6.0 तीव्रता का भूकंप आया तो दिल्ली में इमारतों की क्या हालत होगी? देखें स्टडी
दिल्ली के सत्य निकेतन में हुआ पांच मंजिला इमारत का खौफनाक हादसा अब नए खतरे को लेकर डरा रहा है. सवाल ये है कि क्या दिल्ली एक तगड़े भूकंप का झटका झेल सकती है? National Center for Seismology के वैज्ञानिकों की रिसर्च बताती है कि दिल्ली-NCR में करीब 89 लाख इमारतें हैं, और इनमें से करीब 33 लाख इमारतें खतरे की नींव पर खड़ी हैं. देखें वीडियो.
क्या सिस्टम से नाराज युवा सरकार की बड़ी चुनौती नहीं? देखें हल्ला बोल
देश के युवाओं को अपने-अपने पाले में लाने पर छिड़ी सियासत की जंग बढ़ती जा रही है. आज बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक BJP के सेवा संकल्प अभियान की घोषणा की तो साथ ही राहुल गांधी पर युवाओं को गलत दिशा देने का बड़ा आरोप लगा दिया. उधर, युवाओं के बीच विपक्ष पर नाराज फूफा का प्रधानमंत्री मोदी का तंज बीजेपी का बड़ा कैंपेन बन गया है. देखें...
विधायक-सांसदों पर लगे 65 आपराधिक केस होंगे वापस! सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी राहत?
CJI सूर्या कांत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी मामले में कोई गंभीर या जघन्य अपराध नहीं दिखता है, न ही ऐसा कोई संकेत है कि आरोपी आदतन अपराधी हैं या बार-बार अपराध करते हैं।
Vande Mataram विवाद पर Bawankule का Congress पर वार, कहा- देश का अपमान कर रही है पार्टी
महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को 'वंदे मातरम' को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता वोट-बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रगीत का अपमान कर रहे हैं। बावनकुले ने कहा, 'वंदे मातरम' गाने से इनकार करके और उसका अपमान करके सोनिया गांधी, राहुल गांधी और उनकी पूरी पार्टी देश का अपमान कर रही है। 2029 में उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। जब वे जनता के सामने जाएंगे, तो लोग पूछेंगे कि वे ऐसी पार्टी को वोट क्यों दें जिसने 'वंदे मातरम' का अपमान किया। उन्होंने कांग्रेस पर वोट-बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी 2014 के मुकाबले और भी बुरी स्थिति में पहुंच जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि अमलापुरम के मचावरम, मुम्मीदिवरम और रामचंद्रपुरम इलाकों में ज़मीनें 1908 (ब्रिटिश काल) से ही 22-A(1) के तहत रोक के दायरे में थीं और इन मुद्दों को सुलझाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने 56.37 एकड़ ज़मीन के मामले में कदम उठाए हैं, जिससे 1,410 लोगों को फ़ायदा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उन रेवेन्यू रिकॉर्ड्स को ठीक कर रही है जिनमें पिछली सरकार के समय कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी और ज़मीन से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों को सुलझा रही है। इसे भी पढ़ें: BJP President Nitin Nabin ने वंदे मातरम् पर Congress के रुख को भारत विरोधी बताया महाराष्ट्र के मंत्री ने कहा, वे वोट-बैंक की राजनीति कर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी 2014 के मुकाबले और भी बुरी हालत में पहुँच जाएगी। अगर कोई भारत में रहना चाहता है, तो उसे 'वंदे मातरम' कहना ही होगा। उनके ये बयान 'वंदे मातरम' गाने को लेकर शुरू हुए नए राजनीतिक विवाद के बीच आए हैं, जिसमें कांग्रेस और जम्मू-कश्मीर में उसकी सहयोगी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपनाया है। बीजेपी ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि गठबंधन के सहयोगी एक-दूसरे पर शर्तें नहीं थोप सकते। वन भूमि के अधिकारों का इंतज़ार कर रहे आदिवासी किसानों के मुद्दे पर बावनकुले ने कहा कि राज्य सरकार ने ज़मीन के मालिकाना हक़ के वितरण में हो रही देरी को एक गंभीर चुनौती माना है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को इसका तुरंत समाधान खोजने का निर्देश दिया है। इसे भी पढ़ें: तमिलनाडु में 'Secular Social Justice Victory Alliance' की धमक, Vijay-Congress साथ मिलकर देंगे चुनौती उन्होंने कहा, ऐसे 1.5 से 2 लाख आदिवासी किसान हैं जिन्हें अभी तक ज़मीन के मालिकाना हक नहीं मिले हैं। इन सभी किसानों के हितों की रक्षा के लिए, हम प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) से लेकर महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) तक एक अभियान शुरू कर रहे हैं। बावनकुले ने बताया कि सरकार ने उन सभी पात्र आदिवासी किसानों को तीन महीने के भीतर ज़मीन के अधिकार देने का फ़ैसला किया है, जिन्हें अभी तक ये अधिकार नहीं मिले हैं। महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में वन अधिकार रखने वाले किसानों के लिए भी कई उपायों की घोषणा की है, जिनमें उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उठाए गए कदम भी शामिल हैं।
पत्नी को 'सेक्स स्लेव' बनाकर रखा? पति पर केस चलेगा या नहीं SC करेगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मैरिटल रेप अपवाद की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई शुरू की है. कोर्ट पहले कर्नाटक के एक मामले की जांच करेगा जिसमें पति पर पत्नी के साथ यौन हिंसा का आरोप है.
Chandrababu Naidu: सुशासन से सुधरेंगी पिछली गलतियां, Blockchain तकनीक से सुरक्षित होंगी जमीनें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को कहा कि जनहितैषी गठबंधन सरकार सुशासन के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कोनासीमा जिले के पी गन्नावरम निर्वाचन क्षेत्र के पांडुवरिपेटा में आयोजित 'मी भूमि-मी हक्कू' ग्राम सभा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे लोगों की समस्याओं को समझने के लिए हर महीने यथासंभव अधिक से अधिक बार उनसे मिलने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गठबंधन सरकार किसानों और भूस्वामियों के अपनी संपत्तियों पर अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व शासकों ने राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी की और व्यवस्था को नष्ट कर दिया। उन्होंने पूर्व सरकार द्वारा भूमि स्वामित्व अधिनियम लागू करने की भी आलोचना की और कहा कि गठबंधन सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद इस अधिनियम को निरस्त कर दिया। इसे भी पढ़ें: एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट की AAIB जांच चल रही है, DGCA पायलट टेस्टिंग के नियमों की समीक्षा कर रहा है: एविएशन मिनिस्टर उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने री-सर्वे के नाम पर कई गड़बड़ियाँ की थीं; यहाँ तक कि विरासत में मिली ज़मीनों पर भी लोगों की तस्वीरें लगाई गई थीं। उन्होंने सर्वे के पत्थरों पर तस्वीरें लगाने के पीछे की वजह पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने जिन लोगों को 'अवांछित' माना था, उनकी ज़मीनों और संपत्तियों को '22-A प्रतिबंधित सूची' में डाल दिया था, जिससे मालिकों को परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि इसलिए गठबंधन सरकार मज़बूती और पारदर्शिता के साथ री-सर्वे की प्रक्रिया पूरी कर रही है और 'राजमुद्रा' वाली पट्टादार पासबुक जारी कर रही है। उन्होंने बताया कि इन पासबुक में ई-केवाईसी (e-KYC), क्यूआर कोड और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी जैसे सुरक्षा फ़ीचर भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि ज़मीन की सुरक्षा सुनिश्चित करना गठबंधन सरकार का मुख्य एजेंडा है। उन्होंने बताया कि अब तक 8,234 गाँवों में री-सर्वे पूरा हो चुका है और 36 लाख पट्टादार पासबुक जारी की जा चुकी हैं। इसे भी पढ़ें: आकाश छूने की तैयारी... अगले 10 सालों में भारत को मिलेंगे 100 नए एयरपोर्ट, सरकार खर्च करेगी लगभग 30,000 करोड़ रुपये सरकार ने अगले मार्च तक 8,582 गाँवों में 56 लाख पासबुक जारी करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद ऑटोमैटिक म्यूटेशन (ज़मीन के मालिकाना हक़ में बदलाव की प्रक्रिया) की सुविधा शुरू की है। उन्होंने बताया कि विरासत में मिली ज़मीनों के बँटवारे के लिए स्टाम्प ड्यूटी को 1,000 रुपये तक सीमित कर दिया गया है, जिससे 1.25 लाख परिवारों को फ़ायदा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने गलतियों को सुधारा है और '22-A प्रतिबंधित सूची' से 16 लाख एकड़ ज़मीन हटाकर इस मुद्दे को सुलझाया है। उन्होंने बताया कि शेट्टिपल्ली, कंगुंडी, वट्टीचेरुकुरु और मुदिनेपल्ली जैसी जगहों पर ज़मीन से जुड़े 244 गंभीर विवाद, जो दशकों से अनसुलझे थे, उन्हें भी सुलझा लिया गया है।
New Delhi में BRICS Summit का शेड्यूल जारी, PM Modi के साथ ग्लोबल गवर्नेंस पर होगी क्लोज्ड मीटिंग
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स (BRICS) लीडर्स समिट की मेज़बानी करने जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस दो-दिवसीय बैठक का कार्यक्रम जारी कर दिया है। यह समिट भारत मंडपम में आयोजित होगा और इसमें ब्रिक्स के सदस्य और सहयोगी देशों के नेताओं के साथ-साथ आउटरीच के लिए आमंत्रित नेता भी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में ब्रिक्स सदस्यों के लिए एक बंद कमरे में होने वाला सेशन, 'भारत इनोवेट्स' प्रदर्शनी, नेताओं की फ़ैमिली फ़ोटो, साथ मिलकर पेड़ लगाने का कार्यक्रम और पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित एक शानदार डिनर शामिल है। दूसरे दिन पार्टनर देशों के नेताओं और आउटरीच के लिए आमंत्रित लोगों का आगमन होगा, जिसके बाद लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी पर केंद्रित एक ओपन सेशन होगा। इसे भी पढ़ें: New Delhi में शनिवार से BRICS Summit, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर होगा मंथन 12 सितंबर के लिए ब्रिक्स समिट का शेड्यूल पहला दिन ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं के भारत मंडपम पहुंचने के साथ शुरू होगा। MEA के शेड्यूल के अनुसार, कार्यक्रम इस प्रकार है: दोपहर 2:00 बजे: ब्रिक्स नेताओं का भारत मंडपम के लेवल 2 पर आगमन, जिसके बाद आधिकारिक फोटो सेशन होगा। दोपहर 2:35 बजे: समिट हॉल में ब्रिक्स सदस्य देशों के लिए समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना विषय पर बंद कमरे में बैठक (क्लोज्ड सेशन)। शाम 4:25 बजे: नेता हॉल 14 में भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी देखेंगे। शाम 5:05 बजे: बाहरी लॉन में ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं की सामूहिक तस्वीर (फैमिली फोटोग्राफ)। शाम 5:10 बजे: ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं द्वारा संयुक्त रूप से वृक्षारोपण। शाम 7:30 बजे: भारत मंडपम के लेवल 3 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित विशेष रात्रिभोज (गाला डिनर)। MEA ने कहा है कि कई कार्यक्रमों की 'क्लीन फीड' ब्रिक्स और MEA के यूट्यूब चैनलों और दूरदर्शन के माध्यम से उपलब्ध होगी। फोटो स्ट्रीम भी ब्रिक्स फ्लिक के माध्यम से उपलब्ध होगी। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit 2024: New Delhi में सुरक्षा का चक्रव्यूह तैयार, Bharat Mandapam पर पैनी नज़र 13 सितंबर के लिए ब्रिक्स समिट का शेड्यूल दूसरे दिन की शुरुआत ब्रिक्स पार्टनर देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों के आगमन के साथ होगी। विदेश मंत्रालय (MEA) के शेड्यूल में ये कार्यक्रम शामिल हैं: सुबह 9:55 बजे: भारत मंडपम के लेवल 2 पर ब्रिक्स पार्टनर देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के नेताओं का आगमन। सुबह 10:35 बजे: लेवल 2 पर 'फैमिली फ़ोटोग्राफ़' (सभी नेताओं की सामूहिक तस्वीर)। सुबह 10:50 बजे: समिट हॉल में लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना विषय पर ओपन सेशन।
Hormuz Strait में अमेरिकी पनडुब्बी पकड़ने का ईरान का दावा, ट्रंप के सामने बढ़ी चुनौती
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास एक अमेरिकी बिना क्रू वाले अंडरवाटर व्हीकल को पकड़ लिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, ...
PM मोदी के इवेंट में पहुंचा नकली PMO अफसर खुद ठगा गया, देखें खुलासा
मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में एक नकली PMO अफसर, बंदूकधारी बॉडीगार्ड के साथ पहुंच गया. चेकिंग में जब फर्जी आईदी कार्ड मिला तो इसकी पोल खुल गई. लेकिन असली ट्विस्ट कोर्ट में आया जब इस व्यक्ति के वकील ने दावा किया कि वो कोई घुसपैठिया नहीं, बल्कि फर्जी जॉब रैकेट का शिकार हो गया. उसे PMO का फर्जी लेटर, आईडी और यहां तक कि पीएम के दस्तखत वाली चिट्ठी भेजकर झांसे में लिया गया. देखें वीडियो.
Delhi में BRICS Summit की तैयारी पर Chidambaram का तंज: भारत को क्या फायदा?
सीनियर कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम ने हाल के ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस फ़ायदों पर संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें पिछली दो-तीन बैठकों से कोई खास नतीजा देखने को नहीं मिला है। दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स समिट 2026 पर बात करते हुए चिदंबरम ने कहा कि भारत ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), G20 और QUAD जैसे कई मल्टीलेटरल फ़ोरम का सदस्य है, लेकिन उन्होंने इन सदस्यताओं से मिलने वाले ठोस फ़ायदों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि कितने राष्ट्रपति और कितने प्रधानमंत्री आ रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि पिछले दो-तीन ब्रिक्स सम्मेलनों से कोई ठोस फ़ायदा या ठोस नतीजा निकला है। इसे भी पढ़ें: Nitin Nabin-CM Dhami ने Haldwani में किया BJP का बड़ा मंथन, संगठन मजबूती पर जोर उन्होंने आगे कहा कि असल में, हम BRICS, SCO, G20 और QUAD का हिस्सा हैं। इससे हमें क्या फ़ायदा हो रहा है? मुझे तो कोई फ़ायदा नहीं दिखता। पिछले दो-तीन सम्मेलनों में मुझे कोई फ़ायदा नज़र नहीं आया। पहले, BRICS सम्मेलनों से कुछ ठोस फ़ायदे होते थे। चिदंबरम की ये बातें ऐसे समय में आई हैं जब नई दिल्ली में BRICS समिट 2026 की ज़ोर-शोर से तैयारी चल रही है और इस कार्यक्रम से पहले सिविक और इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसियां अपने काम में तेज़ी ला रही हैं। दिल्ली नगर निगम (MCD) के कमिश्नर संजीव खिरवार और लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रधान सचिव संदीप कुमार ने समिट की जगह और भारत मंडपम के आस-पास के अहम इलाकों का संयुक्त निरीक्षण किया। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस टीम के साथ MCD और PWD के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें संबंधित ज़ोन के डिप्टी कमिश्नर भी शामिल थे, मौजूद थे। खिरवार ने सफ़ाई और नागरिक सुविधाओं का जायज़ा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सफ़ाई और दूसरी ज़रूरी सेवाओं को बनाए रखने के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल रखें। इन उपायों में समिट के रास्तों, वेन्यू, आस-पास के बाज़ारों, सड़कों, फ़ुटपाथ, ग्रीन बेल्ट और दूसरी अहम जगहों पर ज़ोर-शोर से सफ़ाई और रखरखाव शामिल है। इसे भी पढ़ें: Rajasthan निकाय चुनाव: Ashok Gehlot बोले- Congress को मिलेगा जनादेश, BJP सरकार पर बरसे निरीक्षण में दक्षिण-पूर्व दिल्ली के रास्ते जैसे सराय काले खाँ, लोधी रोड और निज़ामुद्दीन के साथ-साथ दक्षिण दिल्ली के इलाके जैसे साकेत और शेख़ सराय भी शामिल थे। अधिकारियों को तैयारी के आखिरी चरण में सफ़ाई कर्मचारी, मशीनरी और सुपरवाइज़र की पर्याप्त तैनाती करने का काम सौंपा गया। खिरवार ने अहम जगहों पर नियमों के पालन, जानवरों पर नियंत्रण, वेक्टर कंट्रोल, सौंदर्यीकरण, लाइटिंग और ब्रांडिंग में सुधार पर ज़ोर दिया। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
जरूरत से ज्यादा सामान क्यों खरीद रहा Gen Z?
जहां पहली जेनेरेशन्स को कोई भी चीज दुकान पर जाकर सोच परख और देख कर खरीदने की आदत थी. वहीं जेन जी ठीक उसका उलटा कर रहे है. कुछ सामान लेना है तो ऐप खोला ऐड टू कार्ट किया और इम्पल्सिव बायिंग के चक्कर में कार्ट में 3-4 चीजें और जोड़कर सामान खरीद लिया. भले ही उसके लिए उसे ज्यादा पैसे देने पड़े. जेन-जी को ये फायदे का सौदा लगता है लेकिन क्या किराना छोड़ क्विक कॉमर्स की ओर बढ़ना सही में जेन जी के लिए फायदे का सौदा है?
दिल्ली में जुटेंगे वैश्विक नेता, जानें BRICS समिट का पूरा शेड्यूल
BRICS सम्मेलन 12-13 सितंबर को भारत मंडपम में होगा. विदेशी मेहमानों की आवाजाही को देखते हुए दिल्ली में 35 से ज्यादा सड़कें प्रभावित रहेंगी और 22 जगहों पर ट्रैफिक डायवर्जन किया जाएगा. कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल विदेश मंत्रालय ने जारी किया है.
राहु के घर में शुक्र की एंट्री, 11 सितंबर से 3 राशियों का बढ़ेगा बैंक-बैलेंस
शुक्र ग्रह 11 सितंबर 2026 को नक्षत्र परिवर्तन करेंगे. शुक्र चित्रा नक्षत्र से निकलकर राहु के स्वामित्व वाले स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. स्वाति को स्वतंत्रता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है. शुक्र का यह बदलाव कर्क, तुला और मकर राशि वालों के लिए शुभ परिणाम ला सकता है.
तमिलनाडु में 'Secular Social Justice Victory Alliance' की धमक, Vijay-Congress साथ मिलकर देंगे चुनौती
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) और कांग्रेस, आईयूएमएल, वीसीके और एमडीएमके के बीच सत्तारूढ़ गुट के आधिकारिक नाम के रूप में धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय विजय गठबंधन (एसएसजेवीए) का खुलासा किया गया है। गठबंधन के सदस्य हैं तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके), कांग्रेस, थोल थिरुमावलवन की विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), वाइको की मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके), और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल)। इसे भी पढ़ें: उधर विपक्ष बेकार के मुद्दों पर राजनीति करता रहा, इधर Modi Cabinet ने कई बड़े फैसले लेकर सबको चौंका दिया गठबंधन के नाम को अंतिम रूप देने का निर्णय बुधवार को चेन्नई में टीवीके मुख्यालय में ब्लॉक के नेताओं की एक बैठक के बाद लिया गया। यह बैठक पनायूर में TVK मुख्यालय में हुई और इसमें गठबंधन में शामिल पार्टियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस की ओर से मणिकम टैगोर, थारागाई कथबर्ट और प्रवीण चक्रवर्ती बैठक में शामिल हुए। VCK का प्रतिनिधित्व उसके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने किया, साथ ही वन्नी अरासु, रवि कुमार और सिंदनाई सेलवन भी मौजूद रहे। MDMK नेता वाइको ने दुरई वाइको के साथ बैठक में हिस्सा लिया, जबकि IUML का प्रतिनिधित्व के.एम. कादर मोहिदीन और शाहजहाँ ने किया। यह गठबंधन धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय पर ध्यान केंद्रित करने वाली पार्टियों को एक साथ लाता है और उम्मीद है कि यह तमिलनाडु की चुनावी लड़ाई में अहम भूमिका निभाएगा। इस बैठक में वामपंथी पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए। CPI(M) और CPI, दोनों ने ही पनायुर में हुई इस बैठक में शामिल न होने का फ़ैसला किया। CPI(M) पहले ही साफ़ कर चुकी है कि TVK के नेतृत्व वाली सरकार को उसका समर्थन मुद्दों पर आधारित होगा और वह सरकार में शामिल नहीं होगी। पार्टी ने औपचारिक गठबंधन से दूर रहने का फ़ैसला किया है और कैबिनेट में हिस्सेदारी की मांग करने से भी इनकार कर दिया है। मंगलवार को CPI(M) नेता पी. शनमुगम ने साफ़ किया कि सरकार के बाहर से मुद्दों पर आधारित समर्थन देने का पार्टी का फ़ैसला विधानसभा में TVK के नेतृत्व वाली सरकार की स्थिरता सुनिश्चित करने के मकसद से लिया गया था। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Assembly Bypolls: DMK ने Madurantakam और Dharapuram सीटों पर उतारे उम्मीदवार पार्टी कैबिनेट में हिस्सेदारी मिले बिना ऐसे किसी औपचारिक गठबंधन ढांचे में शामिल नहीं होना चाहती थी, जिसका मकसद भविष्य के स्थानीय निकाय और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए आधार तैयार करना हो। पार्टी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखना चाहती थी और साथ ही मज़दूरों, खेती और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर सरकार की नीतियों की आलोचना करने की आज़ादी भी बनाए रखना चाहती थी। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
2017 से पहले तीन-तीन महीने नहीं पहुंचता था राशन : सीएम योगी
UP Anganwadi Workers: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में बच्चों के पोषाहार की सप्लाई तक में शराब माफिया का दखल था। तीन-तीन महीने तक आंगनवाड़ी केंद्रों पर राशन नहीं पहुंचता था और ...
प्रयागराज में TGT-PGT अभ्यर्थियों के समर्थन में उतरीं नेहा बोरा
प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी भर्ती परीक्षा में पुरानी नियमावली लागू करने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन पांचवें दिन भी जारी है. शिक्षक दिवस से आमरण अनशन पर बैठे छात्र अपनी मांगों को लेकर सरकार से लिखित आश्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं. इस आंदोलन को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह का समर्थन मिला है.
Classic 350 को देगी टक्कर... लॉन्च हुई नई Jawa, इतनी है कीमत
क्लाकिस लेजेंड्स ने अपनी पॉपुलर जावा 42 का नया वेरिएंट लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस बाइक का ऑल स्टार्स एडिशन पेश किया है. इस बाइक में कंपनी ने कोई भी मैकेनिकल बदलाव नहीं किया है. इसमें सिर्फ कॉस्मेटिक चेंजेज देखने को मिलेंगे. इससे पहले कंपनी ने जावा 42 एफजे और 42 बॉबर का भी ऑल स्टार्स एडिशन लॉन्च किया है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.
तमिलनाडु में थलपति विजय की TVK और कांग्रेस अलायंस के नाम का ऐलान, सेक्युलर शब्द भी शामिल
Thalapathy Vijay: तमिलनाडु में सत्ताधारी गठबंधन ने अपने नाम का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में हुई बैठक में कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने हिस्सा लिया। हालांकि वामपंथी पार्टियों ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी।
हंदवाड़ा में हाइब्रिड आतंकी गिरफ्तार, सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से मचा हड़कंप
पुलिस ने बुधवार को दावा किया कि उन्होंने उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा में हाइब्रिड मोड में काम कर रहे एक पूर्व-आतंकवादी द्वारा चलाए जा रहे आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। एक बयान में पुलिस ने कहा कि हंदवाड़ा पुलिस को एक पूर्व-आतंकवादी की गतिविधियों ...
New Delhi में शनिवार से BRICS Summit, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर होगा मंथन
नयी दिल्ली, नौ सितंबर भारत की मेजबानी में शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में खाद्य, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा न्यूनीकरण और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में सामूहिक लचीलापन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे यह समूह खंडित भू-राजनीतिक माहौल में आगे बढ़ने के लिए एक प्रभावी आधार बन सके। नयी दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) और ट्रंप प्रशासन की व्यापार एवं शुल्क नीतियों के बुरे असर का सामना कर रही है। इस अहम सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल हैं। शिखर सम्मेलन में अब सिर्फ़ तीन दिन बचे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि समूह के सदस्य देश किसी संयुक्त बयान पर आम सहमति बना पाए हैं या नहीं, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं। यह समूह आम सहमति के आधार पर काम करता है। मूल रूप से ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका से मिलकर बने ब्रिक्स का 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात तथा सऊदी अरब शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ। बेलारूस, बॉलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने थे। ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के तौर पर उभरा है क्योंकि यह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा हैं। इस समूह की भारत की अध्यक्षता चार स्तंभों- लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित है। अधिकारियों ने बताया कि लचीलापन स्तंभ के तहत भारत स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य, ऊर्जा, आपदा जोखिम कम करने और आपूर्ति शृंखला जैसे क्षेत्रों में सामूहिक सहयोग को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित करता रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी शिखर सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल होगा। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ की थीम से निर्देशित है। यह थीम ‘मानवता सर्वोपरि’ की भावना में निहित जन-केंद्रित रुख के भारत के दृष्टिकोण को दर्शाती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन क्षेत्रों के अलावा, नेतागण साझा प्राथमिकताओं पर ब्रिक्स के भीतर सहयोग मज़बूत करने के लिए विचार-विमर्श करेंगे और पारस्परिक महत्व के वैश्विक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर अपना नज़रिया साझा करेंगे। इस साल भारत की अध्यक्षता में, देश भर के 25 से ज़्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इनका उद्देश्य ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को तीन मुख्य आधारों-राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच आपसी संपर्क- पर और मज़बूत करना है। भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 तथा 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने एक जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन शनिवार को अपराह्न 2:35 बजे ब्रिक्स सदस्य देशों के लिए ‘‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’’ विषय पर बंद कमरे के सत्र के साथ शुरू होगा। इस सत्र के बाद, नेता ‘भारत इनोवेट्स एग्ज़िबिशन’ का दौरा करेंगे, जो शाम 4:25 बजे शुरू होगी। शाम 5:05 बजे, सभी नेता शिखर सम्मेलन की जगह -- भारत मंडपम -- के लॉन में ‘फ़ैमिली फ़ोटो’ के लिए एकत्र होंगे और उसके बाद मिलकर पौधारोपण कार्यक्रम में शामिल होंगे। पहले दिन के कार्यक्रमों का समापन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शाम 7:30 बजे आयोजित एक शानदार रात्रिभोज के साथ होगा। रविवार को ब्रिक्स सदस्य देशों, सहयोगी देशों और ‘आउटरीच’ के लिए आमंत्रित नेताओं का आगमन सुबह 9:55 बजे से शुरू होगा, जिसके बाद सुबह 10:35 बजे आधिकारिक सामूहिक तस्वीर ली जाएगी। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, ‘‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता: समावेशी वैश्विक प्रगति के लिए भविष्य को आकार देना’’ विषयक खुला सत्र सुबह 10.50 बजे शुरू होगा। नयी दिल्ली घोषणापत्र जारी किए जाने के साथ इस शिखर सम्मेलन का समापन होगा।
दंगल: प्रदर्शनकारी नौजवानों पर यूपी पुलिस गैरकानूनी कार्रवाइयां कर रही?
आज का दंगल देश के जेन-जी को लेकर कानून के 2 तराजू पर है. एक तरफ देश के हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट जेन-जी के मुद्दों पर संवेदनशील है...युवाओं के वाजिब मुद्दों, आंदोलनों, प्रदर्शनों से लेकर उनकी गैरकानूनी गिरफ्तारियां, कार्रवाइयां और उत्पीडन रोकने के लिए आदेश देता है...दूसरी तरफ पता चलता है कि नोएडा में निर्दोष छात्रा पर एनएसए लग गया था...तो गेटर नोएडा में छात्र को 5 लाख के बॉन्ड का नोटिस मिल गया था...गोरखपुर से गोंडा तक छात्रों से पुलिस वालों के बर्ताव के बाद ये सवाल उठे कि आखिर जेन-जी को लेकर कानून के दो पैमाने कैसे हो सकते हैं...देश की अदालतें जिस संविधान और कानून के पहलुओं पर जेन-जी के मुद्दे पूरी संवेदना के साथ सुन रही हैं. देखें...
अमेठी की अर्चना त्रिपाठी बनीं सफल उद्यमी, 30 से 40 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रहीं
Archana Tripathi Amethi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न स्वरोजगार योजनाएं संचालित कर रही हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान ऐसी ही एक महत्वाकांक्षी योजना है, ...
'दलितों का सबसे अधिक सम्मान पीएम मोदी ने किया...', बोले नितिन नवीन
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हल्द्वानी में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति और दलितों का अपमान करने का आरोप लगाया. उन्होंने उत्तराखंड में बीजेपी सरकार की उपलब्धियों की तारीफ करते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव में फिर से बीजेपी की सरकार बनने का दावा किया.
रेप, 38 साल फरारी, अब गिरफ्तारी... बंगाल का बुधदेव मथुरा में अरेस्ट
मथुरा जिले के वृंदावन से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां पश्चिम बंगाल में 38 साल पहले युवती के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में फरार चल रहा 70 वर्षीय आरोपी पकड़ा गया है. वह पिछले 32 सालों से साधु का वेश बदलकर किराए के मकान में रह रहा था.
DU के प्रोफेसर हरीश अरोड़ा बोले, भारतीय भाषा परिवार भाषाई औपनिवेशिकता से मुक्ति का आधार है
नई दिल्ली। ‘अंग्रेजों ने भारत की एकता को विखंडित करने के लिए वर्नाक्युलर भाषाओं का विचार रख जिसने भरतिए भाषाओं को हीन और निचले स्तर की भाषाओं के रूप में स्थापित किया। दुर्भाग्यवश हम भारतीयों ने इसे स्वीकार कर लिया। एकीकृत राष्ट्र की संकल्पना के लिए आवश्यक है कि हम भारतीय भाषाओं को विभाजित परिवारों की भाषा से मुक्ति देते हुए भारतीय भाषा परिवार की संकल्पना को चरितार्थ करें। यह परिवार ही वर्षों से चली या रही औपनिवेशिकता से मुक्ति का आधार है।’ ये विचार दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज (सांध्य) में हिन्दी के प्रोफेसर डॉ. हरीश अरोड़ा ने कर्नाटक राज्य विश्वविद्यालय कॉलेज हिन्दी प्राध्यापक संघ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सप्ताह हिन्दी पर्व-2026 के अवसर पर आभासी पटल के माध्यम से रखे। इस कार्यक्रम का पहला आयोजन विशम कॉटन विमेंस क्रिश्चियन कॉलेज, बेंगलुरू की ओर से आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रो. अरोड़ा ने ‘भारतीय भाषा परिवार की संकल्पना और एकीकृत राष्ट्र’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय भाषाएँ एकीकृत सांस्कृतिक चिंतन-प्रक्रिया की पालना और संवाहक रही हैं। भारतीय भाषाएँ अपने अस्तित्व की पूरी यात्रा में परस्पर सहअस्तित्व में रही हैं और सामंजस्यपूर्ण रूप से साथ-साथ विकसित हुई हैं। उनका साहित्य शब्दावली में एक-दूसरे का पूरक है और विषयवस्तु तथा प्रेरणा के स्रोत में एक-दूसरे को समृद्ध करता है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ अन्य देशों में भाषा को केवल संप्रेषण का माध्यम माना जाता है वहीं भारत में उसे दैवीय माना गया है। सभी भारतीय भाषाओं को वाक् के रूप में पूज्य माना जाता है और वाग्देवी या सरस्वती के रूप में आराधित किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में ‘विविधता में एकता’ की संकल्पना को माना जाता रहा है जबकि भारत में एकता विविधता से कहीं अधिक प्रबल आधार है। उनका मानना था कि विविधता सौंदर्य है, एकता शक्ति है। विविधता का सौंदर्य केवल एकता की शक्ति से ही टिक सकता है। उन्होंने अपने विचार को आरंभ करते हुए बताया कि भारत की गौरवशाली परंपरा से भारतीय समाज को हमेशा से दूर रखा गया है इसी कारण से भारतीय समाज की चेतना पराधीन होती गई। अंग्रेजों ने लोगों को बाँटने, देश को विभाजित करने, समाज को विभाजित करने और एक समुदाय को दूसरे के विरुद्ध भाषाई वैमनस्य के लिए उकसाने का कार्य किया गया। उन्होंने भारत की भाषाओं को भारोपीय, द्रविड, चीनी-तिब्बती और ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवारों में विभाजित कर दिया। इसीलिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस औपनिवेशिकता से मुक्ति के लिए भारतबोध के विचार को स्वीकार किया। कार्यक्रम के आरम्भ में स्वागत वक्तव्य देते हुए डॉ. विनय कुमार ने कहा यादव ने कहा कि आज का विषय अत्यंत ही प्रासंगिक और नवीन है। इस विचार से निश्चित रूप से भारतीय भाषाओं में एकता के साथ भारत भी एकीकृत राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा। कार्यक्रम में कर्नाटक राज्य विश्वविद्यालय कॉलेज हिन्दी प्राध्यापक संघ के संस्थापक डॉ. एस. मंजुनाथ ने संघ की कार्य प्रणाली और विभिन्न योजनाओं से परिचित कराया। इस अवसर पर कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सुनीला कुमारी सहित देश भर से अनेक शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी कार्यक्रम में जुड़े।
जम्मू कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने NC द्वारा पूरे राष्ट्रगीत के गायन के फैसले पर बुधवार को चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों को भारत के संवैधानिक मिजाज को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में सनातन और विकास की गूंज
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हरियाणा के युवाओं के लिए वैश्विक स्किल और रोजगार के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ साझेदारी
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में बुधवार को चंडीगढ़ में भारत में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में हरियाणा और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा,उच्च शिक्षा,स्किल डेवलपमेंट,इनोवेशन,कृषि,ग्रीन एनर्जी,खेल,टूरिज्म,निवेश तथा युवाओं को वैश्विक अवसर उपलब्ध करवाने सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने […]
सनातन द्रोह की विकृत राजनीति The post सनातन द्रोह की विकृत राजनीति appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सीजेपी नेता सौरभ दास समेत अन्य पर मानहानि का मुकदमा दायर कर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा वाले मामले का भी जिक्र किया, तो विदेश में श्रीलंका के राष्ट्रपति ने राजनाथ सिंह से मुलाकात में भारत को भरोसा दिया कि उनकी जमीन का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होगा।
बुध गोचर से पितृपक्ष की शुरुआत, इन 4 राशियों के लिए शुभ संकेत
बुध ग्रह 26 सितंबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे. 26 सितंबर से ही पितृपक्ष भी शुरू हो रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बुध का यह गोचर चार राशियों को व्यापार, नौकरी, आर्थिक मामलों और संवाद से जुड़े क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम दे सकता है.
भरभराकर गिर गई बाथरूम की छत! पढ़ें PG की लड़की के 'खौफ' की कहानी
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली से लेकर नोएडा तक लोगों को हैरान कर दिया है. अभी ये मामला शांत हुआ नहीं था कि नोएडा के पीजी में रहने वाली एक लड़की (सुरक्षा कारणों से नाम रिवील नहीं किया गया है ) ने aajtak.in की टीम से बात कर, अपना दुख बयां किया है. यहां हम उनकी कहानी, उन्हीं की जबानी दे रहे हैं, पढ़ें...
आत्मघाती हमला था लाल किला ब्लास्ट; डॉ. उमर ने खुद को कैसे उड़ाया? NIA के बड़े खुलासे
Delhi Red Fort Blast: NIA ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि लाल किले पर हुआ धमाका एक सुसाइड बॉम्बिंग था। एनआईए ने यह भी खुलासा किया है कि डॉ. उमर उन नबी आतंकी मॉड्यूल 'अंसार गजवत-उल-हिंद' का कथित मास्टरमाइंड था।
शाम 6 बजे के PTI News बुलेटिन में इमारत हादसा, शेयर बाजार और खेल की अहम खबरें
नयी दिल्ली, नौ सितंबर की विभिन्न फाइल से बुधवार शाम छह बजे तक जारी मुख्य समाचार इस प्रकार है :- दि59: दिल्ली अदालत लीड इमारत ढहीइमारत हादसा: अदालत ने भवन मालिक के बेटे, पीजी संचालक और ठेकेदार को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजानयी दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने के मामले में गिरफ्तार भवन मालिक के बेटे, पीजी संचालक और एक ठेकेदार को बुधवार को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी। दि40: न्यायपालिका एनसीईआरटी न्यायपालिकान्यायपालिका आलोचना के विरूद्ध नहीं, बल्कि बिना जानकारी के किये गए दावों के खिलाफ है: न्यायालयनयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि न्यायपालिका आलोचना के खिलाफ नहीं है और न ही वह हो सकती है, लेकिन ऐसी आलोचना सही मंच पर और निष्पक्ष व तर्कसंगत तरीके से की जानी चाहिए। दि44: ईसी भाजपा कांग्रेस खर्चपांच राज्यों में चुनाव के दौरान भाजपा को 1,473 करोड़ रुपये मिले, कांग्रेस से सात गुना से भी अधिकनयी दिल्ली: निर्वाचन आयोग में जमा किये गए खर्च के ब्योरे के अनुसार, इस साल की शुरूआत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा को अपने केंद्रीय मुख्यालय में लगभग 1,473 करोड़ रुपये मिले, जो कांग्रेस को उसकी केंद्रीय और प्रदेश इकाइयों से मिले कुल 207 करोड़ रुपये से सात गुना से भी अधिक रकम है। प्रादे111: झारखंड एसआईआर अफगान नागरिकअफगान नागरिकों ने झारखंड की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का प्रयास किया, जांच शुरूजमशेदपुर/रांची: झारखंड के जमशेदपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान तीन अफगान नागरिकों ने कथित तौर पर मतदाता सूची में अपने नाम दर्ज कराने का प्रयास किया। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। प्रादे51: तेलंगाना विस बीआरएस लीड निलंबिततेलंगाना विधानसभा से बीआरएस के 22 विधायक मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबितहैदराबाद: तेलंगाना विधानसभा में आसन के समक्ष आ कर नारेबाजी करते हुए सदन की कार्यवाही बाधित करने के कारण बुधवार को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के 22 सदस्यों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। वि24: श्रीलंका राजनाथ लीड दिसानायकेराजनाथ सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से की मुलाकात, क्षेत्रीय सुरक्षा पर मिलकर काम करने पर जोरकोलंबो: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षा, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया। वि30: यमन जेल हमलायमन जेल पर हमले में मृतक संख्या बढ़कर 23 हुई, सात लोग लापताकाहिरा: हूती विद्रोहियों द्वारा संचालित उत्तरी यमन की जेल पर हुए हवाई हमले के बाद मलबे से चार और शव मिलने के बाद मृतक संख्या बढ़कर 23 हो गई। सात लोग अभी लापता हैं। अर्थ39: लीड शेयरपश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से सेंसेक्स 813 अंक टूटकर तीन माह के निचले स्तर परमुंबई: घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से मानक सूचकांक... बीएसई सेंसेक्स 813 अंक लुढ़क कर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया। वहीं एनएसई निफ्टी 23,450 अंक के नीचे फिसल गया। अर्थ33 लीड अदाणी एयरपोर्ट्सअदाणी एयरपोर्ट्स एक अरब डॉलर जुटाने के बाद दुनिया की तीसरी सबसे मूल्यवान हवाई अड्डा कंपनी बनीनयी दिल्ली: उद्योगपति गौतम अदाणी की हवाई अड्डा कंपनी अदाणी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स वैश्विक एवं घरेलू निवेशकों के एक समूह से करीब एक अरब डॉलर की नई इक्विटी पूंजी जुटाने के बाद दुनिया की तीसरी सबसे मूल्यवान हवाई अड्डा कंपनी बन गई है। खेल16: खेल तीरंदाजी पैरा सीरीज भारतभारत ने विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज के आखिरी दिन दो स्वर्ण, चार कांस्य जीतेअहमदाबाद: मौजूदा पैरालम्पिक चैम्पियन हरविंदर सिंह और दुनिया की नंबर एक तीरंदाज शीतल देवी की अगुवाई में भारत ने विश्व तीरंदाजी पैरा सीरिज के तीसरे चरण का अंत आखिरी दिन बुधवार को दो स्वर्ण और चार कांस्य पदक के साथ किया। खेल11 खेल टेनिस दूसरी लीड ओपनशेल्टन ने अल्काराज का विजय अभियान रोका, सबालेंका और पेगुला भी सेमीफाइनल मेंन्यूयॉर्क: बेन शेल्टन ने पांच सेट तक चले मैराथन मुकाबले में मौजूदा चैंपियन कार्लोस अल्काराज को हराकर अमेरिकी ओपन टेनिस टूर्नामेंट के पुरुष एकल के सेमीफाइनल में जगह बनाई जबकि महिला वर्ग में एरिना सबालेंका और जेसिका पेगुला अंतिम चार में पहुंचने में सफल रही। ‘द कन्वरसेशन’ से अनुबंध के तहत जारी खबर : वि26: स्वीडन अमीरी‘समतावादी’ स्वीडन में पूंजीपतियों और संपत्ति अर्जित करने को लेकर नजरिया बदल रहालुंड (स्वीडन): समानता और सादगी स्वीडन की सामाजिक पहचान का अहम हिस्सा हैं। वहां ‘जांतेलागेन’ नाम की एक धारणा भी प्रचलित है, जो कहती है कि किसी व्यक्ति को खुद को दूसरों से बेहतर नहीं समझना चाहिए। वि22: एआई रेडियो स्पेक्ट्रमएआई की मदद से रेडियो स्पेक्ट्रम की कमी दूर करने की कोशिश, साझा इस्तेमाल से बढ़ेगी उपलब्धताकोलंबस: जब भी कोई व्यक्ति फोन कॉल या वीडियो कॉल या वीडियो स्ट्रीम करता है या वाई-फाई से जुड़ता है तो उसका उपकरण हवा के जरिए अदृश्य संकेत भेजता और प्राप्त करता है। इसी तरह बेबी मॉनिटर, गैराज का दरवाजा खोलने वाले उपकरण, जीपीएस, मौसम पर नजर रखने वाले उपग्रह और विमानों की सुरक्षित आवाजाही में मदद करने वाले रडार भी इसी अदृश्य संसाधन यानी रेडियो स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करते हैं।
DM की पहल बनी जनअभियान, जुटीं 2500 पुस्तकें, CM धामी ने दीं 151 किताबें
रुद्रप्रयाग में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की पहल 'एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं' अब जनअभियान बन चुकी है. अभियान के तहत अब तक 2500 से ज्यादा पुस्तकें जुटाई गई हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी 151 पुस्तकें दान कर चुके हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं, धार्मिक साहित्य, सामान्य ज्ञान और उपन्यासों समेत किताबें जनपद के पुस्तकालयों में निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं.
प्रेग्नेंसी में न करें ये गलती, बच्चे का दिमाग हो सकता है छोटा
प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ महिलाओं में एनीमिया की बीमारी हो जाती है. इस बीमारी का खतरा केवल मां तक सीमित नहीं है. रिसर्च में बताया गया है कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी में ये बीमारी होती है उनके बच्चों के दिमाग पर इसका असर पड़ता है.
CM Yogi का Varanasi में ऐलान: पूंजी की कमी से नहीं रुकेगा किसी महिला का सपना
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 सितंबर को वाराणसी के बाबतपुर-पिंडरा में आशा एजुकेशन ग्रुप कैंपस में आयोजित कामकाजी महिला सम्मान समारोह में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, रसोइयों, सफाई कर्मचारियों और आशा कार्यकर्ताओं सहित कामकाजी महिलाओं को सम्मानित किया। वाराणसी के अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री का स्वागत महिलाओं की एक बड़ी भीड़ ने किया, जिन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट और गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर उनका अभिवादन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उन्होंने माताओं और बहनों की मातृ शक्ति के जश्न की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि महिलाएं अपने योगदान के लिए सम्मानित और मूल्यवान महसूस करें। इसे भी पढ़ें: BJP President Nitin Nabin ने वंदे मातरम् पर Congress के रुख को भारत विरोधी बताया योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी की बढ़ती ग्लोबल पहचान पर ज़ोर देते हुए कहा कि काशी के नाम से मशहूर यह शहर अपनी आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोए हुए है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि काशी में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली विकास परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और पात्र परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने विधायक अवधेश सिंह के निर्वाचन क्षेत्र पिंडरा में हुए विकास कार्यों की सराहना की। महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और 'मिशन शक्ति' को इसके लिए एक अहम कार्यक्रम बताया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है और प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) में महिला बटालियनें बनाई गई हैं, जिनका नाम तीन साहसी महिलाओं - रानी अवंतीबाई लोधी, वीरांगना उदा देवी और वीरांगना झलकारी बाई - के नाम पर रखा गया है। इसे भी पढ़ें: Rajasthan निकाय चुनाव: Ashok Gehlot बोले- Congress को मिलेगा जनादेश, BJP सरकार पर बरसे मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य पुलिस में महिलाओं की संख्या 2017 से पहले के लगभग 10,000 से बढ़कर आज लगभग 45,000 हो गई है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं, उनके पास जेल या नर्क जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होगा। योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार न केवल कल्याणकारी योजनाएं बना रही है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि उनका लाभ ज़रूरतमंदों तक पहुँचे। उन्होंने कई योजनाओं का ज़िक्र किया, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, सामूहिक विवाह योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने महिलाओं और लड़कियों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
मॉनसून सत्र अब तक औपचारिक रूप से क्यों नहीं हुआ खत्म, कांग्रेस बोली- दाल में कुछ काला
सदन में मत विभाजन में भाग लेने वाले 528 सांसदों में से 298 ने इसके समर्थन में वोट दिया, जबकि 230 ने इसका विरोध किया। विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 मतों की जरूरत थी।
Palghar Hospital Attack: बॉम्बे HC ने फरार आरोपियों पर पुलिस की ढिलाई को फटकारा
मुंबई, नौ सितंबर मुंबई उच्च न्यायालय ने पालघर जिले में एक निजी अस्पताल के चिकित्साकर्मियों पर हमले और तोड़फोड़ के मामले में शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ जांच में ढिलाई को लेकर बुधवार को पुलिस को फटकार लगाई। न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में कोई जांच नहीं की है, जो ‘‘अस्वीकार्य’’ है। अदालत ने कहा कि पुलिस ने जुलाई में ठाणे ज़िले के एक सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों पर हुए हमले की घटना से कोई सबक नहीं सीखा है; जिसमें शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे आरोपी हैं। पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्या पुलिस के लिए एक घटना (ठाणे अस्पताल) काफी नहीं है? क्या पुलिस ने ठाणे मामले से कोई सबक नहीं सीखा है?’’अदालत ने कहा कि अगर पालघर पुलिस मामले की जांच करने में दिलचस्पी नहीं रखती है, तो वह मामले को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा को सौंप देगी। पालघर के पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने उच्च न्यायालय को बताया कि प्राथमिकी में नामजद दस लोगों में से एक व्यक्ति - शिवसेना के शहर प्रमुख राहुल घरात को गिरफ़्तार कर लिया गया है और वह पुलिस हिरासत में हैं। देशमुख ने कहा कि शेष नौ आरोपी फरार हैं। पीठ ने पूछा कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ़्तार करने के लिए तुरंत कदम क्यों नहीं उठाए। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘फरार नौ आरोपियों का पता क्यों नहीं लगाया जा सका? ऐसा लगता है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद कोई जांच ही नहीं की गई। आपकी (पुलिस की) लापरवाही के कारण ही आरोपी फरार हैं।’’इसने सवाल किया कि पुलिस के खिलाफ़ प्रतिकूल निष्कर्ष क्यों न निकाला जाए। अदालत ने कहा, “यह आपकी नाकामी को दिखाता है। आपने ठाणे मामले से कोई सबक नहीं सीखा। यह मंज़ूर नहीं है। यह एक संवेदनशील मामला है जिसमें अस्पताल में तोड़फोड़ की गई, कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई और चिकित्सकों को धमकाया गया। पुलिस ने इस मामले में बहुत ही लापरवाही भरा रवैया अपनाया है।”इसने मामले की अगली सुनवाई के लिए बुधवार शाम का समय तय किया। पालघर के रिलीफ अस्पताल में पांच और छह सितंबर की रात कथित तौर पर शिवसेना के कई कार्यकर्ता घुस गए, जहाँ दही-हांडी समारोह में हिस्सा लेने वाले कुछ घायल ‘गोविंदा’ भर्ती थे। कार्यकर्ताओं ने अधिक पैसे वसूलने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में कथित तौर पर तोड़फोड़ की, चिकित्सकों को धमकाया, कर्मचारियों के साथ मारपीट की और गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती घायल लोगों को जबरदस्ती ले गए। पीठ जुलाई में ठाणे के नगर निकाय अस्पताल में हुई मारपीट की घटना पर स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रही थी कि तभी वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंडार्गी ने इसे पालघर की घटना के बारे में जानकारी दी।
अब हूतियों को सऊदी का जवाब, 24 घंटे के अंदर यमन के 4 राज्यों में 32 एयर स्ट्राइक!
हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब के एयरपोर्ट, एयरबेस पर हमला ताबड़तोड़ हमला कर कोहराम मचा दिया था. अब जवाब देने की बारी सऊदी अरब की है. सऊदी समर्थित यमन की सरकारी सेना ने हूती विद्रोहियों के कई ठिकानों पर एयर स्ट्राइक किए हैं.
TVK-कांग्रेस गठबंधन को मिला नाम, CM विजय ने किया MPSVK का ऐलान
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK के नेतृत्व वाले कांग्रेस, VCK, MDMK और IUML गठबंधन को आधिकारिक नाम मिल गया है. चेन्नई में हुई बैठक के बाद गठबंधन का नाम का ऐलान किया गया. बैठक में विजय समेत सहयोगी दलों के प्रमुख नेता मौजूद रहे और सभी ने एकजुटता का संदेश दिया.
आधुनिक जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण और खानपान की अनियंत्रित आदतों के बीच स्वास्थ्य से जुड़े कई ऐसे खामोश खतरे हमारे इर्द-गिर्द मंडराते रहते हैं, जिन्हें हम अक्सर मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा ही एक जानलेवा और अदृश्य खतरा इन दिनों हमारे घरों के भीतर पैर पसार रहा है, जो न केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को बल्कि उसके आसपास रहने वाले बेकसूर लोगों को भी मौत के मुंह में धकेल रहा है। चिकित्सीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े हालिया आंकड़े बेहद डरावने हैं। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' में प्रकाशित एक नई और व्यापक रिसर्च के अनुसार, भारत में पिछले तीन दशकों यानी 1990 के बाद से सेकंड-हैंड स्मोक यानी 'पैसिव स्मोकिंग' (Passive Smoking) की वजह से होने वाली मौतों के आंकड़ों में लगभग 50 फीसदी का खतरनाक और चौंकाने वाला उछाल दर्ज किया गया है। यदि आपके घर में भी कोई सिगरेट, बीड़ी या तंबाकू का सेवन करता है और आप खुद इन नशों से दूर हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी चेतावनी है क्योंकि बिना एक भी कश लिए हवा में फैल रहा यह जहरीला धुआं आपके लिए एक साइलेंट किलर साबित हो रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि पैसिव स्मोकिंग का यह खामोश खतरा हमारे देश और समाज को किस प्रकार खोखला कर रहा है।'द लैंसेट पब्लिक हेल्थ' की रिपोर्ट: भारत में हर साल तीन लाख से ज्यादा बेकसूर गंवा रहे हैं जानपैसिव स्मोकिंग के बढ़ते खतरे को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे किसी को भी गहरी चिंता में डालने के लिए काफी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1990 में देश में पैसिव स्मोकिंग की वजह से कुल 2,17,700 मौतें दर्ज की गई थीं, जो कि समय के साथ लगातार बढ़ती गईं और साल 2023 तक आते-आते यह भयानक आंकड़ा बढ़कर 3,25,600 तक पहुंच गया। इसका सीधा मतलब यह है कि सिर्फ एक साल के भीतर भारत में तीन लाख से अधिक लोगों ने अपनी मर्जी के खिलाफ, बिना सिगरेट पिए, केवल दूसरों के छोड़े गए धुएं के संपर्क में आने के कारण अपनी अमूल्य जान गंवा दी। चीन के बाद पूरी दुनिया में पैसिव स्मोकिंग का सबसे बड़ा दंश यदि कोई देश झेल रहा है, तो वह भारत है। वर्तमान समय में देश की कुल आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा यानी करीब 44.4 करोड़ लोग इस जहरीले और घातक धुएं की सीधी चपेट में जीवन बिताने को मजबूर हैं।प्रभावित लोगों की संख्या में क्यों हुई बढ़ोतरी, क्या कहते हैं तीन दशकों के आंकड़ेयह समझना बेहद दिलचस्प और जरूरी है कि पिछले कुछ वर्षों में धुएं के संपर्क में आने की कुल दर में भले ही कुछ कमी आई हो, लेकिन इसके बावजूद इससे प्रभावित होने वाले और अपनी जान गंवाने वाले मरीजों की संख्या लगातार क्यों बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आने की दर 43.2% से घटकर 30.6% पर जरूर आई है, लेकिन देश की आबादी में बेतहाशा तेजी से हुई वृद्धि के कारण प्रभावित होने वाले लोगों की कुल संख्या में 18.4% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 1990 के दौरान जहां देश में 37.5 करोड़ लोग इस जहरीले धुएं से प्रभावित थे, वहीं वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर सीधे 44.4 करोड़ तक जा पहुंची। इस खतरनाक स्थिति ने देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जहां लोग अनजाने में ही हर दिन मौत के साए में जीने को मजबूर हो रहे हैं।महिलाएं और पुरुष दोनों बन रहे हैं इस खामोश जहर का शिकारइस गंभीर स्वास्थ्य संकट ने समाज के किसी भी वर्ग को नहीं बख्शा है, और महिलाएं तथा पुरुष दोनों ही इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 1990 से 2023 के बीच महिलाओं में पैसिव स्मोकिंग के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा 1,13,400 से बढ़कर 1,56,900 तक पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर, पुरुषों के मामले में भी स्थिति कम भयावह नहीं है, जहां यह आंकड़ा 1,04,300 से छलांग लगाकर सीधे 1,68,700 पर जा पहुंचा है। इस खामोश और अदृश्य खतरे के कारण अकेले वर्ष 2023 के दौरान भारत ने अपने लगभग 92.8 लाख स्वस्थ जीवन के वर्ष हमेशा-हमेशा के लिए गंवा दिए हैं। जब घर के भीतर कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है, तो उसके द्वारा छोड़ा गया धुआं कमरे की हवा में घुलकर पूरे परिवार के फेफड़ों तक पहुंचता है, जिससे घर की चारदीवारी सुरक्षित होने का भ्रम टूटने लगता है और घर के सदस्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।फेफड़ों के विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव आनंद की चेतावनी: शरीर के हर अंग को खोखला कर रहा है यह जहरनोएडा स्थित फोर्टिस अस्पताल के जाने-माने रेस्पिरेटरी और स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव आनंद के अनुसार, पैसिव स्मोकिंग को महज 'थोड़े से धुएं के संपर्क में आना' समझ लेना सबसे बड़ी और घातक भूल है। यह केवल आंखों में जलन पैदा करने वाला धुआं नहीं है, बल्कि यह आपके दिल, फेफड़ों और शरीर की रक्त नलियों (Blood Vessels) पर बहुत गहरा, स्थायी और बुरा असर डालता है। वैज्ञानिक अध्ययन इस बात को पूरी तरह स्पष्ट करते हैं कि सेकंड-हैंड स्मोक के संपर्क में रहने के कारण इंसान को स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer), क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), इस्केमिक हार्ट डिजीज, ब्रेस्ट कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज और गंभीर अस्थमा जैसी लाइलाज व जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है। जब कोई दूसरा व्यक्ति सिगरेट पीता है, तो निकलने वाला साइड-स्ट्रीम स्मोक अधिक जहरीला होता है, जो आसपास खड़े या बैठे इंसान के शरीर के अंदर जाकर उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को दीमक की तरह चाट जाता है।बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग हैं इस जहरीले धुएं के सबसे आसान और संवेदनशील शिकारडॉ. ध्रुव आनंद का यह स्पष्ट मानना है कि जब घर के बंद कमरों में कोई धूम्रपान करता है, तो वहां मौजूद मासूम बच्चे, घर के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी दिल या सांस की बीमारी से पीड़ित मरीज इस जहरीले धुएं के सबसे आसान और संवेदनशील शिकार बनते हैं। चूंकि छोटे बच्चों के फेफड़ों और श्वसन तंत्र का विकास अभी पूरी तरह से नहीं हुआ होता है, इसलिए इस धुएं की वजह से उन्हें लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (श्वसन नली का संक्रमण) और निमोनिया जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसके अलावा बुजुर्गों की कमजोर होती शारीरिक क्षमता इस आघात को सहन नहीं कर पाती, जिससे उनकी सांसें उखड़ने लगती हैं और वे समय से पहले ही मौत के मुंह में चले जाते हैं।वैश्विक स्तर पर भी हालात बेहद चिंताजनक, तीन बड़े देशों में सिमटी है आधी आबादीकेवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पैसिव स्मोकिंग की यह समस्या एक विकराल रूप धारण कर चुकी है। साल 2023 के वैश्विक आंकड़ों पर गौर करें तो दुनिया भर में लगभग 2.71 अरब लोग सेकंड-हैंड स्मोक की प्रत्यक्ष चपेट में आए थे। इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में कुल 16.6 लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और लगभग 4.48 करोड़ स्वस्थ वर्षों का भारी नुकसान हुआ। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया भर की कुल प्रभावित आबादी का लगभग आधा हिस्सा केवल तीन बड़े देशों यानी चीन, भारत और इंडोनेशिया तक ही सीमित है। एशिया के इन घनी आबादी वाले देशों में यदि समय रहते तंबाकू नियंत्रण के कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह संकट और अधिक भयावह रूप ले सकता है।बचाव ही है एकमात्र उपाय: अपने घरों और बंद जगहों को बनाएं 100% स्मोक-फ्रीइस जानलेवा और खामोश खतरे से बचने का एकमात्र और सबसे असरदार उपाय यही है कि जागरूकता फैलाई जाए और कड़े कदम उठाए जाएं। विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव आनंद की सलाह है कि हर इंसान को अपने घर, अपनी कार और किसी भी प्रकार की बंद इनडोर जगह को 100% 'स्मोक-फ्री' यानी पूरी तरह से धूम्रपान मुक्त बनाना चाहिए। यदि किसी को सिगरेट या तंबाकू का सेवन करना ही है, तो उसे हमेशा घर से बाहर खुली हवा में जाकर ऐसा करना चाहिए ताकि परिवार के अन्य सदस्य इस जहरीले धुएं के संपर्क में न आएं। इसके अलावा, जो लोग खुद धूम्रपान की लत के शिकार हैं, उन्हें अपने प्यारे बच्चों, जीवनसंगिनी और परिवार के अन्य सदस्यों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए आज ही इस घातक लत को छोड़ने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए। आपकी एक छोटी सी सावधानी और बदलाव आपके पूरे परिवार को एक सुरक्षित और स्वस्थ जीवन का उपहार दे सकती है।
कार के गियर बॉक्स के नीचे छुपाया ढाई किलो सोना, पूरा माल जब्त
चंदौली पुलिस और एसओजी ने NH-19 पर चेकिंग के दौरान एक कार से 2 किलो 565 ग्राम सोने के बिस्किट बरामद किए हैं, जिनकी कीमत करीब 3.92 करोड़ रुपये है. कार के सीक्रेट बॉक्स में छिपाकर इन्हें बिहार से दिल्ली ले जाया जा रहा था. पुलिस ने महाराष्ट्र और हरियाणा के दो युवकों को गिरफ्तार किया है.
संसद तय करेगी, सुप्रीम कोर्ट नहीं; मैरिटल रेप अपराध है या नहीं वाले सवाल पर सरकार की सीधी बात
Supreme Court on marital rape: मैरिटल रेप अपराध है या नहीं इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। कोर्ट में सरकार की तरफ से कहा गया कि मैरिटल रेप अपराध है या फिर नहीं, यह तय करना संसद का काम है। सुप्रीम कोर्ट का नहीं।
इधर ‘स्मैश द पेट्रियार्की’ बोलो और उधर शाहबानों को जिंदा दफना दो
स्मैश द पेट्रियार्की The post इधर ‘स्मैश द पेट्रियार्की’ बोलो और उधर शाहबानों को जिंदा दफना दो appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
हरी पत्तेदार सब्जियों का कमाल: ये 10 जादुई पत्तियां रखेंगी आपको हमेशा फिट, तंदुरुस्त और एनर्जेटिक
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, खानपान की अनियंत्रित आदतें और शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से परेशान रहता है। ऐसे में यदि हम अपने शरीर को अंदर से स्वस्थ, ऊर्जावान और बीमारियों से मुक्त रखना चाहते हैं, तो हमें अपनी दैनिक जीवनशैली में प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर आहार को प्राथमिकता देनी होगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आहार विशेषज्ञों (डाइटीशियन) का हमेशा से यह मानना रहा है कि एक संतुलित और स्वस्थ शरीर की नींव सही पोषण पर टिकी होती है। इस दिशा में प्रकृति ने हमें कई ऐसी अद्भुत और गुणकारी सौगातें दी हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। हमारे दैनिक खानपान में हरी पत्तेदार सब्जियों और औषधीय पत्तियों का एक विशेष स्थान है। यदि आप अपनी रोजाना की थाली में इन पौष्टिक हरी पत्तियों को सही मात्रा में शामिल कर लें, तो आप न केवल कई गंभीर बीमारियों के खतरे से खुद को दूर रख सकते हैं, बल्कि जीवनभर तरोताजा और फिट भी रह सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं ऐसी कौन-सी जादुई और गुणकारी हरी पत्तियां हैं जो आपके स्वास्थ्य को संवार सकती हैं।स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं ये पोषक तत्वों से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियांहमारी रसोई में और आसपास आसानी से मिलने वाली हरी पत्तेदार सब्जियां और जड़ी-बूटियां विटामिन, मिनरल्स, डाइटरी फाइबर, आयरन, कैल्शियम और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत मानी जाती हैं। ये हरी पत्तियां हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत करने, पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और शरीर को अंदर से डिटॉक्सिफाई करने में बहुत बड़ा योगदान देती हैं। जब आप नियमित रूप से इनका सेवन करते हैं, तो आपके शरीर की कोशिकाओं को सही पोषण मिलता है, जिससे त्वचा में निखार आता है, बालों का झड़ना कम होता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर हमेशा हाई रहता है। आज के इस दौर में जहां बाजार में मिलने वाली ज्यादातर चीजें केमिकल्स और पेस्टिसाइड्स से युक्त होती हैं, वहां ये प्राकृतिक हरी पत्तियां हमारे शरीर के लिए एक नेचुरल शील्ड का काम करती हैं। आइए जानते हैं उन प्रमुख पत्तियों के बारे में जिन्हें आपको आज ही अपनी थाली का हिस्सा बना लेना चाहिए।पालक: आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स का पावरहाउसहरी पत्तेदार सब्जियों में 'पालक' को सबसे ताकतवर और लोकप्रिय सब्जी माना गया है। पालक आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन सी और कई अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का एक बेजोड़ पावरहाउस है। जिन लोगों के शरीर में अक्सर खून की कमी (अनीमिया) की शिकायत रहती है, उनके लिए पालक का सेवन किसी रामबाण से कम नहीं है। इसके नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से सुधरता है और थकान व कमजोरी दूर होती है। इसके अलावा, पालक में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स आंखों की रोशनी को बढ़ाने और रेटिना को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। आप पालक को अपने भोजन में कई अलग-अलग तरीकों से शामिल कर सकते हैं, जैसे कि पालक की पौष्टिक सब्जी, गर्मागर्म सूप या फिर सुबह की डाइट में हरी स्मूदी के रूप में इसका सेवन करना बेहद फायदेमंद साबित होता है।मेथी के पत्ते: पाचन सुधारने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मददगारसर्दियों के मौसम में विशेष रूप से मिलने वाले मेथी के पत्ते अपने औषधीय गुणों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। मेथी की पत्तियां पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कब्ज और गैस को दूर करने में बहुत असरदार होती हैं। इसके साथ ही, वैज्ञानिक शोधों में भी यह बात साबित हो चुकी है कि मेथी के पत्तों का नियमित सेवन शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत लाभदायक है। इन पत्तियों में भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो लंबे समय तक पेट को भरा रखता है और वजन घटाने (वेट लॉस) की प्रक्रिया में भी बहुत सहायता करता है। आप मेथी के पराठे, साग या इसकी सूखी सब्जी बनाकर अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।सरसों के पत्ते: हड्डियों को मजबूत और दिल की सेहत को रखते हैं बेहतरभारत के पारंपरिक खानपान, विशेषकर उत्तर भारत में सरसों के साग और इसकी पत्तियों का एक अलग ही क्रेज और महत्व है। सरसों के पत्ते विटामिन के, विटामिन सी, कैल्शियम और मैग्नीशियम का एक बहुत अच्छा और प्राकृतिक स्रोत माने जाते हैं। ये पोषक तत्व हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, सरसों की पत्तियों में मौजूद फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स हमारे दिल की सेहत को बेहतर रखते हैं, रक्त संचार को सुधारते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने का काम करते हैं। सर्दियों के दिनों में सरसों के पत्तों का सेवन शरीर को अंदर से गर्म रखता है और इम्युनिटी को बूस्ट करता है।पुदीना: शरीर को ठंडक देने और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने की अचूक बूटीपुदीने की हरी और सुगंधित पत्तियां न केवल हमारे खाने के स्वाद और खुशबू को कई गुना बढ़ा देती हैं, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बेहद गुणकारी हैं। पुदीना शरीर को प्राकृतिक ठंडक प्रदान करता है और पाचन शक्ति को तीव्र करता है। यदि किसी को अपच, पेट फूलना या मितली आने की समस्या है, तो पुदीने का सेवन तुरंत राहत दिलाता है। गर्मियों के दिनों में पुदीने की ताजी पत्तियों की चटनी, जलजीरा या पुदीने का शरबत पीने से शरीर तरोताजा रहता है और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है। इसके रोगाणुरोधी गुण मुंह की बदबू को दूर करने और ओरल हेल्थ को सुधारने में भी मदद करते हैं।धनिया पत्ते: शरीर को डिटॉक्स करने और किडनी की कार्यक्षमता बढ़ाने वाले सुपरग्रीनलगभग हर भारतीय रसोई में दाल, सब्जी और चाट की गार्निशिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली हरी धनिए की पत्तियां सिर्फ स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक बेहतरीन डिटॉक्सिफायर भी हैं। धनिए की पत्तियां शरीर के भीतर जमा जहरीले टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने में मदद करती हैं और हमारी किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर बनाती हैं। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ए, सी और पोटैशियम पाया जाता है, जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। धनिया हमारे शरीर में इंसुलिन के स्तर को संतुलित रखने में भी मदद करता है, जिससे पाचन क्रिया सुचारू रूप से चलती है।तुलसी के पत्ते: एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुणों से भरपूर प्राकृतिक औषधिभारतीय संस्कृति और आयुर्वेद में तुलसी के पौधे को बहुत ही पवित्र और औषधीय गुणों की खान माना गया है। तुलसी के पत्तों में प्रचुर मात्रा में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। मौसम बदलने पर होने वाली सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल संक्रमण से बचाव के लिए तुलसी का सेवन अचूक उपाय माना जाता है। रोजाना सुबह खाली पेट तुलसी के कुछ ताजी पत्तियों का सेवन करने से इम्युनिटी इतनी मजबूत हो जाती है कि सामान्य बीमारियां आसपास भी नहीं फटकती हैं। यह मानसिक तनाव को कम करने और मानसिक स्पष्टता को बढ़ाने में भी बहुत मददगार साबित होती है।करी पत्ता: बालों की सेहत, आंखों की चमक और पाचन के लिए वरदानदक्षिण भारतीय व्यंजनों में अपनी खास महक के लिए मशहूर करी पत्ता सेहत का खजाना है। करी पत्ता आयरन, फॉलिक एसिड और विटामिन ए, बी, सी और ई से भरपूर होता है। यह बालों की जड़ों को मजबूत बनाने, असमय बालों के सफेद होने और झड़ने की समस्या को रोकने में जादुई रूप से काम करता है। इसके नियमित सेवन से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है और शरीर में खून की कमी दूर होती है। आप दाल या तड़के में करी पत्ते का इस्तेमाल करने के अलावा सुबह खाली पेट इसकी कुछ कच्ची पत्तियां भी चबा सकते हैं।चौलाई और सहजन के पत्ते: ताकत और हड्डियों की मजबूती के लिए बेहतरीन सुपरफूडचौलाई (Amaranth) के पत्ते प्रोटीन, फाइबर, आयरन और अनगिनत मिनरल्स से भरपूर होते हैं, जो शरीर को जबरदस्त ताकत और ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, 'सहजन' (Moringa) के पत्तों को तो आधुनिक विज्ञान में भी एक सुपरफूड का दर्जा दिया गया है। सहजन की पत्तियों में संतरे से कई गुना ज्यादा विटामिन सी और दूध से कई गुना ज्यादा कैल्शियम पाया जाता है, जो हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है। इन सभी प्राकृतिक और हरी पत्तियों को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाकर आप एक स्वस्थ, दीर्घायु और खुशहाल जीवन की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। आज ही संकल्प लें कि आप अपनी और अपने परिवार की थाली में इन हरी पत्तियों को जरूर शामिल करेंगे।
गुलजार सिंह सुसाइड केस में गरमाई सियासत, विपक्ष ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
पंजाब के संगरूर के गुलजार सिंह सुसाइड केस में ड्रग्स मामले की मंत्री के सामने सवाल उठाने को लेकर मान सरकार घिरती नजर आ रही है. आप सरकार के खिलाफ कांग्रेस-बीजेपी और अकाली दल सबसे मोर्चा खोल दिया है. पुलिस ने इस मामले में एक्शन लेते हुए सरपंच समेत 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने मृतक गुलजार सिंह के बेटे लखविंदर सिंह के बयानों के आधार पर बीएनएस की धारा 108 और एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.
कल का मौसम: 10 सितंबर को उत्तराखंड के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
उत्तराखंड में बारिश का सिलसिला अभी थमता नजर नहीं आ रहा है. मौसम विभाग ने 10 सितंबर से प्रदेश के कई हिस्सों में फिर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. देहरादून, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है. सभी जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है.
ट्रॉमा और मानसिक सदमे से बढ़ जाता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा, नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा
दैनिक जीवन की भागदौड़ और अप्रत्याशित परिस्थितियों में मनुष्य कभी-कभी ऐसी भीषण घटनाओं का सामना कर जाता है जो उसे मानसिक और शारीरिक रूप से अंदर तक झकझोर कर रख देती हैं। जीवन में घटने वाली ऐसी दर्दनाक और भयावह घटनाओं को सामान्य बोलचाल और चिकित्सीय भाषा में 'ट्रॉमा' या मानसिक सदमा कहा जाता है। हालांकि, अधिकांश लोग इसे केवल एक मानसिक या भावनात्मक समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हाल ही में सामने आए एक व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। एक नई और बेहद महत्वपूर्ण रिसर्च के अनुसार, किसी भी बड़े ट्रॉमा के बाद पैदा होने वाली मानसिक परेशानियां और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विकार भविष्य में इंसान के दिल की सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकते हैं। इन समस्याओं के कारण आगे चलकर हार्ट अटैक (दिल का दौरा), स्ट्रोक और अन्य गंभीर कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का जोखिम कई गुना तक बढ़ जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मानसिक सदमे और हृदय रोगों के बीच क्या संबंध है और यह हमारे शरीर को किस प्रकार प्रभावित करता है।क्या है ट्रॉमा और इसमें किन दर्दनाक घटनाओं को किया जाता है शामिलयह समझना बेहद आवश्यक है कि आखिर 'ट्रॉमा' या सदमा किसे कहा जाता है और इसमें किस तरह के अनुभव शामिल होते हैं। चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक शोध के अनुसार, ट्रॉमा उन गंभीर और अत्यधिक तनावपूर्ण घटनाओं को कहा जाता है जो व्यक्ति के सामान्य जीवन चक्र को अचानक और बुरी तरह से बाधित कर देती हैं। इसमें कई तरह की भयावह स्थितियां शामिल हो सकती हैं, जैसे अचानक कहीं भीषण आग लग जाना, कोई बड़ा धमाका होना, किसी प्रकार का गंभीर शारीरिक हमला या हिंसा का शिकार होना, किसी बेहद करीबी और प्रियजन की अचानक मौत या आत्महत्या, या फिर खुद किसी गंभीर और लाइलाज बीमारी या गहरी शारीरिक चोट की चपेट में आ जाना। ये सभी ऐसी घटनाएं हैं जो इंसान के अवचेतन मन और मस्तिष्क पर बहुत गहरा और नकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं। जब कोई व्यक्ति इस प्रकार के सदमे से गुजरता है, तो उसका मानसिक संतुलन चरमरा जाता है, जो सीधे तौर पर उसके शारीरिक स्वास्थ्य और विशेषकर हृदय प्रणाली को प्रभावित करने लगता है।दो लाख से अधिक वयस्कों पर किया गया 'जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन' का बड़ा शोधमानसिक स्वास्थ्य और हृदय रोगों के बीच के इस गहरे और छिपे हुए कनेक्शन को दुनिया के सामने लाने वाली यह महत्वपूर्ण रिसर्च प्रतिष्ठित 'जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन' (Journal of the American Heart Association) में प्रकाशित हुई है। इस व्यापक और ऐतिहासिक शोध में दुनिया भर के कुल 2,19,866 ऐसे वयस्क नागरिकों को शामिल किया गया था, जिन्होंने अपने जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर किसी गंभीर दर्दनाक घटना या ट्रॉमा का सामना किया था। शोधकर्ताओं ने इन सभी लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का लंबे समय तक बारीकी से अध्ययन किया ताकि यह समझा जा सके कि मानसिक आघात झेलने वाले लोगों के शरीर में किस प्रकार के शारीरिक और जैविक बदलाव आते हैं। इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता जेनिफर ए. समनर (Jennifer A. Sumner) के अनुसार, इन लाखों प्रभावित लोगों में से करीब 44,000 ऐसे मरीज पाए गए जिन्हें अपनी जिंदगी में आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल की गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ा। इनमें से कई लोगों की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को दिल तक खून का संचार फिर से शुरू करने हेतु विशेष मेडिकल ट्रीटमेंट देना पड़ा, तो कई दुर्भाग्यशाली ऐसे भी थे जिन्हें इन्हीं गंभीर कार्डियोवैस्कुलर कारणों के चलते अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा।मशीन लर्निंग तकनीक की मदद से लगाए गए दिल की बीमारियों के 15 सबसे बड़े कारणों का पताइस विशालकाय अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने गंभीर रूप से बीमार पड़ने वाले लोगों के स्वास्थ्य डेटा की तुलना उन लोगों से की जो इस तरह की दिल की समस्याओं से सुरक्षित बचे रहे थे। अनुसंधानकर्ताओं ने कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं के पीछे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों को एक सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष संभावित कारण माना। दिल और दिमाग के बीच के इस घातक तालमेल को और अधिक गहराई से समझने के लिए वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। दिल और दिमाग से जुड़ी इन जानलेवा बीमारियों के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार माने जाने वाले मानसिक स्वास्थ्य विकारों के 15 सबसे प्रमुख और अहम कारणों का सटीक पता लगाने के लिए 'मशीन लर्निंग' (Machine Learning) तकनीक का उपयोग किया गया। इस आधुनिक तकनीकी विश्लेषण से यह साफ हो गया कि ट्रॉमा के बाद मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव किस प्रकार शरीर के बाकी अंगों को कमजोर कर देते हैं।मानसिक दर्द से निपटने के लिए शराब का अत्यधिक सेवन बनता है सबसे बड़ा जोखिम कारकइस पूरी वैज्ञानिक रिसर्च में जो सबसे डरावनी और आंखें खोल देने वाली बात निकलकर सामने आई, वह थी मानसिक तनाव को मिटाने के लिए अत्यधिक शराब का सेवन करने की खतरनाक आदत। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में यह पाया कि ट्रॉमा के शिकार लोगों में दिल की बीमारियों से जुड़ा हुआ सबसे बड़ा मानसिक स्वास्थ्य जोखिम और कोई नहीं बल्कि शराब की लत और उसका अत्यधिक सेवन ही है। इस विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रमुख शोधकर्ता जेनिफर समनर बताती हैं कि आखिर लोग इस खतरनाक रास्ते पर क्यों चले जाते हैं। उनके अनुसार, जब कोई आम इंसान अपने जीवन में किसी बड़े सदमे, दुर्घटना या बुरे अनुभव से गुजरता है, तो उसके भीतर एक भारी मानसिक उथल-पुथल मच जाती है। इस असहनीय मानसिक दर्द और भावनात्मक आघात से निपटने तथा उस बेचैनी को संभालने के लिए लोग अक्सर जाने-अनजाने शराब का सहारा लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि शराब पीने से उनका दर्द कुछ समय के लिए कम हो जाएगा, लेकिन यही अस्थायी राहत की आदत आगे चलकर उनके दिल और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के लिए बेहद घातक साबित होती है। अत्यधिक शराब पीने से रक्तचाप बढ़ता है, धमनियां कमजोर होती हैं और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा चरम पर पहुंच जाता है। इसलिए मानसिक आघात के समय नशीले पदार्थों से दूरी बनाकर सही चिकित्सा और मनोचिकित्सक की सलाह लेना ही बुद्धिमानी है।
Supreme Court ने Rahul Gandhi मानहानि मामले में कहा- सभी के साथ होता है समान व्यवहार
नयी दिल्ली, नौ सितंबर उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई में देरी की शिकायत पर कहा कि ‘सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है’। न्यायालय ने यह टिप्पणी तब की जब मानहानि मामले में शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि राहुल गांधी के खिलाफ दायर मामले को लंबे समय से शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है। उच्चतम न्यायालय राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पिछले साल 29 मई के आदेश को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अधीनस्थ अदालत के समन आदेश को चुनौती दी थी। यह मामला 2022 की उनकी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान भारतीय सेना के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल चार अगस्त को लखनऊ की अदालत में लंबित इस मामले में आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी थी। चार दिसंबर को उच्चतम न्यायालय ने गांधी की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए कहा था कि वह मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा। इसके बाद मामले को 22 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया गया था। बुधवार को एक अन्य मानहानि मामले से जुड़ी दो अलग-अलग लंबित याचिकाओं में जल्द सुनवाई की मांग वाली अर्जियां प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थीं। इन दोनों याचिकाओं को इसके पहले गांधी की याचिका के साथ जोड़ दिया गया था। शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि मामले पर सुनवाई की जाए और इसे उन दो अलग-अलग याचिकाओं से अलग किया जाए। पीठ ने भाटिया से इस संबंध में उचित आवेदन दाखिल करने को कहा। भाटिया ने पीठ से आग्रह किया कि गांधी की याचिका पर सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय की जाए। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले आदेश में कहा गया है कि इसे 22 अप्रैल को सूचीबद्ध किया जाए। सिर्फ इसलिए कि एक व्यक्ति (गांधी) इसमें शामिल हैं, मामले को सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा है। मैं केवल इतना कह रहा हूं कि मामले की सुनवाई की जाए और इसे अलग कर दिया जाए।’’पीठ ने कहा, ‘‘आप प्रक्रिया का पालन करें और जल्द सुनवाई के लिए अर्ज़ी दाखिल करें। सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है। आप अलग अर्ज़ी दाखिल करें।
कब से चलेगी भारत की पहली बुलेट ट्रेन? रेलमंत्री ने दिया ये जवाब
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली भारत की पहली बुलेट ट्रेन पर बड़ा अपडेट दिया है और बताया है कि कबतक इसका काम पूरा होगा, कब ट्रॉयल होगा और कबसे यह ट्रेन चलने लगेगी?
Satya Niketan हादसे में Media Trial पर आपत्ति, 3 आरोपियों को 2 दिन की Police Custody रिमांड
पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के मामले में महेश गुप्ता, कॉन्ट्रैक्टर सानोज कुमार और PG ऑपरेटर सुधांशु को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। दिल्ली पुलिस ने महेश गुप्ता, सानोज कुमार और सुधांशु की तीन दिन की पुलिस कस्टडी मांगी थी। 6 सितंबर को सत्य निकेतन में पांच मंज़िला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) कौतुक भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस की कस्टडी की अर्ज़ी पर सुनवाई के बाद बिल्डिंग के मालिक के बेटे महेश गुप्ता, सानोज कुमार और सुधांशु को दो दिन की कस्टडी में भेज दिया। महेश को दो दिन की कस्टडी पूरी होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जबकि सानोज और सुधांशु को नई गिरफ्तारी के बाद पेश किया गया। इसे भी पढ़ें: Satya Niketan Building Collapse: पांचवीं गिरफ्तारी, PG संचालक सुधांशु को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच करने और एक और PG ऑपरेटर, शुभम त्यागी को गिरफ्तार करने के लिए आरोपियों की तीन दिन की कस्टडी मांगी थी। सुनवाई के दौरान, सुधांशु के वकील के अनुरोध पर कोर्ट ने कैमरे के सामने कार्यवाही (बंद कमरे में सुनवाई) का आदेश दिया। वकील ने कहा कि मामले को मीडिया ट्रायल बनाया जा रहा है और मीडिया की मौजूदगी पर आपत्ति जताई। इसके बाद, कोर्ट ने मीडिया को कोर्टरूम से बाहर जाने के लिए कहा। दिल्ली पुलिस और बचाव पक्ष के वकील यशपाल सिंह की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने दो दिन की पुलिस कस्टडी मंज़ूर कर ली। इसे भी पढ़ें: Satya Niketan हादसे के बाद CM Rekha Gupta का आदेश: MCD चलाएगी अवैध निर्माण पर बुलडोजर 7 सितंबर को, पटियाला हाउस के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने सोमवार रात महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। उनके माता-पिता, हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता, को ज्यूडिशियल कस्टडी (न्यायिक हिरासत) में भेज दिया गया। उन्हें देर रात ड्यूटी मजिस्ट्रेट के घर पेश किया गया और सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के मामले में गिरफ़्तार किया गया। इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने महेश गुप्ता की कस्टडी रिमांड और हरिराम गुप्ता व उर्मिला गुप्ता के लिए 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी की मांग करते हुए अर्ज़ी दी थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, बिल्डिंग का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर था, जबकि उनका बेटा इसका मैनेजमेंट संभाल रहा था। प्रॉपर्टी हरिराम की पत्नी उर्मिला गुप्ता के नाम पर रजिस्टर्ड थी। दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस मामले में बिल्डिंग के मालिक और फ़ायदा उठाने वाले - 81 साल के हरिराम गुप्ता, उनकी 75 साल की पत्नी उर्मिला गुप्ता और उनके 52 साल के बेटे महेश गुप्ता को गिरफ़्तार किया गया। जांच के दौरान पता चला कि प्रॉपर्टी उर्मिला गुप्ता के नाम पर है। इसे उनके पति हरिराम और बेटे महेश मैनेज और ऑपरेट कर रहे थे। हरिराम के नाम पर दो मंज़िलों के बिजली कनेक्शन हैं। वह इंडियन एयर फ़ोर्स से रिटायर्ड सार्जेंट हैं। महेश हार्डवेयर और पेंट की दुकान चलाते हैं। उनके दो बच्चे हैं।
सूर्य देव के 10 दिव्य और अर्थपूर्ण नामों पर रखें बेबी बॉय का नाम, जीवन भर चमकेगी किस्मत
सनातन संस्कृति और हिंदू परंपरा में माता-पिता के लिए अपने नवजात शिशु का नामकरण संस्कार एक बेहद पवित्र, महत्वपूर्ण और आनंददायक अवसर होता है। जब घर में किसी नए मेहमान का आगमन होता है, तो हर माता-पिता के मन में यही दुविधा रहती है कि वे अपने लाडले के लिए एक ऐसा नाम चुनें जो सुनने में आधुनिक हो, बोलने में सरल हो और जिसका कोई गहरा आध्यात्मिक या अर्थपूर्ण मतलब भी हो। आज के समय में पारंपरिक और आधुनिक नामों का अद्भुत मिश्रण पसंद किया जाता है। यदि आप भी अपने नवजात शिशु यानी बेबी बॉय के लिए किसी ऐसे ही चमकीले, तेजस्वी और प्रभावशाली नाम की तलाश कर रहे हैं, तो प्रत्यक्ष देवता और जीवन के आधार माने जाने वाले भगवान सूर्य के दिव्य नामों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष ऊर्जा, आरोग्य, यश और तेज का दाता माना जाता है। सूर्य देव के इन 10 सुंदर और अर्थपूर्ण नामों के माध्यम से आपके बच्चे के जीवन में भी सूर्य जैसी ही चमक और सकारात्मकता बनी रह सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं सूर्य देव के उन 10 दिव्य नामों के बारे में और उनके पीछे छिपे गहरे अर्थों को समझते हैं।भगवान सूर्य का पहला नाम 'सूर्य': जीवन, सेहत और सफलता का प्रतीकसूर्य देव का यह मूल नाम अपने आप में असीम ऊर्जा और जीवन का संदेश देता है। हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है जो पूरी सृष्टि को जीवन और आरोग्य प्रदान करते हैं। यदि आप अपने बच्चे का नाम 'सूर्य' रखते हैं, तो यह उसकी प्रतिभा, उपचार करने की शक्ति और जीवन में मिलने वाली अनंत सफलताओं का एक बहुत बड़ा प्रतीक माना जाता है। यह नाम जितना छोटा और उच्चारण में आसान है, उतना ही इसका प्रभाव गहरा और स्थायी होता है। प्राचीन काल से ही सूर्य को तेज, बल और बुद्धि का देवता माना गया है, इसलिए यह नाम आपके बेटे के व्यक्तित्व को एक अलग ही आत्मविश्वास और मजबूती प्रदान करेगा।आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर दैवीय नाम 'ईशान': शक्ति और सुरक्षा का प्रतीकभगवान सूर्य से जुड़े नामों की सूची में 'ईशान' नाम भी बेहद खास स्थान रखता है। यह नाम आध्यात्मिक ऊर्जा से पूरी तरह भरपूर एक दैवीय नाम माना जाता है। ईशान नाम मुख्य रूप से शक्ति, मानसिक स्पष्टता, दूरदर्शिता और जीवन में सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह नाम व्यक्ति के भीतर छिपे ज्ञान, विवेक और आंतरिक शक्ति को निखारता और चमकाता है। अगर आप अपने बेटे के लिए कोई ऐसा नाम तलाश रहे हैं जो आधुनिक भी हो और जिसकी आध्यात्मिक जड़ें भी मजबूत हों, तो ईशान एक बेहद शानदार और बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।सदाबहार और पारंपरिक नाम 'रवि': गर्माहट और प्रेरणा का अद्भुत संगमरवि भगवान सूर्य के सबसे पारंपरिक, लोकप्रिय और सदाबहार नामों में से एक है। यह नाम जितना सरल है, उतना ही गहरा इसका आध्यात्मिक अर्थ भी है। रवि नाम स्पष्टता, जीवन की गर्माहट, ऊर्जा और दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता का प्रतीक माना जाता है। सदियों से भारतीय समाज में रवि नाम को बहुत पसंद किया जाता रहा है क्योंकि यह कभी पुराना नहीं पड़ता। यह नाम इस बात का प्रतीक है कि आपका बच्चा अपने जीवन में हमेशा उजाला फैलाएगा और हर परिस्थिति में स्पष्टवादी रहेगा। पारंपरिक होने के साथ-साथ यह आज की पीढ़ी के बच्चों पर भी बहुत जमता है।साहस और नई उम्मीद की किरण का प्रतीक नाम 'अरुण': सूर्य देव के सारथी का नामहिंदू पौराणिक कथाओं और ग्रंथों में सूर्य देव के रथ को हांकने वाले उनके सारथी का नाम 'अरुण' है। अरुण नाम साहस, सही दिशा और जीवन में एक नए सवेरे की उम्मीद का प्रतीक माना जाता है। सूर्योदय से ठीक पहले आसमान में जो लालिमा छाती है, उसे भी अरुणोदय कहा जाता है। यह नाम इस बात का संदेश देता है कि आपका बेटा अंधकार को चीरकर आगे बढ़ने वाला और जीवन में हमेशा सही मार्ग दिखाने वाला एक साहसी इंसान बनेगा। यह नाम सुनने में बहुत ही मधुर और कर्णप्रिय लगता है, जो हर किसी को आसानी से पसंद आ जाता है।वैदिक मंत्रों से जुड़ा यूनीक नाम 'आर्क': पवित्रता और दैवीय ऊर्जा का प्रतीकयदि आप अपने बच्चे के लिए कोई ऐसा नाम तलाश रहे हैं जो पूरी तरह से यूनीक हो और जो आम नामों की भीड़ में अलग नजर आए, तो 'आर्क' एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। सूर्य देव का यह नाम बहुत अनोखा है, जिसका मुख्य रूप से प्राचीन वैदिक मंत्रों में बहुत महत्व के साथ उपयोग किया जाता है। यह नाम पवित्रता, आंतरिक शक्ति और उच्च कोटि की दैवीय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसका सीधा संबंध भगवान विष्णु और सूर्य दोनों से जोड़ा जाता है। आधुनिक युग के पेरेंट्स जो लीक से हटकर नाम रखना पसंद करते हैं, उनके लिए यह एक परफेक्ट चॉइस हो सकती है।पवित्रता और प्रकाश का परिचायक नाम 'दिव्यांश': जीवन में दिव्य आनंद की प्राप्ति'दिव्यांश' नाम भी भगवान सूर्य के ही एक अन्य दिव्य स्वरूप और नाम से प्रेरित है। इस नाम का शाब्दिक अर्थ पवित्रता, पावनता और प्रकाश का स्रोत माना जाता है। यह नाम ऐसे बच्चे के लिए एकदम उपयुक्त और सटीक है, जिसके जीवन में आप हमेशा दिव्य आनंद, सुख और सकारात्मकता देखना चाहते हैं। दिव्यांश नाम बोलने में बहुत ही वजनदार और सुंदर लगता है। यह बच्चे के बौद्धिक और मानसिक विकास के साथ-साथ उसके भीतर एक सात्विक ऊर्जा का संचार करने में मदद करता है, जिससे वह समाज में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बनता है।सूर्य जैसी चमक और साहस देने वाला नाम 'सूर्यांश': सूर्य का एक अंश'सूर्यांश' नाम का अर्थ बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक होता है। सूर्यांश का मतलब होता है—सूर्य का ही एक छोटा सा भाग या उसकी किरण। यह नाम आपके बच्चे को सीधे तौर पर सूर्य जैसी प्रचंड चमक, अटूट साहस और कभी न हार मानने वाली ऊर्जा प्रदान करता है। आज के समय में यह नाम काफी ट्रेंड में है और माता-पिता इसे बहुत चाव से अपने बेटों के लिए चुन रहे हैं। यह नाम इस बात की प्रेरणा देता है कि आपका बच्चा अपनी कार्यकुशलता और तेज से हर क्षेत्र में सूर्य की तरह अपनी एक अलग पहचान बनाएगा और चारों तरफ अपनी कीर्ति फैलाएगा।सूरज की पहली किरण और नई शुरुआत का प्रतीक 'आरुष': ताजगी और सकारात्मकताआरुष नाम का अर्थ सीधे तौर पर सूरज की सबसे पहली और ताजी किरण से जुड़ा हुआ है। यह नाम जीवन में एक नई शुरुआत, असीम सकारात्मक ऊर्जा और सुबह की ताजी हवा की तरह ताजगी का प्रतीक माना जाता है। यदि आपके घर में किसी ऐसे बच्चे का जन्म हुआ है जो भोर के समय यानी सुबह जन्मा है या जो आपके परिवार के जीवन में एक नई उम्मीद और रोशनी बनकर आया है, तो उसके लिए आरुष नाम सबसे उत्तम माना जाता है। यह नाम बहुत ही मॉर्डन, स्वीट और मीनिंगफुल है, जो हर किसी के दिल को तुरंत छू लेता है।तेज, नेतृत्व और शक्ति का प्रतीक नाम 'आदित्य': प्राचीन काल से चला आ रहा लोकप्रिय नामहिंदू धर्म और वैदिक परंपरा में भगवान सूर्य देवता को 'आदित्य' नाम से भी पुकारा जाता है। अदिति के पुत्र होने के कारण उन्हें आदित्य कहा गया है, जो असीम चमक, शारीरिक व मानसिक शक्ति और जीवन-शक्ति (प्राण ऊर्जा) का प्रतीक है। यह नाम ताकत, पराक्रम और एक सच्चे लीडर (नेतृत्व क्षमता) के गुणों से जुड़ा हुआ एक बेहतरीन और सर्वमान्य नाम है। सदियों बीत जाने के बाद भी आदित्य नाम की चमक कभी फीकी नहीं पड़ी है। यह नाम आपके बेटे को जीवन के हर मुकाम पर आगे बढ़ने और अपनी नेतृत्व क्षमता से समाज में एक मिसाल कायम करने की प्रेरणा देता है।तेजस्वी आत्मा और दैवीय वंश का प्रतीक नाम 'तनय': मजबूत और ऊर्जावान व्यक्तित्वसूर्य देव के नामों की इस विशेष श्रृंखला में 'तनय' भी एक बहुत ही प्यारा और अर्थपूर्ण नाम है। तनय नाम दैवीय वंश और सूर्य जैसी तेजस्विता व ऊर्जा का सीधा प्रतीक माना जाता है। यह एक ऐसे मजबूत, दृढ़ निश्चयी और तेजस्वी व्यक्तित्व वाले इंसान के लिए एकदम सही नाम है जो अपनी मेहनत के बल पर हर मुकाम हासिल कर सके। नाम छोटा होने के कारण यह जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है और इसका प्रभाव भी बहुत गहरा होता है। अपने बच्चे के नामकरण के लिए यदि आप किसी छोटे, सुंदर और प्रभावशाली नाम की तलाश में हैं, तो तनय आपके लिए एक आदर्श विकल्प हो सकता है। सूर्य देव के इन सभी दिव्य नामों में से आप अपनी पसंद और सुविधानुसार किसी एक का चयन करके अपने लाडले के जीवन को मंगलमय बना सकते हैं।
पहली बार सलमान खान का बिग बॉस शो देखेंगे अरिजीत सिंह, बताई वजह
सिंगर काजी तौकीर इस समय सलमान खान के रियलिटी शो बिग बॉस 20 में नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर हर जगह उनकी चर्चा हो रही है, अब अरिजीत ने काजी तौकीर का खुलकर सपोर्ट किया है.
नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन: भारत की कूटनीतिक परीक्षा और मोदी की वैश्विक रणनीति
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Chanakya Niti: सुंदरता नहीं, इन 7 गुणों वाली स्त्री बनाती है पति को भाग्यशाली और घर को स्वर्ग
भारतीय सनातन संस्कृति, प्राचीन दर्शन और महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य की नीतियों ने हमेशा से ही मानव जीवन को एक सही और अनुशासित दिशा दिखाने का काम किया है। चाणक्य नीति (Chanakya Niti) केवल राजनीति, युद्ध कौशल या अर्थशास्त्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन जीने की कला, पारिवारिक रिश्तों की मजबूती और एक आदर्श जीवनसंगिनी के चुनाव के संबंध में भी बहुत ही गहरे और सटीक सूत्र बताए गए हैं। आचार्य चाणक्य का यह स्पष्ट मानना रहा है कि किसी भी स्त्री की असली सुंदरता उसके बाहरी रूप-रंग या शारीरिक आभूषणों में नहीं होती, बल्कि उसके आंतरिक गुण, उत्तम संस्कार, बुद्धि और उसका आचरण ही उसके सबसे बड़े गहने होते हैं। एक समझदार और गुणवान स्त्री न केवल अपने पति के जीवन को संवारती है, बल्कि पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोकर घर-परिवार को खुशहाली से भर देती है। आज के इस आधुनिक दौर में भी चाणक्य नीति के ये विचार उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन काल में हुआ करते थे। आइए विस्तार से जानते हैं कि आचार्य चाणक्य द्वारा बताए गए वे कौन-से 7 प्रमुख गुण हैं, जो किसी भी स्त्री को एक आदर्श पत्नी बनाते हैं और उसके स्पर्श मात्र से साधारण घर भी स्वर्ग बन जाता है।मधुर वाणी: रिश्तों में प्रेम और मिठास घोलने वाली बोलीआचार्य चाणक्य के अनुसार, मनुष्य की वाणी ही उसके व्यक्तित्व का सबसे बड़ा और प्रभावी दर्पण होती है। एक स्त्री जिसकी बोली में मिठास और शीतलता होती है, वह अपने शब्दों से किसी भी तनावपूर्ण माहौल को पल भर में शांत कर सकती है। मधुर वाणी बोलने वाली पत्नी घर के हर सदस्य के दिल में अपनी एक खास जगह बना लेती है। इसके विपरीत, जो स्त्री सोच-समझकर नहीं बोलती और छोटी-छोटी बातों पर बात का बतंगड़ बना देती है, वह घर की शांति को भंग कर देती है। चाणक्य नीति कहती है कि जो पत्नी हमेशा संतुलित, आदरपूर्ण और मीठे शब्दों का प्रयोग करती है, उसके घर में कभी भी क्लेश या कलह का वास नहीं होता है। ऐसी स्त्री अपने मधुर स्वभाव से पति के जीवन की आधी थकान और तनाव को यूं ही दूर कर देती है, जिससे दांपत्य जीवन में हमेशा प्रेम, अपनापन और सामंजस्य बना रहता है।संतोष रखने की क्षमता: कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने का गुणसंतोष को दुनिया का सबसे बड़ा धन माना गया है, और आचार्य चाणक्य ने भी इसे जीवन का एक अनिवार्य स्तंभ बताया है। आज की इस भौतिकवादी और दिखावे की दुनिया में हर व्यक्ति दूसरे से आगे निकलने की अंधी दौड़ में शामिल है, लेकिन जो स्त्री संतोषी स्वभाव की होती है, वह हर हाल में प्रसन्न रहना जानती है। संतोष रखने वाली पत्नी कभी भी अपने पति पर अनावश्यक दबाव नहीं डालती है और न ही दूसरों की सुख-सुविधाओं को देखकर अपने घर में अशांति फैलाती है। यदि जीवन में कभी कोई आर्थिक तंगी या बुरा वक्त आ भी जाए, तो ऐसी संतोषी और समझदार पत्नी अपने पति का मानसिक संबल बनती है और धैर्य के साथ हर परिस्थिति का सामना करती है। चाणक्य का मानना है कि ऐसी गुणवान पत्नी जिस घर में होती है, वहां अभाव में भी पूर्णता और सुख का अनुभव होता है।बुद्धिमानी और समझदारी: संकट के समय सही निर्णय लेने की अद्भुत क्षमतापरिवारिक जीवन की गाड़ी को सुचारू रूप से चलाने के लिए पति और पत्नी दोनों का ही समझदार होना बहुत जरूरी है। आचार्य चाणक्य के अनुसार, जिस स्त्री के पास पैनी बुद्धि और दूरदर्शिता होती है, वह परिवार पर आने वाले हर संकट को अपनी सूझबूझ से टाल देती है। बुद्धिमान स्त्री कभी भी किसी भी गंभीर समस्या में घबराती नहीं है और न ही भावनाओं में बहकर कोई गलत फैसला लेती है। वह ठंडे दिमाग से हर पहलू पर विचार करती है और फिर सही निर्णय तक पहुंचती है। जीवन के उतार-चढ़ाव भरे सफर में जब कभी पति कोई निर्णय लेने में असमर्थ महसूस करता है, तो ऐसी समझदार पत्नी एक सच्चे सलाहकार और मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है। उसकी दी गई सही सलाह और समय पर लिया गया निर्णय पूरे परिवार को बड़ी से बड़ी आपदा से सुरक्षित बाहर निकाल सकता है।रिश्तों के प्रति निष्ठा: दांपत्य जीवन की सबसे मजबूत और अटूट नींवकिसी भी पवित्र वैवाहिक रिश्ते की उम्र और उसकी मजबूती पूरी तरह से आपसी विश्वास, ईमानदारी और निष्ठा पर टिकी होती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि एक आदर्श पत्नी वही है जो अपने पति और अपने परिवार के प्रति पूरी तरह से समर्पित और वफादार रहे। निष्ठा और पवित्रता ही स्त्री का सबसे बड़ा आभूषण है। जिस रिश्ते में पारदर्शिता और एक-दूसरे के प्रति अटूट सम्मान होता है, उसे कोई तीसरी ताकत या बाहरी परिस्थिति कभी कमजोर नहीं कर सकती। निष्ठावान पत्नी अपने आचरण से परिवार की प्रतिष्ठा को चार चांद लगाती है और समाज में पति का सिर हमेशा ऊंचा रखती है। चाणक्य नीति कहती है कि ऐसी पत्नी पर आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता है, क्योंकि वह हर सुख-दुख में परछाई की तरह अपने साथी के साथ खड़ी रहती है।धर्म और संस्कारों का सम्मान: परिवार की मर्यादा को आगे बढ़ाने वाली नारीसंस्कार और संस्कृति किसी भी सभ्य समाज और परिवार की पहचान होते हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो स्त्री अपने घर-परिवार की सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और पारिवारिक मर्यादाओं का सम्मान करती है, वह पूरे कुल का नाम रोशन करती है। ऐसी स्त्री बड़ों का आदर करना, छोटों को स्नेह देना और हर अतिथि का सत्कार करना अपना नैतिक कर्तव्य मानती है। उसके संस्कारों का सकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों यानी बच्चों पर भी बहुत गहरा पड़ता है। माता के संस्कार ही बच्चों के भविष्य की नींव तय करते हैं, इसलिए संस्कारी पत्नी का होना घर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। वह अपने अच्छे व्यवहार से घर के हर कोने में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेम का संचार करती है, जिससे पूरा परिवार एकजुट होकर आगे बढ़ता है।परिवार को संभालने की उत्तम क्षमता: कुशल प्रबंधन और सामंजस्यघर को केवल ईंट-पत्थरों से बनी इमारत कहा जा सकता है, लेकिन उसे एक जीवंत 'घर' बनाने का कार्य एक कुशल गृहणी ही करती है। चाणक्य नीति के अनुसार, जिस स्त्री के पास घर-परिवार को बेहतरीन तरीके से संभालने और प्रबंधित करने की कला होती है, वह कभी भी घर में अशांति नहीं होने देती। परिवार के सभी सदस्यों की अलग-अलग जरूरतें, पसंद-नापसंद और भावनाओं को समझते हुए उनके बीच तालमेल बिठाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। एक गुणवान पत्नी अपने उत्तम प्रबंधन कौशल से घर के सभी कामों को इस प्रकार व्यवस्थित रखती है कि किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा न हो। वह न केवल घर की व्यवस्था संभालती है, बल्कि हर सदस्य को भावनात्मक रूप से आपस में जोड़कर रखती है, जिससे पारिवारिक एकता हमेशा बनी रहती है।धन का सही प्रबंधन: आर्थिक मोर्चे पर पति का सबसे बड़ा संबलजीवन को चलाने के लिए धन का होना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी उसका सही इस्तेमाल और प्रबंधन करना है। आचार्य चाणक्य एक महान अर्थशास्त्री भी थे, और उनका यह स्पष्ट मत था कि घर की लक्ष्मी वही स्त्री कहलाती है जो धन की बचत करना और उसका सही जगह पर उपयोग करना जानती हो। जिस पत्नी को यह भली-भांति पता होता है कि किस परिस्थिति में कितना धन खर्च करना है और कहां फिजूलखर्ची से बचना है, वह कभी भी अपने परिवार को आर्थिक संकट में नहीं फंसने देती। कठिन से कठिन आर्थिक दौर में भी ऐसी सुयोग्य महिला अपनी सूझबूझ और बचाए हुए धन के बल पर घर की नैया को पार लगा लेती है। अतः आचार्य चाणक्य के इन सात गुणों से युक्त स्त्री यदि किसी को जीवनसंगिनी के रूप में मिल जाए, तो उसका जीवन वास्तव में सफल और भाग्यशाली बन जाता है।
BRICS मेहमानों के लिए चमका चांदनी चौक! जानें तैयारियां
12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में BRICS का 18वां शिखर सम्मेलन होगा..करीब 30 सदस्य और पार्टनर देशों के नेता दिल्ली पहुंचेंगे,विदेशी प्रतिनिधि 11 सितंबर से पहले आना शुरू करेंगे.. यही वजह है कि दिल्ली के कारोबारी चाहते हैं कि बैठकों के बीच अगर मेहमानों को थोड़ा वक्त मिले...तो वो चांदनी चौक की गलियों तक जरूर आएं.
योगी सरकार की FDI नीति का असर, यूपी में ₹2,078 करोड़ का बड़ा निवेश, 1,700 से ज्यादा रोजगार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख औद्योगिक एवं विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। प्रदेश की आकर्षक एफडीआई नीति-2023 के तहत वैश्विक पैकेजिंग ...
Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी पर तुलसी पूजा से चमक सकती है आपकी किस्मत
भारतीय सनातन परंपरा और धार्मिक उत्सवों में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का एक अत्यंत विशिष्ट और आध्यात्मिक महत्व है। जिस प्रकार संपूर्ण देश में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन्माष्टमी के रूप में अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, ठीक उसी प्रकार से जगत जननी श्री राधा रानी के प्राकट्य दिवस को 'राधा अष्टमी' (Radha Ashtami) के रूप में अत्यंत पवित्रता के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण जन्माष्टमी से ठीक पंद्रह दिन पश्चात आने वाली यह तिथि राधारानी के दिव्य अवतरण का दिन है। भक्तों के लिए यह पावन पर्व केवल एक साधारण त्योहार भर नहीं है, बल्कि यह आराध्य के प्रति अपने प्रेम को सर्वस्व समर्पित करने का एक स्वर्णिम अवसर होता है। श्री राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की अह्लादिनी शक्ति और उनकी परम आत्मीय भक्त के रूप में पूजा जाता है। इस विशेष अवसर पर विधि-विधान से श्री जी की आराधना करने के साथ-साथ यदि तुलसी के पौधे की विशेष पूजा की जाए, तो जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि राधा अष्टमी के पावन पर्व पर तुलसी पूजा का क्या धार्मिक महत्व है और इसे संपन्न करने की सही विधि क्या है।वैष्णव परंपरा और पौराणिक कथाओं में तुलसी का राधा रानी और श्रीकृष्ण से गहरा संबंधवैष्णव परंपरा और सनातन ग्रंथों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि तुलसी का पौधा केवल एक साधारण वनस्पति नहीं है, बल्कि इसे साक्षात माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रिय शक्ति माना गया है। पौराणिक मान्यताओं और कथाओं के अनुसार, तुलसी जी, जिनका एक नाम 'वृंदा' भी है, वे श्री राधा रानी की परम प्रिय सखियों में से एक मानी जाती हैं। चूंकि तुलसी भगवान विष्णु यानी श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उनकी उपस्थिति के बिना भगवान को लगाया जाने वाला कोई भी भोग अधूरा माना जाता है। गर्ग संहिता में तुलसी पूजा और उसके महत्व को लेकर एक बेहद सुंदर कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है। उस पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार श्री राधा रानी की समस्त सखियों में शिरोमणि मानी जाने वाली चंद्रनना से स्वयं राधा रानी ने यह प्रश्न किया था कि भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति के लिए सबसे उत्तम और श्रेष्ठ व्रत व पूजा कौन सी है। तब चंद्रनना ने उत्तर देते हुए उन्हें बताया था कि तुलसी की सेवा करना ही श्री कृष्ण को प्रसन्न करने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।राधा रानी द्वारा किए गए तुलसी सेवन व्रत का ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भगर्ग संहिता की कथा के अनुसार, चंद्रनना के वचनों से प्रेरित होकर श्री राधा रानी ने श्रीकृष्ण की प्राप्ति और उनकी प्रसन्नता के लिए आश्विन शुक्ल पूर्णिमा से लेकर चैत्र पूर्णिमा तक 'तुलसी सेवन व्रत' का अत्यंत कठोर अनुष्ठान किया था। इस व्रत के दौरान उन्होंने हर महीने अलग-अलग प्रकार के रसों से तुलसी के पौधे को सींचा था और उनकी विधिवत सेवा की थी। उसी प्राचीन काल से यह मान्यता चली आ रही है कि जो भी भक्त राधा अष्टमी के पावन पर्व पर श्री जी की आराधना के साथ-साथ तुलसी माता की भी विशेष पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन के तमाम पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे भगवान श्रीकृष्ण की अतुल्नीय कृपा प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि जो मनुष्य अपने घर में तुलसी का पौधा लगाता है और उसकी विधिवत देखभाल करता है, उस पौधे के विस्तार के साथ-साथ उसके पूरे कुल और वंश में भी सुख-समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद बरसता है।राधा अष्टमी के दिन तुलसी पूजन करने की संपूर्ण और सही विधियदि आप भी राधा अष्टमी के इस पवित्र अवसर पर माता तुलसी और श्री राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो इसके लिए पूजन की सही विधि का ज्ञान होना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं चरण-दर-चरण तुलसी पूजन की सरल और प्रभावी विधि:राधा अष्टमी के दिन साधक को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात अपने घर के पूजा स्थल पर श्री राधा कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करके उनकी विधिवत पूजा शुरू करनी चाहिए।घर के आंगन या बालकनी में रखे तुलसी के गमले को अच्छी तरह से साफ-सुथरे तरीके से सजाएं। तुलसी के पौधे को नया लाल रंग का वस्त्र या चुनरी ओढ़ाएं, जो सुहाग और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।तुलसी के पौधे की जड़ में शुद्ध जल अर्पित करें और हाथ जोड़कर तुलसी माता के दिव्य मंत्रों का मन ही मन स्मरण व जाप करें।इस दिन श्री राधा रानी को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें और साथ ही तुलसी माता को भी सुहाग की वस्तुएं जैसे कुमकुम, सिंदूर, चूड़ियां और हल्दी अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है।राधा अष्टमी के पावन अवसर पर आप श्री राधा रानी और कान्हा को जो भी नैवेद्य या सात्विक भोग अर्पित करते हैं, उस हर एक भोग में तुलसी की पत्ती (दल) अवश्य रूप से शामिल करें। बिना तुलसी के भोग भगवान स्वीकार नहीं करते हैं।रात्रि के समय तुलसी के पौधे के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें और विधि-विधान से तुलसी जी की आरती गाएं।तुलसी पूजा के माध्यम से जीवन में सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्तिसनातन संस्कृति में तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। घर में तुलसी का हरा-भरा रहना सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है। राधा अष्टमी के इस पावन दिन पर जब भक्त श्री राधा रानी के जन्मोत्सव की खुशी में झूमते हैं और तुलसी माता की सेवा करते हैं, तो उनके जीवन के सारे दुख-दर्द स्वतः समाप्त होने लगते हैं। भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की कृपा पाने का यह सबसे अचूक उपाय माना गया है। इसलिए इस राधा अष्टमी पर विधि-विधान से व्रत रखें, श्री जी की आराधना करें और तुलसी पूजन करके अपने जीवन को धन्य बनाएं।
BJP President Nitin Nabin ने वंदे मातरम् पर Congress के रुख को भारत विरोधी बताया
(तस्वीरों के साथ)नयी दिल्ली, नौ सितंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन पर कांग्रेस की आपत्ति को उसकी ‘भारत विरोधी सोच’ करार दिया। नवीन ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों को लेकर कहा कि इसकी ‘गूंज’ उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं से आगे नहीं जाएगी। जनवरी में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यहां भाजपा मुख्यालय में अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में नवीन ने आम आदमी पार्टी (आप) पर भी हमला बोला और पंजाब में उसके शासन के दौरान ‘‘अराजकता’’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में नशे की समस्या के खिलाफ जन आंदोलन शुरू करेगी और आगामी विधानसभा चुनाव में आप सरकार के दौरान पनपे ‘‘भ्रष्टाचार’’ समेत इन मुद्दों को उठाएगी। नवीन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) के अवसर पर देशभर में शुरू होने वाले एक महीने के ‘सेवा संकल्प अभियान’ की घोषणा के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस अभियान के तहत प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर युवाओं से जुड़ाव और जनभागीदारी पर केंद्रित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस की ओर से वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताए जाने के सवाल पर भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस की इस सोच को अराजकतावादी सोच मानता हूं। मैं इसे भारत विरोधी सोच और उन लाखों शहीदों का अपमान मानता हूं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के इस ‘वीर गान’ (वंदे मातरम्) से प्रेरणा लेकर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।’’उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि विकसित भारत का संकल्प भी इस ‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ आगे बढ़ेगा।’’कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों पर निशाना साधते हुए नवीन ने गांधी पर कटाक्ष किया और पूछा कि अपनी आवाज को गूंजायमान करने का प्रयास करने वाले व्यक्ति की आवाज में कितना दम है? उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के युवा आगे बढ़ रहे हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि उनकी इस ‘गूंज’ का प्रभाव उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं से आगे जाएगा। देश के युवा और आम लोग मोदी जी के साथ हैं।’’नवीन ने आरोप लगाया कि जो लोग युवाओं की आवाज को गलत दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं, अगर उनकी आवाज में ताकत होती तो उन्होंने देश के युवाओं के लिए तब कुछ किया होता जब उन्हें अवसर मिला था। उन्होंने कहा, ‘‘उनकी ‘गूंज’ का उद्देश्य अपने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना है। हमारी ‘गूंज’ पूरी तरह देश के 140 करोड़ लोगों को एकजुट करने पर केंद्रित है।’’हाल में दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात छात्रों की मौत और बाहर से आने वाले विद्यार्थियों के रहने से जुड़ी समस्याओं के बारे में पूछे गए सवाल पर नवीन ने कहा, ‘‘मैं छात्रों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी सरकार इन समस्याओं का निश्चित रूप से समाधान करेगी।’’भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘भारत सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश के युवा, खासकर वे लोग जो शिक्षा या रोजगार के लिए अपने गृह राज्यों से बाहर आते हैं, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित माहौल मिले। हम इसे हमेशा प्राथमिकता देंगे।’’पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर नवीन ने कहा कि राज्य में व्याप्त ‘अराजकता और भ्रष्टाचार की स्थिति’ को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह तैयार है।
LinkedIn पर नौकरी नहीं, मां ढूंढ रही थी बेटे के लिए दुल्हन!
राजस्थान की एक मार्केटिंग प्रोफेशनल को लिंक्डइन पर शादी का रिश्ता मिला. अमेरिका में सेटल अपने बेटे के लिए दुल्हन तलाश रही एक महिला ने उन्हें बेहद शालीन अंदाज में मैसेज भेजा.
अवैध रूप से भारत में घुसे एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों पर बरकरार है UAPA, NIA ने साफ की स्थिति
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों से जुड़ी एक बेहद अहम और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की संप्रभुता से जुड़े एक बड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। भारत में गैरकानूनी और संदिग्ध तरीके से घुसपैठ करने वाले एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ लगाए गए सख्त आतंकवाद विरोधी कानून यानी 'UAPA' के आरोप हटाए नहीं गए हैं, बल्कि वे पूरी तरह से बरकरार हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में भले ही एनआईए ने अभी शुरुआती तौर पर अप्रवासन और विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) के तहत अपनी पहली चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी हो, लेकिन जांच एजेंसी ने यह साफ कर दिया है कि इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए आगे की जांच अभी भी जोरों पर जारी है और आने वाले दिनों में पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट के जरिए UAPA की धाराओं को और अधिक पुख्ता किया जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय घुसपैठ मामले के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और एनआईए की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ रही है।NIA ने विशेष अदालत में दाखिल की पहली चार्जशीट, 180 दिन की समयसीमा का था मामलाराष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में इन सातों विदेशी आरोपियों के खिलाफ अप्रवासन और विदेशी अधिनियम (IFA) की धाराओं 21 और 23 के तहत अपनी पहली आधिकारिक चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन सभी विदेशी नागरिकों की न्यायिक हिरासत के 180 दिन बीते 8 सितंबर को पूरे होने वाले थे। यदि कानूनी समयसीमा के भीतर एजेंसी द्वारा अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती, तो वैधानिक प्रावधानों के तहत इन आरोपियों को 'डिफॉल्ट बेल' (Default Bail) यानी स्वतः जमानत मिलने का खतरा पैदा हो जाता। चूंकि विदेशी अधिनियम के तहत इनके अवैध प्रवेश और अपराध के पुख्ता सबूत पहले ही सामने आ चुके थे, इसलिए एनआईए ने कानूनी पेचीदगियों से बचने और आरोपियों को जमानत का लाभ न मिलने देने के लिए तय समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले यह पहली चार्जशीट दाखिल करने का रणनीतिक कदम उठाया है।क्या UAPA के आरोप हटा दिए गए हैं? सरकार और एजेंसी के सूत्रों ने दूर किया भ्रमइस मामले में जब शुरुआती चार्जशीट में यूएपीए (UAPA) की धाराओं का प्रत्यक्ष जिक्र नहीं दिखा, तो मीडिया और कानूनी गलियारों में यह भ्रम फैल गया था कि शायद इन विदेशी नागरिकों पर से आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप हटा लिए गए हैं। हालांकि, इस भ्रम की स्थिति को पूरी तरह से दूर करते हुए सरकारी और एजेंसी के वरिष्ठ सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि चार्जशीट के शुरुआती दस्तावेज में UAPA की धाराएं न होने का यह कतई मतलब नहीं है कि आतंकवाद के गंभीर आरोप समाप्त हो गए हैं या इस एंगल पर जांच बंद कर दी गई है। भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली के नियमों के अनुसार, पहली चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी किसी भी मामले में आगे की विस्तृत जांच जारी रखी जा सकती है। जैसे-जैसे जांच के दौरान नए डिजिटल सबूत, विदेशी फंडिंग के ट्रेल और अन्य कड़ियां सामने आएंगी, एनआईए अदालत में पूरक (Supplementary) चार्जशीट दाखिल करके UAPA के तहत कठोर आरोप औपचारिक रूप से जोड़ देगी।म्यांमार के रास्ते भारत में हुई थी घुसपैठ, क्या ये किराए के सैनिक थेयह पूरा गंभीर मामला इसी साल 13 मार्च का है, जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वान डिक (Matthew Aaron Van Dyke) और छह यूक्रेनी नागरिकों—कामियांस्की विक्टर, हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमनोवस्की, स्टेफनकीव मारियान और गोंचारुक मैक्सिम—को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अब तक के खुलासे के अनुसार, ये सभी सातों विदेशी नागरिक म्यांमार के रास्ते बेहद गोपनीय और अवैध तरीके से भारतीय सीमा के भीतर दाखिल हुए थे। इसके बाद ये लोग देश के विभिन्न हिस्सों में यात्रा करते हुए घरेलू हवाई अड्डों पर पकड़े गए। भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को इस बात का गहरा अंदेशा है कि यह पूरा अंतरराष्ट्रीय गिरोह भारत या पड़ोसी देशों में 'किराये के सैनिकों' (Mercenaries) या गुप्त सैन्य गतिविधियों के रूप में सक्रिय हो सकता है। इसी गंभीर खतरे को भांपते हुए शुरुआत में एनआईए ने इनके खिलाफ UAPA और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।अमेरिकी राजनयिकों के हस्तक्षेप और कांसुलर एक्सेस पर एनआईए का स्पष्ट रुखइस हाई-प्रोफाइल मामले में जब एक अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी हुई, तो अमेरिका के राजनयिकों और दूतावास द्वारा इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी गई और कानूनी सहायता की मांग उठाई गई। इस कूटनीतिक हस्तक्षेप पर बात करते हुए एनआईए के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया एक सामान्य और स्थापित अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। जिस तरह दुनिया के किसी भी देश में यदि कोई भारतीय नागरिक पकड़ा जाता है, तो भारत का दूतावास वहां कांसुलर एक्सेस और कानूनी सहायता की मांग करता है, ठीक उसी तरह वियना कन्वेंशन (Vienna Convention) के नियमों के तहत विदेशी नागरिकों को भी अपने देश के राजनयिकों से मिलने का अधिकार होता है। इस कूटनीतिक औपचारिकता का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मामले की आपराधिक गंभीरता या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर किसी भी प्रकार का समझौता किया जाएगा। एनआईए इस मामले में पूरी मुस्तैदी से अपनी तफ्तीश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन विदेशी नागरिकों के भारत में घुसने के असली और खतरनाक इरादे क्या थे।
हनुमान अंश : दर्शक बोलते है-यह फिल्म देखना सार्थक रहा
हनुमान अंश The post हनुमान अंश :दर्शक बोलते है-यह फिल्म देखना सार्थक रहा appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
भारतीय सिविल सेवा (UPSC) के इतिहास में कुछ ऐसे बेबाक और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी भी दर्ज हैं, जिनकी कार्यशैली बड़े-बड़े राजनेताओं और माफियाओं के लिए मिसाल बन जाती है। ऐसे ही एक चर्चित, दबंग और ईमानदार अधिकारी हैं महाराष्ट्र कैडर के आईएएस तुकाराम मुंडे (IAS Tukaram Mundhe), जो वर्तमान में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अपने मात्र 21 साल के छोटे से प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान 25 बार तबादला झेल चुके तुकाराम मुंडे अपनी सख्त कार्यशैली और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के लिए जाने जाते हैं। महाराष्ट्र में हाल ही में उनके नेतृत्व में कई बड़े फूड आउटलेट्स और मिलावटखोरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है, जिससे यह साफ हो गया है कि वे जनता के स्वास्थ्य और अधिकारों से कोई समझौता करने वाले नहीं हैं। लेकिन इस कड़े प्रशासनिक मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जिसमें खेतों की मिट्टी की महक से लेकर यूपीएससी की कठिन परीक्षा तक का संघर्ष छिपा हुआ है। आइए विस्तार से जानते हैं कि खेतों में मजदूरी करने और साप्ताहिक बाजारों में सब्जियां बेचने वाला एक साधारण किसान का बेटा किस प्रकार देश का सबसे चर्चित आईएएस अधिकारी बना।महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं तुकाराम मुंडेआईएएस तुकाराम मुंडे का जन्म महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बीड जिले के एक बेहद गरीब और साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि परिवार का भरण-पोषण करना भी एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी। खेती-बारी की तमाम मुश्किलें, सूखा और कर्ज का भारी बोझ हमेशा उनके परिवार के सिर पर मंडराता रहता था। देश के अधिकांश ग्रामीण परिवारों की तरह उनका पूरा परिवार भी खेतों में फसलों को पानी देने के लिए पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर रहता था। स्थिति इतनी विकट थी कि तुकाराम मुंडे को अपने परिवार के साथ खेतों में जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ती थी और घर का खर्च चलाने के लिए वे साप्ताहिक बाजारों में जाकर खुद सब्जियां बेचा करते थे। वे अक्सर रात को 2 बजे ही उठ जाते थे और हाथों से खींचकर या पारंपरिक तरीकों से फसलों में पानी देते थे ताकि उनकी फसलें सूख न जाएं। उनका पूरा बचपन मिट्टी और ईंटों से बने एक कच्चे मकान में बीता, जहां सुख-सुविधाओं का नामोनिशान तक नहीं था।सिस्टम का हिस्सा नहीं, बल्कि सिस्टम को बदलने के लिए चुनी प्रशासनिक सेवातुकाराम मुंडे के मन में बचपन से ही यह सवाल उठता था कि आखिर किसानों और आम जनता को हर छोटी-छोटी बात के लिए प्रशासनिक बाधाओं और भ्रष्टाचार का सामना क्यों करना पड़ता है। उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था कि कैसे सरकारी प्रणालियों की कमियों के कारण उनके परिवार और आसपास के गरीब लोग पिसते रहते हैं। इसी पारिवारिक दर्द और सिस्टम की विसंगतियों ने उन्हें देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा यानी यूपीएससी (UPSC) की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। तुकाराम मुंडे ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात का जिक्र किया था कि वे सिस्टम का सिर्फ हिस्सा बनने के लिए इस सेवा में नहीं आए थे, बल्कि उनका मुख्य उद्देश्य इस सिस्टम को अंदर से दुरुस्त करना और बदलना था। बिना किसी बड़ी और महंगी कोचिंग अकादमी के, बिना किसी मजबूत नेटवर्क या गॉडफादर के और पूरी तरह से अपने दम पर पढ़ाई करते हुए उन्होंने वर्ष 2005 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की और ऑल इंडिया स्तर पर 20वीं रैंक (AIR 20) प्राप्त की। इस तरह उन्हें महाराष्ट्र का होम कैडर मिला और उनका आईएएस बनने का सपना सच हो गया।औरंगाबाद से की उच्च शिक्षा, पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री के बाद क्रैक किया यूपीएससीअपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा के सफर के बारे में बात करें तो तुकाराम मुंडे ने वर्ष 1996 में औरंगाबाद (जिसे अब छत्रपति संभाजीनगर के नाम से जाना जाता है) के प्रसिद्ध गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस से अपनी बैचलर डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1998 में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान (Political Science) विषय में एमए (MA) की मास्टर डिग्री हासिल की। अपनी मास्टर डिग्री की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर अपना ध्यान केंद्रित किया और दिन-रात कड़ी मेहनत करते हुए आखिरकार 2005 में सफलता का परचम लहरा दिया। सिविल सेवा में आने के बाद भी उन्होंने अपनी सीखने की भूख को कभी कम नहीं होने दिया। उन्होंने वित्तीय विश्लेषण (Financial Analysis), राजकोषीय नीति (Fiscal Policy), लीडरशिप, टैक्स एनालिसिस, रेवेन्यू फोरकास्टिंग, मैक्रोइकॉनॉमिक मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन (Disaster Management) जैसे तमाम उच्च स्तरीय और महत्वपूर्ण कोर्स भी सफलतापूर्वक पूरे किए, ताकि वे प्रशासन को और अधिक प्रभावी ढंग से चला सकें।21 साल की सेवा में 25 बार हुआ ताबड़तोड़ तबादला, फिर भी नहीं डिगा हौसलातुकाराम मुंडे की कार्यशैली का सबसे बड़ा और अनोखा पहलू यह है कि वे अपनी ईमानदारी और सख्त फैसलों के कारण हमेशा सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय रहे हैं। उनके दो दशक यानी 21 साल के लंबे प्रशासनिक करियर में अब तक कुल 25 बार ट्रांसफर (तबादला) हो चुका है। आम तौर पर देश में किसी भी आईएएस अधिकारी को एक पोस्टिंग पर कम से कम दो से तीन साल का कार्यकाल पूरा करने का मौका मिलता है, लेकिन तुकाराम मुंडे के साथ ऐसा शायद ही कभी हुआ। उन्हें लगभग हर जगह कम समय में ही हटा दिया गया और कई बार तो उन्हें बिना किसी निश्चित पोस्टिंग के भी रखा गया। इसके बावजूद उनके तेवर में कभी कोई नरमी नहीं आई। उनका स्पष्ट मानना है कि उनका हर एक काम पूरी तरह से कानूनी, नैतिक रूप से सही और केवल और केवल जनहित में होना चाहिए। वे दो टूक कहते हैं कि यदि कोई निर्णय इन मानकों पर खरा उतरता है, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट और बिना किसी दबाव के उसे लागू करते हैं, चाहे सामने कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न खड़ा हो।जल संरक्षण से लेकर म्युनिसिपल प्रशासन तक मिले कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कारअपनी बेदाग ईमानदारी और जनहितकारी कार्यों के लिए तुकाराम मुंडे को देश और राज्य स्तर पर कई बड़े सम्मानों से नवाजा जा चुका है। जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए क्रांतिकारी कार्यों के कारण उन्हें जनता और मीडिया द्वारा प्यार से 'महाराष्ट्र का वाटरमैन' भी कहा जाता है। इसके अलावा शहरी प्रशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवहन व्यवस्था में नई पहल करने के लिए उन्हें देश भर में पहचान मिली। वर्ष 2015-16 के दौरान जिला प्रशासन में हर मोर्चे पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए उन्हें महाराष्ट्र सरकार की तरफ से प्रतिष्ठित 'बेस्ट कलेक्टर अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। जब वे नवी मुंबई के म्युनिसिपल कमिश्नर के रूप में कार्यरत थे, तब उनके द्वारा ई-टॉयलेट और भूकंप-रोधी सुधार की पहलों के लिए उन्हें प्रतिष्ठित 'SKOCH ऑर्डर ऑफ मेरिट' से सम्मानित किया गया। वर्ष 2017 में उन्हें 'बेस्ट इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' के लिए भी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।नवी मुंबई कार्यकाल के दौरान फिजूलखर्ची पर लगाई रोक, शुरू की 'वॉक विद द कमिश्नर' पहलतुकाराम मुंडे जब 2016 में नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कमिश्नर बने थे, तब वहां पहले से ही कई करोड़ रुपये के ऐसे प्रोजेक्ट्स मंजूर हो चुके थे जिनकी उपयोगिता को लेकर गंभीर सवाल थे। इनमें 20 करोड़ रुपये की मार्बल की मूर्ति लगाने का प्रस्ताव और मोरबे डैम पर 163 करोड़ रुपये का सोलर प्रोजेक्ट शामिल था। मुंडे ने इन दोनों प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से अनावश्यक और जनता के पैसों की बर्बादी मानते हुए तुरंत रद्द कर दिया और उस भारी-भरकम फंड का इस्तेमाल शहर के बुनियादी ढांचे को सुधारने और दिव्यांगों के लिए शहर को अधिक सुलभ बनाने में किया। इसके अलावा जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए उनकी 'वॉक विद द कमिश्नर' (Walk with the Commissioner) पहल काफी लोकप्रिय हुई। वे हर रविवार की सुबह शहर की सड़कों पर सैर पर निकलते थे और आम नागरिकों को अपने साथ चलने के लिए आमंत्रित करते थे, ताकि लोग बिना किसी डर या औपचारिकता के सीधे अपनी समस्याएं और सुझाव उन तक पहुंचा सकें। हालांकि, इस पारदर्शी और जनता-मुखी कार्यशैली के कारण कई बार स्थानीय राजनेताओं और पार्षदों के साथ उनका तीखा टकराव भी हुआ, लेकिन एक जननायक के रूप में जनता हमेशा उनके समर्थन में चट्टान की तरह खड़ी नजर आई।
संघ के वैश्विक उभार से घबराए वामपंथी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति- निर्माण को राष्ट्र- निर्माण की आधारशिला मानते हुए बृहद स्तर पर कार्यरत स्वयंसेवक संगठन है। इसके कार्यों में सेवा, संवेदना ,दया ,करुणा ,ममता, त्याग ,अर्पण एवं समर्पण जैसे माननीय मूल्यों की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। The post संघ के वैश्विक उभार से घबराए वामपंथी appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस ने बुधवार को नागपुर में मनुस्मृति के विरोध में 'संविधान सम्मान यात्रा' आयोजित की, जिसमें युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने RSS स्मृति मंदिर के बाहर प्रदर्शन किया। यह विरोध तब हुआ जब हल्द्वानी सिटी कोतवाली पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की। यह FIR उस जगह पर किए गए शुद्धिकरण यज्ञ के बारे में उनकी टिप्पणी पर मिली शिकायत के बाद दर्ज की गई, जहां 8 अगस्त को खड़गे ने कांग्रेस की एक रैली को संबोधित किया था। FIR 30 अगस्त को हल्द्वानी की जवाहर नगर कॉलोनी के रहने वाले और वाल्मीकि समुदाय के सदस्य, 26 वर्षीय अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई थी। कुमार 'श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास' संगठन के पदाधिकारी भी हैं। इसे भी पढ़ें: Nagpur Consumer Commission का आदेश, Edelweiss Tokio महिला को दे 50 लाख रुपये का Insurance Claim इस विरोध प्रदर्शन का मकसद मनुस्मृति से जुड़े विचारों और सिद्धांतों के प्रति यूथ कांग्रेस के विरोध को ज़ाहिर करना था। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने संविधान के समर्थन में नारे लगाए और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित करने की कोशिश की। स्मृति मंदिर के बाहर हुए इस विरोध प्रदर्शन के कारण पुलिस ने यूथ कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी ले लिया। जब प्रदर्शनकारी मार्च के हिस्से के तौर पर RSS परिसर के बाहर इकट्ठा हुए, तो उन्हें रोक दिया गया। महाराष्ट्र प्रदेश यूथ कांग्रेस ने कहा कि 'संविधान सम्मान यात्रा' का आयोजन खास तौर पर मनुस्मृति के खिलाफ और हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद के सिलसिले में पार्टी नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR के विरोध में किया गया था। इसे भी पढ़ें: Nagpur में WCL खदान से विस्फोटक और फोन चुराने वाला कर्मी गिरफ्तार इससे पहले, 2 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता उदित राज को हिरासत में ले लिया था। वे पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर केशव कुंज RSS हेडक्वार्टर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। यह विरोध प्रदर्शन हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद के सिलसिले में पार्टी नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर किया जा रहा था। हिरासत में लिए जाने के बाद उदित राज ने कहा कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान मनुस्मृति जलाई थी और आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान किया गया। उदित राज ने कहा, मुझे हिरासत में ले लिया गया है। मैं केशव कुंज RSS हेडक्वार्टर आया था... मैंने मनुस्मृति जलाई। हमारे नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान किया गया और राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
'पाकिस्तान में भी है भगवान जगन्नाथ की जमीन', मंत्री के दावे से लोग हैरान
ओडिशा सरकार भगवान जगन्नाथ मंदिर की जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू कर रही है. अब तक करीब 36 हजार एकड़ जमीन की पहचान हुई है, जिसमें 25 से 26 फीसदी पर कब्जा है. कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि जगन्नाथ मंदिर की कुछ जमीन पाकिस्तान के सिंध इलाके में भी है, जिसकी पहचान धीरे-धीरे की जाएगी.
भारतीय न्यायिक व्यवस्था और सामाजिक ढांचे के सबसे संवेदनशील विषयों में से एक माने जाने वाले 'मैरिटल रेप' (Marital Rape) यानी वैवाहिक बलात्कार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत में इस गंभीर और संवेदनशील मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना पक्ष बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों में रखा है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को दो टूक बताया कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध के दायरे में लाना या इससे जुड़े कानूनों में बदलाव करना पूरी तरह से देश की विधायिका (संसद) और कार्यपालिका का डोमेन है, न कि सर्वोच्च न्यायालय का। इस कानूनी और सामाजिक बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शादी के पवित्र रिश्ते के भीतर भी सहमति के अभाव को अपराध माना जाना चाहिए या फिर इसके लिए मौजूदा आपराधिक कानूनों के दायरे में ही समाधान तलाशा जाना चाहिए। देश भर की निगाहें इस समय सुप्रीम कोर्ट में चल रही इन महत्वपूर्ण और दूरगामी परिणामों वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच तीन हफ्ते बाद करेगी मैरिटल रेप मामलों पर अंतिम सुनवाईभारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की एक महत्वपूर्ण तीन-सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया है कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की मांग करने वाली तमाम याचिकाओं पर अब से ठीक तीन हफ्ते बाद बुधवार और गुरुवार को नियमित रूप से अंतिम सुनवाई शुरू की जाएगी। कोर्ट के समक्ष यह मुख्य कानूनी चुनौती भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 के अपवाद 2 की वैधता को लेकर है, जो कि पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 में दिए गए मैरिटल रेप के अपवाद का ही संशोधित रूप है। मौजूदा कानूनी प्रावधान के अनुसार, यदि कोई वयस्क पुरुष अपनी बालिग पत्नी (यानी ऐसी पत्नी जिसकी आयु 18 वर्ष से कम न हो) के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध भी शारीरिक संबंध बनाता है, तो उसे कानूनी रूप से बलात्कार (Rape) की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। इस कानूनी अपवाद को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं पिछले लंबे समय से अदालत में लंबित चली आ रही हैं, जिन पर अब अदालत ने ग्रीष्मकालीन या आगामी कार्यदिवसों में ठोस बहस का मन बनाया है।'शादी का मतलब महिला की आजादी का खात्मा नहीं': जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अहम टिप्पणीमामले की सुनवाई के दौरान पीठ के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बेहद तार्किक और मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि शादी के रिश्ते के भीतर किसी महिला को उसकी बिना मर्जी और सहमति के जबरन यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता है, तो क्या वह महिला एक पीड़ित (Victim) नहीं है? जस्टिस बागची ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतें हमेशा पीड़ितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, और मुख्य सवाल यह है कि क्या राज्य सरकारें या देश का कानून इस तरह के कृत्य को बलात्कार की परिभाषा में शामिल करता है या नहीं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट टिप्पणी की कि विवाह संस्था का यह कतई अर्थ नहीं है कि किसी महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, उसकी गरिमा और उसकी शारीरिक स्वायत्तता का अधिकार हमेशा के लिए समाप्त हो गया हो। अदालत ने कहा कि वह इस बात की गहराई से समीक्षा करेगी कि क्या मैरिटल रेप से जुड़ी वर्तमान कानूनी छूट के बावजूद किसी पीड़ित पत्नी द्वारा पति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है या नहीं, और क्या यह छूट भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त समानता और स्वतंत्रता के अधिकारों के बिल्कुल अनुकूल है या नहीं।याचिकाकर्ताओं की दलील: वैवाहिक बंधन किसी को भी शारीरिक हिंसा या अनाधिकार की छूट नहीं देतायाचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में पक्ष रख रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी (Karuna Nandi) ने अपनी जोरदार दलीलें पेश करते हुए कहा कि यदि कोई पति अपनी ही पत्नी के साथ क्रूरता करता है या उसे गंभीर शारीरिक चोटें पहुंचाता है, तो वह केवल 'पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते' की आड़ में किसी भी प्रकार की कानूनी छूट का दावा नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि शादी का रिश्ता किसी भी व्यक्ति को इस बात का लाइसेंस नहीं देता है कि वह अपनी पत्नी की इच्छा या सहमति के बिना उसके साथ संबंध बनाए या उसे गंभीर शारीरिक व मानसिक नुकसान पहुंचाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कानून की नजर में हर नागरिक की देह की पवित्रता और उसका आत्म-सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए, चाहे वह व्यक्ति किसी भी सामाजिक रिश्ते में क्यों न बंधा हुआ हो।केंद्र सरकार का पुराना और अडिग रुख: मैरिटल रेप को अलग अपराध बनाने के पक्ष में नहीं है सरकारकेंद्र सरकार ने इस पूरे मामले में अपने पहले के रुख को दोहराते हुए कहा है कि वह मैरिटल रेप को एक अलग और नया आपराधिक अपराध बनाने के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं है। सरकार का यह मानना है कि यदि वैवाहिक बलात्कार को कानूनन अपराध घोषित कर दिया जाता है, तो इससे भारतीय समाज में परिवार की संस्था और शादी के रिश्तों की स्थिरता बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। सरकार के हलफनामे में यह भी कहा गया है कि वैवाहिक जीवन के भीतर यौन संबंधों से जुड़ी शिकायतों या विवादों को आम स्ट्रीट-क्राइम या सामान्य बलात्कार के अपराध के बराबर तौलने के बजाय, घरेलू हिंसा अधिनियम या अन्य मौजूदा वैधानिक प्रावधानों के दायरे में ही सुलझाया जाना चाहिए। याद रहे कि वर्ष 2022 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर एक खंडित (बंटा हुआ) फैसला सुनाया था, जिसके बाद यह जटिल कानूनी विवाद अपील के रूप में सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंचा था, और अब देश की सर्वोच्च अदालत इस पर अंतिम फैसला सुनाने की ओर अग्रसर है।
अब WhatsApp से भरें बिजली, पानी और गैस का बिल, ऐसे काम करेगा नया Bill Payment फीचर
WhatsApp ने भारत में Bill Payments फीचर की शुरुआत की है, जिससे यूजर्स मैसेजिंग ऐप के अंदर ही बिजली, पानी और गैस समेत कई तरह के बिलों का भुगतान कर सकेंगे। यह सुविधा Bharat Connect (BBPS) से जुड़ी है और कंपनी के अनुसार इसमें 30 कैटेगरी के 22,722 ...
Maharashtra सरकार मनोज जरांगे से मिलने से डर रही: Vijay Wadettiwar
नागपुर, नौ सितंबर कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने बुधवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे से मिलने के लिए प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजना चाहती क्योंकि उसे अपनी और किरकिरी होने का डर है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के प्रमुख नेता वडेट्टीवार ने यह भी कहा कि मराठा समुदाय की शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण की मांग को संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए। मराठा समुदाय को आरक्षण देने समेत अन्य मांगों को लेकर जरांगे पिछले 11 दिनों से अनशन पर हैं। वडेट्टीवार ने दावा किया, ‘‘सरकार पहले कई बार जरांगे के सामने झुक चुकी है और अब वह उनसे मिलने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने से बच रही है क्योंकि उसे आगे और अधिक किरकिरी होने का डर है।’’यह पूछे जाने पर कि क्या मराठा समुदाय को आरक्षण मिलना चाहिए, कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘हमारे देश का संविधान सर्वोच्च है। अगर कोई ऐसी मांग कर रहा है जो संविधान की सीमा से बाहर है, तो सरकार को यह तय करना है कि वह उसे मंजूर करे या संवैधानिक सीमाओं को पार करे।’’गौरतलब है कि राज्य के ओबीसी नेता मराठा समुदाय को कुनबी जाति प्रमाणपत्र देने का विरोध कर रहे हैं। कुनबी प्रमाणपत्र मिलने से मराठा समुदाय के लोगों को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ मिल सकता है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के इस बयान पर कि त्योहार सभी को जोड़ने वाले होते हैं और किसी मुस्लिम व्यक्ति के उनके समारोहों में शामिल होने में कोई गलत बात नहीं है, वडेट्टीवार ने कहा कि उनका रुख स्वागत योग्य है। कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘लेकिन उनके बयान का महत्व तब बढ़ेगा जब वह देवेंद्र फडणवीस को नितेश राणे को मंत्रिमंडल से बाहर रखने के लिए मना लेंगी।’’राज्य सरकार में मंत्री नितेश राणे ने सोमवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का समर्थन करते हुए आरोप लगाया था कि ऐसे त्योहारों के दौरान ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ जाते हैं। राणे ने यह भी कहा था कि मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखने वालों को हिंदू धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं होना चाहिए। महाराष्ट्र में बारिश की स्थिति पर वडेट्टीवार ने कहा कि राज्य के 19 जिलों में सूखे जैसी स्थिति है। कई तालुकों में पिछले 35 से 40 दिनों से बारिश नहीं हुई है और फसलें खतरे में हैं। उन्होंने कहा कि परभणी जिले में 44 दिनों से बारिश नहीं हुई है। कांग्रेस नेता ने इस बात की आशंका जताई कि अगले दो से तीन महीनों में राज्य के आधे बांध सूख सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वडेट्टीवार ने बताया कि कांग्रेस नेता सूखे की स्थिति के साथ-साथ आदिवासियों और ओबीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे।
बच्चे को देख पसीज गया बदमाशों का दिल! वापस किए लूटे हुए पैसे
Aligarh News: अलीगढ़ में बीमार बच्चे को दवा दिलाने जा रहे दंपती से बदमाशों ने तमंचे के बल पर जेवर और 4 हजार रुपये लूट लिए. मासूम की गंभीर हालत और गुहार लगाने पर लुटेरों का दिल पसीज गया, और वे जाते-जाते मोबाइल, बाइक की चाबी और 200 रुपये रास्ते में फेंक गए। पुलिस जांच जारी है.
Fauda Season 5: बेटे की मौत, बाप का बदला... इस बार जंग पर्सनल
Fauda Season 5 सिर्फ गोली और धमाके दिखाने वाली सीरीज नहीं है. इसके पीछे 7 अक्टूबर का दर्द लगातार मौजूद है. हमास के हमले में मारे गए आम लोगों की याद किरदारों के गुस्से और दुख को समझने में मदद करती है.उनके लिए यह मिशन सिर्फ एक और आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन नहीं. इस बार मामला निजी है.
17 सितंबर से बनेगा बुधादित्य योग, 4 राशियों की चमकेगी किस्मत
Budhaditya Yog: 17 सितंबर 2026 से सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा. जानें किन 4 राशियों को करियर, कारोबार और धन के मामले में शुभ परिणाम मिल सकते हैं.
YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के आधिकारिक प्रवक्ता कोंडा राजीव ने बुधवार को कहा कि पार्टी अध्यक्ष YS जगन मोहन रेड्डी 2027 में - ज़्यादातर संभावना है कि सितंबर या अक्टूबर में - पूरे राज्य में पदयात्रा करने की योजना बना रहे हैं। इसका मकसद गठबंधन सरकार की उन नाकामियों को उजागर करना है जिनका पार्टी आरोप लगाती रही है। कोंडा राजीव ने कहा, YS जगन मोहन रेड्डी ने साफ़ कर दिया है कि वह 2027 में पदयात्रा करने की योजना बना रहे हैं, जो ज़्यादातर सितंबर या अक्टूबर में हो सकती है। इस पदयात्रा का मुख्य मकसद गठबंधन सरकार की नाकामियों - जैसे प्रशासनिक विफलताएं, पूरे न किए गए वादे और भ्रष्टाचार - को उजागर करना होगा। उन्होंने कहा, मौजूदा गठबंधन सरकार के तहत पूरे आंध्र प्रदेश में लोग कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इस पदयात्रा के ज़रिए जगन मोहन रेड्डी सीधे लोगों से मिलेंगे, पूरे राज्य का दौरा करेंगे, ज़मीनी हकीकत को समझेंगे और उन मुद्दों को जनता और वोटरों के सामने लाएंगे। इसे भी पढ़ें: Andhra Pradesh में Mega DSC शिक्षक भर्ती के खेल कोटे में धांधली के आरोप खारिज YSRCP के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि 2024 के चुनावों के दौरान गठबंधन वाली पार्टियों ने कई वादे किए थे, जिनमें 'सुपर सिक्स' योजनाओं को लागू करना, युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर, महिलाओं के कल्याण के उपाय और किसानों को मदद देना शामिल था। राजीव ने कहा कि गठबंधन वाली पार्टियों ने 2024 के चुनावों के दौरान कई वादे किए थे, जिनमें सुपर सिक्स योजनाएं, युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर, महिलाओं के कल्याण के उपाय और किसानों को मदद देना शामिल था। इसे भी पढ़ें: उधर विपक्ष बेकार के मुद्दों पर राजनीति करता रहा, इधर Modi Cabinet ने कई बड़े फैसले लेकर सबको चौंका दिया इनमें से कई वादे ज़मीनी स्तर पर लागू नहीं किए गए हैं और लोगों को बढ़ती मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जगन मोहन रेड्डी ने पहले भी पदयात्रा की थी और प्रस्तावित यात्रा का मकसद सिर्फ़ राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि सीधे लोगों की चिंताओं को सुनना होगा। राजीव ने कहा, यह पदयात्रा सिर्फ़ एक राजनीतिक गतिविधि नहीं होगी। यह लोगों की आवाज़ सुनने, उनकी समस्याओं को समझने और गठबंधन सरकार द्वारा नज़रअंदाज़ किए गए मुद्दों को उजागर करने की यात्रा होगी। इसे भी पढ़ें: YSRCP Chief Jagan Mohan Reddy ने भरी हुंकार, स्थानीय निकाय चुनावों में 'Welfare vs Failure' की होगी जोरदार जंग उन्होंने आगे कहा कि प्रस्तावित पदयात्रा से जगन मोहन रेड्डी को सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाने और पूरे आंध्र प्रदेश के लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि जगन मोहन रेड्डी पूरे राज्य का दौरा करेंगे, लोगों से मिलेंगे और उनकी समस्याओं को समझेंगे। लोगों की समस्याओं को जनता और वोटरों के सामने लाया जाएगा और सरकार से उसकी जवाबदेही पर सवाल पूछे जाएंगे।
भारतीय सिनेमा की पहुंच आज वैश्विक मंचों पर लगातार मजबूत होती जा रही है, और देश की अनकही व संवेदनशील वास्तविक कहानियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी प्रशंसा बटोर रही हैं। इसी गौरवशाली कड़ी में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार और अभिनेता अनंत महादेवन (Ananth Mahadevan) की नई और बहुचर्चित निर्देशित फिल्म 'द कंफेशन ऑफ मेरी' (The Confession of Mary) का टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में आधिकारिक तौर पर प्रीमियर संपन्न हुआ है। केरल के साल 1966 के एक चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले खौफनाक हत्याकांड पर आधारित इस फिल्म में दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) ने एक पादरी की बेहद जटिल और अनूठी भूमिका निभाई है। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिल्म को मिले शानदार रिस्पॉन्स और भारतीय सिनेमा के सौ साल से अधिक के गौरवशाली इतिहास को लेकर फिल्म जगत में उत्साह का माहौल है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के पीछे की अनसुनी दास्तान और इसके निर्माण से जुड़ी खास बातें क्या हैं।टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में गूंजा 'द कंफेशन ऑफ मेरी' का डंकाभारतीय कला और सिनेमा के लिए यह बेहद गर्व का क्षण है कि अनंत महादेवन के निर्देशन में बनी फिल्म 'द कंफेशन ऑफ मेरी' का प्रीमियर प्रतिष्ठित टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के वैश्विक मंच पर किया गया। हिंदी सिनेमा के विशालकाय इतिहास और इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच पर बात करते हुए निर्देशक अनंत महादेवन ने हाल ही में अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि हिंदी भाषा हमारे देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली और लोकप्रिय भाषा है, जिसका सौ वर्षों से भी अधिक पुराना और समृद्ध इतिहास रहा है। देश-विदेश के कई जाने-माने कलाकार अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले अपने उच्चारण और भाषा को पूरी तरह साफ करने के लिए हिंदी फिल्मों को देखते हैं। महादेवन ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वह खुद भी अपनी फिल्मों की कहानियां और स्क्रिप्ट हमेशा हिंदी में ही लिखना पसंद करते हैं, क्योंकि जिस भाषा में आप कला का सृजन करते हैं, उस पर आपकी वैचारिक और भाषाई पकड़ मजबूत होनी बेहद जरूरी है।सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्मों का निर्माण और 1966 के केरल हत्याकांड की रोंगटे खड़े करने वाली पृष्ठभूमिकाल्पनिक कहानियों के मुकाबले वास्तविक जीवन की घटनाओं और सच्ची आपराधिक वारदातों पर फिल्म बनाना कितना चुनौतीपूर्ण होता है, इस पर प्रकाश डालते हुए अनंत महादेवन ने बताया कि फिक्शन यानी काल्पनिकता को पर्दे पर उतारना अधिक कठिन होता है, क्योंकि उसके लिए हर एक तर्क और कहानी को गढ़ना पड़ता है। इसके विपरीत, इतिहास के पन्नों में दर्ज 'सच' हमेशा काल्पनिक चीजों से कहीं अधिक अनोखा और प्रभावशाली होता है। सच को दर्शाते वक्त निर्देशक को अपने मन से कुछ नया गढ़ने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि जो घटित हुआ है उसे प्रामाणिकता के साथ पर्दे पर उतारना होता है। यह फिल्म केरल में साल 1966 में घटी एक दिल दहला देने वाली वास्तविक घटना पर आधारित है, जिसमें एक चर्च के पादरी को अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस बेहद संवेदनशील और जटिल विषय पर फिल्म बनाते वक्त निर्देशक के सामने उस दौर के माहौल और वास्तुकला को जीवंत करना सबसे बड़ी चुनौती थी।शूटिंग के दौरान 1960 के दशक के माहौल को जीवंत करने के लिए गोवा में हुई फिल्म की शूटिंगसाल 1966 के उस पुराने दौर को आज के आधुनिक समय में पर्दे पर हूबहू उतारना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं था। निर्देशक ने बताया कि जब उन्होंने केरल में शूटिंग करने की सोची, तो आधुनिक विकास और वर्तमान दौर की चीजें फ्रेम में आ रही थीं जिन्हें विजुअल इफेक्ट्स (VFX) की मदद से हटाना असंभव सा प्रतीत हो रहा था। उस कालखंड के पारंपरिक घर, प्राचीन फर्नीचर और ऐतिहासिक चर्चों की सही वास्तुकला को ढूंढने के लिए आखिरकार टीम ने केरल के बजाय पुराने गोवा (Old Goa) में फिल्म की शूटिंग करने का निर्णय लिया। गोवा की प्राचीन और पारंपरिक वास्तुकला ने उस दौर के माहौल को पर्दे पर बहुत ही प्रामाणिक ढंग से जीवंत कर दिया। निर्देशक का मानना है कि इस फिल्म में केरल से जुड़ी ऐसी कई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परतें छिपी हैं, जो सिनेमाघरों में आने वाले हर वर्ग के दर्शकों को गहराई से अपनी ओर आकर्षित करेंगी और अंत तक सीट से बांधे रखेंगी।फेस्टिवल फिल्मों की धारणा को तोड़ने का प्रयास और मनोरंजन की एक नई और परिपक्व परिभाषाअक्सर यह माना जाता है कि अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स के लिए बनाई जाने वाली फिल्में कमर्शियल बॉक्स ऑफिस के फॉर्मूले से कोसों दूर होती हैं और आम दर्शकों को रास नहीं आती हैं। इस प्रचलित मिथक और धारणा को सिरे से खारिज करते हुए अनंत महादेवन ने कहा कि यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि फेस्टिवल की फिल्म आम जनता के बीच नहीं चल सकती। यदि फेस्टिवल से इतनी ही असुविधा होती, तो दुनिया भर के बड़े-बड़े निर्माता अपनी कमर्शियल फिल्मों को भी अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाने के लिए क्यों दौड़ते? अपनी फिल्मों में सामाजिक संदेश और मनोरंजन का सटीक संतुलन बिठाने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश में 'मनोरंजन' शब्द की परिभाषा को बहुत गलत तरीके से समझ लिया गया है। मनोरंजन का मतलब केवल अकारण कॉमेडी करना या स्क्रीन पर धड़ल्ले से मारधाड़ दिखाना नहीं होता है। सच्चा मनोरंजन वह है जो दर्शक को सिनेमा हॉल की कुर्सी पर इस कदर बांधे रखे कि वह ढाई घंटे तक पलकें तक न झपका सके।नाना पाटेकर को दिया गया बिल्कुल विपरीत और शांत किरदार, ऋषिकेश मुखर्जी से मिली सही कास्टिंग की सीखइस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसके मुख्य कलाकार नाना पाटेकर (Nana Patekar) हैं, जिन्हें दर्शक हमेशा से उनके आक्रामक, ऊर्जावान और तेज-तर्रार अभिनय के लिए जानते आए हैं। लेकिन इस फिल्म में अनंत महादेवन ने उनके साथ एक बड़ा प्रयोग करते हुए उन्हें एक बिल्कुल विपरीत और शांत स्वभाव के पादरी की भूमिका सौंपी है। जब नाना पाटेकर को यह शांत किरदार ऑफर किया गया, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए तुरंत इसके लिए हामी भर दी, क्योंकि हर मंझा हुआ कलाकार लीक से हटकर कुछ नया करने की भूख रखता है। फिल्म का रफ कट देखने के बाद खुद नाना पाटेकर ने भी स्वीकार किया कि इस तरह के रोल ने उनके भीतर छिपे एक अलग ही अभिनेता को बाहर निकाला है। अपनी फिल्मों के लिए हमेशा सटीक और परफेक्ट कास्टिंग करने के महत्व पर बात करते हुए निर्देशक ने बताया कि उन्हें यह अमूल्य सीख भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकार ऋषिकेश मुखर्जी से मिली थी। ऋषिकेश दा ने उन्हें हमेशा यही सिखाया था कि फिल्मों में स्टारडम के पीछे भागने के बजाय हमेशा कहानी की मांग के अनुसार सही और प्रामाणिक अभिनेताओं से ही काम करवाना चाहिए। अगर आप सिर्फ किसी बड़े स्टार को फिल्म में फिट करने के लिए समझौता करते हैं, तो यह सीधे तौर पर कला और कथा के साथ एक बड़ी बेइमानी होगी।
1976 में आई ‘नागिन’ एक फ्रांसीसी उपन्यास से प्रेरित थी.फिल्म में 6 गाने थे और रीना रॉय ने नागिन बनकर पांच लोगों से बदला लिया था. इस फिल्म ने फिल्म इंडस्ट्री में और टीवी पर नाग-नागिन की कहानियों को एक नया मोड़ दिया था.
पानी से भरी बाल्टी में मुंह के बल गिरा मासूम, दम घुटने से मौत
फरीदाबाद के जीवन नगर में एक दर्दनाक हादसे में 1 साल के बच्चे आर्यन की मौत हो गई. मासूम खेलते हुए बाथरूम के पास रखी पानी से भरी बाल्टी में मुंह के बल गिर गया. काफी देर तक कोई आवाज नहीं आने पर दादी ने बाहर आकर देखा. आनन-फानन में परिजन उसे अस्पताल ले गए, मगर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
अफ्रीकी बल्लेबाज ने 150 रन ठोककर रचा इतिहास, वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी!
अपने पहले ही वनडे मैच में जॉर्डन हरमन के वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है. नामीबिया के खिलाफ हरमन ने ताबड़तोड़ अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 150 रन जड़ दिए और इसके साथ ही एक बड़ी उपलब्धि भी अपने नाम कर ली.
इंडस्ट्री ने इस फिल्म को रिलीज से पहले ही फ्लॉप मान लिया था, लेकिन एक महिला ने अपनी पूरी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी. फिर ऐसा क्या हुआ कि महज 33 दिनों में फिल्म ने 132 करोड़ रुपये कमा डाले और बॉक्स ऑफिस पर बड़ा उलटफेर कर दिया?
राष्ट्र की आत्मा से छल है विदेशी भाषा का प्रभुत्व
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BRICS Summit 2026:
Kolkata में बड़ी कार्रवाई: Fire Safety की अनदेखी पर 919 होटल-गेस्ट हाउस सील
कोलकाता में 919 होटलों और गेस्ट हाउसों को आग से सुरक्षा के ज़रूरी नियमों का पालन न करने के कारण अस्थायी रूप से बंद करने का नोटिस दिया गया है। यह कार्रवाई शहर में एक गेस्ट हाउस में लगी जानलेवा आग के बाद सुरक्षा से जुड़ी गंभीर कमियों के सामने आने पर शुरू किए गए बड़े पैमाने पर निरीक्षण अभियान के तहत की गई है। पश्चिम बंगाल फायर सर्विस, कोलकाता नगर निगम और कोलकाता पुलिस के अधिकारियों की संयुक्त निरीक्षण टीमों ने अब तक कोलकाता में लगभग 960 होटलों और गेस्ट हाउसों की जांच की है। इसे भी पढ़ें: Andaman and Nicobar: LG Dinesh Sharma का संकल्प, Modi-Shah के मार्गदर्शन में नए रोडमैप पर होगा काम अधिकारियों ने बताया कि इनमें से केवल 41 जगहों पर ही आग से सुरक्षा के ज़रूरी उपायों का पालन होता पाया गया, जबकि बाकी 919 जगहों को नोटिस जारी कर निर्देश दिया गया कि वे तब तक अपना कामकाज अस्थायी रूप से बंद रखें जब तक कि वे तय सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर लेते। इन निरीक्षणों में शहर में अभी चल रहे लगभग 3,700 होटलों और गेस्ट हाउसों में से लगभग एक-चौथाई को शामिल किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि जिन जगहों की अभी जांच होनी बाकी है, वहां यह प्रक्रिया जारी रहेगी। 19 अगस्त को मध्य कोलकाता की मिर्ज़ा ग़ालिब स्ट्रीट पर स्थित गेस्ट हाउस 'शिखा इन' में लगी जानलेवा आग के बाद जांच अभियान तेज़ कर दिया गया। इस आग में सात बांग्लादेशी नागरिकों समेत नौ लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद अधिकारियों ने होटलों और गेस्ट हाउसों की जांच-पड़ताल तेज़ कर दी और यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या वे आग से सुरक्षा और जीवन-सुरक्षा से जुड़े ज़रूरी नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। इसे भी पढ़ें: दिल्ली की मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम शामिल, AAP ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल अधिकारियों ने कहा कि जिन जगहों को बंद करने का नोटिस मिला है, वे इंस्पेक्शन के दौरान पाई गई सुरक्षा कमियों को ठीक किए बिना अपना कामकाज फिर से शुरू नहीं कर सकतीं। उन्हें अपने फायर सेफ्टी इंतज़ामों को तय नियमों के मुताबिक करना होगा और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (RFSC) का रिन्यूअल लेना होगा। अधिकारियों ने बताया कि इन ज़रूरतों को पूरा करने के बाद ही वे कामकाज फिर से शुरू करने के लिए जरूरी लाइसेंस के वास्ते नए सिरे से अप्लाई कर सकती हैं। चल रहे इंस्पेक्शन अभियान का मकसद कोलकाता के बाकी होटलों और गेस्ट हाउसों की जांच करना है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे ज़रूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं या नहीं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
यह अंतर इसलिए भी खास है क्योंकि भाजपा की ₹1,473 करोड़ की यह रकम सिर्फ उसके केंद्रीय मुख्यालय की है, जबकि पश्चिम बंगाल और केरल में उसके खर्च का ब्यौरा अभी सार्वजनिक होना बाकी है।
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से देश भर में आसानी से उपलब्ध, लोगों पर केंद्रित और अच्छी क्वालिटी वाली आयुष सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कल हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में नीति आयोग द्वारा आयोजित 'राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयुष इकोसिस्टम को मजबूत करने' पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला में यह बात कही। इस कार्यशाला में केंद्र सरकार, 30 से ज़्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञ शामिल हुए। उन्होंने साझा अनुभवों, बेहतरीन तौर-तरीकों और मिलकर काम करने के ज़रिए आयुष इकोसिस्टम को मजबूत करने पर चर्चा की। इसे भी पढ़ें: भारत-UAE की 100 बिलियन डॉलर की यारी, सकपकाया चीन उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रतापराव जाधव शामिल हुए। उनके साथ नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. एम. श्रीनिवास और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा भी मौजूद थे। अपने मुख्य भाषण में, जाधव ने आयुष सिस्टम की पहुंच और असर को बढ़ाने के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच मिलकर काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने लोगों की बदलती स्वास्थ्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिए आयुष हेल्थकेयर सेवाओं की क्वालिटी, पहुंच और लोगों पर केंद्रित डिलीवरी पर ज़्यादा ध्यान देने की बात कही। इसे भी पढ़ें: नासिक का उदमल बनेगा महाराष्ट्र का पहला डार्क स्काई गांव, प्रशासन ने 42.14 लाख रुपये मंजूर किए एम. श्रीनिवास ने इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर के लिए टेक्नोलॉजी और सबूतों पर आधारित तरीकों के महत्व पर प्रकाश डाला, जिनमें भारत और उसके बाहर स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने की क्षमता है। वैद्य राजेश कोटेचा ने आयुष इकोसिस्टम को मज़बूत करने और ज़मीनी स्तर पर आयुष सेवाओं के असरदार तरीके से लागू करने और पहुंचाने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया।
ओडिशा के 3 जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट, UP-बिहार समेत 7 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट, IMD का अपडेट
IMD ने ओडिशा के कटक, खुर्दा और संबलपुर जिलों में अत्यधिक भारी बारिश, बिजली और 60 किमी प्रति घंटे तक की तेज हवाओं के लिए रेड अलर्ट जारी किया है.
Medipalli Crime: लोन ऐप एजेंटों ने नाबालिग की Morphed Photos से महिला को धमकाया, FIR दर्ज
मेडीपल्ली पुलिस ने 'वर्धन' नाम के लोन ऐप के अज्ञात रिकवरी एजेंटों के खिलाफ़ मामला दर्ज किया है। एक 42 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया है कि उसे बुरी तरह परेशान किया गया, जबरन वसूली की कोशिश की गई और उसकी नाबालिग बेटी की मॉर्फ्ड न्यूड तस्वीरों का इस्तेमाल करके धमकी दी गई। बोडुप्पल की रहने वाली 42 वर्षीय मजदूर पसुला कविता, एक लोन ऐप के कथित रिकवरी एजेंटों द्वारा बुरी तरह परेशान किए जाने का शिकार बनीं। उनकी शिकायत के अनुसार, यह उत्पीड़न 30 और 31 अगस्त को शुरू हुआ, जब उन्हें लोन चुकाने की मांग करने वाले कॉल आने लगे। कॉल करने वालों का दावा था कि यह लोन उनके रिश्तेदार पसुला भानु प्रकाश ने वर्धन लोन ऐप के ज़रिए लिया था। इसे भी पढ़ें: Bhadohi Court के आदेश पर जाली हलफनामा दाखिल करने वाले 31 आरोपियों पर FIR दर्ज कविता ने उन्हें बताया कि उनका उस लोन से कोई लेना-देना नहीं है। जब उन्होंने कॉल काटना शुरू किया, तो कॉल करने वालों ने कथित तौर पर उनके साथ बदसलूकी की और गालियां दीं। इसके बाद उन्हें और ज़्यादा परेशान किया जाने लगा। आरोप है कि कॉल करने वालों ने कविता की बेटी (जो 10वीं क्लास की छात्रा है) की मॉर्फ्ड और एडिट की हुई तस्वीरें कविता के WhatsApp पर भेजीं और धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो वे इन तस्वीरों को सार्वजनिक कर देंगे। और ज़्यादा परेशानी के डर से, कविता ने 4 सितंबर को उन्हीं नंबरों से आई कॉल का जवाब नहीं दिया। 7 सितंबर को कविता की शिकायत के बाद, मेडिपल्ली पुलिस ने अज्ञात कॉल करने वालों के खिलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट की धारा 66E के तहत मामला दर्ज किया।
हम भारत के खिलाफ चीन को... इस पड़ोसी देश ने RM राजनाथ सिंह के सामने बीजिंग को ललकारा? दिया एक भरोसा
भारत ने 2000 से 2006 के बीच श्रीलंका वायुसेना को 24, 40 मिमी एल70 वायु रक्षा तोपें उपलब्ध कराई थीं और हाल के वर्षों में इनमें से 18 तोपों का निशुल्क रखरखाव भी किया है। नए समझौते के तहत भारत शेष छह एल70 वायु रक्षा तोपों के रखरखाव के लिए निशुल्क सहायता उपलब्ध कराएगा।
अपनी आवाज का जादू चलाने वाले अरिजीत सिंह ने बिग बॉस देखने की वजह बताई है. उन्होंने कहा कि मैं पहली बार इस शो की देखूंगा और उसकी वजह है शो में आया उनका पुराना दोस्त.
विनोबा भावे के भुदान एवं सर्वोदय में सबका विकास संभव
विनोबा भावे The post विनोबा भावे के भुदान एवं सर्वोदय में सबका विकास संभव appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
Manoj Jarange के आंदोलन के बीच Jalna में शराब बिक्री पर रोक
जालना, नौ सितंबर महाराष्ट्र के जालना जिले में प्रशासन ने कार्यकर्ता मनोज जरांगे के धरना स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका को देखते हुए कुछ इलाकों में दो दिनों के लिए शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। जरांगे पिछले 12 दिनों से अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह मराठा समुदाय के लिए आरक्षण और जाति वैधता प्रमाणपत्र समेत विभिन्न मांगों को लेकर यह आंदोलन कर रहे हैं। अब तक कोई समझौता नहीं होने के कारण जरांगे ने 12 सितंबर को मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर स्थित गांव में मराठा समुदाय के सदस्यों की बैठक बुलाई है। इस आंदोलन के कारण जरांगे के सैकड़ों समर्थक धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिला अधिकारी असीमा मित्तल ने नौ और 10 सितंबर को गोंदी पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में शराब की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है। प्रशासन को आशंका थी कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच थोक शराब की दुकानों का संचालन जारी रहने से अप्रिय घटनाएं हो सकती हैं और सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने 20 सितंबर की आधी रात तक हथियार ले जाने और पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर भी रोक लगा दी है। ये प्रतिबंध 10 सितंबर को होने वाले पोला त्योहार, 14 से 25 सितंबर तक चलने वाले गणेशोत्सव और 17 सितंबर को मनाए जाने वाले मराठवाड़ा मुक्ति दिवस से पहले लगाए गए हैं। इस दौरान जुलूस और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है।

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