SENSEX
NIFTY
GOLD
USD/INR

Weather

28    C

...

राजस्थान के रामपुरा में सरकारी स्कूल की असुरक्षित इमारत गिराई, CJP के अभियान के बाद प्रशासन की कार्रवाई

राजस्थान के रामपुरा (कंवरपुरा) गांव में स्थित एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की बेहद जर्जर और असुरक्षित इमारत को बुधवार को प्रशासन द्वारा ढहा दिया गया।

जागरण 3 Sep 2026 2:00 am

'हिंदू अफसरों को धमकी क्यों नहीं...' कश्मीरी पंडितों पर फारूक अब्दुल्ला का बड़ा दावा

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने बुधवार को आरोप लगाया कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाला प्रशासन घाटी में कश्मीरी पंडितों को धमकियां दिलवा रहा है, ताकि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने से वंचित रखा जा सके।

लाइव हिन्दुस्तान 3 Sep 2026 12:55 am

'कोई भी मुल्क हो, यदि ईरान के साथ कारोबार किया तो...' रुबियो ने चेताया

मार्को रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ऐसी व्यवस्था बनाने में ईरान की मदद ना करे, जिसके जरिए ईरान पैसा कमा सके. फिर उस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को समर्थन देने या परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में करे.

आज तक 3 Sep 2026 12:42 am

दूर बैठा दुश्मन भी खाएगा खौफ: खगंतक-243 का सफल परीक्षण, स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम कैसे बढ़ाएगा सैन्य ताकत?

दूर बैठा दुश्मन भी खाएगा खौफ: खगंतक-243 का सफल परीक्षण, स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम कैसे बढ़ाएगा सैन्य ताकत? iaf-successfully-tests-indigenous-long-range-glide-bomb-khagangtak-243

अमर उजाला 3 Sep 2026 12:40 am

महाराष्ट्र: पानी और सलाइन ले रहे मनोज जरांगे, अनशन खत्म करने से किया इनकार; सरकार के सामने क्या शर्त रखी?

महाराष्ट्र: पानी और सलाइन ले रहे मनोज जरांगे, अनशन खत्म करने से किया इनकार; सरकार के सामने क्या शर्त रखी?

अमर उजाला 3 Sep 2026 12:40 am

पढ़ें 3 सितम्बर के मुख्य और ताजा समाचार - लाइव ब्रेकिंग न्यूज

Latest and Breaking News - Read today's latest and breaking news in hindi on Amarujala. यहां पढ़ें देश, दुनिया, खेल, मनोरंजन, धर्म, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और आर्थिक जगत की खबरों का लाइव अपडेशन

अमर उजाला 3 Sep 2026 12:40 am

क्या अर्धसैनिक बलों में नेतृत्व के लिए योग्य अधिकारी नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति और बल के अपने अधिकारियों की वरिष्ठता विवाद पर केंद्र सरकार से सवाल किया।

जागरण 2 Sep 2026 11:54 pm

सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की 70 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज, सीवीसी रिपोर्ट में खुलासा

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल सरकारी संस्थाओं के खिलाफ 70,500 से अधिक भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलीं।

जागरण 2 Sep 2026 11:51 pm

देश के सभी राज्यों में दौड़ेगी बाइक टैक्सी? गडकरी का नया प्लान तैयार, ट्रैफिक नियम पर किया बड़ा एलान

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी सेवाओं को अनुमति देने की अपील की।

जागरण 2 Sep 2026 11:51 pm

पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिन्दू मंदिर पर बवाल, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, जानें मंदिर गिराने पर क्या बोली सरकार

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में करीब 100 से 125 साल पुराने हिन्दू मंदिर को कथित तौर पर गिराए जाने के मामले में भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थल के खिलाफ “निंदनीय तोड़फोड़ की कार्रवाई” करार दिया है।

वेब दुनिया 2 Sep 2026 11:51 pm

नेपाल में विनाशलीला... भारत में पहाड़ों पर कहर क्यों टूट रहा? देखें दस्तक

कैसे नेपाल में विनाशलीला के बाद, भारत में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों इलाकों में अचानक बाढ़ आ रही हैं. भारी बारिश हो रही है, भूस्खलन हो रहा है. अब सवाल ये है कि, आखिर, मौसम में अचानक से आए इस बदलाव का मतलब क्या है? जब नेपाल त्रासदी की चर्चा दुनियाभर में हो रही है. ऐसे में चर्चाओं का दौर भी शुरु हो गया है. देखें दस्तक.

आज तक 2 Sep 2026 11:48 pm

Pushkar Singh Dhami ने 26 अल्पसंख्यक संस्थानों को दी मान्यता, बाजपुर में 5 मदरसे सील

देहरादून, दो सितंबर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र सौपे जबकि उधमसिंह नगर जिले के बाजपुर में बिना मान्यता के संचालित हो रहे पांच मदरसों को सील कर दिया गया। यहां आयोजित कार्यक्रम ‘‘नई पहचान, नया सम्मान-आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य’’ में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा 26 संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने को मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों और निर्णयों का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा वर्ग को निशाना बनाना नहीं है बल्कि सभी को बिना भेदभाव के समान अवसर उपलब्ध कराना है। आज मान्यता प्रमाण पत्र पाने वाले संस्थानों में देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों के मदरसों सहित अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान शामिल हैं। उधर, उधमसिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में बिना आवश्यक मान्यता एवं दस्तावेजों के संचालित हो रहे पांच मदरसों को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान संबंधित मदरसा संचालक आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर सके जिसके बाद बाजपुर की एसडीएम ऋचा सिंह और कोतवाली निरीक्षक नरेश चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल की मौजूदगी में उन्हें सील कर दिया गया। प्रशासन द्वारा सील किए गए मदरसों में बाजपुर का मदरसा जामिया हनफिया रजाउत उलूम, मदरसा जामिया फातिमा, कनोरा का मदरसा गुलशने इस्लाम, केलाखेड़ा-बाजपुर में गांधीनगर मोहल्ला में स्थित मदरसा मोइनुल उलूम तथा बाजपुर का मदरसा हुज्जतुल इस्लाम शामिल हैं। एसडीएम ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर क्षेत्र में मदरसों का निरीक्षण और जांच-पड़ताल की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों के पास निर्धारित मान्यता अथवा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच, राज्य में लागू नई मदरसा शिक्षा व्यवस्था और मान्यता संबंधी प्रावधानों के खिलाफ कुछ मदरसा संचालकों ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय का रूख किया है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय में दलील दी है कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण तथा शिक्षा बोर्ड से मान्यता की अनिवार्यता के चलते कई मदरसों के सामने संचालन संबंधी कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि जिले में मदरसों का निरीक्षण अभियान जारी है और जिन संस्थानों ने निर्धारित प्राधिकरण से मान्यता नहीं ली है या आवश्यक मानकों और नियमों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि बच्चों को उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखते हुए उन्हें आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना ही नयी व्यवस्था की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत मदरसों को भी निर्धारित शैक्षणिक मानकों और नियमों का पालन करना होगा। धकाते ने कहा कि उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 11:47 pm

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यूरोप दौरा, पोलैंड के बाद यूक्रेन की करेंगे यात्रा; द्विपक्षीय संबंधों पर होगी चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस यात्रा के बाद 3 से 5 सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड का दौरा करेंगे, जहां वे द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा करेंगे।

जागरण 2 Sep 2026 11:43 pm

अब मिग-21 नहीं गोवा की एयरलाइन के विमान उड़ाएंगे कैप्टन अभिनंदन, पाकिस्तान के छुड़ा दिए थे छक्के

भारतीय वायु सेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन और वीर चक्र से सम्मानित अभिनंदन वर्तमान गोवा की रीजनल एयरलाइन फ्लाई91 में पायलट के तौर पर शामिल हुए हैं। अब वह छोटे विमान उड़ाएंगे।

जागरण 2 Sep 2026 11:41 pm

पीड़ितों की मदद के लिए राहत सामग्री लेकर पहुंचे सोनू सूद

नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद वहां के हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. ऐसे संकट के समय में हमेशा लोगों की मदद के लिए आगे रहने वाले बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता सोनू सूद एक बार फिर मसीहा बनकर सामने आए हैं. वह खुद जमीनी स्तर पर जाकर प्रभावित लोगों की सहायता कर रहे हैं. सोनू सूद पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए नेपाल के त्रिशूली इलाके में पहुंच चुके हैं. सोनू सूद ने त्रिशूली में स्थानीय लोगों और आपदा से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने उन लोगों को जरूरी खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं वितरित कीं जो इस प्राकृतिक आपदा के कारण सब कुछ खो चुके हैं. उनकी टीम भी इस राहत कार्य में सक्रियता से जुटी हुई है.इस मानवीय पहल की सोशल मीडिया और हर जगह खूब सराहना हो रही है. संकट की इस घड़ी में सोनू सूद का यह कदम सराहनीय है, जिससे नेपाल के पीड़ितों को तुरंत राहत मिल सकी है. वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके. उनके इस प्रयास ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल पर्दे पर ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी एक सच्चे नायक हैं.

आज तक 2 Sep 2026 11:33 pm

GDP के आंकड़ों से ‘वोट चोरी’ तक... क्या यूपी चुनाव के लिए अभी से राहुल गांधी का 'नैरेटिव' शुरू? Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा

‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ में देश की आर्थिक स्थिति से लेकर वोटर लिस्ट और ‘वोट चोरी’ के आरोपों तक कई अहम राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। सबसे पहले GDP ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर बहस हुई, जहां 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के 2.6 प्रतिशत के दावे पर मेहमानों ने अपनी-अपनी राय रखी।

खबर इंडिया टीवी 2 Sep 2026 11:32 pm

नेपाल की सुरंगों में जिंदगी बचाने की जंग

नेपाल में इस समय एक बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. यह बचाव अभियान एक ऐसी सुरंग के भीतर हो रहा है जहां परिस्थितियां बहुत ही ज्यादा विकट हैं. सुरंग के अंदर पूरी तरह से घुप्प अंधेरा छाया हुआ है और उसमें भारी मात्रा में पानी भरा हुआ है. इस विकट स्थिति में भी नेपाल की रेस्क्यू टीम के वीर जवान अपनी जान की परवाह न करते हुए लगातार काम में जुटे हुए हैं.

आज तक 2 Sep 2026 11:31 pm

दलित राजनीति में हिस्सेदारी की नई लड़ाई: 'कोटे के अंदर कोटा' के बहाने मांझी-चिराग में छिड़ा सियासी संग्राम

मांझी और चिराग पासवान के बीच अनुसूचित जाति आरक्षण में 'कोटे के भीतर कोटा' को लेकर विवाद गहरा गया है, जो दलित राजनीति में हिस्सेदारी और नेतृत्व की नई लड़ाई को दर्शाता है।

जागरण 2 Sep 2026 11:28 pm

मथुरा में कल सजेगा ‘पंचायत आजतक’ का महामंच, यूपी चुनाव पर सियासी चर्चा

3 सितंबर को मथुरा में ‘पंचायत आजतक’ का महामंच सजेगा. सीएम योगी आदित्यनाथ, मंत्री, सांसद, विपक्षी नेता, धर्मगुरु और वकील यूपी की सियासत, हिंदुत्व, मथुरा समेत चुनावी मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

आज तक 2 Sep 2026 11:26 pm

जापान की रेटिंग एजेंसी जेसीआर ने बढ़ाई भारत की रेटिंग, ट्रिपल B+ से बढ़ाकर की A-; मजबूत आर्थिक स्थिति पर लगाई मुहर

जापान की रेटिंग एजेंसी जेसीआर ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को 'ट्रिपल बी प्लस' से बढ़ाकर 'ए माइनस' कर दिया है।

जागरण 2 Sep 2026 11:25 pm

Nepal Flood: भारत ने भेजी 5वीं राहत खेप, 166 भारतीय सुरक्षित निकाले गए

नयी दिल्ली, दो सितंबर भारत ने बुधवार को बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नेपाल को पांच टन से अधिक जरूरी दवाइयों की पांचवीं खेप और 11 सदस्यों वाली बचाव टीम भेजी। नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, पिछले सप्ताह आई अचानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है। बचावकर्मियों ने प्रभावित इलाकों से और शव बरामद किए हैं। आपातकालीन दलों ने अब तक 12,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है, जबकि करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं और खोज एवं बचाव अभियान जारी है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, मानवीय सहायता लेकर भारतीय वायुसेना का पांचवां विमान आज काठमांडू पहुंचा। इसमें करीब 5.5 टन चिकित्सा सामग्री शामिल है, जिसमें एंटीबायोटिक, दर्द निवारक दवाएं, शल्य चिकित्सा से जुड़ी सामग्री और अन्य जरूरी दवाइयां शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि विमान में 11 सदस्यों की एक विशेष टीम और छह टन से अधिक बचाव का सामान भी था। भारत अब तक नेपाल को करीब 74 टन राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया है, जिनमें बुधवार को बचाए गए तीन लोग भी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में तीर्थयात्रा या अन्य गतिविधियों के लिए गए कुल 410 भारतीय नागरिक बुधवार को चीन से रवाना हो चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने नेपाल में भारतीय सुरंग बचाव दल के काम के बारे में भी जानकारी दी। इसने कहा, भारतीय सुरंग बचाव दल ने आज अपना आधार बदलकर त्रिशूली से स्याब्रूबेसी कर लिया है, जिससे चिलिमे तक पहुंचने में लगने वाला समय कम हो जाएगा, जहां बचाव अभियान जारी है। इसमें कहा गया है, दल ने नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे में अपना तलाशी अभियान जारी रखा। सुरंग के अंदर गहरी कीचड़ और अवरोधों के बावजूद दल आज लगभग 100 मीटर आगे बढ़ने में कामयाब रहा। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत से बुधवार दोपहर पहुंचे 11 बचाव विशेषज्ञों का दल विशेष उपकरणों के साथ त्रिशूली बाजार के पास पहुंच गया है और इसके नेपाली सेना के साथ समन्वय कर बृहस्पतिवार से अपना काम शुरू करने की उम्मीद है। भारत ने नेपाल में एक फॉरेंसिक दल भी भेजा है।

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 11:17 pm

अलकनंदा से सतलुज तक... नदियों के नाम पर रखे जा रहे भारतीय भाषाओं की किताबों के नाम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एनसीईआरटी भारतीय भाषाओं की पाठ्यपुस्तकों का नाम देश की नदियों पर रख रही है।

जागरण 2 Sep 2026 11:16 pm

ऑपरेशन सिंदूर के हीरो कैसे बने राम मंदिर के CEO... जितेंद्र मिश्र के चुने जाने की तीन बड़ी वजह

राम मंदिर ट्रस्ट में हुए बड़े बदलाव के बीच जितेंद्र मिश्र को पहली बार बनाए गए CEO पद की जिम्मेदारी मिली है. आखिर उन्हें ही क्यों चुना गया, जानिए इसके पीछे की कहानी.

आज तक 2 Sep 2026 11:14 pm

भारत ने नेपाल भेजी मदद की 5वीं खेप, बचाव दल और 5.5 टन दवाएं शामिल

तिब्बत में ग्लेशियर फटने से नेपाल में आई भीषण बाढ़ से निपटने के लिए भारत ने सहायता की पांचवीं खेप भेजी है, जिसमें बचाव दल और 5.5 टन दवाएं शामिल हैं।

जागरण 2 Sep 2026 11:12 pm

बच्चे-बुजुर्ग नहीं खाते कुंदरू? अमचूर डालकर बनाएं चटपटे भरवां कुंदरू

Bharwan Kundru: अगर आप भी रोज-रोज वही दाल या आलू की सब्जी खाकर बोर हो चुके हैं तो आज हम आपको भरवां कुंदरू की बहुत टेस्टी रेसिपी बता रहे हैं. कुंदरू खाने में अक्सर बच्चे नखरे करते हैं लेकिन अगर आप इसे अलग ट्विस्ट देकर बनाएंगे तो ये बहुत टेस्टी लगते हैं.

आज तक 2 Sep 2026 11:10 pm

भारतीय वायुसेना ने खगंतक-243 ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया, आत्मननिर्भरता में नया मुकाम

आईएएफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि खगंतक-243 के परीक्षण ने सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह भारतीय वायुसेना और भारतीय उद्योग के लिए एक बड़ा माइलस्टोन है।

जागरण 2 Sep 2026 11:09 pm

अमेरिका का ईरान पर फिर मिसाइल अटैक 18 की मौत, 108 घायल

वेस्ट एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष ने एक नया मोड़ लिया है. अमेरिकी सेना ने ईरान के कई इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें 18 लोगों की मौत और 108 घायल हुए हैं.

आज तक 2 Sep 2026 11:09 pm

4000 साल पुरानी अद्भुत छपाई कला जो सरहद पार कर पहुंची राजस्थान के थार मरुस्थल; जानिए दुनिया भर में अजरख प्रिंट का इतिहास

दुनिया के वस्त्र इतिहास और पारंपरिक हस्तशिल्प की जब भी बात होती है, तो कुछ ऐसी कलाएं सामने आती हैं जो सदियों का सफर तय करके आज भी अपनी चमक बनाए हुए हैं। ऐसी ही एक अनूठी और चमत्कारी छपाई की कला है 'अजरख प्रिंट', जिसका इतिहास आज का नहीं बल्कि करीब चार हजार साल पुराना है। इस प्राचीन कला के साक्ष्य और अवशेष हमें सीधे तौर पर सिंधु घाटी सभ्यता के पुरातात्विक उत्खनन से जुड़े स्थलों से मिलते हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि मोहनजोदड़ो की ऐतिहासिक खुदाई के दौरान एक मूर्ति मिली थी जिसके कंधों पर जो शॉल या चादर पड़ी हुई थी, उस पर त्रिफोलियो (Trefoil) डिजाइन और ज्यामितीय पैटर्न उकेरे गए थे, जो आज के आधुनिक अजरख प्रिंट से हूबहू मेल खाते हैं। इस बात से यह साफ हो जाता है कि यह कला इंसानी सभ्यता के शुरुआती दौर से ही कपड़ा बुनाई और रंगाई की दुनिया में अपनी गहरी जड़ें जमा चुकी थी। सिंध क्षेत्र से शुरू हुआ यह सफर सदियों का रास्ता तय करते हुए सरहद पार कर भारत के कच्छ और राजस्थान के रेगिस्तानी अंचलों तक आ पहुंचा, जहाँ के कारीगरों ने इसे अपनी मेहनत और साधना से जीवित रखा।कैसे पड़ा इस अनूठी कला का नाम 'अजरख' और क्या है इसके पीछे की दिलचस्प लोककथा'अजरख' शब्द की उत्पत्ति और इसके नामकरण के पीछे भी कई दिलचस्प कहानियां और ऐतिहासिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। एक लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, अरबी भाषा में 'अज्रक' शब्द का अर्थ 'नीला' होता है, क्योंकि इस पूरी छपाई और रंगाई की प्रक्रिया में नील के रंग यानी इंडिगो की भूमिका सबसे मुख्य होती है। वहीं दूसरी स्थानीय किवंदती यह भी कहती है कि जब इस कला के एक कारीगर ने पहली बार इस जटिल और सुंदर कपड़े को तैयार करके अपने राजा या उस्ताद को दिखाया, तो उन्होंने इसे देखकर कहा था 'आज रख', जिसका मतलब होता है कि इस अद्भुत कला को संभाल कर आज ही रख लो। समय बीतने के साथ यह नाम 'अजरख' के रूप में प्रसिद्ध हो गया। यह कला केवल कपड़ों पर की जाने वाली कोई साधारण छपाई नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही एक ऐसी साधना है जिसमें रेगिस्तान की मिट्टी, पानी के रासायनिक गुण, प्राकृतिक जड़ी-बूटियां और कारीगरों की उंगलियों का हुनर आपस में इस तरह घुल-मिल जाता है कि कपड़ा देखते ही बनता है।सरहद पार कर राजस्थान के रेगिस्तान तक पहुंची कला और बाड़मेर का अजरख प्रिंटसिंधु घाटी और पाकिस्तान के सिंध प्रांत से ताल्लुक रखने वाली यह कला समय के साथ सरहद पार कर भारत के गुजरात के कच्छ और राजस्थान के पश्चिमी छोर पर बसे बाड़मेर जिले तक पहुंच गई। बाड़मेर के बलोतरा और आसपास के इलाकों में खत्री समुदाय के लोगों ने इस कला को अपने सीने से लगाकर इस तरह सहेजा कि आज यह पूरी दुनिया में 'बाड़मेर के अजरख प्रिंट' के नाम से अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। राजस्थान के इस गर्म और शुष्क रेगिस्तानी इलाके में पानी की कमी और चिलचिलाती धूप के बावजूद कारीगरों ने अपनी मेहनत से इस छपाई को जीवित रखा। चूंकि इस छपाई में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है, इसलिए यहाँ की मिट्टी और पानी की प्राकृतिक प्रकृति इन रंगों को और अधिक पक्का तथा चमकदार बना देती है। सरहद के दोनों तरफ भले ही राजनीतिक दीवारें खींच दी गई हों, लेकिन अजरख की यह प्राचीन सांस्कृतिक विरासत आज भी दोनों देशों के साझा इतिहास और कला प्रेम की एक सुंदर और जीवंत मिसाल पेश करती है।सोलह चरणों की बेहद जटिल प्रक्रिया, जिसमें प्रकृति के तत्वों का होता है अनोखा इस्तेमालअजरख प्रिंट को तैयार करना कोई आसान काम नहीं है, बल्कि यह सोलह चरणों से गुजरने वाली एक बेहद लंबी, कठिन और धैर्य की परीक्षा लेने वाली प्रक्रिया है। इस पूरी छपाई में किसी भी तरह के कृत्रिम या रासायनिक (Chemical) रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से इको-फ्रेंडली और प्राकृतिक होती है। सबसे पहले कच्चे कपड़े (कॉटन या सिल्क) को ऊंट की लीद, अरंडी के तेल और सोडा मिलाकर कई दिनों तक पानी में भिगोकर रखा जाता है ताकि कपड़े के रेशे नरम हो जाएं और रंग को अच्छी तरह सोख सकें। इसके बाद हरड़ के घोल में कपड़े की रंगाई की जाती है। डिजाइन उकेरने के लिए लकड़ी के हाथ से तराशे गए जटिल ठप्पों (Wooden Blocks) का प्रयोग किया जाता है। कपड़े पर बार-बार छपाई करके, उसे लोहे के जंग, फिटकरी, मूंठ और प्राकृतिक इंडिगो (नील) तथा लाल रंग के घोल में बार-बार डुबोया जाता है। हर एक रंग को चढ़ाने के बाद कपड़े को धूप में सुखाने और धोने की एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कई हफ्तों का समय लग जाता है।आधुनिक फैशन की दुनिया में अजरख का जलवा और इस विरासत को बचाने की चुनौतीआज के इस आधुनिक और मशीनी युग में जहाँ हर चीज कारखानों में सेकंडों में तैयार हो जाती है, वहाँ हाथ से बनने वाले अजरख प्रिंट की कीमत और उसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। देश-विदेश के बड़े-बड़े फैशन डिजाइनर और पारंपरिक वस्त्रों के पारखी आज अपने विंटर और समर कलेक्शंस में अजरख प्रिंट से बने साड़ियों, कुर्तो, दुपट्टों और शाॅलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्राकृतिक रंगों की महक और इसकी अनूठी ज्यामितीय डिजाइनिंग आधुनिक युवाओं को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही है। हालांकि, इस शानदार विरासत के सामने आज भी कुछ बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। इस कला को सीखने और करने में बहुत अधिक शारीरिक श्रम, धैर्य और समय की आवश्यकता होती है, जिसके चलते नई पीढ़ी के युवा इस पारंपरिक पेशे से दूर होते जा रहे हैं। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले सस्ते सिंथेटिक और नकली 'अजरख' प्रिंट भी असली कारीगरों के व्यापार को नुकसान पहुंचाते हैं। जरूरत इस बात की है कि इस चार हजार साल पुरानी थाती को सरकारी संरक्षण मिले और सही मायनों में उन हुनरमंद कारीगरों को उनका हक और उचित दाम मिले जो रेगिस्तान की धूप में बैठकर इस कला को अपनी सांसों में संजोए हुए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 11:09 pm

पति ने चाकू से गोदकर पत्नी की कर दी हत्या, बचाने आई सास पर भी किया हमला

तेलंगाना के राजन्ना सिरसिला जिले में एक महिला की कथित तौर पर उसके पति ने चाकू से हमला कर हत्या कर दी. पदीरा गांव में हुई वारदात के दौरान महिला की सास ने बीच-बचाव की कोशिश की तो आरोपी ने उस पर भी हमला कर दिया. महिला की मौके पर मौत हो गई, जबकि घायल सास का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

आज तक 2 Sep 2026 11:08 pm

सऊदी अरब में तेजी से बदलते नियम और महिला पर्यटकों के लिए ड्रेस कोड की सच्चाई

कभी दुनिया के सबसे रूढ़िवादी और सख्त कानूनों वाले देशों में गिने जाने वाले सऊदी अरब में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पर्यटकों के लिए नियमों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिले हैं। खाड़ी देशों के इस प्रमुख राष्ट्र ने अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर पर्यटन और वैश्विक निवेश की ओर तेजी से मोड़ा है, जिसके चलते विदेशी पर्यटकों के लिए कई प्रकार की पाबंदियों को आसान बनाया गया है। देश के विजन 2030 के तहत पर्यटन सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए विदेशी सैलानियों का स्वागत खुले दिल से किया जा रहा है। यही वजह है कि अब दुनिया भर से लोग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को देखने के लिए सऊदी अरब का रुख कर रहे हैं। ऐसे में जो महिलाएं या कपल्स पहली बार इस देश की यात्रा करने की योजना बनाते हैं, उनके जेहन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या वहां सार्वजनिक रूप से बुर्का या पारंपरिक अबाया पहनना कानूनी रूप से अनिवार्य है या फिर पश्चिमी शैली के शालीन कपड़े भी पहने जा सकते हैं।क्या सऊदी अरब में महिलाओं के लिए बुर्का या अबाया पहनना अब भी है जरूरी?इस सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब यह है कि विदेशी महिला पर्यटकों के लिए अब सऊदी अरब में पारंपरिक काले रंग का बुर्का या अबाया पहनना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। कुछ साल पहले तक स्थानीय और विदेशी सभी महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थलों पर सिर ढककर काला अबाया पहनना पूरी तरह से बाध्यकारी था और नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाती थी। लेकिन अब नियमों में ऐतिहासिक ढील दी जा चुकी है। आज के समय में विदेशी महिला पर्यटकों को जबरन अबाया या सिर पर हिजाब ओढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है। कानूनन अब महिलाएं अपनी पसंद के ऐसे शालीन कपड़े पहनकर घूम सकती हैं जो स्थानीय संस्कृति और शालीनता के दायरे का सम्मान करते हों। हालांकि, देश की स्थानीय संस्कृति के प्रति आदरभाव दिखाने के लिए आज भी कई पर्यटक और विदेशी नागरिक स्वेच्छा से हल्के और खुले लिबास या केप-स्टाइल के गाउन पहनना पसंद करते हैं, ताकि वे स्थानीय माहौल में सहज महसूस कर सकें।शालीनता और सार्वजनिक शिष्टाचार के नए नियम, पर्यटकों को किन बातों का रखना होगा खास ध्यानभले ही सऊदी सरकार ने विदेशी महिलाओं के लिए बुर्का पहनने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया हो, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि वहां किसी भी प्रकार के आधुनिक या अमर्यादित कपड़े पहनने की पूरी छूट मिल गई है। सऊदी अरब के पब्लिक डीसेंट यानी सार्वजनिक शालीनता के नियम (Public Decency Regulations) आज भी बहुत स्पष्ट और कड़े हैं, जिनका पालन देश के भीतर रहने वाले हर नागरिक और विदेशी पर्यटक के लिए अनिवार्य होता है। इन नियमों के मुताबिक, महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही ऐसे कपड़े पहनने की हिदायत दी जाती है जो बहुत अधिक तंग (Tight), पारदर्शी (Transparent) या शरीर के अंगों को अधिक उजागर करने वाले न हों। महिला पर्यटकों के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे अपने कंधे, घुटने और बांहों को ढकने वाले ढीले-ढाले कपड़े जैसे कि मैक्सी ड्रेस, वाइड-लेग पैंट, लॉन्ग स्कर्ट या फुल-स्लीव ट्यूनी का चयन करें। यदि पहनावा शालीनता के दायरे से बाहर होता है, तो स्थानीय प्रशासन या पुलिस द्वारा आपत्ति जताई जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।धार्मिक स्थलों और रूढ़िवादी क्षेत्रों में प्रवेश के दौरान किन नियमों का करना होता है पालनसऊदी अरब के सभी शहर एक जैसे आधुनिक या खुले विचारों वाले नहीं हैं, इसलिए यात्रा के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना जरूरी है कि आप देश के किस हिस्से में घूम रहे हैं। राजधानी रियाद, आधुनिक तटीय शहर जेद्दाह और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल अल-उला जैसे महानगरों में पर्यटकों को लेकर काफी खुलापन और लचीलापन देखने को मिलता है, जहां बिना अबाया के घूमने पर कोई रोक-टोक नहीं होती। इसके विपरीत, यदि आप देश के अधिक पारंपरिक, ग्रामीण या धार्मिक रूप से संवेदनशील इलाकों में जाते हैं, तो वहां स्थानीय लोग आज भी पारंपरिक वेशभूषा को ही सर्वोपरि मानते हैं। ऐसे क्षेत्रों में यदि महिला पर्यटक शालीन और ढके हुए कपड़े नहीं पहनती हैं, तो उन्हें लोगों की असहज नजरों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, मक्का और मदीना जैसे पवित्र इस्लामिक तीर्थस्थलों या देश की किसी भी मस्जिद के अंदर प्रवेश करते समय सभी महिलाओं (चाहे वे स्थानीय हों या विदेशी) के लिए सिर को स्कार्फ या हिजाब से पूरी तरह ढंकना और शरीर को पूरी तरह से कवर करने वाले कपड़े पहनना आज भी पूरी तरह से अनिवार्य है।सुरक्षित और आरामदायक यात्रा के लिए पर्यटकों को क्या अपनानी चाहिए रणनीतियदि आप आने वाले दिनों में सऊदी अरब की यात्रा पर जाने का मन बना रही हैं, तो अपनी पैकिंग करते समय वहां के सांस्कृतिक परिवेश और मौसम को ध्यान में रखना सबसे समझदारी भरा कदम होगा। रेगिस्तानी जलवायु और चिलचिलाती धूप को देखते हुए सूती (Cotton) और लीनन (Linen) जैसे हल्के और हवादार कपड़ों को अपने बैग में प्राथमिकता दें, जो दिखने में शालीन होने के साथ-साथ पहनने में भी बेहद आरामदायक होते हैं। अपने साथ एक हल्का दुपट्टा, स्टोल या पश्मीना शॉल हमेशा साथ रखें, जो अचानक किसी मस्जिद या पारंपरिक बाजार में प्रवेश करते वक्त सिर या कंधों को ढंकने के बहुत काम आता है। यदि आप बिना किसी झंझट के लोकल माहौल में घुलना-मिलना चाहती हैं, तो आप चाहें तो स्थानीय बाजारों से एक खूबसूरत और हल्के रंग का अबाया या किमेलो खरीदकर पहन सकती हैं, जो आपको धूप से बचाने के साथ-साथ एक परफेक्ट टूरिस्ट लुक भी देता है। नियमों की सही समझ और स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान आपकी इस ऐतिहासिक यात्रा को बेहद सुरक्षित, यादगार और आनंददायक बना देगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 11:07 pm

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे विवाद के बाद NHAI सख्त, अब स्किल ब्रिज पोर्टल से होगी इंजीनियरों की तैनाती

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों के बाद NHAI ने हाईवे निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कुशल इंजीनियरों का पूल बनाने का निर्णय लिया है।

जागरण 2 Sep 2026 11:05 pm

डॉ. निर्मला यादव बनीं राम जन्मभूमि ट्रस्ट की नई ट्रस्टी

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति की गई. इनमें फिरोजाबाद के शिकोहाबाद निवासी शिक्षाविद् डॉ. निर्मला यादव भी शामिल हैं. वह एमजी डिग्री कॉलेज फिरोजाबाद और बीडीएम डिग्री कॉलेज शिकोहाबाद की प्राचार्या रह चुकी हैं. शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे शिकोहाबाद और फिरोजाबाद में खुशी है.

आज तक 2 Sep 2026 11:05 pm

छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी जल संरक्षण मॉडल राष्ट्रीय मंच पर सर्वश्रेष्ठ घोषित; देश भर में पहला स्थान पाकर राज्य ने रचा इतिहास

भारतीय विकास और ग्रामीण परिवर्तन के इतिहास में कई बार कुछ ऐसी अनूठी योजनाएं और प्रयास सामने आते हैं जो न केवल स्थानीय समस्याओं का समाधान करते हैं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन जाते हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य से एक बेहद गर्व और उत्साह से भर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने देश भर के प्रशासनिक और जल प्रबंधन गलियारों में हलचल मचा दी है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जनभागीदारी की तर्ज पर धरातल पर उतारे गए जल संरक्षण और संवर्द्धन मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर सबसे उत्कृष्ट और प्रभावशाली मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया है। केंद्रीय मंत्रालयों और जल शक्ति से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ के इस अभिनव प्रयोग ने तमाम बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब सरकार और जनता हाथ में हाथ डालकर किसी बड़े सामाजिक लक्ष्य के लिए आगे आते हैं, तो सफलता के नए आयाम खुद-ब-खुद सृजित होने लगते हैं।आखिर क्या है छत्तीसगढ़ का वह अनूठा 'जनभागीदारी जल संरक्षण मॉडल' और कैसे हुआ इसका क्रियान्वयनकिसी भी योजना की सफलता उसके जमीनी क्रियान्वयन और उसमें स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किए गए इस जल संरक्षण मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें केवल सरकारी मशीनरी और फाइलों पर भरोसा करने के बजाय गांवों के आम नागरिकों, किसानों, महिलाओं और स्थानीय युवाओं को सीधे तौर पर जोड़ा गया। राज्य के सुदूर ग्रामीण अंचलों और जल संकट से जूझ रहे इलाकों में पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कि तालाबों, कुओं, बावड़ियों और जोहड़ों के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया गया। मनरेगा और अन्य स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग करते हुए ग्रामीणों ने श्रमदान और सामूहिक सहभागिता के जरिए वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। हर गांव में जल समितियों का गठन किया गया जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखा जाए और गर्मियों के दिनों में मवेशियों तथा इंसानों के लिए पेयजल की कोई कमी न हो।भूजल स्तर में भारी सुधार और कृषि क्षेत्र में आई क्रांति, बदल गई गांवों की तस्वीरइस जनभागीदारी अभियान के धरातल पर उतरने के बाद छत्तीसगढ़ के भूजल स्तर (Groundwater Table) में जो सकारात्मक बदलाव देखने को मिले, उसने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। जिन इलाकों में कुछ साल पहले तक गर्मियों के मौसम में हैंडपंप दम तोड़ देते थे और महिलाओं को मीलों दूर पानी के लिए भटकना पड़ता था, आज उन गांवों के जल स्रोत पूरे साल लबालब भरे रहते हैं। जल स्तर सुधरने का सीधा और सकारात्मक प्रभाव राज्य के कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। किसानों को अब धान या अन्य फसलों की सिंचाई के लिए मानसून की अनिश्चितता पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता, क्योंकि बोरवेल और कुओं में भूजल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। दोहरी और तिहरी फसलें उगाने वाले किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल मिला है। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के मोर्चे पर भी इस मॉडल ने शानदार परिणाम दिए हैं, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन (Ecological Balance) मजबूत हुआ है।राष्ट्रीय मंच पर सराहना और अन्य राज्यों के लिए क्यों बना यह मॉडल एक बड़ा सबकछत्तीसगढ़ के इस अनूठे मॉडल की गूंज अब देश की राजधानी दिल्ली से लेकर विभिन्न राज्यों के योजना आयोगों तक सुनाई दे रही है। राष्ट्रीय जल सम्मेलन और समीक्षा बैठकों के दौरान जब छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल के आंकड़ों और सफलता की कहानियों को प्रस्तुत किया गया, तो वहां मौजूद केंद्रीय अधिकारियों और अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने इसकी मुक्तकंठ से सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब पूरा देश जलवायु परिवर्तन (Climate Change), ग्लोबल वार्मिंग और गंभीर जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब छत्तीसगढ़ का यह मॉडल एक सटीक मार्गदर्शिका का काम कर सकता है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खूबी इसकी कम लागत और अत्यधिक प्रभावशीलता है, जिसे देश के किसी भी भू-भाग में आसानी से लागू किया जा सकता है। प्रथम पुरस्कार मिलने के बाद से देश भर के कई अन्य राज्य भी अब इस जनभागीदारी के फॉर्मूले को अपने यहां अध्ययन करने और लागू करने की योजना बना रहे हैं।भविष्य की जल सुरक्षा और इस ऐतिहासिक उपलब्धि से राज्य को मिलने वाली नई ऊर्जाराष्ट्रीय मंच पर प्रथम स्थान हासिल करना छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक प्रशस्ति पत्र या पुरस्कार मिलने जैसा नहीं है, बल्कि यह राज्य के हर उस नागरिक की जीत है जिसने अपनी मेहनत और पसीने से इस अभियान को सफल बनाया है। राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने इस सफलता का पूरा श्रेय प्रदेश की जनता और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दिया है। आने वाले समय में सरकार इस मॉडल के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत राज्य के हर एक जिले और ब्लॉक में जल संरक्षण के नए आयाम स्थापित किए जाएंगे। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, सही दिशा में की गई प्लानिंग और जनता के अटूट विश्वास से किसी भी बड़ी से बड़ी प्राकृतिक चुनौती को मात दी जा सकती है। छत्तीसगढ़ का यह जल संरक्षण मॉडल अब न केवल देश के भीतर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सतत विकास और जल प्रबंधन का एक स्वर्णिम अध्याय बन चुका है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 11:04 pm

पानी बचाने की मुहिम को नई धार, हर बूंद बचाने का प्लान, PM मोदी ने दिया 'जल उत्सव' का मंत्र

केंद्र और राज्यों ने मिलकर देश की जल सुरक्षा के लिए साझा रणनीति बनाई है. प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने, AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और मई 2027 तक 2 करोड़ नए जल संरक्षण ढांचे बनाने का लक्ष्य रखा है.

NDTV इंडिया 2 Sep 2026 11:03 pm

आय से 88 गुना ज्यादा संपत्ति का मालिक निकला करप्शन का 'किंग'; जिला शिक्षा अधिकारी के घर छापेमारी में मिले 8 लाख कैश

देश के सरकारी विभागों में जब भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो जाती हैं, तो किस स्तर पर घपले-घोटाले और अवैध उगाही का खेल चलता है, इसका एक ताजा और सबसे डरावना उदाहरण हाल ही में सामने आया है। शिक्षा विभाग जैसे पवित्र क्षेत्र में बैठकर नौनिहालों के भविष्य को आकार देने की जिम्मेदारी संभालने वाले एक जिला शिक्षा अधिकारी के काले कारनामों का खुलासा हुआ है। भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो और विजिलेंस विभाग की टीमों ने जब इस भ्रष्ट अधिकारी के ठिकानों पर एक साथ औचक छापेमारी की, तो वहां से जो नजारा देखने को मिला उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। सामान्य सी सैलरी पाने वाले इस अधिकारी के पास अकूत संपत्ति का ऐसा साम्राज्य खड़ा मिला, जिसकी कल्पना आम आदमी तो क्या, बड़े-बड़े उद्योगपति भी आसानी से नहीं कर सकते। कागजों पर साधारण जीवन जीने का दिखावा करने वाला यह बाबू और अधिकारी दरअसल पर्दे के पीछे से करोड़ों के साम्राज्य का मालिक बन बैठा था, जिसके कारनामों की गूंज अब पूरे प्रशासनिक गलियारों में सुनाई दे रही है।छापेमारी के दौरान खुला राज, घर से मिले 8 लाख नगद और आधा किलो सोनाविजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की टीमों द्वारा की गई इस लंबी और मैराथन छापेमारी के दौरान अधिकारी के आवास और ठिकानों से जो शुरुआती बरामदगी हुई, वह अपने आप में हैरान करने वाली थी। घर के कोने-कोने की तलाशी लेने पर अधिकारियों को बक्से और तिजोरियों से करीब आठ लाख रुपये की भारी-भरकम नगद राशि बरामद हुई। इसके साथ ही, जब लॉकरों और अलमारियों को खंगाला गया, तो वहां सोने के जेवरात और बिस्कुटों का ऐसा जखीरा मिला जिसका कुल वजन आधा किलो यानी पांच सौ ग्राम से भी अधिक आंका गया। इतनी बड़ी मात्रा में कैश और सोने की मौजूदगी इस बात का स्पष्ट प्रमाण थी कि यह सब अवैध रूप से जमा की गई काली कमाई का हिस्सा है। अधिकारी और उनके परिजन इस अकूत संपत्ति के संबंध में कोई भी संतोषजनक दस्तावेज या आय का वैध स्रोत मौके पर पेश करने में पूरी तरह असमर्थ रहे, जिससे साफ हो गया कि यह सारा धन पूरी तरह से घूसखोरी और भ्रष्टाचार की काली कमाई से जुटाया गया है।40 से अधिक संपत्तियां और मकान, कागजों पर फैला रखा था बेनामी प्रॉपर्टी का जालनगद और सोने के अलावा जब जांच अधिकारियों ने इस भ्रष्ट अधिकारी के नाम दर्ज और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेजों की फाइलें खंगालनी शुरू कीं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। शुरुआती और दस्तावेजों की पड़ताल में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया कि इस जिला शिक्षा अधिकारी ने अकेले अपने और अपने परिवार के नाम पर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कुल 40 से अधिक बेशकीमती संपत्तियां और मकान खरीद रखे हैं। कहीं बड़े-बड़े कमर्शियल प्लॉट हैं, तो कहीं आलीशान बहुमंजिला मकान और फ्लैट्स का एक पूरा जाल बिछा हुआ है। इन संपत्तियों को खरीदने के लिए जिन पैसों का इस्तेमाल किया गया था, वे सभी सरकारी नौकरी के वेतन से कोसों दूर थे। अधिकारी ने अपनी काले धन की कमाई को छिपाने के लिए अलग-अलग रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर फर्जी बेनामी संपत्तियां बना रखी थीं, ताकि किसी को कानोकान खबर न हो सके कि शिक्षा विभाग में बैठकर किस पैमाने पर सरकारी धन और घूस का खेल खेला जा रहा है।आय से 88 गुना अधिक संपत्ति का रिकॉर्ड तोड़ मामला, जानकर सन्न रह गए जांच अधिकारीमामले की गंभीरता को देखते हुए जब विजिलेंस विभाग ने इस अधिकारी की पूरी वैध आय और उसकी कुल संपत्ति का गणितीय आकलन (Asset vs Income Calculation) किया, तो जो आंकड़ा सामने आया उसने भ्रष्टाचार के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। जांच में यह स्पष्ट रूप से साबित हो गया कि इस जिला शिक्षा अधिकारी के पास उसकी ज्ञात और वैध आय से लगभग 88 गुना अधिक अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) मौजूद है। किसी भी सरकारी सेवक के लिए अपनी नौकरी के पूरे कार्यकाल में मिलने वाले कुल वेतन और भत्तों की तुलना में 88 गुना अधिक संपत्ति जमा कर लेना यह बताता है कि उसने अपनी कुर्सी का इस्तेमाल जनता के कल्याण और शिक्षा के विकास के लिए नहीं, बल्कि अपनी तिजोरी भरने के लिए पूरी बेशर्मी से किया है। इस खुलासे के बाद से विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है और यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इतने लंबे समय तक इस अधिकारी के काले कारनामों पर पर्दा कैसे पड़ा रहा और इसके संरक्षण में कौन-कौन लोग शामिल थे।कानूनी शिकंजा और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासनिक मोर्चे पर उठ रहे सख्त कदमइस बड़े खुलासे के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। विजिलेंस की टीमें अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अकूत संपत्ति के साम्राज्य में और कौन-कौन से रिश्तेदार, बिचौलिए या विभाग के अन्य भ्रष्ट कर्मचारी शामिल हैं, जिनकी मदद से यह अवैध नेटवर्क चलाया जा रहा था। कोर्ट के आदेश पर तमाम संपत्तियों के कागजों को जब्त कर लिया गया है और बैंक खातों को सीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दे दिया है कि कानून के हाथ भले ही लंबे हों, लेकिन भ्रष्टाचारियों के लिए अब बच निकलना नामुमकिन होता जा रहा है। आम जनता और ईमानदार नागरिकों का मानना है कि ऐसे दागी अधिकारियों को केवल निलंबित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनकी पूरी अवैध संपत्ति को जब्त कर उन्हें कठोरतम सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी शिक्षा के मंदिर को इस तरह कलंकित करने की हिम्मत न जुटा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 11:03 pm

कमरिया टूटत, करेजवा जरत है... जब UP में साउथ इंडियन डॉक्टर ने बोली ठेठ अवधी, VIDEO वायरल

गोंडा में तैनात डॉ. अनीता मिश्रा का अवधी भाषा बोलते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. दक्षिण भारत में पली-बढ़ी डॉक्टर अनीता ने मरीजों की इस मिठास भरी भाषा की जमकर तारीफ की और अपने अनुभव साझा किए.

NDTV इंडिया 2 Sep 2026 11:02 pm

Ram Mandir Trust के नए CEO की नियुक्ति पर Akhilesh Yadav ने खड़े किए सवाल

लखनऊ, दो सितंबर समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के तौर पर एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाए और पूछा कि मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर्मचारी अब भी जेल में क्यों हैं, जबकि वरिष्ठ जिम्मेदारों को क्लीन चिट दे दी गयी है। यादव ने सहारनपुर दौरे के दौरान मंदिर ट्रस्ट के सीईओ की नियुक्ति को लेकर पूछे गये सवाल पर कहा, ‘‘इस बारे में मुझसे मेरी राय न पूछें क्योंकि नई बात की वजह से आप पुरानी बात भूल जाएंगे।’’उन्होंने मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी के मामले में की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए। यादव ने कहा, ‘‘अगर बड़े लोगों को क्लीन चिट मिल गई है, तो छोटे कर्मचारी अब भी जेल में क्यों हैं? उन्हें भी रिहा करवाएं’’उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भगवान राम को चढ़ाए गए चढ़ावे की ‘‘लूट’’ नहीं होगी। इस बीच, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के पद पर मिश्रा की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘मैं मंदिर के नए सीईओ की नियुक्ति पर बधाई देता हूं। मैं भगवान राम के चरणों में प्रार्थना करता हूं कि उनके आशीर्वाद से सब कुछ अच्छा हो।’’कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं विधायक आराधना मिश्रा ने कहा कि नियुक्ति करने वालों को ही पता होगा कि यह फैसला किस आधार पर लिया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर के दान की कथित चोरी का मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की धार्मिक आस्था से जुड़ा है। मिश्रा ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विशेष जांच टीम (एसआईटी) की तफ्तीश में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। मिश्रा ने कहा, ‘‘पहले हमें बताएं कि दान और चढ़ावा चुराने वालों का क्या हुआ।’’उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छोटे कर्मचारियों को तो गिरफ्तार किया गया लेकिन उस समय मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले लोगों यानी चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। सपा के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने भी राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कथित तौर पर शामिल लोगों के विरुद्ध सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘नई कमेटियां बनाई जा रही हैं और नया सीईओ नियुक्त किया जा रहा है, लेकिन सरकार ने उन लोगों के खिलाफ क्या किया है जिन्होंने पहले गड़बड़ी की थी?’’सुमन ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार की बनाई गयी एसआईटी न्याय दिलाने में नाकाम रही है। उन्होंने फिर से मांग की कि मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश या संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जाए। सुमन ने यह भी आरोप लगाया कि एसआईटी दोषियों को बचा रही है और उसकी जांच केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है। वाराणसी में, पातालपुरी मठ के प्रमुख जगतगुरु बालक दास देवाचार्य महाराज ने सीईओ के पद पर मिश्रा की नियुक्ति का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन सरकार द्वारा नियुक्त सीईओ के बजाय संतों की देखरेख में होना चाहिए। इस कदम को ‘‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’’ बताते हुए देवाचार्य ने कहा कि सीईओ सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करेगा और मंदिर में ‘वीआईपी कल्चर’’ को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि एक प्रशासनिक अधिकारी कामकाज संभालने में तो सक्षम हो सकता है लेकिन जरूरी नहीं कि वह मंदिर की पूजा-पद्धति, परंपराओं और रीति-रिवाजों को समझे। देवाचार्य ने कहा, ‘‘मठ और मंदिर की ज़िम्मेदारी संतों और उनकी देखरेख में होनी चाहिए।’’उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा न होने पर अनियमितताएं, विवाद और ‘वीआईपी कल्चर’ जारी रहेगा। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में 62 वर्षीय जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया।

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 11:02 pm

पत्नी की जिद पर बुजुर्ग माता-पिता का साथ नहीं छोड़ा पति; छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक के केस में सुनाया ऐतिहासिक फैसला

भारतीय समाज और पारिवारिक व्यवस्था में बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करना और उनका भरण-पोषण करना एक संतान का सबसे बड़ा कर्तव्य और नैतिक दायित्व माना जाता है। लेकिन आधुनिक समय में कई बार पारिवारिक जीवन के भीतर यह कर्तव्य पति-पत्नी के बीच विवाद और कलह की सबसे बड़ी वजह बन जाता है। इसी से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी परिणाम देने वाला फैसला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की तरफ से सामने आया है, जिसने देश भर में चल रही पारिवारिक अदालतों और कानूनी बहसों को एक नई दिशा दे दी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने एक स्पष्ट और कड़े फैसले में यह व्यवस्था दी है कि यदि कोई पति अपनी पत्नी की अनुचित जिद या दबाव के आगे झुककर अपने बूढ़े माता-पिता को अकेला छोड़ने से इनकार कर देता है, तो इसे कानून की नजर में किसी भी प्रकार की मानसिक क्रूरता या प्रताड़ना नहीं माना जा सकता है। अदालत ने यह भी दो टूक कहा कि एक शादीशुदा महिला द्वारा अपने पति को उसके बुजुर्ग माता-पिता से अलग रहने के लिए विवश करना और ऐसा न करने पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करना अपने आप में क्रूरता की श्रेणी में आता है।क्या था पूरा मामला और क्यों कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा वैवाहिक विवाद का यह प्रकरणइस कानूनी लड़ाई की शुरुआत तब हुई जब एक दंपत्ति के वैवाहिक जीवन में खटास इतनी अधिक बढ़ गई कि मामला सुलझने के बजाय सीधे परिवार न्यायालय और फिर हाईकोर्ट तक जा पहुंचा। पत्नी का मुख्य आरोप था कि उसका पति उसके साथ ठीक से नहीं रहता और संयुक्त परिवार में माता-पिता की जिम्मेदारियों में ही उलझा रहता है, जिससे उसे पर्याप्त समय और मानसिक सुकून नहीं मिल पा रहा है। पत्नी चाहती थी कि उसका पति अपने बुजुर्ग माता-पिता और परिवार के बाकी सदस्यों से पूरी तरह से नाता तोड़कर उसके साथ किसी अलग शहर या अलग घर में स्वतंत्र रूप से रहे। लेकिन पति ने अपने वृद्ध और आश्रित माता-पिता का साथ छोड़ने से साफ इनकार कर दिया, क्योंकि वह अपनी इकलौती संतान होने के नाते उनकी देखभाल करने का नैतिक और सामाजिक फर्ज निभा रहा था। इसी बात को लेकर घर में लगातार झगड़े होने लगे और पत्नी ने पति तथा उसके परिवार वालों के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना व क्रूरता के आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग कर दी।निचली अदालत के फैसले को चुनौती और हाईकोर्ट में हुई लंबी कानूनी जिरहशुरुआती दौर में जब यह मामला फैमिली कोर्ट के सामने गया, तो दोनों पक्षों के बयानों और परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन किया गया। निचली अदालत ने तमाम साक्ष्यों को देखने के बाद यह पाया कि पति अपने माता-पिता की सेवा करने के अपने कर्तव्य पर पूरी तरह अडिग था, जिसे किसी भी रूप में पत्नी के प्रति अपराध या क्रूरता नहीं ठहराया जा सकता। इसके खिलाफ पत्नी पक्ष ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए तलाक और अन्य कानूनी राहतों की मांग की। हाईकोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों ने अपने-अपने तर्क रखे। पत्नी के वकील का पक्ष था कि अलग रहने से पारिवारिक सामंजस्य बेहतर हो सकता था, जबकि पति के वकील ने अदालत के सामने यह स्पष्ट किया कि भारतीय सांस्कृतिक ताने-बाने में वृद्ध माता-पिता की सेवा करना किसी भी बेटे का कानूनी और नैतिक दायित्व है और इसके लिए पति पर दबाव बनाना सरासर गलत है।अदालत की अहम टिप्पणियां, संयुक्त परिवार की संस्कृति और भारतीय समाज का परिप्रेक्ष्यमामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भारतीय पारिवारिक मूल्यों और कानूनों की बहुत ही सुंदर और तार्किक व्याख्या की। अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत जैसे देश में जहां संयुक्त परिवार की एक लंबी और मजबूत परंपरा रही है, वहां विवाह के बाद भी माता-पिता के प्रति संतान के कर्तव्यों को नकारा नहीं जा सकता। यदि कोई पत्नी अपने पति से यह अपेक्षा करती है कि वह शादी के तुरंत बाद अपने बुजुर्ग माता-पिता को छोड़कर केवल उसके साथ अलग रहे, और ऐसा न करने पर पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है, तो यह कृत्य कानून की नजर में पति और उसके परिवार के खिलाफ एक बड़ा मानसिक आघात है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि माता-पिता की देखभाल करना और उनकी सेवा में समय बिताना किसी भी सभ्य समाज में क्रूरता नहीं, बल्कि एक पुण्य और आवश्यक कर्तव्य है, और यदि इस बात को लेकर कोई जीवनसंगिनी विवाद खड़ा करती है, तो पति को मानसिक प्रताड़ना से बचाने के लिए कानूनी रूप से विवाह विच्छेद यानी तलाक का अधिकार मिलना पूरी तरह न्यायसंगत है।वैवाहिक जीवन के रिश्तों और पारिवारिक दायित्वों को लेकर समाज के लिए एक बड़ा संदेशछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह महत्वपूर्ण फैसला केवल एक मुकदमे का निपटारा नहीं है, बल्कि यह देश भर के उन लाखों परिवारों के लिए एक बड़ा संदेश है जहां आधुनिकता की दौड़ में पारिवारिक रिश्तों और बुजुर्गों की उपेक्षा करने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोर्ट के इस निर्णय ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून भी उन्हीं रिश्तों और अधिकारों का समर्थन करता है जो मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादाओं पर खरे उतरते हैं। एक तरफ जहां महिला अधिकारों की रक्षा के लिए कानून सख्त हैं, वहीं दूसरी तरफ बुजुर्ग माता-पिता के सम्मान और उनके अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए न्यायपालिका का यह संतुलित दृष्टिकोण समाज में एक सकारात्मक संतुलन स्थापित करता है। इस फैसले के आने के बाद से कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि वैवाहिक जीवन में आपसी तालमेल के साथ-साथ परिवार के अन्य आश्रित सदस्यों के प्रति जिम्मेदारी को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 11:01 pm

भारत को मिली 2027 ICC महिला चैंपियंस ट्रॉफी की ऐतिहासिक मेजबानी; आईसीसी ने तारीख और वेन्यू का किया ऐलान

भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और गर्व से भर देने वाली खबर सामने आ रही है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने महिला क्रिकेट के बढ़ते कदम और देश में इस खेल की लोकप्रियता को देखते हुए साल 2027 में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित महिला चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन की जिम्मेदारी भारत को सौंप दी है। खेल जगत के इस सबसे बड़े मंच पर दुनिया भर की बेहतरीन महिला क्रिकेट टीमें भारत की पिचों पर आमने-सामने होंगी और खिताब के लिए एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देंगी। हाल के वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शानदार प्रदर्शन से अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है, उसे देखते हुए देश को इस बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी मिलना भारतीय खेल इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय के जुड़ने जैसा है। इस मेगा इवेंट के भारत में होने से न केवल घरेलू दर्शकों को अपनी पसंदीदा खिलाड़ियों को लाइव देखने का सुनहरा मौका मिलेगा, बल्कि देश में महिला क्रिकेट के बुनियादी ढांचे और लोकप्रियता को भी एक नई और जबरदस्त ऊंचाई हासिल होगी।आईसीसी द्वारा तारीखों और वेन्यू का आधिकारिक ऐलान, क्रिकेट गलियारों में उत्साह का माहौलअंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने आगामी टूर्नामेंट के रोडमैप को स्पष्ट करते हुए 2027 महिला चैंपियंस ट्रॉफी के शेड्यूल, तारीखों और संभावित वेन्यू की घोषणा कर दी है। आईसीसी के इस आधिकारिक ऐलान के साथ ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भी इस टूर्नामेंट की तैयारियों को लेकर अपनी रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है। टूर्नामेंट के मुकाबले देश के चुनिंदा और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस प्रतिष्ठित क्रिकेट स्टेडियमों में खेले जाएंगे, जहां खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और दर्शकों को रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। खेल जानकारों का मानना है कि इस वैश्विक प्रतियोगिता के लिए भारतीय पिचों और मौसम के अनुकूल माहौल का पूरा फायदा हमारी टीम को मिल सकता है। आईसीसी की इस घोषणा के बाद से ही विभिन्न खेल संघों, प्रशासकों और खिलाड़ियों के बीच एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया है और हर कोई इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने की तैयारियों में जुट गया है।हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना की अगुवाई वाली टीम इंडिया से देश को है बड़ी उम्मीदेंजब घरेलू सरजमीं पर कोई इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला जाता है, तो मेजबान टीम पर दबाव के साथ-साथ शानदार प्रदर्शन करने का एक अलग ही जुनून भी सवार होता है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की मौजूदा कप्तान हरमनप्रीत कौर और उपकप्तान स्मृति मंधाना समेत टीम की तमाम युवा व अनुभवी खिलाड़ी इस मेगा इवेंट को लेकर अभी से अपनी तैयारियों में पसीना बहाना शुरू कर चुकी हैं। पिछले कुछ समय से भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ उनके ही घर में और अपनी जमीन पर जिस प्रकार का आक्रामक और अनुशासित खेल दिखाया है, उससे यह साफ हो गया है कि वे किसी भी टीम को आसानी से मात देने का माद्दा रखती हैं। वर्ष 2027 में होने वाली इस चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया खिताबी प्रबल दावेदार के रूप में उतरेगी और करोड़ों देशवासियों की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या हमारी बेटियां इस बार विश्व कप की तर्ज पर चैंपियंस ट्रॉफी की चमचमाती हुई ट्रॉफी को अपने नाम कर पाती हैं या नहीं।महिला क्रिकेट के स्वर्णिम दौर की शुरुआत और आर्थिक-व्यासायिक स्तर पर पड़ने वाले प्रभावबीते कुछ सालों में भारतीय महिला क्रिकेट ने केवल खेल के स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक और लोकप्रियता के पैमाने पर भी लंबी छलांग लगाई है। महिला प्रीमियर लीग यानी डब्ल्यूपीएल के सफल आयोजन के बाद से देश में महिला क्रिकेटरों को एक अलग पहचान और वित्तीय मजबूती मिली है। ऐसे में साल 2027 में भारत में महिला चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन होना इस क्रांति को और अधिक गति प्रदान करेगा। बड़े स्पॉन्सर्स, मीडिया राइट्स और स्टेडियमों में उमड़ने वाली भारी भीड़ यह साबित करेगी कि अब महिला क्रिकेट देश में पुरुषों के खेल के बराबर ही दीवानगी हासिल कर चुका है। इस टूर्नामेंट के जरिए देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों तक खेल का प्रसार होगा और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाली युवा बालिकाओं को अपने सपनों को पंख देने के लिए एक प्रेरणादायक मंच मिलेगा। स्थानीय व्यापार, पर्यटन और खेल से जुड़े उद्योगों को भी इस मेगा इवेंट के दौरान एक बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन मिलने की पूरी उम्मीद है।मेगा इवेंट की तैयारियों में जुटा बीसीसीआई, भव्य और सफल आयोजन का किया जाएगा प्रयासआईसीसी द्वारा मेजबानी सौंपे जाने के बाद से ही बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। स्टेडियमों के आधुनिकीकरण, अभ्यास पिचों की गुणवत्ता, खिलाड़ियों की सुरक्षा, दर्शकों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं और सुगम यातायात प्रबंधन जैसी तमाम व्यवस्थाओं पर अभी से काम करना शुरू कर दिया गया है ताकि जब दुनिया भर के मेहमान खिलाड़ी भारत आएं, तो उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। भारत ने अतीत में भी कई सफल पुरुष और महिला आईसीसी विश्व कप मुकाबलों की मेजबानी बेहद शानदार तरीके से की है, और इस बार भी देश अपनी मेहमाननवाजी और बेहतरीन खेल प्रबंधन का लोहा पूरी दुनिया को मनवाने के लिए पूरी तरह तैयार है। 2027 का यह साल भारतीय खेल प्रेमियों के लिए उत्सव का साल होने वाला है, जहां देश के मैदानों पर चौकों और छक्कों की बरसात के बीच महिला क्रिकेट का सबसे भव्य रूप देखने को मिलेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:59 pm

मुंबई के अस्पताल में भर्ती अन्ना हजारे की कैसी है तबीयत, आया हेल्थ अपडेट

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है. उनके करीबी ने बताया है कि फिलहाल उनकी हालत में सुधार हुआ है और चिंता की कोई बात नहीं है.

आज तक 2 Sep 2026 10:58 pm

SCO समिट में पीएम मोदी-अलीयेव की गर्मजोशी, भारत के साथ रिश्ते सुधारने की पहल में क्यों जुटा अजरबैजान?

प्रधानमंत्री मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति अलीयेव ने एससीओ शिखर सम्मेलन में मुलाकात कर दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का संकेत दिया है।

जागरण 2 Sep 2026 10:58 pm

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 56 का तूफानी औसत और 24 मैचों में ठोक डाले 8 शतक; तिलक वर्मा ने ठोकी टीम इंडिया की मजबूत दावेदारी

भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इस वक्त अगर किसी युवा खिलाड़ी के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह हैं मध्यक्रम के भरोसेमंद और स्टाइलिश बल्लेबाज तिलक वर्मा। सीमित ओवरों के क्रिकेट और आईपीएल में अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी का लोहा मनवाने वाले तिलक ने अब लाल गेंद के क्रिकेट यानी फर्स्ट क्लास फॉर्मेट में भी तहलका मचा दिया है। उन्होंने रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू मुकाबलों में अपने दमदार प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि वे केवल छोटे फॉर्मेट के खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट की लंबी और मुश्किल पिचों पर भी अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाने के पूरी तरह काबिल हैं। हाल ही में उनके बल्ले से निकले रनों के सैलाब ने चयनकर्ताओं और क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जिसके बाद से देश भर के खेल विशेषज्ञ यह कयास लगाने लगे हैं कि बहुत जल्द यह युवा सितारा भारतीय टेस्ट जर्सी पहनकर मैदान पर उतरता हुआ नजर आ सकता है।फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 56 का शानदार औसत और 24 मैचों में 8 शतकों का रिकॉर्डतिलक वर्मा के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि रेड बॉल क्रिकेट में उनकी महारत किस उच्च स्तर की है। उन्होंने अपने अब तक के फर्स्ट क्लास करियर में बेहद निरंतरता के साथ रन बनाए हैं, जिसके चलते उनका औसत प्रभावशाली रूप से 56 के आसपास बना हुआ है। केवल 24 मैचों के अपने छोटे से सफर में ही उन्होंने 8 शानदार शतक जड़कर यह दिखा दिया है कि वे बड़ी पारियां खेलने का हुनर अच्छी तरह जानते हैं। जब टीम संकट में होती है या जब पिच पर गेंदबाजों को मदद मिल रही होती है, तब तिलक का संयम और डिफेंसिव तकनीक देखने लायक होती है। घरेलू टूर्नामेंट्स में उनका यह डोमिनेंस इस बात का प्रमाण है कि वे भारतीय टेस्ट टीम के मिडिल ऑर्डर की रीढ़ बनने की पूरी क्षमता रखते हैं, खासकर तब जब सीनियर खिलाड़ियों के बाद टीम में युवा और प्रतिभाशाली खून की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।आधुनिक तकनीक और संयम का अद्भुत मेल, टेस्ट प्रारूप के लिए पूरी तरह तैयार हैं तिलकआधुनिक क्रिकेट में अक्सर यह माना जाता है कि जो खिलाड़ी टी-20 और आईपीएल में तेज गति से रन बनाता है, वह टेस्ट क्रिकेट के लंबे सत्रों और रक्षात्मक खेल में संघर्ष कर सकता है। लेकिन तिलक वर्मा ने इस मिथक को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया है। क्रीज पर टिककर खेलने की उनकी क्षमता, गेंदबाजों की लाइन और लेंथ को पढ़ने का गजब का धैर्य तथा खराब गेंदों को बाउंड्री के पार भेजने की कला उन्हें एक पूर्ण बल्लेबाज बनाती है। लाल गेंद के खिलाफ खेलते हुए वे क्रीज पर पैर जमाकर खेलना पसंद करते हैं और जरूरत पड़ने पर स्ट्राइक रेट को नियंत्रित करना भी अच्छी तरह जानते हैं। घरेलू सर्किट में उन्होंने जिस तरह से स्पिन और तेज गेंदबाजों दोनों का डटकर मुकाबला किया है, उससे यह साफ हो जाता है कि वे विदेशी दौरों और चुनौतीपूर्ण पिचों पर भारतीय टेस्ट बल्लेबाजी क्रम को मजबूती प्रदान करने के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार हैं।चयनकर्ताओं की नजरों में चढ़े तिलक वर्मा, आगामी टेस्ट सीरीज में मिल सकता है बड़ा मौकाजैसे-जैसे भारतीय टेस्ट टीम के संयोजन में बदलाव और भविष्य की पीढ़ी तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है, वैसे-वैसे तिलक वर्मा का नाम चयन समिति की बैठकों में सबसे ऊपर आता जा रहा है। राष्ट्रीय टीम के कोच और चयनकर्ता घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले युवाओं पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में तिलक का यह धमाकेदार फॉर्म उन्हें बाकी दावेदारों से काफी आगे खड़ा कर देता है। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि यदि वह इसी लय को आने वाले मुकाबलों में भी जारी रखते हैं, तो आगामी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट श्रृंखलाओं के लिए उन्हें भारतीय स्क्वॉड में शामिल किए जाने की पूरी संभावना है। टीम मैनेजमेंट भी ऐसे खिलाड़ियों की तलाश में रहता है जो विदेशी पिचों की बाउंस और स्विंग को झेल सकें, और तिलक की तकनीक इन सभी पैमानों पर खरी उतरती हुई दिखाई दे रही है।भारतीय मध्यक्रम के भविष्य की नई उम्मीद और समर्थकों की जगी बड़ी उम्मीदेंभारतीय टेस्ट टीम में चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य రహाने जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के हटने के बाद से मिडिल ऑर्डर में एक खालीपन सा महसूस होने लगा था, जिसे भरने के लिए युवा बल्लेबाजों को मौके दिए जा रहे हैं। ऐसे में तिलक वर्मा का यह उभरता हुआ रूप भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी बड़ी उम्मीद से कम नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर खेल विशेषज्ञों के मंचों तक हर जगह उनकी तकनीक और रन बनाने की भूख की सराहना की जा रही है। फैंस को पूरी उम्मीद है कि जिस तरह उन्होंने कम उम्र में अपनी अलग पहचान बनाई है, उसी तरह वे टेस्ट क्रिकेट में भी लंबी पारी खेलेंगे और भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाएंगे। घरेलू मैदानों पर पसीना बहाने वाला यह युवा बल्लेबाज अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरने के लिए बिल्कुल बेकरार नजर आ रहा है, और क्रिकेट जगत की निगाहें अब इसी बात पर टिकी हैं कि चयनकर्ता उन्हें कब और किस सीरीज में पहली बार टेस्ट कैप सौंपते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:58 pm

'हिंदू अफसर भी तो हैं, उन्हें धमकी क्यों नहीं?' कश्मीरी पंडितों के मुद्दे को फारूक अब्दुल्ला ने बताया 'साजिश'

घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने 'साजिश' बताया है.

NDTV इंडिया 2 Sep 2026 10:57 pm

बिहार : राज्य नागरिक परिषद और 20 सूत्री कमेटियों के जरिए सम्राट सरकार ने किसे दिया तोहफा और क्या है इसके सियासी मायने

बिहार के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सरकार द्वारा प्रशासनिक और सांगठनिक स्तर पर किए जा रहे नए बदलावों और नियुक्तियों की चर्चा जोरों पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने हाल ही में राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति यानी बीस सूत्री कमेटी और बिहार राज्य नागरिक परिषद में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। इन नियुक्तियों को राजनीतिक विश्लेषक केवल सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे आने वाले राजनीतिक समीकरणों और कोर वोटर माने जाने वाले सवर्ण वर्ग को रिझाने की एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों में एनडीए के पारंपरिक माने जाने वाले सवर्ण मतदाताओं के एक वर्ग में उपजे असंतोष को थामने के लिए सरकार ने यह डैमेज कंट्रोल प्लान तैयार किया है। इन पदों पर जिन चेहरों को नवाजा गया है और जिन्हें राज्य मंत्री या उप मंत्री का दर्जा दिया गया है, उसके पीछे की जातीय और क्षेत्रीय गणित को समझना बेहद दिलचस्प है।राज्य नागरिक परिषद में महत्वपूर्ण नियुक्तियां और डॉ. अजय कुमार सिंह को मिली बड़ी जिम्मेदारीसरकार द्वारा किए गए इस ताजा राजनीतिक और प्रशासनिक प्रबंधन के तहत बिहार राज्य नागरिक परिषद में रिक्त पड़े पदों पर अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सिवान क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले और प्रमुख राजनीतिक परिवार से जुड़े डॉ. अजय कुमार सिंह को राज्य नागरिक परिषद का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि डॉ. अजय सिंह की पत्नी को चुनाव के दौरान टिकट न मिलने से सवर्ण और खासकर राजपूत समाज के एक वर्ग में नाराजगी पनप रही थी। इस नाराजगी को दूर करने और डैमेज कंट्रोल करने के लिए ही सरकार ने उन्हें इस पद पर बिठाकर राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री के बेहद करीबी और लंबे समय तक वफादार सुरक्षाकर्मी रहे हरेंद्र बहादुर सिंह को नागरिक परिषद का नया महासचिव बनाया गया है। हरेंद्र सिंह की यह नियुक्ति भी सियासी रूप से काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए पार्टी ने एक बार फिर अपने पुराने और भरोसेमंद कैडर को साधने का संदेश दिया है।बीस सूत्री कमेटियों में एनडीए के सहयोगियों को जगह और भूमिहार-राजपूत जातियों का संतुलनराज्य स्तरीय बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के विस्तार में भी जातीय और राजनीतिक संतुलन साधने की पूरी कोशिश साफ दिखाई दे रही है। सरकार ने एनडीए के विभिन्न घटक दलों के प्रमुख चेहरों को इस समिति में जगह देकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। रालोमो के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री अनिल कुमार और लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार उर्फ सुरेंद्र विवेक को इस राज्य स्तरीय कमेटी का सदस्य बनाया गया है। इन सभी नियुक्त सदस्यों को सरकार की तरफ से उप मंत्री का दर्जा दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भूमिहार और राजपूत जातियों के इन कद्दावर नेताओं को संगठन और सत्ता में यह जगह देकर सरकार ने यह जताने का प्रयास किया है कि एनडीए गठबंधन में सवर्ण जातियों के हितों और उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है, ताकि आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में किसी भी तरह की नाराजगी का सामना न करना पड़े।क्या यह फैसला महज एक सियासी लॉलीपॉप है या जमीनी स्तर पर असर डालेगा यह कदमइस तरह की राजनीतिक नियुक्तियों के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक हलकों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह कदम वाकई सवर्ण समाज को सशक्त करने का प्रयास है या फिर यह सिर्फ चुनाव से पहले का एक 'लॉलीपॉप' या डैमेज कंट्रोल है? विरोधी दलों का मानना है कि जब चुनाव सिर पर होते हैं या जब किसी खास वर्ग की नाराजगी खुलकर सामने आने लगती है, तभी इस प्रकार के पदों और रेवड़ियों का वितरण किया जाता है। हालांकि, एनडीए के रणनीतिकारों का तर्क है कि इन नियुक्तियों के जरिए सरकार ने प्रशासनिक कामकाज में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को बेहतर करने का काम किया है। हालिया उप चुनावों और स्थानीय राजनीतिक उथल-पुथल के बाद जिस तरह से सवर्ण वोटों के खिसकने की चर्चाएं शुरू हुई थीं, उसे रोकने के लिए यह कदम सरकार की तरफ से एक बड़ा और व्यावहारिक दांव माना जा रहा है।आने वाले दिनों में बिहार की सियासत और जातियों के समीकरण पर क्या होगा इसका प्रभावबिहार की राजनीति हमेशा से ही जातिगत समीकरणों, सोशल इंजीनियरिंग और सत्ता की हिस्सेदारी के इर्द-गिर्द घूमती रही है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी इस नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी जातियों को एकजुट रखकर अपने जनाधार को बचाए रखना है। राज्य नागरिक परिषद और बीस सूत्री कमेटियों के बहाने जिन करीब आधा दर्जन से अधिक नेताओं को बड़े पदों और उप मंत्री के दर्जे से नवाजा गया है, उसके दूरगामी परिणाम आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकते हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह सियासी मलमपट्टी सवर्ण मतदाताओं के गुस्से को शांत करने में पूरी तरह कामयाब होती है या फिर विपक्ष इसे चुनावी स्टंट बताकर जनता के बीच एक नया मुद्दा बनाने में सफल रहता है। फिलहाल, इन नियुक्तियों ने बिहार के राजनीतिक तापमान को एक बार फिर गर्मा दिया है और हर कोई इसके नफा-नुकसान का हिसाब लगाने में जुट गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:55 pm

बदले मुइज्जू... इंडिया आउट का नारा देने वाले राष्ट्रपति अब भारत को कह रहे शुक्रिया!

मालदीव के जो नेता इंडिया आउट का नारा देकर सत्ता में आए थे, वे अब मालदीव के इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने में भारत की भूमिका के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा कर रहे हैं. राष्ट्रपति मुइज्जू की नीतियों में आया यह बदलाव इकोनॉमिक्स की मजबूरियों की कहानी कहता है.

आज तक 2 Sep 2026 10:55 pm

कोचिंग दूर है, किराया नहीं है... छात्रा की गुहार पर DM ने बस PASS के साथ 1 लाख रुपये देकर की मदद

पिता के निधन के बाद मेनका आर्थिक तंगी से जूझ रही और उसकी पढ़ाई छूटने की कगार पर थी. जिसके बाद अब प्रशासन ने उसकी मदद की है.

NDTV इंडिया 2 Sep 2026 10:52 pm

फैसले का स्वागत लेकिन आपको जो करना चाहिए था, वो किया ही नहीं; CJI सूर्यकांत से क्या चाहते थे CJP के सौरव दास?

पोस्ट में आगे कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पास इस समस्या को ठीक करने के बेहतर तरीके थे। उनका कहना है कि कोर्ट उस अस्पष्ट गैर-कानूनी जमावड़े वाले कानून को खत्म कर सकता था जिसका पुलिस गलत इस्तेमाल करती है।

लाइव हिन्दुस्तान 2 Sep 2026 10:49 pm

PM की फोटो हटाई तो FIR, प्लेन क्रैश पर... अजित पवार का नाम ले सुप्रिया सुले ने सरकार को घेरा

सुप्रिला सुले ने महाराष्ट्र सरकार के ऊपर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्य में पीएम मोदी की तस्वीर हटाए जाने पर अमित ठाकरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई, लेकिन वहीं अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत पर कोई एफआईआर नहीं हुई।

लाइव हिन्दुस्तान 2 Sep 2026 10:47 pm

बिहार बॉर्डर के गांव का बेटा बना राम मंदिर ट्रस्ट का CEO, गूंजे जय श्रीराम के नारे

अयोध्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला CEO पूर्व एयर चीफ मार्शल जितेंद्र मिश्र को बनाए जाने पर उनके पैतृक गांव भोपतपुरा में जश्न मनाया गया. लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, आतिशबाजी की और जय श्रीराम के नारे लगाए. गांव के लोग इस नियुक्ति को पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात बता रहे हैं और जितेंद्र मिश्र से ईमानदारी से जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद जता रहे हैं.

आज तक 2 Sep 2026 10:47 pm

UP चुनाव से पहले 'पाला बदलो' वाला खेल शुरू, सपा ने बदली अपनी रणनीति; क्या है भाजपा-कांग्रेस का प्लान?

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता सैयद असीम वकार कांग्रेस में शामिल हो गए।

जागरण 2 Sep 2026 10:44 pm

'तो अब होर्मुज का नाम ट्रंप स्ट्रेट कर दें...', अमेरिकी राष्ट्रपति का नया शिगूफा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक विवादित बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि अब जब यह जलडमरूमध्य अमेरिका के नियंत्रण में है, तो इसका नाम 'ट्रंप स्ट्रेट' रखा जाना चाहिए.

आज तक 2 Sep 2026 10:41 pm

स्वामी गोविंद देव गिरी बने राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव, चंपत राय की लेंगे जगह

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने संगठनात्मक पुनर्गठन करते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को CEO और स्वामी गोविंद देव गिरि को महामंत्री नियुक्त किया है.

NDTV इंडिया 2 Sep 2026 10:40 pm

बिजनौर में गुलदार का पिंजरा बना मनोरंजन का अड्डा

बिजनौर के नजीबाबाद क्षेत्र में गुलदार पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरों के आसपास ग्रामीणों की मौजूदगी का वीडियो वायरल है. दावा है कि कुछ लोग पिंजरे को देखने पहुंच रहे हैं और मुर्गे जैसे चारे को भी बाहर निकाल ले जाते हैं. वन विभाग के मुताबिक ऐसी गतिविधियों से गुलदार पकड़ने की रणनीति प्रभावित हो सकती है. ग्रामीणों से पिंजरों से दूरी बनाए रखने और सहयोग की अपील की गई है.

आज तक 2 Sep 2026 10:38 pm

उद्धव गुट को बॉम्बे HC से झटका, विशाखा राउत की याचिका खारिज

शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व मेयर विशाखा राउत को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. पालघर जाति पड़ताल समिति द्वारा उनका ओबीसी प्रमाण पत्र अमान्य किए जाने के बाद बीएमसी की कार्रवाई के खिलाफ दायर उनकी याचिका अदालत ने खारिज कर दी है.

आज तक 2 Sep 2026 10:38 pm

पाकिस्तान में ढहाया गया 100 साल पुराना मंदिर, भारत ने कहा- बेहद शर्मनाक

भारत ने पाकिस्तान के नारोवाल में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को तोड़े जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और तत्काल जांच की मांग की है।

जागरण 2 Sep 2026 10:34 pm

सर्जरी के लिए तारीख पर तारीख देने के आरोप; तन्वी की मौत पर AIIMS ने बनाई जांच कमेटी

एम्स दिल्ली में जन्मजात दिल की बीमारी से पीड़ित 15 साल की बच्ची तन्वी की मौत के बाद सर्जरी में देरी के आरोपों पर जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। संस्थान ने कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

लाइव हिन्दुस्तान 2 Sep 2026 10:32 pm

'हाथ-पैर टूट जाएं तो भी RSS...', नासिक में बोले राहुल गांधी

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के नासिक में कांग्रेस के 68 जिलाध्यक्षों से संगठन सृजन अभियान के तहत बैठक की. उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा पर मजबूती से टिके रहने और आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने पर जोर दिया.

आज तक 2 Sep 2026 10:31 pm

Confirmed Train Ticket Hacks: दशहरा, दिवाली से छठ तक घर जाने के लिए चाहिए कन्फर्म ट्रेन टिकट? सीट पक्की करने के लिए अपनाएं ये 4 आसान तरीके

दशहरा, दीपावली और आस्था के महापर्व छठ पूजा के दौरान देश के बड़े औद्योगिक व मेट्रो शहरों (जैसे दिल्ली, मुंबई, सूरत, बेंगलुरु और चेन्नई) से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाली ट्रेनों में सीटों की भारी मारामारी शुरू हो जाती है। बुकिंग विंडो खुलते ही चंद मिनटों में सीटें फुल हो जाती हैं और स्क्रीन पर 'वेटिंग लिस्ट' (Waiting List) या 'नो रूम/रिग्रेट' (Regret) दिखने लगता है। यदि आप भी त्योहारों पर अपने घर जाने की योजना बना रहे हैं और साधारण तरीके से आपको टिकट नहीं मिल पा रहा है, तो रेलवे की आधिकारिक व्यवस्थाओं और स्मार्ट ट्रिक्स का इस्तेमाल करके अपनी कन्फर्म सीट पक्की कर सकते हैं।1. IRCTC 'मास्टर लिस्ट' (Master List) से सेकंडों में पूरा करें बुकिंगत्योहारी सीजन में तत्काल या जनरल कोटा खुलते ही सबसे बड़ी चुनौती समय की होती है। फॉर्म भरते-भरते सीटें निकल जाती हैं।क्या करें: टिकट बुकिंग शुरू होने से पहले ही अपने IRCTC ऐप या वेबसाइट में 'My Profile' > 'Master List' सेक्शन में जाएं।फायदा: यहां अपने और परिजनों के नाम, उम्र, लिंग, बर्थ प्रेफरेंस और आधार विवरण पहले से सेव कर लें।नतीजा: जब टिकट विंडो खुलेगी, तो यात्रियों की जानकारी टाइप करने के बजाय 'Add Existing' पर एक क्लिक करते ही सभी यात्रियों का डेटा तुरंत ऑटो-फिल हो जाएगा, जिससे आपके कम से कम 45 से 60 सेकंड बचेंगे और टिकट कन्फर्म होने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।2. 'विकल्प' (Vikalp Scheme) का चयन करें: दूसरी ट्रेन में मिलेगी गारंटीड सीटरेलवे द्वारा चलाई जाने वाली ऑल्टरनेट ट्रेन अकोमोडेशन स्कीम (ATAS) यानी 'विकल्प' योजना उन यात्रियों के लिए वरदान है जिनका टिकट वेटिंग में चला जाता है।कैसे काम करता है: टिकट बुक करते समय 'Vikalp' के चेकबॉक्स पर टिक करें। इसमें आप उसी रूट की 7 अन्य वैकल्पिक ट्रेनों का चयन कर सकते हैं।नियम: यदि आपकी मुख्य ट्रेन में चार्ट बनने तक टिकट वेटिंग रह जाता है, तो रेलवे का सिस्टम अपने आप आपकी चुनी गई दूसरी ट्रेनों में खाली सीट होने पर बिना किसी अतिरिक्त किराए के आपको कन्फर्म बर्थ अलॉट कर देता है। इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता।3. तत्काल बुकिंग का '2-स्टेप' पेमेंट फॉर्मूला और समय का गणितयदि जनरल कोटे में सीटें खत्म हो चुकी हैं, तो यात्रा की तारीख से ठीक एक दिन पहले तत्काल कोटे का सहारा लिया जा सकता है। (एसी क्लास के लिए सुबह 10:00 बजे और स्लीपर क्लास के लिए सुबह 11:00 बजे विंडो खुलती है)।IRCTC iMudra / e-Wallet का प्रयोग: नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर अक्सर बैंक के ओटीपी (OTP) आने में देरी हो जाती है और टिकट हाथ से निकल जाता है।फास्ट चेकआउट: IRCTC ई-वॉलेट या यूपीआई (UPI QR Code स्कैन) का इस्तेमाल करें। ई-वॉलेट में पहले से पैसे लोड करके रखने से पेमेंट पेज पर ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती और मात्र 5 सेकंड में ट्रांजैक्शन पूरा हो जाता है।4. बोर्डिंग स्टेशन ट्रिक और 'प्रीमियम तत्काल' (Premium Tatkal)अक्सर बड़े स्टेशनों से टिकट खत्म हो जाते हैं, लेकिन मध्यवर्ती या शुरुआती स्टेशनों के लिए कोटा उपलब्ध रहता है।बोर्डिंग स्टेशन तकनीक: यदि आपके गंतव्य तक की डायरेक्ट सीट उपलब्ध नहीं है, तो ट्रेन जहां से शुरू हो रही है (Originating Station) वहां से टिकट बुक करें और अपना 'Boarding Point' अपने नजदीकी स्टेशन को चुन लें। इससे रेलवे के नियमों के तहत आपकी सीट सुरक्षित रहती है और आप अपने स्टेशन से बिना किसी जुर्माने के ट्रेन पकड़ सकते हैं।प्रीमियम तत्काल: तत्काल में भी सीट न मिलने पर 'प्रीमियम तत्काल' (PT) कोटे को चेक करें। इसमें डायनामिक प्राइसिंग के तहत टिकट दरें अधिक होती हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान भी सीटें आखिरी समय तक आसानी से मिल जाती हैं।इसके अलावा, भारतीय रेलवे त्योहारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर साल सैकड़ों 'फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें' (Puja Special Trains) चलाता है। नियमित ट्रेनों के अलावा रेलवे के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल और आईआरसीटीसी पोर्टल पर स्पेशल ट्रेनों के नोटिफिकेशन पर लगातार नजर रखें, क्योंकि इनकी घोषणा होते ही पूरी ट्रेन में सीटें खाली उपलब्ध होती हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:31 pm

पटना में डेंगू से मौत के बाद अब रांची में स्वाइन फ्लू का बढ़ा भयंकर खौफ, मिले 3 पॉजिटिव मरीज, डॉक्टरों ने हाथ मिलाने तक से किया सख्त मना

देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के बदलते मिजाज के साथ ही खतरनाक और जानलेवा बीमारियों ने एक बार फिर से अपना पैर पसारना शुरू कर दिया है, जिससे आम जनता के बीच भारी दहशत का माहौल बना हुआ है. एक तरफ जहां बिहार की राजधानी पटना में डेंगू के डंक से एक मरीज की दर्दनाक मौत होने की खबर ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रखा है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड की राजधानी रांची में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 (H1N1) वायरस के तेजी से फैलते प्रकोप ने लोगों की नींद उड़ा दी है. रांची में अचानक से स्वाइन फ्लू के तीन पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है और एहतियात के तौर पर कई कड़े कदम उठाए जाने शुरू कर दिए गए हैं. संक्रमण के इस बढ़ते खतरे को देखते हुए डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को आपस में हाथ मिलाने तक से सख्त परहेज करने की सलाह दी है ताकि इस तेजी से फैलने वाले संक्रामक वायरस की चेन को समय रहते तोड़ा जा सके. स्वाइन फ्लू और डेंगू जैसी बीमारियां हर साल मानसून और सर्दियों के बीच के संक्रमण काल में सबसे ज्यादा कहर बरपाती हैं, और यदि शुरुआती स्तर पर ही इनसे बचाव के पुख्ता उपाय न किए जाएं, तो यह महामारी का रूप ले सकती हैं. आइए इस गंभीर स्थिति की पूरी तह में जाकर सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि पटना और रांची में फैल इन दोनों खतरनाक बीमारियों का वर्तमान हाल क्या है और इससे बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्या-क्या विशेष गाइडलाइंस जारी की गई हैं.पटना में डेंगू का बढ़ता प्रकोप और एक मरीज की मौत से मचा हड़कंपबिहार की राजधानी पटना में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार डेंगू मरीजों की संख्या में तेजी से उछाल देखने को मिल रहा है, जो प्रशासन के लिए चिंता का बड़ा विषय बन गया है. अस्पतालों के जनरल वार्ड से लेकर प्राइवेट क्लीनिकों तक हर जगह प्लेटलेट्स कम होने की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों का तांता लगा हुआ है. इसी कड़ी में पटना के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में इलाज के दौरान डेंगू से पीड़ित एक मरीज की मौत होने की पुष्टि के बाद से शहरभर में कोहराम मच गया है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शहर के कई इलाके जैसे कंकड़बाग, बोरिंग रोड, राजेंद्र नगर और पाटलिपुत्र कॉलोनी डेंगू के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील यानी हॉटस्पॉट बने हुए हैं. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार हो रही हल्की बारिश और जलभराव के कारण मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल रहा है, जिसकी वजह से एडीज मच्छर बेकाबू होकर डेंगू का वायरस तेजी से फैला रहे हैं. प्रशासन द्वारा हालांकि फॉगिंग और एंटी-लार्वा का छिड़काव कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति अभी भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ पाई है. डेंगू के इस बढ़ते संक्रमण ने लोगों को अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने देने और पूरी बांह के कपड़े पहनने के लिए मजबूर कर दिया है, क्योंकि लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है.रांची में स्वाइन फ्लू का भयानक हमला, तीन नए पॉजिटिव मरीजों मिलने से सहमा शहरएक तरफ जहां पटना में डेंगू अपनी जानलेवा दस्तक दे रहा है, वहीं दूसरी ओर झारखंड की राजधानी रांची में स्वाइन फ्लू के तीन नए पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद सनसनी फैल गई है. रांची के अलग-अलग अस्पतालों में जब कुछ संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर उनकी आरटी-पीसीआर (RT-PCR) जांच कराई गई, तो उनमें एच1एन1 वायरस की पुष्टि हुई, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है. स्वाइन फ्लू एक बेहद संक्रामक रेस्पिरेटरी बीमारी है जो हवा और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बहुत तेजी से फैलती है, और यही वजह है कि इसके मरीजों के सामने आते ही शहर के चिकित्सा संस्थानों ने तुरंत विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार करने शुरू कर दिए हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमित पाए गए सभी मरीजों का इलाज कड़े चिकित्सीय प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है और उनके संपर्क में आए परिजनों तथा अन्य लोगों की भी कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है. रांची में सर्दियों की आहट के साथ ही इस तरह के फ्लू के वायरस एक्टिव हो जाते हैं, जो कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को अपनी चपेट में सबसे पहले लेते हैं. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति को तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं महसूस हों, तो वे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी जांच करवाएं ताकि समय रहते संक्रमण को फैलने से रोका जा सके.संक्रमण को रोकने के लिए डॉक्टरों की सख्त चेतावनी, हाथ मिलाने और भीड़भाड़ से बचेंरांची में स्वाइन फ्लू के मामलों में अचानक हुई वृद्धि को देखते हुए मेडिकल एक्सपर्ट्स और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम जनता के लिए बेहद सख्त और जरूरी एडवाइजरी जारी की है. डॉक्टरों का साफ कहना है कि स्वाइन फ्लू और अन्य वायरल संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैलते हैं, इसलिए जब तक इस पर काबू नहीं पाया जाता, तब तक लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए डॉक्टरों ने लोगों को आपस में हाथ मिलाने, गले मिलने या शारीरिक संपर्क बनाने से पूरी तरह बचने की सख्त सलाह दी है. हाथ मिलाने के बजाय पारंपरिक भारतीय तरीके से 'नमस्ते' करने की आदत डालने पर जोर दिया जा रहा है ताकि हाथों के जरिए वायरस एक-दूसरे तक न पहुंच सके. इसके अलावा, मॉल, सिनेमाघरों, बाजारों और सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय हर हाल में फेस मास्क पहनने और हाथों को बार-बार सैनिटाइज या साबुन से धोने के निर्देश दिए गए हैं. चूंकि छींकने या खांसने के दौरान निकलने वाली सूक्ष्म बूंदें हवा में फैलकर दूसरों को संक्रमित कर सकती हैं, इसलिए मुंह और नाक को रूमाल या टिशू पेपर से ढकना अनिवार्य कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि जनता इन छोटे-छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण नियमों का सख्ती से पालन करे, तो इस फ्लू की चेन को आसानी से तोड़ा जा सकता है.डेंगू और स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए प्रशासन के पुख्ता इंतजाम और जागरूकता अभियानबिहार और झारखंड की राजधानियों में पैर पसार रही इन दोनों गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए दोनों राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने कमर कस ली है और युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. पटना में जहां नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें घर-घर जाकर कूलर, गमलों और छतों पर रखे पुराने टायरों की जांच कर रही हैं और पानी मिलने पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ लार्वा नष्ट करने वाली दवाइयां डाल रही हैं, वहीं रांची में भी अस्पतालों को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रख दिया गया है. रांची के सदर और रिम्स (RIMS) जैसे बड़े अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच किट और ओसेल्टामिफिर (Oseltamivir) जैसी जीवन रक्षक एंटीवायरल दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. इसके साथ ही, जिला प्रशासन द्वारा नुक्कड़ नाटक, लाउडस्पीकर और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का महाअभियान चलाया जा रहा है ताकि लोग अपनी सेहत को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें. डॉक्टरों का यह भी कहना है कि खानपान में पौष्टिक चीजों को शामिल करें, विटामिन सी से भरपूर फल खाएं और अपने शरीर को पूरी तरह हाइड्रेटेड रखें ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी मजबूत बनी रहे और शरीर ऐसे खतरनाक वायरसों का डटकर मुकाबला कर सके.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:31 pm

Senior Citizen FD Rates: वरिष्ठ नागरिकों की बल्ले-बल्ले! फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिल रहा 8.50% तक का धमाकेदार ब्याज; जानिए किन बैंकों ने खोला तोहफों का पिटारा

रिटायरमेंट के बाद अपनी गाढ़ी कमाई को बिना किसी बाजार जोखिम के सुरक्षित रखना और उस पर नियमित व अधिकतम मासिक या त्रैमासिक आय प्राप्त करना हर वरिष्ठ नागरिक की पहली प्राथमिकता होती है। जहां देश के बड़े सरकारी और निजी बैंक (जैसे SBI, PNB और HDFC Bank) बुजुर्गों को 3 से 5 साल की एफडी पर 7.00% से 7.50% के आसपास ब्याज दे रहे हैं, वहीं स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है।सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (Suryoday SFB), इक्विटास (Equitas SFB) और शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक चुनिंदा अवधियों (विशेष रूप से 5 वर्ष और स्पेशल टेन्योर) पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों को 8.50% तक का वार्षिक ब्याज ऑफर कर रहे हैं।किन बैंकों में मिल रहा है 8.50% तक का उच्चतम रिटर्न?वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य खाताधारकों की तुलना में 50 बेसिस प्वाइंट्स (0.50%) तक का अतिरिक्त ब्याज मिलता है। वर्तमान में शीर्ष रिटर्न देने वाले बैंकों का विवरण इस प्रकार है:बैंक का नामवरिष्ठ नागरिकों के लिए उच्चतम ब्याज दर (p.a.)प्रमुख टेन्योर (अवधि)सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (Suryoday SFB)8.50%5 वर्ष की अवधिइक्विटास / एसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक8.30% - 8.50%2 से 3 वर्ष की स्पेशल बास्केटशिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक8.50%चुनिंदा रिटेल डिपॉजिट टेन्योरजना स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana SFB)8.30% - 8.50%2 वर्ष से 3 वर्ष (FD Plus)उत्कर्ष / उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक8.20% - 8.25%15 महीने से 3 वर्ष₹5 लाख जमा करने पर कितना बनेगा रिटर्न?यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 8.50% की दर पर ₹5,00,000 की राशि 5 साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करता है, तो त्रैमासिक चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) के आधार पर मिलने वाला रिटर्न:कुल मूलधन (Principal): ₹5,00,000लागू वार्षिक ब्याज दर: 8.50%5 साल में कुल अर्जित ब्याज: लगभग ₹2,61,4905 साल बाद कुल मैच्योरिटी राशि: ₹7,61,490यदि कोई बुजुर्ग हर महीने या हर 3 महीने पर पेंशन के रूप में ब्याज लेना चाहता है, तो उसे 8.50% की दर पर लगभग ₹3,540 मासिक या ₹10,625 त्रैमासिक की नियमित आय प्राप्त होगी।क्या स्मॉल फाइनेंस बैंकों में आपका पैसा 100% सुरक्षित है?कई बुजुर्गों के मन में यह संशय रहता है कि क्या छोटे बैंकों में पैसा लगाना सुरक्षित है।RBI का शेड्यूल्ड बैंक दर्जा: ये सभी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित और शेड्यूल्ड बैंक के रूप में रजिस्टर्ड हैं।DICGC की ₹5 लाख की गारंटी: आरबीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी संस्था 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (DICGC) के तहत प्रत्येक जमाकर्ता के मूलधन और ब्याज को मिलाकर ₹5,00,000 तक की पूरी रकम पर 100% सुरक्षा गारंटी मिलती है।सुरक्षित रणनीति: यदि आपके पास ₹10 से ₹15 लाख की पूंजी है, तो सारा पैसा एक बैंक में लगाने के बजाय दो या तीन अलग-अलग बैंकों में ₹5-5 लाख के टुकड़ों में बांटकर (FD Laddering) जमा करें, जिससे पूरी पूंजी पर डीआईसीजीसी का सुरक्षा कवर भी बना रहे और 8.50% का उच्चतम रिटर्न भी मिले।वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स छूट के नियमधारा 80TTB का लाभ: आयकर कानून की धारा 80TTB के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को एक वित्तीय वर्ष में बैंक एफडी और बचत खातों से अर्जित ब्याज पर ₹50,000 तक की कुल छूट मिलती है। ₹50,000 तक के ब्याज पर कोई टीडीएस (TDS) नहीं कटता।फॉर्म 15H जमा करना न भूलें: यदि आपकी कुल वार्षिक आय कर-योग्य सीमा से कम है, तो वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही बैंक में Form 15H जमा कर दें, ताकि बैंक आपका टीडीएस न काटे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:30 pm

झारखंड में एसआईआर (SIR) को लेकर भड़के कपिल सिब्बल, बोले- सुनियोजित साजिश के तहत राज्य में मुसलमानों को बनाया जा रहा है निशाना

भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के गलियारों में समय-समय पर ऐसे कई ज्वलंत मुद्दे उठ खड़े होते हैं जो पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं, और वर्तमान समय में झारखंड से जुड़ा एक ऐसा ही संवेदनशील मामला सियासी गलियारों में तूफान की तरह छाया हुआ है। देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने झारखंड में चल रहे विशेष मतदाता पुनरीक्षण या एसआईआर (SIR) से जुड़े मामलों को लेकर एक बहुत बड़ा और तीखा बयान दिया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति का तापमान अचानक से काफी बढ़ा दिया है। कपिल सिब्बल ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए यह आरोप लगाया है कि झारखंड की धरती पर एक खास रणनीति और सुनियोजित साजिश के तहत विशेष समुदाय यानी मुसलमानों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जो भारतीय संविधान की मूल भावना और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर बहुत बड़ा और सीधा प्रहार है। उनके इस सनसनीखेज बयान के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेजी से शुरू हो चुका है और हर कोई अपने-अपने राजनीतिक चश्मे से इस बयान के मायने तलाशने में जुटा हुआ है। एक तरफ जहां विपक्षी दल इस मामले को लेकर सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी गहमागहमी का माहौल पैदा हो गया है। आइए इस पूरे गंभीर और संवेदनशील मामले की तह में जाकर सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर कपिल सिब्बल के इस बयान के पीछे की पूरी पृष्ठभूमि क्या है और झारखंड की सियासत में यह एसआईआर (SIR) विवाद किस प्रकार तूल पकड़ता जा रहा है।क्या है झारखंड का एसआईआर (SIR) विवाद और क्यों गरमाई है सियासतकिसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण, पुनरीक्षण और पारदर्शी प्रक्रिया चुनाव आयोग का एक नियमित और संवैधानिक दायित्व माना जाता है, जिसके तहत पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाते हैं और फर्जी या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। लेकिन जब किसी खास राज्य या संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र में इस तरह की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाता है, तो कई बार राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के चलते वह विवादों के घेरे में आ जाती है। झारखंड राज्य में चल रही इस प्रक्रिया को लेकर पिछले कुछ हफ्तों से लगातार स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर उठ रहे थे और कई राजनीतिक दलों व संगठनों द्वारा यह शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं कि चुनिंदा इलाकों और खास समुदायों के लोगों को निशाना बनाकर उनके नाम सूचियों से हटाने या आपत्तियां दर्ज कराने का खेल खेला जा रहा है। इसी पूरे घटनाक्रम ने उस समय एक राष्ट्रीय राजनीतिक मोड़ ले लिया जब देश के वरिष्ठ कानूनविद् कपिल सिब्बल ने इस पर खुलकर अपनी बात रखी और प्रशासनिक मशीनरी की मंशा पर सीधे तौर पर सवालिया निशान लगा दिए। उनका यह कहना कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे किसी राजनीतिक दल या सत्ता के गलियारों में बैठी ताकतों की सोची-समझी साजिश काम कर रही है, ने झारखंड के राजनीतिक तापमान को एकदम से चरम पर पहुंचा दिया है। अब यह मुद्दा केवल स्थानीय प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश भर के मानवाधिकारों, संवैधानिक अधिकारों और चुनावी निष्पक्षता से जुड़ी एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।कपिल सिब्बल के तीखे तेवर और मुसलमानों को निशाना बनाए जाने के गंभीर आरोपप्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए कपिल सिब्बल ने बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में यदि नागरिकों के अधिकारों के साथ इस तरह का खिलवाड़ होने लगे, तो यह देश के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक संकेत है। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे तौर पर यह आरोप लगाया कि झारखंड में एसआईआर (SIR) की आड़ में विशेष रूप से मुस्लिम बहुल क्षेत्रों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के मताधिकार को कमजोर करने या उन्हें सूची से बाहर करने की गुप्त कवायद चल रही है। सिब्बल ने तर्क दिया कि यदि प्रशासनिक मशीनरी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करती, तो एक ही समुदाय के लोगों को बार-बार अपनी नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि एक पूरे समुदाय को हाशिए पर धकेलने और उनके लोकतांत्रिक हकों को छीनने की सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, जिसे किसी भी कीमत पर चुपचाप सहन नहीं किया जा सकता। उनके इन बयानों ने देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और चुनावी शुद्धता की पारदर्शिता पर एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जिस पर अब देश भर के विधि विशेषज्ञों, राजनीतिक विश्लेषकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की पैनी नजर टिकी हुई है।चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए गए बड़े संवैधानिक सवालइस पूरे विवाद के दायरे में केवल स्थानीय प्रशासन ही नहीं, बल्कि देश का सर्वोच्च चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की नीतियां भी सीधे तौर पर आ खड़ी हुई हैं। कपिल सिब्बल ने अपने संबोधन के दौरान चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता और उसकी निष्पक्ष कार्यशैली पर भी गंभीर और तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वह देश के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की रक्षा करे और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या भेदभाव से पूरी तरह ऊपर उठकर काम करे, लेकिन झारखंड के मामले में आयोग की तरफ से अपेक्षित संवेदनशीलता और पारदर्शिता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग इस बात से पूरी तरह अनजान है कि धरातल पर किस प्रकार प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करके एक खास वर्ग को प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके नाम मताधिकार सूची से बाहर किए जा रहे हैं। सिब्बल ने केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके इस तरह की ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देना देश की एकता और अखंडता के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। उनके इन बयानों के बाद से राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से यह बहस छिड़ गई है कि क्या भारत में चुनावी प्रक्रियाएं पूरी तरह से निष्पक्ष बची हैं या फिर उन पर भी राजनीतिक दवाबों के बादल मंडराने लगे हैं।झारखंड की स्थानीय राजनीति और आने वाले चुनावों पर पड़ने वाले इसके गहरे प्रभावझारखंड एक ऐसा राज्य है जहां की सामाजिक, जनसांख्यिकीय और राजनीतिक बनावट बेहद संवेदनशील और विविधतापूर्ण मानी जाती है, और यहां का हर छोटा-बड़ा मुद्दा सीधे तौर पर चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। राज्य में पहले से ही राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज रहती है, और ऐसे समय में कपिल सिब्बल द्वारा उठाए गए इस एसआईआर (SIR) के मुद्दे ने आग में घी डालने का काम किया है। राज्य की सत्ताधारी पार्टियों और विपक्षी दलों के बीच इस बयान के बाद से बयानबाजी का दौर चरम पर पहुंच गया है, जहां एक पक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा की लड़ाई बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे केवल राजनीतिक स्टंट और तुष्टिकरण की राजनीति करार दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों का असर सीधे तौर पर जमीन पर रहने वाले मतदाताओं के मानस पर पड़ता है, जिससे चुनावी माहौल और ज्यादा ध्रुवीकृत हो सकता है। झारखंड के राजनीतिक भविष्य और आगामी रणनीतिक वार्ताओं के लिहाज से यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों ही तरफ के राजनीतिक दल इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने और अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:30 pm

दौसा में 33 लाख की स्मैक के साथ पांच तस्कर अरेस्ट

दौसा। राजस्थान के दौसा में पुलिस ने करीब 33 लाख रुपए कीमत की 164.52 ग्राम अवैध मादक पदार्थ स्मैक बरामद कर पांच तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत दौसा पुलिस ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए यह सफलता हासिल की। […] The post दौसा में 33 लाख की स्मैक के साथ पांच तस्कर अरेस्ट appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 2 Sep 2026 10:29 pm

चलती बस में दरिंदगी, भागने की कोशिश की तो... दिल्ली गैंगरेप मामले में पुलिस का बड़ा खुलासा

दिल्ली पुलिस के अनुसार, ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही एक चलती बस में 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक बलात्कार हुआ। पीड़िता ने बस से भागने की कोशिश की तो आरोपियों ने फिर उसे पकड़ लिया और फिर…

लाइव हिन्दुस्तान 2 Sep 2026 10:28 pm

Credit Card Closure Delay Penalty: बैंक नहीं बंद कर रहा आपका क्रेडिट कार्ड? जानिए RBI का कड़ा नियम, 7 दिन की देरी होते ही आपको रोज मिलेंगे ₹500!

नया क्रेडिट कार्ड बेचते समय बैंक और वित्तीय संस्थान ग्राहकों को दिन में कई बार फोन कर लुभावने ऑफर्स देते हैं, लेकिन जब कोई ग्राहक उपयोग न होने वाले कार्ड को हमेशा के लिए बंद (Cancel/Close) कराना चाहता है, तो अक्सर उसे जटिल प्रक्रियाओं, रिटेंशन कॉल्स और कस्टमर केयर के टालमटोल का सामना करना पड़ता है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है या बैंक आपकी कैंसिलेशन रिक्वेस्ट पर हफ्तों तक कुंडली मारकर बैठा है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का एक बेहद सख्त नियम सीधे तौर पर आपके आर्थिक अधिकार की रक्षा करता है।आरबीआई के मास्टर डायरेक्शन के अनुसार, यदि तय समय-सीमा के भीतर बैंक आपका क्रेडिट कार्ड बंद करने में नाकाम रहता है, तो उसे अपनी जेब से आपको प्रतिदिन ₹500 का हर्जाना (Compensation) देना होगा।क्या है RBI का 7 दिन वाला नियम और ₹500 का दैनिक हर्जाना?भारतीय रिजर्व बैंक के 'मास्टर डायरेक्शन ऑन क्रेडिट कार्ड एंड डेबिट कार्ड (इश्यूएंस एंड कंडक्ट) डायरेक्शंस' के पैराग्राफ 8 में क्रेडिट कार्ड बंद करने की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है:7 कार्य दिवसों की डेडलाइन: कार्डधारक की ओर से औपचारिक आवेदन मिलने के बाद कार्ड जारीकर्ता बैंक या कंपनी को अधिकतम 7 वर्किंग डेज (कार्य दिवस) के भीतर कार्ड को अनिवार्य रूप से बंद करना होगा।8वें दिन से ₹500 रोज की पेनल्टी: यदि बैंक 7 कार्य दिवसों में खाता बंद करने में विफल रहता है, तो 8वें दिन से पेनल्टी मीटर शुरू हो जाता है। बैंक को तब तक ₹500 प्रति कैलेंडर दिन के हिसाब से ग्राहक के खाते में हर्जाना जमा करना होगा, जब तक कि कार्ड औपचारिक रूप से क्लोज न हो जाए।लाखों रुपये तक का मुआवजा: हाल ही में ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां बैंक द्वारा महीनों तक क्लोजर रिक्वेस्ट पेंडिंग रखने पर बैंकिंग लोकपाल ने बैंक को ग्राहक को ₹3 लाख से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया।₹500 प्रतिदिन का मुआवजा पाने के लिए ये 3 शर्तें पूरी होना जरूरीइस कानूनी अधिकार और मुआवजे का दावा आप तभी मजबूती से कर सकते हैं, जब आपने अपनी ओर से प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं सही रखी हों:1. बकाया राशि शून्य (Zero Balance) होना अनिवार्य: कार्ड बंद करने का अनुरोध भेजते समय आपके कार्ड पर कोई भी बिल, पेंडिंग ईएमआई (EMI), वार्षिक मेंटेनेंस चार्ज या बिना बिल वाला खर्च बाकी नहीं होना चाहिए। यदि खाते में ₹1 का भी बकाया रह गया, तो बैंक तकनीकी आधार पर हर्जाने से इनकार कर सकता है।2. लिखित/डिजिटल रिकॉर्ड और टिकट नंबर: केवल मौखिक फोन कॉल पर भरोसा न करें। हमेशा आधिकारिक मोबाइल बैंकिंग ऐप, नेट बैंकिंग या बैंक के अधिकृत शिकायत ईमेल पते के जरिए कार्ड बंद करने का अनुरोध भेजें। आवेदन के बाद मिलने वाला सर्विस रिक्वेस्ट (SR) नंबर, पावती या ईमेल का स्क्रीनशॉट संभालकर रखें, क्योंकि यही तारीख का आधिकारिक प्रमाण होगा।3. रिवॉर्ड पॉइंट्स रिडीम करने का अधिकार: आरबीआई नियमों के तहत कार्ड जारीकर्ता को कार्ड बंद होने पर कार्ड में मौजूद वैध रिवॉर्ड पॉइंट्स को भुनाने (Redeem) के लिए कार्डधारक को कम से कम 30 दिनों का समय देना अनिवार्य है।बैंक शाखा (Branch) के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं कर सकताअक्सर बैंक शाखा प्रबंधक ग्राहकों से कहते हैं कि क्रेडिट कार्ड बंद कराने के लिए उन्हें होम ब्रांच आकर फॉर्म भरना होगा। आरबीआई ने अपनी गाइडलाइंस में साफ कर दिया है कि बैंक किसी भी ग्राहक को सिर्फ ब्रांच आने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।बैंकों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप, समर्पित हेल्पलाइन, आईवीआर (IVR) और रजिस्टर्ड ईमेल जैसे डिजिटल माध्यमों पर वन-क्लिक क्लोजर का विकल्प देना अनिवार्य है। कार्ड सफलतापूर्वक बंद होने पर बैंक को तत्काल एसएमएस और ईमेल के माध्यम से कंफर्मेशन देना होता है। इसके साथ ही 30 दिनों के भीतर क्रेडिट ब्यूरो (CIBIL, Experian) को भी अकाउंट क्लोजर की सूचना भेजना बैंक की जिम्मेदारी होती है।अगर बैंक 7 दिन बाद भी कार्ड बंद न करे और हर्जाना न दे, तो क्या करें?यदि 7 कार्य दिवस बीत चुके हैं और आपका कार्ड अब भी एक्टिव दिख रहा है, तो इस स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया का पालन करें:स्टेप 1 (प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर को ईमेल): बैंक के कस्टमर केयर के बजाय सीधे बैंक के 'प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर' (Principal Nodal Officer - PNO) को ईमेल भेजें। इसमें अपना सर्विस टिकट नंबर, आवेदन की तारीख और RBI Master Direction - Credit Card Paragraph 8 का हवाला देते हुए ₹500 प्रतिदिन के हर्जाने की मांग करें।स्टेप 2 (RBI बैंकिंग लोकपाल में ऑनलाइन शिकायत): यदि बैंक 30 दिनों के भीतर आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता या मुआवजा देने से मना करता है, तो आप बिना किसी कानूनी खर्च के सीधे आरबीआई के कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल cms.rbi.org.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।कार्रवाई: आरबीआई लोकपाल (Banking Ombudsman) दोनों पक्षों की जांच के बाद बैंक को क्लोजर की तारीख तक के पूरे दिनों का ₹500 प्रति दिन के हिसाब से मुआवजा ग्राहक के खाते में ट्रांसफर करने का आदेश देता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:28 pm

राजस्थान में 9 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित

जयपुर। राजस्थान में संचालित शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान के तहत असुरक्षित खाद्य पदार्थों पर राज्यभर में रोक लगा दी गई और नौ खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए जबकि बिना लाइसेंस कारोबार करने वाले तीन प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन निरस्त किया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट और असुरक्षित […] The post राजस्थान में 9 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 2 Sep 2026 10:25 pm

'मछली नहीं खाते तो फिर भोज में गए ही क्यों?' ओमप्रकाश राजभर के इस तीखे सवाल ने बढ़ाई यूपी की सियासी गर्मी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर अक्सर सियासी फिजाओं में गर्मी पैदा करते रहते हैं, और इस बार का यह ताजा विवाद सीधे तौर पर सुहेलवाद भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और कद्दावर नेता ओमप्रकाश राजभर तथा उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के बीच छिड़ गया है। राजनीति के गलियारों में कब कौन सा मुद्दा तूल पकड़ ले और किस बात पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाए, इसका अनुमान लगाना अक्सर मुश्किल होता है। हाल ही में एक ऐसा ही दिलचस्प और तीखा वाकया सामने आया है जिसके बाद सूबे की सियासत एक बार फिर से गर्मा गई है और दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पूरा मामला एक सार्वजनिक भोज और उसमें परोसी गई खानपान की चीजों से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर ओमप्रकाश राजभर ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पर सीधा और तीखा तंज कसा है। राजभर ने अपने खास और बेबाक अंदाज में सवालिया लहजे में कहा है कि जब अजय राय यह अच्छी तरह से जानते थे और खुद इस बात का दावा करते हैं कि वे मछली नहीं खाते हैं, तो फिर आखिर वे उस भोज में शिरकत करने के लिए गए ही क्यों थे? राजभर के इस बयान के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका है और इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस बयानबाजी के पीछे की असल पृष्ठभूमि क्या है और राजनीति के इस नए दंगल में कौन-क्या कह रहा है, आइए इस पूरे घटनाक्रम और उसके हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।क्या है पूरा मामला और क्यों छिड़ा है खानपान को लेकर यह सियासी विवादउत्तर प्रदेश की सियासत में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं, खानपान की आदतों और सार्वजनिक आयोजनों में नेताओं की मौजूदगी को लेकर अक्सर बहस छिड़ जाती है, लेकिन इस बार का विवाद थोड़ा हटकर और ज्यादा दिलचस्प है। राजनीतिक कार्यक्रमों या सामाजिक भोजों में नेताओं का आना-जाना आम बात है, जहां वे तमाम लोगों से मिलते-जुलते हैं और अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। लेकिन जब किसी भोज के मेनू और उसमें परोसे जाने वाले व्यंजनों को लेकर राजनीतिक दल आमने-सामने आ जाएं, तो मामला विवादित बन जाता है। हाल ही में एक ऐसे ही भोज का आयोजन हुआ था जिसमें राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई बड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया था। इसी आयोजन को लेकर जब पत्रकारों ने सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर से सवाल किया, तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखी और सीधे तौर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को अपने निशाने पर ले लिया। राजभर का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दल और सत्ता पक्ष के नेता एक-दूसरे को घेरने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं दे रहे हैं। खानपान की इस चर्चा ने अब सियासी गलियारों में एक नया मोड़ ले लिया है, जहां हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक है कि आखिर इस भोज के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और इस बयान के क्या दूरगामी राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।ओमप्रकाश राजभर के तीखे तेवर और अजय राय पर किया गया करारा कटाक्षअपनी बेबाक बयानबाजी और तीखे तेवरों के लिए मशहूर ओमप्रकाश राजभर ने इस मुद्दे पर बोलते हुए किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती और सीधा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राजनीति में कुछ लोग सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए हर जगह पहुंच जाते हैं, भले ही वहां की चीजें उनके अनुकूल हों या न हों। राजभर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जब अजय राय को यह अच्छी तरह पता था कि उस भोज में क्या परोसा जा रहा है और वे सार्वजनिक तौर पर खुद को शाकाहारी या मछली न खाने वाला बताते हैं, तो फिर ऐसी जगह जाने का औचित्य ही क्या था? उन्होंने कहा कि अगर आप किसी कार्यक्रम में सिर्फ राजनीति चमकाने या विरोध दर्ज कराने के लिए जाते हैं, तो आपकी नीयत पर सवाल उठना लाजमी है। राजभर के इस तीखे कटाक्ष ने कांग्रेस खेमे में हलचल पैदा कर दी है और उनके इस बयान को लेकर सियासी विश्लेषक भी अपने-अपने तरीके से कयास लगा रहे हैं। सुभासपा अध्यक्ष का यह अंदाज पुराना रहा है कि वे किसी भी मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखते हैं और विपक्षी नेताओं को घेरने में कभी पीछे नहीं हटते हैं। इस बार भी उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक अपनी एक अलग जगह बना ली है और कार्यकर्ता भी इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।कांग्रेस और अजय राय की तरफ से इस बयान पर क्या आ रही हैं प्रतिक्रियाएंओमप्रकाश राजभर के इस तीखे हमले के बाद कांग्रेस पार्टी और खुद अजय राय के समर्थकों की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ओमप्रकाश राजभर का यह बयान पूरी तरह से बचकाना और राजनीति से प्रेरित है, जिसका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का तर्क है कि एक सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेता का काम समाज के हर वर्ग और हर कार्यक्रम में जाकर लोगों से संवाद स्थापित करना होता है, न कि यह देखना कि थाली में क्या परोसा जा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी सामाजिक या राजनीतिक भोज में शिरकत करना महज खानपान तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह आपसी मेलजोल और संवाद का एक माध्यम होता है, जिसे राजभर जैसे नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए सनसनीखेज बना रहे हैं। अजय राय के करीबियों का यह भी कहना है कि राजभर जी हमेशा से ही उलटे-सीधे बयान देकर मीडिया की सुर्खियों में बने रहना पसंद करते हैं, और इस बार का यह बयान भी उसी राजनीतिक रणनीति का एक हिस्सा मात्र है। इस प्रकार दोनों दलों के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में वैसे भी सियासी पारा हमेशा हाई रहता है और हर एक बयान को बहुत बारीकी से परखा जाता है।यूपी की सियासत पर इस जुबानी जंग का कितना असर पड़ेगाउत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य में इस तरह के बयान अक्सर बड़े सियासी समीकरणों की तरफ इशारा करते हैं। ओमप्रकाश राजभर वर्तमान में सत्ताधारी एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं, जबकि अजय राय विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के तहत कांग्रेस पार्टी की कमान उत्तर प्रदेश में संभाल रहे हैं। ऐसे में दोनों दिग्गजों के बीच की यह तनातनी केवल एक भोज या खानपान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं। जब भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के कद्दावर नेता आपस में इस तरह के व्यक्तिगत और तीखे कटाक्ष करते हैं, तो चुनावी माहौल और ज्यादा गर्मा जाता है। जनता के बीच भी इन बयोंनों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगती हैं कि कैसे नेता छोटे-छोटे मुद्दों को भी बड़ा राजनीतिक हथियार बना लेते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान भले ही सतही तौर पर हल्के-फुल्के या व्यक्तिगत लग सकते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने और विरोधियों की घेराबंदी करने के लिए पूरी शिद्दत से करते हैं। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अजय राय इस बयान का कोई कड़ा जवाब देते हैं या फिर यह मामला यहीं शांत हो जाता है, लेकिन फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस 'मछली भोज' वाले बयान ने सियासी तापमान को काफी बढ़ा दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:24 pm

'मंत्री डेटा नहीं बनाते', GDP आंकड़ों पर सवाल उठाने पर पीयूष गोयल का विपक्ष और पूर्व वित्त सचिव पर हमला

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाने के लिए विपक्ष और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की आलोचना की।

जागरण 2 Sep 2026 10:23 pm

जन्माष्टमी पर मथुरा, रिंगस और वाराणसी के लिए स्पेशल ट्रेन का ऐलान, देखें पूरा शेड्यूल

रेलवे ने जन्माष्टमी के मौके पर दिल्ली से मथुरा, रिंगस और वाराणसी के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है. मथुरा और रिंगस के लिए चलने वाली जन्माष्टमी स्पेशल ट्रेनों में सिर्फ अनारक्षित कोच होंगे.

NDTV इंडिया 2 Sep 2026 10:23 pm

चार साल बाद खत्म हुआ इंतजार: सपा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत को मिली लखनऊ की कुर्क आलीशान कोठी

उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है, जहां समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी को लगभग चार साल लंबे कानूनी संघर्ष के बाद बड़ी सफलता हासिल हुई है। राजधानी लखनऊ के अति-सुरक्षित और पॉश इलाके डालीबाग में स्थित उनकी करीब 6700 वर्ग फीट में फैली आलीशान आवासीय कोठी को आखिरकार प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सीलमुक्त कर दिया है। बता दें कि अक्टूबर 2022 के दौरान उत्तर प्रदेश शासन और जिला प्रशासन द्वारा गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों का हवाला देते हुए इस बहुचर्चित और आलीशान संपत्ति को कुर्क कर लिया गया था, जिसके बाद से इस पर ताला लटका हुआ था और इसकी देखरेख व प्रशासनिक निगरानी का जिम्मा लखनऊ नगर निगम के आयुक्त को सौंप दिया गया था। इस कार्रवाई के खिलाफ अंसारी परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था और न्याय की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि डालीबाग स्थित यह आवासीय संपत्ति किसी भी प्रकार के संगठित अपराध या अवैध गतिविधियों से अर्जित नहीं की गई है, जिसके बाद कोर्ट ने इस संपत्ति को वैध करार देते हुए इसे तुरंत अवमुक्त करने का आदेश दिया था। निचली अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के अनुपालन में आखिरकार मंगलवार को प्रशासनिक और राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सील हटाने की विधिवत कार्रवाई पूरी की। इस दौरान खुद सांसद अफजाल अंसारी अपने परिजनों और स्थानीय तहसील प्रशासन के अधिकारियों के साथ मौके पर मौजूद रहे और कागजी औपचारिकताओं का पंचनामा तैयार करवाया गया। संपत्ति का वास्तविक दखल और चाबियां परिवार को सौंपे जाने की इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से इस हाई-प्रोफाइल मामले की चर्चा जोरों पर है। आइए इस पूरी कानूनी लड़ाई, कुर्की के इतिहास और सील खुलने के बाद सामने आए घटनाक्रम के हर एक पहलू को विस्तार से समझते हैं।अक्टूबर 2022 में गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई थी डालीबाग की इस कोठी की कुर्कीवर्ष 2022 का वह दौर उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक सुर्खियों में सबसे ऊपर रहा था, जब प्रदेश सरकार द्वारा माफिया और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत कई बड़ी और वीआईपी संपत्तियों को निशाना बनाया गया था। इसी कड़ी में अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह यानी 23 से 28 अक्टूबर 2022 के दौरान गाजीपुर जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी के सख्त आदेशों का पालन करते हुए गाजीपुर पुलिस की एक विशेष टीम राजधानी लखनऊ पहुंची थी। पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर डालीबाग स्थित इस आलीशान बंगले पर उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 14(1) के तहत कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया था और इसे अपने कब्जे में लेते हुए पूरी तरह सील कर दिया था। उस समय इस कार्रवाई को लेकर राज्य भर में भारी सनसनी फैल गई थी क्योंकि यह संपत्ति सपा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम पर आधिकारिक रूप से दर्ज थी। कुर्की की इस कार्रवाई के बाद से ही यह भव्य इमारत पूरी तरह वीरान पड़ी थी और इसकी सुरक्षा व प्रशासनिक निगरानी का जिम्मा लखनऊ नगर आयुक्त के अधीन आ गया था। परिवार के सदस्यों का कहना था कि यह संपत्ति पूरी तरह वैध और उनकी अपनी मेहनत की कमाई से अर्जित है, जिसका किसी भी आपराधिक गतिविधि से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद कानूनी पेचीदगियों के चलते यह आलीशान बंगला लंबे समय तक प्रशासनिक शिकंजे में जकड़ा रहा और अंसारी परिवार को अपने ही आशियाने से बेदखल रहना पड़ा।विशेष अदालत और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से मिली थी कानूनी राहतप्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ अफजाल अंसारी के परिवार ने हार नहीं मानी और न्याय के लिए निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक मजबूत कानूनी पैरवी की। गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने मामले के सभी दस्तावेजों, साक्ष्यों और गवाहों की गहराई से समीक्षा करने के बाद अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया कि डालीबाग स्थित यह आवासीय मकान किसी भी प्रकार के अवैध या गैंगस्टर नेटवर्क से कमाए गए धन से नहीं बनाया गया है। इसके बाद अदालत ने गाजीपुर के जिलाधिकारी को यह निर्देश दिया था कि वह आदेश पारित होने के 30 दिनों के भीतर इस मकान की सील खुलवाकर इसे वैध मालकिन फरहत अंसारी को वापस सौंप दें। हालांकि, इसके बावजूद जब तय समय सीमा के भीतर प्रशासनिक स्तर पर सील हटाने की प्रक्रिया में विलंब हुआ, तो परिवार की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सी. डी. सिंह की एकल पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता ने परिवार का पक्ष मजबूती से रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए तय समय सीमा के भीतर सकारण आदेश पारित करने और अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद जिला प्रशासन के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा कि वह अदालत के आदेश का अक्षरशः पालन करे और कुर्क संपत्ति को मुक्त करे।तहसीलदार और राजस्व टीम की मौजूदगी में खुली सील, परिवार को मिला कब्जाअदालत के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए आखिरकार वह दिन आ गया जब प्रशासनिक अमला डालीबाग स्थित इस विवादित और चर्चित कोठी पर पहुंचा। गाजीपुर और लखनऊ जिला प्रशासन के संयुक्त निर्देश के बाद मौके पर पहुंचे तहसीलदार, राजस्व विभाग के लेखपाल और स्थानीय पुलिस बल ने कानूनी औपचारिकताएं शुरू की। इस पूरी कार्रवाई के दौरान खुद सपा सांसद अफजाल अंसारी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मौके पर मौजूद रहे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में सबसे पहले संपत्ति के कागजात और सीमाओं का मिलान करने के लिए पैमाइश की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद सील खोलने से जुड़े सभी जरूरी कानूनी पंचनामे और दस्तावेज तैयार किए गए। इन तमाम प्रशासनिक और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद आखिरकार चार साल से बंद पड़े इस मुख्य द्वार के ताले खोल दिए गए और संपत्ति का वास्तविक दखल एक बार फिर से अंसारी परिवार को सौंप दिया गया। कोठी के अंदर प्रवेश करने पर परिवार के सदस्यों ने राहत की सांस ली, हालांकि इस दौरान लंबे समय से बंद पड़े होने के कारण घर के भीतर की स्थिति को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गईं। चार साल के लंबे अंतराल के बाद अपने घर की चाबी वापस मिलना अंसारी परिवार के लिए एक बड़ी कानूनी और नैतिक जीत माना जा रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:21 pm

नंदू गैंग के अनुराग और राजीव नयन के रिश्तेदार पुष्कर को UP STF ने दबोचा

उत्तर प्रदेश STF ने लखनऊ के विभूति खंड से दिल्ली के कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग के सदस्य अनुराग मिश्रा और पेपर लीक गैंग के सक्रिय सदस्य पुष्कर पांडे को गिरफ्तार किया है. अनुराग राजकुमार दलाल मर्डर केस में दो साल से फरार था, जबकि पुष्कर पर कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक में शामिल होने का आरोप है.

आज तक 2 Sep 2026 10:21 pm

'मिर्जापुर' में दिखाई बोल्डनेस, एक्ट्रेस को ऑफर हुईं एडल्ट फिल्में

पॉपुलर मिर्जापुर सीरीज में अनंग्शा बिस्वास ने जरीना का रोल कर नाम कमाया. शो में उनकी बोल्ड इमेज देखने को मिली थी.

आज तक 2 Sep 2026 10:20 pm

हत्या में उम्रकैद, जमानत पर बाहर आया तो फिर हत्या, क्राइम ब्रांच ने दबोचा

अहमदाबाद में हत्या के मामले में आजीवन कैद की सजा भुगत रहे हितेश सोलंकी ने जमानत पर बाहर आने के बाद एक और हत्या कर दी. वटवा GIDC के त्रिकमपुरा में मकान के कब्जे और किराए को लेकर हुए विवाद में अजीत सिंह पर हमला हुआ, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई. क्राइम ब्रांच ने हितेश और उसके भाई रवि को गिरफ्तार किया.

आज तक 2 Sep 2026 10:19 pm

6 या 7 सितंबर, अजा एकादशी का व्रत कब है? जानें सही तारीख और मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, अजा एकादशी की तिथि 6 सितंबर की शाम 7:29 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर की शाम 5:03 बजे समाप्त हो जाएगी. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा.

आज तक 2 Sep 2026 10:18 pm

Rewa में NH 39 पर बस और ट्रक की टक्कर, 5 यात्रियों की मौत और 30 घायल

रीवा (मध्यप्रदेश), दो सितंबर मध्यप्रदेश के रीवा में बुधवार शाम राष्ट्रीय राजमार्ग-39 पर एक निजी बस और ट्रक के बीच आमने-सामने की टक्कर में पांच लोगों की मौत हो गई एवं 30 अन्य घायल हो गए। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी के मुताबिक, रीवा जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर गुढ़ थानाक्षेत्र के बदवार में राष्ट्रीय राजमार्ग-39 पर यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि यात्री बस और ट्रक की आमने-सामने टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन पलट गए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) भावना मरावी ने ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से कहा कि अब तक पांच लोगों के मौत की पुष्टि हुई है और 30 अन्य घायल हैं। उन्होंने कहा कि सभी घायलों को संजय गांधी अस्पताल लाया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। मरावी ने कहा कि घटनास्थल पर अब भी बचाव अभियान जारी है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि और कोई यात्री बस में फंसा ना हो। मरावी ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक पलट गया और बस पानी से भरे एक नाले में जा गिरा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोगों की मौत पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की‌। यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज रीवा-सीधी राजमार्ग पर बस और ट्रक की टक्कर में हुई यात्रियों की मृत्यु का समाचार अत्यंत हृदय विदारक है। दिवंगतों की आत्मा को शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना है।’’उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारजनों को राज्य शासन की ओर से 2-2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 1-1 लाख रुपये की सहायता राशि देने के निर्देश दिए गए हैं। उपविभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अनुराग तिवारी ने बताया कि अस्पताल में अतिरिक्त बिस्तर भी आरक्षित किए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर अन्य घायलों का भी तत्काल इलाज किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तथा उसने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए कई एंबुलेंस मौके पर भेजी गईं। राष्ट्रीय राजमार्ग-39 उत्तर प्रदेश के झांसी को झारखंड की राजधानी रांची से जोड़ता है और यह मध्यप्रदेश से गुजरता है।

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 10:17 pm

लखनऊ में अफजाल अंसारी की सील कोठी का ताला खुला तो उड़े होश, अंदर बिखरा सामान, टूटे लॉकर और लाखों के गहने गायब मिलने से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके में स्थित सांसद अफजाल अंसारी की सील की गई कोठी को जब कानूनी प्रक्रिया के तहत खोला गया, तो अंदर का नजारा देखकर प्रशासनिक अधिकारियों और उनके समर्थकों के होश उड़ गए. पिछले कुछ समय से प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के चलते यह बहुचर्चित आवास सील बंद स्थिति में था, जिसके कारण इसके भीतर की असल स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे. जब संबंधित विभाग के अधिकारियों की निगरानी और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में इस सीलबंद कोठी का ताला खोला गया और टीम अंदर दाखिल हुई, तो वहां का मंजर बेहद चौंकाने वाला था. कोठी के भीतर का पूरा सामान अस्त-व्यस्त और पूरी तरह बिखरा हुआ था, कमियों के बीच धूल और गंदगी की परत जमी हुई थी, और सबसे बड़ा आघात उस समय लगा जब कमरों में बने हुए लोहे के भारी-भरकम लॉकर टूटे हुए पाए गए. शुरुआती जांच-पड़ताल और परिजनों के दावों के मुताबिक, इन टूटे हुए लॉकर्स के अंदर रखे लाखों रुपये कीमत के सोने-चांदी के बेशकीमती गहने और अन्य जरूरी दस्तावेज रहस्यमय तरीके से गायब मिल चुके हैं. इस घटना के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक भारी हलचल मच गई है और तरह-तरह के गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. आखिर इतनी सख्त सुरक्षा और सरकारी सील के बावजूद कोठी के भीतर इतनी बड़ी सेंधमारी कैसे संभव हो पाई, यह जांच का एक बहुत बड़ा और गंभीर विषय बन चुका है. आइए इस पूरी सनसनीखेज घटनाक्रम के हर एक पहलू और तह तक जाकर सिलसिलेवार तरीके से पूरी जानकारी प्राप्त करते हैं कि आखिर लखनऊ में बंद पड़े इस वीआईपी बंगले के अंदर असल में क्या कुछ घटित हुआ है.प्रशासनिक सील खुलने के बाद सामने आया लखनऊ की इस वीआईपी कोठी का चौंकाने वाला सचराजधानी लखनऊ के हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील इलाकों में शुमार जगहों पर नेताओं और दिग्गजों के आवासों की सुरक्षा और देखरेख को लेकर हमेशा से ही प्रशासन की पैनी नजर रहती है. अफजाल अंसारी से जुड़ा यह प्रतिष्ठित आवास भी पिछले दिनों कानूनी कार्रवाई के दायरे में आने के बाद प्रशासन द्वारा सील कर दिया गया था, जिसके बाद से इस पर ताला लटका हुआ था और किसी भी बाहरी व्यक्ति या मालिक का प्रवेश पूरी तरह वर्जित था. नियमानुसार जब किसी संपत्ति को प्रशासनिक आदेश के तहत सील किया जाता है, तो उसकी हिफाजत और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन या अधिकृत सुरक्षा बलों की होती है ताकि अंदर रखी परिसंपत्तियों और सामान की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. लेकिन जब लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद या कोर्ट के आदेश पर इस कोठी का सील हटाने और उसका भौतिक सत्यापन करने के लिए प्रशासनिक टीम अंदर पहुंची, तो वहां की तस्वीर ने सबको हैरान कर दिया. घर के मुख्य द्वारों से लेकर भीतर के कमरों तक के ताले तो सुरक्षित थे या उन्हें खोला गया, लेकिन अंदर का हाल ऐसा था मानो वहां कोई गहरी तोड़फोड़ की गई हो. कमरों में रखे सोफे, बेड, अलमारियां और अन्य कीमती घरेलू सामान पूरी तरह अपनी जगह से हिले हुए और बिखरे पड़े थे. इस अप्रत्याशित स्थिति को देखकर वहां मौजूद अधिकारी भी कुछ देर के लिए अछंभे में पड़ गए कि आखिर सीलबंद संपत्ति के भीतर इस प्रकार की अव्यवस्था और तोड़फोड़ होने के पीछे असली वजह क्या हो सकती है.टूटे हुए लॉकर और गायब हुए लाखों के गहनों ने खड़े किए सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालइस पूरी घटना का जो सबसे चिंताजनक और बड़ा पहलू सामने आया है, वह घर के अंदर बने तिजोरियों और लॉकर्स से जुड़ा हुआ है. जब प्रशासनिक टीम और संबंधित पक्षों ने बेडरूम और स्टोर रूम की तलाशी ली, तो उनकी नजर वहां बने मजबूत लोहे के लॉकर्स पर पड़ी, जिन्हें बेहद आक्रामक तरीके से खोलने या तोड़ने की कोशिश की गई थी. वे लॉकर पूरी तरह टूटे हुए और क्षतिग्रस्त हालत में पाए गए, जिन्हें देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें किसी खास मकसद से जबरन खोला गया था. परिजनों और वकीलों की मौजूदगी में जब इन टूटे हुए लॉकर्स की जांच की गई, तो पता चला कि उसके अंदर रखे गए पुश्तैनी और आधुनिक सोने-चांदी के गहने, डायमंड ज्वैलरी और नगदी गायब हो चुकी है. अनुमान के मुताबिक चोरी या गायब हुए इन कीमती आभूषणों और सामानों की कुल कीमत लाखों रुपये से भी ज्यादा आंकी जा रही है. एक तरफ जहां यह बंगला पूरी तरह सील था और बाहर पुलिस या प्रशासन का पहरा होना चाहिए था, वहीं दूसरी तरफ अंदर रखे इतने कीमती सामान का गायब हो जाना सीधे तौर पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा और काला धब्बा लगाता है. क्या इस सीलबंद कोठी के भीतर किसी बाहरी व्यक्ति ने सेंध लगाई थी या फिर इसके पीछे कोई और अंदरूनी साजिश काम कर रही थी, इन तमाम बिंदुओं पर पुलिस अब गहराई से छानबीन करने में जुट गई है.फॉरेंसिक टीम की एंट्री और फिंगरप्रिंट्स जुटाने की प्रक्रिया हुई तेजलखनऊ की इस सीलबंद कोठी के भीतर हुई इस बड़ी चोरी और तोड़फोड़ के खुलासे के बाद मामला केवल सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संगीन आपराधिक मामले का रूप ले चुका है. घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ही उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री यानी एफएसएल (FSL) की विशेष टीम को रवाना किया गया. फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम ने मौके पर पहुंचकर टूटे हुए लॉकर्स, कमरों के दरवाजों, खिड़कियों और बिखरे पड़े सामानों पर से फिंगरप्रिंट्स यानी उंगलियों के निशान और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाने का काम शुरू कर दिया है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर किन लोगों के हाथ इन तिजोरियों तक पहुंचे थे और इस वारदात को अंजाम देने में कितने लोग शामिल हो सकते हैं. चूंकि कोठी लंबे समय से सील थी, इसलिए वहां आम लोगों का आना-जाना पूरी तरह बंद था, जिससे यह अंदेशा और ज्यादा गहरा जाता है कि इस घटना में या तो किसी ऐसे व्यक्ति का हाथ है जिसे इस संपत्ति के अंदरूनी नक्शे और लॉकर्स की सटीक जानकारी थी, या फिर प्रशासनिक सुरक्षा में कोई बहुत बड़ी चूक हुई है. फॉरेंसिक जांच के जो भी वैज्ञानिक परिणाम सामने आएंगे, वे इस पूरे मामले से पर्दा उठाने में सबसे अहम कड़ी साबित होंगे और पुलिस उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई को गति देगी.राजनीतिक हलकों में मचा बवाल और विपक्ष के तीखे तेवरइस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से उबाल आ गया है और विपक्षी दलों को सरकार तथा प्रशासन को घेरने का एक और बड़ा मुद्दा मिल गया है. समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार और कानून-व्यवस्था की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि जब एक हाई-प्रोफाइल नेता की सील की गई संपत्ति प्रशासन के सीधे नियंत्रण और ताले में थी, तो वहां से लाखों के गहने और सामान कैसे गायब हो सकते हैं, यह राज्य में सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है. नेताओं का यह भी आरोप है कि इस प्रकार की घटनाएं यह साबित करती हैं कि सरकारी अभिरक्षा में रखी गई संपत्तियों और सामानों तक भी सुरक्षित नहीं हैं. दूसरी ओर, सत्ता पक्ष और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि वे इस पूरे मामले की बहुत ही निष्पक्षता और गंभीरता से जांच कर रहे हैं. पुलिस ने आश्वासन दिया है कि इस घटना के पीछे चाहे जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही पूरे मामले का सच सबके सामने लाया जाएगा. राजनीतिक बयानों और आरोपों के इस दौर के बीच यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और आम जनता के बीच भी चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है.आगे की कानूनी कार्रवाई और पुलिस जांच की दिशाइस पूरी घटना के बाद से अफजाल अंसारी के परिवार और उनके कानूनी सलाहकारों की तरफ से भी स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग तेज कर दी गई है. उनका साफ कहना है कि जब तक इस बात का खुलासा नहीं हो जाता कि सील बंद अवधि के दौरान कोठी की चाबियां किसके पास थीं और अंदर कौन-कौन लोग दाखिल हुए थे, तब तक न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती. पुलिस अब उन सभी प्रशासनिक दस्तावेजों, रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में लगी है जो इस कोठी के सील होने से लेकर ताले खुलने के इस पूरे सफर के दौरान बनाए गए थे. साथ ही, उस अवधि के दौरान तैनात रहे सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों से भी पूछताछ किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है. लखनऊ पुलिस का यह दावा है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर इस अनसुलझे रहस्य को बहुत जल्द सुलझा लिया जाएगा. यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत संपत्ति के नुकसान से जुड़ा है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और सुरक्षा के बुनियादी ढांचे पर भी एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ गया है, जिसका जवाब ढूंढना अब पुलिस और प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:15 pm

पाकिस्तान में हिंदू मंदिर को तोड़े जाने पर भारत सख्त, कहा- दोषियों पर हो कार्रवाई

भारत ने पाकिस्तान के नरोवाल में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की घटना की कड़ी निंदा की है. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से तत्काल और पारदर्शी जांच कराने तथा जिम्मेदारों को सजा देने की मांग की है.

आज तक 2 Sep 2026 10:13 pm

कौन हैं निर्मला यादव? जो बनीं राम मंदिर ट्रस्ट की इकलौती महिला सदस्य

शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव राम मंदिर ट्रस्ट की इकलौती महिला सदस्य बनी हैं.,निर्मला यादव ने नियुक्ति को प्रभु श्रीराम का प्रसाद बताया और ट्रस्ट में पारदर्शिता के साथ काम करने की बात कही.

आज तक 2 Sep 2026 10:11 pm

कम मेकअप में भी दिखना चाहती हैं नेचुरली खूबसूरत? यह एक स्टेप जिससे चेहरा दिखेगा एकदम फ्लॉलेस और ग्लोइंग

आज के इस आधुनिक दौर में मेकअप सिर्फ चेहरे के दाग-धब्बों को छिपाने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह खुद को आत्मविश्वास से भरने और अपनी नेचुरल खूबसूरती को और ज्यादा निखारने का एक बेहतरीन तरीका बन चुका है. जब भी हम किसी पार्टी, ऑफिस या कैजुअल आउटिंग के लिए तैयार होते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला ख्याल यह आता है कि हमारा लुक ऐसा होना चाहिए जो बहुत ज्यादा हैवी या लाउड न लगे, बल्कि बेहद सटल, फ्रेश और नेचुरल दिखे. अक्सर लोग जब मेकअप करते हैं, तो वे जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर बैठते हैं, जिसकी वजह से चेहरा प्लास्टिक जैसा या केकड़ी यानी पैची नजर आने लगता है और दूर से ही पता चल जाता है कि चेहरे पर टनों कॉस्मेटिक्स थोपे गए हैं. इसके विपरीत आज के मॉडर्न जनरेशन में 'नो-मेकअप मेकअप लुक' यानी ऐसा मेकअप जो किया भी गया हो और देखने वाले को ऐसा लगे कि आपकी स्किन नेचुरली इतनी flawless और चमकदार है, सबसे ज्यादा ट्रेंड में बना हुआ है. इस तरह के लुक को कैरी करने के लिए किसी प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट की जरूरत नहीं है, बल्कि अगर आपको सही तकनीक और सही स्टेप्स की जानकारी हो, तो आप घर बैठे ही चुटकियों में यह कमाल कर सकती हैं. मेकअप के इस जादुई और बेहद आसान तरीके में हर एक स्टेप का अपना एक अलग महत्व होता है, जिसे यदि सही क्रम में और सही मात्रा में फॉलो किया जाए तो आपकी खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं. आइए बिना किसी देरी के विस्तार से जानते हैं कि 'नो-मेकअप मेकअप लुक' को परफेक्ट तरीके से अचीव करने के लिए आपको किस स्टेप पर क्या और कैसे करना चाहिए ताकि लोग आपकी नेचुरल स्किन की तारीफ करते न थकें.त्वचा की सही तैयारी यानी स्किन प्रेप और हाइड्रेशन का महत्वकिसी भी खूबसूरत मेकअप की इमारत मजबूत नींव पर टिकी होती है, और मेकअप की दुनिया में वह मजबूत नींव 'स्किन प्रेप' यानी त्वचा की सही तैयारी को माना जाता है. अगर आपकी स्किन अंदर से हाइड्रेटेड और नौरिश्ड नहीं है, तो आप दुनिया का कितना भी महंगा फाउंडेशन या कंसीलर क्यों न लगा लें, वह थोड़ी देर बाद ड्राई या पैची दिखने लगेगा. नो-मेकअप मेकअप लुक का सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम यह है कि आप अपने चेहरे को किसी माइल्ड और सल्फेट-फ्री क्लींजर से अच्छी तरह धोकर साफ कर लें ताकि दिनभर की धूल-मिट्टी और एक्स्ट्रा ऑयल निकल जाए. चेहरा साफ करने के बाद बारी आती है टोनिंग और मॉइश्चराइजेशन की, जिसके लिए आपको अपनी स्किन टाइप के हिसाब से एक लाइटवेट जेल-बेस्ड या क्रीम-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाना चाहिए. मॉइश्चराइजर लगाने के बाद चेहरे पर एक अच्छा और सनस्क्रीन लगाना बिल्कुल न भूलें ताकि आपकी त्वचा धूप की हानिकारक किरणों से सुरक्षित रह सके. जब आपकी त्वचा अंदर से मॉइश्चराइज्ड और प्लंप होती है, तो उस पर जो भी प्रोडक्ट लगाया जाता है वह स्किन के साथ इस तरह घुल-मिल जाता है कि अलग से कुछ थोपा हुआ नहीं लगता. यही वह सीक्रेट स्टेप है जो आपके चेहरे पर एक नेचुरल और ड्यूई ग्लो लेकर आता है, जिससे आपकी स्किन अंदर से हेल्दी नजर आने लगती है.फाउंडेशन को कहें अलविदा और लाइटवेट स्किन टेंट या बीबी क्रीम का करें इस्तेमालहेवी बेस और थिक कवरेज वाले फाउंडेशन 'नो-मेकअप लुक' के सबसे बड़े दुश्मन माने जाते हैं, क्योंकि वे चेहरे पर एक साफ परत बना देते हैं जो दूर से ही नजर आने लगती है. अगर आप वाकई ऐसा लुक चाहती हैं जो किसी को पता न चले कि आपने कुछ लगाया है, तो आपको फाउंडेशन के भारी डिब्बों को अपनी वैनिटी से बाहर करना होगा. फाउंडेशन की जगह आप एक अच्छी क्वालिटी की बीबी क्रीम, सीसी क्रीम या फिर एक लाइटवेट लिक्विड स्किन टेंट का चुनाव कर सकती हैं. स्किन टेंट या बीबी क्रीम आपके चेहरे के हल्के-फुल्के काले घेरे, रेडनेस और असमान रंगत को बहुत ही खूबसूरती से ब्लेंड कर देती है, और किसी को यह अहसास तक नहीं होता कि आपने चेहरे पर कोई बेस प्रोडक्ट लगाया है. इसे लगाने के लिए अपनी उंगलियों की पोरों या एक नम ब्यूटी ब्लेंडर का इस्तेमाल करें ताकि प्रोडक्ट चेहरे पर समान रूप से फैल जाए और स्किन में बिल्कुल अंदर तक समा जाए. यदि आपके चेहरे पर डार्क स्पॉट्स या पिंपल्स के निशान बहुत ज्यादा गहरे हैं, तो पूरे चेहरे पर फाउंडेशन पोतने के बजाय केवल उन खास जगहों पर थोड़ा सा कंसीलर लगाकर उंगली से टैप कर लें. इस स्मार्ट ट्रिक से आपका चेहरा एकदम साफ, बेदाग और नेचुरल नजर आएगा और किसी को भनक तक नहीं लगेगी कि आपने कोई बेस मेकअप किया है.नेचुरल फ्लश पाने के लिए क्रीम ब्लश और फेस को डायमेंशन देने की कलाचेहरे पर एक मुर्झाया हुआ और डलपन सा लगने लगता है अगर गालों पर गुलाबी या पीचिश नेचुरल रंगत न हो, और इसके लिए ब्लश सबसे जरूरी टूल माना जाता है. नो-मेकअप लुक में पाउडर ब्लश की जगह हमेशा 'क्रीम ब्लश' या लिक्विड टिंट का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि क्रीम प्रोडक्ट्स स्किन के साथ बहुत ही नैचुरली मर्ज हो जाते हैं. अपने गालों के सेब यानी एप्पल ऑफ द चीक्स पर थोड़ी सी मात्रा में पिंक या पीच कलर का लिक्विड टिंट लगाएं और उसे अपनी उंगलियों की मदद से ऊपर की तरफ कानों की तरफ हल्का-हल्का ब्लेंड कर दें. इस तरह से ब्लश लगाने से ऐसा प्रतीत होता है कि आपके गाल धूप की वजह से नेचुरली गुलाबी और खिले-खिले नजर आ रहे हैं. इसके साथ ही चेहरे को थोड़ा सा डिफाइन करने के लिए आप चाहे तो बहुत ही हल्के हाथ से नो-मेकअप कंटूरिंग या वॉर्मर का इस्तेमाल कर सकती हैं, लेकिन अगर आप इसे पूरी तरह छोड़ भी दें तो भी कोई हर्ज नहीं है. चीकबोन्स और नाक के टिप पर थोड़ा सा लिक्विड हाइलाइटर लगाना इस लुक का एक और सीक्रेट है, जो सूरज की रोशनी पड़ने पर एक सटल और शाइनी ग्लो प्रदान करता है. याद रखें कि ब्लश और हाइलाइटर की मात्रा हमेशा कम से कम होनी चाहिए ताकि वह मेकअप कम और आपकी नेचुरल सेहतमंद त्वचा ज्यादा लगे.आंखों और आईब्रोज को सटल लुक देना और बिना लाउड मस्करा के जादूआंखें हमारे चेहरे का सबसे आकर्षक हिस्सा होती हैं और मेकअप में आंखों की सही फिनिशिंग पूरे लुक को बदल कर रख देती है. नो-मेकअप लुक में कभी भी डार्क ब्लैक स्मोकी आइज या मोटी आईलाइनर विंग्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता है क्योंकि वे बहुत ज्यादा ड्रमैटिक और लाउड लगते हैं. अपनी आंखों को बड़ा और तरोताजा दिखाने के लिए सबसे पहले अपनी आईब्रोज यानी भौंहों को एक आईब्रोज पेंसिल या स्पूली की मदद से सेट कर लें, जिससे वे भरी हुई और नेचुरली उठी हुई दिखें. यदि आपकी आईब्रोज हल्की हैं, तो बहुत ही हल्के हाथों से ब्राउन पेंसिल से गैप्स को भरें ताकि आर्टिफिशियल लुक न आए. इसके बाद पलकों यानी पलकों के उभार के लिए एक क्लियर मस्करा या बहुत ही लाइटवेट ब्लैक मस्करा का एक सिंगल कोट लगाएं, जिससे पलकें मुड़ी हुई और लंबी नजर आएं. अगर आप चाहें तो अपनी आंखों की वॉटरलाइन पर सफेद या न्यूड काजल पेंसिल का इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे आंखें बड़ी और और ज्यादा ब्राइट दिखाई देती हैं. पलकों पर डार्क ब्लैक हैवी काजल या थिक लाइनर लगाने से बचें, क्योंकि यह आपके नो-मेकअप लुक को तुरंत ही हेवी पार्टी मेकअप में बदल देगा, जिससे नेचुरल चार्म खत्म हो जाता है.लिप्स को दें परफेक्ट न्यूड टच और पूरे लुक को सेट करने का अंतिम चरणइस पूरे नेचुरल और सटल मेकअप सफर का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव आपके होंठों को सजाना और पूरे मेकअप को लॉक करना होता है. नो-मेकअप लुक में कभी भी डार्क रेड, मैरून या डार्क पर्पल लिपस्टिक का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे बहुत ज्यादा बोल्ड और लाउड इंप्रेशन देते हैं. इसके बजाय आपको हमेशा अपनी स्किन टोन से मिलते-जुलते न्यूड, पिंकिश न्यूड या पीची न्यूड शेड्स की लिपस्टिक या टिंटेड लिप बाम का चुनाव करना चाहिए. आप चाहें तो अपने होंठों पर थोड़ा सा लिप ऑयल या न्यूड लिप ग्लॉस भी लगा सकती हैं, जिससे आपके होंठ नेचुरली प्लंप, हाइड्रेटेड और जूसी नजर आएंगे. लिपस्टिक लगाने के बाद अपने मेकअप को लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए चेहरे पर एक अच्छा सेटिंग स्प्रे या फिक्सिंग मिस्ट छिड़क लें, जो सारे प्रोडक्ट्स को आपस में सेट कर देगा. फिक्सिंग मिस्ट छिड़कने से चेहरे का सारा एक्स्ट्रा पाउडरी या हार्श लुक खत्म हो जाता है और एक बेहद नेचुरल, फ्रेश और ड्यूई फिनिशिंग मिलती है जो पूरे दिन टस से मस नहीं होती. इन आसान और स्मार्ट स्टेप्स को फॉलो करके आप जब घर से बाहर निकलेंगी, तो लोग आपकी इस खूबसूरती के कायल हो जाएंगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा कि आपने कोई मेकअप किया है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Sep 2026 10:10 pm

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बने राम मंदिर के सीईओ, गोविंददेव गिरि को महासचिव का दायित्व

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को अयोध्या में संपन्न हुई, जिसमें ट्रस्ट के तीन रिक्त पदों पर नए न्यासियों की नियुक्ति के साथ ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन को मंजूरी दी गई। चयन समिति की अनुशंसा के बाद सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का मुख्य कार्यकारी अधिकारी […] The post पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बने राम मंदिर के सीईओ, गोविंददेव गिरि को महासचिव का दायित्व appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 2 Sep 2026 10:09 pm

सीनियर बात करने को तैयार, फिर भी हिचकिचाते हैं Gen G; लिंक्डइन की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

लिंक्डइन की रिपोर्ट के अनुसार, जेन-जी पेशेवर आंके जाने के डर से करियर में मददगार लोगों से संपर्क करने में हिचकिचाते हैं। भारत में 83% जेन-जी ऐसे लोगों से बात करने में संकोच करते हैं, जिससे उनके करियर को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

जागरण 2 Sep 2026 10:05 pm

स्वरा के बयान से फिर चर्चा में जौहर, क्या है सन 1303 के चित्तौड़ की कहानी?

स्वरा भास्कर के बयान के बाद जौहर एक बार फिर बहस के केंद्र में है. जौहर को इतिहास और लोककथाओं की नजर से देखना जरूरी है. आखिर 1303 में चित्तौड़ में क्या हुआ था?

आज तक 2 Sep 2026 10:04 pm

कांग्रेस ने की थी राजस्थान की स्थिति खराब : भजनलाल शर्मा

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर प्रदेश की स्थिति खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने स्थिति में बेहद सुधार किया है। शर्मा बुधवार को यहां नगर निकाय चुनाव के लिए जारी भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए […] The post कांग्रेस ने की थी राजस्थान की स्थिति खराब : भजनलाल शर्मा appeared first on Sabguru News .

सबगुरु 2 Sep 2026 10:04 pm

Haryana में गिरा जन्म के समय Sex Ratio, Congress नेता राव नरेंद्र सिंह ने उठाए सवाल

चंडीगढ़, दो सितंबर हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने बुधवार को राज्य में जन्म के समय लिंगानुपात में ‘‘लगातार गिरावट’’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला। सिंह ने कहा कि जिस हरियाणा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत की थी, आज उसी राज्य में पैदा होने वाली लड़कियों की संख्या लगातार घट रही है, जो सरकार के दावों की वास्तविकता उजागर करती है। सिंह ने कहा कि हाल में संपन्न विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। हरियाणा में जून 2026 तक जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) 900 दर्ज किया गया है, जबकि पूरे 2025 और 2019 में यह 923 था। कांग्रेस नेता सिंह ने एक बयान में कहा, ‘‘हरियाणा में जन्म के समय लिंगानुपात 2025 में 923 था, लेकिन जून 2026 तक घटकर केवल 900 रह गया—महज छह महीने में 23 अंकों की गिरावट। इसका मतलब है कि 1,000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 23 कम हो गई है। यह करीब आठ वर्षों में राज्य में दर्ज सबसे निचला स्तर है।’’उन्होंने कहा कि सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के नाम पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है और विज्ञापन जारी कर रही है, लेकिन पैदा होने वाली लड़कियों का अनुपात जमीनी स्तर पर लगातार घट रहा है। उन्होंने कहा कि यह महज आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों और निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता का स्पष्ट संकेत है। सिंह ने कहा कि जिलेवार आंकड़े भी चिंता का कारण हैं। उन्होंने कहा, ‘‘चरखी दादरी में लिंगानुपात 913 से घटकर 829 हो गया।’’उन्होंने कहा कि अंबाला में यह अनुपात 2019 के 959 से घटकर जून 2026 तक 884 हो गया। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में यह 910 से घटकर 871, रेवाड़ी में 919 से घटकर 891, झज्जर में 914 से घटकर 871, जींद में 938 से घटकर 878, पानीपत में 939 से घटकर 880, कैथल में 919 से घटकर 903 और यमुनानगर में 936 से घटकर 895 हो गया। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, करनाल में 945, पलवल में 930, फरीदाबाद में 920, नूंह में 918 और फतेहाबाद में 917 का लिंगानुपात तुलनात्मक रूप से बेहतर रहा। सरकार के अनुसार, कन्या भ्रूण हत्या रोकने और लिंगानुपात में सुधार के लिए गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम तथा चिकित्सा गर्भपात अधिनियम के तहत 1,422 मामले दर्ज किए गए हैं। ‘बेटी के साथ सेल्फी’, ‘प्यारी बेटी न्यूजलेटर’ और फिल्म महोत्सव जैसी जागरूकता पहल भी आयोजित की जा रही हैं।

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 10:02 pm

'सिस्टम तबाह, चिड़‍िया चुग गई...', PAK क्रिकेटर ने PCB पर साधा निशाना

इंग्लैंड के खिलाफ लगातार दो टेस्ट हारने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट में भूचाल आ गया है. PCB ने सात खिलाड़ियों को वापस बुलाने के साथ हेड कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी हटा दिया. इस बीच लेग स्पिनर उसामा मीर ने बिना नाम लिए बोर्ड पर हमला बोला और कहा कि पूरा सिस्टम तबाह कर दिया गया.

आज तक 2 Sep 2026 10:00 pm

राहुल गांधी को बड़ी राहत; नागरिकता पर सवाल उठाने वाले नहीं दे पाए कोई सबूत; HC में अर्जी खारिज

जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने इस आरोप को साबित करने के लिए एक भी दस्तावेज पेश नहीं कर पाया कि गांधी यूनाइटेड किंगडम (UK) के नागरिक थे।

लाइव हिन्दुस्तान 2 Sep 2026 9:54 pm

बांदा में आफत बनी बारिश, कच्ची दीवार गिरने से दो महिलाओं की मौत

उत्तर प्रदेश के बांदा में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है. बबेरू तहसील क्षेत्र के दो अलग-अलग गांवों में कच्ची दीवारें गिरने से दो बुजुर्ग महिलाओं की मौत हो गई. हादसों के बाद परिवारों में चीख-पुकार मच गई. प्रशासन ने पोस्टमार्टम के बाद आपदा प्रबंधन के तहत 24 घंटे में मुआवजा देने की बात कही है.

आज तक 2 Sep 2026 9:53 pm

पीने के अलावा भी कॉफी के हैं कमाल के इस्तेमाल, इन 6 कामों आएंगी काम

कॉफी सिर्फ सुबह की थकान मिटाने के लिए नहीं है. इसके बचे हुए ग्राउंड्स को घर के कई कामों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. फ्रिज की बदबू कम करने से लेकर सफाई और पौधों की देखभाल तक, जानिए कॉफी के 6 आसान घरेलू इस्तेमाल के बारे में.

आज तक 2 Sep 2026 9:50 pm

UP Flood: 32 जिलों में बिगड़े हालात, हादसों में तीन लोगों की गई जान

लखनऊ, दो सितंबर उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिमी मानसून के सक्रिय रहने के बीच 32 जिले इस वक्त बाढ से प्रभावित हैं। बुधवार को राज्य में वर्षाजनित हादसों में एक बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गयी। राज्य सरकार ने एक बयान में कहा कि अब तक 32 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और फिलहाल अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चंदौली, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हापुड़, हरदोई, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, उन्नाव और वाराणसी समेत 22 जिलों में हालात खराब हैं। बयान के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 1,528 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है तथा राहत कार्यों के लिए सैकड़ों नौकाएं, बाढ़ चौकियां और मेडिकल टीम तैनात की गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार को कुल 742 बाढ़ चौकियां, 452 नावें और मोटरबोट तथा 225 मेडिकल टीम काम कर रही थीं, जबकि 105 राहत शिविरों में 2,460 लोग रह रहे थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रतापगढ़ के नवाबगंज थानाक्षेत्र के छोटी कोठरिया गांव में लगातार बारिश के बीच एक कच्चा मकान ढहने से मलबे में दबकर 18 महीने के प्रियांश की मौत हो गई। अमरोहा के गजरौला में भारी बारिश के दौरान एक दुकान का छज्जा गिरने से शेरा (32) और सुरेश (55) मौत हो गयी। उपजिलाधिकारी शैलेश दुबे ने कहा कि इस बात की जांच की जा रही है कि वह छज्जा बारिश के कारण गिरा या अपनी जर्जर हालत की वजह से। चित्रकूट से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने पहाड़ी थानाक्षेत्र के चौरा गांव में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से फंसे करीब 150 लोगों को बचाया। पीएसी की बाढ़-राहत प्लाटून ने स्थानीय प्रशासन की मदद से मोटरबोट का इस्तेमाल किया और लोगों को भोजन, राहत सामग्री तथा चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। बलिया उत्तर प्रदेश में बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है, जहां गंगा और सरयू का जलस्तर बढ़ने से सदर, बैरिया एवं बांसडीह तहसीलों के गांवों और शहरी इलाकों में लगभग 20,500 लोग प्रभावित हुए हैं। बलिया जिला प्रशासन ने 6,500 राशन किट, 33,843 दवा किट और पके हुए भोजन के 83,092 पैकेट बांटे हैं। पीलीभीत में भारी बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद शारदा, देओहा एवं खकरा नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बनबसा बैराज से शारदा नदी में दो लाख क्यूसेक से ज़्यादा पानी छोड़ा गया, जबकि नानक सागर बांध से देओहा नदी में 30 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने हालात सामान्य होने तक पहली से आठ कक्षाओं तक के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है। खकरा नदी पर एक पुल पानी में डूब गया, जिससे लगभग 18 गांवों का सड़क संपर्क टूट गया। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई। पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में ‘अंडरग्राउंड केबल बॉक्स’ में बारिश का पानी घुसने के कारण 200 बिस्तरों वाले अस्पताल की मुख्य बिजली आपूर्ति 34 घंटे से ज्यादा समय तक बाधित रही। लखीमपुर खीरी में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने मोहना नदी के गिरजा बैराज एफ्लक्स बांध पर बाढ़ और कटान-रोधी कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इंजीनियरों को चौबीसों घंटे काम करने का निर्देश दिया और पानी में डूबे इलाके में मौजूद लगभग एक दर्जन घरों के निवासियों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का आदेश दिया। इस बीच, गाजियाबाद जिला प्रशासन ने बताया कि मौसम विभाग ने चार सितंबर तक भारी बारिश और बिजली गिरने को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे बेवजह यात्रा न करें, जर्जर इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों या तारों से दूर रहें और खराब मौसम के दौरान बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर ही रखें।

प्रभासाक्षी 2 Sep 2026 9:47 pm

दिल्ली के 5-स्टार होटलों को FSSAI ने भेजा नोटिस, फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड का पालन करने की दी चेतावनी

खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने देश के प्रमुख फाइव स्टार होटलों को खाद्य सुरक्षा नियमों और स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।

जागरण 2 Sep 2026 9:46 pm

लद्दाख से LoC तक दुश्मन के टैंकों पर कहर बरपाएगी जैवलिन मिसाइल, भारत खरीदेगा नहीं बल्कि खुद बनाएगा!

भारत और अमेरिका के बीच हुए रक्षा सहयोग समझौते के तहत अब जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल का निर्माण भारत में किया जाएगा. यह मिसाइल लद्दाख और LoC जैसे इलाकों में भारत की ताकत बढ़ाएगी.

NDTV इंडिया 2 Sep 2026 9:40 pm