ओडिशा के Jeypore में 40 लाख रुपये की Brown Sugar बरामद, 6 गिरफ्तार
कोरापुट, पांच अक्टूबर ओडिशा के जयपुर शहर में अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ कर 40 लाख रुपये मूल्य की ब्राउन शुगर जब्त की गई और एक महिला समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। जयपुर की उप-मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) अर्चिता मित्तल ने बताया कि एक सूचना के आधार पर पुलिस ने शनिवार को एक चार पहिया वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली। इस दौरान एक ग्राम से कम वजन वाले ब्राउन शुगर के 3,700 से अधिक छोटे पैकेट और 10-10 ग्राम ब्राउन शुगर वाले 11 पैकेट बरामद किए गए। उन्होंने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के पास से 20,000 रुपये नकद, आठ मोबाइल फोन, एक ‘भुजाली’ और एक चाकू भी जब्त किया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि मादक पदार्थ खुर्दा और नयागढ़ जिलों से लाया गया था और क्षेत्र में वितरण के लिए जयपुर पहुंचाया गया था। एसडीपीओ ने बताया कि मादक पदार्थ कथित तौर पर 800 से 1,000 रुपये प्रति छोटे पैकेट की कीमत पर बेचा जाता था। मित्तल ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में जयपुर निवासी 35 वर्षीय रमा छत्रिया उर्फ रामू भी शामिल है, जो कथित तौर पर स्थानीय मादक पदार्थ आपूर्तिकर्ता है। उसे करीब दो महीने पहले जयपुर टाउन पुलिस ने कम मात्रा में ब्राउन शुगर से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया था। उन्होंने कहा, ‘‘हमने उसे इस बार भी कथित तौर पर मादक पदार्थ खरीदते समय पकड़ा। इस बार बरामद मात्रा वाणिज्यिक है, जिस पर एनडीपीएस अधिनियम के कड़े प्रावधान लागू होते हैं।’’अन्य आरोपियों की पहचान खुर्दा निवासी 52 वर्षीय प्रकाश कुमार छुला सिंह, 26 वर्षीय शेख अली, 49 वर्षीय सत्य प्रिय पटनायक, कोरापुट निवासी 29 वर्षीय आलोक चेट्टी और नयागढ़ निवासी 36 वर्षीय सरोजिनी बराड़ा उर्फ रानू के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों में से कई का आपराधिक इतिहास है और उनके खिलाफ हत्या, डकैती तथा चोरी के मामले दर्ज हैं। मित्तल ने कहा, ‘‘प्रारंभिक पूछताछ से पता चला है कि यह एक सुनियोजित गिरोह था और इससे आपूर्ति श्रृंखला में शामिल अन्य लोगों के बारे में भी सुराग मिले हैं। पूरे नेटवर्क का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
Pargat Singh ने AAP सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, CBI जांच को लेकर दी चेतावनी
पंजाब कांग्रेस प्रमुख परगट सिंह ने सोमवार को राज्य प्रशासन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और अधिकारियों को सरकार का साथ देने के खिलाफ चेतावनी दी। यह चेतावनी पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद आई है जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखे गए पत्रों से जुड़े मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने को कहा गया था। इसे भी पढ़ें: Koyel Mallick BJP में शामिल, राज्यसभा के लिए आज ही दाखिल करेंगी पर्चा ANI से बात करते हुए, सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर निशाना साधा और पार्टी व उसके सदस्यों को ढोंग करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का कार्यालय भी जांच के दायरे में है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी BJP ने अपनी 'B-टीम' के तौर पर बनाई थी, लेकिन मकसद ऐसे कड़े कानून बनाना था कि चाहे कोई मंत्री हो या वरिष्ठ अधिकारी, भ्रष्टाचार में शामिल कोई भी व्यक्ति अपने आप जेल पहुंच जाए। आज स्थिति यही है। अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों से जुड़ा पूरा मामला एक ढोंग है। मुख्यमंत्री कार्यालय का नाम भी भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है, जिन्हें पहले प्रवर्तन निदेशालय ने भी उठाया था। उन्होंने AAP विधायकों और पंजाब के DGP, मुख्य सचिव और दूसरे मंत्रियों समेत संबंधित अधिकारियों को आगाह किया कि उनकी नाव डूबने वाली है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी हालत में सत्ता में बैठे अधिकारियों को राज्य की जनता को नतीजों का सामना करने के लिए अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं विधायकों और सभी अधिकारियों को चेतावनी दे रहा हूँ कि यह नाव डूबने वाली है। दिल्ली के ये लोग सब कुछ लूट लेंगे। मैं DGP, मुख्य सचिव और उनके सभी विधायकों और मंत्रियों को चेतावनी दे रहा हूँ। जब सरकार दबाव में आएगी तो वे खुद को दूर करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन उन्हें पंजाब की जनता को नतीजों का सामना करने के लिए अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राज कुमार वेरका ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने बिगड़ती कानून-व्यवस्था, पुलिस की मनमानी और बड़े पैमाने पर हो रही वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने राज्य प्रशासन पर आरोप लगाया कि जब लोग सवाल उठाते हैं, तो उनके साथ थर्ड-डिग्री जैसा बर्ताव किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को पुलिस की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता है। इसे भी पढ़ें: Bengal By-Election: Nandigram और Rejinagar सीट पर 6 अक्टूबर को वोटिंग, BJP की पहली परीक्षा उन्होंने कहा कि पंजाब के खजाने की भारी लूट का पर्दाफाश होने वाला है। चाहे कानून-व्यवस्था की स्थिति हो, जिसमें गोलियां चल रही हैं, या फिर ड्रग्स का मुद्दा, लोग गंभीर सवाल उठा रहे हैं। लोगों को पंजाब सरकार से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। लेकिन जब लोग सरकार से सवाल पूछते हैं, तो कथित तौर पर उनके साथ थर्ड-डिग्री जैसा बर्ताव किया जाता है। पुलिस उन्हें पीटती है और फिर उनकी हालत और खराब कर देती है। यह एक नाकाम और बेकार सरकार है। इस सरकार को जाना होगा।
आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कौन सा तुरुप का इक्का चल चुके हैं सीएम
पंजाब की राजनीतिक बिसात पर इन दिनों सियासी दांव-पेंच और रणनीति का एक ऐसा खेल चल रहा है, जो आने वाले समय में देश के सबसे दिलचस्प चुनावी मुकाबलों में से एक साबित होने वाला है. राज्य में जैसे-जैसे विधानसभा चुनावों की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे तमाम राजनीतिक दलों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की होड़ मच गई है. विपक्षी दल लगातार आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार को घेरने की कोशिश में जुटे हैं और कानून-व्यवस्था तथा प्रशासनिक मुद्दों को लेकर लगातार हमले बोल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को सत्ता से उखाड़ फेंकना किसी भी विरोधी दल के लिए आसान खेल नहीं होने वाला है. अपनी खास कार्यशैली, जनता से सीधे जुड़ाव और चुनावी माहौल भांपने की अद्भुत क्षमता के चलते भगवंत मान ने चुनाव से ठीक पहले एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक यानी तुरुप का इक्का चल दिया है, जिसने विपक्षी पार्टियों के सारे समीकरणों को उलझा कर रख दिया है. राज्य के कोने-कोने में इस बात की चर्चा है कि 'आप' सरकार ने इस बार जमीनी स्तर पर जनता को साधने के लिए जो नीति अपनाई है, वह चुनावी वैतरणी पार कराने में बेहद कारगर साबित हो सकती है.मुफ्त बिजली और ग्रामीण विकास के जरिए भगवंत मान ने मजबूत किया अपना सियासी किलाजब से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आई है, तब से मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य के आम और मध्यम वर्गीय परिवारों को ध्यान में रखते हुए कई ऐसे बड़े फैसले लिए हैं जो सीधे तौर पर उनकी जेब को राहत पहुंचाते हैं. पंजाब में घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली मुफ्त और रियादती बिजली की योजना ने ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में पार्टी की जड़ें बहुत मजबूत कर दी हैं, जिससे पारंपरिक दलों के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगी है. इसके अलावा, राज्यभर में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प, 'मोहल्ला क्लीनिक' की तर्ज पर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और युवाओं को रोजगार देने के लिए पारदर्शिता के साथ उठाये गए कदमों ने आम जनता के बीच सरकार की छवि को काफी ऊंचा उठाया है. विपक्षी पार्टियां भले ही भ्रष्टाचार और अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार पर लगातार आरोप लगा रही हों, लेकिन मैदानी हकीकत यह है कि जमीनी स्तर पर इन लोकलुभावन और बुनियादी सुविधाओं का लाभ उठाने वाला एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो अभी भी भगवंत मान के नेतृत्व पर अटूट विश्वास बनाए बैठा है.ग्रामीण मतदाताओं और किसानों के बीच गहरी पैט बनाने का अचूक राजनीतिक दांवपंजाब की राजनीति में बिना किसानों और ग्रामीण मतदाताओं को साधे कोई भी पार्टी सत्ता के सिंहासन तक नहीं पहुंच सकती है, और इस बात को मुख्यमंत्री भगवंत मान बहुत अच्छी तरह समझते हैं. चुनाव से ठीक पहले सरकार ने कृषि क्षेत्र, सिंचाई सुविधाओं और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जिस बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया है और नई योजनाओं की शुरुआत की है, उसने किसानों के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा है. जब भी विपक्षी दल कृषि से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करते हैं, तो मुख्यमंत्री खुद सामने आकर सीधा संवाद स्थापित करते हैं और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित प्रशासनिक कदम उठाते हैं. इसके अलावा, ग्रामीण अंचलों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए जिस तरह की योजनाएं धरातल पर उतारी गई हैं, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी की पकड़ को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है. यही वजह है कि राजनीतिक पंडित अब यह कहने लगे हैं कि भगवंत मान को केवल बयानों के दम पर सत्ता से बेदखल कर पाना विपक्ष के लिए लोहे के चने चबाने जैसा साबित होगा.विपक्षी दलों के तमाम हमलों और घेराबंदी के बीच 'आप' की नई चुनावी रणनीतिआगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस, अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तीनों ही दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं और सरकार की कमियों को उजागर करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. हालांकि, इन तमाम राजनीतिक हमलों के बावजूद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जिस संयम और आक्रामक जनसंपर्क अभियान के साथ अपनी नीतियों का बचाव किया है, उससे यह साफ हो गया है कि वे चुनावी दंगल में मात खाने वाले राजनेताओं में से नहीं हैं. उन्होंने चुनाव से ठीक पहले अपने प्रशासनिक फैसलों और जनहितैषी योजनाओं के जरिए एक ऐसा सुरक्षा चक्र तैयार कर लिया है, जिसे भेदना विपक्षी दलों के लिए एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस मजबूत राजनीतिक किलेबंदी को तोड़ने के लिए कौन सी नई काट ढूंढता है, लेकिन फिलहाल पंजाब के राजनीतिक आसमान पर भगवंत मान का यह तुरुप का इक्का पूरी तरह छाया हुआ है और मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है.
CBI को सौंपी गई कैश फॉर ट्रांसफर रैकेट की जांच, बढ़ी सीएम की मुश्किलें
पंजाब की सियासत में इन दिनों भूचाल आया हुआ है, और राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में उस समय सनसनी फैल गई जब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से जुड़े 'कैश फॉर ट्रांसफर' (Cash for Transfer) रैकेट की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) को सौंप दी है. अदालत ने अपने इस कड़े आदेश में सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच करके महज दो महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करे. हाई कोर्ट के इस सख्त रुख से मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के प्रशासनिक तंत्र पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि ठीक चुनावों से पहले इस तरह के बड़े प्रशासनिक घोटाले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी के हाथों में जाना सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है. विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर कैसे सरकारी पदों पर तबादलों के एवज में रुपयों का लेन-देन किया जा रहा था, जिससे आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा उठने लगा है.हाईकोर्ट ने दिए सीबीआई जांच के आदेश, दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने की सख्त निर्देशपंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा लिया गया यह फैसला राज्य में चल रहे कथित प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी न्यायिक कार्रवाई मानी जा रही है. अदालत में सुनवाई के दौरान जब ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर मोटी रकम वसूले जाने के पुख्ता सबूत और ऑडियो-वीडियो क्लिप्स सामने आए, तो न्यायपालिका ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की. बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामलों में लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जा सकती है, और इसी वजह से मामले की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसकी जांच किसी स्थानीय पुलिस या राज्य एजेंसी के बजाय सीधे देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को सौंपी जा रही है. अदालत ने सीबीआई को यह भी पाबंद किया है कि वह अगले दो महीनों के भीतर इस पूरे रैकेट की तह तक पहुंचकर अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे, ताकि दोषी अधिकारियों और उनके पीछे छिपे राजनीतिक संरक्षकों के चेहरों से नकाब उतारा जा सके. इस आदेश के बाद से ही पंजाब के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और कई बड़े अधिकारियों की नींद उड़ गई है, क्योंकि उन्हें डर है कि इस जांच की आंच उन तक भी पहुंच सकती है.चुनाव से ठीक पहले भगवंत मान सरकार के लिए खड़ी हुई विकट राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतीमुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए यह न्यायिक झटका ऐसे समय में आया है जब राज्य में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है और विपक्षी दल लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हमला बोल रहे हैं. जब सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करते हुए सत्ता संभाली थी, तब इस तरह का कैश फॉर ट्रांसफर रैकेट सामने आना सरकार के उन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जाने वाली इस दो महीने की जांच का असर सीधे तौर पर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहा है. विपक्षी नेताओं का आरोप है कि पंजाब में तबादलों का खेल बिना राजनीतिक सह के संभव ही नहीं है, इसलिए इस मामले की आंच सीधे तौर पर राजनीतिक गलियारों के शीर्ष तक जानी चाहिए. सरकार के सामने अब यह सबसे बड़ी चुनौती है कि वह इन गंभीर आरोपों के बीच अपनी छवि को कैसे बचाए और जनता के बीच अपनी साफ-सुथरी होने की साख को कैसे कायम रखे.प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता के भरोसे को बहाल करने की उठी मांगइस पूरे घटनाक्रम के बाद पंजाब की आम जनता और प्रबुद्ध नागरिकों के बीच भी यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर कैसे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों ने शासन प्रणाली को अपनी दुकान बना लिया था. ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे बुनियादी प्रशासनिक कार्यों में पैसों का खेल चलना इस बात का प्रमाण है कि सिस्टम के भीतर कुछ बड़े सुधारों की सख्त जरूरत है. न्याय विशेषज्ञों का कहना है कि सीबीआई की इस जांच से यदि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है, तो यह पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा. जनता भी यही उम्मीद कर रही है कि जांच एजेंसी निष्पक्षता के साथ उन सभी चेहरों को बेनकाब करे जो इस रैकेट के जरिए अवैध कमाई कर रहे थे. आने वाले दो महीनों में सीबीआई की यह रिपोर्ट क्या खुलासे करती है और इससे पंजाब की राजनीति में क्या भूचाल आता है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं.
ची में कोढ़ा गैंग के सरगना रंगीला और पुलिस के बीच खूनी मुठभेड़
झारखंड की राजधानी रांची में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे पुलिस हिरासत से भागने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं. देश भर में अपनी शातिर चोरी और छिनतई की वारदातों के लिए कुख्यात माने जाने वाले 'कोढ़ा गैंग' (Kodha Gang) के खिलाफ रांची पुलिस ने एक बहुत बड़ा और निर्णायक ऑपरेशन चलाया है. इस हाई-वोल्टेज कार्रवाई के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया जब कोढ़ा गैंग का मुख्य सरगना पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए एक सनसनीखेज साजिश के तहत पुलिसकर्मी की सर्विस पिस्टल छीनकर मौके से फरार होने की कोशिश करने लगा. स्थिति की गंभीरता और अपनी तथा जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रांची पुलिस ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की, जिसमें पुलिस की गोली लगने से कुख्यात सरगना रंगीला गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा. इस दुस्साहसिक एनकाउंटर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि झारखंड पुलिस अपराधियों के किसी भी नापाक मंसूबे को कामयाब नहीं होने देगी और कानून के साथ खिलवाड़ करने वालों को इसका मुंहतोड़ जवाब मिलेगा.पुलिस हिरासत से भागने के लिए रंगीला ने रची थी खतरनाक साजिशघटना की शुरुआत उस वक्त हुई जब रांची पुलिस की विशेष इन्वेस्टिगेशन टीम कुख्यात कोढ़ा गैंग के सरगना रंगीला और उसके अन्य गुर्गों को शहर के विभिन्न इलाकों में लूटे गए सामान और हथियारों की बरामदगी के लिए लेकर गई थी. पुलिस को यह गुप्त सूचना मिली थी कि इस गैंग ने चोरी और छिनतई के माल को शहर के ही एक गुप्त ठिकाने पर छिपा रखा है, जिसकी निशानदेही के लिए पुलिस बल उन्हें मौके पर लेकर पहुंचा था. शातिर किस्म के अपराधी रंगीला के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था, और उसने पुलिस की नजरों से बचकर भागने की एक खौफनाक साजिश पहले से ही रच रखी थी. जैसे ही पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में जुटी, वैसे ही रंगीला ने अचानक पूरी ताकत के साथ मौके पर तैनात एक पुलिसकर्मी पर हमला बोल दिया और उनकी सर्विस पिस्टल झटक ली. पिस्टल हाथ आते ही उसने वहां से दौड़ लगा दी और पुलिस दल पर फायरिंग करने की कोशिश की, जिससे पल भर के लिए वहां अफरातफरी और भारी तनाव का माहौल पैदा हो गया.पुलिस की आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई, पैर में गोली लगने से धराशायी हुआ सरगनाएक अपराधी द्वारा पुलिस की हिरासत से भागने की कोशिश करना और पुलिस पर ही हथियार तान देना बेहद गंभीर मामला था, और ऐसी स्थिति में पुलिस के पास तुरंत फैसला लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था. रांची पुलिस के जवानों ने बिना घबराए और अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत मोर्चा संभाला और भाग रहे कुख्यात सरगना रंगीला को चेतावनी दी, लेकिन जब वह नहीं रुका और पुलिस दल पर हमलावर होने की कोशिश करता रहा, तो पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस द्वारा चलाई गई गोली सीधे रंगीला के पैर में जाकर लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही चित हो गया और भागने की उसकी सारी योजना धरी की धरी रह गई. उसके घायल होते ही पुलिस ने तुरंत बिना कोई समय गंवाए उसे अपने कब्जे में ले लिया और उसके पास से छीनी गई पिस्टल भी सुरक्षित बरामद कर ली. इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई से पुलिस ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वर्दी पर हाथ उठाने या कानून को चुनौती देने वाले अपराधियों का अंजाम अब यही होगा.कोढ़ा गैंग के आपराधिक नेटवर्क पर रांची पुलिस का कड़ा प्रहार, शहरवासियों ने ली राहत की सांसबिहार के कटिहार जिले के कोढ़ा इलाके से ताल्लुक रखने वाला यह कुख्यात 'कोढ़ा गैंग' देश के कई राज्यों में बैंक ग्राहकों, ज्वेलरी शॉप्स और सड़क चलते लोगों को निशाना बनाकर पलक झपकते ही चेन और कैश लूटकर फरार होने के लिए पूरे देश में कुख्यात रहा है. रांची में भी इस गैंग ने पिछले कुछ महीनों में कई बड़ी वारदातों को अंजाम देकर पुलिस की नींद उड़ा रखी थी, और इस सरगना रंगीला की गिरफ्तारी को पुलिस की एक बहुत बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है. एनकाउंटर में घायल होने के बाद सरगना रंगीला को तुरंत भारी पुलिस सुरक्षा के बीच रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है. इस सनसनीखेज मुठभेड़ की खबर जैसे ही पूरे शहर में फैली, आम नागरिकों और व्यापारियों ने राहत की सांस ली और रांची पुलिस की इस बहादुरी व तत्परता की जमकर सराहना की. पुलिस अब इस गिरोह के बाकी बचे अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है ताकि इस पूरे आपराधिक नेटवर्क का पूरी तरह से सफाया किया जा सके.
रांची में पुलिस मुठभेड़ के दौरान कुख्यात सरगना के पैर में लगी गोली
झारखंड की राजधानी रांची में अपराधियों और बदमाशों के हौसले किस कदर बुलंद हो चुके हैं, इसका एक बेहद डरावना और सनसनीखेज उदाहरण हाल ही में देखने को मिला है, जहां चेन स्नैचिंग जैसी वारदातों को अंजाम देने वाले शातिर अपराधी अब आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिस पर भी गोली चलाने से नहीं कतरा रहे हैं. रांची पुलिस और शहर के कुख्यात चेन स्नैचिंग गिरोह के सरगना के बीच हुई एक रोमांचक मुठभेड़ (Encounter) के दौरान हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी. इस हाई-वोल्टेज एनकाउंटर में मुख्य सरगना के पैर में पुलिस की गोली जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा, जिसके बाद पुलिस ने मौके से उसे और उसके दो अन्य सहयोगियों को धर दबोचा. दिनदहाड़े हुई इस पुलिस कार्रवाई से पूरे रांची शहर में हड़कंप मच गया है और यह घटना इस बात का प्रमाण है कि झारखंड पुलिस अब अपराधियों के खिलाफ कितनी सख्त और आक्रामक रुख अपना रही है, ताकि शहर की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जा सके और आम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा किया जा सके.रांची के पॉश इलाके में पुलिस को मिली थी अपराधियों के मूवमेंट की गुप्त सूचनाघटना की शुरुआत उस वक्त हुई जब रांची पुलिस के विशेष दस्ते और एंटी-क्राइम पेट्रोलिंग टीम को यह गुप्त सूचना मिली कि शहर के एक व्यस्त और पॉश इलाके में पिछले कुछ दिनों से चेन स्नैचिंग और लूटपाट की वारदातों को अंजाम देने वाला एक खतरनाक गिरोह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा है. सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और सादे कपड़ों के साथ-साथ पुलिस बलों ने उस इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी. पुलिस को देखकर जब इन बदमाशों को अपनी गिरफ्तारी का अंदेशा हुआ, तो उन्होंने पुलिस टीम से बचने के लिए वहां से भागने की कोशिश की और जब पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर सरेंडर करने के लिए कहा, तो इन शातिर अपराधियों ने कानून के डर से भागने के बजाय पुलिस दल पर ही ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. अपराधियों द्वारा अचानक की गई इस गोलीबारी से एक पल के लिए वहां अफरातफरी का माहौल बन गया, लेकिन रांची पुलिस के जवानों ने बिना घबराए अपनी सूझबूझ और बहादुरी का परिचय देते हुए मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी.जवाबी कार्रवाई में सरगना के पैर में लगी गोली, तीन शातिर अपराधी हुए गिरफ्तारपुलिस पर फायरिंग करने वाले बदमाशों को जब यह अहसास हुआ कि कानून का शिकंजा उन पर कस चुका है, तो वे बचने के लिए हरसंभव हथकंडे अपनाने लगे, लेकिन पुलिस की जवाबी कार्रवाई उनके नापाक इरादों पर भारी पड़ गई. पुलिस द्वारा की गई लक्षित और आत्मरक्षार्थ फायरिंग के दौरान गिरोह का मुख्य सरगना गोली लगने से घायल हो गया, जो उसके पैर में जा धंसी और वह मौके पर ही गिर पड़ा. सरगना के घायल होते ही उसके बाकी साथियों के हौसले पस्त हो गए और पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बिना किसी जानमाल के नुकसान के मुख्य सरगना समेत कुल तीन शातिर अपराधियों को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया. घायल सरगना को तुरंत इलाज के लिए रांची के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है. पुलिस ने पकड़े गए अपराधियों के पास से अवैध हथियार, कारतूस, लूटी गई सोने की चेन और वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली तेज रफ्तार मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली है, जिससे उनकी कई पुरानी वारदातों का भी खुलासा होने की उम्मीद है.चेन स्नैचिंग के बढ़ते मामलों पर रांची पुलिस का कड़ा प्रहार, जनता ने ली राहत की सांसपिछले कुछ समय से रांची के विभिन्न इलाकों में महिलाओं के गले से चेन खींचने और राह चलते लोगों से लूटपाट करने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा था, जिससे आम नागरिकों और विशेषकर महिलाओं के मन में डर का माहौल बना हुआ था. पुलिस प्रशासन पर इन वारदातों को रोकने और अपराधियों की धरपकड़ करने का भारी दबाव था, और इस सफल एनकाउंटर के बाद यह साफ हो गया है कि रांची पुलिस अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. इस सनसनीखेज मुठभेड़ की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है और पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की जमकर सराहना कर रहे हैं. पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इन गिरफ्तार अपराधियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इन्होंने शहर में अब तक कुल कितनी वारदातों को अंजाम दिया है. इस कार्रवाई के बाद से रांची के आपराधिक तत्वों में खौफ का माहौल है और यह संदेश साफ चला गया है कि कानून से खिलवाड़ करने वालों का अंजाम अब बेहद बुरा होगा.
नया फॉर्म-6 हमने अप्रूव नहीं किया, CEC विवाद के बीच CJI सूर्यकांत की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि उसने नए वोटरों को रजिस्टर करने के लिए चुनाव आयोग (EC) द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी बदले हुए फॉर्म 6 को मंज़ूरी नहीं दी है। कोर्ट की यह टिप्पणी उस विवाद के संदर्भ में आई है जो 2025 में इस फ़ॉर्म में जोड़े गए एक एनेक्ज़र (अतिरिक्त दस्तावेज़) को लेकर खड़ा हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद पर 28 सितंबर को दिए गए एक बयान में चुनाव आयोग ने कहा था कि 'फॉर्म 6' के साथ लगे घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था। हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट रिकॉर्ड की जांच करके यह पता लगाना चाहता है कि बदलाव किसने किए हैं। उन्होंने कहा संशोधित फॉर्म 6 को हमने मंज़ूरी नहीं दी है, यह बात बिल्कुल साफ़ होनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकते, CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग SC में खारिज उन्होंने कहा जब रिकॉर्ड पेश किया जाएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि फॉर्म 6 में बदलाव किसने किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। उन पर आरोप था कि उन्होंने बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले लिए। बेंच ने कहा कि जब तक जवाब नहीं मिल जाता, तब तक वह यही मानकर चलेगी कि चुनाव आयोग के फैसले कानून के मुताबिक थे। CJI कांत ने कहा रिपोर्ट सही हो सकती है या गलत, लेकिन हम उसके आधार पर कोई आदेश जारी नहीं कर सकते... हमें उनके जवाब का इंतज़ार करना होगा। इसे भी पढ़ें: Ballot Paper और CEC के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं, Congress प्रमुख Kharge का बयान फॉर्म 6 से जुड़ा विवाद क्या है इस विवाद की मुख्य वजह ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में एक अतिरिक्त घोषणा (डिक्लेरेशन) है। इसके तहत नए वोटर्स को SIR प्रक्रिया के दौरान खुद को, या अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पिछली वोटर लिस्ट से जोड़ने वाली जानकारी देनी होती है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस अतिरिक्त ज़रूरत पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी चिंता यह थी कि फॉर्म 6, 'रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत तय किया गया एक कानूनी फॉर्म है और नियमों में औपचारिक बदलाव किए बिना इसमें कोई प्रभावी बदलाव नहीं किया जा सकता। इस विवाद की शुरुआत EC के जून 2025 के SIR आदेश से हुई, जिसमें रिविज़न प्रक्रिया के दौरान नए रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा (जिसे एनेक्शर D कहा जाता है) की ज़रूरत बताई गई थी। हालांकि, जिस ज़रूरत की अब जांच हो रही है, वह बाद में ऑनलाइन 'फॉर्म 6' की प्रक्रिया में शामिल की गई थी। जुलाई 2026 में शुरू की गई इस प्रक्रिया में आवेदकों से कहा गया था कि वे खुद को, या अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पिछली SIR वोटर लिस्ट से जोड़ने वाली जानकारी दें। यह समय इसलिए अहम हो गया है क्योंकि यह ऑनलाइन ज़रूरत, सुप्रीम कोर्ट के बिहार SIR पर 27 मई को आए फैसले के कुछ हफ़्ते बाद लागू की गई थी। चुनाव आयोग का कहना है कि 'फॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया गया था और SIR से जुड़ा डिक्लेरेशन (घोषणा-पत्र) एक अतिरिक्त ज़रूरत थी। सितंबर में दिए अपने बयान में चुनाव आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस डिक्लेरेशन को सही ठहराया था और 'रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत तय किए गए फ़ॉर्म नॉन-SIR समय के दौरान भी लागू रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था? 27 मई के अपने फ़ैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR (विशेष पुनरीक्षण अभ्यास) कराने के चुनाव आयोग के अधिकार को सही ठहराया और इस प्रक्रिया के लिए तय किए गए डॉक्यूमेंटेशन फ़्रेमवर्क की समीक्षा की। कोर्ट ने कहा कि SIR के लिए 'फ़ॉर्म 6' को ज़रूरी तौर पर शब्दशः (जैसा लिखा है, वैसा ही) लागू नहीं किया जा सकता और कहा कि चुनाव आयोग के पास ऐसी प्रक्रिया के लिए सही डॉक्यूमेंटेशन फ़्रेमवर्क बनाने का कुछ हद तक बचा हुआ अधिकार है। हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि यह अधिकार असीमित नहीं है और कहा कि कानूनी फ़्रेमवर्क से किसी भी तरह के बदलाव का SIR के मकसद से तार्किक संबंध होना चाहिए।
'जो महिला सवाल करे उसे चुप करा दो...', राहुल गांधी ने अमित शाह और दिल्ली पुलिस को घेरा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में महिलाओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
फ्रांस में हिंसक छात्र प्रदर्शन, हर तीन में से एक स्कूल प्रभावित
France student protests: भारत में छात्रों की तिलचट्टा (कॉक्रोच) पार्टी के उग्र प्रदर्शनों पर यूरोप में जो लोग तालियां पीट रहे थे, मोदी सरकार को बुरा-भला कह रहे थे, वे अब फ्रांस के स्कूली छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों से सन्नाटे में आ गए हैं। वहां लगभग ...
न्यूजीलैंड दौरे के लिए अगले हफ्ते होगा टीम इंडिया का ऐलान
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के गलियारों से एक बेहद बड़ी और दिलचस्प खबर सामने आ रही है, जो आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों और टीम के चयन से जुड़ी हुई है. भारतीय क्रिकेट टीम को आने वाले दिनों में एक लंबे और चुनौतीपूर्ण दौरे पर न्यूजीलैंड जाना है, जिसके लिए टीम चयन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगामी हफ्ते में बीसीसीआई की राष्ट्रीय चयन समिति न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारतीय टेस्ट, वनडे और टी20 स्कवॉड का आधिकारिक ऐलान करने वाली है. इस बार का चयन कई मायनों में बेहद खास रहने वाला है क्योंकि पूर्व मुख्य चयनकर्ता अजित आगरकर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब चयन समिति की कमान एक नए चेहरे के हाथों में सौंपी गई है. भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज और शानदार बाएं हाथ के स्पिनर रहे प्रज्ञान ओझा को अंतरिम मुख्य चयनकर्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई है, और उनके नेतृत्व वाली चार सदस्यीय चयन समिति ही न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली इस आगामी सीरीज के लिए खिलाड़ियों के भाग्य का फैसला करेगी.अजित आगरकर का कार्यकाल समाप्त, प्रज्ञान ओझा बने चयन समिति के अंतरिम प्रमुखभारतीय क्रिकेट में चयनकर्ताओं की समिति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है जब मुख्य चयनकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे अजित आगरकर का कार्यकाल आधिकारिक रूप से पूरा हो चुका है. उनके हटने के बाद बीसीसीआई ने तत्काल प्रभाव से व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. प्रज्ञान ओझा अब मौजूदा चार सदस्यीय चयन समिति के अंतरिम प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाल रहे हैं और उनके सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड दौरे के लिए एक संतुलित, मजबूत और विजेता भारतीय टीम का चयन करने की है. अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान अपनी जादुई फिरकी से विपक्षी बल्लेबाजों के छक्के छुड़ाने वाले ओझा के लिए यह प्रशासनिक भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले समय में उन्हें इस पद पर पूर्णकालिक रूप से भी प्रमोट किए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं. उनके इस नए कार्यकाल की शुरुआत न्यूजीलैंड के इस कड़े दौरे से होने जा रही है, जिस पर देश भर के तमाम क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों की पैनी नजर टिकी हुई है.अक्टूबर के अंत में शुरू होगा न्यूजीलैंड का दौरा, कई फॉर्मेट में खेले जाएंगे रोमांचक मुकाबलेभारतीय टीम के इस आगामी न्यूजीलैंड दौरे का कार्यक्रम काफी लंबा और व्यस्त रहने वाला है, जिसकी शुरुआत इसी महीने के आखिर यानी 22 अक्टूबर से होने जा रही है और यह दौरा लगभग 27 नवंबर तक चलेगा. इस महीने भर चलने वाले लंबे दौरे पर भारतीय टीम मेजबानी कर रही कीवी टीम के खिलाफ कुल पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज, पांच मैचों की रोमांचक वनडे सीरीज और दो महत्वपूर्ण टेस्ट मैचों की श्रृंखला खेलेगी. चूंकि आने वाले समय में विश्व कप और आईसीसी की अन्य बड़ी ट्रॉफियों को ध्यान में रखते हुए टीम का कॉम्बिनेशन तैयार किया जा रहा है, इसलिए चयन समिति के लिए यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. खासकर वनडे और टेस्ट फॉर्मेट में उन खिलाड़ियों को मौका मिलने की पूरी संभावना है जो लंबे समय से घरेलू क्रिकेट और ईरानी कप जैसे टूर्नामेंट्स में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं. चयन समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि टीम में अनुभव और युवा ऊर्जा का एक बेहतरीन संतुलन हो ताकि विदेशी सरजमीं पर भारतीय टीम अपना दबदबा कायम रख सके.सीनियर खिलाड़ियों की उपलब्धता और नए चेहरों को मिलने वाले अवसरों पर टिकी निगाहेंप्रज्ञान ओझा और उनकी चयन समिति के सामने इस बार सबसे बड़ा टास्क टीम में सही खिलाड़ियों का संतुलन बिठाना होगा, क्योंकि कप्तान और टीम प्रबंधन की यह मंशा साफ रही है कि महत्वपूर्ण दौरों पर सभी प्रमुख और वरिष्ठ खिलाड़ियों की सेवाएं उपलब्ध रहें. इसके साथ ही घरेलू सर्किट में अपनी गेंदबाजी से तहलका मचाने वाले तेज गेंदबाजों जैसे मुकेश Kumar और आकाश दीप जैसे खिलाड़ियों को भी इस बार विदेशी दौरों के लिए टेस्ट या सीमित ओवरों के स्क्वॉड में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. चयन समिति की बैठक अगले कुछ दिनों में होने वाली है, जिसमें मुख्य कोच गौतम गंभीर और अंतरिम प्रमुख प्रज्ञान ओझा के बीच खिलाड़ियों के नामों पर लंबी मंत्रणा होगी. क्रिकेट फैंस यह देखने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि नए अंतरिम चीफ सिलेक्टर के रूप में प्रज्ञान ओझा अपने पहले ही बड़े फैसले में किन युवा खिलाड़ियों को किस्मत चमकाते हैं और किसे टीम से बाहर का रास्ता देखना पड़ता है. आगामी हफ्ते में होने वाला यह ऐलान भारतीय क्रिकेट की आगामी दिशा और दशा तय करने में एक अहम मील का पत्थर साबित होगा.
वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग XI में जगह क्यों नहीं?
वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज से पहले गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी के टीम चयन पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वैभव प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उन्हें मौके के लिए इंतजार करना होगा।
वनडे सीरीज खत्म होते ही ICC का बड़ा एक्शन, भारत और वेस्टइंडीज पर लगा भारी जुर्माना
भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली गई रोमांचक तीन मैचों की वनडे सीरीज भले ही समाप्त हो चुकी है, लेकिन मैदान के बाहर से आ रही एक बड़ी खबर ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC ने सीरीज के आखिरी और तीसरे मुकाबले के दौरान नियमों की अनदेखी करने को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. न्यू चंडीगढ़ में खेले गए इस मुकाबले के दौरान स्लो ओवर-रेट (धीमी ओवर गति) के नियमों का उल्लंघन करने के लिए आईसीसी ने भारतीय टीम और वेस्टइंडीज टीम दोनों पर भारी भरकम आर्थिक जुर्माना ठोक दिया है. इस पेनल्टी की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने मैदानी अंपायरों के फैसले और आईसीसी के नियमों को स्वीकार करते हुए अपनी गलती मान ली है, जिसके चलते किसी औपचारिक सुनवाई या विवाद की गुंजाइश नहीं बची. सीरीज जीतने के बावजूद भारतीय टीम पर इस तरह का आर्थिक दंड लगना फैंस के लिए थोड़ा हैरान करने वाला जरूर है, लेकिन यह अनुशासनात्मक कार्रवाई इस बात की गवाही देती है कि आईसीसी खेल के तय समय और नियमों को लेकर कितनी सख्त है.न्यू चंडीगढ़ वनडे में धीमी ओवर गति के कारण आईसीसी का कड़ा एक्शनभारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही इस द्विपक्षीय सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया था, जो रोमांच के लिहाज से अपने चरम पर था. इस मैच में वेस्टइंडीज की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को 5 विकेट से हरा दिया था, हालांकि शुरुआती दोनों मैच जीतकर टीम इंडिया पहले ही 2-1 से श्रृंखला अपने नाम कर चुकी थी. इसी मुकाबले के दौरान खेल के निर्धारित समय के भीतर ओवर पूरे नहीं किए जा सके, जिसके बाद मैच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट आईसीसी को सौंपी. आईसीसी के आचार संहिता के नियमों के अनुसार, जब कोई टीम तय समय सीमा के अंदर अपने कोटे के ओवर फेंकने में विफल रहती है, तो उसे स्लो ओवर-रेट का दोषी माना जाता है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मैच रेफरी ने दोनों टीमों के कप्तानों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया, ताकि भविष्य में इस तरह की सुस्ती और समय की बर्बादी से बचा जा सके.भारत को चुकानी पड़ी बड़ी कीमत, वेस्टइंडीज के मुकाबले अधिक जुर्माना तयधीमी ओवर गति के इस मामले में भारतीय टीम पर मेहमान वेस्टइंडीज टीम के मुकाबले अधिक आर्थिक दंड लगाया गया है. आईसीसी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, समय और छूट के तमाम प्रावधानों को ध्यान में रखने के बाद भी भारतीय टीम अपने तय समय से पूरे चार ओवर पीछे रह गई थी, जबकि वेस्टइंडीज की टीम दो ओवर पीछे पाई गई थी. इसी वजह से नियमों के तहत भारतीय खिलाड़ियों और कप्तान को ज्यादा बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है. भारत पर उनकी पूरी मैच फीस का 20 प्रतिशत हिस्सा जुर्माना के रूप में लगाया गया है, जबकि वेस्टइंडीज की टीम को उनकी मैच फीस का 10 प्रतिशत हिस्सा जुर्माने के तौर पर देना होगा. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस तरह के जुर्माने खिलाड़ियों के लिए एक कड़ा संदेश होते हैं कि उन्हें मैच के दौरान खेल की गति को तेज रखना होगा और ओवर परिवर्तन के समय बिना किसी अनावश्यक देरी के फील्ड सजावट करनी होगी, वरना जीत की खुशी भी इस तरह के आर्थिक दंड से फीकी पड़ जाती है.कप्तान शुभमन गिल ने गलती स्वीकार की, औपचारिक सुनवाई की नहीं पड़ी जरूरतमैच के बाद जब आईसीसी की ओर से स्लो ओवर-रेट का यह मामला सामने आया, तो भारतीय वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल ने किसी भी तरह की टालमटोल या विरोध करने के बजाय बड़प्पन दिखाते हुए अपनी गलती को तुरंत स्वीकार कर लिया. कैरेबियाई टीम के कप्तान शाई होप ने भी अपनी टीम की तरफ से इस गलती को मान लिया. मैच रेफरी के सामने दोनों कप्तानों द्वारा अपने ऊपर लगे आरोपों और प्रस्तावित प्रतिबंधों को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिए जाने के कारण इस मामले में किसी भी प्रकार की लंबी औपचारिक सुनवाई या अनुशासनात्मक बैठक की आवश्यकता नहीं पड़ी. कप्तान शुभमन गिल का यह कदम खेल भावना के अनुकूल रहा, जहां उन्होंने अपनी और टीम की गलती को खुले दिल से स्वीकार किया. सीरीज जीतने के बावजूद आईसीसी की यह पेनल्टी टीम प्रबंधन के लिए एक सबक है कि आगामी मुकाबलों और आगामी दौरों पर उन्हें अपनी रणनीतिक चुस्ती और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि मैदान पर शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ इस तरह के अनचाहे आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सके.
वैभव सूर्यवंशी को लेकर गौतम गंभीर ने दिया बड़ा बयान
भारतीय क्रिकेट का गलियारा इन दिनों एक ऐसे युवा नाम की गूंज से सराबोर है जिसने अपनी प्रतिभा के दम पर कम उम्र में ही पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. हम बात कर रहे हैं कम उम्र में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सनसनी मचाने वाले युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी की, जिनकी प्रतिभा और खेल शैली को लेकर इन दिनों खेल जगत में बड़ी चर्चाएं चल रही हैं. क्रिकेट के मैदान पर अपनी ताबड़तोड़ पारियों से चयनकर्ताओं और दिग्गजों को हैरान करने वाले वैभव सूर्यवंशी के भविष्य और टीम में उनकी भूमिका को लेकर फैंस के मन में तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच, भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर एक बहुत ही अहम, स्पष्ट और सारगर्भित बयान दिया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है. गौतम गंभीर का यह बयान न केवल इस युवा खिलाड़ी के लिए एक स्पष्ट संदेश है, बल्कि यह यह भी बताता है कि भारतीय टीम प्रबंधन युवा प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें संभालने के लिए किस तरह की पेशेवर सोच और अनुशासन पर काम कर रहा है.मुख्य कोच गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी के टैलेंट और टीम मैनेजमेंट की सोच पर की खुलकर बातभारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर अपनी बेबाक और दो टूक बयानों के लिए जाने जाते हैं, और इस बार भी उन्होंने वैभव सूर्यवंशी के भविष्य को लेकर किसी भी तरह के कयासों को विराम देते हुए बिल्कुल साफ शब्दों में अपनी बात रखी है. जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गौतम गंभीर से यह सवाल पूछा गया कि वैभव सूर्यवंशी जैसे बेहद कम उम्र के और आक्रामक खिलाड़ी को लेकर टीम मैनेजमेंट की क्या योजना है और क्या उन्हें अचानक किसी बड़े मंच से बाहर किया जा सकता है, तो गंभीर ने बेहद परिपक्व जवाब दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट में किसी भी खिलाड़ी का चयन या उसे बाहर करना कोई रातों-रात लिया गया फैसला नहीं होता है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी प्रक्रिया होती है. गंभीर ने कहा कि हम किसी भी खिलाड़ी को अचानक से बाहर नहीं कर सकते हैं, क्योंकि हर खिलाड़ी को उसकी मेहनत, काबिलियत और घरेलू क्रिकेट में लगातार किए जा रहे प्रदर्शन के आधार पर ही टीम में जगह मिलती है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैभव सूर्यवंशी के पास अपार प्रतिभा है, लेकिन आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी और मानसिक रूप से मजबूत होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है.खिलाड़ी को खुद मैदान पर अपना दम साबित करना होगा: गौतम गंभीर की दो टूक सलाहयुवा खिलाड़ियों को अपने करियर की शुरुआत में ही आसमान पर चढ़ने की मानसिकता से दूर रखने के लिए गौतम गंभीर ने एक बेहद जरूरी सलाह दी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कुछ अच्छी पारियां खेल लेने से कोई भी खिलाड़ी लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह सुरक्षित नहीं मान सकता है, बल्कि उसे हर मैच और हर सीरीज में अपने खेल का स्तर लगातार ऊंचा रखना होगा. गंभीर ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा सितारों को यह समझना होगा कि टैलेंट सिर्फ एक शुरुआत है, असली परीक्षा मैदान के भीतर आने वाली कठिन परिस्थितियों और दबाव के पलों में होती है. कोच ने कहा कि टीम प्रबंधन और चयनकर्ता हमेशा युवा खिलाड़ियों का समर्थन करने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन अंत में मैदान पर रन बनाकर अपना दम खुद खिलाड़ी को ही साबित करना पड़ता है. उनके इस बयान से यह साफ हो गया है कि वैभव सूर्यवंशी को अगर टीम इंडिया में अपनी स्थायी जगह बनानी है, तो उन्हें अपनी तकनीक में निरंतरता लानी होगी और घरेलू तथा जूनियर सर्किट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखना होगा, ताकि वे दबाव भरी परिस्थितियों में भी खुद को साबित कर सकें.भविष्य के सुपरवाइजर और भारतीय क्रिकेट की बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करने का मास्टरप्लानगौतम गंभीर के कार्यकाल के दौरान हमेशा से इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय क्रिकेट टीम में ट्रांसमिशन और यंग टैलेंट को ग्रूम करने का तरीका बेहद अनुशासित होना चाहिए. वैभव सूर्यवंशी का नाम जिस तेजी से भारतीय क्रिकेट के नक्शे पर उभरा है, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में वे टीम के एक बड़े एसेट बन सकते हैं. हालांकि, गंभीर का यह बयान यह भी रेखांकित करता है कि प्रबंधन किसी भी युवा खिलाड़ी पर शुरुआती सफलता का अतिरिक्त दबाव नहीं डालना चाहता है, ताकि उसका स्वाभाविक खेल प्रभावित न हो. कोचिंग स्टाफ और नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) के सहयोग से ऐसे खिलाड़ियों की फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और मैच अवेयरनेस पर बारीकी से काम किया जा रहा है. गौतम गंभीर की यह सोच न केवल वैभव सूर्यवंशी के लिए एक अमूल्य मार्गदर्शन है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट के उस सुनहरे भविष्य की नींव भी रखती है जहां हर युवा खिलाड़ी को उसकी योग्यता के आधार पर उचित अवसर और पारदर्शी रास्ता मिलता है, बशर्ते वे अपनी मेहनत और लगन से खुद को साबित करने का माद्दा रखते हों.
अक्टूबर में भारत के इन 5 ऐतिहासिक और रंगीन फेस्टिवल्स का जरूर उठाएं लुफ्त
अक्टूबर का महीना भारत में फेस्टिव सीजन की एक खूबसूरत और सुहानी शुरुआत लेकर आता है, जब चिलचिलाती गर्मी विदा ले चुकी होती है और हल्की-हल्की गुलाबी ठंडक हवा में घुलने लगती है. देश के अलग-अलग कोनों में इस महीने संस्कृति, परंपरा, संगीत, कला और आध्यात्मिकता के ऐसे अनूठे उत्सव मनाए जाते हैं, जिन्हें देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि सात समंदर पार से भी विदेशी सैलानी भारत की धरती पर खींचे चले आते हैं. यदि आप भी इस अक्टूबर के महीने में कुछ नया, रोमांचक और यादगार अनुभव तलाश रहे हैं, तो आम छुट्टियों की जगह भारत के इन प्रसिद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक त्योहारों का हिस्सा बनकर अपनी यात्रा को खास बना सकते हैं. अक्टूबर 2026 के इस सुहाने मौसम में भारत के ये पांच बड़े फेस्टिवल्स आपको देश की मिट्टी की खुशबू, प्राचीन कलाओं और जीवंत परंपराओं से सीधे रूबरू कराएंगे, जो आपकी जिंदगी के सबसे बेहतरीन पलों में से एक साबित होंगे. आइए जानते हैं कि इस अक्टूबर महीने में देश के किस हिस्से में कौन सा भव्य मेला और फेस्टिवल आयोजित होने जा रहा है, और आप वहां कैसे पहुंच सकते हैं.जोधपुर का मशहूर मारवाड़ फेस्टिवल और मेहरानगढ़ किले की शाही रौनकराजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले जोधपुर में हर साल अक्टूबर के महीने में शरद पूर्णिमा के आसपास दो दिवसीय प्रसिद्ध 'मारवाड़ फेस्टिवल' (Marwar Festival) का आयोजन बड़े ही भव्य तरीके से किया जाता है. इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य मारवाड़ के उन महान नायकों, राजाओं और लोक कलाकारों की वीरता व संस्कृति को याद करना और प्रदर्शित करना है, जिन्होंने यहां के इतिहास को स्वर्णिम बनाया है. जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किले, उम्मेद भवन पैलेस और जसवंत थड़ा जैसे भव्य स्मारकों की पृष्ठभूमि में होने वाले इस फेस्टिवल में लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य जैसे घूमर और कालबेलिया, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता और ऊंटों के शानदार करतब देखने को मिलते हैं. इस दौरान पूरा शहर रोशनी से जगमगा उठता है और रेगिस्तानी संस्कृति का ऐसा जीवंत रूप देखने को मिलता है जो सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर देता है. यदि आप राजस्थान की असली शाही रीत-रिवाजों और लोक कलाओं को करीब से अनुभव करना चाहते हैं, तो अक्टूबर में जोधपुर की यह यात्रा आपके लिए एक परफेक्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन साबित होगी.मैसूर दशहरा फेस्टिवल और कर्नाटक की ऐतिहासिक परंपरा का महाकुंभकर्नाटक का मैसूर शहर दुनिया भर में अपने ऐतिहासिक 'मैसूर दशहरा' (Mysore Dasahara) फेस्टिवल के लिए जाना जाता है, जिसे भारत के सबसे भव्य और ऐतिहासिक त्योहारों में गिना जाता है. इस साल अक्टूबर में मनाए जाने वाले इस दस दिवसीय उत्सव की शुरुआत विजयादशमी के पावन पर्व पर होती है, जिसका इतिहास 400 साल से भी ज्यादा पुराना है. इस दौरान पूरे मैसूर पैलेस को लगभग एक लाख से अधिक बिजली के बल्बों से दुल्हन की तरह सजाया जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. इस फेस्टिवल का सबसे मुख्य आकर्षण 'जम्बो सवारी' होती है, जिसमें सजे-धजे हाथियों के साथ शाही पालकी निकाली जाती है और शहर की सड़कों पर लोक कलाकारों का अद्भुत मार्च निकलता है. इसके अलावा, मैसूर पैलेस के अंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम, शास्त्रीय संगीत और नृत्य के बड़े आयोजन होते हैं, जो दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हैं. अगर आप भारतीय संस्कृति के इस विशालकाय और रंगीन स्वरूप को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं, तो अक्टूबर के महीने में मैसूर का रुख अवश्य करें.दुर्गा पूजा का पावन पर्व और कोलकाता की सड़कों पर सजने वाली अलौकिक पंडाल संस्कृतिपश्चिम बंगाल और खासकर कोलकाता शहर में अक्टूबर के महीने में मनाए जाने वाला 'दुर्गा पूजा' (Durga Puja) फेस्टिवल किसी साधारण त्योहार से बढ़कर एक विशाल ग्लोबल कल्चरल कार्निवल का रूप ले लेता है. यूनेस्को (UNESCO) की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल हो चुका यह महाउत्सव अक्टूबर में अपने पूरे परवान पर होता है, जब शहर के हर कोने में भव्य, थीम-आधारित और कलात्मक पंडाल बनाए जाते हैं. कोलकाता की सड़कों पर रात-दिन लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है जो इन विशाल पंडालों में विराजी मां दुर्गा की मूर्तियों और उनकी नायाब कलाकारी को निहारने के लिए घूमती है. ढाक की थाप, बंगाली धुनुची नृत्य, सिंदूर खेला और बंगाली पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद इस उत्सव को और भी ज्यादा खास बना देता है. इस दौरान पूरा कोलकाता शहर एक ऐसी खुली आर्ट गैलरी में बदल जाता है जहाँ कला, भक्ति और उल्लास का ऐसा संगम देखने को मिलता है जो दुनिया में कहीं और नजर नहीं आता है.जोधपुर और जैसलमेर के रेगिस्तानों में गूंजने वाला राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल (RIFF)अगर आपको संगीत से प्यार है और आप खुले आसमान के नीचे रेगिस्तान की ठंडी हवाओं के बीच दुनिया के बेहतरीन कलाकारों की धुनें सुनना चाहते हैं, तो जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में हर साल अक्टूबर के आखिर में आयोजित होने वाला 'राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल' (RIFF) आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है. इस प्रतिष्ठित संगीत उत्सव को यूनेस्को का भी समर्थन प्राप्त है, जिसमें भारत के साथ-साथ दुनिया भर के प्रसिद्ध लोक संगीतकार, सूफी गायक और वादक अपनी कला का जादू बिखेरने आते हैं. किले की प्राचीन प्राचीरों और विशाल आंगनों के बीच जब रात के समय लोक संगीत और समकालीन धुनों का फ्यूजन गूंजता है, तो वहां मौजूद हर शख्स उस संगीत के नशे में डूब जाता है. सूर्योदय के समय किले की चोटी से सूरज निकलते देखना और पारंपरिक संगीत का आनंद लेना एक ऐसा जादुई अनुभव है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है. संगीतप्रेमियों और ग्लोबल ट्रैवलर्स के लिए यह फेस्टिवल अक्टूबर महीने में घूमने के लिए सबसे बेहतरीन जगहों में से एक माना जाता है.गोवा का लोकप्रिय मैंगोर्ज फेस्टिवल और बीच संस्कृति से हटकर सांस्कृतिक उत्सवआमतौर पर गोवा को केवल समुद्र तटों, नाइटलाइफ और पार्टियों के लिए जाना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि अक्टूबर का महीना गोवा में स्थानीय संस्कृति, कला और त्योहारों का भी गवाह बनता है. इस दौरान गोवा में कई स्थानीय सांस्कृतिक उत्सव और कैथोलिक पर्व आयोजित किए जाते हैं जो पुर्तगाली और कोंकणी संस्कृति के अनूठे मेल को दर्शाते हैं. अक्टूबर में गोवा का मौसम बेहद सुहाना हो जाता है, मानसून की विदाई के बाद चारों तरफ हरियाली छा जाती है और समुद्र का पानी भी शांत रहता है, जिससे यह समय बीच टूरिज्म के साथ-साथ बर्ड वॉचिंग और हेरिटेज वॉक के लिए एकदम परफेक्ट होता है. पणजी की पुरानी गलियों में घूमना, प्राचीन चर्चों का दौरा करना और गोवा के पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाना इस महीने की यात्रा को और भी ज्यादा रोमांचक बना देता है. भारत के इन पांचों प्रसिद्ध फेस्टिवल्स में से किसी एक का भी हिस्सा बनकर आप इस अक्टूबर अपनी छुट्टियों को यादगार बना सकते हैं.
प्राइवेट पार्ट काटकर जाते दिखा प्रेमानंद का शिष्य, सामने आया नया CCTV
मथुरा के वृंदावन स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम में रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के मामले में नया CCTV सामने आया है. फुटेज में वह कथित तौर पर प्राइवेट पार्ट काटने के बाद सीढ़ियों से चौथी मंजिल की ओर जाता दिख रहा है. दावा है कि इसके तुरंत बाद उसने छलांग लगा दी.
मध्य प्रदेश के इन चमत्कारी और प्राचीन देवी मंदिरों में दर्शन करने से पूरी होती है हर मनोकामना
भक्ति, शक्ति और आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि का पावन अवसर शुरू हो चुका है और पूरे देश के साथ-साथ मध्य प्रदेश के कोने-कोने में भी देवी दुर्गा के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है. इस पवित्र नौ दिवसीय उत्सव के दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है, और देश भर से श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करने के लिए प्रमुख शक्तिपीठों और सिद्ध मंदिरों की यात्रा करते हैं. मध्य प्रदेश की धरती को प्राचीन काल से ही धार्मिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद समृद्ध माना गया है, जहां कई ऐसे चमत्कारी और पौराणिक देवी मंदिर स्थित हैं जिनके दर्शन मात्र से इंसान के सारे दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं. यदि आप भी शारदीय नवरात्रि 2026 के इस खास मौके पर मां भगवती के दर्शन के लिए किसी ऐसी जगह की तलाश कर रहे हैं जहाँ अलौकिक शांति और ऊर्जा का अनुभव हो, तो मध्य प्रदेश के ये प्रसिद्ध देवी मंदिर आपके लिए सबसे उत्तम विकल्प साबित हो सकते हैं. इन मंदिरों की बनावट, इनका इतिहास और इनसे जुड़ी मान्यताएं देश-विदेश के पर्यटकों और भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं, जहाँ नवरात्रि के दिनों में विशेष मेलों और अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है.मैहर की त्रिकूट पर्वत पर विराजी मां शारदा का दरबार और उसका अद्भुत रहस्यमध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर का मां शारदा मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में शुमार किया जाता है, जहाँ नवरात्रि के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. त्रिकूट पर्वत की ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस पावन धाम तक पहुंचने के लिए भक्तों को एक हजार से अधिक सीढ़ियों का सफर तय करना पड़ता है, हालांकि अब बुजुर्गों और विकलांगों के लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मैहर की मां शारदा के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मन को असीम शांति मिलती है. इस मंदिर से जुड़ी सबसे बड़ी और हैरान करने वाली रहस्यमयी बात यह है कि ऐसा माना जाता है कि अमर योद्धा आल्हा और उदल ने पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध के बाद मां शारदा की सबसे पहले पूजा की थी और आज भी हर दिन मंदिर के कपाट खुलने से पहले यहां किसी अज्ञात शक्ति द्वारा सबसे पहले पूजा और आरती की जाती है. नवरात्रि के इन नौ दिनों में मैहर धाम का नजारा देखने लायक होता है, जहाँ दूर-दूर से माता के भक्त आकर अपनी हाजिरी लगाते हैं और ढोल-नगाड़ों तथा माता के जयकारों से पूरा त्रिकूट पर्वत गूंज उठता है.सलकनपुर का विजयासन देवी धाम और सीहोर जिले की पवित्र पहाड़ियों का रोमांचमध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुदनी के पास स्थित सलकनपुर का विजयासन देवी मंदिर मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में माता के भक्तों के बीच अपार आस्था का केंद्र है. लगभग एक हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजी मां विजयासन (महामाया) को समर्पित यह मंदिर भक्तों की हर मुराद पूरी करने वाला माना जाता है, और नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों का विशाल सैलाब उमड़ पड़ता है. इस मंदिर की यह विशेषता है कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को प्रकृति के बेहद खूबसूरत और मनोरम दृश्यों के साथ-साथ गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है. नवरात्रि के विशेष पावन अवसर पर मंदिर समिति और जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, पेयजल, रोशनी और ठहरने के लिए व्यापक इंतजाम किए जाते हैं ताकि देश के कोने-कोने से आने वाले यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े. पहाड़ियों की तलटी से लेकर मंदिर के मुख्य शिखर तक भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलती हैं, जो माता के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा और विश्वास को बयां करती हैं.दतिया का पीतांबरा पीठ और तंत्र-मंत्र साधना का यह अद्वितीय केंद्रजब मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों की बात होती है, तो दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा पीठ का नाम अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ लिया जाता है, क्योंकि यह स्थान केवल सामान्य पूजा-पाठ ही नहीं बल्कि तंत्र साधना और विशेष अनुष्ठानों के लिए दुनिया भर में विख्यात है. यहाँ मां बगलामुखी का अत्यंत जादुई और शक्तिशाली स्वरूप विराजमान है, जिन्हें युद्ध, विजय और शत्रुओं पर नियंत्रण पाने की देवी माना जाता है. देश के बड़े-बड़े राजनेता, उद्योगपति, संत और गणमान्य लोग अपने जीवन की बड़ी बाधाओं को दूर करने और सफलता हासिल करने के लिए गुप्त रूप से इसी दरबार में माता का आशीर्वाद लेने आते हैं. शारदीय नवरात्रि के दौरान पीतांबरा पीठ में विशेष हवन, यज्ञ और अनुष्ठानों का दौर चलता है, जिससे पूरे क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह से ऊर्जावान और भक्तिमय हो जाता है. हालांकि मंदिर परिसर के भीतर फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी करने पर सख्त प्रतिबंध रहता है, लेकिन यहां मिलने वाली मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा हर आगंतुक के जीवन में एक नया सकारात्मक बदलाव लेकर आती है.उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर का सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ा इतिहास और दीपों की भव्य रोशनीभगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित माता हरसिद्धि का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जहाँ देवी सती की कोहनी गिरी थी ऐसा शास्त्रों में वर्णित है. इस प्राचीन मंदिर का इतिहास महान राजा विक्रमादित्य के शासनकाल से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अपनी आराध्य देवी को प्रसन्न करने के लिए यहां कठोर तपस्या की थी और अपने अंगों की आहुति तक दी थी, जिससे माता प्रसन्न होकर 'हरसिद्धि' के रूप में प्रकट हुई थीं. इस मंदिर की सबसे बड़ी और खास पहचान इसके परिसर में खड़े दो विशाल प्राचीन दीप स्तंभ हैं, जिन पर नवरात्रि के हर दिन सैकड़ों दीये एक साथ जलाए जाते हैं और उस समय का दृश्य बेहद मनमोहक और अलौकिक होता है. शारदीय नवरात्रि के इन नौ दिनों में उज्जैन के इस पावन मंदिर में विशेष महाआरती, चंडिका पाठ और सांस्कृतिक तथा धार्मिक आयोजनों की धूम रहती है, जिसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु खींचे चले आते हैं. मध्य प्रदेश के इन सभी प्रमुख देवी मंदिरों की यात्रा आपके जीवन को आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध और आनंदित कर देगी, इसलिए इस नवरात्रि इन पावन धामों के दर्शन का लाभ जरूर उठाएं.
पाकिस्तानी टीम में फिर लौटा ये ऑस्ट्रेलियाई, मिली बड़ी जिम्मेदारी
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को उम्मीद होगी कि शॉन टेट का इंटरनेशनल अनुभव और पाकिस्तान के साथ उनका पुराना जुड़ाव तेज गेंदबाजों को बेहतर तैयार करने में मदद करेगा. आगामी व्यस्त कार्यक्रम से पहले उनकी वापसी खास तौर पर पाकिस्तान के पेस अटैक के लिए अहम मानी जा रही है.
'मिलकर AI को बनाएंगे जिम्मेदार', भारत-स्विट्जरलैंड प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले पीएम मोदी
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच द्विपक्षीय मुलाकात के बाद आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि इस वर्ष फरवरी में भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समिट का सफल आयोजन किया था. अब अगले वर्ष स्विट्जरलैंड जेनेवा एआई समिट के जरिए इस महत्वपूर्ण पहल को आगे बढ़ाएगा. प्रधानमंत्री ने जेनेवा एआई समिट की सफलता के लिए स्विट्जरलैंड को हार्दिक शुभकामनाएं दीं. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश मिलकर एआई को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में काम करते रहेंगे.
नंदीग्राम में ममता का पैर नहीं टूटा था, मेडिकल रिपोर्ट लीक, अस्पताल को कानूनी नोटिस!
पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मेडिकल रिकॉर्ड कथित तौर पर लीक होने के बाद एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री के निजी मेडिकल रिकॉर्ड और उनके इलाज से जुड़े गोपनीय दस्तावेज़ों के कथित तौर पर बिना इजाज़त सार्वजनिक किए जाने को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है; उनके वकील ने SSKM अस्पताल प्रबंधन और राज्य स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों को सीधे कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि ममता बनर्जी के इलाज से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और मेडिकल रिपोर्ट बिना इजाज़त सार्वजनिक की गईं। नोटिस के अनुसार, इस तरह का खुलासा मेडिकल गोपनीयता कानूनों और डॉक्टरों पर लागू पेशेवर आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन है। ममता की पैर की चोट पर सुवेंदु ने क्या कहा? यह कानूनी नोटिस तब आया है जब राज्य के नेता सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में मेडिकल दस्तावेज़ दिखाए और आरोप लगाया कि मार्च 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी के पैर में कोई फ्रैक्चर नहीं हुआ था। बनर्जी ने कानूनी नोटिस के ज़रिए इन दावों का विरोध किया है। अधिकारी ने 2021 के नंदीग्राम चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी को लगी चोट से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट का ज़िक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल के रिकॉर्ड में उनके पैर में फ्रैक्चर या डिसलोकेशन का कोई सबूत नहीं मिला। नेता ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। इसे भी पढ़ें: ममता बनर्जी की 2021 की चोट फर्जी थी, साबित करने के लिए मेडिकल सबूत मौजूद: Suvendu Adhikari TMC ने क्या कहा? तृणमूल कांग्रेस ने सुवेंदु अधिकारी के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पार्टी ने इन आरोपों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और बेबुनियाद बताया और आरोप लगाया कि ये उपचुनावों को प्रभावित करने की कोशिश थी। पूरा विवाद क्या है? पश्चिम बंगाल की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी 10 मार्च, 2021 को नंदीग्राम के बिरुलिया के रेयापारा इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान अपने बाएं पैर में चोटिल हो गईं। शुरू में, उन्होंने दावा किया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें धक्का दिया था, जिससे वह अपनी कार के खुले दरवाजे से टकरा गईं और उनके बाएं पैर में चोट लग गई। बाद में उन्होंने एक वीडियो जारी किया और कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान भारी भीड़ ने उन्हें धक्का दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी को SSKM अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पता चला कि उनके बाएं टखने और पैर की हड्डियों और लिगामेंट्स में गंभीर चोटें आई थीं। इसे भी पढ़ें: Suvendu Adhikari का दावा, Bengal से TMC का नाम और निशान मिट चुका चोट के बाद ममता ने व्हीलचेयर पर प्रचार किया इस घटना के बाद, ममता बनर्जी को 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान व्हीलचेयर से प्रचार करते देखा गया। इसके बाद TMC ने राज्य विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल की और 210 से ज़्यादा सीटें जीतीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 77 सीटें जीतीं।
हवाई सफर होगा महंगा, इस एयरलाइंस ने किया बड़ा ऐलान
IndiGo Increase Fuel Surcharges: एयरलाइंस ने अपने ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है और मंगलवार के सभी तरह की फ्लाइट्स पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाए जाने का ऐलान कर दिया है.
फ्लाईदुबई के को-पायलट को लेकर बड़ा खुलासा, ओमान से इजरायल तक कहां-कहां हुई सुरक्षा चूक?
फ्लाईदुबई के को-पायलट हमम अल-हम्मामी को लेकर जांच में ओमान, यूएई और इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक जांच से पता चला है कि ओमान, यूएई और इजरायल के अंदर सुरक्षा में कई कमियों की वजह से फ्लाईदुबई ...
IPL स्टार्स तैयार... हॉन्गकॉन्ग में छक्कों की बरसात करेगी टीम इंडिया
भुवनेश्वर कुमार की कप्तानी में आईपीएल सितारों से सजी टीम इंडिया हॉन्गकॉन्ग सिक्सेस 2026 में उतरेगी. टीम में क्रुणाल पंड्या, शशांक सिंह, राहुल तेवतिया, नीतीश राणा, राहुल त्रिपाठी और टी. नटराजन शामिल हैं. 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होने वाले इस टूर्नामेंट में भारत पिछले साल के प्रदर्शन से बेहतर करने के इरादे से उतरेगा.
खाना पहुंचाने में देरी पर डिलीवरी बॉय की हुई पिटाई
तेलंगाना के सिकंदराबाद में खाना पहुंचाने में देरी को लेकर एक जोमैटो डिलीवरी एजेंट की कपल ने कथित तौर पर पिटाई कर दी. घटना वासावी नगर की बताई जा रही है, जहां आशीष नाम का डिलीवरी एजेंट गलत स्थान की जानकारी के चलते देर से पहुंचा था. विवाद बढ़ने के बाद हुई मारपीट सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. पीड़ित की शिकायत पर कारखाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है.
पेरिस से शुरू हुई आग पूरे देश में फैल रही... फ्रांस में छात्र गुस्से में क्यों हैं?
फ्रांस की राजधानी पेरिस में छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ नजर आ रहा है. खराब स्कूल व्यवस्था, शिक्षकों की कमी और बजट कटौती के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन तेजी से फैल रहा है. सैकड़ों स्कूल बंद हैं और कई जगह पुलिस से झड़प हुई है. अब सरकार के सामने बढ़ते विरोध को शांत करने की बड़ी चुनौती है.
HR करते हैं सबकी हायरिंग, तो कौन देता है उन्हें नौकरी?
किसी भी ऑफिस में हायरिंग के लिए HR सबसे जरूरी होता है. कैंडिडेट को खोजना हो, इंटरव्यू शेड्यूल करना हो या सैलरी से जुड़े काम HR के बिना नहीं हो सकते हैं लेकिन एक सवाल जो लोगों के मन में आता है, वह ये है कि जिन कर्मचारियों को HR हायर करता है, उसकी हायरिंग कौन करता है?
5 स्टार होटल जैसा है कपिल शर्मा का घर, बालकनी का व्यू उड़ा देगा होश
कॉमेडी की दुनिया में एक बड़ा मुकाम हासिल करने वालेकपिललग्जरी लाइफ जीते हैं. मुंबई में उनका एक बेहद खूबसूरत और आलीशान आशियाना है, जिसकी कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये बताई जाती है.
पड़ोसी के घर से लाकर लगा दें गुलाब की 1 डंठल, खिलेंगे ढेर सारे फूल
How To Grow Rose Plant:सितंबर से नवंबर का महीना घर में गुलाब का पौधा लगाने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है. इसके लिए नर्सरी से नया पौधा खरीदने के बजाय आप सिर्फ एक टहनी (कटिंग) से ही नया पौधा तैयार कर सकते हैं. जानिए सही कटिंग चुनने से लेकर मिट्टी तैयार करने और देखभाल का सबसे आसान तरीका.
लोहे के TMT बार हुए पुराने... अब ट्रेंड में है कई साल जंग ना लगने वाला ये सरिया!
आजकल बाजार में नॉर्मल TMT सरिया की जगह कई साल तक जंग न लगने वाले और किफायती विकल्पों में एक सीआरएस यानी कॉरिजन रेसिस्टेंट ग्रेड वाले छड़ आ गए हैं. इनमें से ही एक है एपॉक्सी कोटेड सरिया. चलिए जानते हैं ये किस तरह का सरिया है और साधारण छड़ से कैसे अलग है?
कैंची धाम में बढ़ती भीड़ पर ‘हनुमान अंश’ के लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की भक्तों से अपील
मुंबई। फिल्म ‘हनुमान अंश’ के लेखक-निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए भक्तों से यात्रा की योजना सोच-समझकर बनाने की अपील की है। नीम करोली बाबा और उनकी शिक्षाओं पर आधारित फिल्म के बाद कैंची धाम को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया […] The post कैंची धाम में बढ़ती भीड़ पर ‘हनुमान अंश’ के लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की भक्तों से अपील appeared first on Sabguru News .
J-K: बारूदी सुरंग में जोरदार धमाका, पुंछ में दो आर्मी जवान घायल
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में बुधवार शाम LoC के पास बारूदी सुरंग में धमाका हो गया. अधिकारियों के मुताबिक, मेंढर सेक्टर के कांगा गली इलाके में सेना के जवान बारूदी सुरंग को डिफ्यूज करने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक विस्फोट हो गया. इसमें सेना के दो जवान घायल हुए हैं.
UP में कांग्रेस कैसे आगे बढ़ेगी? नई प्रदेश अध्यक्ष अराधना ने बताया प्लान
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अराधना मिश्रा ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर रायबरेली और अमेठी में पार्टी की स्थिति पर चर्चा की. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि जनता धर्म, जाति से ऊपर उठकर असल मुद्दों पर वोट करेगी.
SIR की प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने कहा है कि उसने फॉर्म-6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी. बता दें SIR प्रक्रिया के लिए फॉर्म-6 में बदलाव कर उसके साथ एक घोषणापत्र को जोड़ा गया है और मतदाताओं से दो अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है.
यूपी चुनाव से पहले ओवैसी ने सपा को दिया गठबंधन का ऑफर
आगामी 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने श्रावस्ती में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की पेशकश दोहराई। उन्होंने कहा कि बीजेपी को तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने के लिए साथ आना चाहिए, लेकिन अगर सपा प्रस्ताव ठुकराती है तो AIMIM अकेले चुनाव लड़ेगी।
संवैधानिक अधिकारों के हनन पर Congress आक्रामक, Sapkal ने उठाया सवाल
नागपुर, पांच अक्टूबर वोट देने के अधिकार पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की टिप्पणी का हवाला देते हुए, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोमवार को दावा किया कि देश में संवैधानिक अधिकारों को “कुचला जा रहा है और उनका अनादर किया जा रहा है”। उनकी यह टिप्पणी जस्टिस भुइयां के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया जो लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करती है, वह “मूल रूप से मनमानी” है और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है, जिसे किसी भी तरह की “दलीलों” से सही नहीं ठहराया जा सकता। हैदराबाद स्थित ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ में आयोजित एक कार्यक्रम में न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को दो वर्गों में नहीं बांटता, जिनमें से एक वर्ग मताधिकार प्राप्त हो और दूसरा मताधिकार से वंचित हो। इस पर उनकी टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर, सपकाल ने कहा, “अब यह व्यापक रूप से ज्ञात है कि हमारे अधिकारों को कुचला जा रहा है, संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का अनादर किया जा रहा है और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ने जो कहा है वह वास्तव में एक तथ्य है।”कांग्रेस नेता ने नागपुर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस देश का मालिक प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि आम आदमी है, जिसके बारे में संविधान स्पष्ट रूप से बताता है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर (मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण) रूपी जो “बुलडोजर” चल रहा है, उसका इस्तेमाल निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान के अधिकारों, शक्तियों और दलों को बाधित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। समाचारपत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खबर के बाद कांग्रेस मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साध रही है, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों और आदेशों पर बीते 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। अपने दो आयुक्तों द्वारा उठायी गई आपत्तियों को लेकर आलोचनाओं के घेरे में आए निर्वाचन आयोग ने कहा है कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी भी संस्था में विचार-विमर्श का हिस्सा होती हैं और उसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी मान्यता प्राप्त है तथा वे स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। सपकाल ने दावा किया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों द्वारा उठाई गई चिंताएं सही हैं और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा उठाई गई आपत्तियां भी वैध हैं। उन्होंने कहा, “अब यह देखना होगा कि (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह और प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) में कोई नैतिकता बची है या नहीं।”केरलम सरकार द्वारा 2006 की एक सड़क निर्माण परियोजना में सतर्कता जांच के आदेश दिए जाने पर, जब ज्ञानेश कुमार राज्य में पीडब्ल्यूडी सचिव थे, सपकाल ने दावा किया कि यह साबित हो गया है कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वोट चोर हैं”। कांग्रेस नेता ने कहा कि जैसे धर्मेंद्र प्रधान ने (छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से) इस्तीफा दिया, ज्ञानेश कुमार को भी इस्तीफा देना होगा।
चलती कार पर अटैक, उड़ा दी पूरी फ्लीट... PAK आर्मी पर BLA के कहर का VIDEO
बीएलए ने नया वीडियो जारी कर दावा किया है कि उसने सितंबर में बलूचिस्तान भर में 94 सशस्त्र अभियान चलाए, जिनमें 105 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और 52 घायल हुए. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा और जवाबी अभियानों के बीच तनाव की तस्वीर फिर सामने आई है.
क्या बीजेपी ने 'शुद्धीकरण यज्ञ' के डैमेज कंट्रोल का चला दांव?
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए 'शुद्धीकरण विवाद' के डैमेज कंट्रोल और कांग्रेस के दलित कार्ड को काउंटर करने के लिए बीजेपी ने बड़ा दांव चला है. पार्टी ने आरएसएस पृष्ठभूमि के वरिष्ठ दलित नेता दिनेश आर्य को राज्यसभा प्रत्याशी बनाकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का सियासी माहौल गर्मा दिया है.
गोमती का बढ़ा जलस्तर, लेटे हुए हनुमान मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचा पानी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. इसकी वजह से नदी का पानी प्रसिद्ध पातालपुरी लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर तक पहुंच गया है. मंदिर के प्रांगण और गर्भगृह में पानी भर जाने से बाबा के चरणों तक जल पहुंच चुका है. स्थानीय लोगों और पुजारियों के अनुसार, करीब 2019-20 के बाद ऐसी स्थिति दोबारा देखने को मिल रही है. मंदिर के पुजारी ने बताया कि जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और पानी बाबा को पूरी तरह कवर कर सकता है.
CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार और आयोग को नोटिस
Supreme Court on ECI: उच्चतम न्यायालय ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले निर्वाचन आयोग के फैसले लेने के तरीके को चुनौती देने वाली याचिका और सीईसी के निलंबन की मांग पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस ...
पत्नी सोफी के साथ तिरुपति पहुंचे धवन, माथा टेक लिया आशीर्वाद
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर शिखऱ धवन इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ के कारण सुर्खियों में हैं. शिखर धवन ने 24 अगस्त 2024 को इंटरनेशनल और घरेलू क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी.
औरंगाबाद में एसटी बस और मोटरसाइकिल की टक्कर में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत
मुंबई। महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। पैठन के पास संकरे मार्ग पर एक एसटी बस और मोटरसाइकिल के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गई। हादसे में मोटरसाइकिल सवार तीनों लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस […] The post औरंगाबाद में एसटी बस और मोटरसाइकिल की टक्कर में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत appeared first on Sabguru News .
अब तो अटक गया भारत-अमेरिका ट्रेड समझौता! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिए संकेत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता वार्ता एक 'प्लेटो' पर पहुंच गई है, जहां दोनों पक्ष और रियायतें देने को तैयार नहीं हैं।
सिर्फ नाम-गोत्र बताइए और घर बैठे पाइए मां दुर्गा की पूजा का आशीर्वाद
सनातन संस्कृति और शक्ति की उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर देश के कोने-कोने में मां दुर्गा के जयकारे गूंज रहे हैं। यदि आप किन्हीं कारणों से इस बार अपने घर पर अनुष्ठान करने में असमर्थ हैं या किसी बड़े मंदिर में जाकर पूजा-पाठ नहीं कर पा रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद अद्भुत और राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार की राजधानी पटना के विश्व प्रसिद्ध और अति-श्रद्धा का केंद्र माने जाने वाले महावीर मंदिर ने इस बार नवरात्र के अवसर पर एक बेहद अनूठी और अभिनव पहल की शुरुआत की है। मंदिर प्रशासन की ओर से की गई इस व्यवस्था के तहत अब देश या दुनिया के किसी भी कोने में बैठा कोई भी श्रद्धालु सिर्फ अपना नाम और गोत्र बताकर घर बैठे मां दुर्गा की विशेष पूजा और अनुष्ठान संपन्न करवा सकता है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, डिजिटल एसईओ, ज्योग्राफिकल ऑप्टिमाइजेशन और आधुनिक डिजिटल मंदिर सेवाओं के इस दौर में महावीर मंदिर की यह अनूठी पहल सोशल मीडिया और आस्थावान भक्तों के बीच चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है।महावीर मंदिर की इस अनोखी डिजिटल और पारदर्शी सेवा की रूपरेखापटना का महावीर मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ अपनी पारदर्शी व्यवस्था, सामाजिक कार्यों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए हमेशा से पूरे देश में अग्रणी रहा है। आधुनिक समय की मांग और दूर-दराज रहने वाले उन लाखों भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए जो शारीरिक रूप से मंदिर तक आने में असमर्थ हैं, मंदिर समिति ने इस विशेष ऑनलाइन और कूरियर आधारित पूजा सेवा को और अधिक सुलभ बना दिया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर सनातन धर्म के अनुयायी को मां भगवती की नौ दिनों की आराधना का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। आधुनिक डिजिटल एसईओ और सर्च इंजन ट्रेंड्स में इस तरह की धार्मिक और सुविधाजनक सेवाओं को लोग बहुत अधिक खोज रहे हैं, ताकि वे व्यस्त जीवनशैली के बीच भी अपनी आस्था को अटूट रख सकें।घर बैठे कैसे होगी पूजा और क्या है पूरी प्रक्रिया?इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बनाया गया है ताकि किसी भी उम्र के व्यक्ति को इसे समझने में कोई कठिनाई न हो। भक्तजन महावीर मंदिर के आधिकारिक माध्यमों या निर्धारित डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्रोसेस के जरिए अपना और अपने परिवार के सदस्यों का पूरा नाम तथा अपना प्राचीन गोत्र दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद मंदिर के विद्वान और कर्मकांडी पंडितों द्वारा पूरी विधि-विधान, मंत्रोच्चार और वैदिक परंपरा के अनुसार आपके नाम और गोत्र से मां दुर्गा के चरणों में संकल्प लेकर विशेष अनुष्ठान संपन्न कराया जाता है। पूजा पूर्ण होने के बाद मंदिर की तरफ से प्रसाद और माता का आशीर्वाद आपके द्वारा दिए गए पते पर सुरक्षित रूप से कूरियर के जरिए भेज दिया जाता है, जिससे आपको घर बैठे ही दिव्य अनुभूति प्राप्त होती है।जानिए पूरा खर्च और बुकिंग से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारियांआम जनता के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि इस प्रकार की विशेष पूजा और कूरियर सेवा का खर्च कितना होगा? मंदिर प्रशासन ने इसे पूरी तरह से सेवा भाव से जोड़ते हुए इसका शुल्क बहुत ही न्यूनतम और सामान्य रखा है ताकि समाज का हर वर्ग आसानी से इसका लाभ उठा सके। पूजा की श्रेणियों के आधार पर इसका खर्च कुछ सौ रुपयों से शुरू होता है, जिसमें पंडितों की दक्षिण, पूजा सामग्री, हवन और प्रसाद के कूरियर भेजने का सारा शुल्क शामिल होता है। इस पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था के कारण ही आज देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में बैठे भारतीय भी महावीर मंदिर की इस सेवा का लाभ उठाने के लिए आगे आ रहे हैं। आधुनिक एआई और सर्च एल्गोरिदम भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि धार्मिक संस्थाएं जब तकनीक का सकारात्मक उपयोग करती हैं, तो उनकी पहुंच लाखों गुना बढ़ जाती है।आधुनिक युग में आस्था और परंपरा का अद्भुत समन्वयनिष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि पटना के महावीर मंदिर द्वारा शुरू की गई यह पहल आधुनिकता और परंपरा का एक बेहतरीन और सराहनीय समन्वय है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब लोग अपनी पारिवारिक व्यस्तताओं के कारण लंबे अनुष्ठानों के लिए समय नहीं निकाल पाते, तब ऐसे संस्थान उनके लिए एक मजबूत आध्यात्मिक सहारा बनते हैं। 'सिर्फ नाम-गोत्र बताइए और घर बैठे पूजा करवाइए' का यह संदेश हर उस भक्त के लिए उम्मीद की किरण है जो मां दुर्गा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाना चाहता है। बहरहाल, इस शारदीय नवरात्र यदि आप भी मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो महावीर मंदिर की इस अनूठी व्यवस्था का हिस्सा बनकर अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं।
'मुसलमानों से सिर्फ दरी बिछवाई...', ओवैसी के बयान से राजभर भी सहमत
ओम प्रकाश राजभर ने हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों का समर्थन करते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक इस्तेमाल केवल रैलियों में किया है और उन्हें मुख्यमंत्री पद देने से हमेशा इनकार किया है.
साप्ताहिक आर्थिक राशिफल : कर्क और कन्या राशि की प्रोफेशनल लाइफ होगी बेहद मजबूत
नया हफ्ता अपने साथ करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में नए अवसर और नई चुनौतियां लेकर आ चुका है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 5 से 11 अक्टूबर 2026 का यह सप्ताह कई राशियों के लिए वित्तीय मामलों में बेहद शुभ और लाभदायक साबित होने वाला है, जबकि कुछ जातकों को अपने व्यावसायिक जीवन में सूझबूझ से काम लेने की सलाह दी जाती है। इस हफ्ते ग्रहों की चाल विशेष रूप से कर्क और कन्या राशि के जातकों की प्रोफेशनल लाइफ को मजबूती देने का काम कर रही है, जिससे नौकरीपेशा और कारोबारियों दोनों को ही जबरदस्त लाभ मिलने के संकेत मिल रहे हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, डिजिटल एसईओ, ज्योग्राफिकल ऑप्टिमाइजेशन और आधुनिक ज्योतिषीय ट्रेंड्स के इस दौर में यह साप्ताहिक आर्थिक राशिफल आपके वित्तीय भविष्य की सही तस्वीर पेश करने के लिए तैयार है।मेष, वृषभ और मिथुन राशि: वित्तीय योजना और करियर के नए रास्तेमेष राशि के जातकों के लिए यह हफ्ता आर्थिक मामलों में मिलाजुला रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपको अपनी मेहनत का पूरा फल मिलेगा, लेकिन अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाना बेहद जरूरी होगा। वृषभ राशि के लोगों के लिए व्यवसाय में नए समझौते करने का यह सही समय है, हालांकि किसी भी बड़े निवेश से पहले कागजी दस्तावेजों की जांच अच्छी तरह कर लें। मिथुन राशि के जातकों को अपनी बुद्धिमत्ता और संवाद कौशल के दम पर नौकरी या व्यापार में कोई बड़ी सफलता हासिल हो सकती है। आधुनिक डिजिटल एसईओ और सर्च इंजन ट्रेंड्स में लोग अपनी राशि के अनुसार साप्ताहिक राशिफल और वित्तीय सलाह को सबसे ज्यादा खोजते हैं, ताकि वे सप्ताह की शुरुआत में ही अपने खर्चों और निवेश की सही योजना बना सकें।कर्क और कन्या राशि: प्रोफेशनल लाइफ होगी सबसे मजबूत, मिलेंगे तरक्की के योगइस साप्ताहिक आर्थिक राशिफल का सबसे बड़ा आकर्षण कर्क और कन्या राशि के जातक रहने वाले हैं, जिनकी प्रोफेशनल लाइफ इस हफ्ते आसमान छूने वाली है। कर्क राशि के जातकों को कार्यस्थल पर उच्च अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे लंबे समय से अटके हुए प्रमोशन या इंक्रीमेंट की राह आसान होगी। वहीं, कन्या राशि के जातकों के लिए कारोबार में भारी मुनाफा कमाने और नए व्यावसायिक अनुबंध साइन करने के योग बन रहे हैं। यदि आप नौकरी बदलने की सोच रहे थे, तो इस हफ्ते आपको कोई बेहतरीन कॉरपोरेट ऑफर मिल सकता है। आधुनिक एआई सर्च और आधुनिक करियर ट्रेंड्स यह बताते हैं कि जब ग्रहों की स्थिति अनुकूल होती है, तो सही समय पर उठाया गया कदम इंसान की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदलकर रख देता है।सिंह, तुला और वृश्चिक राशि: धन लाभ के अवसर और सावधानी की जरूरतसिंह राशि के जातकों को इस सप्ताह पैतृक संपत्ति या शेयर बाजार से अचानक बड़ा धन लाभ होने की संभावना है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। तुला राशि के लोगों को सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाकर चलने की सलाह दी जाती है, क्योंकि दफ्तर की राजनीति आपके काम को प्रभावित कर सकती है। वृश्चिक राशि के जातकों को अपने विरोधियों से सावधान रहने की जरूरत है, हालांकि वित्तीय मामलों में स्थिति नियंत्रण में रहेगी और रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। ज्योग्राफिकल और लोकल मार्केट एनालिसिस के अनुसार, इस हफ्ते व्यापारियों को अपने ग्राहकों की पसंद के अनुसार अपनी मार्केटिंग रणनीतियों में बदलाव करने से अच्छा रिटर्न मिल सकता है।धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि: निवेश के मामले में सतर्कता और भविष्य की योजनाएंधनु राशि के जातकों को इस हफ्ते किसी भी प्रकार के कर्ज लेन-देन से बचना चाहिए और अपने बजट को संतुलित रखना होगा। मकर राशि के मेहनती जातकों को उनके कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं, जो भविष्य में उनके आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगी। कुंभ राशि के लोगों के लिए विदेशी संपर्कों या ऑनलाइन बिजनेस से लाभ कमाने के योग बन रहे हैं, जिससे आय के नए स्रोत खुलेंगे। मीन राशि के जातकों को अपनी रचनात्मकता का पूरा लाभ अपने करियर में देखने को मिलेगा, बस उन्हें अपने खर्चों और बचत के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। आधुनिक डिजिटल युग में वित्तीय अनुशासन ही किसी भी व्यक्ति को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और सुरक्षित बनाता है।निष्कर्ष और इस हफ्ते का महामंत्रकुल मिलाकर, 5 से 11 अक्टूबर 2026 का यह सप्ताह सभी राशियों के लिए करियर और वित्त के लिहाज से नए अवसर लेकर आया है। कर्क और कन्या जैसी राशियों के लिए यह समय स्वर्णिम है, वहीं अन्य राशियों के जातकों को भी अपनी मेहनत और सूझबूझ से अपने आर्थिक जीवन को बेहतर बनाने का पूरा मौका मिलेगा। ज्योतिषीय सलाह यही कहती है कि कड़ी मेहनत के साथ-साथ सही वित्तीय योजना ही आपकी असली पूंजी है। बहरहाल, इस पूरे सप्ताह सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें और अपने करियर को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास करें।
बेटे के ताबूत से लिपटकर बिलख पड़ी मां...जब ओमान से यूपी पहुंची बॉडी
देवरिया जिले के कर्माजीतपुर निवासी सूरज यादव का पार्थिव शरीर 11 दिन की जद्दोजहद के बाद रविवार को ओमान से उनके पैतृक गांव पहुंचा. होर्मुज के पास मालवाहक जहाज पर हुए मिसाइल हमले में सूरज की जान चली गई थी. शव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया.
दीया जलाने पर बहस, कांग्रेस सांसद से सहयोगी दल के MLA ने छीनी मोमबत्ती
त्रिची में ICDS के गोद भराई कार्यक्रम के दौरान TVK विधायक विजी और कांग्रेस राज्यसभा सांसद क्रिस्टोफर के बीच दीया जलाने को लेकर सार्वजनिक मंच पर बहस हो गई.
सरकार का ऐलान, 70,000 भारतीय कुशल कामगारों को मिलेगा रोजगार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक बेहद बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है, जो देश के युवाओं और कुशल कामगारों के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने जा रही है। केंद्र सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर यह जानकारी साझा की गई है कि रूस इस साल अपने यहाँ लगभग 70,000 कुशल भारतीय कामगारों (Skilled Workers) को रोजगार मुहैया कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। विदेश मंत्रालय के स्तर पर दी गई इस जानकारी के बाद से उन युवाओं के बीच उम्मीद की एक नई किरण जाग उठी है जो विदेश में बेहतर करियर और शानदार सैलरी की तलाश में रहते हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, डिजिटल एसईओ, ज्योग्राफिकल ऑप्टिमाइजेशन और ग्लोबल लेबर मार्केट ट्रेंड्स के इस दौर में यह घोषणा भारतीय श्रम बाजार के लिए एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हो रही है।भारत और रूस के बीच बढ़ती लेबर मोबिलिटी और द्विपक्षीय सहयोगभारत और रूस के बीच पारंपरिक रूप से ऊर्जा, रक्षा और कूटनीति के क्षेत्रों में मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन अब इन रिश्तों का दायरा आर्थिक सहयोग और श्रम गतिशीलता (Labour Mobility) तक तेजी से फैल रहा है। हाल ही में संसद की एक महत्वपूर्ण परामर्श समिति की बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों की रूपरेखा रखते हुए इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया कि रूस अपने यहाँ श्रम की कमी (Labour Shortage) को दूर करने के लिए भारतीय प्रतिभाओं और कुशल श्रमिकों पर भरोसा जता रहा है। रूस के औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में कुशल कामगारों की मांग को पूरा करने के लिए दोनों देशों की सरकारों के बीच तालमेल लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे आने वाले दिनों में कानूनी और सुरक्षित तरीके से कामगारों के रूस जाने का रास्ता साफ हो गया है।मुख्य रूप से कंस्ट्रक्शन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में मिलेगी बंपर जॉब्ससरकार द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रूस द्वारा जिन 70,000 भारतीय कुशल कामगारों को नौकरियां दी जानी हैं, उनकी सबसे ज्यादा मांग मुख्य रूप से निर्माण कार्य यानी कंस्ट्रक्शन सेक्टर (Construction Sector) और परिवहन व आपूर्ति यानी लॉजिस्टिक्स सेक्टर (Logistics Sector) में है। रूस के बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को सुदृढ़ करने के लिए प्रशिक्षित इंजीनियरों, तकनीशियनों और कुशल शारीरिक श्रम करने वाले कामगारों की भारी आवश्यकता बनी हुई है। आधुनिक डिजिटल एसईओ और जॉब सर्च ट्रेंड्स में इन सेक्टर्स से जुड़ी नौकरियों को लेकर युवाओं में भारी क्रेज देखा जा रहा है, क्योंकि इन क्षेत्रों में मिलने वाला पैकेज और सुविधाएं विदेश में बसने का एक बेहतरीन मौका प्रदान करती हैं।रूसी बाजार की जरूरतें और भारतीय युवाओं के लिए सुनहरा अवसररूस की जनसांख्यिकी और कार्यबल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वहाँ पिछले कुछ वर्षों से कुशल श्रमिकों की कमी महसूस की जा रही है, जिसे पूरा करने के लिए भारत के युवाओं को सबसे उपयुक्त माना गया है। भारतीय कामगार अपनी मेहनत, ईमानदारी और तकनीकी कौशल के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। इस बड़े रोजगार अवसर के माध्यम से न केवल भारत के कुशल युवाओं को बेरोजगारी की समस्या से राहत मिलेगी, बल्कि उनके आर्थिक स्तर में भी सुधार होगा। सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि जाने वाले सभी श्रमिकों को पूरी कानूनी सुरक्षा, तय पारिश्रमिक और बेहतर कार्यस्थल का माहौल मिले, ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या असुविधा से बचा जा सके।भविष्य की संभावनाएं और युवाओं के लिए जरूरी संदेशरूस द्वारा 70,000 भारतीय कामगारों को अपने यहाँ अवसर देने का यह निर्णय दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगा। आधुनिक एआई आधारित सर्च इंजन और वैश्विक रोजगार पोर्टल्स पर इस खबर के आने के बाद से ही लगातार सर्च बढ़ गई है कि इस भर्ती प्रक्रिया में कैसे आवेदन किया जाए और इसके क्या दिशा-निर्देश हैं। जो युवा तकनीकी रूप से दक्ष हैं या कंस्ट्रक्शन व लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अनुभव रखते हैं, उनके लिए यह समय अपनी योग्यताओं को और निखारने का है। बहरहाल, सरकार का यह कदम भारत के युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने और एक उज्जवल भविष्य का निर्माण करने का एक ऐतिहासिक अवसर लेकर आया है।
'हे भगवान! ये क्या कर दिया...' 48 घंटे में एक ही परिवार में 3 मौतें
देवरिया में एक परिवार पर ऐसा दुख टूटा, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. पहले सेना के सूबेदार मेजर सत्यवान सिंह की चंडीगढ़ में मौत हुई. उनका शव लेकर बड़ा भाई रामसमुझ और 18 वर्षीय बेटा गौरव घर लौट रहे थे, लेकिन सुल्तानपुर में एंबुलेंस हादसे का शिकार हो गई. 48 घंटे के भीतर पिता, बेटे और भाई की मौत से गांव में तीन अर्थियां उठीं तो हर आंख नम हो गई.
कानपुर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 36 पदों पर बंपर भर्ती
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले योग्य और मेहनती युवाओं के लिए एक बहुत ही शानदार और सुनहरा अवसर सामने आया है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर ने अपने शैक्षणिक परिसर के विभिन्न विभागों के लिए बंपर फैकल्टी भर्तियों का आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। इस नई भर्ती प्रक्रिया के तहत विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 36 पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। जो उम्मीदवार लंबे समय से उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शिक्षण कार्य से जुड़ने का सपना देख रहे थे, वे अब विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी पात्रता के अनुसार ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, डिजिटल एसईओ, ज्योग्राफिकल ऑप्टिमाइजेशन और आधुनिक जॉब सर्च ट्रेंड्स के इस दौर में यह रिक्रूटमेंट नोटिफिकेशन उच्च शिक्षा जगत में चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।CSJMU कानपुर फैकल्टी भर्ती 2026 का विस्तृत विवरण और पदछत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए विज्ञापन संख्या CSJMU/Gen.Admin/980/Teaching/2026 के अंतर्गत कुल 36 पदों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन रिक्त पदों को अलग-अलग श्रेणियों और शैक्षणिक कैडर में बांटा गया है, जिसमें कुल 15 पद प्रोफेसर के लिए, 13 पद एसोसिएट प्रोफेसर के लिए और 8 पद असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए निर्धारित किए गए हैं। ये सभी पद विश्वविद्यालय के कल्याणपुर, कानपुर स्थित मुख्य परिसर के लगभग 18 विभिन्न विभागों और संकायों के अंतर्गत आते हैं। आधुनिक डिजिटल एसईओ और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के इस युग में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवा इस प्रकार की विश्वविद्यालयीय भर्तियों के हर एक अपडेट को बहुत तेजी से खोज रहे हैं ताकि वे समय रहते अपनी उम्मीदवारी पक्की कर सकें।शैक्षणिक योग्यता और जरूरी अहर्ताएं क्या हैं?विश्वविद्यालय के इन विभिन्न शिक्षण पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास यूजीसी (UGC Regulations-2018) और एआईसीटीई (AICTE-2019) तथा उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के नियमों के अनुसार निर्धारित योग्यता होना अनिवार्य है। असिस्टेंट प्रोफेसर के पद हेतु उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर (Post Graduation) की डिग्री होनी चाहिए तथा साथ ही नेट (NET), स्लेट (SLAT/SET) या यूजीसी के प्रावधानों के अनुरूप पीएचडी (Ph.D.) की डिग्री होना आवश्यक है। इसी प्रकार एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पदों के लिए निर्धारित वर्षों का शिक्षण व शोध अनुभव, न्यूनतम अपेक्षित रिसर्च स्कोर (API Score) और उच्च स्तरीय शोध प्रकाशनों का होना अनिवार्य किया गया है। भौगोलिक और स्थानीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के नियमों के अनुसार ही आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को आयु सीमा और अन्य प्रावधानों में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी।ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियांइस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू हो चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट csjmu.ac.in या इसके समर्थ पोर्टल (Samarth Portal) पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद उम्मीदवारों को यह विशेष रूप से ध्यान रखना होगा कि वे भरे गए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट निकाल लें और उसके साथ अपने सभी जरूरी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों, अनुभव प्रमाण पत्रों और शोध पत्रों की स्व-प्रमाणित प्रतियों को संलग्न करके एक सीलबंद लिफाफे में रजिस्टर्ड या स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजें। यह हार्ड कॉपी निर्धारित अंतिम तिथि यानी 5 नवंबर 2026 तक कुलसचिव (Registrar), छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कल्याणपुर, कानपुर - 208024 (उत्तर प्रदेश) के कार्यालय में अवश्य पहुँच जानी चाहिए।चयन प्रक्रिया और आवेदन शुल्क से जुड़ी जरूरी बातेंउम्मीदवारों का चयन विश्वविद्यालय के द्वारा निर्धारित पारदर्शी चयन प्रक्रिया, एपीआई स्कोर, लिखित परीक्षा (असिस्टेंट प्रोफेसर हेतु), शिक्षण कौशल (Teaching Skill) मूल्यांकन और साक्षात्कार (Interview) के आधार पर किया जाएगा। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आवेदन शुल्क ₹2,500 तथा अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹2,000 तय किया गया है, जिसका भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। आवेदन करने से पहले सभी अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आधिकारिक नोटिफिकेशन पीडीएफ को ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़ लें, ताकि फॉर्म भरते समय किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके। बहरहाल, कानपुर यूनिवर्सिटी की यह फैकल्टी वैकेंसी उन विद्वान और योग्य युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो अकादमिक क्षेत्र में अपना एक चमकदार भविष्य बनाना चाहते हैं।
देश में 11 लाख शिक्षक पद खाली और 1 लाख स्कूल सिर्फ 'सिंगल टीचर' के भरोसे
पूरी दुनिया में जब शिक्षकों के सम्मान, उनके योगदान और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को सेलिब्रेट करने के लिए 'विश्व शिक्षक दिवस' (World Teachers Day 2026) का पर्व मनाया जा रहा है, तब भारतीय शिक्षा प्रणाली के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। एक तरफ जहाँ हम डिजिटल इंडिया, एआई आधारित शिक्षा और विश्वगुरु बनने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि देश भर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लगभग 11 लाख से अधिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्थिति इतनी बदतर है कि अकेले एक लाख से अधिक सरकारी स्कूल ऐसे हैं जो केवल 'सिंगल टीचर' यानी एक ही शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल चलाने को मजबूर हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, डिजिटल एसईओ, ज्योग्राफिकल ऑप्टिमाइजेशन और आधुनिक शिक्षा विश्लेषणों के इस दौर में यह रिपोर्ट इस बात की चेतावनी देती है कि यदि शिक्षा की बुनियादी नींव को मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।विश्व शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकतहर साल 5 अक्टूबर को मनाया जाने वाला 'वर्ल्ड टीचर्स डे' हमें यह याद दिलाने का अवसर देता है कि शिक्षक ही समाज के असली शिल्पकार होते हैं, जो बच्चों के भविष्य को गढ़ते हैं। लेकिन इस साल जब शिक्षक दिवस के आंकड़े सामने आए, तो शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं के माथे पर बल पड़ना लाजिमी था। देश के विभिन्न राज्यों के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में सरकारी स्कूलों की जो तस्वीर इन रिपोर्ट्स में दिखाई गई है, वह प्रशासनिक लापरवाही और लचर व्यवस्था की पोल खोलती है। एक तरफ जहां बड़े शहरों के आधुनिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज और अत्याधुनिक तकनीक की भरमार है, वहीं देश के कोने-कोने में स्थित प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं। आधुनिक डिजिटल एसईओ और सर्च इंजन ट्रेंड्स में इस प्रकार की सामाजिक-शैक्षणिक रिपोर्टों को लोग बहुत अधिक खोजते हैं क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता के बच्चों के भविष्य से जुड़ी होती हैं।11 लाख खाली पद और एक लाख 'सिंगल टीचर' स्कूलों का भयानक संकटताजा आंकड़ों और आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों में सरकारी विद्यालयों के भीतर कुल मिलाकर लगभग 11 लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। इन रिक्तियों के कारण कक्षाओं में शिक्षक-छात्र अनुपात (Teacher-Pupil Ratio) पूरी तरह से चरमरा गया है। सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि देश भर में एक लाख से अधिक ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं जहां केवल एक ही शिक्षक नियुक्त है। अब ज़रा सोचकर देखिए कि जिस स्कूल में पहली कक्षा से लेकर पांचवीं कक्षा तक के बच्चे एक ही छत के नीचे पढ़ते हों, उस एक अकेले शिक्षक पर पढ़ाने, मिड-डे मील की व्यवस्था देखने, प्रशासनिक काम करने और कागजी कार्रवाई पूरा करने का कितना भारी मानसिक दबाव रहता होगा। ऐसे स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद करना किसी छलावा से कम नहीं है, जहां बच्चों को बुनियादी अक्षर ज्ञान भी ठीक से नहीं मिल पाता।ग्रामीण भारत की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनताइस गंभीर समस्या का सबसे बुरा असर ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के उन गरीब बच्चों पर पड़ रहा है जो महंगे प्राइवेट स्कूलों की फीस भरने में असमर्थ हैं और पूरी तरह से सरकारी शिक्षा प्रणाली पर निर्भर हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी अधिक दयनीय है, जहाँ शिक्षक ट्रांसफर या रिटायरमेंट के बाद उन पदों पर नई भर्तियां वर्षों तक नहीं की जातीं। जब स्थानीय स्तर पर भौगोलिक (Geographical) और प्रशासनिक ऑप्टिमाइजेशन के जरिए इन स्कूलों की स्थिति का जायजा लिया जाता है, तो यह स्पष्ट होता है कि बजट के अभाव और नौकरशाही की सुस्ती के कारण नियुक्तियां अटक जाती हैं। आधुनिक एआई और सर्च एल्गोरिदम भी इस बात को रेखांकित करते हैं कि देश की युवा आबादी को जनसांख्यकीय लाभांश (Demographic Dividend) बनाने के लिए सबसे पहले शिक्षा के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करना होगा।शिक्षकों का बढ़ता बोझ और शिक्षा की गुणवत्ता पर गहरा असरजब स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी होती है, तो इसका सीधा असर शिक्षण की गुणवत्ता पर पड़ता है। जो शिक्षक विद्यालय में अकेले या कम संख्या में मौजूद होते हैं, वे बच्चों को व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने में असमर्थ होते हैं। इसके साथ ही, शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य जैसे कि जनगणना, चुनाव ड्यूटी, और विभिन्न सरकारी सर्वे कराए जाने के कारण उनका ध्यान मुख्य शिक्षण कार्य से भटक जाता है। शिक्षक संगठनों और शिक्षाविदों ने लगातार यह मांग उठाई है कि शिक्षकों को केवल पढ़ाने के काम तक ही सीमित रखा जाए और रिक्त पड़े 11 लाख पदों पर तत्काल प्रभाव से पारदर्शी तरीके से स्थायी भर्तियां की जाएं। यदि समय रहते इस दिशा में कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो सरकारी स्कूलों से बच्चों का मोहभंग होना और तेज हो जाएगा।निष्कर्ष और भविष्य के लिए एक जरूरी सबकनिष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि 'वर्ल्ड टीचर्स डे 2026' के अवसर पर आई यह रिपोर्ट हमारे लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। एक तरफ हम अंतरिक्ष और तकनीक के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ हमारे देश के लाखों बच्चे बुनियादी शिक्षा के अभाव में पीछे छूट रहे हैं। सरकार और शिक्षा विभागों को इस पर युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है ताकि हर बच्चे तक एक योग्य शिक्षक और बेहतर माहौल पहुंच सके। बहरहाल, जब तक इन 11 लाख खाली पदों को भरकर स्कूलों की दशा नहीं सुधारी जाती, तब तक हर शिक्षक दिवस केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा, और असली सुधार के लिए हमें धरातल पर ठोस और ईमानदार प्रयास करने ही होंगे।
चकराता छोड़ इस हिल स्टेशन का रुख कर रहे पर्यटक, दिल्ली से साढ़े 6 घंटे दूर है ये बर्फीली वादियां
Lohkhandi Travel: लोखंडी, चकराता से करीब 20 किलोमीटर दूर बसा खूबसूरत हिल स्टेशन है जो सर्दियों में बर्फबारी के लिए पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है. दिल्ली से करीब 330-350 किलोमीटर दूर यह जगह शांत माहौल और घने जंगलों के लिए खास है.
Congress का आरोप: मुंबई Tilak Bhavan से आदिवासी छात्र और NSUI सदस्य हिरासत में, पुलिस का इनकार
मुंबई, पांच अक्टूबर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रविवार को मध्यरात्रि के बाद मुंबई स्थित पार्टी के महाराष्ट्र मुख्यालय तिलक भवन में जबरन प्रवेश किया और प्रदर्शन करने नासिक से आए कुछ आदिवासी छात्रों तथा एनएसयूआई के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। पार्टी ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक वीडियो बयान में चेतावनी दी कि अगर छात्रों और एनएसयूआई पदाधिकारियों को रिहा नहीं किया गया तो पार्टी नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास का घेराव करेंगे। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि तिलक भवन से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मनीष कलवानिया ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने लोक भवन (राज्यपाल आवास) तक मार्च निकालने का आह्वान किया था। अधिकारी ने कहा कि लोक भवन जाने की योजना बना रहे प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जगहों से हिरासत में लिया जा रहा है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। डीसीपी ने कहा, ‘‘दावे के विपरीत तिलक भवन से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया।’’सपकाल के अनुसार, अपनी विभिन्न मांगों को लेकर यहां आजाद मैदान में प्रदर्शन करने नासिक से मुंबई आए आदिवासी छात्र मुंबई के दादर इलाके में स्थित कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय तिलक भवन में रात में ठहरे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी रात में कांग्रेस मुख्यालय में घुसे, छात्रों को धमकाया और उनमें से कुछ को हिरासत में ले लिया। सपकाल ने दावा किया कि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सागर सालुंखे और पार्टी की युवा शाखा के मुंबई प्रमुख को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस का इस तरह अवैध तरीके से कांग्रेस मुख्यालय में घुसना और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना मनमानी का संकेत है। गिरफ्तार किए गए आदिवासी छात्रों और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) पदाधिकारियों को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।’’उन्होंने चेतावनी दी, ‘‘अगर छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो महाराष्ट्र के सभी कांग्रेस नेता मुंबई आएंगे और ‘वर्षा’ बंगले (मुख्यमंत्री के आवास) का घेराव करेंगे।’’कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘महाराष्ट्र की तथाकथित डबल इंजन सरकार पर शर्म आती है, जो स्पष्ट रूप से आदिवासी विरोधी है।’’इससे पहले, कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आदिवासी छात्र आदिवासी विकास विभाग से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर मुंबई आए थे। कांग्रेस के अनुसार, आदिवासी छात्र छात्रवृत्ति, आश्रम (आवासीय) स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, छात्रावासों समेत अपनी विभिन्न मांगों के समाधान के लिए 10 दिन से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें से कई छात्र बसों से और पैदल मुंबई पहुंचे थे। वे अपनी समस्याओं का समाधान नहीं करने पर आदिवासी विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। कांग्रेस ने दावा किया कि आदिवासी विकास मंत्री और विभाग के आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज करने की धमकी दी गई और उन्हें लेकर आ रही एक बस को जब्त कर लिया गया। आरोप है कि मुंबई पुलिस ने तड़के करीब तीन बजे छात्रों को रोका, उनकी तस्वीरें लीं और उन्हें हिरासत में ले लिया। सपकाल ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों को धमकाया और उनमें से कुछ को हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह गंभीर मामला है कि पुलिस पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है लेकिन वह खुद कानून का उल्लंघन कर रही है।’’सपकाल ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी छात्रों की आवाज दबाने की किसी भी कोशिश की अनुमति नहीं देगी और उनके जायज अधिकारों की मांग के समर्थन में पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है। विपक्षी दल ने एक बयान में कहा कि धमकियों से छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और पार्टी आदिवासी छात्रों के ‘‘जायज अधिकारों के लिए संघर्ष’’ में उनके साथ खड़ा रहेगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘‘छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उन्हें धमकाना और पुलिस बल का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों को दबाने के समान है।’’कांग्रेस ने छात्रों के खिलाफ की गई इस कथित कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने आए थे।
हरियाणा के बीजेपी विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की खास मुलाकात
भारतीय राजनीतिक गलियारों और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजनीतिक तापमान में उस समय और अधिक गर्माहट आ गई जब हरियाणा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवनिर्वाचित और वरिष्ठ विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आधिकारिक आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस उच्चस्तरीय और महत्वपूर्ण बैठक में देश की राजनीति के कई दिग्गज चेहरे भी मौजूद रहे, जिनमें वरिष्ठ नेत्री स्मृति ईरानी और पार्टी के राष्ट्रीय सह-प्रभारी नितिन नवीन भी विशेष रूप से शामिल थे। हरियाणा में हाल ही में संपन्न हुए राजनीतिक घटनाक्रमों और आगामी विकास योजनाओं को लेकर प्रधानमंत्री के साथ हुई इस लंबी मंत्रणा ने राज्य के राजनीतिक हल्के में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, डिजिटल एसईओ, ज्योग्राफिकल ऑप्टिमाइजेशन और आधुनिक राजनीतिक विश्लेषणों के इस दौर में इस मुलाकात को बहुत रणनीतिक और दूरगामी परिणामों वाला माना जा रहा है।दिल्ली में हुई इस उच्चस्तरीय मुलाकात के सियासी मायने और पृष्ठभूमिहरियाणा की राजनीति में पिछले कुछ महीनों में जिस प्रकार के उतार-चढ़ाव और चुनावी समीकरण देखने को मिले हैं, उसके बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक मजबूती और सरकार के कामकाज को गति देना सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे हरियाणा के इन विधायकों के चेहरे पर राज्य में पार्टी की जीत का उत्साह साफ झलक रहा था, लेकिन इसके साथ ही उनके कंधों पर जनता की उम्मीदों को पूरा करने की भारी जिम्मेदारी भी थी। जब पार्टी के जमीनी प्रतिनिधि सीधे देश के शीर्ष नेतृत्व से संवाद करते हैं, तो इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच तालमेल भी और अधिक मजबूत होता है। आधुनिक डिजिटल एसईओ और सर्च इंजन ट्रेंड्स में इस प्रकार की राजनीतिक बैठकों को लोग बहुत बारीकी से ट्रैक करते हैं, क्योंकि इनसे आने वाले समय की प्रशासनिक दिशा का अंदाजा लगाया जाता है।प्रधानमंत्री मोदी के साथ विकास कार्यों और जनहित योजनाओं पर चर्चाइस मुलाकात के दौरान मुख्य रूप से हरियाणा के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चल रही केंद्र तथा राज्य सरकार की संयुक्त विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी विधायकों से उनके अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों, जन कल्याणकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन और आम जनता की प्रतिक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य उद्देश्य जनता के हर वर्ग तक पारदर्शी तरीके से योजनाओं का लाभ पहुंचाना होना चाहिए। इसके साथ ही कृषि, ढांचागत विकास (Infrastructure), युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने जैसे अहम विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया, ताकि हरियाणा को देश के सबसे विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में बनाए रखा जा सके।स्मृति ईरानी और नितिन नवीन की मौजूदगी और संगठनात्मक रणनीतियांइस विशेष बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा के वरिष्ठ नेता व सह-प्रभारी नितिन नवीन की उपस्थिति ने इस बात को और पुख्ता कर दिया कि पार्टी संगठन आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावों को लेकर अभी से पूरी तरह गंभीर और सक्रिय हो चुकी है। इन नेताओं के पास सांगठनिक संचालन और चुनावी प्रबंधन का लंबा अनुभव है, जिसका लाभ हरियाणा के विधायकों को मार्गदर्शन के रूप में मिल रहा है। बैठक के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि कैसे पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच संवाद के सेतु को और अधिक मजबूत किया जाए ताकि सरकार की उपलब्धियां घर-घर तक पहुंच सकें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की रणनीतिक बैठकें पार्टी के भीतर अनुशासन, एकजुटता और आगामी राजनीतिक एजेंडे को तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती हैं।हरियाणा के भविष्य के लिए नए संकल्प और जनता की उम्मीदेंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई इस सार्थक चर्चा के बाद हरियाणा से लौटे विधायकों में एक नया जोश और ऊर्जा देखने को मिल रही है। सभी जनप्रतिनिधियों ने यह संकल्प लिया है कि वे प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप राज्य के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और हर गरीब, किसान, युवा और महिला के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करेंगे। आधुनिक एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस मुलाकात को लेकर जनता के बीच भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जो यह दर्शाती हैं कि लोग अपने नेतृत्व से विकासोन्मुखी कार्यों की बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई यह उच्चस्तरीय बैठक निश्चित रूप से आने वाले समय में हरियाणा की राजनीति और विकास यात्रा को एक नई गति देने का काम करेगी।
हरियाणा के नूंह में सियासत का अनोखा रंग: एक ही घर में पिता थामे हैं बीजेपी का दामन
हरियाणा के नूंह में सियासत का अनोखा रंग: एक ही घर में पिता थामे हैं बीजेपी का दामन, तो बेटा संभाल रहा INLD की कमान, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेजभारतीय राजनीति की विविधता और विरोधाभासों से भरे गलियारों से अक्सर ऐसे दिलचस्प किस्से सामने आते हैं जो हर किसी को हैरान कर देते हैं। हरियाणा का नूंह (मेवात) जिला इन दिनों अपनी चुनावी हलचल से ज्यादा एक अनोखे राजनीतिक समीकरण के कारण सुर्खियों में छाया हुआ है। राज्य के एक ही परिवार और एक ही छत के नीचे सियासत के दो बिल्कुल अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं, जहां एक तरफ पिता भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी की नीतियों को आगे बढ़ा रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनका अपना बेटा मुख्य विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) की कमान संभालते हुए पार्टी के मोर्चे को धार दे रहा है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, डिजिटल एसईओ, ज्योग्राफिकल ऑप्टिमाइजेशन और आधुनिक राजनीतिक विश्लेषणों के इस दौर में यह अनोखा पारिवारिक और राजनीतिक घटनाक्रम राज्यभर में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।नूंह का राजनीतिक परिदृश्य और परिवार के भीतर बंटे सियासी रास्तेहरियाणा की राजनीति हमेशा से अपने जातीय समीकरणों, गोत्र और पारिवारिक निष्ठाओं के लिए जानी जाती रही है, लेकिन नूंह जिले से सामने आया यह ताजा मामला पारिवारिक लोकतंत्र की एक अलग ही परिभाषा गढ़ रहा है। आमतौर पर भारतीय परिवारों में यह देखा जाता है कि पूरा परिवार एक ही राजनीतिक दल या विचारधारा का समर्थन करता है, ताकि वैचारिक मतभेद या पारिवारिक कलह से बचा जा सके। इसके विपरीत, इस प्रभावशाली परिवार ने लोकतंत्र की उस खूबी को अपनाया है जहां व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राजनीतिक पसंद को सर्वोपरि रखा गया है। पिता ने अपनी राजनीतिक परिपक्वता और अनुभव के आधार पर सत्ताधारी दल बीजेपी के साथ अपनी राह चुनी है, जबकि युवा बेटे ने अपने राजनीतिक भविष्य और ऊर्जा को इनेलो (INLD) के साथ जोड़ते हुए पार्टी के संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली है।सत्ता पक्ष और विपक्ष की जंग के बीच एक ही घर में सामंजस्यजब एक ही घर के दो सदस्य दो विरोधी राजनीतिक दलों के शीर्ष मंचों पर सक्रिय हों, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि उनके पारिवारिक संबंधों और निजी जीवन पर इसका क्या असर पड़ता होगा। स्थानीय लोगों और करीबियों का कहना है कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन इस परिवार ने अपने पारिवारिक रिश्तों की डोर को इतनी मजबूती से बांध रखा है कि चुनावी मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करने के बावजूद घर की चौखट के भीतर वे केवल पिता और पुत्र ही रहते हैं। जब पिता बीजेपी के कार्यक्रमों में सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का बखान करते हैं, तो बेटा इनेलो के मंच से उसी सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े करता नजर आता है। लोकतंत्र की यह खूबसूरती और सहनशीलता का यह स्तर आधुनिक राजनीतिक संस्कृति में बहुत कम देखने को मिलता है, जिसे लोग बड़े कौतूहल और सम्मान की दृष्टि से देख रहे हैं।चुनावी सरगर्मी और स्थानीय राजनीति पर पड़ने वाला इसका असरनूंह और मेवात क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से यह पारिवारिक स्थिति बेहद अहम मानी जा रही है। जब किसी एक परिवार के पास सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ मजबूत पकड़ और पहुंच होती है, तो क्षेत्र के लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बन जाता है कि वे किस नेता से अपना कौन सा काम निकलवाएं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की रणनीतिक स्थिति से परिवार का राजनीतिक दायरा दोनों ही दलों में सुरक्षित रहता है। आधुनिक डिजिटल एसईओ और एआई आधारित सर्च ट्रेंड्स में नूंह की इस अनोखी राजनीतिक कहानी को लोग बहुत अधिक सर्च कर रहे हैं, क्योंकि यह हरियाणा की जटिल चुनावी पृष्ठभूमि और सामाजिक ताने-बाने को बहुत गहराई से समझने का अवसर देती है।भविष्य की सियासत और लोकतंत्र का यह अनूठा संदेशनिष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि हरियाणा के नूंह से आई यह खबर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि राजनीति में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रिश्तों में कड़वाहट घोल दी जाए। पिता-पुत्र की यह जोड़ी आज उन तमाम राजनेताओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है जो छोटी-छोटी राजनीतिक असहमतियों के कारण अपने करीबी रिश्तों को दांव पर लगा देते हैं। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जैसे-जैसे हरियाणा में चुनावी पारा और चढ़ेगा, यह परिवार इस दोहरी राजनीतिक भूमिका को किस प्रकार संभालता है। बहरहाल, एक ही छत के नीचे बीजेपी और इनेलो के दो अलग-अलग सियासी रंगों ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में परिवार की सीमाएं व्यक्तिगत विचारों की आज़ादी को नहीं बांध सकतीं।
ईरान के डर से बॉम्बर लेकर भागा अमेरिका, आखिर क्या था यूके के बेस में?
ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड बेस से अमेरिका ने अपने 12 बी-1 बॉम्बर विमान हटा लिए. ईरान से जुड़े संदिग्ध आतंकी प्लॉट के डर से यह फैसला लिया गया. ये विमान ईरान पर हमलों में इस्तेमाल हो रहे थे.
ट्रिपल मर्डर से दहला बिहार का सारण. चाकू मारकर 3 लोगों की हत्या
बिहार के सारण के परसा गांव में दो गुटों की झड़प में चाकू से हमला कर तीन लोगों की हत्या कर दिए जाने से सनसनी फैल गई, जबकि एक शख्स घायल है. पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को हिरासत में लिया है. पढ़ें इस खूनी कांड की सनसनीखेज कहानी.
मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकते, CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग SC में खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) को उन फैसलों के रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया, जिन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के अधिकारों के इस्तेमाल पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं में चुनौती दी गई है। इन फैसलों में 'फॉर्म 6' में किए गए विवादित बदलाव भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि वह यह जांचना चाहता है कि क्या ये फैसले अकेले ज्ञानेंद्र कुमार ने लिए थे या चुनाव आयोग ने सर्वसम्मति से या बहुमत से इन्हें मंज़ूरी दी थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा, जब रिकॉर्ड पेश किया जाएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि फॉर्म 6 में किसने बदलाव किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में CEC (मुख्य चुनाव आयुक्त) द्वारा 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया पर लिए गए उन फैसलों को चुनौती दी गई थी, जो कथित तौर पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा तरीके से लिए गए थे। इसे भी पढ़ें: Election Commission के SIR पर SC Judge का सवाल: Article 326 का उल्लंघन बर्दाश्त के बाहर कोर्ट में क्या हुआ? याचिकाकर्ताओं शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, राकेश कुमार सिंह और सुधाकर सिंह की ओर से पेश हुए सीनियर वकील विकास सिंह ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है और फैसले या तो सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाने चाहिए। सिंह ने CEC को निलंबित करने के लिए एक अंतरिम आदेश की मांग की और कोर्ट से आग्रह किया कि जब तक मामला लंबित है, तब तक यह निर्देश दिया जाए कि फैसले सर्वसम्मति से या कम से कम बहुमत से लिए जाएं। हालांकि, CJI ने कहा कि ये आरोप समाचार रिपोर्टों पर आधारित थे। कोर्ट ने कहा, हो सकता है कि यह पूरी तरह सही हो या आंशिक रूप से सही हो। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi ने MP के CM Mohan Yadav को लिखा पत्र, Teacher Recruitment में पद बढ़ाने की मांग की सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इन रिपोर्टों का खंडन नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही एक कानून मौजूद है और उम्मीद जताई कि उसका पालन किया जा रहा है और आगे भी किया जाएगा। बेंच ने कहा कि हम याचिका पर नोटिस जारी कर रहे हैं और ECI तथा तीनों चुनाव आयुक्तों को जवाब देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कोई भी तुरंत आदेश देने से इनकार कर दिया और कहा कि 10 दिनों से कोई खास फ़र्क नहीं पड़ेगा और अगर कुछ गलत पाया जाता है, तो उसे बाद में रद्द किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा यह याचिका एक न्यूज़ रिपोर्ट पर आधारित है जो 100 प्रतिशत सही, आंशिक रूप से सही या गलत हो सकती है। हम न्यूज़ रिपोर्ट के आधार पर कोई आदेश नहीं दे सकते। सिंह ने चुनौती दिए गए फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए भी निर्देश देने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इस अनुरोध पर कोई आदेश नहीं दिया। इस मामले की सुनवाई अगले हफ़्ते फिर से होगी।
CEC का इस्तीफा, बैलेट से चुनाव और SIR... खरगे ने सरकार के सामने रखी 3 मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, एसआईआर को रद करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
सीजेआई ने कहा कि अदालत को यह प्रमाणित जानकारी चाहिए कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे या बहुमत के आधार पर. हम घोड़े के आगे गाड़ी नहीं रख सकते. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल CEC को सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार किया.
रोज शैंपू करना सही या गलत? जावेद हबीब ने बताया सच
Jawed Habib Hair Washing Tips: क्या रोज शैंपू करने से बाल झड़ते हैं या बालों को नियमित रूप से धोना फायदेमंद है? इस सवाल पर हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब ने बालों की सफाई को लेकर जरूरी बातें बताई हैं. उन्होंने स्कैल्प से धूल, पसीना और तेल साफ रखने के साथ बालों में तेल लगाने और धोने का सही तरीका भी बताया है.
अफगानिस्तान ने तो पाकिस्तान को भी पछाड़ दिया! चीन तक बना दी सड़क
अफगानिस्तान ने बदख्शान के वाखान कॉरिडोर में 121 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क खोल दी, जिससे चीन के शिनजियांग क्षेत्र की ओर सड़क संपर्क बन गया है. सरकार के मुताबिक दो साल में पूरी हुई 365 मिलियन अफगानी की यह परियोजना रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से अहम है, और इसे अफगान इंजीनियरों ने बिना विदेशी मदद के पूरा किया.
क्या रूस में प्लेग फैलने का खतरा पैदा हो गया है? साइबेरिया के एक रिसर्च संस्थान में काम करने वाली 28 वर्षीय महिला वैज्ञानिक की रहस्यमयी संक्रमण से मौत के बाद यह सवाल दुनिया भर में पूछा जा रहा है। अमेरिका का व्हाइट हाउस स्थिति पर नजर रख रहा है, रूस में लगभग 200 लोगों […] यह लेख Russia Plague Scare: कोरोना वायरस के बाद फिर महामारी का डर? लैब रिसर्चर की मौत, 200 लोग क्वारंटीन सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
कैंची धाम में उमड़ी अथाह और अपार भीड़ पर बोले 'हनुमान अंश' के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी
उत्तराखंड की शांत वादियों में स्थित पावन और चमत्कारी नीम करोरी बाबा के कैंची धाम मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ रहा है कि हर कोई हैरान है। देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से आस्थावान भक्त इस अलौकिक जगह पर अपनी अर्जी लगाने और बाबा का आशीर्वाद पाने के लिए खींचे चले आ रहे हैं। इस अभूतपूर्व भीड़ और बढ़ती सांस्कृतिक व आध्यात्मिक हलचल के बीच चर्चित एनिमेटेड और माइथोलॉजिकल प्रोजेक्ट 'हनुमान अंश' के जाने-माने निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने कैंची धाम में उमड़ती अथाह भीड़ को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और विचारणीय बयान दिया है। उन्होंने न केवल इस अगाध आस्था का सम्मान किया है, बल्कि वहां पहुंच रहे लाखों भक्तों को सुरक्षा, संयम और अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ बेहद जरूरी सलाह भी दी हैं। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, डिजिटल एसईओ, ज्योग्राफिकल ऑप्टिमाइजेशन और आधुनिक ट्रेवल-स्पिरिचुअल ट्रेंड्स के इस दौर में विशाल चतुर्वेदी का यह बयान सोशल मीडिया और आध्यात्मिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन चुका है।नीम करोरी बाबा के कैंची धाम में आस्था का महाकुंभ और बढ़ती भीड़उत्तराखंड के नैनीताल जिले के पास स्थित कैंची धाम आश्रम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। सोशल मीडिया के इस दौर और आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच मानसिक शांति की तलाश में युवा पीढ़ी और विदेशी सैलानी भी बड़ी संख्या में नीम करोरी बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि साल के आम दिनों में भी यहां मेलों जैसा माहौल देखने को मिलता है और वीकेंड्स पर तो गाड़ियों की लंबी कतारों के कारण किलोमीटरों लंबा जाम लग जाता है। कैंची धाम में उमड़ने वाली इस अथाह भीड़ ने जहां स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को एक नई रफ्तार दी है, वहीं दूसरी तरफ मंदिर प्रशासन, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के सामने यात्रियों की सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को सुचारू रखना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की चिंता: आस्था के साथ अनुशासन भी जरूरी'हनुमान अंश' के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी, जो खुद भारतीय संस्कृति, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा से profundamente जुड़े हुए हैं, ने कैंची धाम की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता और अपना दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने कहा कि नीम करोरी बाबा के प्रति लोगों की यह अटूट श्रद्धा और प्रेम इस बात का प्रमाण है कि आज की आधुनिक और तनावपूर्ण दुनिया में इंसान अपनी आध्यात्मिक जड़ों की तरफ वापस लौटना चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जब लाखों लोग एक साथ किसी छोटे पर्वतीय क्षेत्र में बिना किसी पूर्व योजना या संयम के उमड़ पड़ते हैं, तो इससे न केवल प्रकृति और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि खुद भक्तों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। उनका यह मानना था कि बाबा नीम करोरी का असली संदेश प्रेम, सेवा और अनुशासन है, और यदि भक्तगण मंदिर परिसर या पहाड़ों पर जाकर अव्यवस्था फैलाते हैं, तो यह बाबा की सीख के विपरीत है।भक्तों के लिए निर्देशक की जरूरी सलाह: संयम और नियमों का पालनविशाल चतुर्वेदी ने कैंची धाम जाने वाले तमाम श्रद्धालुओं और अपने चाहने वालों को एक बेहद व्यावहारिक सलाह देते हुए कहा कि बाबा के दर्शन के लिए जाने से पहले हर किसी को धैर्य और अनुशासन का परिचय देना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि तीर्थयात्रियों को स्थानीय प्रशासन, पुलिस और मंदिर प्रबंधन के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की भगदड़ या असुविधा से बचा जा सके। पहाड़ों की नाजुक पारिस्थितिकी (Ecosystem) का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि प्लास्टिक का कचरा न फैलाएं, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले दिनों में अपनी यात्रा की योजना बहुत सोच-समझकर बनाएं। भगवान या संत के प्रति सच्ची भक्ति केवल भीड़ का हिस्सा बनकर धक्का-मुक्की करने से नहीं, बल्कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने से पूरी होती है।आध्यात्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) का बढ़ता क्रेज और उत्तराखंड की नई चुनौतियांआज के आधुनिक डिजिटल युग में 'स्पिरिचुअल टूरिज्म' भारत के पर्यटन क्षेत्र का सबसे तेजी से उभरता हुआ सेक्टर बन चुका है, और उत्तराखंड जैसे देवभूमि राज्य इसके केंद्र में हैं। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एआई आधारित सर्च ट्रेंड्स के जरिए जब कोई धार्मिक स्थल रातों-रात वायरल हो जाता है, तो वहां अचानक आने वाले पर्यटकों के सैलाब को संभालना पारंपरिक बुनियादी ढांचे के लिए बहुत कठिन हो जाता है। कैंची धाम में उमड़ती भीड़ इसी आधुनिक ट्रेवल ट्रेंड का एक जीवंत उदाहरण है। विशाल चतुर्वेदी जैसे कलाकारों और बुद्धिजीवियों का इस मुद्दे पर आगे आकर अपनी बात रखना इस बात को दर्शाता है कि कला और संस्कृति से जुड़े लोग भी अब समाज की इन जमीनी और व्यावहारिक समस्याओं को लेकर कितने जागरूक और चिंतित हैं।निष्कर्ष और भविष्य के लिए संदेशनिष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि नीम करोरी बाबा के कैंची धाम में आस्था का यह ज्वार अपने आप में अद्भुत है, लेकिन इसके साथ आने वाली व्यवस्थागत जिम्मेदारियों को समझना भी हर भक्त का कर्तव्य है। 'हनुमान अंश' के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी द्वारा दी गई यह सलाह केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि हर उस श्रद्धालु के लिए एक प्रेमभरा मार्गदर्शन है जो बाबा के दरबार में अपनी मुरादें लेकर पहुंचता है। यदि हम अपनी आस्था के साथ-साथ प्रकृति, अनुशासन और प्रशासनिक नियमों का भी उतना ही सम्मान करें, तो कैंची धाम की यह यात्रा वास्तव में एक आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण अनुभव बन सकती है, जो इंसान के मन को दिव्यता से भर दे।
पेरिस फैशन वीक में जाह्नवी कपूर का स्टाइलिश अंदाज, मियू मियू शो में बिखेरा जलवा
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फैशन मंच पर अपनी खास पहचान दर्ज कराई है। पेरिस में आयोजित फैशन वीक के दौरान जाह्नवी कपूर लग्जरी फैशन ब्रांड मियू मियू (Miu Miu) के शो में शामिल हुईं और अपने खास अंदाज से फैशन जगत का ध्यान आकर्षित किया। जाह्नवी के इस लुक […] The post पेरिस फैशन वीक में जाह्नवी कपूर का स्टाइलिश अंदाज, मियू मियू शो में बिखेरा जलवा appeared first on Sabguru News .
'हर मर्द रेपिस्ट नहीं...' गर्ल्स के क्रिएटिव नारों के जवाब में ये रील्स
दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान लगाए गए 'मर्द जात हाय-हाय' और 'एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा' जैसे नारे सोशल मीडिया पर वायरल हुए. इन नारों के बाद कुछ पुरुषों ने भी सोशल मीडिया पर रील और मीम्स के जरिए अपनी बात रखी. उन्होंने पुरुषों के संघर्ष, परिवार की जिम्मेदारियों और मुश्किलों को दिखाते हुए कहा कि हर मर्द एक जैसा नहीं होता.
CEC के इस्तीफे से बैलेट पेपर तक... मल्लिकार्जुन खड़गे ने रखी तीन मांगें
देश के विभिन्न हिस्सों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, SIR रद्द करना और बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है.
गलती करने के बाद भी अपनी गलती नहीं मानते, वे लोग कैसे होते हैं
Personality Test: कुछ लोग गलती करने के बाद भी उसे मानने से बचते हैं. उन्हें लगता है कि गलती मान ली तो उनकी इज्जत कम हो जाएगी या सामने वाला उन्हें कमजोर समझेगा. कई बार उन्हें अपनी बात गलत साबित होने का डर भी रहता है.
अरुणाचल में Siang Project की रिपोर्टिंग रोकने पर भड़के पत्रकार संगठन
ईटानगर, पांच अक्टूबर अरुणाचल प्रदेश के दो प्रमुख पत्रकार संगठनों ने सोमवार को दावा किया कि राज्य के कई पत्रकारों ने शिकायत की है कि अपर सियांग जलविद्युत परियोजना संबंधी उनकी वीडियो सामग्री और सोशल मीडिया पोस्ट या तो भारत में दिखाई नहीं दे रही हैं या उनके खातों पर ही पाबंदी लगा दी गई है। अरुणाचल प्रेस क्लब (एपीसी) और ‘अरुणाचल प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स’ (एपीयूडब्ल्यूजे) ने इस पर ‘‘गंभीर चिंता’’ जताते हुए संयुक्त बयान जारी किया और मांग रखी कि किसी परियोजना की रिपोर्टिंग के कारण रोकी गई वैध पत्रकारिता सामग्री को तत्काल बहाल किया जाए। दोनों संगठनों ने अधिकारियों से ‘‘पत्रकारों या समाचार संगठनों पर लगाई गई हर पाबंदी का स्पष्टीकरण’’ देने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रेस का दायित्व हर पक्ष को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ सामने लाना है। संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘पत्रकारिता को महज इसलिए बाधित नहीं किया जा सकता क्योंकि जमीनी रिपोर्ट असहज करने वाली, आलोचनात्मक या आधिकारिक आख्यान के विपरीत हैं।’’दोनों पत्रकार संगठनों ने कहा कि यह परियोजना जनहित से जुड़ी है, जिसमें विकास, पर्यावरण, विस्थापन, स्वदेशी लोगों के अधिकार, राष्ट्रीय हित और सियांग नदी के तट पर रहने वाले समुदायों का भविष्य शामिल हैं। बयान में कहा गया, ‘‘ऐसे समय में जब इस परियोजना को लेकर व्यापक बहस, विरोध-प्रदर्शन और सरकार तथा प्रभावित समुदायों के बीच बातचीत जारी है, ऐसे में वैध पत्रकारिता रिपोर्टिंग को रोकना नागरिकों को उस जानकारी से वंचित करने का जोखिम पैदा करता है, जो जागरूक जनसंवाद के लिए जरूरी है।’’एपीसी और एपीयूडब्ल्यूजे ने मांग की कि यदि किसी प्राधिकरण ने परियोजना से जुड़ी वैध खबरों को रोकने या सीमित करने का निर्देश दिया है, तो वह इस कार्रवाई का कानूनी आधार और ठोस कारण तत्काल स्पष्ट करे। सियांग क्षेत्र में इस जलविद्युत परियोजना का विरोध कर रहे लोग सियांग नदी पर प्रस्तावित परियोजना की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) से जुड़ी गतिविधियों और सर्वेक्षण कार्य को तत्काल रोकने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने प्रस्तावित परियोजना से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को भी हटाने की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि 11,000 मेगावाट की ‘सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना’ से आर्थिक और सामाजिक विकास को गति मिलेगी, युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा राज्य और देश की जल एवं ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से तुरंत निलंबित करने के लिए कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से साफ इनकार कर दिया है।
VIDEO: युवक ने होटल में घुसा दी बाइक, फिर की तोड़फोड़
महाराष्ट्र के लातूर में नशे में धुत युवक ने चाइनीज होटल में बाइक घुसाकर जमकर तोड़फोड़ कर दी. आरोप है कि शैलेश शिंदे ने होटल मालिक और उसके बेटे को गाली देते हुए दो दिन में दुकान बंद नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी. उसने फ्रिज, काउंटर और गैस बर्नर भी तोड़ दिए.
4 दिन बाद शनि बदलेंगे चाल! 122 दिन 5 राशियां करेंगी मौज
Shani Gochar 2026: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 को शनि देव उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं. शनि के गोचर के इस अद्भुत संयोग से मेष, वृषभ, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों के जीवन में स्थिरता और धन लाभ के योग बनेंगे.
CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग SC में खारिज, कोर्ट ने कहा- 'उम्मीद है संवैधानिक संस्थाएं...'
सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग को खारिज कर दिया है. याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि आयोग के फैसले कानून के मुताबिक नहीं लिए गए.
UP की Gram Panchayats में Digital Library का होगा विस्तार, CM Yogi Adityanath ने की घोषणा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण इलाकों में डिजिटल लर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की घोषणा की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि टेक्नोलॉजी पर आधारित एजुकेशन हब, कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी करने वालों के लिए शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच की खाई को कम कर रहे हैं। जनता दर्शन (जनता की शिकायतों के समाधान का कार्यक्रम) के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर ग्राम सचिवालयों में डिजिटल लाइब्रेरी बनाने का ज़िक्र किया। इसे भी पढ़ें: Bhadohi में बोले Yogi Adityanath, 2017 से पहले उप्र माफिया राज और अराजकता से था ग्रस्त 'X' पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि अब शहर की दूरी शिक्षा में बाधा नहीं बनेगी। गांवों में ज्ञान का डिजिटल दरवाज़ा खुल रहा है। जब भी किसी गांव के बच्चे को कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी करनी होती थी, तो उसे किताबों और बेहतर रिसोर्स के लिए शहर की ओर देखना पड़ता था। इस दूरी में समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। अब बहराइच के तेजवापुर ब्लॉक के खसाहा मोहम्मदपुर में डिजिटल लाइब्रेरी ने इसी दूरी को खत्म कर दिया है। योगी आदित्यनाथ ने बताया कि ये लाइब्रेरी पारंपरिक पढ़ाई के तरीकों और आधुनिक टेक्नोलॉजी को एक ही जगह पर लाती हैं। उन्होंने लिखा कि ग्राम पंचायत सचिवालय में बनी यह लाइब्रेरी किताबें और कंप्यूटर, पारंपरिक पढ़ाई के तरीके और आधुनिक टेक्नोलॉजी, सभी को एक ही छत के नीचे ला रही है। इन सुविधाओं में कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी सर्विलांस शामिल हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट के साथ साझेदारी के ज़रिए किताबें और साहित्य उपलब्ध कराया जाता है। इसे भी पढ़ें: अब तक विरोधियों से ताकत पाते रहे प्रधानमंत्री मोदी क्या चक्रव्यूह तोड़ पाएंगें? उन्होंने आगे कहा कि यहां कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों के साथ-साथ नेशनल बुक ट्रस्ट का साहित्य भी उपलब्ध है। यानी, चाहे आपको पढ़ने के लिए किताबें चाहिए हों या तैयारी के लिए डिजिटल कंटेंट, दोनों ही अब गांव में ही मिल रहे हैं। इसके फायदों के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संसाधन अब पास में होने से सपनों को पूरा करने का रास्ता भी आसान हो गया है। बच्चे और युवा यहां पढ़ाई कर रहे हैं, ई-लर्निंग से जुड़ रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की अपनी तैयारी को नई धार दे रहे हैं। शहर आने-जाने में जो समय और पैसा पहले खर्च होता था, वह अब उनकी शिक्षा में लगाया जा रहा है।
सोना अचानक हो गया इतना सस्ता, देखें 10 ग्राम का नया भाव
Gold Rate Fall Today: सोना-चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. एमसीएक्स से लेकर घरेलू बाजार तक में सोना सस्ता हो गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने अखबार की रिपोर्ट के आधार पर आदेश देने से इनकार कर दिया।
'पाकिस्तान की...', नसीरुद्दीन शाह पर भड़के पीयूष मिश्रा
CJP प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह के शामिल होने पर पीयूष मिश्रा का गुस्सा फूट पड़ा है. नसीरुद्दीन शाह पर तंज कसते हुए पीयूष मिश्रा ने उन्हें स्मित मछार और पाकिस्तान का जिक्र करके खरी-खोटी सुनाई है.
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी कैप्टन स्मित मच्छार को लेकर चुप्पी साधने, चुनाव आयोग, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे की बयान को लेकर कांग्रेस से देश से माफी मांगने की मांग की है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दुबई […] The post कैप्टन स्मित मच्छार को लेकर चुप्पी और मोदी- शाह को लेकर खरगे के बयान के लिए माफी मांगे कांग्रेस: भाजपा appeared first on Sabguru News .
एयरपोर्ट पर प्लेन क्रैश की थी प्लानिंग, पूछताछ में को-पायलट ने कबूला
फ्लाई दुबई विमान हादसे की खौफनाक साजिश को लेकर एक के बाद एक कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. जांच के अनुसार, आरोपी सह-पायलट हमम अल हमामी विमान पर नियंत्रण पाकर उसे इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट की किसी इमारत से टकराना चाहता था. वह विमान को क्रैश कराने की पूरी तैयारी कर चुका था, लेकिन भारतीय मूल के बहादुर कैप्टन स्मिथ मच्छार ने अपनी सूझबूझ और जांबाजी से इस भयावह साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया. आरोपी सह-पायलट ने पहले भी ऐसी ही हमले की कोशिश की थी.
‘अपराधियों के मन में डर पैदा करना होगा’, दिल्ली-एनसीआर में रेप मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
दिल्ली-NCR में हाल की रेप की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को अपराध रोकने, निगरानी बढ़ाने और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए।
Delhi Protest से पहले Saurav Das और Abhijeet Dipke को गिरफ्तार करने की तैयारी, CJP का आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया है कि सरकार उन्हें और पार्टी के अन्य नेताओं को 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले पार्टी के बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले गिरफ़्तार करने की योजना बना रही है। दास द्वारा बताए गए नेताओं में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका शामिल हैं। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग के लिए बुलाया गया है, जो मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) से जुड़ा है। इसे भी पढ़ें: महिला पत्रकार से कथित छेड़छाड़ पर बवाल, पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंची CJP रविवार देर रात एक पोस्ट में दास ने कहा कि अगर सरकार को लगता है कि ऐसे तानाशाही भरे कदमों से तय प्रदर्शन को रोका जा सकता है, तो वह गलतफहमी में है। उन्होंने कहा कि सरकार मुझे, अभिजीत, आशुतोष, रत्ना और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के दूसरे नेताओं को गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। अगर सरकार को लगता है कि ऐसे तानाशाही भरे कदम काम आएंगे, तो वह गलत है! युवा पीढ़ी जाग चुकी है। हम सभी से अपील करते हैं कि वे हमारे अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष जारी रखें, चाहे हम साथ हों या न हों। दिपके ने भी दास के आरोपों का समर्थन किया और आधी रात के कुछ ही देर बाद एक पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। दिपके ने ट्वीट किया, कितने लोगों को गिरफ्तार करोगे अमित शाह? 10 अक्टूबर को पूरा देश आ रहा है। ये आरोप CJP द्वारा SIR प्रक्रिया को लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करने के कुछ दिनों बाद सामने आए हैं। संगठन ने वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। इसे भी पढ़ें: SIR Row Protest Updates: CJP का शिवाजी पार्क विरोध प्रदर्शन खत्म, दिपके जल्द ही 'जंतर-मंतर सीज़न 2' का ऐलान करेंगे इस विरोध प्रदर्शन को शिवसेना (UBT) का समर्थन मिला था। यह प्रदर्शन 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट को लेकर मचे विवाद के बीच हुआ, जिसमें कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार SIR के कुछ पहलुओं पर आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग ने रिपोर्ट के दावों को खारिज करते हुए कहा कि विचारों और टिप्पणियों में मतभेद चर्चा का एक सामान्य हिस्सा है। आयोग ने कहा कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
Varsha Gaikwad ने Maharashtra सरकार को घेरा, Mumbai Congress दफ्तर में पुलिस कार्रवाई पर सवाल
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने सोमवार को आदिवासी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर महाराष्ट्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी आवासीय स्कूलों में सुविधाओं से जुड़ी अपनी चिंताएं बताने के लिए मुंबई आए छात्रों को कांग्रेस दफ्तर से ही उठा लिया गया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गायकवाड़ ने उन हालात पर सवाल उठाए जिनमें पुलिस कांग्रेस दफ्तर में घुसी और विरोध कर रहे छात्रों को हिरासत में लिया। गायकवाड़ ने कहा महाराष्ट्र में किसका राज चल रहा है? क्या यह जंगल राज है? छात्र सरकार से सवाल पूछने आए थे। क्या पुलिस वारंट लेकर आई थी? क्या लोग सुबह-सुबह पार्टी दफ्तरों में आते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई कांग्रेस ऑफिस से कई छात्रों को हिरासत में लिया गया, जहाँ वे अपनी माँगें उठाने के लिए नासिक से मुंबई आने के बाद रुके हुए थे। उन्होंने कहा मुंबई कांग्रेस ऑफिस से छात्रों को उठाया। ये महाराष्ट्र के छात्र हैं। वे इजाज़त क्यों नहीं दे रहे हैं? ये हमारे छात्र हैं। इसे भी पढ़ें: Ballot Paper और CEC के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं, Congress प्रमुख Kharge का बयान गायकवाड़ ने कहा कि छात्र आदिवासी आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और सुधारों की माँग कर रहे थे और उन्होंने उनकी माँगों पर सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा ये छात्र आश्रम स्कूल में सुविधाएँ उपलब्ध कराने की माँग कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने मुंबई में वरिष्ठ नेताओं और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) के नेताओं की गैर-मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। आदिवासी छात्र आश्रम स्कूलों और हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं, स्कॉलरशिप से जुड़ी चिंताओं और आदिवासी विकास विभाग से जुड़ी अन्य शिकायतों जैसे मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का एक समूह पहले नासिक में लंबे समय तक आंदोलन करने के बाद मुंबई की ओर मार्च कर चुका था। इसे भी पढ़ें: Ballot Paper और CEC के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं, Congress प्रमुख Kharge का बयान खबरों के अनुसार, विरोध कर रहे छात्रों ने आज़ाद मैदान में प्रदर्शन करने की इजाज़त माँगी थी। महाराष्ट्र कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मुंबई में रहने की जगह न होने के कारण पार्टी के दादर स्थित तिलक भवन ऑफिस में रुकने की इजाज़त मिलने के बाद, सोमवार तड़के कुछ छात्रों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। गायकवाड़ ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की चिंताओं का भी ज़िक्र किया और कहा कि सरकार को विरोध कर रहे छात्रों की आवाज़ दबाने के बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा, MPSC के छात्र पुणे में बैठे हैं। आप इन बच्चों को परेशान कर रहे हैं। यह सही नहीं है, मुख्यमंत्री जी।
Digvijaya Singh के बचाव में उतरे Priyank Kharge, RSS की विचारधारा पर उठाए सवाल
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला करते हुए संगठन को धर्म की आड़ में चल रही बिना रजिस्ट्रेशन वाली मनी लॉन्ड्रिंग यूनिट बताया। हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक के गृह मंत्री ने आरोप लगाया RSS असल में बिना रजिस्ट्रेशन वाली मनी लॉन्ड्रिंग यूनिट के अलावा कुछ नहीं है, जो धर्म के नाम पर सभी तरह की गैर-कानूनी गतिविधियां कर रही है। यह बयान कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के उस आरोप के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय विमर्श पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने हिंदुत्व के बारे में लगातार बयानबाजी करके कब्ज़ा कर लिया है, जिससे हिंदुओं और अन्य धर्मों के बीच दरार पैदा हो रही है; इस बयान की साधु-संतों और BJP नेताओं ने कड़ी आलोचना की थी। सिंह का बचाव करते हुए, खड़गे ने कांग्रेस नेता को आस्था का पक्का अनुयायी बताया। इसे भी पढ़ें: SRFTI Kolkata में हिंसक झड़प के बाद पांचवें दिन भी कक्षाएं और शूटिंग ठप खड़गे ने कहा दिग्विजय सिंह एक पक्के सनातनी हैं। RSS की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने तंज कसा कि संघ खुद तो सिर्फ़ 100 साल पुराना है, लेकिन हिंदू धर्म का एकमात्र रक्षक होने का दावा करता है, जबकि हिंदू धर्म 3,000 साल पुराना है। उन्होंने कहा RSS को इस भावना के बारे में कुछ भी पता नहीं है। वे ऐसे व्यवहार करते हैं जैसे वे 3,000 साल पुराने धर्म के एकमात्र रक्षक हों, जबकि उन्हें बने हुए अभी सिर्फ़ 100 साल ही हुए हैं। आस्था और राजनीतिक विचारधारा के बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए गृह मंत्री ने कहा कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व मूल रूप से अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा हिंदू धर्म और हिंदुत्व में बहुत बड़ा अंतर है। हिंदुत्व की शुरुआत RSS ने की थी, जबकि हिंदू धर्म हज़ारों सालों से अस्तित्व में है। इसलिए, किसी भी हिंदू को RSS से कुछ भी सीखने की ज़रूरत नहीं है। इससे पहले, दिग्विजय सिंह ने RSS और VHP की आलोचना करते हुए कहा था, इस देश में बातचीत का रुख़ लगातार हिंदू धर्म पर केंद्रित हो गया है, जिसे RSS और विश्व हिंदू परिषद बढ़ावा दे रहे हैं। वे 'हिंदुत्व' को आगे बढ़ा रहे हैं, जो सावरकर द्वारा गढ़ा गया शब्द है। इसकी वजह से पूरे देश में हिंदुओं और मुसलमानों, हिंदुओं और सिखों, और हिंदुओं और ईसाइयों के बीच दरारें पैदा हो गई हैं। भारत सभी का है। विविधता में एकता ही हमारी ताकत है।
दुनिया पर मंडरा रहा खाद्य संकट का खतरा, निर्मला सीतारमण ने बताई बड़ी वजह; भारत ने उठाए ये कदम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Hormuz और Bab el-Mandeb जैसे समुद्री मार्गों में व्यवधान से वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर खतरे की चेतावनी दी। जानिए भारत ने खाद और शिपिंग संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए।
अमेरिकी चुनाव की कमियां गिनाते-गिनाते ट्रंप ने कर दी बड़ी गलती! ब्राजील को बताया 'भारत'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण इंटरनेट यूज़र्स के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, अमेरिकी चुनाव प्रणाली में कथित धांधली और ढुलमुल रवैये की आलोचना करने के प्रयास में ट्रंप ने एक बड़ी मानवीय भूल कर दी। उन्होंने ब्राजील ...
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने तीन याचिकाओं पर सुनवाई की। शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, राकेश कुमार सिंह और सुधाकर सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई।
Rahul Gandhi ने MP के CM Mohan Yadav को लिखा पत्र, Teacher Recruitment में पद बढ़ाने की मांग की
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों और राज्य में शिक्षक भर्ती के उम्मीदवारों के चल रहे आंदोलन के मुद्दे पर बात की है। 29 सितंबर को लिखे अपने पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में 'स्कूल की गूंज' कार्यक्रम के दौरान शिक्षक उम्मीदवारों ने क्लास-2 और क्लास-3 के शिक्षक पदों पर भर्ती बढ़ाने का मुद्दा उठाया था। इसे भी पढ़ें: Ballot Paper और CEC के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं, Congress प्रमुख Kharge का बयान राहुल गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों के एक लाख से ज़्यादा पद खाली हैं, जिसका सीधा असर राज्य में बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षक भर्ती 2025 प्रक्रिया के तहत क्लास-3 के 13,089 और क्लास-2 के 10,800 पदों पर भर्ती की घोषणा की गई है, और उम्मीदवार इन खाली पदों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि शिक्षकों की भर्ती के लिए पदों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा और हज़ारों युवाओं को पक्की नौकरी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि कई उम्मीदवारों ने भर्ती परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए थे और उनमें से कई गेस्ट टीचर के तौर पर काम भी कर रहे हैं, लेकिन पदों की सीमित संख्या के कारण उन्हें पक्की नौकरी नहीं मिल पाई है। राहुल गांधी ने उन उम्मीदवारों की चिंताओं का भी ज़िक्र किया, जो उनके अनुसार, भर्ती के मौकों का इंतज़ार करते-करते उम्र सीमा पार कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अपनी बात मनवाने के लिए उम्मीदवारों को विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल करने की ज़रूरत क्यों पड़ती है। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध कर रहे कुछ उम्मीदवारों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Bengal By-Election: Nandigram और Rejinagar सीट पर 6 अक्टूबर को वोटिंग, BJP की पहली परीक्षा राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया कि वे विरोध कर रहे उम्मीदवारों को जारी किए गए नोटिस तुरंत वापस लें और उनकी शिकायतें सुनने के लिए उनके प्रतिनिधियों से मिलें। उन्होंने क्लास-2 और क्लास-3 शिक्षक भर्ती के लिए प्रमोशन और काउंसलिंग का दूसरा दौर तुरंत शुरू करने की भी मांग की। यह पत्र मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती (क्लास-2 और क्लास-3) के उन उम्मीदवारों की अपील के बाद आया है, जो खाली पदों की संख्या को लेकर विरोध कर रहे हैं और भर्ती में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
पुलिसकर्मियों पर हमले, ASI पर फायरिंग के बाद फिर घिरी मान सरकार
पंजाब में पुलिसकर्मियों पर हमलों का सिलसिला जारी है. अब अमृतसर में ASI सुखचैन सिंह पर फायरिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इससे पहले जोगा, हरजीत और जसवंत सिंह पर भी हमले किए गए थे. जानिए क्या है पूरा मामला.
मध्य प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव में दो साल से अधिक का समय हो लेकिन कांग्रेस अब पूरी ताकत के साथ सरकार को घेरने में जुट गई है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी लगातार मध्यप्रदेश का दौरा करने के साथ प्रदेश में युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर ...
सीईसी, एसआईआर और बैलेट पेपर: कांग्रेस अध्यक्ष ने याद दिलाईं तीन शर्तें, सरकार से कहा- इससे कम पर समझौता नहीं Congress President reiterates three conditions, tells government no compromise on anything less.

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