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सूखी जड़ों से लौटती हरियाली

अप्रैल का महीना था। मौसम पूरी तरह से नए पौधे लगाने के अनुकूल नहीं था, फिर भी घूमने के दौरान एक सुंदर सा पौधा मन को इतना भा गया कि उसे अपने साथ घर ले आए। घर पहुँचते ही उसे एक बड़े गमले में सावधानी से लगा दिया। यह जानते हुए भी कि समय शायद सही नहीं है, ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 5:11 pm

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कालापीपल को दी 30.86 करोड़ की सौगात, दोहराया UCC को लागू करने का संकल्प

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को शाजापुर जिले के कालापीपल को 30.86 करोड़ लागत के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने यहां कई कामों के लोकार्पण और भूमिपूजन किए। उन्होंने यहां आयोजित किसान समृद्धि संकल्प सम्मेलन एवं ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 5:10 pm

जेवर हादसे में 3 मजदूरों की मौत, जल्द गिरफ्तार होगा वाहन चालक: एडीसीपी संतोष कुमार

ग्रेटर नोएडा के जेवर में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। इस हादसे में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की चपेट में आने से सड़क किनारे पैदल जा रहे तीन युवकों की मौत हो गई। हादसा बुधवार देर रात जेवर-खुर्जा मार्ग पर नीमका गांव के सामने हुआ। ग्रेटर नोएडा के एडिशनल डीसीपी संतोष कुमार ने बताया कि पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई है।

देशबन्धु 9 Jul 2026 5:08 pm

Iran : तबाही देख दहली दुनिया, अयातुल्ला अली खामेनेई के गुप्त ठिकाने का 35 सेंकड का वीडियो, US-Israel की Airstrike के Unseen फुटेज

ईरान के सरकारी मीडिया ने गुरुवार को पहली बार वह वीडियो जारी किया है, जिसमें पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के तेहरान स्थित परिसर के अंदर हुई भारी तबाही दिखाई गई है। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब एक सप्ताह तक चले अंतिम संस्कार के बाद ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 4:56 pm

FIFA World Cup 2026: फुटबॉल के अंदर सेंसर और बैटरी का खेल! जानें पाकिस्तान के सियालकोट में बनी इस 'स्मार्ट बॉल' का पूरा गणित

फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) का रोमांच इस समय पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है और टूर्नामेंट अब अपने सबसे दिलचस्प मोड़ यानी क्वार्टर फाइनल की तरफ बढ़ चुका है। इस महाकुंभ में मेसी, रोनाल्डो और एम्बापे जैसे दिग्गज खिलाड़ी जिस फुटबॉल से मैदान पर जादू बिखेर रहे हैं, वह कोई साधारण गेंद नहीं है। 'ट्रियोन्डा' (Trionda) नाम की इस आधिकारिक फुटबॉल के भीतर अत्याधुनिक सेंसर और बैटरी की हाई-टेक तकनीक छिपी हुई है, जिसका सीधा कनेक्शन हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान के सियालकोट (Sialkot) शहर से है। आइए समझते हैं इस स्मार्ट फुटबॉल के पीछे का पूरा विज्ञान और इसकी हैरान करने वाली खासियतें।सियालकोट: दुनिया की फुटबॉल राजधानी में बनी सबसे एडवांस्ड गेंदपाकिस्तान के सियालकोट को दुनिया की 'फुटबॉल राजधानी' कहा जाता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल होने वाली दो-तिहाई से ज्यादा फुटबॉल इसी शहर में मैनुफैक्चर की जाती हैं। ट्रियोन्डा फुटबॉल को जर्मनी में डिजाइन किया गया है, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन सियालकोट में हुआ है। एडिडास (Adidas) की यह अब तक की सबसे एडवांस्ड गेंद है, जो पूरी तरह से डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर काम करती है।500 हर्ट्ज का मोशन सेंसर: हर सेकंड 500 बार रिकॉर्ड होती है मूवमेंटइस फुटबॉल के बिल्कुल सेंटर में एक बेहद शक्तिशाली 500 हर्ट्ज (Hz) का सस्पेंडेड मोशन सेंसर लगाया गया है।लाइव डेटा ट्रैकिंग: यह सेंसर हर एक सेकंड में 500 बार गेंद की हर एक मूवमेंट, उसकी स्पिन (घूमना), स्पीड, खिलाड़ियों का टच और शॉट की पावर को रिकॉर्ड करता है।रेफरी को सटीक मदद: गेंद से मिलने वाला यह सारा डेटा रियल-टाइम में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) रूम और कनेक्टेड एआई सिस्टम को भेजा जाता है। इसकी मदद से ऑफसाइड (Offside) और गोल-लाइन जैसे विवादित फैसलों को रेफरी पलक झपकते ही बिल्कुल सटीक तरीके से सुलझा लेते हैं।मैच से पहले चार्ज होती है फुटबॉल, जीरो ग्रेविटी में हुआ है टेस्टचूँकि गेंद के अंदर इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और ट्रांसमीटर लगे हैं, इसलिए इन्हें पावर देने के लिए एक छोटी रीचार्जबल बैटरी भी फिट की गई है। यही वजह है कि हर वर्ल्ड कप मैच से ठीक पहले इन फुटबॉल को किसी स्मार्टफोन की तरह बाकायदा चार्जिंग पॉइंट पर लगाकर चार्ज किया जाता है।गेंद का संतुलन (Balance) इतना परफेक्ट है कि इसे अंतरिक्ष में, जीरो ग्रेविटी (Zero Gravity) के माहौल में भी टेस्ट किया जा चुका है, जहाँ इसकी फ्लाइट और बैलेंस 100% सटीक पाए गए। भारतीय मुद्रा में इस एक ऑफिशियल मैच बॉल की कीमत लगभग 14,000 से 15,000 रुपये के बीच है।कम पैनल्स और गजब का एयर कंट्रोलडिजाइन की बात करें तो ट्रियोन्डा को बेहद कम पैनल्स को आपस में जोड़कर (थर्मल बॉन्डिंग तकनीक से) बनाया गया है। कम जोड़ होने की वजह से हवा में इस गेंद की रफ्तार (Flight) बेहद स्मूद और प्रेडिक्टेबल यानी अनुमान लगाने योग्य होती है। यह अनोखा डिजाइन खिलाड़ियों को मैदान पर गजब का ग्रिप, स्विंग और शॉट पर बेहतरीन कंट्रोल देता है। जहाँ एक तरफ इस फुटबॉल की बदौलत खेल की दुनिया में पाकिस्तान की तकनीक का डंका बज रहा है, वहीं दूसरी तरफ क्रिकेट जैसे पारंपरिक खेलों में पाकिस्तान का ग्राफ लगातार नीचे गिरता जा रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:52 pm

Sawan Vrat Tyohar List 2026: सावन में महादेव को करना है प्रसन्न? नोट कर लें ये 6 सबसे शुभ और पवित्र तिथियां, बरसेगी शिव कृपा

हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए सावन (श्रावण) के महीने को सबसे उत्तम और परम फलदायी माना गया है। सावन का पूरा महीना ही शिव भक्ति के रंग में रंगा होता है, लेकिन इस दौरान कुछ विशेष व्रत और त्योहार ऐसे आते हैं जिनमें शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भोलेनाथ अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं। साल 2026 का सावन मास कई मायनों में बेहद अनूठा और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। आइए जानते हैं सावन के उन 6 महा-अवसरों की पूरी लिस्ट, जिन दिनों शिव जी की उपासना करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।1. सावन के सोमवार (4 सोमवार का अद्भुत संयोग)सावन मास में सोमवार के व्रत का अत्यधिक महत्व है। साल 2026 में सावन के महीने में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं, जिनमें कई विशेष संयोग बन रहे हैं:पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026दूसरा सावन सोमवार (सोम प्रदोष व्रत): 10 अगस्त 2026तीसरा सावन सोमवार (नाग पंचमी): 17 अगस्त 2026चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 20262. सावन के महा-अचूक प्रदोष व्रत (Som & Bhaum Pradosh)प्रदोष व्रत साक्षात भगवान शिव को समर्पित होता है। इस बार सावन में दो बेहद शुभ प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं:सोम प्रदोष व्रत (10 अगस्त 2026): सावन के दूसरे सोमवार को ही प्रदोष व्रत का होना एक महासंयोग है। इस दिन जलाभिषेक करने से दुर्लभ फलों की प्राप्ति होती है।भौम प्रदोष व्रत (25 अगस्त 2026): मंगलवार के दिन पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत को कर्ज मुक्ति और हनुमान जी की कृपा के लिए भी उत्तम माना जाता है।3. सावन शिवरात्रि (11 अगस्त 2026)सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है, जो इस साल 11 अगस्त 2026 को है। यदि किसी के विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हैं या वैवाहिक जीवन में अनबन चल रही है, तो इस दिन व्रत रखकर चार पहर की पूजा और शिवलिंग पर पंचामृत अभिषेक करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।4. हरियाली तीज (15 अगस्त 2026)महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए अखंड सौभाग्य का पर्व हरियाली तीज इस साल 15 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस पावन तिथि पर माता पार्वती और देवाधिदेव महादेव की संयुक्त रूप से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत रखने पर सुयोग्य, मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और सुहागिनों के पति की आयु लंबी होती है।5. नाग पंचमी पर दुर्लभ सोमवार का योग (17 अगस्त 2026)इस साल नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा और सबसे विशेष बात यह है कि इस दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है। सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ होना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन महादेव के साथ-साथ उनके गले के आभूषण नाग देवता की दूध और जल से विशेष पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से कालसर्प दोष, अज्ञात भय और सर्पदंश के खतरों से मुक्ति मिलती है।6. सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन (28 अगस्त 2026)सावन महीने का समापन श्रावण पूर्णिमा के साथ होता है, जो इस साल 28 अगस्त 2026 को है। इसी पावन तिथि पर भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। सावन की पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और भोलेनाथ का गंगाजल से जलाभिषेक करने से पूरे परिवार पर शिव जी का वरदहस्त बना रहता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:51 pm

अमरीकी हमलों की दूसरी रात के बाद ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप को चेताया, हमला करोगे तो जवाब मिलेगा

तेहरान। अमरीका और ईरान के बीच लगातार दूसरी रात हमलों के आदान-प्रदान के बाद ईरानी नेतृत्व ने अमेरिकी प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य अभियान का दायरा होर्मुज जलडमरूमध्य से आगे बढ़ाते हुए ईरान के रणनीतिक बंदरगाह शहर चाबहार तक कर दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड […] The post अमरीकी हमलों की दूसरी रात के बाद ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप को चेताया, हमला करोगे तो जवाब मिलेगा appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 4:47 pm

Effort Recession in Corporate Sector: क्या है 'एफर्ट रिसेशन'? काम सिर्फ उतना ही जितने के पैसे; भारतीय कंपनियों में क्यों खत्म हो रहा है एक्स्ट्रा काम करने का ट्रेंड?

भारतीय कॉर्पोरेट जगत (Corporate Sector) में इन दिनों एक नया और चौंकाने वाला वर्क कल्चर तेजी से पैर पसार रहा है। अब कर्मचारी दफ्तर आते हैं, अपनी डेस्क संभालते हैं, सिर्फ उतना ही काम करते हैं जितना उनके कॉन्ट्रैक्ट या जॉब डिस्क्रिप्शन (JD) में लिखा है, और समय होते ही लॉग-ऑफ कर देते हैं—न एक मिनट कम, न एक मिनट ज्यादा। मैनेजमेंट और एचआर की भाषा में इस नए ट्रेंड को 'एफर्ट रिसेशन' (Effort Recession यानी प्रयासों में मंदी) का नाम दिया गया है, जिसने देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के कप्तानों की नींद उड़ा दी है।क्या होता है 'डिस्क्रीशनरी एफर्ट' जो अब गायब हो रहा है?किसी भी नौकरी में एक ऐसा हिस्सा होता है, जिसे कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों से जबरन या नियम कानून के दम पर नहीं करवा सकती। जैसे—बिना कहे देर रात तक रुकना, अपनी जिम्मेदारी से बाहर जाकर किसी कलीग की मदद करना, या किसी प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए अपनी क्षमता से बढ़कर योगदान देना। इसे मैनेजमेंट विज्ञान में 'डिस्क्रीशनरी एफर्ट' (Discretionary Effort - स्वैच्छिक प्रयास) कहा जाता है। यही वो एक्स्ट्रा पुश होता है जो किसी साधारण कर्मचारी को लीडर बनाता है और कंपनियों को आगे बढ़ाता है, लेकिन अब भारतीय वर्कफोर्स से यह स्वैच्छिक प्रयास पूरी तरह गायब होता दिख रहा है।'ग्रेट प्लेस टू वर्क' की रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा'ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया' (Great Place to Work India) की साल 2026 की एक हालिया स्टडी ने इस ट्रेंड पर मुहर लगाई है।10 में से 6 कंपनियां परेशान: सर्वे में शामिल देश की लगभग 63% कंपनियों (380 में से 240 संगठनों) ने स्वीकार किया है कि पिछले एक साल में उनके कर्मचारियों के 'स्वैच्छिक प्रयास' में औसतन 5% की भारी गिरावट आई है।रिटेल और आईटी पर सबसे ज्यादा मार: इस मंदी का सबसे बुरा असर रिटेल सेक्टर (88%) में देखा गया है। इसके बाद आईटी (IT) और प्रोफेशनल सर्विसेज (77%) तथा कंस्ट्रक्शन व रियल एस्टेट (71%) का नंबर आता है। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस मामले में सबसे मजबूत रहा, जहाँ सिर्फ 44% कंपनियों ने ही इस गिरावट को महसूस किया।'मूड वैसा, काम जैसा' — मैनेजर के व्यवहार पर टिका है एक्स्ट्रा एफर्टरिपोर्ट के निष्कर्ष साफ इशारा करते हैं कि कर्मचारी अब 'अंधभक्ति' के मूड में नहीं हैं। उनका एक्स्ट्रा काम पूरी तरह से कंपनी के लीडरशिप और भरोसे पर टिका है:केयरिंग मैनेजर = 99% एफर्ट: जिन कर्मचारियों को लगता है कि उनका मैनेजर सच में उनकी परवाह करता है और उन्हें काम के बदले सही पैसे व सम्मान मिलेगा, उनका अतिरिक्त प्रयास का स्तर 99 फीसदी तक देखा गया।भरोसे की कमी = सिर्फ 29% काम: जहाँ कर्मचारियों और मैनेजमेंट के बीच भरोसे की कमी है, वहाँ यह स्वैच्छिक योगदान गिरकर महज 29 फीसदी पर सिमट जाता है। इसी तरह, प्रेरणादायक लीडरशिप मिलने पर एक्स्ट्रा एफर्ट 98% रहता है, अन्यथा केवल 32% रह जाता है।Gen Z और AI के दौर में एचआर (HR) के सामने नई चुनौतीभारतीय कार्यबल (Workforce) में अब जेन-जी (Gen Z) यानी नई पीढ़ी के कर्मचारियों की हिस्सेदारी बढ़कर 26% हो चुकी है। इसके साथ ही कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बड़े बदलावों से गुजर रही हैं।लगभग 58% चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर्स (CHROs) का मानना है कि उन्हें एक तरफ एआई (AI) को अपनाना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी की उम्मीदों के हिसाब से ऑफिस का माहौल बदलना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 50% एचआर प्रमुखों ने माना कि वे आज भी जेन-जी कर्मचारियों की प्राथमिकताओं (वर्क-लाइफ बैलेंस, मेंटल पीस) को पूरी तरह समझने में नाकाम रहे हैं। कर्मचारी अब 'क्वाइट क्विटिंग' (Quiet Quitting) को अपना रहे हैं, जो सीधे तौर पर कॉर्पोरेट जगत के लिए 'एफर्ट रिसेशन' बन चुका है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:46 pm

UPTET Answer Key 2026: यूपीटीईटी प्रोविजनल आंसर की जारी, 14 जुलाई तक दर्ज कराएं आपत्ति; ओएमआर शीट से ऐसे कैलकुलेट करें मार्क्स

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 की प्रोविजनल आंसर की (Provisional Answer Key) और रिस्पॉन्स शीट आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी है। जो उम्मीदवार 2 से 4 जुलाई 2026 के बीच आयोजित हुई इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे अब ऑनलाइन माध्यम से अपनी उत्तर कुंजी चेक और डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही आयोग ने प्रश्नों या उत्तरों पर आपत्ति (Objection) दर्ज करने की तारीखों का भी ऐलान कर दिया है।14 जुलाई है आपत्ति दर्ज करने की लास्ट डेट, प्रति प्रश्न लगेंगे ₹500अगर किसी उम्मीदवार को आयोग द्वारा जारी किए गए किसी प्रश्न या उसके उत्तर पर कोई आपत्ति है, तो वह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना चैलेंज सबमिट कर सकता है। आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई 2026 को रात 11:59 बजे तक तय की गई है। उम्मीदवारों को ध्यान रखना होगा कि प्रत्येक आपत्ति के लिए ₹500 की फीस ऑनलाइन जमा करनी होगी। इसके साथ ही साक्ष्य के रूप में एनसीईआरटी (NCERT) या एससीईआरटी (SCERT) जैसी प्रामाणिक किताबों के स्कैन दस्तावेज अपलोड करने होंगे। यदि उम्मीदवार की आपत्ति सही पाई जाती है, तो यह फीस उनके खाते में वापस (Refund) कर दी जाएगी।OMR Sheet से कैसे कैलकुलेट करें अपना संभावित स्कोर?UPTET एक ऑफलाइन पेन-पेपर आधारित परीक्षा है, जिसमें उत्तरों का मूल्यांकन कंप्यूटर आधारित ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन (OMR) स्कैनर द्वारा किया जाता है। परीक्षा के बाद आपको मिली ओएमआर शीट की 'स्टूडेंट कार्बन कॉपी' और आधिकारिक आंसर की की मदद से आप घर बैठे अपना सटीक स्कोर जान सकते हैं।इस परीक्षा की मार्किंग स्कीम बेहद सरल है क्योंकि इसमें कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं है। परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे गए थे, जो 150 अंकों के थे। हर सही उत्तर के लिए आपको +1 अंक जोड़ना है, जबकि गलत या बिना हल किए गए प्रश्नों के लिए 0 अंक मिलेंगे (यानी कोई नंबर नहीं काटा जाएगा)। अपनी ओएमआर शीट के गोलों का आधिकारिक मास्टर आंसर की से मिलान करें और जितने विकल्प सही मिल रहे हैं, उन्हें जोड़कर अपना स्कोर निकाल लें। सामान्य वर्ग के लिए क्वालीफाइंग मार्क्स 90 (60%) और आरक्षित वर्ग (OBC/SC/ST) के लिए 82 (55%) तय हैं।UPTET Answer Key 2026 कैसे डाउनलोड करें?आंसर की डाउनलोड करने और आपत्ति दर्ज करने के लिए उम्मीदवार इन आसान स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:सबसे पहले उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाएं।होमपेज पर फ्लैश हो रहे लिंक 'शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET-2026) -: प्रश्न आपत्ति (Qs. Objection)' पर क्लिक करें।अब आपके सामने एक नया लॉगिन पेज खुलेगा, जहाँ आपको अपना रोल नंबर (या रजिस्ट्रेशन नंबर) और जन्मतिथि (DOB) दर्ज करनी होगी।डिटेल्स सबमिट करते ही आपका डैशबोर्ड खुल जाएगा, जहाँ से आप पेपर-1 और पेपर-2 की प्रोविजनल आंसर की पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।यदि ऑब्जेक्शन करना हो, तो ड्रॉप-डाउन मेनू से प्रश्न संख्या चुनकर, अपना दावा दर्ज करें और प्रमाण पत्र अटैच करके ऑनलाइन फीस का भुगतान करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:45 pm

Smart Home Ecosystem India: अब बीमारी का इंतजार नहीं, आपके बीमार होने से पहले ही घर कर देगा अलर्ट! जानें AI तकनीकों का कमाल

पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल बड़ी टेक कंपनियों या दफ्तरों तक सीमित रहने वाली तकनीक नहीं रह गया है, बल्कि यह चुपचाप हमारे घरों का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। पैसों के लेनदेन और रास्तों की खोज से आगे बढ़कर AI अब हमारे लिविंग रूम, किचन और बाथरूम तक पहुंच चुका है। हालिया ग्लोबल रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दशक के अंत तक वैश्विक एआई बाजार 1.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का होने की उम्मीद है। यह तकनीक अब सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और एक बेहतर, तनावमुक्त जीवनशैली को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे 'स्मार्ट होम इकोसिस्टम' (Smart Home Ecosystem) की नींव बन चुकी है।बीमारी आने के बाद नहीं, बीमारी से पहले ही मिलेगा समाधानदशकों से भारतीयों की यह आदत रही है कि जब सेहत खराब होती है, हम तभी डॉक्टर या समाधान की तरफ भागते हैं। जैसे- खांसी या सांस की तकलीफ बढ़ने पर एयर प्यूरीफायर का ख्याल आता है या पेट खराब होने पर पानी के टीडीएस (TDS) की चिंता होती है। लेकिन एआई और ऑटोमेशन (Automation) ने अब इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है।भविष्यवाणी करने वाली तकनीक: आधुनिक स्मार्ट होम अब अपने आसपास के माहौल को खुद समझते हैं, यूजर की आदतों से सीखते हैं और संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का पहले से अनुमान लगाकर समय रहते जरूरी कदम उठा लेते हैं।बाजार में रिकॉर्ड तेजी: यही वजह है कि साल 2024 में जो वैश्विक स्मार्ट होम मार्केट लगभग 128 अरब अमेरिकी डॉलर का था, वह 2030 तक तेजी से बढ़कर 537 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।कोविड-19 के बाद बदली सोच: हेल्थ और हाइजीन बनी पहली प्राथमिकताइस तकनीकी क्रांति के पीछे सबसे बड़ी वजह कोविड-19 (COVID-19) महामारी के बाद लोगों की बदली हुई मानसिकता है। अब लोग अपनी इम्युनिटी और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर बेहद गंभीर हो चुके हैं। भारत के बड़े महानगरों से लेकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी सस्ता इंटरनेट, स्मार्टफोन की पहुंच और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित गैजेट्स ने स्मार्ट लिविंग को हर घर तक पहुंचा दिया है।AI एयर प्यूरीफायर और स्मार्ट वॉटर फिल्टर: सांस और पानी पर कड़ा पहराबढ़ते प्रदूषण के इस दौर में घर के अंदर की हवा को शुद्ध रखना अब विलासिता नहीं बल्कि मजबूरी बन चुका है।स्मार्ट एयर प्यूरीफिकेशन: पारंपरिक फिल्टरों के उलट, एआई-आधारित एयर प्यूरीफायर हवा में मौजूद धूल के सूक्ष्म कणों (PM 2.5), नमी, बैक्टीरिया और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों पर लाइव नजर रखते हैं। अगर बाहर अचानक प्रदूषण बढ़ता है, तो ये सिस्टम खुद-ब-खुद अपनी क्लीनिंग स्पीड बढ़ा देते हैं और कमरा खाली होने पर बिजली बचाने के लिए स्लीप मोड में चले जाते हैं।खुद डॉक्टर बनने वाले वॉटर प्यूरीफायर: पानी को शुद्ध करने के लिए अब एआई वॉटर प्यूरीफायर आ चुके हैं, जो पानी के टीडीएस (TDS) के स्तर की लगातार जांच करते रहते हैं। ये फिल्टर की लाइफ पर खुद नजर रखते हैं और स्थानीय पानी की गुणवत्ता के आधार पर मोबाइल ऐप के जरिए पहले ही यूजर को अलर्ट कर देते हैं कि सर्विसिंग की जरूरत कब पड़ने वाली है। आजकल 2.5 साल तक चलने वाले लॉन्ग-लाइफ फिल्टर और सब्सक्रिप्शन आधारित मेंटेनेंस मॉडल ने इसे और आसान बना दिया है।स्मार्ट किचन और चिमनी: वॉइस कमांड पर बदल जाती है सेटिंगयह एआई बदलाव केवल हवा और पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि अब आपके किचन को भी हाइटेक बना रहा है। आधुनिक स्मार्ट किचन (Smart Kitchen) घर के सदस्यों की खानपान की आदतों, कैलोरी की जरूरत और पसंद के आधार पर खुद ब खुद हेल्दी रेसिपीज के विकल्प सुझाने लगे हैं। वहीं, किचन में लगने वाली एआई चिमनी अब वॉइस कमांड (Voice Command), गेस्चर कंट्रोल, IoT कनेक्टिविटी और सीधे मोबाइल ऐप के जरिए धुएं के स्तर को भांपकर अपनी सक्शन पावर और सेटिंग्स को ऑटो-एडजस्ट कर लेती हैं।रोज-रोज के छोटे फैसलों और मानसिक थकान से मिलेगी मुक्तिइन एडवांस होम ऑटोमेशन तकनीकों का सबसे बड़ा फायदा सिर्फ गैजेट्स का दिखावा करना नहीं है, बल्कि इंसानी दिमाग से रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसलों का मानसिक बोझ (Decision Fatigue) कम करना है। 'क्या पानी पीने के लिए सुरक्षित है?', 'क्या कमरे की हवा साफ हो चुकी है?', या 'क्या खाना ठीक से पक गया है?'— इन तमाम चिंताओं पर अब एआई खुद चौबीसों घंटे निगरानी रखता है। ये सिस्टम बैकग्राउंड में चुपचाप काम करते हैं और केवल तभी यूजर को नोटिफिकेशन भेजते हैं जब वास्तव में किसी इंसानी एक्शन या फिल्टर बदलने की जरूरत होती है। इससे हमारा घर मानसिक तनाव की वजह बनने के बजाय हमें मानसिक सुकून देने वाला एक सुरक्षित स्पेस बन जाता है।भारत की जरूरत के हिसाब से बदलने होंगे विदेशी मॉडलभले ही ये तकनीकें डेटा और यूजर्स की आदतों को ट्रैक करके चलती हैं, इसलिए कंपनियों के लिए डेटा प्राइवेसी, कंज्यूमर ट्रस्ट और पारदर्शिता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। भारत में जिस तरह से पर्यावरण और शहरी जीवन की चुनौतियां बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए भारत को केवल पश्चिमी देशों के स्मार्ट होम मॉडल को कॉपी-पेस्ट करने से बचना होगा। हमें भारतीय घरों की बनावट, बिजली-पानी की उपलब्धता और यहां के परिवारों की खास आदतों को ध्यान में रखकर इस तकनीक को कस्टमाइज करना होगा। भविष्य ऐसी दुनिया का है जहां तकनीक दीवारों पर लगी स्क्रीन्स में चिल्लाएगी नहीं, बल्कि बैकग्राउंड में चुपचाप रहकर हमारी जिंदगी को सुरक्षित, टिकाऊ और सेहतमंद बनाएगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:43 pm

BSNL Satellite Phone: बिना सिम और मोबाइल टावर के सीधे आसमान से कनेक्ट होगा यह फोन, कीमत ₹1.34 लाख; खरीदने से पहले जान लें नियम

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज के इस 5G और AI के दौर में कोई ऐसा भी फोन हो सकता है, जिसकी कीमत ₹1.34 लाख से अधिक हो, लेकिन उसमें न तो कोई चमचमाता हुआ एमोलेड डिस्प्ले हो और न ही कोई हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा? भारत की सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) एक ऐसा ही अनोखा फोन लेकर आई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस फोन को चालू रखने या बात करने के लिए न तो किसी सिम कार्ड की जरूरत है और न ही किसी मोबाइल टावर की। इस डिवाइस का नेटवर्क सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट होता है, जिसे विशेष रूप से इमरजेंसी और क्रिटिकल कम्यूनिकेशन के लिए डिजाइन किया गया है।₹1.34 लाख की भारी-भरकम कीमत और इनमारसैट तकनीकयह कोई आम स्मार्टफोन नहीं है जिसे कोई भी राह चलता व्यक्ति खरीद ले। टैक्स (GST) को मिलाकर इस स्पेशल हैंडसेट की कीमत ₹1,34,166 तय की गई है। यह एक 'Inmarsat' (इनमारसैट) सैटेलाइट फोन है। इसे उन कठिन परिस्थितियों और दुर्गम इलाकों के लिए बनाया गया है, जहाँ मोबाइल के पारंपरिक जमीनी नेटवर्क (Terrestrial Networks) का नामोनिशान नहीं होता। इस फोन के जरिए देश के सबसे पिछड़े, घने जंगलों, गहरे समुद्र या ऊंचे पहाड़ी इलाकों से भी सीधे और स्पष्ट वॉयस कॉलिंग की जा सकती है।इन सेक्टर्स और वीआईपी ऑपरेशंस के लिए बनी है यह डिवाइसBSNL ने अपनी आधिकारिक घोषणा में साफ किया है कि यह फोन आम जनता के रेगुलर इस्तेमाल के लिए नहीं है। इस डिवाइस का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाएगा:डिफेंस और सुरक्षा एजेंसियां: सेना और सीमा सुरक्षा बल के जवान।समुद्री ऑपरेशंस (Maritime): गहरे समुद्र में तैनात मर्चेंट नेवी और जहाजों के क्रू मेंबर्स।आपदा प्रबंधन (Disaster Response): बाढ़, भूकंप या चक्रवात के समय जब मोबाइल टावर गिर जाते हैं, तब राहत कार्यों के लिए।माइनिंग और इंडस्ट्रियल साइट्स: जमीन के काफी नीचे या सुदूर रिमोट लोकेशंस पर काम करने वाले इंजीनियर्स।एडवेंचर ट्रैवलर्स और पर्वतारोही: हाई-एल्टीट्यूड ट्रैकिंग और रिस्क जोन में जाने वाले लोग।कठिन हालातों के लिए खास फीचर्स और मजबूत बनावटमहंगा होने के साथ-साथ यह फोन बेहद टिकाऊ और रग्ड (Rugged) फिनिशिंग के साथ आता है:डायरेक्ट सैटेलाइट वॉयस कॉलिंग: बिना किसी सेलुलर नेटवर्क के सीधे आसमान से सिग्नल लेकर बात करने की सुविधा।डेडिकेटेड SOS इमरजेंसी सपोर्ट: किसी भी बड़े संकट या आपातकालीन स्थिति में फंसे होने पर तुरंत मदद बुलाने के लिए इसमें एक खास SOS बटन दिया गया है।बेहद मजबूत बॉडी: इसे अत्यधिक गर्म, बर्फीले या रेतीले और कठिन मौसम में भी बिना खराब हुए काम करने के लिए तैयार किया गया है।दमदार बैटरी बैकअप: बिजली की अनुपलब्धता वाले क्षेत्रों में कई दिनों तक स्टैंडबाय पर रहने के लिए इसमें लंबी चलने वाली बैटरी दी गई है।क्या आम आदमी खरीद सकता है यह फोन? जानिए कानूनी नियमअगर आप सोच रहे हैं कि इसे किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट या मोबाइल शॉप से खरीदा जा सकता है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। भारत में सैटेलाइट फोन रखना या बिना अनुमति इसका इस्तेमाल करना पूरी तरह से गैरकानूनी है और ऐसा करने पर गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसे खरीदने के लिए ग्राहकों को सबसे पहले दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications - DoT) से बकायदा लिखित में परमिशन और ऑथराइजेशन लेटर लेना होगा। इसके बाद ही ग्राहक अपने नजदीकी BSNL ऑफिस से संपर्क कर, वाजिब कारण बताकर इस फोन को ₹1,34,166 में आधिकारिक तौर पर खरीद सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:42 pm

निसान ने दुनिया के लिए पेश की भारत में बनी नई टेकटॉन, कीमत 10.49 लाख रुपए से शुरू

नई दिल्ली। जापानी कार निर्माता कंपनी निसान मोटर की भारतीय इकाई निसान मोटर इंडिया ने गुरुवार को भारत में आयोजित विश्व प्रीमियर के दौरान नयी निसान टेकटॉन बाजार में पेश की। इस साल भारत में पेश किया गया यह निसान का दूसरा नया मॉडल है। यह दो इंजन विकल्पों टर्बो टी160 औ टर्बो टी280 में […] The post निसान ने दुनिया के लिए पेश की भारत में बनी नई टेकटॉन, कीमत 10.49 लाख रुपए से शुरू appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 4:41 pm

Dhamaal 4 Advance Booking: बॉक्स ऑफिस पर अजय देवगन का 'धमाल', एडवांस बुकिंग में बिके हजारों टिकट; ओपनिंग डे पर करेगी बंपर कमाई

बॉलीवुड के 'सिंघम' यानी अजय देवगन एक बार फिर दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट करने के लिए सिनेमाघरों में दस्तक दे रहे हैं। कई बार टलने के बाद आखिरकार उनकी मोस्ट अवेटेड कॉमेडी फिल्म 'धमाल 4' रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है। जुलाई की शुरुआत में रिलीज हुई बड़े बजट की फिल्में 'ऐल्फा' और 'बेबी डू एंड डाई' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं, जिसके बाद अब पूरी फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमाप्रेमियों की उम्मीदें 'धमाल 4' पर टिकी हैं। फिल्म के शुरुआती एडवांस बुकिंग के आंकड़े सामने आ चुके हैं, जो इशारा कर रहे हैं कि थिएटर्स में एक बार फिर दर्शकों का मेला लगने वाला है।एडवांस बुकिंग में 'धमाल 4' की शानदार रफ्तार, बिके 50 हजार से ज्यादा टिकटट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 'धमाल 4' की एडवांस बुकिंग को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने बिना ब्लॉक सीट्स के ऑल इंडिया लेवल पर 1.45 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है, वहीं ब्लॉक सीट्स को शामिल करने पर यह आंकड़ा 5 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। अब तक पहले दिन के लिए फिल्म के 57,000 से ज्यादा टिकट धड़ाधड़ बिक चुके हैं। फिल्म की इस रफ्तार को देखकर ट्रेड एक्सपर्ट्स अनुमान लगा रहे हैं कि यह ओपनिंग डे पर 13 से 16 करोड़ रुपये का दमदार बिजनेस कर सकती है।दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में सबसे ज्यादा क्रेज'धमाल' फ्रेंचाइजी की तगड़ी फैन फॉलोइंग का फायदा फिल्म को प्री-बुकिंग में साफ मिल रहा है। देशभर में फिल्म के लिए करीब 7,894 शोज अलॉट किए जा चुके हैं। अगर शहरों के हिसाब से बात करें तो सबसे ज्यादा दीवानगी दिल्ली-एनसीआर में देखी जा रही है, जहां से फिल्म ने करीब 60 लाख रुपये का बिजनेस कर लिया है। इसके बाद मुंबई सर्किट से 40 लाख रुपये, हैदराबाद से 19 लाख रुपये, बेंगलुरु से 11 लाख रुपये और पुणे-अहमदाबाद जैसे शहरों से 9-9 लाख रुपये की कमाई हो चुकी है।पुरानी पलटन के साथ रवि किशन और ईशा गुप्ता का डबल डोजइस बार की कहानी में वही पुराना पागलपन और बड़ा खजाना ढूंढने का एडवेंचर देखने को मिलने वाला है। फिल्म का निर्देशन दिग्गज डायरेक्टर इंद्र कुमार ने किया है। स्टार कास्ट की बात करें तो अजय देवगन के साथ रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी और संजय मिश्रा जैसे फ्रेंचाइजी के परमानेंट चेहरों की वापसी हुई है। कॉमेडी के इस डोज को और मजेदार बनाने के लिए इस बार भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन, ईशा गुप्ता, संजीदा शेख और अंजलि आनंद की भी एंट्री हुई है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को 'UA 13+' सर्टिफिकेट दिया है।क्या 'टोटल धमाल' का रिकॉर्ड तोड़ पाएगी चौथी किस्त?'धमाल' सीरीज का इतिहास बॉक्स ऑफिस पर हमेशा शानदार रहा है। साल 2007 में आई पहली 'धमाल' ब्लॉकबस्टर रही थी, जिसके बाद 2011 में 'डबल धमाल' और 2019 में आई 'टोटल धमाल' ने भी बंपर कमाई की थी। 'टोटल धमाल' ने अपने पहले दिन 16.50 करोड़ रुपये की ओपनिंग ली थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या अजय देवगन की यह नई फिल्म 'ऐल्फा' की सुस्त रफ्तार का फायदा उठाकर अपने ही पिछले पार्ट का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:37 pm

श्रीगंगानगर : नाबालिग पुत्र की हत्या करने के दोषी पिता को आजीवन कारावास

श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपने ही नाबालिग पुत्र की हत्या करने के आरोपी को गुरुवार को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विपिन बिश्नोई ने अभियुक्त राजकुमार उर्फ निक्कू को शराब के नशे में उसके 13 वर्षीय पुत्र […] The post श्रीगंगानगर : नाबालिग पुत्र की हत्या करने के दोषी पिता को आजीवन कारावास appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 4:37 pm

China Economic News: चीन के सबसे बेबाक अर्थशास्त्री गाओ शानवेन का 55 की उम्र में निधन, चीनी GDP के सरकारी दावों को दी थी खुली चुनौती

चीन की कम्युनिस्ट सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले हस्तियों की संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होने या मौत होने की लिस्ट में अब एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। चीन की अर्थव्यवस्था और कैपिटल मार्केट पर बेहद बेबाक व स्वतंत्र राय रखने वाले 55 वर्षीय दिग्गज मैक्रो-इकोनॉमिस्ट गाओ शानवेन (Gao Shanwen) का निधन हो गया है। चीनी सरकारी मीडिया 'शंघाई सिक्योरिटीज न्यूज' के मुताबिक, उनकी मौत एक गंभीर बीमारी (कैंसर) के चलते हुई है। हालांकि, चीन में सरकार विरोधी सुर अलापने वालों के इतिहास को देखते हुए इस मौत को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।चीनी सरकार के 5% GDP के दावों की निकाल दी थी हवागाओ शानवेन चीन के सबसे प्रभावशाली और प्रसिद्ध संस्थागत अर्थशास्त्रियों में से एक थे। वह सरकारी नियंत्रण वाले इन्वेस्टमेंट ग्रुप 'SDIC सिक्योरिटीज' के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में कार्यरत थे। गाओ सबसे पहले साल 2024 के आखिर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने वाशिंगटन में 'पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स' के एक मंच पर बीजिंग को सीधे चुनौती दे डाली थी। उन्होंने आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि साल 2021 से 2023 के बीच चीन की वास्तविक औसतन GDP ग्रोथ सिर्फ 2 फीसदी के आसपास रही होगी, जबकि चीनी सरकार इसे बढ़ा-चढ़ाकर 5 फीसदी (लगभग 10% संचयी अंतर) बताती रही है।युवाओं की बेरोजगारी पर खोला था मोर्चा, कहा- 'युवा बेजान हैं'अपने दावों को साबित करने के लिए गाओ ने चीन के रोजगार, घरेलू खपत और गहरे रियल एस्टेट संकट के आंकड़ों में भारी हेरफेर का पर्दाफाश किया था। उन्होंने देश में युवाओं की रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी पर गहरी चिंता जताते हुए एक विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि आज के चीन में बुजुर्ग ऊर्जा से भरे हैं और सार्वजनिक जगहों पर नाच रहे हैं, जबकि देश का युवा बेजान हो चुका है और अपनी कमाई घटने के कारण अंधेरे में बैठकर नूडल्स खाने को मजबूर है। उनके इस बयान ने शी जिनपिंग सरकार के उस नैरेटिव की धज्जियां उड़ा दी थीं, जिसमें दावा किया जा रहा था कि युवाओं की खपत से चीन की अर्थव्यवस्था महामारी के बाद तेजी से सुधर रही है।बयान के बाद लगा बैन, नौकरी से भी धोना पड़ा था हाथबीजिंग के आधिकारिक आर्थिक डेटा को इस तरह सरेआम चुनौती देना चीन की सरकार को बिल्कुल रास नहीं आया। इस बयान के ठीक बाद चीनी प्रशासन ने उन पर सख्त कार्रवाई की। गाओ शानवेन के पब्लिक स्पीकिंग और मीडिया इंटरव्यूज पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स, ब्लॉग्स, वीडियो और आर्टिकल्स को चीनी इंटरनेट से पूरी तरह सेंसर या डिलीट कर दिया गया। 'सिक्योरिटीज एसोसिएशन ऑफ चाइना' ने उन्हें सरकार की नीतियों का केवल सकारात्मक प्रचार करने की सख्त हिदायत दी। इसके बाद साल 2025 के अंत में उन्हें उनकी नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया और उनका हांगकांग इन्वेस्टमेंट एडवाइजर लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया।सच बोलने वाले एक और चीनी चेहरे का अंतचीन में लियू शियाओबो (Liu Xiaobo) और ली वांगयांग (Li Wangyang) जैसे कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विचारकों की मौत पहले भी रहस्यमयी हालात में हो चुकी है। चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'वीबो' (Weibo) और 'श्याओहोंगशू' पर लोग गाओ शानवेन को नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। चीन के कड़े सेंसरशिप के बावजूद एक यूजर ने लिखा, चीन में सच बोलने वाला आखिरी अर्थशास्त्री भी चला गया, अब यहाँ सिर्फ सरकार की झूठी तारीफ करने वाले 'आशावादी' चाटुकार ही बचे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:34 pm

झुंझुनूं में पुत्र ने चाकू से वार करके मां को मार डाला

झुंझुनूं। राजस्थान में झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ थाना क्षेत्र में बुधवार को एक व्यक्ति ने मां की चाकुओं के वार से हत्या कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग में बाबू के पद पर पदस्थ राजवीर (28) ने अपनी मां प्रभाती देवी (59) पर चाकुओं के कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर […] The post झुंझुनूं में पुत्र ने चाकू से वार करके मां को मार डाला appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 4:33 pm

Bullet Train Network in India: दिल्ली-एनसीआर बनेगा बुलेट ट्रेन का सबसे बड़ा हब, 2 लाख करोड़ के निवेश से यूपी, बिहार और बंगाल तक दौड़ेगी हाई-स्पीड ट्रेन

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शानदार सफलता के बाद अब केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर को देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का सबसे बड़ा जंक्शन बनाने जा रही है। इस महायोजना के तहत दिल्ली से देश के अलग-अलग कोनों को जोड़ने वाले चार नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का खाका तैयार किया गया है। केंद्रीय बजट में सात प्रमुख हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है, जिस पर सरकार लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने की तैयारी में है।दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी रूट: यूपी के इन शहरों की चमकेगी किस्मतप्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर के जरिए उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, राजनीतिक और औद्योगिक शहरों को आपस में कनेक्ट किया जाएगा। यह आधुनिक रूट दिल्ली से शुरू होकर नोएडा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और न्यू भदोही होते हुए सीधे वाराणसी पहुंचेगी। इतना ही नहीं, लखनऊ को सीधे रामनगरी अयोध्या से जोड़ने के लिए भी 124 से 135 किलोमीटर लंबा एक अलग हाई-स्पीड लिंक बनाने का शानदार प्लान है।देश का सबसे लंबा बुलेट ट्रेन रूट: दिल्ली से सिलीगुड़ी सिर्फ 6 घंटे मेंयह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भारत का सबसे लंबा हाई-स्पीड रेल रूट बनने जा रहा है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इसके सिविल स्ट्रक्चर डिजाइन के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं। पहले से तय दिल्ली-वाराणसी लाइन को अब आगे बढ़ाकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक ले जाया जाएगा। लगभग 1705 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दिल्ली, यूपी के बाद बिहार के बक्सर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी (सिलीगुड़ी) से होकर गुजरेगा। इस रूट पर ट्रेनें 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी, जिससे दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर महज 6 घंटे में पूरा हो जाएगा, जबकि दिल्ली से लखनऊ सिर्फ 2 घंटे 10 मिनट और वाराणसी 3 घंटे 50 मिनट की दूरी पर रह जाएगा।दिल्ली से मुंबई का सफर भी होगा आसानदूसरा बड़ा कॉरिडोर दिल्ली को राजस्थान और गुजरात के रास्ते सीधे आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ेगा। इस रूट पर सफर करने वाले यात्री बिना किसी रुकावट के हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का आनंद ले सकेंगे। इसके तहत द्वारका, बिजवासन, गुरुग्राम, मानेसर, रेवाड़ी, बहरोड़ (नीमराना), शाहपुरा, जयपुर, किशनगढ़ (अजमेर), बिजयनगर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, डूंगरपुर, हिम्मतनगर और साबरमती (अहमदाबाद) जैसे स्टेशनों को शामिल करने का प्रस्ताव है।दिल्ली से कटरा: माता वैष्णो देवी के दर्शन होंगे बेहद आसानधार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली-अमृतसर कॉरिडोर का भी प्लान तैयार है। यह रूट रोहतक, जींद, कैथल, चंडीगढ़, मोहाली, लुधियाना और जालंधर होते हुए अमृतसर पहुंचेगा। भविष्य में इसे जालंधर से पठानकोट होते हुए सीधे जम्मू और कटरा तक विस्तार दिया जाएगा, जिससे वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी और दिल्ली से अमृतसर की दूरी घटकर महज दो घंटे रह जाएगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:32 pm

पटौदी पैलेस का वो सीक्रेट कोना: भाई सैफ के पास है पूरा महल, तो बहन सोहा अली खान क्यों रहती हैं 'जनरेटर रूम' में?

नवाबों के शहर और बॉलीवुड के गलियारों में पटौदी पैलेस की भव्यता के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन इस आलीशान महल के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी भी छिपी है। जहाँ एक तरफ इस विशाल महल के मालिक बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान हैं, वहीं उनकी छोटी बहन सोहा अली खान इस शाही प्रॉपर्टी के उस हिस्से की मालकिन हैं जो कभी जनरेटर रूम हुआ करता था। जी हाँ, सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन आज यह जनरेटर रूम किसी लग्जरी फ्लैट से कम नहीं है।जनरेटर रूम से 2BHK अपार्टमेंट बनने का दिलचस्प किस्सासोहा अली खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्हें यह अनोखा हिस्सा विरासत में कैसे मिला। दरअसल, साल 2005 से 2014 के बीच जब पटौदी पैलेस को 'नीमराना होटल्स' चेन को लीज पर दिया गया था, तब सोहा के माता-पिता यानी मंसूर अली खान पटौदी और शर्मिला टैगोर को पैलेस में रहने के लिए एक निजी जगह की जरूरत थी। उस समय पैलेस के पुराने जनरेटर रूम को मॉडिफाई करके एक बेहद खूबसूरत और आरामदायक 2BHK अपार्टमेंट में बदल दिया गया। सोहा कहती हैं, होटल के समय मेरे माता-पिता इसी जगह शिफ्ट हो गए थे और आज यह खूबसूरत प्रॉपर्टी मेरी है, जिसके रखरखाव का पूरा खर्च मैं खुद उठाती हूँ।शाही महल में पेंट नहीं, आज भी होती है सफेदी; जानिए क्यों?भारत के सबसे महंगे और मशहूर शाही घरों में शुमार होने के बावजूद, पटौदी परिवार दिखावे से ज्यादा व्यावहारिकता पर भरोसा करता है। सोहा ने बताया कि उनकी माँ शर्मिला टैगोर आज भी खुद पटौदी पैलेस का पाई-पाई का हिसाब रखती हैं। बजट को कंट्रोल में रखने के लिए इस महल की दीवारों पर महंगा पेंट कराने के बजाय आज भी पारंपरिक सफेदी (चुना) कराई जाती है, क्योंकि यह काफी सस्ती पड़ती है। सालों से यहाँ कोई फिजूलखर्ची या नई चीजें नहीं खरीदी गईं, बल्कि इसकी पुरानी ऐतिहासिक बनावट को ही सहेज कर रखा गया है।सैफ अली खान ने भारी रकम चुकाकर वापस पाया अपना हकमंसूर अली खान पटौदी के निधन के बाद सैफ अली खान ने होटल चेन से लीज को खत्म करवाया और करोड़ों रुपये की डील के बाद इस पैलेस को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। सैफ अली खान के मुताबिक, उनकी दादी हमेशा कहती थीं कि इस ऐतिहासिक धरोहर को कभी कमर्शियल होटल नहीं बनने देना चाहिए, क्योंकि इसका अपना एक गौरवशाली इतिहास है।इसी जमीन में दफन है पटौदी खानदान का इतिहाससैफ और सोहा के लिए यह पैलेस महज एक आलीशान बंगला नहीं बल्कि भावनाओं का समंदर है। इसी पैलेस के परिसर में सैफ-सोहा के दादा-दादी और उनके पिता मंसूर अली खान पटौदी की कब्रें मौजूद हैं। आज यह महल पटौदी परिवार का प्राइवेट हॉलिडे होम है, जिसे कभी-कभी चुनिंदा बॉलीवुड फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए किराए पर दिया जाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:31 pm

IMD Rain Alert: भारी बारिश के चलते यूपी, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में स्कूल बंद, घर से निकलने से पहले जानें अपने जिले का हाल

देश के कई राज्यों में मानसून की भारी बारिश ने आफत खड़ी कर दी है। मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी मूसलाधार बारिश के अलर्ट को देखते हुए कई राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में छुट्टी का ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया पर पूरे देश में स्कूल बंद होने की खबरें तैर रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि यह आदेश केवल भारी जलभराव और रेड/ऑरेंज अलर्ट वाले प्रभावित जिलों में ही लागू है।गाजियाबाद और पश्चिमी यूपी में स्कूल बंदउत्तर प्रदेश के गाजियाबाद समेत कई पश्चिमी और पूर्वी जिलों में बादलों का डेरा है। गाजियाबाद जिला प्रशासन ने मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूलों को बंद रखने का सख्त आदेश जारी किया है। प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस गाइडलाइन का पालन करें।उत्तराखंड और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरापहाड़ी राज्य उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश आफत बन कर बरस रही है। देहरादून, नैनीताल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन (Landslide) और रास्ते बंद होने की आशंका को देखते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है।दिल्ली-एनसीआर और कर्नाटक में ऑरेंज अलर्टदिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में झमाझम बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बन गई है। दिल्ली और एनसीआर के कुछ प्रभावित इलाकों में ऐहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं, जहां प्रशासन ने ऑरेंज अलर्ट जारी कर लोगों को बिना वजह घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। वहीं दक्षिण भारत के कर्नाटक में भी शिवमोग्गा समेत भारी बारिश वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर स्कूल बंद कर दिए गए हैं।मुंबई और गुजरात में रेड अलर्टमहाराष्ट्र की राजधानी मुंबई और गुजरात के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण रेड अलर्ट जारी है। इन राज्यों के प्रभावित जिलों में भी सुरक्षा के मद्देनजर स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का निर्देश दिया गया है। अभिभावकों और छात्रों से अनुरोध है कि वे किसी भी सोशल मीडिया अफवाह पर भरोसा न करें और केवल अपने स्थानीय शिक्षा विभाग या स्कूल प्रबंधन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना को ही सही मानें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:25 pm

झारखंड के 18 जिलों में मानसून का 'अलर्ट मोड': तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश की चेतावनी, वज्रपात से रहें सावधान

झारखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। मौसम विभाग ने राज्य के 18 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें रांची और धनबाद जैसे प्रमुख शहर भी शामिल हैं। अगले कुछ घंटों में इन इलाकों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं चलने और वज्रपात (बिजली गिरने) की भी चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण लेने से बचें।किन जिलों पर है सबसे ज्यादा असर?मौसम विभाग के अनुसार, रांची, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, रामगढ़, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, जामताड़ा, देवघर, दुमका और पाकुड़ जिलों में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। इन क्षेत्रों में मेघ गर्जन के साथ आंधी-तूफान की आशंका बनी हुई है। कृषि कार्य में लगे किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। खेत में काम करते समय यदि बादल गरजते दिखें, तो तुरंत पक्के मकान या सुरक्षित स्थान की ओर चले जाना ही समझदारी है।सावधानी ही बचाव: विभाग की एडवाइजरीलगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होने की आशंका है। मौसम केंद्र ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें। बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए मोबाइल फोन का उपयोग करते समय भी सावधानी बरतें और खुले मैदान में जाने से परहेज करें। विभाग द्वारा जारी यह अलर्ट अगले 24 से 48 घंटों तक प्रभावी रहने की उम्मीद है, जिसके बाद स्थिति का आकलन कर आगे की जानकारी दी जाएगी।तापमान में गिरावट से मिली राहतमानसून की इस सक्रियता के कारण लंबे समय से भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे झारखंडवासियों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई है। हालांकि, यह बारिश न केवल तापमान को नियंत्रित करने में सहायक है, बल्कि आने वाले खरीफ सीजन की फसलों के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जा रही है। किसान मानसून के इस दौर को फसलों के लिए 'जीवनदान' मान रहे हैं, बशर्ते वज्रपात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव रहे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:22 pm

झारखंड में AI क्रांति का आगाज: ₹1150 करोड़ के मेगा प्लान से बदलेंगी सूरत, युवाओं को मिलेंगी 1 लाख नई नौकरियां

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य के भविष्य को तकनीक की नई ऊंचाई देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बदलाव लाने के लिए ₹1150 करोड़ के एक महत्वाकांक्षी मेगा प्लान को मंजूरी दी गई है। इस पहल का सीधा लक्ष्य न केवल प्रशासनिक और औद्योगिक कार्यों को आधुनिक बनाना है, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलना भी है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से सरकार अगले कुछ वर्षों में 1 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जो झारखंड को एक नई पहचान दिलाएगा।क्या है हेमंत सरकार का 'AI विजन'?राज्य सरकार का यह मेगा प्लान मुख्य रूप से 'स्किल इंडिया' और 'डिजिटल झारखंड' के विजन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के लागू होने से झारखंड देश के प्रमुख 'टेक हब' की दौड़ में शामिल हो जाएगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि तकनीक केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका लाभ युवाओं तक पहुंचे, जिससे पलायन की समस्या पर भी लगाम लग सके।1 लाख युवाओं के लिए रोजगार का सुनहरा मौकाइस योजना की सबसे बड़ी खूबी इसमें शामिल 'रोजगार सृजन' का पहलू है। ₹1150 करोड़ की इस परियोजना से डेटा एनालिटिक्स, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, मशीन लर्निंग और AI आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे राज्य के युवाओं को अपने ही गृह राज्य में बेहतर वेतन वाली नौकरियां मिल सकेंगी। सरकार युवाओं को AI और अत्याधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करने के लिए विशेष सेंटर भी खोलने की तैयारी में है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर तकनीकी प्रतिभाओं का विकास होगा, बल्कि झारखंड के युवाओं के लिए वैश्विक स्तर के अवसर भी पैदा होंगे।झारखंड के भविष्य के लिए एक 'गेम चेंजर'झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य में यह पहल एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य अब तकनीक और नवाचार की ओर कदम बढ़ा रहा है। इस मेगा प्लान से न केवल राज्य का जीडीपी (GDP) बढ़ेगा, बल्कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और तेजी भी आएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना का लाभ आगामी वर्षों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री की इस बड़ी पहल ने प्रदेश के युवाओं में एक नई ऊर्जा का संचार किया है और वे अब तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर संवारने के लिए उत्साहित हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 4:21 pm

Honda WN7 Electric Motorcycle : पहली फुल-साइज इलेक्ट्रिक बाइक, 140KM की रेंज और 30 मिनट में फास्ट चार्जिंग

जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी Honda ने यूरोप में अपनी पहली फुल-साइज इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल WN7 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह बाइक अब यूरोप के डीलरशिप पर उपलब्ध है और इसके साथ ही कंपनी ने प्रीमियम इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में कदम रख दिया है।

वेब दुनिया 9 Jul 2026 4:21 pm

'ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखाई भारत की ताकत', मेलबर्न में भारतीयों से बोले पीएम मोदी; टॉप-3 इकोनॉमी बनने का दोहराया लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर, भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध, विकसित भारत, टॉप-3 अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य और भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान पर विस्तार से बात की। जानिए उनके भाषण की प्रमुख ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 4:05 pm

भाजपा की सबसे बड़ी ताकत और खतरा क्या? 4 पॉइंट्स में समझें सियासी समीकरण, विपक्ष की चुनौती से बढ़ी बीजेपी की धुकधुकी

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। 2024 के लोकसभा चुनावों में मिले झटकों के बाद भाजपा अब अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए 'एक्शन मोड' में है। वहीं, विपक्षी खेमे में 'PDA' की राजनीति और कांग्रेस के नए तेवर सत्ताधारी दल के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। आखिर 2027 का रण किसके लिए कितना मुश्किल और आसान है? आइए इसे 4-4 प्रमुख बिंदुओं में समझते हैं।भाजपा की सबसे बड़ी 'ताकत' (Strength)संगठनात्मक ढांचा: भाजपा का बूथ-स्तर तक फैला नेटवर्क देश में सबसे मजबूत माना जाता है। शक्ति केंद्र संयोजकों और सक्रिय कार्यकर्ताओं की फौज पार्टी के लिए सबसे बड़ी बैकबोन है।नेतृत्व और चेहरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्माई नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'लॉ एंड ऑर्डर' मॉडल आज भी ग्रामीण और शहरी इलाकों में पार्टी की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है।कल्याणकारी योजनाएं: केंद्र और राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ आम जनता तक पहुँचाना पार्टी की चुनावी तैयारी का मुख्य आधार है, जो वोट बैंक को साधे रखने में मदद करता है।NDA का एकजुट मोर्चा: निषाद पार्टी, अपना दल (एस), आरएलडी (RLD) और सुभासपा जैसे सहयोगियों के साथ भाजपा अपने सामाजिक समीकरणों को और अधिक समावेशी बनाने की कोशिश कर रही है।भाजपा के सामने 'खतरे' और चुनौतियां (Challenges)बेरोजगारी और पेपर लीक: भर्ती परीक्षाओं में हो रही धांधली और बेरोजगारी का मुद्दा युवाओं के बीच भाजपा के खिलाफ एक बड़ा असंतोष पैदा कर रहा है, जो चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है।महंगाई और सत्ता-विरोधी लहर: 10 साल के शासन के बाद स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) का सामना करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे कम करना आसान नहीं होगा।जातिगत समीकरण और PDA: अखिलेश यादव का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला जातियों की एकजुटता को तोड़ रहा है, जिससे बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक छिटकने का खतरा बना हुआ है।विपक्ष की '3 नंबर' की चुनौती: विपक्षी गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) की बढ़ती आक्रामकता, खासकर कांग्रेस का नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरना और सीटों के बंटवारे पर 'सम्मानजनक' रुख, बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।चुनावी भविष्य का विश्लेषणराजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 का चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि 'नैरेटिव' की लड़ाई है। बीजेपी जहाँ अपनी पुरानी जीत के रिकॉर्ड को तोड़कर 'उत्तम प्रदेश' का संकल्प दोहरा रही है, वहीं विपक्ष संविधान और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर जमीन पर मजबूत तैयारी कर रहा है। '3 नंबर' यानी विपक्ष का एकजुट होकर लड़ना बीजेपी के लिए वह खतरे की घंटी है जिसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रहा। पार्टी के नए संगठन प्रमुख नितिन नबिन के दौरे और बैठकों से यह स्पष्ट है कि भाजपा अब किसी भी स्तर पर चूक नहीं करना चाहती।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 3:37 pm

राम मंदिर ट्रस्ट में यतींद्र मोहन मिश्रा की एंट्री की चर्चा तेज, संत बोले- आंदोलन में रही है बड़ी भूमिका

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक नाम ने अचानक सुर्खियां बटोर ली हैं। राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में चर्चा है कि मशहूर लेखक और विचारक यतींद्र मोहन मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इस चर्चा ने तब और जोर पकड़ लिया जब अयोध्या के कई प्रमुख संतों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने उनके नाम का समर्थन करते हुए राम मंदिर आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। आखिर कौन हैं यतींद्र मोहन मिश्रा और उनकी दावेदारी को लेकर क्यों हो रही है इतनी चर्चा, आइए विस्तार से जानते हैं।कौन हैं यतींद्र मोहन मिश्रा?यतींद्र मोहन मिश्रा एक प्रसिद्ध हिंदी कवि, लेखक, संपादक और कला समीक्षक हैं। अयोध्या में पले-बढ़े यतींद्र मोहन ने भारतीय शास्त्रीय संगीत, कला और संस्कृति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं। 'अमर उजाला' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे और साहित्य के क्षेत्र में 'भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार' जैसे सम्मान पा चुके यतींद्र मोहन का अयोध्या के सांस्कृतिक और बौद्धिक विमर्श में एक बड़ा नाम है। अयोध्या की परंपराओं, वहां के इतिहास और राम कथा के मर्म को समझने वाले विद्वानों में उनकी गिनती होती है।राम मंदिर आंदोलन और यतींद्र मोहन का योगदानअयोध्या के संतों का कहना है कि यतींद्र मोहन मिश्रा केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि उस लंबी वैचारिक लड़ाई के सिपाही रहे हैं, जिसने राम मंदिर के लिए आधार तैयार किया। संतों के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन के दौरान जब यह मुद्दा केवल सड़कों का संघर्ष नहीं, बल्कि बौद्धिक और कानूनी लड़ाई भी था, तब यतींद्र मोहन ने अपनी लेखनी और विचारों के माध्यम से इसे तार्किक रूप से स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके इसी बौद्धिक योगदान के कारण अब उन्हें ट्रस्ट में शामिल करने की मांग उठ रही है ताकि मंदिर की व्यवस्था और उसकी सांस्कृतिक भव्यता को और बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।ट्रस्ट में शामिल होने के क्या हैं मायने?यदि यतींद्र मोहन मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट का हिस्सा बनते हैं, तो यह ट्रस्ट के लिए एक बड़ा बदलाव माना जाएगा। अभी तक ट्रस्ट में अधिकतर प्रशासनिक और धार्मिक हस्तियां शामिल हैं। यतींद्र मोहन के आने से ट्रस्ट में साहित्य, कला और सांस्कृतिक चेतना का एक नया आयाम जुड़ेगा। राम मंदिर न केवल एक पूजा स्थल है, बल्कि भारतीय संस्कृति का केंद्र भी है, और यतींद्र मोहन का अनुभव मंदिर के भविष्य की योजनाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रबंधन में मील का पत्थर साबित हो सकता है। फिलहाल, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन अयोध्या की हवाओं में यह नाम चर्चा का विषय बना हुआ है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 3:36 pm

यूपी चुनाव का बिगुल: 'सपा-कांग्रेस को कब्रिस्तान पसंद है', अखिलेश के राम मंदिर चंदा चोरी वाले तंज पर सीएम योगी का तीखा पलटवार

उत्तर प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग अब अपने चरम पर पहुंच गई है। आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे से ठीक पहले विपक्ष पर बड़ा सियासी हमला बोला है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए 'राम मंदिर चंदा चोरी' के गंभीर आरोपों पर पलटवार करते हुए सीएम योगी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया है। उन्होंने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस को प्रदेश का विकास नहीं, बल्कि 'कब्रिस्तान' पसंद है। सीएम के इस एक बयान ने यूपी की राजनीति में चुनावी एजेंडा पूरी तरह से सेट कर दिया है।अयोध्या दौरे से पहले सेट किया हिंदुत्व का एजेंडाराम नगरी अयोध्या के अपने अहम दौरे से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों और चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, सीएम योगी ने अपने इस पलटवार से स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनावों में बीजेपी का मुख्य फोकस राम मंदिर, सुशासन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर ही रहने वाला है। अयोध्या में चल रहे ऐतिहासिक विकास कार्यों का जायजा लेने से पहले विपक्ष पर उनका यह प्रहार, सीधे तौर पर सपा और कांग्रेस की पुरानी नीतियों को घेरने की एक बड़ी कोशिश है।अखिलेश के 'चंदा चोरी' वाले बयान का करारा जवाबदरअसल, इस पूरी सियासी खींचतान की शुरुआत तब हुई जब पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित धांधली और चोरी का आरोप लगाया था। इसी का जवाब देते हुए सीएम योगी ने अखिलेश यादव और कांग्रेस को एक ही कटघरे में खड़ा कर दिया। 'कब्रिस्तान' शब्द का इस्तेमाल कर सीएम योगी ने सीधे तौर पर विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है, और जनता को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि पिछली सरकारों के दौरान किन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाती थी।यूपी चुनाव: तुष्टिकरण बनाम विकास के मुद्दे पर आर-पार की जंगउत्तर प्रदेश की सियासत में तुष्टिकरण और ध्रुवीकरण का मुद्दा हमेशा से हावी रहा है। आधुनिक जनरेटिव एआई (AI) सर्च और डिजिटल मीडिया के इस दौर में नेताओं के बयान मिनटों में वायरल होकर जनता का मूड सेट करते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम योगी का यह बयान यूपी चुनाव में नैरेटिव को पूरी तरह बदल देगा। एक तरफ विपक्ष राम मंदिर के नाम पर बीजेपी को घेरने की जुगत में है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल ने विपक्ष को उनके पुराने कार्यकाल के 'कब्रिस्तान और श्मशान' वाले विवादों में घसीट कर अपना चुनावी एजेंडा साफ कर दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 3:34 pm

कभी हरी तो कभी गुलाबी: भारत की रहस्यमयी झील का विज्ञान, जिसने वैज्ञानिकों को भी कर दिया है हैरान

भारत की प्राकृतिक संपदाओं में कई ऐसी जगहें हैं जो आज भी किसी अजूबे से कम नहीं हैं। महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित 'लोनार झील' दुनिया भर में अपनी अनूठी विशेषताओं के लिए जानी जाती है। यह न केवल एक प्राचीन उल्कापिंड के गिरने से बनी झील है, बल्कि इसका पानी समय-समय पर अपना रंग बदलकर गुलाबी या हरा हो जाता है। लोग इसे अक्सर किसी चमत्कार या धार्मिक मान्यता से जोड़ते हैं, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आखिर यह झील अपना रंग क्यों बदलती है, तो यह लेख आपके लिए है।आखिर क्यों बदलता है झील का रंग?वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, लोनार झील के रंग बदलने के पीछे मुख्य कारण इसमें मौजूद 'हेलोआर्चिया' (Haloarchaea) नामक सूक्ष्म जीव और खारापन है। जब झील के पानी का तापमान बढ़ता है और पानी का स्तर कम होता है, तो खारेपन की मात्रा काफी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में, पानी में मौजूद सूक्ष्म जीव और शैवाल (Algae) तेजी से पनपने लगते हैं और वे लाल या गुलाबी रंग का पिगमेंट छोड़ते हैं। यही वजह है कि अचानक से झील का नीला-हरा पानी गुलाबी या लाल नजर आने लगता है।उल्कापिंड से जुड़ा है इतिहासलोनार झील का निर्माण लगभग 52,000 साल पहले एक विशाल उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था। यह दुनिया की सबसे पुरानी बेसाल्टिक चट्टानों में बनी उल्कापिंडीय झील है। वैज्ञानिकों ने जब इस पानी का परीक्षण किया, तो पाया कि इसका क्षारीय (Alkaline) स्तर बहुत अधिक है। यह झील न केवल पर्यटकों के लिए, बल्कि शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी रहती है, क्योंकि यह पृथ्वी के प्रारंभिक पर्यावरण और अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी के दुर्लभ प्रमाण देती है।पर्यटन और शोध का केंद्रलोनार झील अब एक प्रमुख भू-वैज्ञानिक विरासत स्थल (Geo-heritage site) के रूप में विकसित हो चुकी है। हर साल दुनिया भर से भूगोल प्रेमी और पर्यटक यहाँ की अनूठी पारिस्थितिकी को देखने आते हैं। यहाँ की जैव विविधता इतनी समृद्ध है कि आसपास के क्षेत्र में कई दुर्लभ पक्षी और वनस्पतियां भी पाई जाती हैं। हालांकि, झील के संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों ने समय-समय पर चेतावनी दी है ताकि इसका इकोसिस्टम बना रहे। यदि आप महाराष्ट्र की यात्रा कर रहे हैं, तो बुलढाणा जिले का यह रहस्यमयी स्थल आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 3:18 pm

बारिश में स्वर्ग जैसा अहसास: अलवर की सिलीसेढ़ झील, जहाँ बोटिंग और हरियाली बना देगी आपकी ट्रिप यादगार

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सिलीसेढ़ झील मानसून के दौरान किसी जन्नत से कम नहीं लगती। अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसी यह झील बारिश में अपनी खूबसूरती के नए रंग बिखेरती है। चारों तरफ फैली हरियाली, बादलों से घिरी हुई पहाड़ियाँ और झील के शांत पानी में बोटिंग का अनुभव इस जगह को राजस्थान के सबसे पसंदीदा मानसून टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से एक बनाता है। अगर आप प्रकृति की शांति और सुकून भरी ट्रिप की तलाश में हैं, तो सिलीसेढ़ झील इस वीकेंड के लिए आपके लिए बेस्ट स्पॉट है।मानसून में जादुई हो जाती है सिलीसेढ़ की खूबसूरतीबारिश के मौसम में यहाँ का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। झील के चारों ओर अरावली की चोटियों पर छाई धुंध और पहाड़ों से गिरते छोटे-छोटे झरने किसी पेंटिंग की तरह दिखते हैं। पानी का स्तर बढ़ने के साथ ही इसका किनारा और भी अधिक मनमोहक हो जाता है। यहाँ का वातावरण इतना ठंडा और ताजी हवाओं से भरा होता है कि यहाँ पहुँचते ही शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी का तनाव पल भर में छूमंतर हो जाता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए मानसून में यह जगह किसी वरदान से कम नहीं है।बोटिंग और शानदार व्यू का आनंदसिलीसेढ़ झील की असली पहचान यहाँ की बोटिंग है। झील के नीले पानी के बीच बोट की सवारी करना एक अद्भुत अनुभव है। मानसून में जब चारों ओर हरियाली और ठंडी हवाएं चलती हैं, तो बोटिंग का मज़ा दोगुना हो जाता है। झील के किनारे बना 'लेक पैलेस' होटल इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगाता है। आप यहाँ बैठकर चाय और पकौड़ों के साथ बारिश का लुत्फ उठा सकते हैं। परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए इससे बेहतर जगह अलवर के पास और कोई नहीं है।कैसे पहुँचें और यात्रा के टिप्सअलवर शहर से सिलीसेढ़ झील की दूरी महज 15-20 किलोमीटर है, जहाँ आप अपनी कार या टैक्सी से आसानी से पहुँच सकते हैं। दिल्ली या जयपुर से आने वाले पर्यटकों के लिए अलवर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी पॉइंट है। मानसून में यहाँ भीड़ थोड़ी ज्यादा हो सकती है, इसलिए बेहतर होगा कि आप सुबह जल्दी पहुँचें। झील परिसर के पास खाने-पीने के अच्छे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन साथ में कुछ जरूरी सामान और छाता जरूर रखें ताकि बारिश में आपकी ट्रिप में कोई बाधा न आए। यह जगह वीकेंड गेटअवे के लिए एक बेहतरीन विकल्प है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 3:16 pm

कूड़े के ढेर से बना 'ग्रीन पैराडाइज': नोएडा का यह अनूठा पार्क जल संरक्षण और खूबसूरती की बनी नई मिसाल

क्या आपने कभी सोचा है कि कचरे से पटे एक बदबूदार इलाके को शहर का सबसे खूबसूरत 'ईको-पार्क' बनाया जा सकता है? नोएडा के सेक्टर-91 स्थित यह पार्क आज शहर की एक ऐसी पहचान बन चुका है, जो न केवल हरियाली का स्वर्ग है, बल्कि जल संरक्षण की एक अद्भुत मिसाल भी पेश कर रहा है। कभी कूड़े के ढेरों से घिरी यह जगह आज हजारों पेड़-पौधों और वन्यजीवों का सुरक्षित ठिकाना बन चुकी है, जिसे देखकर शहर के अन्य इलाकों के लिए भी प्रेरणा की एक नई किरण जगी है।कचरे से कंचन: कूड़े के पहाड़ का कायाकल्पएक समय था जब इस क्षेत्र में सिर्फ गंदगी और कूड़े के ढेर नजर आते थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों की मेहनत ने इसे पूरी तरह से बदल दिया है। यहाँ कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निपटाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को वापस लौटाया गया। आज यहाँ सघन वृक्षारोपण के कारण एक छोटा सा जंगल विकसित हो चुका है, जो शहर के बढ़ते प्रदूषण के बीच शुद्ध ऑक्सीजन का केंद्र बना हुआ है। लोग यहाँ सुबह-शाम टहलने के लिए आते हैं और पर्यावरण की शुद्धता का अहसास करते हैं।जल संरक्षण की अनूठी तकनीकइस पार्क की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका 'वाटर हार्वेस्टिंग' सिस्टम है। यहाँ बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पार्क के चारों ओर बने तालाब और जल निकासी की व्यवस्था इस तरह से की गई है कि पानी जमीन के अंदर जाकर भूजल स्तर को रिचार्ज करता है। यह न केवल आसपास के इलाकों में पानी की कमी को दूर करने में मदद कर रहा है, बल्कि भीषण गर्मी में भी पौधों को जीवित रखने में सहायक सिद्ध हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए यह मॉडल पूरे देश के लिए एक केस स्टडी बन सकता है।खरगोशों की अठखेलियां और पर्यटन का केंद्रइस पार्क में हरियाली और जल संरक्षण के अलावा एक और खास आकर्षण है, जो बच्चों और बड़ों का मन मोह लेता है—यहाँ की खरगोश कॉलोनी! पार्क के विशेष क्षेत्रों में खरगोशों को स्वच्छंद रूप से घूमते और अठखेलियां करते देखना किसी एडवेंचर से कम नहीं है। प्राकृतिक वातावरण में इन नन्हें जीवों का बसेरा यह साबित करता है कि अगर हम प्रकृति को सहेजें, तो वह हमें दोगुना लौटाती है। यह पार्क अब न केवल एक पिकनिक स्पॉट है, बल्कि नोएडा का प्रमुख ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन भी बन चुका है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 3:15 pm

गडग में मानसिक रूप से दिव्यांग महिला से बार-बार रेप, प्रेगनेंट होने पर खुला राज

गडग। कर्नाटक के गडग जिले में मानसिक रूप से एक दिव्यांग युवती के साथ कथित तौर पर बार-बार दुष्कर्म करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पीड़िता लगभग छह महीने की गर्भवती पाई गई है, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार रोना तालुक के […] The post गडग में मानसिक रूप से दिव्यांग महिला से बार-बार रेप, प्रेगनेंट होने पर खुला राज appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 3:06 pm

मानसून में जामुन का कमाल: इम्यूनिटी से लेकर दिल की सेहत तक, जानें क्यों है यह 'सुपरफूड' और किन लोगों को है सावधानी बरतने की जरूरत

बरसात का मौसम आते ही बाजारों में बैगनी रंग के रसीले जामुन दिखने लगते हैं। स्वाद में खट्टे-मीठे और सेहत के गुणों से भरपूर जामुन को आयुर्वेद में मानसून का सबसे बेहतरीन 'सुपरफूड' माना जाता है। न केवल इसका स्वाद लाजवाब है, बल्कि यह शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है। हालांकि, इतने फायदों के बावजूद हर किसी के लिए जामुन खाना सही नहीं होता। चलिए जानते हैं कि जामुन आपके स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है और मानसून में किन लोगों को इसे खाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।इम्यूनिटी बूस्टर और हृदय का रक्षकजामुन विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स का पावरहाउस है। मानसून के दौरान जब वायरस और बैक्टीरिया का खतरा बढ़ जाता है, तब जामुन का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें मौजूद पोटेशियम और मैग्नीशियम हृदय को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, जो रक्तचाप को नियंत्रित करने और धमनियों को सुचारू रखने में सहायक होते हैं। इसका नियमित सेवन शरीर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ ही ऊर्जा का स्तर भी बनाए रखता है।शुगर कंट्रोल और पाचन में जादुई प्रभावमधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए जामुन किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें मौजूद 'जामुनलीन' नामक तत्व ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोकने में मदद करता है। इसके अलावा, जामुन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। बरसात में अक्सर होने वाली पेट संबंधी समस्याओं, जैसे अपच या दस्त में भी जामुन का सीमित सेवन राहत पहुँचा सकता है। इसमें मौजूद आयरन की प्रचुर मात्रा एनीमिया के रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होती है।सावधान! इन लोगों के लिए मुसीबत बन सकते हैं जामुनजामुन के फायदों के बाद यह जानना भी जरूरी है कि कुछ लोगों को इससे परहेज क्यों करना चाहिए। खाली पेट जामुन का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इससे पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा, जिन लोगों को हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर लेवल कम होना) की समस्या है, उन्हें जामुन खाने से बचना चाहिए क्योंकि यह शुगर को और कम कर सकता है। साथ ही, बहुत अधिक मात्रा में जामुन खाने से जोड़ों में दर्द या गले में खराश जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। हमेशा याद रखें कि जामुन को दूध के साथ या दूध पीने के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:43 pm

बारामूला में यूएपीए मामले में जांच के तहत छापेमारी, पुलिस ने डिजिटल उपकरण किए सीज

जम्मू-कश्मीर की बारामूला पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए ) से जुड़े एक मामले की जांच के तहत जिले में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। मौके से कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं।

देशबन्धु 9 Jul 2026 2:42 pm

40 की उम्र के बाद दिल की सेहत का रखें ख्याल: हार्ट अटैक से बचने के लिए कार्डियोलॉजिस्ट की बताई ये 7 आदतें बदल देंगी आपकी जिंदगी

बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कार्यक्षमता और हृदय की धमनियों में बदलाव आना स्वाभाविक है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, 40 की उम्र का पड़ाव वह समय होता है जब आपके हृदय की कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव और खान-पान में अनियमितता के कारण आजकल कम उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि यदि आप 40 के बाद अपनी जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव कर लें, तो दिल की बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं वे 7 जरूरी आदतें जो आपके दिल को लंबे समय तक जवान और स्वस्थ रखेंगी।रोजाना 30 मिनट का व्यायाम और सक्रियतादिल को स्वस्थ रखने का सबसे पहला मंत्र है शारीरिक सक्रियता। रोजाना कम से कम 30 मिनट का तेज चलना (ब्रिस्क वॉकिंग), योग, या कोई भी एरोबिक एक्सरसाइज हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। यह न केवल रक्तचाप को नियंत्रित रखता है, बल्कि कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। यदि आप जिम नहीं जा सकते, तो सीढ़ियां चढ़ना या घर के काम में सक्रिय रहना भी हृदय गति के लिए फायदेमंद हो सकता है।खान-पान में सात्विक और पोषक तत्वों का संतुलनदिल की सेहत सीधे आपकी थाली से जुड़ी है। 40 के बाद अपने आहार से अत्यधिक नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट (जैसे तली-भुनी चीजें) को बाहर का रास्ता दिखाएं। अपनी डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और फलों को शामिल करें। अधिक फाइबर वाला भोजन धमनियों में ब्लॉकेज होने से रोकता है और हृदय तक रक्त का प्रवाह सुचारू बनाए रखता है।तनाव मुक्त जीवन के लिए योग और मेडिटेशनआज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव हार्ट अटैक का एक बड़ा कारण बन गया है। मानसिक तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो हृदय की धमनियों पर दबाव डालता है। दिन में कम से कम 10 से 15 मिनट का ध्यान (मेडिटेशन) या डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। यह आपके नर्वस सिस्टम को शांत करता है और ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने में मदद करता है।नियमित हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंगअक्सर हृदय संबंधी समस्याएं शुरुआती दौर में कोई लक्षण नहीं दिखातीं। 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार फुल बॉडी चेकअप जरूर करवाएं। लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की नियमित मॉनिटरिंग आपको किसी भी संभावित खतरे के प्रति पहले से सचेत कर सकती है। समय पर पहचान ही हार्ट अटैक जैसी आपातकालीन स्थिति से बचने का सबसे प्रभावी रास्ता है।धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरीतंबाकू, धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन हृदय की धमनियों को अंदर से सख्त और कमजोर बना देता है। यह धमनियों में प्लाक जमने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए इन व्यसनों का पूरी तरह से त्याग करना ही एकमात्र विकल्प है।पर्याप्त नींद है अनिवार्यनींद की कमी का सीधा असर आपके हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है। जो लोग रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद नहीं ले पाते, उनमें उच्च रक्तचाप और हृदय रोग होने की संभावना अधिक होती है। सोते समय शरीर खुद की मरम्मत करता है और हृदय को आराम मिलता है। इसलिए, रात में जल्दी सोने और सुबह समय पर उठने की आदत डालें।वजन पर नियंत्रण और बॉडी मास इंडेक्स (BMI)बढ़ता हुआ वजन, विशेषकर पेट के आसपास की चर्बी, मेटाबॉलिक सिंड्रोम का संकेत है जो सीधे हृदय पर दबाव डालता है। अपना बीएमआई (BMI) चेक करते रहें और इसे एक स्वस्थ सीमा के भीतर बनाए रखें। वजन नियंत्रित रहने से हृदय को शरीर में रक्त पंप करने के लिए अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती, जिससे इसकी उम्र बढ़ती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:40 pm

वन तुलसी के जादुई फायदे: सर्दी-खांसी से लेकर त्वचा रोगों का रामबाण इलाज, एक्सपर्ट ने बताए इसके अचूक गुण

आयुर्वेद में 'वन तुलसी' को साक्षात औषधि का भंडार माना गया है। सामान्य तुलसी से भिन्न, यह दुर्लभ जड़ी-बूटी जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पनपती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो वन तुलसी न केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में सक्षम है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ भी एक सुरक्षा कवच का काम करती है। यदि आप भी प्राकृतिक उपचार में रुचि रखते हैं, तो वन तुलसी के ये औषधीय गुण आपके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।सर्दी, खांसी और सांस संबंधी रोगों में असरदारबदलते मौसम के साथ होने वाली सर्दी, जुकाम और सूखी खांसी में वन तुलसी का सेवन बेहद राहत प्रदान करता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल तत्व श्वसन नली में जमा कफ को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसके पत्तों का काढ़ा या चाय पीने से गले की खराश दूर होती है और फेफड़ों को मजबूती मिलती है। अस्थमा और सांस से जुड़ी अन्य परेशानियों में भी इसके अर्क का नियमित सेवन जादुई असर दिखाता है।त्वचा रोगों और संक्रमण से बचाववन तुलसी के पत्तों में एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि यह त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे दाद, खाज, खुजली और एक्जिमा में अत्यंत कारगर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाने से संक्रमण फैलने से रुकता है और त्वचा जल्दी ठीक होने लगती है। यह त्वचा को गहराई से डिटॉक्स करने का भी कार्य करती है, जिससे प्राकृतिक चमक बनी रहती है।ब्लैक फंगस जैसी समस्याओं में सुरक्षा कवचहाल के वर्षों में चर्चा में रही 'ब्लैक फंगस' जैसी फंगल इन्फेक्शन की समस्याओं के दौरान भी वन तुलसी के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। इसके बायो-एक्टिव कंपाउंड्स शरीर में हानिकारक सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, गंभीर बीमारियों में इसे केवल एक सहायक उपचार के रूप में देखा जाना चाहिए और चिकित्सक के परामर्श का पालन करना सर्वोपरि है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इसकी पत्तियों का सेवन या इसका पानी पीना शरीर के आंतरिक सिस्टम को फंगल हमलों से बचाने में सहायक हो सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:38 pm

मंदिर जाने का सही समय: सुबह, दोपहर या शाम? जानें कब दर्शन करने से मिलता है सबसे ज्यादा पुण्य

सनातन धर्म में मंदिर जाना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा को सकारात्मक बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि ईश्वर के दर्शन के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन सा है? शास्त्रों और वास्तु विज्ञान के अनुसार, मंदिर जाने का सही समय न केवल हमारे मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि पूजा का फल भी कई गुना बढ़ा देता है। यदि आप भी अपने इष्टदेव के दर्शन के लिए जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन नियमों और समय चक्र को जरूर समझें ताकि आपकी प्रार्थना सीधे परमात्मा तक पहुँचे।सुबह का समय: ऊर्जा और सकारात्मकता की शुरुआतधार्मिक दृष्टिकोण से मंदिर जाने का सबसे उत्तम समय 'ब्रह्ममुहूर्त' या सुबह का समय माना जाता है। सूर्योदय के समय जब मंदिर के कपाट खुलते हैं, उस समय वातावरण में सात्विक ऊर्जा का संचार सबसे अधिक होता है। इस समय मंदिर में जाकर की गई प्रार्थना और ध्यान मन को पूरे दिन के लिए शांत और केंद्रित रखता है। सुबह के समय शंखनाद और मंत्रोच्चार सुनने से मस्तिष्क में सकारात्मक तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक होती हैं।दोपहर और शाम: कब जाएँ और क्या है महत्वदोपहर का समय अक्सर मंदिरों में विश्राम या भोग का समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान दर्शन करने से बचना चाहिए। वहीं, शाम का समय यानी 'संध्याकाल' दीपक जलाने और आरती के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। सूर्यास्त के बाद का समय देवी-देवताओं की पूजा और आत्म-चिंतन के लिए उत्तम है। इस समय मंदिर की घंटियों की ध्वनि और जलते हुए दीपों की रोशनी मन में छिपे अंधकार और नकारात्मक विचारों को दूर करने का कार्य करती है।मंदिर दर्शन के जरूरी नियममंदिर जाते समय केवल समय ही नहीं, बल्कि आचरण का भी ध्यान रखना अनिवार्य है। सदैव स्नान कर और स्वच्छ वस्त्र धारण करके ही मंदिर में प्रवेश करें। मंदिर जाते समय खाली हाथ न जाएं, श्रद्धा के साथ फूल या भोग लेकर जाना श्रेष्ठ माना जाता है। गर्भगृह में प्रवेश करते समय मन में पूर्ण समर्पण का भाव रखें और दर्शन के बाद शांति से कुछ देर मंदिर परिसर में बैठें। याद रखें, मंदिर का अर्थ ही 'मन का स्थिर होना' है, इसलिए वहां जाकर मोबाइल या बातचीत में समय बिताने के बजाय अपनी आत्मा को ईश्वर से जोड़ने का प्रयास करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:35 pm

गुप्त नवरात्रि 2026: 15 जुलाई से शुरू होगी साधना की शक्ति, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

आध्यात्मिक ऊर्जा और तंत्र साधना के लिए सबसे विशेष माने जाने वाले गुप्त नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 15 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होने वाली यह गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए मां दुर्गा की विशेष कृपा पाने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। हिंदू धर्म में वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्रि होती हैं, जो विशेष रूप से गुप्त सिद्धियों, मनोकामनाओं की पूर्ति और नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए समर्पित होती हैं।गुप्त नवरात्रि 2026: तिथि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्तइस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 को हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कलश स्थापना के लिए 15 जुलाई को सुबह 05:45 से 07:22 बजे तक का समय सबसे शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो कि दोपहर 11:58 से 12:53 बजे तक रहेगा। यह समय साधना और पूजा-पाठ की शुरुआत के लिए अत्यंत फलदायी है।गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि और नियमगुप्त नवरात्रि का अर्थ ही है अपनी साधना को गुप्त रखना, इसलिए इस दौरान पूजा की प्रक्रिया को जितना संभव हो सके गोपनीय रखा जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने पूजा स्थान पर कलश स्थापित करें। कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के नौ स्वरूपों और विशेष रूप से दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। यदि आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करना और मां के मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है। पूजा के दौरान पूरी तरह से सात्विक आहार का पालन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। अपनी साधना को किसी से साझा न करें, क्योंकि गुप्त नवरात्रि की शक्ति गोपनीयता में ही निहित होती है।आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्वआषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पर्व मुख्य रूप से तांत्रिकों, अघोरियों और उन भक्तों के लिए विशेष है जो जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करना चाहते हैं। इस दौरान मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी यानी दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। माना जाता है कि जो भक्त पूरे मन और श्रद्धा के साथ इन नौ दिनों में गुप्त रूप से मां की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह समय जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला माना गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:34 pm

अशोक सिंह ने कांग्रेस छोड़ी, अनुशासन समिति के नोटिस से नाराज होकर दिया इस्तीफा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी सदस्य अशोक सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है। इस्तीफे में उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर नाराजगी जताते हुए इसे अपने फैसले की प्रमुख […] The post अशोक सिंह ने कांग्रेस छोड़ी, अनुशासन समिति के नोटिस से नाराज होकर दिया इस्तीफा appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 2:33 pm

योगिनी एकादशी 2026: 10-11 जुलाई को इस विधि से करें विष्णु पूजा, एक व्रत से मिलेगा 80 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का महापुण्य

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को 'योगिनी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का अत्यंत विशेष महत्व बताया गया है। साल 2026 में यह पावन तिथि 10 और 11 जुलाई को पड़ रही है। शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी के बारे में कहा जाता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस व्रत को संपन्न करता है, उसे 80 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। अगर आप भी जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं, तो यह व्रत आपके लिए विशेष फलदायी हो सकता है।योगिनी एकादशी की कथा: क्या है इसके पीछे का पौराणिक महत्व?योगिनी एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार, कुबेर के माली हेम और उनकी पत्नी की कहानी प्रचलित है। इस कथा में बताया गया है कि कैसे अपनी गलती के कारण माली को कोढ़ (कुष्ठ रोग) का श्राप मिला और कैसे योगिनी एकादशी का व्रत करने से उन्हें उस श्राप से मुक्ति मिली। भगवान विष्णु की कृपा से इस व्रत के प्रभाव ने उनके पापों का नाश कर दिया। व्रत के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा के बाद इस कथा को सुनने या पढ़ने का विशेष फल मिलता है। माना जाता है कि जो भक्त इस कथा का श्रवण करता है, उसके घर में दरिद्रता का नाश होता है और लक्ष्मी का वास होता है।पूजा विधि और शुभ मुहूर्त: ऐसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्नयोगिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान के बाद संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल, अक्षत, धूप, दीप और पंचामृत अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। एकादशी की तिथि पर सात्विक भोजन ग्रहण करें और संभव हो तो निर्जला या फलाहारी रहकर व्रत का पालन करें। ध्यान रहे कि इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है। शाम के समय विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें। आपकी छोटी सी निष्ठा और भक्ति से आप 80 हजार ब्राह्मणों को भोज कराने के समान अक्षय पुण्य अर्जित कर सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:30 pm

'सतलुज' फिल्म पर अब आर-पार की लड़ाई: बैन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे दिलजीत दोसांझ

पंजाबी सुपरस्टार और ग्लोबल आइकन दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिल्म की रिलीज पर लगे बैन को चुनौती देते हुए अब मामला सीधे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। फिल्म के बैन के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें रिलीज पर लगी रोक को असंवैधानिक बताया गया है। दिलजीत दोसांझ के फैंस और फिल्म से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप कर फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचने का रास्ता साफ करेगी। वहीं, दूसरी तरफ फिल्म के कंटेंट को लेकर विरोध करने वाले पक्ष भी अपनी दलीलों के साथ तैयार हैं, जिससे यह मामला अब एक लंबी कानूनी जंग में तब्दील होता नजर आ रहा है।क्यों हो रहा है विरोध और क्या है PIL का आधार?'सतलुज' फिल्म की कहानी और उसके संवेदनशील विषयों को लेकर कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस पर रोक लगा दी थी। हालांकि, याचिकाकर्ता का तर्क है कि सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद फिल्म को रोकना अभिव्यक्ति की आजादी का सीधा उल्लंघन है। PIL में इस बात पर जोर दिया गया है कि फिल्म को बिना देखे या केवल अनुमानों के आधार पर बैन करना गलत है। अदालत में अब यह बहस का मुख्य मुद्दा होगा कि क्या किसी फिल्म के कंटेंट से उपजे विरोध के कारण उसकी पूरी रिलीज को रोकना उचित है। यह सुनवाई न केवल दिलजीत दोसांझ की इस फिल्म के भविष्य को तय करेगी, बल्कि भविष्य में बनने वाली ऐसी फिल्मों के लिए भी एक नजीर (Precedent) साबित हो सकती है।पंजाब की राजनीति और दिलजीत के फैंस की निगाहेंपंजाब के साथ-साथ दिल्ली और अन्य राज्यों में भी दिलजीत दोसांझ के प्रशंसकों के बीच इस फिल्म को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है। सोशल मीडिया पर #ReleaseSatluj जैसे ट्रेंड्स के जरिए फैंस लगातार अपना समर्थन दिखा रहे हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का रुख इस मामले में बहुत कुछ स्पष्ट कर देगा। यदि अदालत याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो जाएगा, लेकिन यदि प्रशासन की दलीलें मजबूत रहीं, तो फिल्म का विवाद और गहरा सकता है। मामला अब पूरी तरह से न्यायपालिका के पाले में है और हर किसी की नजरें आने वाली सुनवाई की तारीख पर टिकी हैं कि आखिर कब 'सतलुज' पर्दे पर दस्तक देगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:24 pm

सिर्फ 40 मिनट का रोल और ऋषि कपूर का स्टारडम फीका, इस 'नौसिखिया' एक्टर ने महफिल लूटकर IMDb पर मचाया धमाल

बॉलीवुड में अक्सर ऐसी फिल्में आती हैं जिनमें मुख्य स्टार का जादू चलता है, लेकिन कभी-कभी कोई ऐसा कलाकार दस्तक देता है जो पर्दे पर अपनी मौजूदगी से बड़े से बड़े दिग्गज की चमक को भी चुनौती दे देता है। कुछ ऐसा ही हुआ एक फिल्म के सेकंड हाफ में, जहाँ एक नौसिखिया एक्टर की एंट्री ने पूरी कहानी का रुख मोड़ दिया। महज़ 40 मिनट के अपने किरदार के साथ इस कलाकार ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि स्क्रीन पर दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर जैसे मंजे हुए कलाकार की मौजूदगी को भी जबरदस्त टक्कर दे दी। इस अचानक आई एंट्री ने फिल्म की पूरी रेटिंग को बदल दिया और आज यह फिल्म अपनी दमदार परफॉर्मेंस के कारण IMDb पर शानदार रेटिंग के साथ दर्शकों की पसंदीदा बनी हुई है।सेकंड हाफ का मास्टरस्ट्रोक: जब एंट्री ने बदल दी फिल्म की किस्मतफिल्म की कहानी जब अपने चरम पर होती है, तब एक नए चेहरे का आना किसी भी फिल्म के लिए जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन इस फिल्म में उस नए कलाकार की एंट्री ने फिल्म में नई जान फूंक दी। नौसिखिया होने के बावजूद, उसने जिस सहजता के साथ अपने किरदार को निभाया, उसने आलोचकों को भी हैरान कर दिया। ऋषि कपूर जैसे दिग्गज अभिनेता के साथ स्क्रीन शेयर करना कोई छोटी बात नहीं है, लेकिन इस एक्टर ने अपनी अदाकारी से साबित कर दिया कि स्टारडम से ऊपर भी कुछ है, और वह है 'प्योर टैलेंट'। दर्शकों को इस कलाकार का काम इतना पसंद आया कि आज भी सोशल मीडिया पर उस 40 मिनट के रोल की चर्चा कम नहीं होती।IMDb रेटिंग और दर्शकों का क्रेज: आखिर क्या है इस परफॉर्मेंस में खास?इस परफॉर्मेंस की सबसे बड़ी खूबी उसका 'नैचुरल' होना है। फिल्म का सेकंड हाफ जिस तरह से इस एक्टर ने संभाला, उसने न केवल फिल्म को एक इमोशनल गहराई दी बल्कि इसे एक क्लासिक का दर्जा भी दिला दिया। IMDb पर इस फिल्म को मिली बेहतरीन रेटिंग के पीछे सबसे बड़ा कारण इसी कलाकार का वह छोटा लेकिन प्रभावकारी रोल है। फिल्म की पूरी टीम का मानना है कि उस एक फैसले—यानी इस एक्टर को कास्ट करने का—ने फिल्म को औसत दर्जे से उठाकर ब्लॉकबस्टर कैटेगरी में खड़ा कर दिया। यदि आप आज भी उस फिल्म को देखेंगे, तो पाएंगे कि वह एक्टर महज़ 40 मिनट के लिए नहीं, बल्कि पूरी फिल्म की यादों पर छा जाने के लिए आया था।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:23 pm

कर्नाटक में एमयूवी और लॉरी की टक्कर में 7 लोगों की मौत, दो गंभीर घायल

कारवार। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में गुरुवार तड़के एक बहु उपयोगी वाहन (एमयूवी) की लॉरी से आमने-सामने की टक्कर में 7 लोगों की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा रात करीब 1.30 बजे येल्लापुर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर अराबैल घाट […] The post कर्नाटक में एमयूवी और लॉरी की टक्कर में 7 लोगों की मौत, दो गंभीर घायल appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 2:22 pm

सिर्फ 6 महीने की मेहनत और 80 लाख का पैकेज! 10 नौकरियों पर सिर्फ एक दावेदार

नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद शानदार और रोमांचक खबर सामने आई है। बाजार में एक ऐसा क्षेत्र उभरकर सामने आया है जहाँ प्रतिभाओं की भारी कमी है, जिसके कारण यहां 10 नौकरियों के लिए बमुश्किल एक ही दावेदार मिल पा रहा है। इसका सीधा सा मतलब है कि यदि आपके पास सही कौशल है, तो नौकरी मिलना तय है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में स्किल्ड प्रोफेशनल्स को 80 लाख रुपये सालाना तक का भारी-भरकम पैकेज मिल रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि आपको इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सालों का इंतजार नहीं करना है, बल्कि मात्र 6 महीने की सही दिशा में की गई मेहनत आपको करियर के शिखर पर पहुंचा सकती है।क्यों है इस सेक्टर में भारी डिमांड और कम सप्लाई?इस सेक्टर में डिमांड और सप्लाई का अंतर इसलिए है क्योंकि तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है और बहुत कम लोग नए दौर की इन स्किल्स को सीख पा रहे हैं। कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो न केवल थ्योरी जानते हों, बल्कि रियल-टाइम प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव रखते हों। चाहे वह डेटा एनालिटिक्स हो, एडवांस्ड एआई इंटीग्रेशन हो या फिर स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग, जिन लोगों ने इन 6 महीनों में खुद को इंडस्ट्री-रेडी बना लिया है, उनके लिए सैलरी का पैमाना आसमान छू रहा है। यह उन लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो अपने करियर में एक बड़ा जंप लेना चाहते हैं और जिन्होंने अब तक अपनी मेहनत को सही दिशा नहीं दी थी।6 महीने में कैसे पाएं कामयाबी?इस सुनहरे मौके को भुनाने के लिए आपको किसी लंबी डिग्री के बजाय 'इंटेंसिव स्किल-बेस्ड' लर्निंग पर ध्यान केंद्रित करना होगा। पिछले कुछ समय में देखे गए ट्रेंड्स बताते हैं कि जो उम्मीदवार केवल रटने के बजाय व्यावहारिक ज्ञान (Practical Knowledge) पर काम करते हैं, उन्हें कंपनियां हाथों-हाथ ले रही हैं। यदि आप अगले 6 महीने पूरी लगन के साथ उन तकनीकों को सीख लेते हैं जिनकी बाजार में भारी कमी है, तो आप न केवल एक सुरक्षित करियर पाएंगे बल्कि आर्थिक रूप से भी एक बड़ा उछाल हासिल करेंगे। यह समय अपनी स्किल्स को अपडेट करने का है, क्योंकि बाजार में मंदी के बावजूद इन खास क्षेत्रों में टैलेंट की कमी बनी हुई है और कंपनियों का बजट भारी पैकेज देने के लिए तैयार है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:21 pm

क्या AI की रेस में आप बन पाएंगे करोड़पति? मशीन लर्निंग या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भविष्य के लिए कौन सा स्किल है बेस्ट

दुनिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ChatGPT की क्रांति के बीच खड़ी है। हर तरफ यह चर्चा है कि क्या AI हमारी नौकरियों को खत्म कर देगा या फिर यह करियर बनाने का एक नया स्वर्ण युग लेकर आया है? आज के समय में मशीन लर्निंग (Machine Learning) और AI के क्षेत्र में स्किल्स की मांग आसमान छू रही है। जो युवा इन तकनीकों को समझ रहे हैं, वे न केवल लाखों का पैकेज पा रहे हैं, बल्कि भविष्य की बड़ी कंपनियों का आधार भी बन रहे हैं। क्या आप भी इस डिजिटल बदलाव का हिस्सा बनने को तैयार हैं? अगर आप अपने करियर को AI के साथ सुरक्षित करना चाहते हैं, तो यह सही समय है यह समझने का कि आखिर कौन सी स्किल आपको बाजार में सबसे आगे खड़ा करेगी।मशीन लर्निंग बनाम AI: किसे चुनें और कहाँ है पैसा?मशीन लर्निंग (ML) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वह हिस्सा है जहाँ कंप्यूटर डेटा से खुद सीखते हैं, जबकि AI एक बड़ा अंब्रेला टर्म है जिसमें मशीन लर्निंग के साथ-साथ न्यूरल नेटवर्क्स और डेटा प्रोसेसिंग भी शामिल है। अगर आप एक टेक्निकल करियर बनाना चाहते हैं, तो मशीन लर्निंग में कोडिंग और एल्गोरिदम की गहराई आपको किसी भी मल्टीनेशनल कंपनी में ऊंची सैलरी दिलाने की गारंटी दे सकती है। दूसरी तरफ, अगर आप जनरेटिव AI (जैसे ChatGPT के मॉडल) के साथ जुड़ते हैं, तो यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो क्रिएटिविटी और प्रॉब्लम सॉल्विंग में माहिर हैं। कंपनियां आज ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो न केवल AI मॉडल बनाना जानते हों, बल्कि उनके जरिए बिजनेस की समस्याओं को सुलझाना भी जानते हों।करियर में सफलता के लिए अपनाएं 'AI-First' दृष्टिकोणChatGPT के आने के बाद अब सिर्फ कोडिंग जानना ही काफी नहीं है, बल्कि अब 'प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग' और 'AI टूल इंटीग्रेशन' जैसी नई स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ी है। भविष्य उन लोगों का है जो AI को एक दुश्मन के रूप में नहीं बल्कि एक 'को-पायलट' के रूप में देखते हैं। यदि आप डेटा साइंस, पाइथन प्रोग्रामिंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) में महारत हासिल करते हैं, तो आप उन चुनिंदा लोगों में होंगे जिनकी डिमांड अगले दशक में सबसे ज्यादा होगी। यह केवल एक नौकरी पाने की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसा कौशल विकसित करने की है जो आपको ऑटोमेशन के दौर में अपरिहार्य बना दे। सफलता की कुंजी इसी में है कि आप आज ही इन उभरती हुई तकनीकों को सीखना शुरू करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:19 pm

क्या टैटू होने से छिन सकती है सरकारी नौकरी? UPSC, सेना और पुलिस भर्ती के कड़े नियमों की पूरी सच्चाई जानें

आजकल युवाओं में टैटू बनवाने का क्रेज काफी बढ़ गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर पर बना एक छोटा सा टैटू आपके सरकारी नौकरी के सपने को तोड़ सकता है? अक्सर उम्मीदवार इस असमंजस में रहते हैं कि टैटू के साथ वे किन विभागों में आवेदन कर सकते हैं और कहाँ उन्हें रिजेक्शन का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय सेना (Indian Army), पुलिस बल और UPSC जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में टैटू को लेकर बेहद स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश हैं। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ने से पहले इन नियमों को समझना बहुत जरूरी है, ताकि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन या मेडिकल टेस्ट के दौरान आपको किसी निराशा का सामना न करना पड़े।सेना और पुलिस भर्ती में टैटू के कड़े नियमभारतीय सेना और पुलिस सेवाओं में शारीरिक फिटनेस और अनुशासन को सर्वोपरि माना जाता है। सेना के नियमों के अनुसार, टैटू केवल शरीर के कुछ विशिष्ट हिस्सों पर ही मान्य हैं। उदाहरण के तौर पर, कोहनी से नीचे के अंदरूनी हिस्से या हथेली के पिछले हिस्से पर धार्मिक या छोटे टैटू की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते वे आपत्तिजनक न हों। यदि टैटू चेहरा, गर्दन या हाथ के बाहर के हिस्से पर है, तो इसे अक्सर अयोग्य माना जाता है। वहीं, राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों (CAPF) में भी टैटू को लेकर कड़ाई बरती जाती है। टैटू का आकार, उसकी स्थिति और उसका संदेश (जैसे किसी का नाम या कोई चिन्ह) मेडिकल बोर्ड द्वारा जांचा जाता है। यदि टैटू भड़काऊ है या उससे पहचान छिपने का अंदेशा है, तो उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है।UPSC और सिविल सेवा में क्या है टैटू की नीति?UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षाओं (IAS, IPS, IFS) के नियम सेना की तुलना में थोड़े अलग हैं। प्रशासनिक सेवाओं में आपकी बुद्धिमत्ता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए एक छोटा या सामान्य टैटू आमतौर पर आपकी उम्मीदवारी को प्रभावित नहीं करता है। हालांकि, यदि आप IPS (इंडियन पुलिस सर्विस) के लिए चयनित होते हैं, तो आपको पुलिस नियमों के तहत कड़े मेडिकल मानकों से गुजरना होगा। यहाँ भी टैटू का शरीर के किस हिस्से पर होना और उसकी प्रकृति क्या है, यह मायने रखता है। यदि टैटू शालीन है और कोई गलत संदेश नहीं देता, तो यह आपकी नौकरी में बाधा नहीं बनता है। फिर भी, किसी भी सरकारी पद के लिए आवेदन करते समय टैटू को लेकर विभाग के आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिए गए 'Medical Standards' को ध्यान से पढ़ना ही सबसे सही रास्ता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:17 pm

हार्ट अटैक का खतरा होगा जीरो! दिल के डॉक्टर खुद रोज फॉलो करते हैं ये 6 आसान नियम, आज ही बदलें अपनी ये आदतें

आधुनिक दौर की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण दिल की बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। आज के समय में युवा भी तेजी से गंभीर हार्ट से जुड़ी परेशानियों और कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में अपने दिल की सेहत का ख्याल रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। अच्छी बात यह है कि दिल को अभेद्य और मजबूत बनाने के लिए आपको अपनी जिंदगी में कोई बहुत बड़े या कठिन बदलाव करने की जरूरत नहीं है।देश के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) डॉ. संजय भोजराज ने हाल ही में उन 6 बेहद आसान और असरदार नियमों का खुलासा किया है, जिन्हें वे अपने दिल को 100% फिट रखने के लिए खुद भी हर दिन बिना चूके फॉलो करते हैं।रात के भोजन के बाद 10 मिनट की वॉक और सुबह की जादुई धूप है जरूरीडॉ. संजय भोजराज के अनुसार, रात का भारी या हल्का भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने की गलती कभी न करें। डिनर के बाद कम से कम दस मिनट तक सामान्य गति से पैदल जरूर टहलें। यह छोटी सी आदत आपके भोजन को आसानी से पचाने में मदद करती है और रात के समय अचानक बढ़ने वाले ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को नियंत्रित रखती है।इसके साथ ही, सुबह सोकर उठने के बाद बेड-टी या कॉफी का कप थामने से पहले कुछ देर प्राकृतिक धूप में बिताने की आदत डालें। सुबह की ताजी धूप हमारे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) को संतुलित करती है, जिससे तनाव कम होता है और दिनभर के लिए भरपूर एनर्जी मिलती है।सिर्फ वजन ही नहीं, कमर के बढ़ते साइज पर रखें पैनी नजरअक्सर लोग वजन तोलने वाली मशीन पर अपना वजन देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन डॉक्टर का मानना है कि यह पैमाना अधूरा है। अगर आपके वजन के मुकाबले आपकी कमर के आसपास (Visceral Fat) चर्बी बढ़ रही है, तो यह सीधे तौर पर दिल की बीमारी के आने का अलार्म है। इसलिए केवल वजन कम करने के बजाय पेट और कमर की चर्बी को नियंत्रित करने और शरीर के समग्र स्वास्थ्य (Overall Fitness) को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।पौष्टिक भोजन में करें निवेश, भविष्य में दवाओं का खर्च होगा साफडॉ. भोजराज का एक बेहद सटीक सिद्धांत है— आज अच्छा भोजन चुनेंगे, तो भविष्य में महंगी दवाओं और डॉक्टरों की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे अच्छे और शुद्ध खानपान को शरीर के लिए सबसे बड़ा और सुरक्षित निवेश मानते हैं। अपनी दैनिक डाइट में पैकेटबंद और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह से बंद करके ताजे मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और ओमेगा-3 से भरपूर संतुलित भोजन को शामिल करें।साइलेंट किलर है मानसिक तनाव, मन खुश तो दिल भी रहेगा तंदुरुस्तआजकल की कॉपोरेट लाइफस्टाइल में तनाव (Stress) को एक सामान्य बात मान लिया जाता है, लेकिन यह दिल के लिए सबसे बड़ा साइलेंट किलर है। जब आप लगातार मानसिक तनाव या डिप्रेशन में रहते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ता है जो सीधे आपकी धमनियों पर दबाव डालता है। दिल की लंबी उम्र के लिए सिर्फ शरीर का ही नहीं, बल्कि मन का शांत और खुश रहना भी बेहद अनिवार्य है। इसके लिए मेडिटेशन या अपनी पसंद के शौक को समय दें।ऐसी वर्कआउट रूटीन चुनें, जिसे आप अगले 10 साल तक निभा सकेंफिटनेस के जोश में आकर अचानक जिम में जाकर भारी वजन उठाना या बेहद कठिन व्यायाम शुरू कर देना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। डॉक्टर की सलाह है कि हमेशा ऐसी शारीरिक गतिविधि या आदत चुनें, जिसे आप बिना थके सालों-साल मजे से जारी रख सकें। जिम की भारी कसरत के बजाय रोज 30 मिनट तेज गति से चलना, साइकिल चलाना, स्विमिंग या हल्का योग करना भी आपके हार्ट रेट को दुरुस्त रखने और दिल को हमेशा युवा बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।लक्षणों का इंतजार न करें, समय पर करवाएं प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअपहृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय भोजराज चेतावनी देते हुए कहते हैं कि दिल की अधिकांश बीमारियां शरीर के भीतर कई साल पहले ही पनपना शुरू हो जाती हैं, लेकिन उनके गंभीर लक्षण (जैसे सीने में दर्द या सांस फूलना) काफी बाद में दिखाई देते हैं। इसलिए किसी अनहोनी या लक्षण का इंतजार करने के बजाय 30 की उम्र के बाद नियमित रूप से अपना लिपिड प्रोफाइल, ब्लड प्रेशर और प्रिवेंटिव हार्ट चेकअप करवाते रहना ही सबसे समझदारी भरा और सुरक्षित कदम है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 2:16 pm

दान की गणना पर चंपत राय ने उठाए सवाल! आखिर किस पर साधा निशाना

Champat Rai viral letter: राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद मंदिर में दान व चढ़ावे की चोरी को लेकर नित नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस पूरे प्रकरण में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान व चढ़ावे की ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 2:06 pm

निफ्टी ने 24,000 का स्तर किया पार, सेंसेक्स में 500 अंकों की रॉकेट तेजी; डॉ. रेड्डीज के शेयरों में भारी गिरावट

आज भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में आज सुबह से ही खरीदारी का माहौल बना हुआ है, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स आज 500 अंकों की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। बाजार के इस सकारात्मक रुख के पीछे वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता को मुख्य कारण माना जा रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में आ रही इस तेजी ने निवेशकों के बीच विश्वास पैदा किया है, जिससे चुनिंदा मिडकैप और लार्जकैप शेयरों में भी रौनक देखी जा रही है।बाजार में तेजी का कारण और निफ्टी का नया पड़ावबाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी का 24,000 के ऊपर टिके रहना एक मजबूत संकेत है। यदि बाजार इसी गति को बनाए रखता है, तो आने वाले दिनों में नए उच्चतम स्तर देखने को मिल सकते हैं। सेंसेक्स में 500 अंकों की उछाल के पीछे बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर का बड़ा योगदान रहा है। बाजार की इस तेजी के दौरान चुनिंदा स्टॉक्स में मुनाफावसूली का दौर भी चल रहा है, लेकिन कुल मिलाकर मार्केट का सेंटीमेंट 'बुलिश' बना हुआ है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार में किसी भी बड़ी हलचल के दौरान सतर्क रहें और अपने पोर्टफोलियो को सावधानी से मैनेज करें।Dr. Reddy’s में बड़ी गिरावट, निवेशकों की चिंता बढ़ीजहाँ एक ओर बाजार में हरियाली है, वहीं दूसरी ओर दिग्गज फार्मा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (Dr. Reddy’s Laboratories) के शेयरों में आज भारी दबाव देखने को मिल रहा है। कंपनी के शेयर आज के कारोबारी सत्र में करीब 6 फीसदी तक टूट गए हैं। इस गिरावट के पीछे बाजार में चल रही नकारात्मक खबरों और तिमाही नतीजों से जुड़ी उम्मीदों को मुख्य वजह बताया जा रहा है। अचानक आई इस गिरावट से फार्मा सेक्टर के निवेशकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स और तकनीकी चार्ट को जरूर देखें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:35 pm

बाढ़ या भूकंप में घर तबाह होने पर किरायेदार को नहीं देना होगा रेंट? जानिए क्या कहता है भारतीय कानून

देश के कई हिस्सों में अचानक आने वाली बाढ़, भूकंप, तूफान या आगजनी जैसी प्राकृतिक आपदाएं न केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि किराये पर रहने वाले लोगों के लिए भी बड़ा संकट खड़ी कर देती हैं। ऐसी आपातकालीन स्थिति में अक्सर किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच विवाद शुरू हो जाता है। सबसे बड़े सवाल यह उठते हैं कि क्या घर टूटने या बाढ़ का पानी भरने के बाद भी किराया देना होगा? सिक्योरिटी डिपॉजिट का क्या होगा और मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी? भारतीय कानून में इन सभी परिस्थितियों को लेकर बेहद स्पष्ट और कड़े नियम बनाए गए हैं, जो किरायेदारों को बड़ी राहत देते हैं।भारत में इस तरह के विवादों और अधिकारों को तय करने के लिए मुख्य रूप से दो कानूनी व्यवस्थाएं काम करती हैं— पहला 'ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट, 1882' और दूसरा आधुनिक समय का 'आदर्श किराया अधिनियम, 2021' (Model Tenancy Act)।ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट: क्या आपदा आते ही रेंट एग्रीमेंट खुद खत्म हो जाता है?यह केंद्रीय कानून पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू होता है, बशर्ते किसी राज्य का अपना विशिष्ट रेंट कंट्रोल कानून इससे अलग न हो। इस अधिनियम की धारा 108(B)(e) के तहत यह प्रावधान है कि यदि कोई किराये की संपत्ति बाढ़, आग, भूकंप या किसी अन्य प्राकृतिक या मानवीय आपदा (जैसे दंगा या हिंसा) के कारण आंशिक या पूरी तरह से नष्ट हो जाती है और वह रहने के योग्य नहीं रह जाती, तो किरायेदार के पास यह अधिकार होता है कि वह उस लीज एग्रीमेंट को तत्काल प्रभाव से रद्द (शून्य) मान ले।हालांकि, इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि आपदा आने पर रेंट एग्रीमेंट अपने आप या स्वतः समाप्त नहीं होता। यह पूरी तरह से किरायेदार की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह घर छोड़ना चाहता है या नहीं। अगर किरायेदार उसी क्षतिग्रस्त मकान में रुकने का फैसला करता है, तो उसे नियमित किराया देना होगा। यह नियम केवल तभी लागू होता है जब नुकसान बहुत बड़ा और स्थायी हो; छोटी-मोटी मरम्मत के आधार पर एग्रीमेंट रद्द नहीं किया जा सकता।मॉडल टेनेंसी ऐक्ट: उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु समेत इन राज्यों में किरायेदारों को मिली बड़ी सुरक्षावक्त के साथ रेंट नियमों को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने मॉडल टेनेंसी ऐक्ट, 2021 तैयार किया था, जिसे अब उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और असम जैसे कई बड़े राज्यों ने अपने यहां लागू कर दिया है। इस नए कानून की धारा 15(6) किरायेदारों को बहुत बड़ी आर्थिक सुरक्षा देती है।इस कानून के मुताबिक, अगर प्राकृतिक आपदा की वजह से घर रहने लायक नहीं रह जाता है, तो मकान मालिक किरायेदार पर किराया देने का दबाव नहीं बना सकता। मकान मालिक को सबसे पहले उस संपत्ति की पूरी मरम्मत करानी होगी और उसे दोबारा रहने योग्य बनाना होगा। जब तक घर पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक की अवधि का किराया पूरी तरह माफ रहेगा।15 दिनों में लौटाना होगा सिक्योरिटी डिपॉजिट और इमरजेंसी में बिना नोटिस एंट्री के नियमअगर आपदा के कारण मकान पूरी तरह रहने योग्य नहीं बचा है या मकान मालिक उसकी मरम्मत कराने की स्थिति में नहीं है, तो किरायेदार घर खाली कर सकता है। ऐसी स्थिति में नोटिस की अवधि समाप्त होने के ठीक 15 दिनों के भीतर मकान मालिक को किरायेदार का पूरा सिक्योरिटी डिपॉजिट और एडवांस में लिया गया किराया वापस करना अनिवार्य है। यदि किरायेदार का कोई पिछला बकाया है, तो मकान मालिक उसे काट कर बाकी रकम लौटाएगा।इसके अलावा, इस कानून की धारा 5(3) कहती है कि अगर किसी किरायेदार का तय समय वाला (Fixed-term) रेंट एग्रीमेंट आपदा के दौरान ही खत्म हो रहा है, तो किरायेदार की गुजारिश पर मकान मालिक को उसे आपदा की स्थिति संभलने के बाद भी अगले एक महीने तक उसी पुरानी शर्तों पर घर में रहने की अनुमति देनी होगी।आमतौर पर मकान मालिक को किराये के घर में आने के लिए 24 घंटे पहले नोटिस देना होता है, लेकिन बाढ़ या भूकंप जैसी इमरजेंसी स्थिति में यह नियम लागू नहीं होता। ऐसी आपातकालीन स्थिति में मकान मालिक बिना किसी पूर्व नोटिस के भी सीधे परिसर में दाखिल हो सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:34 pm

सियासी दांव-पेंच फ्लॉप, 'दादा' हिट! जय शाह के राज में सौरव गांगुली को मिला क्रिकेट का सर्वोच्च सम्मान

क्रिकेट की हरी पिच हो या फिर क्रिकेट प्रशासन का हाई-प्रोफाइल बोर्ड रूम, 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' यानी सौरव गांगुली का नाम हमेशा सुर्खियों के केंद्र में रहता है। भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे आक्रामक और सफल कप्तानों में शुमार 'दादा' ने अपने 54वें जन्मदिन पर एक ऐसा ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है, जिसने हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। जय शाह के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने सौरव गांगुली को प्रतिष्ठित 'आईसीसी हॉल ऑफ फेम' में शामिल कर क्रिकेट जगत का सबसे बड़ा सम्मान दिया है। आईसीसी का यह फैसला न सिर्फ एक महान खिलाड़ी की विरासत को सलाम करता है, बल्कि उन आलोचकों को भी करारा जवाब है जो गांगुली और जय शाह के बीच कड़वाहट की मनगढ़ंत कहानियां बुन रहे थे।दिग्गजों के एलीट क्लब में शामिल हुए सौरव गांगुलीइस ऐतिहासिक सम्मान के साथ ही सौरव गांगुली अब भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा कालजयी खिलाड़ियों की विशेष कतार में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने विश्व पटल पर भारत की धाक जमाई थी। 'हॉल ऑफ फेम' का हिस्सा बनते ही दादा ने आधिकारिक रूप से सुनील गावस्कर, कपिल देव और सचिन तेंदुलकर जैसे लेजेंड्स के एलीट क्लब में अपनी जगह पक्की कर ली है। क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले 'लॉर्ड्स' की बालकनी में टी-शर्ट लहराकर गोरे हुक्मरानों को उनकी औकात याद दिलाने से लेकर टीम इंडिया को विदेशों में जीत का हुनर सिखाने तक, गांगुली का यह सफर अब क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो चुका है।खेल भावना के आगे राजनीति ढेर, अफवाहों पर लगा पूर्णविरामजब सौरव गांगुली की बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष पद से विदाई हुई थी, तब सोशल मीडिया और गलियारों में कई तरह के राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की कोशिश की गई थी। कई विश्लेषकों ने इसे जय शाह और गांगुली के बीच की तथाकथित आपसी खींचतान का नतीजा करार दिया था। लेकिन आज जब जय शाह आईसीसी के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, तब उनके कार्यकाल में गांगुली को यह सर्वोच्च सम्मान मिलना खेल की शुद्धता को दर्शाता है। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि खेल के मैदान पर की गई तपस्या और बेजोड़ टैलेंट के आगे हर तरह के राजनीतिक दांव-पेंच और मनगढ़ंत अफवाहें घुटने टेक देती हैं।मैच फिक्सिंग के अंधेरे से निकालकर टीम इंडिया को निडर बनानाआईसीसी हॉल ऑफ फेम में गांगुली की यह शानदार एंट्री सिर्फ उनके बल्ले से निकले 18,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रनों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उस बेखौफ 'लीडरशिप' का सम्मान है जिसने भारतीय क्रिकेट को सबसे कठिन दौर से बाहर निकाला था। साल 2000 में जब मैच फिक्सिंग के काले साए ने भारतीय क्रिकेट की साख को हिलाकर रख दिया था, तब दादा ने ही टीम की कमान संभाली और खिलाड़ियों में आंखों में आंखें डालकर लड़ने का जज्बा भरा। वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, जहीर खान और खुद महेंद्र सिंह धोनी जैसे मैच-विनर्स गांगुली की पारखी नजरों की ही देन हैं। साल 2003 वर्ल्ड कप का फाइनल हो या नेटवेस्ट सीरीज की ऐतिहासिक जीत, गांगुली ने हमेशा भारतीय टीम को फ्रंट से लीड किया।'हॉल ऑफ फेम' का गौरव पाने वाले 12वें भारतीय बने दादाइस अभूतपूर्व उपलब्धि को हासिल करने के साथ ही सौरव गांगुली 'आईसीसी हॉल ऑफ फेम' की प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाने वाले भारत के 12वें महान खिलाड़ी बन गए हैं। आईसीसी के इस सर्वोच्च मंच पर अब तक सम्मान पाने वाले भारतीय दिग्गजों की पूरी सूची इस प्रकार है:बिशन सिंह बेदी (2009)सुनील गावस्कर (2009)कपिल देव (2010)अनिल कुंबले (2015)राहुल द्रविड़ (2018)सचिन तेंदुलकर (2019)वीनू मांकड़ (2021)डायना एडुल्जी (2022)वीरेंद्र सहवाग (2023)नीतू डेविड (2024)एमएस धोनी (2025)सौरव गांगुली (2026)राजनीति में एंट्री को लेकर उड़ने वाली तमाम अफवाहों और अटकलों पर खुद सौरव गांगुली ने हमेशा के लिए विराम लगा दिया है। दादा ने स्पष्ट लहजे में कहा कि वे अपने जीवन में कभी भी किसी राजनीतिक मामले या दल का हिस्सा नहीं रहे हैं और उनका एकमात्र प्यार और ध्यान हमेशा क्रिकेट पर ही केंद्रित रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:32 pm

दिल्ली के रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत गिरने से तीन लोगों की मौत

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के रोहिणी सेक्टर-16 में एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत के ढ़हने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर को बचा लिया गया। बचाव अभियान बुधवार की शाम से अभी तक जारी है। मलबे से तीन शव बरामद किये गये और मृतकों की पहचान स्थानीय निवासी […] The post दिल्ली के रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत गिरने से तीन लोगों की मौत appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 1:30 pm

चीन से कितनी ताकतवर है भारतीय वायुसेना? ग्लोबल रैंकिंग में ड्रैगन पस्त, पाकिस्तान का स्कोर देख उड़ जाएंगे होश

भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतिक और लड़ाकू क्षमता का लोहा मनवाया है। रक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठित संस्था 'वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट' (WDMMA) द्वारा जारी ताजा 'ग्लोबल एयर पावर्स रैंकिंग' में भारतीय वायुसेना को दुनिया की छठी सबसे शक्तिशाली हवाई ताकत घोषित किया गया है। इस रैंकिंग का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि भारत ने अपने पड़ोसी और धुर विरोधी देश चीन को हवाई मारक क्षमता और आधुनिकता के मामले में पीछे छोड़ दिया है। वहीं, इस लिस्ट में पाकिस्तान की हालत बेहद पतली नजर आ रही है।दुनिया की टॉप एविएशन फोर्सेज में किसका है दबदबा और नंबर वन कौन?वैश्विक स्तर पर हवाई ताकत के मामले में महाशक्ति अमेरिका का एकतरफा दबदबा कायम है। दुनिया की टॉप-5 सबसे मजबूत एविएशन फोर्सेज में से चार अकेले अमेरिका की ही अलग-अलग विंग्स हैं। इस सूची में पहले स्थान पर यूनाइटेड स्टेट्स एयरफोर्स (USAF) है, जो 242.9 के सर्वोच्च 'ट्रू-वैल्यू रेटिंग' (TvR) स्कोर और 5,004 लड़ाकू व सहायक विमानों के साथ शीर्ष पर है।इसके बाद दूसरे नंबर पर अमेरिकी नेवी, तीसरे पर रूसी एयरफोर्स, चौथे पर अमेरिकी आर्मी और पांचवें स्थान पर अमेरिकी मरीन कॉर्प्स का कब्जा है। हालांकि, अगर सेनाओं की आंतरिक एविएशन विंग्स को हटाकर विशुद्ध रूप से केवल देशों की मुख्य वायुसेनाओं के बीच तुलना की जाए, तो अमेरिका और रूस के ठीक बाद भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी और शक्तिशाली वायुसेना के रूप में उभरता है।कम एयरक्राफ्ट होने के बाद भी ड्रैगन से आगे कैसे निकला भारत?आंकड़ों के लिहाज से यह मुकाबला बेहद दिलचस्प है। ओवरऑल रैंकिंग में भारतीय वायुसेना 69.4 TvR स्कोर के साथ छठे पायदान पर है, जबकि चीनी वायुसेना (PLAAF) 63.8 TvR स्कोर के साथ सातवें स्थान पर खिसक गई है। अगर सिर्फ विमानों की संख्या को देखें, तो चीन के पास 3,733 सक्रिय लड़ाकू विमान हैं, जो भारत के 1,716 विमानों के बेड़े से दोगुने से भी कहीं ज्यादा हैं। इसके बावजूद भारत ने चीन को तकनीकी रूप से मात दे दी है।इसकी मुख्य वजह WDMMA का मूल्यांकन करने का अनोखा फॉर्मूला है। यह संस्था केवल विमानों की गिनती नहीं करती, बल्कि 'ट्रू-वैल्यू रेटिंग' (TvR) के आधार पर सेना की वास्तविक मारक क्षमता को मापती है। इस फॉर्मूले में बेड़े का आधुनिकरण, लॉजिस्टिकल सपोर्ट, कठिन परिस्थितियों में ट्रेनिंग, हमला और रक्षा करने की रणनीतिक क्षमता के साथ-साथ फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर्स के सटीक संतुलन को परखा जाता है। भारतीय वायुसेना के पास 4.5 जनरेशन के सुखोई (Su-30MKI), फ्रांस निर्मित राफेल और स्वदेशी तेजस का ऐसा घातक और संतुलित मिश्रण है, जो युद्ध की स्थिति में चीन पर गुणात्मक रूप से भारी पड़ता है।टॉप-15 से भी बाहर हुआ पाकिस्तान, जानिए कहां ठहरती है पाक वायुसेनास्वयं को भारत के समकक्ष दिखाने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान की हवा इस ग्लोबल लिस्ट में पूरी तरह निकल चुकी है। पाकिस्तान एयरफोर्स (PAF) वैश्विक स्तर पर टॉप-10 या टॉप-15 में भी अपनी जगह सुरक्षित करने में नाकाम रही है। पूरी सूची में पाकिस्तान 879 सक्रिय एयरक्राफ्ट और महज 46.3 के कमजोर TvR स्कोर के साथ 18वें पायदान पर संघर्ष करता नजर आ रहा है, जो भारत की ताकत के सामने बेहद बौना है।भारतीय नौसेना और थल सेना की एविएशन विंग ने भी गाड़े झंडेWDMMA की इस विस्तृत रिपोर्ट में भारत की अन्य दो सेनाओं की हवाई ताकत की भी सराहना की गई है। भारतीय नौसेना (Indian Navy) की एविएशन विंग 232 विमानों और 41.2 TvR स्कोर के साथ दुनिया में 27वें स्थान पर है। वहीं, भारतीय थल सेना (Indian Army) की एविएशन यूनिट 540 विमानों और 30.0 TvR स्कोर के साथ 36वें स्थान पर मजबूती से टिकी है।तुलना की बात करें तो चीन की नेवी इस सूची में जरूर 15वें स्थान पर है, लेकिन 107 सैन्य इकाइयों वाली इस वैश्विक फिफ्टी-लिस्ट में पाकिस्तान की नेवी या आर्मी की एविएशन विंग अपनी जगह तक नहीं बना पाई हैं। यह ताजा रिपोर्ट साफ संदेश देती है कि आधुनिक दौर के आसमान में जंग केवल विमानों की 'संख्या' से नहीं, बल्कि 'सटीकता, गुणवत्ता और लड़ाकू अनुभव' से जीती जाती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:25 pm

TMC को बड़ी राहत: ममता बनर्जी के फ्रीज खातों से अब निकल पाएगा पैसा, लेकिन हाई कोर्ट ने लगा दी यह कड़ी शर्त

पश्चिम बंगाल की सियासत और कानूनी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को एक बहुत बड़ी अंतरिम राहत दी है। अदालत ने पार्टी को अपने रोजमर्रा के खर्चों और कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए उन तीन बैंक खातों को इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है, जिन्हें हाल ही में डेबिट-फ्रीज कर दिया गया था। हालांकि, कोर्ट ने इस राहत के साथ एक बड़ी शर्त भी जोड़ी है। अब इन खातों का संचालन पूरी तरह से अदालत द्वारा नियुक्त एक विशेष अधिकारी की कड़ी निगरानी में किया जाएगा। हाई कोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने यह अहम फैसला सुनाते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।पूर्व जज की निगरानी में 30 सितंबर तक होगा खातों का कामकाजकलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत के पूर्व न्यायाधीश, जस्टिस सुब्रत तालुकदार को इन खातों के संचालन के लिए 'स्पेशल ऑफिसर' नियुक्त किया है। यह विशेष निगरानी व्यवस्था 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान तृणमूल कांग्रेस केवल अपने बेहद जरूरी दैनिक खर्चों और दफ्तर के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए ही सीमित धनराशि निकाल सकेगी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इन खातों से किसी भी प्रकार के बड़े या संदेहास्पद वित्तीय लेन-देन की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी। इस काम के लिए स्पेशल ऑफिसर को 1.25 लाख रुपये का मानदेय दिया जाएगा, जिसका वहन कालीघाट स्थित ममता बनर्जी गुट वाली तृणमूल कांग्रेस को करना होगा।एफआईआर के तुरंत बाद एक्शन? पुलिस की 'जल्दबाजी' पर कोर्ट नाराजसुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बिधाननगर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की टाइमिंग और उसकी रफ्तार पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस बात को समझने में पूरी तरह असमर्थ है कि आखिर एफआईआर दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर पुलिस ने इतनी जल्दबाजी दिखाकर पार्टी के खातों को फ्रीज क्यों कर दिया। कोर्ट को पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई के पीछे कोई ठोस और न्यायसंगत आधार नजर नहीं आया, जिसके बाद ममता बनर्जी गुट को यह अंतरिम राहत प्रदान की गई।अभिषेक मनु सिंघवी की दलील: लोकतंत्र में 'समान अवसर' को खत्म करने की कोशिशअदालत में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की तरफ से देश के दिग्गज और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। सिंघवी ने दलील दी कि एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/क्षेत्रीय राजनीतिक दल के बैंक खातों को अचानक इस तरह पूरी तरह ठप कर देना सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(d) का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि ऐसी कार्रवाई से लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यानी 'समान अवसर' (Level Playing Field) पूरी तरह समाप्त हो जाता है। सिंघवी ने विरोधियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों को पूरी तरह धुंधला और राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि दो दिन के भीतर बैंक खाते सील करना केवल दुर्भावनापूर्ण कदम है।क्या है 440 करोड़ रुपये का यह पूरा विवाद और ED का एंगल?यह पूरा मामला तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही भीषण अंदरूनी गुटबाजी और केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में पार्टी दो स्पष्ट धड़ों में बंटी नजर आ रही है, जिसमें एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि बागी धड़े की कमान विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी के हाथों में है। विवाद एचडीएफसी बैंक की शाखाओं में मौजूद पार्टी के 3 खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये के फंड को लेकर है।रितब्रत बनर्जी के समर्थक 10 बागी विधायकों और पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने पुलिस में शिकायत की थी कि इस भारी-भरकम फंड का स्रोत अवैध वसूली और हालिया घोटाले हो सकते हैं। इसी शिकायत के आधार पर बिधाननगर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए खातों को फ्रीज किया था। इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत समानांतर जांच कर रहा है। ईडी का आरोप है कि टीएमसी के खातों से 'केयरवेल एविएशन' नाम की एक प्राइवेट कंपनी को चार्टर्ड फ्लाइट्स और वीआईपी हेलीकॉप्टर के लिए 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।असली TMC कौन? फिलहाल चुनाव आयोग के पाले में गेंदकलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में यह बेहद स्पष्ट कर दिया है कि ममता बनर्जी गुट को खातों से पैसे निकालने की अनुमति देने का मतलब यह बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि कोर्ट ने उन्हें असली तृणमूल कांग्रेस मान लिया है। अदालत ने कहा कि असली पार्टी और सिंबल का मालिकाना हक किसका है, इसका अंतिम फैसला भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष लंबित है और वही इस पर निर्णय लेगा। हाई कोर्ट ने यह भी साफ निर्देश दिया है कि जब तक चुनाव आयोग का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक बागी रितब्रत बनर्जी का गुट इस वित्तीय संचालन के मामले में स्पेशल ऑफिसर से किसी भी प्रकार का संपर्क या हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:23 pm

Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

Trip To London: जानकर अजीब-सा लगता है ना? लेकिन यह हकीकत है। ऐसा नहीं है कि ऐसा मैंने नहीं देखा, बल्कि वास्तविकता में भी है। होते हैं, लेकिन पूर्व सूचना के आधार पर, निर्धारित जगह पर, निश्चित समय पर। चारों तरफ पुलिस घेरे रहेगी, हेलिकॉप्टर से निगरानी ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 1:19 pm

सिर्फ एक 'टाइपो' और मिल गई जमानत? सोनम रघुवंशी को वापस जेल भेजने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की बड़ी दलीलें

इंदौर के चर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक नया और बेहद दिलचस्प मोड़ आ चुका है। मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत को रद्द कराकर उसे दोबारा सलाखों के पीछे भेजने के लिए मेघालय सरकार अब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटा चुकी है। इस मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली, जहां सरकार की ओर से पेश हुए देश के सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने एक ऐसी दलील दी जिसने कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।कानून का पालन हुआ, बस टाइपिंग की एक चूक भारी पड़ी: तुषार मेहतासुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी सोनम रघुवंशी को इस तकनीकी आधार पर जमानत मिल गई कि गिरफ्तारी के वक्त उसे हिरासत में लेने का लिखित आधार नहीं बताया गया था। लेकिन असलियत ऐसी नहीं है।सॉलिसिटर जनरल ने दावा किया कि पुलिस ने गिरफ्तारी की पूरी कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया था। आरोपी को लिखित में आधार भी सौंपा गया था, लेकिन कागजी कार्रवाई के दौरान 'एक छोटी सी टाइपिंग मिस्टेक' (टाइपो) हो गई थी।धारा 103 की जगह लिख दिया 403, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा सबूतजस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की खंडपीठ के सामने जब गिरफ्तारी का लिखित आधार न मिलने का मुद्दा उठा, तो एसजी तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि आधार लिखित में ही दिया गया था। आपत्ति सिर्फ इतनी सी थी कि दस्तावेज में कानूनी धारा लिखने में गलती हो गई। पुलिस को वहां धारा 103 (1) लिखना था, लेकिन मानवीय भूल के कारण धारा 403 (1) दर्ज हो गया।इस दलील को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले की गंभीरता को समझा और सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के समय सौंपे गए मूल दस्तावेजों की एक साफ फोटोकॉपी अदालत के समक्ष पेश करें, ताकि यह साफ हो सके कि आरोपी को केस की सामान्य पृष्ठभूमि की जानकारी दी गई थी या नहीं।क्या अब बड़ी बेंच तय करेगी सोनम रघुवंशी का भविष्य?इस मामले में कानूनी पेच इतना उलझ गया है कि सुप्रीम कोर्ट अब इसे एक मिसाल के तौर पर देख रहा है। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर विस्तार से विचार करने की आवश्यकता है। अदालत ने संकेत दिए कि अलग-अलग बेंचों के पिछले फैसलों (जैसे बंसल और मिहिर राजेश मामले) में कुछ विरोधाभास नजर आ रहा है।ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इस बात की भी समीक्षा करेगा कि क्या इस कानूनी बिंदु को सुलझाने के लिए मामले को किसी बड़ी बेंच (Larger Bench) के पास भेजने की जरूरत है या नहीं। फिलहाल, अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई आगामी मंगलवार, 14 जून के लिए तय कर दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:16 pm

भीलवाड़ा में ठगी और ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश

भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के शंभूगढ़ थाना क्षेत्र में पुलिस ने नाता विवाह के नाम पर लाखों रुपए की ठगी और ब्लैकमेलिंग करने वाले एक कथित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी शादी के बाद नकदी और सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो जाते थे और […] The post भीलवाड़ा में ठगी और ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 1:11 pm

सरदार सरोवर समझौते पर कांग्रेस ने की श्र्वेत पत्र लाने की मांग, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने पूछा, MP के 7,669 करोड़ क्यों छोड़े?

सरदार सरोवर परियोजना को लेकर गुजरात को किए जाने वाले भुगतान को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गर्मा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरदार सरोवर बांध से जुड़े मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के हितों की अनदेखी की जा रही ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 1:09 pm

अमरीका का ईरान पर फिर हमला, चाबहार में बिजली अवसंरचना, अस्पताल प्रभावित

तेहरान। अमरीका ने ईरान के खिलाफ नये सैन्य हमले किए हैं, जिनमें दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार की बिजली अवसंरचना, बंदरगाह सुविधाओं और एक अस्पताल को नुकसान पहुंचा है। देश के अन्य दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में भी हमलों और विस्फोटों की सूचना मिली है। ईरानी मीडिया के अनुसार बुधवार को हुए हमलों में चाबहार की […] The post अमरीका का ईरान पर फिर हमला, चाबहार में बिजली अवसंरचना, अस्पताल प्रभावित appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 1:07 pm

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना का 75 से 80 प्रतिशत कार्य हो चुका है पूरा : नितिन गडकरी

कोटा। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना में लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपए की लागत से 75 से 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा शेष कार्य भी तेजी से प्रगति पर है। गडकरी बुधवार देर शाम कोटा के गोपालपुरा मण्डाना में आमसभा को संबोधित […] The post दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना का 75 से 80 प्रतिशत कार्य हो चुका है पूरा : नितिन गडकरी appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 1:01 pm

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और भारतमाला परियोजनाएं राजस्थान के विकास को देगी नई गति : भजनलाल शर्मा

कोटा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा विकसित की जा रही दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे एवं भारतमाला जैसी महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाएं राजस्थान के विकास को नई गति प्रदान करेंगी। शर्मा बुधवार देर शाम कोटा के गोपालपुरा मण्डाना में आमसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं […] The post दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और भारतमाला परियोजनाएं राजस्थान के विकास को देगी नई गति : भजनलाल शर्मा appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 12:56 pm

गया : सड़क हादसे में कार में लगी आग, 2 लोग जिंदा जले

गया जी। बिहार के गया जिले में डोभी-पटना फोरलेन पर बीती देर रात एक सड़क हादसे में कार सवार दो लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि चालक गंभीर रूप से झुलस गया। यह हादसा बोधगया थाना क्षेत्र के सिजुआ गांव के पास बीती रात करीब 1:30 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खाद से […] The post गया : सड़क हादसे में कार में लगी आग, 2 लोग जिंदा जले appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 9 Jul 2026 12:50 pm

बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई, क्रिप्टो और चिटफंड निवेश मामलों में कई ठिकानों पर छापेमारी

पश्चिम बंगाल में ईडी ने क्रिप्टो निवेश, चिटफंड और फर्जी शेयर बाजार योजनाओं से जुड़े मामलों में दुर्गापुर, हावड़ा और नदिया सहित कई स्थानों पर छापेमारी की।

देशबन्धु 9 Jul 2026 12:15 pm

ऑस्ट्रेलिया से भारत को मिलेगा यूरेनियम, PM मोदी और अल्बानीज के बीच कई बड़े समझौते; रक्षा से लेकर ऊर्जा तक बढ़ी साझेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात की। इस दौरान 2015 के ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौते के तहत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत को यूरेनियम निर्यात करने संबंधी समझौते को ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 12:06 pm

चाबहार पोर्ट समेत ईरान के 90 ठिकानों पर अमेरिका की बमबारी, 3 लोग मरे; ईरान ने किया पलटवार

अमेरिका-ईरान सीजफायर खत्म! ट्रंप के आदेश पर चाबहार पोर्ट सहित ईरान के 90 ठिकानों पर अमेरिकी बमबारी। जवाब में ईरान ने कुवैत-बहरीन में अमेरिकी बेस को निशाना बनाया। कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी।

देशबन्धु 9 Jul 2026 11:28 am

E20 पेट्रोल पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान, बोले- इथेनॉल से मुझे कोई निजी फायदा नहीं, वाहन खराब होने के आरोप भी खारिज

Nitin Gadkari on Ethenol : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को इथेनॉलमिश्रित पेट्रोल (ई-20) नीति का जोरदार बचाव करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल नीति से उन्हें कोई व्यक्तिगत ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 10:56 am

दिल्ली से केरल तक भारी बारिश का कहर, रेल, सड़क और हवाई सेवाएं प्रभावित, राहत-बचाव अभियान तेज

देश के कई राज्यों में भारी मानसूनी बारिश से बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। सड़क और रेल सेवाएं प्रभावित हैं तथा राहत-बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:55 am

ई-20 पेट्रोल विवाद पर बोले गडकरी, कहा- एथनॉल नीति से मुझे कोई निजी लाभ नहीं

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ई-20 एथनॉल नीति से उन्हें कोई निजी लाभ नहीं होता। उन्होंने एथनॉल मिश्रण को किसानों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:54 am

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में आधी रात कांपी धरती, चार बार महसूस हुए भूकंप के झटके

महाराष्ट्र के हिंगोली, नांदेड़ और परभणी जिलों में तड़के चार बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। सबसे तेज झटके की तीव्रता 4.6 रही, जबकि किसी नुकसान की सूचना नहीं है।

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:11 am

हिजाब वाली फोटो में कान दिखने जरूरी हैं? हैदराबाद में वोटर लिस्ट चेकिंग के दौरान मुस्लिम महिलाओं में भारी भ्रम

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) क्षेत्र में इस समय चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान एक अनोखा प्रशासनिक और सामाजिक विवाद सामने आया है। वोटर लिस्ट फॉर्म पर चिपकाई जाने वाली पासपोर्ट साइज तस्वीरों को लेकर मुस्लिम महिला मतदाताओं के बीच भारी असमंजस और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से हिजाब, बुर्का या सिर पर पारंपरिक स्कार्फ पहनने वाली महिलाओं में इस बात को लेकर गहरा सस्पेंस है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड और वोटर आईडी कार्ड के लिए दी जाने वाली तस्वीर में उनके कान दिखाई देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यह मुद्दा तब और गंभीर हो गया जब अलग-अलग मतदान केंद्रों पर तैनात बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) ने महिलाओं को विरोधाभासी निर्देश देने शुरू कर दिए, जिससे पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता की मांग तेज हो गई है।बीएलओ के अलग-अलग बयानों से फैला भ्रम: ज़मीनी स्तर पर नियमों में एकरूपता की भारी कमीहैदराबाद के विभिन्न मुस्लिम बहुल इलाकों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों को खुद इस नियम की स्पष्ट जानकारी नहीं है। कुछ बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) ने महिलाओं को सख्त हिदायत दी है कि वे ऐसी तस्वीरें जमा करें जिसमें उनका सिर तो ढका हो लेकिन दोनों कान पूरी तरह साफ नजर आ रहे हों। इसके उलट, कई अन्य बीएलओ इस बात को लेकर पूरी तरह अनिश्चित दिखे और उन्होंने किसी भी तरह की फोटो स्वीकार करना शुरू कर दिया।मणिकोंडा की रहने वाली एक मुस्लिम महिला मतदाता आयशा फातिमा ने इस प्रशासनिक भ्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आमतौर पर लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि पासपोर्ट, आधार या किसी भी अन्य मुख्य आधिकारिक दस्तावेज के लिए महिला आवेदक के कान साफ दिखने चाहिए। इसी सामाजिक धारणा और अधिकारियों के अलग-अलग बयानों के कारण महिलाओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनके धार्मिक पहनावे के साथ सरकारी पहचान पत्र की फोटो का कोई टकराव है।बहादुरपुरा में सोशल मीडिया की अफवाहों ने बढ़ाई चिंता: बिना स्कार्फ और स्कार्फ वाली फोटो का घालमेलइस असमंजस का सबसे ज्यादा असर बहादुरपुरा विधानसभा क्षेत्र में देखा जा रहा है। वहां कार्यरत एक बीएलओ ने बताया कि सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक पोस्ट चल रहे थे, जिसके बाद से उनके पास महिलाओं के सवालों की बाढ़ आ गई है।वर्तमान स्थिति यह है कि महिलाएं पूरी तरह असमंजस में होने के कारण तीन अलग-अलग श्रेणियों की तस्वीरें जमा कर रही हैं—कुछ महिलाएं बिना स्कार्फ के सामान्य फोटो दे रही हैं, कुछ स्कार्फ के साथ कान दिखने वाली फोटो जमा कर रही हैं, तो कुछ ऐसी तस्वीरें भी दे रही हैं जिनमें सिर और कान दोनों पूरी तरह से ढके हुए हैं। बीएलओ फिलहाल केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि फोटो धुंधली न हो, लेकिन वे किसी को ठोस नियम बताने की स्थिति में नहीं हैं।चुनाव पंजीकरण अधिकारियों में भी मतभेद: वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्टीकरण का इंतजारयह भ्रम केवल आम जनता या बीएलओ तक सीमित नहीं है, बल्कि शीर्ष चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के स्तर पर भी दिशानिर्देशों को लेकर एकरूपता का भारी अभाव दिखा। जब प्रशासनिक स्तर पर इस नियम की पड़ताल की गई, तो तीन अलग-अलग अधिकारियों ने तीन अलग-अलग दलीलें दीं।एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से हिजाब में कान दिखने की अनिवार्यता को लेकर कोई विशेष या अलग से गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। वहीं, दूसरे अधिकारी ने कहा कि अगर फोटो में कान साफ दिखाई दे रहे हैं, तो वे उसे बिना किसी आपत्ति के तुरंत स्वीकार कर लेंगे। इसके विपरीत, तीसरे अधिकारी ने किसी भी तरह के विवाद से बचते हुए कहा कि वे इस संवेदनशील विषय पर अपने शीर्ष अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण लेने के बाद ही कोई आधिकारिक जवाब देंगे।जिला चुनाव अधिकारी आरवी कर्नन ने खत्म किया सस्पेंस: चेहरा साफ दिखना ही एकमात्र शर्ततस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों में चल रही सभी अटकलों और भ्रम पर विराम लगाते हुए आखिरकार जिला चुनाव अधिकारी (DEO) और जीएचएमसी कमिश्नर आरवी कर्नन ने पूरी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ और कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे में किसी भी नागरिक के धार्मिक पहनावे से निर्वाचन प्रक्रिया को कोई आपत्ति नहीं है।जिला चुनाव अधिकारी आरवी कर्नन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि मतदाता पहचान पत्र या नए पंजीकरण फॉर्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी बात यह है कि सभी तस्वीरें बिल्कुल साफ और उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। जब तक फोटो में संबंधित महिला मतदाता का चेहरा पूरी तरह से सामने से स्पष्ट, पहचानने योग्य और विजिबल दिख रहा है, तब तक कान दिखने या न दिखने से तस्वीरों की प्रामाणिकता पर कोई समस्या नहीं होनी चाहिए और ऐसी सभी तस्वीरों को बिना किसी भेदभाव के तुरंत स्वीकार किया जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 9:59 am

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या घटी, अयोध्या की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

Ram Mandir Theft Impact: विश्व में हिंदू आस्था का सर्वोच्च प्रतीक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, जिसे 550 वर्षों के लंबे संघर्ष और अनगिनत बलिदानों के बाद प्राप्त किया गया, आज एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम का सामना कर रहा है। श्रीराम लला की मंदिर व्यवस्था ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 8:53 am

बुखार में क्यों 'मर' जाती है भूख? डॉक्टर से जानिए इसके पीछे की असली वैज्ञानिक वजह और रिकवरी के लिए बेस्ट डाइट

अक्सर देखा जाता है कि जब भी किसी व्यक्ति को बुखार (Fever) आता है, तो उसका कुछ भी खाने-पीने का मन नहीं करता। इसे आम भाषा में बुखार में भूख का मर जाना कहते हैं। अमूमन लोग इसे कमजोरी या बीमारी का साधारण लक्षण मान लेते हैं, लेकिन डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बुखार के दौरान भूख न लगना दरअसल हमारे शरीर की एक बेहद सोची-समझी वैज्ञानिक और रक्षात्मक प्रतिक्रिया (Defensive Response) है। आइए गुरुग्राम के चोटी के डॉक्टरों से सीधे समझते हैं कि बुखार में हमारी बॉडी के अंदर ऐसा क्यों होता है और इस दौरान शरीर को टूटने से बचाने के लिए क्या खाना चाहिए।शरीर में बनने वाले 'सायटोकाइन' केमिकल हैं असली वजहडॉक्टर रविंद्र गुप्ता (हेड ऑफ डिपार्टमेंट, इंटरनल मेडिसिन, सीके बिड़ला हॉस्पिटल, गुड़गांव) के अनुसार, बुखार आने का मुख्य कारण शरीर में किसी बैक्टीरिया या वायरस का इंफेक्शन (संक्रमण) होना होता है। जब यह इंफेक्शन फैलता है, तो उससे मुकाबला करने के लिए हमारा इम्यून सिस्टम शरीर में विशेष प्रकार के प्रोटीन्स और कैमिकल्स रिलीज करता है, जिन्हें सायटोकाइन (Cytokines) कहा जाता है।यह सायटोकाइन केमिकल हमारे मस्तिष्क (ब्रेन) में स्थित हंगर सेंटर (भूख को नियंत्रित करने वाले हिस्से) पर जाकर उसे कुछ समय के लिए ब्लॉक या दबा देते हैं। शरीर ऐसा इसलिए करता है ताकि भोजन को पचाने (डाइजेशन) में खर्च होने वाली भारी-भरकम ऊर्जा (Energy) को बचाकर, उसे पूरी तरह से इंफेक्शन के कीटाणुओं को मारने और उनसे लड़ने में लगाया जा सके।स्वाद ग्रंथियों का सुन्न होना और लिवर पर असरभूख न लगने के पीछे डॉक्टर कुछ अन्य महत्वपूर्ण कारण भी बताते हैं:लिवर पर दबाव: कई बार इंफेक्शन का सीधा असर हमारे लिवर पर पड़ता है, जिससे पाचन एंजाइम्स का बनना कम हो जाता है और भूख गायब हो जाती है।स्वाद और सूंघने की क्षमता का घटना: वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हमारी जीभ की स्वाद कलिकाएं (Taste Buds) और नाक की सूंघने वाली कोशिकाएं अस्थायी रूप से काम करना बंद कर देती हैं। खाना पूरी तरह बेस्वाद और फीका लगने के कारण भी खाने की इच्छा खत्म हो जाती है।शारीरिक लक्षण: बुखार के साथ होने वाला तेज सिरदर्द, बदन दर्द, मतली (जी मिचलाना) और गले में खराश भी खाने की राह में रोड़ा बनते हैं।बिना खाए रहना सेहत के लिए खतरनाक; अपनाएं थोड़ी-थोड़ी डाइटडॉ. आर. आर. दत्ता (एचओडी, इंटरनल मेडिसिन विभाग, पारस हेल्थ, गुरुग्राम) सचेत करते हुए कहते हैं कि भले ही बुखार में आपका मन कुछ खाने का न हो, लेकिन इस समय आपकी बॉडी को रिकवरी के लिए सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा कैलोरी और पोषण की जरूरत होती है। अगर आप लंबे समय तक भूखे रहेंगे, तो शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाएगा और बीमारी लंबी खिंच सकती है।इसलिए मरीज को एक बार में भारी भोजन देने के बजाय हर दो-तीन घंटे में थोड़ी-थोड़ी (Small Frequent Meals) मात्रा में हल्का और सुपाच्य भोजन देते रहना चाहिए। शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी को रोकने के लिए पर्याप्त मात्रा में लिक्विड डाइट और प्रोटीन का सेवन बहुत जरूरी है।बुखार के दिनों में क्या खाना रहेगा सबसे फायदेमंद?बुखार के दौरान हमेशा ऐसी चीजें खाएं जो पेट पर भारी न पड़ें और शरीर को तुरंत ग्लूकोज व एनर्जी दें:मूंग दाल की पतली खिचड़ी: यह प्रोटीन से भरपूर और पचाने में सबसे आसान भोजन है।दलिया या ओट्स: यह शरीर को जरूरी फाइबर्स और कार्बोहाइड्रेट देता है।वेजिटेबल या चिकन सूप: गर्म सूप गले को राहत देता है और शरीर में फ्लूइड की मात्रा बढ़ाता है।नारियल पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स: यह बॉडी को तुरंत हाइड्रेट करता है और जरूरी साल्ट्स की कमी पूरी करता है।ताजे फल: केला, सेब और पपीता जैसे फल खाएं जो आसानी से पचते हैं। (गले में इंफेक्शन न होने पर डॉक्टर की सलाह से फ्रेश दही भी ले सकते हैं)।डॉक्टरी सलाह: अगर मरीज को कई दिनों तक लगातार तेज बुखार बना रहे, भूख बिल्कुल न लगे, कुछ भी खाते ही लगातार उल्टी हो या शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज किए बिना तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:52 am

प्याज काटते ही आंखों में क्यों आ जाते हैं आंसू? जानिए इसके पीछे का असली विज्ञान और बचने के 5 जादुई तरीके

प्याज भारतीय रसोई का एक बेहद अहम हिस्सा है। चाहे ग्रेवी वाली मसालेदार सब्जी हो, दाल का तड़का हो या फिर खाने के साथ कंचा सलाद— प्याज के बिना भारतीय व्यंजनों का स्वाद अधूरा सा लगता है। स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ प्याज हमारी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, विटामिन बी6, फोलेट, पोटैशियम और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर इसे संतुलित डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। लेकिन, इस गुणकारी प्याज को काटना किसी जंग से कम नहीं होता, क्योंकि चाकू चलते ही आंखों से आंसुओं का सैलाब बहने लगता है। आइए जानते हैं कि आखिर प्याज काटने पर आंसू क्यों आते हैं और इससे बचने के आसान उपाय क्या हैं।आखिर प्याज काटते समय क्यों रोती हैं आंखें? जानिए विज्ञानप्याज काटने पर आंखों में होने वाली जलन और आंसुओं के पीछे एक पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रक्रिया काम करती है। असल में, जब हम चाकू से प्याज को काटते हैं, तो उसके अंदर मौजूद सूक्ष्म सेल्स (कोशिकाएं) टूट जाती हैं। सेल्स के टूटने से रासायनिक प्रतिक्रिया होती है और सिन-प्रोपैनेथियल-एस-ऑक्साइड ($Syn-propanethial-E-oxide$) नाम की एक खास सल्फर गैस हवा में रिलीज होती है।जब यह गैस उड़कर हमारी आंखों तक पहुंचती है, तो आंखों की सतह पर मौजूद प्राकृतिक नमी (पानी) के संपर्क में आते ही यह हल्का सा एसिड (सल्फ्यूरिक एसिड) बना देती है। इसी एसिड के कारण आंखों में तेज खुजली और जलन होने लगती है। इस जलन से खुद को बचाने और एसिड को धोने के लिए हमारा नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है और लैक्रिमल ग्लैंड्स (आंसू ग्रंथियों) को तेजी से पानी बनाने का आदेश देता है। यही वजह है कि हमारी आंखों से फटाफट आंसू निकलने लगते हैं।प्याज काटते समय आंसुओं से बचने के 5 आसान और घरेलू उपायअगर प्याज काटते समय आपकी आंखों से भी ज्यादा आंसू आते हैं, तो शेफ और वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए इन आसान किचन हैक्स को अपनाकर आप इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं:प्याज को फ्रिज में रखें (चिलिंग इफेक्ट): प्याज को काटने से कम से कम 15 से 20 मिनट पहले फ्रिज या ठंडे पानी में रख दें। तापमान कम होने के कारण प्याज के अंदर होने वाली रासायनिक प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे गैस बहुत कम मात्रा में निकलती है।हमेशा तेज धार वाले चाकू का इस्तेमाल करें: कम धार या कुंद चाकू से काटने पर प्याज के सेल्स बेरहमी से कुचल जाते हैं, जिससे ज्यादा मात्रा में गैस हवा में फैलती है। इसके विपरीत, एक बहुत तेज धार वाला चाकू स्मूथ कटिंग करता है और गैस को रिलीज होने से रोकता है।हवादार जगह या एग्जॉस्ट फैन के पास काटें: प्याज को हमेशा खुली और अच्छी वेंटिलेशन वाली जगह पर काटें। आप चाहें तो किचन की चिमनी या एग्जॉस्ट फैन को ऑन कर सकते हैं, जिससे निकलने वाली गैस आंखों तक पहुंचने से पहले ही बाहर खिंच जाएगी।जड़ वाले हिस्से (Root) को आखिर में काटें: प्याज के सबसे निचले यानी जड़ वाले हिस्से में सल्फर और गैस बनाने वाले एंजाइम्स की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसलिए प्याज को ऊपर से काटना शुरू करें और जड़ वाले हिस्से को सबसे अंत में काटकर अलग कर दें।प्रोटेक्टिव चश्मे का इस्तेमाल: अगर आपकी आंखें बहुत ज्यादा सेंसिटिव हैं, तो प्याज काटते समय आप साधारण पारदर्शी चश्मा या किचन गॉगल्स पहन सकते हैं। यह चश्मा गैस को सीधे आंखों के संपर्क में आने से रोकने के लिए एक दीवार का काम करता है।भूलकर भी न करें ये गलतियां; बढ़ सकती है परेशानीप्याज काटते समय कुछ आम गलतियों से बचना बेहद जरूरी है, वरना आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। कभी भी बंद या बिना वेंटिलेशन वाले कमरे में ढेर सारे प्याज एक साथ न काटें। सबसे जरूरी बात, प्याज काटते समय जब आंखों में जलन हो, तो अपने हाथों से आंखों को बार-बार रगड़ने की भूल बिल्कुल न करें; क्योंकि आपके हाथों और नाखूनों में प्याज का तीखा रस लगा होता है, जो जलन को कई गुना बढ़ा सकता है। आंखों को छूने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धो लें। अगर प्याज काटने के काफी देर बाद भी आंखों में तेज दर्द, लगातार पानी आना या लालिमा (Redness) बनी रहे, तो इसे सामान्य न समझें और तुरंत किसी आई स्पेशलिस्ट (डॉक्टर) से संपर्क करें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:50 am

जियो का नया धमाका: मात्र ₹55 में लॉन्च किया JioTV Pro Pack, महीने भर के लिए मिलेंगे 1000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स

देश की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने अपने ग्राहकों को एंटरटेनमेंट का बड़ा तोहफा देते हुए एक बेहद सस्ता और नया JioTV Pro Pack लॉन्च कर दिया है। मात्र 55 रुपये की कीमत वाले इस नए पैक के जरिए यूजर्स 'JioTV' मोबाइल ऐप पर 1000 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स का आनंद ले सकते हैं। कंपनी ने इस प्लान को विशेष रूप से उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया है जो कम कीमत में सिर्फ और सिर्फ प्योर एंटरटेनमेंट का ऑप्शन तलाश रहे हैं। इस प्लान के साथ यूजर्स को पूरे 30 दिनों की वैलिडिटी (वैधता) मिलती है।जरूरी बात: इस प्लान को लेने से पहले ग्राहकों को यह ध्यान रखना होगा कि ₹55 वाले इस प्रो पैक में आपको डेटा (Data), कॉलिंग (Calling) या एसएमएस (SMS) जैसी कोई भी टेलीकॉम सुविधाएं नहीं मिलेंगी। यह पैक पूरी तरह से केवल लाइव टेलीविजन स्ट्रीमिंग पर फोकस करता है।16 भाषाओं में 150 से ज्यादा प्रीमियम चैनल्स का एक्सेसरिलायंस जियो के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस छोटे पैक में यूजर्स को 16 से ज्यादा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में 1000 से अधिक लाइव टीवी चैनल्स देखने को मिलेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस लिस्ट में 150 से ज्यादा प्रीमियम चैनल्स भी शामिल हैं। इसके तहत ग्राहक एंटरटेनमेंट, सुपरहिट फिल्में, देश-दुनिया की खबरें, बच्चों के कार्टून प्रोग्राम, लाइफस्टाइल और बेहतरीन रीजनल कंटेंट देख सकेंगे। इस पैक के जरिए यूजर्स JioStar, Sony Entertainment, Sun TV Network, Warner Bros. Discovery और ETV जैसे बड़े ब्रॉडकास्टर्स के चैनल्स का लुत्फ उठा सकेंगे। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बजट प्लान में JioStar और Sony के स्पोर्ट्स (खेल) चैनल्स को शामिल नहीं किया गया है।कैसे करें एक्टिवेट? प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों के लिए उपलब्धइस सर्विस को शुरू करने की प्रक्रिया बेहद आसान और झंझट मुक्त है:₹55 वाले प्लान से अपना रिचार्ज सफल होने के बाद, यूजर्स को अपने स्मार्टफोन में सिर्फ 'JioTV' ऐप ओपन करना होगा।ऐप में अपने रजिस्टर्ड जियो मोबाइल नंबर को दर्ज कर ओटीपी (OTP) के जरिए लॉग इन करना होगा।इसके लिए किसी अलग या जटिल एक्टिवेशन प्रोसेस की जरूरत नहीं है, रिचार्ज होते ही सारे एलिजिबल प्रीमियम चैनल्स तुरंत अनलॉक हो जाते हैं।ये सब्सक्रिप्शन फिलहाल एक समय में एक मोबाइल डिवाइस (Single Screen) पर काम करेगा और जियो के प्रीपेड व पोस्टपेड, दोनों तरह के ग्राहकों के लिए उपलब्ध है।आखिर किन यूजर्स के लिए सबसे बेस्ट है ये प्लान?यह नया प्रो पैक उन मोबाइल यूजर्स के लिए एकदम सटीक विकल्प है जो मुख्य रूप से अपने स्मार्टफोन पर ही टीवी सीरियल्स और लाइव शोज देखना पसंद करते हैं और जिन्हें अतिरिक्त डेटा या कॉलिंग रीचार्ज की जरूरत नहीं होती। चूंकि यह सिर्फ एक एड-ऑन एंटरटेनमेंट पैक है, इसलिए इस सर्विस का लाभ उठाने के लिए सब्सक्राइबर्स के पास पहले से ही कोई भी एक एक्टिव जियो प्रीपेड या पोस्टपेड बेस प्लान होना अनिवार्य है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:48 am

मार्केट क्रैश में काम आया 'जादुई फॉर्मूला': जब फेल हो गए सोना और शेयर बाजार, तब मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ने दिया 20% तक का बंपर रिटर्न

पिछले छह महीने वैश्विक और भारतीय निवेशकों के लिए बेहद उथल-पुथल भरे रहे हैं। पहले घरेलू इक्विटी मार्केट में मंदी आई और फिर अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते ग्लोबल स्टॉक मार्केट्स औंधे मुंह गिर गए। आमतौर पर जब शेयर बाजार गिरता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने-चांदी की तरफ भागते हैं क्योंकि इन दोनों एसेट क्लास में उल्टा संबंध (Inverse Relationship) होता है। लेकिन इस बार इतिहास ने खुद को नहीं दोहराया। मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरें न घटाने के कड़े संकेतों के चलते पिछले 6 महीनों में सोने की कीमतों में करीब 20% और चांदी में 43% की भारी गिरावट आई है। वहीं दूसरी ओर, युद्ध के दबाव से सेंसेक्स 11% और निफ्टी 8.6% तक टूट चुके हैं। जब कमाई के ये दोनों मुख्य रास्ते बंद हो गए, तब म्यूचुअल फंड की एक खास कैटेगरी 'मल्टी एसेट एलोकेशन फंड' (Multi-Asset Allocation Fund) निवेशकों के लिए संकटमोचक बनकर उभरी और तगड़ा मुनाफा कराया।सेबी के नियम और निवेश का पूरा गणितमार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के कड़े नियमों के अनुसार, मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स के लिए यह अनिवार्य है कि वे कम से कम तीन अलग-अलग एसेट क्लास में से प्रत्येक में न्यूनतम 10% का निवेश (Allocation) बनाए रखें। ये तीन मुख्य साधन होते हैं:इक्विटी (Equity): शेयर बाजार में निवेश।डेट (Debt): फिक्स्ड इनकम और सरकारी सिक्योरिटीज।कमोडिटी (Commodity): सोना, चांदी या रियल एस्टेट (REITs)।चूंकि अलग-अलग समय पर हर एसेट क्लास का प्रदर्शन अलग होता है, इसलिए यह फंड ऑटोमैटिक तरीके से आपके रिस्क और रिटर्न को बैलेंस कर देता है।इन टॉप फंड्स ने पिछले 3 साल में दिया 20% तक का सालाना रिटर्नइस कैटेगरी में सबसे बड़ी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) संभालने वाले फंड्स ने इक्विटी म्यूचुअल फंड्स को भी मात दे दी है। पिछले 3 सालों के प्रदर्शन की तालिका नीचे दी गई है:म्यूचुअल फंड का नामपिछले 3 साल का सालाना रिटर्न (CAGR)निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड19.92%एसबीआई (SBI) मल्टी एसेट एलोकेशन फंड17.50%आदित्य बिड़ला सन लाइफ मल्टी एसेट फंड17.40%मोतीलाल ओसवाल मल्टी एसेट फंड13.90%बार-बार पोर्टफोलियो बदलने के झंझट से मुक्तिमल्टी एसेट फंड का सबसे बड़ा व्यावहारिक फायदा यह है कि इसमें खुद निवेशकों को बाजार की चाल देखकर बार-बार अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस (बदलना) नहीं करना पड़ता। फंड मैनेजर बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए खुद ही पैसे को सही जगह शिफ्ट कर देते हैं। इससे निवेशकों का पैसा केवल उन एसेट्स में फंसने से बच जाता है जो पहले अच्छा कर रहे थे पर अब मंदी में हैं। यह फंड उन एसेट्स में भी सही समय पर एंट्री दिलाता है जिन्हें वर्तमान में बाजार पसंद नहीं कर रहा, लेकिन भविष्य में वे बंपर रिटर्न दे सकते हैं।बाजार के दिग्गजों की राय: पोर्टफोलियो डाइवर्सिफ़िकेशन के लिए यही है बेस्ट टाइमफाइनेंशियल एक्सपर्ट्स और बाजार के जानकारों का साफ मानना है कि यदि आप मौजूदा वैश्विक मंदी और युद्ध के हालातों में अपने निवेश को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) लाने का यह सबसे सही और सटीक समय है। मल्टी-एसेट फंड्स जोखिम को बहुत कम कर देते हैं क्योंकि जब इक्विटी और कमोडिटी दोनों नीचे जा रहे हों, तब डेट (Fixed Income) वाला हिस्सा आपके पोर्टफोलियो को भारी गिरावट से बचाए रखता है। नए और सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे लोगों के लिए यह हाइब्रिड मॉडल सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:47 am

RBI का बैंकों को बड़ा झटका: नियमों के पालन, अवेयरनेस और प्रमोशनल SMS पर शुल्क वसूलने पर लगी रोक; जानें ग्राहकों को कितना होगा फायदा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक नए और कड़े फैसले से देश के बड़े बैंकों को वित्तीय रूप से तगड़ा झटका लगने वाला है। बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ग्राहकों को भेजे जाने वाले कुछ विशेष SMS अलर्ट पर शुल्क वसूलने (SMS Charges) पर रोक लगने से बड़े बैंकों की सालाना फीस आय (Fee Income) में करीब 300 करोड़ रुपये तक की भारी कमी आ सकती है। हालांकि, केंद्रीय बैंक के इस कदम से देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें अपनी जेब से इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा।नियमों के पालन, जागरूकता और प्रचार वाले SMS अब मुफ्तRBI द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश के मुताबिक, बैंक अब नियमों के पालन (Compliance), वित्तीय जागरूकता (Awareness) और प्रचार-प्रसार (Promotional) से जुड़े SMS अलर्ट के लिए ग्राहकों से किसी भी प्रकार का चार्ज नहीं वसूल सकते हैं। अब तक देश के अधिकांश सरकारी और निजी बैंक इन रूटीन संदेशों की लागत निकालने के नाम पर ग्राहकों के खातों से हर तिमाही (Quarterly) 15 से 18 रुपये तक का SMS शुल्क गुपचुप तरीके से काट लेते थे, जिस पर अब पूरी तरह ब्रेक लग गया है।₹500 तक के छोटे ट्रांजैक्शन पर SMS भेजना अब जरूरी नहींरिजर्व बैंक ने बैंकों को परिचालन लागत कम करने के लिए एक बड़ी छूट भी दी है। नए नियम के तहत, 500 रुपये या उससे कम के छोटे लेनदेन (Small Value Transactions) पर ग्राहकों को SMS अलर्ट भेजना अब कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं रहेगा। बैंक चाहें तो लागत बचाने के लिए इन छोटे ट्रांजैक्शन की सूचना SMS के बजाय अन्य डिजिटल माध्यमों से दे सकते हैं।हालांकि, ग्राहकों की सुरक्षा और बेहतर बैंकिंग अनुभव को ध्यान में रखते हुए HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े प्राइवेट बैंक फिलहाल इस सुविधा को पहले की तरह ही जारी रख सकते हैं। इन बैंकों का मानना है कि रीयल-टाइम SMS अलर्ट से बैंकिंग फ्रॉड (धोखाधड़ी) की आशंका काफी कम हो जाती है।एक बैंक को सालाना ₹360 करोड़ तक के नुकसान का अनुमानविशेषज्ञों का कहना है कि इस रोक के बाद बैंक SMS भेजने का पूरा खर्च सीधे ग्राहकों की जेब से नहीं निकाल पाएंगे। अनुमान के मुताबिक, यदि किसी बड़े बैंक के पास करीब 5 करोड़ एक्टिव और शुल्क देने वाले ग्राहक हैं, तो SMS चार्ज बंद होने से उस अकेले बैंक को सालाना लगभग 360 करोड़ रुपये की शुद्ध आय का नुकसान उठाना पड़ेगा। इस घाटे की भरपाई करने के लिए आने वाले दिनों में बैंक अकाउंट मेंटेनेंस चार्ज (AMC), मिनिमम बैलेंस पेनल्टी या अन्य हिडन शुल्कों को थोड़ा बढ़ा सकते हैं।टेलीकॉम कंपनियों का भी बिगड़ेगा गणित; WhatsApp और Google RCS बनेंगे विकल्पRBI के इस फैसले की आंच टेलीकॉम सेक्टर (दूरसंचार कंपनियों) तक भी पहुंचने वाली है। भारत में वर्तमान में हर महीने लगभग 60 से 80 अरब कमर्शियल (A2P) SMS भेजे जाते हैं, जिनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा बैंकों के छोटे मूल्य वाले ट्रांजैक्शन का होता है। यदि बैंकों ने 500 रुपये तक के लेनदेन पर SMS भेजना बंद या कम कर दिया, तो टेलीकॉम कंपनियों के SMS बिजनेस रेवेन्यू में भारी गिरावट आएगी।केंद्रीय बैंक ने इसके विकल्प के तौर पर बैंकों को Google RCS (रिच कम्युनिकेशन सर्विसेज), WhatsApp Business, इन-ऐप अलर्ट और मोबाइल पुश नोटिफिकेशन जैसे आधुनिक और सस्ते डिजिटल विकल्पों को आधिकारिक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की हरी झंडी दे दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:46 am

केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा: जुलाई से 3% बढ़ेगा महंगाई भत्ता (DA), मई के AICPI इंडेक्स से समझें अपनी सैलरी का पूरा गणित

केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी है। महंगाई के मोर्चे पर राहत देते हुए सरकार जल्द ही महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3 फीसदी का इजाफा करने जा रही है। नवीनतम औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आधिकारिक आंकड़ों ने इस बढ़ोतरी पर अपनी मुहर लगा दी है। इस नए संशोधन के बाद, जनवरी 2026 में मिलने वाले 60 फीसदी डीए के मुकाबले अब नया महंगाई भत्ता बढ़कर 63 फीसदी हो जाएगा, जिससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और पेंशनभोगियों के खाते में आने वाली रकम में तगड़ी बढ़ोतरी होगी।कैसे तय होता है आपके डीए का पूरा गणित? जानिए फॉर्मूलासरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते का कैलकुलेशन किसी अनुमान पर नहीं, बल्कि श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) द्वारा जारी होने वाले कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित एक विशेष गणितीय फॉर्मूले के तहत किया जाता है:$$DA\% = frac{ ext{12 महीने का औसत AICPI-IW (2001 बेस)} - 261.42}{261.42} imes 100$$चूंकि वर्तमान AICPI-IW का बेस ईयर (आधार वर्ष) 2016 है, इसलिए सटीक कैलकुलेशन के लिए पहले प्राप्त इंडेक्स को 2.88 से गुणा करके 2001 के बेस ईयर में बदला जाता है। इसी आधार पर कर्मचारियों का अंतिम महंगाई भत्ता तय होता है।मई के आंकड़ों से समझिए डीए का लाइव कैलकुलेशनश्रम ब्यूरो के नए आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में औद्योगिक श्रमिकों के लिए इंडेक्स बढ़कर 150.8 के स्तर पर पहुंच गया है। मई तक के पिछले 12 महीनों का औसत AICPI-IW निकाला जाए, तो यह 148.075 बैठता है।स्टेप 1 (2001 बेस में बदलाव): $148.075 imes 2.88 = 426.456$स्टेप 2 (फॉर्मूले में वैल्यू रखना): $frac{426.456 - 261.42}{261.42} imes 100$स्टेप 3 (घटाने पर वैल्यू): $frac{165.036}{261.42} imes 100$स्टेप 4 (भाग देने पर अंतिम परिणाम): $0.6313 imes 100 = 63.13\%$सरकारी नियमानुसार, महंगाई भत्ते को कभी भी दशमलव (Decimal) में नहीं, बल्कि निकटतम पूर्णांक (Nearest Round Figure) में घोषित किया जाता है। इसलिए मौजूदा आंकड़ों के आधार पर आपका डीए 63% तय हो चुका है, जो जनवरी के 60% से पूरे 3% अधिक है।8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर आई बड़ी टाइमलाइनमहंगाई भत्ते में इस बढ़ोतरी के साथ-साथ केंद्रीय कर्मचारियों की नजरें 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी समय-सीमा पर भी टिकी हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि नए पे-स्केल की आधिकारिक सिफारिशें अगले साल के अंत तक सामने आ सकती हैं। हालांकि, वेतन में होने वाली वास्तविक वृद्धि को जनवरी 2026 से ही प्रभावी (Retroactive) माना जाएगा।ऐसे में जब भी नया वेतन आयोग पूरी तरह से धरातल पर उतरेगा, तो कर्मचारियों को 18 से 24 महीने का एकमुश्त बंपर एरियर (Arrears) मिलने की प्रबल संभावना है। फिलहाल जुलाई का डीए संशोधन 7वें वेतन आयोग के तहत ही होगा, लेकिन भविष्य में 8वां वेतन आयोग लागू होने पर जुलाई से बनने वाले वित्तीय अंतर की भरपाई एरियर के जरिए कर दी जाएगी।दिवाली पर होगी आधिकारिक घोषणा, एरियर के साथ आएगी सैलरीकेंद्र सरकार नियमानुसार साल में दो बार (1 जनवरी और 1 जुलाई) महंगाई भत्ते को संशोधित करती है। हालांकि, केंद्रीय कैबिनेट से इसकी औपचारिक मंजूरी मिलने में अक्सर कुछ महीनों का वक्त लग जाता है। लेकिन कर्मचारियों को इससे कोई नुकसान नहीं होता, क्योंकि बढ़ी हुई दरें हमेशा 1 जुलाई से ही प्रभावी मानी जाती हैं।उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई के इस डीए संशोधन का आधिकारिक एलान सरकार द्वारा इस साल अक्टूबर में दिवाली के त्योहारी सीजन के आसपास किया जाएगा। त्योहारी मौसम में होने वाले इस एलान से कर्मचारियों के खातों में पिछले महीनों के एरियर के साथ-साथ बढ़ी हुई सैलरी का भुगतान एक साथ होगा, जो बाजारों में भी रौनक लाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:41 am

ITR 80G Tax Deduction Rules: दान पर टैक्स छूट का दावा करने वाले सावधान! इस बार ITR फॉर्म में देना होगा बैंक का ये सीक्रेट कोड और ट्रांजैक्शन नंबर

अगर आप भी समाज सेवा या धार्मिक संस्थाओं में दान देकर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में धारा 80G के तहत टैक्स छूट (Tax Deduction) का दावा करते हैं, तो इस बार आपको पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रहना होगा। आकलन वर्ष 2026-27 (AY 2026-27) के लिए जारी नए ITR फॉर्म में आयकर विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। अब 80G के तहत मिलने वाली छूट के लिए करदाताओं को अतिरिक्त और बेहद सटीक वित्तीय जानकारियां देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कड़े कदम का मुख्य मकसद दान के दावों का डिजिटल तरीके से सत्यापन (Cross-Verification) करना और फर्जी क्लेम के जरिए होने वाली टैक्स चोरी पर पूरी तरह रोक लगाना है।अब सिर्फ रसीद काफी नहीं; देना होगा IFSC कोड और ट्रांजैक्शन नंबरनए नियमों के मुताबिक, अब ITR फॉर्म में केवल यह लिख देना काफी नहीं होगा कि आपने किस संस्था को कितनी राशि दान में दी है। यदि आपने UPI, नेट बैंकिंग (NEFT/RTGS/IMPS) या चेक के जरिए डिजिटल माध्यम से कोई दान दिया है, तो आपको ITR दाखिल करते समय उस भुगतान का ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर (Transaction Reference Number) और जिस बैंक खाते से पैसा कटा है, उस बैंक का IFSC कोड भी दर्ज करना पड़ सकता है। इसका मतलब यह है कि आयकर विभाग अब आपके बैंक स्टेटमेंट के साथ दान की गई राशि के पूरे डिजिटल ट्रेल की सीधे जांच कर सकेगा।ITR-1 से लेकर ITR-4 तक के फॉर्म्स में हुआ बदलावआयकर विभाग ने यह नया खुलासा (Disclosure Clause) उन सभी प्रमुख ITR फॉर्म में जोड़ दिया है, जिनके जरिए टैक्सपेयर्स धारा 80G का क्लेम करते हैं। इनमें नौकरीपेशा लोगों के लिए ITR-1, कैपिटल गेन और अन्य आय वालों के लिए ITR-2, बिजनेस व प्रोफेशनल्स के लिए ITR-3 और प्रिजम्प्टिव इनकम वालों के लिए ITR-4 शामिल हैं। अलग-अलग फॉर्म के लेआउट के हिसाब से इसका प्रारूप थोड़ा बहुत अलग हो सकता है, लेकिन मांगी जाने वाली मुख्य जानकारियां सभी में बिल्कुल एक समान रहेंगी।आखिर क्यों सरकार को उठाना पड़ा यह सख्त कदम?टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर विभाग अब रिटर्न की स्क्रूटनी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस डेटा एनालिटिक्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। विभाग के पास आपके बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले डेटा का पूरा बैकअप होता है। ऐसे में यदि कोई टैक्सपेयर ITR में गलत, अधूरी या फर्जी जानकारी भरता है, तो एआई सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेगा। इससे न केवल आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग रुक जाएगी, बल्कि आपका टैक्स छूट का दावा भी सीधे खारिज कर दिया जाएगा और पेनल्टी का नोटिस घर आ सकता है।ITR फाइल करने से पहले ये 5 दस्तावेज रख लें पासअगर आप बिना किसी अड़चन के 80G का पूरा रिफंड और लाभ उठाना चाहते हैं, तो ऑनलाइन फॉर्म भरने से पहले ये दस्तावेज अपने पास जरूर रख लें:संबंधित संस्था द्वारा जारी की गई आधिकारिक दान की रसीद (Donation Receipt)।संबंधित वित्तीय वर्ष का बैंक स्टेटमेंट या पासबुक।डिजिटल पेमेंट का ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर।अपने बैंक का सही IFSC कोड।संस्था का PAN नंबर और यह जांच लें कि वह संस्था धारा 80G के तहत आयकर विभाग से मान्यता प्राप्त (Registered) है या नहीं।भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना फंस जाएगा रिफंडटैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि जरा सी लापरवाही आपके लिए भारी पड़ सकती है। ITR भरते समय कभी भी अनुमान या अंदाजे के आधार पर आंकड़े न लिखें। गलत ट्रांजैक्शन नंबर दर्ज करना, दान की तारीख या राशि में हेरफेर करना, या किसी ऐसी संस्था के नाम पर क्लेम करना जो 80G के लिए पात्र नहीं है, आपको मुश्किल में डाल सकता है। डिजिटल सत्यापन के इस नए दौर में सही और सटीक जानकारी देना ही आयकर विभाग के नोटिस और अतिरिक्त पूछताछ से बचने का एकमात्र तरीका है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:40 am

सेडान कारों में क्यों नहीं होता रियर वाइपर? पैसे बचाने की तरकीब या कोई बड़ा वैज्ञानिक कारण; जानिए इसके पीछे का असली लॉजिक

अगर आपने कभी सड़कों पर दौड़ती अलग-अलग गाड़ियों को ध्यान से देखा हो, तो एक बात जरूर आपके दिमाग में आई होगी। ज्यादातर हैचबैक (Hatchback) और एसयूवी (SUV) कारों के पीछे वाले शीशे (Windscreen) पर वाइपर लगा होता है, लेकिन लग्जरी और प्रीमियम दिखने वाली सेडान (Sedan) कारों में यह फीचर गायब रहता है। ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि शायद कंपनियां पैसे बचाने या लागत कम करने के लिए सेडान में रियर वाइपर नहीं देतीं। लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है। इसके पीछे ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का एक बहुत बड़ा तकनीकी और वैज्ञानिक कारण छिपा है। आइए इसे बेहद आसान भाषा में समझते हैं।1. एयरोडायनामिक्स (Aerodynamics) और कार का डिजाइनसेडान कारों में रियर वाइपर न होने की सबसे मुख्य वजह उसका एयरोडायनामिक डिजाइन है। सेडान कारों की बनावट 'थ्री-बॉक्स' (Three-Box) स्टाइल में होती है, जिसमें इंजन, पैसेंजर केबिन और बूट स्पेस (डिक्की) अलग-अलग झुकाव में होते हैं। इन कारों का पिछला शीशा एक सुचारू ढलान (Sloping Roofline) की तरह नीचे की ओर जाता है।जब कार तेज रफ्तार में सड़क पर दौड़ती है, तो सामने से आने वाली हवा गाड़ी की छत से होती हुई पिछले शीशे के ऊपर से बेहद तेजी और सीधे प्रवाह में निकल जाती है। हवा का यह तेज बहाव अपने साथ शीशे पर पड़ने वाली हल्की धूल, मिट्टी और बारिश की बूंदों को खुद-ब-खुद उड़ा ले जाता है। यानी कुदरती हवा ही सेडान के पिछले शीशे को साफ रखने का काम कर देती है।2. SUV और हैचबैक में क्यों जरूरी है रियर वाइपर?एसयूवी और हैचबैक कारों का पिछला हिस्सा (रियर प्रोफाइल) बिल्कुल सीधा या फ्लैट (Flat Vertical Back) होता है। जब ये गाड़ियां तेज रफ्तार में चलती हैं, तो इनके सीधे डिजाइन के कारण गाड़ी के ठीक पीछे हवा का दबाव अचानक बहुत कम हो जाता है, जिससे वहां एक लो-प्रेशर वैक्यूम जोन (Low-Pressure Vacuum Zone) बन जाता है।इस वैक्यूम के कारण कार के नीचे और पहियों से उड़ने वाली धूल, कीचड़, गंदगी और बारिश का पानी पीछे की तरफ गोल घूमते हुए सीधे रियर शीशे पर जाकर चिपक जाता है। इसके चलते ड्राइवर को रियर व्यू मिरर (IRVM) से पीछे का ट्रैफिक दिखना बंद हो जाता है। इसी गंदगी को साफ करने के लिए हैचबैक और एसयूवी में रियर वाइपर और वॉशर देना तकनीकी रूप से अनिवार्य हो जाता है।3. बूट स्पेस (डिक्की) और वाइपर मोटर की जगहएक व्यावहारिक कारण यह भी है कि सेडान कारों की डिक्की (Boot Space) पिछले शीशे के ठीक नीचे से शुरू होती है। रियर वाइपर को चलाने के लिए एक भारी-भरकम इलेक्ट्रिकल मोटर लगानी पड़ती है। हैचबैक और एसयूवी में इस मोटर को पिछले दरवाजे (Tailgate) के अंदर आसानी से फिट कर दिया जाता है। लेकिन सेडान में शीशे के ठीक नीचे डिक्की का ढक्कन होने के कारण वाइपर मैकेनिज्म और मोटर को इंस्टॉल करने के लिए पर्याप्त और सही जगह नहीं मिल पाती है।क्या पैसे बचाना है कंपनियों का मकसद?यह पूरी तरह एक मिथक (अफ़वाह) है कि कंपनियां पैसे बचाने के लिए ऐसा करती हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियां गाड़ियों को डिजाइन करते समय एयरोडायनामिक्स, वजन संतुलन और ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) को प्राथमिकता देती हैं। जब कार का डिजाइन खुद ही शीशे को साफ रखने में सक्षम है, तो वहां बिना वजह रियर वाइपर लगाना कार की लागत, वजन और तकनीकी जटिलता को बढ़ाना होगा। यही वजह है कि लाखों रुपये की लग्जरी सेडान कारों में भी रियर वाइपर नहीं दिया जाता।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:39 am

एक पौधे पर 12 तरह के आम: जमुई के दो भाइयों ने 'पुष्पवाटिका' में उगाया जापान का मियाजाकी और थाईलैंड का बनाना मैंगो, हर साल हो रही ₹12 लाख की कमाई

बिहार के जमुई जिले से कृषि क्षेत्र में एक बेहद प्रेरणादायक और अनोखी सफलता की कहानी सामने आई है। सिंगारपुर गांव के दो सगे भाइयों— कनिष्क कुमार गुप्ता और राम प्रसाद गुप्ता ने पारंपरिक खेती की रूढ़ियों को तोड़कर विदेशी और प्रीमियम किस्म के आमों की सफल बागवानी की है। दोनों भाइयों ने आधुनिक तकनीक और नई सोच के दम पर अपनी पारिवारिक ‘पुष्पवाटिका नर्सरी’ को एक ऐसे हाई-टेक मॉडल में बदल दिया है, जो आज पूरे बिहार के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।एक ही पेड़ पर उग रहे हैं 2 से 12 अलग-अलग किस्म के आमइस पुष्पवाटिका नर्सरी की सबसे बड़ी खासियत और आकर्षण का केंद्र यहाँ ग्राफ्टिंग (कलम लगाने) की आधुनिक तकनीक से तैयार किए गए अनोखे पौधे हैं। दोनों भाइयों ने अपनी कुशलता से एक ही आम के पौधे पर 2 से लेकर 12 अलग-अलग वैरायटी (किस्मों) के आम उगाकर सबको हैरान कर दिया है। इस अनोखे अजूबे और आधुनिक बागवानी को देखने के लिए दूर-दूर से किसान और कृषि विशेषज्ञ सिंगारपुर गांव पहुंच रहे हैं।नौकरी के बजाय चुनी आधुनिक खेती, पिता की नर्सरी को दिया नया रूपकरीब 40 वर्ष पहले इनके पिता शत्रुधन साव ने एक बहुत ही छोटे स्तर पर इस नर्सरी की नींव रखी थी। बड़े होने पर कनिष्क और राम प्रसाद ने नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय अपनी पुश्तैनी जमीन और काम को ही आगे बढ़ाने का फैसला किया। दोनों भाइयों ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से बागवानी और ग्राफ्टिंग का कड़ा वैज्ञानिक प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक नर्सरी को आधुनिक और विदेशी तकनीक के साथ अपग्रेड कर आत्मनिर्भर खेती की एक बेहतरीन मिसाल पेश की।18 इंच का केला आम और दुनिया का सबसे महंगा 'मियाजाकी'कनिष्क कुमार गुप्ता के मुताबिक, जमुई की मिट्टी और जलवायु (Climate) इन विदेशी और प्रीमियम आमों के उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल साबित हुई है। उनकी नर्सरी में इस समय ये खास किस्में फल दे रही हैं:बनाना मैंगो (Thailand): थाईलैंड की यह वैरायटी दिखने में बिल्कुल केले जैसी लंबी होती है। इसके एक आम की लंबाई करीब 18 इंच तक और वजन 800 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक होता है।मियाजाकी आम (Japan): अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये प्रति किलो बिकने वाला जापान का यह विश्व प्रसिद्ध रूबी-रेड आम अब जमुई के सिंगारपुर में भी सफलतापूर्वक उग रहा है।इसके अलावा नर्सरी में देश-विदेश की प्रसिद्ध किस्में जैसे मालदा, दशहरी, आम्रपाली, काजू आम, कैसर, बंगाल टाइगर और महाराष्ट्र का मशहूर अल्फांसो (हापुस) भी तैयार किया जा रहा है।शुरुआत में उड़ाया मजाक, अब 50 विदेशी किस्मों का है लक्ष्यराम प्रसाद गुप्ता ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने शुरुआत में एक ही पेड़ पर कई तरह के आम उगाने और विदेशी किस्में लाने के प्रयोग शुरू किए, तो स्थानीय लोग उन पर हंसते थे और उनके इस आइडिया का मजाक उड़ाते थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज वही लोग उनकी इस वैश्विक सफलता की तारीफ कर रहे हैं। दोनों भाइयों का अगला लक्ष्य अब 50 से अधिक दुर्लभ विदेशी किस्मों के आम भारतीय किसानों तक किफायती दाम पर पहुंचाना है। इसके साथ ही वे आम की गुठली के औषधीय और व्यावसायिक उपयोग पर भी रिसर्च कर रहे हैं।सालाना ₹12 लाख का मुनाफा; किसानों को दी 'मेड़ बागवानी' की सलाहआज इस आधुनिक नर्सरी से गुप्ता परिवार को तमाम खर्चे काटकर करीब 12 लाख रुपये की शुद्ध सालाना आय (Annual Income) हो रही है। दोनों भाई अन्य किसानों को पारंपरिक धान-गेहूं की खेती के साथ-साथ फलदार पौधों को अपनाने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि किसान भाई अपने खेतों की मेड़ों (Boundaries) पर भी इन कीमती आमों के पौधे लगाकर अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं। सिंगारपुर गांव के इन युवा किसानों की यह सफलता साबित करती है कि अगर सही प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प हो, तो बिहार की धरती पर भी विश्वस्तरीय खेती कर मोटी कमाई की जा सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:37 am

अमरनाथ यात्रा पर सियासत: समय से पहले बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने पर भिड़े उमर अब्दुल्ला और इल्तिजा मुफ्ती, जानिए क्या है पूरा विवाद

जम्मू-कश्मीर की पवित्र अमरनाथ गुफा से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने देशभर के श्रद्धालुओं को मायूस कर दिया है। 57 दिनों तक चलने वाली इस पावन अमरनाथ यात्रा को शुरू हुए अभी महज कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग (हिमलिंग) लगभग पूरी तरह पिघल चुका है। 3 जुलाई से शुरू हुई इस यात्रा के शुरुआती 4 दिनों में ही 80 हजार से अधिक भक्तों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे, लेकिन 6 जुलाई को सामने आई तस्वीरों के मुताबिक हिमलिंग करीब 90 फीसदी तक गायब हो चुका है। इस घटना के बाद अब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।शिवलिंग का पिघलना इंसानी नियंत्रण से बाहर: सीएम उमर अब्दुल्लाहिमलिंग के समय से पहले पिघलने और बिना रजिस्ट्रेशन के पहुंच रहे श्रद्धालुओं के मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को अपनी बात रखी। सीएम उमर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, जहां तक शिवलिंग का सवाल है, यह कुदरत और भगवान का बनाया हुआ है। न तो आप और न ही मैं यह तय कर सकते हैं कि यह कितने समय तक रहेगा। इस बार यह पूर्ण आकार में छह दिन तक रहा, जो इंसानी नियंत्रण से परे है।बिना पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) यात्रा करने की कोशिश करने वाले लोगों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तीर्थयात्रियों की संख्या पर पहले से ही एक सीमा (Cap) तय की है। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) इस नियम को लागू करने के लिए पूरी तरह बाध्य है और यह पूरी तरह से श्राइन बोर्ड का आंतरिक मामला है।इल्तिजा मुफ्ती ने उठाए सवाल: रोप-वे और अंधाधुंध भीड़ को बताया जिम्मेदारदूसरी तरफ, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने बाबा बर्फानी के समय से पहले अंतर्ध्यान होने पर गंभीर चिंता जताते हुए श्राइन बोर्ड के प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। इल्तिजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि अमरनाथ गुफा ग्लेशियरों और बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच बेहद संवेदनशील (Eco-sensitive Zone) इलाके में स्थित है। हिंदुओं के लिए 12वीं सदी से अस्तित्व में रहे इस बेहद पवित्र स्थल के आसपास किए जा रहे गैर-जरूरी निर्माण कार्य, यात्रियों की भारी भीड़ और बड़ा रोप-वे प्रोजेक्ट पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।इल्तिजा मुफ्ती ने आगे कहा, अमरनाथ यात्रा हमारी साझा 'कश्मीरियत' की भावना से गहराई से जुड़ी है और श्रद्धालुओं का कश्मीर में हमेशा दिल से स्वागत है। लेकिन इस पवित्र परंपरा को लंबे समय तक अक्षुण्ण रखने के लिए श्राइन बोर्ड को अधिक सावधानी और समझदारी बरतनी होगी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक दौर ऐसा भी था जब यात्रा खत्म होने के बाद भी हिमलिंग काफी समय तक अपने प्राकृतिक स्वरूप में बना रहता था।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:30 am

गुरु दत्त बर्थ एनिवर्सरी: एक शहर की मोहब्बत में बदला था अपना नाम, कोलकाता से शुरू हुआ था 'वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण' का अमर सफर

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसी शख्सियतें हुई हैं, जिन्होंने सिर्फ फिल्में नहीं बनाईं, बल्कि पर्दे पर जज्बातों की जीवंत कविता लिखी है। एक ऐसा ही कालजयी नाम है— गुरु दत्त। ‘प्यासा’, ‘कागज के फूल’ और ‘साहब बीबी और गुलाम’ जैसी क्लासिक फिल्में देने वाले महान फिल्ममेकर गुरु दत्त की आज 9 जुलाई 2026 को बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर सिनेमाप्रेमी उनकी जिंदगी से जुड़े अनसुने पन्नों को पलट रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस 'गुरु दत्त' के नाम पर आज दुनिया फिदा है, वह उनका असली नाम था ही नहीं? उन्होंने एक शहर के प्रति अपनी बेपनाह मोहब्बत के चलते अपना नाम हमेशा के लिए बदल लिया था।'वसंत कुमार' से 'गुरु दत्त' बनने की बेहद दिलचस्प कहानीबहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि गुरु दत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। उनका जन्म बेंगलुरु (बेंगलोर) में हुआ था, लेकिन उनकी किस्मत का रुख किसी और ही शहर में बदलने वाला था। दरअसल, पिता की नौकरी के सिलसिले में उनका पूरा परिवार कोलकाता (तब कलकत्ता) शिफ्ट हो गया था। गुरु दत्त का बचपन और जवानी के शुरुआती दिन इसी सांस्कृतिक शहर की गलियों में बीते।कोलकाता की हवा में घुले साहित्य, कला और संगीत ने युवा वसंत कुमार के दिल-ओ-दिमाग पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि उन्हें बंगाली संस्कृति और भाषा से बेइंतहा मोहब्बत हो गई। इस शहर के प्रति अपने इसी गहरे जुड़ाव और सम्मान की खातिर उन्होंने अपना मूल नाम 'वसंत कुमार' त्याग दिया और अपना नया नाम 'गुरु दत्त' रख लिया, जो सुनने में पूरी तरह से एक बंगाली नाम प्रतीत होता है।कोलकाता की तंगहाली में सीखीं कोरियोग्राफी की बारीकियांकोलकाता का प्रभाव सिर्फ उनके नाम बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके भीतर छिपे संवेदनशील डायरेक्टर को तराशने में भी इस शहर का बड़ा योगदान था। आर्थिक तंगहाली के दौर में भी उन्होंने कला से अपना नाता नहीं तोड़ा। उन्होंने कोलकाता में रहते हुए मशहूर डांसर उदय शंकर की डांस एकेडमी में दाखिला लिया और कोरियोग्राफी की बारीकियां सीखीं। बंगाली समाज और वहां के सिनेमा के इसी गहरे प्रभाव ने आगे चलकर गुरु दत्त को एक ऐसा फिल्ममेकर बनाया, जो इंसानी दर्द और तन्हाई को पर्दे पर जीवंत कर देता था।मुंबई आगमन और ‘प्यासा’ से रचा नया इतिहासजब गुरु दत्त ने मायानगरी मुंबई का रुख किया, तो शुरुआत में उन्होंने बतौर कोरियोग्राफर और एक्टर संघर्ष किया। लेकिन उनका असली हुनर कैमरे के पीछे यानी निर्देशन में था। उन्होंने ‘बाजी’ और ‘आर पार’ जैसी कमर्शियल फिल्में बनाकर इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। लेकिन उन्हें असली वैश्विक पहचान तब मिली जब उन्होंने ‘प्यासा’ और ‘कागज के फूल’ जैसी बेहतरीन कल्ट फिल्में बनाईं। इन फिल्मों में दिखाया गया समाज का खोखलापन और प्यार की तड़प आज भी दुनिया भर के फिल्म स्कूलों में एक मिसाल की तरह पढ़ाई जाती है।अधूरा रह गया जिंदगी का सफर, तन्हाई में बीती रातेंगुरु दत्त पर्दे पर जितने कामयाब थे, उनकी निजी जिंदगी उतनी ही उलझी हुई और अकेलेपन से भरी रही। मशहूर प्लेबैक सिंगर गीता दत्त से शादी के बाद भी उनकी जिंदगी में सुकून नहीं लौट सका। काम के प्रति उनका पागलपन और पर्सनल लाइफ के तनाव ने उन्हें अंदर से खोखला कर दिया था। आखिरकार, साल 1964 में महज 39 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले गुरु दत्त ने अपनी जिंदगी का सफर भले ही बहुत जल्दी खत्म कर लिया हो, लेकिन सिनेमा के इतिहास में एक शहर की मोहब्बत में बदला गया उनका यह नाम हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गया।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:29 am

आलिया भट्ट की ‘ऐल्फा’ का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल: छठे दिन आई 33% की भारी गिरावट, क्या YRF स्पाई यूनिवर्स को लगेगा एक और बड़ा झटका?

बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की मोस्ट अवेटेड स्पाई-थ्रिलर फिल्म ‘ऐल्फा’ (Alpha) के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को देखकर मंगलवार को लगा था कि शायद फिल्म की मुश्किलें अब कम हो रही हैं, लेकिन बुधवार के नतीजों ने मेकर्स की चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। फिल्म की रिलीज को 6 दिन पूरे हो चुके हैं और छठे दिन 'ऐल्फा' की कमाई अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। रिलीज के पहले वीकेंड में जिस तरह फिल्म ने रफ्तार पकड़ी थी, उसे देखकर लग रहा था कि यह अपने 100 करोड़ रुपये के बजट को आसानी से पार कर लेगी। लेकिन अब बजट निकालना ही फिल्म के लिए सबसे बड़ा टास्क बन गया है। अगर फिल्म बजट वसूलने में नाकाम रहती है, तो यह आलिया भट्ट के लिए बहुत बड़ा झटका होगा, क्योंकि उनकी पिछली फिल्म ‘जिगरा’ भी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई थी।छठे दिन औंधे मुंह गिरी कमाई, ऑक्यूपेंसी सिर्फ 10%फिल्म बॉक्स ऑफिस ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार (छठे दिन) ‘ऐल्फा’ के बिजनेस में मंगलवार के मुकाबले 32.9% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। फिल्म ने बुधवार को भारतीय बॉक्स ऑफिस पर महज 2.85 करोड़ रुपये का कारोबार किया है, जबकि एक दिन पहले मंगलवार को इसका कलेक्शन 4.25 करोड़ रुपये था। देशभर में फिल्म के पास कुल 7,321 शोज हैं, लेकिन इसके बावजूद सिनेमाघरों में ऑक्यूपेंसी रेट (थिएटर भरने की रफ्तार) गिरकर सिर्फ 10 परसेंट रह गई है।6 दिनों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (कमाई का पूरा ब्यौरा)फिल्म की अब तक की कमाई पर नजर डालें तो पहले वीकेंड के बाद से इसके ग्राफ में लगातार गिरावट देखी जा रही है:पहला दिन (शुक्रवार): ₹9.25 करोड़दूसरा दिन (शनिवार): ₹11.50 करोड़तीसरा दिन (रविवार): ₹13.25 करोड़चौथा दिन (सोमवार): ₹3.85 करोड़पांचवां दिन (मंगलवार): ₹4.25 करोड़छठा दिन (बुधवार): ₹2.85 करोड़इस गिरावट के साथ ही 'ऐल्फा' का कुल नेट भारतीय बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 44.95 करोड़ रुपये हो चुका है। वहीं, अगर भारत में ग्रॉस कलेक्शन की बात करें तो यह आंकड़ा 53.59 करोड़ रुपये है। वर्ल्डवाइड (दुनियाभर से) कलेक्शन के मामले में फिल्म ने अब तक कुल 74.89 करोड़ रुपये की कमाई की है।क्या 'वार 2' की तरह फ्लॉप होने की राह पर है 'ऐल्फा'?यशराज फिल्म्स (YRF) के स्पाई यूनिवर्स के लिए यह समय काफी मुश्किलों भरा नजर आ रहा है। इससे पहले 450 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनी ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर स्टारर 'वार 2' (War 2) बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई थी, जिससे मेकर्स को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा था। अब आलिया भट्ट की 'ऐल्फा' भी उसी कगार पर खड़ी दिख रही है। अगर इस फिल्म को फ्लॉप के टैग से बचना है, तो इसे घरेलू बाजार में कम से कम अपना बजट (100 करोड़ रुपये) निकालना होगा ताकि यह कम से कम 'एवरेज' फिल्मों की कैटेगरी में शामिल हो सके। इससे पहले आई सलमान खान की 'टाइगर 3' फ्लॉप तो नहीं थी, लेकिन उसने भी उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं की थी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि फिल्म आने वाले वीकेंड में कितनी वापसी कर पाती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:28 am

टीवी की 'कोमोलिका' उर्वशी ढोलकिया का जन्मदिन: 16 में शादी, 17 में जुड़वा बच्चे और 18 से पहले तलाक; किसी फिल्म जैसी है असली जिंदगी

छोटे पर्दे पर अपनी शातिर निगाहों, टेढ़ी मुस्कान और बैकग्राउंड में बजने वाले खास ट्यून से घर-घर में 'कोमोलिका' के रूप में मशहूर हुईं एक्ट्रेस उर्वशी ढोलकिया आज 9 जुलाई 2026 को अपना 47वां जन्मदिन मना रही हैं। टीवी स्क्रीन पर भले ही उर्वशी ने वैम्प (खलनायिका) बनकर लोगों के दिलों में खौफ पैदा किया हो, लेकिन उनकी असल जिंदगी की कहानी किसी सुपरहिट इमोशनल फिल्म की हिरोइन जैसी है। आज उनके जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन का वह पन्ना, जब बेहद कम उम्र में उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।17 की उम्र में बनीं मां, 18 से पहले उजड़ गया संसारउर्वशी ढोलकिया की निजी जिंदगी शुरुआत से ही कड़े संघर्षों के बीच गुजरी है। जिस नादान उम्र में लड़कियां अपने करियर और पढ़ाई के सपने बुनती हैं, यानी महज 16 साल की उम्र में उर्वशी की शादी कर दी गई थी। शादी के तुरंत बाद वह प्रेग्नेंट हो गईं और जब वह सिर्फ 17 साल की थीं, तब उन्होंने दो जुड़वा बेटों— क्षितिज और सागर को जन्म दिया। लेकिन किस्मत का क्रूर खेल देखिए, बच्चों के जन्म के महज डेढ़ साल के भीतर ही पति से उनका रिश्ता हमेशा के लिए टूट गया। 18 साल की होने से पहले ही उर्वशी के कंधों पर बिना किसी सहारे के दो नन्हें बच्चों को अकेले पालने की भारी जिम्मेदारी आ गई थी।समाज के तानों और आर्थिक तंगी से लड़ीं अकेले जंगउस दौर में एक सिंगल मदर के लिए समाज में अकेले दो बच्चों की परवरिश करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लोगों के तीखे ताने, अकेलेपन का खौफ और पैसों की भारी किल्लत जैसी तमाम मुश्किलें उनके सामने दीवार बनकर खड़ी थीं। लेकिन उर्वशी ने कभी हार नहीं मानी और न ही अपनी किस्मत पर आंसू बहाए। अपने परिवार के सहयोग से उन्होंने टीवी इंडस्ट्री का रुख किया और छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत कर दिन-रात एक कर दिया। उन्होंने मेहनत के दम पर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि अपने दोनों बच्चों को एक शानदार परवरिश और बेहतरीन जिंदगी भी दी।जो बच्चे कभी थे जिम्मेदारी, आज वही हैं उनकी सबसे बड़ी ढालउर्वशी ढोलकिया का वही दर्दनाक और कठिन अतीत आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। उनके दोनों बेटे— क्षितिज और सागर अब बड़े हो चुके हैं और अपनी मां की ढाल बनकर हर मोड़ पर खड़े रहते हैं। अक्सर दोनों बेटे अपनी मां उर्वशी के साथ सोशल मीडिया पर फनी और प्यारे वीडियोज (Reels) शेयर करते रहते हैं, जिन्हें फैंस का भरपूर प्यार मिलता है। जो बच्चे कभी उनकी गोद में थे, आज वही उनके जीवन के सबसे मजबूत पिलर हैं।'कोमोलिका' से 'बिग बॉस' विनर बनने तक का सफरउर्वशी के करियर की बात करें तो एकता कपूर के कल्ट शो ‘कसौटी जिंदगी की’ में 'कोमोलिका' का आइकॉनिक किरदार निभाकर उन्होंने इतिहास रच दिया था। उनके इस किरदार की बराबरी आज तक कोई विलेन नहीं कर पाई है। इसके बाद उन्होंने 'बिग बॉस सीजन 6' में अपनी बेबाक और मजबूत पर्सनैलिटी से दर्शकों का दिल जीता और शो की विनर बनीं। आज उर्वशी ढोलकिया एक बेहद खुशहाल, आत्मनिर्भर और गर्व से भरी जिंदगी जी रही हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:26 am

ITR Filing Mistakes: आयकर रिटर्न भरते समय भूलकर भी न करें ये 15 गलतियां, वरना सीधे घर आएगा इनकम टैक्स का नोटिस

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आ गया है। अगर आप समय पर और सही तरीके से अपना टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको इनकम टैक्स नोटिस, रिफंड में देरी, अतिरिक्त ब्याज और भारी जुर्माने जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आज के डिजिटल दौर में आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस डेटा एनालिटिक्स की मदद से हर एक टैक्सपेयर के डेटा की बारीक जांच कर रहा है। ऐसे में अनजाने में की गई एक छोटी सी गलती भी आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। आइए जानते हैं ITR भरते समय किन 15 मुख्य गलतियों से आपको हर हाल में बचना चाहिए।1. गलत कटौती (Deduction) या छूट (Exemption) का दावा करनाइन दिनों इनकम टैक्स विभाग ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा सख्त है। गलत सेक्शन में टैक्स कटौती दिखाना, बिना किसी पुख्ता सबूत या रसीद के हाउस रेंट अलाउंस (HRA) या अन्य छूट का दावा करना सीधे तौर पर टैक्स चोरी की श्रेणी में आता है, जिससे विभाग से तुरंत नोटिस आ सकता है।2. गलत ITR फॉर्म का चुनाव करनाटैक्सपेयर्स के लिए अपनी आय के स्रोत के अनुसार सही फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है:ITR-1 (सहज): यह फॉर्म उन नौकरीपेशा (Salaried) लोगों के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और उन्हें कोई कैपिटल गेन नहीं हुआ है।ITR-3: यह फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनकी आय का जरिया कोई बिजनेस या प्रोफेशन है।गलत फॉर्म चुनने पर आयकर विभाग आपके रिटर्न को अमान्य घोषित कर 'डिफेक्टिव नोटिस' जारी कर सकता है।3. गलत असेसमेंट ईयर (AY) भरनावित्तीय वर्ष (Financial Year) और असेसमेंट ईयर (Assessment Year) के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सही असेसमेंट ईयर 2026-27 होगा। गलत AY चुनने पर आपका टैक्स कैलकुलेशन बिगड़ जाएगा और आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है।4. व्यक्तिगत और बैंक जानकारी गलत दर्ज करनाITR फॉर्म में आपका नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जन्मतिथि और पैन (PAN) नंबर हमेशा आपके आधिकारिक पैन रिकॉर्ड के अनुसार ही होना चाहिए। इसके अलावा, यदि आपका कोई टैक्स रिफंड बनता है, तो अपना बैंक खाता नंबर और IFSC कोड बिल्कुल सही और वैलिडेटेड दर्ज करें, अन्यथा आपका रिफंड अधर में लटक सकता है।5. आय के सभी स्रोतों को छिपानाकई लोग सोचते हैं कि केवल सैलरी की जानकारी देना ही काफी है, जो कि बिल्कुल गलत है। आपको अपनी हर छोटी-बड़ी कमाई का ब्यौरा देना अनिवार्य है, जैसे—सेविंग अकाउंट और फिक्स डिपॉजिट (FD) से मिलने वाला ब्याजमकान या दुकान से आने वाली किराए की आय (Rental Income)शेयरों या म्यूचुअल फंड से मिला डिविडेंड और कैपिटल गेनयाद रखें, भले ही कोई आय टैक्स-फ्री (Tax-Free) दायरे में आती हो, फिर भी उसे रिटर्न में दिखाना जरूरी है।6. जानकारी को गलत फॉर्मेट में भरनाITR दाखिल करते समय तारीख जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को हमेशा तय फॉर्मेट यानी DD/MM/YYYY में ही भरें। गलत फॉर्मेट का उपयोग करने से सिस्टम सॉफ्टवेयर आपके रिटर्न में एरर (त्रुटि) दिखा देगा।7. Form 26AS से मिलान न करनारिटर्न सबमिट करने से पहले अपने Form 26AS और Form 16 का मिलान जरूर कर लें। अगर आपकी कंपनी या बैंक द्वारा काटा गया टीडीएस (TDS) आपके Form 26AS में रिफ्लेक्ट नहीं हो रहा है, तो आपको उस कटे हुए टैक्स का क्रेडिट (लाभ) नहीं मिल पाएगा।8. AIS और TIS की जांच न करनाआयकर विभाग के पास आपके हर बड़े वित्तीय लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड होता है, जो आपके Annual Information Statement (AIS) और Taxpayer Information Summary (TIS) में दिखाई देता है। ITR भरने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी घोषित आय इन दोनों स्टेटमेंट से पूरी तरह मैच कर रही हो।9. दो कंपनियों के Form 16 का सही इस्तेमाल न करनायदि आपने संबंधित वित्तीय वर्ष के दौरान अपनी नौकरी बदली है और आपको दो अलग-अलग नियोक्ताओं (Companies) से Form 16 मिला है, तो आपको दोनों कंपनियों से मिली कुल सैलरी को जोड़कर ITR में दिखाना होगा। ऐसा न करने पर टैक्स देनदारी कम दिखती है, जिससे विभाग नोटिस भेजता है।10. एम्प्लॉयर के पास HRA का दावा न कर पानाअगर आप अपनी कंपनी में समय पर किराए की रसीद (Rent Receipts) जमा नहीं कर पाए थे और फॉर्म-16 में एचआरए छूट नहीं मिली है, तो घबराएं नहीं। आप सीधे ITR दाखिल करते समय भी HRA छूट का क्लेम कर सकते हैं, हालांकि इसके लिए मकान मालिक का पैन कार्ड नंबर देना आवश्यक हो सकता है।11. उपलब्ध टैक्स कटौतियों का फायदा न उठानाजागरूकता की कमी के कारण कई लोग आयकर कानून के तहत मिलने वाली विभिन्न वैध कटौतियों (जैसे हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस, आदि) का लाभ उठाना भूल जाते हैं। ITR फाइल करने से पहले सभी वैध कटौतियों को अच्छे से समझ लें ताकि कानूनी रूप से टैक्स बचाया जा सके।12. एडवांस टैक्स न भरना या देरी से भरनायदि आपकी कुल अनुमानित टैक्स देनदारी (TDS कटने के बाद) 10,000 रुपये से अधिक बनती है, तो आपको तिमाही आधार पर एडवांस टैक्स जमा करना होता है। इसमें देरी करने या कम भुगतान करने पर आयकर अधिनियम के तहत 1% प्रति माह की दर से दंडात्मक ब्याज देना पड़ता है।13. समय पर ITR का ई-वेरिफिकेशन न करनाITR फॉर्म को ऑनलाइन सबमिट करना ही प्रक्रिया का अंत नहीं है। रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना अनिवार्य है। आप इसे नेट बैंकिंग, बैंक खाता नंबर, ओटीपी या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) के जरिए आसानी से कर सकते हैं। ऐसा न करने पर आपका भरा हुआ ITR अमान्य (Invalid) माना जाएगा।14. Schedule AL की जानकारी न देनायदि आपकी वार्षिक कुल आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है, तो आपके लिए ITR में 'Schedule AL' भरना अनिवार्य हो जाता है। इस शेड्यूल में आपको देश-विदेश में मौजूद अपनी सभी चल-अचल संपत्तियों (Assets) और उनसे जुड़ी देनदारियों (Liabilities) का पूरा ब्यौरा देना होता है।15. विदेशी संपत्तियों और बैंक खातों की जानकारी छिपानायदि आप भारत के निवासी (Resident and Ordinarily Resident) हैं और आपके पास विदेश में कोई बैंक खाता है, विदेशी कंपनियों के शेयर्स, म्यूचुअल फंड, या ESOP जैसी कोई भी संपत्ति है, तो उसकी जानकारी Schedule FA में देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। भले ही उस विदेशी संपत्ति पर भारत में कोई टैक्स न लगता हो, इसे छिपाने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:24 am

बृहस्पतिवार के नियम: गुरुवार को भूलकर भी न बनाएं और खाएं खिचड़ी, जानिए इसके पीछे की असली ज्योतिषीय वजह

सनातन धर्म में तिथियों की तरह ही सप्ताह के हर दिन का एक विशेष और गहरा धार्मिक महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता और नवग्रहों को समर्पित है, जिसके आधार पर ही दैनिक पूजा-पाठ, खान-पान और रहन-सहन के नियम तय किए जाते हैं। आज गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन है, जो जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र में गुरुवार को अत्यंत पवित्र माना गया है, लेकिन इस दिन रसोई को लेकर कुछ बेहद कड़े नियम बताए गए हैं, जिनमें से एक है— गुरुवार को खिचड़ी बनाने और खाने पर पूर्ण पाबंदी।कुंडली में कमजोर होता है गुरु ग्रह, मंडराता है कंगाली का खतरासुनने में भले ही यह बात थोड़ी हैरान करने वाली लगे, लेकिन ज्योतिषीय और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार के दिन घर में खिचड़ी बनाना और उसे खाना पूरी तरह वर्जित (अशुभ) माना गया है।काली दाल की खिचड़ी: गुरुवार के दिन खिचड़ी में उड़द या काली दाल डालकर बनाना और खाना महा-अशुभ माना जाता है, क्योंकि काली दाल का संबंध मुख्य रूप से शनिदेव से है।पीली दाल की खिचड़ी: कई लोग सोचते हैं कि पीली दाल (जैसे मूंग या अरहर) की खिचड़ी तो गुरुवार को खाई जा सकती है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र इसके लिए भी मना करता है। मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार को पीली खिचड़ी खाने से इंसान की जन्म कुंडली में देवगुरु बृहस्पति कमजोर पड़ जाते हैं।धन की हानि और दरिद्रता को देता है आमंत्रणकुंडली में गुरु ग्रह के कमजोर होने का सीधा और घातक असर व्यक्ति के ज्ञान, भाग्य और उसकी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। गुरु के निर्बल होने से घर में रखा धन पानी की तरह बहने लगता है, व्यापार और नौकरी में मंदी आ जाती है और जमा पूंजी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। शास्त्रों का मानना है कि इस दिन खिचड़ी खाने से घर में दरिद्रता (कंगाली) का वास हो सकता है, इसलिए आज भी कई सनातन परिवारों में इस नियम का बड़ी कड़ाई से पालन किया जाता है।भगवान सत्यनारायण और गुरु आराधना के लिए सर्वोत्तम है आज का दिनगुरुवार का दिन आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान और करियर में अपार सफलता पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन लोग अपने आध्यात्मिक गुरुओं का स्मरण करते हैं और भगवान सत्यनारायण की विशेष कथा व पूजा का आयोजन करते हैं। जीवन में सुख-समृद्धि और उन्नति के लिए गुरुवार के दिन व्रत रखने, पीले वस्त्र धारण करने, चने की दाल और गुड़ से भगवान विष्णु व केले के वृक्ष की पूजा करने का विधान है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:23 am

अमेरिकी हमलों से दहले ईरान के 8 शहर, बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के पास धमाके

US Iran War : राष्‍ट्रपति ट्रंप द्वारा सीजफायर खत्म करने के एलान के बाद अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन भी ईरान के 8 शहरों में बड़ा हमला किया। अमेरिकी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान की उस क्षमता को कमजोर करने के लिए की जा रही है, जिससे वह होर्मुज ...

वेब दुनिया 9 Jul 2026 8:23 am

राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय का इस्तीफा मंजूर: भले ही टूटा औपचारिक नाता, लेकिन बैंक खातों के संचालन में अभी भी करीबियों का ही बोलबाला

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र) में चढ़ावा चोरी मामले के बाद मचे घमासान के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्व महासचिव चंपत राय का इस्तीफा भले ही औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया हो और वे ट्रस्ट से बाहर हो चुके हों, लेकिन मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन में उनका दबदबा अब भी बरकरार है। ट्रस्ट के बैंक खातों के संचालन की अहम जिम्मेदारी अब चंपत राय के दो सबसे विश्वस्त करीबियों को सौंप दी गई है।अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन संभालेंगे कमानबीती 6 जुलाई को चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर होने के बाद ट्रस्ट ने कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया है। नए नियमित महासचिव की नियुक्ति होने तक कृष्ण मोहन ही ट्रस्ट का पूरा कामकाज और आगामी रूपरेखा संभालेंगे। हालांकि, ट्रस्ट के विभिन्न बैंकों में कई अहम और बड़े खाते होने के कारण इनके संचालन के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है, जिसमें चंपत राय के वफादारों को जगह मिली है।चंपत राय के वफादार 'चंदन' और 'जगदीश' को मिली बड़ी जिम्मेदारीबैंक खातों की देखरेख और वित्तीय संचालन में अंतरिम महासचिव की सहायता के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) चंदन राय और इंजीनियर जगदीश आफले को नियुक्त किया गया है।सीए चंदन राय: लंबे समय से ट्रस्ट के वित्तीय ऑडिट और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को चंपत राय के सीधे निर्देशन में ही देखते आ रहे हैं।इंजीनियर जगदीश आफले: महाराष्ट्र के रहने वाले जगदीश आफले जनवरी में हुए प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान अयोध्या आए थे और तब से यहीं रहकर चंपत राय के मुख्य सहयोगी के रूप में मंदिर प्रबंधन का काम संभाल रहे हैं।चंपत राय का एसआईटी के सामने बड़ा खुलासा: एसबीआई (SBI) पर मढ़ा ढिलाई का आरोपइस पूरे विवाद के बीच चंपत राय ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के सामने अपना एक पेज का लिखित बयान दर्ज कराया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को कटघरे में खड़ा किया है। राय ने आरोप लगाया कि बैंक ने अपने ही सुरक्षा नियमों और गाइडलाइंस का घोर उल्लंघन किया, जिसे हमेशा नजरअंदाज किया गया।चंपत राय ने अपने बयान में कहा, देश के सभी बैंकों में करेंसी चेस्ट रूम से जुड़े बेहद कड़े नियम होते हैं। इसके तहत अंदर जाने और बाहर निकलते समय कर्मचारियों की सघन तलाशी लेना और बिना जेब (Pocketless) वाली विशेष यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य होता है। लेकिन एसबीआई ने इस गाइडलाइन को कभी अमल में नहीं लाया। बैंक ने शुरुआत में जो कपड़े अपने स्टाफ को दिए थे, उनमें जेबें बनी हुई थीं। राय ने एसआईटी से मांग की है कि बैंक के सीनियर अधिकारियों से जवाब तलब किया जाए कि इतनी संवेदनशील जगह पर इतनी बड़ी ढील कैसे बरती गई।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:20 am

Top News 9 July: ईरान में फिर अमेरिकी हमला, 23 राज्यों में बारिश का अलर्ट, ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी

Top News 9 July : अमेरिका ईरान में जंग तेज हुई, देशभर में मानसून का कहर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ऑस्ट्रेलिया दौरे पर है। भारत और इंग्लैंड के बीच चौथा टी 20 मैच आज ब्रिस्टल में खेला जाएगा। 9 जुलाई की बड़ी खबरें :

वेब दुनिया 9 Jul 2026 7:53 am

कोलकाता में विरोध मार्च के दौरान ममता बनर्जी ने खोया आपा, पार्टी कार्यकर्ता को जड़ा थप्पड़

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना आपा खो दिया और बारुईपुर में एक नाबालिग के कथित रेप और हत्या के विरोध में कोलकाता में अपनी पार्टी के विरोध जुलूस के दौरान मचे हंगामे के बीच एक पार्टी कार्यकर्ता को थप्पड़ जड़ दिया।

देशबन्धु 9 Jul 2026 7:00 am

'वीबी-जी राम जी' हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है: सीएम सुक्खू

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' को लागू करना राज्य के हित में नहीं है।

देशबन्धु 9 Jul 2026 6:00 am

मुझे नेता प्रतिपक्ष से उम्मीद है, वो देश की सुरक्षा के मुद्दे को उठाएंगे : प्रकाश आंबेडकर

वंचित बहुजन अघाड़ी पार्टी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने देश की सुरक्षा का जिक्र करके केंद्र सरकार को घेरा। साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे नेता प्रतिपक्ष से उम्मीद है कि वो इस मुद्दे को उठाने का काम करेंगे।

देशबन्धु 9 Jul 2026 5:50 am