महाराष्ट्र के विकास पर PM Modi से मिले Fadnavis, केंद्र से माँगा और सहयोग
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात का मकसद राज्य में चल रही कई विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना और केंद्र-राज्य की संयुक्त पहलों के लिए अधिक सहयोग की मांग करना था। बैठक के बाद, फडणवीस ने इस बातचीत को प्रेरणादायक बताया और महाराष्ट्र के विकास के रोडमैप के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसे भी पढ़ें: BJP IT Cell में बड़ा बदलाव! Amit Malviya की जगह Deepak Mhaske बने नए प्रमुख, कौन हैं वे? X पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि आज नई दिल्ली में मैंने हमारे वैश्विक नेता और देश के प्रिय प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी से मुलाकात की। हमने कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। मैंने उन्हें कई विकास परियोजनाओं की प्रगति के बारे में बताया और केंद्र-राज्य की संयुक्त परियोजनाओं के लिए भारत सरकार से और अधिक सहयोग का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र के विकास को दिशा देने में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन के महत्व पर ज़ोर दिया और केंद्र सरकार से मिल रहे लगातार सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमेशा की तरह, प्रधानमंत्री जी से मिलना प्रेरणादायक रहा और इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। विकास से जुड़े मुद्दों पर लगातार और बहुमूल्य मार्गदर्शन तथा महाराष्ट्र को मज़बूत समर्थन देने के लिए मैं उनका सदैव आभारी हूँ! दिल्ली में बातचीत के बाद, फडणवीस मंगलवार को मुंबई लौटेंगे और इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IACC) के नेशनल कन्वेंशन 2026 में उद्घाटन भाषण देंगे। 'द ललित मुंबई' में होने वाले इस कन्वेंशन का विषय भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नए सिरे से परिभाषित करना है और इसमें भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर समेत कई जाने-माने वक्ता शामिल होंगे। इसे भी पढ़ें: चिदंबरम के बाद केजरीवाल ने भी खुद को बताया 'दिमागी नक्सली': जो लोग विकसित भारत चाहते हैं... इस कार्यक्रम का मकसद भारत और अमेरिका के बीच आपसी व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के भविष्य को प्राथमिकता देना है। राजदूत गोर एक विशेष भाषण देंगे जिसमें वे इस बात पर ज़ोर देंगे कि अमेरिका-भारत की साझेदारी गहरे भरोसे और साझा मूल्यों पर टिकी है। उन्होंने कहा कि मज़बूत सप्लाई चेन बनाने और दोनों देशों में रोज़गार पैदा करने के लिए अमेरिकी टेक्नोलॉजी और निवेश को भारतीय स्तर और टैलेंट के साथ मिलाना जरूरी है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष स्थान है। हमारे घरों में सुबह-शाम की पूजा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि परमात्मा से जुड़ने और मानसिक शांति पाने का एक सशक्त माध्यम है। पूजा की थाली में रखी हर एक सामग्री के पीछे गहरा अर्थ और मान्यता छिपी है। शास्त्रों में वर्णित इन पूजा सामग्रियों का उपयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से अनिवार्य माना गया है, बल्कि इनके पीछे वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी निहित हैं। अक्सर हम जाने-अनजाने में इन चीजों का प्रयोग तो करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा के दौरान बजाई जाने वाली घंटी, प्रज्वलित किया जाने वाला दीपक, जल का पात्र और धूपबत्ती का वास्तव में क्या महत्व है? आइए जानते हैं पूजा की उन 4 प्रमुख चीजों के बारे में जिनके बिना हमारी प्रार्थना अधूरी मानी जाती है।1. पूजा की घंटी: सकारात्मक ऊर्जा का संचार और एकाग्रतापूजा के दौरान घंटी बजाना किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घंटी की ध्वनि से निकलने वाली गूंज वातावरण को शुद्ध करती है और मन को एकाग्र करती है। जब हम घंटी बजाते हैं, तो इससे निकलने वाली 'ओंकार' जैसी ध्वनि हमारे मस्तिष्क के सभी सात केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय कर देती है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी घंटी की ध्वनि में ऐसी क्षमता होती है जो मानसिक तनाव को दूर कर मन को शांति प्रदान करती है। घंटी बजाने से मंदिर में प्रवेश करते ही हमारे मन से बाहरी सांसारिक विचार समाप्त हो जाते हैं और हम पूरी तरह से ईश्वर की आराधना में लीन होने के लिए तैयार हो जाते हैं।2. प्रज्वलित दीपक: अंधकार का नाश और आत्म-प्रकाश का प्रतीकदीपक पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' यानी अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का प्रतीक माना जाता है। दीपक की लौ का ऊपर की ओर उठना निरंतर प्रगति और ज्ञान का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं में घी का दीपक सकारात्मकता और सात्विक ऊर्जा का संचार करता है, जबकि सरसों के तेल का दीपक बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। दीपक जलाते समय ध्यान का केंद्र केवल लौ पर होता है, जिससे मन के भीतर का अंधेरा और नकारात्मकता दूर होती है। यह न केवल मंदिर में रोशनी करता है, बल्कि हमारे भीतर की आत्मा को भी जागृत करने की प्रेरणा देता है, जिससे व्यक्ति के आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि होती है।3. जल का पात्र (कलश या लोटा): जीवन और पवित्रता का आधारपूजा की थाली में शुद्ध जल से भरा एक पात्र, अक्सर तांबे या पीतल का लोटा, रखना अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों में जल को 'जीवन' कहा गया है। पूजा में जल का उपयोग भगवान को अभिषेक करने, अर्घ्य देने और आचमन करने के लिए किया जाता है। माना जाता है कि जल में देवी-देवताओं का वास होता है और यह नकारात्मक शक्तियों को सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है। तांबे के पात्र में रखे जल का वैज्ञानिक लाभ भी है; तांबा जल को शुद्ध करता है और इसमें औषधीय गुण पैदा करता है। पूजा के अंत में इस जल को पूरे घर में छिड़कना घर की शुद्धि और नकारात्मकता को नष्ट करने का एक अत्यंत प्रभावी उपाय माना जाता है।4. धूप या अगरबत्ती: नकारात्मकता का नाश और मन की शुद्धिपूजा में उपयोग की जाने वाली धूप या अगरबत्ती की सुगंध हमारे मन को तरोताजा और शांत करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धूप का धुआं हवा में मौजूद सूक्ष्म कीटाणुओं और नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट कर देता है। सुगंधित वातावरण में की गई प्रार्थना का फल शीघ्र प्राप्त होता है, क्योंकि मन की प्रसन्नता और शांति ही ईश्वर से जुड़ने का मुख्य आधार है। धूप की खुशबू हमारे आसपास के माहौल में शांति और पवित्रता का संचार करती है, जिससे मन के विकार दूर होते हैं। यह हमारे चारों ओर एक ऐसा आध्यात्मिक आभामंडल (Aura) बना देती है जिससे पूजा के दौरान एकाग्रता बनी रहती है और हम ईश्वर से सीधा संवाद स्थापित कर पाते हैं।धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अद्भुत संगमनिष्कर्षतः, हमारी पूजा पद्धति में शामिल ये चारों चीजें- घंटी, दीपक, जल और धूप- केवल रस्मों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक पूर्ण जीवन पद्धति का हिस्सा हैं। इनका नियमित उपयोग हमारे जीवन में अनुशासन, शुचिता और मानसिक शांति का संचार करता है। यदि हम इन चीजों के महत्व को समझकर श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करें, तो हमें निश्चित रूप से मानसिक शक्ति, सकारात्मक सोच और आंतरिक शांति प्राप्त होती है। पूजा की थाली का हर घटक हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर हमारे भीतर ही विराजमान है और ये प्रतीक हमें उस आंतरिक चेतना से जोड़ने का एक माध्यम मात्र हैं। अपने दैनिक पूजा कर्मों में इन प्रतीकों का महत्व समझकर उन्हें शामिल करना आपके आध्यात्मिक जीवन को एक नई दिशा दे सकता है।
दलित की जमीन पर कब्जे और धमकी का आरोप, AAP पार्षद के पति गिरफ्तार
AAP नेशनल काउंसिल सदस्य और जैतपुर पार्षद हेमा वोहरा के पति चंद वोहरा को प्लॉट पर कथित कब्जे और शिकायतकर्ता को धमकाने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है. मामले में कालिंदी कुंज थाने में FIR दर्ज की गई थी.
अक्सर लोग रिटायरमेंट को अपने कामकाजी जीवन का अंत और फुर्सत के दिनों की शुरुआत मानते हैं, लेकिन आज के दौर में 50 या 60 साल की उम्र में रिटायर होना किसी के लिए भी एक नए अध्याय की शुरुआत जैसा है। आज का दौर पहले से कहीं अधिक गतिशील है और स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते इस उम्र में भी लोग पूरी तरह से सक्रिय और ऊर्जावान बने रहते हैं। रिटायरमेंट के बाद का समय घर पर बैठकर बिताने के लिए नहीं, बल्कि अपने उन सपनों और शौक को पूरा करने के लिए है जिन्हें आपने करियर की भागदौड़ में पीछे छोड़ दिया था। यदि आप भी रिटायरमेंट के बाद एक अर्थपूर्ण, संतोषजनक और आर्थिक रूप से समृद्ध जीवन बिताना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए एक मार्गदर्शक साबित होगा, जिसमें हम उन बेहतरीन करियर विकल्पों पर चर्चा करेंगे जो न केवल आपकी व्यस्तता बनाए रखेंगे, बल्कि आपको समाज में एक नई पहचान भी दिलाएंगे।1. कंसल्टिंग और मेंटरिंग: अपने अनुभव को बनाएं अपनी ताकतआपने अपनी पूरी कामकाजी जिंदगी में जो अनुभव और ज्ञान अर्जित किया है, वह किसी खजाने से कम नहीं है। कई युवा स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियां अपने व्यवसाय को ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए अनुभवी लोगों की तलाश में रहती हैं। आप एक स्वतंत्र [Consultant] या मेंटर के रूप में अपना करियर फिर से शुरू कर सकते हैं। यह न केवल आपको सक्रिय रखता है, बल्कि आपको दूसरों की सफलता का हिस्सा बनने का मौका भी देता है। आप अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित कंपनियों को रणनीतिक सलाह देकर एक सम्मानजनक और आकर्षक आय प्राप्त कर सकते हैं।2. ऑनलाइन टीचिंग और कोचिंग: ज्ञान बांटने का बेहतरीन माध्यमशिक्षा का प्रसार करने की कोई उम्र नहीं होती। यदि आप अपने विषय के जानकार हैं, तो आप [Online Teaching] या कोचिंग के माध्यम से न केवल छात्रों की मदद कर सकते हैं, बल्कि अपने विषय पर पकड़ भी बनाए रख सकते हैं। आज कई ऐसे ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म मौजूद हैं जहां आप अपने विषयों के वीडियो कोर्स बना सकते हैं या लाइव क्लासेस ले सकते हैं। यह विकल्प न केवल आपको आर्थिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि युवाओं के साथ जुड़े रहने से आपको मानसिक रूप से युवा महसूस करने में भी मदद करता है।3. कंटेंट राइटिंग और ब्लॉगिंग: अपने विचारों को दें नई उड़ानक्या आपको लिखने का शौक है? रिटायरमेंट के बाद ब्लॉगिंग [Blogging] या फ्रीलांस राइटिंग एक शानदार विकल्प हो सकता है। आप अपने जीवन के अनुभवों, यात्राओं, खाना पकाने, या किसी भी अन्य विषय पर अपना ब्लॉग शुरू कर सकते हैं। धीरे-धीरे आपका ब्लॉग आपकी एक आय का जरिया भी बन सकता है। लिखना न केवल एक रचनात्मक प्रक्रिया है, बल्कि यह आपके दिमाग को तेज रखने और नई जानकारी हासिल करने का भी एक बेहतरीन जरिया है।4. रियल एस्टेट या इंश्योरेंस एडवाइजरयदि आपको लोगों से मिलना-जुलना और नेटवर्किंग पसंद है, तो आप रियल एस्टेट [Real Estate] या बीमा सलाहकार के रूप में अपना काम शुरू कर सकते हैं। इस क्षेत्र में आपकी उम्र और अनुभव ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है, क्योंकि लोग ऐसे सलाहकार पर ज्यादा भरोसा करते हैं जो अनुभवी हो। लचीला समय और बिना किसी बॉस के काम करने की आजादी इस करियर विकल्प को और अधिक आकर्षक बनाती है।5. एनजीओ और सामाजिक कार्य: संतुष्टि और सेवा का संगमरिटायरमेंट के बाद का समय समाज को कुछ वापस देने के लिए सबसे अच्छा होता है। आप किसी एनजीओ [Non-Governmental Organization] से जुड़कर सामाजिक कार्यों में अपना समय लगा सकते हैं। सेवा करना न केवल दिल को खुशी देता है, बल्कि यह एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का भी सबसे बड़ा माध्यम है। आप शिक्षा, स्वास्थ्य, या पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में काम करके समाज में एक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।6. टूरिस्ट गाइड या ट्रैवल ब्लॉगरअगर आपको घूमने-फिरने का शौक है, तो आप अपने पसंदीदा पर्यटन स्थलों के बारे में लोगों को जानकारी देने वाले टूरिस्ट गाइड [Tourist Guide] या ट्रैवल ब्लॉगर बन सकते हैं। आज के समय में लोग स्थानीय और छिपी हुई जगहों के बारे में जानना चाहते हैं। अपने अनुभवों को दूसरों के साथ साझा करना आपको न केवल खुश रखेगा, बल्कि यह आपके लिए आय का एक बेहतरीन स्रोत भी बन सकता है।7. होम-बेस्ड बिजनेस और क्राफ्टिंगअगर आप खाना पकाने में माहिर हैं, तो आप 'होम-बेस्ड कैटरिंग' शुरू कर सकते हैं। इसी तरह, यदि आपको पेंटिंग, बागवानी, या क्राफ्टिंग पसंद है, तो आप अपने बनाए हुए सामान को ऑनलाइन बेच सकते हैं। [E-commerce platforms] जैसे कि Etsy या फेसबुक मार्केटप्लेस के जरिए अपने उत्पादों को दुनिया तक पहुंचाना अब बेहद आसान हो गया है। यह विकल्प आपको घर बैठे रचनात्मक कार्य करने और मुनाफा कमाने का मौका देता है।8. लाइफ कोच या मोटिवेशनल स्पीकरजीवन की लंबी यात्रा में आपने बहुत कुछ सीखा है। आप अपने अनुभवों को साझा करके दूसरों को प्रेरित कर सकते हैं। [Life Coach] या मोटिवेशनल स्पीकर बनकर आप उन लोगों की मदद कर सकते हैं जो करियर, रिश्तों या मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। आपकी सलाह किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है, और यह काम काफी सम्मानजनक भी है।9. एग्री-प्रिन्योरशिप: बागवानी और जैविक खेतीयदि आपके पास थोड़ा सा जमीन का टुकड़ा है, तो आप जैविक खेती या बागवानी [Organic Farming] में हाथ आजमा सकते हैं। आज के समय में जैविक सब्जियों और फलों की मांग बहुत अधिक है। खेती न केवल आपको प्रकृति के करीब रखती है, बल्कि यह एक बहुत ही संतोषजनक और सेहतमंद गतिविधि भी है। यह रिटायरमेंट के बाद का एक बेहतरीन शौक और करियर दोनों हो सकता है।10. ई-बुक्स लेखन और पब्लिशिंगआपने अपनी जिंदगी में जो कुछ भी देखा और महसूस किया है, उसे एक किताब का रूप क्यों न दें? आप अपनी आत्मकथा या किसी खास विषय पर आधारित ई-बुक लिखकर अमेज़न [Amazon Kindle] जैसे प्लेटफॉर्म पर पब्लिश कर सकते हैं। अपनी लेखनी को दुनिया के सामने लाना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और यह आपको एक लेखक के रूप में नई पहचान दिलाती है।निष्कर्ष: खुद को सक्रिय और खुश रखेंरिटायरमेंट का मतलब जीवन का अंत नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं को पूरा करने का नया अवसर है। ऊपर बताए गए सभी करियर विकल्प आपको आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखेंगे। याद रखें, उम्र केवल एक नंबर है और आप अपनी मर्जी से अपने भविष्य को डिजाइन कर सकते हैं। आज ही अपने किसी एक शौक या अनुभव को चुनें और रिटायरमेंट के बाद के इस सफर को यादगार बनाएं।
देशभर के उच्च शिक्षा और शोध क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए एक बार फिर से असमंजस, तनाव और गुस्से का दौर शुरू हो चुका है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी [National Testing Agency (NTA)] द्वारा आयोजित की जाने वाली देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी यूजीसी नेट [UGC NET Exam] को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा की तारीखों में अचानक किए गए बदलाव और री-एग्जाम [Re-Exam] की घोषणा ने छात्रों के पूरे शेडूल को तहस-नहस कर दिया है। छात्रों के सामने सबसे बड़ा और चुभने वाला सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर महज 24 दिन के छोटे से अंतराल में पूरे सिलेबस को दोबारा कैसे तैयार किया जाए, जबकि एक बार वे इस कठिन परीक्षा की पूरी मानसिक और शारीरिक तैयारी करके परीक्षा दे भी चुके थे। इस अप्रत्याशित फैसले के विरोध में देश भर के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।NTA ऑफिस के बाहर छात्रों का फूटा गुस्सा और जोरदार प्रदर्शनइस मनमाने फैसले से आक्रोशित होकर दिल्ली स्थित राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी [NTA Office Delhi] के बाहर देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों छात्र और युवा एकत्र हो गए। छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और हाथों में तख्तियां लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि NTA की लचर व्यवस्था और बार-बार परीक्षाओं को रद्द करने या पुनर्निर्धारित करने की नीति ने उनके भविष्य को अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिया है। कड़ाके की धूप और परेशानियों का सामना करते हुए छात्रों ने NTA अधिकारियों से मिलने और इस तुगलकी फरमान को वापस लेने की मांग की। सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि छात्रों का यह गुस्सा अब एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।'24 दिन में तैयारी कैसे करें?' छात्रों के सामने खड़ा हुआ विकराल संकटछात्रों के सामने इस वक्त सबसे बड़ी व्यावहारिक और मानसिक समस्या यह है कि वे मात्र 24 दिनों के भीतर पोस्ट-ग्रेजुएशन स्तर के इतने विशालकाय सिलेबस को कैसे कवर करें। यूजीसी नेट परीक्षा में फर्स्ट पेपर (टीचिंग एंड रिसर्च एप्टीट्यूड) के साथ-साथ सेकंड पेपर (संबंधित विषय) का पाठ्यक्रम इतना व्यापक होता है कि सामान्य तौर पर इसकी गहन तैयारी के लिए महीनों की आवश्यकता होती है। अचानक से परीक्षा की तलवार सिर पर लटक जाने से छात्र रात-दिन जागकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए लिखा है कि क्या परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को छात्रों की मानसिक स्थिति और उनकी सालों की मेहनत का कोई अंदाजा नहीं है? यह स्थिति न केवल अकादमिक तनाव को बढ़ा रही है, बल्कि युवाओं का सिस्टम से भरोसा भी उठा रही है।प्रशासनिक लापरवाही और परीक्षा प्रणाली पर उठते गंभीर सवालयह कोई पहला मौका नहीं है जब NTA द्वारा आयोजित की जाने वाली किसी बड़ी परीक्षा को लेकर इस तरह की प्रशासनिक चूक या अव्यवस्था सामने आई हो। पिछले कुछ वर्षों में नीट, यूजीसी नेट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के पेपर लीक होने, तकनीकी खामियों के कारण परीक्षा रद्द होने या अंतिम समय पर शेड्यूल बदलने की घटनाओं ने देश की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली [Indian Exam System] की साख पर बट्टा लगा दिया है। शिक्षाविदों और विशेषज्ञों का यह मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में भविष्य के प्रोफेसर और शोधार्थी तैयार करने वाली परीक्षा को यदि इस तरह गैर-पेशेवर तरीके से संचालित किया जाएगा, तो देश की शिक्षा व्यवस्था का स्तर कैसे सुधरेगा। NTA की इस प्रकार की कार्यप्रणाली के कारण युवाओं का कीमती वक्त और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं, जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता।छात्रों की मुख्य मांगें और भविष्य की अनिश्चितता का दौरNTA कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और छात्र संगठनों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि एजेंसी ने उनके हितों को ध्यान में रखते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया या परीक्षा की तारीखों को आगे नहीं बढ़ाया, तो उनका यह विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप ले लेगा। छात्र यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें तैयारी के लिए कम से कम पर्याप्त समय दिया जाए या फिर परीक्षा के इस नए शेड्यूल को रद्द किया जाए। दूसरी तरफ, NTA के अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है, जिससे छात्रों में निराशा और गुस्सा और अधिक बढ़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि भारत के युवाओं को अपनी शैक्षणिक और करियर की राह बनाने के लिए कितनी भारी प्रशासनिक और मानसिक लड़ाइयां लड़नी पड़ रही हैं।
आज की इस अत्याधुनिक और तेजी से बदलती हुई डिजिटल दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस [Artificial Intelligence] यानी एआई ने जिस तरह से हर क्षेत्र में अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी है, उसने दुनिया भर के कामकाजी पेशेवरों और युवाओं के मन में एक अनजाना डर पैदा कर दिया है। आज चैटजीपीटी, जेमिनी और अन्य आधुनिक एआई टूल्स ने ऑफिस के रूटीन कामों से लेकर सॉफ्टवेयर कोडिंग, कंटेंट राइटिंग और डेटा एनालिसिस तक के मोर्चे पर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा लिया है। यही वजह है कि आज हर नौकरीपेशा व्यक्ति के जेहन में एक ही सबसे बड़ा सवाल घूम रहा है—क्या आने वाले समय में एआई हमारी नौकरी खा जाएगा? इस तकनीकी क्रांति के दौर में यदि आपने समय रहते खुद को अपडेट नहीं किया, तो ऑटोमेशन और मशीनों की इस दौड़ में पिछड़कर बेरोजगार होना तय माना जा रहा है। इसी आसन्न खतरे से निपटने के लिए आज के दौर में कुछ ऐसे 'एआई-प्रूफ कोर्सेज' [AI-Proof Courses] करना बेहद अनिवार्य हो चुका है, जो आपको कभी नौकरी से बाहर नहीं होने देंगे।पहला कोर्स: एआई प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और मशीन लर्निंग की बुनियादी समझजब हम भविष्य की सुरक्षित नौकरियों की बात करते हैं, तो सबसे पहला और महत्वपूर्ण कौशल [AI Prompt Engineering and Machine Learning] आता है। एआई खुद से कुछ नहीं सोचता, बल्कि उसे निर्देश देने वाले यानी प्रॉम्प्ट इंजीनियर की जरूरत हर कंपनी को होती है। यदि आप यह सीख जाते हैं कि एआई टूल्स से सटीक और बेहतरीन आउटपुट कैसे निकाला जाता है, तो आप कभी बेरोजगार नहीं हो सकते। आज बाजार में ऐसे कई ऑनलाइन और ऑफलाइन सर्टिफिकेशन कोर्सेज उपलब्ध हैं जो आपको यह सिखाते हैं कि मशीनों के साथ कैसे संवाद स्थापित किया जाए। यह कोर्स न केवल आपकी तकनीकी क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि आपको एआई के इस दौर में एक कदम आगे रखता है, क्योंकि हर कंपनी को ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश है जो एआई की भाषा को अच्छी तरह समझते हों और उसका सही उपयोग कर सकें।दूसरा कोर्स: क्रिएटिव स्ट्रैटेजी और ह्यूमन साइकोलॉजी का एडवांस्ड कोर्समशीनें और एल्गोरिदम चाहे जितने भी स्मार्ट क्यों न हो जाएं, वे इंसानी भावनाओं, सहानुभूति, रचनात्मकता और गहरी मनोवैज्ञानिक समझ [Creative Strategy and Human Psychology] की बराबरी कभी नहीं कर सकते। मार्केटिंग, ब्रांडिंग और मीडिया के क्षेत्र में एआई कंटेंट तो तैयार कर सकता है, लेकिन उस कंटेंट के पीछे की असली मानवीय भावना और रचनात्मक रणनीति सिर्फ एक इंसान ही तय कर सकता है। इसलिए क्रिएटिव स्ट्रैटेजी और कंज्यूमर बिहेवियर से जुड़े कोर्सेज करना आपके करियर को पूरी तरह से सुरक्षित बना सकता है। जब आप रोबोट्स या एआई द्वारा किए जाने वाले कामों से हटकर उन चीजों में महारत हासिल करते हैं जहां इंसानी दिमाग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तो आपकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है और कोई भी तकनीक आपकी जगह नहीं ले सकती।तीसरा कोर्स: डेटा साइंस और एनालिटिक्स जिसमें हो इंसानी निर्णय क्षमताआज का पूरा कॉरपोरेट जगत डेटा के इर्द-गिर्द घूम रहा है, और कंपनियों के पास लाखों-करोड़ों डेटा पॉइंट्स मौजूद हैं। एआई इस डेटा को चंद सेकंड में छांट और व्यवस्थित तो कर सकता है, लेकिन उस डेटा का विश्लेषण करके एक सही व्यावसायिक निर्णय [Business Decision Making] लेना केवल एक कुशल डेटा एनालिस्ट का ही काम है। डेटा साइंस और एडवांस एनालिटिक्स से जुड़े कोर्सेज करने से आपको यह समझ मिलती है कि बड़े-बड़े बिजनेस ट्रेंड्स को कैसे पढ़ा जाए और भविष्य की रणनीतियां कैसे तैयार की जाएं। यह एक ऐसा तकनीकी क्षेत्र है जिसमें एआई आपका सहायक बन सकता है, लेकिन आपका स्थान नहीं ले सकता, क्योंकि रणनीतिक फैसले हमेशा इंसानी सूझबूझ और अनुभव के आधार पर ही लिए जाते हैं।चौथा कोर्स: साइबर सुरक्षा और एआई एथिक्स का स्पेशलाइज्ड कोर्सजैसे-जैसे दुनिया पूरी तरह से डिजिटल और एआई पर निर्भर होती जा रही है, वैसे-वैसे डेटा चोरी, साइबर हमलों और एआई के गलत इस्तेमाल (Deepfakes and Cyber Threats) का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है। साइबर सुरक्षा [Cybersecurity and AI Ethics] आज के समय में सबसे तेजी से उभरता हुआ और कभी न खत्म होने वाला सेक्टर बन चुका है। कंपनियों को ऐसे विशेष विशेषज्ञों की सख्त जरूरत है जो यह सुनिश्चित कर सकें कि उनके सिस्टम सुरक्षित हैं और एआई का इस्तेमाल नैतिक सीमाओं के भीतर ही किया जा रहा है। यदि आप साइबर सिक्योरिटी और एथिकल एआई से जुड़ा कोई प्रोफेशनल कोर्स कर लेते हैं, तो आपकी नौकरी पर कभी कोई आंच नहीं आ सकती, क्योंकि डिजिटल दुनिया जितनी बढ़ेगी, सुरक्षा उतनी ही बड़ी प्राथमिकता बनेगी।पांचवा कोर्स: लीडरशिप, नेगोशिएशन और टीम मैनेजमेंट की कलातकनीक चाहे जितनी भी एडवांस हो जाए, वह कभी भी एक अच्छी लीडरशिप [Leadership and Negotiation Skills] और टीम प्रबंधन की जगह नहीं ले सकती। ऑफिस के माहौल में अलग-अलग कर्मचारियों को संभालना, कठिन परिस्थितियों में सही नेगोशिएशन करना और कंपनी के विजन को आगे बढ़ाना केवल एक भावनात्मक रूप से बुद्धिमान इंसान ही कर सकता है। लीडरशिप और सॉफ्ट स्किल्स से जुड़े कोर्सेज आपको कारपोरेट सीढ़ी के शीर्ष पर पहुंचाने में मदद करते हैं। एआई आपके लिए रिपोर्ट बना सकता है, आंकड़े पेश कर सकता है, लेकिन टीम को प्रेरित करके लक्ष्य हासिल करना केवल एक सक्षम लीडर का काम होता है। इसलिए अपनी लीडरशिप क्षमताओं को निखारने वाले कोर्सेज करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।निष्कर्ष और युवाओं के लिए भविष्य की तैयारीअंत में यही कहा जा सकता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डरने के बजाय आवश्यकता इस बात की है कि आप खुद को समय के साथ ढालें और इन एआई-प्रूफ स्किल्स को जल्द से जल्द अपनाएं। जो लोग तकनीक को अपना दुश्मन मानते हैं, वे पीछे छूट जाते हैं, लेकिन जो लोग तकनीक का उपयोग करना सीख जाते हैं, वे इस दौड़ में सबसे आगे निकल जाते हैं। आज ही इनमें से किसी एक प्रासंगिक कोर्स में दाखिला लें और अपने भविष्य को पूरी तरह से सुरक्षित तथा मजबूत बनाएं, ताकि कोई भी तकनीक आपकी आजीविका और करियर को नुकसान न पहुंचा सके।
देश के अन्नदाता एक बार फिर अपनी विभिन्न मांगों और लंबित मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। किसानों के नए आंदोलन के ऐलान और दिल्ली की तरफ मार्च करने के आह्वान ने देश की राजधानी सहित हरियाणा और पंजाब के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। किसान संगठनों द्वारा सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक बार फिर से बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो चुका है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने कमर कस ली है। इस आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू होते ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है, और हर कोई यह जानना चाहता है कि इस बार किसानों और प्रशासन के बीच का यह गतिरोध किस दिशा में आगे बढ़ेगा।हरियाणा-पंजाब बॉर्डर को किया गया सील, छावनी में बदला इलाकाकिसानों के इस मार्च के ऐलान के बाद सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखते हुए प्रशासन ने हरियाणा और पंजाब की सीमाओं को पूरी तरह से सील कर दिया है। दोनों राज्यों को जोड़ने वाले मुख्य बॉर्डर इलाकों को भारी पुलिस बल, अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) और सीमेंट के बैरिकेड्स लगाकर छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम इसलिए किए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और यातायात को सुचारू रखा जा सके। बॉर्डर पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे हर आने-जाने वाले वाहन और व्यक्ति की बारीकी से जांच करें। इस कड़े सुरक्षा घेरे के कारण सीमावर्ती इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे आम जनता और दैनिक यात्रियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।ट्रैफिक डायवर्जन और आम जनजीवन पर पड़ता असरबॉर्डर सील होने और भारी पुलिस बल की तैनाती के चलते हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के बीच आवागमन करने वाले लोगों को भारी ट्रैफिक जाम और रूट डायवर्जन [Traffic Diversion] का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्गों की सूची जारी की है, ताकि वे बिना किसी बड़ी बाधा के अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। इसके बावजूद, लंबी कतारों और गाड़ियों की धीमी रफ्तार के कारण आम नागरिकों का जनजीवन बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। व्यापारिक गतिविधियां, परिवहन सेवाएं और रोजमर्रा की आवाजाही पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और लोगों से अपील कर रहा है कि वे यात्रा करने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी [Traffic Advisory] जरूर देख लें ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।किसानों की प्रमुख मांगें और सरकार के साथ गतिरोधकिसानों का कहना है कि उनकी कई ऐसी मांगें हैं जिन पर सरकार के साथ पूर्व में हुई बैठकों के बावजूद अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्ज माफी, और पिछले आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने जैसी प्रमुख मांगें एक बार फिर से इस नए आंदोलन के केंद्र में हैं। किसान संगठनों का तर्क है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा जिस तरह से बॉर्डर सील किए जा रहे हैं और कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, उससे उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरी ओर, सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों का यह पक्ष है कि सार्वजनिक शांति, कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए एहतियाती कदम उठाना बेहद आवश्यक है।आने वाले दिनों की राजनीतिक चुनौतियां और प्रशासनिक सतर्कताकिसानों के इस मार्च और हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर बने तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए आने वाले कुछ दिन काफी संवेदनशील रहने की संभावना है। केंद्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियां लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही हैं और दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं ताकि किसी भी बड़े टकराव को टाला जा सके। लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इसके साथ ही देश की आंतरिक सुरक्षा और आम जनता की सहूलियत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। बहरहाल, किसानों के इस नए ऐलान और प्रशासन की सख्त घेराबंदी के बीच यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में इस गतिरोध का क्या कूटनीतिक और प्रशासनिक समाधान निकलता है।
भारत-थाईलैंड में सैन्य सहयोग को प्रोत्साहन
नई दिल्ली। भारतीय सेना की टुकड़ी आज भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री’ के 15वें संस्करण (2026) में भाग लेने केल
PM Modi का नई BJP टीम पर पूरा भरोसा, बोले- संगठन और जनसेवा पर दें ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नए नियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों को बधाई दी और भरोसा जताया कि नई टीम संगठन को मज़बूत करेगी और जनसेवा पर ध्यान देगी। X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि BJP के नए नियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों और पार्टी में अलग-अलग ज़िम्मेदारियाँ पाने वाले सभी लोगों को बधाई। यह नई टीम संगठनात्मक अनुभव, ऊर्जा और ज़मीनी स्तर पर लोगों से जुड़ाव का संगम है। मुझे भरोसा है कि वे हमारी पार्टी को मज़बूत करने और जनसेवा पर ध्यान देने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे। उन्हें मेरी शुभकामनाएँ। इसे भी पढ़ें: BJP IT Cell में बड़ा बदलाव! Amit Malviya की जगह Deepak Mhaske बने नए प्रमुख, कौन हैं वे? भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय टीम में नव-नियुक्त सभी पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। अनुभव और ऊर्जा के मेल से बनी यह टीम, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संगठन को नई गति प्रदान करेगी। मुझे विश्वास है कि प्रत्येक सदस्य, एक समर्पित कार्यकर्ता की भावना के साथ, 'विकसित भारत' के संकल्प और राष्ट्र-निर्माण की प्रतिबद्धता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए संगठन को और मजबूत करेगा। बीजेपी ने सोमवार को पार्टी प्रमुख नितिन नवीन के नेतृत्व में संगठन में बड़े बदलाव की घोषणा की। इसके तहत नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई और कई नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गईं। ये नियुक्तियां तुरंत प्रभाव से लागू होंगी। पार्टी ने 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किए हैं, जिनमें राम माधव, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, बैजयंत जय पांडा, लोकसभा सांसद डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, भारती पवार, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और मनप्रीत सिंह बादल शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: Nitin Nabin की New Team का ऐलान, वसुंधरा राजे, राम माधव और स्मृति ईरानी को मिली बड़ी जिम्मेदारी इस बीच, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को बीजेपी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पार्टी ने बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बनाए रखा है और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी तथा त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को आठ राष्ट्रीय महासचिवों की अपनी टीम में शामिल किया है। नई टीम में विनोद तावड़े और सुनील बंसल ही ऐसे दो राष्ट्रीय महासचिव हैं जिन्हें बरकरार रखा गया है। बीजेपी ने अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले राष्ट्रीय सचिवों की 16-सदस्यीय टीम में कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, संदीप पाठक और मनोज टिग्गा समेत कई नए चेहरों को भी शामिल किया है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
83 साल की उम्र में भी अमिताभ बच्चन मेहनत करने से बिल्कुल नहीं घबराते हैं. लेकिन अब अमिताभ बच्चन बिना कुछ किए घर बैठे 33 लाख रुपये की अच्छी-खासी कमाई करने वाले हैं.
राजस्थान से किन-किन लोगों को बीजेपी नई टीम में मिली जगह, किसे कौन जिम्मेदारी?
भारतीय जनता पार्टी की नई टीम में राजस्थान से 4 लोगों को जगह मिली है. नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, एक राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) समेत अन्य पदों पर नियुक्ति हुई है.
देशभर में मशहूर मुरथल के रेशम ढाबे का कमाल: अब इंसानों की जगह रोबोट परोस रहे हैं गर्मा-गरम परांठे
भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे हरियाणा के जीटी रोड स्थित मुरथल [Murthal] का नाम आते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है और गर्मा-गरम मक्खन से सजे परांठों की सोंधी खुशबू का अहसास होने लगता है। दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित मुरथल की यह दुनिया भर में मशहूर ढाबा संस्कृति दशकों से अपनी बेहतरीन मेहमाननवाज़ी और लजीज व्यंजनों के लिए जानी जाती रही है। बदलते वक्त और आधुनिक तकनीक के इस दौर में अब मुरथल के ढाबों ने भी खुद को पूरी तरह से हाई-टेक बना लिया है। इसी कड़ी में यहां के सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित [रेशम ढाबा] (Resham Dhaba Murthal) ने एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है, जिसने खाने के शौकीनों और दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों को पूरी तरह से हैरान कर दिया है। अब इस मशहूर ढाबे पर सिर्फ पारंपरिक जायका ही नहीं, बल्कि आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जहां इंसानी वेटर के बजाय अत्याधुनिक रोबोट ग्राहकों की टेबल पर लजीज पकवान और परांठे सर्व कर रहे हैं।रोबोटिक्स तकनीक और आधुनिकता का अनूठा मेलपारंपरिक ढाबा संस्कृति और अत्याधुनिक तकनीक का यह मेल भारत की बदलती हुई तस्वीर को बहुत ही खूबसूरती से बयां करता है। रेशम ढाबे के प्रबंधकों ने अपने यहां आने वाले ग्राहकों को एक बिल्कुल नया और अनूठा अनुभव देने के लिए हाई-टेक रोबोट्स [Smart Waiter Robots] को अपनी सेवा में शामिल किया है। जैसे ही कोई ग्राहक अपनी पसंद का ऑर्डर काउंटर पर दर्ज कराता है, रसोई घर में तैयार होने वाला गर्मा-गरम खाना सीधे इन स्मार्ट रोबोट्स की ट्रे पर सजा दिया जाता है। पारंपरिक वेटर जहां कई बार भीड़भाड़ और व्यस्तता के कारण ऑर्डर देने में थोड़ा विलंब कर देते हैं, वहीं ये रोबोट्स बिना किसी थकान या देरी के पूरी सटीकता के साथ तय की गई टेबल तक बिना एक पल गंवाए पहुंच जाते हैं। इस आधुनिक प्रयोग ने न केवल ढाबे की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है, बल्कि यहां आने वाले परिवारों और बच्चों के लिए भी यह आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।टेबल तक कैसे पहुंचता है आर्डर और क्या है पूरी तकनीक?लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि आखिर ये रोबोट बिना किसी ड्राइवर या रिमोट के इतनी भीड़भाड़ वाली जगह पर सही टेबल तक कैसे पहुंच जाते हैं। इस अद्भुत तकनीक के पीछे उन्नत सेंसर्स और मैपिंग [Sensors and Navigation Mapping] का इस्तेमाल किया जाता है। ढाबे के फर्श पर विशेष प्रकार के ट्रैक या सेंसर्स सेट किए जाते हैं, जिनकी मदद से ये रोबोट्स बिना किसी से टकराए एक तय रास्ते पर आसानी से आगे बढ़ते हैं। जैसे ही रोबोट ग्राहक की टेबल के पास पहुंचता है, उसमें लगी डिजिटल स्क्रीन या सेंसर के जरिए आवाज या सिग्नल मिलता है, जिससे ग्राहक आसानी से अपनी ट्रे से अपना खाना उठा लेते हैं। खाना उठाने के बाद रोबोट एक बटन दबाने या स्वतः ही वापस अपने चार्जिंग और किचन पॉइंट पर लौट जाता है। इस पूरी स्वचालित प्रक्रिया को देखने के लिए लोग दूर-दूर से इस ढाबे पर खिंचे चले आ रहे हैं।ग्राहकों का उत्साह और बच्चों में रोबोट्स को लेकर भारी क्रेजजब से रेशम ढाबे पर इन रोबोट्स ने परांठे परोसने का काम शुरू किया है, तब से यहां आने वाले ग्राहकों की संख्या में और अधिक उछाल देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से वीकेंड [Weekends] के दिनों में जब दिल्ली और आसपास के इलाकों से लोग लॉन्ग ड्राइव पर मुरथल पहुंचते हैं, तो वे इस नए अनुभव का आनंद लेने के लिए विशेष रूप से इसी ढाबे का रुख करते हैं। खाने की टेबल पर जब एक रोबोट हाथ में ट्रे लिए मुस्कुराते हुए और अपनी भाषा में स्वागत करते हुए पहुंचता है, तो बच्चों से लेकर बड़े तक सभी लोग अपने मोबाइल फोन में इस अद्भुत पल को कैद करने के लिए दौड़ पड़ते हैं। ढाबे के मालिक का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य अपने ग्राहकों को पारंपरिक स्वाद के साथ-साथ एक वर्ल्ड-क्लास और फ्यूचरिस्टिक डाइनिंग एक्सपीरियंस देना था, जिसे लोगों ने बेहद सराहा है।भविष्य के ढाबों की तस्वीर और आतिथ्य सत्कार का नया दौरमुरथल के रेशम ढाबे की यह अनूठी पहल इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि भारतीय खानपान और आतिथ्य सत्कार [Hospitality Industry] का यह क्षेत्र अब तकनीक को कितनी तेजी से अपना रहा है। आने वाले समय में देश के अन्य हिस्सों और हाईवे के ढाबों पर भी इस तरह की रोबोटिक सेवाओं का विस्तार देखने को मिल सकता है। हालांकि, पारंपरिक वेटर और ढाबे के पुराने अंदाज की अपनी एक अलग ही मिठास है, लेकिन समय के साथ कदम ताल मिलाते हुए इस प्रकार के बदलाव व्यापार को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं। कुल मिलाकर, अगर आप भी मुरथल के मक्खन वाले परांठों का स्वाद लेने के साथ-साथ रोबोट के हाथों परोसे जाने वाले भोजन का आनंद उठाना चाहते हैं, तो रेशम ढाबा इस वक्त हर फूड लवर के लिए एक अनिवार्य डेस्टिनेशन बन चुका है।
AAP से आए संदीप पाठक ही नहीं, नितिन नवीन की टीम में एक और बाहरी को मिला मौका
बीजेपी ने पार्टी को दो बाहरी नेताओं को भी दल में बड़ा पद दिया है. आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए संदीप पाठक को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है.
'मुझे भरोसा है कि ये लोग अपना बेस्ट देंगे...', बीजेपी की नई टीम को पीएम मोदी ने दी बधाई
'मुझे भरोसा है कि ये लोग अपना बेस्ट देंगे...', बीजेपी की नई टीम को पीएम मोदी ने दी बधाई
हरियाणा अपनी अनूठी और बेबाक संस्कृति के लिए पूरे देश में जाना जाता है, लेकिन जब यहां के किसान अपनी मांगों को लेकर विरोध पर उतरते हैं, तो उनके तरीके भी इतने अनोखे और दिलचस्प होते हैं कि हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। सोनीपत जिला मुख्यालय के बाहर हाल ही में एक ऐसा ही हैरान करने वाला और चर्चा का विषय बनने वाला मामला सामने आया है, जहां एक स्थानीय किसान ने विरोध प्रदर्शन का एक ऐसा तरीका अपनाया जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। प्रशासनिक अधिकारियों की कथित तौर पर अनदेखी और लंबे समय से लंबित पड़ी समस्याओं से परेशान होकर इस किसान ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए विरोध का एक ऐसा अनूठा रास्ता चुना, जिसकी गूंज पूरे प्रशासनिक गलियारों में सुनाई देने लगी है। पारंपरिक धरने-प्रदर्शनों और नारों से हटकर किए गए इस अनोखे प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं और यह मामला पूरे इलाके में सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।डीसी ऑफिस के मुख्य गेट पर मवेशियों को बांधकर अनोखा मोर्चासोनीपत के जिला कलेक्ट्रेट यानी डीसी दफ्तर के बाहर का नजारा उस वक्त पूरी तरह से बदल गया जब एक किसान अपनी बहुमूल्य भैंस और एक कटड़े को लेकर सीधे मुख्य द्वार पर पहुंच गया। आमतौर पर लोग अपनी शिकायतें लेकर कागजों फाइलों के साथ दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, लेकिन इस किसान ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए अपने पशुओं को ही डीसी दफ्तर के मुख्य गेट के बाहर रस्सियों से बांध दिया। किसान का यह कृत्य इस बात का प्रतीक था कि जब अधिकारी आम जनता और अन्नदाताओं की फरियाद सुनने में आना-कानी करते हैं, तो मजबूर होकर उन्हें इस तरह के अनोखे कदम उठाने पड़ते हैं। दफ्तर के बाहर अचानक मवेशियों को बंधा हुआ देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर इस किसान की ऐसी कौन सी बड़ी समस्या है जिसने उसे प्रशासन के खिलाफ यह कड़ा और अनोखा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।लंबे समय से लंबित समस्याएं और प्रशासनिक सुस्ती से आक्रोशइस अनोखे विरोध प्रदर्शन को अंजाम देने वाले किसान ने मीडिया और अधिकारियों के सामने अपनी भड़ास निकालते हुए बताया कि वह पिछले काफी समय से अपनी एक गंभीर समस्या के समाधान के लिए स्थानीय अधिकारियों और दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुका है, लेकिन हर बार उसे सिर्फ कोरे आश्वासन और तारीखें ही मिलती हैं। ग्रामीण इलाकों में किसानों के लिए उनके पशु ही उनकी आजीविका और संपत्ति का सबसे बड़ा जरिया होते हैं। जब प्रशासन किसानों की बुनियादी और जरूरी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता, तो उनका यह गुस्सा इस तरह के अनूठे विरोध के रूप में बाहर आता है। किसान का साफ कहना था कि जब तक उसकी समस्या का कोई स्थायी और संतोषजनक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक वह और उसका परिवार इस प्रकार के लोकतांत्रिक और अनूठे तरीकों से अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा।स्थानीय लोगों की भीड़ और सोशल मीडिया पर वायरल होती चर्चाएंडीसी दफ्तर के मुख्य गेट पर कटड़े और भैंस को बांधकर किए गए इस अनोखे प्रदर्शन को देखने के लिए आसपास के लोगों और राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोग इस नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने लगे और देखते ही देखते यह खबर पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर भी इस विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे, जहां लोग किसान के इस साहसी और अनूठे तरीके की चर्चा कर रहे हैं। कई लोगों का समर्थन किसान के साथ था तो कई प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे कि आखिर क्यों आम जनता को अपनी छोटी-छोटी या गंभीर समस्याओं के लिए इस हद तक जाकर प्रदर्शन करने की नौबत आ जाती है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि आज के डिजिटल दौर में जनता अपनी आवाज पहुंचाने के लिए कितने नए और रचनात्मक तरीके अपना रही है।प्रशासनिक हलचल और भविष्य की कार्रवाई पर टिकी निगाहेंइस हाई-प्रोफाइल और अनोखे हंगामे के बाद सोनीपत जिला प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और तुरंत प्रभाव से उच्च अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। डीसी दफ्तर के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसान से बातचीत की और उसकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने का भरोसा दिलाया, जिसके बाद जाकर मामला शांत हुआ। प्रशासन की तरफ से यह आश्वासन दिया गया है कि संबंधित विभागों के अधिकारियों की एक विशेष कमेटी बनाकर इस मामले की जांच की जाएगी और जल्द से जल्द न्यायसंगत समाधान निकाला जाएगा। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक स्तर पर यदि समय रहते मामलों का निपटारा न किया जाए, तो जनता का गुस्सा किसी भी रूप में सामने आ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस किसान की समस्याओं को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से हल करता है।
अंतरिक्ष से पृथ्वी देखकर शुभांशु शुक्ला की सोच क्यों बदल गई?
अंतरिक्ष में बिताए 20 दिनों ने शुभांशु शुक्ला को धरती और जिंदगी को देखने का एक नया नजरिया दिया. ISS से धरती का नजारा, स्पेस की विशालता, मिशन की चुनौतियां और गगनयान के लिए मिली सीख, उन्होंने अपने अनुभवों के जरिए साझा की.
नितिन नवीन की टीम में 50% उपाध्यक्ष महिलाएं, जानिए कौन-कौन?
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है. टीम की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं की मजबूत भागीदारी है। 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में 6 महिलाएं शामिल हैं, जो कुल संख्या का लगभग आधा हिस्सा हैं.
Himanta Biswa Sarma ने Rahul Gandhi और सोनिया पर राष्ट्र विरोधी काम का आरोप लगाया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे सत्ता में वापसी के लिए खुलेआम ‘‘राष्ट्र-विरोधी’’ गतिविधियां कर रहे हैं और देश में ‘‘अराजकता फैलाने’’ की कोशिश कर रहे हैं। शर्मा ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा खुद को ‘‘दिमागी नक्सल’’ कहने को लेकर उनपर भी निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के वरिष्ठ नेता ‘‘खांटी नक्सल’’ हैं और इस बात की जांच होनी चाहिए कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहने के दौरान उन्होंने माओवादियों के खिलाफ क्या जानबूझकर कोई कदम नहीं उठाया था। शर्मा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘सोनिया गांधी और राहुल गांधी देश का विरोध करने के मिशन पर हैं। फिर चाहे जेन-जी के नाम पर विरोध-प्रदर्शन भड़काना ही क्यों न हो, उन्होंने देश का माहौल खराब करने की ठान ली है।’’स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पूरे वंदे मातरम् का गायन करने का विरोध करने वाले कांग्रेस नेताओं के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सोनिया गांधी का व्यवहार दर्शाता है कि अगर कांग्रेस गलती से सत्ता में वापस आ जाती है, तो देश का क्या हाल होगा?’’भाजपा नेता ने कहा, ‘‘वे खुलेआम देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं तथा लोगों को आंदोलन करने और धरने पर बैठने के लिए उकसा रहे हैं, और यह सब सिर्फ अराजकता फैलाने के लिए किया जा रहा है। ‘मां-बेटा’ द्वारा वंदे मातरम् को रोकने की कोशिश से यह साफ हो जाता है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो देश का भविष्य क्या होगा।’’स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण में ‘‘दिमागी नक्सल’’ शब्द का इस्तेमाल किये जाने के बाद, चिदंबरम द्वारा खुद को ऐसा कहे जाने पर शर्मा ने कहा कि उनके (चिदंबरम के) केंद्रीय गृह मंत्री रहने के दौरान छत्तीसगढ़ में एक हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.सी. शुक्ला और अन्य लोग मारे गए थे, और ‘‘फिर भी कांग्रेस ने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए कुछ नहीं किया।’’उन्होंने दावा किया, ‘‘मुझे लगता है कि चिदंबरम सिर्फ दिमागी नक्सल नहीं हैं, बल्कि वह खांटी नक्सल हैं, जो देश में अराजकता चाहते हैं।’’शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ही नक्सल-मुक्त भारत संभव हो पाया है और हर तरफ शांति है, जिसमें असम में राष्ट्रीय पर्वों का सुचारू रूप से आयोजन भी शामिल है।
BJP ने नयी राष्ट्रीय टीम की घोषणा की, Piyush Goyal बने कोषाध्यक्ष
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में अपनी नयी राष्ट्रीय टीम की घोषणा की जिसमें राम माधव, लोकसभा सदस्य डी. पुरंदेश्वरी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत समेत 13 उपाध्यक्ष नियुक्त किये गए। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा द्वारा जारी सूची के अनुसार, पार्टी ने बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बनाए रखा है। वहीं, अपनी आठ राष्ट्रीय महासचिवों की टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को शामिल किया है। विनोद तावड़े और सुनील बंसल ही ऐसे दो राष्ट्रीय महासचिव हैं, जिन्हें पार्टी ने अपनी नयी टीम में बरकरार रखा है। भाजपा ने अलग-अलग राज्यों से 16 राष्ट्रीय सचिवों की अपनी टीम में कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, संदीप पाठक और मनोज तिग्गा समेत कई नये चेहरों को शामिल किया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के अलावा वैजयंत जे. पांडा और रेखा वर्मा को भी उपाध्यक्ष बनाये रखा गया है।
Bhogapuram Airport पर शुरू हुईं वाणिज्यिक उड़ानें, हैदराबाद से आई पहली फ्लाइट
आंध्र प्रदेश के भोगपुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार को वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं शुरू हो गईं। पहली वाणिज्यिक उड़ान हैदराबाद से इंडिगो की थी, जो हवाई अड्डे पर पहुंची। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक अगस्त को इस हवाई अड्डे का उद्घाटन किया था। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने सोमवार को हवाई अड्डे पर पहली वाणिज्यिक उड़ान सेवा को हरी झंडी दिखाई और यात्रियों को बोर्डिंग पास सौंपे। इसके साथ ही इस नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ान सेवाएं शुरू हो गयीं। राममोहन नायडू ने एक संदेश में कहा, ‘‘अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की शुरुआत बेहद खुशी और गर्व का विषय है। यह उत्तर आंध्र प्रदेश के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है और यह क्षेत्र के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।”आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हवाई अड्डे पर कामकाज शुरू होने को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक अध्याय बताया। पहली इंडिगो उड़ान हैदराबाद से भोगपुरम पहुंची, जिसके बाद एअर इंडिया एक्सप्रेस की एक उड़ान बेंगलुरु से यहां पहुंची। हैदराबाद से आई पहली उड़ान ने अपनी वापसी की यात्रा में तेलंगाना की राजधानी के लिए उड़ान भरी, जो भोगपुरम से रवाना होने वाली पहली उड़ान थी। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जिस तरह भोगपुरम से विमान उड़ान भर रहे हैं, उसी तरह हमारे युवाओं की आकांक्षाएं, सपने और भविष्य भी नयी ऊंचाइयों की ओर उड़ान भरेंगे और उनके लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।’’केंद्रीय मंत्री नायडू के अनुसार, हवाई अड्डे पर पहुंचे यात्रियों ने इसके बुनियादी ढांचे, वास्तुकला और सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह हवाई अड्डा केवल एक इमारत के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास, विरासत और संस्कृति के प्रतीक के रूप में बनाया गया है। विशाखापत्तनम हवाई अड्डे का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह उन लोगों की भावनाओं को समझते हैं, जो वहां नियमित वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं बंद होने से दुखी हैं। उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल अब सामान्य वायुयान चालन के तहत निजी उड़ानों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोगपुरम हवाई अड्डे तक पहुंच के लिए बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जा रहा है। कई सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है और सोंत्यम रोड समेत सात प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। विशाखापत्तनम हवाई अड्डे पर निर्धारित वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं 16 अगस्त को बंद हो गईं। वहां से आखिरी उड़ान इंडिगो की 6ई 2018 थी, जिसने रात 10 बजकर 45 मिनट पर दिल्ली के लिए उड़ान भरी। आंध्र प्रदेश सरकार 5,700 करोड़ रुपये की लागत से जीएमआर समूह द्वारा विकसित भोगपुरम हवाई अड्डे को महज एक बुनियादी ढांचा परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि पूरे उत्तर आंध्र क्षेत्र के कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली परिसंपत्ति के रूप में देखती है। इसे औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, निर्यात, कौशल विकास और अनुसंधान को बढ़ावा देने वाले उत्प्रेरक के रूप में परिकल्पित किया गया है।
Rajasthan के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है
राजस्थान सरकार ने सरकारी विद्यालयों के परिसर में प्रधानाचार्य की अनुमति के बिना बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। साथ ही लिखित मंजूरी के बिना स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी पर भी रोक लगा दी गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व कांग्रेस पार्टी के अन्य नेताओं ने इसके लिए सरकार की आलोचना करते हुए आदेश वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदेश वापस नहीं लिया गया तो पार्टी आंदोलन करेगी। उल्लेखनीय है कि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने हाल ही में घोषणा की थी कि उसकी टीम राज्य के उन विद्यालयों का दौरा करेगी जिनकी हालत ठीक नहीं है। इसके बाद ही राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने रोक संबंधी यह आदेश निकाला। राज्य में अनेक जगह सरकारी विद्यालयों के छात्रों द्वारा शिक्षकों की कमी, कक्षा कक्षों की कमी व अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को लेकर हाल ही में विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे। इनमें से कई विरोध-प्रदर्शनों को सोशल मीडिया पर काफी कवरेज मिली थी। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस आदेश का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद नाबालिग छात्र छात्राओं की निजता, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि इससे आगंतुकों पर पूरी तरह कोई रोक नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने रविवार सुबह कहा था कि टीम राजस्थान के उन विद्यालयों का दौरा करेगी जिनकी हालत खराब है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘राजस्थान से मुझे अब तक जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, धौलपुर, भरतपुर, कोटा, बाड़मेर, हनुमानगढ़ में ख़राब स्कूल का निरीक्षण करने का अनुरोध आया है। इन जगहों पर प्रशासन स्कूल ठीक करने की माँग नहीं मान रहा। अगले कुछ दिनों में मैं ये सभी जगह जाऊंगा।’’इसके कुछ घंटे बाद ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने ये निर्देश जारी किए। इनमें कहा गया है कि राज्य सरकार अभिभावक के समान दायित्व के सिद्धांत के अंतर्गत, राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत सभी बच्चों की सुरक्षा, गरिमा, निजता एवं कल्याण की विशेष जिम्मेदारी वहन करती है। इनमें कहा गया है कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक बच्चे को जीवन, गरिमा एवं निजता का अधिकार प्रदान करता है। साथ ही निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की है। इनमें कहा गया है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की स्कूल सुरक्षा नीति एवं दिशा-निर्देश इस बात पर बल देते हैं कि प्रत्येक विद्यालय बच्चों के लिए सुरक्षित, संरक्षित एवं बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराए तथा उन्हें शोषण एवं निजता के अतिक्रमण से संरक्षण प्रदान करे। निर्देशों के तहत, प्रधानाचार्य/संस्था प्रधान की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी बाहरी व्यक्ति को विद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी, केवल शासकीय अधिकारी अपवाद होंगे, जो अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वाह हेतु विधिवत अधिकृत हों। इसके तहत प्रत्येक आगंतुक विद्यालय परिसर में प्रवेश करने से पूर्व आगंतुक रजिस्टर में अपनी प्रविष्टि करेगा। इसी तरह प्रधानाचार्य, किसी शिक्षक अथवा अधिकृत विद्यालय अधिकारी के साथ हुए बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल मैदान, शौचालय अथवा विद्यार्थियों की किसी भी गतिविधि वाले क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेगा। इसमें कहा गया है कि प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना विद्यार्थियों, शिक्षकों अथवा विद्यालय गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग अथवा लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी तथा यह केवल विधि सम्मत उद्देश्य के लिए ही अनुमन्य होगी। निर्देशों के अनुसार विद्यालय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि विद्यार्थियों के फोटो, वीडियो अथवा व्यक्तिगत जानकारी का ऐसा संग्रह, प्रकाशन अथवा प्रसार न हो जिससे उनकी निजता, गरिमा अथवा सुरक्षा प्रभावित हो। दिशा निर्देश में कहा गया है कि प्रधानाचार्य को किसी भी ऐसे आगंतुक को प्रवेश से मना करने का अधिकार दिया गया है जिसकी उपस्थिति से सुरक्षा, निजता, अनुशासन या शैक्षिक माहौल पर असर पड़ सकता हो। इसके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति के अंदर आता है,स्कूल परिसर से जाने से मना करता है, बिना इजाज़त फ़ोटो या वीडियो लेने की कोशिश करता है या स्कूल के कामकाज में रुकावट डालता है तो प्रधानाचार्य तुरंत स्थानीय पुलिस और ज़िला शिक्षा अधिकारी को सूचित कर सकते हैं ताकि नियमों के तहत कार्रवाई की जा सके। वहीं मंत्री दिलावर ने इस आदेश का बचाव करते हुए सोमवार को कहा कि यह अच्छी बात नहीं है कि कोई बिना अनुमति विद्यालयों में आए और बिना किसी वजह के छात्र-छात्राओं का साक्षात्कार ले। उन्होंने कहा, कुछ लोगों से सुन रहा हूं कि सरकार ने विद्यालयों में किसी के आने जाने या रिकॉर्डिंग करने पर प्रतिबंध लगाया है। हमारा कोई प्रतिबंध नहीं है।’’उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों की सुरक्षा की जिम्मा हमारा है और नाबालिग छात्र-छात्राओं की फोटो या उनका बयान लेने से पहले उनके अभिभावक से अनुमति जरूरी है। विद्यालय में शिक्षक ही अभिभावक हैं। अगर कोई बिना किसी वजह के अंदर आता है और बच्चों का इंटरव्यू लेता है, उनकी निजता का उल्लंघन करता है या उनसे गैर-ज़रूरी सवाल पूछता है, तो यह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि स्कूल माता-पिता के साथ मिलकर काम करते हैं और हर महीने माता-पिता-शिक्षक बैठकें होती हैं इसलिए कुछ भी छिपाने जैसी बात नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत, राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस आदेश की आलोचना करते हुए इसे वापस लेने की मांग की हैं। इन नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार तुरंत यह आदेश वापस ले और पारदर्शिता से भागना बंद करे। गहलोत ने कहा, ‘‘भाजपा शासन में राजस्थान के सरकारी विद्यालयों की दुर्गति किसी से छुपी नहीं है। राजकीय विद्यालयों में टूटी छतें, टपकती कक्षाएं और शिक्षकों के हजारों रिक्त पद इस सरकार की हकीकत हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘समाधान इन कमियों को दूर करना था, लेकिन भाजपा सरकार ने नया फरमान जारी कर दिया। अब बिना प्रधानाचार्य की अनुमति के कोई बाहरी व्यक्ति स्कूल में प्रवेश नहीं कर सकेगा, न फोटो खींच सकेगा, न वीडियो बना सकेगा, न मीडिया रिपोर्टिंग हो सकेगी।’’गहलोत के अनुसार, ‘‘जो सरकार अपने ही विद्यालयों की हकीकत से डरकर, उनमें सुधार करने की बजाय पारदर्शिता न रखने के लिए दरवाजे बंद करा रही है, वह शिक्षा का भला कभी नहीं कर सकती। भाजपा सरकार तुरंत यह आदेश वापस ले और पारदर्शिता से भागना बंद करे।’’उन्होंने कहा कि अगर यह तानाशाही आदेश वापस नहीं लिया तो आने वाले दिनों में जनता स्वयं आगे आकर विद्यालयों की सच्चाई दिखाने वाला अभियान चलाकर इस आदेश की धज्जियां उड़ा देगी। वहीं जूली ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘भाजपा सरकार ने टूटी छतों, टपकते क्लासरूम और शिक्षकों की भारी कमी का एक बेहतरीन समाधान ढूंढ निकाला है। इन कमियों को दूर करने के बजाय, सरकार ने इन्हें दुनिया की नज़रों से छिपाने के आदेश जारी किए हैं।’’उन्होंने आरोप लगाया कि इन निर्देशों से विद्यालयों में हो रही गड़बड़ियां सामने नहीं आ पाएंगी और उन्होंने इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की। कांग्रेस नेता ने कहा, अब बिना इजाज़त कोई अंदर नहीं जा पाएगा, ताकि असलियत सामने न आए। इस तानाशाही आदेश को राज्य सरकार जल्द से जल्द वापस ले, वरना इसके विरुद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया जाएगा।
BJP IT Cell में बड़ा बदलाव! Amit Malviya की जगह Deepak Mhaske बने नए प्रमुख, कौन हैं वे?
भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ के एक कम चर्चित राजनीतिक ऑर्गनाइज़र, दीपक म्हास्के को अपनी IT सेल का नया प्रमुख नियुक्त किया है। इस नियुक्ति से वे पार्टी के डिजिटल कामकाज के केंद्र में एक राष्ट्रीय भूमिका में आ गए हैं। बीजेपी के सोशल-मीडिया रणनीतिकार के तौर पर म्हास्के का प्रोफेशनल बैकग्राउंड कुछ अलग तरह का है। उनके करियर में केमिस्ट्री के प्रोफेसर के तौर पर काम करना, खेती और बागवानी के क्षेत्र में काम, चुनावी डेटा का विश्लेषण, एक सरकारी कंपनी के बोर्ड में पद और छत्तीसगढ़ सरकार में एक सीनियर भूमिका शामिल रही है। वे कई वर्षों से छत्तीसगढ़ में बीजेपी के संगठन से भी जुड़े रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Nitin Nabin की New Team का ऐलान, वसुंधरा राजे, राम माधव और स्मृति ईरानी को मिली बड़ी जिम्मेदारी 1968 में जन्मे म्हास्के ने केमिस्ट्री में MSc की है, साथ ही सीमेंट टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का सर्टिफाइड कोर्स भी किया है। इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) को दी गई अपनी प्रोफ़ाइल के अनुसार, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कॉलेज में केमिस्ट्री प्रोफ़ेसर के तौर पर की थी और बाद में वे खेती-बाड़ी के क्षेत्र में आ गए; उन्हें बागवानी और ऑर्गेनिक खेती का तीन दशक से ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने कुछ समय के लिए सड़क निर्माण के क्षेत्र में भी काम किया। इसके बाद उनके करियर ने राजनीति और डेटा से जुड़े काम का रूप ले लिया। EIL की प्रोफ़ाइल में बताया गया है कि म्हास्के की डेटा इकट्ठा करने और उसका विश्लेषण करने में खास दिलचस्पी है, खासकर चुनावी डेटा और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से जुड़े डेटा में। इसमें यह भी कहा गया है कि उनके तैयार किए गए रिपोर्ट निजी और सरकारी एजेंसियों को सौंपे गए और उनका इस्तेमाल भी किया गया। म्हस्के की लिंक्डइन प्रोफ़ाइल से पता चलता है कि वे 2009 से ही बीजेपी के छत्तीसगढ़ आईटी सेल से जुड़े रहे हैं और उन्हें छत्तीसगढ़ में बीजेपी का राज्य प्रवक्ता बताया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने से पहले, उन्होंने पार्टी के राज्य-स्तरीय राजनीतिक माहौल में कई साल काम किया है। म्हस्के के पास कॉर्पोरेट और पब्लिक-सेक्टर का भी अनुभव है। उन्हें नवंबर 2021 में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) का नॉन-ऑफिशियल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया था। EIL, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत एक सरकारी इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी और इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। उन्हें मार्च 2025 में दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया था। कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, EIL बोर्ड में उनका कार्यकाल इस मार्च में समाप्त हुआ। इसे भी पढ़ें: Vande Mataram विवाद पर बोले Imran Masood, अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं, ये मेरा संवैधानिक अधिकार बोर्ड में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने ऑडिट कमेटी, CSR कमेटी, रिस्क मैनेजमेंट कमेटी और नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी जैसी कमेटियों में काम किया। उनके EIL प्रोफ़ाइल में सामाजिक-कल्याण पहलों में उनकी भागीदारी का भी ज़िक्र है, जिनमें 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ', हेल्थ कैंप, ग्रामीण लाइब्रेरी और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल ट्रांज़ैक्शन के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिशें शामिल हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Abhishek Banerjee पहुंचे Calcutta High Court, बैंक खाता फ्रीज करने के फैसले को दी चुनौती
तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने एक निजी बैंक द्वारा उनके बैंक खाते पर कथित तौर पर रोक लगाए जाने को चुनौती देते हुए सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया। याचिका में बनर्जी ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा है कि चिकित्सकीय कारणों से वह जल्द ही विदेश यात्रा करने वाले हैं और इसके लिए उन्हें उच्चतम न्यायालय से अनुमति मिल चुकी है। न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई बुधवार को करेंगे। साथ ही, उन्होंने अभिषेक बनर्जी के वकील को तब तक संबंधित पक्षों को नोटिस देने का निर्देश दिया। बनर्जी के वकील अयान भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि निजी बैंक ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना उनके व्यक्तिगत बैंक खाते पर रोक लगा दी। भट्टाचार्य ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस सांसद चिकित्सकीय कारणों से विदेश यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, जिसकी अनुमति उच्चतम न्यायालय ने दे दी है। डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने बैंक प्राधिकार द्वारा उनके बैंक खाते पर रोक लगाए जाने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया। न्यायमूर्ति राव के इस सवाल पर कि क्या बनर्जी के खिलाफ कोई जांच चल रही है, उनके वकील ने बताया कि उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ चल रही जांच में किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से उन्हें संरक्षण दे रखा है और वह अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों का पालन कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने पिछले सप्ताह बनर्जी को चिकित्सकीय उपचार के लिए तीन सप्ताह के वास्ते विदेश यात्रा करने की अनुमति दी थी।
कौन हैं प्रोफेसर तारिक मंसूर? जिन्हें बीजेपी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर साधे बड़े सियासी समीकरण
भारतीय राजनीतिक पटल पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सांगठनिक ढांचे को और अधिक धारदार और व्यापक बनाने के लिए एक बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी की इस नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान के बाद से ही देश भर के राजनीतिक गलियारों में विभिन्न चेहरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस फेरबदल में सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाले नामों में एक प्रमुख नाम [प्रोफेसर तारिक मंसूर (Prof. Tariq Mansoor)] का भी शामिल है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (National Vice President) जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। इस कदम को राजनीतिक विश्लेषक आगामी चुनावों और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से बेहद दूरगामी और रणनीतिक मान रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर समावेशी राजनीति को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति का सफरप्रोफेसर तारिक मंसूर का अकादमिक और प्रशासनिक करियर बेहद गौरवशाली और प्रेरणादायक रहा है। राजनीति में सक्रिय होने से पहले वे देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार [अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)] के कुलपति (Vice-Chancellor) के पद पर लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2017 से 2023 तक एएमयू के वीसी के रूप में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक विकास में अहम योगदान दिया था। एक कुशल सर्जन और प्रसिद्ध शिक्षाविद् के रूप में उनकी पहचान देश भर में रही है। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक का अनुभव रखने वाले [तारिक मंसूर] ने प्रशासनिक दक्षता का लोहा मनवाया है, जिसके चलते उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की समितियों और संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा चुकी हैं।राजनीति में प्रवेश और उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सफरशिक्षा जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाने के बाद प्रोफेसर तारिक मंसूर ने सक्रिय राजनीति की दुनिया में कदम रखा। अप्रैल 2023 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा उन्हें राज्य के उच्च सदन यानी विधान परिषद (MLC) के लिए मनोनीत किया गया था। विधान परिषद सदस्य के रूप में उनके कार्यकालों और सांगठनिक निष्ठा को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी है। बीजेपी संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति इस बात का प्रमाण है कि पार्टी ऐसे बौद्धिक, सक्षम और अनुभवी चेहरों को आगे ला रही है, जो समाज के हर वर्ग के बीच अपनी गहरी और सकारात्मक पकड़ रखते हैं।पसमांदा मुसलमानों और सामाजिक समीकरणों पर पार्टी की नजरराजनीतिक जानकारों का मानना है कि तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने एक बहुत ही स्पष्ट और मजबूत संदेश देने का प्रयास किया है। देश के अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर [पसमांदा मुसलमानों (Pasmanda Muslims)] और प्रबुद्ध वर्ग तक अपनी पहुंच बनाने की रणनीति के तहत यह निर्णय बेहद अहम माना जा रहा है। एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नेता को संगठन के शीर्ष पद पर बिठाकर पार्टी ने यह साबित कर दिया है कि वह योग्यता और समावेशिता को सर्वोपरि रखती है। आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी राज्यों में इस प्रकार के रणनीतिक बदलाव पार्टी के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।भविष्य की रणनीतियां और राजनीतिक निहितार्थकिसी भी राष्ट्रीय दल के लिए वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक संतुलन दोनों का तालमेल बिठाना बेहद जरूरी होता है। तारिक मंसूर का राजनीतिक कद बढ़ना और उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि पार्टी केवल पारंपरिक राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के प्रबुद्ध और पेशेवर वर्ग को भी मुख्यधारा की राजनीति से जोड़ रही है। उनकी यह नई जिम्मेदारी न केवल पार्टी के भीतर सांगठनिक संतुलन को मजबूत करेगी, बल्कि एक नए नेतृत्व के रूप में उनके अनुभव का राष्ट्रव्यापी लाभ भी पार्टी को मिलने की पूरी संभावना है।
Mahindra Scorpio Lifestyler और नई Toyota Hilux में बड़ा मुकाबला होगा. जानिए दोनों के बीच 3 सबसे बड़े अंतर और क्या लोगों के दिलों पर राज कर पाएगी Mahindra Scorpio Lifestyler.
Census 2027 में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले इलाकों में आज से जनगणना का दूसरा फेज शुरू हो गया है. जानिए पूछे जाने वाले 40 सवालों को और आधार, जाति, बैंक अकाउंट समेत पहली बार पूछे जा रहे सवालों के पीछे की कहानी.
भारतीय राजनीतिक गलियारों में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर चल रहे सांगठनिक फेरबदल को लेकर चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है। देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल में समय-समय पर संगठन को अधिक प्रभावी, चुस्त-दुरुस्त और आधुनिक बनाने के लिए नए बदलाव किए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और नई संगठनात्मक घोषणाओं ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। जब भी किसी बड़े राजनीतिक दल में नई टीमों का गठन होता है या फिर पुराने पदों पर नए चेहरों की सुगबुगाहट होती है, तो मीडिया से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगते हैं। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में भी कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है, जहां पार्टी के आंतरिक ढांचे में बदलाव को लेकर कई तरह की बातें की जा रही हैं।अमित मालवीय की भूमिका और सोशल मीडिया सेल की कार्यप्रणालीभारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया और आईटी सेल के कामकाज को पिछले एक दशक से बेहद करीब से देखा जा रहा है। इस डिजिटल विंग के जरिए पार्टी अपनी नीतियों, योजनाओं और विचारों को देश के करोड़ों नागरिकों तक पहुंचाने का काम करती है। अमित मालवीय लंबे समय से पार्टी के इस महत्वपूर्ण डिजिटल और आईटी प्रभार को संभालते आ रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान पार्टी के डिजिटल कैंपेन ने कई बड़े राजनीतिक मौकों पर अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, सोशल मीडिया की यह दुनिया काफी तेज रफ्तार और तीखी प्रतिक्रियाओं वाली होती है, जहां छोटी से छोटी घटना या बयान पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ जाती है। यही वजह है कि पार्टी के इस विंग और इसके प्रमुख से जुड़ी हर खबर राजनीतिक गलियारों में तुरंत सुर्खियों का हिस्सा बन जाती है।नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान और नए चेहरों की एंट्रीपार्टी के संगठनात्मक ढांचे को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान किया गया है, जिसमें कई दिग्गज और अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस नई सूची में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी राज्यों में पार्टी पूरी ताकत के साथ उतर सके। संगठनात्मक नियुक्तियों के इस दौर में विभिन्न मोर्चों और विभागों के प्रभारियों को लेकर भी लगातार मंथन चल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी का यह नया स्वरूप आने वाले समय में देश की चुनावी रणनीतिक दिशा तय करने में एक बड़ा कदम साबित होगा, जिससे कार्यकर्ताओं में भी नए जोश का संचार हुआ है।डिजिटल विंग और पार्टी की भावी रणनीतियों का महत्वआज के आधुनिक दौर में किसी भी राजनीतिक दल के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO), और सोशल मीडिया संवाद सबसे बड़े हथियार बन चुके हैं। जनता के बीच किसी भी मुद्दे पर त्वरित प्रतिक्रिया देने और अपनी बात को प्रामाणिक रूप से रखने के लिए आईटी और मीडिया सेल की भूमिका सर्वोपरि होती है। पार्टी अपने इन सभी विंग्स को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और परिणाममूलक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संगठनात्मक फेरबदल की इन प्रक्रियाओं के बीच यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में पार्टी अपनी डिजिटल और वैचारिक लड़ाई को किस प्रकार आगे बढ़ाती है और जनता के बीच अपनी पैठ को और कितना मजबूत करती है।
अल्लू अर्जुन ने शेयर की झंडे की गलत तस्वीर, भड़क उठे फैन्स बोले - पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए
अल्लू अर्जुन ने 15 अगस्त के मौके पर फैन्स को बधाई देने के लिए एक तस्वीर पोस्ट की लेकिन इसमें भारतीय झंडे में एक गड़बड़ थी जो कि नेटिजन्स की पकड़ में आ गई और उसके बाद बवाल शुरू हो गया.
2 लाख करोड़ बचे, किसानों को गए 1.66 लाख करोड़! E20 पर बहस के बीच इंडियन ऑयल ने गिनाए और फायदे
पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने भी इससे पहले बताया था कि किसी भी गाड़ी का माइलेज सिर्फ फ्यूल पर निर्भर नहीं करता. गाड़ी चलाने का तरीका, ट्रैफिक, गाड़ी की देख-रेख, टायर का प्रेशर और AC का इस्तेमाल, ये सभी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं.
KVS और NVS टियर-2 भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी, cbse.gov.in पर ऐसे करें चेक
KVS NVS Tier 2 Result 2026: जिन उम्मीदवारों ने केंद्रीय विद्यालय और नवोदल विद्यालय टीचिंग और नॉन टीचिंग पदों पर भर्ती के लिए आवेदन किया था, वो सभी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रिजल्ट चेक कर सकते हैं.
AAP का फेसबुक और इंस्टा अकाउंट करें बहाल, सुप्रीम कोर्ट का Meta को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में आम आदमी पार्टी के इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स को तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है. अदालत ने मेटा को निर्देश दिया है कि आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के बाद ही ये अकाउंट्स बहाल किए जाएं. ये आदेश पार्टी की याचिका पर सुनाया गया, जिसमें बिना पूर्व सूचना के सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक करने को गलत बताया गया था.
बीजेपी की टीम हुई जवान, जानिए कितने नेता हैं अंडर-40
बीजेपी ने नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है. 65 नेताओं वाली टीम में डॉ. हेमंग जोशी को युवा मोर्चा की जिम्मेदारी मिली है. 35 साल के हेमंग इस टीम में 40 से कम उम्र के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं.
नितिन नवीन की इस नई संगठनात्मक टीम में देश की जानी-मानी और मुखर नेत्री स्मृति ईरानी को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव (National General Secretary) नियुक्त किया गया है। स्मृति ईरानी का संगठनात्मक कौशल और आक्रामक वक्ता के रूप में उनकी छवि पार्टी के लिए हमेशा से एक बड़ी ताकत रही है। उन्हें इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने का मुख्य उद्देश्य पार्टी के जमीनी अभियानों को और अधिक धार देना तथा महिला कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को मजबूत करना है। राजनीतिक जानकारों का यह मानना है कि स्मृति ईरानी के पास सांगठनिक और प्रशासनिक मामलों का लंबा अनुभव है, जिसका सीधा फायदा आने वाले समय में पार्टी के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों और अभियानों को मिलेगा।वसुंधरा राजे और राम माधव बने पार्टी के नए उपाध्यक्षइस नई टीम के गठन का एक और सबसे बड़ा आकर्षण राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेत्री वसुंधरा राजे तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ विचारक राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (National Vice President) के पद पर नियुक्त किया जाना है। वसुंधरा राजे का राजनीतिक कद और उनका व्यापक जनाधार पार्टी को विशेष रूप से पश्चिमी और उत्तरी भारत में मजबूती प्रदान करेगा। वहीं, राम माधव की रणनीतिक क्षमता और वैचारिक सुदृढ़ता को संगठन के शीर्ष स्तर पर शामिल करने से नीतिगत फैसलों में और अधिक गहराई आएगी। इन दोनों अनुभवी चेहरों को उपाध्यक्ष पद की कमान सौंपे जाने से यह साफ संदेश दिया गया है कि पार्टी अपने पुराने और वरिष्ठ दिग्गजों के अनुभव का भरपूर उपयोग करते हुए आगे बढ़ना चाहती है।जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह और सांगठनिक मजबूती की तैयारीकिसी भी बड़े राजनीतिक दल के लिए उसकी सांगठनिक टीम उसकी रीढ़ की हड्डी होती है। नितिन नवीन के नेतृत्व और मार्गदर्शन में बनाई गई इस नई टीम में युवा जोश और अनुभवी दिग्गजों का एक बहुत ही सुंदर और संतुलित मिश्रण देखने को मिल रहा है। बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पार्टी के नेटवर्क को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए यह फेरबदल बेहद अहम माना जा रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले नेताओं को इस टीम में जगह मिलने से क्षेत्रीय संतुलन भी पूरी तरह साधा गया है। कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच इस घोषणा के बाद काफी उत्साह का माहौल देखा जा रहा है, और वे पूरी ऊर्जा के साथ संगठन के आगामी लक्ष्यों को पूरा करने में जुट गए हैं।राजनीतिक भविष्य की दिशा और आने वाली रणनीतियांआने वाले दिनों में देश के राजनीतिक परिदृश्य में होने वाले चुनावों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह सांगठनिक बदलाव मील का पत्थर साबित हो सकता है। पार्टी हाईकमान ने जिस प्रकार सोची-समझी रणनीति के तहत चेहरो का चयन किया है, उससे यह स्पष्ट है कि संगठन पूरी तरह से सक्रिय मोड में आ चुका है। जनता के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत करने, सरकारी नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने और विपक्ष के हमलों का माकूल जवाब देने के लिए यह नई टीम पूरी तरह तैयार है। राजनीति के इस बदलते दौर में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नितिन नवीन की यह नई टीम किस प्रकार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए पार्टी को नई ऊंचाइयों पर ले जाती है।
वसुंधरा राजे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और स्मृति ईरानी महासचिव बनाई गईं
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम घोषणा की, जिसमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को महासचिव बनाया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी सूची के अनुसार नवीन ने वसुंधरा राजे […] The post वसुंधरा राजे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और स्मृति ईरानी महासचिव बनाई गईं appeared first on Sabguru News .
ईरानी सेना के प्रमुख कमांडर का होर्मुज़ पर बड़ा दावा, देखें दुनिया आजतक
ईरानी सेना के प्रमुख कमांडर अमीर हातमी ने बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा, अमेरिकी सेना को होर्मुज़ से बाहर निकाला गया. अमीर हातमी ने कहा कि फारस की खाड़ी, ओमान और होर्मुज़ में प्रवेश की अनुमति नहीं है, और अब होर्मुज़ में किसी भी हाल में अपनी पुरानी स्थिति में अमेरिकी सैन्य ठिकाने नहीं आ सकेंगे. देखें दुनिया आजतक.
आतंक पर बड़ा प्रहार, शहजाद भट्टी नेटवर्क ध्वस्त, 14 राज्यों में 200 से ज्यादा गिरफ्तारी
स्वतंत्रता दिवस से पहले ISI समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की गई. 14 राज्यों में चलाए गए ऑपरेशन में 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया और बड़ी मात्रा में हथियार व अन्य सामान बरामद हुआ.
बचे हुए चावल से बनाएं प्याज का कुरकुरा पराठा, मिनटों में होगा तैयार
Onion Rice Paratha: आज हम आपको बचे हुए चावल से प्याज का टेस्टी पराठा बनाने की आसान रेसिपी बताएंगे, जिसे आप बेहद आसानी से घर पर तैयार कर सकते हैं. इसका कुरकुरा स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को खूब पसंद आएगा.
भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को 636 पन्नों की चार्ज शीट दाखिल कर दी। इस मामले में जांच एजेंसी ने रिटायर्ड जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को आरोपी बनाया है। दोनों के खिलाफ ...
सीएम पद छोड़ने की अटकलों के बीच पीएम मोदी से मिले फडणवीस, बताया प्लान
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिल्ली दौरे के दौरान केंद्र में मंत्री बनने की अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है. उन्होंने कहा कि उन्हें महाराष्ट्र की जनता ने चुना है और उनकी प्राथमिकता राज्य की जिम्मेदारी निभाना है.
IPS आशुतोष मिश्रा की मां की नहीं हुई हत्या, पोस्टमार्टम में क्या पता चला?
अब पोस्टमार्टम में हुए खुलासे ने इस मामले को पूरी तरह पलट दिया है. इससे पहले तक जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर दूसरे विपक्षी नेताओं ने योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया था
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया। नई टीम में मध्यप्रदेश के छह नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें लाल सिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, गजेंद्र पटेल को ...
Prayagraj Flood: झोपड़ियों में घुसा पानी, जानें स्थिति
यूपी के प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने से दारागंज की निचली बस्तियों में बाढ़ का पानी घुस गया है. कई झोपड़ियां डूब गईं और परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियां भी जलमग्न हैं. प्रशासन ने राहत चौकियां सक्रिय कर निगरानी बढ़ा दी है.
अमिताभ ने मुंबई में किराए पर दी अपनी प्रॉपर्टी, मिलेगा करोड़ों का किराया
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ को 5 साल की इस डील कुल ₹21.88 करोड़ का किराया मिलेगा. मुंबई से लेकर अयोध्या तक लगातार फैल रहा यह निवेश बिग बी के मजबूत होते रियल एस्टेट पोर्टफोलियो को दर्शाता है.
नितिन नवीन की टीम में अमित मालवीय नहीं, BJP के नए सोशल मीडिया हेड दीपक म्हस्के बने
डिजिटल और सोशल मीडिया ऑपरेशन्स को नए सिरे से पुनर्गठित करते हुए पार्टी ने छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को नया राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक नियुक्त किया है।
बीजेपी की टीम नितिन नवीन में दो मुस्लिम चेहरे भी, जानिए किसको मिला मौका
बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में दो मुस्लिम नेताओं को शामिल किया है. अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले इसे राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
भिंड : प्रेम-प्रसंग में बाधा बनी 6 साल की बेटी की हत्या, मां और प्रेमी अरेस्ट
भिण्ड। मध्यप्रदेश में भिण्ड जिले के लहार थाना क्षेत्र में करीब दो महीने पहले कुएं में मिली 6 वर्षीय बच्ची की लाश के मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए उसकी मां और उसके प्रेमी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों साथ रहना चाहते थे और बच्ची उनके रिश्ते की जानकारी परिवार को […] The post भिंड : प्रेम-प्रसंग में बाधा बनी 6 साल की बेटी की हत्या, मां और प्रेमी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
बिजली जाने के बाद 10 घंटे तक चलता रहेगा ये सीलिंग फैन!
ओरिएंट इलेक्ट्रिक ने एक BLDC सीलिंग फैन लॉन्च किया है जिसमें इनबिल्ट बैटरी है. बिजली जाने की स्थिति में ये चलता रहेगा. कंपनी ने दावा किया है कि ये बिजली की भी बचत करेगा और आवाज भी नहीं करेगा.
कौन हैं तेज प्रताप की पत्नी, क्या है दूरियों की वजह? भोजपुरी हसीना पर हुए फिदा!
तेज प्रताप इन दिनों भोजपुरी बवाल शो से खूब वाहवाही लूट रहे हैं. एक्ट्रेस काजल राघवानी संग उनकी जोड़ी को खूब पसंद भी किया जा रहा है. लेकिन इस बीच उनकी शादीशुदा जिंदगी की भी चर्चा शुरू हो गई है. कौन हैं तेज प्रताप यादव की पत्नी, और क्या है उनकी शादी में आई दूरियों की वजह, पढ़ें.
नाग पंचमी पर सूर्य-केतु की युति, इन 4 राशियों को 1 महीना होगी धन हानि
Surya Gochar 2026:ग्रहों के राजा सूर्य सिंह राशि में प्रवेश कर लिया है. इस राशि में पाप ग्रह केतु पहले से बैठा हुआ है. ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य और केतु की यह युति मिथुन, सिंह, मकर और कुंभ राशि के लोगों मुश्किल खड़ी कर सकती है.
जानें कौन हैं दीपक महस्के जो होंगे बीजेपी के नए आईटी सेल हेड, अमित मालवीय की लेंगे जगह
अमित मालवीय साल 2015 से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल के प्रमुख (राष्ट्रीय संयोजक) रहे हैं. लेकिन बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने नई टीम में उन्हें पद से मुक्त कर दिया है.
नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान, बीजेपी ने संगठन में बदलाव कर दिए 5 बड़े सियासी संदेश
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई कार्यकारिणी में स्मृति ईरानी और राम माधव की वापसी के साथ 38 पदाधिकारियों की घोषणा की गई है, जिसके जरिए 2027 के राज्य विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव का सियासी खाका तैयार किया गया है.
‘मालामाल वीकली 2’ को लेकर इन दिनों चर्चाओं का बाजार गर्म है. साल 2006 में रिलीज हुई सुपरहिट कॉमेडी फिल्म ‘मालामाल वीकली’ के सीक्वल को लेकर लगातार नई जानकारियां सामने आ रही हैं.
पार्लर में करवाते हैं आइब्रो थ्रेडिंग? यह लापरवाही बना सकती है गंभीर संक्रमण का कारण
क्या आइब्रो थ्रेडिंग से लिवर फेल हो सकता है? डॉक्टर के अनुसार गंदे धागे और खराब हाइजीन से हेपेटाइटिस B और C जैसे संक्रमण फैल सकते हैं. जानें पार्लर में किन बातों का रखें ध्यान.
रिटायरमेंट फंड और जायदाद के लिए पति से झगड़ा, फिर पत्नी ने उतारा मौत के घाट
तेलंगाना के सिद्दिपेट में एक महिला ने अपने पति की हत्या कर दी. दोनों के बीच रिटायरमेंट के पैसों और जायदाद के बंटवारे को लेकर झगड़ा हुआ था. लड़ाई के दौरान महिला ने ओखली के मूसल से पति पर वार कर दिया. मृतक वेंकटेशम सरकारी कमर्शियल टैक्स ऑफिसर थे, जो अगस्त में ही रिटायर होने वाले थे.
शहजाद पूनावाला ने फिर दिया भाजपा से इस्तीफा
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी नेता शहजाद पूनावाला ने एक बार फिर पार्टी से इस्तीफा देने की पेशकश करते हुए पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से इसे स्वीकार करने की गुजारिश की है। पूनावाला ने अपने इस्तीफे की प्रति सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर साझा करते हुए कहा कि यह मेरे लिए अत्यंत भावुक करने […] The post शहजाद पूनावाला ने फिर दिया भाजपा से इस्तीफा appeared first on Sabguru News .
विज्ञापन पानी का... ब्रांडिंग शराब की! क्या है सरोगेट विज्ञापन?
इन दिनों विमल इलायची का एड वाला मामला सुर्खियों में हैं. क्योंकि, सरोगेट विज्ञापन का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र एफडीए ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को भी आरोपी बनाया है. ऐसे में जानते हैं आखिर क्या है सरोगेट विज्ञापन?
ब्राह्मण, महिला, मुस्लिम... नितीन नवीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश से किन्हें मिली जगह?
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश से 8 नेताओं को जगह मिली है. इसमें सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है.
नागेश्वरन ने अपने एक लेख में E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे विभिन्न दावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि E20 के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन को व्यापक नुकसान होने की आशंकाओं का समर्थन उपलब्ध वैज्ञानिक और परीक्षण संबंधी प्रमाण नहीं करते।
देखा तारा, निकला ब्लैक होल... हैदराबाद के रोहन नायडू की बड़ी खोज
हैदराबाद के रोहन नायडू और उनकी टीम ने जेम्स वेब टेलेस्कोप से शुरुआती ब्रह्मांड में एक अनोखे 'ब्लैक होल स्टार' की पहचान की है. तारे जैसा दिखने वाला यह लाल बिंदु असल में ब्लैक होल हो सकता है.
त्रिपुरा में 15 वर्षीय बालिका से रेप के आरोप में 4 नाबालिग सहित 6 अरेस्ट
अगरतला। त्रिपुरा के गोमती जिले की एक स्थानीय अदालत ने दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों को हिरासत में भेज दिया है। इनमें से चार नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेज दिया गया, जबकि दो वयस्कों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस ने दुष्कर्म के दो सप्ताह बाद सभी आरोपियों […] The post त्रिपुरा में 15 वर्षीय बालिका से रेप के आरोप में 4 नाबालिग सहित 6 अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
आतंकवाद पर जोरदार प्रहार; शहजाद भट्टी नेटवर्क ध्वस्त, 14 राज्यों से 253 संदिग्ध हिरासत में
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सुरक्षा बलों ने स्वतंत्रता दिवस से पहले शाहजाद भट्टी नेटवर्क को ध्वस्त कर उसके संभावित आतंकी मंसूबों को नाकाम कर दिया। उन्होंने बताया कि 14 राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर एक साथ अभियान चलाया गया।
2 बीघा खेत के लालच में 35 घंटे तक सड़ती रही पिता की लाश!
झांसी के चिरगांव खुर्द में 2 बीघा जमीन के विवाद के कारण बेटों ने पिता के अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया. बहन द्वारा जमीन लौटाने की सहमति, रजिस्ट्रार कार्यालय में सर्वर डाउन और बारिश के कारण 35 घंटे का समय लगा. पुलिस की समझाइश के बाद समथर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार हुआ.
Modi सरकार का आतंकवाद पर वार: Shahzad Bhatti का नेटवर्क ध्वस्त, 14 राज्यों से 200+ आतंकी दबोचे गए
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान स्थित शहज़ाद भट्टी आतंकी नेटवर्क को खत्म कर दिया है और स्वतंत्रता दिवस से पहले विध्वंसक हमलों की साजिशों को नाकाम कर दिया है। शाह ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा कि 14 राज्यों में चलाए गए समन्वित अभियानों के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि ये अभियान आतंकवाद के प्रति सरकार की 'ज़ीरो-टॉलरेंस' नीति का हिस्सा थे और इनका मकसद नेटवर्क द्वारा रची गई हमलों की साजिशों को रोकना था। इसे भी पढ़ें: Nitin Nabin की New Team का ऐलान, वसुंधरा राजे, राम माधव और स्मृति ईरानी को मिली बड़ी जिम्मेदारी शाह ने कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों ने 14 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर समन्वित अभियान चलाकर इस नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। गृह मंत्री के अनुसार, अभियानों के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने भारी मात्रा में हथियार और अन्य सामग्री बरामद की। बरामद सामान में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले CCTV कैमरे शामिल थे। शाह ने कहा कि इस नेटवर्क को पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) का समर्थन हासिल था और यह भारत में कई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था। शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क की जांच कई सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। उन पर कथित तौर पर आतंकी भर्ती, कट्टरपंथ को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी और हमलों में शामिल होने के आरोप हैं। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान में मौजूद शाहज़ाद भट्टी का संबंध कई आतंकी मामलों से जोड़ा है, जिनमें हरियाणा के सिरसा में महिला पुलिस स्टेशन पर हुआ ग्रेनेड हमला भी शामिल है। इसे भी पढ़ें: Vande Mataram विवाद पर बोले Imran Masood, अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं, ये मेरा संवैधानिक अधिकार सुरक्षा एजेंसियों ने हाल के महीनों में कई राज्यों में भट्टी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ ऑपरेशन चलाए हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली पुलिस ने इस नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच के दौरान हथियार व अन्य सामान बरामद किए हैं। शाह ने कहा कि इस हालिया कार्रवाई ने नेटवर्क को अपने मंसूबों को अंजाम देने से रोका है और विदेशी मदद से चल रहे आतंकी नेटवर्क से सख्ती से निपटने के सरकार के संकल्प को दिखाया है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
कब और कितना दिया गया घूस? ये वेबसाइट खोल देगी पूरी पोल, भारतीय छात्र ने बनाई कमाल की साइट
भारतीय छात्र आर्यन निषाद ने Bribes.fyi वेबसाइट बनाई है. जहां लोग सरकारी दफ्तरों में रिश्वत मांगने या देने से इनकार करने की घटनाएं दर्ज कर सकते हैं.
कोटकासिम में स्कूल बस की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत
खैरथल-तिजारा। राजस्थान में खैरथल-तिजारा जिले के कोटकासिम थाना क्षेत्र में सोमवार को निजी स्कूल बस की चपेट में आने से मोटर साइकिल पर सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुणसोर गांव का करण धानक सुबह मोटर साइकिल से मजदूरी के लिए जा रहा था। इसी दौरान वह गुरगचका गांव के […] The post कोटकासिम में स्कूल बस की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत appeared first on Sabguru News .
स्मृति ईरानी की भाजपा में महत्वपूर्ण पद पर वापसी, नितिन नबीन की टीम में बनीं राष्ट्रीय महासचिव
भाजपा की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी की लंबे समय बाद भाजपा में महत्वपूर्ण पद पर वापसी हुई है। 2026 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद स्मृति भाजपा की महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रिया से बाहर थीं। अब नितिन नबीन की टीम में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। यह पहली बार है जब […]
BJP की नई टीम का ऐलान: स्मृति ईरानी-वसुंधरा राजे की वापसी, पीयूष गोयल बने कोषाध्यक्ष
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का एलान कर दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और वसुंधरा राजे की भी राष्ट्रीय राजनीति में वापसी हुई है। उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया है। पीयूष गोयल को पार्टी का कोषाध्यक्ष ...
बीजेपी की नई टीम में कोषाध्यक्ष बनाए गए पीयूष गोयल, क्या सरकार में रहेंगे?
भारतीय जनता पार्टी की नई टीम का आज ऐलान हो गया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में कई चौंकाने वाले नाम भी शामिल हैं. इसमें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भी शामिल किया गया है.
AI से बदल सकती है हेल्थकेयर की तस्वीर, लेकिन नैतिकता और मानवता सबसे जरूरी : डॉ. अभिजात शेठ
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय AI परामर्श में विशेषज्ञों ने कहा कि AI डॉक्टरों की मदद कर सकता है, लेकिन उनकी जगह नहीं ले सकता. जानें हेल्थकेयर, मेडिकल शिक्षा और रिसर्च में AI को लेकर क्या बनी रणनीति.
वसुंधरा राजे सिंधिया ने मुंबई के इस कॉलेज से की है पढ़ाई, ऐसे शुरू हुआ पॉलिटिकल करियर
Vasundhara Raje Education:राजस्थान चुनाव के बाद से ही बीजेपी में साइडलाइन समझी जा रहीं वसुंधरा राजे सिंधिया को बड़ी जिम्मेदारी मिली है. उनका नाम बीजेपी की नई टीम में शामिल किया गया है.
बंगाल में शानदार प्रदर्शन का बिप्लब देब को मिला इनाम, टीम नवीन में बने महासचिव
Biplab Kumar Deb: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का ऐलान हो गया है. पार्टी ने पूर्वोत्तर के नेता बिप्लब देव को मौका दिया है. देव त्रिपुरा के पूर्व सीएम रह चुके हैं.
गोविंदा और सुनीता आहूजा के बीच दरार देख सच्चे प्यार पर छलका कश्मीरा शाह का दर्द
बॉलीवुड की रंगीन और चकाचौंध भरी दुनिया में रिश्तों के बनने और बिगड़ने का सिलसिला कोई नया नहीं है, लेकिन जब इंडस्ट्री के सबसे चर्चित और स्थापित जोड़ों के बीच अनबन की खबरें सामने आती हैं, तो फैंस और साथी कलाकार भी हैरान रह जाते हैं। इन दिनों फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया के गलियारों में दिग्गज अभिनेता गोविंदा (Govinda) और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा (Sunita Ahuja) के बीच रिश्तों में चल रही खटास और तकरार ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रखा है। कई दशकों तक एक-दूसरे के पूरक माने जाने वाले इस जोड़े के बीच अनबन की खबरों ने न सिर्फ मीडिया की सुर्खियां बटोरी हैं, बल्कि बॉलीवुड के अन्य कलाकारों को भी अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। इसी बीच, गोविंदा के परिवार से जुड़े और इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री कश्मीरा शाह (Kashmera Shah) का इस पूरे मामले पर दर्द खुलकर सामने आया है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और सच्चे प्यार की परिभाषा पर एक नई बहस छेड़ दी है।कश्मीरा शाह का छलका दर्द और रिश्तों की बदलती सच्चाईगोविंदा की पारिवारिक अनबन और उनके आपसी रिश्तों में आ रही दूरियों को देखकर कश्मीरा शाह का दिल बेहद दुखी है। मीडिया और इंटरव्यूज के दौरान जब कश्मीरा से इस बारे में बात की गई, तो उनका दर्द साफ छलक उठा। उन्होंने बेबाकी से अपनी राय रखते हुए कहा कि आज के दौर में जब वे लंबे समय से साथ रह रहे जोड़ों और दशकों पुरानी शादियों को इस तरह बिखरते या तनाव से गुजरते हुए देखती हैं, तो उनका 'सच्चे प्यार' (True Love) और वैवाहिक बंधनों से धीरे-धीरे भरोसा हिलने लगा है। कश्मीरा का यह बयान इस बात का प्रतीक है कि कैसे फिल्म जगत के भीतर और बाहर लोग पारिवारिक कलह और दूरियों से मानसिक रूप से आहत होते हैं। जब परिवार के अपने लोग ही एक-दूसरे के आमने-सामने आ जाते हैं, तो उसका असर सिर्फ उन पर नहीं बल्कि उनके आसपास के रिश्तों और रिश्तेदारों पर भी गहरा प्रभाव डालता है।लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक मतभेद और दूरियांगोविंदा और सुनीता आहूजा का रिश्ता इंडस्ट्री में हमेशा एक मिसाल माना जाता रहा है, जहां सुनीता ने हर मुश्किल वक्त में गोविंदा का साथ दिया। हालांकि, पिछले कुछ समय से परिवार के भीतर आंतरिक कलह, आपसी गलतफहमियों और संवाद की कमी के कारण दूरियां इस हद तक बढ़ गई हैं कि अब वे सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुकी हैं। पारिवारिक रिश्तों में जब अहं (Ego) और दूरियां घर कर जाती हैं, तो मजबूत से मजबूत रिश्ते भी कमजोर पड़ने लगते हैं। कश्मीरा शाह ने इसी कड़वी सच्चाई की ओर इशारा करते हुए यह महसूस किया कि कैसे छोटी-छोटी बातें और अहंकार आपसी संबंधों में जहर घोल देते हैं। परिवार के करीबी होने के नाते इस तरह के तनाव को करीब से देखना और महसूस करना किसी भी संवेदनशील व्यक्ति के लिए बेहद पीड़ादायक होता है, और यही दर्द कश्मीरा के शब्दों में साफ तौर पर झलकता है।आधुनिक दौर में शादियों के टिकने की चुनौतियां और मानसिक दबावआज की आधुनिक जीवनशैली, भागदौड़ भरी जिंदगी और सोशल मीडिया के इस दौर में सेलिब्रिटीज की शादियां और निजी जीवन हमेशा एक शीशे के घर की तरह सबके सामने होते हैं। आम इंसान से लेकर बड़े-बड़े कलाकारों तक के लिए अपने रिश्तों में सामंजस्य बिठाना एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है। कश्मीरा शाह का यह दर्द केवल गोविंदा और सुनीता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज के पूरे समाज का आईना है जहां शादियां बहुत जल्दी टूट रही हैं या आपसी तनाव का शिकार हो रही हैं। जब इतने लंबे समय तक साथ निभाने वाले जोड़े भी अनबन की राह पर चल पड़ते हैं, तो यह समाज के लिए सोचने का विषय बन जाता है कि क्या हम आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपने पारिवारिक मूल्यों और सहनशक्ति को खोते जा रहे हैं। प्यार और विश्वास का जो धागा रिश्तों को बांधकर रखता है, उसका कमजोर होना वाकई चिंताजनक है।रिश्तों में सुधार की उम्मीद और आपसी संवाद की अहमियतहर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन समझदारी इसी में होती है कि समय रहते गलतफहमियों को दूर कर लिया जाए। कश्मीरा शाह के इस दर्दभरे बयान के बाद फैंस और शुभचिंतक यही उम्मीद कर रहे हैं कि गोविंदा और सुनीता आहूजा अपने आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक बार फिर से अपने परिवार को मजबूती के साथ जोड़ लेंगे। पारिवारिक रिश्तों में दरारें जितनी जल्दी भरी जाएं, उतना ही बेहतर होता है। कश्मीरा की यह प्रतिक्रिया इस बात की याद दिलाती है कि रिश्ते खून के हों या प्यार के, उन्हें संजोए रखने के लिए बहुत त्याग, धैर्य और क्षमा की आवश्यकता होती है। उम्मीद है कि इंडस्ट्री के इस पुराने और प्यारे जोड़े के बीच की यह तकरार जल्द खत्म होगी और एक बार फिर से आपसी प्रेम और सद्भाव की मिसाल देखने को मिलेगी।
वसुंधरा और सतीश पूनिया को बीजेपी में बड़ी जिम्मेदारी, नई राष्ट्रीय टीम का हुआ ऐलान
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज अपनी नई राष्ट्रीय टीम के सदस्यों की घोषणा कर दी है जिसमें राजस्थान के दो प्रमुख नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी गई है.
LPG उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, E-KYC की अंतिम तारीख बढ़ी; जानें पूरा प्रोसेस
एलपीजी ई-केवाईसी की अंतिम तिथि 16 अगस्त से बढ़ाकर 23 अगस्त कर दी गई है, लेकिन सर्वर डाउन और तकनीकी खामियों के कारण उपभोक्ता अभी भी संघर्ष कर रहे हैं।
बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी दमदार अदाकारी और बेबाक अंदाज का परचम लहराने वाली ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा [Priyanka Chopra] इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने एक पुराने लेकिन बेहद गहरे और विचारोत्तेजक पोस्ट को लेकर फिर से चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। सोशल मीडिया की दुनिया में अक्सर सेलिब्रिटीज के बयानों और पोस्ट्स पर लोगों की पैनी नजर रहती है, और इस बार प्रियंका चोपड़ा का वह बयान लोगों का ध्यान खींच रहा है जिसमें उन्होंने महिलाओं की उम्र, सामाजिक पड़ाव और उन पर थोपे जाने वाले अजीबोगरीब पैमानों पर खुलकर तंज कसा था। प्रियंका ने अपने इस वायरल पोस्ट के जरिए समाज के उस दोहरे रवैये पर करारा प्रहार किया है जो हर उम्र की महिला के लिए जीवन जीने के कुछ तयशुदा और रूढ़िवादी कायदे-कानून बनाकर रखता है, जैसे कि किस उम्र में शादी करनी चाहिए, कब बच्चे होने चाहिए और किस उम्र में कौन सा काम करना शोभा देता है।समाज के तयशुदा पैमाने और महिलाओं पर उम्र का मानसिक दबावजब एक महिला अपने जीवन के चौथे दशक यानी 40 साल की उम्र में प्रवेश करती है, तो हमारा यह पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी समाज उसे अलग-अलग खानों में बांटने की कोशिश करने लगता है। प्रियंका चोपड़ा ने अपने इस बयान में इसी कड़वी सच्चाई को बहुत ही बेबाकी और चुटीले अंदाज में सबके सामने रखा था। उन्होंने लिखा था कि समाज की नजर में एक 40 साल की महिला के लिए लोगों के मन में अजीबोगरीब धारणाएं होती हैं—कोई यह मान लेता है कि इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते महिला किसी के बच्चे की दादी या नानी बन चुकी होगी और अपने घर-गृहस्ती में पूरी तरह उलझ गई होगी, तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों की दबी जुबान में यह चर्चा भी होती है कि क्या वह किसी कम उम्र या 25 साल के लड़के को डेट कर रही है। इस तरह के हास्यास्पद और पूर्वाग्रह से ग्रसित विचार इस बात को दर्शाते हैं कि समाज आज भी महिलाओं को उनकी व्यक्तिगत सफलताओं या असफलताओं के बजाय केवल उनकी उम्र और वैवाहिक स्थिति के चश्मे से ही देखता है।ग्लोबल स्टार बनने का सफर और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं की कहानीप्रियंका चोपड़ा ने अपने अब तक के सफर में यह साबित कर दिया है कि एक महिला अपनी शर्तों पर जीना कैसे जानती है। मिस वर्ल्ड बनने से लेकर बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्री बनने और फिर हॉलीवुड तक का उनका सफर आसान नहीं रहा है, लेकिन उन्होंने हर कदम पर लीक से हटकर फैसले लिए हैं। जब उन्होंने निक जोनास [Nick Jonas] से शादी की, जो उम्र में उनसे छोटे हैं, तो भी समाज के एक वर्ग द्वारा तरह-तरह की बातें बनाई गईं। लेकिन प्रियंका ने कभी भी इन फालतू की बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उनका यह वायरल पोस्ट इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि वे जानती हैं कि लोग क्या कहेंगे, क्योंकि 'लोगों का काम है कहना'। वे अपने जीवन के फैसले खुद अपनी खुशी और प्राथमिकताओं के आधार पर लेती हैं, न कि समाज के किसी पुराने और दबे-कुचले मानदंडों के हिसाब से।सोशल मीडिया पर महिलाओं के लिए प्रेरणा और बदलती मानसिकताआज के डिजिटल और सोशल मीडिया [Social Media] के दौर में सेलिब्रिटीज जब इस तरह के मुद्दों पर खुलकर बात करते हैं, तो यह लाखों-करोड़ों युवा लड़कियों और महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा संबल बनता है। प्रियंका चोपड़ा का यह बयान केवल एक सेलिब्रिटी का व्यक्तिगत विचार नहीं है, बल्कि यह हर उस आधुनिक महिला की आवाज है जो उम्र के हर पड़ाव पर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। आज महिलाएं अपनी उम्र को छिपाने के बजाय उसे गर्व के साथ स्वीकार करती हैं और 40 या 50 की उम्र में भी अपने करियर, फिटनेस और पर्सनल गोल्स को लेकर उतनी ही एनर्जेटिक रहती हैं जितनी वे अपने 20 के दशक में थीं। सोशल मीडिया पर उनके इस पोस्ट के वायरल होने का मुख्य कारण यही है कि हर आम और खास महिला खुद को इस बात से जुड़ा हुआ महसूस करती है और समाज की इन दकियानूसी सोच के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा पाती है।रूढ़िवादी सोच को अलविदा और अपनी शर्तों पर जीने का संदेशअंत में, प्रियंका चोपड़ा का यह चर्चित बयान और उनका यह दृष्टिकोण हमें यह सिखाता है कि जीवन किसी दूसरे के बनाए गए नियमों पर चलने के लिए नहीं मिला है। समाज क्या कहेगा और लोग क्या सोचेंगे, अगर इंसान इसी डर में जीता रहेगा, तो वह कभी अपनी असली खुशी नहीं पा सकता। प्रियंका ने अपने इस अंदाज से यह साफ संदेश दे दिया है कि महिलाओं को अपनी उम्र या समाज के तय किए गए दायरों में बंधकर रहने की कोई जरूरत नहीं है। वे अपनी जिंदगी की कहानी खुद लिखने का पूरा हक रखती हैं, चाहे वह करियर चुनना हो, हमसफर चुनना हो या अपने जीने का ढंग तय करना हो। उनका यह बेबाक और बोल्ड अंदाज आज की पीढ़ी के लिए एक मिसाल बन चुका है, जो यह बताता है कि असली खूबसूरती और ताकत अपने आत्मविश्वास में निहित होती है, न कि समाज के खोखले पैमानों में।
संभल में युवक ने पाकिस्तान के झंडे के साथ फोटो लगाई, पुलिस ने शुरू की जांच
संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के चंदौसी क्षेत्र में स्वतंत्रता दिवस के दिन पाकिस्तान के झंडे के साथ एक युवक की फोटो सोशल मीडिया पर स्टेटस के रूप में पोस्ट किए जाने का मामला सामने आया है। स्टेटस वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी। […]
'डिंपल यादव पूरे देश की मां', बोले सपा विधायक, अखिलेश पर भी दिया बयान
समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद फहीम ने सपा सांसद डिंपलयादव को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है. कांवड़ियों के स्वागत के दौरान विधायक मोहम्मद फहीम ने डिंपल यादव को 'पूरे देश की मां' बताते हुए उन्हें ममता का प्रतीक बताया. उन्होंने दावा किया कि 2027 में अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे.
'पुरानी गाड़ियों के लिए E10 वापस लाएं' मुख्य आर्थिक सलाहकार की सरकार को सलाह
मुख्य आर्थिक सलाहकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को वापस लेने या रोकने की जरूरत नहीं है, बल्कि देश की मौजूदा गाड़ियों की फ्लीट को ध्यान में रखते हुए लचीला रुख अपनाने की जरूरत है।
Nitin Nabin की New Team का ऐलान, वसुंधरा राजे, राम माधव और स्मृति ईरानी को मिली बड़ी जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की। इसमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और BJP के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। पार्टी की 17 अगस्त की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन नियुक्तियों की घोषणा BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने की और ये नियुक्तियां तुरंत प्रभाव से लागू हो गई हैं। इसे भी पढ़ें: चिदंबरम के बाद केजरीवाल ने भी खुद को बताया 'दिमागी नक्सली': जो लोग विकसित भारत चाहते हैं... राजे और माधव उन 13 नेताओं में शामिल हैं जिन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सूची में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, बैजयंत जय पांडा, डी पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, भारती प्रवीण पवार, मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, एम नागराजा, तारिक मंसूर और मधुचंद्र कर भी शामिल हैं। बीजेपी ने आठ राष्ट्रीय महासचिवों की नियुक्ति की है। इस सूची में स्मृति ईरानी के साथ-साथ विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देब, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: 'वंदे मातरम' विवाद में फंसी Congress! Sonia-Rahul पर अपमान का आरोप, Delhi Police कर रही जांच बीजेपी के संगठनात्मक सचिव बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बने रहेंगे, जबकि शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) नियुक्त किया गया है। पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और राजेश मंगल को राष्ट्रीय संयुक्त कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पार्टी ने अपने संगठन और आउटरीच विंग में भी नियुक्तियों की घोषणा की है। संबित पात्रा को नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेटर बनाया गया है, जबकि तरुण चुघ को सेंट्रल ऑफिस का इंचार्ज नियुक्त किया गया है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @NitinNabin द्वारा निम्नलिखित सदस्यों को भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं अन्य दायित्वों पर नियुक्त किया जा रहा है। (1/2) pic.twitter.com/tcTJsJG0dc — BJP (@BJP4India) August 17, 2026
मध्य पूर्व (Middle East) के बेहद संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य [Hormuz Strait] पर इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक तलवार लटक रही है। वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसके तहत ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही एक अहम समझौता डील आज आधिकारिक तौर पर समाप्त होने जा रही है। जानकारों का यह मानना है कि यह डील क्षेत्र में बढ़ते तनाव और युद्ध के बादलों को टालने के लिए की गई थी, लेकिन यह समझौता अपनी इस बुनियादी शर्त में पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। दुनिया भर की निगाहें इस वक्त फारस की खाड़ी [Persian Gulf] पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस समझौते के खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव और अधिक गहराने की आशंका पैदा हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की सप्लाई पर भी बड़ा संकट आ सकता है।शांति समझौते की विफलता और युद्ध रोकने के प्रयास फेलकुछ समय पहले जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं के बाद इस विशेष डील को अमली जामा पहनाया गया था, तो यह उम्मीद जताई जा रही थी कि हॉर्मोझ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी और दोनों देशों के बीच किसी भी संभावित महायुद्ध को टाला जा सकेगा। लेकिन पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि यह डील केवल कागजी साबित हुई है। ज़मीनी स्तर पर ईरान के सैन्य अभियानों, प्रॉक्सी संगठनों की गतिविधियों और अमेरिकी नौसेना की तैनाती के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता ही चला गया। कूटनीतिक मोर्चे पर दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज यह डील बिना किसी ठोस और स्थायी शांति परिणाम के अपने दम तोड़ते हुए आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है।वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर मंडराता सायाहॉर्मोझ संकट का सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। दुनिया का कुल कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी हॉर्मोझ स्ट्रेट के रास्ते से समुद्री जहाजों के जरिए दुनिया भर के बाजारों में सप्लाई किया जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच आज डील खत्म होने और तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल टैंकरों की आवाजाही पर गंभीर पाबंदियां लग सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल [Crude Oil Prices] की कीमतों में भारी उछाल आने की पूरी संभावना है। यदि हालात युद्ध जैसे बनते हैं, तो वैश्विक स्तर पर महंगाई एक बार फिर विकराल रूप धारण कर सकती है, जिसका सीधा असर भारत समेत विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर देखने को मिलेगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल दो देशों का नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक ट्रेड चेन के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है।दोनों देशों की सैन्य तैयारियां और कूटनीतिक गतिरोधइस समझौते के खत्म होने के मुहाने पर खड़े होकर दोनों ही देश अपनी-अपनी सैन्य ताकतों को और अधिक मजबूत करने में जुटे हुए हैं। पेंटगन [Pentagon] और अमेरिकी रक्षा मुख्यालय की ओर से फारस की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोतों और अत्याधुनिक सैन्य विमानों की तैनाती बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अपनी नौसेना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रख दिया है, जिससे इस क्षेत्र में सैन्य टकराव की संभावना अपने चरम पर पहुंच गई है। कूटनीतिक चैनल इस वक्त लगभग बंद होने की कगार पर हैं और दोनों पक्षों की तरफ से बयानबाजी का दौर तेज हो चुका है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र [United Nations] के सामने यह एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है कि वे कैसे इस क्षेत्र को एक और भयानक युद्ध की विभीषिका से बचाएं।आने वाला समय और भू-राजनीतिक भविष्य की अनिश्चितताआज जब ईरान और अमेरिका के बीच की यह डील आधिकारिक रूप से समाप्त हो रही है, तो मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से अनिश्चितताओं के भंवर में फंस गया है। दुनिया भर के देश और कूटनीतिक विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि आने वाले दिनों में दोनों पक्षों ने संयम नहीं बरता, तो यह छोटा क्षेत्रीय विवाद एक बड़े वैश्विक युद्ध में भी बदल सकता है। कूटनीति के मोर्चे पर असफल साबित हुई यह डील इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जब तक दोनों देश आपसी अविश्वास और भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर किसी वास्तविक और न्यायसंगत समाधान की तरफ नहीं बढ़ते, तब तक हॉर्मोझ जलडमरूमध्य और खाड़ी देशों की शांति केवल एक सपना ही बनकर रह जाएगी।
लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की मदद के लिए निकला अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS वाशिंगटन खुद हुआ बीमार
दुनिया की सबसे ताकतवर और अत्याधुनिक सैन्य ताकत होने का दावा करने वाली अमेरिकी नौसेना (United States Navy) के भीतर से एक ऐसी शर्मनाक और हैरान करने वाली हकीकत सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ जहां अमेरिकी युद्धपोत [USS Washington] को समंदर में किसी बड़े मिशन पर तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) को राहत और सहायता पहुंचाने के लिए रवाना किया गया था, वहीं खुद यह युद्धपोत तकनीकी और प्रशासनिक बदहाली के कारण गंभीर संकट में घिर गया है। इस युद्धपोत के अंदर की जो तस्वीरें और रिपोर्ट्स सामने आई हैं, उन्होंने नौसेना के भीतर मचे आंतरिक हाहाकार को उजागर कर दिया है। पोत पर तैनात सैनिकों, विशेषकर महिला नौसैनिकों को जिन अमानवीय और दयनीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, उसने अमेरिकी सैन्य प्रबंधन [Military Management] की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।टॉयलेट और स्वच्छता के बदतर हालात से सैनिक परेशानUSS वाशिंगटन जैसे विशाल और आधुनिक युद्धपोत पर बुनियादी सुविधाओं का इस हद तक लावारिस हाल होना किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। पोत पर तैनात क्रू मेंबर्स और अधिकारियों के अनुसार, जहाज के अंदर बने अधिकांश टॉयलेट और सैनिटेशन सिस्टम पिछले काफी समय से पूरी तरह से खराब या जाम पड़े हैं। सीवर लाइन और प्लंबिंग फेल होने के कारण पोत के भीतर असहनीय बदबू और अस्वच्छ माहौल बन चुका है, जिससे सैनिकों के लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो गया है। समंदर की बीच लहरों के बीच लंबे अभियानों पर रहने वाले नौसैनिकों के लिए साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता सबसे पहली जरूरत होती है, लेकिन जब युद्धपोत के टॉयलेट ही काम करना बंद कर दें, तो सैनिकों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों चरमराने लगता है। प्रशासनिक लापरवाही की यह पराकाष्ठा है कि महासागर की गहराइयों में गश्त लगाने वाले इन जांबाज सैनिकों को बुनियादी मानवीय जरूरतों के लिए भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।महिला सैनिकों के सामने विकराल संकट और सैनिटरी पैड तक की कमीइस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक और शर्मनाक पहलू यह है कि युद्धपोत पर तैनात महिला सैनिकों (Female Sailors) को अपनी बुनियादी स्वास्थ्य और स्वच्छता जरूरतों के लिए भी भारी अपमान और संकट का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्धपोत पर एमरजेंसी मेडिकल सप्लीमेंट्स और आवश्यक सैनिटरी प्रोडक्ट्स [Sanitary Pads] का भारी अकाल पड़ चुका है, जिसके चलते महिला सैनिकों को पीरियड्स के दौरान गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिस देश की सेना दुनिया भर में मानवाधिकारों और महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े उपदेश देती है, उसी देश के युद्धपोत पर सेवारत महिला नौसैनिकों को बुनियादी सैनिटरी पैड जैसी सामान्य वस्तुएं तक उपलब्ध न करा पाना रक्षा मंत्रालय और नौसेना कमान की बड़ी विफलता को दर्शाता है। महिला सैनिकों ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि एक तरफ उन्हें पुरुषों के बराबर युद्धक मोर्चों पर तैनात किया जाता है, लेकिन जब मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की बात आती है, तो उन्हें पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।तकनीकी खराबी और लॉजिस्टिक्स की भयंकर विफलताअमेरिकी नौसेना के इन युद्धपोतों के संचालन के पीछे अरबों-खरबों डॉलर का बजट होता है, इसके बावजूद इस तरह की रसद और तकनीकी विफलताएं [Logistics Failures] यह साबित करती हैं कि जमीनी स्तर पर प्रबंधन कितना खोखला हो चुका है। USS वाशिंगटन जब लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की मदद के लिए निकला था, तो उम्मीद यह की जा रही थी कि यह पोत युद्ध के मोर्चों पर एक मजबूत बैकअप साबित होगा, लेकिन खुद अपने ही आंतरिक रख-रखाव के मोर्चे पर यह पोत चित्कार उठा। जहाजों के इंजनों की तकनीकी समस्याओं के साथ-साथ समय पर स्पेयर पार्ट्स और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की आपूर्ति न होना इस बात का प्रमाण है कि रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Defense Supply Chain) में गंभीर खामियां आ चुकी हैं। नौसेना अधिकारियों द्वारा इस मामले को दबाने और छिपाने के तमाम प्रयास किए गए, लेकिन जब पीड़ित सैनिकों ने अपनी आपबीती मीडिया और मानवाधिकार मंचों तक पहुंचाई, तो पोल खुल गई।अमेरिकी सेना की साख को बट्टा और जवाबदेही की मांगइस सनसनीखेज खुलासे के बाद अमेरिका के रक्षा विभाग [Pentagon] और नौसेना मुख्यालय में हड़कंप मच गया है। रक्षा विशेषज्ञों और सांसदों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने की मांग की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर किस स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई जिसके कारण देश की रक्षा करने वाले सैनिक खुद नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हुए। युद्धपोत पर तैनात सैनिकों के परिवारों में भी भारी रोष व्याप्त है, जो यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सरकार सैनिकों की जान और उनकी गरिमा के साथ इसी तरह खिलवाड़ करती रहेगी। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में तीखी बहस होने की पूरी संभावना है, क्योंकि इस घटना ने दुनिया के सबसे बड़े सुपरपॉवर की सैन्य तैयारियों के खोखलेपन को सबके सामने बेनकाब कर दिया है।
पहले बांग्लादेश से हारे, अब ICC देगी झटका! AUS की बढ़ी मुश्किलें
बांग्लादेश से शर्मनाक हार के बाद अब ऑस्ट्रेलिया की नजर आईसीसी के फैसले पर होगी. यदि डब्ल्यूटीसी पॉइंट्स काटे जाते हैं तो मैदान पर मिली हार का असर सिर्फ सीरीज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फाइनल की रेस पर भी पड़ सकता है.
यूरोप के बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक देश ग्रीस (Greece) से इस वक्त एक बेहद डरावनी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। ग्रीस के प्रसिद्ध सलामिना आइलैंड (Salamina Island) पर प्रकृति का भयंकर कोहराम देखने को मिल रहा है, जहां जंगलों में अचानक लगी भीषण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। तेज हवाओं के झोंकों और शुष्क मौसम के कारण यह आग लगातार तेजी से फैलती जा रही है, जिससे द्वीप के बड़े हिस्से में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया है। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और आसमान में दूर-दूर तक उठता धुएं का काला गुबार इस बात की गवाही दे रहा है कि तबाही का यह मंजर कितना भयानक है। स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विभाग के लिए यह आग एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी है, क्योंकि आग तेजी से रिहायशी इलाकों और पर्यटन स्थलों की तरफ बढ़ रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों और वहां घूमने गए पर्यटकों की जान पर बड़ा संकट मंडराने लगा है।जंगलों में धधकती आग और आसमान को घेरता धुएं का गुबारसलामिना आइलैंड के जंगलों में लगी इस भीषण आग की तीव्रता इतनी ज्यादा है कि कुछ ही घंटों में सैकड़ों एकड़ हरा-भरा जंगल जलकर खाक हो चुका है। द्वीप के चप्पे-चप्पे पर इस वक्त तबाही का मंजर देखा जा सकता है, जहां पेड़-पौधे और वन्यजीव इस लपटों की चपेट में आकर बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। चिलचिलाती धूप, भीषण गर्मी और गर्मियों के मौसम में चलने वाली तेज हवाओं ने आग की इन लपटों को और अधिक भड़का दिया है, जिससे फायर ब्रिगेड कर्मियों के लिए आग पर काबू पाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। द्वीप के कई हिस्सों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। हवा में फैले जहरीले धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, और आसपास के गांवों तथा बस्तियों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी से समय रहते निपटा जा सके।आपातकालीन सेवाओं की तैनाती और युद्धस्तर पर राहत कार्यइस विकट प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए ग्रीस की सरकार और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। आग पर काबू पाने के लिए घटनास्थल पर सैकड़ों फायरफाइटर्स (Firefighters), विशेष बचाव दल और स्थानीय पुलिस के जवान दिन-रात मुस्तैद होकर काम कर रहे हैं। जमीन के अलावा आसमान से भी इस आग को बुझाने के लिए एरियल फायर फाइटिंग (Aerial Firefighting) विमानों और अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है, जो लगातार जंगलों के ऊपर पानी और केमिकल का छिड़काव कर रहे हैं। फायर फाइटिंग टीमों की यह कोशिश है कि आग को आगे बढ़ने से रोककर जल्द से जल्द नियंत्रित किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को टाला जा सके। ग्रीक प्रशासन ने आसपास के इलाकों के नागरिकों को सतर्क रहने और सरकारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है, जबकि आपातकालीन चिकित्सा दलों को भी पूरी तरह से तैयार रखा गया है।जलवायु परिवर्तन और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में बढ़ती आग की घटनाएंभूमध्यसागरीय [Mediterranean Region] देशों में पिछले कुछ वर्षों से गर्मियों के मौसम में जंगल की आग (Wildfires) की घटनाएं एक खतरनाक और चिंताजनक प्रवृत्ति के रूप में उभरकर सामने आई हैं। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का यह मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग [Global Warming] और जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में लगातार हो रही बेतहाशा वृद्धि इस तरह की भयानक आग के मुख्य कारणों में से एक है। ग्रीस जैसे देश जहां पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है और गर्मियों में सूखा बहुत अधिक पड़ता है, वहां इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होती हैं। सलामिना आइलैंड पर लगी यह आग केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि यदि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में इस तरह के प्राकृतिक संकट और अधिक विकराल रूप धारण कर सकते हैं।स्थानीय जनजीवन पर असर और प्रशासन की अपीलसलामिना आइलैंड पर मचे इस कोहराम के कारण वहां का सामान्य जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। सड़कों पर यातायात को नियंत्रित किया गया है ताकि फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की गाड़ियां बिना किसी बाधा के घटनास्थल तक पहुंच सकें। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को यह सख्त हिदायत दी है कि वे फिलहाल प्रभावित जंगलों और पहाड़ी रास्तों के आसपास बिल्कुल भी न जाएं। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता इस समय लोगों की जान बचाना और संपत्ति के नुकसान को कम से कम करना है। जैसे-जैसे दमकल कर्मी आग पर काबू पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, देश भर से लोग प्रभावित परिवारों के लिए दुआएं मांग रहे हैं। इस संकट की घड़ी में ग्रीस की सरकार और राहत एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ इस भयानक आपदा से निपटने के लिए डटी हुई हैं, और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया जाएगा।
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रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स के साथ भारतीय नौसेना के लिए दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन लीज पर लेने का डील किया है. यह सौदा करीब 1943 करोड़ रुपये का है. समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत होगी.

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