारण साहस की बात होती है, तो कुछ नाम इतिहास के पन्नों पर हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। हाल ही में भारत के एक होनहार और वीर सपूत पायलट स्मिट मच्छार ने अपने अदम्य साहस, असाधारण सूझबूझ और पेशेवर कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा परिचय दिया है जिसने न केवल देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है बल्कि सुदूर पश्चिम एशिया में स्थित देश इजरायल तक के नागरिकों और रक्षा अधिकारियों को उनका मुरीद बना दिया है। सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों तक इस समय 'स्मित मच्छार, ये नाम कभी नहीं भूलेंगे' जैसे गूंजते संदेशों की बाढ़ आ गई है और हर कोई इस भारतीय पायलट की जांबाजी की खुली तारीफ कर रहा है। एक आम इंसान से लेकर बड़े-बड़े रक्षा विश्लेषक तक इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि कैसे एक कठिन और तनावपूर्ण परिस्थिति के दौरान भारतीय पायलट ने अपनी जान की परवाह न करते हुए जिस पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन किया, उसने पूरी दुनिया के सामने भारत के युवाओं की क्षमता का एक नया लोहा मनवाया है।कौन हैं हीरो पायलट स्मिट मच्छार और क्यों उनकी बहादुरी के चर्चे आज पूरी दुनिया की जुबान पर हैंभारतीय वायुसेना और विमानन जगत के भीतर अपनी बेहतरीन कार्यकुशलता और अनुशासित जीवनशैली के लिए पहचाने जाने वाले पायलट स्मिट मच्छार ने अपनी एक ऐसी साहसिक और सूझबूझ भरी प्रतिक्रिया से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। जब आसमान में अचानक किसी गंभीर तकनीकी संकट या अप्रत्याशित परिस्थिति का साया मंडराता है, तब एक पायलट के पास फैसला लेने के लिए केवल कुछ ही सेकंड का वक्त होता है और उस छोटे से अंतराल में लिया गया निर्णय ही सैकड़ों लोगों की जान बचाता है। पायलट स्मिट मच्छार ने उस नाजुक और खौफनाक घड़ी में जिस गजब की मानसिक शांति, संयम और सटीक तकनीकी निर्णय का परिचय दिया, उसी ने किसी बड़े संभावित हादसे को टालने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। उनके इस असाधारण और साहसिक कदम के बाद से ही देश के कोने-कोने से उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया है और सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में अनगिनत पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं, जो यह बताते हैं कि हमारे देश के वीर सपूतों की बहादुरी सीमाओं के बंधनों से परे जाकर पूरी दुनिया को प्रभावित करती है।इजरायल से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक क्यों उमड़ पड़े हैं तारीफों के संदेश और क्या है इसका कूटनीतिक महत्वयह बेहद दिलचस्प और गौरवान्वित करने वाला पहलू है कि भारतीय पायलट स्मिट मच्छार की इस वीरतापूर्ण घटना के बाद इजरायल के नागरिकों, रक्षा जानकारों और सोशल मीडिया यूजर्स ने बढ़-चढ़कर उनकी सराहना की है और उनके सम्मान में कई संदेश साझा किए हैं। इजरायल और भारत के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, रक्षात्मक और तकनीकी सहयोग जिस ऊंचे मुकाम पर पहुंचा है, उसने दोनों देशों की जनता के बीच एक भावनात्मक रिश्ता भी कायम कर दिया है। जब भी भारत का कोई नागरिक या सैनिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बुद्धिमत्ता और साहस का परचम लहराता है, तो इजरायल जैसे देश जो खुद अपनी रक्षात्मक सतर्कता और मजबूत सैन्य संस्कृति के लिए जाने जाते हैं, वे इसकी गहराई को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। यही कारण है कि वहां के लोगों ने स्मिट मच्छार के इस साहसिक कारनामे को खुले दिल से सराहा है और इसे सच्ची मानवीय बहादुरी का एक बेहतरीन उदाहरण करार दिया है, जिससे दोनों मित्र देशों के बीच आपसी सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध और अधिक मजबूत हुए हैं।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और सोशल मीडिया के दौर में कैसे वायरल होती है सच्ची वीरता की दास्तानआज का यह आधुनिक डिजिटल युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एल्गोरिदम और जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का दौर है जहां कोई भी सकारात्मक या प्रेरणादायक घटना पालतू पलों में पूरी दुनिया के कोने-कोने तक पहुंच जाती है। जब पायलट स्मिट मच्छार की बहादुरी की खबर इंटरनेट पर आई, तो सर्च इंजन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम से जुड़े कीवर्ड्स कुछ ही घंटों में ट्रेंडिंग लिस्ट में सबसे ऊपर पहुंच गए। डिजिटल उपयोगकर्ताओं ने न केवल उनकी तस्वीर और घटना के विवरण को शेयर किया, बल्कि उनके अदम्य साहस को सलाम करते हुए कई दिल को छू लेने वाले लेख और वीडियो भी तैयार किए, जिन्हें लाखों लोगों द्वारा देखा और सराहा गया। तकनीक के इस पारदर्शी दौर में अब असली नायकों की मेहनत, निष्ठा और बहादुरी कभी छुप नहीं सकती है और वे अपनी काबिलियत के दम पर ग्लोबल मंच पर एक नई पहचान बना लेते हैं। पायलट स्मिट मच्छार की यह गाथा आज के युवाओं के लिए इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि यदि आप अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित और ईमानदार हैं, तो आपकी मेहनत पूरी दुनिया में सम्मान और प्रतिष्ठा जरूर दिलाती है।
सिंधु घाटी सभ्यता पर पूर्व पाकिस्तानी पीएम के इस अजीबोगरीब दावे ने मचाया तहलका
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और इतिहास के पन्नों में जब भी प्राचीन सभ्यताओं की बात होती है, तो पूरी दुनिया के इतिहासकार भारतीय उपमहाद्वीप की महान संस्कृति और विरासत का जिक्र बड़े ही गर्व के साथ करते हैं। लेकिन हाल ही में पाकिस्तान के गलियारों से एक ऐसा हैरान कर देने वाला और अजीबोगरीब बयान सामने आया है जिसने सोशल मीडिया से लेकर शैक्षणिक जगत तक में सनसनी फैला दी है। पाकिस्तान के एक पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने हालिया संबोधन के दौरान यह दावा ठोक दिया है कि पाकिस्तान की जड़ें कोई आज की नहीं बल्कि पूरे 9,000 साल पुरानी हैं और प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता का असली वारिस वही देश है। उनके इस दावे के सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और इतिहास प्रेमियों ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई तथा उनकी इस बयानबाजी कोरी राजनीतिक नौटंकी करार दिया। इस तरह के बयानों से एक बार फिर से यह बहस छिड़ गई है कि कैसे राजनीतिक फायदे के लिए प्राचीन इतिहास और भौगोलिक सच्चाइयों को मरोड़ने की कोशिश की जाती है जिस पर आज के जागरूक नागरिक और सोशल मीडिया यूजर्स अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।क्या है प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता का ऐतिहासिक सच और कैसे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो का इतिहास जुड़ा है अखंड भारत सेइतिहास के तमाम प्रामाणिक दस्तावेजों और पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता जिसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है, मानव इतिहास की सबसे पुरानी और उन्नत शहरी सभ्यताओं में से एक है। आज से हजारों साल पहले विकसित हुई इस महान सभ्यता का विस्तार मुख्य रूप से उत्तर भारत, पश्चिमी भारत और वर्तमान पाकिस्तान के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ था, जब उस समय आधुनिक राजनीतिक सीमाओं जैसी कोई अवधारणा अस्तित्व में ही नहीं थी। उस कालखंड में इस पूरी भू-भाग की संस्कृति, रहन-सहन, व्यापार, लिपि और जीवनशैली एक जैसी थी और यह पूरी तरह से प्राचीन भारतीय उपमहाद्वीप की साझी विरासत का एक अभिन्न हिस्सा हुआ करती थी। इतिहासकार हमेशा से इस बात पर जोर देते आए हैं कि प्राचीन सभ्यताओं को किसी एक आधुनिक देश की सीमा में बांधकर देखना न केवल ऐतिहासिक भूल है बल्कि यह तथ्यों के साथ सरासर खिलवाड़ करने जैसा है। यही वजह है कि जब भी कोई राजनेता इस तरह के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथ्यों को अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए तोड़-मरोड़कर पेश करता है, तो इतिहासकार और आम जनता उस पर कड़ी आपत्ति जताती है।सोशल मीडिया पर क्यों भड़के आम लोग और कैसे पाकिस्तानी राजनेताओं के बयानों का उड़ रहा है जमकर मजाकपूर्व प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए इस 9,000 साल पुराने दावे के सोशल मीडिया पर आते ही इंटरनेट यूजर्स ने मीम्स और तीखी प्रतिक्रियाओं के जरिए उनकी जमकर क्लास लगानी शुरू कर दी। लोगों का कहना है कि जिस देश का गठन खुद आधुनिक इतिहास में मजहब के आधार पर साल 1947 में हुआ हो, वह भला हजारों साल पुरानी प्राचीन सभ्यताओं पर अपना एकाधिकार कैसे जमा सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इतिहास के जानकार युवाओं ने नक्शे और पुरातात्विक प्रमाण साझा करते हुए यह साबित किया कि प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता का केंद्र और उसकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप की समग्र मिट्टी में रमी हुई हैं, जिनका पाकिस्तान के राजनीतिक वजूद से कोई लेना-देना नहीं है। जनता की इस तीखी प्रतिक्रिया से यह साफ हो गया है कि आज का जागरूक नागरिक इतिहास के साथ होने वाले खिलवाड़ को चुपचाप बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है और वह तथ्यों के आधार पर हर झूठे दावे का मुंहतोड़ जवाब देना अच्छी तरह जानता है। राजनीतिक नेताओं द्वारा इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार गढ़ने की यह प्रवृत्ति अब सोशल मीडिया के दौर में ज्यादा समय तक छिप नहीं पाती है और तुरंत बेनकाब हो जाती है।आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल युग में इतिहास के सच को कैसे तलाश रहा है आज का युवा पाठकआज का दौर पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सर्च इंजन और जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन का दौर बन चुका है जहां किसी भी ऐतिहासिक तथ्य की सच्चाई जानने के लिए युवा केवल एक क्लिक करते हैं। जब इस प्रकार के विवादित और सनसनीखेज बयान इंटरनेट पर वायरल होते हैं, तो सर्च इंजन और एआई टूल्स तुरंत प्रामाणिक इतिहास की किताबों, शोध पत्रों और पुरातत्व विभाग के दस्तावेजों को निकालकर पाठकों के सामने रख देते हैं। इससे पाठकों को यह समझने में जरा भी देर नहीं लगती कि कौन सा बयान केवल राजनीतिक पब्लिसिटी स्टंट है और कौन सी बात पूरी तरह से ऐतिहासिक सत्यों पर आधारित है। डिजिटल तकनीक के इस दौर में अब नेताओं के लिए झूठे दावे करना और बिना सिर-पैर की कहानियां गढ़ना पहले जितना आसान नहीं रह गया है क्योंकि हर एक शब्द का डिजिटल रिकॉर्ड और सच तुरंत जनता के सामने आ जाता है। अंततः इतिहास किसी की राजनीतिक बपौती नहीं होता बल्कि वह साक्ष्यों, सबूतों और इंसानी सभ्यता के क्रमिक विकास का एक ऐसा सच्चा दर्पण होता है जिसे चाहकर भी कोई झुठला नहीं सकता है।
ब्रह्मोस मिसाइल के खौफ से कांपे पाकिस्तान ने एयरबेस की सुरक्षा के लिए तैनात किया सिस्टम
अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार और कूटनीति के गलियारों में इन दिनों एक बार फिर से भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की ताकत और उसके खौफ की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। अपनी अचूक मारक क्षमता, अद्वितीय गति और अत्याधुनिक तकनीक के लिए पूरी दुनिया में लोहा मनवा चुकी ब्रह्मोस मिसाइल के नाम से ही पड़ोसी देश पाकिस्तान की नींद उड़ी हुई है, जिसके चलते उसने अपनी रणनीतिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्राप्त खुफिया रिपोर्टों और रक्षा विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान ने भारतीय मिसाइलों के आसन्न खतरे और संभावित हमलों से अपने महत्वपूर्ण वायुसेना अड्डों यानी एयरबेस को बचाने के लिए चीन से खरीदे गए आधुनिक एलडी-2000 यानी एलडी-2000 क्लोज-इन वेपन सिस्टम को तैनात कर दिया है। इस चीनी एंटी-मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती यह साफ दर्शाती है कि भारतीय सशस्त्र बलों की बढ़ती ताकत से पाकिस्तान किस कदर डरा हुआ है और वह अपनी सरहद की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से विदेशी हथियारों पर निर्भर होता जा रहा है। आधुनिक युद्धकौशल और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया के सामरिक परिदृश्य में एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आया है, जिस पर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की पैनी नजर टिकी हुई है।क्या है चीनी LD-2000 एयर डिफेंस सिस्टम और कैसे काम करती है इसकी तकनीक जिसे पाकिस्तान ने बनाया है अपना रक्षा कवचपाकिस्तान द्वारा अपने एयरबेस की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए इस चीनी एलडी-2000 सिस्टम के बारे में जब रक्षा विशेषज्ञों ने गहराई से पड़ताल की, तो इसकी कई चौंकाने वाली तकनीकी विशेषताएं सामने आईं। यह सिस्टम मुख्य रूप से एक मोबाइल क्लोज-इन वेपन सिस्टम यानी सीआईडब्ल्यूएस है, जिसे विशेष रूप से दुश्मन की कम दूरी से आने वाली क्रूज मिसाइलों, गाइडेड बमों और लड़ाकू विमानों को हवा में ही तबाह करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एक शक्तिशाली रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम लगा होता है जो बेहद कम समय में तेजी से आगे बढ़ने वाले लक्ष्यों को खुद ब खुद पहचान कर उन पर सटीक निशाना साध सकता है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-बैरेल गन और आधुनिक गोलियों की बौछार है जो एक सेकंड में दर्जनों राउंड फायर करके आसमान में ही आने वाले खतरे को मलबे में बदल सकती है। हालांकि चीन द्वारा निर्मित इन हथियारों की विश्वसनीयता और युद्ध के मैदान में उनके वास्तविक प्रदर्शन को लेकर अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजारों में हमेशा से सवालिया निशान लगते रहे हैं, लेकिन फिर भी पाकिस्तान अपनी घबराहट को छुपाने के लिए इन पर आंख मूंदकर भरोसा कर रहा है।ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की वह बेजोड़ ताकत जिसके खौफ से पाकिस्तान ने खड़े किए यह सुरक्षा घेरेभारतीय सेना के बेड़े में शामिल ब्रह्मोस मिसाइल आज के समय में दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है, जिसका कोई तोड़ फिलहाल दुनिया के पास नहीं है। यह मिसाइल आवाज की गति से भी लगभग तीन गुना यानी करीब 2.8 से 3.0 मैक की तीव्र गति से उड़ान भरती है, जिससे दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को संभलने या प्रतिक्रिया देने का मौका तक नहीं मिलता है। यही मुख्य कारण है कि पाकिस्तान के सैन्य रणनीतिकार इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि यदि युद्ध की स्थिति में भारत ने ब्रह्मोस का रुख उनकी तरफ कर दिया, तो उनके पारंपरिक डिफेंस सिस्टम ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएंगे। अपनी इसी घबराहट और अनहोनी के डर से पाकिस्तान लगातार अपने प्रमुख एयरबेस और सामरिक ठिकानों के चारों ओर इस तरह के चीनी सुरक्षा कवच लगाने के लिए मजबूर हो रहा है ताकि वह अपनी कमियों को कुछ हद तक छुपा सके। लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस जैसी आधुनिक और बदलती दिशा में मार करने वाली मिसाइलों के सामने इस तरह के शुरुआती डिफेंस सिस्टम ज्यादा देर तक टिक नहीं सकते हैं और भारत की सामरिक बढ़त के आगे यह प्रयास नाकाफी साबित होंगे।आधुनिक युद्ध और जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में दक्षिण एशिया का बदलता रणनीतिक समीकरणआज का दौर पारंपरिक युद्धों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल रडार और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन जैसी तकनीकों का दौर बन चुका है जहां हर एक सैन्य गतिविधि पर सुपरकंप्यूटर और उपग्रहों की नजर रहती है। ऐसे समय में जब भारत अपनी स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के उन्नत संस्करण तैयार कर रहा है, तब पाकिस्तान का इस तरह से पुराने या चीनी उपकरणों पर निर्भर रहना उसकी सामरिक कमजोरी को उजागर करता है। रक्षा मामलों के जानकारों का यह भी कहना है कि हथियारों की यह अंधी दौड़ और सुरक्षा घेरे खड़े करना केवल युद्ध की विभीषिका को ही बढ़ाते हैं, जबकि असली सुरक्षा क्षेत्रीय स्थिरता और शांतिपूर्ण संवाद में ही निहित होती है। इसके बावजूद, देश की संप्रभुता और सुरक्षा सबसे सर्वोपरि होती है, जिसके लिए भारतीय सेनाएं हर पल मुस्तैद और आधुनिक हथियारों से लैस होकर दुश्मनों के हर नापाक मंसूबों को नाकाम करने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठी हैं।
शेयर बाजार लगातार क्यों गिर रहा? FII, Crude या Global Crisis? |Sensex-Nifty में लगातार गिरावट क्यों?
इजरायली पीएम नेतन्याहू के इस बड़े खुलासे ने दुनिया में मचाई सनसनी
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के गलियारों में जब भी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम आता है, तो उनके सख्त फैसलों और चौंकाने वाले बयानों की चर्चा पूरी दुनिया में होने लगती है। हाल ही में नेतन्याहू ने एक ऐसा ही बेहद सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला बयान दिया है जिसने विमानन सुरक्षा और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। उन्होंने अपने एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान खुलासा किया है कि इतिहास में एक बार एक भारतीय पायलट पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया गया था, जिसके बाद से विमानों की सुरक्षा को लेकर कई कड़े नियम बनाए गए। इस चौंकाने वाले खुलासे के सामने आने के बाद से ही आम लोगों के मन में यह सवाल सबसे तेजी से उठ रहा है कि आखिर दुनिया के हर कमर्शियल और पैसेंजर प्लेन के अंदर कुल्हाड़ी जैसी खतरनाक चीज को रखने की आखिर क्या जरूरत पड़ती है। आधुनिक दौर में जहां सुरक्षा के लिहाज से एक सुई तक को विमान के अंदर ले जाने पर पाबंदी होती है, वहीं कॉकपिट या केबिन के अंदर कुल्हाड़ी का होना अपने आप में एक बड़ा रहस्य और बहस का मुद्दा बना हुआ है।क्या है विमान के अंदर कुल्हाड़ी रखने का असली और हैरान करने वाला तकनीकी कारण जिसे हर यात्री को जानना चाहिएजब भी कोई आम यात्री हवाई जहाज में सफर करता है, तो वह यही सोचता है कि उड़ान के दौरान उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आधुनिक और डिजिटल उपकरण मौजूद हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तकनीकी रूप से इतने उन्नत और कंप्यूटरीकृत माने जाने वाले विमानों के अंदर आज भी एक पारंपरिक हथियार यानी मेटल की कुल्हाड़ी को अनिवार्य रूप से क्यों रखा जाता है। विमानन और एविएशन सेक्टर के तकनीकी नियमों के अनुसार यह कुल्हाड़ी कोई हमला करने का हथियार नहीं है, बल्कि यह पायलट और क्रू मेंबर के लिए एक आपातकालीन यानी इमरजेंसी रेस्क्यू टूल के रूप में काम करती है। उड़ान के दौरान यदि किसी तकनीकी खराबी के चलते विमान का कोई हिस्सा जाम हो जाता है, दरवाजा ब्लॉक हो जाता है, या इलेक्ट्रॉनिक शॉर्ट सर्किट के कारण कोई लकड़ी या प्लास्टिक का पैनल फंस जाता है, तो उसे तुरंत काटने या तोड़ने के लिए इस कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कई बार क्रैश लैंडिंग या आपातकालीन स्थिति में जब दरवाजे या खिड़कियां जाम हो जाती हैं, तब यह कुल्हाड़ी यात्रियों की जान बचाने में सबसे बड़ा हथियार साबित होती है।इतिहास के वे खौफनाक पन्ने जब विमान अपहरण और हमलों के दौरान कॉकपिट की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौतीबेंजामिन नेतन्याहू द्वारा जिस भारतीय पायलट पर हमले का जिक्र किया गया है, उसने विमानन इतिहास के उन काले और डरावने दिनों की याद ताजा कर दी है जब दुनिया भर में एयरक्राफ्ट हाईजैकिंग की घटनाएं आम हुआ करती थीं। पिछले दशकों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जब आतंकवादियों या असामाजिक तत्वों ने विमान के कॉकपिट में घुसने और पायलटों को बंधक बनाने की कोशिश की ताकि विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लिया जा सके। ऐसे गंभीर और जानलेवा हालातों से निपटने के लिए ही विमान निर्माताओं ने पायलटों को यह अधिकार दिया है कि वे कॉकपिट के अंदर ऐसी किसी भी अप्रिय स्थिति या आपातकाल से खुद का बचाव करने के लिए कुल्हाड़ी का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि, 9/11 की दर्दनाक आतंकवादी घटना के बाद से दुनिया भर की एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियों ने विमान के कॉकपिट के दरवाजों को बुलेटप्रूफ और अत्यधिक सुरक्षित बना दिया है, जिससे अंदर बाहरी व्यक्ति का प्रवेश लगभग असंभव हो गया है। इसके बावजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आज भी दुनिया भर के अधिकांश विमानों में इस इमरजेंसी टूल को एक तय सुरक्षित जगह पर रखने का नियम सख्ती से निभाया जाता है।आधुनिक विमानन सुरक्षा और जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में कितनी बदल चुकी है फ्लाइट सेफ्टीआज का दौर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है जहां हर एक उड़ान पर जमीन से बैठे एयर ट्रैफिक कंट्रोल और आधुनिक सेंसर की पैनी नजर रहती है। आधुनिक विमानों में आग बुझाने वाले आधुनिक उपकरण, डिजिटल फायर फाइटिंग सिस्टम और कई प्रकार के स्वचालित सुरक्षा कवच लगे होते हैं जो किसी भी खतरे को होने से पहले ही भांप लेते हैं। यही कारण है कि आज के समय में आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कुल्हाड़ी जैसे पारंपरिक उपकरणों के साथ-साथ कई अन्य हाई-टेक गैजेट्स और रेस्क्यू किट भी विमान के अंदर उपलब्ध कराए जाने लगे हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा में कोई भी चूक न हो सके। इसके बावजूद नेतन्याहू के इस बयान ने एक बार फिर से इस बात की बहस छेड़ दी है कि आपातकाल के समय इंसानी सूझबूझ और बुनियादी उपकरण ही सबसे बड़े संकटमोचन साबित होते हैं। चाहे तकनीक कितनी भी आगे क्यों न बढ़ जाए, लेकिन विमानन इतिहास के वे सबक और सुरक्षा के कड़े नियम हमेशा एयरलाइंस को किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रखते हैं, जिससे हर यात्री का सफर सुरक्षित बनता है।
Special NIA Court का आदेश, यासीन मलिक समेत 6 अन्य लोगों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय
एनआईए की एक विशेष अदालत ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक और छह अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने हवाला चैनलों के ज़रिए पाकिस्तानी और विदेशी फंड का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को फाइनेंस करने के लिए किया। 9 सितंबर को जारी और गुरुवार को उपलब्ध कराए गए एक आदेश में, अदालत ने कहा कि प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 3 के तहत अपराध (जिसके लिए धारा 4 के तहत सज़ा का प्रावधान है) के लिए सभी सात आरोपियों के खिलाफ़ मज़बूत संदेह पैदा करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी। अदालत ने कहा मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि प्रथम दृष्टया, रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है जिसके आधार पर सभी सात आरोपियों के खिलाफ़ मज़बूत संदेह पैदा होता है। इसे भी पढ़ें: एआई से जुड़े महाविनाश के खतरेः नियंत्रित कमान जरूरी हालाँकि, राउज़ एवेन्यू कोर्ट्स के स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को निर्देश दिया कि वे न्यायिक हिरासत में बंद मलिक और अन्य आरोपियों के हस्ताक्षर लें, क्योंकि सुरक्षा कारणों से उन्हें औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं किया जा सका था। मामले की अगली तारीख 30 अक्टूबर तय की गई है। मामले में आरोपी हैं मलिक, जहूर अहमद शाह वताली, अब्दुल राशिद शेख, शब्बीर अहमद शाह, मसर्रत आलम, नवल किशोर कपूर और ट्राइसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के अनुसार, जांच के दायरे में आई आपराधिक गतिविधियों से कुल ₹8.94 करोड़ की अवैध कमाई हुई। एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने अलग-अलग तरीकों से इस पैसे को हासिल किया, ट्रांसफर किया, छिपाया, अपने पास रखा और इस्तेमाल किया। इसे भी पढ़ें: सोने-चांदी के जेवर चुराने वाले Bhavnagar के गिरोह का भंडाफोड़, Jhansi Railway Police ने दबोचा ED का मामला यह है कि अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देने और देश-विरोधी गतिविधियों में मदद करने के लिए, कथित तौर पर नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन से कैश कूरियर के ज़रिए हुर्रियत नेताओं (जिनमें मलिक भी शामिल हैं) तक पैसे पहुंचाए गए। एजेंसी ने वताली के साथ काम करने वाले अकाउंटेंट-कम-कैशियर गुलाम मोहम्मद भट से बरामद सबूतों का भी सहारा लिया। कथित तौर पर इन दस्तावेज़ों से पता चला कि मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम को 2015-16 फाइनेंशियल ईयर के दौरान वताली के ज़रिए विदेशी चंदा मिला था। जांच में मलिक से जुड़े कुछ ईमेल भी मिले। ED के मुताबिक, इन ईमेल से पता चला कि उसने आज़ादी की लड़ाई के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी, अलगाववादी और गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए विदेश से फंड जुटाने का एक नेटवर्क बनाया था। एजेंसी का आरोप है कि इस फंड का इस्तेमाल JKLF को बनाए रखने और अलगाववादी हिंसा को बढ़ाने के लिए किया गया था। ED की जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि मलिक को 2015-16 के दौरान वटाली के ज़रिए ₹15 लाख और मिले, जिससे उसे कथित तौर पर मिली कुल रकम ₹30.75 लाख हो गई। NIA ने अपनी दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोप लगाया कि मलिक को 2013 में सऊदी अरब से ₹15.75 लाख मिले थे। ED ने इन रकमों को अपराध से हुई कमाई माना, जो कथित तौर पर तय अपराधों से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों से हासिल की गई थी।
पत्नी ने अपने पिता के पैसों से खरीदा घर, क्या पति होगा मालिक? हाईकोर्ट ने दे दिया बड़ा फैसला
केरल हाईकोर्ट ने संयुक्त नाम पर खरीदी गई जमीन और मकान पर पत्नी को विशेष स्वामित्व दिया। संपत्ति खरीदने की रकम पत्नी के पिता ने दी थी। कोर्ट ने पति को तीन महीने में घर खाली करने का निर्देश दिया।
Whatsapp मैसेज को लेकर Meta ने प्राइसिंग पॉलिसी में बदलाव किया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू किया गया है. इसके तहत भारत में बिजनेस अकाउंट्स के लिए मैसेज को अलग-अलग कैटेगरी में बांटकर चार्ज तय किए गए हैं.
क्या अक्टूबर के महीने में शेयर बाजार के पुराने जख्मों पर लगेगा मरहम
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में हर महीने की अपनी एक अलग कहानी और चाल होती है लेकिन जब बात अक्टूबर महीने की आती है तो निवेशकों के दिल की धड़कनें अपने आप तेज हो जाती हैं क्योंकि यह महीना अपने साथ उम्मीदों और अनिश्चितताओं का एक अनूठा पिटारा लेकर आता है। पिछला सितंबर का महीना दलाल स्ट्रीट के तमाम छोटे-बड़े निवेशकों के लिए काफी उथल-पुथल भरा और कई मायनों में चिंताजनक रहा है जहां बाजार के दिग्गजों को भी भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है। ऐसे में हर निवेशक के मन में बस एक ही सवाल बार-बार कौंध रहा है कि क्या कैलेंडर बदलते ही अक्टूबर का यह नया महीना सितंबर के सभी जख्मों पर मरहम लगाने का काम करेगा या फिर निवेशकों को अभी और इंतजार करना होगा। बाजार की इस चाल को गहराई से समझने और आगामी कारोबारी हफ्तों की सही रणनीति तय करने के लिए हमें पिछले पूरे दस साल के आंकड़ों को बहुत ही बारीकी से खंगालना होगा ताकि यह साफ हो सके कि ऐतिहासिक रूप से अक्टूबर का महीना निवेशकों के पोर्टफोलियो के लिए कैसा साबित होता आया है।पिछले दस वर्षों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि अक्टूबर में बाजार की चाल कैसी रही हैशेयर बाजार के पिछले एक दशक यानी दस साल के रिटर्न के आंकड़ों पर अगर एक सरसरी नजर डाली जाए तो यह बात बहुत स्पष्ट रूप से सामने आती है कि अक्टूबर का महीना अक्सर भारतीय बाजारों के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होता रहा है। बाजार विशेषज्ञों और तकनीकी विश्लेषकों द्वारा किए गए पिछले वर्षों के डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि कई बार इस महीने में त्योहारी सीजन के उत्साह के चलते जबरदस्त तेजी देखने को मिली है तो वहीं कुछ खास ग्लोबल कारणों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण गिरावट का सामना भी करना पड़ा है। पिछले दस में से लगभग सात से आठ बार ऐसा देखा गया है कि अक्टूबर के शुरुआती हफ्तों में सुस्ती या बिकवाली के बाद महीने के मध्य या उत्तरार्ध में बाजार ने जोरदार वापसी की है और निवेशकों को मालामाल किया है। जब भी निवेशक पिछले सालों के इन ऐतिहासिक रुझानों का अध्ययन करके अपनी निवेश रणनीति बनाते हैं, तो उन्हें यह समझने में आसानी होती है कि बाजार के इस मौजूदा दौर में घबराने के बजाय किस तरह से धैर्य रखकर सही शेयरों में पैसा लगाना चाहिए।त्योहारी सीजन का जबरदस्त तड़का और ऑटो से लेकर कंज्यूमर गुड्स शेयरों में शानदार तेजी की उम्मीदभारत में अक्टूबर का महीना आते ही चारों तरफ त्योहारों की धूम शुरू हो जाती है जिसमें नवरात्रि, दशहरा और दीपा जैसे बड़े पावन पर्व शामिल होते हैं जो देश के व्यापारिक जगत में नई जान फूंक देते हैं। इस त्योहारी सीजन का सीधा और सबसे गहरा सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है क्योंकि बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती है और हर सेक्टर की कंपनियों की बिक्री में भारी उछाल दर्ज किया जाता है। ऑटोमोबाइल सेक्टर, एफएमसीजी यानी रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुएं बनाने वाली कंपनियां, रियल एस्टेट, बैंकिंग और खुदरा व्यापार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में इस दौरान विशेष रूप से खरीदार टूट पड़ते हैं जिससे बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह से बदल जाता है। शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि चूंकि इस बार भी त्योहारी सीजन की शुरुआत बहुत ही जोरदार तरीके से हो रही है, इसलिए अक्टूबर के महीने में कंजम्पशन आधारित शेयरों से बाजार को एक बहुत बड़ा सहारा मिलने की पूरी उम्मीद है जो पिछले महीने के नुकसान की भरपाई आसानी से कर सकता है।वैश्विक बाजार के संकेत और विदेशी निवेशकों की भूमिका तय करेगी बाजार की असली दिशाघरेलू मोर्चे पर त्योहारी रौनक और मजबूत बुनियादी आधार के बावजूद इस बात से बिल्कुल इंकार नहीं किया जा सकता है कि भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक घटनाओं और विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई के रुख का गहरा प्रभाव पड़ता है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर लिए जाने वाले फैसलों, भू-राजनीतिक तनावों और कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर इस समय देश के हर बड़े निवेशक की पैनी नजर बनी हुई है। यदि वैश्विक बाजार से किसी प्रकार के नकारात्मक संकेत नहीं मिलते हैं और विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों में एक बार फिर से शुद्ध खरीदार के रूप में लौटते हैं, तो अक्टूबर का महीना वाकई में पिछले सभी जख्मों को भुलाकर एक नई और लंबी तेजी की शुरुआत कर सकता है। ऐसे समय में निवेशकों को पूरी तरह सतर्क और अनुशासित रहकर केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों पर ही दांव लगाना चाहिए ताकि किसी भी अचानक आने वाले वैश्विक झटके से उनके पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखा जा सके।
ऑस्कर की दौड़ में शामिल हुई Theja Rio की नगालैंड आधारित फिल्म Aang
(रवि बंसल)नयी दिल्ली, एक अक्टूबर फिल्म निर्देशक थेजा रियो का कहना है कि नगालैंड की पृष्ठभूमि पर बनी उनकी फिल्म ‘आंग’ ऐसे फिल्म उद्योग से आती है, जो लगभग अस्तित्वहीन है और निश्चित रूप से आत्मनिर्भर नहीं है। अपनी फिल्म के नगालैंड की घाटियों से टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और अब ऑस्कर की दौड़ तक पहुंचने से उत्साहित रियो कहते हैं कि वह चाहते हैं कि उनकी संस्कृति को सिर्फ प्रदर्शित नहीं किया जाए, बल्कि समझा भी जाए। 1960 के दशक की पृष्ठभूमि पर बनी और 16 मिमी पर फिल्माई गई ‘आंग’ ने टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (टीआईएफएफ) में प्लेटफॉर्म पुरस्कार जीता। यह फिल्म ऑस्कर के सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म वर्ग में पात्रता की दौड़ में शामिल हो गई। कोन्याक में बनी ‘आंग’ इस श्रेणी में संभावित नामांकन के लिए भारत की दूसरी फिल्म होगी। इससे पहले आधिकारिक प्रविष्टि के तौर पर मराठी फिल्म ‘गोंधल’ भेजी गई है। कोहिमा में जन्मे 31 वर्षीय रियो पहली बार फिल्म निर्देशन कर रहे हैं। उन्होंने इसी नाम की अपनी पुरस्कार विजेता लघु फिल्म को विकसित करके यह 103 मिनट की फिल्म बनाई है। फिल्म कोन्याक जनजातीय समुदाय के एक पिता और पुत्र की कहानी है, जिन्हें अपनी मातृभूमि में बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश का सामना करना पड़ता है। रियो ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम सिर्फ प्रदर्शित नहीं होना चाहते। हम चाहते हैं कि हमें समझा जाए। उम्मीद है कि ‘आंग’ के रिलीज होने के बाद ज्यादा से ज्यादा लोग हमारे बारे में जानेंगे और दुनिया को हमारे नजरिए से भी देखेंगे।’’उन्होंने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर और नगालैंड से बहुत से और फिल्मकार सामने आएंगे और मुझे उम्मीद है कि उन्हें समर्थन मिलता रहेगा।’’अपनी फिल्म की ऑस्कर यात्रा के बारे में रियो ने कहा, ‘‘हमें यह अवसर मिला है, इसलिए हम नामांकन हासिल करने की पूरी कोशिश करेंगे। हम फिल्म को यहां रिलीज करने पर भी विचार कर रहे हैं।’’उन्होंने कहा कि ‘आंग’ एक नगा पात्र के नजरिए से कही गई कहानी है और इसे नगा लोगों ने बनाया है। रियो ने कहा, ‘‘यह किसी बाहरी व्यक्ति की खोज की कहानी नहीं, बल्कि पात्र के नजरिए से कही गई कहानी है। फिल्में एक खूबसूरत खिड़की की तरह होती हैं, जिनके जरिए किसी संस्कृति और वहां के लोगों को समझने की अंतर्दृष्टि मिल सकती है।’’उन्होंने कहा कि अपनी फिल्म को टोरंटो जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाना उनके लिए सपना सच होने जैसा था और वहां उन्हें दूसरे फिल्मकारों से बातचीत का अवसर भी मिला। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि हम जीतने वाले हैं लेकिन मेरे निर्माता इस मामले में मुझसे ज्यादा आश्वस्त थे। उन्हें विश्वास था कि हम जीतेंगे। जब विजेता के तौर पर हमारे नाम की घोषणा हुई तो वह अवास्तविक-सा पल था, क्योंकि जैसा मैंने कहा, फिल्म को वहां तक ले जाना ही हमारे लिए बड़ी उपलब्धि थी।’’रियो के अनुसार, भारत के अन्य हिस्सों के विपरीत नगालैंड में फिल्म निर्माण की संस्कृति नहीं रही और पूरे राज्य में केवल दो सिनेमाघर थे। यहां तक कि राजधानी कोहिमा में भी कोई सिनेमाघर नहीं था। वह बचपन में टेलीविजन पर फिल्में देखते हुए बड़े हुए और बाद में पायरेटेड डीवीडी तथा अवैध स्ट्रीमिंग सेवाओं के जरिए फिल्में देखीं। उनका पहला सिनेमाघर का अनुभव सात साल की उम्र में दिल्ली में पीटर जैक्सन की फिल्म ‘द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स: द रिटर्न ऑफ द किंग’ देखने का था। इस अनुभव का उन पर गहरा असर पड़ा और उन्होंने फिल्म निर्माण को अपना करियर बनाने का फैसला किया। रियो ने कहा, ‘‘‘आंग’ ऐसे फिल्म उद्योग से आती है जो लगभग अस्तित्वहीन है और निश्चित रूप से आत्मनिर्भर नहीं है। अपनी संस्कृति में रची-बसी फिल्में बनाने के बावजूद हमें दर्शकों और मान्यता के लिए बाहर देखना पड़ता है। टीआईएफएफ और ऐसे अन्य फिल्म महोत्सव हमें दृश्यता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।’’‘आंग’ का निर्माण नैन्सी निसा बेसो और रियो ने किया है। फिल्म में हेंशल के साथ स्थानीय नगा कलाकारों ने अभिनय किया है। हेंशल को धारावाहिक ‘शेटलैंड’ में उनकी भूमिका के लिए बाफ्टा पुरस्कार मिल चुका है।
टॉप 5 बैंक एफडी में ₹10 हजार निवेश करने पर मिलेगा इतना जबरदस्त मुनाफा
महंगाई के इस दौर में अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखते हुए उस पर बेहतरीन रिटर्न प्राप्त करना हर समझदार निवेशक की पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है जिसके लिए फिक्स डिपॉजिट यानी एफडी आज भी देश के करोड़ों मध्यम वर्गीय परिवारों और नौकरीपेशा लोगों के बीच निवेश का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय जरिया बनी हुई है। अगर आप भी शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम से दूर रहकर अपनी बचत पर एक निश्चित और शानदार मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो सुरक्षित निवेश का यह पारंपरिक विकल्प आपके लिए वरदान साबित हो सकता है। मौजूदा समय में देश के कई छोटे और बड़े बैंक निवेशकों को लुभाने के लिए केवल एक साल की अवधि वाली फिक्स डिपॉजिट स्कीम पर बंपर ब्याज दरों की पेशकश कर रहे हैं, जो निवेशकों को कम समय में मालामाल करने का दम रखती हैं। अगर आप इस त्योहारी सीजन में महज 10,000 रुपये जैसी छोटी सी रकम को सही जगह निवेश करने की सोच रहे हैं, तो बाजार में उपलब्ध इन टॉप 5 बैंक एफडी विकल्पों के बारे में पूरी जानकारी होना आपके लिए बेहद जरूरी है ताकि आप अपनी मेहनत की एक-एक पाई पर सबसे ज्यादा मुनाफा हासिल कर सकें।क्या है फिक्स डिपॉजिट का जादू और क्यों निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई है एक साल की शॉर्ट-टर्म एफडीफिक्स डिपॉजिट यानी एफडी निवेश का एक ऐसा सुरक्षित साधन है जहां बाजार के जोखिमों का आपकी मूल राशि पर कोई असर नहीं पड़ता है और बैंक आपको पहले से तयशुदा ब्याज दर देने का पूरा वादा करते हैं। पिछले कुछ समय से देश के बैंकिंग सेक्टर में ब्याज दरों को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है, जिसका सीधा फायदा आम निवेशकों को मिल रहा है क्योंकि बैंक अब शॉर्ट-टर्म निवेश पर भी लंबी अवधि जैसे आकर्षक ब्याज ऑफर कर रहे हैं। विशेष तौर पर एक साल की अवधि वाली एफडी निवेशकों के बीच इसलिए भी बहुत लोकप्रिय हो रही है क्योंकि इसमें आपका पैसा बहुत लंबे समय के लिए लॉक नहीं होता है और आप महज बारह महीनों के भीतर ही अपनी निवेशित राशि पर तगड़ा मुनाफा पाकर उसे या तो दोबारा निवेश कर सकते हैं या अपनी किसी अन्य जरूरत के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का हमेशा से यह मानना रहा है कि अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाइड रखने और आपातकालीन जरूरतों के लिए लिक्विडिटी बनाए रखने के वास्ते एक साल की एफडी सबसे बेहतरीन और व्यावहारिक वित्तीय रणनीति मानी जाती है।टॉप 5 बैंकों की लिस्ट जो एक साल की एफडी पर दे रहे हैं सबसे धांसू और दमदार ब्याज दरेंदेश के बैंकिंग बाजार में इस समय ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई नामचीन और प्रतिष्ठित बैंक अपनी एक साल की सावधि जमा योजनाओं पर सबसे ऊंची ब्याज दरों का तोहफा दे रहे हैं। इस वित्तीय विश्लेषण और मौजूदा बाजार दरों के अनुसार, शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक और इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक जैसे चुनिंदा बैंक एक साल की एफडी पर निवेशकों को सबसे अधिक यानी करीब 8.25 प्रतिशत से लेकर 8.50 प्रतिशत तक का सालाना ब्याज मुहैया करा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर देश के बड़े और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक जैसे कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और पंजाब नेशनल बैंक भी एक साल की इस विशेष अवधि पर अपने सामान्य ग्राहकों और वरिष्ठ नागरिकों को 6.8 प्रतिशत से लेकर 7.3 प्रतिशत तक का आकर्षक रिटर्न दे रहे हैं। इन सभी बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करने से यह साफ पता चलता है कि यदि आप थोड़ा समझदारी से अपने बैंक का चुनाव करें, तो आप अपनी सामान्य बचत पर भी अतिरिक्त मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं।महज ₹10,000 के निवेश पर जानिए आपको एक साल के भीतर कुल कितना तगड़ा मुनाफा मिलेगाअब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि आप इन चुनिंदा बैंकों में अपनी गाढ़ी कमाई से मात्र 10,000 रुपये की छोटी सी रकम एक साल के लिए जमा करते हैं, तो बारह महीने पूरे होने पर आपके हाथ में कुल कितने रुपये आएंगे। मान लीजिए कि आपने किसी ऐसे बैंक में अपनी एफडी कराई है जो एक साल की अवधि पर आपको सालाना 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज दे रहा है, तो कंपाउंडिंग और साधारण ब्याज के गणित के हिसाब से आपको सिर्फ एक साल में लगभग 850 रुपये से ज्यादा का शुद्ध ब्याज मुनाफा मिल जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि आपकी मूल राशि 10,000 रुपये बढ़कर बिना किसी जोखिम के सीधे 10,850 रुपये या उससे भी अधिक हो जाएगी जो कि किसी भी बैंक बचत खाते में मिलने वाले सामान्य 3 प्रतिशत ब्याज के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। यदि इसी गणना को बड़े पैमाने पर देखा जाए और आप 1 लाख या उससे अधिक का निवेश करते हैं, तो मिलने वाला रिटर्न आपके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान ले आएगा और यही वजह है कि आज हर समझदार निवेशक अपनी छोटी बचत को भी एफडी के जरिए तेजी से बढ़ाने में लगा हुआ है।
त्योहारी सीजन से पहले देश में आई आर्थिक बहार, 14.7% की जोरदार उछाल
देश के करोड़ों लोगों के लिए त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले अर्थव्यवस्था को लेकर एक बेहद उत्साहजनक और राहत भरी खबर सामने आई है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है कि कैसे त्योहारी रौनक ने देश के राजकोष को मालामाल कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सितंबर महीने में सकल वस्तु एवं सेवा कर यानी ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन में सालाना आधार पर पूरे 14.7 फीसदी की शानदार और जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है जिसके बाद यह आंकड़ा सीधे छलांग लगाते हुए लगभग 2.04 लाख करोड़ यानी 2,03,521 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर जा पहुंचा है। अर्थव्यवस्था के जानकारों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि त्योहारी सीजन की आहट और बाजारों में बढ़ी हुई उपभोक्ता मांग के चलते यह उछाल आया है जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश का व्यापार और औद्योगिक उत्पादन तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है।लगातार तीन महीने से दो लाख करोड़ के पार बना हुआ है टैक्स कलेक्शनभारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर यह लगातार तीसरा ऐसा मौका है जब ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन ने दो लाख करोड़ रुपये के जादुई और महत्वपूर्ण आंकड़े को पार करने में कामयाबी हासिल की है जो देश की मजबूत होती वित्तीय स्थिति की एक मजबूत गवाही देता है। इस साल सितंबर के महीने में जो कुल टैक्स कलेक्शन हुआ है उसमें घरेलू मोर्चे पर हुई जबरदस्त आय के साथ-साथ विदेशों से होने वाले आयात पर लगने वाले जीएसटी में भी करीब 26 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। देश के तमाम राज्यों और महानगरों से लेकर छोटे व्यापारिक केंद्रों तक में इन दिनों जिस तरह से त्योहारी खरीद-फरोख्त का माहौल बना हुआ है, उससे कर अधिकारियों और नीति निर्माताओं में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है। सरकार के पास राजस्व के रूप में आ रहे इन पैसों का सीधा असर देश के बुनियादी ढांचे, विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ता है, जिससे आम जनता को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर लाभ मिलता है।त्योहारी खरीदारी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा राजस्वत्योहारों का सीजन शुरू होते ही देश के बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी है जिसका सीधा और सकारात्मक असर देश के टैक्स कलेक्शन पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। ऑटोमोबाइल सेक्टर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल एस्टेट, कपड़े और एफएमसीजी सेक्टर तक हर जगह उपभोक्ता की मांग में भारी तेजी दर्ज की गई है जिसकी वजह से जीएसटी संग्रह में यह रिकॉर्डतोड़ वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार द्वारा कारोबार को आसान बनाने और कर चोरी रोकने के लिए उठाए गए कड़े डिजिटल कदमों का भी अब धरातल पर बहुत ही बेहतरीन परिणाम देखने को मिल रहा है, जिससे पारदर्शी तरीके से सरकारी खजाना लगातार मजबूत हो रहा है। आर्थिक क्षेत्र के जानकारों का यह भी अनुमान है कि आने वाले त्योहारी महीनों यानी अक्टूबर और नवंबर में बाजारों की यह चमक और अधिक बढ़ सकती है, जिससे जीएसटी संग्रह के पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त होने की पूरी उम्मीद है और देश की जीडीपी को भी इससे एक बहुत बड़ा संबल प्राप्त होगा।
बाल विवाह भारत में 97 साल से गैरकानूनी, लेकिन अमेरिका की सच्चाई चौंकाने वाली है
अमेरिका का कैलिफोर्निया बाल विवाह पर बैन लगाने वाला 18वां राज्य बन गया है. लेकिन अभी भी 32 राज्य ऐसे हैं जहां बाल विवाह प्रथा कानूनी है. भारत में जानिए कब इसके विरूद्ध कानून बन गया था और इस मामले में भारत कितना आगे है.
EC ने फॉर्म-6 में किया बड़ा बदलाव तो भड़के राहुल, पूछा-किसने ये आदेश दिया?
EC ने फॉर्म-6 में किया बड़ा बदलाव तो भड़के राहुल, पूछा-किसने ये आदेश दिया?
दूरदर्शन का चित्रहार 80 के दशक के चल रहा है, जिसमें हिंदी सिनेमा चुनिंदा गीतों को दिखाया जाता था. इस शो की खास बात यह थी कि एक समय पर इसे 15 करोड़ दर्शक देखा करते थे. वहीं यह टीवी के इतिहास का सबसे लंबा चलने वाला कार्यक्रम है.
सोने-चांदी के जेवर चुराने वाले Bhavnagar के गिरोह का भंडाफोड़, Jhansi Railway Police ने दबोचा
गुजरात से उत्तर प्रदेश तक, सात रिश्तेदार एक परिवार की तरह साथ यात्रा करते थे ताकि किसी को शक न हो और वे ट्रेन यात्रियों से कैश, गहने और फ़ोन लूट सकें। झांसी रेलवे पुलिस ने मंगलवार को चार पुरुषों और तीन महिलाओं को गिरफ़्तार किया और उनसे चोरी का सामान बरामद किया। ये सभी सात आरोपी रिश्तेदार हैं और गुजरात के भावनगर ज़िले के रहने वाले हैं। झांसी रेलवे पुलिस के अनुसार, आरोपी ट्रेनों में साथ यात्रा करते थे और ऐसे यात्रियों पर नज़र रखते थे जो सो गए हों या कहीं जाते समय अपने बैग बिना किसी की देखरेख के छोड़ गए हों। वे कैसे पकड़े गए? गैंग की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने के बाद, पुलिस की एक टीम ने झांसी रेलवे स्टेशन पर रेल की पटरियों के पास घेराबंदी की। इसे भी पढ़ें: UP पुलिस SI भर्ती पर हाई कोर्ट का बड़ा चाबुक! नियुक्ति पत्र बांटने पर रोक, आंसर की के 'खेल' से फंसा 12 हजार युवाओं का भविष्य! मौके पर ही 7 आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया। उनकी पहचान इस प्रकार है: अमर (45), मनोज (45), संगीता (42), ज्योति (42), दिलीप (34), उषा (32) और कृष्णा अमर (20)। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि वे झांसी से आगरा, मथुरा, हाथरस और बरेली जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों को निशाना बनाते थे, और कभी-कभी अयोध्या जाने वाली ट्रेनों को भी निशाना बनाते थे। आरोपियों के ख़िलाफ़ झांसी रेलवे पुलिस स्टेशन में चोरी के दो मामले दर्ज किए गए हैं। दूसरे ज़िलों और राज्यों के रेलवे स्टेशनों पर उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। इसे भी पढ़ें: Manipur में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, PLA और PREPAK-Pro के चार उग्रवादी पकड़े गए महिलाओं के बैग मुख्य निशाने पर होते थे जांच में पाया गया कि आरोपी ट्रेन में यात्रा करते समय यात्रियों के बीच घुल-मिल जाते थे और महिलाओं के बैग और सामान पर खास नज़र रखते थे। पुलिस ने बताया कि जब कोई महिला यात्री सो जाती थी या उसका ध्यान कहीं और होता था, तो आरोपी इस मौके का फ़ायदा उठाकर उसका बैग खोलते थे और गहने व अन्य कीमती सामान चुरा लेते थे। पुलिस के अनुसार, चोरी किए गए गहनों को या तो बेच दिया जाता था या उनकी मंज़िल तक पहुँचा दिया जाता था। चोरी का सामान बरामद पुलिस ने आरोपियों से दो ब्रेसलेट, एक मंगलसूत्र, एक अंगूठी और लगभग 5,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस बरामद गहनों को पहले दर्ज चोरी के मामलों से जोड़ने और उन यात्रियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिनका यह सामान था। वे यह भी जाँच कर रहे हैं कि क्या आरोपी अन्य घटनाओं में भी शामिल हैं।
राजस्थान कांग्रेस में सब कुछ सामान्य है या अंदर ही अंदर बड़ी लड़ाई चल रही है? निकाय चुनाव में हार के बाद पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर सीधा हमला बोल दिया है. टिकट वितरण से लेकर भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं तक कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
Barapullah Flyover Route: बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर के उद्घाटन के अगले ही दिन भारी ट्रैफिक जाम लग गया. दिल्ली के साथ नोएडा और गाजियाबाद से आने वाले ट्रैफिक से यहां वाहनों का रेला लग गया. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी.
अमेरिकी सैनिकों की इराक से वापसी, अब ISIS का खतरा
इराक से अमेरिकी सैनिकों की 21 साल वापसी हुई. इस मौके पर बगदाद की सड़कों पर नागरिकों ने जश्न मनाया. इसे इराक की आजादी और संप्रभुता से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, इस खुशी के साथ ही अब इराक पर ISIS का खतरा भी मंडरा रहा है.
Avengers Endgame Encore Box Office Collection: 4600 करोड़ बजट और 23 सुपरहीरो वाली एवेंजर्स डूम्स्डे 18 दिसंबर को रिलीज हो रही है. उससे पहले 38 सुपरहीरो वाली मूवी एवेंजर्स एंडगेम को एवेंजर्स एंडगेम एनकोर नाम से रीरिलीज किया गया है. इसका सिक्का इंडियन बॉक्स ऑफिस पर चल गया है.

34 C
