कोर्ट की कार्यवाही को अनधिकृत रूप से सोशल मीडिया मंचों पर डालने, साझा करने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अंतरिम आदेश जारी कर न्यायालय की कार्यवाही के ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना संबंधित न्यायालय की पूर्व अनुमति के सोशल मीडिया तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डालने, एडिट करने, शेयर करने या उससे कमाई करने पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची […] The post कोर्ट की कार्यवाही को अनधिकृत रूप से सोशल मीडिया मंचों पर डालने, साझा करने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक appeared first on Sabguru News .
रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया
नई दिल्ली। केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि भारत के […] The post रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया appeared first on Sabguru News .
साल 2026 में सिनेमाघरों में एक से बढ़कर एक फिल्में रिलीज हुई हैं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर न सिर्फ धमाकेदार कमाई की बल्कि अब ओटीटी पर भी जलवा बिखेर रही हैं। हालांकि, इनमें सबसे ज्यादा ध्यान हॉरर (Horror) कैटेगरी की फिल्मों ने खींचा है। ऐसी ही एक नई डरावनी फिल्म इन दिनों बड़े पर्दे पर दर्शकों की चीखें निकाल रही है।महज 14 दिनों के भीतर कई बड़ी हॉरर फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ने वाली इस फिल्म को देखने के लिए आज भी लोग थिएटर्स का रुख कर रहे हैं। इस बहुचर्चित और खौफनाक फिल्म का नाम ‘इविल डेड बर्न’ (Evil Dead Burn) है।नामचीन मेकर्स और दमदार स्टारकास्टइस डरावनी फिल्म का निर्देशन मशहूर फ्रांसीसी डायरेक्टर सेबेस्टियन वानीसेक ने किया है। उन्होंने अपने सह-लेखक के साथ मिलकर इसकी सांसें थमा देने वाली पटकथा (Screenplay) तैयार की है।फिल्म में सूहेला याकूब, टैंडी राइट, हंटर डूहान, लुसिएन बुकानन, एरोल शैंड और मॉड डेवी जैसे मंझे हुए अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की टोली नजर आ रही है। सबसे खास बात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट को सैम राइमी और रॉब टैपर्ट जैसे हॉरर जॉनर के दिग्गज प्रोड्यूसर्स का साथ मिला है।रोंगटे खड़े कर देने वाली है कहानीफिल्म की कहानी एक ऐसी महिला और उसके परिवार के ईद-गिर्द घूमती है, जिसके पति की अचानक मौत हो जाती है। खुद को संभालने के लिए वह महिला अपने ससुराल वालों के पास रहने जाती है। लेकिन वहां एक प्राचीन और खतरनाक शैतानी शक्ति एक्टिव हो जाती है।धीरे-धीरे परिवार के सदस्य उस बुरी ताकत (डेडाइट्स) के कब्जे में आने लगते हैं और एक-दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं। जब महिला को समझ आता है कि पूरा परिवार खत्म होने की कगार पर है, तो वह निडर होकर उन खौफनाक शैतानी शक्तियों का सामना करती है।14 दिनों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शनबॉक्स ऑफिस आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने अपने दूसरे मंगलवार को नॉर्थ अमेरिका में $857k की कमाई की।14 दिनों का घरेलू कलेक्शन (US): $25.4 मिलियन (जो अब बढ़कर $27.2 मिलियन हो चुका है)।वर्ल्डवाइड कलेक्शन (Worldwide): फिल्म ने अब तक दुनिया भर में $52.6 मिलियन (लगभग 440 करोड़ रुपये) का शानदार कारोबार कर लिया है।हालांकि, सैम राइमी की 2013 में आई रिबूट फिल्म ‘इविल डेड’ ने दुनिया भर में $97.5 मिलियन कमाए थे, जिससे ‘इविल डेड बर्न’ अभी लगभग $50 मिलियन पीछे है, फिर भी इसकी रफ्तार बॉक्स ऑफिस पर बनी हुई है।ऑडियंस रिएक्शन और IMDb रेटिंगदर्शकों का रिस्पॉन्स: दुनिया भर के हॉरर लवर्स इस फिल्म के खौफनाक सीन्स, जंप स्केयर्स और टेंशन से भरे बैकग्राउंड स्कोर की जमकर तारीफ कर रहे हैं। भारत में भी इस फिल्म को लेकर हॉरर फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है।IMDb रेटिंग: फिल्म को रिव्यू एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म IMDb पर 10 में से 6.7 की रेटिंग मिली है, जो हॉरर कैटेगरी की फिल्मों के लिहाज से एक बेहतरीन स्कोर माना जाता है।तेजी से आगे बढ़ती कहानी और बेहतरीन विजुअल इफेक्ट्स (VFX) की बदौलत 'इविल डेड बर्न' साल 2026 की सबसे चर्चित और डरावनी फिल्मों की लिस्ट में अपनी जगह पक्की कर चुकी है।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन अब बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस के मार्च के बाद, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा की गई एक विस्तृत पोस्ट में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की मंशा और पुलिस कार्रवाई पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगाने वाले मामले में शिक्षा मंत्री का बचाव करने के लिए इतनी उतावली क्यों दिख रही है।छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई बर्बरममता बनर्जी ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई की सख्त निंदा की। उन्होंने लिखा:अस्वीकार्य कार्रवाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस का बल प्रयोग, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ना और पैलेट गन का इस्तेमाल बेहद परेशान करने वाला और पूरी तरह से अमानवीय है।भविष्य की लड़ाई: यह लड़ाई केवल एक परीक्षा घोटाला (NEET Scam) में न्याय पाने की नहीं है, बल्कि देश के हर युवा के भविष्य को सुरक्षित करने का आंदोलन है।लोकतांत्रिक आंदोलन से क्यों डरी हुई है सरकार?केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित करना तथा प्रदर्शनकारी छात्रों पर कड़े कानून लगाना यह दर्शाता है कि सरकार इस लोकतांत्रिक आंदोलन से घबराई हुई है।उन्होंने पूछा कि अगर लाखों अभ्यर्थियों का जीवन और करियर प्रभावित करने वाले आरोपी खुले घूम रहे हैं और जवाबदेही से बच रहे हैं, तो सरकार आखिर किस-किस को बचाने का प्रयास कर रही है।छात्रों के साथ खड़ा है पूरा विपक्षपूर्व सीएम ने देश के युवाओं के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि पूरा विपक्ष इस कठिन परिस्थिति में छात्रों और अभ्यर्थियों के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने लाठियों, पुलिस कार्रवाई और सरकारी दबाव के आगे न झुकने के लिए युवाओं के अटूट साहस को सलाम किया।आपको बता दें कि इससे पहले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी छात्रों की मांगों के समर्थन में अनशन पर थे, जिन्होंने हाल ही में सरकार से मिले आश्वासन के बाद अपनी 26 दिन पुरानी भूख हड़ताल खत्म की है। हालांकि, जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा सुधारों को लेकर विभिन्न संगठनों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है।
देशभर के कई राज्यों में मानसून पूरी तरह से मेहरबान है, लेकिन गुजरात में इस समय बारिश ने हाहाकार मचा रखा है। खासकर दक्षिण गुजरात (South Gujarat) में तो महज एक ही दिन में इतनी भीषण मूसलाधार बारिश हुई कि कई इलाकों में जलप्रलय और बाढ़ जैसे भयावह हालात पैदा हो गए।घर, दुकानें, मुख्य सड़कें, गाड़ियां और रेलवे ट्रैक सब पानी में डूब गए। आखिर गुजरात के एक ही हिस्से में अचानक इतनी भयानक बारिश क्यों हुई और मौसम विभाग (IMD) का इस पर क्या कहना है? आइए समझते हैं।क्यों हुई गुजरात में इतनी भयावह बारिश?भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस अप्रत्याशित और मूसलाधार बारिश के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े मौसमी कारण (Weather Systems) जिम्मेदार हैं:मजबूत दक्षिण-पश्चिम मानसून: गुजरात के ऊपर दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय अपने चरम पर है।अरब सागर से उठती नमी: अरब सागर से लगातार नमी से भरी मानसूनी हवाएं बिना किसी रुकावट के गुजरात के तटीय अंचलों की ओर आ रही हैं।एक ही जगह पर रुका वेदर सिस्टम: पश्चिमी भारत के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure System) एक ही जगह पर स्थिर हो गया। इसके चलते दक्षिण गुजरात के सीमित दायरे में लगातार बादलों का जमावड़ा बना रहा और कई घंटों तक मूसलाधार बारिश होती रही।इन इलाकों में हुई सबसे ज्यादा रिकॉर्ड तोड़ बारिशस्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के आंकड़ों के मुताबिक, बारिश ने बीते 24 घंटों में सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:उंबरगांव (Umargam): सबसे ज्यादा 906 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से कई गुना अधिक और बेहद दुर्लभ श्रेणी में आती है।कपाराडा: 731 मिलीमीटरनानापोंधा: 643 मिलीमीटरधरमपुर: 499 मिलीमीटरपारडी: 448 मिलीमीटरवापी व वलसाड: वापी में 413 mm और वलसाड में 403 mm बारिश दर्ज हुई।तापी व डांग: तापी के डोलवन में 378 mm और डांग के वघई में 369 mm बारिश हुई।सामान्य से 4 गुना ज्यादा बरसा पानी, आगे भी राहत नहींमौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि किसी क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर 204.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश होती है, तो उसे 'अत्यधिक भारी बारिश' (Extremely Heavy Rainfall) की श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन गुजरात के उंबरगांव, कपराडा और वलसाड जैसे इलाकों में इस मानक से 3 से 4 गुना ज्यादा पानी एक ही दिन में बरस गया।भारी बारिश के कारण नदियों-नालों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, पटरियों पर पानी भरने से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक गुजरात में मानसूनी सिस्टम ऐसा ही बना रहेगा और भारी बारिश से फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं हैं।
देशभर में नीट (NEET) परीक्षा धांधली को लेकर मचे बवाल और छात्रों के लगातार जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच पूर्व मिस वर्ल्ड और बॉलीवुड अभिनेत्री मानुषी छिल्लर ने अभ्यर्थियों के हक में अपनी आवाज उठाई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा करते हुए मानुषी ने कहा कि जो लोग इस स्थिति में आसानी से कह देते हैं कि 'बस परीक्षा दोबारा लिख लो', वे असल में एक छात्र के संघर्ष, रातों की नींद और सालों की कड़ी मेहनत को नहीं समझ पा रहे हैं।'2015 में मुझे भी दोबारा देनी पड़ी थी परीक्षा'मानुषी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए खुलासा किया कि साल 2015 में जब वे खुद मेडिकल की तैयारी कर रही थीं, तब पेपर लीक होने के कारण उन्हें भी दोबारा परीक्षा देनी पड़ी थी।उन्होंने लिखा कि एक एस्पिरेंट के लिए यह सिर्फ एक एग्जाम नहीं होता, बल्कि यह सालों की तपस्या, अनगिनत त्यागों और अपने सपनों को पूरा करने की जिद होती है। बार-बार परीक्षा रद्द होने या लीक होने से छात्रों का मनोबल पूरी तरह टूट जाता है।सिस्टम की खामियों और मिडिल क्लास के संघर्ष पर उठाए सवालमानुषी ने उन वित्तीय और मानसिक चुनौतियों का खास जिक्र किया, जिनसे एक परीक्षार्थी का पूरा परिवार गुजरता है। उन्होंने कहा:माता-पिता का त्याग: डॉक्टर बनने का सपना सिर्फ बच्चे का नहीं होता। कोचिंग सेंटरों में उन माता-पिता को देखना दर्दनाक होता है जो अपनी हैसियत से ज्यादा कर्ज लेकर बच्चों की फीस भरते हैं।समानता का जरिया: इस असमानता से भरी दुनिया में शिक्षा ही मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आगे बढ़ने और बराबरी हासिल करने का एकमात्र जरिया है।सिस्टम में सुधार जरूरी: परीक्षा प्रणाली की इन गहरी और पुरानी समस्याओं को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।'संवाद और सुधार ही समाधान'अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी यह अपील किसी संस्थान के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के विश्वास पर टिकी है। भारत के लोकतंत्र और संविधान में आस्था जताते हुए उन्होंने कहा कि कड़े से कड़े संकट का समाधान आपसी बातचीत, करुणा और सम्मान से ही निकल सकता है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से युवाओं के भविष्य की खातिर संवेदनशील रुख अपनाने की अपील की।12वीं में 96% मार्क्स और ऑल इंडिया टॉपर रही हैं मानुषीआपको बता दें कि अभिनय जगत में कदम रखने से पहले मानुषी छिल्लर एक बेहद होनहार मेडिकल स्टूडेंट थीं:12वीं में शानदार रिकॉर्ड: उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 96% अंक हासिल किए थे और CBSE के इंग्लिश विषय में ऑल इंडिया टॉपर रही थीं।मेडिकल कॉलेज में एडमिशन: NEET की परीक्षा सफलतापूर्वक क्रैक करने के बाद उन्होंने सोनीपत (हरियाणा) के प्रतिष्ठित 'भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज' में MBBS में दाखिला लिया था।मिस वर्ल्ड का ताज: अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने साल 2017 में मिस वर्ल्ड (Miss World 2017) का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया, जिसके बाद उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा।
अगर आप भी शहर की भागदौड़, भारी ट्रैफिक और रोजमर्रा के तनाव से ब्रेक लेकर कुछ दिन सुकून के बिताना चाहते हैं, तो उत्तर-पूर्व (North-East) की खूबसूरत वादियां आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। ऊंचे-बर्फ से ढके पहाड़, घने जंगल, शांत वातावरण और कुदरती सुंदरता से भरपूर यह क्षेत्र छुट्टियां बिताने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है।पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने एक खास 'अरुणोदय अरुणाचल' (Arunoday Arunachal) फ्लाइट टूर पैकेज लॉन्च किया है। इस पैकेज के जरिए आप बिना किसी झंझट के उत्तर-पूर्व के सबसे खूबसूरत स्थलों की यात्रा कर सकते हैं।किन-किन खूबसूरत जगहों को करेंगे एक्सप्लोर?IRCTC के इस स्पेशल फ्लाइट टूर पैकेज के तहत पर्यटकों को असम और अरुणाचल प्रदेश के कई प्रसिद्ध और दर्शनीय स्थलों की सैर कराई जाएगी:गुवाहाटी (Guwahati): असम का यह प्रमुख शहर उत्तर-पूर्व का प्रवेश द्वार माना जाता है, जहां से इस यादगार यात्रा की शुरुआत होगी।तेजपुर (Tezpur): पवित्र ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिक शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, चाय के बागानों और शांत माहौल के लिए जाना जाता है।दिरांग (Dirang): अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत घाटियों में बसा यह छोटा सा कस्बा अपनी हरियाली, ठंडे मौसम और सुरम्य नजारों के लिए पर्यटकों का दिल जीत लेता है।तवांग (Tawang): समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित तवांग अपने बर्फ से ढके पहाड़ों, विशाल व प्राचीन बौद्ध मठों (Tawang Monastery) और खूबसूरत झीलों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।क्यों खास है यह 'अरुणोदय अरुणाचल' टूर पैकेज?अनछुई प्राकृतिक सुंदरता: शहर के प्रदूषण से दूर साफ हवा, कल-कल बहते झरने और हरियाली आपको पूरी तरह से तरोताजा कर देगी।हिमालय के विहंगम दृश्य: बादलों से ढकी चोटियां, गहरी घाटियां और पहाड़ियों के नजारे आपके सफर को जीवनभर के लिए यादगार बना देंगे।आध्यात्मिक शांति: तवांग के प्रसिद्ध बौद्ध मठों में जाकर आपको अनोखी मानसिक शांति और संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलेगा।एडवेंचर और रोड ट्रिप: घुमावदार पहाड़ी रास्ते और ऊंचे दर्रे एडवेंचर और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं।कितना आएगा खर्च और क्या मिलेंगी सुविधाएं?IRCTC के इस 'अरुणोदय अरुणाचल' फ्लाइट टूर पैकेज की शुरुआती कीमत ₹53,500 प्रति व्यक्ति रखी गई है।इस पैकेज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एयर टिकट (आने-जाने की फ्लाइट), होटल में ठहरने की व्यवस्था, स्थानीय ट्रांसफर के लिए कैब/बस, और भोजन (BreakFast & Dinner) जैसी प्रमुख सुविधाएं शामिल हैं। यानी आपको अलग-अलग बुकिंग करने की कोई टेंशन नहीं लेनी होगी। अगर आप नॉर्थ-ईस्ट के शांत माहौल में एक बजट-फ्रेंडली और आरामदायक ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो यह IRCTC पैकेज आपके लिए एकदम परफेक्ट विकल्प साबित हो सकता है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के लाखों सेवारत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के गठन को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों के पे-स्ट्रक्चर, महंगाई भत्ते (DA), पेंशन लाभ और सेवा शर्तों की व्यापक समीक्षा की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।पूर्व केंद्रीय आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में इस 4 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। आयोग को 6 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें और अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिसे आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार आगे भी बढ़ा सकती है।वेतन आयोग का मुख्य कार्य और उद्देश्यवेतन आयोग सरकार द्वारा गठित एक समीक्षा समिति होती है, जो महंगाई, आर्थिक स्थिति और राज्य की वित्तीय क्षमता के आधार पर सरकारी कर्मचारियों के पे-स्केल, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों में संशोधन की आवश्यकता की जांच करती है। केंद्र सरकार जहां अपने कर्मियों के लिए केंद्रीय वेतन आयोग का गठन करती है, वहीं राज्य सरकारें अपनी वित्तीय क्षमता और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार अपने आयोग गठित करती हैं।किन-किन विषयों की जांच करेगा 7वां वेतन आयोग?पश्चिम बंगाल के 7वें वेतन आयोग को कर्मचारियों के सेवा ढांचे की विस्तृत जांच का अधिकार दिया गया है। आयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी सिफारिशें तैयार करेगा:मूल वेतन (Basic Pay) और महंगाई भत्ता (DA): बेसिक पे, विशेष भत्तों और डीए के पुनरीक्षण पर जोर।अन्य भत्ते व लाभ: यात्रा भत्ता, प्रमोशन पॉलिसी, डेथ-कम-रिटायरमेंट बेनिफिट्स और मेडिकल लाभ।प्रतिभा और दक्षता: सरकारी सेवाओं में कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस बनाने के लिए आकर्षक पैकेज का सुझाव देना।पेंशन पुनरीक्षण: सेवानिवृत्त कर्मियों और पेंशनभोगियों की पेंशन संशोधन प्रक्रिया को सरल बनाना।महंगाई भत्ता (DA) की समीक्षा क्यों है बेहद खास?पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों के लिए डीए की समीक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। वर्तमान में राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के डीए में अंतर है। राज्य सरकार की मंशा एक ही बार में भारी बढ़ोतरी करने के बजाय केंद्र और राज्य के डीए अंतर को चरणबद्ध (धीरे-धीरे) तरीके से खत्म करने की है। आयोग इसके लिए एक उपयुक्त और स्थायी फॉर्मूले की सिफारिश करेगा।क्या कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन तुरंत बढ़ जाएगी?नहीं, इस चरण में वेतन तुरंत नहीं बढ़ेगा।वेतन आयोग का गठन होने का अर्थ तुरंत सैलरी या पेंशन में वृद्धि होना नहीं है। प्रक्रिया के तहत:आयोग पहले मौजूदा वेतन ढांचे का गहन अध्ययन करेगा।विभिन्न कर्मचारी संगठनों और हितधारकों से बातचीत कर परामर्श मांगेगा।6 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगा।सिफारिशें मिलने के बाद राज्य सरकार वित्तीय आंकलन कर उन्हें लागू करने का अंतिम फैसला लेगी।8वें केंद्रीय वेतन आयोग का क्या पड़ेगा असर?राज्य सरकार के संकल्प के मुताबिक, आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय केंद्र सरकार के 8वें वेतन आयोग (8th CPC) के फैसलों को ध्यान में रख सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य सरकार केंद्रीय पे-स्ट्रक्चर को पूरी तरह अपनाएगी। राज्य आयोग स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा और सिफारिशें राज्य की प्रशासनिक जरूरतों व बजट पर आधारित होंगी।
आजकल नेल आर्ट, नेल एक्सटेंशन और जेल नेल पॉलिश का ट्रेंड काफी पॉपुलर हो चुका है। अलग-अलग रंगों की नेल पॉलिश आपके हाथों को स्टाइलिश और अट्रैक्टिव लुक देती है। हालांकि, हर नेल कलर हर स्किन टोन पर एक जैसा नहीं दिखता। खासकर डार्क या डस्की (Dusky) स्किन टोन वाली लड़कियों के लिए सही शेड चुनना पूरे लुक में बड़ा फर्क ला सकता है।ब्यूटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय ऐसे नेल शेड्स चुनने चाहिए जो आपकी नेचुरल रंगत को उभारें। आइए जानते हैं ऐसे ही नेल पॉलिश शेड्स के बारे में, जो डार्क और डस्की स्किन टोन पर सबसे ज्यादा खूबसूरत नजर आते हैं:1. एवरीडे एलिगेंस के लिए न्यूड शेड्स (Nude Shades)अगर आप ऐसी नेल पॉलिश चाहती हैं जिसे रोजाना ऑफिस, कॉलेज या रूटीन में लगाया जा सके, तो वार्म न्यूड शेड्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हैं:कैरामेल न्यूड (Caramel Nude) और मौका (Mocha)वार्म बेज (Warm Beige) और टेराकोटा (Terracotta)ये रंग डार्क स्किन पर बेहद सॉफ्ट, एलिगेंट और नेचुरल लुक देते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि ये शेड्स लगभग हर तरह के वेस्टर्न और एथनिक आउटफिट्स के साथ आसानी से मैच हो जाते हैं।2. फेस्टिव सीजन के लिए शिमरी और मेटैलिक लुकत्योहार, शादी या किसी खास सेलिब्रेशन में आपके हाथों की चमक बढ़ाने के लिए मेटैलिक शेड्स परफेक्ट रहते हैं:गोल्ड शिमर (Gold Shimmer)ब्रॉन्ज (Bronze) और कॉपर (Copper)ये रंग रोशनी में अलग ही चमक बिखेरते हैं और डस्की हाथों को ज्यादा रॉयल, रीगल और अट्रैक्टिव लुक देते हैं।3. बोल्ड और ब्राइट कलर्स से बढ़ाएं स्टाइलअक्सर लोग मानते हैं कि डार्क स्किन टोन पर चमकीले या ब्राइट कलर्स अच्छे नहीं लगते, लेकिन एक्सपर्ट्स की राय इससे अलग है। सही ब्राइट शेड्स आपके हाथों को इंस्टेंट फ्रेश लुक देते हैं:ब्रिक रेड (Brick Red) और चेरी रेड (Cherry Red)फ्यूशिया पिंक (Fuchsia Pink)मस्टर्ड येलो (Mustard Yellow)एमराल्ड ग्रीन (Emerald Green)ये कलर्स आपकी डार्क स्किन टोन के साथ एक बोल्ड और अट्रैक्टिव कॉन्ट्रास्ट बनाते हैं।4. रिच और क्लासी लुक के लिए डार्क टोन (Dark Tones)अगर आपको इवनिंग पार्टी या किसी स्पेशल डिनर डेट के लिए रिच और क्लासी लुक पसंद है, तो गहरे शेड्स ट्राई करें:बरगंडी वाइन (Burgundy Wine)डीप प्लम (Deep Plum)चॉकलेट ब्राउन (Chocolate Brown)मिडनाइट ब्लू (Midnight Blue)ये शेड्स डस्की कॉम्पलेक्शन पर बेहद निखर कर आते हैं और हाथों को एक मॉडर्न व एलिगेंट टच देते हैं।ब्यूटी टिप: हमेशा स्किन टोन को देखकर करें चुनावनेल पॉलिश या जेल नेल आर्ट चुनते समय केवल ट्रेंड पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्किन के अंडरटोन का ध्यान रखें। सही रंग न सिर्फ आपके हाथों को साफ और ग्लोइंग दिखाता है, बल्कि आपके ओवरऑल पर्सनालिटी को भी निखारता है।
देशभर में मानसूनी हवाओं के असर से मौसम का मिजाज बेहद आक्रामक हो गया है। यूपी से लेकर गुजरात और असम तक नदियां उफान पर हैं और कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा मौसम बुलेटिन जारी कर गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत देश के 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश, आंधी-तूफान और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है।मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और आसपास के इलाकों में बने कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure Area) की वजह से गुजरात और मध्य महाराष्ट्र में असाधारण रूप से भारी बारिश का खतरा बना हुआ है।बीते 24 घंटों में रिकॉर्ड तोड़ बारिशIMD के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में गुजरात रीजन के कुछ स्थानों पर 230 सेमी तक की रिकॉर्ड तोड़ असाधारण बारिश दर्ज की गई।अत्यंत भारी बारिश (21 सेमी): कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, सौराष्ट्र और कच्छ।बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी): गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, तटीय व दक्षिण आंतरिक कर्नाटक।भारी बारिश (7-11 सेमी): जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पूर्वी यूपी, राजस्थान, एमपी, असम और केरल।क्षेत्रवार मौसम का विस्तृत पूर्वानुमान और अलर्ट1. पश्चिम भारत: गुजरात और महाराष्ट्र में रेड अलर्टदक्षिण-पूर्वी राजस्थान पर बने दबाव के चलते गुजरात राज्य में 24 और 25 जुलाई को असाधारण रूप से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। सौराष्ट्र-कच्छ में 26 जुलाई तक और गुजरात रीजन में 27 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहेगा। मध्य महाराष्ट्र में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कोंकण और गोवा में 25 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश होगी।2. उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली, यूपी और पहाड़ी राज्यों का हालपहाड़ी राज्य: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में 30 जुलाई तक अधिकांश स्थानों पर बारिश जारी रहेगी। उत्तराखंड में 27 से 29 जुलाई के दौरान अत्यंत तेज बारिश का अनुमान है।मैदानी इलाके: पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 28 और 29 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 29-30 जुलाई और पूर्वी यूपी में 28-29 जुलाई को भारी बारिश का पूर्वानुमान है।राजस्थान: पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 24-25 जुलाई को भारी बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।3. मध्य भारत: एमपी और छत्तीसगढ़पश्चिम और पूर्वी मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में 26 से 30 जुलाई के दौरान व्यापक और भारी बारिश का अलर्ट है। विदर्भ क्षेत्र में 28 और 29 जुलाई को मूसलाधार बारिश दर्ज हो सकती है।4. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारतगांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और झारखंड में 28 जुलाई तक गरज-चमक और 30-40 किमी/घंटा की तूफानी हवाओं के साथ भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में 30 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।5. दक्षिण भारत: आंधी और बिजली गिरने का अलर्टतटीय कर्नाटक, केरल और माहे में 30 जुलाई तक बारिश जारी रहेगी। इसके अलावा तमिलनाडु, पुडुचेरी, रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश में 40 से 50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा) की तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) तथा सुशासन की नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में मा० उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी के निर्देशों के अनुपालन में गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के संबंध में संयुक्त आयुक्त (मनरेगा), ग्राम्य विकास, संजय कुमार पाण्डेय के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया है।संजय कुमार पाण्डेय द्वारा जनपद उन्नाव में उपायुक्त (स्वतः रोजगार), राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के पद पर तैनाती के दौरान वित्तीय अनियमितताएं किए जाने के आरोपों की जांच में प्रथमदृष्टया उन्हें गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाए जाने पर मा० उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए।साथ ही, संजय कुमार पाण्डेय के विरुद्ध प्रस्तावित अनुशासनिक कार्यवाही को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-4 के अंतर्गत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है तथा वे नियमानुसार ग्राम्य विकास विभाग मुख्यालय सम्बद्ध रहेंगे।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए शुक्रवार को 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई एजेंसी में व्यापक सुधार प्रक्रिया के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई केवल सेवा […] The post राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त appeared first on Sabguru News .
उदयपुर में बिजली के टूटे तार की चपेट में आने से युवक की मौत
उदयपुर। राजस्थान में उदयपुर के हिरन मगरी थाना क्षेत्र में लकड़वास गांव में शुक्रवार को 11 केवी बिजली लाइन के तार की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि लहरी लाल बागरिया (48) शुक्रवार सुबह दूध लेने के लिए घर से निकला, जहां पास ही बिजली की […] The post उदयपुर में बिजली के टूटे तार की चपेट में आने से युवक की मौत appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ में संदिग्ध उर्वरक कारखाने में कृषि विभाग की कार्रवाई
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र में किसानों को नकली या अवैध री-पैक उर्वरक बेचने वाले एक संदिग्ध कारखाने पर कृषि विभाग ने कार्रवाई की है। खुफिया सूचना के आधार पर हुई इस छापेमारी में फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में खाद, उर्वरक और पैकिंग सामग्री जब्त की गई है। प्रारंभिक जांच में लाइसेंस […] The post हनुमानगढ़ में संदिग्ध उर्वरक कारखाने में कृषि विभाग की कार्रवाई appeared first on Sabguru News .
पाक मीडिया की रिपोर्ट निराधार, भारत जानबूझकर नहीं छोड़ रहा पानी, मानसूनी बारिश है कारण
नई दिल्ली। भारत ने पाकिस्तान के मीडिया में आ रही इन रिपोर्टों को पूरी तरह से निराधार बताया है जिनमें आरोप लगाया गया है कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर पाकिस्तान में बाढ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। भारत का कहना है कि चेनाब नदी में पानी की वृद्धि जम्मू और आसपास के क्षेत्रों […] The post पाक मीडिया की रिपोर्ट निराधार, भारत जानबूझकर नहीं छोड़ रहा पानी, मानसूनी बारिश है कारण appeared first on Sabguru News .
बाराबंकी में किशोरी का धर्मांतरण कर कराया निकाह
बारबंकी। उत्तर प्रदेश में बाराबंकी जिले के कोतवाली फतेहपुर में तैनात रहे सिपाही की मदद से युवक ने पहले तो किशोरी का ब्रेनवाश कर धर्मांतरण कराया फिर मजार पर मौलाना के पास जा कर निकाह करा दिया। आरोप है कि आरोपी लगातार किशोरी का यौन उत्पीड़न करता रहा। गर्भवती होने पर दो बार गर्भपात तक […] The post बाराबंकी में किशोरी का धर्मांतरण कर कराया निकाह appeared first on Sabguru News .
कपड़ा व्यापारी से 60 लाख रुपए की रंगदारी मांगने वाले गिरोह का पर्दाफाश
अलवर। राजस्थान में कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बासदयाल थाना क्षेत्र में कराणा कस्बे में कपड़ा व्यापारी से 60 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को अवैध हथियार सहित गिरफ्तार और एक नाबालिग को निरुद्ध किया है। पुलिस सू्त्रों ने शुक्रवार को बताया कि आरोपियों ने व्यापारी को धमकी दी थी […] The post कपड़ा व्यापारी से 60 लाख रुपए की रंगदारी मांगने वाले गिरोह का पर्दाफाश appeared first on Sabguru News .
सहारनपुर पटाखा फैक्ट्री में बड़ा हादसा, विस्फोट में 2 कारीगरों की मौत, 2 मजदूर लापता, जांच के आदेश
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के चलते दो मजदूरों की मौत हो गई जबकि दो मजदूर अभी तक लापता है, जिनकी तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। यहां घटना गंगोह थाना क्षेत्र के नया गांव (बसी कुंडा) में चल रही एक पटाखा ...
जल प्रबंधन से जल आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा राजस्थान : भजनलाल शर्मा
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में जल सुरक्षा को नई दिशा मिली हैं और उनके नेतृत्व में डबल इंजन सरकार के इन्हीं प्रयासों से राजस्थान आने वाले समय में जल प्रबंधन एवं जल संचयन का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा। शर्मा शुक्रवार को यहां जयपुर […] The post जल प्रबंधन से जल आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा राजस्थान : भजनलाल शर्मा appeared first on Sabguru News .
आगरा में विकास की नई रफ्तार, मेट्रो और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स से उभर रहा इंडस्ट्रियल हब
बीते 9 वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आगरा जनपद ने विकास की नई इबारत लिखी है। ताजनगरी अब केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तेजी से एक आधुनिक और औद्योगिक शहर के रूप में विकसित हुई है।
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की दूरदराज और दुर्गम पांगी घाटी में शुक्रवार को भारी चट्टान गिरने के कारण एक टाटा सूमो वाहन मलबे में दब गया। इस हादसे में 6 महीने के एक मासूम सहित 13 लोगों की मौत हो गई।
CM योगी का आगरा दौरा, 342 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, 36 योजनाओं का करेंगे शिलान्यास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार से आगरा के दो दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ताजनगरी को 342 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 53 बड़ी विकास परियोजनाओं की शानदार सौगात देंगे। मुख्यमंत्री का मुख्य कार्यक्रम फतेहाबाद रोड स्थित ...
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने खराब सेहत का हवाला देकर पद छोड़ा
ढाका। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक चलना था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से करीब दो साल पहले ही त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। इसके बाद […] The post बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने खराब सेहत का हवाला देकर पद छोड़ा appeared first on Sabguru News .
जेएनयू ने छात्रों को सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन से दूर रहने की दी नसीहत
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन में अपने छात्रों और अन्य संबंधित लोगों को शामिल होने से बचने की नसीहत देते हुए सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को एडवाइजरी जारी किया है। गौरतलब है कि यह एडवाइजरी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे […] The post जेएनयू ने छात्रों को सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन से दूर रहने की दी नसीहत appeared first on Sabguru News .
पैलेट गन से घायल छात्र को साथ लाकर राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को 10 जनपथ स्थित आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हालिया छात्र आंदोलन के दौरान कथित रूप से पैलेट गन से घायल हुए हरियाणा के छात्र साहिल को मीडिया के सामने पेश किया। इस मौके पर गांधी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे […] The post पैलेट गन से घायल छात्र को साथ लाकर राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना appeared first on Sabguru News .
पेपर लीक के दोषियों को सख्त सजा वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को मंत्रिमंडल की मंजूरी
नई दिल्ली। नीट यूजी पेपर लीक को लेकर देश भर में हो रहे प्रदर्शनों के बीच केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा देने के प्रावधान वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय […] The post पेपर लीक के दोषियों को सख्त सजा वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को मंत्रिमंडल की मंजूरी appeared first on Sabguru News .
NEET पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारियों पर कार्रवाई
सीजेपी प्रोस्टेट के बीच शिक्षा मंत्रालय ने एनटीए को लेकर बड़ा एक्शन लिया गया है। एनटीए के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है। कुछ अफसरों पर कानूनी कार्रवाई भी की गई है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई NTA में बड़े सुधार और जवाबदेही तय करने के लिए ...
भीलवाड़ा में आंट गांव स्थित सौर संयंत्र लाखों रुपए के ताम्बे के तार चोरी
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया थाना क्षेत्र में आंट गांव स्थित एक सौर संयंत्र परिसर से अज्ञात बदमाश करीब पांच हजार मीटर लंबा ताम्बे का तार काटकर ले गए। चोरी गए तार की अनुमानित कीमत करीब पांच लाख रुपए बताई जा रही है। चोर वारदात को अंजाम देने के बाद मौके पर लगे […] The post भीलवाड़ा में आंट गांव स्थित सौर संयंत्र लाखों रुपए के ताम्बे के तार चोरी appeared first on Sabguru News .
पहाड़पुर रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा गार्ड की पत्थर मारकर हत्या
भरतपुर। राजस्थान में भरतपुर के बंशी पहाड़पुर रेलवे स्टेशन पर गुरुवार की रात एक सुरक्षा गार्ड की एक अन्य यात्री ने पत्थर मार कर हत्या कर दी। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) सूत्रों ने बताया कि गुजरात में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले संतोष को लखनऊ में उतरकर हरदोई जाना था। सफर के दौरान ट्रेन […] The post पहाड़पुर रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा गार्ड की पत्थर मारकर हत्या appeared first on Sabguru News .
प्रकृति से अलग होने का सवाल ही नहीं : दिया मिर्ज़ा
मुंबई। अभिनेत्री और पर्यावरण संरक्षण की मुखर समर्थक दिया मिर्ज़ा ने कहा है कि मनुष्य और प्रकृति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं तथा धरती ही हमारी असली पहचान है। दिया मिर्ज़ा के सहयोग से बनी लघु फिल्म ‘पन्हा’ को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराहना मिल रही है। फिल्म को ऑल लिविंग थिंग्स […] The post प्रकृति से अलग होने का सवाल ही नहीं : दिया मिर्ज़ा appeared first on Sabguru News .
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रश्नपत्र लीक के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए एक विधेयक के मसौदे को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को घोषणा की थी कि अगले हफ्ते संसद ...
गुजरात में कॉन्ट्रैक्ट नौकरियों में आरक्षण लागू करने की तैयारी में सरकार
Gujarat Contracts Jobs Quota News: गुजरात सरकार ने लंबी विचार-विमर्श के बाद राज्य की संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) नौकरियों में आरक्षित वर्ग के लिए सीटें सुरक्षित करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यदि यह नीति लागू होती है, तो भविष्य में सभी ...
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने 'संसद चलो' मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।
CM योगी का 150 लोगों को भरोसा, निश्चिंत रहें सबकी समस्याओं पर होगा एक्शन
CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन, शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन किया। जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस अवसर पर उन्होंने समस्या-शिकायत लेकर आए ...
योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत नकली दवा फैक्ट्री पर छापा, दो गिरफ्तार
Fake Medicine Raid Dehradun: उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त नीति के तहत चलाए जा रहे अभियान में एक और बड़ी सफलता मिली है। लखनऊ के अमीनाबाद में बरामद नकली Flozen दवा के सैंपल से शुरू हुई जांच ने ...
सोशल मीडिया के इस दौर में विरोध और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। हाल ही में मुंबई की सड़कों पर एक मॉडल द्वारा पुलिस की गाड़ी रोककर अपनी बात रखने का वीडियो जैसे ही वायरल हुआ, उसने एक बार फिर इंटरनेट पर हलचल पैदा कर दी।
'सरकार छात्रों को डराना-धमकाना और मारना बंद करे', पेपर लीक प्रदर्शन पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेपर लीक के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बातचीत के दौरान, उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और कई छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं।
होंडा ने लॉन्च की सात नई मोटरसाइकिल और स्कूटर
नई दिल्ली। होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने शुक्रवार को भारतीय बाजार के लिए 10 नई मोटरसाइकिलों और स्कूटरों का विस्तारित पोर्टफोलियो पेश किया जिनमें सात बिल्कुल नए मॉडल है जबकि तीन मॉडल नए रंग विकल्पों के साथ अपडेट किए गए हैं। कंपनी ने बताया कि यह लाइनअप क्रूज़िंग, एडवेंचर टूरिंग, रोडस्टर, लाइफस्टाइल राइडिंग, इलेक्ट्रिक […] The post होंडा ने लॉन्च की सात नई मोटरसाइकिल और स्कूटर appeared first on Sabguru News .
अमरीका ने भारत समेत 60 देशों पर लगाया 10 फीसदी टैरिफ
वाशिंगटन। अमरीका ने भारत समेत दुनिया के 60 देशों की ओर से बंधुआ मजदूरी और श्रम कानूनों का उल्लंघन कर बने सामान के आयात पर कड़ा प्रतिबंध न लगाने के कारण इन देशों पर विशेष सीमा शुल्क लगाने का फैसला किया है। अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमिसन ग्रीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्पष्ट निर्देशों […] The post अमरीका ने भारत समेत 60 देशों पर लगाया 10 फीसदी टैरिफ appeared first on Sabguru News .
Raksha Bandhan Essay: राखी पर्व पर हिन्दी निबंध: वर्तमान समय में रक्षा बंधन का त्योहार
Essay on Raksha Bandhan: वर्तमान समय में रक्षा बंधन का त्योहार अपनी पारंपरिक जड़ों को कायम रखते हुए आधुनिकता के साथ आगे बढ़ रहा है। इसने प्रेम व सुरक्षा के अर्थ को अधिक व्यापक बनाया है। भले ही इसे मनाने के साधन बदल गए हों, लेकिन कलाई पर बंधा वह धागा ...
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक धरा पर एक बार फिर से भगवान श्रीराम के प्रति अगाध प्रेम और अनोखी आस्था का भव्य नजारा देखने को मिलने वाला है। छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल यानी 'भांचा श्रीराम' के रूप में मानने की यहाँ की प्राचीन और अनूठी परंपरा रही है। इसी सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के उद्देश्य से न्यायधानी बिलासपुर में आगामी तीन दिनों तक एक ऐतिहासिक 'श्रीराम श्रद्धा यात्रा' का भव्य आयोजन किया जाने वाला है। इस तीन दिवसीय धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा को लेकर बिलासपुर शहर के कोने-कोने में जबरदस्त उत्साह का माहौल देखा जा रहा है, और राम भक्तों द्वारा इस यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।छत्तीसगढ़ की खास पहचान 'भांचा श्रीराम', आस्था के सम्मान में सजेगी यह यात्रादेशभर में जहां भगवान श्रीराम को आराध्य भगवान के रूप में पूजा जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ में एक विशेष और अनूठा रिश्ता है, जहां लोग उन्हें अपने परिवार के 'भांजे' यानी 'भांचा श्रीराम' के रूप में मानते हैं। इसी लोक-संस्कृति और अटूट आस्था के सम्मान में बिलासपुर में निकलने वाली यह 3 दिवसीय 'श्रीराम श्रद्धा यात्रा' विशेष महत्व रखती है। इस यात्रा के दौरान शहर के मुख्य मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वरूपों की झांकियां सजाई जाएंगी। धार्मिक अनुष्ठानों, भजनों और राम नाम के जयकारों से पूरा बिलासपुर शहर राममय होने के लिए पूरी तरह से तैयार नजर आ रहा है।तीन दिनों तक चलेंगे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़आयोजकों से मिली जानकारी के अनुसार, यह तीन दिवसीय 'श्रीराम श्रद्धा यात्रा' बिलासपुर के विभिन्न प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहों और मंदिरों से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत द्वार बनाए गए हैं और पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया जाएगा। इन तीन दिनों के भीतर संध्या के समय विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों, राम कथा और भजन संध्या का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश से आने वाले प्रख्यात संत और कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस आयोजन में शामिल होने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और जिलों से भी हजारों की संख्या में राम भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए हैं।बिलासपुर में बयार बहेगी भक्ति की, सनातन संस्कृति का दिखेगा अद्भुत नजाराइस भव्य 'श्रीराम श्रद्धा यात्रा' के आयोजन से न केवल बिलासपुर का माहौल पूरी तरह से आध्यात्मिक हो गया है, बल्कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की प्राचीन संस्कृति और लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक बेहतरीन माध्यम भी बन रहा है। इस तरह के आयोजनों से समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और धार्मिक सौहार्द की भावना मजबूत होती है। बिलासपुर के हर वर्ग और आयु के लोगों में इस यात्रा को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है, और हर कोई इस ऐतिहासिक और पावन पल का साक्षी बनने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को आश्वासन दिया कि वह छात्रों की सुरक्षा और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की शुचिता बनाए रखने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। यह आश्वासन न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष इस वर्ष कथित नीट प्रश्न पत्र लीक […] The post नीट पेपर लीक : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा-छात्रों के हित सुरक्षित करने के लिए 10 कदम आगे बढ़ रही है सरकार appeared first on Sabguru News .
छत्तीसगढ़ में नीट विवाद को लेकर गरमाई सियासत; थाने के बाहर बड़ी संख्या में जुटे कांग्रेसी नेता
देशभर में चर्चा का विषय बने नीट (NEET) परीक्षा के मुद्दों को लेकर अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में भारी उबाल आ गया है। राज्य की राजधानी समेत विभिन्न जिलों में इस गंभीर मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग अब थाने की दहलीज तक पहुंच गई है। विपक्षी दल कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में नजदीकी थाने के बाहर इकट्ठा हो गए और उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि जिस तरह से उनके कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, उसी प्रकार सत्ताधारी दल के बीजेपी नेताओं के खिलाफ भी तत्काल प्रभाव से काउंटर एफआईआर (Counter FIR) दर्ज की जानी चाहिए। इस घटना के बाद से राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गरमा गया है और पुलिस प्रशासन के लिए भी स्थिति को संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है।नीट परीक्षा विवाद और पुलिस थाने के बाहर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शनपूरा मामला नीट परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और उसके विरोध में चल रहे राजनीतिक प्रदर्शनों से उपजा है। हाल ही में जब इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आए, तो प्रशासनिक और राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया। इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी के कई प्रमुख नेता और स्थानीय कार्यकर्ता अचानक थाने के बाहर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहा है और केवल विपक्षी नेताओं के खिलाफ ही मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा भी नियमों की अनदेखी की गई है। थाने के बाहर उमड़ी इस भीड़ के कारण पुलिस अधिकारियों को भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी।काउंटर एफआईआर की मांग पर अड़े कांग्रेसी, बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोपथाने के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी तरह के दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं के इशारे पर पुलिस प्रशासन काम कर रहा है और बिना निष्पक्ष जांच के कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस ने मांग उठाई है कि यदि उनके लोगों पर मुकदमे दर्ज हो रहे हैं, तो उसी आधार पर बीजेपी के उन नेताओं के खिलाफ भी तुरंत काउंटर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए जिन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून हाथ में लिया था। इस राजनीतिक ड्रामे के चलते छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और दोनों दल एक-दूसरे पर हमलावर नजर आ रहे हैं।छत्तीसगढ़ की राजनीति में गर्माया पारा, आगामी दिनों में बढ़ सकता है सियासी टकरावनीट के मुद्दे पर सड़क से लेकर थाने तक पहुंचे इस घमासान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ने वाला है। एक तरफ जहाँ विपक्षी कांग्रेस इस मामले को लेकर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल के नेता भी पूरी आक्रामकता के साथ पलटवार कर रहे हैं। इस सियासी उठापटक के बीच आम जनता के बुनियादी मुद्दे पीछे छूटते नजर आ रहे हैं और पूरा प्रशासनिक अमला राजनीतिक दलों के इस हंगामे को शांत करने में उलझ कर रह गया है।
सूरजपुर में खाकी पर जानलेवा हमला! वारंटी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने किया पथराव
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से कानून-व्यवस्था को हिला देने वाली एक बेहद दहला देने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले के एक गांव में किसी मामले में वारंटी को गिरफ्तार करने पहुंची स्थानीय पुलिस टीम पर उग्र ग्रामीणों ने अचानक हमला बोल दिया। देखते ही देखते स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि भीड़ ने पुलिसर्किमयों पर चारों तरफ से पथराव शुरू कर दिया, जिसमें एक डीएसपी (DSP) स्तर के अधिकारी समेत 24 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस अचानक हुए खूनी संघर्ष और हिंसक झड़प के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है, और स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर रवाना किया गया है।वारंटी की गिरफ्तारी के दौरान अचानक कैसे भड़की हिंसा?प्राप्त शुरुआती जानकारी के अनुसार, सूरजपुर पुलिस को लंबे समय से फरार चल रहे एक वारंटी की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर पुलिस विभाग की एक टीम तय रणनीति के तहत संबंधित गांव में दबिश देने और आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची थी। जैसे ही पुलिस ने वारंटी को हिरासत में लेने की प्रक्रिया शुरू की, गांव के कुछ असामाजिक तत्वों और ग्रामीणों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। बात इतनी बढ़ गई कि देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और उन्होंने पुलिस दल को चारों तरफ से घेरकर पथराव शुरू कर दिया। अचानक हुए इस हमले से पुलिसकर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कई जवान लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े।डीएसपी समेत 24 से ज्यादा जवान घायल, अस्पतालों में मची अफरातफरीइस भीषण पथराव और हिंसक झड़प में पुलिस विभाग को भारी क्षति उठानी पड़ी है। हमले की चपेट में आने वाले अधिकारियों में एक डीएसपी रैंक के तेज-तर्रार अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें गंभीर चोटें आई हैं। इसके अलावा थाने के कई एसआई, हेड कांस्टेबल और आरक्षक भी इस खूनी हमले में घायल हुए हैं। सभी घायल पुलिसकर्मियों को आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों और जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिले के तमाम आला अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस बल पर हुए इस तरह के हमले से पूरे महकमे में आक्रोश का माहौल है।पुलिस प्रशासन का सख्त एक्शन, आरोपियों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ दबिशखाकी पर हुए इस कातिलाना हमले को पुलिस प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिस बल पर जानलेवा हमला करने वाले किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा। घटना के बाद इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और क्यूआरटी के जवानों को तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने वीडियोग्राफी और फोटोग्राफ्स के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करनी शुरू कर दी है और रातभर छापेमारी कर कई संदिग्धों को हिरासत में भी ले लिया है। इस बड़ी घटना के बाद से पूरे सूरजपुर जिले में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है और तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
देशभर के वकीलों के एक समूह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह 21 जुलाई को विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के नेतृत्व में प्रधानमंत्री मोदी के आधिकारिक आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के पास किए गए धरना-विरोध प्रदर्शन पर स्वतः संज्ञान ले।
क्रिस गेल और स्टार बल्लेबाजों को अपनी गेंदों से नचाने वाले तेज गेंदबाज बने डीएसपी क्रिकेटर आकाश दीप
भारतीय क्रिकेट टीम (Team India) के लिए अपनी तेज गेंदबाजी का लोहा मनवाने वाले स्टार क्रिकेटर्स आकाश दीप और मुकेश कुमार ने खेल के मैदान के बाद अब प्रशासनिक दुनिया में एक नई और शानदार पारी की शुरुआत कर दी है। इन दोनों प्रतिभावान खिलाड़ियों को राज्य सरकार द्वारा पुलिस विभाग में डीएसपी (DSP) पद का आधिकारिक नियुक्ति पत्र सौंप दिया गया है। जैसे ही इन दोनों तेज गेंदबाजों को अपना अपॉइंटमेंट लेटर मिला, उन्होंने अपनी सादगी और संस्कारों का परिचय देते हुए मुख्यमंत्री के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मैदान पर बल्लेबाजों के परखच्चे उड़ाने वाले इन क्रिकेटर्स का यह सम्मान समारोह इस समय देश भर के खेल प्रेमियों और युवाओं के बीच चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है, और हर कोई उनकी इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।जमीन से उठकर शिखर तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानीक्रिकेट की दुनिया में अपनी मेहनत के दम पर बड़ा मुकाम हासिल करने वाले आकाश दीप और मुकेश कुमार का यहां तक का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बेहद सामान्य परिवारों से ताल्लुक रखने वाले इन दोनों खिलाड़ियों ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल (IPL) में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय टेस्ट टीम तक का सफर तय किया। अपनी कातिलाना गेंदबाजी से विरोधी बल्लेबाजों के मन में खौफ पैदा करने वाले इन पेसर्स ने साबित कर दिया कि अगर सच्ची लगन हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। अब सरकारी सेवा में उच्च पद यानी डीएसपी की जिम्मेदारी मिलने के बाद वे देश और समाज की सेवा के लिए भी पूरी तरह से तैयार नजर आ रहे हैं।नियुक्ति पत्र मिलते ही दिखे खास संस्कार, सीएम के छुए पैरजब इन दोनों क्रिकेटर्स को मंच पर औपचारिक रूप से डीएसपी पद का नियुक्ति पत्र सौंपा गया, तो वहां मौजूद हर शख्स उनकी सादगी देखकर दंग रह गया। सफलता की बुलंदियों पर पहुंचने के बावजूद दोनों ने अपनी मिट्टी और संस्कारों को नहीं छोड़ा, और अपॉइंटमेंट लेटर लेते ही मुख्यमंत्री के पैर छूकर उनका आभार व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर उनकी यह तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें फैंस द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। खेल जगत के दिग्गजों और राजनीतिक हस्तियों ने भी दोनों खिलाड़ियों को इस नई पारी के लिए ढेरों बधाइयां दी हैं और उम्मीद जताई है कि वे खेल के साथ-साथ प्रशासनिक सेवा में भी अपनी धाक जमाएंगे।खेल के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारी, युवाओं के लिए बने मिसालएक क्रिकेटर से सीधे पुलिस विभाग में राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) बनने का यह सफर आने वाली पीढ़ी के युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल बन गया है। युवाओं को यह संदेश मिलता है कि खेल के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करने से न केवल देश का नाम रोशन होता है, बल्कि भविष्य के लिए भी सुरक्षित और गौरवशाली रास्ते खुल जाते हैं। आकाश दीप और मुकेश कुमार की इस उपलब्धि से उनके गृह क्षेत्रों में भी जश्न का माहौल है, और फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि वे आने वाले समय में क्रिकेट पिच पर भी अपनी रफ्तार का जादू बिखेरते रहेंगे और प्रशासनिक मोर्चे पर भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाएंगे।
भारतीय Gen-Z ने मेलोनी से की पीएम मोदी की शिकायत, छात्र बोले, मोदीजी को समझाओ न प्लीज
सोशल मीडिया पर लोकप्रिय 'Melodi' (मोदी + मेलोनी) ट्रेंड का सहारा लेते हुए भारतीय युवाओं ने मेलोनी के पोस्ट्स के कमेंट सेक्शन को अपने तीखे व्यंग्य, मजेदार रील्स और गुहार से पाट दिया है। कुल मिलाकर छात्रों ने मेलोनी से पीएम मोदी की शिकायत कर डाली। ...
बिहार की राजनीति के चतुर और अनुभवी खिलाड़ी माने जाने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक चालों को समझना हर किसी के बस की बात नहीं रही है। राजनीतिक गलियारों में हमेशा से लालू यादव के सोशल इंजीनियरिंग और चुनावी मैनेजमेंट के खास फॉर्मूलों की चर्चा होती रही है, जिसमें उनका 'SLL' (Social, Land and Local/Leadership) समीकरण बेहद अहम माना जाता रहा है। लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों के बाद यह सवाल सियासी गलियारों में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर लालू यादव के इस अचूक फॉर्मूले को उनके उत्तराधिकारी और युवा नेता तेजस्वी यादव पूरी तरह से क्यों नहीं समझ पाए? इस राजनीतिक पहेली के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आरजेडी अपनी रणनीति में क्या बड़ा बदलाव करने जा रही है।क्या है लालू यादव का पुराना और अचूक 'SLL' राजनीतिक फॉर्मूला?लालू प्रसाद यादव ने अपने दशकों लंबे राजनीतिक सफर के दौरान बिहार की जमीनी राजनीति को साधने के लिए एक ऐसा मजबूत ताना-बाना बुना था, जिसे 'SLL' या उनके विशिष्ट सामाजिक-राजनीतिक समीकरण के रूप में जाना जाता है। इसमें समाज के हर तबके को जोड़ना, स्थानीय समीकरणों को साधना और जमीन स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं को आगे बढ़ाना शामिल था। इस फॉर्मूले की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें हर जाति, वर्ग और क्षेत्र के नुमाइंदों को भरोसे में लेकर एक अजेय वोट बैंक तैयार किया जाता था। लालू यादव की इसी शैली के दम पर पार्टी सालों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में बनी रही और आज भी उनके इस करिश्माई राजनीतिक कौशल की मिसाल दी जाती है।नई पीढ़ी की राजनीति और तेजस्वी यादव से कहां हुई चूक?समय के साथ राजनीति का स्वरूप बदल चुका है और आज की युवा पीढ़ी या नए दौर के मतदाता केवल पुरानी जातीय लकीरों के सहारे वोट नहीं देते। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव ने पार्टी को ए टू जेड (A to Z) पार्टी बनाने की कोशिश तो की और युवाओं को रोजगार जैसे मुद्दों पर फोकस भी किया, लेकिन वे पिता लालू यादव के उस पारंपरिक 'SLL' संतुलन को पूरी तरह से जमीन पर उतारने में कहीं न कहीं असमूक साबित हुए। नए दौर की कॉर्पोरेट स्टाइल राजनीति और सोशल मीडिया के इस युग में जमीनी स्तर के पुराने कार्यकर्ताओं और पारंपरिक रणनीतिक तालमेल के बीच एक खालीपन देखने को मिला, जिसका खामियाजा पार्टी को कई मोर्चों पर भुगतना पड़ा है।अब आगे क्या करेगी आरजेडी? क्या होगा तेजस्वी यादव का नया मास्टरस्ट्रोक?अपनी रणनीतिक कमियों और पुरानी चूकों से सबक लेते हुए अब आरजेडी कैंप में एक बार फिर मंथन का दौर शुरू हो चुका है। पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि आगामी चुनावों और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए केवल आधुनिक नारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि लालू यादव के उस पारंपरिक और पुख्ता जमीनी फॉर्मूले को नए कलेवर में ढालना होगा। तेजस्वी यादव आने वाले दिनों में अपनी पार्टी की कार्यशैली में बड़ा बदलाव कर सकते हैं, जिसमें युवाओं के जोश के साथ-साथ पुराने और अनुभवी नेताओं के अनुभव का मिश्रण देखने को मिल सकता है। बिहार की राजनीति में आरजेडी का यह अगला कदम राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख सकता है।
बिहार के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक तंत्र में इन दिनों एक ही नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, और वह है उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) के नेतृत्व और उनके फैसलों का अंदाज। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद से शुरुआती 100 दिन पूरे हो चुके हैं, और इन सौ दिनों के भीतर सम्राट चौधरी ने अपने सख्त तेवर और ताबड़तोड़ एक्शन से पूरे राज्य की राजनीति का नक्शा ही बदल कर रख दिया है। इन 100 दिनों के भीतर सरकार ने विधानसभा में रिकॉर्ड 13 महत्वपूर्ण विधेयक (Bills) पास कराए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने के लिए अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 16 बड़े एनकाउंटर को अंजाम दिया गया है। अपराधियों में खौफ और जनता के बीच सुशासन की वापसी का यह दौर अब बिहार की सियासत का सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बन चुका है।100 दिनों में 13 धमाकेदार विधेयक और विधानसभा में कड़े फैसलों की बाढ़सम्राट चौधरी के इन शुरुआती 100 दिनों के कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता उनका विधायी (Legislative) और प्रशासनिक आक्रामक रुख रहा है। सरकार ने अपने विजन को साफ करते हुए महज तीन महीनों के भीतर सदन में कुल 13 नए और ऐतिहासिक विधेयक पेश किए और उन्हें सफलतापूर्वक पास भी कराया। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुधारना, भूमि विवादों का स्थाई समाधान निकालना, युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलना और सबसे बढ़कर अपराध पर लगाम कसने के लिए कड़े कानून बनाना रहा है। विपक्ष भले ही इन विधेयकों और फैसलों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी कम अवधि में इतने बड़े विधायी कदम उठाना किसी भी राजनीतिक इच्छाशक्ति का एक मजबूत उदाहरण है।अपराध पर जीरो टॉलरेंस नीति: 16 एनकाउंटर से कांपे अपराधी, पुलिस को खुली छूटबिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर हमेशा से विपक्ष हमलावर रहा है, लेकिन सम्राट चौधरी ने गृह विभाग या अपने प्रभाव वाले महकमों के जरिए यह साबित कर दिया है कि राज्य में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। इन 100 दिनों के भीतर बिहार पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए राज्यभर में 16 बड़े एनकाउंटर किए हैं। कई कुख्यात अपराधी या तो पुलिस की गोली का शिकार बने हैं या फिर सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। पुलिस की इस बेखौफ कार्रवाई से राज्य के आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है, वहीं दूसरी तरफ अपराध जगत से जुड़े तत्वों के बीच भगदड़ और खौफ का माहौल साफ तौर पर देखा जा सकता है।राजनीतिक नफा-नुकसान और जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता का ग्राफइन 100 दिनों के कामकाज ने सम्राट चौधरी को बिहार की राजनीति के सबसे कद्दावर और फायरब्रांड नेताओं की सूची में ला खड़ा किया है। एक तरफ जहाँ उनके समर्थकों का मानना है कि वे 'योगी मॉडल' की तर्ज पर बिहार में कड़े और त्वरित फैसले ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विरोधी दल उनकी कार्यशैली को लेकर लगातार हमलावर हैं। बावजूद इसके, इन 100 दिनों के भीतर जिस गति से विकास कार्य, कड़े प्रशासनिक फेरबदल और अपराधियों पर नकेल कसी गई है, उसने यह तय कर दिया है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति इसी ट्रैक पर आगे बढ़ने वाली है और जनता की उम्मीदें इस नई सरकार से काफी ज्यादा बढ़ चुकी हैं।
रेतीले धोरों और अपनी धूप के लिए मशहूर राजस्थान के मौसम का मिजाज इन दिनों पूरी तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है। राज्य में बने एक नए और सक्रिय लो प्रेशर एरिया (Low Pressure Area) के कारण मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। खासकर दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में बादलों ने ऐसा तांडव मचाया है कि प्रशासन ने दोनों जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' घोषित कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं, निचले इलाकों में पानी भर गया है और आम जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र ने लोगों को बिना जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलने की कड़ी सलाह दी है।लो प्रेशर एरिया का असर और खतरनाक होता मौसम का रुखमौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से उठे सिस्टम के पश्चिमी राजस्थान की तरफ असर दिखाने और एक नया कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure) बनने के कारण मानसून एक बार फिर अत्यंत आक्रामक हो गया है। इस मौसमी बदलाव के चलते राज्य के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में काले बादलों का डेरा जमा हुआ है और लगातार तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश दर्ज की जा रही है। बांसवाड़ा और डूंगरपुर के अलावा उदयपुर, प्रतापगढ़ और सिरोही जिलों में भी ऑरेंज अलर्ट जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह आफत अभी कुछ और दिनों तक राज्य के लोगों को परेशान कर सकती है, जिससे प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है।बांसवाड़ा और डूंगरपुर में रेड अलर्ट, स्कूलों की छुट्टी और प्रशासनिक तैयारियां तेजमौसम विभाग की चेतावनी के बाद बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिला प्रशासन पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर आ गया है। सुरक्षा और एहतियात के तौर पर संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार हो रही बरसात के कारण कई छोटे-बड़े नालों और बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे बाढ़ जैसे हालात पैदा होने की आशंका भी जताई जा रही है। जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित कर दिया है ताकि स्कूली बच्चों को किसी भी प्रकार की असुविधा या खतरे का सामना न करना पड़े। एसडीआरएफ (SDRF) और राहत टीमों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात कर दिया गया है।किसानों के चेहरे पर चिंता और आम जनता को बरतनी होगी विशेष सावधानीएक तरफ जहां इस मानसुनी बारिश से कुछ इलाकों में फसलों को जीवनदान मिला है, वहीं दूसरी तरफ जरूरत से ज्यादा हो रही मूसलाधार बारिश ने किसानों की पकी हुई फसलों को चौपट करना शुरू कर दिया है, जिससे अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। मौसम विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे जलभराव वाले रास्तों, कमजोर इमारतों और उफनते नालों या पुलियों को पार करने से पूरी तरह बचें। इस वेदर अपडेट के बाद से पूरे प्रदेश में मानसून की यह आफत चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है, और हर कोई आसमान की तरफ टकटकी लगाए राहत की उम्मीद कर रहा है।
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस की लाठीचार्ज की घटना की आग अब देश के दूसरे हिस्सों में भी तेजी से सुलगने लगी है। इस अमानवीय पुलिस कार्रवाई के विरोध में गुलाबी नगरी जयपुर में युवाओं और छात्रों का गुस्सा खुलकर सड़कों पर आ गया है। जयपुर के बेहद व्यस्त और प्रमुख इलाके जवाहर सर्किल पर देर रात तक सैकड़ों की संख्या में छात्र और युवा इकट्ठा होकर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते नजर आए। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए युवाओं ने इस बल प्रयोग को पूरी तरह से अलोकतांत्रिक करार दिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की, जिससे राजधानी का राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल गरमा गया है।जंतर-मंतर की घटना से भड़की चिंगारी, जयपुर में एकजुट हुए युवाप्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के वीडियो और खबरें सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई थीं। इस घटना के बाद देश भर के छात्रों में रोष व्याप्त हो गया। इसी कड़ी में जयपुर के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र संगठन एकजुट हुए और उन्होंने शाम ढलते ही जवाहर सर्किल पर डेरा डालना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहाँ भारी संख्या में युवा पहुंच गए और शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालते हुए पुलिसिया दमन के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। छात्रों का कहना है कि अपनी आवाज उठाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन सरकार और पुलिस बल का प्रयोग करके युवाओं की आवाज को दबाना चाहती है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।देर रात तक गूंजे नारे, ट्रैफिक और सुरक्षा के बीच चौकसी हुई कड़ीजयपुर के जवाहर सर्किल पर छात्रों के इस अचानक और उग्र प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन के भी होश उड़ गए। भारी संख्या में युवाओं के जमा होने से आसपास के मार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और क्यूआरटी (QRT) के जवानों को तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों से समझाइश करने की कोशिश की, लेकिन छात्र अपनी मांगों और लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के निलंबन की जिद पर देर रात तक डटे रहे। युवाओं का यह जोश यह साफ दिखा रहा है कि यह आंदोलन अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी अपनी जड़ें फैला रहा है।छात्रों की दो टूक चेतावनी- अगर न्याय नहीं मिला तो होगा और बड़ा आंदोलनजयपुर में हुए इस जोरदार प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारों ने छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करना बंद नहीं किया, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने मांग की कि जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज करने वाले सभी दोषी अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए और घायल छात्रों को उचित मुआवजा दिया जाए। इस विरोध प्रदर्शन के बाद से राजस्थान की सियासत में भी सरगर्मी तेज हो गई है, और विपक्षी दलों ने भी छात्रों के इस समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला तूल पकड़ सकता है।
भ्रष्टाचार पर सरकार का इनाम!' राजस्थान में शिक्षा सचिव के तबादले पर CJP का तीखा हमला
राजस्थान के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों से इस वक्त एक बड़ी और गरमागरम खबर सामने आ रही है। राज्य में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और शिक्षा विभाग के सचिव के हालिया तबादले को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस ट्रांसफर को लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला है। हनुमान बेनीवाल ने इस प्रशासनिक फेरबदल को सीधा 'भ्रष्टाचार पर सरकार का इनाम' करार देते हुए तीखा तंज कसा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि अधिकारियों की ऐसी कार्यप्रणाली के खिलाफ आम जनता और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।शिक्षा विभाग के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल पर क्यों भड़के हनुमान बेनीवाल?पूरा मामला राजस्थान के शिक्षा विभाग में हाल ही में हुए प्रशासनिक बदलावों से जुड़ा हुआ है। जब सरकार ने शिक्षा सचिव स्तर के एक प्रमुख अधिकारी का तबादला किया, तो इसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे। सीजेपी और आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से इस तबादले पर कड़ा ऐतराज जताया। उनका आरोप है कि यदि किसी अधिकारी के कार्यकाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल उठे थे, तो उसे सजा मिलने के बजाय मनचाही जगह पर पोस्टिंग देना या सुरक्षित करना सीधे तौर पर सिस्टम की कमियों को उजागर करता है। बेनीवाल का यह बयान अब राज्य की सियासत में एक नया भूचाल ला चुका है, जिस पर विपक्षी दल और सरकार समर्थकों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।'भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी रहेगा कड़ा संघर्ष', आरएलपी सुप्रीमों का ऐलानहनुमान बेनीवाल ने अपने तीखे तेवरों में साफ कर दिया है कि राजस्थान की जनता और खासकर बेरोजगार युवाओं के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे पवित्र विभाग में यदि भ्रष्टाचार या मनमानी को बढ़ावा दिया जाएगा, तो उनकी पार्टी चुप नहीं बैठेगी। सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पारदर्शी प्रशासन देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। बेनीवाल ने ऐलान किया है कि वे इस पूरे मामले को जनता के बीच लेकर जाएंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक अपनी लड़ाई पूरी ताकत से जारी रखेंगे।राजस्थान की सियासत में गर्माया मुद्दा, आगामी दिनों में बढ़ सकता है राजनीतिक टकरावइस तीखे राजनीतिक हमले के बाद से राजस्थान की राजनीति में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। एक तरफ जहाँ आरएलपी और अन्य विपक्षी दल सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहे हैं, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों को लेकर उठ रहे इन सवालों ने सत्ता पक्ष की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर जनसभाओं तक एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है, जिससे यह साफ है कि राजस्थान की राजनीति में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक फेरबदल का यह चैप्टर अभी लंबे समय तक सुर्खियों में रहने वाला है।
सिख इतिहास के महान सिद्धांत 'मीरी और पीरी' के पावन दिवस के अवसर पर धार्मिक नगरी अमृतसर में एक बेहद भव्य और उत्साह से भरा नजारा देखने को मिला है। सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब से मीरी-पीरी दिवस के मौके पर एक विशाल और पारंपरिक खालसा मार्च (नगर कीर्तन) की शुरुआत की गई है। इस धार्मिक मार्च में बड़ी संख्या में निहंग सिखों, गतका पार्टियों और श्रद्धालुओं ने पूरी आन-बान और शान के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वाहेगुरु के जयकारों और गंतव्य की ओर बढ़ते इस मार्च का सिख संगत द्वारा जगह-जगह जोरदार स्वागत किया जा रहा है। यह पारंपरिक खालसा मार्च अमृतसर से अपनी पूरी भव्यता के साथ रवाना होकर कल ऐतिहासिक नगरी तरनतारन साहिब पहुंचेगा, जहाँ इसका समापन और विशेष दीवान सजाया जाएगा।श्री अकाल तख्त साहिब से पारंपरिक वाद्य यंत्रों और जयकारों के साथ हुआ आगाजमीरी-पीरी के सिद्धांत के संस्थापक और सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व व मीरी-पीरी दिवस को समर्पित इस आयोजन की शुरुआत श्री अकाल तख्त साहिब से हुई। सिंह साहिबान और विभिन्न पंथक शख्सियतों की छत्रछाया में अरदास करने के बाद खालसा मार्च की शुरुआत की गई। इस दौरान पारंपरिक शस्त्रों के साथ गतका के जौहर दिखाते नौजवान और खालिसाई बाने में सजे श्रद्धालु आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। अमृतसर की सड़कों पर गूंजते 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के जयकारों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक और ऊर्जावान बना दिया, जिसे देखने के लिए सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।सिख इतिहास का अनूठा संदेश है 'मीरी-पीरी', अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीकइतिहासकारों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, 'मीरी' राजनीतिक और सांसारिक प्रभुत्व का प्रतीक है, जबकि 'पीरी' आध्यात्मिक मार्गदर्शन का। सिखों के छठे पातशाही गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने दो तलवारें धारण कर यह संदेश दिया था कि एक सिख को आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ समाज में हो रहे अन्याय और जुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए अपनी रक्षा करने में भी सक्षम होना चाहिए। मीरी-पीरी दिवस का यह पावन पर्व हमें हमेशा दीन-दुखियों की रक्षा करने और सच्चाई के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। यही वजह है कि इस दिन निकलने वाले इस खालसा मार्च में पंजाब के कोने-कोने से संगत बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है।कल तरनतारन साहिब पहुंचेगा खालसा मार्च, सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजामअमृतसर से रवाना हुआ यह भव्य खालसा मार्च विभिन्न गांवों और कस्बों से होते हुए अपनी तय यात्रा पूरी करेगा और कल ऐतिहासिक श्री दरबार साहिब तरनतारन पहुंचेगा। यात्रा के मार्ग में आने वाले सभी पड़ावों पर स्थानीय संगत द्वारा लंगर और चाय-पानी की विशेष व्यवस्था की गई है। इस विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की ट्रैफिक समस्या या असुविधा से बचने के लिए अमृतसर और तरनतारन जिला प्रशासन तथा पुलिस विभाग ने सुरक्षा और रूट डायवर्जन के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन से पूरे माझा क्षेत्र में एक बार फिर से धार्मिक और उल्लासपूर्ण माहौल देखने को मिल रहा है।
पेपर लीक पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला। कैबिनेट ने संशोधन विधेयक को मंजूरी दी। दोषियों के लिए 10 साल की जेल, 10 करोड़ रुपये जुर्माना और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों का नाम सुनते ही सबसे पहले जेहन में कठिन चढ़ाई, लंबे ट्रेकिंग रूट्स और भारी सामान लादकर चलने की तस्वीरें उभरने लगती हैं। कई बार लोग उम्र, सेहत या समय की कमी के कारण पहाड़ों की असली सुंदरता का लुत्फ उठाने से महरूम रह जाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि बिना ट्रेक किए हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचना मुमकिन नहीं है। लेकिन अगर आप भी बिना किसी शारीरिक थकान या लंबी पैदल यात्रा के सीधे बादलों के बीच पहुंचना चाहते हैं, तो हिमालय की गोद में बसे ये जादुई और खूबसूरत गांव आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। सड़क मार्ग से सीधे जुड़े ये ऑफबीट ठिकाने कम मेहनत में आपको जिंदगी भर का यादगार अनुभव देने के लिए बिल्कुल तैयार हैं।चोपता और तुंगनाथ से हटकर जानिए लंगसी और मक्कूमठ जैसे अनजान ठिकानेउत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में स्थित कई ऐसे गांव हैं जो अपनी प्राकृतिक भव्यता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन वहां सैलानियों की भारी भीड़ नहीं पहुंच पाती। आमतौर पर लोग चोपता पहुंचकर तुंगनाथ का कठिन ट्रेक करते हैं, लेकिन अगर आप बिना ट्रेकिंग के हिमालय के विशाल नजारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो चोपता से पहले आने वाले छोटे-छोटे और मनमोहक गांवों का रुख कर सकते हैं। इन जगहों पर वाहन सीधे आपके होटल या होमस्टे के दरवाजे तक पहुंच जाते हैं और खिड़की खोलते ही विशाल बर्फ से ढकी चोटियां आपका स्वागत करती हैं। यहाँ की शांत आबोहवा और स्थानीय संस्कृति पर्यटकों को एक अलग ही मानसिक सुकून देती है।सांगला और छिटकुल: हिमाचल की हसीन वादियों में बिना थके बिताएं सुकून के पलहिमाचल प्रदेश की किन्नौर घाटी में स्थित सांगला और भारत का आखिरी छोर कहे जाने वाले छिटकुल गांव तक पहुंचने के लिए आपको किसी तरह की मुश्किल ट्रेकिंग करने की जरूरत नहीं है। बस और कैब जैसी बेहतरीन सड़क सुविधाओं के जरिए आप सीधे इन अद्भुत वादियों के बीचोंबीच पहुंच सकते हैं। बहती हुई बासपा नदी का कलकल करता पानी, सेब के लदे हुए बाग और लकड़ी के बने पारंपरिक पहाड़ी मकान इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। यहाँ आप बिना किसी भागदौड़ या थकान के प्रकृति की गोद में बैठकर गर्म चाय की चुस्की के साथ पहाड़ों के असली सौंदर्य को महसूस कर सकते हैं।ऑफबीट ट्रैवलर्स के लिए क्यों खास हैं ये रोड-कनेक्टिविटी वाले पहाड़ी गांवआज के समय में जब लोकप्रिय हिल स्टेशनों पर पर्यटकों का भारी रेला लगा रहता है और गाड़ियां ट्रैफिक जाम में फंसी रहती हैं, तब ये छोटे और सुलभ गांव एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रहे हैं। यहाँ न तो प्रदूषण का शोर है और न ही शहर जैसी भागदौड़। आप अपनी गाड़ी से या आसानी से मिलने वाली टैक्सी से सीधे इन लोकेशंस पर पहुंचकर स्थानीय होमस्टे में ठहर सकते हैं। उत्तराखंड और हिमाचल के इन छिपे हुए नगीनों की यात्रा आपके वीकेंड को बिना किसी शारीरिक थकान के बेहद आरामदायक और यादगार बना देगी, जहाँ आप प्रकृति के सबसे करीब खुद को महसूस करेंगे।
नैनीताल, भीमताल और सातताल से हटकर उत्तराखंड की इन 5 खूबसूरत 'हिडन लोकेशन' पर डालें नजर
उत्तराखंड की हसीन वादियों में जब भी घूमने की बात आती है, तो सबसे पहले पर्यटकों की जुबान पर नैनीताल, भीमताल और सातताल जैसे मशहूर तालों का ही नाम आता है। यही वजह है कि सालभर इन लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर सैलानियों का भारी रेला लगा रहता है, जिससे कई बार वहां वह सुकून और शांति नहीं मिल पाती जिसकी तलाश में लोग पहाड़ों की तरफ रुख करते हैं। अगर आप भी इस बार की छुट्टियों या वीकेंड पर किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जहाँ प्राकृतिक सुंदरता अपनी पूरी रोनक के साथ बिखरती हो और जहाँ आम टूरिस्टों की भीड़भाड़ न के बराबर हो, तो उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के आस-पास मौजूद ये छिपे हुए खूबसूरत ठिकाने (Hidden Gems) आपके लिए एकदम परफेक्ट साबित हो सकते हैं। आइए जानते हैं इन गुप्त और अद्भुत जगहों के बारे में।नौकुचियाताल और खुर्पाताल से आगे, प्रकृति की गोद में बसा नौकुचियाताल का शांत कोनानैनीताल जिले की भीड़भाड़ से थोड़ी ही दूरी पर स्थित नौकुचियाताल और उसके आसपास के इलाके अभी भी अपनी कुंवारी खूबसूरती के लिए पहचाने जाते हैं। नौ कोणों वाले इस रहस्यमयी ताल के चारों ओर फैले हरे-भरे जंगल और चीड़ के लंबे पेड़ सैलानियों का मन मोह लेते हैं। यहाँ की आबोहवा में एक ऐसा सुकून है जो आपको शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से पूरी तरह दूर ले जाता है। बर्ड वॉचिंग (पक्षी प्रेमियों) और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है, क्योंकि यहाँ आपको दुर्लभ प्रजाति के पक्षी और एकांत में बहती ठंडी हवा का अहसास आसानी से मिल जाएगा।मुक्तेश्वर के पास छुपा 'भेड़ाघाट' और पंगनाथ की हसीन वादियाँमुक्तेश्वर और रामगढ़ की पहाड़ियों के बीच कुछ ऐसी छोटी और अनजान जगहें छिपी हैं, जहाँ कम ही पर्यटकों की नजर पहुंच पाती है। मुक्तेश्वर के मुख्य बाजार से थोड़ा आगे बढ़ने पर ऐसी कई घाटियां और ट्रेकिंग ट्रेल्स मिलते हैं, जो सीधे बादलों के बीच ले जाते हैं। यहाँ से बर्फ से ढकी हिमालय की विशाल चोटियों का जो विहंगम नजारा दिखाई देता है, वह नैनीताल की भीड़ में बैठकर कभी नहीं मिल सकता। स्थानीय संस्कृति और पहाड़ी जीवनशैली को बेहद करीब से देखने के लिए इन अनछुए गांवों की यात्रा करना किसी रोमांचक अनुभव से कम नहीं है।रामगढ़ और सतखोल: सेब के बागों के बीच बसा एक अनदेखा स्वर्गनैनीताल जिले का ही रामगढ़ अपनी ठंडी जलवायु और मीठे फलों के बागों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके भीतर बसा 'सतखोल' नाम का छोटा सा गांव अभी भी पर्यटकों की नजरों से काफी हद तक ओझल है। सतखोल में आपको बड़े-बड़े सेब, आड़ू और खुबानी के बाग मिलेंगे, जहाँ आप प्रकृति के बीच शांति से कुछ वक्त बिता सकते हैं। यहाँ होमस्टे कल्चर तेजी से विकसित हो रहा है, जहाँ आपको शुद्ध पहाड़ी खाना और स्थानीय आतिथ्य का अनूठा अनुभव मिलेगा। वीकेंड पर बिना किसी शोर-शराबे के मानसिक शांति पाने के लिए यह लोकेशन उत्तराखंड के सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक है।
क्रिकेट की दुनिया के 'भगवान' कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने मैदान पर तो अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए ही हैं, लेकिन उनका जीवन खेल के मैदान से बाहर भी करोड़ों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा रहा है। हाल ही में सचिन तेंदुलकर ने अपने जीवन से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक सार्वजनिक मंच पर अपने पुराने दिनों को याद करते हुए सचिन ने कहा कि 'मेरे पिता एक प्रोफेसर थे', और उनके संस्कारों ने ही मुझे जमीन से जुड़े रहना सिखाया। अपनी इस बातचीत के दौरान उन्होंने शिक्षा, असफलता और जिंदगी के उन महत्वपूर्ण पाठों पर खुलकर बात की जो आज के दौर के युवाओं और बच्चों के लिए किसी अमूल्य सीख से कम नहीं हैं।जब सचिन तेंदुलकर ने याद किए अपने पिता के सिखाए गए कड़े अनुशासन के पाठसचिन तेंदुलकर ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके पिता स्वर्गीय रमेश तेंदुलकर एक जाने-माने मराठी कवि और प्रोफेसर थे। घर का माहौल पूरी तरह से साहित्यिक, अनुशासित और सादगी से भरा हुआ था। सचिन ने साझा किया कि एक प्रोफेसर का बेटा होने के बावजूद लोग अक्सर यह उम्मीद करते थे कि वे पढ़ाई में ही सबसे आगे रहेंगे, लेकिन उनका पूरा ध्यान क्रिकेट की पिच पर रहता था। इसके बावजूद उनके पिता ने कभी उन पर जबरन पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया, बल्कि उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की पूरी छूट दी। हालांकि, उन्होंने यह भी सिखाया कि आप जीवन में जो भी काम करें, उसमें पूरी ईमानदारी और मेहनत होनी चाहिए।'फेल होना बिल्कुल ठीक है, लेकिन कोशिश करना न छोड़ें'इस बातचीत के दौरान सचिन तेंदुलकर ने आज की युवा पीढ़ी और बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव (Stress and Pressure) पर बेहद गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चे जरा सी असफलता से घबरा जाते हैं या डिप्रेशन में आ जाते हैं। सचिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जीवन में किसी परीक्षा या काम में फेल हो जाना या असफल होना कोई पाप नहीं है, यह बिल्कुल ठीक है। असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी होती है और गलतियों से ही इंसान सीखता है। असली हार तब होती है जब आप डरकर कोशिश करना ही छोड़ देते हैं। उनका यह पॉजिटिव नजरिया छात्रों और खेल प्रेमियों के दिलों को छू गया।असफलता से सीख लेकर कैसे आगे बढ़ें युवा पीढ़ीमास्टर ब्लास्टर का यह संदेश आज के अत्यधिक प्रतिस्पर्धा वाले दौर में बहुत प्रासंगिक है, जहां बच्चों पर हमेशा अव्वल आने का दबाव रहता है। सचिन ने अपने क्रिकेट करियर का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने अपने खेल जीवन में कई बार खराब दौर और शून्य पर आउट होने का सामना किया, लेकिन हर असफलता ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया। माता-पिता और बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता की राह कभी सीधी नहीं होती, उसमें उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। जरूरी यह है कि आप अपनी गलतियों से सीख लें और पूरी ऊर्जा के साथ एक नई शुरुआत करें।
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज और मौजूदा समय में कप्तान की भूमिका निभा रहे शुभमन गिल इन दिनों खेल के मैदान के साथ-साथ एक बेहद दिलचस्प वजह से चर्चाओं के केंद्र में आ गए हैं। सोशल मीडिया से लेकर देश के युवा वर्ग के बीच एक खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि शुभमन गिल किसी बड़े छात्र आंदोलन (Student Protest) का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि युवा कप्तान ने अपना समर्थन देने से पहले एक बड़ी और चौंकाने वाली शर्त रख दी है। उनकी इस शर्त के सामने आने के बाद से राजनीतिक गलियारों से लेकर खेल प्रेमियों के बीच बहस छिड़ गई है कि आखिर इस युवा क्रिकेटर का यह कदम क्या नया मोड़ लेकर आएगा।क्या है पूरा छात्र आंदोलन और क्यों चर्चा में आए शुभमन गिलदेश के अलग-अलग हिस्सों में इन दिनों युवाओं और छात्रों द्वारा शिक्षा, रोजगार और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अलग-अलग मुद्दों पर आवाज उठाई जा रही है। इसी कड़ी में जब छात्रों ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से देश के युवा आइकॉन और खिलाड़ियों से अपने इस आंदोलन का समर्थन करने की अपील की, तो अप्रत्याशित रूप से भारतीय कप्तान शुभमन गिल का नाम इस चर्चा से जुड़ गया। खेल जगत से जुड़ा कोई बड़ा नाम इस तरह के सामाजिक या छात्र मुद्दों पर सीधे तौर पर अपनी राय रखने या जुड़ने से आम तौर पर बचता आया है, लेकिन गिल के इस मामले में एंट्री लेने से माहौल पूरी तरह बदल गया है।शुभमन गिल की वह 'बड़ी शर्त' जिसने सबको चौंका दियासूत्रों और वायरल रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब कुछ छात्र संगठनों या नुमाइंदों ने शुभमन गिल से इस आंदोलन का हिस्सा बनने या सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन जाहिर करने का आग्रह किया, तो उन्होंने बेहद सधा हुआ और परिपक्व जवाब दिया। कप्तान शुभमन गिल ने साफ कर दिया कि वह देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ पूरी सहानुभूति रखते हैं, लेकिन वे किसी भी ऐसे आंदोलन में शामिल होने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि प्रदर्शन पूरी तरह से अनुशासित, शांतिपूर्ण और राजनीति से प्रेरित न हो। उनकी यह शर्त इस बात की गवाही देती है कि एक जिम्मेदार राष्ट्रीय खिलाड़ी के तौर पर वे अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल देश या समाज में किसी भी प्रकार की अराजकता फैलाने के लिए नहीं होने देना चाहते हैं।खेल और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिशआज के दौर में जब सोशल मीडिया और सेलिब्रिटी कल्चर का प्रभाव युवाओं पर सबसे ज्यादा होता है, तब शुभमन गिल का यह रुख काफी समझदारी भरा माना जा रहा है। एक तरफ जहां युवा पीढ़ी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सड़क पर उतर रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के कप्तान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि समर्थन हमेशा सकारात्मक, रचनात्मक और शांति के दायरे में रहकर ही होना चाहिए। क्रिकेट के मैदान पर अपनी शानदार पारियों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले शुभमन गिल का यह संतुलित और परिपक्व अंदाज आने वाले दिनों में उन्हें एक बड़े लीडर के रूप में स्थापित कर सकता है, जिस पर हर किसी की नजर टिकी हुई है।
नीट पेपर लीक मामले पर CJP और केंद्र सरकार के बीच अहम बैठक हुई। संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखीं और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार को शनिवार तक का समय दिया गया।
जिन्होंने खेले सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच; 13 साल से अटूट है सचिन तेंदुलकर का यह महारिकॉर्ड
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में मैदान पर लंबे समय तक टिके रहना और अपनी फिटनेस के दम पर देश के लिए रिकॉर्डों का अंबार लगाना हर खिलाड़ी का सपना होता है। क्रिकेट के लंबे करियर के दौरान कई बड़े खिलाड़ियों ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और शानदार तकनीक से लोहा मनवाया है, लेकिन कुछ ही ऐसे लीजेंड्स रहे हैं जिन्होंने अपने खेल के सफर को दशकों तक खींचा है। बात जब सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने की आती है, तो क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे ऊपर आता है। उनके नाम दर्ज यह महारिकॉर्ड पिछले 13 सालों से ऐसा अटूट किला बना हुआ है, जिसे आज तक दुनिया का कोई भी बल्लेबाज भेद नहीं पाया है। आइए जानते हैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले दुनिया के उन 5 महान बल्लेबाजों के बारे में।सचिन तेंदुलकर: क्रिकेट जगत का वह शिखर जिसे छूना नामुमकिनइस फेरबलिस्त में सबसे पहला और सर्वोपरि नाम भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का आता है। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने ऐतिहासिक करियर के दौरान कुल 664 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले (टेस्ट, वनडे और टी20 मिलाकर) खेले हैं। साल 2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले सचिन तेंदुलकर का यह रिकॉर्ड पिछले 13 वर्षों से पूरी तरह सुरक्षित और अटूट बना हुआ है। उनकी लंबी फिटनेस, खेल के प्रति समर्पण और लगातार रन बनाने की भूख का ही नतीजा है कि आज भी कोई सक्रिय खिलाड़ी इस जादुई आंकड़े के आसपास भी नहीं पहुंच पा रहा है।महेला जयवर्धने और रिकी पोंटिंग: दिग्गजों की इस लिस्ट में दूसरे और तीसरे पायदान पर नामश्रीलंका के पूर्व दिग्गज कप्तान और स्टाइलिश बल्लेबाज महेला जयवर्धने इस सूची में दूसरे स्थान पर काबिज हैं। उन्होंने अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 652 मैच खेले और अपनी टीम के लिए कई यादगार पारियां खेलीं। वहीं, ऑस्ट्रेलिया को अपनी कप्तानी में दो बार विश्व कप जिताने वाले महान बल्लेबाज रिकी पोंटिंग इस फेहरिस्त में तीसरे नंबर पर आते हैं। पोंटिंग ने अपने लंबे और यशस्वी करियर में कुल 560 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। इन खिलाड़ियों का नाम क्रिकेट इतिहास के सबसे अनुशासित और जुझारू खिलाड़ियों में शुमार किया जाता है।विराट कोहली और अन्य सक्रिय खिलाड़ी: क्या कोई तोड़ पाएगा यह महान रिकॉर्ड?सूची में आगे बढ़ते हुए पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और धाकड़ बल्लेबाज शोएब मलिक (446 मैच) और भारत के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली जैसे दिग्गजों का नाम आता है। मौजूदा दौर के आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस के नए आयाम गढ़ने वाले विराट कोहली ने भी सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय मैच खेल लिए हैं और वे लगातार इस फेहरिस्त में ऊपर आ रहे हैं। हालांकि, जिस तरह से आज के समय में खिलाड़ियों का वर्कलोड मैनेजमेंट किया जाता है और अलग-अलग फॉर्मेट्स से खिलाड़ी संन्यास ले लेते हैं, उसे देखकर क्रिकेट पंडितों का मानना है कि सचिन तेंदुलकर के 664 मैचों के इस महारिकॉर्ड को तोड़ना भविष्य में लगभग असंभव सा नजर आता है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर उस दौर में दाखिल हो चुकी है, जहां हर एक खामोशी के पीछे किसी बड़े राजनीतिक भूचाल के संकेत छिपे होते हैं। साल 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सूबे का सियासी पारा हाई होने लगा है। इस बीच सबसे बड़ा और पेचीदा सवाल हर राजनीतिक विश्लेषक की जुबान पर है कि आखिर बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती की चुप्पी का राज क्या है? जहां एक तरफ सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी व कांग्रेस अपनी-अपनी रैलियों और बयानों से मैदान गरमाए हुए हैं, वहीं मायावती का इस तरह से पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाना विरोधी दलों की नींद उड़ाए हुए है।बसपा सुप्रीमो की खामोशी के मायने और यूपी का बदला हुआ राजनीतिक समीकरणउत्तर प्रदेश की राजनीति के इतिहास में मायावती को एक मंझी हुई और चौंकाने वाले फैसले लेने वाली नेता के रूप में जाना जाता है। जब-जब राजनीतिक पंडितों ने यह मान लिया कि बसपा कमजोर हो रही है, तब-तब पार्टी ने जमीन पर अपने कैडर के जरिए बड़ा उलटफेर किया है। इस बार 2027 के चुनाव से पहले मायावती का मीडिया के सामने कम आना और सीधे तौर पर रोजाना के बयानों से दूरी बनाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि बीएसपी इस वक्त सोशल इंजीनियरिंग के अपने पुराने और अचूक फॉर्मूले को नए कलेवर में ढालने में जुटी है, ताकि बिना शोर शराबे के सीधे ग्राउंड जीरो पर वोट बैंक को मजबूत किया जा सके।विरोधी दलों की क्यों बढ़ी बेचैनी, क्या त्रिकोणीय मुकाबले में फिर पलटेगा पासा?अखिलेश यादव का पीडीए (PDA) समीकरण और एनडीए की आक्रामक चुनावी तैयारियों के बीच मायावती की यह खामोश चाल सभी दलों के लिए सिरदर्द बन गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसपा का दलित वोट बैंक आज भी अपनी जगह इंटैक्ट है और यदि पार्टी ने चुनाव के वक्त मुस्लिम या अन्य पिछड़ी जातियों को अपने पाले में साधने में थोड़ी भी कामयाबी हासिल कर ली, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो जाएगा। यही वजह है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के भीतर इस बात की गहरी बेचैनी है कि कहीं बसपा का यह गुप्त मंथन उनके समीकरणों को बिगाड़ न दे, जबकि बीजेपी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।जमीन पर चल रहा है साइलेंट कैंपेन और जनता के बीच क्या है चर्चाभले ही टेलीविजन डिबेट्स और बड़े मंचों पर मायावती इन दिनों कम नजर आ रही हों, लेकिन बहुजन समाज पार्टी का जमीनी कैडर गांव-गांव और बूथ स्तर पर अपनी तैयारियों को पुख्ता करने में लगा है। पार्टी के पुराने निष्ठावान कार्यकर्ताओं को लगातार यह निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना किसी शोर के सीधे जनता के बीच जाएं और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करें। उत्तर प्रदेश की आम जनता के बीच अब यह चर्चा आम हो चली है कि 'का कहत बा यूपी?' और क्या इस बार मायावती कोई बड़ा सियासी सरप्राइज देने वाली हैं। आने वाले दिनों में बसपा के इस खामोश तेवर का असर यूपी की राजनीति पर क्या होगा, इस पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों सियासी समीकरण तेजी से बदलते हुए नजर आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के राजनीतिक कद और प्रभाव में आई सुस्ती के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के नए चेहरे के रूप में समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम बहुत तेजी से उभर रहा है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी आलाकमान की तरफ से भी अखिलेश यादव को लगातार मिल रहे खुलकर समर्थन ने इस राजनीतिक चर्चा को और अधिक हवा दे दी है। क्षेत्रीय क्षत्रपों के बीच संतुलन साधते हुए अखिलेश की बढ़ती स्वीकार्यता ने विपक्षी इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) के भीतर नए नेतृत्व की सुगबुगाहट को तेज कर दिया है।क्षेत्रीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय फलक पर कैसे मजबूत हो रहे अखिलेश यादवकभी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय सीमाओं और जातिगत समीकरणों तक सीमित माने जाने वाले अखिलेश यादव ने पिछले कुछ समय से अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पीडीए (PDA - पिछड़ा, दलित, अल्संख्यक) फॉर्मूले के जरिए उन्होंने यूपी में जो सियासी जमीन तैयार की है, उसने राष्ट्रीय स्तर के तमाम विपक्षी दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। संसद से लेकर सड़क तक केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख और मुद्दों पर बेबाक बयानबाजी ने उन्हें विपक्षी खेमे के सबसे भरोसेमंद और मुखर युवा चेहरों में ला खड़ा किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के अपने राज्य की आंतरिक राजनीतिक व्यस्तताओं में घिरने के बाद खाली हुई जगह को भरने में अखिलेश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।राहुल गांधी के साथ बढ़ती ट्यूनिंग और इंडिया गठबंधन का नया समीकरणकांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच का तालमेल इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। चुनाव के दौरान शुरू हुई यह सियासी दोस्ती अब एक मजबूत राजनीतिक गठबंधन और आपसी भरोसे में बदल चुकी है। राहुल गांधी द्वारा अखिलेश यादव की रणनीतियों और उनके नेतृत्व को दिए जा रहे खुले समर्थन से यह साफ हो गया है कि विपक्षी गठबंधन आगामी राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक और युवा नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच इस सहज तालमेल से विपक्ष को उत्तर भारत के सबसे बड़े सूबे यानी उत्तर प्रदेश में एक नई और आक्रामक धार मिलती दिखाई दे रही है।विपक्षी खेमे में नेतृत्व की रेस और आने वाले दिनों की सियासी चालेंजैसे-जैसे देश में अगले राजनीतिक पड़ाव और चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो रही है, वैसे-वैसे विपक्ष के भीतर पीएम पद या प्रमुख चेहरे की दावेदारी को लेकर अंदरखाने चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। ममता बनर्जी जैसे पुराने दिग्गज नेताओं के अपने बयानों या क्षेत्रीय सीमाओं में सिमटने की चर्चा के बीच अखिलेश यादव का लगातार मजबूत होना विपक्षी दल की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है। यदि यह समीकरण इसी तरह बरकरार रहा, तो आने वाले राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में अखिलेश यादव विपक्ष के सबसे प्रमुख और निर्णायक चेहरों में से एक बनकर उभर सकते हैं, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियों के तेज होते ही सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जनता की शिकायतों और प्रशासनिक सुस्ती पर सख्त रुख अपनाते हुए सीएम योगी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी या टेंशन हुई, तो संबंधित अधिकारियों की बिल्कुल खैर नहीं होगी। मुख्यमंत्री के इस तेवर से साफ जाहिर है कि चुनाव से पहले सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और जनता की संतुष्टि ही इस बार प्रशासन का सबसे बड़ा पैमाना होगी।जनता की नाराजगी सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी: सीएम योगी का कड़ा संदेशसमीक्षा बैठकों और जनसुनवाई के दौरान लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और विभागीय प्रमुखों को कड़ी हिदायत दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे धरातल पर पहुंचना चाहिए और आम नागरिकों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना हर अधिकारी की पहली और मुख्य जिम्मेदारी है। यदि किसी स्तर पर जनता को उत्पीड़न या लापरवाही का सामना करना पड़ा, तो सीधे तौर पर उस इलाके के जिम्मेदार अफसरों पर गाज गिरेगी।चुनावी तैयारियों के बीच प्रशासनिक कसावट और ग्राउंड जीरो का फीडबैकराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी चुनावों के मद्देनजर सीएम योगी का यह सख्त रुख सियासी और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से बेहद अहम है। सरकार चाहती है कि चुनाव से पहले जनता के बीच शासन की छवि पूरी तरह साफ-सुथरी और जनहितैषी बनी रहे। इसके लिए लगातार ग्राउंड जीरो से फीडबैक लिया जा रहा है और लापरवाह अधिकारियों को या तो सुधरने या मैदान छोड़ने की चेतावनी दी जा रही है। पुलिस और प्रशासनिक महकमे में इस हाई-वोल्टेज आदेश के बाद से हड़कंप मच गया है और सभी अधिकारी जनता की समस्याओं के निस्तारण में तेजी से जुट गए हैं।जनता के लिए राहत की उम्मीद और अफसरों की बड़ी जिम्मेदारीमुख्यमंत्री के इस कड़े संदेश के बाद आम जनता के मन में यह उम्मीद जगी है कि अब प्रशासनिक अमला उनकी सुनेगा और फाइलों में अटके काम तेजी से पूरे होंगे। जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को पाटने के लिए सरकार ने फील्ड विजिट और जनसुनवाई पोर्टलों की मॉनिटरिंग भी और अधिक कड़ी कर दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम योगी के इस कड़क आदेश का मैदानी स्तर पर अधिकारियों के कामकाज पर कितना असर पड़ता है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में लापरवाही बरतने वाले अफसरों के लिए नौकरी करना आसान नहीं रहने वाला है।
बैठकर पेशाब करना बेहतर है या खड़े होकर? डॉक्टर ने किया हैरान करने वाला खुलासा
हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई ऐसी आदतें होती हैं, जिन्हें हम बिना सोचे-समझे सालों से अपनाते आ रहे हैं। इन्हीं में से एक बेहद सामान्य आदत पेशाब करने की मुद्रा यानी पोजीशन (Posture) से जुड़ी हुई है। अक्सर पुरुषों के बीच यह बहस का विषय रहता है कि उन्हें खड़े होकर पेशाब करना चाहिए या बैठकर। हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और यूरोलॉजिस्ट्स ने इस विषय पर एक चौकाने वाली मेडिकल रिसर्च सामने रखी है। डॉक्टरों का कहना है कि पेशाब करने का तरीका सिर्फ आपके ब्लैडर (मूत्राशय) की सेहत को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि इसका सीधा असर आपके जोड़ों, घुटनों और रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ सकता है।खड़े होकर पेशाब करने के क्या हैं नुकसान और इसका जोड़ों पर असरआधुनिक जीवनशैली में खड़े होकर पेशाब करना बहुत आम हो गया है, लेकिन मेडिकल साइंस के दृष्टिकोण से यह तरीका लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। जब कोई व्यक्ति खड़े होकर पेशाब करता है, तो उसके शरीर का निचला हिस्सा और पेल्विक फ्लोर (Pelvic Floor) की मांसपेशियां पूरी तरह से रिलैक्स नहीं हो पाती हैं। इसके अलावा, खड़े होने की स्थिति में शरीर का पूरा वजन रीढ़ की हड्डी और पैरों के जोड़ों पर पड़ता है। जो लोग पहले से ही अर्थराइटिस या घुटनों के दर्द (Joint Pain) से जूझ रहे हैं, यदि वे गलत पोश्चर में लंबे समय तक खड़े रहते हैं, तो उनकी यह आदत जोड़ों के दर्द को और अधिक गंभीर बना सकती है।बैठकर पेशाब करना क्यों माना जाता है वैज्ञानिक और शारीरिक रूप से बेहतरविशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक बनावट के लिहाज से बैठकर पेशाब करना सबसे प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक तरीका है। जब आप बैठकर पेशाब करते हैं, तो पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां पूरी तरह से तनावमुक्त हो जाती हैं, जिससे मूत्राशय (Bladder) पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। इससे ब्लैडर पूरी तरह खाली हो जाता है और भविष्य में यूटीआई (UTI), प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं और किडनी पर पड़ने वाला दबाव काफी हद तक कम हो जाता है। साथ ही, इस पोजीशन से रीढ़ की हड्डी और जोड़ों को भी आराम मिलता है, जिससे शरीर का संतुलन बेहतर बना रहता है।जोड़ों को सुरक्षित रखने और बेहतर सेहत के लिए क्या अपनाएं आदतेंशरीर को स्वस्थ और बीमारियों से दूर रखने के लिए छोटी-छोटी शारीरिक आदतों में बदलाव करना बहुत जरूरी होता है। डॉक्टरों की सलाह है कि पुरुषों को भी खासकर उम्र बढ़ने के साथ या जोड़ों के दर्द की समस्या होने पर बैठकर पेशाब करने की आदत अपनानी चाहिए। यह न केवल आपके मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम (मांसपेशियों और हड्डियों के तंत्र) को सुरक्षित रखता है, बल्कि आंतरिक अंगों की कार्यप्रणाली को भी दुरुस्त रखता है। स्वास्थ्य से जुड़ी इन छोटी सावधानियों को अपनाकर आप अपने जोड़ों के दर्द को गंभीर होने से बचा सकते हैं और एक स्वस्थ जीवनशैली जी सकते हैं।
मानसूनी बरसात में बनाएं ये स्पेशल रेसिपीज
बारिश का मौसम यूं भी सुहावना होता है। ऐसे में कुछ गरमा गरम और स्वादिष्ट खाने को मिल जाए तो सोने मे सुहागा हो जाता है। तो फिर देर किस बात की आईए बारिश की रिमझिमम के बीच शानदार मौसम में कुछ स्पेशल हो जाए। 1. मसाला प्याज पकोड़ा विधि सबसे पहले 3 बड़े प्याज […] The post मानसूनी बरसात में बनाएं ये स्पेशल रेसिपीज appeared first on Sabguru News .
खुद बनाई चाय, संवाद से लोगों का जीता दिल, देखें सीएम डॉ. मोहन यादव की सादगी के Photos
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने अनोखे और सौम्य स्वभाव के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं। कई बार उनकी सादगी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं। इसकी एक और बानगी 23 जुलाई को देखने को मिली। दरअसल, सीएम डॉ. यादव ने आलीराजपुर जिले के ...
मेधावी विद्यार्थियों के लिए मध्यप्रदेश में सस्ती होगी मेडिकल शिक्षा
डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले स्टूडेंट्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। नीट मेरिट में स्थान पाने वाले मेधावी विद्यार्थियों के लिए मध्यप्रदेश में मेडिकल शिक्षा सस्ती होने जा रही है। मेरिट में आने वाले स्टूडेंट्स की फीस में एक-तिहाई की कमी होने के आसार ...
दिल्ली में CJP प्रदर्शन के बीच DMRC ने नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिया। अब कुल 18 मेट्रो स्टेशन प्रभावित हैं। जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी, सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त किया।
अंगुल गैंगरेप मामले में 4 दोषियों को 20 साल की कठोर कैद की सज़ा
भुवनेश्वर। ओडिशा में अंगुल की फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने 21 वर्षीय महिला और एक नाबालिग लड़की के साथ 2024 के अंगुल गैंगरेप मामले में सभी चार आरोपियों को 20 साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई है। अंगुल के अतिरिक्त ज़िला और सत्र न्यायाधीश (फ़ास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय) ने शुक्रवार को चार आरोपियों को […] The post अंगुल गैंगरेप मामले में 4 दोषियों को 20 साल की कठोर कैद की सज़ा appeared first on Sabguru News .
नीट पेपर लीक से जुड़ी याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।
NEET प्रदर्शन विवाद : पुलिस लाठीचार्ज वाली याचिका मामले में क्यों भड़के CJI सूर्यकांत?
CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में सुनवाई को लेकर मीडिया में चल रही खबरों का सख्ती से खंडन किया है। CJI ने उन दावों को पूरी तरह भ्रामक और 'लापरवाह' करार दिया है, ...
बहराइच में मासूम बालक के साथ कुकर्म और हत्या के दोषी को मृत्यु दंड
बहराइच। उत्तर प्रदेश में बहराइच जिले की एक विशेष अदालत ने सात वर्षीय बालक के साथ दुष्कर्म कर उसकी निर्मम हत्या करने के मामले में दोषी अभियुक्त को घटना के लगभग दो माह के भीतर मृत्यु दण्ड की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर एक लाख रुपए का अर्थदण्ड भी लगाया गया है। […] The post बहराइच में मासूम बालक के साथ कुकर्म और हत्या के दोषी को मृत्यु दंड appeared first on Sabguru News .
दिल्ली में Gen-Z का ‘मीम वार’, NEET लीक के खिलाफ सड़कों पर शेयर हुआ क्रिएटिविटी और ह्यूमर का डोज
जंतर-मंतर और दिल्ली की सड़कों पर आमतौर पर गंभीर और भारी-भरकम नारों वाली रैलियां देखने को मिलती हैं, लेकिन नीट (NEET) विवाद को लेकर जब Gen-Z छात्र सड़कों पर उतरे, तो विरोध का अंदाज बिल्कुल बदल गया। रोष वही था, गुस्सा उतना ही गहरा, लेकिन अपनी बात कहने ...
पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने गठित किया फास्टट्रैक कोर्ट
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्टट्रैक कोर्ट गठित करने का निर्णय लिए जाने के कुछ ही घंटों में दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऐसे कोर्ट का गठन कर अनु ग्रोवर बालिगा को विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया है। पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्टट्रैक कोर्ट गठित […] The post पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने गठित किया फास्टट्रैक कोर्ट appeared first on Sabguru News .
छात्र आंदोलन को लेकर सोनिया गांधी बोलीं, उनके साथ खड़ा होना हमारा राजनीतिक और संवैधानिक कर्तव्य
कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को परीक्षा के पेपर लीक होने को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से निपटने के केंद्र सरकार के तरीके की आलोचना की और आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट का सामना कर रही है।
महंगे क्रूड के बावजूद Reliance मचाएगा धमाल? ब्रोकरेज ने दिया 22% की तगड़ी तेजी का टारगेट
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और बढ़ते दामों ने जहां एक तरफ दुनिया भर की तेल कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं भारतीय बाजार के दिग्गज स्टॉक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। बाजार के एक्सपर्ट्स और दिग्गज ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रिलायंस की कमाई की रफ्तार को ब्रेक नहीं लगा पाएंगी, बल्कि कंपनी आने वाली तिमाहियों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इसी मजबूत आउटलुक के दम पर ब्रोकरेज ने स्टॉक में मौजूदा स्तरों से करीब 22% से ज्यादा के बंपर अपसाइड पोटेंशियल के साथ निवेश करने की बड़ी सलाह दे दी है।कच्चे तेल की महंगाई के बीच क्यों मजबूत है रिलायंस की स्थितिआमतौर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें उन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बनाती हैं जो तेल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स (O2C) के कारोबार से जुड़ी हैं। हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनेस मॉडल अब केवल तेल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक विशाल तेल-से-टेलीकॉम और रिटेल ग्रुप बन चुका है। ब्रोकरेज फर्मों की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में सुधार देखने को मिल रहा है और वैश्विक स्तर पर डीजल व गैसोलीन की मजबूत मांग का सीधा फायदा रिलायंस की रिफाइनरियों को मिल रहा है। इसके अलावा, कंपनी ने हाल ही में अपने ऑयल-टू-केमिकल बिजनेस के परिचालन को और अधिक आधुनिक और लागत-प्रभावी बनाया है, जिससे महंगे क्रूड के असर को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।जियो और रिटेल बिजनेस से मिलेगा कमाई को असली बूस्टबाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर ओ2सी (O2C) सेगमेंट में कच्चे तेल की वजह से थोड़ा बहुत दबाव आता भी है, तो उसकी पूरी भरपाई रिलायंस के दो सबसे मजबूत कंज्यूमर बिजनेस—रिलायंस जियो (Jio) और रिलायंस रिटेल (Retail) आसानी से कर देंगे। जियो के प्रति यूजर औसत रेवेन्यू (ARPU) में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है और 5G रोलआउट के बाद डेटा की खपत बढ़ने से कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन काफी मजबूत हुआ है। ठीक इसी तरह, त्योहारी सीजन और ग्रामीण इलाकों में मांग सुधरने की वजह से रिलायंस रिटेल के स्टोर्स से भी रिकॉर्ड कमाई की उम्मीद जताई जा रही है। यही वजह है कि विश्लेषक इस शेयर को लेकर पूरी तरह से बुलिश नजर आ रहे हैं।ब्रोकरेज का बड़ा दावा और निवेशकों के लिए कमाई का मौकाग्लोबल और डोमेस्टिक ब्रोकरेज हाउसेज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्टॉक पर अपनी 'BUY' रेटिंग को बरकरार रखते हुए इसका नया टारगेट प्राइस तय कर दिया है, जो इसके मौजूदा मार्केट प्राइस से लगभग 22% ऊपर है। तकनीकी चार्ट पर भी यह शेयर अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल्स से बाउंस बैक करने के लिए तैयार दिख रहा है। ऐसे में बाजार के जानकारों का कहना है कि जो निवेशक लंबी अवधि के लिए अपने पोर्टफोलियो में एक सुरक्षित और लगातार रिटर्न देने वाला लार्ज-कैप शेयर जोड़ना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट में खरीदारी करने का एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है।
शेयर बाजार में हाहाकार! Sensex 800 अंक टूटा, Nifty 23,600 के नीचे फिसला
भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त बिकवाली का दौर देखने को मिला, जिससे चारों तरफ हाहाकार मच गया। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि सेंसेक्स (Sensex) देखते ही देखते 800 अंकों से ज्यादा धराशायी हो गया। वहीं, निफ्टी (Nifty) ने भी अपनी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक बढ़त खो दी और यह 23,600 के स्तर से नीचे फिसल गया। इस अचानक आई गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपये मिनटों में स्वाहा हो गए।ऑटो और रियल्टी सेक्टर में सबसे बड़ी सेंधबाजार में मची इस तबाही के पीछे सबसे बड़ा हाथ ऑटोमोबाइल और रियल्टी (रियल एस्टेट) सेक्टर का रहा। इन दोनों ही सेक्टर्स के शेयरों में संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) ने जमकर बिकवाली की। टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे बड़े ऑटो दिग्गजों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे, जबकि डीएलएफ और गोदरेज प्रॉपर्टीज जैसे रियल्टी शेयरों में भी भारी मुनाफावसूली देखने को मिली। जानकारों का मानना है कि कमजोर तिमाही नतीजों की आशंका और वैश्विक बाजारों से मिल रहे नकारात्मक संकेतों की वजह से इन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है।वैश्विक दबाव और बिकवाली की मुख्य वजहेंबाजार के जानकारों के मुताबिक, इस भारी गिरावट की टाइमिंग काफी महत्वपूर्ण है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी बाजार (Wall Street) में आई कमजोरी का असर घरेलू बाजार पर साफ तौर पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने आग में घी का काम किया है। स्थानीय स्तर पर भी निवेशक अब ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर सतर्क हो गए हैं, जिसके चलते उन्होंने सुरक्षित निवेश की तरफ रुख करना शुरू कर दिया है।निवेशकों के लिए आगे की राह और रणनीतियांइस उतार-चढ़ाव भरे माहौल में रिटेल निवेशकों को जल्दबाजी में कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि 23,600 के नीचे निफ्टी का जाना अल्पावधि (Short-term) के लिए कमजोरी का संकेत है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों को निचले स्तर पर खरीदने का एक बेहतरीन मौका भी हो सकता है। मौजूदा स्थिति में लार्ज-कैप शेयरों और डिफेंसिव सेक्टर्स (जैसे FMCG और IT) पर नजर बनाए रखना समझदारी होगी।
सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद तोड़ा आमरण अनशन, सीजेपी का आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान
नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर 26 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया लेकिन शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सड़कों पर उतरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक अपना आंदोलन जारी […] The post सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद तोड़ा आमरण अनशन, सीजेपी का आंदोलन जारी रखने का किया ऐलान appeared first on Sabguru News .
गुजरात में 14 घंटे में 400 मिमी बारिश से तबाही, जानें वैज्ञानिकों का अनुमान क्यों गलत साबित हुआ?
गुजरात में पिछले दो दिनों से बारिश ने रौद्र रूप धारण कर लिया है और महज 14 घंटों में कई इलाकों में 400 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। नवसारी के चिखली, अहमदाबाद के धोलेरा (धोलका) और सूरत के उमरपाड़ा जैसे इलाकों में मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ ...
IMD ने दिल्ली-NCR, यूपी, बिहार समेत 14 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 48 घंटे में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना, गुजरात और असम में बाढ़ का खतरा।
DU की एडवाइजरी पर भड़के राहुल गांधी, कहा- छात्रों को धमकाने की हिम्मत कैसे हुई?
दिल्ली यूनिवर्सिटी की जंतर-मंतर प्रदर्शन से दूर रहने की एडवाइजरी पर राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने से डराना गलत है और इसके लिए जवाबदेही तय होगी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए एम/एस संतोष ओवरसीज लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ शुक्रवार को कई स्थानों पर छापेमारी की।
संसद में फिर पेपर लीक पर हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित
संसद के मानसून सत्र के पांचवें दिन भी NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष के विरोध के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।
सोनम वांगचुक के 26 दिन का अनशन खत्म करने के बाद भी CJP ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। संगठन ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
Top News 24 July : PM मोदी का बड़ा ऐलान, 26 दिन बाद खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन
Top News 24 July : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून का एलान किया। सोनम वांगचुक का अनशन खत्म। सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में 17 मेट्रो स्टेशन बंद। देश की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति और छात्रों के प्रदर्शन को ...
सोनिया गांधी ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने छात्रों की मांगों, NTA की कार्यप्रणाली, सरकारी शिक्षा में निवेश और रोजगार के मुद्दों पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की।
26 दिन बाद खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन, सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद लिया फैसला
सोनम वांगचुक के अनुसार सरकार और उनके प्रतिनिधियों के बीच पिछले दो दिनों से लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक आश्वासन उनके लिए पर्याप्त नहीं था। वे चाहते थे कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को लिखित रूप में दर्ज करे। उन्होंने बताया कि इसी कारण उन्हें दो दिन अतिरिक्त अनशन जारी रखना पड़ा।
ईरान से युद्ध पर अमेरिका 37.5 अरब डॉलर फूंक चुका, 67 अरब डॉलर और चाहिए
US Iran war cost: अमेरिका को ईरान के साथ युद्ध बहुत मंहगा पड़ रहा है। लगभग 37 अरब 50 करोड़ डॉलर अब तक ख़र्च हो चुका है और युद्ध का अंत कहीं दिख नहीं रहा। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को इन्हीं दिनों अमेरिकी संसद के उच्च सदन, यानी सीनेट की एक कमेटी के ...
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार देने के लिए योगी सरकार की एक और महत्वाकांक्षी योजना विंध्य एक्सप्रेसवे (Vindhya Expressway) पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रयागराज से भदोही और मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक बनने वाले 333 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के लिए सर्वे, मैपिंग और अलाइनमेंट की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इस परियोजना के पूरा होने से जहां यात्रा का समय काफी घट जाएगा, वहीं पूरे क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।प्रयागराज की 3 तहसीलों के 84 गांवों से गुजरेगा एक्सप्रेसवेउत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज जिले की तीन मुख्य तहसीलों के कुल 84 गांवों से होकर गुजरेगा:सोरांव तहसील: 29 गांवफूलपुर तहसील: 24 गांवहंडिया तहसील: 31 गांव45 गांवों का अलाइनमेंट हुआ फाइनलयूपीडा (UPEIDA) द्वारा गठित कंसल्टेंट एजेंसी लगातार जमीनी मैपिंग और सर्वे का काम पूरा कर रही है। एजेंसी ने पहले चरण में 45 गांवों का प्रस्ताव जिला प्रशासन को सौंपा था।प्रशासनिक जांच के दौरान सोरांव (14 गांव), फूलपुर (16 गांव) और हंडिया (11 गांव) यानी कुल 31 गांवों में जमीन के गाटा संख्या, रकबे और भूस्वामियों के नाम में जो मामूली त्रुटियां मिली थीं, उन्हें दुरुस्त कर लिया गया है। संशोधनों के बाद प्रशासन ने इन 45 गांवों की फाइनल रिपोर्ट यूपीडा को भेज दी है।33 गांवों में सर्वे जारी, 1 महीने में पूरा होगा कामवर्तमान में द्वितीय चरण के तहत सोरांव के 6, फूलपुर के 12 और हंडिया के 12 गांवों समेत कुल 33 गांवों में सत्यापन और सर्वे का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।इन 33 गांवों की रिपोर्ट तैयार होते ही कुल 78 गांवों की प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी। इसके बाद महज 6 ग्राम पंचायतें शेष बचेंगी, जिनके लिए यूपीडा से नया प्रस्ताव आते ही काम पूरा कर लिया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे और सत्यापन की इस प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग एक से डेढ़ महीने का समय और लगेगा।जल्द शुरू होगी जमीन क्रय और बैनामे की प्रक्रियाअलाइनमेंट और गाटा सत्यापन का कार्य शत-प्रतिशत पूरा होते ही यूपीडा द्वारा प्रभावित किसानों व भूस्वामियों से जमीन खरीदने और बैनामा कराने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए सोरांव, फूलपुर और हंडिया तहसील के उपजिलाधिकारियों (SDM) और राजस्व अधिकारियों को पहले ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं।
उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को नई धार देने के लिए अटल एक्सप्रेसवे (Atal Expressway) प्रोजेक्ट पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के मार्गदर्शन में तैयार हो रहा यह फोरलेन एक्सप्रेसवे देश के तीन राज्यों को आपस में जोड़ेगा। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से न केवल राज्यों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।परियोजना की मुख्य बातें और कुल लंबाईकुल लंबाई और चौड़ाई: यह एक्सप्रेसवे 414 किलोमीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा बनाया जाएगा।लागत व बजट: इस मेगा प्रोजेक्ट पर लगभग 15,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसके लिए बजट का आवंटन पहले ही किया जा चुका है।वर्तमान स्थिति: वर्तमान में इस एक्सप्रेसवे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम चल रहा है।तीन राज्यों से कनेक्शन: यह मार्ग मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को आपस में जोड़ेगा।इटावा बनेगा उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा 'इंटरचेंज हब'अटल एक्सप्रेसवे के निर्माण के साथ ही यूपी का इटावा जिला एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम करेगा। यह राज्य का पहला ऐसा जिला बनने जा रहा है, जहां चार बड़े एक्सप्रेसवे एक साथ आपस में जुड़ेंगे।इटावा का कुदरैल क्षेत्र एक विशाल इंटरचेंज पॉइंट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पहले से ही आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा लिंक एक्सप्रेसवे को कनेक्ट करने का काम जारी है।12 घंटे का सफर अब सिर्फ 4 घंटे में!अटल एक्सप्रेसवे बनने के बाद आम जनता और यात्रियों के समय की भारी बचत होगी:रफ्तार: इस फोरलेन एक्सप्रेसवे पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगे।समय की बचत: वर्तमान में इटावा से राजस्थान के कोटा पहुंचने में सड़क मार्ग से करीब 12 घंटे का समय लगता है। एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद यह दूरी महज 4 घंटे में तय की जा सकेगी।आर्थिक विकास: एक्सप्रेसवे के दोनों ओर नए औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) स्थापित होंगे, जिससे क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं को भारी संख्या में रोजगार मिलेगा।भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू (धारा 3-ए लागू)उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की कवायद तेज हो गई है। मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गाती गांव से यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करेगा।NHAI के निर्देशों पर जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 3-ए के तहत आधिकारिक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन का लक्ष्य तय दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए जल्द से जल्द मुआवजा व अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा करना है ताकि निर्माण कार्य समय पर शुरू किया जा सके।

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