Dehradun के थानी गांव में महिलाओं ने Drugs के खिलाफ लाठी थामकर रातभर पहरा दिया
ध्रुव मिश्रादेहरादून, 28 अगस्त देहरादून के ओल्ड मसूरी रोड पर बसे थानी गांव में शाम ढलते ही एक असामान्य तस्वीर दिखाई देती है। जिन हाथों में दिनभर घर की जिम्मेदारियां होती हैं, उन्हीं हाथों में रात होते-होते लाठियां आ जाती हैं। कोई महिला खाना बनाकर निकली है, तो कोई बच्चों को सुलाकर और कोई नौकरी से लौटने के बाद लाठियां थामे सड़क पर आ गई है। इनका मकसद एक है - अपने गांव की गलियों को नशे के कारोबार से बचाना। गांव में शाम के बाद किसी भी अनजान व्यक्ति को रोककर वे कुछ आसान सवाल पूछती हैं, जैसे - आप कहां जा रहे हैं, आप किससे मिलने आए हैं और आप यहां क्यों आए हैं। इतना ही नहीं संदेह होने पर उन्हें आगे जाने से रोक दिया जाता है। पहाड़ियों के बीच बसा थानी गांव पहली नजर में शांत और खूबसूरत इलाका लगता है। चारों ओर हरियाली, ठंडी हवा और शांत गलियां हैं। लेकिन इसी खूबसूरती के बीच लगा एक पोस्टर यहां की दूसरी कहानी सुनाता है। इस पोस्ट पर लिखा है, ‘‘भांग-गांजा प्रतिबंधित है। बेचने और खरीदने वालों पर कार्रवाई हो सकती है।’’इसी पोस्टर के आसपास कई बार महिलाएं लाठी-डंडे लेकर पहरा देती दिखाई देती हैं। उन्हें जो भी संदिग्ध लगता है, उसे रोककर पूछताछ करती हैं और जिनके बारे में लगता है कि वे मादक पदार्थ के लिए गांव की ओर जा रहे हैं, उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया जाता है। यह किसी सरकारी अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं द्वारा ‘नारी जागृति संगठन’ के बैनर तले शुरू की गई निगरानी व्यवस्था है। स्थानीय निवासी सुधा बधानी बताती हैं कि एक समय स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित होने लगा था। उन्होंने कहा, ‘‘सड़क पर आना मुश्किल हो गया था। हम टहलने तक नहीं निकल पाते थे। बच्चे दुकानों तक नहीं जा सकते थे। बाहर निकलने में डर लगता था।’’महिलाओं का दावा है कि पास की एक बस्ती में लंबे समय से नशीले पदार्थ बिकने की शिकायतें रही हैं और इन्हें खरीदने आने वाले लोग थानी गांव की सड़क का इस्तेमाल रास्ते के रूप में करते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान समस्या और बढ़ी। शुरुआत में महिलाओं ने कार्रवाई के लिए पुलिस और प्रशासन से संपर्क किया। शिकायतें की गईं और आवेदन दिए गए। हालांकि, सुधा बताती हैं कि जब हालात नहीं सुधरे तो महिलाओं ने खुद पहरा देने का फैसला किया। वह कहती हैं, ‘‘पहले लगा कि यह हमारा काम नहीं बल्कि पुलिस-प्रशासन का है। लेकिन जब पानी सिर के ऊपर चला गया तो हमें खुद निकलना पड़ा।’’करीब दो महीने पहले शुरू हुआ यह अभियान अब गांव की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। महिलाओं की अलग-अलग टोलियां निगरानी करती हैं। किसी संदिग्ध व्यक्ति के दिखते ही महिलाओं के व्हाट्सएप समूह में संदेश जाता है, ‘‘सब पहुंचो।’’इसके बाद जो महिला जहां होती है, अपना काम छोड़कर निकल पड़ती है। इस मुहिम में करीब 20 साल की युवतियों से लेकर 60-70 साल की महिलाएं तक शामिल हैं। दिन में घर संभालने वाली महिलाएं शाम की जिम्मेदारी लेती हैं, जबकि नौकरीपेशा महिलाएं रात में पहरा देती हैं। कभी यह निगरानी आधी रात तक चलती है और कभी उससे भी आगे। स्थानीय निवासी ललित धीमान बताते हैं कि इसके लिए लगभग पाली जैसी व्यवस्था बन गई है। उनका दावा है कि अभियान के शुरुआती दिनों में एक दिन में 100 तक लोगों को इलाके में जाने से रोका गया, हालांकि अब संख्या काफी कम हो गई है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों को लेकर है। अनसुइया रौतेला कहती हैं, ‘‘हम सब मां हैं। हम नहीं चाहते कि किसी दूसरी मां के बच्चे की जिंदगी भी नशे की वजह से खराब हो।’’उनका कहना है कि कई बार महिलाओं को अपशब्द सुनने पड़ते हैं, धमकियां मिलती हैं और झगड़े का खतरा भी रहता है, लेकिन वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रौतेला ने कहा, ‘‘एक साल लगे या दो साल, हम इसे पूरी तरह खत्म होने तक जारी रखेंगे।’’‘नारी जागृति संगठन’ की अध्यक्ष सुनीता शर्मा कहती हैं कि स्थिति तब गंभीर हो गई जब बच्चों और बुजुर्गों का सड़क पर निकलना मुश्किल होने लगा। उनका आरोप है कि कुछ लोग घरों तक पहुंचकर नशे के बारे में पूछने लगे थे। इसके बाद महिलाओं ने बैठक कर संगठन बनाया और निगरानी शुरू की। गांव की निवासी रीता का कहना है कि विरोध के कारण महिलाओं को गालियां और धमकियां भी मिलती हैं और उनके बीच विवाद पैदा करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि अगर हम आपस में टूट गए तो यह मुहिम भी टूट जाएगी।’’महिलाएं यह भी स्पष्ट करती हैं कि वे पुलिस की जगह लेने नहीं निकली हैं। पुलिस की गश्त और कार्रवाई होती रही है और कुछ संदिग्ध लोगों को पुलिस के हवाले भी किया गया है। फिर भी सवाल बना हुआ है कि किसी गांव की महिलाओं को अपने बच्चों, घरों और गलियों को सुरक्षित महसूस कराने के लिए आधी रात तक पहरा क्यों देना पड़ रहा है? थानी की महिलाएं मानती हैं कि सिर्फ नशीले पदार्थ बेचने वालों पर कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। जब तक नशे की मांग रहेगी, कोई न कोई नया रास्ता तलाश लिया जाएगा। इसलिए उनकी निगरानी खरीदने और बेचने वाले दोनों पर है।
Amit Thackeray की कैब ड्राइवरों को चेतावनी, कहा- मराठी नहीं बोली तो होगी पिटाई
मराठी भाषा के नियम को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे ने चेतावनी दी है कि जो ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर सिर्फ़ हिंदी में बात करने की ज़िद करेंगे, उनकी पिटाई की जाएगी। MNS नेता का यह बयान तब आया जब महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों को काम-काज लायक मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ड्राइवर संगठनों के प्रतिनिधियों ने और समय की मांग की थी, क्योंकि इस सेक्टर में अलग-अलग उम्र और शिक्षा-दीक्षा वाले लोग काम करते हैं। MNS प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने कहा कि अगर ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों के हिंदी में बात करने या यात्रियों के साथ बदतमीज़ी से पेश आने की शिकायतें मिलीं, तो उनकी पार्टी कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा अगर हमें पता चला कि कोई ऑटो-रिक्शा ड्राइवर हिंदी में बात कर रहा है या बदतमीज़ी से पेश आ रहा है, तो हम उसकी पिटाई करेंगे। अगर आप लोगों को परेशान करेंगे, तो आपकी पिटाई होगी। लोगों से यह मत कहिए कि उन्हें UP की भाषा या हिंदी बोलनी होगी। हम मराठी में बात करेंगे। इतना तो आप समझते ही होंगे। इसे भी पढ़ें: मराठी अस्मिताबोध की नई अभिव्यक्ति ठाकरे ने कामकाज के लायक मराठी सीखने के लिए एक साल का समय और देने के फ़ैसले को लेकर भी फडणवीस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठी भाषा के बजाय उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से जुड़ी राजनीतिक बातों को ज़्यादा अहमियत दी जा रही है। उन्हें 10 साल का एक्सटेंशन दें। उन्हें 15 साल का एक्सटेंशन दें। हम समझ गए हैं कि आपको मराठी भाषा और हमारे राज्य से कितना लगाव है। ठाकरे ने आगे कहा आप गुजरात, पंजाब या दक्षिण भारत में जाएं - हर जगह लोग अपनी भाषा से जुड़े होते हैं। अब, क्योंकि यूपी में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए आप एक साल का एक्सटेंशन दे रहे हैं। इसे भी पढ़ें: अब Mumbai के Taxi-Auto Drivers को मराठी सीखने के लिए पूरे 365 दिन, Fadnavis का फैसला यह एक साल का एक्सटेंशन ऐसे समय में दिया गया है जब राज्य सरकार के ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के नियम को कानूनी चुनौती दी गई है। चार कैब ड्राइवरों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी है। महाराष्ट्र सरकार ने 12 अगस्त से कमर्शियल पैसेंजर गाड़ियों के ड्राइवरों - जिनमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवर शामिल हैं - के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया था।
‘अगली बार वोट मांगने आऊंगा तो पानी नहीं भरेगा’, अमित शाह का वादा
गांधीनगर सांसद अमित शाह ने बोपल, घुमा, आंबली और शेला इलाकों में जुलाई की बारिश से हुए जलभराव पर लोगों से मुलाकात की. उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगली बार वोट मांगने से पहले यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी और 30 इंच बारिश में भी पानी नहीं भरेगा.
भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र और अनूठे रिश्ते को समर्पित रक्षाबंधन का पावन पर्व इस साल देश भर में बहुत ही धूमधाम, हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। आम नागरिकों से लेकर देश की बड़ी-बड़ी फिल्मी हस्तियों और राजनीतिक दिग्गजों तक ने इस त्योहार को अपने परिवार के साथ बेहद खास अंदाज में सेलिब्रेट किया। इसी कड़ी में बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री, बेबाक बयानों के लिए पहचानी जाने वाली और हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत ने भी अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन का यह पर्व बहुत ही सादगी और पारम्परिक तरीके से मनाया। कंगना रनौत ने अपने सगे भाई अक्षत रनौत की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान अभिनेत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इस पारिवारिक उत्सव की कुछ बेहद मनमोहक और खूबसूरत तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें भाई-बहन के बीच का अगाध स्नेह और पारंपरिक भारतीय संस्कृति की एक बहुत ही प्यारी झलक साफ तौर पर दिखाई दे रही है। कंगना द्वारा लिखी गई भावुक बातें और शेयर की गई तस्वीरें इस समय इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही हैं और उनके चाहने वाले इस पोस्ट पर जमकर प्यार बरसा रहे हैं।पारंपरिक अंदाज में सजे परिवार के साथ मनाया रक्षाबंधनकंगना रनौत अपनी संस्कृति, जड़ों और पारिवारिक संस्कारों से बेहद गहराई से जुड़ी हुई हैं, और यह बात उनके हर त्योहार मनाने के तरीके में साफ झलकती है। रक्षाबंधन के इस खास अवसर पर कंगना ने पूरी तरह से पारंपरिक भारतीय पहनावा चुना, जो उनके इस पर्व के प्रति सम्मान को दर्शाता है। हिमाचल की वादियों और अपनी पारिवारिक जड़ों के बीच मनाए गए इस उत्सव में घर का माहौल बेहद खुशनुमा और आत्मीय नजर आ रहा था। अभिनेत्री ने अपने भाई अक्षत रनौत को तिलक लगाकर, आरती उतारकर और कलाई पर सुंदर राखी बांधकर रक्षाबंधन की परंपराओं का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया। इस दौरान घर के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पारिवारिक मिलन को और अधिक खास बना दिया। आधुनिकता की दौड़ में जहां आज के समय में कई लोग त्योहारों को केवल एक औपचारिकता की तरह मनाते हैं, वहीं कंगना रनौत का इस तरह अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव दिखाना उनके प्रशंसकों को बहुत पसंद आ रहा है और वे इसकी खूब सराहना कर रहे हैं।भाई अक्षत के लिए लिखा गया वह भावुक और दिल छू लेने वाला संदेशइस रक्षाबंधन के पावन अवसर पर कंगना रनौत ने अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोते हुए सोशल मीडिया पर एक ऐसा दिल छू लेने वाला संदेश लिखा, जिसने पढ़ने वाले हर शख्स की आंखें नम कर दीं। कंगना ने अपने भाई अक्षत के लिए लिखा कि मेरे प्यारे भाई, तुम मेरे लिए केवल एक भाई नहीं हो, बल्कि तुम मेरे जीवन में माता-पिता की छवि हो, जिन्होंने हर मुश्किल वक्त में मेरा साथ दिया और एक मजबूत छांव की तरह मेरी रक्षा की। अभिनेत्री ने यह भी लिखा कि जीवन के उतार-चढ़ाव और तमाम संघर्षों के बीच भाई-बहन का यह अटूट रिश्ता ही सबसे बड़ी ताकत बनता है। उनके द्वारा कहे गए इन शब्दों ने साबित कर दिया कि परदे पर भले ही कंगना एक दबंग और बेबाक छवि रखती हों, लेकिन अपने परिवार और भाई के प्रति उनका कोमल और समर्पित रूप बेहद अनमोल है। यह भावुक पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी और लोगों ने इसे भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की सबसे बेहतरीन परिभाषा बताया।सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें और फैंस का जोरदार रिएक्शनकंगना रनौत द्वारा शेयर की गई इन पारिवारिक तस्वीरों को इंटरनेट पर कुछ ही घंटों में लाखों लाइक्स और कमेंट्स मिल चुके हैं। उनके फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स लगातार इन तस्वीरों पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और कंगना तथा उनके भाई अक्षत को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर इस तरह अपनी जड़ों और परिवार के साथ त्योहार मनाना यह सिखाता है कि सफलता के कितनी भी ऊंचाई पर पहुंच जाओ, अपनों का साथ ही असली पूंजी होता है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि कंगना और उनके भाई का यह पारंपरिक अंदाज वाकई में दिल जीतने वाला है। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद से ही यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग एक बार फिर से भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की इस खूबसूरती की मिसाल दे रहे हैं।पारिवारिक बंधन और जीवन के संघर्षों में भाई का साथकंगना रनौत ने अपने अब तक के फिल्मी और राजनीतिक सफर में कई बड़े तूफानों और संघर्षों का सामना किया है, और हर मुश्किल मोड़ पर उनके परिवार, विशेष तौर पर उनके भाई-बहनों ने चट्टान की तरह उनका साथ दिया है। कंगना अक्सर यह मानती हैं कि उनकी सफलता के पीछे उनके परिवार का वह नैतिक समर्थन है, जो उन्हें कभी टूटने नहीं देता। रक्षाबंधन के इस बहाने एक बार फिर से यह देखने को मिला कि कैसे एक सार्वजनिक हस्ती होने के बावजूद वे अपने निजी रिश्तों को कितनी प्राथमिकता देती हैं। भाई अक्षत के साथ उनकी यह बॉन्डिंग इस बात का प्रतीक है कि चाहे दुनिया में कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, अपनों के लिए समय निकालना और संस्कृति को संजोकर रखना ही असली जीवन है। यह प्यारा सा उत्सव और संदेश आने वाले समय में भी लोगों को परिवार के महत्व को समझाने की प्रेरणा देता रहेगा।
भारतीय राजनीति के फलक पर जब भी देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों, वैचारिक पुरुषों और राष्ट्र निर्माताओं की बात आती है, तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम सबसे शीर्ष पर लिया जाता है। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बेहद महत्वपूर्ण और वैचारिक कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी के जीवन दर्शन, उनके विचारों और देश के प्रति उनके अगाध प्रेम को याद करते हुए एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। गृह मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि महात्मा गांधी केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के ही पैरोकार नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, उसकी मूल आत्मा और नैतिक मूल्यों के भी सबसे बड़े रक्षक थे। बापू के जीवन के एक बेहद गहरे और अनछुए पहलू को सामने रखते हुए अमित शाह ने कहा कि महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में स्पष्ट रूप से यह माना था कि जबरन या प्रलोभन देकर किया जाने वाला धर्म परिवर्तन समाज के लिए एक गंभीर पाप और नैतिक पतन के समान है। गृह मंत्री के इस ओजस्वी और विचारोत्तेजक भाषण के बाद से देश भर के वैचारिक गलियारों और राजनीतिक मंचों पर महात्मा गांधी के उन विचारों पर एक बार फिर से गंभीर चर्चा शुरू हो गई है, जिन्हें आज की आधुनिक और बदलती हुई दुनिया में प्रासंगिक माना जा रहा है।महात्मा गांधी का वैचारिक फलसफा और धर्म की परिभाषामहात्मा गांधी के विचारों का दायरा केवल अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन या अहिंसा के सत्याग्रह तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका समाज सुधार का दृष्टिकोण बहुत ही व्यापक और गहरा था। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान बापू के उन संस्मरणों को याद किया जिसमें उन्होंने धर्म और अध्यात्म को लेकर अपनी बेहद स्पष्ट और खरी राय रखी थी। बापू का हमेशा से यह मानना था कि हर व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और अपने मार्ग पर चलने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन किसी भी प्रकार का लालच देकर, धोखे से या वैचारिक दबाव बनाकर किसी का धर्म परिवर्तन कराना न केवल मानवीय मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि यह देश की सामाजिक समरसता को तोड़ने का भी एक कुत्सित प्रयास है। महात्मा गांधी ने अपने दौर में भी इस बात की पुरजोर वकालत की थी कि असली धर्म इंसानियत, सत्य और प्रेम सिखाता है, न कि जबरन थोपे गए वैचारिक बदलाव। गृह मंत्री ने आज की पीढ़ी को यह याद दिलाया कि हमें बापू के इन मूल सिद्धांतों को समझकर समाज में आपसी भाईचारा और सांस्कृतिक सुरक्षा को बनाए रखना चाहिए।सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता पर गृह मंत्री का जोरआज के समय में जब देश और दुनिया विभिन्न प्रकार के वैचारिक संघर्षों और सांस्कृतिक पहचान की बहसों से गुजर रही है, तब देश के गृह मंत्री द्वारा महात्मा गांधी के विचारों को इस रूप में सामने लाना बहुत बड़ा संदेश देता है। अमित शाह ने अपने भाषण में विस्तार से बताया कि कैसे महात्मा गांधी ने हमेशा देश के हर वर्ग, हर जाति और हर संप्रदाय के लोगों को एक सूत्र में पिरोकर रखने का ऐतिहासिक कार्य किया था। उन्होंने देश की विविधता को उसकी सबसे बड़ी ताकत माना और कभी भी ऐसी ताकतों को बर्दाश्त नहीं किया जो समाज के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करना चाहती हों। गृह मंत्री ने कहा कि बापू का सपना एक ऐसे भारत का निर्माण करना था जहां हर नागरिक बिना किसी डर और प्रलोभन के अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ गर्व से जी सके। उनके द्वारा धर्म परिवर्तन को लेकर कही गई बातें इस बात का प्रमाण हैं कि वे भारतीय संस्कृति की जड़ों से कितनी गहराई से जुड़े हुए थे और वे देश की आत्मा को किसी भी बाहरी या आंतरिक दबाव के आगे झुकने देना नहीं चाहते थे।राजनीतिक परिदृश्य और बयानों के गहरे निहितार्थअमित शाह द्वारा महात्मा गांधी के इन विचारों का सार्वजनिक मंच से जिक्र किए जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके विचार परिवार ने हमेशा से देश के उन महापुरुषों और नायकों को आगे बढ़ाने का काम किया है जिन्होंने राष्ट्रवादी सोच और भारतीय मूल्यों की रक्षा की है। ऐसे में गृह मंत्री द्वारा बापू के विचारों को इस स्पष्टता के साथ रखना यह साबित करता है कि राष्ट्रपिता के विचार किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं हैं, बल्कि वे पूरे देश की साझा विरासत हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के बयानों से देश की युवा पीढ़ी को यह समझने में आसानी होती है कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का असली दृष्टिकोण क्या था और उन्होंने किस प्रकार के स्वतंत्र, स्वाभिमानी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत का सपना देखा था। यह बयान वर्तमान समय में चल रही तमाम सामाजिक और धार्मिक बहसों के बीच एक वैचारिक दिशा देने का कार्य कर रहा है।देश की युवा पीढ़ी के लिए बापू के संदेश की प्रासंगिकताआज की आधुनिक और रफ्तार भरी दुनिया में जहाँ युवा सोशल मीडिया और पश्चिमी प्रभावों के बीच अपनी पहचान तलाश रहे हैं, वहाँ महात्मा गांधी के जीवन के ये नैतिक और वैचारिक मूल्य एक मजबूत मार्गदर्शक का काम करते हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने इस संबोधन के अंत में देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे बापू के जीवन से सत्य, अहिंसा, नैतिक साहस और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना को अपने जीवन में उतारें। जब तक देश का युवा अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा और समाज विरोधी ताकतों के बहकावे में नहीं आएगा, तब तक भारत विश्व गुरु बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ता रहेगा। महात्मा गांधी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वे आजादी के आंदोलन के समय थे, और गृह मंत्री द्वारा उन्हें याद किया जाना इस बात की याद दिलाता है कि हमें एक मजबूत, संगठित और नैतिक रूप से सशक्त भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
बनिहाल में कश्मीरी बहनों ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी
जब देशभर में रक्षाबंधन मनाया जा रहा था, तब सीमा पर तैनात जवान हजारों किलोमीटर दूर अपने परिवारों से दूर ड्यूटी निभा रहे थे. इसी बीच जम्मू-कश्मीर के बनिहाल से आई कुछ तस्वीरों ने इस त्योहार के रिश्ते को एक अलग ही भावनात्मक रंग दे दिया.
Nepal Floods: फंसे नागरिकों की मदद के लिए Sikkim ने Task Force गठित किया
सिक्किम सरकार ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित राज्य के उन लोगों को राहत और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक कार्य बल का गठन किया है, जो वहां फंसे या लापता हो सकते हैं। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक प्रभाकर राय की अध्यक्षता वाला कार्य बल केंद्र सरकार, नेपाल स्थित भारतीय दूतावास और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर आपदा से प्रभावित राज्य के लोगों के बारे में जानकारी जुटाएगा। अधिकारी ने बृहस्पतिवार को जारी अधिसूचना के हवाले से कहा, ‘‘यह कार्य बल घटना में लापता, फंसे, घायल, मृत या किसी अन्य रूप से प्रभावित बताए गए लोगों के बारे में जानकारी एकत्र, संकलित और सत्यापित करेगा।’’उन्होंने कहा कि कार्य बल प्रभावित सिक्किम निवासियों के परिवारों के साथ संपर्क स्थापित करेगा और उनकी स्थिति तथा ठिकाने के बारे में सत्यापित जानकारी के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करेगा। मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 हो गई। अधिकारियों ने और शव बरामद किए हैं। अब तक प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों से 1,545 घायल और फंसे लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें से 84 का काठमांडू के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। नेपाल पुलिस के एक बयान के अनुसार, त्रासदी के तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है, जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं। बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से हिमस्खलन हुआ, जिससे पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव मध्य नेपाल के इलाकों में फैल गया। इससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई तथा मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।
भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों में शुमार गांधी परिवार से जुड़ी एक बहुत ही बड़ी और चौंकाने वाली खबर इस समय पब्लिशिंग इंडस्ट्री से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से एक कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा, जिसका शीर्षक 'बिलॉन्गिंग...' (Belonging...) तय किया गया था, उसे देश के जाने-माने और प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया' (Penguin Random House India) द्वारा छापने से आधिकारिक तौर पर इनकार कर दिया गया है। जैसे ही यह खबर बाहर आई, वैसे ही साहित्यिक और राजनीतिक जगत में अटकलों का बाजार गर्म हो गया कि आखिर किस वजह से इतनी बड़ी हस्ती की बायोग्राफी को पब्लिश करने से एक शीर्ष प्रकाशन हाउस ने कदम पीछे खींच लिए। इस पूरी घटना के बाद से भारतीय राजनीति के गलियारों में और मीडिया के विभिन्न मंचों पर यह बहस छिड़ गई है कि क्या इस निर्णय के पीछे कोई अंदरूनी राजनीतिक दबाव है या फिर पब्लिशिंग कॉन्ट्रैक्ट और कमर्शियल शर्तों से जुड़े कानूनी पेच जिम्मेदार हैं, जिसने इस किताब के बाजार में आने से पहले ही इसे विवादों के घेरे में ला खड़ा किया है।सोनिया गांधी की आत्मकथा और 'बिलॉन्गिंग...' का सफरसोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन, उनके इटली से भारत आने, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से विवाह, इंदिरा गांधी के सानिध्य में राजनीति के गुर सीखने और फिर पति की असमय हत्या के बाद कांग्रेस पार्टी की कमान अपने हाथों में लेने का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा है। उनके जीवन के इन अनछुए पहलुओं और ऐतिहासिक राजनीतिक उतार-चढ़ावों को जानने के लिए देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के राजनीतिक विश्लेषक और पाठक लंबे समय से उत्सुकता से इस आत्मकथा का इंतजार कर रहे थे। 'बिलॉन्गिंग...' नामक इस पुस्तक में उनके निजी जीवन के संघर्षों के साथ-साथ भारतीय लोकतंत्र के कई बड़े फैसलों के पीछे की अंदरूनी कहानियों के होने की उम्मीद जताई जा रही थी। एक ऐसी हस्ती की किताब, जिसके एक इशारे पर देश की राजनीति की दिशा बदल जाती हो, उसका पब्लिशिंग जगत में इस तरह से अटक जाना अपने आप में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है।पेंगुइन इंडिया के इनकार के पीछे की असली वजह क्या है?जब दुनिया के सबसे बड़े पब्लिशर्स में शुमार पेंगुइन इंडिया ने सोनिया गांधी की इस महत्वपूर्ण आत्मकथा को प्रकाशित करने से मना किया, तो इसके कारणों को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। शुरुआती रिपोर्ट्स और अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस निर्णय के पीछे मुख्य रूप से संपादकीय मतभेद, पांडुलिपि (Manuscript) के दायरे और कानूनी-व्यापारिक शर्तों को लेकर असहमतियां बताई जा रही हैं। पब्लिशिंग हाउस और लेखक या उनके प्रतिनिधियों के बीच किताब के कुछ विशेष अध्यायों में शामिल किए जाने वाले राजनीतिक संस्मरणों, कूटनीतिक खुलासों और संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं के विवरण को लेकर सहमति नहीं बन पाई। प्रकाशन गृहों की अपनी एक संपादकीय नीति और कानूनी जोखिम मूल्यांकन (Legal Risk Assessment) की प्रक्रिया होती है, जिसके तहत कई बार वे अत्यधिक संवेदनशील राजनीतिक सामग्री वाली पुस्तकों के प्रकाशन से बचते हैं ताकि किसी भी प्रकार के कानूनी पचड़े या मानहानि के मुकदमों से बचा जा सके।राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट और कयासों का दौरजैसे ही पेंगुइन इंडिया द्वारा इस किताब को न छापे जाने की खबर सार्वजनिक हुई, वैसे ही विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोर पकड़ने लगी कि क्या इस फैसले के पीछे कोई राजनीतिक दबाव है या फिर कांग्रेस पार्टी के भीतर से ही किताब के कुछ अंशों को लेकर आपत्ति जताई गई थी। हालांकि, कांग्रेस पार्टी या सोनिया गांधी के करीबी सूत्रों की तरफ से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक और विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, जिससे इन अटकलों को और अधिक हवा मिल रही है। जानकारों का मानना है कि सोनिया गांधी जैसी कद की नेता की आत्मकथा यदि बाजार में आती है, तो उसमें 1991 के बाद के भारतीय राजनीतिक इतिहास, गठबंधन सरकारों के दौर और पार्टी के भीतर के कई बड़े फैसलों पर खुलकर बात होगी, जिसे लेकर पब्लिशिंग इंडस्ट्री बेहद सतर्क रुख अपना रही है।क्या अब किसी अन्य पब्लिशर के पास जाएगी किताब?पेंगुइन इंडिया के साथ डील रद्द होने या आगे न बढ़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सोनिया गांधी की यह आत्मकथा किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय या घरेलू पब्लिशिंग हाउस के जरिए पाठकों तक पहुंचेगी या नहीं। भारतीय पुस्तक बाजार के जानकारों का कहना है कि सोनिया गांधी के कद की किसी भी राजनीतिक शख्सियत की आत्मकथा पब्लिश करना किसी भी पब्लिशर के लिए सबसे बड़ा कमर्शियल मौका होता है, क्योंकि इसकी लाखों कॉपियां बिकने की गारंटी होती है। इसलिए यह मान लेना कि यह किताब कभी प्रकाशित नहीं होगी, बिल्कुल गलत होगा। हो सकता है कि लेखक और उनके साहित्यिक एजेंट अब किसी अन्य बड़े प्रकाशन संस्थान के साथ नए सिरे से बातचीत कर रहे हों, जो बिना किसी संपादकीय कटौती के इस आत्मकथा को बाजार में लाने का जोखिम उठाने के लिए तैयार हो। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि 'बिलॉन्गिंग...' का अगला पड़ाव कौन सा पब्लिशिंग हाउस बनता है।साहित्य और राजनीति के मिलन पर एक नई बहसएक तरफ जहां राजनीतिक आत्मकथाएं हमेशा से पाठकों के बीच खासी लोकप्रिय रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनका इस तरह से विवादों में घिर जाना यह साबित करता है कि राजनीति और साहित्य का रिश्ता कितना संवेदनशील होता है। भारत में राजनेताओं द्वारा लिखी गई आत्मकथाओं का इतिहास बहुत पुराना और दिलचस्प रहा है, जहां कई नेताओं ने अपने फैसलों और गलतियों पर खुलकर लिखा है। सोनिया गांधी की इस पुस्तक के इर्द-गिर्द खड़े हुए इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या राजनेताओं को अपनी बायोग्राफी में पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए या फिर उन्हें राजनीतिक और कूटनीतिक सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए। फिलहाल, देश भर के पाठकों और कांग्रेस समर्थकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 'बिलॉन्गिंग...' शीर्षक वाली यह बहुप्रतीक्षित आत्मकथा अंततः किस रूप में और कब पाठकों के हाथों तक पहुंच पाती है।
रक्षाबंधन पर इजरायली दूतावास के अधिकारियों ने बंधवाई राखी; जानिए क्या मिला खास रिटर्न गिफ्ट
भारत और इजरायल के बीच कूटनीतिक, सामरिक और तकनीकी साझेदारियों की चर्चा तो दुनिया भर में अक्सर होती रहती है, लेकिन इन सबके इतर जब सांस्कृतिक और मानवीय रिश्तों की बात आती है, तो दोनों देशों की दोस्ती एक अलग ही मुकाम पर नजर आती है। इस बार देश भर में मनाए जाने वाले भाई-बहन के पवित्र पावन पर्व रक्षाबंधन के मौके पर नई दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास में कुछ ऐसा अनूठा और मनमोहक नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हुए इजरायली दूतावास के शीर्ष अधिकारियों और राजनयिकों ने भारतीय महिलाओं और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं से कलाई पर रेशम की डोर यानी राखी बंधवाई। इस भव्य और आत्मीय कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी सांस्कृतिक और पारिवारिक आत्मीयता साफ तौर पर झलक रही थी, जहां दूतावास के कमरों से लेकर कार्यालय परिसरों तक भारत के इस पारंपरिक त्योहार की गूंज सुनाई दी। इस अनूठी पहल ने सोशल मीडिया पर भी तहलका मचा दिया है और लोग दोनों देशों की इस अटूट दोस्ती को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के रूप में सराहा रहे हैं।इजरायली दूतावास में सजा रक्षाबंधन का विशेष दरबारनई दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास में इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व किसी राजकीय उत्सव की तरह बहुत ही धूमधाम और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। दूतावास के अधिकारियों ने पहले से ही इस भारतीय पर्व को अपने कार्यस्थल पर मनाने की पूरी तैयारी कर रखी थी। जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई, पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में सजी महिलाओं ने इजरायली राजनयिकों और कर्मचारियों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, उनका तिलक किया और मुंह मीठा कराया। इस दौरान इजरायली अधिकारियों के चेहरे पर जो खुशी और उत्साह देखने को मिल रहा था, वह यह साबित कर रहा था कि वे भारतीय संस्कृति और उसकी परंपराओं को कितनी गहराई से आत्मसात कर चुके हैं। दूतावास के अधिकारियों ने न केवल इस अनुष्ठान में पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया, बल्कि उन्होंने खुद आगे बढ़कर इस बात पर खुशी जताई कि उन्हें दुनिया के सबसे खूबसूरत और पवित्र त्योहार का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है।रक्षा सूत्र बंधवाने के बाद मिला खास रिटर्न गिफ्टभारतीय परंपरा के अनुसार, जब भाई की कलाई पर बहन राखी बांधती है, तो भाई उसे सुरक्षा और उपहार का वचन देता है, और इस बार इजरायली दूतावास में भी इस परंपरा का बहुत ही अनूठे तरीके से पालन किया गया। राखी बंधवाने के बाद इजरायली अधिकारियों ने अपनी बहनों को बेहद खास और तकनीक से जुड़े रिटर्न गिफ्ट्स भेंट किए, जो इजरायल की नवाचार और आधुनिकता की पहचान को दर्शाते हैं। इसके साथ ही इजरायली दूतावास की तरफ से सभी महिलाओं को पारंपरिक मिष्ठान और मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) की प्रसिद्ध खास सौगातें उपहार स्वरूप दी गईं। अधिकारियों ने अपनी बहनों को यह वचन दिया कि जिस तरह इजरायल और भारत हर मुश्किल घड़ी में एक-दूसरे के सच्चे और पक्के दोस्त बनकर खड़े रहते हैं, उसी तरह वे भी इस रिश्ते की मर्यादा को हमेशा निभाएंगे। यह आदान-प्रदान केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच आपसी सम्मान और स्नेह का एक बहुत ही जीवंत और मार्मिक उदाहरण बन गया।भारत और इजरायल की दोस्ती के गहरे भू-राजनीतिक मायनेकूटनीति के जानकारों का मानना है कि भारत और इजरायल के बीच के रिश्ते केवल रक्षा सौदों, कृषि तकनीकी सहयोग या खुफिया साझेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दिलों का रिश्ता है जो समय के साथ और अधिक मजबूत होता जा रहा है। जब किसी देश के राजनयिक विदेशी धरती पर मेजबान देश के सबसे सांस्कृतिक और पारिवारिक त्योहारों को इस अपनापन के साथ मनाते हैं, तो इससे दोनों देशों की जनता के बीच की दूरियां हमेशा के लिए मिट जाती हैं। भारत में इजरायली राजदूत और अन्य अधिकारियों ने कई बार यह बात कही है कि दोनों देशों की आत्मा एक जैसी है क्योंकि दोनों ही प्राचीन संस्कृतियों के वाहक हैं और आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर रहे हैं। रक्षाबंधन के इस कार्यक्रम ने एक बार फिर से इस बात पर मुहर लगा दी है कि भारत और इजरायल की दोस्ती अब कूटनीतिक दायरे से निकलकर सीधे आम नागरिकों और पारिवारिक भावनाओं तक पहुंच चुकी है, जो भविष्य में इस रिश्ते को और अधिक अमर बनाएगी।सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें और जनता का जबरदस्त रिएक्शनइजरायली दूतावास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर की गई रक्षाबंधन की इन खूबसूरत तस्वीरों और वीडियो ने इंटरनेट पर आते ही तहलका मचा दिया है। भारत के आम नागरिकों से लेकर बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों ने इन तस्वीरों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इजरायली अधिकारियों की इस पहल की भूरी-भरी प्रशंसा की है। लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि यह दुनिया की सबसे बेहतरीन और मजबूत कूटनीति है, जहां सरकारें तो हाथ मिलाती ही हैं, साथ ही दिल भी आपस में जुड़ जाते हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि 'भाई-बहन जैसे भारत-इजरायल के रिश्ते' अब इस धरती पर अटूट विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुके हैं। इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन दोनों देशों के बीच आपसी पर्यटन, छात्र आदान-प्रदान और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने में एक उत्प्रेरक का काम करते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इस अनोखी दोस्ती को हमेशा याद रखेंगी।
एशियाई भू-राजनीति और हिमालयी पर्यावरण से इस समय एक बहुत ही बड़ी और डराने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने भारत, नेपाल और चीन की सीमाओं पर बसे इलाकों में सनसनी फैला दी है। तिब्बत के भीतर नेपाल की सीमा से लगे बेहद संवेदनशील और ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र में एक बार फिर से हिमस्खलन और दबाव के चलते प्राकृतिक झील (Glacial Lake) के फटने की भयंकर घटना घटी है। इस अप्रत्याशित जल प्रलय के बाद से नेपाल के उत्तरी इलाकों में बहने वाली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की सांसें अटक गई हैं। नेपाल के काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन शाह (बालेन सरकार और स्थानीय प्रशासन) ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत एक हाई अलर्ट जारी कर दिया है और नदी के किनारे बसे गांवों तथा बस्तियों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इस गंभीर प्राकृतिक आपदा के बीच चीन के रवैये ने क्षेत्रीय सहयोग पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है, क्योंकि चीनी प्रशासन ने इस सीमावर्ती क्षेत्र में किसी भी प्रकार के संयुक्त राहत और बचाव कार्य या बाहरी मदद को पूरी तरह से रोक दिया है, जिससे स्थिति और अधिक पेचीदा हो गई है।तिब्बत की पहाड़ी झीलों का बढ़ता खतरा और पर्यावरण संकटहिमालयी श्रृंखलाओं में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का असर अब बेहद खतरनाक रूपों में सामने आने लगा है। तिब्बत का यह पूरा इलाका बड़े-बड़े ग्लेशियरों और ऊंची झीलों से घिरा हुआ है, जो लगातार पिघल रहे हैं। जब अत्यधिक मात्रा में पिघला हुआ बर्फ का पानी इन प्राकृतिक झीलों में जमा हो जाता है और भौगोलिक दबाव सहन करने की क्षमता समाप्त हो जाती है, तो ये झीलें किसी बड़े बांध की तरह अचानक फट जाती हैं। इस बार भी तिब्बत के भीतर कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसके कारण हजारों क्यूसेक पानी अचानक नेपाल की तरफ बहने वाली नदियों में आ गिरा। पर्यावरणविदों और भूगर्भ वैज्ञानिकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि तिब्बत और हिमालयी बेल्ट में बुनियादी ढांचे के विकास और बढ़ते तापमान के कारण ऐसी 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) की घटनाएं भविष्य में और ज्यादा भयानक रूप ले सकती हैं, और आज की यह घटना उसी आसन्न खतरे का एक जीवंत और डरावना प्रमाण है।बालेन सरकार और नेपाल प्रशासन की त्वरित चेतावनीझील फटने की इस सूचना के मिलते ही नेपाल के स्थानीय और केंद्रीय प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। काठमांडू के लोकप्रिय और कड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए जाने जाने वाले मेयर बालेन शाह ने इस आपदा से निपटने के लिए तुरंत आपातकालीन कदम उठाते हुए सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से जनता के लिए चेतावनी जारी की। प्रशासन ने विशेष तौर पर सिंधुपालचौक, रसुवा और भोटेकोशी नदी बेसिन के आसपास रहने वाले नागरिकों को आगाह किया है कि वे तुरंत नदियों के किनारों को खाली कर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले जाएं। नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और स्थानीय आपदा प्रबंधन समितियों को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मोर्चा संभाला जा सके। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पानी के अचानक बहाव से किसी भी प्रकार की जनहानि न हो, क्योंकि साल के इस समय में नदी घाटियों के पास पशुओं को चराने और स्थानीय गतिविधियों में लोग शामिल रहते हैं।चीन का असहयोग और बचाव कार्यों पर रोकइस पूरी आपदा के दौरान सबसे बड़ा कूटनीतिक और मानवतावादी विवाद चीन के अड़ियल रवैये को लेकर खड़ा हो गया है। चूंकि झील के फटने की मूल घटना चीनी सीमा के भीतर तिब्बत के भूभाग पर हुई है, इसलिए तकनीकी रूप से राहत कार्यों, सेंसर लगाने और शुरुआती चेतावनी प्रणाली का नियंत्रण बीजिंग के पास है। लेकिन हमेशा की तरह चीनी प्रशासन ने इस मामले में न केवल पारदर्शिता बरतने से इंकार कर दिया है, बल्कि नेपाल की तरफ से आने वाली राहत और तकनीकी टीमों को भी घटनास्थल के करीब जाने से रोक दिया है। चीन ने सुरक्षा और सामरिक गोपनीयता का हवाला देते हुए बचाव कार्यों पर पाबंदी लगा दी है, जिससे नेपाल के अधिकारियों को यह अनुमान लगाने में भारी कठिनाई हो रही है कि आगे जलप्रलय का कितना बड़ा खतरा और आ सकता है। चीन का यह संदेहास्पद और मनमाना रुख सीमावर्ती देशों के बीच आपसी सहयोग और आपदा प्रबंधन के समझौतों की पोल खोल रहा है।भारत और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों पर असरतिब्बत और नेपाल की सीमा पर घटी इस घटना का सीधा प्रभाव भारत के भी कई हिस्सों पर पड़ सकता है, क्योंकि नेपाल से बहने वाली कई नदियां आगे चलकर बिहार और उत्तर प्रदेश की नदियों में मिलती हैं। कोसी, गंडक और घाघरा जैसी प्रमुख नदियां यदि उफान पर आती हैं, तो भारत के उत्तरी मैदानी इलाकों में भी बाढ़ का खतरा अचानक कई गुना बढ़ जाता है। भारतीय जल संसाधन मंत्रालय और आपदा प्रबंधन एजेंसियां नेपाल के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और उपग्रहों (Satellites) के जरिए पानी के बहाव पर पैनी नजर रख रही हैं। सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि यदि जलस्तर अचानक बढ़ता है, तो समय रहते निचले गांवों में बचाव दल को तैनात किया जा सके। भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय रूप से यह घटना यह साबित करती है कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप की साझा जिम्मेदारी है।भविष्य की चुनौतियां और स्थायी समाधान की जरूरतहिमालयी क्षेत्र में बार-बार हो रही इन प्राकृतिक आपदाओं ने सरकारों और नीति निर्माताओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब तक क्षेत्रीय देश आपस में मिलकर कोई स्थायी वैज्ञानिक समाधान नहीं निकालेंगे, तब तक करोड़ों लोगों की जान जोखिम में बनी रहेगी। तिब्बत की इन ऊंचाई वाली झीलों के पास आधुनिक अर्ली-वार्निंग सिस्टम (Early Warning Systems) लगाए जाने की सख्त जरूरत है, जो पानी का स्तर बढ़ते ही तुरंत सायरन या डिजिटल सिग्नल के जरिए नीचे बसे गांवों को आगाह कर सकें। इसके अलावा, चीन को भी अपनी संकीर्ण कूटनीति छोड़कर मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा और पड़ोसी देशों के साथ पर्यावरण डेटा साझा करना होगा। फिलहाल, नेपाल और भारत के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और आने वाले कुछ घंटे राहत एवं बचाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, जिस पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई हैं।
यहूदी और इतालवी समुदायों के बाद अब न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के निशाने पर आए मोहन भागवत
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैचारिक गलियारों से इस समय एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने अमेरिका के सबसे बड़े महानगर न्यूयॉर्क से लेकर भारतीय राजनीतिक हलकों तक में हलचल मचा दी है। न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी एक बार फिर अपने बयानों और तीखे राजनीतिक रुख के चलते वैश्विक सुर्खियों के केंद्र में आ गए हैं। इस बार उनके तीखे निशाने पर कोई स्थानीय अमेरिकी राजनेता या पश्चिमी हस्ती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की हालिया अमेरिका यात्रा और वहां होने वाले कार्यक्रम हैं। अपने कड़े तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले जोहरान ममदानी इससे पहले यहूदी और इतालवी समुदायों से जुड़े मुद्दों और हस्तियों पर अपनी मुखर टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं, और अब उन्होंने सीधे तौर पर हिंदू संगठनों और आरएसएस प्रमुख के दौरे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रवासी भारतीयों, स्थानीय अमेरिकी राजनीतिक समूहों और वैचारिक संगठनों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिससे यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि इस तीखे विरोध के पीछे की गहरी राजनीतिक और सामाजिक वजहें क्या हैं।जोहरान ममदानी का राजनीतिक रुख और पिछला इतिहासन्यूजीलैंड में जन्मे और अपने वामपंथी तथा प्रगतिशील वैचारिक झुकाव के लिए जाने जाने वाले जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली और मुखर चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्होंने अपने छोटे से राजनीतिक सफर में कई ऐसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी है, जो अक्सर स्थापित व्यवस्था या विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों के साथ टकराव की स्थिति पैदा कर देते हैं। इससे पहले उन्होंने स्थानीय नीतियों और बयानों के जरिए यहूदी समुदायों की नुमाइंदगी करने वाले संगठनों तथा इतालवी मूल के समूहों के साथ तीखे वैचारिक मतभेद मोल लिए थे। उनकी राजनीतिक शैली मुख्य रूप से पहचान की राजनीति (Identity Politics) और वैचारिक ध्रुवीकरण पर आधारित मानी जाती है, जिसके तहत वे अक्सर ऐसे विषयों को चुनते हैं जो मीडिया की सुर्खियों में आसानी से आ जाएं। अब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की यात्रा पर उनके द्वारा उठाई गई आपत्तियां भी इसी सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का एक हिस्सा मानी जा रही हैं, जिसका उद्देश्य प्रवासी समुदायों के एक वर्ग विशेष को प्रभावित करना है।मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा और संघ का वैचारिक विस्तारराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की इस महत्वपूर्ण विदेश यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में बसे लाखों प्रवासियों, हिंदू स्वयंसेवकों और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ना तथा भारतीय संस्कृति, मूल्यों और दर्शन का प्रचार-प्रसार करना है। संघ लंबे समय से दुनिया भर में फैले भारतीय प्रवासियों के बीच सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने के लिए कार्य करता रहा है। अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में जहां विभिन्न नस्लों और संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं, वहां भारतीय डायस्पोरा अपनी पहचान को बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों का आयोजन करता है। मोहन भागवत का यह दौरा संघ के वैचारिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर रखने और विदेशों में रहने वाले युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिसे दुनिया भर में रह रहे भारतीय समुदाय का भारी समर्थन भी मिल रहा है।मेयर के विरोध के पीछे के छिपे हुए राजनीतिक मायनेसवाल यह उठता है कि आखिर एक अमेरिकी शहर के मेयर को भारत के एक सांस्कृतिक संगठन के प्रमुख की यात्रा से क्या आपत्ति हो सकती है और इसके क्या निहितार्थ हैं? जानकारों का मानना है कि पश्चिमी देशों के कुछ खास राजनीतिक हलकों में दक्षिणपंथी विचारधारा या भारतीय सांस्कृतिक संगठनों के प्रति एक पूर्वाग्रहपूर्ण दृष्टिकोण काम करता है, जिसका फायदा स्थानीय नेता अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उठाते हैं। जोहरान ममदानी जैसे नेता अपने खास वोट बैंक को साधे रखने और वैचारिक रूप से ध्रुवीकृत बयानों के जरिए लाइमलाइट में बने रहने के लिए ऐसे मुद्दों को हवा देते हैं। वे मोहन भागवत की यात्रा को एक सांस्कृतिक संवाद के रूप में देखने के बजाय इसे राजनीतिक चश्मे से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि न्यूयॉर्क के स्थानीय चुनावों और नस्लीय समीकरणों में उन्हें इसका राजनीतिक लाभ मिल सके।प्रवासी भारतीयों की प्रतिक्रिया और स्थानीय समुदाय का रुखजोहरान ममदानी के इस बयान और विरोध के बाद न्यूयॉर्क और अमेरिका के अन्य हिस्सों में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय में भारी नाराजगी और रोष देखने को मिल रहा है। भारतीय मूल के लोगों का कहना है कि इस प्रकार के बयान न केवल सांस्कृतिक सहिष्णुता के खिलाफ हैं, बल्कि यह अमेरिका में रहने वाले शांतिप्रिय और कानून का पालन करने वाले हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत करने का एक प्रयास हैं। स्थानीय हिंदू संगठनों और मंदिरों से जुड़े प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि मोहन भागवत की यात्रा पूरी तरह से सांस्कृतिक और वैचारिक संवाद के लिए है, जिसका किसी भी स्थानीय अमेरिकी नीति से कोई लेना-देना नहीं है। प्रवासी समुदाय अब संगठित होकर ऐसे बयानों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहा है और यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि अमेरिका की धरती पर किसी भी समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत या राजनीति न फैलाई जा सके।भविष्य की राजनीति और वैश्विक कूटनीति पर इसका असरयह पूरा विवाद इस बात का एक स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे स्थानीय अमेरिकी राजनीति अब केवल घरेलू मुद्दों तक सीमित न रहकर वैश्विक घटनाओं और विचारों से भी तेजी से प्रभावित हो रही है। जब भी भारत से जुड़े किसी बड़े धार्मिक या वैचारिक व्यक्तित्व का दौरा पश्चिमी देशों में होता है, तो वहां की स्थानीय राजनीति में अपने समीकरण साधने वाले नेता तुरंत उस पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर देते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जोहरान ममदानी के इस रुख का न्यूयॉर्क की स्थानीय राजनीति पर क्या असर पड़ता है और क्या प्रवासी भारतीय एकजुट होकर इस वैचारिक चुनौती का राजनीतिक रूप से जवाब देते हैं या नहीं। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम एक बार फिर यह साबित करता है कि वैचारिक सरहदें अब मिट चुकी हैं और दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली घटना वैश्विक मंच पर एक बड़ी बहस का मुद्दा बन सकती है।
खुशखबरी: लद्दाख में अब हाई कोर्ट की बेंच, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी; लोगों को न्याय मिलना होगा आसान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लद्दाख में हाई कोर्ट की पीठ स्थापित करने के लिए एक विनियमन जारी किया है। इससे लद्दाख के लोगों को न्याय तक पहुंच आसान होगी। यह कदम संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत उठाया गया है।
PoK का स्टेटस बदलने की तैयारी में ड्रैगन और शहबाज सरकार, अचानक क्यों तेज हुई यह भू-राजनीतिक हलचल
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर से कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को लेकर सरगर्मी बेहद तेज हो गई है। पिछले कुछ दिनों से इस्लामाबाद के गलियारों में ऐसी सुगबुगाहट तेज है कि पाकिस्तानी हुक्मरान भारत के ऐतिहासिक 'आर्टिकल 370' के तर्ज पर PoK के प्रशासनिक और संवैधानिक ढांचे में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव करने की गहरी साजिश रच रहे हैं। जिस तरह से भारत सरकार ने साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर उसे देश की मुख्यधारा के साथ पूरी तरह से एकीकृत कर दिया था, ठीक उसी तर्ज पर अब पाकिस्तान अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए PoK के स्टेटस को पूरी तरह बदलकर उसे अपने किसी अन्य प्रांत की तरह विलय करने का कुचक्र रच रहा है। इस अचानक मची भू-राजनीतिक हलचल के पीछे न केवल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक मजबूरियां हैं, बल्कि इसके पीछे चीन के नापाक आर्थिक और सामरिक दबाव का भी बहुत बड़ा हाथ बताया जा रहा है, जो सीपैक (CPEC) प्रोजेक्ट को कानूनी सुरक्षा कवच देने के लिए ऐसा करने को मजबूर कर रहा है।PoK के दर्जे को बदलने की सुगबुगाहट क्यों तेज हुई?पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK को लेकर पिछले दशकों में हमेशा एक दिखावटी विशेष प्रशासनिक ढांचा बनाए रखा गया है, जिसे पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर 'आजाद कश्मीर' कहता है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण हमेशा रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय और इस्लामाबाद के प्रधानमंत्री कार्यालय से ही होता है। अब अचानक ऐसी क्या आफत आ गई है कि शहबाज शरीफ सरकार और वहां की ताकतवर फौज इस क्षेत्र के मौजूदा कानूनी और संवैधानिक स्वरूप को पूरी तरह से पलटने की तैयारी कर रही है? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि स्थानीय कश्मीरी जनता पाकिस्तान के दमनकारी शासन, भारी टैक्स, बिजली कटौती और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ पिछले कई महीनों से सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन कर रही है। जनता के भारी विद्रोह और पाकिस्तान विरोधी नारों से घबराए हुक्मरान अब इस क्षेत्र पर अपनी सीधी और लोहे की पकड़ मजबूत करने के लिए कोई नया संवैधानिक दांवपेंच आजमाने की जुगत में लगे हैं, ताकि विरोध की हर आवाज को हमेशा के लिए कुचला जा सके।चीन का CPEC प्रोजेक्ट और सामरिक मजबूरीइस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में ड्रैगन यानी चीन की विस्तारवादी नीतियां और उसका महत्वाकांक्षी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) सबसे अहम भूमिका निभा रहा है। CPEC का मुख्य मार्ग इसी विवादित PoK के गिलगित-बल्तिस्तान और अन्य इलाकों से होकर गुजरता है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत लगातार अपनी सख्त आपत्ति जताते रहे हैं। चूंकि यह क्षेत्र कानूनी रूप से एक विवादित क्षेत्र माना जाता है, इसलिए विदेशी निवेशकों और खुद चीन को भी इस बात का हमेशा डर रहता है कि भविष्य में भू-राजनीतिक समीकरण बदलने पर उनके अरबों डॉलर के निवेश का क्या होगा। चीन अपने इस सामरिक और आर्थिक निवेश को कानूनी सुरक्षा देने के लिए पाकिस्तान पर लगातार दबाव बना रहा है कि वह इस इलाके के संविधान में बदलाव कर इसे अपना आधिकारिक प्रांत घोषित कर दे। यही वजह है कि बीजिंग के इशारे पर इस्लामाबाद में PoK के स्टेटस को बदलने का नापाक खाका तेजी से तैयार किया जा रहा है।भारत का कड़ा रुख और रणनीतिक निगरानीपाकिस्तान की इस किसी भी हरकत पर भारत की खुफिया एजेंसियों और विदेश मंत्रालय की पैनी और सख्त नजर बनी हुई है। भारत अपने इस रुख पर पूरी तरह अडिग और स्पष्ट है कि पूरा का पूरा पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। भारत के आंतरिक मामलों या PoK के भू-राजनीतिक स्वरूप में पाकिस्तान द्वारा किया जाने वाला कोई भी एकतरफा बदलाव पूरी तरह से अवैध और अंतरराष्ट्रीय संधियों के खिलाफ माना जाएगा। नई दिल्ली में बैठे रणनीतिकार इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि पाकिस्तान अपनी जनता का ध्यान देश के भीतर चल रहे भयंकर आर्थिक संकट, महंगाई, भुखमरी और राजनीतिक अस्थिरता से हटाने के लिए ऐसी खतरनाक चालें चल रहा है। भारतीय सामरिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पाकिस्तान ने PoK की डेमोग्राफी या उसके कानूनी दर्जे को बदलने की कोई भी हिमाकत की, तो इसका उसे कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बहुत भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर असरपाकिस्तान के इस तथाकथित 'आर्टिकल 370' जैसे दांव से दक्षिण एशिया की शांति और सुरक्षा एक बार फिर से खतरे में पड़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर पहले से ही कश्मीर मुद्दे को लेकर मुंह की खाने वाला पाकिस्तान यदि PoK को हड़पने या उसका जबरन विलय करने की कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। पश्चिमी देश और मानवाधिकार संगठन पहले से ही बलूचिस्तान और PoK में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों पर नजर रखे हुए हैं। इस प्रकार की बलपूर्वक प्रशासनिक फेरबदल से स्थानीय स्तर पर गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं क्योंकि वहां के स्थानीय लोग पाकिस्तान के शासन से तंग आ चुके हैं और वे भारत के साथ अपने ऐतिहासिक जुड़ाव को अंदरखाने महसूस करते हैं। आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बहुत बड़ा केंद्र बनने वाला है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
नेपाल बाढ़ से बाल-बाल बचे आंध्र प्रदेश के 10 श्रद्धालु, ड्राइवर की सूझबूझ और वीजा में देरी बनी वरदान
आंध्र प्रदेश के भीमिली और विशाखापट्टनम के 10 श्रद्धालु नेपाल की यात्रा पर थे. जिस दिन भीषण बाढ़ आई, उस दिन ये लोग रसुवा में ही होने वाले थे, लेकिन वीजा में देरी और ड्राइवर की सूझबूझ से ये लोग बाल-बाल बच गए.
Sabarimala विवाद: Sunny M Kapikkad पर केस दर्ज, Kerala गृह मंत्री ने दी जानकारी
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने शुक्रवार को कहा कि शबरिमला के भगवान अयप्पा और देवी मलिकप्पुरथम्मा के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में दलित कार्यकर्ता सनी एम. कपिक्कड़ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कपिक्कड़ के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं किए जाने संबंधी सवाल पर चेन्निथला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है।’’कपिक्कड़ ने हाल में एक शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगवान अयप्पा और देवी मलिकप्पुरथम्मा का जिक्र करते हुए कथित तौर पर आपत्तिजनक का इस्तेमाल किया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं, शबरिमला से जुड़े स्वयंसेवी संगठनों और कार्यकर्ता राहुल ईश्वर ने बृहस्पतिवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कर कपिक्कड़ के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री से कथित टिप्पणी के पूरे वीडियो और उसके संदर्भ की जांच करने तथा कानूनी कार्रवाई शुरू करने का भी आग्रह किया था।
Mirzapur The Movie Advance Booking: मिर्जापुर मूवी की रिलीज को सात दिन बाकी हैं और रक्षा बंधन के मौके पर फिल्म की एडवांस बुकिंग का ऐलान कर दिया गया है.
नेपाल से आई बड़ी खुशखबरी! त्रिशूली हाइड्रो प्रोजेक्ट साइट से 350 मजदूरों का रेस्क्यू
नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के बीच नेपाली सेना ने त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में फंसे 350 मजदूरों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है. इनमें कई भारतीय भी शामिल हैं. सेना ने रसुवा के अलग-अलग इलाकों से कुल 883 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है.
भारतीय सर्राफा बाजार में इस बार रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सोने और चांदी की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। त्योहारी सीजन और बाजार में चल रहे उतार-चढ़ाव के बीच देश भर के सर्राफा बाजारों में कीमती धातुओं के दामों में जबरदस्त नरमी दर्ज की गई है। लंबे समय से लगातार आसमान छू रहे सोने के दामों में आई इस अचानक गिरावट से आम आदमी और महिलाओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। रक्षाबंधन के खास मौके पर सोने की कीमतों में करीब 1,000 रुपये तक की कमी आई है, वहीं चांदी के तेवर भी ढीले पड़ गए हैं। अगर आप भी इस त्योहारी मौके पर अपने परिवार या बहनों के लिए सोने-चांदी के गहने या सिक्के खरीदने का मन बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए बेहद किफायती साबित हो सकता है। आइए जानते हैं देश के प्रमुख महानगरों और आपके अपने शहर में आज सोने और चांदी का ताजा खुदरा भाव क्या चल रहा है।रक्षाबंधन पर सोने की कीमतों में बड़ी राहतत्योहारी सीजन के दौरान बाजार में सोने की कीमतों का घटना एक सुखद आश्चर्य माना जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार तेजी का रुख दिखा रहा सोना अब घटकर काफी निचले स्तर पर आ गया है। वैश्विक बुलियन बाजारों में आई सुस्ती और घरेलू स्तर पर मुनाफावसूली के चलते कीमतों पर दबाव देखा गया है। जानकारों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख के कारण निवेशकों ने सोने में सतर्क रुख अपनाया है, जिसका सीधा फायदा भारतीय खुदरा खरीदार को मिल रहा है। रक्षाबंधन के दिन बाजारों में जेवर खरीदने पहुंचे ग्राहकों ने इस गिरावट का पूरा फायदा उठाया है और स्थानीय सर्राफा दुकानों पर अच्छी खासी चहल-पहल नजर आई है।चांदी के दामों में भी आई भारी कमजोरीसोने के साथ-साथ सफेद धातु यानी चांदी के दीवानों के लिए भी बाजार से शानदार खबर आई है। चांदी की कीमतों में पिछले कुछ सत्रों से लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजारों (Commodity Markets) में बिकवाली के दबाव के कारण चांदी के तेवर ठंडे पड़ गए हैं। पिछले सप्ताह के मुकाबले चांदी के भाव में बड़ी फिसलन दर्ज की गई है, जिससे यह निवेशकों और आभूषण निर्माताओं दोनों के लिए मुफ़्त भाव जैसी लग रही है। हालांकि, पिछले एक साल के लंबे अंतराल को देखें तो चांदी ने अपने निवेशकों को बंपर रिटर्न दिया है, लेकिन वर्तमान में आई यह साप्ताहिक गिरावट शॉर्ट-टरम खरीदारों के लिए राहत भरी है।प्रमुख महानगरों में आज क्या है सोने का भावदेश के अलग-अलग शहरों में वैट, लोकल टैक्स और मेकिंग चार्ज के हिसाब से सोने के दामों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने का भाव गिरकर लगभग 1,59,040 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,45,787 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,59,320 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,46,043 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। इसके अलावा चेन्नई जैसे दक्षिण भारतीय बाजारों में 24 कैरेट सोना 1,59,780 रुपये प्रति 10 ग्राम और कोलकाता तथा बेंगलुरु में भी इसी के आस-पास मजबूत कारोबार देखा जा रहा है।चांदी का ताजा रेट और लोकल मार्केट का हालमेट्रो शहरों में चांदी की चमक भी फीकी पड़ी है और यह निवेशकों के बजट में फिट बैठ रही है। देश की राजधानी दिल्ली में 999 फाइन चांदी का हाजिर भाव गिरकर करीब 2,40,950 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। वहीं मुंबई और कोलकाता में चांदी 2,41,000 से 2,41,370 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में बिक रही है। चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में चांदी का भाव थोड़ा ऊपर यानी लगभग 2,42,070 रुपये प्रति किलोग्राम तक दर्ज किया गया है। स्थानीय सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि रक्षाबंधन के पावन पर्व पर निचले दामों के मिलने से बाजार में रौनक लौट आई है और लोग सोने के सिक्के, हल्के गहने तथा चांदी के उपहार बड़े पैमाने पर खरीद रहे हैं।निवेश से पहले इन बातों का रखें विशेष ध्यानयदि आप रक्षाबंधन या आने वाले दिनों में किसी भी प्रकार का निवेश करने की सोच रहे हैं, तो केवल कीमत देखकर फैसला न करें। हमेशा आभूषण खरीदते समय उसकी शुद्धता की परख हॉलमार्क (Hallmark) के निशान से जरूर करें। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध होता है लेकिन उसके गहने नहीं बनते, इसलिए जेवर हमेशा 22 कैरेट या उससे कम शुद्धता में ही खरीदे जाते हैं। इसके अलावा ज्वेलर से मेकिंग चार्ज (Making Charges) पर मोलभाव करना और जीएसटी का पक्का बिल लेना बिल्कुल न भूलें, ताकि भविष्य में जब आप इसे बेचने जाएं तो आपको आपकी संपत्ति का पूरा और सही मूल्यांकन मिल सके।
नेपाल बाढ़ त्रासदी: नेपाल से बह कर यूपी पहुंचे शव, गंडक नदी से निकाला गया
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद अब उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुएमहराजगंज और कुशीनगर में हाई अलर्टघोषित किया गया है.
Operation Sindoor Pakistan pulled out all stops to locate the S-400; what did the former Air Marshal reveal? ऑपरेशन सिंदूर: एस-400 की लोकेशन के लिए PAK ने लगाया था एड़ी-चोटी का जोर, पूर्व एयर मार्शल ने क्या किया खुलासा?
स्कूल से लौटीं मायावती ने साहस किया और नन्हे भाई को गोद में लेकर पैदल ही अस्पताल की ओर चल पड़ीं. खुद बच्ची थीं और रास्ता लंबा था.
तिब्बत में एक और झील टूटी, नेपाल में आ सकती है तबाही की दूसरी लहर, खाली कराया जा रहा इलाका
Nepal Flood News: नेपाल में बाढ़ को लेकर नया अलर्ट जारी किया गया है. जिसमें तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की खबर है. ऐसे में लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है.
अहमदाबाद में मलाला की किताब पर बवाल! बजरंग दल का हंगामा, रीडिंग कर रहे लोगों के साथ मारपीट
अहमदाबाद के वस्त्रपुर AUDA गार्डन में मलाला यूसुफजई की किताब पढ़ने के लिए जुटे सिविल सोसाइटी और कांग्रेस नेताओं पर बजरंग दल ने हमला किया.
पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने कोलकाता के कैमक स्ट्रीट पर पार्टी के 'अनधिकृत' (बिना इजाज़त लगाए गए) बिलबोर्ड के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की और उनके काम में बाधा डाली। शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में पहली सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई। गुरुवार को कोलकाता नगर निगम (KMC) की एक टीम पुलिस के साथ 9, कैमक स्ट्रीट पर लगे एक अनधिकृत होर्डिंग को हटाने पहुंची थी। नगर निकाय ने पुलिस से उस होर्डिंग को हटाने में मदद मांगी थी, जिस पर TMC का साइन लगा हुआ था। इसे भी पढ़ें: Kolkata Police और KMC की कार्रवाई पर भड़के Abhishek Banerjee, गैर-कानूनी एंट्री को लेकर जाएंगे कोर्ट हालांकि, टीम के पहुंचने पर बनर्जी, ओ'ब्रायन, बैसानोर चट्टोपाध्याय और अन्य सहित कई TMC नेताओं ने एक 'गैर-कानूनी भीड़' बनाई और पुलिसकर्मियों तथा KMC अधिकारियों को उनके काम करने से रोकने के लिए उनसे भिड़ गए। पुलिस ने बताया कि TMC नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 191(2), 191(3), 190, 121(1), 74, 3(5) और 351(2) के तहत शेक्सपियर सरणी में मामला दर्ज किया गया। इसे भी पढ़ें: Abhishek Banerjee के Kolkata ऑफिस से हटा TMC होर्डिंग, पुलिस से झड़प TMC ने पुलिस और सिविक बॉडी की कार्रवाई की आलोचना की TMC ने सिविक बॉडी और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक बदले की भावना बताया है। पार्टी, जिसने 2026 के पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों सत्ता गंवा दी थी, ने कहा है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी TMC से 'डरे हुए' हैं। अभिषेक ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल में संवैधानिक शासन का लगातार पतन हो रहा है और राज्य तेज़ी से पुलिस राज की ओर बढ़ रहा है। जब राज्य की सत्ता बिना किसी संवैधानिक रोक-टोक के काम करती है, तो न्यायपालिका ही बचाव की आखिरी उम्मीद होती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर मौलिक अधिकारों के हनन के समय न्यायपालिका दखल नहीं देती है, तो दांव पर सिर्फ़ लोगों की आज़ादी नहीं होती, बल्कि लोकतंत्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता है। वहीं, ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि शुक्रवार को TMC के छात्रों की एक सालाना रैली होने वाली थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिविक बॉडी की टीम ज़रूरी जानकारी देने में नाकाम रही और उनका दस्तावेज़ बिना हस्ताक्षर वाला और अधूरा था।
जिन्हें खुद श्रीलंका ने नहीं माना भरोसेमंद, उन्होंने भारतीय स्पिनरों की खोल दी पोल!
सीरीज जीतने के बावजूद कोलंबो टेस्ट का पांचवां दिन भारत के लिए कई सवाल छोड़ गया. स्पिन के अनुकूल पिच पर श्रीलंका के निचले क्रम को करीब दो दिन तक आउट न कर पाना भारतीय गेंदबाजी की धार और 'किलिंग इंस्टिंक्ट' पर सवाल खड़े करता है. श्रीलंका की जुझारू बल्लेबाजी काबिल-ए-तारीफ रही, लेकिन भारत के लिए संदेश साफ है- टेलेंडर्स को जल्दी समेटने की पुरानी कमजोरी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
देहरादून के इस गांव में बहनें नहीं बांध पाएंगी राखी; NDTV को सुनाई अपनी दर्दभरी कहानी
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व माना जाता है, लेकिन देहरादून जिले की सहसपुर विधानसभा के बटोली गांव में इस बार यह त्योहार मायूसी के बीच गुजर रहा है. यहां की कई बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांध पाएंगी.
इतनी बड़ी हुई सुष्मिता सेन की छोटी बेटी, दिखा ग्लैमरस अंदाज
सुष्मिता सेन आज अपनी छोटी बेटी अलिसा सेन का 17वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रही हैं. इस मौके पर उन्होंने उन्हें बर्थडे विश करते हुए कुछ प्यार भरी पोस्ट शेयर की हैं.
पहलवानों से हुई भिड़ंत... आ रहा Ather का सबसे सस्ता स्कूटर
देसी कंपनी एथर एनर्जी भारतीय बाजार में एक नया स्कूटर लाने वाली है. 29 अगस्त को लॉन्च होने वाला ये स्कूटर दमदार फीचर्स के साथ आएगा. एथर कोणार्क कंपनी का सबसे सस्ता स्कूटर होने वाला है. ब्रांड ने इसका एक नया वीडियो शेयर किया है, जिसमें स्कूटर की ड्यूरेबिलिटी को दिखाया गया है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.
रक्षाबंधन पर इस दिशा में भाई को बांधें राखी
देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है. भारतीय परंपराओं में इस पर्व का विशेष महत्व है. वास्तु के अनुसार, राखी बांधते समय दिशाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है. रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए पहली महत्वपूर्ण दिशा पूर्व-उत्तर-पूर्व है.
उपासना सिंह ने लगाए CINTAA पर गंभीर आरोप, कहा- सिर्फ पूनम ढिल्लो-पद्मिनी को दिखाया जाता है
उपासना सिंह, जो सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की पूर्व महासचिव रही हैं. उन्होंने संगठन के मौजूदा नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
रक्षाबंधन पर बाबा रामदेव ने कंगना रनौत को भेजे तोहफे और मिठाई, कहा- शिकवे भुलाकर आगे बढ़ें
बीते दिनों योग गुरु बाबा रामदेव और भाजपा सांसद कंगना रनौत के बीच विवाद कंगना के 'जेन-जी' प्रदर्शनकारियों को गटरछाप कहने वाले बयान से शुरू हुआ था. लेकिन अब बाबा रामदेव ने कंगना को मिठाई और गिफ्ट भेजा है.
नेपाल के लिए अगला 90 मिनट डरावना... जिस लेक के फटने का डर था, अब वहां से आ रही तबाही!
चीन-नेपाल सीमा पर ग्लेशियर धंसने से मलबे की बनी झील से पानी ओवरफ्लो होने लगा, जिसके बाद राहत और बचाव अभियान फिलहाल रोक दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, इसलिए नेपाल के लिए अगला 90 मिनट बेहद अहम माना जा रहा है.
जलप्रलय के बाद नेपाल के इस कस्बे को पहचानना हुआ मुश्किल, देखें
नेपाल में भारी तबाही के बीच आजतक की टीम मौके पर मौजूद है, वहां की हर तस्वीर हम आपतक पहुंचा रहे हैं. रसुआ, नुवाकोट और त्रिशूली वो इलाके हैं, जहां सबसे अधिक तबाही हुई है. आजतक संवादादाता श्वेता सिंह की रिपोर्ट देखिए.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। इस मामले में दिल्ली में रहने वाले एक पति-पत्नी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों साल 2024 से पाकिस्तान में बैठे कथित खुफिया ऑपरेटिव्स के संपर्क में थे और भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जुटाने में उनकी मदद कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साहिल (25) और उसकी पत्नी समीरा (21) के रूप में हुई है। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे सुराग मिले हैं, जिनके तार दिल्ली से निकलकर पाकिस्तान के कराची और इस्लामाबाद तक जुड़ते हैं। पुलिस का आरोप है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स इस दंपति को पैसे भेजते थे और बदले में उनसे अलग-अलग तरह की मदद ली जाती थी। पुलिस के मुताबिक, साहिल और समीरा ने 2024 से 2025 के बीच आठ भारतीय सिम कार्ड हासिल किए और उन्हें दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजा। इन सिम कार्ड के बदले कथित तौर पर दंपति को करीब 30 हजार रुपये दिए गए। जांच एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान पहुंचने के बाद इन नंबरों से WhatsApp अकाउंट एक्टिव किए गए। कथित पाकिस्तानी ऑपरेटिव्स ने इन अकाउंट्स का इस्तेमाल भारत में लोगों से संपर्क करने और संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए किया। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि कुछ WhatsApp अकाउंट्स के जरिए भारतीय WhatsApp ग्रुप्स में शामिल होने की कोशिश की गई। पुलिस को शक है कि इन ग्रुप्स के माध्यम से भी भारत से जुड़ी जानकारियां जुटाने का प्रयास किया जा रहा था। इसे भी पढ़ें: Chandra Grahan 2026: Raksha Bandhan 2026 और Chandra Grahan का संयोग, क्या भारत में दिखेगा आंशिक ग्रहण स्पेशल सेल के मुताबिक, मामले में साहिल की भूमिका केवल ऑनलाइन संपर्क या लॉजिस्टिक मदद तक सीमित नहीं थी। उस पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में कैंटोनमेंट और सैन्य इलाकों की रेकी करने का काम सौंपे जाने का आरोप है। पुलिस का यह भी कहना है कि साहिल से सेना के ऐसे जवानों से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई, जिनके खिलाफ सैन्य न्यायिक कार्रवाई यानी कोर्ट मार्शल की कार्यवाही चल रही थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इन सुरागों से संकेत मिलता है कि कथित नेटवर्क का मकसद सिर्फ सामान्य सूचनाएं इकट्ठा करना नहीं था। इसकी नजर भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों पर भी थी। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई। साहिल कथित तौर पर 2024 में Instagram के जरिए एक पाकिस्तानी एजेंट के संपर्क में आया था। पुलिस का आरोप है कि इस संपर्क को उसकी पत्नी समीरा ने आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। साहिल और समीरा एक-दूसरे को 2022 से जानते थे और बाद में दोनों ने शादी कर ली। जांच के मुताबिक, Instagram पर संपर्क में आए पाकिस्तानी एजेंट ने बाद में इस दंपति को एक पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव से मिलवाया। कथित तौर पर इसी ऑपरेटिव ने दोनों को पैसे का लालच देकर नेटवर्क के लिए काम करने के लिए तैयार किया। इसके बाद उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ती गईं। पुलिस का कहना है कि दंपति को दिल्ली में नेटवर्क के लिए लॉजिस्टिक मदद उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए लोगों को जासूसी और फील्ड ऑपरेशन से जोड़ने का काम भी दिया गया था। इसे भी पढ़ें: Shubman Gill ने श्रीलंका के खिलाफ फॉलोऑन देने के फैसले का बचाव किया स्पेशल सेल ने सबसे पहले साहिल को दिल्ली के सराय काले खां इलाके में स्थित चांद बीबी कैंप से गिरफ्तार किया। वह मोहम्मद अशफाक का बेटा है। साहिल के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पाकिस्तानी एजेंट्स के साथ हुई बातचीत मिली। इन्हीं चैट्स के आधार पर जांच आगे बढ़ी और अधिकारियों को समीरा की कथित भूमिका के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने समीरा को भी गिरफ्तार कर लिया। उसके मोबाइल फोन से भी WhatsApp चैट और बातचीत मिलने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, इन बातचीत में साहिल के अलावा पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर्स से संपर्क के संकेत मिले। दंपति के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इन उपकरणों में पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव्स के साथ बातचीत के अलावा भारत में नेटवर्क से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों से संबंधित जानकारी भी मौजूद थी। जांच में कथित नेटवर्क की तस्वीर यहीं तक सीमित नहीं रही। पुलिस का कहना है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स भारत में मौजूद कुछ लोगों से सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क कर रहे थे। इनमें कथित तौर पर कुछ ओवरग्राउंड वर्कर्स और स्लीपर सेल्स से जुड़े लोग भी शामिल थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भारत में इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था और गिरफ्तार दंपति के अलावा इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। इसे भी पढ़ें: Mohan Bhagwat के अमेरिकी इवेंट आयोजक का X Account निलंबित, Akhilesh ने साधा निशाना पुलिस के मुताबिक, साल 2001 में जन्मे साहिल ने दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से BA की पढ़ाई की है। वह एक वकील के साथ काम कर चुका था और आगे LLB करने की योजना बना रहा था। जून 2025 में उसने अपनी नौकरी छोड़ दी थी और उसके बाद से वह बेरोजगार था। वहीं, 2005 में जन्मी समीरा ने केशवपुरम के कन्या विद्यालय से 12वीं तक पढ़ाई की और बाद में पत्राचार के जरिए BA किया। गिरफ्तारी से पहले वह नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम कर रही थी। स्पेशल सेल के मुताबिक, इस पूरे मामले की जांच उस वक्त शुरू हुई जब अधिकारियों को आतंकवादी संगठनों, उनके कथित ओवरग्राउंड वर्कर्स और स्लीपर सेल्स को लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराए जाने की जानकारी मिली। जांच आगे बढ़ने के साथ अधिकारियों को ऐसे स्थानीय लोगों के बारे में सुराग मिले, जो कथित तौर पर भारतीय सिम कार्ड हासिल करने और पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तथा भारत में मौजूद संपर्कों के बीच संचार स्थापित कराने में मदद कर रहे थे। अब साहिल और समीरा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। स्पेशल सेल का कहना है कि दोनों से पूछताछ और उनके मोबाइल उपकरणों से मिले डेटा ने पाकिस्तान स्थित कथित खुफिया नेटवर्क और भारत में उसके संपर्कों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग दिए हैं। फिलहाल जांच का बड़ा सवाल यही है कि यह नेटवर्क दिल्ली और कुछ दूसरे इलाकों में कितनी दूर तक फैला हुआ था और इसके जरिए किस स्तर की संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी।
मोबाइल को खत्म कर देगा SIM वाला इयरफोन? मिलेंगे AI फीचर्स भी
Plaud One नाम का TWS लॉन्च हुआ है, जिसके अंदर कई कमाल के फीचर्स और सिम कार्ड का सपोर्ट दिया है. इसमें सिम कार्ड की मदद से बिना फोन और कंप्यूटर के भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसमें AI का सपोर्ट दिया है, जो वॉयस कमांड पर काम करेगा. साथ ही कॉल रिकॉर्डिंग में मदद करेगा. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने आईएसआई समर्थित जासूसी मॉड्यूल से जुड़े दंपति साहिल और समीरा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों पर 8 भारतीय सिम पाकिस्तान भेजने और संवेदनशील जानकारी जुटाने में मदद का आरोप है।
Amaravati में खुलेगा देश का पहला Quantum और AI विश्वविद्यालय, CM चंद्रबाबू नायडू ने दी मंजूरी
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) द्वारा अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और कृत्रिम मेधा (एआई) विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राजधानी क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण की बैठक में लिया गया। एनआईईएलआईटी विश्वविद्यालय का संचालन भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता है। बृहस्पतिवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में नायडू ने कहा, ‘‘हमने भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एनआईईएलआईटी की ओर से अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और एआई विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने की मंजूरी दी है।’’यह परिसर 8.5 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाएगा, जिसमें पांच वर्षों में 730.7 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इस राशि को इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार के सहायता अनुदान द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित करने का प्रस्ताव है। यह संस्थान क्वांटम प्रौद्योगिकियों, एआई, सेमीकंडक्टर और अन्य उभरते हुए प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता का समावेश होगा। अमरावती में स्थायी परिसर का निर्माण पूरा होने तक शैक्षणिक और उन्नत प्रौद्योगिकी कौशल विकास कार्यक्रम सितंबर 2026 से गुंटूर स्थित आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय के एक अस्थायी परिसर में शुरू होंगे। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस परियोजना के माध्यम से पांच वर्षों में लगभग 8,250 शिक्षार्थियों को प्रशिक्षित होने का अनुमान है जिनमें 1,650 औपचारिक डिग्री कार्यक्रमों के माध्यम से और 6,600 कौशल तथा प्रमाणनकार्यक्रमों के माध्यम से शामिल होंगे। पांचवें वर्ष तक वार्षिक प्रवेश क्षमता लगभग 3,913 शिक्षार्थियों तक पहुंचने अनुमान है।
रक्षाबंधन के मौके पर पैसा डबल, 300 का शेयर 634 रुपये पर पहुंचा - Aaj Tak News
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बॉलीवुड मे कई ऐसी फिल्मे हैं जो भाई-बहन के प्यार और रिश्ते को दिखाती हैं. आइए जानते हैं बॉलीवुड की वो फिल्में जिसे आप अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन वाले दिन देख सकते हैं.
खाकर विरोध करो; भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से बोल आए मंत्री, अब घिर गए
महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों का एक समूह छात्रावास सुविधाओं, प्रवेश नियमों समेत कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है और हाल ही में दो मंत्री उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे। अब उनकी टिप्पणियों को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई है।
Raksha Bandhan Special: बिना प्याज-लहसुन वाली मटर काजू की सब्जी, होटल वाला स्वाद अब घर पर
अगर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो राखी पर बिना प्याज-लहसुन की शाही मटर काजू सब्जी जरूर बनाएं. स्वाद इतना लाजवाब कि मेहमान भी पूछेंगे इसकी रेसिपी.
दाऊद को कौन बांधता था राखी? पंचोली के जवाब ने खोल दी कहानी
आदित्य पंचोली का गुस्सा सिर्फ इस एक अफवाह तक सीमित नहीं था. उन्होंने अपने ऊपर लगने वाले तमाम आरोपों को लेकर कहा कि आरोप कोई भी किसी पर लगा सकता है, लेकिन आरोप लग जाने भर से कोई व्यक्ति वैसा नहीं बन जाता. लेकिन उन्होंने माना कि फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उनसे गलतियां हुई हैं और हर इंसान से गलतियां होती हैं
शक्तिमान की वापसी पर खुद रुकावट बने मुकेश खन्ना, कहा- मैं अटका हुआ हूं
एक्टर मुकेश खन्ना, जिन्हें शक्तिमान सीरियल के आइकॉनिक किरदार के लिए जाना जाता है. उन्होंने कुबूल किया कि इंडियन सुपरहीरो को दोबारा लाने में वह खुद रोड़ा बने हुए हैं.
'टॉक्सिक' की OTT और सैटेलाइट डील ने मचाया तहलका, रिलीज के दूसरे दिन ही आया यश की मूवी पर बड़ा अपडेट
यश की फिल्म 'टॉक्सिक' की कथित OTT और सैटेलाइट डील ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचाकर रख दिया है. जानिए ZEE5 से हुई डील, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और स्टारकास्ट से जुड़ी पूरी जानकारी.
आर. प्रज्ञानानंद ने रचा इतिहास, बने पहले भारतीय ग्रैंड चेस टूर चैंपियन; कारुआना को हराकर जीता खिताब
आर. प्रज्ञानानंद ने फैबियानो कारुआना को 15-13 से हराकर ग्रैंड चेस टूर फाइनल्स का खिताब जीत लिया। वह यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।
नौकरी लगते ही बॉयफ्रेंड संग गई पत्नी, महिला कॉन्स्टेबल पर पति का आरोप
ये कहानी रोहतास की है. बिहार पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर नौकरी लगने के बाद एक महिला के अपने पति को छोड़कर प्रेमी के साथ फरार हो गई. महिला की पोस्टिंग बेगूसराय के BSAP में बताई जा रही है. अब उसके पति ने डालमियानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है, एसपी से भी गुहार लगाई है. महिला की मां भी बेटी के लापता होने की शिकायत लेकर एसपी के पास पहुंची हैं.
रिजिजू ने दिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत, परिसीमन बिल पर टिकीं निगाहें; विपक्ष में हलचल
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद सत्र फिर बुलाने के संकेत दिए हैं, जिससे महिला आरक्षण कानून लागू होने की संभावना बढ़ी है।
'20 मिनट में यहां पानी पहुंचने वाला है', पुलिस का अलर्ट आते ही पैनिक मोड में नेपाल के लोग
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से उबरने के बीच नुवाकोट के धुंडे बाजार में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. अधिकारियों ने लोगों को नदी किनारे से हटाकर सुरक्षित जगह जाने को कहा है. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक ऊपर से पानी छोड़े जाने या ग्लेशियर टूटने के बाद अगले कुछ मिनटों में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है.
तमिलनाडु में टासमैक की खुदरा दुकानों पर 1 सितंबर से शुरू होने जा रही है हाई-टेक डिजिटल इंडेंट व्यवस्था। हैंडहेल्ड डिवाइस और ओटीपी सुरक्षा से जुड़ी पूरी खबर यहां पढ़ें।
शशि थरूर vs ‘नेपाल के थरूर’… मंच पर चली ऐसी अंग्रेजी कि निकालनी पड़ेगी डिक्शनरी
कार्यक्रम का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस जुगलबंदी को देख अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं। शशि थरूर को ‘नेपाल के थरूर’ से अंग्रेजी में तगड़ी टक्कर मिलती है। कई मुश्किल शब्दों का आदान-प्रदान भी हुआ।
भोटेकोशी त्रासदी के बीच पहले नेपाल और अब चीन में आया भूकंप
दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत में शुक्रवार को धरती हिल गई. चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के मुताबिक लॉन्गचांग शहर में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया. इस खबर से इलाके में हलचल मच गई है और लोग सतर्क हो गए हैं. यह भूकंप शुक्रवार को दर्ज किया गया. चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर यानी सीईएनसी, जो चीन में भूकंप की निगरानी करने वाली आधिकारिक संस्था है, ने इसकी पुष्टि की है. भूकंप का केंद्र लॉन्गचांग शहर में बताया गया है, जो सिचुआन प्रांत में स्थित है. सिचुआन प्रांत पहले भी कई बार भूकंप की घटनाओं का गवाह रह चुका है, इसलिए यहां भूकंप को लेकर लोग हमेशा सतर्क रहते हैं. 5.1 तीव्रता का भूकंप मध्यम स्तर का माना जाता है और इससे इमारतों में हल्के झटके और दरारें आने की आशंका रहती है. फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की जानकारी सामने नहीं आई है. स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
नेपाल में फंसे गुजरात के नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए गुजरात सरकार पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। राज्य सरकार के प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघानी ने बताया कि राज्य सरकार लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में है। इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए ...
उन्हें मारने की कोशिश हो रही... इमरान खान के बेटों का बड़ा दावा
खेल जगत में इमरान खान की पहचान उस कप्तान की रही है, जिनकी अगुवाई में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम ने यादगार प्रदर्शन किया. इमरान खान के अंडर ही पाकिस्तान ने 1992 में अपना पहला वर्ल्ड कप जीता था. अब उनके बेटों के दावों ने एक बार फिर पूर्व पाकिस्तानी कप्तान के स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
Rahul Gandhi और सोनिया पर Deepfake Video पोस्ट करने वाले दो X खातों पर केस
हैदराबाद की साइबर अपराध पुलिस ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को निशाना बनाकर अश्लील डीपफेक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में ‘एक्स’ के दो खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। तेलंगाना कांग्रेस पार्टी से विधानपरिषद के सदस्य (एलएलसी) वेंकट बालमूर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के इन अकाउंट पर ऐसे अश्लील ‘डीपफेक’ वीडियो पोस्ट किए गए हैं जिनमें कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को निशाना बनाया गया है। आरोप है कि ये पोस्ट ‘भारत मैट्रिक्स’ (ऐट एक्स भारत) और ‘भास्कर शास्त्री’ (ऐट भाजोस 1एस97051) नाम के अकाउंट्स से साझा किए गए थे। शिकायतकर्ता ने कहा कि उन ‘एक्स’ हैंडल के जरिए प्रसारित किए गए वीडियो गलत जानकारी और भड़काऊ सामग्री को बढ़ावा दे रहे थे। उन्होंने डीपफेक वीडियो की सामग्री और उसके प्रसार की जांच की मांग की। पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर, 27 अगस्त को साइबर अपराध थाने में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है। भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि महिला नेताओं और शहीदों के परिवार को निशाना बनाना राजनीति का सबसे निचला स्तर है। आईवाईसी के एक बयान में कहा गया है, ‘‘मौजूदा सांसदों, वरिष्ठ नेताओं और सोनिया गांधी को निशाना बनाने वाले इन अश्लील डीपफेक वीडियो को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब इन फर्जी खातों को कड़ा सबक सिखाने का समय आ गया है। हम इन सोशल मीडिया हैंडल के पीछे छिपे हर चेहरे को बेनकाब करेंगे। इन लोगों ने हद पार कर दी है। अब उन्हें कानून का सामना करना होगा।
3 दिन से मौत के मुहाने पर 18 मजदूर... हेलीकॉप्टर आया, लेकिन रेस्क्यू नहीं हो सका
नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी बाढ़ के बाद लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 18 मजदूर पिछले तीन दिनों से फंसे हैं. नेपाली सेना ने हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू की कोशिश की, लेकिन लैंडिंग नहीं हो सकी. एक मजदूर गंभीर रूप से घायल है. नेपाल में 13 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी और 15 हेलीकॉप्टर राहत-बचाव में लगाए गए हैं.
ट्रेनों में गंदगी की तो खैर नहीं! पेनल्टी से सजा तक रेलवे लाया नए नियम
रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म और ट्रेन में गंदगी फैलाना अब जेब पर भारी पड़ सकता है. रेलवे ने साफ-सफाई से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए अधिकतम जुर्माने की रकम ₹500 से बढ़ाकर ₹1,000 कर दी है. कचरा फेंकने के अलावा थूकने, रेलवे संपत्ति पर लिखने, पोस्टर लगाने और दूसरी प्रतिबंधित गतिविधियों पर भी कार्रवाई हो सकती है.
Delhi में पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind ने मनाया रक्षाबंधन का पर्व
देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली में अपने घर पर रक्षाबंधन का त्योहार बड़ी खुशी और उत्साह के साथ मनाया। इस खास मौके पर उन्होंने सभी देशवासियों को रक्षाबंधन की दिल से बधाई और शुभकामनाएं दीं। समाज को जोड़ने वाला पवित्र धागा रामनाथ कोविंद ने कहा कि रक्षाबंधन सिर्फ भाई और बहन के प्यार तक सीमित नहीं है। यह त्योहार इंसानियत, आपस में सम्मान और समाज में एक-दूसरे को जोड़ने की भावना को दिखाता है। भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है, जहां भाई-बहन के इस रिश्ते को इतने खास तरीके से मनाया जाता है। यह धागा प्यार का एक ऐसा मजबूत बंधन है, जो जिंदगी भर कभी नहीं टूटता। #WATCH | Delhi: Former President Ram Nath Kovind celebrates the festival of Raksha Bandhan at his residence. pic.twitter.com/NJZlrfdh6W — ANI (@ANI) August 28, 2026
ककोड़ा की सब्जी नहीं खाने वाले भी उंगलियां चाटते रह जाएंगे, लंच और डिनर के लिए परफेक्ट है ये रेसिपी
क्या आपको भी ककोड़ा की सब्जी पसंद नहीं है? इस आसान रेसिपी को ट्राई करें, बच्चे और बड़े सभी उंगलियां चाटते रह जाएंगे.
Neeraj Chopra ने 28 अगस्त को जीता था स्वर्ण, Budapest में रचा था नया इतिहास
ओलंपिक चैम्पियन नीरज चोपड़ा ने 28 अगस्त 2023 को इतिहास रचा और बुडापेस्ट में विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। नीरज ने पुरूषों की भालाफेंक स्पर्धा में 88 . 17 मीटर के थ्रो के साथ यह उपलब्धि हासिल की। तोक्यो में 2021 ओलंपिक में एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले चोपड़ा पहले भारतीय बने और उन्होंने 2022 में यूजीन में विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता था। इस प्रकार एक ही समय पर ओलंपिक और विश्व खिताब जीतने वाले वह तीसरे भालाफेंक खिलाड़ी बन गए। अब चोपड़ा के नाम खेल के सारे खिताब हो गए हैं। उन्होंने एशियाई खेल (2018), राष्ट्रमंडल खेल (2018) स्वर्ण के अलावा चार डायमंड लीग खिताब और 2022 में डायमंड लीग चैम्पियन ट्रॉफी जीती। वह 2016 में जूनियर विश्व चैम्पियन रहे और 2017 में एशियाई चैम्पियनशिप खिताब जीता। 28 अगस्त 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दक्षिणी लेबनान में लगभग पांच दशक बाद संयुक्त राष्ट्र शांति सेना को समाप्त करने का निर्णय लिया। ‘लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल’ (यूएनआईएफआईएल) का गठन 1978 में इजराइल के आक्रमण के बाद किया गया था। उसका उद्देश्य दक्षिणी लेबनान से इजराइली सैनिकों की वापसी की निगरानी करना था और 2006 में इज़राइल तथा उग्रवादी समूह हिज़्बुल्ला के बीच एक महीने तक चले युद्ध के बाद इसके मिशन का विस्तार किया गया। देश-दुनिया के इतिहास में 28 अगस्त की तारीख में दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-1600 : मुगलों ने अहमदनगर पर कब्जा किया। 1896 : उर्दू शायर फिराक गोरखपुरी का जन्म। 1904 : कलकत्ता से बैरकपुर तक प्रथम कार रैली का आयोजन। 1916 : प्रथम विश्वयुद्व में इटली ने जर्मनी के खिलाफ युद्व की घोषणा की। 1922 : जापान साइबेरिया से अपने सैनिकों को वापस बुलाने पर सहमत हुआ। 1924 : जॉर्जिया में सोवियत संघ के खिलाफ विद्रोह में हजारों लोगों की मौत। 1956 : इंग्लैड ने क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया को हटाकर एशेज श्रृंखला पर कब्जा जमाया। 1972 : साधारण बीमा कारोबार राष्ट्रीयकरण विधेयक पारित। 1984 : सोवियत संघ ने भूमिगत परमाणु परीक्षण किया। 1986 : भाग्यश्री साठे शतरंज में ग्रैंडमास्टर बनने वाली भारत की पहली महिला बनीं। 1990 : इराक ने कुवैत को अपना 19वां प्रांत घोषित किया। 1993 : पश्चिमी चीन के किंघाई में एक बांध टूटने से भीषण तबाही मची, जिसमें 280 से अधिक लोगों की मौत हो गई। 1997 : अल्जीरिया के रैस में सशस्त्र इस्लामी समूहों ने देश के सबसे खूनी नरसंहारों में से एक को अंजाम दिया गया जिसमें आधिकारिक तौर पर 98 और अनौपचारिक रूप से 300 से अधिक ग्रामीण मारे गए थे। 2003 : ब्रिटेन के दक्षिण लंदन में भारी बिजली संकट (ब्लैकआउट) हुआ, जिससे लगभग पांच लाख लोगों की बिजली आपूर्ति और लंदन का अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क प्रभावित हुआ। 2006 : इराक के दीवानिया में पाइपलाइन विस्फोट में 36 लोग मारे गए। 2013 : इराक में सिलसिलेवार धमाकों में 65 से अधिक लोगों की मौत। ये हमले मुख्य रूप से राजधानी बगदाद के शिया बहुल इलाकों को निशाना बनाकर किए गए थे। 2015 : मणिपुर के चंदेल जिले का जौमोल गांव भूस्खलन होने से मलबे में दबा, 20 से अधिक लोग मारे गए। 2021 : बांग्लादेश में मालवाहक नौका से टकरा कर यात्री नाव डूबी, 22 की मौत2018 : भारत के मंजीत सिंह ने जकार्ता एशियाई खेलों की पुरुष 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। 2019 : पूर्वी मेक्सिको के एक क्लब ‘मेक्सिको बार’ पर बंदूकधारियों ने गैसोलीन बम फेंक कर उसे आग लगा दी, 25 लोगों की मौत। 2021 : बांग्लादेश में दो नौकाओं की टक्कर में यात्री नाव डूबी, 22 की मौत। 2022 : लीबिया की राजधानी त्रिपोली में हिंसक झड़पों में 30 लोगों की मौत। 2023 : ओलंपिक चैम्पियन नीरज चोपड़ा ने बुडापेस्ट में रचा इतिहास, विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने। 2025 : 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दक्षिणी लेबनान में लगभग पांच दशक बाद संयुक्त राष्ट्र शांति सेना को समाप्त करने का निर्णय लिया।
रात के बचे चावल से झटपट बना लें स्वादिष्ट सा नाश्ता, हर कोई चट कर जाएगा पूरी प्लेट
Leftover Rice Recipe : रात के बचे हुए चावल से आप घर पर बहुत ही आसान तरीके से स्वादिष्ट ब्रेकफास्ट बना सकते हैं. यहां हम आपको एक खास रेसिपी के बारे में बताने जा रहे हैं. चलिए नोट कर लें पूरी रेसिपी-
न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम से ठीक पहले सोशल मीडिया पर नया विवाद खड़ा हो गया है. कार्यक्रम के आयोजक AHEAD फोरम का X अकाउंट कुछ घंटों के लिए सस्पेंड रहा, जिसके बाद संगठन ने दावा किया कि विरोधियों ने बॉट अकाउंट्स के जरिए उसके हैंडल को ब्लॉक करवाने की कोशिश की.
आज पूरे दिन पंचक, सुबह का मुहूर्त निकला, दोपहर में कब बांधें राखी?
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर आज पूरे दिन पंचक रहेगा. सुबह का मुख्य शुभ मुहूर्त निकल चुका है. जानें पंचक के बीच दोपहर में कब भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा .
Tilak Nagar Muskaan Murder Case: पुलिस मुठभेड़ में आरोपी इमरान गिरफ्तार, पैर में लगी 3 गोलियां
पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में 21 वर्षीय छात्रा और मॉडल मुस्कान की चाकू मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी आकिब उर्फ इमरान को गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार देर रात राजा गार्डन स्थित होम गार्डन ग्राउंड के पास पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान इमरान के पैर में तीन गोलियां लगीं। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस अब हत्या के पीछे की वजह और मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच कर रही है। आरोपी ने पुलिस पर चार राउंड फायरिंग की वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी हरेश्वर वी. स्वामी ने बताया कि परसों शाम करीब 6 बजे तिलक नगर थाना क्षेत्र में मुस्कान नाम की युवती की हत्या हुई थी। इस मामले में इमरान मुख्य संदिग्ध था और उसे घटना के बाद मौके से भागते हुए देखा गया था। इसके बाद पुलिस ने दिल्ली और दिल्ली से बाहर कई जगहों पर उसकी तलाश शुरू की। इमरान के राजौरी गार्डन इलाके में दिखाई देने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान इमरान ने पुलिस पर चार राउंड फायरिंग की। जवाब में पुलिस ने सात राउंड फायरिंग की, जिसमें तीन गोलियां इमरान के पैरों में लगीं। अभी इमरान अस्पताल में भर्ती है, इसलिए पुलिस उससे विस्तार से पूछताछ नहीं कर पाई है। उसके ठीक होने के बाद उससे पूछताछ की जाएगी। पुलिस हथियार कहां से आया और हत्या के पीछे असली वजह क्या थी, इसकी भी जांच करेगी। #WATCH | Delhi: DCP West District, Hareshwar V Swami, says, The day before yesterday, around 6 PM, a young woman named Muskan was murdered within the jurisdiction of the Tilak Nagar police station. The prime suspect in the case is Imran. He was seen fleeing the scene, so a… https://t.co/zRoKjuO77Q pic.twitter.com/IBzXirhegs — ANI (@ANI) August 28, 2026 इसे भी पढ़ें: Mohan Bhagwat के अमेरिकी इवेंट आयोजक का X Account निलंबित, Akhilesh ने साधा निशाना 15 से ज्यादा पुलिस टीमें तलाश में जुटी थीं आरोपी आकिब उर्फ इमरान की उम्र 26 साल है और वह जिम ट्रेनर के तौर पर काम करता था। पुलिस के मुताबिक, 26 अगस्त को मुस्कान की उसके अपार्टमेंट में चाकू मारकर हत्या करने के बाद से इमरान फरार था। उसे पकड़ने के लिए 15 से ज्यादा पुलिस टीमें बनाई गई थीं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना के बाद पूरे जिले में बैरिकेड और चेकपॉइंट लगाए गए थे। कई जगह पुलिस टीमों को तैनात किया गया था। इमरान लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। सूचना मिलने के बाद स्पेशल स्टाफ और एंटी-टेरर स्क्वाड (एटीएस) की टीमों ने उसे पकड़ने के लिए घेराबंदी की। मुठभेड़ में इमरान के पैर में लगीं तीन गोलियां पुलिस के अनुसार, इमरान और पुलिसकर्मियों के बीच हुई गोलीबारी में आरोपी ने चार राउंड फायर किए, जबकि पुलिस ने सात राउंड गोली चलाईं। इस दौरान इमरान के पैर में तीन गोलियां लगीं। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और अस्पताल में भर्ती कराया। मामले में आगे की जांच जारी है। जिम में हुई थी मुस्कान और इमरान की पहली मुलाकात पुलिस के मुताबिक, इमरान मुस्कान को करीब 18 महीने से जानता था। दोनों की पहली मुलाकात जिम में हुई थी, जहां इमरान ट्रेनर था। मुस्कान दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में सेकंड ईयर की छात्रा थीं। वह कंटेंट क्रिएटर और पार्ट-टाइम मॉडल के तौर पर भी काम करती थीं। परिवार के जानकारों के मुताबिक, मुस्कान की बड़ी बहन भी मॉडल हैं। वह चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं और पश्चिमी दिल्ली में मंगला अस्पताल के पास किराए के मकान में माता-पिता और भाई-बहनों के साथ रहती थीं। इसे भी पढ़ें: Rajasthan DGP से मिले Army Chief Dheeraj Seth, सीमा सुरक्षा और इंटेलिजेंस पर बनी सहमति मुस्कान नहीं चाहती थी इमरान के साथ रिश्ता इमरान बेरोजगार था। जिम में करीब तीन महीने काम करने के बाद उसे लगभग दो महीने पहले ग्राहकों के साथ अनुचित व्यवहार के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था। 18 जुलाई को मुस्कान ने इमरान द्वारा परेशान किए जाने की शिकायत पुलिस स्टेशन में की थी, लेकिन उन्होंने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। पुलिस ने इमरान के नशे की लत के इतिहास को देखते हुए उसे ड्रग डि-एडिक्शन सेंटर भेज दिया था। 30 जुलाई को उसे खुद को नुकसान पहुंचाने के आरोप में वहां से छुट्टी मिल गई थी। पुलिस का कहना है कि मुस्कान इमरान के साथ रिश्ता जारी नहीं रखना चाहती थीं, लेकिन वह उनका पीछा करता रहा। पुलिस को शक है कि पिछले दो महीनों में मुस्कान के किसी और से बात करने को लेकर इमरान गुस्से में था। शाम 5:40 बजे इमारत में जाता दिखा आरोपी पुलिस के मुताबिक, 26 अगस्त की शाम इमरान मुस्कान के घर पहुंचा, जब वह घर में अकेली थीं। दोनों के बीच बहस हुई, जिसके बाद इमरान ने कथित तौर पर चाकू से उन पर कई वार किए और वहां से भाग गया। सीसीटीवी फुटेज में इमरान को करीब शाम 5:40 बजे इमारत में दाखिल होते हुए देखा गया है। तिलक नगर पुलिस स्टेशन को शाम 7:24 बजे मुस्कान पर चाकू से हमले की पीसीआर कॉल मिली थी। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (पश्चिम) हरेश्वर वी. स्वामी ने यह जानकारी दी। घर की मददगार ने दूसरी मंजिल पर मुस्कान को घायल हालत में देखा और परिवार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया। मुस्कान को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया।
कंगना रनौत ने भाई को बांधी राखी- गले लगाकर दिया आशीर्वाद, Photos
कंगना रनौत ने अपने रक्षाबंधन सेलिब्रेशन की तस्वीरें फैंस संग शेयर करके उन्हें ट्रीट दी है. एक्ट्रेस ने अपने भाई और भाभी संग धूमधाम से राखी का त्योहार मनाया.
Experts View on Gold: इंटरनेशनल मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि केविन वॉर्श ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकते हैं और इस आशंका में शॉर्ट टर्म में सोने की कीमतों में कुछ और नरमी देखने को मिल सकती है.
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Meta पर 17.1 बिलियन डॉलर का जुर्माना, अब YouTube और TikTok पर भी क्यों नियम थोपना चाहते हैं जकरबर्ग?
Mark Zuckerberg ने बड़ा दांव खेला है. Meta अपने 1.6 लाख करोड़ रुपये के जुर्माने से YouTube और TikTok को घेरने की कोशिश कर रहा है. कंपनी इंडस्ट्री नियमों में बदलाव चाह रही है.
चीन की स्मार्ट सिटी से नेपाल में तबाही? रसुवा फ्लैश फ्लड पर पत्रकार समूह का सनसनीखेज दावा
नेपाल के रसुवा जिले में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड को लेकर चीन की सीमा के पास चल रहे निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गए हैं। नेपाल के एक पत्रकार समूह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया है कि तिब्बत सीमा क्षेत्र में चीनी ...
नेपाल में जलप्रलय, बिहार-यूपी में ‘सन्नाटा’ ! आखिर कहां गायब हो गई बाढ़ की वो खतरनाक लहर?
नेपाल में ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़ ने बिहार और यूपी को भी अलर्ट पर ला दिया था. लेकिन नेपाल जैसी तबाही भारत में क्यों नहीं हुई? जानिए गंडक नदी, वाल्मीकिनगर बैराज, फ्लड वेव और प्रशासनिक तैयारी का पूरा गणित.
डॉक्टर को जिम में आया हार्ट अटैक, एक्सरसाइज करते धड़ाम से गिरा और मौत, VIDEO सामने आया
डॉक्टर रोजाना की तरह जिम करने पहुंचे थे, वो घुटने के बल बैठ कर एक्सरसाइज कर ही रहे थे, इसी बीच अचानक वो मुंह के बल गिरे और उनकी मौत हो गई. यह पूरी घटना जिम में लगे सीसीटीवी में कैद हो गई.
H1N1 (स्वाइन फ्लू) के कुछ मरीज ICU तक क्यों पहुंच जाते हैं? सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, शारदाकेयर-हेल्थसिटी, डॉ. नीरज कुमार से जानें किन लोगों में खतरा ज्यादा होता है और कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए.
सावन में मटन खाने की जिद करने लगा बेटा, पिता ने पीट-पीटकर मार डाला; मां ने की सबूत मिटाने की कोशिश
विवाद की शुरुआत तब हुई जब महेश ने घर पर मटन खाने की जिद पकड़ी। इस बात को लेकर पिता और बेटे के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि बात हाथापाई तक पहुंच गई।
Thane Ashram School का रसोइया गिरफ्तार, पहले भी POCSO मामले में जा चुका है जेल
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक सरकारी आश्रमशाला की 22 नाबालिग छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप में इस सप्ताह की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया रसोइया पहले भी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत जेल जा चुका है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, वह आदतन अपराधी है और पिछले मामले में निलंबित किए जाने के बावजूद बाद में उसे बहाल कर दिया गया था। एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (आईटीडीपी), शहापुर की परियोजना अधिकारी तेजस्विनी आर. जी. ने बताया कि शहापुर के टेंभा स्थित आश्रमशाला में काम करने वाला आरोपी गणपति गावली पहले आघई की एक अन्य आश्रमशाला में भी इसी तरह के आरोपों का सामना कर चुका है। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में गिरफ्तारी के बाद गावली को निलंबित कर दिया गया है। तेजस्विनी ने कहा, ‘‘आदतन अपराधी गावली की सेवानिवृत्ति में केवल 10 महीने बाकी हैं। आघई की एक अन्य आश्रमशाला में पॉक्सो अधिनियम अपराधों को लेकर भी उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था और तब उसे निलंबित किया गया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि बाद में उसे किसने और किन परिस्थितियों में बहाल किया।’’टेंभा स्थित आश्रमशाला की छात्राओं ने 24 अगस्त को पहली बार अधिकारियों से शिकायत की थी। इसके बाद अधीक्षक ने मामला प्रधानाध्यापक के पास भेजा। प्रधानाध्यापक ने तत्काल जनजातीय विकास विभाग को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी। तेजस्विनी ने बताया कि इसके बाद शहापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वह इस तरह की हरकतों में शामिल था। 17-18 छात्राओं का एक ही तरह की शिकायत करना अपने आप में इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उनके आरोप सही हैं।’’अधिकारियों के अनुसार, गावली को इससे पहले आघई आश्रमशाला में छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जेल से रिहा होने के बाद उसे मुरबाड की मोरोशी आश्रमशाला में तैनात किया गया था। टेंभा आश्रमशाला में हालिया तबादले से पहले वह वहीं कार्यरत था।
H1N1 फ्लू के 3-4 दिन बाद फिर से चढ़ने लगा तेज बुखार? डॉक्टर से समझें यह किस खतरे का है संकेत
H1N1 या स्वाइन फ्लू में बुखार उतरने के बाद फिर तेज बुखार, खांसी और सांस फूलना फेफड़ों के सेकेंडरी बैक्टीरियल संक्रमण का संकेत हो सकता है. डॉ. प्रेरणा गोयल (सीनियर कंसल्टेंट - फिजिशियन, आरजी हॉस्पिटल्स, लुधियाना) से जानिए चेतावनी संकेत.
TRE 4 Protest : NET, CTET, STET सब पास, फिर भी बेरोजगार, संघर्ष और नौकरी की तलाश में भटकती एक पीढ़ी
TRE 4 Syllabus Controversy : TRE-4 भर्ती को लेकर जारी विवाद के बीच बिहार के हजारों अभ्यर्थियों की संघर्षभरी कहानी सामने आई है. कोई 15 साल से नौकरी की तैयारी कर रहा है, तो कोई NET, CTET और STET जैसी परीक्षाएं पास करने के बावजूद रोजगार का इंतजार कर रहा है.
नेपाल बाढ़ की सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाया तबाही की असली मंजर, कई इलाकों का बदला भूगोल
सैटेलाइट तस्वीरों में भोटे कोशी नदी के किनारे बसे कई इलाके उजड़ते दिखाई दे रहे हैं. बाढ़ ने सड़कों, पुलों और रिहायशी क्षेत्रों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है.
DDA की 1287 फ्लैट वाली नागरिक आवास योजना, आज से बुकिंग शुरु, जानें खासियत और कीमत
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) 1287 फ्लैट वाली नागरिक आवास योजना शुरू करने जा रहा है. इसमें 1287 HIG और MIG फ्लैट्स उपलब्ध होंगे.
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H1N1 Virus Symptoms: किन लोगों को इस H1N1 वायरस से अधिक सावधान रहने की जरूरत है, इस बारे में BLK-Max Hospital, Delhi के Principal Director & HOD-Pulmonology डॉ. संदीप नायर से बातचीत की. जानें डॉक्टर का क्या कहना है?
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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर भाई-बहन की खूबसूरत और रियलिस्टिक फोटो बनानी है? यहां देखें बेहतरीन AI prompts, जिनकी मदद से आप राखी सेल्फी, गिफ्ट एक्सचेंज और फैमिली फोटो को शानदार लुक दे सकते हैं.
बिना दाल भिगोए, जरा से घी-मेवों से बनाएं पीली मूंग दाल की बर्फी
Moong Dal Burfi: अगर आप भी आज रक्षाबंधन पर झटपट कुछ मीठा बनाना चाहते हैं तो यहां हम आपको इंस्टैंट पीली मूंग दाल की टेस्टी बर्फी बनाने की रेसिपी बता रहे हैं. ये खाने में बहुत स्वादिष्ट होती है.
युवा विद्यार्थी मंथन में CM धामी का संवाद, बोले- युवा पीढ़ी के सपनों से बनेगा विकसित उत्तराखंड
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में आयोजित ‘युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में युवा विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के विचार और सुझाव सुने तथा उनके भविष्य के सपनों और विकसित ...
मुंबई में बड़े पैमाने पर उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग रहते हैं और इनमें से कई अपने गृहराज्यों में मतदाता भी हैं. भले ही मराठी अनिवार्य करने का फैसला शिंदे के मंत्री का था लेकिन सरकार का चेहरा तो बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस ही हैं.
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अहमदाबाद से दिल्ली जा रही वोल्वो स्लीपर बस खड़े ट्रक से टकरा गई. इससे पहले जुलाई में बस और ट्रेलर की भीषण भिड़ंत हुई थी.
देश में जल्द ही रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला है. यह त्योहार केवल कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्यार और विश्वास का वो सफर है, जो वक्त के साथ मजबूत होता जाता है.
दिल्ली आ गई 'कांदा एक्सप्रेस', 60-70 रुपये वाला प्याज अब 35 रुपये किलो, जानिए कहां मिलेगा?
दिल्ली में प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 35 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री शुरू की है। नासिक से ‘कांदा एक्सप्रेस’ प्याज लेकर दिल्ली पहुंची है। जानिए दिल्ली में कहां-कहां मिलेगा सस्ता प्याज, बिक्री की पूरी जानकारी।
चंद्रग्रहण का रक्षाबंधन पर क्या होगा असर? कैसा रहेगा आपका दिन, देखें भाग्य चक्र
आज के कार्यक्रम भाग्य चक्र में शैलेंद्र पांडेय बात करेंगे रक्षाबंधन के पर्व की, इसके पौराणिक, धार्मिक महत्व की, इसके पूजा विधान की. क्योंकि आज दुनिया में चंद्रग्रहण भी लग रहा है तो इस चंद्रग्रहण का रक्षाबंधन पर क्या असर है, इस बारे में भी बात करेंगे. आपके सवाल का जवाब भी देंगे. पहर और सक्सेस मंत्र के साथ ही बताएंगे मेष से लेकर मीन तक 12 राशियों के दैनिक राशिफल के बारे में. देखें वीडियो.
देश की बेटियों ने जीता दिल, कर दिखाया वो कमाल जो अब तक नहीं हुआ
52 साल बाद भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप के शीर्ष पांच में पहुंची है. जर्मनी को 3-1 से हराकर पांचवां स्थान हासिल करने वाली भारत की इस टीम में 11 खिलाड़ी विश्व कप डेब्यूटेंट थीं. पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ नीदरलैंड्स से हार और आखिरी 17 मिनट में जर्मनी के खिलाफ तीन गोल इस अभियान की बढ़ती ताकत और भविष्य की संभावनाओं का संकेत देते हैं.
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में रक्षाबंधन के दिन बड़ा सड़क हादसा हो गया। एबी रोड पर ब्यावरा के भोपाल बायपास के पास एक स्लीपर कोच बस घुमावदार ब्रिज पर हादसे का शिकार हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में 4 यात्रियों की मौत की सूचना है, जबकि कई ...
History of Rakhi: रक्षाबंधन पर बंधी राखी सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक नहीं, बल्कि प्राचीन रक्षासूत्र परंपरा से जुड़ी है. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि यह रक्षा, संकल्प, जिम्मेदारी, धर्म और मर्यादा का संदेश देती है.
रक्षाबंधन 2026 पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में सवा लाख बेसन लड्डुओं का भोग लगेगा. जानें घर पर स्वादिष्ट बेसन के लड्डू बनाने की आसान रेसिपी.

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