'पाकिंग स्टाफ ने किया मुझपर अटैक', कारगिल वॉर हीरो ने बयां की आपबीती
गुरुग्राम के मैग्नम ग्लोबल पार्क के एक रेस्टोरेंट में परिवार के साथ डिनर करने गए कारगिल युद्ध के एक पूर्व अफसर पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया. इस हमले में उनके सिर में गंभीर चोटें आईं और हाथ की हड्डी टूट गई. रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन अमित कुमार गुप्ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि पार्किंग अटेंडेंट ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी. उन्होंने पुलिस पर मदद न करने और अस्पताल पर झूठी रिपोर्ट देने का आरोप भी लगाया है. अमित कुमार गुप्ता ऑपरेशन सफेद सागर का हिस्सा थे.
तरुण तेजपाल ने गोवा में किया सरेंडर, बोले- सुप्रीम कोर्ट में जारी रखेंगे लड़ाई
2013 के रेप केस में दोषी तरुण तेजपाल ने गोवा में सरेंडर कर दिया है. उन्हें कोलवाले जेल भेजा गया है. तेजपाल ने कहा है कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जारी रखेंगे.
लड़कों को 'मेंढक' बनाया, फिर बीच सड़क दौड़ाया... वीडियो वायरल
हमीरपुर में गहरे पानी में रील बना रहे युवकों से पुलिस ने केवल कच्छे में 'फ्रॉग जंप' लगवाई. मौदहा कोतवाली क्षेत्र के कम्हरिया बंधे पर खतरनाक स्टंट कर रहे युवकों को पुलिस ने ऑन-द-स्पॉट अनोखी सजा दी. इसका वीडियो वायरल है, और पुलिस ने चेतावनी दी है कि जान जोखिम में डालने पर सख्त कार्रवाई होगी.
ऑनलाइन मोहब्बत, आर्य समाज मंदिर में शादी फिर पति हुआ लापता
ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट पर शुरू हुई दोस्ती प्यार और फिर शादी तक पहुंची, लेकिन कुछ ही समय बाद पत्नी पति की तलाश में बागपत पहुंच गई. गाजियाबाद के लोनी की ऊषा का दावा है कि उसने 23 जुलाई 2026 को सूरज से आर्य समाज मंदिर में शादी की थी. अब वह पति के साथ रहने और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर अधिकारियों से गुहार लगा रही है.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में उत्तरी मोर्चे पर वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के आसपास चीनी सेना की तैनाती में महत्वपूर्ण कमी देखी गई। एलएसी और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में चीनी सेना की करीब 10 संयुक्त हथियार ब्रिगेड के आकार की टुकड़ियां तैनात रहीं। वहीं, भारतीय सेना ने सभी क्षेत्रों में मजबूत और रणनीतिक रूप से उपयुक्त तैनाती बनाए रखी। वहीं सेना जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में 19 आतंकी ढेर किए।
भारतीय जॉब मार्केट में डिग्री और स्किल का बढ़ता महत्व: युवाओं के लिए नई राह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिग्री के साथ स्किल के महत्व पर जोर दिया है, क्योंकि भारतीय जॉब मार्केट तेजी से बदल रहा है। भारत में औपचारिक कौशल प्रशिक्षण विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता प्रभावित हो रही है।
FATF को धोखा देने के लिए पाकिस्तान का नया पैंतरा, आतंकी मसूद अजहर पर 70 लाख का घोषित किया ईनाम
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की अक्टूबर में होने वाली प्लीनरी से पहले पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है. पाकिस्तान की राष्ट्रीय जांच एजेंसी FIA ने अपनी मोस्ट वांटेड आतंकियों की रेड बुक जारी की है, जिसमें मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है.
अचानक इस बैंक ने लिया बड़ा फैसला, 3 देशों में खुलेंगे ऑफिस, जानें प्लान
बैंकों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अब कमाई बढ़ाने के लिए कारोबार का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है. सरकारी क्षेत्र का इंडियन बैंक (Indian Bank) भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. बैंक नए कारोबार में उतरने के साथ विदेशी बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है.
DPC शीट क्या है? भूल जाएंगे सीलन की टेंशन, जानें कितने की आती है
आजकल घर बनाते वक्त डीपीसी कराने के दौरान एक विशेष प्रकार की शीट लगाई जा रही है. इसे डीपीसी शीट कहा जाता है. चलिए जानते हैं इस शीट को लगाने का खर्चा क्या आता है और इसके फायदे क्या हैं?
भारत में बुलेट ट्रेन के कैसे बनेंगे ड्राइवर? कितनी मिलेगी सैलरी
भारत में अगले साल यानी 15 अगस्त 2027 को पहली बार बुलेट ट्रेन चलने वाली है. इसके लिए ड्राइवरों की जरूरत भी पड़ेगी. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर किन आधारों पर इनका चयन किया जाएगा और उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी?
तरुण तेजपाल ने गोवा की अदालत में किया सरेंडर, रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
मशहूर न्यूज मैगजीन तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 2013 के रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार गोवा की मापुसा अदालत में सरेंडर कर दिया है।
ट्रॉफी 'छीनकर' नकवी बन गए पाक के हीरो! पाक फैन ने कहा- शाबाश सर
श्रीलंका के खिलाफ भारतीय महिला टीम ने एशिया कप के फाइनल मैच को 72 रनों से जीतकर ट्रॉफी अपने नाम करने में सफलता हासिल की. लेकिन पुरुष टीम की तरह भारतीय महिलाओं ने भी मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी लेने से साफ इनकार कर दिया.
ADC Major Navya Shekhawat:
दिल्ली में आश्रम-सराय काले खां जाने से पहले पढ़ लें ये खबर, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का हिस्सा बंद
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मदनपुर खादर के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के एक हिस्से को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. जैतपुर से आश्रम और सराय काले खां जाने वाले यात्रियों को कालिंदी कुंज और मथुरा रोड के रास्ते जाने की सलाह दी गई है.
बेसन नहीं, पोहा और सूजी से बनाएं क्रिस्पी चीला, रेसिपी है आसान
Poha Chilla Recipe: हर दिन बेसन का चीला खाकर अगर आप बोर हो गए हैं तो इस बार पोहा चीला ट्राई कर सकते हैं. पोहा और सूजी से बना यह चीला खाने में टेस्टी होने के साथ सुबह की जल्दबाजी में आसानी से तैयार हो जाता है. आज हम आपको इसे बनाने की आसान रेसिपी बताएंगे.
AI कंपनियों के शेयर 13% तक धड़ाम, Expert बोले- ये तो होना ही था, जानिए SoftBank क्यों लुढ़का
AI Stocks Fall: एआई शेयरों में भारी गिरावट. OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों के प्रमुखों द्वारा AI विकास की रफ्तार धीमी करने की अपील के बाद ग्लोबल टेक शेयरों में भारी बिकवाली हुई है. जानिए इसका भारतीय बाजारों पर क्या असर हो सकता है.
क्या बिहार में भी लागू होगा यूसीसी? अमित शाह के बयान से उठे सवाल, जेडीयू ने कहा- 'NO'
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि देश में बीजेपी-एनडीए शासित राज्यों में 2029 तक समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी. इसके बाद बीजेपी की सहयोगी जेडीयू ने कहा है कि वो बिहार में इसे नहीं लागू होने देंगे.
रिव्यू: भावनाओं से खेल गए रामायण मेकर्स, सुना दी 51 साल पुरानी धुन!
'रामायण' का पहला गाना 'जय जय राम' रिलीज हो गया है. एआर रहमान, अरिजीत सिंह, श्रेया घोषाल और कुमार विश्वास का ये गाना सुनने में मधुर है, लेकिन पुरानी राम भजन की धुन के सहारे इसकी ओरिजिनैलिटी पर सवाल उठते हैं.
BRICS Summit में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भागीदारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 50 मिनट से अधिक चली अहम द्विपक्षीय बातचीत के बीच भारत-चीन सीमा से एक बड़ी खबर सामने आई है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 2025 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के उत्तरी हिस्सों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की तैनाती में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि इस घटनाक्रम को किसी भी तरह की रणनीतिक ढिलाई का संकेत मानने की गलती भारत नहीं कर रहा है। LAC के सभी सेक्टरों में भारतीय सेना की तैनाती अब भी मजबूत, संतुलित और हर संभावित चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार LAC और चीन के पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में अब भी कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड स्तर की करीब 10 चीनी सैन्य टुकड़ियां मौजूद हैं। यानी बीजिंग ने सेना पीछे जरूर की है, लेकिन सीमा पर उसकी सैन्य क्षमता खत्म नहीं हुई है। यही वह बिंदु है, जहां भारत की रणनीति सबसे ज्यादा मायने रखती है। चीन की तैनाती घटने को राहत के संकेत के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे खतरे के अंत के रूप में नहीं माना जा सकता। इसे भी पढ़ें: जाते-जाते भारत में बड़ा धमाका कर गए जिनपिंग, पूरी दुनिया हैरान! दिलचस्प बात यह है कि चीनी सैनिकों की तैनाती में यह कमी केवल सैन्य स्तर पर नहीं आई। इसके समानांतर भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य संवाद भी लगातार बढ़ा। 2025 में दोनों देशों के बीच Working Mechanism for Consultation and Coordination (WMCC) की 33वीं और 34वीं बैठक मार्च और जुलाई में हुई। सीमा विवाद पर दोनों देशों के Special Representatives के बीच बातचीत भी फिर शुरू हुई। देखा जाये तो दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में हुई इन वार्ताओं ने सीमा विवाद को केवल सैन्य कमांडरों के स्तर तक सीमित रहने से रोका और राजनीतिक संवाद की एक समानांतर पटरी तैयार की। इस प्रक्रिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा ने भी नई गति दी। अगस्त 2025 में तियानजिन में आयोजित Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit के दौरान मोदी की चीन यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। इसके बाद भी सैन्य संवाद जारी रहा और अक्टूबर 2025 में पूर्वी लद्दाख में 23वीं Corps Commander Level Meeting हुई। सीमा के विभिन्न सेक्टरों में Border Personnel Meetings भी अपेक्षाकृत सौहार्दपूर्ण माहौल में जारी रहीं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह केवल तनाव कम होने की कहानी है? देखा जाये तो जवाब इतना सीधा नहीं है। LAC पर चीन की सैन्य मौजूदगी में कमी निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत के लिए इसका रणनीतिक अर्थ सतर्कता कम करना नहीं, बल्कि अपनी बढ़त को बनाए रखते हुए कूटनीतिक स्पेस बढ़ाना है। गलवान के बाद भारत ने जिस तरह सीमा पर सैन्य ढांचा, सैनिक तैनाती और निगरानी क्षमता मजबूत की, उसका एक बड़ा संदेश यह है कि अब बीजिंग के साथ बातचीत कमजोर स्थिति से नहीं, बल्कि पर्याप्त सैन्य तैयारी के साथ की जा रही है। इसी रणनीतिक पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया 50 मिनट से अधिक लंबी द्विपक्षीय बैठक बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। BRICS Summit के दौरान हुई इस मुलाकात में मोदी ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा का अवसर होने की बात कही। वहीं शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों को “रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण” से देखने की बात कही और साझा विकास के लिए दोनों देशों के साथ काम करने पर जोर दिया। देखा जाये तो चीन और भारत दोनों दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं और Global South में प्रभावशाली शक्तियां हैं। बदलते वैश्विक समीकरणों, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकटों के बीच बीजिंग भी यह समझता है कि नई दिल्ली को लगातार टकराव की स्थिति में रखना उसके दीर्घकालिक हित में नहीं है। भारत के लिए भी रणनीतिक गणित स्पष्ट है। सीमा पर शांति का अर्थ चीन पर भरोसा करना नहीं, बल्कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और सहयोग, दोनों को अपनी शर्तों पर संभालना है। LAC पर सेना की मजबूत तैनाती और दूसरी तरफ राजनीतिक संवाद का विस्तार इसी दोहरी रणनीति का संकेत है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सीमा पर तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, लेकिन भारत अपनी सुरक्षा की कीमत पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। चीन अगर सैनिक घटाता है तो यह स्वागत योग्य है, मगर भारत अपनी सैन्य तैयारी बरकरार रखेगा। यानी नई दिल्ली की रणनीति साफ है। बातचीत के दरवाजे खुले रहेंगे, लेकिन सीमा की चौकसी में कोई दरार नहीं आने दी जाएगी। बहरहाल, यही संतुलन आने वाले समय में भारत-चीन रिश्तों की सबसे बड़ी कसौटी होगा। अगर सैन्य तनाव में कमी वास्तविक और स्थायी साबित होती है, तो दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिए रास्ते खुल सकते हैं। लेकिन भारत के लिए अंतिम पैमाना बयान नहीं, बल्कि LAC पर चीन का व्यवहार होगा।
Success Story : 5 साल में मेजर, फिर राष्ट्रपति की ADC, कौन हैं मेजर नव्या शेखावत?
उन्होंने UPSC CDS परीक्षा के जरिए सेना में प्रवेश किया था और 2021 में आर्मी सर्विस कॉर्प्स में कमीशन प्राप्त किया. उनकी नियुक्ति भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के बढ़ते अवसरों का प्रतीक मानी जा रही है.
24 साल में खपा डाले 70 करोड़ नकली सिक्के, सप्लाई का सिस्टम दंग कर देगा
सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले इंटरस्टेट गैंग का भंडाफोड़ कर मास्टरमाइंड समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक गैंग 2001 से यह धंधा कर रहा था और रोज करीब 12 हजार नकली सिक्के तैयार करता था.
सितंबर अमावस्या पर पितरों के लिए क्या बनाएं? थाली में जरूर शामिल करें ये पारंपरिक और सात्विक पकवान
सितंबर अमावस्या पर कई घरों में पितरों के निमित्त तर्पण, दान और विशेष भोग तैयार किया जाता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल होता है कि थाली में क्या-क्या रखा जाए. अगर आप भी इस बार अमावस्या के लिए पारंपरिक और सात्विक मेन्यू ढूंढ रहे हैं, तो खीर, पूड़ी, कद्दू, अरबी और चने की दाल जैसी चीजें थाली का हिस्सा बन सकती हैं.
राजस्थान निकाय चुनाव: वसुंधरा के गढ़ में BJP का सफाया, झालावाड़ में कांग्रेस की जबरदस्त जीत
राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मजबूत राजनीतिक गढ़ झालावाड़ में बीजेपी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. झालावाड़ नगर परिषद चुनाव के घोषित नतीजों में कांग्रेस ने 45 में से 29 वार्डों में शानदार जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है.
बेंगलुरु में नकली दवाइयों का एक बड़ा रैकेट सामने आया है। इसमें कैंसर की दवाओं के साथ कई दूसरी जरूरी दवाएं भी शामिल थीं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये नकली दवाएं करीब 90 अस्पतालों और क्लीनिकों में असली दवाओं से करीब 50 फीसदी कम कीमत पर सप्लाई की जाती ...
अच्छी डिग्री और नॉलेज होने के बावजूद कई लोग इंटरव्यू में रिजेक्ट हो जाते हैं. इसकी वजह कमजोर कम्यूनिकेशन स्किल्स (Communication Skills) , घबराहट और आत्मविश्वास की कमी हो सकती है. ऐसे में यहां जानिए इंटरव्यू में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
रेप मामले में तरुण तेजपाल ने किया सरेंडर, SC ने दी थी तीन हफ्ते की मोहलत
मशहूर न्यूज़ मैगज़ीन 'तहलका' के जाने-माने पूर्व एडिटर-इन-चीफ़ तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा की मापुसा कोर्ट में सरेंडर कर दिया। यह 2013 के रेप केस से जुड़ा मामला है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 63 साल के पूर्व एडिटर को सज़ा के ख़िलाफ़ उनकी अपील पर सुनवाई शुरू होने से पहले सरेंडर करने के लिए तीन हफ़्ते का समय दिया था। तीन हफ़्ते की यह समय-सीमा कल खत्म हो रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 6 अगस्त को तेजपाल को दोषी ठहराया और 2013 में अपनी एक पूर्व सहयोगी के साथ रेप करने के आरोप में 10 साल की जेल की सज़ा सुनाई। कोर्ट ने इस मामले में 2021 में उन्हें बरी किए जाने के फ़ैसले को पलट दिया था। तेजपाल का कहना है कि वह खुद पीड़ित हैं। इसे भी पढ़ें: दिशा सालियान की मौत मामले में CBI की एंट्री! बॉम्बे HC के आदेश के बाद FIR पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की उस अर्ज़ी को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के दोषी ठहराने वाले फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील लिस्ट होने तक सरेंडर से छूट मांगी थी। तेजपाल ने सरेंडर करने से छूट की मांग की थी, उनका तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट को पहले उनकी अपील को लिस्ट करना चाहिए और उस पर सुनवाई करनी चाहिए। तेजपाल की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि शीर्ष अदालत के पास उचित मामले में सरेंडर की शर्त से छूट देने और आरोपी के सरेंडर न करने पर भी आपराधिक अपील को लिस्ट करने का अधिकार है। गोवा राज्य की ओर से पेश भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) तुषार मेहता ने इस याचिका का विरोध किया और कहा कि छूट की अर्जी पर मामले की मेरिट के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला दिया और कहा कि यह मामला गंभीर रेप का है, जिसके लिए तेजपाल को 10 साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई गई थी।
कुकर के बिना पतीले में भी आराम से गलेगी चने की दाल, ये आसान हैक्स बना देंगे आपका काम आसान
पतीले में बनेगी एकदम मक्खन जैसी मुलायम चने की दाल, बस अपनाएं ये आसान टिप्स.
सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियन डेथ केस की CBI करेगी जांच, एफआईआर दर्ज
सीबीआई ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज की है।
'BJP-JDS के कई नेता कांग्रेस में शामिल होने को तैयार', DK शिवकुमार का दावा
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने दावा किया है कि बीजेपी और जेडीएस के कई नेता उनके और कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखने वाले नेताओं की लिस्ट तैयार की जा रही है.
ओमान के तट पर तेल टैंकर में हमले के बाद भारतीय नाविक लापता, 13 की बची जान
आपको बता दें कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष में अब तक मारे गए 16 भारतीयों में दस भारतीय नाविक शामिल हैं, जबकि काले सागर में जहाजों पर हुए हमलों में पांच अन्य भारतीय नाविकों की मौत हुई है।
क्या आप भी गलत बर्तन में उबालते हैं दूध? स्टील, एल्युमीनियम और पीतल में कौन है बेस्ट
चाय के लिए दूध किसी भी बर्तन में उबाल देते हो? ये गलती पड़ सकती है भारी, जानिए कौन सा बर्तन है दूध के लिए बेस्ट.
बंगाल में 5 साल बाद कब्र से निकला BJP कार्यकर्ता का शव, ममता बनर्जी की जीत के बाद क्या हुआ था?
जानकारी के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी की सरकार आने के बाद नए सिरे से शिकायत दर्ज कराई गई थी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया है कि परिवार ने एक नई शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद कोर्ट ने शव को कब्र से निकालने का आदेश दिया।
गुरुग्राम में कार सवार ने मारी टक्कर, लेडी बाइकर ने पोस्ट किया Video
गुरुग्राम में हिट एंड रन का मामला सामने आया है. एक कार सवार ने महिला बाइकर को टक्कर मारी और भाग निकला. महिला बाइकर सिया ने आरोप लगाया कि एक कार में सवार लोग पहले उनका पीछा कर रहे थे और बाद में उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मारकर मौके से फरार हो गए. हादसे का वीडियो उनकी बाइक पर लगे कैमरे में रिकॉर्ड हुआ है. सिया ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है. सिया के मुताबिक रविवार को वो अपने बाइकिंग ग्रुप के साथ गोल्फ कोर्स रोड पर स्पोर्ट्स बाइक चला रही थीं. सिया के मुताबिक कार में बैठे लोग नशे में लग रहे थे.
Disha Salian Death: बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने दर्ज की FIR
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस महीने की शुरुआत में बंबई उच्च न्यायालय ने सालियान की मौत की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था और छह साल तक प्राथमिकी दर्ज नहीं करने के लिए मुंबई पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसकी जांच से ‘‘जवाब मिलने के बजाय और सवाल खड़े होते हैं।’’पीठ ने छह साल तक मामले को केवल दुर्घटनावश मौत के रूप में देखने के लिए पुलिस की आलोचना की थी और जांच में ‘‘स्पष्ट विसंगतियों’’ की ओर इशारा किया था। राजपूत की मैनेजर के रूप में कुछ समय काम कर चुकीं सालियान की आठ जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने मामले में दुर्घटनावश मौत की रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की थी। राजपूत एक सप्ताह बाद 14 जून 2020 को अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे, जिसके बाद दोनों की मौत की घटनाओं के बीच संभावित संबंध को लेकर अटकलें लगने लगी थीं। राजपूत की मौत के बाद मचे हंगामे के बीच महाराष्ट्र सरकार ने मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। एजेंसी ने बाद में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल करते हुए कहा था कि राजपूत की मौत आत्महत्या से हुई थी। हालांकि, संबंधित अदालत ने अभी इस रिपोर्ट पर सुनवाई नहीं की है।
Hyundai ने किया कन्फर्म... आ रही नई SUV, मारुति से होगा मुकाबला
Hyundai Bayon जल्द ही भारत में लॉन्च होने वाली है. कंपनी ने अपनी अपकमिंग एसयूवी का नाम कन्फर्म कर दिया है. ये कार वेन्यू और क्रेटा के बीच में प्लेस की जाएगी. हुंडई इस कार के साथ फैक्टरी फिटेड सीएनजी का विकल्प दे सकती है. फिलहाल ब्रांड ने सिर्फ इस कार का नाम कन्फर्म किया है. ये कार दिवाली से पहले लॉन्च हो सकती है.
'अगर जनता का विश्वास नहीं है तो...', लोकायुक्त कार्यक्रम में बोले CM योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकायुक्त के 50वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं में जनता का विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने न्याय, सत्य और समानता पर जोर देते हुए कहा कि सुशासन तभी मुमकिन है जब हर व्यक्ति भी संस्थाओं पर गर्व महसूस करे.
घर पर बनाएं चटपटी और हेल्दी जीरा पाचक गोली, नोट करें आसान रेसिपी
Homemade Jeera Paachak Goli: आज हम आपको घर पर खट्टी-मीठी और चटपटी जीरा पाचक गोली बनाने की आसान रेसिपी बताएंगे. जीरा, आमचूर और मसालों से तैयार इस गोली को खाने के बाद मुंह का स्वाद बदलने के लिए ट्राई कर सकते हैं.
इस कपल ने खोला राज, होटल से लेकर खाने तक का पूरा खर्च और बजट मैनेज करने के सीक्रेट्स
विदेशी यात्राओं का सपना देखने वाले हर भारतीय टूरिस्ट के जेहन में सबसे पहला नाम अगर किसी खूबसूरत देश का आता है, तो वह बर्फीली वादियों और आल्प्स पहाड़ों से घिरे स्विट्जरलैंड का होता है, जिसे दुनिया का स्वर्ग कहा जाता है। लेकिन इस देश का नाम सुनते ही सबसे बड़ा डर जो लोगों के मन में बैठ जाता है, वह है वहां का भारी-भरकम खर्च, क्योंकि आम तौर पर यह माना जाता है कि स्विट्जरलैंड घूमना केवल करोड़पतियों और रईसों के बस की बात है। इस आम धारणा को पूरी तरह से गलत साबित करते हुए हाल ही में एक ट्रैवल कपल ने अपनी 21 दिनों की लंबी स्विट्जरलैंड यात्रा का पूरा कच्चा-चिट्ठा दुनिया के सामने खोलकर रख दिया है और यह साबित कर दिया है कि सही प्लानिंग और स्मार्ट डील्स के जरिए इस महंगे देश को भी बजट में घूमा जा सकता है। इस साहसी कपल ने मात्र 7.5 लाख रुपये के कुल बजट में पूरे 21 दिनों तक स्विट्जरलैंड के कोने-कोने की सैर की, जिसमें उनके होटल में ठहरने से लेकर लोकल ट्रांसपोर्ट, ट्रेन पास और खाने-पीने का सारा खर्च शामिल था। सोशल मीडिया पर उनके इस बजट ब्रेकडाउन और यात्रा के अनुभवों ने उन तमाम युवाओं और कपल्स को एक नई उम्मीद दे दी है जो पैसों की कमी के कारण अपने यूरोप ट्रिप के सपने को बार-बार टाल रहे थे। इस विस्तृत लेख में हम आपको उसी स्मार्ट कपल द्वारा अपनाए गए उन तमाम गुप्त तरीकों, होटल बुकिंग ट्रिक्स और सस्ते खानपान के जुगाड़ के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप भी अपने अगले वेकेशन को बेहद किफायती बना सकते हैं।स्विट्जरलैंड को महंगा क्यों माना जाता है और इस कपल ने कैसे तोड़ा यह मिथकस्विट्जरलैंड अपनी खूबसूरती के साथ-साथ दुनिया के सबसे महंगे देशों में शुमार किया जाता है, जहाँ एक साधारण पानी की बोतल या एक कप कॉफी की कीमत भी भारत के मुकाबले कई गुना अधिक होती है। होटल के कमरे, प्रीमियम ट्रेनें और लग्जरी餐廳 पर्यटकों की जेब पर भारी पड़ते हैं, जिसकी वजह से ट्रेवल एजेंसियां भी यूरोप टूर के नाम पर लाखों-करोड़ों के पैकेज थमा देती हैं। लेकिन इस स्मार्ट कपल ने पैकेज टूर के झंझट में पड़ने के बजाय पूरी यात्रा की डिजाइनिंग खुद की, हर एक चीज की बुकिंग महीनों पहले ऑनलाइन रिसर्च करके की और वहां पहुंचने के बाद भी पैसों की बर्बादी करने से बचे। उनका यह मानना था कि अगर आप पीक सीजन (Peak Season) के बजाय ऑफ-सीजन या शोल्डर सीजन में यात्रा की योजना बनाते हैं और लग्जरी होटलों की जगह होमस्टे या अपार्टमेंट चुनते हैं, तो खर्चों में भारी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने अपनी इस 21 दिन की लंबी यात्रा के दौरान किसी भी फाइव-स्टार होटल में रहने के बजाय ऐसे स्वच्छ और आरामदायक स्थानों को चुना जहाँ किचन की सुविधा भी उपलब्ध थी, जिससे उनका खाने का बजट बहुत हद तक कंट्रोल में आ गया। उनके इस अनूठे दृष्टिकोण ने यह दिखा दिया कि यात्रा केवल पैसे खर्च करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक कला है जिसमें कम बजट में भी दुनिया के सबसे खूबसूरत नजारों का आनंद लिया जा सकता है।होटल बुकिंग और स्टे के मामले में अपनाई गई खास रणनीतियांकिसी भी विदेश यात्रा के दौरान कुल बजट का सबसे बड़ा हिस्सा यानी लगभग तीस से चालीस प्रतिशत हिस्सा होटल और ठहरने की जगहों पर खर्च हो जाता है, और स्विट्जरलैंड में यह समस्या और भी विकराल रूप ले लेती है। इस कपल ने अपने होटल के खर्च को न्यूनतम रखने के लिए पारंपरिक होटलों के विकल्प को छोड़कर एयरबीएनबी (Airbnb), हॉस्टल और स्थानीय अपार्टमेंट्स का सहारा लिया, जो न केवल किफायती थे बल्कि वहां घरेलू माहौल भी मिल जाता था। उन्होंने ज्यूरिख, इंटरलाकेन, जिरमैट और ल्यूसेंट जैसे महंगे शहरों में रहने के लिए ऐसी जगहों का चुनाव किया जो शहर के मुख्य केंद्र से थोड़े हटकर थीं लेकिन जहां से पब्लिक ट्रांसपोर्ट आसानी से मिल जाता था। इसके अलावा उन्होंने होटल बुक करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा कि कमरे के साथ ब्रेकफास्ट मुफ्त में मिले और यदि संभव हो तो कमरे में छोटा सा किचन या माइक्रोवेव हो ताकि वे रात का खाना खुद तैयार कर सकें। होटल बुक करने के लिए उन्होंने महीनों पहले से विभिन्न ट्रेवल पोर्टल्स पर मिलने वाले डिस्काउंट कूपन और क्रेडिट कार्ड ऑफर्स का जमकर इस्तेमाल किया, जिससे उन्हें भारी-भरकम कैशबैक और छूट मिल गई। इस प्रकार की छोटी-छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रणनीतियों की बदौलत वे 21 दिनों तक स्विट्जरलैंड के सबसे बेहतरीन लोकेशंस पर रुके बिना अपने बजट को बिगड़ने दिए अपनी यात्रा का आनंद लेते रहे।खाने-पीने के भारी खर्च से ऐसे बची यह जोड़ी, अपनाए देसी और स्मार्ट उपायस्विट्जरलैंड के रेस्तरां में बैठकर खाना खाना किसी आम इंसान के बजट से बाहर हो सकता है क्योंकि वहां मेन्यू कार्ड देखते ही पसीने छूटने लगते हैं, और इस कपल ने इस बात को बहुत जल्दी भांप लिया था। उन्होंने वहां के महंगे रेस्तरां में रोज खाने के बजाय सुपरमार्केट चेन जैसे कि माइग्रोस (Migros) और कोप (Coop) का रुख किया, जो पूरे स्विट्जरलैंड में आसानी से मिल जाते हैं और जहां फ्रेश ग्रॉसरी, सैंडविच, पास्ता और रेडी-टू-ईट मील्स बहुत ही वाजिब दामों पर मिल जाते हैं। इसके अलावा वे अपने साथ भारत से कुछ सूखे मेजे, थेपला, उपमा के पैकेट और मसाले भी लेकर गए थे, जिससे सुबह के वक्त उन्हें देसी नाश्ता बनाने में आसानी होती थी और बाहर खाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। जब भी वे दिनभर घूमने के बाद शाम को अपने अपार्टमेंट में लौटते थे, तो वे खुद ही सुपरमार्केट से सामान लाकर हल्का-फुल्का और पौष्टिक खाना तैयार कर लेते थे, जिससे उनका हजारों रुपये का रोज का खर्च बच जाता था। कभी-कभार जब उनका मन बाहर खाने का करता था, तो वे फैंसी रेस्तरां के बजाय लोकल स्ट्रीट फूड आउटलेट्स या बेकरी से पेस्ट्री और लोकल स्नैक्स ट्राई करते थे, जो स्वाद में भी बेहतरीन होते थे और जेब पर भी भारी नहीं पड़ते थे। खानपान में की गई इस समझदारी भरी बचत ने ही उन्हें 21 दिनों तक बिना किसी आर्थिक तनाव के देश के सबसे खूबसूरत इलाकों में घूमने की पूरी छूट दी।ट्रांसपोर्ट और लोकल ट्रेवल के लिए स्विस ट्रैवल पास का शानदार इस्तेमालस्विट्जरलैंड में एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए वहां की ट्रेनें, बसें और केबल कारें दुनिया की सबसे बेहतरीन प्रणालियों में गिनी जाती हैं, लेकिन अगर आप हर बार अलग टिकट खरीदेंगे तो आपका बजट तुरंत धराशायी हो जाएगा। इस कपल ने इस समस्या का सबसे बेहतरीन समाधान निकालते हुए 'स्विस ट्रैवल पास' (Swiss Travel Pass) खरीदा, जो भले ही देखने में एक बार में महंगा लगता है, लेकिन 21 दिनों के हिसाब से यह उनके लिए सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। इस पास की मदद से उन्होंने देश की लगभग सभी ट्रेनों, बसों, नावों और यहां तक कि कई पहाड़ों पर जाने वाली दर्शनीय बोट्स में असीमित यात्रा की, जिससे उन्हें हर सफर के लिए अलग से भारी भरकम टिकट खरीदने की चिंता नहीं सताई। इसके अलावा इस पास के जरिए उन्हें देश के सैकड़ों संग्रहालयों (Museums) में मुफ्त प्रवेश मिला और कई माउंटेन एक्सकर्शन पर भारी डिस्काउंट भी प्राप्त हुआ, जो कुल मिलाकर उनके हजारों रुपये बचा गया। उन्होंने लंबी दूरियों के सफर के लिए हमेशा पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दी और कभी भी वहां कार रेंट पर लेने की गलती नहीं की, क्योंकि कार का किराया और वहां का टोल तथा पार्किंग टैक्स बहुत ज्यादा महंगा होता है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल से न केवल उनका सफर आरामदायक रहा बल्कि वे स्थानीय लोगों की संस्कृति और जीवनशैली को भी बहुत करीब से देख पाए।7.5 लाख के इस बजट ट्रिप से आम यात्रियों के लिए क्या है बड़ी सीखइस प्रेरणादायक ट्रैवल स्टोरी से उन सभी भारतीय पर्यटकों को एक बहुत बड़ा संदेश मिलता है जो यह सोचते हैं कि स्विट्जरलैंड घूमना केवल सपनों की बात है और इसके लिए बैंक खाता खाली करना पड़ता है। सही समय पर फ्लाइट की बुकिंग, एडवांस प्लानिंग, स्विस ट्रैवल पास का सही उपयोग, महंगे होटलों के बजाय अपार्टमेंट्स में रहना और रेस्तरां के बजाय सुपरमार्केट से खाना मैनेज करना वे मूल मंत्र हैं जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा को किफायती बना सकते हैं। इस कपल ने यह साबित कर दिया कि अगर आपके अंदर घूमने का जनून है और आप पैसों का प्रबंधन स्मार्ट तरीके से करना जानते हैं, तो दुनिया की कोई भी जगह आपके बजट से बाहर नहीं हो सकती। 21 दिनों तक स्विट्जरलैंड की हसीन वादियों में बिताया गया वह समय उनके जीवन का सबसे बेहतरीन अनुभव बन गया, और वह भी तब जब उन्होंने बिना किसी फिजूलखर्ची के बेहद अनुशासित तरीके से अपनी यात्रा पूरी की। यदि आप भी आने वाले दिनों में यूरोप या स्विट्जरलैंड जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इस कपल की इन शानदार टिप्स को अपनी डायरी में नोट कर लें, ताकि आपका अगला वेकेशन भी पॉकेट-फ्रेंडली और यादगार बन सके।
भारत को उत्सवों और त्योहारों का देश कहा जाता है जहां साल भर कोई न कोई पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन जब बात भाद्रपद मास में आने वाले गणेशोत्सव की आती है, तो पूरे देश की हवा में एक अलग ही भक्ति और उमंग घुल जाती है। दस दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व विघ्नहर्ता भगवान गणेश के स्वागत, उनकी उपासना और फिर धूमधाम से विसर्जन के रूप में मनाया जाता है, जिसका उत्साह देखते ही बनता है। यदि आप भी इस गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा के उस अलौकिक और भव्य जश्न का हिस्सा बनना चाहते हैं जिसके चर्चे पूरी दुनिया में होते हैं, तो आपको देश की उन चुनिंदा पांच जगहों के बारे में जरूर जानना चाहिए जहां का गणेशोत्सव अपने आप में एक अनोखा इतिहास और सांस्कृतिक महत्व रखता है। आम तौर पर लोग केवल अपने घरों या स्थानीय पंडालों में ही पूजा-पाठ करते हैं, लेकिन भारत के कुछ खास शहरों में यह पर्व किसी महाकुंभ की तरह मनाया जाता है, जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दराज के राज्यों और विदेशों से भी बप्पा के दर्शन करने के लिए खींचे चले आते हैं। इस विशेष लेख के माध्यम से हम आपको देश की उन पांच सबसे प्रसिद्ध जगहों की यात्रा पर ले चल रहे हैं, जहां गणेश चतुर्थी का जश्न आपकी जिंदगी के सबसे खूबसूरत और यादगार पलों में से एक साबित हो सकता है।1. मायानगरी मुंबई: जहां गणेशोत्सव का होता है सबसे भव्य और विशाल रूपगणेश चतुर्थी के जश्न की बात हो और सबसे पहले महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई का नाम न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता क्योंकि मुंबई का गणेशोत्सव पूरी दुनिया में अपनी भव्यता और अनूठी संस्कृति के लिए विख्यात है। यहाँ गली-मोहल्लों से लेकर बड़े-बड़े कॉर्पोरेट पंडालों तक, हर जगह बप्पा के स्वागत में गगनभेदी नारे गूंजते हैं और पूरा शहर रोशनी से जगमगा उठता है। मुंबई का सबसे प्रसिद्ध 'लालबागचा राजा' पंडाल हर साल देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं और मशहूर हस्तियों को अपनी ओर आकर्षित करता है, जहाँ दर्शन पाने के लिए लंबी-लंबी कतारों में लोग घंटों इंतजार करते हैं। इसके अलावा जीएसबी सेवा मंडल, अंधेचा राजा और गिरगांव चौपाटी पर होने वाला विशाल अनंत चतुर्दशी का विसर्जन समारोह ऐसा अद्भुत नजारा पेश करता है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ढोल-ताशों की गड़गड़ाहट, गुलाल की उड़ती हुई फुहारें और 'गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या' के जयकारों के बीच जब बप्पा को विदा किया जाता है, तो हर भक्त की आंखें नम हो जाती हैं। यदि आप गणपति उत्सव का असली, जीवंत और ऊर्जा से भरा हुआ रूप देखना चाहते हैं, तो मुंबई की इन सड़कों और पंडालों का सफर आपके लिए किसी सपने के सच होने जैसा होगा।2. ऐतिहासिक पुणे: पेशवा संस्कृति और परंपराओं से सराबोर बप्पा का दरबारमुंबई के बाद अगर महाराष्ट्र में किसी शहर का गणेशोत्सव सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहता है, तो वह है सांस्कृतिक राजधानी पुणे, जिसका इतिहास सीधे तौर पर छत्रपति शिवाजी महाराज और पेशवा काल से जुड़ा हुआ है। पुणे में लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी ताकि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोग एक मंच पर एकजुट हो सकें, और आज भी इस शहर की परंपराएं उसी प्राचीन गरिमा को पूरी शान के साथ जीवित रखे हुए हैं। पुणे के 'श्रीमंत दगडूशेथ हलवाई गणपती' के दरबार में हर साल देश-विदेश से सोने-चांदी के आभूषणों से सजे बप्पा के दर्शन करने के लिए लाखों भक्त पहुंचते हैं। इसके अलावा पुणे के 'माननीय पांच गणपति' (कसबा गणपति, तांबड़ी जोगेश्वरी, गुरुजी तालिम, तुलशीबाग और केसरी वाड़ा) इस शहर के सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक माने जाते हैं, जिनकी भव्य शोभायात्रा में पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लेजिम पथकों की गूंज मंत्रमुग्ध कर देती है। पुणे का यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति, कला और इतिहास का एक ऐसा जीवंत दस्तावेज है जिसे हर भारतीय को अपने जीवन में कम से कम एक बार जरूर देखना चाहिए।3. हैदराबाद का ऐतिहासिक खैराबाद और टंक बंड: दक्षिण भारत का महाउत्सवउत्तर और पश्चिमी भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी गणेश चतुर्थी का पर्व अब बहुत ही बड़े पैमाने पर मनाया जाने लगा है, और इसमें तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का नाम सबसे ऊपर आता है। हैदराबाद के 'खैराबाद गणेश' और हुसैन सागर झील के किनारे होने वाला गणेशोत्सव अपनी विशाल मूर्तियों और अभूतपूर्व भीड़ के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध माना जाता है। यहाँ हर साल कई फीट ऊंची भव्य और कलात्मक मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दराज के जिलों से लोग शहर में आते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन जब शहर के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की संख्या में गणेश प्रतिमाएं एक विशाल जुलूस के रूप में हुसैन सागर झील की ओर बढ़ती हैं, तो उस नजारे को देखकर आंखें खुली की खुली रह जाती हैं। हैदराबाद का यह सांप्रदायिक सौहार्द और भव्यता इस बात का प्रमाण है कि भगवान गणेश की भक्ति किसी एक क्षेत्र या भाषा की सीमाओं में बंधे होने के बजाय पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का काम करती है।4. राजस्थान का रंगीन जयपुर: गुलाबी नगरी में सजते हैं पारंपरिक पंडालजब बात ऐतिहासिक और पारंपरिक उत्सवों की होती है, तो राजस्थान की खूबसूरत गुलाबी नगरी जयपुर का नाम बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है, जहां गणेश चतुर्थी का जश्न एक अलग ही शाही अंदाज में मनाया जाता है। जयपुर का प्रसिद्ध 'मोती डूंगरी गणेश मंदिर' इस पूरे क्षेत्र की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है, जहां बप्पा के दर्शन करने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन मीलों लंबी कतारें लगती हैं। ऐसा माना जाता है कि मोती डूंगरी के गणेश जी इस क्षेत्र के राजा हैं और शहर में होने वाले हर शुभ कार्य का पहला निमंत्रण यहीं दिया जाता है। इस अवसर पर पूरे जयपुर शहर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है, विभिन्न स्थानों पर भव्य मेले लगते हैं और राजस्थानी संस्कृति की झलक इन आयोजनों में साफ तौर पर देखने को मिलती है। पारंपरिक लोक नृत्य, संगीत और राजशाही ठाट-बाथ के साथ मनाया जाने वाला जयपुर का यह गणेशोत्सव पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है, जो उत्तर भारत की अनूठी संस्कृति का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।5. गोवा का तटीय गणेशोत्सव: प्रकृति की गोद में पारंपरिक 'चविथ' का आनंदअगर आप किसी ऐसी जगह पर गणेश चतुर्थी देखना चाहते हैं जहाँ आधुनिक चकाचौंध के बजाय प्रकृति की गोद में पूरी तरह से पारंपरिक और पारिवारिक माहौल मिले, तो आपको गोवा का रुख करना चाहिए, जहां इस पर्व को 'चविथ' या 'परब' के रूप में मनाया जाता है। गोवा में गणेशोत्सव मुख्य रूप से घरों और ग्रामीण इलाकों में बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जहाँ लोग मिट्टी की पारंपरिक मूर्तियां लाकर उनकी पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं। यहाँ का मुख्य आकर्षण प्राकृतिक सौंदर्य के बीच होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक व्यंजन (जैसे मोदक और नेवरियो) और ढोल-झांझ की धुनों पर होने वाले लोक नृत्य हैं। गोवा के गांवों में जब परिवार के सभी सदस्य मिलकर एक साथ बप्पा का स्वागत करते हैं, तो एक ऐसा अपनापन और सुकून मिलता है जो बड़े शहरों की भीड़भाड़ में पानामुश्किल होता है। समुद्र की लहरों के किनारे और हरे-भरे पेड़ों के बीच मनाया जाने वाला गोवा कायह शांत और पावन गणेशोत्सव आपके मन को असीम शांति और एक अलग ही प्रकार की ऊर्जा से भर देगा।
दिल्ली: जिम ट्रेनर की हत्या से सनसनी, बदमाशों ने बीच सड़क मारी 12 गोलियां
दिल्ली के साउथ जिले के आया नगर इलाके में सोमवार सुबह एक जिम ट्रेनर की ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई. वारदात को दो आरोपियों ने अंजाम दिया. बताया जा रहा है कि बदमाशों ने करीब 10 से 12 राउंड फायरिंग की. घटना सुबह करीब साढ़े 10 बजे हुई. पुलिस को हत्या के पीछे आपसी रंजिश का शक है.
कुत्ते की मौत पर परिवार ने की इंसानों जैसी तेरहवीं
मेरठ में 12 साल तक परिवार का हिस्सा रहे पालतू कुत्ते टफ्फू की मौत के बाद परिवार ने उसकी इंसानों की तरह तेरहवीं की। 13 सितंबर को हवन कराया गया और रिश्तेदारों व पड़ोसियों को प्रसाद बांटा गया। टफ्फू की तस्वीर लगाकर उसकी पसंद के लड्डू भी बनवाए गए।
रांची से कामाख्या मंदिर का सफर हुआ बेहद आसान: जानिए ट्रेन, फ्लाइट और किराए की पूरी डिटेल
असम की खूबसूरत और पवित्र वादियों में स्थित मां कामाख्या देवी का शक्तिपीठ देश के सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारी धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां सालभर करोड़ों भक्तों का तांता लगा रहता है। झारखंड की राजधानी रांची से असम के गुवाहाटी स्थित इस पावन धाम तक पहुंचने के लिए अब श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि परिवहन के साधनों में हुए विस्तार ने इस यात्रा को बेहद सुगम बना दिया है। यदि आप भी रांची से मां कामाख्या के दरबार में हाजिरी लगाने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आप कम से कम समय में कैसे इस दिव्य स्थान पर पहुंच सकते हैं और बिना लंबी लाइनों में खड़े महज 30 मिनट के भीतर वीआईपी व्यवस्था के जरिए मां के अलौकिक दर्शन कैसे प्राप्त कर सकते हैं। असम के गुवाहाटी शहर में स्थित नीलाचल पर्वत पर विराजमान इस मंदिर की महत्ता तंत्र साधना और शक्ति उपासना के लिए पूरे विश्व में विख्यात है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। झारखंड के तीर्थयात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस लेख में हम आपको रांची से कामाख्या मंदिर तक की पूरी यात्रा का रूट, ट्रेन और फ्लाइट के विकल्प, समय सारणी और झटपट दर्शन करने के आसान तरीकों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, ताकि आपकी यह यात्रा बिना किसी परेशानी के पूरी तरह मंगलमय हो सके।रांची से गुवाहाटी के लिए फ्लाइट और ट्रेन के बेहतरीन विकल्पझारखंड की राजधानी रांची से असम के मुख्य शहर गुवाहाटी की दूरी लगभग एक हजार किलोमीटर से अधिक है, जिसे तय करने के लिए आपके पास हवाई यात्रा और रेल यात्रा दोनों के शानदार विकल्प मौजूद हैं। यदि आप समय की बचत करना चाहते हैं और जल्द से जल्द मां के दरबार पहुंचना चाहते हैं, तो रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से गुवाहाटी के लोकप्रीय गोपीनाथ बोरदोलॉई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए फ्लाइट ले सकते हैं। हालांकि रांची से गुवाहाटी के लिए अधिकांश उड़ानें कनेक्टिंग होती हैं जो कोलकाता या पटना के रास्ते जाती हैं, लेकिन कुल यात्रा का समय कुछ घंटों में ही सिमट जाता है और आप आसानी से असम की भूमि पर उतर जाते हैं। इसके अलावा यदि आप रेल मार्ग से सफर करना पसंद करते हैं, तो रांची रेलवे स्टेशन से गुवाहाटी या पास के कामाख्या जंक्शन के लिए सीधी या साप्ताहिक ट्रेनें उपलब्ध हैं जो आपको इस सफर का आनंद देते हुए असम पहुंचाती हैं। ट्रेन का सफर उन लोगों के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है जो परिवार के साथ बजट में रहकर आरामदायक यात्रा करना चाहते हैं और प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाना चाहते हैं। यात्रा शुरू करने से पहले अपनी सुविधा के अनुसार ट्रेन की टिकटों की बुकिंग और फ्लाइट के शेड्यूल की जांच कर लेना हमेशा समझदारी का काम होता है, ताकि अंतिम समय में किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।गुवाहाटी एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से कामाख्या मंदिर तक पहुंचने का आसान रास्ताजब आप ट्रेन या फ्लाइट के जरिए गुवाहाटी पहुंच जाते हैं, तो वहां से नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर की दूरी बहुत अधिक नहीं रह जाती है और स्थानीय परिवहन के साधन आसानी से मिल जाते हैं। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग सात से आठ किलोमीटर है, जबकि एयरपोर्ट से यह दूरी लगभग बीस किलोमीटर के आसपास है, जहां से आप कैब, ऑटो-रिक्शा या टैक्सी बुक करके सीधे मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंच सकते हैं। पहाड़ी की तलहटी से मंदिर तक जाने के लिए स्थानीय वाहन हर समय उपलब्ध रहते हैं जो आपको कुछ ही मिनटों में मंदिर परिसर तक पहुंचा देते हैं। रास्ते में असम की सुंदर आबोहवा और ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे का नजारा आपकी इस धार्मिक यात्रा की थकान को पलभर में दूर कर देता है। जैसे ही आप नीलाचल पहाड़ी पर कदम रखते हैं, वहां का आध्यात्मिक माहौल और मंत्रोच्चार आपके मन को एक गहरी शांति और ऊर्जा से भर देता है, जो इस यात्रा के सबसे खूबसूरत पलों में से एक माना जाता है।महज 30 मिनट में ऐसे पाएं मां कामाख्या के दर्शन, वीआईपी पास और ऑनलाइन बुकिंग की पूरी प्रक्रियाकामाख्या मंदिर में आम दिनों के दौरान भी देश के कोने-कोने से आने वाले भक्तों की इतनी भारी भीड़ होती है कि कई बार सामान्य कतारों में खड़े होकर दर्शन करने में चार से छह घंटे या उससे अधिक का समय लग जाता है। लेकिन यदि आप अपने समय को बचाना चाहते हैं और बिना लंबी लाइनों में धक्के खाए महज 30 मिनट के भीतर मां के दर्शन करना चाहते हैं, तो आपके पास वीआईपी दर्शन पास या विशेष एंट्री टिकट का विकल्प चुनना सबसे अच्छा तरीका है। मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से विशेष दर्शन पास की व्यवस्था की जाती है, जिसे आप मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए पहले से बुक कर सकते हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर के आसपास बने काउंटरों से भी नियत शुल्क देकर विशेष शीघ्र दर्शन (Quick Darshan) पर्ची प्राप्त की जा सकती है, जिसके जरिए आपको अलग और तेज कतार में प्रवेश दिया जाता है। इस विशेष व्यवस्था का लाभ उठाकर आप मात्र आधे घंटे यानी तीस मिनट के भीतर गर्भगृह के पास पहुंचकर मां कामाख्या के दुर्लभ और चमत्कारी दर्शन कर सकते हैं। जिन बुजुर्गों या बच्चों के साथ लोग यात्रा कर रहे हैं, उनके लिए यह वीआईपी सुविधा किसी वरदान से कम साबित नहीं होती है, जिससे वे बिना किसी शारीरिक थकान के आसानी से अपनी पूजा-अर्चना संपन्न कर लेते हैं।कामाख्या मंदिर यात्रा के दौरान ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें और मौसम की जानकारीमां कामाख्या के दर्शन के लिए जाने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है ताकि आपकी यह यात्रा पूरी तरह सफल और सुखद हो सके। सबसे पहले बात करते हैं मौसम की, तो असम में सालभर उमस और बारिश का माहौल रहता है, इसलिए अपने साथ हल्के सूती कपड़े और छाता या रेनकोट रखना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि यहां अचानक कभी भी बारिश हो सकती है। मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं और भारी भीड़ के कारण अपने सामान तथा बच्चों का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। इसके अलावा मंदिर के आसपास प्रसाद और पूजा की सामग्री खरीदने के लिए कई दुकानें हैं, लेकिन खरीदारी करते समय उचित मोलभाव कर लेना सही रहता है। साल के जून महीने में लगने वाला अंबुबाची मेला यहां का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध उत्सव माना जाता है, उस दौरान देश-विदेश से लाखों तांत्रिक और साधु-संत यहां आते हैं, इसलिए यदि आप सामान्य और शांतिपूर्ण दर्शन चाहते हैं, तो उस अवधि को छोड़कर बाकी महीनों में अपनी यात्रा की योजना बनाएं। रांची से शुरू हुआ यह धार्मिक सफर आपके जीवन में एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा भ
सैलरी से PF कट गया... खाते में जमा हुआ या नहीं? घर बैठे ऐसे करें चेक
हर महीने सैलरी से PF कटने के बाद ज्यादातर कर्मचारी निश्चिंत हो जाते हैं कि पैसा उनके खाते में जमा हो गया होगा. लेकिन इस रकम पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी है. एक छोटी सी लापरवाही आगे चलकर PF ट्रांसफर, निकासी या रिटायरमेंट के समय परेशानी खड़ी कर सकती है.
एशिया कप में मोहसिन नकवी की घनघोर बेइज्जती के बाद पीएम मोदी का मास्टरस्ट्रोक
क्रिकेट के खेल के मैदान से लेकर कूटनीतिक और प्रशासनिक मंचों तक इन दिनों भारत और पाकिस्तान के बीच का माहौल एक दिलचस्प मोड़ पर आ चुका है, जहां एक तरफ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख और मंत्री मोहसिन नकवी की शर्मनाक हरकतों के कारण पूरी दुनिया में किरकिरी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपने अनूठे और प्रेरणादायक अंदाज से सबका दिल जीत लिया है। हाल ही में समाप्त हुए एशिया कप के दौरान जहां पाकिस्तानी अधिकारियों की ओछी और बचकानी हरकतों की वजह से खेल जगत में उनकी जबरदस्त बेइज्जती हुई और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खरी-खोटी सुननी पड़ी, ठीक उसी समय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़कर हमारी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक और शानदार जीत पर उन्हें बेहद गर्मजोशी के साथ बधाई दी है। पीएम मोदी द्वारा देश की बेटियों की इस महान उपलब्धि पर दी गई यह बधाई न केवल करोड़ों देशवासियों के भीतर एक नया जोश और गर्व भरने का काम करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत सरकार महिला सशक्तिकरण और खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को कितना उच्च सम्मान देती है। जिस मंच पर पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी हरकतों के चलते उपहास का पात्र बन रहे थे, उसी वैश्विक पटल पर भारतीय नेतृत्व ने अपनी बेटियों की पीठ थपथपाकर यह साबित कर दिया कि भारत की संस्कृति और संस्कार खेल भावना को सबसे ऊपर रखते हैं। प्रधानमंत्री के इस दिल जीतने वाले संदेश के बाद से सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ केवल भारतीय महिला क्रिकेट टीम की इस ऐतिहासिक जीत और देश के नेतृत्व की सराहना के चर्चे हो रहे हैं, जिसने हर एक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।मोहसिन नकवी की फजीहत और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की गिरती साखएक तरफ जहां खेल की गरिमा को बनाए रखने के लिए खिलाड़ी अपनी जान लगा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी ने जिस प्रकार का बचकाना और गैर-जिम्मेदाराना आचरण एशिया कप के दौरान दिखाया, उसने उनके पूरे देश के माथे पर कलंक का टीका लगा दिया है। जब एक देश का मंत्री या जिम्मेदार अधिकारी मंचों से ट्राफियां चुराने जैसी हरकतों पर उतर आता है, तो वहां मौजूद अन्य देशों के प्रतिनिधि और सैन्य अधिकारी भी उसकी ओछी मानसिकता पर थू-थू करने लगते हैं। मोहसिन नकवी को न केवल वहां मौजूद लोगों और अधिकारियों द्वारा खरी-खोटी सुनाई गई, बल्कि उन्हें सरेआम 'ट्रॉफी चोर' और 'झूठा आदमी' जैसे विशेषणों से नवाजा गया, जो किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या खेल प्रशासक के लिए सबसे बड़ी और असहनीय बेइज्जती मानी जाती है। यह घटना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जब अंदर से नीयत और नीति दोनों खोखली हो जाती हैं, तो बड़े पदों पर बैठने के बावजूद इंसान अपनी फजीहत कराने से नहीं बच सकता। इसके विपरीत, भारत के प्रतिनिधि और खिलाड़ी हमेशा अपनी शालीनता, अनुशासन और शानदार खेल प्रदर्शन के दम पर पूरी दुनिया में सम्मान हासिल करते आए हैं। पाकिस्तान के इन ओछे कारनामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वे खेल को भी राजनीति और अपनी गंदी हरकतों का अखाड़ा बनाने से बाज नहीं आते, जिसका खामियाजा उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार किरकिरी उठाकर भुगतना पड़ रहा है।पीएम मोदी का प्रेरणादायक संदेश: महिला क्रिकेट टीम की जीत पर पूरा देश गदगदजब पाकिस्तानी खेमे में निराशा और बेइज्जती का अंधेरा छाया हुआ था, तब ठीक उसी समय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी खेल प्रेम और प्रोत्साहन की परंपरा को निभाते हुए एशिया कप जीतने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम को एक भव्य और ऊर्जावान अंदाज में बधाई दी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह रेखांकित किया कि हमारी देश की बेटियां हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं और क्रिकेट के मैदान पर उनका यह दबदबा पूरे देश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। पीएम मोदी ने महिला खिलाड़ियों के अटूट संघर्ष, उनकी कड़ी मेहनत और विपरीत परिस्थितियों में भी जीत हासिल करने के जज्बे की खुलकर तारीफ की, जिससे मैदान पर पसीना बहाने वाली उन बेटियों का हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया। किसी भी देश के शीर्ष नेतृत्व द्वारा जब इस प्रकार खिलाड़ियों की पीठ थपथपाई जाती है, तो यह केवल एक औपचारिक बधाई नहीं होती, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत बड़ा प्रेरणास्त्रोत बन जाती है। प्रधानमंत्री का यह संदेश इस बात का प्रतीक है कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के साथ-साथ 'बेटी खिलाओ और उन्हें देश का नाम रोशन करने का पूरा अवसर दो' की सोच अब धरातल पर कितनी मजबूती से रंग ला रही है। देश की करोड़ों युवतियां जो छोटे-छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर खेलों में अपना करियर बनाने का सपना देख रही हैं, वे पीएम मोदी के इस प्रोत्साहन के बाद और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ मैदान पर उतरने के लिए प्रेरित हुई हैं।खेल और कूटनीति के मोर्चे पर भारत की विजय और पाकिस्तान की पराजय का संदेशएशिया कप के इस पूरे घटनाक्रम और तमाशे ने दुनिया के सामने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि कूटनीतिक और खेल के मैदान पर भारत और पाकिस्तान की कार्यशैली में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है। जहां एक ओर पाकिस्तान अपनी हरकतों, बदइंतजामी और गैर-पेशेवर रवैये के कारण अपनी रही-सही इज्जत भी गंवा बैठा है, वहीं दूसरी ओर भारत अपनी शालीनता, बेहतरीन खेल प्रबंधन और शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन के बल पर लगातार नई बुलंदियों को छू रहा है। मोहसिन नकवी की घनघोर बेइज्जती इस बात का प्रतीक है कि झूठ और अहंकार की नींव पर ज्यादा दिनों तक इमारत नहीं टिक सकती, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिला क्रिकेट टीम को दी गई यह शानदार बधाई इस बात का सुबूत है कि सफलता हमेशा अनुशासन, मेहनत और सच्ची निष्ठा की हकदार होती है। भारतीय महिला टीम ने जिस प्रकार अपने खेल से एशिया कप की ट्रॉफी पर अपना अधिकार जमाया और देश का तिरंगा शान से ऊंचा किया, उसने हर भारतवासी के दिल में एक नई उमंग भर दी है। आने वाले समय में जब भी इस टूर्नामेंट को याद किया जाएगा, तब एक तरफ मोहसिन नकवी की वह शर्मनाक छवि याद आएगी जो चोरों की तरह हरकतें कर रहे थे, और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़ी हमारी विजेता महिला क्रिकेटर्स की वह मुस्कुराती हुई तस्वीरें इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों मेंदर्ज रहेंगी, जो यह बताती हैं कि भारत वास्तव में वैश्विक मंच पर किस बुलंदी और सम्मान का हकदार है।
'करोड़ों के लिए सोने को तैयार', इंफ्युएंसर के बयान पर भड़की एक्ट्रेस
चारुल ने कहा कि आजकल ओटीटी शोज में न्यूडिटी, गाली-गलौज बहुत ज्यादा दिखाई जा रही है. इससे हम लगो आने वाली जनरेशन को बिगाड़ रहे हैं. यूट्यूब के कई कॉमेडी शोज में इंतनी गंदगी दिखाते हैं कि घरवालों के साथ देख नहीं सकते.
पर्दे के पीछे का छिपा हुआ असली हीरो: कभी टीम इंडिया के लिए खेलने का सपना हुआ था चकनाचूर
क्रिकेट के खेल में अक्सर सुर्खियां वही खिलाड़ी बटोरते हैं जो मैदान पर चौके-छक्के लगाते हैं या गेंद से विकेट चटकाते हैं, और मैच जीतने के बाद चमकती हुई ट्रॉफी के साथ जश्न मनाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उन खिलाड़ियों को चैंपियन बनाने के पीछे पर्दे के पीछे बैठकर दिन-रात मेहनत करने वाला वह शख्स कौन होता है जिसकी रणनीति और मार्गदर्शन के बिना कोई भी टीम मैदान पर सफल नहीं हो सकती? आज हम आपको एक ऐसे ही गुमनाम योद्धा और पर्दे के पीछे के असली हीरो की कहानी बताने जा रहे हैं, जिनके जीवन का एक समय ऐसा दौर भी आया था जब उनका खुद का भारत के लिए खेलने का बड़ा सपना पूरी तरह से चूर-चूर हो गया था और उनका क्रिकेट करियर लगभग समाप्त माना जाने लगा था। लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने अपनी असफलताओं को अपनी ताकत बनाया और कोचिंग की दुनिया में ऐसा इतिहास रचा कि आज उन्हीं के मार्गदर्शन में भारतीय क्रिकेट टीम ने एशिया कप की प्रतिष्ठित ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमा लिया है। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां एक ऐसा इंसान जो खुद अंतरराष्ट्रीय मैदान पर देश की जर्सी पहनने के अपने सपने को पूरा नहीं कर सका, उसने अपनी कड़ी मेहनत और अचूक रणनीतिक कौशल के दम पर देश के लिए अनगिनत चैंपियंस तैयार कर दिए। इस प्रेरणादायक यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो जिंदगी के किसी भी मोड़ पर मिली असफलता आपको रोक नहीं सकती, बल्कि वह आपको सफलता के एक नए और ऊंचे शिखर तक पहुंचा सकती है।जब टूट गया था भारत के लिए खेलने का सपना और जीवन में छा गया था गहरा अंधेराहर एक युवा क्रिकेटर का सपना बचपन से यही होता है कि वह बड़े होकर देश की नीली जर्सी पहने, लाखों दर्शकों के बीच मैदान पर उतरे और राष्ट्रगान के दौरान अपने देश का मान बढ़ाए। हमारे इस गुमनाम हीरो ने भी अपनी जवानी के दिनों में इस सपने को सच करने के लिए पसीना बहाया था, घंटों नेट्स पर प्रैक्टिस की थी और घरेलू क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए संघर्ष किया था। लेकिन खेल का यह मैदान कई बार बेहद क्रूर साबित होता है, जहां प्रतिभा होने के बावजूद किस्मत, चोट या अन्य कारणों से हर किसी का सपना पूरा नहीं हो पाता है। उनके जीवन में भी एक ऐसा ही दौर आया जब तमाम कोशिशों के बाद भी जब उन्हें टीम इंडिया में चयन का वह सुनहरा अवसर नहीं मिला, तो उनका क्रिकेटिंग करियर अचानक थम गया और उनका वह बड़ा सपना हमेशा के लिए चूर-चूर हो गया। उस वक्त ऐसा लगा था कि सब कुछ खत्म हो चुका है, भविष्य अंधकारमय हो गया है और उनके द्वारा की गई सालों की मेहनत बेकार चली गई है। किसी भी खिलाड़ी के लिए अपने उस सपने को टूटते देखना जिससे उसने अपनी सांसें जोड़ी हों, बहुत ही दर्दनाक अनुभव होता है, और इस मानसिक आघात से उबरना आसान काम नहीं होता। लेकिन इस असाधारण शख्सियत ने अपनी किस्मत के आगे घुटने टेकने के बजाय यह तय किया कि भले ही वह खुद मैदान पर देश के लिए नहीं खेल पाए, लेकिन वे ऐसे खिलाड़ियों को जरूर तैयार करेंगे जो देश के लिए मैदान पर तिरंगा लहराएंगे।कोचिंग की कठिन दुनिया में कदम और अपनी रणनीतिक सोच से बदली तस्वीरमैदान पर बतौर खिलाड़ी असफल होने के बाद उन्होंने अपनी क्रिकेट की समझ, तकनीकी ज्ञान और खेल के प्रति अगाध प्रेम को हथियार बनाते हुए कोचिंग की दुनिया में पूरी तरह से उतरने का फैसला किया। शुरुआत का यह सफर उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि एक असफल खिलाड़ी को कोई भी बड़ी टीम आसानी से अपना कोच या मेंटॉर बनाने के लिए तैयार नहीं होती है, इसलिए उन्हें बिल्कुल जमीनी स्तर से शुरुआत करनी पड़ी। उन्होंने देश के अलग-अलग कोनों में जाकर युवा प्रतिभाओं को तराशना शुरू किया, उनकी कमियों पर बारीकी से काम किया और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाना सिखाया। उनकी यह खासियत थी कि वे खिलाड़ियों की बल्लेबाजी या गेंदबाजी की तकनीकी कमियों को पलभर में भांप लेते थे और उन्हें सुधारने के लिए बेहद सरल और प्रभावी उपाय बताते थे। धीरे-धीरे उनकी यह शानदार कार्यशैली और खिलाड़ियों के साथ उनका दोस्ताना लेकिन अनुशासित व्यवहार घरेलू सर्किट से लेकर नेशनल क्रिकेट अकादमी तक चर्चा का विषय बन गया। जिन खिलाड़ियों को दुनिया कम आंकती थी या जो अपने करियर के बुरे दौर से गुजर रहे थे, वे इस कोच के पास आते ही एक नए और खतरनाक रूप में ढल जाते थे। उन्होंने अपनी इस दूसरी पारी में यह साबित कर दिया कि एक सफल कोच बनने के लिए खुद का महान खिलाड़ी होना जरूरी नहीं है, बल्कि खेल की गहरी समझ और समर्पण होना सबसे ज्यादा मायने रखता है।एशिया कप में टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत और इस पर्दे के पीछे के हीरो का बड़ा योगदानहाल ही में समाप्त हुए एशिया कप के महामुकाबले में जब भारतीय टीम ने एक बार फिर से अपनी धाक जमाते हुए शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल मुकाबला जीतकर चैंपियन का ताज अपने नाम किया, तो हर तरफ जीत के जश्न का माहौल था। मैदान पर खिलाड़ियों ने जीत का श्रेय एक-दूसरे को दिया, लेकिन क्रिकेट के जानकारों और अंदरूनी सूत्रों का यह मानना है कि इस जीत के असली शिल्पकार और मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे बैठे यही कोच थे। जब पूरी टीम दबाव में थी, विपक्षी टीमें रणनीति बना रही थीं और मैच के दौरान पेचीदा स्थितियां पैदा हो रही थीं, तब इस रणनीतिकार ने ड्रेसिंग रूम में बैठकर ऐसे अचूक और सटीक प्लान तैयार किए जिन्होंने मैच का रुख पूरी तरह से पलट कर रख दिया। खिलाड़ियों के साथ उनका संवाद, उन्हें मानसिक रूप से शांत रखना और हर परिस्थिति के लिए तैयार करना इस बात का सबूत था कि वे क्यों आज देश के सबसे बेहतरीन और भरोसेमंद कोचों की सूची में शीर्ष पर आते हैं। जब खिलाड़ियों ने एशिया कप की उस चमकती हुई ट्रॉफी को हवा में उठाया, तो इस गुमनाम हीरो के चेहरे पर जो सुकून और गर्व की मुस्कान थी, वह किसी भी व्यक्तिगत शतक या अवार्ड से कहीं ज्यादा बड़ी थी। उन्होंने अपने टूटे हुए सपनों की राख से एक ऐसा साम्राज्य खड़ा कर दिया था जिसमें आज देश के करोड़ों क्रिकेट प्रेमी झूम रहे थे।असफलता से सफलता तक का यह सफर देश के युवाओं के लिए एक बड़ी सीखइस प्रेरणादायक कहानी से यह साफ संदेश मिलता है कि जीवन में अगर आपका कोई एक सपना टूट जाता है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी जिंदगी का सफर भी वहीं समाप्त हो गया है। हमारे देश के इस महान और पर्दे के पीछे के हीरो ने यह दिखा दिया कि अगर आप अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार हैं और रास्ता बदलने की हिम्मत रखते हैं, तो असफलताएं भी आपको सफलता के एक नए रास्ते पर ले जा सकती हैं। आज वे युवा क्रिकेटरों के लिए एक मिसाल बन चुके हैं जो यह सिखाते हैं कि शोहरत और कैमरों की चमक से दूर रहकर भी देश के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया जा सकता है। उनकी यह कहानी उन तमाम युवाओं को प्रेरित करती है जो जिंदगी की किसी न किसी मोड़ पर असफलता मिलने के बाद निराश हो जाते हैं और हार मान लेते हैं। भारतीय क्रिकेट आज जिस ऊंचाई पर है और भविष्य में जो नई ऊंचाइयों को छुएगा, उसमें इन गुमनाम नायकों का योगदान हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा, जो खुद तो मैदान पर नहीं खेल पाए लेकिन उन्होंने भारत को हमेशा जीतना सिखा दिया।
Rajasthan के सभी 10 नगर निगमों में BJP आगे, CM भजन लाल बोले- Gen Z को पसंद आई PM Modi की योजनाएं
राजस्थान में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ी बढ़त बना ली है, जिससे मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। वोटों की गिनती जारी है और BJP राज्य के 10 नगर निगमों में आगे चल रही है; साथ ही, पार्टी ने बड़ी संख्या में नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में भी मज़बूत स्थिति बना ली है। यह परफॉर्मेंस शर्मा के लिए अहम है, जिन्होंने BJP के कैंपेन में एक्टिव भूमिका निभाई और वोटिंग से पहले 10 शहरों में रोड शो किए। मुख्यमंत्री ने अब कहा है कि BJP को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का फायदा मिला। इसे भी पढ़ें: Rajasthan Urban Local Body Elections 2026 | वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में कांग्रेस का 'सर्जिकल स्ट्राइक', नगर परिषद पर दर्ज की एकतरफा जीत भजन लाल शर्मा ने PM मोदी की लोकप्रियता को श्रेय दिया शर्मा ने BJP के शानदार प्रदर्शन का कुछ श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी को मिले समर्थन और लोकप्रियता से BJP को निकाय चुनावों में फायदा हुआ। शर्मा ने कहा कि 'जेन Z' (नई पीढ़ी) ने प्रधानमंत्री की लीडरशिप और पहलों में काफी दिलचस्पी दिखाई है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के युवा PM द्वारा शुरू की गई योजनाओं की तारीफ कर रहे हैं। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि राजस्थान के निकाय चुनाव भजन लाल शर्मा सरकार के लिए शहरी इलाकों में पहली बड़ी चुनावी परीक्षा हैं। पार्टी के अंदर भी BJP के इस प्रदर्शन पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी, क्योंकि यह पार्टी की संगठनात्मक ताकत और शहरी समर्थन आधार का संकेत होगा। CM शर्मा का 10 शहरों में रोड शो कैंपेन शर्मा नगर निकाय चुनावों के दौरान BJP के मुख्य प्रचारकों में से एक थे। मुख्यमंत्री ने 10 शहरों में रोड शो किए, BJP उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांगा और शहरी मतदाताओं के बीच सीधे प्रचार किया। उनके कैंपेन में BJP के बड़े नेतृत्व को काफी अहमियत दी गई, क्योंकि पार्टी अपने राज्य-स्तरीय कैंपेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़ना चाहती थी। मुख्यमंत्री की सीधी भागीदारी अब चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि BJP कई शहरी निकायों में आगे चल रही है। शर्मा का आखिरी रोड शो प्रचार के आखिरी दिन जयपुर में हुआ। इसे भी पढ़ें: Rajasthan Urban Local Body Election Results | अलवर में BJP को शुरुआती बढ़त, पाली और उदयपुर में कांग्रेस आगे, जानें निकाय चुनाव का पूरा गणित और वोटिंग आंकड़े सभी 10 नगर निगमों में BJP आगे मौजूदा नतीजों और रुझानों से पता चलता है कि BJP सभी 10 नगर निगमों में आगे है। इनमें जयपुर, अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, जोधपुर, कोटा, पाली और उदयपुर शामिल हैं। अब तक मिले आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि BJP कई नगर परिषदों में भी बढ़त बना रही है। जयपुर नगर निगम में, घोषित आंकड़ों के अनुसार 35 वार्डों में से BJP ने 22, कांग्रेस ने 12 और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की। अजमेर में 18 वार्डों के नतीजे घोषित हुए, जिनमें BJP ने नौ, कांग्रेस ने सात और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटें जीतीं। अलवर में घोषित वार्डों में से BJP ने 15, कांग्रेस ने नौ और निर्दलीय उम्मीदवारों ने सात सीटें जीतीं। व्यापक रुझान राजस्थान के शहरी स्थानीय निकायों में BJP के मजबूत प्रदर्शन की ओर इशारा करते हैं। नगर निकाय चुनावों की मतगणना सोमवार को शुरू हुई और नतीजे धीरे-धीरे घोषित किए जा रहे हैं।
Neem Karoli Baba पर बनी फिल्म Hanuman Ansh ने कमाए 250 करोड़
आध्यात्मिक गुरु बाबा नीम करौली के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है। विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म लक्ष्मीनारायण की कहानी है, जो अपनी मां की मृत्यु के बाद ईश्वर की तलाश में आध्यात्मिक यात्रा पर निकलता है। फिल्म के कारोबार पर नजर रखने वाली वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म की कुल कमाई 253.55 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि इसकी नेट कमाई 214.63 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। महज दो करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म सात अगस्त को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। शुरुआत में फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत मिली और पहले दो हफ्तों तक कमाई कम रही। फिर दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद फिल्म की कमाई में तेजी आई। फिल्म में शोभिनव सत्य मुख्य भूमिका में हैं। इसमें विहान शेडगे, चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास पटेल भी नजर आए हैं। बाबा नीम करौली का जन्म करीब 1900 में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के एक गांव में हुआ था और 1973 में उन्होंने अंतिम श्वांस ली थी। उनका कम उम्र में विवाह हुआ था और बाद में वह साधु बन गए थे। उनके अनुयायियों में जूलिया रॉबर्ट्स, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जैसी चर्चित हस्तियां शामिल हैं। कहा जाता है कि स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग भी उत्तराखंड स्थित कैंची धाम आश्रम गए थे। फिल्म की शुरुआत 250 पर्दों पर हुई थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर मिली सफलता के बाद अब यह संख्या बढ़कर 2,000 स्क्रीन तक पहुंच गई है।
छत्तीसगढ़ में बस का सफर हुआ महंगा: किराया बढ़ाने पर सहमति बनी, कैबिनेट लेगी अंतिम फैसला
छत्तीसगढ़ के परिवहन और यात्रा जगत से इस समय आम जनता, यात्रियों और बस संचालकों के लिए एक बहुत ही बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है, जिसने राज्यभर में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है। पिछले काफी समय से डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, स्पेयर पार्ट्स के महंगे होने और बसों के रखरखाव के बढ़ते खर्चों के कारण छत्तीसगढ़ के बस ऑपरेटरों द्वारा लगातार किराया बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी, जिसे लेकर परिवहन विभाग और बस एसोसिएशन के बीच बैठकों का दौर चल रहा था। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों और वार्ताओं के बाद यह सहमति बन चुकी है कि राज्य में बसों के किराए में बढ़ोतरी की जाएगी, हालांकि इस पर आधिकारिक मुहर लगाने के लिए अब अंतिम फैसला राज्य सरकार की आगामी कैबिनेट बैठक में लिया जाएगा। इस बड़े फैसले के बाद बस संचालकों ने राहत की सांस ली है, जिसका सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि 22 सितंबर को छत्तीसगढ़ में बस एसोसिएशन द्वारा जो राज्यव्यापी महाबंद का ऐलान किया गया था, उसे फिलहाल आधिकारिक तौर पर स्थगित कर दिया गया है। इस पूरी खबर से जहां एक तरफ बस मालिकों को अपनी वित्तीय समस्याओं से निपटने की उम्मीद बंधी है, वहीं दूसरी तरफ आम यात्रियों की जेब पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ पड़ने की आशंका पूरी तरह से गहरा गई है। छत्तीसगढ़ की सड़कों पर रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए यह खबर एक बड़ा झटका साबित हो सकती है, क्योंकि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी के लिए बस का किराया बढ़ना बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख देगा।क्यों बढ़ानी पड़ी बस किराए की मांग और क्या थे बस संचालकों के तर्कछत्तीसगढ़ में बस संचालन करने वाले निजी और सार्वजनिक ऑपरेटरों का यह लंबे समय से तर्क रहा है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान व्यावसायिक डीजल के दामों में भारी उछाल आया है, टायर, ट्यूब, मोबिल ऑयल और बसों के बीमा से लेकर अन्य जरूरी उपकरणों की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके अलावा ड्राइवरों, कंडक्टर्स और अन्य स्टाफ का वेतन तथा बसों की फिटनेस से जुड़े खर्चे भी इतने ज्यादा बढ़ चुके हैं कि पुराने किराए के स्ट्रक्चर पर बसों का संचालन करना पूरी तरह से घाटे का सौदा साबित हो रहा था। बस एसोसिएशन का कहना था कि यदि सरकार समय रहते किराए में कम से कम बीस से तीस प्रतिशत तक की वृद्धि नहीं करती है, तो कई रूटों पर बसें चलाना पूरी तरह असंभव हो जाएगा और परिवहन व्यवसाय दिवालिया होने की कगार पर पहुंच जाएगा। बार-बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपने और अपनी मांगों को लेकर कई दौर की वार्ताओं के विफल होने के बाद बस संचालकों ने सड़क पर उतरने और राज्यव्यापी हड़ताल करने का कड़ा रुख अपना लिया था। ऑपरेटरों के इसी कड़े तेवर को देखते हुए परिवहन विभाग के अधिकारियों को मामले की गंभीरता समझ आई और उन्होंने बस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की, जिसमें किराए में संशोधन करने को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन गई। इस सहमति के पीछे मुख्य तर्क यह था कि यदि बसें बंद हो जाती हैं, तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आवागमन पूरी तरह ठप हो जाएगा, जिससे राज्य की जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।22 सितंबर का महाबंद स्थगित होने से यात्रियों और प्रशासन ने ली राहत की सांसबस संचालकों द्वारा छत्तीसगढ़ में 22 सितंबर को एक दिन के पूर्ण महाबंद और चक्काजाम का जो आह्वान किया गया था, उसके कारण प्रशासनिक अमले और आम यात्रियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ तौर पर देखी जा रही थीं। छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्य में यदि अचानक सभी बसें पहिए थाम लेतीं, तो स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, मरीजों और व्यापारियों का दैनिक जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाता और यातायात व्यवस्था चरमरा जाती। परिवहन मंत्री और उच्च अधिकारियों की मध्यस्थता के बाद जब बस एसोसिएशन के साथ सकारात्मक बातचीत हुई और यह आश्वासन दिया गया कि उनकी किराया बढ़ाने की मांग पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा, तब जाकर एसोसिएशन ने अपना आंदोलन टालने का फैसला किया। 22 सितंबर का महाबंद स्थगित होने से राज्य सरकार और प्रशासन ने बड़ी राहत की सांस ली है, क्योंकि किसी भी बड़े आंदोलन या चक्काजाम से कानून-व्यवस्था और आम जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का हमेशा खतरा रहता है। हालांकि, बस ऑपरेटरों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने फिलहाल केवल बातचीत और समझौते के आधार पर अपना महाबंद स्थगित किया है, और यदि सरकार कैबिनेट बैठक में जल्द से जल्द बढ़ा हुआ किराया लागू करने का आधिकारिक आदेश जारी नहीं करती है, तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।कैबिनेट के फैसले पर टिकी सबकी नजरें, आम जनता की जेब पर पड़ेगा सीधा असरअब पूरे मामले की निगाहें राज्य सरकार की आगामी कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई हैं, जहां परिवहन विभाग द्वारा तैयार किए गए नए किराए के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। कैबिनेट की मुहर लगते ही छत्तीसगढ़ के सभी लोकल और लॉन्ग रूट की बसों का नया किराया लागू हो जाएगा, जिसके तहत प्रति किलोमीटर के हिसाब से यात्रियों को अधिक भुगतान करना पड़ेगा। हालांकि सरकार यह संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है कि किराए में उतनी ही बढ़ोतरी की जाए जिससे बस संचालकों का घाटा भी पूरा हो जाए और आम जनता की जेब पर भी अत्यधिक बोझ न पड़े, लेकिन महंगाई के इस दौर में हर छोटी बढ़ोतरी लोगों को चुभती है। छात्र वर्ग, महिलाएं, और रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर किराया बढ़ता है तो उनके मासिक बजट पर इसका बहुत गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों के वे लोग जो पूरी तरह से निजी बसों पर निर्भर हैं, उनके लिए सफर करना और अधिक महंगा हो जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि सरकार किस प्रकार ऑपरेटरों और यात्रियों दोनों के हितों के बीच संतुलन बिठाते हुए एक व्यावहारिक और न्यायसंगत किराया नीति को अंतिम रूप देती है, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के परिवहन ढांचे को सुचारू रूप से चलाने में मददगार साबित हो सके।
PAK पर ICC का डबल अटैक, 11 WTC अंक कटे, भारी जुर्माना भी लगा
पाकिस्तान अब नवंबर में श्रीलंकाई टीम की मेजबानी करेगा. दोनों टीमों के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी. मुकाबले रावलपिंडी और लाहौर में होंगे. पाकिस्तान के लिए यह सीरीज खास तौर पर अहम होगी. इंग्लैंड के खिलाफ करारी हार और स्लो ओवर रेट ने उसके डब्ल्यूटीसी अभियान को बड़ा झटका दिया है.
भारतीय राजनीति और कूटनीति के मंच से एक बहुत ही गर्व से भरा और प्रेरणादायक बयान सामने आया है, जिसने देश के बढ़ते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और मजबूत होते प्रशासनिक ढांचे पर मुहर लगा दी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान देश को संबोधित करते हुए यह बड़ा बयान दिया है कि आज़ाद भारत का गवर्नेंस और विकास मॉडल पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा बन चुका है। मुख्यमंत्री ने विशेष तौर पर इस बात पर जोर दिया कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका और कूटनीतिक कद में जो अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, वह किसी से छिपी नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए दुनिया की बड़ी महाशक्तियों के बीच अपनी एक अलग और सशक्त पहचान बना ली है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) जैसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन की अध्यक्षता करना इस बात का सीधा और स्पष्ट प्रमाण है कि आज दुनिया भारत की लीडरशिप क्वालिटी और उसकी निर्णय लेने की क्षमता पर कितना भरोसा करती है। इस प्रकार के बयानों से न केवल देशवासियों के भीतर राष्ट्रवाद और गर्व की भावना मजबूत होती है, बल्कि यह भी पता चलता है कि कैसे एक मजबूत और स्थिर राजनीतिक इच्छाशक्ति वाले देश में हर एक नागरिक का भविष्य सुरक्षित और प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। मुख्यमंत्री के इस संबोधन के बाद से राजनीतिक और वैचारिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि कैसे भारत अब वैश्विक नीतियों को तय करने में एक अगुआ की भूमिका निभा रहा है।वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते कदम और कूटनीतिक सफलताएंपिछले कुछ दशकों के दौरान अगर दुनिया के नक्शे पर भारत की स्थिति का आकलन किया जाए, तो यह साफ तौर पर दिखाई देता है कि देश ने कूटनीति, अर्थव्यवस्था और विज्ञान के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। कभी विकासशील देशों की श्रेणी में गिने जाने वाले भारत ने आज अपनी आत्मनिर्भरता, डिजिटल क्रांति और मजबूत विनिर्माण क्षेत्रों के दम पर विकसित देशों को भी पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसी बात को रेखांकित करते हुए कहा कि दुनिया के तमाम देश आज भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं क्योंकि हमारे यहां की नीतियां और योजनाएं सीधे तौर पर आम जनमानस के कल्याण को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। चाहे कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर के देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने की बात हो या फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक मंदी जैसे गंभीर मुद्दों पर मजबूत पक्ष रखने की, भारत ने हमेशा एक विश्वगुरु की भूमिका निभाई है। जब कोई देश अपने आंतरिक प्रबंधन को मजबूत करते हुए बाहरी दुनिया में शांति और विकास का संदेश देता है, तो उसकी प्रतिष्ठा स्वतः ही आसमान छूने लगती है। भारत की इसी बढ़ती हुई कूटनीतिक ताकत का परिणाम है कि आज दुनिया का हर बड़ा मंच भारत की सहभागिता के बिना अधूरा माना जाता है, और यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब भारतीय मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहा है।ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता और भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता का लोहाब्रिक्स जैसे बड़े और प्रभावशाली संगठन, जिसमें दुनिया की उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, की अध्यक्षता करना किसी भी राष्ट्र के लिए एक बहुत बड़ा सम्मान और कूटनीतिक उपलब्धि माना जाता है। भारत ने जब-जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे बड़े संगठनों की कमान संभाली है, तब-तब उसने यह साबित कर दिया है कि वह केवल अपने देश के हितों की रक्षा करना नहीं जानता, बल्कि पूरी दुनिया को एक साथ लेकर चलने की कुब्बत रखता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ब्रिक्स की इस अध्यक्षता को भारत की उस नेतृत्व क्षमता का जीवंत प्रतीक बताया जो वसुधैव कुटुंबकम की प्राचीन भारतीय संस्कृति और परंपरा पर आधारित है। आज के इस बहुध्रुवीय विश्व में जहां महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की जंग चल रही है, भारत ने हमेशा गुटनिरपेक्ष और शांतिप्रिय देश के रूप में अपनी छवि को बरकरार रखते हुए निष्पक्ष फैसले लिए हैं। ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार, तकनीकी सहयोग, कृषि, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत ने जिस प्रकार का नेतृत्व प्रदान किया है, उससे सभी सदस्य देशों के बीच एक नया विश्वास पैदा हुआ है। यह इस बात का सबूत है कि बीसवीं सदी के उत्तरार्ध का भारत अब एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास से लैस होकर इक्कीसवीं सदी की वैश्विक व्यवस्था का मार्गदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार है।देश के भीतर समावेशी विकास और जनता के कल्याण का भारतीय मॉडलअंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के साथ-साथ जब हम देश के भीतर चल रही विकास योजनाओं और नीतियों पर नजर डालते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि 'भारत का मॉडल' क्यों दुनिया के लिए इतना खास और अनुकरणीय बनता जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता हमेशा से देश के अंतिम छोर पर बैठे उस गरीब व्यक्ति तक हर मूलभूत सुविधा पहुंचाना रही है, जो दशकों तक विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ था। डिजिटल इंडिया, जनधन योजना, मुफ्त राशन वितरण, पक्के आवास, स्वच्छ भारत अभियान और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं ने देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन स्तर को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य का उदाहरण देते हुए यह भी बताया कि कैसे राज्य सरकारें केंद्र के साथ कदम से कदम मिलाकर गरीब कल्याण और आदिवासी उत्थान के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर उतार रही हैं। जब किसी देश का विकास केवल कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों तक सीमित न रहकर गांव, गरीब, किसान, महिला और युवाओं तक समान रूप से पहुंचता है, तो उसे एक सच्चा और टिकाऊ विकास मॉडल कहा जाता है। दुनिया के कई देश आज इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि इतनी बड़ी आबादी वाले देश में कैसे पारदर्शी तरीके से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाया जा रहा है। भारत का यह समावेशी और कल्याणकारी मॉडल अब ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक ऐसा मार्गदर्शक बन गया है जिसे वे अपने यहां भी लागू करने की इच्छा रखते हैं।भविष्य का भारत और वैश्विक मंच पर नेतृत्व की नई इबारतआज जब भारत आजादी के अमृत काल से आगे बढ़ते हुए भविष्य के लक्ष्यों को साध रहा है, तो देश के प्रत्येक नागरिक के मन में यह विश्वास पैदा हो चुका है कि आने वाला समय भारत का ही है। तकनीकी नवाचार, अंतरिक्ष विज्ञान में चंद्रयान और गगनयान जैसी सफलताओं, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और युवाओं की ऊर्जा ने देश को दुनिया के सबसे गतिशील राष्ट्रों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह बयान केवल एक राजनीतिक भाषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस जमीनी सच्चाई का आईना है जिसे आज पूरी दुनिया महसूस कर रही है। जब देश का नेतृत्व मजबूत, दूरदर्शी और जनता के प्रति समर्पित होता है, तो राष्ट्र निर्माण की राह में आने वाली हर बाधा स्वतः ही समाप्त हो जाती है। ब्रिक्स की अध्यक्षता से लेकर वैश्विक मंचों पर गूंजने वाली भारत की हर एक आवाज इस बात का ऐलान करती है कि अब भारत किसी का अनुकरण करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह खुद दुनिया को नई राह दिखाने वाला एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बन चुका है। आने वाले वर्षों में भारत की यह वैश्विक भूमिका और अधिक मजबूत होगी, जिससे न केवल हमारे देश का मान-सम्मान बढ़ेगा, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
अगले 90 दिन 6 राशियां मालामाल! केतु देंगे बड़ी खुशखबरी
Ketu Gochar 2026: छाया और रहस्यमयी ग्रह 'केतु' का सूर्य की राशि सिंह में प्रवेश हो चुका है, जहां वे अगले 90 दिनों तक विराजमान रहेंगे. ज्योतिष में भले ही केतु को क्रूर ग्रह माना जाता है, लेकिन यह गोचर 6 राशियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होने वाला है. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में.
उत्तर प्रदेश के किसी स्थानीय रिहायशी इलाके से एक ऐसा सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जिसने प्रशासन, पुलिस और वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की सांसें घंटों तक अटकाए रखीं। नशे में धुत एक युवक अचानक अपनी सुधबुध खो बैठा और किसी फिल्मी सीन की तरह सीधे लगभग 150 फीट ऊंचे बिजली के एक खतरनाक हाईटेंशन टावर पर जा चढ़ा। इतनी अधिक ऊंचाई पर बिना किसी सुरक्षा के बैठे उस युवक को देखकर नीचे खड़े लोगों के रोंगटे खड़े हो गए, क्योंकि एक छोटी सी चूक या संतुलन बिगड़ने से उसकी जान जा सकती थी। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासनिक अमला तुरंत मौके पर दौड़ पड़ा और इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई। करीब 6 घंटे तक चले इस लंबे और तनावपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस अधिकारियों और युवक के परिवार वालों ने लगातार उसे समझा-बुझाकर नीचे उतारने की कोशिश जारी रखी। आखिरकार लंबी मान-मव्वल और प्रशासनिक सूझबूझ के बाद वह शराबी युवक टावर से सुरक्षित नीचे उतर आया, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली। इस अजीबोगरीब और खतरनाक घटना ने एक तरफ जहां लोगों को हंसाया और हैरान किया, वहीं दूसरी तरफ शराब के नशे में इस तरह की खतरनाक हरकतें करने वाले लोगों की मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।शराब के नशे में धुत युवक का खौफनाक कारनामा और 150 फीट की ऊंचाईघटना की शुरुआत तब हुई जब अचानक एक सिरफिरे युवक ने शराब के नशे में चूर होकर अपनी जिंदगी को दांव पर लगाने का यह खतरनाक फैसला किया। चिलचिलाती धूप या अंधेरे के बीच जब वह बिना किसी डर के उस भारी-भरकम हाईटेंशन टावर की सीढ़ियां चढ़ता हुआ सबसे ऊपरी छोर पर पहुंच गया, तो नीचे खड़े राहगीरों के होश उड़ गए। हाईटेंशन बिजली के टावर आम तौर पर बहुत अधिक वोल्टेज वाले तारों से जुड़े होते हैं, जहां से गुजरने वाली विद्युत धारा किसी भी इंसान को पलभर में राख बना सकती है, हालांकि गनीमत यह रही कि उस समय उस लाइन का लोड या स्थिति ऐसी थी कि एक बड़ा हादसा टल गया। युवक टावर की सबसे ऊंची चोटी पर बैठकर कभी हाथ हिला रहा था तो कभी अजीबोगरीब हरकतें कर रहा था, जिससे नीचे खड़े उसके परिजन बार-बार रोकर उसे नीचे उतरने की गुहार लगा रहे थे। इस तरह के नशे में किए गए कारनामे न केवल उस व्यक्ति की अपनी जान के लिए खतरा बनते हैं, बल्कि पुलिस और प्रशासन के अमले को भी घंटों तक पसीना बहाने पर मजबूर कर देते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस तरह की ऊंचाई पर चढ़ने की हिम्मत कोई सामान्य व्यक्ति होश की हालत में कभी नहीं कर सकता, और यह सब कुछ केवल उस भारी नशे का असर था जिसके कारण उसे अपनी जान की परवाह भी नहीं रही।6 घंटे तक चला हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ड्रामा और पुलिस की सूझबूझजैसे ही इस बात की खबर स्थानीय थाने और पुलिस कंट्रोल रूम को मिली, तुरंत पुलिस बल, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और बचाव दल के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। टावर के चारों ओर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और नीचे गद्दे व सुरक्षा जाल बिछाने की तैयारियां शुरू कर दी गईं ताकि यदि युवक नीचे गिर भी जाए तो उसकी जान बचाई जा सके। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए उस युवक से लगातार संवाद स्थापित करने की कोशिश की और उसे भरोसा दिलाया कि नीचे आने पर उसके साथ कोई सख्ती नहीं की जाएगी, बल्कि उसकी हर समस्या का समाधान किया जाएगा। स्थानीय भीड़ में खड़े लोग अपने मोबाइल फोन से इस लाइव ड्रामे को रिकॉर्ड करने में लगे हुए थे, जिससे प्रशासन को भीड़ को नियंत्रित करने में भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। लगभग 6 घंटे तक चले इस मानसिक तनाव और थका देने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान हर पल यह डर सता रहा था कि कहीं नशे की हालत में युवक का पैर न फिसल जाए और कोई अनहोनी न हो जाए। पुलिस की इस टीम ने जिस संयम, धैर्य और समझदारी का परिचय दिया, उसकी तारीफ वहां मौजूद हर आम नागरिक ने की, क्योंकि इस तरह के मामलों में जरा सी जल्दबाजी किसी की भी जान ले सकती थी।परिवार की गुहार और सुरक्षित नीचे उतरने के बाद राहत की सांसइस पूरे छह घंटे लंबे नाटक का सबसे भावुक और निर्णायक मोड़ तब आया जब पुलिस ने युवक के बुजुर्ग माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को मौके पर बुलाकर उसके सामने माइक पर बोलने के लिए कहा। परिवार वालों के आंसुओं, गिड़गिड़ाने और बार-बार नीचे उतरने की मिन्नतों का असर आखिरकार उस शराबी युवक पर हुआ और उसने धीरे-धीरे टावर से नीचे उतरना शुरू किया। जैसे ही उसने टावर के निचले हिस्सों को छुआ और जमीन पर पैर रखा, वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और राहत दल ने तुरंत उसे अपनी गिरफ्त में लिया और सुरक्षित वाहन में बिठाकर अस्पताल की तरफ रवाना किया। परिवार ने चैन की सांस ली कि उनका बेटा सुरक्षित वापस लौट आया है, वरना छह घंटे तक चली इस सांस रोक देने वाली कशमकश ने सबको झकझोर कर रख दिया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर किस परिस्थिति में उस युवक ने इतना बड़ा कदम उठाया और क्या उसके पीछे कोई पारिवारिक कलह या अन्य मानसिक तनाव था। इस घटना ने एक बार फिर से इस समाज में बढ़ती नशे की लत और उसके घातक परिणामों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है, जो हंसते-खेलते परिवारों को पलभर में बर्बादी के कगार पर ला खड़ा करती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश ‘सेवा संकल्प अभियान‘ चलाया जाएगा। ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर के मध्य 12 अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए 71 हजार से अधिक बूथों के लाभार्थियों तक ...
तेजस्वी यादव के ‘पावर सेंटर’ बनने के बाद से आरजेडी के लिए एमएलसी चुनाव बने एक कठिन चुनौती
बिहार की सियासत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सत्ता समीकरणों और राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने क्षेत्रीय दलों के भीतर की गुटबाजी को सतह पर ला दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर जब से पार्टी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मुख्य रूप से ‘पावर सेंटर’ के रूप में अपनी कमान संभाली है और संगठन के सभी बड़े फैसले अपने हाथ में लिए हैं, तब से पार्टी के सामने विधान परिषद यानी एमएलसी (MLC) चुनाव एक बेहद कठिन और पेचीदा चुनौती बन गए हैं। किसी भी राजनीतिक दल के भीतर जब युवा नेतृत्व का दौर आता है, तो पुरानी शैली के नेताओं और नई कार्यशैली के बीच एक वैचारिक व रणनीतिक टकराव होना स्वाभाविक माना जाता है, और आरजेडी में भी पिछले चार साल के इस छोटे से अंतराल के दौरान एमएलसी चुनाव के टिकट वितरण व प्रबंधन को लेकर कम से कम तीन बड़े और गंभीर राजनीतिक विवाद खुलकर सामने आ चुके हैं। इन विवादों ने न केवल पार्टी के आंतरिक अनुशासन पर सवालिया निशान खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे पार्टी के भीतर सांगठनिक निर्णयों को लेकर पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं तथा नए नेतृत्व के बीच खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व कौशल के लिए इन चुनौतियों से निपटना और पार्टी को एकजुट रखना आने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है, क्योंकि विधान परिषद जैसे उच्च सदन के चुनाव पार्टी की वैचारिक पकड़ और आर्थिक-राजनीतिक प्रबंधन की मजबूत परीक्षा लेते हैं।युवा नेतृत्व और पुरानी राजनीतिक शैली के बीच बढ़ता सांगठनिक संघर्षराजद जैसी पारंपरिक पार्टी में, जो दशकों से सामाजिक न्याय और एम-वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण के बूते अपनी राजनीति करती आई है, अचानक से कॉरपोरेट स्टाइल या अत्यधिक चुनिंदा फैसलों वाली कार्यशैली को लागू करना आसान काम नहीं होता है। तेजस्वी यादव के मुख्य ‘पावर सेंटर’ बनने के बाद पार्टी के अंदर यह संदेश गया कि अब टिकटों का आवंटन और सांगठनिक पदों पर नियुक्तियां पूरी तरह से निष्पक्षता और जमीनी मेहनत के आधार पर होंगी, लेकिन जमीनी हकीकत में कई बार इसके विपरीत परिणाम देखने को मिले। जब पुराने और दिग्गज नेताओं की अनदेखी करके नए या उन चेहरों को प्राथमिकता दी जाने लगी जो युवा नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं, तो पार्टी के भीतर असंतोष का सुलगता हुआ शोला बाहर आने में देर नहीं लगी। एमएलसी चुनाव, जो कि अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय निकायों या विधानसभा के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा लड़े जाते हैं और जिनमें भारी-भरकम संसाधनों की भी आवश्यकता होती है, वहां टिकट वितरण को लेकर हुई गफलत ने आरजेडी के आंतरिक मामलों को मीडिया की सुर्खियों में ला दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक धड़ा लगातार यह महसूस करने लगा कि फैसले लेते वक्त उनके अनुभवों और सुझावों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे संगठन के भीतर एक मानसिक दूरी बनती चली गई और आपसी विश्वास में कमी आई।चार साल के भीतर एमएलसी चुनाव से जुड़े तीन बड़े विवादों की अंदरूनी कहानीपिछले चार वर्षों के राजनीतिक सफर पर अगर गहरी नजर डाली जाए, तो आरजेडी के भीतर एमएलसी चुनावों के दौरान कम से कम तीन ऐसे प्रमुख विवाद खड़े हुए जिन्होंने पार्टी की किरकिरी कराई और शीर्ष नेतृत्व को असहज स्थिति में ला खड़ा किया। पहला विवाद टिकट बंटवारे के दौरान जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को पूरी तरह से दरकिनार करने के आरोपों को लेकर था, जहां पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ताओं ने खुलकर आलाकमान के खिलाफ बगावत का झंडा उठा लिया था। दूसरा विवाद चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग और पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ भीतरघात से जुड़ा था, जिसमें यह बात सामने आई कि पार्टी के भीतर ही कुछ ताकतें अपने ही उम्मीदवार को हरने के लिए अंदरखाने साजिश रच रही थीं। और तीसरा तथा सबसे ताजा विवाद तब सामने आया जब विधान परिषद चुनाव के टिकटों के चयन को लेकर कुछ ऐसे नाम सामने आए जिन पर विरोधी दलों ने भाई-भतीजावाद और धनबल के इस्तेमाल के गंभीर आरोप मढ़े, जिससे पार्टी की सेक्युलर और सामाजिक न्याय की छवि को धक्का लगा। इन तीनों ही मामलों में तेजस्वी यादव को खुद आगे आकर डैमेज कंट्रोल करना पड़ा और कई नाराज नेताओं को मनाना पड़ा, लेकिन इन विवादों ने यह साबित कर दिया कि पार्टी की कमान संभालने के बाद से चुनावी प्रबंधन में अभी भी कई बड़ी खामियां मौजूद हैं जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है।आगामी चुनावों से पहले राजद के लिए सांगठनिक एकता और अनुशासन की बड़ी परीक्षाविधान परिषद के ये चुनाव भले ही सीधे आम जनता के बीच नहीं लड़े जाते हैं, लेकिन इनका प्रभाव पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक तंत्र पर बहुत गहरा पड़ता है, क्योंकि ये सदन राज्य के सबसे बुद्धिजीवी और अनुभवी मंचों में गिने जाते हैं। यदि पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर बार-बार विवाद खड़े होंगे और वरिष्ठ नेताओं के साथ समन्वय की कमी बनी रहेगी, तो इसका सीधा असर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ेगा। बिहार की राजनीति में आने वाले बड़े चुनावी दंगल को जीतने के लिए केवल युवा चेहरे और रैलियों की भीड़ काफी नहीं होती, बल्कि इसके लिए एक मजबूत, अनुशासित और एकजुट सांगठनिक मशीनरी की आवश्यकता होती है जो हर मोर्चे पर सटीक रणनीति के साथ काम कर सके। तेजस्वी यादव के सामने इस समय सबसे बड़ी और मुख्य चुनौती यही है कि वे पार्टी के पुराने दिग्गजों और युवा विंग के बीच एक बेहतर सामंजस्य बिठाएं ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों की पुनरावृत्ति न हो सके। यदि वे इन आंतरिक अंतर्विरोधों को समय रहते सुलझाने में सफल हो जाते हैं, तो आरजेडी एक मजबूत और आक्रामक विकल्प के रूप में उभर सकती है, अन्यथा इस प्रकार की अंदरूनी कलह पार्टी के बड़े सपनों को बीच रास्ते में ही तोड़ सकती है।
संदेशखाली: कोर्ट के आदेश पर पांच साल बाद कब्र से निकले भाजपा कार्यकर्ता के अवशेष; 2021 हिंसा से जुड़ा मामला----Sandeshkhali BJP Worker Case: Skeletal Remains Exhumed Five Years After Alleged Post-Poll Violence
सऊदी बॉर्डर से कितने दूर हैं हूती विद्रोही? मैप में समझें कैसे बढ़ रहा अरब मुल्क के लिए खतरा
हूती विद्रोही सऊदी अरब की सीमा से सटी हुई उत्तरी यमन में बैठे हैं. हाल में लाल सागर तट पर उनके कब्जे और मिसाइल हमलों से सऊदी के लिए खतरा बढ़ गया है. तेल मार्ग और सीमा सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
ब्रिक्स समिट 2026: बौखला गए तारिक रहमान, बांग्लादेश का पीएम मोदी को संदेश
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स समिट के लिए दिल्ली नहीं आए थे. तब हुमायूं कबीर ने कहा था कि बांग्लादेश के पीएम को आमंत्रित नहीं किया गया. अब बांग्लादेश ने भारत से रिश्तों के बारे में नया बयान दिया है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई: राजनाथ सिंह
नई दिल्ली, नई दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल समापन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है।
गोंडा-अयोध्या-प्रतापगढ़... यूपी में तीन हत्याकांड से चढ़ा सियासी पारा!
उत्तर प्रदेश में गोंडा, अयोध्या और प्रतापगढ़ में हुई तीन हत्याओं ने 'ओबीसी बनाम सवर्ण' की सियासत को हवा दी जा रही है. पीड़ित परिवारों के समर्थन में उतरे विपक्षी दलों ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे आगामी 2027 के चुनाव से पहले राज्य का सियासी तापमान और पार्टी की टेंशन बढ़ गई है.
पत्नी का सिर काटकर फ्रिज में रखा, आरोपी ने लगा दी पुलिस वाहन से छलांग; मौके पर ही मौत
गुवाहाटी में पत्नी का सिर काटकर फ्रीज में रखने वाले रामानुज गोस्वामी की भी मौत हो गई है। आरोपी ने पुलिस वाहन से छलांग लगा दी थी। गंभीर चोट लगने की वजह से उसकी मौत हो गई।
Disha Salian Case: दिशा सालियान केस में CBI ने दर्ज की FIR, अब खुलेगा मौत का राज?
बता दें कि, सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की आठ जून 2020 को उत्तरी मुंबई के मलाड की एक बिल्डिगं की 14वीं मंजिल से गिरने के कारण मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने दुर्घटना वश मौत का मामला दर्ज किया था।
काशी विश्वनाथ मंदिर के CEO विश्वभूषण मिश्रा अपने पद से हटाए गए
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं विशिष्ट क्षेत्र वाराणसी विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा को पद से हटा दिया गया है. उन्हें अब उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में उपसचिव की जिम्मेदारी दी गई है.
बंगाल में गैर मान्यता प्रप्त मदरसों पर शुभेंदु सरकार का बड़ा एक्शन
शुभेंदु सरकार ने 252 ग़ैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया है. पश्चिम बंगाल सरकार ने मदरसों के इंफ्रास्ट्रक्चर, मान्यता की स्थिति और मैनेजमेंट सिस्टम की जांच के लिए अहम कदम उठाए हैं. वेरिफिकेशन के पहले चरण के बाद 252 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया गया है. साथ ही, प्रशासन ने करीब 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जिन मदरसों को बंद करने का नोटिस मिला है, उनमें से ज़्यादातर 'खारिजी मदरसे' हैं.
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जमकर निशाना साधा है।। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस ने देश के हित में कुछ नहीं किया, केवल बातें कीं। सीएम ने राहुल ...
टीम इंडिया के लिए सुपर संडे... हॉकी-क्रिकेट में धमाका, धीरज भी छाए
13 सितंबर 2026 भारतीय खेल प्रेमियों के लिए यादगार रहा. जूनियर एशिया कप में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने खिताब जीतकर डबल धमाल किया. वहीं महिला एशिया कप के फाइनल में भारत ने श्रीलंका को 72 रनों से हराकर 8वीं बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाया. पुरुष क्रिकेट टीम ने भी अफगानिस्तान को पहले टी20 में 7 विकेट से शिकस्त दी. इसके अलावा धीरज बोम्मादेवरा ने आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया. यानी एक ही दिन भारत ने हॉकी, क्रिकेट और तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन कर सुपर संडे को यादगार बना दिया.
दरगाहों-मस्जिदों में पक्षियों को दाना डालने पर रोक से कश्मीर में बवाल, वक्फ बोर्ड ने बदला आदेश
जम्मू कश्मीर में वक्फ बोर्ड की ओर से दरगाहों और वक्फ के अधीन धार्मिक स्थलों में पक्षियों को दाना डालने तथा खाद्य सामग्री बांटने पर जारी निर्देश ने सोमवार को कश्मीर में विवाद खड़ा कर दिया। बोर्ड की अध्यक्ष दरख्शां अंद्राबी द्वारा जारी आदेश के बाद ...
एक ही पते से बने 17 पासपोर्ट, मध्य प्रदेश में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा
मध्य प्रदेश के डबरा और भोपाल में STF ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनाने वाले बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है. जांच में पता चला कि 17 फर्जी पासपोर्ट एक ही कॉलोनी के पते से और 40 पासपोर्ट भोपाल के बौद्ध मठ के पते से बनाए गए. संदिग्धों ने इन पासपोर्ट का उपयोग थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान की यात्राओं में किया. STF ने इस मामले में दो आरोपियों को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया है.
'इंडिया गठबंधन में फूट डालने की कोशिश': केरलम के पूर्व सीएम के खिलाफ कार्रवाई पर भड़के विधायक, भाजपा को घेरा- Attempt to sow discord in INDIA alliance UDF MLAs furious over action against former Keralam CM Vijayan
लंदन में पहली गंगा आरती, टेम्स नदी में नहीं डाली गई पूजा सामग्री
London Ganga Aarti: लंदन में पहली बार टेम्स नदी के किनारे गंगा आरती हुई. मंत्र, शंखनाद और दीपों के बीच दिखी वाराणसी के घाटों जैसी झलक, जानें आयोजन में क्या रहा खास.
सनातन धर्म में गणेश उत्सव के ठीक एक दिन बाद यानी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है, जो मुख्य रूप से सप्तर्षियों को समर्पित एक बेहद पवित्र व्रत है। इस विशेष दिन पर देश भर की महिलाएं अपने द्वारा जाने-अनजाने में हुई किसी भी प्रकार की अशुद्धि या मानसिक व शारीरिक गलतियों से मुक्ति पाने के लिए उपवास रखती हैं और सात महान ऋषियों यानी सप्तर्षियों की विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सप्तर्षियों ने सृष्टि के कल्याण और ज्ञान के प्रसार के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था, इसलिए उनका स्मरण करना और उनकी आराधना करना मनुष्य के जीवन के समस्त पापों और विकारों को दूर कर देता है। ऋषि पंचमी का यह व्रत महिलाओं के लिए विशेष रूप से फलदायी माना गया है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से महिलाओं को रजोधर्म से जुड़ी अनजाने में हुई अशुद्धियों के दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति व आरोग्यता का आगमन होता है। इस वर्ष 2026 में ऋषि पंचमी की तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के मन में तमाम तरह के सवाल हैं, जिनका समाधान हम इस विस्तृत लेख के माध्यम से करने जा रहे हैं, जिसमें आपको व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा की पूरी प्रक्रिया और इसके ऐतिहासिक व आध्यात्मिक महत्व के बारे में संपूर्ण जानकारी मिलेगी।वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी के रूप में मनाया जाता है, और इस वर्ष 2026 में यह तिथि श्रद्धालुओं के लिए बहुत खास रहने वाली है। पंचांग की गणना के अनुसार इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ और उसका समापन किस दिन हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी होना हर व्रतधारी के लिए बेहद आवश्यक है ताकि वे सही समय पर अनुष्ठान संपन्न कर सकें। वर्ष 2026 में ऋषि पंचमी का व्रत किस दिन रखा जाएगा और इसका सबसे उत्तम पूजा मुहूर्त क्या रहेगा, इसे लेकर ज्योतिषीय आकलन स्पष्ट करते हैं कि गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन यानी 15 सितंबर 2026 को ऋषि पंचमी का व्रत मनाया जाएगा। पूजा के लिए सबसे अनुकूल और शुभ मुहूर्त सुबह के समय रहेगा, क्योंकि सनातन परंपराओं के अनुसार ऋषि पंचमी की पूजा सूर्योदय के बाद और मध्याह्न काल से पहले करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पूजा का संकल्प लिया जाता है और पूरे दिन नियमों का पालन करते हुए सप्तर्षियों का ध्यान किया जाता है। पंचांग के जानकारों का मानना है कि इस शुभ मुहूर्त में पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।ऋषि पंचमी के दिन मुख्य रूप से जिन सात महान ऋषियों की पूजा की जाती है, वे हमारे ब्रह्मांड के मार्गदर्शक और सप्तऋषि कहलाते हैं, जिनमें कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ शामिल हैं। इन सभी ऋषियों ने वेदों, पुराणों और धर्मग्रंथों की रचना करके मानव समाज को ज्ञान का प्रकाश दिखाया है और जीने की सही राह सिखाई है। धार्मिक ग्रंथों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि प्राचीन काल में महिलाओं के लिए यह व्रत विशेष रूप से अनिवार्य बताया गया है ताकि वे अपने दैनिक जीवन में मासिक धर्म या अन्य कारणों से होने वाली अशुद्धियों के प्रभावों से मानसिक और शारीरिक रूप से शुद्ध हो सकें। हालांकि, आज के समय में केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी अपने जीवन में ज्ञान, संयम और अनुशासन की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखते हैं। ऋषि पंचमी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह हमें हमारे प्राचीन ऋषियों के योगदान की याद दिलाता है और हमें उनके बताए गए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दिन व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन अन्न ग्रहण नहीं करते हैं और केवल फलाहार या एक समय बिना जुताई किए उपजाए गए अनाज का सेवन करते हैं, जिससे शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है।ऋषि पंचमी के दिन की जाने वाली पूजा विधि बेहद सरल लेकिन उतनी ही सख्त नियमों पर आधारित होती है, जिसका पालन करना हर व्रतधारी के लिए जरूरी होता है। पूजा की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण किए जाते हैं और घर के पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र किया जाता है। इसके बाद पूजा के स्थान पर एक साफ चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाया जाता है और सप्तर्षियों की तस्वीर या प्रतीक रूप में सुपारी या कलश की स्थापना की जाती है। सप्तर्षियों का आह्वान करते हुए कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और ऋषि वशिष्ठ के नामों का उच्चारण कर उनका ध्यान किया जाता है। पूजा के दौरान सप्तर्षियों को रोली, अक्षत, कलावा, धूप, दीप, नैवेद्य, फल और फूल अर्पित किए जाते हैं, विशेष रूप से उन्हें सफेद और पीले पुष्प बेहद प्रिय माने जाते हैं। पूजा के अंत में ऋषि पंचमी की कथा का पाठ किया जाता है या ध्यानपूर्वक सुना जाता है, जिसके बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है। कथा समाप्त होने के बाद आरती की जाती है और भगवान से अपने द्वारा अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना की जाती है, जिससे पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है और साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।किसी भी व्रत की सफलता उसके नियमों के कड़ाई से पालन करने पर निर्भर करती है और ऋषि पंचमी का व्रत भी इसके अपवाद नहीं है, इसमें कुछ विशेष सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। इस व्रत के दौरान खान-पान को लेकर बहुत सख्त नियम बनाए गए हैं, जिसके तहत व्रतियों को ऐसा भोजन करना होता है जो सीधे तौर पर जमीन जोतकर न उगाया गया हो। यही कारण है कि इस दिन किसान द्वारा हल से जोती गई भूमि का अन्न जैसे कि चावल या गेहूं खाने की मनाही होती है, और लोग केवल समक के चावल, दूध, फल और सिंघाड़े के आटे से बनी चीजों का ही सेवन करते हैं। इसके अलावा व्रत के दिन किसी भी प्रकार के कटु वचन बोलने, क्रोध करने या नकारात्मक विचार लाने से बचना चाहिए और पूरा दिन भगवान के स्मरण में बिताना चाहिए। महिलाओं को इस दिन विशेष रूप से अपनी वाणी और आचरण पर संयम रखना चाहिए तथा पूजा के सभी नियमों का पालन करना चाहिए। इस प्रकार जो भी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा, नियम और निष्ठा के साथ ऋषि पंचमी का यह व्रत संपन्न करता है, उसे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, मानसिक शांति और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
'बारिश आ गई, कपड़े उतारो', सास की बात सुन भड़की बहू, फिर...
बारिश आने पर सास ने बहू से कहा कि कपड़े उतार कर अंदर रख दो, तो बहू आग बबूला हो गई. गुस्से में बहू ने सास को जमीन पर पटका और गला दबाया, जिससे 65 साल की सास (ओमवती ) की मौत हो गई. अब पुलिस मामले की जांच कर रही है.
हरतालिका तीज पर करें इस पौराणिक कथा का पाठ, वैवाहिक जीवन में बनी रहेगी सुख-समृद्धि
हरतालिका तीज का पावन पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए साल के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है, जिसमें माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान के साथ उपासना की जाती है। इस विशेष दिन पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। इस व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा का बहुत बड़ा महत्व है, जिसे हर व्रती महिला को पूजा के दौरान जरूर सुनना या पढ़ना चाहिए।#हरतालिका तीज व्रत कथा और उसका पौराणिक महत्वपौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर जंगल में कठिन तपस्या की थी। उन्होंने अन्न और जल का त्याग करके केवल सूखे पत्तों को खाकर साधना की थी, जिससे उनकी स्थिति बहुत नाजुक हो गई थी। माता पार्वती के पिता हिमालय अपनी पुत्री की इस कठिन तपस्या को देखकर बहुत चिंतित थे और वे उनका विवाह भगवान विष्णु से तय करना चाहते थे। जब माता पार्वती को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपनी सखियों से इस बात की चर्चा की और अपनी व्यथा सुनाई। इसके बाद उनकी सखियां उन्हें एक गुप्त और घने जंगल में ले गईं ताकि उनके पिता उन्हें ढूंढ न सकें। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने रेत से एक शिवलिंग का निर्माण किया और पूरी रात जागरण करते हुए भगवान शिव की आराधना की। उनकी इस कठोर तपस्या और अचल भक्ति से प्रसन्न होकर भोलेनाथ प्रकट हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।#भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया व्रत का पूरा लाभइस व्रत की कथा के दौरान जब माता पार्वती ने भगवान शिव से इस उपवास के फल और महत्व के बारे में पूछा, तब भोलेनाथ ने विस्तार से इसके लाभ बताए थे। भगवान शिव ने स्पष्ट किया कि जो भी सुहागिन स्त्री या कन्या पूरी निष्ठा, श्रद्धा और विधि-विधान के साथ हरतालिका तीज का व्रत रखती है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शिवजी ने बताया कि इस व्रत को करने वाली महिलाओं को इस लोक में सभी प्रकार के भौतिक सुख और ऐश्वर्य मिलते हैं तथा अंत में उन्हें शिवलोक में स्थान प्राप्त होता है। भगवान शिव ने यह भी कहा कि इस व्रत के प्रभाव से पति-पत्नी के बीच का आपसी प्रेम और विश्वास हमेशा अटूट रहता है तथा परिवार में कभी भी क्लेश या धन-धान्य की कमी नहीं होती है। इस व्रत को करने से अनजाने में हुए पाप भी नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।#व्रत के दौरान किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यानहरतालिका तीज का व्रत अन्य व्रतों की तुलना में इसलिए भी कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग किया जाता है। व्रत के नियमों के अनुसार एक बार यदि यह उपवास शुरू कर दिया जाए, तो इसे बीच में छोड़ा नहीं जाता है। हर साल इसे पूरी नियम-निष्ठा के साथ निरंतर रखना पड़ता है। पूजा के समय शाम के वक्त प्रदोष काल में माता पार्वती और भगवान शिव की षोडशोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही रात्रि में जागरण करना और भजन-कीर्तन करना इस व्रत का मुख्य अंग माना गया है। अगले दिन सूर्योदय के बाद स्नान करने और पूजा-पाठ संपन्न करने के बाद ही व्रती महिलाओं को अन्न और जल ग्रहण करके अपना व्रत खोलना चाहिए।
प्रेमिका से मिलने पहुंचा शादीशुदा प्रेमी, परिजनों ने उल्टा लटकाकर पीटा
सहारनपुर के कासिमपुर गांव में प्रेमिका से मिलने पहुंचे शादीशुदा युवक शहजाद उर्फ इलियास के साथ मारपीट का मामला सामने आया है. आरोप है कि युवती के परिजनों ने उसे पकड़कर रस्सी से बांधकर उल्टा लटका दिया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले योग्य उम्मीदवारों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खबर सामने आई है। बिहार के ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University, Rajgir) ने विभिन्न विभागों में टीचिंग फैकल्टी के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि जिन उम्मीदवारों ने यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा पास नहीं की है, वे भी इसके लिए आवेदन करने के योग्य हैं, बशर्ते वे विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित अन्य उच्च शैक्षणिक योग्यताएं और रिसर्च का अनुभव रखते हों। आवेदन करने की अंतिम तिथि कल यानी 15 सितंबर 2026 है, इसलिए इच्छुक और पात्र उम्मीदवारों के पास अब बहुत ही कम समय बचा है।अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर (बिहार) द्वारा निकाली गई इस फैकल्टी वैकेंसी के तहत प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। यह उन स्कॉलर्स के लिए एक सुनहरा अवसर है जो ग्लोबल एकेडमिक माहौल में पढ़ाने और रिसर्च करने की इच्छा रखते हैं। इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के जरिए उम्मीदवार भारत के साथ-साथ विदेशों से भी आवेदन कर सकते हैं, क्योंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी है जहाँ भारतीय नागरिकों के अलावा ओसीआई (OCI), पीआईओ (PIO) और विदेशी नागरिक भी अप्लाई कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि आवेदन ऑनलाइन माध्यम से गूगल फॉर्म (Google Form) के जरिए स्वीकार किए जा रहे हैं, और प्रत्येक पद के लिए 500 रुपये का आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है।नालंदा यूनिवर्सिटी के इस नोटिफिकेशन के अनुसार, कुल 6 प्रमुख और विशिष्ट शैक्षणिक विभागों (Schools/Departments) के लिए योग्य शिक्षकों की तलाश की जा रही है। इन विभागों में बुद्धिस्ट स्टडीज (Buddhist Studies), हिंदू स्टडीज (Hindu Studies), फिलासफी (Philosophy), संस्कृत (Sanskrit), डेटा साइंस और एआई (Data Science and AI), तथा साइंस टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी स्टडीज (Science, Technology & Policy Studies) शामिल हैं। इन सभी विभागों को मिलाकर प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के अलग-अलग पद बांटे गए हैं। उदाहरण के लिए, डेटा साइंस और एआई तथा साइंस टेक डिपार्टमेंट्स में आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष पद सृजित किए गए हैं, जो एआई सर्च और आधुनिक तकनीकी युग की मांग के अनुकूल हैं।अक्सर उच्च शिक्षा संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए यूजीसी नेट या स्लेट (SLET/SET) पास होना अनिवार्य माना जाता है, लेकिन नालंदा यूनिवर्सिटी के इस नोटिफिकेशन ने उन विद्वानों को बड़ी राहत दी है जिनके पास पीएचडी (Ph.D.) या पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च की डिग्री है। पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यताएं इस प्रकार हैं:प्रोफेसर पद के लिए: उम्मीदवार के पास संबंधित या सम्बद्ध विषय में पीएचडी या पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च की डिग्री होनी चाहिए। मास्टर्स लेवल पर कम से कम 60% अंकों के साथ उत्कृष्ट अकादमिक रिकॉर्ड होना अनिवार्य है। इसके अलावा, एसोसिएट प्रोफेसर या समकक्ष पद पर 3 से 7 साल का शिक्षण और रिसर्च अनुभव होना जरूरी है, साथ ही प्रतिष्ठित सहकर्मी-समीक्षित (peer-reviewed) पत्रिकाओं में कम से कम 10 रिसर्च पेपर या पुस्तकें प्रकाशित होनी चाहिए।एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए: मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में पीएचडी या पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च, मास्टर्स में 60% अंक, और 3 से 5 साल का टीचिंग व रिसर्च अनुभव आवश्यक है। इसके साथ ही न्यूनतम 8 पब्लिकेशन या रिसर्च पेपर होने चाहिए।असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए: संबंधित या प्रासंगिक विषय में पीएचडी या पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च डिग्री, और मास्टर डिग्री स्तर पर न्यूनतम 60% (या कुछ पदों के लिए निर्धारित उच्च मानक) अंक होने चाहिए। इसके अलावा कम से कम 3 से 5 रिसर्च पब्लिकेशन या पुस्तकें होना अनिवार्य है। इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी अनिवार्य यूजीसी नेट परीक्षा की बाध्यता का उल्लेख नहीं किया गया है, जो इसे पारंपरिक यूनिवर्सिटी नौकरियों से अलग बनाती है।नालंदा यूनिवर्सिटी चूँकि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का संस्थान है, इसलिए यहाँ मिलने वाला वेतनमान भी बेहद आकर्षक और वैश्विक मानकों के अनुरूप है। वार्षिक वेतन पैकेज अमेरिकी डॉलर (USD) के आधार पर निर्धारित किया गया है:प्रोफेसर पद के लिए: 30,000 अमेरिकी डॉलर से 45,000 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष।एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए: 20,000 अमेरिकी डॉलर से 35,000 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष।असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए: 15,000 अमेरिकी डॉलर से 25,000 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष।यह सैलरी स्ट्रक्चर भारतीय मुद्रा के अनुसार काफी उच्च है, जिससे देश-विदेश के बेहतरीन प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं को इस संस्थान से जुड़ने का अवसर प्राप्त होता है।नालंदा विश्वविद्यालय में फैकल्टी पदों के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शिता और योग्यता पर आधारित है। सबसे पहले प्राप्त होने वाले सीवी (CV) और एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) की स्क्रीनिंग की जाती है। इसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को सेमिनार प्रेजेंटेशन, लिखित परीक्षा (यदि आवश्यक समझी जाए) और पर्सनल इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया जाता है।चूंकि आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 है, इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे तुरंत नालंदा यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट nalandauniv.edu.in पर जाएं, वहां उपलब्ध विस्तृत विज्ञापन को ध्यान से पढ़ें, और दिए गए गूगल फॉर्म लिंक के माध्यम से अपना आवेदन तुरंत सबमिट करें। आवेदन के साथ अपने सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पीएचडी डिग्री, अनुभव प्रमाण पत्र और रिसर्च पब्लिकेशन के दस्तावेज तैयार रखें। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा, इसलिए बिना किसी देरी के आज ही अपना आवेदन पूरा करें।
काउंसलिंग या रिजल्ट के बाद नहीं बदल सकते कैटेगरी, EWS आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली नीट यूजी (NEET UG) परीक्षा को लेकर छात्रों के बीच हमेशा से ही जबरदस्त उत्साह और तनाव दोनों का माहौल रहता है। इस बीच देश के एक प्रमुख उच्च न्यायालय ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण के लाभ को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट फैसला सुनाया है। कई बार छात्र परीक्षा के फॉर्म भरते समय जल्दबाजी में या सही जानकारी न होने के कारण जनरल या अन्य श्रेणियों में आवेदन कर देते हैं और बाद में काउंसलिंग के समय या रिजल्ट आने के बाद ईडब्ल्यूएस कोटे का लाभ लेने की कोशिश करते हैं। अदालत के इस नए फैसले के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि तय की गई समय-सीमा के बाद मनमाने तरीके से श्रेणी में बदलाव की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह फैसला उन तमाम उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी चेतावनी और सीख है जो आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरक्षण का लाभ पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे।यह पूरा कानूनी मामला तब शुरू हुआ जब कुछ उम्मीदवारों ने नीट यूजी की परीक्षा पास करने और अखिल भारतीय स्तर पर मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद अपनी कैटेगरी जनरल या ओबीसी से बदलकर ईडब्ल्यूएस करने की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया। इन छात्रों का तर्क था कि काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपने दस्तावेजों को अपडेट करने या नया प्रमाण पत्र दिखाने का मौका मिलना चाहिए। हालांकि, जब मामला अदालत के सामने आया तो न्यायूर्ति ने तमाम दलीलों को गहराई से परखा और पाया कि इस तरह के बदलाव से पूरी चयन प्रक्रिया और अन्य योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ता है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि नियमों के दायरे से बाहर जाकर किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा संपन्न होने के बाद अपनी मूल श्रेणी बदलने की छूट नहीं दी जा सकती है।इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने बेहद कड़े शब्दों में टिप्पणी की कि खेल शुरू होने के बाद उसके नियमों में बदलाव करना कानूनन सही नहीं है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आवेदन फॉर्म भरने की निर्धारित प्रक्रिया चल रही थी, तब सभी उम्मीदवारों को अपनी सही श्रेणी का चयन करना अनिवार्य था। परीक्षा आयोजित होने, परिणाम घोषित होने और मेरिट लिस्ट तैयार हो जाने के बाद यदि इस तरह के बदलाव की अनुमति दी जाने लगी, तो इससे पूरी चयन सूची प्रभावित होगी और उन छात्रों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने शुरू से ही अपने सही दस्तावेजों और कैटेगरी के आधार पर आवेदन किया था। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए यह भी दोहराया कि कट-ऑफ या आवेदन की अंतिम तिथि के बाद जारी किए गए प्रमाण पत्रों को शुरुआती चयन का आधार नहीं बनाया जा सकता।इस अहम न्यायिक फैसले से देश भर के मेडिकल aspirants को यह सिख मिलती है कि उन्हें किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के फॉर्म भरते समय अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। यदि कोई छात्र ईडब्ल्यूएस या किसी अन्य आरक्षित श्रेणी के तहत लाभ प्राप्त करना चाहता है, तो उसके पास आवेदन की निर्धारित अंतिम तिथि से पहले का वैध प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। काउंसलिंग के दौरान केवल अंतिम समय में प्रमाण पत्र बनवाकर श्रेणी बदलने का दावा करना कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा। विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि छात्रों को हमेशा आधिकारिक सूचना पत्र (Information Bulletin) को ध्यान से पढ़ना चाहिए और सभी जरूरी कागजात समय से पहले तैयार रखने चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी या कानूनी पचड़े से बचा जा सके।
केरलम में NTPC से बिजली खरीदने की तैयारी, मंत्री Sunny Joseph ने दी जानकारी
केरलम के बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार हमेशा की तरह सबसे कम संभव दर पर बिजली खरीदने का प्रयास कर रही है और इस संबंध में एनटीपीसी के साथ बातचीत चल रही है। जोसेफ ने यह भी कहा कि सरकार पूर्ववर्ती यूडीएफ सरकार के कार्यकाल में निजी बिजली कंपनियों के साथ किए गए दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते को फिर से बहाल कराने के लिए कानूनी कदम उठा रही है। इस समझौते को पिछली एलडीएफ सरकार ने रद्द कर दिया था। करीब 30 रुपये प्रति यूनिट की ऊंची दर पर बिजली खरीदने के प्रभाव के बारे में पत्रकारों के सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि इससे सरकार पर ‘‘अतिरिक्त वित्तीय बोझ’’ पड़ेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या भविष्य में उपकर के जरिये यह बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा, उन्होंने कहा कि फिलहाल इस पहलू पर विचार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘अभी हम किसी भी तरह बिजली खरीदने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि बहुत से लोग कह रहे हैं कि कीमत अधिक होने के बावजूद उन्हें बिजली चाहिए। तापमान बढ़ने के साथ पंखों और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल भी बढ़ जाता है।’’उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कंपनी नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) राज्य के लिए बिजली खरीदने के प्रमुख विकल्पों में से एक है। मंत्री ने दावा किया कि उस समझौते को रद्द करना गलत फैसला था, जिसके तहत राज्य को करीब 440 मेगावाट बिजली 4.2 रुपये प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध हो सकती थी। उनके अनुसार, यदि यह समझौता कायम रहता तो मौजूदा बिजली संकट से बचा जा सकता था। उन्होंने आगे दावा किया कि तत्कालीन एलडीएफ सरकार ने समझौता रद्द करने की अपनी गलती सुधारने की कोशिश की थी, ‘‘लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।’’जोसेफ ने एक दिन पहले कहा था कि केरलम राज्य विद्युत बोर्ड (केएसईबी) ने राज्य में बढ़ती मांग और बिजली की कमी के बीच ऊंची दरों पर अतिरिक्त बिजली खरीदने की अनुमति के लिए राज्य सरकार से संपर्क करने का फैसला किया है।
डीआरडीओ में बिना परीक्षा के इंटर्नशिप करने का सुनहरा मौका, हर महीने मिलेंगे 30,000 रुपये स्टाइपेंड
भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ (DRDO) ने देश के प्रतिभाशाली और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद शानदार और करियर बदलने वाले अवसर का ऐलान किया है। जो युवा देश की रक्षा तकनीक और अनुसंधान में अपना योगदान देने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए DRDO Internship 2026 के दरवाजे पूरी तरह से खुल चुके हैं। इस इंटर्नशिप कार्यक्रम की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसमें चयन पाने के लिए उम्मीदवारों को किसी भी तरह की लिखित प्रतियोगी परीक्षा (Written Exam) के झंझट से नहीं गुजरना पड़ेगा। इसके साथ ही, चयनित होने वाले मेधावी छात्रों को हर महीने पूरे 30,000 रुपये का आकर्षक स्टाइपेंड (Stipend) भी प्रदान किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले इस प्रतिष्ठित संस्थान में काम करने का अनुभव किसी भी युवा के रिज्यूमे को चार चांद लगाने के लिए काफी है, जिसके चलते इंजीनियरिंग और साइंस के छात्रों के बीच रजिस्ट्रेशन करने की होड़ मच गई है।डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन द्वारा शुरू की गई यह नई इंटर्नशिप योजना देश के उन छात्रों के लिए डिजाइन की गई है जो विज्ञान, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी या अन्य संबंधित विषयों में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत बीई/बीटेक, एमई/एमटेक या विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में मास्टर्स डिग्री पूरी कर रहे या अंतिम वर्ष के छात्र आवेदन करने के पात्र हैं। डीआरडीओ का मुख्य उद्देश्य देश के युवा दिमागों को अत्याधुनिक रक्षा शोध, एयरोस्पेस, मिसाइल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देना है ताकि वे भविष्य के वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ बन सकें। इस प्रतिष्ठित संस्थान के लैब्स और रिसर्च सेंटर्स में काम करने का मौका मिलना किसी भी छात्र के पेशेवर सफर की सबसे बड़ी शुरुआत साबित हो सकता है, जहां उन्हें देश के शीर्ष वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में सीखने का अनमोल अवसर मिलता है।छात्रों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि इतनी बड़ी और प्रतिष्ठित संस्था में इंटर्नशिप पाने के लिए कितनी कठिन परीक्षाएं पास करनी होंगी, लेकिन डीआरडीओ ने इस प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और सरल रखा है। DRDO Internship 2026 के लिए किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाएगा, बल्कि उम्मीदवारों का चयन उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड, सेमेस्टर या डिग्री में प्राप्त अंकों (Academic Marks), उनके द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट्स और इंटरव्यू या वॉक-इन-इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। छात्रों को आधिकारिक पोर्टल पर अपने सभी जरूरी दस्तावेज, कॉलेज के प्रोफेसर या संस्थान द्वारा जारी किया गया नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) और अपना अपडेटेड रिज्यूमे अपलोड करना होगा। जिन छात्रों के पास रिसर्च पेपर्स या तकनीकी प्रोजेक्ट्स का अच्छा अनुभव होगा, उनके चयन की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी।आज के दौर में जब छात्र अपनी पढ़ाई के बाद इंटर्नशिप की तलाश करते हैं, तो कई जगहों पर उन्हें बिना किसी भुगतान के काम करना पड़ता है, जिसे अनपेड इंटर्नशिप कहा जाता है। लेकिन डीआरडीओ अपने यहां आने वाले योग्य और चुनिंदा इंटर्न्स को आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के लिए हर महीने 30,000 रुपये का एक बेहतरीन स्टाइपेंड देता है। यह वित्तीय सहायता छात्रों को अपने रहने, खाने और प्रोजेक्ट से जुड़े खर्चों को उठाने में पूरी तरह से मदद करती है, जिससे वे बिना किसी आर्थिक तनाव के पूरी लगन और फोकस के साथ अपने रिसर्च और डेवलपमेंट के काम में ध्यान लगा सकते हैं। सरकार का यह कदम देश के टैलेंट को बढ़ावा देने और उन्हें रक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित करने की एक बड़ी पहल माना जा रहा है।जो योग्य छात्र इस शानदार अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें बिना किसी देरी के डीआरडीओ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा करना होगा। आवेदन पत्र भरने से पहले छात्रों को यह सलाह दी जाती है कि वे विज्ञापन में दिए गए सभी दिशा-निर्देशों, जरूरी योग्यताओं और अलग-अलग लैब्स के विषयों को ध्यान से पढ़ लें। चूंकि आवेदन करने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, इसलिए समय रहते अपना फॉर्म सबमिट करना ही समझदारी होगी। देश के रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में अपना योगदान देने और अपने करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए डीआरडीओ की यह इंटर्नशिप हर युवा तकनीकी छात्र के लिए एक सुनहरा अवसर है।
Public Confidence in Dhami Government, BJP Projected to Win 54 Seats
उत्तराखंड के मतदाताओं ने सीएम पुष्कर सिंह धामी को मजबूत समर्थन दिखाया है, बीजेपी 2027 के चुनावों में 54 सीटें जीत सकती ह
सौराष्ट्र में भारी बारिश, लंबे अंतराल के बाद बारिश से फसलों को मिला नया जीवन
सौराष्ट्र में लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए राहत की खबर सामने आई है। अमरेली, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, मोरबी और जामनगर समेत कई इलाकों में बारिश ने जोरदार दस्तक दी है। करीब एक महीने के लंबे अंतराल के बाद हुई बारिश से सूख रही फसलों में ...
भारतीय न्याय व्यवस्था में अपराधियों के हौसले और उनकी दबंगई पर सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर से बेहद कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। हरियाणा के एक सनसनीखेज हत्या के मामले में जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद आरोपी द्वारा शहर में जश्न मनाते हुए विजय जुलूस निकाला जाना उसे और उसके समर्थकों को भारी पड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए उस हत्या के आरोपी को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद सख्त तेवर दिखाए हैं। अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति पर हत्या जैसे गंभीर अपराध का मुकदमा चल रहा हो, वह जमानत पर बाहर आकर इस तरह का जश्न और शक्ति प्रदर्शन कैसे कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बिना किसी हीला-हवाली के तुरंत आत्मसमर्पण यानी सरेंडर करने का कड़ा फरमान सुनाया है, जिसने पूरे देश के आपराधिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।यह पूरा मामला हरियाणा राज्य के एक स्थानीय जिले से जुड़ा हुआ है, जहां कुछ समय पहले आपसी रंजिश या अन्य विवाद के चलते एक व्यक्ति की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य अपराध के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था, और मामला निचली अदालत से होते हुए उच्च न्यायालय तक पहुंचा था। कानूनी प्रक्रियाओं और तकनीकी पहलुओं का फायदा उठाते हुए आरोपी पक्ष किसी तरह अदालत से जमानत हासिल करने में कामयाब हो गया था, और वह जेल से बाहर आ गया था। आमतौर पर जमानत मिलने पर आरोपियों को शांत रहना चाहिए और कानून की मर्यादा का पालन करना चाहिए, लेकिन इस मामले में आरोपी और उसके समर्थकों ने अपनी जीत का ढिंढोरा पीटते हुए इलाके में भारी लवाजमे के साथ विजय जुलूस निकाला। इस जुलूस के दौरान जमकर आतिशबाजी की गई, डीजे बजाए गए और खुलेआम कानून के मुंह पर तमाचा मारते हुए शक्ति प्रदर्शन किया गया, जिससे इलाके के आम नागरिकों और पीड़ित परिवार में खौफ का माहौल पैदा हो गया था।हत्या के आरोपी द्वारा इस तरह सरेआम जश्न मनाए जाने और पीड़ित परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की वीडियो क्लिप जब सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में वायरल हुई, तो पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट के सम्मानित जजों ने जब इस विजय जुलूस के दृश्यों और आरोपी के इस दुस्साहस को देखा, तो वे बेहद आहत और क्रोधित हुए। अदालत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि जमानत का मतलब यह कतई नहीं होता कि कोई आरोपी कानून का मजाक उड़ाए और समाज में भय का वातावरण तैयार करे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अदालत द्वारा दी गई राहत का इस तरह का दुरुपयोग समाज में न्याय प्रणाली के प्रति अविश्वास पैदा करता है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों ने आरोपी के वकीलों को आड़े हाथों लेते हुए बिना किसी नरमी के अपना फैसला सुनाया। अदालत ने आदेश दिया कि हत्या के आरोपी की जमानत को रद्द किया जाता है और उसे तुरंत प्रभाव से संबंधित जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करना होगा। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि यदि आरोपी तय समय के भीतर खुद सरेंडर नहीं करता है, तो स्थानीय पुलिस प्रशासन को यह अधिकार दिया जाता है कि वह उसे तुरंत गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाले। इस फैसले से उन तमाम दबंग तत्वों और अपराधियों को एक कड़ा संदेश गया है जो यह सोचते हैं कि वे जमानत मिलने के बाद कानून और पीड़ित परिवार को डराने-धमकाने में कामयाब हो जाएंगे।सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारत में न्यायपालिका आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और अपराधियों के हौसलों को पस्त करने के लिए कितनी तत्पर है। हरियाणा की इस घटना ने एक बार फिर से इस बहस को जन्म दे दिया है कि क्या अदालतों को जमानत देते समय इस बात की कड़ी शर्त रखनी चाहिए कि आरोपी रिहाई के बाद इस तरह की किसी भी सार्वजनिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के मामलों में सर्वोच्च अदालत खुद संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करती है, तो अपराधियों के मन में कानून का डर हमेशा बना रहेगा। पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राहत की सांस ली है और उन्हें उम्मीद जगी है कि कानून के इस लंबे सफर के अंत में उन्हें असली न्याय जरूर मिलेगा।
तमिलनाडु में खतरे में थलपति विजय की कुर्सी? वामपंथियों ने छोड़ दिया CM का साथ
विजय की TVK सरकार को लेकर उनकी सहयोगी पार्टी ने यह तक कह दिया है कि सरकार को पूरे 5 साल समर्थन मिलेगा या नहीं, यह विजय सरकार की नीतियों और रवैये पर निर्भर करेगा। वहीं पार्टी अकेले चुनाव भी लड़ रही है।
विदेश भेजने के नाम पर 1 करोड़ से अधिक की ठगी, रैकेट चलाने वाला दंपति गिरफ्तार
गुजरात के आणंद में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी का मामला सामने आया है. सोशल मीडिया पर दिए गए नौकरी के ऑफर के बाद शुरू हुई इस ठगी में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है. पुलिस ने मामले में दंपति को गिरफ्तार किया है. आखिर कैसे सामने आया पूरा फर्जीवाड़ा और कितने लोग इसकी चपेट में आए, यहां जानिए.
देश के साइबर सिटी कहे जाने वाले गुरुग्राम (Gurugram) से एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सड़कों पर चलने वाली महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था और बेलगाम सड़क रोष (Road Rage) की संस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिलेनियम सिटी के नाम से मशहूर गुरुग्राम के सबसे पॉश और व्यस्त माने जाने वाले गोल्फ कोर्स रोड (Golf Course Road) पर एक सनकी कार चालक ने दुस्साहस की सभी हदें पार करते हुए एक अकेली महिला बाइक सवार का पीछा किया और जब वह नहीं रुकी, तो बेरहमी से उसकी बाइक में टक्कर मारकर उसे सड़क पर गिरा दिया। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज और वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो देश भर के लोगों का खून खौल उठा और पुलिस प्रशासन पर भी त्वरित कार्रवाई करने का भारी दबाव बन गया। सड़क पर वाहन चलाने वाले इन दबंगों और कानून का खौफ न रखने वाले मनचलों की हरकतों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आज के समय में हमारे देश की सड़कें कितनी असुरक्षित होती जा रही हैं।प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज घटना गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड की है, जहां एक महिला अपनी दोपहिया वाहन यानी स्कूटी या बाइक से अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। रास्ते में एक तेज रफ्तार लग्जरी या सामान्य कार चला रहा चालक किसी बात पर महिला के साथ बदतमीजी करने और अनुचित तरीके से वाहन चलाने लगा। जब महिला बाइकर ने अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उस मनचले कार चालक को तवज्जो नहीं दी और अपनी गति तेज करके वहां से निकलने की कोशिश की, तो उस सनकी ड्राइवर का अहंकार आड़े आ गया। उसने अपनी कार को महिला के पीछे पूरी रफ्तार से दौड़ाना शुरू कर दिया। गोल्फ कोर्स रोड जैसी हाई-प्रोफाइल और चौड़ी सड़क पर खुलेआम इस तरह की गुंडागर्दी होते देख आसपास के अन्य वाहन चालकों के भी होश उड़ गए, लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि वह सिरफिरा ड्राइवर इतनी बड़ी और खतरनाक आपराधिक हरकत को अंजाम दे देगा।जब महिला बाइकर ने अपनी बाइक को रोकने से इनकार कर दिया और लगातार आगे बढ़ती रही, तो उस कार ड्राइवर ने अपनी गाड़ी की स्पीड और बढ़ा दी और सीधे जाकर महिला की बाइक में जोर से टक्कर मार दी। इस भयानक टक्कर के कारण महिला अपनी बाइक समेत सड़क पर दूर जा गिरी, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और वह दर्द से तड़पने लगी। टक्कर मारने के बाद भी उस कायर और बेरहम ड्राइवर का दिल नहीं पसीजा, और वह गाड़ी रोकने के बजाय मौके से तेजी से फरार हो गया। गनीमत यह रही कि वहां से गुजर रहे अन्य सतर्क राहगीरों और स्थानीय नागरिकों ने तुरंत मानवता का परिचय देते हुए अपनी गाड़ियां रोकीं और घायल महिला की मदद के लिए दौड़ पड़े। यदि समय पर लोग वहां इकट्ठा न होते, तो उस सनकी ड्राइवर की इस खतरनाक हरकत से महिला की जान भी जा सकती थी, जिसने एक बार फिर गुरुग्राम की ट्रैफिक पुलिस और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।इस पूरी वीभत्स घटना का किसी पीछे आ रहे वाहन के डैशबोर्ड कैमरे या राहगीर के मोबाइल में रिकॉर्ड किया गया वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर अपलोड हुआ, वह आग की तरह फैल गया। ट्विटर (एक्स), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लोग गुरुग्राम पुलिस को टैग करके उस आरोपी कार ड्राइवर की तत्काल गिरफ्तारी और उसकी गाड़ी जब्त करने की मांग करने लगे। जनता के भारी गुस्से और सोशल मीडिया के दबाव को देखते हुए गुरुग्राम पुलिस हरकत में आई और गोल्फ कोर्स रोड के आसपास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी। पुलिस ने वाहन के नंबर प्लेट के आधार पर आरोपी ड्राइवर की पहचान कर ली है और उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, लापरवाही से गाड़ी चलाने और महिला की सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले ऐसे उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड की यह घटना कोई इकलौती मिसाल नहीं है, बल्कि देश के बड़े महानगरों में आए दिन इस तरह के रोड रेज (Road Rage) और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के आंकड़े लगातार डरा रहे हैं। लोग छोटी-छोटी बातों पर अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं और सड़क को अखाड़ा बनाकर किसी की भी जान लेने पर उतारू हो जाते हैं। विशेष तौर पर रात के समय या सुनसान सड़कों पर अकेली यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा आज के समय में एक बहुत बड़ा और गंभीर मुद्दा बन चुका है। समाज के रूप में हमें यह सोचने की जरूरत है कि आखिर हमारी युवा पीढ़ी में इस तरह का असहिष्णुता और आपराधिक मानसिकता क्यों बढ़ती जा रही है। जब तक प्रशासन ऐसे मनचलों और सनकी ड्राइवर्स के खिलाफ मिसाल कायम करने वाली सख्त सजा का प्रावधान नहीं करेगा, तब तक सड़कों पर इस तरह की गुंडागर्दी पर पूरी तरह से लगाम लगाना नामुमकिन बना रहेगा।
एम्स का ‘आई ऑन्कोलॉजी’ BRICS पेपर में शामिल, कैंसर का करेगा इलाज
AIIMS दिल्ली ने iOncology.ai नाम एक एआई आधारित प्लेटफॉर्म विकसित किया है जो कैंसर, विशेषकर ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर की पहचान और इलाज को आसान बनाता है. ‘आई ऑन्कोलॉजी’ मॉडल को BRICS पेपर में शामिल किया गया है. इसको AIIMS के बायोकैमिस्ट्री विभाग और C-DAC पुणे ने मिलकर बनाया है.
भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों एक ऐसा हैरान करने वाला और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिल रहा है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ट्रेड एक्सपर्ट ने की होगी। एक तरफ जहां बड़े बैनर और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों के पसीने छूट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बेहद कम बजट में बनी आध्यात्मिक ड्रामा फिल्म 'हनुमान अंश' (Hanuman Ansh) ने ऐसा ऐतिहासिक भौकाल काटा है कि बॉक्स ऑफिस के तमाम बड़े बादशाह पानी मांगते नजर आ रहे हैं। आलम यह है कि सिनेमाघरों में अपने छठे हफ्ते में चल रही 'हनुमान अंश' ने हाल ही में रिलीज हुई बहुचर्चित 'मिर्जापुर द मूवी' (Mirzapur The Movie) और अक्षय कुमार-सैफ अली खान स्टारर नई फिल्म 'हैवान' को कमाई के मामले में पीछे छोड़ दिया है। खासकर रविवार के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के आंकड़े ने यह साबित कर दिया है कि दर्शकों के बीच अब कंटेट और दमदार वर्ड-ऑफ-माउथ का जादू किस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है, जिससे बड़ी-बड़ी फिल्मों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है।वीकेंड यानी रविवार के दिन अमूमन सिनेमाघरों में नई फिल्मों की चांदी रहती है और दर्शक परिवार के साथ टिकट खिड़की पर लंबी लाइनें लगाते हैं, लेकिन इस बार का संडे पूरी तरह से 'हनुमान अंश' के नाम रहा। ट्रेड एनालिस्ट्स के मुताबिक, अपने रिलीज के छठे हफ्ते और 38वें दिन भी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जो कोहराम मचाया, वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक दुर्लभ मिसाल बन चुका है। फिल्म ने अपने छठे रविवार को जबरदस्त डबल डिजिट में कमाई करते हुए लगभग 15 से 22 करोड़ रुपये के आसपास का शानदार नेट कलेक्शन दर्ज किया, जो कि सिनेमाघरों में पहले से हफ्तों टिक चुकी किसी फिल्म के लिए अकल्पनीय है। इसके साथ ही 'हनुमान अंश' ने भारत में कुल नेट कलेक्शन के मामले में 200 करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार करते हुए कुल कमाई के मामले में कई बड़ी फिल्मों को धूल चटा दी है।ओटीटी पर कल्ट फैन फॉलोइंग और भौकाल बनाने वाली 'मिर्जापुर' जब बड़े पर्दे पर 'Mirzapur The Movie' के रूप में उतरी थी, तो बॉक्स ऑफिस पर बंपर ओपनिंग देखने को मिली थी। गुड्डू भैया, कालीन भैया और मुन्ना भैया के क्रेज के सहारे फिल्म ने शुरुआती हफ्तों में ताबड़तोड़ कमाई की थी और 200 करोड़ के क्लब की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रही थी। लेकिन जैसे ही इसका मुकाबला सिनेमाघरों में पहले से मजबूत पकड़ बना चुकी 'हनुमान अंश' की आंधी से हुआ, इसकी रफ्तार धीमी पड़ने लगी। रविवार के आंकड़ों में 'हनुमान अंश' ने नए रिलीज होने के बावजूद 'मिर्जापुर द मूवी' को कमाई के मामले में पीछे छोड़ दिया, जिससे यह साफ हो गया कि सिर्फ बड़े नाम और फ्रेंचाइजी का खौफ लंबे समय तक दर्शकों को सिनेमाघरों में रोकने के लिए काफी नहीं है, जब तक कि फिल्म में एक अलग तरह का जुड़ाव और दम न हो।इस बॉक्स ऑफिस क्लैश और घमासान के बीच अगर किसी फिल्म की सबसे ज्यादा दुर्गति हुई है, तो वह है प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी और अक्षय कुमार तथा सैफ अली खान जैसे दिग्गजों से सजी फिल्म 'हैवान'। लगभग 100 करोड़ या उससे अधिक के भारी-भरकम बजट से तैयार की गई यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के मात्र 3 दिन के भीतर ही डिजास्टर की श्रेणी में खड़ी होती नजर आ रही है। फिल्म की ओपनिंग बेहद ठंडी रही और शुरुआती दो-तीन दिनों में ही इसका कारोबार बुरी तरह पिट गया। आलम यह है कि फिल्म के लिए अपना बजट निकाल पाना तो दूर, सिनेमाघरों में अपने शोज बचाए रखना भी मुश्किल साबित हो रहा है। 'हैवान' की इस नाकामी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि दर्शक अब घिसी-पिसी कहानियों या रीमेक फिल्मों को पूरी तरह से नकार चुके हैं और उन्हें कुछ ऐसा चाहिए जो दिल को छू सके।'हनुमान अंश' की यह सफलता किसी परीकथा जैसी लगती है, क्योंकि महज 1.8 से 2 करोड़ रुपये के छोटे से बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 100 गुना से ज्यादा का मुनाफा कमाकर सभी को हैरान कर दिया है। फिल्म की शुरुआत बेहद मामूली थी और पहले दिन इसने केवल 10 लाख रुपये से खाता खोला था। लेकिन नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक संदेशों से प्रेरित इस कहानी ने दर्शकों के दिलों में ऐसी जगह बनाई कि माउथ पब्लिसिटी के दम पर इसने इतिहास रच दिया। यह फिल्म अब 2026 की तीसरी सबसे बड़ी ग्रॉसर फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो चुकी है और दुनियाभर में इसकी कुल कमाई 268 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया है कि बॉक्स ऑफिस पर असली बादशाह कंटेंट होता है, और अगर कहानी में दम हो तो छोटे बजट की फिल्म भी बड़े-बड़े दिग्गजों के अहंकार को चकनाचूर कर सकती है।
हूतियों से जंग के लिए सऊदी जाएंगे 100000 पाकिस्तानी यूथ? मुनीर को वार्निंग
पाकिस्तान के सीनेटर अब्दुल करीम ने सऊदी अरब और हरम शरीफ की रक्षा के लिए पाकिस्तान सरकार से अपनी सेना भेजने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती तो अहले-हदीस के 1 लाख युवा सऊदी अरब भेजे जाने के लिए तैयार हैं.
30 साल पुराने अफेयर और रोमांस के चर्चों पर एक्ट्रेस नीलम कोठारी का दो टूक और बड़ा खुलासा
नब्बे के दशक के बॉलीवुड गॉसिप्स के पन्नों को अगर पलटा जाए, तो अभिनेता गोविंदा और अभिनेत्री नीलम कोठारी की लव स्टोरी और उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री के किस्से आज भी फिल्मी गलियारों में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरते हैं। उस दौर में दोनों की जोड़ी सिल्वर स्क्रीन पर आग लगा देती थी और दर्शक उनकी जोड़ी पर जान छिड़कते थे, लेकिन पर्दे के पीछे उनके निजी जीवन को लेकर जो तूफान चल रहा था, उससे बहुत कम लोग वाकिफ थे। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब नीलम कोठारी से उनके और गोविंदा के उस पुराने कथित रोमांस और टूटे हुए रिश्तों को लेकर तीखे सवाल पूछे गए, तो अभिनेत्री ने बिना किसी झिझक के खुलकर अपनी बात रखी और तीन दशक पुराने उस राज से पर्दा उठाया जिसने एक बार फिर से पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। नीलम ने अपने इस दो टूक जवाब में यह साफ कर दिया कि उस नासमझ उम्र में उन्हें इस बात की बिल्कुल भनक नहीं थी कि उनके सह-कलाकार गोविंदा पहले से ही शादी के बंधन में बंध चुके हैं, जिसके बाद से यह बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है।अस्सी के दशक के आखिरी और नब्बे के दशक के शुरुआती सालों में गोविंदा ने जब बॉलीवुड में कदम रखा, तो उनकी कॉमिक टाइमिंग और एनर्जेटिक डांस ने तहलका मचा दिया था। उसी दौरान नीलम कोठारी अपनी डॉल जैसी खूबसूरती, सादगी और बेहतरीन अभिनय के दम पर देश भर के युवाओं की धड़कन बन चुकी थीं। जब इन दोनों कलाकारों ने पहली बार किसी फिल्म में साथ काम किया, तो पर्दे पर उनकी जो केमिस्ट्री देखने को मिली, उसने निर्माताओं की झोली में एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में डाल दीं। साथ काम करते-करते दोनों के बीच गहरी दोस्ती हुई, जो देखते ही देखते मीडिया की नजरों में एक प्रेम प्रसंग या रोमांस के रूप में तब्दील हो गई। मैगजीन के पन्ने गोविंदा और नीलम के प्यार के किस्सों से रंगे रहते थे, और फैंस भी यह उम्मीद करने लगे थे कि यह जोड़ी रील लाइफ से निकलकर रियल लाइफ में भी एक हो जाएगी, लेकिन पर्दे के पीछे की सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी।दशकों की चुप्पी तोड़ने के बाद नीलम कोठारी ने हाल ही में दिए गए अपने साक्षात्कार में उस दौर को याद करते हुए स्पष्ट किया कि उस समय वे इंडस्ट्री में बिल्कुल नहीं थीं और उनकी उम्र भी बहुत कम थी, जिसके कारण उन्हें दुनियादारी और रिश्तों की जटिलताओं की ज्यादा समझ नहीं थी। नीलम ने खुलकर कहा कि जब उनके और गोविंदा के अफेयर की चर्चाएं चारों तरफ उड़ रही थीं, तब उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि गोविंदा पहले से ही सुनीता आहुजा के साथ शादी के बंधन में बंध चुके हैं, क्योंकि उस जमाने में आज की तरह सोशल मीडिया या पल-पल की खबर देने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स नहीं हुआ करते थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शुरुआती दौर में वे अपने काम और करियर को लेकर पूरी तरह समर्पित थीं और बाहरी दुनिया की खबरों से अक्सर अनजान रहती थीं, जिसके कारण कई बार ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ गया जिनके बारे में उन्हें बाद में गहराई से अहसास हुआ।यह एक जगजाहिर सच है कि गोविंदा ने सुनीता आहुजा के साथ अपनी शादी की बात शुरुआती दिनों में दुनिया से पूरी तरह छुपा कर रखी थी, ताकि उनके स्टारडम और करियर पर कोई बुरा असर न पड़े। उन दिनों अभिनेताओं के विवाहित होने की बात सामने आने पर उनकी फीमेल फैन फॉलोइंग कम होने का एक अजीब सा डर फिल्म इंडस्ट्री में बना रहता था, और यही कारण था कि गोविंदा की शादी की खबर काफी समय तक एक राज बनी रही। जब नीलम कोठारी के साथ उनकी नजदीकियां बढ़ने लगीं और मीडिया में कहानियां छपने लगीं, तब जाकर यह बात खुलकर सामने आई कि गोविंदा पहले ही शादीशुदा हैं। इस खुलासे के बाद नीलम के लिए वह स्थिति बेहद असहज और मानसिक तनाव से भरी हो गई थी, क्योंकि वे कभी भी किसी के घर तोड़ने या किसी विवाहित रिश्ते में दखल देने वाली इंसान नहीं थीं। उन्होंने समझदारी दिखाते हुए तुरंत अपने कदम पीछे खींच लिए और अपने करियर को बचाने के लिए गोविंदा के साथ काम करना बंद कर दिया।समय के पहिए के साथ वह दौर भी बीत गया और दोनों कलाकारों ने अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला किया। गोविंदा ने अपने परिवार और फिल्मी करियर को संभाला, तो वहीं नीलम कोठारी ने बाद में अभिनेता समीर सोनी से शादी की और अब वे एक सफल उद्यमी (Entrepreneur) के साथ-साथ 'फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स' जैसी मशहूर वेब सीरीज के जरिए ओटीटी की दुनिया में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी हैं। इतने सालों बाद जब भी उन पुराने दिनों का जिक्र होता है, तो नीलम हमेशा एक ग्रेस और परिपक्वता के साथ उन सवालों का सामना करती हैं। उनका यह ताजा बयान यह साबित करता है कि वे अपने अतीत को लेकर किसी भी तरह के पछतावे में जीने के बजाय एक खूबसूरत और गरिमापूर्ण जीवन जी रही हैं, जिसे उनके फैंस आज भी बेहद पसंद करते हैं और उनके इस खुलेपन की तारीफ कर रहे हैं।
राजस्थान में BJP का दबदबा, निकाय चुनाव में 163 सीटों पर जीत
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव परिणामों की सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो गई है और शुरुआती नतीजों में बीजेपी बड़ी जीत दर्ज करती नजर आ रही है. वहीं, कांग्रेस भी ठीक-ठाक प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है. राजस्थान के 309 नगर निकाय में से बीजेपी ने अबतक 163 पर जीत दर्ज की है.. वहीं कांग्रेस भी 103 पर जीत दर्ज कर चुकी है..वहीं 43 पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते राजस्थान के 309 नगर निकायों के 10167 वार्डों के पार्षद पद पर हुए चुनाव पर मतगणना जारी है.. कुल 38 हजार 889 उम्मीदार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनमें 10 नगर निगम के साथ ही, 252 नगर पालिका और 47 नगर परिषद शामिल हैं. जानकारी के लिए बता दें कि मतदान 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुए थे.
गेहूं नहीं, चावल के आटे से बनाएं कुरकुरा पराठा, रेसिपी है आसान
Chawal Atta Paratha Recipe: रोज-रोज गेहूं की रोटी या परांठे खाकर बोर हो गए हैं तो इस बार चावल के आटे से बने परांठे ट्राई करें. मसालों और हरे धनिये से तैयार ये पराठे स्वाद में काफी टेस्टी लगते हैं और इन्हें बनाना भी आसान है.

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