नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच उत्सुकता चरम पर है। सरकार द्वारा आयोग के गठन की घोषणा के बाद अब सबसे बड़ा कौतूहल 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) को लेकर बना हुआ है। फिटमेंट फैक्टर ही वह मुख्य फॉर्मूला या आधार होगा, जिसके जरिए केंद्रीय कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी (मूल वेतन) और भविष्य के सभी भत्ते तय किए जाएंगे। फिटमेंट फैक्टर का आंकड़ा जितना ऊंचा होगा, कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और उनका हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी उसी अनुपात में छलांग लगाएगा। हालांकि, सरकार की तरफ से अभी फिटमेंट फैक्टर की अंतिम दर पर मुहर लगना बाकी है।आखिर क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? आसान भाषा में समझिए इसका गणितफिटमेंट फैक्टर असल में एक 'गुणक' (Multiplier) की तरह काम करता है। सातवें वेतन आयोग के तहत मिल रही मौजूदा बेसिक सैलरी को इसी तय गुणक से गुणा (Multiply) करके नए वेतन आयोग की बेसिक सैलरी निकाली जाती है।उदाहरण के लिए: यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन 20,000 रुपये है और आगामी वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.50 तय किया जाता है, तो उसकी नई बेसिक सैलरी बढ़कर सीधी 50,000 रुपये ($20,000 imes 2.5$) हो जाएगी। यह नई बढ़ी हुई बेसिक सैलरी ही आगे चलकर आपके महंगाई भत्ते (DA), एचआरए (HRA) और प्रोविडेंट फंड (PF) की गणना का नया बेस बनती है।2, 2.5 और 3 के फिटमेंट फैक्टर का पूरा गुणा-भागविशेषज्ञों और कर्मचारी संगठनों के आकलन के मुताबिक, फिटमेंट फैक्टर के अलग-अलग पैमानों पर सैलरी में होने वाला बदलाव कुछ इस प्रकार दिखेगा:यदि फिटमेंट फैक्टर 2 तय हुआ: इस स्थिति में कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी सीधे दोगुनी हो जाएगी। हालांकि, कर्मचारी संगठन इसे कम मान रहे हैं।यदि फिटमेंट फैक्टर 2.5 तय हुआ: मध्यम मार्ग के तहत अगर यह फैक्टर 2.5 लागू होता है, तो सैलरी में एक सम्मानजनक और बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। अधिकांश एक्सपर्ट्स इसी दायरे की उम्मीद जता रहे हैं।यदि फिटमेंट फैक्टर 3 तय हुआ: यदि सरकार कर्मचारियों की मांग मानकर इसे 3 तय करती है, तो पे-मैट्रिक्स के लेवल-1 से लेकर लेवल-13 तक के सभी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और एचआरए में बंपर ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी।बेसिक सैलरी के साथ HRA में भी होगा बंपर इजाफाफिटमेंट फैक्टर बढ़ने का सबसे बड़ा लॉटरी इफेक्ट कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर पड़ता है। चूंकि एचआरए का निर्धारण शहर की कैटेगरी (X, Y और Z) के हिसाब से क्रमशः 27%, 18% और 9% की दर से बेसिक सैलरी के ऊपर ही कैलकुलेट किया जाता है, इसलिए जैसे ही फिटमेंट फैक्टर के कारण बेसिक सैलरी का ग्राफ ऊपर जाएगा, वैसे ही मिलने वाली एचआरए की रकम भी अपने आप कई गुना बढ़ जाएगी। यही वजह है कि देश के तमाम केंद्रीय कर्मचारी संगठन सरकार पर ज्यादा से ज्यादा फिटमेंट फैक्टर रखने का दबाव बना रहे हैं, ताकि उनकी कुल मासिक आय में उल्लेखनीय सुधार हो सके।गठन की घोषणा के बाद अब फाइनल नोटिफिकेशन का इंतजारकेंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग के गठन को हरी झंडी दे दी है, लेकिन इसके सदस्यों की आधिकारिक नियुक्ति, कार्यक्षेत्र (Terms of Reference) और फिटमेंट फैक्टर के अंतिम फॉर्मूले पर कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। कर्मचारी यूनियनों की पुरजोर मांग है कि महंगाई के इस दौर को देखते हुए फिटमेंट फैक्टर को कम से कम 2.5 से 3 के बीच ही रखा जाए। फिलहाल, देश के करीब 48 लाख से अधिक सेवारत कर्मचारियों और 67 लाख से ज्यादा पेंशनभोगियों की नजरें अब आयोग की आने वाली सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) देश के करोड़ों नौकरीपेशा (Salaried) लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे भरोसेमंद और बड़ा जरिया है। इस फंड में कर्मचारी की बेसिक सैलरी का एक हिस्सा और उतना ही योगदान नियोक्ता (Company) की तरफ से जमा होता है, जिस पर सरकार हर साल आकर्षक ब्याज भी देती है। हाल ही में 'EPFO 3.0' के अपग्रेडेशन और डिजिटल सेवाओं में सुधार की चर्चाओं के बीच, कई कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे अपनी किसी भी जरूरत पर जब चाहें अपने पीएफ खाते का 100 फीसदी (पूरा) पैसा निकाल सकते हैं?इसका सीधा और साफ जवाब है—'बिल्कुल नहीं'। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सख्त नियमों के मुताबिक, नौकरी में रहते हुए आपको अपने पीएफ खाते से पूरी रकम निकालने की अनुमति कतई नहीं दी जाती है। 100% निकासी केवल कुछ बेहद विशेष और अनिवार्य परिस्थितियों में ही संभव है।इन 2 खास परिस्थितियों में ही निकाल सकते हैं पीएफ का पूरा पैसामौजूदा ईपीएफओ गाइडलाइंस के अनुसार, कोई भी खाताधारक अपने पीएफ का शत-प्रतिशत पैसा केवल नीचे दी गई स्थितियों में ही निकाल (Final Settlement) सकता है:रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने पर: जब कर्मचारी अपनी नौकरी के बाद 58 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तो वह अपने ईपीएफ खाते में जमा पूरी राशि (कर्मचारी + नियोक्ता का हिस्सा + ब्याज) निकालने के लिए पूरी तरह पात्र हो जाता है।नौकरी छूटने या बेरोजगारी की स्थिति में: यदि किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है और वह बेरोजगार हो जाता है, तो वह पूरा फंड निकाल सकता है। हालांकि, इसके लिए भी एक समय सीमा तय है।बेरोजगारी के दौरान पैसे निकालने का क्या है '75:25' का फॉर्मूला?नौकरी छूटने की स्थिति में कर्मचारियों को तुरंत वित्तीय संकट से बचाने के लिए ईपीएफओ ने एक विशेष व्यवस्था की है। नियमों के मुताबिक:1 महीना बेरोजगार रहने पर: नौकरी छूटने के ठीक एक महीने बाद (30 दिन पूरे होने पर) कर्मचारी अपनी कुल पीएफ राशि का अधिकतम 75 फीसदी हिस्सा एडवांस के रूप में निकाल सकता है।2 महीने बेरोजगार रहने पर: यदि कर्मचारी को लगातार दो महीने (60 दिन) या उससे अधिक समय तक कोई नई नौकरी नहीं मिलती है, तो वह अपने खाते में बची हुई शेष 25 फीसदी राशि को भी निकालकर अपना फुल एंड फाइनल सेटलमेंट कर सकता है।नई नौकरी मिलते ही पीएफ निकालना घाटे का सौदा, ट्रांसफर करना है बेस्टअक्सर देखा जाता है कि कई कर्मचारी कंपनी बदलते ही अपनी पुरानी पीएफ राशि को सीधे बैंक खाते में निकाल लेते हैं। ईपीएफओ और वित्तीय विशेषज्ञ ऐसा करने की सख्त मनाही करते हैं। संगठन का कहना है कि नौकरी बदलने पर आपको अपनी पुरानी पीएफ राशि को अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) की मदद से नई कंपनी के पीएफ खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर (Transfer) कर लेना चाहिए।ऐसा करने से आपके पीएफ खाते पर मिलने वाले चक्रवर्धि ब्याज (Compounding Interest) का क्रम नहीं टूटता, आपकी कुल सर्विस हिस्ट्री (सेवा अवधि) लगातार जुड़ी रहती है (जो आगे चलकर पेंशन के लिए जरूरी है) और रिटायरमेंट तक एक बहुत बड़ा फंड तैयार हो जाता है। बार-बार पीएफ का पैसा निकालने से आपका भविष्य असुरक्षित होता है और यदि सेवा अवधि 5 साल से कम है तो निकाली गई रकम पर भारी टैक्स भी देना पड़ सकता है।एमरॉन्सी में काम आएगी 'आंशिक निकासी' (PF Advance) की सुविधाभले ही नौकरी के दौरान आपको 100% रकम निकालने की इजाजत न हो, लेकिन ईपीएफओ अपने सदस्यों को जीवन की कुछ महत्वपूर्ण और आपातकालीन जरूरतों के लिए आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) यानी पीएफ एडवांस की बेहतरीन सुविधा देता है। आप नीचे दिए गए कार्यों के लिए अपने पीएफ खाते से एक निश्चित सीमा तक पैसा निकाल सकते हैं:स्वयं या बच्चों की उच्च शिक्षा (Higher Education) और शादी के लिए।नया घर खरीदने, प्लॉट लेने या मकान बनवाने के लिए।होम लोन (Home Loan) की बची हुई ईएमआई को चुकाने के लिए।परिवार में किसी गंभीर बीमारी के इलाज (Medical Emergency) के लिए।ध्यान रहे कि हर एक जरूरत के लिए पीएफ से पैसे निकालने की पात्रता, नौकरी की न्यूनतम समय सीमा और निकासी की अधिकतम लिमिट अलग-अलग तय की गई है।फाइनल सेटलमेंट से पहले जरूर करें सोच-विचारफाइनेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईपीएफ को महज एक सेविंग अकाउंट की तरह नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह आपके बुढ़ापे की लाठी है। इसमें आपके और कंपनी के योगदान के साथ-साथ सालाना मिलने वाला सरकारी ब्याज आपके फंड को तेजी से बढ़ाता है। इसलिए जब तक कोई बेहद गंभीर संकट न हो, पीएफ के पूरे पैसे को निकालने के बजाय उसे खाते में ही बरकरार रहने दें, ताकि रिटायरमेंट के बाद आपकी आर्थिक आजादी और सुरक्षा पूरी मजबूती के साथ बनी रहे।
नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए एक बेहद जरूरी और बड़ी खबर है। वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (Income Tax Return - ITR) दाखिल करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयकर विभाग ने टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए ITR-1 (सहज), ITR-2, ITR-3 और ITR-4 (सुगम) फॉर्म की एक्सेल यूटिलिटी (Excel Utility) लाइव कर दी है। इसके साथ ही ITR-1 से लेकर ITR-5 तक के सभी जरूरी फॉर्म भी अधिसूचित (Notified) कर दिए गए हैं। इस ऑफलाइन एक्सेल यूटिलिटी की मदद से टैक्सपेयर्स बिना इंटरनेट के भी अपना रिटर्न आराम से तैयार कर सकते हैं और बाद में उसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर आसानी से अपलोड कर सकते हैं। ध्यान रहे, आम करदाताओं (Individual Taxpayers) के लिए बिना किसी लेट फीस के ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है।इस बार ITR-1 (सहज) फॉर्म में क्या हुए हैं बड़े बदलाव?आयकर विभाग ने इस साल ITR-1 फॉर्म के ढांचे में कुछ महत्वपूर्ण और टैक्सपेयर्स-फ्रेंडली बदलाव किए हैं, जिन्हें फॉर्म भरने से पहले जान लेना बेहद जरूरी है:दो सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी की छूट: अब योग्य टैक्सपेयर्स अपने मालिकाना हक वाली दो सेल्फ-ऑक्यूपाइड (खुद के रहने वाली) हाउस प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी ITR-1 फॉर्म में ही दे सकते हैं।अनरियलाइज्ड रेंट (Unrealized Rent) का नया कॉलम: अगर आपकी प्रॉपर्टी से ऐसा कोई किराया था जो कानूनी तौर पर आपको मिलना तय था लेकिन किसी वजह से नहीं मिल पाया, तो उस 'अनरियलाइज्ड रेंट' की जानकारी देने के लिए फॉर्म में एक नया और विशेष कॉलम जोड़ दिया गया है।विदेशी रिटायरमेंट बेनिफिट्स से राहत: फॉर्म से विदेशी रिटायरमेंट बेनिफिट्स (Foreign Retirement Benefits) की अनिवार्य रिपोर्टिंग के नियम को अब पूरी तरह हटा दिया गया है।ध्यान दें: कौन से लोग नहीं भर सकते ITR-1 फॉर्म?नियमों के मुताबिक, सहज (ITR-1) फॉर्म केवल उन लोगों के लिए है जिनकी आय सैलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी और अन्य स्रोतों (जैसे बैंक ब्याज) से कुल मिलाकर 50 लाख रुपये तक है। अगर आपकी आय के स्रोत नीचे दिए गए कैटेगरी में आते हैं, तो आप ITR-1 का उपयोग नहीं कर सकते:यदि आपकी आय किसी बिजनेस (व्यापार) या प्रोफेशन (जैसे डॉक्टर, वकील आदि) से होती है।यदि आपको शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) हुआ हो।यदि आपको वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) हुआ हो।यदि आपको एक से अधिक किराए पर उठी हुई (Let-out) प्रॉपर्टी से रेंटल इनकम हो रही हो।रिटर्न फाइल करने की तैयारी: इन 5 डॉक्यूमेंट्स को जरूर रखें पासआयकर विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि रिटर्न दाखिल करने की जल्दबाजी में कोई भी गलत जानकारी न भरें। लॉग इन करने से पहले अपने पास ये दस्तावेज और जानकारियां पूरी तरह तैयार रखें:Form-16 और वित्तीय विवरण: अपनी कंपनी से मिला फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट और ब्याज प्रमाणपत्र (Interest Certificate)।AIS और Form-26AS का मिलान: अपने ई-फाइलिंग अकाउंट से एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म-26AS डाउनलोड करके अपनी कुल कटी हुई टैक्स (TDS) राशि का मिलान कर लें।प्री-फिल्ड डेटा की री-चेकिंग: पोर्टल पर पहले से दर्ज (Pre-filled) जानकारियां जैसे आपका पैन (PAN), वर्तमान पता, एक्टिव मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और रिफंड पाने के लिए बैंक अकाउंट डिटेल्स को अच्छी तरह री-वेरिफाई कर लें। गलत फॉर्म चुनने या गलत डेटा भरने पर आपका रिटर्न 'डिफेक्टिव' (Defective Return) घोषित हो सकता है।सावधान! बिना ई-वेरिफिकेशन के रद्दी माना जाएगा आपका ITRकई टैक्सपेयर्स रिटर्न अपलोड करने के बाद रिलैक्स हो जाते हैं, जो कि एक बड़ी भूल है। ITR दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। जब तक आप अपने रिटर्न को वेरिफाई नहीं करते, तब तक आयकर विभाग उसे मान्य नहीं मानता है।अगर आप किसी तकनीकी कारण से ऑनलाइन (आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए) वेरिफिकेशन नहीं कर पा रहे हैं, तो आपको अपने ITR-V की हस्ताक्षरित (सिग्नेचर की हुई) फिजिकल कॉपी रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर सीपीसी (CPC) बेंगलुरु डाक द्वारा भेजनी होगी।छूटे हुए रिटर्न के लिए ITR-U की सुविधा और लेट फीस का गणितयदि किसी कारणवश आपने पिछले चार असेसमेंट वर्षों का अपना कोई टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है, तो विभाग आपको 'अद्यतन रिटर्न' यानी ITR-U (Updated ITR) के जरिए उसे सुधारने या दोबारा भरने का एक मौका देता है।लेकिन याद रहे, अगर आप इस साल के लिए तय समय सीमा यानी 31 जुलाई 2026 के बाद अपना रिटर्न दाखिल करते हैं, तो आपको 5,000 रुपये तक की भारी लेट फीस (Late Fee under Section 234F) देनी पड़ सकती है, और यदि कोई टैक्स बकाया है, तो उस पर भारी ब्याज भी भुगतना होगा। इसलिए अंतिम दिनों की वेबसाइट क्रैश और हड़बड़ी से बचने के लिए समय रहते अपने सभी दस्तावेजों की जांच कर सही फॉर्म के साथ अपना ITR फाइल कर दें।
मुंबई/मनोरंजन डेस्क: ओटीटी (OTT) की दुनिया में एक बार फिर से 'जेल के कैदियों' का हाई-वोल्टेज ड्रामा और तहलका शुरू हो चुका है। नेटफ्लिक्स का सबसे मच-अवेटेड और चर्चित रियलिटी शो ‘लॉक अप’ (Lock Upp) आज यानी 27 जून 2026 से आधिकारिक तौर पर स्ट्रीम होना शुरू हो गया है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अभी शो का पहला एपिसोड पूरी तरह से दर्शकों के सामने आया भी नहीं है और इसके कंटेस्टेंट्स ने इंटरनेट पर गदर मचाना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर शो का एक वीडियो आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें पहले ही दिन कंटेस्टेंट्स के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिल रही है।आप 52 साल के हैं और अब तक सीख ही रहे हैं? श्रेया ने राम कपूर पर साधा निशानानेटफ्लिक्स द्वारा जारी किए गए ‘लॉकअप’ के इस लेटेस्ट प्रोमो ने दर्शकों के उत्साह को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। शो के प्रीमियर से ठीक पहले सामने आए इस वीडियो में रियलिटी शो स्टार और मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रेया कालरा सीधे टीवी और बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर राम कपूर से पंगा लेती नजर आ रही हैं। वीडियो में श्रेया, अभिनेता राम कपूर को उनकी बातों के बीच में ही टोकते हुए उनकी जिम्मेदारी और उम्र को लेकर उन पर सीधा निशाना साधती हैं। श्रेया ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा:आपके पास इतना बड़ा प्लेटफॉर्म है, इतने सारे लोग आपको देख रहे हैं राम कपूर। आपको इस बात की जिम्मेदारी लेनी होगी। आप 52 साल के हैं और अभी भी सिर्फ सीख ही रहे हैं? ये मेरे लिए सच में बहुत बड़ा शॉक है!राम कपूर ने मुस्कुराते हुए बंद की बोलती: बोले- 'मैं मरते दम तक बच्चा ही रहना चाहता हूं'श्रेया कालरा के इस तीखे और सीधे वार पर दिग्गज अभिनेता राम कपूर भी चुप नहीं रहे। उन्होंने बिना आपा खोए, बड़े ही कूल और बेबाक अंदाज में श्रेया को ऐसा जवाब दिया जिसने उनकी बोलती बंद कर दी। चेहरे पर अपनी सिग्नेचर मुस्कान लाते हुए राम कपूर ने कहा:मैं उम्मीद करता हूं कि मैं जिंदगी भर सीखता रहूं। मैं चाहता हूं कि जब तक मेरी मौत न हो, तब तक मैं कुछ न कुछ नया सीखता रहूं। मैं मरते दम तक एक बच्चा ही बने रहना चाहता हूं। सो सॉरी मैम, आपकी अपनी सोच है और मेरी अपनी। मैं अपनी जिम्मेदारी बहुत पहले ही ले चुका हूं, और मैंने फ्रंट पेज पर खड़े होकर खुद को ‘गिल्टी’ (दोषी) भी स्वीकार किया है।राम कपूर का यह बेबाक और मैच्योर रवैया सोशल मीडिया पर नेटिज़न्स को बेहद पसंद आ रहा है। फैंस उनके इस 'लर्निंग एटीट्यूड' की जमकर तारीफ कर रहे हैं और श्रेया कालरा को बेवजह का मुद्दा बनाने के लिए ट्रोल भी कर रहे हैं।फराह खान और रितेश देशमुख की 'जेल' में होगी अग्निपरीक्षाइस बार नेटफ्लिक्स के ‘लॉकअप’ का नजारा पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प, खतरनाक और ग्लैमरस होने वाला है। इस सीजन में बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर डायरेक्टर-कोरियोग्राफर फराह खान और अपनी बेहतरीन कॉमिक व सीरियस टाइमिंग के लिए मशहूर एक्टर रितेश देशमुख बतौर होस्ट नजर आ रहे हैं। शो की इस अनोखी जेल में इतने अलग, बेबाक और अतरंगी कंटेस्टेंट्स को बंद किया गया है कि पहले ही दिन से माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका है। अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि फराह और रितेश इस जेल के कैदियों और उनके ईगो को कैसे संभालते हैं और आने वाले दिनों में यह शो विवादों के क्या नए रिकॉर्ड बनाता है।
पेपर लीक के बाद TET परीक्षा रद्द, ओवैसी बोले- सरकार नाकाम; विपक्ष ने खोला मोर्चा
पेपर लीक के बाद TET परीक्षा रद्द होने से महाराष्ट्र में हड़कंप मच गया। एक ओर परीक्षा की तैयारियों में जुटे छात्र इस खबर से निराश नजर आए तो दूसरी ओर विपक्ष ने भी इस मामले में सरकार को जमकर घेरा। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने TET परीक्षा में पेपर ...
हैदराबाद/मनोरंजन डेस्क: साउथ सिनेमा की लेडी सुपरस्टार समांथा रुथ प्रभु (Samantha Ruth Prabhu) इन दिनों अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत और यादगार फेज में हैं। 39 साल की बेहद लोकप्रिय एक्ट्रेस जल्द ही मां बनने वाली हैं। इस खुशखबरी की पुष्टि खुद उनकी आगामी फिल्म ‘मां इंति बंगारम’ (Maa Inti Bangaram) की डायरेक्टर नंदिनी रेड्डी ने की है। समांथा इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी इस नई फिल्म की सफलता का स्वाद तो चख ही रही हैं, साथ ही अपनी प्रेग्नेंसी को भी खूब एन्जॉय कर रही हैं। हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है और पिक्चर अपना बजट निकालकर मुनाफे की राह पर बढ़ चुकी है। फिल्म की डायरेक्टर ने खुलासा किया कि इस एक्शन-ड्रामा फिल्म के कई हिस्सों और गानों की शूटिंग के दौरान समांथा प्रेग्नेंट थीं और गंभीर 'मॉर्निंग सिकनेस' से जूझ रही थीं, लेकिन उन्होंने काम से कोई समझौता नहीं किया।जब एनर्जेटिक गाने की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर को पता चली सच्चाईनंदिनी रेड्डी की फिल्म ‘मां इंति बंगारम’ में समांथा रुथ प्रभु साड़ी पहनकर रोंगटे खड़े कर देने वाले एक्शन सीन्स करती नजर आ रही हैं। स्क्रीन पर ये सीन जितने सहज दिखते हैं, असल में उन्हें शूट करना उतना ही चुनौतीपूर्ण था। 'आई ड्रीम मीडिया' (iDream Media) के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल को दिए एक इंटरव्यू में डायरेक्टर नंदिनी ने समांथा की प्रेग्नेंसी के उस पल को याद किया जब उन्हें पहली बार इस बात का पता चला था। नंदिनी ने बताया:मुझे समांथा की प्रेग्नेंसी के बारे में तब पता चला, जब हम फिल्म के एक बेहद हाई-एनर्जी गाने की शूटिंग कर रहे थे। यह हमारी फिल्म के आखिरी शेड्यूल का समय था। शूटिंग की शुरुआत में मुझे क्रू ने बताया कि सुबह से समांथा की तबीयत कुछ ठीक नहीं है। हमें लगा कि शायद मौसम की वजह से उन्हें हल्का बुखार होगा। लेकिन असल में उस जबरदस्त डांस गाने की शूटिंग के बीच समांथा को बार-बार मॉर्निंग सिकनेस (उल्टी और जी मिचलाना) हो रही थी।'Thassadiya' वेडिंग सॉन्ग की शूटिंग और समांथा का जज्बानंदिनी रेड्डी ने आगे बताया, अगले दिन जब मैंने समांथा से उनके स्वास्थ्य और बुखार के बारे में पूछा, तो पहले तो वो थोड़ी देर शांत रहीं। फिर एक मिनट बाद मुस्कुराते हुए उन्होंने मुझसे कहा कि 'नंदिनी, दरअसल मैं प्रेग्नेंट हूं और यह बुखार नहीं, बल्कि मॉर्निंग सिकनेस है।' यह उनकी प्रेग्नेंसी का बिल्कुल शुरुआती दौर (First Trimester) था। यह जानने के बाद हमने सेट पर उनके आराम और सेहत का खास ख्याल रखा। राहत की बात यह थी कि फिल्म के भारी-भरकम एक्शन वाले हिस्से हम पहले ही शूट कर चुके थे।आपको बता दें कि समांथा ने जिस हालत में इस गाने की शूटिंग पूरी की, वह आज सोशल मीडिया पर तबाही मचा रहा है। फिल्म के इस वेडिंग सॉन्ग का नाम 'थसाड़िया' (Thassadiya) है, जिसे यूट्यूब पर अब तक 31 मिलियन (3.1 करोड़) से ज्यादा लोग देख चुके हैं। इस सुपरहिट गाने को मशहूर म्यूजिक कंपोजर संतोष नारायणन ने तैयार किया है, जबकि इसे चिन्मयी श्रीपदा और पुण्य सेल्वा ने अपनी खूबसूरत आवाज दी है। दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज की पत्नी और मशहूर कोरियोग्राफर पोनी वर्मा ने इस गाने को कोरियोग्राफ किया है, जिसमें प्रेग्नेंट होने के बावजूद समांथा ने अपनी पूरी एनर्जी के साथ कमाल का डांस स्टेप्स करके फैंस को अपना दीवाना बना दिया है।
सागर/भोपाल: मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल की कथित घोर लापरवाही के कारण एक मरीज की जान चली गई है। परिजनों का गंभीर आरोप है कि वार्ड में ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन और ब्लूटूथ इयरफोन पर बात करने में मशगूल एक नर्स ने टोकने के बावजूद मरीज को गलत और अत्यधिक खतरनाक इंजेक्शन लगा दिया। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद जहां एक तरफ पीड़ित परिवार में कोहराम मचा है, वहीं पूरे अस्पताल प्रशासन और प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।छोटी सी गांठ की जांच कराने आए थे देवेंद्र, लापरवाही ने छीन ली जिंदगीमृतक की पहचान सागर निवासी देवेंद्र पाठक के रूप में हुई है। देवेंद्र को बीती 12 जून को गले में एक छोटी सी गांठ की जांच और बायोप्सी (Biopsy) प्रक्रिया के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ईएनटी (ENT) विभाग में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके अगले दिन होने वाले ऑपरेशन और जांच की तैयारी के तहत अस्पताल के मेडिकल स्टोर से 'एट्राक्यूरियम बेसीलेट' ($Atracurium Besylate$) नाम का एक विशेष इंजेक्शन मंगवाकर रखने को कहा था। डॉक्टरों की योजना इस दवा को ऑपरेशन थिएटर (OT) के भीतर इस्तेमाल करने की थी।ब्लूटूथ कान में लगा था, मना करने पर भी नर्स ने दे दी 'हाई-रिस्क' दवादेवेंद्र पाठक की पत्नी रीता पाठक ने पुलिस में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात नर्स शिखा पटले के कानों में ब्लूटूथ इयरफोन लगे हुए थे और वह पूरी तरह फोन पर किसी से बातचीत करने में व्यस्त थी। इसी दौरान वह देवेंद्र को इंजेक्शन लगाने के लिए आगे बढ़ी। परिजनों ने जब देखा कि नर्स का ध्यान फोन पर है, तो उन्होंने उसे रोका और बात बंद करने को कहा, लेकिन नर्स ने उनकी बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया। फोन पर बात करते-करते ही नर्स ने वह 'एट्राक्यूरियम बेसीलेट' इंजेक्शन देवेंद्र को वार्ड में ही लगा दिया, जिसे अगले दिन एनेस्थीसिया (बेहोशी) के समय दिया जाना था।वेंटिलेटर पर 11 दिनों तक जिंदगी की जंग, आखिरकार थमी सांसेंचिकित्सा विज्ञान में 'एट्राक्यूरियम बेसीलेट' को एक 'हाई-अलर्ट' और बेहद संवेदनशील दवा माना जाता है। इसका मुख्य काम ऑपरेशन के दौरान मरीज की मांसपेशियों को पूरी तरह शिथिल (पैरालाइज) करना होता है। इसे केवल एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की सीधी निगरानी और वेंटिलेटर सपोर्ट की मौजूदगी में ही दिया जाता है।बिना डॉक्टर की लिखित अनुमति और बिना किसी डबल-चेकिंग के जैसे ही यह दवा देवेंद्र के शरीर में गई, महज कुछ ही सेकंड में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें सांस लेने में भयंकर तकलीफ होने लगी और वे तड़पने लगे। डॉक्टरों को जब इसकी भनक लगी तो आनन-फानन में उन्हें बचाने का प्रयास शुरू हुआ। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) दिया, लेकिन हालत में सुधार न होते देख उन्हें तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर ले जाया गया। देवेंद्र करीब 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे, लेकिन आखिरकार 23 जून की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।आरोपी नर्स निलंबित, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सिस्टम पर उठाए 5 बड़े सवालमामला तूल पकड़ते ही अस्पताल प्रबंधन ने शुरुआती आंतरिक जांच के बाद आरोपी नर्स शिखा पटले को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने भी इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए उच्च अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।हालांकि, इस घटना ने अस्पताल की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसे सिर्फ एक नर्स की व्यक्तिगत गलती कहकर दबाया नहीं जा सकता। इसके पीछे पूरे मेडिकल कॉलेज के सिस्टम की नाकामी साफ दिखती है, जो कई गंभीर सवाल खड़े करती है:इतनी संवेदनशील और हाई-अलर्ट श्रेणी की दवा बिना डॉक्टर या फार्मासिस्ट की मंजूरी के जनरल वार्ड तक कैसे पहुंच गई?अस्पताल के भीतर 'हाई-रिस्क' दवाओं के रख-रखाव और इस्तेमाल के लिए तय अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया?क्या वार्ड में मरीजों को दवा देने से पहले उसकी 'डबल-चेक' (दो बार मिलान करने) की कोई व्यवस्था लागू नहीं थी?अगर दवा के नाम या इस्तेमाल को लेकर नर्स के मन में कोई संदेह था, तो उसने ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से इसकी पुष्टि क्यों नहीं की?फिलहाल, सागर पुलिस और मेडिकल कॉलेज प्रशासन दोनों ही अपने-अपने स्तर पर इस पूरे मामले की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं। शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की जांच के आधार पर आरोपी नर्स व प्रबंधन के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
शाह का मास्टरस्ट्रोक: गांधीनगर से 'भारत टैक्सी' लॉन्च, निजी कंपनियों के शोषण से बचेंगे 7 लाख ड्राइवर
गांधीनगर/बिजनेस डेस्क: देश के सहकारिता आंदोलन को एक नई ऊंचाई देते हुए केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को गुजरात के गांधीनगर में देश की पहली सहकारी मॉडल पर आधारित अनूठी टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ (Bharat Taxi) को औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया। इस क्रांतिकारी पहल की शुरुआत करते हुए उन्होंने साफ कहा कि सरकार के इस कदम का सीधा मकसद निजी कैब कंपनियों के हाथों ड्राइवरों और ग्राहकों दोनों को शोषण से बचाना है। यह मॉडल ड्राइवरों को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और अपने काम का असली मालिकाना हक दिलाएगा।ड्राइवर नहीं 'सारथी' हैं मालिक, 7 लाख पार्टनर्स बने शेयरहोल्डर्सकेंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘भारत टैक्सी’ को लॉन्च करने के पीछे मुख्य विजन यही है कि सेवा देने वाले ‘सारथी’ (ड्राइवर) और सेवा लेने वाले ग्राहक, दोनों में से किसी का भी नुकसान न हो। उन्होंने निजी कंपनियों पर निशाना साधते हुए कहा:अब हमारे भाइयों को किसी प्राइवेट ऐप पर रजिस्ट्रेशन कराकर उनके रहमो-करम पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। यह सहकारी ढांचा सीधे ड्राइवरों को कंपनी का मालिकाना हक सौंपता है। मुझे गर्व है कि ‘भारत टैक्सी’ से जुड़े करीब 7 लाख पार्टनर ही इसके असली मालिक और शेयरधारक (Shareholders) हैं। यह मालिकाना हक सिर्फ एक आर्थिक हिस्सेदारी नहीं है, बल्कि यह हमारे सारथियों के लिए सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि की फुल गारंटी है।गुजरात के सभी प्रमुख शहरों में सेवा शुरू, ऑटो से लेकर फोर-व्हीलर तक के विकल्पअमित शाह ने बताया कि देश के कई हिस्सों में इस सेवा का बेहद सफल ट्रायल किया जा चुका है और अब गुजरात में इसकी कमर्शियल और औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। आज से ही गुजरात राज्य के सभी प्रमुख शहरों में ‘भारत टैक्सी’ की गाड़ियां सड़कों पर दौड़ने लगेंगी। इस नई सहकारी टैक्सी सेवा के तहत आम जनता को टू-व्हीलर टैक्सी (बाइक राइड), ऑटो-रिक्शा और फोर-व्हीलर कैब (एसयूवी/सेडान) जैसे सभी बड़े विकल्प एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगे।मौजूदा ऐप-आधारित बड़ी टैक्सी कंपनियों की मनमानी पर बोलते हुए सहकारिता मंत्री ने आरोप लगाया कि वे कंपनियों के नाम पर ड्राइवरों से भारी कमीशन वसूलती हैं, उनकी मेहनत की कमाई के भुगतान में बेवजह देरी करती हैं और बिना किसी ठोस कारण के अचानक ड्राइवरों के अकाउंट ब्लॉक कर देती हैं। ऐसी स्थिति में ‘भारत टैक्सी’ यात्रियों और ड्राइवरों दोनों के लिए एक पारदर्शी और मजबूत राष्ट्रीय विकल्प बनकर उभरेगी।अमूल की तर्ज पर ट्रांसपोर्ट सेक्टर में क्रांति, एयरपोर्ट से लेकर मेट्रो तक हुए MoUअमित शाह ने गुजरात के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए डेयरी सेक्टर में 'अमूल कोऑपरेटिव' (Amul) की वैश्विक सफलता का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह अमूल ने पशुपालकों की तकदीर बदली, उसी तरह भारत टैक्सी देश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर की सूरत बदलने जा रही है।इस सेवा को बिना किसी रुकावट के पूरी ताकत से जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने पहले ही दिन कई बड़े संगठनों के साथ समझौते (MoU) साइन किए हैं। इसके तहत गुजरात मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (GMRC), अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC), गुजरात स्टेट कोऑपरेटिव बैंक, राज्य ट्रैफिक पुलिस समेत प्रमुख एयरपोर्ट्स और रेलवे अथॉरिटी के साथ रणनीतिक भागीदारी की गई है, ताकि यात्रियों को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों से सीधे और सुरक्षित कनेक्टिविटी मिल सके।ड्राइवरों की बढ़ेगी बचत और यात्रियों को मिलेगा सबसे सस्ता सफरइस सहकारी पहल से ड्राइवरों की शुद्ध आय में बड़ा इजाफा होगा क्योंकि उन्हें किसी निजी कंपनी को भारी-भरकम कमीशन नहीं देना होगा। इसके साथ ही सरकार उन्हें बेहतर सामाजिक सुरक्षा और बीमा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगी। दूसरी तरफ, यात्रियों को भी बिना किसी हिडन चार्ज (छिपे हुए शुल्क) या पीक-आवर सर्च प्राइसिंग के पूरी तरह से पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट सर्विस मिलेगी। ‘भारत टैक्सी’ को देश के सहकारिता-आधारित ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक गेम-चेंजर प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
तिरुपति मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन होगा हाईटेक, ICAI तैयार करेगा पारदर्शी और सुरक्षित सिस्टम
आईसीएआई के अध्यक्ष सीए प्रसन्ना कुमार डी. ने इस परियोजना की पुष्टि करते हुए बताया कि विशेषज्ञों की एक टीम पहले लगभग 100 दिनों तक मंदिर की वर्तमान व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन करेगी।
नई दिल्ली/शिक्षा डेस्क: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अंडरग्रेजुएट (UG) कोर्सों में एडमिशन की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है। इस बार भी दाखिला पूरी तरह से CUET UG 2026 के स्कोर के आधार पर ही होगा, लेकिन छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि सिर्फ अच्छे नंबर लाना ही काफी नहीं है। डीयू के कड़े नियमों के मुताबिक, उम्मीदवार जिस विषय में ग्रेजुएशन करना चाहता है, वह विषय उसने 12वीं कक्षा में पढ़ा और पास किया होना अनिवार्य है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की यह पूरी दाखिला प्रक्रिया 'समान सीट आवंटन प्रणाली' यानी CSAS पोर्टल के जरिए तीन अलग-अलग चरणों में ऑनलाइन पूरी की जाएगी।तीन चरणों में समझें दिल्ली यूनिवर्सिटी का पूरा एडमिशन प्रोसेसदिल्ली विश्वविद्यालय में सीट पाने के लिए छात्रों को तीन अनिवार्य चरणों से गुजरना होगा, जो इस प्रकार हैं:पहला चरण (रजिस्ट्रेशन): सबसे पहले छात्रों को डीयू के आधिकारिक CSAS पोर्टल पर जाकर अपना बेसिक रजिस्ट्रेशन करना होगा।दूसरा चरण (प्रेफरेंस फिलिंग): इस चरण में उम्मीदवारों को अपनी पसंद के कॉलेजों और कोर्सों की प्राथमिकता सूची (Preference List) ऑनलाइन भरनी होगी।तीसरा चरण (सीट अलॉटमेंट): अंत में, छात्र के CUET स्कोर और उसकी चुनी गई प्राथमिकताओं के आधार पर कंप्यूटर द्वारा ऑटोमैटिक सीट अलॉट की जाएगी।'सब्जेक्ट मैपिंग' है सबसे जरूरी, एक गलती से रद्द हो सकती है दावेदारीएडमिशन के दूसरे चरण में सबसे महत्वपूर्ण काम 'विषय मिलान' (Subject Mapping) का होगा। इसके तहत विश्वविद्यालय यह जांच करेगा कि छात्र ने CUET परीक्षा में जिन विषयों को चुना है, क्या वे उसके 12वीं के रिपोर्ट कार्ड से मेल खाते हैं या नहीं। इसी सब्जेक्ट मैपिंग के आधार पर सॉफ्टवेयर खुद तय करेगा कि छात्र किस-किस कोर्स के लिए योग्य (Eligible) है और उसकी फाइनल मेरिट लिस्ट कैसे तैयार होगी। नियमों में विसंगति होने पर आवेदन रिजेक्ट भी किया जा सकता है।72 हजार रेगुलर सीटें, स्पोर्ट्स और ECA कोटे से मिलेगा एक्स्ट्रा मौकादिल्ली यूनिवर्सिटी के विभिन्न कॉलेजों में करीब 72,000 नियमित (Regular) सीटें हैं। इसके अलावा, खेलकूद (Sports Quota), पाठ्येतर गतिविधियां (ECA) और अन्य सुपरन्यूमरेरी कोटे के तहत भी हजारों सीटों पर एडमिशन का मौका मिलेगा। इन सभी अतिरिक्त और आरक्षित सीटों को मिलाकर डीयू में कुल सीटों का आंकड़ा लगभग 85,000 तक पहुंच जाता है, जिससे कट-ऑफ की रेस में पिछड़े छात्रों को भी एक बड़ा बैकअप मिल जाता है।CSAS पोर्टल पर ऐसे करें पहले चरण का रजिस्ट्रेशनआवेदन करने के लिए छात्रों को CSAS पोर्टल पर जाना होगा और अपने CUET UG 2026 के एप्लिकेशन नंबर की मदद से लॉग इन करना होगा। लॉग इन करते ही छात्र का नाम, जन्मतिथि, फोटो और सिग्नेचर जैसी जरूरी जानकारियां CUET के डेटाबेस से अपने आप (Auto-fetch) ले ली जाएंगी। ध्यान रहे कि इस डेटा में बाद में कोई बदलाव या सुधार नहीं किया जा सकेगा। सभी आवश्यक विवरणों को री-चेक करने के बाद निर्धारित फीस का भुगतान करके फॉर्म सबमिट करना होगा।जनरल से लेकर रिजर्व कैटेगरी तक, जानिए कितनी है आवेदन फीसडीयू ने अलग-अलग वर्गों और विशेष कोर्सों के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क का निर्धारण इस प्रकार किया है:कैटेगरी / कोर्स का प्रकारनिर्धारित आवेदन शुल्क (रुपये में)सामान्य, ओबीसी (OBC-NCL) और ईडब्ल्यूएस (EWS)₹250एससी (SC), एसटी (ST) और PwBD वर्ग₹100विशेष कोर्स (BFA, B.Sc PE, BA Hons Music आदि)₹400 (अतिरिक्त)स्पोर्ट्स या ECA कोटा (प्रति कोटा)₹100 (अतिरिक्त)1 अगस्त से घंटी बजेगी, समय पर शुरू होगा नया कॉलेज सेशनशेड्यूल के मुताबिक, सीट अलॉट होने के बाद छात्रों को ऑनलाइन ही डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराना होगा और निर्धारित समय के भीतर कॉलेज की फीस जमा कर अपना एडमिशन लॉक करना होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस साल का नया एजुकेशनल सेशन 1 अगस्त 2026 से शुरू करने की पूरी तैयारी है। एक्सपर्ट्स ने छात्रों को सलाह दी है कि वे आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते रजिस्ट्रेशन पूरा करें और अपनी कॉलेज प्रेफरेंस लिस्ट बहुत सोच-समझकर तैयार करें।
मुंबई/मनोरंजन डेस्क: बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसे फनकार हुए हैं जिन्हें किसी एक विधा या दायरे में समेट कर नहीं रखा जा सकता। चाहे वो किशोर कुमार की हरफनमौला गायकी हो या गुलजार की मखमली कलम। लेकिन इसी सुनहरे दौर में एक ऐसा संगीतकार भी आया, जिसने न सिर्फ अपने पिता की महान विरासत को आगे बढ़ाया, बल्कि भारतीय संगीत की परिभाषा को ही हमेशा के लिए बदल दिया। हम बात कर रहे हैं संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह आर डी बर्मन की, जिन्हें दुनिया बेहद प्यार से 'पंचम दा' कहती है। उनकी बर्थ एनिवर्सरी के खास मौके पर आइए जानते हैं कि महज 9 साल की उम्र से शुरू हुआ उनका यह संगीतमय सफर कैसे चार दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करता रहा।सिर्फ 9 साल की उम्र में कंपोज कर दिया था पहला गानाआर डी बर्मन का जन्म दिग्गज संगीतकार एस डी बर्मन के घर हुआ था, इसलिए संगीत उनके खून में दौड़ रहा था। लेकिन पंचम दा की प्रतिभा बचपन से ही हैरान करने वाली थी। जिस उम्र में बच्चे कंचे और खिलौनों से खेलते हैं, उस उम्र में महज 9 साल के आर डी बर्मन ने एक धुन तैयार कर डाली थी। उनकी इस कमाल की धुन को बाद में फिल्म में गाने के तौर पर इस्तेमाल भी किया गया। यानी सिंगल डिजिट की उम्र में ही उन्होंने साबित कर दिया था कि वो लंबी रेस के घोड़े हैं।300 से ज्यादा फिल्मों में बिखेरा जादू, राजेश-किशोर के साथ बनाई 'अमर तिकड़ी'अगर 1970 के दशक को हिंदी सिनेमा और संगीत का स्वर्ण युग कहा जाता है, तो इसके पीछे पंचम दा का ही दिमाग था। उस दौर में सुपरस्टार राजेश खन्ना, गायक किशोर कुमार और संगीतकार आर डी बर्मन की तिकड़ी ने कामयाबी के ऐसे नए रिकॉर्ड बनाए जिनकी गूंज आज भी सुनाई देती है। पंचम दा ने अपने करियर में 331 फिल्मों में यादगार संगीत दिया। इनमें 'शोले', 'तीसरी मंजिल', 'पडोशन', 'अमर प्रेम', 'कटी पतंग', 'हरे रामा हरे कृष्णा', 'यादों की बारात', 'आंधी', 'गोलमाल', 'सत्ते पे सत्ता', 'मासूम' और उनकी आखिरी फिल्म '1942 अ लव स्टोरी' जैसे कई कल्ट नाम शामिल हैं।सिर्फ धुनें ही नहीं बनाईं, अपनी कशिश भरी आवाज से भी जीता दिलआर डी बर्मन सिर्फ बेहतरीन धुनें बनाने वाले उस्ताद नहीं थे, बल्कि उनकी अनूठी और दमदार आवाज का भी एक अलग ही दीवानापन था। उन्होंने गाने में जिस तरह की तकनीकों और 'रफ वॉइस' का इस्तेमाल किया, उसने सबको चौंका दिया। फिल्म 'अपना देश' का मशहूर गाना ‘दुनिया में लोगों को धोखा कभी हो जाता है’ हो या फिर फिल्म 'शोले' का कल्ट गाना ‘महबूबा महबूबा’, पंचम दा ने अपनी गायकी से इन गानों को हमेशा-हमेशा के लिए अमर बना दिया। इसके अलावा 'धन्नो की आंखों में' और 'तुम क्या जानों मोहब्बत क्या है' जैसे गीतों में भी उनका अनोखा अंदाज देखने को मिला।जब संगीत छोड़ महमूद के साथ 'भूत बंगला' में करने लगे एक्टिंगपंचम दा की कला सिर्फ संगीत और गायकी तक ही सीमित नहीं थी। उनके अंदर का कलाकार उन्हें कैमरे के पीछे से खींचकर कैमरे के सामने भी ले आया। करीब सात दशक पहले मशहूर कॉमेडियन महमूद ने भारत की पहली हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'भूत बंगला' बनाई थी। इस फिल्म का निर्देशन भी खुद महमूद ने ही किया था। इस फिल्म में पंचम दा ने एक मजेदार कैमियो किया था। फिल्म में महमूद और पंचम दा की कॉमिक टाइमिंग और केमिस्ट्री इतनी शानदार थी कि दर्शकों ने थिएटर में हंसते-हंसते पेट पकड़ लिया था। बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही इस फिल्म से उन्होंने साबित कर दिया कि वो एक पैदाइशी एंटरटेनर थे।
पिछले 147 साल का रिकॉर्ड टूटा, 'हीट-डोम' से दहला फ्रांस; पेरिस में पारा 44 पार, रेड अलर्ट जारी
पेरिस/इंटरनेशनल डेस्क: यूरोप का खूबसूरत देश फ्रांस इस समय एक भीषण और अप्रत्याशित 'हीट इमरजेंसी' (गर्मी के आपातकाल) का सामना कर रहा है। राजधानी पेरिस सहित पूरे देश में गर्मी ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया है, जिसने पिछले 147 वर्षों (1872-2019) का इतिहास बदल कर रख दिया है। इस हफ्ते पेरिस की सड़कों पर 40C से अधिक तापमान वाले इतने दिन दर्ज किए गए हैं, जितने पिछले डेढ़ सौ साल में कभी नहीं देखे गए। हालात इतने बदतर हैं कि पिस्सॉस में पारा 44.3C तक जा पहुंचा है, जबकि पूरे फ्रांस का राष्ट्रीय औसत तापमान 29.8C रिकॉर्ड हुआ है। मौसम विभाग ने देश के आधे से ज्यादा हिस्से में 'रेड हीट अलर्ट' जारी कर दिया है। इस जानलेवा गर्मी के कारण अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं नदियों और झीलों में राहत तलाशने के चक्कर में डूबने के मामले भी तेजी से बढ़े हैं।फ्रांस अचानक 'हीट-चैंबर' क्यों बन गया? जानिए इसके पीछे का विज्ञानफ्रांस में अचानक आई इस भयंकर तबाही के पीछे सबसे बड़ा कारण 'हीट डोम' (Heat Dome) को माना जा रहा है। मौसम विज्ञान की भाषा में कहें तो यह एक 'हाई-प्रेशर ब्लॉकिंग सिस्टम' है। जब वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर एक बेहद मजबूत हाई प्रेशर जोन बनता है, तो वह आसमान में एक विशाल 'ढक्कन' की तरह काम करने लगता है। यह ढक्कन गर्म हवा को एक ही दायरे में कैद कर लेता है और उसे बाहर नहीं निकलने देता। यह रुकी हुई गर्म हवा नीचे की ओर दबती है और जैसे-जैसे नीचे आती है, इसका घनत्व बढ़ने से यह और ज्यादा खौलने लगती है। फ्रांस के ऊपर यह डोम पिछले कई दिनों से लगातार टिका हुआ है, जिसके कारण तापमान हर दिन नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है।यूरोप में भारत से ज्यादा खतरनाक क्यों महसूस हो रही है यह गर्मी?आम तौर पर 40C से 44C का तापमान भारतीयों के लिए नया नहीं है, लेकिन यूरोप के लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो रही है। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:यूरोपीय घरों की खास बनावट: भारत के विपरीत, यूरोपीय देशों में घर मोटी दीवारों और तगड़े इन्सुलेशन वाले बनाए जाते हैं। यह तकनीक सर्दियों में तो घर को गर्म रखने में मदद करती है, लेकिन गर्मियों में यह अभिशाप बन जाती है क्योंकि अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। यहां भारतीय घरों की तरह क्रॉस-वेंटिलेशन (प्राकृतिक हवा का आना-जाना) भी बहुत कम होता है।AC की भारी कमी: ठंडे मौसम के आदी होने के कारण यूरोप के आम घरों और सार्वजनिक जगहों पर एयर कंडीशनिंग (AC) की व्यवस्था नहीं होती है। ऐसे में अचानक आई इस भीषण गर्मी से बचने का लोगों के पास कोई जरिया नहीं बचा है।अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट: पेरिस जैसे बड़े शहरों में कंक्रीट की इमारतें और डामर की सड़कें दिनभर सूरज की तपिश को सोखती हैं और रात के समय उसे वापस छोड़ती हैं, जिससे रात में भी राहत नहीं मिलती।अत्यधिक उमस (Humidity): भारी तापमान के साथ उमस बढ़ जाने के कारण शरीर का पसीना सूख नहीं पाता, जिससे बॉडी का नेचुरल कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है।ग्लोबल वार्मिंग का साइड इफेक्ट: अब सामान्य होती जा रही हैं 'ट्रॉपिकल नाइट्स''वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन' (WWA) के वैज्ञानिकों के एक हालिया अध्ययन ने दुनिया को चौंका दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फ्रांस में आज जो स्थिति है, वैसी भीषण गर्मी साल 1976 में आना लगभग असंभव था। अगर उस दौर में ऐसी कोई हीटवेव आती भी, तो उसका तापमान आज की तुलना में करीब 3.5 डिग्री सेल्सियस कम होता। इसका सीधा मतलब है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने इस गर्मी की मार को कई गुना बढ़ा दिया है।एक्सपर्ट्स के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता 'ट्रॉपिकल नाइट्स' (उष्णकटिबंधीय रातें) बन गई हैं। ये ऐसी रातें होती हैं जब सूरज डूबने के बाद भी तापमान नीचे नहीं गिरता और रातें भी बेहद गर्म बनी रहती हैं। दिन में झुलसाने वाली धूप और रात में भी भारी गर्मी के कारण मानव शरीर को खुद को ठंडा करने और आराम पाने का मौका नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि लोगों में हीट स्ट्रोक, गंभीर डिहाइड्रेशन और दिल का दौरा पड़ने का खतरा खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।अल-नीनो नहीं, इंसानी गलतियां हैं जिम्मेदार; क्या है इसका परमानेंट इलाज?वैज्ञानिकों ने पूरी तरह साफ कर दिया है कि इस विनाशकारी गर्मी के लिए प्रकृति या अल-नीनो जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इंसानों द्वारा कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल है। हवा में लगातार बढ़ रही ग्रीनहाउस गैसों के कारण हमारी धरती एक भट्टी बनती जा रही है। चिंताजनक बात यह है कि यूरोप महाद्वीप बाकी दुनिया के औसत की तुलना में करीब दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है।इस वैश्विक संकट का एकमात्र समाधान यही है कि दुनिया भर के देश जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को तुरंत खत्म करें। इसकी जगह सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसी स्वच्छ और सस्ती तकनीकों को युद्ध स्तर पर अपनाना होगा। साथ ही, अब ऐसे शहरों और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को डिजाइन करने की जरूरत है जो कंक्रीट के जंगल न बनकर अधिक से अधिक पेड़-पौधों और हरियाली से लैस हों, ताकि भविष्य में आने वाली ऐसी घातक हीटवेव्स का सामना किया जा सके। अगर अभी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह तबाही और भी ज्यादा लंबी और जानलेवा होती जाएगी।
सिंहस्थ को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने सुनाए रोचक किस्से, बताया क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी इस बार
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को उज्जैन में आयोजित 'सिंहस्थ 2016 का अनुभव, सिंहस्थ 2028 का संकल्प' कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। कार्यशाला में वे अधिकारी और लोग शामिल हुए, जिन्हें ...
अमरनाथ यात्रा में आतंक के साथ मौसम भी चुनौती, यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए हाईटेक डॉप्लर रडार
Amarnath Yatra 2026 : इस बार की अमरनाथ यात्रा में संभावित और आशंकित आतंकी खतरे से निपटने के लिए किए जा रहे बहुचक्रिय उपायों के साथ ही मौसम के भी विलेन बनने की आशंका सता रही है जिससे निपटने को भी पूरे उपाय करने का दावा किया जाने लगा है।
रांची में बनेगा सिक्स-लेन स्मार्ट रोड, बदलेगी शहर की सूरत
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड की राजधानी रांची अब एक नए और बेहद आधुनिक अवतार में नजर आने वाली है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्लोबल स्टैंडर्ड का बनाने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत हो चुकी ...
3300 करोड़ से संवरेगा टनकपुर, बनेगा विश्वस्तरीय 'शारदा रिवरफ्रंट' और भव्य 'आरती घाट'
उत्तराखंड को एक वैश्विक आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में धामी सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बड़ा एलान करते हुए बताया कि राज्य सरकार 3,300 ...
परीक्षा से एक दिन महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक, 28 जून की परीक्षा रद्द
Maharashtra TET Exam Cancelled : परीक्षा से एक दिन पहले महाराष्ट्र के ठाणे में शनिवार को टीईटी का पेपर लीक होने से हड़कंप मच गया। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने 28 जून को होने वाली परीक्षा रद्द कर दी।
राजस्थान के जयपुर के बड़ी चौपड़ इलाके में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टला। ऐतिहासिक 'कुरैशियां का ताजिया' के गुंबद में अचानक आग लग गई, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे अखिलेश सरकार में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना : ओम प्रकाश राजभर
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
Weather Update 27 June : मौसम विभाग ने एक बार फिर से 27 जून को उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली समेत कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की संभावना है।
पुणे केतन अग्रवाल हत्याकांड : आखिर क्यों जानलेवा बन रहे हैं प्रेम संबंध?
जालंधर। महाराष्ट्र के पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद प्रेम संबंधों में बढ़ते हिंसक अपराधों को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की सलाहकार एवं आपदा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. नरेश पुरोहित का कहना है कि ऐसे मामलों की जड़ केवल प्रेम नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव, असुरक्षा, अस्वीकृति […] The post पुणे केतन अग्रवाल हत्याकांड : आखिर क्यों जानलेवा बन रहे हैं प्रेम संबंध? appeared first on Sabguru News .
राजस्थान की कोचिंग सिटी कोटा (Kota) में अवैध कब्जों और सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के मुद्दे ने इस समय पूरे संभाग की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है। इस गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक मसले पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता आमने-सामने आ गए हैं, जिससे शहर का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। भाजपा के स्थानीय नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्षी दल पर सीधे और तीखे हमले किए हैं और आरोप लगाया है कि पूरी कांग्रेस पार्टी इस समय कोटा के बड़े भूमाफियाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बीजेपी की घेराबंदी शुरू कर दी है और इस पूरे मामले पर अपना आधिकारिक और करारा जवाब जारी किया है।भाजपा का तीखा हमला: वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में भूमाफियाओं को मिल रहा है राजनीतिक संरक्षणकोटा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा के जिला पदाधिकारियों और स्थानीय विधायकों ने प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान का पुरजोर समर्थन किया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कोटा शहर के कई मुख्य व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों के साथ-साथ कीमती सरकारी चारागाह भूमियों पर भूमाफियाओं ने अवैध रूप से कब्जे किए हैं। बीजेपी का दावा है कि जब भी प्रशासन इन अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने या कार्रवाई करने की कोशिश करता है, तो कांग्रेस के बड़े नेता अपराधियों को बचाने के लिए ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं। भाजपा ने साफ कहा कि शहर के सुनियोजित विकास के लिए माफियाओं के खिलाफ यह कड़ा अभियान रुकने वाला नहीं है।कांग्रेस का पलटवार: गरीब जनता की आशियाने उजाड़ रही है सरकार, बदले की भावना से हो रही है कार्रवाईभाजपा के इन गंभीर आरोपों पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देर नहीं की। कांग्रेस के स्थानीय वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि भाजपा असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भूमाफियाओं का नाम ले रही है। कांग्रेस ने दलील दी कि विकास और अतिक्रमण हटाने के नाम पर सालों से रह रहे गरीब, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी किसी भी तरह के बड़े अवैध कब्जे का समर्थन नहीं करती है, लेकिन बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या उचित मुआवजे के की जा रही एकतरफा और बदले की भावना वाली प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ वे हमेशा जनता के साथ खड़े रहेंगे।कोचिंग सिटी के स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में अनिश्चितता का माहौल, प्रशासन अलर्टनेताओं के बीच छिड़ी इस जुबानी जंग का सीधा असर कोटा के स्थानीय नागरिकों, प्रॉपर्टी डीलरों और व्यापारिक संगठनों पर भी देखने को मिल रहा है। शहर के कुछ चिन्हित इलाकों में जहां पीला पंजा (बुलडोजर) चलने की सुगबुगाहट है, वहां तनाव और अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। कोटा जिला कलेक्टर और पुलिस प्रशासन ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी भी प्रकार के हिंसक विरोध या कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के शहरी विकास विश्लेषकों का भी मानना है कि बड़े शहरों में अतिक्रमण हटाते समय राजनीतिक नफा-नुकसान से ऊपर उठकर निष्पक्ष विधिक प्रक्रिया का पालन किया जाना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर लगातार सर्च किया जा रहा है कोटा अतिक्रमण अभियान का लाइव स्टेटसआजकल के आधुनिक और डिजिटल युग में जब भी किसी बड़े शहर में राजनीतिक दलों के बीच ऐसी तीखी जंग छिड़ती है, तो लोग सीधे गूगल, बिंग और एआई सर्च इंजनों (GEO) पर स्थानीय विवादों और अतिक्रमण सूची की जानकारी खोजते हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजनों पर 'कोटा अवैध कब्जा न्यूज़ टुडे लाइव', 'बीजेपी कांग्रेस भूमाफिया विवाद कोटा' और 'कोटा नगर निगम बुलडोजर एक्शन लिस्ट' जैसी कस्टमाइज्ड क्वेरीज इस वक्त लगातार ट्रेंड कर रही हैं। एआई-आधारित पॉलिटिकल और अर्बन डेटा मॉडल्स भी यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग थिकली पॉप्युलेटेड इलाकों में जमीनी विरोध प्रदर्शनों का रूप ले सकती है, जिस पर राज्य सरकार की पैनी नजर बनी हुई है।
राजस्थान के खेल गलियारों और क्रिकेट की राजनीति से इस वक्त की बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA Election Update) के बहुप्रतीक्षित चुनाव एक बार फिर टल गए हैं। खेल विभाग और सहकारिता के नियमों के तहत आरसीए का कामकाज देख रही एडहॉक कमेटी (Ad-hoc Committee) का कार्यकाल पूरे 3 महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। इस नए प्रशासनिक आदेश के बाद अब आरसीए को आगामी सितंबर महीने तक अपनी नई कार्यकारिणी का चुनाव करना होगा। इस फैसले के बाद से ही राजस्थान के विभिन्न जिला क्रिकेट संघों और खेल प्रेमियों के बीच कयासों का दौर तेज हो गया है, क्योंकि हर कोई आरसीए में एक स्थायी और चुनी हुई नई बॉडी का बेसब्री से इंतजार कर रहा था।खेल विभाग का बड़ा फैसला: क्यों बढ़ाना पड़ा एडहॉक कमेटी का कार्यकाल?आरसीए की कमान संभाल रही एडहॉक कमेटी का मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के कगार पर था, जिसके चलते उम्मीद जताई जा रही थी कि जून या जुलाई के महीने में ही चुनावी प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन जिला संघों के विवादों, मतदाता सूची (Voter List) के नवीनीकरण और कुछ कानूनी अड़चनों के कारण चुनाव समय पर कराना संभव नहीं हो पा रहा था। खेल के सुचारू संचालन और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए शासन स्तर पर मंथन किया गया, जिसके बाद कमेटी के कार्यकाल को 3 महीने का विस्तार देने की मंजूरी दी गई। अब सितंबर के अंत तक कमेटी को हर हाल में चुनावी प्रक्रिया संपन्न कराकर नई कार्यकारिणी को सत्ता सौंपनी होगी।जिला क्रिकेट संघों की अंदरूनी सियासत तेज: जयपुर से लेकर जोधपुर तक मची हलचलआरसीए चुनाव टलने और एडहॉक कमेटी को मिले सेवा विस्तार के बाद राजस्थान के क्रिकेट जगत की अंदरूनी सियासत अचानक बेहद गरमा गई है। जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम (SMS Stadium) से लेकर जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर और कोटा के जिला क्रिकेट संघों के पदाधिकारी अब नए सिरे से अपनी गोटियां सेट करने में जुट गए हैं। इस 3 महीने के अतिरिक्त समय का इस्तेमाल विभिन्न गुट अपने पक्ष में माहौल बनाने और मतदाता सूची में अपने समर्थकों के नाम शामिल करवाने के लिए करेंगे। खेल जानकारों का मानना है कि इस देरी से आरसीए के आगामी घरेलू सत्र और खिलाड़ियों के चयन ट्रायल पर भी थोड़ा बहुत असर देखने को मिल सकता है।खेल बुनियादी ढांचे और आईपीएल मैचों के आयोजन पर टिकीं नजरेंराजस्थान में क्रिकेट का बुनियादी ढांचा हमेशा से देश के सर्वश्रेष्ठ इंफ्रास्ट्रक्चर में से एक रहा है। जयपुर के पास बन रहे विश्व स्तरीय नए क्रिकेट स्टेडियम के काम और आगामी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) व घरेलू टूर्नामेंट्स की तैयारियों को लेकर क्रिकेट प्रेमी चिंतित हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के खेल विश्लेषकों का भी कहना है कि किसी भी राज्य क्रिकेट बोर्ड में तदर्थ (एडहॉक) व्यवस्था का लंबा खींचना दीर्घकालिक फैसलों के लिए सही नहीं होता। खेल प्रेमियों की मांग है कि सितंबर की समयसीमा के भीतर हर हाल में पारदर्शी तरीके से चुनाव कराकर आरसीए को नया अध्यक्ष और नई टीम दी जानी चाहिए ताकि राजस्थान क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर लगातार सर्च किया जा रहा है आरसीए चुनाव का नया शेड्यूलआजकल के आधुनिक और डिजिटल युग में जब भी खेल संघों की राजनीति या चुनावों से जुड़ी कोई बड़ी खबर आती है, तो लोग सीधे गूगल, बिंग और एआई सर्च इंजनों (GEO) पर लेटेस्ट अपडेट खोजते हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजनों पर 'राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव नई तारीख 2026', 'आरसीए एडहॉक कमेटी चेयरमैन लिस्ट' और 'जयपुर एसएमएस स्टेडियम क्रिकेट न्यूज़' जैसी कस्टमाइज्ड क्वेरीज इस वक्त लगातार ट्रेंड कर रही हैं। एआई-आधारित स्पोर्ट्स एल्गोरिदम भी यह संकेत दे रहे हैं कि सितंबर में होने वाले आरसीए के यह चुनाव राजस्थान खेल इतिहास के सबसे दिलचस्प और कड़े मुकाबलों में से एक होने वाले हैं।
अमेरिकी हमले में छिना घर का कमाऊ सदस्य, अब इंसाफ की बाट जोह रहा भारतीय नाविक का परिवार
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में मारे गए एक भारतीय नाविक के मामले से नाविकों की सुरक्षा, जवाबदेही और भारत की प्रतिक्रिया को लेकर जरूरी सवाल उठ रहे हैं. डीडब्ल्यू ने इस हादसे का शिकार हुए नाविक के परिवार से भी बात की
बिहार के प्रशासनिक और कारागार महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा जेलों के भीतर सुरक्षा तंत्र को चाक-चौबंद करने के उद्देश्य से एक बहुत बड़ा प्रशासनिक फेरबदल (Administrative Reshuffle in Bihar) कर दिया है। गृह विभाग (Home Department Bihar) ने एक साथ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए सूबे के 30 जेल उपाधीक्षकों (Deputy Superintendents of Jails) का तबादला कर दिया है। सरकार के इस अचानक और कड़े फैसले से राज्य की केंद्रीय और जिला जेलों के भीतर हड़कंप मच गया है। विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के तहत सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से अपने नए कप्तानी वाले पदभार को संभालने का सख्त निर्देश दिया गया है।सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की बड़ी कवायद: कई संवेदनशील जेलों के प्रभारी बदले गएगृह विभाग से जारी ट्रांसफर लिस्ट के मुताबिक, इस फेरबदल में राज्य की कई अति-संवेदनशील जेलों के प्रभारियों को इधर से उधर किया गया है। पटना की बेउर जेल, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया और आरा जैसी बड़ी केंद्रीय तथा जिला कारागारों के उपाधीक्षकों के नाम इस सूची में प्रमुखता से शामिल हैं। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि जेलों के भीतर हाल के दिनों में सामने आई कुछ विसंगतियों और आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है। नए प्रभारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे जेल मैनुअल का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं और बैरकों के भीतर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से नकेल कसें।रूटीन ट्रांसफर या कोई बड़ा प्रशासनिक एक्शन? सचिवालय के गलियारों में चर्चाएं तेजनीतीश सरकार के इस बड़े फैसले के बाद पटना मुख्य सचिवालय (Patna Secretariat) से लेकर जिला मुख्यालयों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह एक नियमित और प्रशासनिक प्रक्रिया (Routine Transfer) के तहत किया गया बदलाव है, जिसका उद्देश्य जेल प्रशासन के कामकाज में पारदर्शिता लाना और लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों को बदलना है। इसके बावजूद, एक साथ 30 बड़े जेल अधिकारियों का स्थानांतरण होना यह साफ संकेत देता है कि गृह विभाग जेलों की व्यवस्था और कैदियों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है।पटना से लेकर भागलपुर और मुजफ्फरपुर तक जिला स्तर पर नए आदेशों की तामील शुरूइस अधिसूचना के जारी होते ही सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को नए जेल उपाधीक्षकों की जॉइनिंग को लेकर अलर्ट कर दिया गया है। स्थानीय स्तर पर पुराने अधिकारियों द्वारा प्रभार सौंपने और नए अधिकारियों द्वारा पदभार ग्रहण करने की कागजी प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है। लखनऊ स्थित क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का भी मानना है कि बिहार जैसे बड़े राज्य में जेल प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त रखना स्थानीय अपराध नियंत्रण (Local Crime Control) के लिए बेहद जरूरी होता है, क्योंकि कई बार बड़े आपराधिक गिरोह जेलों के भीतर से ही नेटवर्क संचालित करने की कोशिश करते हैं।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर लगातार सर्च की जा रही है बिहार जेल ट्रांसफर लिस्टआजकल के आधुनिक और डिजिटल युग में जब भी शासन स्तर पर कोई बड़ा फेरबदल या तबादला एक्सप्रेस चलती है, तो लोग उसकी पूरी सूची और अधिकारियों की नई पोस्टिंग को जानने के लिए सीधे गूगल, बिंग और एआई सर्च इंजनों (GEO) का रुख करते हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजनों पर 'बिहार जेल उपाधीक्षक तबादला सूची 2026 पीडीएफ', 'गृह विभाग बिहार लेटेस्ट ट्रांसफर आर्डर' और 'बेउर जेल के नए उपाधीक्षक कौन हैं' जैसी कस्टमाइज्ड क्वेरीज इस वक्त इंटरनेट पर लगातार ट्रेंड कर रही हैं। एआई-आधारित एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा मॉडल्स भी यह दर्शा रहे हैं कि इस फेरबदल के बाद बिहार के जेल प्रशासन में एक बड़ा ढांचागत सुधार देखने को मिल सकता है।
बंगाल : तारातला माल गोदाम हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16, बचाव कार्य जारी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि शहर के पुलिस आयुक्त अजय नंद तारातला माल गोदाम हादसे के जांच की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं। घटनास्थल पर बचाव कार्य जारी है और मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। कोलकाता पुलिस के सूत्रों ने बताया कि […] The post बंगाल : तारातला माल गोदाम हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16, बचाव कार्य जारी appeared first on Sabguru News .
गुजरात दौरे पर अमित शाह, भारत की पहली सहकारी टैक्सी सेवा 'भारत टैक्सी' का करेंगे शुभारंभ
गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 27 और 28 जून को दो दिनों के लिए अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरे के दौरान वे नागरिकों को करोड़ों रुपये के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे, साथ ही ...
बिहार के कानूनी और सियासी गलियारों से इस वक्त की एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। चर्चित मामले के मुख्य आरोपी फैजल खान (Faisal Khan Bihar) को माननीय अदालत से एक बार फिर बड़ी मोहलत मिल गई है। कोर्ट ने राहत की अवधि को बढ़ाते हुए फैजल खान की गिरफ्तारी पर आगामी 30 जून तक के लिए पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद फैजल खान और उनके समर्थकों ने अंतरिम राहत की सांस ली है। लेकिन दूसरी तरफ, इस मामले से जुड़े उनके निजी अंगरक्षकों (Bodyguards) को अदालत से करारा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके बॉडीगार्ड्स की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसके कारण उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।अदालत में चली लंबी बहस: फैजल खान को मिली अंतरिम राहत, पुलिस की दलीलें दरकिनारपटना से लेकर संबंधित जिला अदालत के परिसर में इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर सुबह से ही वकीलों और मीडिया कर्मियों की भारी भीड़ जमा थी। फैजल खान के कानूनी सलाहकारों ने अदालत के समक्ष अपनी मजबूत दलीलें पेश करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं, इसलिए उन्हें अग्रिम सुरक्षा दी जाए। हालांकि, सरकारी वकील और पुलिस प्रशासन की तरफ से फैजल खान की कस्टडी की मांग की जा रही थी ताकि मामले की तह तक जाया जा सके। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कानून के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैजल खान को 30 जून तक के लिए पुलिसिया कार्रवाई और गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण (Anticipatory Relief) दे दिया।अंगरक्षकों की बढ़ी मुश्किलें: बेल पिटीशन खारिज, जाना होगा जेलफैजल खान को जहां इस कानूनी लड़ाई में कुछ दिनों की राहत मिल गई है, वहीं उनके साथ साए की तरह रहने वाले अंगरक्षकों के लिए आज का दिन बेहद बुरा साबित हुआ। पुलिस ने आरोप लगाया था कि मामले के दौरान अंगरक्षकों ने सरकारी काम में बाधा डालने और हथियारों का गलत इस्तेमाल या रौब दिखाने की कोशिश की थी। कोर्ट ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अंगरक्षकों की बेल पिटीशन (Zamanat Arji) को सिरे से नामंजूर कर दिया। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब पुलिस कस्टडी में मौजूद इन बॉडीगार्ड्स को जेल की हवा खानी पड़ेगी, जिससे फैजल खान का सुरक्षा घेरा भी कमजोर हो गया है।पटना से लेकर पूरे बिहार के प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्मइस बड़े अदालती फैसले के बाद से ही बिहार पुलिस मुख्यालय (Patna Police Headquarters) और स्थानीय थानों की विजिलेंस टीमें अलर्ट मोड पर हैं। 30 जून की समयसीमा बेहद नजदीक है, ऐसे में पुलिस प्रशासन अपनी केस डायरी और गवाहों के बयानों को और अधिक पुख्ता करने में जुट गया है ताकि अगली सुनवाई के दौरान अदालत के सामने कड़े सबूत पेश किए जा सकें। स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि इस केस का रुख आने वाले दिनों में बिहार की स्थानीय कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़े कई बड़े फैसलों को प्रभावित कर सकता है।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर तेजी से ट्रेंड हो रही है फैजल खान केस की हिस्ट्रीआजकल के आधुनिक और डिजिटल युग में जब भी कोई बड़ा कानूनी विवाद या अदालती फैसला सामने आता है, तो लोग केस की बैकस्टोरी और धाराओं को समझने के लिए सीधे गूगल, बिंग और एआई सर्च इंजनों (GEO) का रुख करते हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजनों पर 'फैजल खान बिहार कोर्ट केस स्टेटस', '30 जून तक गिरफ्तारी पर रोक का मतलब' और 'बिहार में बॉडीगार्ड्स की जमानत खारिज न्यूज़' जैसी कस्टमाइज्ड क्वेरीज इस वक्त लगातार टॉप सर्च वॉल्यूम के साथ ट्रेंड कर रही हैं। एआई-आधारित लीगल एल्गोरिदम भी यह संकेत दे रहे हैं कि 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले के भविष्य को तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगी।
बिहार के सीमावर्ती इलाके से इस वक्त की एक बेहद संवेदनशील, बड़ी और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा (Indo-Nepal Border) के पास मुहर्रम के पवित्र मौके पर निकाले जा रहे जुलूस के दौरान अचानक दो पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि ताजिया जुलूस पर असामाजिक तत्वों द्वारा ताबड़तोड़ पथराव शुरू कर दिया गया। इस अचानक हुए हमले और ईंट-पत्थर चलने के कारण घटना स्थल पर भगदड़ मच गई, जिसमें आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हो गए हैं। घटना के बाद से ही सीमावर्ती दोनों देशों के इस संवेदनशील इलाके में तनाव का माहौल व्याप्त है और भारी संख्या में सशस्त्र सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है।रास्ते के विवाद को लेकर भड़की हिंसा: अचानक चलने लगे लाठी-डंडे और ईंट-पत्थरस्थानीय खुफिया सूत्रों और चश्मदीदों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरी घटना भारत-नेपाल बॉर्डर से सटे बिहार के एक सुदूर सीमावर्ती गांव के पास हुई। मुहर्रम के मौके पर अखाड़े के खिलाड़ी और स्थानीय लोग पारंपरिक रूप से ताजिया जुलूस निकाल रहे थे। इसी बीच जुलूस के गुजरने वाले तय रास्ते को लेकर दूसरे पक्ष के कुछ लोगों से तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ी कि दोनों तरफ से लोग लाठी-डंडे लेकर आमने-सामने आ गए और इसी बीच उपद्रवियों ने जुलूस को निशाना बनाते हुए पथराव (Stone Pelting) शुरू कर दिया। पथराव के कारण जुलूस में शामिल कई अकीदतमंदों के सिर और हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।सुरक्षा बल एक्शन में: एसएसबी और स्थानीय पुलिस ने संभाला मोर्चा, उपद्रवियों की धरपकड़ तेजइंटरनेशनल बॉर्डर का मामला होने के कारण इस घटना की गंभीरता को देखते हुए सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों और बिहार पुलिस की टुकड़ियों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। जिला प्रशासन के आला अधिकारी, एसपी और जिलाधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंच चुके हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है और स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों पर पैनी नजर रखी जा रही है और वीडियो फुटेज के आधार पर दंगा भड़काने वाले उपद्रवियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।बिहार के सीमावर्ती जिलों और नेपाल रूट पर सुरक्षा चाक-चौबंद, फ्लैग मार्च शुरूइस हिंसक झड़प का असर बिहार के अन्य सीमावर्ती जिलों जैसे रक्सौल, सीतामढ़ी, मधुबनी और किशनगंज के सुरक्षा तंत्र पर भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर असामाजिक तत्वों की किसी भी अवैध गतिविधि को रोकने के लिए पेट्रोलिंग और नाकेबंदी को कड़ा कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित सुरक्षा मुख्यालयों और पटना मुख्यालय से भी इस पूरी स्थिति की पल-पल की मॉनिटरिंग की जा रही है। शांति व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों के बीच सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा इलाके में फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है, साथ ही दोनों समुदायों के प्रबुद्ध जनों के साथ शांति समिति की बैठक बुलाई गई है।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर लगातार सर्च की जा रही है बॉर्डर हिंसा की लाइव अपडेटआजकल के आधुनिक और डिजिटल युग में जब भी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास कोई सांप्रदायिक या हिंसक झड़प होती है, तो लोग घटना की सच्चाई और सुरक्षा स्थिति जानने के लिए सीधे गूगल, बिंग और एआई सर्च इंजनों (GEO) का रुख करते हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजनों पर 'बिहार भारत नेपाल बॉर्डर मुहर्रम बवाल न्यूज', 'ताजिया जुलूस पर पथराव लाइव अपडेट' और 'बॉर्डर पर एसएसबी अलर्ट टूडे' जैसी कस्टमाइज्ड क्वेरीज इस वक्त लगातार ट्रेंड कर रही हैं। एआई-आधारित क्राइम ट्रैकिंग एल्गोरिदम भी यह संकेत दे रहे हैं कि ऐसे संवेदनशील मौकों पर शरारती तत्वों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिशों को रोकने के लिए ड्रोन निगरानी और डिजिटल मैपिंग की बेहद सख्त जरूरत है।
वैश्विक राजनीति और आतंकवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई के बीच इस वक्त की एक बेहद सनसनीखेज और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा देने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। साल 1985 में हुए इतिहास के सबसे जघन्य आतंकी हमलों में से एक, एयर इंडिया के 'कनिष्क' विमान बम विस्फोट त्रासदी (Kanishka Bombing Incident) को लेकर आखिरकार कनाडा सरकार ने चार दशक यानी पूरे 41 साल बाद अपना एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कबूलनामा जारी किया है। कनाडाई प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि उस वक्त उनके सुरक्षा तंत्र और खुफिया एजेंसियों से बहुत बड़ी लापरवाही हुई थी, जिसके कारण 329 बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हालांकि, इस खौफनाक सच को स्वीकार करने के बावजूद कनाडाई धरती पर आज भी भारत विरोधी अलगाववादी और खालिस्तानी नेटवर्क (Khalistani Network in Canada) का खुलेआम सक्रिय रहना वैश्विक सुरक्षा पर एक बहुत बड़ा और तीखा सवाल खड़ा करता है।कनिष्क त्रासदी का वो काला दिन: कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों का सबसे बड़ा 'इंटेलिजेंस फेल्योर'23 जून 1985 को आयरलैंड के तट के पास हवा में ही एयर इंडिया की उड़ान 182 (कनिष्क) को बम से उड़ा दिया गया था, जिसमें सवार सभी 329 यात्री और क्रू मेंबर्स मारे गए थे। इनमें से अधिकांश भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे। कनाडा सरकार की ताजा समीक्षा रिपोर्ट में यह माना गया है कि उस दौर में कनाडाई खुफिया एजेंसी (CSIS) और रॉयल कनाडाई माउंटेड पुलिस (RCMP) को संभावित खतरे के कई पुख्ता इनपुट्स मिले थे, लेकिन आपसी तालमेल की कमी और घोर लापरवाही के चलते उन सुरागों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इस भयंकर भूल को इतिहास के सबसे बड़े 'इंटेलिजेंस फेल्योर' के रूप में दर्ज किया गया है।कबूलनामा तो कर लिया, पर खालिस्तानी आतंकियों की पनाहगाह क्यों बना हुआ है कनाडा?अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा सरकार का यह कबूलनामा केवल एक औपचारिक लीपापोती है, क्योंकि जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है। कनिष्क बम विस्फोट की साजिश रचने वाले बब्बर खालसा जैसे संगठनों के वैचारिक उत्तराधिकारी आज भी कनाडा के वैंकूवर, टोरंटो और ओटावा जैसे शहरों में खुलेआम रैलियां निकाल रहे हैं, भारत विरोधी जहर उगल रहे हैं और वहां के स्थानीय गुरुद्वारों व राजनीतिक व्यवस्था में अपनी गहरी पैठ बना चुके हैं। ट्रूडो प्रशासन द्वारा वोट बैंक की राजनीति के चलते इन कट्टरपंथियों पर कोई सख्त कानूनी कार्रवाई न करना भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में कड़वाहट की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है।नई दिल्ली से लेकर लखनऊ के थिंक-टैंक तक भारत ने जताया कड़ा ऐतराजकनाडा के इस दोहरे रवैये को लेकर भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा अपनी आवाज बुलंद की है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सामरिक और वैश्विक मामलों के थिंक-टैंक व सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी इस मुद्दे पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। लखनऊ के रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि जब तक कनाडा अपनी धरती पर पल रहे उग्रवादी तत्वों के खिलाफ ठोस और दंडात्मक जमीनी कार्रवाई नहीं करता, तब तक कनिष्क जैसी त्रासदियों पर सिर्फ माफी मांगना या शोक जताना पूरी तरह से बेमानी है। भारत ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद और अलगाववाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर लगातार ट्रेंड कर रहा है भारत-कनाडा विवादआजकल के आधुनिक और डिजिटल युग में जब भी वैश्विक आतंकवाद या राजनयिक संबंधों से जुड़ी कोई बड़ी खबर आती है, तो दुनिया भर के नेटिजंस गूगल, बिंग और एआई सर्च इंजनों (GEO) पर उसकी पूरी केस स्टडी को बारीकी से खंगालते हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजनों पर 'कनिष्क विमान हादसा कनाडा रिपोर्ट 2026', 'कनाडा में खालिस्तानी नेटवर्क लाइव अपडेट' और 'एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम ब्लास्ट हिस्ट्री' जैसी क्वेरीज इस वक्त दुनिया भर में टॉप सर्च वॉल्यूम के साथ ट्रेंड कर रही हैं। एआई-आधारित ग्लोबल सुरक्षा मॉडल्स भी यह स्पष्ट चेतावनी दे रहे हैं कि किसी भी देश द्वारा अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए चरमपंथ को बढ़ावा देना भविष्य में खुद उसी के लिए सबसे बड़ा भस्मासुर साबित हो सकता है।
गाजा की स्थिति पर सरकार की चुप्पी हैरान करने वाली : सोनिया गांधी
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि गाजा पर हो रहे हमलों के खिलाफ पूरी दुनिया लगातार आवाज उठा रही है, लेकिन भारत सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे है, जो हैरान करने वाली है। सोनिया गांधी के शनिवार को एक अंग्रेजी दैनिक में इस विषय पर प्रकाशित लेख […] The post गाजा की स्थिति पर सरकार की चुप्पी हैरान करने वाली : सोनिया गांधी appeared first on Sabguru News .
पंजाब के लोग इस समय आसमान की ओर नजरें गड़ाए मानसून की पहली फुहारों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कुदरत फिलहाल उनके सब्र का कड़ा इम्तिहान ले रही है। राज्य में पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी और उमस का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि पूरा पंजाब भट्टी की तरह तप रहा है। मौसम विभाग से मिली ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पछुआ हवाओं के असर से राज्य के अधिकतम तापमान में महज एक ही दिन के भीतर 1.9 डिग्री सेल्सियस की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने आम जनजीवन को पूरी तरह बेहाल कर दिया है। हालांकि, इस चिलचिलाती धूप के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक राहत भरी बड़ी खुशखबरी भी दी है। मौसम केंद्र ने आज पंजाब के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और झमाझम बारिश होने का यलो अलर्ट (Yellow Alert) जारी किया है।पारा चढ़ने से बढ़ी बेचैनी: लुधियाना, पटियाला और अमृतसर में उमस ने छुड़ाए पसीनेपंजाब के मैदानी इलाकों में सूरज के तीखे तेवरों ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है। लुधियाना, पटियाला, जालंधर और अमृतसर जैसे बड़े औद्योगिक व रिहायशी शहरों में तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर पहुंच गया है। एक ही दिन में 1.9 डिग्री तापमान बढ़ने के कारण उमस का स्तर (Humidity Level) भी काफी हाई हो गया है, जिससे राहगीरों और कामकाजी लोगों के पसीने छूट रहे हैं। दोपहर के समय बाजारों और मुख्य सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। बिजली की भारी मांग के कारण कई स्थानीय इलाकों में कट भी लग रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।मौसम विभाग की नई भविष्यवाणी: आज आंधी-बारिश के साथ बदलेगा मौसम का मिजाजइस जानलेवा गर्मी के बीच मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ ने पंजाब के किसानों और नागरिकों के लिए एक राहत भरी एडवाइजरी जारी की है। आईएमडी के मुताबिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के सक्रिय होने के कारण आज शाम तक पंजाब के मौसम में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। राज्य के बठिंडा, फिरोजपुर, मोगा, गुरदासपुर और होशियारपुर सहित कई जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूल भरी हवाएं चल सकती हैं और गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसी वजह से विभाग ने यलो अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।किसान भाइयों के लिए महत्वपूर्ण समय: धान की बुआई और फसलों के लिए अमृत बनेगी यह बारिशयह मानसूनी बारिश पंजाब की लाइफलाइन यानी खेती-किसानी के लिए बेहद संजीवनी साबित होने वाली है। पंजाब के किसान इस समय धान की रोपाई (Paddy Transpanting) में जुटे हुए हैं, जिसके लिए पानी की बहुत ज्यादा आवश्यकता होती है। तापमान बढ़ने और मानसून में देरी के कारण ट्यूबवेलों पर निर्भरता काफी बढ़ गई थी और भूजल स्तर पर भी दबाव पड़ रहा था। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आज होने वाली यह संभावित बारिश खेतों को नई जिंदगी देगी और चढ़ते तापमान से फसलों को झुलसने से भी बचाएगी।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर लगातार सर्च किया जा रहा है पंजाब वेदर का लाइव स्टेटसआजकल के आधुनिक और डिजिटल युग में जब भी मौसम विभाग कोई बड़ी चेतावनी जारी करता है, तो लोग सीधे गूगल, बिंग और एआई सर्च इंजनों (GEO) पर लाइव वेदर ट्रैकिंग टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजनों पर 'पंजाब मानसून अराइवल डेट 2026', 'चंडीगढ़ मौसम केंद्र यलो अलर्ट आज' और 'पंजाब में बारिश कब होगी' जैसी क्वेरीज इस वक्त लगातार टॉप ट्रेंड में बनी हुई हैं। एआई-आधारित क्लाइमेट मॉडल्स भी यह संकेत दे रहे हैं कि इस यलो अलर्ट के बाद पंजाब में गर्मी का दौर काफी हद तक थमेगा और मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर (Ambikapur) से कानून व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक को गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित किए जाने के बावजूद, एक शख्स ने अपनी ही पत्नी को रिश्तेदारों के सामने सरेआम 'ट्रिपल तलाक' (Triple Talaq) देकर रिश्ता खत्म करने का दुस्साहस किया है। यह पूरी घटना उस वक्त हुई जब पीड़िता को ससुराल वालों द्वारा लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था और इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के रिश्तेदार जुटे थे। पीड़िता की लिखित शिकायत पर अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पति और ससुराल वालों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।दहेज की लगातार बढ़ती मांग: कार और नकदी के लिए नवविवाहिता को किया लहूलुहानपुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, पीड़िता का निकाह कुछ समय पहले ही अंबिकापुर के एक स्थानीय मोहल्ले के निवासी से हुआ था। शादी के कुछ दिनों बाद से ही पति और उसके परिजनों ने कम दहेज मिलने का ताना देना शुरू कर दिया था। ससुराल वालों की तरफ से लगातार नई कार और लाखों रुपये मायके से लाने का दबाव बनाया जा रहा था। जब पीड़िता ने असमर्थता जताई, तो उसे भूखा रखकर शारीरिक और मानसिक रूप से बेरहमी से प्रताड़ित किया जाने लगा। पीड़िता ने अपने माता-पिता को पूरी आपबीती सुनाई, जिसके बाद मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने के लिए एक सामाजिक बैठक बुलाई गई थी।बीच पंचायत में कानून की उड़ी धज्जियां: गुस्से में आकर पति ने तीन बार कहा 'तलाक'विवाद को खत्म करने और बेटी का घर बचाने के उद्देश्य से जब दोनों परिवारों के बुजुर्ग और करीबी रिश्तेदार अंबिकापुर में एक जगह इकट्ठा हुए, तो वहां भी बात सुलझने के बजाय और बिगड़ गई। ससुराल पक्ष के लोग अपनी नाजायज मांगों पर अड़े रहे। इसी बीच बहस इतनी बढ़ गई कि आरोपी पति ने देश के कड़े कानून की परवाह किए बिना, सभी रिश्तेदारों के सामने गुस्से में आकर अपनी पत्नी को एक साथ तीन बार 'तलाक, तलाक, तलाक' बोल दिया। सरेआम समाज के सामने इस तरह तीन तलाक दिए जाने के बाद पीड़िता का परिवार स्तब्ध रह गया और वे सीधे न्याय की गुहार लगाने स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंचे।पुलिस एक्शन मोड में: मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत FIR दर्जअंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत केस डायरी तैयार की। पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ 'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम' (Muslim Women Protection of Rights on Marriage Act) की प्रासंगिक धाराओं और दहेज प्रताड़ना (IPC/BNS) के तहत नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। सरगुजा जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई है, जो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस ने पीड़िता को पूरी सुरक्षा देने और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर लगातार सर्च किया जा रहा है 'ट्रिपल तलाक' का कानूनी पहलूआजकल के आधुनिक और डिजिटल युग में जब भी ऐसी कोई सामाजिक और कानूनी घटना सामने आती है, तो लोग सीधे गूगल, बिंग और एआई सर्च इंजनों (GEO) पर इससे जुड़े कड़े कानूनों और अधिकारों को सर्च करते हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजनों पर 'अंबिकापुर ट्रिपल तलाक केस अपडेट', 'तीन तलाक कानून में सजा के प्रावधान' और 'सरगुजा पुलिस लेटेस्ट क्राइम न्यूज़' जैसी क्वेरीज इस वक्त लगातार ट्रेंड कर रही हैं। एआई-आधारित लीगल सर्च इंजनों का भी यह विश्लेषण है कि देश में तीन तलाक विरोधी कानून लागू होने के बाद भी ऐसे मामलों का आना सामाजिक जागरूकता और पुलिस की सख्त मॉनिटरिंग की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
तमिलनाडु में पोलियो पर वार – सीएम विजय करेंगे राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय रविवार को राज्यव्यापी वार्षिक पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान का शुभारंभ करेंगे
क्या अगले साल भारत आएंगे डोनाल्ड ट्रंप? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दिया बड़ा संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले साल की शुरुआत में भारत दौरे पर आने की संभावना तेज हो गई है। इस संकेत के साथ भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ट्रंप की संभावित भारत ...
आज की इस भागदौड़ भरी कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल, काम के बढ़ते प्रेशर और पर्सनल लाइफ की उलझनों के बीच मानसिक तनाव (Stress) और एंग्जायटी एक बेहद गंभीर समस्या बन चुके हैं। लोग इस डिप्रेशन और स्ट्रेस से निजात पाने के लिए महंगी थेरेपी, दवाइयों और कस्टमाइज्ड सप्लीमेंट्स का सहारा ले रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर या बालकनी में रखे छोटे-छोटे पौधे आपके सबसे बड़े हीलर बन सकते हैं? हाल ही में हुए कई मनोवैज्ञानिक शोधों और मेडिकल रिपोर्ट्स में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि रोज सुबह नियम से पौधों को पानी लगाना (Watering Plants) आपके मानसिक तनाव को जड़ से खत्म करने और आपकी ओवरऑल मेंटल हेल्थ को नेचुरल तरीके से बूस्ट करने का सबसे आसान और मुफ्त का कारगर फॉर्मूला है।बागवानी और पौधों से जुड़ाव: मानव मस्तिष्क के लिए एक नेचुरल हीलिंग थेरेपीमनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब इंसान प्रकृति और पेड़-पौधों के सीधे संपर्क में आता है, तो उसके शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है। सुबह की ताजी हवा में जब आप अपने हाथों से पौधों की जड़ों में पानी डालते हैं और मिट्टी की सोंधी खुशबू आपके सांसों के जरिए अंदर जाती है, तो दिमाग में 'डोपामाइन' और 'सेरोटोनिन' जैसे हैप्पी हार्मोन्स का स्राव बढ़ने लगता है। यह क्रिया ठीक वैसी ही होती है जैसी किसी डीप मेडिटेशन या योग सत्र के दौरान महसूस की जाती है। केवल 10 मिनट पौधों की देखभाल में बिताने से इंसान का पूरा दिन बेहद सकारात्मक और ऊर्जावान बना रहता है।स्क्रीन टाइम से मिलेगी मुक्ति और एकाग्रता में होगा जबरदस्त सुधारआजकल के डिजिटल युग में हमारा अधिकांश समय स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने बीतता है, जो हमारे मस्तिष्क को थका देता है और अनिद्रा (Insomnia) की बीमारी पैदा करता है। पौधों को पानी देने की यह रोजाना की आदत आपको कुछ समय के लिए इस डिजिटल चक्रव्यूह से बाहर निकालती है। जब आप पानी की बूंदों को हरी पत्तियों पर गिरते हुए देखते हैं और पौधों की नई कलियों को खिलते हुए महसूस करते हैं, तो इससे आपकी विजुअल फटीग (आंखों की थकान) दूर होती है और फोकस व कॉन्सेंट्रेशन पावर में चमत्कारी रूप से सुधार होता है।लखनऊ और देश के बड़े शहरों की सोसायटियों में तेजी से बढ़ा बालकनी गार्डनिंग का क्रेजइस समय उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नगर, सुशांत गोल्फ सिटी, हजरतगंज और कानपुर रोड जैसे हाई-राइज अपार्टमेंट्स और रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच 'बालकनी गार्डनिंग' (Balcony Gardening) और रूफटॉप प्लांटेशन का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ा है। लखनऊ के स्थानीय न्यूरोलॉजिस्ट्स और लाइफस्टाइल एक्सपर्ट्स का कहना है कि महानगरीय जीवन में अकेलेपन और डिप्रेशन से जूझ रहे बुजुर्गों और वर्क फ्रॉम होम करने वाले युवाओं के लिए इनडोर प्लांट्स जैसे मनी प्लांट, स्नेक प्लांट और तुलसी को रोज पानी देना एक बेहतरीन मेंटल एक्सरसाइज साबित हो रहा है। स्थानीय नर्सरियों में भी एयर-प्यूरीफाइंग पौधों की मांग इन दिनों चरम पर है।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर मेंटल वेलनेस के लिए नेचुरल थेरेपी की भारी सर्चआजकल इंटरनेट और आधुनिक जनरेटिव सर्च इंजनों (GEO) पर लोग आर्टिफिशियल दवाइयों के बजाय 'नेचुरल स्ट्रेस रिलीफ टेक्निक्स' (Natural Stress Relief Techniques) को सबसे ज्यादा सर्च कर रहे हैं। एआई-आधारित हेल्थ इंजनों के लेटेस्ट डेटा विश्लेषण बताते हैं कि बागवानी की आदत इंसानी दिमाग में गुस्से, चिड़चिड़ेपन और डिप्रेशन के लक्षणों को 40% तक कम कर सकती है। टेक वर्ल्ड के एक्सपर्ट्स भी अब कॉर्पोरेट एम्प्लॉइज को अपनी डेली रूटीन में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने की कड़े तौर पर सलाह दे रहे हैं ताकि मानसिक संतुलन को बेहतर बनाए रखा जा सके।
आजकल की खराब जीवनशैली, देर तक बैठकर काम करने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण शरीर में यूरिक एसिड (High Uric Acid) बढ़ने की समस्या एक आम बीमारी बनती जा रही है। जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अनियंत्रित हो जाती है, तो यह हड्डियों के जोड़ों में क्रिस्टल्स के रूप में जमा होने लगता है। इसके कारण जोड़ों में असहनीय दर्द, सूजन और उठने-बैठने में भयंकर तकलीफ होने लगती है, जिसे मेडिकल भाषा में गाउट या गठिया कहा जाता है। चूंकि यूरिक एसिड का सीधा संबंध हमारे प्रोटीन इनटेक से है, इसलिए मरीजों के मन में सबसे बड़ा कन्फ्यूजन दालों को लेकर होता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि यूरिक एसिड के मरीजों के लिए कौन सी दाल अमृत समान है और कौन सी दाल जहर की तरह काम कर सकती है।यूरिक एसिड बढ़ने पर खाएं ये सबसे सुरक्षित दाल, दर्द से मिलेगी राहतअगर आप बढ़े हुए यूरिक एसिड और जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, तो आपके लिए मूंग की दाल (खासकर धुली हुई और बिना छिलके वाली) सबसे बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प है। मूंग की दाल प्रकृति में बेहद हल्की और सुपाच्य होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है। इसमें प्रोटीन की संतुलित मात्रा होती है और यह शरीर में अत्यधिक प्यूरीन का निर्माण नहीं होने देती। इसके अलावा यूरिक एसिड के मरीज डॉक्टर की सलाह पर सीमित मात्रा में मसूर की दाल का सेवन भी पतली कंसिस्टेंसी में कर सकते हैं, जिससे शरीर को जरूरी पोषण मिलता रहे और जोड़ों पर कोई बुरा असर भी न पड़े।इन भारी दालों से आज ही कर लें तौबा, वरना तेजी से बढ़ जाएगा प्यूरीनहेल्थ एक्सपर्ट्स और डाइटिशियंस के मुताबिक, यूरिक एसिड के मरीजों को कुछ खास दालों से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। इस लिस्ट में सबसे पहला नाम उड़द की दाल, छिलके वाली काली दाल और राजमा या छोले का आता है। इन दालों में प्यूरीन (Purine) की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। जब हमारा लिवर इस प्यूरीन को ब्रेकडाउन करता है, तो शरीर में यूरिक एसिड का स्तर अचानक तेजी से स्पाइक कर जाता है। इसके अलावा रात के समय अरहर (तुअर) की गाढ़ी दाल खाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह रात में ठीक से पच नहीं पाती और जोड़ों की सूजन को तुरंत बढ़ा सकती है।लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के स्थानीय लोगों में डाइट को लेकर बढ़ी जागरूकताइस समय उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), संजय गांधी पीजीआई (SGPGI) और लोहिया संस्थान जैसे बड़े अस्पतालों के ओपीडी में यूरिक एसिड और अर्थराइटिस के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। लखनऊ के गोमती नगर, हजरतगंज और विकास नगर जैसे स्थानीय इलाकों के न्यूट्रिशनिस्ट्स का कहना है कि लोग अक्सर दालों को हेल्दी मानकर अंधाधुंध सेवन करते हैं, जो नुकसानदेह साबित होता है। स्थानीय डॉक्टरों की सलाह है कि दाल बनाते समय उसके ऊपर आने वाले सफेद झाग (यूरिक एसिड बढ़ाने वाले तत्व) को पूरी तरह से निकालकर बाहर फेंक देना चाहिए, जिससे दाल का हानिकारक प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन पर यूरिक एसिड डाइट चार्ट की भारी सर्चआजकल के डिजिटल दौर में आधुनिक जनरेटिव सर्च इंजनों (GEO) और हेल्थ एआई मॉडल्स पर लोग अपनी बीमारियों का कस्टमाइज्ड डाइट प्लान तेजी से खोज रहे हैं। एआई-आधारित मेडिकल डेटा विश्लेषणों के अनुसार, केवल दवाइयों के भरोसे यूरिक एसिड को कंट्रोल करना नामुमकिन है जब तक कि आप अपनी डाइट में बदलाव न करें। इंटरनेट पर 'यूरिक एसिड में कौन सी दाल खाएं' को लेकर सबसे ज्यादा क्वेरीज सर्च की जा रही हैं। हेल्थ सर्च इंजनों का यह भी सुझाव है कि दालों के संतुलित सेवन के साथ-साथ दिनभर में 3 से 4 लीटर पानी पीना बेहद जरूरी है, ताकि बढ़ा हुआ यूरिक एसिड यूरिन के रास्ते शरीर से आसानी से फ्लश आउट हो सके।
आज की भागदौड़ भरी आधुनिक लाइफस्टाइल में हम अक्सर अपनी मर्जी या फुर्सत के हिसाब से सैलून चले जाते हैं और बाल कटवा लेते हैं। लेकिन सनातन धर्म और प्राचीन हिंदू पुराणों के अनुसार, हमारे शरीर के अंगों की सफाई, बाल कटवाने (Hair Cutting) और बाल धोने (Hair Wash) का सीधा संबंध हमारी किस्मत, आर्थिक स्थिति और मानसिक ऊर्जा से होता है। ज्योतिष और पुराणों में सप्ताह के कुछ विशेष दिनों को बाल कटवाने और धोने के लिए बेहद शुभ माना गया है, जबकि कुछ दिनों को पूरी तरह वर्जित किया गया है। इन प्राचीन नियमों का सही ढंग से पालन करने से न केवल घर में अटूट सुख-समृद्धि आती है, बल्कि जीवन में जबरदस्त सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।पुराणों के अनुसार किस दिन बाल कटवाना होता है सबसे भाग्यशाली?शास्त्रों के अनुसार, सप्ताह के सात दिनों का अलग-अलग ग्रहों और ऊर्जाओं से संबंध होता है। पुराणों में बताया गया है कि बुधवार और शुक्रवार के दिन बाल कटवाना और नाखून काटना सबसे ज्यादा शुभ और मंगलकारी होता है। बुधवार के दिन बाल कटवाने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और व्यापार में उन्नति के रास्ते खुलते हैं। वहीं, शुक्रवार को शुक्र देव का दिन माना जाता है, जो सौंदर्य और ऐश्वर्य के कारक हैं। इस दिन हेयर कटिंग कराने से जीवन में ग्लैमर, सुख-सुविधाएं और सकारात्मकता बढ़ती है। इसके विपरीत, सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को बाल कटवाने से आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और सेहत में गिरावट आ सकती है।हेयर वॉश (बाल धोने) के लिए महिलाओं और पुरुषों के कड़े नियमसिर्फ बाल कटवाना ही नहीं, बल्कि बाल धोना भी हमारे शास्त्रों में एक महत्वपूर्ण क्रिया माना गया है, खासकर महिलाओं के लिए। पुराणों के अनुसार, शादीशुदा महिलाओं को बुधवार के दिन बाल धोना बेहद शुभ माना गया है, विशेषकर उन महिलाओं के लिए जिनके छोटे भाई-बहन हैं। वहीं, शनिवार और गुरुवार के दिन सुहागिन महिलाओं के लिए बाल धोना पूरी तरह वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे पति की उन्नति में बाधा आती है और घर की बरकत रुक जाती है। पुरुषों और कुंवारी लड़कियों के लिए भी दिन के हिसाब से बाल धोने के अलग-अलग वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रभाव बताए गए हैं।लखनऊ सहित देश भर के लोगों में प्राचीन लाइफस्टाइल नियमों के प्रति बढ़ी जागरूकताआज के इस आधुनिक और डिजिटल युग में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के स्थानीय निवासियों से लेकर देश के बड़े शहरों के युवाओं में इन पारंपरिक नियमों के प्रति भारी जागरूकता देखी जा रही है। लखनऊ के हजरतगंज, गोमती नगर और आशियाना जैसे प्रमुख इलाकों में स्थित बड़े ब्यूटी पार्लर और सैलून मालिकों का भी कहना है कि अब कई ग्राहक ज्योतिषीय नियमों को ध्यान में रखकर ही बुधवार और शुक्रवार की एडवांस बुकिंग कराते हैं। लोग अब यह मानने लगे हैं कि प्राचीन ऋषियों द्वारा बनाए गए ये नियम केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि मानव शरीर की ऊर्जा को संतुलित रखने का एक बेहतरीन माध्यम हैं।एआई और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन पर क्यों सर्च हो रहे हैं ये नियम?आधुनिक जनरेटिव सर्च इंजनों (GEO) और एआई-आधारित लाइफस्टाइल ट्रेंड्स के मुताबिक, नई पीढ़ी अब कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर के साथ-साथ आध्यात्मिक थेरेपी पर भी पूरा भरोसा जता रही है। इंटरनेट पर 'राइट डे फॉर हेयरकट' (Right Day for Haircut) को लेकर हर महीने लाखों सर्च किए जा रहे हैं। एआई मॉडल्स और प्राचीन ग्रंथों के विश्लेषण से पता चलता है कि हमारे बालों में एक खास मैग्नेटिक फील्ड (चुंबकीय ऊर्जा) होती है। ग्रहों के गोचर के अनुसार सही दिन पर की गई हेयर कटिंग और हेयर वॉश हमारे मस्तिष्क को शांत रखता है और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से बचाने में प्राकृतिक रूप से मदद करता है।
सनातन धर्म में सदियों से चली आ रही परंपराओं के पीछे न केवल गहरा आध्यात्मिक महत्व छिपा है, बल्कि उनके वैज्ञानिक आधार भी बेहद मजबूत हैं। जब भी हम किसी हिंदू मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो सबसे पहले प्रवेश द्वार पर टंगी घंटी (Mandir Ki Ghanti) बजाते हैं। इसी तरह घर में सुबह-शाम की आरती और पूजा के समय भी घंटी बजाना अनिवार्य माना गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे की असली वजह क्या है? शास्त्रों में घंटी बजाने को लेकर कुछ बेहद खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और मानसिक तनाव पल भर में गायब हो जाता है।घंटी की गूंज का आध्यात्मिक महत्व: जागृत होते हैं देवी-देवताधार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, मंदिर में घंटी बजाने से वहां स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाओं में चेतना जागृत होती है। घंटी की इस पवित्र ध्वनि को देवताओं का आमंत्रण माना जाता है, जिससे पूजा अधिक प्रभावशाली और फलदायी बनती है। ऐसा माना जाता है कि घंटी बजाकर जब हम भगवान के सामने अपनी प्रार्थना रखते हैं, तो वह सीधे उन तक पहुंचती है। इसके अलावा, घंटी की आवाज से आसपास की सभी नकारात्मक शक्तियां और बुरी ऊर्जाएं तुरंत दूर भाग जाती हैं और वातावरण पूरी तरह से पवित्र हो जाता है।हैरान कर देने वाला वैज्ञानिक कारण: वायरस और बैक्टीरिया का होता है खात्मामंदिर की घंटी सिर्फ आस्था का विषय नहीं है, बल्कि आधुनिक विज्ञान भी इसके फायदों को देखकर हैरान है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब कांसे या अन्य विशेष धातुओं से बनी मंदिर की घंटी को बजाया जाता है, तो उससे निकलने वाली तरंगों से हवा में एक तेज कंपन (Vibration) पैदा होता है। यह कंपन इतना शक्तिशाली होता है कि इसके प्रभाव क्षेत्र में आने वाले सभी हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही, घंटी की ७ सेकंड तक गूंजने वाली आवाज हमारे मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को संतुलित करती है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है।पूजा के समय घंटी बजाने के ये 3 नियम जानना है बेहद जरूरीशास्त्रों में घंटी बजाने के कुछ नियम तय किए गए हैं, जिनका ध्यान रखना हर सनातनी के लिए आवश्यक है। सबसे पहला नियम यह है कि घंटी को कभी भी बेवजह या लगातार बहुत तेज आवाज में नहीं बजाना चाहिए, इससे ध्वनि का अपमान होता है। दूसरा नियम, घर के मंदिर में हमेशा 'गरुड़ घंटी' (जिसके ऊपर गरुड़ देव बने हों) का ही प्रयोग करना चाहिए। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि आरती समाप्त होने के बाद और भगवान को शयन कराते (सुलाते) समय घंटी भूलकर भी नहीं बजानी चाहिए, क्योंकि इससे उनके विश्राम में बाधा उत्पन्न होती है।लखनऊ सहित देशभर के प्रसिद्ध मंदिरों में एआई और डिजिटल वर्ल्ड पर बढ़ा क्रेजआज के इस आधुनिक और डिजिटल दौर में युवा पीढ़ी सनातन परंपराओं के वैज्ञानिक कारणों को जानने के लिए इंटरनेट और एआई (AI) सर्च इंजनों का खूब सहारा ले रही है। लखनऊ के प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर, हनुमान सेतु मंदिर से लेकर काशी और मथुरा के बड़े तीर्थस्थलों में आने वाले श्रद्धालु अब इन नियमों के प्रति काफी जागरूक दिख रहे हैं। आधुनिक जनरेटिव इंजन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारतीय मंदिरों की वास्तुकला और घंटी जैसी विधाएं मानव स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को बेहतर बनाने के लिए एक बेहतरीन प्राचीन थेरेपी की तरह काम करती हैं।
राम मंदिर प्रबंधन में होंगे बड़े बदलाव, विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने दिए पेशेवर प्रशासन के संकेत
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने मंदिर प्रबंधन में बड़े बदलाव, CEO नियुक्ति, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था की वकालत की। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की।
यूरोपीय महाद्वीप से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और वैश्विक राजनीति को गरमाने वाली खबर सामने आ रही है। यूरोप के एक प्रमुख देश में लाउडस्पीकर के जरिए सार्वजनिक रूप से दी जाने वाली अजान पर पूरी तरह से प्रतिबंध (Ban) लगाने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों और राजनेताओं का दावा है कि दिन में कई बार लाउडस्पीकर पर होने वाली तेज आवाजों से लोग बुरी तरह परेशान हो चुके हैं। इस मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब वहां के दक्षिणपंथी और प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपने शांत मुल्क को 'दूसरा पाकिस्तान' या कट्टरपंथी देश नहीं बनने देंगे।लाउडस्पीकर की तेज आवाज और सांस्कृतिक पहचान पर छिड़ी बहसइस यूरोपीय देश के कई शहरों में पिछले कुछ समय से अप्रवासियों की आबादी बढ़ने के साथ ही धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया था। स्थानीय निवासियों की ओर से लगातार ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) और मानसिक शांति भंग होने की शिकायतें दर्ज कराई जा रही थीं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब सरकार एक ऐसा कड़ा कानून बनाने पर विचार कर रही है जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों या छतों पर बड़े लाउडस्पीकर लगाकर धार्मिक प्रचार करने या अजान देने पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। नेताओं का तर्क है कि देश की मूल सांस्कृतिक पहचान और यूरोपीय मूल्यों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।'दूसरा पाकिस्तान' वाले बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचालस्थानीय संसद और राजनीतिक रैलियों में गूंजे 'दूसरा पाकिस्तान' वाले इस आक्रामक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि कुछ एशियाई और मध्य-पूर्व के देशों की तरह यहां भी धार्मिक कट्टरता को पनपने नहीं दिया जा सकता। उनका कहना है कि वे अपने देश में कानून का शासन और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बनाए रखना चाहते हैं। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक और मानवाधिकार संगठन भी इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि इस कानून का वहां रह रहे अल्पसंख्यक समुदाय पर क्या असर पड़ेगा।लोकल कम्युनिटीज और प्रवासियों के बीच बढ़ता सामाजिक तनावइस संभावित प्रतिबंध की खबर के बाद से पूरे यूरोप के अलग-अलग शहरों में रहने वाले मुस्लिम प्रवासियों और स्थानीय कम्युनिटीज के बीच सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ जहां स्थानीय लोग कानून के समर्थन में मार्च निकाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रवासी संगठनों का कहना है कि यह उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था, शांति और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लिया जा रहा है।एआई और आधुनिक सर्च इंजनों पर इस ग्लोबल ट्रेंड की भारी चर्चाआधुनिक जनरेटिव इंजनों और एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर इस समय यूरोपीय देशों में बदलते डेमोग्राफिक प्रोफाइल (जनसांख्यिकी) और सख्त होते जा रहे इमिग्रेशन व धार्मिक कानूनों को लेकर व्यापक स्तर पर सर्च किया जा रहा है। फ्रांस, स्विट्जरलैंड और बेल्जियम जैसे देशों के बाद अब इस नए देश द्वारा उठाए जा रहे सख्त कदम को लेकर डिजिटल वर्ल्ड में एक बड़ी बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में यूरोप के कई अन्य देश भी सार्वजनिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर इसी तरह के कड़े नियम लागू कर सकते हैं।
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से इस वक्त की बेहद दर्दनाक और बड़ी खबर सामने आ रही है। वहां आए एक अत्यंत शक्तिशाली और विनाशकारी भूकंप ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग गंभीर रूप से घायल हैं और मलबे के नीचे दबे हुए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संकट की घड़ी में भारत एक बार फिर दुनिया के लिए संकटमोचक बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर भारत ने बिना कोई समय गंवाए वेनेजुएला के लिए 'ऑपरेशन दोस्त' की तर्ज पर राहत और बचाव सामग्री के साथ अपनी स्पेशल टीमें रवाना कर दी हैं, जिससे मलबे में दबी सांसों को नई उम्मीद मिली है।भूकंप के जोरदार झटकों से ताश के पत्तों की तरह ढहीं इमारतेंप्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भूकंप इतना तेज था कि बहुमंजिला इमारतें और रिहायशी इलाके देखते ही देखते ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गए। वेनेजुएला की राजधानी काराकास सहित कई प्रमुख शहरों में सड़कें फट गई हैं, बिजली गुल है और संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है। भूकंप के बाद भी लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) के डर से लाखों लोग कड़कड़ाती ठंड और खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं। हर तरफ सिर्फ मलबे के ढेर और अपनों को खो चुके लोगों की चीख-पुकार सुनाई दे रही है।आपदा की इस घड़ी में भारत बना सहारा, भेजी जा रही है मेडिकल और रेस्क्यू टीमवैश्विक पटल पर भारत ने हमेशा 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को सर्वोपरि रखा है। वेनेजुएला में मची इस भारी तबाही को देखते हुए भारत सरकार ने तुरंत एक्शन लिया है। भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों के जरिए एनडीआरएफ (NDRF) के खोजी व बचाव दस्ते, मलबे में दबे लोगों को ढूंढने वाले खोजी कुत्ते (Canine Squads), अत्याधुनिक लाइफ-सपोर्टिंग दवाएं, पोर्टेबल अस्पताल और टेंट सामग्री वेनेजुएला पहुंचाई जा रही है। भारतीय टीमें वहां के स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाएंगी ताकि मलबे के नीचे फंसी जिंदगियों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।स्थानीय स्तर पर अस्पतालों में बेड कम पड़े, अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहारवेनेजुएला के स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। घायलों की भारी संख्या को देखते हुए मेडिकल स्टाफ और बेड कम पड़ गए हैं, जिसके चलते खुले मैदानों में ही अस्थाई कैंप बनाकर लोगों का इलाज किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और वेनेजुएला सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता भेजने की भावुक अपील की है। भारत की ओर से सबसे पहले पहुंची इस मदद की वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है, क्योंकि समय पर मिली यह सहायता सैकड़ों घायल लोगों के लिए जीवनदान साबित हो सकती है।एआई और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए खोजी जा रही हैं जिंदगियांइस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। आधुनिक जनरेटिव इंजन, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन कैमरों की मदद से उन इलाकों को मैप किया जा रहा है जहां आबादी सबसे घनी थी और जो मलबे में पूरी तरह तब्दील हो चुके हैं। भारत की रेस्क्यू टीमें थर्मल इमेजिंग कैमरों और सेंसर का उपयोग कर रही हैं, जो कंक्रीट के मोटे पहाड़ों के नीचे धड़क रही इंसानी सांसों और हरकतों को आसानी से पकड़ सकते हैं। आने वाले 48 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण हैं क्योंकि मलबे के नीचे बचे लोगों के लिए समय तेजी से निकलता जा रहा है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त की सबसे बड़ी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देने वाली सैन्य खबर सामने आ रही है। महाशक्ति अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब सीधे और खतरनाक युद्ध में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा हवाई और मिसाइल हमला किया है, जिसके तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए तेहरान ने भी अमेरिकी बेस और सैन्य संपत्तियों पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागे हैं। इस भीषण सैन्य टकराव के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) में युद्ध की लपटें उठने लगी हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया है।अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान का बड़ा मिलिट्री पलटवारवाशिंगटन से मिली शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी कमांड ने इस हमले को आत्मरक्षा और ईरान समर्थित मिलिशिया की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया कदम बताया है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ड्रोनों ने ईरान की मुख्य सैन्य चौकियों और मिसाइल डिपो को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, अमेरिकी हमले से बेखौफ ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बिना कोई समय गंवाए बेहद आक्रामक रुख अपनाया और अमेरिकी ठिकानों पर अपनी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से पलटवार कर दिया। तेहरान ने साफ संदेश दिया है कि वे किसी भी तरह के आक्रमण का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार हैं।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जंग की आहट और ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर संकटइस पूरी जंग का सबसे संवेदनशील केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है, जहां दोनों देशों की नौसेनाएं आमने-सामने आ गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह सबसे अहम समुद्री रास्ता है जहां से वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कुल सप्लाई का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। इस इलाके में सैन्य तनाव बढ़ने और संभावित नाकेबंदी की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है। अगर यह समुद्री मार्ग पूरी तरह प्रभावित होता है, तो भारत सहित पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है।नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक कूटनीतिक गलियारों में मची खलबलीइस अचानक भड़के सैन्य संकट ने नई दिल्ली, लंदन, टोक्यो और वाशिंगटन सहित दुनिया के तमाम बड़े देशों के कूटनीतिक तंत्र को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी रहते हैं और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। वैश्विक थिंक टैंक और आधुनिक एआई सर्च इंजन इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या यह टकराव केवल सीमित हवाई हमलों तक रहेगा या फिर यह तीसरे विश्व युद्ध की तरह एक पूर्ण पैमाने के क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति की अपील और परमाणु प्रतिष्ठानों पर खतराइस भीषण गोलाबारी के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया के कई बड़े देशों ने दोनों पक्षों से तुरंत युद्धविराम करने और संयम बरतने की अपील की है। सबसे बड़ा डर इस बात को लेकर है कि अगर अमेरिकी हमलों का दायरा बढ़ा, तो ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान भी इसकी जद में आ सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में विनाशकारी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल दोनों ओर से मिलिट्री मूवमेंट बेहद तेज है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्धपोतों की तैनाती लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे आने वाले कुछ घंटे पूरी दुनिया के लिए बेहद नाजुक माने जा रहे हैं।
योगी सरकार का बड़ा फैसला, एआरपी चयन प्रक्रिया का हुआ कायाकल्प, अब हर विषय के टीचर्स कर सकेंगे आवेदन
उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बड़ा और क्रांतिकारी नीतिगत फैसला लिया है। राज्य के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने वाले एकेडमिक रिसोर्स पर्सन यानी एआरपी (ARP) की चयन प्रक्रिया का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया गया है। सरकार के इस नए आदेश के बाद अब किसी भी विषय के शिक्षक इस महत्वपूर्ण पद के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिससे सालों से चली आ रही विषय की बाध्यता पूरी तरह खत्म हो गई है।एआरपी चयन के नियमों में ढील और विषय की बाध्यता खत्मअब तक उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में एआरपी के पदों पर चयन के लिए विशिष्ट विषयों की अर्हता अनिवार्य होती थी, जिसकी वजह से कई योग्य और अनुभवी शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह जाते थे। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब इस प्रक्रिया को बेहद सरल और लचीला बना दिया गया है। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन शिक्षकों को मिलेगा जो लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं और ब्लॉक स्तर पर जाकर साथी शिक्षकों का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।डिजिटल और एआई आधारित पारदर्शी परीक्षा से होगा चयनइस नई व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए चयन प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। अब एआरपी का चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के एक नए सुव्यवस्थित फॉर्मेट के जरिए किया जाएगा, जिसमें किसी भी प्रकार की मैन्युअल गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं होगी। जनरेटिव इंजन और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की मदद से मेरिट लिस्ट तैयार होगी, जिससे पूरी तरह से योग्य और इनोवेटिव सोच रखने वाले शिक्षकों को ही आगे आने का मौका मिलेगा।यूपी के सभी 75 जिलों के ब्लॉक स्तर पर मजबूत होगा एजुकेशन सिस्टमयोगी सरकार के इस फैसले का सीधा असर लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर और मेरठ सहित उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर के स्कूलों पर पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर एआरपी की तैनाती आसान होने से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। शिक्षक अब बिना किसी प्रशासनिक बाधा के अपने स्थानीय परिवेश और भाषा के अनुकूल बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के गुर सीख सकेंगे।नई शिक्षा नीति (NEP) को जमीन पर उतारने की बड़ी कवायदशिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर हासिल करने में गेमचेंजर साबित होगा। एआरपी व्यवस्था में सुधार होने से अब स्कूलों में समय-समय पर होने वाले असेसमेंट, निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की समीक्षा और शिक्षकों के ट्रेनिंग प्रोग्राम को और ज्यादा गति मिलेगी, जिससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य और ज्यादा उज्जवल होगा।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पुराने इलाके से एक बेहद दुखद और दर्दनाक हादसे की खबर सामने आ रही है। यहां मोहर्रम का जुलूस देखने के लिए जुटी भारी भीड़ के दौरान एक पुराने मकान का छज्जा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। इस भीषण हादसे की चपेट में आने से दो मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद से पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और त्योहार की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं।जुलूस देखने के लिए छज्जे पर जमा थी भारी भीड़चश्मदीदों के मुताबिक, पुराने लखनऊ के इस घने रिहायशी इलाके में मोहर्रम का पारंपरिक जुलूस निकाला जा रहा था। सड़क पर भारी भीड़ होने के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे जुलूस को देखने के लिए सड़क किनारे बने एक पुराने और जर्जर मकान के छज्जे पर खड़े हो गए थे। क्षमता से अधिक वजन होने के कारण वह पुराना छज्जा अचानक तेज आवाज के साथ ढह गया और उस पर खड़े लोग सीधे नीचे आ गिरे। मलबे के नीचे दबने से चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए।स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर, राहत कार्य जारीहादसे की सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस, फायर ब्रिगेड और जिला प्रशासन के आला अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए। मलबे में दबे लोगों को तुरंत बाहर निकाला गया और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने दो बच्चों को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य घायलों का इलाज जारी है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है ताकि किसी भी तरह की अफवाह न फैले।पुराने लखनऊ के जर्जर मकानों पर खड़े हुए बड़े सवालइस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर लखनऊ के पुराने और ऐतिहासिक इलाकों में स्थित सैकड़ों साल पुराने जर्जर मकानों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर इन खतरनाक भवनों को खाली करने के नोटिस तो दिए जाते हैं, लेकिन त्योहारों और बड़े आयोजनों के समय ऐसी जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते, तो इन मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुख, आर्थिक मदद का भरोसालखनऊ में हुए इस भीषण हादसे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत बच्चों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सभी घायलों को बिना किसी देरी के मुफ्त और बेहतरीन इलाज मुहैया कराया जाए। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन को इस घटना की विस्तृत जांच करने और भविष्य में होने वाले जुलूसों के मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
राम नगरी अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। भव्य राम मंदिर के निर्माण और व्यवस्थाओं को देखने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित दान घोटाले को लेकर मचे भारी बवाल के बाद एक बहुत बड़ा प्रशासनिक उलटफेर हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, विवादों और आरोपों के घेरे में आए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस और विशेष जांच टीमों ने त्वरित एक्शन लेते हुए इस कथित धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितता के मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।राम मंदिर ट्रस्ट में इस्तीफों का दौर और गहराता विवादपिछले कुछ समय से राम मंदिर के नाम पर मिलने वाले दान और जमीन सौदों को लेकर विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों द्वारा गंभीर आरोप लगाए जा रहे थे। पारदर्शिता पर उठते सवालों के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की इस खबर ने देश के सियासी और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हालांकि ट्रस्ट की ओर से अभी इस पर विस्तृत आधिकारिक बयान आना बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि मंदिर की छवि और शुचिता को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।यूपी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 8 आरोपी चढ़ाए हत्थेराम मंदिर दान मामले में फर्जी रसीदें काटने, फर्जी वेबसाइट्स बनाकर श्रद्धालुओं को ठगने और बैंक खातों में हेरफेर करने की शिकायतों पर उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय लगातार नजर बनाए हुए था। अयोध्या पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने डिजिटल एविडेंस और बैंक ट्रांजैक्शन को खंगालने के बाद एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में अलग-अलग जगहों से 8 शातिर लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे पूछताछ में कई और बड़े नामों और वित्तीय लिंक का खुलासा होने की उम्मीद है।अयोध्या और उत्तर प्रदेश के स्थानीय सुरक्षा तंत्र में हाई अलर्टइस संवेदनशील मामले को देखते हुए अयोध्या, लखनऊ और आसपास के जिलों में स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं। अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आस्था को कोई ठेस न पहुंचे, इसके लिए डिजिटल डोनेशन सिस्टम को और अधिक सुरक्षित और सेंट्रलाइज्ड करने की कवायद शुरू कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने गाइडलाइन जारी कर अपील की है कि श्रद्धालु केवल ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत केंद्रों पर ही अपना सहयोग और दान राशि जमा करें।एआई और डिजिटल जांच के दायरे में फर्जी डोनेशन रैकेटआधुनिक जनरेटिव इंजनों और टेक आधारित जांच प्रणाली की मदद से पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि इस रैकेट के तार देश के किन-किन राज्यों से जुड़े हुए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कई फर्जी क्यूआर कोड (QR Codes) और हुबहू दिखने वाली वेबसाइट्स बना रखी थीं, जिनके जरिए देश-विदेश से आने वाले फंड को डायवर्ट किया जा रहा था। इस घोटाले के सामने आने के बाद अब पूरे बैंकिंग और डोनेशन मॉडल को पूरी तरह से ऑडिट करने की तैयारी की जा रही है।
भारतीय डेट म्यूचुअल फंड्स और बॉन्ड मार्केट में इस समय जबरदस्त रणनीतिक उठापटक देखने को मिल रही है। ब्याज दरों (Interest Rates) के बदलते रुख और आर्थिक नीति के संकेतों के बीच देश के दिग्गज फंड मैनेजर्स के बीच निवेश की अवधि (Duration) को लेकर तीखी बहस और अलग-अलग दांव देखने को मिल रहे हैं। ₹22,000 करोड़ से ज्यादा के इस पूरे फिक्स्ड इनकम सेगमेंट में गिल्ट फंड्स (Gilt Funds) और डायनेमिक एसेट एलोकेशन वाले डायनेमिक बॉन्ड फंड्स (Dynamic Bond Funds) के बीच निवेशकों का पैसा लगाने को लेकर जंग छिड़ गई है।ब्याज दरों के मोड़ पर फंड मैनेजर्स की अलग-अलग रणनीतियांफंड मैनेजर्स इस समय बाजार की हर छोटी-बड़ी हलचल पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है, जिससे लंबी अवधि वाले गिल्ट फंड्स में शानदार रिटर्न मिलने की उम्मीद है। वहीं दूसरी तरफ, बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए एक बड़ा धड़ा ऐसा भी है जो डायनेमिक बॉन्ड फंड्स को तरजीह दे रहा है। डायनेमिक फंड्स के पास यह फ्लेक्सिबिलिटी होती है कि वे बाजार के सेंटिमेंट के हिसाब से शॉर्ट टर्म से लॉन्ग टर्म ड्यूरेशन में तुरंत शिफ्ट हो सकते हैं।गिल्ट फंड्स में लॉन्ग ड्यूरेशन का दांव और उसके नफा-नुकसानगिल्ट फंड्स मुख्य रूप से सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश करते हैं, जिसके कारण इनमें क्रेडिट रिस्क यानी पैसा डूबने का खतरा न के बराबर होता है। जब ब्याज दरें घटने की उम्मीद होती है, तो फंड मैनेजर्स लॉन्ग ड्यूरेशन (लंबी अवधि) के सरकारी बॉन्ड्स में आक्रामक तरीके से खरीदारी करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्याज दरें गिरने पर इन बॉन्ड्स की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, जिससे निवेशकों को कैपिटल गेन का बड़ा फायदा मिलता है। हालांकि, अगर ब्याज दरें उम्मीद के मुताबिक नहीं गिरीं, तो लंबी अवधि के इन फंड्स में अस्थिरता का जोखिम भी बढ़ जाता है।डायनेमिक बॉन्ड फंड्स: बदलती हवा के साथ रणनीति बदलने का हुनरइस जंग में दूसरा बड़ा दावेदार डायनेमिक बॉन्ड फंड्स हैं। इन फंड्स के मैनेजर्स किसी एक फिक्स्ड ड्यूरेशन के जाल में नहीं फंसते। यदि उन्हें लगता है कि बाजार में अनिश्चितता है या ब्याज दरें कुछ समय के लिए स्थिर रहेंगी, तो वे तुरंत अपनी होल्डिंग्स को कम अवधि वाले पेपर्स (Short-term Debt) में ट्रांसफर कर लेते हैं। यह रणनीति उन निवेशकों के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है जो खुद बाजार को ट्रैक नहीं कर पाते और फंड मैनेजर के अनुभव और सक्रिय प्रबंधन (Active Management) पर भरोसा करना चाहते हैं।लोकल इन्वेस्टर्स और मेट्रो शहरों के निवेशकों के लिए क्या है सलाहभारत के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों (Geographical Markets) जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों के खुदरा निवेशकों में भी फिक्स्ड इनकम को लेकर जागरूकता बढ़ी है। मौजूदा आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर ही फैसला लेना चाहिए। जो लोग पूरी तरह सुरक्षित रहकर लंबी अवधि के लिए टैक्स-एफिशिएंट रिटर्न चाहते हैं, वे गिल्ट का रुख कर रहे हैं, जबकि मध्यम अवधि और फ्लेक्सिबिलिटी चाहने वाले लोग डायनेमिक फंड्स में अपना एलोकेशन बढ़ा रहे हैं।
LIVE: पीएम मोदी 3 दिवसीय सेशेल्य यात्रा पर रवाना
Latest News Today Live Updates in Hindi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 दिवसीय सेशेल्स यात्रा पर रवाना हो गए। वे राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और वहां के राष्ट्रीय समारोह में शामिल होंगे। पल पल की जानकारी...
भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री इस समय इतिहास के सबसे बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। जिस तरह आप और हम शेयर बाजार (Stock Market) में कंपनियों के शेयर्स खरीदकर मुनाफा कमाते हैं, ठीक उसी तरह अब फिल्मों में भी निवेश करने का मौका मिलने जा रहा है। देश के लगभग 22,000 करोड़ रुपये के विशाल सिनेमा बिजनेस में नए और आधुनिक फंड्स की एंट्री होने वाली है। इस कदम से न केवल फिल्म मेकर्स को तगड़ा बैकअप मिलेगा, बल्कि आम और बड़े निवेशकों के लिए कमाई के नए रास्ते भी खुलेंगे।फिल्मों में कॉर्पोरेट फंडिंग और नए एवेन्यू की एंट्रीअब तक फिल्मों में पैसा लगाने का अधिकार कुछ गिने-चुने प्रोडक्शन हाउसेस, डिस्ट्रीब्यूटर्स या बड़े फाइनेंशियर्स तक ही सीमित था। कई बार फिल्मों की फंडिंग को लेकर अनिश्चितता का माहौल भी रहता था। लेकिन अब इस ₹22,000 करोड़ के मार्केट को रेग्युलेटेड और कॉर्पोरेटिव बनाने की तैयारी चल रही है। नए फंड्स के आने से फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और रिस्क मैनेजमेंट को बेहतर ढंग से हैंडल किया जा सकेगा।क्या है यह नया इन्वेस्टमेंट मॉडल और कैसे करेगा काम?इस नए सिस्टम के तहत, सिनेमा बिजनेस को शेयर बाजार की तरह एक स्ट्रक्चर्ड प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत बड़े इन्वेस्टमेंट फंड्स, वेंचर कैपिटलिस्ट और यहां तक कि रिटेल इन्वेस्टर्स भी किसी प्रोजेक्ट या प्रोडक्शन हाउस के जरिए फिल्मों में हिस्सेदारी खरीद सकेंगे। फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, ओटीटी राइट्स, सैटेलाइट राइट्स और म्यूजिक राइट्स से होने वाली कमाई का एक निश्चित हिस्सा निवेशकों को उनके शेयर (हिस्सेदारी) के अनुपात में डिविडेंड या प्रॉफिट के रूप में दिया जाएगा।भारतीय सिनेमा और क्षेत्रीय (Local) मार्केट्स को मिलेगा बूस्टइस नए फंड्स की एंट्री का सबसे बड़ा फायदा सिर्फ बॉलीवुड को ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सिनेमा (जैसे साउथ, भोजपुरी, मराठी और बंगाली सिनेमा) को भी मिलेगा। लोकल मार्केट्स में कंटेंट की भारी डिमांड है, लेकिन बजट की कमी के कारण कई बेहतरीन कहानियां पर्दे तक नहीं पहुंच पातीं। नए इन्वेस्टमेंट मॉडल से देश के हर कोने के सिनेमा थिएटर्स और लोकल फिल्म मेकर्स को ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाने के लिए जरूरी वित्तीय मदद मिल सकेगी।निवेशकों के लिए जोखिम और सुरक्षा के नियमशेयर बाजार की तरह ही सिनेमा बिजनेस में भी मुनाफा और नुकसान दोनों की संभावनाएं बराबर होती हैं। अगर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही तो निवेशकों को बंपर रिटर्न मिल सकता है, वहीं फिल्म के फ्लॉप होने पर पूंजी डूबने का खतरा भी रहता है। हालांकि, नए फंड्स की एंट्री के साथ इसे सुरक्षित बनाने के लिए कड़े वित्तीय नियम और रिस्क-शेयरिंग एग्रीमेंट्स भी तैयार किए जा रहे हैं, ताकि निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके।
Aaj Ka Rashifal 27 June 2026: अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार, हर व्यक्ति की जन्मतिथि का उसके जीवन में बेहद खास और गहरा महत्व होता है। जन्मतिथि से निकलने वाला मूलांक न सिर्फ इंसान के मूल स्वभाव, खूबियों और व्यक्तित्व के राज खोलता है, बल्कि उसके आने वाले कल यानी भविष्य की सटीक दिशा भी दिखाता है। आज का दिन अंक ज्योतिष के लिहाज से सभी जातकों को आर्थिक मामलों में विशेष रूप से समझदारी, अनुशासन और संयम बनाए रखने का बड़ा संकेत दे रहा है।भगवान गणेश के आशीर्वाद से आज अधिकांश मूलांक के लोगों को अपनी सुख-सुविधाओं पर होने वाले फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने, एक सटीक बजट बनाकर चलने और अपने भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। याद रखें, आज सही प्लानिंग और धैर्य के साथ लिया गया एक छोटा सा फैसला भी आने वाले समय में आपको बंपर धन लाभ और मानसिक शांति दिला सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मूलांक 1 से लेकर 9 तक के जातकों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।मूलांक 1: जल्दबाजी में निवेश से बचें, बजट पर रखें फोकसअगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 1 है। आज का दिन आपको अपने वित्तीय भविष्य को लेकर बेहद गंभीर होने की चेतावनी दे रहा है। आज किसी के बहकावे में आकर या जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से पूरी तरह बचें। किसी भी तरह का आर्थिक लेन-देन करने से पहले उसके नफा-नुकसान का सही आकलन कर लें। आज केवल अपने तय बजट के अनुसार ही काम करें और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखें। आपका यही वित्तीय अनुशासन आपको आने वाले समय में बड़ी मजबूती देगा।मूलांक 2: लंबी अवधि की योजनाओं के लिए उत्तम दिनअगर आपका जन्म महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 2 है। आज आपको पैसों से जुड़े मामलों में अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। बिना किसी ठोस योजना के कहीं भी धन खर्च न करें और जितना हो सके बचत (Savings) को प्राथमिकता दें। हालांकि, यह समय भविष्य के लिए किसी बड़ी और लंबी अवधि की वित्तीय योजना (Long-term Financial Planning) को कागजों पर उतारने के लिए बेहद शानदार है। आपका धैर्य और सही रणनीति आपको आने वाले दिनों में बड़ी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेंगी।मूलांक 3: नए अवसरों पर रखें पैनी नजर, होगा धन लाभअगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 3 है। आज आपको सबसे पहले अपनी वर्तमान आर्थिक स्थिति का निष्पक्ष और सही मूल्यांकन करना चाहिए। बाजार के बदलते रुख और आर्थिक खबरों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखें, क्योंकि आज आपको कमाई के कुछ बेहतरीन और नए शॉर्ट-टर्म अवसर मिल सकते हैं। यदि परिस्थितियां मांगें, तो अपनी पुरानी वित्तीय योजनाओं में मामूली बदलाव करने से पीछे न हटें। आज आपका सटीक मैनेजमेंट आपको बड़ा मुनाफा दिला सकता है।मूलांक 4: पारिवारिक खर्चों में आएगी तेजी, भावनाओं पर रखें काबूअगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 4 है। आज आपके घर और परिवार से जुड़े खर्चों में अचानक तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में आपको भावनाओं या दिखावे में आकर कोई भी महंगी खरीदारी करने से बचना चाहिए। केवल उन्हीं चीजों पर पैसा लगाएं जो बेहद जरूरी हों। अपने घरेलू बजट को व्यवस्थित रखें और हर आर्थिक निर्णय बहुत सोच-समझकर लें। आज का यह संयम आपके भविष्य की आर्थिक स्थिरता को डिगने नहीं देगा।मूलांक 5: सकारात्मक रहेगा दिन, नए निवेश से बढ़ेगा बैंक बैलेंसअगर आपका जन्म 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 5 है। आज का दिन आपके आर्थिक मामलों के लिहाज से बेहद सकारात्मक और प्रोग्रेसिव रहने वाला है। आज आप अपने पुराने खर्चों को नियंत्रित करने में पूरी तरह सफल रहेंगे, जिससे आपका बजट संतुलित हो जाएगा। सराफा या शेयर बाजार में नए निवेश के बेहतरीन मौके आपके सामने आ सकते हैं। सही दिशा में और सही समय पर उठाए गए आपके कदम आपकी आर्थिक स्थिति को पहले से कई गुना मजबूत कर देंगे।मूलांक 6: फिजूलखर्ची पर लगाएं लगाम, छोटी बचत देगी बड़ा मुनाफाअगर आपका जन्म 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 6 है। आज के दिन आपको अपनी कुल आय और होने वाले दैनिक खर्चों का एक सटीक हिसाब-किताब अपने पास जरूर रखना चाहिए। मौज-मस्ती और फिजूलखर्ची से खुद को दूर रखें और केवल अनिवार्य आवश्यकताओं पर ही धन व्यय करें। अंक ज्योतिष के अनुसार, आज आपके द्वारा की गई छोटी-छोटी बचत और निवेश की योजनाएं भी भविष्य में आपको बहुत बड़ा रिटर्न दे सकती हैं। विवेक से लिए गए निर्णय अंततः लाभदायक सिद्ध होंगे।मूलांक 7: लग्जरी चीजों से बनाएं दूरी, दिखावे में न गंवाएं पैसाअगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 7 है। आज के दिन आपके लिए अपनी संचित पूंजी और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। सुख-सुविधाओं और लग्जरी लाइफस्टाइल की चीजों पर मोटी रकम बर्बाद करने से बचें। अपने जीवन के बड़े और मुख्य आर्थिक लक्ष्यों पर फोकस बनाए रखें। आज बजट के कड़े नियमों का पालन करना और योजनाबद्ध तरीके से सुरक्षित जगहों पर निवेश करना ही आपके भविष्य को सुरक्षित बनाएगा।मूलांक 8: निवेश की समीक्षा के लिए श्रेष्ठ दिन, मिलेगी बड़ी सफलताअगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 8 है। आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन आपके लिए काफी फलदायी और अच्छा माना जा सकता है। आज आप भविष्य की बड़ी जरूरतों को ध्यान में रखकर किसी नई इन्वेस्टमेंट स्कीम का हिस्सा बन सकते हैं। इसके साथ ही अपने पुराने निवेशों की एक बार बारीकी से समीक्षा (Review) जरूर कर लें ताकि आप सही दिशा में आगे बढ़ सकें। आज समझदारी और सूझबूझ से लिया गया कोई भी व्यावसायिक फैसला आपको बड़ा लाभ दिलाएगा।मूलांक 9: पैसों के मामलों में बनाएं संतुलन, जल्दबाजी से बचेंअगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 9 है। आज आपको अपने जीवन में पैसों की आवक और जावक के बीच एक मजबूत संतुलन स्थापित करने की जरूरत है। कार्यक्षेत्र में आपको कुछ नए और आकर्षक प्रोजेक्ट्स या डील मिल सकती हैं, लेकिन किसी भी पेपर पर साइन करने या अंतिम फैसला लेने में तनिक भी जल्दबाजी न दिखाएं। अपने आर्थिक लक्ष्यों की समय-समय पर समीक्षा करें और आवश्यकतानुसार रणनीति बदलें। सही प्लानिंग और धैर्य ही आज आपको आर्थिक सफलता के शिखर पर ले जाएंगे।
Shani Pradosh Vrat Today 27 June 2026: सनातन परंपरा में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत को सबसे उत्तम और शीघ्र फलदायी माना गया है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत की मुख्य पूजा हमेशा शाम के समय यानी 'प्रदोष काल' में की जाती है।दिलचस्प बात यह है कि जब यह त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'शनि प्रदोष व्रत' (Shani Pradosh Vrat) कहा जाता है। आज यानी 27 जून 2026, शनिवार को ज्येष्ठ महीने का अंतिम और बेहद फलदायी शनि प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। यह एक ऐसा दुर्लभ और पावन मौका होता है जब श्रद्धालु एक ही दिन महादेव के साथ-साथ न्याय के देवता शनिदेव की भी असीम कृपा पा सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस दिन किए गए विशेष उपायों से कुंडली में मौजूद भयंकर शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से तुरंत और स्थाई राहत मिलती है।शनि प्रदोष व्रत 2026: तिथि और शाम की पूजा का सटीक मुहूर्तहिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत कल रात यानी 26 जून 2026 को रात 10:22 बजे हो चुकी है। इस तिथि का समापन कल मध्यरात्रि यानी 28 जून 2026 को रात 12:43 बजे होगा। उदयातिथि और प्रदोष काल के नियमों के चलते यह व्रत आज 27 जून को ही पूर्ण निष्ठा के साथ रखा जा रहा है।भगवान शिव की कृपा बरसाने वाला आज की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल) शाम 07:23 बजे से लेकर रात 09:23 बजे तक रहेगा। भक्तों को महादेव के साक्षात आशीर्वाद के लिए इस कुल 2 घंटे की पावन अवधि के बीच ही अपनी पूजा, जलाभिषेक और आरती संपन्न कर लेनी चाहिए।इन 5 राशियों पर चल रही है शनि की टेढ़ी नजर, आज जरूर दें ध्यानमौजूदा समय में ग्रहों की चाल के अनुसार, देश के लाखों लोग शनि की महादशा का सामना कर रहे हैं। इस समय कुल पांच राशियां ऐसी हैं जिन पर शनि देव की विशेष नजर बनी हुई है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, मेष राशि, कुंभ राशि और मीन राशि के जातकों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती (Sadesati) का अलग-अलग चरण चल रहा है।दूसरी तरफ, सिंह राशि और धनु राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या (Dhaiya) का भारी प्रभाव बना हुआ है। इन पांचों ही राशियों के जीवन में इस समय मानसिक तनाव, करियर में रुकावटें या आर्थिक तंगी जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में इन पांचों राशियों के जातकों को आज के इस महासंयोग का पूरा फायदा उठाते हुए नीचे दिए गए 5 अचूक उपाय जरूर करने चाहिए।साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों को बेअसर करने के 5 महा-उपायज्योतिष शास्त्र और लाल किताब के अनुसार, शनि प्रदोष के दिन यदि पूरी श्रद्धा से ये कार्य किए जाएं, तो शनिदेव अपने उग्र रूप को शांत कर जातक को शुभ फल देना शुरू कर देते हैं:मंत्र जाप और तेल का दीपक: आज शाम के समय किसी नजदीकी शनि मंदिर जाएं। वहां शनिदेव की मूर्ति के सामने बैठकर सरसों के तेल का एक बड़ा दीपक जलाएं। इसके बाद वहीं बैठकर शांत मन से 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार या अधिक से अधिक जाप करें। इससे शनि देव की वक्र दृष्टि शांत होती है।शनि से संबंधित वस्तुओं का दान: शनि प्रदोष के दिन दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। आज के दिन किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को शनि से संबंधित वस्तुएं जैसे—काले वस्त्र, काले तिल, साबुत काली उड़द की दाल, सरसों का तेल या लोहे का कोई बर्तन दान करें। यह उपाय आपके संचित पापों का नाश करता है।पीपल वृक्ष की परिक्रमा: हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ में त्रिदेवों के साथ शनिदेव का भी वास माना गया है। आज सूर्यास्त के बाद किसी पुराने पीपल के पेड़ के नीचे जाएं, वहां सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं और पेड़ की सात बार परिक्रमा (परिक्रमा करते समय मन में शिव जी का ध्यान रखें) करें।बजरंगबली की विशेष आराधना: शनिदेव को नियंत्रित करने की शक्ति केवल हनुमान जी के पास है। आज शनि प्रदोष पर हनुमान जी के मंदिर जाकर उन्हें चमेली का तेल और सिंदूर का चोला अर्पित करें। इसके साथ ही साढ़ेसाती के भयंकर कष्टों को कम करने के लिए आसन बिछाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। संभव हो तो आज के दिन इसका लगातार पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है।शिवलिंग का अभिषेक: चूंकि शनिदेव भगवान शिव के परम शिष्य और मानस पुत्र माने जाते हैं, इसलिए शिव जी की भक्ति करने वालों को शनिदेव कभी परेशान नहीं करते। आज प्रदोष काल में शुद्ध जल में गंगाजल और थोड़े से काले तिल मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करें। महादेव की यह पूजा आपको हर प्रकार के ग्रह दोषों से हमेशा के लिए सुरक्षित कर देगी।
UPPSC PCS 2026 Notification:उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनने और प्रांतीय सिविल सेवा परीक्षा (PCS) की तैयारी में जुटे लाखों युवाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित खबर आ चुकी है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने कंबाइंड राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2026 के लिए अपना आधिकारिक और विस्तृत नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित विभागों में ग्रुप ए और ग्रुप बी के प्रशासनिक पदों पर काम करने के इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।आयोग द्वारा यह विज्ञापन 25 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर जारी किया गया है, और इसके साथ ही डिजिटल पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म भरने की विंडो भी ओपन हो चुकी है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं को उत्तर प्रदेश शासन में डिप्टी कलेक्टर (SDM), डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) जैसे रसूखदार पदों पर सेवा करने का सुनहरा मौका मिलेगा। उम्मीदवार 27 जुलाई 2026 की निर्धारित अंतिम तिथि तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।वैकेंसी डिटेल्स: करीब 500 पदों पर होगी सीधी भर्तीयूपीपीएससी द्वारा जारी किए गए विस्तृत विज्ञापन के अनुसार, इस साल विभिन्न सरकारी विभागों में ग्रुप ए और ग्रुप बी के कुल मिलाकर करीब 500 रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख रूप से डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, बीडीओ, सब रजिस्ट्रार और जिला प्रशासनिक अधिकारियों के पद शामिल हैं। रिक्तियों की अंतिम संख्या मुख्य परीक्षा के परिणाम आने तक परिस्थितियों और शासन की आवश्यकताओं के आधार पर घट या बढ़ भी सकती है।UPPSC PCS 2026: परीक्षा से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण तारीखेंअभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे समय सीमा का विशेष ध्यान रखें और आखिरी दिनों में सर्वर पर बढ़ने वाले लोड से बचने के लिए समय रहते अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें:नोटिफिकेशन जारी होने की तिथि: 25 जून 2026ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तारीख: 25 जून 2026ऑनलाइन आवेदन करने की आखिरी तारीख: 27 जुलाई 2026ऑफिशियल वेबसाइट: uppsc.up.nic.inआयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता का पूरा पैमानायूपी सरकार के कार्मिक विभाग के मौजूदा नियमों के मुताबिक, इस परीक्षा में शामिल होने के लिए सामान्य (General) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। वहीं, उत्तर प्रदेश के मूल निवासी ओबीसी, एससी, एसटी और अन्य आरक्षित श्रेणियों के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमानुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी, जिसके तहत वे अधिकतम 45 वर्ष की उम्र तक आवेदन फॉर्म भर सकते हैं।शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो प्रशासनिक पदों जैसे एसडीएम और डीएसपी के लिए उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक (Bachelor Degree) की डिग्री होनी अनिवार्य है। हालांकि, कुछ तकनीकी और विशिष्ट पदों जैसे सब रजिस्ट्रार के लिए कानून में स्नातक (LLB) और स्टैटिस्टिकल ऑफिसर (सांख्यिकी अधिकारी) के लिए संबंधित विषय में परास्नातक (Postgraduate) जैसी विशेष योग्यताओं की मांग की गई है।आवेदन प्रक्रिया, वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) और फीसयूपी पीसीएस 2026 की परीक्षा के लिए केवल ऑनलाइन माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए उम्मीदवारों को निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR): आवेदन करने से पहले हर अभ्यर्थी को आयोग की वेबसाइट पर जाकर अपना 'वन टाइम रजिस्ट्रेशन' पूरा करना होगा। बिना ओटीआर नंबर के आगे का फॉर्म नहीं भरा जा सकेगा।फॉर्म सबमिशन: ओटीआर जनरेट होने के बाद उम्मीदवार को लॉगिन कर अपनी शैक्षणिक योग्यता दर्ज करनी होगी, साथ ही दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपनी लेटेस्ट पासपोर्ट साइज फोटो और सिग्नेचर स्कैन करके अपलोड करने होंगे।श्रेणीवार आवेदन शुल्क: आवेदन को अंतिम रूप देने के लिए ऑनलाइन गेटवे के माध्यम से फीस का भुगतान करना होगा। सामान्य और ओबीसी श्रेणी के लिए आवेदन शुल्क 125 रुपये निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए यह शुल्क 65 रुपये है, जबकि दिव्यांग (PWD) उम्मीदवारों को मात्र 25 रुपये की फीस देनी होगी।चयन प्रक्रिया: 3 कड़े चरणों को पार कर मिलेगी सफलतायूपीपीएससी पीसीएस 2026 की पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है:प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): यह चयन का पहला और छंटनी चरण होता है, जो पूरी तरह से ऑब्जेक्टिव टाइप (MCQs) बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित होता है। इसमें सामान्य अध्ययन के 2 पेपर होते हैं, जिनमें दूसरा पेपर (CSAT) केवल क्वालिफाइंग होता है।मुख्य परीक्षा (Mains): प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किए गए शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवार मुख्य परीक्षा में बैठेंगे। यह चरण पूरी तरह से वर्णनात्मक (Descriptive) यानी लिखित परीक्षा पर आधारित होता है, जिसमें अभ्यर्थियों के विषय ज्ञान और लेखन शैली का कड़ा इम्तिहान होता है।इंटरव्यू (Personality Test): चयन का अंतिम पड़ाव साक्षात्कार होता है। इसमें आयोग के पैनल द्वारा उम्मीदवार की प्रशासनिक क्षमता, त्वरित निर्णय लेने के कौशल, उनकी पर्सनैलिटी और कम्युनिकेशन स्किल्स का व्यापक मूल्यांकन किया जाता है।आयोग ने स्पष्ट किया है कि मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू का विस्तृत कार्यक्रम तथा प्रारंभिक परीक्षा के एडमिट कार्ड सही समय पर ऑफिशियल पोर्टल पर अपलोड कर दिए जाएंगे। अभ्यर्थी किसी भी भ्रामक खबर से बचने के लिए नियमित रूप से केवल uppsc.up.nic.in पर ही विजिट करते रहें।
Gold Rate Today 27 June 2026: सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए आज एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। पिछले कुछ दिनों से सराफा बाजार में सोने की कीमतों में जारी गिरावट पर अब पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। 27 जून 2026 की सुबह देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में सोने और चांदी के भाव में एक बार फिर उछाल दर्ज किया गया है।वैश्विक संकेतों के चलते राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत बढ़कर 1,42,960 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी यह भाव 1,42,760 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो वहां भी सोने ने एक बार फिर शानदार वापसी करते हुए 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक मार्क को पार कर लिया है और हाजिर सोना (Spot Gold) अब 4,077.64 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।आखिर क्यों अचानक आई सोने के दामों में तेजी? अमेरिकी डेटा ने बदला रुखबाजार विश्लेषकों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए कुछ बड़े आर्थिक बदलावों के कारण सोने की कीमतों को नया सपोर्ट मिला है। दरअसल, अमेरिका में महंगाई (Inflation) को लेकर जारी हुए ताजा आंकड़ों के बाद वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में कमजोरी देखी गई। इसके साथ ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी किए जाने की उम्मीदें भी थोड़ी कम हुई हैं।आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में मई 2026 तक के पिछले 12 महीनों में 'U.S. पर्सनल कंजंप्शन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स' में 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस डेटा के सामने आने के बाद निवेशकों ने एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की तरफ रुख किया है, जिससे इसकी मांग और कीमतों में एक साथ उछाल आया है।27 जून 2026: देश के प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड रेटआज देश के बड़े शहरों के सराफा बाजार में 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के खुदरा भाव (प्रति 10 ग्राम) नीचे दी गई तालिका के अनुसार खुले हैं:शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)दिल्ली1,31,0601,42,960मुंबई1,30,8601,42,760चेन्नई1,33,0101,45,100कोलकाता1,30,8601,42,760अहमदाबाद1,30,9601,42,860हैदराबाद1,30,8601,42,760जयपुर1,31,0601,42,960लखनऊ1,31,0601,42,960भोपाल1,30,9601,42,860चंडीगढ़1,31,0601,42,960पुणे1,30,8601,42,760बेंगलुरु1,30,8601,42,760चांदी की चमक भी हुई तेज, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे दामसोने की राह पर चलते हुए दूसरी सबसे मूल्यवान और औद्योगिक धातु चांदी की कीमतों में भी आज सुबह जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। 27 जून को भारतीय बाजार खुलते ही चांदी का भाव बढ़कर 2,40,100 रुपये प्रति किलोग्राम के भारी-भरकम स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हाजिर चांदी (Spot Silver) की मांग में तेजी आने की वजह से इसकी कीमत इस समय 59.12 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड कर रही है। चांदी की इस बढ़ती चमक का असर आने वाले दिनों में घरेलू आभूषणों की मेकिंग और औद्योगिक लागत पर भी साफ देखने को मिल सकता है।
Rahu Dhanishtha Nakshatra Gochar 2026:ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक अत्यंत रहस्यमयीग्रह माना जाता है, जो भ्रम, माया और अचानक होने वाली घटनाओं का कारक है। वर्तमान में कुंभ राशि में विराजमान यह छाया ग्रह आने वाली 30 जून 2026 को एक बड़ा बजटीय और नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहा है। राहु अब पराक्रम और साहस के देवता मंगल के 'धनिष्ठा' नक्षत्र में प्रवेश करेगा, जहां वह 5 दिसंबर 2026 तक रहने वाला है। इस लगभग पांच महीने की अवधि के दौरान राहु कुंभ राशि के अंतर्गत धनिष्ठा नक्षत्र के चौथे और तीसरे पद से होकर अपनी यात्रा पूरी करेगा।चूंकि मंगल को अग्नि, ऊर्जा, क्रोध और साहस का कारक माना जाता है, इसलिए राहु जैसे ठंडे और कूटनीतिक ग्रह का मंगल के नक्षत्र में जाना ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बहुत उथल-पुथल भरा माना जा रहा है। इन दोनों विरोधी ऊर्जाओं के मिलन से एक तरह का 'लघु अंगारक योग' (Angarak Yog) बनने जा रहा है, जो कई मायनों में उग्र और चुनौतीपूर्ण परिणाम दे सकता है।आखिर अंगारक योग क्या होता है और क्यों लोग इससे डरते हैं?कुंडली या गोचर में जब भी अग्नि तत्व के स्वामी मंगल और वायु तत्व के राहु का सीधा संबंध या युति बनती है, तो उसे 'अंगारक योग' कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है—अंगारक यानी अंगारे के समान दहकता हुआ। यह योग जातक के भीतर की आक्रामकता, अनियंत्रित गुस्से और जल्दबाजी में गलत फैसले लेने की प्रवृत्ति को अचानक बढ़ा देता है।इस योग के प्रभाव से व्यक्ति बिना सोचे-समझे जोखिम भरे काम कर बैठता है, जिससे बाद में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है। मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और सेहत से जुड़ी आकस्मिक परेशानियाँ इस योग के मुख्य लक्षण माने जाते हैं।इन 3 भाग्यशाली राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगा बंपर लाभभले ही इस गोचर से चारों तरफ एक उग्र ऊर्जा का संचार होगा, लेकिन वैदिक ज्योतिष के अनुसार, तीन विशेष राशियां ऐसी हैं जिनके लिए यह 'लघु अंगारक योग' किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा। इन राशियों को इस अवधि में जबरदस्त सफलता और धन लाभ मिलने के योग हैं:मेष राशि (Aries): आपकी राशि के स्वामी खुद मंगल देव हैं, इसलिए राहु का यह नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए बेहद खास रहने वाला है। आपको कार्यक्षेत्र में मनमुताबिक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। हालांकि, सेहत के मोर्चे पर आपको थोड़ा उतार-चढ़ाव झेलना पड़ सकता है, लेकिन आर्थिक तौर पर आपकी आय (Income) में बंपर बढ़ोतरी होने के साफ संकेत हैं। फंसा हुआ पैसा वापस मिल सकता है।कन्या राशि (Virgo): कन्या राशि के जातकों के लिए मंगल और राहु की यह जुगलबंदी करियर में तरक्की के नए रास्ते खोलेगी। आप जिस भी काम में हाथ डालेंगे, उसमें एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियां चढ़ते जाएंगे। आपके सोचे हुए काम समय पर पूरे होंगे और समाज में आपका मान-सम्मान तथा रुतबा बढ़ेगा। कुल मिलाकर यह समय आपके पक्ष में झुका हुआ है।धनु राशि (Sagittarius): धनु राशि के व्यापारियों और नौकरीपेशा जातकों के लिए यह गोचर आर्थिक समृद्धि लेकर आ रहा है। यदि आप नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या अपने मौजूदा काम का विस्तार करने की सोच रहे हैं, तो आपका व्यापार इस समय बुलेट की रफ्तार पकड़ेगा। आप अपनी व्यावसायिक ग्रोथ और मुनाफे से बेहद संतुष्ट नज़र आएंगे। निवेश के लिए भी समय अनुकूल है।राहु के नकारात्मक प्रभाव और भ्रम से बचने के सरल तरीकेधनिष्ठा नक्षत्र में बैठकर राहु कई बार बुद्धि को भ्रमित कर देता है, जिससे व्यक्ति आलस का शिकार हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु के इस दोष से बचने के लिए सबसे पहले अपने भीतर के आलस का त्याग करें, क्योंकि आलस बढ़ते ही राहु आपकी निर्णय लेने की क्षमता को नष्ट कर देता है।यदि आपकी कुंडली में राहु की महादशा या अंतर्दशा चल रही है, तो अपने घर और आसपास की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। इसके अलावा, रोजाना शिवलिंग पर शुद्ध जल या दूध अर्पित करें। शनिवार के दिन बहते जल में सूखा नारियल या कोयला प्रवाहित करना और शाम के समय तिल के तेल का दीपक जलाना राहु के कष्टों को तुरंत शांत करता है।अंगारक योग के उग्र असर को बेअसर करने के 4 अचूक ज्योतिषीय उपाययदि इस गोचर के दौरान आपको बात-बात पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा है या बनते हुए काम बिगड़ रहे हैं, तो आपको निम्नलिखित उपायों को अपने जीवन में जरूर शामिल करना चाहिए:वाणी और गुस्से पर नियंत्रण: इस पूरे पाँच महीने की अवधि में अपने स्वभाव में धैर्य रखें। किसी भी तरह के वाद-विवाद, कोर्ट-कचहरी के मामलों या सड़क पर होने वाली बहसबाजी से खुद को पूरी तरह दूर रखें।अतिरिक्त ऊर्जा का सही इस्तेमाल: अंगारक योग के कारण शरीर में बढ़ने वाली एक्स्ट्रा एनर्जी को गुस्से में निकालने के बजाय खेलकूद, जिम, योग, प्राणायाम या किसी भी तरह के शारीरिक श्रम (Hard Work) में लगाएं। इससे आपकी ऊर्जा सही दिशा में चैनल की जाएगी।हनुमान जी की शरण: संकटमोचन हनुमान जी की पूजा इस योग में रामबाण मानी जाती है। हर मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी के मंदिर जाएं, उन्हें चोला चढ़ाएं और पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। इससे मंगल और राहु दोनों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।अंगारक शांति पूजा: यदि इसके बावजूद जीवन में लगातार परेशानियां, दुर्घटनाएं या मानसिक तनाव बना हुआ है, तो किसी योग्य और विद्वान पंडित के परामर्श से 'अंगारक योग शांति पूजा' संपन्न कराएं।
Petrol Diesel Price Today:देश में हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की नई किरणों से नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल की बदलती कीमतों से भी होती है। ईंधन के ये दाम सीधे तौर पर आम आदमी की जेब और उसके मासिक बजट पर असर डालते हैं। रोजाना सुबह 6 बजे देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी करती हैं। ये कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर तय की जाती हैं। ईंधन की कीमतों में होने वाला मामूली बदलाव भी ऑफिस जाने वाले नौकरीपेशा लोगों से लेकर फल-सब्जी बेचने वाले छोटे व्यापारियों तक, हर किसी की जिंदगी को प्रभावित करता है।ऐसे में हर दिन अपने शहर के ईंधन के दामों की सही जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा कदम भी है। भारत में लागू यह दैनिक मूल्य निर्धारण प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं तक किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी न पहुंचे।27 जून 2026: देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल का भावआज देश के अलग-अलग महानगरों और प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम इस प्रकार दर्ज किए गए हैं:नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 83.09 रुपये प्रति लीटर।मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये और डीजल 86.00 रुपये प्रति लीटर।कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये और डीजल 93.50 रुपये प्रति लीटर।चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 91.50 रुपये प्रति लीटर।लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 95.75 रुपये प्रति लीटर।नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये और डीजल 90.00 रुपये प्रति लीटर।हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 97.00 रुपये प्रति लीटर flockजयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 90.91 रुपये प्रति लीटर।अहमदाबाद: डीजल 82.25 रुपये प्रति लीटर।पुणे: डीजल 92.50 रुपये प्रति लीटर।भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये प्रति लीटर।चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये प्रति लीटर।पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये प्रति लीटर।तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये प्रति लीटर।पिछले दो साल से क्यों बनी हुई है कीमतों में स्थिरता?अगर आप गौर करें तो मई 2022 के बाद से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बड़ी स्थिरता देखने को मिली है। दरअसल, मई 2022 में केंद्र सरकार और उसके बाद कई राज्य सरकारों द्वारा उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और वैट (VAT) में बड़ी कटौती की गई थी। इसके बाद से, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कई बार भारी उतार-चढ़ाव आया है, लेकिन भारतीय तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित और स्थिर रखा है।इन 5 मुख्य कारणों से तय होती हैं ईंधन की खुदरा कीमतेंभारत में जब आप एक लीटर पेट्रोल या डीजल खरीदते हैं, तो उसकी कीमत के पीछे कई आर्थिक कारक काम कर रहे होते हैं:कच्चे तेल (Crude Oil) के वैश्विक दाम: पेट्रोल और डीजल का मुख्य स्रोत कच्चा तेल ही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ओपेक (OPEC) देशों के फैसलों और वैश्विक परिस्थितियों के कारण जब भी कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, भारतीय बाजार में ईंधन महंगा होने की संभावना बढ़ जाती है।डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति: भारत अपनी जरूरत का लगभग 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में होता है। यदि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होता है, तो तेल का आयात महंगा हो जाता है, जिससे देश में कीमतें बढ़ती हैं।सरकारी टैक्स और वैट: केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक्साइज टैक्स और अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा वसूला जाने वाला वैट (VAT) ईंधन की खुदरा कीमत का एक बहुत बड़ा हिस्सा होते हैं। यही वजह है कि एक ही दिन अलग-अलग राज्यों या शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट में अंतर दिखाई देता है।रिफाइनिंग की लागत: विदेशों से आयात होने वाले कच्चे तेल को सीधे गाड़ियों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे देश की रिफाइनरियों में साफ (रिफाइन) करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स का खर्च भी अंतिम कीमत में शामिल किया जाता है।मांग और आपूर्ति का गणित: बाजार में मांग के बढ़ने या घटने से भी कीमतें प्रभावित होती हैं। त्योहारों के सीजन, भीषण गर्मी या कड़ाके की ठंड के दौरान जब ट्रांसपोर्टेशन और बिजली उत्पादन के लिए ईंधन की खपत अचानक बढ़ जाती है, तो इसका असर बाजार की चाल पर भी पड़ता है।सिर्फ एक SMS के जरिए अपने मोबाइल पर ऐसे चेक करें आज का रेटअगर आप बिना इंटरनेट के भी अपने शहर में पेट्रोल-डीजल का सटीक और ताजा भाव जानना चाहते हैं, तो तेल कंपनियों की एसएमएस सेवा का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए बेहद आसान प्रक्रिया है:इंडियन ऑयल (IOCL) के ग्राहक: अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में RSP [स्पेस] अपने शहर का कोड टाइप करें और इसे 9224992249 पर भेज दें।भारत पेट्रोलियम (BPCL) के ग्राहक: अपने फोन से RSP [स्पेस] शहर का कोड लिखकर 9223112222 पर एसएमएस करें।हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के ग्राहक: HP Price [स्पेस] शहर का कोड टाइप करें और इसे 9222201122 पर भेजकर तुरंत ताजा रेट की जानकारी पा सकते हैं।
ईरान के मिसाइल ठिकानों पर अमेरिकी हमला, तेहरान का पलटवार; मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ा
US Iran Tension : अमेरिकी और ईरान के बीच तनाव उस समय बड़ गया जब अमेरिकी सेना ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण ठिकानों व तटीय रडार साइट्स पर हमले किए। यह कार्रवाई तब की गई, जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया। बहरहाल इन ...
Urmila Matondkar Chamma Chamma Song:बॉलीवुड की 'रंगीला गर्ल' यानी उर्मिला मातोंडकर ने अपने करियर के सबसे आइकॉनिक और सदाबहार गानों में से एक छम्मा छम्मा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। उर्मिला ने बताया कि वह इस सुपरहिट डांस नंबर को लगभग रिजेक्ट करने वाली थीं, जो बाद में उनके करियर और बॉलीवुड के इतिहास का सबसे बड़ा चार्टबस्टर गाना साबित हुआ। डांस रियलिटी शो 'इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीजन 5' (India's Best Dancer Season 5) के आगामी स्पेशल एपिसोड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं एक्ट्रेस ने इस गाने की मेकिंग और शूटिंग से जुड़े कई अनसुने किस्से फैंस के साथ शेयर किए हैं।'उस दौर में आइटम सॉन्ग को गलत समझा जाता था' - उर्मिलासाल 1998 में आई कल्ट फिल्म 'चाइना गेट' (China Gate) के इस सुपरहिट गाने के बारे में याद करते हुए उर्मिला मातोंडकर ने बताया कि वह शुरुआत में इस ट्रैक को करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थीं। उर्मिला ने उस दौर की मानसिकता का जिक्र करते हुए कहा, जब फिल्म के महान निर्देशक राज कुमार संतोषी जी ने मुझसे संपर्क किया और कहा कि आपको इस फिल्म में एक स्पेशल गेस्ट अपीयरेंस के तौर पर आइटम सॉन्ग करना है, तो मैं बिल्कुल हिचकिचा रही थी। सच कहूं तो मैं इसके पक्ष में बिल्कुल नहीं थी, क्योंकि उस दौर में बॉलीवुड में 'आइटम सॉन्ग' शब्द और इस कॉन्सेप्ट को बहुत ही गलत और अजीब नजरिए से देखा जाता था।डायरेक्टर राजकुमार संतोषी के इस एक वाक्य ने बदल दिया फैसलाउर्मिला ने आगे बताया कि कैसे निर्देशक राजकुमार संतोषी के शब्दों ने उनका पूरा नजरिया बदल दिया और उन्हें यह गाना साइन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। संतोषी जी ने उर्मिला से कहा था, उर्मिला, बरसों पहले सिनेमा में एक ऐसा गाना आया था जिस पर आज भी लोग डांस की बात करते हैं और उसकी कोरियोग्राफी की मिसाल देते हैं। मुझे अपनी इस फिल्म में उस पुराने ऐतिहासिक गाने से भी बेहतर और भव्य गाना तैयार करना है और यह सिर्फ तुम्हारे साथ ही मुमकिन है। डायरेक्टर के इस भरोसे और विज़न को देखने के बाद उर्मिला खुद को रोक नहीं पाईं और उन्होंने गाने के लिए हां कह दी।12 दिन का शेड्यूल और गणेश आचार्य की कोरियोग्राफी: मात्र 3 दिन में हुआ कमालइस आइकॉनिक ट्रैक की शूटिंग के बारे में बात करते हुए उर्मिला ने एक और बेहद हैरान करने वाला राज खोला। उन्होंने बताया कि इस गाने की कोरियोग्राफी मशहूर डांस मास्टर गणेश आचार्य (Ganesh Acharya) ने की थी। उर्मिला ने याद करते हुए कहा, मैंने गणेश मास्टर जी से पूछा था कि इस बेहद हैवी स्टेप्स और बैकग्राउंड डांसर्स वाले गाने को शूट करने में कितने दिन लगेंगे? उन्होंने मुझे बताया था कि प्रोडक्शन का प्लान पूरे 12 दिनों का है। लेकिन आप विश्वास नहीं करेंगे, हम सभी की कड़ी मेहनत और कमाल के तालमेल की वजह से वह पूरा गाना हमने सिर्फ 3 दिन के भीतर ही शूट करके खत्म कर दिया था।सेट पर मौजूद करिश्मा कपूर ने भी बांधे तारीफों के पुलशो में बतौर जज नजर आ रही बॉलीवुड की एक और सुपरस्टार एक्ट्रेस करिश्मा कपूर (Karisma Kapoor) ने भी उस दौर को याद करते हुए उर्मिला मातोंडकर के स्क्रीन प्रेजेंस की जमकर तारीफ की। करिश्मा ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है जब यह गाना रिलीज हुआ था, तो इसने पूरे देश में तहलका मचा दिया था। मैंने खुद उर्मिला को फोन करके उनकी तारीफ की थी और कहा था कि क्या कमाल का गाना है और तुमने इसमें जो एनर्जी और डांस मूव्स दिखाए हैं, उसका कोई मुकाबला नहीं है। 4 सितंबर को रिलीज होने वाली 'मिर्जापुर द मूवी' और अन्य कल्ट प्रोजेक्ट्स के बीच, टीवी स्क्रीन्स पर उर्मिला का यह नॉस्टैल्जिक लुक और पुराने अनसुने किस्से फैंस को बेहद पसंद आ रहे हैं।
Samsung Galaxy Z Fold 8 Series Leak:प्रीमियम फोल्डेबल स्मार्टफोन्स की दुनिया में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए टेक दिग्गज सैमसंग (Samsung) एक बार फिर पूरी तरह तैयार है। उम्मीद जताई जा रही है कि कंपनी अपनी अगली पीढ़ी की फ्लैगशिप फोल्डेबल सीरीज़, यानी 'Samsung Galaxy Z Fold 8', को अगले महीने वैश्विक बाजार में लॉन्च कर सकती है। आधिकारिक लॉन्च से पहले ही इस सीरीज़ से जुड़े कई बड़े और चौंकाने वाले स्पेसिफिकेशन्स ऑनलाइन लीक हो चुके हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार सैमसंग पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव करते हुए Galaxy Z Fold 8 Ultra और स्टैंडर्ड Galaxy Z Fold 8 जैसे दो अलग-अलग मॉडल्स पेश कर सकती है। लीक्स का दावा है कि जहाँ अल्ट्रा मॉडल का मुख्य डिज़ाइन पिछले Galaxy Z Fold 7 जैसा ही रहने वाला है, वहीं स्टैंडर्ड वर्ज़न में यूज़र्स को पहले के मुकाबले काफी ज्यादा चौड़ी (वाइड) इनर फोल्डेबल स्क्रीन देखने को मिलेगी। इसके अलावा, हालिया लीक ने फोन के वजन और इसकी बिक्री की तारीखों को लेकर भी बेहद दिलचस्प संकेत दिए हैं।स्टैंडर्ड मॉडल का वजन होगा बेहद कम, हाथ में नहीं होगा भारीपन का अहसासकोरियाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'Naver' पर मशहूर टिपस्टर Lanzuk ने एक पोस्ट में दावा किया है कि इस बार स्टैंडर्ड Galaxy Z Fold 8 का वजन इंजीनियरिंग के स्तर पर बेहद कम किया गया है। उनके मुताबिक, जिन लोगों ने इस प्रोटोटाइप डिवाइस को हाथ में लेकर इस्तेमाल किया है, वे इसके हल्केपन को देखकर हैरान रह गए हैं। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि फोन का यही 'फैदर-लाइट' (बेहद हल्का) डिज़ाइन बाजार में इसकी सबसे बड़ी यूएसपी (Unique Selling Proposition) साबित हो सकता है।हालांकि, लीक पोस्ट में इसके सटीक वजन का आधिकारिक आंकड़ा तो नहीं दिया गया है, लेकिन उद्योग से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इसका कुल वजन मात्र 201 ग्राम के आसपास हो सकता है। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो यह पिछले Galaxy Z Fold 7 (वजन 215 ग्राम) के मुकाबले काफी हल्का होगा। गौरतलब है कि मौजूदा मॉडल को भी बुक-स्टाइल फोल्डेबल सेगमेंट में काफी लाइटवेट माना जाता है, ऐसे में 201 ग्राम का वजन इसे सामान्य स्मार्टफोन्स की श्रेणी में ला खड़ा करेगा।बेहतर पिक्सल और स्क्रीन क्रीज से मिलेगी राहत, डिस्प्ले में हुआ बड़ा अपग्रेडडिस्प्ले के मोर्चे पर भी इस बार यूज़र्स को एक बेहतरीन एक्सपीरियंस मिलने वाला है। लीक रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि नए वाइड मॉडल में डिस्प्ले पिक्सल और फोल्डेबल स्क्रीन पर दिखने वाले 'क्रीज एरिया' (Crease Area) को पहले से काफी ज्यादा इम्प्रूव किया गया है।सैमसंग इस बार फोल्ड होने वाले हिस्से पर पहले से काफी मोटे और एडवांस अल्ट्रा-थिन ग्लास (UTG) का इस्तेमाल करने जा रही है। इस तकनीक की वजह से न सिर्फ स्क्रीन के बीच में पड़ने वाली लाइन (क्रीज) लगभग गायब हो जाएगी, बल्कि डिस्प्ले की मजबूती और ड्यूरेबिलिटी भी कई गुना बढ़ जाएगी।4 अगस्त से प्री-बुकिंग और 7 अगस्त से शुरू होगी धमाकेदार सेललॉन्च और सेल टाइमलाइन की बात करें तो टिपस्टर का दावा है कि Galaxy Z Fold 8 और Galaxy Z Fold 8 Ultra दोनों ही प्रीमियम स्मार्टफोन्स 7 अगस्त से वैश्विक स्तर पर बिक्री (Sale) के लिए उपलब्ध करा दिए जाएंगे। वहीं, इन डिवाइसेस के लिए प्री-रिजर्वेशन या प्री-बुकिंग की प्रक्रिया 4 अगस्त से ही लाइव कर दी जाएगी।पुरानी रिपोर्ट्स पर गौर करें तो सैमसंग आगामी 22 जुलाई को लंदन में एक भव्य 'Galaxy Unpacked' इवेंट का आयोजन करने जा रही है, जहाँ इन दोनों फोल्डेबल फोन्स से आधिकारिक तौर पर पर्दा उठाया जाएगा। इसी मंच पर कंपनी अपने क्लैमशेल फोल्डेबल Galaxy Z Flip 8 और नई वियरेबल सीरीज़ Galaxy Watch 9 को भी दुनिया के सामने पेश कर सकती है।स्नैपड्रैगन 8 एलीट प्रोसेसर और 45W फास्ट चार्जिंग का मिलेगा पावरलीक रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार परफॉर्मेंस को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए Galaxy Z Fold 8 और Z Fold 8 Ultra दोनों ही मॉडल्स में Qualcomm का सबसे शक्तिशाली 'Snapdragon 8 Elite Gen 5' चिपसेट दिया जाएगा, जो एडवांस एआई (AI) फीचर्स को बेहद आसानी से हैंडल कर सकेगा।कैमरा सेटअप की बात करें तो स्टैंडर्ड मॉडल में बैक पैनल पर दो 50-मेगापिक्सल सेंसर्स वाला दमदार डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है। पावर बैकअप के लिए इस पतले फोन में 4,800mAh की एक सक्षम बैटरी फिट की जाएगी, जो 45W की वायर्ड फास्ट चार्जिंग तकनीक को सपोर्ट करेगी, जिससे आपका फोन कुछ ही मिनटों में चार्ज हो जाएगा।
RBI Digital Fraud New Rules:ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी का शिकार होने वाले बैंक ग्राहकों के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक ऐतिहासिक और बेहद राहत भरी घोषणा की है। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते खतरों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने नए नियमों को नोटिफाई कर दिया है, जिसके तहत अगर किसी व्यक्ति के साथ ₹50,000 तक का डिजिटल पेमेंट फ्रॉड होता है, तो उसके नुकसान के एक बहुत बड़े हिस्से की भरपाई बैंक को करनी होगी।आरबीआई द्वारा 24 जून 2026 को जारी किए गए ये नए नियम आगामी 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में पूरी तरह लागू हो जाएंगे। इसे उन करोड़ों मध्यम और कम आय वर्ग के खाताधारकों के लिए संजीवनी के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी गाढ़ी कमाई पर साइबर अपराधी पलक झपकते ही डाका डाल देते हैं।वित्त वर्ष 2025-26 में ₹48,000 करोड़ से ज्यादा की ठगी, कम आय वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावितआरबीआई ने यह कड़ा कदम यूं ही नहीं उठाया है, बल्कि इसके पीछे डराने वाले आंकड़े हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में देश के भीतर ₹48,000 करोड़ से भी अधिक के डिजिटल फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इन फ्रॉड का शिकार होने वाले अधिकांश लोग कम आय वर्ग (Low Income Group) से ताल्लुक रखते थे, जिनके लिए ₹10,000 या ₹20,000 की रकम भी जीवन भर की जमा-पूंजी जैसी होती है। इसी तबके के आर्थिक हितों की रक्षा करने और डिजिटल बैंकिंग के प्रति जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए आरबीआई ने कंपनसेशन (मुआवजा) के नियमों में यह क्रांतिकारी बदलाव किया है।नुकसान का 85% हिस्सा वापस पाने का हकदार होगा पीड़ित, जानिए क्या है गणितआरबीआई के नए नियमों के तहत अब डिजिटल फ्रॉड का शिकार होने वाला व्यक्ति अपने कुल नुकसान के 85 फीसदी तक की भरपाई का कानूनी हकदार होगा। हालांकि, इसके लिए अधिकतम सीमा ₹25,000 तय की गई है।नियम के मुताबिक, अगर कोई ग्राहक किसी ऐसे फ्रॉड या अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन (EBT) की रिपोर्ट दर्ज कराता है, जिसमें उसका कुल नुकसान ₹50,000 तक का है, तो उसे उसके नेट लॉस का 85% या ₹25,000 (इनमें से जो भी राशि कम होगी) वापस दी जाएगी। लेकिन इस पैसे को वापस पाने के लिए ग्राहक को एक बेहद जरूरी शर्त पूरी करनी होगी, और वह है समय पर शिकायत दर्ज कराना।5 दिनों के भीतर करनी होगी शिकायत, ₹500 से ऊपर के हर ट्रांजेक्शन पर अलर्ट जरूरीकेंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को घटना की जानकारी होने या मैसेज मिलने के अधिकतम 5 दिनों के भीतर अपने बैंक में इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज करानी होगी। यदि फ्रॉड बैंक की सुरक्षा प्रणाली में चूक या लापरवाही के कारण हुआ है, तो बैंक को बिना किसी आनाकानी के पूरी भरपाई करनी होगी।इसके साथ ही, आरबीआई ने बैंकों पर नकेल कसते हुए नियम बनाया है कि ₹500 से अधिक के किसी भी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन पर ग्राहक को तत्काल एसएमएस (SMS) या ईमेल अलर्ट भेजना अनिवार्य होगा, ताकि ग्राहक को तुरंत फ्रॉड का पता चल सके।45 दिनों में करना होगा केस का निपटारा, आरबीआई और बैंक मिलकर उठाएंगे खर्च का बोझआरबीआई ने बैंकों को अपनी शिकायत प्रणाली को अत्यधिक दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। अब हर बैंक को ग्राहकों की शिकायतों के रजिस्ट्रेशन के लिए 24 घंटे सातों दिन (24/7) काम करने वाला चैनल या हेल्पलाइन एक्टिव रखनी होगी। शिकायत मिलने के बाद बैंक को अधिकतम 45 दिनों के भीतर पूरे मामले की जांच कर उसका निपटारा करना होगा। हालांकि, यदि फ्रॉड के तार विदेशों (International Fraud) से जुड़े हैं, तो बैंक को इसके लिए 60 दिनों का समय मिलेगा।असाधारण बात यह है कि ₹29,412 से कम के फ्रॉड के मामलों में, जहां ग्राहक को 85% नुकसान का भुगतान किया जाना है, वहां बैंक पर पूरा बोझ नहीं पड़ेगा। इस कुल लागत का 65 फीसदी हिस्सा खुद आरबीआई वहन करेगा, जबकि 10 फीसदी हिस्सा पीड़ित ग्राहक के बैंक को और बाकी बचा 10 फीसदी हिस्सा उस बैंक को भुगतना होगा, जिस फ्रॉड अकाउंट में पैसा ट्रांसफर किया गया है। इससे बैंकों के बीच भी फ्रॉड रोकने को लेकर मुस्तैदी बढ़ेगी।जागरूकता की भारी कमी: ठगी के बाद डरें नहीं, तुरंत दर्ज कराएं रिपोर्टबैंकिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि आरबीआई के इस नए नियम से उन करोड़ों सीधे-साधे ग्राहकों को बहुत बड़ा वित्तीय सुरक्षा कवच मिलेगा, जो अब तक साइबर ठगों के आगे बेबस नजर आते थे। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर भी चिंता जताते हैं कि आज भी देश में डिजिटल फ्रॉड को लेकर जागरूकता की भारी कमी है। अक्सर लोग फ्रॉड होने के बाद लोक-लाज या पुलिसिया कार्रवाई के डर से शिकायत ही दर्ज नहीं कराते, जिससे जालसाजों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं। अब समय आ गया है कि जनसंचार के सभी माध्यमों, सोशल मीडिया और टीवी विज्ञापनों के जरिए लोगों को इस नए नियम के प्रति जागरूक किया जाए ताकि हर पीड़ित समय रहते अपनी शिकायत दर्ज कराकर अपनी गाढ़ी कमाई वापस पा सके।
Top News: वेनेजुएला में भूकंप से 920 मौतें, ईरान पर अमेरिकी हमला, हैदराबाद में ट्रंप एवेन्यू
Top News 27 June : वेनेजुएला में भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 920 हुई। अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण ठिकानों व तटीय रडार साइट्स पर हमले किए। हैदराबाद में डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर सड़क। आयरलैंड ने भारत को 34 रनों से हराया। फ्रांस ...
पश्चिम बंगाल में 'जबरन धर्मांतरण' और 'लव जिहाद' के खिलाफ सख्त कानून लाएंगे: मुख्यमंत्री अधिकारी
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में जबरन धर्मांतरण और लव जिहाद की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार जल्द ही एक सख्त कानून लाएगी।
34 साल का सफर, आज भी वही 'दीवाना' अंदाज, मंगलुरु में शाह रुख खान का ऐसा डांस देख फैंस हुए बेकाबू
बॉलीवुड के सुपरस्टार शाह रुख खान हाल ही में मंगलुरु में आयोजित एक भव्य इवेंट में शामिल हुए, जहां उनका स्वागत किसी राजा की तरह किया गया। संयोगवश, यह वही दिन था जब शाह रुख खान की बॉलीवुड डेब्यू फिल्म 'दीवाना' को रिलीज हुए 34 साल पूरे हुए। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक, अपने चहेते स्टार की एक झलक पाने के लिए प्रशंसकों का हुजूम उमड़ पड़ा। किंग खान ने भी फैंस को निराश नहीं किया और मंच पर अपनी उपस्थिति से पूरे माहौल को ऊर्जावान बना दिया।कन्नड़ में बोला 'नमस्कार', फैंस हुए गदगद इवेंट के दौरान शाह रुख खान ने न केवल अपने अंदाज से लोगों का दिल जीता, बल्कि कन्नड़ भाषा में 'नमस्कार' कहकर स्थानीय लोगों के साथ एक गहरा जुड़ाव भी बनाया। उन्होंने कहा, मंगलुरु आकर जो प्यार और उत्साह मुझे मिला, वह शब्दों से परे है। मैं इस अपनापन का शुक्रगुजार हूं। 'दीवाना' की 34वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए उन्होंने अपनी पुरानी यादें ताजा कीं और मंच पर जमकर मस्ती करते हुए डांस भी किया, जिसे देख फैंस अपनी कुर्सियों से उठकर झूमने लगे।फैन के प्रपोजल पर क्या बोले किंग खान? इस इवेंट का सबसे यादगार पल तब आया जब एक फैन ने भरी महफिल में कहा कि वह अपने पति से ज्यादा शाह रुख खान से प्यार करती है। अपनी सिग्नेचर मुस्कान बिखेरते हुए शाह रुख ने बड़े ही मजेदार अंदाज में जवाब दिया, ये सब बातें अकेले में बतानी चाहिए, है ना? उन्होंने बड़ी शालीनता से बात को संभालते हुए कहा, मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूं और मुझे यकीन है कि आपके पति भी इसे समझते होंगे। मैं आप सभी से, आपके परिवार और आपके पति से भी प्यार करता हूं।एक्टर नहीं होते तो क्या बनते किंग खान? अपने करियर और जीवन से जुड़े एक दिलचस्प सवाल का जवाब देते हुए शाह रुख ने बताया कि अगर वे अभिनेता नहीं होते, तो वे जरूर एक शिक्षक होते। उन्होंने बड़ी सादगी से कहा, अगर मैं मंगलुरु में होता, तो मैं सेंट एलॉयसियस, शारदा विद्यालय या माउंट कार्मेल स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहा होता। बता दें कि शाह रुख खान अब जल्द ही अपनी बेटी सुहाना खान के साथ बहुप्रतीक्षित फिल्म 'किंग' में बड़े पर्दे पर नजर आने वाले हैं, जिसका उनके फैंस को बेसब्री से इंतजार है।
अक्षय कुमार की फिल्म ने पहले दिन ही तोड़े रिकॉर्ड्स, छप्परफाड़ कमाई देख फैंस गदगद
बहुप्रतीक्षित 'वेलकम' फ्रेंचाइजी की तीसरी कड़ी 'वेलकम टू द जंगल' (Welcome To The Jungle) आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और आते ही इसने बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा दिया है। अक्षय कुमार की इस कॉमेडी फिल्म के लिए दर्शकों का उत्साह चरम पर था, जिसका असर पहले ही दिन की छप्परफाड़ कमाई के रूप में देखने को मिला। अहमद खान के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने न केवल एडवांस बुकिंग में रिकॉर्ड बनाए, बल्कि रिलीज के दिन भी अपनी दमदार पकड़ साबित कर दी है।20 करोड़ के पार पहुंचा कुल कलेक्शन सैकनिल्क की अर्ली रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म को देशभर में 10,487 शोज मिले, जिनमें शाम के शो में दर्शकों की भारी भीड़ देखी गई। फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत करते हुए करीब 15 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इसके अलावा, पेड प्रिव्यू में हासिल हुए 3.75 करोड़ रुपये को जोड़ दिया जाए, तो फिल्म का कुल कलेक्शन 18.75 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। वहीं, ग्रॉस कलेक्शन की बात करें तो फिल्म पहले ही दिन 20 करोड़ रुपये का जादुई आंकड़ा पार करने में सफल रही है। नॉन-वीकेंड (गुरुवार) रिलीज होने के बावजूद इतनी शानदार कमाई यह इशारा करती है कि शनिवार और रविवार को फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।सितारों से सजी है 'वेलकम टू द जंगल' 'वेलकम टू द जंगल' सिर्फ अक्षय कुमार की मौजूदगी के कारण ही नहीं, बल्कि अपनी स्टार-पावर्ड कास्ट के लिए भी चर्चा में है। इस कॉमेडी सफर में परेश रावल, सुनील शेट्टी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अरशद वारसी, लारा दत्ता और रवीना टंडन जैसे दिग्गज कलाकार एक साथ नजर आ रहे हैं। 'वेलकम बैक' के बाद अक्षय कुमार की इस फ्रेंचाइजी में वापसी ने दर्शकों के रोमांच को दोगुना कर दिया है। फिल्म को मिल रही पॉजिटिव प्रतिक्रिया और कॉमेडी पंचेज को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यह फिल्म जल्द ही इस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल हो जाएगी।
बॉलीवुड बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों दो बड़ी फिल्मों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। शाहिद कपूर, रश्मिका मंदाना और कृति सेनन की फिल्म ‘कॉकटेल 2’ सिनेमाघरों में अपना एक हफ्ता पूरा कर चुकी है। अक्षय कुमार की मल्टी-स्टारर कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ (Welcome to the Jungle) के 26 जून को रिलीज होने के बावजूद, ‘कॉकटेल 2’ ने अपनी धाक बरकरार रखी है। नई पीढ़ी यानी जेन-जी (Gen-Z) को यह मॉडर्न लव स्टोरी बेहद पसंद आ रही है, जिसका सीधा असर फिल्म की कमाई पर दिख रहा है।बॉक्स ऑफिस पर बरसे नोट फिल्म के शुरुआती आंकड़ों पर नजर डालें तो ‘कॉकटेल 2’ ने पहले दिन 13.50 करोड़, दूसरे दिन 16.25 करोड़ और तीसरे दिन 17.75 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की थी। अपने पहले वीक में फिल्म ने कुल 70.50 करोड़ रुपये का घरेलू कलेक्शन कर लिया था। अब आठवें दिन के आंकड़े भी सामने आ गए हैं, जहां फिल्म ने कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच लगभग 4 करोड़ रुपये का और इजाफा किया है। इस तरह फिल्म का घरेलू बॉक्स ऑफिस कलेक्शन अब 74.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि दुनिया भर में यह फिल्म 122 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है।क्या अक्षय कुमार की फिल्म पड़ रही भारी? अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ एक कॉमेडी एंटरटेनर है, जिससे पहले दिन ही 20 करोड़ रुपये की ओपनिंग की उम्मीद जताई जा रही थी। अहमद खान द्वारा निर्देशित इस फिल्म में बड़े सितारों की फौज है, जो दर्शकों को गुदगुदाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। लेकिन शाहिद कपूर की फिल्म जिस तरह से वीकडेज में भी खुद को संभाले हुए है, वह काबिल-ए-तारीफ है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ‘कॉकटेल 2’ अगले वीकेंड पर भी ‘वेलकम टू द जंगल’ की कॉमेडी के सामने अपनी मजबूती बनाए रख पाएगी या फिर अक्षय कुमार की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर राज करेगी।
चीन की राजधानी बीजिंग से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। शुक्रवार शाम को बीजिंग की सबसे ऊंची 108 मंजिला इमारत 'सिटिक टॉवर' (CITIC Tower) एक बड़े हादसे का गवाह बनी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार के आकार का एक छोटा विमान अनियंत्रित होकर सीधे इमारत की ऊपरी मंजिल से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि उसकी आवाज किसी बड़े बम विस्फोट जैसी सुनाई दी, जिसने आस-पास के लोगों को सकते में डाल दिया।क्या दिखा चश्मदीदों को? मौके पर मौजूद एक कूरियर बॉय ने घटना का आंखों देखा हाल बयां करते हुए बताया कि शाम करीब 6 बजे एक जोरदार धमाके के साथ सब कुछ हिल गया। जब उसने ऊपर देखा, तो कार के आकार का विमान इमारत से टकरा चुका था। इस भीषण टक्कर के कारण इमारत की ऊपरी मंजिलों के दो विशाल शीशे चकनाचूर हो गए और मलबा नीचे गिरने लगा। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया और घटनास्थल की ओर जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया गया।सोशल मीडिया पर 'ब्लैकआउट' की चर्चा सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि चीन के इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से इस घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरों को तेजी से हटाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के प्रमुख ऐप 'श्याओहोंगशू' (Xiaohongshu) पर सिटिक टॉवर सर्च करने पर इस हादसे का कोई भी हालिया अपडेट दिखाई नहीं दे रहा है। वहां केवल पुराने पोस्ट ही मौजूद हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है? फिलहाल, चीनी प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे पूरे इलाके में रहस्य और डर का माहौल बना हुआ है।
दुनियाभर में जारी तनाव और बढ़ते सैन्य टकरावों के बीच, अमेरिकी वायुसेना ने भविष्य के हवाई युद्ध में अपनी बादशाहत कायम करने के लिए एक 'गेम-चेंजर' मिसाइल प्रोजेक्ट पर काम तेज कर दिया है। 'एयर फोर्स लॉन्ग रेंज वेपन' (AFLRW) प्रोग्राम के तहत अमेरिका एक ऐसी महाविनाशक मिसाइल विकसित कर रहा है, जो 1,850 किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों को पलक झपकते ही राख में बदल देगी। इस मिसाइल की मारक क्षमता मौजूदा दौर की किसी भी 'एयर-टू-एयर' मिसाइल से कई गुना अधिक है, जो इसे सैन्य क्षेत्र में एक अपराजेय हथियार बनाती है।चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को इस लंबी दूरी के हथियार की जरूरत मुख्य रूप से प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए पड़ी है। जहां चीन अपनी PL-17 जैसी मिसाइलों से अमेरिकी सेना को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है, वहीं 1,850 किमी रेंज की AFLRW मिसाइल अमेरिका को युद्ध के मैदान में चीन पर एक निर्णायक बढ़त दिलाएगी। इस प्रोजेक्ट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी वायुसेना 25-26 अगस्त 2026 को एगलिन एयरफोर्स बेस पर रक्षा उद्योग के दिग्गजों के साथ इस पर एक गुप्त मंथन करने जा रही है।कैसे काम करेगी यह 'स्मार्ट' मिसाइल? सबसे बड़ा सवाल यह है कि पृथ्वी की गोलाई और रडार की सीमा (550 किमी) के बावजूद यह मिसाइल 1,850 किमी दूर लक्ष्य को कैसे साधेगी? इसका जवाब 'नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर' या 'किल वेब' तकनीक में छिपा है। आधुनिक युद्ध में केवल एक विमान का रडार काफी नहीं होता। यह मिसाइल अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स, जमीन पर स्थित रडार स्टेशनों और अन्य टोही विमानों (AEW&C) से मिले डेटा का उपयोग करके अपने लक्ष्य तक पहुंचेगी। यानी, दुश्मन को भनक लगे बिना ही उसे सैकड़ों किलोमीटर दूर से निशाना बनाया जा सकेगा।दुनिया की शीर्ष मिसाइलों के मुकाबले AFLRW की ताकत मौजूदा समय में कोई भी देश अमेरिका के इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट के आसपास भी नहीं है। रूस की R-37M (लगभग 300 किमी) या चीन की PL-17 (लगभग 400 किमी) जैसी मिसाइलें AFLRW की 1,850+ किलोमीटर की रेंज के सामने बौनी नजर आती हैं। भारत की अस्त्र फैमिली और यूरोप की मीटियर मिसाइलें भी इस नई अमेरिकी तकनीक के मुकाबले काफी पीछे हैं। अगर अमेरिका का यह प्रयोग सफल रहता है, तो यह 'बियॉन्ड विजुअल रेंज' (BVR) कॉम्बैट में एक नए युग की शुरुआत होगी, जहां दुश्मन विमान के पायलट को यह पता भी नहीं चलेगा कि हमला किसने और कहां से किया।
पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा हो गया है। हाल ही में हुए 60 दिन के सीजफायर और 14 सूत्रीय अंतरिम समझौते के बावजूद ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपने नियंत्रण के अधिकार को फिर से दोहराया है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी फैसले में उसकी भूमिका को नजरअंदाज करना असुरक्षा का कारण बनेगा। ओमान के समीप एक जहाज पर हुए हमले ने इस तनाव को और हवा दे दी है, जिससे अमेरिका और छह खाड़ी देश सीधे तौर पर ईरान के सामने आ गए हैं।अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती खींचतान अमेरिका और खाड़ी देशों के गठबंधन ने ईरान के टोल वसूली और नियंत्रण वाले दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने इसे लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि होर्मुज से गुजरने वाली जहाजों की सुरक्षित आवाजाही तब तक सुनिश्चित नहीं हो सकती, जब तक ईरान को एक तटीय देश के रूप में उचित स्थान न मिले। वहीं, ईरान का आरोप है कि खाड़ी में अमेरिकी सेना की मौजूदगी ही क्षेत्रीय अस्थिरता की असली जड़ है। इस बीच, दुबई में गलती से जारी हुआ मिसाइल अलर्ट भी पूरे क्षेत्र में बढ़े हुए डर और अनिश्चितता को दर्शाता है।परमाणु निरीक्षण और वैश्विक चिंता तनाव के इन संकेतों के बीच, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रासी ने कहा है कि ईरान ने उन्हें अपने परमाणु स्थलों के निरीक्षण की अनुमति दे दी है, जो एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि 'अंतिम समझौते' तक देश के मुख्य परमाणु स्थलों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा और वहां किसी बाहरी व्यक्ति की पहुंच नहीं होगी। इन सब घटनाक्रमों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जिनमें लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।क्या आगे होगा सैन्य टकराव? अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुए 14 सूत्रीय अंतरिम समझौते के तहत एक 'संचार लाइन' की स्थापना की गई थी ताकि किसी भी सैन्य टकराव को टाला जा सके। लेकिन ईरान की ताजा जिद और होर्मुज पर उसके रुख से यह स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया का भविष्य अभी भी बेहद नाजुक मोड़ पर है। जहां एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, वहीं तेहरान अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रहा है।
ट्रंप सरकार ने बंद किया शरण कार्यक्रम, अवैध प्रवासियों की घर वापसी के लिए शुरू हुआ महा-अभियान
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का कड़ा प्रहार अमेरिका की आव्रजन नीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव आया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से उत्साहित ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अमेरिका में अवैध रूप से आने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका का शरण देने का कार्यक्रम अब समाप्त कर दिया गया है। सरकार ने अवैध प्रवासियों को ढूंढ-ढूंढकर उनके मूल देशों में वापस भेजने का अपना अभियान और अधिक आक्रामक और तेज कर दिया है।दुनियाभर के देशों के साथ होगा समझौता ट्रंप प्रशासन ने केवल कठोर बयानों तक सीमित न रहकर कूटनीतिक स्तर पर भी तैयारी शुरू कर दी है। मिलर के अनुसार, अमेरिका दुनिया के लगभग हर उस देश के साथ समझौते की प्रक्रिया में है, जिसके नागरिक अवैध रूप से अमेरिका में मौजूद हैं। इन समझौतों के तहत संबंधित देशों को अपने नागरिकों को वापस स्वीकार करना अनिवार्य होगा। ट्रंप सरकार का संदेश साफ है—अमेरिका अब घुसपैठियों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। जो लोग अपने देश छोड़कर अन्यत्र शरण लेना चाहते हैं, उन्हें अमेरिका के बजाय किसी दूसरे विकल्प की तलाश करनी होगी। यह कदम देश के सीमित संसाधनों को सुरक्षित रखने और अपराध पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है।2028 तक पूरी होगी मेक्सिको सीमा की 'दीवार' घुसपैठ को जड़ से खत्म करने के लिए अमेरिका अपनी सीमा सुरक्षा को अभेद्य बनाने जा रहा है। आंतरिक सुरक्षा मंत्री मार्कवायने मुलिन ने जानकारी दी है कि मेक्सिको बॉर्डर पर चल रही दीवार का निर्माण और घुसपैठ विरोधी तमाम उपाय 2028 तक, यानी ट्रंप के मौजूदा राष्ट्रपति कार्यकाल के अंत तक पूरी तरह से पूरे हो जाएंगे। 2017 में जिस दीवार की नींव रखी गई थी और बीच में काम ठप हो गया था, उसे 2025 में ट्रंप के दोबारा सत्ता में आते ही नई ऊर्जा के साथ शुरू कर दिया गया है। सीमा पर दोहरी दीवार, कटीले तार, हाई-टेक ड्रोन और चौबीसों घंटे निगरानी के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी और घुसपैठ पर पूर्ण विराम लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
मेटा की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल इंटरनेट मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा एक बार फिर कानूनी संकट में घिर गई है। कंपनी की पूर्व कार्यकारी सारा विन-विलियम्स ने मेटा के खिलाफ उत्तरी कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। विन-विलियम्स, जो 2011 से 2017 तक मेटा (तब फेसबुक) में ग्लोबल पालिसी डायरेक्टर थीं, ने कंपनी पर उन्हें चुप कराने और अपनी बेस्टसेलिंग किताब 'केयरलेस पीपुल' के प्रचार को रोकने का गंभीर आरोप लगाया है।किताब में जुकरबर्ग पर लगे चौंकाने वाले आरोप सारा विन-विलियम्स की किताब 'केयरलेस पीपुल' ने सिलिकॉन वैली के गलियारों में हलचल मचा दी है। इस किताब में उन्होंने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और अन्य उच्च कार्यकारियों के खराब बर्ताव का कच्चा-चिट्ठा खोला है। किताब में सबसे चौंकाने वाला खुलासा जुकरबर्ग द्वारा चीनी अधिकारियों को खुश करने की कथित कोशिशों को लेकर है। विन-विलियम्स का दावा है कि कंपनी छोड़ते समय उन पर जो 'नॉन-डिस्पैरेजमेंट' (कंपनी के खिलाफ न बोलने का) समझौता करने का दबाव बनाया गया था, वह पूरी तरह से गलत था और अब वह उस समझौते को अमान्य करने की मांग कर रही हैं।कंपनी ने आरोपों को नकारा दूसरी ओर, मेटा ने विन-विलियम्स के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पूर्व कार्यकारी ने अपने कानूनी समझौते का उल्लंघन किया है। मेटा का दावा है कि उनकी किताब में दी गई जानकारियां तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और कंपनी की छवि खराब करने के उद्देश्य से लिखी गई हैं। अब यह मामला अदालत में है, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मेटा अपनी नीतियों के बचाव में सफल हो पाती है या सारा विन-विलियम्स के खुलासे कंपनी के लिए बड़ी कानूनी चुनौती बन जाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज 27 जून से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के विशेष निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा भारत के 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विजन को नई गति प्रदान करेगी। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। यह यात्रा वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते प्रभाव और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी निर्णायक भूमिका को प्रदर्शित करती है।सामरिक रूप से क्यों अहम है यह दौरा? वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, विशेषकर पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच, सेशेल्स का महत्व कई गुना बढ़ गया है। भारत की अधिकांश ऊर्जा जरूरतों का आयात इन्हीं समुद्री मार्गों से होता है, जिसके पास सेशेल्स स्थित है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक पैठ को देखते हुए भारत के लिए यह देश एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रहरी के रूप में कार्य करता है। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी और रक्षा क्षमता निर्माण में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेगा।चीन के प्रभाव को मात देने की रणनीति पिछले कुछ वर्षों में चीन ने हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में अपनी पहुंच बढ़ाने की पुरजोर कोशिश की है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह इस क्षेत्र में खुद को एक 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' (Net Security Provider) के रूप में स्थापित करने के लिए दृढ़ है। फरवरी 2026 में सेशेल्स के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान जो आर्थिक विकास और सुरक्षा का 'दृष्टि प्रपत्र' तैयार किया गया था, उसे धरातल पर उतारने की दिशा में यह दौरा मील का पत्थर साबित होगा।क्या होगा खास? इस दौरे में भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी और नौसेना के दो विशेष जहाज भी समारोह का हिस्सा बनेंगे, जो भारत की समुद्री शक्ति और रक्षा सहयोग का स्पष्ट संकेत देंगे। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा मुख्य केंद्र में रहेगी। रणनीतिकारों का मानना है कि सेशेल्स के साथ मजबूत साझेदारी भारत को हिंद महासागर में एक अपराजेय सुरक्षा कवच प्रदान करेगी, जो आने वाले समय में चीन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरेगा।
95 साल की उम्र में भारतीय नागरिक बनकर अंतिम सांस लेना चाहती हैं आंध्र प्रदेश की महिला
94 वर्षीय के महालक्ष्मम्मा की जिंदगी की अब केवल एक ही अंतिम इच्छा है कि वह भारतीय नागरिक के रूप में अपनी अंतिम सांस लेना चाहती हैं
यूसीसी पर भाजपा का दो टूक रुख, संजय उपाध्याय बोले-पूरे देश में होना चाहिए लागू
भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का समर्थन करती है। उन्होंने टीएमसी के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया
राम मंदिर चंदा घोटाला, आस्था पर महाघात – प्रियंका का हमला
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और हेराफेरी के मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर आघात बताते हुए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है
CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, हॉकी में गोल्ड जीतने वालों को ₹3 लाख, ब्रॉन्ज विजेताओं को ₹1 लाख मिलेगा
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 26 जून को पदक विजेता हॉकी खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी टीम में मध्यप्रदेश बढ़ता प्रतिनिधित्व एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले समय में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अन्य ...
Ayodhya Ram Temple donation scam case: सभी 8 आरोपी 29 जून तक पुलिस रिमांड पर, 79.85 लाख रुपए बरामद
अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस दौरान जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ जारी रखेंगी। शुक्रवार को अभियोजन पक्ष के एक ...
टेक की दुनिया में अपने अनोखे और ट्रांसपेरेंट डिज़ाइन के लिए मशहूर लंदन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी 'नथिंग' (Nothing) एक बार फिर बाजार में तहलका मचाने के लिए तैयार है। कल ही सोशल मीडिया पर अपकमिंग 'Nothing Phone 4b' का आधिकारिक डिज़ाइन सामने आने के बाद, अब इस डिवाइस के लगभग सभी मुख्य स्पेसिफिकेशन्स ऑनलाइन लीक हो गए हैं। यह नया स्मार्टफोन कंपनी की बिल्कुल नई b सीरीज़ का पहला हैंडसेट होगा, जिसे मौजूदा Nothing Phone 4a सीरीज़ से नीचे यानी अधिक किफायती बजट सेगमेंट में प्लेस किया जाएगा।हालांकि कंपनी के सीईओ कार्ल पेई (Carl Pei) पहले ही इस फोन के रियर लुक और डिज़ाइन से जुड़ी कई दिलचस्प जानकारियों पर मुहर लगा चुके हैं, लेकिन अब मशहूर टेक टिप्स्टर योगेश बरार ने फोन के अंदरूनी हार्डवेयर और संभावित फीचर्स का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। आइए जानते हैं आगामी 7 जुलाई को आधिकारिक रूप से पर्दा उठाने जा रहे Nothing Phone 4b में हमें क्या कुछ खास देखने को मिल सकता है।120Hz AMOLED डिस्प्ले और स्नैपड्रैगन प्रोसेसर से लैस होगा फोनलीक हुई रिपोर्ट के अनुसार, Nothing Phone 4b में कंटेंट देखने और गेमिंग के शानदार अनुभव के लिए 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करने वाला 6.7-इंच का बड़ा AMOLED डिस्प्ले दिया जा सकता है। बेहतरीन परफॉर्मेंस और स्मूद मल्टीटास्किंग के लिए कंपनी इस फोन में Qualcomm का लेटेस्ट Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर दे सकती है।यह लीक हाल ही में सामने आई गीकबेंच (Geekbench) लिस्टिंग से भी पूरी तरह मेल खाता है, जिसमें इस बात का संकेत मिला था कि यह फोन 8GB रैम और भविष्य के सबसे आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम Android 16 पर आधारित Nothing OS के साथ मार्केट में एंट्री लेगा।50MP डुअल कैमरा और 5400mAh की दमदार बैटरी का कॉम्बोफोटोग्राफी के शौकीनों की बात करें तो लीक दावों के मुताबिक, इस डिवाइस के बैक पैनल पर 50 मेगापिक्सल का मुख्य (Primary) रियर कैमरा देखने को मिलेगा। हालांकि इसके सेकेंडरी कैमरे के सेंसर के बारे में अभी सटीक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन नथिंग ने अपने आधिकारिक टीज़र में पहले ही साफ कर दिया है कि फोन के पीछे वर्टिकल स्टाइल में डुअल-कैमरा सेटअप ही मौजूद रहेगा।स्मार्टफोन को दिनभर बिना किसी रुकावट के चालू रखने के लिए Nothing Phone 4b में 5400mAh की एक बेहद पावरफुल बैटरी दी जा सकती है, जो फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी।बदल जाएगा सिग्नेचर ग्लिफ़ इंटरफ़ेस, मिलेगा नया हॉरिजॉन्टल बारनथिंग के पुराने स्मार्टफोन्स की तुलना में इस बार डिज़ाइन के स्तर पर एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिलेगा। Phone 4b में ब्रांड का पुराना और पारंपरिक सेगमेंटेड ग्लिफ़ इंटरफ़ेस (Glyph Interface) नहीं दिया जाएगा। इसकी जगह कंपनी ने लागत को कम रखने के लिए कैमरा मॉड्यूल के ठीक नीचे एक छोटा, हॉरिजॉन्टल ग्लिफ़ बार (Glyph Bar) फिट किया है।कंपनी के मुताबिक, यह छोटी सी लाइटिंग स्ट्रिप भी पहले की तरह ही आपके फोन के नोटिफिकेशन, चार्जिंग स्टेटस की लाइव ट्रैकिंग और ऐप-स्पेसिफिक अलर्ट को बखूबी संभालेगी। इसके साथ ही बैक पैनल पर नथिंग का वह खास ट्रांसपेरेंट (पारदर्शी) लुक भी बरकरार रहेगा, जिसके लिए यह ब्रांड वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान रखता है।वेरिएंट्स, संभावित कलर्स और भारतीय बाजार में अनुमानित कीमतलीक रिपोर्ट्स की मानें तो Nothing Phone 4b को बाजार में दो मुख्य स्टोरेज वेरिएंट्स—8GB RAM + 128GB स्टोरेज और 8GB RAM + 256GB स्टोरेज में उतारा जा सकता है। कलर ऑप्शंस की बात करें तो यह फोन कुल तीन आकर्षक रंगों में आने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी ने अभी सभी कलर्स के नाम गोपनीय रखे हैं, लेकिन ब्रांड ने अपने ऑफिशियल टीज़र में एक खूबसूरत 'लाइट ब्लू' (हल्के नीले) कलर की पहली झलक फैंस को दिखा दी है।कीमत के मोर्चे पर नथिंग ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन टेक पंडितों और लीक्स का अनुमान है कि भारत में Nothing Phone 4b की कीमत ₹25,000 से लेकर ₹30,000 के बीच तय की जा सकती है। यह प्राइस रेंज इसे सीधे तौर पर मध्यम बजट वाले ग्राहकों की पहुंच में ला देगी। कंपनी आगामी 7 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले अपने भव्य वैश्विक लॉन्च इवेंट में इस फोन की असल कीमत, ऑफर्स और सेल की तारीखों से पूरी तरह पर्दा उठाएगी।
अगर आप भी प्राइवेट या सरकारी नौकरी में हैं और अपने पीएफ (PF) खाते से एडवांस पैसा निकालने, क्लेम सेटलमेंट करने या फिर अपना पीएफ बैलेंस चेक करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी और सतर्क करने वाली खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने तकनीकी कारणों से अपने मुख्य पोर्टल के माध्यम से दी जाने वाली सभी ऑनलाइन क्लेम सर्विसेज को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया है।हैरान करने वाली बात यह है कि ईपीएफओ पोर्टल के साथ-साथ केंद्र सरकार के लोकप्रिय 'उमंग ऐप' (Umang App) पर मिलने वाली पीएफ से जुड़ी तमाम डिजिटल सेवाएं भी अगले कुछ दिनों तक पूरी तरह अनुपलब्ध रहेंगी। इस औचक शटडाउन के कारण देश के करोड़ों पीएफ सब्सक्राइबर्स सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि ईपीएफओ की ये सेवाएं कब से कब तक बंद रहने वाली हैं और खाताधारक दोबारा कब से अपना काम सुचारू रूप से कर पाएंगे।EPFO पोर्टल अपडेट: 3 दिनों तक पूरी तरह ठप रहेगी ऑनलाइन क्लेम सर्विसईपीएफओ द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, विभाग के सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन और डेटाबेस सुरक्षा सिस्टम को मजबूत करने के लिए एक पूर्वनिर्धारित प्लानिंग के तहत डेटा माइग्रेशन का काम किया जा रहा है। इस तकनीकी काम की वजह से ऑनलाइन क्लेम सबमिशन और प्रोसेसिंग की सभी सेवाएं 26 जून की रात 00:00 बजे (मध्यरात्रि) से लेकर 28 जून की रात 23:59 बजे तक पूरी तरह से बंद रहेंगी। पीएफ पोर्टल पर ये सभी डिजिटल सेवाएं 29 जून को सुबह 00:00 बजे से दोबारा सामान्य रूप से लाइव कर दी जाएंगी।इस मेंटेनेंस पीरियड (रखरखाव अवधि) के दौरान पीएफ मेंबर्स न तो कोई नया ऑनलाइन क्लेम फॉर्म भर सकेंगे और न ही विभाग के स्तर पर पुराने पेंडिंग क्लेम प्रोसेस किए जाएंगे। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि जो क्लेम इस शटडाउन से ठीक पहले सबमिट किए जा चुके हैं, उन पर भी आगे की कार्रवाई सेवाएं पूरी तरह बहाल होने के बाद ही यानी 29 जून से ही शुरू हो पाएगी।उमंग ऐप पर 2 जुलाई 2026 तक बढ़ी मुसीबत, नहीं होंगे ये 5 जरूरी काममुख्य ईपीएफओ पोर्टल के अलावा, पीएफ विभाग ने एक और जरूरी अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि शेड्यूल मेंटेनेंस एक्टिविटी के चलते सरकारी मोबाइल एप्लीकेशन 'उमंग' पर भी ईपीएफओ की सभी सेवाएं 2 जुलाई 2026 तक पूरी तरह लॉक रहेंगी। उमंग ऐप पर यह रुकावट पोर्टल के मुकाबले ज्यादा लंबी होने वाली है, जिसके कारण स्मार्टफोन से पीएफ का काम निपटाने वाले नौकरीपेशा लोग अगले कुछ दिनों तक इन बेहद जरूरी सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे:बैलेंस और पासबुक चेक करना: मेंबर्स अपने पीएफ खाते में जमा रकम और मंथली कंट्रीब्यूशन की पासबुक नहीं देख पाएंगे।नया क्लेम और ट्रैकिंग: किसी भी तरह का एडवांस पीएफ या फुल विड्रॉल क्लेम फाइल नहीं होगा और न ही पुराने क्लेम का स्टेटस ट्रैक किया जा सकेगा।UAN आधारित सेवाएं: यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) को एक्टिवेट करने या उसमें सुधार करने जैसी सेवाएं बंद रहेंगी।शिकायत निवारण: ईपीएफओ से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए उमंग ऐप के जरिए शिकायत (Grievance) दर्ज नहीं की जा सकेगी।सर्टिफिकेट्स के लिए आवेदन: पेंशनभोगियों के लिए आवश्यक स्कीम सर्टिफिकेट और डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र के सबमिशन की प्रक्रिया भी इस अवधि में थमी रहेगी।आखिर क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला? ईपीएफओ ने बताई असली वजहकरोड़ों सब्सक्राइबर्स को होने वाली इस अस्थायी असुविधा को लेकर ईपीएफओ प्रशासन का कहना है कि इस बड़े तकनीकी अपग्रेडेशन और डेटाबेस कंसॉलिडेशन (डेटा एकीकरण) का मुख्य उद्देश्य विभाग के पूरे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को साइबर खतरों से सुरक्षित, तेज और अधिक कुशल बनाना है।अधिकारियों के मुताबिक, इस नए अपग्रेड के लागू होने के बाद ईपीएफओ का क्लेम प्रोसेसिंग सिस्टम पहले से कई गुना ज्यादा मजबूत और पारदर्शी हो जाएगा। इसका सीधा फायदा भविष्य में सब्सक्राइबर्स को मिलेगा, क्योंकि तब क्लेम सेटलमेंट में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और लोगों को बिना किसी एरर के एक शानदार यूजर एक्सपीरियंस मिलेगा। ऐसे में अगर आपका कोई पीएफ से जुड़ा बेहद जरूरी काम अटका है, तो आपको ईपीएफओ पोर्टल के लिए 29 जून तक और उमंग ऐप के लिए 2 जुलाई तक का इंतजार करना होगा।
देश के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से ज्यादा पेंशनभोगियों के लिए एक बहुत बड़ी और बेहद उत्साहजनक खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार द्वारा गठित किया गया 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ चुका है। हर 10 साल के अंतराल पर बनने वाला यह हाई-प्रोफाइल आयोग इस बार सरकारी कर्मचारियों की किस्मत बदलने और उनकी झोली में बंपर सैलरी हाइक (Salary Hike) डालने की पुरजोर तैयारी कर रहा है।सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में काम कर रहा यह आयोग इस समय देशव्यापी दौरों पर है और 30 जून 2026 तक ऑनलाइन डेटा जुटाने की अंतिम प्रक्रिया में व्यस्त है। इस बीच, विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष अपनी ऐतिहासिक मांगें रख दी हैं, जिसमें न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा ₹18,000 से सीधे बढ़ाकर ₹69,000 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.80 गुना तक ले जाने का पुरजोर समर्थन किया गया है। रेलवे, डिफेंस (रक्षा) समेत तमाम सरकारी विभागों के लगभग 1 करोड़ से अधिक परिवारों की जेब और भविष्य पर सीधा असर डालने वाले इस महा-बदलाव को लेकर 10 सबसे बड़े और महत्वपूर्ण अपडेट्स सामने आए हैं, जिन्हें हर नौकरीपेशा और रिटायर्ड कर्मचारी के लिए जानना बेहद जरूरी है।1. न्यूनतम बेसिक पे सीधे ₹69,000 करने की हुंकारसैलरी स्ट्रक्चर में आमूलचूल बदलाव को लेकर देश के सबसे बड़े कर्मचारी संगठनों ने आयोग को अपना आधिकारिक मांग पत्र सौंप दिया है। नेशनल काउंसिल (NC-JCM) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने संयुक्त रूप से मांग की है कि महंगाई के मौजूदा दौर को देखते हुए न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर सीधे ₹69,000 किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन ने इसे ₹65,000 निर्धारित करने की वकालत की है।2. रेलवे यूनियनों ने रखा अपना अलग और तार्किक पक्षकर्मचारियों की संख्या के लिहाज से सबसे बड़े विभाग भारतीय रेलवे की यूनियनों ने भी अपनी आवाज बुलंद की है। इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने आज के आधुनिक आर्थिक कारकों और बाजार भाव के आधार पर न्यूनतम वेतन ₹52,600 करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) का तर्क है कि इस नए न्यूनतम वेतन की सटीक गणना 1 जनवरी 2026 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Price Index) को आधार बनाकर ही की जानी चाहिए ताकि कर्मचारियों को वास्तविक लाभ मिल सके।3. फिटमेंट फैक्टर पर आया यह बड़ा गुणा-भागकेंद्रीय कर्मचारियों की अंतिम सैलरी तय करने में 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) की भूमिका सबसे ज्यादा निर्णायक होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे यूनियन (IRTSA) ने विशेष मांग की है कि रेलवे के सेफ्टी कैटेगरी से जुड़े पदों (विशेषकर लेवल 6) के लिए उच्च इंडेक्सिंग का फॉर्मूला अपनाया जाए। उन्होंने आयोग को सुझाव दिया है कि इस बार कर्मचारियों की जिम्मेदारी और कार्यकुशलता के आधार पर 2.92, 3.50 और अधिकतम 3.80 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाना चाहिए।4. महंगाई भत्ते (DA) को लेकर तैयार हो रहा है नया फॉर्मूलाकर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी संगठनों ने आयोग के सामने बिल्कुल नए और व्यावहारिक सुझाव रखे हैं:NC-JCM का सुझाव: कर्मचारियों के लिए एक 'इन्फ्लेशन-लिंक्ड' यानी सीधे महंगाई की दर से जुड़ा हुआ वेज मॉडल तैयार होना चाहिए, जिससे जैसे-जैसे बाजार में महंगाई बढ़े, सैलरी में स्वतः ही आनुपातिक बढ़ोतरी हो जाए।महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन: इन्होंने मांग की है कि साल में न्यूनतम 4% डीए बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाए। साथ ही, जैसे ही महंगाई भत्ता 50% के आंकड़े को छुए, उसे तुरंत बेसिक सैलरी में मर्ज (विलय) कर दिया जाना चाहिए।5. डेटा सबमिशन की अंतिम तारीख 30 जून 2026 तय8वें वेतन आयोग ने विभिन्न संगठनों और हितधारकों द्वारा फिजिकल ज्ञापन सौंपने की खिड़की को बीते 15 जून को बंद कर दिया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जो भी संगठन या व्यक्तिगत स्टेकहोल्डर्स अपना ऑनलाइन डेटा या सुझाव सबमिट करना चाहते हैं, उनके लिए आयोग का आधिकारिक डिजिटल पोर्टल 30 जून 2026 तक पूरी तरह खुला रहेगा। इसके बाद डेटा कलेक्शन का काम बंद कर दिया जाएगा।6. जानिए कौन-कौन हैं इस रसूखदार पैनल के सदस्यइस समय 8वें वेतन आयोग की पूरी कमान देश की जानी-मानी कानूनी विशेषज्ञ और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में है, जो इसकी अध्यक्ष हैं। उनके इस सफर में देश के दो और दिग्गज नाम पैनल में शामिल हैं—पहले हैं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सम्मानित सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष और दूसरे हैं पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज जैन, जो इस पूरे आयोग में बतौर सदस्य-सचिव (Member-Secretary) अपनी सेवाएं दे रहे हैं।7. ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मैदान पर उतरेगा आयोगविभिन्न राज्यों के जमीनी हालात और वहां के स्थानीय कर्मचारी संगठनों की नब्ज टटोलने के लिए आयोग की टीम लगातार राज्यों के दौरे कर रही है। इसी देशव्यापी अभियान के अगले चरण के तहत आयोग की पूरी टीम 6 और 7 जुलाई को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर का दौरा करेगी, जबकि इसके तुरंत बाद 9 और 10 जुलाई को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में कर्मचारियों और यूनियनों के साथ आमने-सामने की मैराथन बैठकें की जाएंगी।8. देश के 1 करोड़ से अधिक परिवारों को मिलेगा सीधा लाभइस नए वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होते ही इसका सीधा और सकारात्मक असर देश के आर्थिक ढांचे पर दिखेगा। इससे केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले 50 लाख से अधिक एक्टिव कर्मचारियों और देश की सेवा कर चुके लगभग 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार होगा। इस विशाल लाभार्थी वर्ग में भारतीय सेना (रक्षा विभाग) और लाइफलाइन कहे जाने वाले रेलवे के लाखों कर्मचारी और उनके रिटायरीज भी शामिल हैं।9. कब तक आएगी वेतन आयोग की फाइनल रिपोर्ट?सरकारी प्रक्रियाओं और पिछले इतिहास को देखें तो किसी भी वेतन आयोग को देश भर से मिले लाखों ज्ञापनों का अध्ययन करने और अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपने में कम से कम 18 महीने का समय लग जाता है। इस गणित के हिसाब से फरवरी 2027 से पहले आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट आना काफी मुश्किल नजर आ रहा है। हालांकि, ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल का मानना है कि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल 2027 के बजट सत्र के आसपास केंद्र सरकार इस संबंध में कोई बहुत बड़ा और ऐतिहासिक ऐलान कर सकती है।10. कर्मचारियों की जेब में वास्तव में कब तक आएगा बढ़ा हुआ पैसा?सरकारी कर्मचारियों के लिए यह जानना भी बेहद जरूरी है कि घोषणा होने और खाते में पैसा आने के बीच कितना समय लगता है। अगर पुराने वेतन आयोगों के ट्रेंड्स और उनके क्रियान्वयन की रफ्तार को देखें, तो सिफारिशें टेबल पर आने के बाद उन्हें देश के हर विभाग में पूरी तरह लागू करने और एरियर आदि की गणना करने में 2 से 3 साल का लंबा वक्त लग जाता है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि यदि साल 2027 में सरकार नए वेतनमान और सैलरी बढ़ोतरी की घोषणा कर भी देती है, तो उसका वास्तविक और पूरा नकद लाभ कर्मचारियों को अपनी मंथली सैलरी स्लिप में साल 2029 या 2030 तक ही दिखाई देगा।
सीएम योगी के नोएडा दौरे पर 2478 करोड़ की 70 परियोजनाओं की सौगात, नए प्रशासनिक भवन का करेंगे लोकार्पण
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह नोएडा में कुल 2,478 करोड़ रुपये की 70 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इनमें 1,045 करोड़ रुपये की 5 परियोजनाओं का लोकार्पण तथा 1,434 करोड़ रुपये की 65 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री का यह दौरा नोएडा और आसपास के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सावन 2026 की शुरुआत कब से? जानें इस बार कितने सोमवार और मंगला गौरी व्रत का बन रहा है अद्भुत संयोग
रिमझिम फुहारें, चारों तरफ फैली हरियाली और हवाओं में गूंजते 'बोले बम-बम' के जयकारे... जी हां, शिव भक्तों के सबसे पसंदीदा और पावन महीने सावन की दस्तक अब बहुत दूर नहीं है। हिंदू कैलेंडर का पांचवा महीना यानी श्रावण मास आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से सनातन धर्म में सबसे उत्तम माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह पूरा महीना देवाधिदेव महादेव को अत्यंत प्रिय है। इस विशेष कालखंड में माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त रूप से की गई आराधना भक्तों के जीवन के सभी कष्टों को हर लेती है।सावन के महीने में सोमवार के दिन का एक अलग ही और अनूठा महत्व होता है। वैसे तो पूरा महीना ही शिवजी की भक्ति के रंग में रंगा रहता है, लेकिन सोमवार के दिन शिवालयों में उमड़ने वाला जनसैलाब देखते ही बनता है। भोलेनाथ के दीवाने पूरे महीने व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और कांवड़ यात्रा जैसी कठिन और पवित्र धार्मिक गतिविधियों में लीन रहते हैं। ऐसे में अगर आप भी सावन 2026 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए बेहद अच्छी खबर है। आइए जानते हैं कि इस साल सावन का महीना कब से शुरू हो रहा है और इसमें व्रत रखने के कितने विशेष मौके मिल रहे हैं।सावन 2026: जानिए कब से शुरू और कब समाप्त होगा यह पवित्र महीनापंचांग और तिथियों की गणना को लेकर लोकल 18 से खास बातचीत में पुजारी शुभम तिवारी ने बताया कि उत्तर भारतीय पंचांग (पूर्णिमांत कैलेंडर) के अनुसार, साल 2026 में सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई 2026, दिन गुरुवार से होने जा रही है। वहीं, इस पवित्र महीने का समापन 28 अगस्त 2026, दिन शुक्रवार को होगा। शास्त्रों में वर्णित है कि सावन के पूरे 30 दिनों तक जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और पूरी निष्ठा से महादेव की शरण में रहता है, उसकी हर अधूरी मनोकामना पूरी होती है और घर में सुख, शांति तथा अटूट समृद्धि का वास होता है।इस बार मिलेंगे भक्ति के विशेष अवसर: 4 सोमवार और 4 मंगला गौरी व्रत का संयोगसावन 2026 की सबसे खास बात यह है कि इस बार भक्तों को शिव और शक्ति दोनों की कृपा पाने के बराबर और बेहद दुर्लभ अवसर मिल रहे हैं। इस साल के सावन में कुल चार सोमवार और चार ही मंगला गौरी व्रत पड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि यदि आप सावन के सोमवार व्रत रखने या कांवड़ लाकर जलाभिषेक करने का संकल्प ले रहे हैं, तो आपके पास तैयारी करने के लिए अभी से पर्याप्त समय है।सावन 2026 के 4 सोमवार की सटीक तारीखेंसनातन परंपरा में सोमवार का दिन साक्षात भगवान शिव का दिन माना जाता है। सावन के सोमवार को सुबह उठकर पवित्र स्नान के बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल, गाय का कच्चा दूध, बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करने से भोलेनाथ बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। साल 2026 में पड़ने वाले चारों सोमवार की तारीखें इस प्रकार हैं:पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026अखंड सौभाग्य के लिए 4 मंगला गौरी व्रतजिस तरह सावन का सोमवार पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए शिव भक्ति का पर्व है, उसी तरह सावन का हर मंगलवार विशेष रूप से महिलाओं के लिए 'मंगला गौरी व्रत' के रूप में आरक्षित रहता है। यह व्रत साक्षात माता पार्वती को समर्पित है। सुहागिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली, दांपत्य सुख और पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत बहुत नियम-धर्म से रखती हैं। वहीं, घर की अविवाहित कन्याएं सुयोग्य और मनचाहा वर पाने की इच्छा से इस दिन माता गौरी का श्रृंगार और पूजन करती हैं।साल 2026 में मंगला गौरी व्रत की तिथियां 4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त और 25 अगस्त को आ रही हैं। इन विशेष दिनों पर माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
महाराष्ट्र के पुणे से सामने आए चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने इस समय पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। लोहागढ़ किले में हुई इस खौफनाक वारदात में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस बीच, अब मृतक केतन के पिता विशाल अग्रवाल का एक बेहद महत्वपूर्ण बयान सामने आया है, जिसने पुलिस की शुरुआती थ्योरी को पूरी तरह पलट कर रख दिया है। विशाल अग्रवाल ने उन मीडिया रिपोर्टों और पुलिस कयासों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि केतन के लुक और उनके 'हेयर विग' की वजह से उनकी मंगेतर सिया गोयल इस शादी से खुश नहीं थी और इसी नफरत के कारण उसने केतन को मौत के घाट उतरवा दिया।'सगाई से पहले ही सिया के परिवार को पता था सच' - पिता का दावालोहागढ़ किले में 18 जून को मार दिए गए 25 वर्षीय युवा कारोबारी केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल बेहद भावुक और आक्रोशित हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके बेटे के लुक को लेकर जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह झूठी, भ्रामक और मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने वाली हैं। विशाल अग्रवाल ने बताया कि केतन को एक मेडिकल समस्या (Alopecia या बाल झड़ने की बीमारी) थी, जिसके कारण उनके सिर के एक हिस्से के बाल गिर गए थे। इसी वजह से वह हेयर विग पैच का इस्तेमाल करता था।केतन के पिता ने खुलासा किया कि इस मेडिकल कंडीशन की पूरी जानकारी सगाई की बात पक्की होने से काफी समय पहले ही मंगेतर सिया गोयल और उसके पूरे परिवार को दे दी गई थी। उन्होंने कहा, हमने कुछ भी नहीं छुपाया था। अगर सिया या उसके परिवार को केतन के लुक या विग से कोई भी दिक्कत होती, तो वे उसी समय शादी के रिश्ते से इनकार कर सकते थे। इसलिए अब हत्या की वजह विग को बताना पूरी तरह गलत है।हादसा नहीं सोची-समझी साजिश, मंगेतर और उसके प्रेमी ने मिलकर रची मौत की पटकथाविशाल अग्रवाल के इस बयान के बाद अब पुलिस की सुई पूरी तरह से एक सुनियोजित और ठंडे दिमाग से की गई हत्या की साजिश (Premeditated Murder) पर टिक गई है। इस हत्याकांड में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की मुख्य भूमिका सामने आई है। शुरुआती दौर में जब केतन का शव खाई से मिला था, तो इसे पैर फिसलने की वजह से हुआ एक हादसा माना जा रहा था। लेकिन जैसे ही पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस और फॉरेंसिक सबूतों को खंगाला, यह मामला एक खौफनाक कत्ल की साजिश में बदल गया।पहली बार झाड़ियों ने बचाई जान, दूसरी बार खाई में धक्का देकर ले ली जानपुलिस जांच में जो टाइमलाइन और सबूत सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। तफ्तीश के मुताबिक, मंगेतर सिया गोयल साजिश के तहत केतन को बार-बार पुणे के पास स्थित ऐतिहासिक लोहागढ़ किले के सुनसान इलाकों में ले जा रही थी। वारदात से ठीक चार दिन पहले, यानी 14 जून को भी सिया केतन को किले के एक ऊंचे पॉइंट पर लेकर गई थी। वहां उसने केतन को पहाड़ी की चट्टान से नीचे धक्का देने की कोशिश की थी, लेकिन किस्मत अच्छी थी कि केतन ने गिरते समय वहां उगी एक मजबूत झाड़ी को पकड़ लिया और उसकी जान बच गई।इस नाकाम कोशिश से सबक न लेते हुए, सिया गोयल 18 जून को दोबारा केतन को उसी लोहागढ़ किले के सुसाइड पॉइंटनुमा इलाके में ले गई। इस बार बैकअप के तौर पर उसका प्रेमी चेतन चौधरी भी गुपचुप तरीके से उनके पीछे-पीछे किले पर पहुंच गया। पुलिस का आरोप है कि जैसे ही केतन का ध्यान भटका, सिया और चेतन ने मिलकर उसे गहरी खाई में धक्का दे दिया। इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण केतन की मौके पर ही मौत हो गई।बदनामी के डर से नहीं तोड़ी सगाई, कॉल डिटेल्स ने खोले राजइस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस को सुलझाने में पुलिस के हाथ दोनों आरोपियों के मोबाइल सीडीआर (Call Detail Records) लगे हैं, जो उनके गुनाह की गवाही दे रहे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, सगाई होने के बाद भी सिया और चेतन चौधरी के बीच हजारों बार फोन पर बातचीत हुई थी, जिनमें से कई कॉल कई-कई घंटों लंबी थीं।कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी चेतन ने पुलिस के सामने कुबूल किया है कि सिया केतन से शादी नहीं करना चाहती थी, लेकिन वह खुद सगाई भी नहीं तोड़ पा रही थी क्योंकि उसे समाज और परिवार में होने वाली बदनामी का डर था। इसी बदनामी से बचने के लिए उसने केतन को ही रास्ते से हटाने का खौफनाक फैसला कर लिया। फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपी मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। दोनों के खिलाफ हत्या (IPC 302) और आपराधिक साजिश (IPC 120B) के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का विवाहित महिलाओं के लिए एक बेहद खास और पवित्र स्थान है। देश के कई हिस्सों में इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए वट पूर्णिमा का व्रत रखती हैं। इसे कई जगहों पर वट सावित्री व्रत के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ की शाखाओं में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा, इसके मजबूत तने में भगवान विष्णु और इसकी गहरी जड़ों में देवों के देव महादेव का वास होता है। यही वजह है कि इस पेड़ की पूजा करने से त्रिमूर्ति का आशीर्वाद एक साथ मिल जाता है।ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त का सटीक समयसाल 2026 में ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून को तड़के सुबह 03:06 बजे से हो रही है, जो अगले दिन यानी 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि के महत्व को सर्वोपरि माना जाता है, इसलिए पूर्णिमा का व्रत, पवित्र नदियों में स्नान-दान और मुख्य पूजा 29 जून 2026 को ही संपन्न की जाएगी।इस पावन दिन पर स्नान और दान के लिए सबसे उत्तम समय यानी ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:06 बजे से सुबह 04:46 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी पवित्र नदी में डुबकी लगाना या घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना और उसके बाद गरीबों को दान देना बेहद कल्याणकारी और पुण्य फलदायी माना जाता है। इसके अलावा सुबह की पूजा का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त 06:00 बजे से 08:30 बजे तक है। दोपहर के समय पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त 11:57 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा, जबकि शाम को गोधूलि मुहूर्त 07:22 बजे से 07:42 बजे तक रहेगा।इस बार बन रहा है 2 शुभ योगों का अद्भुत संयोगइस साल वट पूर्णिमा का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि इस दिन शुक्ल योग और ब्रह्म योग का एक बहुत ही दुर्लभ और पावन संयोग बन रहा है। 29 जून को सुबह से लेकर दोपहर 02:36 बजे तक शुक्ल योग रहेगा और इसके तुरंत बाद ब्रह्म योग की शुरुआत हो जाएगी। ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों ही योगों को बेहद शुभ और मंगलकारी माना गया है। इन विशेष योगों में की गई पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्य कभी निष्फल नहीं होते। महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार सुबह या दोपहर के किसी भी शुभ मुहूर्त में बरगद के पेड़ की परिक्रमा कर सकती हैं और सावित्री-सत्यवान की पौराणिक व्रत कथा का श्रवण कर पुण्य की भागीदार बन सकती हैं।क्या है जून की पूर्णिमा और 'स्ट्रॉबेरी मून' का अनोखा कनेक्शन?दिलचस्प बात यह है कि ज्येष्ठ माह की यह पूर्णिमा सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार उत्तरी अमेरिका और कई पश्चिमी देशों में भी बड़े चाव से देखी जाती है। जून महीने में दिखने वाले इस पूरे चांद को दुनिया भर में 'स्ट्रॉबेरी मून' (Strawberry Moon) के नाम से जाना जाता है। हालांकि, नाम को सुनकर अगर आप यह सोच रहे हैं कि इस रात चांद का रंग गुलाबी या लाल हो जाता है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। दरअसल, इस समय उत्तरी अमेरिका में स्ट्रॉबेरी की फसल पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है और वहां के स्थानीय लोग इस बेहद कम समय के सीजन में स्ट्रॉबेरी की कटाई करते हैं। इसी वजह से सदियों से जून की पूर्णिमा के चांद को यह खूबसूरत नाम दिया गया है।29 जून की रात आसमान में दिखेगा अनोखा नजारानॉटिंघम यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'स्ट्रॉबेरी मून' शब्द की उत्पत्ति उत्तर-पूर्वी उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी 'एल्गोंक्वियन' लोगों से जुड़ी है। उनके लिए यह नाम किसी रंग का प्रतीक नहीं, बल्कि एक मौसमी इंडिकेटर की तरह काम करता था, जिससे उन्हें पता चलता था कि अब जंगली स्ट्रॉबेरी को इकट्ठा करने का समय आ गया है। वहीं दूसरी तरफ, पूरे यूरोप में जून के इस पूरे चांद को 'हनी मून', 'मीड मून' या 'रोज मून' भी कहा जाता है, जो वहां की पारंपरिक खेती और लोक संस्कृति के चक्र को दर्शाता है।इस बार स्ट्रॉबेरी मून के साथ दिखेगा 'माइक्रो मून' का दुर्लभ रूपभारत में इस अद्भुत खगोलीय घटना यानी स्ट्रॉबेरी मून का सबसे खूबसूरत और साफ़ नजारा 29 जून की सुबह 05:26 बजे के आसपास देखा जा सकेगा। खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार का यह पूरा चांद एक 'माइक्रो मून' (Micro Moon) भी होगा। माइक्रो मून का सीधा मतलब यह होता है कि इस समय चंद्रमा अपनी कक्षा (Orbit) में चक्कर काटते हुए पृथ्वी से अपनी सबसे अधिकतम दूरी पर स्थित होगा। दूरी बहुत ज्यादा होने के कारण यह चांद आम पूर्णिमा के चंद्रमा के मुकाबले आकार में थोड़ा छोटा और रोशनी में थोड़ा धुंधला दिखाई देगा। इसे देखने के लिए 28 और 29 जून की पूरी रात आसमान में एक बेहद खूबसूरत नजारा बना रहेगा।
दिल्ली वालों को अभी और तरसाएगा मानसून, मौसम विभाग ने बताया राष्ट्रीय राजधानी में कब होगी एंट्री
दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर-पश्चिम भारत में भीषण गर्मी का प्रकोप झेल रहे लोगों के लिए एक बड़ी और थोड़ी मायूस करने वाली खबर है। देशभर में सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रहा दक्षिण-पश्चिम मानसून अब दिल्ली में भी अपने तय समय पर दस्तक नहीं दे पाएगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में मानसून की एंट्री अगले हफ्ते होने की उम्मीद है। आमतौर पर दिल्ली में मानसून पहुंचने की तारीख 27 जून के आसपास मानी जाती है, लेकिन इस बार हवाओं का रुख और मौसमी सिस्टम इसका साथ नहीं दे रहे हैं।मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि मानसून केरल में अपने सही समय पर पहुंच गया था, लेकिन पिछले कुछ सालों का ट्रेंड देखें तो इसे उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों तक पहुंचने में पहले के मुकाबले अधिक समय लग रहा है। आईएमडी ने 1961 से 2019 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद मानसून के पहुंचने की सामान्य तारीखों में कुछ बदलाव भी किए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि मानसून का मिजाज बदल रहा है।इन राज्यों में भी बढ़ा इंतजार, सामान्य से 41 फीसदी कम बरसे बदरामानसून की धीमी चाल का असर सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सामान्य तौर पर मानसून को 26 जून तक चंडीगढ़, 27 जून तक दिल्ली, 28 जून तक जम्मू, 1 जुलाई तक जयपुर और 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेना चाहिए। मगर इस साल जमीनी हकीकत काफी अलग है। यह प्रायद्वीपीय और मध्य भारत के कई हिस्सों में अपने सामान्य समय से काफी पीछे चल रहा है।हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा अभी सूरत, इंदौर, डाल्टनगंज और मोतिहारी तक ही पहुंच पाई है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अभी भी इसकी एंट्री नहीं हुई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी में जुटे किसान बेहद चिंतित हैं। मानसून की इस बेरुखी की वजह से जून महीने में देशभर में सामान्य से करीब 41 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 2 जुलाई तक भी स्थिति में बहुत बड़ा सुधार होने की उम्मीद नहीं है और बारिश सामान्य से कम ही रहेगी।मौसम विभाग का नया अपडेट: अगले 3-4 दिनों में यहां बदल सकता है मौसमराहत की बात यह है कि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में मानसून के दोबारा एक्टिव होने की उम्मीद जताई है। आईएमडी के नए बुलेटिन के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। इसके बाद, यानी 2 जुलाई से मानसून धीरे-धीरे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बचे भागों के साथ-साथ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और राजस्थान के कुछ और इलाकों की तरफ कदम बढ़ाएगा।मानसून के आने में हो रही इस देरी ने उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी और उमस को चरम पर पहुंचा दिया है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में इस समय भीषण लू (Heatwave) चल रही है। प्रयागराज में पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है, जो सामान्य से 4 से 5 डिग्री ज्यादा है। दिल्ली की बात करें तो यहां दिन और रात दोनों ही समय लोग उमस भरी गर्मी से बेहाल हैं। दिन का अधिकतम तापमान 37 से 40 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, बीच-बीच में चलने वाली तेज धूलभरी हवाओं और हल्की आंधी से तापमान में मामूली गिरावट आती है, लेकिन वह फौरी राहत ही साबित हो रही है। आने वाले दिनों में भी दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।अल नीनो ने बिगाड़ा खेल, जून से सितंबर तक दिख सकता है बड़ा असरइस साल मानसून की इस सुस्ती के पीछे मौसम वैज्ञानिक 'अल नीनो' (El Nino) के बढ़ते प्रभाव को मुख्य वजह मान रहे हैं। एक्सपर्ट्स ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में अल नीनो की स्थिति पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। समुद्र की सतह का तापमान (SST) बढ़ने के कारण वैश्विक हवाओं के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है, जिसका सीधा असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ रहा है।मौसम विभाग के मुताबिक, जून से सितंबर तक चलने वाले इस मानसूनी सीजन के दौरान अल नीनो का यह प्रभाव और ज्यादा मजबूत हो सकता है। आईएमडी ने अपने शुरुआती लॉन्ग रेंज फोरकास्ट में भी इस बात का अंदेशा जताया था कि इस साल देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश देखने को मिल सकती है। ऐसे में कई राज्यों में मानसून का सीजन कमजोर रहने की आशंका अब सच साबित होती दिख रही है, जो कृषि और जल संकट के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
भारतीय सेना प्रमुख और यूएई के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की अहम बैठक, रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की थल सेना के डिप्टी कमांडर, ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ मोहम्मद खमीस मोहम्मद अल-हसानी ने शुक्रवार को भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच भारत और यूएई के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
दिल्ली से हरियाणा में जींद के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का अंतिम परीक्षण
नई दिल्ली। भारतीय रेल के इतिहास में जल्द ही एक नई और हरित क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। इसे लेकर शुक्रवार को दिल्ली और हरियाणा के जींद के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का अंतिम परीक्षण किया गया। यह ट्रेन न धुआं छोड़ेगी, न प्रदूषण फैलाएगी, बल्कि अपनी ताकत के सबूत में सिर्फ पानी की […] The post दिल्ली से हरियाणा में जींद के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का अंतिम परीक्षण appeared first on Sabguru News .
बाराबंकी में मौलवी तांत्रिक ने युवक की जीभ काटी, मौत
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश में बाराबंकी जिले के टिकैतनगर क्षेत्र में गुरुवार और शुक्रवार की मध्यरात्रि काे एक मौलवी तांत्रिक ने एक व्यक्ति की जीभ काटकर हत्या कर दी। परिवारजन ने तंत्र-मंत्र करने वाले मौलवी पर हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर […] The post बाराबंकी में मौलवी तांत्रिक ने युवक की जीभ काटी, मौत appeared first on Sabguru News .
अलवर के टहला में बालिका से रेप करने का आरोपी टैक्सी चालक अरेस्ट
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के टहला थाना क्षेत्र में एक बालिका के अपहरण और दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने 25 हजार रुपए के इनामी मुख्य आरोपी को गिरफ्तार लिया है। पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने शुक्रवार को अलवर में पत्रकार वार्ता में बताया कि 24 जून को बालिका के अपहरण और दुष्कर्म […] The post अलवर के टहला में बालिका से रेप करने का आरोपी टैक्सी चालक अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
झुंझुनूं : खेतड़ी में बेटे ने ट्रैक्टर से कुचलकर पिता की हत्या कर दी
झुंझुनूं। खेतड़ी में एक युवक ने जमीन विवाद को लेकर अपने पिता की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि महावीर प्रसाद (65) की हत्या की गई है। उसके पुत्र शमशेर सिंह (38) को पकड़ लिया गया है। उन्होंने बताया कि रात करीब साढ़े दस 10 बजे महावीर प्रसाद […] The post झुंझुनूं : खेतड़ी में बेटे ने ट्रैक्टर से कुचलकर पिता की हत्या कर दी appeared first on Sabguru News .
राम मंदिर चढ़ावा मामले में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का ट्रस्ट से इस्तीफा
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। विश्व हिंदू परिषद के सूत्रों के अनुसार राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया है। […] The post राम मंदिर चढ़ावा मामले में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का ट्रस्ट से इस्तीफा appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ : पिकअप सहित 36 लाख की अवैध अंग्रेजी शराब जप्त
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के संगरिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने गुरुवार देर रात एक पिकअप वाहन से चंडीगढ़ निर्मित करीब 36 लाख रुपए मूल्य की अंग्रेजी शराब बरामद की। पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीणा ने शुक्रवार को बताया कि भारतमाला मार्ग पर नगराना टोल नाका के नजदीक पुलिस दल ने पिकअप वाहन को […] The post हनुमानगढ़ : पिकअप सहित 36 लाख की अवैध अंग्रेजी शराब जप्त appeared first on Sabguru News .

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