30 की जवान बहू, CCTV से नजर... चौंका देगी कानपुर में कारोबारी हत्याकांड की कहानी
कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में चौंकाने वाला मोड़ आया है. ससुर की मौत पर रोती नजर आई करीब 30 साल की बहू शालू को पुलिस ने हत्या की कथित साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया है. CCTV फुटेज से पूर्व नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर तक पुलिस पहुंची.
कौशल किशोर की नाराजगी, अब हीरा ठाकुर का एग्जिट... अवध में कैसे संभालेगी बीजेपी?
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक तापमान बढ़ने के साथ ही अवध बेल्ट में भाजपा की चुनौतियां बढ़ती दिख रही हैं. कौशल किशोर की सार्वजनीक नाराजगी और हीरा ठाकुर जैसे ओबीसी नेताओं के पाला बदलने से पार्टी के 'सोशल इंजीनियरिंग' और 'गैर-जाटव दलित' समीकरण पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
तेलंगाना विधानसभा परिसर में स्पेशल चीफ सेक्रेटरी नवीन मित्तल के पर्सनल सेक्रेटरी राजू की हार्ट अटैक से मौत हो गई. मंत्री वकीटी श्रीहरि ने उन्हें बचाने के लिए CPR भी दिया.
मंत्री देते रहे CPR, हार्ट अटैक से अधिकारी के PS का निधन
तेलंगाना विधानसभा परिसर में स्पेशल चीफ सेक्रेटरी नवीन मित्तल के पर्सनल सेक्रेटरी राजू की हार्ट अटैक से मौत हो गई. मंत्री वकीटी श्रीहरि ने उन्हें बचाने के लिए CPR भी दिया.
दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे पर सियासत, विपक्ष ने BJP सरकार पर उठाए सवाल
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां एक तीन मंजिला इमारत जमींदोज हो गई. इस इमारत में कई छात्र रह रहे थे, जिसके कारण पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. इस हादसे पर अब जमकर राजनीति भी शुरू हो गई है. विपक्षी दल इस बड़ी लापरवाही को लेकर सरकार और एमसीडी प्रशासन पर लगातार हमला बोल रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि आखिरकार इस घटना का जिम्मेदार कौन है.
नाश्ते में अंकुरित मूंग-चने से बनाएं क्रिस्पी चीला, स्वाद है लाजवाब
Sprouts Chilla Recipe: अगर आप दिन की शुरुआत प्रोटीन से भरपूर और टेस्टी नाश्ते के साथ करना चाहते हैं तो स्प्राउट्स चीला एक बढ़िया ऑप्शन है. अंकुरित मूंग और काले चने से तैयार यह चीला प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है और इसे कम तेल में आसानी से बनाया जा सकता है.
सत्य निकेतन हादसे में खुलासा, किराए के लालच में फ्लोर बढ़ाने का आरोप
दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को हुए बिल्डिंग हादसे की FIR में निर्माण को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस के मुताबिक, बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल उर्फ गुप्ता और उनके भाई ने किराए के लालच में कई साल पुरानी इमारत के ऊपर कथित तौर पर चार मंजिलें बनवा दीं. पुलिस का आरोप है कि मालिकों को पता था कि पुरानी बिल्डिंग की नींव अतिरिक्त भार सहने की स्थिति में नहीं है, इसके बावजूद निर्माण जारी रखा गया.
'बस इंडिया को हराना है!' कम नहीं हुई पाकिस्तान की अकड़
पाकिस्तान को महिला एशिया कप में भारत के हाथों शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद पाकिस्तानी फैन्स भारतीय टीम को हराने का सपना देख रहे हैं.
फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? सऊदी अरब के प्लांट्स पर हूतियों का हमला; लगी भीषण आग
सऊदी अरब के तेल प्लांट्स पर हूतियों ने हमला कर दिया है। जानकारी के मुताबिक कई यूनिट तबाह हो गए हैं। अब भी भीषण आग लगी हुई है। इन घटनाओं में 70 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।
शिक्षक भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, RTE-NCTE-UGC की योग्यता पूरी किए बिना नियुक्ति पर रोक
यह मामला राजेश चौहान की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में ऐसी कानूनी व्यवस्थाओं को चुनौती दी गई है, जिनके जरिए निजी, अस्थायी या वेंचर शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को बिना निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के सीधे सरकारी सेवा में शामिल करने की अनुमति दी जाती है।
नए अवतार में लॉन्च हुई पांच बाइक्स, इतने रुपये है कीमत
सुजुकी ने भारतीय बाजार में अपनी बाइक्स को अपडेट कर दिया है. कंपनी ने जिक्सर रेंज को नए कलर ऑप्शन के साथ लॉन्च किया है. इसमें कोई मैकेनिकल अपडेट नहीं किया गया है. इन बाइक्स को पुराने कलर ऑप्शन के साथ ही नए में भी खरीदा जा सकता है. कंपनी ने अपनी जिक्सर, जिक्सर एसएफ, जिक्सर 250, जिक्सर एसएफ 250 और जिक्सर एसएफ 250 एफएफवी को अपडेट किया है.
बिहार और मध्य प्रदेश में बाढ़ का तांडव, उफान पर नदियां
बिहार इस समय पिछले एक दशक की सबसे भीषण बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है. राजधानी पटना समेत बिहार के कई उत्तरी और दक्षिणी जिले बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हैं. भागलपुर, सारण, वैशाली, मुंगेर और बेगूसराय जैसे जिलों में गंगा और उसकी सहायक नदियों का पानी कहर बरपा रहा है. मध्य प्रदेश के श्योपुर में भी मूसलाधार बारिश के कारण क्वारी नदी उफान पर है.
घर बनाने में ना करें ये गलती... सत्य निकेतन में हादसे का ये कारण था?
Satya Niketan Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद उसके पास वाले घर की चर्चा हो रही है, जिसमें एक भी पिलर नहीं दिखाई दे रहा है.
'घायलों का बेहतर इलाज हो रहा है', ट्रामा सेंटर पहुंच बोलीं CM रेखा
दिल्ली के सत्य निकेतन में जिस पांच मंजिला इमारत के गिरने से सात लोगों की मौत हुई, अब उसके बगल की जर्जर इमारत को भी गिराया जाएगा. दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने ये एलान किया है. रेखा गुप्ता ने कहा कि रविवार को गिरी इमारत के बगल वाली बिल्डिंग को कल गिराया जाएगा.. दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता एम्स ट्रामा सेंटर गई थीं. वहां घायलों का हाल-चाल लेने के बाद जब वो बाहर निकलीं तब उन्होंने ये बात कही.
विजय थलपति की लक्जरी या CM की जरूरत? 6.17 करोड़ के ऑफिस पर भाजपा ने घेरा
भाजपा सवाल उठा रही है कि जब सरकार पहले ही 1,200 करोड़ रुपये की लागत से नया सचिवालय बनाने का ऐलान कर चुकी है, तो फिर अस्थायी तौर पर CM ऑफिस शिफ्ट करने पर करोड़ों रुपये खर्च करने की क्या जरूरत है।
सत्य निकेतन हादसा: आज ही गिराई जाएगी बगल की जर्जर इमारत
Satya Niketan Demolition Live Updates: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने के बाद अब उसके बराबर वाली बिल्डिंग पर भी एक्शन होगा. प्रशासन ने आज से ही इस बिल्डिंग को गिराने की तैयारी शुरू कर दी है.
पानी, खुदाई या कमजोर नींव? IIT एक्सपर्ट ने बताया दिल्ली में कैसे भरभराकर गिरी इमारत
दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए पीजी बिल्डिंग हादसे पर आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा ने बताया कि ऐसे हादसों की शुरुआत अक्सर जमीन के नीचे से होती है. उनके मुताबिक 95 से 99 फीसदी इमारतें मिट्टी पर टिकी होती हैं और पानी जमा होने से मिट्टी की ताकत 50 फीसदी तक कम हो सकती है.
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की उबड़-खाबड़ गलियों, कट्टे की गूंज और कालीन भैया के खौफ से तो पूरी दुनिया ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पहले ही वाकिफ हो चुकी है, लेकिन अब इस खूंखार और धमाकेदार दुनिया ने बॉक्स ऑफिस पर जो कोहराम मचाया है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। वेब सीरीज के रूप में घर-घर में तहलका मचाने वाली 'मिर्जापुर' की कहानी जब बड़े पर्दे पर उतरी, तो दर्शकों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि अच्छे-अच्छे बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड चकनाचूर हो गए। दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर फिल्मों की कमाई सोमवार आते ही ठंडी पड़ जाती है और आंकड़े धड़ाम हो जाते हैं, लेकिन मिर्जापुर के इन किरदारों ने सोमवार के दिन भी सिनेमाघरों में ऐसी धमाचौकड़ी मचाई कि ट्रेड एनालिस्ट्स के होश उड़ गए। रिलीज के महज चार दिनों के भीतर ही इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए 154 करोड़ रुपये का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। बॉलीवुड के कई बड़े सुपरस्टार्स, जिनमें सलमान खान की फिल्में भी शामिल हैं, के शुरुआती बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को इस फिल्म ने पीछे छोड़ दिया है और टिकट खिड़की पर अपनी बादशाहत पूरी तरह से कायम कर ली है।ओटीटी के सुल्तान अब सिल्वर स्क्रीन के भी बादशाह, गुड्डू और मुन्ना की जोड़ी का चला जादूजब पहली बार यह घोषणा हुई थी कि ओटीटी की सबसे पॉपुलर फ्रेंचाइजी 'मिर्जापुर' को एक फीचर फिल्म के रूप में बड़े पर्दे पर लाया जाएगा, तो लोगों के मन में यह संशय था कि क्या छोटे परदे या फोन की स्क्रीन पर पसंद आने वाला कंटेंट सिनेमाघरों की भव्यता पर खरा उतर पाएगा या नहीं। लेकिन फिल्म के मेकर्स और निर्देशक ने जिस तरह से बड़े पैमाने पर इस खूंखार दुनिया को पर्दे पर उतारा है, उसने दर्शकों को अपनी सीटों से हिलने तक का मौका नहीं दिया है। फिल्म में गुड्डू पंडित की आक्रामक एंट्री, मुन्ना भैया के स्वैग और कालीन भैया के शांत लेकिन खतरनाक अंदाज ने सिनेमाघरों में सीटियों और तालियों की गड़गड़ाहट से माहौल को पूरी तरह से गूंजायमान कर दिया है। दर्शक बार-बार इस फिल्म को देखने के लिए थिएटर का रुख कर रहे हैं, और यही वजह है कि पहले वीकेंड के बाद भी मंडे टेस्ट में फिल्म ने शानदार प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया है कि जनता के बीच इस फ्रेंचाइजी का क्रेज किसी भी बड़े स्टार से कम नहीं है।बॉक्स ऑफिस पर सलमान खान के रिकॉर्ड को पछाड़ने वाली तूफानी रफ्तारभारतीय सिनेमा में सलमान खान को बॉक्स ऑफिस का सुल्तान माना जाता है, जिनकी फिल्मों की ओपनिंग और शुरुआती वीकेंड की कमाई के आंकड़े हमेशा से आसमान छूते रहे हैं, लेकिन मिर्जापुर के इस फिल्मी अवतार ने इन सभी धारणाओं को नए सिरे से परिभाषित कर दिया है। महज चार दिनों के भीतर 154 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन करना यह बताता है कि दर्शक अब लीक से हटकर कुछ रॉ, इंटेंस और देसी मास एंटरटेनर देखना चाहते हैं। फिल्म के एक्शन सीन्स, गालियों के तीखे डायलॉग्स और उत्तर प्रदेश की स्थानीय संस्कृति की सोंधी खुशबू ने उत्तर भारत के सिंगल स्क्रीन थिएटर्स से लेकर महानगरों के मल्टीप्लेक्स तक में तहलका मचा रखा है। ट्रेड पंडितों का मानना है कि जिस रफ्तार से यह फिल्म वीकडेज में भी कमाई कर रही है, वह आने वाले दिनों में कई और मेगा बजट फिल्मों के लाइफटाइम कलेक्शन को भी पीछे छोड़ सकती है और बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रच सकती है।सिंगल स्क्रीन से लेकर मल्टीप्लेक्स तक उत्तर प्रदेश और बिहार में हाउसफुल के बोर्डमिर्जापुर की इस सफलता के पीछे भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के उन दर्शकों का सबसे बड़ा योगदान है जो अपनी मिट्टी से जुड़ी कहानियों को पर्दे पर देखना पसंद करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के सिनेमाघरों में तो इस समय ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है जैसा दशकों पहले अमिताभ बच्चन या शाहरुख खान की एक्शन फिल्मों के समय हुआ करता था। सुबह के शुरुआती शोज से लेकर देर रात के नाइट शोज तक ज्यादातर हॉल्स में हाउसफुल के बोर्ड टंगे हुए हैं, और टिकट खिड़की पर लंबी-लंबी कतारें इस बात का सबूत हैं कि जनता इस फिल्म को लेकर कितनी क्रेजी हो चुकी है। फिल्म की मार्केटिंग स्ट्रेटेजी और सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ ने इसकी पहुंच को युवाओं के बीच इतना मजबूत कर दिया है कि हर कोई इस सिनेमाई अनुभव का हिस्सा बनने के लिए सिनेमाघरों की तरफ भागा चला आ रहा है।आने वाले दिनों में कमाई के नए मील के पत्थर और मिर्जापुर फ्रेंचाइजी का सुनहरा भविष्यसिनेमाघरों में मिल रहे इस अभूतपूर्व प्रतिसाद को देखते हुए अब यह तय माना जा रहा है कि मेकर्स इस कहानी के अगले पार्ट्स पर भी तेजी से काम शुरू कर देंगे, क्योंकि दर्शकों की भूख अभी शांत नहीं हुई है। गुड्डू और मुन्ना की यह फिल्मी भिड़ंत भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक नया बिजनेस मॉडल पेश कर रही है, जहां लोकप्रिय ओटीटी IPs को बड़े पर्दे पर भुनाकर भारी-भरकम मुनाफा कमाया जा सकता है। आने वाले स्वतंत्रता दिवस या छुट्टियों के सीजन में इस फिल्म को और भी बड़ा फायदा मिलने की पूरी उम्मीद है, जिससे इसका कुल कलेक्शन 300 करोड़ रुपये के क्लब की तरफ आसानी से बढ़ सकता है। मिर्जापुर की यह सफलता इस बात का पक्का प्रमाण है कि यदि कहानी में दम हो, जमीन से जुड़ापन हो और किरदारों में जान हो, तो दर्शक किसी भी बड़े स्टार के मोहताज हुए बिना उस फिल्म को सिर आंखों पर बिठा लेते हैं।
दिल्ली के व्यस्त और छात्र बहुल इलाके सत्य निकेतन में हाल ही में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने एक बार फिर देश की राजधानी में छात्रों के रहने की व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दुखद घटना के बाद समाजसेवा के लिए पूरी दुनिया में अपनी एक खास पहचान बना चुके लोकप्रिय अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद ने सरकार और प्रशासन को एक बेहद संवेदनशील और आंखें खोल देने वाली सलाह दी है। सोनू सूद ने अपने आधिकारिक बयानों और सोशल मीडिया के जरिए इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया है कि दिल्ली जैसे बड़े शिक्षा के हब में देश भर से आने वाले लाखों छात्र सस्ते और सुरक्षित आवास के अभाव में जान जोखिम में डालकर छोटे-छोटे और असुरक्षित कमरों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जहां दिल्ली में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या सात लाख से अधिक है, वहीं सरकारी हॉस्टलों में कुल सीटों की संख्या मात्र तीस हजार के आसपास ही सिमटी हुई है। इस बड़े अंतर और प्रशासनिक अनदेखी के कारण आए दिन छात्रों को इस तरह के भयानक हादसों का शिकार होना पड़ता है, जिस पर अब सरकारों को संजीदगी से विचार करने की सबसे ज्यादा जरूरत है।सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे की भयावहता और छात्रों की असुरक्षित जिंदगीदिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ और साउथ कैंपस के आसपास स्थित सत्य निकेतन जैसे इलाके हजारों छात्र-छात्राओं के लिए पढ़ाई के दौरान आशियाना ढूंढने का मुख्य केंद्र माने जाते हैं, लेकिन यहां बने पीजी (PG) और हॉस्टल अक्सर सुरक्षा के तमाम पैमानों पर पूरी तरह फेल साबित होते हैं। हाल ही में सत्य निकेतन क्षेत्र में जो बिल्डिंग हादसा हुआ, उसने वहां रहने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों की रूह कंपा दी, क्योंकि जरा सी लापरवाही कई मासूम जिंदगियों को लील सकती थी। बहुमंजिला इमारतों में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इन पीजी और कमरों में वेंटिलेशन, फायर सेफ्टी और मजबूत स्ट्रक्चर का भारी अभाव रहता है। जब भी ऐसे हादसे होते हैं, तो कुछ दिनों के लिए प्रशासनिक अमला हरकत में आता है, जांच के आदेश दिए जाते हैं और फिर सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो जाता है, लेकिन इस बार सोनू सूद जैसी शख्सियत के सामने आने से इस गंभीर मुद्दे को एक राष्ट्रीय स्तर की बहस का रूप मिल गया है, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ना लाजिमी है।सोनू सूद द्वारा सरकार को दी गई सलाह: शिक्षा के साथ आवास भी है बुनियादी अधिकारविपत्ति के समय हमेशा मसीहा बनकर सामने आने वाले सोनू सूद ने इस बार सरकारों और नीति निर्माताओं को यह कड़े शब्दों में याद दिलाया है कि देश के भविष्य यानी युवाओं को पढ़ाना और उनके सपनों को पंख देना तभी सार्थक होगा जब वे सुरक्षित माहौल में रह सकें। सोनू सूद ने अपनी सलाह में स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य और केंद्र सरकारों को मिलकर दिल्ली और अन्य बड़े मेट्रो शहरों में छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर कम लागत वाले आधुनिक सरकारी हॉस्टलों और स्टूडेंट हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का निर्माण करना चाहिए। जब तक सरकारें खुद आगे आकर सुरक्षित और सस्ते हॉस्टल की व्यवस्था नहीं करेंगी, तब तक प्राइवेट माफिया छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें जानलेवा और महंगे कमरों में रहने के लिए मजबूर करते रहेंगे। उनका यह सुझाव न केवल मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश के अर्बन प्लानिंग और छात्र कल्याण नीतियों के लिए एक बेहतरीन ब्लूप्रिंट भी पेश करता है।7 लाख छात्र बनाम 30 हजार सीटें: आवास संकट का यह कड़वा सच किसी बड़े खतरे से कम नहींदेश के कोने-कोने से छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, सिविल सेवक और वैज्ञानिक बनने का सपना लेकर दिल्ली जैसे महानगरों में आते हैं, लेकिन यहां पहुंचने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर छिपाने के लिए एक सुरक्षित छत ढूंढने की होती है। सरकारी आंकड़ों और रिपोर्ट्स की मानें तो दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों में पढ़ने वाले कुल छात्रों की संख्या सात लाख से अधिक है, जबकि इसके मुकाबले सरकारी और मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी हॉस्टलों में कुल सीटों की संख्या मुश्किल से तीस हजार तक ही पहुंच पाती है। इस विशाल अंतर का मतलब साफ है कि 95 प्रतिशत से ज्यादा छात्रों को मजबूरन प्राइवेट पीजी, फ्लैट्स या खस्ताहाल कमिटेड कम, असुरक्षित इमारतों में किराए पर रहना पड़ता है। यह आवास संकट (Housing Crisis) किसी बड़े छिपे हुए खतरे की तरह है, जहां हर दिन हजारों युवा अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी पढ़ाई पूरी करने की जद्दोजहद कर रहे हैं।इस त्रासदी से सबक लेकर प्रशासनिक सुधार और भविष्य की ठोस रणनीतियों की दरकारसत्य निकेतन हादसे के बाद अब समय आ गया है कि नगर निगम (MCD), दिल्ली सरकार और शिक्षा मंत्रालय मिलकर एक साझा कार्ययोजना तैयार करें ताकि छात्रों के जीवन से इस तरह का खिलवाड़ हमेशा के लिए बंद किया जा सके। अवैध रूप से चल रहे पीजी और हॉस्टलों की सख्त औचक जांच होनी चाहिए और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बिना किसी नरमी के आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाने चाहिए। इसके साथ ही, सरकारी जमीनों पर कम किराए वाले मल्टी-स्टोरी स्टूडेंट हॉस्टलों का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू किया जाना चाहिए ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार भी अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल में पढ़ा सकें। सोनू सूद की यह चेतावनी और सलाह यदि समय रहते मान ली गई, तो आने वाले दिनों में किसी भी माता-पिता को अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर इस तरह की खौफनाक खबरों का सामना नहीं करना पड़ेगा, और देश के युवा बिना किसी डर के अपनी मंजिल की तरफ कदम बढ़ा सकेंगे।
भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों हलचल उस समय अचानक तेज हो गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल के 20 प्रमुख मंत्रियों की एक बेहद गुप्त और उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। खास बात यह रही कि इस अहम बैठक में किसी भी विभाग के वरिष्ठ आईएएस सचिव या नौकरशाह (Bureaucrat) को शामिल नहीं किया गया, बल्कि पीएम मोदी ने पूरी तरह से अकेले और सीधे तौर पर इन मंत्रियों के मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की। दिल्ली के राजनीतिक हलकों में इस अनूठे और सरप्राइज मूव के बाद से कैबिनेट फेरबदल, मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड और कार्यशैली में बड़े बदलाव की अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। जब देश का सर्वोच्च नेतृत्व बिना किसी प्रशासनिक मध्यस्थ के सीधे मंत्रियों के साथ संवाद करता है, तो उसके कूटनीतिक और राजनीतिक मायने बहुत गहरे होते हैं, और इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) सरकार के कामकाज को लेकर अब पूरी तरह से और अधिक आक्रामक और परिणाम-उन्मुख रुख अपनाने जा रहा है।बिना आईएएस अधिकारियों के हुई मंत्रियों की इस गुप्त बैठक के सियासी मायनेआम तौर पर जब भी केंद्र सरकार के मंत्रालयों की समीक्षा बैठकें होती हैं, तो उनमें संबंधित विभागों के सचिव, संयुक्त सचिव और दर्जनों आईएएस अधिकारी अपने-अपने प्रेजेंटेशन और फाइलों के साथ मौजूद रहते हैं। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई बैठक में नौकरशाहों की इस लंबी चौड़ी फौज को पूरी तरह से बाहर रखा गया, जिससे यह साफ संदेश गया कि यह बैठक प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक और परफॉर्मेंस-बेस्ड थी। पीएम मोदी ने सीधे तौर पर मंत्रियों से उनके विभागों में चल रही योजनाओं, जनता तक उनके पहुंचने की गति और अब तक के प्रदर्शन का हिसाब-किताब मांगा। जानकारों का कहना है कि जब मंत्रियों से बिना नौकरशाही की ढाल के सीधे सवाल-जवाब किए जाते हैं, तो हर मंत्री की प्रशासनिक क्षमता और उसकी जमीनी पकड़ का वास्तविक आकलन सामने आ जाता है, और यही इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भी माना जा रहा है।कैबिनेट फेरबदल और मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड को लेकर तेज हुई अटकलेंपिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही थी कि सरकार जल्द ही अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकती है और कुछ अकुशल या सुस्त मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है। 20 प्रमुख मंत्रियों के साथ पीएम मोदी की इस सीधी और दो टूक समीक्षा बैठक ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है, क्योंकि हर मंत्री का परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड अब सीधे प्रधानमंत्री की टेबल पर पहुंच चुका है। जिन मंत्रियों ने अपने विभागों में बेहतरीन काम किया है और जनता के बीच सकारात्मक संदेश दिया है, उन्हें इस फेरबदल में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, जबकि जिनका प्रदर्शन औसत या कमजोर रहा है, उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है या उनके विभाग बदले जा सकते हैं। इस उच्चस्तरीय मंथन के बाद से मंत्रियों और उनके कार्यालयों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि हर कोई यह जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री के इस सीधे इम्तिहान में कौन पास हुआ है और कौन फेल।प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली और गवर्नेंस में ट्रांसपेरेंसी का नया मॉडलप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली शुरू से ही लीक से हटकर और प्रशासनिक कसावट पर जोर देने वाली रही है, और यह ताजा बैठक उसी रणनीति का एक और मजबूत हिस्सा है। नौकरशाही के तामझाम को दरकिनार करके सीधे राजनीतिक नेतृत्व से जवाब तलब करना यह दिखाता है कि सरकार अब पूरी तरह से जवाबदेही और पारदर्शी शासन प्रणाली पर फोकस कर रही है। आज के डिजिटल और जनरेटिव एआई के दौर में जहां जनता हर एक काम का त्वरित परिणाम चाहती है, वहां पारंपरिक और सुस्त प्रशासनिक तौर-तरीके अब नहीं चल सकते हैं। मंत्रियों को यह समझना होगा कि जनता के प्रति उनकी सीधी प्रतिबद्धता ही उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला करेगी, और यदि वे अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते हैं, तो शीर्ष नेतृत्व कड़े फैसले लेने में बिल्कुल भी संकोच नहीं करेगा।आने वाले दिनों में देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ने वाले बड़े प्रभावइस हाई-प्रोफाइल बैठक के दूरगामी परिणाम आने वाले दिनों में देश की राजनीति, नीतियों के क्रियान्वयन और प्रशासनिक सुधारों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगेंगे। मंत्रियों को अब यह अच्छी तरह समझ आ गया है कि केवल बयानों या कागजी रिपोर्टों से काम नहीं चलने वाला है, बल्कि जमीन पर धरातल पर परिणाम दिखाने ही होंगे। विपक्ष भले ही इस बैठक को लेकर अपने राजनीतिक कयास लगा रहा हो, लेकिन सत्ता के गलियारों में यह स्पष्ट संदेश चला गया है कि काम करने वालों को ही सरकार में जगह मिलेगी। जैसे-जैसे अगला राजनीतिक सत्र और चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सरकार की यह आंतरिक कसावट यह तय करेगी कि जनता के बीच शासन का मॉडल कितना प्रभावी साबित होता है, और इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में खुद प्रधानमंत्री मोदी की पैनी और सख्त नजर बनी हुई है।
देशभर में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए एक बार फिर से कड़ी चेतावनी जारी की है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अस्पतालों के भीतर घुसकर डॉक्टरों के साथ मारपीट करने वाले लोग समाज में खुलेआम घूमने के बिल्कुल भी हकदार नहीं हैं। शीर्ष अदालत ने नेताओं और प्रभावशाली लोगों को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जा सके। हाल ही में महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में अस्पतालों के भीतर चिकित्सा कर्मियों पर हुए हमलों के मामलों पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। देश की रक्षा करने और मरीजों की जान बचाने वाले डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की यह दो टूक टिप्पणी राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बन गई है, जहां यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक अन्नदाताओं और जीवनदाताओं को इस तरह हिंसा का शिकार होना पड़ेगा।अस्पतालों में बढ़ती हिंसा और डॉक्टरों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकारजब एक डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ अपनी जान जोखिम में डालकर मरीज की जान बचाने में दिन-रात जुटा होता है, तब इस तरह की हिंसा न केवल मानवता को शर्मसार करती है बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र का मनोबल भी गिराती है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि कैसे कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोग या उनके कार्यकर्ता अस्पतालों के अंदर जबरन घुसकर डॉक्टरों के साथ मारपीट जैसी घिनौनी वारदातों को अंजाम देते हैं। अदालत का यह मानना है कि ऐसी घटनाएं किसी एक व्यक्ति पर हमला नहीं हैं, बल्कि यह सीधे तौर पर देश की कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवा पर एक बड़ा प्रहार हैं। न्यायपालिका ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी बरतना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा, क्योंकि यदि डॉक्टरों को ही सुरक्षा नहीं मिलेगी तो आम जनता का इलाज कौन करेगा।नेताओं और राजनीतिक दलों की कार्यशैली पर अदालत के गंभीर सवालहाल ही में सामने आए कुछ मामलों में जब राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों या स्थानीय नेताओं के नाम डॉक्टरों पर हमले में सामने आए, तो न्यायिक तंत्र ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि किस प्रकार एक ही विचारधारा या पृष्ठभूमि से जुड़े लोग बार-बार ऐसी हिंसा को अंजाम देते हैं और फिर कानूनी पेंचो-खम का फायदा उठाकर बाहर घूमने की कोशिश करते हैं। अदालत ने यह साफ कर दिया कि चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, अगर उसने कानून का उल्लंघन किया है और डॉक्टरों पर हाथ उठाया है, तो उसे तुरंत हिरासत में लिया जाना चाहिए। राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे कानून की रक्षा करेंगे, लेकिन जब वही लोग या उनके समर्थक कानून को अपने हाथ में लेते हैं, तो लोकतंत्र की नींव हिलने लगती है।देश भर के मेडिकल स्टाफ और रेजिडेंट डॉक्टरों में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताइस तरह की हिंसक घटनाओं का सीधा असर देश के उन युवा डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों पर पड़ता है जो सुदूर ग्रामीण इलाकों से लेकर बड़े शहरों के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुरक्षित माहौल न मिलने के कारण आए दिन डॉक्टरों को अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल और प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ता है, जिससे अंततः गरीब और आम मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। चिकित्सा संघों और संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख का स्वागत किया है और मांग की है कि अस्पतालों को सुरक्षित जोन घोषित किया जाए तथा वहां पुलिस बल की स्थाई तैनाती सुनिश्चित की जाए। जब तक हमलावरों को त्वरित और कड़ी सजा नहीं मिलेगी, तब तक इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाना मुमकिन नहीं हो पाएगा।भविष्य के लिए कड़ा संदेश और प्रशासनिक मोर्चे पर सख्ती की जरूरतसुप्रीम कोर्ट की यह चेतावनी केवल एक अदालती टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक सख्त निर्देश है कि वे स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के वास्ते कड़े और व्यावहारिक कदम उठाएं। अदालतों का यह स्पष्ट मानना है कि आरोपियों को जमानत मिलने और उनके आसानी से छूट जाने के संदेश समाज में गलत प्रभाव डालते हैं, इसलिए मामलों की सुनवाई तेज गति से होनी चाहिए। आने वाले समय में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासनिक मशीनरी इस दिशा में कितनी मुस्तैदी से काम करती है और क्या वाक़ए में डॉक्टरों को वह सुरक्षित माहौल मिल पाता है जिसके वे हकदार हैं। देश के हर नागरिक को यह समझना होगा कि डॉक्टर इस धरती पर भगवान का रूप होते हैं, और उन पर हाथ उठाना सीधे तौर पर मानवीयता और कानून दोनों की धज्जियां उड़ाने के बराबर है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर एक बार फिर से दुनिया की निगाहें ब्रिक्स (BRICS) देशों की बैठकों पर टिक गई हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया में सुलग रही युद्ध की भीषण आग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। इसी सुलगते भू-राजनीतिक माहौल के बीच ब्रिक्स देशों के शेरपाओं की एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया है, जिसमें विशेष रूप से पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और आगामी दिल्ली घोषणापत्र के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। दुनिया के तमाम प्रमुख उभरते हुए आर्थिक महाशक्तियों के प्रतिनिधि एक मंच पर बैठकर इस बात का मंथन कर रहे हैं कि कैसे इस क्षेत्रीय संघर्ष के प्रभावों को ग्लोबल लेवल पर नियंत्रित किया जाए और शांति बहाली के लिए एक साझा कूटनीतिक रुख अपनाया जाए। हालांकि, इस बैठक के एजेंडे में सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा पिछली बार की तरह ही इस बार भी खाड़ी देशों के आपसी मतभेद बने हुए हैं, क्योंकि पिछले सम्मेलन के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तीखी तनातनी देखने को मिली थी, जिसने इस बहुपक्षीय मंच की एकता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।ब्रिक्स शेरपाओं की इस आपात बैठक का मुख्य उद्देश्य और वैश्विक कूटनीति में इसका महत्वजब दुनिया के विभिन्न हिस्से युद्ध, आर्थिक मंदी और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं से जूझ रहे हैं, तब ब्रिक्स जैसे प्रभावशाली संगठन की भूमिका और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाती है। ब्रिक्स शेरपाओं की इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना और पश्चिम एशिया में जारी खूनी संघर्ष के बीच एक संतुलित तथा शांतिपूर्ण दृष्टिकोण तैयार करना है। दिल्ली घोषणापत्र के प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले सभी देशों के प्रतिनिधि हर एक बिंदु पर बारीकी से विचार कर रहे हैं ताकि किसी भी ऐसे संवेदनशील विषय पर आम सहमति बनाई जा सके जिससे किसी एक देश की संप्रभुता या कूटनीतिक संबंधों को ठेस न पहुंचे। भारत की मेजबानी और नेतृत्व में आयोजित होने वाली इस बैठक में यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की जा रही है कि ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक मजबूती के साथ उठाया जाए, विशेषकर तब जब पश्चिमी देश अपने हितों के अनुसार नीतियों को आकार दे रहे हैं।पिछली बार ईरान और यूएई के बीच हुए विवाद की कड़वी यादें और इस बार की चुनौतियांब्रिक्स समूह का विस्तार होने के बाद से इसमें शामिल नए और पुराने सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक समीकरण काफी जटिल हो चुके हैं, जिसकी एक बानगी हमें पिछली बैठकों में देखने को मिली थी। मध्य पूर्व के दो प्रमुख देश, ईरान और यूएई, जिनके बीच ऐतिहासिक और राजनीतिक स्तर पर गहरे मतभेद रहे हैं, वे जब एक ही मंच पर आते हैं तो क्षेत्रीय तनावों की आंच बैठकों के अंदर तक महसूस की जाने लगती है। पिछली बार जब खाड़ी के इन दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने आए थे, तो क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर तीखी बहस छिड़ गई थी, जिसके कारण साझा बयानों और घोषणापत्रों को तैयार करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भी ईरान और यूएई के बीच के उन पुराने तनावों के उभरने का पूरा अ अंदेशा बना हुआ है, और ब्रिक्स शेरपाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे कूटनीतिक कौशल का परिचय देते हुए इन दोनों देशों को एक मंच पर साधकर रखें ताकि संगठन की एकता अक्षुण्ण बनी रहे।दिल्ली घोषणापत्र और पश्चिम एशिया संकट पर भारत की संतुलित कूटनीति की भूमिकाभारत ने हमेशा से वसुधैव कुटुंबकम और शांति के सिद्धांतों पर चलते हुए सभी देशों के साथ अपने मधुर कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखा है, और ब्रिक्स के इस मंच पर भी भारत की यही कोशिश है कि किसी भी तरह के ध्रुवीकरण से बचा जाए। पश्चिम एशिया में फंसे लाखों भारतीयों और वहां की अर्थव्यवस्था पर निर्भरता के चलते भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए दिल्ली घोषणापत्र में शांति, क्षेत्रीय अखंडता और कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। ब्रिक्स के अन्य सदस्य देश जैसे रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका भी इस बात पर सहमत नजर आ रहे हैं कि दुनिया को एक और बड़े आर्थिक संकट से बचाने के लिए पश्चिम एशिया में तुरंत युद्धविराम होना चाहिए। भारत का यह कूटनीतिक प्रयास रंग लाता है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि शेरपा स्तर की इस बैठक में सभी देश अपने क्षेत्रीय अहंकारों को छोड़कर वैश्विक कल्याण के एजेंडे पर कितनी जल्दी और कितनी सहजता से राजी होते हैं।भविष्य के भू-राजनीतिक समीकरण और ब्रिक्स समूह की बढ़ती हुई वैश्विक जवाबदेहीआने वाले समय में ब्रिक्स केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि यह दुनिया की नई राजनीतिक व्यवस्था को दिशा देने वाला एक प्रमुख मंच बनकर उभर रहा है। पश्चिम एशिया के युद्ध जैसे गंभीर मामलों पर ब्रिक्स देशों का एक सुर में बोलना या बंटा हुआ नजर आना यह तय करेगा कि वैश्विक स्तर पर इस संगठन का कितना वजन माना जाएगा। ईरान-यूएई के आपसी तनाव को सुलझाते हुए एक ठोस और सर्वमान्य दिल्ली घोषणापत्र तैयार करना इस बैठक की सबसे बड़ी सफलता होगी, जो दुनिया को यह संदेश देगी कि बहुध्रुवीय विश्व में आपसी संवाद से हर बड़े संकट का समाधान निकाला जा सकता है। कूटनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि यदि ब्रिक्स इस परीक्षा में सफल हो जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसका कद और भी ज्यादा बुलंद हो जाएगा, जिससे दुनिया के तमाम विकासशील देशों को एक नई उम्मीद की किरण दिखाई देगी।
गड्ढे में पलटी शराब से भरी कार, लोगों में मच गई लूटने की होड़-VIDEO
बिहार के समस्तीपुर में तेज बारिश के दौरान एनएच-28 पर एक शराब से भरी कार अनियंत्रित होकर गड्ढे में पलट गई. हादसे के बाद कार सवार मौके से फरार हो गए. कार में शराब होने की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई और पुलिस के पहुंचने से पहले टेट्रा पैक लूटकर ले गई.
पेरिस के आइकॉनिक और दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र एफिल टावर से जुड़ी एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भूचाल ला दिया है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित इस ऐतिहासिक इमारत को अचानक से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है, जिसके पीछे स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों से जुड़ा एक गंभीर विवाद बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संतों के दौरे या किसी विशेष कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर वहां तैनात महिला कर्मचारियों को उनके काम करने की जगह से हटाने या दूर रखने की मांग की गई, जिसके बाद फ्रांस के कड़े श्रम कानूनों और लैंगिक समानता के सिद्धांतों पर एक बड़ा बवंडर खड़ा हो गया है। इस घटना के सामने आने के बाद से फ्रांसीसी मीडिया, राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है, क्योंकि फ्रांस जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में इस तरह की सांस्कृतिक या धार्मिक मांगों को स्वीकार किए जाने को लेकर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं।एफिल टावर के अचानक बंद होने से पर्यटकों में निराशा और प्रशासन में खलबलीदुनिया के सात अजूबों में शुमार और पेरिस की शान कहे जाने वाले एफिल टावर के अचानक बंद होने से वहां घूमने पहुंचे हजारों पर्यटकों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा है। सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अंदरूनी प्रशासनिक तनाव और अचानक उपजे इस सांस्कृतिक-धार्मिक विवाद के चलते प्रबंधन को एहतियातन यह सख्त कदम उठाना पड़ा है। फ्रांस आने वाले सैलानी जब इस ऐतिहासिक टावर के बंद दरवाजों के पास पहुंचे, तो उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ा, जिसके बाद से पेरिस की सड़कों से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक इसी बात की चर्चा हो रही है। इस अप्रत्याशित बंदी से फ्रांस के पर्यटन विभाग को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, और सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कैसे एक निजी धार्मिक दौरे के अरेंजमेंट के चक्कर में वैश्विक स्तर पर पहचान रखने वाले इस स्मारक को विवादों के घेरे में ला दिया गया।महिला कर्मचारियों को हटाने की कथित मांग पर फ्रांस के लेबर यूनियन भड़केइस पूरे विवाद की जड़ में वह कथित मांग बताई जा रही है जिसमें संतों के संप्रदाय या उनके प्रबंधकों द्वारा यह कहा गया था कि वे महिलाओं के साथ सीधे संपर्क या उनके कार्यक्षेत्र के दायरे में असहज महसूस कर सकते हैं, जिसके चलते वहां काम कर रही महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने या अन्य स्थान पर शिफ्ट करने की बात उठी। फ्रांस अपने सख्त लेबर लॉ, महिला अधिकारों और जेंडर इक्वलिटी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, ऐसे में किसी भी कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ इस तरह के भेदभाव या उन्हें हटाने की सुगबुगाहट ने वहां की ट्रेड यूनियनों और लेबर संगठनों को आग बबूला कर दिया है। यूनियनों का साफ तौर पर कहना है कि फ्रांस की धरती पर किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यताओं के नाम पर महिलाओं के काम करने के अधिकार और उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे मेहमान कोई भी हों।स्वामीनारायण संप्रदाय के इस प्रकरण से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छिड़ी एक नई बहसस्वामीनारायण संप्रदाय अपनी भव्यता, विशाल मंदिरों और अनुशासित जीवनशैली के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है, लेकिन पेरिस की इस घटना ने उनके प्रबंधन और विदेश दौरों के प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब धार्मिक और आध्यात्मिक संगठन अपने पारंपरिक नियमों या मान्यताओं को दूसरे देशों की लोकतांत्रिक और आधुनिक सामाजिक व्यवस्था पर लागू करने की कोशिश करते हैं, तो अक्सर इस तरह के टकराव देखने को मिलते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं से न केवल संबंधित धार्मिक संस्था की छवि को धक्का पहुंचता है, बल्कि विदेशों में रह रहे या यात्रा कर रहे अन्य भारतीय नागरिकों के लिए भी एक असहज स्थिति पैदा हो जाती है। फ्रांस जैसे देश में, जहां सेक्युलरिज्म को सबसे ऊपर रखा जाता है, वहां इस तरह की प्रशासनिक मांगें रखना पूरी तरह से अदूरदर्शिता का परिचय देता है।फ्रांस सरकार और स्थानीय प्रशासन का सख्त रुख, भविष्य के आयोजनों पर संकटइस गंभीर विवाद के तूल पकड़ने के बाद फ्रांस की स्थानीय सरकार और प्रशासन इस पूरे मामले की गहन जांच में जुट गए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर किस स्तर पर इस तरह के निर्देश या मांगें रखी गई थीं। प्रशासन ने यह साफ संकेत दे दिया है कि देश के कानूनों से ऊपर कोई भी व्यक्ति या संस्था नहीं हो सकती है, और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद से भविष्य में इस तरह के धार्मिक आयोजनों और विदेशी मेहमानों के दौरों के लिए पेरिस प्रशासन और अधिक सख्त गाइडलाइंस तैयार करने पर विचार कर रहा है। अंततः यह प्रकरण इस बात की सीख देता है कि जब भी कोई संगठन अपनी सीमाओं से बाहर किसी दूसरे देश की यात्रा करे, तो वहां की स्थानीय संस्कृति, कानूनों और मानवाधिकारों का पूर्ण सम्मान करना सर्वोपरि होना चाहिए।
मंगलवार को वडोदरा में 'नमो फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोगों की भारी भीड़ ने गर्मजोशी और उत्साह के साथ स्वागत किया। प्रधानमंत्री गुजरात के दौरे पर हैं, जिसके दौरान वे देश को कई बड़े विकास प्रोजेक्ट्स समर्पित करेंगे और ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उद्घाटन करेंगे। इस दौरे में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। देश को समर्पित किए जा रहे प्रमुख प्रोजेक्ट्स में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के तीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं, जो कुल मिलाकर 326 रूट किलोमीटर में फैले हैं। इन प्रोजेक्ट्स को कुल 20,700 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से तैयार किया गया है। इसे भी पढ़ें: Dhirendra Shastri पर Bengal BJP का पलटवार, कहा- बाहरी नहीं तय करेंगे बंगाली क्या खाएंगे! वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जिन तीन सेक्शन को देश को समर्पित किया जाएगा, वे हैं: साणंद (N)-मकरपुरा, न्यू उमबरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-JNPT। ये हिस्से फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क का एक अहम हिस्सा हैं और इनका मकसद प्रमुख औद्योगिक और कमर्शियल इलाकों में रेल से माल की ढुलाई को मज़बूत करना है। इन सेक्शन के चालू होने से वेस्टर्न रूट पर माल की ढुलाई की क्षमता और दक्षता और बढ़ने की उम्मीद है। इसे भी पढ़ें: Rajasthan निकाय चुनाव में Congress को जिताने के लिए Ashok Gehlot ने जनता से की अपील इससे पहले वडोदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने वाले कार्यक्रम को ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली है; BookMyShow पर रजिस्ट्रेशन शुरू होने के सिर्फ़ एक घंटे के अंदर ही सभी उपलब्ध सीटें बुक हो गईं। गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने X पर बताया कि इसके बाद 42,000 से ज़्यादा लोगों को वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया। कार्यक्रम का डिजिटल रजिस्ट्रेशन और एंट्री सिस्टम भी इसकी एक खास बात रही है, जिसमें अधिकारियों ने लोगों के आने-जाने और भीड़ को संभालने के लिए एक प्राइवेट डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। #WATCH | Gujarat | PM Modi receives an enthusiastic welcome from the crowd attending the 'NaMo for Viksit Bharat' event in Vadodara (Video source: ANI/DD) pic.twitter.com/klrHAJri9T — ANI (@ANI) September 8, 2026
पूरी दुनिया को झकझोर कर रख देने वाले और मध्य पूर्व के समीकरणों को हमेशा के लिए बदल देने वाले हमास के खूनी हमले को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह बात सामने आई है कि यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) के राष्ट्रपति ने गाजा सीमा पर सुलगती चिंगारी और संभावित बड़े खतरे को भांपते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पहले ही एक गंभीर चेतावनी दे डाली थी। लेकिन इजरायली खुफिया तंत्र और खुद पीएम नेतन्याहू ने इस अहम चेतावनी को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया, जिसके परिणाम स्वरूप इतिहास का सबसे बड़ा सुरक्षा फेल्योर देखने को मिला। कूटनीतिक गलियारों और वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच इस खुलासे के बाद से हड़कंप मच गया है, क्योंकि यदि समय रहते इस चेतावनी पर गौर कर लिया जाता, तो शायद हजारों बेकसूर लोगों की जान बचाई जा सकती थी और आज मध्य पूर्व इस भयानक युद्ध की आग में नहीं जल रहा होता।यूएई के राष्ट्रपति की वह गुप्त चेतावनी जिसे इजरायली पीएम ने कर दिया था खारिजजब खाड़ी देशों के साथ इजरायल अपने कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था और 'अब्राहम अकॉर्ड' के तहत क्षेत्रीय शांति स्थापना की कोशिशें जारी थीं, तब यूएई के नेतृत्व के पास खुफिया स्रोतों से कुछ ऐसी जानकारियां हाथ लगी थीं जो बेहद खतरनाक थीं। यूएई के राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत स्तर पर और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से बेंजामिन नेतन्याहू को यह आगाह किया था कि गाजा पट्टी के भीतर कुछ बहुत बड़ा और विनाशकारी पक रहा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएई को इस बात का अ अंदेशा हो चुका था कि हमास किसी बड़े हमले की बहुत बड़ी साजिश रच रहा है और सीमा पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना एक बड़ी आपदा को खुला निमंत्रण दे रहा है। हालांकि, अपनी सैन्य और खुफिया ताकत के अदम्य अहंकार में डूबे इजरायली प्रधानमंत्री ने इस दोस्ताना और संवेदनशील चेतावनी को ज्यादा तवज्जो नहीं दी और इसे महज एक सामान्य क्षेत्रीय तनाव मानकर पूरी तरह से खारिज कर दिया।इजरायली खुफिया तंत्र और नेतन्याहू की लापरवाही से हुआ इतिहास का सबसे बड़ा सुरक्षा चूककिसी भी देश के सर्वोच्च नेतृत्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने नागरिकों की रक्षा करना होती है, लेकिन 7 अक्टूबर के उस काले दिन ने यह साबित कर दिया कि इजरायल का सुरक्षा तंत्र अपनी सबसे बड़ी नाकामी के दौर से गुजर रहा था। मोसाद और शिन बेट जैसी दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसियों के पास इनपुट होने के बावजूद, राजनीतिक नेतृत्व की उदासीनता और अति-आत्मविश्वास के कारण समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नेतन्याहू सरकार का पूरा ध्यान उस समय देश के भीतर चल रहे न्यायिक सुधारों और राजनीतिक उठापटक पर केंद्रित था, जिससे सीमा सुरक्षा से ध्यान पूरी तरह से भटक गया था। यूएई जैसी मित्र शक्ति द्वारा दी गई चेतावनी को नजरअंदाज करना इजरायल के इतिहास में एक ऐसा काला अध्याय बन गया है, जिसकी भारी कीमत देश को हजारों नागरिकों की जान देकर चुकानी पड़ी और आज भी नेतन्याहू सरकार को अपनी इसी लापरवाही के चलते देश-विदेश में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।क्षेत्रीय कूटनीति और खाड़ी देशों के साथ इजरायल के संबंधों पर इस खुलासे का गहरा असरइस सनसनीखेज खुलासे के सामने आने के बाद से मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है और यह सवाल बार-बार पूछा जा रहा है कि आखिर क्यों एक भरोसेमंद क्षेत्रीय सहयोगी की बात को इतनी आसानी से दरकिनार कर दिया गया। यूएई और इजरायल के बीच पिछले कुछ वर्षों में जो व्यापारिक और सामरिक रिश्ते बने थे, इस घटना के बाद से उनके भीतर एक अविश्वास का साया मंडराने लगा है। खाड़ी देश हमेशा से यह चाहते हैं कि इस क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और व्यापार तथा विकास को बढ़ावा मिले, लेकिन इजरायल की आक्रामक नीतियों और अंदरूनी राजनीतिक कमजोरियों के कारण पूरा क्षेत्र बार-बार युद्ध की आग में झोंक दिया जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस खुलासे के बाद इजरायल की अंतरराष्ट्रीय साख को करारा झटका लगा है और आने वाले समय में दुनिया भर के देश नेतन्याहू की कार्यशैली और उनकी निर्णय लेने की क्षमता पर पूरी तरह से सवालिया निशान खड़े करेंगे।युद्ध के मैदान से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नेतन्याहू पर मंडराता इस्तीफे का खतराआज जब गाजा और लेबनान में युद्ध अपने चरम पर है और इजरायल चारों तरफ से मोर्चों पर उलझा हुआ है, तब इस तरह के खुलासे बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक करियर के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकते हैं। इजरायल की आम जनता और विपक्ष लगातार यह मांग कर रहे हैं कि देश की सुरक्षा में हुई इस आपराधिक लापरवाही के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। युद्ध की विभीषिका के बीच घरेलू मोर्चे पर बढ़ता यह दबाव इजरायली सरकार के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है, क्योंकि जनता अब यह समझ चुकी है कि सरकार की अदूरदर्शिता और अहंकार के कारण ही देश को यह भयानक दिन देखना पड़ा है। इतिहास इस बात का गवाह रहेगा कि जब एक दोस्त ने हाथ बढ़ाकर आने वाले खतरे से आगाह किया था, तब अहंकार के चश्मे ने उस सच्चाई को देखने से इंकार कर दिया था, जिसका खामियाजा पूरी मानवता को भुगतना पड़ रहा है।
अलगाववादी और आतंकी गतिविधियों के मामलों में दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे जेकेएलएफ के पूर्व सरगना यासीन मलिक और उनकी पाकिस्तानी मूल की पत्नी मुशाल हुसैन मलिक के बीच चल रहा पारिवारिक और निजी विवाद अब अचानक से सुर्खियों के केंद्र में आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स और अंदरखाने से सामने आ रही खबरों के मुताबिक, जेल में बंद यासीन मलिक ने अपनी पत्नी को तलाक देने की बात कह दी है, जिसके बाद से पाकिस्तान में रह रही मुशाल हुसैन के होश उड़े हुए हैं। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के सामने आने के बाद मुशाल हुसैन मलिक ने न केवल सार्वजनिक रूप से गुहार लगाई है, बल्कि अपने पति की तत्काल जेल से रिहाई की मांग करते हुए अपनी और अपने परिवार की जान को बड़ा खतरा बताया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने एक बार फिर से भारत और पाकिस्तान के कूटनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भारी हलचल पैदा कर दी है, जहाँ लोग इस निजी और राजनीतिक ड्रामे की हर एक कड़ी पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।यासीन मलिक के तलाक के अल्टीमेटम से पाकिस्तान में मचा हड़कंपतिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे अपनी सजा काट रहे यासीन मलिक का यह कथित तौर पर उठाया गया कदम उनकी पत्नी मुशाल हुसैन के लिए एक बड़े मानसिक आघात की तरह सामने आया है। कानूनी और सुरक्षा संबंधी पेचीदगियों के बीच घिरे यासीन मलिक द्वारा अचानक इस तरह का पारिवारिक फैसला लेना कई तरह के अनकहे सवालों को जन्म दे रहा है। मुशाल हुसैन, जो लंबे समय से पाकिस्तान में रहकर अपने पति के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रोपेगैंडा चलाती रही हैं, के लिए यह निजी झटका किसी बड़े भूचाल से कम नहीं है। कश्मीरी अलगाववादियों के इस परिवार में चल रही कलह अब इस कदर बाहर आ चुकी है कि इसे छिपाना मु मुमकिन नहीं रह गया है और आए दिन इस पर नए खुलासे हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जेल के भीतर की अनिश्चितताओं और लगातार कम होते राजनीतिक वजूद के चलते यासीन मलिक के मानसिक तनाव में काफी इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर उनके पारिवारिक रिश्तों पर भी साफ-साफ दिखाई दे रहा है।पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन की भावुक गुहार और रिहाई की सनसनीखेज मांगतलाक की चर्चाओं के बीच मुशाल हुसैन मलिक ने एक वीडियो संदेश और मीडिया बयानों के जरिए भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से यह गुहार लगाई है कि यासीन मलिक की सेहत बहुत नाजुक है और उन्हें तुरंत जेल से रिहाई दी जानी चाहिए। मुशाल ने दावा किया है कि जेल के अंदर उनके पति की जान को गंभीर खतरा है और यदि समय रहते उनकी सुध नहीं ली गई, तो कोई अनहोनी भी हो सकती है। हालांकि, भारतीय न्यायिक प्रणाली और सुरक्षा एजेंसियों के कड़े शिकंजे के बीच आतंकवाद और देशद्रोह के मामलों में सजा काट रहे किसी अपराधी के लिए इस तरह की भावनात्मक अपील का असर होना लगभग असंभव माना जाता है। इसके बावजूद, मुशाल हुसैन लगातार यह साबित करने की कोशिश कर रही हैं कि यासीन मलिक को राजनीतिक बदले की भावना के तहत प्रताड़ित किया जा रहा है, ताकि वे पाकिस्तान और दुनिया भर की सहानुभूति बटोर सकें।कानूनी शिकंजा और अलगाववादी नेताओं के बिखरते निजी व सियासी समीकरणभारत की अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद से ही यासीन मलिक का राजनीतिक और सामाजिक दायरा पूरी तरह से सिमट चुका है और वे पूरी तरह से अकेले पड़ चुके हैं। अलगाववादी राजनीति करने वाले इन चेहरों की हकीकत जब जनता और कानून के सामने बेनकाब होती है, तो उनके पारिवारिक रिश्ते भी इस दबाव को झेलने में नाकाम साबित होने लगते हैं। मुशाल हुसैन और यासीन मलिक का रिश्ता हमेशा से ही भारत विरोधी एजेंडे और राजनीतिक ड्रामे की धुरी पर टिका रहा है, और अब जब कानून ने अपना काम पूरी सख्ती से कर दिया है, तो यह रिश्ता भी बिखरने की कगार पर आ पहुंचा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के हथकंडे अक्सर दबाव बनाने या मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए अपनाए जाते हैं, जिनका न्यायिक प्रक्रियाओं पर कोई असर नहीं पड़ता है।भविष्य के संकेत और इस हाई-प्रोफाइल विवाद का कूटनीतिक असरयह पूरा प्रकरण इस बात का जीवंत उदाहरण है कि किस तरह आतंकवाद और अलगाववाद के रास्ते पर चलने वाले लोगों का अंत केवल तबाही और अकेलेपन पर आकर ही खत्म होता है। यासीन मलिक द्वारा तलाक की बात और मुशाल हुसैन द्वारा रिहाई की गुहार भले ही एक निजी पारिवारिक विवाद जैसा प्रतीत होता हो, लेकिन इसके राजनीतिक और कूटनीतिक मायने बहुत गहरे हैं। पाकिस्तान में बैठकर भारत के खिलाफ जहर उगलने वाली मुशाल हुसैन आज खुद अपने ही घर और रिश्तों के मोर्चे पर घिर चुकी हैं, जिससे उनकी लाचारी साफ झलकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यासीन मलिक इस कानूनी और पारिवारिक मोर्चे पर क्या रुख अपनाते हैं, लेकिन यह तय है कि भारतीय जेल में बंद इस कैदी के जीवन का यह नया अध्याय हर किसी को हैरान करने के लिए काफी है।
ब्रिटेन के एक प्रमुख गुरुद्वारे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के संभावित या पूर्व निर्धारित कार्यक्रम को लेकर उपजे विवाद ने इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। ब्रिटेन के स्थानीय सिख समुदाय और कुछ राजनीतिक हलकों से इस आयोजन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं, जिसके बाद गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने अब इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बेहद सख्त और स्पष्ट सफाई पेश की है। गुरुद्वारा प्रबंधन का साफ तौर पर कहना है कि सिख धर्म के पवित्र और खुले दरवाजे हर उस व्यक्ति के लिए हमेशा स्वागत के भाव से खुले हैं जो शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश लेकर आता है, इसलिए इस धार्मिक स्थल पर आने की अनुमति को किसी भी सूरत में अपनी क्षुद्र राजनीतिक रोटियां सेकने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। यूके के इस प्रतिष्ठित गुरुद्वारे के इस बेबाक बयान ने उन तमाम राजनीतिक तत्वों को करारा जवाब दिया है जो धार्मिक स्थलों को अपने वैचारिक एजेंडे का अखाड़ा बनाने की कोशिश कर रहे थे।ब्रिटेन के गुरुद्वारे में मोहन भागवत के कार्यक्रम पर क्यों मचा है सियासी घमासानविदेशी धरती पर भारतीय संगठनों और उनके शीर्ष नेतृत्व के कार्यक्रमों को लेकर अक्सर एक अलग किस्म की राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिलती है, और मोहन भागवत के इस कार्यक्रम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। ब्रिटेन के कुछ स्थानीय समूहों और कट्टरपंथी तत्वों द्वारा इस बात का विरोध किया जा रहा था कि आरएसएस प्रमुख जैसे वैचारिक रूप से विवादास्पद माने जाने वाले व्यक्तित्व को किसी गुरुद्वारे के मंच पर जगह क्यों दी जानी चाहिए। इस विरोध के चलते वहां का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया था और सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय प्रशासनिक स्तर तक इस पर तीखी बहस छिड़ गई थी। हालांकि, इन विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बड़ा तबका ऐसा भी था जो यह मान रहा था कि गुरुद्वारे जैसे सर्वसमावेशी और सार्वभौमिक स्थानों पर किसी भी भारतीय नेता या विचारक के आने पर पाबंदी लगाना धार्मिक स्वतंत्रता और खुलेपन की भावना के बिल्कुल खिलाफ है।गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की दो टूक: गुरु घर के दरवाजे सभी के लिए हमेशा खुले हैंविवाद के तूल पकड़ने के बाद ब्रिटिश गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने पूरी दृढ़ता के साथ यह स्पष्ट किया है कि उनके दरवाजे किसी खास राजनीतिक विचारधारा के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए बिना किसी भेदभाव के खुले रहते हैं। प्रबंधन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि गुरुद्वारा साहिब एक ऐसा पवित्र स्थान है जहाँ कोई भी इंसान, चाहे उसकी पृष्ठभूमि या विचार कुछ भी हों, मत्था टेकने और संवाद स्थापित करने आ सकता है। इसे किसी राजनीतिक पार्टी के चश्मे से देखना या इस पर आपत्ति जताना गुरु घर की मूल परंपराओं और सिद्धांतों के सरासर खिलाफ है। प्रबंधन ने दो टूक शब्दों में यह संदेश दिया है कि वे किसी भी बाहरी दबाव या राजनीतिक ध्रुवीकरण के आगे झुकने वाले नहीं हैं और गुरुद्वारे की गरिमा एवं उसकी सार्वभौमिक परंपरा को हर हाल में बरकरार रखा जाएगा।धार्मिक स्थलों पर राजनीति हावी होने से सिख समुदाय और प्रवासियों में चिंताइस पूरे घटनाक्रम के बाद ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासी भारतीयों और मुख्यधारा के सिख समुदाय के बीच इस बात को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है कि कैसे कुछ राजनीतिक ताकतें अपने निहित स्वार्थों के लिए धार्मिक संस्थानों का इस्तेमाल करने से बाज नहीं आ रही हैं। जानकारों का मानना है कि ब्रिटेन जैसे लोकतांत्रिक देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के बीच सौहार्द बिगाड़ने के लिए अक्सर ऐसे मुद्दों को बेवजह तूल दिया जाता है, जिनका ज़मीनी हकीकत से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है। गुरुद्वारे जैसी संस्थाओं का मूल उद्देश्य हमेशा से भूखों को भोजन कराना, जरूरतमंदों की सेवा करना और शांति का संदेश फैलाना रहा है, लेकिन जब इन्हें संकीर्ण राजनीतिक बहसों में घसीटा जाता है, तो इससे पूरी कम्युनिटी की छवि पर असर पड़ने का खतरा पैदा हो जाता है। समझदार और प्रबुद्ध वर्ग का यही मानना है कि धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखना ही समाज के हित में सबसे बेहतर कदम है।वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे और संवाद की है आज सबसे बड़ी जरूरतआज के इस वैश्वीकृत दौर में जहां दुनिया भर में दूरियां और वैचारिक टकराव बढ़ रहे हैं, वहां इस तरह की घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि हमें नफरत की राजनीति को छोड़कर आपसी संवाद के रास्ते अपनाने चाहिए। मोहन भागवत के कार्यक्रम पर ब्रिटिश गुरुद्वारे द्वारा दी गई यह सफाई केवल एक संस्था का पक्ष नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि धार्मिक स्थल स्वतंत्र और खुले संवाद के केंद्र बने रहने चाहिए, न कि राजनीतिक अखाड़े। यदि हम वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर खुले मन से एक-दूसरे की बात सुनने की संस्कृति को बढ़ावा दें, तो विदेशों में बसे भारतीय समुदायों के बीच भी एकजुटता और मजबूत भाईचारा कायम रह सकता है। अंततः सच की जीत इसी बात में है कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को खारिज किया जाए और गुरुघरों जैसे पवित्र स्थानों की मूल गरिमा को हमेशा अक्षुण्ण बनाए रखा जाए।
वडोदरा पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी: युवाओं से करेंगे संवाद, गुजरात को देंगे हजारों करोड़ के परियोजनाओं की सौगात- PM Modi gifts projects worth 35000 crore to Gujarat interacts with Gen Z in Vadodara find out what he said
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार पहले दो बच्चों के जन्म पर प्रसूता माताओं और नवजात शिशुओं को 'महालक्ष्मी किट' प्रदान कर रही है। इस किट में माँ के पोषण और बच्चे के लिए कपड़े व अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। जानिए इस योजना की पूरी जानकारी।
केएल राहुल छोड़ेंगे DC? टीम मालिक के पोस्ट पर बैटर ने दिया जवाब
केएल राहुल के IPL 2027 में दिल्ली कैपिटल्स छोड़ने की अटकलों पर अब विराम लग गया है. दिल्ली कैपिटल्स के सह-मालिक पार्थ जिंदल ने राहुल को 'क्लच प्लेयर' बताते हुए अधूरे काम का जिक्र किया. इसके जवाब में राहुल ने कहा कि वह अगले सीजन का इंतजार नहीं कर सकते. इससे उनके दिल्ली के साथ बने रहने की तस्वीर साफ हो गई है.
बुरे फंसे राहुल गांधी, 'चौकीदार चोर' वाला केस रद्द करने से हाईकोर्ट का साफ इनकार
‘चोरों के सरदार’ और ‘कमांडर-इन-चीफ’ टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने केस रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी। जानिए कोर्ट ने क्या कहा।
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स्पेन की राजकुमारी की उत्तराधिकारी लियोनोर अब शाही महल से निकलकर कॉलेज की जिंदगी शुरू कर चुकी हैं. 20 साल की लियोनोर सोमवार सुबह मैड्रिड की कार्लोस तृतीय यूनिवर्सिटी के गेटाफे कैंपस पहुंचीं, जिसके बाद से उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा. उनके पहुंचते ही कैंपस में छात्रों और मीडिया के बीच उत्सुकता देखने को मिली. उन्होंने भी दूसरे छात्रों की तरह एंट्रेंस एग्जाम दिया और उसी प्रक्रिया से गुजरकर अपनी जगह बनाई.
बेंगलुरु में डार्क स्टोर्स पर क्रैकडाउन, 1.43 करोड़ के एक्सपायर्ड सामान जब्त
कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने बेंगलुरु के डार्क स्टोर्स और स्टोरेज फैसिलिटी में एक्सपायर्ड, मिसलेबल्ड फूड प्रोडक्ट और बिना लाइसेंस दवाइयां जब्त कीं. कार्रवाई के बाद एक इंस्टामार्ट फैसिलिटी बंद की गई है और संदिग्ध प्रोडक्ट को लेकर जांच अभी जारी है.
घर में सोना-चांदी रखने पर भी लगता है इनकम टैक्स? ट्राइब्यूनल ने सुनाया बड़ा फैसला; महिला को राहत
नवी मुंबई की रहने वाली एक महिला के घर से और बैंक लॉकर से जो सोना और चांदी मिला उसका बड़ा हिस्सा अघोषित आय में शामिल किया गया। हालांकि इनकम टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल के फैसले के बाद उसे बड़ी राहत मिली है।
Dhirendra Shastri पर Bengal BJP का पलटवार, कहा- बाहरी नहीं तय करेंगे बंगाली क्या खाएंगे!
पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने सोमवार को खुद को भगवान का दूत बताने वाले धीरेंद्र शास्त्री की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बंगालियों से दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन न करने को कहा था। भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में आने वाला कोई भी धार्मिक व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि लोगों को क्या खाना चाहिए या क्या पहनना चाहिए। शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर बाबा के नाम से भी जाना जाता है, ने त्योहार के दौरान मांसाहारी भोजन करने वालों को पाखंडी कहा था और उनसे ऐसा न करने की अपील की थी। इसे भी पढ़ें: पंजाब में 'Gunda Tax' और 'Gang Culture' का बोलबाला, BJP नेता Tarun Chugh का CM Mann पर तीखा हमला इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य के बाहर से आए किसी व्यक्ति के कहने पर बंगालियों के खान-पान की आदतों और परंपराओं को बदला नहीं जा सकता। भट्टाचार्य ने कहा कि मुझे अपनी मर्ज़ी से जीने दें। बंगाली वही खाएंगे जो वे खाते आए हैं। क्या बंगाली मछली और मांस नहीं खा सकते? स्वामी विवेकानंद ने ऐसा कहा है। उनसे बड़ा कौन है? उन्होंने आगे कहा कि यहां मां काली को बकरे का मांस चढ़ाया जाता है। बीजेपी के राज्य अध्यक्ष ने अष्टमी पर 'लुची' (पूरी) और नवमी पर बकरे का मांस खाने की पुरानी परंपरा का ज़िक्र करते हुए कहा कि लोगों से इन रिवाज़ों को छोड़ने के लिए कहने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि हम आम तौर पर अष्टमी पर 'लुची' और नवमी पर बकरे का मांस खाते हैं। हम ऐसा करना जारी रखेंगे। कोई भी पश्चिम बंगाल के लोगों को यह नहीं बता सकता कि उन्हें क्या खाना चाहिए। शास्त्री के बयानों ने पश्चिम बंगाल में बहस छेड़ दी है, जहाँ खान-पान, धर्म और सांस्कृतिक परंपराएँ ऐतिहासिक रूप से साथ-साथ चलती रही हैं और हमेशा सख़्त शाकाहारी धार्मिक नियमों का पालन नहीं किया जाता रहा है। यह विवाद शास्त्री के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने लोगों से दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से बचने की अपील की थी और त्योहार के दौरान इसे खाने वालों को धर्म-विरोधी (heretic) कहा था। उनके दौरे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया क्योंकि बीजेपी सरकार के तहत वे पूरे राज्य में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर पाए, जबकि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान उन्हें अनुमति लेने में कथित तौर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। हालाँकि, बीजेपी के राज्य नेतृत्व ने खुद को ऐसी किसी भी बात से अलग कर लिया है जिसे बंगाल की पारंपरिक खान-पान की आदतों को तय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सके। इसे भी पढ़ें: BJP अध्यक्ष Nitin Nabin का 9 सितंबर से Uttarakhand दौरा, चुनावी तैयारियों का लेंगे जायजा भट्टाचार्य ने कहा कि वे शास्त्री का एक धार्मिक हस्ती के तौर पर सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि उनके निजी विचार बंगाली समाज पर थोपे नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि किसी संत या डॉक्टर को लोगों को शाकाहारी बनने की सलाह देने का अधिकार हो सकता है। लेकिन बाहर से आने वाला कोई भी व्यक्ति बंगाल में बैठकर यह तय नहीं कर सकता कि कौन क्या खाएगा और कौन क्या पहनेगा। भट्टाचार्य ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि शास्त्री के बयान उनके निजी विचार थे। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
72 घंटे बाद भी वेबसाइट पर नहीं आई FIR, महुआ बोलीं जानबूझकर हो रही देरी
महुआ मोइत्रा के वकील अर्क कुमार नाग ने डायमंड हार्बर पुलिस को अवमानना का नोटिस भेजा है. आरोप है कि 1 सितंबर को दर्ज साइबर क्राइम एफआईआर 72 घंटे बाद भी वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुई, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे में अपलोड करना अनिवार्य किया है.
दर-दर भटका 'तारक मेहता' का गोलू, लोगों के घरों में बनाया खाना!
तारक मेहता का उल्टा चश्मा के गोली यानी कुश शाह अब YouTube पर नया कंटेंट बना रहे हैं. मुंबई की सड़कों पर लोगों से घर जाकर खाना बनाने की गुजारिश पर झील मेहता और पलक सिंधवानी ने भी रिएक्ट किया.
LIVE: 'फ्रेट कॉरिडोर 7-8 साल अटका रहा', वडोदरा में पीएम मोदी का Gen-Z से मेगा संवाद
वडोदरा में पीएम मोदी ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की रफ्तार पर बात की. उन्होंने कहा कि 2014 से पहले प्रोजेक्ट फाइलों में अटका रहा, अब 2,800 किमी से ज्यादा कॉरिडोर पूरा हो चुका है.
LIVE: पीएम मोदी का मेगा शो, Gen-Z से सीधा संवाद, वडोदरा में 6 हजार यंग प्रोफेशनल जुटे
LIVE: पीएम मोदी का मेगा शो, Gen-Z से सीधा संवाद, वडोदरा में 6 हजार यंग प्रोफेशनल जुटे
'नैनोवाले ने...' IIT बॉम्बे की प्रोफेसर ने किया ऐसा डांस, वायरल हुआ VIDEO
IIT बॉम्बे की केमिस्ट्री प्रोफेसर रुचि आनंद का एक अलग अंदाज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. विभाग के इन-हाउस कार्यक्रम में उन्होंने 'नैनोवाले ने...' गाने पर ऐसा डांस किया कि इंटरनेट यूजर्स उनकी तारीफ करने लगे.
Eiffel Tower Strike:
ग्राउंड रिपोर्ट: जर्जर इमारत, तारों का जाल... देखें सत्य निकेतन के PGs का हाल
दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई. इस मामले में हॉस्टल मालिक, उसकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार किया गया है. लेकिन सत्य निकेतन इलाके में कई ऐसी ही जर्जर इमारतें हैं जो बड़े हादसों को न्योता दे रही हैं. इमारतों में आने-जाने का सिर्फ एक रास्ता, बालकनी का सरिया बाहर निकला हुआ है. बिजली के तारों का जाल बिछा हुआ हैं. देखें ग्राउंड रिपोर्ट.
मराठा आरक्षण पर आर-पार की लड़ाई, 11वें दिन भी जरांगे का अनशन जारी
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन लगातार तेज हो रहा है. जालना के अंतरवाली सराटी में मनोज जरांगे पाटिल का अनशन 11वें दिन में पहुंच गया है.बड़ी संख्या में मराठा समुदाय के लोग प्रदर्शन स्थल पर जुट रहे हैं. बता दें कि जरांगे ने सरकार को उनकी मांगे मानने के लिए 11 सितंबर तक का समय दिया है.
तुकाराम मुंढे के विभाग ने छीना लाइसेंस, HC भड़का; पूरे FDA को लगाई लताड़
बम्बई उच्च न्यायालय ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन या FDA को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट का कहना है कि कमियों को दूर करने के बाद भी निलंबन वापस नहीं लेने का असर कर्मचारियों और प्रतिष्ठानों पर पड़ रहा है। पुणे की एक कंपनी ने याचिका दाखिल की थी।
सफेद मार्बल पड़ रहा पीला? जान लें सालों-साल चमकदार रखने का सीक्रेट
How To Clean White Marble: क्या आपके घर का सफेद मार्बल समय के साथ पीला और मटमैला पड़ रहा है? इसकी वजह सफाई की कुछ रोजमर्रा की गलतियां भी हो सकती हैं. जानिए किन चीजों से मार्बल की चमक खराब होती है और इसे लंबे समय तक दूध जैसा चमकदार रखने के आसान टिप्स.
14 सितंबर को पधारेंगे बप्पा! 5 राशियों को मिलेगा पैसा ही पैसा
Ganesh Chaturthi 2026 Horoscope: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुद्धि और शुभता के दाता भगवान श्री गणेश के आगमन के साथ ही ग्रहों की विशेष स्थितियों से कई राशियों का भाग्य चमकने वाला है. बप्पा के आशीर्वाद से कई राशियों को फायदा होगा.
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में 50 साल पुरानी इमारत ढहने के दर्दनाक हादसे के बाद जहाँ एक तरफ राहत और बचाव कार्य जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मुख्यमंत्री नागरिक (सिविक) कार्यों में देरी और लापरवाही को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को जमकर फटकार लगाती नज़र आ रही हैं। हालांकि वीडियो की सटीक पृष्ठभूमि और इसके सत्य निकेतन हादसे से सीधे जुड़ाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आम जनता और सोशल मीडिया यूज़र्स इसे प्रशासनिक ढिलाई पर मुख्यमंत्री की सख्त प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं। एक वीडियो में गुस्से में मुख्यमंत्री को यह कहते हुए सुना गया, हर चीज़ की एक सीमा होती है। मैं पिछले दो सालों से आपको 800 करोड़ रुपये का फंड दे रही हूं। सारा फंड कहां जा रहा है? क्या यह पैसा आपकी जेब में जा रहा है? हालांकि बातचीत से यह साफ नहीं हुआ कि गुप्ता को किस बात पर गुस्सा आया, लेकिन ऐसा लग रहा था कि वह किसी इलाके में कुछ स्लैब ठीक करने के काम से नाखुश थीं। इसी वजह से उन्होंने दो अधिकारियों को फटकार लगाई। जब उनमें से एक ने सभी स्लैब ठीक करने के लिए एक हफ़्ते का और समय मांगा, तो उन्होंने उन्हें और भी ज़्यादा फटकार लगाई और कहा कि वह इस तरह की समस्या को हल करने के लिए और समय नहीं दे सकतीं। यह वीडियो जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कई यूज़र्स ने जनसेवा के प्रति उनके सख्त रवैये की तारीफ़ की। गुप्ता के निरीक्षण पर सोशल मीडिया यूज़र्स की प्रतिक्रिया एक यूज़र ने X पर लिखा कि यह देखना होगा कि क्या गुप्ता की फटकार से सरकारी अधिकारियों के काम करने के तरीके में कोई बदलाव आता है या नहीं। उन्होंने लिखा, रेखा गुप्ता गुस्से में अधिकारियों को जमकर फटकार लगा रही हैं। देखते हैं मुख्यमंत्री की फटकार का क्या असर होता है। एक अन्य यूज़र ने लिखा कि गुप्ता के इस तरह के कदमों से ऊपर के स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित होती है। “दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खराब काम और लगातार हो रही देरी को लेकर सिविक इंजीनियरों और अधिकारियों से मौके पर ही कड़े सवाल किए। जब अधिकारियों ने ‘एक हफ़्ते का और समय’ मांगा, तो उन्होंने उन्हें 24 घंटे की सख्त डेडलाइन दे दी और कल तक ठीक किए गए स्लैब की फोटो दिखाने को कहा। कोई फ़ाइल नहीं, कोई बहाना नहीं — सीधे तौर पर जवाबदेही तय की गई!” उन्होंने लिखा। एक और यूज़र ने कहा कि अधिकारियों से ‘अपना काम करवाने’ के लिए कभी-कभी चिल्लाना बहुत ज़रूरी हो जाता है। इसे भी पढ़ें: TN Assembly में DMK MLAs के खिलाफ Marshal का एक्शन, EV Velu ने कहा- यह अलोकतांत्रिक सरकार की हद “दिल्ली की CM रेखा गुप्ता का गुस्से वाला वीडियो वायरल हो रहा है... वीडियो में रेखा गुप्ता अधिकारियों को डांट रही हैं... चिल्ला रही हैं... ऐसे घमंडी अधिकारियों को अच्छी तरह डांट-फटकार कर लाइन पर लाना ज़रूरी है... वरना, सिस्टम की लापरवाही के कारण कई परिवारों की खुशियां इसी तरह खत्म होती रहेंगी,” उन्होंने लिखा। इसे भी पढ़ें: Thane Court ने 2011 के नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को सुनाई 10 साल की सजा हालांकि गुप्ता के गुस्से की वजह साफ़ नहीं है, लेकिन इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर इस बात पर बहस छेड़ दी है कि सरकारी अधिकारी सिविक कामों में देरी और कमियों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। फ़िलहाल, अधिकारियों के साथ गुप्ता की सख्त बातचीत ने उन लोगों का ध्यान खींचा है जो प्रशासन से ज़्यादा जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi जो यह रौद्र रूप REKHA GUPTA JI आज दिखा रही है, काश यही रौद्र और ईमानदारी पहले होती तो यह जवाबदेही नही मांगनी पडती, और आज हालात कुछ और होते। ON Camera के सामने गुस्सा दिखाना आसान है, असली परीक्षा ज़मीन पर काम से होती है। #Rekhagupta #satyaniketan #DelhiPGCollapse #NSUI #ABVP #AAP pic.twitter.com/Ddknz0vBWh — THISS4YOU (@Thiss_4you) September 8, 2026
Z-Category Security के बावजूद Vijender Gupta को बम से उड़ाने की धमकी, हाई अलर्ट पर सुरक्षा तंत्र
दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को मंगलवार को ईमेल के ज़रिए बम से उड़ाने की धमकी मिली। पुलिस ने बताया कि वे सभी ज़रूरी जाँच-पड़ताल के प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। अभी और जानकारी का इंतज़ार है। इससे पहले, इस साल अप्रैल में दिल्ली विधानसभा को लगातार कई बम की धमकियों वाले ईमेल मिलने के बाद गुप्ता को Z-कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, यह फ़ैसला कई बार मिली खास धमकियों और हाल ही में सुरक्षा में हुई एक बड़ी चूक के बाद लिया गया। इसे भी पढ़ें: Satya Niketan Building Collapse: Delhi Police तलाश रही मरम्मत करने वाला ठेकेदार बढ़ाई गई Z-कैटेगरी सुरक्षा व्यवस्था के तहत, गुप्ता को एक खास सुरक्षा टीम से चौबीसों घंटे सुरक्षा और साथ में एक समर्पित एस्कॉर्ट गाड़ी मिली। सचिवालय और स्पीकर के ऑफ़िस को लगभग छह से सात धमकी भरे ईमेल मिले थे। बम धमाकों की धमकियों के बाद अप्रैल महीने में ही दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, यह निर्णय कई लक्षित धमकियों, एक हाई-प्रोफाइल सुरक्षा चूक के मद्देनजर लिया गया है। जेड श्रेणी की बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था के तहत, गुप्ता को विशेष सुरक्षा दल द्वारा चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान की जाएगी, साथ ही एक समर्पित एस्कॉर्ट वाहन भी उपलब्ध कराया गया।
Satya Niketan Building Collapse: Delhi Police तलाश रही मरम्मत करने वाला ठेकेदार
नयी दिल्ली, आठ सितंबर दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास सत्य निकेतन स्थित पीजी इमारत के बेसमेंट में पानी के रिसाव (सीपेज) की पुरानी समस्या थी। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को इस इमारत के गिरने से सात लोगों के मौत हो गई थी। इस इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट व्यवस्था के रूप में किया जा रहा था। पुलिस अब उस ठेकेदार की तलाश कर रही है जो बेसमेंट में रिसाव की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम करा रहा था। सूत्रों ने बताया कि पुलिस उन परिस्थितियों की जांच कर रही है जिनमें यह काम कराया जा रहा था, और क्या इसके कारण कोई ढांचागत बदलाव हुआ जिससे भवन ढह गया। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने भी दक्षिण जोन में कार्रवाई तेज कर दी है। सात सितंबर के आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चला है कि भवन विभाग ने वार्ड 160 में मैदानगढ़ी, सैदुलाजाब और नेब सराय सहित अन्य क्षेत्रों की पांच आवासीय संपत्तियों को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किए हैं, जबकि सैदुलाजाब में एक अन्य आवासीय संपत्ति को जर्जर होने की वजह से गिराने की कार्रवाई की गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सत्य निकेतन में दशकों पुरानी यह इमारत लगभग 55 वर्ग मीटर में फैली हुई थी और इसमें एक बेसमेंट तथा भूतल और चार ऊपरी मंजिलें थीं। बताया जाता है कि प्रत्येक मंजिल पर दो कमरे थे और हर कमरे में दो बिस्तर थे। इस संरचना में खंभे और बीम नहीं थे। यह इमारत रविवार को दोपहर करीब 1:30 बजे मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई। मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने इमारत ढहने के सिलसिले में इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, वायु सेवा से सेवानिवृत्त 81 साल के उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को गिरफ्तार कर लिया है। शुरू में हरिराम को संपत्ति का मालिक माना जा रहा था, लेकिन पुलिस ने कहा कि दस्तावेजों से पता चला है कि इमारत की मालकिन उर्मिला हैं, जबकि हरिराम और महेश कथित तौर पर पीजी का प्रबंधन संभालते थे। इमारत ढहने की घटना के बाद नगर निकाय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई, जिसके तहत एमसीडी के दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों - अधीक्षण अभियंता रणबीर सिंह, अधिशासी अभियंता ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार को निलंबित कर दिया गया। एमसीडी ने पूरी दिल्ली में इमारतों, विशेष रूप से ऊंचाई और मंजिल सीमाओं का उल्लंघन करने वाली संरचनाओं के निरीक्षण का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी अधिकारियों को शहर में सभी पांच मंजिला ढांचों को सील करने का निर्देश दिया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उच्च स्तरीय एमसीडी जांच के आदेश देते हुए कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उच्च न्यायालय ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधु ने पीजी हब में निरीक्षण के निर्देश दिए और अधिकारियों से इमारतों के लिए सुरक्षा मानदंडों को सख्ती से लागू करने को कहा है।
दुनिया के 'असली' मैप में क्या-क्या बदलेगा, US खिलाफ क्यों, भारत ने किस बात पर चेतावनी दी
450 साल से क्या हम दुनिया को गलत आकार में देखते आ रहे थे? क्या नक्शे पर बड़ा दिखना ही दुनिया में बड़ा होना है? ‘Correct the Map’ की मुहिम इसी भ्रम को चुनौती दे रही है. लेकिन पेच ये है कि गोल धरती को सपाट कागज पर उतारेंगे, तो कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर होगी.
दिल्ली में कल पावर कट! ये 14 इलाके रहेंगे प्रभावित, चेक करें टाइमिंग
दिल्ली में 9 सितंबर को कई इलाकों में बिजली कटौती होने वाली है. यह कटौती ग्रिड अपग्रेड और जरूरी मेंटेनेंस के चलते की जाएगी. कुछ इलाकों में करीब एक से तीन घंटे तक बिजली बंद रह सकती है. प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को पावर कट की टाइमिंग BSES Rajdhani Power Limited के ऐप पर चेक की जा सकती है.
तेलंगाना कांग्रेस नेता मोथा रोहित ने मंगलवार को BRS MLC टी. मधुसूदन राव (उर्फ टाटा मधु) और एन. नवीन कुमार रेड्डी की गिरफ्तारी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना विधानसभा स्पीकर गड्डम प्रसाद कुमार के खिलाफ कथित टिप्पणियों को लेकर की गई यह कार्रवाई सही थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने मधु को गिरफ्तार करके सही कदम उठाया है; मधु पर एक दलित स्पीकर का अपमान करने का आरोप है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस टाटा मधु के इस्तीफे की मांग को लेकर गांधी भवन में विरोध प्रदर्शन करेगी। ANI से बात करते हुए रोहित ने कहा, मैं KCR और KTR से सवाल पूछना चाहता हूँ। आप इसे गैर-कानूनी गिरफ्तारी कैसे कह सकते हैं? आपको इस गिरफ्तारी का स्वागत करना चाहिए... BRS का दलितों का अपमान करने का लंबा इतिहास रहा है... कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस सरकार ने मधु को गिरफ्तार करके सही काम किया है, जिन्होंने एक दलित स्पीकर का अपमान किया है... हम आज गांधी भवन में टाटा मधु के इस्तीफे की मांग को लेकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच, BRS नेता दासोजू श्रवण कुमार ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली तेलंगाना सरकार पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान BRS नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। इसे भी पढ़ें: Telangana Assembly का Monsoon Session सोमवार से, Congress और BRS में तीखी बहस के आसार उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों, मार्शल और सादे कपड़ों में अज्ञात लोगों ने BRS प्रदर्शनकारियों को रोका और उन पर हमला किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान महिला विधायकों के साथ बदसलूकी की गई। कुमार ने कहा, रेवंत रेड्डी ने न केवल हिटलर के प्रति अपनी प्रशंसा जाहिर की है, बल्कि वे तेलंगाना में हिटलर के आदर्शों और प्रशासनिक तरीकों को भी लागू कर रहे हैं... डरपोक सरकार ने BRS प्रदर्शनकारियों को रोकने और उन्हें पीटने के लिए पुलिस, मार्शल और सादे कपड़ों में अज्ञात गुंडों का इस्तेमाल किया। इसे भी पढ़ें: Telangana Assembly Speaker पर कथित टिप्पणी मामले में BRS के दो MLC गिरफ्तार श्रावण कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार टाटा मधु को विधान परिषद से हटाने की साजिश रच रही है। उन्होंने आगे कहा, सरकार टाटा मधु को परिषद से बाहर करने की साजिश रच रही है... महिला विधायकों को उनके बालों से खींचकर नीचे गिराया गया, उनकी साड़ियाँ खींची गईं, उनका गला दबाया गया... रेवंत रेड्डी इस सरकार को हिटलर की तरह चला रहे हैं। मैं राहुल गांधी से दखल देने की अपील करता हूँ... अगर विधायकों और MLCs का यह हाल है, तो आम आदमी का क्या होगा? BRS लीगल सेल के वकील कक्ला लक्ष्मण ने कहा कि सैफabad पुलिस ने दो MLCs को हिरासत में लेकर मौलिक अधिकारों, संविधान, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और हाई कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन किया है।
Samsung India में छंटनी की मार, 100 लोगों की नौकरी गई!
सैमसंग इंडिया में बढ़ती कॉस्ट और महंगी मेमोरी चिप का असर अब एम्प्लॉइज पर भी दिख रहा है. कंपनी ने टीवी और होम अप्लायंसेज बिजनेस में करीब 100 लोगों को नौकरी से हटा दिया है.
TN Assembly में DMK MLAs के खिलाफ Marshal का एक्शन, EV Velu ने कहा- यह अलोकतांत्रिक सरकार की हद
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के विधायक और पार्टी व्हिप EV वेलु ने तमिलनाडु सरकार और स्पीकर JCD प्रभाकर की कड़ी आलोचना की। यह घटना तब हुई जब मुख्यमंत्री C जोसेफ विजय की 'मेंटेनेंस ऑफ़ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट' (MISA) पर की गई टिप्पणी के विरोध में मार्शल ने DMK विधायकों को विधानसभा से बाहर निकाल दिया। वेलु ने स्पीकर के इस कदम को लोकतंत्र-विरोधी सरकार की हद बताया और कहा कि DMK राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक जायज़ मांग उठा रही थी। वेलु ने पत्रकारों से कहा, हमने तमिलनाडु में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर जवाब मांगा था, लेकिन CM ने मुद्दे से ध्यान भटकाते हुए MISA एक्ट के बारे में बात की। सरकारिया आयोग ने किसी को दोषी नहीं ठहराया था; इसलिए, हमने स्पीकर से उन हिस्सों को रिकॉर्ड से हटाने के लिए कहा, लेकिन स्पीकर ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसे भी पढ़ें: KN Nehru और 12 अन्य पर DVAC ने 1020 करोड़ के टेंडर घोटाले में दर्ज की FIR उन्होंने कहा, एक जायज़ मांग उठाने पर स्पीकर ने हमें ज़बरदस्ती सदन से बाहर निकाल दिया। यह एक अलोकतांत्रिक सरकार और अलोकतांत्रिक काम की हद है। DMK सरकार ने असल सरकार चलाई, लेकिन TVK 'रील' (नकली) सरकार चला रही है। मंगलवार को DMK ने स्पीकर के चैंबर के बाहर धरना दिया और सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विजय की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। इस विरोध के कारण सदन में हंगामा हुआ, जिसके बाद स्पीकर ने मार्शल को DMK विधायकों को बाहर निकालने का निर्देश दिया। वेलु ने पहले विधानसभा में आपत्ति जताते हुए तर्क दिया था कि जांच के दायरे में आने वाले विजिलेंस मामलों का ज़िक्र करना विधायी परंपरा का उल्लंघन है। इसे भी पढ़ें: CM Vijay का DMK पर निशाना, कहा – ED Report में है Karur Gang के भ्रष्टाचार का सबूत उन्होंने कहा, मामलों को पढ़कर सुनाना परंपरा का उल्लंघन है। कल मुख्यमंत्री ने MISA और सरकारिया आयोग के बारे में बात की थी। मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान विजिलेंस मामलों को पढ़कर सुनाना परंपरा का उल्लंघन है। जो मामले जांच के दायरे में हैं, उन पर टिप्पणी नहीं की जा सकती। स्पीकर JCD प्रभाकर ने MISA पर विजय की टिप्पणियों को हटाने की DMK की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन मामलों का ज़िक्र किया था जिन पर सदन में पहले ही चर्चा हो चुकी है। यह टकराव सोमवार को हुई तीखी बहस के बाद हुआ, जब विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को पिछली DMK सरकार के खिलाफ विजय द्वारा लगाए गए आरोपों का तुरंत जवाब देने की अनुमति नहीं मिलने पर DMK ने सदन से वॉकआउट किया था। अपने भाषण के दौरान, विजय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सामग्री, सरकारिया आयोग और पिछली DMK सरकारों के दौरान कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया।
Tamil Nadu FIR against former minister KN Nehru ₹1,020 crore scam; accused extortion name of party funds.
आधी रात तक बजता रहा DJ, बेटी की बाहों में पिता ने तोड़ा दम... वर्षा कदम की आपबीती
पिंपरी-चिंचवड के एक परिवार ने तेज आवाज वाले डीजे और साउंड सिस्टम की वजह से अपने बुजुर्ग पिता की मौत का आरोप लगाया है. परिवार का कहना है कि शोर के कारण समय पर मेडिकल मदद नहीं मिल सकी. परिवार का कहना है कि धर्म के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है.
मणिपुरी संगीतकार की हत्या: राहुल बोले- शाह का गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस क्या कर रहे; सीसीटीवी में क्या?chongtham vikram singh murder cctv rahul gandhi mha
सत्य निकेतन इमारत हादसे में मालिक समेत तीन गिरफ्तार
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने के बाद पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम, उसकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार किया है। MCD ने दक्षिण जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया।
Thane Court ने 2011 के नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को सुनाई 10 साल की सजा
ठाणे, आठ सितंबर महाराष्ट्र में ठाणे जिले के कल्याण की एक विशेष त्वरित अदालत ने 2011 में 15 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म करने के मामले में एक व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. पी. मुले ने सोमवार को सुनाए फैसले में कहा कि पीड़िता ने आरोपी के साथ अपनी मर्जी से जाने के बाद इस्लाम धर्म अपना लिया था लेकिन उस समय वह नाबालिग थी इसलिए धर्म परिवर्तन को उसकी स्वेच्छा से लिया गया फैसला नहीं माना जा सकता। ठाणे जिले के डोंबिवली की रहने वाली पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी अजहर उर्फ बदू मुस्ताक कुरैशी (39) के साथ लखनऊ गई थी। अदालत ने आरोपी को इसी आधार पर अपहरण के आरोप से बरी कर दिया। हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि अलग नाम से टिकट खरीदना यह दर्शाता है कि आरोपी ने ‘‘गलत मंशा के साथ पहले से ही साजिश रच ली थी।’’अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से पता चलता है कि आरोपी ने केवल पीड़िता के साथ ‘‘शारीरिक संबंध बनाने’’ के उद्देश्य से पहले ही यह साजिश रची थी। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता ने जब इस्लाम धर्म अपनाया और आरोपी के साथ गई, उस समय वह नाबालिग थी। अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए धर्म परिवर्तन की रस्मों में पीड़िता की भागीदारी को स्वैच्छिक कृत्य नहीं कहा जा सकता।’’अदालत ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाने वाले व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत दुष्कर्म के अपराध के लिए दंडित किया जा सकता है, भले ही 15 से 18 वर्ष आयुवर्ग की पीड़िता उसकी पत्नी हो। अदालत ने कहा कि इसलिए आरोपी आईपीसी की धारा 375 के अपवाद-2 का सहारा लेकर अभियोजन से नहीं बच सकता। इस अपवाद के अनुसार किसी व्यक्ति का अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं माना जाएगा, जबकि पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम न हो। अदालत ने आरोपी को पांच फरवरी से 12 सितंबर 2012 तक मुकदमे से पहले हिरासत में बिताई गई अवधि का लाभ देने का भी आदेश दिया। अदालत ने पीड़िता को मुआवजा देने के लिए मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पास भेजने की भी सिफारिश की। अतिरिक्त लोक अभियोजक सचिन कुलकर्णी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने पीड़िता समेत सात गवाहों से पूछताछ की।
बिहार में बाढ़ का भयंकर रूप: 13 जिलों में 27 लाख लोग प्रभावित, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
पटना, भागलपुर, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय और मुंगेर समेत बिहार के 13 जिलों में बाढ़ का कहर दिखाई दे रहा है। भागलपुर के 178 गांव पानी में डूब गए तो सारण के 109 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। राज्य के करीब 27 लाखों लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
कूड़ा फेंकने की छोटी सी बात पर खूनी खेल, बांदा में देवर-भतीजे ने भाभी की ले ली जान
बांदा के जसपुरा थाना क्षेत्र के बरेहटा फकीरा गांव में घर के सामने कूड़ा फेंकने को लेकर दो सगे भाइयों के परिवारों में विवाद हो गया. कहासुनी के बाद दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई. इसी दौरान खेत से लौटी गीता पर देवर रामबहादुर और उसके भतीजे ने हंसिया से हमला कर दिया.
आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि साक्षरता गरीबी के चक्र को तोड़ने और बेहतर भविष्य बनाने का सबसे अच्छा ज़रिया है। X पर एक पोस्ट में आप संयोजक ने सभी के लिए शिक्षा की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। केजरीवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की बधाई। साक्षरता गरीबी के चक्र को तोड़ने, बेरोज़गारी कम करने और बेहतर भविष्य बनाने का हमारा सबसे अच्छा ज़रिया है। हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, ताकि उन्हें मुकाबला करने और जीतने की ताकत मिल सके। इसे भी पढ़ें: Delhi Jal Board Case: AAP नेता Satyendar Jain को बड़ी राहत, ₹2 लाख के बांड पर मिली Bail इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LoP) मल्लिकार्जुन खड़गे ने 60वें अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की थीम लोगों, धरती और समृद्धि के लिए साक्षरता की तारीफ़ की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षा एक सशक्त समाज और टिकाऊ भविष्य की नींव है। एक्स पर एक पोस्ट में, कांग्रेस प्रमुख ने 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' की तारीफ़ करते हुए कहा कि इस अहम कानून ने पूरे भारत में शिक्षा तक पहुँच को काफ़ी बढ़ाया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि सीखने के नतीजों (लर्निंग आउटकम) पर खास ध्यान देते हुए अच्छी क्वालिटी की शिक्षा देना देश के सामने अगली चुनौती है जिसे पूरा करना है। खड़गे ने शिक्षा बजट को दोगुना करने और शिक्षा पर सरकारी खर्च को देश की GDP का 6 प्रतिशत तक बढ़ाने के अपनी पार्टी के वादे को दोहराया, जिसमें टेक्नोलॉजी-आधारित लर्निंग और स्किल डेवलपमेंट पर ज़्यादा ध्यान दिया जाएगा। इसे भी पढ़ें: Satya Niketan Building Collapse: मलबे में जिंदगी की तलाश के बीच सियासत गर्म, हादसे पर BJP और AAP भिड़े खड़गे ने कहा, 60वें अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की थीम 'लोगों, धरती और समृद्धि के लिए साक्षरता' हमें याद दिलाती है कि शिक्षा एक सशक्त समाज और बेहतर भविष्य की नींव है। क्रांतिकारी 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' ने पूरे भारत में शिक्षा तक पहुँच बढ़ाई। अगला कदम क्वालिटी पर होना चाहिए, जिसमें सीखने के नतीजों पर ज़्यादा ध्यान दिया जाए। कांग्रेस पार्टी शिक्षा बजट को दोगुना करने और शिक्षा पर सरकारी खर्च को GDP का 6% तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें टेक्नोलॉजी-आधारित लर्निंग और स्किल डेवलपमेंट पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाएगा। #InternationalLiteracyDay पर, हम शिक्षा में निवेश करने और भारत के आगे बढ़ने की चाह रखने वाले युवाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य को आकार देने के लिए सशक्त बनाने के अपने संकल्प को दोहराते हैं।
पंजाब में 'Gunda Tax' और 'Gang Culture' का बोलबाला, BJP नेता Tarun Chugh का CM Mann पर तीखा हमला
बीजेपी सांसद तरुण चुघ ने मंगलवार को पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला करते हुए उस पर गैंग कल्चर, माफिया और जबरन वसूली को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चुघ ने कहा पंजाब में भगवंत मान सरकार, अरविंद केजरीवाल के इशारे पर, पूरे राज्य में लगातार गैंग कल्चर, माफिया और जबरन वसूली के कल्चर को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया, वे आपराधिक गतिविधियों, माफिया और गैंगस्टरों को संस्थागत रूप दे रहे हैं, जिसकी वजह से आज पूरा पंजाब डर के माहौल में जी रहा है। इस सरकार के बनने के बाद पंजाब में पहली बार संगठित जबरन वसूली शुरू हुई है। इसे भी पढ़ें: चुनाव आयोग ने 6 सीटों पर उपचुनाव का ऐलान किया, नंदीग्राम पर रहेगी सबकी नजर चुघ ने कहा कि इसके नतीजे हर वर्ग में दिख रहे हैं, पंजाब में हर उद्योगपति, हर व्यापारी, हर डॉक्टर, हर अस्पताल प्रशासन, हर वकील, हर बड़े किसान, यहाँ तक कि नया वाहन खरीदने वाले किसी भी व्यक्ति को फ़ोन कॉल आता है। इन कॉल्स के ज़रिए जबरन वसूली की मांग की जाती है। राज्य में एक समानांतर व्यवस्था का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, गैंगस्टर लगातार पंजाब की शांति और सुकून से खिलवाड़ कर रहे हैं। हर व्यक्ति को ज़िंदा रहने और सुरक्षित रहने के लिए एक समानांतर 'गुंडा टैक्स' देना पड़ता है... पंजाब में एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है। पंजाब में एक समानांतर सरकारी व्यवस्था है। लोग बेबस हैं। उन्होंने आगे कहा लोग अपने परिवारों, बच्चों, कारोबार और घरों को लेकर डरे हुए हैं। फरवरी 2022 से माहौल ऐसा हो गया है कि गैंगस्टर, माफिया और जबरन वसूली करने वाले लोग भगवंत मान की सरकार का हिस्सा बन गए हैं। चुघ ने एक तस्वीर भी दिखाई और आरोप लगाया कि आपराधिक बैकग्राउंड वाला एक व्यक्ति बीजेपी को डराने के लिए उनके घर के बाहर हुए प्रदर्शन में शामिल था। इसे भी पढ़ें: BJP अध्यक्ष Nitin Nabin का 9 सितंबर से Uttarakhand दौरा, चुनावी तैयारियों का लेंगे जायजा उन्होंने कहा कि मैं आपको एक फ़ोटो दिखा रहा हूँ। यह मेरे घर के बाहर का प्रदर्शन है... जिस व्यक्ति के हाथ में आम आदमी पार्टी का झंडा है... उसका नाम कमल बोरी है... मैंने उसके अपराधों की एक लंबी सूची बनाई है... पंजाब पुलिस खुद मानती है कि वह पूरी तरह से माफ़िया है, एक गैंग चलाता है और जबरन वसूली करता है।
तमिलनाडु विधानसभा में मीसा पर महाभारत: स्पीकर के चेंबर के सामने बैठे डीएमके विधायक, मार्शल ने जबरन उठाया- Opposition uproar over MISA in Tamil Nadu Assembly DMK MLAs sat outside Speaker chamber were forcibly removed
राम मंदिर के नए CEO जितेंद्र मिश्र आज संभालेंगे कमान, CM का भी करेंगे स्वागत
मंगलवार को राम मंदिर के पहले CEO जितेंद्र मिश्र अयोध्या में नई जिम्मेदारी संभालेंगे. इस दौरान अयोध्या आ रहे सीएम योगी आदित्यनाथ के रामलला दर्शन से पहले जितेंद्र मिश्र उनकी अगवानी करेंगे.
BCCI से झटका, टीम इंडिया से दूरी... कप्तानी ने बदला ईशान किशन का खेल
BCCI का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट गंवाने और टीम इंडिया से दूर होने के बाद ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट में वापसी की. झारखंड की कप्तानी ने उनके खेल और सोच को नया नजरिया दिया. इसी बदलाव का नतीजा अब दलीप ट्रॉफी फाइनल में उनकी 270 रनों की ऐतिहासिक पारी के रूप में सामने आया है.
लखनऊ से सहारनपुर पहुंचे ASI के असिस्टेंट आर्कियोलॉजिकल ऑफिसर मनोज कुमार यादव ने बताया कि वहां जो चीज़ें दिख रही हैं, वे उसकी ऐतिहासिक पहचान स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा थीं.
पीएम मोदी का गुजरात दौरा : वडोदरा में पीएम मोदी के शो का क्रेज, 1 घंटे में बिके सारे टिकट
वडोदरा में पीएम मोदी के कार्यक्रम को लेकर ऐसा उत्साह देखने को मिला है, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी... कार्यक्रम में आम लोगों के लिए जैसे ही मुफ्त रजिस्ट्रेशन का रास्ता खुला, महज एक घंटे में ही सारी सीटें फुल हो गईं।
नितेश तिवारी की अपकमिंग फिल्म रामायण में रणबीर कपूर को भगवान राम के रोल के लिए चुने जाने की घोषणा के बाद से ही फैंस की राय बंटी हुई है.
कोटा के सीवी गार्डन में घुसा तेंदुआ, 40 फीट ऊंचे जामुन के पेड़ पर चढ़ा; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
कोटा के बीचोंबीच स्थित सीवी गार्डन में मंगलवार सुबह एक तेंदुआ घुस आने से हड़कंप मच गया. करीब 200 लोग मॉर्निंग वॉक और योग कर रहे थे, तभी तेंदुआ दिखाई दिया. बाद में वह 40 फीट ऊंचे जामुन के पेड़ पर चढ़ गया. वन विभाग की टीम उसे सुरक्षित पकड़ने के लिए अभियान चला रही है.
दिवाली और छठ के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान, देखें रूट और शेड्यूल
दिवाली और छठ के लिए स्पेशल ट्रेन का ऐलान किया जा चुका है और इनकी बुकिंग भी शुरू हो चुकी है. अगर आप भी दिवाली और छठ के लिए कंफर्म टिकट चाहते हैं तो इन ट्रेनों में फटाफट बुकिंग कर सकते हैं.
MP में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में OPD बंद! MBBS इंटर्न ने छोड़ा काम, JUDA ने भी दिया अल्टीमेटम
मध्य प्रदेश में MBBS इंटर्न्स के आंदोलन का असर अब पूरे प्रदेश में दिखने लगा है. स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग को लेकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न्स ने काम बंद कर दिया है. भोपाल के हमीदिया अस्पताल में OPD प्रभावित हुई है, जबकि JUDA ने भी सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.
Rajasthan के 162 नगर निकायों में पहले चरण की Voting बुधवार को, तैयारियां पूरी
जयपुर, आठ सितंबर राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार को मतदान होगा जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में बुधवार को जयपुर जिले के 18 नगर निकाय समेत राज्य के 162 नगर निकायों में मतदान होगा। मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होगा। उन्होंने बताया कि पहले चरण में पार्षद के 5,393 पदों के लिए 20 हजार से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। जिन 162 नगर निकायों में बुधवार को मतदान होने जा रहे हैं उनमें चार नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाएं शामिल हैं। पहले चरण में शामिल चार नगर निगम अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा हैं। इस चरण में कुल 20,623 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। अधिकारियों के अनुसार, 162 नगर निकायों में 7,683 मतदान केंद्रों पर 57,52,278 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। जयपुर जिले में 18 नगर निकायों के लिए 565 केंद्रों पर मतदान होगा। जयपुर जिले में जिन निकायों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें मनोहरपुर, फुलेरा, सांभर, किशनगढ़-रेनवाल, शाहपुरा, दूदू, चाकसू, फागी, जोबनेर, खेजरोली, जमवारामगढ़, वाटिका, कानोता, बस्सी, बगरू, कालाडेरा और चौमूं शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को होने वाले मतदान के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मतदान दल मंगलवार को अपने-अपने मतदान केंद्रों का जिम्मा संभाल लेंगे। राज्य के सभी 309 नगरीय निकायों के चुनाव के लिए दो चरणों में नौ और 11 सितंबर को मतदान होगा, जबकि परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।
खाने के पार्सल में मिला सूप से सना चूहा, वायरल वीडियो देख लोगों का मिचलाया जी
हाल ही में एक महिला ने जब ऑनलाइन मंगवाया खाना खोला, तो अंदर का नजारा देखकर उसकी चीखें निकल गईं. नूडल्स के बीच एक जिंदा चूहा रेंग रहा था, जिसका वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.
'हमास बड़ा हमला करने वाला है...', UAE ने चेताया लेकिन नेतन्याहू ने किया इग्नोर
हमास के अक्टूबर 2023 के हमले को लेकर एक नई रिपोर्ट में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. हारेत्ज की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले से करीब 10 दिन पहले UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने फोन पर नेतन्याहू को हमास के बड़े हमले की चेतावनी दी थी.
न Gold, न Silver... Copper ने रिकॉर्ड तेजी दिखाई है. ऐसी तेजी कि अबतक के सारे रिकॉर्ड टूट गए. एक्सपर्ट्स ने इसके पीछे की जो वजह बताई है, वो सीधे आपसे जुड़ी है. जानिए इस समय निवेश का सही समय है या नहीं.
क्या आप भी पकौड़े खाने के शौकीन हैं, लेकिन कुछ ट्विस्ट और यूनिक ट्राई करना चाहते हैं, तो अरबी के पातरा को ट्राई कर सकते हैं.
चीन की कंपनी को थिलाफुशी में पोर्ट का ठेका मिलना अहम है। यह इलाका भारत के ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का भी अहम हिस्सा है। हाल ही में राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत की मदद से बन रहे थिलामाले ब्रिज की तारीफ की थी।
1-1 लाख का जुर्माना, बंद करने के आदेश... आगरा में 58 अमान्य स्कूल
उत्तर प्रदेश के आगरा में उन स्कूलों पर बड़ी कार्रवाई की गई है जिनके पास मान्यता नहीं थी लेकिन फिर भी उनमें क्लासेस चल रही हैं. इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले के अमान्य 58 स्कूलों में एक-एक लाख का जुर्माना लगाया है और साथ ही स्कूल को बंद करने का ऐलान किया है.
आकृति चौधरी केस: नोएडा डीएम मेधा रूपम पर हमलावर महुआ मोइत्रा, पिता ज्ञानेश कुमार को भी घसीटा; जानें क्या कहा?Mahua Moitra attack on DM Medha Rupam in Akriti Chaudhary case targeted also Gyanesh Kumar
Karwa Chauth 2026: करवा चौथ 2026 पर सुबह 6:25 से 6:46 बजे तक भद्रा रहेगी. आचार्य मदन मोहन ने इस दौरान सुहाग की चीजें न पहनने और चंद्रमा को विशेष अर्घ्य देने की सलाह दी है.
क्या है केशलोचन परंपरा? जिसमें हाथों से उखाड़े जाते हैं सिर के बाल
Paryushana Parva 2026: केशलोचन को केश लुंचन प्रक्रिया भी कहा जाता है. त्याग, संयम और कठिन तप पर आधारित जैन धर्म में केशलोचन को साधना का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है.
KN Nehru और 12 अन्य पर DVAC ने 1020 करोड़ के टेंडर घोटाले में दर्ज की FIR
चेन्नई, आठ सितंबर सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने सरकारी निविदाओं में बड़े पैमाने पर कथित हेरफेर और रिश्वत वसूली से जुड़े 1,020 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू को ‘‘मुख्य आरोपी’’ बनाते हुए उनके तथा 12 अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता नेहरू के भाइयों के साथ-साथ पार्टी के दो पूर्व विधायकों एस. सुदर्शनम (ए10) और जे. जे. एबेनेजर (ए11) को भी आरोपी बनाया गया है। उन पर ठेकेदारों के नाम की सिफारिश करने तथा निविदाओं से जुड़ी जानकारी और कथित रिश्वत की रकम का ब्योरा साझा करने का आरोप है। डीवीएसी के दस्तावेज में दावा किया गया है कि नेहरू ने वरिष्ठ नौकरशाहों तक पहुंच उपलब्ध कराई और निविदाएं आवंटित करने की प्रक्रिया को ‘‘प्रभावित’’ किया। दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग के पूर्व मंत्री ने अपने भाइयों को अपने एक करीबी सहयोगी के साथ मिलकर ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों से ‘‘पार्टी फंड’’ के नाम पर अवैध रूप से रिश्वत वसूलने की अनुमति दी। इसमें 1,020 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि ठेकों की कुल राशि का 7.5 से 10 प्रतिशत ‘‘पार्टी फंड’’ के रूप में वसूला गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की 258 पृष्ठों की रिपोर्ट के आधार पर डीवीएसी की जांच के बाद शुक्रवार को मामला दर्ज किया गया। ईडी की रिपोर्ट में 2021 से 2025 के बीच सरकारी ठेकों में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। दस्तावेज में नेहरू को मुख्य आरोपी बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि उनके भाई के. एन. मणिवन्नन (ए2) और एन. रविचंद्रन (ए3) कथित रिश्वत की वसूली करने और उसे आगे पहुंचाने में मदद करते थे। इसमें दावा किया गया है कि नेहरू ने अपने भाइयों को अपने करीबी सहयोगी कवि प्रसाद के साथ मिलकर ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों से कथित रिश्वत वसूलने की अनुमति दी, जिसे बाद में उन्हें पहुंचाया जाता था। दस्तावेज में अविनाशी और तिरुप्पुर स्थित कुछ कंपनियों के नाम भी दिए गए हैं, जिन पर यह रकम देने का आरोप है। कोयंबटूर के नगर नियोजन अधिकारी और तिरुप्पुर के क्षेत्रीय इंजीनियरों पर भी नगरपालिका के कार्यों और कथित रिश्वत के लेन-देन में मदद करने का आरोप लगाया गया है। प्राथमिकी में चेन्नई स्थित एक निर्माण कंपनी के मालिक एवं पदाधिकारियों तथा कुछ अज्ञात अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। दस्तावेज में सुदर्शनम और प्रसाद के बीच छह सितंबर 2021 को व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत तथा एबेनेजर से संबंधित संदेशों को भी आधार बनाया गया है। मणिवन्नन के फोन से कुछ रसीदें भी बरामद की गईं।
पहले 'कुंडली' निकालते,फिर दिखाते डर... IPS केके बिश्नोई की टीम ने कसा शिकंजा
बिजनौर में पुलिस ने लोगों को मुकदमों में फंसाने का डर दिखाकर कथित तौर पर पैसे वसूलने वाले गिरोह का खुलासा किया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले लोगों के विवाद और पुरानी रंजिश की जानकारी जुटाते थे, फिर समझौते के नाम पर रकम मांगते थे. मांग पूरी न होने पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बनाया जाता था. मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
लाल से नीली हुई सपा की ड्रेस... अखिलेश की इस रणनीति के पीछे आखिर दांव क्या
उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले दलित वोटरों और जेन-जी को साधने के लिए अखिलेश यादव ने बड़ा दांव चला है. सपा प्रमुख ने अपनी 'पीडीए' रणनीति को धार देते न केवल खुद नीला गमछा धारण किया, बल्कि सपा छात्र सभा का नया ड्रेस कोड भी नीला तय कर दिया है.
हनुमान अंश का बुंदेली लोक भजन ‘पार्वती’ शिव-पार्वती की प्रेम और तपस्या की कहानी को देसी अंदाज में पेश करता है. जानें इस भजन में क्या है खास जो लोगों को आ रहा है इतना पसंद.
6, 4, 6...गिल ने मचाया धमाल, आखिरी गेंद पर अभिषेक ने किया खेल खत्म
शेर-ए-पंजाब टी20 लीग में शुभमन गिल ने अभिषेक के एक ही ओवर में 16 रन जड़कर धमाल मचा दिया, लेकिन आखिरी गेंद पर अभिषेक ने गिल को आउट कर दिया. इसके बाद अभिषेक ने बल्ले से भी 15 गेंदों पर 49 रन ठोक दिए.
गैंगवॉर, गाली, इंटीमेसी ही नहीं...टूटे दिल की कहानी भी कहती है ‘मिर्जापुर’
Mirzapur Review: ‘मिर्जापुर’ में बाहुबली दुश्मनों पर गोलियां बरसाते हैं, लेकिन प्यार के सामने खुद बेबस हो जाते हैं. गुड्डू, मुन्ना, बब्बन और बबलू की मोहब्बत कहानी को एक अलग ह्यूमन एंगल देती है.
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इमारत क्यों गिरी। बड़ा स

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