राज ठाकरे की फोटो सामने, सिर पर चप्पल रखकर कराई उठक-बैठक; MNS वर्कर ने इंफ्लूएंसर को दी 'सजा'!
इस पूरी घटना और दी गई सजा का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह मामला पुणे के हडपसर इलाके का है।
'लंदन एक डेड इकॉनमी', अन्नामलाई का CM विजय पर तंज, कहा- मदुरै जाएं
तमिलनाडु के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के छह दिन के यूके दौरे पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि निवेश के लिए विदेश जाने के बजाय तमिलनाडु और भारत के बड़े औद्योगिक केंद्रों पर फोकस करना चाहिए.
₹10 के विवाद में ऑटो चालक की पीट-पीटकर हत्या, जांच में जुटी पुलिस
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां के वट्टेपल्ली इलाके में मात्र 10 रुपये के मामूली विवाद को लेकर एक ऑटो चालक की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ऑटो चालक का दो यात्रियों के साथ किराए के छुट्टे पैसों को लेकर विवाद हुआ था.
शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा पर मुहर, 23 से 25 सितंबर तक दौरा; ट्रंप एयरपोर्ट पर करेंगे स्वागत
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की राजकीय यात्रा करेंगे। ट्रंप एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करेंगे। जानें ट्रंप-शी बैठक के संभावित मुद्दे।
लखीमपुर के स्कूल में महिला टीचर को गोली मारी, युवक ने खुद को भी उड़ाया; दोनों की मौत
लखीमपुर खीरी के चिल्ड्रन्स एकेडमी स्कूल में युवक ने महिला टीचर को गोली मारने के बाद खुद को भी गोली मार ली। दोनों की मौत के बाद पुलिस जांच में जुटी है।
सोते वक्त 10 छात्राओं की चोटियां कटने से हॉस्टल में मचा हड़कंप
रात में सभी छात्राएं सो रही थीं, सुबह उठने पर बाल कटे मिले तो हॉस्टल में हड़कंप मच गया. पहले शक हुआ कि कोई बाहरी व्यक्ति परिसर में घुसा था, लेकिन CCTV फुटेज देखने के बाद कहानी कुछ और ही निकली. जानें क्या है पूरा मामला?
UP का 4 राज्यों में बंटवारा तय, OP Rajbhar बोले- पूर्वांचल में बनेगा राजभर समाज का CM
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश को चार छोटे राज्यों में बांटना तय है। अंबेडकर नगर में बोलते हुए राजभर ने कहा कि भविष्य में किसी भी चुनावी गठबंधन के लिए यह ज़रूरी होगा कि प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य का मुख्यमंत्री राजभर समुदाय से ही हो। राजभर ने इस दावे के आधार के तौर पर पूर्वी इलाके में राजभर समुदाय की आबादी और उनके वोटों की बड़ी हिस्सेदारी का ज़िक्र किया। इसे भी पढ़ें: Annamalai बोले- Periyar के जाति सुधार का समर्थन, नास्तिकता और ब्राह्मण विरोध मंजूर नहीं राजभर ने कहा कि राज्य का बंटवारा तय है। जब राज्य का बंटवारा होगा—जिसमें पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश जैसे इलाके शामिल होंगे—तो अगर आप उस इलाके को देखें जहां हम अभी बैठे हैं, यानी अंबेडकर नगर से शुरू करते हुए, तो पूरे पूर्वांचल इलाके में राजभर समुदाय के वोटों की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा है। इसलिए, गठबंधन करने वाली किसी भी पार्टी के लिए यह पहले से तय शर्त होगी कि भविष्य के पूर्वांचल राज्य का मुख्यमंत्री राजभर समुदाय से ही होगा। उत्तर प्रदेश को बांटने के प्रस्ताव पर दशकों से राजनीतिक हलकों में बहस होती रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश का हिस्सा, पूर्वांचल, अपनी घनी आबादी और बेरोजगारी व पलायन जैसी चुनौतियों के लिए जाना जाता है, फिर भी इसका काफी राजनीतिक प्रभाव है। मध्य क्षेत्र में स्थित मध्यांचल या अवध प्रदेश में लखनऊ और कानपुर जैसे प्रमुख प्रशासनिक और आर्थिक केंद्र शामिल हैं। दक्षिण में स्थित बुंदेलखंड संसाधनों की कमी और सूखे की समस्याओं का सामना कर रहा है, और इसका विकास जल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर निर्भर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बना हरित प्रदेश या पश्चिम प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के करीब होने और मजबूत कृषि बुनियादी ढांचे का लाभ उठाता है, जिससे तेजी से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। इसे भी पढ़ें: Imran Masood बोले Rahul Gandhi के बिना BJP से लड़ाई नामुमकिन Akhilesh Yadav फाइनल करें गठबंधन राजभर की ये बातें 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले आई हैं, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। 1955 में, बी.आर. अंबेडकर ने अपनी किताब 'थॉट्स ऑन लिंग्विस्टिक स्टेट्स' में उत्तर प्रदेश को तीन छोटे राज्यों में बांटने का सुझाव दिया था। इसके अलावा, 2011 में मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी सरकार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्य को इन्हीं चार क्षेत्रों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं की और यह अभी भी लागू नहीं हुआ है। फिलहाल, इस बंटवारे को लागू करने के लिए कोई आधिकारिक फैसला या विधायी पहल नहीं की गई है।
प्रोजेक्ट उत्तराखंड में, UP को संपत्तियां क्यों? THDC विवाद पर SC ने कहा- बैठकर बात करें
टिहरी हाइड्रोपावर की संपत्तियों को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच 2012 से विवाद चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को बातचीत से समाधान तलाशने की सलाह दी है. मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी.
TMC के पैसों पर अब भी रहेगा ममता बनर्जी का कंट्रोल, हाई कोर्ट ने बढ़ाई राहत, बैंक अकाउंट एक्सेस मिला
कलकत्ता हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से चुनाव चिह्न में किया गया बदलाव केवल आगामी उपचुनावों तक ही सीमित है। इसलिए फिलहाल यह बैंक खातों के वित्तीय प्रबंधन पर लागू नहीं होगा।
iPhone पर स्क्रीन गार्ड लगाना बेकार? Apple के बॉस ने बताई वजह
iPhone खरीदते ही स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाना आम बात है, लेकिन ऐपल के हार्डवेयर इंजीनियरिंग चीफ खुद इसे पसंद नहीं करते. उनका कहना है कि कंपनी ने iPhone की स्क्रीन को काफी मजबूत बनाया है. नई Ceramic Shield 2 टेक्नोलॉजी पुराने वर्जन के मुकाबले ज्यादा स्क्रैच रेसिस्टेंट है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब iPhone पर स्क्रीन गार्ड लगाने की जरूरत नहीं है?
US से आई ये खबर... तेजी से बिखरा सोना, चांदी भी टूटी
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगातार उच्चे स्तर पर बना हुआ है, जिस कारण सोने पर दबाव दिखाई दे रहा है. सोने में दबाव के कारण चांदी के भाव भी गिरे हुए हैं. आइए जानते हैं 24 कैरेट सोने का भाव क्या है.
Air Marshal Jeetendra Mishra बने Ram Mandir Trust के पहले CEO, संभाला पदभार
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने आधिकारिक तौर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ के रूप में कार्यभार संभाला। मिश्रा मंदिर के प्रशासनिक कामकाज की देखरेख करेंगे। उनके अयोध्या और मंदिर परिसर में ही रहने की उम्मीद है, जिससे रोज़मर्रा के कामकाज के प्रबंधन में ज़्यादा सीधा और सक्रिय तरीका अपनाया जा सकेगा। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी के आरोप लगे हैं। ट्रस्ट ने प्रशासनिक निगरानी को मज़बूत करने और मंदिर से जुड़ी गतिविधियों के प्रबंधन को बेहतर बनाने के मकसद से मिश्रा को नियुक्त किया है। उनके पद संभालने से चढ़ावे के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और रोज़मर्रा के कामकाज पर ज़्यादा ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। हालाँकि, मौजूदा सिस्टम में किसी भी बदलाव के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है। राम मंदिर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। बढ़ती भीड़ को संभालना, सुविधाओं को बनाए रखना और श्रद्धालुओं के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना मुख्य प्रशासनिक ज़िम्मेदारियों में शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: 2027 का उत्तर प्रदेश दंगल: समाजवाद की नई राजनीतिक रंगोली या महज अवसरवाद का मुखौटा? मिश्रा के अयोध्या में रहने के फ़ैसले से रोज़मर्रा की गतिविधियों पर बेहतर नज़र रखने और मंदिर प्रबंधन के अलग-अलग पहलुओं को संभालने वाले अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने में मदद मिलने की उम्मीद है। मिश्रा के पद संभालने और मंदिर के मौजूदा प्रशासनिक सिस्टम व कामकाज की समीक्षा करने के बाद और बदलाव होने की उम्मीद है। जीतेंद्र मिश्रा कौन हैं? जीतेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर, 1986 को भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट के तौर पर शामिल हुए थे। उन्होंने 38 से ज़्यादा सालों तक सेवा की है और वे एक फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं, जिन्हें 3,000 घंटे से ज़्यादा की उड़ान का अनुभव है। उन्होंने पुणे की नेशनल डिफेंस एकेडमी, बेंगलुरु के एयर फ़ोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ़ कॉलेज और यूके के रॉयल कॉलेज ऑफ़ डिफेंस स्टडीज़ से पढ़ाई की है। इसे भी पढ़ें: राजस्थान में Ashok Gehlot का BJP पर आरोप, निकाय चुनाव में पुलिस का दुरुपयोग कर रही सरकार अपने मिलिट्री करियर के दौरान, मिश्रा ने एक फ़ाइटर स्क्वाड्रन की कमान संभाली और एयरक्राफ़्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ़ टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने दो फ़्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफ़िसर कमांडिंग के तौर पर भी काम किया।
वैभव-अभिषेक उतरे तो... जापान क्या करेगा? बेसबॉल के देश में दिखेगी ‘क्रिकेट वाली कुटाई’
भारत-जापान के ऐतिहासिक टी20 मुकाबले में सबसे बड़ा रोमांच वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा की संभावित ओपनिंग जोड़ी को लेकर है. अगर 15 साल के ‘Baby Boss’ और 30 गेंदों में टी20 इंटरनेशनल शतक ठोक चुके अभिषेक साथ उतरे, तो बेसबॉल के दीवाने जापान में क्रिकेट का अलग ही ‘हल्लाबोल’ देखने को मिल सकता है.
अफगानिस्तान में पाकिस्तान की नापाक हरकत, 3 लोगों की मौत
अफगानिस्तान के पक्तिका और कुनार प्रांत में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के हवाई हमलों की खबर है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक कुनार में तीन लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए, जबकि पक्तिका में दो ठिकानों पर हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
कैसे नीम करोली बाबा ने बदल दी थी एक अमेरिकी डॉक्टर की जिंदगी? जानें
Neem Karoli Baba: 70 के दशक में जब एक अमेरिकी डॉक्टर मानसिक शांति की तलाश में कैंची धाम पहुंचा, तो नीम करोली बाबा ने उनके दिल का हाल चुटकियों में जान लिया था. तो आइए जानते हैं कि कैसे बाबा ने अमेरिका से आए डॉक्टर का जीवन हमेशा के लिए बदल दिया था.
पुणे के बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में अब तक का सबसे सनसनीखेज एंगल सामने आया है। पुलिस की जांच इस वक्
जब भी हम हवाई जहाज या फ्लाइट में सफर करते हैं, तो उड़ान भरने से ठीक पहले एयर होस्टेस या पायलट द्वारा यात्रियों से बार-बार एक ही निर्देश दिया जाता है कि वे अपने स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को 'एरोप्लेन मोड' (Airplane Mode) पर डाल दें। कई बार यात्रियों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर इस छोटे से बटन या फीचर का असल काम क्या है और क्या सच में फोन ऑन रखने से कोई बहुत बड़ा विमान हादसा हो सकता है। लोग अक्सर यह सोचते हैं कि यह सिर्फ एक औपचारिकता है या फिर फ्लाइट के दौरान नेटवर्क न मिलने पर बैटरी बचाने का एक तरीका है, लेकिन इसके पीछे की तकनीकी सच्चाई बेहद गंभीर और हैरान करने वाली है। आइए आज इस लेख में बहुत ही विस्तार से समझते हैं कि आखिर फ्लाइट में एरोप्लेन मोड ऑन करना क्यों जरूरी होता है और इसके पीछे कौन-कौन से बड़े सुरक्षा कारण छिपे हैं।हवाई यात्रा आज के समय में दुनिया का सबसे सुरक्षित परिवहन माध्यम माना जाता है, क्योंकि इसमें सुरक्षा के हर एक पहलू पर बहुत बारीकी से काम किया जाता है। विमान में सफर के दौरान यात्रियों की जरा सी लापरवाही भी एक बड़ी मुसीबत का सबब बन सकती है। आधुनिक तकनीक से लैस विमान हवा में हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ते समय कई जटिल रेडियो सिग्नल्स और नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भर होते हैं। यदि कोई यात्री उड़ान के दौरान अपने फोन को नॉर्मल मोड पर चालू रखता है, तो उससे निकलने वाली रेडियो तरंगें विमान के संवेदनशील उपकरणों में किस तरह का खलल डाल सकती हैं, आइए इसकी एक-एक परत को बहुत ही गहराई से टटोलते हैं।क्या सच में फोन ऑन रहने से क्रैश हो सकता है हवाई जहाज? जानिए तकनीकी सचआम तौर पर लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि यदि किसी ने फ्लाइट में फोन का इस्तेमाल कर लिया, तो तुरंत विमान क्रैश हो जाएगा। हालांकि, तकनीक के जानकारों और एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक सिंगल फोन से सीधे तौर पर विमान क्रैश होने की संभावना बहुत कम होती है, लेकिन खतरा फिर भी टलता नहीं है। जब विमान आसमान में उड़ रहा होता है, तो वह जमीन से मीलों दूर स्थित एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टॉवर और सैटेलाइट्स के साथ लगातार रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए संपर्क में रहता है। विमान के कॉकपिट में बैठे पायलटों को रास्ता देखने, मौसम की जानकारी लेने और लैंडिंग या टेकऑफ के निर्देश पाने के लिए इन्हीं सिग्नल्स की जरूरत होती है।यदि केबिन के अंदर सैकड़ों यात्री अपने फोन को नॉर्मल मोड पर चालू रखते हैं, तो उनके फोन पास के मोबाइल टावरों से सिग्नल पकड़ने या तलाशने के लिए अपनी पूरी ताकत से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स (EMF) छोड़ने लगते हैं। जब एक साथ सैकड़ों फोन से इस तरह की किरणें और सिग्नल्स निकलते हैं, तो वे विमान के कम्युनिकेशन सिस्टम में 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस' (EMI) पैदा कर देते हैं। इसके कारण पायलटों के हेडफोन में एक अजीब सी कर्कश और डिस्टर्ब करने वाली आवाज (Buzzing Sound) गूंजने लगती है, जिससे उन्हें एटीसी के महत्वपूर्ण निर्देश स्पष्ट सुनाई नहीं देते और यह स्थिति किसी भी बड़े हादसे को बुलावा दे सकती है।मोबाइल नेटवर्क टावरों और विमान की फ्रिक्वेंसी के बीच का खतरनाक कनेक्शनइसे थोड़ा और तकनीकी रूप से समझें, तो हमारे मोबाइल फोन एक तयशुदा फ्रिक्वेंसी बैंड पर काम करते हैं, जो जमीन पर मौजूद सेल टॉवर से कम्युनिकेट करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। जब आप जमीन पर होते हैं, तो आपके फोन को कुछ ही दूरी पर स्थित टॉवर से कनेक्ट होना होता है, इसलिए वह कम ऊर्जा खर्च करता है। लेकिन जब आप 30,000 फीट की ऊंचाई पर हवा में उड़ रहे होते हैं, तो आपका फोन कई किलोमीटर नीचे जमीन पर मौजूद दर्जनों टावरों के सिग्नल्स को एक साथ पकड़ने की कोशिश करता है। ऐसा करने के लिए फोन अपनी ट्रांसमिशन पावर को अधिकतम स्तर पर बढ़ा देता है।यह अत्यधिक मजबूत रेडियो फ्रिक्वेंसी विमान के नेविगेशन सिस्टम, ऑटोपायलट और रडार उपकरणों को भ्रमित कर सकती है। यही वजह है कि विमानन नियमों के तहत टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को या तो पूरी तरह बंद करने या फिर एरोप्लेन मोड पर डालने की सख्त हिदायत दी जाती है। एरोप्लेन मोड ऑन करते ही फोन का सेलुलर ट्रांसमीटर, वाई-फाई और ब्लूटूथ डिसेबल हो जाते हैं, जिससे किसी भी तरह के बाहरी सिग्नल्स का आदान-प्रदान बंद हो जाता है और विमान का सिस्टम सुरक्षित रहता है।क्या आने वाले समय में खत्म हो जाएगा एरोप्लेन मोड का झंझट? जानिए क्या है आधुनिक तकनीकजैसे-जैसे तकनीक एडवांस हो रही है, वैसे-वैसे विमानन क्षेत्र में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दुनिया भर की कई बड़ी टेलीकॉम कंपनियां और विमान निर्माता अब ऐसी आधुनिक तकनीक पर काम कर रहे हैं जिससे यात्रियों को फ्लाइट के दौरान भी बिना किसी रुकावट के मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा मिल सके। यूरोपीय संघ (EU) और कई अन्य देशों के एविएशन बोर्ड्स ने अब एयरलाइंस को यह अनुमति देना शुरू कर दिया है कि वे अपनी उड़ानों में 5G तकनीक और विशेष 'पिको-सेल्स' (Pico-cells) का इस्तेमाल कर सकें। इन विशेष उपकरणों की मदद से विमान के भीतर ही एक छोटा लोकल नेटवर्क बन जाता है, जिससे फोन सीधे विमान के सिस्टम से कनेक्ट होते हैं और नीचे जमीन के टावरों को डिस्टर्ब नहीं करते हैं।हालांकि, भारत और कई अन्य देशों में अभी भी सुरक्षा मानकों को सर्वोपरि रखते हुए टेकऑफ और लैंडिंग के समय एरोप्लेन मोड ऑन रखना अनिवार्य है। जब तक सभी विमान पूरी तरह से इस नई तकनीक से लैस नहीं हो जाते, तब तक हर यात्री की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह क्रू मेंबर के निर्देशों का पालन करे और यात्रा को सुरक्षित बनाए।यात्रियों की एक छोटी सी सावधानी बचा सकती है सैकड़ों बेकसूर लोगों की जानहवाई यात्रा केवल एक सफर नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारी और अनुशासन का एक ऐसा ताना-बाना है जहां हर एक यात्री की छोटी सी बात मायने रखती है। जब आप फ्लाइट में चढ़ते हैं और सीट बेल्ट बांधने के साथ-साथ अपने फोन को एरोप्लेन मोड पर डाल देते हैं, तो आप केवल नियमों का पालन नहीं कर रहे होते, बल्कि आप उस विमान में बैठे सैकड़ों अन्य यात्रियों और खुद अपनी सुरक्षा में अपना योगदान दे रहे होते हैं। सफर के दौरान कुछ घंटों के लिए दुनिया से कट जाना और आसमान की इन हसीन वादियों का लुत्फ उठाना वास्तव में एक बहुत ही सुकून भरा अनुभव होता है।
कश्मीर घूमने का बना रहे हैं प्लान? 5 दिनों में Srinagar से Pahalgam तक ऐसे करें सफर
धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले खूबसूरत जम्मू-कश्मीर की हसीन और मनमोहक वादियां हर साल देश-विदेश के लाखों सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यदि आप भी भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा सुकून भरा वक्त चुराकर कश्मीर की यात्रा पर जाने का मन बना रहे हैं, और आपके पास सीमित समय यानी केवल 5 दिन हैं, तो श्रीनगर से पहलगाम तक का यह सफर आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। पांच दिनों के इस छोटे लेकिन बेहद रोमांचक टूर प्लान में आप कश्मीर की संस्कृति, ठंडी हवाओं, देवदार के जंगलों और बर्फीली चोटियों का पूरा आनंद उठा सकते हैं। हालांकि, किसी भी ट्रिप पर निकलने से पहले सही रूट की जानकारी, घूमने की जगहें और सटीक बजट का अंदाजा होना बहुत जरूरी है, ताकि आपको वहां जाकर किसी भी तरह की आर्थिक या लॉजिस्टिक परेशानी का सामना न करना पड़े।कश्मीर की इस खूबसूरत यात्रा को कैसे प्लान करें, किस दिन किस जगह पर जाएं और इस पूरे 5 दिवसीय सफर में आपका अनुमानित खर्च कितना आ सकता है, आइए इस विस्तृत ट्रैवल गाइड के जरिए एक-एक बात को बहुत ही बारीकी से समझते हैं।पहले और दूसरे दिन की शुरुआत: श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील और मुगल गार्डन का दीदारआपकी पांच दिनों की इस जादुई यात्रा की शुरुआत देश के मुकुट कहे जाने वाले श्रीनगर शहर से होती है। पहले दिन जब आप श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतरते हैं, तो वहां से सीधे अपने होटल या पारंपरिक हाउस बोट (Houseboat) के लिए निकल जाएं। थोड़ा आराम करने के बाद शाम के वक्त विश्व प्रसिद्ध डल झील (Dal Lake) में शिकारा राइड का आनंद लें, जो किसी भी पर्यटक के लिए एक बेहद सुहाना अनुभव होता है। झील के ठंडे पानी पर तैरते हुए जब सूरज ढलता है, तो चारों तरफ का नजारा देखते ही बनता है। इसके बाद आप श्रीनगर के ऐतिहासिक मुगल गार्डन्स जैसे निशाद बाग और शालीमार बाग की सैर कर सकते हैं, जहां की वास्तुकला और हरियाली आपका मन मोह लेगी।यात्रा के दूसरे दिन आप श्रीनगर से सुबह-सुबह निकलकर गुलमर्ग (Gulmarg) के लिए रवाना हो सकते हैं, जो श्रीनगर से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गुलमर्ग में दुनिया के सबसे ऊंचे केवल कार्स में से एक 'गोंडोला राइड' (Gondola Ride) का रोमांचक अनुभव लें। यहां की बर्फीली वादियां और अल्पाइन घास के मैदान देखकर आपकी सारी थकान पल भर में छूमंतर हो जाएगी। शाम को वापस आकर श्रीनगर में ही रात गुजारें।तीसरे और चौथे दिन का सफर: श्रीनगर से पहलगाम की ओर और 'वैली ऑफ शेफर्ड्स' की हसीन वादियांतीसरे दिन की सुबह ब्रेकफास्ट करने के बाद अपना सामान पैक करें और श्रीनगर से पहलगाम के लिए अपनी कार का रुख करें। श्रीनगर से पहलगाम की दूरी लगभग 124 किलोमीटर है, जिसे तय करने में बाय रोड करीब 3 से 4 घंटे का समय लगता है। रास्ते में पैम्पर के प्रसिद्ध केसर के खेत (Saffron Fields), अनंतनाग के रास्ते में पड़ने वाले प्राचीन अवंतीपुर के खंडहर और सेब के खूबसूरत बाग आपका स्वागत करेंगे। आप इन जगहों पर कुछ देर रुककर तस्वीरें खींच सकते हैं और शुद्ध केसर या लोकल ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी भी कर सकते हैं। पहलगाम पहुंचते ही आपको चारों तरफ फैली हरियाली और कल-कल बहती लिद्दर नदी (Lidder River) की आवाज एक अलग ही सुकून देगी।चौथे दिन का पूरा समय पहलगाम की लोकल और बेहद खूबसूरत जगहों को देखने के लिए आरक्षित रखें। यहां आप बेताब वैली (Betaab Valley), अरु वैली (Aru Valley) और चंदनवाड़ी की सैर कर सकते हैं। फिल्मों की शूटिंग के लिए मशहूर बेताब वैली की सुंदरता देखते ही बनती है। इसके अलावा, अगर आपको एडवेंचर पसंद है, तो आप घुड़सवारी करते हुए 'बिसरान वैली' (जिसे मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है) जा सकते हैं, जहां से पूरी घाटी का पैनोरमिक व्यू बेहद शानदार नजर आता है।पांचवें दिन की वापसी: यादों के अनमोल पिटारे के साथ श्रीनगर एयरपोर्ट के लिए विदाईअपनी इस पांच दिवसीय यादगार यात्रा के पांचवें और अंतिम दिन, सुबह पहलगाम के ठंडे और ताज़ा वातावरण में चाय की चुस्की लेने के बाद आप वापस श्रीनगर के लिए प्रस्थान करेंगे। रास्ते में यदि आपके पास समय बचता है, तो आप स्थानीय बाजारों से पारंपरिक पश्मीना शॉल, कश्मीरी कहवा टी, और लकड़ी के हस्तशिल्प की वस्तुएं खरीद सकते हैं। इसके बाद समय पर श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचकर अपनी वापसी की फ्लाइट ले सकते हैं, और अपने साथ कश्मीर की अनमोल यादों का पिटारा लेकर अपने घर लौट सकते हैं।5 दिनों के इस कश्मीर टूर में कितना आएगा कुल खर्च? (Budget Estimation)अब सबसे अहम सवाल यह है कि इस 5 दिन और 4 रात के ट्रिप में कुल कितना खर्च आएगा। यदि आप बजट फ्रेंडली तरीके से यात्रा करते हैं, तो प्रति व्यक्ति खर्च लगभग 15,000 से 20,000 रुपये के बीच आ सकता है। इसमें 3-स्टार होटल में ठहरना, लोकल ट्रांसपोर्ट या कैब का किराया, और सामान्य खानपान शामिल है। यदि आप लग्जरी रिसॉर्ट्स चुनते हैं या गोंडोला राइड, बेटाब वैली एंट्री फीस और पोनी राइड जैसी अतिरिक्त गतिविधियां शामिल करते हैं, तो यह खर्च प्रति व्यक्ति 25,000 से 35,000 रुपये तक जा सकता है। बेहतर यही होगा कि आप अपनी सुविधा के अनुसार कैब और होटल की बुकिंग पहले से ही कर लें ताकि पीक सीजन में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
पहाड़ों के बीच कंगना का खूबसूरत आशियाना, तस्वीरें देख करेगा घूमने का मन, ट्रिप में ये जगहें न छोड़ें
बॉलीवुड की बेबाक और बिंदास अदाकारा कंगना रनौत अपनी फिल्मों और बयानों के साथ-साथ अपनी बेहतरीन और क्लासी जीवनशैली के लिए भी हमेशा चर्चा में रहती हैं। हिमाचल प्रदेश की हसीन वादियों में बसा उनका यह आशियाना किसी परी कथा के महल से कम नहीं है, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होती रहती हैं। देवदार के ऊंचे-ऊंचे पेड़ों से घिरे, बर्फीली चोटियों की छांव में और पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला से सजा यह आशियाना हर किसी का मन मोह लेता है। इन खूबसूरत तस्वीरों को देखकर हर ट्रेवल लवर का दिल यही कहेगा कि बोरिंग शहर की भागदौड़ छोड़कर तुरंत पहाड़ों की ओर निकल पड़ें। अगर आप भी इस वीकेंड या छुट्टियों में हिमाचल की वादियों की सैर करने का मन बना रहे हैं, तो कंगना के इस खूबसूरत गृह नगर मनाली और उसके आसपास की उन जादुई जगहों के बारे में जरूर जान लें जिन्हें आपको अपनी ट्रिप के दौरान बिल्कुल भी नहीं छोड़ना चाहिए।हिमाचल प्रदेश की आबोहवा और प्राकृतिक सुंदरता दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है, और जब बात बॉलीवुड सितारों के आशियानों की हो, तो लोगों की उत्सुकता और अधिक बढ़ जाती है। कंगना रनौत ने अपने इस आशियाने को बेहद करीने से डिजाइन करवाया है, जहां मॉडर्न लग्जरी के साथ-साथ हिमाचली संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। लकड़ी की नक्काशी, बड़े-बड़े कांच की खिड़कियां जिनसे बाहर के बर्फ से ढके पहाड़ साफ नजर आते हैं, इस घर की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। आइए इस विस्तृत ट्रेवल गाइड के जरिए कंगना के इस आशियाने की खासियतों और मनाली के आसपास घूमने लायक उन तमाम बेहतरीन जगहों की पूरी सैर करते हैं जो आपकी ट्रिप को यादगार बना देंगी।पहाड़ों की रानी मनाली में कंगना रनौत का यह ड्रीम हाउस क्यों है इतना खास?मनाली की हसीन पहाड़ियों के बीच स्थित कंगना रनौत का यह आशियाना किसी वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। अभिनेत्री ने अपने इस घर को बनवाने में स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है, ताकि यह आधुनिकता के साथ-साथ पहाड़ी संस्कृति की भी नुमाइंदगी कर सके। घर के चारों ओर फैले हरे-भरे सेब के बगीचे, रंग-बिरंगे फूल और साल भर बहने वाले ठंडे पानी के झरने इस जगह की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं। कंगना अक्सर जब भी मुंबई की चकाचौंध से दूर सुकून के पल बिताने आती हैं, तो वे इसी घर में समय बिताना पसंद करती हैं। सोशल मीडिया पर शेयर की गई उनकी इन घरों की तस्वीरें फैंस को इतना आकर्षित करती हैं कि हर कोई एक बार यहां जाने की हसरत जताता है।इस घर की बालकनी से दिखने वाले पहाड़ियों के नजारे सुबह की कॉफी को और भी ज्यादा खास बना देते हैं। लकड़ी और पत्थरों से बना यह आशियाना पर्यावरण के अनुकूल भी है, जो सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है। यदि आप कभी मनाली जाएं, तो इन खूबसूरत वादियों के बीच से गुजरते हुए आपको भी इस बात का अहसास होगा कि पहाड़ों के बीच अपना खुद का आशियाना होना कितना सुकून भरा अनुभव हो सकता है।मनाली ट्रिप के दौरान इन बेहतरीन और जादुई जगहों पर जाना बिल्कुल न भूलेंयदि आप कंगना रनौत के इस आशियाने की खूबसूरती से प्रेरित होकर मनाली की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो आपको अपनी लिस्ट में कुछ ऐसी जगहों को जरूर शामिल करना चाहिए जो इस ट्रिप को सबसे खास बना देंगी। सबसे पहले बात करते हैं ओल्ड मनाली (Old Manali) की, जो अपनी शांत वादियों, ओल्ड-स्कूल कैफे, हैंडीक्राफ्ट मार्केट और पाइन के जंगलों के लिए जानी जाती है। यहां की संकीर्ण गलियों में घूमना और स्थानीय संस्कृति को करीब से देखना अपने आप में एक अलग ही आनंद है। इसके अलावा, सोलांग वैली (Solang Valley) एडवेंचर लवर्स के लिए स्वर्ग के समान है, जहां आप पैराग्लाइडिंग, जोरबिंग और विंटर सीजन में स्कीइंग का भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं।हडिम्बा देवी मंदिर (Hadimba Temple) भी मनाली की एक ऐसी ऐतिहासिक और पौराणिक जगह है जो घने देवदार के वनों के बीच स्थित है। लकड़ी की अद्भुत वास्तुकला से बना यह मंदिर पर्यटकों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। यदि आपके पास थोड़ा और समय है, तो अटल टनल को पार करके लाहुल-स्पीति की तरफ जाना और सिस्सू वॉटरफॉल का नजारा देखना आपकी इस पूरी यात्रा को हमेशा के लिए यादगार बना देगा।हिमाचली खानपान, संस्कृति और लोकल मार्केट की शॉपिंग का अनोखा अनुभवपहाड़ों की ट्रिप तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक आप वहां के स्थानीय व्यंजनों (Local Pahadi Cuisine) का स्वाद न चखें। मनाली में आपको सिड्डू, मद्रा, थुकपा और ऑथेंटिक हिमाचली थाली का स्वाद जरूर चखना चाहिए, जो ताजे मसालों और स्थानीय अनाजों से तैयार की जाती है। इसके अलावा, मॉल रोड और तिब्बती मार्केट से आप ऊनी शॉल, स्थानीय हैंडीक्राफ्ट, लकड़ी के सुंदर शोपीस और हस्तनिर्मित आभूषण खरीद सकते हैं। पहाड़ी लोगों का सीधा-साधा स्वभाव और आतिथ्य सत्कार पर्यटकों का दिल जीत लेता है।जब आप इन बाजारों में टहलते हैं और ठंडी-ठंडी पहाड़ी हवा आपके चेहरे को छूती है, तो शहर की सारी थकान और तनाव पल भर में गायब हो जाता है। कंगना रनौत भी अक्सर अपने इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट्स में हिमाचल के इस पारंपरिक खानपान और वहां की आबोहवा की जमकर तारीफ करती नजर आती हैं।प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए मनाली क्यों है परफेक्ट डेस्टिनेशन?फोटोग्राफी और व्लॉगिंग के शौकीनों के लिए मनाली और उसके आसपास की वादियां किसी जन्नत से कम नहीं हैं। हर मौसम में इस जगह का एक अलग ही रूप देखने को मिलता है - गर्मियों में जहां चारों तरफ हरियाली और खिले हुए फूल नजर आते हैं, वहीं सर्दियों में यह पूरी घाटी बर्फ की सफेद चादर से ढक जाती है। कंगना के घर के आसपास के इलाके भी ऐसे ही शानदार बैकग्राउंड प्रदान करते हैं जहां कैमरे में कैद की गई तस्वीरें किसी पेंटिंग जैसी लगती हैं। प्रकृति के करीब कुछ दिन बिताने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन की एक नई ऊर्जा भी प्राप्त होती है।ट्रैवल जानकारों का सुझाव है कि यदि आप भीड़भाड़ से दूर सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो मुख्य मनाली के अलावा वशिष्ठ गांव या जोगिनी वॉटरफॉल के ट्रेकिंग रूट पर जरूर जाएं, जहां प्रकृति अपने सबसे शुद्ध और सुंदर रूप में मौजूद है।
21 की उम्र में शादी-बच्चा कर पछताई? ज्योतिषी बोली- पति को छोड़ा...
जय मदान दूसरों की लाइफ को लेकर प्रेडिक्शन करती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं उनकी खुद की शादी में एक वक्त दिक्कतें आई थीं. गुस्से में उन्होंने पति को छोड़ भी दिया था.
मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में सुचीका तरियाल ने रचा इतिहास, भारत को दिलाया पहला कांस्य पदक
अंतरराष्ट्रीय खेल जगत के मंच से मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) के इतिहास में एक ऐसा स्वर्णिम और भावुक कर देने वाला पल सामने आया है जिसने पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। एशियन गेम्स 2026 के इस महामुकाबले में भारत की स्टार फाइटर सुचीका तरियाल ने अपनी अदम्य दृढ़ इच्छाशक्ति और फौलादी हौसलों के दम पर एक ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है। खिताबी भिड़ंत और बेहद नाटकीय तथा तनावपूर्ण मुकाबलों के दौर से गुजरते हुए, आंसुओं और खुशी की मिलीजुली लहर के बीच सुचीका ने भारत के लिए मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स स्पर्धा में पहला कांस्य पदक (Bronze Medal) जीतकर देश का मान पूरी दुनिया में ऊंचा कर दिया है। मुकाबले के दौरान जिस तरह का हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला और अंत में तिरंगा लहराते हुए जब उनके गले में यह पदक पड़ा, तो खेल प्रेमियों की आंखें भी नम हो गईं। आइए इस रोमांचक और संघर्षपूर्ण जीत के हर एक पहलू, मुकाबले के दौरान चले उस ड्रामे और सुचीका तरियाल के इस ऐतिहासिक सफर को बेहद विस्तार से समझते हैं।मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स जैसे बेहद कठिन, शारीरिक रूप से थका देने वाले और आक्रामक कॉम्बैट स्पोर्ट्स में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं है। एशियाई खेलों के इस मंच पर सुचीका तरियाल ने न केवल दुनिया की दिग्गजों को कड़ी चुनौती दी, बल्कि विपरीत परिस्थितियों और मानसिक दबाव का डटकर मुकाबला करते हुए यह साबित कर दिया कि भारतीय बेटियां किसी भी मामले में किसी से पीछे नहीं हैं। खेल की दुनिया में इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद से ही बधाइयों का तांता लग गया है, और हर कोई इस जांबाज खिलाड़ी की जमकर सराहना कर रहा है। आइए इस पूरे मुकाबले की एक-एक परत को बहुत ही बारीकी से टटोलते हैं और जानते हैं कि कैसे यह मेडल भारत के लिए एक नया मील का पत्थर साबित हुआ है।मुकाबले के दौरान का वह नाटकीय और भावुक पल: जब आंसुओं के बीच सुचीका ने लिखी सफलता की नई इबारतइस स्पर्धा का सेमीफाइनल और कांस्य पदक का मुकाबला जितना शारीरिक रूप से कठिन था, उससे कहीं अधिक वह मानसिक तनाव और नाटकीय मोड़ों से भरा हुआ था। मैट पर उतरने से लेकर रेफरी के अंतिम फैसले तक रिंग के चारों ओर एक अलग ही तरह का तनाव और सन्नाटा पसरा हुआ था। मुकाबले के दौरान एक ऐसा क्षण भी आया जब चोट और तकनीकी निर्णयों को लेकर रिंग के भीतर जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला, जिससे दर्शकों की सांसें थम गईं थीं। सुचीका तरियाल को एक कड़े मुकाबले में मामूली अंकों या विवादास्पद निर्णयों के कारण फाइनल में पहुंचने से भले ही चूकना पड़ा हो, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कांस्य पदक के प्लेऑफ मैच में अपने आक्रामक गेमप्लान से विरोधी फाइटर को पूरी तरह धराशायी कर दिया।जीत की घोषणा होते ही सुचीका अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं और रिंग के बीचों-बीच ही भावुक होकर रो पड़ीं। ये आंसू किसी कमजोरी के नहीं, बल्कि उस लंबी और कड़े संघर्ष की दास्तान थे जो उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए झेली थी। कोच और सपोर्ट स्टाफ ने दौड़कर उन्हें गले लगाया और तिरंगा उनके कंधों पर डाल दिया। यह दृश्य देखकर स्टेडियम में मौजूद सभी भारतीय दर्शकों और टीवी स्क्रीन के सामने बैठे करोड़ों देशवासियों का दिल भर आया। खेल के मैदान पर इस तरह के जज्बे को बहुत कम ही देखने को मिलता है जहां एक खिलाड़ी अपने आंसुओं को जीत की ऊर्जा में बदल देता है।मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) में भारत का पहला ऐतिहासिक कांस्य पदक: क्यों है यह जीत इतनी खास?भारत में कॉम्बैट स्पोर्ट्स यानी कुश्ती, बॉक्सिंग और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स का क्रेज लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक या एशियन गेम्स स्तर पर एमएमए जैसे नए और बेहद आधुनिक खेल में मेडल जीतना देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। सुचीका तरियाल द्वारा जीता गया यह कांस्य पदक इस मायने में ऐतिहासिक है क्योंकि यह इस खेल में भारत का पहला आधिकारिक मेडल है। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में स्ट्राइकिंग, जुजित्सु, रेसलिंग और ग्रैपलिंग जैसी कई कठिन कलाओं का मिश्रण होता है, जिसके लिए खिलाड़ी को शारीरिक रूप से वज्र के समान मजबूत और मानसिक रूप से बेहद तेज होना पड़ता है।सुचीका ने अपनी ट्रेनिंग के दौरान जिन कठिनाइयों का सामना किया है, वे किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए एक मिसाल हैं। भारत जैसे देश में जहां पारंपरिक खेलों को ज्यादा बढ़ावा मिलता है, वहां एमएमए जैसी विधा में अपने दम पर पहचान बनाना और फिर महाद्वीपीय खेलों में देश के लिए पोडियम फिनिश करना यह साबित करता है कि अब भारतीय खिलाड़ी वैश्विक पटल पर अपनी नई पहचान गढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस पदक के आने से देश के हजारों युवा एमएमए को एक पेशेवर करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।कड़ी ट्रेनिंग, संघर्ष और पारिवारिक समर्थन की वह अनकही कहानीहर एक महान जीत के पीछे एक लंबा और दर्दनाक संघर्ष छिपा होता है, और सुचीका तरियाल की यह कहानी भी इससे अछूती नहीं है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने वर्षों तक अपने परिवार से दूर रहकर दिन-रात जिम और ट्रेनिंग कैंप्स में पसीना बहाया है। कई बार गंभीर चोटों, मांसपेशियों के खिंचाव और वित्तपोषण की कमी के कारण ऐसा दौर भी आया जब लगा कि शायद वे खेल छोड़ देंगी, लेकिन उनकी जिजीविषा और कुछ कर गुजरने के जज्बे ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। उनके माता-पिता और कोच ने हर मुश्किल समय में चट्टान की तरह उनका साथ दिया।सुचीका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और उन तमाम गुरुओं को दिया है जिन्होंने उनकी इस यात्रा में हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि आपके सपने सच्चे हैं और आप उनके लिए अपनी जान लगाने को तैयार हैं, तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती। देश की युवा पीढ़ी के लिए वे अब एक ऐसी रोल मॉडल बन चुकी हैं जो कठिनाइयों से लड़ने का पाठ पढ़ाती हैं।खेल जगत से मिल रही बधाइयां और भविष्य की बड़ी तैयारियांसुचीका तरियाल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद देश भर से बधाइयों का तांता लगा हुआ है। प्रधानमंत्री, खेल मंत्री, विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारियों और ओलंपिक एसोसिएशन ने ट्वीट कर उन्हें इस शानदार सफलता पर बधाई दी है। खेल प्रेमियों का कहना है कि सुचीका ने यह पदक जीतकर देश की हर बेटी को यह संदेश दिया है कि वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। एशियाई खेलों के इस पदक ने आने वाले विश्व चैंपियनशिप और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए सुचीका का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।कोचिंग स्टाफ का मानना है कि यह तो अभी शुरुआत है, और आने वाले दिनों में सुचीका इस खेल में देश के लिए और भी कई स्वर्ण पदक जीतकर लाएंगी। उनकी इस सफलता के बाद देश में एमएमए के बुनियादी ढांचे और अकादमियों को भी और अधिक बढ़ावा मिलने की उम्मीद है ताकि आने वाली पीढ़ी को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें।
सिर्फ 13 साल की नन्ही एथलीट ने रचा इतिहास, मैदान पर ऐसा जादुई कारनामा देख खुली रह गईं आंखें
अंतरराष्ट्रीय खेल जगत के मंच से एक ऐसी हैरान कर देने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है जिसे सुनकर पूरी दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज और खेल विशेषज्ञ हक्के-बक्के रह गए हैं। एशियन गेम्स के इस महामंच पर एक महज 13 साल की नन्ही और मासूम सी एथलीट ने अपने फौलादी हौसलों और अकल्पनीय प्रतिभा के दम पर ऐसा इतिहास रच दिया है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उम्र के इस बेहद कच्चे पड़ाव पर जहां बच्चे खेल के मैदानों को केवल सीखने की जगह मानते हैं, वहीं इस कमसिन खिलाड़ी ने दुनिया के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों को धूल चटाते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम कर लिया है। उसकी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और तिरंगे की शान दुनिया के सामने एक बार फिर से सबसे ऊपर चमक उठी। आइए इस असाधारण और प्रेरणादायक कहानी के हर एक पन्ने को बेहद विस्तार से जानते हैं कि कैसे इस छोटी सी उम्र में इस बेटी ने पूरी दुनिया को अपना मुंह ताकने पर मजबूर कर दिया।खेल के इतिहास में जब भी कभी सबसे कम उम्र में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों का जिक्र किया जाएगा, तो इस 13 वर्षीय सनसनी का नाम सबसे ऊपर स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। इस अद्भुत जीत ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती, बल्कि जज्बा और कड़ी मेहनत हो तो इंसान पहाड़ों को भी चीर सकता है। आइए जानते हैं कि इस नन्ही एथलीट ने किस खेल स्पर्धा में हिस्सा लिया था, कैसे उसने फाइनल मुकाबले तक का सफर तय किया और इस शानदार सफलता के पीछे उसके वर्षों का कड़ा संघर्ष कितना गहरा है।कौन है यह 13 साल की जांबाज एथलीट और क्या था उसका यह ऐतिहासिक खेल मुकाबला?इस पूरी घटना की नायिका वह तेरह वर्षीय प्रतिभावान खिलाड़ी है जिसने अपने देश और महाद्वीप के खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। एशियन गेम्स के इस विशेष संस्करण में जब उसने अपनी खेल स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश किया, तो किसी को यह अंदाज़ा नहीं था कि यह नन्ही सी बच्ची मैदान पर ऐसा तहलका मचा देगी। उसकी लंबाई और शारीरिक बनावट उसके सामने खड़े अन्य उम्रदराज और अनुभवी खिलाड़ियों की तुलना में काफी छोटी लग रही थी, लेकिन जब खेल शुरू हुआ तो उसकी फुर्ती, तकनीक और मानसिक संतुलन ने सभी को हैरान कर दिया। उसने बिना किसी दबाव के अपने खेल का वह उत्कृष्ट नमूना पेश किया जो बड़े-बड़े ओलंपियन अपने पूरे करियर में नहीं कर पाते हैं।खेल के हर एक चरण में उसने अपने प्रतिद्वंद्वियों को तकनीकी रूप से पूरी तरह पछाड़ दिया। जजों और खेल विशेषज्ञों की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि क्या यह बच्ची इस दबाव को झेल पाएगी, लेकिन उसने अपने शानदार प्रदर्शन से आलोचकों के मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिए। जैसे ही अंतिम स्कोरबोर्ड पर उसका नाम शीर्ष पर आया, पूरा स्टेडियम खुशी से झूम उठा और उसकी आंखों से छलकते खुशी के आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उसने कितनी बड़ी कुर्बानियां दी हैं।फाइनल मुकाबले का रोमांचक सफर: दिग्गजों को पीछे छोड़कर कैसे हासिल किया स्वर्ण पदक?इस ऐतिहासिक स्वर्ण पदक तक पहुंचने का रास्ता बिल्कुल भी आसान नहीं था। क्वालीफाइंग राउंड से लेकर फाइनल तक इस 13 साल की एथलीट का सामना दुनिया की उन दिग्गज खिलाड़ियों से हुआ जो अपने-अपने देशों की नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं और उम्र तथा अनुभव में इस बच्ची से कई गुना आगे थीं। मुकाबला शुरू होने से पहले खेल पंडितों का मानना था कि शायद यह नन्ही खिलाड़ी अनुभव की कमी के कारण पदक की रेस से बाहर हो जाएगी, लेकिन मैदान पर उतरते ही उसने अपने खेल के तेवर से सभी समीकरण बदल दिए। उसने हर एक मूव और तकनीक का इस्तेमाल इतनी परिपक्वता के साथ किया मानो वह कोई वर्षों से खेल रही मंझी हुई खिलाड़ी हो।फाइनल मुकाबले के आखिरी पलों में जब मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर पर पहुंच गया था, तब इस बच्ची ने अपने गजब के आत्मबल का परिचय देते हुए निर्णायक बढ़त हासिल कर ली। उसके कोच और सपोर्ट स्टाफ मैदान के बाहर से लगातार उसका हौसला बढ़ा रहे थे, और उसने हर एक निर्देश का अक्षरशः पालन करते हुए असंभव लगने वाली इस जीत को संभव बना दिखाया। जब खेल समाप्त हुआ और स्वर्ण पदक उसके गले में डाला गया, तो वह पल पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक और कभी न भूलने वाला पल बन गया।दुनिया भर में हो रही है इस करिश्माई प्रदर्शन की चर्चा, खेल जगत के दिग्गजों ने की तारीफइस 13 साल की एथलीट के इस चमत्कारी प्रदर्शन के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर वैश्विक खेल मीडिया तक हर जगह इसी की चर्चा हो रही है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अधिकारियों और विभिन्न देशों के खेल मंत्रियों ने भी इस नन्ही खिलाड़ी की जमकर सराहना की है और इसे खेल जगत का एक नया 'वंडर किड' (Wonder Kid) करार दिया है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र में इस तरह का मानसिक दबाव झेलते हुए गोल्ड मेडल जीतना सामान्य मानव क्षमता से परे है, और यह इस बात का संकेत है कि आने वाले ओलंपिक खेलों में यह खिलाड़ी देश के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बनने वाली है।उसके अपने देश लौटने पर एक भव्य और ऐतिहासिक स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। छोटे-छोटे बच्चों और युवाओं के लिए वह अब एक रोल मॉडल बन चुकी है, जो यह सिखाती है कि सपने चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, यदि आपके इरादे पक्के हैं तो उम्र कभी भी आपके रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती।इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे का कड़ा संघर्ष और परिवार का अटूट समर्थनकिसी भी कम उम्र के खिलाड़ी के इस स्तर तक पहुंचने के पीछे एक बहुत लंबी और संघर्षपूर्ण कहानी छिपी होती है। इस नन्ही एथलीट ने भी बहुत कम उम्र से ही सुबह के अंधेरे से लेकर रात के सन्नाट तक कड़े प्रशिक्षण शिविरों में पसीना बहाया है। उसके माता-पिता और परिवार ने हर कदम पर उसका साथ दिया, चाहे वह आर्थिक तंगी से निपटना हो या समाज के ताने सुनना कि 'इस उम्र में खेलकूद में समय क्यों बर्बाद कर रहे हो'। परिवार के इसी अटूट विश्वास और खुद उस बच्ची की दिन-रात की मेहनत का परिणाम है कि आज पूरा देश उसकी इस कामयाबी पर गर्व महसूस कर रहा है।प्रशिक्षक का कहना है कि इस बच्ची में जिस तरह की एकाग्रता और सीखने की भूख है, वैसी उन्होंने अपने पूरे कोचिंग करियर में बहुत कम देखी है। वह हार मानने के बजाय हर गलती से सीखती है और अगले दिन मैदान पर दोगुनी ऊर्जा के साथ उतरती है। यही खूबी उसे बाकी खिलाड़ियों से अलग और खास बनाती है।
एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम का आंधी-तूफान जारी, दर्ज की दूसरी धमाकेदार जीत
भारतीय खेल जगत के लिए एशियन गेम्स के मंच से एक बेहद रोमांचक और गर्व से भर देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां हमारी महिला हॉकी टीम ने अपने इरादों को पूरी तरह से बुलंद रखते हुए मैदान पर एक बार फिर से ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। एशियन गेम्स 2026 के इस महामुकाबले में भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों ने अपनी शानदार कला, स्टिक वर्क और गजब की फॉर्म का मुजाहिरा करते हुए इंडोनेशियाई टीम को किसी भी मौके पर टिकने का मौका नहीं दिया। मैच की शुरुआत से ही आक्रामक तेवर अपनाते हुए भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने इंडोनेशियाई डिफेंस की धज्जियां उड़ा दीं और मुकाबले को एकतरफा बनाते हुए रिकॉर्ड 17-1 के विशाल अंतर से करारी शिकस्त दी। यह टूर्नामेंट में भारत की लगातार दूसरी सबसे बड़ी और धमाकेदार जीत है, जिससे पूरे देश में जश्न का माहौल है और खिलाड़ियों के इस पराक्रम ने यह साबित कर दिया है कि इस बार स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाने के लिए हमारी बेटियां पूरी तरह से तैयार हैं।अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में जब कोई टीम इस तरह के रिकॉर्ड तोड़ अंतर से जीत दर्ज करती है, तो उसकी गूंज पूरे महाद्वीप में सुनाई देती है। एशियाई खेलों के इस महत्वपूर्ण चरण में भारतीय खिलाड़ियों ने जिस जोश, तालमेल और फिटनेस का प्रदर्शन किया है, उसने दुनिया भर के हॉकी विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मैच के दौरान मैदान पर खिलाड़ियों का उत्साह और कोच की रणनीति बिल्कुल सटीक बैठती नजर आई। आइए इस शानदार मुकाबले के हर एक रोमांचक पल, गोल की बारिश और भारतीय महिला हॉकी टीम के सफर के सफर को बेहद विस्तार से समझते हैं।मुकाबले की आक्रामक शुरुआत: पहले ही मिनट से इंडोनेशिया पर पूरी तरह हावी रहीं भारतीय खिलाड़ीमैच की सीटी बजते ही भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को पास देते हुए और सटीक पेनल्टी कॉर्नर्स में बदलकर इंडोनेशियाई गोल पोस्ट पर ताबड़तोड़ हमलों की झड़ी लगा दी। इंडोनेशिया की टीम भारतीय खिलाड़ियों की इस तेज रफ्तार और फुर्ती के आगे पूरी तरह असहाय नजर आ रही थी और वे केवल बचाव की मुद्रा में सिमट कर रह गए। खेल के पहले क्वार्टर से ही भारत ने अपनी बढ़त बना ली थी, जो समय के साथ और अधिक मजबूत होती चली गई। फॉरवर्ड खिलाड़ियों ने मैदान के हर कोने से बेहतरीन मूव्स बनाए और गोलकीपर को जरा भी चैन से बैठने का मौका नहीं दिया।दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में जब भारतीय खिलाड़ियों ने एक के बाद एक गोल दागने शुरू किए, तो तिरंगा लहराते हुए फैंस का उत्साह देखने लायक था। खिलाड़ियों का यह शानदार प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि उन्होंने इस बहुप्रतिष्ठित टूर्नामेंट के लिए कितनी कड़ी मेहनत और पसीना बहाया है। कोच और सपोर्ट स्टाफ की रणनीति ने मैदान पर अद्भुत रंग दिखाया, जहां खिलाड़ियों ने बिना किसी दबाव के अपनी स्वाभाविक और आक्रामक हॉकी का खुलकर आनंद लिया।रिकॉर्ड 17-1 का अंतर: खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन ने रचा नया इतिहासइस मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण गोलों की वह आंधी रही जिसने स्कोरबोर्ड को लगातार व्यस्त रखा। भारत की ओर से कप्तान और प्रमुख स्ट्राइकर्स ने बेहतरीन फील्ड गोल्स और ड्रैग फ्लिक के जरिए गोल दागे। मैच के दौरान कई बार ऐसा मौका आया जब भारतीय खिलाड़ियों ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर अपनी तकनीकी दक्षता का लोहा मनवाया। इंडोनेशिया की टीम पूरे मैच के दौरान केवल एक ही गोल करने में सफल रही, वह भी तब जब भारतीय डिफेंस में थोड़ी देर के लिए सुस्ती आई थी, लेकिन उसके तुरंत बाद भारतीय टीम ने और अधिक आक्रामकता दिखाते हुए कई और गोल दागकर हिसाब बराबर कर लिया।टीम की युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का संयोजन इस मैच में सबसे बड़ा हथियार साबित हुआ। अनुभव जहां मैदान पर पेस को नियंत्रित कर रहा था, वहीं युवा खिलाड़ियों की ऊर्जा और गति इंडोनेशियाई खिलाड़ियों के लिए सिरदर्द बन गई थी। इस बड़ी जीत से न केवल टीम का कुल गोल अंतर (Goal Difference) बेहद मजबूत हो गया है, बल्कि खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी सातवें आसमान पर पहुंच गया है, जो आगे के कड़े मुकाबलों के लिए बेहद जरूरी है।एशियन गेम्स 2026 में भारत का अगला सफर और स्वर्ण पदक की मजबूत होती दावेदारीएशियन गेम्स 2026 के इस संस्करण में भारतीय महिला हॉकी टीम के इस प्रदर्शन ने देश की उम्मीदों को कई गुना बढ़ा दिया है। लगातार दो बड़ी जीत हासिल करने के बाद अब टीम का अगला मुकाबला और अधिक मजबूत और पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी टीमों के साथ होने की संभावना है। कोचिंग स्टाफ का कहना है कि खिलाड़ी इस बड़ी जीत से बहुत ज्यादा उत्साहित होकर अपनी लय खोना नहीं चाहती हैं, बल्कि उनका पूरा फोकस अगले मैच की रणनीति पर है। एशियाई खेलों में पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल करने और सीधे ओलंपिक कोटा पक्का करने के लिए यह टूर्नामेंट भारतीय महिला हॉकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।देशभर के खेल प्रेमियों और पूर्व ओलंपियनों ने सोशल मीडिया और अन्य मंचों के माध्यम से महिला टीम को इस ऐतिहासिक जीत पर बधाइयां दी हैं। खेल मंत्री और भारतीय ओलंपिक संघ ने भी खिलाड़ियों के इस जज्बे को सलाम किया है। जिस तरह से हमारी बेटियां विदेशी धरती पर या एशियाई मंच पर तिरंगे का मान बढ़ा रही हैं, वह देश की आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है।महिला हॉकी का बढ़ता स्वर्ण युग: बुनियादी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफरभारतीय महिला हॉकी ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी फिटनेस, स्किल और मानसिक मजबूती के स्तर पर जो सुधार किया है, वह किसी से छिपा नहीं है। ग्रामीण इलाकों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय टर्फ पर अपनी कला का जादू बिखेरने वाली इन खिलाड़ियों की संघर्ष गाथा हर किसी को प्रेरित करती है। खेल महासंघों द्वारा दी जा रही आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय दौरों के अनुभव का ही परिणाम है कि आज भारतीय टीम किसी भी बड़ी टीम को मैदान पर कड़ी चुनौती देने का माद्दा रखती है। इंडोनेशिया के खिलाफ यह मैच केवल एक जीत नहीं है, बल्कि यह इस बात की घोषणा है कि भारतीय महिला हॉकी अब दुनिया की शीर्ष ताकतों को पछाड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।आगामी नॉकआउट मुकाबलों और फाइनल की राह अभी थोड़ी और बाकी है, लेकिन जिस तरह का तेवर और अनुशासन हमारी टीम ने दिखाया है, उससे यह उम्मीद बंधती है कि इस बार का एशियन गेम्स का सफर देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। फैंस की निगाहें अब अगले धमाकेदार मैच पर टिकी हैं जहां एक बार फिर हमारी स्टिक का जादू देखने को मिलेगा।
जलती चिता पर पकाया चिकन, शाहजहांपुर में श्मशान घाट पर शर्मनाक कांड
शाहजहांपुर के पुवायां थाना क्षेत्र के नत्थापुर गांव में श्मशान घाट पर हैरान करने वाली घटना सामने आई. आरोप है कि तीन लोग शराब पीते हुए जलती हुई चिता पर बर्तन रखकर मांस पका रहे थे.
निर्माणाधीन मंच का छज्जा भरभराकर गिरा: बाल-बाल बचे लोग, भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप
देश के विभिन्न ग्रामीण और शहरी इलाकों में विकास कार्यों के नाम पर किस तरह से जनता के गाढ़े पसीने की कमाई का दुरुपयोग किया जाता है, इसका एक और लाइव और डरावना उदाहरण सामने आया है। एक तरफ जहां सरकारें और प्रशासन जिला खनिज संस्थान न्यास यानी डीएमएफ (DMF) फंड के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करते हैं, वहीं धरातल पर घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल से किस तरह लोगों की जान खतरे में डाली जाती है, इसकी बानगी देखने को मिली है। हाल ही में एक सार्वजनिक स्थल पर बनाए जा रहे निर्माणाधीन मंच का भारी-भरकम छज्जा अचानक से भरभराकर नीचे जमीन पर आ गिरा। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय वहां कोई बड़ा जनसमूह या स्कूली बच्चे मौजूद नहीं थे, वरना एक बहुत बड़ी अनहोनी हो सकती थी और कई लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। इस आकस्मिक दुर्घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश फैल गया है और उन्होंने सीधे तौर पर इस परियोजना के लिए स्वीकृत 10 लाख रुपये के फंड में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का गंभीर आरोप लगाया है।सरकारी योजनाओं की कार्यप्रणाली पर उठते ये सवाल आज देश के हर उस कोने की सच्चाई बयां करते हैं जहां ठेकेदार और भ्रष्ट अधिकारी मिलकर जनता के पैसों से खिलवाड़ करते हैं। इस घटना के सामने आने के बाद से ही इलाके में हड़कंप मच गया है और जांच एजेंसियों तथा स्थानीय प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। आइए इस पूरे हादसे, खनिज न्यास के पैसों के इस्तेमाल और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के हर एक पहलू को बेहद विस्तार से समझते हैं।कैसे हुआ यह हादसा? अचानक भरभराकर गिरा मंच का छज्जा और टल गया एक बड़ा जनजीवन संकटप्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना एक ऐसे ग्रामीण या अर्द्ध-शहरी इलाके के सार्वजनिक मैदान या सामुदायिक भवन परिसर की है जहां जनता के कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक पक्के मंच का निर्माण कार्य पिछले कुछ हफ्तों से तेजी से चल रहा था। स्थानीय पंचायत और निर्माण एजेंसी की देखरेख में बन रहे इस मंच की छत या छज्जे की ढलाई का काम कुछ ही दिन पहले पूरा हुआ था। अभी यह निर्माण पूरी तरह से सूखा भी नहीं था और इसका औपचारिक उद्घाटन होना तो दूर, ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा था कि अचानक एक दिन तेज आवाज के साथ मंच का भारी-भरकम छज्जा अपने ही वजन और घटिया मजबूती के कारण भरभराकर नीचे आ गिरा।प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाके जैसी आवाज सुनकर जब आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि कंक्रीट और सरिए से बना हुआ छज्जा मलबे में तब्दील हो चुका था। संयोगवश उस वक्त आसपास कोई मजदूर या स्थानीय नागरिक मौजूद नहीं था, अन्यथा इतनी बड़ी मात्रा में मलबे के नीचे दबने से किसी की भी मौके पर जान जा सकती थी। इस बाल-बाल बचे हादसे ने स्थानीय लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यदि निर्माण पूरा होने के बाद किसी बड़े सांस्कृतिक या राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान इस मंच पर दर्जनों नेता और कलाकार खड़े होते और तब यह छज्जा गिरता, तो कितनी बड़ी त्रासदी हो सकती थी।जिला खनिज न्यास (DMF) के 10 लाख रुपये के फंड पर सवाल: भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के सनसनीखेज आरोपइस पूरे हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने खुलेआम यह आरोप लगाया कि इस निर्माणाधीन मंच के निर्माण में जिला खनिज न्यास (District Mineral Foundation - DMF) फंड से मिले करीब 10 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि का सरासर दुरुपयोग किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस फंड का उद्देश्य इलाके के विकास और जनता को मजबूत बुनियादी सुविधाएं देना था, लेकिन ठेकेदार, इंजीनियर और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से इसमें जमकर भ्रष्टाचार किया गया। निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों के विपरीत अत्यंत घटिया किस्म की सीमेंट, बालू और लोहे के सरियों का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण थोड़ा सा भी वजन या दबाव पड़ते ही छज्जा सहन नहीं कर सका और जमींदोज हो गया।ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने निर्माण के शुरुआती दिनों में ही ठेकेदार को यह चेताया था कि काम सही तरीके से नहीं हो रहा है, तो उनकी बातों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया और अपनी जेबें भरने के चक्कर में काम को जैसे-तैसे पूरा करवा दिया गया। अब जबकि यह हादसा सबके सामने आ चुका है, तो जिम्मेदार अधिकारी अपनी नाकामी छुपाने के लिए लीपापोती करने में जुट गए हैं। जनता का सवाल है कि आखिर इस 10 लाख रुपये के बजट का पाई-पाई का हिसाब कौन देगा और क्या बिना किसी उच्चस्तरीय जांच के इन भ्रष्ट ठेकेदारों को यूं ही छोड़ दिया जाएगा?प्रशासनिक अमले में हड़कंप: जांच के आदेश और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासननिर्माणाधीन मंच के छज्जे के गिरने और 10 लाख के घोटाले के आरोप लगने की खबर जैसे ही जिला मुख्यालय और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंची, महकमे में खलबली मच गई। आनन-फानन में जिला प्रशासन ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए एक जांच टीम गठित करने के निर्देश दे दिए हैं। संबंधित विभाग के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को यह आदेश दिया गया है कि वे तुरंत घटनास्थल का दौरा करें और मलबे के नमूनों की जांच करके यह पता लगाएं कि आखिर निर्माण में किन मानकों की अनदेखी की गई थी।प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से यह बयान जारी किया गया है कि यदि शुरुआती जांच में भी ठेकेदार या किसी भी सरकारी कर्मचारी की लापरवाही या भ्रष्टाचार साबित होता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि, ग्रामीण और स्थानीय विपक्षी नेता इस बात को लेकर आशंकित हैं कि हमेशा की तरह इस बार भी लीपापोती करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जिला कलेक्ट्रेट का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।विकास कार्यों में पारदर्शिता और जनता की भागीदारी का अभाव: एक गंभीर राष्ट्रीय चिंतायह अकेली ऐसी घटना नहीं है जहां किसी ग्रामीण विकास कार्य या खनिज न्यास फंड से बनने वाली संरचना में इस तरह की धांधली सामने आई हो। देश के कई खनिज-समृद्ध जिलों में जहां डीएमएफ फंड के रूप में करोड़ों-अरबों रुपये आते हैं, वहां अक्सर देखा गया है कि धरातल पर योजनाओं का क्रियान्वयन बहुत ही लचर और भ्रष्टाचार से ग्रस्त होता है। जब तक स्थानीय जनता और ग्राम पंचायतों को इन विकास कार्यों की निगरानी (Social Audit) का अधिकार पूरी सख्ती से नहीं दिया जाएगा, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे और आम जनता के टैक्स या रॉयल्टी का पैसा यूं ही मलबे में दफन होता रहेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्यों में थर्ड-पार्टी इंसपेक्शन (Third-Party Inspection) को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए ताकि कोई भी ठेकेदार घटिया सामग्री इस्तेमाल करने की हिम्मत न जुटा सके। जनता अब जागरूक हो चुकी है और वह केवल खोखले आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है, बल्कि वह हर एक रुपये का हिसाब चाहती है।
डीयूएसयू चुनाव परिणामों का हवाला देकर छत्तीसगढ़ के सीएम का गांधी परिवार पर तीखा हमला
भारतीय राजनीतिक गलियारों में बयानों के तीर किस तेजी से चलते हैं, इसका अंदाजा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के ताजा और बेहद आक्रामक बयान से लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी की चुनावी रैलियों और राजनीतिक यात्राओं पर सीधा और तीखा तंज कसते हुए कहा है कि राहुल गांधी ने देश के जिस भी हिस्से में कदम रखा या जहां-जहां चुनाव प्रचार के लिए गए, वहां-वहां कांग्रेस पार्टी को भारी नुकसान ही उठाना पड़ा है। सीएम साय ने अपने इस दावे को पुख्ता करने के लिए हाल ही में आए दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी डीयूएसयू (DUSU) चुनाव के परिणामों का विशेष रूप से हवाला दिया और कहा कि छात्रों और युवाओं ने भी कांग्रेस की नीतियों और नेतृत्व को पूरी तरह से नकार दिया है। मुख्यमंत्री के इस तीखे बयान के सामने आते ही देश की राजनीति में एक बार फिर से जुबानी जंग तेज हो गई है, और कांग्रेस कार्यकर्ताओं तथा नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है।राजनीतिक परिदृश्य में जब कोई बड़ा संवैधानिक पद पर बैठा नेता किसी राष्ट्रीय विपक्षी चेहरे की साख और उसकी रैलियों के असर पर सीधा सवाल उठाता है, तो उसके राजनीतिक मायने बहुत दूर तक जाते हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का यह बयान केवल एक जुबानी हमला नहीं है, बल्कि इसके जरिए बीजेपी ने लोकसभा और अन्य स्थानीय चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की कहानी को एक बार फिर से राष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा किया है। आइए इस पूरे सियासी घटनाक्रम, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बयानों के पीछे के राजनीतिक निहितार्थ और डीयूएसयू चुनाव परिणामों के संदर्भ को बेहद विस्तार से समझते हैं।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का राहुल गांधी पर करारा प्रहार: बोले- 'जहां-जहां गए राहुल, वहां डूबी कांग्रेस की नैया'मीडिया से बातचीत और विभिन्न राजनीतिक मंचों को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राहुल गांधी की राजनीतिक कार्यशैली और उनके प्रभाव पर खुला सवाल उठाया। सीएम साय ने बहुत तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी पिछले कुछ वर्षों से लगातार देश भर में अपनी जमीन खोती जा रही है, और इसका सबसे बड़ा कारण राहुल गांधी का नेतृत्व और उनकी रणनीतियां हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान राहुल गांधी चाहे जितनी भी लंबी यात्राएं निकाल लें या कितने भी बड़े-बड़े दावे कर लें, धरातल पर उसका असर हमेशा कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों की हार के रूप में ही सामने आता है। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने अपनी जीत के बड़े दावे किए थे, लेकिन परिणाम इसके बिल्कुल विपरीत आए।विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि देश की जनता अब भली-भांति जान चुकी है कि कांग्रेस के पास न तो कोई स्पष्ट विकास का विजन है और न ही देश को आगे ले जाने की कोई ठोस नीति। राहुल गांधी के बयानों को केवल एक राजनीतिक स्टंट करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता अब उनके भाषणों के झांसे में आने वाली नहीं है। बीजेपी हमेशा से यह मानती आई है कि राहुल गांधी का चुनावी मैदान में होना दरअसल भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के लिए जीत का रास्ता और अधिक आसान बना देता है, और इस बार भी सूबे और देश के चुनावी समीकरण इसी बात की गवाही दे रहे हैं।डीयूएसयू (DUSU) चुनाव परिणामों का दिया हवाला: बोले- देश के युवा और छात्र भी अब समझ चुके हैं कांग्रेस की सच्चाईमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने इस हमले को और अधिक धारदार बनाते हुए हाल ही में संपन्न हुए दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के चुनाव परिणामों का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी के युवा और छात्र, जिन्हें देश का भविष्य माना जाता है, उन्होंने भी डीयूएसयू चुनावों में कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा वर्ग अब राष्ट्रवाद, विकास और सकारात्मक राजनीति के साथ खड़ा है, न कि दिशाहीन और नकारात्मक राजनीति करने वाली पार्टियों के साथ। दिल्ली विश्वविद्यालय के इन नतीजों का हवाला देते हुए उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि न केवल राष्ट्रीय राजनीति में बल्कि शैक्षणिक संस्थानों के स्तर पर भी कांग्रेस का जनाधार तेजी से रसातल में जा रहा है।डीयूएसयू चुनाव देश की राजनीति में हमेशा से एक बैरोमीटर की तरह देखे जाते हैं, क्योंकि इनमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा छात्र भाग लेते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा इन परिणामों को राहुल गांधी की विफलता से जोड़े जाने पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बीजेपी की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वे यह संदेश देना चाहते हैं कि देश की युवा पीढ़ी भी अब कांग्रेस के पारंपरिक नेतृत्व से पूरी तरह ऊब चुकी है। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के लिए इन चुनावों के नतीजे हमेशा से प्रतिष्ठा का विषय रहे हैं, और जब वहां हार मिलती है तो विरोधी दल इसे एक राष्ट्रीय स्तर के संकेत के रूप में पेश करने से नहीं चूकते।कांग्रेस पार्टी का तीखा पलटवार: कहा- बीजेपी बौखला गई है, राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता से डर रही है सरकारछत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इस तीखे बयान के बाद कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय और प्रांतीय प्रवक्ताओं ने जोरदार पलटवार किया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और उसके मुख्यमंत्री राहुल गांधी की देश भर में बढ़ रही लोकप्रियता और 'भारत जोड़ो यात्रा' तथा अन्य जन-अभियानों से मिलने वाले अपार जनसमर्थन से पूरी तरह डर चुके हैं। कांग्रेस का यह कहना है कि बीजेपी के नेता जानबूझकर ओछे बयानों के जरिए जनता का ध्यान बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और किसानों की समस्याओं जैसे असली मुद्दों से भटकाना चाहते हैं। कांग्रेस नेताओं ने डीयूएसयू चुनाव परिणामों पर सफाई देते हुए कहा कि छात्रसंघ चुनाव स्थानीय मुद्दों और परिसरों की परिस्थितियों पर आधारित होते हैं, और उन्हें राष्ट्रीय राजनीति या किसी एक नेता के प्रभाव से जोड़कर देखना पूरी तरह गलत और बचकाना है।कांग्रेस ने यह भी याद दिलाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने कई राज्यों में शानदार वापसी की है और जनता आज भी उनकी बातों को बहुत गौर से सुनती है। विपक्षी दल के नेताओं का आरोप है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अपनी सरकार की विफलताओं को छुपाने और केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने के लिए इस तरह के अनर्गल बयान दे रहे हैं। बहरहाल, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच छिड़ी इस जुबानी जंग ने एक बार फिर से सूबे और देश की सियासत का तापमान काफी बढ़ा दिया है, और आने वाले दिनों में यह बयान चुनाव प्रचार के दौरान एक बड़ा हथियार बनने वाला है।छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय राजनीति में इस बयान के क्या होंगे दूरगामी सियासी मायने?छत्तीसगढ़ की राजनीति में विष्णुदेव साय का कद और उनका यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। एक तरफ जहां राज्य सरकार अपने विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री लगातार राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी मुखर राय रख रहे हैं। राहुल गांधी की असफलताओं को रेखांकित करते हुए डीयूएसयू चुनाव का हवाला देना यह दिखाता है कि बीजेपी अब केवल राज्य स्तर तक सीमित न रहकर हर मोर्चे पर कांग्रेस को वैचारिक और राजनीतिक रूप से घेरने की पूरी रणनीति बना चुकी है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल तो बढ़ता ही है, साथ ही मीडिया की सुर्खियों में भी बने रहने का मौका मिलता है। आगामी चुनावों को देखते हुए बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस प्रकार की बयानबाजी और अधिक तेज होने की पूरी संभावना है। जनता अब यह तय करेगी कि वह किस नेता के बयानों और किस दल के विकास कार्यों को प्राथमिकता देती है।
छत्तीसगढ़ : सिर्फ रिश्वत के पैसे मिलना भ्रष्टाचार साबित करने के लिए काफी नहीं
भारतीय न्याय व्यवस्था में भ्रष्टाचार के मामलों और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई को लेकर अक्सर अदालतों के कई बड़े फैसले सामने आते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह ताजा फैसला कानूनी गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी परिणाम वाले फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी सरकारी मुलाजिम या आरोपी के पास से रिश्वत के रूप में ली गई दागी नकदी या पैसे बरामद हो जाना मात्र इस बात का पक्का सबूत नहीं है कि उसने भ्रष्टाचार किया है। अदालत ने बहुत कड़े शब्दों में यह टिप्पणी की है कि कानून की नजर में किसी व्यक्ति को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत रिश्वतखोरी में दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को यह अनिवार्य रूप से साबित करना होगा कि आरोपी द्वारा रिश्वत की 'मांग' (Demand) की गई थी और उसके बाद ही पैसों का लेन-देन हुआ था। इस अदालती आदेश ने देश भर के कानूनी विशेषज्ञों और आपराधिक मुकदमों की सुनवाई कर रही अदालतों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, क्योंकि इससे निचली अदालतों में चल रहे भ्रष्टाचार के हजारों मामलों की दिशा और दशा बदल सकती है।भ्रष्टाचार के मामलों में वर्षों से यह बहस चली आ रही है कि क्या केवल पैसों की बरामदगी (Recovery of Bribe Money) ही सजा सुनाने के लिए काफी है या फिर इसके पीछे के इरादे और मौखिक व दस्तावेजी सबूतों का होना भी उतना ही जरूरी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस स्पष्ट और तार्किक निर्णय ने उन तमाम लोगों को एक बड़ी राहत दी है जो केवल परिस्थितियों और कमजोर सबूतों के आधार पर अदालतों के चक्कर काट रहे थे। आइए इस पूरे कानूनी मामले, अदालत द्वारा की गई टिप्पणियों और इसके भारतीय न्याय प्रणाली पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों को बेहद विस्तार से समझते हैं।क्या था पूरा मामला और किस पृष्ठभूमि में आया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह अहम फैसला?इस संपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत एक ऐसे मामले से हुई जहाँ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने किसी सरकारी विभाग के एक अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोप में छापा मारा था और कथित तौर पर उसकी जेब या दफ्तर की मेज से कुछ नोट बरामद किए थे। निचली अदालत यानी स्पेशल कोर्ट ने इस बरामदगी को ही मुख्य आधार मानते हुए उस लोक सेवक को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दे दिया था और उसे जेल की सजा तथा जुर्माने से दंडित किया था। सजा मिलने के बाद उस व्यक्ति ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपील दायर की और अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा तथा बेबुनियाद बताया।हाईकोर्ट में इस अपील की लंबी सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने यह दलील दी कि उनके मु मुक्किल से कभी भी किसी भी प्रकार के काम के एवज में कोई अवैध मांग नहीं की गई थी और न ही ऐसा कोई सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद है जो यह साबित कर सके कि पैसे उसने मांगे थे। मामले की सभी फाइलों, गवाहों के बयानों और कानूनी प्रावधानों की बारीकी से समीक्षा करने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को पलट दिया जिसमें केवल पैसों के मिलने मात्र से जुर्म साबित मान लिया गया था। अदालत के इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि आपराधिक न्याय शास्त्र में किसी को भी दोषी ठहराने के लिए संदेह कितना भी मजबूत क्यों न हो, उसे कानूनी मानकों पर खरा उतरना ही होगा।अदालत की मुख्य टिप्पणियां: 'डिमांड' और 'एक्सेप्टेंस' दोनों का साबित होना क्यों है कानूनी रूप से जरूरी?छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत किसी आरोपी को सजा देने के लिए अभियोजन पक्ष (Prosecution) को मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण तत्वों को बिना किसी संदेह के साबित करना होता है - पहला, रिश्वत की प्रत्यक्ष मांग (Demand of Bribe) और दूसरा, उस मांग के आधार पर रिश्वत की राशि को स्वीकार करना (Acceptance)। अदालत ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहता है कि आरोपी ने अपनी मौखिक या लिखित जुबान से किसी काम को करने के एवज में पैसों की मांग की थी, तो केवल किसी ट्रेप के दौरान पैसे बरामद हो जाने से उस व्यक्ति को भ्रष्ट या रिश्वतखोर नहीं माना जा सकता।न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि कई बार परिस्थितियां ऐसी होती हैं जहां झूठे फंसाने या रंजिश के तहत किसी व्यक्ति की जेब में जबरन पैसे रख दिए जाते हैं या फिर किसी अन्य एवज में दिए गए लेन-देन को रिश्वत का रूप दे दिया जाता है। ऐसे में यदि अदालतें केवल रिकवरी के आधार पर आंख मूंदकर सजा सुनाने लगेंगी, तो कोई भी निर्दोष व्यक्ति प्रशासनिक और राजनीतिक साजिशों का शिकार बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने यह दोहराया कि कानून का यह सर्वमान्य सिद्धांत है कि संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह पक्के और अकाट्य सबूतों का विकल्प नहीं बन सकता।इस फैसले का एंटी-रिस्पॉन्से और भ्रष्टाचार मामलों की जांच पर क्या पड़ेगा दूरगामी असर?छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद देश भर के कानूनी पंडितों, वकीलों और एंटी-करप्शन एजेंसियों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से उन सभी मामलों में अभियुक्तों को बहुत बड़ी कानूनी राहत मिलेगी जहां जांच एजेंसियों ने बिना पुख्ता मौखिक या ऑडियो-वीडियो सबूतों के केवल पैसों की बरामदगी के बल पर चार्जशीट दाखिल कर दी थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और पुलिस विभागों को अब इस बात की सख्त सीख मिल गई है कि जब भी वे किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ ट्रैप की कार्रवाई करें, तो वे केवल पैसों के मिलने पर निर्भर न रहें, बल्कि उस व्यक्ति द्वारा रिश्वत की मांग किए जाने के पुख्ता तकनीकी या स्वतंत्र गवाहों वाले सबूत भी अवश्य जुटाएं।दूसरी तरफ, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का यह भी मानना है कि इस प्रकार के कड़े कानूनी प्रावधानों से कई बार वास्तविक रूप से पकड़े गए भ्रष्ट अधिकारी अदालती तकनीकी कमियों और गवाहों के मुकरने (Hostile Witnesses) का फायदा उठाकर बरी हो सकते हैं। हालांकि, न्यायपालिका का यह स्पष्ट मत है कि एक भी निर्दोष व्यक्ति को गलत सजा नहीं मिलनी चाहिए, भले ही इसके लिए कानून की प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना पड़े। यह संतुलन ही भारतीय लोकतंत्र और संविधान की असली ताकत है, जो हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है।कानूनी विशेषज्ञों की राय: अदालतों में अब कैसे तय होगी भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष सुनवाई?कानूनी मामलों के जानकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह निर्णय ट्रायल कोर्ट्स के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका (Guideline) का काम करेगा। निचली अदालतों को अब भ्रष्टाचार के मामलों में सुनवाई करते समय यह देखना होगा कि क्या अभियोजन पक्ष ने मांग (Demand) के सिद्धांत को संदेह से परे साबित किया है या नहीं। यदि गवाहों के बयानों में मांग को लेकर विरोधाभास पाया जाता है, तो आरोपी को इसका सीधा कानूनी लाभ मिलेगा। यह फैसला इस बात की याद दिलाता है कि आपराधिक न्याय प्रणाली में 'बेकसूर साबित होने तक हर कोई निर्दोष है' का सिद्धांत कितना महत्वपूर्ण है।राज्य के प्रशासनिक और सरकारी महकमों में भी इस फैसले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ईमानदार अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह विश्वास बढ़ा है कि न्यायपालिका उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है, वहीं भ्रष्ट तत्वों के लिए यह एक स्पष्ट चेतावनी भी है कि वे कानून की पैनी नजर से बच नहीं सकते, बशर्ते जांच एजेंसियां सभी वैज्ञानिक और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करें।
गुलाब सा खिलेगा चेहरा! घर पर बने चुकंदर आइस क्यूब्स से ऐसे करें मसाज
Beetroot Ice Cubes for Skin: अगर आपकी स्किन अक्सर डल और थकी हुई नजर आती है तो आप चुकंदर से बने आइस क्यूब्स ट्राई कर सकते हैं. इन्हें आप बेहद आसानी से घर पर तैयार करके अपनी स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं.
बिहार में उपेंद्र कुशवाहा ने दिया 'बंटेंगे तो कटेंगे' वाला सियासी टिप्स
बिहार की सियासत में इन दिनों बयानों के तीर और राजनीतिक समीकरण इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि हर नया दिन एक नया भूचाल लेकर आ रहा है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख और अनुभवी राजनेता उपेंद्र कुशवाहा ने एक बार फिर से ऐसा तीखा और धारदार बयान दे दिया है जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। उपेंद्र कुशवाहा ने एक सार्वजनिक मंच से समाज और पार्टी कार्यकर्ताओं को 'बंटेंगे तो कटेंगे' वाला ऐसा अचूक सियासी टिप्स दिया है, जिसके निहितार्थ आने वाले चुनावों के लिहाज से बहुत बड़े माने जा रहे हैं। सबसे खास और चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस वक्त कुशवाहा यह बयान दे रहे थे, ठीक उसी मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद थे। इन तमाम बड़े चेहरों की मौजूदगी में दिए गए इस बयान ने एनडीए खेमे के भीतर और बाहर दोनों तरफ नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, और हर कोई यह कयास लगा रहा है कि आखिर इस बयान के पीछे की असली राजनीतिक रणनीति क्या है।बिहार जैसे जातियों के मकड़जाल में उलझे राज्य में हर एक शब्द और नारे का बहुत बड़ा रणनीतिक महत्व होता है। जब कोई नेता मंच से एकता और एकजुटता की बात करते हुए इस तरह के जुमलों का इस्तेमाल करता है, तो उसके राजनीतिक संदेश बहुत दूर तक जाते हैं। विपक्षी दलों ने इस पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है, वहीं एनडीए के भीतर इसे एक बड़ी गोलबंदी की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। आइए इस पूरे घटनाक्रम, मंच पर मौजूद चेहरों के समीकरण और उपेंद्र कुशवाहा के इस सनसनीखेज बयान के हर एक पहलू को बेहद विस्तार से समझते हैं।किस मंच से दिया गया यह बयान और क्यों अचानक चर्चा में आए उपेंद्र कुशवाहा?यह पूरा वाकया उस समय का है जब राज्य की राजधानी पटना या किसी बड़े जिले में एनडीए समर्थित एक भव्य राजनीतिक या सामाजिक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में एनडीए के कई दिग्गज नेता एक ही मंच पर नजर आए, जिससे यह दिखाने की कोशिश की जा रही थी कि सत्ताधारी गठबंधन पूरी तरह एकजुट और मजबूत है। इसी दौरान जब राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा माइक पर अपनी बात रखने आए, तो उन्होंने अपनी चिर-परिचित आक्रामक और विश्लेषणात्मक शैली में राजनीतिक और सामाजिक हालातों पर खुलकर बात की। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान उपस्थित जनसमूह को आगाह करते हुए कहा कि यदि समाज और राजनीतिक दल छोटी-छोटी जातियों या आपसी मतभेदों के आधार पर बिखरे रहेंगे, तो विरोधी ताकतें इसका पूरा फायदा उठाएंगी।इसी संदर्भ में उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत यही है कि सभी लोग आपस में एकजुट रहें, क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज बंटा है, तब-तब उसका नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि यह नारा या वाक्य मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषणों से काफी चर्चा में आया था, लेकिन जब बिहार के संदर्भ में उपेंद्र कुशवाहा जैसे दिग्गज नेता ने इसे एनडीए के मंच से दोहराया, तो इसके राजनीतिक मायने पूरी तरह बदल गए। वहां मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस बात का समर्थन किया, लेकिन इसके सियासी गलियारों में दूरगामी परिणाम पड़ने तय माने जा रहे हैं।मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की मौजूदगी ने खींचा सबका ध्यानइस पूरे कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील पहलू यह रहा कि जब उपेंद्र कुशवाहा 'बंटेंगे तो कटेंगे' जैसी बातें कह रहे थे, तब मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और बिहार के उपमुख्यमंत्री व भाजपा के दिग्गज नेता सम्राट चौधरी भी करीने से बैठे हुए थे। राजनीतिक पंडितों के लिए यह दृश्य बहुत कुछ बयां करने वाला था। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) हमेशा से सर्वधर्म समभाव और सेकुलरिज्म की राजनीति की बात करती रही है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के बयानों पर उनके राजनीतिक सहयोगियों की तरफ से ऐसी सहमति दिखना एक नए राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा करता है।निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता या मंचों पर उनकी उपस्थिति को लेकर पिछले कुछ समय से अटकलों का बाजार गर्म रहता है, और ऐसे हाई-प्रोफाइल मंच पर उनका मौजूद रहना और इन बयानों को सुनना यह दर्शाता है कि गठबंधन के भीतर विचारों का एक नया सामंजस्य बिठाने की कोशिश चल रही है। वहीं, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जो खुद हिंदुत्ववादी और आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाते हैं, वे इस बयान के दौरान बेहद तन्मयता से सुनते नजर आए। इन तीनों नेताओं का एक मंच पर होना और इस तरह के बयानों का समर्थन मिलना यह साबित करता है कि आगामी चुनावों के लिए एनडीए अपनी वैचारिक और सामाजिक गोलबंदी को और अधिक धारदार बनाने में जुट गया है।विपक्षी दलों का तीखा पलटवार: कहा- एनडीए के पास विकास का कोई मुद्दा नहीं, इसलिए अपना रहे हैं ध्रुवीकरण का रास्ताउपेंद्र कुशवाहा के इस बयान के सामने आते ही बिहार का मुख्य विपक्ष यानी राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और अन्य घटक दल पूरी तरह हमलावर हो गए हैं। विपक्षी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखे हमले बोले और कहा कि एनडीए के पास जनता को दिखाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कोई बड़ा विकास कार्य या रोजगार का आंकड़ा नहीं बचा है, यही वजह है कि वे चुनावों से ठीक पहले समाज को बांटने और ध्रुवीकरण करने वाले बयानों का सहारा ले रहे हैं। विपक्ष का यह आरोप है कि इस प्रकार के नारों और बयानों से राज्य का सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है और आम जनता के असली मुद्दे जैसे महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन पीछे छूट जाते हैं।विपक्षी खेमे का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो कभी सुशासन और सबको साथ लेकर चलने की बात करते थे, आज वे मजबूर हो चुके हैं और उनके ही मंच से ऐसे विभाजनकारी बयानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाला नहीं है और आने वाले दिनों में चुनावी रैलियों में इस बयान को एक बड़ा हथियार बनाकर एनडीए को घेरा जाएगा। बहरहाल, सत्ता पक्ष की तरफ से अभी तक इस पर कोई बहुत तीखा बचाव सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने यह माना जा रहा है कि यह बयान रणनीतिक रूप से सोच-समझकर दिया गया है।बिहार की सियासत पर इस बयान का क्या होगा दूरगामी असर? जातिगत समीकरणों की नई बिसातबिहार की राजनीति हमेशा से जातियों के ताने-बाने पर टिकी रही है, जहां यादव, कुर्मी, कुशवाहा, भूमिहार, राजपूत और दलित वोट बैंक हर एक पार्टी की जीत-हार तय करते हैं। उपेंद्र कुशवाहा खुद एक बड़े कोइरी (कुशवाहा) समाज के नेता हैं, जो राज्य में एक निर्णायक वोट बैंक माने जाते हैं। जब कुशवाहा समाज का एक कद्दावर नेता इस प्रकार की एकजुटता और वैचारिक नारे की बात करता है, तो इसका सीधा असर लव-कुश और अन्य पिछड़ी जातियों के समीकरणों पर पड़ता है। वे अपने समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि वे राजनीतिक रूप से बिखर गए, तो उनका वजूद कमजोर हो जाएगा।दूसरी ओर, इस बयान के जरिए एनडीए यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि तमाम आंतरिक असहमतियों और अलग-अलग दलों के होने के बावजूद वे विपक्ष के खिलाफ एक मजबूत और अटूट दीवार बनकर खड़े हैं। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस तरह की बयानबाजी केवल एक शुरुआत है, और जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आएंगी, बिहार की राजनीति में बयानों के तीर और अधिक तीखे होते चले जाएंगे। जनता अब यह तय करेगी कि वह विकास के मुद्दों पर वोट करती है या फिर इन वैचारिक और राजनीतिक नारों के आधार पर अपना पालय तय करती है।
चीन में ताबूत के अंदर जिंदा हो गई मृत महिला, अगले ही दिन फिर थम गईं सांसें
चीन से एक बेहद ही हैरान और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मौत के बाद ताबूत में बंद की गई एक महिला अचानक से जीवित हो उठी. इस घटना ने न केवल मृतका के परिवार वालों को बल्कि पूरे इलाके के लोगों को हैरत में डाल दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी चीन के हब प्रांत में रहने वाली एक महिला को डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ताबूत में बंद कर दिया गया था. लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.
फर्जी पहचान, नकली आधार और हथियार... लॉरेंस-आरज़ू गैंग के शार्पशूटर अरेस्ट
जोधपुर में राजस्थान AGTF और पुलिस ने लॉरेंस-आरज़ू बिश्नोई गैंग से जुड़े दो कथित शार्पशूटरों को गिरफ्तार किया है. दोनों फर्जी पहचान और नकली आधार कार्ड से रह रहे थे. जानें क्या है पूरा मामला?
नवी मुंबई के दीघा में फर्नीचर गोदाम में लगी भीषण आग, सब जलकर खाक
नवी मुंबई के दीघा इलाके से एक बेहद दर्दनाक और डराने वाली खबर सामने आ रही है. यहां स्थित एक फर्नीचर गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई. आग इतनी भयानक थी कि देखते ही देखते पूरा गोदाम जलकर पूरी तरह से खाक हो गया. बताया जा रहा है कि गोदाम के अंदर भारी मात्रा में लकड़ी का सामान और फर्नीचर रखा हुआ था, जिसके कारण आग ने बेहद तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया और लगातार फैलती चली गई.
मनीष सिसोदिया को डेटा मिसमैच तो जयशंकर को 'अनमैप्ड' का अलर्ट...SIR में और भी चौंकाने वाले अपडेट
दिल्ली में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) के दौरान दी गई जानकारी में गड़बड़ियों को लेकर कई बड़े वोटरों को नोटिस भेजे गए हैं। इनमें पूर्व उप-प्रधानमंत्री एल.के. आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू शामिल हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद वेरिफिकेशन प्रोसेस के तहत ये नोटिस भेजे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 33.13 लाख वोटरों को उनके एन्यूमरेशन फ़ॉर्म में दी गई जानकारी में गड़बड़ी के कारण नोटिस भेजे जा रहे हैं। इनमें से कई मामले वोटर की ऐसी जानकारी से जुड़े हैं जो 2002 में हुए पिछले SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) में मौजूद जानकारी से मेल नहीं खाती थी। इसे भी पढ़ें: Haryana के पूर्व सैनिक Lal Chand Godara ने 85 साल की उम्र में IGNOU से किया MA वेरिफिकेशन के बाद एस एस संधू की जानकारी वेरिफ़ाई की गई नोटिस पाने वालों में चुनाव आयुक्त भी शामिल थे। उनके मामले में, समस्या उनके नाम में अंतर से जुड़ी थी। उनके बेटे दमनबीर संधू को भी माता-पिता के नाम में अंतर के कारण नोटिस भेजा गया था। हालांकि, नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर ने कहा कि संधू की वोटर लिस्ट एंट्री पहले ही वेरिफ़ाई हो चुकी है। उनके जमा किए गए दस्तावेज़ों की जांच के बाद उनका नाम फ़ाइनल वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए रखा गया है। संधू और उनके बेटे दिल्ली कैंटोनमेंट विधानसभा क्षेत्र के वोटर हैं। इसे भी पढ़ें: Congress का Election Commission पर हमला, SIR प्रक्रिया को बताया मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश आडवाणी, जयशंकर और धनखड़ को भी नोटिस भेजे गए एलके आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका को नोटिस भेजे गए हैं क्योंकि उनके नाम 2002 की SIR वोटर लिस्ट से मैच नहीं हो पाए। हालांकि, आडवाणी के बेटे जयंत का नाम लिस्ट से मैच हो गया। ये चारों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के वोटर हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको जयशंकर, जो नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सुनहरी बाग इलाके के वोटर हैं, उन्हें भी 'पिछली SIR लिस्ट से मैच न होने' वाली कैटेगरी में नोटिस मिला है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश को भी नोटिस भेजे गए हैं। उनके वोटर रिकॉर्ड में उपराष्ट्रपति के सरकारी आवास का पता दर्ज है। इस लिस्ट में कई और जाने-माने लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिनमें विदेश सचिव विक्रम मिस्री, दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, JNU के पूर्व वाइस-चांसलर एम जगदीश कुमार, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, नीति आयोग के पूर्व वाइस-चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया, SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे, पूर्व सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी और CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद शामिल हैं।
'UP के 4 टुकड़े होंगे, राजभर का बेटा बनेगा पूर्वांचल का CM', बोले राजभर
उत्तर प्रदेश के विभाजन को लेकर कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के एक बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. देवरिया में आयोजित सामाजिक समरसता रैली के दौरान राजभर ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को चार अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया जाएगा. उन्होंने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यदि भविष्य में पूर्वांचल को एक अलग राज्य का दर्जा मिलता है, तो राजभर समाज का बेटा ही वहां का पहला मुख्यमंत्री बनेगा.
'काश ये खूबी मेरे पास होती...', SKY भी हुए वैभव के मुरीद!
सूर्यकुमार यादव अपनी फॉर्म और भारतीय टी20 टीम में दोबारा पक्की जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. भारत को टी20 वर्ल्ड कप दिलाने के बावजूद सूर्या अपनी फॉर्म के कारण टीम से बाहर हो गए थे. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कई दिलचस्प खुलासे किए हैं.
सलमान के कमेंट से खफा हुईं कबीर खान की पत्नी! क्यों हुआ दुख?
सलमान खान ने प्राइम वीडियो के रियलिटी शो अलायंस पर मिनी माथुर से मजाकिया अंदाज में कुछ कहा था, जो उन्हें उतना पसंद नहीं आया है. एक्ट्रेस ने अपने हालिया इंटरव्यू में इसे लेकर बात भी की है.
बीजेपी नेता राम कदम ने शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत की आलोचना की है। राउत ने दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन की आदित्य ठाकरे के घर हालिया मुलाक़ात को सिर्फ़ ड्रामा बताया था, जिसे कदम ने शोक में डूबे माता-पिता के प्रति बेहद असंवेदनशील टिप्पणी कहा। मीडिया से बात करते हुए कदम ने कहा कि दिशा सालियन के पिता ने अपनी बेटी को खो दिया है। उनके कामों को ड्रामा बताना बेहद असंवेदनशील है। उन्होंने आगे सवाल किया कि सालियन की मौत की जांच पहले ही सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को क्यों नहीं सौंपी गई। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को अपना काम पूरा करने देना चाहिए और आख़िरकार न्यायपालिका ही इस मामले पर फ़ैसला करेगी। इसे भी पढ़ें: Imran Masood बोले Rahul Gandhi के बिना BJP से लड़ाई नामुमकिन Akhilesh Yadav फाइनल करें गठबंधन कदम ने सालियन के परिवार की बार-बार हो रही सार्वजनिक जांच-पड़ताल की आलोचना की और कहा कि जब आपकी अपनी सरकार और पुलिस सिस्टम सत्ता में थे, तब कोई संतोषजनक जांच नहीं की गई। ज़ाहिर है, लोग इन घटनाओं को आपस में जोड़कर देखने लगते हैं और सवाल पूछते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि परिवार के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए गए बयानों और बातों से सिर्फ़ उन्हें ही ज़्यादा जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ता है और लोग सोचने लगते हैं कि वे इतने बचाव की मुद्रा में क्यों दिख रहे हैं। ये टिप्पणियां तब आईं जब शनिवार को सतीश सालियन अपने वकील के साथ ठाकरे परिवार के घर 'मातोश्री' गए थे और उसके बाद राउत ने उनकी कड़ी आलोचना की थी। यह मुलाक़ात कथित मानहानि से जुड़े एक कानूनी नोटिस के सिलसिले में थी। राउत ने इस दौरे को सिर्फ़ ड्रामा बताया और सालियन पर राजनीतिक समर्थन से सस्ती पब्लिसिटी पाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति की बेटी गुज़र गई; वह एक बहुत दुखद मौत थी और हम सभी को इसका दुख था। लेकिन छह साल बाद उसके पिता का इस तरह का तमाशा करना उस लड़की की बदकिस्मती है कि उसे ऐसा पिता मिला। वह बीच-बीच में क्यों हंस और मुस्कुरा रहे हैं? आप खुद देखिए। यह सच्चा दुख नहीं है। उस आदमी को बस कोई वकील मिल गया है। हम उनके बारे में क्या कह सकते हैं? इसे भी पढ़ें: Congress अब बनी Muslim League Maoist पार्टी, Sudhanshu Trivedi का Rahul Gandhi पर वार राउत ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि मामला अभी कानूनी जांच के दायरे में है और अपील की कि जांच और कोर्ट के निर्देशों को आगे बढ़ने दिया जाए। उन्होंने कहा कि CBI पहले से ही जांच कर रही है, है ना? उन्हें करने दीजिए। कोर्ट ने कुछ निर्देश जारी किए हैं और उनका पालन किया जाना चाहिए। सस्ती पब्लिसिटी पाने के लिए मातोश्री आना घिनौना है। कृपया याद रखें: जब छह साल पहले वह दुखद घटना और दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई थी, तो सभी ने दुख जताया था।
पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का ‘बिग 5’ अभियान
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान को पांच सूत्रीय रणनीति के रूप में आगे बढ़ाया है.
पुष्पा स्टाइल में तस्करी, कबाड़ के नीचे छिपाकर ले जा रहे थे 39 हजार बोतलें
नागपुर में क्राइम ब्रांच ने कबाड़ के नीचे छिपाकर ले जाई जा रही देशी शराब की करीब 39 हजार बोतलें बरामद की हैं. पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि धुले से शराब से भरा ट्रक गढ़चिरौली की ओर जा रहा है. तलाशी में 390 बॉक्स मिले, जिनमें 90 एमएल की रॉकेट देशी शराब थी. पुलिस ने आरोपी अब्दुल तोसिफ अब्दुल हाफिज को गिरफ्तार किया और 28.70 लाख रुपये का माल जब्त किया.
इटली के स्कूलों में बुर्का-नकाब होगा बैन, जानें मेलोनी सरकार का प्लान
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार देश के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की बड़ी योजना बना रही है. सरकार का स्पष्ट मानना है कि स्कूल जैसी जगहों पर चेहरा पूरी तरह से खुला होना चाहिए ताकि बच्चों की पहचान और आपस में बातचीत करने में कोई बाधा न आए. जॉर्जिया मेलोनी के अनुसार, किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक परंपरा के नाम पर किसी भी लड़की को स्कूल में अपना चेहरा पूरी तरह से ढकने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
'पैसे के दम पर हुई है जीत', DUSU चुनाव पर अभिजीत दिपके का आरोप
'पैसे के दम पर हुई है जीत', DUSU चुनाव पर अभिजीत दिपके का आरोप
सूर्यकिरण टीम ने मेरठ में दिखाए हवाई करतब
मेरठ। भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने पहलीबार मेरठ के आसमान में अपने शानदार हवाई करतब दिखाकर दर्शको
दिल्ली SIR: एलके आडवाणी और S जयशंकर समेत कई को नोटिस, जानें मामला
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के दौरान एक बड़ा मामला सामने आया है. वोटर लिस्ट के डेटा वेरिफिकेशन के दौरान कई दिग्गज नेताओं, पूर्व अधिकारियों और महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों को चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस भेजे गए हैं. इन बड़े नामों में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, चुनाव आयुक्त एसएस संधू, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद शामिल हैं.
'कम्युनिस्टों की सोच सबसे बड़ा खतरा...', जिनपिंग के आने से पहले ट्रंप का तीर
ट्रंप ने कम्युनिज्म को अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा खतरा बताया है, लेकिन संकट यह है कि वे दुनिया के सबसे बड़े कम्युनिस्ट नेता शी जिनपिंग के स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछा रहे हैं. इस वजह से ट्रंप को अपने विरोधियों का और भी हमला सहना पड़ रहा है.
हिमाचल से हरियाणा जाते समय राजस्थान कांग्रेस के पार्षद लापता हो गए; पुलिस ने जांच शुरू की
चेयरपर्सन चुनाव से पहले, राजस्थान की तिजारा म्युनिसिपल काउंसिल के 18 कांग्रेस पार्षद हिमाचल प्रदेश से लौटते समय हरियाणा में लापता हो गए, जिससे एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। बताया जा रहा है कि अहम वोटिंग से पहले ये पार्षद हिमाचल प्रदेश में एक साथ रुके हुए थे। यह बताना ज़रूरी है कि आज 273 शहरी स्थानीय निकायों (जिनमें सात नगर निगम भी शामिल हैं) में मेयर, चेयरपर्सन और प्रेसिडेंट के चुनाव होने हैं। राजस्थान में 32 शहरी स्थानीय निकायों के चेयरपर्सन निर्विरोध चुने गए हैं। इनमें से कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो पद जीते, जबकि बाकी 28 स्थानीय निकायों में बीजेपी उम्मीदवार चुने गए। कांग्रेस का दावा है कि हरियाणा पुलिस ने पार्षदों को हिरासत में लिया कांग्रेस ने दावा किया कि उसके खेमे का समर्थन करने वाले पार्षदों को हिमाचल प्रदेश से हरियाणा होते हुए लौटते समय हिरासत में ले लिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि उन्हें हरियाणा के पंचकूला ज़िले में चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाज़ा के पास रोका गया। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि पार्षदों को पुलिस की गाड़ियों में ले जाया गया और आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव में हिस्सा लेने से रोका जा रहा था। इन आरोपों के बाद पिंजौर पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध-प्रदर्शन हुआ और कांग्रेस नेताओं ने पार्षदों व उनके ठिकाने के बारे में जानकारी मांगी। यह विवाद तिजारा नगर परिषद के चेयरपर्सन पद के लिए वोटिंग से कुछ घंटे पहले सामने आया है। इसे भी पढ़ें: Congress अब बनी Muslim League Maoist पार्टी, Sudhanshu Trivedi का Rahul Gandhi पर वार कांग्रेस नेता और कालका के पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी ने कहा तिजारा नगर परिषद के लिए हमारे उम्मीदवार ने 19 पार्षदों का समर्थन हासिल किया था और उन्हें घूमने के लिए हिमाचल प्रदेश ले गए थे। जब वे रात में अपने परिवारों और दोस्तों के साथ राजस्थान लौट रहे थे, तो पिंजौर में चंडी मंदिर टोल प्लाज़ा के पास उनकी गाड़ियों को रोका गया और उन्हें ज़बरदस्ती पुलिस की गाड़ियों में बिठाकर मोर्नी के जंगलों में ले जाया गया। हम यह विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इन पार्षदों को—जिन्होंने बीजेपी के खिलाफ चुनाव जीता था और कांग्रेस को वोट देने वाले थे—ज़बरदस्ती वोट डालने से रोका जा रहा है और हरियाणा पुलिस ने उन्हें उनकी मर्ज़ी के खिलाफ हिरासत में ले लिया है। इसे भी पढ़ें: Imran Masood बोले Rahul Gandhi के बिना BJP से लड़ाई नामुमकिन Akhilesh Yadav फाइनल करें गठबंधन हरियाणा पुलिस ने कांग्रेस के दावे को नकारा इस बीच, हरियाणा पुलिस ने कथित तौर पर हिरासत में लेने की बात से इनकार किया। ACP राम कुमार ने कहा कि पुलिस को राजस्थान के कुछ पार्षदों के लापता होने की जानकारी मिली थी, जो हिमाचल प्रदेश से हरियाणा की ओर आ रहे थे। पुलिस ने बताया कि बाद में उनकी लोकेशन अंबाला या शाहबाद के आस-पास के इलाके में मिली और उन्हें खोजने की कोशिशें की जा रही हैं। ACP ने कहा इस घटना से हरियाणा पुलिस का कोई लेना-देना नहीं है। जांच करने पर पता चला कि उनकी लोकेशन हरियाणा में अंबाला या शाहबाद के आस-पास थी। हम उन्हें खोजने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में हमारी कोई भूमिका नहीं है, लेकिन जो भी जानकारी मिलेगी, उसके आधार पर हम कार्रवाई करेंगे। उन्होंने आगे कहा हम उनके लापता होने के हालात की जांच कर रहे हैं। पुलिस की भूमिका के बारे में लगाए जा रहे आरोपों पर हम साफ करना चाहते हैं कि इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है। हम बस उनके लापता होने की जांच कर रहे हैं—खासकर यह कि उन्हें कौन ले गया और क्या वे लोग अनजान थे या कोई और। इसके बाद यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां कांग्रेस ने पार्षदों के कथित तौर पर लापता होने के मामले में दखल की मांग की। कोर्ट ने भिवाड़ी के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) को इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
लोगों को खत्म कर देगा AI? ओबामा के इस बयान से बढ़ गया खौफ
AI की बढ़ती रफ्तार को लेकर Barack Obama ने बड़ी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि AI कंपनियों की वैल्यूएशन में हाइप हो सकता है, लेकिन टेक्नोलॉजी खुद ओवरहाइप्ड नहीं है. उनका मानना है कि AI अब तेजी से खुद सीख रहा है. आने वाले समय में सेल्फ लर्निंग बढ़ी तो AI की स्पीड और भी तेज हो सकती है और इंसानों के लिए नए खतरे पैदा हो सकते हैं.
'अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश': लखनऊ में SP प्रमुख को निशाना बनाने वाला पोस्टर सामने आया
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं। ऐसे में सोमवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (SP) के पूर्व नेताओं अतीक अहमद, आज़म खान और मुख्तार अंसारी की तस्वीर वाला एक पोस्टर सामने आया, जिसमें पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया। पोस्टर पर लिखा था, आज़म, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार। अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश। यह घटना 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले हुई है। इस दौरान राजनीतिक पार्टियां राज्य में कानून-व्यवस्था, कथित अपराधी-राजनेता गठजोड़ और कामकाज के तरीकों को लेकर अपने विरोधियों पर हमले तेज़ कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: Imran Masood बोले Rahul Gandhi के बिना BJP से लड़ाई नामुमकिन Akhilesh Yadav फाइनल करें गठबंधन समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की अप्रैल 2023 में प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय उन्हें मेडिकल जांच के लिए ले जाया जा रहा था। अहमद पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे और उत्तर प्रदेश में उनका लंबा राजनीतिक करियर रहा था। मऊ के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी की मार्च 2024 में हिरासत के दौरान मौत हो गई; उन्हें कई आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया गया था। उनका राजनीतिक करियर पूर्वी उत्तर प्रदेश से गहराई से जुड़ा था और उन्होंने कई बार मऊ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आज़म खान पर भी पिछले कुछ वर्षों में कई आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। उन्होंने बार-बार गलत काम करने के आरोपों से इनकार किया है और अपने खिलाफ दर्ज कई मामलों को राजनीति से प्रेरित बताया है। इससे पहले रविवार को, रायबरेली के एक कॉलेज में SP के छात्र विंग और RSS से जुड़े ABVP के बीच हुई झड़प के बाद अखिलेश यादव ने सत्ताधारी BJP पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में BJP के शासन में PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्गों के लोगों को अपमानित होना पड़ रहा है। इसे भी पढ़ें: BJP अध्यक्ष Nitin Nabin के स्वागत में Meerut Toll Plaza पर सजी बुलडोज़र की कतार यादव ने दावा किया कि हाशिए पर मौजूद समुदाय एकजुट हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे उनकी परेशानी बढ़ेगी, राज्य में सरकार के खिलाफ आंदोलन भी बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने देखा है कि पुलिस प्रशासन और सरकार ने छात्रों के साथ कैसा व्यवहार किया है... भारतीय जनता पार्टी की सरकार में PDA वर्गों के लोगों को जान-बूझकर अपमानित किया जा रहा है। इन हाशिए पर मौजूद वर्गों के लोगों को परेशान किया जा रहा है; अपमान के साथ-साथ उन्हें तकलीफें भी दी जा रही हैं। इसीलिए जो लोग पीड़ित हैं, वे एकजुट हो रहे हैं। तकलीफ जितनी बढ़ेगी, आंदोलन भी उतना ही बढ़ेगा। #WATCH | Uttar Pradesh: A poster with pictures of Atiq Ahmed, Azam Khan and Mukhtar Ansari with words Azam, Atiq aur Mukhtar, yahi chalate thhey sarkar. Akhilesh ke mafia, mafia ke Akhilesh' seen in Lucknow. pic.twitter.com/vY9IDC4bN6 — ANI (@ANI) September 21, 2026
साहिल की मौत पर बवाल के बीच IIT बॉम्बे ने मांगी माफी, प्रोफेसर पर भी एक्शन
आईआईटी बॉम्बे ने अपने छात्र साहिल की मौत के मामले में दिए गए अपने ही शुरुआती बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है. संस्थान ने स्वीकार किया कि पुलिस जांच पूरी होने से पहले घटना की परिस्थितियों पर टिप्पणी करना अनुचित था. जानिए क्या है पूरा मामला.
'बाद में मत रोना', यूपी चुनाव में गठबंधन को लेकर विपक्ष से बोले ओवैसी
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी है. कानपुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान ओवैसी ने विपक्ष को साफ तौर पर गठबंधन में शामिल करने का न्योता दिया. उन्होंने विपक्षी दलों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर वे वास्तव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराना चाहते हैं, तो उन्हें गठबंधन का हिस्सा बनाया जाए. ओवैसी ने इसके लिए 2 अक्टूबर तक की समयसीमा (डेडलाइन) तय की है.
Imran Masood बोले Rahul Gandhi के बिना BJP से लड़ाई नामुमकिन Akhilesh Yadav फाइनल करें गठबंधन
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन पर जल्द फ़ैसला लेने की पुरज़ोर अपील की है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अगर गठबंधन करना है तो उसे फ़ाइनल किया जाए, वरना हम अपनी तैयारी शुरू कर देंगे। ANI से बात करते हुए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि अगर गठबंधन करना है तो उसे फ़ाइनल किया जाए, वरना हमें अपनी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। न सिर्फ़ यहाँ, बल्कि पूरे देश में राजनीतिक माहौल ऐसा है कि कांग्रेस के बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता; कांग्रेस ज़रूरी है। BJP के ख़िलाफ़ लड़ाई सिर्फ़ कांग्रेस के साथ ही लड़ी जा सकती है; सिर्फ़ कांग्रेस ही उनका मुक़ाबला कर सकती है। इसे भी पढ़ें: BJP अध्यक्ष Nitin Nabin के स्वागत में Meerut Toll Plaza पर सजी बुलडोज़र की कतार इमरान मसूद ने आगे कहा कि राहुल गांधी का नेतृत्व इन चुनौतियों से पार पाने में सक्षम है। गठबंधन को तुरंत अंतिम रूप दें। मुझे नहीं पता कि कौन संपर्क में है; मुझे अभी तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया, तो जमीनी स्तर पर नुकसान होगा। रविवार को समाजवादी पार्टी (एसपी) के प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य कार्यकारिणी की बैठक में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर हमला बोला और आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए। यादव ने अपनी पार्टी की रणनीति का ब्यौरा दिया, राज्य में कानून-व्यवस्था के प्रबंधन की आलोचना की और भाजपा तथा गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं पर राजनीतिक कटाक्ष करते हुए मुस्लिम समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया। यादव ने घोषणा की कि आज हमारी राज्य कार्यकारिणी की बैठक थी। इसमें हमने तय किया है कि 2027 के विधानसभा चुनावों में हम हर विधानसभा सीट पर 27,000 वोट बढ़ाने के लिए काम करेंगे। इसका मतलब है कि हम बीजेपी के 27,000 वोट कम करेंगे। इसके अलावा, मसूद ने मतदाताओं को उत्तर प्रदेश में भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने के एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी के प्रस्ताव के झांसे में न आने की चेतावनी दी। उन्होंने दावा किया कि ओवैसी भले ही कुछ सीटें जीत जाएं, लेकिन उनका राजनीतिक प्रभाव अंततः भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता में आने में मदद करता है। इसे भी पढ़ें: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में जेन जी ने एबीवीपी को जीताया, एनएसयूआई को छकाया, समझिए इसके राजनीतिक निहितार्थ उत्तर प्रदेश में भाजपा को कोई एक पार्टी अकेले नहीं हरा सकती, इस ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा को हराना ही प्राथमिक लक्ष्य है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इसे हासिल करने के लिए रणनीतिक मतदान बेहद जरूरी है।
'डरना नहीं, बीवी को जरूर बोलना आई लव यू': सियासी मंच पर दिखा ओवैसी का जुदा अंदाज, शादीशुदा लोगों को दी नसीहत asaduddin-owaisi-unique-advice-people-to-say-love-you-to-their-wifes-aimim-up-assembly-election-2027-alliance
I will consider you son of a real man': Nishikant lashes out Subhash Garg meeting claim files defamation suit.
बंगाल SIR: अबतक निपटाई गईं अपीलों में मतदाताओं के पक्ष में 93% फैसले
बंगाल की वोटर लिस्ट को लेकर चल रही लड़ाई में अब एक नया आंकड़ा सामने आया है. चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जिन अपीलों पर फैसला हो चुका है, उनमें करीब 93 फीसदी मामलों में मतदाताओं के नाम वापस वोटर लिस्ट में जोड़ दिए गए. लेकिन दूसरी तरफ लाखों अपीलें अब भी फैसले का इंतजार कर रही हैं.
मैं गिरफ्तार अब कैसे करूं प्रचार?... हाई कोर्ट पहुंचे नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान
जज के सामने मिलन प्रधान के वकील ने दलील दी कि नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को मतदान होना है और प्रचार का आखिरी दिन 4 अक्टूबर है। लेकिन उनके मुवक्किल को चुनाव से ठीक पहले न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
बाजार के महंगे मोदक छोड़िए, बाप्पा के लिए बनाएं शाही पान-गुलकंद मोदक
How to Make Paan Modak: अगर आप भी अपने घर में भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाना चाहते हैं तो बाजार से इन्हें लाने की जरूरत नहीं है. यहां हम आपको बाप्पा के लिए खास पान फ्लेवर वाले टेस्टी पान-गुलकंद मोदक की रेसिपी शेयर कर रहे हैं जिसे बनाना भी आसान है और ये खाने में बहुत टेस्टी लगते हैं.
रोज एक कीवी खाने से कब्ज, खराब कोलेस्ट्रॉल, शुगर और वजन पर पड़ता है असर
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और गलत खान-पान की आदतों के कारण आज के समय में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां लोग किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से परेशान न हों। कोई मोटापे से जूझ रहा है, तो किसी का बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) रातों की नींद उड़ा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का हमेशा से यह जोर रहा है कि अगर हम अपनी डाइट में कुछ सुपरफूड्स को शामिल कर लें, तो कई बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है। हाल ही में जानी-माने न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटीशियन डॉ. समीक्षा कालरा ने कीवी फल के फायदों को लेकर एक बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है, जिसमें उन्होंने यह समझाया है कि रोजाना सिर्फ एक कीवी खाने से हमारे शरीर में कौन-कौन से बड़े और सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह छोटा सा हरा फल हमारी सेहत के लिए कितना जादुई साबित हो सकता है।कीवी को स्वास्थ्य की दुनिया में एक बेहतरीन पोषक तत्वों से भरपूर फल माना जाता है, जिसमें विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन ई, पोटेशियम और भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर पाए जाते हैं। बहुत से लोग इसे केवल स्वाद के लिए या बीमार होने पर ही खाते हैं, लेकिन डॉक्टर समीक्षा कालरा के अनुसार यदि इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए, तो यह शरीर की कई अंदरूनी समस्याओं को जड़ से ठीक करने की ताकत रखता है। आइए एक-एक करके जानते हैं कि कब्ज, कोलेस्ट्रॉल, शुगर और वजन घटाने के मामले में कीवी किस तरह से हमारे शरीर पर असर डालती है और इसके सेवन का सही तरीका क्या है।पेट की जिद्दी कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं से हमेशा के लिए राहतआज के दौर में खराब पाचन और कब्ज (Constipation) एक आम समस्या बन चुकी है, जिससे हर उम्र के लोग परेशान रहते हैं। सुबह पेट साफ न होने के कारण पूरा दिन सुस्ती और थकान में गुजरता है, जिससे कार्यक्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। डाइटीशियन डॉ. समीक्षा कालरा बताती हैं कि कीवी में प्रचुर मात्रा में नेचुरल सॉल्युबल और इनसॉल्युबल फाइबर पाए जाते हैं, जो आंतों की सेहत के लिए किसी टॉनिक की तरह काम करते हैं। जब आप नियमित रूप से कीवी का सेवन करते हैं, तो यह मल को मुलायम बनाता है और आंतों की मूवमेंट (Peristalsis) को बेहतर करता है, जिससे पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या भी धीरे-धीरे दूर होने लगती है।इसके अलावा, कीवी में एक्टिनिडिन (Actinidin) नाम का एक विशेष प्राकृतिक एंजाइम पाया जाता है, जो हमारे द्वारा खाए गए भोजन में मौजूद प्रोटीन को तेजी से पचाने में मदद करता है। जिन लोगों को अक्सर ब्लोटिंग (Bloating), गैस या अपच की शिकायत रहती है, उनके लिए भोजन के बाद या दिन के समय एक कीवी खाना बेहद फायदेमंद साबित होता है। यह पेट को ठंडक देता है और गट हेल्थ (Gut Health) को मजबूत बनाकर संपूर्ण पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस होता है।बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कंट्रोल कर दिल की सेहत को रखता है मजबूतखराब खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण शरीर में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानी खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर दिल की बीमारियों का खतरा पैदा कर देता है। डॉ. समीक्षा कालरा के अनुसार, कीवी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और पोटेशियम हमारे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह फल न केवल बढ़े हुए खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, बल्कि गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को संतुलित बनाए रखने में भी सहायक होता है।कीवी में मौजूद पोटेशियम रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को आराम पहुंचाता है, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। जिन लोगों को दिल से जुड़ी शुरुआती समस्याएं हैं या जो अपने हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखना चाहते हैं, वे अगर अपनी डेली डाइट में इस खट्टे-मीठे फल को शामिल कर लें, तो वे कई गंभीर जोखिमों से सुरक्षित रह सकते हैं। यह प्राकृतिक रूप से रक्त को साफ करने और नसों में ब्लॉकेज की संभावना को कम करने में भी मददगार माना जाता है।डायबिटीज के मरीज भी बेझिझक खा सकते हैं कीवी, ब्लड शुगर रहता है नियंत्रितअक्सर डायबिटीज के मरीजों के मन में यह सवाल रहता है कि मीठे फल खाने से उनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है, इसलिए वे फलों से दूरी बना लेते हैं। लेकिन डॉ. समीक्षा कालरा ने इस भ्रम को दूर करते हुए बताया है कि कीवी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index - GI) काफी कम होता है, जिसका मतलब है कि यह शरीर में जाने के बाद ग्लूकोज को बहुत धीरे-धीरे रिलीज करता है। यही वजह है कि ब्लड शुगर के मरीजों के लिए यह एक बेहद सुरक्षित और फायदेमंद फल माना जाता है, जो अचानक शुगर स्पाइक (Sugar Spike) का खतरा पैदा नहीं करता।कीवी में मौजूद फाइबर्स और विटामिन्स इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में मदद करते हैं, जिससे शरीर में शुगर का स्तर नियंत्रण में रहता है। डायबिटीज के मरीज यदि अपनी दिनचर्या में सीमित मात्रा में कीवी को शामिल करते हैं, तो इससे न केवल उनकी मीठे की क्रेविंग शांत होती है, बल्कि उन्हें भरपूर पोषण भी मिलता है। हालांकि, किसी भी स्वास्थ्य स्थिति में अपने डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना हमेशा सबसे अच्छा विकल्प होता है ताकि शरीर की व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से सही डाइट प्लान तैयार किया जा सके।बढ़ते वजन और मोटापे से परेशान लोगों के लिए फैट बर्नर का करता है कामआज के समय में बढ़ता वजन और पेट की चर्बी (Belly Fat) हर दूसरे व्यक्ति के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन चुके हैं, जिसके लिए लोग जिम में घंटों पसीना बहाते हैं और डाइटिंग करते हैं। डॉ. समीक्षा कालरा के अनुसार, वजन घटाने की प्रक्रिया में कीवी एक बेहतरीन और मददगार फल साबित हो सकता है। कीवी में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और फाइबर बहुत अधिक होता है, जिसे खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास होता है, जिससे बार-बार कुछ न कुछ अनहेल्दी खाने की इच्छा (Cravings) नियंत्रित हो जाती है।जब आप कम कैलोरी और उच्च पोषक तत्वों वाले आहार का सेवन करते हैं, तो आपका मेटाबॉलिज्म (Metabolism) तेज हो जाता है, जिससे शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी तेजी से बर्न होने लगती है। इसके अलावा, कीवी शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में भी मदद करता है, जिससे टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और त्वचा पर भी एक अलग ही प्राकृतिक चमक देखने को मिलती है। वजन घटाने के सफर में यदि सही वर्कआउट के साथ कीवी को जोड़ा जाए, तो परिणाम बेहद चौंकाने वाले और सकारात्मक मिल सकते हैं।त्वचा में चमक और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मिलती है अद्भुत मजबूतीशरीर की अंदरूनी सेहत के साथ-साथ हमारी बाहरी खूबसूरती और इम्युनिटी पर भी खान-पान का गहरा असर पड़ता है। कीवी में संतरे और नींबू से भी अधिक मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व माना जाता है। मजबूत इम्युनिटी होने पर मौसमी बीमारियां, सर्दी-जुकाम और इंफेक्शन आसानी से पास नहीं फटकते। इसके अलावा, इसमें मौजूद विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन सेल्स को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं, जिससे झुर्रियां कम होती हैं और चेहरे पर हमेशा एक नेचुरल ग्लो बना रहता है।
BJP अध्यक्ष Nitin Nabin के स्वागत में Meerut Toll Plaza पर सजी बुलडोज़र की कतार
21 और 22 सितंबर को उत्तर प्रदेश के दौरे से पहले, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का स्वागत करने के लिए मेरठ के बाहरी इलाके में टोल प्लाज़ा पर बुलडोज़रों की एक कतार लगाई गई थी। वहाँ की तस्वीरों में हाईवे के किनारे पार्टी के झंडों और बैनरों से सजे, चमकीले रंगों में रंगे बुलडोज़र एक क्रम में खड़े दिखाई दिए। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले नितिन नबीन का यह दो दिवसीय दौरा काफी अहम है। अपने दौरे के दौरान, वे चुनाव की तैयारियों पर केंद्रित संगठनात्मक बैठकों, जन-कार्यक्रमों और सम्मेलनों की अगुवाई करेंगे। साथ ही, पार्टी के सेवा, समर्पण और आस्था पर ज़ोर देने के तहत वे ऐतिहासिक स्थलों और प्रमुख मंदिरों का भी दौरा करेंगे। इसे भी पढ़ें: Congress अब बनी Muslim League Maoist पार्टी, Sudhanshu Trivedi का Rahul Gandhi पर वार 21 सितंबर को नबिन क्रांतिधरा मेरठ पहुंचेंगे और इंडियन नेशनल आर्मी शहीद स्मारक और पार्क में श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद, वह स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी के मंगल्य ऑडिटोरियम में ‘युवा सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे और युवाओं से अपनी ताकत का सही इस्तेमाल करने का आग्रह करेंगे। इसके बाद, वह उसी कैंपस में आयोजित ‘शक्ति केंद्र सम्मेलन (पश्चिमी क्षेत्र)’ में भी बोलेंगे। उसी दिन बाद में, नबिन चुनाव की रणनीतियों को अंतिम रूप देने के लिए पश्चिमी क्षेत्र के पूर्व पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। 22 सितंबर को सुबह वे मेरठ की जानी-मानी हस्तियों और खास नागरिकों से बातचीत करेंगे। इसके बाद, वे पूजा-अर्चना के लिए ऐतिहासिक औघड़नाथ मंदिर जाएंगे। सहारनपुर पहुँचने पर, नितिन नवीन बीजेपी के एक कार्यकर्ता के घर दोपहर का भोजन करेंगे, जो पार्टी की 'कार्यकर्ता' परंपरा को दर्शाता है। सहारनपुर में, वे पश्चिमी क्षेत्र के पूर्व सांसदों और विधायकों से बातचीत करेंगे। इसके बाद, वे चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा करने के लिए राज्य और क्षेत्रीय पदाधिकारियों, ज़िला अध्यक्षों, ज़िला प्रभारियों और महासचिवों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक करेंगे। इसे भी पढ़ें: K Annamalai ने पेरियार के सुधारों को सराहा, नास्तिकता और ब्राह्मण विरोधी विचारों को नकारा अपनी यात्रा के समापन पर, नितिन नवीन सिद्धपीठ शाकंभरी देवी मंदिर में माँ भगवती की पूजा-अर्चना करेंगे। वे सभी नागरिकों के लिए सुख-समृद्धि और शांति के साथ-साथ देश की निरंतर प्रगति की कामना करेंगे और इस तरह पार्टी के ज़मीनी संगठन को मज़बूत करेंगे।
'चौड़ाई थोड़ा...', महिला पार्षद पर विजयवर्गीय का विवादित बयान
इंदौर के वार्ड नंबर 6 में करीब 7 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक टिप्पणी को लेकर विवाद हो गया है. वायरल वीडियो में मंत्री महिला पार्षद की शारीरिक बनावट को लेकर टिप्पणी करते सुनाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है.
अनुपम खेर को ओहायो में मिला खास सम्मान, बोले-'घर से इतनी दूर सम्मानित होना बेहद भावुक करने वाला'
दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने हिंदी सिनेमा में चार दशक से ज्यादा का सफर तय किया है और इस दौरान पर्दे के साथ-साथ रंगमंच पर भी अपनी खास पहचान बनाई है।
होठों के आकार और टेक्सचर के हिसाब से परफेक्ट लिपस्टिक लगाने का प्रोफेशनल तरीका
मेकअप की दुनिया में लिपस्टिक एक ऐसा कॉस्मेटिक प्रोडक्ट है जो आपके पूरे चेहरे के लुक को पल भर में पूरी तरह से बदल सकता है। एक सही शेड और सही तरीके से लगाई गई लिपस्टिक न केवल आपके चेहरे पर निखार लाती है, बल्कि आपके कॉन्फिडेंस को भी कई गुना बढ़ा देती है। इसके बावजूद, बहुत सी महिलाओं और लड़कियों की यह शिकायत रहती है कि वे चाहे कितनी भी महंगी लिपस्टिक क्यों न खरीद लें, वह होठों पर या तो फैल जाती है, कुछ ही घंटों में उतर जाती है या फिर होठों के आकार को अजीब दिखाने लगती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि हर किसी के होठों का आकार (Lip Shape), साइज और टेक्सचर (Texture) अलग-अलग होता है, और हर एक स्टाइल हर किसी पर फिट नहीं बैठती। यदि आप भी यह सीखना चाहती हैं कि अपने होठों की बनावट के अनुसार लिपस्टिक कैसे लगाई जाए ताकि आपका लुक एकदम परफेक्ट और प्रोफेशनल लगे, तो यह गाइड आपके लिए बेहद काम की साबित होने वाली है।होठों की सही तैयारी और एक्सफोलिएशन का महत्वकिसी भी खूबसूरत मेकअप की शुरुआत हमेशा एक साफ और तैयार बेस से होती है, और लिपस्टिक लगाने की प्रक्रिया में भी यही नियम सबसे पहले लागू होता है। अक्सर हम बिना सोचे-समझे सीधे होठों पर लिपस्टिक लगा लेते हैं, जिससे पपड़ी जमने लगती है और होंट फटे हुए नजर आते हैं। होठों को मुलायम और खूबसूरत बनाने के लिए सबसे पहले उनका एक्सफोलिएशन (Exfoliation) करना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप चीनी और शहद का घरेलू स्क्रब इस्तेमाल कर सकती हैं या फिर एक नरम टूथब्रश की मदद से हल्के हाथों से होठों की डेड स्किन को हटा सकती हैं। डेड स्किन हटने के बाद होठों पर एक अच्छी क्वालिटी का लिप बाम या मॉइस्चराइजर लगाएं और उसे कुछ मिनट के लिए छोड़ दें ताकि होंट पूरी तरह से हाइड्रेट हो जाएं। इसके बाद किसी टिशू पेपर से अतिरिक्त नमी को हल्का सा सोख लें, जिससे आपका लिप कलर लंबे समय तक टिका रहेगा और फैलेगा नहीं।होठों के आकार (Lip Shapes) को समझें और उसके अनुसार लगाएं लिपस्टिकहर महिला के होठों का शेप अलग होता है, और यदि आप अपने होठों के प्राकृतिक आकार को ध्यान में रखकर लिपस्टिक और लिप लाइनर का इस्तेमाल करती हैं, तो आपका मेकअप आर्टिस्टिक और गॉर्जियस नजर आता है। यदि आपके होंट बहुत पतले (Thin Lips) हैं, तो आपको डार्क शेड्स के बजाय हमेशा लाइट और न्यूड शेड्स चुनने चाहिए, क्योंकि डार्क रंग पतले होठों को और ज्यादा पतला दिखाते हैं। पतले होठों को थोड़ा भरा हुआ दिखाने के लिए लिप लाइनर का इस्तेमाल हमेशा होठों की प्राकृतिक रेखा से हल्का सा बाहर की तरफ (Over-lining) करें और शिमरी या ग्लॉसी लिपस्टिक लगाएं। इसके विपरीत, यदि आपके होंट बहुत मोटे या चौड़े (Full Lips) हैं, तो आपको लिप लाइनर का इस्तेमाल होठों के अंदरूनी हिस्से पर करना चाहिए और हमेशा मैट लिपस्टिक चुननी चाहिए, ताकि होठों पर अतिरिक्त चमक न फैले और वे संतुलित तथा आकर्षक दिखें।लिप टेक्सचर (Lip Texture) और मौसम के हिसाब से चुनें सही फॉर्मूलाहोठों का टेक्सचर इस बात को तय करता है कि आपके होठों पर लिक्विड मैट लिपस्टिक अच्छी लगेगी या क्रीमी और साटन फिनिश वाली लिपस्टिक। यदि आपके होंट बहुत जल्दी सूखते हैं और उन पर दरारें पड़ जाती हैं, तो आपको मैट या लिक्विड लिपस्टिक के इस्तेमाल से बचना चाहिए, क्योंकि यह फॉर्मूला होठों की नमी को पूरी तरह खींच लेता है जिससे होंट और अधिक फटे हुए नजर आने लगते हैं। ऐसे टेक्सचर वाले होठों के लिए हाइड्रेटिंग लिपस्टिक, टिंटेड बाम या मॉइस्चराइजिंग ग्लॉस सबसे बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं। वहीं, अगर आपके होंट चिकने और सामान्य हैं, तो आप किसी भी प्रकार की लॉन्ग-वेअर लिक्विड मैट लिपस्टिक का खुलकर इस्तेमाल कर सकती हैं जो बिना फैले घंटों तक टिकी रहती है। इसके अलावा, बदलते मौसम के साथ अपने लिप प्रोडक्ट्स में बदलाव करना भी उतना ही जरूरी है जितना कि स्किनकेयर रूटीन में बदलाव करना।लंबे समय तक लिपस्टिक टिकाए रखने के आसान और प्रोफेशनल टिप्सकई बार ऑफिस या पार्टी में जाने के कुछ ही घंटों बाद लिपस्टिक बीच से गायब होने लगती है या फीकी पड़ जाती है, जिससे बार-बार टच-अप करने की जरूरत पड़ती है। अपनी लिपस्टिक को वाटरप्रूफ और लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए मेकअप आर्टिस्ट एक खास तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जिसे लेयरिंग कहा जाता है। सबसे पहले लिप बाम लगाने के बाद पूरे होठों पर लिप लाइनर से एक बेस तैयार करें, क्योंकि इससे लिपस्टिक को पकड़ने के लिए एक मजबूत आधार मिल जाता है। पहली कोट लगाने के बाद होठों के बीच एक पतला टिशू पेपर रखें और उसके ऊपर से हल्का सा ट्रांसलूसेंट पाउडर डस्ट करें, जिससे अतिरिक्त नमी सोख ली जाती है। इसके बाद लिपस्टिक की दूसरी कोट लगाएं, और आप खुद देखेंगी कि आपकी लिपस्टिक सुबह से शाम तक बिना जरा भी हिले एकदम परफेक्ट बनी रहती है।
गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं गया के DM शशांक, पितृपक्ष पर क्यों चर्चा में
भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2014 बैच के अधिकारी शशांक शुभंकर अभी गयाजी के जिला पदाधिकारी हैं और 25 सितंबर से गयाजी में पितृपक्ष मेला शुरू होने वाला है. इसे लेकर प्रशासन की ओर से खास तैयारियां की गई हैं. श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर डीएम ने कई इंतजाम किए हैं.इसके बाद से ही वह सुर्खियों में बने हुए हैं.
इस हफ्ते किन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा? जानें नौकरी, कारोबार और धन लाभ का पूरा हाल
ज्योतिषीय गणनाओं और नक्षत्रों की चाल के आधार पर हर नया हफ्ता हमारे जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर गहरा प्रभाव डालता है, जिसमें आर्थिक स्थिति, नौकरी और व्यापार सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नया सप्ताह यानी 21 से 27 सितंबर 2026 का यह समयावधि वित्तीय दृष्टिकोण से सभी बारह राशियों के लिए बेहद खास रहने वाली है। ग्रहों के गोचर और उनकी बदलती स्थितियों के कारण कुछ जातकों को जबरदस्त धन लाभ और करियर में तरक्की के नए अवसर मिलने की पूरी संभावना है, तो वहीं कुछ अन्य राशियों को इस हफ्ते पैसों के लेन-देन और व्यावसायिक निवेश के मामले में बहुत अधिक सतर्कता बरतनी होगी। आइए मशहूर ज्योतिषीय विश्लेषण के आधार पर विस्तार से जानते हैं कि मेष से लेकर मीन राशि तक सभी जातकों के लिए यह सप्ताह आर्थिक रूप से कैसा बीतने वाला है और किसे मिलेगी सफलता तथा किसे करना पड़ सकता है संघर्ष।धन, समृद्धि और करियर की स्थिरता हर इंसान के जीवन का एक अहम हिस्सा होती है, और हर कोई यह जानना चाहता है कि आने वाले सात दिनों में उसकी वित्तीय स्थिति कैसी दिशा तय करेगी। क्या आपको नौकरी में प्रमोशन या इन्क्रिमेंट मिलने वाला है? क्या आपका नया व्यापारिक समझौता आपको मुनाफा देगा या फिर घाटे का सौदा साबित होगा? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आइए मेष से लेकर मीन राशि तक के संपूर्ण साप्ताहिक आर्थिक राशिफल का विश्लेषण करते हैं और समझते हैं कि सितारों की चाल आपके बैंक बैलेंस पर क्या असर डालने जा रही है।मेष, वृषभ और मिथुन राशि: इस हफ्ते किसे मिलेगा छप्परफाड़ धन लाभ और किसे संभालना होगा बजट?मेष राशि के जातकों के लिए 21 से 27 सितंबर 2026 का यह सप्ताह आर्थिक मोर्चे पर मिला-जुला लेकिन सकारात्मक परिणाम लेकर आया है। यदि आप पिछले कुछ समय से किसी नए व्यवसाय में निवेश करने की सोच रहे थे, तो इस हफ्ते आपको कोई बेहतरीन डील मिल सकती है, हालांकि कागजी कार्रवाई में पूरी सावधानी बरतें। नौकरीपेशा लोगों को अपने कार्यक्षेत्र में सीनियर अधिकारियों का सहयोग मिलेगा, जिससे आय में वृद्धि के योग बन रहे हैं। वृषभ राशि वाले जातकों के लिए यह हफ्ता वित्तीय स्थिरता लेकर आया है। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में फैसला आपके पक्ष में आ सकता है, जिससे आपका बैंक बैलेंस मजबूत होगा। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में सोच-समझकर किया गया निवेश आपको भविष्य में बड़ा मुनाफा दे सकता है, लेकिन शॉर्टकट अपनाने से बचें।मिथुन राशि के जातकों को इस सप्ताह अपने खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण रखने की सख्त जरूरत है। अनावश्यक चीजों पर पैसा खर्च करने के कारण महीने के अंत में बजट गड़बड़ा सकता है। हालांकि, व्यापार से जुड़े लोगों को विदेशी स्रोतों या ऑनलाइन माध्यमों से अचानक धन लाभ होने की प्रबल संभावना है। यदि आप पार्टनरशिप में बिजनेस करते हैं, तो अपने साझीदार के साथ पारदर्शिता बनाए रखें ताकि किसी भी प्रकार के वित्तीय विवाद से बचा जा सके। स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च आपकी बचत को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अपनी जीवनशैली को संतुलित रखना आपके लिए इस हफ्ते सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।कर्क, सिंह और कन्या राशि: करियर में आएगी जबरदस्त तेजी, कारोबारियों को मिलेगी नई व्यावसायिक ऊंचाइयांकर्क राशि के जातकों के लिए यह हफ्ता धन संचय के लिहाज से बहुत उत्तम रहने वाला है। आप अपनी सूझबूझ और वाणी के बल पर अटके हुए पुराने पैसों को वापस पाने में कामयाब रहेंगे। नौकरीपेशा वर्ग के जातकों को ऑफिस में कोई नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिससे भविष्य में वेतन वृद्धि के रास्ते खुलेंगे। सिंह राशि के जातकों का आत्मविश्वास इस सप्ताह सातवें आसमान पर रहेगा, जिसके दम पर आप अपने कारोबार को एक नई दिशा देने में सफल होंगे। सरकारी क्षेत्र से जुड़े कामों में रुकावटें दूर होंगी और ठेकेदारों को बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल हो सकते हैं। परिवार के साथ किसी धार्मिक या मांगलिक कार्य में धन खर्च होने के योग हैं, जिससे मन प्रसन्न रहेगा।कन्या राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह कड़ी मेहनत और शानदार आर्थिक रिटर्न दोनों लेकर आया है। यदि आपने बैंक से कोई लोन या कर्ज ले रखा है, तो इस हफ्ते आप उसका एक बड़ा हिस्सा चुकाने में सफल रहेंगे, जिससे मानसिक तनाव कम होगा। मीडिया, कला, तकनीक या शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आय के नए स्रोत विकसित होंगे। निवेश के मामले में किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना आपके लिए बेहद फायदेमंद रहेगा। सप्ताह के मध्य में अचानक किसी यात्रा पर जाना पड़ सकता है, जो भविष्य में आपके व्यावसायिक संपਰकों को मजबूत करने का काम करेगी।तुला, वृश्चिक और धनु राशि: आर्थिक योजनाओं को मिलेगी गति, वित्तीय मामलों में बरतनी होगी विशेष सावधानीतुला राशि के जातकों के लिए 21 से 27 सितंबर 2026 का यह सप्ताह आर्थिक दृष्टिकोण से बहुत ही प्रगतिशील रहने वाला है। आपकी व्यावसायिक योजनाएं पटरी पर लौटेंगी और बाजार में आपकी साख बढ़ेगी। यदि आप नया मकान, वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने का मन बना रहे हैं, तो इस हफ्ते इस दिशा में उठाया गया कदम बेहद शुभ साबित होगा। वृश्चिक राशि के जातकों को इस हफ्ते पैसों के लेन-देन में थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और कागजों पर हस्ताक्षर करने से पहले हर शर्त को अच्छी तरह पढ़ लें। नौकरी में बदलाव का विचार बना रहे लोगों को अभी कुछ दिनों के लिए इंतजार करना बेहतर रहेगा।धनु राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह करियर में तरक्की के नए द्वार खोलने वाला है। नौकरीपेशा लोगों को मनचाहा ट्रांसफर या प्रमोशन मिलने की खुशखबरी मिल सकती है। व्यापार में यदि पिछले कुछ समय से मंदी का दौर चल रहा था, तो इस हफ्ते ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने से मुनाफे में भारी उछाल देखने को मिलेगा। परिवार के बुजुर्गों की सलाह से किए गए वित्तीय निवेश आपको लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेंगे। छात्रों को अपनी पढ़ाई से जुड़े खर्चों के लिए स्कॉलरशिप या आर्थिक सहायता मिलने की संभावना है।मकर, कुंभ और मीन राशि: निवेश के नए अवसर और आकस्मिक धन लाभ के बन रहे हैं प्रबल योगमकर राशि के जातकों के लिए यह हफ्ता आर्थिक मामलों में बहुत संभलकर चलने वाला है। हालांकि आपकी आमदनी स्थिर बनी रहेगी, लेकिन बढ़ते हुए घरेलू खर्च और पारिवारिक जरूरतों के कारण आपको थोड़ा आर्थिक दबाव महसूस हो सकता है। किसी भी प्रकार के सट्टेबाजी या जोखिम भरे निवेश से पूरी तरह दूर रहें, अन्यथा बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। कुंभ राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह बेहद भाग्यशाली साबित होने वाला है। आपको किसी पैतृक संपत्ति या अचानक हुए लॉटरी/शेयर लाभ से भारी मात्रा में धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं। व्यापारी वर्ग के लोग अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए नई शाखाएं खोल सकते हैं, जिसमें बैंक या निवेशकों से आसानी से लोन मिल जाएगा।मीन राशि के जातकों के लिए 21 से 27 सितंबर 2026 का यह सप्ताह मानसिक शांति और आर्थिक संतुलन लेकर आया है। आपके सोचे हुए सभी कार्य समय पर पूरे होंगे, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। जीवनसाथी के सहयोग से आपको किसी बड़े निवेश में मुनाफा कमाने का अवसर मिलेगा। कला, संगीत, लेखन या अभिनय के क्षेत्र से जुड़े लोगों को इस हफ्ते अपनी कला के दम पर बड़ी आर्थिक सफलता और मान-सम्मान दोनों की प्राप्ति होगी। कुल मिलाकर यह सप्ताह सभी राशियों के लिए अपनी आर्थिक रणनीतियों को बेहतर बनाने और भविष्य की प्लानिंग करने का सबसे सही समय साबित होगा।
23 या 24 सितंबर, कब रखा जाएगा भाद्रपद माह का अंतिम प्रदोष व्रत
सनातन धर्म में पंचांग और व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना गया है, जिनमें प्रदोष व्रत का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और फलदायी कहा गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है। भाद्रपद मास का यह अंतिम प्रदोष व्रत इस बार किस दिन रखा जाएगा, इसको लेकर श्रद्धालुओं के मन में काफी असमंजस और दुविधा की स्थिति बनी हुई है कि व्रत 23 सितंबर को रखा जाए या 24 सितंबर को। इस तिथि के संशय को दूर करने के लिए देश के प्रमुख ज्योतिषीय और धार्मिक केंद्र उज्जैन के प्रसिद्ध आचार्यों ने स्पष्ट गणना के आधार पर सही तिथि, व्रत के नियम और पूजा-पाठ के शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी साझा की है। यदि आप भी भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो प्रदोष व्रत के सही समय और पूजन विधान को जानना आपके लिए बेहद आवश्यक है।भगवान शिव की आराधना का यह पावन व्रत न केवल भक्तों के सभी संकटों को दूर करता है, बल्कि उन्हें मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और अमोघ पुण्य की प्राप्ति भी कराता है। प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के ठीक पहले और बाद का समय भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। भाद्रपद माह के समापन की ओर बढ़ते हुए यह अंतिम प्रदोष व्रत इसलिए भी खास हो जाता है क्योंकि इस दिन व्रत रखने से चातुर्मास के दौरान मिलने वाली विशेष शिव कृपा का पूरा लाभ मिलता है। आइए जानते हैं कि उज्जैन के विद्वान आचार्यों के अनुसार इस बार प्रदोष व्रत की वास्तविक और शास्त्र-संमत तिथि कौन सी है और किस दिन व्रत रखना सबसे अधिक फलदायी रहेगा।उज्जैन के आचार्य ने दूर किया संशय: जानिए क्या है 23 या 24 सितंबर में से सही तिथिभाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथियों के घट-बढ़ होने के कारण अक्सर व्रत की तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है। उज्जैन के जाने-माने ज्योतिष आचार्य और पंचांगकर्ताओं ने इस विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया है कि उदया तिथि और प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी के नियमों का पालन करना सबसे जरूरी होता है। आचार्य के अनुसार, यदि त्रयोदशी तिथि का विस्तार प्रदोष काल (संध्या के समय) तक रहता है, तो उसी दिन का व्रत सबसे उत्तम माना जाता है। पंचांग की सटीक गणना के मुताबिक, इस वर्ष भाद्रपद माह का अंतिम प्रदोष व्रत किस तारीख को सूर्य की स्थिति और चंद्रमा के गोचर के आधार पर मान्य होगा, इसकी पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है ताकि भक्तों को पूजा में किसी भी प्रकार की दुविधा का सामना न करना पड़े।विद्वानों का कहना है कि शास्त्रों में प्रदोष व्रत के लिए प्रदोष काल को मुख्य आधार माना गया है। यदि किसी दिन द्वादशी समाप्त होकर त्रयोदशी तिथि शाम के समय यानी सूर्यास्त के आसपास शुरू होती है या पूरे प्रदोष काल में व्याप्त रहती है, तो वह दिन व्रत के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। इसलिए, जिन लोगों को 23 सितंबर को लेकर संशय था, उन्हें पंचांग के सही नियमों के अनुसार ही अपना उपवास रखना चाहिए ताकि उनकी पूजा का पूर्ण प्रतिफल मिल सके। आचार्य ने यह भी सलाह दी है कि व्रत का संकल्प हमेशा सही तिथि और पंडितों द्वारा बताए गए मुहूर्त के अनुसार ही लेना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की धार्मिक त्रुटि से बचा जा सके।प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा का सबसे उत्तम समयकिसी भी व्रत और अनुष्ठान की सफलता उसके सही मुहूर्त पर निर्भर करती है। प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल में ही की जाती है, जो सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले शुरू होती है और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक रहती है। इस विशेष कालखंड में भगवान शिव अपने पूरे परिवार यानी माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी जी के साथ कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान होते हैं। इस दौरान की गई पूजा से साधक की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद के इस अंतिम प्रदोष व्रत के दिन संध्याकाल का मुहूर्त अत्यंत ही ऊर्जावान और पावन रहेगा, जिसमें भगवान शिव का अभिषेक करना विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है।पूजा के समय व्रतियों को शाम के वक्त स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करने चाहिए और प्रदोष काल शुरू होने से पहले ही अपने घर के मंदिर या किसी शिवालय में पूजा की पूरी तैयारी कर लेनी चाहिए। प्रदोष काल में भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, और बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, धूप-दीप व नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। इस दिन 'ॐ नमः शिवाय' महामंत्र का निरंतर जाप करना और प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण करना अत्यंत शुभ फल देता है। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती कर अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगनी चाहिए और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करनी चाहिए।प्रदोष व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम और सावधानियांप्रदोष व्रत अन्य व्रतों की तुलना में थोड़ा अलग और विशेष नियमों वाला माना जाता है। इस व्रत को रखने वाले श्रद्धालुओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और दिनभर मन में भगवान शिव का स्मरण रखना चाहिए। इस दिन अन्न का सेवन नहीं किया जाता है, और जो लोग पूरी तरह निर्जला व्रत रखने में सक्षम नहीं हैं, वे फलाहार या केवल दूध और जल ग्रहण करके उपवास रख सकते हैं। व्रत के दिन किसी भी प्रकार के असत्य, क्रोध, वाद-विवाद या नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि भगवान शिव निर्मल मन और सच्चे भाव से की गई भक्ति से ही सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं।इसके अलावा, प्रदोष व्रत के दिन बाल और नाखून काटने जैसी क्रियाओं से बचना चाहिए तथा ब्रह्मचर्य नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। सूर्यास्त के बाद एक बार पुनः स्नान या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनकर ही प्रदोष काल की पूजा में बैठना चाहिए। पूजा संपन्न होने के बाद ही अन्न या फलाहार ग्रहण करना चाहिए। जो लोग विधि-विधान से इन सभी नियमों का पालन करते हैं, उन्हें महादेव की असीम कृपा प्राप्त होती है और उनके जीवन के सभी कष्ट व बाधाएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं।भगवान शिव की कृपा और प्रदोष व्रत का अलौकिक आध्यात्मिक महत्वसनातन परंपरा में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की प्राप्ति और उनके आशीर्वाद का सबसे सरल मार्ग माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जो मनुष्य प्रदोष व्रत के नियमों का पालन करते हुए सच्चे मन से शिव-पार्वती की आराधना करता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और उसके जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं। भाद्रपद माह का यह अंतिम प्रदोष व्रत चातुर्मास के बीच आने के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन चार महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं और सृष्टि का संचालन और संरक्षण भगवान शिव के हाथों में विशेष रूप से माना जाता है। इस दौरान शिव आराधना करने से साधक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।
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पद्मा एकादशी पर हरिवासर का दुर्लभ संयोग: बैकुंठ धाम में स्थान पाने के लिए ऐसे करें व्रत
सनातन धर्म और हिंदू पंचांग में एकादशी व्रत का विशेष और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है, जिसे सभी व्रतों में अत्यंत फलदायी माना जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मुख्य रूप से पद्मा एकादशी या परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस पावन अवसर पर इस बार एक बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग यानी 'हरिवासर' का महासंयोग बन रहा है, जिसने इस व्रत के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व को कई गुना बढ़ा दिया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु क्षीरसागर में अपनी करवट बदलते हैं, इसीलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है। जो भी श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान के साथ इस उपवास को संपन्न करते हैं, उन्हें मृत्यु के पश्चात सीधे बैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है। आइए इस विशेष पर्व के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके अलौकिक महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं।हिंदू संस्कृति में एकादशी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और ईश्वर की आराधना का सबसे उत्तम मार्ग है। पद्मा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा-अर्चना का विधान है। पुराणों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने वाले मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। जैसे-जैसे इस पावन तिथि की तैयारियां शुरू होती हैं, देश भर के मंदिरों और श्रद्धालुओं के घरों में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। व्रत के नियमों का पालन करते हुए भगवान विष्णु के श्री चरणों में अपनी हाजिरी लगाने के लिए भक्तगण सुबह से ही मंदिरों में अपनी तैयारियां पूरी करने में जुट जाते हैं।पद्मा एकादशी और हरिवासर का दुर्लभ संयोग: क्या है इसका ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व?पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पद्मा एकादशी के पावन पर्व पर 'हरिवासर' का विशेष संयोग बन रहा है। हरिवासर वह समय अवधि होती है जो एकादशी तिथि के शुरुआती चरणों में आती है, और इसे भगवान हरि की आराधना के लिए सबसे अधिक पवित्र और ऊर्जावान माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का कहना है कि हरिवासर के दौरान किए गए जप, तप, दान और व्रत का पुण्य साधारण दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है। इस काल में भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। पितरों की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए भी इस एकादशी को बहुत चमत्कारिक माना गया है, क्योंकि इस दिन किए गए अनुष्ठान सीधा भगवान विष्णु के चरणों तक पहुंचते हैं।धार्मिक कथाओं के अनुसार, राजा बलि के अहंकार को चूर करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया था और इसी एकादशी के दिन उन्होंने अपनी योगनिद्रा के दौरान करवट बदली थी। यही कारण है कि इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से जीवन में आने वाले सभी प्रकार के संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं। जो लोग लंबे समय से मानसिक तनाव या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है। भगवान विष्णु की कृपा से भक्तों के सभी रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं और घर में माता लक्ष्मी का स्थायीि वास होता है।पद्मा एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त और पारण का सही समयकिसी भी व्रत की पूर्णता उसके सही मुहूर्त और विधि-विधान पर निर्भर करती है। पद्मा एकादशी तिथि का आरंभ और समापन पंचांग के अनुसार निश्चित होता है, और उसी के आधार पर व्रतियों को अपनी पूजा और उपवास का संकल्प लेना चाहिए। पूजा का सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त या सुबह का समय होता है, जब स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके पश्चात भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित कर उनका षोडशोपचार पूजन किया जाता है। हरिवासर के समय को ध्यान में रखते हुए भक्तों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे इस पवित्र अवधि के दौरान भगवान के ध्यान में लीन रहें और किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों से दूर रहें।व्रत का पारण (व्रत खोलना) द्वादशी तिथि के दिन सूर्योदय के पश्चात और हरिवासर की समाप्ति के बाद ही किया जाना चाहिए। बिना हरिवासर के समाप्त हुए या बिना द्वादशी के पारण किए व्रत अधूरा माना जाता है। पारण के दिन सुबह भगवान विष्णु की पुनः पूजा कर ब्राह्मणों को भोजन कराना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा देना अत्यंत पुण्य का काम माना गया है। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत का समापन किया जाता है। जानकारों का कहना है कि यदि इन सभी नियमों का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाए, तो व्रत का संपूर्ण फल साधक को अवश्य प्राप्त होता है।पद्मा एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि और ध्यान रखने योग्य जरूरी नियमपद्मा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पीले वस्त्र धारण करना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु को अति प्रिय है। इसके बाद एक साफ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान भगवान को रोली, अक्षत, पीले फूल, तुलसी दल, मौसमी फल, पंचामृत और मिष्ठान का भोग लगाएं। इस व्रत में तुलसी के पत्तों का विशेष महत्व होता है, इसलिए भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि इसके बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। पूजा के समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना मानसिक शांति प्रदान करता है।व्रत के दौरान खान-पान को लेकर भी कुछ कड़े नियम बताए गए हैं। इस दिन अन्न का सेवन बिल्कुल नहीं किया जाता है, और जो लोग निर्जला व्रत रखने में सक्षम नहीं हैं, वे फलाहार या दूध-जल ग्रहण करके उपवास रख सकते हैं। दिनभर मन में भगवान का स्मरण रखें और किसी भी प्रकार के झूठ, क्रोध या कटु वचन से दूर रहें। रात्रि के समय भगवान के जागरण और भजन-कीर्तन का आयोजन करना इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। जो लोग पूरी रात जागकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उनके समस्त पाप धुल जाते हैं और उन्हें भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।बैकुंठ धाम की प्राप्ति और जीवन के अंतिम लक्ष्यों का आध्यात्मिक मार्गसनातन परंपरा में बैकुंठ धाम को भगवान विष्णु का परम लोक कहा जाता है, जहां पहुंचकर मनुष्य जन्म-मरण के चक्र से पूरी तरह मुक्त हो जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि जो मनुष्य अपने जीवनकाल में पद्मा एकादशी का व्रत नियमपूर्वक रखता है, उसके लिए बैकुंठ के द्वार स्वतः खुल जाते हैं। कलियुग में पापों के प्रायश्चित और आत्मा की शुद्धि के लिए एकादशी के व्रतों को सबसे सरल और प्रभावशाली साधन माना गया है। यह व्रत न केवल हमें धार्मिक रूप से अनुशासित बनाता है, बल्कि हमारे भीतर सेवा, करुणा और समर्पण के भाव को भी जागृत करता है।
कॉफी पीने के इतनी देर बाद लें जरूरी दवाएं, तभी मिलेगा पूरा फायदा
कॉफी के साथ या कुछ देर बाद कुछ खास प्रकार की दवाएं लेने से उनके एब्जॉर्प्शन पर असर पड़ सकता है, जिससे शरीर को पूरा फायदा नहीं मिलता है. डॉक्टरों से जानते हैं कि कॉफी पीने के बाद सप्लीमेंट्स और दवाएं लेने के लिए कितने घंटे का गैप रखना जरूरी होता है.
देशभर के लाखों मेडिकल छात्रों का सपना होता है कि वे राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट (NEET) में शानदार अंक हासिल करके किसी प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस (MBBS) की सीट पक्की कर सकें। लेकिन क्या हो जब कोई छात्र अपनी मेहनत के दम पर बेहतरीन स्कोर हासिल करने के बावजूद इस डर के साये में जीए कि उसका एडमिशन किसी भी वक्त रद्द किया जा सकता है? देवभूमि उत्तराखंड से एक ऐसा ही सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने मेडिकल काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े की भनक लगते ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है और उच्चस्तरीय जांच के तत्काल आदेश दे दिए हैं। इस प्रशासनिक कदम के बाद से उन तमाम छात्रों और उनके अभिभावकों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिन्होंने हाल ही में काउंसलिंग के जरिए अपनी सीटें सुरक्षित की थीं।भारतीय शिक्षा व्यवस्था में मेडिकल सीटों का आवंटन बेहद संवेदनशील और कड़े नियमों के तहत किया जाता है, ताकि केवल योग्य और मेधावी छात्रों को ही डॉक्टर बनने का अवसर मिल सके। लेकिन जब कभी भी इन पवित्र प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार या नियमों की अनदेखी की खबरें सामने आती हैं, तो वह पूरे समाज को झकझोर कर रख देती हैं। उत्तराखंड जैसे शांत और पहाड़ी राज्य में काउंसलिंग के बाद उपजे इस विवाद ने यह साबित कर दिया है कि किस तरह शातिर लोग सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर अपनी जगह बनाने की कोशिश करते हैं। आइए इस पूरे घटनाक्रम की गहराई में उतरते हैं और यह समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर क्यों मुख्यमंत्री को इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा और इसके क्या दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।नीट काउंसलिंग में धांधली की आशंका: क्या सच में खतरे में है मेधावी छात्रों का भविष्य?नीट की परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिनी जाती है, जिसमें सफलता पाने के लिए छात्र दिन-रात एक कर देते हैं। ऐसे में जब काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होती है, तो हर छात्र यह उम्मीद करता है कि उसे उसकी रैंक के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ कॉलेज आवंटित किया जाएगा। लेकिन उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में काउंसलिंग के बाद सामने आई कुछ कथित अनियमितताओं और संदिग्ध मामलों ने पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। सूत्रों के अनुसार, कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां दस्तावेजों की हेराफेरी, कोटे के दुरुपयोग या अन्य संदिग्ध तरीकों से सीटें हासिल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। जब इस तरह की गड़बड़ियों की शिकायतें शासन तक पहुंचीं, तो प्रशासन के कान खड़े हो गए क्योंकि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन ईमानदार और मेधावी छात्रों के अधिकारों पर भी बड़ा डाका है जो अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे।इस प्रकार की धांधलियां न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाती हैं, बल्कि इससे उन छात्रों का मनोबल भी टूटता है जो पूरी ईमानदारी से तैयारी करते हैं। जब अयोग्य या कम अंक वाले लोग गलत तरीकों से एमबीबीएस की सीटों पर कब्जा जमा लेते हैं, तो योग्य छात्र पीछे छूट जाते हैं। यही कारण है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग यह मांग कर रहे हैं कि इस पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से समीक्षा की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो सके और किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का कड़ा एक्शन: उच्चस्तरीय जांच के दिए सख्त आदेशमामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने बिना किसी देरी के तुरंत प्रभाव से उच्चस्तरीय जांच बिठाने के आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार या अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच समिति को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे काउंसलिंग के हर एक चरण की बारीकी से जांच करें, दस्तावेजों का पुनः सत्यापन करें और यह पता लगाएं कि इस प्रक्रिया में किन-किन लोगों की लापरवाही या मिलीभगत शामिल है। यदि जांच के दौरान यह साबित होता है कि किसी ने फर्जी दस्तावेजों या गलत तरीकों का इस्तेमाल करके एडमिशन लिया है, तो उसका एमबीबीएस एडमिशन तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा और उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।सरकार के इस सख्त रुख से महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों और कॉलेज प्रशासनों के बीच इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है कि जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, कई और बड़े चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं। मुख्यमंत्री का यह कदम इस बात का संदेश देता है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। जनता और छात्र वर्ग ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इस निष्पक्ष जांच के बाद हर एक दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह के घिनौने खेल को खेलने की हिम्मत न जुटा सके।कैसे हो सकता है अच्छा स्कोर होने के बाद भी एडमिशन रद्द? जानिए क्या कहते हैं नियमअक्सर छात्रों और अभिभावकों के मन में यह सवाल आता है कि यदि किसी छात्र ने परीक्षा में खुद मेहनत करके अच्छे अंक प्राप्त किए हैं, तो उसका एडमिशन कैसे रद्द हो सकता है? इसका जवाब काउंसलिंग के नियमों और पात्रता की शर्तों में छिपा होता है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया या राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) और राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, केवल नीट स्कोर ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि काउंसलिंग के दौरान प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज, डोमिसाइल (मूल निवास प्रमाण पत्र), श्रेणी प्रमाण पत्र (Category Certificate) और अन्य पात्रता मानदंड भी पूरी तरह वैध होने चाहिए। यदि काउंसलिंग के किसी भी चरण में या उसके बाद की गई जांच में यह पाया जाता है कि दस्तावेजों में कोई छेड़छाड़ की गई थी या कोटे के नियमों का गलत फायदा उठाया गया था, तो उस स्थिति में छात्र का एडमिशन कानूनी रूप से अवैध घोषित कर दिया जाता है, भले ही उसका नीट स्कोर कितना भी अच्छा क्यों न हो।इसके अलावा, कई बार काउंसलिंग के दौरान च्वॉइस फिलिंग या सीट अलॉटमेंट में तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटियां सामने आती हैं, जिन्हें सुधारने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने पड़ते हैं। ऐसे में जो छात्र नियमों के दायरे से बाहर जाकर या धोखाधड़ी करके सीटें हासिल करते हैं, उनकी तलवार हमेशा लटकी रहती है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश पाने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता ही काफी नहीं है, बल्कि आपकी कानूनी और कागजी पात्रता भी पूरी तरह से पारदर्शी और सटीक होनी चाहिए, अन्यथा एक छोटी सी गलती आपके पूरे करियर को बर्बाद कर सकती है।छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल, पारदर्शिता की उठ रही है मांगइस पूरी घटनाक्रम के सामने आने के बाद से उत्तराखंड के मेडिकल छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। जिन छात्रों ने पूरी ईमानदारी से अपनी पढ़ाई की और काउंसलिंग के जरिए कॉलेज में प्रवेश पाया, वे भी इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं इस जांच की आड़ में उन्हें भी परेशानियों का सामना न करना पड़े। दूसरी ओर, छात्र संगठनों और शैक्षणिक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की यह जांच बिल्कुल सही दिशा में उठाया गया कदम है, क्योंकि इससे भविष्य में इस प्रकार की धांधलियों पर रोक लगेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए ताकि किसी भी निर्दोष छात्र के करियर के साथ खिलवाड़ न हो सके। न्याय और पारदर्शिता की इस मांग ने पूरे राज्य की सियासत और शिक्षा जगत में हलचल पैदा कर दी है।विपक्ष और विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर काउंसलिंग के दौरान इस तरह की खामियां प्रशासन की नजरों से कैसे बच गईं। वे मांग कर रहे हैं कि केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों या दलालों पर कार्रवाई करने के बजाय उन बड़े अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाना चाहिए जिनकी देखरेख में यह पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया संपन्न हुई थी। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि मेडिकल सीटों के आवंटन में पारदर्शिता का मुद्दा सीधे तौर पर देश के भविष्य के डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।भविष्य के लिए सबक: काउंसलिंग प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल और सुरक्षित बनाने की जरूरतउत्तराखंड की इस घटना ने एक बार फिर से देश भर की मेडिकल और इंजीनियरिंग काउंसलिंग प्रक्रियाओं की सुरक्षा और तकनीकी मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक काउंसलिंग प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप (Human Interference) को पूरी तरह से समाप्त करके ब्लॉकचेन या पूरी तरह से ऑटोमेटेड डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम लागू नहीं किया जाएगा, तब तक इस तरह के फर्जीवाड़ों को रोकना पूरी तरह से मुसंभव नहीं होगा। राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को मिलकर एक ऐसा फुल-प्रूफ मेकैनिज्म तैयार करना चाहिए जिससे हर एक छात्र के दस्तावेजों की जांच एडमिशन से पहले ही इतनी पुख्ता हो जाए कि बाद में इस तरह के विवादों की गुंजाइश ही न बचे।अंत में यही कहा जा सकता है कि उत्तराखंड में नीट काउंसलिंग के बाद सामने आया यह मामला एक चेतावनी भी है और सुधार का अवसर भी। यदि सरकार और प्रशासन इस जांच को उसके तार्किक अंत तक पहुंचाते हैं और दोषियों को कड़ी सजा दिलाते हैं, तो यह भारतीय शिक्षा प्रणाली के प्रति आम जनता और छात्रों के भरोसे को और अधिक मजबूत करेगा। छात्रों को भी यह सीख लेनी चाहिए कि वे हमेशा शॉर्टकट अपनाने के बजाय अपनी योग्यता और नियमों के दायरे में रहकर ही अपने सपनों को पूरा करें। आने वाले दिनों में इस उच्चस्तरीय जांच की रिपोर्ट से क्या नए खुलासे होते हैं, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जोरदार हंगामा, विधायकों के बीच हुई धक्का-मुक्की
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जोरदार हंगामा, विधायकों के बीच हुई धक्का-मुक्की
भारतीय शिक्षा प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था कई बार ऐसी अजीबोगरीब और हास्यास्पद गलतियों का शिकार हो जाती है, जो किसी भी छात्र के भविष्य को खतरे में डालने के लिए काफी होती हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला हाल ही में सामने आया है, जहां एक छात्र ने अपनी मर्जी और विधिवत नियमों के तहत तीसरी भाषा के रूप में 'पंजाबी' विषय का चयन किया था, लेकिन स्कूल प्रशासन की भारी लापरवाही और मनमानी के चलते उसे पढ़ाई के दौरान अचानक 'संस्कृत' विषय थमा दिया गया। हद तो तब हो गई जब स्कूल में उस भाषा को पढ़ाने के लिए एक भी योग्य टीचर तक मौजूद नहीं था, और इसके बावजूद छात्र पर जबरन परीक्षा देने का दबाव बनाया जाने लगा। इस अन्याय के खिलाफ छात्र ने हार नहीं मानी और न्याय की आस में अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए छात्र को परीक्षा में बड़ी राहत दी है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैला दी है।आज के समय में जब देश के हर कोने में शिक्षा के अधिकार और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई की बातें की जाती हैं, तब जमीनी स्तर पर स्कूलों की यह लापरवाही शिक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोल देती है। छात्र जब स्कूल में दाखिला लेता है और अपने भविष्य की नींव रखने के लिए विषयों का चुनाव करता है, तो वह यह मानकर चलता है कि शैक्षणिक संस्थान उसे वे सभी सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराएगा जो नियमों के दायरे में आते हैं। लेकिन जब स्कूल प्रबंधन अपनी अकार्यक्षमता को छिपाने के लिए छात्रों के करियर के साथ खिलवाड़ करने लगता है, तो स्थितियां कितनी गंभीर हो जाती हैं, इस मामले ने इसे पूरी तरह से उजागर कर दिया है। आइए जानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में किस तरह से न्याय की जीत हुई और कैसे अदालत ने छात्र के टूटते हुए सपनों को एक नया जीवनदान दिया है।क्या था पूरा मामला: छात्र की पसंद की अनदेखी कर स्कूल ने थोपी दूसरी भाषाप्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब छात्र ने अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम के तहत तीसरी भाषा के रूप में पंजाबी भाषा का आधिकारिक रूप से चयन किया था। नियमों के मुताबिक छात्र को अपनी पसंद की भाषा चुनने का पूरा अधिकार था और उसने तदनुसार ही अपनी पढ़ाई शुरू की थी। लेकिन कुछ समय बीतने के बाद स्कूल प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के छात्र की चुनी हुई भाषा को बदल दिया और उसकी जगह उसे संस्कृत भाषा पढ़ने और परीक्षा देने का आदेश दे दिया। जब छात्र और उसके परिजनों ने इसका विरोध किया, तो स्कूल के अधिकारियों ने उनकी बात सुनने से साफ इनकार कर दिया और प्रशासनिक रौब दिखाते हुए कहा कि स्कूल के पास पंजाबी पढ़ाने के लिए न तो शिक्षक है और न ही संसाधन, इसलिए छात्र को संस्कृत ही पढ़नी होगी।एक ऐसे विषय की परीक्षा देने का दबाव बनाना जिसे छात्र ने कभी पढ़ा ही नहीं और जिसके लिए स्कूल में कोई फैकल्टी तक उपलब्ध नहीं थी, सरासर मानसिक प्रताड़ना और उसके मौलिक अधिकारों का हनन था। स्कूल प्रशासन का यह रवैया इस बात को साबित करता है कि कई संस्थान अपनी व्यवस्था की कमियों को सुधारने के बजाय उसका पूरा बोझ मासूम छात्रों के कंधों पर डाल देते हैं। छात्र ने जब इस तानाशाही रवैये के खिलाफ आवाज उठाई, तो स्कूल प्रबंधन ने उसे आगामी परीक्षाओं में बैठने से रोकने की धमकी तक दे डाली। ऐसे में छात्र और उसके परिवार के सामने अदालत का दरवाजा खटखटाने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर उसके पूरे शैक्षणिक वर्ष और भविष्य की दिशा से जुड़ा हुआ था।हाईकोर्ट की कड़ी फटकार: छात्र के मौलिक अधिकारों के पक्ष में आया ऐतिहासिक फैसलाजब यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (High Court) के समक्ष पहुंचा, तो अदालत ने इस पर बेहद गंभीर रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान जब जज के सामने यह तथ्य आया कि स्कूल प्रशासन ने बिना किसी कानूनी आधार के छात्र की भाषा बदली और बिना शिक्षक के पढ़ाई का दबाव बनाया, तो अदालत ने स्कूल अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी प्रशासनिक विफलता या शिक्षकों की कमी का खामियाजा किसी छात्र के भविष्य को बलि चढ़ाकर भुगते। अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए छात्र को अपनी पसंद की भाषा के आधार पर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी और स्कूल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई।कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला देश भर के शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक कड़ा संदेश है। अक्सर यह देखा जाता है कि देश के सरकारी और निजी स्कूलों में विषय शिक्षकों की भारी कमी होती है, और जब छात्र उस विषय को चुन लेते हैं, तो स्कूल प्रशासन उन पर दबाव बनाकर विषय बदलने के लिए मजबूर करता है। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि छात्रों की शैक्षणिक स्वतंत्रता सर्वोपरि है और स्कूल प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकता। अदालत के इस न्यायपूर्ण आदेश के बाद छात्र और उसके परिवार ने राहत की सांस ली है, और अब छात्र पूरी, ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ अपनी आगे की परीक्षाओं की तैयारी में जुट गया है।शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत: क्यों भुगतने पड़ते हैं छात्रों को प्रशासनिक खामियों के नतीजे?यह पूरी घटना केवल एक छात्र और एक स्कूल के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की बुनियादी शिक्षा प्रणाली की एक बड़ी विसंगति को उजागर करती है। आज भी हमारे कई सरकारी और अर्ध-सरकारी स्कूलों में विभिन्न भाषाओं और विषयों के ट्रेंड शिक्षकों की भारी कमी है। जब सरकारें या शिक्षा बोर्ड पाठ्यक्रम में क्षेत्रीय भाषाओं या आधुनिक विषयों को शामिल करने की घोषणा करते हैं, तो उन्हें जमीनी स्तर पर यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हर स्कूल में उन विषयों को पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक उपलब्ध हों। शिक्षकों की कमी के नाम पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। इस मामले ने एक बार फिर से शिक्षाविदों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारी शिक्षण संस्थाएं वाकई छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए तैयार हैं।इसके अलावा, अभिभावकों और छात्रों में भी अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। बहुत से छात्र ऐसी प्रशासनिक ज्यादतियों के आगे घुटने टेक देते हैं और चुपचाप सिस्टम के दबाव को सह लेते हैं, जिससे स्कूलों का हौसला और बढ़ जाता है। लेकिन इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि यदि कोई छात्र और उसका परिवार अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का साहस जुटाए, तो देश की न्यायपालिका हमेशा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर रहती है। समाज के हर वर्ग को इस बात की सराहना करनी चाहिए कि कैसे एक साधारण छात्र ने सिस्टम की लाचारी के खिलाफ खड़े होकर अपनी जीत सुनिश्चित की और आने वाले समय में अन्य छात्रों के लिए एक मजबूत मिसाल कायम की।भविष्य के लिए सबक: क्या अब बदलेंगी स्कूलों की कार्यप्रणाली?हाईकोर्ट के इस कड़े और स्पष्ट फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि पश्चिम बंगाल या हरियाणा सहित देश के अन्य हिस्सों के स्कूल प्रशासन भी अब अधिक सतर्क और जिम्मेदार बनेंगे। स्कूलों को यह समझ लेना चाहिए कि वे किसी व्यवसायिक दुकान की तरह नहीं चलाए जा सकते, जहां नियमों को अपनी सुविधा के अनुसार तोड़ा-मरोड़ा जा सके। हर एक छात्र का भविष्य अमूल्य है और उसके शैक्षिक अधिकारों की रक्षा करना शिक्षण संस्थानों का सबसे पहला और परम कर्तव्य है। यदि स्कूल अपनी व्यवस्था सुधारने में असमर्थ हैं, तो उन्हें छात्रों के प्रवेश के समय ही इस बात की पारदर्शी जानकारी देनी चाहिए ताकि कोई भी बच्चा गलतफहमी का शिकार न हो।अंत में यही कहा जा सकता है कि यह मामला अंततः सत्य और न्याय की जीत के रूप में सामने आया है। पंजाबी भाषा चुनने वाले उस छात्र को अदालत से जो संबल मिला है, उसने एक बार फिर से देश की न्यायपालिका पर आम जनता के भरोसे को और अधिक मजबूत किया है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले इन संस्थानों को अब आत्मમंथन करने की आवश्यकता है कि वे अपनी प्रशासनिक कमियों को छात्रों पर थोपने की बजाय एक पारदर्शी, सहायक और छात्र-अनुकूल माहौल प्रदान करें। उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद कोई भी स्कूल प्रशासन दोबारा किसी छात्र के भविष्य के साथ इस तरह की मनमानी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा और शिक्षा का स्तर वास्तव में सुधार की ओर अग्रसर होगा।
नंदीग्राम उपचुनाव: गिरफ्तारी के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे कांग्रेस प्रत्याशी
नंदीग्राम उपचुनाव के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है. कांग्रेस ने गिरफ्तारी को राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए बीजेपी पर निशाना साधा था, जबकि बीजेपी ने आरोपों को खारिज किया था. अब हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी.
ट्रंप के व्हाइट हाउस में वापसी के बाद क्या भारतीय छात्र भूल जाएं अमेरिकन ड्रीम
संयुक्त राज्य अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के एक बार फिर सत्ता संभालने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति, व्यापार और आव्रजन नीतियों को लेकर दुनिया भर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों और उनके परिवारों के मन में इस समय एक ही बड़ा सवाल कौंध रहा है कि क्या 'अमेरिकन ड्रीम' अब धुंधला पड़ता जा रहा है? हालिया प्रशासनिक बदलावों और आव्रजन नियमों में होने वाले संभावित बदलावों के मद्देनजर अमेरिका में स्टूडेंट वीजा (F-1 Visa) हासिल करना पहले के मुकाबले कहीं अधिक कठिन और चुनौतीपूर्ण हो गया है। वीजा इंटरव्यू के दौरान सख्ती, दस्तावेजों की पैनी जांच और कोटे से जुड़े नियमों के कारण छात्रों के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस गंभीर स्थिति पर देश-विदेश के प्रमुख इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स ने विचार व्यक्त करते हुए चार ऐसी बेहद जरूरी बातें साझा की हैं, जिन्हें हर भारतीय छात्र को अमेरिका जाने का प्लान बनाने से पहले जान लेना चाहिए।भारतीय समाज में यह लंबे समय से एक आम मान्यता रही है कि अमेरिका की किसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल करने के बाद करियर की ऊंचाइयां तय करना आसान हो जाता है। हर साल लाखों छात्र अमेरिका जाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं, जीआरई (GRE) और टोफेल (TOEFL) जैसी परीक्षाएं पास करते हैं और भारी-भरकम लोन लेकर अपनी ट्यूशन फीस का इंतजाम करते हैं। लेकिन ट्रंप प्रशासन की वीज़ा नीतियों, वीजा फीस में बढ़ोतरी, और विदेशी छात्रों के प्रति कड़े रवैये ने इस पूरी प्रक्रिया को एक अनिश्चितता के दौर में ला खड़ा किया है। जानकारों का मानना है कि भले ही अमेरिका के दरवाजे पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अब वहां तक पहुंचने का रास्ता पहले जितना सुगम नहीं रह गया है, जिसके लिए छात्रों को अपनी रणनीति में व्यापक बदलाव करने की आवश्यकता है।अमेरिका में स्टूडेंट वीजा की प्रक्रिया क्यों हुई जटिल और क्या हैं इसके मुख्य कारण?डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का मुख्य केंद्र हमेशा से 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) रहा है, जिसका सीधा प्रभाव स्थानीय नागरिकों के रोजगार और अप्रवासी नीतियों पर पड़ता है। प्रशासन का यह मानना है कि अंतरराष्ट्रीय छात्र और विदेशी कामगार अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों पर असर डालते हैं, यही वजह है कि वीजा अप्रूवल रेट को लेकर सख्त रुख अपनाया जा रहा है। हाल के दिनों में अमेरिकी दूतावासों और कंसुलेट द्वारा वीजा इंटरव्यू के दौरान छात्रों से बहुत अधिक तीखे और गहराई से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। कई मामलों में मामूली सी कागजी कमी या इंटरव्यू के दौरान आत्मविश्वास में थोड़ी सी भी कमी होने पर वीजा तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाता है। इस कठोरता के कारण योग्य छात्रों के मन में भी निराशा का भाव पैदा होने लगा है, क्योंकि वे अपनी पूरी तैयारी के बावजूद केवल वीजा अधिकारी के एक फैसले के कारण अपने सपनों को टूटते हुए देख रहे हैं।इसके अलावा, ऑप्टिकल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) और एच-1बी (H-1B) वीजा के नियमों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। छात्र अक्सर यह सोचकर अमेरिका जाते हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे वहां कुछ साल काम करके अपने एजुकेशन लोन को चुका सकेंगे और फिर परमानेंट रेजिडेंसी (Green Card) की ओर बढ़ेंगे। लेकिन जब वर्क वीजा के नियम कड़े कर दिए जाते हैं, तो छात्रों के सामने पढ़ाई के बाद अमेरिका में टिके रहना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि छात्रों को केवल दाखिला मिलने से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें लॉन्ग-टर्म इमिग्रेशन पॉलिसीज को भी ध्यान में रखकर ही अपने कदम आगे बढ़ाने चाहिए, अन्यथा उन्हें बीच रास्ते में ही निराशा हाथ लग सकती है।एक्सपर्ट्स की पहली सलाह: आवेदन से पहले अपने कोर्स और यूनिवर्सिटी का चयन बेहद सावधानी से करेंइमिग्रेशन और स्टडी एब्रॉड एक्सपर्ट्स की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि छात्रों को किसी भी एवरेज यूनिवर्सिटी में आंख मूंदकर दाखिला लेने से बचना चाहिए। ट्रंप राज में उन विश्वविद्यालयों के छात्रों पर वीजा अधिकारियों की विशेष नजर रहती है जिनकी साख संदिग्ध होती है या जो केवल नाममात्र के लिए कोर्स चलाते हैं। छात्रों को केवल यूएस न्यूज रैंकिंग या प्रतिष्ठित संस्थानों (Ivy League और टॉप-टियर यूनिवर्सिटीज) को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके अलावा, आपके अकादमिक रिकॉर्ड और आपके चुने गए कोर्स के बीच एक मजबूत तारतम्य (Relevance) होना चाहिए। यदि वीजा ऑफिसर को यह लगता है कि आप केवल अमेरिका में प्रवेश पाने के लिए किसी भी कोर्स में जा रहे हैं, तो आपके वीजा आवेदन को खारिज होने में एक सेकंड का भी समय नहीं लगेगा।यूनिवर्सिटी के चयन के साथ-साथ फाइनेंशियल प्लानिंग यानी वित्तीय तैयारी भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए। केवल पहले साल की फीस दिखाना अब पर्याप्त नहीं माना जाता है, बल्कि आपके पास पूरे कोर्स की अवधि के दौरान के खर्चों को उठाने की पुख्ता और पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए। बैंक बैलेंस, स्पॉन्सरशिप के कागजात और टैक्स रिटर्न जैसे दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अस्पष्टता सीधे तौर पर वीजा रिजेक्शन का कारण बन सकती है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि छात्रों को अपने वित्तीय दस्तावेजों को किसी पेशेवर सीए (Chartered Accountant) से पूरी तरह सत्यापित करवा कर ही इंटरव्यू के लिए जाना चाहिए ताकि कोई कानूनी सुराग हाथ न लगे।दूसरी और तीसरी सलाह: सॉलिड एकेडमिक प्रोफाइल और वीजा इंटरव्यू की रिहर्सल पर दें पूरा जोरविशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में सिर्फ अच्छे नंबर ले आना ही काफी नहीं है, बल्कि आपका पूरा प्रोफाइल दमदार होना चाहिए। आपके पास इंटर्नशिप, रिसर्च वर्क, प्रोजेक्ट्स और एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियों के पुख्ता प्रमाण होने चाहिए जो यह साबित करें कि आप एक मेधावी छात्र हैं। वीजा इंटरव्यू के दौरान आपको केवल 2 से 3 मिनट का समय मिलता है जिसमें आपको इंटरव्यूअर को यह समझाना होता है कि आप अमेरिका क्यों जा रहे हैं, आप उस कोर्स को क्यों चुन रहे हैं और पढ़ाई पूरी करने के बाद आपके भारत लौटने के क्या इरादे हैं। अमेरिका का कानून यह मांग करता है कि हर स्टूडेंट वीजा आवेदक को यह साबित करना होगा कि उसकी जड़ें अपने देश में मजबूत हैं और वह पढ़ाई के बाद वापस लौट आएगा।वीजा इंटरव्यू के दौरान अक्सर छात्र घबरा जाते हैं और रटी-रटाई बातें बोलने लगते हैं, जिसे अमेरिकी अधिकारी तुरंत भांप लेते हैं। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि छात्रों को मॉक इंटरव्यू (Mock Interviews) की भरपूर प्रैक्टिस करनी चाहिए। आपको अपने भविष्य के करियर गोल्स को लेकर पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए। यदि आप इंटरव्यू में आत्मविश्वास के साथ, बिना किसी हिचकिचाहट के अपने सवालों के सटीक जवाब देते हैं, तो वीजा मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। झूठे दस्तावेज या किसी भी प्रकार की गलत जानकारी देने की भूल कभी न करें, क्योंकि एक बार रिकॉर्ड खराब होने पर भविष्य में अमेरिका का वीजा मिलना लगभग असंभव हो जाता है।चौथी सलाह: प्लान-बी हमेशा तैयार रखें, यूरोप और अन्य विकल्पों पर भी विचार करेंएक्सपर्ट्स की चौथी और सबसे व्यावहारिक सलाह यह है कि कभी भी अपने सभी अंडे एक ही टोकरी में न रखें। यदि अमेरिका जाने का आपका सपना प्रशासनिक अड़चनों या वित्तीय कारणों से पूरा नहीं हो पा रहा है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपके उच्च शिक्षा के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं। आज के समय में जर्मनी, फ्रांस, यूके, आयरलैंड, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को उच्च स्तर की शिक्षा और बेहतरीन करियर के अवसर प्रदान कर रहे हैं। इन देशों में वीज़ा और पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट के नियम कई मायनों में अमेरिका की तुलना में अधिक स्पष्ट और छात्र-अनुकूल हैं। एक समझदार छात्र वही होता है जो हमेशा एक मजबूत 'प्लान-बी' तैयार रखता है ताकि किसी एक देश के नियमों में बदलाव से उसका पूरा भविष्य दांव पर न लगे।अंत में यही कहा जा सकता है कि ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका में स्टूडेंट वीजा हासिल करना भले ही अधिक कठिन हो गया हो, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि भारतीय छात्र अपने 'अमेरिकन ड्रीम' को पूरी तरह से भूल जाएं। जरूरत इस बात की है कि छात्र भावनाओं में बहकर फैसले लेने के बजाय पूरी तरह से रिसर्च करके, अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत रखकर और कानूनी रूप से सभी पैमानों पर खरे उतरते हुए आगे बढ़ें। सही मार्गदर्शन, पुख्ता तैयारी और मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि के दम पर आज भी अमेरिका में सफलता के शिखर को छुआ जा सकता है, बशर्ते आप हर चुनौती का सामना करने के लिए मानसिक और कागजी तौर पर पूरी तरह से तैयार हों।
फरीदाबाद में दोस्त से बातें कर रहे 7वीं के छात्र पर खतरनाक पिटबुल कुत्ते का खौफनाक हमला
देशभर में खतरनाक नस्ल के कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है और एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के फरीदाबाद से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। फरीदाबाद में अपने ही एक दोस्त से सामान्य बातचीत कर रहे 7वीं कक्षा के मासूम छात्र पर एक आक्रामक पिटबुल कुत्ते ने अचानक पीछे से जानलेवा हमला कर दिया। इस खौफनाक हमले में कुत्ते ने छात्र के शरीर पर एक-दो नहीं बल्कि पूरे 16 अलग-अलग जगहों पर बुरी तरह से काटा और नोच डाला। इस अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और किसी तरह स्थानीय लोगों ने लाठी-डंडों की मदद से कुत्ते के चंगुल से बच्चे को छुड़ाया। गंभीर रूप से घायल छात्र को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में पालतू कुत्तों के मालिकों के प्रति भारी गुस्सा और दहशत का माहौल देखने को मिल रहा है।घटना के बारे में मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्र शाम के वक्त अपने एक दोस्त के घर के बाहर खड़ा होकर उससे सामान्य बातें कर रहा था। उसी दौरान पड़ोसी का पालतू पिटबुल कुत्ता अचानक बिना किसी उकसावे के वहां आ गया और उसने सीधे मासूम बच्चे पर हमला बोल दिया। पिटबुल नस्ल की ताकत और आक्रामकता इतनी अधिक होती है कि एक बार जब वह किसी पर हमला कर देता है, तो उसे छुड़ाना बेहद मुश्किल हो जाता है। कुत्ता लगातार बच्चे को खींचता रहा और उसके शरीर के अलग-अलग हिस्सों को अपने नुकीले दांतों से काटता रहा। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर दौड़े और बड़ी मशक्कत के बाद कुत्ते के जबड़े से बच्चे को आजाद कराया। यदि समय पर लोग वहां न पहुंचते, तो यह हादसा और भी ज्यादा भयानक रूप ले सकता था।अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा मासूम, शरीर पर गहरे जख्मों के निशानइस डरावने हमले में बुरी तरह जख्मी हुए 7वीं कक्षा के छात्र को तुरंत एक बड़े निजी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर पर 16 से अधिक गंभीर घाव हैं। कुत्ते ने उसके हाथों, पैरों, चेहरे और शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्सों को बुरी तरह से क्षत-विक्षत कर दिया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी जान बचाने की कोशिश में जुटी हुई है और कई टांके लगाए गए हैं। अत्यधिक खून बह जाने के कारण और गहरे जख्मों के गहरे दर्द के चलते बच्चा गहरे सदमे में है। अस्पताल के बाहर मौजूद परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे इस बात से बेहद आक्रोशित हैं कि आखिर इस तरह के खतरनाक और जानलेवा कुत्तों को रिहायशी इलाकों में पालने वाले लोग सुरक्षा नियमों को लेकर इतने लापरवाह क्यों बने हुए हैं।परिजनों और स्थानीय लोगों ने इस मामले की शिकायत तुरंत संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने पीड़ित परिवार के बयानों के आधार पर पिटबुल के मालिक के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार पहले भी उस मालिक को चेतावनी दी थी कि उनका कुत्ता बहुत आक्रामक है और उसे बाहर निकालते समय हमेशा मुंह पर जाली (Muzzle) लगानी चाहिए, लेकिन मालिक की लगातार लापरवाही के कारण आज एक मासूम बच्चे को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही बरतने वाले मालिक को बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।रिहायशी इलाकों में खतरनाक नस्ल के कुत्तों का आतंक और प्रशासन की ढिलाईफरीदाबाद की यह घटना कोई पहली ऐसी घटना नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग शहरों से आए दिन पिटबुल, रोटवाइलर और डोबरमैन जैसे खतरनाक नस्ल के कुत्तों द्वारा बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमलों की खबरें सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद न तो स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस और कड़े दिशा-निर्देश सख्ती से लागू किए जा रहे हैं और न ही पालतू जानवरों के मालिकों के भीतर कानून का कोई डर दिखाई दे रहा है। कई शहरों के नगर निगमों ने इन खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने पर प्रतिबंध लगाने या उनके लिए लाइसेंस अनिवार्य करने के नियम बनाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन कराने में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। लोग अपनी शानो-शौकत के लिए खतरनाक कुत्तों को छोटे-छोटे फ्लैट्स और कॉलोनियों में पालते हैं, जिससे आसपास रहने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा हमेशा खतरे में बनी रहती है।विशेषज्ञों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि पिटबुल जैसी नस्लें अपनी अत्यधिक आक्रामकता के लिए जानी जाती हैं और बिना उचित ट्रेनिंग तथा नियंत्रण के इन्हें रिहायशी बस्तियों में खुला छोड़ना किसी बम से खेलने जैसा है। जब तक सरकार और स्थानीय नगर निकाय इस मामले में कड़े दंड के प्रावधान और भारी जुर्माने लागू नहीं करते, तब तक इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाना मुमकिन नहीं होगा। जनता अब यह मांग कर रही है कि प्रशासन को तुरंत प्रभाव से ऐसे खतरनाक कुत्तों को पालने वाले सभी लोगों का वेरिफिकेशन करना चाहिए और जिन लोगों के पास अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन जानवरों को रेस्क्यू सेंटर भेजना चाहिए ताकि आम जनता सुरक्षित महसूस कर सके।पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग और नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशानइस पूरी दुर्घटना ने एक बार फिर से इस कड़वी सच्चाई को सामने ला दिया है कि हमारे शहरों में रहने वाले आम नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा आज कितनी भगवान भरोसे चल रही है। एक हंसता-खेलता बच्चा जो अपनी पढ़ाई और सामान्य जिंदगी में व्यस्त था, वह आज एक लापरवाह और खतरनाक कुत्ते के कारण अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कराह रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। यूजर्स लगातार मांग कर रहे हैं कि घायल बच्चे को और उसके परिवार को उचित मुआवजा मिलना चाहिए और लापरवाह कुत्ते के मालिक को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। समाज के हर वर्ग से यह आवाज उठ रही है कि अब समय आ गया है जब प्रशासन को सख्त रुख अपनाते हुए ऐसे मामलों में मिसाल कायम करने वाली सजा देनी चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति दूसरों की जिंदगी के साथ इस तरह का खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके।
गुरुग्राम के एक पॉश पीजी में चल रहा था हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट, पुलिस की अचानक रेड से मचा हड़कंप
देश के प्रमुख कॉर्पोरेट हब और साइबर सिटी के रूप में पहचाने जाने वाले गुरुग्राम से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। गुरुग्राम के एक पॉश इलाके में बने पेइंग गेस्ट यानी पीजी (PG) आवास के अंदर बड़े पैमाने पर अवैध सेक्स रैकेट का संचालन किया जा रहा था। स्थानीय पुलिस को पिछले काफी समय से इस संदिग्ध गतिविधि की गुप्त सूचना मिल रही थी, जिसके आधार पर पुलिस ने एक गुप्त योजना के तहत इस स्थान पर अचानक छापेमारी (Red) कर दी। पुलिस के इस अचानक एक्शन से वहां अफरा-तफरी मच गई और पूरे इलाके में हड़कंप सा मच गया। इस सनसनीखेज कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 8 महिलाओं समेत कुल 21 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।साइबर सिटी गुरुग्राम में रोजगार की तलाश में आने वाले युवाओं और छात्रों के लिए पीजी रहना एक आम बात है, लेकिन जब इस तरह के आवासीय परिसरों का इस्तेमाल आपराधिक और अनैतिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगता है, तो यह समाज और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस रैकेट का संचालन करने वाले लोग बेहद शातिर तरीके से इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहे थे। वे ऑनलाइन माध्यमों, सोशल मीडिया और विशेष तौर पर बनाए गए नेटवर्क्स के जरिए ग्राहकों से संपर्क करते थे और इस पीजी को सेफ जोन बताकर बाहरी लोगों का आना-जाना जारी रखते थे। स्थानीय लोगों को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस प्रशासन से की, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई।पुलिस की स्पेशल रेड और मौके पर मिला आपत्तिजनक सामानगुरुग्राम पुलिस के उच्च अधिकारियों को जब इस हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट के बारे में पक्की खबर मिली, तो एक विशेष टीम का गठन किया गया। योजना के तहत एक फर्जी ग्राहक को उस पीजी में भेजा गया ताकि अंदर चल रहे अवैध कारोबार का पुख्ता सबूत मिल सके। जैसे ही अंदर से हरी झंडी मिली, पुलिस बल ने पूरी इमारत को चारों तरफ से घेर लिया और अचानक रेड डाल दी। इस अचानक हुई छापेमारी से वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पुलिस ने कमरे की तलाशी के दौरान भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्रियां, नकदी, मोबाइल फोन और कई अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह धंधा काफी लंबे समय से और बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा था।हिरासत में लिए गए सभी 21 लोगों से पुलिस थाने में गहन पूछताछ की जा रही है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो इस पूरे नेटवर्क के मुख्य संचालक या दलाल बताए जा रहे हैं, साथ ही वे युवतियां भी हैं जिन्हें पैसों का लालच देकर इस दलदल में धकेला गया था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट के तार गुरुग्राम के अलावा दिल्ली-एनसीआर या अन्य पड़ोसी राज्यों से जुड़े हैं या नहीं। पूछताछ के दौरान कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे इस अवैध नेटवर्क के अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सकेगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।गुरुग्राम के पीजी और किराए के मकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालइस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर से गुरुग्राम में चल रहे पीजी और किराए के कमों की सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस वेरिफिकेशन और स्थानीय प्रशासन की निगरानी पर बहुत बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। नियमों के मुताबिक, हर पीजी संचालक के लिए यह अनिवार्य होता है कि वह वहां रहने वाले या आने-जाने वाले हर व्यक्ति का पुलिस सत्यापन (Police Verification) कराए और पूरी जानकारी स्थानीय थाने में दर्ज रखे। इसके बावजूद, कई मकान मालिक अधिक किराए के लालच में इस तरह के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हैं और बिना किसी कागजी कार्रवाई के लोगों को कमरे किराए पर दे देते हैं। इस प्रकार की लापरवाही अपराधियों और असमाजिक तत्वों के लिए एक सेफ हेवन तैयार कर देती है।स्थानीय रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और आम नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकार के पीजी और ओयो रूम्स की समय-समय पर औचक जांच की जानी चाहिए ताकि आवासीय क्षेत्रों की पवित्रता और सुरक्षा बनी रहे। लोगों का कहना है कि जब इस तरह के घिनौने धंधे रिहायशी इलाकों के बीचों-बीच चलने लगते हैं, तो वहां रहने वाले परिवारों और विशेष रूप से महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। पुलिस और नगर निगम को मिलकर एक ऐसा कड़ा तंत्र विकसित करना चाहिए जिससे बिना रजिस्ट्रेशन या बिना वेरिफिकेशन के चलने वाले ऐसे सभी अवैध अड्डों को तुरंत सील किया जा सके और उनके मालिकों के खिलाफ मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई की जा सके।मानव तस्करी और अनैतिक व्यापार के एंगल से भी हो रही है गहन जांचजांच एजेंसियों को इस बात की भी आशंका है कि इस सेक्स रैकेट के पीछे कोई बड़ा मानव तस्करी (Human Trafficking) का सिंडिकेट भी सक्रिय हो सकता है। कई बार गरीब और मजबूर परिवार की युवतियों को अच्छी नौकरी या ऊंचे वेतन का झांसा देकर बड़े शहरों में लाया जाता है और फिर उन्हें जबरन इस तरह के अनैतिक कार्यों में धकेल दिया जाता है। पुलिस इस एंगल से भी मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है कि पकड़ी गई महिलाओं की पृष्ठभूमि क्या है और उन्हें इस दलदल में किसने फंसाया था। यदि इस मामले में किसी बड़े संगठित गिरोह का हाथ पाया जाता है, तो पुलिस अन्य राज्यों में भी छापेमारी कर सकती है और इस अवैध कारोबार से जुड़े हर एक अपराधी को कानून के कटघरे में खड़ा करेगी।आने वाले दिनों में गुरुग्राम पुलिस इस तरह के मामलों में और अधिक सख्ती बरतने के संकेत दे रही है। शहर के सभी पुलिस स्टेशनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में चलने वाले पीजी, गेस्ट हाउस और होटल-लॉज की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें। नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि उनके आसपास किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अनजान लोगों का अत्यधिक आना-जाना दिखाई दे, तो वे तुरंत पुलिस को सूचना दें ताकि समय रहते ऐसे अपराधों को रोका जा सके। यह घटना एक बार फिर से यह याद दिलाती है कि समाज में सुरक्षा केवल पुलिस की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके प्रति हर नागरिक को भी जागरूक और सतर्क रहना बेहद आवश्यक है।
'बदला जरूर लेंगे...' PAK एयरस्ट्राइक पर भड़का अफगानिस्तान, मुनीर की सेना को दी धमकी
अफगान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान के हवाई हमलों की निंदा की. कुनार में तीन नागरिक मारे गए, पक्तिका में घर और दुकान पर हमला हुआ. उन्होंने उचित जवाब देने की बात कही.
हर समय परफेक्ट दिखने का दबाव? 'मिर्जापुर' एक्ट्रेस हर्षिता गौर ने बताया कैसे करती हैं डील
'मिर्जापुर' फेम एक्ट्रेस हर्षिता गौर ने बताया कि वह हर समय परफेक्ट दिखने के लगातार दबाव से कैसे निपटती हैं। आईएएनएस से खास बातचीत में हर्षिता ने कहा कि यह पूरी तरह से व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह दबाव लेना चाहता है या अपनी असलियत में सहज रहना चाहता है।
Delhi में बड़े नेताओं को SIR Notice के बाद ECI बोला- नहीं कटेंगे Voter List से नाम
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने कहा कि वोटर लिस्ट में सुधार के लिए चल रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) के दौरान कुछ वोटरों को भेजे गए नोटिस का मतलब यह नहीं है कि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे। यह स्पष्टीकरण तब आया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनसे पहले मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख हस्तियों को उनके फ़ॉर्म में गड़बड़ियों के कारण नोटिस भेजे गए। इसे भी पढ़ें: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में जेन जी ने एबीवीपी को जीताया, एनएसयूआई को छकाया, समझिए इसके राजनीतिक निहितार्थ मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय के अनुसार, जानकारी की पुष्टि के बाद मुख्यमंत्री का नाम वेरिफ़ाई किया गया। दिल्ली के पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया और BJP विधायक कैलाश गहलोत उन लोगों में शामिल थे जिन्हें उनकी जानकारी में गड़बड़ी के कारण नोटिस जारी किए गए थे। अन्य नामों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एसएस संधू शामिल थे। हालांकि, CEO ऑफिस ने साफ़ किया कि नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटा दिए जाएंगे। CEO ऑफिस ने कहा कि सभी संबंधित लोगों को सूचित किया जाता है कि नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि NCT दिल्ली की वोटर लिस्ट से उनके नाम हटा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बिना अपनी बात रखने का मौका दिए और उचित, तर्कपूर्ण और अपील करने योग्य आदेश के बिना किसी का नाम नहीं हटाया जा सकता। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इन नोटिसों से कोई अस्तित्व का संकट पैदा नहीं हो रहा है। इसे भी पढ़ें: राजस्थान में Ashok Gehlot का BJP पर आरोप, निकाय चुनाव में पुलिस का दुरुपयोग कर रही सरकार वोटर लिस्ट का ड्राफ़्ट उन जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया था जो वोटरों ने बूथ लेवल ऑफ़िसर्स (BLOs) को एन्यूमरेशन फ़ॉर्म के ज़रिए दी थीं। इसे 31 अगस्त को CEO दिल्ली की वेबसाइट पर पब्लिश किया गया था। यह लिस्ट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (ERO) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (AERO) के ऑफ़िस और तय किए गए पोलिंग स्टेशनों पर भी उपलब्ध है।
डुसू चुनाव: दीपांशु शौकीन क्या तुक्के में जीत गए? NSUI और ABVP को ऐसे दिया झटका
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में वाइस प्रेसीडेंट के पद पर निर्दलीय उम्मीदवार के दीपांशु शौकीन की जीत पर सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है. उनकी जीत ने चारों केंद्रीय पैनल के पदों पर एबीवीपी को क़ब्ज़ा करने से रोक दिया. तो क्या ये तुक्का था,
‘द रेवोल्यूशनरीज़’ में स्वतंत्रता सेनानी प्रतिभा लाहिड़ी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस प्रतिभा रांटा ने सीरीज में अपने किरदार के बारे में जानकारी दी है।
बिहार के जमुई में एक लड़की से बदसलूकी का मामला सामने आया है. लड़की अपने दोस्त के साथ घूमने निकली थी, तभी कुछ लड़कों ने उसे घेर लिया और फिर उसके साथ छेड़छाड़ की है. घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है.
सहारनपुर पीएनबी नकली नोट कांड: 17.29 करोड़ के नकली नोट मामले की जांच एनआईए को, दो नई गिरफ्तारियां
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के करेंसी चेस्ट से बरामद 17.29 करोड़ रुपये के नकली भारतीय नोटों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दो और प्रमुख आरोपियों मुकेश कुमार और राजेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, दोनों पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी आदेश चौधरी के करीबी सहयोगी हैं और करेंसी चेस्ट के जरिए नकली नोटों के प्रसार की साजिश से जुड़े प्रमुख आरोपी हैं।
Sixth Schedule की मांग पर Ladakh में तेज होगा आंदोलन, Sonam Wangchuk करेंगे 20 km मार्च
क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की एक सांकेतिक पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। यह यात्रा लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को दोहराने के लिए होगी। राज्य का दर्जा और आदिवासी पहचान को बचाने के लिए संविधान की छठी अनुसूची में क्षेत्र को शामिल करने की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत के एक साल बाद यह कदम उठाया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Manoj Sinha ने SMVDSB बैठक में कटरा के International Museum of Goddess की समीक्षा की वांगचुक के ऑफ़िस ने कहा कि 24 सितंबर को हुई आम नागरिकों की हत्याओं की पहली बरसी के मौके पर, अगले दिन मार्च के बाद शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। लद्दाख के नेता मारे गए लोगों के परिवारों के लिए उचित मुआवज़े और उनसे जुड़े मामलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। पिछले हफ़्ते, दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक बेनतीजा रहने के बाद वांगचुक और लद्दाख के दूसरे नेताओं ने 19 से 24 सितंबर तक नए आंदोलन की धमकी दी थी। हालांकि, मौसम की स्थिति को देखते हुए इस आंदोलन को रद्द कर दिया गया। लद्दाख प्रशासन ने मारे गए चार लोगों के परिवारों को ₹15-15 लाख और घायलों को ₹3-3 लाख का मुआवज़ा देने की घोषणा की। लेकिन वांगचुक ने पिछले हफ़्ते कहा कि वह इस रकम से खुश नहीं हैं। वांगचुक ने कहा कि इस मुआवज़े को देखकर मुझे खुशी नहीं हो रही है। बल्कि, शर्म से मेरा सिर झुक गया है। वांगचुक पर लद्दाख में हिंसा भड़काने का आरोप था, जिसके चलते उन्हें नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत छह महीने तक हिरासत में रखा गया था। इसे भी पढ़ें: आतंकी संगठनों में नहीं भर्ती हो रहे स्थानीय युवा, पत्थरबाजी और अलगाववाद बंद, घुसपैठ के सभी प्रयास विफल, Modi राज की सफलता को दर्शा रहे हैं J&K संबंधी ताजा आंकड़े 59 साल के वांगचुक पर 'अरब स्प्रिंग' जैसे विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ ज़िक्र करके लोगों को गुमराह करने का आरोप था। सरकार ने मार्च में सभी संबंधित पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत को आसान बनाने की ज़रूरत का हवाला देते हुए उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया। उनकी रिहाई सुप्रीम कोर्ट में उस 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई से कुछ दिन पहले हुई, जो 1980 के कानून के तहत एक्टिविस्ट की हिरासत को लेकर दायर की गई थी; इस कानून के तहत बिना ट्रायल के 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है।
यूपी चुनाव: 2 दिवसीय दौरे पर नितिन नवीन, सीएम योगी भी रहेंगे साथ
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करते हुए बीजेपी नेता नितिन नवीन का दो दिवसीय महत्वपूर्ण यूपी दौरा आज से शुरू हो रहा है. इस दौरे की शुरुआत मेरठ से होगी, जहां वे युवा सम्मेलन को संबोधित करेंगे. इसके अलावा वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शक्ति केंद्रों की अहम बैठक में भी हिस्सा लेंगे. नितिन नवीन अपने इस प्रवास के दौरान पार्टी के पूर्व पदाधिकारियों, वर्तमान सांसदों, विधायकों और सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे और आगे की रणनीतियों पर मंथन करेंगे.
16 साल की लड़की से हैवानियत, 56 साल के दुकानदार ने किया रेप
दिल्ली के सदर बाजार में 16 साल की नाबालिग लड़की से रेप के आरोप में 56 वर्षीय दुकानदार मकसूद को गिरफ्तार किया गया है. घटना 16 सितंबर की बताई जा रही है. आरोप है कि स्टेशनरी खरीदने निकली लड़की को मकसूद बहला-फुसलाकर दुकान में ले गया, जहां उसके हाथ-पैर बांधकर यौन उत्पीड़न किया.
Cockroach found dining table Mumbai 5-star hotel Dr. Seth sent video Tukaram Mundhe; find out what was said.
MNS की गुंडागर्दी: इन्फ्लुएंसर का मुंह काला कर सिर पर रखवाई चप्पल
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर महेश मोटे का चेहरा कथित तौर पर काला करने और उन्हें माफी मांगने के लिए मजबूर करने का आरोप है. MNS नेताओं ने आरोप लगाया कि मोटे ने राज ठाकरे के खिलाफ आपत्तिजनक और व्यक्तिगत टिप्पणियां की थीं.
'आजा गुफाओं में आ' के बारे में रवीना टंडन ने दूर की गलतफहमी, बोलीं- इसे हॉरर फॉर्मेट देना गलत
अभिनेत्री रवीना टंडन ने अपनी फिल्म अक्स के गाने 'आजा गुफाओं में आ' के रीक्रिएशन पर ऐतराज जताया और इसे हॉरर सॉन्ग मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि यह गीत डरावना नहीं, बल्कि बेहद खूबसूरत और महिलाओं की शक्ति को दर्शाने वाला गीत है।
'वंदे मातरम्' पर कर्नाटक में हंगामा, 2 स्टैंजा बाद रुका ऑडियो तो BJP ने पूरा गाया
कर्नाटक विधानसभा में 'वंदे मातरम्' का ऑडियो दो स्टैंजा के बाद रोक दिया गया. इसके बाद बीजेपी विधायकों ने बाकी स्टैंजा खुद गाना शुरू कर दिया. पूरा मामला राज्य सरकार के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में पहले दो स्टैंजा गाने की व्यवस्था की गई है.
यहां मेन्यू नहीं, आपकी Pulse बताएगी कौन सी कॉकटेल पीनी है!
चीन के शंघाई में एक ऐसा बार चर्चा में है, जहां कॉकटेल ऑर्डर करने से पहले ग्राहकों की पल्स चेक की जाती है. इसके बाद उसके पल्स के आधार पर जड़ी-बूटियों और दूसरी चीजों से खास कॉकटेल तैयार की जाती है.

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