नागपुर में भूकंप के झटके से सहमे लोग, रिक्टर स्केल पर 2.6 मापी गई तीव्रता
महाराष्ट्र के नागपुर जिले में रविवार को भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए हैं. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, 8 नवंबर 2026 को दोपहर 2:17 बजे 2.6 रिक्टर स्केल तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. इसकी गहराई जमीन से 5 किलोमीटर नीचे पाई गई है. जानिए भूकंप से जुड़ी पूरी रिपोर्ट और वैज्ञानिकों का क्या कहना है.
ACC Entrance Exam 2027 : परीक्षा 4 जनवरी 2027 को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के रूप में आयोजित होगी. उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन और शुल्क भुगतान पूरा करने की सलाह दी गई है.
लोगों के साथ होने पर भी अकेलापन क्यों महसूस होता है? एक्सपर्ट ने बताई वजह
अक्सर ऐसा होता है कि हमारे आसपास बहुत से लोग होते हैं, लेकिन फिर भी अंदर से अकेलापन लगता है और किसी से कुछ बोल भी नहीं पाते. यहां जानिए लोगों के साथ होने पर भी अकेलापन क्यों महसूस होता है?
Jaipur Crime: जयपुर के पॉश इलाके वैशाली नगर में 'Oven The Bakery Cafe' के संचालक मयंक गोपालिया पर बदमाशों ने लोहे के पाइप से ताबड़तोड़ जानलेवा हमला किया. गंभीर रूप से घायल मयंक फोर्टिस अस्पताल में भर्ती हैं. इस खौफनाक वारदात का CCTV फुटेज भी सामने आया है.
मिलावट करने वालों पर हल्लाबोल; 82 करोड़ की खाद्य सामग्री जब्त, 11 हजार से अधिक लाइसेंस रद्द
FSSAI ने सोशल मीडिया पर इस अभियान की जानकारी दी। अथॉरिटी ने बताया कि त्योहारों को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाई गई थी। इस दौरान देशभर में कुल 56,431 खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई।
केरल में छिपा है प्रकृति का अनोखा वाटर स्लाइड, जहां फ्री में ले सकते हैं एडवेंचर का मजा
इंस्टाग्राम पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें पर्यटक केरल के एक नेचुरल वाटर स्पॉट का आनंद लेते नजर आ रहे हैं. अगर आप बिना महंगे वाटर पार्क का टिकट खरीदे पानी में मस्ती करना चाहते हैं, तो केरल की एक खास जगह आपके लिए बेस्ट रहेगी.
कुलगाम में आंतिकयों के दो सहयोगी गिरफ्तार, पिस्तौल और ग्रेनेड बरामद
कुलगाम में चेकिंग के दौरान आतंकियों के दो सहयोगी गिरफ्तार हुए हैं. उनके पास चीनी पिस्तौल, कारतूस और दो ग्रेनेड बरामद हुआ. सीआरपीएफ और एसओजी ने भागने की कोशिश नाकाम की.
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 17 से 19 नवंबर तक यूपी में प्रतापगढ़ के कुंडा में श्रीराम कथा करेंगे. इससे पहले उन्होंने वीडियो संदेश में राजा भैया को सनातन का प्रखर चेहरा बताया है.
Telangana में धूमधाम से मनी Diwali, राज्यपाल ने Bhagyalakshmi Temple में की पूजा
हैदराबाद, आठ नवंबर तेलंगाना में रविवार को पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ दीपावली का त्योहार मनाया गया और लोगों ने अपने घरों को रोशनी से सजाया तथा पूजा-अर्चना की। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी, केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार और अन्य प्रमुख नेताओं ने इस अवसर पर प्रदेश वासियों को बधाई व शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए एक संदेश में राज्यपाल ने लोगों से प्रेम, करुणा और सेवा भावना के साथ यह पर्व मनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। उन्होंने सभी लोगों से खुशियां फैलाने, वंचितों की सहायता करने, स्वदेशी सामान को बढ़ावा देने और पूरी सावधानी व सुरक्षा के साथ त्योहार मनाने का आह्वान किया। लोक भवन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला अपनी पत्नी जानकी शुक्ला के साथ यहां स्थित ऐतिहासिक चारमीनार के प्रसिद्ध भाग्यलक्ष्मी मंदिर पहुंचे और दर्शन किए। मंदिर की न्यासी शशिकला और पुजारियों ने राज्यपाल दंपति की अगवानी की, जिन्होंने वहां देवी की विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद, पुजारियों ने उन्हें तीर्थ-प्रसाद दिया। एक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दीपों के इस पर्व पर हर घर में खुशहाली और समृद्धि आने की कामना की।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त थोड़ी देर में शुरू, बस इतना मिलेगा समय
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल को सबसे उत्तम घड़ी माना जाता है. प्रदोष काल आज शाम 5 बजकर 31 मिनट से शाम 8 बजकर 09 मिनट तक रहने वाला है. इस बीच शाम 5 बजकर 54 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 50 मिनट तक वृषभ काल भी रहेगा. आप चाहें तो इस अबूझ मुहूर्त में भी लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं.
PAK को मिलेगा 5700 करोड़ का अमेरिकी पैकेज, भारत बोला- दोहरा मापदंड
अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट को अपग्रेड करने के लिए 686 मिलियन डॉलर का पैकेज दिया. इसपर भारत ने अमेरिका पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया. अमेरिका के इस हरकत से पाकिस्तान की क्षमता बढ़ेगी.
पटाखे से आग लगी आग तो काम आएंगे ये 7 सस्ते गैजेट्स, तुरंत मंगा लें
दिवाली से पहले ही कई जगहों पर आग लगने की खबर आई है. दिवाली के दौरान छोटी गलती भी कई बार बड़े आग का कारण बन सकती है. इसलिए घर पर ये गैजेट्स जरूर रखें.
पोलैंड में गोलीबारी से 6 लोगों की मौत, देखें दुनिया की बड़ी खबरें
पोलैंड के क्राको शहर में हुई गोलीबारी में 6 लोगों की मौत हो गई है. जबकि 16 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. पुलिस ने हमलावर को भी गोली मार दी थी. इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध के घर तलाशी ली, जहां तीन शव पाए गए हैं. देखें दुनिया आजतक.
सपा और Congress पर बरसे Yogi Adityanath, लगाया Ayodhya के खिलाफ दुष्प्रचार का आरोप
गोरखपुर, आठ नवंबर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर अयोध्या के खिलाफ ‘दुष्प्रचार फैलाने’ का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि राज्य में विरासत संरक्षण और विकास की मौजूदा यात्रा जारी रही तो इन दोनों विपक्षी दलों का राजनीतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। आदित्यनाथ ने गोरखपुर के जंगल तिनकोनिया में वनटांगिया समुदाय के लिए आयोजित दीपावली कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्षी दल अयोध्या के विकास और राज्य में चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से असहज हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अब लोग डर के कारण अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं। वे अयोध्या के खिलाफ दुष्प्रचार फैला रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि अगर विरासत और विकास की यह यात्रा इसी तरह जारी रही तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की राजनीति हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।’’उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों ने कभी राज्य के सामने पहचान का संकट पैदा किया था, अब उन्हें खुद अपनी राजनीतिक पहचान के संकट का सामना करना पड़ेगा। अगर यह यात्रा इसी मजबूती और एकजुटता के साथ जारी रही तो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी खुद पहचान के संकट से जूझेंगी।’’मुख्यमंत्री ने वनटांगिया समुदाय के लिए 82 करोड़ रुपये से अधिक की 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को किट भी वितरित कीं। आदित्यनाथ ने दावा किया कि 2017 से पहले इस समुदाय को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और वनटांगिया गांव सड़क, बिजली, पेयजल, राशन कार्ड, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाओं, पेंशन और पक्के मकानों जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे। उन्होंने कहा, ‘‘भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे और पूरे देश ने दीपावली मनाई थी। लेकिन पहले अंग्रेजों ने, फिर कांग्रेस ने और उसके बाद समाजवादी पार्टी ने आपको और आपके पूर्वजों को 100 साल से अधिक समय तक इन जंगलों में भटकने के लिए छोड़ दिया।’’उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में वनटांगिया समुदाय के 56 गांव हैं, जिनके निवासी दशकों तक बुनियादी सुविधाओं और आधिकारिक पहचान से वंचित रहे। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद स्थिति में काफी बदलाव आया है। उन्होंने लोगों से सवाल किया, ‘‘क्या आज आपके पास पक्की सड़कें हैं? क्या आपके पास राशन कार्ड, पक्के मकान, स्कूल और आयुष्मान कार्ड हैं? 2017 से पहले हर सवाल का जवाब नहीं था। आज हर सवाल का जवाब हां है।’’भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्ष के बीच राजनीतिक अंतर बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यही भाजपा नीत राजग और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस के पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक, जैसा कि सपा इसे कहती है) के बीच का अंतर है। उनके हर सवाल का जवाब नहीं है, जबकि हमारा जवाब हां है।’’आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने गरीबों, दलितों, वंचितों और अति पिछड़े समुदायों के बजाय केवल अपने परिवारों के हितों पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों ने केवल अपने परिवारों के बारे में सोचा है, उनसे गरीबों, दलितों, वंचितों और अति पिछड़े समुदायों के बारे में सोचने की उम्मीद नहीं की जा सकती।’’उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जाति, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना उत्तर प्रदेश की पूरी आबादी को एक परिवार मानती है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम करती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी तक पहुंचे। राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण का विरोध करने और श्रद्धालुओं को अयोध्या पहुंचने से रोकने की कोशिश करने वाले लोग अब इस पवित्र नगरी के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अयोध्या में सड़कों, बिजली सुविधाओं, हवाई अड्डे और रेल संपर्क सहित बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आई है। आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘हमने आपको वोट बैंक नहीं बनाया। भगवान राम के भक्तों के रूप में हमने हर वनवासी, हर वंचित और हर दलित को अपनाया और उन्हें भगवान राम के कार्य में भागीदार बनाया, जो राष्ट्र का कार्य है।’’मुख्यमंत्री ने लोगों से त्योहारों को खुशी और उत्साह के साथ मनाने तथा नशे और जुए से दूर रहने की भी अपील की।
'अपने कृत्यों के लिए अयोध्या से माफी मांगें अखिलेश', सीएम योगी का वार
'पंचायत आजतक उत्तर प्रदेश' के मंच पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मॉडरेटर श्वेता सिंह ने खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने कृत्यों के लिए अयोध्या से माफी मांगना चाहिए. देखें ये वीडियो.
ना फ्लाइट का झंझट, ना महंगे होटल! IRCTC करा रहा है ऊटी-कुन्नूर की सैर
भागदौड़ भरी जिंदगी और रोजमर्रा के तनाव से दूर अगर आप भी किसी शांत, ठंडी और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर जगह पर छुट्टियां बिताने का मन बना रहे हैं, तो भारतीय रेलवे ने आपके लिए एक बेहद शानदार और किफायती मौका पेश किया है। अक्सर लोगों का यह सपना होता है कि वे दक्षिण भारत के मशहूर हिल स्टेशनों ऊटी और कुन्नूर की हसीन वादियों में कुछ पल सुकून के बिताएं, लेकिन फ्लाइट के महंगे टिकट, होटल के भारी-भरकम खर्च और ट्रैवल प्लानिंग के झंझट के कारण कई लोग अपना यह प्लान टाल देते हैं। यात्रियों की इसी समस्या का समाधान निकालते हुए भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) ने एक बेहद किफायती और ऑल-इन्क्लूसिव टूर पैकेज लॉन्च किया है। इस पैकेज के जरिए आप बिना किसी भागदौड़ या महंगे खर्च के दक्षिण भारत के इन स्वर्ग जैसे नजारों का लुत्फ उठा सकते हैं। इस विशेष टूर पैकेज की शुरुआती कीमत मात्र 10,280 रुपये रखी गई है, जो आम आदमी के बजट में आसानी से फिट बैठ जाती है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको इस शानदार टूर पैकेज की पूरी रूपरेखा, मिलने वाली सुविधाओं और बुकिंग से जुड़ी तमाम अहम जानकारियों से रूबरू कराएंगे।बजट फ्रेंडली टूर पैकेज: कम खर्च में दक्षिण भारत के खूबसूरत हिल स्टेशनों की सैरभारतीय रेलवे का यह टूर पैकेज उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो कम बजट में एक बेहतरीन और यादगार वेकेशन चाहते हैं। आमतौर पर ऊटी (Ooty) और कुन्नूर (Coonoor) घूमने जाने पर कैब बुकिंग, होटल स्टे, लोकल ट्रांसपोर्ट और खाने-पीने में हजारों-लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं, लेकिन आईआरसीटीसी के इस पैकेज में आपकी इन सारी चिंताओं को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। पैकेज की शुरुआती कीमत प्रति व्यक्ति मात्र 10,280 रुपये से शुरू होती है, जिसमें यात्रियों को ठहरने के लिए अच्छे होटल, खाने-पीने की सुविधा, घूमने के लिए वाहन और गाइड की व्यवस्था जैसी तमाम मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। इसके साथ ही, यात्रा के दौरान पर्यटकों को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त भागदौड़ नहीं करनी पड़ती क्योंकि रेलवे का प्रशिक्षित स्टाफ हर कदम पर उनकी सहायता के लिए मौजूद रहता है। मध्यम वर्गीय परिवारों और कपल्स के लिए यह पैकेज इस सीजन का सबसे बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आया है, जिसके जरिए वे बिना अपनी जेब पर ज्यादा बोझ डाले प्रकृति के बेहद करीब वक्त बिता सकते हैं।ऊटी और कुन्नूर की हसीन वादियां, टॉय ट्रेन का सफर और प्राकृतिक खूबसूरती का दीदारदक्षिण भारत के नीलगिरी पहाड़ियों की गोद में बसे ऊटी और कुन्नूर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरे-भरे चाय के बागानों, झरनों और सुहावने मौसम के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। इस टूर पैकेज के तहत पर्यटकों को ऊटी की प्रसिद्ध झील (Ooty Lake), बॉटनिकल गार्डन, डोड्डाबेट्टा पीक (नीलगिरी की सबसे ऊंची चोटी) और रोज गार्डन जैसी खूबसूरत जगहों का भ्रमण कराया जाएगा। इसके अलावा, कुन्नूर के लैम्ब्स रॉक और सिम्स पार्क की सैर भी इस यात्रा में चार चांद लगा देती है। इस यात्रा का सबसे बड़ा और रोमांचक आकर्षण नीलगिरी माउंटेन रेलवे का वह ऐतिहासिक टॉय ट्रेन सफर है, जो घने जंगलों, सुरम्य घाटियों और दर्जनों सुरंगों से होते हुए गुजरता है। इस टॉय ट्रेन में बैठकर खिड़की से बाहर के नजारे देखना पर्यटकों के लिए जीवन भर का एक अनमोल अनुभव बन जाता है। यहाँ का शांत वातावरण और बादलों से ढकी पहाड़ियां शहर के शोरगुल से दूर मानसिक शांति प्रदान करती हैं, जहाँ फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए बेहतरीन फ्रेम और प्राकृतिक दृश्य मिल जाते हैं।बुकिंग प्रक्रिया, पैकेज की अन्य जरूरी बातें और यात्रियों के लिए खास सलाहयदि आप भी इस शानदार और किफायती आईआरसीटीसी टूर पैकेज का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इसकी बुकिंग प्रक्रिया बेहद आसान है। आप आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट (irctc.com) या उनके टूरिज्म ऐप के जरिए ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। इसके अलावा, रेलवे के आधिकारिक टूरिज्म काउंटर से भी इस पैकेज के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करके अपनी सीट पक्की की जा सकती है। पैकेज की कीमत इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप अकेले यात्रा कर रहे हैं, डबल शेयरिंग में हैं या परिवार के साथ ट्रिप प्लान कर रहे हैं। त्योहारी सीजन और छुट्टियों के दिनों में इस प्रकार के पैकेजेस की मांग बहुत तेजी से बढ़ती है, इसलिए सलाह दी जाती है कि आप समय रहते अपनी बुकिंग पक्की कर लें ताकि अंतिम समय में टिकट या होटल को लेकर किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। बिना फ्लाइट और महंगे होटलों की टेंशन के, रेलवे के इस सुरक्षित और भरोसेमंद सफर के जरिए अपनी छुट्टियों को इस बार वाकई खास बनाएं।
'दीवाली का तोहफा दो...' गुरुग्राम में कार सवार से खुलेआम वसूली करता दिखा पुलिसकर्मी, Video Viral
दीवाली के अवसर पर गुरुग्राम के व्यस्त साइबर हब क्षेत्र में जांच चौकी पर तैनात एक पुलिसकर्मी द्वारा खुलेआम उपहार मांगने का मामला सामने आया है।
समुद्र के बीच स्थित एक ऐसा रहस्यमयी और वीरान शहर
भारत के दक्षिणी छोर पर प्रकृति की खूबसूरती और उसके विध्वंसक रूप का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है, जो देखने वाले के रोंगटे खड़े कर दे। तमिलनाडु के पंबन द्वीप के आखिरी छोर पर बसा धनुषकोडी (Dhanushkodi) आज एक ऐसा रहस्यमयी और वीरान स्थान बन चुका है, जिसे दुनिया 'घोस्ट टाउन' यानी भूतों का शहर के नाम से जानती है। समुद्र की विशाल लहरों के बीच खड़े इस स्थान का इतिहास जितना रोमांचक और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है, उतना ही दर्दनाक इसका वह काला अतीत है जब एक ही रात में हंसता-खेलता पूरा शहर जलमग्न हो गया था। चारों तरफ समंदर के नीले पानी और सफेद रेत के बीच खड़े खंडहर इस बात की गवाही देते हैं कि यहां कभी इंसानी जिंदगी आबाद हुआ करती थी। आज भले ही यहां स्थायी रूप से कोई नहीं रहता, लेकिन हर साल लाखों सैलानी इस रहस्यमयी और रोमांचक नज़ारे को देखने के लिए यहां खींचे चले आते हैं। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे एक हंसता-खेलता शहर खंडहर में तब्दील हो गया और इस जगह से जुड़ी अनसुनी कहानियां क्या हैं।साल 1964 की वह प्रलयकारी रात: जब एक ही चक्रवात में उजड़ गया पूरा का पूरा शहरदिसंबर 1964 से पहले धनुषकोडी भारत और श्रीलंका के बीच व्यापार और यात्रा का एक बेहद व्यस्त और प्रमुख केंद्र हुआ करता था। यहां रेलवे स्टेशन, कस्टम ऑफिस, अस्पताल, चर्च और बाजार हुआ करते थे, जिसे मिनी लंका या एक छोटा शहर कहा जाता था। लेकिन 22-23 दिसंबर 1964 की वह काली रात इस इलाके के लिए काल बनकर आई। बंगाल की खाड़ी में उठे एक भयानक चक्रवात (Rameswaram Cyclone) ने यहाँ तबाही का ऐसा तांडव मचाया कि जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। करीब 250 से 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं और लगभग 25 फीट ऊंची समुद्री लहरों (Storm Surge) ने पल भर में पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया। उस रात पंबन से धनुषकोडी आने वाली एक पूरी यात्री ट्रेन (Boat Mail) समंदर की तेज लहरों की चपेट में आकर पानी में समा गई, जिसमें सवार सैकड़ों यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस कुदरती कहर के बाद मद्रास सरकार ने इस जगह को रहने के लिए पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर दिया और यह हमेशा के लिए एक वीरान भूतिया शहर बनकर रह गया।समुद्र की लहरों के बीच आज भी खड़े हैं खंडहर, पुराणों से जुड़ा है गहरा नाताआज जब सैलानी धनुषकोडी के पम्बन तट से आगे बढ़ते हैं, तो उन्हें जगह-जगह ब्रिटिश कालीन इमारतों, चर्च के अवशेष और रेलवे स्टेशन के टूटे-फूट खंभे नजर आते हैं। समंदर के खारे पानी और तेज हवाओं के थपेड़े सहते हुए ये खंडहर आज भी उस दौर की कहानी बयां करते हैं। इस जगह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका धार्मिक और पौराणिक महत्व भी रामायण काल से जुड़ा हुआ है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि भगवान राम ने अपने भक्तों की सहायता से लंका पर चढ़ाई करने के लिए यहीं से 'राम सेतु' का निर्माण शुरू किया था। इस स्थान को 'धनुषकोडी' नाम इसलिए दिया गया क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने अपने धनुष की कोटि (छोर) से इस जगह को चिन्हित किया था। यहाँ बंगाल की खाड़ी और भारतीय महासागर का मिलन होता है, जिसे 'अरिचल मुनाई' (Arichal Munai) कहा जाता है, और यहां से श्रीलंका की दूरी महज कुछ ही किलोमीटर रह जाती है।वीरानियों के बीच पर्यटकों के लिए एडवेंचर और रहस्य का बड़ा केंद्र बना धनुषकोडीसालों तक दुनिया की नजरों से दूर और वीरान रहने वाला धनुषकोडी अब भारत के सबसे लोकप्रिय ऑफबीट टूरिस्ट डेस्टिनेशंस में शुमार हो चुका है। सरकार और प्रशासन द्वारा पंबन से यहां तक की पक्की सड़क बन जाने के बाद से पर्यटकों का आना-जाना बहुत आसान हो गया है। दोनों तरफ अथाह समंदर और बीच में संकरी सड़क से गुजरते हुए यहां पहुंचना किसी रोमांचक सफर से कम नहीं है। शाम ढलते ही इस इलाके में एक अजीब सा सन्नाटा छा जाता है, जो पर्यटकों के भीतर एक अलग ही रोमांच पैदा करता है। प्रकृति की विनाशलीला और इंसानी संघर्ष का यह जीवंत दस्तावेज देखने वालों को गहरी सोच में डाल देता है कि प्रकृति के आगे इंसानी ताकत कितनी बेबस है। अगर आप भी इतिहास, रहस्य और समंदर की असीम सुंदरता को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो रामेश्वरम यात्रा के दौरान धनुषकोडी की यह यात्रा आपके जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक साबित होगी।
क्यों अपराधी-ठगों पर भी मेहरबान होती हैं लक्ष्मी? मेहनती रह जाते गरीब
अक्सर आपने कई लोगों की जुबां से यह शिकायत सुनी होगी कि कोई बेईमानी और दो नंबर का काम करके भी मौज कर रहा है और कोई बहुत मेहनती होने के बावद भी गरीबी की आग में झुलस रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बेईमान लोगों पर भी लक्ष्मी क्यों मेहरबान रहती हैं. आइए जानते हैं.
Ranbir Kapoor और Yash की Ramayana ने पहले वीकेंड में कमाए 375.50 करोड़ रुपये
नयी दिल्ली, आठ नवंबर अभिनेता रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश अभिनीत फिल्म ‘रामायण’ ने अपने प्रदर्शन के पहले सप्ताहांत में दुनिया भर के सिनेमाघरों से 300 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर लिया है। यह फिल्म पांच नवंबर को हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में नजर आ रहे हैं। यह प्राचीन पौराणिक महाकाव्य ‘रामायण’ पर आधारित दो भागों की फिल्म शृंखला का पहला भाग है। फिल्म कारोबार और कमाई पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘सैक्निल्क’ के अनुसार, इस फिल्म ने दुनिया भर में कुल 375.50 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। वहीं, भारतीय सिनेमाघरों से फिल्म की सकल कमाई 218.25 करोड़ रुपये रही है। इस फिल्म का संगीत ऑस्कर विजेता संगीतकार हांस जिमर और ए. आर. रहमान ने तैयार किया है, वहीं स्टंट विशेषज्ञ टेरी नोटरी और गाइ नॉरिस इसके युद्ध व रोमांचक दृश्यों को निर्देशित करने वाली टीम का हिस्सा हैं। इस फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के ‘प्राइम फोकस स्टूडियोज’ ने ‘डीनेग’ और यश की ‘मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस’ के साथ मिलकर किया है। फिल्म के अन्य प्रमुख कलाकारों में सनी देओल, अनुपम खेर, काजल अग्रवाल, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय, आदिनाथ कोठारे, अरुण गोविल, कुणाल कपूर, इंदिरा कृष्णन और लारा दत्ता शामिल हैं।
भारत का सबसे अमीर गांव: जहां 17 बैंकों में जमा हैं 7,000 करोड़ रुपये
भारत विविधताओं का देश है, जहां गांवों को अक्सर पिछड़ेपन या कम संसाधनों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव भी मौजूद है जिसे न केवल देश बल्कि पूरे एशिया महाद्वीप का सबसे अमीर गांव होने का गौरव प्राप्त है? इस गांव की आर्थिक संपन्नता किसी बड़े महानगर या कॉर्पोरेट हब को भी मात देती है। हम बात कर रहे हैं पश्चिम भारत के गुजरात राज्य के कच्छ जिले में स्थित 'माधापर' (Madhapar Village) गांव की। जिला मुख्यालय भुज के पास बसा यह गांव आज अपनी बेहिसाब दौलत, आधुनिक बुनियादी ढांचे और अनूठी जीवनशैली के कारण देश-दुनिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस गांव की वित्तीय ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के स्थानीय बैंकों में लोगों की फिक्स डिपॉजिट (FD) के रूप में लगभग 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि जमा है। इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको इस अनोखे गांव की पूरी कहानी और इसकी बेमिसाल अमीरी के रहस्यों से रूबरू कराएंगे।आलीशान कोठियां और महानगरों जैसी आधुनिक सुविधाएं इस गांव की पहचानजब कोई पहली बार माधापर गांव की सीमा में प्रवेश करता है, तो उसे किसी गांव की बजाय किसी हाई-फाई पॉश टाउनशिप या विदेश के किसी शहर जैसा अहसास होता है। यहां की सड़कें पूरी तरह चौड़ी, पक्की और साफ-सुथरी हैं। गांव में बड़े-बड़े आलीशान बंगले और कोठियां बनी हुई हैं, जिन्हें देखकर बड़े-बड़े अमीर फेल नजर आते हैं। गांव के निवासियों के लिए यहां शुद्ध पेयजल आपूर्ति, बेहतरीन भूमिगत जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम), अत्याधुनिक स्वास्थ्य केंद्र, उच्च शिक्षा के लिए शानदार स्कूल और पार्क जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा, गांव में कई भव्य और खूबसूरत मंदिर भी हैं जो इसकी सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं। ग्रामीण परिवेश में इस स्तर की सुख-सुविधाएं देखना वाकई हैरान करने वाला है और यही वजह है कि इसे देश के सबसे विकसित और समृद्ध ग्रामीण इलाके के रूप में जाना जाता है।17 बड़े बैंकों का डेरा और सात हजार करोड़ रुपये के फिक्स डिपॉजिट का अद्भुत आंकड़ामाधापर गांव की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली विशेषता इसका बैंकिंग ढांचा है। अमूनन किसी सामान्य गांव में एक या दो बैंक शाखाएं मुश्किल से मिलती हैं, लेकिन माधापर में देश के लगभग सभी प्रमुख सरकारी और प्राइवेट बैंकों की कुल 17 बड़ी शाखाएं मौजूद हैं। इनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और एक्सिस बैंक जैसे तमाम बड़े वित्तीय संस्थान शामिल हैं। इन बैंकों में ग्रामीणों और एनआरआई परिवारों द्वारा जमा की गई कुल राशि लगभग 7,000 करोड़ रुपये के फिक्स डिपॉजिट (FD) के आंकड़े को पार कर चुकी है। बैंक अधिकारियों के अनुसार, यहां आने वाला कुल डिपॉजिट और ट्रांजैक्शन कई छोटे शहरों के कुल कारोबार से भी कहीं अधिक है, जो इस गांव की आर्थिक सुदृढ़ता की खुली गवाही देता है।इस अपार संपत्ति और समृद्धि के पीछे छिपा है एनआरआई (NRI) कनेक्शन का बड़ा राजसवाल यह उठता है कि आखिर इस छोटे से गांव के पास इतनी अकूत संपत्ति और पैसे कहां से आते हैं? इसकी मुख्य वजह इस गांव का मजबूत विदेशी कनेक्शन है। माधापर गांव के लगभग 1,200 से अधिक परिवार विदेशों में जाकर बस चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर लोग यूके (ब्रिटेन), अफ्रीकी देशों और अन्य पश्चिमी देशों में बड़े कारोबार या उच्च पदों पर कार्यरत हैं। विदेश में रहने के बावजूद इन लोगों की जड़ें अपनी मातृभूमि से गहराई से जुड़ी हुई हैं। वे अपनी विदेशी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने पैतृक गांव की बैंकों और पोस्ट ऑफिस में फिक्स डिपॉजिट या बचत खातों के रूप में सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा, लंदन और अन्य देशों में 'माधापर विलेज एसोसिएशन' जैसी संस्थाएं भी बनाई गई हैं जो विदेश में बसे लोगों को उनके गांव से जोड़े रखती हैं और विकास कार्यों में सहयोग करती हैं।आधुनिकता के साथ कृषि और पारंपरिक जड़ें भी हैं मजबूतमाधापर गांव की सफलता केवल विदेशों से आने वाले पैसों पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि यहां का स्थानीय कृषि और व्यापार भी इसकी रीढ़ की हड्डी है। गांव के आसपास की उपजाऊ जमीन पर किसान आधुनिक तकनीकों की मदद से आम, पपीता, गन्ना, मक्का और अन्य सब्जियों की बंपर पैदावार करते हैं। यहां का कृषि उत्पादन न केवल स्थानीय स्तर पर खपत होता है, बल्कि देश के अन्य बड़े बाजारों में भी निर्यात किया जाता है। आधुनिकता की दौड़ में आगे निकलने के बावजूद यहां के लोग अपनी संस्कृति, परंपरा और मिट्टी से प्रेम करना नहीं भूले हैं। गांव के लोगों का यह आपसी भाईचारा और अपनी माटी के प्रति समर्पण ही है जो माधापर को भारत का सबसे अनूठा और गौरवशाली गांव बनाता है।
'लोमड़ी कभी बाघ नहीं बन सकती', केटी रामा राव के लिए क्या बोल गए रेवंत रेड्डी
मुख्यमंत्री ने केटीआर पर तंज कसते हुए कहा, ‘जिस तरह कोई लोमड़ी अपनी धारियों की नकल करके बाघ नहीं बन सकती, उसी तरह उसकी नकल करने से कोई बाघ नहीं बन जाता। सिर्फ दाढ़ी बढ़ाने से कोई रेवंत रेड्डी नहीं बन सकता।’
2026 की दिवाली पिछले 50 सालों में सबसे खास: पीएम मोदी ने जवानों को दी शुभकामनाएं
रोशनी, उमंग और आतिशबाजी के महापर्व दीपावली (Diwali 2026) के इस पावन अवसर पर देश के कोने-कोने में जश्न का माहौल है, लेकिन इस उत्सव की चमक तब और अधिक बढ़ जाती है जब देश के प्रधानमंत्री खुद अपने घरों से दूर सीमा और कैंपों में तैनात वीर प्रहरियों के बीच पहुंचकर उनकी दिवाली को यादगार बना देते हैं। इस साल 2026 की दीपावली को ज्योतिषीय गणनाओं और ऐतिहासिक पंचांग के लिहाज से पिछले 50 सालों की सबसे खास और दुर्लभ दीपावली माना जा रहा है, क्योंकि इस बार के ग्रहों के संयोग ने इस पर्व को और अधिक आध्यात्मिक व ऐश्वर्यशाली बना दिया है। ऐसे खास और ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपनी पुरानी परंपरा को निभाते हुए प्रोटोकॉल और औपचारिकताओं से परे जाकर सीधे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के कैंप में अचानक दस्तक दी। अचानक अपने बीच देश के प्रधानमंत्री को पाकर जवानों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और पूरा कैंप भारत माता के जयकारों से गूंज उठा। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि पीएम मोदी के इस सरप्राइज दौरे से जवानों में कितना उत्साह बढ़ा और 2026 की यह दिवाली क्यों इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है।पिछले 50 सालों का सबसे अद्भुत खगोलीय और आध्यात्मिक संयोग बना 2026 की दिवाली परइस वर्ष 2026 की दीपावली केवल सामान्य रोशनी का त्योहार नहीं है, बल्कि खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसे पिछले पांच दशकों यानी 50 सालों का सबसे अनोखा पर्व बताया जा रहा है। जानकारों के अनुसार, इस बार दिवाली पर ग्रहों की जो विशेष स्थिति और दुर्लभ योग बने हैं, वे देश के लिए समृद्धि, शांति और प्रगति के नए द्वार खोलने वाले हैं। ऐसे अभूतपूर्व और ऐतिहासिक अवसर पर जब पूरा देश अपने परिवारों के साथ दीये जला रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यह ऐतिहासिक दिवाली देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों के साथ मनाने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री का यह अप्रत्याशित कदम इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि उनके लिए देश के असली पर्व और उत्सव उन वीरों के साथ हैं जो बिना किसी छुट्टी या आराम के 24 घंटे देश की सुरक्षा में अपनी जान जोखिम में डालकर डटे रहते हैं।सीआरपीएफ कैंप में अचानक पहुंचे पीएम मोदी, जवानों के बीच पहुंचकर बांटी खुशियांदीपावली के दिन जब सीआरपीएफ के जवान अपनी सामान्य ड्यूटी और मुस्तैदी में व्यस्त थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला अचानक उनके कैंप के मुख्य द्वार पर आ पहुंचा। किसी को इस बात की भनक तक नहीं थी कि देश के प्रधानमंत्री खुद चलकर उनके बीच आने वाले हैं। जैसे ही जवानों ने पीएम मोदी को अपने सामने देखा, उनका उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया। प्रधानमंत्री ने कैंप में पहुंचते ही वहां तैनात एक-एक जवान से हाथ मिलाया, उनका कुशलक्षेम पूछा और त्योहार की बधाई दी। उन्होंने जवानों के साथ बैठकर न केवल चाय की चुस्कियां लीं, बल्कि अपने हाथों से मिठाइयां बांटकर उनके साथ दीपोत्सव की खुशियों को साझा किया। इस दौरान जवानों के चेहरों पर जो मुस्कान और गर्व का भाव था, वह यह बयां करने के लिए काफी था कि अपनों से दूर रहकर भी उन्हें अपने देश के शीर्ष नेतृत्व के रूप में एक सच्चे परिवार का अहसास हो रहा था।देश की सुरक्षा और जवानों के कल्याण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धताकैंप में जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासी अपने घरों में चैन की नींद इसलिए सो पाते हैं और रोशनी के इस पर्व को इतने उल्लास के साथ मना पाते हैं क्योंकि देश की सीमाओं और आंतरिक मोर्चों पर सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों के जवान मुस्तैदी से पहरा दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण, आधुनिक हथियारों की उपलब्धता और उनकी सुविधाओं के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। देश के इतिहास में पिछले 50 सालों की सबसे खास मानी जाने वाली इस 2026 की दिवाली ने यह साबित कर दिया है कि जब नेतृत्व और सेना का हौसला इस तरह आपस में मिलता है, तो देश की एकता और अखंडता को कोई भी ताकत चुनौती नहीं दे सकती। यह दीपावली देश के हर नागरिक के दिल में देशभक्ति की एक नई अलख जगा गई है।
मैं वापस आऊंगा': पीएम मोदी के सामने जवानों ने ताली बजाकर गाया जोश से भरा गीत
देश की सीमाओं की सुरक्षा में चौबीसों घंटे तैनात रहने वाले हमारे वीर जवानों के साथ त्योहार मनाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंदाज हमेशा से देशवासियों के दिलों को छूने वाला रहा है। इस बार भी परंपरा को निभाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना दीपावली का पावन पर्व देश के वीर जवानों के साथ बेहद आत्मीय और खास अंदाज में मनाया। इस दौरान का एक बेहद भावुक और जोश से भरा वीडियो सामने आया है, जिसमें सीमा पर तैनात जवान प्रधानमंत्री के सामने ताली बजाकर और उत्साह के साथ एक लोकप्रिय गीत गाते हुए नजर आ रहे हैं, जिसके बोल हैं- 'मैं वापस आऊंगा'। जवानों के इस देशभक्ति से ओतप्रोत गीत और उनके बुलंद हौसलों को देखकर वहां मौजूद हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। इस खुशनुमा और मार्मिक माहौल के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भी बड़े प्यार से अपने हाथों से जवानों को मिठाइयां खिलाईं और उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि इस खास मुलाकात का पूरा वाकया क्या था और जवानों के साथ पीएम मोदी का यह जश्न देश के लिए क्या संदेश लेकर आया।देश की सरहद पर जवानों के बीच दीपावली मनाने की परंपरा और पीएम मोदी का खास अंदाजप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में देश को एक ऐसा नेतृत्व मिला है जो हर साल दीपावली की खुशियां अपने परिवार के साथ मनाने के बजाय देश के दूर-दराज के इलाकों में सीमा पर तैनात सेना, बीएसएफ, आईटीबीपी और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों के बीच जाकर मनाता है। इस बार भी प्रधानमंत्री ने अपनी इस पुरानी और प्रेरणादायक परंपरा को जारी रखते हुए देश के किसी संवेदनशील अग्रिम मोर्चे पर पहुंचकर जवानों के साथ दीपोत्सव का आनंद लिया। जब प्रधानमंत्री अचानक जवानों के बीच पहुंचे, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आम तौर पर कठिन परिस्थितियों, बर्फीले पहाड़ों और रेगिस्तानों में अपने घरों से दूर रहकर देश की रक्षा करने वाले ये जवान त्योहार के दिन अपनों को याद करके थोड़े भावुक जरूर होते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री को अपने बीच पाकर उनका उत्साह दोगुना हो गया। पीएम मोदी ने एक-एक जवान से मिलकर उनका हालचाल जाना और उनके पराक्रम की सराहना की।'मैं वापस आऊंगा' गीत की गूंज और जवानों के बुलंद हौसलों का अद्भुत नजाराइस मुलाकात के दौरान का सबसे खूबसूरत और यादगार पल वह था जब जवानों ने अपने अदम्य साहस और देशभक्ति को बयां करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सुर से सुर मिलाकर एक प्रसिद्ध गीत गाया। जवानों की जुबान पर जब 'मैं वापस आऊंगा' के बोल आए और उन्होंने तालियों की थाप के साथ गीत गाना शुरू किया, तो वहां का पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में रंग गया। यह गीत केवल कुछ पंक्तियां नहीं थीं, बल्कि यह हर उस सैनिक का संकल्प था जो देश की रक्षा के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर सीमा पर डटा रहता है कि चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियां क्यों न हों, वह अपनी मातृभूमि की सेवा कर सकुशल वापस लौटेगा। जवानों के इस जज्बे को देखकर प्रधानमंत्री मोदी भी मंत्रमुग्ध हो गए और उन्होंने तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। यह क्षण कैमरे में कैद होकर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और करोड़ों देशवासियों की आंखें नम और गर्व से भर गईं।प्रधानमंत्री ने अपने हाथों से बांटी मिठाइयां, देशवासियों को दिया एकता और सुरक्षा का संदेशत्योहार के इस पावन अवसर पर किसी भी परिवार की कमी को महसूस न होने देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद आगे बढ़कर अपने हाथों से डिब्बे से मिठाइयां निकालीं और एक-एक जवान को बड़े स्नेह के साथ खिलाईं। प्रधानमंत्री का यह सादगी भरा और अपनापन दिखाने वाला रूप देखकर जवान गदगद हो गए। इस दौरान पीएम मोदी ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासी चैन की नींद इसलिए सो पाते हैं क्योंकि सरहद पर आप जैसे वीर प्रहरी मुस्तैद रहते हैं। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया जा सकता और सरकार हमेशा सैनिकों तथा उनके परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। जवानों के साथ बिताए गए इन पलों ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि भारत का राजनीतिक नेतृत्व और उसकी सेना एक परिवार की तरह देश की रक्षा के लिए अटूट रूप से समर्पित है।
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त होने वाला है शुरू, जरूर पढ़ें ये चालीसा
Lakshmi Chalisa in Hindi: दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त कुछ ही देर में शुरू होने वाला है. इस खास मौके पर देवी की आराधना के साथ लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना न भूलें. यहां पढ़ें पूरी चालीसा.
Jammu के Shiv Market में आग से 40 दुकानें खाक, PDP Chief ने की तुरंत Financial Relief की मांग
8 नवंबर को जम्मू के शिव मार्केट में लगी भीषण आग से प्रभावित दुकानदारों से PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मुलाकात की। उन्होंने देखा कि स्थानीय कारोबारों को भारी नुकसान पहुंचा है और कई दुकानें आग में पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। मुफ्ती ने कहा कि यहां बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। ये छोटे दुकानदार हैं, कोई बहुत बड़े कारोबारी नहीं; इन्होंने कर्ज ले रखा था... इनकी दुकानें पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। इसे भी पढ़ें: Jammu Kashmir: नेकां विधायकों में असंतोष की अटकलें खत्म, बोले Dy CM Surinder Choudhary उन्होंने सरकार से अपील की कि वह प्रभावित दुकानदारों को आर्थिक मदद दे, ताकि वे अपनी दुकानें फिर से बना सकें, नया स्टॉक ला सकें और अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि मैं सरकार से आग्रह करती हूँ कि वह इन दुकानदारों को हर संभव मदद दे। उन्हें अपनी दुकानें फिर से खड़ी करनी हैं। चूँकि उनका ज्यादातर स्टॉक - जो उन्होंने उधार पर लिया था - जलकर राख हो गया है, इसलिए उनके पास अब कुछ भी नहीं बचा है। सरकार को इसमें सक्रिय रूप से दिलचस्पी लेनी चाहिए और जल्द से जल्द कदम उठाने चाहिए; ये दुकानें लंबे समय तक ऐसी हालत में नहीं रह सकतीं। उन्हें आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए ताकि वे अपनी दुकानों को ठीक से फिर से बना सकें, नया स्टॉक जुटा सकें और एक बार फिर अपनी आजीविका कमाकर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकें। इसे भी पढ़ें: Speaker Om Birla ने स्वीकार किया Srinagar सांसद Aga Syed Ruhullah Mehdi का इस्तीफा जम्मू रेलवे स्टेशन के सामने स्थित शिव मार्केट में 26 अक्टूबर की तड़के आग लग गई, जिससे लगभग 35 से 40 दुकानें पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में किसी की जान नहीं गई और न ही कोई घायल हुआ। इसके अलावा, 22 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में सुपरनाघामा क्रालगुंड इलाके में तीन रिहायशी मकानों में आग लग गई। भीषण लपटों ने इन मकानों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां रहने वालों में अफरा-तफरी मच गई। फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज डिपार्टमेंट ने इन तीनों मकानों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है।
अनंत सिंह ने नीतीश कुमार और लालू यादव को बेटी की शादी का दिया खुला न्योता
बिहार की सियासत में जब भी बाहुबली से लेकर जननेता तक की चर्चा होती है, तो अनंत सिंह का नाम बड़े ही आदर और कौतूहल के साथ लिया जाता है। अपनी खास शैली, दबंग छवि और अनोखे अंदाज के लिए मशहूर अनंत सिंह (Anant Singh) इन दिनों अपने घर में गूंजने वाली शहनाइयों और पारिवारिक आयोजनों को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं। मौका उनकी बेटी के विवाह का है, जिसे लेकर उन्होंने सूबे की राजनीति के तमाम दिग्गजों को निजी तौर पर आमंत्रित करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में जब अनंत सिंह से राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेदों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने सियासी गलियारों में एक बार फिर से गर्माहट ला दी है। उन्होंने बेहद साफगोई और दो टूक अंदाज में कहा कि पक्ष और विपक्ष की लड़ाई सिर्फ और सिर्फ चुनावी मैदान में होती है, शादी-ब्याह और पारिवारिक अनुष्ठानों में कोई राजनीति या दुश्मनी नहीं होती। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव समेत राज्य के तमाम बड़े नेताओं को अपनी बेटी की शादी का सपरिवार न्योता भेजा है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि अनंत सिंह के इस आमंत्रण और उनके इस बयान के बिहार की राजनीति में क्या मायने निकाले जा रहे हैं।बेटी के विवाह समारोह की भव्य तैयारियां और मेहमानों की सूची में बड़े सियासी नाममोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के घर इन दिनों खुशियों का माहौल है और उनकी बेटी का विवाह समारोह बेहद भव्य तरीके से आयोजित करने की तैयारियां चल रही हैं। एक तरफ जहां शादी की रस्में और कार्ड बांटने का सिलसिला तेजी से चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस समारोह में शामिल होने वाले मेहमानों की सूची ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बिहार की राजनीति में भले ही नीतीश कुमार (JDU) और लालू प्रसाद यादव (RJD) एक-दूसरे के धुर विरोधी दलों के मुखिया माने जाते हों और चुनावी मंचों पर एक-दूसरे पर तीखे हमले करते हों, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की जब बात आती है, तो पुराने समीकरण और तहजीब आज भी जिंदा नजर आती है। अनंत सिंह ने व्यक्तिगत रूप से संपर्क साधकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव को अपनी बेटी की शादी का निमंत्रण कार्ड सौंपा है। उनके इस कदम से यह साफ हो गया है कि व्यक्तिगत संबंधों के मामले में वे राजनीतिक सरहदों को आड़े नहीं आने देते हैं।'चुनावी जंग अलग है और पारिवारिक रिश्ते अलग': अनंत सिंह का बेबाक अंदाजराजनीतिक पंडितों और विश्लेषकों का मानना है कि अनंत सिंह का यह बयान बिहार की उस पुरानी और समृद्ध राजनीतिक संस्कृति की याद दिलाता है जहां वैचारिक मतभेद अपनी जगह होते थे, लेकिन पारिवारिक और सामाजिक मेल-मिलाप में कभी खटास नहीं लाई जाती थी। जब मीडिया ने उनसे यह सवाल किया कि क्या राजनीतिक विरोधियों को न्योता देने से कोई असहजता होगी, तो उन्होंने हंसते हुए और बड़े ही सहज अंदाज में जवाब दिया कि चुनाव और राजनीति अपनी जगह है, वहां जनता के बीच तीखे सवाल और बयानबाजी चलती है, लेकिन शादी-ब्याह जैसे पवित्र और मांगलिक अवसरों पर सब गिले-शिकवे भुलाकर एक परिवार की तरह शामिल होते हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग उनकी इस पारंपरिक सोच की सराहना कर रहे हैं, जो आज की आक्रामक राजनीति में कम ही देखने को मिलती है।बिहार की सियासत में इस आमंत्रण के निकाले जा रहे हैं सियासी मायनेभले ही अनंत सिंह इसे विशुद्ध रूप से एक पारिवारिक और सामाजिक आयोजन बता रहे हों, लेकिन बिहार की पैनी राजनीतिक नजर रखने वाले लोग इसमें भविष्य के राजनीतिक संकेतों की तलाश भी करने लगे हैं। नीतीश कुमार और लालू यादव जैसे दिग्गज नेताओं की इस समारोह में संभावित उपस्थिति को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो चुका है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब बिहार के राजनेता राजनीतिक लड़ाइयों से परे जाकर ऐसे आयोजनों में एक मंच पर नजर आए हों, लेकिन अनंत सिंह के रुतबे को देखते हुए इस शादी में सूबे के तमाम दिग्गज नेताओं का जुटना तय माना जा रहा है। कुल मिलाकर, यह विवाह समारोह केवल एक बेटी की विदाई का कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीति के कई दिग्गजों को एक छत के नीचे लाने का एक बड़ा सामाजिक अवसर भी बनता जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
मुहूर्त ट्रेडिंग पर गिरा बाजार... फिर भी 2 लाख करोड़ की कमाई, 20% चढ़ा ये स्टॉक!
दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग के मौके पर शेयर बाजार में निवेशकों की दिवाली मन गई. बाजार गिरने के बाद भी निवेशकों के पोर्टफोलियो ग्रीन में बंद हुए. निवेशकों ने दिवाली के मौके पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये की कमाई की.
सीतामढ़ी जंक्शन से गुजरने वाली छह नई पूजा स्पेशल ट्रेनें
दीपावली, छठ और आगामी त्यौहारी सीजन के दौरान घर जाने वाले प्रवासियों और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बहुत बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है। बिहार के महत्वपूर्ण और व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शुमार सीतामढ़ी जंक्शन (Sitamarhi Junction) से होकर कुल छह जोड़ी नई पूजा स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। रेलवे बोर्ड और पूर्व मध्य रेलवे जोन द्वारा लिए गए इस फैसले से उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और देश के अन्य बड़े शहरों के बीच सफर करने वाले लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। त्योहारी सीजन के दौरान ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और टिकट न मिलने की समस्या से जूझ रहे यात्रियों के लिए यह किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि सीतामढ़ी जंक्शन से गुजरने वाली इन छह पूजा स्पेशल ट्रेनों का रूट क्या होगा, इनके संचालन की समय-सारणी क्या है और यात्रियों को इसका किस प्रकार लाभ मिलेगा।त्यौहारी सीजन में उमड़ने वाली भारी भीड़ और कन्फर्म टिकट की किल्लत से मिलेगी मुक्तिहर साल दीपावली और लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान दिल्ली, मुंबई, सूरत, पंजाब और दक्षिण भारत से उत्तर बिहार लौटने वाले यात्रियों की संख्या में अचानक भारी इजाफा हो जाता है। ट्रेन के डिब्बों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती और लोग जनरल कोच में भी ठूस-ठूसकर सफर करने को मजबूर होते हैं। यात्रियों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए रेलवे प्रशासन ने एडवांस प्लानिंग करते हुए स्पेशल ट्रेनों के पहियों को गति देने का निर्णय लिया है। सीतामढ़ी जंक्शन से गुजरने वाली ये छह स्पेशल ट्रेनें न केवल यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित करेंगी, बल्कि उन्हें उनके गंतव्य तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाएंगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन ट्रेनों के चलने से नियमित एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों पर से यात्रियों का अत्यधिक दबाव कम होगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को भी बड़ी सहूलियत मिलेगी।सीतामढ़ी जंक्शन से गुजरने वाली छह पूजा स्पेशल ट्रेनों का रूट और शेड्यूलपूर्व मध्य रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये छह पूजा स्पेशल ट्रेनें विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेंगी। इनमें आनंद विहार (दिल्ली), रक्सौल, मुजफ्फरपुर, बरौनी, और गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण जंक्शनों को जोड़ने वाली ट्रेनें शामिल हैं। सीतामढ़ी जंक्शन पर इन ट्रेनों के ठहराव से सीतामढ़ी के अलावा शिवहर, रक्सौल, मधुबनी और आसपास के ग्रामीण इलाकों के यात्रियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। रेलवे ने इन ट्रेनों में सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए हैं ताकि यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त टिकट काउंटर, हेल्प डेस्क और आरपीएफ (RPF) के जवानों की तैनाती की गई है ताकि सुगम और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।यात्रियों के लिए रेलवे की अपील और बुकिंग से जुड़ी जरूरी जानकारियांइन पूजा स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की घोषणा होने के बाद से ही यात्रियों में खुशी की लहर दौड़ गई है और लोग तेजी से अपनी सीटों की बुकिंग कराने में जुट गए हैं। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए रेलवे के आधिकारिक ऐप (IRCTC) या काउंटर के जरिए ही अपने टिकट बुक करवाएं। अनाधिकृत या दलालों के चक्कर में पड़ने से बचें। रेलवे की इस बेहतरीन पहल से इस बार का त्योहारी सीजन प्रवासियों के लिए काफी सुगम और आरामदायक साबित होने वाला है, और वे बिना किसी धक्के-मुक्के के अपने परिवार के साथ हंसी-खुशी त्योहार मना सकेंगे।
बिहार में 7202 शिक्षकों और कर्मियों ने की थी 35.27 करोड़ की अवैध निकासी
बिहार के शिक्षा विभाग से इन दिनों एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा वित्तीय फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत हजारों शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों, गलत तरीके से वेतन निर्धारण और नियमों को ताक पर रखकर कुल 35 करोड़ 27 लाख रुपए से अधिक की अवैध निकासी (Illegal Withdrawal) का मामला उजागर हुआ है। जब विभाग के उच्च अधिकारियों और विजिलेंस सेल ने वित्तीय अनियमितताओं की इस गहरी परत को खंगाला, तो आंकड़े देखकर हर कोई हैरान रह गया। कुल 7202 शिक्षकों और कर्मियों की संलिप्तता इस अवैध खेल में पाई गई। हालांकि, इसके बाद शिक्षा विभाग ने बिना किसी नरमी के कड़ा रुख अख्तियार किया और युद्ध स्तर पर रिकवरी अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप अब तक लगभग 33 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि की वसूली सरकारी खजाने में की जा चुकी है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे इस पूरे फर्जीड़े का खुलासा हुआ और विभाग की कार्रवाई ने किस तरह इन जालसाजों पर शिकंजा कसा।कैसे खुला राज: फर्जी तरीके से वेतन और भत्तों की अवैध निकासी का पूरा खेलराजधानी पटना से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक फैले इस वित्तीय घोटाले का खुलासा तब हुआ जब शिक्षा विभाग द्वारा राज्यभर के शिक्षकों के वेतन वितरण, सर्विस बुक और वित्तीय रिकॉर्ड्स का डिजिटल ऑडिट कराया गया। ऑडिट के दौरान यह बात सामने आई कि राज्य के अलग-अलग जिलों में कई ऐसे शिक्षक और कर्मचारी हैं जिन्हें उनके वास्तविक वेतनमान या हक से कहीं अधिक राशि लगातार भेजी जा रही थी। कुछ मामलों में तो ऐसे लोग भी वेतन उठाते रहे जिन्होंने नौकरी छोड़ दी थी या जिनके कागजात पूरी तरह से फर्जी पाए गए थे। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने जब इसकी गहरी छानबीन की, तो पता चला कि मिलीभगत और प्रशासनिक सुस्ती का फायदा उठाकर कुल 7202 शिक्षकों और कर्मियों ने मिलकर सरकारी कोष से कुल 35 करोड़ 27 लाख रुपए की अवैध निकासी कर ली है। इस खुलासे के बाद महकमे में भूचाल आ गया और तुरंत कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।शिक्षा विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई: सख्त नोटिस और वेतन रोकने का बड़ा कदममामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे बहुत ही कड़ाई से लिया। सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को यह सख्त निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्र के दोषी शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची तैयार करें और उनसे एक-एक पाई का हिसाब वसूलें। विभाग ने चेतावनी दी कि जो लोग स्वेच्छा से अवैध रूप से निकाली गई राशि वापस नहीं करेंगे, उनके खिलाफ निलंबन, विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। इस ताबड़तोड़ प्रशासनिक कार्रवाई के डर और विभाग की पैनी निगरानी के कारण दोषी कर्मियों के होश उड़ गए। चरणबद्ध तरीके से चलाए गए इस रिकवरी अभियान का नतीजा यह निकला कि देखते ही देखते आरोपियों ने अवैध रूप से ली गई राशि को वापस करना शुरू कर दिया, जिससे खजाने में लगभग 33 करोड़ रुपए की वापसी सुनिश्चित हो चुकी है।शेष राशि की रिकवरी और भविष्य में इस तरह की धांधली रोकने के लिए पुख्ता डिजिटल सुधारयद्यपि शिक्षा विभाग ने लगभग 33 करोड़ रुपए की बड़ी रिकवरी कर एक मिसाल पेश की है, लेकिन अभी भी कई ऐसे मामले हैं जहां शेष बची हुई राशि की वसूली के लिए प्रक्रिया जारी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाकी बचे हुए दोषियों को भी बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से इस बात को उजागर कर दिया है कि सरकारी महकमों में वित्तीय पारदर्शिता कितनी जरूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए अब बिहार सरकार और शिक्षा विभाग ने वेतन भुगतान प्रणाली को पूरी तरह से ऑनलाइन, पारदर्शी और सेंट्रलाइज्ड (Centralized Salary System) कर दिया है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या शिक्षक इस प्रकार की अवैध निकासी करने की हिम्मत न जुटा सके। इस सख्त कदम से न केवल सरकारी धन की बर्बादी रुकेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी एक नई शुचिता और अनुशासन देखने को मिलेगा।
दिवाली पर छाई गहरी शोक की लहर: चार बार के विधायक और पूर्व मंत्री डॉ. जसवंत यादव का निधन
दीपावली के पावन और उल्लास से भरे पर्व के दिन राजस्थान के राजनीतिक गलियारों और अलवर क्षेत्र से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। राज्य के वरिष्ठ और कद्दावर राजनेता, बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान विधायक तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. जसवंत सिंह यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे डॉ. यादव ने जयपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही उनके पैतृक क्षेत्र बहरोड़, अलवर सहित पूरे राजस्थान में शोक की लहर दौड़ गई है। दीपावली के दिन प्रदेश ने एक ऐसा जनप्रिय नेता खो दिया है, जिसने अपने चार दशक लंबे राजनीतिक सफर में हमेशा जनता के अधिकारों और क्षेत्रीय विकास के लिए कड़ा संघर्ष किया। उनके निधन के बाद से राजनीतिक दिग्गजों और समर्थकों द्वारा लगातार श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है।लंबे समय से गंभीर बीमारी से जंग और अस्पताल में ली अंतिम सांसडॉ. जसवंत यादव पिछले काफी लंबे समय से कैंसर (प्रोस्टेट कैंसर) जैसी खतरनाक बीमारी से मुकाबला कर रहे थे। बीमारी के बावजूद उनके भीतर का जननेता और सेवाभाव कभी कम नहीं हुआ, और वे अपनी शारीरिक तकलीफों को दरकिनार कर लगातार क्षेत्र की जनता के बीच सक्रिय बने रहे थे। हाल ही में सेहत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें जयपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। तमाम कोशिशों के बावजूद वे इस जानलेवा बीमारी से अपनी लंबी जंग हार गए और रविवार सुबह करीब 8 बजकर 15 मिनट पर उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। उनके निधन की आधिकारिक सूचना उनके पुत्र मोहित यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की, जिसे पढ़ते ही उनके चाहने वालों और पार्टी कार्यकर्ताओं पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।शानदार राजनीतिक सफर: चार बार विधायक, सांसद और कैबिनेट मंत्री का पद संभालाडॉ. जसवंत सिंह यादव का राजनीतिक करियर उपलब्धियों और जनसेवा की बेमिसाल मिसाल रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करते हुए साल 1998 में पहली बार मुंडावर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक सूझबूझ का दायरा लगातार बढ़ता चला गया। वे अपने राजनीतिक जीवन में कुल चार बार विधायक चुने गए। इसके अलावा, साल 1999 के आम चुनावों में उन्होंने अलवर लोकसभा सीट से शानदार जीत हासिल की थी और संसद पहुंचकर क्षेत्र की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया था। राजस्थान सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली और प्रशासन में अपनी मजबूत पकड़ का अहसास कराया। अलवर जिले की राजनीति में उन्हें एक मजबूत स्तंभ माना जाता था, जिन्होंने बिना किसी भेदभाव के हमेशा आम जनता के हितों के लिए काम किया।राजनीतिक जगत में शोक की लहर, मुख्यमंत्री और दिग्गजों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलिडॉ. जसवंत यादव के निधन की खबर सामने आते ही पूरे राजनीतिक गलियारे में शोक छा गया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत पक्ष और विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। नेताओं ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. यादव का पूरा जीवन जनसेवा, समर्पण और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रहा। उनका यूं चला जाना न केवल भारतीय जनता पार्टी के लिए, बल्कि समूचे राजस्थान और खासकर अलवर परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव सिलपटा (खैरथल-तिजारा) में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा, जहां उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में समर्थकों और गणमान्य लोगों के जुटने की उम्मीद है।
Parvinder Jhota का पार्थिव शरीर PGI Chandigarh से Mansa पहुँचा, उमड़ा समर्थकों का हुजूम
नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा का पार्थिव शरीर रविवार को अंतिम संस्कार के लिए पंजाब के मानसा पहुँचा। उनके साथ समर्थकों का एक बड़ा जुलूस था, जिन्होंने उनके पार्थिव शरीर पर फूल बरसाए और परविंदर झोटा अमर रहे के नारे लगाए। झोटा के पार्थिव शरीर को PGI चंडीगढ़ से मानसा लाया गया, जहाँ उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए विरोध-स्थल पर काफी लोग इकट्ठा हुए। जुलूस के बाद, उनके पार्थिव शरीर को उनके घर ले जाया गया। परिवार की योजना के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार उनके खेतों में किया जाएगा। इसे भी पढ़ें: पंजाब में Parwinder Singh Jhota का शव मानसा पहुंचा, रविवार को होगा अंतिम संस्कार ANI से बात करते हुए, झोटा के पिता भीम सिंह ने राजनीतिक नेताओं और पुलिस अधिकारियों पर उनके बेटे की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने मामले की गहन जांच की मांग की और स्थानीय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के तुरंत तबादले की अपील की। उन्होंने कहा कि 28 दिन बीत चुके हैं... पंजाब सरकार ने स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर, नशा तस्करों के साथ साजिश रची और परविंदर की हत्या करवा दी... असली हत्यारे—जो इस पूरी साजिश के पीछे के मुख्य राजनीतिक सूत्रधार हैं—अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। जिनके संरक्षण में यह हत्या हुई, उन्हें अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। यहाँ तक कि इसमें शामिल पुलिस अधिकारी भी खुलेआम घूम रहे हैं। जब तक इस मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती और इन राजनीतिक साजिशकर्ताओं को जेल नहीं भेज दिया जाता, तब तक हमें चैन नहीं मिलेगा... पंजाब के युवा दिन-ब-दिन बर्बाद हो रहे हैं—उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। हम केंद्र सरकार—खासकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह मंत्री—से मांग करते हैं कि अगर न्याय चाहिए, तो स्थानीय SSP का तुरंत तबादला किया जाए। उनका तबादला इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि 'झाड़ू पार्टी' (आम आदमी पार्टी) के राजनीतिक नेता इस पुलिस अधिकारी को बचा रहे हैं। परिवार के सदस्यों ने पहले झोटा को एक ऐसे योद्धा के रूप में याद किया, जो नशे के खिलाफ डटकर खड़ा रहा और समाज के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उन्होंने पंजाब के युवाओं से अपील की कि वे नशे की समस्या के खिलाफ झोटा की लड़ाई से प्रेरणा लें। अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच, परिवार के एक सदस्य ने कहा कि हमारा योद्धा आ रहा है। हमें बहुत खुशी हो रही है—आमतौर पर लोग शोक मनाते हैं, लेकिन हम खुश हैं। हम उस समुदाय से आते हैं: जहाँ हमारे लोगों को पहियों पर बांधकर तोड़ा गया, खौलती कड़ाही में उबाला गया, और आरी से जिंदा चीर दिया गया। वह हमारा योद्धा है। इसे भी पढ़ें: परविंदर झोटा की पत्नी को ₹2 करोड़ और सरकारी नौकरी, Joint Action Committee का धरना खत्म रिश्तेदार जसपाल ने बताया कि झोटा पर फूलों की बारिश इसलिए की गई, क्योंकि उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा 'शहीद' की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा कि फूलों की बारिश इसलिए की जा रही है क्योंकि सर्वोच्च सत्ता श्री अकाल तख्त साहिब है, जहाँ से उन्हें शहीद की उपाधि दी गई थी। उन पर ईश्वर की कृपा है; पंजाब में, हमारे दस गुरुओं ने 14 युद्ध लड़े और हमारे लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। हमारे इस योद्धा ने भी हमारे लिए बहुत कुछ किया है, और हमें उनके उदाहरण से सीखना चाहिए। दीवाली के अवसर पर, परिवार ने युवाओं से अपील की कि वे नशीले पदार्थों से दूर रहें और पंजाब से नशा खत्म करने के प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग लें।
BSF, SSB और पुलिसकर्मियों के लिए Bengal में शुरू होगा Seema Mitra पुरस्कार
हिंगलगंज (पश्चिम बंगाल), आठ नवंबर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार देश की सीमाओं की सुरक्षा में असाधारण योगदान देने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और राज्य पुलिस के कर्मियों को सम्मानित करने के लिए 2027 से ‘सीमा मित्र’ पुरस्कार शुरू करेगी। शुभेंदु ने कहा कि पुरस्कार पाने वाले कर्मियों का चयन करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी। उन्होंने बांग्लादेश की सीमा से लगे उत्तर 24 परगना जिले के हिंगलगंज इलाके में बीएसएफ के जवानों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम बीएसएफ, एसएसबी और पश्चिम बंगाल पुलिस के कर्मियों को अगले साल से ‘सीमा मित्र’ पुरस्कार देंगे।’’बीएसएफ भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा करता है, जबकि एसएसबी के कर्मी नेपाल और भूटान से लगी सीमाओं पर तैनात हैं। मुख्यमंत्री ने दिवाली और काली पूजा के अवसर पर जवानों को शुभकामनाएं देने के लिए हिंगलगंज सीमा चौकी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर जवानों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। शुभेंदु ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘मैं पिछली सरकार द्वारा बीएसएफ और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों और उनके साथ किए गए व्यवहार के लिए राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में आपसे माफी मांगता हूं।’’उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार ने पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब 600 किलोमीटर लंबे हिस्से पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं कराई थी। शुभेंदु ने कहा कि राज्य में सत्ता संभालने के तुरंत बाद भाजपा सरकार ने बीएसएफ को खुली सीमा पर बाड़ लगाने के लिए आवश्यक जमीन मिलना सुनिश्चित किया।
5 दिन तक पिता की लाश के साथ फ्लैट में रहा बेटा, धनतेरस पर मिठाई देने पहुंची बेटी तब खुला राज
कानपुर के पनकी में रिटायर्ड डॉक्टर प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव का शव 5 दिन तक फ्लैट में पड़ा रहा. बेटा विजय उसी घर में रहता रहा और किसी को नहीं बताया.
दीवाली पर चमकी किस्मत... 200 रुपये के टिकट ने ग्रामीण परिवार को बनाया 1.5 करोड़ का मालिक
दीपावली के मौके पर पंजाब के एक ग्रामीण परिवार की किस्मत ऐसी पलटी कि महज 200 रुपये की मंथली लॉटरी टिकट ने उसे डेढ़ करोड़ रुपये का मालिक बना दिया।
मकड़ियों को कैसे भगाएं? घर से मकड़ियों को हमेशा के लिए दूर रखने वाला स्प्रे कैसे बनाएं
अगर आप घर पर भी हर जगह मकड़ी के जाले दिखाई देते हैं तो आप कुछ घरेलू उपाय आजमा सकते हैं. यहां जानिए घर से मकड़ियों को कैसे भगाएं, मकड़ियों को हमेशा के लिए घर से दूर रखने वाला स्प्रे कैसे बनाएं.
कैटरीना कैफ और विक्की कौशल ने दिवाली के मौके पर दिखाई बेटे की पहली झलक, क्यूट विहान ने जीता सबका दिल
कैटरीना कैफ और विक्की कौशल ने दिवाली के मौके पर अपने बेटे विहान कौशल की पहली झलक शेयर की. देखें कैटरीना के क्यूट बेटे की पहली तस्वीर.
दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर, लागू हुईं ग्रैप-3 की पाबंदियां
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। औसत एक्यूआई 182 दर्ज होने के बावजूद कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुँच गया है। स्थिति को देखते हुए ग्रैप-3 की पाबंदियाँ लागू कर दी गई हैं। दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन चुकी है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
अयोध्या दीपोत्सव में बना रिकॉर्ड, 36 लाख दीपों से जगमगा उठी रामनगरी, देखें 100 शहर 100 खबर
अयोध्या में 10वें दीपोत्सव पर 36 लाख से अधिक दिए जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री राम जन्मभूमि और हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की. सरयू तट पर महाआरती और 2100 ड्रोन्स के शो ने दीपोत्सव को अलौकिक बनाया. इसके साथ ही देश भर में धूमधाम से दिवाली मनाई जा रही है, वहीं दिल्ली में प्रदूषण AQI 400 के पार पहुंच गया है.
Fact Check: क्या 1 जनवरी से चेकबुक के नियमों में होने वाला है बदलाव? RBI ने बताया वायरल मैसेज का सच
PIB Fact Check: एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि आरबीआई 1 जनवरी, 2027 से चेकबुक के नियमों में बदलाव करने जा रहा है. पीआईबी फैक्ट चेक ने इस दावे को फर्जी बताया है. आरबीआई ने भी साफ किया है कि फिलहाल CTS चेकबुक के नियमों में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है.
गुरुद्वारा और मस्जिद भी तो हैं, फिर मंदिरों को ही पैसे क्यों? कांग्रेस नेता ने उठाया सवाल
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बंगाल में गुरुद्वारा भी हैं और मस्जिद भी। फिर फंड केवल मंदिरों को ही क्यों दिया जा रहा है।
ठाणे में नाबालिग से दरिंदगी के मामले में दोषी को POCSO Court ने सुनाई 20 साल की कैद
ठाणे, आठ नवंबर महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की से कई बार दुष्कर्म करने के मामले में 35 वर्षीय व्यक्ति को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रेमल एस. विठलानी ने आरोपी श्रीनिवास अशोक येलगोंडा को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और बाल यौन अपराधों विरोधी कानून पॉक्सो की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता ठाणे जिले के दिवा पूर्व स्थित उसी आवासीय सोसायटी में रहती थी, जहां आरोपी भी रहता था। जून, 2020 में दोनों की जान-पहचान हुई और फोन पर बातचीत के दौरान उनके बीच प्रेम संबंध शुरू हो गया। विशेष लोक अभियोजक रेखा हिवराले ने अदालत को बताया कि आरोपी ने नवंबर, 2020 में शादी का वादा करके पड़ोसी के खाली फ्लैट में पहली बार नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने कई बार उसका यौन शोषण किया। फरवरी 2022 में आरोपी द्वारा शादी से मुकरने के बाद हुए विवाद के दौरान यह मामला सामने आया। बचाव पक्ष ने प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी और घटनाओं की सटीक तारीखें उपलब्ध नहीं होने का तर्क दिया। हालांकि, अदालत ने पीड़िता के जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र के आधार पर पुष्टि की कि वह घटनाओं के दौरान नाबालिग थी। इसलिए उसकी सहमति कानूनन अप्रासंगिक थी। न्यायाधीश ने कहा कि पीड़िता को आरोपी से शादी होने का भरोसा था, जिसके कारण उसने इस संबंध और घटनाओं को अपने माता-पिता से छिपाए रखा। परिवार द्वारा पुलिस से संपर्क करने में हुई देरी भी सामाजिक प्रतिष्ठा और लड़की के भविष्य से जुड़ी परिस्थितियों में स्वाभाविक थी। अदालत ने कहा कि हिंसा और पूर्व नियोजित यौन अपराध के प्रमाण नहीं मिले, लेकिन पीड़िता की नाबालिग उम्र के कारण कानून के तहत न्यूनतम 20 साल की सजा देना अनिवार्य था।
दिवाली पर मां लक्ष्मी को किन चीजों का भोग लगाएं? ज्योतिषविद ने बताया
आज देशभर में दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. मान्यता है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा से सुख-समृद्धि बढ़ती है. इस दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कुछ खास चीजों का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है.
पंजाब में पराली जलाने के 3307 मामले, 60.60 लाख रुपये जुर्माना
पंजाब में 7 नवंबर तक पराली जलाने के 3307 मामले दर्ज किए गए. 60.60 लाख जुर्माना हुआ है. 32.50 लाख की वसूली हुई है. तरनतारन सबसे आगे 623 मामलों के साथ. पटियाला में 196 घटनाएं हुई हैं. एफआईआर, रेड एंट्री और नोटिस की कार्रवाई जारी.
कटरीना-विक्की ने दिखाई बेटे 'विहान' की झलक, दिवाली पर की ट्विनिंग
Katrina Kaif-Vicky Kaushal Son Photo: दिवाली पर कटरीना कैफ और विक्की कौशल ने बेटे विहान की पहली झलक दिखाई है. पीली जैकेट और क्रीम कुर्ते में विहान ने मम्मी-पापा संग ट्विनिंग की. देखिए कपल की खूबसूरत फैमिली फोटो और तीनों का दिवाली लुक.
कल दिवाली के दूसरे दिन 3 राशियां खूब कमाएंगी पैसा, पढ़ें राशिफल
Kal Ka Rashifal 9 November 2026: कामकाज सामान्य रहेगा. समय सीमा लापरवाही से मामले लंबित रह सकते हैं. पेशेवर प्रयास व्यवस्थित रहेंगे. कामकाजी यात्राएं बढ़ेंगी. वातावरण सामान्य रहेगा. वाणिज्यिक मामलों में धैर्य दिखाएं
कटरीना-विक्की ने बेटे संग शेयर की पहली तस्वीर, दिवाली पर दिखाया चेहरा
कटरीना कैफ और विक्की कौशल ने दिवाली के खास मौके पर अपने नन्हे राजकुमार की पहली तस्वीर शेयर कर दी है.
बोर्ड ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उसमें दर्ज सभी जानकारियों की सावधानीपूर्वक जांच करें. यदि नाम, जन्मतिथि, फोटो, परीक्षा केंद्र या अन्य किसी विवरण में कोई त्रुटि दिखाई देती है, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर उसे परीक्षा तिथि से पहले ठीक करवा लें.
'अब लड़ाई का कोई मतलब नहीं', पानी के बंटवारे पर थलपति विजय से क्या बोले डीके शिवकुमार
डीके शिवकुमार ने विजय से इस प्रोजेक्ट को लेकर प्रतिनिधिमंडल कर्नाटक भेजने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्नाटक जलाशय में जमा पानी का गलत इस्तेमाल नहीं करेगा और पानी छोड़ने के अपने वादे पर कायम रहेगा।
दिवाली की पूजा में न करें देर, बस इतने समय रहेगा शुभ मुहूर्त
Diwali 2026: आज दिवाली 2026 पर मां लक्ष्मी की पूजा कब और कैसे करें? जानें लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, गणेश-कुबेर पूजा विधि और षोडशोपचार पूजन के मंत्र.
परविंदर सिंह झोटा का 26 दिन बाद अंतिम संस्कार, पैतृक गांव में परिवार ने दी आखिरी विदाई
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के 26 दिन बाद आखिरकार उन्हें आखिरी विदाई दे दी गई है. उनके परिवार ने उनके ही खेत में उनका अंतिम संस्कार कर दिया है.
26 दिन बाद परविंदर सिंह झोटा का अंतिम संस्कार, पैतृक गांव में परिवार ने दी आखिरी विदाई
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के 26 दिन बाद आखिरकार उन्हें आखिरी विदाई दे दी गई है. उनके परिवार ने उनके ही खेत में उनका अंतिम संस्कार कर दिया है.
E20 पेट्रोल में 30% तक एथनॉल मिलाने के आरोप पर आया सरकार का जवाब, कर्नाटक की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
मंत्रालय के मुताबिक, पेट्रोल पंपों के निरीक्षण के दौरान एक-एक लीटर के छह नमूने लिए जाते हैं। इनमें से दो नमूने डीलर को, दो तेल कंपनी या संबंधित विभाग को और दो अधिकृत प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जाते हैं।
CEC Gyanesh Kumar के हटने तक जारी रहेगा Congress का आंदोलन: KC Venugopal
कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने रविवार को कहा कि कांग्रेस का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटा नहीं दिया जाता और देश की चुनाव प्रणाली को निष्पक्ष एवं पारदर्शी नहीं बनाया जाता। वेणुगोपाल ने यहां पत्रकारों से कहा कि विभिन्न राज्यों एवं जिलों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं तथा दिवाली के दौरान इनमें कुछ समय के लिए विराम दिया जा सकता है। उन्होंने एक नवंबर को नयी दिल्ली में कांग्रेस की ओर से आयोजित रैली को देश के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक बताया और कहा कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘हम इस आंदोलन को तभी समाप्त करेंगे, जब ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दिया जाएगा और भारत की चुनाव प्रणाली एवं प्रक्रियाओं को त्रुटिहीन, निष्पक्ष तथा न्यायसंगत बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। यह ऐसी लड़ाई नहीं है, जिसे हम बीच में छोड़ देंगे।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण गरीब लोग मतदान के अधिकार के साथ-साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हो जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि सरकारी योजनाओं के लाभ को तेजी से मतदाता पहचान पत्र से जोड़ा जा रहा है। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस अगले डेढ़ महीने के दौरान पंचायत स्तर पर देशव्यापी ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान चलाएगी। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत पार्टी प्रत्येक मतदान केंद्र पर एक ‘वोट रक्षक’ नियुक्त करेगी, जो मतदाता सूचियों की जांच करेगा, जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं उनकी पहचान करेगा और उनके घर जाकर मतदाता सूची में नाम दोबारा जुड़वाने में मदद करेगा। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस की विभिन्न इकाइयां राज्यों एवं जिलों में कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं तथा अन्य राजनीतिक दलों के साथ संयुक्त कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा और विपक्ष हाल के विवादों तथा जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठाएगा। वेणुगोपाल ने संसद के पिछले सत्र का जिक्र करते हुए दावा किया कि विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के कारण अमित शाह करीब दो सप्ताह तक सदन में प्रवेश नहीं कर पाए थे। केरलम सरकार के कामकाज के बारे में पूछे जाने पर वेणुगोपाल ने कहा कि राज्य में सक्षम प्रशासन है और सरकार अपने खिलाफ उठाए गए मुद्दों का समाधान करेगी। उन्होंने कहा कि छिटपुट घटनाएं और प्रशासनिक खामियां सामने आना स्वाभाविक है, लेकिन जहां भी आवश्यकता होगी, सरकार उचित कार्रवाई करेगी। वेणुगोपाल ने केरलम के आबकारी मंत्री एम. लिजू के शराब बार मालिकों से संबंध होने के आरोपों से निपटने के सरकार के तरीके का बचाव करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्रों में कारोबारियों सहित विभिन्न लोगों को जानते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व आबकारी आयुक्त एस. संबाशिव राव को विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप उस समय उठाने चाहिए थे, जब वह पद पर थे। हालांकि, वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार शिकायत की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने पर सहमत हो गई है।
दिवाली में इस्तेमाल मिट्टी के दीयों से घर पर पीतांबरी कैसे बनाएं, जानें पितांबरी बनाने का तरीका
Copper Cleaning Home Remedy: दिवाली के पुराने मिट्टी के दीयों को फेंकने की बजाय उनसे घर पर सफाई पाउडर बनाया जा सकता है. वायरल हैक में दीयों की बारीक मिट्टी, नमक और डिटर्जेंट मिलाकर तांबे के बर्तन साफ करने का तरीका बताया गया है. हालांकि, इस्तेमाल से पहले सावधानी जरूरी है.
Vadodara Court ने पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ दिया आपराधिक कार्रवाई का आदेश
वडोदरा (गुजरात), आठ नवंबर गुजरात के वडोदरा की एक अदालत ने 2024 में एक व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट करने के मामले में तत्कालीन पुलिस निरीक्षक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। इस घटना में व्यक्ति के कान का पर्दा फट गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुप्रिया सान्याल ने चार नवंबर को पारित अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया गोरवा थाने के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक के. एन. लाठिया के खिलाफ मामला बनता है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की उन धाराओं के तहत लाठिया के खिलाफ समन जारी करने का निर्देश दिया, जो स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाने और जानबूझकर अपमान करने से संबंधित हैं। शिकायतकर्ता मोइन पठान के अनुसार, चार नवंबर 2024 की रात वह गुजरात के वडोदरा शहर के गोरवा इलाके में कार चला रहे थे, तभी मोटरसाइकिल पर सवार चार-पांच लोगों ने उन पर हमला कर दिया। पठान ने मदद के लिए अपने भाई मोहम्मद अहमद खान को फोन किया। इसके बाद उनके भाई ने पुलिस नियंत्रण कक्ष में फोन किया। हालांकि, फोन करने के बावजूद मौके पर कोई पुलिस सहायता नहीं पहुंची। बाद में जब लाठिया घटनास्थल पर पहुंचे तो वह वर्दी में नहीं थे और एक निजी काली कार में आए थे। शिकायतकर्ता के वकील दर्शन पटेल ने आरोप लगाया, ‘‘वह कार चालक और मोटरसाइकिल सवार लोगों, दोनों पक्षों को गोरवा पुलिस थाने ले गए। वहां उन्होंने दोनों शिकायतकर्ताओं (पठान और उनके भाई) की बेरहमी से पिटाई की, जिससे पठान के कान का पर्दा फट गया।’’पठान ने घटना के अगले दिन उपचार कराया। पुलिस की कथित बर्बरता के बाद दोनों भाइयों ने लाठिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस आयुक्त, राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और गृह मंत्री से संपर्क किया। हालांकि, कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने अदालत का रुख किया। अपने बचाव में लाठिया ने कहा कि दोनों भाई नशे में थे और उनके खिलाफ शराब पीकर गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया गया था, जो अदालत में साबित हो चुका है। पटेल ने कहा, ‘‘अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और आरोपी पुलिस निरीक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने उसे समन जारी करने का भी निर्देश दिया।’’
पंजाब के राजपुरा की 22 वर्षीय रसनीत कौर ने बिना किसी कोचिंग के UPSC सिविल सेवा परीक्षा में पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल कर मिसाल कायम की है. PSPCL में लाइनमैन पिता की बेटी ने घर पर रहकर सेल्फ स्टडी के दम पर यह बड़ी सफलता हासिल की.
18 दिन बाद हरकी पैड़ी पर लौटी गंगा, फिर गुलजार हुए हरिद्वार के घाट
हरिद्वार में 18 दिन की गंगा बंदी समाप्त हो गई है. हरकी पैड़ी सहित सभी घाटों पर गंगा का पानी लौट आया है. इस दौरान नहर की सफाई का काम किया गया.
राजस्थान के बहरोड़ विधानसभा सीट से भाजपा के वर्तमान विधायक और राज्य सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. जसवंत सिंह यादव का रविवार सुबह जयपुर में निधन हो गया. वह लंबे समय से कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और 73 वर्ष के थे. जानिए उनके राजनीतिक सफर और अंतिम संस्कार से जुड़ी पूरी डिटेल्स.
Ayodhya में हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन कर संतों से मिले CM Yogi, भेंट किए उपहार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अयोध्या के हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश के लोगों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अयोध्या में 10वें दीपोत्सव के भव्य आयोजन के एक दिन बाद रविवार सुबह गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने भगवान हनुमान के सामने शीश नवाया और प्रदेशवासियों की खुशी, समृद्धि एवं कल्याण के लिए प्रार्थना की। योगी शनिवार से ही अयोध्या प्रवास पर हैं। अधिकारियों के मुताबिक, हनुमानगढ़ी पहुंचने पर संतों और पुजारियों ने जय श्री राम के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री श्रीराम जन्मभूमि परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने रामलला की पूजा-अर्चना की और आरती उतारी। उन्होंने मंदिर की परिक्रमा भी की और राम दरबार में पूजा कर प्रदेशवासियों की निरंतर प्रगति एवं कल्याण की कामना की। मंदिर से बाहर आने पर श्रद्धालुओं ने जय श्री राम के नारे लगाकर मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। आदित्यनाथ ने हाथ हिलाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। अयोध्या प्रवास के दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। बाद में मुख्यमंत्री ने अयोध्या के विभिन्न अखाड़ों और मठों में पहुंचकर संतों से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और दीपावली के उपलक्ष्य में उपहार भेंट किए। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, योगी सबसे पहले दिगंबर अखाड़े पहुंचे, जहां उन्होंने महंत सुरेश दास से मुलाकात की। इस दौरान संत राम लखन दास भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने दोनों संतों से प्रदेश और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की और उन्हें दीपावली के उपहार भेंट किए। इसके बाद मुख्यमंत्री बड़ा भक्त महल पहुंचे, जहां उन्होंने महंत कौशल किशोर दास जी महाराज से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और दीपावली के उपहार भेंट किए। योगी राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास से मिलने मणिराम दास छावनी भी पहुंचे। उन्होंने महंत के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके दीर्घायु होने की कामना करते हुए उन्हें दीपावली का उपहार भेंट किया।
देश के सजग पहरी हैं Indian Army के जवान, Sikkim पहुंचे Rajnath Singh ने की सराहना
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 नवंबर को सिक्किम के शेराथांग युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपना जीवन बलिदान करने वालों की याद में बनाए गए स्मारक, राष्ट्रीय कर्तव्य और त्याग की याद दिलाते हैं।'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, राजनाथ सिंह ने लिखा कि आज दिवाली के पावन अवसर पर, मैंने सिक्किम के शेराथांग युद्ध स्मारक पर हमारे अमर वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। जैसा कि कहा जाता है, 'स्मारक जीवित लोगों के लिए होते हैं, मृतकों के लिए नहीं'; ये स्मारक हमें लगातार प्रेरित करते हैं और हमारे भीतर राष्ट्रीय गौरव की भावना जगाते हैं। कर्तव्य पथ पर दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान, एक कृतज्ञ राष्ट्र की स्मृतियों में सदैव अंकित रहेगा, और हम उनके शौर्य के सदैव ऋणी रहेंगे। इसे भी पढ़ें: देश और दुनिया की प्रमुख खबरें: PM Modi का बस्तर दौरा, Congress चंदे में कमी और Japan भूकंप इस दौरे के दौरान, रक्षा मंत्री ने सीमा के कठिन और चुनौतीपूर्ण इलाकों में तैनात सैनिकों से मुलाकात की और उनसे बातचीत की। उन्होंने सैनिकों की सतर्कता की तुलना पारंपरिक दीवाली के दीयों से करते हुए कहा, “हमारे जवान खुद उन ‘दीयों’ की तरह हैं, जो चुपचाप अंधेरे से लड़ रहे हैं और देश के हर घर में सुरक्षा का प्रकाश फैला रहे हैं। बेहद खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी, उनकी अटूट सतर्कता, असीम देशभक्ति और ऊंचा हौसला हजारों दीयों से भी ज्यादा तेज चमकता है।” इसे भी पढ़ें: Bagdogra में जवानों संग Rajnath Singh ने मनाई दिवाली, Made in India तकनीक को सराहा उन्होंने सैनिकों के साथ दीवाली मनाने को एक बड़ा सम्मान बताया और सीमा पर तैनात सभी जवानों तथा उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं: “मातृभूमि के सच्चे रक्षकों के बीच दीवाली मनाना बहुत गर्व की बात है। सीमा पर तैनात हमारे सभी बहादुर जवानों और उनके परिवारों को दीवाली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।” इससे पहले, नाथुला दर्रे के पास शेराथांग युद्ध स्मारक पर, सिंह ने भारतीय सेना के जवानों के अनुशासन, समर्पण और बलिदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं पर उनकी मौजूदगी के कारण ही नागरिक त्योहार मना पाते हैं और चैन की नींद सो पाते हैं।
दाढ़ी बढ़ाने से कोई Revanth Reddy नहीं बनता, Telangana CM ने BRS नेता KTR पर कसा तंज
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शनिवार को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव पर निशाना साधा। उन्होंने रामा राव पर अपना लुक कॉपी करने का आरोप लगाते हुए कहा, सिर्फ दाढ़ी बढ़ा लेने से आप रेवंत रेड्डी जैसे नहीं दिखने लगेंगे। रेड्डी ने यह भी कहा कि बिना किसी ठोस आधार के राजनीतिक दिखावा करना, खुद को बाघ दिखाने की कोशिश कर रहे लोमड़ी जैसा है; और सिर्फ नकल करने से के.टी. रामा राव (जिन्हें KTR के नाम से जाना जाता है) को मतदाताओं का भरोसा नहीं मिल पाएगा। इसे भी पढ़ें: Congress को मिले चंदे में 75 फीसदी गिरावट, 2025-26 में आए 130 करोड़ रुपये विकाराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए रेड्डी ने कहा कि जैसे कोई लोमड़ी बाघ की धारियों की नकल करके बाघ नहीं बन सकती, वैसे ही आप भी किसी की नकल करके बाघ नहीं बन सकते। सिर्फ दाढ़ी बढ़ा लेने से कोई रेवंत रेड्डी नहीं बन जाता। उन्हें दाढ़ी बढ़ाने में 50 साल लग गए। पता नहीं, उन्हें थोड़ी समझदारी हासिल करने में और कितने साल लगेंगे? उन्होंने आगे कहा, जब तक नेता अपनी सोच नहीं बदलता, तब तक तेलंगाना की जनता उस पर कभी भरोसा नहीं करेगी। उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि चाहे आप 10 जन्म ले लें या ताड़ के पेड़ से लटक जाएं, आप तारक रामाराव ही रहेंगे, लेकिन अपने पूरे जीवन में कभी रेवंत रेड्डी नहीं बन पाएंगे। कार्यकर्ताओं का ख्याल रखने और उन्हें अपने दिल के करीब रखने के लिए हिम्मत चाहिए होती है। इस रिपोर्ट को तैयार किए जाने के समय तक राव या BRS की ओर से कोई तत्काल टिप्पणी नहीं आई थी। यह बयान कांग्रेस और BRS के बीच चल रही जुबानी जंग का एक और हिस्सा है, जिसमें दोनों पार्टियों के नेता राज्य में शासन, नेतृत्व और विकास के मुद्दों पर एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Nation First के सिद्धांत से LK Advani ने रखी BJP की नींव, PM Modi ने याद किया सफर रेड्डी ने आरोप लगाया कि 10 साल तक मुख्यमंत्री रहने और राज्य का बजट ₹20 लाख करोड़ तक पहुंच जाने के बावजूद, BRS अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने सिंचाई से जुड़ी कोई भी लंबित परियोजना पूरी नहीं की है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अविभाजित आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने 16 लाख एकड़ से अधिक भूमि की सिंचाई के लिए 'प्राणहिता-चेवेल्ला' परियोजना की योजना बनाई थी, लेकिन KCR ने इसकी जगह बदलकर और इसकी लागत बढ़ाकर इसे 'कालेश्वरम' परियोजना में बदल दिया। उन्होंने आगे कहा कि इस परियोजना का निर्माण KCR ने ही कराया था और उनके कार्यकाल के दौरान ही यह ढह गई।
Kochi में लॉज पर छापा मारकर 192 ग्राम MDMA बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार
कोच्चि, आठ नवंबर केरलम के एक लॉज में तलाशी के दौरान 185 ग्राम एमडीएमए समेत कुल 192 ग्राम प्रतिबंधित मादक पदार्थ जब्त किया और दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। एर्णाकुलम के ग्रामीण जिला पुलिस प्रमुख के. एस. सुदर्शन को मिली गुप्त सूचना के आधार पर यह तलाशी ली गयी। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरिकृष्णन के. एस. (32) और शिनू सेबेस्टियन (34) के रूप में हुई है। अलुवा के पुलिस उपाधीक्षक बैजू पॉलोस के नेतृत्व में एक टीम ने लॉज में छापा मारकर हरिकृष्णन को गिरफ्तार किया और उसके पास से 185 ग्राम एमडीएमए बरामद किया। इसकी कीमत लगभग 7.5 लाख रुपये आंकी गई है। उससे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने कोच्चि सिटी पुलिस के साथ मिलकर थोप्पुमपडी स्थित शिनू के घर की तलाशी ली। वहां कथित तौर पर एक पक्षी के पिंजरे में छिपाकर रखा गया सात ग्राम एमडीएमए और बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि जांच में पता चला है कि आरोपी तमिलनाडु से एक पर्यटक बस के जरिये मादक पदार्थ कोच्चि लाए थे। उन्होंने कथित तौर पर इसे केले के एक गुच्छे के अंदर छिपा रखा था। मादक पदार्थों के स्रोत और उनके वितरण नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच तेज कर दी गई है। इसमें बेंगलुरु-तमिलनाडु क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस तस्करी में और कितने लोग शामिल थे, आरोपियों को मादक पदार्थ किसने बेचे थे और उनसे इन्हें किसने खरीदा था।
वनटांगिया परिवार के साथ दिवाली क्यों मनाते हैं CM योगी? खुद बताई वजह
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर साल गोरखपुर के वनटांगिया गांव जाकर दिवाली मनाते हैं. त्योहार के इस पावन पर्व पर उन्होंने इसकी वजह बताई और इस समाज की दशकों से चली आ रही समस्याओं पर चर्चा की. सीएम योगी ने बताया कि उनकी सरकार ने वनटांगिया परिवारों को राजस्व गांव का दर्जा दिलाया और उनका मकसद समाज के अंतिम व्यक्ति तक खुशियां पहुंचाना है.
'नक्सली खत्म हुए, खतरा नहीं', बस्तर में PM मोदी ने क्यों किया दिमागी नक्सलियों का जिक्र?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में CRPF जवानों के साथ दिवाली मनाई. उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सली खत्म हुए हैं, लेकिन दिमागी नक्सलियों का खतरा अभी बरकरार है. जानें प्रधानमंत्री के भाषण की खास बातें.
MARUTI ला रही नई 7-सीटर MPV... इन कारों का बिगड़ेगा खेल
मारुति सुजुकी जल्द ही एक नई 7-सीटर कार लॉन्च करने वाली है. ये मारुति की पहली इलेक्ट्रिक 7 सीटर होगी, जिसका सीधा मुकाबला किआ कारेन्स क्लैविस ईवी और दूसरी इलेक्ट्रिक 7-सीटर कारों से होगा. इस साल कई बार कंपनी की अपकमिंग 7-सीटर को टेस्ट करते हुए देखा गया है. आइए जानते हैं इस कार में क्या कुछ खास होने वाला है.
'स्वागत है ससुराल' ट्रेलर: जिस सौतेली बेटी पर किया सितम, वही बनी सहारा
भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री स्मृति सिन्हा अपनी नई फिल्म 'स्वागत है ससुराल' के साथ दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं. फिल्म का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया है, जिसने सोशल मीडिया पर काफ़ी तहलका मचाया है. यह फिल्म एक परिवार की कहानी है, जिसमें स्मृति सिन्हा एक सौतेली माँ की भूमिका निभा रही हैं, जो अपनी सौतेली बेटी पर सितम करती है, लेकिन बाद में वही बेटी उसकी ढाल बन जाती है. ट्रेलर में स्मृति सिन्हा का अभिनय काफ़ी दमदार लग रहा है और उनके प्रशंसक उनके इस नए रूप को देखने के लिए काफ़ी उत्साहित हैं. फिल्म में स्मृति सिन्हा के साथ कई अन्य लोकप्रिय कलाकार भी नज़र आएंगे, जिन्होंने अपने अभिनय से फिल्म को काफ़ी ख़ास बनाया है.'स्वागत है ससुराल' के ट्रेलर में स्मृति सिन्हा एक सौतेली माँ की भूमिका निभा रही हैं, जो अपनी सौतेली बेटी पर सितम करती है. उनके अभिनय में नफ़रत और ज़्यादती की भावना काफ़ी साफ़ नज़र आ रही है. ट्रेलर में कई ऐसे दृश्य हैं जिनमें स्मृति सिन्हा अपनी सौतेली बेटी को प्रताड़ित करती हुई नज़र आ रही हैं. उनके प्रशंसक उनके इस नए रूप को देखने के लिए काफ़ी उत्साहित हैं और वे सोशल मीडिया पर उनके अभिनय की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं. स्मृति सिन्हा ने अपने अभिनय से यह साबित कर दिया है कि वे न केवल सकारात्मक भूमिकाओं में दमदार लगती हैं, बल्कि नकारात्मक भूमिकाओं में भी वे अपना जलवा बिखेर सकती हैं. उनके प्रशंसक उनके इस नए रूप को देखने के लिए काफ़ी उत्साहित हैं.फिल्म 'स्वागत है ससुराल' के ट्रेलर में एक और महत्वपूर्ण मोड़ नज़र आ रहा है, जिसमें स्मृति सिन्हा की सौतेली बेटी उनकी ढाल बन जाती है. जिस बेटी पर स्मृति सिन्हा ने सितम किया, वही बेटी उनकी मदद के लिए आगे आती है. ट्रेलर में यह काफ़ी भावनात्मक दृश्य नज़र आ रहा है, जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया है. यह साबित करता है कि प्यार और विश्वास हर ज़्यादती पर भारी पड़ सकते हैं. ट्रेलर के इस हिस्से ने दर्शकों को काफ़ी प्रभावित किया है और वे फिल्म को देखने के लिए काफ़ी उत्साहित हैं. फिल्म में सौतेली बेटी की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री ने भी अपने अभिनय से काफ़ी ख़ास बनाया है.'स्वागत है ससुराल' के ट्रेलर ने दर्शकों में काफ़ी उत्साह पैदा कर दिया है और वे फिल्म को देखने के लिए काफ़ी उत्साहित हैं. स्मृति सिन्हा के प्रशंसक उनके अभिनय की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि यह फिल्म भी उनकी पिछली फिल्मों की तरह काफ़ी लोकप्रिय होगी. फिल्म में स्मृति सिन्हा के साथ कई अन्य लोकप्रिय कलाकार भी नज़र आएंगे, जिन्होंने अपने अभिनय से फिल्म को काफ़ी ख़ास बनाया है. फिल्म के निर्देशक और निर्माता ने भी फिल्म को काफ़ी ख़ास बनाया है और उन्हें उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों को काफ़ी पसंद आएगी.
कौन हैं अर्जुन राजपूत? जिन्होंने PAK के खिलाफ जड़ा तूफानी शतक
पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले मेंं भारतीय टीम ने 86 रनों के स्कोर तक 5 विकेट गंवा दिए थे. विकेटों के पतझड़ के बीच अर्जुन राजपूत ने तूफानी शतक लगाकर भारतीय टीम की लाज बचाई.
दिवाली बैश में ईशा देओल पूर्व पति संग आईं नज़र, सारा अली खान ने दी सौतेली माँ को मात
बॉलीवुड में दिवाली का जश्न जोरों पर है, और बीती रात कई बड़े सितारों ने एक-दूसरे के दिवाली बैश में शिरकत की. इस जश्न में ईशा देओल अपने पूर्व पति भरत तख्तानी के साथ नज़र आईं, जबकि सारा अली खान ने अपनी सौतेली माँ करीना कपूर पर भारी पड़कर सबका ध्यान खींचा. वहीं, रकुल प्रीत सिंह का 'शूर्पणखा' स्वैग सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. जानें पूरी खबर.माया नगरी मुंबई (Mumbai) में दिवाली (Diwali) का त्यौहार हमेशा से ही चकाचौंध और खुशियों का सैलाब लेकर आता है. इस साल भी, बॉलीवुड (Bollywood) हस्तियां पूरी शिद्दत के साथ इस रोशनी के त्यौहार को मनाने में जुटी हुई हैं. एकता कपूर, कृति सैनन और रमेश तौरानी जैसे कई बड़े निर्माताओं और सितारों ने अपने घरों पर दिवाली बैश (Diwali Bash) का आयोजन किया, जहाँ पूरी इंडस्ट्री एक छत के नीचे जमा हुई. इस साल के इन दिवाली बैशों में कुछ ऐसी बातें हुईं जो अब टॉक ऑफ द टाउन बन गई हैं. इनमें सबसे ज़्यादा चर्चा ईशा देओल (Esha Deol) की अपने पूर्व पति (ex-husband) के साथ सार्वजनिक उपस्थिति, सारा अली खान (Sara Ali Khan) का अपनी सौतेली माँ (stepmother) से ज़्यादा लाइमलाइट चुराना और रकुल प्रीत सिंह (Rakul Preet Singh) का 'शूर्पणखा' स्वैग रहा.इस दिवाली के जश्न में सबसे बड़ा सरप्राइज़ ईशा देओल ने दिया. वह रमेश तौरानी की दिवाली पार्टी में अपने पूर्व पति भरत तख्तानी (Bharat Takhtani) के साथ एक ही कार में नज़र आईं. ईशा और भरत, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में अपनी 12 साल पुरानी शादी को ख़त्म करने का फ़ैसला किया था, को एक साथ देखकर पैपराजी और प्रशंसक दोनों ही हैरान रह गए. हालाँकि ईशा ने पैपराजी के सामने पोज़ नहीं दिया, लेकिन भरत तख्तानी ने हाथ जोड़कर सबका अभिवादन किया और मीडिया के सामने पोज़ भी दिया. ईशा का इस तरह दिवाली के जश्न में अपने पूर्व पति के साथ आना, उनके रिश्ते को लेकर कई कयासों को जन्म दे रहा है. प्रशंसक यह सोच रहे हैं कि क्या यह कोई रीयूनियन है या फिर बस एक दोस्ताना दिवाली मिलन. जो भी हो, ईशा और भरत की यह सार्वजनिक उपस्थिति इस साल के दिवाली बैशों की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बन गई है.ईशा देओल और भरत तख्तानी की दो बेटियाँ हैं, और उनके तलाक की घोषणा के बाद से दोनों को सार्वजनिक तौर पर एक साथ नहीं देखा गया था. इसलिए, दिवाली जैसे त्यौहार पर उनका एक साथ नज़र आना कई सवाल और आशाएं जगा रहा है. प्रशंसक अब सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि शायद यह रिश्ता एक बार फिर से जुड़ जाए. हालांकि, ईशा देओल या भरत तख्तानी की तरफ से इस रीयूनियन को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, और यह भी हो सकता है कि वे बस अपनी बेटियों की खातिर या पुराने रिश्तों के सम्मान में एक साथ आए हों.कृति सैनन के दिवाली बैश में सारा अली खान अपनी सौतेली माँ करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) पर भारी पड़ती नज़र आईं. करीना, जो हमेशा अपने फैशन सेंस और चार्म से सबका दिल जीत लेती हैं, इस बार सारा के सामने थोड़ी फीकी पड़ गईं. सारा ने एक ख़ूबसूरत मैरून और गोल्डन एथनिक वियर (ethnic wear) पहना था, जिसमें वह काफ़ी स्टनिंग लग रही थीं. वहीं, करीना ने एक साधारण बेज कलर का कुर्ता-पैंट पहना था, जो सारा के लुक के सामने काफ़ी साधारण लग रहा था. सारा ने पूरी लाइमलाइट चुरा ली और पैपराजी के सामने भी काफ़ी कॉन्फिडेंट पोज़ दिए. उनकी ख़ूबसूरती और स्टाइल ने सबका ध्यान खींचा, और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें काफ़ी वायरल हो रही हैं. यह पहली बार नहीं है जब सारा ने अपनी सौतेली माँ को फैशन में मात दी हो, लेकिन दिवाली जैसे बड़े त्यौहार पर यह काफ़ी चर्चित हो गया. प्रशंसक सोशल मीडिया पर सारा के लुक की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं और करीना के सिंपल लुक पर सवाल भी उठा रहे हैं. यह साफ़ है कि सारा अब बॉलीवुड की एक बड़ी फैशन आइकॉन बनती जा रही हैं और हर बड़े इवेंट में अपना जलवा बिखेर रही हैं.रकुल प्रीत सिंह ने एकता कपूर के दिवाली बैश में अपने 'शूर्पणखा' स्वैग से सबको हैरान कर दिया. उन्होंने एक ख़ूबसूरत और अनोखा एथनिक वियर पहना था, जिसके साथ उन्होंने एक विशेष हेडगियर (headgear) भी पहना था. उनका यह हेडगियर उन्हें पौराणिक चरित्र 'शूर्पणखा' (Surpanakha) जैसा लुक दे रहा था. रकुल ने अपने इस लुक को 'शूर्पणखा' स्वैग के साथ कैरी किया और सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें काफ़ी वायरल हो रही हैं. उनके प्रशंसक उनके इस यूनीक और साहसी लुक की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं और उन्हें बॉलीवुड की सबसे स्टाइलिश अभिनेत्रियों में से एक बता रहे हैं. रकुल ने अपने इस लुक के साथ दिवाली के जश्न में एक नया ट्रेंड सेट किया है और आने वाले समय में हमें कई और अभिनेत्रियाँ इस तरह के यूनीक लुक में नज़र आ सकती हैं. रकुल का यह 'शूर्पणखा' स्वैग सोशल मीडिया पर छाया हुआ है और लोग उनके फैशन सेंस की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं. यह साफ़ है कि रकुल अब बॉलीवुड की एक बड़ी फैशन आइकॉन बनती जा रही हैं और हर बड़े इवेंट में अपना जलवा बिखेर रही हैं.बॉलीवुड दिवाली बैश न केवल खुशियों और चकाचौंध का त्यौहार है, बल्कि यह रिश्तों को और भी मज़बूत करने का एक अवसर भी है. इन बैशों में पूरी इंडस्ट्री एक छत के नीचे जमा होती है और एक-दूसरे के साथ त्यौहार की खुशियाँ बांटती है. ईशा देओल का अपने पूर्व पति के साथ आना, सारा अली खान का अपनी सौतेली माँ के साथ दिवाली मनाना, ये सभी बातें बॉलीवुड के रिश्तों और उनकी जटिलताओं को दिखाती हैं. लेकिन अंत में, ये सभी बैश खुशियों और त्यौहार की भावना का जश्न मनाते हैं. प्रशंसक भी सोशल मीडिया पर इन बैशों की तस्वीरें और वीडियो देखकर त्यौहार की खुशियाँ मना रहे हैं. बॉलीवुड दिवाली बैश हमेशा से ही लोगों को त्यौहार के लिए प्रेरित करते रहे हैं और इस साल भी यह कोई अलग नहीं है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर योगी का विपक्ष पर पलटवार
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर विपक्ष के दुष्प्रचार का आरोपराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों की गलत हरकतों की सजा पूरी अयोध्या, संत समाज और रामभक्तों को नहीं दी जा सकती।
RITES Vacancy 2026: नवरत्न कंपनी में ग्रेजुएट-डिप्लोमा पास के लिए बंपर भर्ती
RITES Limited, जो भारत सरकार के रेल मंत्रालय के तहत एक नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSU) है, ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारकों के लिए एक बड़ी भर्ती योजना की घोषणा की है. यह भर्ती प्रक्रिया कई मायनों में अनूठी और उम्मीदवारों के लिए काफ़ी उत्साहजनक है. सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इस भर्ती में चयन के लिए उम्मीदवारों को न तो किसी कठिन लिखित परीक्षा (Written Test) का सामना करना होगा और न ही किसी इंटरव्यू (Interview) में भाग लेना होगा. यह एक सीधा और पारदर्शी चयन है, जो पूरी तरह से उम्मीदवार के शैक्षणिक अंकों (Academic Marks) पर आधारित मेरिट लिस्ट (Merit List) के ज़रिए किया जाएगा. यह उन उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा अवसर है जो एक प्रतिष्ठित नवरत्न कंपनी में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं.RITES की यह भर्ती अभियान देश भर के उन ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो एक सरकारी कंपनी में नौकरी का सपना देख रहे हैं. नवरत्न दर्जा प्राप्त RITES Limited एक प्रतिष्ठित संगठन है, जो बुनियादी ढांचे और परामर्श क्षेत्र में काम करता है. यहाँ नौकरी करना न केवल आर्थिक रूप से सुरक्षित है, बल्कि पेशेवर विकास के लिए भी कई अवसर प्रदान करता है. इस भर्ती के तहत, कई अलग-अलग पदों को भरा जाना है, जो ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारकों के लिए उपलब्ध हैं. पदों की विस्तृत जानकारी और पात्रता मानदंड के बारे में आधिकारिक अधिसूचना में विस्तार से बताया गया है, जिसे उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले ध्यान से पढ़ना चाहिए.यह भर्ती प्रक्रिया उम्मीदवारों के लिए काफ़ी सरल और सुलभ है. उन्हें बस आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन की समय सीमा और अन्य महत्वपूर्ण तारीखें आधिकारिक अधिसूचना में दी गई हैं. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने आवेदन को समय पर जमा करें ताकि वे किसी भी अंतिम समय की जल्दबाज़ी से बच सकें. यह भर्ती ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारकों के लिए एक बड़ा अवसर है जो एक सरकारी कंपनी में नौकरी का सपना देख रहे हैं.RITES की इस भर्ती के लिए अप्लाई करने के लिए, उम्मीदवारों को कुछ पात्रता मानदंड को पूरा करना होगा. सबसे महत्वपूर्ण मानदंड शैक्षणिक योग्यता है. उम्मीदवारों को संबंधित क्षेत्र में ग्रेजुएट या डिप्लोमा धारक होना चाहिए. पदों की विस्तृत जानकारी और प्रत्येक पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता आधिकारिक अधिसूचना में दी गई है. उम्मीदवारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आयु सीमा और अन्य आवश्यक मानदंडों को पूरा करते हैं. आयु सीमा और अन्य छूटों के बारे में जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध है.शैक्षणिक योग्यता के अलावा, उम्मीदवारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे शारीरिक रूप से फिट हैं और किसी भी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त नहीं हैं. स्वास्थ्य मानदंडों के बारे में जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में दी गई है. उम्मीदवारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे नागरिकता और अन्य आवश्यक मानदंडों को पूरा करते हैं. नागरिकता और अन्य आवश्यकताओं के बारे में जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध है. यह भर्ती ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारकों के लिए एक बड़ा अवसर है जो एक सरकारी कंपनी में नौकरी का सपना देख रहे हैं.RITES की इस भर्ती की सबसे बड़ी विशेषता इसकी चयन प्रक्रिया है. इसमें कोई लिखित परीक्षा या इंटरव्यू नहीं होगा; उम्मीदवारों का चयन सीधे उनके शैक्षणिक अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट के ज़रिए किया जाएगा. इसका मतलब है कि उम्मीदवारों को बस अपने आवेदन में अपने शैक्षणिक अंकों को सही ढंग से भरना होगा. RITES उनके अंकों के आधार पर एक मेरिट लिस्ट तैयार करेगा और चयनित उम्मीदवारों को दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) और मेडिकल जांच (Medical Examination) के लिए बुलाया जाएगा. यह एक सीधा और पारदर्शी चयन है, जो पूरी तरह से उम्मीदवार के शैक्षणिक अंकों पर आधारित मेरिट लिस्ट के ज़रिए किया जाएगा.यह चयन प्रक्रिया उन उम्मीदवारों के लिए काफ़ी सहायक होगी जो प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं. उन्हें अब अपनी मेहनत और शैक्षणिक अंकों के बल पर एक प्रतिष्ठित सरकारी कंपनी में नौकरी पाने का मौका मिलेगा. दस्तावेज़ सत्यापन और मेडिकल जांच के बारे में जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में दी गई है. उम्मीदवारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे नागरिकता और अन्य आवश्यक मानदंडों को पूरा करते हैं. नागरिकता और अन्य आवश्यकताओं के बारे में जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध है. यह भर्ती ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारकों के लिए एक बड़ा अवसर है जो एक सरकारी कंपनी में नौकरी का सपना देख रहे हैं.RITES की इस भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों को सरकारी कंपनी में नौकरी के सभी लाभ मिलेंगे, जिनमें आकर्षक वेतन और अन्य भत्ते शामिल हैं. वेतन और अन्य लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में दी गई है, जिसे उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले ध्यान से पढ़ना चाहिए. सरकारी कंपनी में नौकरी करना न केवल आर्थिक रूप से सुरक्षित है, बल्कि पेशेवर विकास के लिए भी कई अवसर प्रदान करता है. यह उन उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा अवसर है जो एक प्रतिष्ठित नवरत्न कंपनी में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं.आकर्षक वेतन के अलावा, उम्मीदवारों को अन्य लाभ भी मिलेंगे, जैसे कि चिकित्सा सुविधा, परिवहन सुविधा, और अन्य भत्ते. वेतन और अन्य लाभों के बारे में जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में दी गई है. उम्मीदवारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे नागरिकता और अन्य आवश्यक मानदंडों को पूरा करते हैं. नागरिकता और अन्य आवश्यकताओं के बारे में जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध है. यह भर्ती ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारकों के लिए एक बड़ा अवसर है जो एक सरकारी कंपनी में नौकरी का सपना देख रहे हैं.छात्रों को स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने से पहले, पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करनी चाहिए. छात्रों को अपने आवेदन को समय पर जमा करना चाहिए ताकि वे स्कॉलरशिप के लिए पात्र हो सकें. कुछ मामलों में, स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने की समय सीमा काफ़ी कठिन हो सकती है, इसलिए छात्रों को अपने आवेदन को काफ़ी पहले ही जमा कर देना चाहिए. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं.
भारत के वो बच्चे, जिनके असाधारण हुनर को सलाम करती है दुनिया! मिलते हैं करोड़ों रुपये
भारत में कई ऐसे बच्चे हैं जिनके असाधारण हुनर (exceptional talent) को दुनिया सलाम करती है. ये वो युवा प्रतिभाएँ हैं जो बिना JEE (Joint Entrance Examination) के ही IIT (Indian Institutes of Technology) और IIIT (Indian Institutes of Information Technology) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में सीट हासिल कर सकते हैं और उन्हें करोड़ों रुपये की स्कॉलरशिप और फंडिंग मिलती है. जानें उनकी प्रेरणादायक कहानियाँ.भारत, जो अपनी विविधता और प्रतिभा के लिए जाना जाता है, कई असाधारण बच्चों का घर है जिनके हुनर को दुनिया भर में सराहा जा रहा है. ये युवा प्रतिभाएँ पारंपरिक शैक्षणिक रास्तों को चुनौती दे रही हैं और साबित कर रही हैं कि हुनर किसी उम्र या परीक्षा का मोहताज नहीं होता. जहाँ लाखों छात्र IIT और IIIT जैसे संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और JEE जैसी कठिन परीक्षा देते हैं, वहीं कुछ ऐसे बच्चे हैं जो अपने असाधारण कौशल (exceptional skill) के बल पर इन संस्थानों में सीधे प्रवेश पाने के पात्र बन जाते हैं. इन बच्चों की कहानियाँ न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि भारत में हुनर को पहचानना और उसे बढ़ावा देना कितना महत्वपूर्ण है.पारंपरिक शैक्षणिक प्रणाली में, छात्रों को उनकी बुद्धिमत्ता और योग्यता को साबित करने के लिए परीक्षाओं और ग्रेड पर निर्भर रहना पड़ता है. हालांकि, कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिनके हुनर को इन परीक्षाओं के ज़रिए मापा नहीं जा सकता. ये बच्चे कोडिंग, कला, संगीत, खेल या विज्ञान जैसे क्षेत्रों में असाधारण प्रतिभा दिखाते हैं, जो उनके लिए नए रास्ते खोलते हैं. IIT और IIIT जैसे संस्थानों ने अब इस बात को पहचाना है और वे इन युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रवेश कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं. इन कार्यक्रमों के तहत, छात्र अपने हुनर और उपलब्धि के बल पर इन संस्थानों में प्रवेश पा सकते हैं, बिना JEE दिए.यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो भारत में हुनर को पहचानने और उसे बढ़ावा देने की दिशा में एक नया रास्ता खोलता है. यह साबित करता है कि हुनर किसी उम्र या परीक्षा का मोहताज नहीं होता और अगर उसे सही दिशा और समर्थन मिले, तो वह दुनिया भर में अपनी पहचान बना सकता है. इन असाधारण बच्चों की कहानियाँ हमें यह भी सिखाती हैं कि हमें पारंपरिक शैक्षणिक रास्तों से हटकर नए अवसरों की तलाश करनी चाहिए और अपने हुनर को संवारने पर ध्यान देना चाहिए.IIT और IIIT जैसे संस्थानों ने अब असाधारण हुनर वाले छात्रों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रवेश कार्यक्रम शुरू किए हैं. इन कार्यक्रमों के तहत, छात्र कोडिंग प्रतियोगिताओं, कला प्रदर्शनियों, संगीत कार्यक्रमों या खेल प्रतियोगिताओं में अपनी उपलब्धि के बल पर इन संस्थानों में सीधे प्रवेश पा सकते हैं. यह इन संस्थानों की एक महत्वपूर्ण पहल है जो भारत में हुनर को पहचानने और उसे बढ़ावा देने की दिशा में एक नया रास्ता खोलती है.यह न केवल इन छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत में हुनर को अब प्रतिष्ठित संस्थानों का साथ मिल रहा है. यह साबित करता है कि हुनर किसी उम्र या परीक्षा का मोहताज नहीं होता और अगर उसे सही दिशा और समर्थन मिले, तो वह दुनिया भर में अपनी पहचान बना सकता है. इन असाधारण बच्चों की कहानियाँ हमें यह भी सिखाती हैं कि हमें अपने हुनर को संवारने पर ध्यान देना चाहिए और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ जुड़कर नए अवसरों की तलाश करनी चाहिए.असाधारण हुनर वाले छात्रों को न केवल प्रतिष्ठित संस्थानों का साथ मिल रहा है, बल्कि उन्हें करोड़ों रुपये की स्कॉलरशिप और फंडिंग भी मिल रही है. यह वित्तीय समर्थन उन्हें अपने हुनर को संवारने और अपने सपनों को साकार करने में मदद करता है. कई सरकारी और निजी संगठन अब इन युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष स्कॉलरशिप और फंडिंग कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं.यह एक महत्वपूर्ण पहल है जो भारत में हुनर को वित्तीय समर्थन प्रदान करने की दिशा में एक नया रास्ता खोलती है. यह साबित करता है कि हुनर किसी उम्र या परीक्षा का मोहताज नहीं होता और अगर उसे सही दिशा और समर्थन मिले, तो वह दुनिया भर में अपनी पहचान बना सकता है. इन असाधारण बच्चों की कहानियाँ हमें यह भी सिखाती हैं कि हमें अपने हुनर को संवारने पर ध्यान देना चाहिए और वित्तीय समर्थन हासिल करके नए अवसरों की तलाश करनी चाहिए.भारत में कई ऐसे बच्चे हैं जिनके असाधारण हुनर को दुनिया सलाम करती है. कोडिंग से लेकर कला और संगीत तक, ये युवा प्रतिभाएँ अपनी मेहनत और लगन से अपनी पहचान बना रही हैं. इनमें से कुछ बच्चों की कहानियाँ काफ़ी प्रेरणादायक हैं, जैसे कि 12 वर्षीय कोडर जिसने अपना खुद का ऐप बनाया, या 10 वर्षीय चित्रकार जिसकी पेंटिंग्स अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में प्रदर्शित की गईं.इन बच्चों की कहानियाँ हमें यह सिखाती हैं कि हुनर किसी उम्र या परीक्षा का मोहताज नहीं होता और अगर उसे सही दिशा और समर्थन मिले, तो वह दुनिया भर में अपनी पहचान बना सकता है. ये कहानियाँ हमें यह भी सिखाती हैं कि हमें अपने हुनर को संवारने पर ध्यान देना चाहिए और नए अवसरों की तलाश करनी चाहिए. ये बच्चे भारत के भविष्य हैं और उनके हुनर को बढ़ावा देना हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है.भारत में कई ऐसे बच्चे हैं जिनके असाधारण हुनर को दुनिया सलाम करती है. ये युवा प्रतिभाएँ पारंपरिक शैक्षणिक रास्तों को चुनौती दे रही हैं और साबित कर रही हैं कि हुनर किसी उम्र या परीक्षा का मोहताज नहीं होता. IIT और IIIT जैसे संस्थानों ने अब इस बात को पहचाना है और वे इन युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रवेश कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं. इसके अलावा, इन छात्रों को करोड़ों रुपये की स्कॉलरशिप और फंडिंग भी मिल रही है, जो उनके हुनर को संवारने में मदद करती है.यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है कि वह इन युवा प्रतिभाओं को पहचाने और उन्हें बढ़ावा दे. हमें पारंपरिक शैक्षणिक प्रणाली से हटकर नए अवसरों की तलाश करनी चाहिए और अपने हुनर को संवारने पर ध्यान देना चाहिए. ये असाधारण बच्चे भारत के भविष्य हैं और उनके हुनर को बढ़ावा देना हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है. हमें उन्हें सही दिशा और समर्थन प्रदान करना चाहिए ताकि वे दुनिया भर में अपनी पहचान बना सकें और भारत का नाम रोशन कर सकें.
दुनिया के सबसे अमीर देश में फ्री पढ़ने का मौका, हर सेमेस्टर मिलेंगे ₹15 लाख
विदेश में पढ़ाई का सपना देख रहे छात्रों के लिए शानदार मौका है. दुनिया के सबसे अमीर देशों में शुमार लक्ज़मबर्ग (Luxembourg) ने एक विशेष स्कॉलरशिप प्रोग्राम का ऐलान किया है, जिसके तहत भारतीय छात्रों को हर सेमेस्टर लगभग ₹15 लाख की वित्तीय सहायता मिलेगी. जानें इसके लिए कहाँ और कैसे अप्लाई करना होगा.विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करना (Study Abroad) कई भारतीय छात्रों का एक बड़ा सपना होता है, लेकिन वित्तीय बाधाएं अक्सर उनके रास्ते में आ जाती हैं. अगर आप भी इस तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण बन सकती है. यूरोप के एक छोटे लेकिन दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक, लक्ज़मबर्ग (Luxembourg), ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों (International Students) के लिए एक बेहद आकर्षक स्कॉलरशिप योजना की घोषणा की है. इस कार्यक्रम के तहत, चयनित छात्रों को प्रति सेमेस्टर (Per Semester Scholarship) लगभग ₹15 लाख की भारी वित्तीय सहायता मिलेगी. यह स्कॉलरशिप छात्रों को लक्ज़मबर्ग में अपनी पढ़ाई जारी रखने और अपने सपनों को साकार करने में मदद करेगी.लक्ज़मबर्ग सरकार द्वारा शुरू की गई इस स्कॉलरशिप का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के प्रतिभाशाली छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करना और देश के शैक्षणिक संस्थानों को और अधिक विविधता प्रदान करना है. यह स्कॉलरशिप छात्रों को न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक माहौल में सीखने और विकसित होने का भी मौका देती है. लक्ज़मबर्ग अपनी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों और सुरक्षित वातावरण के लिए जाना जाता है. यह छात्रों के लिए एक आदर्श स्थान है जो एक अंतरराष्ट्रीय डिग्री हासिल करना चाहते हैं और अपने करियर को एक नई ऊँचाई पर ले जाना चाहते हैं.यह स्कॉलरशिप प्रोग्राम विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों में स्नातक (Bachelor's), स्नातकोत्तर (Master's), और पीएचडी (PhD) स्तर की पढ़ाई के लिए उपलब्ध है. छात्र अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार अपने लिए उपयुक्त कोर्स का चयन कर सकते हैं. स्कॉलरशिप के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता में ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, और अन्य शैक्षणिक खर्च शामिल हैं. इससे छात्रों को बिना किसी वित्तीय बोझ के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी. यह स्कॉलरशिप छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं.लक्ज़मबर्ग स्कॉलरशिप कार्यक्रम के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता काफ़ी आकर्षक है. चयनित छात्रों को प्रति सेमेस्टर लगभग ₹15 लाख की भारी वित्तीय सहायता मिलेगी. यह राशि छात्रों के लिए काफ़ी सहायक होगी और उन्हें अपनी पढ़ाई के दौरान वित्तीय चिंताओं से मुक्त रखेगी. स्कॉलरशिप के लिए पात्रता मानदंड विभिन्न कोर्स और शैक्षणिक संस्थानों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं. आम तौर पर, स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने के लिए छात्रों को एक अच्छी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, प्रासंगिक शैक्षणिक योग्यता, और अंग्रेज़ी भाषा में दक्षता साबित करनी होगी. कुछ मामलों में, छात्रों को प्रवेश परीक्षा या साक्षात्कार में भी भाग लेना पड़ सकता है.स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने से पहले, छात्रों को संबंधित शैक्षणिक संस्थान की वेबसाइट पर जाकर पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करनी चाहिए. यह काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ मामलों में, स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने की समय सीमा और अन्य आवश्यकताएं काफ़ी कठिन हो सकती हैं. छात्रों को अपने आवेदन के साथ अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड, सिफारिश पत्र, और एक व्यक्तिगत विवरण भी जमा करना होगा. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं.लक्ज़मबर्ग अपनी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के लिए एक आदर्श स्थान है. देश के शैक्षणिक संस्थान आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और छात्रों को एक अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक माहौल प्रदान करते हैं. लक्ज़मबर्ग में पढ़ाई करने से छात्रों को न केवल एक अंतरराष्ट्रीय डिग्री हासिल करने का मौका मिलता है, बल्कि उन्हें एक नई संस्कृति और भाषा सीखने का भी मौका मिलता है. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो अपने क्षितिज को व्यापक बनाना चाहते हैं और अपने करियर को एक नई ऊँचाई पर ले जाना चाहते हैं.लक्ज़मबर्ग एक सुरक्षित और स्वागत करने वाला देश है, जो छात्रों के लिए एक आदर्श स्थान है. देश में परिवहन की अच्छी व्यवस्था है और छात्रों के लिए रहने का खर्च काफ़ी कम है. लक्ज़मबर्ग में पढ़ाई करने से छात्रों को न केवल एक अंतरराष्ट्रीय डिग्री हासिल करने का मौका मिलता है, बल्कि उन्हें एक नई संस्कृति और भाषा सीखने का भी मौका मिलता. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो अपने क्षितिज को व्यापक बनाना चाहते हैं और अपने करियर को एक नई ऊँचाई पर ले जाना चाहते हैं. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं.लक्ज़मबर्ग स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने के लिए, छात्रों को संबंधित शैक्षणिक संस्थान की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन प्रक्रिया आम तौर पर शैक्षणिक संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध होती है और छात्रों को आवेदन पत्र को ध्यान से भरना होगा. छात्रों को अपने आवेदन के साथ अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड, सिफारिश पत्र, और एक व्यक्तिगत विवरण भी जमा करना होगा. स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने की समय सीमा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और कोर्स के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.छात्रों को अपने आवेदन को समय पर जमा करना चाहिए ताकि वे स्कॉलरशिप के लिए पात्र हो सकें. कुछ मामलों में, स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने की समय सीमा काफ़ी कठिन हो सकती है, इसलिए छात्रों को अपने आवेदन को काफ़ी पहले ही जमा कर देना चाहिए. छात्रों को स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने से पहले, पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करनी चाहिए. यह काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ मामलों में, स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने की समय सीमा और अन्य आवश्यकताएं काफ़ी कठिन हो सकती हैं. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं.लक्ज़मबर्ग स्कॉलरशिप कार्यक्रम विदेश में पढ़ाई का सपना सच करने का एक सुनहरा अवसर है. यह स्कॉलरशिप छात्रों को न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक माहौल में सीखने और विकसित होने का भी मौका देती है. लक्ज़मबर्ग अपनी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों और सुरक्षित वातावरण के लिए जाना जाता है. यह छात्रों के लिए एक आदर्श स्थान है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं.छात्रों को स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने से पहले, पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करनी चाहिए. छात्रों को अपने आवेदन को समय पर जमा करना चाहिए ताकि वे स्कॉलरशिप के लिए पात्र हो सकें. कुछ मामलों में, स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई करने की समय सीमा काफ़ी कठिन हो सकती है, इसलिए छात्रों को अपने आवेदन को काफ़ी पहले ही जमा कर देना चाहिए. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं. यह छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं और अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहते हैं.
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो दिवाली पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा
Diwali Vrat Katha: दिवाली की पूजा में मां लक्ष्मी की व्रत कथा पढ़ने का विशेष महत्व है. जानें भगवान राम की वापसी, समुद्र मंथन और साहूकार की बेटी से जुड़ी पौराणिक कथाएं.
मुहूर्त ट्रेडिंग शुरू.. शेयर बाजार में तूफानी तेजी, बीते 10 साल का देखें डेटा
Muhurat Trading Last 10 Years: शेयर बाजार में आज मुहूर्त ट्रेडिंग शुरू हो गई है और सेंसेक्स-निफ्टी जोरदार तेजी के साथ खुले हैं. बीते 10 साल में इस खास ट्रेडिंग सेशन में दोनों इंडेक्स की परफॉर्मेंस देखें, तो 10 में से 8 में ये इंडेक्स बढ़त में रहे, जबकि 2 सेशन में गिरावट देखने को मिली है.
मनोज तिवारी ने चलाई रिक्शा-बेची साड़ी, पत्नी को किया Kiss
मनोज तिवारी का अब एक अलग अंदाज देखने को मिला. पत्नी को डेट पर ले जाने के लिए उन्होंने छोटे-मोटे काम करके पैसे कमाए. मनोज तिवारी ने पत्नी को रोमांटिक अंदाज में प्रपोज भी किया.
इस दिवाली खादी को दें तरजीह, बुनकरों और कारीगरों तक पहुँचाएं उजाला
यह दिवाली 'खादी वाली' मनाने की अपील की जा रही है, ताकि देश के बुनकरों और कारीगरों के घरों तक भी खुशियों का उजाला पहुँच सके. उनके हुनर को संवारने और उन्हें आर्थिक संबल देने के लिए यह एक सार्थक पहल है.जैसे-जैसे दीपावली (Diwali) का त्योहार नज़दीक आ रहा है, बाज़ार रोशनियों और उपहारों से जगमगा उठे हैं. ऐसे में एक नई और सार्थक पहल जोर पकड़ रही है—'ये दीवाली खादी वाली'. यह केवल एक नारा नहीं है, बल्कि एक आह्वान है अपने देश के उन लाखों बुनकरों (Weavers) और कारीगरों (Artisans) के घरों को रोशन करने का, जिनके अथक परिश्रम से हमारा पारंपरिक हुनर जीवित है. खादी (Khadi), जो स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक रही है, आज फिर से एक बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव का ज़रिया बन सकती है.हम सभी जानते हैं कि दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है. हम अपने घरों को सजाते हैं, नए कपड़े खरीदते हैं और मिठाईयाँ बांटते हैं. लेकिन क्या हम कभी उन लोगों के बारे में सोचते हैं जो ये सब चीज़ें हमारे लिए बनाते हैं? देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों बुनकर और कारीगर आज भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. उनके लिए दिवाली का मतलब केवल अतिरिक्त मेहनत है, ताकि वे कुछ और पैसे कमा सकें.'ये दीवाली खादी वाली' पहल का उद्देश्य इन बुनकरों और कारीगरों को समर्थन देना है. खादी के बने कपड़े, घर की सजावट के सामान और यहाँ तक कि खादी के दीये खरीदकर, हम न केवल अपने लिए कुछ अनूठा और पारंपरिक चुनते हैं, बल्कि सीधे तौर पर उनके आर्थिक सशक्तिकरण (Economic Empowerment) में योगदान देते हैं. यह एक ऐसा तरीक़ा है जिससे हम उनके हुनर का सम्मान कर सकते हैं और उन्हें यह महसूस करा सकते हैं कि वे भी इस त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.खादी केवल एक कपड़ा नहीं है, यह एक परंपरा है, एक विरासत है. हर खादी के कपड़े के पीछे एक बुनकर की कड़ी मेहनत और उसका हुनर छिपा होता है. उनके हाथों का जादू ही है जो साधारण से सूत को एक ख़ूबसूरत और टिकाऊ कपड़े में बदल देता है. लेकिन आज के दौर में, जहाँ मशीन से बने कपड़े बाज़ार पर हावी हैं, ये बुनकर पीछे छूटते जा रहे हैं.'ये दीवाली खादी वाली' पहल हमें एक अवसर देती है उनके हुनर को संवारने का. जब हम खादी के उत्पाद खरीदते हैं, तो हम न केवल उनकी मेहनत का फल देते हैं, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित भी करते हैं कि वे अपनी परंपरा को जीवित रखें. यह एक ऐसा तरीक़ा है जिससे हम उनके जीवन में खुशियों की रोशनी ला सकते हैं और उन्हें यह महसूस करा सकते हैं कि उनका हुनर आज भी क़दरदानों की तलाश में नहीं है. यह उनके लिए एक नई शुरुआत हो सकती है, एक ऐसा अवसर जिससे वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें.खादी के उत्पाद न केवल परंपरा और हुनर का प्रतीक हैं, बल्कि वे टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) भी हैं. खादी के कपड़े हाथ से बुने जाते हैं, जिसका मतलब है कि उनके निर्माण में बिजली का कम इस्तेमाल होता है. इसके अलावा, खादी के उत्पादन में रसायनों का इस्तेमाल भी कम होता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए एक बेहतर विकल्प बन जाता है.इस दिवाली, जब हम अपने लिए नए कपड़े और सजावट के सामान चुन रहे हों, तो खादी को एक विकल्प के रूप में ज़रूर विचार करें. खादी के बने कपड़े न केवल ख़ूबसूरत और आरामदायक होते हैं, बल्कि वे हमारे पर्यावरण के लिए भी बेहतर होते हैं. यह एक ऐसा तरीक़ा है जिससे हम अपने त्योहार को और भी सार्थक बना सकते हैं, न केवल अपने लिए बल्कि अपने देश और पर्यावरण के लिए भी. यह एक ऐसा क़दम हो सकता है जो हमें एक टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाए.'ये दीवाली खादी वाली' केवल एक पहल नहीं है, यह एक सामाजिक आंदोलन की ओर बढ़ता एक क़दम है. यह एक ऐसा आंदोलन है जो हमारे देश के पारंपरिक हुनर को जीवित रखने और उसे प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है. यह एक ऐसा आंदोलन है जो हमारे बुनकरों और कारीगरों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने और उन्हें एक बेहतर भविष्य देने के लिए काम कर रहा है.इस दिवाली, हम सभी को इस आंदोलन का हिस्सा बनना चाहिए. हम खादी के उत्पाद खरीदकर, अपने दोस्तों और परिवार को इसके बारे में बताकर और सोशल मीडिया पर इसके बारे में चर्चा करके इसमें योगदान दे सकते हैं. यह एक ऐसा तरीक़ा है जिससे हम अपने देश के पारंपरिक हुनर को जीवित रख सकते हैं और अपने बुनकरों और कारीगरों के जीवन में खुशियों की रोशनी ला सकते हैं. यह एक ऐसा क़दम हो सकता है जो हमारे देश के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करे.इस दिवाली, हम सभी को 'ये दीवाली खादी वाली' मनाने का संकल्प लेना चाहिए. हम खादी के उत्पाद खरीदकर, अपने घरों को सजाकर और अपने दोस्तों और परिवार को उपहार देकर इस त्योहार को और भी सार्थक बना सकते हैं. यह एक ऐसा तरीक़ा है जिससे हम अपने देश के पारंपरिक हुनर को जीवित रख सकते हैं और अपने बुनकरों और कारीगरों के जीवन में खुशियों की रोशनी ला सकते हैं.यह एक ऐसा क़दम हो सकता है जो हमारे देश के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करे. आइए, हम सभी मिलकर इस दिवाली को 'खादी वाली' बनाएं और खुशियों का उजाला फैलाएं. यह हमारे लिए एक नया अवसर हो सकता है, एक ऐसा अवसर जिससे हम अपने त्योहार को और भी सार्थक बना सकें और अपने देश के लिए कुछ अच्छा कर सकें. यह हमारे लिए एक नई शुरुआत हो सकती है, एक ऐसा अवसर जिससे हम एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें.
दिवाली पर अयोध्या में CM योगी ने किए रामलला-हनुमानगढ़ी के दर्शन, Video
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में रामलला के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. इसके पश्चात वे सीधे हनुमानगढ़ी पहुंचे और वहां बजरंगबली के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया. मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने जय श्री राम के गगनभेदी नारों के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया. दिवाली का पर्व अयोध्या के लिए बेहद पावन और ऐतिहासिक माना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान श्री राम 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या वापस लौटे थे और नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर के पुजारियों से भी बातचीत की और प्रदेश वासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं. पूरी रामनगरी इस समय दिव्य दीपों और सुंदर सजावट से जगमगा रही है.
₹150 करोड़ का साइबर फ्रॉड: आरोपी सॉफ्टवेयर इंजीनियर को मिली जमानत
मुंबई की एस्प्लेनेड मजिस्ट्रेट कोर्ट ने ₹150 करोड़ के साइबर फ्रॉड मामले में इंदौर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर पंकज गुप्ता को जमानत दी. आरोपी पर 2,805 खतरनाक APK फाइल बनाने और साइबर अपराधियों को बेचने का आरोप है.
व्यावसायिक फसल उगाने से जंगल की जमीन पर कब्जे का हक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल व्यावसायिक फसल उगाने से किसी व्यक्ति को जंगल की जमीन पर कब्जे का हक नहीं मिल जाता. अदालत ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता.सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection) की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय दिया है. अदालत ने साफ़ शब्दों में कहा है कि महज़ व्यावसायिक फसलें (Commercial Crops) उगाने से कोई भी व्यक्ति जंगल की जमीन (Forest Land) पर मालिकाना हक़ या कब्ज़े का दावा नहीं कर सकता. जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वन भूमि का प्राथमिक उद्देश्य वनस्पति और वन्यजीवों का संरक्षण है, न कि व्यावसायिक कृषि.यह फ़ैसला एक ऐसे मामले में आया है जहाँ कुछ लोगों ने तर्क दिया था कि वे दशकों से वन भूमि पर व्यावसायिक फसलें उगा रहे हैं, इसलिए उन्हें उस ज़मीन का पट्टा या कब्ज़ा मिलना चाहिए. अदालत ने इस तर्क को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया. बेंच ने वन संरक्षण अधिनियम, 1980 (Forest Conservation Act, 1980) का हवाला देते हुए कहा कि यह अधिनियम वन भूमि के गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध लगाता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि गैर-वानिकी उद्देश्य में व्यावसायिक फसलें उगाना भी शामिल है, जब तक कि इसके लिए केंद्र सरकार से विशेष अनुमति न ली गई हो.पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वन केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि एक जटिल पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) हैं जो जलवायु नियंत्रण, जल चक्र और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं. अदालत ने कहा कि वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी कार्यों के लिए करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है. अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे वन भूमि पर अवैध कब्ज़ों को हटाने के लिए कड़े कदम उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि वन भूमि का उपयोग केवल वानिकी उद्देश्यों के लिए हो.सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय वन भूमि और व्यावसायिक फसलों के बीच के कानूनी संबंधों को स्पष्ट करता है. अदालत ने कहा कि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत, राज्य सरकारें केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना वन भूमि को गैर-वानिकी कार्यों के लिए आवंटित या उपयोग नहीं कर सकतीं. गैर-वानिकी उद्देश्य में चाय, कॉफी, रबर, मसालों और अन्य व्यावसायिक फसलों की खेती शामिल है.अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के वन भूमि पर व्यावसायिक फसलें उगाता है, तो यह कानून का उल्लंघन है और उसे उस ज़मीन पर कोई हक़ नहीं मिल सकता. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वन भूमि पर कब्ज़े का दावा करने के लिए महज़ व्यावसायिक फसलें उगाना पर्याप्त नहीं है. किसी व्यक्ति को वन भूमि पर हक़ पाने के लिए वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act, 2006) के तहत अपनी पात्रता साबित करनी होगी, जो मुख्य रूप से वन-निवासी अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के अधिकारों को मान्यता देता है.सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है. अदालत ने कहा कि वन देश की प्राकृतिक संपत्ति हैं और उनका संरक्षण करना हर नागरिक और सरकार का कर्तव्य है. अदालत ने बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के कारण वन भूमि पर बढ़ते दबाव पर चिंता व्यक्त की.अदालत ने कहा कि वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी कार्यों के लिए करना न केवल पारिस्थितिकी संतुलन को बिगाड़ता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के नुकसान को भी बढ़ावा देता है. अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे वन भूमि के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक नीतियां बनाएं और यह सुनिश्चित करें कि वन भूमि का उपयोग स्थायी वानिकी (Sustainable Forestry) के लिए हो. अदालत ने पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता के महत्व पर भी ज़ोर दिया, ताकि लोग वनों के महत्व को समझें और उनके संरक्षण में योगदान दें.सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को वन भूमि पर अवैध कब्ज़ों को हटाने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा कि राज्य सरकारें वन भूमि पर अवैध कब्ज़ों की पहचान करें और उन्हें हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करें. अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में वन भूमि पर कोई अवैध कब्ज़ा न हो.अदालत ने राज्य सरकारों को वन भूमि के संरक्षण के लिए उचित निगरानी और प्रवर्तन तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया. अदालत ने राज्य सरकारों को यह भी निर्देश दिया कि वे वन भूमि पर अवैध कब्ज़ों को हटाने के लिए स्थानीय समुदायों और नागरिक समाज संगठनों के साथ मिलकर काम करें. अदालत ने कहा कि राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करें कि वन भूमि पर अवैध कब्ज़ों को हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो और प्रभावित लोगों को उचित पुनर्वास प्रदान किया जाए.सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय वन संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं. वन भूमि पर अवैध कब्ज़े, अवैध कटाई और गैर-वानिकी कार्यों के लिए वन भूमि का उपयोग जारी है. अदालत ने कहा कि वन संरक्षण के लिए सरकार और नागरिकों के बीच सहयोग और समन्वय की आवश्यकता है.अदालत ने कहा कि वन संरक्षण के लिए स्थायी वानिकी और पारिस्थितिकी बहाली (Ecological Restoration) के महत्व पर ज़ोर दिया जाना चाहिए. अदालत ने यह भी कहा कि वन संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और उनके अधिकारों को मान्यता देना महत्वपूर्ण है. अदालत ने पर्यावरण संरक्षण के लिए नई तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान के उपयोग पर भी ज़ोर दिया. अदालत ने कहा कि वन संरक्षण देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है और सभी को मिलकर इसके लिए काम करना होगा.सर्वोच्च न्यायालय का व्यावसायिक फसल उगाने से जंगल की जमीन पर कब्जे का हक नहीं होने से संबंधित निर्णय पर्यावरण न्याय (Environmental Justice) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता और पर्यावरण संरक्षण सर्वोपरि है. अदालत ने राज्य सरकारों को वन भूमि पर अवैध कब्ज़ों को हटाने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि वन भूमि का उपयोग केवल वानिकी उद्देश्यों के लिए हो.अदालत ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है और सभी को मिलकर इसके लिए काम करने की अपील की है. यह निर्णय देश के वनों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए दूरगामी परिणाम देगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और स्थायी पर्यावरण सुनिश्चित करेगा. अदालत ने वन संरक्षण के लिए सतत प्रयास और सभी हितधारकों की भागीदारी के महत्व पर ज़ोर दिया.
लालकृष्ण आडवाणी: शताब्दी की ओर बढ़ता एक प्रेरणादायी सफर, PM मोदी का खास लेख
भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी आज अपना 99वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके लिए एक विशेष लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने आडवाणी के जीवन और योगदान को विस्तार से सराहा है। पीएम मोदी ने आडवाणी को 'भारतीय राजनीति का शिखर पुरुष' और 'लाखों लोगों के लिए प्रेरणा' बताया है।एक साधारण शुरुआत से भारतीय राजनीति के शिखर तकपीएम मोदी ने अपने लेख में आडवाणी के शुरुआती जीवन का ज़िक्र किया है। उन्होंने बताया कि कैसे एक साधारण परिवार में जन्मे आडवाणी ने अपनी मेहनत और लगन से भारतीय राजनीति में एक ऊंचा स्थान हासिल किया। आडवाणी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया और फिर भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठन और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।राम जन्मभूमि आंदोलन और भारतीय राजनीति में बदलावपीएम मोदी ने आडवाणी के नेतृत्व में चले राम जन्मभूमि आंदोलन का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाया और देश भर में लोगों को एकजुट किया। आडवाणी की रथ यात्रा ने राम जन्मभूमि के मुद्दे को जन-जन तक पहुँचाया और अंततः अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।एक दूरदर्शी नेता और कुशल प्रशासकपीएम मोदी ने आडवाणी को एक दूरदर्शी नेता और कुशल प्रशासक के रूप में भी याद किया है। उन्होंने बताया कि आडवाणी ने उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में देश की सेवा की और कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। उनके कार्यकाल में देश में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने के लिए कई कदम उठाए गए।आडवाणी का जीवन: मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारितपीएम मोदी ने अपने लेख में आडवाणी के जीवन के मूल्यों और सिद्धांतों पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने हमेशा देश और समाज के हित को सर्वोपरि रखा और कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनका जीवन ईमानदारी, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का एक बेहतरीन उदाहरण है।एक शताब्दी की ओर बढ़ता प्रेरणादायी सफरपीएम मोदी ने अंत में आडवाणी को उनके 99वें जन्मदिन पर बधाई दी और उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि आडवाणी का जीवन एक शताब्दी की ओर बढ़ता हुआ एक प्रेरणादायी सफर है और आने वाली पीढ़ियां हमेशा उनसे प्रेरणा लेती रहेंगी।
कांग्रेस को फंडिंग का बड़ा झटका: एक साल में 75% की भारी गिरावट
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress Party), जो देश के सबसे पुराने राजनीतिक दलों में से एक है, को राजनीतिक फंडिंग (Political Funding) में एक बड़ा झटका लगा है. चुनाव आयोग (Election Commission) को सौंपी गई पार्टी की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान कांग्रेस को मिलने वाले चंदे में पिछले वर्ष की तुलना में 75% की भारी गिरावट देखी गई है. इस अवधि में पार्टी को केवल 130 करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक चंदा मिला है, जो इसकी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करता है.कांग्रेस की फंडिंग में भारी गिरावट: क्या है इसका मतलब और राजनीतिक असर?राजनीतिक दलों के लिए फंड जुटाना उनकी गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होता है, जिसमें चुनाव प्रचार, संगठनात्मक कार्य और जनसंपर्क शामिल हैं. कांग्रेस की फंडिंग में यह भारी गिरावट पार्टी के लिए एक चिंता का विषय है, खासकर तब जब देश में चुनाव नज़दीक आ रहे हों. इस गिरावट के कई राजनीतिक और संगठनात्मक मतलब हो सकते हैं, जिनमें पार्टी के प्रति दाताओं का विश्वास कम होना, पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में कमियां और चुनावी हार शामिल हैं.इस गिरावट का सीधा असर कांग्रेस के चुनाव प्रचार और राजनीतिक कार्यक्रमों पर पड़ सकता है, जिससे पार्टी के लिए अपनी बात जनता तक पहुँचाना और भी मुश्किल हो जाएगा. यह गिरावट कांग्रेस के लिए एक चेतावनी है कि वह अपनी संगठनात्मक कमियों को दूर करे और दाताओं का विश्वास फिर से जीतने के लिए काम करे. इसके अलावा, यह गिरावट भारतीय राजनीति में फंड जुटाने के तरीकों और राजनीतिक दलों के वित्तीय स्वास्थ्य के बारे में भी सवाल उठाती है.छह कंपनियों ने दिया सबसे ज्यादा फंड: कौन हैं ये दाता और उनकी क्या भूमिका है?कांग्रेस की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, छह प्रमुख कंपनियों ने पार्टी को सबसे ज्यादा फंड दिया है, जो इसकी राजनीतिक फंडिंग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. ये दाता कंपनियाँ विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं और उनकी फंडिंग पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता है. दाताओं के नाम और उनके द्वारा दी गई राशि की जानकारी चुनाव आयोग की रिपोर्ट में उपलब्ध है, जो राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है.इन कंपनियों की फंडिंग पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता है, जिससे वह अपनी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों को जारी रख सकती है. हालांकि, राजनीतिक फंडिंग में कंपनियों की भूमिका के बारे में भी सवाल उठाए जाते हैं, जैसे कि वे पार्टी के निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं या वे अपने हितों को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसलिए, राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, ताकि राजनीतिक दल अपने वित्तीय स्रोतों के बारे में पारदर्शी रहें और उनके निर्णय जनहित में हों.राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही: एक ज़रूरी मुद्दाराजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही भारतीय राजनीति में एक ज़रूरी मुद्दा है, जो लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. राजनीतिक दलों के लिए फंड जुटाना ज़रूरी होता है, लेकिन फंड के स्रोतों के बारे में पारदर्शी होना भी उतना ही ज़रूरी है, ताकि राजनीतिक दल अपने निर्णयों और गतिविधियों के लिए जवाबदेह रहें.चुनाव आयोग राजनीतिक दलों की फंडिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसे कि वह उनकी ऑडिट रिपोर्ट और दाताओं के बारे में जानकारी सार्वजनिक करता है. हालांकि, राजनीतिक फंडिंग में और भी सुधार की ज़रूरत है, जैसे कि अज्ञात स्रोतों से फंडिंग को सीमित करना और राजनीतिक दलों के वित्तीय स्वास्थ्य के बारे में और भी पारदर्शिता सुनिश्चित करना. इससे भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार और काले धन के इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलेगी और राजनीतिक दल अपने निर्णयों और गतिविधियों के लिए जवाबदेह रहेंगे.कांग्रेस की भविष्य की चुनौतियाँ और फंड जुटाने के तरीकेकांग्रेस के लिए राजनीतिक फंडिंग में यह भारी गिरावट एक बड़ी चुनौती है, जिसे उसे दूर करने के लिए काम करना होगा. पार्टी को अपने दाताओं का विश्वास फिर से जीतने और नए स्रोतों से फंड जुटाने के लिए काम करना होगा. इसके अलावा, पार्टी को अपनी संगठनात्मक कमियों को दूर करने और अपनी राजनीतिक गतिविधियों को और भी प्रभावी बनाने के लिए काम करना होगा, ताकि वह अपने राजनीतिक एजेंडे को जन-जन तक पहुँचा सके.फंड जुटाने के नए तरीकों और दाताओं के साथ मज़बूत संबंध बनाने के लिए कांग्रेस को एक व्यापक रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि वह अपने वित्तीय स्वास्थ्य को मज़बूत कर सके. इसके अलावा, पार्टी को अपनी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों को और भी प्रभावी बनाने के लिए काम करना होगा, ताकि वह अपने राजनीतिक एजेंडे को जन-जन तक पहुँचा सके और चुनावी सफलता हासिल कर सके. यह कांग्रेस के लिए एक कठिन चुनौती है, लेकिन वह अपने राजनीतिक एजेंडे और संगठनात्मक मज़बूती के ज़रिए इस चुनौती को दूर कर सकती है.भारतीय राजनीति में फंड जुटाने के बदलते तरीके और चुनौतियाँभारतीय राजनीति में फंड जुटाने के तरीके और चुनौतियाँ बदल रही हैं, जो राजनीतिक दलों के वित्तीय स्वास्थ्य और लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं. राजनीतिक दलों के लिए अज्ञात स्रोतों से फंडिंग को सीमित करना और फंडिंग में और भी पारदर्शिता सुनिश्चित करना भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार और काले धन के इस्तेमाल को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है.इसके अलावा, राजनीतिक दलों को अपने दाताओं के साथ मज़बूत संबंध बनाने और नए स्रोतों से फंड जुटाने के लिए काम करना होगा, ताकि वह अपने वित्तीय स्वास्थ्य को मज़बूत कर सकें. राजनीतिक फंडिंग में कंपनियों की भूमिका और उनके हितों के बारे में भी सवाल उठाए जाते हैं, इसलिए राजनीतिक दलों के लिए फंड जुटाने के तरीकों और स्रोतों के बारे में पारदर्शी होना ज़रूरी है, ताकि राजनीतिक दल अपने निर्णयों और गतिविधियों के लिए जवाबदेह रहें. यह भारतीय राजनीति में फंड जुटाने के तरीकों और चुनौतियों के बारे में एक ज़रूरी मुद्दा है, जिसे हल करने के लिए सभी राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग को मिलकर काम करना होगा.
4 लाख लोगों की दावत, घुड़दौड़ में थार ईनाम... शाही अंदाज में बेटी की शादी करेंगे अनंत सिंह
जदयू विधायक अनंत सिंह की बेटी की शादी को लेकर भव्य तैयारियां चल रही हैं. इस शादी जिसमें देशभर के राजनीतिक और मनोरंजन जगत के बड़े नामों को निमंत्रण दिया गया है. नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव समेत कई नेता और अभिनेता सोनू सूद, मैथिली ठाकुर, मनोज तिवारी, पवन सिंह और अक्षरा सिंह इस समारोह में शामिल हो सकते हैं.
देश और दुनिया की प्रमुख खबरें: PM Modi का बस्तर दौरा, Congress चंदे में कमी और Japan भूकंप
नयी दिल्ली, आठ नवंबर रविवार को अपराह्न दो बजे तक ‘भाषा’ की विभिन्न फाइल से जारी मुख्य समाचार इस प्रकार हैं : प्रादे44 मोदी दिवाली बस्तरमाओवादी आतंक का खात्मा सही नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत : मोदीजगदलपुर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि माओवादी आतंक और नक्सली खतरे का खत्म होना देश की सही नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत है। दि13 सोनिया दिवालीसोनिया ने दिवाली पर इंदिरा के आवास की यादों को साझा किया, कहा- हर तरफ जलते थे दीयेनयी दिल्ली, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने रविवार को दिवाली के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आवास पर दीपोत्सव मनाने की पुरानी यादें साझा कीं और कहा कि उस समय दिवाली का उत्सव बेहद खूबसूरत होता था तथा घर में चारों ओर दीये जलाए जाते थे। दि14 कांग्रेस चंदा आयोगकांग्रेस को मिलने वाले चंदे में लगभग 75 प्रतिशत की गिरावट, एक दशक की सबसे बड़ी कमीनयी दिल्ली, कांग्रेस को 2025-26 में 20,000 रुपये से अधिक मिलने वाले चंदे के रूप में 130.69 करोड़ रुपये मिले, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 75 प्रतिशत कम हैं। पार्टी को मिलने वाले चंदे में एक दशक की सबसे बड़ी सालाना गिरावट दर्ज की गई है। निर्वाचन आयोग के पास दाखिल पार्टी के दस्तावेजों के विश्लेषण से यह जानकारी सामने आई है। प्रादे14 सिक्किम राजनाथ आगमनराजनाथ सिंह वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने सिक्किम के शेरेथांग पहुंचेगंगटोक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार को सिक्किम में नाथू ला सीमा के पास स्थित शेरेथांग पहुंचे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। दि5 मोदी आडवाणीवैचारिक स्पष्टता, छद्म धर्मनिरपेक्षता को उजागर करना आडवाणी की दो प्रमुख विशेषताएं: मोदीनयी दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की वैचारिक स्पष्टता एवं बौद्धिक प्रखरता और भारतीय राजनीति में लंबे समय तक हावी रही छद्म धर्मनिरपेक्षता की वास्तविकता को उजागर करने का उनका तरीका ऐसी दो विशेषताएं हैं, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देती हैं। अर्थ1 एसबीआई अमेरिका टेक्सास विस्तारएसबीआई ने टेक्सास में अपनी पहली अनुषंगी शाखा के साथ अमेरिका में विस्तार कियाह्यूस्टन (अमेरिका), देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (कैलिफोर्निया) ने टेक्सास के फ्रिस्को में अपनी नई शाखा का उद्घाटन किया है। अर्थ2 आईओसी कच्चा तेल एलपीजी जहाजपोत परिवहन जोखिमों के बीच आईओसी खरीदेगी कच्चे तेल और एलपीजी के जहाजनयी दिल्ली, आठ नवंबर सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) अपने खुद के कच्चे तेल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) वाहक जहाज खरीदने की योजना बना रही है। खेल3 खेल भारत एभारत ए ने पांच विकेट पर 464 रन बनाकर पारी घोषित कीलिंकन, ध्रुव जुरेल, तिलक वर्मा और वाशिंगटन सुंदर के अर्धशतकों के बाद तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा ने दो विकेट झटककर भारत ए को न्यूजीलैंड ए के खिलाफ तीसरे अनौपचारिक टेस्ट के दूसरे दिन रविवार को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। खेल4 खेल भारत ए टीमबडोनी ने चोटिल पाटीदार की जगह ली, रिंकू सिंह एसीसी राइजिंग स्टार्स एशिया कप में उपकप्तान नियुक्तनयी दिल्ली, आयुष बडोनी ने एसीसी राइजिंग स्टार्स एशिया कप के लिए रविवार को भारत ए टीम में चोटिल मध्यक्रम के बल्लेबाज रजत पाटीदार की जगह ली जो चोटों से पूरी तरह उबरने में नाकाम रहे हैं। वि1 जापान भूकंपजापान में 5.7 तीव्रता का भूकंप, कम से कम 22 लोग घायलतोक्यो, जापान के मध्य हिस्से में रविवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए और इस दौरान कम से कम 22 लोग घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। वि7 पाकिस्तान दीपावलीपाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दीपावली की शुभकामनाएं दींइस्लामाबाद, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दीपावली के अवसर पर दुनियाभर में, विशेष रूप से पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। सरकारी मीडिया ने रविवार को यह जानकारी दी।
केएल राहुल ने जीता दिल... इनाम में मिला फोन इन्हें किया गिफ्ट
जीत के बावजूद भारतीय टीम की बल्लेबाजी चिंता का विषय बन गई है. गेंदबाजों ने न्यूजीलैंड को कम स्कोर पर रोककर मजबूत स्थिति बनाई थी, लेकिन टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों के जल्दी आउट होने के चलते भारतीय टीम मुश्किल में आ गई. बारिश ने अंत में भारत को राहत दी.
किसानों के साथ दिवाली मनाने पहुंचे फडणवीस तो खुश हो गए पीएम मोदी, बोले- भावुक करने वाला पल
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस बार दिवाली मनाने नागपुर में सूखा प्रभावित किसानों के पास पहुंचे। इसपर पीएम मोदी ने सराहना करते हुए कहा कि यह बेहद भावुक कर देने वाला पल है।
चढ़ावा चोरी, यूपी में नौकरियों से निवेश तक, हर मुद्दे पर बोले सीएम योगी
अयोध्या में रविवार को आयोजित 'पंचायत आजतक उत्तर प्रदेश' के सत्र 'रामजी बनाएंगे काम' में खास तौर पर आमंत्रित रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी. सत्र की मॉडरेटर श्वेता सिंह उनसे बातचीत में अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, उत्तर प्रदेश में नौकरियों , निवेश से लेकर यूपी चुनाव 2027 समेत कई अहम मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे. जिनके मुख्यमंत्री ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिए. देखें ये सत्र.
6.5 Kg सोना और 213 गहने... दुबई में सजी ऐसी रंगोली, देखते रह गए लोग
Dubai Gold Diamond Rangoli: दिवाली के मौके पर फूलों और रंगों की रंगोली तो आम बात है, लेकिन दुबई के एक मॉल में सोने और हीरों के 213 कीमती गहनों से तैयार 6.5 किलो वजनी लग्जरी रंगोली ने सबको हैरान कर दिया है. ट्रेडिशनल भारतीय कला और शाही अंदाज का यह अनूठा संगम सोशल मीडिया पर छाया हुआ है.

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