बोल्सोनारो पर भड़के राष्ट्रपति लूला, परिवार को वीजा देने की तैयारी में वॉशिंगटन
ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो ने राष्ट्रपति चुनाव में हार स्वीकार किए बिना देश छोड़ दिया. राष्ट्रपति लूला ने इसे शर्मनाक बताया और कहा कि अगर वे बेगुनाह हैं तो देश में रहकर अपनी निर्दोषता साबित करें.
'पीछे हटिए, यह हवाना नहीं...', संयुक्त राष्ट्र में भिड़े अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधि
संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने क्यूबा सरकार पर भ्रष्टाचार और आलीशान जीवनशैली के आरोप लगाए.
महंगाई भत्ते पर आने वाला है बड़ा फैसला, दीपावली से पहले इतनी बढ़कर आएगी सैलरी?
महंगाई भत्ते पर आने वाला है बड़ा फैसला, दीपावली से पहले इतनी बढ़कर आएगी सैलरी?
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद अमेरिका भागे फ्लावियो बोल्सोनारो
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो अमेरिका चले गए हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पासपोर्ट जमा करने के आदेश का पालन नहीं किया, जिसके कारण उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है.
अपडेट्स: सरकार ने एयरलाइंस को दिए निर्देश- कोहरे के मौसम में योग्य क्रू ही उपलब्ध कराएं
अपडेट्स: सरकार ने एयरलाइंस को दिए निर्देश, कोहरे के मौसम में योग्य क्रू ही उपलब्ध कराएं
ऑस्ट्रेलिया के लिए वीजा आवेदन पर देनी पड़ सकती है बायोमीट्रिक जानकारी, नई शर्तें लागू
नई दिल्ली स्थित ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग ने कहा, आस्ट्रेलिया सरकार भारत में वीजा आवेदकों के लिए अपने बायोमीट्रिक संग्रह कार्यक्रम का विस्तार कर रही है। इस साल 26 अक्टूबर से, भारत में ऑस्ट्रेलिया का नया वीजा आवेदन जमा करने वाले लोगों को बायोमीट्रिक जानकारी देने की आवश्यकता हो सकती है।
रायपुर में ज्वेलरी और जमीन कारोबारी नितिन डागा से जुड़े रवि नगर स्थित सुशील विला में ईडी के अधिकारी पहुंचे तो दुर्ग में कारोबारी गुलशन कुमार बघेल के ऋषभ ग्रीन सिटी स्थित आवास और रायपुर के मालवीय नगर स्थित उनके कार्यालय में जांच की गई।
एसएसबी प्रमुख संजय सिंघल को आईटीबीपी डीजी का अतिरिक्त प्रभार, गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला
केंद्र सरकार ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के प्रमुख संजय सिंघल को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक (डीजी) का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का फैसला किया है। सिंघल 1993 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं।
राजस्थान सरकार की वेबसाइट हैक करने का दावा: 59 हजार ई-मेल अकाउंट बंद; मचा हड़कंप
हैकर्स के दावों के बीच सर्वर की जांच और मेंटेनेंस कार्य के चलते राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट तीन दिन से बंद है। इनमें पुलिस, वित्त, चिकित्सा, शिक्षा, जलदाय जैसे महत्वपूर्ण विभागों की वेबसाइटें शामिल हैं।
मणिपुर में केएनएफ- एमसी का सदस्य गिरफ्तार, विदेशी हथियार, मादक पदार्थ बरामद
पुलिस ने मंगलवार को बताया कि चूड़चंदपुर जिला पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 129वीं बटालियन और असम राइफल्स की पांचवीं बटालियन की संयुक्त टीम ने सोमवार रात किंगकिन गांव में खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान चलाया था।
इजरायल में 2024 के चुनाव के एग्जिट पोल के अनुसार, आइजेनकोट के नेतृत्व वाले ब्लॉक को तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों ने नेतन्याहू के ब्लॉक से आगे बताया है. हालांकि, किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है.
पॉक्सो की विशेष अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने 78 वर्षीय दोषी को आठ धाराओं में मृत्यु तक जेल में रखने और दो धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर कुल 77 लाख 64 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
केरल मर्सिडीज हादसा: भारी दबाव के बाद एक्शन में सरकार, जज के खिलाफ FIR दर्ज; 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड
गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला के निर्देश पर मंगलवार को एफआईआर में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए जोड़ी गई, जिसके तहत नाबालिग के अभिभावक या वाहन मालिक को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
चक्रवात अर्नब LIVE: आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की प्रक्रिया शुरू, भारी बारिश और तेज आंधी का अलर्ट
चक्रवात अर्नब LIVE: आंध्र प्रदेश के तट से टकराया तूफान, भारी बारिश और तेज आंधी का अलर्ट
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग; 30 अक्टूबर को खरगे के घर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया गठबंधन के नेताओं को पत्र लिखकर 30 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने आवास पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए बुलाया है।
करतारपुर साहिब कॉरिडोर फिर से खोला जाए, धार्मिक भावनाएं राजनीति से ऊपर: मुख्यमंत्री भगवंत मान
पंजाब के मुख्यमंत्री ने तीर्थयात्रियों की निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करने और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के लिए
यूरोपीय देशों को भारत के गोला-बारूद निर्यात में 1600 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भारत को यूरोप का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बताया है, जो यूरोपीय रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाता है।
पढ़ें 28 अक्टूबर के मुख्य और ताजा समाचार - लाइव ब्रेकिंग न्यूज
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खरगे के बयान पर मचा घमासान: भाजपा बोली- 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे', कांग्रेस ने मीम्स से दिया जवाब
प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मल्लिकार्जुन खरगे की 'बाप' टिप्पणी पर भाजपा और कांग्रेस इंटरनेट मीडिया पर भिड़ गए।
भाजपा की विजय का विश्वास, विपक्षी हताश और निराश : श्री मौर्य
श्री मौर्य ने विपक्षी गठबंधन की प्रस्तावित रैली को लेकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में ऐतिहासिक विजय मिलने का विश्वास है। उन्होंने कहा कि श्री राहुल गांधी, श्री अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेता हताशा और निराशा में हैं। उनके आंदोलनों को जनता का समर्थन नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का उद्देश्य देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना है, लेकिन उसकी ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनता अपने मताधिकार के माध्यम से हर राजनीतिक दल को जवाब देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन जनता के समर्थन से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि विपक्ष के आगामी आंदोलन भी सफल नहीं होंगे और देश की जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा विकास के पक्ष में अपना समर्थन व्यक्त करती रहेगी।
'सिर्फ भावुक सर्कुलर से नहीं रुकेगी एसिड की बिक्री', सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने देश में एसिड अटैक की बढ़ती घटनाओं पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि केवल भावुक सर्कुलर जारी करने से एसिड बिक्री पर रोक का उद्देश्य पूरा नहीं होगा और केंद्र को प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया।
कच्चे घर की बेबसी से पक्के आशियाने के सुकून तक पहुंचीं सुन्दरकली, बोलीं— धन्यवाद मोदी जी
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को गोमती नगर स्थित होटल हयात में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला एवं प्रधानमंत्री आवास स्वीकृति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। श्री मौर्य ने जनपद बाराबंकी के ब्लॉक सिधियांवा की श्रीमती सुनीता, श्रीमती रामकुमारी, श्रीमती जगरीना, शिवकुमारी, श्रीदेवी सहित ब्लॉक इस्लामपुर से श्रीमती जयनाथा, श्रीमती सुन्दरकली, श्रीमती सुमन एवं श्रीमती राजकुमारी को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृति पत्र वितरित किये।श्री मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसी के दृष्टिगत भारत सरकार से आग्रह किया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत भी मैदानी एवं पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और निर्माण लागत को ध्यान में रखते हुए आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाए। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों को मिलने वाली आवास सहायता के बीच के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी गरीब परिवारों को सम्मानजनक, सुरक्षित और सुविधायुक्त आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण सामग्री की ढुलाई तथा अन्य भौगोलिक कठिनाइयों के कारण निर्माण लागत अधिक हो सकती है, इसलिए आवास सहायता में वृद्धि से जरूरतमंद परिवारों को विशेष लाभ मिलेगा। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। प्रधानमंत्री जी ने 20 नवंबर 2016 को आगरा से इस योजना का शुभारंभ किया था, उत्तर प्रदेश को अब तक लगभग 43 लाख आवासों का आवंटन प्राप्त हुआ है। गत वर्ष तक स्वीकृत 36.56 लाख आवासों में से 36.40 लाख आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इस प्रकार प्रदेश में आवास पूर्णता की दर 99.55 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि भूमिहीन पात्र लाभार्थियों को पट्टा उपलब्ध कराने, राजमिस्त्री प्रशिक्षण, एरिया ऑफिसर एप से निरीक्षण और सोशल ऑडिट जैसे कार्यों में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।श्री मौर्य ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत सरकार ने आवास प्लस सर्वेक्षण-2024 के आधार पर उत्तर प्रदेश को 6.18 लाख आवासों का लक्ष्य दिया है। नए सर्वेक्षण में 39.21 लाख लाभार्थी चिन्हित हुए हैं। उन्होंने पात्र परिवारों की बड़ी संख्या को देखते हुए इस वर्ष आवास लक्ष्य बढ़ाकर कम से कम 10 लाख करने तथा वर्तमान निर्माण लागत के अनुरूप प्रति आवास ₹1.20 लाख की सहायता राशि बढ़ाने पर विचार करने का अनुरोध किया। उन्होंने पात्र आंशिक पक्के मकानों वाले परिवारों को भी योजना के दायरे में शामिल करने और लंबित प्रशासनिक मद की धनराशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्री कमलेश पासवान, प्रदेश की ग्राम्य विकास राज्यमंत्री श्रीमती विजय लक्ष्मी गौतम, प्रमुख सचिव श्री सौरभ बाबू, आयुक्त ग्राम्य विकास श्री प्रमोद कुमार उपाध्याय, भारत सरकार के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार श्री पीयूष श्रीवास्तव, निदेशक श्री पवन कुमार सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि और ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे एवं हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों ने भी कार्यशाला में प्रतिभाग किया।
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट के तहत पत्रकारों को सूचना प्रकाशित करने से पहले अनुमति लेना न्यूज रूम बंद कर देगा।
महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रोटोकॉल की मांग पर केंद्र को नोटिस, तीन नवंबर को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कानून-व्यवस्था और विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए एक समान प्रोटोकॉल की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
शांगरी-ला होटल के रेस्तरां पर एक्शन, जबरन सर्विस चार्ज लेने पर 1 लाख का जुर्माना
सीसीपीए ने नई दिल्ली के शांगरी-ला इरोस होटल के रेस्तरां 'मिस्टर चाय' पर 1 लाख रुपये जुर्माना लगाया है. ग्राहकोंकी आपत्ति और शिकायत के बाद प्राधिकरण ने यह आदेश जारी किया है.
दस्तक: SC में SIR पर सुनवाई, राहुल गांधी ने क्यों शेयर किया त्रिपुंड?
आज दस्तक में पहले बात, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लड़ाई, अब रामलीला से चढ़ाई तक पहुंच गई है. जी हां 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के 19 दल महारैली करने जा रहे हैं. लेकिन, चुनाव आयोग, सरकार और विपक्ष की इस जंग के बीच राहुल गांधी ने, आज भगवान शिव से जुड़े पवित्र चिह्न 'त्रिपुंड तिलक' की एक तस्वीर साझा की, जिसका सच प्रियंका गांधी ने बताया. देखें...
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से नदियों तथा तालाबों में अनुपचारित सीवेज छोड़ने पर रिपोर्ट मांगी है।
दुनिया में बजेगा भारत की टेक्नोलॉजी का डंका! PM मोदी ने बताया विकसित भारत का रोडमैप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ESTIC-2026 सम्मेलन में भारत को भविष्य की तकनीकों के विकास में वैश्विक नेतृत्व करने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने AI के जिम्मेदार इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और नवाचार के जरिए विकसित भारत बनाने पर जोर दिया।
शिवसेना UBT के 6 सांसदों के विलय को स्पीकर की मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट में 8 दिसंबर को अंतिम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट 8 दिसंबर को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी के मामले में अंतिम सुनवाई करेगा। यह मामला दल-बदल कानून के तहत संवैधानिक नैतिकता और संसदीय लोकतंत्र से जुड़े अहम सवालों पर केंद्रित है।
गर्भवती पत्रकार से 'बदसलूकी' मामले में राहुल को नोटिस, तीन नवंबर को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने एक गर्भवती पत्रकार से कथित बदसलूकी के मामले में राहुल गांधी और अन्य को नोटिस जारी किया है।
अर्नब तूफान की गति ज्यादा रही तो क्या सुनामी आएगी? देखें B&W
हमारा अगला विश्लेषण खासतौर पर उन लोगों के लिए है, जो आंध्र प्रदेश, तमिल नाडु, केरल, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में रहते हैं. मौसम विभाग का अनुमान है कि अर्नब नाम का तूफान कल सुबह तक आन्ध्र प्रदेश और पुडुचेरी के यानम तट से टकरा सकता है. और इस दौरान हवाएं अधिकतम 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं. देखें...
PM Modi और लिकटेंस्टाइन के युवराज Alois के बीच द्विपक्षीय सहयोग पर वार्ता
(फोटो के साथ)नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लिकटेंस्टाइन के युवराज एलोइस ने मंगलवार को व्यापार और प्रौद्योगिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की। छोटे यूरोपीय देश लिकटेंस्टाइन के कार्यवाहक प्रमुख एलोइस रविवार से भारत की चार दिवसीय यात्रा पर हैं। उनके साथ उनकी पत्नी राजकुमारी सोफी और उद्योग जगत के कई प्रमुख नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी आया है। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि मोदी और एलोइस ने व्यापार एवं निवेश, उन्नत विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, नवाचार, वित्तीय सेवाओं, कृषि, अंतरिक्ष, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने दोहरे कराधान से बचाव संबंधी समझौता करने की संभावना पर भी चर्चा की। जॉर्ज ने कहा, “द्विपक्षीय सहयोग को प्रगाढ़ बनाने और उन यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए तीन ‘टी’ यानी व्यापार (ट्रेड), प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉडी) और प्रतिभा (टैलेंट) को आगे बढ़ाने पर स्पष्ट रूप से जोर दिया गया। लिकटेंस्टाइन ईएफटीए का एक महत्वपूर्ण सदस्य है।”लिकटेंस्टाइन के युवराज की भारत यात्रा, नयी दिल्ली और ईएफटीए देशों के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) लागू होने के एक साल से अधिक समय बाद हो रही है। भारत और ईएफटीए के बीच करीब 16 साल की बातचीत के बाद मार्च 2024 में टीईपीए पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता पिछले साल अक्टूबर में लागू हुआ था। इस बड़े व्यापार समझौते के तहत ईएफटीए के सदस्य देश आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने पर विचार कर रहे हैं। जॉर्ज ने कहा कि युवराज एलोइस की इस “ऐतिहासिक यात्रा” से भारत और लिकटेंस्टाइन के संबंधों में “एक नयी शुरुआत” हुई है। इससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक संपर्क बढ़ेगा, संस्थागत संबंध मजबूत होंगे और सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा, “अब ध्यान (नयी पहलों को) लागू करने पर है। यात्रा के दौरान बनी सहमति को ठोस परियोजनाओं, साझेदारियों और परिणामों में बदलने पर जोर दिया जा रहा है।”इससे पहले युवराज एलोइस ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा, “भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते से मिले अवसरों के कारण विभिन्न क्षेत्रों में हमारी द्विपक्षीय साझेदारी तेजी से आगे बढ़ रही है।”विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि लिकटेंस्टाइन के नेता की भारत यात्रा दोनों देशों की द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। युवराज एलोइस का मंगलवार सुबह राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत भी किया गया।
हैदराबाद हाउस में PM मोदी से मिले लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलियोस और प्रिंसेस सोफी की मेजबानी की।
बिहार: राजगीर में भारत-न्यूजीलैंड अंडर-20 रग्बी सीरीज संपन्न, खेल मैत्री के 100 साल का जश्न
राजगीर में भारत और न्यूजीलैंड अंडर-20 रग्बी सीरीज प्रशिक्षण सत्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतर्राष्ट्रीय सहयो
बाराबंकी टोल प्लाजा पर 2.76 करोड़ के गोल्ड समेत 2 गिरफ्तार, नेपाल से तस्करी
नेपाल से दिल्ली ले जाए जा रहे 1 किलो 996 ग्राम विदेशी सोने के साथ डीआरआई ने बाराबंकी टोल प्लाजा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. बरामद सोने की कीमत 2.76 करोड़ रुपये बताई गई है. पढ़ें पूरी कहानी.
पत्नी के जिम ट्रेनर से प्रेम संबंध, पति बना कांटा तो कर दिया अटैक
Ghaziabad News: गाजियाबाद के वसुंधरा में पत्नी ने जिम ट्रेनर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या की कोशिश. सुबह घर में घुसकर गोदा चाकू. दोनों गिरफ्तार. पढ़ें रिपोर्ट...
दुबई यात्रा पर मेडिकल बिल का बड़ा झटका! केंद्र ने भारतीयों को दी ये सलाह
भारत ने यूएई जाने वाले अपने नागरिकों को यात्रा से पहले पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा लेने की सलाह दी है. दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के मुताबिक कई भारतीयों को अचानक बीमारी या इमरजेंसी में भारी मेडिकल बिल का सामना करना पड़ा, जो कई बार मरीज और उसके परिवार की क्षमता से बाहर था. मिशन ने कहा है कि बीमा में कैशलेस सुविधा और मेडिकल रिपैट्रिएशन का खर्च शामिल होना चाहिए.
वर्ष 2029 में भी Narendra Modi के नेतृत्व में बनेगी राजग सरकार: JP Nadda
केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) वर्ष 2029 में भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सत्ता में लौटेगा। नड्डा ने बांग्लादेश और अल्बानिया जैसे हालात की आशंकाओं को खारिज करते हुए भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना की और राहुल गांधी तथा कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस निर्वाचन आयोग और चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाकर लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। नड्डा ने अहमदाबाद के वाडज इलाके में भाजपा की पदयात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि घुसपैठियों की मदद से सरकार बनाने के विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के इरादे कभी पूरे नहीं होने दिए जाएंगे। नड्डा ने कहा कि चुनाव जनता के समर्थन से जीते जाते हैं, विरोध प्रदर्शनों या रैलियों से नहीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘‘याद रखना राहुल बाबा, 2029 में भी मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनेगी।’’उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि लोगों की आवाज सुनी जाए और उसका सम्मान किया जाए। नड्डा ने कहा, ‘‘आप नेपाल का उदाहरण दे रहे हैं, आप अल्बानिया का उदाहरण दे रहे हैं। यह 140 करोड़ लोगों का देश और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत है। यहां न तो बांग्लादेश जैसे हालात होते हैं और न ही अल्बानिया जैसे।’’गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत आयोजित पदयात्रा में हिस्सा लिया। नड्डा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ पर निर्वाचन आयोग को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘जब वे चुनाव हारते हैं, तो निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हैं, लेकिन जीतने पर जनता का समर्थन मिलने का दावा करते हैं।’’नड्डा ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान गिर के जंगल के भीतर एक मतदाता के लिए बनाए गए मतदान केंद्र का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के 10 अधिकारियों ने एक मंदिर के पुजारी को मतदान करने में सक्षम बनाने के लिए करीब 10 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘यही भारत का लोकतंत्र है। निर्वाचन आयोग की गौरवशाली विरासत है और भारत के संवैधानिक संस्थानों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।’’नड्डा ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का बचाव करते हुए विपक्ष के इस आरोप को खारिज किया कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। नड्डा ने कहा कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अपात्र मतदाताओं और भारत में मतदाता के रूप में पंजीकृत अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उनके नाम हटाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘‘यह ‘इंडिया’ गठबंधन घुसपैठियों के समर्थन से देश चलाना चाहता है। यही उसका असली इरादा है। एसआईआर की प्रक्रिया हर हाल में पूरी की जाएगी।’’राहुल गांधी का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इस नादान और हठी बालक को याद रखना चाहिए कि किसी को भी घुसपैठियों की मदद से सरकार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और न ही हम घुसपैठियों को मतदाता बनने देंगे।’’मंगलवार को गुजरात के राजकोट में भी भाजपा का यह अभियान चलाया गया जिसका नेतृत्व गुजरात के प्रभारी तरुण चुग और प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने किया। गुजरात भाजपा के मीडिया विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, पदयात्रा की शुरुआत बहुमाली भवन के पास सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा से हुई। इसमें केंद्रीय मंत्री नीमूबेन बंभानिया, भाजपा के वरिष्ठ नेता परषोत्तम रूपाला, राज्य के मंत्री और पार्टी के अन्य नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। सभा को संबोधित करते हुए चुग ने राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और न्यायपालिका पर दबाव डालने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
नींबू और अलसी से बनाएं कोलेजन जेल, 50 में दिखेंगी 25 की
अगर आपकी स्किन भी वक्त से पहले झुर्रीदार, डल और बेजान दिखने लगी है तो मार्केट की महंगी क्रीम छोड़िए. यहां हम आपको घर पर ही नींबू और अलसी से कोलेजन जेल बनाने का तरीका बता रहे हैं जो आपकी स्किन पर फिर से चमक ले जाएगा.
Supreme Court on Cancer Drug Prices:
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान 'अर्णब' बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, तूफान पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है। इसके 28 अक्टूबर की सुबह आंध्रप्रदेश के तट ...
विपक्ष के सभी सांसदों को 30 अक्टूबर को दिल्ली बुलाया गया, क्या है इसका मकसद?
दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 1 नवंबर को रैली होने वाली है। इस रैली में विपक्ष के करीब-करीब सभी नेता मौजूद हो सकते हैं। वहीं, इस रैली से पहले सभी विपक्षी सांसदों को 30 अक्टूबर को दिल्ली बुलाया गया है।
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को मीडिया समूहों की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें देश के निजता कानून को
Sardar Patel को कमान मिलती तो पूरा Jammu Kashmir भारत का होता: Shivraj Singh Chouhan
केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कश्मीर मामले को संभालने के तरीके और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आलोचना की। चौहान ने सरदार वल्लभभाई पटेल की राष्ट्रीय एकता और मजबूत शासन की विरासत को याद किया। ‘ऑल इंडिया रेडियो’ पर 67वें ‘सरदार पटेल स्मारक व्याख्यान’ को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि आजादी के बाद रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने के सरदार पटेल के प्रयासों के बिना, देश का मौजूदा भौगोलिक स्वरूप संभव नहीं हो पाता। उन्होंने 1947-48 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान नेहरू द्वारा युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा करने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘अगर कश्मीर का मामला भी सरदार वल्लभभाई पटेल पर छोड़ दिया गया होता, तो शायद जो हिस्सा पाकिस्तान के पास चला गया, वह नहीं जाता।’’चौहान ने दावा किया कि जब युद्धविराम की घोषणा की गई, तब भारतीय सेना पाकिस्तानी बलों और कबायली लड़ाकों के खिलाफ आगे बढ़ रही थी। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा न हुआ होता, तो जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र भारत का हिस्सा होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि देश का प्रथम प्रधानमंत्री बनने के लिए पटेल को कांग्रेस के अधिकांश सदस्यों का समर्थन हासिल था, लेकिन महात्मा गांधी की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्होंने नेहरू की नियुक्ति को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के त्याग का उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है।’’ उन्होंने पटेल को ऐसा नेता बताया, जिनके लिए व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से अधिक राष्ट्रीय एकता महत्वपूर्ण थी। मंत्री ने कहा कि पटेल ने बातचीत के जरिए कई रियासतों को भारत में शामिल होने के लिए राजी किया और जहां आवश्यक हुआ, वहां बल प्रयोग भी किया। उन्होंने कहा कि हैदराबाद, जूनागढ़ और भोपाल उन चुनौतियों के उदाहरण थे, जिनका सामना रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया के दौरान करना पड़ा। उन्होंने पटेल को दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में उनका योगदान महत्वपूर्ण था। चौहान ने पटेल की विरासत और नरेन्द्र मोदी सरकार की नीतियों के बीच समानता बताते हुए अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और नक्सलवाद को समाप्त करने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने इन्हें राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सरकार का दृष्टिकोण एक मजबूत देश और आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने की पटेल की सोच को दर्शाता है। सोमनाथ मंदिर के बारे में चौहान ने कहा कि आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरू के विरोध के बावजूद मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प पटेल ने लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के कार्यक्रम पर नेहरू ने नाराजगी जताई थी। मंत्री ने गुजरात में खेड़ा और बारदोली आंदोलनों में पटेल की भूमिका को याद करते हुए कहा कि उन्होंने फसल खराब होने और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद ब्रिटिश सरकार द्वारा लगान वसूलने के प्रयासों के खिलाफ किसानों को संगठित किया था। पटेल को भारत के एकीकरण का शिल्पकार बताते हुए चौहान ने गुजरात में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा कि पटेल की 150वीं जयंती, ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष और आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती लोगों को राष्ट्रीय एकता और विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर प्रदान करती है। आकाशवाणी द्वारा 1955 से आयोजित की जा रही सरदार पटेल स्मारक व्याख्यान श्रृंखला भारत के पहले उपप्रधानमंत्री, गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री की विरासत का सम्मान करती है। यह व्याख्यान 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर रात साढ़े नौ बजे आकाशवाणी के राष्ट्रीय प्रसारण नेटवर्क पर देशभर में प्रसारित किया जाएगा। राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।
ओडिशा में भ्रष्टाचारियों पर बड़ा एक्शन, 41 कर्मचारी बर्खास्त, 91 रिटायर्ड कर्मियों की पेंशन बंद
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया कि जून 2024 से अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में 41 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है और 91 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन बंद की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की मांग वाली जनहित याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट से स्थानांतरित करने की मांग पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
योगी सरकार का श्रमिकों को दिवाली से पहले तोहफा, न्यूनतम मजदूरी के साथ महंगाई भत्ते की नई दरें लागू
लखनऊ, 27 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के हित में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश के 74 अनुसूचित नियोजनों में परिवर्तनीय महंगाई भत्ते (वीडीए) की संशोधित दरें निर्धारित की हैं। इसके तहत श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी में ₹174.25 से लेकर ₹238.39 तक की वृद्धि हुई है। नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी।श्रम विभाग की ओर से 21 अक्टूबर 2026 को जारी शासनादेश के अनुसार, श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में यह संशोधन जनवरी से जून 2026 की अवधि के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के औसत 431 अंकों के आधार पर किया गया है। इसका उद्देश्य महंगाई में हुए बदलाव के अनुरूप श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का लाभ उपलब्ध कराना है।योगी सरकार की इस पहल से औद्योगिक इकाइयों, प्रतिष्ठानों और संबंधित अनुसूचित नियोजनों में काम करने वाले अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों को लाभ मिलेगा। संशोधित दरों के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में श्रमिकों की श्रेणी के अनुसार न्यूनतम मासिक मजदूरी निर्धारित की गई है।तीनों श्रेणियों के श्रमिकों की बढ़ी मजदूरीगौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद: इन दोनों जिलों में अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी ₹13,690 से बढ़ाकर ₹13,883.59, अर्द्धकुशल श्रमिकों की ₹15,059 से बढ़ाकर ₹15,271.41 और कुशल श्रमिकों की ₹16,868 से बढ़ाकर ₹17,106.39 कर दी गई है। इससे श्रमिकों को हर महीने क्रमशः ₹193.59, ₹212.41 और ₹238.39 का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।नगर निगम वाले अन्य जनपद: गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद को छोड़कर नगर निगम वाले जनपदों में अकुशल श्रमिकों की मासिक मजदूरी ₹13,006 से बढ़ाकर ₹13,189.68, अर्द्धकुशल श्रमिकों की ₹14,306 से बढ़ाकर ₹14,507.46 और कुशल श्रमिकों की ₹16,025 से बढ़ाकर ₹16,250.86 निर्धारित की गई है। इस श्रेणी में मासिक वृद्धि ₹183.68 से ₹225.86 तक है।अन्य जनपद: प्रदेश के शेष जनपदों में अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी ₹12,356 से बढ़ाकर ₹12,530.25, अर्द्धकुशल श्रमिकों की ₹13,590 से बढ़ाकर ₹13,782.30 और कुशल श्रमिकों की ₹15,224 से बढ़ाकर ₹15,438.42 कर दी गई है। इससे श्रमिकों को हर महीने ₹174.25 से ₹214.42 तक का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।महंगाई के अनुरूप भत्ते का निर्धारणश्रमिकों को देय परिवर्तनीय महंगाई भत्ते की गणना जनवरी से जून 2026 तक के औसत अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के 431 अंकों के आधार पर की गई है। पूर्व निर्धारित 400 अंकों के आधार स्तर से ऊपर सूचकांक में हुई वृद्धि को ध्यान में रखते हुए महंगाई भत्ता तय किया गया है। सरकार की व्यवस्था के अनुसार न्यूनतम मजदूरी की दैनिक दर मासिक मजदूरी के आधार पर 1/26 के अनुपात में निर्धारित होगी। साथ ही, पहले से अधिक मजदूरी प्राप्त कर रहे कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। यदि किसी कर्मचारी को पहले से निर्धारित दरों के अनुसार अधिक मजदूरी मिल रही है, तो उसे जारी रखा जाएगा।नियोजकों को करना होगा नई दरों का पालनश्रम विभाग ने संबंधित नियोजकों, औद्योगिक इकाइयों और प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों को निर्धारित नई दरों के अनुसार न्यूनतम मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है। भुगतान करते समय श्रमिक की कुशलता की श्रेणी और संबंधित क्षेत्र में लागू दरों का ध्यान रखना होगा। योगी सरकार का यह कदम महंगाई के अनुरूप श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में संशोधन करने और उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। नई दरों के लागू होने से प्रदेश के संबंधित अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों को नियमित रूप से संशोधित न्यूनतम मासिक पारिश्रमिक प्राप्त होगा।
SCO सम्मेलन के लिए भारत ने पाकिस्तान को किया आमंत्रित, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार
भारत ने पाकिस्तान को एससीओ सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के बाद, यह पहली बार है जब भारत ने पाकिस्तान को कोई निमंत्रण भेजा है।
मध्य प्रदेश पर्यटन प्रश्नोत्तरी 2026 शीर्ष टीमों ने मुफ्त टूर पैकेज जीते, साथ ही छात्रों के लिए पर्यटन क्षेत्र में कर
जिस जमीन पर होना था पानी, वहां 25 साल से हो रही थी खेती, अब चला बुलडोजर
संभल में प्रशासन ने 25 साल बाद तालाब की 450 वर्गमीटर जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया. राजस्व रिकॉर्ड में जमीन तालाब के नाम दर्ज थी, लेकिन वहां खेती की जा रही थी. एसडीएम के बेदखली आदेश पर तहसीलदार और पुलिस टीम ने बुलडोजर चलवाकर कब्जा हटाया. कार्रवाई का विरोध करने पर एक महिला समेत दो लोगों को हिरासत में लिया गया.
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली संस्मरण पुस्तक (Memoir) को लेकर कहा है कि इसके प्रकाशित होने के बाद कुछ ‘तमाशा’ होना तय है। उन्होंने कहा कि दशकों से दूसरे लोग उनकी कहानी बताते रहे हैं, लेकिन अब अपनी कहानी खुद बताने की ...
दरभंगा में RJD, कांग्रेस और CPM तीनों आमने-सामने... त्रिकोणीय मुकाबले में बाजी मार ले गया जन सुराज
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में महागठबंधन के घटक दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने का फायदा जन सुराज को मिला.
सूखे से जूझ रहे महाराष्ट्र को राहत, गुजरात के उकाई डैम से मिलेगा 5 TMC पानी
नर्मदा जल विवाद के तहत महाराष्ट्र को गुजरात के उकाई बांध से 5 TMC पानी मिलेगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूखे की स्थिति के बीच अपने हिस्से का पानी देने का मुद्दा उठाया.
Siddaramaiah ने स्टिंग विवाद की जानकारी Congress आलाकमान को दी, राहुल गांधी से मुलाकात की उम्मीद
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े मुद्दे को कांग्रेस आलाकमान के संज्ञान में ला दिया है और एक नवंबर को नयी दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान वह पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मिलना चाहेंगे। सिद्धरमैया ने स्पष्ट किया कि उन्होंने गांधी के साथ मुलाकात कोई कार्यक्रम तय नहीं किया है, लेकिन एक नवंबर को दिल्ली यात्रा के दौरान वह उनसे मुलाकात करेंगे। वह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी जा रहे हैं। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘सब कुछ उनके (पार्टी आलाकमान के) संज्ञान में ला दिया गया है। स्टिंग ऑपरेशन में है ही क्या? यह एक झूठी और मनगढ़ंत कहानी है।’’सिद्धरमैया ने अदालत से एक मानहानिपूर्ण वीडियो को प्रकाशित या प्रसारित करने पर रोक लगाने का अनुरोध किया है, जिसे कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत भी दी है, जिसके बाद कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें जद(एस) की सोशल मीडिया टीम के दो सदस्य भी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री और जद(एस) नेता एच. डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार उन कांग्रेस नेताओं को बचा रही है जो इस स्टिंग ऑपरेशन के सरगना हैं, और उसने निर्दोष जद(एस) कार्यकर्ताओं को फंसा दिया है। पत्रकारों ने जब सिद्धरमैया से पूछा कि क्या वह इस मामले को कांग्रेस आलाकमान के संज्ञान में लाएंगे, तो उन्होंने बताया, ‘‘वे इससे अवगत हैं। मैंने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के. सी. वेणुगोपाल को इस बारे में बता दिया है।’’दिल्ली यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से अलग से मुलाकात करने के बारे में पूछे जाने पर, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर मौका मिला तो वह उनसे जरूर मिलेंगे। उन्होंने बताया, ‘‘मैं उनसे मिलूंगा। वहां पहुंचने के बाद मैं मिलने के लिए समय लूंगा।’’
दिवाली बोनस को बनाएं वेल्थ: पोस्ट ऑफिस की 5 धांसू स्कीम्स, जहां 7.7% तक मिलेगा गारंटीड सरकारी ब्याज
दिवाली के पावन त्योहार पर कर्मचारियों और कारोबारियों को मिलने वाला बोनस सिर्फ शॉपिंग या पटाखों पर खर्च करने के लिए नहीं होता, बल्कि यह आपके भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने का एक शानदार अवसर होता है। यदि इस त्योहारी बोनस को बाजार के जोखिमों से दूर रखकर 100% सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाली योजनाओं में लगाया जाए, तो यह कुछ ही वर्षों में एक बड़ा फंड बन सकता है। भारतीय डाकघर (Post Office) की छोटी बचत योजनाएं केंद्र सरकार द्वारा समर्थित (Sovereign Guarantee) होती हैं, जहां आपके एक-एक पैसे की सुरक्षा की पूरी गारंटी सरकार की होती है। वर्तमान में पोस्ट ऑफिस की कई योजनाएं 7.1% से लेकर 7.7% प्रति वर्ष तक का जोरदार ब्याज दे रही हैं। यदि आपको इस दिवाली ₹25,000, ₹50,000 या ₹2 लाख से अधिक का बोनस मिला है, तो जानिए डाकघर की वे 5 सबसे बेहतरीन योजनाएं जहां आप अपना पैसा लगाकर ताबड़तोड़ मुनाफा कमा सकते हैं।1. नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC): 7.7% ब्याज और 80C का डबल फायदायदि आप 5 साल के लिए अपने बोनस को एकमुश्त जमा करके सबसे अधिक ब्याज पाना चाहते हैं, तो 'राष्ट्रीय बचत पत्र' यानी एनएससी (NSC - VIII Issue) सबसे बेहतरीन विकल्प है।ब्याज दर: इस पर सरकार 7.70% प्रति वर्ष का आकर्षक ब्याज दे रही है, जिसकी गणना सालाना चक्रवृद्धि (Compounded Annually) के आधार पर होती है।अवधि: इसका लॉक-इन पीरियड 5 साल का होता है।टैक्स लाभ: आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत इसमें जमा की गई ₹1.5 लाख तक की रकम पर टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा, पहले 4 वर्षों तक हर साल जुड़ने वाला ब्याज स्वतः पुनर्निवेशित (Re-invested) माना जाता है, जिससे उस ब्याज पर भी 80C के तहत अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन का लाभ मिलता है।मुनाफे का हिसाब: यदि आप अपना ₹1,00,000 का दिवाली बोनस एनएससी में लगाते हैं, तो 5 साल बाद मैच्योरिटी पर आपको बिना किसी रिस्क के लगभग ₹1,44,903 मिलेंगे, यानी ₹44,900 से अधिक का शुद्ध मुनाफा सीधा आपकी जेब में आएगा।2. 5-वर्षीय टाइम डिपॉजिट (Post Office TD): 7.5% ब्याज के साथ सालाना पेआउटबैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह डाकघर की 5 साल की टाइम डिपॉजिट (TD) उन लोगों के लिए मुफीद है जो हर साल अपने ब्याज की निकासी करना चाहते हैं।ब्याज दर: 5 साल की टीडी पर 7.50% सालाना की दर से ब्याज दिया जा रहा है।चक्रवृद्धि का फायदा: ब्याज की गणना तिमाही आधार पर कंपाउंड (Quarterly Compounding) होती है, लेकिन इसका भुगतान हर साल निवेशक के बचत खाते में सालाना आधार पर कर दिया जाता है। तिमाही चक्रवृद्धि के कारण इसका प्रभावी वार्षिक रिटर्न लगभग 7.71% बैठता है।टैक्स छूट: इस 5 साल की टीडी पर भी धारा 80C के तहत टैक्स डिडक्शन की सुविधा उपलब्ध है। यदि आप ₹50,000 का बोनस जमा करते हैं, तो हर साल आपको लगभग ₹3,857 का निश्चित ब्याज आपके खाते में मिलता रहेगा और 5 साल बाद आपका ₹50,000 का मूलधन सुरक्षित वापस मिल जाएगा।3. पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS): हर महीने तय आमदनी का इंतजामअगर आप चाहते हैं कि आपका दिवाली बोनस हर महीने आपके घर के छोटे-मोटे खर्च, बिजली का बिल या मोबाइल रिचार्ज का खर्च उठाता रहे, तो मंथली इनकम स्कीम (MIS) आपके लिए सबसे मुफीद है।ब्याज दर: एमआईएस पर 7.40% प्रति वर्ष का निश्चित ब्याज मिलता है, जिसका भुगतान हर महीने किया जाता है।अवधि और सीमा: यह खाता 5 साल के लिए खोला जाता है। सिंगल अकाउंट में अधिकतम ₹9 लाख और जॉइंट अकाउंट (पति-पत्नी मिलकर) में अधिकतम ₹15 लाख तक जमा किए जा सकते हैं।कमाई का गणित: यदि आप ₹1,00,000 का बोनस एमआईएस में जमा करते हैं, तो आपको हर महीने ₹616 से ₹617 सीधे आपके बचत खाते में मिलते रहेंगे। यदि आप ₹5,00,000 का निवेश करते हैं, तो हर महीने लगभग ₹3,083 की नियमित मासिक पेंशन जैसी आमदनी अगले 5 साल तक तय हो जाएगी। 5 साल पूरे होने पर आपकी मूल पूंजी ज्यों की त्यों वापस मिल जाती है।4. किसान विकास पत्र (KVP): 7.5% ब्याज, पैसा होगा दोगुनाअपने बोनस के पैसे को बिना किसी सिरदर्द के दोगुना करने की चाहत रखने वाले पारंपरिक निवेशकों के लिए किसान विकास पत्र (KVP) दशकों से एक भरोसेमंद जरिया रहा है।ब्याज दर: इस पर सरकार 7.50% सालाना का चक्रवृद्धि ब्याज दे रही है।मैच्योरिटी अवधि: केवीपी में जमा किया गया पैसा ठीक 115 महीने (9 साल और 7 महीने) में दोगुना (2X) हो जाता है।खासियत: इसमें निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है और इसे जरूरत पड़ने पर किसी भी बैंक में लोन लेने के लिए जमानत (Collateral) के तौर पर गिरवी भी रखा जा सकता है। यदि आप ₹1,00,000 का बोनस इसमें लगाते हैं, तो 115 महीने बाद आपको पूरे ₹2,00,000 की गारंटीड मैच्योरिटी राशि मिलेगी।5. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): 7.1% टैक्स-फ्री ब्याज और लंबी अवधि की सुरक्षायदि आप अपने दिवाली बोनस से अपने रिटायरमेंट या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए 15 साल का एक सुरक्षित फंड बनाना चाहते हैं, तो पीपीएफ सबसे सशक्त माध्यम है।ब्याज दर: वर्तमान में पीपीएफ पर 7.10% प्रति वर्ष का ब्याज मिल रहा है, जिसकी गणना वार्षिक चक्रवृद्धि आधार पर होती है।ट्रिपल टैक्स छूट (EEE स्टेटस): पीपीएफ की सबसे बड़ी यूएसपी इसका 'एक्सेम्प्ट-एक्सेम्प्ट-एक्सेम्प्ट' (EEE) स्टेटस है। इसमें निवेश की गई राशि (80C), हर साल मिलने वाला ब्याज और 15 साल बाद मिलने वाली पूरी मैच्योरिटी राशि पर ₹1 का भी आयकर नहीं लगता।फ्लेक्सिबिलिटी: इसमें आप साल भर में न्यूनतम ₹500 से लेकर अधिकतम ₹1.5 लाख तक जमा कर सकते हैं। बोनस का ₹50,000 या ₹1 लाख इसमें डालकर आप अपने पीपीएफ खाते को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।पोस्ट ऑफिस की टॉप 5 दिवाली बोनस स्कीम्स का तुलनात्मक चार्टस्कीम का नामब्याज दर (सालाना)निवेश की अवधिटैक्स लाभ (80C)सबसे खास फायदानेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)7.70%5 सालहाँ, ब्याज पर भी छूट5 साल में सबसे ज्यादा निश्चित ब्याज5-वर्षीय टाइम डिपॉजिट (TD)7.50%5 सालहाँ (₹1.5 लाख तक)तिमाही कंपाउंडिंग, सालाना पेआउटमंथली इनकम स्कीम (POMIS)7.40%5 सालनहींहर महीने सीधे खाते में नियमित आयकिसान विकास पत्र (KVP)7.50%115 महीनेनहीं9 साल 7 महीने में पैसा पक्का दोगुनापब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)7.10%15 सालहाँ (EEE श्रेणी)ब्याज और मैच्योरिटी पूरी तरह टैक्स फ्रीखाता कैसे खोलें और क्या दस्तावेज लगेंगे?डाकघर में इनमें से किसी भी योजना में खाता खोलना बेहद आसान है। आप अपने नजदीकी डाकघर में जाकर खाता खोलने का फॉर्म भर सकते हैं।जरूरी दस्तावेज: पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड और पैन कार्ड की स्व-सत्यापित कॉपी, दो पासपोर्ट साइज फोटो और चेक या नकदी की आवश्यकता होती है।डिजिटल सुविधा: यदि आपका डाकघर में पहले से सेविंग्स अकाउंट है और आपने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) या नेट बैंकिंग सक्रिय करा रखी है, तो आप घर बैठे मोबाइल बैंकिंग ऐप के जरिए भी एनएससी, टीडी या पीपीएफ में सीधे अपने बोनस की राशि ट्रांसफर करके खाता चालू कर सकते हैं। इस दिवाली अपने बोनस को खर्च करने के बजाय डाकघर की इन योजनाओं में निवेश करें और अपने पैसे से पैसा बनाने की शुरुआत करें।
बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान अर्नब विकराल रूप ले चुका है, जो बुधवार को आंध्र प्रदेश तट से टकराएगा।
देख लेंगे जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है... 'दिमागी नक्सल' वाली टीशर्ट पहन बरसे नसीरुद्दीन शाह
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने फेसबुक वीडियो जारी कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने खुद को दिमागी नक्सल बताते हुए कहा कि युवाओं, शिक्षा संस्थानों और लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन छात्रों का हौसला नहीं टूटेगा.
सावधान! सुबह आपके जगने से पहले ही दस्तक दे चुका होगा चक्रवात अर्नब, IMD का कहां-कहां अलर्ट
तूफान के लैंडफॉल के दौरान हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है, जबकि झोंकों के साथ यह 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज गति के कारण तट से टकराने का समय कुछ जल्दी हो सकता है।
भारतीय रेल से रोजाना सफर करने वाले करोड़ों आम यात्रियों के लिए रेलवे प्रशासन ने एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित कल्याणकारी कदम उठाया है। अब तक आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप से ऑनलाइन ई-टिकट बुक करने वाले यात्रियों को ही टिकट बुकिंग के दौरान मात्र 45 पैसे (0.45 रुपये) के मामूली प्रीमियम पर ₹10 लाख तक के यात्रा दुर्घटना बीमा (Optional Travel Insurance) का विकल्प मिलता था। रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटरों (PRS Counters) से कागजी टिकट खरीदने वाले यात्री इस महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कवच से वंचित रह जाते थे। इस भेदभाव को समाप्त करते हुए रेलवे ने आज से पूरे देश में कंप्यूटराइज्ड पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटरों से खरीदे जाने वाले आरक्षित टिकटों पर भी इस 45 पैसे वाले वैकल्पिक यात्रा बीमा को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है।मात्र 45 पैसे के प्रीमियम में क्या-क्या मिलता है? कवरेज का पूरा ब्योराभारतीय रेलवे द्वारा अधिकृत बीमा कंपनियों के साथ मिलकर संचालित की जा रही इस योजना का उद्देश्य किसी भी अप्रत्याशित ट्रेन दुर्घटना या अप्रिय घटना (आतंकी हमला, डकैती, उपद्रव या पटरी से उतरने) की स्थिति में यात्री और उसके परिवार को त्वरित वित्तीय संबल प्रदान करना है। 45 पैसे की इस नाममात्र राशि में मिलने वाला कवरेज इस प्रकार है:मृत्यु होने पर (Accidental Death): रेल हादसे में दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने की स्थिति में मृतक यात्री के नामांकित व्यक्ति (Nominee) या कानूनी वारिस को ₹10,00,000 (10 लाख रुपये) का एकमुश्त बीमा क्लेम दिया जाता है।पूर्ण स्थायी दिव्यांगता (Permanent Total Disability): दुर्घटना के कारण दोनों हाथ, दोनों पैर, दोनों आंखें खोने या पूरी तरह अपंग होने पर पीड़ित यात्री को ₹10,00,000 (10 लाख रुपये) की पूरी बीमा राशि का भुगतान होता है।आंशिक स्थायी दिव्यांगता (Permanent Partial Disability): एक आंख की रोशनी जाने, एक हाथ या एक पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने जैसी आंशिक स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹7,50,000 (साढ़े 7 लाख रुपये) तक का मुआवजा मिलता है।अस्पताल में इलाज का खर्च (Hospitalization Expenses): गंभीर चोट लगने पर अस्पताल में भर्ती होने और उपचार के लिए ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) तक का कैशलेस या रीइंबर्समेंट मेडिकल कवरेज उपलब्ध कराया जाता है।पार्थिव शरीर का परिवहन (Transportation of Mortal Remains): दुर्घटनास्थल से मृतक के पार्थिव शरीर को उसके गृह नगर तक पहुंचाने के लिए ₹10,000 तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी इस पॉलिसी में शामिल रहती है।काउंटर टिकट पर कैसे मिलेगा यह बीमा? समझिए बुकिंग प्रक्रियारेलवे स्टेशन के काउंटर से टिकट बनवाते समय इस सुविधा का लाभ लेना बेहद आसान और पारदर्शी बनाया गया है:आरक्षण फॉर्म में टिक करें: काउंटर पर मिलने वाले रिजर्वेशन फॉर्म में अब 'क्या आप यात्रा बीमा का विकल्प चुनना चाहते हैं? (Do you want to opt for Travel Insurance?)' का स्पष्ट कॉलम जोड़ दिया गया है। यात्री को वहां 'हाँ (Yes)' पर टिक करना होगा।मोबाइल नंबर अनिवार्य: टिकट बुक करते समय फॉर्म में अपना सही और चालू मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा, क्योंकि बीमा पॉलिसी का सीधा लिंक और यूनीक पॉलिसी नंबर उसी मोबाइल पर एसएमएस के जरिए भेजा जाएगा।टिकट पर दर्ज होगा शुल्क: टिकट प्रिंट होते ही उसमें प्रति यात्री मात्र 45 पैसे का अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाएगा और टिकट पर 'Travel Insurance Opted' स्पष्ट रूप से छपकर आएगा।नॉमिनी (Nominee) की जानकारी दर्ज करना सबसे जरूरी: ऐसे करें अपडेटबीमा लेना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण नॉमिनी का विवरण भरना है। यदि नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं होता है, तो भविष्य में क्लेम के समय कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) बनवाने में परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।काउंटर से टिकट कटने के कुछ ही मिनटों के भीतर यात्री के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर संबंधित बीमा कंपनी (जैसे एसबीआई जनरल, लिबर्टी जनरल या आईसीआईसीआई लोम्बार्ड) की ओर से एक एसएमएस प्राप्त होगा।उस एसएमएस में एक सुरक्षित वेब लिंक (URL) और पॉलिसी नंबर दिया रहेगा।लिंक पर क्लिक करके यात्री को बीमा कंपनी के पोर्टल पर जाना होगा और वहां अपने पीएनआर (PNR) व मोबाइल नंबर के जरिए लॉगिन करके अपने नॉमिनी का नाम, संबंध और आयु दर्ज कर सबमिट करना होगा। यह प्रक्रिया यात्रा शुरू होने से पहले किसी भी समय पूरी की जा सकती है।किन स्थितियों में मान्य होगा क्लेम और कब नहीं मिलेगा लाभ?रेलवे यात्रा बीमा के नियम बहुत स्पष्ट हैं:यात्रा अवधि की सीमा: यह बीमा यात्री द्वारा अपने बोर्डिंग स्टेशन पर ट्रेन में सवार होने के समय से शुरू होकर गंतव्य स्टेशन पर उतरने तक (या ट्रेन से उतरने के तय समय तक) ही प्रभावी रहता है।किन हादसों पर लागू: यह केवल रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 123 और 124 के तहत परिभाषित रेल दुर्घटनाओं, रेलगाड़ी के टकराने, डिरेलमेंट, आतंकी घटनाओं या ट्रेन के भीतर हिंसक उपद्रव के कारण होने वाली शारीरिक क्षति पर ही लागू होता है।कब नहीं मिलेगा क्लेम: चलती ट्रेन की छत या पायदान (Footboard) पर यात्रा करने, बिना टिकट सफर करने, आत्महत्या या खुद को पहुंचाई गई चोट, नशा करके ट्रेन से गिरने या रेलवे ट्रैक पार करते समय होने वाले हादसों को इस पॉलिसी के तहत कवर नहीं किया जाता है। इसके अलावा 5 वर्ष से कम उम्र के वे बच्चे जिनका अलग से टिकट नहीं लिया गया है, वे इस बीमा के दायरे में नहीं आते।क्लेम की प्रक्रिया: परिजनों को क्या करना होगा?दुर्घटना की स्थिति में क्लेम सेटलमेंट को बेहद तेज और कागजी औपचारिकता-मुक्त रखने के निर्देश दिए गए हैं:रेल हादसे की सूचना मिलने पर संबंधित रेलवे मंडल द्वारा जारी दुर्घटना प्रमाणपत्र (Railway Accident Certificate), अस्पताल के डिस्चार्ज/इलाज के मूल बिल या मृत्यु प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।दावेदार (नॉमिनी) को संबंधित बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर या वेबसाइट पर जाकर पीएनआर नंबर के साथ क्लेम दर्ज करना होता है।सभी जरूरी दस्तावेज जमा होने के 15 कार्यदिवसों के भीतर बीमा कंपनी को सीधे नॉमिनी के सत्यापित बैंक खाते में एनईएफटी (NEFT) के जरिए क्लेम राशि ट्रांसफर करनी अनिवार्य होती है। स्टेशन काउंटर से टिकट लेने वाले यात्रियों के लिए यह 45 पैसे का निवेश उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से एक वरदान साबित होगा।
3 साल से इस्तेमाल नहीं हो रहे जीरो बैलेंस खाते को PNB बंद करेगा, जानें कैसे करवा सकते हैं चालू
पंजाब नेशनल बैंक ने ऐसे खातों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिनमें पिछले 3 साल से कोई लेनदेन नहीं हुआ है और जिनका बैंक बैलेंस शून्य (Zero Balance) है.
ईवी की ओर बढ़ रहा देश का रुझान, हर चौथा स्कूटर अब बिक रहा इलेक्ट्रिक
भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, जहाँ लगभग 43% खरीदार अब इन्हें लेने पर विचार कर रहे हैं।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों अंशधारकों के लिए उमंग ऐप (UMANG App) पीएफ बैलेंस जांचने और क्लेम स्टेटस ट्रैक करने का एक बेहद लोकप्रिय जरिया रहा है। लेकिन अक्सर महीने के शुरुआती दिनों, वेतन आने के समय या सर्वर मेंटेनेंस के दौरान उमंग ऐप में 'तकनीकी खराबी' (Technical Glitch), सेशन एक्सपायर्ड या लोडिंग एरर जैसी समस्याएं आने लगती हैं। ऐसे वक्त में यदि आपको अचानक अपने पीएफ खाते का बैलेंस चेक करना हो, पासबुक डाउनलोड करनी हो या किसी आपातकालीन जरूरत (जैसे मेडिकल इमरजेंसी, शादी या मकान निर्माण) के लिए पीएफ का पैसा निकालना हो, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट और उसके एकीकृत सदस्य पोर्टल (Unified Member Portal) पर ये सभी सुविधाएं बिना किसी ऐप पर निर्भर रहे सीधे कंप्यूटर या मोबाइल ब्राउज़र के जरिए 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं।1. EPFO पासबुक पोर्टल से बैलेंस और स्टेटमेंट कैसे चेक करें?यदि उमंग ऐप पर पासबुक नहीं खुल रही है, तो ईपीएफओ के विशेष पासबुक पोर्टल से सीधे विस्तृत लेजर डाउनलोड किया जा सकता है:आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले अपने मोबाइल या लैपटॉप के ब्राउज़र में ईपीएफओ का आधिकारिक पासबुक पोर्टल (passbook.epfindia.gov.in) खोलें।लॉगिन क्रेडेंशियल्स दर्ज करें: होमपेज पर अपना 12 अंकों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और पासवर्ड डालें।कैप्चा और ओटीपी सत्यापन: स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड भरें और साइन इन पर क्लिक करें। आपके आधार से जुड़े रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक 6 अंकों का ओटीपी आएगा, उसे दर्ज कर सबमिट करें।मेंबर आईडी (Member ID) चुनें: लॉगिन होते ही आपके यूएएन से जुड़ी सभी कंपनियों (वर्तमान और पिछली) की मेंबर आईडी स्क्रीन पर दिखाई देंगी। जिस कंपनी खाते का विवरण देखना चाहते हैं, उस पर क्लिक करें।पासबुक देखें या पीडीएफ डाउनलोड करें: यहां आप 'View Passbook' पर क्लिक करके अपना और नियोक्ता का अंशदान, संचित ब्याज और कुल बैलेंस देख सकते हैं। भविष्य के रिकॉर्ड के लिए 'Download Passbook' विकल्प चुनकर पूरी पीडीएफ फाइल भी सेव कर सकते हैं।बिना इंटरनेट या स्मार्टफोन के बैलेंस चेक करने के 2 सुपरफास्ट विकल्पयदि आपके पास इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है या आप तुरंत बिना लॉगिन किए बैलेंस जानना चाहते हैं, तो ईपीएफओ की ये दो ऑफलाइन सेवाएं सबसे कारगर हैं:मिस्ड कॉल सर्विस (Missed Call): अपने यूएएन-रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 पर कॉल करें। दो रिंग के बाद कॉल अपने आप कट जाएगी और 60 सेकंड के भीतर एसएमएस के जरिए आपके खाते का कुल बैलेंस और अंतिम जमा की सूचना आपके फोन पर आ जाएगी।एसएमएस सुविधा (SMS): अपने रजिस्टर्ड नंबर से EPFOHO UAN HIN लिखकर 7738299899 पर भेजें (अंग्रेजी के लिए HIN की जगह ENG लिखें)। कुछ ही पलों में हिंदी में आपके पीएफ खाते का पूरा ब्योरा एसएमएस से प्राप्त हो जाएगा।2. EPFO पोर्टल से ऑनलाइन पीएफ विड्रॉल (पैसा निकालने) की पूरी प्रक्रियानौकरी में रहते हुए अग्रिम (PF Advance) निकालने के लिए या नौकरी छोड़ने के बाद पूरा पैसा निकालने के लिए ईपीएफओ मेंबर सेवा पोर्टल सबसे सुरक्षित माध्यम है:मेंबर पोर्टल पर लॉगिन: ब्राउज़र में ईपीएफओ यूनिफाइड पोर्टल (unifiedportal-mem.epfindia.gov.in) खोलें और अपने UAN, पासवर्ड व कैप्चा के जरिए लॉगिन करें।केवाईसी (KYC) की पुष्टि करें: मेनू बार में 'Manage' टैब पर जाएं और 'KYC' पर क्लिक करके जांच लें कि आपका बैंक खाता, पैन और आधार कार्ड 'Approved' स्थिति में हैं या नहीं।ऑनलाइन सर्विसेज में क्लेम चुनें: ऊपर दिए गए मुख्य मेनू में 'Online Services' पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन से ‘Claim (Form-31, 19, 10C & 10D)’ का चयन करें।बैंक खाता सत्यापित करें: स्क्रीन पर आपका विवरण दिखाई देगा। वहां अपने पीएफ खाते से जुड़े बैंक खाते के अंतिम अंक या पूरा खाता नंबर दर्ज करें और 'Verify' बटन पर क्लिक करें।क्लेम का प्रकार चुनें (I Want To Apply For):यदि नौकरी में रहते हुए इलाज, शादी या आवास के लिए पैसा निकाल रहे हैं, तो Form 31 (PF Advance) चुनें।यदि नौकरी छोड़ चुके हैं और 2 महीने से अधिक का समय हो गया है, तो पूरे पीएफ के लिए Form 19 (PF Settlement) और पेंशन के लिए Form 10C चुनें।कारण और राशि दर्ज करें: निकासी का कारण चुनें, अपेक्षित राशि भरें और अपना वर्तमान पता दर्ज करें। इसके बाद अपने बैंक पासबुक या कैंसिल्ड चेक की साफ स्कैन की हुई कॉपी (100 KB से 500 KB के बीच, जेपीजी फॉर्मेट) अपलोड करें।आधार ओटीपी से फाइनल सबमिशन: 'Get Aadhaar OTP' पर क्लिक करें। आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी को दर्ज करके 'Validate OTP and Submit Claim Form' पर क्लिक करें। स्क्रीन पर क्लेम की पावती (PDF Slip) आ जाएगी, जिसे डाउनलोड कर लें।पीएफ निकासी के समय इन 4 बातों का रखें विशेष ध्यानबैंक खाते में नाम और आईएफएससी (IFSC) मैच होना: जो कैंसिल्ड चेक आप अपलोड कर रहे हैं, उस पर आपका नाम, खाता संख्या और बैंक का आईएफएससी कोड स्पष्ट रूप से छपा होना चाहिए; अन्यथा क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।पैन कार्ड लिंक होना जरूरी: यदि आपकी कुल सेवा अवधि 5 वर्ष से कम है और निकासी राशि ₹50,000 से अधिक है, तो 10% से 20% तक टीडीएस (TDS) कटौती से बचने के लिए पैन का लिंक होना अनिवार्य है।एग्जिट डेट (Date of Exit) का अंकन: यदि नौकरी छोड़ चुके हैं, तो फाइनल विड्रॉल (Form 19) भरने से पहले 'Manage' टैब में जाकर 'Mark Exit' के जरिए कंपनी छोड़ने की तारीख दर्ज करना न भूलें।प्रोसेसिंग का समय: ऑनलाइन क्लेम सबमिट होने के बाद ईपीएफओ आमतौर पर 7 से 15 कार्यदिवसों के भीतर क्लेम प्रोसेस कर देता है और स्वीकृत राशि सीधे आपके सत्यापित बैंक खाते में एनईएफटी (NEFT) के जरिए ट्रांसफर हो जाती है। आप 'Online Services' में जाकर 'Track Claim Status' के जरिए अपने क्लेम की वास्तविक स्थिति भी देख सकते हैं।
दिनदहाड़े महिंद्रा थार की स्टेपनी चोरी, CCTV में कैद हुई वारदात
हैदराबाद के मलकपेट स्थित अकबर बाग में दिनदहाड़े महिंद्रा थार की स्टेपनी चोरी हो गई. यह वारदात CCTV में कैद हो गई. इस मामले में चादरघाट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है. पढ़ें पूरी कहानी.
चित्रकूट में आज और कल भारी बारिश की संभावना, मौसम विभाग का अलर्ट
चित्रकूट में भारी बारिश: चित्रकूट में भारी बारिश, मौसम ब्रेकिंग (चित्रकूट): जिले में आज और कल प्रतिकूल मौसम के साथ भारी बारिश, तेज हवाएं चलने व बज्रपात की संभावना जताई गई है। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती मौसम तंत्र के प्रभाव को देखते हुए मौसम विभाग ने एडवाइजरी जारी की है और किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह दी है।
SBI की 180 से 210 दिन की FD में ₹1 लाख जमा करने पर कितना ब्याज मिलेगा? समझें पूरा वित्तीय हिसाब
यदि आपके पास ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की अधिशेष पूंजी (Surplus Funds) मौजूद है और आपको अगले 6 से 7 महीनों के भीतर किसी काम (जैसे बच्चों की स्कूल फीस, घर की मरम्मत या किसी आयोजन) के लिए इसकी जरूरत पड़ने वाली है, तो इसे सामान्य बचत खाते में छोड़ने के बजाय बैंक एफडी में पार्क करना एक समझदारी भरा वित्तीय कदम है। देश का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अल्पावधि यानी 'शॉर्ट-टर्म' निवेशकों के लिए 180 दिन से लेकर 210 दिन की विशेष टेन्योर बकेट प्रदान करता है। वर्तमान ब्याज दरों के ढांचे के तहत इस अवधि के लिए सामान्य नागरिकों को जहां 5.65% प्रति वर्ष का ब्याज दिया जा रहा है, वहीं वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को 50 बेसिस प्वाइंट्स (0.50%) का अतिरिक्त लाभ जोड़कर 6.15% प्रति वर्ष की आकर्षक दर की पेशकश की जा रही है। आइए समझते हैं कि 6.15% सालाना ब्याज दर के हिसाब से ₹1 लाख के निवेश पर आपको कितनी वास्तविक कमाई होगी।180 बनाम 210 दिन: ₹1 लाख पर ब्याज की सटीक गणनाभारतीय बैंकिंग नियमों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 182 दिन (लगभग छह माह) से कम की अवधि के लिए साधारण ब्याज (Simple Interest) और छह महीने या उससे अधिक की अवधि के लिए तिमाही चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) का सिद्धांत लागू होता है। चूंकि 180 से 210 दिन की अवधि लगभग 6 से 7 महीने (0.493 वर्ष से 0.575 वर्ष) के बीच बैठती है, इसलिए दिन-प्रतिदिन के आधार पर ब्याज की गणना इस प्रकार है:कुल जमा मूलधन: ₹1,00,000 (एक लाख रुपये)लागू वार्षिक ब्याज दर: 6.15% प्रति वर्ष (वरिष्ठ नागरिक दर)दैनिक ब्याज दर: लगभग ₹16.85 प्रति दिन ($frac{₹1,00,000 imes 6.15\%}{365}$)विकल्प 1: ठीक 180 दिन (लगभग 6 माह) पूरे होने पर:अर्जित ब्याज: लगभग ₹3,033कुल मैच्योरिटी राशि: ₹1,03,033विकल्प 2: अधिकतम 210 दिन (लगभग 7 माह) पूरे होने पर:अर्जित ब्याज: लगभग ₹3,538कुल मैच्योरिटी राशि: ₹1,03,538इस प्रकार, मात्र 6 से 7 महीने की इस सुरक्षित अवधि में आपकी ₹1 लाख की पूंजी पर बिना किसी शेयर बाजार के जोखिम के ₹3,033 से लेकर ₹3,538 तक का शुद्ध निश्चित ब्याज आपके खाते में जुड़ जाता है।SBI 180 से 210 दिन एफडी: ब्याज और मैच्योरिटी का तुलनात्मक विवरणनिवेशक श्रेणीलागू वार्षिक ब्याज दर (% p.a.)180 दिन बाद कुल ब्याज210 दिन बाद कुल ब्याज210 दिन पर कुल मैच्योरिटी राशिवरिष्ठ नागरिक (Senior Citizens)6.15%₹3,033₹3,538₹1,03,538सामान्य नागरिक (General Public)5.65%₹2,786₹3,251₹1,03,251शॉर्ट-टर्म एफडी के प्रमुख फायदे: तरलता और सुरक्षा का बेहतरीन संतुलनकम अवधि वाली इस एफडी में निवेश करने के कई व्यावहारिक लाभ हैं:सॉवरेन स्तर की सुरक्षा: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एक 'डोमेस्टिक सिस्टेमिकली इम्पोर्टेंट बैंक' (D-SIB) है, जिसमें आपकी जमा पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। साथ ही डीआईसीजीसी (DICGC) के तहत ₹5 लाख तक की पूंजी पर पूर्ण सरकारी बीमा सुरक्षा प्राप्त होती है।समय से पहले निकासी (Premature Withdrawal): यदि 180 दिन से पहले आपको अचानक पैसों की आवश्यकता पड़ जाती है, तो आप इस एफडी को समय से पहले तुड़वा सकते हैं। एसबीआई ₹5 लाख तक की रिटेल एफडी पर मात्र 0.50% की मामूली पेनाल्टी काटकर शेष दिनों का ब्याज देकर पैसा वापस लौटा देता है।लोन और ओवरड्राफ्ट सुविधा: आपातकालीन स्थिति में एफडी तोड़ने के बजाय आप अपनी इस एफडी के बदले 90% तक का इंस्टेंट गोल्ड लोन या ओवरड्राफ्ट (OD) भी ले सकते हैं, जिस पर एफडी दर से मात्र 1% अधिक ब्याज लगता है।टैक्स (TDS) और रिटर्न से जुड़े जरूरी नियमबैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते समय आयकर नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है:टीडीएस (TDS) कटौती की सीमा: आयकर नियमों के तहत एक वित्तीय वर्ष में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सभी बैंक एफडी से होने वाली कुल ब्याज आय यदि ₹50,000 (सामान्य नागरिकों के लिए ₹40,000) से कम है, तो बैंक कोई टीडीएस नहीं काटता। चूंकि ₹1 लाख पर मिलने वाला यह ब्याज (लगभग ₹3,538) निर्धारित सीमा से काफी नीचे है, इसलिए इस पर बैंक द्वारा सीधे कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा।टैक्स स्लैब के अनुसार देनदारी: हालांकि बैंक टीडीएस नहीं काटेगा, लेकिन अर्जित ब्याज आपकी वार्षिक आय में 'अन्य स्रोतों से आय' के रूप में जुड़ेगा। यदि आपकी कुल वार्षिक आय कर-योग्य सीमा से कम है, तो आप बैंक में फॉर्म 15H (वरिष्ठ नागरिकों के लिए) या फॉर्म 15G जमा करके टीडीएस कटौती से पूरी तरह मुक्त रह सकते हैं।कैसे खोलें 180 से 210 दिन की यह एफडी?एसबीआई में यह शॉर्ट-टर्म फिक्स्ड डिपॉजिट खोलना बेहद आसान है। बैंक के मौजूदा ग्राहक अपने स्मार्टफोन में 'YONO SBI' ऐप या इंटरनेट बैंकिंग (onlinesbi.sbi) में लॉगिन करके 'Deposits' सेक्शन में जाकर 'Open Fixed Deposit' चुन सकते हैं। वहां अवधि में 'Days' का चयन करके 180 से 210 दिन दर्ज करें। इसके अलावा, आप अपनी नजदीकी एसबीआई शाखा में जाकर मात्र एक पेज का फॉर्म भरकर भी चेक या बचत खाते के जरिए यह एफडी तुरंत शुरू कर सकते हैं।
दिल्ली में घर बैठे होगी शराब की ऑनलाइन बुकिंग, जानें क्या हैं नियम
दिल्ली में शराब खरीदने वालों के लिए DSIIDC ने नया मोबाइल ऐप लॉन्च किया है. इससे ग्राहक ऑनलाइन एडवांस बुकिंग और पेमेंट कर सकते हैं. हालांकि, शराब की होम डिलीवरी नहीं होगी और खरीदारों को 48 घंटे के भीतर स्टोर से अपनी बोतलें लेनी होंगी.
केंद्रीय कर्मचारियों के बीच 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के तहत वेतन पुनरीक्षण को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। 7वें वेतन आयोग की पे-मैट्रिक्स व्यवस्था में ग्रेड पे 2400 को 'लेवल-4' (Level-4) में रखा गया है। लेवल-4 की शुरुआत ₹25,500 के शुरुआती मूल वेतन (इंडेक्स 1) से होती है, जबकि सेवा के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए इसका 40वां चरण यानी 'स्टेज 40' (इंडेक्स 40) अधिकतम सीलिंग का प्रतिनिधित्व करता है। कर्मचारी यूनियनों द्वारा प्रस्तावित 2.86 के फिटमेंट फैक्टर, 50% से अधिक महंगाई भत्ते के समायोजन, एक्स-क्लास शहरों के 30% हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA) के नए स्लैब को ध्यान में रखते हुए जब इस स्टेज का आकलन किया जाता है, तो ग्रॉस सैलरी में लगभग 30.15% तक की प्रभावी और सीधी बढ़ोतरी दर्ज होती है। आइए समझते हैं कि लेवल-4 के स्टेज 40 पर वर्तमान 7th CPC की तुलना में 8वें वेतन आयोग में वेतन का ढांचा किस प्रकार बदलेगा।7th CPC बनाम 8th CPC: स्टेज 40 (बेसिक ₹81,100) का विस्तृत सैलरी ब्रेकअपवेतन घटक (Salary Component)7वें वेतन आयोग में वर्तमान स्थिति (DA 50%+)8वें वेतन आयोग में अनुमानित स्थिति (फिटमेंट 2.86)पे लेवल / ग्रेड पेलेवल-4 (ग्रेड पे ₹2400)लेवल-4 (8th CPC रिवाइज्ड पे-बैंड)स्टेज (इंडेक्स)स्टेज 40स्टेज 40 (रिवाइज्ड बेसिक)मूल वेतन (Basic Pay)₹81,100₹2,31,946 (₹81,100 $ imes$ 2.86)महंगाई भत्ता (DA)₹40,550 (50% की दर से)₹0 (नए आयोग के लागू होते ही DA शून्य से शुरू)मकान किराया भत्ता (HRA - X क्लास)₹24,330 (30% की दर से)₹55,667 (प्रस्तावित 24% रिसेट दर पर)परिवहन भत्ता (TPTA + DA)₹5,400 (A1/X शहरों के लिए ₹3,600 + DA)₹10,296 (रिवाइज्ड ट्रांसपोर्ट अलाउंस स्लैब)कुल सकल वेतन (Gross Salary)₹1,51,380₹1,97,909मासिक ग्रॉस में शुद्ध वृद्धि—+₹46,529 प्रति माहप्रतिशत वृद्धि (Hike Percentage)—+30.15%फिटमेंट फैक्टर 2.86 का असर: बेसिक सैलरी ₹81,100 से सीधे ₹2.31 लाख के पार7वें वेतन आयोग की लेवल-4 पे-मैट्रिक्स के अनुसार स्टेज 40 पर अधिकतम बेसिक सैलरी ₹81,100 है। कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांग 2.86 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने की है। जब इस फिटमेंट गुणक को लागू किया जाता है:नया बेसिक पे: ₹81,100 $ imes$ 2.86 = ₹2,31,946 (राउंड ऑफ में लगभग ₹2,32,000)।वर्तमान में 7th CPC के तहत ₹81,100 की बेसिक पर 50% से अधिक डीए (लगभग ₹40,550) मिल रहा है। नए वेतन आयोग के लागू होने पर प्रचलित महंगाई भत्ता समाप्त होकर बेसिक सैलरी में समाहित (मर्ज) हो जाता है और महंगाई भत्ते की गणना नए सिरे से 0% से शुरू होती है। इस प्रकार मूल वेतन का यह बड़ा आधार भविष्य के इंक्रीमेंट और रिटायरमेंट ग्रेच्युटी के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करता है।एचआरए (HRA) और टीपीटीए (TPTA) का पुनर्गठन: एक्स, वाई और जेड शहरों में प्रभाववेतन आयोगों की स्थापित परंपरा के अनुसार, जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है और बेसिक पे में बड़ा उछाल आता है, तब भत्तों की प्रतिशत दरों को युक्तिकरण (Rationalization) के तहत पुनः व्यवस्थित किया जाता है:हाउस रेंट अलाउंस (HRA): 7th CPC में डीए 50% पार होने पर एक्स-क्लास शहरों के लिए एचआरए 30%, वाई-क्लास के लिए 20% और जेड-क्लास के लिए 10% हो चुका है। 8वें वेतन आयोग की शुरुआत में इसे प्रारंभिक रूप से 24%, 16% और 8% पर रिसेट किए जाने का अनुमान है। बेसिक पे बढ़कर ₹2.31 लाख होने के कारण 24% की घटी दर पर भी कर्मचारी को ₹55,667 का बंपर एचआरए मिलेगा, जो वर्तमान के ₹24,330 के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA): लेवल-3 से लेवल-8 के कर्मचारियों के लिए बड़े शहरों (Higher TPTA Cities) में वर्तमान में ₹3,600 + डीए देय है। नए वेतन ढांचे में फिटमेंट के आधार पर ट्रांसपोर्ट अलाउंस का मूल स्लैब बढ़कर ₹10,296 के आसपास निर्धारित होने का अनुमान है, जिससे रोजमर्रा के आवागमन के खर्च में बड़ी राहत मिलेगी।एनपीएस (NPS), सीजीएचएस (CGHS) और नेट इन-हैंड सैलरी पर असरग्रॉस सैलरी में 30.15% (₹46,529 प्रति माह) के इजाफे के साथ ही वैधानिक कटौतियों (Statutory Deductions) में भी आनुपातिक बदलाव आएगा:एनपीएस/यूपीएस कंट्रीब्यूशन: राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत कर्मचारी का 10% अंशदान मूल वेतन और महंगाई भत्ते पर आधारित होता है। बेसिक पे बढ़कर ₹2.31 लाख होने से मासिक पेंशन अंशदान बढ़कर लगभग ₹23,195 हो जाएगा, जिससे कर्मचारी का रिटायरमेंट फंड तेजी से बढ़ेगा।सीजीएचएस और इनकम टैक्स: लेवल-4 के तहत सीजीएचएस का मासिक प्रीमियम वर्तमान ₹250-₹450 के दायरे से बढ़कर नए स्लैब में जाएगा। हालांकि, टैक्स कटने और एनपीएस कटौती के बाद भी कर्मचारी की शुद्ध इन-हैंड सैलरी (Net Take-Home Salary) में ₹32,000 से ₹35,000 प्रति माह की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज होगी।1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने पर एरियर का बड़ा लाभचूँकि 7वें वेतन आयोग का 10 वर्षीय कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है, इसलिए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएंगी। यदि सरकार आयोग की रिपोर्ट प्राप्त करने और पे-मैट्रिक्स को अंतिम रूप देने में 2027 या 2028 तक का समय लेती है, तो लेवल-4 स्टेज 40 पर कार्यरत कर्मचारियों को लगभग ₹46,500 प्रति माह के अंतर के हिसाब से 24 से 30 महीने का एकमुश्त बंपर एरियर प्राप्त होगा। यह वित्तीय बदलाव न केवल वरिष्ठ कर्मचारियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाएगा, बल्कि उनकी सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले लीव इनकैशमेंट, कम्यूटेशन और पेंशन की राशि को भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा देगा।
तिरहुत शिक्षक सीट पर BJP प्रत्याशी नरेंद्र प्रसाद सिंह 594 मतों से विजयी
बिहार विधान परिषद के तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह ने मंगलवार को जीत दर्ज की। अधिकारियों ने बताया कि सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी भूषण कुमार झा को 594 मतों के अंतर से हराया। अधिकारियों के अनुसार, सिंह को 2,945 वोट मिले, जबकि झा को 2,351 मतों से संतोष करना पड़ा। इस जीत के साथ विधान परिषद में सिंह की वापसी होगी। वह पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) समर्थित उम्मीदवार और तीन बार के विधान परिषद सदस्य संजय कुमार सिंह इस चुनाव में प्रमुख दावेदार के रूप में उभरने में नाकाम रहे। नरेंद्र प्रसाद सिंह की जीत की खबर मिलते ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) खेमे में जश्न शुरू हो गया और समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाई दी। मतगणना के दौरान मुकाबला काफी करीबी रहा। भाकपा समर्थित उम्मीदवार डॉ. संजय कुमार सिंह के मजबूत दावेदारी पेश करने में विफल रहने के बाद मुख्य मुकाबला नरेंद्र प्रसाद सिंह और निर्दलीय उम्मीदवार भूषण कुमार झा के बीच सिमट गया। दोनों के बीच मतगणना के दौरान कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन अंततः सिंह ने 594 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। जीत के बाद सिंह ने कहा कि यह जीत राजग और उसके कार्यकर्ताओं की है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय गठबंधन के कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत और समर्थन को दिया। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम को क्षेत्र के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिणाम की औपचारिक घोषणा और निर्वाचन प्रमाणपत्र जारी किए जाने की उम्मीद है। वहीं, भाजपा से निष्कासित और निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगभग चुनाव जीत चुके हैं हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उन्होंने राजग के उम्मीदवार चयन के खिलाफ बगावत की थी, जिसके बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार, तीसरे दौर की मतगणना समाप्त होने के बाद भी राहुल राज अपनी बढ़त बनाए हुए हैं। खबर के लिखे जाने तक दरभंगा स्नातक सीट पर पहले दौर की मतगणना के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद)समर्थित उम्मीदवार अनिल झा आगे चल रहे थे जबकि, दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के सुरेश राय कांग्रेस के मदन मोहन झा से काफी आगे हैं। अधिकारी ने बताया कि पटना की दो सीट के लिए मतगणना बांकीपुर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं के एमआरपी और खुदरा मूल्य में भारी अंतर को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने इसे लोगों के जीवन से जुड़ा मुद्दा बताते हुए दवा निर्माताओं को मदद देने वाले तंत्र पर भी सवाल खड़े किए।
'अर्नब' का कहर: आज रात तट से टकराएगा भीषण चक्रवात, आंध्र-ओडिशा में रेड अलर्ट, यूपी तक असर
चक्रवात से निपटने के लिए दक्षिण तटीय रेलवे और पूर्वी तटीय रेलवे क्षेत्रों में करीब 600 किलोमीटर रेलवे ट्रैक की विशेष निगरानी की जा रही है.
चक्रवात अर्नब: चक्रवात अर्नब, मौसम ब्रेकिंग (भुवनेश्वर/अमरावती): बंगाल की खाड़ी में उठा अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान अर्नब 28 अक्टूबर को तड़के आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है। इसके मद्देनजर तटीय इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
म्यूचुअल फंड उद्योग की शीर्ष संस्था 'एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया' (AMFI) ने खुदरा निवेशकों में वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) की ताकत को एक बेहद आसान और प्रभावी उदाहरण के जरिए समझाया है। अक्सर आम नौकरीपेशा, छोटे कारोबारी या कॉलेज के छात्र यह सोचते हैं कि शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए लाखों रुपये की पूंजी जरूरी होती है। इस मिथक को तोड़ते हुए एएमएफआई ने स्पष्ट किया है कि लंबी अवधि में दौलत बनाने का असली सीक्रेट बड़ी रकम नहीं, बल्कि निवेश का लंबा समय और कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) का अनुशासन है। यदि कोई निवेशक प्रतिदिन मात्र ₹33 यानी हर महीने केवल ₹1,000 की छोटी बचत को 15 साल के लिए किसी उपयुक्त म्यूचुअल फंड में लगाता है, तो रूढ़िवादी और संतुलित रिटर्न के आधार पर भी वह मैच्योरिटी पर ₹3.48 लाख (लगभग साढ़े तीन लाख रुपये) का मजबूत फंड खड़ा कर सकता है।₹1,000 प्रति माह का 15 साल का गणित: आपकी जेब से कितना लगा और कितना मिला मुनाफा?एएमएफआई द्वारा साझा किए गए वित्तीय मॉडल के अनुसार, जब आप 15 साल (180 महीने) तक लगातार हर महीने ₹1,000 की एसआईपी चालू रखते हैं, तो आपकी जेब से कुल निवेश राशि मात्र ₹1,80,000 (एक लाख अस्सी हजार रुपये) जाती है। यदि पोर्टफोलियो पर औसतन 8% प्रति वर्ष का अत्यंत रूढ़िवादी और सुरक्षित रिटर्न (जो कि अमूमन कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड्स या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स में आसानी से देखने को मिलता है) भी मिलता है, तो 15 साल पूरे होने पर आपकी कुल संचित राशि बढ़कर लगभग ₹3,48,000 से ₹3,49,000 हो जाती है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपके द्वारा जमा किए गए ₹1.80 लाख के मूलधन पर लगभग ₹1.68 लाख का शुद्ध मुनाफा (कंपाउंडेड रिटर्न) केवल ब्याज और पूंजीगत लाभ के रूप में जुड़ जाता है। यानी आपका पैसा लगभग दोगुना होकर आपके हाथ में आता है।8% बनाम 12% सीएजीआर: यदि इक्विटी का साथ मिले तो फंड कितना बड़ा होगा?एएमएफआई ने यह भी रेखांकित किया कि 8% का रिटर्न केवल एक बुनियादी और सुरक्षित पैमाना है। यदि कोई युवा या मध्यम अवधि का निवेशक शुद्ध इक्विटी फंड्स (जैसे लार्ज कैप इंडेक्स फंड या फ्लेक्सी कैप फंड) का चयन करता है, जिन्होंने भारतीय बाजारों में ऐतिहासिक रूप से लंबी अवधि में औसतन 12% या उससे अधिक का वार्षिक सीएजीआर (CAGR) रिटर्न डिलीवर किया है, तो यह आंकड़ा और भी अधिक आकर्षक रूप ले लेता है।12% औसत रिटर्न पर: 15 साल में ₹1,80,000 के कुल निवेश पर शुद्ध वेल्थ गेन लगभग ₹3,24,000 बनता है, जिससे आपका कुल कॉर्पस लगभग ₹5,04,500 (पांच लाख रुपये से अधिक) पहुंच जाता है।15% औसत रिटर्न पर: यदि बाजार की चाल बेहतर रहती है और पोर्टफोलियो 15% का रिटर्न देता है, तो यही ₹1,000 की मासिक किस्त 15 साल में लगभग ₹6,76,000 (पौने सात लाख रुपये) का बड़ा फंड बन जाती है। यह अंतर साफ दिखाता है कि समय के साथ कंपाउंडिंग कैसे घातीय (exponential) गति से बढ़ती है।कंपाउंडिंग का आठवां अजूबा: शुरुआती 5 साल बनाम आखिरी 5 साल का फर्ककंपाउंडिंग की ताकत को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह रैखिक (linear) नहीं बल्कि गुणात्मक रूप से काम करती है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने यूं ही कंपाउंडिंग को दुनिया का आठवां अजूबा नहीं कहा था।शुरुआती 5 साल (60 महीने): ₹1,000 महीना जमा करने पर आपका निवेश ₹60,000 होता है और 8% पर उस पर ब्याज मात्र ₹13,400 के करीब जुड़ता है, जिससे कुल फंड करीब ₹73,400 बनता है। इस चरण में लगता है कि पैसा बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है।10 साल पूरे होने पर: आपका कुल निवेश ₹1,20,000 होता है और कुल फंड लगभग ₹1.82 लाख पहुंचता है (लगभग ₹62,000 का ब्याज)।15 साल पूरे होने पर: असली विस्फोट अंतिम 5 वर्षों में होता है, जब ब्याज पर भी ब्याज मिलने लगता है। अंतिम 5 वर्षों में फंड ₹1.82 लाख से छलांग लगाकर सीधे ₹3.48 लाख के स्तर को पार कर जाता है। यही कारण है कि जो निवेशक शुरुआती 3 से 5 साल में अधीर होकर एसआईपी बंद कर देते हैं, वे कंपाउंडिंग के असली फल से वंचित रह जाते हैं।छोटे निवेशकों के लिए एएमएफआई की अहम सलाह: बाजार के उतार-चढ़ाव से न घबराएंएएमएफआई ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे शेयर बाजार के दैनिक उतार-चढ़ाव, मंदी या तेजी की खबरों को देखकर अपनी नियमित एसआईपी कभी न रोकें। जब बाजार गिरता है, तो उसी ₹1,000 में आपको म्यूचुअल फंड की अधिक यूनिट्स (Units) आवंटित होती हैं। वहीं जब बाजार उछाल भरता है, तो आपकी पहले से खरीदी गई यूनिट्स की वैल्यू तेजी से बढ़ जाती है, जिसे 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee Cost Averaging) कहा जाता है। इसलिए निवेश का सबसे सरल नियम यह है कि महीने की शुरुआत में जैसे ही वेतन या आय आए, सबसे पहले एसआईपी की किस्त कटने दें और बाकी बचे पैसे से अपने घरेलू खर्च चलाएं। किसी भी अधिकृत एएमसी (AMC), बैंक ऐप या सेबी-पंजीकृत म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए घर बैठे आधार और पैन की मदद से मात्र 5 मिनट में ₹1,000 की यह एसआईपी शुरू की जा सकती है, जो भविष्य के किसी बड़े वित्तीय लक्ष्य की मजबूत बुनियाद साबित होगी।
पोस्ट ऑफिस 5 साल की TD में ₹15 लाख जमा करने पर कितना ब्याज मिलेगा? समझें पूरा वित्तीय गणित
शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर अपनी एकमुश्त गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने और उस पर गारंटीड रिटर्न पाने के लिए डाकघर की 'टाइम डिपॉजिट' (Post Office Time Deposit - TD) योजना देश के सबसे पसंदीदा विकल्पों में से एक है। बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तर्ज पर काम करने वाली इस सरकारी योजना में केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष सॉवरेन गारंटी मिलती है, जिससे जमाकर्ता की पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। पोस्ट ऑफिस 1 वर्ष, 2 वर्ष, 3 वर्ष और 5 वर्ष की अवधियों के लिए टीडी खाते की पेशकश करता है। इनमें से 5 साल की टाइम डिपॉजिट सबसे अधिक लोकप्रिय है, क्योंकि इस पर न केवल सबसे ज्यादा 7.5% प्रति वर्ष का आकर्षक ब्याज दिया जा रहा है, बल्कि आयकर की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है। यदि आप अपनी ₹15,00,000 (15 लाख रुपये) की पूंजी 5 साल के लिए पोस्ट ऑफिस टीडी में निवेश करते हैं, तो आपको सालाना और 5 साल की पूरी अवधि में कितना शुद्ध ब्याज मिलेगा, इसका पूरा हिसाब समझना बेहद जरूरी है।₹15 लाख की जमा पर ब्याज का पूरा गणित: सालाना भुगतान और कुल रिटर्नडाकघर टाइम डिपॉजिट नियमों के तहत ब्याज की गणना तिमाही चक्रवृद्धि (Quarterly Compounding) के आधार पर की जाती है, लेकिन इसका भुगतान हर साल के अंत में निवेशक के डाकघर बचत खाते में सालाना आधार पर कर दिया जाता है। 7.5% की वार्षिक ब्याज दर (तिमाही चक्रवृद्धि के साथ लगभग 7.71% प्रभावी वार्षिक यील्ड) के अनुसार ₹15 लाख के निवेश का वित्तीय ब्योरा इस प्रकार है:एकमुश्त जमा राशि: ₹15,00,000 (15 लाख रुपये)लागू ब्याज दर: 7.5% प्रति वर्ष (तिमाही आधार पर कंपाउंडेड)हर साल मिलने वाला ब्याज: लगभग ₹1,15,707 प्रति वर्ष5 साल में कुल अर्जित शुद्ध ब्याज: लगभग ₹5,78,535 (करीब ₹5.78 लाख)5 साल बाद कुल वापसी (मूलधन + कुल ब्याज): लगभग ₹20,78,535यदि आप हर साल मिलने वाले इस ₹1.15 लाख के ब्याज को अपने बचत खाते से निकालते हैं, तो यह आपको एक नियमित वार्षिक आय प्रदान करता है। वहीं 5 साल का कार्यकाल समाप्त होने पर आपकी मूल जमा पूंजी ₹15,00,000 पूरी तरह सुरक्षित वापस मिल जाती है।साल-दर-साल ब्याज भुगतान का विवरणवर्षआरंभिक मूलधनवार्षिक ब्याज भुगतान (तिमाही चक्रवृद्धि आधारित)वर्ष के अंत में कुल संचित ब्याजपहला वर्ष₹15,00,000₹1,15,707₹1,15,707दूसरा वर्ष₹15,00,000₹1,15,707₹2,31,414तीसरा वर्ष₹15,00,000₹1,15,707₹3,47,121चौथा वर्ष₹15,00,000₹1,15,707₹4,62,828पांचवां वर्ष₹15,00,000₹1,15,707₹5,78,535धारा 80C के तहत टैक्स छूट का फायदापोस्ट ऑफिस की 1, 2 या 3 साल की टीडी पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती, लेकिन 5-वर्षीय टाइम डिपॉजिट को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80C के तहत विशेष टैक्स छूट का दर्जा प्राप्त है:₹1.5 लाख तक की कटौती: पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) का विकल्प चुनने वाले करदाता इस खाते में जमा की गई राशि पर एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹1,50,000 तक की आयकर कटौती (Deduction) का दावा कर सकते हैं।ब्याज पर टैक्स के नियम: ध्यान रखें कि हर साल मिलने वाला ₹1,15,707 का ब्याज कर-मुक्त नहीं होता है। यह ब्याज आपकी वार्षिक आय में 'अन्य स्रोतों से आय' (Income from Other Sources) के तहत जुड़ता है और आपके संबंधित टैक्स स्लैब के अनुसार इस पर टैक्स देय होता है। यदि सालाना ब्याज टीडीएस सीमा से अधिक होता है, तो डाकघर नियमानुसार टीडीएस काटता है, जिससे बचने के लिए पात्र व्यक्ति फॉर्म 15G या फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं।प्री-मैच्योर विड्रॉल (समय से पहले निकासी) और अकाउंट एक्सटेंशन के नियमकिसी अप्रत्याशित वित्तीय संकट के समय पैसे निकालने के लिए पोस्ट ऑफिस टीडी में लचीले नियम बनाए गए हैं:न्यूनतम लॉक-इन: खाता खुलने की तारीख से 6 महीने पूरे होने से पहले टीडी खाते से कोई निकासी नहीं की जा सकती।6 महीने से 12 महीने के बीच बंदी: यदि आप 6 महीने बाद लेकिन 1 वर्ष से पहले खाता बंद करते हैं, तो आपको केवल डाकघर बचत खाते (Post Office Savings Account) की साधारण ब्याज दर (वर्तमान में 4%) के हिसाब से ब्याज दिया जाएगा।1 वर्ष बाद बंदी: 1 साल पूरा होने के बाद 5 साल की टीडी को समय से पहले बंद करने पर उस अवधि के लिए लागू टीडी ब्याज दर से 2% कम ब्याज काटा जाता है।अकाउंट एक्सटेंशन: 5 साल पूरे होने पर यदि आपको पैसों की तुरंत आवश्यकता नहीं है, तो आप मैच्योरिटी की तारीख से 18 महीने के भीतर आवेदन देकर अपने खाते को अगले 5 वर्षों के लिए उसी समय लागू ब्याज दर पर आगे बढ़ा (Extend) सकते हैं।डाकघर में टीडी खाता कैसे खोलें?पोस्ट ऑफिस में 5 साल का टाइम डिपॉजिट खाता खोलना बेहद सरल और पारदर्शी है। इसके लिए आप देश के किसी भी नजदीकी डाकघर में जाकर आवेदन फॉर्म के साथ अपना पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पैन कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो जमा कर सकते हैं। ₹15 लाख के निवेश के लिए आप चेक या डाकघर बचत खाते से सीधे ट्रांसफर का विकल्प चुन सकते हैं। खाता एकल (Single) या तीन वयस्कों तक संयुक्त (Joint) रूप से खोला जा सकता है। इसके अलावा, जिन निवेशकों के पास पोस्ट ऑफिस का एक्टिव इंटरनेट बैंकिंग या आईपीपीबी (IPPB) मोबाइल बैंकिंग खाता है, वे बिना किसी कागजी दौड़-भाग के घर बैठे भी यह खाता ऑनलाइन बुक कर सकते हैं।
देश के एक करोड़ से अधिक सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच इस समय 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को लेकर चर्चाएं चरम पर हैं। 7वें वेतन आयोग की 10 साल की समयावधि तकनीकी रूप से 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है और नियमों के अनुसार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जानी हैं। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा अब तक आधिकारिक तौर पर आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के नाम व टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) की औपचारिक घोषणा में हो रहे विलंब को लेकर कर्मचारी यूनियनों में चिंता जरूर थी, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों और ट्रेड यूनियनों का मानना है कि इस देरी में कर्मचारियों का नुकसान नहीं, बल्कि एकमुश्त एरियर (Arrears) का बड़ा वित्तीय फायदा छिपा हुआ है। यदि आयोग अपनी सिफारिशें सौंपने और उन्हें लागू करने में 2027 या 2028 तक का समय लेता है, तो कर्मचारियों की झोली में 18 से लेकर 30 महीने तक का मोटा बकाया आना तय माना जा रहा है।वेतन आयोगों का ऐतिहासिक पैटर्न: देरी हमेशा लाती है बंपर एरियरकेंद्रीय कर्मचारियों के वेतन संशोधन के इतिहास पर नजर डालें तो किसी भी वेतन आयोग की सिफारिशें उसी दिन से लागू नहीं हो पातीं जिस दिन उनका कार्यकाल शुरू होता है।5वें, 6वें और 7वें वेतन आयोग का उदाहरण: 7वें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में हुआ था, लेकिन इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से प्रभावी मानी गईं और कर्मचारियों को संशोधित वेतन का भुगतान अगस्त-सितंबर 2016 में किया गया था। इस दौरान कर्मचारियों को लगभग 8 महीने का एरियर मिला था।6वें वेतन आयोग का बड़ा एरियर: 6वें वेतन आयोग के समय यह देरी और अधिक लंबी खिंची थी, जिसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों को दो किस्तों में लगभग 32 महीने तक का भारी-भरकम एरियर दिया गया था।8वें वेतन आयोग की स्थिति: यदि केंद्र सरकार आगामी समय में आयोग की औपचारिक अधिसूचना जारी करती है, तो आयोग को देश भर के विभिन्न विभागों, सैन्य बलों और कर्मचारी संगठनों से चर्चा कर रिपोर्ट तैयार करने में कम से कम 12 से 18 महीने का वक्त लगेगा। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी और पे-मैट्रिक्स निर्धारण में और कुछ महीने लग सकते हैं। चूूँकि प्रभावी तारीख 1 जनवरी 2026 ही रहेगी, इसलिए लागू होने के दिन तक का पूरा अंतर (लगभग 24 से 30 महीने) कर्मचारियों के खातों में एकमुश्त एरियर के रूप में क्रेडिट किया जाएगा।फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम बेसिक सैलरी में कितना उछाल संभव?8वें वेतन आयोग के तहत सबसे बड़ा बदलाव 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) के रूप में देखा जाएगा। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का कॉमन फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिसके चलते केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 प्रति माह हुआ था।कर्मचारी यूनियनों की मांग: नेशनल काउंसिल (JCM) और विभिन्न रेलवे व रक्षा कर्मचारी महासंघों की मांग है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 2.86 से 3.68 के बीच रखा जाना चाहिए।न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay): यदि सरकार 2.86 के फिटमेंट फैक्टर को स्वीकार करती है, तो लेवल-1 (ग्रुप डी/एमटीएस) के कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से सीधे उछलकर लगभग ₹34,500 से ₹36,000 प्रति माह हो सकती है।अधिकतम वेतन: इसी अनुपात में उच्च स्तरों (लेवल-18 कैबिनेट सचिव स्तर) का अधिकतम वेतन ₹2.5 लाख से बढ़कर ₹4 लाख से ₹4.5 लाख प्रति माह तक पहुंच सकता है।30 महीने के एरियर का संभावित वित्तीय गणित: खाते में कितना आएगा पैसा?वेतन आयोग लागू होने में जितनी देरी होगी, एरियर का कॉर्पस उतना ही बड़ा होगा। एरियर की गणना मूल वेतन में होने वाली बढ़ोतरी, उस पर मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) के समायोजन और नए पे-मैट्रिक्स के अंतर के आधार पर की जाती है।लेवल-1 कर्मचारियों के लिए: मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी में प्रति माह ₹12,000 से ₹15,000 की शुद्ध वृद्धि (DA एडजस्टमेंट के बाद) दर्ज होती है। 30 महीने की देरी की स्थिति में केवल मूल वेतन के अंतर का एरियर ही लगभग ₹3.5 लाख से ₹4.5 लाख बन सकता है।लेवल-7 से 10 (अधिकारी वर्ग): अनुभाग अधिकारियों, रक्षा अधिकारियों और राजपत्रित (Gazetted) अधिकारियों के मामले में यह अंतर ₹25,000 से ₹40,000 प्रति माह तक बैठता है। 30 महीनों के अंतराल पर उनका कुल एरियर ₹7.5 लाख से ₹12 लाख से अधिक हो सकता है।पेंशनर्स को दोहरा लाभ: 65 लाख से अधिक केंद्रीय पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन में भी समान फिटमेंट फैक्टर से बढ़ोतरी होगी, जिससे बुजुर्गों को भी एकमुश्त एरियर की बड़ी राशि प्राप्त होगी, जो उनके रिटायरमेंट फंड और स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूती देगी।सरकार के खजाने पर असर और वित्तीय संतुलन की रणनीतिबेशक कर्मचारियों के लिए एरियर एक बड़ी बचत या पूंजीगत खर्च (जैसे घर खरीदना, लोन चुकाना या बच्चों की शिक्षा) का जरिया बनता है, लेकिन सरकार के राजकोषीय गणित के लिए यह एक बड़ी चुनौती होती है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों और आर्थिक रिपोर्टों में यह संकेत दिया गया है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने से केंद्र के बजट पर सालाना सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 0.6% से 0.8% तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यही कारण है कि वित्त मंत्रालय आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों को बेहद सुनियोजित तरीके से चरणबद्ध कर रहा है, ताकि राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित रखते हुए अर्थव्यवस्था में उपभोग (Consumption Demand) को बढ़ावा दिया जा सके।डीए (DA) का 50% पार होना और भविष्य के संकेतनियमों के मुताबिक जब भी महंगाई भत्ता (DA) 50% के आंकड़े को छूता है या पार करता है, तो हाउस रेंट अलाउंस (HRA), चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस (CEA), हॉस्टल सब्सिडी और ग्रेच्युटी की सीमाओं में स्वतः संशोधन हो जाता है। वर्तमान में डीए 50% के अहम स्तर से ऊपर बना हुआ है, जिससे भत्तों में इजाफा पहले ही प्रभावी हो चुका है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अब समय आ गया है कि इस बढ़े हुए डीए को मूल वेतन में मर्ज करके नए वेतन आयोग की औपचारिक रूपरेखा तय की जाए। आने वाले संसद सत्र और बजट प्रावधानों में 8वें वेतन आयोग के गठन के औपचारिक ऐलान की पूरी संभावना जताई जा रही है, जो कर्मचारियों के लंबे इंतजार को एक शानदार वित्तीय सौगात में बदल सकता है।
पूर्णिया न्यूज़: सीमांचल में तीन दिनों तक चक्रवात का असर, गुरुवार से झमाझम बारिश की संभावना
पूर्णिया न्यूज़: पूर्णिया में चक्रवात का असर बुधवार से शुरू हो जाएगा, जिससे गुरुवार से झमाझम बारिश की पूरी संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 29 से 31 अक्टूबर तक सीमांचल के कई इलाकों में बारिश का यह दौर लगातार तीन दिनों तक सक्रिय रहेगा।
कल का मौसम : हरियाणा समेत 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
कल का मौसम: कल का मौसम, मौसम ब्रेकिंग (हरियाणा): देशभर में मौसम का मिजाज 28 अक्टूबर बुधवार को पूरी तरह से बदल जाएगा। विशेषज्ञों ने बिहार, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई है।
Houthis attack on Saudi Arabia's defence ministry:
खबर है कि यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित रक्षा मंत्रालय पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमल
Chhath Puja: Delhi में 1,400 से ज्यादा घाटों पर होगी व्यवस्था, विदेशी राजनयिक भी होंगे आमंत्रित
दिल्ली सरकार ने छठ पूजा के लिए शहर भर में 1,400 से अधिक घाटों, प्रमुख स्थलों पर सीसीटीवी निगरानी, भीड़भाड़ वाले घाटों के पास दमकल की गाड़ियों और महिलाओं के लिए ‘चेंजिंग रूम’ , शौचालय, व पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की योजना बनाई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। छठ पूजा का त्योहार 13 से 16 नवंबर तक चलेगा, जिसमें 16 नवंबर को दिल्ली में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक बयान के अनुसार, अन्य व्यवस्थाओं में बड़े और मध्यम आकार के घाटों पर ढके हुए तंबू, स्वागत द्वार और प्रमुख मॉडल घाटों पर एलईडी स्क्रीन शामिल हैं। अधिकारियों को उचित भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बैठक में निर्देश दिया कि छह नवंबर तक घाटों पर बुनियादी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, तथा पर्व से कम से कम दो दिन पहले सभी प्रमुख व्यवस्थाएं कर ली जाएं। पानी भरने व तंबू लगाने सहित शेष कार्य इसके बाद पूरा किया जाएगा। दिल्ली सरकार भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के समन्वय सेबयान के मुताबिक, इस वर्ष छठ पूजा पर विदेशी राजदूतों और उच्चायुक्तों को भी आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के समन्वय से सूर घाट या किसी अन्य उपयुक्त और बेहतर तैयार घाट पर आयोजन की संभावना तलाशने के निर्देश दिए गए। बयान में कहा गया है कि अधिकारियों को इस वर्ष 1,400 से अधिक घाट विकसित करने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष 1,326 थे। व्यवस्थाओं में पर्याप्त शौचालय और महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, पर्याप्त कूड़ेदान और 15 तथा 16 नवंबर को भीड़ के दौरान चौबीसों घंटे स्वच्छता व्यवस्था शामिल है। इसके मुताबिक, घाटों की ओर जाने वाली सड़कों की मरम्मत की जाएगी, मलबे को हटाया जाएगा और गड्ढों को भरा जाएगा तथा नियमित पानी के छिड़काव के माध्यम से उन्हें धूल मुक्त रखा जाएगा। अधिकारियों को मार्गों पर उचित रोशनी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, और यातायात पुलिस पार्किंग, मार्ग परिवर्तन और सड़कों को बंद करने के संबंध में आयोजकों के साथ समन्वय करेगी। बयान में कहा गया है कि बड़े, भीड़भाड़ वाले घाटों के पास दमकल की गाड़ियां तैनात की जाएंगी, जबकि दिल्ली पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य एजेंसियां सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया का समन्वय करेंगी। इसमें कहा गया है कि मॉडल घाटों पर एलईडी स्क्रीन छठ से संबंधित सामग्री और दिल्ली सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदर्शित करेंगी। बैठक में बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए त्योहार के दौरान रेलवे स्टेशनों पर बढ़ती हुई भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय के साथ समन्वय पर कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बसों से यात्रा करने वाले लोगों की सुविधा को भी समान रूप से ध्यान में रखा जाए। आईएसबीटी पर आवश्यक सूचना, बैनर और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर नागरिक रक्षा के कर्मियों की मदद ली जाए।
जमशेदपुर में चक्रवात अर्नब के खतरे के कारण स्कूल दो दिन बंद
जमशेदपुर स्कूल बंद: चक्रवाती तूफान अर्नब के खतरे को देखते हुए जमशेदपुर के पूर्वी सिंहभूम जिले में 12वीं तक के सभी स्कूलों को 28 और 29 अक्टूबर 2026 को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। मौसम विभाग ने जिले को ऑरेंज जोन में रखा है।
शादी से 1-2 महीने पहले लगाएं ये उबटन, शादी के दिन चांद-सा दमकेगा चेहरा
Homemade Bridal Ubtan: शादी से पहले चेहरे पर कुदरती निखार लाने के लिए आप घर पर बेसन, हल्दी, चंदन पाउडर, दूध और शहद की मदद से उबटन तैयार कर सकती हैं. आज हम आपको घर पर देसी उबटन बनाना बताएंगे.
2047 तक उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य, धामी सरकार ने विकास और जनकल्याण पर जताई प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को विकसित और आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए सरकार विकास कार्यों को बढ़ावा देने और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दे रही है।
देश भर में पेट्रोल पंपों पर E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) की उपलब्धता बढ़ने के बीच वाहन चालकों और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के मन में यह सवाल उठ रहा था कि क्या सरकार भविष्य में इस मिश्रण को और आगे बढ़ाएगी। इस पर विराम लगाते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को 20% से अधिक बढ़ाने की कोई योजना या मंशा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जैव ईंधन नीति (Biofuel Policy) के तहत 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था, देश उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुका है। 20% का यह स्तर पर्यावरण संरक्षण, विदेशी मुद्रा की बचत और देश के मौजूदा वाहन बेड़े की इंजीनियरिंग अनुकूलता (Compatibility) के लिहाज से पूरी तरह संतुलित है। इसलिए इस सीमा को पार करने का कोई तात्कालिक प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।इंजन खराब होने और माइलेज घटने के दावों पर पेट्रोलियम मंत्री का जवाबहाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर यह दावा किया जा रहा था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन में खराबी आ रही है, रबर के पुर्जे गल रहे हैं और माइलेज में भारी गिरावट दर्ज हो रही है। इन दावों को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश भर के पेट्रोल पंपों पर रोजाना करीब 6 करोड़ गाड़ियां ईंधन भरवाने आती हैं। अगर E20 ईंधन से बड़े पैमाने पर इंजन खराब हो रहे होते, तो यह समस्या सड़कों पर व्यापक स्तर पर दिखाई देती, न कि केवल सोशल मीडिया पर चुनिंदा भ्रामक पोस्ट्स तक सीमित रहती। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा वर्ष 2023 के बाद निर्मित सभी नए वाहन पूरी तरह E20-अनुकूल (E20 Compliant) प्रमाणित हैं। जहां तक 2003 से पहले बने बेहद पुराने वाहनों का सवाल है, केवल उनमें ही कुछ रबर पार्ट्स के अनुकूलन की समस्या आ सकती है, लेकिन आधुनिक BS6 वाहनों के लिए यह ईंधन पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित है।₹1.6 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों को सीधा फायदापेट्रोलियम मंत्री ने एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के आर्थिक और राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इस नीति से भारत को बहुआयामी लाभ हुआ है।कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती: पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाने के कारण भारत ने अब तक लगभग ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की कीमती विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की बचत की है। यह वह रकम है जो कच्चे तेल के आयात बिल के रूप में विदेशों को भेजी जाती थी।किसानों की जेब में पहुंचा पैसा: एथेनॉल का उत्पादन गन्ने के शीरे (Molasses), क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, मक्का और टूटे चावल से किया जाता है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा एथेनॉल की खरीद से देश के गन्ना किसानों और अनाज उत्पादकों को सीधे तौर पर ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का भुगतान हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व संबल मिला है।कार्बन उत्सर्जन में कमी: पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण जलने पर कम कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन उत्सर्जित करता है, जिससे बड़े शहरों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है।E100 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए अलग से खुला रास्तासरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 20% की सीमा सामान्य पेट्रोल के लिए तय की गई है, लेकिन जो लोग शत-प्रतिशत हरित ईंधन पर चलना चाहते हैं, उनके लिए सरकार ने 'फ्लेक्स-फ्यूल' (Flex-Fuel) और E100 (100% एथेनॉल) के नियम पहले ही अधिसूचित कर दिए हैं। टोयोटा, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां भारतीय बाजार के लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाले मॉडल्स पर तेजी से काम कर रही हैं। ये वाहन खास इंजन तकनीक से लैस होते हैं, जो सामान्य पेट्रोल से लेकर 100% शुद्ध एथेनॉल तक किसी भी अनुपात के ईंधन पर बिना किसी इंजन खराबी के आसानी से चल सकते हैं।उपभोक्ताओं के लिए क्या है इस बयान का सीधा संदेश?केंद्रीय मंत्री के इस बयान से देश के करोड़ों दोपहिया और चार पहिया वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिली है। वाहन चालकों को अब यह डर पालने की जरूरत नहीं है कि सरकार आने वाले दिनों में चुपके से पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 25% या 30% कर देगी, जिससे उनकी मौजूदा गाड़ियों को नुकसान पहुंचे। 20% की सीमा तय रहने से वाहन निर्माता कंपनियों को भी अपने इंजन डिजाइन और फ्यूल सिस्टम को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि भारत आयातित जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यह कदम आम उपभोक्ताओं की गाड़ियों की सुरक्षा और तकनीकी मानकों की अनदेखी करके नहीं उठाया जाएगा।
देश में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे करोड़ों मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहे निजी फार्मा कंपनियों के बेलगाम मुनाफे पर देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट में जीवनरक्षक दवाओं के अत्यधिक अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले अनुचित ट्रेड मार्जिन के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य पीठ ने केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसे चौंकाने वाले दस्तावेज और आंकड़े पेश किए गए, जहां कैंसर, हृदय रोग और गंभीर संक्रमणों में इस्तेमाल होने वाली जिन दवाओं की वास्तविक निर्माण और खरीद लागत मात्र ₹120 से ₹150 बैठती है, उन पर दवा निर्माता कंपनियां ₹1,200 से लेकर ₹1,300 तक का एमआरपी छापकर खुले बाजार में बेच रही हैं। इस पर जस्टिस की बेंच ने सरकार की खिंचाई करते हुए सीधा सवाल दागा कि जब गरीब और मध्यमवर्गीय जनता दवाओं के भारी बिल के नीचे दबकर कर्जदार हो रही है, तब सरकार इतने वर्षों से इस ट्रेड मार्जिन पर लगाम लगाने के लिए क्या कर रही थी?शीर्ष अदालत की दो टूक: 'स्वास्थ्य का अधिकार सिर्फ अमीरों की बपौती नहीं हो सकता'सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त 'जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार' (Right to Health) का हवाला देते हुए कहा कि किफायती दरों पर जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध कराना किसी भी कल्याणकारी राज्य की पहली संवैधानिक जिम्मेदारी है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब कोई मरीज अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा होता है, तो उसके तीमारदार के पास केमिस्ट द्वारा मांगे गए मनमाने पैसे चुकाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। बेंच ने सरकार से कड़े शब्दों में पूछा कि क्या अधिकारियों को इस बात का अहसास है कि दवाओं पर 800% से 1000% तक का ट्रेड मार्जिन रखना आम जनता के साथ सीधा खिलवाड़ और शोषण है? अदालत ने मौखिक रूप से दर्ज किया कि नीतिगत बैठकों और समितियों के गठन के नाम पर दशकों से फाइलों को इधर से उधर घुमाया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों को कोई ठोस कानूनी राहत नहीं मिल पाई है।क्या है ट्रेड मार्जिन का खेल और कैसे तय होता है दवाओं का मनमाना एमआरपी?दवा उद्योग में दवाओं की कीमतों का पूरा ढांचा मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बंटा हुआ है:शेड्यूल्ड दवाएं (Scheduled Drugs): राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) के तहत आने वाली लगभग 900 से अधिक दवाएं, जिनकी अधिकतम कीमत (सीलिंग प्राइस) नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) द्वारा 'ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर' (DPCO) के जरिए तय की जाती है। इन दवाओं पर कंपनियां मनमाना रेट नहीं बढ़ा सकतीं।गैर-शेड्यूल्ड दवाएं (Non-Scheduled Drugs): देश के कुल दवा बाजार का लगभग 80% हिस्सा गैर-शेड्यूल्ड और ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं का है। मौजूदा नियमों के अनुसार, इन दवाओं पर सरकार का कोई सख्त प्राइस कैप नहीं है; कंपनियां साल में अधिकतम 10% तक कीमत बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं।मार्जिन का खुला खेल: फार्मा कंपनियां थोक विक्रेताओं (Wholesalers), वितरकों (Stockists) और अस्पतालों को आकर्षित करने के लिए दवा का एक्स-फैक्ट्री प्राइस (लागत) तो ₹100 या ₹120 रखती हैं, लेकिन उस पर प्रिंटेड एमआरपी ₹1,300 डाल देती हैं। इसके बाद अस्पताल या मेडिकल स्टोर संचालक थोक में ₹150 में दवा खरीदकर मरीज को पूरे ₹1,300 में बेचते हैं। बीच का ₹1,150 का शुद्ध मुनाफा अस्पताल, डिस्ट्रीब्यूटर और बिचौलियों की जेब में जाता है।ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन (TMR) की सिफारिशें वर्षों से धूल क्यों फांक रही हैं?याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि सरकार ने खुद वर्ष 2016 और उसके बाद भी फार्मा सेक्टर में 'ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन' (TMR) को लेकर कई उच्चस्तरीय टास्क फोर्स और विशेषज्ञ समितियां गठित की थीं।समितियों की सिफारिश: इन सरकारी समितियों ने स्पष्ट सिफारिश की थी कि गैर-शेड्यूल्ड जीवनरक्षक दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को पहले बिंदु (First Point of Sale) से अंतिम उपभोक्ता तक अधिकतम 30% से 50% के दायरे में सीमित (Cap) कर दिया जाना चाहिए।कैंसर दवाओं में दिखा था असर: जब सरकार ने कुछ वर्ष पूर्व पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 42 गैर-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को 30% पर कैप किया था, तो उन दवाओं की एमआरपी में 85% से 90% तक की भारी गिरावट आई थी और मरीजों के सैकड़ों करोड़ रुपये बचे थे।अन्य दवाओं पर रोक क्यों नहीं: अदालत ने पूछा कि जब कैंसर की दवाओं में यह फॉर्मूला पूरी तरह सफल रहा, तो डायबिटीज, बीपी, किडनी, लिवर और एंटीबायोटिक जैसी आम जीवनरक्षक दवाओं पर इसे पूरे देश में अनिवार्य रूप से लागू करने में सरकार को इतने साल क्यों लग गए?केंद्र सरकार का पक्ष: संतुलन साधने और इनोवेशन को बचाने का तर्ककेंद्र सरकार की ओर से पेश विधि अधिकारियों ने अदालत को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि सरकार दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयासरत है और प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (Jan Aushadhi Kendras) के जरिए देश भर में 50% से 90% सस्ती जेनेरिक दवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। सरकार ने दलील दी कि भारत दुनिया की फार्मेसी है और देश में लाखों लोगों को रोजगार देने वाले फार्मास्युटिकल सेक्टर में मूल्य नियंत्रण लागू करते समय दवा निर्माण की गुणवत्ता, कच्चे माल (API) की अंतरराष्ट्रीय लागत और नए शोध (R&D) में लगने वाले भारी निवेश को भी ध्यान में रखना पड़ता है। यदि बहुत कठोर मूल्य सीमा लगाई गई, तो कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां जरूरी दवाओं का भारत में निर्माण या आपूर्ति बंद कर सकती हैं।सुप्रीम कोर्ट का कड़ा निर्देश: ठोस एक्शन प्लान पेश करे सरकारसरकार के स्पष्टीकरण से पूरी तरह असंतुष्ट नजर आई शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया कि व्यापारिक मुनाफाखोरी कभी भी आम नागरिक के स्वास्थ्य से ऊपर नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय (फार्मास्युटिकल विभाग) और एनपीपीए को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे ट्रेड मार्जिन को युक्तिसंगत बनाने और गैर-शेड्यूल्ड दवाओं के एमआरपी पर कानूनी लगाम कसने के लिए एक समयबद्ध और ठोस कार्ययोजना (Comprehensive Action Plan) अदालत के समक्ष दाखिल करें। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि सरकार नीतिगत स्तर पर शीघ्रता से कदम नहीं उठाती है, तो सुप्रीम कोर्ट को जनहित में सीधे हस्तक्षेप करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद लगाए बैठे करोड़ों आम कर्जदारों और निवेशकों के लिए वैश्विक वित्तीय बाजार से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। वैश्विक ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म 'डॉयचे बैंक' (Deutsche Bank) के ताजा आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति (Inflation) के बढ़ते जोखिमों और लगातार मजबूत बनी हुई आर्थिक वृद्धि के दबाव में आकर अपनी मौद्रिक नीति को और कड़ा कर सकता है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि केंद्रीय बैंक 2027 की पहली छमाही (H1 2027) तक अपनी प्रमुख नीतिगत दर यानी रेपो रेट (Repo Rate) को बढ़ाकर 6.25% तक ले जा सकता है। यदि यह अनुमान हकीकत में बदलता है, तो मौद्रिक नीति के वर्तमान चक्र में ब्याज दरों में कुल 100 बेसिस प्वाइंट्स (1%) तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2026 की समीक्षा बैठक से 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि के साथ हो सकती है।महंगाई का दोहरा झटका: थोक मूल्य और घरेलू खर्चों से बढ़ रहा है दबावडॉयचे बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई को आने वाली तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि के मुकाबले कीमतों की स्थिरता (Price Stability) को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। रिपोर्ट का आकलन है कि वित्त वर्ष 2026 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई औसतन 6% के संवेदनशील स्तर पर रह सकती है। इसके बाद वित्त वर्ष 2027 में इसके 5% और वित्त वर्ष 2028 में 4.7% के आसपास रहने का अनुमान है।ईंधन और इनपुट लागत का असर: त्योहारी सीजन के बाद घरेलू ईंधन की कीमतों में संभावित बदलाव और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में इनपुट लागतों की तेज बढ़ोतरी का असर सीधे खुदरा बाजार में देखने को मिल सकता है।सेकंड-राउंड इफेक्ट (Second-Round Effects): रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता यह जताई गई है कि परिवारों की महंगाई से जुड़ी भविष्य की उम्मीदें (Household Inflation Expectations) 8% से उछलकर 10% के स्तर पर पहुंच गई हैं। जब आम जनता भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका देखती है, तो इससे वेतन वृद्धि की मांग और उत्पादों के अंतिम मूल्य बढ़ते हैं, जिसे अर्थशास्त्र में 'सेकंड-राउंड इफेक्ट' कहा जाता है। इसी दबाव को थामने के लिए केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों का डंडा चलाना पड़ता है।अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी: ₹97 के पार जाने की आशंकामहंगाई के अलावा दूसरा सबसे बड़ा कारक भारतीय मुद्रा (INR) पर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण बन रहा भारी दबाव है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक स्तर पर मजबूत होता अमेरिकी डॉलर भारत के चालू खाता संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं।विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट: सितंबर की शुरुआत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 786 अरब डॉलर के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर था, जिसमें हाल के हफ्तों में विदेशी पूंजी निकासी और मुद्रा को संभालने के उपायों के चलते लगभग 60 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई है।आयातित महंगाई (Imported Inflation) का खतरा: डॉयचे बैंक ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक व्यापक आर्थिक परिस्थितियों में बड़ा सुधार नहीं हुआ, तो साल 2027 के दौरान रुपया फिसलकर ₹97 प्रति डॉलर के पार भी जा सकता है। कमजोर रुपये का सीधा मतलब होता है कि भारत जो कच्चा तेल, खाद्य तेल, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे और मशीनरी आयात करता है, वे और महंगे हो जाएंगे। यह 'इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन' घरेलू महंगाई की आग में घी का काम करेगी, जिससे निपटने के लिए दरों में बढ़ोतरी अपरिहार्य हो सकती है।जीडीपी ग्रोथ मजबूत लेकिन वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में रफ्तार धीमी होने के आसाररिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू यह सामने आया है कि चुनौतियों के बावजूद भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ (Real GDP Growth) वित्त वर्ष 2027 और 2028 दोनों में 7% से ऊपर बनी रह सकती है। हालांकि, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों की गति थोड़ी सुस्त पड़ सकती है। इसके पीछे महंगे कच्चे तेल के कारण कंपनियों के मुनाफे पर दबाव, पिछले साल जीएसटी दरों में कटौती के बाद बनने वाला प्रतिकूल बेस इफेक्ट और ऊर्जा लागतों के चलते घरेलू उपभोग में आने वाली संभावित कमी को मुख्य कारण माना जा रहा है। राजकोषीय मोर्चे पर केंद्र सरकार के 4.3% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद तो है, लेकिन आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के संभावित वित्तीय बोझ और सब्सिडी की बढ़ती मांग के चलते वित्त वर्ष 2028 में राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना एक कड़ी चुनौती साबित होगा।आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर? होम लोन ईएमआई और फिक्स्ड डिपॉजिट का गणितयदि रिजर्व बैंक वास्तव में अपने सख्त मौद्रिक रुख (Monetary Tightening) की ओर कदम बढ़ाता है और रेपो रेट 6.25% तक पहुंचता है, तो इसका सीधा असर आम परिवारों की वित्तीय योजना पर पड़ेगा:होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन होंगे महंगे: फ्लोटिंग रेट पर लिए गए सभी बैंक लोन सीधे रेपो रेट से जुड़े (Repo Linked Lending Rate - RLLR) होते हैं। 100 बेसिस प्वाइंट्स (1%) की वृद्धि का मतलब होगा कि ₹40 लाख के 20 साल वाले होम लोन पर आपकी मासिक ईएमआई सीधे ₹2,500 से ₹3,000 तक बढ़ जाएगी या आपके लोन की अवधि कई साल लंबी खिंच जाएगी।बैंक एफडी (Fixed Deposit) निवेशकों को फायदा: कर्जदारों के विपरीत, वरिष्ठ नागरिकों और फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाने वाले रूढ़िवादी निवेशकों के लिए यह राहत की खबर होगी। रेपो रेट बढ़ने से बैंक अपनी जमा दरों (FD Rates) में भी बढ़ोतरी करेंगे, जिससे बैंकों में 1 से 3 साल की एफडी पर 7.5% से 8% तक का सुरक्षित सालाना रिटर्न मिलने का रास्ता साफ होगा।बजट पर दोहरा असर: एक तरफ आवश्यक वस्तुओं, तेल और किराना बिल में महंगाई का असर रहेगा, वहीं दूसरी तरफ बैंक किश्तों (EMI) में बढ़ोतरी होने से मध्यमवर्गीय परिवारों के हाथ में अन्य विवेकाधीन खर्चों (जैसे यात्रा, गैजेट्स या लग्जरी खरीदारी) के लिए नकदी कम बचेगी।आने वाले समय में आरबीआई और बाजार की नजरें किस पर?हालांकि यह अनुमान एक अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म के आर्थिक मॉडल और वैश्विक ऊर्जा बाजार की संवेदनशीलता पर आधारित है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत देता है कि ब्याज दरों में बड़ी कटौती का दौर फिलहाल टलता नजर आ रहा है। दिसंबर में होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की आगामी बैठक पर पूरे देश की निगाहें रहेंगी। केंद्रीय बैंक घरेलू आर्थिक विकास को पटरी पर बनाए रखते हुए रुपये की स्थिरता और महंगाई को 4% के अपने आधिकारिक लक्ष्य के भीतर साधने के लिए क्या रुख अपनाता है, यही आने वाले वर्षों में देश की बैंकिंग लागत और आम आदमी की वित्तीय सेहत की दिशा तय करेगा।
FDI और FPI निवेश बढ़ाने के लिए RBI का मास्टर प्लान: NRI को टैक्स राहत और LRS नियमों में ढील का सुझाव
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और विकसित देशों में ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव के बीच भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ को बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी की आवश्यकता है। घरेलू बाजार को वैश्विक लिक्विडिटी का सबसे पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और विदेशी पोर्टफोलियो/संस्थागत निवेश (FPI/FII) के नियमों को उदार बनाने का एक विस्तृत ब्लूप्रिंट केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय को सौंपा है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि पारंपरिक और जटिल नियामक बाधाओं को हटाए बिना बड़े विदेशी सॉवरेन वेल्थ फंड्स, पेंशन फंड्स और प्रवासी भारतीयों (NRIs) की विशाल पूंजी को पूरी क्षमता के साथ आकर्षित नहीं किया जा सकता। इसके तहत फेमा (FEMA) नियमों के सरलीकरण से लेकर कराधान ढांचे में व्यावहारिक बदलावों तक के सुझाव शामिल किए गए हैं।अनिवासी भारतीयों (NRIs) को लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में राहत का प्रस्तावआरबीआई के सुझावों में सबसे प्रमुख बिंदु अनिवासी भारतीयों (NRIs) और ओवरसीज सिटिजन्स ऑफ इंडिया (OCIs) के लिए कर नियमों को आसान बनाना है।टीडीएस (TDS) कटौती की जटिलता से मुक्ति: वर्तमान व्यवस्था में जब कोई एनआरआई भारतीय इक्विटी बाजार या रियल एस्टेट से अपनी संपत्ति बेचकर मुनाफा कमाता है, तो उस पर अधिकतम स्लैब के आधार पर उच्चतम दर से भारी टीडीएस काट लिया जाता है। इसके बाद रिफंड पाने के लिए एनआरआई को लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।रेजिडेंट निवेशकों के समान व्यवहार की मांग: आरबीआई ने सुझाव दिया है कि एनआरआई निवेशकों के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर टैक्स व्यवस्था को सुसंगत और पारदर्शी बनाया जाए। स्वचालित टीडीएस नियमों को सरल करके और टैक्स डिडक्शन की दरों को युक्तिसंगत बनाकर अनिवासी भारतीयों को अपनी बचत सीधे भारतीय विनिर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और शेयर बाजार में लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) और आउटवर्ड/इनवर्ड रेमिटेंस की सीमाओं पर पुनर्विचारकेंद्रीय बैंक ने भारतीय नागरिकों और कारोबारियों के वैश्विक विस्तार तथा विदेशी पूंजी के आवागमन को संतुलित करने के लिए 'लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम' (LRS) के ढांचे पर भी महत्वपूर्ण राय दी है।वार्षिक सीमा में लचीलापन: वर्तमान में एलआरएस के तहत एक व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹2.1 करोड़) तक बाहर भेज सकता है। आरबीआई ने सुझाव दिया है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और वैध विदेशी व्यापारिक अधिग्रहणों के लिए इस सीमा को अधिक लचीला बनाया जाए।पूंजी की राउंड-ट्रिपिंग के नियमों का सरलीकरण: इसके साथ ही, विदेशी मुद्रा को बिना किसी अनावश्यक कानूनी उलझन के पुनः भारत में निवेश करने (Inward Remittance) की प्रक्रियाओं को डिजिटल और सिंगल-विंडो आधारित बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि विदेशों में जमा भारतीय पूंजी आसानी से घरेलू स्टार्ट-अप्स और लिस्टेड कंपनियों में आ सके।एफडीआई (FDI) और एफपीआई (FPI) निवेश सीमाओं का युक्तिकरणआरबीआई ने विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए निवेश की राह आसान करने के मकसद से कई संरचनात्मक सुधार प्रस्तावित किए हैं:सूचीबद्ध कंपनियों में एनआरआई/एफआईआई निवेश कैप: आरबीआई ने पहले ही कंपनियों में एनआरआई/ओसीआई के लिए इक्विटी निवेश की सीमा में ढील दी है, और अब सरकार को सिफारिश की गई है कि सरकारी बैंकों (PSU Banks) और रणनीतिक विनिर्माण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमाओं को 20% से बढ़ाकर 49% या उससे अधिक करने पर विचार किया जाए।10% की कठोर सीमा पर री-क्लासिफिकेशन का सरलीकरण: किसी भी विदेशी निवेशक द्वारा किसी भारतीय कंपनी में 10% से कम हिस्सेदारी को एफपीआई (FPI) और 10% या उससे अधिक को एफडीआई (FDI) माना जाता है। इस सीमा के पार होने पर होने वाले अनुपालन (Compliance) को स्वचालित और व्यापार-अनुकूल बनाने की सिफारिश की गई है ताकि तकनीकी कारणों से निवेशकों को जुर्माना न झेलना पड़े।भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर क्या होगा असर?यदि वित्त मंत्रालय आगामी नीतिगत समीक्षाओं में आरबीआई के इन सुझावों को अंतिम रूप देता है, तो भारतीय वित्तीय बाजारों पर इसका गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा:विदेशी मुद्रा भंडार को संबल: विदेशी पूंजी का निरंतर प्रवाह भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिरता प्रदान करेगा और देश के चालू खाता घाटे (CAD) को संतुलित रखने में मदद करेगा।इक्विटी मार्केट में रिकॉर्ड तरलता: एनआरआई और विदेशी रिटेल निवेशकों के लिए प्रक्रिया आसान होने से भारतीय शेयर बाजार केवल घरेलू डीआईआई (DII) पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक पूंजी का बड़ा केंद्र बनेगा।स्टार्टअप्स और बुनियादी ढांचे को सस्ती पूंजी: ऑटोमेटिक रूट का दायरा बढ़ने से भारत के ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में लंबी अवधि की विदेशी पूंजी सीधे पहुंचेगी, जिससे घरेलू उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।
बीपीएसी ASO मेंस परीक्षा का रिजल्ट जारी, संतोष कुमार बने टॉपर, 41 उम्मीदवारों का चयन
बिहार लोक सेवा आयोग ने सहायक प्रशाखा पदाधिकारी मेंस परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। 27 फरवरी 2026 को आयोजित इस परीक्षा में कुल 609 अभ्यर्थी शामिल हुए थे.
साइबर सुरक्षा के लिए 13 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत, डीपीडीपी कानून अगले से होगा लागू
इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय के संयुक्त सचिव के.के. सिंह ने बताया कि देश को साइबर हमलों से निपटने के लिए 13 लाख प्रोफेशनल्स की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 5 लाख कार्यरत हैं।
सऊदी के आसमान में 'जासूस', फिर सटीक हमले, क्या रूस ने हूतियों को मदद की?
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जंग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. एक निजी फर्म ने आसमान में रूसी सैटेलाइट की स्थिति का आकलन कर दावा किया है कि रूसी उपग्रहों ने सऊदी अरब के अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों की सटीक लोकेशन ईरान को दी. इसके बाद ईरान ने इस लोकेशन को अपने सहयोगियों के साथ शेयर किया. इसी को आधार बनाकर सऊदी अरब पर हमला किया गया.
Himachal Pradesh के नाहन में दो गुटों में हिंसक झड़प के बाद 29 अक्टूबर तक धारा 144 लागू
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन कस्बे में दो समुदायों के बीच विवाद के हिंसक रूप लेने के बाद 29 अक्टूबर तक यहां के कुछ हिस्सों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। जिलाधिकारी (सिरमौर) प्रियंका वर्मा ने सोमवार देर रात यह आदेश जारी किया। अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिली थी कि हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब से सिख एवं वाल्मीकि समुदायों के लोग अपने-अपने समुदायों के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिए वाल्मीकि चौक पहुंच सकते हैं। नाहन के वाल्मीकि चौक पर 23 अक्टूबर को सिख समुदाय द्वारा स्वागत द्वार लगाए जाने को लेकर दोनों समुदायों के सदस्यों के बीच विवाद हो गया था। पुलिस के अनुसार, दोनों गुटों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर ईंटों, पत्थरों और कांच की बोतलों से हमला किया। इस घटना में नाहन सदर थाने के थाना प्रभारी (एसएचओ) कुलबीर सिंह और दो अन्य पुलिसकर्मियों सहित कुल 14 लोग घायल हो गए। सरकारी और निजी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। आदेश में कहा गया है कि पुलिस के लगातार हस्तक्षेप से स्थिति पर काबू पा लिया गया, लेकिन इलाके में सांप्रदायिक तनाव की आशंका बनी हुई है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस के मजबूत अवरोधकों के कारण हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों और पड़ोसी राज्यों से नाहन आ रहे समूहों को शहर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इसके परिणामस्वरूप, कहीं भी विरोध प्रदर्शन या नारेबाजी नहीं हुई। निषेधाज्ञा लागू होने के बाद पुलिस ने सिरमौर जिले में करीब 150 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को तैनात किया, ताकि नाहन जाने वाले लोगों की सघन जांच की जा सके। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने काला अंब, नाहन दोसड़का, नाहन वाल्मीकि चौक, पांवटा, बाटा पुल, कोलर गांव, सराहां और बानोग में जांच चौकियां स्थापित कीं। इन स्थानों पर वाहनों की गहन तलाशी ली गई। विवाद को सुलझाने में मदद करने के लिए दोनों समुदायों के प्रतिनिधि पंजाब से नाहन पहुंचे। पंजाब बुड्ढा दल के जत्थेदार अवतार सिंह और अमृतसर स्थित वाल्मीकि तीर्थ के महासचिव बिल्लू वाल्मीकि ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने सिख और वाल्मीकि समुदायों के सदस्यों से आपसी भाईचारा, सौहार्द और शांति बनाए रखने की अपील की। दोनों प्रतिनिधियों ने दोनों समुदायों के लोगों से संयम बरतने और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों को आपसी बातचीत से मामले का समाधान निकालना चाहिए और इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी जा रही है। पुलिस स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है और लगातार निगरानी कर रही है। निषेधाज्ञा के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, घातक हथियार लेकर चलने, रैलियां निकालने, जुलूस आयोजित करने, प्रदर्शन करने और हड़ताल करने पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा, ज्वलनशील वस्तुएं ले जाने तथा सार्वजनिक स्थानों पर पत्थर या अन्य आपत्तिजनक सामग्री फेंकने पर भी प्रतिबंध है। जिला मजिस्ट्रेट ने भड़काऊ, सांप्रदायिक, राज्य-विरोधी या राष्ट्र-विरोधी भाषणों पर भी रोक लगा दी है। इससे पहले, शनिवार को जिला मजिस्ट्रेट ने वाल्मीकि और सिख समुदायों के सदस्यों की संयुक्त बैठक बुलाई थी। बैठक में दोनों पक्षों ने शांति समझौते पर सहमति जताते हुए भविष्य में किसी तरह का विवाद नहीं करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद वाल्मीकि जयंती का जुलूस गोविंदगढ़ इलाके से गुजरा, जहां सिख समुदाय के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक उसका स्वागत किया।

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