आर्टिफिशियल जूलरी को काला होने से कैसे बचाएं? अपनाएं ये आसान ट्रिक
How to Store Fashion Jewellery: अक्सर ऐसा होता है कि हमारी महंगी से महंगी आर्टिफिशियल जूलरी कुछ ही दिन में काली और बेरंग पड़ जाती है जिसके बाद उसे फेंकने के अलावा और कोई रास्ता नहीं होता. ऐसे में यहां हम आपको आर्टिफिशियल जूलरी को सेफ करने के कुछ ट्रिक्स बता रहे हैं.
BJP विधायक से भिड़ा ग्रेजुएट युवक VIDEO हुआ वायरल
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायक देवेंद्र जैन और एक युवक के बीच तीखी बहस हो गई. युवक ने विधायक से कहा कि वह ग्रेजुएट है और विधायक को गधा बताया. इस पर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं. ओबीसी महासभा के प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने पहुंचे थे. उनकी मांग है कि सरकार सात दिन के भीतर आरक्षण लागू करे.
हवा में छलांग, आसमान में गुलाटी और चारों पहियों पर लैंडिंग, आई TESLA की फ्लाइंग कार
Tesla ने अपनी इस इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार Roadster के जरिए रफ्तार और टेक्नोलॉजी की एक ऐसी तस्वीर दुनिया के सामने पेश की है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है. हर किसी के जेहन में एक ही सवाल है कि, क्या एलन मस्क हवा में उड़ने वाली कार पेश कर दी है.
25,534 रन, 577 विकेट... क्रिकेट के इस महारथी के आगे दिग्गज भी फीके!
दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज ऑलराउंडर जैक्स कैलिस ने अपने करियर में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों से कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं. जानिए उनके जन्मदिन पर उनके शानदार क्रिकेट सफर और रिकॉर्ड्स तक की पूरी कहानी
24 साल बाद मां ने देखी बेटे की सूरत... आंखें नम कर देगी ये कहानी
राजस्थान के राजसमंद जिले के सेंगनवास गांव का प्रकाश नायक 12 साल की उम्र में मुंबई में अपने पिता से बिछड़ गया था. करीब 24 साल बाद बिहार में उसकी जानकारी मिली. पत्रकारों के आपसी संपर्क और कोशिशों से उसकी तस्वीर परिवार तक पहुंची, मां सोहनी देवी ने बेटे को पहचान लिया और आखिरकार परिवार उससे मिल सका.
SC में बहस के दौरान छीनी गई माइक, जंतर-मंतर केस से वकील ने खुद को किया अलग
Supreme Court News: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल थे। इस पीठ ने गुरुवार को लगभग 46 याचिकाओं पर सुनवाई की।
आ गई उड़ने वाली कार, Tesla Roadster ने हवा में दिखाया कमाल का स्टंट
TESLA की फ्लाइंग कार का वीडियो सामने आ गया है, जिसमें कार ने कमाल का स्टंट करके दिखाया है. पहले यह कार सड़क पर दौड़ी और फिर हवा में उड़ते हुए सेफ लैंडिंग करके दिखाई है. Elon Musk ने भी कार का वीडियो शेयर किया है. देखें वायरल वीडियो.
मीटिंग के दौरान महिला अधिकारी पर भड़क गए IAS, देने लगे गाली; वीडियो वायरल
जम्मू-कश्मीर में श्रम एवं रोजगार विभाग की एक बैठक के दौरान आईएएस अधिकारी संजीव रंजन एक महिला अधिकारी पर भड़क गए। उन्होंने महिला अधिकारी को गाली दे दी।
CJP के तिरंगा मार्च का दिल्ली मेट्रो पर भी असर? राजीव चौक, जनपथ, मंडी हाउस पर जान लें ताजा अपडेट
दिल्ली में CJP ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा यात्रा का ऐलान किया है. इसका असर दिल्ली मेट्रो पर होगा या नहीं इसका अपडेट भी सब जानना चाहते हैं. आज राजीव चौक, पटेल चौक, मंडी हाउस जैसे प्रमुख स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था अलर्ट पर है.
सरकार इसी महीने बुला सकती है संसद का विशेष सत्र, परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को पारित कराने का प्लान
केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है, जिसमें परिसीमन और महिला आरक्षण के अमल से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लाए जा सकते हैं.
रूस में आया भूकंप, कामचटका प्रायद्वीप में रिक्टर स्केल पर 7 की तीव्रता से थर्राई धरती
रूस के कामचटका प्रायद्वीप क्षेत्र में 7 तीव्रता का भूकंप आया है.
घर में क्या रखने से सांप नहीं आता है? सांप को घर से दूर रखने के लिए क्या जलाना चाहिए
सांप किस चीज से डरता है? बारिश में सांप घर, बगीचे और बाथरूम के आसपास दिखाई दे सकते हैं. ऐसे में घर की सफाई, कबाड़ हटाना, चूहों पर नियंत्रण और दरारें बंद करना जरूरी है. सांप दिखने पर खुद पकड़ने के बजाय विशेषज्ञों की मदद लें.
IIT दिल्ली का रोबोटिक्स एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम: पांच महीने में सीखें रोबोट बनाना, इतनी है फीस
IIT Delhi Robotics Executive Program: रोबोटिक्स और ऑटोमेशन पर आईआईटी दिल्ली ने एक कोर्स शुरू किया है, जिसमें कुछ ही महीनों में रोबोट बनाना और उससे जुड़ी कई तरह की चीजें सीखने को मिलेंगीं.
जयपुर। बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ अपने एक बयान को लेकर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। भाजपा सांसद ने गुरुवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पाकिस्तान को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने इस दौरान कहा कि अगर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है, तो भारत पाकिस्तान के साथ खड़ा होगा, क्योंकि वह हमारा पड़ोसी देश है। जब आपस में किसी मुद्दे की बात आती है, तो भारत के साथ खड़ा होना चाहिए। उनका ये बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भाजपा को निशाने पर लिया है। कांग्रेस ने इस संबंध में सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि बीजेपी का पाकिस्तान प्रेम फिर सामने आया। राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है - अगर अमेरिका-पाकिस्तान में युद्ध होता है, तो हम पाकिस्तान के साथ हैं। जी हां, बीजेपी उसी पाकिस्तान का साथ देगी, जिसने भारत के नागरिकों की हत्या करवाई। बीजेपी वालों की रग-रग में देशद्रोह भरा है। बीजेपी का नेता पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात करे तो मोदी जी का राष्ट्रवाद कहाँ चला जाता है: आप वहीं आम आदमी पार्टी ने मदन राठौड के इस बयान को लेकर एक्स के माध्यम से कहा कि बीजेपी के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का बयान: अमेरिका-पाकिस्तान का युद्ध हुआ तो हम पाकिस्तान के साथ हैं! जनता सवाल पूछे तो पाकिस्तानी, युवा आवाज उठाए तो आतंकवादी! लेकिन बीजेपी का नेता पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात करे तो मोदी जी का राष्ट्रवाद कहाँ चला जाता है? पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात करने वाली बीजपेी JP देशद्रोही है या नहीं, मोदी जी? PC:aajtak अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें BJP का पाकिस्तान प्रेम फिर सामने आया राजस्थान BJP के अध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है - अगर अमेरिका-पाकिस्तान में युद्ध होता है, तो हम पाकिस्तान के साथ हैं।जी हां, BJP उसी पाकिस्तान का साथ देगी, जिसने भारत के नागरिकों की हत्या करवाई।BJP वालों की रग-रग में देशद्रोह भरा है। https://t.co/bs93i1KLVe — Congress (@INCIndia) October 15, 2026 BJP के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का बयान: अमेरिका-पाकिस्तान का युद्ध हुआ तो हम पाकिस्तान के साथ हैं!जनता सवाल पूछे तो पाकिस्तानी, युवा आवाज़ उठाए तो आतंकवादी! लेकिन BJP का नेता पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात करे तो मोदी जी का राष्ट्रवाद कहाँ चला जाता है?पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात करने वाली BJP देशद्रोही है या नहीं, मोदी जी? — AAP (@AamAadmiParty) October 15, 2026
यामी गौतम की 'नई नवेली' का फर्स्ट डे फर्स्ट शो अचानक कैंसल, खाली सीटें या रिव्यू का डर?
यामी गौतम की हॉरर फिल्म नई नवेली के फर्स्ट डे फर्स्ट शो अचानक कैंसल होने से निराश होकर लौटना पड़ा. खाली थिएटर, रिव्यू का डर या मेकर्स की कोई रणनीति, यही सवाल कर रहे तंग.
अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं, अमेरिकी सांसद की ‘चिंता’ पर भारत का करारा जवाब
प्रमिला जयपाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में SIR पर सवाल उठाए थे। उन्होंने लिखा कि वे भारत सरकार द्वारा मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम हटाने के कदम से बेहद चिंतित हैं। अब भारत ने करारा जवाब दिया है।
भोपाल की सड़कों पर हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा. 'एक कचौरी दो समोसा, शिक्षा मंत्री का क्या भरोसा?' जैसे नारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने सीएम हाउस कूच की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने रोशनपुरा चौराहे पर रोक दिया। अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि पदवृद्धि का आदेश जारी होने तक आंदोलन खत्म नहीं होगा.
लंबे समय तक चले राजनयिक तनाव के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में अब एक नया और सकारात्मक दौर शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 11 और 12 दिसंबर को कनाडा का आधिकारिक दौरा करेंगे। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हुई एक सार्थक बातचीत के बाद इस महत्वपूर्ण दौरे की रूपरेखा तय की गई है। ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने शुक्रवार को इस बहुप्रतीक्षित दौरे की आधिकारिक घोषणा की। ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने शुक्रवार को इस दौरे की घोषणा की। उच्चायोग ने बताया कि दोनों नेता अपने संबंधों में आए सकारात्मक बदलाव को आगे बढ़ाने और व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने पर सहमत हुए हैं। इससे पहले गुरुवार को कैलगरी के एक रेस्तरां में लोगों से बातचीत के दौरान, कार्नी ने मोदी के इस संभावित दौरे की पुष्टि की थी। दौरे का एजेंडा इस दौरे में व्यापार पर खास फोकस रहने की उम्मीद है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए, कनाडा अपनी आर्थिक साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू फिलहाल भारत के छह दिवसीय व्यापार मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों देश इस साल के अंत तक एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। CTV न्यूज़ के अनुसार, दोनों पक्षों का लक्ष्य 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके सालाना 70 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। मंगलवार को हुई बातचीत के दौरान, मोदी और कार्नी ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। मोदी ने बताया कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों में बनी सकारात्मक गति को आगे बढ़ाने और व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ठोस परिणाम लाने पर सहमत हुए हैं। दोनों नेताओं ने 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते' (CEPA) पर बातचीत को जल्द से जल्द पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा तथा कृषि क्षेत्रों में भरोसेमंद साझेदारों के महत्व पर भी चर्चा की। कार्नी ने इससे पहले मार्च में भारत का दौरा किया था। ट्रूडो के बाद भारत-कनाडा संबंधों में सुधार यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और कनाडा अपने उन संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, जो 2023 में वैंकूवर के पास हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद काफी खराब हो गए थे। निज्जर, जो कनाडा के नागरिक और खालिस्तान आंदोलन के समर्थक थे और जिन्हें भारत ने आतंकवादी घोषित किया था, जून 2023 में मारे गए। कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया कि इस हत्या में भारतीय एजेंट शामिल हो सकते हैं; नई दिल्ली ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। इन आरोपों के कारण एक बड़ा राजनयिक विवाद खड़ा हो गया, जिससे 2024 में दोनों देशों के आपसी संबंधों में काफी गिरावट आई। ट्रूडो के बाद सत्ता में आने के बाद से, कार्नी ने भारत के साथ संबंधों को फिर से सुधारने की कोशिश की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की व्यापार नीतियों के कारण वैश्विक स्तर पर टैरिफ को लेकर जो तनाव पैदा हुआ है, उसके बीच आर्थिक सहयोग को एक प्रमुख प्राथमिकता के रूप में देखा जा रहा है। कार्नी ने पहले भारत को एक विश्वसनीय व्यापार भागीदार बताया था, जो यह दर्शाता है कि ओटावा दोनों देशों के संबंधों को फिर से मजबूत करने में रुचि रखता है। माना जा रहा है कि मोदी की यह यात्रा दोनों देशों को आर्थिक बातचीत को आगे बढ़ाने, रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने और हाल ही में आपसी संबंधों में आए सुधार को और अधिक सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करेगी। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi
ब्रा का फुल फॉर्म क्या होता है? 99% लड़कियां नहीं जानती हैं पूरा नाम, सही सुनकर चौंक जाएंगी आप
महिलाओं के लिए ब्रा का पूरा नाम क्या है? ब्रा तो पहनती हैं? आप जानती हैं कि ब्रा का क्या है फुल फॉर्म है. 99 प्रतिशत लड़कियों को पता ही नहीं है, ब्रा के पूरे नाम की. चलिए चेक करते हैं आपको कितनी है इसकी नॉलेज
SIR और को लेकर विपक्ष के हमलों के बीच बीजेपी देशव्यापी अभियान शुरू करने की तैयारी में है. पार्टी के नेता, मंत्री और जनप्रतिनिधि लोगों के बीच जाकर SIR से जुड़े तथ्यों को रखेंगे.
Jailer 2 Box Office Collection Day 1: बॉक्स ऑफिस पर जेलर 2 के तूफान ने दस्तक दे दी है, जिसमें थलाइवा यानी सुपरस्टार रजनीकांत (Thalivar Rajinikanth) का जलवा बॉक्स ऑफिस पर पहले ही दिन देखने को मिला है.
प्रयागराज में वकील सतीश श्रीवास्तव की हत्या से हड़कंप!
प्रयागराज के सोलाती इलाके में गुरुवार को एक विवादित जमीन पर कब्जे को लेकर हुए खूनी संघर्ष में 52 वर्षीय वकील सतीश कुमार श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस सनसनीखेज मामले में एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट देवेंद्र नाथ मिश्रा और उनके परिवार पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है.
IAS-IPS को कैसे मिलता है होम कैडर? एक दूसरे से शादी करने के बाद ट्रांसफर का भी नियम
UPSC Home Cadre Rules: हर साल कई लोग UPSC की सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करते हैं और IAS या आईपीएस बनते हैं. इनमें से ज्यादातर लोग पहली प्राथमिकता अपने स्टेट को देते हैं, लेकिन हर किसी को ये मौका नहीं मिल पाता है.
घर पर मिनटों में बनाएं चटपटी अनारदाना चटनी, बेहद आसान है रेसिपी
अनारदाना, हरा धनिया, पुदीना, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च से अनारदाना चटनी तैयार करें. समोसे, पकौड़े, कचौड़ी और पराठों के साथ परोसने के लिए बेहतरीन ऑप्शन है, इसे बनाने में ज्यादा समय और मेहनत नहीं लगती. आइए आपको इस चटनी की आसान रेसिपी बताते हैं.
दूरदर्शन की रामायण और महाभारत को खूब पसंद किया गया है. वहीं आज भी दर्शकों के बीच इन शोज में नजर आए सितारे उसी किरदार के लिए जाने जाते हैं. हालांकि अब कुछ सितारे इस दुनिया में नहीं है.
'श्मशान घाट में मैडिटेशन कर मिला सुकून', बोलीं तनुश्री दत्ता
तनुश्री दत्ता ने कहा है कि वो श्मशान घाट जाकर शांति महसूस करती हैं. उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज अघोरी थे और वे आत्माओं से संवाद करती हैं. तनुश्री के ये दावे यूजर्स को हैरान कर रहे हैं.
Bank Holidays 16-31 October 2026:अक्टूबर महीने के 15 दिन बीत चुके हैं, अब आज से शुरू हो रहे इस दूसरे पखवाड़े में दशहरा, दुर्गा पूजा समेत कई मौकों पर बैंक बंद रहे सकते हैं. जाने से पहले ये लिस्ट जरूर चेक कर लें.
CP में धारा-163 लागू, 4 लोगों से ज्यादा जमा नहीं हो सकते, जानें पाबंदियां
दिल्ली में 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन के चलते कई प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है. वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है.
भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' डाउन: सर्च करने में यूजर्स को हो रही परेशानी
X service disrupted in India: Users facing issues with search, News in hindi, X Updates in Hindi
क्या शराब की लत छुड़ाने के लिए किसी के खाने में बिना बताए दवा मिलाना सुरक्षित है? जानिए ऐसा करना क्यों खतरनाक हो सकता है और शराब की लत से बाहर निकलने का सुरक्षित तरीका क्या है.
मशहूर गार्डनिंग एक्सपर्ट तरुण चोपड़ा ने मनी प्लांट की ग्रोथ बढ़ाने और इस पौधे पर ज्यादा पत्तियां लाने का तरीका बताया है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
बिना फटे कुरकुरे साबूदाना वड़ा बनाने की आसान रेसिपी, देखें वीडियो
हर बार साबूदाने की खिचड़ी और पापड़ खा-खाकर हो गए हैं बोर? इस बार ट्राई करें कुरकुरे वड़े. स्वाद ऐसा कि बार-बार यही बनाने का दिल करेगा. नोट करें रेसिपी.
मौसम का बदला मिजाज, कहीं ठंड, कहीं बारिश, कहीं लू
उत्तर भारत में बारिश और ठंडी हवाओं से मौसम ने करवट ली है. दिल्ली एनसीआर में तापमान गिरने से ठंडक बढ़ी है, जबकि हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई है. उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और कई मैदानी राज्यों में भी बारिश के आसार हैं. दूसरी ओर, दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी जारी है. मुंबई में बढ़ती गर्मी के बीच मौसम विभाग ने लू का पीला अलर्ट दिया है.
हल्दी लग गई लेकिन शादी कब है ? राम और रीना की लव स्टोरी में ट्विस्ट
यूपी के औरैया में करीब 30 साल की ब्लॉगर रीना और 75 साल के राम सगर की शादी की चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है. दोनों की सगाई हो चुकी है, हल्दी लग चुकी है. लेकिन शादी की तारीख पूछने पर दोनों के जवाब अलग-अलग हैं. अब सभी की नजर शादी की तारीख तय होने पर है.
गुजरात सरकार ने 'बेट द्वारका कॉरिडोर' परियोजना की शुरुआत कर दी है. यहां आने वाले भक्तों को उच्चस्तरीय सुविधाएं दिलाने के उद्देश्य से इस परियोजना पर काम किया जा रहा है. जिस पर जल्द काम शुरू होगा.
Reliance's response to Musk over the Starlink entry controversy calls for a level playing field for all.
17 अफसर, 80 जवान और छापेमारी... धनबाद के गांव में चल क्या रहा था?
ये कहानी झारखंड के धनबाद के एक गांव की है. यहां 17 अफसरों, 80 जवानों ने छापेमारी कर दी. इस दौरान पुलिस ने मौके से 20 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 23 बैंक पासबुक, 16 एटीएम कार्ड और 10 चेकबुक सहित कई दस्तावेज बरामद किए. इसी के साथ पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. आखिर क्या है इसकी पूरी कहानी?
'जीने-खाने दो...', CJP की तिरंगा यात्रा से पहले व्यापारियों के सवाल
CJP के संस्थापक अभिजीतदिपकेने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क पर आज तिरंगा यात्रा का ऐलान किया है. इस बीच नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने CJP के विरोध प्रदर्शन से पहले सवाल उठाया है कि CP ही क्यों, यह एक सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट और मार्केट एरिया है, न कि विरोध प्रदर्शन की जगह.
रील के चक्कर में ठुक जाओगे... वैभव ने पैपराजी को दी वॉर्निंग, VIDEO
वैभव सूर्यवंशी वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा टी20 सीरीज में भारतीय टीम का हिस्सा हैं. हालांकि वैभव को अब तक बेंच पर ही बैठना पड़ा है. सीरीज का पांचवां मुकाबला बेंगलुरु में 17 अक्टूबर को होना है. उस मुकाबले में भी वैभव को शायद ही चांस मिले.
पंजाब के अमृतसर में सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार से चल रहे हथियारों और विस्फोटकों के एक बड़े तस्करी नेटवर्क का सनसनीखेज भंडाफोड़ किया है। अमृतसर पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस (सीआई) की संयुक्त कार्रवाई में एक अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच कुख्यात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक पिता और उसका बेटा भी शामिल हैं, जो इस अवैध सिंडिकेट को लंबे समय से संचालित कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में एक व्यक्ति और उसका बेटा भी शामिल हैं। उनके पास से एक .30 बोर की असॉल्ट राइफल, दो हथगोले और विदेश में निर्मित 13 अत्याधुनिक पिस्तौल बरामद की गई हैं। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गिरफ्तार लोगों की पहचान अमृतसर के अजनाला स्थित बल्लारवाल गांव के निवासी गुरप्रीत सिंह और उसके बेटे जसकरण सिंह तथा उनके सहयोगियों बटाला निवासी वीनू, अमृतपाल सिंह और गौरव मसीह के रूप में हुई है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बृहस्पतिवार को बताया कि बरामद पिस्तौलों में नौ एमएम की चार ग्लॉक पिस्तौल और .30 बोर की नौ पिस्तौल शामिल हैं। इनके अलावा 25 कारतूस भी बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी के अलावा, अमृतसर पुलिस की खुफिया रोधी (सीआई) टीम ने हथियारों की खेप की ढुलाई में इस्तेमाल की जा रही दो मोटरसाइकिलें भी जब्त की हैं। सीमा पार से चल रही थी साजिश खुफिया एजेंसियों और काउंटर इंटेलिजेंस (CI) टीम को पिछले कुछ दिनों से अमृतसर सीमा के पास असामाजिक गतिविधियों और हथियारों की तस्करी की पुख्ता सूचना मिल रही थी। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर इस गिरोह को धर दबोचा। अधिकारियों का मानना है कि ये हथियार पंजाब का माहौल खराब करने और टारगेट किलिंग जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए मंगाए गए थे। पुलिस अब आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क के तार सीमा पार पाकिस्तान में बैठे किन आतंकवादियों या तस्करों से जुड़े हैं और इनके अन्य कौन-कौन से स्थानीय मददगार इस साजिश में शामिल हैं। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
भारतीय परिवारों में बचत और सुरक्षित निवेश की जब भी बात आती है, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी पहली पसंद बना हुआ है। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में रिटर्न का आकर्षण चाहे जितना हो, गारंटीड रिटर्न और पूंजी सुरक्षा के लिहाज से बैंक एफडी का कोई तोड़ नहीं है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और बैंकों की लिक्विडिटी जरूरतों के चलते जमाकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा असमंजस यह है कि क्या अपनी एकमुश्त पूंजी को अभी एफडी में लॉक कर दिया जाए या आने वाले समय में ब्याज दरों के और बढ़ने का इंतजार किया जाए। लखनऊ के हजरतगंज और गोमती नगर स्थित प्रमुख सरकारी व निजी बैंकों की शाखाओं में इन दिनों वरिष्ठ नागरिकों से लेकर युवा नौकरीपेशा तक यही सवाल पूछ रहे हैं कि अधिकतम मुनाफा कमाने के लिए कौन सी रणनीति अपनाई जाए। वित्तीय विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ इंतजार करते रहने से मिलने वाला ब्याज हाथ से निकल जाता है, जबकि एक सटीक और आजमाया हुआ फॉर्मूला आपको ब्याज दरों के हर उतार-चढ़ाव में सबसे ज्यादा रिटर्न दिला सकता है।क्या ब्याज दरों के और बढ़ने का इंतजार करना समझदारी हैबैंकों द्वारा सावधि जमा पर दी जाने वाली ब्याज दरें सीधे तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रेपो रेट और बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति पर निर्भर करती हैं। बैंकिंग जानकारों और मैक्रोइकॉनॉमिक विश्लेषकों का विश्लेषण है कि ब्याज दरों का वर्तमान चक्र अपने शीर्ष (Peak Cycle) के बेहद करीब पहुंच चुका है। जब नीतिगत दरें उच्चतम स्तर पर स्थिर होती हैं, तो बैंकों द्वारा दरों में आगे बड़ी बढ़ोतरी की गुंजाइश सीमित हो जाती है। यदि कोई निवेशक इस उम्मीद में अपने पैसे को सामान्य बचत खाते (Savings Account) में 2.7% से 3% ब्याज पर पड़ा रहने देता है कि अगले कुछ महीनों में दरें आधा फीसदी बढ़ जाएंगी, तो वह हर महीने लगभग 4 से 4.5% तक के संभावित अतिरिक्त ब्याज का सीधा नुकसान (Opportunity Loss) उठा रहा होता है। इसलिए पूरा पैसा रोककर रखने के बजाय मौजूदा आकर्षक दरों पर लंबी अवधि के लिए पूंजी को लॉक करना वित्तीय दृष्टि से अधिक सुरक्षित कदम माना जाता है।स्पेशल टेन्योर और 1 से 3 साल की एफडी में सबसे तगड़ा रिटर्नअगर आप बैंकों के मौजूदा ब्याज दर चार्ट का बारीकी से अध्ययन करें, तो पाएंगे कि बैंक 5 या 10 साल की बहुत लंबी अवधि के बजाय 1 से 3 साल के खास बकेट्स (Special Tenures) पर सबसे ज्यादा ब्याज ऑफर कर रहे हैं। 399 दिन, 444 दिन, 555 दिन या 666 दिन जैसी विशेष योजनाओं में प्रमुख बैंक सामान्य नागरिकों को 7.10% से 7.50% तक और वरिष्ठ नागरिकों को 7.60% से 8.00% तक का वार्षिक ब्याज दे रहे हैं। बैंकों को अपनी अल्पकालिक और मध्यम अवधि की ऋण मांग को पूरा करने के लिए तुरंत डिपॉजिट की आवश्यकता होती है, इसलिए वे इन खास अवधियों पर प्रीमियम ब्याज दरें तय करते हैं। यदि आपके पास कोई ऐसा फंड है जिसकी जरूरत आपको अगले 2 से 3 वर्षों में पड़ने वाली है, तो इन विशेष अवधियों वाली एफडी में तुरंत पैसा लगाना सबसे मुफीद साबित होगा।एक्सपर्ट्स का पैसा बनाने वाला 'एफडी लैडरिंग' फॉर्मूलापूरा पैसा एक ही बैंक में और एक ही अवधि के लिए फिक्स कर देना एफडी की सबसे पुरानी और जोखिम भरी गलती मानी जाती है। इससे अगर बीच में पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो पूरी एफडी प्री-मैच्योर तोड़नी पड़ती है और 0.5% से 1% तक की पेनल्टी चुकानी पड़ती है। इस समस्या से बचने और अधिकतम रिटर्न पाने के लिए वित्तीय सलाहकार 'एफडी लैडरिंग' (FD Laddering) तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं। मान लीजिए आपके पास 5 लाख रुपये की एकमुश्त पूंजी है, तो उसे एक साथ 3 साल के लिए जमा करने के बजाय 1-1 लाख रुपये के 5 हिस्सों में बांट लें। पहला हिस्सा 1 साल के लिए, दूसरा 2 साल के लिए, तीसरा 3 साल के लिए, चौथा 4 साल के लिए और पांचवां 5 साल के लिए जमा करें। जैसे ही पहले साल 1 लाख रुपये की एफडी मैच्योर होगी, उसे ब्याज सहित अगले 5 साल के लिए रिन्यू कर दें। इस रणनीति से हर साल आपके हाथ में लिक्विडिटी रहेगी, इमरजेंसी में पूरी एफडी तोड़ने की जरूरत नहीं होगी और आपको ब्याज दरों के औसत का सबसे बड़ा फायदा मिलेगा।टैक्स नियमों का गणित और टीडीएस से बचने के तरीकेएफडी में निवेश करते समय अर्जित ब्याज पर लगने वाले टैक्स को समझना भी उतना ही अनिवार्य है। आयकर नियमों के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में सभी बैंक शाखाओं को मिलाकर एफडी से मिलने वाला कुल ब्याज यदि सामान्य नागरिकों के लिए 40,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये से अधिक होता है, तो बैंक नियमानुसार 10% टीडीएस (TDS) काटते हैं। यदि बैंक खाते के साथ पैन कार्ड लिंक नहीं है, तो यह टीडीएस दर सीधे 20% तक पहुंच सकती है। यदि आपकी कुल वार्षिक आय मूल कर छूट सीमा से कम है, तो टीडीएस कटने से बचाने के लिए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही बैंक में फॉर्म 15G (सामान्य नागरिकों के लिए) या फॉर्म 15H (वरिष्ठ नागरिकों के लिए) जमा करना न भूलें। इसके अलावा, यदि आप 30% वाले टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो एफडी से मिलने वाला ब्याज आपकी कुल आय में जुड़कर उसी स्लैब के अनुसार टैक्स के दायरे में आएगा, जिसे ध्यान में रखकर ही वास्तविक पोस्ट-टैक्स रिटर्न की गणना करनी चाहिए।छोटे फाइनेंस बैंक बनाम बड़े कमर्शियल बैंक: कहां रखें पूंजीअक्सर देखा जाता है कि स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) बड़े सरकारी और निजी बैंकों की तुलना में एफडी पर 0.50% से 1.00% तक अधिक ब्याज की पेशकश करते हैं। कई जमाकर्ता सुरक्षा को लेकर संशय में रहते हैं। इस संदर्भ में यह ध्यान रखना जरूरी है कि आरबीआई के पूर्ण स्वामित्व वाले डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत हर शेड्यूल्ड बैंक—चाहे वह एसबीआई हो, पीएनबी हो या कोई स्मॉल फाइनेंस बैंक—में प्रत्येक खाताधारक की 5 लाख रुपये तक की जमा पूंजी (मूलधन और ब्याज मिलाकर) पूरी तरह सुरक्षित और बीमित होती है। यदि आप उच्च रिटर्न का लाभ उठाना चाहते हैं, तो समझदारी इसी में है कि अपनी पूंजी को एक ही बैंक में केंद्रित करने के बजाय अलग-अलग शेड्यूल्ड बैंकों में 5 लाख रुपये की सीमा के भीतर फैलाकर जमा करें। इससे आपको अधिकतम ब्याज दर का फायदा भी मिलेगा और आपकी शत-प्रतिशत पूंजी को सरकारी बीमा सुरक्षा का अभेद्य कवच भी हासिल रहेगा।कीवर्ड्स (Keywords): fixed deposit interest rates 2026, best fd rates in india, fd laddering strategy, fixed deposit right time to invest, sbi fd interest rates, senior citizen fd rates, fd vs mutual fund return, rbi repo rate impact on fd, dicgc 5 lakh insurance rules, form 15g 15h for fd tds, short term fd vs long term fd, small finance bank fd interest, tax on bank fixed deposit, एफडी में निवेश का सही समय, बैंक एफडी ब्याज दरें 2026, एफडी लैडरिंग फॉर्मूला, फिक्स्ड डिपॉजिट नियम, वरिष्ठ नागरिक एफडी ब्याज, बैंक एफडी टैक्स नियम, फॉर्म 15जी टीडीएस बचत, स्मॉल फाइनेंस बैंक एफडी, एफडी पर 8 प्रतिशत ब्याज, सुरक्षित निवेश विकल्प, बैंक जमा बीमा डीआईसीजीसी, एफडी तोड़ने पर पेनल्टी, फिक्स्ड डिपॉजिट कैलकुलेटर
Delhi में आज ट्रैफिक अलर्ट, इन रास्तों पर जाने से बचें!
दिल्ली में शुक्रवार 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के चलते कई सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, दोपहर 3 बजे से आसपास के इलाकों में जाम लग सकता है. संसद मार्ग, बाराखंभा रोड, जनपथ और मिंटो रोड समेत कई रास्तों पर असर पड़ने की संभावना है. पुलिस ने लोगों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने और सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
जीएसआरटीसी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, CM भूपेंद्र पटेल ने महंगाई भत्ते में किया 2% का इजाफा
GSRTC Employees DA Hike: गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) के कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा निगम के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 2 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी गई है।
गाड़ी से नज़र नहीं हटेगी! भारत में इस दिन लॉन्च होगी होंडा की पहली EV
Honda 0 Alpha को बतौर कॉन्सेप्ट कंपनी ने पिछले साल अक्टूबर में दुनिया के सामने पेश किया था. उस वक्त से ही इस इलेक्ट्रिक एसयूवी के लुक और डिज़ाइन को लेकर चर्चा होती रही है. पिछले कई महीनों से भारत में इसकी टेस्टिंग की जा रही थी. अब आखिरकार कंपनी इस ईवी को भारत में लॉन्च करने जा रही है.
डायबिटीज में घाव क्यों नहीं भरता? नई रिसर्च में पता चला नया कारण
डायबिटीज के मरीजों में पैर के घाव, जिन्हें डायबिटिक फुट अल्सर कहा जाता है, आसानी से ठीक नहीं होते. नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक थेरेपी विकसित की है जो इस समस्या का इलाज कर सकती है. हालांकि अभी यह शुरुआती ट्रायल में ही है.
Connaught Place में कॉजपा के मार्च से पहले Delhi Traffic Police ने जारी की एडवाइजरी
नयी दिल्ली में शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के कारण मध्य दिल्ली के कई अहम रास्तों पर यातायात प्रभावित रहेगा, इसलिए यात्रियों को कुछ खास रास्तों से बचने की सलाह दी गई है। दिल्ली यातायात पुलिस की ओर से जारी परामर्श के अनुसार, कनॉट प्लेस और उसके आसपास की सड़कों पर अपराह्न तीन बजे से यातायात प्रभावित हो सकता है। इन मार्गों में संसद मार्ग, बाबा खड़क सिंह मार्ग, शहीद भगत सिंह मार्ग, पंचकुइयां रोड, बसंत लेन, चेल्म्सफोर्ड रोड, मिंटो रोड, बाराखंभा रोड, कस्तूरबा गांधी मार्ग, जनपथ, रेल भवन, रफी मार्ग, ‘सी’ हेक्सागन, मंडी हाउस, पटेल चौक, विंडसर प्लेस, गोल डाकखाना, अशोक रोड (जीपीओ से ‘सी’ हेक्सागन तक), तिलक मार्ग, टॉल्स्टॉय मार्ग और सिकंदरा रोड शामिल हैं। यातायात पुलिस ने कहा कि स्थिति के अनुसार मार्गों में बदलाव किया जाएगा। उसने वाहन चालकों को यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय रखने और जहां तक संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने घोषणा की है कि प्रशासनिक कारणों से सेंट्रल पार्क शुक्रवार और शनिवार को आम लोगों के लिए बंद रहेगा। यह घोषणा दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कॉजपा को प्रदर्शन करने से रोकने से इनकार करने के बाद की गई है। इस प्रदर्शन की घोषणा कॉजपा नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पहुंचने के बाद गिरफ्तार किए जाने और एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद की गई। दिल्ली पुलिस ने लोगों से मार्च से दूर रहने की अपील की है। हालांकि, पुलिस ने कहा कि वह लोगों के एक सीमित समूह को किसी उपयुक्त स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने की सुविधा दे सकती है। पुलिस ने कहा कि शांति बनाए रखने तथा लोगों की जान और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति की सुरक्षा के लिए इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू है, जिसके तहत लोगों के एकत्र होने पर रोक है।
'कॉम्पिटिशन से नहीं डरते, हमें भी मंजूरी...', मस्क को रिलायंस का जवाब
भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर एलन मस्क के आरोपों और दावों पर रिलायंस इंडस्ट्रीज का जवाब आया है. मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत में कारोबारी हित स्टारलिंक का रास्ता रोक रहे हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने उनके आरोपों पर जवाब देते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से नहीं डरती और देश के कानून का पालन सबको करना होगा.
राहुल से लेकर CJP तक... सुप्रीम कोर्ट में सबकी तय हो गई सुनवाई की तारीख
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के प्रदर्शनों, चुनाव आयोग के कामकाज और SIR से जुड़ी याचिकाओं को विषय के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटकर सुनवाई की तारीखें तय की हैं. राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी की याचिकाओं पर 27 अक्टूबर को सुनवाई होगी. दिल्ली के प्रदर्शनों और जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई के मामले 3 नवंबर को सुने जाएंगे. महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न का मामला 5 नवंबर को आएगा.
सीनियर्स की इन आदतों से परेशान हुई Gen Z एम्प्लॉय, रेडिट पोस्ट में बताया
ऑफिस में उम्र का डिफ्रेंस कई बार बातचीत और काम करने के तरीके में भी दिखता है. रेडिट पर एक महिला यूजर ने अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि उनके ज्यादातर कलीग्स उससे करीब 20 साल बड़े हैं. उसे डर है कि उसकी डेली लाइफ की कुछ आदतें उन्हें रूड या अन प्रोफोशनल लग सकती हैं.
स्वतंत्रता संग्राम के बाद से भारत में हुए प्रमुख जन-आंदोलनों (जेपी आंदोलन, मंडल आयोग, राम मंदिर आंदोलन, किसान आंदोलन से लेकर हालिया छात्र प्रदर्शनों) का विस्तृत विश्लेषण। जानिए इन आंदोलनों ने देश की राजनीति को कैसे नई दिशा दी।
देश में फर्जी कॉल्स, साइबर धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट और अनचाहे स्पैम कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने कॉलर पहचान से जुड़े नियमों में एक बड़ा और निर्णायक संशोधन लागू किया है। अब तक किसी भी टेलीकॉम कॉल की पहचान मुख्य रूप से कॉल करने वाले के मोबाइल या लैंडलाइन नंबर और डेटा आधारित कॉल्स में उसके आईपी एड्रेस (IP Address) तक ही सीमित रहती थी। नए संशोधनों के तहत सरकार ने 'कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन' (CLI) की कानूनी परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें ग्राहक के पंजीकृत नाम (Subscriber's Registered Name) को अनिवार्य रूप से शामिल कर दिया है। एकीकृत लाइसेंस समझौते (Unified License Agreement) की शर्तों में किए गए इस बदलाव के बाद टेलीकॉम ऑपरेटरों के कस्टमर डेटा रिकॉर्ड (Customer Data Record) में दर्ज असली नाम ही कॉलर की आधिकारिक पहचान माना जाएगा। यह नया नियम 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के तकनीकी जानकारों से लेकर देश भर के करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स के लिए यह बदलाव प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों स्तरों पर काफी असरदार साबित होगा।कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) के नियमों में क्या हुआ संशोधनदूरसंचार विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, लाइसेंस नियमों के उस मौजूदा प्रावधान को बदल दिया गया है जो कॉल करने वाले की तकनीकी पहचान को परिभाषित करता था। पहले के प्रावधानों में कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन का आशय केवल उस दूरसंचार पहचानकर्ता (Telecom Identifier) से था जो ऑपरेटर द्वारा यूजर को सौंपा जाता था—जैसे कि 10 अंकों का फोन नंबर, लैंडलाइन नंबर, डेटा नेटवर्क के लिए आवंटित आईपी एड्रेस या लाइसेंसकर्ता द्वारा समय-समय पर निर्धारित कोई अन्य तकनीकी पैरामीटर। अब संशोधित परिभाषा के तहत साफ तौर पर यह प्रावधान जोड़ा गया है कि कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन में सेवा प्रदाता द्वारा दिए गए नंबर और आईपी एड्रेस के साथ-साथ टेलीकॉम कंपनियों के डेटाबेस में दर्ज 'यूजर का नाम' (Name of the User in Customer Data Record) भी अनिवार्य घटक होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा, जनहित और दूरसंचार सेवाओं के पारदर्शी संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए लाइसेंसिंग नियमों में यह संशोधन किया है।CNAP सिस्टम: 4G और 5G नेटवर्क पर स्क्रीन पर दिखेगा वेरिफाइड नामइस नीतिगत बदलाव की तकनीकी रीढ़ कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (Calling Name Presentation - CNAP) प्रणाली है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने फर्जी कॉल्स से निपटने के लिए सीएनएपी व्यवस्था को नेटवर्क स्तर पर अनिवार्य करने की सिफारिश की थी। इस व्यवस्था के तहत जब भी किसी व्यक्ति के मोबाइल पर कोई अनजान कॉल आएगी, तो फोन स्क्रीन पर सिर्फ 10 अंकों का अनजान नंबर नहीं चमकेगा, बल्कि उस सिम कार्ड को खरीदते समय कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) और ई-केवाईसी (e-KYC) में दर्ज कराया गया आधिकारिक नाम भी स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। दूरसंचार विभाग ने 4G और 5G नेटवर्क पर इस प्रणाली को सुचारू रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बैंक अधिकारी, पुलिस या सरकारी जांच एजेंसी के नाम पर फर्जी कॉल करने वाले जालसाजों की असली पहचान तुरंत बेनकाब हो जाएगी। इसके अलावा, विदेशी नंबरों से आने वाली इंटरनेट और स्पूफ कॉल्स की पहचान के लिए स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से 'International Call' टैग प्रदर्शित करने की व्यवस्था भी की जा रही है।ट्रूकॉलर जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स की जरूरत होगी खत्मवर्तमान में अधिकांश स्मार्टफोन उपभोक्ता अनजान नंबरों की पहचान के लिए Truecaller या अन्य थर्ड-पार्टी कॉलर आईडी ऐप्स पर निर्भर रहते हैं। हालांकि, इन ऐप्स की पहचान प्रणाली क्राउडसोर्स्ड (Crowdsourced) डेटा पर काम करती है, जिसका अर्थ यह है कि यूजर ने किसी नंबर को जिस नाम से सेव किया है, वही नाम दूसरों की स्क्रीन पर दिखता है। इसके चलते ठग अक्सर अपना नाम बैंक एग्जीक्यूटिव, पुलिस ऑफिसर या सीबीआई अधिकारी के रूप में क्राउडसोर्स करवा लेते थे। नई व्यवस्था सीधे टेलीकॉम ऑपरेटरों के सरकारी आधार और आईडी-वेरिफाइड डेटाबेस से जुड़ी होगी। इसके लिए उपभोक्ता को अपने फोन में किसी अतिरिक्त ऐप को डाउनलोड करने, कॉन्टैक्ट्स की अनुमति देने या बैटरी खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी। नेटवर्क स्तर पर ही यह जानकारी सीधे हैंडसेट पर भेजी जाएगी, जिससे गलत या भ्रामक नामों की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।बिजनेस कॉल्स और प्राइवेसी सुरक्षा के लिए तय किए गए मानकव्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के अलावा वाणिज्यिक और संस्थागत कॉल्स के लिए भी सरकार ने सख्त नियम तय किए हैं। बैंकों, बीमा कंपनियों, डिलीवरी एग्रीगेटर्स और कॉर्पोरेट संस्थानों द्वारा किए जाने वाले कॉल्स पर उनके सत्यापित ट्रेड नेम (Verified Trade Names) प्रदर्शित होंगे, ताकि ग्राहक यह तय कर सकें कि कॉल जरूरी है या स्पैम। वहीं, सामान्य उपभोक्ताओं की निजता (Privacy) की रक्षा के लिए भी सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं। जिन उपभोक्ताओं को सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान गुप्त रखनी है, उनके लिए कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रिस्ट्रिक्शन (CLIR) की विशेष छूट का विकल्प उपलब्ध रहेगा। यदि किसी यूजर ने सक्षम प्राधिकारी से सीएलआईआर सुविधा ले रखी है, तो उनका नाम सामान्य रूप से प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। नए नियमों का मकसद हर आम नागरिक को यह बुनियादी अधिकार देना है कि उसके फोन की घंटी बजते ही उसे पता हो कि कॉल करने वाला असली शख्स कौन है।
नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) का खाता न केवल बुढ़ापे का सबसे बड़ा आर्थिक सहारा माना जाता है, बल्कि आपातकालीन वित्तीय जरूरतों के समय यह एक भरोसेमंद इमरजेंसी फंड की भूमिका भी निभाता है। अक्सर शादी-ब्याह, बच्चों की उच्च शिक्षा, गंभीर बीमारी का इलाज या घर खरीदने जैसे बड़े खर्चों के वक्त कर्मचारियों को पीएफ खाते से एडवांस निकासी की जरूरत पड़ती है। हालांकि, कई बार अंशधारकों के मन में यह बड़ा असमंजस रहता है कि क्या वे अपने खाते में जमा पूरी रकम निकाल सकते हैं या फिर सरकार ने इसकी कोई तय सीमा निर्धारित कर रखी है। यदि आपके ईपीएफ खाते में कुल 1 लाख रुपये का बैलेंस जमा है, तो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नवीनतम नियमों के अनुसार आप 25,000 रुपये, 50,000 रुपये या 75,000 रुपये में से अधिकतम कितनी रकम अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा सकते हैं, इसका गणित समझना हर वेतनभोगी के लिए बेहद जरूरी है। लखनऊ के गोमती नगर और हजरतगंज स्थित कॉरपोरेट दफ्तरों से लेकर देश भर के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ ने निकासी नियमों को पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और सुगम बना दिया है।1 लाख के बैलेंस पर 75 प्रतिशत का फॉर्मूला और 25 प्रतिशत लॉक-इन नियमकर्मचारी भविष्य निधि संगठन के सामान्य एडवांस निकासी नियमों के मुताबिक, कोई भी कार्यरत अंशधारक अपने कुल पात्र पीएफ बैलेंस का अधिकतम 75 प्रतिशत तक ही गैर-वापसी योग्य (Non-refundable Advance) के रूप में निकाल सकता है। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि यदि आपके पीएफ खाते में कुल 1 लाख रुपये का फंड जमा है, तो आप एक बार में अधिकतम 75,000 रुपये तक की निकासी के लिए आवेदन कर सकते हैं। शेष 25 प्रतिशत यानी 25,000 रुपये की राशि खाते में 'प्रोटेक्टेड' या अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखी जाती है। ईपीएफओ ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के हाथ पूरी तरह खाली न हों और बची हुई राशि पर सरकार द्वारा तय किया गया 8.25 प्रतिशत का सालाना चक्रवृद्धि ब्याज लगातार मिलता रहे। जब तक कर्मचारी सेवा में रहता है, तब तक विशेष परिस्थितियों को छोड़कर पूरे 1 लाख रुपये की 100% निकासी की अनुमति नहीं दी जाती।मेडिकल इमरजेंसी और ऑटो-क्लेम सेटलमेंट में कितनी मिलेगी राहतयदि किसी कर्मचारी या उसके आश्रित परिवार के सदस्यों (माता-पिता, जीवनसाथी या बच्चों) को अचानक किसी गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने के चलते मेडिकल इमरजेंसी का सामना करना पड़ता है, तो ईपीएफओ के नियम सबसे ज्यादा लचीले साबित होते हैं। चिकित्सा आपातकाल (Form 31 - Illness) के तहत कर्मचारी अपने हिस्से के पूरे अंशदान और उस पर मिले ब्याज के बराबर रकम निकालने का दावा कर सकता है। ₹1 लाख के कुल बैलेंस में यदि कर्मचारी और नियोक्ता का संयुक्त अंशदान पात्रता के दायरे में आता है, तो मरीज के इलाज के लिए ₹75,000 या उससे अधिक की आवश्यक राशि तुरंत स्वीकृत की जा सकती है। इतना ही नहीं, ईपीएफओ ने अपने आईटी सिस्टम को अपग्रेड करते हुए मेडिकल और शिक्षा जैसे प्राथमिक कारणों के लिए ऑटो-मोड क्लेम सेटलमेंट की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर दिया है। इसके तहत यदि आपकी केवाईसी और आधार सीडिंग पूरी है, तो आवेदन करने के महज 3 से 4 कार्य दिवसों के भीतर पैसा सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट हो जाता है।शादी और बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए 50 प्रतिशत तक निकासी का नियमयदि आप अपने स्वयं के विवाह, भाई-बहन की शादी या बेटे-बेटी की उच्च शिक्षा के लिए पीएफ खाते से पैसा निकालना चाहते हैं, तो इसके लिए ईपीएफओ ने अलग पात्रता मापदंड तय किए हैं। इस श्रेणी में लाभ उठाने के लिए कर्मचारी का ईपीएफओ में कम से कम 7 वर्ष का निरंतर सेवाकाल (7 Years of Continuous Service) पूरा होना अनिवार्य है। शादी और पढ़ाई के उद्देश्य से आप अपने कुल कर्मचारी अंशदान (Employee Share) का अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही निकाल सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि आपके खाते के 1 लाख रुपये के कुल बैलेंस में आपका अपना जमा अंशदान 50,000 रुपये है और बाकी कंपनी का हिस्सा है, तो आप अधिकतम 25,000 रुपये की निकासी कर सकेंगे। यदि आपका अपना अंशदान 1 लाख रुपये है, तो आप सीधे 50,000 रुपये की राशि निकालने के लिए अधिकृत होंगे। जीवनकाल में शादी या शिक्षा के नाम पर अधिकतम तीन बार ही इस तरह की आंशिक निकासी की अनुमति दी जाती है।मकान निर्माण, फ्लैट खरीद और होम लोन रीपेमेंट की विशेष छूटघर खरीदना या बनवाना हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सबसे बड़ा सपना होता है और ईपीएफओ इस सपने को पूरा करने के लिए सबसे उदार निकासी विकल्प उपलब्ध कराता है। आवासीय उद्देश्य—जैसे नया मकान खरीदना, फ्लैट बुक करना, प्लॉट खरीदना या पुराने मकान का पुनर्निर्माण—के लिए कम से कम 5 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद कर्मचारी अपने कुल पीएफ बैलेंस का 90 प्रतिशत तक निकालने के पात्र हो जाते हैं। इस विशेष श्रेणी में यदि आपके खाते में 1 लाख रुपये मौजूद हैं, तो आप 75,000 रुपये की सामान्य सीमा को पार करते हुए विशेष अनुमति के साथ 90,000 रुपये तक की निकासी कर सकते हैं, बशर्ते संपत्ति आपके या आपके जीवनसाथी के नाम पर पंजीकृत हो। इस प्रावधान का इस्तेमाल बैंक से लिए गए होम लोन के मूलधन को चुकाने के लिए भी किया जा सकता है, जिससे कर्ज का मासिक बोझ कम करने में भारी मदद मिलती है।नौकरी छूटने पर कब निकाल सकते हैं पूरा ₹1 लाख का फंडयदि किसी कारणवश आपकी नौकरी छूट जाती है या आप रोजगारविहीन हो जाते हैं, तो पीएफ निकासी के नियम सेवा में रहने के दौरान मिलने वाले नियमों से पूरी तरह अलग होते हैं। ईपीएफओ के नियमों के तहत नौकरी छूटने के एक महीने बाद ही आप अपने पीएफ खाते का 75 प्रतिशत यानी ₹75,000 तुरंत निकाल सकते हैं। यदि लगातार दो महीने तक आप किसी नई नौकरी से नहीं जुड़ते हैं और बेरोजगार रहते हैं, तो आपको अपने खाते में बचा हुआ 25% यानी पूरा 1 लाख रुपये निकालने (Full & Final Settlement) की कानूनी अनुमति मिल जाती है। इसके अलावा यदि कर्मचारी 58 वर्ष की आयु पूरी करके रिटायर हो जाता है या स्थायी रूप से विदेश में बसने का फैसला करता है, तो वह बिना किसी रोक-टोक के अपने पीएफ और पेंशन (EPS) की पूरी 100 फीसदी जमा पूंजी एक साथ निकाल सकता है।टीडीएस और टैक्स नियमों का रखें ध्यान, न करें ये गलतीपीएफ खाते से पैसा निकालते समय टैक्स के नियमों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि आपने लगातार 5 साल की सेवा (5 Years of Continuous Service) पूरी कर ली है, तो निकाली गई कोई भी रकम पूरी तरह से आयकर मुक्त (Tax-Free) होती है। लेकिन यदि आपकी कुल नौकरी 5 साल से कम है और आप 50,000 रुपये से अधिक की रकम निकाल रहे हैं, तो उस पर टीडीएस (TDS) काटा जाता है। यदि आपका पैन कार्ड (PAN) ईपीएफ खाते और यूएएन (UAN) से विधिवत लिंक है, तो 10 प्रतिशत की दर से टीडीएस कटेगा। यदि पैन लिंक नहीं है, तो अधिकतम सीमांत दर यानी 34.6 प्रतिशत तक का भारी टैक्स कट सकता है। इसलिए यदि आपकी कुल आय करयोग्य सीमा से कम है, तो टीडीएस से बचने के लिए फॉर्म 15G या वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15H ऑनलाइन क्लेम के साथ अपलोड करना कभी न भूलें।
मणिपुर में क्या हुआ? अस्पताल में भर्ती कराए गए BSF के 84 जवान
मणिपुर में फूड पॉइजनिंग की आशंका के बीच BSF के 84 जवानों और 3 नागरिक ड्राइवरों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। सभी की हालत फिलहाल गंभीर नहीं है। जवानों के खाने के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। जानें क्या है पूरा मामला।
ऑनलाइन फूड डिलीवरी की दुनिया में प्रमुख प्लेटफॉर्म स्विगी (Swiggy) ने ग्राहकों के अनुभव को पूरी तरह बदलने के लिए एक क्रांतिकारी 'मल्टी-रेस्टोरेंट ऑर्डरिंग' (Multi-Restaurant Ordering) फीचर पेश कर दिया है। अब तक फूड डिलीवरी ऐप्स पर सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि अगर घर या दफ्तर में बैठे चार अलग-अलग लोगों को अलग-अलग रेस्टोरेंट से खाना खाना होता था, तो हर व्यक्ति के लिए अलग से ऑर्डर करना पड़ता था, अलग पेमेंट करनी होती थी और बार-बार प्लेटफॉर्म फीस व डिलीवरी चार्ज चुकाना पड़ता था। इस बड़ी समस्या का समाधान निकालते हुए स्विगी ने अब ग्राहकों को अपने लिविंग रूम में ही वर्चुअल 'फूड कोर्ट' का अनुभव देने की व्यवस्था शुरू कर दी है। इस नए फीचर के तहत उपभोक्ता एक ही ट्रांजैक्शन में अधिकतम 5 अलग-अलग रेस्टोरेंट से अपने पसंदीदा व्यंजन कार्ट में जोड़कर मंगा सकेंगे। लखनऊ के हजरतगंज और गोमती नगर जैसे लोकप्रिय खान-पान केंद्रों से लेकर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु तक, यह नया अपडेट त्योहारी सीजन और वीकेंड पार्टीज के दौरान दोस्तों और परिवारों के बीच फूड ऑर्डरिंग को बेहद आसान और किफायती बनाने जा रहा है।एक ही कार्ट में 5 रेस्टोरेंट से ऑर्डर और सिंगल चेकआउट की सुविधास्विगी के इस नए फीचर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यूजर्स को अब अलग-अलग रेस्टोरेंट के बीच स्विच करते समय बार-बार अपनी कार्ट खाली नहीं करनी पड़ेगी। उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार एक रेस्टोरेंट से स्टार्टर, दूसरे से मेन कोर्स, तीसरे से बिरयानी और चौथे या पांचवें से डेजर्ट या आइसक्रीम एक साथ चुन सकते हैं। इन सभी आइटम्स को एक ही मास्टर कार्ट में इकट्ठा किया जा सकेगा। जब यूजर चेकआउट स्क्रीन पर जाएंगे, तो उन्हें सभी रेस्टोरेंट्स के आइटम्स का कुल योग एक साथ दिखाई देगा और वे यूपीआई, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए केवल एक बार में पूरा भुगतान (Single Checkout & Payment) कर सकेंगे। इससे न सिर्फ समय की भारी बचत होगी, बल्कि बार-बार पेमेंट फेल होने या अलग-अलग खातों से पैसे कटने की झंझट भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।डिलीवरी चार्ज और प्लेटफॉर्म फीस में होगी सीधी बचतआम तौर पर जब कोई ग्राहक अलग-अलग रेस्टोरेंट से 3 या 4 ऑर्डर करता था, तो हर ऑर्डर पर अलग से प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और जीएसटी जोड़ दिया जाता था। कई बार खाने की कुल कीमत से ज्यादा इन अतिरिक्त शुल्कों का बोझ जेब पर भारी पड़ता था। स्विगी के मल्टी-रेस्टोरेंट ऑर्डरिंग सिस्टम में ऑर्डर्स को एक ही ट्रांजैक्शन में बंडल करने की सुविधा मिलने से ग्राहकों को बार-बार कटने वाली प्लेटफॉर्म फीस और अतिरिक्त डिलीवरी लागत से बड़ी राहत मिलेगी। विशेषकर ऑफिस लंच के दौरान या घर में होने वाली गेट-टुगेदर और किटी पार्टीज में जहां हर सदस्य की फूड चॉइस अलग होती है, वहां यह फीचर बिल को काफी कम रखने में मददगार साबित होगा। फूड लवर्स अब बजट बिगड़ने की चिंता किए बिना शहर के मशहूर आउटलेट्स से अपने मनपसंद पकवान एक साथ मंगा सकते हैं।अलग-अलग डिलीवरी पार्टनर और सिंगल स्क्रीन पर लाइव ट्रैकिंगतकनीकी मोर्चे पर स्विगी ने इस जटिल लॉजिस्टिक्स को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है। भले ही ऑर्डर और पेमेंट एक ही बार में की गई हो, लेकिन खाना बनाने और डिलीवरी की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ऑर्डर होने के बाद हर रेस्टोरेंट को अपना-अपना फूड तैयार करने का नोटिफिकेशन अलग से जाएगा। इसके बाद स्विगी के एल्गोरिदम के तहत नजदीकी डिलीवरी पार्टनर्स स्वतंत्र रूप से उन रेस्टोरेंट्स से खाना पिक करेंगे। यूजर को अपनी ऐप स्क्रीन पर एक ही कंसोलिडेटेड ट्रैकिंग डैशबोर्ड दिखेगा, जहां अलग-अलग टैब के जरिए यह साफ देखा जा सकेगा कि किस रेस्टोरेंट का खाना तैयार हो रहा है और कौन सा डिलीवरी पार्टनर किस रूट से उनके पते की ओर आ रहा है। इससे खाना गर्म और ताजा रहने की गारंटी सुनिश्चित होती है, क्योंकि एक रेस्टोरेंट के चक्कर में दूसरे का खाना ठंडा नहीं होगा।जोमैटो को कड़ी टक्कर और फूड डिलीवरी मार्केट में नई जंगस्विगी का यह कदम भारतीय फूड-टेक बाजार में अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी जोमैटो (Zomato) पर तकनीकी और सर्विस बढ़त बनाने की रणनीति के तहत उठाया गया है। हाल ही में दोनों प्लेटफॉर्म्स ने बड़े ऑर्डर्स और इवेंट्स के लिए लार्ज ऑर्डर फ्लीट जैसे प्रयोग शुरू किए थे, लेकिन रिटेल यूजर्स के लिए 5 रेस्टोरेंट्स से एक साथ कस्टमाइज्ड ऑर्डर की सुविधा देकर स्विगी ने सीधे उपभोक्ता की रोजमर्रा की जरूरत को साध लिया है। कंपनी का मानना है कि इस इनोवेशन से औसत ऑर्डर वैल्यू (AOV) में बड़ा उछाल आएगा और उन ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ेगी जो पहले अलग-अलग रेस्टोरेंट से खाना मंगाने की हिचकिचाहट के चलते किसी एक ही आउटलेट के सामान्य मेनू से समझौता कर लेते थे। आने वाले दिनों में यह फीचर पूरे देश के सभी टियर-1 और टियर-2 शहरों में फेज़-वाइज तरीके से पूरी तरह रोलआउट कर दिया जाएगा, जिससे ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग का ट्रेंड एक नए मुकाम पर पहुंचना तय है।
दिल्ली में शुक्रवार 16 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तिरंगा मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कन
दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती दो प्रमुख लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पुष्टि की है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (Bilateral Trade Deal) के पहले चरण (First Tranche) को औपचारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया गया है और अब यह समझौता विधिक प्रारूप यानी कानूनी ड्राफ्टिंग (Legal Drafting) के दौर में पहुंच चुका है। नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच पिछले कई महीनों से चल रही सघन व्यापार वार्ता के बाद इस पहले हिस्से पर बनी सहमति ने दोनों देशों के कारोबारी संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वाणिज्यिक और निर्यातक हलकों से लेकर मुंबई और दिल्ली के कॉरपोरेट गलियारों तक इस घटनाक्रम को भारतीय उद्योगों, विशेष रूप से टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि निर्यात के लिए बेहद उत्साहजनक माना जा रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने यह भी बिल्कुल साफ कर दिया है कि भारत केवल समझौते पर दस्तखत करने की जल्दबाजी में नहीं है, बल्कि घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा और प्रतिस्पर्धी लाभ की अनिवार्य शर्त पूरी होने के बाद ही इसे धरातल पर लागू किया जाएगा।पहले चरण की लीगल ड्राफ्टिंग शुरू और अमेरिकी राजदूत के सकारात्मक संकेतवाणिज्य मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों देशों की वार्ता टीमों ने अपनी चेकलिस्ट में शामिल सबसे जटिल और बड़े बुनियादी मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझा लिया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष समझौते के पहले चरण की रूपरेखा को बंद करने के बेहद करीब हैं और वर्तमान में कानूनी बारीकियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस प्रगति पर भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी नई दिल्ली में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच पर मुहर लगाते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के मुख्य और बड़े बिंदुओं पर व्यापक सहमति बन चुकी है। उन्होंने वार्ता की प्रगति को उल्लेखनीय बताते हुए विश्वास जताया कि दोनों रणनीतिक साझेदार जल्द ही इस पहले चरण के समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर करने की स्थिति में होंगे।भारत की दो टूक शर्त: प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मिले बेहतर टैरिफ लाभव्यापार समझौते के पहले चरण पर सहमति बनने के बावजूद भारत ने अपने रुख में पूरी तरह दृढ़ता और स्पष्टता बनाए रखी है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यह द्विपक्षीय समझौता तभी पूरी तरह लागू किया जाएगा जब भारत को अमेरिकी बाजार में अपने अन्य समकक्ष और प्रतिस्पर्धी देशों (Peer & Competitor Countries) की तुलना में टैरिफ के स्तर पर बराबरी या उनसे बेहतर प्रतिस्पर्धी बढ़त हासिल होगी। भारत का सीधा तर्क है कि अमेरिकी बाजार में केवल औपचारिक प्रवेश पाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वियतनाम, बांग्लादेश, मैक्सिको या अन्य एशियाई प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारतीय उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Tariffs) अधिक अनुकूल होने चाहिए। जब तक भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में स्पष्ट टैरिफ सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता की कानूनी गारंटी नहीं मिलती, तब तक समझौते को अंतिम रूप से प्रभावी नहीं माना जाएगा।गैर-टैरिफ बाधाओं और सेक्शन 301 जांच के पेच पर नजरभारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता की शुरुआत टैरिफ संबंधी विवादों को सुलझाने, गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को समाप्त करने और दोनों पक्षों के लिए बाजार पहुंच को सुगम बनाने के लक्ष्य के साथ हुई थी। इस वार्ता में अमेरिका द्वारा कुछ वस्तुओं पर लगाए जाने वाले नियमों और सेक्शन 301 (Section 301 Investigation) के तहत चलने वाली जांच प्रक्रियाओं के संभावित प्रभावों पर भी भारतीय वार्ताकारों की पैनी नजर बनी हुई है। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी समझौते के बाद अमेरिकी विनियामक एजेंसियां भारतीय फार्मा, आईटी सेवाओं और कृषि उत्पादों पर अनावश्यक तकनीकी या स्वच्छता संबंधी अड़ंगे न लगा सकें। इसके अलावा, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में गैर-बाजार आधारित गतिविधियों और जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता (Excess Capacity) के चलते वैश्विक व्यापार पर पड़ने वाले दबावों से निपटने के लिए भी साझा रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का बड़ा लक्ष्यवर्तमान में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एकल व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ भारत एक मजबूत व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) बनाए हुए है। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करते हुए वर्ष 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुने से अधिक बढ़ाकर 500 अरब डॉलर (लगभग 48 लाख करोड़ रुपये) के ऐतिहासिक आंकड़े तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। पहले चरण की डील फाइनल होने से भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों—जैसे रत्न एवं आभूषण, कपड़ा उद्योग, ऑटो कंपोनेंट्स, प्रोसेस्ड फूड और आईटी कंसल्टिंग—को भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं, अमेरिका के लिए भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार में उन्नत मशीनरी, मेडिकल डिवाइस, एयरोस्पेस उपकरण और उच्च-तकनीकी ऊर्जा समाधानों की आपूर्ति के नए रास्ते खुलेंगे।अन्य वैश्विक समझौतों की कतार और भारत की बढ़ती धमकभारत इस समय न केवल अमेरिका बल्कि यूरोपीय संघ (EU), कनाडा और ब्रिटेन जैसे कई अन्य प्रमुख विकसित बाजारों के साथ भी मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने के लिए सक्रिय वार्ता कर रहा है। वाणिज्य मंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि यूरोपीय संघ के साथ एफटीए बातचीत बहुत उन्नत स्तर पर है और इसे आगामी महीनों में हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है। दुनिया भर की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं का एक साथ भारत के साथ व्यापक व्यापारिक समझौते करने के लिए आगे आना यह साबित करता है कि वैश्विक सप्लाई चेन के पुनर्गठन और चीन-प्लस-वन (China+1) रणनीति के दौर में भारत एक अपरिहार्य, भरोसेमंद और मजबूत विनिर्माण एवं उपभोग केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है।
कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी!
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं और खुफिया ब्यूरो के कर्मचारी उनके घर की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई कि दिल्ली पुलिस उन्हें हिरासत में ले सकती है. यह बयान शुक्रवार को प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले आया है. पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनावी अनियमितताओं की जांच की मांग कर रही है.
देश में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और नए उद्यमियों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम' (PMEGP - Prime Minister's Employment Generation Programme) एक बेहद लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी योजना बनकर उभरी है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा संचालित इस क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी स्कीम के तहत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नया उद्योग स्थापित करने के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये तक की परियोजना लागत (Project Cost) स्वीकृत की जाती है। इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली भारी-भरकम 'मार्जिन मनी' (सब्सिडी) है, जो पात्र श्रेणियों और ग्रामीण इलाकों में 35 प्रतिशत तक पहुंचती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि 50 लाख रुपये की परियोजना में सरकार की तरफ से 17.5 लाख रुपये की गैर-वापसी योग्य सब्सिडी का लाभ मिलता है, जिससे उद्यमी के सिर से कर्ज का बोझ काफी कम हो जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित देश भर के छोटे कस्बों और ग्रामीण अंचलों में अपना कारखाना, प्रोसेसिंग यूनिट या विनिर्माण इकाई लगाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए यह योजना वरदान साबित हो रही है।₹50 लाख के प्रोजेक्ट में सब्सिडी और लोन का पूरा गणितपीएमईजीपी योजना में वित्तपोषण का ढांचा तीन मुख्य घटकों में बंटा होता है—उद्यमी का स्वयं का अंशदान (Own Contribution), सरकारी मार्जिन मनी (Subsidy), और बैंक द्वारा दिया जाने वाला शेष ऋण (Bank Loan)। यदि कोई विशेष श्रेणी (महिला, एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग या पूर्व सैनिक) का व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्र में 50 लाख रुपये की लागत से विनिर्माण इकाई लगाता है, तो उसे अपनी जेब से मात्र 5 प्रतिशत यानी 2.50 लाख रुपये लगाने होते हैं। केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट पर 35 प्रतिशत यानी 17.50 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान करती है। बैंक द्वारा शुरुआत में 95 प्रतिशत (47.50 लाख रुपये) का कुल ऋण स्वीकृत किया जाता है, जिसमें से सरकार द्वारा भेजी गई 17.50 लाख रुपये की सब्सिडी बैंक में टर्म डिपॉजिट रिसीट (TDR) के रूप में 3 साल के लिए सुरक्षित रखी जाती है। 3 साल के सफल संचालन और फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद यह राशि सीधे लोन खाते में समायोजित कर दी जाती है, जिससे लाभार्थी को वास्तव में केवल 30 लाख रुपये का मूल ऋण ही अपनी कमाई से बैंक को ब्याज सहित चुकाना पड़ता है। सामान्य वर्ग (शहरी) के लिए स्वयं का अंशदान 10% और सब्सिडी 15% (7.50 लाख) होती है, जबकि सामान्य वर्ग (ग्रामीण) के लिए सब्सिडी 25% (12.50 लाख) तय की गई है।कौन-कौन हैं पात्र और क्या हैं जरूरी शर्तेंइस योजना के तहत सहायता केवल नई सूक्ष्म इकाइयों (New Greenfield Units) की स्थापना के लिए ही दी जाती है, पहले से चल रहे किसी व्यवसाय के लिए पहला लोन मान्य नहीं होता। आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए और इसके लिए परिवार की आय की कोई ऊपरी सीमा (No Income Ceiling) तय नहीं की गई है। यदि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रोजेक्ट की कुल लागत 10 लाख रुपये से अधिक है, तो आवेदक का कम से कम 8वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। एक परिवार (स्वयं और पति/पत्नी) से केवल एक ही व्यक्ति इस योजना के तहत वित्तीय लाभ ले सकता है। इसके अलावा, जिन उद्यमियों ने पूर्व में पीएमआरवाई (PMRY), आरईजीपी (REGP) या मुद्रा जैसी किसी अन्य सरकारी सब्सिडी-लिंक्ड योजना का लाभ उठाया हुआ है, वे इस योजना में सब्सिडी पाने के पात्र नहीं माने जाते। लोन वितरण से पूर्व लाभार्थी को खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) या नामित संस्थान द्वारा आयोजित उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP Training) को सफलतापूर्वक पूरा करना भी जरूरी होता है।आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और डीपीआर की अहमियतयोजना में आवेदन करने से पहले आवेदक के पास सभी वैधानिक दस्तावेज डिजिटल रूप में तैयार होने चाहिए। इसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ, निवास प्रमाण पत्र, जाति या विशेष श्रेणी प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), और शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्र में इकाई लगाने पर ग्राम प्रधान या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी 'रूरल एरिया सर्टिफिकेट' लगाना आवश्यक होता है ताकि 35% सब्सिडी का लाभ मिल सके। सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज 'विस्तृत परियोजना रिपोर्ट' (Detailed Project Report - DPR) होती है, जिसमें प्रस्तावित उद्योग की मशीनरी लागत, कच्चे माल का खर्च, शेड निर्माण, वर्किंग कैपिटल और अगले 3 से 5 वर्षों के अनुमानित लाभ-हानि का पूरा ब्योरा दर्ज होना चाहिए। प्रोजेक्ट रिपोर्ट जितनी व्यावहारिक और वित्तीय रूप से मजबूत होगी, बैंक द्वारा लोन की मंजूरी मिलने की संभावना उतनी ही अधिक हो जाती है।घर बैठे ऑनलाइन कैसे करें अप्लाई: पूरा प्रोसेसपीएमईजीपी ऋण के लिए किसी भी बिचौलिए या दफ्तर के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है, पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी है। आवेदक को सबसे पहले खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के आधिकारिक पोर्टल (kviconline.gov.in/pmegpeportal) पर जाना होता है। होमपेज पर 'Application for New Unit' पर क्लिक करने के बाद 20 बिंदुओं वाला ऑनलाइन फॉर्म खुलता है। फॉर्म में आधार प्रमाणीकरण, नाम, पता, उद्योग का प्रकार, कार्यान्वयन एजेंसी (KVIC, KVIB या DIC) और पसंदीदा बैंक शाखा का चयन करना होता है। सभी व्यक्तिगत विवरण भरने के बाद डीपीआर और अन्य आवश्यक प्रमाणपत्र अपलोड करके फॉर्म सबमिट करना होता है। सबमिशन के बाद एक यूनिक एप्लीकेशन आईडी और पासवर्ड जनरेट होता है, जिससे आवेदन की स्थिति ट्रैक की जा सकती है। इसके बाद जिला स्तरीय टास्क फोर्स कमेटी (DLTFC) आवेदन की जांच कर उसे बैंक को फॉरवर्ड करती है, जहां से बैंक लोन का सैंक्शन लेटर जारी करता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी ढांचे और वित्तीय अनुशासन का सकारात्मक असर एक बार फिर सरकारी खजाने पर साफ दिखाई देने लगा है। चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 14 अक्टूबर तक देश के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (Net Direct Tax Collection) में सालाना आधार पर 13.21 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और आयकर विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने अब तक 13.38 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम शुद्ध प्रत्यक्ष कर राजस्व जुटा लिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वाणिज्यिक केंद्रों से लेकर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के कॉरपोरेट गलियारों तक इस रिकॉर्ड संग्रह को कारोबारी गतिविधियों की तेज रफ्तार और कर अनुपालन में आए ऐतिहासिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। प्रत्यक्ष करों में यह तेज उछाल स्पष्ट संकेत दे रहा है कि वैश्विक मंदी की आहटों के बीच भी भारतीय घरेलू मांग, कॉरपोरेट मुनाफा और व्यक्तिगत आय का स्तर मजबूती से विस्तार कर रहा है।कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट टैक्स में भारी बढ़ोतरीटैक्स संग्रह के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इस शानदार प्रदर्शन में कॉरपोरेट जगत और व्यक्तिगत आयकरदाताओं दोनों का बराबर का योगदान रहा है। 14 अक्टूबर तक की अवधि में शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 20.58 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए लगभग 5.99 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। कंपनियों के मुनाफे में हुई इस वृद्धि ने साबित कर दिया है कि भारतीय विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की बैलेंस शीट लगातार मजबूत हो रही है। वहीं दूसरी तरफ, नॉन-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह, जिसमें व्यक्तिगत आयकर (Personal Income Tax) और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हैं, बढ़कर 6.92 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है। इसके अलावा शेयर बाजार में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से मिलने वाले राजस्व में भी मजबूत इजाफा देखने को मिला है, जिसने कुल संग्रह के ग्राफ को और ऊंचा उठा दिया है।ग्रॉस कलेक्शन 16 लाख करोड़ पार और रिफंड में 24 फीसदी का इजाफायदि टैक्स रिफंड को घटाने से पहले के सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह (Gross Direct Tax Collection) की बात करें, तो इसमें लगभग 14.89 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की गई है। चालू कारोबारी सत्र में अब तक का कुल ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 16.03 लाख करोड़ रुपये के पार निकल चुका है, जो पिछले साल की इसी अवधि में 13.95 लाख करोड़ रुपये के आसपास दर्ज किया गया था। इस व्यवस्था की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि टैक्सपेयर्स को समय पर रिफंड जारी करने की गति में भी भारी तेजी आई है। आयकर विभाग ने 1 अप्रैल से 14 अक्टूबर के बीच 2.65 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 24.22 प्रतिशत अधिक है। आधुनिक एआई संचालित प्रोसेसिंग सिस्टम और डिजिटल सुधारों के चलते अब करदाताओं के खातों में रिफंड सीधे और बिना किसी प्रशासनिक देरी के ट्रांसफर हो रहे हैं, जिससे कर प्रणाली पर जनता का भरोसा गहरा हुआ है।डिजिटल सुधार, एआई तकनीक और बेहतर कर अनुपालन का असरप्रत्यक्ष कर संग्रह में यह निरंतर उछाल केवल सामान्य आर्थिक विकास का परिणाम नहीं है, बल्कि आयकर विभाग द्वारा अपनाई गई अत्याधुनिक तकनीक और डेटा एनालिटिक्स की भी बड़ी भूमिका है। विभाग द्वारा पेश किए गए एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) और प्रोजेक्ट इनसाइट जैसे आधुनिक डिजिटल टूल्स के माध्यम से वित्तीय लेन-देन पर रियल-टाइम नजर रखी जा रही है। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट और बड़े बैंक ट्रांजैक्शंस की जानकारी सीधे करदाताओं के पोर्टल पर दिखाई देती है, जिससे कर चोरी की गुंजाइश लगभग समाप्त हो गई है। लखनऊ के गोमती नगर और हजरतगंज जैसे क्षेत्रों में स्थित चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्मों और टैक्स सलाहकारों का कहना है कि नोटिस आधारित जांच के बजाय फेसलेस असेसमेंट और ई-वेरिफिकेशन ने आम प्रोफेशनल्स और व्यापारियों को समय पर व सटीक टैक्स जमा करने के लिए प्रेरित किया है।राजकोषीय घाटा नियंत्रण और विकास योजनाओं को मिलेगी नई गतिटैक्स राजस्व में दोहरे अंकों की यह मजबूत वृद्धि केंद्र सरकार के लिए राजकोषीय मोर्चे पर एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। केंद्रीय बजट में तय किए गए पूरे साल के प्रत्यक्ष कर लक्ष्यों की दिशा में यह प्रगति बेहद उत्साहजनक है, जिससे चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.9 प्रतिशत से नीचे रखने के सरकारी लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी आसानी होगी। खजाने में अतिरिक्त पूंजी आने से सरकार को रेलवे आधुनिकीकरण, राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े पूंजीगत व्यय (Capex) को बिना किसी वित्तीय दबाव के आगे बढ़ाने की खुली छूट मिलेगी। इसके साथ ही, प्रत्यक्ष कर संग्रह का यह मजबूत रुख त्योहारी सीजन के दौरान ग्रामीण और शहरी खपत को बढ़ावा देने वाली विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के निर्बाध वित्तपोषण की भी गारंटी देता है।
मोहन यादव की शिवराज सिंह से किस बात की लड़ाई, मामा ने क्यों खोल दिया मोर्चा?
राजनीति में जब अपने ही दल के अंदर से विरोध की आवाज आने लगे तो चिंता बढ़ जाती है। मोहन यादव के साथ भी फिलहाल ऐसा ही हो रही है। राज्य के एक कद्दावर नेता का विरोध उन्हें झेलना पड़ रहा है।
'इंग्लैंड क्यों आए हो?', ब्रिटेन में भारतीय छात्रों के साथ बदसलूकी
इंग्लैंड के सोलिहल में मेरिडेन पार्क में टहल रहे तीन भारतीय छात्रों को चेलम्सली वुड पैट्रियट्स नाम के समूह ने रोका, सवाल किए और वीडियो बनाया. समूह ने उन्हें आखिरी चेतावनी देकर दोबारा पार्क में न आने को कहा. समूह का दावा है कि बच्चों के लापता होने और बलात्कार की खबरों के कारण वह गश्त कर रहा था.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के जोनल कार्यालय से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जिसने बैंकिंग प्रणाली के शिकायत निवारण तंत्र और ग्राहक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के दौर में जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार उपभोक्ताओं को साइबर सुरक्षा, पारदर्शिता और त्वरित शिकायत समाधान का भरोसा दिला रहा है, वहीं लखनऊ जोनल ऑफिस के शिकायत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। मीडिया संस्थान 'Look News India' से जुड़े शिकायतकर्ता ने अपने पेमेंट गेटवे से संबंधित तकनीकी विवाद के समाधान के दौरान बैंक की आंतरिक प्रणाली, जिम्मेदार कर्मियों के आचरण और ग्राहकों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर कई गंभीर खुलासे किए हैं। इस पूरे प्रकरण में आधिकारिक पत्राचार, साइबर जोखिम, धमकी और ग्राहक अधिकारों के हनन से जुड़े ऐसे बिंदु उठाए गए हैं जो सामान्य खाताधारकों के बैंकिंग अधिकारों से सीधे ताल्लुक रखते हैं।पेमेंट गेटवे विवाद और संदिग्ध संपर्क नंबर साझा किए जाने का आरोपशिकायतकर्ता के अनुसार यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब 'Look News India' की ओर से अपने पेमेंट गेटवे में आ रही तकनीकी दिक्कतों और लेन-देन से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए पंजाब नेशनल बैंक के लखनऊ जोनल ऑफिस के शिकायत विभाग में विधिवत शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि शिकायत विभाग में तैनात संबंधित महिला कर्मी रीता मेहता द्वारा आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से समाधान के नाम पर एक अज्ञात व्यक्ति का नाम और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया गया और कहा गया कि उक्त व्यक्ति से संपर्क करने पर समस्या का निस्तारण कर दिया जाएगा। शिकायतकर्ता का दावा है कि जब उस दिए गए नंबर की प्राथमिक स्तर पर तकनीकी जांच और पड़ताल की गई, तो सामने आया कि वह विवरण किसी प्रमाणित तकनीकी अधिकारी का न होकर संदिग्ध साइबर गतिविधियों से जुड़े एक बड़े हैकर का निकला। बैंकिंग पत्राचार के आधिकारिक मंच से किसी तीसरे अज्ञात व अनधिकृत व्यक्ति का नंबर दिया जाना साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और बैंकिंग गोपनीयता का अत्यंत गंभीर उल्लंघन माना जाता है, जिससे किसी भी ग्राहक के वित्तीय डेटा के असुरक्षित होने का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।स्पष्टीकरण मांगने पर गंभीर धाराओं में फंसाने की धमकी का दावाइस चौंकाने वाले खुलासे के बाद जब शिकायतकर्ता ने इस मामले पर सीधे संबंधित कर्मी से आधिकारिक बातचीत करने और स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर स्थिति और अधिक बिगड़ गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अपनी गलती स्वीकारने या स्पष्टीकरण देने के बजाय संबंधित बैंक कर्मी द्वारा आक्रामक रुख अख्तियार किया गया और सीधे तौर पर धमकाया गया कि यदि इस प्रकरण की शिकायत किसी उच्च स्तर पर की गई, तो वे छेड़खानी के झूठे आरोप में फंसाकर जेल भिजवा देंगी। किसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय में शिकायतकर्ता को अपने वैध अधिकारों के प्रयोग के बदले कानूनी मुकदमों में फंसाने की ऐसी कथित धमकी मिलना कार्यस्थल आचरण और बैंकिंग लोकपाल नियमों के बिल्कुल विपरीत है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने तत्काल इसकी सूचना तत्कालीन जोनल जनरल मैनेजर मृत्युंजय जी को दी, जिनके द्वारा मौखिक रूप से कर्मचारी की चूक पर खेद जताते हुए क्षमा याचना की बात कही गई, लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभाग में मनमानी और अनुचित व्यवहार का सिलसिला थमने के बजाय और तेज हो गया।बिना सहमति शिकायत बंद करने और सांठगांठ के गंभीर आरोपप्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब पीड़ित पक्ष की दर्ज शिकायत को बिना किसी समाधान, पूर्व सूचना या लिखित सहमति के प्रणाली में बंद (Close) कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नियमों को दरकिनार करते हुए मामले को दबाने और शिकायत बंद करने की इस प्रक्रिया में शिकायत विभाग की कर्मी और अन्य सहकर्मी राजेश चौधरी की संदिग्ध भूमिका रही है। आरोप लगाया गया है कि दोनों कर्मियों के बीच आपसी तालमेल के चलते नियमों की खुली अनदेखी की जाती है और एक-दूसरे के गलत कृत्यों पर पर्दा डालने का काम किया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि जोनल स्तर पर तैनात इन कर्मियों द्वारा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ग्राहक सेवा फ्रेमवर्क और बैंक की आंतरिक आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जहां ग्राहकों के साथ अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज, धमकियां और मानसिक उत्पीड़न की शिकायतें सामने आ रही हैं, जो एक राष्ट्रीयकृत बैंक की साख को बट्टा लगाने के लिए काफी हैं।उच्चाधिकारियों से मिलने पर रोक का सच और आरबीआई की गाइडलाइंसइस प्रकरण ने बैंकिंग ग्राहकों के उस मौलिक अधिकार पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है जिसके तहत कोई भी उपभोक्ता अपनी समस्या के समाधान के लिए बैंक के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जब उन्होंने इस अन्याय के खिलाफ जोनल हेड या उच्चाधिकारियों से मिलने की कोशिश की, तो निचले स्तर पर ही उन्हें रोक दिया गया और स्पष्ट रूप से कहा गया कि वे उनके अलावा किसी अन्य आला अधिकारी से नहीं मिल सकते। इस घटनाक्रम ने बैंकिंग जगत में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या किसी भी ग्राहक को जोनल मैनेजर या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने से रोका जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की 'कस्टमर सर्विस इन बैंक्स' गाइडलाइंस और सिटीजन चार्टर में यह बिल्कुल स्पष्ट है कि शिकायत निवारण त्रिस्तरीय होना चाहिए, जिसमें शाखा प्रबंधक से लेकर जोनल हेड और बैंकिंग लोकपाल तक ग्राहक को सीधी पहुंच का अधिकार है। पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि यदि बैंक प्रबंधन द्वारा उच्चाधिकारियों से आम उपभोक्ताओं के मिलने पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध लगाया गया है, तो उस आदेश की प्रमाणित छायाप्रति सार्वजनिक की जाए या फिर इसे तुरंत लिखित में ई-मेल व एसएमएस के जरिए खाताधारकों तक पहुंचाया जाए ताकि नियमों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।इस घटनाक्रम का मास्टरमाइंड राजेश चौधरी है
SIR के बाद अब 17 राज्यों में होने जा रहा है एसएसआर, चुनाव आयोग ने जारी कर दी तारीख
एसआईआर के बाद अब चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में एसएसआर की तारीख जारी कर दी है। 4 जनवरी तक चुनाव आयोग इन राज्यों में फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करेगा।
Noida Encounter: 92 मुकदमों में वांछित दो शातिर लुटेरे पुलिस गोलीबारी में घायल, गिरफ्तार
नोएडा पुलिस ने मुठभेड़ के बाद दो कुख्यात बदमाशों को गिरफ्तार किया है जिनके खिलाफ विभिन्न थानों में कुल 92 मुकदमे दर्ज हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी के अनुसार, आरोपियों की पहचान दिल्ली के भजनपुरा निवासी सलमान (29) और तनवीर (37) के रूप में हुई है तथा उनके पास से एक देसी तमंचा, कारतूस, चोरी की मोटरसाइकिल और दो लाख रुपये से अधिक बरामद किए गए हैं। अपर पुलिस उपायुक्त अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि बृहस्पतिवार की मध्य रात्रि को सेक्टर-39 थाने की पुलिस बदमाशों की तलाश में जांच कर रही थी तभी सेक्टर-41 के पास मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध आते दिखाई दिए। उन्होंने बताया कि पुलिस दल ने दोनों को रुकने का इशारा दिया, लेकिन वे तेज गति से मोटरसाइकिल चलाते हुए भागने लगे। इसी बीच सड़क पर जलभराव के कारण उनकी मोटरसाइकिल फिसल गई और दोनों गिर पड़े। मिश्रा ने दावा किया, ‘‘खुद को घिरता देख बदमाशों ने पुलिस दल पर जान से मारने की नीयत से गोली चलाई।’’उन्होंने बताया कि पुलिस ने भी जवाबी गोलीबारी की। इस दौरान पैर में गोली लगने से दोनों बदमाश घायल हो गए जिसके बाद पुलिस दल ने उन्हें गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया। अपर पुलिस उपायुक्त ने कहा, ‘‘पूछताछ के दौरान बदमाशों ने सेक्टर-39 थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति से सोने की चेन लूटने की बात स्वीकार की है। सलमान के खिलाफ पहले से 48 और तनवीर के खिलाफ 44 मुकदमे दर्ज हैं।’’उन्होंने बताया कि दोनों बदमाश राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लूटपाट करते थे।
डेड इंटरनेट थ्योरी: एआई कंटेंट, फर्जी अकाउंट और बॉट्स, क्या बदल रही है इंटरनेट की असली दुनिया?
इंटरनेट पर बढ़ते एआई कंटेंट और बॉट्स ने डेड इंटरनेट थ्योरी की एक नई बहस छेड़ दी है। आखिर ये थ्योरी है क्या आइए जानते हैं इसके बारे में
नेहा बोरा के चलते कांग्रेस में खटपट? राहुल गांधी का अपने नेताओं को जवाब- आप गलत पार्टी में हैं
नेहा बोरा को विपक्षी मार्च में तवज्जो मिलने से कांग्रेस के छात्र संगठन में नाराजगी की चर्चा है। इस बीच राहुल गांधी ने युवा नेताओं से कहा कि श्रेय लेने आए हैं तो गलत पार्टी में हैं। जानिए बैठक में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या कहा।
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने करोड़ों रिटेल और कॉरपोरेट कर्जदारों को झटका देते हुए अपनी प्रमुख उधारी दरों (Lending Rates) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। बैंक की ओर से मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में चुनिंदा अवधियों के लिए 15 बेसिस प्वाइंट्स (0.15%) तक का इजाफा किया गया है, जबकि एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) और रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) में भी 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई संशोधित दरें लागू हो चुकी हैं। भारतीय स्टेट बैंक के इस कदम के बाद फ्लोटिंग ब्याज दर पर लिए गए सभी प्रकार के होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्त (EMI) या लोन की अवधि (Tenure) बढ़ना तय माना जा रहा है। लखनऊ, कानपुर, दिल्ली-एनसीआर से लेकर मुंबई तक एसबीआई की शाखाओं से जुड़े मौजूदा और नए लोन ग्राहकों के बजट पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिलेगा।एसबीआई ने किन-किन बेंचमार्क दरों में किया है संशोधनबैंक द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न अवधियों के एमसीएलआर में 15 बेसिस प्वाइंट्स तक की वृद्धि की गई है। हालांकि, ओवरनाइट और एक महीने की एमसीएलआर को 7.85% पर अपरिवर्तित रखा गया है। वहीं, तीन महीने की दर 8.25% से बढ़कर 8.40%, छह महीने की दर 8.60% से बढ़कर 8.75% और सबसे महत्वपूर्ण एक वर्ष की एमसीएलआर को 8.70% से बढ़ाकर 8.85% कर दिया गया है। दो साल की एमसीएलआर 8.75% से बढ़कर 8.90% और तीन साल की दर 8.80% से बढ़कर 8.95% हो गई है। अधिकांश ऑटो लोन, पर्सनल लोन और कॉर्पोरेट वर्किंग कैपिटल लोन 1 साल की एमसीएलआर से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही, खुदरा होम लोन को प्रभावित करने वाला ईबीएलआर (EBLR) बढ़कर 8.15% प्लस स्प्रेड और आरएलएलआर (RLLR) 7.75% प्लस स्प्रेड पर पहुंच गया है।ईएमआई पर क्या होगा असर और कितना बढ़ेगा मासिक बोझबैंक के इस फैसले से फ्लोटिंग रेट वाले सभी कर्जदारों की जेब पर सीधा वित्तीय असर पड़ेगा। यदि किसी ग्राहक ने 30 लाख रुपये का होम लोन 8.50% की ब्याज दर पर 20 साल के लिए लिया हुआ था, तो उसकी मौजूदा ईएमआई लगभग 26,035 रुपये प्रति माह बनती है। ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी होकर 8.75% होने पर यही ईएमआई बढ़कर 26,511 रुपये हो जाएगी। यानी हर महीने लगभग 476 रुपये और सालाना आधार पर 5,712 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पूरे 20 साल की अवधि में यह अंतर लगभग 1.14 लाख रुपये के अतिरिक्त कुल ब्याज के रूप में सामने आएगा। यदि लोन की रकम 50 लाख रुपये है, तो मासिक ईएमआई में लगभग 794 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी होगी, जो सालाना आधार पर करीब 9,528 रुपये का अतिरिक्त खर्च जोड़ेगी।एमसीएलआर बनाम ईबीएलआर: किस लोन पर तुरंत दिखेगा बदलावअक्टूबर 2019 के बाद रिजर्व बैंक के नियमों के तहत बैंकों द्वारा जारी किए गए लगभग सभी नए होम लोन और अधिकांश पर्सनल लोन सीधे बाहरी बेंचमार्क यानी ईबीएलआर या आरएलएलआर से जुड़े हैं। इन बेंचमार्क्स में बदलाव होते ही अगली बिलिंग साइकिल या तिमाही रीसेट पर ब्याज दर स्वतः बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जो पुराने कर्जदार अभी भी एमसीएलआर (MCLR) व्यवस्था के तहत लोन चला रहे हैं, उन पर इसका असर उनके संबंधित रीसेट डेट (Reset Date) के दिन से लागू होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी ग्राहक का एक साल का एमसीएलआर रीसेट हर साल जनवरी में आता है, तो नई 8.85% की दर जनवरी के बाद से ही उनकी ईएमआई में जुड़ेगी।ग्राहकों के पास क्या हैं विकल्प और कैसे संभालें लोन का बजटब्याज दरें बढ़ने पर आमतौर पर बैंक ग्राहकों की ईएमआई तुरंत बढ़ाने के बजाय लोन का रीपेमेंट टेन्योर (अवधि) बढ़ा देते हैं, ताकि मासिक बजट तुरंत न बिगड़े। लेकिन टेन्योर बढ़ने से कुल चुकाया जाने वाला ब्याज काफी अधिक हो जाता है। ऐसे में वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि कर्जदारों को हर साल लोन के मूलधन का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा पार्ट-पेमेंट (Prepayment) के जरिए चुकाने की योजना बनानी चाहिए, जिससे बढ़ी हुई ब्याज दरों का असर खत्म हो सके। इसके अलावा, पुराने एमसीएलआर व्यवस्था में फंसे ग्राहक मामूली प्रोसेसिंग फीस देकर अपने लोन को मौजूदा पारदर्शी ईबीएलआर/आरएलएलआर व्यवस्था में स्विच करवा सकते हैं।
'वाह, मुंबई पुलिस?', इमरान के लीव इंडिया नोटिस से शॉक्ड किरण राव
आमिर खान के भांजे इमरान खान को मुंबई पुलिस ने देश छोड़ने को कहा है. इस फरमान पर फिल्ममेकर किरण राव और इमरान की गर्लफ्रेंड लेखा ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैंय
देश की सबसे बड़ी एकीकृत ऊर्जा कंपनी और महारत्न सार्वजनिक उपक्रम एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC Limited) ने वैश्विक पटल पर अपने परिचालन का विस्तार करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया है। घरेलू ऊर्जा बाजार में अपनी बेजोड़ तकनीकी दक्षता और उत्पादन क्षमता का लोहा मनवाने के बाद अब एनटीपीसी ने अफ्रीकी महाद्वीप के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पैन-अफ्रीकन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म 'अफ्रीका50' (Africa50) के साथ हाथ मिलाया है। दोनों दिग्गज संस्थाओं के बीच एक उच्चस्तरीय सहयोग समझौते (Cooperation Agreement) पर विधिवत हस्ताक्षर किए गए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारी का प्राथमिक उद्देश्य अफ्रीका भर में बिजली उत्पादन परियोजनाओं की पहचान करना, उनका गहन मूल्यांकन करना, उन्हें धरातल पर उतारना और सीमा पार बिजली व्यापार यानी क्रॉस-बॉर्डर इलेक्ट्रिसिटी ट्रेडिंग (Cross-Border Electricity Trading) के नए व्यावसायिक अवसरों को तलाशना है। लखनऊ से लेकर दिल्ली के पावर सेक्टर गलियारों और शेयर बाजार तक एनटीपीसी के इस वैश्विक कदम की चौतरफा सराहना हो रही है, क्योंकि यह भारत और अफ्रीका के बीच ऊर्जा सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।एनटीपीसी और अफ्रीका50 के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौताएनटीपीसी लिमिटेड और अफ्रीका50 के बीच हुआ यह सहयोग समझौता दोनों पक्षों की मजबूत क्षमताओं को एक साझा मंच पर लाने की नींव रखता है। अफ्रीका50 अफ्रीकी विकास बैंक (AfDB) और अफ्रीकी देशों की सरकारों द्वारा समर्थित एक प्रतिष्ठित अवसंरचना निवेश संगठन है, जो पूरे महाद्वीप में ऊर्जा, परिवहन और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजी जुटाने और परियोजनाओं को वित्तीय रूप से व्यवहार्य बनाने में विशेषज्ञता रखता है। वहीं, भारत की महारत्न कंपनी एनटीपीसी के पास बड़े पैमाने पर थर्मल, हाइड्रो, सोलर और ग्रीन एनर्जी पावर प्लांट्स की डिजाइनिंग, निर्माण, संचालन और रखरखाव का दशकों पुराना समृद्ध अनुभव है। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर ऐसे बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट्स की सूची तैयार करेंगे जो अफ्रीका के विभिन्न देशों में बिजली की भारी कमी को दूर करने में सक्षम हों। इसके साथ ही क्षेत्रीय बिजली ग्रिडों को आपस में जोड़कर एक देश से दूसरे देश में निर्बाध बिजली ट्रांसमिशन और ट्रेडिंग के आधुनिक नेटवर्क विकसित किए जाएंगे।अफ्रीकी महाद्वीप में बिजली क्षेत्र की अपार संभावनाएं और मांगवर्तमान समय में अफ्रीकी महाद्वीप दुनिया के सबसे तेजी से उभरते हुए आर्थिक और जनसांख्यिकीय क्षेत्रों में से एक है, लेकिन इसके सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और आधुनिक ऊर्जा ग्रिड का अभाव है। अफ्रीका के दर्जनों देशों में औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और विनिर्माण गतिविधियों की गति तेज हो रही है, जिससे बिजली की कुल खपत और मांग में सालाना आधार पर भारी उछाल देखा जा रहा है। हालांकि, पर्याप्त वित्तीय निवेश और उन्नत इंजीनियरिंग विशेषज्ञता की कमी के चलते कई परियोजनाएं कागजों से बाहर नहीं निकल पातीं। ऐसे समय में एनटीपीसी और अफ्रीका50 का गठबंधन स्थानीय सरकारों की प्राथमिकताओं को वास्तविक और बैंक-योग्य (Bankable) प्रोजेक्ट्स में बदलने का काम करेगा। इससे न केवल अफ्रीकी नागरिकों को सस्ती और 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारी उद्योगों की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती से पूरा किया जा सकेगा।क्रॉस-बॉर्डर इलेक्ट्रिसिटी ट्रेडिंग से जुड़ेगा पूरा महाद्वीपइस समझौते का दूसरा और सबसे क्रांतिकारी पहलू सीमा पार बिजली व्यापार यानी क्रॉस-बॉर्डर पावर ट्रेडिंग को बढ़ावा देना है। जिस प्रकार भारत ने दक्षिण एशिया में नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार के साथ क्रॉस-बॉर्डर इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड बनाकर एक सफल मॉडल स्थापित किया है, ठीक उसी तरह का एकीकृत बिजली बाजार मॉडल अफ्रीका में भी लागू करने की योजना है। अफ्रीका के अलग-अलग देशों में प्राकृतिक संसाधनों का वितरण असमान है—कुछ देशों में सौर और पवन ऊर्जा के असीम भंडार हैं, कुछ में जलविद्युत की अपार संभावनाएं हैं, तो कुछ जीवाश्म ईंधन से समृद्ध हैं। एनटीपीसी अपनी ट्रेडिंग सहायक कंपनियों और पावर ग्रिड प्रबंधन अनुभव के जरिए ऐसे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन कॉरिडोर तैयार करने में सहयोग करेगी, जिससे अधिशेष बिजली वाले देश आसानी से कमी वाले पड़ोसी मुल्कों को बिजली बेच सकेंगे। इससे क्षेत्रीय बिजली बाजारों का एकीकरण होगा और ऊर्जा सुरक्षा को अभेद्य मजबूती मिलेगी।एनटीपीसी का ग्लोबल विजन और भारत-अफ्रीका कूटनीतिक संबंधएनटीपीसी लिमिटेड के लिए यह अंतरराष्ट्रीय साझेदारी अपने भौगोलिक पदचिह्न (Geographical Footprint) को भारत से बाहर बहुराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। वर्तमान में 91.5 गीगावाट (GW) से अधिक की स्थापित उत्पादन क्षमता के साथ एनटीपीसी भारत के कुल बिजली उत्पादन में लगभग एक-चौथाई का विशाल योगदान देती है। भारत सरकार की विदेश नीति और ग्लोबल साउथ विजन के तहत भी अफ्रीका के साथ ऊर्जा साझेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। एनटीपीसी और अफ्रीका50 का यह समझौता न केवल भारतीय सरकारी उपक्रम की वैश्विक साख और इंजीनियरिंग पराक्रम को साबित करता है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशकों के बीच भारतीय कंपनियों की स्वीकार्यता को भी नई ऊंचाई पर ले जाता है। जैसे-जैसे इस समझौते के तहत चिन्हित परियोजनाओं पर अंतिम निवेश निर्णय (FID) लिए जाएंगे, वैसे-वैसे भारतीय तकनीकी मैनपावर, उपकरण निर्माताओं और ऊर्जा सलाहकारों के लिए भी अफ्रीका में विकास के नए रास्ते खुलेंगे।
हर महीने की पहली तारीख को जैसे ही मोबाइल स्क्रीन पर सैलरी क्रेडिट होने का मैसेज आता है, चेहरे पर चमक और मन में राहत का एहसास होता है, लेकिन महीना खत्म होते-होते अगर आपका बैंक बैलेंस दोबारा शून्य की कगार पर पहुंच जाता है, तो यह स्थिति सामान्य नहीं बल्कि एक गंभीर वित्तीय खतरे की घंटी है। लखनऊ के गोमती नगर और हजरतगंज के व्यस्त बाजारों में शॉपिंग से लेकर ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्रेडिट कार्ड स्वाइप करने तक, आजकल ज्यादातर कामकाजी पेशेवर इस बात से परेशान हैं कि पैसा आता तो खूब है लेकिन रुकता कहीं नहीं। कमाई के आंकड़े बड़े होने के बावजूद बचत न होना किसी जादू या किस्मत का खेल नहीं है, बल्कि अनजाने में की जाने वाली वे बुनियादी वित्तीय गलतियां हैं जो दीमक की तरह आपके बैंक बैलेंस को धीरे-धीरे चट कर रही हैं। अगर आप भी हर महीने 'पैसा कहां गया' की पहेली में उलझे रहते हैं, तो समय रहते अपनी वित्तीय आदतों की समीक्षा कर लेना ही भविष्य की सुरक्षा की पहली सीढ़ी है।पहली गलती: कमाई बढ़ते ही लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन के जाल में फंस जानाइंसानी फितरत है कि जैसे ही आमदनी या सैलरी पैकेज में 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, इंसान उसी अनुपात में अपने रहन-सहन का स्तर भी तुरंत अपग्रेड कर लेता है। इसे वित्तीय भाषा में 'लाइफस्टाइल इंफ्लेशन' (Lifestyle Inflation) कहा जाता है। इंक्रीमेंट मिलते ही तुरंत नया प्रीमियम स्मार्टफोन खरीद लेना, महंगे रेस्टोरेंट्स में डिनर करना, बिना जरूरत के कार अपग्रेड करना और ब्रांडेड कपड़ों पर अंधाधुंध खर्च करना इस आदत के मुख्य लक्षण हैं। जब आपकी कमाई बढ़ती है, तो आपकी बचत और निवेश की दर बढ़नी चाहिए, लेकिन अधिकांश लोग अपने ऐशो-आराम के खर्चों को आमदनी से भी तेज गति से बढ़ा लेते हैं, जिसके कारण आमदनी लाखों में पहुंचने के बावजूद बचत का स्तर जस का तस शून्य पर ही अटका रहता है।दूसरी गलती: नो-कॉस्ट ईएमआई और क्रेडिट कार्ड का अंधाधुंध इस्तेमालआधुनिक डिजिटल कॉमर्स की दुनिया में क्रेडिट कार्ड और नो-कॉस्ट ईएमआई (No Cost EMI) को सहूलियत के नाम पर परोसा जाता है, लेकिन हकीकत में यह भविष्य की कमाई को वर्तमान में ही गिरवी रख देने का सबसे आसान जरिया बन चुका है। क्रेडिट कार्ड हाथ में होते ही इंसान यह भूल जाता है कि वह प्लास्टिक मनी नहीं बल्कि अपना वास्तविक पैसा खर्च कर रहा है। कपड़ों से लेकर गैजेट्स और वेकेशन तक हर छोटी-बड़ी चीज को 3 से 6 महीने की किस्तों में बदलवा लेना आदत बन जाता है। महीने की शुरुआत होते ही सैलरी का 40 से 50 फीसदी हिस्सा विभिन्न ईएमआई और मिनिमम क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने में निकल जाता है। यह स्थिति व्यक्ति को एक ऐसे कर्ज चक्रव्यूह में धकेल देती है जहां से बाहर निकलना आमदनी बढ़ने के बाद भी नामुमकिन लगने लगता है।तीसरी गलती: बजट न बनाना और 50-30-20 नियम की खुली अनदेखीबिना योजना के खर्च करना अंधेरे में तीर चलाने जैसा होता है। ज्यादातर लोगों को महीने के अंत में यह अंदाजा ही नहीं होता कि उनका पैसा किन मदों में खर्च हो गया। वित्तीय अनुशासन का सबसे प्रसिद्ध और कारगर मॉडल 50-30-20 का नियम है, जिसकी अनदेखी जेब खाली रहने का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। इस नियम के अनुसार आपकी कुल टेक-होम सैलरी का 50% हिस्सा बुनियादी जरूरतों (मकान किराया, राशन, बिजली, बच्चों की फीस) में जाना चाहिए, 30% हिस्सा जीवनशैली या शौक पर और कम से कम 20% हिस्सा अनिवार्य रूप से बचत और निवेश में जाना चाहिए। जब लोग बिना बजट बनाए सीधे खर्च शुरू करते हैं, तो अक्सर विलासिता और इच्छाओं (Wants) का दायरा 60 से 70 फीसदी तक फैल जाता है, जिससे निवेश का अनुपात घटकर शून्य पर सिमट जाता है।चौथी गलती: पहले खर्च करना और महीने के अंत में बचे पैसे बचाने की सोचनाज्यादातर कामकाजी लोगों का बचत को लेकर नजरिया पूरी तरह उल्टा होता है। उनका सामान्य फॉर्मूला होता है: 'कमाई - खर्च = बचत'। यानी महीना भर दिल खोलकर खर्च करो और अगर महीने की 30 तारीख को अकाउंट में कुछ बच गया, तो उसे सेविंग मान लिया जाए। हकीकत यह है कि मॉडर्न कंज्यूमर कल्चर में महीने के आखिर में कभी कुछ नहीं बचता। दुनिया के सबसे सफल निवेशक वॉरेन बफे का बुनियादी सिद्धांत है: 'पहले बचत करें, फिर जो बचे उसे खर्च करें' यानी 'कमाई - बचत = खर्च'। जिस दिन सैलरी क्रेडिट हो, उसी दिन अपनी आय का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा सीधे म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP), पीपीएफ या फिक्स्ड डिपॉजिट में ऑटो-डेबिट के जरिए ट्रांसफर हो जाना चाहिए। जब पैसा मुख्य खाते से कटकर निवेश में चला जाएगा, तो आप बचे हुए पैसे के हिसाब से ही अपना मासिक बजट तय करने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहेंगे।पांचवीं गलती: इमरजेंसी फंड न बनाना और अनचाहे खर्चों में उलझनाजीवन में अचानक आने वाली मेडिकल इमरजेंसी, गाड़ी का अचानक खराब हो जाना, घर की मरम्मत या नौकरी में बदलाव जैसी अनपेक्षित घटनाएं हर किसी के सामने आती हैं। यदि आपके पास एक समर्पित 'इमरजेंसी फंड' (Emergency Fund) नहीं है, तो ऐसे अचानक आए खर्चों को पूरा करने के लिए आप या तो अपनी पुरानी बचत को तोड़ते हैं या फिर भारी ब्याज वाले पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का सहारा लेते हैं। एक बार जब आप अचानक आए 50 हजार या 1 लाख के खर्च को ईएमआई में बदलते हैं, तो अगले एक साल तक की बचत पर ग्रहण लग जाता है। हर कामकाजी पेशेवर के पास अपने कम से कम 6 महीने के अनिवार्य खर्चों के बराबर का लिक्विड फंड (लिक्विड म्यूचुअल फंड या ऑटो-स्वीप बैंक खाते में) सुरक्षित होना चाहिए ताकि किसी भी अचानक आई मुसीबत में मासिक बजट की रीढ़ न टूटे।
डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलावों ने आम युवाओं, कामकाजी पेशेवरों और घर से काम करने के इच्छुक लोगों के लिए कमाई के अभूतपूर्व दरवाजे खोल दिए हैं। आज के समय में जब स्मार्टफोन और इंटरनेट हर हाथ में पहुंच चुका है, तब ऑनलाइन कमाई करने के लिए लाखों रुपये का पूंजी निवेश या बड़ा कार्यालय खोलने की जरूरत बिल्कुल खत्म हो चुकी है। OpenAI के ChatGPT और Google के Gemini जैसे अत्याधुनिक जनरेटिव एआई टूल्स ने जटिल और समय लेने वाले कामों को चुटकियों में समेट दिया है। लखनऊ के हजरतगंज, गोमती नगर के स्टार्टअप हब से लेकर देश के छोटे कस्बों और टियर-2, टियर-3 शहरों में रहने वाले युवा भी इन एआई टूल्स को अपना स्मार्ट डिजिटल असिस्टेंट बनाकर हर महीने 40 हजार से 1 लाख रुपये या उससे भी अधिक की नियमित आय अर्जित कर रहे हैं। इस पूरे खेल में सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि एआई केवल एक बटन दबाकर पैसे नहीं देता, बल्कि इसका असली फायदा उन लोगों को मिलता है जो इसे एक सटीक बिजनेस मॉडल और वैल्यू क्रिएशन के साथ जोड़ना जानते हैं।कंटेंट राइटिंग और एसईओ ब्लॉगिंग से कमाई का सुपरचार्ज्ड मॉडलइंटरनेट पर हर सेकंड लाखों वेबसाइट्स, ई-कॉमर्स पोर्टल्स और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स को नए और सटीक कंटेंट की जरूरत होती है। पहले जहां एक विस्तृत 1500 शब्दों का ब्लॉग या आर्टिकल रिसर्च करके लिखने में पूरा दिन निकल जाता था, वहीं अब ChatGPT और Google Gemini की मदद से यह काम कुछ घंटों में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जा सकता है। आप Gemini का इस्तेमाल रियल-टाइम डेटा, ट्रेंडिंग न्यूज और गूगल सर्च इंटेंट को समझने के लिए कर सकते हैं, जबकि ChatGPT की मदद से लेख का स्ट्रक्चर, आकर्षक हेडिंग्स और फ्लो तैयार करवा सकते हैं। इसमें सबसे खास बात यह रखनी होती है कि एआई द्वारा जनरेट किए गए टेक्स्ट को सीधे कॉपी-पेस्ट न करके उसमें अपना व्यक्तिगत अनुभव, स्थानीय उदाहरण और फैक्ट-चेकिंग जोड़ें। इस तरह तैयार किया गया ओरिजिनल और हाई-वैल्यू कंटेंट आप देश-विदेश के क्लाइंट्स को फ्रीलांस प्लेटफॉर्म्स जैसे Upwork, Fiverr या लिंक्डइन के जरिए 1 रुपये से लेकर 3 रुपये प्रति शब्द की दर पर बेचकर शानदार कमाई कर सकते हैं।लोकल बिजनेसेज के लिए सोशल मीडिया मैनेजमेंट और मार्केटिंगआपके शहर या इलाके में स्थित रेस्टोरेंट, बुटीक, रियल एस्टेट डेवलपर्स, कोचिंग संस्थान और क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर्स अपने कारोबार को ऑनलाइन ले जाना चाहते हैं, लेकिन उनके पास सोशल मीडिया पोस्ट लिखने या विज्ञापन डिजाइन करने का समय नहीं होता। ऐसे स्थानीय कारोबारियों के लिए आप एआई संचालित 'सोशल मीडिया एजेंसी' शुरू कर सकते हैं जिसमें शुरुआती निवेश शून्य के बराबर होता है। आप ChatGPT से पूरे महीने का सोशल मीडिया कंटेंट कैलेंडर, इंस्टाग्राम रील्स के कैची स्क्रिप्ट्स और आकर्षक कैप्शन्स तैयार करवा सकते हैं। इसके बाद Canva जैसे फ्री टूल की मदद से विजुअल्स बनाकर स्थानीय दुकानों और कंपनियों को सोशल मीडिया हैंडलिंग की सर्विस ऑफर कर सकते हैं। लखनऊ, कानपुर, नोएडा या वाराणसी जैसे शहरों में यदि आप केवल 4 से 5 लोकल दुकानों या क्लाइंट्स को 8,000 से 10,000 रुपये प्रति महीने के रिटेनर पर ऑनबोर्ड कर लेते हैं, तो बिना किसी दफ्तर के आपकी 40 से 50 हजार रुपये की बंधी-बंधाई मासिक कमाई शुरू हो जाती है।डिजिटल प्रोडक्ट्स, ई-बुक्स और रेडीमेड टेम्प्लेट्स की बिक्रीयदि आप एक बार मेहनत करके बार-बार पैसे कमाने यानी पैसिव इनकम का जरिया तलाश रहे हैं, तो डिजिटल प्रोडक्ट्स का निर्माण सबसे बेहतरीन और सुरक्षित रास्ता है। ChatGPT और Gemini की मदद से आप विभिन्न विषयों पर उपयोगी चेकलिस्ट्स, स्टूडेंट्स के लिए स्टडी गाइड्स, शुरुआती प्रोफेशनल्स के लिए इंटरव्यू प्रिपरेशन हैंडबुक्स या छोटे बिजनेस ओनर्स के लिए ईमेल मार्केटिंग टेम्प्लेट्स लिखवा सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप 'पर्सनल फाइनेंस फॉर बिगिनर्स' या 'रियल एस्टेट निवेश की चेकलिस्ट' जैसी 30-40 पन्नों की ई-बुक या डिजिटल गाइड तैयार कर सकते हैं। इस कंटेंट को पीडीएफ फॉर्मेट में सजाकर Gumroad, Payhip, Instamojo या अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए 99 रुपये से 299 रुपये की किफायती कीमत पर सीधे ग्राहकों को बेच सकते हैं। डिजिटल उत्पाद की खास बात यह होती है कि इसमें इन्वेंट्री या कूरियर का कोई झंझट नहीं होता और बिक्री का पूरा पैसा सीधे आपके बैंक खाते में मुनाफा बनकर जमा होता है।यूट्यूब ऑटोमेशन और फेसलेस वीडियो क्रिएशन का बढ़ता क्रेजयूट्यूब और इंस्टाग्राम पर बिना अपना चेहरा दिखाए ज्ञानवर्धक, ऐतिहासिक, आर्थिक या मोटिवेशनल वीडियो बनाकर कमाई करने का ट्रेंड इस समय शीर्ष पर है। इस पूरे वीडियो निर्माण प्रोसेस को एआई टूल्स ने पूरी तरह ऑटोमेट और आसान बना दिया है। सबसे पहले आप Google Gemini से ट्रेंडिंग टॉपिक और रिसर्च निकलवाते हैं, जिसके बाद ChatGPT से 60 सेकंड की हाई-एंगेजमेंट शॉर्ट्स स्क्रिप्ट या 8 मिनट की लॉन्ग वीडियो स्टोरी लिखवा सकते हैं। इस स्क्रिप्ट को फ्री टेक्स्ट-टू-स्पीहेडलाइन: Low Investment AI Money Making Tips: ChatGPT और Gemini को बनाएं अपना डिजिटल पार्टनर, घर बैठे हर महीने होगी तगड़ी कमाईमेटा डिस्क्रिप्शन: Low Investment AI Business Ideas: ChatGPT और Gemini जैसे जनरेटिव एआई टूल्स का इस्तेमाल करके कम लागत में घर बैठे तगड़ी कमाई कैसे करें? जानिए कंटेंट राइटिंग, लोकल एसईओ, फ्रीलांसिंग और डिजिटल मार्केटिंग के सटीक और प्रैक्टिकल तरीके।डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में कमाई के पारंपरिक तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। अब किसी भी नए व्यवसाय को शुरू करने के लिए लाखों रुपये की पूंजी, बड़े दफ्तर या लंबी-चौड़ी टीम की आवश्यकता नहीं रह गई है। यदि आपके पास एक लैपटॉप, स्थिर इंटरनेट कनेक्शन और सही प्रॉम्प्ट (निर्देश) देने की समझ है, तो OpenAI का ChatGPT और Google का Gemini आपके सबसे बड़े कमाई के औजार बन सकते हैं। लखनऊ के हजरतगंज और गोमती नगर जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से लेकर देश के छोटे-बड़े शहरों तक, युवा और प्रोफेशनल्स अब एआई को एक डिजिटल असिस्टेंट के रूप में तैनात कर तगड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। सही रणनीति, सही स्किल और न्यूनतम निवेश के साथ आप इन एआई टूल्स की मदद से हर महीने 30,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये या उससे अधिक की आय का जरिया तैयार कर सकते हैं।कंटेंट राइटिंग और एसईओ ब्लॉगिंग से रोजाना कमाईइंटरनेट पर रोजाना लाखों लेख, ब्लॉग पोस्ट और न्यूज आर्टिकल्स पब्लिश किए जाते हैं, जिनके लिए डिजिटल पब्लिशर्स को हमेशा बेहतरीन राइटर्स की तलाश रहती है। ChatGPT और Gemini की मदद से आप गूगल डिस्कवर, एसईओ (SEO), और एईओ (AEO) फ्रेंडली आर्टिकल्स चंद मिनटों में ड्राफ्ट कर सकते हैं। इसके लिए आपको केवल एआई को सही संदर्भ, टोन, कीवर्ड्स और संरचना का इनपुट देना होता है। हालांकि, केवल कॉपी-पेस्ट करने के बजाय एआई द्वारा जनरेट किए गए ड्राफ्ट में मानवीय संवेदना, लोकल फैक्ट्स और मौलिक संपादन जोड़कर आप प्रीमियम कंटेंट तैयार कर सकते हैं। फ्रीलांसिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे Upwork, Fiverr और Freelancer पर हेल्थ, फाइनेंस, रियल एस्टेट, टेक और लाइफस्टाइल जैसी हाई-पेइंग कैटेगरीज में आर्टिकल्स लिखकर शुरुआत में प्रति आर्टिकल 500 से 2,000 रुपये तक आसानी से चार्ज किए जा सकते हैं।लोकल बिजनेसेज के लिए डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंटस्थानीय बाजारों में मौजूद रेस्टोरेंट्स, कोचिंग सेंटर्स, रियल एस्टेट डेवलपर्स, बुटीक और क्लिनिक्स को सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने की सख्त जरूरत होती है, लेकिन उनके पास इसके लिए समय या विशेषज्ञता नहीं होती। आप इन स्थानीय व्यापारियों के लिए एक वन-स्टॉप सोशल मीडिया एजेंसी शुरू कर सकते हैं। Gemini का इस्तेमाल करके आप एक पूरे महीने का सोशल मीडिया कंटेंट कैलेंडर, आकर्षक विज्ञापन कॉपी (Ad Copy), इंस्टाग्राम रील्स की स्क्रिप्ट और हैशटैग्स तैयार कर सकते हैं। इसके बाद Canva जैसे फ्री टूल्स की मदद से उन पोस्ट्स के ग्राफिक्स डिजाइन करके क्लाइंट्स को डिलीवर किए जा सकते हैं। यदि आप अपने शहर के 4 से 5 स्थानीय दुकानों या संस्थानों को भी 8,000 से 10,000 रुपये प्रति महीने के रिटेनर मॉडल पर ऑनबोर्ड कर लेते हैं, तो बिना किसी इंफ्रास्ट्रक्चर लागत के महीने की एक तय और स्थिर आमदनी शुरू हो जाती है।फ्रीलांस ट्रांसलेशन और सबटाइटल्स क्रिएशन की भारी मांगभारत जैसे बहुभाषी देश में क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। अंग्रेजी से हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद और वीडियो सबटाइटल्स तैयार करने का काम एक आकर्षक कमाई का विकल्प बन चुका है। YouTube क्रिएटर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और कॉरपोरेट कंपनियां अपने वीडियोज के लिए सटीक सबटाइटल्स और वॉयसओवर स्क्रिप्ट्स तैयार करने के लिए फ्रीलांसर्स को अच्छे पैसे देती हैं। उन्नत एआई मॉडल्स बोलचाल की स्थानीय भाषा और मुहावरों को बहुत सटीकता से समझते हैं। आप किसी भी जटिल अंग्रेजी लेख, प्रेस रिलीज या यूट्यूब वीडियो ट्रांसक्रिप्ट को Gemini में इनपुट करके उसका धाराप्रवाह और सटीक हिंदी रूपांतरण तैयार कर सकते हैं। इसके बाद बस थोड़ी सी प्रूफरीडिंग की आवश्यकता होती है, जिससे आपका काम घंटों के बजाय मिनटों में पूरा हो जाता है और आप प्रति प्रोजेक्ट 1,000 से 5,000 रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।डिजिटल प्रोडक्ट्स और ई-बुक्स तैयार कर पैसिव इनकम का रास्ताएक बार मेहनत करके बार-बार कमाई करने के लिए डिजिटल प्रोडक्ट्स सबसे बेहतरीन जरिया माने जाते हैं। ChatGPT और Gemini की मदद से आप 'हाउ-टू' गाइड्स, इंटरव्यू की तैयारी, प्रतियोगी परीक्षाओं के स्टडी नोट्स, कोडिंग चीट-शीट्स या बच्चों की कहानियों की ई-बुक्स तैयार कर सकते हैं। एआई से चैप्टर आउटलाइन बनवाकर प्रत्येक अध्याय का विस्तार करें, उसे व्यवस्थित रूप से फॉर्मेट करें और फिर Amazon Kindle Direct Publishing (KDP) या Instamojo और Gumroad जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लिस्ट कर दें। डिजिटल प्रोडक्ट्स की खासियत यह है कि इसमें इन्वेंट्री या डिलीवरी की कोई लागत नहीं आती। एक बार किताब या गाइड ऑनलाइन अपलोड होने के बाद देश भर के पाठक उसे खरीद सकते हैं, जिससे आपके बैंक खाते में 24 घंटे पैसिव इनकम का फ्लो बना रहता है।लोकल एसईओ और गूगल बिजनेस प्रोफाइल ऑप्टिमाइजेशनस्थानीय स्तर पर अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए हर छोटे-बड़े दुकानदार को गूगल मैप्स और लोकल सर्च में टॉप पर दिखना जरूरी होता है। आप व्यापारियों की 'गूगल बिजनेस प्रोफाइल' (Google Business Profile) को ऑप्टिमाइज करने की सेवा दे सकते हैं। Gemini की सहायता से आप उस व्यवसाय के लिए कीवर्ड-रिच बिजनेस डिस्क्रिप्शन, ग्राहकों की समीक्षाओं (Reviews) के पेशेवर जवाब और अपडेट पोस्ट्स तैयार कर सकते हैं। बहुत से दुकानदार इस बात से परेशान रहते हैं कि निगेटिव या पॉजिटिव रिव्यूज का क्या जवाब दें। एआई चंद सेकंड में बेहद प्रभावशाली और विनम्र रिप्लाई तैयार कर देता है। इस तरह की लोकल प्रोफाइल मैनेजमेंट सर्विस के लिए आप व्यापारियों से 3,000 से 5,000 रुपये मासिक शुल्क ले सकते हैं, जिसे प्रबंधित करने में प्रति क्लाइंट हफ्ते में केवल एक घंटे का समय लगता है।सफल एआई कमाई के लिए जरूरी टूल्स और वर्कफ्लोएआई से कमाई करने के लिए सबसे जरूरी बात यह याद रखनी चाहिए कि तकनीक केवल एक सहायक है, असली मूल्य आपके संपादन और क्लाइंट हैंडलिंग का होता है। शुरुआत करने के लिए एक अच्छा लैपटॉप, भरोसेमंद ब्रॉडबैंड कनेक्शन, ChatGPT या Gemini का फ्री अथवा पेड वर्जन और बेसिक कैनवा अकाउंट काफी है। अपने काम में निरंतरता बनाए रखें, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LinkedIn पर अपनी सेवाओं के बारे में पोस्ट करें और संभावित क्लाइंट्स को सीधे ईमेल या मैसेज भेजकर संपर्क करें। जैसे-जैसे आपके काम के सैंपल्स बढ़ते जाएंगे, आपके पास ऑर्डर्स की संख्या भी बढ़ेगी, जिससे न्यूनतम निवेश में शुरू हुआ यह काम एक पूर्णकालिक डिजिटल एजेंसी में तब्दील हो सकता है।
'काश मैं 20 साल छोटा होता...', भारत की बात कर सुनील मित्तल ऐसा क्यों बोले?
भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक सुनील भारती मित्तल का मानना है कि भारत में आने वाले दो दशक कारोबार और तकनीक के लिहाज से बड़े बदलाव लेकर आएंगे. युवा आबादी, तकनीक, ऊर्जा और विशाल बाजार भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे. उन्होंने कहा कि काश वह 20 साल छोटे होते, ताकि इन अवसरों का हिस्सा बन पाते.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स (Windfall Gains Tax) की दरों में अहम संशोधन किया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बड़ी राहत दी गई है, जबकि पेट्रोल के विदेशी शिपमेंट पर ड्यूटी को बढ़ा दियाहेडलाइन: Petrol Diesel Export Duty: पेट्रोल-डीजल के एक्सपोर्ट टैक्स में केंद्र सरकार का बड़ा फेरबदल, जानिए तेल कंपनियों और आम जनता पर इसका असरमेटा डिस्क्रिप्शन: Petrol Diesel Export Tax Revision: केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोल पर ड्यूटी बढ़ाई गई है, जबकि डीजल के निर्यात टैक्स में ₹7.50 की भारी कटौती की गई है। जानिए रिफाइनरियों और घरेलू बाजार पर इसका पूरा प्रभाव।केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए ईंधन निर्यात नियमों में एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगाए जाने वाले अप्रत्याशित लाभ कर यानी विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स (Windfall Tax) की दरों में नया संशोधन लागू कर दिया गया है। इस समीक्षा के तहत सरकार ने जहां एक तरफ पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में बढ़ोतरी दर्ज की है, वहीं दूसरी तरफ डीजल के विदेशी निर्यात पर लगने वाले टैक्स में 7.50 रुपये प्रति लीटर की सीधी और बड़ी कटौती करके घरेलू रिफाइनिंग कंपनियों को बड़ी राहत दी है। नई दरें आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के साथ ही तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं, जिससे ऊर्जा क्षेत्र और शेयर बाजार में सूचीबद्ध तेल कंपनियों की गतिविधियों में हलचल तेज हो गई है। लखनऊ से लेकर दिल्ली-मुंबई तक देश भर के कमोडिटी और आर्थिक विश्लेषक सरकार के इस कदम के नफे-नुकसान का आकलन करने में जुट गए हैं।अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के रुझान और विंडफॉल टैक्स की नई दरेंवैश्विक बाजार में जब अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड और रिफाइंड फ्यूल के क्रैक स्प्रेड्स में तेजी से अंतर आता है, तब घरेलू स्तर पर आपूर्ति सुरक्षित रखने और कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे को संतुलित करने के लिए यह व्यवस्था अपनाई जाती है। सरकार हर पखवाड़े (15 दिनों में) अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के औसत आधार पर इस टैक्स की दरों की समीक्षा करती है। ताजा पखवाड़े की समीक्षा में यह देखा गया कि वैश्विक स्तर पर डीजल के मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा था, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट मार्जिन में तुलनात्मक मजबूती बनी हुई थी। इसी समीकरण को संतुलित करने के लिए राजस्व विभाग ने पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाने का फैसला किया, ताकि घरेलू बाजार में पेट्रोल की उपलब्धता बनी रहे और निर्यात से होने वाले अप्रत्याशित मुनाफे पर राजस्व जुटाया जा सके। वहीं, डीजल पर 7.50 रुपये प्रति लीटर की सीधी कटौती वैश्विक स्तर पर भारतीय रिफाइनर्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।रिलायंस और नायरा जैसी दिग्गज तेल रिफाइनरियों पर सीधा प्रभावभारत से बड़े पैमाने पर पेट्रोल और अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल का निर्यात करने वाली प्रमुख कंपनियों में निजी क्षेत्र की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और रूस समर्थित नायरा एनर्जी (Nayara Energy) सबसे आगे हैं। जामनगर और वाडिनार स्थित इन निजी रिफाइनरियों के लिए डीजल निर्यात पर 7.50 रुपये प्रति लीटर की छूट एक बड़ी वित्तीय राहत बनकर सामने आई है। पिछले कुछ हफ्तों से वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और यूरोपीय बाजारों में मांग के धीमे पड़ने के कारण रिफाइनिंग मार्जिन दबाव में चल रहे थे। डीजल पर टैक्स का बोझ कम होने से इन रिफाइनर्स के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में तुरंत सुधार देखने को मिलेगा। इसके उलट, पेट्रोल पर बढ़ाई गई ड्यूटी कंपनियों के पेट्रोल एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर हल्का दबाव डाल सकती है, हालांकि डीजल की तुलना में पेट्रोल के कुल निर्यात का अनुपात सीमित होने के कारण कंपनियों का ओवरऑल बैलेंस शीट गणित सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई जा रही है।सरकारी तेल विपणन कंपनियों और घरेलू बाजार की मौजूदा स्थितिसार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) का प्राथमिक फोकस घरेलू खुदरा बाजार में आपूर्ति बनाए रखना होता है। हालांकि, ये कंपनियां भी अतिरिक्त उत्पादन होने की स्थिति में चुनिंदा खेपों का निर्यात करती हैं। सरकार के इस नीतिगत बदलाव से घरेलू ईंधन बाजार की आपूर्ति व्यवस्था पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार ने इस बात के सख्त दिशा-निर्देश पहले से तय कर रखे हैं कि रिफाइनर्स को अपने कुल उत्पादित ईंधन का एक निश्चित हिस्सा घरेलू बाजार के पेट्रोल पंपों पर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। इस नियम के कारण देश भर के खुदरा पेट्रोल पंपों पर किसी भी प्रकार की आपूर्ति किल्लत की संभावना पूरी तरह खारिज हो जाती है।आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-पंप की कीमतों पर क्या असर होगाआम जनता और वाहन चालकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि क्या इस टैक्स बदलाव के बाद उनके शहर में पेट्रोल या डीजल के दाम कम या ज्यादा होंगे। ऊर्जा विशेषज्ञों और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधन केवल देश से बाहर भेजे जाने वाले (एक्सपोर्ट होने वाले) ईंधन पर लागू होता है, इसका घरेलू खुदरा बिक्री पर लगने वाली केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) या राज्यों के वैट (VAT) से कोई सीधा संबंध नहीं है। इसलिए आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले तेल की कीमतों में तत्काल कोई बदलाव नहीं आएगा। लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, नोएडा या देश के किसी भी शहर में जो दरें पेट्रोल पंपों पर लागू हैं, वे यथावत बनी रहेंगी। यह कदम पूरी तरह से कॉर्पोरेट टैक्स ढांचे और रिफाइनरियों के अंतरराष्ट्रीय मार्जिन प्रबंधन से जुड़ा हुआ है।सरकार का राजस्व संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा रणनीतिभारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जबकि इसके विपरीत देश के पास विशाल रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है जिसके जरिए भारत तैयार ईंधन का बड़ा निर्यातक भी है। सरकार ने जुलाई 2022 में पहली बार विंडफॉल टैक्स पेश किया था, जब यूक्रेन संकट के चलते निजी तेल कंपनियां घरेलू पंपों को सूखा छोड़कर विदेशों में भारी मुनाफे पर पेट्रोल-डीजल बेच रही थीं। सरकार की यह पाक्षिक समीक्षा नीति देश के खजाने में राजस्व की निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को भी अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करती है। पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाकर जहां सरकारी खजाने को टैक्स संग्रह में मदद मिलेगी, वहीं डीजल पर दी गई बड़ी रियायत यह सुनिश्चित करेगी कि भारत वैश्विक परिदृश्य में ऊर्जा उत्पादों का एक प्रमुख और प्रतिस्पर्धी रिफाइनिंग हब बना रहे।
त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही देश भर के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों की निगाहें अपने बैंक खाते और कंपनी के एचआर विभाग के नोटिस बोर्ड पर टिक जाती हैं। लखनऊ के हजरतगंज, गोमती नगर के आईटी व कॉरपोरेट दफ्तरों से लेकर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु तक हर कार्यस्थल पर इन दिनों केवल एक ही सवाल गूंज रहा है कि इस दिवाली प्रबंधन बोनस का ऐलान कब करेगा। त्योहारी खर्चों, मिठाइयों, नए कपड़ों और घर के बजट को संतुलित करने के लिए दिवाली बोनस हर कामकाजी पेशेवर के लिए एक बड़ी राहत बनकर आता है। कई बार कर्मचारियों के मन में यह संशय बना रहता है कि क्या बोनस पाना उनका वैधानिक अधिकार है या फिर यह पूरी तरह कंपनी प्रबंधन की स्वेच्छा और उदारता पर निर्भर करता है। भारत के श्रम कानूनों में कर्मचारियों के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए बेहद स्पष्ट और सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिन्हें जानना हर संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगार के लिए आवश्यक है।पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 और इसके कानूनी दायरेभारत में कर्मचारियों को मिलने वाला वैधानिक बोनस किसी प्रबंधन का अहसान नहीं बल्कि एक कानूनी व्यवस्था के तहत तय किया गया अधिकार है। देश की संसद द्वारा पारित पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 (The Payment of Bonus Act, 1965) के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी औद्योगिक, व्यावसायिक या कॉरपोरेट प्रतिष्ठान में काम करने वाले पात्र कामगारों को वित्तीय वर्ष के मुनाफे में से उनका हिस्सा दिया जाए। यह कानून हर उस कारखाने, उद्योग या वाणिज्यिक संस्थान पर अनिवार्य रूप से लागू होता है जहां किसी भी वित्तीय वर्ष के दौरान किसी एक दिन भी 20 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत रहे हों। कई राज्यों में राज्य सरकारों ने इस सीमा को घटाकर 10 कर्मचारी तक भी निर्धारित किया है, जिससे छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी कानूनन सुरक्षा मिलती है। यदि कोई कंपनी इस कानून के दायरे में पंजीकृत है, तो वह यह कहकर बोनस देने से हाथ पीछे नहीं खींच सकती कि उसका मन नहीं है या यह केवल स्वैच्छिक उपहार है।बोनस पाने के लिए जरूरी नियम और पात्रता की शर्तेंकानूनन बोनस पाने के लिए कर्मचारी का संबंधित संस्थान में निरंतर सेवा का एक तय समय पूरा होना अनिवार्य माना गया है। पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट के नियमों के अनुसार, किसी वित्तीय वर्ष के दौरान जिस कर्मचारी ने उस प्रतिष्ठान में कम से कम 30 कार्य दिवस (30 working days) पूरे कर लिए हों, वह न्यूनतम बोनस का दावा करने के लिए कानूनी रूप से पात्र बन जाता है। इस नियम के तहत स्थायी कर्मचारियों के अलावा संविदा, दैनिक वेतनभोगी और प्रोबेशन पर काम कर रहे वे सभी कर्मचारी आते हैं जो न्यूनतम कार्य दिवस की शर्त को पूरा करते हैं। वर्तमान वैधानिक वेतन सीमा के मुताबिक, जिन कर्मचारियों का मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) मिलाकर प्रति माह 21,000 रुपये तक है, वे सीधे तौर पर इस अधिनियम के वैधानिक बोनस प्रावधानों के अंतर्गत सुरक्षित हैं। जिन उच्च वेतनभोगी अधिकारियों या कर्मचारियों का वेतन इस सीमा से ऊपर होता है, उन्हें दिया जाने वाला बोनस कंपनी की आंतरिक एचआर पॉलिसी, परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव और रोजगार अनुबंध की शर्तों के आधार पर तय किया जाता है।न्यूनतम और अधिकतम बोनस का गणितीय कैलकुलेशनश्रम कानून में न्यूनतम और अधिकतम बोनस का प्रतिशत पूरी तरह से स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है ताकि किसी भी कर्मचारी का वित्तीय शोषण न हो सके। अधिनियम के तहत प्रत्येक पात्र नियोक्ता को अपने कर्मचारी को कम से कम 8.33 प्रतिशत का बोनस देना कानूनी रूप से बाध्यकारी है, चाहे उस वित्तीय वर्ष में कंपनी को मुनाफा हुआ हो या घाटा उठाना पड़ा हो। यह 8.33 प्रतिशत न्यूनतम बोनस कर्मचारी के एक महीने के मूल वेतन के बराबर बैठता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि दिवाली पर कामगार खाली हाथ न रहे। यदि कंपनी को उस वित्तीय वर्ष में असाधारण लाभ होता है और उपलब्ध सरप्लस फंड पर्याप्त है, तो प्रबंधन इस बोनस की दर को बढ़ाकर अधिकतम 20 प्रतिशत तक कर सकता है। बोनस की गणना के लिए सरकार ने 7,000 रुपये प्रति माह या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी (जो भी अधिक हो) का मानक तय किया है, जिसके आधार पर ही 8.33 से 20 फीसदी की दर से वास्तविक भुगतान राशि निकाली जाती है।क्या घाटे में चल रही कंपनियां भी बोनस देने से मना कर सकती हैंअक्सर कंपनियों के प्रबंधन यह तर्क देकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि चालू कारोबारी साल में संस्था को भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ा है, इसलिए वे इस बार दिवाली बोनस जारी करने में असमर्थ हैं। हालांकि, भारतीय श्रम कानून का स्पष्ट नियम है कि मुनाफे की कमी न्यूनतम 8.33 प्रतिशत के बोनस भुगतान से बचने का आधार नहीं बन सकती। कानून में 'सेट ऑन और सेट ऑफ' (Set-on and Set-off of Allocable Surplus) की एक विस्तृत व्यवस्था दी गई है, जिसके अंतर्गत अच्छे मुनाफे वाले वर्षों के सरप्लस को सुरक्षित रखा जाता है ताकि घाटे वाले वर्षों में भी कर्मचारियों को न्यूनतम बोनस की अदायगी की जा सके। केवल नई स्थापित इकाइयों को शुरुआती पांच वर्षों के दौरान कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट मिलती है, बशर्ते उन वर्षों में उन्होंने कोई लाभ न कमाया हो। जैसे ही किसी नए प्रतिष्ठान में मुनाफा दर्ज होता है, उसी क्षण से बोनस भुगतान के नियम पूरी तरह से प्रभावी हो जाते हैं।किन विशेष परिस्थितियों में रुक सकता है कर्मचारी का बोनसकानून कर्मचारियों को अधिकार देने के साथ-साथ कार्यस्थल पर अनुशासन और निष्ठा की अपेक्षा भी करता है, जिसके चलते कुछ खास हालातों में बोनस जब्त करने की छूट है। यदि किसी कर्मचारी को सेवा से धोखाधड़ी, गबन, वित्तीय अनियमितता, कार्यस्थल पर हिंसक या उपद्रवी व्यवहार, या प्रतिष्ठान की संपत्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने (सबोटाज) के गंभीर आरोप में विधिवत जांच के बाद बर्खास्त किया गया हो, तो नियोक्ता उसका बोनस रोक सकता है। ऐसी स्थिति के अलावा सामान्य इस्तीफा देने वाले, नोटिस पीरियड पूरा करने वाले या सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को उस वित्तीय वर्ष में किए गए कार्य दिवसों के अनुपात में पूरा बोनस पाने का पूरा अधिकार होता है। कोई भी प्रबंधन बिना किसी कानूनी जांच या ठोस आधार के मनमाने तरीके से किसी कर्मचारी का वैधानिक बोनस नहीं रोक सकता।कंपनी बोनस न दे तो कहां और कैसे दर्ज कराएं शिकायतयदि आपकी कंपनी पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट के दायरे में आती है और सभी पात्रता शर्तें पूरी होने के बावजूद प्रबंधन दिवाली पर बोनस देने से इनकार करता है, तो आप कानूनी कदम उठा सकते हैं। सबसे पहले कर्मचारी को कंपनी के एचआर और उच्च प्रबंधन को आधिकारिक ईमेल या पत्र के जरिए कानून का हवाला देते हुए लिखित मांग पत्र भेजना चाहिए। यदि वहां से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलता है, तो कर्मचारी अपने जिले के श्रम आयुक्त कार्यालय (Office of the Labour Commissioner) में लेबर ऑफिसर के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा कर्मचारी राज्य श्रम विभाग के ऑनलाइन ग्रीवेंस पोर्टल, समाधान पोर्टल या श्रम अदालत (Labour Court) में धारा 33C के तहत अपने बकाये की वसूली के लिए वाद दायर कर सकते हैं। अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ जुर्माने से लेकर छह महीने तक के कारावास तक का सख्त कानूनी प्रावधान है।
ट्रेन की बर्थ पर सजाई पान की दुकान, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
मुंबई से छत्तीसगढ़ जा रही ट्रेन के थर्ड एसी कोच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें एक शख्स ट्रेन की बर्थ पर बैठकर पान बनाता दिखाई दे रहा है. वीडियो शेयर करने वाले के मुताबिक, उसे 20 से 25 पान बनाने का ऑर्डर मिला था. इस नजारे को देखकर लोग हैरान हैं.
नेपाल के डांग में पहुंची श्रद्धा दुबे? होटल में मिली लास्ट लोकेशन
लखनऊ के कैफे संचालक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में मुख्य आरोपी बताई जा रही श्रद्धा दुबे की तलाश नेपाल तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है. रुपईडीहा की पार्किंग में मिली स्कॉर्पियो, नेपाल के CCTV फुटेज और डांग जिले के एक होटल में कथित आखिरी लोकेशन से जुड़े सुरागों के बीच सवाल है कि श्रद्धा कहां है और शिवा की मौत की गुत्थी कब सुलझेगी.
अमेरिका के औरोरा में हिंदू मंदिर पर मास शूटिंग की कथित साजिश के आरोप में 19 साल के एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस को 11 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया. उस पर आतंकवादी धमकी और अवैध हथियार रखने के आरोप हैं. कोर्ट ने उसे बिना जमानत हिरासत में रखने और जेल में हार्मोन इंजेक्शन और दवाएं जारी रखने का निर्देश दिया है.
बारिश की फुहारों से धुला आसमान: 181 से फिसलकर 149 पर पहुंचा दिल्ली का AQI, सांसों को मिली संजीवनी
अक्टूबर के मध्य में जहां हर साल दिल्ली की आबोहवा में पराली के धुएं और जहरीले स्मॉग का पहरा जमने लगता था, वहीं गुरुवार को आसमान से बरसी राहत की फुहारों ने समूची राष्ट्रीय राजधानी को एक नया जीवनदान दे दिया है। पिछले कई दिनों से धूल, धुएं और धीमी हवाओं के कारण घुट रही दिल्ली की हवा अचानक साफ और पारदर्शी नजर आने लगी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक समीर ऐप के ताजा बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) एक दिन पहले दर्ज 181 के आंकड़े से सीधे लुढ़ककर 149 के स्तर पर आ गया है। हवा की गुणवत्ता का 'खराब' (Poor) की दहलीज से फिसलकर संतोषजनक रूप से 'मध्यम' (Moderate) श्रेणी में दर्ज होना दिल्लीवासियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। वातावरण में तैर रहे सूक्ष्म धूल कण यानी पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 (PM 10) बारिश की बूंदों के साथ घुलकर जमीन पर बैठ गए, जिससे सुबह और शाम के वक्त आंखों में होने वाली जलन और सांस लेने में महसूस होने वाली भारी तकलीफ से आम नागरिकों, खासकर सुबह की सैर पर निकलने वाले बुजुर्गों और बच्चों को भारी राहत मिली है। इंडिया गेट, कर्तव्य पथ, कनॉट प्लेस, चाणक्यपुरी और शांति पथ के आसपास का दृश्य जो कल तक धुंध की चादर में लिपटा रहता था, वह आज पूरी तरह धुलकर साफ और हरा-भरा दिखाई दे रहा है।दिन के पारे में रिकॉर्ड गिरावट: सफदरजंग और पालम में सुहावना हुआ मौसम, उमस से मिली मुक्तिबारिश का असर केवल हवा की शुद्धता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पिछले कई दिनों से दिन के वक्त सता रही तीखी धूप और चिपचिपी उमस को भी पूरी तरह गायब कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग वेदर स्टेशन के साथ-साथ पालम, लोधी रोड, रिज और आयानगर के वेदर स्टेशनों पर अधिकतम तापमान में सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की तेज गिरावट दर्ज की गई है। सफदरजंग वेदर स्टेशन पर गुरुवार को अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे गिरकर लगभग 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास सिमट गया, जिसने दोपहर के समय भी हवा में सुखद ठंडक घोल दी। हालांकि रात का न्यूनतम तापमान अभी भी सामान्य से थोड़ा ऊपर यानी 23.3 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, लेकिन दिन के तापमान में आई इस अचानक गिरावट ने दिल्ली में समय से पहले 'गुलाबी ठंड' की औपचारिक शुरुआत का अहसास करा दिया है। दिनभर चली 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली ठंडी हवाओं ने वातावरण में मौजूद नमी को सुहावने अहसास में बदल दिया, जिससे दिल्ली की सड़कों पर दोपहर के समय भी लोगों को एसी और कूलरों से राहत मिलती दिखी।अक्टूबर में प्रदूषण के संकट पर ब्रेक: क्या बारिश ने टाल दिया ग्रैप (GRAP) के कड़े प्रतिबंधों का खतरा?आमतौर पर अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में जब हवा की गति धीमी पड़ती है और रातें ठंडी होती हैं, तो दिल्ली-एनसीआर में 'थर्मल इन्वर्जन' (तापमान का उलटाव) शुरू हो जाता है, जिससे प्रदूषण जमीन के पास ही कैद होकर रह जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) हर साल ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी 'ग्रैप' (GRAP) के कड़े चरण लागू करने के लिए मजबूर होता है, जिसमें जनरेटरों पर रोक, निर्माण कार्यों पर पाबंदी और पानी के छिड़काव जैसे आपात उपाय शामिल होते हैं। गुरुवार को हुई इस बेमौसम बारिश ने पर्यावरण नीति-निर्माताओं और दिल्ली सरकार को बहुत बड़ी राहत दी है। बारिश के कारण वातावरण से पार्टिकुलेट मैटर का प्राकृतिक 'वॉशआउट' हो गया है, जिसके चलते हवा का स्तर फिलहाल ग्रैप के गंभीर चरणों (स्टेज 2 या 3) की सीमा से काफी नीचे बना हुआ है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह बारिश न हुई होती, तो स्थानीय धूल और वाहनों के उत्सर्जन के चलते एक्यूआई 200 से 250 के पार निकल चुका होता। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह आगाह भी किया है कि बारिश का यह प्राकृतिक उपहार एक फौरी राहत है, और जब तक हवा की गति तेज नहीं रहेगी या स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर लगातार नियंत्रण नहीं रखा जाएगा, तब तक यह राहत बहुत लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है।एनसीआर के शहरों में भी दिखा असर: नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में हवा हुई साफबारिश और हवा के इस सकारात्मक बदलाव का दायरा केवल दिल्ली के प्रशासनिक बॉर्डर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के तमाम सैटेलाइट शहरों में भी पर्यावरण की तस्वीर एक झटके में बदल गई है। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) तथा गाजियाबाद में पिछले दिनों एक्यूआई 190 से 210 के पार दर्ज किया जा रहा था, जो बारिश के बाद सुधरकर 130 से 150 के 'मध्यम' दायरे में आ गया है। हरियाणा के मिलेनियम सिटी गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और सोनीपत में भी तेज बौछारों के साथ हवा में मौजूद गर्द पूरी तरह बैठ गई है। गुरुग्राम के साइबर हब और गोल्फ कोर्स रोड जैसे कंक्रीट के जंगलों में जहां भारी ट्रैफिक के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा था, वहां बारिश के बाद हवा में ताजगी महसूस की गई। हालांकि, इस बारिश का दूसरा पहलू यह भी रहा कि दिल्ली के धौला कुआं, आईटीओ, आश्रम चौक, आउटर रिंग रोड और सराय काले खां जैसे व्यस्त चौराहों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई, लेकिन हवा में आई इस बेमिसाल शुद्धता के आगे लोगों ने जाम की इस असुविधा को खुशी-खुशी स्वीकार किया।पराली का धुआं और सर्दियों की आहट: क्या लंबे समय तक टिकेगी यह साफ हवा या फिर बिगड़ेगा मिजाज?अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या 149 का यह सुधरा हुआ एक्यूआई आने वाले दिनों में भी बरकरार रहेगा? कृषि और उपग्रह डेटा के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खेतों में धान की कटाई अपने अंतिम चरण में है और खेतों में पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाएं धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। उत्तर-पश्चिमी हवाएं जैसे ही सक्रिय होंगी, वे पराली के बारीक धुएं को दिल्ली के मैदानी कटोरे में खींचकर ला सकती हैं। इसके अलावा, आगामी दीपावली का त्योहार नजदीक है, जिसमें पटाखों के धुएं और बाजार की बढ़ती हलचल से उत्सर्जन का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ता है। मौसम वैज्ञानिकों का विश्लेषण है कि बारिश के बाद जब जमीन में नमी अधिक होती है और तापमान तेजी से गिरता है, तो आने वाले दिनों में सुबह के समय हल्का 'रेडिएशन फॉग' (धुंध) बनने की संभावना बढ़ जाती है। यदि आने वाले दिनों में हवा की गति 10 किमी प्रति घंटे से कम हो गई, तो यह नमी धूल और धुएं के कणों को बांधकर दोबारा स्मॉग का रूप दे सकती है। इसलिए दिल्लीवासियों के लिए अगले एक सप्ताह तक यह मौसम राहत भरा रहेगा, लेकिन उसके बाद सर्दियों के वास्तविक प्रदूषण संकट का असली इम्तिहान शुरू होगा।अगले 48 घंटों के लिए मौसम विभाग का नया बुलेटिन: जानिए कब तक खिली रहेगी धूप और कैसी रहेगी ठंड?भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम बुलेटिन के अनुसार, उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। अगले 24 से 48 घंटों के दौरान दिल्ली और एनसीआर के आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है, लेकिन भारी बारिश के आसार अब कम हैं। शुक्रवार और शनिवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का पूर्वानुमान है। सुबह के समय हल्की धुंध और ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे सुबह की वॉक करने वालों को हल्की सिहरन महसूस होगी। मौसम विभाग ने स्वास्थ्य के लिहाज से सलाह दी है कि चूंकि दिन में हल्की धूप और सुबह-शाम ठंडी हवाएं चल रही हैं, ऐसे में मौसम के इस बदलाव के दौरान लोग मौसमी वायरल, खांसी-जुकाम और गले के संक्रमण से बचने के लिए सतर्क रहें। कुल मिलाकर, बारिश ने दिल्ली को एक बहुप्रतीक्षित 'ग्रीन विंडो' दी है, जिसने त्योहारी तैयारियों के बीच राजधानी के बाशिंदों को खुलकर और सुकून से सांस लेने का एक दुर्लभ और खुशनुमा मौका मुहैया कराया है।
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के वायुमंडल में सर्दियों की आहट ने इस बार तय समय से पहले ही जोरदार दस्तक दे दी है। कांगड़ा घाटी के सिरमौर कहे जाने वाले भव्य धौलाधार पर्वत श्रृंखला और पर्यटन नगरी मनाली की गगनचुंबी चोटियों ने सीजन की पहली ताजा बर्फबारी के साथ कुदरत की चमचमाती सफेद चादर ओढ़ ली है। समुद्र तल से 13,058 फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व विख्यात रोहतांग दर्रा, शिंकुला टॉप, बारालाचा ला, कुंजुम पास और लाहौल-स्पीति घाटी के ऊपरी रिहायशी इलाकों में लगातार रुक-रुक कर हो रहे हिमपात ने पूरे प्रदेश को भीषण ठंड की आगोश में ले लिया है। अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में ही इस तरह अचानक पहाड़ों पर गिरी बर्फ ने न केवल स्थानीय जनजीवन की दिनचर्या को बदल दिया है, बल्कि मैदानी इलाकों से पहुंचे पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। चोटियों पर बर्फ की सफेद परत जमने के साथ ही वादियों से उठने वाली बर्फीली और ठंडी हवाएं निचले इलाकों में तेजी से उतरने लगी हैं। कुल्लू, धर्मशाला, पालमपुर और शिमला के पहाड़ी ढलानों पर सुबह और शाम के समय घना कोहरा छाने लगा है और स्थानीय लोगों ने बमुश्किल अक्टूबर के महीने में ही अलमारियों से भारी ऊनी कपड़े, स्वेटर, जैकेट और रजाई-कंबल बाहर निकाल लिए हैं।कुकुमसेरी में पारा शून्य के करीब और शिमला-मनाली में ठिठुरन: तापमान में 10 डिग्री तक की ऐतिहासिक गिरावटताजा बर्फबारी और निचले इलाकों में लगातार हो रही मानसूनी विदाई के बाद की बारिश ने हिमाचल के तापमान ग्राफ को धड़ाम से नीचे गिरा दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) शिमला के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के औसत अधिकतम तापमान में एक ही दिन के भीतर 6.7 डिग्री से लेकर 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 0.5 से 1.8 डिग्री सेल्सियस के बेहद ठंडे स्तर पर आ गया है, जबकि ताबो में न्यूनतम पारा 2.3 से 3.4 डिग्री और कल्पा में 5.6 से 6.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मनाली में अधिकतम तापमान सामान्य से 7.2 डिग्री नीचे गिरकर 11.2 से 14.6 डिग्री सेल्सियस के बीच सिमट गया है, जिससे दोपहर के समय भी हवा में चुभन महसूस हो रही है। राजधानी शिमला में अधिकतम तापमान गिरकर 16.4 डिग्री और कुफरी में 13.1 डिग्री सेल्सियस तक आ चुका है। दिन के समय ही अचानक छा जाने वाले घने काले बादलों और ठंडी हवाओं के चलते शिमला और मनाली के माल रोड पर घूमने वाले सैलानियों और स्थानीय दुकानदारों को दिन में ही अलाव और हीटरों का सहारा लेना पड़ रहा है।शिंकुला और रोहतांग मार्ग पर फिसलन का खतरा: प्रशासन ने दोपहिया वाहनों की एंट्री रोकी, हेल्पलाइन 1077 एक्टिवपहाड़ों पर समय से पहले हुई इस बर्फबारी ने जहां खूबसूरती बिखेरी है, वहीं सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण पहाड़ी मार्गों पर आवाजाही के लिए गंभीर चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। लाहौल-स्पीति और जांस्कर घाटी को जोड़ने वाले 16,580 फीट ऊंचे दारचा-शिंकुला मार्ग पर भारी बर्फबारी और सड़क की सतह पर पानी जमने से खतरनाक 'ब्लैक आइस' (अदृश्य फिसलन वाली बर्फ) की परत बिछ गई है। सड़क पर फिसलकर वाहनों के खाई में गिरने के बढ़ते जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने दारचा-शिंकुला मार्ग पर सभी प्रकार के दोपहिया वाहनों और हल्के वाहनों की आवाजाही को एहतियातन पूरी तरह बंद कर दिया है। सीमा सड़क संगठन (BRO) की स्नो-कटर मशीनें और बीकन के जवान पटरियों से बर्फ हटाने के काम में जुटे हुए हैं। मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और अटल टनल रोहतांग के साउथ और नॉर्थ पोर्टल के आसपास भी पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को अलर्ट मोड पर डालते हुए टोल फ्री नंबर 1077 जारी किया है और पर्यटकों से अपील की है कि वे किसी भी सूरत में अनजाने बर्फीले रास्तों, संवेदनशील ढलानों और ब्यास व चंद्रा नदियों के तेज बहाव वाले किनारों की ओर न जाएं।पश्चिमी विक्षोभ का असर और मौसम विभाग का अलर्ट: अंधड़, आकाशीय बिजली और बारिश की दोहरी मारमौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अप्रत्याशित मौसमी बदलाव के पीछे उत्तर भारत के क्षोभमंडल में सक्रिय हुआ एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और उससे प्रेरित चक्रवाती हवाओं का दबाव क्षेत्र है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अंधड़ चलने, आकाशीय बिजली कड़कने और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए बाकायदा येलो अलर्ट (Yellow Alert) जारी किया है। मौसम विभाग के बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि कांगड़ा, धर्मशाला, पालमपुर, चंबा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर के मध्य और निचले पर्वतीय इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं और गरज-चमक के साथ मूसलाधार बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। वहीं, 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले सभी हिमालयी शिखरों पर मध्यम से लेकर भारी हिमपात का दौर जारी रहने का अनुमान जताया गया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ का यह असर अगले 48 घंटों तक बना रहेगा, जिसके बाद पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में आसमान धीरे-धीरे साफ होने की उम्मीद है, लेकिन हवा में मौजूद नमी और जमी हुई बर्फ के चलते तापमान में कोई राहत नहीं मिलेगी।विंटर टूरिज्म को लगे पंख, होटलों में ऑक्यूपेंसी बढ़ी: मनाली और रोहतांग के लिए सैलानियों की सुरक्षा गाइडलाइंसअक्टूबर के महीने में ही बर्फबारी की यह खबर जैसे ही सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों के जरिए फैली, मैदानी राज्यों—पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश से पर्यटकों का सैलाब पहाड़ों की ओर उमड़ पड़ा है। मनाली, सोलंग वैली, गुलाबा, सिसु, कोक्सर और धर्मशाला के मैकलोडगंज में होटल बुकिंग और होमस्टे की ऑक्यूपेंसी में 35 से 40 प्रतिशत तक का अचानक भारी उछाल दर्ज किया गया है। त्योहारी सीजन और दिवाली की छुट्टियों से ठीक पहले हुई इस बर्फबारी को हिमाचल के पर्यटन उद्योग के लिए एक वरदान माना जा रहा है। हालांकि, पर्यटन कारोबारियों के चेहरे खिलने के साथ ही स्थानीय पुलिस प्रशासन ने बाहरी राज्यों से आने वाले निजी वाहन चालकों के लिए सख्त सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। ड्राइवरों को सलाह दी गई है कि वे तेज गति में गाड़ी न चलाएं और बर्फबारी वाले मोड़ों पर अचानक ब्रेक लगाने से बचें क्योंकि इससे वाहन के स्किड होकर खाई में गिरने का खतरा रहता है। पर्यटकों को अपने साथ पर्याप्त मात्रा में वूलन इनरवेअर, विंड-प्रूफ जैकेट्स, वाटरप्रूफ जूते, स्नो गॉगल्स और सर्दी-जुकाम व सांस संबंधी जरूरी दवाइयां रखने की सख्त हिदायत दी गई है।पहाड़ों की बर्फबारी से मैदानी इलाकों में ठिठुरन: दिल्ली-एनसीआर और यूपी में समय से पहले 'गुलाबी ठंड' की आहटहिमाचल प्रदेश की धौलाधार और पीर पंजाल पर्वतमालाओं पर गिरी सीजन की पहली बर्फ केवल पहाड़ी राज्य तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसका सीधा और व्यापक असर उत्तर भारत के समूचे मैदानी भूभाग पर दिखना शुरू हो गया है। पहाड़ों की बर्फीली चोटियों से टकराकर आ रही शुष्क और ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने पंजाब के अमृतसर, जालंधर, हरियाणा के करनाल, अंबाला और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के पश्चिमी व मध्य जिलों में सिहरन पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़ और बरेली जैसे प्रमुख शहरों में रात का न्यूनतम तापमान तेजी से लुढ़ककर 19 से 21 डिग्री सेल्सियस के दायरे में पहुंच गया है। सुबह के समय आसमान में हल्की धुंध की चादर नजर आने लगी है और पार्कों में सैर करने वाले लोगों को हल्की सिहरन और 'गुलाबी ठंड' का स्पष्ट अहसास होने लगा है। घरों में दिनभर चलने वाले एयर कंडीशनर (AC) अब बंद होने लगे हैं और पंखों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। मौसम के इस त्वरित संक्रमण काल ने यह साफ कर दिया है कि इस वर्ष उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दियां अपने तय समय से काफी पहले ही पूरे शबाब पर होंगी, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहराने जा रहा है।
बीजेपी मुख्यालय में अब रोज होगी कार्यकर्ताओं की जनसुनवाई
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन में तरुण चुघ ने कार्यकर्ताओं की समस्या सुनने के लिए नई व्यवस्था लागू की है. पार्टी का मानना है कि इससे कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधा संवाद मजबूत होगा.
Jio IPO से जुड़े आपके मन में भी हैं ये 10 सवाल, जानिए एक-एक का जवाब
Mukesh Ambani Jio IPO: मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का इंतजार कर रहे निवेशकों के लिए इश्यू से जुड़ी एक-एक डिटेल सामने आ गई है. जिनके बारे में निवेशकों को जानना जरूरी है.
नवरात्रि के 6ठे दिन सर्राफा बाजार में हाहाकार: सोना और चांदी दोनों धड़ाम, खरीदारों की खुली लॉटरी
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर जब आमतौर पर आभूषणों के बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ के चलते सोने और चांदी की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, तब इस बार 2026 के त्योहारी सीजन में बिल्कुल विपरीत और हैरान कर देने वाला नजारा देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के छठे दिन, जब श्रद्धालु मां कात्यायनी की आराधना में लीन हैं, देश भर के प्रमुख सर्राफा बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला और गहरा गया है। पिछले कारोबारी सत्रों से शुरू हुई बिकवाली की लहर ने आज सुबह के कारोबार में पीली धातु और सफेद धातु दोनों को जबर्दस्त झटका दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर स्थानीय खुदरा बाजारों तक दोनों कीमती धातुओं के ग्राफ तेजी से लाल निशान में फिसलते नजर आ रहे हैं। इस दोहरी गिरावट ने जहां आभूषण कारोबारियों और बड़े बुलियन ट्रेडर्स की सांसें अटका दी हैं, वहीं दूसरी तरफ आम मध्यमवर्गीय परिवारों, शादी-ब्याह के लिए गहने बनवाने वाले खरीदारों और आगामी धनतेरस व दीपावली पर शुभ निवेश की योजना बना रहे लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। बाजारों में त्योहारी उत्साह के चरम पर होने के बावजूद कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने ग्राहकों को त्योहारी खरीदारी का सबसे सुनहरा और अप्रत्याशित अवसर थमा दिया है।दिल्ली से लखनऊ तक 22 और 24 कैरेट के ताजा भाव: ₹1.35 लाख के करीब फिसला जेवराती सोनाराष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तर भारत के सबसे बड़े बुलियन बाजारों में आज 22 कैरेट और 24 कैरेट दोनों श्रेणियों के सोने में तेज नरमी दर्ज की गई है। दिल्ली के प्रमुख खुदरा सर्राफा बाजार—चांदनी चौक, कूचा महाजनी, करोल बाग और दरीबा कलां में 22 कैरेट जेवराती सोने का भाव लगभग ₹1,35,490 प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया है, जो कल के मुकाबले ₹600 से ₹800 प्रति 10 ग्राम तक की सीधी गिरावट दर्शाता है। वहीं, शुद्धता के शिखर 24 कैरेट (99.9% शुद्ध) सोने की कीमत भी ₹1,48,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर ₹1,47,810 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रही है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक चौक, अमीनाबाद, हजरतगंज और आलमबाग के ज्वेलरी शोरूम्स में भी यही गिरावट का रुख देखा गया, जहां 22 कैरेट सोना ₹1,35,290 और 24 कैरेट सोना ₹1,47,580 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर में 22 कैरेट सोना ₹1,35,200 पर है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 22 कैरेट का भाव ₹1,35,150 और 24 कैरेट ₹1,47,440 प्रति 10 ग्राम चल रहा है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 22 कैरेट सोना ₹1,35,240, जबकि दक्षिण भारत के चेन्नई में स्थानीय टैक्स संरचना के चलते यह ₹1,35,600 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर स्थिर बना हुआ है। पिछले एक पखवाड़े के उच्चतम स्तर से तुलना करें तो प्रति 10 ग्राम पर ₹2,500 से ₹3,000 तक की सीधी राहत मिल चुकी है, जिससे हल्के गहनों की खरीदारी बजट के अनुकूल हो गई है।चांदी का हाल बेहाल: किलो पर ₹2,000 से ज्यादा की भारी गिरावट, ₹2.22 लाख के दायरे में आई सफेद धातुसोने से भी ज्यादा बुरा और निराशाजनक हाल चांदी का देखने को मिल रहा है। औद्योगिक मांग में अचानक आई सुस्ती और सटोरियों द्वारा की गई भारी मुनाफावसूली के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी बुरी तरह टूटी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के वायदा भाव में सुबह के सत्र में ₹2,000 से ₹2,500 प्रति किलोग्राम से अधिक की भीषण गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और लखनऊ के बाजारों में 999 शुद्धता वाली 1 किलोग्राम चांदी की कीमत ₹2,24,500 से लुढ़ककर ₹2,22,200 से ₹2,22,500 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। वहीं 925 स्टर्लिंग चांदी के दाम भी गिरकर ₹2,06,000 प्रति किलो के आसपास पहुंच गए हैं। बर्तन, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, चांदी के सिक्के और पायल-बिछिया बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि चांदी में आई यह गिरावट त्योहारी सीजन के लिहाज से बेहद अनुकूल है। धनतेरस और दीपावली पर पूजन के लिए चांदी के सिक्कों और बर्तनों की सबसे ज्यादा मांग रहती है, और इस गिरावट के कारण छोटे बजट वाले ग्राहक भी अब दिल खोलकर चांदी के उपहार और आभूषण खरीदने का मन बना रहे हैं।वैश्विक बाजार का दबाव और मजबूत डॉलर: आखिर क्यों त्योहारी सीजन में लगातार गिर रहे हैं कीमती धातुओं के दाम?घरेलू सर्राफा बाजार में नवरात्रि के दौरान सोने-चांदी के भाव में आ रही इस लगातार गिरावट के पीछे कोई स्थानीय कारण नहीं, बल्कि गहरे अंतरराष्ट्रीय और व्यापक आर्थिक कारक काम कर रहे हैं। वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स (COMEX) पर स्पॉट गोल्ड की कीमतें 4,200 डॉलर प्रति औंस के पार टिकने में पूरी तरह नाकाम रहीं और मुनाफावसूली के चलते फिसलकर नीचे आ गईं। इसकी सबसे मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) का लगातार 103 के स्तर के पार मजबूत बना रहना है। अंतरराष्ट्रीय वित्त व्यवस्था का यह स्थापित नियम है कि जब भी डॉलर में मजबूती आती है, तो गैर-अमेरिकी मुद्राओं में सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बनता है। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद ब्याज दरों में कटौती की गति को धीमा रखने के संकेतों ने भी कमोडिटी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनावों का जो प्रीमियम अब तक सोने को 'सेफ हेवन' (सुरक्षित निवेश) मानकर मिल रहा था, उसमें बड़े हेज फंड्स ने अपना मुनाफा काट लिया है और नकदी को इक्विटी तथा बॉन्ड यील्ड की तरफ मोड़ दिया है। इस चौतरफा वैश्विक बिकवाली का सीधा झटका भारत के घरेलू वायदा और हाजिर बाजार को झेलना पड़ रहा है।धनतेरस और दिवाली से पहले खरीदारी का गोल्डन चांस: क्या अभी जेवर बुक करना समझदारी है या और गिरेगा भाव?सर्राफा बाजार की इस नरमी ने खरीदारों के सामने एक बड़ा रणनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उन्हें अभी खरीदारी कर लेनी चाहिए या धनतेरस और दिवाली तक भाव और गिरने का इंतजार करना चाहिए। वित्तीय विश्लेषकों और अनुभवी ज्वेलर्स का स्पष्ट मानना है कि मौजूदा स्तर आभूषणों की खरीदारी और एडवांस बुकिंग के लिए एक बेहतरीन 'स्वीट स्पॉट' है। आमतौर पर देखा गया है कि धनतेरस से ठीक दो या तीन दिन पहले खुदरा मांग में अप्रत्याशित उछाल आता है, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर प्रीमियम बढ़ जाता है और ज्वैलर्स मेकिंग चार्ज में बढ़ोतरी कर देते हैं। ऐसे में जो परिवार आगामी नवंबर और दिसंबर में होने वाले विवाह समारोहों के लिए भारी सेट, कंगन या चेन खरीदना चाहते हैं, उनके लिए नवरात्रि का छठा दिन एक सुनहरा मौका बनकर आया है। कई बड़े ब्रांडेड शोरूम्स और स्थानीय एसोसिएशन इस समय 'रेट-प्रोटेक्शन स्कीम' भी दे रहे हैं, जिसमें ग्राहक आज के घटे हुए भाव पर आभूषण बुक कर सकते हैं; यदि डिलीवरी के दिन दाम और गिरे तो कम भाव का लाभ मिलेगा और यदि दाम बढ़े तो आज का सस्ता भाव ही लागू रहेगा। यह समझदारी भरी रणनीति उपभोक्ताओं को भविष्य के किसी भी अप्रत्याशित उछाल से पूरी तरह सुरक्षित रखती है।गिरावट के दौर में ठगी से कैसे बचें: 6 अंकों का HUID कोड, बीआईएस हॉलमार्क और पक्के बिल की अनिवार्यताजब भी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आती है, तो स्थानीय स्तर पर कुछ असामाजिक तत्व और असंगठित विक्रेता कम कीमत का लालच देकर मिलावटी या कम कैरेट का सोना खपाने की कोशिश करते हैं। इसलिए ग्राहकों को इस समय विशेष रूप से सतर्क रहने की सख्त जरूरत है। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कड़े नियमों के अनुसार, भारत में अब बिना 6 अंकों वाले अल्फान्यूमेरिक HUID (हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन) कोड के किसी भी सोने के आभूषण की बिक्री पूरी तरह गैर-कानूनी है। गहने खरीदते समय यह सुनिश्चित करें कि उस पर तीन स्पष्ट निशान मौजूद हों: पहला बीआईएस का मानक तिकोना लोगो, दूसरा शुद्धता का पैमाना (जैसे 22 कैरेट के लिए 22K916 और 18 कैरेट के लिए 18K750), और तीसरा छह अंकों व अक्षरों का अनूठा HUID कोड। ग्राहक अपने मोबाइल में सरकारी 'BIS Care App' डाउनलोड करके इस कोड को स्कैन कर सकते हैं, जिससे स्क्रीन पर आभूषण की शुद्धता, उसकी वजन श्रेणी और हॉलमार्किंग केंद्र का नाम खुलकर आ जाता है। इसके अतिरिक्त, हमेशा पक्का जीएसटी बिल ही प्राप्त करें, जिसमें धातु का वजन, उस दिन का सटीक रेट और मेकिंग चार्ज अलग-अलग दर्ज हो, ताकि आपकी गाढ़ी कमाई से खरीदे गए आभूषणों पर शुद्धता और गारंटी का कानूनन सुरक्षा कवच हमेशा बरकरार रहे।
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को बांग्लादेश भेजी गई मुमताज बेगम का पता लगाने का आदेश दिया है।
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कॉकरोच जनता पार्टी के कनॉट प्लेस पर जुटने के ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड पर है। त्योहारों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। इसी बीच देर रात पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी।
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Guru Gochar 2026: देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, बुद्धि, सौभाग्य, संतान और विस्तार का कारक माना जाता है. वहीं, सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं, जिन्हें आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है.
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11 दिसंबर 2026 को शनि देव मीन राशि में मार्गी होने जा रहे हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि की चाल में इस बदलाव से मेष, वृषभ और मकर राशि के जातकों को करियर और कारोबार में लाभ मिलने की संभावना है. नौकरी में तरक्की, नए अवसर और अटके काम पूरे होने के संकेत बताए जा रहे हैं. हालांकि, ये ज्योतिषीय अनुमान हैं, जिनकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है.
भारत 38वां सबसे नवाचारी देश, स्विट्जरलैंड लगातार 16वें साल शीर्ष पर
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IRDAI बदलने जा रहा है इंश्योरेंस के नियम. क्या आपकी पॉलिसी और प्रीमियम के घटेंगे दाम? जानिए आपकी पॉलिसी, कमीशन और एजेंटों पर क्या होगा असर
Aaj Ka Mausam 16 October 2026: दिल्ली-NCR में 15 अक्टूबर की बारिश के बाद तापमान गिरने से सुबह-शाम ठंडक बढ़ गई है। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई है, जबकि सच पास में 30 सेंटीमीटर तक बर्फ दर्ज की गई। आज दिल्ली में हल्की बारिश, उत्तराखंड में गरज-चमक और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भारी बारिश का अनुमान है।

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