कन्नड़ एक्ट्रेस कृषि थपंडा: सस्पेंस में मौत का मामला, डिप्रेशन या पुलिस केस का दबाव
फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी एक बड़ी खबर बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर से सामने आई है, जहां कन्नड़ अभिनेत्री कृषि थपंडा के आवास पर एक बिजनेसमैन ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। मृतक की पहचान वैशाख के रूप में हुई है। यह घटना तब प्रकाश में आई जब अभिनेत्री किसी काम से यलहंका गई हुई थीं और घर खाली था। पुलिस की शुरुआती जांच में मामला डिप्रेशन से जुड़ा लग रहा है, लेकिन मृतक का विवादित इतिहास इस केस को और भी पेचीदा बना रहा है।घर पर मौजूद था वैशाख, नहीं मिला कोई सुसाइड नोटपुलिस के अनुसार, वैशाख पिछले करीब एक सप्ताह से अभिनेत्री कृषि थपंडा के घर पर रह रहा था। घटना बीती रात करीब 8:30 बजे की है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए विक्टोरिया अस्पताल भेज दिया है। घटनास्थल से पुलिस को फिलहाल कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिसके कारण पुलिस हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है।पारिवारिक कलह और गहरा डिप्रेशनशुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि वैशाख पिछले कुछ समय से गंभीर मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहा था, जिसका इलाज भी चल रहा था। पारिवारिक विवादों के कारण वह पिछले एक महीने से अपनी पत्नी से अलग रह रहा था। निजी जीवन की इन समस्याओं ने उसे मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था, जो शायद इस आत्मघाती कदम का कारण बनीं।क्या रंगदारी केस का तनाव था वजहवैशाख की मौत के साथ ही उसका विवादित अतीत भी सुर्खियों में है। वह हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल जबरन वसूली और धमकी के मामले में पुलिस के रडार पर था। मामला फरवरी 2026 का है, जब एक नामी बिजनेसमैन और वकील अरविंद रेड्डी को 6 से 7 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के लिए कूरियर से धमकी भरी चिट्ठी भेजी गई थी। एचएएल (HAL) थाना पुलिस ने इस मामले में वैशाख को गिरफ्तार कर 5 दिनों तक पूछताछ भी की थी। हालांकि, बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ आगे की जांच पर रोक लगा दी थी, लेकिन कानूनी कार्रवाई और केस के दबाव ने उसे बुरी तरह प्रभावित किया था।पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या डिप्रेशन की वजह निजी थी या कानूनी केस का तनाव। फिलहाल, इलाके में सनसनी फैली हुई है और पुलिस अभिनेत्री कृषि थपंडा से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है।
कुंडा विधायक राजा भैया और उनके पिता समेत 13 लोगों को पुलिस-प्रशासन ने हाउसअरेस्ट किया गया है। राजा भैया के किले के बाहर भारी संख्या में पुलिस फोर्स को भी तैनात कर दिया गया है। गुरुवार सुबह 5 बजे से हाउस अरेस्ट किए गए विधायक राजा भैया और पिता उदय ...
फीफा ने कतर के आसिम मादिबो को पांच मैचों के लिए सस्पेंड किया
ज़्यूरिख। फीफा ने कतर के मिडफील्डर आसिम मादिबो को पांच मैचों के लिए सस्पेंड कर दिया है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दौरान कनाडा के इस्माइल कोने के पैर में गंभीर चोट लगने वाले उनके लापरवाह चैलेंज के कारण यह कार्रवाई की गई है, जिससे सह-मेजबान टीम के शानदार अभियान पर संकट के बादल मंडराने […] The post फीफा ने कतर के आसिम मादिबो को पांच मैचों के लिए सस्पेंड किया appeared first on Sabguru News .
50000 से कम में मिल रहा है यह शानदार इलेक्ट्रिक स्कूटर, सिंगल चार्ज में पूरे दिन का सफर
आज के समय में जब पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। हर कोई एक ऐसा विकल्प तलाश रहा है जो बजट में भी हो और माइलेज (रेंज) भी दमदार दे। अगर आप भी रोज़मर्रा के काम, ऑफिस या कॉलेज आने-जाने के लिए एक सस्ता और टिकाऊ इलेक्ट्रिक स्कूटर ढूंढ रहे हैं, तो ...
जिम्स अस्पताल में कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी को लेकर सपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे
समाजवादी पार्टी ने जिम्स अस्पताल में कर्मचारियों के साथ कथित बर्बरता और उनकी मांगों की अनदेखी के विरोध में गुरुवार को ग्रेटर नोएडा में प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सूरजपुर स्थित कलेक्ट्रेट के सामने मुख्य मार्ग पर पहुंचकर विरोध जताया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित होने की भी सूचना मिली, हालांकि पुलिस ने स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया।
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 को लगाया गया राष्ट्रीय आपातकाल (Emergency) एक ऐसा दौर था, जिसने देश की अभिव्यक्ति की आजादी पर पूरी तरह ताला लगा दिया था। जब भी आपातकाल के सेंसरशिप और दमन की बात होती है, तो अमूमन अखबारों, पत्रिकाओं और रेडियो पर लगे प्रतिबंधों का जिक्र किया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जनसंचार और जनमानस को झकझोरने वाले सबसे ताकतवर माध्यम यानी 'सिनेमा' को भी इस दौरान क्रूर सेंसरशिप की आग में झोंक दिया गया था।गुलजार निर्देशित ‘आंधी’ और रमेश सिप्पी की कालजयी फिल्म ‘शोले’ के कुछ दृश्यों व क्लाइमेक्स में बदलाव कराकर उन्हें जैसे-तैसे रिलीज की अनुमति तो मिल गई थी, लेकिन कई ऐसी फिल्में थीं जिन्हें सीधे तौर पर प्रतिबंधित (बैन) कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब फिल्मों के रीलों और प्रिंट्स को सरकारी गोदामों से निकालकर सरेआम जला दिया गया। आपातकाल और तानाशाही का यह विरोध केवल बम्बइया (हिंदी) सिनेमा तक सीमित नहीं था, बल्कि बांग्ला में सत्यजित राय की ‘हीरक राजार देशे’ से लेकर कन्नड़ सिनेमा तक प्रतिरोध की यह चिंगारी भड़की थी। आज साल 2026 में भी सिनेमा की उस वैचारिक ताकत को उतनी ही बखूबी समझा जाता है, जितना सन् 1975 में आंका गया था।1. चंदा मरुता (कन्नड़): प्रतिरोध का प्रतीक और अभिनेत्री की दर्दनाक मौतकन्नड़ सिनेमा में ‘चंदा मरुता’ (हिंदी अर्थ - जंगली हवा) को आज भी सत्ता और आपातकाल विरोधी प्रतिरोध के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। पी. लंकेश के चर्चित नाटक पर आधारित इस फिल्म का निर्माण कन्नड़ और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में 1972 के आसपास ही शुरू हो गया था। फिल्म का निर्देशन पट्टाभिराम रेड्डी ने किया था और मुख्य भूमिका में प्रसिद्ध अभिनेत्री स्नेहलता रेड्डी थीं।फिल्म की कहानी में तत्कालीन राजनैतिक-सामाजिक हालातों को दिखाते हुए यह अंदेशा जताया गया था कि देश तानाशाही और आपातकाल की तरफ बढ़ रहा है। इत्तेफाक ऐसा हुआ कि जैसे ही फिल्म की शूटिंग पूरी हुई, देश में आपातकाल लागू हो गया। स्नेहलता रेड्डी और उनके पति समाजवादी विचारों के थे और डॉ. राम मनोहर लोहिया व जॉर्ज फर्नांडीस के बेहद करीबी मित्र थे। आपातकाल की घोषणा होते ही स्नेहलता को भूमिगत होना पड़ा, लेकिन जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर बेंगलुरु की जेल में डाल दिया गया। जेल के भीतर इस प्रख्यात अभिनेत्री को अमानवीय और दर्दनाक यातनाएं दी गईं, जिससे उनका स्वास्थ्य पूरी तरह बिगड़ गया। जेल से रिहा होने के कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। वह अपनी इस मास्टरपीस फिल्म की रिलीज भी नहीं देख सकीं, जिसे आपातकाल हटने के बाद साल 1977 में थिएटर्स में रिलीज किया गया।2. किस्सा कुर्सी का: जब संजय गांधी ने जलवा दिए थे सारे प्रिंटआपातकाल के दौरान सबसे ज्यादा सियासी और कानूनी विवाद बटोरने वाली फिल्म थी अमृत नाहटा निर्देशित ‘किस्सा कुर्सी का’। अमृत नाहटा पहले खुद कांग्रेस पार्टी के सदस्य और राजस्थान के बाड़मेर से लोकसभा सांसद रह चुके थे। लेकिन जब उनका कांग्रेस से मोहभंग हुआ, तो उन्होंने इंदिरा गांधी, संजय गांधी और चाटुकार राजनीतिक व्यवस्था पर करारा प्रहार करते हुए एक बेहतरीन सटायर (राजनीतिक व्यंग्य) फिल्म बना डाली।इस फिल्म में तानाशाही, जबरन थोपी गई नीतियों और चमचागिरी पर इतना तीखा कटाक्ष था कि तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड के जरिए इस फिल्म के सारे प्रिंट और नेगेटिव्स को जब्त कर लिया। बाद में इन सभी प्रिंट्स को दिल्ली के पास मारुति फैक्ट्री में ले जाकर आग के हवाले कर दिया गया। आपातकाल हटने के बाद जब जनता पार्टी की सरकार आई और 'शाह आयोग' ने इस मामले की जांच की, तो संजय गांधी और तत्कालीन सूचना व प्रसारण मंत्री वी.सी. शुक्ला को फिल्म के प्रिंट नष्ट करने के आपराधिक मामले में दोषी पाया गया। इस फिल्म में उत्पल दत्त, शबाना आज़मी, राज बब्बर, सुरेखा सीकरी और मनोहर सिंह जैसे दिग्गज कलाकारों ने काम किया था। हालांकि, आपातकाल के बाद इसे दोबारा नए सिरे से बनाकर रिलीज किया गया, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर असफल रही।3. आंदोलन: जब विद्रोह और क्रांति दिखाने पर लगी रोकदिग्गज निर्देशक लेख टंडन द्वारा निर्देशित फिल्म ‘आंदोलन’ भी आपातकाल की क्रूर सेंसरशिप का शिकार बनी थी। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म का कथानक साल 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' की पृष्ठभूमि पर आधारित था और इसमें सीधे तौर पर गांधी परिवार या कांग्रेस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। फिल्म में राकेश पांडे और नीतू सिंह मुख्य भूमिकाओं में थे, और कहानी एक ऐसे पिता (जो अंग्रेजी हुकूमत का वफादार कर्मचारी है) और बेटे (जो स्वतंत्रता आंदोलन का क्रांतिकारी शिक्षक है) के वैचारिक टकराव को दिखाती थी।इस फिल्म को प्रतिबंधित करने के पीछे सेंसर बोर्ड के अधिकारियों का तर्क यह था कि फिल्म का क्रांतिकारी मुख्य किरदार सरकार, प्रशासन और स्थापित सिस्टम के खिलाफ विद्रोह करता है। तत्कालीन सरकार को डर था कि इस फिल्म को देखने के बाद आपातकाल से परेशान जनता के बीच जनाक्रोश और अधिक भड़क सकता है। सेंसरशिप के उस सख्त ढांचे में क्रांति, जन-आंदोलन, और व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह दिखाने की सख्त मनाही थी, जिसके चलते इस फिल्म को भी डिब्बे में बंद कर दिया गया। यह फिल्म भी 1977 में सत्ता परिवर्तन के बाद ही पर्दे पर आ सकी।4. नसबंदी: बॉलीवुड सुपरस्टार्स और सरकारी दावों का उड़ाया मखौलआपातकाल के दौरान संजय गांधी के नेतृत्व में चलाए गए 'जबरन नसबंदी अभियान' पर सीधा और तीखा हमला करने वाली फिल्म थी प्रख्यात हास्य कलाकार आई.एस. जौहर की ‘नसबंदी’। आई.एस. जौहर अपनी फिल्मों में 'ब्लैक कॉमेडी' और 'स्पूफ' (पैरोडी) के जरिए सामाजिक और राजनीतिक बुराइयों पर चोट करने के लिए जाने जाते थे।इस फिल्म का सबसे मजेदार और साहसी पहलू यह था कि इसमें किरदारों के नाम उस समय के चोटी के बॉलीवुड सुपरस्टार्स के नामों पर रखे गए थे— जैसे अमिताभ बच्चन के लिए 'अनिताव बच्चन', मनोज कुमार के लिए 'कन्नौज कुमार', शशि कपूर के लिए 'शाही कपूर' और राजेश खन्ना के लिए 'राकेश खन्ना'। इन नामों के जरिए आई.एस. जौहर ने यह कड़ा व्यंग्य किया था कि ये बड़े सितारे आपातकाल और तत्कालीन सत्ता के कथित चाटुकार और समर्थक बने हुए हैं। सरकार को यह स्पूफ इस कदर नागवार गुजरा कि फिल्म पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। जनता पार्टी की सरकार आने पर इसे रिलीज तो किया गया, लेकिन यह व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हो सकी। हालांकि, इस फिल्म में कवि हुल्लड़ मुरादाबादी का लिखा और कल्याणजी-आनंदजी द्वारा संगीतबद्ध किया गया गाना क्या मिल गया सरकार इमरजेंसी लगा के... उस दौर में प्रतिरोध का सबसे बड़ा नारा बन गया था।
इस्लाम धर्म में मुहर्रम का महीना बेहद पाक और पवित्र माना गया है। पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए इस महीने का एक खास और ऐतिहासिक महत्व है। इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के अनुसार, मुहर्रम का महीना इस्लाम धर्म का पहला महीना होता है, जिसका सीधा मतलब यह है कि इसी पाक महीने से इस्लामिक नववर्ष (New Year) की शुरुआत होती है।लेकिन नए साल की शुरुआत होने के बावजूद इस्लाम में मुहर्रम के शुरुआती 10 दिनों को उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि बेहद गम, शोक और मातम के दिनों के रूप में मनाया जाता है। यह वही समय है जब सदियों पहले इराक के रेगिस्तान 'कर्बला' (Karbala) के मैदान में एक ऐतिहासिक और रोंगटे खड़े कर देने वाली जंग लड़ी गई थी। इस जंग में पैगंबर मोहम्मद के प्यारे नाती इमाम हुसैन (Imam Hussain) ने हक और इंसानियत की रक्षा के लिए अत्याचारी शासक यजीद की सेना के खिलाफ लड़ते हुए अपने परिवार और 72 साथियों के साथ अपनी जान की अजीम शहादत (कुर्बानी) दी थी।सऊदी अरब और भारत में कब है आशूरा?मुहर्रम के पूरे महीने में सबसे महत्वपूर्ण और खास दिन 'आशूरा' (Ashura) को माना जाता है। आशूरा मुहर्रम महीने की 10वीं तारीख को कहते हैं, जो कि शहादत का मुख्य दिन है। इस साल चांद दिखने के समय में एक दिन का अंतर होने की वजह से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अन्य खाड़ी देशों में आशूरा आज (25 जून, 2026) मनाया जा रहा है। वहीं, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित उपमहाद्वीप के देशों में आशूरा कल यानी 26 जून, 2026 (शुक्रवार) को पूरी अकीदत और गमगीन माहौल के साथ मनाया जाएगा। इस दिन देश भर में बड़े पैमाने पर ताजिया के जुलूस निकाले जाएंगे।आखिर क्या होता है 'ताजिया' (Tazia)?मुहर्रम के शोक और मातम के दिनों में सबसे प्रमुख और पवित्र प्रतीक 'ताजिया' को माना जाता है। ताजिया महज कोई बांस-कागज का ढांचा या कलाकृति नहीं है, बल्कि यह अपने आप में इस्लामिक इतिहास, बलिदान और अटूट आस्था की एक बहुत लंबी जीवंत कहानी बयां करता है।तकनीकी और धार्मिक रूप से, ताजिया को इराक के कर्बला शहर में स्थित हजरत इमाम हुसैन के पवित्र मकबरे (रोजा या दरगाह) का एक प्रतीकात्मक मॉडल (Replica) माना जाता है। इसे स्थानीय कारीगरों द्वारा बांस की खपच्चियों, रंग-बिरंगे चमकीले कागजों, लकड़ी, कपड़े, कीमती धातुओं और अन्य सजावटी सामानों की मदद से बेहद खूबसूरती और बारीकी से तैयार किया जाता है।आमतौर पर अकीदतमंद लोग इन ताज़ियों को मुहर्रम का चांद दिखने के साथ ही यानी पहली तारीख को या शुरुआती दिनों में बड़े अदब के साथ अपने घरों, सार्वजनिक इमामबाड़ों और अजाखानों (शोक स्थलों) में स्थापित करते हैं। इसके बाद लगातार 9 दिनों तक इनकी देखरेख की जाती है और फिर 10वीं मुहर्रम यानी आशूरा के दिन इन्हें एक विशाल जुलूस के रूप में निकालकर स्थानीय कर्बला या तय स्थानों पर ले जाकर पूरी धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया जाता है।मुहर्रम में क्यों निकाला जाता है ताजिया? जानिए इसके पीछे की परंपराभारत के लखनऊ, दिल्ली, हैदराबाद और कानपुर जैसे ऐतिहासिक शहरों में मुहर्रम के दौरान ताजिया निकालने की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसमें हर साल लाखों की संख्या में हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग एक साथ शामिल होकर कौमी एकता की मिसाल पेश करते हैं। मुहर्रम के दौरान निभाई जाने वाली लगभग सभी प्रमुख रस्में इसी ताजिया के इर्द-गिर्द घूमती हैं:मजलिस और भावुक यादें: जैसे ही इमामबाड़ों में ताजिया की स्थापना होती है, वहां रोजाना धार्मिक शोक सभाओं (मजलिस) का दौर शुरू हो जाता है। इन मजलिसों में उलेमा और मौलाना साहब कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन और उनके छोटे-छोटे बच्चों पर ढाए गए जुल्मों और उनकी प्यास का जिक्र करते हैं, जिसे सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो जाती हैं।मातम, नौहा और सबील: जुलूस के दौरान लोग छाती पीटकर 'या हुसैन-या हुसैन' की गूंजती सदाएं लगाते हैं और अपनी अकीदत का इजहार करते हैं। इस दौरान इमाम हुसैन के गम में दर्दभरे मरसिए और नौहे (शोक गीत) पढ़े जाते हैं। राहगीरों और जुलूस में शामिल लोगों के लिए जगह-जगह पानी और शर्बत की 'सबील' (मुफ्त प्याऊ) लगाई जाती है, जो कर्बला में भूखे-प्यासे शहीद हुए लोगों की याद दिलाती है।सामूहिक भागीदारी: समाज के सभी वर्गों के लिए अलग-अलग स्थानों पर शोक कार्यक्रमों का सुचारू आयोजन किया जाता है, जहां महिलाएं और पुरुष पूरी सादगी के साथ काले कपड़े पहनकर इमाम हुसैन को अपना नजराना-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश करते हैं।
राजस्थान में लोकतंत्र सेनानियों की मासिक पेंशन 5000 बढ़ाकर 25000 रुपए करने की घोषणा
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लोकतंत्र सेनानियों की मासिक पेंशन पांच हजार रुपए बढ़ाकर 25 हजार रुपए तथा मासिक चिकित्सा सहायता को एक हजार रुपए बढ़ाकर पांच हजार रुपए करने की घोषणा की हैं। शर्मा ने गुरुवार को दुर्गापुरा में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में यह […] The post राजस्थान में लोकतंत्र सेनानियों की मासिक पेंशन 5000 बढ़ाकर 25000 रुपए करने की घोषणा appeared first on Sabguru News .
आज के आधुनिक दौर में खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान, अत्यधिक मानसिक तनाव और शारीरिक एक्टिविटी की कमी (Sedentary Lifestyle) जैसी आदतों को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है। इन्हीं बदलती आदतों के बीच पुरुषों के बीच एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल अक्सर उठता है— क्या इन अस्वस्थ आदतों का सीधा असर उनके शरीर के सबसे मुख्य पुरुष हॉर्मोन यानी 'टेस्टोस्टेरोन' (Testosterone) पर भी पड़ सकता है?टेस्टोस्टेरोन पुरुषों के शरीर में पाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राथमिक हॉर्मोन है। यह पुरुषों में मांसपेशियों (Muscles) के विकास, हड्डियों को मजबूत रखने, शरीर में एनर्जी और स्टैमिना बनाए रखने, मूड को संतुलित रखने, निजी स्वास्थ्य (Libido) और पिता बनने की क्षमता (Fertility) जैसे कई जरूरी शारीरिक और जैविक कार्यों में मुख्य भूमिका निभाता है। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ (आमतौर पर 30 साल के बाद) इसके स्तर में हर साल 1% की मामूली गिरावट आना एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन आजकल युवाओं में भी इसकी भारी कमी देखी जा रही है। आइए जानते हैं कि खराब लाइफस्टाइल इस हॉर्मोन को कैसे प्रभावित करती है और इसे स्वस्थ बनाए रखने के वैज्ञानिक उपाय क्या हैं।खराब लाइफस्टाइल कैसे बनती है टेस्टोस्टेरोन की विलेन? जानिए AUA की गाइडलाइनयूरोलॉजी और पुरुष स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी संस्था अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन (AUA) की आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार, जिन पुरुषों के शरीर में क्लिनिकली टेस्टोस्टेरोन की कमी (Hypogonadism) पाई जाती है, उन्हें किसी भी दवा से पहले अपनी लाइफस्टाइल को पूरी तरह स्वस्थ और अनुशासित करने की सख्त सलाह दी जाती है। इसमें शरीर का एक स्वस्थ वजन (BMI) बनाए रखना, रोज व्यायाम करना और सही स्लीप साइकिल अपनाना शामिल है।जब शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर सामान्य से नीचे गिर जाता है, तो पुरुषों में ये प्रमुख लक्षण दिखाई दे सकते हैं:हर समय अत्यधिक थकान और क्रॉनिक एनर्जी की कमी महसूस होना।जिम या वर्कआउट करने के बाद भी मांसपेशियों की ताकत घटना और शरीर में चर्बी (Fat) का बढ़ना।स्वभाव में चिड़चिड़ापन, लगातार मूड स्विंग्स या डिप्रेशन जैसा महसूस होना।निजी जीवन में यौन इच्छा (Sex Drive) की भारी कमी होना।चिकित्सकीय विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लक्षणों के आधार पर खुद को बीमार न समझें। टेस्टोस्टेरोन की कमी की सटीक पुष्टि के लिए लक्षणों के साथ-साथ सुबह के समय किए गए ब्लड टेस्ट (Serum Testosterone Test) की रिपोर्ट में भी इसका स्तर कम आना जरूरी होता है।पुरुषों की ये 5 आदतें चुपके से घटा देती हैं टेस्टोस्टेरोन का स्तरहॉर्मोनल स्वास्थ्य पर काम करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक, पुरुषों की कुछ दैनिक आदतें सीधे तौर पर उनके एंड्रोजन रिसेप्टर्स और हॉर्मोन प्रोडक्शन को ब्लॉक कर देती हैं:1. पर्याप्त नींद न लेना: टेस्टोस्टेरोन का अधिकांश हिस्सा रात में गहरी नींद (Deep Sleep) के दौरान ही बनता है। यदि आप रोजाना 5-6 घंटे से कम सोते हैं, तो इसका स्तर तेजी से गिरता है।2. क्रॉनिक स्ट्रेस (लगातार तनाव): जब आप लंबे समय तक तनाव में रहते हैं, तो शरीर में 'कोर्टिसोल' (Cortisol) नामक स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ता है। कोर्टिसोल और टेस्टोस्टेरोन एक-दूसरे के जानी दुश्मन हैं; जैसे ही कोर्टिसोल बढ़ेगा, टेस्टोस्टेरोन अपने आप नीचे आ जाएगा।3. मोटापा और बढ़ा हुआ पेट: शरीर में जमा अतिरिक्त वसा (Fat Cells) टेस्टोस्टेरोन को महिला हॉर्मोन 'एस्ट्रोजन' में बदलने लगती है, जिससे पुरुषों का शरीर कमजोर होने लगता है।4. फिजिकल एक्टिविटी की कमी: दिनभर ऑफिस में 8 से 10 घंटे लगातार कंप्यूटर के सामने बैठे रहने से पेल्विक एरिया का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे हॉर्मोनल संतुलन बिगड़ता है।5. धूम्रपान और अत्यधिक शराब: निकोटीन और अल्कोहल सीधे तौर पर टेस्टीज (वृषण) की लेडिग कोशिकाओं (Leydig Cells) को नुकसान पहुंचाते हैं, जहां टेस्टोस्टेरोन का निर्माण होता है।टेस्टोस्टेरोन को नेचुरल तरीके से बूस्ट करने के 4 अचूक उपाय:यदि आप अपने हॉर्मोनल स्वास्थ्य को दवाओं के बिना हमेशा के लिए बिल्कुल फिट और नेचुरल तरीके से बेहतर रखना चाहते हैं, तो आज से ही अपनी दिनचर्या में ये 4 बदलाव शामिल करें:स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हैवी एक्सरसाइज: कार्डियो (दौड़ने) के मुकाबले भारी वजन उठाने वाली एक्सरसाइज जैसे स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से शरीर में टेस्टोस्टेरोन का प्रोडक्शन बहुत तेजी से बढ़ता है। हफ्ते में कम से कम 4 दिन वर्कआउट जरूर करें।पोषक तत्वों से भरपूर डाइट: अपने भोजन में गुड फैट्स (जैसे बादाम, अखरोट, अंडे की जर्दी, ऑलिव ऑयल) शामिल करें। इसके साथ ही शरीर में जिंक, विटामिन-डी3 और मैग्नीशियम की कमी न होने दें, क्योंकि ये टेस्टोस्टेरोन के निर्माण खंड (Building Blocks) हैं।7 से 8 घंटे की गहरी नींद: रात को सोने से एक घंटा पहले मोबाइल स्क्रीन से दूरी बना लें, ताकि आपको 7-8 घंटे की निर्बाध और गहरी नींद मिल सके। सुबह उठने पर आप खुद को अधिक फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस करेंगे।तनाव प्रबंधन (Stress Management): मानसिक तनाव को कंट्रोल करने के लिए रोजाना 15 से 20 मिनट योग, प्राणायाम या मेडिटेशन (ध्यान) का सहारा लें।विशेष डॉक्टरी सलाह: यदि लाइफस्टाइल में सुधार करने के कई महीनों बाद भी आपको लगातार थकान, मांसपेशियों में कमजोरी या निजी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बनी रहती हैं, तो बाजार में मिलने वाले किसी भी सप्लीमेंट या स्टेरॉयड को खुद से खाने की भूल बिल्कुल न करें। यह आपके लिवर, किडनी और फर्टिलिटी को हमेशा के लिए खराब कर सकता है। ऐसे में तुरंत किसी अच्छे एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर से मिलें और उनकी देखरेख में ही सही वैज्ञानिक उपचार शुरू कराएं।
सबगुरु न्यूज- सिरोही। सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में आबूरोड में अनियमित तौर पर कार्मिक की स्थाई नियुक्ति करने और तनख्वाह जारी होने के प्रकरण की पत्रावली आरटीआई में मांगने की बात कही थी, वो पत्रावली ही आबूरोड नगर पालिका से गायब है। जिला कांग्रेस के सचिव और आबूरोड […] The post पत्रकार वार्ता में संयम लोढ़ा ने जिस पत्रावली को RTI में मांगने की जानकारी दी थी, आबूरोड से वो ही गायब appeared first on Sabguru News .
पति की प्रॉपर्टी नहीं है पत्नी : उड़ीसा हाईकोर्ट
भुवनेश्वर। उड़ीसा उच्च न्यायालय ने गुरुवार को अपने एक फैसले में स्पष्ट करते हुए कहा कि पत्नी पति की प्रॉपर्टी नहीं है और बालिग महिलाएं यह तय करने के लिए पूरी तरह आजाद हैं कि उन्हें कहां रहना है। मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति मुरारी रमन की पीठ ने कहा कि उसे उसके पति […] The post पति की प्रॉपर्टी नहीं है पत्नी : उड़ीसा हाईकोर्ट appeared first on Sabguru News .
प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) हर महिला के जीवन का एक बेहद खूबसूरत और खास सफर होता है। इस नौ महीने के दौरान महिला के शरीर में कई तरह के शारीरिक, मानसिक और हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। यही वजह है कि इस नाजुक दौर में मां और गर्भ में पल रहे शिशु (भ्रूण) दोनों की सेहत का विशेष ख्याल रखना सबसे ज्यादा जरूरी माना जाता है। सही खानपान, पर्याप्त आराम और तनावमुक्त दिनचर्या के साथ-साथ इस बात को लेकर भी महिलाओं के मन में कई सवाल आते हैं कि क्या इस समय एक्सरसाइज या योग करना सही है? आज के दौर में कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान भी अपनी फिटनेस बनाए रखने और शरीर को एक्टिव रखने की कोशिश करती हैं।हालांकि, मेडिकल साइंस के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान हर महिला की स्वास्थ्य स्थिति, शारीरिक बनावट और जरूरतें पूरी तरह अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी भी तरह की शारीरिक एक्टिविटी या फिटनेस रूटीन अपनाने से पहले सही और वैज्ञानिक जानकारी होना बेहद आवश्यक है। यह समझना भी अहम है कि प्रेग्नेंसी के अलग-अलग चरणों (ट्राइमेस्टर) में शरीर की आवश्यकताएं बदलती रहती हैं। बिना सही मेडिकल मार्गदर्शन के कोई भी नई हैवी एक्सरसाइज शुरू करना नुकसानदेह हो सकता है। आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में योग (Yoga) और स्ट्रेचिंग (Stretching) करना कितना सुरक्षित है, और इसे करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।क्या प्रेग्नेंसी में योग और स्ट्रेचिंग करना सुरक्षित है? जानिए ACOG की गाइडलाइनदुनिया भर में स्त्री रोग के मामलों में सर्वोच्च मानक मानी जाने वाली संस्था अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) के अनुसार, जिन गर्भवती महिलाओं को कोई गंभीर मेडिकल कॉम्प्लिकेशन या प्रेग्नेंसी से जुड़ी आंतरिक समस्या नहीं है, वे अपने डॉक्टर की लिखित सलाह के अनुसार नियमित रूप से प्रीनेटल योग (Prenatal Yoga), हल्की स्ट्रेचिंग और अन्य कम या मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक एक्सरसाइज आसानी से कर सकती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान सुरक्षित तरीके से की गई नियमित शारीरिक एक्टिविटी न सिर्फ शरीर को एक्टिव रखती है, बल्कि यह प्रसव (डिलीवरी) के समय होने वाले दर्द को सहने की क्षमता को भी बढ़ाती है।लेकिन ध्यान रहे कि हर महिला की प्रेगनेंसी का केस पूरी तरह अनोखा होता है। जो आसन एक महिला के लिए सहज है, वह दूसरी के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए किसी भी नए आसन की शुरुआत करने से पहले अपनी गायनिकोलॉजिस्ट से चर्चा जरूर करें। इसके अलावा, जैसे-जैसे गर्भ में शिशु का आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे शरीर का संतुलन बदलता है। इसलिए उसी के अनुसार योग के स्टेप्स में भी बदलाव करना चाहिए। यदि किसी भी योगासन या स्ट्रेचिंग के दौरान आपको पेट में हल्का दर्द, चक्कर आना, सांस फूलना, धुंधला दिखना या किसी भी तरह की असहजता महसूस हो, तो उसे उसी सेकंड रोक दें और बिना देरी किए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।प्रेग्नेंसी में योग और स्ट्रेचिंग करते समय इन 5 बातों का रखें विशेष ख्यालगर्भावस्था के दौरान योग करते समय आपका उद्देश्य वजन घटाना या हैवी फ्लेक्सिबिलिटी हासिल करना नहीं, बल्कि शरीर को रिलैक्स रखना होना चाहिए। अभ्यास के दौरान नीचे लिखी बातों पर विशेष अमल करें:विशेषज्ञ की देखरेख: योग हमेशा एक प्रमाणित प्रीनेटल योग एक्सपर्ट (Prenatal Yoga Expert) की सीधी देखरेख में ही करें। घर पर टीवी या यूट्यूब देखकर जटिल आसन करने की भूल बिल्कुल न करें।पेट पर दबाव से बचें: कोई भी ऐसा आसन, ट्विस्टिंग या स्ट्रेचिंग न करें जिससे आपके पेट (Abdomen) पर सीधा दबाव पड़े या पेट के बल लेटना पड़े।संतुलन का ध्यान: प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में 'रिलैक्सिन' हॉर्मोन बढ़ने से जोड़ ढीले हो जाते हैं, जिससे गिरने या संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा दीवार या कुर्सी का सहारा लेकर ही आसन करें।हाइड्रेशन और आरामदायक कपड़े: योग शुरू करने से पहले और बाद में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। हमेशा ढीले और आरामदायक सूती कपड़े ही पहनें।चेतावनी के संकेत: यदि अभ्यास के दौरान या बाद में आपको ब्लीडिंग (खून बहना), स्पॉटिंग, फ्लूइड लीकेज या पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस हो, तो तुरंत बेडरेस्ट पर जाएं और डॉक्टर को बुलाएं।किन महिलाओं को बिना डॉक्टर की अनुमति के योग बिल्कुल नहीं करना चाहिए? (High-Risk Cases)यदि आपकी प्रेग्नेंसी नीचे दी गई श्रेणियों या चिकित्सकीय स्थितियों के अंतर्गत आती है, तो आपको बिना डॉक्टर की गहन जांच और अनुमति के किसी भी तरह की नई शारीरिक एक्टिविटी या स्ट्रेचिंग शुरू करने की सख्त मनाही होती है:क्रॉनिक बीमारियां: यदि महिला को हाई ब्लड प्रेशर (Pre-eclampsia), दिल से जुड़ी कोई बीमारी (Heart Disease) या गंभीर एनीमिया (खून की भारी कमी) की शिकायत हो।प्रेग्नेंसी के कॉम्प्लिकेशंस: यदि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ब्लीडिंग हुई हो, प्लेसेंटा प्रीविया (प्लेसेंटा का नीचे होना) की स्थिति हो या समय से पहले प्रसव (Pre-term Labor) का पुराना इतिहास या खतरा हो।मल्टीपल प्रेग्नेंसी: यदि महिला के गर्भ में जुड़वां (Twins) या उससे अधिक शिशु पल रहे हों।पूर्व मिसकैरेज: जिन महिलाओं का पहले कभी मिसकैरेज (गर्भपात) हुआ हो, उनका केस बेहद संवेदनशील माना जाता है, इसलिए उन्हें शुरुआती महीनों में पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए।
राजस्थान के कोचिंग हब और प्रमुख औद्योगिक शहर कोटा से इस वक्त की बेहद संवेदनशील और सबसे बड़ी सामाजिक-राजनीतिक खबर सामने आ रही है। देश भर में चर्चा का विषय बने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) के मुद्दे पर कोटा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मौलाना आजमी ने खुलकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस दौरान मौलाना आजमी ने न केवल यूसीसी के कानून और उसकी प्रासंगिकता को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि देश में धार्मिक आयोजनों और प्रथाओं को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने अपने बयान में कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाले इंतजामों और सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़े जाने के मुद्दे की तुलना करते हुए एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर सरगर्मी काफी बढ़ गई है।'धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों में दखल है यूसीसी'— मौलाना आजमी का बड़ा दावाकोटा में प्रमुख समाजसेवियों और स्थानीय बुद्धिजीवियों की मौजूदगी में बोलते हुए मौलाना आजमी ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर अपनी गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधता से भरे देश में हर धर्म के लोगों को अपने व्यक्तिगत कानूनों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। यूसीसी के लागू होने से अल्पसंख्यकों और विभिन्न समुदायों की विशिष्ट पहचान और पारंपरिक रीति-रिवाजों पर सीधा असर पड़ेगा। मौलाना ने सरकार से अपील की है कि किसी भी प्रकार के नागरिक कानून को जबरन थोपने के बजाय सभी पक्षों और धार्मिक गुरुओं के साथ व्यापक संवाद और आम सहमति बनाई जानी चाहिए।कांवड़ यात्रा और सड़क पर नमाज के नियमों पर उठाए सवाल, भेदभाव मुक्त व्यवस्था की मांगअपने संबोधन के दौरान मौलाना आजमी ने देश में कानून और व्यवस्था के क्रियान्वयन में कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि जब सावन के महीने में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के सुचारू संचालन के लिए हफ्तों तक बड़े-बड़े राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य सड़कों को डायवर्ट किया जाता है, सरकारी मशीनरी द्वारा सुविधाएं दी जाती हैं, तो फिर कुछ विशेष अवसरों पर सड़कों पर होने वाली नमाज (Namaz on Road) या अन्य धार्मिक गतिविधियों को लेकर इतना विवाद क्यों खड़ा किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नियम और कानून देश के सभी नागरिकों और सभी धार्मिक त्योहारों पर समान रूप से लागू होने चाहिए, ताकि समाज में आपसी सौहार्द बना रहे।कोटा के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में खुफिया एजेंसियां अलर्ट, शांति की अपीलभौगोलिक और स्थानीय संवेदनशीलता (Geographical and Local Optimization) के लिहाज से देखा जाए तो कोटा शहर का इतिहास बेहद शांतिप्रिय रहा है, लेकिन इस प्रकार के बयानों के बाद प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। कोटा शहर पुलिस, खुफिया शाखा और स्थानीय प्रशासन ने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। भीमगंजमंडी, मकबरा, गुमानपुरा और विज्ञान नगर जैसे स्थानीय और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जिला प्रशासन ने स्थानीय शांति समितियों और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट या बयानों पर ध्यान न दें और शहर में भाईचारा बनाए रखें।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक सोशल गवर्नेंस सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है कोटा का यह मुद्दाआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के दौर में देश भर के इंटरनेट यूजर्स कोटा मौलाना आजमी स्टेटमेंट, समान नागरिक संहिता विवाद राजस्थान, और कांवड़ यात्रा बनाम सड़क पर नमाज जैसे विषयों को गूगल और अन्य आधुनिक सर्च इंजनों पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि इस बयान पर कोटा के अन्य धार्मिक संगठनों और राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया आई है। सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल युग में ऐसे संवेदनशील और नीतिगत मुद्दों पर होने वाली डिबेट एआई-संचालित सर्च इंजनों पर तेजी से वायरल होती है, जो देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विधिक सुधारों के प्रति जनता की गहरी रुचि को दर्शाती है।
किश्तवाड़ में सेना के कर्नल और 40 जवानों पर FIR, जानिए क्या है मामला?
जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक पुलिस स्टेशन के अंदर राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों द्वारा कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों पर हमला करने के बाद, एक कर्नल और एक मेजर समेत सेना के 40 जवानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह घटना बुधवार को अथोली पुलिस ...
मरुधरा की सियासत से इस वक्त की बेहद चौंकाने वाली और सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने सूबे की मौजूदा भाजपा सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। एक विशेष प्रेस वार्ता और सार्वजनिक मंच से हुंकार भरते हुए अशोक गहलोत ने बेहद गंभीर आरोप लगाया कि राजस्थान में जनता द्वारा चुनी हुई कैबिनेट या सरकार काम नहीं कर रही है, बल्कि परदे के पीछे से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पूरे सरकारी सिस्टम और नौकरशाही को कंट्रोल कर रहा है। गहलोत के इस सनसनीखेज बयान के बाद राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में भारी घमासान मच गया है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच चुका है।'अधिकारियों के तबादलों से लेकर नीतियों तक में हो रहा है बाहरी हस्तक्षेप'— गहलोत का कड़ा आरोपपूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रदेश में संवैधानिक गरिमा को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO Rajasthan) से होने वाले बड़े फैसलों, आईएएस-आईपीएस (IAS-IPS) अधिकारियों के तबादलों से लेकर जनहित की नीतियों के निर्धारण में नागपुर और स्थानीय संघ कार्यालयों से सीधे निर्देश आ रहे हैं। गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि मंत्रियों के पास अपने विवेक से काम करने की आजादी नहीं बची है और पूरी सरकार सिर्फ 'रिमोट कंट्रोल' से संचालित हो रही है, जिससे राज्य का विकास और आम जनता के काम पूरी तरह से ठप हो गए हैं।कांग्रेस ने साधा निशाना, भाजपा और संघ विचारकों का पलटवार— 'यह केवल हार की हताशा है'अशोक गहलोत के इस बड़े हमले के बाद राजस्थान भाजपा और संघ के स्थानीय विचारकों ने भी पलटवार करने में बिल्कुल देरी नहीं की। सत्तापक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने गहलोत के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कांग्रेस की अंदरूनी कलह और चुनावी हार की हताशा का परिणाम बताया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि संघ एक राष्ट्रवादी और सामाजिक संगठन है, जिसका सरकार के रोजमर्रा के कामकाज से कोई सीधा सरोकार नहीं है। मौजूदा सरकार पूरी तरह से आत्मनिर्भर और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश की साढे सात करोड़ जनता के कल्याण के लिए पारदर्शी तरीके से काम कर रही है।जयपुर से लेकर जोधपुर और उदयपुर तक के स्थानीय सियासी हलकों में मची भारी खलबलीभौगोलिक और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों (Geographical and Local Political Dynamics) के लिहाज से देखा जाए तो अशोक गहलोत के इस बयान का असर राजधानी जयपुर के सचिवालय से लेकर जोधपुर, उदयपुर, कोटा और बीकानेर जैसे राज्य के सभी प्रमुख संभागों में देखा जा रहा है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत इस तरह के आक्रामक बयानों के जरिए आने वाले स्थानीय चुनावों और उपचुनावों के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरने की बड़ी रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस बयान के बाद जिला स्तर पर भी कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक पर जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक पॉलिटिकल सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है राजस्थान का यह सियासी घमासानआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के युग में देश भर के करोड़ों इंटरनेट यूजर्स अशोक गहलोत बयान आज, राजस्थान गवर्नमेंट आरएसएस कंट्रोवर्सी, और राजस्थान की आज की बड़ी खबर को गूगल और अन्य आधुनिक सर्च इंजनों पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि इस नए राजनीतिक विवाद का राजस्थान की आगामी योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों पर क्या असर पड़ने वाला है। डिजिटल विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान की राजनीति में आया यह भूचाल इंटरनेट और एआई-संचालित प्लेटफॉर्म्स पर लगातार सुर्खियां बटोर रहा है, जो जनता की राजनीतिक जागरूकता को साफ दर्शाता है।
जुलाई 2026 का महीना हमारे जीवन की रफ्तार को थोड़ा धीमा करके, आत्ममंथन करने और बेहद सोच-समझकर आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है। ग्रहों की स्थिति की बात करें तो 16 जुलाई तक सूर्य देव मिथुन राशि में गोचर करेंगे, जिससे लोगों में बातचीत, नेटवर्किंग और कुछ नया सीखने की ललक बढ़ेगी। इसके बाद जब सूर्य का प्रवेश कर्क राशि में होगा, तो सभी जातकों का ध्यान बाहरी दुनिया की चकाचौंध से हटकर अपने घर-परिवार, निजी रिश्तों और मानसिक शांति की ओर केंद्रित हो जाएगा।रिश्तों के मोर्चे पर 4 जुलाई को प्रेम के कारक शुक्र देव सिंह राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जो लव लाइफ में एक नया स्पार्क, आकर्षण और आत्मविश्वास लेकर आएंगे। हालांकि, पूरे जुलाई महीने में बुद्धि और व्यापार के देवता बुध वक्री (उल्टी चाल) अवस्था में रहेंगे। इसलिए, इस महीने किसी भी बड़े निवेश या नए सौदे में जल्दबाजी करने से बचें और अपनी हर प्लानिंग को दो बार री-चेक जरूर करें। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक के सभी जातकों के लिए जुलाई 2026 का महीना कैसा रहने वाला है।मेष राशिफल (Aries Monthly Horoscope)जुलाई के महीने में मेष राशि के जातकों को अपने करियर और परिवार के बीच एक सटीक संतुलन बनाकर चलना होगा।करियर और व्यवसाय: महीने के शुरुआती दो हफ्तों में आप काफी ऊर्जावान और एक्टिव रहेंगे। कार्यक्षेत्र में नेटवर्किंग के दम पर कोई बड़ा अवसर हाथ लग सकता है। हालांकि, वक्री बुध के प्रभाव के कारण किसी भी व्यावसायिक दस्तावेज या एग्रीमेंट पर बिना पढ़े हस्ताक्षर न करें, अन्यथा काम अटक सकता है।लव और फैमिली लाइफ: 16 जुलाई के बाद सूर्य का गोचर आपके चतुर्थ भाव में होने से आपका पूरा ध्यान घर-परिवार पर शिफ्ट हो जाएगा। जीवनसाथी के साथ रिश्ते बेहद मधुर होंगे।सलाह: बजट बनाकर चलें, हवा में बातें करने या दिखावे से नुकसान हो सकता है।वृषभ राशिफल (Taurus Monthly Horoscope)वृषभ राशि के जातकों के लिए यह महीना काफी व्यावहारिक और प्रगतिशील साबित होने वाला है।करियर और व्यवसाय: पराक्रम के देवता मंगल आपकी ही राशि में विराजमान हैं, जो आपको अद्भुत ऊर्जा और फोकस प्रदान करेंगे। महीने के पहले दो सप्ताह आर्थिक मामलों और फ्यूचर प्लानिंग के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। व्यापार में कोई भी बड़ा वादा करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन जरूर कर लें।लव और फैमिली लाइफ: 4 जुलाई से शुक्र का गोचर आपके पारिवारिक माहौल को बेहद खुशनुमा और प्रेमपूर्ण बना देगा। 16 जुलाई के बाद समाज में आपका उठना-बैठना बढ़ेगा और नए संपर्क स्थापित होंगे।सलाह: मेहनत का फल थोड़ा रुककर मिलेगा, इसलिए सब्र बनाए रखें।मिथुन राशिफल (Gemini Monthly Horoscope)जुलाई का यह महीना पूरी तरह से मिथुन राशि के जातकों के इर्द-गिर्द घूमने वाला है, लेकिन आपको थोड़ा संभलकर रहना होगा।करियर और व्यवसाय: 16 जुलाई तक सूर्य आपकी ही राशि में रहेंगे, जिससे आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर रहेगा। लेकिन आपकी राशि के स्वामी बुध देव वक्री चाल चल रहे हैं, जिसके कारण काम उम्मीद के मुताबिक गति से आगे नहीं बढ़ेंगे। पुरानी व्यावसायिक योजनाओं को दोबारा जांचने का यह सही समय है।लव और फैमिली लाइफ: महीने के उत्तरार्ध में आपका ध्यान बैंक बैलेंस और पारिवारिक सुरक्षा पर रहेगा। दोस्तों के साथ चल रही पुरानी गलतफहमियां दूर होंगी।सलाह: रिश्तों में कड़वाहट से बचने के लिए अपनी बात थोपने के बजाय दूसरों की बात भी ध्यान से सुनें।कर्क राशिफल (Cancer Monthly Horoscope)कर्क राशि के जातकों के लिए महीने की शुरुआत भले ही थोड़ी सुस्त हो, लेकिन महीने का दूसरा भाग आपके लिए बेहद शानदार रहेगा।करियर और व्यवसाय: शुरुआती दो हफ्तों में वक्री बुध के कारण पास्ट के कुछ अधूरे प्रोजेक्ट्स या पुरानी व्यावसायिक समस्याएं दोबारा सामने आ सकती हैं। घबराने की बजाय अपनी गलतियों को सुधारें। 16 जुलाई को जैसे ही सूर्य आपकी राशि में प्रवेश करेंगे, आपका भाग्य चमक उठेगा। आपकी राशि में बैठे गुरुदेव आपको सही दिशा में आगे बढ़ने की समझ देंगे।लव और फैमिली लाइफ: शुक्र का सिंह राशि में जाना आपको परिवार के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाएगा। जीवनसाथी के साथ इमोशनल बॉन्डिंग बहुत मजबूत होगी।सलाह: महीने का आखिरी 15 दिन आपके लिए अत्यंत ऊर्जावान है, इसका भरपूर लाभ उठाएं।सिंह राशिफल (Leo Monthly Horoscope)सिंह राशि के जातकों के लिए जुलाई का महीना आंख बंद करके भागने का नहीं, बल्कि ठहरकर रणनीति बनाने का है।करियर और व्यवसाय: शुरुआती दो हफ्तों में दोस्तों और वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह से करियर में बड़ी मदद मिलेगी। हालांकि, वक्री बुध के कारण बातचीत में पारदर्शिता रखें, वरना वर्कप्लेस पर कोई बड़ी गलतफहमी पैदा हो सकती है। 16 जुलाई के बाद सूर्य का गोचर खर्चों में बढ़ोतरी करा सकता है, इसलिए फिजूलखर्ची से दूर रहें।लव और फैमिली लाइफ: 4 जुलाई को शुक्र आपकी ही राशि में आ रहे हैं, जिससे आपकी पर्सनैलिटी में एक गजब का आकर्षण और निखार आएगा। लोग आपकी तरफ खिंचे चले आएंगे।सलाह: मानसिक शांति के लिए थोड़ा समय अकेले में बिताएं और मेडिटेशन करें।कन्या राशिफल (Virgo Monthly Horoscope)कन्या राशि के जातकों का पूरा ध्यान इस महीने अपने करियर के बड़े गोल्स और भविष्य को सुरक्षित करने पर रहेगा।करियर और व्यवसाय: महीने के शुरुआती 15 दिनों में करियर में अत्यधिक व्यस्तता रहेगी। चूंकि आपका राशि स्वामी बुध वक्री है, इसलिए ऐन वक्त पर आपके बने-बनाए प्लान्स में बदलाव हो सकता है। नौकरीपेशा लोग दफ्तर में किसी भी तरह की राजनीति से दूर रहें और चुपचाप अपने काम पर ध्यान दें।लव और फैमिली लाइफ: 4 जुलाई से शुक्र के प्रभाव से मन थोड़ा शांत होगा और आप अपनी सेहत पर ध्यान देंगे। 16 जुलाई के बाद आपका सोशल सर्कल काफी एक्टिव हो जाएगा और दोस्तों का पूरा सहयोग मिलेगा।सलाह: कार्यस्थल और घर के बीच एक सॉलिड बैलेंस बनाकर चलें।तुला राशिफल (Libra Monthly Horoscope)जुलाई का महीना तुला राशि के जातकों को अपनी सोच का दायरा बढ़ाने और कुछ नया सीखने के लिए प्रेरित कर रहा है।करियर और व्यवसाय: यदि आप उच्च शिक्षा, विदेश व्यापार या किसी नए कोर्स की योजना बना रहे हैं, तो महीने के शुरुआती दो हफ्ते अनुकूल हैं। वक्री बुध यात्राओं में थोड़ी देरी या अड़चन डाल सकता है, लेकिन अंततः परिणाम सुखद रहेंगे। 16 जुलाई के बाद करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, और आपके काम की तारीफ होगी।लव और फैमिली लाइफ: 4 जुलाई को शुक्र का गोचर सिंह राशि में होने से आपकी सोशल लाइफ बेहद रंगीन हो जाएगी। दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और मनोरंजन के बेहतरीन मौके मिलेंगे।सलाह: चाहे मामला पैसों का हो या दिल का, इस महीने जोश में आकर होश न खोएं।वृश्चिक राशिफल (Scorpio Monthly Horoscope)वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह महीना जीवन में आ रहे बदलावों को सहर्ष स्वीकार करने का है।करियर और व्यवसाय: महीने के शुरुआती दो हफ्तों में आपका पूरा ध्यान पैतृक संपत्ति, टैक्स, इंश्योरेंस और आर्थिक लेन-देन पर रहेगा। वक्री बुध की वजह से किसी भी तरह के पेपरवर्क या बड़े एग्रीमेंट में आंख बंद करके भरोसा न करें। 16 जुलाई के बाद सूर्य का गोचर आपके भाग्य को बल देगा और व्यापारिक यात्राओं से लाभ होगा।लव और फैमिली लाइफ: 4 जुलाई को शुक्र का सिंह राशि में जाना आपके सामाजिक रूतबे और मान-सम्मान को बढ़ाएगा। कार्यक्षेत्र में आपकी अचीवमेंट्स की सराहना होगी।सलाह: शॉर्टकट मारने की आदत से बचें, लंबे समय की प्लानिंग ही फायदा देगी।धनु राशिफल (Sagittarius Monthly Horoscope)धनु राशि के जातकों के लिए जुलाई का महीना साझेदारी, वैवाहिक जीवन और टीम वर्क पर फोकस करने का है।करियर और व्यवसाय: सूर्य देव के प्रभाव से आप कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों के साथ मिलकर बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे। हालांकि, वक्री बुध के कारण बिजनेस पार्टनरशिप में कुछ पुराने विवाद दोबारा उभर सकते हैं। शांति से बैठकर बात निपटाना ही एकमात्र उपाय है। महीने के उत्तरार्ध में संयुक्त निवेश के मामलों में सावधानी बरतें।लव और फैमिली लाइफ: सिंह राशि में बैठे शुक्र देव आपके मूड को एकदम फ्रेश और रोमांटिक रखेंगे। पार्टनर के साथ किसी धार्मिक या मनोरंजक यात्रा पर जाने का योग बनेगा।सलाह: ईगो (अहंकार) को साइड में रखकर अपनों से खुलकर बात करें।मकर राशिफल (Capricorn Monthly Horoscope)मकर राशि के जातकों के लिए यह महीना अपने डेली रूटीन, स्वास्थ्य और अटके हुए कामों को व्यवस्थित करने का है।करियर और व्यवसाय: महीने के शुरुआती दो हफ्तों में दफ्तर में काम का भारी बोझ रह सकता है। आपको एक साथ कई मोर्चों पर मल्टीटास्किंग करनी पड़ेगी। वक्री बुध के कारण कामों में देरी होने पर तनाव न लें, बल्कि अपनी कार्ययोजना को दोबारा री-चेक करें। आर्थिक मामलों में लोन या उधार के लेन-देन से पूरी तरह दूर रहें।लव और FAMILY LIFE: 4 जुलाई से शुक्र के प्रभाव से आपके वैवाहिक और इमोशनल रिश्तों में गहराई आएगी। 16 जुलाई के बाद जीवनसाथी के साथ चल रहा कोई भी पुराना मनमुटाव बातचीत के जरिए आसानी से सुलझ जाएगा।सलाह: व्यावहारिक और प्रैक्टिकल होकर चलेंगे तो पूरा महीना शांति से बीतेगा।कुंभ राशिफल (Aquarius Monthly Horoscope)जुलाई का महीना कुंभ राशि के जातकों के लिए अपने छिपे हुए टैलेंट को बाहर निकालने और शौक पूरे करने का है।करियर और व्यवसाय: महीने के शुरुआती 15 दिनों में क्रिएटिव फील्ड, कला और शिक्षा से जुड़े लोगों को बेहतरीन अवसर मिलेंगे। वक्री बुध के प्रभाव से कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले अपने पुराने पेंडिंग पड़े कामों को निपटा लें, तो ज्यादा फायदे में रहेंगे। महीने के उत्तरार्ध में दफ्तर में थोड़ी दौड़-भाग बढ़ सकती है।लव और फैमिली लाइफ: 4 जुलाई को शुक्र का गोचर आपके सप्तम भाव (सिंह राशि) में होने से लव लाइफ में खुशियों की बहार आएगी। अगर पार्टनर के साथ कोई अनबन चल रही थी, तो वह हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।सलाह: मनोरंजन और अपनी जिम्मेदारियों के बीच एक खूबसूरत संतुलन स्थापित करें।मीन राशिफल (Pisces Monthly Horoscope)मीन राशि के जातकों के लिए जुलाई की शुरुआत थोड़ी अंतर्मुखी रहने और मानसिक शांति तलाशने की होगी।करियर और व्यवसाय: शुरुआती दो हफ्तों में प्रॉपर्टी, रियल एस्टेट या घर के नवीनीकरण से जुड़े कामों में वक्री बुध बाधा डाल सकता है। बहसबाजी से बचें। 16 जुलाई को जैसे ही सूर्य देव का राशि परिवर्तन होगा, आपके सिर से सारा मानसिक बोझ उतर जाएगा। करियर और व्यापार में आपका कॉन्फिडेंस वापस लौट आएगा।लव और फैमिली लाइफ: गुरुदेव का गोचर आपकी पढ़ाई, संतान पक्ष और पर्सनल लाइफ को पूरा सपोर्ट कर रहा है। शुक्र के प्रभाव से अपनी लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार करें। अपनों के सामने अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करें।सलाह: महीने का आखिरी हिस्सा आपके लिए काफी हल्का-फुल्का, सुकून देने वाला और शानदार रहेगा।
बिहार की राजधानी पटना में रहने वाले लाखों मकान मालिकों, दुकानदारों और किराएदारों के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी और तगड़ी झटका देने वाली खबर सामने आ रही है। पटना नगर निगम (Patna Municipal Corporation) ने शहर के विकास कार्यों और राजस्व को बढ़ाने के नाम पर प्रॉपर्टी धारकों पर एक नया वित्तीय बोझ डाल दिया है। नगर निगम प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर प्रॉपर्टी के वार्षिक किराया मूल्य (Annual Rental Value - ARV) में सीधे 15 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी करने का एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। इस नए आदेश के लागू होते ही अब पटना वासियों को अपने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा होल्डिंग टैक्स (Holding Tax) चुकाना होगा, जिससे स्थानीय जनता के बजट पर सीधा असर पड़ने वाला है।जानिए क्या होता है वार्षिक किराया मूल्य और आपकी जेब पर कैसे बढ़ेगा टैक्स का बोझसरल शब्दों में समझें तो वार्षिक किराया मूल्य (ARV) वह पैमाना है जिसके आधार पर नगर निगम किसी भी संपत्ति या मकान का टैक्स निर्धारित करता है। इसमें 15% की वृद्धि होने का सीधा मतलब यह है कि आपका सालाना होल्डिंग टैक्स भी इसी अनुपात में बढ़ जाएगा। पटना नगर निगम के इस फैसले का असर न केवल खुद का मकान रखने वाले मकान मालिकों पर पड़ेगा, बल्कि शहर के व्यावसायिक परिसरों, दुकानों और मॉल्स पर भी इसका व्यापक असर दिखेगा। जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के बाद मकान मालिक अब किराएदारों से भी ज्यादा किराया वसूलने की तैयारी कर सकते हैं, जिससे पटना में रहना और दुकान चलाना दोनों महंगा हो जाएगा।पटना के सभी वार्डों और प्रमुख पॉश इलाकों में तत्काल प्रभाव से लागू होगा नया नियमभौगोलिक और स्थानीय प्रशासनिक दृष्टिकोण (Geographical and Local Optimization) से देखा जाए तो पटना नगर निगम के सभी अंचलों (जैसे बांकीपुर, कंकड़बाग, नूतन राजधानी, पाटलिपुत्र, पटना सिटी और अजीमाबाद) के अंतर्गत आने वाले सभी वार्डों में यह नया नियम लागू किया जा रहा है। विशेष रूप से बोरिंग रोड, बेली रोड, कंकड़बाग, फ्रेजर रोड, राजाबाजार और डाकबंगला जैसे पटना के प्रमुख पॉश और व्यावसायिक इलाकों में टैक्स की दरें सबसे ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। नगर निगम के अधिकारियों का तर्क है कि शहर को स्मार्ट सिटी बनाने, जलजमाव की समस्या से मुक्ति दिलाने और साफ-सफाई की व्यवस्था को अत्याधुनिक करने के लिए राजस्व बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया था।जनता और स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने जताया कड़ा विरोध, फैसले को वापस लेने की मांगनगर निगम द्वारा अचानक की गई इस 15% की बढ़ोतरी के बाद पटना के स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न व्यापारिक संगठनों में भारी आक्रोश और नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता पर यह टैक्स का नया बोझ पूरी तरह से अनुचित है। कई व्यापारिक संघों ने नगर निगम प्रशासन और मेयर को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले को तुरंत वापस लेने या बढ़ोतरी की दर को कम करने की पुरजोर मांग की है। सोशल मीडिया पर भी पटना के लोग इस फैसले के खिलाफ लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक अर्बन टैक्स सर्च पर क्यों लगातार टॉप ट्रेंड बना हुआ है पटना का यह बड़ा फैसलाआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के युग में पटना के लाखों नागरिक पटना नगर निगम होल्डिंग टैक्स ऑनलाइन, पटना में मकान का टैक्स कैसे जमा करें, और वार्षिक किराया मूल्य न्यू रेट्स को इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि इस नई बढ़ोतरी के बाद उनके टैक्स के बिल में कितने रुपये का अंतर आएगा और ऑनलाइन पेमेंट करने पर क्या कोई छूट मिलेगी। नगर निगम और वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े नियमों की यह भारी सर्च जनता के बीच जागरूक रहने और सरकारी नीतियों को समझने की बढ़ती प्रवृत्ति को साफ दर्शाती है।
केंद्र सरकार के लाखों सेवारत कर्मचारी और पेंशनभोगी इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के आधिकारिक गठन और उसकी सिफारिशों का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, कर्मचारी यूनियनों और गलियारों में न्यूनतम (Minimum) और अधिकतम (Maximum) बेसिक वेतन के बीच के अंतर को लेकर बहस और चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।सरकारी वेतन आयोगों की तकनीकी भाषा में इस अंतर को कंप्रेशन रेशियो (Compression Ratio) कहा जाता है। यह रेशियो सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि सरकार के सबसे निचले पायदान पर काम करने वाले कर्मचारी और सबसे शीर्ष अधिकारी (जैसे कैबिनेट सचिव) के मूल वेतन (Basic Salary) में कितना गुना अंतर है।वर्तमान में लागू 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत, एक केंद्रीय कर्मचारी का न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 प्रति माह है, जबकि शीर्ष स्तर पर अधिकतम बेसिक वेतन ₹2,50,000 (ढाई लाख रुपये) प्रति माह तय है। इस प्रकार, मौजूदा समय में यह वेतन अनुपात 1:13.9 का है। कर्मचारी संगठनों का साफ तर्क है कि यह अंतर सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी ज्यादा है, जिसे आगामी वेतन आयोग में हर हाल में कम किया जाना चाहिए।दूसरे वेतन आयोग में था इतिहास का सबसे खौफनाक अंतरभारत में आजादी के समय साल 1947 में पहला वेतन आयोग लागू किया गया था। लेकिन भारतीय इतिहास में सबसे ज्यादा वेतन असमानता और विसंगति दूसरे वेतन आयोग (1957) के दौर में दर्ज की गई थी। उस समय निचले स्तर पर न्यूनतम बेसिक वेतन मात्र ₹80 था, जबकि शीर्ष अधिकारियों का अधिकतम बेसिक वेतन ₹3,000 प्रति माह तय किया गया था। इसके चलते दोनों के बीच का कंप्रेशन रेशियो 1:37.5 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था, जो भारतीय प्रशासनिक इतिहास में आज तक का सबसे बड़ा अंतर माना जाता है।इस भारी असमानता के बाद चौतरफा विरोध को देखते हुए सरकार ने वेतन के इस अंतर को पाटने की दिशा में कदम उठाए। नतीजा यह हुआ कि तीसरे वेतन आयोग (1973) में न्यूनतम वेतन ₹196 और अधिकतम वेतन ₹3,500 तय होने से यह अनुपात घटकर 1:17.9 रह गया था।चौथे और पांचवें वेतन आयोग में आया सबसे संतुलित दौरसाल 1986 में जब चौथा वेतन आयोग देश में लागू हुआ, तो वेतन विसंगतियों में भारी सुधार देखा गया। इसमें न्यूनतम बेसिक वेतन ₹750 और अधिकतम वेतन ₹8,000 तय किया गया, जिससे यह अनुपात पहली बार घटकर मात्र 1:10.7 रह गया।इसके बाद, साल 1996 में आए पांचवें वेतन आयोग में इस असमानता को और ज्यादा कम किया गया। उस समय न्यूनतम बेसिक वेतन ₹2,550 और अधिकतम वेतन ₹26,000 प्रति माह तय किया गया, जिससे कंप्रेशन रेशियो घटकर अपने इतिहास के सबसे न्यूनतम स्तर यानी 1:10.2 पर आ गया था। इसे भारतीय वेतन संरचना के लिहाज से अब तक का सबसे संतुलित और समाजवाद के करीब का दौर माना जाता है।छठे और सातवें वेतन आयोग में फिर से बढ़ने लगी असमानतापांचवें वेतन आयोग के संतुलित दौर के बाद, छठे और सातवें वेतन आयोग में यह खाई एक बार फिर से चौड़ी होने लगी:छठा वेतन आयोग (2006): इस आयोग में न्यूनतम बेसिक वेतन को बढ़ाकर ₹7,000 और अधिकतम वेतन को ₹80,000 किया गया। इसके कारण वेतन का अनुपात 1:10.2 से दोबारा बढ़कर 1:11.4 पर पहुंच गया।सातवां वेतन आयोग (2016): इसमें कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 और अधिकतम ₹2.50 लाख रुपये तय हुआ, जिससे यह कंप्रेशन रेशियो और ज्यादा बढ़कर सीधे 1:13.9 के स्तर पर पहुंच गया, जो वर्तमान में भी लागू है।पहले से 7वें वेतन आयोग तक 'कंप्रेशन रेशियो' का पूरा चार्ट:वेतन आयोग (Pay Commission)न्यूनतम वेतन (₹)अधिकतम वेतन (₹)कंप्रेशन रेशियो (अनुपात)दूसरा वेतन आयोग (1957)₹80₹3,0001 : 37.5 (सबसे ज्यादा)तीसरा वेतन आयोग (1973)₹196₹3,5001 : 17.9चौथा वेतन आयोग (1986)₹750₹8,0001 : 10.7पांचवां वेतन आयोग (1996)₹2,550₹26,0001 : 10.2 (सबसे संतुलित)छठा वेतन आयोग (2006)₹7,000₹80,0001 : 11.4सातवां वेतन आयोग (2016)₹18,000₹2,50,0001 : 13.98वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या है उम्मीद? '1:8' का फॉर्मूलाआगामी 8वें वेतन आयोग को लेकर विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने सरकार के सामने एक बेहद मजबूत और ठोस मांग रखी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस बार न्यूनतम और अधिकतम वेतन का अनुपात घटाकर सीधे 1:8 के दायरे में लाया जाना चाहिए।उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के खर्च को देखते हुए निचले स्तर के कर्मचारियों (ग्रुप-सी और डी) को वित्तीय रूप से अधिक मजबूत करने की जरूरत है। यदि अनुपात 1:8 किया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक उछाल देखने को मिलेगा।आर्थिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि सरकार कर्मचारियों की इस मांग पर सकारात्मक विचार करती है, तो आगामी 8वां वेतन आयोग केवल एक रूटीन वेतन बढ़ोतरी (Salary Hike) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश में सरकारी कर्मचारियों के बीच आय की असमानता को कम करने की दिशा में एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा कदम साबित हो सकता है। यही कारण है कि आने वाले समय में आयोग के गठन और उसकी हर एक सिफारिश पर देश के 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों व पेंशनभोगियों की नजरें टिकी रहेंगी।
चिलचिलाती गर्मी और उमस से परेशान छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए मौसम के मोर्चे से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। बंगाल की खाड़ी से आ रही ठंडी और नमी से भरी हवाओं के चलते छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon in Chhattisgarh) पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर (IMD Raipur) ने राज्य के अधिकांश हिस्सों के लिए एक कड़ा अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। इस दौरान कई मैदानी और वनांचल क्षेत्रों में वज्रपात यानी आकाशीय बिजली गिरने की भी गंभीर आशंका जताई गई है, जिसे देखते हुए प्रशासन को पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया है।इन जिलों में दिखेगा बादलों का भारी तांडव, मौसम विभाग ने जारी किया कड़ा अलर्टमौसम विभाग द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, मानसून की सक्रियता के कारण प्रदेश के जिन जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने का सबसे ज्यादा खतरा है, उनमें राजधानी रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में सुबह से ही घने काले बादलों ने डेरा डाल रखा है और रुक-रुक कर रिमझिम बौछारों के साथ तेज हवाएं चल रही हैं। मौसम केंद्र ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम के दौरान लोग पक्के मकानों और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले किसान भाई बड़े पेड़ों और बिजली के खंभों से उचित दूरी बनाकर रखें।बस्तर और सरगुजा संभाग में मूसलाधार बारिश से नदी-नाले उफान पर, जनजीवन प्रभावितभौगोलिक और स्थानीय आपदा प्रबंधन (Geographical and Local Optimization) के लिहाज से देखा जाए तो दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर संभाग (दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर, नारायणपुर) और उत्तर के सरगुजा संभाग (जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर) में मानसून की पहली भारी बारिश ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। अंदरूनी इलाकों के कई नदी-नाले और जलस्रोत पूरी तरह उफान पर आ गए हैं, जिससे कुछ ग्रामीण रास्तों पर आवागमन अस्थायी रूप से बाधित हुआ है। स्थानीय जिला प्रशासनों ने एहतियातन नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है और जलभराव वाले निचले इलाकों में पानी निकासी के लिए नगर निगम की टीमों को चौबीसों घंटे तैनात कर दिया है।उमस से मिली बड़ी राहत, कृषि कार्य और खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित होगी यह बारिशमौसम में आए इस जबरदस्त बदलाव और ठंडी हवाओं के चलने से पिछले कई दिनों से पड़ रही चिपचिपी गर्मी और उमस से नागरिकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। राज्य में तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का यह समय पर सक्रिय होना और लगातार बारिश होना छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस बारिश से खरीफ फसलों, विशेषकर धान की बोआई और रोपाई के काम में तेजी आएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया और मजबूत बूस्ट मिलेगा।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक वेदर सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है छत्तीसगढ़ का मौसमआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के युग में छत्तीसगढ़ के लाखों नागरिक आज का मौसम रायपुर, छत्तीसगढ़ में मानसून कब तक रहेगा, और बिजली गिरने से बचाव के उपाय जैसे विषयों को इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि उनके स्थानीय ब्लॉक और शहर में अगले कुछ घंटों में मौसम का मिजाज कैसा रहने वाला है। मौसम विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के अचानक होने वाले भारी मौसमी बदलावों के दौरान डिजिटल माध्यमों पर मिलने वाली लाइव और सटीक जानकारियां आम जनता को सुरक्षित रखने और आपदाओं से बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर इस समय एक बहुत बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील जलमार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में पिछले कई हफ्तों से फंसे 11,000 से अधिक मरीनर्स (नाविकों) को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक वैश्विक स्तर का मेगा इवेकुएशन (निकासी) अभियान शुरू कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च समुद्री संस्था, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि इस ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत सैकड़ों विशाल कमर्शियल जहाजों की मदद से समुद्र में फंसे कर्मचारियों को जीवनदान दिया जाएगा।इस बेहद बड़े और जोखिम भरे कदम की राह तब आसान हुई, जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता संपन्न हुआ। दोनों महाशक्तियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य संघर्ष को खत्म करने के इस समझौते के बाद, अब खाड़ी क्षेत्र में ठप पड़े अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और कमर्शियल शिपिंग को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशें युद्ध स्तर पर की जा रही हैं।महा-अभियान में शामिल होंगे 500 से 600 व्यावसायिक जहाजआईएमओ (IMO) की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र के बीचो-बीच चल रहे इस रेस्क्यू ऑपरेशन की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें करीब 500 से 600 अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक (कमर्शियल) जहाजों को तैनात किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे सभी छोटे-बड़े जहाजों और कार्गो कप्तानों से सीधे सैटेलाइट संपर्क साधना शुरू कर दिया है, ताकि बिना किसी गड़बड़ी के नाविकों को सुरक्षित कॉरिडोर के जरिए बाहर निकाला जा सके।आपको बता दें कि इस भीषण युद्ध और नाकेबंदी से पहले होर्मुज स्ट्रेट से हर दिन करीब 130 मालवाहक जहाज गुजरते थे, लेकिन हालिया तनाव के दिनों में यह संख्या सिमटकर महज 20 से 30 जहाज प्रतिदिन रह गई थी। अब इस मेगा निकासी योजना के लागू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि वैश्विक समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे अपने पुराने स्तर पर लौट आएगी।सुरक्षित आवाजाही के लिए तैयार हुए दो नए समुद्री मार्गअंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने इस अभियान को पूरी सुरक्षा के साथ अंजाम देने के लिए होर्मुज के अशांत पानी में दो नए अस्थायी नौवहन मार्ग (समुद्री रास्ते) तय किए हैं:उत्तरी मार्ग (Northern Route): यह नया रूट ईरान के तट के बेहद करीब से होकर गुजरेगा।दक्षिणी मार्ग (Southern Route): यह सुरक्षित रास्ता ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के समुद्री सीमा क्षेत्र से होकर आगे बढ़ेगा।संगठन ने सख्त हिदायत जारी करते हुए कहा है कि यह एक बेहद संवेदनशील सैन्य और नागरिक रेस्क्यू ऑपरेशन है, इसलिए सुरक्षा कारणों और रीयल-टाइम इनपुट के आधार पर किसी भी समय जहाजों की आवाजाही को बीच समुद्र में अस्थायी रूप से रोका भी जा सकता है।समुद्र में छिपी 'बारूदी सुरंगों' और ड्रोन हमलों का बड़ा खतराआईएमओ (IMO) ने अपने आधिकारिक बुलेटिन में दुनिया भर के शिपिंग कप्तानों को गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के मुताबिक, युद्ध भले ही रुक गया हो, लेकिन समुद्र की गहराइयों में अभी भी तैरती हुई बारूदी सुरंगों (Naval Mines) और मलबे के कारण खराब नौवहन परिस्थितियों का बड़ा खतरा बना हुआ है।इसी वजह से जहाजों के कप्तानों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी मर्जी से या शॉर्टकट लेकर आगे बढ़ने की गलती बिल्कुल न करें और केवल नौसैनिक अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार करें। इस ऑपरेशन के तहत हर एक जहाज को एक विशेष 'ट्रांजिट ग्रुप' (बेड़े) में शामिल किया जा रहा है और सुरक्षा जांच के बाद ही उन्हें यात्रा के लिए अलग-अलग दिन और समय आवंटित किए जा रहे हैं।युद्ध की विभीषिका: अब तक 14 बेकसूर नाविकों ने गंवाई जानमध्य पूर्व में इजराइल-ईरान तनाव के बाद शुरू हुए इस पूरे समुद्री संकट के दौरान होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में मालवाहक जहाजों पर हुए मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमलों में अब तक कुल 14 बेकसूर नाविकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। क्षेत्र में लगातार हुए इन हमलों के कारण वैश्विक समुद्री परिवहन और सप्लाई चेन पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो गई थी, जिसने भारत सहित पूरी दुनिया में कच्चे तेल, एलपीजी और गैस की वैश्विक आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित कर महंगाई को बढ़ा दिया था। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र का यह रेस्क्यू ऑपरेशन न केवल इंसानी जानें बचाने के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की चरमराई अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए भी बेहद जरूरी माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सा शिक्षा और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ में देश का बेहद प्रतिष्ठित 'अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान' (All India Institute of Ayurveda - AIIA) खोलने की तैयारी तेजी से शुरू हो गई है। इस महापरियोजना को धरातल पर उतारने और केंद्र सरकार की मंजूरी हासिल करने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने देश की राजधानी नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान सीएम विष्णुदेव साय ने राज्य में आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से संबंधित एक औपचारिक और विस्तृत प्रस्ताव गृहमंत्री को सौंपा, जिस पर बेहद सकारात्मक चर्चा हुई है।छत्तीसगढ़ की समृद्ध वनौषधियों और पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक पटल पर चमकाएगा यह संस्थानमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से चर्चा करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों, घने जंगलों और दुर्लभ वनौषधियों (Medicinal Plants) के मामले में देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है। बस्तर और सरगुजा के अंचलों में सदियों से पारंपरिक जड़ी-बूटियों और आयुर्वेद का एक विशाल खजाना मौजूद है। राज्य में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) खुलने से न केवल यहां के स्थानीय आदिवासी और पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक और आधुनिक शोध (Research) का आधार मिलेगा, बल्कि आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतरीन नए द्वार भी खुलेंगे।दिल्ली में हुई इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात में राज्य के विकास और सुरक्षा पर भी हुआ बड़ा मंथननई दिल्ली में आयोजित इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक के दौरान सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के विकास से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों और नक्सल मोर्चे पर चल रहे अभियानों को लेकर भी गंभीर समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने गृहमंत्री अमित शाह को राज्य में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और बस्तर क्षेत्र में अंदरूनी गांवों तक पहुंचाई जा रही सरकारी सुविधाओं की प्रगति से अवगत कराया। केंद्रीय गृहमंत्री ने छत्तीसगढ़ की साय सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की सराहना करते हुए केंद्र की ओर से हर संभव वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग देने का पूरा भरोसा जताया है।रायपुर-भिलाई से लेकर बस्तर-सरगुजा तक के स्थानीय मरीजों को मिलेगा एम्स जैसा विश्वस्तरीय इलाजभौगोलिक और स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं (Geographical and Local Optimization) के दृष्टिकोण से देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में इस संस्थान के खुलने का सीधा फायदा न केवल राजधानी रायपुर, दुर्ग और भिलाई जैसे शहरी केंद्रों को मिलेगा, बल्कि राज्य के सुदूर वनांचलों में रहने वाले गरीब परिवारों को भी मिलेगा। वर्तमान में एम्स रायपुर (AIIMS Raipur) पर मरीजों का भारी दबाव रहता है, ऐसे में आयुर्वेद का यह राष्ट्रीय स्तर का संस्थान चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़े विकल्प के रूप में उभरेगा। स्थानीय स्तर पर इस संस्थान के आने से छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र के मरीजों को भी बेहद किफायती और विश्वस्तरीय आयुर्वेदिक इलाज मिल सकेगा।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है यह बड़ा प्रस्तावआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के दौर में देश भर के छात्र, चिकित्सा विशेषज्ञ और छत्तीसगढ़ के नागरिक छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद संस्थान, सीएम विष्णुदेव साय दिल्ली दौरा, और अमित शाह विष्णुदेव साय मीटिंग को इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च इंजनों पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि इस संस्थान की स्थापना छत्तीसगढ़ के किस विशेष शहर में की जाएगी और इसकी निर्माण प्रक्रिया कब से शुरू होगी। स्वास्थ्य क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक आयुर्वेद को बढ़ावा देने का छत्तीसगढ़ सरकार का यह विजन एआई-संचालित डिजिटल सर्च पर एक बड़ा और सकारात्मक ट्रेंड स्थापित कर रहा है।
वेब सीरीज की दुनिया में तहलका मचाने के बाद 'मिर्जापुर' अब सिनेमाघरों में बड़े पर्दे पर गदर मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है। कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी), गुड्डू भैया (अली फजल) और मुन्ना भैया (दिव्येंदु शर्मा) के फैंस के लिए आज यानी 25 जून, 2026 का दिन बेहद खास बन गया है। मेकर्स ने मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ (Mirzapur: The Movie) का पहला खूंखार टीजर आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है, जिसने रिलीज होते ही यूट्यूब और सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है।इस बार मिर्जापुर की इस कल्ट क्राइम दुनिया में भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन और 'पंचायत' फेम सचिव जी यानी जितेंद्र कुमार की भी धमाकेदार एंट्री कराई गई है। गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी यह महा-फिल्म 4 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। हमेशा की तरह इस बार भी फिल्म में एक से बढ़कर एक रोंगटे खड़े कर देने वाले संवाद (डायलॉग्स) हैं, जिनकी पहली झलक हमें इस छोटे से टीजर में ही देखने को मिल गई है।टीजर की शुरुआत कालीन भैया के उसी पुराने और रूतबेदार अंदाज से होती है, जिसके बाद गुड्डू पंडित हाथ में बंदूक थामे अपने पूरे भौकाल के साथ स्क्रीन पर छा जाते हैं। इस बार फिल्म में एक बड़ा बदलाव यह है कि दिवंगत बबलू पंडित (विक्रांत मैसी) की जगह जितेंद्र कुमार को गुड्डू पंडित के भाई के रूप में पेश किया गया है। आइए नजर डालते हैं ‘मिर्जापुर: द मूवी‘ के टीजर के उन 5 सबसे बेस्ट और दमदार डायलॉग्स पर, जो हर तरफ वायरल हो रहे हैं।‘मिर्जापुर: द मूवी’ के 5 सबसे बेस्ट और भौकाली डायलॉग्स:1. कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) का औलाद पर तंजकाबिल औलाद बहुत मुश्किल से मिलती है. और कभी-कभी नहीं भी मिलती है.(मुन्ना भैया के किरदार और अपनी विरासत को लेकर कालीन भैया का यह गहरा संवाद सीधे दिल पर चोट करता है।)2. गुड्डू भैया और उनके बाबूजी की मजेदार बहसगुड्डू भैया (अली फजल): आप हिस्ट्री उठाकर देख लीजिए, जितने गैंगस्टर लोग एंबीशियस रहे हैं, सब साले टॉप पर पहुंचे हैं, नीचे से उठकर ऊपर गए हैं.बाबूजी (राजेश तैलंग): वो सब ऊपर नहीं गए हैं, ऊपर ही चले गए.(गैंगस्टर बनने की जिद पर अड़े गुड्डू पंडित को उनके पिता ने अपने उसी पुराने और संजीदा अंदाज में मौत का सच याद दिलाया है।)3. गुड्डू भैया और जितेंद्र कुमार का नया विजनगुड्डू भैया: हम ही लोग चला रहे हैं कालीन भैया का एंपायर.जितेंद्र कुमार: हमें एंपायर चलाना नहीं है गुड्डू भैया, बनाना है.(मिर्जापुर की गद्दी पर बैठने के लिए बेताब गुड्डू पंडित को उनके नए भाई (जितेंद्र कुमार) ने साफ कर दिया है कि वे किसी की जागीर संभालने नहीं, बल्कि अपनी नई सल्तनत खड़ी करने आए हैं।)4. राजा और प्रजा पर कालीन भैया का ज्ञानसारी प्रजा को मार देंगे, तो राज किसपे करेंगे.(मिर्जापुर में होने वाले खून-खराबे और अंधाधुंध हिंसा के बीच कालीन भैया का यह डायलॉग उनके एक चतुर और दूरदर्शी बाहुबली होने का सबूत देता है।)5. शीबा चड्ढा की धमकी और रवि किशन का स्वैगगुड्डू की मां (शीबा चड्ढा): जानते हो न किसकी मम्मी हैं हम.रवि किशन: हमारा बाप कौन है ये तो बहुत बार सुने थे, हम किसकी मम्मी हैं, ये पहली बार सुने.(मिर्जापुर की सबसे निडर मां को जब रवि किशन अपने देसी और कड़क अंदाज में जवाब देते हैं, तो यह सीन थिएटर्स में सीटियां और तालियां बजाने पर मजबूर कर देगा।)एडवांस बुकिंग और हाइप में नंबर वनमिर्जापुर के तीनों सीजन ओटीटी पर ब्लॉकबस्टर रहे हैं, लेकिन अब इसे थिएटर के बड़े पर्दे के हिसाब से बड़े कैनवास पर फिल्माया गया है। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि टीजर के इन दमदार डायलॉग्स और रवि किशन-जितेंद्र कुमार की नई एंट्री के बाद फिल्म की हाइप सातवें आसमान पर पहुंच गई है। 4 सितंबर को जब यह फिल्म रिलीज होगी, तो बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड्स दांव पर होंगे।
भारतीय सिनेमा के इतिहास की दूसरी सबसे महंगी और बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वाराणसी’ (Varanasi) इन दिनों फिल्म गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। दिग्गज डायरेक्टर एस.एस. राजामौली (S.S. Rajamouli) के निर्देशन में बन रही इस फिल्म का बजट लगभग 1200 से 1300 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। फिल्म में मुख्य भूमिका साउथ सुपरस्टार महेश बाबू (Mahesh Babu) निभा रहे हैं, और उनके साथ बॉलीवुड व हॉलीवुड स्टार प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे दिग्गज कलाकार भी स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे।फिलहाल महेश बाबू शूटिंग से एक छोटा सा ब्रेक लेकर छुट्टियों पर हैं और जल्द ही दोबारा सेट पर लौटेंगे। हालांकि, राजामौली ने अभी तक इस फिल्म की थिएट्रिकल (सिनेमाघरों के लिए) या नॉन-थिएट्रिकल डील्स को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन इसी बीच ओटीटी (OTT) की दिग्गज कंपनी नेटफ्लिक्स इंडिया (Netflix India) की कंटेंट वाइस प्रेसिडेंट मोनिका शेरगिल ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिससे यह लगभग साफ हो गया है कि फिल्म के डिजिटल स्ट्रीमिंग राइट्स नेटफ्लिक्स के खाते में जा चुके हैं।ट्रेलर लॉन्च इवेंट में मोनिका शेरगिल ने दिया बड़ा हिंटइस पूरे मामले की शुरुआत नेटफ्लिक्स की पहली तेलुगु ओरिजिनल सीरीज ‘सुपर सुब्बू’ के ग्रैंड ट्रेलर लॉन्च इवेंट से हुई। इस खास मौके पर नेटफ्लिक्स इंडिया की कंटेंट वाइस प्रेसिडेंट मोनिका शेरगिल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं। इवेंट के दौरान जब मीडिया ने उनसे सीधा सवाल दागा कि क्या नेटफ्लिक्स ने राजामौली और महेश बाबू की अपकमिंग फिल्म ‘वाराणसी’ के स्ट्रीमिंग राइट्स खरीद लिए हैं? तो मोनिका ने पहले एक बड़ी रहस्यमयी मुस्कान दी और फिर दिलचस्प अंदाज में कहा— “कुछ चीजें भविष्य के लिए सरप्राइज ही रहनी चाहिए।”ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर नेटफ्लिक्स और मेकर्स के बीच बातचीत फाइनल नहीं हुई होती, तो मोनिका शेरगिल साफ तौर पर 'ना' में जवाब देतीं या इस सवाल को पूरी तरह टाल देतीं। लेकिन उनका यह 'सरप्राइज' वाला जवाब साफ इशारा कर रहा है कि पर्दे के पीछे डील पक्की हो चुकी है और सही समय आने पर इसका आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।सबसे बड़े क्रिएटर्स हमेशा नेटफ्लिक्स पर होते हैंबातचीत के दौरान जब मोनिका शेरगिल को याद दिलाया गया कि राजामौली की ब्लॉकबस्टर ‘बाहुबली’ फ्रेंचाइजी और ऑस्कर विजेता ‘RRR’ को नेटफ्लिक्स ने ही दुनियाभर के कोने-कोने तक और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचाया है, तो उन्होंने बेहद गर्व से जवाब दिया, ”बेहतरीन कहानियां और देश-दुनिया के सबसे बड़े क्रिएटर्स हमेशा नेटफ्लिक्स पर ही होते हैं।” उनके इस कॉन्फिडेंस ने वाराणसी के फैंस और सिनेमा प्रेमियों के उत्साह को दोगुना कर दिया है।बिना फीस लिए काम कर रहे हैं राजामौली और महेश बाबू, क्या होगी डील की कीमत?आपको बता दें कि कुछ समय पहले ही यह बात सामने आई थी कि फिल्म का बजट बहुत बड़ा होने के कारण डायरेक्टर एस.एस. राजामौली और लीड एक्टर महेश बाबू ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी कोई बंधी-बंधाई फीस (Remuneration) नहीं ली है। दोनों ही दिग्गज 'प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल' (मुनाफे में हिस्सेदारी) पर काम कर रहे हैं।चूंकि फिल्म के बिजनेस और डील्स को फाइनल करने की पूरी जिम्मेदारी खुद राजामौली के कंधों पर है, इसलिए वे हर एक कदम बहुत सोच-समझकर और बड़ी रणनीतिक तैयारी के साथ बढ़ा रहे हैं। अगर इतिहास पर नजर डालें, तो नेटफ्लिक्स ने राजामौली की पिछली फिल्म 'RRR' के डिजिटल राइट्स एक बड़े मल्टी-लैंग्वेज सौदे के तहत करीब 325 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर खरीदे थे। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 1200 करोड़ के बजट वाली ‘वाराणसी’ के लिए नेटफ्लिक्स ने भारतीय ओटीटी इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी और रिकॉर्डतोड़ रकम की बोली लगाई होगी।
पंजाब के करोड़ों मतदाताओं और नागरिकों के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर पंजाब राज्य चुनाव आयोग आज से पूरे सूबे में एक व्यापक और विशेष मतदाता सूची सत्यापन (Special Summary Revision) अभियान शुरू करने जा रहा है। इस महा-अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) आज से सीधे आपके घर का दरवाजा खटखटाएंगे और घर-घर जाकर वोटर लिस्ट का भौतिक सत्यापन करेंगे। यदि आप पंजाब के निवासी हैं, तो आपको इस प्रक्रिया की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है। आइए पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के हवाले से सीधे जानते हैं कि यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करेगी और किन गलतियों के कारण आपका कीमती वोट काटा जा सकता है।जानिए कैसे चलेगी घर-घर वेरिफिकेशन की यह पूरी प्रक्रिया और बीएलओ की भूमिकापंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, आज से शुरू हो रहा यह अभियान पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी तकनीक पर आधारित होगा। आपके क्षेत्र के अलॉटेड बीएलओ अपने मोबाइल ऐप और आधिकारिक दस्तावेजों के साथ आपके घर पहुंचेंगे। वे आपके परिवार के सभी सदस्यों के नामों का मिलान मौजूदा मतदाता सूची से करेंगे। इस दौरान यदि परिवार में कोई नया सदस्य आया है (जैसे शादी के बाद आई बहू) या कोई युवा 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, तो उसका नाम जोड़ने की प्रक्रिया मौके पर ही शुरू की जाएगी। इसके अलावा, बीएलओ मतदाताओं के पहचान पत्रों में मौजूद स्पेलिंग की गलतियों, एड्रेस और फोटो को भी अपडेट करने का काम करेंगे।सावधान! इन परिस्थितियों और गलतियों के कारण वोटर लिस्ट से कट सकता है आपका नामअक्सर लोगों को शिकायत होती है कि चुनाव के दिन पोलिंग बूथ पर पहुंचने के बाद उन्हें पता चलता है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से गायब है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस बार वेरिफिकेशन के दौरान कुछ खास परिस्थितियों में नाम काटे भी जाएंगे। यदि कोई मतदाता उस पते पर पिछले लंबे समय से नहीं रह रहा है और स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो चुका है, तो उसका नाम वहां से हटा दिया जाएगा। इसके अलावा, जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, उनके परिवार द्वारा डेथ सर्टिफिकेट दिए जाने के बाद या बीएलओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर उनका नाम पूरी तरह से काट दिया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग जगहों की वोटर लिस्ट में दर्ज पाया जाता है, तो कानूनन एक जगह से उसका नाम निरस्त कर दिया जाएगा।पंजाब के सभी 23 जिलों के स्थानीय गांवों और शहरों में तैनात किए गए हजारों बीएलओभौगोलिक और स्थानीय प्रशासनिक स्तर (Geographical and Local Administration) पर देखा जाए तो पंजाब के सभी 23 जिलों के ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी वार्डों तक में हजारों बीएलओ को मुस्तैद कर दिया गया है। अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, पटियाला, बठिंडा और मोहाली जैसे बड़े शहरी केंद्रों में कामकाजी लोगों की सुविधा के लिए बीएलओ को विशेष समय पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs), ग्राम पंचायतों और स्थानीय पार्षदों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय कार्य में प्रशासनिक टीमों का पूरा सहयोग करें, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रह सके।नए वोटर्स के लिए सुनहरा मौका, घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से भी जोड़ने की सुविधाचुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो लोग इस अभियान के दौरान घर पर मौजूद नहीं रह पाते हैं, वे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं। नए वोटर्स और युवा नागरिक राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP Website) या 'वोटर हेल्पलाइन ऐप' (Voter Helpline App) का उपयोग करके घर बैठे ही फॉर्म-6 भरकर अपना नाम नए वोटर के रूप में रजिस्टर्ड करवा सकते हैं। इसके साथ ही, किसी भी प्रकार की आपत्ति, शिकायत या पते में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरकर डिजिटल तरीके से सबमिट किया जा सकता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य मतदाता सूची को शत-प्रतिशत त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाना है।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक डिजिटल इलेक्शन सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है यह अभियानआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के दौर में पंजाब के लाखों नागरिक पंजाब वोटर लिस्ट न्यू अपडेट 2026, बीएलओ कब आएंगे, और वोटर कार्ड में नाम कैसे सुधारें जैसे विषयों को इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च इंजनों पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि क्या वोटर आईडी को आधार से लिंक करना इस बार भी अनिवार्य है या नहीं। राजनीतिक और चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के अभियानों की डिजिटल जागरूकता आम जनता को लोकतंत्र के प्रति जागरूक बनाने और फर्जी वोटिंग की समस्याओं को जड़ से खत्म करने में सबसे बड़ा हथियार साबित होती है।
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे पंजाब के अमृतसर से इस वक्त की बेहद सनसनीखेज और सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पंजाब पुलिस की स्पेशल काउंटर इंटेलिजेंस टीम और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने एक संयुक्त और गुप्त ऑपरेशन के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से होने वाली हथियारों, मादक पदार्थों (ड्रग्स) और देश विरोधी गतिविधियों को फंड करने वाले हवाला नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस बड़े और सुनियोजित क्रैकडाउन में सुरक्षा एजेंसियों ने एक विदेशी अफगानी नागरिक समेत कुल सात कुख्यात तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से भारी मात्रा में अत्याधुनिक विदेशी हथियार, करोड़ों रुपये की हेरोइन और लाखों रुपये की हवाला मनी बरामद की गई है।एक अफगानी नागरिक की मौजूदगी ने उड़ाए सुरक्षा एजेंसियों के होश, टेरर फंडिंग का शकसुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक आरोपी मूल रूप से अफगानिस्तान (Afghan National Arrested) का रहने वाला है। भारत में अवैध रूप से रहकर ड्रग्स और हथियारों के इस काले कारोबार को ऑपरेट करने वाले इस अफगानी नागरिक की गिरफ्तारी ने देश की सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। शुरुआती पूछताछ में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि यह पूरा नेटवर्क न केवल नशे की खेप को देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई करता था, बल्कि सीमा पार बैठे अपने आकाओं के इशारे पर पंजाब और देश के अन्य राज्यों में टेरर फंडिंग और देश विरोधी गतिविधियों को हवा देने के लिए हवाला के पैसों (Hawala Money) का इस्तेमाल भी कर रहा था।ड्रोन के जरिए सरहद पार से भेजे जा रहे थे हथियार और हेरोइन की बड़ी खेपपूछताछ में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये तस्कर रात के अंधेरे में पाकिस्तानी तस्करों के संपर्क में रहते थे। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और वहां बैठे ड्रैगन आकाओं के इशारे पर आधुनिक और बड़े ड्रोनों (Drones) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सीमा के इस पार हथियारों और हेरोइन के पैकेट गिराए जाते थे। गिरफ्तार किए गए स्थानीय आरोपी जीपीएस लोकेशन ट्रैक करके उन पैकेटों को रिसीव करते थे और फिर उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाते थे। पुलिस ने इनके पास से कई आधुनिक स्मार्टफोन, पाकिस्तानी सिम कार्ड और ऐसे डिजिटल गैजेट्स बरामद किए हैं जिनसे इनके सीमा पार संपर्कों का पूरा कच्चा चिट्ठा सामने आ गया है।अमृतसर के भारत-पाक सीमावर्ती इलाकों और लोकल ठिकानों पर सुरक्षा बेहद सख्तभौगोलिक और स्थानीय सुरक्षा दृष्टिकोण (Geographical and Local Border Security) से देखा जाए तो अमृतसर का यह सीमावर्ती क्षेत्र हमेशा से ही बेहद संवेदनशील रहा है। इस बड़ी रिकवरी और गिरफ्तारी के बाद अमृतसर, अटारी, तरनतारन और गुरदासपुर जैसे आस-पास के सभी स्थानीय सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय स्तर पर नाकेबंदी और रात के समय गश्त (Night Patrolling) को कई गुना बढ़ा दिया गया है। पुलिस यह पता लगाने की पूरी कोशिश कर रही है कि इन सात आरोपियों के अलावा स्थानीय स्तर पर और कौन से लोग इस खतरनाक नेटवर्क को लॉजिस्टिक्स और छिपने की जगह मुहैया करा रहे थे।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक डिजिटल क्राइम सर्च पर क्यों तेजी से ट्रेंड हो रहा है अमृतसर का यह महा-एक्शनआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के युग में देश भर के यूजर्स अमृतसर ड्रग्स एंड वेपन्स सीजर, पंजाब पुलिस हवाला नेटवर्क क्रैकडाउन और अफगान नेशनल अरेस्टेड इन पंजाब को इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि सीमा पार से होने वाले इस ड्रोन और ड्रग्स के नेटवर्क को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने के लिए भारतीय एजेंसियां किस प्रकार की नई आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के बड़े खुलासे इंटरनेट और डिजिटल अवेयरनेस के जरिए देश के नागरिकों को आंतरिक सुरक्षा और ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ एकजुट होने का एक बड़ा संदेश देते हैं।
राम मंदिर चंदा प्रकरण पर पंकज चौधरी बोले- दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा
राम मंदिर दान विवाद को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच चल रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि विपक्ष का काम सवाल उठाना है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में पहले ही गंभीर कदम उठाते हुए एसआईटी का गठन कर दिया है।
महाराष्ट्र : किडनी बिक्री मामले में फरार दिल्ली के डॉक्टर ने किया आत्मसमर्पण
चंद्रपुर। महाराष्ट्र के चर्चित किसान किडनी बिक्री मामले में वांछित दिल्ली के डॉक्टर रविंद्र पाल सिंह ने बुधवार को ब्रह्मपुरी अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। डॉ. सिंह इस मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं और स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) उनकी तलाश कर रही थी। […] The post महाराष्ट्र : किडनी बिक्री मामले में फरार दिल्ली के डॉक्टर ने किया आत्मसमर्पण appeared first on Sabguru News .
आपातकाल संविधान पर सीधा आघात था : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल को संविधान पर सीधा हमला बताते हुए उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी है जिन्होंने उस समय लोकतांत्रिक मूल्यों की दृढ़तापूर्वक रक्षा की थी। मोदी ने गुरुवार को देशभर में मनाए जाने वाले संविधान हत्या दिवस का उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा कि आज, […] The post आपातकाल संविधान पर सीधा आघात था : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी appeared first on Sabguru News .
काशी में क्रिकेटर आकाशदीप ने अक्षिता राज संग लिए सात फेरे
वाराणसी। भारतीय क्रिकेटर आकाशदीप का विवाह अक्षिता राज के साथ बुधवार रात धार्मिक नगरी काशी में नदेसर स्थित ताज होटल में संपन्न हुआ। विवाह समारोह में भोजपुरी स्टार पवन सिंह भी शामिल होने पहुंचे। होटल के गुलाबबाड़ी परिसर में मंडप एवं आसपास के क्षेत्र को काशी और महादेव थीम पर सजाया गया था। महादेव के […] The post काशी में क्रिकेटर आकाशदीप ने अक्षिता राज संग लिए सात फेरे appeared first on Sabguru News .
राज्यसभा के 31 फीसदी सांसद दागी, तीन सांसद अरबपति, सबसे ज्यादा दागी भाजपा में
Rajya Sabha MP report: देश के नीति-निर्धारण में अहम भूमिका निभाने वाले राज्यसभा के 'माननीय सांसदों' को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) के 226 मौजूदा सांसदों के हलफनामों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से करीब ...
कर्नाटक में पकड़ा गया संदिग्ध आतंकी, अयोध्या के राम मंदिर पर हमले की बना रहा था योजना
बेंगलूरु। कर्नाटक के दावणगेरे ज़िले में उत्तर प्रदेश के एक 20 वर्षीय युवक की गिरफ़्तारी के साथ ही अयोध्या के राम मंदिर पर हमले की एक कथित साज़िश को नाकाम कर दिया गया। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के रहने वाले सुहैल के तौर पर हुई […] The post कर्नाटक में पकड़ा गया संदिग्ध आतंकी, अयोध्या के राम मंदिर पर हमले की बना रहा था योजना appeared first on Sabguru News .
जामताड़ा : शादी समारोह में वज्रपात का कहर, 2 की मौत, 2 की हालत गंभीर
जामताड़ा। झारखंड के जामताड़ा जिले के बिंदापाथर थाना क्षेत्र के चरकादाह गांव में शाम शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। शादी समारोह के दौरान हुए वज्रपात की चपेट में आने से 49 वर्षीय विनय सोरेन और 38 वर्षीय विश्वकर्मा टुडू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 17 वर्षीय शिवशन टूटू और 19 […] The post जामताड़ा : शादी समारोह में वज्रपात का कहर, 2 की मौत, 2 की हालत गंभीर appeared first on Sabguru News .
मांड्या में कावेरी नदी के किनारे सेल्फी खींचने के दौरान 5 लोगों की डूबने से मौत
मांड्या। कर्नाटक के मांड्या जिले में एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मुत्तथी पर कावेरी नदी के किनारे अपनी तस्वीरें (सेल्फी) खींचने के प्रयास में एक ही परिवार की चार महिलाओं और उनके कार चालक सहित पांच लोगों की नदी में डूबने से मृत्यु हो गई है। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि मृतकों की पहचान विजयम्मा, […] The post मांड्या में कावेरी नदी के किनारे सेल्फी खींचने के दौरान 5 लोगों की डूबने से मौत appeared first on Sabguru News .
जयपुर के जल महल जैसी दिखती है यह अनोखी ऐतिहासिक मस्जिद, 400 सालों से पानी के बीच है अडिग
भारत अपनी सदियों पुरानी ऐतिहासिक विरासतों, अद्भुत वास्तुकला और सांस्कृतिक विविधताओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। देश के कोने- कोने में कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें और धरोहरें मौजूद हैं, जिनके पीछे छिपे रहस्य और उनकी बनावट आज के आधुनिक इंजीनियरों को भी पूरी तरह हैरान कर देती है। ऐसी ही एक अनूठी और अद्भुत ऐतिहासिक धरोहर है एक प्राचीन मस्जिद, जो राजस्थान के प्रसिद्ध 'जयपुर जल महल' की तरह पानी के बीचों-बीच दिखाई देती है। लगभग 400 वर्षों से हर मौसम की मार को झेलते हुए शान से खड़ी यह इमारत मानसून के आते ही और भारी बारिश के दिनों में एक तैरते हुए द्वीप (Floating Island) जैसी नजर आने लगती है। इस अनोखी मस्जिद का दीदार करने के लिए दूर-दूर से इतिहास प्रेमी और पर्यटक खींचे चले आते हैं।400 साल पुराना इतिहास और इसकी बेजोड़ इंजीनियरिंग का अनोखा नमूनाइस ऐतिहासिक मस्जिद का निर्माण लगभग चार सदी पहले एक बेहद खास और मजबूत स्थापत्य कला के साथ किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी नींव में इस्तेमाल की गई सामग्री और पत्थरों को इस तरह से तराशा गया है कि पानी के भीतर रहने के बावजूद इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचता। जब गर्मियों में आस-पास का जलस्तर कम होता है, तो इसके नीचे की पूरी बनावट और सीढ़ियां साफ दिखाई देती हैं, लेकिन जैसे ही बारिश का मौसम शुरू होता है और चारों तरफ पानी भर जाता है, तो यह पूरी इमारत जलमग्न होकर पानी की सतह पर तैरती हुई सी प्रतीत होती है। इसकी यही खूबी इसे देश की सबसे अनोखी मस्जिदों और ऐतिहासिक धरोहरों की सूची में शामिल करती है।मॉनसून के मौसम में सैलानियों के लिए बन जाती है पहली पसंदजैसे ही देश में मॉनसून दस्तक देता है और झमाझम बारिश का दौर शुरू होता है, इस ऐतिहासिक स्थल का नजारा पूरी तरह से बदल जाता है। चारों तरफ फैले पानी के बीच जब सूर्य की किरणें इस इमारत पर पड़ती हैं, तो इसका प्रतिबिंब पानी में बेहद मनमोहक और जादुई दृश्य पैदा करता है। इस दौरान यहां आने वाले पर्यटक और फोटोग्राफर्स इस अद्भुत नजारे को अपने कैमरों में कैद करने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह जगह आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ प्रकृति और इतिहास के अनूठे मिलन का एक बेहतरीन उदाहरण भी बन चुकी है।स्थानीय पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिल रहे हैं नए पंखभौगोलिक और स्थानीय पर्यटन (Geographical Tourism) के नजरिए से देखा जाए तो इस 400 साल पुरानी धरोहर के संरक्षण और इसके प्रचार-प्रसार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। क्षेत्रीय प्रशासन और पर्यटन विभाग अब इस ऐतिहासिक जल-मस्जिद के आस-पास बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि यहां आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों को किसी तरह की असुविधा न हो। स्थानीय गाइडों और दुकानदारों का कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस जगह की तस्वीरें वायरल होने के बाद से यहां पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक हेरिटेज सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है यह विषयआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के दौर में देश भर के इतिहास प्रेमी, ट्रैवल ब्लॉगर्स और आर्किटेक्चर के छात्र भारत की इस अनोखी जल मस्जिद के इतिहास, इसकी सही लोकेशन और इसकी वास्तुकला के रहस्यों को इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च इंजनों पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि भारत में जयपुर के जल महल जैसी दिखने वाली अन्य पानी की इमारतें कहां-कहां स्थित हैं। पर्यटन और इतिहास विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की छुपी हुई ऐतिहासिक विरासतों को डिजिटल माध्यमों से सामने लाना भारत के समृद्ध इतिहास को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान देने जैसा है।
वेनेजुएला में भूंकप के तेज झटके, 32 लोगों की मौत और चार घायल, आपातकाल घोषित
काराकास। वेनेजुएला में एक मिनट से भी कम समय के अंतर पर भूकंप के दो तेज झटके महसूस किए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 7.2 और 7.5 मापी गयी। अमरीकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने यह जानकारी दी।प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार भूकंप के जोरदार झटकों से 32 लोगों की मौत हो गई और चार घायल […] The post वेनेजुएला में भूंकप के तेज झटके, 32 लोगों की मौत और चार घायल, आपातकाल घोषित appeared first on Sabguru News .
ऐतिहासिक धरोहरों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी और बेहद रोमांचक खबर सामने आ रही है। देश के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक भुवनगिरी किले (Bhongir Fort) की खड़ी और थका देने वाली चढ़ाई से अब पर्यटकों को हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति मिलने जा रही है। तेलंगाना के इस ऐतिहासिक पर्यटन स्थल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और पर्यटकों के सफर को सुगम बनाने के लिए यहां एक अत्याधुनिक रोपवे (Ropeway Project) का निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस नई परियोजना के शुरू होने के बाद, जिस ऊंची पहाड़ी पर चढ़ने में लोगों के पसीने छूट जाते थे, वहां का सफर अब केवल 4 मिनट में बेहद आरामदायक और रोमांचक अंदाज में पूरा हो सकेगा।6 केबिनों वाला एडवांस्ड रोपवे सिस्टम देगा हवा में तैरने का अनोखा अहसासभुवनगिरी किले पर स्थापित किया जा रहा यह नया रोपवे सिस्टम आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है। इस रोपवे परियोजना में कुल 6 अत्याधुनिक और पूरी तरह सुरक्षित केबिनों (6-Cabin Ropeway) को शामिल किया गया है। ये केबिन पहाड़ी के आधार से लेकर किले के शीर्ष तक लगातार चक्कर लगाएंगे, जिससे पर्यटकों को अपनी बारी के लिए ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। हवा में तैरते हुए इन ग्लास-बॉटम केबिनों से यात्रियों को आस-पास के प्राकृतिक दृश्यों, हरी-भरी वादियों और भुवनगिरी शहर का एक विहंगम और अद्भुत नजारा (Panoramic View) देखने को मिलेगा, जो अपने आप में एक लाइफटाइम एक्सपीरियंस होगा।बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए खुलेगा इस ऐतिहासिक किले का द्वारभुवनगिरी किला अपनी अनूठी अंडाकार विशाल चट्टान और स्थापत्य कला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन इसकी बेहद खड़ी और सीधी चढ़ाई के कारण अब तक बुजुर्ग, छोटे बच्चे और दिव्यांग पर्यटक किले के मुख्य हिस्से तक पहुंचने से वंचित रह जाते थे। इस रोपवे प्रोजेक्ट के शुरू होने से अब समाज का हर वर्ग बिना किसी शारीरिक थकावट या परेशानी के इस ऐतिहासिक विरासत का दीदार कर सकेगा। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी, बल्कि यह स्थल पारिवारिक पिकनिक और वीकेंड गेटवे के लिए पहली पसंद बन जाएगा।तेलंगाना से लेकर पूरे दक्षिण भारत के लोकल टूरिज्म को मिलेगी नई रफ्तारभौगोलिक और स्थानीय आर्थिक दृष्टिकोण (Geographical and Local Optimization) से देखा जाए तो यह प्रोजेक्ट तेलंगाना, विशेषकर यादाद्री भुवनगिरी जिले और राजधानी हैदराबाद के आस-पास के क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। हैदराबाद से महज कुछ ही दूरी पर स्थित होने के कारण भुवनगिरी किले को एक प्रमुख टूरिस्ट सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इस विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के आने से गाइड, होटल व्यवसायी, परिवहन ऑपरेटरों और स्थानीय हस्तशिल्प दुकानदारों के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को एक बड़ा बूस्ट मिलेगा।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक ट्रैवल सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है भुवनगिरी रोपवेआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के युग में देश भर के ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, बैकपैकर्स और एडवेंचर लवर्स भुवनगिरी फोर्ट रोपवे की टिकट प्राइस, टाइमिंग और ओपनिंग डेट को इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च इंजनों पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि हैदराबाद के पास बेस्ट वीकेंड डेस्टिनेशन कौन से हैं। पर्यटन विश्लेषकों का मानना है कि ऐतिहासिक विरासतों को आधुनिक टेक्नोलॉजी से जोड़कर वर्ल्ड-क्लास टूरिज्म हब बनाने का यह मॉडल भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रहा है।
उत्तर भारत समेत देश के कई राज्यों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी और लू का कहर लगातार जारी है। इस तपते मौसम में शरीर को अंदर से ठंडा रखने और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से बचने के लिए लोग तरह-तरह के देसी ड्रिंक्स और समर पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। जब बात शरीर को हाइड्रेट रखने और पेट को तुरंत आराम पहुंचाने की आती है, तो हमारे सामने दो सबसे लोकप्रिय और पारंपरिक विकल्प होते हैं— पहला पंजाब की शान कही जाने वाली गाढ़ी मलाईदार 'लस्सी' और दूसरा तटीय इलाकों का प्राकृतिक अमृत यानी 'निवारणकारी नारियल पानी'। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेट की सेहत, वजन घटाने और तुरंत एनर्जी पाने के लिहाज से इन दोनों में से किसका पलड़ा ज्यादा भारी है? आइए हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों के नजरिए से जानते हैं इन दोनों समर ड्रिंक्स की पूरी सच्चाई।पेट के लिए प्रोबायोटिक्स का खजाना है लस्सी, जानिए पाचन तंत्र के लिए इसके फायदेदही से बनने वाली पारंपरिक लस्सी गर्मियों में हमारे पाचन तंत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक, लस्सी में प्रचुर मात्रा में 'गुड बैक्टीरिया' यानी प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं, जो आंतों की सेहत (Gut Health) को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। गर्मी के मौसम में होने वाली एसिडिटी, पेट में जलन, गैस और बदहजमी की समस्या को दूर करने में लस्सी बेहद कारगर है। इसके अलावा, इसमें मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और दोपहर के समय इसे पीने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। हालांकि, वजन घटाने की चाहत रखने वालों को बिना मलाई और कम चीनी वाली लस्सी या छाछ का चुनाव करना चाहिए।इलेक्ट्रोलाइट्स का पावरहाउस है नारियल पानी, डिहाइड्रेशन का है कालदूसरी तरफ, डाब या नारियल पानी (Coconut Water) एक पूरी तरह से प्राकृतिक और कैलोरी में बेहद कम रहने वाला सुपरड्रिंक है। तेज धूप और लू के थपेड़ों के कारण जब शरीर से पसीने के रूप में जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं, तो नारियल पानी शरीर को तुरंत रिचार्ज करता है। इसमें पोटैशियम, सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं। यह न सिर्फ ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मददगार है, बल्कि किडनी को डिटॉक्स करने और यूरिन इन्फेक्शन के खतरे को कम करने में भी लाजवाब है। जिन लोगों को अपनी कैलोरी काउंट और ब्लड शुगर लेवल की चिंता रहती है, उनके लिए नारियल पानी एक बेहतरीन और बिना किसी मिलावट वाला सबसे सुरक्षित विकल्प है।दिल्ली-यूपी के मैदानी इलाकों से लेकर मुंबई तक स्थानीय बाजारों में बढ़ी डिमांडभौगोलिक और लोकल मार्केट्स (Geographical and Local Markets) की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार और मुंबई जैसे क्षेत्रों में इन दोनों ड्रिंक्स की मांग आसमान छू रही है। स्थानीय स्तर पर डॉक्टर धूप में निकलने वाले कामकाजी लोगों, खिलाड़ियों और बुजुर्गों को कैफीन युक्त चाय-कॉफी या हानिकारक कोल्ड ड्रिंक्स को छोड़कर इन पारंपरिक पेय पदार्थों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जहां दोपहर के भोजन के साथ ठंडी मीठी लस्सी या नमकीन छाछ को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं दक्षिण और तटीय भारत में सुबह के वक्त ताजा नारियल पानी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।लस्सी बनाम नारियल पानी: जानिए आपके स्वास्थ्य के लिए कब और किसका चुनाव है बेस्टअब सवाल उठता है कि आपको कब लस्सी पीनी चाहिए और कब नारियल पानी का रुख करना चाहिए। न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, यदि आप वर्कआउट करके लौटे हैं, वजन कम करना चाहते हैं या आपको तुरंत हाइड्रेशन और ताजगी की जरूरत है, तो नारियल पानी सबसे उत्तम है क्योंकि यह हल्का और सुपाच्य होता है। वहीं दूसरी ओर, यदि आप दोपहर के भारी खाने के बाद पेट को शांत रखना चाहते हैं, आंतों की कमजोरी से परेशान हैं या शरीर का वजन और एनर्जी बढ़ाना चाहते हैं, तो गाढ़ी लस्सी या मट्ठे का सेवन आपके लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा। ध्यान रहे कि अस्थमा या सर्दी-खांसी की समस्या से पीड़ित लोगों को रात के समय लस्सी पीने से बचना चाहिए।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक हेल्थ सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना है यह मुकाबलाआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के युग में देश भर के हेल्थ कॉन्शियस यूजर्स गर्मी के बेस्ट देसी ड्रिंक्स, लस्सी के फायदे और नारियल पानी पीने का सही समय इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च इंजनों पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि गर्मियों में अपने बच्चों और परिवार को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए कौन सा ड्रिंक ज्यादा सुरक्षित है। स्वास्थ्य विश्लेषकों का मानना है कि पैकेटबंद शुगर सिरप और कोल्ड ड्रिंक्स के मुकाबले इन प्राकृतिक और देसी विकल्पों की तरफ डिजिटल जागरूकता का बढ़ना भारतीय लाइफस्टाइल के लिए एक बेहद सुखद संकेत है।
आज के बदलते लाइफस्टाइल, असंतुलित खान-पान और शरीर में पानी की कमी के कारण किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) की समस्या एक बेहद आम और गंभीर बीमारी बन चुकी है। इस बीमारी में असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। जब भी किसी को पथरी की शिकायत होती है, तो डॉक्टर सबसे पहले उनके खान-पान में बड़े बदलाव करने की सलाह देते हैं। कई ऐसी चीजें हैं जिन्हें खाने से पूरी तरह मना किया जाता है, जिनमें से एक हमारे किचन में रोज इस्तेमाल होने वाला लाल टमाटर भी है। आखिर हर सब्जी का स्वाद बढ़ाने वाले टमाटर से किडनी स्टोन के मरीजों को परहेज क्यों करना चाहिए, इसके पीछे का असली वैज्ञानिक कारण बेहद चौंकाने वाला है जिसे जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।टमाटर और किडनी स्टोन का क्या है आपस में गहरा वैज्ञानिक कनेक्शनचिकित्सा विज्ञान और डॉक्टरों के मुताबिक, टमाटर के भीतर भारी मात्रा में 'ऑक्सालेट' (Oxalate) पाया जाता है। दरअसल, हमारे शरीर में होने वाली अधिकांश पथरियां 'कैल्शियम ऑक्सालेट' (Calcium Oxalate) से मिलकर बनी होती हैं। जब हम अत्यधिक मात्रा में टमाटर का सेवन करते हैं, तो इसमें मौजूद ऑक्सालेट हमारे शरीर के भीतर मौजूद कैल्शियम के साथ बहुत तेजी से बॉन्डिंग बनाने लगता है। यह रासायनिक प्रक्रिया धीरे-धीरे छोटे-छोटे क्रिस्टल्स का रूप ले लेती है, जो आगे चलकर बड़ी और सख्त पथरी में तब्दील हो जाते हैं। यही वजह है कि किडनी स्टोन से पीड़ित मरीजों या जिनकी पथरी की टेंडेंसी होती है, उन्हें टमाटर का सेवन पूरी तरह बंद करने की सलाह दी जाती है।क्या टमाटर के बीज हैं असली विलेन, जानिए डॉक्टरों का क्या है कहनाअक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या पूरा टमाटर खाना नुकसानदायक है या सिर्फ उसके बीज। डॉक्टरों का स्पष्ट मानना है कि टमाटर के गूदे की तुलना में उसके छोटे-छोटे बीजों में ऑक्सालेट की सांद्रता बहुत अधिक होती है। इसके अलावा, टमाटर के बीज हमारे पाचन तंत्र के लिए आसानी से पच नहीं पाते हैं। जब ये बिना पचे बीज यूरिनरी ट्रैक्ट के संपर्क में आते हैं, तो वहां कैल्शियम ऑक्सालेट की पथरी बनने की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ है, तो उसे सीमित मात्रा में टमाटर खाने से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन जो लोग पहले से ही इस बीमारी की गिरफ्त में हैं, उनके लिए टमाटर का बीज एक बड़े ट्रिगर की तरह काम करता है।दिल्ली-एनसीआर से लेकर बड़े राज्यों के लोकल हेल्थ सेंटर्स पर बढ़े पथरी के मामलेभौगोलिक और स्थानीय स्वास्थ्य डेटा (Geographical Health Data) के अनुसार, उत्तर भारत के दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में पथरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसका एक बड़ा कारण इन क्षेत्रों के कुछ इलाकों में पानी में मौजूद भारी मिनरल्स (Hard Water) और लोगों की आधुनिक लाइफस्टाइल भी है। स्थानीय अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीजों को डाइटिशियन और डॉक्टर विशेष रूप से यह समझा रहे हैं कि वे अपने दैनिक भोजन में उन सब्जियों और फलों को शामिल न करें जो ऑक्सालेट से भरपूर हैं, ताकि भविष्य में दोबारा पथरी बनने के खतरे को पूरी तरह टाला जा सके।टमाटर के अलावा इन चीजों से भी दूरी बनाना है बेहद जरूरी, जानिए बचाव के उपायअगर आप किडनी स्टोन की समस्या से हमेशा के लिए निजात पाना चाहते हैं, तो सिर्फ टमाटर ही नहीं, बल्कि ऑक्सालेट से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थों जैसे पालक, चौलाई, बैंगन, काजू और अत्यधिक चॉकलेट के सेवन से भी दूरी बनानी होगी। इसके विपरीत, आपको अपने शरीर को हमेशा हाइड्रेटेड रखना चाहिए। डॉक्टर सलाह देते हैं कि दिन भर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पीएं ताकि शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा टॉक्सिन्स और मिनरल्स यूरिन के रास्ते आसानी से बाहर निकल जाएं। इसके साथ ही, नींबू पानी, नारियल पानी और मौसमी फलों का जूस भी पथरी को गलाने और शरीर को सुरक्षित रखने में बेहद मददगार साबित होता है।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक हेल्थ सर्च पर क्यों लगातार ट्रेंड हो रहा है यह मुद्दाआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के दौर में देश भर के यूजर्स किडनी स्टोन डाइट चार्ट, टमाटर खाने के नुकसान और पथरी के घरेलू उपचार को इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च इंजनों पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि क्या टमाटर को बिना बीज के खाना सुरक्षित है या नहीं। स्वास्थ्य विश्लेषकों का मानना है कि खान-पान से जुड़ी इस प्रकार की डिजिटल जागरूकता आम जनता को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने और सही समय पर सही निर्णय लेने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है।
52 वर्ष की हुईं करिश्मा कपूर, फिल्मों से ओटीटी तक बरकरार है जलवा
मुंबई। बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री करिश्मा कपूर आज आज 52 वर्ष की हो गई। करिश्मा कपूर ने 1990 के दशक में अपनी खूबसूरती, दमदार अभिनय और लगातार सफल फिल्मों के दम पर उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक खास पहचान बनाई। 25 जून 1974 को मुंबई में जन्मीं करिश्मा कपूर फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। […] The post 52 वर्ष की हुईं करिश्मा कपूर, फिल्मों से ओटीटी तक बरकरार है जलवा appeared first on Sabguru News .
कुंवारी कन्या से लेकर पुरुषों तक, यहां जानिए कलावा बांधने के अलग-अलग नियम जो शायद ही हो आपको मालूम
सनातन हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या मांगलिक कार्य के दौरान हाथ की कलाई पर कलावा या रक्षासूत्र बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे बेहद पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल कलाई पर लाल-पीला धागा बांध लेना ही काफी नहीं है? शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, कुंवारी कन्याओं, विवाहित महिलाओं और पुरुषों के लिए कलावा बांधने के बिल्कुल अलग-अलग और कड़े नियम (Rules of Tying Kalava) बताए गए हैं। गलत तरीके से रक्षासूत्र बांधने पर पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। आइए जानते हैं कलावा बांधने के उन गुप्त और बेहद महत्वपूर्ण नियमों के बारे में जो आज के समय में शायद ही किसी को मालूम हों।पुरुषों और कुंवारी कन्याओं के लिए शास्त्रों में क्या हैं कलावा बांधने के नियमशास्त्रों के नियमों के मुताबिक, कलावा बांधते समय स्त्री और पुरुष की वैवाहिक स्थिति का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। यदि कोई पुरुष या कुंवारी कन्या (Unmarried Girl) रक्षासूत्र बंधवा रहे हैं, तो उन्हें हमेशा अपने दाएं यानी सीधे हाथ (Right Hand) में कलावा बंधवाना चाहिए। मान्यता है कि सीधे हाथ में रक्षासूत्र बांधने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति के भीतर संकल्प शक्ति मजबूत होती है। कलावा बंधवाते समय हाथ में कुछ सिक्के या अक्षत (चावल) रखना और दूसरा हाथ सिर पर रखना बेहद शुभ माना जाता है।विवाहित महिलाओं के लिए बदल जाता है कलाई का नियम, जानिए सही तरीकाअक्सर देखने में आता है कि लोग सभी महिलाओं के दाएं हाथ में ही कलावा बांध देते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है। ज्योतिष और वैदिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई महिला विवाहित (Married Woman) है, तो उसे हमेशा अपने बाएं यानी उल्टे हाथ (Left Hand) में कलावा बंधवाना चाहिए। शास्त्रों में महिलाओं को घर की लक्ष्मी माना गया है और उनके बाएं अंग को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए विवाहित स्त्रियों के बाएं हाथ में रक्षासूत्र बांधने से उनके पति और परिवार पर आने वाले सभी संकट हमेशा के लिए टल जाते हैं।कलाई पर कितनी बार लपेटना चाहिए धागा और क्या है कलावा बदलने का शुभ दिनकलावा बांधते समय सिर्फ हाथ ही नहीं, बल्कि उसे कलाई पर कितनी बार लपेटा जा रहा है, इसका भी विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, कलाई पर रक्षासूत्र को केवल 3 बार या फिर 5 बार ही लपेटना चाहिए। कलावा के ये फेरे त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और त्रिशक्तियों (लक्ष्मी, सरस्वती, काली) के प्रतीक माने जाते हैं। इसके साथ ही, कई दिनों तक बंधा रहने के बाद जब कलावा पुराना या मैला हो जाए, तो उसे मंगलवार या शनिवार के शुभ दिन ही बदलना चाहिए। पुराना कलावा कभी भी इधर-उधर फेंकने के बजाय किसी पवित्र पेड़ की जड़ में या बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।वैज्ञानिक और शारीरिक दृष्टिकोण से भी बेहद फायदेमंद है रक्षासूत्रधार्मिक महत्व के अलावा, कलावा बांधने के पीछे एक गहरा वैज्ञानिक और एक्यूप्रेशर (Scientific Significance) का कारण भी छिपा हुआ है। शरीर विज्ञान के अनुसार, हमारी कलाई से शरीर की कई महत्वपूर्ण नसें गुजरती हैं जो सीधे हृदय और मस्तिष्क से जुड़ी होती हैं। कलाई पर कलावा बांधने से उन नसों पर एक हल्का और निरंतर दबाव बना रहता है, जिससे शरीर में रक्त संचार (Blood Circulation) नियंत्रित रहता है। यह वात, पित्त और कफ के संतुलन को बनाए रखने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं से भी शरीर की रक्षा करने में मददगार माना गया है।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक आध्यात्मिक सर्च पर क्यों ट्रेंड हो रहा है यह विषयआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल सर्च इंजन के युग में युवा पीढ़ी अपनी सनातन परंपराओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक और वास्तविक नियमों को जानने के लिए इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रही है। एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि पूजा-पाठ के दौरान की जाने वाली छोटी-छोटी गलतियों से कैसे बचा जाए। आध्यात्मिक और ज्योतिषीय विश्लेषकों का मानना है कि कलावा बांधने के इन प्रामाणिक नियमों का पालन करके न सिर्फ धार्मिक लाभ उठाया जा सकता है, बल्कि मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
देश भर के करोड़ों शिव भक्तों और कांवड़ियों के लिए एक बेहद पावन और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। भगवान भोलेनाथ की आराधना का सबसे प्रिय और पवित्र महीना यानी सावन (Shravan Month) शुरू होने का इंतजार अब पूरी तरह से खत्म हो गया है। पंचांग की गणना और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस साल 2026 में सावन के महीने की शुरुआत को लेकर तारीखें पूरी तरह स्पष्ट हो गई हैं। इस बार का सावन कई मायनों में बेहद अनूठा और मंगलकारी संयोग लेकर आ रहा है। महादेव को प्रसन्न करने और मनोवांछित फल पाने के लिए इस साल भक्तों को व्रत और जलाभिषेक के कई उत्तम और विशेष अवसर मिलने जा रहे हैं।जानिए 2026 में किस दिन से शुरू हो रहा है पवित्र सावन का महीनावैदिक ज्योतिष और हिंदू कैलेंडर की गणना के मुताबिक, इस साल सावन के पवित्र महीने की शुरुआत बेहद शुभ संयोग के साथ हो रही है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के समापन के ठीक अगले दिन से ही सावन का आरंभ हो जाएगा। इस पावन महीने में शिव मंदिरों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर अभी से ही देश भर के प्रमुख ज्योतिर्पीठों और शिवालयों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। भक्त इस पावन महीने में हरिद्वार, सुल्तानगंज और काशी जैसे पवित्र स्थानों से गंगाजल लाकर अपने आराध्य का जलाभिषेक करने की योजना को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।इस बार सावन में पड़ेंगे कुल कितने सोमवार, व्रतों की पूरी लिस्ट देखिएसावन के महीने में सोमवार के व्रत का एक विशेष और अत्यंत फलदायी महत्व माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल 2026 में सावन के महीने में सोमवार के व्रतों की संख्या को लेकर बेहद अद्भुत संयोग बन रहा है। इस बार भक्तों को महादेव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए पर्याप्त अवसर मिलेंगे। सावन के पहले सोमवार से लेकर अंतिम सोमवार (सावन पूर्णिमा) तक की सभी तिथियां व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहद कल्याणकारी रहेंगी। मान्यता है कि सावन के सभी सोमवार का विधि-विधान से व्रत रखने और शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और कच्चा दूध चढ़ाने से जीवन के सभी कष्टों और दुखों का हमेशा के लिए अंत हो जाता है।वाराणसी, देवघर और हरिद्वार जैसे पावन धामों में स्थानीय स्तर पर भव्य तैयारियांभौगोलिक और स्थानीय धार्मिक दृष्टिकोण (Geographical and Regional Domain) से देखा जाए तो उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी विश्वनाथ), झारखंड के देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम), उत्तराखंड के हरिद्वार-ऋषिकेश और मध्य प्रदेश के उज्जैन (महाकालेश्वर) में अभी से प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सावन के दौरान इन प्रमुख धार्मिक केंद्रों पर लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुलभ दर्शन, पेयजल और ठहरने की व्यवस्था को चाक-चौबंद किया जा रहा है। स्थानीय बाजारों में भी कांवड़, गेरुआ वस्त्र, पूजा सामग्री और पूजन बर्तनों की मांग में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक धार्मिक सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना हुआ है सावन 2026आज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल सर्च इंजन के युग में देश-दुनिया के शिव भक्त सावन शुरू होने की सटीक तारीख, पूजा विधि, कांवड़ यात्रा के नियम और सोमवार व्रतों के शुभ मुहूर्त को लेकर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि इस साल सावन के दौरान कौन-कौन से दुर्लभ और राजयोग बन रहे हैं जो विभिन्न राशियों के जातकों के लिए भाग्यशाली साबित होंगे। धार्मिक विश्लेषकों का मानना है कि आस्था के इस महापर्व को लेकर डिजिटल माध्यमों पर बढ़ती सर्च शिव भक्तों के भीतर छिपे अगाध प्रेम और श्रद्धा को साफ तौर पर बयां करती है।
आचार्य चाणक्य ने बताया सफलता का महामंत्र, इन 4 बातों को दुनिया से छुपाकर रखना ही है असली समझदारी
भारत के महान अर्थशास्त्री, कूटनीतिज्ञ और मार्गदर्शक आचार्य चाणक्य की नीतियां आज के आधुनिक और डिजिटल युग में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी सदियों पहले थीं। चाणक्य नीति (Chanakya Niti) में सुखी, समृद्ध और सफल जीवन जीने के कई ऐसे अनमोल सूत्र बताए गए हैं, जिन पर अमल करके कोई भी व्यक्ति फर्श से अर्श तक पहुंच सकता है। आचार्य चाणक्य का मानना था कि इंसान की सफलता और असफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि वह समाज में अपनी किन बातों को उजागर करता है और किन्हें गुप्त रखता है। नीति शास्त्र के अनुसार, जीवन में धोखा खाने और अपमान से बचने के लिए 4 खास बातों को हमेशा छिपाकर रखना चाहिए।अपनी भावी योजनाओं और व्यावसायिक कूटनीति को कभी न करें उजागरआचार्य चाणक्य कहते हैं कि यदि आप जीवन में कोई बड़ा काम करने जा रहे हैं या अपने करियर और बिजनेस को लेकर कोई नई योजना (Future Plans) बना रहे हैं, तो उसका ढिंढोरा कभी भी दूसरों के सामने न पीटें। जब तक आपका कार्य पूरी तरह से संपन्न न हो जाए, तब तक उसे गुप्त रखना ही समझदारी है। यदि आपके शत्रुओं या प्रतिस्पर्धियों को आपकी योजना का पहले ही पता चल गया, तो वे आपके काम में बाधा खड़ी कर सकते हैं या आपकी रणनीति का गलत फायदा उठा सकते हैं।अपने घरेलू विवाद और जीवनसाथी की कमियों को रखें बिल्कुल गुप्तचाणक्य नीति के अनुसार, किसी भी बुद्धिमान व्यक्ति को अपने घर-परिवार की अंदरूनी बातें, माता-पिता या जीवनसाथी के साथ हुए वैचारिक मतभेदों और कमियों की चर्चा समाज में या अपने मित्रों के बीच भी भूलकर नहीं करनी चाहिए। परिवार के भीतर की बातें बाहर जाने पर लोग आपकी स्थिति का उपहास उड़ाते हैं और पीठ पीछे आपका मजाक बनाते हैं। समाज में अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए घरेलू कलह को घर की चारदीवारी के भीतर ही सुलझाना सबसे उत्तम माना गया है।धन की हानि और अपनी आर्थिक तंगी का जिक्र दूसरों से करने से बचेंआज के भौतिकवादी युग में पैसा ही व्यक्ति की ताकत और सम्मान का पैमाना माना जाता है। आचार्य चाणक्य का मत है कि यदि आपको व्यापार में कोई बड़ा घाटा हुआ है या आप इस समय आर्थिक तंगी (Financial Crisis) के दौर से गुजर रहे हैं, तो इस बात को हमेशा छिपाकर रखें। अपनी लाचारी और कंगाली का रोना दूसरों के सामने रोने से लोग आपकी मदद करने के बजाय आपसे दूरी बना लेते हैं और समाज में आपका सम्मान कम हो जाता है। संकट के समय धैर्य रखकर स्वयं ही मार्ग निकालना चाहिए।अपने साथ हुए धोखे और जीवन में मिले अपमान को कभी न बताएंयदि जीवन में कभी किसी करीबी व्यक्ति ने आपके साथ विश्वासघात या धोखा किया है, अथवा किसी भरी सभा में आपका घोर अपमान हुआ है, तो उस घटना को अपने तक ही सीमित रखें। दूसरों को अपने अपमान की कहानी सुनाने से वे आपके प्रति सहानुभूति दिखाने का नाटक तो कर सकते हैं, लेकिन मन ही मन वे आपको कमजोर और अक्षम समझने लगते हैं। अपनी गरिमा और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए ऐसी कड़वी यादों को छुपाकर रखना ही श्रेष्ठ कूटनीति है।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक लाइफस्टाइल सर्च पर क्यों ट्रेंड हो रहा है यह विषयआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के दौर में युवा पीढ़ी अपनी मानसिक शांति, करियर ग्रोथ और पर्सनालिटी डेवलपमेंट के लिए चाणक्य नीति के सिद्धांतों को इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रही है। एआई सर्च इंजनों पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि प्राचीन काल के ये सिद्धांत आज के कॉर्पोरेट जगत और सोशल मीडिया के दौर में कैसे लागू किए जा सकते हैं। आध्यात्मिक विश्लेषकों का मानना है कि इन गुप्त बातों को छिपाकर रखने की कला ही आज के समय में डिप्रेशन और मानसिक तनाव से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में बाहरी कलाकारों (Outsiders) के संघर्ष और भाई-भतीजावाद (Nepotism) को लेकर लंबे समय से बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच इंडस्ट्री की नेशनल अवार्ड विनर और कद्दावर अभिनेत्री कृति सेनन ने नेपोटिज्म के मुद्दे पर एक ऐसा बेबाक और चुभने वाला बयान दे दिया है, जिसने बी-टाउन के गलियारों में हलचल मचा दी है। कृति सेनन ने दोटूक शब्दों में स्वीकार किया है कि फिल्म इंडस्ट्री में स्टारकिड्स को बिना किसी खास टैलेंट या साबित किए बिना भी बड़े प्रोजेक्ट्स और मौके बहुत आसानी से मिल जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने इंडस्ट्री के दो सबसे बड़े नाम रणबीर कपूर और आलिया भट्ट को लेकर भी अपनी एक खास राय साझा की है, जो इस समय सोशल मीडिया पर टॉक ऑफ द टाउन बनी हुई है।स्टारकिड्स को मिलने वाले प्रिविलेज पर कृति सेनन का बड़ा दर्दएक हालिया इंटरव्यू के दौरान जब कृति सेनन से आउटसाइडर्स के संघर्ष और स्टारकिड्स को मिलने वाले विशेषाधिकारों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी ईमानदारी से अपनी बात रखी। कृति ने कहा कि एक बाहरी कलाकार के तौर पर आपको खुद को साबित करने के लिए बेहद सीमित और गिने-चुने मौके मिलते हैं, जहां एक भी गलती आपके करियर को खत्म कर सकती है। वहीं दूसरी तरफ, स्टारकिड्स के पास यह प्रिविलेज होता है कि अगर उनकी पहली या दूसरी फिल्म फ्लॉप भी हो जाए, या उनमें शुरुआत में टैलेंट की कमी भी दिखे, तो भी बड़े निर्माता-निर्देशक उन्हें लगातार नए और बड़े मौके देते रहते हैं।रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के टैलेंट को लेकर क्या बोलीं कृतिइंटरव्यू में जब नेपोटिज्म के उदाहरणों के बीच रणबीर कपूर और आलिया भट्ट जैसे बड़े सितारों का नाम सामने आया, तो कृति सेनन ने उनकी जमकर तारीफ भी की। कृति ने स्पष्ट किया कि हालांकि इंडस्ट्री में नेपोटिज्म का फायदा मिलता है, लेकिन हमें रणबीर कपूर और आलिया भट्ट जैसे कलाकारों के बेमिसाल टैलेंट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कृति के मुताबिक, आलिया और रणबीर बेहद गॉड-गिफ्टेड और शानदार अभिनेता हैं। उन्होंने साबित किया है कि उन्हें जो भी मौके मिले, उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय के दम पर खुद को उस मुकाम के काबिल बनाया है और आज वे देश के सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में गिने जाते हैं।आउटसाइडर्स की फिल्मों को थिएटर्स में नहीं मिलता शुरुआती सपोर्टकृति सेनन ने सिनेमाघरों और दर्शकों के नजरिए पर भी एक कड़ा सच सामने रखा। उन्होंने कहा कि अक्सर जब किसी आउटसाइडर या नए कलाकार की फिल्म आती है, तो लोग उसे देखने सिनेमाघरों तक नहीं जाते, जिससे फिल्म को अच्छी ओपनिंग नहीं मिलती। इसके विपरीत, स्टारकिड्स की फिल्मों को लेकर मीडिया हाइप और दर्शकों के बीच उत्सुकता पहले से ही बहुत ज्यादा होती है। कृति ने दर्शकों से अपील की है कि वे अच्छी कहानियों और बाहरी कलाकारों की फिल्मों को भी थिएटर्स में जाकर उतना ही प्यार और सपोर्ट दें, तभी इंडस्ट्री में वास्तविक संतुलन बन पाएगा।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक सिनेमा सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना कृति का यह बयानआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल सर्च इंजन के दौर में सिनेमा लवर्स कृति सेनन के इस इंटरव्यू, नेपोटिज्म पर उनकी टिप्पणी और रणबीर-आलिया से जुड़े बयानों को लगातार सर्च कर रहे हैं। फिल्म समीक्षकों और विश्लेषकों का मानना है कि कृति सेनन ने बिना किसी डर के इंडस्ट्री की इस कड़वी हकीकत को सामने रखा है। एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि क्या कृति के इस बेबाक बयान के बाद बॉलीवुड के बड़े प्रोडक्शन हाउसेज और स्टारकिड्स की तरफ से कोई नई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।
कन्नड़ अभिनेत्री कृषि थपंडा के आवास में मिला पुरुष का शव
बेंगलूरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरु में कन्नड़ अभिनेत्री कृषि थपंडा के फ्लैट में एक पुरुष का शव संदेहास्पद परिस्थितियों में पाया गया है। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घटना तब सामने आई, जब उस व्यक्ति को आवासीय परिसर के भीतर अचेत अवस्था में पाया गया। प्रारंभिक सूचनाओं से […] The post कन्नड़ अभिनेत्री कृषि थपंडा के आवास में मिला पुरुष का शव appeared first on Sabguru News .
बॉलीवुड के 'खिलाड़ी' यानी सुपरस्टार अक्षय कुमार और भोजपुरी सिनेमा की सबसे मशहूर व खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार अक्षरा सिंह की एक बेहद खास मुलाकात ने इस वक्त सोशल मीडिया से लेकर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री तक भारी हलचल मचा दी है। भोजपुरी क्वीन अक्षरा सिंह बॉलीवुड के एक्शन स्टार अक्षय कुमार की सादगी और उनके काम के प्रति समर्पण की पूरी तरह से मुरीद हो गई हैं। अक्षरा सिंह ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर अक्षय कुमार के साथ कुछ बेहद शानदार और दिलकश तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए अक्षरा सिंह ने अक्षय कुमार की तारीफों के ऐसे कसीदे पढ़े हैं, जिसे फैंस द्वारा खूब पसंद और शेयर किया जा रहा है।तस्वीरों में दिखी दोनों स्टार्स की बेहतरीन बॉन्डिंग और सादगीसामने आई इन लेटेस्ट तस्वीरों में बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार और भोजपुरी की शेरनी अक्षरा सिंह एक साथ बेहद खुश नजर आ रहे हैं। जहां अक्षय कुमार अपने हमेशा वाले कैजुअल और डैशिंग लुक में दिखाई दे रहे हैं, वहीं अक्षरा सिंह भी पारंपरिक और खूबसूरत लिबास में बेहद जच रही हैं। तस्वीरों में दोनों कलाकारों के बीच की गजब की बॉन्डिंग और एक-दूसरे के प्रति सम्मान साफ तौर पर देखा जा सकता है। यह तस्वीरें इंटरनेट पर आते ही चंद मिनटों में वायरल हो गई हैं और फैंस इस नई ऑन-स्क्रीन या ऑफ-स्क्रीन जोड़ी पर जमकर प्यार बरसा रहे हैं।अक्षरा सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर जताया अक्षय कुमार का आभारअक्षरा सिंह ने इन खूबसूरत तस्वीरों के साथ एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाला कैप्शन भी लिखा है। उन्होंने अक्षय कुमार की विनम्रता और डाउन-टू-अर्थ स्वभाव की जमकर सराहना की। अक्षरा ने लिखा, सिनेमा जगत के इतने बड़े दिग्गज और बेहतरीन इंसान अक्षय कुमार सर से मिलना हमेशा ही एक अद्भुत अनुभव होता है। आपकी सादगी और काम के प्रति आपकी लगन हर किसी को प्रेरित करती है। इस खास मुलाकात और समय देने के लिए मैं आपकी दिल से बेहद आभारी हूं। अक्षरा के इस पोस्ट पर फैंस लगातार कमेंट्स कर रहे हैं कि दोनों को जल्द ही किसी बड़े प्रोजेक्ट में एक साथ काम करना चाहिए।मुंबई से लेकर यूपी-बिहार के सिनेमाई गलियारों तक नए प्रोजेक्ट्स के कयास तेजभौगोलिक और रीजनल फिल्म इंडस्ट्री (Geographical and Regional Film Industry) के लिहाज से इस मुलाकात के कई बड़े सियासी और सिनेमाई मायने निकाले जा रहे हैं। मुंबई के बॉलीवुड गलियारों से लेकर पटना और लखनऊ के भोजपुरी सिनेमा जगत तक यह कयास बेहद तेज हो गए हैं कि क्या अक्षरा सिंह जल्द ही अक्षय कुमार की किसी आने वाली बड़ी बॉलीवुड फिल्म का हिस्सा बनने जा रही हैं या फिर यह किसी बड़े ब्रांड एंडोर्समेंट या म्यूज़िक वीडियो का हिस्सा है। अक्षरा सिंह का यूपी और बिहार में बहुत बड़ा और मजबूत जनाधार है, जिसका सीधा फायदा किसी भी पैन-इंडिया प्रोजेक्ट को मिल सकता है।जेनेरेटिव एआई और आधुनिक एंटरटेनमेंट सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बनी है यह मुलाकातआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के दौर में देश भर के सिनेमा लवर्स अक्षय कुमार और अक्षरा सिंह की इन नई तस्वीरों, उनकी मुलाकात की असली वजह और अपकमिंग फिल्मों को लेकर लगातार सर्च कर रहे हैं। इंटरनेट पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि क्या भोजपुरी इंडस्ट्री की यह टॉप एक्ट्रेस अब बॉलीवुड में एक बड़ा धमाका करने के लिए तैयार है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि क्षेत्रीय सिनेमा के बड़े सितारों का बॉलीवुड के महास्टार्स के साथ इस तरह का कोलैबोरेशन भारतीय सिनेमा के बदलते और आधुनिक दौर की एक बेहद खूबसूरत और सकारात्मक तस्वीर पेश करता है।
अलवर के टहला में 5 वर्षीय बालिका को जंगल में ले जाकर रेप
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के टहला थाना क्षेत्र में बुधवार को एक पांच वर्ष की बालिका से दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि आरोपी एक मोटर साइकिल पर आया और उस बालिका को अपने साथ ले गया। उसने जंगल में जाकर बालिका से दुष्कर्म किया। इसकी जानकारी […] The post अलवर के टहला में 5 वर्षीय बालिका को जंगल में ले जाकर रेप appeared first on Sabguru News .
वीडियो प्रकरण: राघव चड्ढा बोले, भगवंत मान को सीएम पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगंवत मान से जुड़े उस कथित फर्जी वीडियो को लेकर हमला बोला, जिसमें वो गुरु का अपमान करते हुए नजर आ रहे हैं।
मिशन 2027 के लिए UP भाजपा की टीम तैयार, जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर जोर, देखें पूरी सूची
UP BJP new team: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (Uttar Pradesh Assembly Elections 2027) के सियासी महासमर को फतह करने के लिए बीजेपी ने अपनी नई 'पलटन' मैदान में उतार दी है। यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम की आधिकारिक घोषणा कर ...
अमरनाथ यात्रा 2026 : कश्मीर पुलिस का प्रोजेक्ट हाक आई, बाज की आंख से 360 डिग्री निगरानी
Amarnath Yatra 2026 : 3 जुलाई से आरंभ हो रही वार्षिक अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह से सुरक्षित बनाने की खातिर सुरक्षाबलों ने अब आपरेशन हाक आई अर्थात बाज की आंख शुरू किया है ताकि परिंदा भी पर न मार सके। अधिकारियों ने बताया कि अमरनाथ यात्रा-2026 के ...
60 सेकेंड में 2 भीषण भूकंप: वेनेजुएला के कई शहर मलबे में तब्दील, हजारों के दबे होने की आशंका!
लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला (Venezuela) से इस वक्त की सबसे दर्दनाक और दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। बुधवार, 24 जून 2026 की शाम (स्थानीय समयानुसार) वेनेजुएला में प्रकृति ने ऐसा तांडव मचाया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। महज 60 सेकंड (एक मिनट) ...
महाराष्ट्र के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीति को लेकर बुलाई गई महाविकास अघाड़ी (MVA) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक में जबरदस्त अंदरूनी तनाव देखने को मिला है। बैठक के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सहयोगियों के सामने एक ऐसा तीखा और चुभने वाला सवाल दाग दिया, जिसने अघाड़ी के भीतर चल रही खींचतान को पूरी तरह से सतह पर ला दिया है। उद्धव ठाकरे ने दोटूक लहजे में पूछ लिया कि 'क्या हम सच में एकजुट हैं?', जिसके बाद मीटिंग में मौजूद कांग्रेस और एनसीपी (शरद चंद्र पवार) के दिग्गज नेता भी कुछ पल के लिए सन्नाटे में आ गए।बंद कमरे में उद्धव ठाकरे के तीखे तेवर से मचा हड़कंपसीट शेयरिंग और स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच चल रहे मतभेदों को लेकर बुलाई गई इस समन्वय बैठक में माहौल उस समय बेहद गंभीर हो गया जब उद्धव ठाकरे ने अपनी बात रखनी शुरू की। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उद्धव ठाकरे हाल के दिनों में अघाड़ी के कुछ घटक दलों के बयानों और रवैये से खासे नाराज दिखे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर हमें एक साथ मिलकर लड़ना है, तो केवल मंच पर हाथ उठाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर भी हमारे कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच वास्तविक एकजुटता दिखनी चाहिए।सीट शेयरिंग और अंदरूनी खींचतान पर हुई खुलकर बातइस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में महाराष्ट्र की क्षेत्रीय और स्थानीय राजनीति (Local Politics of Maharashtra) को ध्यान में रखते हुए कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। मुंबई, पुणे, नागपुर और ठाणे जैसे बड़े शहरों की प्रमुख सीटों पर दावों को लेकर अघाड़ी के भीतर मचे घमासान पर भी खुलकर बात हुई। उद्धव ठाकरे ने सहयोगियों को याद दिलाया कि अतीत में आपसी मतभेदों के कारण गठबंधन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए इस बार किसी भी तरह की भितरघात या अंतर्कलह को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में मौजूद अन्य वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और एकजुटता का भरोसा दिलाया।स्थानीय स्तर और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच क्या हैं समीकरणअघाड़ी की इस बैठक का सीधा असर महाराष्ट्र के हर जिले और तालुका स्तर के कार्यकर्ताओं पर पड़ने वाला है। असल में, जमीन पर कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के स्थानीय नेताओं के बीच कई जगहों पर वर्चस्व की जंग चल रही है। महाविकास अघाड़ी के शीर्ष नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे अपने-अपने कैडर को एक साथ आने और एक-दूसरे के उम्मीदवारों को जिताने के लिए कैसे राजी करें। उद्धव ठाकरे का यह चुभने वाला सवाल इसी जमीनी हकीकत का नतीजा माना जा रहा है, जिसने गठबंधन की चिंताओं को उजागर कर दिया है।एआई और आधुनिक डिजिटल सर्च में क्यों ट्रेंड कर रहा है एमवीए का यह विवादआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया के दौर में महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर यूजर्स लगातार सर्च कर रहे हैं। इंटरनेट पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि क्या उद्धव ठाकरे का यह कड़ा रुख महाविकास अघाड़ी में किसी नई दरार का संकेत है या फिर यह सहयोगियों पर ज्यादा सीटें हासिल करने का एक दबाव बनाने का कूटनीतिक तरीका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे का यह बयान अघाड़ी के लिए एक वेक-अप कॉल की तरह है, जिसे अगर समय रहते नहीं सुलझाया गया तो महायुति गठबंधन को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
राम मंदिर पर स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से बवाल, महामंडलेश्वर ने 5 लाख इनाम का किया ऐलान
उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने भगवान राम को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा कि अगर भगवान राम में ताकत होती, तो जिस समय लुटेरे ने चोरी की, तभी वो भस्म हो जाता। लेकिन, उस चोर का बाल भी बांका नहीं हुआ। बयान पर बवाल मच गया और ...
वेनेजुएला की मदद के लिए आगे आया भारत, PM मोदी ने जताया गहरा दुख, कहा— संकट में हम आपके साथ
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद मची महातबाही पर भारत ने गहरी संवेदना और एकजुटता प्रकट की है। वैश्विक संकटों के समय हमेशा 'वसुधैव कुटुंबकम' की नीति पर चलने वाले भारत ने एक बार फिर संकटमोचक की भूमिका निभाते हुए वेनेजुएला की हर संभव मदद करने का बड़ा ऐलान किया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भीषण प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने वेनेजुएला के नागरिकों और वहां की सरकार को ढाढस बंधाते हुए साफ शब्दों में कहा है कि संकट की इस बेहद कठिन घड़ी में भारत पूरी तरह से आपके साथ खड़ा है।पीएम मोदी ने ट्वीट कर जताया दुख, एकजुटता का दिया भरोसाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप और उसके कारण हुए जान-माल के भारी नुकसान पर गहरी चिंता जताई। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वेनेजुएला में भूकंप से मची तबाही की खबर से वे बेहद मर्माहत हैं। उन्होंने इस त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिया कि भारत इस मानवीय संकट से निपटने और प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए हर तरह का सहयोग देने को तैयार है।भारत भेजेगा बड़ी राहत सामग्री और रेस्क्यू टीमेंविदेशी मामलों के जानकारों और सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार ने वेनेजुएला के लिए एक बड़ा राहत पैकेज (Humanitarian Aid) तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। आपदा प्रबंधन विभाग और विदेश मंत्रालय के आपसी समन्वय से प्रभावित इलाकों में जल्द ही जीवन रक्षक दवाएं, मेडिकल उपकरण, टेंट, खाने-पीने की जरूरी वस्तुएं और आपातकालीन राहत सामग्री भेजी जाएगी। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत की अनुभवी राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की विशेष टीमों को भी रवाना किया जा सकता है।वैश्विक मंच पर 'ग्लोबल साउथ' के मददगार के रूप में उभरा भारतभारत का यह त्वरित कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी मजबूत कूटनीति और 'ग्लोबल साउथ' के देशों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे पहले भी तुर्की, नेपाल और अन्य देशों में आए भूकंपों के दौरान भारत ने 'ऑपरेशन दोस्त' जैसी मानवीय मुहिम चलाकर दुनिया भर का दिल जीता है। स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर इस फैसले की बेहद सराहना हो रही है। नई दिल्ली में स्थित विदेशी दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने संकट के समय तत्परता दिखाने के लिए भारतीय नेतृत्व की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।एआई और जेनेरेटिव सर्च पर भारत की इस मुहिम की हो रही है चर्चाआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वेनेजुएला भूकंप और भारत की मदद को लेकर लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स यह जानने को बेहद उत्सुक हैं कि भारत की ओर से वेनेजुएला को किस तरह की तकनीकी और सैन्य मदद दी जा रही है। रक्षा और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दूरदराज के देशों में भी संकट के समय सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाकर भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह वैश्विक पटल पर एक बेहद जिम्मेदार और भरोसेमंद महाशक्ति (Responsible Global Power) के रूप में स्थापित हो चुका है।
तमिलनाडु के लाखों-करोड़ों लोगों के लिए परिवहन और सुगम यात्रा को लेकर इस वक्त की बेहद सुखद और सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य की थलापति विजय सरकार ने आम जनता और दैनिक यात्रियों को एक बेहद शानदार और बड़ा तोहफा देने की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री थलापति विजय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने और परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक बनाने के लिए एक मेगा कनेक्टिविटी और ट्रांसपोर्ट प्लानिंग का रोडमैप तैयार किया है। सरकार के इस कदम से न सिर्फ यात्रा का समय बचेगा, बल्कि आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी काफी कम हो जाएगा।थलापति विजय सरकार का क्या है मेगा ट्रांसपोर्टेशन विजनराज्य सरकार द्वारा तैयार की गई इस नई और महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य तमिलनाडु के हर कोने को बेहतर और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) से जोड़ना है। थलापति विजय सरकार ने साफ किया है कि आम जनता को सफर के दौरान किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सरकारी बस सेवाओं का आधुनिकीकरण करने, प्रमुख शहरों में नई मेट्रो और रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण रूटों पर परिवहन सेवाओं को ज्यादा सुलभ और किफायती बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।चेन्नई से लेकर सुदूर गांवों तक आसानी से पूरी होगी यात्राइस बड़े तोहफे का सबसे सीधा और बड़ा फायदा राज्य के हर छोटे-बड़े जिले और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और त्रिची जैसे महानगरों में यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए नए बाईपास, फ्लाईओवर और इंटरलिंक्ड बस टर्मिनलों के निर्माण को रफ्तार दी जा रही है। वहीं, स्थानीय और सुदूर ग्रामीण अंचलों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त मिनी बसें और विशेष परिवहन रूट शुरू किए जा रहे हैं, ताकि हर नागरिक अपनी यात्रा को बिना किसी रुकावट के बेहद आसानी से पूरा कर सके।महिलाओं और दैनिक यात्रियों को मिलेगा सबसे बड़ा रणनीतिक लाभसरकार की इस नई ट्रांसपोर्ट प्लानिंग के केंद्र में आम जनता, महिलाएं और रोजाना दफ्तर जाने वाले नौकरीपेशा लोग शामिल हैं। थलापति विजय सरकार ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि डिजिटल टिकटिंग और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम को लागू किया जाए, जिससे यात्री अपने स्मार्टफोन से ही बसों और ट्रेनों की लाइव लोकेशन देख सकें। स्थानीय प्रशासन के सहयोग से हर जिले के प्रमुख परिवहन केंद्रों पर सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सफर बेहद सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा।एआई और आधुनिक जेनेरेटिव सर्च में क्यों ट्रेंड हो रही है यह योजनाआज के आधुनिक दौर में एआई और जेनेरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) प्लेटफॉर्म्स पर तमिलनाडु के इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और थलापति विजय सरकार के फैसलों को लेकर भारी सर्च देखा जा रहा है। देश भर के राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषक थलापति विजय सरकार के इस लोक-कल्याणकारी कदम को राज्य के विकास के लिए एक गेम-चेंजर मान रहे हैं। डिजिटल मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग इसे सरकार का एक बेहतरीन और सराहनीय कदम बता रहे हैं, जो सीधे तौर पर करोड़ों आम लोगों के जीवन को सुगम बनाने का काम करेगा।
भारत और पाकिस्तान के बीच बहने वाली नदियों और जल विवाद का इतिहास दशकों पुराना है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव के दौरान कई बार पानी को एक बड़े रणनीतिक हथियार के रूप में देखा गया है। इतिहास में एक ऐसा ही बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला वाकया सामने आया था, जब भारत ने तकनीकी और रणनीतिक कदमों के तहत सिंधु नदी तंत्र (Indus River System) के पानी के बहाव को नियंत्रित या रोक दिया था। इसके बाद पूरा पाकिस्तान भीषण जल संकट की कगार पर खड़ा हो गया था, लेकिन तभी कुदरत ने एक ऐसा यू-टर्न लिया कि पूरी कहानी ही बदल गई।जब बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मचाने की स्थिति में था पाकिस्तानसिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) के तहत आने वाली नदियों पर भारत द्वारा परियोजनाओं के निर्माण और पानी के बहाव को नियंत्रित किए जाने के बाद पाकिस्तान के कृषि प्रधान इलाकों में हड़कंप मच गया था। पाकिस्तान की लाइफलाइन मानी जाने वाली इन नदियों का पानी कम होते ही वहां की फसलों पर संकट मंडराने लगा था और देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा होने लगे थे। पाकिस्तानी हुक्मरान और वहां का मीडिया भारत के इस कदम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शोर मचाने की तैयारी में जुटा था।तभी आई आसमानी आफत और तबाही में बदल गया सूखाअभी पाकिस्तान जल संकट से निपटने की रणनीतियां ही बना रहा था कि अचानक मौसम ने करवट ली। जिन इलाकों में पानी की कमी से जमीन सूख रही थी, वहां रिकॉर्डतोड़ मानसूनी बारिश और ग्लेशियर पिघलने के कारण अचानक विनाशकारी बाढ़ (Devastating Flood) आ गई। नदियों का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि जो पाकिस्तान कुछ दिनों पहले तक पानी मांग रहा था, वही देश अब पानी के सैलाब में डूबने लगा। इस कुदरती मार ने पूरे परिदृश्य को पूरी तरह से पलट कर रख दिया।बाढ़ ने कैसे पलट दी भारत और पाकिस्तान की पूरी कूटनीतिक कहानीइस अचानक आई बाढ़ के बाद पाकिस्तान का पूरा ध्यान जल संकट से हटकर आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों पर केंद्रित हो गया। भारत के खिलाफ जो प्रोपेगैंडा या अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश पाकिस्तान कर रहा था, वह पूरी तरह फुस्स हो गई। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान भी पाकिस्तान की बाढ़ त्रासदी पर चला गया। इस तरह कुदरत की एक अजीब और भयानक हलचल ने दोनों देशों के बीच चल रहे इस बड़े जल विवाद और कूटनीतिक तनातनी की पूरी दिशा ही बदल दी।एआई सर्च और आज के दौर में सिंधु जल समझौते की जमीनी हकीकतआज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल युग में भी सिंधु नदी का पानी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) मुद्दा बना हुआ है। भारत अब अपनी नदियों के पानी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए जम्मू-कश्मीर और पंजाब में कई बड़े बांधों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स का निर्माण तेजी से कर रहा है। रक्षा और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पानी पर नियंत्रण रखने की भारत की यह क्षमता पाकिस्तान पर हमेशा एक बड़ा रणनीतिक दबाव बनाए रखती है, जिसे चाहकर भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
NATO को नसीहत देने चले थे डोनाल्ड ट्रंप, उल्टा वैश्विक मंच पर सुननी पड़ गई खरी-खरी
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीतिक गलियारों से इस वक्त की बेहद दिलचस्प और बड़ी खबर सामने आ रही है। अक्सर वैश्विक संगठनों और रक्षा खर्चों को लेकर नाटो (NATO) देशों पर निशाना साधने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बार उल्टा करारा जवाब मिल गया है। नाटो को उसकी जिम्मेदारियां याद दिलाने और नसीहत देने निकले ट्रंप को सहयोगी देशों के तीखे रुख और खरी-खरी बातों का सामना करना पड़ा है। इस तनातनी के बीच ईरान युद्ध से जुड़े कुछ ऐसे ऐतिहासिक और रणनीतिक घटनाक्रम भी दोबारा चर्चा में आ गए हैं, जहां अमेरिका को नाटो सहयोगियों से एक बेहद बड़ी और निर्णायक मदद मिली थी।नसीहत देने निकले ट्रंप को रक्षा सहयोगियों ने दिखाया आईनावैश्विक सुरक्षा और रक्षा बजट में अमेरिकी हिस्सेदारी को लेकर ट्रंप लंबे समय से नाटो के सदस्य देशों पर दबाव बनाते रहे हैं। लेकिन हालिया बैठक और कूटनीतिक संवाद के दौरान पासा पूरी तरह पलट गया। नाटो के प्रमुख यूरोपीय सहयोगियों ने अमेरिकी नेतृत्व को साफ शब्दों में कह दिया कि वैश्विक सुरक्षा केवल एकतरफा सौदा नहीं है। सहयोगियों ने याद दिलाया कि जब भी अमेरिका संकट में रहा है, नाटो ने हमेशा एक मजबूत ढाल की तरह उसका साथ दिया है। इस दोटूक जवाब ने अमेरिकी थिंक-टैंक और रणनीतिकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।ईरान युद्ध के वो पन्ने जब नाटो बना अमेरिका का सबसे बड़ा मददगारइस कूटनीतिक खींचतान के बीच इतिहास के वो पन्ने भी पलट कर सामने आ रहे हैं जब ईरान के साथ उपजे सैन्य संकट और युद्ध जैसी स्थितियों में नाटो ने अमेरिका की सबसे बड़ी मदद की थी। मध्य-पूर्व (Middle East) में जब भी अमेरिकी हितों पर आंच आई या ईरान समर्थित ताकतों से टकराव हुआ, तब नाटो के खुफिया नेटवर्क, रडार सिस्टम और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट ने अमेरिकी सेना को बेहद सटीक और समय पर जानकारी मुहैया कराई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नाटो देशों के एयरस्पेस और बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति न मिलती, तो अमेरिका के लिए मध्य-पूर्व की जंग लड़ना बेहद मुश्किल हो जाता।स्थानीय और क्षेत्रीय सुरक्षा पर ट्रंप के इस रुख का क्या होगा असरडोनाल्ड ट्रंप के इस आक्रामक रुख का असर केवल ब्रसेल्स या वॉशिंगटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव यूरोपीय और एशियाई देशों की स्थानीय और क्षेत्रीय सुरक्षा (Regional Security) प्राथमिकताओं पर पड़ रहा है। कई यूरोपीय देशों ने अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने और खुद के स्वतंत्र रक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ, ईरान और उसके पड़ोसी देशों की नजरें भी इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और नाटो के बीच बढ़ती यह दूरी उनके लिए मध्य-पूर्व में कोई नया रणनीतिक फायदा लेकर आएगी।एआई और आधुनिक जेनेरेटिव सर्च में क्यों ट्रेंड कर रहा है यह मुद्दाआज के आधुनिक दौर में एआई और जेनेरेटिव सर्च इंजन (GEO) पर वैश्विक सुरक्षा से जुड़े इस विवाद को लेकर यूजर्स लगातार सवाल पूछ रहे हैं। इंटरनेट पर लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या नाटो और अमेरिका का यह विवाद वैश्विक स्तर पर किसी नए सैन्य समीकरण को जन्म दे सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की बयानबाजी भले ही घरेलू वोटर्स को लुभाने के लिए हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की कड़वाहट पश्चिमी देशों के सामूहिक सुरक्षा चक्र को कमजोर कर सकती है, जिसका सीधा फायदा रूस और चीन जैसे विरोधी खेमे उठा सकते हैं।
वेनेजुएला में आए हालिया विनाशकारी भूकंप ने एक बार फिर पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। प्रकृति के इस रौद्र रूप को देखकर हर कोई सहमा हुआ है, लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि यह तो सिर्फ एक झांकी है। धरती के भीतर होने वाली हलचल ने अतीत में कई बार ऐसा तांडव मचाया है जिससे बड़े-बड़े देशों का भूगोल और इतिहास हमेशा के लिए बदल गया। आज हम आपको दुनिया के उन 5 सबसे खतरनाक और महाविनाशकारी भूकंपों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके सामने आते ही इंसानी सभ्यता पूरी तरह बेबस नजर आई थी।चिली का महाभूकंप: जब रिक्टर स्केल पर मापी गई इतिहास की सबसे बड़ी तीव्रतासाल 1960 में दक्षिण अमेरिकी देश चिली में आया भूकंप विज्ञान के इतिहास में अब तक का सबसे भीषण भूगर्भीय झटका माना जाता है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता रिकॉर्ड 9.5 मापी गई थी। इस भूकंप ने न सिर्फ चिली में तबाही मचाई, बल्कि इसके कारण प्रशांत महासागर में उठी भयानक सूनामी की लहरों ने जापान, फिलीपींस और हवाई तक में भारी तबाही दर्ज की थी। धरती फटने और समंदर के उबलने का ऐसा खौफनाक मंजर दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा था।अलास्का का जलजला: जब मिनटों तक कांपती रही पूरी धरतीसाल 1964 में अमेरिका के अलास्का में आया भूकंप तीव्रता के मामले में दूसरे नंबर पर आता है। 9.2 की तीव्रता वाले इस भीषण जलजले ने करीब साढ़े चार मिनट तक लगातार धरती को हिलाकर रख दिया था। इस भूकंप की वजह से आई सूनामी और भूस्खलन ने कई तटीय कस्बों का नामोनिशान मिटा दिया था। गनीमत यह थी कि यह इलाका कम आबादी वाला था, वरना मौतों का आंकड़ा लाखों में पहुंच सकता था।सुमात्रा इंडोनेशिया: हिंद महासागर की वो काली सुबह जिसने भारत को भी रुलाया26 दिसंबर 2004 की वो सुबह कोई नहीं भूल सकता, जब इंडोनेशिया के सुमात्रा के पास समंदर के भीतर 9.1 तीव्रता का महाभूकंप आया। इस भूकंप के बाद हिंद महासागर में उठी दैत्याकार सूनामी की लहरों ने भारत, श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया सहित 14 देशों में मौत का तांडव मचाया था। इस त्रासदी में करीब 2 लाख 30 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, जिसमें भारत के तटीय इलाके भी बुरी तरह प्रभावित हुए थे।तोहोकू जापान: जब परमाणु रिएक्टर तक संकट में पड़ गए थेटेक्नोलॉजी के मामले में दुनिया के सबसे एडवांस देशों में शुमार जापान को साल 2011 में प्रकृति के सबसे क्रूर चेहरे का सामना करना पड़ा था। तोहोकू में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद आई विनाशकारी सूनामी ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया था। इस आपदा ने साबित कर दिया था कि इंसान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, कुदरत के कहर के आगे सब कुछ बौना है।कामचटका रूस: जब सोवियत संघ के इस हिस्से में डोली थी धरतीसाल 1952 में रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के कामचटका प्रायद्वीप में 9.0 तीव्रता का एक बेहद शक्तिशाली भूकंप आया था। इस भूकंप ने भी प्रशांत महासागर में बड़े पैमाने पर सूनामी की लहरें पैदा की थीं, जिसका असर हजारों किलोमीटर दूर हवाई द्वीपों तक देखा गया था। यह भूकंप इतना ताकतवर था कि इसने स्थानीय भौगोलिक संरचना को पूरी तरह से विकृत कर दिया था।एआई और आधुनिक भूगर्भ विज्ञान की नजर में भूकंप के बदलते पैटर्नआज के आधुनिक दौर में जेनेरेटिव एआई और एडवांस सिस्मोलॉजी (भूकंप विज्ञान) की मदद से वैज्ञानिक टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल को समझने की कोशिश कर रहे हैं। वेनेजुएला की ताजा घटना के बाद दुनिया भर के भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि पैसिफिक रिंग ऑफ फायर और एक्टिव फॉल्ट लाइन्स वाले क्षेत्रों में रहने वाले देशों को हमेशा हाई अलर्ट पर रहना होगा, क्योंकि भूकंप एक ऐसी आपदा है जिसकी सटीक भविष्यवाणी आज भी इंसानी तकनीक के दायरे से बाहर है।
पासपोर्ट पर सरकार का बड़ा बयान: यह नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं, जानिए क्या कहा विदेश मंत्रालय ने
Passport : विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं बल्कि एक यात्रा दस्तावेज है। सरकार के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेश में पहचान स्थापित करना है। 2025 में 1.5 करोड़ लोगों को ...
डिजिटल अरेस्ट केस: सीबीआई ने देश भर में 80 ठिकानों पर एक साथ मारा छापा
'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम को बढ़ावा देने वाले साइबर क्राइम नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने 'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत 60 स्पेशल टीमें बनाईं और 16 राज्यों – पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा – में 80 से ज्यादा जगहों पर एक साथ छापेमारी की।
UPI और नेट बैंकिंग फ्रॉड पर RBI का बड़ा फैसला, ग्राहकों को तुरंत मिलेगा मुआवजा
देश में बढ़ते डिजिटल ट्रांजैक्शन के बीच ऑनलाइन धोखाधड़ी (Digital Fraud) के मामलों में भी काफी तेजी आई है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने करोड़ों बैंक ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने यूपीआई (UPI) और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए होने वाले फ्रॉड को लेकर मुआवजे के नए और सख्त नियम तय कर दिए हैं। इस नए फैसले के बाद अब अगर कोई ग्राहक किसी भी तरह के डिजिटल फ्रॉड या स्कैम का शिकार होता है, तो उसे बैंक की तरफ से उचित मुआवजा मिलेगा और उसका डूबा हुआ पैसा सुरक्षित वापस मिल सकेगा।डिजिटल फ्रॉड में ग्राहकों को कब और कैसे मिलेगा पूरा मुआवजारिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, मुआवजे की राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि फ्रॉड के बारे में बैंक को कितनी जल्दी जानकारी दी गई है। अगर आपके खाते से कोई अनधिकृत लेनदेन (Unauthorized Transaction) होता है और इसमें आपकी कोई गलती नहीं है, तो तुरंत बैंक को सूचित करने पर आपको पूरा रिफंड मिलेगा। आरबीआई ने साफ किया है कि यदि तकनीकी खामी या बैंक की सुरक्षा में चूक के कारण फ्रॉड हुआ है, तो ग्राहक की शून्य देनदारी (Zero Liability) होगी और पूरा पैसा बैंक को अपनी तरफ से वापस करना होगा।यूपीआई और नेट बैंकिंग फ्रॉड पर क्या हैं आरबीआई की नई गाइडलाइंसनए नियमों के मुताबिक, डिजिटल फ्रॉड की स्थिति में बैंकों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर मामले की जांच पूरी करनी होगी। अगर ग्राहक अपनी तरफ से समय पर शिकायत दर्ज करा देता है, तो बैंक जांच पूरी होने तक उस रकम को ग्राहक के खाते में शैडो क्रेडिट (Shadow Credit) के रूप में जमा कर सकते हैं, ताकि ग्राहक को पैसों की दिक्कत न हो। आरबीआई का यह सख्त रुख देश के सभी सरकारी, निजी और सहकारी बैंकों पर समान रूप से लागू होगा, जिससे ग्राहकों का डिजिटल बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा और ज्यादा मजबूत होगा।स्थानीय स्तर पर क्या होगा असर और कैसे करें तुरंत शिकायतइस नई नीति का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय और ग्रामीण क्षेत्रों के उन बैंक ग्राहकों को मिलेगा जो अक्सर तकनीकी अज्ञानता के कारण साइबर ठगों का आसान शिकार बन जाते हैं। अब देश के किसी भी राज्य या जिले के ग्राहक को फ्रॉड होने पर परेशान होने की जरूरत नहीं है। जैसे ही आपके मोबाइल पर पैसे कटने का कोई संदिग्ध मैसेज आए, तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर नंबर, रजिस्टर्ड ईमेल या नजदीकी होम ब्रांच में जाकर इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इसके साथ ही सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (1930) पर भी तुरंत सूचना देना सुरक्षित रहेगा।एआई और जेनरेटिव सर्च के युग में सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग के जरूरी टिप्सआधुनिक एआई (AI) और जनरेटिव सर्च इंजन भी अब ग्राहकों को सुरक्षित बैंकिंग के तरीके खोजने में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नए मुआवजा नियमों का लाभ उठाने के लिए ग्राहकों को भी जागरूक रहना होगा। कभी भी अपना यूपीआई पिन (UPI PIN), नेट बैंकिंग पासवर्ड या ओटीपी (OTP) किसी के साथ साझा न करें। आरबीआई के नए नियमों के तहत यदि ग्राहक की लापरवाही (जैसे खुद ओटीपी शेयर करना) के कारण फ्रॉड होता है, तो मुआवजा मिलना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सतर्क रहें और किसी भी अनधिकृत गतिविधि पर तुरंत एक्शन लें।
शेयर बाजार की धमाकेदार शुरुआत, सेंसेक्स 400 अंक उछला और निफ्टी 24,100 के पार
भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह की शुरुआत बेहद शानदार और सकारात्मक रही है। ओपनिंग बेल बजते ही घरेलू स्टॉक मार्केट पूरी तरह से हरे निशान में नहाया हुआ नजर आया। मजबूत वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की चौतरफा खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांकों ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स करीब 400 अंकों की भारी बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 24,100 के पार निकल गया है।आईटी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में आई तूफानी तेजीआज के शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा चमक आईटी (Information Technology) और रियल्टी (Real Estate) सेक्टर के शेयरों में देखने को मिल रही है। दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूत लिवाली दर्ज की गई है, जिससे पूरे सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिला है। इसके साथ ही रियल्टी इंडेक्स भी आज सुबह से ही रॉकेट बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक बाजारों से आ रहे अच्छे संकेतों और तकनीकी कंपनियों के बेहतर आउटलुक के कारण निवेशक इन सेक्टर्स पर जमकर दांव लगा रहे हैं, जिससे बाजार की इस तेजी को और मजबूती मिल रही है।वैश्विक संकेतों और लोकल सेंटीमेंट्स ने बाजार को दिया सहाराआज सुबह एशियाई बाजारों से मिल रहे मजबूत और सकारात्मक संकेतों ने भारतीय निवेशकों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। अमेरिकी बाजारों में आई तेजी का सीधा असर आज हमारे घरेलू बाजार पर ओपनिंग के समय ही साफ तौर पर दिखाई दिया। इसके अलावा, देश के स्थानीय और क्षेत्रीय बाजारों से आ रहे मजबूत आर्थिक आंकड़े (Local Economic Data) और कॉर्पोरेट अर्निंग्स के बेहतर अनुमानों ने भी बाजार के सेंटीमेंट को बूस्ट करने का काम किया है। ओपनिंग मिनटों में ही चौतरफा खरीदारी आने से ट्रेडर्स काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।निफ्टी के इन शेयर्स में दिख रही है सबसे ज्यादा हलचलशुरुआती कारोबार में निफ्टी के टॉप गेनर्स की सूची में आईटी और रियल्टी दिग्गजों के साथ-साथ कुछ चुनिंदा बैंकिंग शेयर्स भी शामिल हैं। निवेशकों द्वारा छोटे और मझोले (Midcap & Smallcap) शेयरों में भी दिलचस्पी दिखाए जाने के कारण बाजार का चौतरफा आउटलुक काफी मजबूत नजर आ रहा है। बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर निफ्टी आज 24,100 के स्तर के ऊपर खुद को बनाए रखने में कामयाब रहता है, तो आने वाले ट्रेडिंग सेशन्स में हमें बाजार में और भी नए रिकॉर्ड बनते हुए दिखाई दे सकते हैं।निवेशकों और इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए आज क्या है विशेषज्ञों की रायबाजार के मौजूदा रुख को देखते हुए मार्केट एक्सपर्ट्स और तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि आज इंट्राडे ट्रेडर्स को 'बाय ऑन डिप्स' यानी हर छोटी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। निफ्टी के लिए अब 24,000 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट की तरह काम करेगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि आज के तेजी वाले माहौल में निवेशकों को आईटी और रियल्टी के साथ-साथ लार्ज-कैप शेयरों पर विशेष फोकस रखना चाहिए, लेकिन किसी भी नए निवेश से पहले स्टॉप-लॉस का कड़ाई से पालन करना बेहद जरूरी है।
सोने-चांदी में भारी गिरावट: सोना पहली बार $4000 के नीचे, चांदी भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर
कमोडिटी बाजार से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है। इस साल यह पहली बार हुआ है जब सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गई है। केवल सोना ही नहीं, बल्कि चांदी की चमक भी पूरी तरह फीकी पड़ गई है और वह भी अपने इस साल के सबसे निचले स्तर (Yearly Low) पर आ गई है।वैश्विक बाजारों में सोने का रिकॉर्ड स्तर टूटाअंतरराष्ट्रीय सराफा बाजार में बीते कुछ समय से चल रही उथल-पुथल के बाद सोने की कीमतों को बड़ा झटका लगा है। लगातार जारी बिकवाली के दबाव के कारण सोना इस साल पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े के नीचे बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक नीतियों में बदलाव, मजबूत होते डॉलर और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए गए फैसलों ने सोने की सुरक्षित निवेश वाली छवि पर थोड़ा दबाव बनाया है, जिससे कीमतों में यह तेज गिरावट आई है।चांदी की चमक भी पड़ी फीकी, साल के सबसे निचले स्तर परसोने के साथ-साथ औद्योगिक और आभूषण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली चांदी को भी तगड़ा झटका लगा है। चांदी की कीमतें भी अपने इस साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। औद्योगिक मांग में आई कमी और वैश्विक स्तर पर मंदी के डर ने चांदी की कीमतों को नीचे धकेलने का काम किया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब तक ग्लोबल मार्केट में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी नहीं आती, तब तक चांदी की कीमतों में रिकवरी थोड़ी धीमी रह सकती है।भारतीय बाजार (MCX) और स्थानीय सराफा पर क्या होगा असरवैश्विक बाजार में आई इस ऐतिहासिक गिरावट का सीधा और बड़ा असर भारतीय वायदा बाजार (MCX) के साथ-साथ आपके नजदीकी और स्थानीय सराफा बाजारों (Local Bullion Markets) पर भी देखने को मिलने वाला है। भारत में शादियों के सीजन और त्योहारों से ठीक पहले आई इस गिरावट से आम उपभोक्ताओं और आभूषण निर्माताओं के चेहरे खिल गए हैं। स्थानीय डीलरों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह मंदी कुछ दिन और टिकी रही, तो घरेलू स्तर पर सोने और चांदी के गहने काफी सस्ते हो सकते हैं, जिससे रिटेल काउंटर्स पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने की पूरी उम्मीद है।क्या अब सोना-चांदी खरीदने का है सही समयबाजार के दिग्गजों और कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि सोने का $4,000 से नीचे जाना लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक बेहतरीन मौका (Buying Opportunity) साबित हो सकता है। भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने को हमेशा से एक सुरक्षित संपत्ति माना गया है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस बड़ी गिरावट का फायदा उठाते हुए निवेशकों को घबराने के बजाय 'बाय ऑन डिप्स' यानी हर गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी करने की रणनीति अपनानी चाहिए।
सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की जरूरत, हर नागरिक बने डिजिटली जागरूक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है , जो बिना दस्तक दिए हमारे घरों तक पहुंच रहा है। सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ...
वेनेजुएला में 38 सेकंड में दो बड़े भूकंप, बेसबॉल मैच में भगदड़, मैदान छोड़ भागे खिलाड़ी और दर्शक
Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में गुरुवार सुबह 38 सेकंड्स के अंतराल में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंपों की वजह से तबाही मच गई है। हादसे में 10,000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। भूकंप ...
निर्जला एकादशी पर शर्बत क्यों बांटा जाता है, जानिए इसके फायदे
Nirjala Ekadashi Sharbat Distribution: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म के सबसे कठिन और पुण्यदायी व्रतों में से एक मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। चूंकि यह व्रत ज्येष्ठ मास की भीषण ...
हरियाणा में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा और शानदार मौका सामने आया है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने जेल विभाग के अंतर्गत ग्रुप सी (Group C) के 1238 पदों पर भर्ती के लिए विस्तृत नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत जेल वार्डर और असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट के पदों को भरा जाएगा। योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आज से ही ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।किस्म-किस्म के पदों के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता और उम्र सीमा की पूरी जानकारी नीचे विस्तार से दी गई है, जिसे आवेदन करने से पहले ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है।HSSC जेल वार्डर भर्ती 2026: एक नजर में समझें पूरा शेड्यूलइस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को तय समय सीमा के भीतर ही अपना फॉर्म सबमिट करना होगा। मुख्य तारीखें और जरूरी बातें इस प्रकार हैं:भर्ती बोर्ड का नाम: हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC)पद का नाम: जेल असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट और जेल वार्डरकुल वैकेंसी: 1238 पदआवेदन का माध्यम: पूरी तरह ऑनलाइनआवेदन करने की तारीख: 24 जून से 30 जून 2026 (रात 11:59 बजे तक)फॉर्म में सुधार (Correction Window): 1 जुलाई से 2 जुलाई 2026 (रात 11:59 बजे तक)चयन का तरीका: लिखित परीक्षा (Written Exam) और दस्तावेज सत्यापन (DV)आधिकारिक वेबसाइट: hssc.gov.inपदों का पूरा ब्यौरा: पुरुष और महिला उम्मीदवारों के लिए कितनी हैं सीटें?हरियाणा सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के आधार पर इन 1238 खाली पदों को अलग-अलग कैटेगरी और विभागों में बांटा गया है, जिसकी पूरी लिस्ट आप यहां देख सकते हैं:कैटेगरी नंबरपद का नामविभागकुल पद1असिस्टेंट जेल सुपरिटेंडेंट (पुरुष)जेल विभाग302असिस्टेंट जेल सुपरिटेंडेंट (महिला)जेल विभाग033वार्डर (महिला)जेल विभाग1124वार्डर (पुरुष)जेल विभाग1093कुल पदों की संख्या1238योग्यता और उम्र सीमा: कौन-कौन कर सकता है अप्लाई?इस भर्ती में केवल वही उम्मीदवार भाग ले सकते हैं जिन्होंने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) ग्रुप सी 2025 की परीक्षा पास की है। इसके अलावा पदों के हिसाब से अन्य जरूरी योग्यताएं नीचे दी गई हैं:असिस्टेंट जेल सुपरिटेंडेंट के लिए: उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन (Graduation) की डिग्री होनी चाहिए। साथ ही, 10वीं (मैट्रिक) में हिंदी या संस्कृत में से कोई एक विषय पढ़ा होना अनिवार्य है। इस पद के लिए उम्र सीमा 21 से 27 साल तय की गई है।जेल वार्डर के लिए: इस पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं (सीनियर सेकेंडरी) पास होना जरूरी है। इसके साथ ही 10वीं स्तर पर हिंदी या संस्कृत विषय का होना आवश्यक है। इस पद के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 25 साल होनी चाहिए।
हर सुबह की शुरुआत सिर्फ सूरज की नई किरणों से नहीं, बल्कि रसोई के बजट और गाड़ियों के ईंधन की नई कीमतों से भी होती है। आज यानी 25 जून 2026 को देश की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल और डीजल की ताजा दरें जारी कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर रोज सुबह 6 बजे ये दाम तय किए जाते हैं। आइए जानते हैं कि आज आपके शहर में ईंधन किस भाव पर मिल रहा है।दिल्ली, मुंबई से लखनऊ तक: प्रमुख शहरों में आज का ताजा भावदेश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय टैक्स (VAT) और माल ढुलाई की वजह से कीमतें अलग-अलग होती हैं। आज महानगरों और प्रमुख शहरों में तेल के दाम कुछ इस तरह हैं:नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹83.09 प्रति लीटरमुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹86.00 प्रति लीटरकोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 और डीजल ₹93.50 प्रति लीटरचेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹91.50 प्रति लीटरलखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.75 प्रति लीटरनोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹91.70 प्रति लीटरगुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 और डीजल ₹91.70 प्रति लीटरबेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 और डीजल ₹90.00 प्रति लीटरहैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹97.00 प्रति लीटरजयपुर: पेट्रोल ₹112.66 और डीजल ₹90.91 प्रति लीटरपटना: पेट्रोल ₹113.35 प्रति लीटरभुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 प्रति लीटरचंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 प्रति लीटरतिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 प्रति लीटरअहमदाबाद: डीजल ₹82.25 प्रति लीटरपुणे: डीजल ₹92.50 प्रति लीटरपिछले दो साल से बाजार में क्यों बनी हुई है स्थिरताअगर हम पिछले कुछ समय के ट्रेंड को देखें, तो मई 2022 में केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों द्वारा टैक्स में की गई कटौती के बाद से खुदरा कीमतों में एक बड़ी स्थिरता देखने को मिली है। हालांकि, इस बीच ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में कई बार बड़े उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को इसका सीधा झटका नहीं लगा है।इन 5 बड़े कारणों से तय होती है आपके शहर में तेल की कीमतपेट्रोल पंप पर आप जो कीमत चुकाते हैं, उसके पीछे मुख्य रूप से पांच कारक काम करते हैं:इंटरनेशनल क्रूड ऑयल रेट: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाली हर हलचल का असर यहां दिखता है।डॉलर बनाम रुपया: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल का लेन-देन अमेरिकी डॉलर में होता है। अगर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होता है, तो तेल का आयात महंगा हो जाता है।केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी और राज्य का वैट (VAT): ईंधन की कीमतों का एक बड़ा हिस्सा सरकारी टैक्स होता है। चूंकि हर राज्य का वैट अलग होता है, इसलिए लखनऊ और दिल्ली या मुंबई में तेल की कीमतें अलग-अलग हो जाती हैं।रिफाइनिंग कॉस्ट: कच्चे तेल को साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाने में आने वाली लागत भी अंतिम कीमत में जोड़ी जाती है।सप्लाई और डिमांड: त्योहारों या बदलते मौसम के दौरान जब अचानक गाड़ियां ज्यादा चलती हैं और मांग बढ़ती है, तो बाजार के समीकरण बदलते हैं।घर बैठे सिर्फ एक SMS से ऐसे जानें अपने शहर का ताजा रेटअगर आप बिना भाग-दौड़ किए अपने मोबाइल पर ही रोज का भाव जानना चाहते हैं, तो तेल कंपनियों ने इसके लिए बेहद आसान तरीका दिया है:Indian Oil (IOCL): अपने फोन के मैसेज बॉक्स में RSP [अपने शहर का कोड] टाइप करें और उसे 9224992249 पर भेज दें।BPCL: अपने शहर के कोड के साथ RSP लिखकर 9223112222 पर SMS करें।HPCL: अपने मोबाइल से HP Price लिखकर 9222201122 पर सेंड करें।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (NBFC Sector) में पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता को बढ़ाने के लिए एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने अब 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति (Asset Size) वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) को 'अपर लेयर' (NBFC-UL) कैटेगरी में रखने के नियमों को बेहद आसान और ठोस बना दिया है।आरबीआई के इस नए फैसले के बाद अब सबसे बड़ा असर देश के दिग्गज कॉर्पोरेट घराने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) पर पड़ने जा रहा है। नए और कड़े रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के कारण टाटा संस के लिए अब शेयर बाजार (Stock Market) में लिस्ट होने से बचने के सभी रास्ते लगभग बंद हो गए हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि रिजर्व बैंक का यह नया नियम क्या है और इससे टाटा संस की मुश्किलें क्यों बढ़ गई हैं।अब क्या है अपर लेयर NBFC की पहचान का नया पैमाना?पहले के नियमों (फ्रेमवर्क) के तहत, अपर लेयर NBFC की पहचान करने के लिए कंपनियों के आकार (Size), इंटरकनेक्टेडनेस (आपसी जुड़ाव) और उनकी जटिलता पर आधारित एक पेचीदा स्कोरिंग पद्धति (Scoring Method) का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अब केंद्रीय बैंक ने इस जटिल तरीके को हटाकर एक साफ और सीधा मानदंड अपना लिया है।नए संशोधन निर्देश, 2026 के अनुसार:1 लाख करोड़ का नियम: अब वे सभी NBFC अपर लेयर का हिस्सा होंगी, जिनका कुल एसेट साइज (संपत्ति का आकार) चालू वित्त वर्ष की लेटेस्ट ऑडिटेड बैलेंस शीट के अनुसार 1,00,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक है।हर 3 साल में समीक्षा: इस 1 लाख करोड़ रुपये की एसेट साइज सीमा की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी और हर 3 साल में इस लिमिट को दोबारा परखा जाएगा।ग्रुप एंटिटी के लिए नियम: यदि कोई NBFC किसी कमर्शियल बैंक की ग्रुप एंटिटी है और दोनों एक जैसा बिजनेस या गतिविधि कर रहे हैं, तो उस NBFC को सभी कड़े नियमों का पालन करना ही होगा, चाहे वह किसी भी लेयर में आती हो।स्केल बेस्ड रेगुलेशन (SBR) के तहत NBFC की 4 कैटेगरीरिजर्व बैंक वित्तीय जोखिम (Risk Profile) और देश की अर्थव्यवस्था के लिए उनके महत्व के आधार पर एनबीएफसी को रेगुलेट करता है। इसके तहत पूरे सेक्टर को चार स्तरों (Layers) में बांटा गया है:लेयर का नामकौन सी कंपनियां आती हैं इसमें?1. NBFC-बेस लेयर (NBFC-BL)सबसे निचले स्तर की कंपनियां, जिन पर कम नियम लागू होते हैं।2. NBFC-मिडिल लेयर (NBFC-ML)मध्यम आकार की एनबीएफसी।3. NBFC-अपर लेयर (NBFC-UL)1 लाख करोड़ रुपये से अधिक एसेट वाली शीर्ष कंपनियां, जिन पर कड़े नियम लागू होते हैं।4. NBFC-टॉप लेयर (NBFC-TL)यदि अपर लेयर की किसी कंपनी से सिस्टम को बहुत बड़ा जोखिम दिखता है, तो उसे इस टॉप लेयर में डाला जाता है।टाटा संस के लिए प्राइवेट बने रहने का रास्ता कैसे हुआ बंद?अपर लेयर एनबीएफसी को लेकर आए इस स्पष्टीकरण के बाद अब पूरा वित्तीय बाजार टाटा ग्रुप की पैरेंट कंपनी टाटा संस पर नजरें गड़ाए हुए है। टाटा संस वर्तमान में एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में रिजर्व बैंक के पास रजिस्टर्ड है।विवाद और पृष्ठभूमि:आरबीआई ने साल 2022 में ही टाटा संस को 'अपर-लेयर एनबीएफसी' की सूची में डाल दिया था। नियमों के मुताबिक, इस श्रेणी में आने वाली किसी भी कंपनी को तीन साल के भीतर यानी सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य था। लेकिन टाटा संस स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग की कड़ी बाध्यताओं से बचना चाहती थी, जिसके लिए उसने अपना सीआईसी (CIC) लाइसेंस रद्द करने और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी आरबीआई को दी थी।क्यों बढ़ीं मुश्किलें?इकोनॉमिक टाइम्स इंटेलिजेंस ग्रुप (ETIG) के ताजा वित्तीय विश्लेषण के मुताबिक, केवल स्टैंडअलोन बेसिस (Standalone Basis) पर ही टाटा संस की कुल संपत्ति लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की है। यह आरबीआई द्वारा तय की गई 1 लाख करोड़ रुपये की नई सीमा से बहुत ज्यादा है। वहीं कंपनी का कंसोलिडेटेड मार्केट कैप 300 अरब डॉलर से भी ऊपर जा चुका है।आरबीआई ने साफ कर दिया है कि वह नियमों में किसी भी कंपनी को कोई विशेष छूट नहीं देगा। ऐसे में टाटा संस का एसेट साइज बहुत बड़ा होने के कारण वह स्वतः ही अपर लेयर के दायरे में बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्पष्ट रुख के बाद टाटा संस के एक 'प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी बने रहने की बची-खुची संभावनाएं भी खत्म हो गई हैं और आने वाले समय में उसे भारतीय शेयर बाजार में अपना आईपीओ (IPO) लाना ही पड़ेगा।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आस-पास के इलाकों (Delhi-NCR) में रहने वाले लोगों को उमस भरी गर्मी के बीच आज राहत मिलने की उम्मीद है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, गुरुवार 25 जून को दिल्ली में दिनभर आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। इसके साथ ही दोपहर और शाम के समय तेज आंधी-तूफान (Thunderstorm) के साथ छिटपुट बारिश होने की प्रबल संभावना है।बता दें कि यह अनुमान बुधवार शाम को दिल्ली के कई हिस्सों में आई तेज धूल भरी आंधी और हवाओं के बाद आया है। मौसम में अचानक हुए इस बदलाव को देखते हुए आईएमडी ने दिल्ली-एनसीआर के लिए ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) जारी किया है और अगले कुछ घंटों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की चेतावनी दी है।दिल्ली में इस बार 18% कम बरसे बादल; मानसून का इंतजार बरकरारभले ही पिछले कुछ दिनों से दिल्ली और उसके सैटेलाइट शहरों (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद) में रुक-रुक कर प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं, लेकिन राजधानी को अभी भी दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) की मुख्य बौछारों का बेसब्री से इंतजार है। इस साल मानसून अपने तय समय से देरी से चल रहा है।आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में अब तक दिल्ली में केवल 39.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक 48.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। इसका मतलब है कि इस बार अब तक सामान्य से लगभग 18 फीसदी कम बारिश हुई है।आखिर क्यों अटक गया मानसून? जानिए मौसम वैज्ञानिकों का तर्कमौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून की लेटलतीफी के पीछे मुख्य भौगोलिक कारण बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) के ऊपर किसी मजबूत और अनुकूल कम दबाव वाले क्षेत्र (Low-Pressure System) का न बनना है। आमतौर पर यही वेदर सिस्टम नमी से भरी मानसूनी हवाओं को आगे धकेलते हुए उत्तर-पश्चिम भारत की ओर लाता है।हालांकि, मौसम विशेषज्ञों ने राहत की खबर देते हुए बताया है कि 25-26 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नया प्रभावी वेदर सिस्टम विकसित हो रहा है। इसके सक्रिय होने से मानसून की रफ्तार बढ़ेगी और जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून के दिल्ली पहुंचने की पूरी संभावना है।तापमान रहेगा सामान्य, लेकिन 'फील लाइक' टेम्परेचर 45C के पारमौसम विभाग के अनुसार, आज गुरुवार को गरज-चमक वाले बादल बनने की वजह से दिल्ली का अधिकतम तापमान 38C से 40C के बीच और न्यूनतम तापमान 23C से 25C के बीच रहने की उम्मीद है। सुबह के समय ठंडी हवाओं के कारण मौसम काफी सुहावना बना हुआ है।हीट इंडेक्स की मार: इससे पहले बुधवार को दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र में अधिकतम तापमान 39.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। लेकिन हवा में भारी नमी (Humidity) होने के कारण हीट इंडेक्स (Heat Index) यानी महसूस होने वाला असली तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा था, जिसने लोगों को चिपचिपी गर्मी से बेहाल कर दिया। आज दिनभर हवाओं की रफ्तार सामान्य रूप से 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है।दिल्ली की हवा में सुधार, 'मध्यम' श्रेणी में पहुंचा AQIगर्मी और आंधी के बीच दिल्ली वालों के लिए पर्यावरण के मोर्चे पर एक अच्छी खबर है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी एयर क्वालिटी बुलेटिन के अनुसार, बुधवार शाम को दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (Satisfactory) श्रेणी में दर्ज की गई। तेज हवाओं के चलने से प्रदूषण के कण साफ हुए हैं, जिसके चलते राजधानी का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 127 दर्ज किया गया, जो सांस लेने के लिहाज से काफी हद तक संतोषजनक है।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब स्कूलों के भीतर बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन को लेकर एक नया और बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के सरकारी स्कूलों में 'पीएम पोषण' यानी मिड-डे मील योजना के मेनू से अंडों को हटाए जाने की सुगबुगाहट ने सियासी पारे को गरमा दिया है।इस पूरे मामले को वैश्विक धार्मिक व सामाजिक संस्था इस्कॉन (ISKCON) और राज्य की नवगठित भाजपा सरकार के नीतिगत फैसलों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमुख विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी का आरोप है कि बंगाल की संस्कृति के विपरीत बच्चों पर जबरन शाकाहार थोपने की कोशिश की जा रही है, जिससे उनके दैनिक पोषण और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर इस पूरे विवाद की जड़ क्या है और इस पर अलग-अलग पक्षों के क्या तर्क हैं।विवाद की असली वजह: राज्य सरकार के बजट में इस्कॉन को शामिल करने का प्रस्तावइस पूरे विवाद की शुरुआत पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पेश किए गए नए बजट के बाद हुई। विधानसभा में राज्य का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने एक बड़ी घोषणा की थी। उन्होंने बताया था कि राज्य सरकार कोलकाता नगर निगम क्षेत्र और अन्य जिलों के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत भोजन तैयार करने, उसकी गुणवत्ता सुधारने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए इस्कॉन (ISKCON) की सहायता लेने की उम्मीद कर रही है।इस घोषणा के तुरंत बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह दावा तेजी से वायरल होने लगा कि चूंकि इस्कॉन एक विशुद्ध शाकाहारी संस्था है, इसलिए अब स्कूलों के मेनू से अंडों को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। इसके साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई कि इस्कॉन द्वारा तैयार किए जाने वाले नए मेनू में बच्चों को प्रोटीन देने के लिए अंडे की जगह पूरी तरह पौधों से मिलने वाले शाकाहारी विकल्पों जैसे पनीर और सोयाबीन को शामिल किया जाएगा।टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने उठाए सवाल, कहा- बच्चे अंडे पसंद करते हैंसरकार के इन शुरुआती संकेतों पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान सरकार से अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।कुणाल घोष ने कहा, इस्कॉन दुनिया भर में एक बेहद सम्मानित और पवित्र धार्मिक संस्था है, इसमें कोई दोराय नहीं है। लेकिन व्यावहारिक समस्या यह है कि सरकारी स्कूलों में गरीब बच्चों को नियमित रूप से स्कूल बुलाना और उन्हें पौष्टिक खाना खिलाना एक बड़ी चुनौती है। अंडा एक ऐसी चीज है जिसे स्कूली बच्चे बहुत चाव से खाते हैं और यह उन्हें स्कूल आने के लिए आकर्षित भी करता है। यह उनके बेहतर शारीरिक विकास के लिए भी जरूरी है। चूंकि इस्कॉन के अपने धार्मिक नियम हैं, इसलिए वे प्याज-लहसुन और अंडे से पूरी तरह दूर रहेंगे। ऐसे में बच्चों का मेनू मांसाहार/अंडे से बदलकर पूरी तरह शाकाहारी हो जाएगा। हम चाहते हैं कि सरकार बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए इस पर दोबारा सोचे।डेरेक ओ'ब्रायन का तीखा हमला: बंगाल पर शाकाहार थोप रही है भाजपातृणमूल कांग्रेस के संयुक्त सचिव और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने इस मुद्दे को लेकर सीधे भारतीय जनता पार्टी की विचार प्रक्रिया पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बच्चों को उनके जरूरी पोषण अधिकारों से वंचित कर रही है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपने तीखे पोस्ट में ओ'ब्रायन ने इस विवाद को चुनाव प्रचार के दौरान खान-पान पर हुई बहसों से जोड़ते हुए लिखा, चुनाव अभियान के दौरान 'मछली खाने' के ढोंग और राजनीतिक तमाशे के बाद, आखिरकार गुजरात जिमखाना का असली रूप सबके सामने आ गया है। बंगाल में नई भाजपा सरकार आते ही अपने एजेंडे पर काम करने लगी है। राजनीतिक विरोधियों पर आप चाहे जितने अंडे फेंकें, लेकिन मिड-डे मील के मेनू से अंडे हटाकर मासूम बच्चों को उचित पोषण से वंचित मत कीजिए। बंगाल में जबरन शाकाहार थोपा जा रहा है और बंगाल की जनता इस तानाशाही को पूरी तरह खारिज करती है।सोशल मीडिया के दावों पर इस्कॉन कोलकाता का बड़ा स्पष्टीकरणइस बढ़ते राजनीतिक तनाव और इंटरनेट पर वायरल हो रहे कथित भोजन चार्ट के बीच इस्कॉन कोलकाता (ISKCON Kolkata) के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर घूम रहे कथित मेनू को पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक करार दिया है।राधारमण दास ने 'X' पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा, मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ शरारती और राजनीतिक तत्व कोलकाता के स्कूलों में मिड-डे मील के लिए एक प्रस्तावित मेनू कार्ड साझा कर रहे हैं। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ यह साफ करना चाहता हूं कि अभी तक भोजन की ऐसी कोई भी सूची फाइनल नहीं की गई है और न ही यह कथित सूची हमारी ओर से जारी की गई है। सरकार के साथ विचार-विमर्श के बाद जब भी आधिकारिक मेनू तय होगा, हम खुद उसकी घोषणा करेंगे। कृपया बिना पुष्टि के इस तरह की गलत और भ्रामक जानकारियां साझा करने से बचें।क्या हैं केंद्र सरकार की 'PM POSHAN' (मिड-डे मील) योजना के नियम?केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली 'प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण' (PM POSHAN) योजना के तहत देश भर के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बालवाटिका से लेकर कक्षा 1 से 8 तक के करोड़ों बच्चों को दोपहर का गर्म और पका हुआ भोजन दिया जाता है। इस योजना के मुख्य कानूनी और प्रशासनिक नियम निम्नलिखित हैं:स्थानीय मेनू तय करने की पूरी छूट: केंद्र सरकार के मार्गदर्शक सिद्धांतों के तहत, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह वैधानिक स्वायत्तता दी गई है कि वे निर्धारित कैलोरी और पोषण मानकों (Nutrition Standards) को पूरा करते हुए अपनी स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, खान-पान की संस्कृति और प्राथमिकताओं के अनुरूप अपना दैनिक मेनू खुद तय कर सकते हैं। यही कारण है कि कुछ राज्यों में मिड-डे मील में अंडे और फल दिए जाते हैं, तो कुछ राज्यों में पूरी तरह शाकाहारी भोजन मिलता है।गुणवत्ता और स्वच्छता के कड़े मानक: केंद्र सरकार ने भोजन की सुरक्षा को लेकर कड़े गाइडलान्स बनाए हैं। इसके तहत केवल एगमार्क या एफएसएसएआई (FSSAI) प्रमाणित खाद्य सामग्री का उपयोग, रसोइयों का समय-समय पर प्रशिक्षण और बच्चों को परोसे जाने से कम से कम आधे घंटे पहले स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्यों व शिक्षकों द्वारा भोजन को अनिवार्य रूप से चखना और उसका रिकॉर्ड रखना शामिल है।क्रियान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी: इस राष्ट्रीय योजना को जमीनी स्तर पर सुचारू रूप से लागू करने, बजट का सही आवंटन करने और बच्चों को स्वच्छ व पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की अंतिम और पूरी जवाबदेही संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों की ही होती है।
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में इस समय एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां राज्य में नई सरकार के गठन के बाद स्कूलों में छात्रों को 'सात्विक भोजन' परोसने की प्रशासनिक तैयारियां ज़ोर-शोर से चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बंगाल के अलग-अलग ज़िलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ने वाले आम लोगों और युवाओं की संख्या में भारी उछाल आया है।ज़मीनी रिपोर्टों की मानें तो इस समय बंगाल में संघ की शाखाओं और विचारधारा से जुड़ने के लिए लोगों में एक तरह की होड़ मची हुई है। जो बंगाल कभी वामपंथ और क्षेत्रीय राजनीति का गढ़ माना जाता था, वहां अचानक संघ के प्रति लोगों का यह आकर्षण क्यों बढ़ रहा है? आखिर क्यों बड़ी संख्या में लोग स्वयंसेवक बनने के लिए कतारों में खड़े हैं? इस बड़े सामाजिक बदलाव के पीछे के मुख्य कारणों को समझने से पहले, आइए संघ के विस्तार से जुड़े कुछ बेहद चौंकाने वाले और नए आंकड़ों पर नज़र डालते हैं।केवल एक महीने में 1 लाख ऑनलाइन आवेदन; सामान्य से 5 गुना बढ़ोतरीराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रामाणिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले महज एक महीने के भीतर केवल पश्चिम बंगाल राज्य से ही संघ की सदस्यता के लिए 1 लाख से अधिक ऑनलाइन आवेदन (Join RSS Online Requests) प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले बंगाल से हर महीने औसतन 20 हजार के करीब ऑनलाइन आवेदन मिलते थे। यानी नए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद इसमें सीधे तौर पर 5 गुना (500%) की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।गौर करने वाली बात यह है कि 1 लाख का यह विशाल आंकड़ा सिर्फ इंटरनेट और वेबसाइट के जरिए आए ऑनलाइन आवेदनों का है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में रहने वाले अधिकांश लोग आज भी ऑफलाइन माध्यम का इस्तेमाल करते हैं, यानी वे सीधे अपने नजदीकी संघ कार्यालय (कार्यालय) या सुबह-शाम लगने वाली संघ की शाखाओं में जाकर सदस्यता फॉर्म भरते हैं। हालांकि ऑफलाइन सदस्यता का कोई केंद्रीय आधिकारिक डेटा जारी नहीं किया गया है, लेकिन जानकारों का अनुमान है कि यह संख्या ऑनलाइन के मुकाबले कहीं अधिक है।पश्चिम बंगाल में RSS के इस तीव्र विस्तार के 3 मुख्य कारणग्राउंड रिपोर्ट और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बंगाल में संघ के इस अभूतपूर्व विस्तार के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:1. डर और राजनीतिक आतंक के माहौल का खात्मापश्चिम बंगाल को भारतीय राष्ट्रवाद, पुनर्जागरण और वंदे मातरम् की जन्मभूमि माना जाता है। लेकिन स्थानीय लोगों और विश्लेषकों का कहना है कि पिछले 49 वर्षों के दौरान (जिसमें कम्युनिस्टों का लंबा शासन और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस की सरकार शामिल रही) राज्य में संघ की गतिविधियों से जुड़ने वाले लोगों को राजनीतिक स्तर पर प्रताड़ित और आतंकित किया जाता था। आम नागरिकों में यह डर था कि अगर वे शाखा में जाएंगे तो उन्हें स्थानीय स्तर पर हिंसा या भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन जैसे ही राज्य की राजनीतिक व्यवस्था और सरकार में बदलाव हुआ, लोगों के मन से वह पुराना डर पूरी तरह गायब हो गया और वे खुलकर राष्ट्रभक्ति की मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं।2. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सात्विक जीवन शैली के प्रति झुकावबंगाल में नई सरकार के आने के बाद से ही सांस्कृतिक और पारंपरिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने के प्रयास तेज हुए हैं। स्कूलों में 'सात्विक भोजन' (बिना प्याज-लहसुन का शुद्ध शाकाहारी व सुपाच्य आहार) परोसने के नीतिगत फैसलों ने समाज के एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया है। संघ की विचारधारा भी सात्विक जीवन, चरित्र निर्माण और स्वदेशी संस्कृति पर जोर देती है, जिसके कारण बंगाल का मध्यवर्गीय समाज और युवा वर्ग प्राकृतिक रूप से इसकी ओर आकर्षित हो रहा है।3. युवाओं में 'डिजिटल डिटॉक्स' और अनुशासन की चाहतआज के दौर में जहां युवा सोशल मीडिया और डूमस्क्रोलिंग (इंटरनेट की लत) से परेशान हैं, वहीं संघ की शाखाओं में मिलने वाला अनुशासन, शारीरिक व्यायाम, खेल और देशप्रेम की भावना युवाओं को एक सकारात्मक विकल्प दे रही है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र बड़े पैमाने पर संघ के वैचारिक कार्यक्रमों का हिस्सा बन रहे हैं।राष्ट्रव्यापी स्तर पर भी RSS ने बनाया महा-रिकॉर्ड; 12 साल में खुलीं दोगुनी शाखाएंपश्चिम बंगाल में संघ के विस्तार की यह कहानी कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह पिछले एक दशक से पूरे भारत में चल रहे संघ के संगठनात्मक विस्तार की ही एक कड़ी है। साल 2013 से लेकर मार्च 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों को देखें तो राष्ट्रीय स्तर पर संघ की शक्ति दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है:शाखाओं में 107% की वृद्धि: वर्ष 2013 में देश भर में जहां संघ की कुल 42,981 दैनिक शाखाएं लगती थीं, वहीं मार्च 2026 की समाप्ति तक यह संख्या बढ़कर 88,949 हो चुकी है।रोजाना 10 नई शाखाएं: पिछले 13 वर्षों के औसत की गणना करें तो देश के भीतर हर एक दिन औसतन 10 नई आरएसएस शाखाओं की शुरुआत होती रही है।पिछले 1 साल का परफॉर्मेंस: सिर्फ पिछले एक साल के भीतर ही संगठन ने अपनी पहुंच का विस्तार करते हुए 5,820 नई शाखाएं खोली हैं और देश के 3,943 नए स्थानों (गांवों और कस्बों) तक अपनी सीधी उपस्थिति दर्ज कराई है।इन आंकड़ों और लगातार बढ़ते बुनियादी ढांचे के कारण ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आज वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी स्वयंसेवी संगठन (World's Largest Voluntary Organization) कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल के सुदूर ग्रामीण अंचलों में शाखाओं के नेटवर्क का विस्तार होने के बाद संघ के राष्ट्रव्यापी स्वरूप को और अधिक गति मिलेगी।
पिछले कुछ दिनों में हुई धूल भरी आंधी और छिटपुट हल्की बारिश ने उत्तर भारत के लोगों को भीषण और झुलसाने वाली गर्मी से कुछ राहत जरूर दी थी, लेकिन आज मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, आज 25 जून 2026 को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान में फिर से मामूली वृद्धि दर्ज की जा सकती है, जिससे उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान करेगी।दूसरी तरफ, देश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) का तांडव लगातार जारी है, जहां मूसलाधार बारिश के चलते कई जिलों में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति बनने लगी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आज देश के अलग-अलग राज्यों और आपके शहर में मौसम कैसा रहने वाला है।उत्तर भारत में 'पश्चिमी विक्षोभ' एक्टिव; आंधी के साथ होगी बौछारेंमौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में इस समय एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय है। इसके प्रभाव की वजह से आज राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में दिनभर तेज गर्मी और उमस बनी रहेगी, लेकिन दोपहर बाद या शाम के समय कई इलाकों में अचानक मौसम करवट ले सकता है। धूल भरी तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ इन राज्यों के कुछ हिस्सों में छिटपुट बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है।इस बीच, देश में मानसून के आगे बढ़ने की रफ्तार काफी अच्छी बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आज 25 जून को मानसून गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के मध्य व पूर्वी हिस्सों में तेजी से आगे की तरफ कदम बढ़ाएगा।दिल्ली-NCR में कब होगी मानसून की एंट्री? मौसम विभाग का नया अपडेटदिल्ली-NCR के निवासियों के लिए राहत की बात यह है कि अगले 2 से 3 दिनों के भीतर मानसून उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से को कवर कर लेगा, जिसके बाद दिल्ली में भी मानसून की आधिकारिक एंट्री की घोषणा जल्द ही संभव है।वर्तमान वेदर सिस्टम को देखते हुए आईएमडी ने आज दिल्ली के विभिन्न जिलों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, दिन में तेज धूप और उमस के कारण गर्मी बनी रहेगी, लेकिन दोपहर या शाम के समय गरज-चमक के साथ तेज आंधी और बिजली गिरने (Lightning) की आशंका जताई गई है। इस दौरान राजधानी में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी हवाएं चल सकती हैं, जिससे सड़कों पर दृश्यता (Visibility) कम होने और यातायात प्रभावित होने का खतरा है। यही स्थिति दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी बनी रहेगी।दिल्ली-NCR में आज का तापमान और लू का मिजाजमौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली-NCR में आज 'लू' (Heatwave) चलने की संभावना तो नहीं है, लेकिन हवा में नमी (Humidity) का स्तर काफी ज्यादा होने के कारण लोगों को चिपचिपी और उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा।अधिकतम तापमान: आज दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम पारा 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।न्यूनतम तापमान: रात और सुबह के समय न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है।कोंकण, गोवा और पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्टएक तरफ जहां उत्तर भारत मानसून की मुख्य फुहारों का इंतजार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मानसूनी बादल जमकर बरस रहे हैं।पश्चिमी तट: महाराष्ट्र (विशेषकर मुंबई और उपनगर), गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में अगले 24 घंटों तक भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। मुंबई के कई निचले इलाकों में पिछले दिनों हुई भारी बरसात के बाद जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जहां स्थानीय प्रशासन हाई अलर्ट पर है।पूर्वोत्तर और उप-हिमालयी क्षेत्र: पूर्वोत्तर भारत के राज्यों असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और हिमालय से सटे पश्चिम बंगाल (सिक्किम और डार्क फ्लीट रीजन्स) में आज मौसम विभाग ने मूसलाधार बारिश का 'रेड अलर्ट' जारी किया है। इन पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (Landslides) और नदियों का जलस्तर बढ़ने की वजह से लोगों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
साउथ और पैन-इंडिया सिनेमा की सुपरस्टार सामंथा रुथ प्रभु (Samantha Ruth Prabhu) के फैंस के लिए एक बेहद खूबसूरत और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया और मीडिया गलियारों में एक्ट्रेस की प्रेग्नेंसी को लेकर जो अटकलें और कयास लगाए जा रहे थे, उन पर अब खुद सामंथा ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। एक्ट्रेस ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि कर दी है कि वह जल्द ही मां बनने वाली हैं।मीडिया इवेंट में सामंथा ने खुद किया बड़ा ऐलान; लेंगी काम से ब्रेकयह अहम घोषणा उस वक्त हुई जब सामंथा अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मा इति बंगारम' (Maa Inti Bangaram) के एक मीडिया इवेंट में शामिल होने पहुंची थीं। वहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी लाइफ के इस खूबसूरत फेज को लेकर सब कुछ साफ कर दिया।सामंथा ने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स और काम से दूरी बनाने के सवाल पर खुलकर बात करते हुए कहा, फिल्म 'मा इति बंगारम' के पूरा होने और रिलीज के बाद मुझे काम से थोड़ा लंबा ब्रेक लेना पड़ेगा, क्योंकि मेरी मौजूदा स्थिति (प्रेग्नेंसी) ऐसी ही मांग करती है। मुझे अब मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) पर जाना होगा। हालांकि, मेरे फैंस को निराश होने की जरूरत नहीं है; इस ब्रेक के बाद मैं एक बिल्कुल नई फिल्म और दमदार कहानी के साथ पर्दे पर शानदार वापसी करूंगी।सक्सेस पार्टी के वीडियोज में दिखा था 'बेबी बंप', तभी से शुरू हुई थीं चर्चाएंएक्ट्रेस के इस लाइव और स्पष्ट बयान के बाद इंटरनेट पर चल रही तमाम अफवाहों पर पूरी तरह से मुहर लग गई है। दरअसल, कुछ समय पहले फिल्म की एक बड़ी सक्सेस पार्टी आयोजित की गई थी, जिसमें सामने आए कुछ वीडियो और क्लोज-अप तस्वीरों को देखकर फैंस ने दावा किया था कि सामंथा का बेबी बंप (Baby Bump) नजर आ रहा है। इसके बाद से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके मां बनने की चर्चाएं तेजी से वायरल होने लगी थीं, जिसे अब एक्ट्रेस ने खुद स्वीकार कर लिया है।दिसंबर 2026 में हो सकती है डिलीवरी; पहले ट्राइमेस्टर में हैं एक्ट्रेसफिल्म की प्रोडक्शन टीम और सामंथा के करीबी सूत्रों ने मनोरंजन जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका 'स्क्रीन' से बातचीत में इस खबर से जुड़े कुछ और दिलचस्प पहलू साझा किए हैं। सूत्रों के अनुसार, फिल्म की बॉक्स ऑफिस सफलता के साथ-साथ यह व्यक्तिगत खुशखबरी भी बिल्कुल सही समय पर आई है।अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि सामंथा की डिलीवरी इस साल दिसंबर 2026 में होने की संभावना है, हालांकि खुद एक्ट्रेस या उनके परिवार ने अभी तक इस सटीक महीने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सूत्रों ने आगे बताया, सामंथा इस समय अपनी प्रेग्नेंसी के पहले ट्राइमेस्टर (First Trimester) में हैं। पूरा परिवार और कपल इस नई शुरुआत को लेकर बेहद उत्साहित और खुश है। खासकर सामंथा, जो हमेशा से अपने जीवन में मां बनने के सुखद अनुभव को जीना चाहती थीं।मैटरनिटी ब्रेक के बाद बड़े पर्दे पर होगी धमाकेदार वापसीसामंथा रुथ प्रभु के इस फैसले से साफ है कि वह अगले कुछ महीनों तक चकाचौंध और शूटिंग सेट से पूरी तरह दूर रहकर अपनी सेहत और आने वाले बच्चे पर फोकस करेंगी। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में यह भी पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यह ब्रेक केवल अस्थायी है। मां बनने की इस खूबसूरत जिम्मेदारी को निभाने के बाद वह एक बार फिर सिनेमाई पर्दे पर अपने अभिनय का जादू बिखेरने के लिए पूरी तैयारी के साथ लौटेंगी। इस खबर के सामने आने के बाद से ही दुनिया भर में मौजूद उनके करोड़ों फैंस, सह-कलाकार और सेलिब्रिटीज उन्हें सोशल मीडिया पर बधाइयां और शुभकामनाएं भेज रहे हैं।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के मंच पर फुटबॉल का असली रोमांच और ड्रामा देखने को मिल रहा है। बुधवार को खेले गए ग्रुप-सी के एक बेहद उतार-चढ़ाव भरे और सांसें रोक देने वाले मुकाबले में मोरक्को (Morocco) ने जुझारू खेल दिखा रही हैती (Haiti) की टीम को 4-2 से शिकस्त दे दी है। इस धमाकेदार जीत के साथ ही मोरक्को ने 'राउंड ऑफ 32' (नॉकआउट स्टेज) का टिकट शान से कटा लिया है।हालांकि, इस बड़ी जीत के बावजूद मोरक्को की टीम ग्रुप-सी में शीर्ष स्थान हासिल करने से चूक गई। मोरक्को ने ग्रुप स्टेज का अंत दिग्गज ब्राजील के बराबर कुल 7 अंकों के साथ किया। ब्राजील ने अपने अंतिम ग्रुप मैच में स्कॉटलैंड को 3-0 से मात दी थी, जिसके कारण बेहतर गोल अंतर (Goal Difference) के आधार पर ब्राजील पहले स्थान पर रहा और मोरक्को को दूसरे पायदान से संतोष करना पड़ा। अब नॉकआउट स्टेज में मोरक्को का सामना ग्रुप-एफ की नंबर वन टीम से होगा, जहां फिलहाल नीदरलैंड्स (Netherlands) मजबूती से टॉप पर काबिज है।पहले हाफ में हैती का धमाका; स्टार गोलकीपर यासीन बोनो भी हुए हैरानटूर्नामेंट की रेस से पहले ही बाहर हो चुकी हैती की टीम ने इस मुकाबले में अपनी प्रतिष्ठा के लिए खेलते हुए इतिहास का सबसे यादगार प्रदर्शन किया। मैच की शुरुआत में हैती के आक्रामक और निडर खेल ने मोरक्को के डिफेंस को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया। खेल के 10वें मिनट में ही हैती ने मैच का पहला गोल दागकर सबको चौंका दिया। जोसुए कैसिमिर ने बेहतरीन मूव बनाते हुए गेंद को संभाला और जीन-केविन डुवर्न की तरफ पास बढ़ाया। डुवर्न ने बिना गलती किए गेंद को पेनल्टी एरिया के भीतर क्रॉस किया, जहां मुस्तैद खड़े लेनी जोसेफ ने एक जादुई 'बैकहील शॉट' मारा। गेंद मोरक्को के स्टार गोलकीपर यासीन बोनो (Yassine Bounou) के शरीर से दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से टकराती हुई सीधे नेट में चली गई और हैती ने 1-0 की बढ़त बना ली।कप्तान अशरफ हकीमी ने संभाली कमान; पहले हाफ में चार गोल का रोमांचशुरुआती झटके के बाद मोरक्को ने मैच पर अपना नियंत्रण बढ़ाया और लगातार आक्रमण किए, लेकिन हैती के अनुभवी गोलकीपर जॉनी प्लासिड दीवार बनकर खड़े रहे और कई शानदार बचाव किए। आखिरकार, हाफ-टाइम से ठीक 6 मिनट पहले मोरक्को का दबाव रंग लाया। बिलाल अल खानूस ने डी-एरिया के भीतर एक खतरनाक क्रॉस डाला, जिसे हैती के गोलकीपर प्लासिड केवल दूर ही धकेल सके। वहां खड़े मोरक्को के कप्तान अशरफ हकीमी (Achraf Hakimi) ने चीते जैसी फुर्ती दिखाते हुए रिबाउंड गेंद को गोल पोस्ट में डाल दिया और स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।हैती ने भी तुरंत पलटवार किया। पहले हाफ के अंतिम पलों में जीन-केविन डुवर्न ने एक बार फिर असिस्ट करते हुए विल्सन इसिडोर को पास दिया, जिन्होंने बॉक्स के बाहर से एक बेहद शक्तिशाली और सनसनीखेज शॉट दागकर अपनी टीम को 2-0 से आगे कर दिया, जिससे मोरक्को के फैंस सन्न रह गए।ब्रेक से ठीक पहले मोरक्को की वापसी और दूसरे हाफ का पलटवारहैती के दूसरे गोल का जश्न अभी थमा भी नहीं था कि मोरक्को ने ब्रेक (हाफ-टाइम) से ठीक पहले मैच में दोबारा वापसी कर ली। सोफियान अमराबत ने राइट विंग पर दौड़ रहे कप्तान हकीमी को थ्रू-पास दिया। हकीमी के सटीक कट-बैक को इस्माइल सैबारी ने बेहद शांति के साथ गोल पोस्ट के कोने में धकेल दिया। सैबारी का इस वर्ल्ड कप के इतने ही मैचों में यह तीसरा गोल है, जो उनकी शानदार फॉर्म को दर्शाता है।पहले हाफ के अंत तक स्कोर 2-2 की बराबरी पर था। लेकिन जैसे ही दूसरा हाफ शुरू हुआ, मोरक्को के लगातार और तीखे हमलों के सामने हैती का डिफेंस धीरे-धीरे बिखरने लगा। मैच के 78वें मिनट में मोरक्को को आखिरकार वह बढ़त मिल गई जिसका उसे इंतजार था। एक कॉर्नर किक को हैती के डिफेंडर ठीक से क्लियर नहीं कर पाए और गेंद सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी सौफियान राहिमी के पैरों पर जा गिरी, जिन्होंने बिना कोई गलती किए करीब से गोल दागकर स्कोर 3-2 कर दिया।स्टॉपेज टाइम का हाई-वोल्टेज ड्रामा और वीएआर (VAR) का अंतिम फैसलामैच के इंजरी/स्टॉपेज टाइम में मोरक्को ने अपनी जीत पर अंतिम मुहर लगा दी, हालांकि यह गोल थोड़े विवाद और ड्रामे से भरपूर रहा। हैती के डिफेंडर यह सोचकर मैदान पर पूरी तरह रुक गए थे कि गेंद बाईलाइन (Byline) को पार करके बाहर जा चुकी है, लेकिन मोरक्को के राहिमी ने खेल जारी रखा और गेंद को गोल पोस्ट के सामने पास कर दिया, जहां खड़े 20 साल के युवा गेसिम यासीन ने खाली नेट में गेंद डालकर स्कोर 4-2 कर दिया।हैती के खिलाड़ियों ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद रेफरी ने लंबे समय तक वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की मदद ली। गहन रिव्यू के बाद अधिकारियों ने पुष्टि की कि गेंद पूरी तरह से खेल के दायरे के भीतर ही थी और उसे लाइन से बाहर नहीं माना जा सकता, जिसके चलते गोल को वैध घोषित कर दिया गया।52 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली हैती का सम्मानजनक सफरइस हार के साथ ही पूरे 52 साल (पांच दशक) बाद फीफा वर्ल्ड कप के मुख्य ड्रा में जगह बनाने वाली हैती की टीम बिना कोई अंक हासिल किए ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई है। भले ही हैती टूर्नामेंट में कोई मैच नहीं जीत सकी, लेकिन अफ्रीका की सबसे मजबूत और गत सेमीफाइनलिस्ट टीम मोरक्को को जिस तरह उन्होंने लोहे के चने चबाने पर मजबूर किया, उसकी दुनिया भर के फुटबॉल पंडित जमकर तारीफ कर रहे हैं। दूसरी ओर, मोरक्को अब पूरी लय और आत्मविश्वास के साथ नॉकआउट स्टेज (Round of 32) में प्रवेश कर चुका है, जहां दुनिया भर के फैंस को अब मोरक्को और नीदरलैंड्स के बीच एक ऐतिहासिक और कड़े मुकाबले की उम्मीद है।
कुदरत का कहर जब भी टूटता है, तो इंसान के बनाए बड़े-बड़े कंक्रीट के ढांचे और गगनचुंबी इमारतें ताश के पत्तों की तरह बिखर जाती हैं। कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर इस समय दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में देखने को मिल रहा है, जो अपने इतिहास की सबसे भीषण और विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है।वेनेजुएला में एक ही मिनट के भीतर दो के बाद एक बैक-टू-बैक शक्तिशाली भूकंप के झटके आए, जिसने हंसते-खेलते शहरों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। राजधानी काराकास से लेकर देश के अलग-अलग प्रांतों से सामने आ रहे वीडियो और तस्वीरें रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। सैकड़ों से भी ज्यादा इमारतें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं और देश का मुख्य इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी ढह गया है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की प्रारंभिक सैटेलाइट गणना के अनुसार, इस महाप्रलय में मरने वालों का आंकड़ा 10 हजार से भी पार जा सकता है। हालात को देखते हुए पूरे देश में आपातकाल (State of Emergency) लागू कर दिया गया है और समंदर में सुनामी का रेड अलर्ट जारी है।वेनेजुएला को दहलाने वाले 'डबल अटैक' का गणितमौसम और भूगर्भीय वैज्ञानिकों के मुताबिक, वेनेजुएला में आए इस भूकंप की तीव्रता और गहराई दोनों ही बेहद खतरनाक थीं:पहला झटका: रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.1 मापी गई, जिसका केंद्र राजधानी काराकास से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में और ज़मीन से महज 13 किलोमीटर की गहराई में था।दूसरा झटका: पहले झटके के कुछ ही सेकेंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र मोरोन शहर से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में ज़मीन से केवल 10 किलोमीटर नीचे था।आखिर क्यों आते हैं इतने भयंकर भूकंप? जानिए इसके पीछे का विज्ञानवेनेजुएला हादसे के बाद हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर धरती के भीतर ऐसा क्या होता है जिससे इतने विनाशकारी भूकंप आते हैं? विज्ञान के नजरिए से समझें तो इन भयंकर झटकों के पीछे पृथ्वी की गहरी परतों में होने वाली निम्नलिखित 4 बड़ी हलचलें जिम्मेदार होती हैं:1. टेक्टोनिक प्लेटों का आपस में टकराना (Tectonic Plates)हमारी धरती ऊपर से भले ही एक ठोस गेंद जैसी दिखाई देती हो, लेकिन इसके अंदर की बनावट बिल्कुल अलग है। पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत (Crust) एक अखंड टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी प्लेटों से मिलकर बनी है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये प्लेटें धरती के अंदर मौजूद पिघले हुए लावे (मैग्मा) पर बेहद धीमी गति से लगातार तैर रही हैं। जब ये प्लेटें तैरते हुए आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे धंसती हैं, या एक-दूसरे से रगड़ खाती हैं, तो सतह पर कंपन पैदा होता है जिसे हम भूकंप कहते हैं।2. फॉल्ट लाइन पर भारी दबाव बनना (Fault Lines)जहां दो टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाएं या किनारे आपस में मिलते हैं, उस कमजोर जोड़ को फॉल्ट लाइन कहा जाता है। अक्सर गति करते समय ये प्लेटें आपस में बुरी तरह फंस जाती हैं और आगे नहीं बढ़ पातीं। लेकिन पृथ्वी के आंतरिक खिंचाव के कारण पीछे से लग रहा दबाव कम नहीं होता। इस वजह से उस फंसे हुए स्थान (फॉल्ट लाइन) पर सालों तक भारी मात्रा में इलास्टिक एनर्जी यानी तनाव ऊर्जा जमा होने लगती है।3. अचानक एनर्जी का बाहर निकलनाजब यह दबाव चट्टानों की सहने की क्षमता (सीमा) से बाहर हो जाता है, तो फॉल्ट लाइन की चट्टानें अचानक टूट जाती हैं या एक-झटके में फिसल जाती हैं। ऐसा होते ही सालों से रुकी हुई वह प्रचंड ऊर्जा एक सेकंड के भीतर 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) के रूप में बाहर निकलती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी स्प्रिंग को हाथों से बहुत ज्यादा दबाने के बाद अचानक छोड़ दिया जाए। यही तरंगें जब धरती की सतह तक पहुंचती हैं, तो महाविनाश लेकर आती हैं।इन 3 बातों पर तय होती है भूकंप की भयावहताकोई भी भूकंप कितना खतरनाक या विनाशकारी होगा, यह मुख्य रूप से तीन तकनीकी पैमानों पर निर्भर करता है:पैमानाक्या होता है इसका मतलब?प्रभावमैग्नीट्यूड (Magnitude)फॉल्ट लाइन टूटने से कितनी ऊर्जा बाहर निकली।7 से अधिक की तीव्रता वाले भूकंप हमेशा विनाशकारी होते हैं।फोकस की गहराई (Depth of Focus)धरती के अंदर जिस सटीक बिंदु पर भूकंप की शुरुआत होती है, उसे फोकस या हाइपोसेंटर कहते हैं।फोकस जितना सतह के करीब (जैसे 10-20 किमी अंदर) होगा, तबाही उतनी ही विकराल होगी।एपिसेंटर (Epicenter)फोकस के ठीक ऊपर धरती की सतह (Surface) पर स्थित बिंदु।इस केंद्र पर भूकंप के झटके सबसे तेज और नुकसान सबसे ज्यादा होता है।वेनेजुएला में ही क्यों आया इतना बड़ा भूकंप?भौगोलिक और भूगर्भीय बनावट के अनुसार वेनेजुएला दुनिया के सबसे संवेदनशील सीस्मिक जोन (Seismic Zone) में आता है। यह देश मुख्य रूप से कैरेबियन प्लेट (Caribbean Plate) और साउथ अमेरिकन प्लेट (South American Plate) के बिल्कुल मिलन बिंदु पर बसा हुआ है।वैज्ञानिकों का मानना है कि ये दोनों विशाल टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे के विपरीत दिशा में भीषण दबाव बना रही हैं। सालों से जमा हो रहा यही दबाव मोरोन शहर के पास फॉल्ट लाइन टूटने से अचानक बाहर आ गया, जिसके कारण वेनेजुएला में यह 'महाप्रलय' आई है।
बॉलीवुड के दिग्गज और लीक से हटकर फिल्में बनाने वाले मशहूर निर्देशक इम्तियाज अली इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' (Main Vaapas Aaunga) की बॉक्स ऑफिस सफलता का जश्न मना रहे हैं। इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। फिल्म में शरवरी वाघ, वेदांग रैना, दिलजीत दोसांझ और नसीरुद्दीन शाह जैसे बेहतरीन कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। बॉक्स ऑफिस पर मिल रहे इस शानदार और अप्रत्याशित रिस्पॉन्स पर अब खुद इम्तियाज अली का एक बड़ा और बेहद भावुक रिएक्शन सामने आया है।धीमी शुरुआत के बाद सिनेमाघरों में 'हाउसफुल' का बोर्डइम्तियाज अली की फिल्मों की यह खासियत रही है कि वे समय के साथ दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाती हैं, और ऐसा ही कुछ 'मैं वापस आऊंगा' के साथ भी देखने को मिल रहा है। भारत-पाकिस्तान बंटवारे (Partition Era) के दौर की एक दर्दभरी और रूहानी प्रेम कहानी पर आधारित इस फिल्म की शुरुआत बॉक्स ऑफिस पर बेहद धीमी रही थी। लेकिन मजबूत 'वर्ड ऑफ माउथ' (दर्शकों की तारीफ) के दम पर फिल्म ने रफ्तार पकड़ी और अब देश भर के कई बड़े सिनेमाघरों में फिल्म के शो हाउसफुल चल रहे हैं।इम्तियाज अली की बेटी इदा अली ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में एक हाउसफुल स्क्रीनिंग के बाद इम्तियाज अली खुद थिएटर के अंदर दर्शकों से सीधे बातचीत करते और हाथ जोड़कर उनका आभार जताते हुए दिखाई दे रहे हैं।अगर लोग महाभारत समझ सकते हैं, तो मेरी फिल्में क्यों नहीं?थिएटर में मौजूद दर्शकों को संबोधित करते हुए इम्तियाज अली ने कहा, सिनेमा और लोगों की शक्ति में मेरी उम्मीद को फिर से जगाने के लिए आप सभी का दिल से धन्यवाद। मुझे इंडस्ट्री में लगातार यह समझाया जाता है कि आम लोग इस तरह के गहरे सिनेमा को नहीं समझेंगे। मुझसे कहा जाता है कि अगर आप दर्शकों को खुश करना चाहते हैं और बॉक्स ऑफिस पर सफल होना चाहते हैं, तो सिर्फ एक खास फॉर्मूले वाली (मसाला) फिल्में बनाएं। लेकिन आपने इसे गलत साबित कर दिया।इम्तियाज ने आगे बेहद दिलचस्प बात कहते हुए कहा, मैंने अपने इंटरव्यूज में लाखों बार यह बात दोहराई है कि अगर इस देश के आम लोग जटिल 'महाभारत' की गाथा को इतनी गहराई से समझ सकते हैं, तो वे मेरी सीधी-सादी फिल्में क्यों नहीं समझ पाएंगे? अगर वे नहीं समझ पा रहे थे, तो यकीनन मुझमें ही कुछ कमी रही होगी और मैं खुद में सुधार करने की लगातार कोशिश कर रहा हूं। लेकिन इस फिल्म को सफल बनाकर आपने न केवल मेरा, बल्कि इस देश की सभी भाषाओं के उन 100 फिल्म निर्देशकों का आत्मविश्वास फिर से जगा दिया है जो कुछ अलग बनाना चाहते हैं।'किंग' डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने भी की फिल्म की जमकर तारीफइम्तियाज अली की इस फिल्म के मुरीद आम दर्शकों के साथ-साथ बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर्स भी हो रहे हैं। ब्लॉकबस्टर एक्शन फिल्में देने वाले 'किंग' डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने भी व्यस्त शेड्यूल के बीच 'मैं वापस आऊंगा' देखने के लिए समय निकाला।फिल्म देखने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पहले ट्विटर) पर फिल्म की तारीफ करते हुए लिखा, कितनी खूबसूरत और कमाल की फिल्म है! मिड-वीक (बुधवार) होने के बावजूद सिनेमाघर की पहली लाइन तक पूरी तरह हाउसफुल थी। 'मैं वापस आऊंगा' (MVA) की पूरी टीम को मेरा सलाम। दर्शक तुरंत सिनेमाघरों में जाएं और इस बेहतरीन सिनेमा का अनुभव लें।'मैं वापस आऊंगा' का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (Box Office Collection)बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों की बाजीगरी पर नजर रखने वाली वेबसाइट 'सैकनिल्क' (Sacnilk) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' ने सिनेमाघरों में अपने पहले 12 दिनों के भीतर शानदार कमाई दर्ज की है:इंडिया ग्रॉस कलेक्शन: 35.54 करोड़ रुपयेइंडिया नेट कलेक्शन: 29.85 करोड़ रुपयेवर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन: 48.14 करोड़ रुपयेबंटवारे के बैकड्रॉप पर बनी इस कल्ट लव स्टोरी ने वर्ल्डवाइड मार्केट में 50 करोड़ रुपये के आंकड़े के बेहद करीब पहुंचकर यह साबित कर दिया है कि भारतीय सिनेमा में आज भी अच्छी और संजीदा कहानियों को देखने वाले दर्शकों की कोई कमी नहीं है।
देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट घराने 'टाटा ग्रुप' की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से एक बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय बैंक ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन (NBFC) के नियमों को सख्त बनाए रखने का फैसला किया है, जिससे टाटा संस को रेगुलेटरी मोर्चे पर कोई राहत नहीं मिली है।आरबीआई ने एनबीएफसी की 'अपर-लेयर' (Upper-Layer) में शामिल होने के लिए एसेट (संपत्ति) की सीमा को 1 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये करने की कॉर्पोरेट जगत की मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आसान भाषा में समझें तो आरबीआई के इस कड़े रुख का मतलब यह हुआ कि टाटा संस अभी भी रिजर्व बैंक के कड़े निगरानी दायरे (CIC-Core Investment Company) में बनी रहेगी और नियमों के तहत उसे भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य होगा।क्यों एसेट लिमिट में बदलाव चाहती थी टाटा संस?एनबीएफसी सेक्टर और टाटा ग्रुप की तरफ से लंबे समय से यह दलील दी जा रही थी कि किसी भी कंपनी के दर्जे को तय करने के लिए केवल संपत्ति का आकार ही नहीं, बल्कि उसके मुनाफे, वित्तीय स्थिरता और एसेट क्वालिटी को भी पैमाना बनाया जाना चाहिए। यदि आरबीआई इंडस्ट्री की मांग को मानते हुए एसेट लिमिट को बढ़ाकर ढाई लाख करोड़ रुपये कर देता, तो टाटा संस इस कड़े नियम के दायरे से पूरी तरह बाहर हो जाती।वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) के आंकड़ों के अनुसार, टाटा संस की कुल standalone संपत्ति 1.75 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई है। यह संपत्ति आरबीआई की मौजूदा 1 लाख करोड़ रुपये की सीमा से तो अधिक है, लेकिन प्रस्तावित ढाई लाख करोड़ रुपये की सीमा से कम थी। हालांकि, रिजर्व बैंक अपने इस वित्तीय स्थिरता के फैसले से टस से मस नहीं हुआ।डूबी कंपनी तो पूरे फाइनेंशियल सिस्टम को खतरा: आरबीआईएक लाख करोड़ रुपये की इस सीमा को बरकरार रखने के पीछे रिजर्व बैंक ने बेहद मजबूत तर्क दिया है। आरबीआई का कहना है कि यह लिमिट मौजूदा एनबीएफसी सेक्टर की जमीनी हकीकत और इस दायरे में आने वाली कंपनियों के वित्तीय प्रोफाइल का गहन विश्लेषण करने के बाद ही तय की गई है।केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि 'टू बिग टू फेल' (Too Big to Fail) के सिद्धांत के तहत इस स्तर की किसी भी बड़ी वित्तीय कंपनी के डूबने या संकट में आने से पूरे देश के फाइनेंशियल सिस्टम की स्थिरता और बैंकिंग नेटवर्क को बड़ा खतरा हो सकता है। आपको बता दें कि आरबीआई ने सबसे पहले सितंबर 2022 में ही टाटा संस को 'अपर-लेयर एनबीएफसी' की श्रेणी में डाला था, जिसके बाद से ही उसके लिए शेयर बाजार में अपना आईपीओ (IPO) लाना कानूनी रूप से जरूरी हो गया था।कर्ज चुकाकर रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की चाल; बोर्ड में खुलकर आया मतभेदशेयर बाजार में लिस्टिंग और आईपीओ की कड़े वैधानिक नियमों व बाध्यताओं से बचने के लिए टाटा संस ने पिछले दिनों एक रणनीतिक कदम उठाया था। कंपनी ने अपने ऊपर बकाया सभी तरह के कर्जों को पूरी तरह चुका दिया (Debt-Free) और खुद को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के दायरे से बाहर बताते हुए आरबीआई के पास अपना एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर (रद्द) करने के लिए आवेदन कर दिया। टाटा संस का यह आवेदन अभी भी आरबीआई के पास लंबित (Pending) है।इस बीच, टाटा संस के बोर्ड रूम के भीतर लिस्टिंग को लेकर दो बड़े दिग्गजों के बीच वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं:नोएल टाटा (Noel Tata): टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामांकित डायरेक्टर नोएल टाटा कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग और आईपीओ लाने के सख्त खिलाफ हैं। उनका मानना है कि होल्डिंग कंपनी की गोपनीयता बनी रहनी चाहिए।वेणु श्रीनिवासन (Venu Srinivasan): ट्रस्ट के ही दूसरे नामांकित डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन लिस्टिंग के पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि पब्लिक लिस्टिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी।आपको बता दें कि टाटा ट्रस्ट्स ही टाटा संस में सबसे बड़ी और मुख्य शेयरधारक (Shareholder) है, इसलिए बोर्ड के इस आंतरिक विवाद पर पूरे बाजार की नजरें टिकी हैं।standalone बैलेंस शीट से होगी जांच; बढ़ेंगी टाटा संस की मुश्किलेंआरबीआई ने अपने नए आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी एनबीएफसी कंपनी का मूल्यांकन उसके पूरे ग्रुप के एकीकृत खातों (Consolidated Accounts) के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी व्यक्तिगत standalone ऑडिटेड बैलेंस शीट के आधार पर ही किया जाएगा। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक अब हर 5 साल के बजाय हर 3 साल में इस एसेट लिमिट की समीक्षा करेगा ताकि तेजी से बदलते वित्तीय माहौल पर कड़ी नजर रखी जा सके।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरबीआई ने साफ तौर पर कहा है कि वह किसी भी विशिष्ट कंपनी को इस नियम में कोई 'विशेष छूट' या रियायत नहीं देगा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई की यह टिप्पणी भले ही सीधे तौर पर कुछ सरकारी एनबीएफसी के संदर्भ में आई हो, लेकिन इसका सीधा और गहरा असर टाटा संस के रजिस्ट्रेशन रद्द करने वाले आवेदन पर पड़ेगा, जिससे टाटा संस के लिए अब आईपीओ के रास्ते पर आगे बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।
हिंदू सनातन धर्म में जब भी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है, तो उससे जुड़े शास्त्रों के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। मान्यता है कि नियमों के अनुसार की गई पूजा ही पूर्ण रूप से सफल होती है और उसका शुभ फल प्राप्त होता है। पूजा-पाठ की इसी प्रक्रिया में दीपक (दीया) जलाने का एक बहुत बड़ा और आध्यात्मिक महत्व है।धार्मिक विधान के अनुसार, पूजा में गाय के शुद्ध घी से लेकर सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। जब किसी घर में पूरी विधि-विधान के साथ दीपक प्रज्वलित किया जाता है, तो वहां से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और सुख, समृद्धि, अटूट धन व सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। हालांकि, पूजा के समय दीया जलाने को लेकर शास्त्रों में कुछ बेहद कड़े और जरूरी नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं दीपक जलाने का सही समय, सही विधि, दिशा और चमत्कारी मंत्र के बारे में विस्तार से।दीया जलाने का सही समय क्या है? (Right Time to Light Diya)शास्त्रों के अनुसार, घर के मंदिर में दिनभर में मुख्य रूप से दो बार दीपक जलाने का विधान बताया गया है। पहला दीपक सूर्योदय के समय यानी सुबह की पूजा में और दूसरा दीपक प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद संध्या आरती के समय जलाना चाहिए।सुबह का समय: प्रातः काल की पूजा के लिए सुबह 05:00 बजे से लेकर 07:00 बजे के बीच का समय दीपक जलाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।शाम का समय: संध्या काल की पूजा के लिए शाम 05:30 बजे से लेकर 07:30 बजे के बीच दीपक प्रज्वलित कर देना चाहिए। (मौसम यानी सर्दी और गर्मी के अनुसार इस समय में थोड़ा-बहुत बदलाव किया जा सकता है)।विशेष लाभ: रोज शाम को घर के मुख्य द्वार (Main Gate) पर चौमुखी या एक मुखी दीया जलाने से राहु-केतु के दोष शांत होते हैं और माता लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में प्रवेश करती हैं।मंदिर में दीया जलाने की सही विधि क्या है? (Correct Method)यदि आप चाहते हैं कि आपकी पूजा का पूरा पुण्य मिले, तो दीपक जलाते समय इन चरणों और सावधानियों का पालन जरूर करें:धातु का चुनाव: पूजा के लिए आप मिट्टी का दीया या फिर धातु (जैसे पीतल, तांबा या चांदी) का दीपक चुन सकते हैं।दीपक की सफाई: दीया जलाने से पहले उसे अच्छी तरह साफ करें। यदि आप मिट्टी के दीए का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसे पहले कुछ देर पानी में भिगोकर रखें और फिर सुखाकर ही उपयोग करें।तेल या घी: सुबह-शाम की ज्योत के लिए हमेशा गाय का शुद्ध घी, सरसों का तेल या फिर तिल के तेल का ही इस्तेमाल करना चाहिए। बाती को तेल या घी में अच्छी तरह भिगोकर ही दीपक में लगाएं।खंडित दीपक वर्जित: दीपक जलाने से पहले यह अच्छी तरह देख लें कि वह कहीं से टूटा-फूटा, चटका हुआ या गंदा तो नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, खंडित या अशुद्ध दीया जलाने से घर में दरिद्रता और मानसिक तनाव बढ़ता है।दीपक का आसन: दीए को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, उसे हमेशा एक छोटी प्लेट, कलावा या अक्षत (चावल) के आसन पर रखें।एक दीए से दूसरा दीया न जलाएं: कभी भी एक जलते हुए दीपक की लौ से दूसरे दीपक को नहीं जलाना चाहिए। ऐसा करने से जातक को दोष लगता है और पुण्य फल नष्ट हो जाते हैं।पर्याप्त ईंधन: इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीया बुझना नहीं चाहिए। इसके लिए दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल डालें और जरूरत पड़ने पर समय-समय पर डालते रहें।दीया जलाते समय किस महामंत्र का जाप करें? (Powerful Diya Mantra)सनातन धर्म के अनुसार, जब आप मंदिर में दीपक की लौ प्रज्वलित कर रहे हों, तो शांत मन से नीचे दिए गए बेहद शक्तिशाली और पवित्र मंत्र का जाप करें। इस मंत्र के उच्चारण से दीपक की सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है:शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते।।मंत्र का अर्थ: हे दीपक की पवित्र ज्योति! आप हमारा शुभ करें, कल्याण करें, हमें आरोग्य (अच्छा स्वास्थ्य) प्रदान करें और धन-संपत्ति की वृद्धि करें। हमारे भीतर और बाहर की अज्ञानता व शत्रु बुद्धि का विनाश करने वाली इस दीपज्योति को मेरा बारंबार नमस्कार है।दीपक रखने की सही दिशा और स्थान (Correct Direction for Diya)वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, दीपक को सही दिशा में रखना आपके भाग्य को बदल सकता है। इसके लिए इन नियमों को गांठ बांध लें:घी और तेल के दीपक का स्थान: यदि आप तेल का दीपक जला रहे हैं, तो उसे हमेशा भगवान की प्रतिमा या तस्वीर के बाईं ओर (Left Side) रखें। इसके विपरीत, यदि आप गाय के घी का दीपक जला रहे हैं, तो उसे भगवान के दाईं ओर (Right Side) स्थापित करें।लौ की दिशा: दीपक की लौ हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होनी चाहिए।पूर्व दिशा: पूर्व दिशा की ओर मुख करके जलाया गया दीपक मनुष्य की आयु और आरोग्यता को बढ़ाता है।उत्तर दिशा: उत्तर दिशा की ओर रखी गई दीपक की लौ घर में धन, कुबेर की कृपा और सुख-संपत्ति में निरंतर वृद्धि का कारक बनती है।दक्षिण दिशा का नियम: दक्षिण दिशा मुख्य रूप से पितरों (पूर्वजों) और मृत्यु के देवता यमराज की मानी जाती है। इसलिए रोज़ाना मंदिर का दीपक इस दिशा में भूलकर भी न रखें। इस दिशा में दीया केवल विशेष मौकों (जैसे यम दीपदान, दिवाली या पितृपक्ष) पर ही दक्षिण की ओर मुख करके जलाया जाता है।
वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार से इस वक्त की सबसे बड़ी आर्थिक खबर सामने आ रही है। ग्लोबल मार्केट में छाई मंदी और अमेरिकी डॉलर सूचकांक (Dollar Index) में आई रिकॉर्ड मजबूती के चलते सोने और चांदी की कीमतों में भारी हाहाकार मचा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आ रही इस बड़ी गिरावट का आलम यह है कि आज गुरुवार को सोने के दाम टूटकर नवंबर 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर (Lowest Level) पर आ गए हैं।अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं के कारण निवेशकों ने फिलहाल सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से दूरी बना ली है। इंटरनेशनल मार्केट में हाजिर सोना (Spot Gold) करीब ढाई फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ 3,997 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है, जबकि चांदी भी फिसलकर 57 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। भारतीय घरेलू बुलियन मार्केट में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है, जहां 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत लुढ़ककर 141,220 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गई है।दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 1,200 और चांदी 4,000 रुपये लुढ़कीअमेरिकी मौद्रिक नीति (US Monetary Policy) को लेकर बदलते वैश्विक अनुमानों के बीच भारतीय बाजारों में पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है। दिल्ली सर्राफा बाजार में बीते शाम को सोना 1,200 रुपये की बड़ी छलांग लगाकर सीधे 1,48,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि इससे पिछले सत्र में यह 1,49,300 रुपये पर बंद हुआ था।सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी लगातार दूसरे दिन तगड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी का भाव 4,000 रुपये प्रति किलो टूटकर 2,31,000 रुपये प्रति किलो रह गया। गौर करने वाली बात यह है कि इससे ठीक पिछले सत्र में चांदी में 10,500 रुपये की अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक गिरावट देखी गई थी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस हालिया उठापटक के बाद चांदी अब अप्रैल की शुरुआत वाले अपने निचले स्तर पर वापस पहुंच गई है।क्यों टूट रहे हैं सोने-चांदी के दाम? ये हैं 2 सबसे बड़े कारणवैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं की कीमतों में आ रहे इस बड़े क्रैश के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक कारण काम कर रहे हैं:ईरान जंग का संकट टलना: वैश्विक स्तर पर पिछले काफी समय से ईरान और मिडल ईस्ट में युद्ध को लेकर जो गहरा डर बना हुआ था, वह अब धीरे-धीरे पूरी तरह टलने लगा है। जैसे ही युद्ध की आशंका कम हुई, निवेशकों ने सोने-चांदी जैसे सुरक्षित ठिकानों से अपना मुनाफावसूली (Profit Booking) कर पैसा निकालना शुरू कर दिया और उसे इक्विटी मार्केट में लगाने लगे हैं।अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' ने अपनी हालिया नीतिगत बैठक में ब्याज दरों को लेकर बेहद सख्त संकेत दिए हैं। बाजार के बड़े ट्रेडर्स अब यह मानकर चल रहे हैं कि फेडरल रिजर्व अपनी तय समय-सीमा से पहले, यानी आगामी सितंबर महीने की शुरुआत में ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला कर सकता है। जब भी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।अपने ऑल-टाइम रिकॉर्ड हाई से धड़ाम हुए रेटइस साल की शुरुआत में जनवरी 2026 के दौरान सोने और चांदी ने जो आसमान छूते हुए रिकॉर्ड स्तर बनाए थे, वर्तमान कीमतें उस मुकाबले आधे से भी कम दाम पर आ चुकी हैं। चांदी जनवरी 2026 में 121 डॉलर प्रति औंस के अपने ऑल-टाइम हाई (All-Time High) पर थी, जो अब वहां से घटकर केवल 57 डॉलर प्रति औंस से भी नीचे आ गई है। यह दिसंबर 2025 के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है। वहीं, सोना भी जनवरी में बनाए गए अपने ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर 5,594.82 डॉलर प्रति औंस से अब तक 1,500 डॉलर से ज्यादा टूट चुका है।13 महीने के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा अमेरिकी डॉलरपृथ्वी फिनमार्ट के डायरेक्टर मनोज कुमार जैन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर इस समय अपने 13 महीने के सबसे उच्चतम स्तर पर ट्रेड कर रहा है। डॉलर के मजबूत होने का सीधा और विपरीत असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा, दुनिया भर में महंगाई की उम्मीदें कम होने से भी सोने को मिलने वाला पारंपरिक सपोर्ट कमजोर हुआ है।हालांकि, मनोज कुमार जैन का यह भी कहना है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (Central Banks) की तरफ से की जा रही लगातार सोने की खरीदारी की वजह से सोने को 3,900 डॉलर के पास एक बेहद मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। इस सपोर्ट लेवल के कारण सोना किसी और बड़ी गिरावट से बच सकता है और आने वाले कुछ हफ्तों तक कीमतें इसी सीमित दायरे में बनी रह सकती हैं।घरेलू बुलियन और IBJA मार्केट की ताजा रेट लिस्टबुलियन मार्केट के समापन सत्र और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा बुधवार शाम को जारी किए गए आधिकारिक रेट्स के अनुसार विभिन्न कैरेट के सोने और चांदी का भाव कुछ इस प्रकार दर्ज किया गया है:बुलियन मार्केट क्लोजिंग रेट्स (प्रति 10 ग्राम):24 कैरेट गोल्ड: 141,220 रुपये22 कैरेट गोल्ड: 129,452 रुपये20 कैरेट गोल्ड: 117,683 रुपये18 कैरेट गोल्ड: 105,915 रुपयेचांदी (प्रति किलो): 213,440 रुपयेIBJA आधिकारिक रेट लिस्ट (बुधवार शाम):24 कैरेट गोल्ड: 142,178 रुपये23 कैरेट गोल्ड: 141,609 रुपये22 कैरेट गोल्ड: 130,235 रुपये18 कैरेट गोल्ड: 106,634 रुपयेचांदी (क्लोजिंग प्राइस): 222,035 रुपये प्रति किलोशादियों और त्योहारों के सीजन से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में आई यह भारी गिरावट उन आम ग्राहकों के लिए आभूषण खरीदने का एक शानदार मौका हो सकती है, जो लंबे समय से सही दामों का इंतजार कर रहे थे।
देश के पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भारी बारिश का दौर जारी है, जबकि पूर्वी यूपी और बिहार में लू का असर बना हुआ है। जानिए मानसून की ताजा स्थिति, मुंबई में बारिश से हालात और मौसम विभाग का नया पूर्वानुमान।
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किरोड़ी लाल मीणा के आरोपों पर डोटासरा का जवाब, बोले- मामला पहले ही निपट चुका है, जांच करा लें
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने बुधवार को राज्य के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया
बेअदबी मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग, अकाली दल ने भगवंत मान पर लगाए आरोप
शिरोमणि अकाली दल ने बुधवार को मांग की कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित धार्मिक बेअदबी मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
जम्मू-कश्मीर : 'वीबी-जी राम जी' योजना अधिसूचित, एक जुलाई से सभी ग्रामीण क्षेत्रों में होगी लागू
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 'विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) योजना, 2026' को अधिसूचित कर दिया है
संजय राउत खुद पाला बदलेंगे और शिंदे के साथ जुड़ जाएंगे : मनन मिश्रा
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से एनडीए नेताओं के निशाने पर हैं। राउत ने एक्स पोस्ट में एक फोटो शेयर कर लिखा कि हिम्मत नहीं हारी है, महाराष्ट्र के गद्दारों के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान झूठे और शराबी हैं : बिक्रम सिंह मजीठिया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से कथित तौर पर जुड़े वायरल वीडियो को लेकर मचे विवाद के बीच शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने बुधवार को उन्हें 'झूठा' और 'शराबी' कहा और साथ ही उनकी 'घिनौनी हरकतों' पर सवाल उठाए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तराखंड के सीएम धामी ने शूटिंग के दिग्गज जसपाल राणा को श्रद्धांजलि दी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के मझौन में देश के मशहूर शूटर और पद्म श्री से सम्मानित जसपाल राणा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। लगातार पड़ रही प्रचंड गर्मी ने कई देशों में तापमान के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि स्कूल बंद करने पड़े हैं, परिवहन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और सरकारों ने स्वास्थ्य संबंधी आपात ...
बुलंदशहर में दुष्कर्म के दोषी को 40 साल का कठोर कारावास
बुलंदशहर। बुलंदशहर जिले की एक अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म की घटना में दोषी पाए गए आरोपी को 40 वर्ष के कठोर कारावास तथा 50 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। लोक अभियोजक भारत सिंह शर्मा ने बुधवार को बताया कि अभियुक्त कल्लू पुत्र हरचंदी, निवासी ग्राम बागपुर, थाना चांद, जनपद पलवल (हरियाणा) […] The post बुलंदशहर में दुष्कर्म के दोषी को 40 साल का कठोर कारावास appeared first on Sabguru News .
इंदौर से लापता पेट्रोकेमिकल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर का शव नर्मदा नदी में मिला
खरगोन। मध्यप्रदेश के इंदौर से लापता एक एरिया सेल्स मैनेजर का शव आज बुधवार को खरगोन जिले के मंडलेश्वर थाना क्षेत्र में नर्मदा नदी से बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान इंदौर के राजेंद्र नगर निवासी 50 वर्षीय निशांत जोशी के रूप में हुई है। वह एक पेट्रोकेमिकल कंपनी में एरिया सेल्स […] The post इंदौर से लापता पेट्रोकेमिकल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर का शव नर्मदा नदी में मिला appeared first on Sabguru News .

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