Pune में शिवसेना MLC Neelam Gorhe के बंगले में चोरी, आरोपी छात्र गिरफ्तार
शिवसेना की विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) नीलम गोरहे के पुणे स्थित बंगले में कथित रूप से घुसकर चोरी करने के आरोप में 21 वर्षीय एक छात्र को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, घटना 26 सितंबर की तड़के हुई। शिवाजीनगर थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, आरोपी छात्र नासिक जिले के ताहराबाद का रहने वाला है और चोरी की घटना के कुछ घंटे बाद 26 सितंबर को शाम करीब 7.20 बजे उसे गिरफ्तार किया गया। बंगले में तैनात सुरक्षा गार्ड की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की चोरी और घर में अनधिकृत प्रवेश या सेंधमारी से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 26 सितंबर तड़के शिवाजीनगर के पॉश आवासीय इलाके मॉडल कॉलोनी स्थित गोरहे के घर में प्रवेश किया और एक चाय का थर्मस चुरा लिया। पुलिस ने बताया कि कॉलोनी स्थित गोरहे के ‘सिल्वर रॉक्स’ बंगले की छत पर सुरक्षा गार्ड ने एक व्यक्ति को देखा, जिसके बाद घटना का पता चला। घटना के समय घर पर मौजूद नहीं रहीं गोरहे ने बाद में बताया कि पानी की आपूर्ति अचानक बंद होने के बाद सुरक्षा गार्ड पानी की टंकी की जांच करने गया था। उन्होंने बताया कि इसी दौरान गार्ड ने छत पर मौजूद व्यक्ति को देखा। महाराष्ट्र विधान परिषद की पूर्व उपसभापति गोरहे ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में व्यक्ति को रात करीब तीन बजे बंगले की छत पर पहुंचने और सुबह करीब सात बजे तक वहीं रहने की बात सामने आई है।
Haryana के Ambala में निर्माणाधीन इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत, FIR दर्ज
हरियाणा के अंबाला शहर के निकट धूलकोट गांव में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढहने से दो और लोगों की मौत हो गई, जिससे हादसे में जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर छह हो गई। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मलबे से निकाले गए दो और लोगों को रविवार देर रात मृत घोषित कर दिया गया। यह निर्माणाधीन इमारत रविवार शाम उस समय ढह गई, जब पहली मंजिल पर निर्माण कार्य चल रहा था। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजन अंबाला शहर के सिविल अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए और इमारत के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। मरने वाले छह लोगों के शव रविवार रात से ही अस्पताल के शवगृह में रखे हुए हैं। मामले में पुलिस ने कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इन धाराओं में धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), धारा 289 (मशीनरी के इस्तेमाल में लापरवाही) और धारा 290 (इमारतों वगैरह को गिराने, उनकी मरम्मत या निर्माण में लापरवाही) शामिल हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजन को 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। हादसे में घायल एक मजदूर ने रविवार को बताया था कि कुछ मजदूर भूतल पर काम कर रहे थे, जबकि अन्य ऊपर थे। हादसे में 12 लोग घायल हो गए। घायलों में से तीन का अस्पताल में उपचार हो रहा है, जबकि अन्य को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री अनिल विज, जो पास के अंबाला छावनी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं, ने सोमवार को सिविल अस्पताल में घायलों से मुलाकात की और उनके परिजनों को भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय मिलेगा। अपने दौरे के दौरान, विज ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से फ़ोन पर बात की और कहा कि पूरी घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय एसआईटी बनाई जानी चाहिए। विज ने डीजीपी से कहा, इस घटना में छह लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं। एक उच्च स्तरीय एसआईटी बनाई जानी चाहिए। पीड़ितों के परिजनों का कहना है कि पुलिस उनके आरोपों के मुताबिक उनके बयान दर्ज नहीं कर रही है। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए विज ने अनधिकृत कॉलोनियों का मुद्दा उठाया और कहा कि उन्होंने पहले भी अधिकारियों को तीन बार पत्र लिखकर इन पर रोक लगाने को कहा था। विज ने कहा, भू माफिया की लॉबी इतनी मज़बूत है कि मेरे पत्र लिखने पर भी वे कोई कार्रवाई नहीं करते। ...जो भी दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा भी सिविल अस्पताल पहुंचे और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और पीड़ितों को न्याय दिलाना चाहिए। अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी और पार्टी के अंबाला शहर से विधायक निर्मल सिंह अस्पताल पहुंचे और घायलों के परिजनों तथा हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों से मुलाकात की।
बदला मौसम का मिजाज: आज नौ राज्यों में आंधी-बारिश के आसार, मैदानी इलाकों में तापमान गिरा; कई जगह बारिश-भूस्खलन
Kanpur विमान हादसा: AAIB की रिपोर्ट में खुलासा, Garg Aviation ने नहीं किया था निगरानी नियमों का पालन
जांच एजेंसी एएआईबी ने पिछले महीने गर्ग एविएशन के दोहरे-इंजन वाले विमान के हादसे पर जारी शुरुआती रिपोर्ट में कहा है कि संचालक ने उड़ान की निगरानी के नियमों का पालन नहीं किया था। दुर्घटना में प्रशिक्षु पायलट और एक प्रशिक्षक की मौत हो गई थी। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने यह भी सुझाव दिया है कि उड्डयन क्षेत्र के नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को उड़ान प्रशिक्षण संगठनों (एफटीओ) द्वारा उड़ान संबंधी आंकड़ों की निगरानी की प्रक्रियाओं के बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। गर्ग एविएशन के दो इंजन वाले टेकनम पी2006टी प्रशिक्षण विमान के 27 अगस्त को दिन में करीब साढ़े ग्यारह बजे दुर्घटनाग्रस्त होने से एक प्रशिक्षु पायलट और एक प्रशिक्षक की मौत हो गई थी। एएआईबी ने कहा कि हादसे से पहले विमान से कोई आपात संदेश नहीं भेजा गया था और हादसे के कारण विमान नष्ट हो गया। हादसा विमान के कानपुर के हवाई अड्डे से उड़ान भरने के 20 मिनट से भी कम समय बाद हुआ। इस हवाई अड्डे का प्रबंधन और रखरखाव भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) करता है। एएआईबी की सात पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्ग एविएशन ने एफटीओ में प्रशिक्षण की निगरानी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया था। एएआईबी ने कहा, ‘‘उड़ान संबंधी आंकड़ों की निगरानी के बारे में पूछे जाने पर एफटीओ ने बताया कि गार्मिन के आंकड़ों की बेतरतीब तरीके से निगरानी की जा रही थी। हालांकि, ऐसी निगरानी का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया था और निगरानी कैसे की जानी है या इसमें किन सीमा से अधिक आंकड़ों को माना जाएगा, इसे तय करने वाली कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) नहीं थी।’’गार्मिन डेटा कार्ड छोटे विमानों में इस्तेमाल होने वाला एक उपकरण है, जो उड़ान से जुड़े आंकड़ों को रिकॉर्ड करता है।
पाक सीमा पर भविष्य के महासमर की तैयारी?: तरंग शक्ति में एफ-35ए क्यों है खास, भविष्य की जंग के लिए कितना जरूरी?
तीन बड़े मुद्दे: यूजीसी, यूसीसी और यूपीआई पर सियासी घमासान के आसार, यूपी में दिख सकता है सबसे ज्यादा असर
Bhagat Singh का Lucknow से जुड़ाव: Kakori Action पर उनके लेखन को Dastangoi में पेश करेंगे कलाकार
भगत सिंह को देशभर में उस क्रांतिकारी के रूप में याद किया जाता है, जिसे महज 23 वर्ष की उम्र में फांसी दे दी गई थी। हालांकि, उनके जीवन का एक कम चर्चित अध्याय उन्हें लखनऊ से जोड़ता है। यह संबंध ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’, उससे जुड़े क्रांतिकारियों और उन पर लिखे भगत सिंह के लेखों के माध्यम से सामने आता है, जिनमें उन्होंने इन क्रांतिकारियों व उनके संघर्ष के घटनाक्रम को दर्ज किया था। भगत सिंह की जयंती 28 सितंबर को मनाई जाती है। इस अवसर पर लखनऊ की दास्तानगोई कलाकार प्रज्ञा शर्मा और हिमांशु बाजपेयी भगत सिंह के जीवन के इस कम चर्चित पहलू को अपनी आगामी दास्तान के माध्यम से सामने लाने की तैयारी कर रहे हैं। नौ अगस्त, 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान और उनके क्रांतिकारी साथियों ने लखनऊ के निकट काकोरी में एक ट्रेन रोककर सरकारी खजाना लूट लिया था। इस लूट का उद्देश्य अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाना था। इस घटना में शामिल चंद्रशेखर आजाद को छोड़कर लगभग सभी क्रांतिकारी बाद में गिरफ्तार कर लिए गए थे। उस समय भगत सिंह कानपुर में रह रहे थे और हिंदुस्तान रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ चुके थे। काकोरी एक्शन के बाद क्रांतिकारियों पर हुई कार्रवाई उनके राजनीतिक विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उस समय भगत सिंह की उम्र 18 वर्ष भी नहीं थी। मई 1927 में भगत सिंह ने ‘विद्रोही’ उपनाम से पंजाबी में ‘काकोरी के वीरों से परिचय’ शीर्षक से एक लेख लिखा था। यह लेख चमन लाल द्वारा संपादित पुस्तक ‘भगत सिंह के पूर्ण दस्तावेज’ में शामिल है। क्रांतिकारियों के खिलाफ चली न्यायिक कार्यवाही के बारे में भगत सिंह के अपने विवरण से उनके प्रति उनके सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का पता चलता है। उन्होंने फैसला सुनाए जाने के दिन को याद करते हुए लिखा था कि क्रांतिकारी यह गीत गाते हुए अदालत पहुंचे थे, ‘‘सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है।’’उन्होंने लिखा कि क्रांतिकारियों ने अपनी सजा सुनी और इस दौरान हंसते रहे। हालांकि, वह क्षण भावुक करने वाला था जब वे लोग, जिन्होंने एक-एक पल साथ गुजारा था, वे एक-दूसरे से अलग किए जाने वाले थे। भगत सिंह ने लिखा था कि आम लोग क्रांतिकारियों के बीच के गहरे प्रेम को समझ नहीं सकते। उन्होंने लिखा, ‘‘जिन्होंने अपना सिर कुर्बान करके प्रेम की गली में कदम रखा है, उनकी महानता को हम जैसे अभागे लोग कैसे समझ सकते हैं?’’भगत सिंह ने कहा था कि क्रांतिकारियों के बीच आपसी स्नेह इतना गहरा था कि ‘‘हम उसे सपने में भी नहीं जान सकते।’’इसके बाद उन्होंने क्रांतिकारियों को सुनाई गई सजाओं का उल्लेख किया। तीन को मृत्युदंड, एक को आजीवन निर्वासन, एक को 14 वर्ष के कारावास और चार को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। बाकी क्रांतिकारियों को पांच से 10 वर्ष तक के सश्रम कारावास की सजा दी गई थी। भगत सिंह ने याद किया कि न्यायाधीश ने क्रांतिकारियों से कहा था कि वे ‘‘सच्चे सेवक और आत्मबलिदानी लोग’’ हैं, लेकिन उन्होंने गलत रास्ता चुना है। इस पर भगत सिंह ने लिखा था, ‘‘केवल गरीब भारत में ही सच्चे देशभक्तों का ऐसा हश्र हो सकता है।’’बिछड़ने के अंतिम क्षणों का वर्णन करते हुए भगत सिंह ने लिखा था कि युवा क्रांतिकारी अपने वरिष्ठ साथियों के सामने झुककर उनका आशीर्वाद लेते और आहें भरते हुए एक-दूसरे से गले मिलते थे। उन्होंने विशेष रूप से राम प्रसाद बिस्मिल की विदाई को याद करते हुए लिखा था, ‘‘दार-ओ-दीवार पे हसरत से नजर करते हैं, खुश रहो अहले वतन, हम तो सफर करते हैं।’’भगत सिंह ने काकोरी के क्रांतिकारियों के बलिदान और जेल के बाहर मौजूद लोगों की उदासीनता पर टिप्पणी करते हुए अपना लेख समाप्त किया। उन्होंने लिखा, ‘‘हम एक बार आह भरते हैं और समझते हैं कि हमारा कर्तव्य पूरा हो गया। हमारे भीतर आग नहीं लगती, हम पीड़ा से नहीं तड़पते; हम इतने मुर्दा हो गए हैं।’’भगत सिंह ने लोगों से उन क्रांतिकारियों की पीड़ा को समझने का आह्वान किया, जिन्होंने देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था। यह लेख ‘विद्रोही’ नाम से प्रकाशित हुआ था। पुस्तक में दिए संपादकीय नोट के अनुसार, लेख के प्रकाशन के कुछ समय बाद ही भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी दौरान हथकड़ी लगे भगत सिंह के चारपाई पर बैठे होने की प्रसिद्ध तस्वीर खींची गई थी। चमन लाल द्वारा संपादित पुस्तक ‘भगत सिंह के संपूर्ण दस्तावेज’ का हवाला देते हुए शर्मा ने कहा कि काकोरी मामले में कार्रवाई के समय भगत सिंह पहले से ही क्रांतिकारी संगठन से जुड़े हुए थे। वहीं, सुधीर विद्यार्थी द्वारा संपादित एक अन्य महत्वपूर्ण पुस्तक ‘भगत सिंह : क्रांति का साक्ष्य’ का हवाला देते हुए बाजपेयी ने कहा कि काकोरी प्रकरण से भगत सिंह का जुड़ाव केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने इस घटना पर लेखन और दस्तावेजीकरण भी किया। बाजपेयी ने कहा, ‘‘इसलिए लखनऊ से उनका जुड़ाव केवल भौगोलिक नहीं था। लखनऊ के निकट काकोरी भगत सिंह के लिए ऐसा घटनाक्रम बना, जिसे उन्होंने देखा, समझा और उस पर लिखा, जबकि इसी दौरान उनके राजनीतिक विचार भी आकार ले रहे थे।’’शर्मा और बाजपेयी द्वारा तैयार भगत सिंह पर आधारित दास्तान का पहला मंचन 19 दिसंबर को लखनऊ में होगा। यह तारीख राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान और रोशन सिंह के शहादत दिवस के रूप में भी जानी जाती है। तीनों को 19 दिसंबर, 1927 को फांसी दी गई थी। शर्मा और बाजपेयी इससे पहले अपनी दास्तानों के जरिए भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और उससे जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों की कहानियां व्यापक दर्शकों तक पहुंचा चुके हैं। उनकी प्रस्तुतियों में महात्मा गांधी, वाजिद अली शाह, बेगम हजरत महल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बिरसा मुंडा, चंद्रशेखर आजाद, जवाहरलाल नेहरू और कैफी आजमी जैसे व्यक्तित्व शामिल रहे हैं। दोनों कलाकार काकोरी ट्रेन एक्शन पर भी दास्तान पेश कर चुके हैं। भगत सिंह पर उनकी दास्तान इसी क्रम की नवीनतम प्रस्तुति है। इसमें लखनऊ से भगत सिंह के उस संबंध को केंद्र में रखा गया है, जो काकोरी प्रकरण के माध्यम से सामने आता है। यह उस युवा क्रांतिकारी की कहानी है, जिसने काकोरी मामले में शामिल क्रांतिकारियों के संघर्ष और उनके साथ हुए घटनाक्रम को पढ़ा, समझा और अपने लेखन में दर्ज किया। काकोरी के क्रांतिकारियों का संघर्ष और उनका बलिदान भगत सिंह की राजनीतिक यात्रा के विकास के महत्वपूर्ण संदर्भों में से एक रहा।
अमेरिका की मोस्ट वॉन्टेड टॉप 10 लिस्ट में गोल्डी बराड़ का नाम, रख दिया 10 करोड़ का इनाम
गैंगस्टर गोल्डी बराड़ का नाम अमेरिकी एजेंसी एफबीआई की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल किया गया है। इसके साथ ही उसपर लगभग 10 करोड़ रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट: सीजेआई की बेंच का निर्देश- नकली दवा पर रोक से जुड़ी याचिका अधिकारियों के पास भेजें याचिकाकर्ता
UAE ने की नेतन्याहू के दौरे की पुष्टि, ईरान और द्विपक्षीय रिश्तों पर हुई चर्चा
UAE ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दौरे की पुष्टि की है. इस दौरान UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनकी मुलाकात हुई. यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब ईरान के साथ युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है.
गृह मंत्री अमित शाह से मिले पंजाब और हरियाणा के राज्यपाल, राज्य के अहम मुद्दों पर हुई चर्चा
पंजाब और हरियाणा के राज्यपालों, गुलाब चंद कटारिया और असीम कुमार घोष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अलग-अलग मुलाकात की।
महाराष्ट्र: ठाणे में शिवसेना नेता पर थाने में हमला; विधान परिषद चुनावों के लिए उच्च-स्तरीय समिति का गठन
न्यूज डायरी: स्वदेशी बुलेटप्रूफ कांच बनाएगी डीआरडीओ, डील साइन; तेलंगाना में महिला पर काला जादू के आरोप
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तमिलनाडु में ग्रेनाइट व्यवसायी आर. वीरमणि द्वारा नाबालिग लड़कियों के कथित यौन शोषण का स्वतः संज्ञान लिया है।
भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने कन्नूर और कोझीकोड में केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और मंत्री रमेश चेनिथला के काफिलों पर काले झंडे लहराकर विरोध प्रदर्शन किया।
अंतरराज्यीय नकली दवा रैकेट के मुख्य आरोपी प्रशांत राजन बाबू को बेंगलुरु हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया। वह इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता था और अजरबैजान से लौटने पर पकड़ा गया।
'ऑपरेशन तूफान' का असर, केरल में नशा तस्करी और दुरुपयोग में 30 प्रतिशथ की आई गिरावट
केरलम के गृह मंत्री रमेश चेननिथला ने बताया कि 'ऑपरेशन तूफान' अभियान के बाद राज्य में नशे के दुरुपयोग और तस्करी में 30% की कमी आई है।
अमित शाह की सुरक्षा में चूक पर भड़की भाजपा, कोल्लम में निकाला विरोध मार्च; उच्चस्तरीय जांच की मांग
कोल्लम भाजपा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान सुरक्षा में हुई चूक के विरोध में मार्च निकाला, जिसमें युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए थे।
चीन को हथियार बेचने के दावे पर ट्रंप का यू-टर्न? राजदूत के बयान को नकारा
चीन को अमेरिकी हथियार बेचने को लेकर ट्रंप और चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू के बयान अलग-अलग हैं. पर्ड्यू ने दावा किया था कि ट्रंप ने शी जिनपिंग से हथियार खरीदने के बारे में पूछा था. अब ट्रंप ने इस दावे का खंडन किया है.
'नकली दवाओं पर कसना होगा शिकंजा', सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को भेजी व्यापक नीति बनाने वाली याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने नकली दवाओं के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका को संबंधित अधिकारियों के पास विचार हेतु भेजने का निर्देश दिया है।
1 अक्टूबर से बदल रहा है LPG सब्सिडी नियम, तुंरत करना होगा ये काम!
1 अक्टूबर से बदल रहा है LPG सब्सिडी नियम, तुंरत करना होगा ये काम!
पार्टी फंड और पद के नाम पर लिए 82.63 लाख: पद दिलाने का किया था वादा, जानें महिला ने कैसे खेला ठगी का पूरा खेल
'गिरेंगे गैस के दाम...', ईरान से जंग को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के साथ चल रही जंग में जल्द जीत हासिल करेगा. उन्होंने इस लड़ाई के खत्म होने के बाद गैस की कीमतों को लेकर भी बड़ा बयान दिया है. उनका यह दावा ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं.
Cancer Tarot Card Rashifal: आसपास के माहौल पर रखें पैनी नजर, सतर्कता बनेगी आपकी ताकत
Cancer Tarot Card Horoscope 29 September: Knight of wands की ऊर्जा जीवन आगे बढ़ाने के लिए गलत कार्य और शॉर्टकट से बचने का प्रयास, आसपास के वातावरण को लेकर सजगता और बिना पढ़े हस्ताक्षर न करने की कोशिश की बात लेकर आ सकती है. आईए जानते हैं, कर्क राशि वाले जातकों के जीवन, रिश्तों, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.
Gemini Tarot Card Rashifal: घर और करियर दोनों में बनेंगे अच्छे अवसर, सीखने पर रहेगा फोकस
Gemini Tarot Card Horoscope 29 September: Four of swords की ऊर्जा कार्यों को सही तरीके से व्यवस्थित कर परेशानी से बचने का प्रयास, विवाह से पूर्व घर में आवश्यक कार्य पर विचार और अपनी प्रतिभा और स्किल को बेहतर बनाने के लिए अच्छे अवसर प्राप्त होने की बात लेकर आ सकती है.आइए जानते हैं,मिथुन राशि वाले जातकों के जीवन, रिश्तों, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.
Taurus Tarot Card Rashifal: दूसरों की बातों में न आएं, आर्थिक मामलों में बरतें पूरी सावधानी
Taurus Tarot Card Horoscope 29 September: Five of swords की ऊर्जा दूसरों के दिए लालच से बचकर रहने की कोशिश, बिना सच्चाई जाने किसी बात पर प्रतिक्रिया न देने और नौकरी की तलाश के लिए समय की प्रतिकूलता की बात लेकर आ सकती है. आईए जानते हैं, वृषभ राशि वाले जातकों के जीवन, रिश्तों,आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.
NDTV युवा 2026 में अंकिता सिन्हा और दीपक रेड्डी ने बताया कैसे समस्याओं को पहचानकर तकनीक और स्टार्टअप के जरिए समाधान बनाया और सफलता हासिल की. दोनों ने अदाणी ग्रुप और NDTV की 'वंदे भारतम' पहल की भी सराहना की.
नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगेगी लगाम? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा कानूनी समाधान
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिए एक कानूनी ढांचा तलाशने को कहा है। इसका उद्देश्य नाबालिगों को स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से रोकना और भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना है।
सुप्रीम कोर्ट को मिलेंगे तीन नए जज, कॉलेजियम ने की किसके नामों की सिफारिश?
सुप्रीम कोर्ट को जल्द ही तीन नए जज मिलेंगे।कॉलेजियम ने गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की है।
Sagittarius Aaj Ka Rashifal: घूमने और मनोरंजन पर बढ़ सकता है खर्च, योजनाओं को दें थोड़ा समय
Sagittarius Horoscope Today 29 September 2026, Dhanu Rashifal: मनोरंजन और घूमने-फिरने पर खर्च बढ़ सकता है. बाजार की प्रतिक्रिया जाने बिना बड़ी मात्रा में पैसा लगाने से बचें.
Scorpio Aaj Ka Rashifal: काम का दबाव बढ़े तो भी संयम रखें, आज व्यवस्था से मिलेगी राहत
Scorpio Horoscope Today 29 September 2026, Vrishchik Rashifal: परिवार में छोटी बात को लेकर बहस हो सकती है. व्यापार में पुराने बकाया और रोजमर्रा के संचालन से जुड़े विषयों पर ध्यान देना होगा.
Libra Aaj Ka Rashifal: बातचीत से बनेगी बात, रिश्तों और करियर दोनों में संतुलन जरूरी
Libra Horoscope Today 29 September 2026, Tula Rashifal: नौकरी में सहकर्मी के साथ अधिकार क्षेत्र को लेकर मतभेद हो सकता है. आज आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आप संतुलन बनाए रखते हुए कितनी स्पष्टता से निर्णय लेते हैं.
FBI की टॉप-10 वांटेड लिस्ट में गोल्डी बराड़, गिरफ्तारी पर करोड़ों का इनाम
FBI ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को अपनी 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की लिस्ट में शामिल किया है. एजेंसी ने उसकी गिरफ्तारी की जानकारी देने वाले को 10 लाख डॉलर तक का इनाम देने का ऐलान किया है. गोल्डी बराड़ पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने समेत कई गंभीर अपराधों के आरोप हैं.
Virgo Aaj Ka Rashifal: छिपी जानकारी समझे बिना फैसला न लें, आज सतर्कता ही सुरक्षा है
Virgo Horoscope Today 29 September 2026, Kanya Rashifal: आज गुप्त रूप से चल रही योजना पर काम करने का समय है, हर बात की घोषणा करने का नहीं. अपनी ओर से किए गए काम का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें.
Leo Aaj Ka Rashifal: पुराना फैसला फिर बदल सकता है दिशा, सलाह को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी
Leo Horoscope Today 29 September 2026, Singh Rashifal: आज अति-आत्मविश्वास आपकी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकता है. भविष्य के लिए बचाई गई राशि को छोटी अवधि के लाभ के लालच में न लगाएं.
Cancer Aaj Ka Rashifal: प्रतिष्ठा से जुड़ा दिन, छोटी लापरवाही भी ला सकती है बड़ा असर
Cancer Horoscope Today 29 September 2026, Kark Rashifal: आर्थिक मामलों में काम से जुड़े खर्च सामने आ सकते हैं. यदि कोई पुरानी कार्यपद्धति अपेक्षित परिणाम नहीं दे रही है तो उसमें बदलाव की शुरुआत की जा सकती है.
Gemini Aaj Ka Rashifal: नए अवसरों के बीच संभलकर चुनें रास्ता, आर्थिक जोखिम से बचें
Gemini Horoscope Today 29 September 2026, Mithun Rashifal: आय के नए स्रोत पर विचार करेंगे, लेकिन एक साथ कई योजनाओं में पैसा लगाने से बचना चाहिए. नौकरी करने वालों को टीम के किसी सदस्य से महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है.
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ई20 पेट्रोल से घटेगा भारत का तेल आयात: ओएनजीसी अधिकारी ने बताया कैसे बढ़ सकती है आत्मनिर्भरता, जानें पूरा गणित
कैसे होगी स्पैम कॉल की पहचान?: ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए जारी किए नए नियम; आप खुद भी कर सकते हैं शिकायत
अंतरिक्ष में पहुंचा स्टारशिप, 26 सैटेलाइट छोड़ने के बाद हुआ ब्लास्ट
स्पेसएक्स के स्टारशिप ने अपनी 14वीं टेस्ट उड़ान में पहली बार पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचकर इतिहास रच दिया. हालांकि, उड़ान के दौरान आई तकनीकी खराबी के चलते मिशन को तय समय से पहले खत्म करना पड़ा.
शिकायत नहीं, समाधान चाहिए; जनता की समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई करें अधिकारी : केशव प्रसाद मौर्य
वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों के संबंध में श्री मौर्य ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाए तथा जलभराव, क्षति या अन्य समस्या सामने आने पर तत्काल कार्रवाई कर समाधान सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की जानकारी तत्काल उच्च स्तरीय अधिकारियों को दी जाए।उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज कैम्प कार्यालय, सात कालिदास मार्ग, लखनऊ पर आयोजित ‘जनता दर्शन में सड़क, नाली, जल निकासी, पेयजल, बिजली, आवास, राशन, पेंशन, राजस्व, रोजगार और आर्थिक सहायता से संबंधित मामले सामने आए। उपमुख्यमंत्री ने पात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, पेंशन, किसान कल्याण, रोजगार एवं स्वरोजगार तथा महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।श्री मौर्य ने कहा कि पंक्ति में सबसे पीछे खड़े व्यक्ति को एहसास करना है कि ‘सरकार आपके साथ है’, यही जनता दर्शन का मूल उद्देश्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त शिकायतों पर संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करते हुए प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
आज बैंक खुले रहेंगे या बंद? यूनियन ने 3 दिन की बैंक हड़ताल क्यों टाली; पूरी डिटेल
बैंक ग्राहकों के लिए राहत की खबर है कि 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल टाल दी गई है।
केशव प्रसाद मौर्य जी ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभिन्न स्टॉलों पर प्रदर्शित उत्पादों एवं नवाचारों की जानकारी ली। श्री मौर्य ने कहा कि डबल इंजन सरकार प्रदेश की दीदियों को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय से वार्ता कर उत्तर प्रदेश के प्रत्येक गांव में महिला स्वयं सहायता समूहों को गैस एजेंसी एवं सिलेंडर वितरण व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे गांव की महिलाओं के लिए आय के नए और स्थायी अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से प्रदेश में 11.21 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों, 66,002 ग्राम संगठनों तथा 3,297 संकुल स्तरीय संघों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। लगभग 1.31 करोड़ ग्रामीण परिवारों की महिलाओं को सामाजिक एवं वित्तीय समावेशन तथा कृषि एवं गैर-कृषि आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘लखपति दीदी’ के संकल्प को साकार करते हुए उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक अपनी भूमिका मजबूत कर रही हैं। हमारा लक्ष्य है—बेहतर उत्पाद, बेहतर गुणवत्ता, बेहतर पैकेजिंग, मजबूत ब्रांड और व्यापक बाजार पहुंच के साथ महिला उद्यमियों की बढ़ती आय।
विनीत मिनोचा हत्याकांड: 21 दिन बाद जेल से बाहर आई शालू, बयां किया अपना दर्द
कानपुर के चर्चित विनीत मिनोचा हत्याकांड में एक बड़ा मोड़ आया है. पुलिस ने पहले जिस बहू शालू को इस हत्या का मास्टरमाइंड माना था, वह जांच में पूरी तरह निर्दोष साबित हुई है. कोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार शालू 21 दिनों तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद बाहर आ चुकी हैं. जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने आजतक से खास बातचीत में अपना दर्द साझा किया. शालू ने बताया कि उनके लिए यह 21 दिन बेहद चुनौतीपूर्ण और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले रहे. उन्होंने कहा कि उनके पति सुब्रत ने जो कुछ भी किया, उसका उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था.
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रशांत महासागर में अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है, जो 2026-27 तक बेहद शक्तिशाली स्थिति में पहुंच सकता है।
ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि, जो पहले से ही बच्चों के यौन शोषण मामले में जेल में हैं, के खिलाफ अब एक नाबालिग से रेप का नया मामला दर्ज किया गया है।
एक और नाबालिग की शिकायत, तमिलनाडु में वीरामणि का खुलता जा रहा काला चिट्ठा; पॉक्सो केस दर्ज
तमिलनाडु में ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरामाणि के खिलाफ शिकंजा कसता जा रहा है। सोमवार को एसआईटी ने एक नाबालिग लड़की की मां की शिकायत के बाद उसके खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज किया।
'शहीद भगत सिंह के सपनों का पंजाब बना रहे हैं', जश्न-ए-इंकलाब में बोले CM भगवंत मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर आयोजित 'जश्न-ए-इंकलाब' कार्यक्रम में कहा कि उनकी सरकार देशभक्ति, समानता, इंसाफ और लोककल्याण पर आधारित पंजाब बनाने के लिए काम कर रही है
यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हुए MP के 4 नए स्थल, देखें लिस्ट
MP UNESCO Tentative List: मध्य प्रदेश के 4 नए ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में मिली जगह. धार की बाघ गुफाएं से लेकर विदिशा की उदयगिरि गुफाएं तक शामिल. पढ़ें पूरी खबर...
परीक्षा में सुधारों पर नीलेकणि ने राधाकृष्णन समिति के अध्यक्ष रहे पूर्व इसरो प्रमुख से ली सलाह
नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाले परीक्षा सुधार पैनल ने इसरो के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन से सलाह ली, जिन्होंने नीट पेपर लीक के बाद बनी समिति की अध्यक्षता की थी।
कोयले पर निर्भर आर्थिक विकास: भारत में बढ़ी बिजली की मांग, बाहरी प्रदूषण और शहरी मौतें
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के अनुसार, 2000 से 2020 के बीच भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि ने बिजली की मांग को चार गुना बढ़ा दिया।
LPU के छात्रों की सुरक्षा पर John Brittas ने CM Bhagwant Mann को लिखा पत्र
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मनमाने तरीके से हिरासत में लेने एवं अवैध रूप से निशाना बनाने से रोकने के लिए उनसे तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया। ब्रिटास ने कहा कि इस स्थिति से देशभर (खासकर केरल से बड़ी संख्या में एलपीयू में पढ़ने वाले छात्रों के बीच) के छात्रों और उनके परिवारों में गहरी चिंता पैदा हुई है, जिनमें से कई छात्राएं छात्रावासों में रहती हैं। उन्होंने मान को लिखे अपने पत्र में कहा, अभी जो आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, उनकी सच्चाई चाहे जो भी हो, राज्य के प्राधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन की सबसे पहली और अहम जिम्मेदारी हर छात्र की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना है। एलपीयू के छात्रों ने रविवार को दावा किया था कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी बाहरी व्यक्ति ने एक छात्रा के साथ दुष्कर्म किया है, जिसके बाद उन्होंने परिसर के बाहर नयी दिल्ली-अमृतसर राजमार्ग के एक हिस्से को जाम कर दिया था। अधिकारियों ने बताया कि शाम के समय प्रदर्शन हिंसक हो गया, जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर पथराव किया, उनके वाहनों पर हमला किया और कुछ वस्तुओं में आग लगा दी जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। उन्होंने कहा कि सोमवार सुबह राजमार्ग पर यातायात बहाल हो गया और परिसर में स्थिति सामान्य हो गई। ब्रिटास ने कहा कि ‘‘डर के माहौल’’ में छात्रावासों में रह रहे छात्रों को प्रभावी सुरक्षा, आवश्यक सेवाओं तक सुरक्षित पहुंच और तत्काल सहायता के लिए भरोसेमंद माध्यम उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के अभिभावकों को भी उनके बच्चों की सुरक्षा और स्थिति के बारे में पर्याप्त जानकारी दी जानी चाहिए। विश्वविद्यालय में 10 दिन के लिए कक्षाएं निलंबित किए जाने के बाद कई छात्र अपने घर लौट रहे हैं। मध्यावधि परीक्षाएं भी अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई हैं।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाओं के पास हुनर है, उत्पाद हैं और मेहनत है। डबल इंजन सरकार इन उत्पादों को बाजार, तकनीक और वैश्विक मंच उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है। खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से कृषि एवं बागवानी उत्पादों का मूल्य संवर्धन होने के साथ ही किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि गांव का उत्पाद गांव तक सीमित न रहे, बल्कि उसकी पहुंच देश और दुनिया के बाजारों तक हो। खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराना महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने कहा कि UPITS-2026 उत्तर प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बना है। खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा इस आयोजन में कुल 16 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनकी कुल राशि लगभग 50,000 अमेरिकी डॉलर है। इन समझौतों से प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों एवं उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने तथा निर्यात के नए अवसर विकसित करने में सहायता मिलेगी।खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023, PMFME सहित विभागीय योजनाओं, निवेश संभावनाओं, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक, उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेष सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग श्री राज कमल यादव, IAS तथा श्री बी.एल. मीना, IAS द्वारा योजनाओं एवं नीतिगत प्रावधानों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा भी खाद्य प्रसंस्करण, उद्यमिता एवं आधुनिक तकनीकों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।श्री मौर्य उत्तर प्रदेश अब ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसान की उपज का मूल्य बढ़े, गांव की महिलाओं की मेहनत को बाजार मिले, युवाओं को रोजगार मिले और उत्तर प्रदेश के उत्पादों की पहचान विश्व स्तर पर बने। यही विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की दिशा में डबल इंजन सरकार का संकल्प है।
टॉयलेट सीट के बीच बैठा था साइलेंट किलर! बच्ची की चीख से दहला परिवार
Bijnor Snake In Toilet Case: बिजनौर के नहटौर में टॉयलेट के अंदर मिला अति-जहरीला 'कॉमन करैत' सांप. बच्ची की समझदारी से टला हादसा, सर्प मित्र बी-भास्कर ने किया रेस्क्यू. पढ़ें पूरी खबर.
Delhi Weather: राजधानी में बढ़ेगा पारा, IMD ने दी सुहावने मौसम के खत्म होने की जानकारी
राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को भी मौसम सुहावना रहा और अधिकतम तापमान 28.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से छह डिग्री कम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। मौसम में यह खुशनुमा बदलाव ऐसे समय दिखा है, जब एक दिन पहले ही दिल्ली में पिछले 25 साल में सितंबर का दूसरा सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया था। हालांकि, मौसम कार्यालय ने स्पष्ट किया कि यह समय से पहले सर्दियों की शुरुआत नहीं है। विभाग ने कहा कि सुहावने मौसम का यह दौर जल्द खत्म हो सकता है, क्योंकि आने वाले दिन में तापमान लगातार बढ़ने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, शहर के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.3 डिग्री कम और रविवार की तुलना में दो डिग्री अधिक है। वहीं, रविवार को दिन का अधिकतम तापमान 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा था। पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश व आसपास के क्षेत्र में बने ऊपरी हवा के चक्रवातीय परिसंचरण के असर से दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में तापमान में गिरावट देखी गई। मौसम विभाग ने बताया कि यह स्थिति जल्द ही बदलने वाली है, खासकर एक अक्टूबर से, जब दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास रहने की उम्मीद है। आईएमडी ने कहा कि अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। दिल्ली के मौसम केंद्रों में सोमवार को रिज क्षेत्र में अधिकतम तापमान सबसे कम 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 7.7 डिग्री कम है। वहीं, यहां का न्यूनतम तापमान 18.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 4.2 डिग्री कम है। पालम में अधिकतम तापमान सामान्य से 7.4 डिग्री कम यानी 27.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.1 डिग्री कम होकर 20.4 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा लोधी रोड में अधिकतम तापमान 28.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन में कई मौसम केंद्रों पर बूंदाबांदी से लेकर हल्की बारिश दर्ज की गई। रिज में 2.2 मिमी, पालम में एक मिमी और आयानगर में 0.7 मिमी बारिश हुई, जबकि सफदरजंग और लोधी रोड में बूंदाबांदी दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार शाम चार बजे तक दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 56 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है। सीपीसीबी के अनुसार, 0 से 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा , 51 से 100 को संतोषजनक , 101 से 200 को मध्यम , 201 से 300 को खराब , 301 से 400 को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर श्रेणी में माना जाता है। मौसम विभाग ने मंगलवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान जताया है। इस दौरान न्यूनतम और अधिकतम तापमान क्रमशः 22 और 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
भारतीय दवा कंपनियों को बड़ी राहत, स्पेशल ड्रग्स पर टैरिफ नहीं लगाएगा US
अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट ने भारत समेत 20 देशों से आयातित कुछ विशेष दवाओं और उनके इंग्रीडिएंट्स पर कोई एड वैलोरम टैरिफ नहीं लगाने का निर्णय लिया है. ये कदम दुर्लभ बीमारियों, बांझपन, सेल और जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स और पशु दवाओं में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स पर लागू होगा.
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के बेला एस्टेट इलाके में पहुंचकर SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया.
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज संकट के बावजूद भारत ने कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बनाए रखी है।
अगर वृद्धावस्था पेंशन का आवेदन सालों से लटका हुआ है और लेखपाल या प्रधान स्तर पर अटका कर रखा गया है, तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं. इस बारे में दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता ने जानकारी दी है.
चेन्नई में SIT ने ग्रेनाइट कारोबारी R Veeramani पर दर्ज किया नया POCSO केस
ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरामाणि के खिलाफ बाल यौन शोषण मामले की जांच कर रही एसआईटी ने सोमवार को एक नाबालिग लड़की की मां की शिकायत के बाद उसके खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज किया। चेन्नई नगर पुलिस ने यह जानकारी दी। चेन्नई नगर पुलिस ने बताया कि नाबालिग लड़की की मां 28 सितंबर को एसआईटी अधिकारियों के सामने पेश हुईं और शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एक नया मामला दर्ज किया गया है एवं जांच शुरू की गई है। वीरामणि और अन्य लोगों के खिलाफ बच्चों का यौन शोषण से संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज यौन शोषण के मामले की व्यापक जांच करने के लिए तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक महेश कुमार अग्रवाल के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था जिसमें सभी सदस्य महिलाएं हैं। चेन्नई पुलिस ने एक विज्ञप्ति में लोगों से अपील की है कि अगर उनके पास कोई जानकारी, दस्तावेज या सबूत हों तो वे उन्हें साझा करें या ज़रूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके लिए वे 9345319676 नंबर पर फ़ोन कॉल या ‘व्हाट्सऐप’ के ज़रिए जांच करने वालों से संपर्क कर सकते हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि जानकारी देने वालों की पहचान और सूचना पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी तथा पुष्टि होने के बाद तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने वीरामणि द्वारा 12-16 साल की नाबालिग लड़कियों के कथित यौन शोषण का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा है कि उसकी जांच टीम इस मामले की ज़मीनी स्तर पर जांच करने के लिए चेन्नई जाएगी। शुक्रवार को एक पोक्सो अदालत ने वीरामणि की न्यायिक हिरासत नौ अक्टूबर तक बढ़ा दी। वह 29 अगस्त से न्यायिक हिरासत में है और उसकी मौजूदा रिमांड की अवधि शुक्रवार को खत्म होने वाली थी। वीरामणि पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का आरोप है। इस बड़े उद्योगपति और तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले ने पूरे तमिलनाडु में हलचल मचा दी है; सभी राजनीतिक दलों और नागरिक संस्था ने इस अपराध के दोषियों को कड़ी सज़ा देने की मांग की है।
तुकाराम मुंडे से लेकर वॉर्निंग लेबल्स तक: भारत में फूड सेफ्टी को लेकर अचानक तेज हुई चर्चा
भारत में खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई घटनाक्रम एक साथ हो रहे हैं. रेस्तराओं में छापेमारी कर साफ-सफाई जांची जा रही है, पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर चेतावनी वाले लेबल लगाने की पहल हो रही है लेकिन उद्योग-धंधे इससे परेशान हैं
सांपों को न्योता देते हैं ये पौधे, गंध सूंघते ही खिंचे चले आते हैं!
Snake Safety Tips: घर में लगे पेड़-पौधे घर की शोभा बढ़ाने के साथ ही वातावरण को भी शुद्ध रखते हैं लेकिन कई पेड़-पौधे जहरीले कीड़े-मकौड़ों और चूहों का ठिकाना बन जाते हैं जिसकी वजह आपके घर में जहरीले सांपों के आने का खतरा भी बढ़ जाता है. इसीलिए यहां हम आपको ऐसी ही कुछ पेड़-पौधों की जानकारी दे रहे हैं जिनकी वजह से सांप आपके घर आ सकते हैं.
महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली के संवेदनशील इलाकों का होगा सुरक्षा ऑडिट
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिला सुरक्षा पर चिंता जताते हुए पुलिस को व्यापक निर्देश दिए हैं। इनमें चार सप्ताह के भीतर संवेदनशील इलाकों का सर्वे, गश्त बढ़ाना, खराब स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी ठीक करना शामिल है।
भारत का स्टार्टअप अंतरिक्ष में बनाएगा डेटा सेंटर, 1 अक्टूबर को लॉन्च होगा पहला सेटेलाइट
भारतीय स्टार्टअप टेकमी2स्पेस 1 अक्टूबर को स्पेसएक्स मिशन के तहत भारत का पहला आर्बिटल कंप्यूटिंग सेटेलाइट एमओआइ-1ए लॉन्च करेगा।
Election Commission के SIR प्रोसेस पर उठे सवाल, Kapil Sibal और वकीलों ने CEC के इस्तीफे की मांग की
वरिष्ठ वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संस्था के सदस्यों के एक समूह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने, हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रतिभागियों ने ‘टुगेदर वी स्टैंड’ बैनर तले आयोजित प्रेस वार्ता में आगामी चुनाव एसआईआर-पूर्व मतदाता सूचियों के आधार पर कराए जाने और इस प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा किये गये फैसलों की संवैधानिक एवं कानूनी वैधता की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि निर्वाचन आयोग का कामकाज ‘दागदार’ हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को देखा, उससे नागरिकों का आगे आना जरूरी हो गया है। सिब्बल ने कहा, ‘‘अगर निष्पक्ष चुनाव में बाधा आती है, तो क्या लोकतंत्र बचेगा?’’उन्होंने कहा कि एसआईआर के तहत बड़े पैमाने पर नाम हटाने और जोड़ने का मुद्दा कई बार उच्चतम न्यायालय के सामने उठाया गया है। सिब्बल ने कहा, ‘‘अब यह साबित हो चुका है कि वह गलत था। तब से कई चुनाव हो चुके हैं।’’उन्होंने एसआईआर से जुड़े सभी फैसलों को वापस लेने की मांग की क्योंकि ये फैसले निर्वाचन आयोग ने नहीं लिए थे बल्कि आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इन्हें जबरन लागू करवाया था और इसलिए इनकी कोई कानूनी वैधता नहीं थी। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को यह बताया जाना चाहिए कि जिन मामलों को पहले निर्वाचन आयोग के आदेश माना गया था, वे असल में आयोग के फैसले नहीं थे बल्कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उन्हें एकतरफा तौर पर लिये थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या एसआईआर प्रक्रिया का मकसद मुसलमानों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना था, तो सिब्बल ने कहा कि तार्किक विसंगतियों का पैमाना इसी मकसद से बनाया गया था। योगेंद्र यादव ने प्रेसवार्ता में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या से नाम हटाने के पैमाने पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान, देश में वयस्क आबादी 99 करोड़ थी और मतदाताओं की संख्या 98 करोड़ थी, जो लगभग बराबर थी। हमें गर्व था कि हमारे पास मतदाताओं की एक सटीक सूची थी।’’यादव ने कहा, ‘‘एसआईआर के ज़रिए सुधार के बाद, अब मतदाताओं की संख्या 88 करोड़ या उससे कम है, जबकि वयस्क आबादी 103 करोड़ है। इस तरह, कम से कम 15 करोड़ भारतीय मतदाता सूची से गायब हैं।’’वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने निर्वाचन आयोग द्वारा तार्किक विसंगति शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे मामलों पर फैसला लेने के लिए कोई मानक या ढांचा है। भूषण ने यह भी कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया ‘जनप्रतिनिधित्व कानून’ और नियमों का उल्लंघन करके की जा रही है।
10 तेंदुओं की खाल तस्करी में एनजीओ के CEO का नाम, 11 घंटे तक पूछताछ
Shivpuri Leopard Skin Smuggling Case: 10 तेंदुए की खालों की तस्करी मामले में NGO के सीईओ कार्तिक नारायण से शिवपुरी में 11 घंटे तक पूछताछ. तस्करों ने लिया था नाम. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
चूहे की बीट और छिपकलियां... कयानी कैफे और रॉयल चाइना कार्रवाई; महाराष्ट्र में FDA का ऐक्शन
त्योहारों से पहले महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने पूरे राज्य में बड़ी कार्रवाई की है। 30 खाने की दुकानों के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिए गए हैं। साथ ही 50,601 किलो से ज्यादा खाना जब्त किया गया है, जिसकी कीमत करीब 1.19 करोड़ रुपये है।
सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल: भारत का एक फैसला और पाकिस्तान के खिलाफ हमेशा के लिए बदल गए नियम
उड़ी हमले के 10 साल बाद भी सर्जिकल स्ट्राइक भारत की आतंकवाद विरोधी नीति का आधार बनी हुई है। इस कार्रवाई ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और निर्णायक जवाब देने की क्षमता को प्रदर्शित किया।
बिहार MLC Election में JDU विधायक Anant Singh का बागी रुख, जन सुराज प्रत्याशी को दिया समर्थन
बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक अनंत कुमार सिंह ने सोमवार को विधान परिषद (एमएलसी) के आगामी चुनाव में अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी और मौजूदा सदस्य नीरज कुमार को हराने का संकल्प लेते हुए जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार करने का ऐलान किया। मोकामा से विधायक अनंत सिंह ने पटना स्थित अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की। इस दौरान जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह भी मौजूद थे। अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चौथी बार चुनाव लड़ रहे नीरज कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बीच मुकाबला ‘‘व्यक्तिगत’’ है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘नीरज कुमार ने कभी मेरे खिलाफ चुनाव लड़ा था। वह आरसीपी सिंह खेमे में भी थे, जिसने मेरे मोकामा स्थित घर में हथियार और विस्फोटक छिपाकर मेरे खिलाफ साजिश रची थी।’’अनंत सिंह ने 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से मतभेद के बाद पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपनी विधानसभा सीट बरकरार रखी थी। उस समय जदयू ने मोकामा सीट से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। चार वर्ष बाद अनंत सिंह के मोकामा स्थित आवास से एके-47 राइफल और रॉकेट लॉन्चर बरामद होने पर उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव से पहले जदयू में दोबारा शामिल हुए अनंत सिंह लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह और उनकी आईपीएस बेटी लिपि सिंह उनके खिलाफ ‘‘साजिश’’ में शामिल थे। लिपि सिंह, 2019 में मोकामा की अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी थीं। अनंत सिंह ने कहा, ‘‘मैंने एक पंडित से सलाह ली है। उन्होंने एक अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने के लिए शुभ तिथि बताई है। उस दिन मैं अनुज सिंह के साथ रहूंगा और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के सभी 26 विधानसभा क्षेत्रों में उनके लिए प्रचार भी करूंगा।’’अपनी ही पार्टी के विधायक के खुले विरोध पर जदयू की ओर से देर शाम तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। वहीं, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया कि जदयू अब ‘‘केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भाजपा के हितों की पूर्ति के लिए चलाई जा रही है’’ और नीतीश कुमार के पास कोई निर्णयकारी भूमिका नहीं बची है।
धौलपुर में इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर ने पत्नी सहित की सुसाइड
धौलपुर। शहर के निहालगंज थाना क्षेत्र में सोमवार को यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर बलराम मीणा और उनकी पत्नी सरोज मीणा के शव किराए के मकान में अलग-अलग कमरों में फंदे से लटके मिले। घटना से कुछ समय पहले बलराम के व्हाट्सएप अकाउंट पर ‘अंतिम जोहार’ लिखा स्टेटस दिखाई दिया था। पुलिस को मौके […] The post धौलपुर में इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर ने पत्नी सहित की सुसाइड appeared first on Sabguru News .
रबी सीजन में नकदी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए लहसुन हमेशा से एक अत्यधिक लाभकारी विकल्प रहा है। बाजार में लहसुन की लगातार मजबूत कीमतों और बढ़ती मांग के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (NHRDF) द्वारा विकसित उन्नत किस्में किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। लहसुन की ऐसी ही उन्नत और अधिक उपज देने वाली किस्मों (जैसे भीमा ओंकार, यमुना सफेद-3 / G-282 और एग्रीफाउंड पार्वती) ने किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह फसल मात्र 130 से 135 दिनों के भीतर पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है और उचित प्रबंधन से प्रति एकड़ 35 से 40 क्विंटल (लगभग 80 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) तक बंपर पैदावार देने की क्षमता रखती है।उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश (विशेष रूप से मंदसौर और नीमच मंडी क्षेत्र), राजस्थान (कोटा और बारां बेल्ट), गुजरात, हरियाणा और बिहार के प्रमुख कृषि अंचलों में लहसुन की यह उन्नत किस्में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इस किस्म के कंद (Bulbs) मध्यम से बड़े आकार के, आकर्षक चमकदार सफेद रंग के और बेहद ठोस होते हैं। इसमें पाए जाने वाले तीखेपन और एलिसिन (Allicin) नामक औषधीय तत्व की उच्च मात्रा के कारण इसे घरेलू रसोई के साथ-साथ मसाला व फार्मास्यूटिकल उद्योगों में भी हाथों-हाथ खरीदा जाता है।इस उन्नत किस्म की प्रमुख शारीरिक विशेषताएं और भंडारण क्षमताइस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी एक समान कलियां और बेहतरीन भंडारण क्षमता (Storage Capacity) है। अक्सर पारंपरिक देशी लहसुन में यह समस्या देखी जाती है कि फसल कटाई के कुछ महीनों बाद कंद सूखने लगते हैं या अंदर से खोखले हो जाते हैं, जिससे किसानों को औने-पौने दाम पर फसल बेचनी पड़ती है। इसके विपरीत, इस उन्नत किस्म के कंदों का छिलका मोटा और सख्त होता है, जिससे इसे सामान्य तापमान वाले हवादार गोदामों में भी 6 से 8 महीने तक बिना किसी वजन या चमक के नुकसान के आसानी से स्टोर किया जा सकता है।रोग प्रतिरोधक क्षमता के मामले में भी यह किस्म काफी आगे है। यह लहसुन के प्रमुख रोगों जैसे 'बैंगनी धब्बा रोग' (Purple Blotch), डाउनी मिल्ड्यू (Downy Mildew) और तना झुलसा रोग के प्रति सामान्य किस्मों के मुकाबले कहीं अधिक सहनशील है। इसके मजबूत तने और चौड़ी पत्तियां प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को तेज करती हैं, जिससे जमीन के नीचे गांठों का विकास तेजी से और भरपूर होता है।बुवाई का सही समय, खेत की तैयारी और जलवायु आवश्यकताएंलहसुन ठंडी जलवायु की फसल है, जिसके वानस्पतिक विकास के लिए 15 से 20 डिग्री सेल्सियस और कंद पकने के समय 25 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान आदर्श माना जाता है। उत्तर भारत और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में इसकी बुवाई के लिए अक्टूबर के पहले सप्ताह से लेकर नवंबर के मध्य तक का समय सबसे मुफीद रहता है।खेत की तैयारी के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसका पीएच (pH) मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेत को 2 से 3 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें। अंतिम जुताई के समय प्रति एकड़ 8 से 10 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या 2 टन वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए। संतुलित पोषण के लिए मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ-साथ 10 से 12 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से सल्फर (गंधक) का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें, क्योंकि सल्फर लहसुन के कंदों में तीखापन, सुगंध और कड़कपन बढ़ाने में सीधी भूमिका निभाता है।बीज की मात्रा, उपचार और रोपाई का वैज्ञानिक तरीकाएक एकड़ खेत में बुवाई के लिए स्वस्थ और मोटे कंदों से निकली लगभग 1.5 से 2 क्विंटल (150-200 किग्रा) कलियों (Cloves) की आवश्यकता होती है। बुवाई से पहले कलियों का उपचार करना बेहद जरूरी है। इसके लिए कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा विरिडी (5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) के घोल से कलियों को 15-20 मिनट तक उपचारित करके छाया में सुखा लें। इससे बीज जनित और भूमि जनित फंगल बीमारियों का खतरा पूरी तरह टल जाता है।बुवाई करते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी (Row to Row) 15 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी (Plant to Plant) 8 से 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। कलियों को जमीन में 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर कलिका का नुकीला सिरा ऊपर की ओर रखते हुए गाड़ना चाहिए। बुवाई के तुरंत बाद एक हल्की सिंचाई करें। आधुनिक समय में ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) और रेज्ड बेड (उठी हुई क्यारियों) पर लहसुन की बुवाई करने से पानी की 40% तक बचत होती है और कंदों का आकार 25 से 30% तक बड़ा प्राप्त होता है।लागत, मुनाफा और बाजार अर्थशास्त्र: किसान कैसे कमाएं लाखों का शुद्ध लाभ?एक एकड़ में लहसुन की इस उन्नत किस्म की वैज्ञानिक खेती करने में बीज, जुताई, खाद-उर्वरक, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर लगभग 45,000 से 55,000 रुपये तक की कुल लागत आती है। यदि किसान को औसतन 35 से 40 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार मिलती है और बाजार में सामान्य थोक भाव भी औसतन ₹6,000 से ₹8,000 प्रति क्विंटल (या ऑफ-सीजन में ₹10,000 से ₹15,000 प्रति क्विंटल) मिल जाता है, तो प्रति एकड़ 2.4 लाख से 3.2 लाख रुपये तक का सकल राजस्व आसानी से मिल सकता है।सभी इनपुट खर्चों को घटाने के बाद भी किसान मात्र 135 दिनों की अवधि में एक एकड़ से लगभग 1.8 से 2.5 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं। यदि किसान कटाई के तुरंत बाद फसल बेचने के बजाय उसे 3-4 महीने उचित भंडारण में रोककर ऑफ-सीजन में बेचें, तो यह मुनाफा और भी अधिक बढ़ जाता है। उन्नत बीजों का चयन और आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर किसान लहसुन की खेती को वास्तविक अर्थों में मुनाफे की एक ठोस मशीन बना सकते हैं।
'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' गाया अमेरिकी ने, 16 लाख बार देखा गया Video
'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की है और अब फिल्म का संगीत भी विदेश तक पहुंच रहा है. अमेरिकी सिंगर एलेक सोडरबर्ग ने फिल्म का भजन 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' एकतारा के साथ गाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.
भारतीय रेलवे को देश की जीवनरेखा (लाइफलाइन) कहा जाता है, जो प्रतिदिन करोड़ों यात्रियों को उनकी मंजिलों तक पहुंचाती है। रेलवे नेटवर्क के विस्तार और भारी ट्रैफिक को संभालने के लिए देश भर में कई विशालकाय रेलवे स्टेशन स्थापित किए गए हैं। जब प्लेटफॉर्म की संख्या और ट्रेनों के परिचालन की क्षमता की बात आती है, तो पश्चिम बंगाल का ऐतिहासिक हावड़ा जंक्शन (HWH) पूरे देश में निर्विवाद रूप से पहले पायदान पर बना हुआ है। हावड़ा जंक्शन में कुल 23 क्रियाशील प्लेटफॉर्म हैं, जो रोजाना लाखों यात्रियों और सैकड़ों मेल, एक्सप्रेस व उपनगरीय लोकल ट्रेनों का सुचारू संचालन करते हैं।हावड़ा के ठीक बाद दूसरे स्थान पर कोलकाता का ही सियालदह रेलवे स्टेशन (SDAH) आता है, जहां 21 प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। यह स्टेशन कोलकाता उपनगरीय रेलवे नेटवर्क का सबसे व्यस्त केंद्र माना जाता है। वहीं, मुंबई का विश्व धरोहर स्थल छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) 18 प्लेटफॉर्म के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद दक्षिण भारत का सबसे महत्वपूर्ण रेलवे हब एमजीआर चेन्नई सेंट्रल (MAS) 17 प्लेटफॉर्म के साथ चौथे और देश की राजधानी का नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) 16 प्लेटफॉर्म के साथ पांचवें पायदान पर काबिज है। टॉप-5 के इन सभी स्टेशनों में 16 या उससे अधिक प्लेटफॉर्म हैं, जो भारत के महानगरों को देश के हर कोने से जोड़ते हैं।भारत के 20 सबसे बड़े रेलवे स्टेशनों की पूरी सूची (प्लेटफॉर्म की संख्या के अनुसार)देश के विभिन्न राज्यों में फैले प्रमुख 20 बड़े रेलवे स्टेशनों की स्थिति उनके स्टेशन कोड और प्लेटफॉर्म की संख्या के आधार पर नीचे दी गई है:क्रम संख्यारेलवे स्टेशन का नामस्टेशन कोडराज्य / केंद्र शासित प्रदेशप्लेटफॉर्म की संख्या1.हावड़ा जंक्शनHWHपश्चिम बंगाल232.सियालदह रेलवे स्टेशनSDAHपश्चिम बंगाल213.छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT)CSMTमहाराष्ट्र184.एमजीआर चेन्नई सेंट्रलMASतमिलनाडु175.नई दिल्ली रेलवे स्टेशनNDLSदिल्ली166.अहमदाबाद जंक्शनADIगुजरात127.खड़गपुर जंक्शनKGPपश्चिम बंगाल128.कानपुर सेंट्रलCNBउत्तर प्रदेश109.प्रयागराज जंक्शनPRYJउत्तर प्रदेश1010.विजयवाड़ा जंक्शनBZAआंध्र प्रदेश1011.पटना जंक्शनPNBEबिहार1012.गोरखपुर जंक्शनGKPउत्तर प्रदेश1013.केएसआर बेंगलुरु सिटीSBCकर्नाटक1014.वाराणसी जंक्शन (कैंट)BSBउत्तर प्रदेश915.लखनऊ चारबागLKOउत्तर प्रदेश916.पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय)DDUउत्तर प्रदेश817.इटारसी जंक्शनETमध्य प्रदेश818.नागपुर जंक्शनNGPमहाराष्ट्र819.बिलासपुर जंक्शनBSPछत्तीसगढ़820.कल्याण जंक्शनKYNमहाराष्ट्र812, 10 और 9 प्लेटफॉर्म वाले प्रमुख जंक्शन: उत्तर और दक्षिण भारत के व्यस्त केंद्ररैंकिंग में छठे स्थान पर संयुक्त रूप से दो बड़े जंक्शन आते हैं—गुजरात का अहमदाबाद जंक्शन (ADI) और पश्चिम बंगाल का खड़गपुर जंक्शन (KGP), जिनमें 12-12 प्लेटफॉर्म हैं। खड़गपुर जंक्शन लंबे समय तक दुनिया के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म के लिए भी मशहूर रहा है।इस सूची में आठवें पायदान पर एक साथ छह व्यस्त स्टेशन आते हैं, जिनमें से प्रत्येक में 10-10 प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। इनमें उत्तर भारत का विशाल औद्योगिक व रेलवे हब कानपुर सेंट्रल, धार्मिक व प्रशासनिक केंद्र प्रयागराज जंक्शन, दक्षिण भारत का प्रमुख कनेक्टिविटी पॉइंट विजयवाड़ा जंक्शन, बिहार का सबसे व्यस्त पटना जंक्शन, पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय गोरखपुर जंक्शन और सिलिकॉन वैली का मुख्य स्टेशन केएसआर बेंगलुरु सिटी शामिल हैं।वहीं 14वें स्थान पर उत्तर प्रदेश के दो सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र हैं—वाराणसी जंक्शन (कैंट) और लखनऊ चारबाग, जहां 9-9 प्लेटफॉर्म के जरिए दैनिक रेल यातायात का संचालन होता है।8 प्लेटफॉर्म वाले रणनीतिक जंक्शन और रेलवे का आधुनिकीकरण अभियानसूची के अंतिम पायदानों पर वे रेलवे स्टेशन आते हैं जिनके पास 8-8 प्लेटफॉर्म हैं, लेकिन सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से इनका महत्व किसी से कम नहीं है। इनमें एशिया के सबसे बड़े रेलवे मार्शलिंग यार्ड के लिए पहचाने जाने वाला पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU), उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम रेल कॉरिडोर का केंद्रीय मिलन बिंदु मध्य प्रदेश का इटारसी जंक्शन, मध्य भारत का केंद्र नागपुर जंक्शन, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय बिलासपुर जंक्शन और मुंबई उपनगरीय नेटवर्क का महत्वपूर्ण नोड कल्याण जंक्शन शामिल हैं।भारतीय रेलवे वर्तमान में 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत इन सभी व्यस्त और बड़े रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास कर रही है। इसके तहत स्टेशनों पर नए फुटओवर ब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर, आधुनिक वेटिंग लाउंज और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी की सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं, ताकि यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का यात्रा अनुभव मिल सके।
भारतीय नौसेना का शीर्ष नेतृत्व 29 सितंबर से शुरू हो रहे द्विवार्षिक सम्मेलन में ऑपरेशनल तैयारियों और ऊर्जा सुरक्षा सहित समुद्री हितों की समीक्षा करेगा।
देश भर में 140 करोड़ नागरिकों और करोड़ों व्यापारियों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट चार्ज लगाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारिक (Person-to-Merchant) यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की नई व्यवस्था को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर अहम कदम उठाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को औपचारिक नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।हालांकि, इस विवाद में याचिकाकर्ता को फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाले इस नए एमडीआर फ्रेमवर्क पर किसी भी प्रकार की रोक (Interim Stay) लगाने से साफ इनकार कर दिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जब तक मामले की अगली विस्तृत सुनवाई नहीं हो जाती और अदालत कोई विपरीत आदेश नहीं देती, तब तक सरकार और एनपीसीआई द्वारा तय किया गया नया नियम निर्धारित समय पर लागू माना जाएगा। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को अपना विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल: इस चार्ज से किसे हो रही है कमाई और इसका कानूनी स्वरूप क्या है?सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस नए वित्तीय शुल्क के कानूनी और नीतिगत आधार को लेकर कड़े सवाल खड़े किए। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि आखिर ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई भुगतानों पर लगने वाले इस एमडीआर चार्ज से असल कमाई किसकी होगी? अदालत ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि यह शुल्क कोई टैक्स है, सर्विस फीस है या सेस? कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि जब एक करदाता से दूसरे करदाता के पास डिजिटल माध्यम से पैसा ट्रांसफर होता है, तो इस लेन-देन पर लगने वाले शुल्क का वैधानिक आधार (Statutory Basis) क्या है और इसमें कौन सी टैक्स देनदारी या संस्थाएं शामिल हैं?केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने अदालत के सामने स्पष्टीकरण देते हुए दलील दी कि यह सरकार द्वारा वसूला जाने वाला कोई नया टैक्स या राजस्व नहीं है। उन्होंने कहा कि एमडीआर डिजिटल भुगतान तंत्र को सुचारू, तकनीकी रूप से सुरक्षित और वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए बैंकों, पेमेंट गेटवेज और सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बटने वाला एक ऑपरेशनल सेटलमेंट चार्ज है। सरकार को इस वसूली से एक भी रुपया प्राप्त नहीं होगा। सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि देश में होने वाले 96 प्रतिशत से अधिक सामान्य और खुदरा व्यापारिक लेन-देन पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे।क्या है नया UPI MDR फ्रेमवर्क और किन लेन-देन पर लगेगा शुल्क?केंद्र सरकार और एनपीसीआई द्वारा अधिसूचित नए फ्रेमवर्क के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नियम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:सामान्य पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतान: बड़े व्यापारिक आउटलेट्स या ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर ₹2,000 से अधिक के पात्र लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क तय किया गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के बड़े लेन-देन पर अधिकतम चार्ज की सीमा ₹300 (Cap) तय की गई है।फ्लैट-रेट कैटेगरी (Flat MDR): रेलवे टिकट बुकिंग, पेट्रोल पंप, दूरसंचार (Recharge/Bills), बिजली-पानी के बिल, बीमा प्रीमियम और कृषि इनपुट जैसे संवेदनशील व कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर प्रतिशत के बजाय मात्र ₹5 का फिक्स्ड फ्लैट एमडीआर लगेगा।कैपिटल मार्केट लेन-देन: म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर से जुड़े लेन-देन पर मात्र 0.02 प्रतिशत (अधिकतम ₹300) का रियायती एमडीआर लागू होगा।किसे नहीं देना होगा कोई चार्ज: एक आम उपभोक्ता से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सभी पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा, ₹2,000 तक के सभी रोजमर्रा के मर्चेंट पेमेंट और प्रति माह ₹1 लाख तक का टर्नओवर प्राप्त करने वाले छोटे दुकानदारों व ठेले-खोमचे वालों को 'जीरो-एमडीआर' श्रेणी के तहत पूरी तरह छूट दी गई है।याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्तियां: क्यों पहुंचा मामला अदालत की चौखट पर?सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में केंद्र सरकार द्वारा सितंबर माह में जारी अधिसूचना और एनपीसीआई के एमडीआर फ्रेमवर्क को सीधे चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की धारा 10A में किए गए बदलावों के जरिए कार्यपालिका (सरकार) को बिना किसी व्यापक सार्वजनिक परामर्श, ठोस डेटा और विधायी बहस के मनमाने ढंग से वित्तीय शुल्क लगाने का असीमित अधिकार मिल गया है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 19(1)(g) का उल्लंघन है।याचिका में यह भी दलील दी गई है कि एक तरफ रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड से भुगतान को बिना किसी मौद्रिक सीमा के पूरी तरह शुल्क-मुक्त रखा गया है, वहीं दूसरी तरफ उसी डिजिटल इकोसिस्टम के तहत यूपीआई पर ₹2,000 की सीमा के बाद चार्ज लगाना भेदभावपूर्ण है। याचिकाकर्ता ने यह गंभीर आशंका भी जताई कि भले ही कागजों पर यह शुल्क मर्चेंट यानी व्यापारी को देना हो, लेकिन कम मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारी अंततः इस लागत का भार अप्रत्यक्ष रूप से आम उपभोक्ताओं और ग्राहकों की जेब पर ही ट्रांसफर करेंगे, जिससे देश के डिजिटल इंडिया अभियान और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।आम जनता और व्यापारियों पर क्या होगा असर? वित्त मंत्रालय का स्पष्टीकरणइस विवाद पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बढ़ती चर्चाओं के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूर्व में ही स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि इस नए नियम से आम नागरिकों को घबराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि किसी भी सामान्य नागरिक द्वारा सब्जी, राशन, दूध, किराना, कैब बुकिंग या दोस्तों-रिश्तेदारों को पैसे भेजने पर एक भी नया पैसा अतिरिक्त नहीं कटेगा। यह शुल्क मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) है, जो बैंकों और तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए बड़े व्यापारियों से लिया जाने वाला आंतरिक सेवा शुल्क है।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक न लगाए जाने से डिजिटल पेमेंट कंपनियों, बैंकों और फिनटेक कंपनियों ने थोड़ी राहत महसूस की है, क्योंकि 15 अक्टूबर की तैयारी को कानूनी झटका नहीं लगा है। हालांकि, चार सप्ताह बाद जब केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक और एनपीसीआई अदालत में अपना विस्तृत कानूनी पक्ष और हलफनामा दाखिल करेंगे, तब इस बात का अंतिम फैसला होगा कि भारत के सबसे सफल डिजिटल भुगतान तंत्र पर यह नया वित्तीय ढांचा टिका रहेगा या इसमें कोई बड़ा फेरबदल करना पड़ेगा।
कॉपी घर भूला, स्कूल से चुपचाप लौटा मासूम, कपड़े उतारे तो कांप उठे मां-बाप
नागौर में कॉपी घर भूलने पर 5वीं के छात्र की शिक्षक द्वारा कथित बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया है. आरोप है कि शिक्षक ने बच्चे को लाठी से पीटा, बाल खींचे और किसी को बताने पर धमकी दी. डर के कारण बच्चा चुप रहा. दो दिन बाद परिजनों ने शरीर पर चोट के निशान देखे. पुलिस ने FIR दर्ज की.
बिना रिश्वत नौकरी चाहिए तो Yogi Adityanath को तीसरी बार CM बनाएं: OP Rajbhar
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को 1,375 नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पक्ष में प्रचार करने की अपील की और समाजवादी पार्टी (सपा) तथा कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष राजभर ने यहां नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान उन्होंने सपा और कांग्रेस को ‘‘मरे हुए लोगों’’ की विचारहीन पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि ये दल केवल विरोध के लिए सरकार का विरोध करते हैं। पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज विभाग के कैबिनेट मंत्री राजभर ने नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों से पूछा कि क्या मौजूदा सरकार सपा सरकार से बेहतर है? उन्होंने दावा किया कि अब सरकारी नौकरियां बिना रिश्वत के मिल रही हैं। राजभर ने कहा, ‘‘जब आप यहां से जाएंगे और जिस भी जिले में आपकी तैनाती होगी, वहां नौकरी शुरू करेंगे तो इसका प्रचार करें। अपने भाई-बहनों को बताएं कि अगर वे भी बिना पैसे दिए नौकरी चाहते हैं तो योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाएं।’’इसके बाद उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों से पूछा कि उनमें से कितने लोग इस संदेश का प्रचार करेंगे। इस पर लगभग सभी लोगों ने हाथ उठाया। राजभर ने भगवान हनुमान का उल्लेख करते हुए नवनियुक्त अधिकारियों से विपक्षी दलों के खिलाफ प्रचार करने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘अकेले हनुमान जी ने रावण की पूरी ताकत का पता लगाने के बाद लंका जलाई थी और फिर भगवान राम को इसकी जानकारी देने लौटे थे। आप यहां 1,375 लोग हैं। मुझे बताएं, क्या आप समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की लंका जलाएंगे या नहीं?’’उन्होंने कहा, ‘‘चिंता मत कीजिए, हालांकि मैं अकेले ही रोज उनकी लंका में आग लगाता रहता हूं।’’मंत्री ने राज्य सरकार के कामकाज की आलोचना करने को लेकर विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिलों के बीच संपर्क बेहतर हुआ है, गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी बनाई गई हैं और विकास कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लोग कहते हैं कि योगी सरकार ने कुछ किया ही नहीं है। लगता है उनके चश्मे का नंबर बढ़ गया है, इसलिए उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता।’’विपक्ष पर हमला करते हुए राजभर ने कहा, ‘‘चाहे कांग्रेस के लोग हों या सपा के, ये लोग वास्तव में मरे हुए लोग हैं... जिंदा नहीं हैं। वे विचारों की राजनीति नहीं करते, बल्कि केवल विरोध की राजनीति करते हैं। वे नफरत की राजनीति करना चाहते हैं, लेकिन जनता नफरत की राजनीति नहीं चाहती। वह भाईचारा और आपसी सद्भाव चाहती है।’’उन्होंने लोगों से अपने माता-पिता और पूर्वजों की सीख के अनुसार काम करने की अपील करते हुए कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में यह सुनिश्चित किया जाए कि सपा समाप्त हो जाए और कांग्रेस आधी रह जाए।
वैश्विक व्यापार में संरक्षणवाद और आयात शुल्कों को लेकर जारी उथल-पुथल के बीच भारतीय दवा उद्योग के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के बाजार से एक बेहद राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा अपनी घरेलू स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और दवाओं की किल्लत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कुछ खास जरूरी और जीवनरक्षक दवाओं (Essential and Life-Saving Drugs) को आयात शुल्क यानी टैरिफ से पूरी तरह मुक्त (Tariff-Free) करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इस रणनीतिक फैसले का सीधा और सबसे बड़ा लाभार्थी 'विश्व की फार्मेसी' (Pharmacy of the World) के रूप में विख्यात भारत बनने जा रहा है।भारतीय फार्मास्यूटिकल सेक्टर लंबे समय से अमेरिकी बाजार में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता रहा है। अमेरिका में बेची जाने वाली हर तीन में से एक जेनेरिक दवा भारतीय कंपनियों के संयंत्रों में तैयार की जाती है। ऐसे में दवाओं की कुछ विशिष्ट श्रेणियों पर आयात शुल्क हटने या शून्य किए जाने से भारतीय फार्मा कंपनियों के लाभ मार्जिन (Profit Margins) में सीधा सुधार होगा और अमेरिका में उनके उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक ताकत और अधिक मजबूत होगी। यह फैसला न केवल भारत के फार्मा निर्यात को नई गति देगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की केंद्रीय भूमिका पर भी एक बार फिर मुहर लगाएगा।किन दवाओं को मिल सकती है टैरिफ फ्री राहत? कैंसर, हृदय रोग और एंटीबायोटिक्स लिस्ट में आगेअमेरिकी स्वास्थ्य विनियामकों और व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैरिफ छूट का प्राथमिक दायरा उन दवाओं तक सीमित रखा जा रहा है जिनकी अमेरिकी घरेलू बाजार में गंभीर कमी (Drug Shortages) देखी जा रही है या जिनकी कीमतें वहां के आम नागरिकों की जेब पर अत्यधिक भारी पड़ रही हैं। इसमें कैंसर के उपचार में काम आने वाली ऑन्कोलॉजी दवाएं, हृदय रोग (Cardiovascular) की जरूरी दवाएं, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और कई महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक्स व एंटी-इफेक्टिव फॉर्मूलेशन शामिल हैं।इसके अलावा, कुछ विशिष्ट जटिल जेनेरिक फॉर्मूलेशन और रेयर डिजीज (दुर्लभ बीमारियों) में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को भी इस टैरिफ-मुक्त व्यवस्था के तहत प्राथमिकता दी जा रही है। अमेरिकी अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा तंत्र पर दवाओं की आसमान छूती कीमतों के चलते भारी दबाव था। स्थानीय स्तर पर इन दवाओं का उत्पादन तुरंत बढ़ाना संभव नहीं था, जिसके चलते अमेरिकी प्रशासन ने आयात निर्भरता को स्वीकार करते हुए शुल्क हटाने का व्यावहारिक रास्ता चुना है। भारत की सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला, ल्यूपिन, अरबिंदो फार्मा और जाइडस लाइफसाइंसेज जैसी शीर्ष दवा निर्माता कंपनियों के पास इन दवाओं के उत्पादन की विशाल और विश्वस्तरीय क्षमताएं मौजूद हैं, जिससे उन्हें इस नीतिगत ढील का सीधा रणनीतिक लाभ मिलना तय है।यूएस-इंडिया फार्मा व्यापार: भारतीय कंपनियों की बैलेंस शीट और शेयर बाजार पर क्या होगा असर?भारत के कुल दवा निर्यात में अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी लगभग 30 से 35 प्रतिशत के बीच रहती है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान सख्त यूएस एफडीए (USFDA) ऑडिट्स, मूल्य दबाव (Price Erosion) और कुछ नियामकीय अनिश्चितताओं के कारण भारतीय फार्मा कंपनियों को अमेरिकी बाजार में कड़े वित्तीय संघर्ष का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में चुनिंदा दवाओं पर टैरिफ खत्म होने से कंपनियों की शिपिंग लागत में सीधी बचत होगी और उनका ईबीआईटीडीए (EBITDA) मार्जिन मजबूत होगा।वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस घोषणा के बाद दलाल स्ट्रीट और घरेलू शेयर बाजार में लिस्टेड फार्मा शेयरों में नई चमक देखने को मिलेगी। विशेष रूप से वे कंपनियां जिनका अमेरिकी बाजार में बड़ा एक्सपोजर है और जिनके पास यूएस एफडीए से अनुमोदित एब्रिविएटेड न्यू ड्रग एप्लीकेशंस (ANDAs) की बड़ी पाइपलाइन मौजूद है, उनके राजस्व में आगामी तिमाहियों के दौरान ठोस वृद्धि दर्ज हो सकती है। आयात शुल्क हटने से भारतीय कंपनियां अपनी सप्लाई को अधिक तेजी से अमेरिकी अस्पतालों और फार्मेसी चेन्स तक पहुंचा सकेंगी, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार संतुलन को भी नया संबल मिलेगा।घरेलू स्वास्थ्य प्रणाली और एपीआई (API) सेक्टर को नई दिशा: चीन पर निर्भरता घटने का फायदाअमेरिका द्वारा दवाओं को टैरिफ फ्री करने की यह कवायद केवल तैयार दवाओं (Finished Dosages) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स यानी एपीआई (API) और बल्क ड्रग्स के वैश्विक समीकरणों को भी सीधे प्रभावित करेगी। कोविड महामारी के बाद से ही पश्चिमी देश अपनी दवा आपूर्ति के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भरता को खत्म करने की रणनीति (China Plus One) पर काम कर रहे हैं। भारत ने केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के जरिए घरेलू स्तर पर एपीआई और की स्टार्टिंग मैटेरियल्स (KSMs) के निर्माण में भारी आत्मनिर्भरता हासिल की है।जब अमेरिका जैसी दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था कुछ खास दवाओं पर आयात प्रतिबंधों और टैरिफ में ढील देती है, तो भारतीय निर्माताओं को अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार करने और अनुसंधान व विकास (R&D) में और अधिक पूंजी लगाने का प्रोत्साहन मिलता है। तेलंगाना के हैदराबाद जीनोम वैली, गुजरात के अंकलेश्वर और अहमदाबाद फार्मा क्लस्टर, महाराष्ट्र के तारापुर और हिमाचल प्रदेश के बद्दी जैसे प्रमुख भारतीय फार्मा हब्स से अमेरिकी बाजारों के लिए शिपमेंट्स की रफ्तार तेज होने की पूरी उम्मीद है। संक्षेप में कहें तो, यह घटनाक्रम न केवल भारतीय फार्मा निर्यातकों के लिए एक बड़ी वित्तीय राहत है, बल्कि यह वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भारत की अनिवार्य और अपरिहार्य स्थिति का भी स्पष्ट प्रमाण है।
होर्मुज बंद रहा तो 120 डॉलर तक जा सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें, भारत की अर्थव्यवस्था पर गहराएगा संकट
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था पर संकट गहरा सकता है।
उपचुनावों से पहले बंगाल की एसआईआर याचिकाएं नहीं सुनेगा सुप्रीम कोर्ट, 6 अक्टूबर को वोटिंग
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित याचिकाओं पर उपचुनाव से पहले सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में छिपे अधिक नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट के गंभीर स्वास्थ्य खतरों से देश के नागरिकों को सीधे तौर पर सचेत करने के लिए पैकेट के ठीक आगे 'फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल' (Front-of-Pack Labelling - FOPL) अनिवार्य करने की मांग पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपना रुख स्पष्ट करने की तैयारी कर ली है। सुप्रीम कोर्ट की मुख्य पीठ ने इस संवेदनशील और 140 करोड़ नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े जनहित के मुद्दे पर सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना अंतिम निर्णय सुरक्षित रख लिया है। शीर्ष अदालत में दाखिल इस जनहित याचिका (PIL) में यह मांग की गई है कि पैकेट के पीछे बेहद छोटे अक्षरों में लिखे पोषण संबंधी जटिल विवरणों को आम उपभोक्ता ठीक से समझ नहीं पाते, इसलिए पैकेट के बिल्कुल सामने स्पष्ट, बड़े और रंगीन चेतावनी संकेत (Warning Labels) अनिवार्य किए जाएं।इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं, केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अपने-अपने पक्ष जोरदार तरीके से रखे। अदालत ने इस बात को गंभीरता से संज्ञान में लिया कि देश में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और पैकेज्ड स्नैक्स का बाजार जिस तेजी से बढ़ा है, उसी अनुपात में बच्चों, युवाओं और वयस्कों में गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों के मामलों में खतरनाक उछाल आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अब समूचे एफएमसीजी (FMCG) उद्योग, खाद्य उत्पादक कंपनियों और उपभोक्ता अधिकार संगठनों की सांसें अटकी हुई हैं क्योंकि अदालत का यह फैसला भारतीय फूड पैकेजिंग के पूरे परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलने की ताकत रखता है।पैकेट के पीछे बारीक अक्षरों में छिपी हकीकत बनाम पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी का सीधा टकराववर्तमान में भारत में बिकने वाले अधिकांश चिप्स, बिस्कुट, नूडल्स, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और फ्रोजन स्नैक्स के पीछे न्यूट्रिशनल वैल्यू (पोषण तालिका) बेहद बारीक अक्षरों में छापी जाती है। इस प्रणाली की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि एक सामान्य उपभोक्ता, ग्रामीण नागरिक या कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति यह आसानी से नहीं समझ पाता कि उस उत्पाद में मौजूद सोडियम, कुल शुगर और सैचुरेटेड फैट उसकी दैनिक अनुशंसित सीमा (Daily Recommended Allowance) से कितना ज्यादा है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में रेखांकित किया कि खाद्य निर्माता कंपनियां इस जटिलता का व्यावसायिक लाभ उठाती हैं और हानिकारक तत्वों से भरपूर उत्पादों को भी आकर्षक विज्ञापनों के जरिए 'हेल्दी' या 'एनर्जी से भरपूर' बताकर बेचती हैं।याचिका में वैश्विक स्वास्थ्य मानकों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अध्ययनों का हवाला देते हुए मांग की गई है कि भारत में लैटिन अमेरिकी देशों जैसे चिली, मेक्सिको और पेरू की तर्ज पर 'ब्लैक हेक्सागोनल वॉर्निंग लेबल' (काले रंग के चेतावनी चिन्ह) अनिवार्य होने चाहिए। इन चिन्हों में पैकेट के बिल्कुल सामने साफ शब्दों में उच्च चीनी (High in Sugar), उच्च नमक (High in Salt) या उच्च वसा (High in Saturated Fat) लिखा होता है। जब कोई उपभोक्ता सुपरमार्केट की शेल्फ से कोई पैकेट उठाता है, तो उसे पहली ही नजर में यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि वह अपने और अपने बच्चों के शरीर में क्या डालने जा रहा है।FSSAI का रुख और 'इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग' (INR) बनाम सख्त वॉर्निंग लेबल्स की जंगसुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकीलों ने अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश की। एफएसएसआई ने अदालत को अवगत कराया कि वह पैकेज्ड फूड्स के लिए फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग नियमों को लागू करने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है और इसके लिए विभिन्न हितधारकों, उद्योग प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ कई दौर का विचार-विमर्श किया जा चुका है। नियामक ने 'इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग' (Indian Nutrition Rating - INR) प्रणाली का प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत उत्पादों को स्टार रेटिंग (1 से 5 स्टार) देने की रूपरेखा तैयार की गई थी, ठीक उसी तरह जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर ऊर्जा दक्षता के लिए स्टार दिए जाते हैं।हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, बाल रोग विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं ने एफएसएसआई की इस स्टार-रेटिंग प्रणाली का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि स्टार रेटिंग भ्रामक हो सकती है क्योंकि कंपनियां कुछ अतिरिक्त पोषक तत्व (जैसे कृत्रिम विटामिन या फाइबर) मिलाकर अस्वास्थ्यकर जंक फूड को भी 3 या 4 स्टार रेटिंग दिलवाने में सफल हो जाएंगी, जिससे उपभोक्ता भ्रमित होंगे। जनहित याचिका में पुरजोर वकालत की गई है कि भारत जैसे विशाल और बहुभाषी देश में स्टार रेटिंग के बजाय स्पष्ट और सीधी नकारात्मक चेतावनी (Warning Signs) ही सबसे कारगर उपाय है, ताकि भाषा की समझ न होने पर भी रंग और संकेत देखकर अनपढ़ व्यक्ति भी खतरे को तुरंत भांप सके।बच्चों और युवाओं में डायबिटीज व मोटापे का विस्फोट: भारत क्यों बन रहा बीमारियों की राजधानी?चिकित्सा विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों ने पैकेज्ड फूड पर सख्त लेबलिंग को आज के समय की सबसे बड़ी राष्ट्रीय आपातकालीन जरूरत करार दिया है। भारत को दुनिया की 'डायबिटीज कैपिटल' कहा जाने लगा है और हालिया अध्ययनों के अनुसार देश में 10 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित हैं, जबकि करोड़ों लोग प्री-डायबिटिक स्थिति में हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक स्थिति भारतीय बच्चों की है, जहां पैकेज्ड जंक फूड और मीठे पेयों की अत्यधिक खपत के कारण बचपन में ही मोटापा (Childhood Obesity), फैटी लिवर और उच्च रक्तचाप की समस्याएं तेजी से पांव पसार रही हैं।जब तक पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग अनिवार्य नहीं होगी, तब तक उपभोक्ता अनजाने में धीमे जहर का सेवन करते रहेंगे। स्कूल-कॉलेजों की कैंटीनों, किराना दुकानों और ऑनलाइन क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले अधिकांश आकर्षक खाद्य पदार्थ अत्यधिक रिफाइंड कार्ब्स और प्रिजर्वेटिव्स से भरे होते हैं। सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत दलीलों में यह स्पष्ट किया गया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को मिला 'जीने का अधिकार' (Right to Life) केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक स्वस्थ जीवन और अपने भोजन के बारे में 'जानने का अधिकार' (Right to Know) भी पूरी तरह अंतर्निहित है। नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे जो उत्पाद खरीद रहे हैं, वह उनके शरीर के अंगों पर क्या असर डालेगा।खाद्य उद्योग (FMCG) की आपत्तियां और सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले का भविष्य पर असरदूसरी ओर, पैकेज्ड फूड निर्माता कंपनियों और उद्योग लॉबी ने अदालत में यह तर्क दिया है कि अत्यधिक कड़े चेतावनी लेबल लगाने से भारत के तेजी से बढ़ते फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कृषि उत्पादों की मांग प्रभावित हो सकती है। उद्योग का कहना है कि सुधारों को क्रमिक रूप से लागू किया जाना चाहिए और कंपनियों को अपनी पैकेजिंग व रेसिपी में बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की इन बेहद जटिल, तीखी और तकनीकी बहसों को सुनने के बाद सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आने वाले ऐतिहासिक फैसले पर टिकी हैं। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाती है और केंद्र सरकार व एफएसएसआई को सख्त फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल्स तुरंत लागू करने का आदेश देती है, तो भारत के उपभोक्ता संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास में यह एक युगांतरकारी मोड़ साबित होगा। यह फैसला सीधे तौर पर कंपनियों को अपने उत्पादों में चीनी, नमक और हानिकारक फैट की मात्रा घटाने के लिए मजबूर करेगा, जिससे अंततः भारत के आम नागरिकों की थाली और सेहत अधिक सुरक्षित हो सकेगी।
शेयर बाजार की अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव भरे दौर में हर निवेशक अपने खून-पसीने की कमाई को ऐसी जगह लगाना चाहता है जहां सुरक्षा पूरी हो और रिटर्न भी आकर्षक मिले। यदि आप भी अपने भविष्य के लिए बिना किसी जोखिम के गारंटीड मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो डाकघर (Post Office) की छोटी बचत योजनाएं (Small Savings Schemes) आज भी देश में निवेश का सबसे मजबूत और विश्वसनीय माध्यम बनी हुई हैं। डाक विभाग की इन योजनाओं की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इन्हें भारत सरकार का सॉवरेन गारंटी (Sovereign Guarantee) संरक्षण प्राप्त होता है, यानी यहां आपका एक-एक रुपया और उस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह सुरक्षित रहता है।चाहे आप अपनी लाडली बेटी के सुनहरे भविष्य और उच्च शिक्षा की योजना बना रहे हों, सेवानिवृत्ति के बाद मासिक पेंशन जैसी नियमित आय चाहते हों, या फिर 5 साल में अपने पैसे पर फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा ब्याज कमाना चाहते हों—डाकघर के पास हर वर्ग और उम्र के लिए सुपरहिट विकल्प मौजूद हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा इन योजनाओं पर अधिकतम 8.2% प्रति वर्ष तक का बंपर ब्याज दिया जा रहा है, जो अधिकांश बड़े वाणिज्यिक बैंकों की सामान्य सावधि जमा (FD) दरों से कहीं अधिक है।सुकन्या समृद्धि और सीनियर सिटीजन स्कीम: मिलता है सबसे ज्यादा 8.2% का बंपर ब्याजडाकघर की बचत योजनाओं में सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली दो प्रमुख योजनाएं हैं—सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS)। दोनों ही योजनाओं में सरकार वर्तमान में 8.2 प्रतिशत की उच्चतम वार्षिक ब्याज दर प्रदान कर रही है:सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): 10 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के नाम पर शुरू होने वाला यह खाता बेटियों के भविष्य के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसमें 8.2% का वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है। न्यूनतम ₹250 से शुरू होकर इसमें सालाना ₹1.5 लाख तक निवेश किया जा सकता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह योजना 'EEE' श्रेणी में आती है, यानी जमा राशि, मिलने वाला ब्याज और 21 वर्ष बाद मिलने वाली पूरी मैच्योरिटी राशि 100% टैक्स-फ्री होती है।सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS): 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह योजना नियमित आय का सबसे बड़ा सहारा है। इसमें एकमुश्त अधिकतम ₹30 लाख तक निवेश किए जा सकते हैं। 8.2% सालाना ब्याज दर के साथ इसमें हर तिमाही (Quarterly) सीधे बैंक या डाकघर खाते में ब्याज की राशि ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे बुजुर्गों को किसी पर आश्रित नहीं रहना पड़ता।नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और किसान विकास पत्र (KVP): वेल्थ क्रिएशन के अचूक हथियारयदि आपका लक्ष्य 5 से 10 वर्षों के भीतर एकमुश्त बड़ा फंड तैयार करना है, तो नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट और किसान विकास पत्र बेहतरीन विकल्प हैं:नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC): एनएससी पर सरकार 7.7% की वार्षिक दर से ब्याज दे रही है, जिसकी गणना सालाना चक्रवृद्धि आधार पर होती है और भुगतान 5 साल की मैच्योरिटी पर एक साथ किया जाता है। इस योजना में निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। साथ ही, आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत प्रतिवर्ष ₹1.5 लाख तक की कर छूट भी प्राप्त होती है।किसान विकास पत्र (KVP): अपने पैसे को पूरी तरह दोगुना करने की चाहत रखने वाले निवेशकों के लिए किसान विकास पत्र सबसे लोकप्रिय माध्यम है। वर्तमान में 7.5% के ब्याज दर के साथ इस योजना में जमा की गई मूल राशि ठीक 115 महीने (9 वर्ष और 7 महीने) में दोगुनी हो जाती है। इसमें भी निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं रखी गई है।मंथली इनकम स्कीम (MIS) और टाइम डिपॉजिट (TD): हर महीने बंधी-बंधाई कमाई का जरियापोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS): यदि आपके पास एकमुश्त पूंजी है और आप हर महीने एक तयशुदा रकम ब्याज के तौर पर पाना चाहते हैं, तो 5 वर्षीय एमआईएस योजना सबसे मुफीद है। इसमें 7.4% प्रति वर्ष की दर से मासिक ब्याज का भुगतान किया जाता है। सिंगल अकाउंट में अधिकतम ₹9 लाख और ज्वाइंट अकाउंट में ₹15 लाख तक जमा किए जा सकते हैं। ₹15 लाख के अधिकतम ज्वाइंट निवेश पर हर महीने बिना किसी जोखिम के ₹9,250 की निश्चित आमदनी घर बैठे प्राप्त होती है।पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (POTD / FD): डाकघर की सावधि जमा योजना 1, 2, 3 और 5 वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध है। 1 वर्ष पर 6.9%, 2 वर्ष पर 7.0%, 3 वर्ष पर 7.1% और 5 वर्ष की एफडी पर 7.5% का आकर्षक ब्याज मिलता है। विशेष रूप से 5 वर्षीय टाइम डिपॉजिट में निवेश करने पर धारा 80C के तहत टैक्स डिडक्शन का दोहरा लाभ भी मिलता है।पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): 15 साल की दीर्घावधि के लिए पीपीएफ पर 7.1% टैक्स-फ्री ब्याज मिल रहा है, जो रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए सुरक्षित वेल्थ क्रिएटर माना जाता है।डाकघर की प्रमुख बचत योजनाओं की ब्याज दर सूचीयोजना का नाम (Scheme Name)वार्षिक ब्याज दर (%)परिपक्वता अवधि (Tenure)न्यूनतम निवेश सीमाटैक्स लाभ (Tax Benefit)सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)8.2% (सालाना चक्रवृद्धि)21 वर्ष₹250EEE (पूर्णतः टैक्स-फ्री)सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS)8.2% (तिमाही भुगतान)5 वर्ष₹1,00080C छूट उपलब्धनेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)7.7% (सालाना चक्रवृद्धि)5 वर्ष₹1,00080C छूट उपलब्धकिसान विकास पत्र (KVP)7.5% (पैसा 115 माह में डबल)115 महीने₹1,000कोई विशेष छूट नहींपोस्ट ऑफिस 5-वर्षीय FD (TD)7.5% (त्रैमासिक चक्रवृद्धि)5 वर्ष₹1,00080C छूट उपलब्धमंथली इनकम स्कीम (POMIS)7.4% (मासिक भुगतान)5 वर्ष₹1,000ब्याज कर-योग्यपब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)7.1% (सालाना चक्रवृद्धि)15 वर्ष₹500EEE (पूर्णतः टैक्स-फ्री)5-वर्षीय रिकrecurring डिपॉजिट (RD)6.7% (त्रैमासिक चक्रवृद्धि)5 वर्ष₹100 प्रतिमाहकोई विशेष छूट नहींखाता कैसे खोलें और किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?डाकघर की इन सुपरहिट बचत योजनाओं में खाता खुलवाना बेहद आसान और झंझट-मुक्त है। आप अपने नजदीकी किसी भी प्रधान डाकघर (Head Post Office) या उप-डाकघर (Sub Post Office) में जाकर आवेदन कर सकते हैं।खाता खोलने के लिए आपको संबंधित योजना का आवेदन पत्र भरकर उसके साथ पहचान प्रमाण (आधार कार्ड या पैन कार्ड), पते का प्रमाण (बिजली बिल, वोटर आईडी, राशन कार्ड), नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो और प्रारंभिक जमा राशि (नकद या चेक) जमा करनी होती है। इसके साथ ही अब इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के मोबाइल बैंकिंग ऐप के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन आरडी, पीपीएफ और सुकन्या खाते में पैसे ट्रांसफर करने की डिजिटल सुविधा भी उपलब्ध है। यदि आप भी अपने भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देना चाहते हैं, तो इन योजनाओं में आज ही निवेश की शुरुआत कर सकते हैं।
तकनीकी और सुरक्षा के नजरिए से देखें तो केवल मोबाइल हाथ में आने से कोई भी व्यक्ति सीधे आपके बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर नहीं कर सकता। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सुरक्षा की दोहरी परतों (Two-Factor Authentication) पर काम करता है। किसी भी लेनदेन को पूरा करने के लिए केवल ऐप खोलना काफी नहीं होता, बल्कि 4 या 6 अंकों का गोपनीय UPI पिन (PIN) दर्ज करना अनिवार्य होता है। यह पिन आपके डिवाइस में नहीं, बल्कि बैंक के सुरक्षित सर्वर पर सत्यापित होता है।हालांकि, सुरक्षा के इस मजबूत घेरे के बावजूद असावधानी बरतने पर जोखिम पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। यदि आपने अपने फोन पर कोई स्क्रीन लॉक (पिन, पासवर्ड, फिंगरप्रिंट) नहीं लगाया है, या आपका स्क्रीन लॉक और UPI पिन एक ही है (जैसे जन्म का साल या 1234), तो गलत हाथों में जाने पर खाता खाली होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, यदि साइबर अपराधी फोन से सिम कार्ड निकालकर किसी अन्य डिवाइस में डाल लें, तो वे बैंक एसएमएस और ओटीपी (OTP) के जरिए पिन रीसेट करने या अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं।फोन खोते ही बिना देर किए तुरंत उठाएं ये 4 जरूरी कदमयदि आपका स्मार्टफोन कभी गुम या चोरी हो जाए, तो घबराने के बजाय नीचे दिए गए कदमों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल पूरा करें:सबसे पहले अपना सिम कार्ड (SIM Card) ब्लॉक करवाएं:जैसे ही फोन गायब हो, किसी परिजन के फोन से अपने टेलीकॉम ऑपरेटर (Jio, Airtel, Vi, BSNL) के कस्टमर केयर पर कॉल करें या नजदीकी स्टोर पर जाएं और उस नंबर का सिम कार्ड तुरंत डिएक्टिवेट/ब्लॉक करवाएं। सिम ब्लॉक होते ही आपके नंबर पर आने वाले बैंक ओटीपी (OTP) और एसएमएस अलर्ट रुक जाएंगे, जिससे कोई भी पासवर्ड रीसेट नहीं कर पाएगा।UPI और पेमेंट ऐप्स (Google Pay, PhonePe, Paytm) की सेवाएं ब्लॉक करें:पेमेंट सेवा प्रदाताओं के हेल्पलाइन नंबरों या वेबसाइट पर जाकर अपने अकाउंट को अस्थायी रूप से सस्पेंड कराएं:Google Pay: हेल्पलाइन नंबर 1800-419-0157 पर संपर्क करें या गूगल अकाउंट से डिवाइस को अनलिंक करें।PhonePe: हेल्पलाइन नंबर 080-68727374 पर कॉल करके 'Report Fraud or Lost Phone' विकल्प चुनें और अकाउंट फ्रीज कराएं।Paytm: हेल्पलाइन नंबर 0120-3888388 पर संपर्क कर 'Lost Phone' विकल्प के जरिए सभी डिवाइसेज से तुरंत लॉग-आउट कराएं।बैंक को सूचित कर नेट बैंकिंग और यूपीआई एक्सेस होल्ड कराएं:अपने बैंक के 24x7 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें और उन्हें मोबाइल खोने की सूचना दें। बैंक प्रतिनिधि से अपने खाते से जुड़े मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई एक्सेस को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का अनुरोध करें। इससे जब तक नया सिम और डिवाइस न मिले, खाते से कोई भी डेबिट ट्रांजैक्शन नहीं हो सकेगा।गूगल 'Find My Device' से फोन का डेटा रिमोटली डिलीट करें:किसी कंप्यूटर या दूसरे फोन के ब्राउज़र में [google.com/android/find](https://google.com/android/find) (आईफोन के लिए [icloud.com/find](https://icloud.com/find)) पर जाएं और अपनी उसी ईमेल आईडी से लॉगिन करें जो खोए हुए फोन में थी। वहां से 'Erase Device' विकल्प चुनकर फोन का सारा डेटा रिमोटली डिलीट (Factory Reset) कर दें। इससे फोन में मौजूद सभी ऐप्स, बैंक क्रेडेंशियल्स और कैशे मेमोरी पूरी तरह साफ हो जाएगी।पुलिस में FIR और CEIR पोर्टल पर फोन ब्लॉक करना न भूलेंवित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद नजदीकी पुलिस स्टेशन में फोन गुमशुदगी की शिकायत (FIR या NCR) दर्ज कराएं। इसके बाद भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के आधिकारिक पोर्टल CEIR (ceir.gov.in) पर जाएं। वहां अपनी पुलिस शिकायत संख्या और फोन के आईएमईआई (IMEI) नंबर की मदद से हैंडसेट को केंद्रीय स्तर पर ब्लॉक करवा दें। इससे वह फोन देश के किसी भी नेटवर्क पर बेकार हो जाएगा और कोई दूसरा व्यक्ति उसमें नया सिम डालकर भी उसका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।
पैसा कमाना जितना कठिन और पसीने का काम है, उसे संभालकर रखना और सही जगह निवेश कर उससे वेल्थ बनाना उससे भी बड़ा हुनर है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, सोशल मीडिया के दिखावे और ई-कॉमर्स की चकाचौंध में लोग अक्सर वित्तीय अनुशासन खो बैठते हैं। महीने की शुरुआत में अकाउंट में सैलरी आते ही शानो-शौकत से खर्च करना और महीने के आखिरी 10 दिनों में उधारी मांगने की नौबत आना अब एक आम मध्यमवर्गीय त्रासदी बन चुकी है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय संकट का कारण कम कमाई नहीं, बल्कि पैसों से जुड़े गलत और गैर-जिम्मेदाराना फैसले होते हैं। जब क्रेडिट कार्ड के भारी बिल, पर्सनल लोन की ईएमआई और खाली बैंक अकाउंट सामने आता है, तब लोगों के मुंह से बरबस निकलता है—'भारी मिस्टेक हो गई!'अगर आप भी अपनी मेहनत की कमाई को व्यर्थ बहने से बचाना चाहते हैं और भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करना चाहते हैं, तो रुपये-पैसों से जुड़ी इन 10 सबसे बड़ी गलतियों को आज ही समझ लें और इनसे दूरी बना लें।1. इमरजेंसी फंड (आपातकालीन कोष) न बनानाजीवन में बीमारी, नौकरी छूटना, अचानक घर की मरम्मत या कोई पारिवारिक संकट कभी भी बताकर नहीं आता। सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग अपनी पूरी कमाई खर्च कर देते हैं और कोई लिक्विड इमरजेंसी फंड नहीं रखते। आपातकाल आने पर उन्हें हाई-इंटरेस्ट वाले पर्सनल लोन लेने पड़ते हैं या क्रेडिट कार्ड स्वाइप करना पड़ता है, जो उन्हें लंबे कर्ज के भंवरजाल में धकेल देता है।समाधान: अपने कम से कम 6 महीने के अनिवार्य खर्च (राशन, किराया, ईएमआई, बच्चों की फीस) के बराबर रकम सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड म्यूचुअल फंड में अलग सुरक्षित रखें।2. कमाई से ज्यादा खर्च और दिखावे का कल्चर (Lifestyle Inflation)आजकल इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लाइफस्टाइल की तस्वीरें डालने की होड़ में लोग अपनी हैसियत से बाहर जाकर महंगे कैफे, डिजाइनर कपड़े और गैजेट्स पर अनाप-शनाप खर्च कर रहे हैं। इसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'लाइफस्टाइल इंफ्लेशन' कहा जाता है। आमदनी बढ़ते ही खर्च का दायरा दोगुना बढ़ा लेना भविष्य की बचत का गला घोंट देता है।समाधान: 50-30-20 के क्लासिक बजटिंग नियम का पालन करें—50% बुनियादी जरूरतों पर, 30% इच्छाओं पर और कम से कम 20% अनिवार्य बचत व निवेश में जाना चाहिए।3. क्रेडिट कार्ड का 'Minimum Due' भरकर खुश हो जानाक्रेडिट कार्ड जितनी बड़ी सुविधा है, गलत इस्तेमाल होने पर उतना ही बड़ा वित्तीय फंदा बन जाता है। कई लोग बिल आने पर केवल 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (लगभग 5%) भर देते हैं और सोचते हैं कि काम चल गया। असल में, बचे हुए 95% बकाए पर बैंक 36% से लेकर 45% सालाना तक का चक्रवृद्धित ब्याज (Compound Interest) वसूलते हैं।समाधान: क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल हमेशा ड्यू डेट से 2-3 दिन पहले चुकाएं। यदि पूरा भुगतान करने की क्षमता न हो, तो क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।4. बिना सोचे-समझे 'Buy Now, Pay Later' (BNPL) और ईएमआई के जाल में फंसनाआजकल हर छोटी-बड़ी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर 'नो कॉस्ट ईएमआई' और 'बाय नाउ, पे लेटर' के विकल्प मौजूद हैं। 10 हजार के जूते से लेकर 1 लाख का फोन तक लोग ईएमआई पर उठा लेते हैं। कई छोटी-छोटी ईएमआई मिलकर महीने के वेतन का 40-50% हिस्सा पहले ही काट लेती हैं, जिससे निवेश के लिए एक रुपया नहीं बचता।समाधान: उपभोग की ऐसी किसी भी चीज को ईएमआई पर न खरीदें जो समय के साथ अपनी कीमत खो देती है (Depreciating Assets)। यदि आपके पास नकद पैसे नहीं हैं, तो उस खरीदारी को कुछ महीनों के लिए टाल दें।5. टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस को फिजूलखर्ची समझनाअक्सर युवा सोचते हैं कि 'मुझे क्या होने वाला है' और वे बीमा लेने से कतराते हैं। एक गंभीर बीमारी पूरे परिवार की दशकों की जमा पूंजी, एफडी और म्यूचुअल फंड को कुछ ही हफ्तों में चट कर सकती है। इसी तरह परिवार के कमाने वाले सदस्य के असामयिक निधन पर पीछे छूटा परिवार सड़क पर आ सकता है।समाधान: अपनी वार्षिक आय का कम से कम 15 से 20 गुना का एक प्योर टर्म प्लान लें। साथ ही, पूरे परिवार के लिए एक व्यापक फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी जरूर रखें।6. निवेश शुरू करने में देरी और 'कल से करूंगा' का रवैयापैसों के मामले में समय ही सबसे बड़ा धन है। कई लोग 20 से 30 साल की उम्र सिर्फ यह सोचकर गंवा देते हैं कि जब बड़ी सैलरी होगी तब निवेश शुरू करेंगे। ऐसा करके वे अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा कहे गए दुनिया के आठवें अजूबे—'कंपाउंडिंग की शक्ति' (Power of Compounding)—को पूरी तरह खो देते हैं।समाधान: चाहे ₹500 या ₹1,000 प्रति माह ही क्यों न हो, 20-22 साल की उम्र से ही इक्विटी म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) शुरू कर दें। 10 साल की देरी आपके अंतिम कॉर्पस में करोड़ों का नुकसान कर सकती है।7. केवल बैंक सेविंग्स अकाउंट या एफडी पर भरोसा करनाबचत खाते में पड़ा पैसा धीरे-धीरे अपनी क्रय शक्ति खोता रहता है क्योंकि महंगाई दर (Inflation) 5 से 6 प्रतिशत रहती है और सेविंग्स अकाउंट में ब्याज केवल 2.5 से 3 प्रतिशत मिलता है। यानी आपका पैसा वास्तव में बढ़ नहीं रहा, बल्कि सिकुड़ रहा है। एफडी में भी टैक्स कटने के बाद मिलने वाला नेट रिटर्न महंगाई को मात नहीं दे पाता।समाधान: अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाएं। सोने, रियल एस्टेट, पीपीएफ के साथ-साथ इक्विटी और इंडेक्स फंड्स में पैसा लगाएं ताकि महंगाई को पछाड़कर वास्तविक संपत्ति तैयार हो सके।8. सोशल मीडिया टिप्स, इन्फ्लुएंसर्स और पेनी स्टॉक्स के चक्कर में पड़नायूट्यूब, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम पर रातों-रात अमीर बनाने का सपना दिखाने वाले 'फिन-इन्फ्लुएंसर्स' और ऑप्शंस ट्रेडिंग के तथाकथित गुरुओं के बहकावे में आकर अपनी मेहनत की कमाई जुए की तरह गंवा देना आज के युवाओं की सबसे बड़ी त्रासदी है।समाधान: शेयर बाजार को लॉटरी का टिकट न समझें। बिना वित्तीय समझ के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) और पेनी स्टॉक्स से दूर रहें। केवल सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड एडवाइजर्स की सलाह लें या सीधे इंडेक्स फंड्स में निवेश करें।9. इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को एक साथ मिलाना (ULIP व पारंपरिक पॉलिसियां)भारत में सबसे ज्यादा बेची जाने वाली पारंपरिक एंडोमेंट पॉलिसियां और मनी-बैक प्लान्स निवेशकों को न तो पर्याप्त बीमा कवर देते हैं और न ही अच्छा रिटर्न। 15-20 साल तक भारी प्रीमियम भरने के बाद जब रिटर्न हाथ आता है, तो वह 4 से 5 प्रतिशत सालाना से ज्यादा नहीं होता, जो बैंक एफडी से भी कम है।समाधान: निवेश और सुरक्षा को हमेशा अलग रखें। सुरक्षा के लिए सस्ता और बड़ा 'टर्म इंश्योरेंस' लें और निवेश के लिए अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार 'म्यूचुअल फंड, पीपीएफ या एनपीएस' का चयन करें।10. रिटायरमेंट प्लानिंग को बुढ़ापे का काम समझनाअधिकांश भारतीय अपने बच्चों की पढ़ाई, शादी और मकान बनाने में अपनी सारी पूंजी झोंक देते हैं, लेकिन अपनी रिटायरमेंट के लिए एक फंड तक नहीं बनाते। वे यह भूल जाते हैं कि उच्च शिक्षा और घर के लिए तो बैंक लोन दे देगा, लेकिन बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए कोई भी बैंक 'रिटायरमेंट लोन' नहीं देता।समाधान: अपनी पहली नौकरी से ही रिटायरमेंट की योजना बनाएं। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), पीपीएफ (PPF) और इक्विटी फंड्स में हर महीने एक निश्चित हिस्सा अपनी वृद्धावस्था के लिए सुरक्षित करना शुरू करें।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने असेसमेंट ईयर 2026-27 (फाइनेंशियल ईयर 2025-26) के लिए टैक्स ऑडिट कराने वाले कारोबारियों, कंपनियों और प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत दी है। आयकर कानून के तहत टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (Tax Audit Report - Form 3CA/3CB-3CD) जमा करने की अंतिम तिथि जो पहले 30 सितंबर निर्धारित थी, उसे बढ़ाकर अब 21 अक्टूबर कर दिया गया है।त्योहारी सीजन से ठीक पहले आई इस घोषणा से देश भर के लाखों व्यापारियों, कॉरपोरेट्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) ने राहत की सांस ली है। विभिन्न व्यापारिक संगठनों और पेशेवर निकायों ने आयकर विभाग के पोर्टल पर भारी लोड, तकनीकी अड़चनों और जीएसटी व टीडीएस रिकॉन्सिलेशन के भारी काम का हवाला देते हुए समयसीमा बढ़ाने की पुरजोर मांग की थी। सीबीडीटी ने इन व्यावहारिक कठिनाइयों को संज्ञान में लेते हुए 21 अतिरिक्त दिनों की मोहलत प्रदान की है।तो अब कब तक भरा जाएगा इनकम टैक्स रिटर्न (ITR)? 21 नवंबर तक का मिला समयटैक्स ऑडिट रिपोर्ट की तारीख बढ़ने के साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह था कि ऐसे करदाताओं के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की अंतिम तारीख क्या होगी। नियमों के अनुसार, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने के बाद ही संबंधित व्यक्ति या संस्था अपना आयकर रिटर्न अंतिम रूप से सबमिट कर सकते हैं।सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं (धारा 139(1) के स्पष्टीकरण 2 के तहत आने वाले मामलों) के लिए आईटीआर फाइलिंग की आखिरी तारीख जो पहले 31 अक्टूबर थी, उसे भी आगे बढ़ाकर 21 नवंबर कर दिया गया है। यानी टैक्सपेयर्स को ऑडिट रिपोर्ट सबमिट करने के बाद रिटर्न दाखिल करने के लिए पूरे एक महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा।अनुपालन का प्रकार (Compliance)पूर्व निर्धारित अंतिम तिथिघोषित नई अंतिम तिथिटैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करना (Form 3CA/3CB-3CD)30 सितंबर21 अक्टूबरइनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग (ऑडिट केस)31 अक्टूबर21 नवंबरट्रांसफर प्राइसिंग (TP Cases - Form 3CEB/ITR)31 अक्टूबर (रिपोर्ट) / 30 नवंबर (ITR)यथावत (अपरिवर्तित)किन टैक्सपेयर्स को मिलेगा इस एक्सटेंशन का फायदा और किसे नहीं?यह जानना बेहद जरूरी है कि यह राहत सभी श्रेणी के करदाताओं के लिए सामान्य रूप से लागू नहीं है:किन्हें मिला फायदा:सभी पंजीकृत कंपनियां (प्राइवेट व पब्लिक लिमिटेड)।ऐसे गैर-कॉर्पोरेट कारोबारी, फर्में और प्रोफेशनल्स जिनके खाते आयकर अधिनियम की धारा 44AB या किसी अन्य लागू कानून के तहत ऑडिट होना अनिवार्य हैं।ऐसी ऑडिट योग्य फर्मों के वर्किंग पार्टनर्स (साझेदार)।किन्हें नहीं मिला फायदा:सामान्य वेतनभोगी कर्मचारी (Salaried Individuals) और गैर-ऑडिट वाले सामान्य टैक्सपेयर्स, जिनके लिए ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की मूल समयसीमा (31 जुलाई) पहले ही समाप्त हो चुकी है।ट्रांसफर प्राइसिंग (Transfer Pricing) के दायरे में आने वाली वे बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो धारा 92E के तहत फॉर्म 3CEB भरती हैं; उनके लिए निर्धारित समयसीमा पूर्ववत ही लागू रहेगी।टैक्सपेयर्स और प्रोफेशनल्स के लिए जरूरी सलाह: अंतिम दिन का न करें इंतजारकर विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि 21 दिनों की यह मोहलत बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन करदाताओं को आखिरी तारीख तक टालमटोल करने से बचना चाहिए। टैक्स ऑडिट के दौरान बैंक खातों का मिलान, फॉर्म 26AS, एआईएस (AIS), टीआईएस (TIS) और जीएसटी पोर्टल के डेटा का पूर्ण मिलान आवश्यक होता है।अंतिम दिनों में ई-फाइलिंग पोर्टल पर सर्वर लोड बढ़ने से ओटीपी वेरिफिकेशन और डिजिटल सिग्नेचर (DSC) अटैच करने में दिक्कतें आती हैं। इसलिए अपने ऑडिटर से संपर्क कर समय रहते ऑडिट रिपोर्ट स्वीकृत करवाएं और 21 नवंबर से पहले अपना आईटीआर फाइल करें, ताकि धारा 234A के तहत लगने वाले ब्याज और लेट फीस के अनावश्यक वित्तीय बोझ से बचा जा सके।
Himalaya संरक्षण के लिए व्यापक नीति बनाएं केंद्र और राज्य: Murli Manohar Joshi
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने सोमवार को केंद्र और हिमालयी राज्यों की सरकारों से ऐसी योजनाओं को बढ़ावा देने का आग्रह किया, जिससे हिमालय का संरक्षण हो तथा पर्यावरण, विकास, रक्षा क्षेत्र और संस्कृति का भी संवर्धन हो सके। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हिमालय क्षेत्र में पर्यावरणीय आपदाओं और विकास कार्यों से समस्त जनजीवन संकट का सामना कर रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हिमालय के गांवों से पलायन भी निरंतर बढ़ता जा रहा है, विभिन्न निर्माण कार्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण टूट रहे हैं और सड़कें व अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार चेतावनी दे रहा है और ऐसे में जब हिमालय हमारी संस्कृति संरक्षण, प्राकृतिक संपदा और अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्रोत है, उसकी उपेक्षा करना देश के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है।’’जोशी ने हिमालय की तलहटी में बसे सभी राज्यों द्वारा इस पर गंभीरता से विचार कर संपूर्ण हिमालय के लिए एक समेकित सर्वांगीण विकास योजना बनाने की आवश्यकता पर तत्काल विचार करने भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल इन राज्यों से ही संबंधित नहीं है बल्कि हिमालय के कारण सारा देश संरक्षित है। भाजपा नेता ने पोस्ट में कहा कि हिमालय से देश की 20 प्रतिशत जीडीपी प्राप्त होती है, इसलिए उसकी रक्षा करना राष्ट्र की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘इस स्थिति में भी कुछ सरकारों द्वारा वैज्ञानिकों, भूगर्भशास्त्रियों, भू-वैज्ञानिकों, कृषि एवं जैव विविधता के विद्वानों के प्रतिवेदनों की उपेक्षा करके, विभिन्न यात्राओं, पर्यटन कार्यक्रमों एवं बिना सोचे-समझे हिमालय क्षेत्र में विकास की ऐसी योजनाओं को संचालित किया जा रहा है, जिससे हिमालय की संधारण क्षमता तेजी से समाप्त होती जा रही है।’’जोशी ने कहा, ‘‘मैं केंद्र एवं हिमालयी राज्यों की सरकारों से आग्रह करता हूं कि वे ऐसी योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाएं, जिससे हिमालय का संरक्षण हो तथा पर्यावरण, विकास, रक्षा क्षेत्र और संस्कृति का संवर्धन हो सके। मेरा मानना है कि हिमालय है तो हम हैं।’’इससे पहले शुक्रवार को, जोशी ने उत्तराखंड के बद्रीनाथ में हाल में आयोजित एक सांस्कृतिक उत्सव पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा था कि किसी पवित्र स्थल पर ऐसे संगीत कार्यक्रम की अनुमति देना न केवल सांस्कृतिक मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि पवित्र धाम की शुचिता पर सीधा हमला भी है। मीडिया की खबरों के अनुसार, उत्तराखंड के चमोली जिले के बद्रीनाथ शहर में ‘संस्कृति हमारी धरोहर, हमारा भविष्य’ विषय पर दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया था। जोशी ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, ‘‘बद्रीनाथ धाम में संगीत समारोह को अनुमति प्रदान करना न केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उन्लंघन है बल्कि धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है।
भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, पाटन चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका रद करने की मांग खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से उनकी जीत को चुनौती देने वाली याचिका को रद करने की मांग की थी।
AAP को चंदा देने वालों की लिस्ट जारी; आशुतोष रांका का भी नाम, केजरीवाल ने कितना दिया
प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट और ट्राइडेंट लिमिटेड ने आप को 5-5 करोड़ रुपये दिए। ट्राइडेंट की ओर से दिया गया 5 करोड़ रुपये का चेक 9 जनवरी 2026 का है। उस समय राजिंदर गुप्ता आप के साथ थे। वह अक्टूबर 2025 में राज्यसभा सदस्य बने थे।

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