जो बीजेपी कल तक कांग्रेस की रैलियों पर 'व्यापारियों को करोड़ों के नुकसान' का हिसाब मांग रही थी, आज वही चांदनी चौक के सबसे व्यस्त बाजार में खुद सवालों के कटघरे में आ खड़ी हुई है! करवा चौथ और दिवाली की चौखट पर सजे चांदनी चौक में जब गूंजनी चाहिए थी ग्राहकों की रौनक, तब वहां निकली बीजेपी की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा। नतीजा? सड़कें जाम, ग्राहक नदारद और त्योहार के पीक सीजन में अपनी रोजी-रोटी ताकते बेबस व्यापारी। अब सवाल उठ रहा है कि जब विपक्ष प्रदर्शन करे तो 'व्यापार को घाटा', और जब खुद सत्ताधारी पार्टी करवा चौथ से ठीक एक दिन पहले एशिया के सबसे बड़े बाजार को रैली का मैदान बना दे, तो क्या तब व्यापारियों का नुकसान नहीं होता? आज बात इसी दोहरे मापदंड और चांदनी चौक के सुलगते दर्द की! भाजपा के कमल चांदनी चौक में छाए हुए नजर आए। भाजपा ने एक पद यात्रा निकाली जो कांग्रेस के खिलाफ थी और नारा था वो लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ। भाजपा का मानना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस अराजकता फैला रहे हैं देश में और एसआईआर के प्रोटेस्ट के माध्यम से एक पॉलिटिकल माइलेज लेना चाहते हैं। पर इस रैली वर्सेस रैली के बीच में कहीं चांदनी चौक थोड़ा सा फंस गया है। चांदनी चौक एक ऐसी जगह है जो दिवाली के टाइम पर जल उठती है। जो व्यापार है वह चरम स्तर पर होता है। पर आज व्यापारी थोड़े दुखी हैं। क्योंकि उनका मानना है क्योंकि उनका मानना है कि लोग जो हैं अब वो आ नहीं पा रहे हैं क्योंकि रैलियां हो रही हैं और उनके व्यापार पे इसका असर पड़ रहा है। इसे भी पढ़ें: Pawan Khera का आरोप, Jamia Millia Islamia में छात्रों का दमन कर रही BJP व्यापारियों ने व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई चांदनी चौक में करवा चौथ से एक दिन पहले BJP की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा पर एक्टिविस्ट और कुछ स्थानीय व्यापारियों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि त्योहार से पहले बाजार में राजनीतिक कार्यक्रम से कारोबार प्रभावित होने की चिंता करने वाले लोग कहां है ? राजनीतिक एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर सवाल किया कि क्या दिल्ली के सबसे व्यस्त बाजार चांदनी चौक में मंच लगाकर प्रदर्शन करने के लिए बीजेपी ने पुलिस से 10 दिन पहले इजाजत ली थी या यह बिना इजाजत हुआ। किनारी बाजार के गोटा जरी व्यापार मंडल के पूर्व महा मंत्री संजय गुप्ता ने सवाल किया कि 1 नवंबर को कांग्रेस की रामलीला मैदान में महारैली से कारोबार को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की बात कहने वाले व्यापारी नेता अब कहां हैं? लहंगे और सूट के व्यापारी राहुल शर्मा ने भी पूछा कि करवा चौथ से एक दिन पहले पदयात्रा से कारोबारियों को परेशानी नहीं हुई? सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि त्योहारों से पहले बाजारों में किसी भी राजनीतिक दल को कार्यक्रम से बचना चाहिए। इसे भी पढ़ें: RSS के किले Nagpur और Modi के गढ़ Varanasi में BJP की करार हार से सत्ता पक्ष की नींद उड़ी अभिजीत दिपके ने उठाए सवाल CJP के अभिजीत दिपके ने सवाल उठाया कि क्या BJP का मार्च किसी तय विरोध स्थल पर हो रहा है, और त्योहारों के मौसम में राजनीतिक प्रदर्शनों का व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) से जुड़े अभिजीत दिपके ने दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पदयात्रा की जगह और त्योहारों के मौसम में इस तरह के प्रदर्शनों का व्यापारियों पर पड़ने वाले असर पर सवाल उठाए हैं। एक्स पर एक पोस्ट में दिपके ने पूछा क्या यह किसी तय विरोध स्थल पर हो रहा है? और त्योहारों के दौरान व्यापार पर पड़ने वाले असर का क्या? उनकी यह टिप्पणी तब आई है, जब समाचार एजेंसी ANI ने 28 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में निकाली गई पार्टी की पदयात्रा का फुटेज साझा किया। 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' नाम का यह प्रदर्शन, 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे अभियान के जवाब में आयोजित किया गया था। व्यापार में रुकावट का मुद्दा अब BJP और विपक्षी दलों के बीच विवाद का विषय बन गया है। व्यापारियों के संगठनों ने त्योहारों की खरीदारी के सबसे व्यस्त समय के दौरान होने वाले प्रदर्शनों, ट्रैफिक पाबंदियों और सुरक्षा इंतजामों के संभावित नतीजों को लेकर चिंता जताई है।
Digital Fraud पीड़ितों के नुकसान की भरपाई करें बैंक, Supreme Court ने RBI से मांगी रिपोर्ट
'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों पर, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह RBI के KYC संशोधन निर्देशों की समीक्षा करेगा, जिन्हें 31 दिसंबर तक लागू किया जाना है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहकों के साथ हो रही धोखाधड़ी और उनके खातों में होने वाले संदिग्ध लेन-देन के बारे में नजदीकी पुलिस थानों को सूचित करें। सुप्रीम कोर्ट ने RBI से उन बैंकों की सूची मांगी है, जिन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। साथ ही, कोर्ट ने पीड़ितों को हुए नुकसान की भरपाई के उपाय करने को भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार लोगों के नुकसान की भरपाई के लिए बैंकों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी बताया कि भले ही डिजिटल अपराधों में 50 प्रतिशत की कमी आई है, फिर भी इस साल अब तक पीड़ितों को ऐसे अपराधों के कारण 800 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। इसे भी पढ़ें: केरल की वृद्ध संरक्षण पहल से जगेगी नई चेतना सुप्रीम कोर्ट ने 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े स्वतः संज्ञान (suo motu) मामले में व्हाट्सएप को भी पक्ष रखने की अनुमति दी। इस पर व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने अब तक 9,400 संदिग्ध अकाउंट्स को बैन कर दिया है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब दिल्ली पुलिस ने इस हफ्ते की शुरुआत में दो लोगों को गिरफ्तार किया। इन पर आरोप है कि वे एक ऐसा बैंक अकाउंट (म्यूल अकाउंट) चला रहे थे, जिसका इस्तेमाल 2.10 करोड़ रुपये की 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी से जुड़ी रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया था। जांच के दौरान, पुलिस ने आरोपियों—सोनू खान (36) और अर्जुन चौधरी (38)—के पास से चार मोबाइल फोन, छह डेबिट कार्ड और 10 चेकबुक बरामद कीं। इसे भी पढ़ें: ADAS और नए Z12E इंजन के साथ Maruti Fronx देगी ज्यादा माइलेज, टेस्टिंग में दिखी कार 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान, पुलिस को पता चला कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार में रजिस्टर्ड एक बैंक अकाउंट में 12 अक्टूबर को 98,592 रुपये आए थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह रकम उस मामले से जुड़ी है, जिसे 'इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस' (IFSO) यूनिट ने दर्ज किया था। यह मामला जनकपुरी के एक निवासी की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसके साथ 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के जरिए करीब 2.10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। पुलिस के अनुसार, 23 अक्टूबर को अशोक नगर में डिस्पोजेबल सामान बेचने वाली एक दुकान पर सोनू खान का पता चला। वहां से तीन मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड और चेकबुक बरामद की गईं। पूछताछ में खान ने बताया कि अर्जुन चौधरी ने ही यह दुकान खुलवाने में मदद की थी और बदले में आर्थिक सहायता देकर उसके बैंक अकाउंट्स पर अपना नियंत्रण बना लिया था। अधिकारी ने बताया, बाद में चौधरी को भी पकड़ लिया गया और उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। पुलिस का कहना है कि पैसों के लेन-देन (मनी ट्रेल) का पता लगाने और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए आगे की जांच जारी है।
लगातार बारिश से किसानों की बढ़ी धड़कन, खेतों में पककर तैयार धान की फसल पर मंडराया संकट
धान की फसल: धान की फसल, मौसम ब्रेकिंग बोकारो: पिंड्राजोरा क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में फसल पककर तैयार है, लेकिन जलजमाव के कारण कटाई में गंभीर परेशानी हो रही है।
हरियाणा में आज दिखेगा अर्नब तूफान का असर: 15 जिलों में बारिश-ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट
हरियाणा मौसम अलर्ट: हरियाणा में भी चक्रवाती तूफान अर्नब का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। गुरुवार सुबह पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद, नारनौल, यमुनानगर, पंचकूला, अंबाला, जींद, कुरुक्षेत्र और करनाल जिले के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी के बाद आसमान में काली घटाएं छाई हुई हैं। चंडीगढ़ मौसम केंद्र की चेतावनी: मौसम विज्ञान.
देश में J&K के बाद छत्तीसगढ़ में नेताओं की सुरक्षा पर उड़ रहे सबसे ज्यादा करोड़
देश के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक राज्यों में गिने जाने वाले छत्तीसगढ़ को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा और प्रशासनिक खर्च के नए आंकड़ों के अनुसार, देश में जम्मू-कश्मीर के बाद अगर किसी राज्य में नेताओं, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक हस्तियों की वीआईपी सुरक्षा पर सरकारी खजाने का सबसे बड़ा हिस्सा पानी की तरह बहाया जा रहा है, तो वह छत्तीसगढ़ है। राज्य सरकार हर साल केवल माननीयों, मंत्रियों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था, बुलेटप्रूफ गाड़ियों, एस्कॉर्ट और गार्ड्स पर औसतन 150 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च कर रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र की आड़ में सुरक्षा के नाम पर हो रहे इस बेतहाशा खर्च को लेकर अब आम जनता और प्रशासनिक गलियारों में सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या वाकई इतने बड़े बजट का सही इस्तेमाल हो रहा है या यह केवल वीआईपी कल्चर का एक बड़ा जरिया बन चुका है।#1 जम्मू-कश्मीर के बाद छत्तीसगढ़ क्यों बना नेताओं की सुरक्षा में सबसे बड़ा खर्चीला राज्य?देश के राजनीतिक मानचित्र पर छत्तीसगढ़ की स्थिति हमेशा से नक्सल हिंसा और उग्रवाद के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील रही है। साल 2013 का झीरम घाटी नक्सली हमला, जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का सफाया हो गया था, उसके बाद से ही राज्य में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और सरकार का रुख बेहद सख्त हो गया। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में वर्तमान विधायकों, पूर्व विधायकों, सांसदों, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्षों और यहां तक कि जिला स्तरीय नेताओं को भी एक्स (X), वाई (Y), वाई-प्लस (Y+), जेड (Z) और जेड-प्लस (Z+) श्रेणी की वीआईपी सुरक्षा प्रदान की गई है। इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था में हजारों सशस्त्र पुलिस बल (CAF), जिला पुलिस बल और विशेष सुरक्षा समूह (SSG) के जवान चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं, जिनकी सैलरी, भत्ते और लॉजिस्टिक्स पर हर साल करीब 150 करोड़ रुपये का विशाल बजट खर्च होता है।#1 बुलेटप्रूफ गाड़ियां, फ्यूल और एस्कॉर्ट का काफिला: सरकारी खजाने पर भारी पड़ रहा 'वीआईपी कल्चर'नेताओं की सुरक्षा केवल गार्ड्स की तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा वाहनों के काफिले और लॉजिस्टिक्स पर खर्च होता है। राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और बस्तर व सरगुजा संभाग जैसे अत्यधिक नक्सल प्रभावित इलाकों में दौरा करने वाले नेताओं के लिए विशेष रूप से बुलेटप्रूफ (Bulletproof) फॉर्च्यूनर, सफारी और जिप्सी गाड़ियों का बेड़ा इस्तेमाल किया जाता है। इन बख्तरबंद गाड़ियों का रखरखाव (Maintenance) बेहद खर्चीला होता है और सामान्य गाड़ियों की तुलना में इनमें ईंधन की खपत बहुत अधिक होती है। इसके अलावा, एस्कॉर्ट गाड़ियों का काफिला, पायलट वाहन और जवानों के आने-जाने व ठहरने का दैनिक खर्च रोजाना लाखों रुपये में पहुंच जाता है। जनहित के विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाला करदाताओं का यह पैसा हर साल नेताओं की सुरक्षा में स्वाहा हो रहा है।#1 सुरक्षा ऑडिट पर उठे सवाल: क्या वास्तव में खतरे में हैं सभी नेता या सिर्फ रुतबे की जंग?गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार, किसी भी जनप्रतिनिधि या व्यक्ति को सुरक्षा देने से पहले खुफिया एजेंसियों (IB और स्टेट इंटेलिजेंस) द्वारा थ्रेट पर्सेप्शन रिपोर्ट (Threat Perception Report) यानी खतरे के आकलन की विस्तृत समीक्षा की जाती है। लेकिन छत्तीसगढ़ में जिस पैमाने पर जिला स्तर के नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों को भारी सुरक्षा मुहैया कराई गई है, उस पर अब एक्सपर्ट्स और इंटेलिजेंस के पूर्व अधिकारी भी उंगली उठाने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि कई बार राजनीतिक दबाव और रुतबा दिखाने के लिए भी सुरक्षा श्रेणियों का आवंटन कर दिया जाता है। चुनाव खत्म होने के बाद भी कई पूर्व नेताओं से सुरक्षा वापस नहीं ली जाती, जिससे पुलिस महकमे में बल (Manpower) की भारी कमी हो जाती है और आम जनता की सुरक्षा के लिए थानों में जवानों का अकाल पड़ जाता है।#1 आम जनता की सुरक्षा राम भरोसे, थानों में जवानों की कमी और नेताओं के घर पहराछत्तीसगढ़ में नेताओं की वीआईपी सुरक्षा का सबसे नकारात्मक असर आम जनता की कानून-व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। राज्य के मैदानी और शहरी इलाकों—जैसे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई—के थानों में पुलिस बल की भारी कमी है। पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी अपराध नियंत्रण और सड़कों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन हजारों जवानों को नेताओं के बंगलों के बाहर पहरेदारी करने, उनके काफिले को रास्ता देने और व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSO) के रूप में तैनात कर दिया गया है। जनता और नागरिक संगठनों ने मांग उठाई है कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था का निष्पक्ष कैडर रिव्यू (Cadre Review) किया जाना चाहिए ताकि अनावश्यक सुरक्षा हटाकर उस बजट को राज्य की स्वास्थ्य, शिक्षा और पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण में लगाया जा सके।
उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई नकदी मिलने से हड़कंप मच गया है। नवाबगंज के बरईपुर रामनगर गांव में पुलिस ने खुदाई कर तीन ड्रम बरामद किए, जिनमें ₹500 के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं। बरामद नकदी की रकम ₹5 करोड़ से ज्यादा बताई ...
नाबालिग अध्यक्ष' वाले बयान पर मचा बवाल
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानों के तीर चलने और तीखी जुबानी जंग का दौर एक बार फिर से बेहद तेज हो गया है। इस बार राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मौजूदा उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा के बीच सीधा राजनीतिक टकराव देखने को मिला है। विवाद की मुख्य वजह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय नेतृत्व और छत्तीसगढ़ मामलों से जुड़े वरिष्ठ नेता नितिन नवीन पर भूपेश बघेल द्वारा दिया गया बेहद विवादित बयान है। पूर्व सीएम बघेल ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करते हुए सार्वजनिक तौर पर तंज कसा और भाजपा के शीर्ष नेता को 'नाबालिग अध्यक्ष' करार दे दिया। इस तंजभरे बयान के सामने आते ही सत्ताधारी भाजपा खेमे में भारी उबाल आ गया, जिसके बाद प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने मोर्चा संभालते हुए भूपेश बघेल पर करारा पलटवार किया और उन्हें पंजाब में कांग्रेस की हार व राजनीतिक नाकामी की याद दिला डाली।#1 भूपेश बघेल का हमला: कहा- 'भाजपा के नाबालिग अध्यक्ष की बात को कोई गंभीरता से नहीं लेता'पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भाजपा नेताओं के बयानों को पूरी तरह से हास्यास्पद और खारिज करने लायक बताया। राहुल गांधी और कांग्रेस पर विदेशी ताकतों के प्रभाव व अव्यवस्था फैलाने के आरोपों का जवाब देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के 'नाबालिग अध्यक्ष' जो भी कह रहे हैं, उसे देश में कोई सीरियसली (गंभीरता से) नहीं लेता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार की विफलताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वाकई देश में कोई विदेशी फंडिंग या ताकतें अशांति फैला रही हैं, तो सरकार और उसके गृहमंत्री क्या कर रहे हैं? भूपेश बघेल द्वारा इस्तेमाल किए गए 'नाबालिग' शब्द ने राजनीतिक गलियारों में एक नया बवंडर खड़ा कर दिया।#1 डिप्टी सीएम विजय शर्मा का करारा पलटवार: 'पंजाब का हश्र भूल गए क्या बघेल जी?'पूर्व मुख्यमंत्री के इस विवादित बयान पर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। विजय शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि जिस नेता को अब खुद छत्तीसगढ़ की जनता गंभीरता से नहीं ले रही है, वे दूसरों को सीख दे रहे हैं। विजय शर्मा ने भूपेश बघेल को उनके उस चुनावी दौर की याद दिलाई जब कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें पंजाब विधानसभा चुनाव का मुख्य पर्यवेक्षक बनाया था। डिप्टी सीएम ने कहा कि भूपेश बघेल जी शायद भूल रहे हैं कि पंजाब में जब वे प्रभारी बनकर गए थे, तो वहाँ कांग्रेस का क्या हश्र हुआ था? पूरी पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया था। विजय शर्मा ने आगे कहा कि नितिन नवीन भाजपा के बेहद कुशल रणनीतिकार हैं और उनकी ही बूथ-लेवल प्लानिंग के दम पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता से बेदखल हुई थी।#1 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव का अतीत और दोनों नेताओं के बीच पुरानी राजनीतिक अदावतगौरतलब है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान नितिन नवीन भाजपा के राज्य सह-प्रभारी के रूप में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत कर रहे थे। उनकी माइक्रो-मैनेजमेंट और रणनीतिक घेराबंदी के चलते भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया और तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सत्ता को उखाड़ फेंका। यही वजह है कि दोनों नेताओं और दलों के बीच राजनीतिक अदावत काफी पुरानी और गहरी मानी जाती है। जब से नितिन नवीन को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं, तब से कांग्रेस लगातार उन पर हमलावर रही है, जबकि भाजपा उनके नेतृत्व और चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड का बचाव करते हुए कांग्रेस पर लगातार हमला बोल रही है।#1 छत्तीसगढ़ में गर्माया सियासी माहौल: पक्ष और विपक्ष में जुबानी जंग जारी'नाबालिग अध्यक्ष' और 'पंजाब की हार' को लेकर शुरू हुआ यह वाकयुद्ध अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। रायपुर से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर गरमा-गर्मी का माहौल बना हुआ है। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी भूपेश बघेल के तर्कों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की विदेश और सुरक्षा नीतियों पर सवाल खड़े कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ता और मंत्री पूर्व सीएम के खिलाफ सड़कों व सोशल मीडिया पर मोर्चा खोले हुए हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग और भी अधिक तीखी हो सकती है, क्योंकि आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए दोनों ही दल एक-दूसरे पर बढ़त बनाने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते।
चक्रवाती तूफान 'अर्नब' छत्तीसगढ़ में दाखिल, बस्तर से लेकर रायपुर तक अलर्ट मोड पर प्रशासन
बंगाल की खाड़ी से उठे भयानक चक्रवाती तूफान 'अर्नब' (Cyclone Arnab) ने तटीय राज्यों में तबाही मचाने के बाद अब छत्तीसगढ़ के मैदानी और दक्षिणी इलाकों में प्रवेश कर लिया है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों से टकराने के बाद हालांकि यह तूफान कमजोर होकर अवदाब (Depression) में तब्दील हो गया है, लेकिन इसके असर से प्रदेश भर के मौसम में अचानक भारी बदलाव आया है। बस्तर संभाग समेत राज्य के 12 से अधिक जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह से हरकत में आ चुके हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रशासनिक मशीनरी को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।#1 बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिलों में तूफान का सबसे ज्यादा असर, भारी बारिश की चेतावनीमौसम विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात 'अर्नब' के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने से बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और महासमुंद जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं और लगातार हो रही बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा पैदा हो गया है। बस्तर जिले में 18 से अधिक राहत शिविर तैयार किए गए हैं और तटीय इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है। बारिश के चलते नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए बांधों और जलाशयों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।#1 आपात स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे एक्टिव कंट्रोल रूम, जारी हुए ये आपातकालीन नंबर्सआपदा प्रबंधन विभाग ने किसी भी आपात स्थिति, जलभराव या दुर्घटना की सूचना देने और सहायता प्राप्त करने के लिए राज्य और जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित कर दिए हैं जो 24 घंटे काम कर रहे हैं:राज्य स्तरीय राज्य आपदा कंट्रोल रूम (टोल फ्री नंबर): 1070रायपुर जिला नियंत्रण कक्ष: 0771-2413233बस्तर (जगदलपुर) बाढ़ नियंत्रण कक्ष: 07782-223122बालोद जिला कंट्रोल रूम: 07749-223950प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम खराब रहने के दौरान बेवजह घरों से बाहर न निकलें, कच्चे या जर्जर मकानों में जाने से बचें और जलभराव वाले स्थलों व नदी-नालों के करीब बिल्कुल न जाएं। किसी भी आपदा या मदद की जरूरत होने पर सीधे जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर्स पर संपर्क किया जा सकता है।#1 बिजली, स्वास्थ्य और रेलवे विभाग हाई अलर्ट पर, अधिकारियों की छुट्टियां रद्दतूफान 'अर्नब' के प्रभाव को देखते हुए राज्य शासन के निर्देश पर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने समीक्षा बैठक की है। अतिसंवेदनशील जिलों में अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। बिजली विभाग की विशेष टीमों को तैनात किया गया है ताकि आंधी-तूफान से पेड़ गिरने या पोल टूटने पर तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल की जा सके। इसके साथ ही, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने भी एडवायजरी जारी कर यात्रियों को स्टेशन पहुँचने और ट्रेनों के समय में बदलाव की पुष्टि करने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश और जल जनित बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाइयों का स्टॉक सुनिश्चित किया है।#1 अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील: जानिए आगे कैसा रहेगा छत्तीसगढ़ में मौसम का हालमौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ के दक्षिणी और मध्य हिस्से में रुक-रुक कर भारी से अति भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग में भी काले बादलों का डेरा जमा रहेगा और मध्यम से तेज बारिश दर्ज की जा सकती है। 30 अक्टूबर के बाद धीरे-धीरे चक्रवात का प्रभाव कम होने की उम्मीद जताई गई है। राज्य सरकार ने सभी कलेक्टर्स और एसपी को निर्देश दिया है कि संवेदनशील गांवों और बस्तियों में राहत टीमों (SDRF/NDRF) को मुस्तैद रखा जाए ताकि जन-धन की क्षति को शून्य रखा जा सके।
पटना स्नातक MLC सीट पर आ गई वोटों की पूरी डिटेल
बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) की सबसे हाई-प्रोफाइल और चर्चित मानी जाने वाली पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनावी फैसला आ चुका है। शुरुआत से ही मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के आक्रामक तेवरों और बयानों के कारण सुर्खियों में रही इस सीट पर आखिरकार जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार ने जीत का परचम लहराते हुए इतिहास रच दिया है। वोटों की गिनती पूरी होने के बाद आधिकारिक और राउंडवार आंकड़ों की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो चुकी है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी जेडीयू, मुख्य विपक्षी दल राजद (RJD), प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और कांग्रेस उम्मीदवारों के बीच था।#1 कोटा सिस्टम से तय हुई जीत: चौथे दौर के बाद नीरज कुमार ने हासिल किया निर्णायक मतों का आंकड़ापटना स्नातक सीट पर विजेता का फैसला पारंपरिक बहुमत के बजाय वरीयता मतों (Preferential Votes) की कोटा प्रणाली (Quota System) के आधार पर हुआ। कुल पड़े वैध वोटों की संख्या के आधार पर जीत के लिए आवश्यक न्यूनतम कोटा तय किया गया था। जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार ने शुरुआती दौर से ही बढ़त बनाए रखी। पहले दौर की मतगणना में नीरज कुमार को 2,149 प्रथम वरीयता के वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद के उम्मीदवार को 2,041 मत प्राप्त हुए थे। अंतिम राउंड की गिनती और एलिमिनिटरी राउंड की प्रोसेस पूरी होने के बाद नीरज कुमार ने तय न्यूनतम कोटा को सफलतापूर्वक हासिल कर जीत दर्ज की और लगातार चौथी बार एमएलसी बनने का रिकॉर्ड बनाया।#1 नीरज, दिलीप, अनुज और असदुल्लाह को मिले वोटों का पूरा गणितमतगणना केंद्र से निकलकर सामने आई अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीदवारों को मिले कुल मतों और उनकी अंतिम रैंकिंग का विवरण कुछ इस प्रकार रहा:नीरज कुमार (JDU - विजेता): प्रथम वरीयता और ट्रांसफर मतों को मिलाकर विजयी कोटा हासिल करते हुए पहले स्थान पर रहे और जीत दर्ज की।दिलीप कुमार पटेल (RJD - उपविजेता): राजद प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे। उन्होंने नीरज कुमार को कड़ी टक्कर दी लेकिन कोटे के जादुई आंकड़े से पीछे रह गए।डॉ. अनुज कुमार सिंह (जन सुराज - तीसरा स्थान): मोकामा विधायक अनंत सिंह के खुले समर्थन के बावजूद जन सुराज उम्मीदवार तीसरे स्थान पर खिसक गए।डॉ. असदुल्लाह खान (कांग्रेस - चौथा स्थान): कांग्रेस के खाते में बेहद कम वोट आए और उनके प्रत्याशी चौथे पायदान पर सिमट गए।#1 नहीं चला अनंत सिंह का 'पावर गेम': बाहुबली के दावों और हवा-हवाई वादों की खुली पोलइस चुनाव परिणाम ने मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह को सबसे बड़ा सियासी झटका दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह ने खुलेआम जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार की जमानत जब्त कराने और जन सुराज प्रत्याशी अनुज सिंह को बंपर वोटों से जिताने का दावा किया था। इस बगावत के कारण जेडीयू ने अनंत सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित भी कर दिया था। हालांकि, जब नतीजे सामने आए तो जनता ने बाहुबल और बयानबाजी के बजाय नीरज कुमार के 18 सालों के संसदीय अनुभव और विकास कार्यों पर अपनी मुहर लगाई। नतीजों के बाद अनंत सिंह ने भी हार स्वीकार करते हुए कहा कि जनता ही मालिक है और जो जनता चुनेगी वही होगा।#1 नीरज कुमार ने रचा इतिहास: 2008 से लगातार जीत की हैट्रिक के बाद चौथी बार बने MLCअपनी धमाकेदार जीत के बाद जेडीयू कार्यालय पहुंचे नीरज कुमार का कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। जीत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों और एनडीए कार्यकर्ताओं के कड़े परिश्रम को दिया। नीरज कुमार का राजनीतिक सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। साल 2002 में अपना पहला चुनाव हारने के बाद वे 2008 में पहली बार एमएलसी चुने गए थे। इसके बाद 2014, 2020 और अब 2026 में लगातार चौथी बार इस प्रतिष्ठित सीट पर कब्जा जमाकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि पटना स्नातक क्षेत्र में उनका जनाधार अटूट है।
बिहार विधान परिषद चुनाव परिणाम: कांग्रेस '1 से 0' और राजद '0 से 1
बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) की आठ सीटों पर संपन्न हुए उपचुनाव और द्विवार्षिक चुनाव के नतीजों ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। इन परिणामों ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच महाविकास गठबंधन (महागठबंधन) की अंदरूनी कड़वाहट और शक्ति-संतुलन की पोल खोलकर रख दी है। चुनाव परिणामों में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस पार्टी को लगा है, जिसकी इकलौती सीट भी हाथ से निकल गई और वह शून्य पर सिमट गई। दूसरी ओर, राजद ने भाजपा के तीन दशक पुराने गढ़ को ढहाकर 'शून्य से एक' सीट का सफर तय करते हुए अपनी खोई ताकत वापस पाई है। इस नाटकीय उलटफेर के बाद अब बिहार की राजनीति और खुद कांग्रेस के अंदरूनी खेमे में यह बड़ा सवाल कौंध रहा है कि आखिर कब तक देश की सबसे पुरानी पार्टी 'बी टीम' (B-Team) का ठप्पा अपने माथे पर लगाकर लालू प्रसाद यादव के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास (Lalu Awas) से तय होने वाले राजनीतिक फैसलों की बलि चढ़ती रहेगी।#1 दरभंगा और पटना शिक्षक सीटों के नतीजे: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का किला ढहा, राजद ने भाजपा को चटाई धूलविधान परिषद के इन नतीजों में सबसे चौंकाने वाली हार दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से देखने को मिली। यहाँ कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को करारी हार का सामना करना पड़ा। प्रशांत किशोर की नई नवेली जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj Party) समर्थित उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के इस अभेद्य किले में सेंध लगाते हुए डॉ. मदन मोहन झा को शिकस्त दी और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुलने दिया। इसके ठीक विपरीत, पटना शिक्षक सीट पर लालू यादव की राजद ने जबरदस्त राजनीतिक घेराबंदी की। राजद प्रत्याशी डॉ. संजीव कुमार ने लगातार पांच बार से जीतते आ रहे भाजपा के कद्दावर नेता नवल किशोर यादव को पटखनी देकर सीट अपने नाम कर ली। इस तरह जहां राजद शून्य से उठकर एक सीट जीतने में कामयाब रही, वहीं कांग्रेस अपनी जीती हुई सीट गंवाकर एक से सीधे शून्य पर आ गिरी।#1 सीट बंटवारे से लेकर उम्मीदवार तय करने तक: लालू आवास का एकतरफा दबाव और कांग्रेस का आत्मसमर्पणराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में कांग्रेस की इस दुर्दशा के पीछे कोई और नहीं बल्कि उसकी खुद की लाचारी और राजद के सामने घुटने टेकने की नीति है। चुनाव चाहे विधानसभा के हों, लोकसभा के हों या फिर विधान परिषद के, टिकट बंटवारे की पूरी पटकथा लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के आवास पर ही लिखी जाती है। कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को केवल सहमति की मुहर लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। क्षेत्रीय स्तर पर अपने जनाधार और समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर जब-जब कांग्रेस ने राजद की शर्तों पर समझौते किए हैं, तब-तब उसे मुंह की खानी पड़ी है। राजद अपने राजनीतिक आधार (MY समीकरण व कैडर) को मजबूत करने के लिए कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्रों का इस्तेमाल करती है, लेकिन जब कांग्रेस उम्मीदवारों को जिताने की बारी आती है, तो राजद का जमीनी वोट बैंक खामोशी से अपना रास्ता बदल लेता है।#1 'बी टीम' के ठप्पे से घुटता कांग्रेस कैडर: क्या अब राजद के राजनीतिक प्रभाव से आजाद होगी पार्टी?एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष का गुबार फूट पड़ा है। पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं का खुलकर कहना है कि जब तक पार्टी राज्य में लालू-तेजस्वी की बैसाखियों के सहारे चलेगी, तब तक उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व कभी बहाल नहीं हो सकता। जनता के बीच कांग्रेस को केवल राजद की 'सहायक' या 'बी टीम' के रूप में देखा जाने लगा है, जिससे पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक (उच्च जातियां, मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग) अब तीसरे विकल्पों जैसे जन सुराज या एनडीए की ओर शिफ्ट हो रहा है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि लालू आवास के इशारों पर फैसले लेने की इस आत्मघाती नीति ने कांग्रेस के संगठन को बिहार में पूरी तरह से पंगु बना दिया है, और यदि अब भी केंद्रीय कमान ने कड़े फैसले नहीं लिए तो पार्टी का वजूद राज्य से हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।#1 बिहार में नए राजनीतिक विकल्पों का उदय: जन सुराज की एंट्री और महागठबंधन के भविष्य पर मंडराता संकटइन चुनाव परिणामों का एक सबसे बड़ा संदेश यह भी है कि बिहार की प्रबुद्ध और शिक्षित जनता—चाहे वह शिक्षक हों या स्नातक—अब पारंपरिक गठबंधनों के बजाए नए विकल्पों को स्वीकार कर रही है। जन सुराज पार्टी द्वारा पहली ही बार में एमएलसी सीट जीतकर खाता खोलना यह साबित करता है कि जनता राजद-कांग्रेस के पुराने राजनीतिक ढर्रे से तंग आ चुकी है। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आए ये परिणाम महागठबंधन के लिए भारी चेतावनी हैं। यदि कांग्रेस ने खुद को राजद के राजनीतिक दबदबे और लालू आवास के फरमानों से मुक्त करके अपनी स्वतंत्र रणनीति नहीं बनाई, तो बिहार के आगामी सियासी महासमर में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होना तय माना जा रहा है।
ललन सिंह और संजय झा की अंदरूनी जंग में मोहरा बने अनंत सिंह
बिहार की राजनीति में सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर चल रहा वर्चस्व का बड़ा खेल अब पूरी तरह से सड़कों और चौराहों पर बेपर्दा हो चुका है। मोकामा के चर्चित बाहुबली विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को जेडीयू से 6 साल के लिए निष्कासित किए जाने और उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश के बाद राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। लेकिन इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में केवल विधान परिषद चुनाव (MLC Election) का विवाद नहीं है, बल्कि पार्टी के दो सबसे कद्दावर दिग्गजों—केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा—के बीच चल रही वर्चस्व की अंदरूनी जंग है। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा जोरों पर है कि ललन सिंह और संजय झा के बीच पावर गेम और शह-मात की इस लड़ाई में अनंत सिंह बलि का बकरा बन गए हैं।एमएलसी चुनाव में बागी तेवर और जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व के बीच बटीं गुटबंदियांबिहार विधान परिषद के पटना स्नातक चुनाव के दौरान इस अंदरूनी कलह की पहली चिंगारी भड़की थी। जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मैदान में उतरे अनंत सिंह ने जब जनसुराज प्रत्याशी का समर्थन किया, तो इसे पार्टी की अनुशासनहीनता माना गया। हालांकि, जब तक मामले को सुलझाने की बात थी, तब तक ललन सिंह ने बीच-बचाव करते हुए यह बयान दिया था कि ताली एक हाथ से नहीं बजती और पार्टी से भी कुछ चूक हुई है। लेकिन दूसरी ओर, संजय झा और पार्टी के अन्य रणनीतिकारों ने इसे सीधे तौर पर चुनौती माना। ललन सिंह द्वारा मोकामा विधायक के बचाव की कोशिशों और संजय झा खेमे द्वारा सख्त कार्रवाई के दबाव ने पार्टी के भीतर दो बड़े पावर सेंटर्स की दरार को पूरी तरह उजागर कर दिया।दिल्ली में संसद परिसर में ललन-संजय की चुप्पी ने दिए बड़े राजनीतिक संकेतअनंत सिंह और उनकी पत्नी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश जारी होने के तुरंत बाद जब दिल्ली में मीडिया ने ललन सिंह और संजय झा को एक साथ घेरा, तो वहां जो नजारा देखने को मिला उसने पूरी कहानी बयान कर दी। निष्कासन के सवाल पर ललन सिंह ने सीधे तौर पर संजय झा की ओर इशारा करते हुए कह दिया कि यह उनके अधिकार क्षेत्र का मामला है, उनसे बात कीजिए और वे गाड़ी में बैठकर निकल गए। वहीं, जब संजय झा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने भी चुप्पी साध ली और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए। केंद्रीय नेतृत्व के दो शीर्ष स्तंभों का इस तरह मीडिया के सामने जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालना और चुप्पी साधना यह साबित करता है कि जेडीयू के भीतर फैसलों को लेकर गहरी खींचतान जारी है।'छोटे सरकार' का अगला कदम: क्या नई रणनीति से पलटेंगे बिहार का सियासी समीकरण?जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखाए जाने और विधानसभा सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर को पत्र भेजे जाने के बाद 'छोटे सरकार' के नाम से मशहूर अनंत सिंह ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। मोकामा में अपना मजबूत जनाधार रखने वाले अनंत सिंह ने संकेत दिए हैं कि वे आने वाले समय में अपने समर्थकों के साथ नई राजनीतिक राह चुन सकते हैं। बिहार की राजनीति के जानकारों का मानना है कि मोकामा और आसपास के भूमिहार बहुल इलाकों में अनंत सिंह की सीधी पकड़ को नजरअंदाज करना जेडीयू के लिए भी आने वाले विधानसभा चुनावों में भारी पड़ सकता है। फिलहाल, ललन सिंह और संजय झा की इस अंदरूनी जंग से उपजे सियासी बवंडर पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हुई हैं।
यूपी में आसमान से बरसेगी आफत, तेज हवाओं और बिजली गिरने का अलर्ट
बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती मौसम तंत्र के असर से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को तेज हवाओं, गरज-चमक, वज्रपात और भारी बारिश की आशंका जताई गई है. राहत आयुक्त कार्यालय ने जिलाधिकारियों को एडवाइजरी जारी की है. गोरखपुर में आपदा नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय रहेगा और किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है.
आंखों की रोशनी पर स्क्रीन का असर, बढ़ रही ये बीमारी
मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर के बढ़ते यूज से बच्चों और युवाओं में आंखों की समस्याएं जैसे मायोपिया और ड्राई आई बढ़ रही हैं. डॉ. सुदीप्तो पाकरासी ने बताया कि स्क्रीन की रोशनी के साथ देखने का तरीका भी आंखों की सेहत पर असर डालता है.
कर्नाटक में PDS अनाज तस्करी पर बड़ी कार्रवाई, 215 गिरफ्तार
कर्नाटक सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत वितरित किए जाने वाले 17.78 लाख किलोग्राम चावल और अन्य खाद्यान्न पिछले तीन महीने में जब्त किए हैं। राशन के अनाज की कथित तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के तहत इस मामले में 215 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री रिजवान अरशद के निर्देश पर विभागीय अधिकारी एक अगस्त से राज्य भर में राशन की आपूर्ति करने वाले वाहनों की नियमित जांच कर रहे हैं और निजी गोदामों पर छापेमारी कर रहे हैं। मंत्री के कार्यालय की ओर से बृहस्पतिवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, जब्त की गई वस्तुओं में चावल, गेहूं, रागी और विभिन्न प्रकार की दालें शामिल हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि बेलगावी जिले में पीडीएस का पांच लाख किलोग्राम से अधिक अनाज जब्त किया गया, जबकि कोलार जिले में 3.5 लाख किलोग्राम अनाज बरामद हुआ। बागलकोट और विजयपुरा जिलों में भी एक-एक लाख किलोग्राम से अधिक चावल और अन्य खाद्यान्न जब्त किए गए। छापेमारी और जांच के सिलसिले में विभिन्न पुलिस थानों में कुल 238 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। अधिकारियों ने राशन के अनाज की अवैध ढुलाई में कथित तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे 156 वाहन भी जब्त किए हैं। बयान के अनुसार रसोई गैस सिलेंडरों और पेट्रोल-डीजल के अवैध भंडारण के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इस दौरान पिछले तीन महीने में 14,250 लीटर पेट्रोल और 1,492 गैस सिलेंडर जब्त किए गए। विज्ञप्ति के मुताबिक, जब्त खाद्यान्न, गैस सिलेंडर और पेट्रोल का कुल मूल्य लगभग 10 करोड़ रुपये आंका गया है। अरशद ने अधिकारियों को पीडीएस के चावल और अन्य खाद्यान्न की कथित तस्करी में शामिल नेटवर्क के खिलाफ छापेमारी जारी रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए निर्धारित खाद्यान्न को दूसरे कामों में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, राज्य में सूखे की स्थिति है और गरीब लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में उनके लिए निर्धारित चावल का व्यावसायिक इस्तेमाल करना और उससे मुनाफा कमाना अक्षम्य अपराध है। हमारी सरकार ऐसा नहीं होने देगी। मंत्री ने चावल की कीमतों में हालिया वृद्धि के बीच अवैध रूप से चावल का भंडारण करने या उसे कालाबाजारी में बेचने की कोशिश करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, यदि कोई चावल की बढ़ती कीमतों से पैदा हुई स्थिति का फायदा उठाकर अवैध रूप से चावल का भंडारण करने या उसे कालाबाजारी में बेचने की कोशिश करता है, तो विभाग उसके खिलाफ भी कार्रवाई करेगा।
Lava के स्मार्टफोन पर बंपर ऑफर, फीचर्स फोन पर भी डिस्काउंट
Lava ने फेस्टिव ऑफर्स का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत लावा के स्मार्टफोन और फीचर्स फोन पर बंपर डिस्काउंट मिलेगा. कुछ दिन में दिवाली आने वाली है और उससे पहले बहुत से लोग अपने लिए न्यू स्मार्टफोन खरीदते हैं. हर एक ब्रांड इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं.
दिवाली पर जगमग रहेगा यूपी, दिवाली-छठ पर नहीं होगी बिजली कटौती
ऊर्जा मंत्री ने झटपट पोर्टल पर नए बिजली कनेक्शन के लिए लंबित आवेदनों का जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए. उन्होंने निरस्त किए गए आवेदनों की समीक्षा कर व्यवस्था में जरूरी सुधार करने को भी कहा.
PM मोदी दो दिन के गुजरात दौरे पर, किसानों को देंगे 19 हजार करोड़ की सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30-31 अक्टूबर 2026 को गुजरात दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वो बनासकांठा और एकता नगर में 14,400 करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे. वो PM-किसान योजना की 24वीं किस्त के तहत 19,000 करोड़ रुपए किसानों को जारी करेंगे और राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह की अध्यक्षता करेंगे.
जयपुर में ट्रैफिक का जानलेवा मकड़जाल, बेलगाम अतिक्रमण और पार्किंग का संकट
राजस्थान की विश्व प्रसिद्ध विरासत और राजधानीजयपुरClick to open side panel for more information में हर दिन सड़कों पर उतरने वाले लाखों आम नागरिकों, व्यापारियों और पर्यटकों के लिए ट्रैफिक की बदहाली एक विकराल और दर्दनाक समस्या बन चुकी है। 'पिंक सिटी' की खूबसूरती और ऐतिहासिक आकर्षण पर अतिक्रमण के काले बादल और पार्किंग की घोर किल्लत ग्रहण लगा रहे हैं। शहर के व्यस्ततम चौराहों से लेकर परकोटे के पारंपरिक बाज़ारों तक में वाहनों की लंबी-लंबी कतारें, पैदल चलने वालों के लिए जगह की कमी और घंटों लगने वाले ट्रैफिक जाम ने जनता का जीना मुहाल कर दिया है। पब्लिक ओपिनियन (Public Opinion) के माध्यम से जब जयपुर की आम जनता, दुकानदारों, युवाओं और दैनिक यात्रियों से इस ज्वलंत मुद्दे पर बात की गई, तो उनका गुस्सा प्रशासन की उदासीनता और नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली पर जमकर फूटा। लोगों ने सीधे तौर पर सवाल उठाते हुए शहर को इस ट्रैफिक के मकड़जाल से मुक्ति दिलाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है।#1 जयपुर के परकोटे से लेकर वीआईपी इलाकों तक ट्रैफिक का बुरा हाल: जनता ने बयां किया अपना दर्दजयपुरClick to open side panel for more informationशहर की रीढ़ माने जाने वाले चारदीवारी क्षेत्र (परकोटा)—जैसे जौहरी बाज़ार, बापू बाज़ार, चांदपोल, और हवामहल मार्ग—में स्थिति दिन-ब-दिन बेहद विस्फोटक होती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुबह की शुरुआत होते ही सड़कों पर गाड़ियों का रेंगना शुरू हो जाता है, जो देर रात तक बदस्तूर जारी रहता है। सिर्फ ऐतिहासिक परकोटा ही नहीं, बल्कि मानसरोवर, वैशाली नगर, मालवीय नगर और टोंक रोड जैसे नए और पॉश इलाकों में भी चौराहे जाम की चपेट में हैं। स्कूल जाने वाले नन्हें बच्चे, दफ्तर समय पर पहुंचने की जद्दोजहद में लगे नौकरीपेशा लोग और आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस में फंसे मरीज हर दिन इस जाम की भारी कीमत चुका रहे हैं। जनता का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस केवल चालान काटने और कैमरों के जरिए फाइन भेजने में व्यस्त है, लेकिन जमीनी स्तर पर जाम खुलवाने के लिए चौराहों पर होमगार्ड या सिपाही तक तैनात नहीं नजर आते।#1 सड़कों और फुटपाथों पर अवैध कब्जे: अतिक्रमणकारियों के आगे लाचार दिखा नगर निगम प्रशासनपब्लिक ओपिनियन के दौरान शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और व्यापारियों ने खुलकर कहा कि जयपुर में ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी और मूल वजह सड़कों और फुटपाथों पर पसर चुका अवैध अतिक्रमण है। बाज़ारों में मुख्य सड़कों के किनारों पर ठेलों, ढाबों, अस्थायी दुकानों और रेहड़ी-पटरी वालों ने इस तरह कब्जा कर रखा है कि पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। मजबूरी में पैदल चलने वाले लोग जब मुख्य सड़क पर चलते हैं, तो हादसों का खतरा बढ़ जाता है और गाड़ियों की रफ्तार थम जाती है। दुकानदारों का आरोप है कि नगर निगम का सतर्कता दस्ता (Vigilance Team) और स्थानीय पुलिस केवल खानापूर्ति के नाम पर कभी-कभार छोटी-मोटी कार्रवाई करती है, लेकिन उनके जाते ही कुछ ही घंटों में अतिक्रमणकारी दोबारा काबिज हो जाते हैं। मिलीभगत और हफ्ता वसूली के चलते इस अवैध कब्जे पर कोई स्थायी बुलडोजर या सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।#1 स्मार्ट सिटी में पार्किंग की भारी किल्लत: नो-पार्किंग में गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर हैं वाहन चालकजयपुर को 'स्मार्ट सिटी' का दर्जा दिए जाने के बावजूद शहर में व्यवस्थित और बहुस्तरीय पार्किंग (Multilevel Parking) का भारी अभाव है। जयपुर की आबादी और वाहनों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है, उसके मुकाबले सार्वजनिक पार्किंग स्थलों का विकास बिल्कुल शून्य के बराबर रहा है। खरीदारी करने या काम के सिलसिले में बाज़ार आने वाले लोगों को अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए कई किलोमीटर तक भटकना पड़ता है। पार्किंग स्पेस न मिलने के कारण मजबूरी में लोग सड़कों के किनारों पर या नो-पार्किंग ज़ोन में वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे पहले से संकरी सड़कें और अधिक तंग हो जाती हैं। ट्रैफिक क्रेन द्वारा नो-पार्किंग से गाड़ियां उठाकर भारी-भरकम जुर्माना वसूलना तो आसान है, लेकिन नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) जनता को पर्याप्त पार्किंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।#1 जयपुर को जाम मुक्त बनाने के लिए जनता ने सरकार और प्रशासन के सामने रखीं ये बड़ी मांगेंशहर के भविष्य और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए जयपुरवासियों ने शासन-प्रशासन के सामने बेहद व्यावहारिक सुझाव और मांगें रखी हैं। आम जनता का कहना है कि सबसे पहले परकोटे और मुख्य बाज़ारों को पूरी तरह से 'नो-एनक्रोचमेंट ज़ोन' (No-Encroachment Zone) घोषित किया जाए और अवैध कब्जों को बुलडोजर चलाकर स्थायी रूप से हटाया जाए। इसके अलावा, व्यस्त इलाकों में खाली पड़ी जमीनों का अधिग्रहण कर अत्याधुनिक मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स बनाए जाएं। जनता ने यह भी मांग उठाई है कि ई-रिक्शा और सिटी बसों के लिए अलग लेन और रूट निर्धारित किए जाएं क्योंकि बिना किसी परमिट के बेतरतीब चलने वाले ई-रिक्शा भी जाम की बहुत बड़ी वजह बन चुके हैं। यदि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने समय रहते इन जमीनी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले समय में जयपुर का ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो जाएगा और पर्यटन व्यवसाय को भी भारी नुकसान पहुंचेगा।
Sai Pallavi on Ravana: रणबीर कपूर और साई पल्लवी की फिल्म 'रामायणम्' के वर्ल्ड प्रीमियर के बाद साई पल्लवी का रावण को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है. उन्होंने कहा कि रावण पूरी तरह बुरा नहीं था. उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया है
11 लाख रुपये लो और नौकरी छोड़ दो, Microsoft इंजीनियर को कंपनी ने दिया ऑफर
Microsoft Voluntary Exit Offer: वॉलंटरी एग्जिट ऑफर स्कीम (VEO) के तहत माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से कर्मचारियों को ऑफर दिया जा रहा है. इसमें तीन महीने की सैलरी के साथ रिजाइन करने की बात कही जा रही है.
बेमौसम बारिश से बहरागोड़ा में धान की फसल पर संकट
बेमौसम बारिश: बेमौसम बारिश, मौसम ब्रेकिंग (बहरागोड़ा): साइक्लोन अर्णब के प्रभाव से हो रही लगातार बारिश के चलते बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र में पककर तैयार धान की फसल पर बड़ा संकट मंडरा गया है। किसानों को भारी नुकसान की आशंका सता रही है।
फील्ड फायरिंग रेंज में चूका बम का निशाना: सीधा आ गिरा तुलसाराम के खेत में
राजस्थान के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज से सटे ग्रामीण इलाके में उस वक्त हड़कंप और दहशत का माहौल बन गया, जब युद्धाभ्यास के दौरान दागा गया एक जिंदा बम अपने तय निशाने से पूरी तरह भटक गया। निशाने से चूकते ही यह विस्फोटक सीधा पास के गांव में स्थित किसान तुलसाराम के कृषि खेत में आ गिरा। खेत की जमीन से टकराते ही इतना भीषण और जोरदार धमाका हुआ कि आसपास का कई किलोमीटर का इलाका थर्रा उठा और ग्रामीण डर के मारे अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह मिसाइल या बम खेत में गिरा, उस समय खेत के उस हिस्से में कोई मजदूर या परिवार का सदस्य मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा और दर्दनाक हादसा टल गया। हालांकि, धमाके का असर इतना जबरदस्त था कि खेत में कई फीट गहरा गड्ढा बन गया और आसपास की फसलों को नुकसान पहुंचा है।#1 फील्ड फायरिंग रेंज से दागा गया विस्फोटक भटक गया रास्ता: जानिए कैसे हुआ यह बड़ा हादसापोकरण और आसपास का सीमावर्ती रेगिस्तानी क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां भारतीय सेना और रक्षा एजेंसियां नियमित रूप से अपने तोपखानों, टैंकों और मिसाइल प्रणालियों का अभ्यास करती हैं। मिली जानकारी के अनुसार, फील्ड फायरिंग रेंज में सामान्य दिनों की तरह ही सैन्य अभ्यास और फायरिंग का दौर चल रहा था। इसी दौरान दागा गया एक भारी विस्फोटक गोला तकनीकी खामी या हवा की रफ्तार के कारण अपनी निर्धारित रेंज की सीमा को पार कर गया। फायरिंग रेंज की बाउंड्री से बाहर निकलकर यह सीधा सिविलियन एरिया यानी नागरिक आबादी के करीब बने तुलसाराम के खेत में जाकर गिरा। धमाके की गूंज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर स्थित गांवों में भी खिड़कियां और दरवाजे कांप उठे, जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।#1 किसान तुलसाराम के खेत में बना 10 फीट गहरा गड्ढा, ग्रामीणों में भारी दहशत और आक्रोशहादसे के तुरंत बाद किसान तुलसाराम और आसपास के दर्जनों ग्रामीण बदहवास हालत में मौके पर पहुंचे। वहां का नजारा देखकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए। जिस जगह पर बम गिरा था, वहां धुएं का गुबार उड़ रहा था और खेत की उपजाऊ जमीन पर लगभग 8 से 10 फीट गहरा और चौड़ा गड्ढा बन चुका था। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब फायरिंग रेंज से छूटकर कोई बम या गोला उनके रिहाइशी इलाकों या खेतों में आकर गिरा हो। इस तरह की घटनाओं से हमेशा जान-माल का खतरा बना रहता है। इस घटना से गुस्साए स्थानीय लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था और रेंज की बाउंड्री वॉल की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है और मुआवजे की मांग की है।#1 सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और सेना की टीम मौके पर पहुंची: जांच के आदेश जारीघटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस थाने और जिला प्रशासन के अधिकारियों को दी गई। खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम, प्रशासनिक अधिकारी और सेना के सुरक्षा विशेषज्ञ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे इलाके को सील (Cordon Off) कर दिया। सेना और पुलिस के तकनीकी विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर मलबे के नमूनों को एकत्रित किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह किस प्रकार का गोला या मिसाइल थी और किस तकनीकी चूक के कारण यह रिहाइशी इलाके की तरफ भटक गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने किसान तुलसाराम और ग्रामीणों को शांत कराते हुए आश्वस्त किया है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और नियमानुसार हुए नुकसान का आकलन कर मुआवजा प्रदान किया जाएगा।#1 रिहाइशी इलाकों की सुरक्षा बढ़ाने और सुरक्षा मानकों को सख्त करने की उठी मांगइस गंभीर घटना के बाद पोकरण और आसपास के सीमावर्ती गांवों के जन प्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों ने रक्षा मंत्रालय और जिला प्रशासन से फायरिंग रेंज के सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने की पुरजोर मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि रेंज के आसपास आबादी का विस्तार हो चुका है, ऐसे में अभ्यास के दौरान दिशा और दूरी का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि यह बम खेत के बजाय किसी मकान या मवेशियों के बाड़े पर गिरता, तो भारी तबाही मच सकती थी। फिलहाल सेना की ओर से भी इस मामले की आंतरिक जांच (Court of Inquiry) शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा चूकों की पुनरावृत्ति को पूरी तरह से रोका जा सके।
TATA की बड़ी तैयारी, ला रही नई 7-सीटर SUV, जल्द होगी लॉन्च
टाटा अपनी सबसे प्रीमियम इलेक्ट्रिक एसयूवी को लॉन्च कर सकती है. हम बात कर रहे हैं टाटा सफारी ईवी की, जो अगले साल की शुरुआत में लॉन्च हो सकती है. ये कंपनी की पहली 7-सीटर एसयूवी होगी, जिसका सीधा मुकाबला महिंद्रा एक्सईवी 9एस और एमजी हेक्टर टॉमाहॉक ईवी से होगी. आइए जानते हैं टाटा की अपकमिंग एसयूवी में क्या खास मिलेगा.
चौमूं में पुलिस और पोलिंग पार्टी पर पथराव: उपद्रवियों के अवैध अतिक्रमण चिन्हित
राजस्थान केजयपुरClick to open side panel for more information जिले के ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील कस्बे चौमूं में मतदान प्रक्रिया के दौरान एक सनसनीखेज और चिंताजनक घटना सामने आई है। उपद्रवियों और असामाजिक तत्वों के एक अनियंत्रित समूह ने मतदान संपन्न कराकर लौट रही पुलिस और पोलing पार्टी की गाड़ियों को निशाना बनाते हुए जमकर पथराव (Stone Pelting) कर दिया। इस अचानक हुए हिंसक हमले में कई पुलिसकर्मी और चुनावकर्मी घायल हो गए, जबकि सरकारी वाहनों के शीशे चकनाचूर हो गए। पुलिस प्रशासन और स्थानीय राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने पूरी तरह से एक्शन मोड में आते हुए पथराव करने वाले उपद्रवियों के अवैध निर्माणों और सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमणों को चिन्हित (Marking) कर लिया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने वालों और लोकतंत्र के इस महापर्व में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त बुलडोजर एक्शन (Bulldozer Action) किया जाएगा।#1 चौमूं में मतदान के दौरान अचानक बिगड़ा माहौल: उपद्रवियों ने पुलिस व पोलिंग पार्टी की गाड़ियों पर बरसाए पत्थरस्थानीय सूत्रों और पुलिस द्वारा दर्ज मामले के अनुसार, चौमूं के एक अतिसंवेदनशील मतदान केंद्र पर शांतिपूर्ण मतदान संपन्न होने के बाद जब शाम को पोलिंग पार्टियां ईवीएम (EVM) मशीनों को सुरक्षित सील करके पुलिस सुरक्षा घेरे में लौट रही थीं, तभी क्षेत्र के कुछ असमाजिक तत्वों ने पुरानी रंजिश और चुनावी गहमागहमी के चलते रास्ता रोक लिया। देखते ही देखते उपद्रवियों की भीड़ ने छतों और गलियों से पुलिस वाहनों और मतदान दल की गाड़ियों पर पथराव शुरू कर दिया। इस अचानक हुए जानलेवा हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और चुनाव कर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल, डीएसपी और आला प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े तथा हल्का बल प्रयोग कर उपद्रवियों को खदेड़ा।#1 प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई: उपद्रवियों के अवैध निर्माण और अतिक्रमण चिन्हितघटना के तुरंत बादजयपुरClick to open side panel for more information ग्रामीण पुलिस और चौमूं नगर पालिका की राजस्व टीम ने मिलकर पूरे इलाके का सघन सर्वे शुरू कर दिया। वीडियो फुटेज, सीसीटीवी (CCTV) कैमरों और ड्रोन कैमरों की मदद से पथराव में शामिल मुख्य आरोपियों, उपद्रवियों और उनके मददगारों की पहचान की गई। इसके बाद नगर पालिका और राजस्व विभाग की टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन चिन्हित अपराधियों द्वारा सरकारी जमीनों, रास्तों और नाले-नालियों पर किए गए अवैध कब्जों व बिना अनुमति बने पक्के निर्माणों पर लाल निशान (Red Markings) लगा दिए हैं। प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों और कानून का उल्लंघन करने वालों की अवैध संपत्तियों पर अब कोई रहम नहीं दिखाया जाएगा।#1 पुलिस ने दर्ज की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी: अब तक कई आरोपी हिरासत में, बुलडोजर चलाने की तैयारीचौमूं थाना पुलिस ने घटना को लेकर राजकार्य में बाधा, जानलेवा हमला, दंगा भड़काने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। देर रात से ही पुलिस की अलग-अलग टीमें दबिश देकर कई मुख्य साजिशकर्ताओं और पत्थरबाजों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही हैं। इधर, नगर पालिका प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण करने वाले उपद्रवियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। नोटिस की समयावधि पूरी होते ही चिन्हित किए गए अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर और पीला पंजा चलाए जाने की पूरी प्रशासनिक तैयारी कर ली गई है।#1 चौमूं में भारी पुलिस बल तैनात: इलाके में शांति बहाल, अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजरपथराव और उसके बाद शुरू हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पूरे चौमूं शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में स्थिति बनी हुई है। एहतियात के तौर पर संवेदनशील चौराहों और बाज़ारों में आरएसी (RAC) की बटालियन और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। जिला प्रशासन ने आम जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की भ्रामक खबर या अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर नफरत या हिंसा फैलाने वाली पोस्ट डालने वालों पर भी आईटी एक्ट (IT Act) के तहत कड़ी निगरानी रखी जा रही है, और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।
दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल पर रोक से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि हर साल आदेश जारी करने के बावजूद समस्या बनी रहती है.
विशाल चतुर्वेदी की फिल्म ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर अब भी मजबूती से टिकी हुई है. नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित इस फिल्म को रिलीज हुए 84 दिन हो चुके हैं, लेकिन यह अभी भी सिनेमाघरों में चल रही है.
Diljit के शो के लिए दिल्ली मेट्रो का बड़ा फैसला!
दिलजीत दोसांझ के ऑरा इंडिया टूर 2026 को लेकर दिल्ली में फैंस का उत्साह चरम पर है. जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होने वाले कॉन्सर्ट के लिए सुरक्षा और यातायात के खास इंतजाम किए गए हैं. दिल्ली मेट्रो रात 12 बजे तक चलेगी, जबकि ट्रैफिक पुलिस ने स्टेडियम के आसपास दोपहर 1 बजे से आधी रात तक मार्ग बदलने की चेतावनी दी है. दिलजीत ने भी फैंस से मेट्रो से आने की अपील की है.
Maharashtra विधान परिषद चुनाव: Nagpur सीट पर कांग्रेस की जीत बदलाव का संकेत, हर्षवर्धन सपकाल का बयान
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने विधान परिषद की पांच में से तीन सीट पर विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) की जीत को राजनीतिक बदलाव का संकेत बताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि नागपुर से उनके पार्टी सहयोगी अभिजीत वंजारी का दोबारा निर्वाचित होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मुंबई के पास करजत में संवाददाताओं से बातचीत में सपकाल ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि फडणवीस ने उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए मनाने और प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव डालने के लिए अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रयासों के बावजूद कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी नागपुर से दोबारा निर्वाचित हुए, जिसे आरएसएस का गढ़ माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह उनकी पार्टी की ऐतिहासिक जीत है और मतदाताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को नकार दिया है। कड़े मुकाबले में वंजारी ने नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी सीट बरकरार रखते हुए भाजपा के निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 3,271 मतों से हराया। सपकाल ने फडणवीस के एक पोस्ट को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। इस पोस्ट को बाद में हटा दिया गया था। भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के सत्तारूढ़ ‘महायुति’ में कथित मतभेद की खबरों पर सपकाल ने कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर गठबंधन के घटक दल एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं लेकिन सत्ता और पद के लिए ये दल अंततः फिर एकजुट हो जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘कौन मुख्यमंत्री बनेगा और किसे वित्त विभाग मिलेगा, यह तय करना उनका काम है। महाराष्ट्र को सत्ता के लिए उनकी आपसी खींचतान में कोई दिलचस्पी नहीं है।’’कांग्रेस नेता ने सरकार से अपने वादे पूरे करने की अपील की, जिसमें लाडकी बहिन योजना के तहत मिलने वाली मासिक सहायता राशि को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये करना और किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ करना शामिल है।
यूपीएसएसएससी (UPSSSC) द्वारा आयोजित की जा रही पीईटी परीक्षा-2026 के कारण लखनऊ के 45 परीक्षा केंद्रों पर होने वाली भारी भीड़ और संभावित ट्रैफिक जाम को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है.
सस्ते फोन से Motorola करने वाला है धमाका, मिल सकती है 7,000mAh बैटरी, 144Hz डिस्प्ले और 50MP कैमरा
मोटोरोला का नया स्मार्टफोन Motorola Edge 70 Neo भारत में जल्द लॉन्च हो सकता है। आधिकारिक लॉन्च की घोषणा का इंतजार है, लेकिन एक लीक में फोन के संभावित कलर ऑप्शन और प्रमुख स्पेसिफिकेशंस सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस फोन में 7,000mAh की बड़ी ...
करवा चौथ पर पति को प्रेमिका के साथ देख भड़की पत्नी, फिर हुई मारपीट, Video
इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि शालीमार टाउनशिप के बाहर पत्नी ने अपने पति को दूसरी महिला के साथ देखकर विवाद किया. पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लिया है. फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है और घटना की वास्तविकता की जांच जारी है.
अहम साक्ष्य जुटाने में लाचारी पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, 4 नवंबर को एसपी तलब
राजधानी रांची के चर्चित डीजे संदीप प्रामाणिक हत्याकांड (Sandeep Pramanik Murder Case) मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस अनुसंधान की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान अहम साक्ष्य और कड़ियां जुटाने में बरती गई लापरवाही पर तीखी टिप्पणी करते हुए संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को आगामी 4 नवंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का सख्त आदेश दिया है। इस हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामले में अदालत की सख्ती के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, और एक बार फिर से इस पूरे प्रकरण की जांच और कानूनी कार्रवाई पर सियासी व कानूनी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील और हाईकोर्ट की समीक्षा प्रक्रियामूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले और रांची के एक लोकप्रिय बार में डीजे संचालक के रूप में काम करने वाले संदीप प्रामाणिक की हत्या के मामले में निचली अदालत ने पूर्व में फैसला सुनाया था। निचली अदालत द्वारा कुछ आरोपियों को सजा सुनाए जाने और अन्य पहलुओं को लेकर दोषियों द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में अपील याचिका दायर की गई है। जब हाईकोर्ट की खंडपीठ इस मामले की फाइल और पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की समीक्षा कर रही थी, तब अदालत की नजर पुलिस अनुसंधान (Investigation) के दौरान छूटी महत्वपूर्ण कमियों और कमजोर साक्ष्यों पर पड़ी। अदालत का मानना है कि हत्या जैसे गंभीर मामले में साक्ष्यों का इस तरह कमजोर रहना न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।पुलिस अनुसंधान की कमियों पर अदालत का कड़ा रुख, तय तारीख पर पेशी का निर्देशसुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि इस सनसनीखेज वारदात की तह तक जाने के लिए जिस वैज्ञानिक और पुख्ता साक्ष्य संकलन की आवश्यकता थी, उसमें अनुसंधानकर्ताओं स्तर पर गंभीर चूकें की गई हैं। गवाहों के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों के बीच की कड़ियों के टूटने पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर एक पहलू की सटीक जांच जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने संबंधित एसपी को तलब किया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शुरुआती तफ्तीश के दौरान किन कारणों से महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज किया गया।न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ित परिवार की नजरें अब उच्च न्यायालय के अगले कदम परइस पूरे घटनाक्रम से एक बार फिर मृतक संदीप प्रामाणिक के परिजनों को न्याय मिलने की आस और अधिक गहरी हो गई है। परिवार और आम जनता की निगाहें अब 4 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत के समक्ष पुलिस प्रशासन को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। विधिक जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस कड़े रुख से राज्यभर की पुलिस एजेंसियों को यह कड़ा संदेश मिला है कि आपराधिक मामलों की जांच में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और अदालतें न्याय के हित में हर बारीक बिंदु की गहराई से समीक्षा करेंगी।
31 अक्टूबर को वाराणसी और कानपुर को मिलेगी सौगात, साबरमती और आनंद विहार के चलेगी सुपरफास्ट ट्रेन
31 अक्टूबर को शुरू होने वाली ट्रेनों में सेमी-हाई-स्पीड तकनीक से लैस वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस, आम यात्रियों के लिए किफायती अमृत भारत एक्सप्रेस और दो प्रमुख रूटों पर सुपरफास्ट/मेल ट्रेनें शामिल हैं.
MLC चुनाव नतीजों के बाद महायुति में बढ़ी रार! BJP ने शिंदे गुट पर लगाया आरोप
महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए एमएलसी चुनाव के परिणामों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. 5 सीटों पर हुए इन चुनावों में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को केवल 2 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. इस चुनावी परिणाम के बाद महायुति के भीतर अंदरूनी कलह और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
5 लाख लेकर मेरे रिसॉर्ट में मत आना, बर्गर भी नहीं मिलेगा... बोले ट्रंप तो बजी तालियां
मिड टर्म चुनावों के लिए प्रचार कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ही मतदाताओं को चिढ़ाया है. ट्रंप ने अपने सुपर लग्जरी रिजॉर्ट का उदाहरण देते हुए कहा है कि 5000 डॉलर लेकर मेरे रिजॉर्ट पर मत आना, पता नहीं इतने पैसे में बर्गर भी मिल पाएगा या नहीं. ट्रंप ने नगद ट्रांसफर के रूप में अमेरिकियों को 5000 डॉलर देने का वादा किया है.
'सुबह एक चम्मच घी और गरम पानी' स्वामी रामदेव ने दिए हेल्थ टिप्स
HealthWealth Summit 2026: इंडिया टुडे के समिट में योग गुरु स्वामी रामदेव ने अपनी फिटनेस और लाइफस्टाइल के कई दिलचस्प राज खोले. उन्होंने बताया कि वे पिछले 25 सालों से सुबह का नाश्ता नहीं करते और दिन में सिर्फ एक बार मुख्य भोजन लेते हैं. साथ ही उन्होंने परफेक्ट डाइजेशन और बीमारियों से दूर रहने के लिए अपने डेली रूटीन के कई अचूक नुस्खे साझा किए.
यूपी में दिखा अर्नब चक्रवात का असर, वाराणसी और प्रयागराज में हो रही बारिश
अर्नब चक्रवात: बंगाल की खाड़ी से सक्रिय नये चक्रवात अर्नब का असर यूपी में दिखने लगा है. गुरुवार की सुबह से कई जिलों में बारिश शुरू हो गई. वाराणसी, प्रयागराज, सोनभद्र समेत कई जिलों में इसका असर देखने को मिल रहा है. जहां वाराणसी, प्रयागराज और सोनभद्र में हल्की बारिश हुई और वहीं तेज हवाएं भी चल रही हैं. यूपी.
Andaman Nicobar में 5.1 तीव्रता का भूकंप, जान-माल के नुकसान की खबर नहीं
USGS के अनुसार, गुरुवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बैम्बू फ्लैट से 218 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपश्चिम में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। हालांकि, अभी तक किसी तरह के नुकसान या जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं मिली है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब हाल के महीनों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भूकंपीय गतिविधियां देखी गई हैं; इससे पहले, नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने 2 फरवरी 2026 को तड़के करीब 3:30 बजे इस क्षेत्र में 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया था। इसे भी पढ़ें: Indo-Pacific में बदलती चुनौतियों पर IAF की नजर, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह बोले- दूर तक मारक क्षमता जरूरी चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का भूकंप आया चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के अनुसार, पिछले हफ्ते चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का भूकंप आया। स्थानीय समयानुसार रात लगभग 10:33 बजे आए इस भूकंप से नागकू शहर के बाकेन काउंटी में किसी के हताहत होने या नुकसान की कोई तत्काल खबर नहीं मिली है। भूकंप का केंद्र 32.40 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 93.79 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' की रिपोर्ट के अनुसार, यह भूकंप जमीन से 10 किमी की गहराई पर आया था। तिब्बती पठार को शक्तिशाली भूकंपों के प्रति संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यह उस जगह पर स्थित है जहां यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं और अक्सर बहुत तेज ताकत के साथ टकराती हैं। इसे भी पढ़ें: Delhi के Rohini में वायुसेना अधिकारी के मकान का ताला तोड़कर लाखों के जेवर चोरी उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया इस महीने की शुरुआत में, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में रिक्टर पैमाने पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे घबराए लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी नुकसान की कोई खबर नहीं है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, यह भूकंप रात 8:07 बजे आया। इसका केंद्र उत्तरकाशी से दो किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में, जमीन की सतह से 11 किलोमीटर नीचे था। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी नुकसान की कोई सूचना नहीं है। इससे कुछ दिन पहले, 6 अक्टूबर को चमोली जिले में रिक्टर पैमाने पर 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप निगरानी और अनुसंधान केंद्र के अनुसार, इस हफ्ते की शुरुआत में रविवार को नेपाल के बैतड़ी जिले में 4.2 तीव्रता का एक और भूकंप आया। अनुसंधान केंद्र ने बताया कि रविवार दोपहर को आए इस भूकंप का केंद्र नेपाल-भारत सीमा के पास सुदूर पश्चिम प्रांत के बैतड़ी जिले के दिलासैनी इलाके में था। इसके झटके बैतड़ी और दार्चुला जिलों के आसपास के इलाकों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अभी तक भूकंप से किसी तरह के भौतिक नुकसान की कोई तत्काल खबर नहीं है। नेपाल, जहाँ हर साल कई भूकंप आते हैं, सबसे सक्रिय टेक्टोनिक ज़ोन (सिस्मिक ज़ोन IV और V) में से एक में स्थित है, जिससे यह हिमालयी देश भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाता है।
पिकअप में लदी शराब बेतिया की तरफ ले जाई जा रही थी. हालांकि, शराब कहां से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था, इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.
एक्ट्रेस ने दारू पीकर शूट किए इंटीमेट सीन, बॉयफ्रेंड ने लगाई फटकार
नायरा बनर्जी टीवी इंडस्ट्री की बोल्ड हसीनाओं में शुमार हैं. वो छोटे पर्दे के अलावा वर्टिकल्स, ओटीटी पर भी काम करती हैं. उन्होंने इंटीमेसी को लेकर बात की.
आज मंथली ₹5000 जमा, 20 साल बाद मिलेगी ₹63000 की पेंशन, जानिए कैसे
नेशनल पेंशन स्कीम के तहत हर महीने 5000 रुपये का निवेश करके आप 20 साल बाद हर महीने 63000 रुपये की जयादा की पेंशन मिल सकती है. आइए जानते हैं इसका पूरा कैलकुलेशन...
‘त्योहारों पर रोजी-रोटी पर लात न मारें’, INDIA ब्लॉक की रैली का विरोध
दिल्ली के सदर बाजार के व्यापारियों ने इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर को प्रस्तावित रामलीला मैदान रैली को त्योहारी सीजन तक टालने की अपील की है. सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा की अगुवाई में व्यापारियों ने पोस्टर लेकर राहुल गांधी से रैली स्थगित करने को कहा.
स्कूलों को धमकी मामले में एक्शन, फर्जी ईमेल बेचने वाला गिरफ्तार
यूपी ATS ने कानपुर से 24 वर्षीय अंकित शंखवार को फर्जी ईमेल आईडी बनाकर बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है. ATS के मुताबिक, आरोपी के लैपटॉप में करीब पांच लाख ईमेल आईडी का डेटा मिला है. इनमें नोएडा, दिल्ली-NCR और गुरुग्राम के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ईमेल से जुड़ी आईडी भी शामिल हैं.
90 के दशक में माधुरी दीक्षित का यह गाना हर घर में गूंजता था. हरी साड़ी में उनका देसी और मराठी लुक, साथ में अलका याग्निक की सुरीली आवाज, इस गीत को उस दौर के सबसे यादगार गानों में शामिल कर गया.
Delhi के सभी जिलों में भारी बारिश की आशंका, IMD ने जारी किया Red Alert
सोमवार को दिल्ली में भारी बारिश और आंधी-तूफान देखने को मिला। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राष्ट्रीय राजधानी के सभी 11 जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया और पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी। मौसम के इतने खराब रहने के बावजूद, दिल्ली हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन सामान्य रहा। एक 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' (पश्चिमी विक्षोभ) के कारण उत्तर भारत के मौसम पर असर पड़ा, जिससे इस क्षेत्र के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और बारिश हुई। IMD ने बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने और भारी बारिश की चेतावनी दी थी, वहीं इस बारिश से हाल ही में चल रही गर्मी से कुछ राहत मिली। इसे भी पढ़ें: ठीक हो जाओ, फिर लड़ना सिखाऊंगा...Captain Smit Machhar के घाव देखने के बाद बोले UAE के राष्ट्रपति IMD के रेड अलर्ट में दिल्ली के सभी 11 जिले शामिल थे। सुबह 9 बजे तक यहाँ आंधी-तूफान, बिजली कड़कने, 60 kmph तक की तेज हवाओं और 15 mm प्रति घंटे से ज्यादा भारी बारिश का अनुमान जताया गया था। हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम, रोहतक और सोनीपत के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के नौ जिलों के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था। इन इलाकों में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने, 40-60 kmph की तेज हवाओं और मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस बारिश का असर सड़क यातायात पर पड़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या होने की आशंका रहती है। भारी बारिश के कारण राजधानी के कई इलाकों में जनजीवन और आवागमन प्रभावित हुआ। करोल बाग में झंडेवालान मंदिर के पास की सड़कों पर पानी भर गया, जबकि कई जगहों पर पेड़ उखड़ गए और जलभराव के कारण लोगों को और भी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। IMD ने लोगों को आगाह किया था कि ट्रैफिक में देरी हो सकती है, सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है, और सड़कों तथा निचले इलाकों में पानी जमा हो सकता है। इसे भी पढ़ें: Kolkata Police जांच: पूजा पंडाल में बारिश से बचने के लिए निकास द्वार पर जुटी महिलाओं की भीड़ से मची थी भगदड़ निवासियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक की स्थिति देख लें, आधिकारिक ट्रैफिक सलाह का पालन करें और ऐसे रास्तों से बचें जहाँ जलभराव की संभावना हो। बारिश ने हाल की गर्मी से कुछ राहत दी है। आसमान में बादल छाए रहने और बारिश होने से पूरे इलाके में तापमान लगभग 1-2 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। हालांकि, IMD के अनुसार, दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक दिन का तापमान 31 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है।
UP में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन के नियम सख्त, इस तरह के लोगों को नहीं मिलेगी नौकरी
UP Govt Jobs Character Verification Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित बनाने के लिए चरित्र सत्यापन (Character Verification) के नियमों में बड़ा और सख्त बदलाव ...
ब्रह्मोस मिसाइल होगी और घातक... रेंज बढ़कर दोगुनी हो जाएगी
DRDO ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 450 किलोमीटर से बढ़ाकर 800 किलोमीटर करने पर काम कर रहा है. नए रैमजेट इंजन के साथ 2027 में टेस्ट किया जाएगा. नौसेना के जहाजों में कोई बदलाव नहीं होगा. एक्सपोर्ट के लिए 290 किमी वर्जन जारी होगा.
ब्रिटिश रिपोर्ट का दावा- पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 14.6% से घटकर 1.7% हुई
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की आबादी में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का एक बड़ा विषय बन चुका है. एक हालिया ब्रिटिश रिपोर्ट के अनुसार, 1941 में वर्तमान पश्चिमी पाकिस्तान के क्षेत्र में हिंदुओं की कुल जनसंख्या 14.6 प्रतिशत थी, जो अब भारी कमी के साथ घटकर मात्र 1.7 प्रतिशत रह गई है. इस रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है और ब्रिटेन की संसद में भी इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की गई है.
गजब के चोर! सड़क किनारे खड़ा पूरा ट्रक मिनटों में गायब, Video
गुजरात के सूरत में सड़क किनारे खड़े ट्रक को चुराने वाले इंटर स्टेट गैंग को पुलिस ने पकड़ा है. सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने चार दिन की जांच के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया. यह गैंग दिन में रेकी करता था. रात में ट्रक चोरी करता था और गैस कटर से काटकर पुर्जे कबाड़ में बेच देता था. पुलिस ने 15.35 लाख रुपये का माल भी बरामद किया है.
जयंत के इलाके में BJP सुपरहिट, MLC चुनाव में कौन सहयोगी आया कितना काम?
आरएलडी के प्रमुख जयंत चौधरी के गढ़ पश्चिमी यूपी में एमएलसी चुनाव में बीजेपी का स्ट्राइक रेट सुपरहिट रहा, जहां पार्टी ने 5 में से 4 सीटों पर कब्जा जमाया. वहीं, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में पार्टी के सहयोगी दल पूरी तरह बेअसर साबित हुए और बीजेपी को भारी नुकसान उठाना पड़ा.
अगर आप भी कम खर्च और कम मेहनत में बालों को हेल्दी और लंबा बनाना चाहते हैं तो कुछ देसी तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है. आज हम आपको ऐसे ही 3 तेलों के बारे में बताने जा रहे हैं.
क्या गर्भवती महिलाओं को करवाचौथ का व्रत रखना चाहिए? जानिए प्रेमानंद महाराज के विचार
देशभर में 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा. ऐसे में गर्भवती महिलाओं के मन में सवाल आता है कि क्या उन्हें ये व्रत रखना चाहिए. आइए जानते हैं इस पर प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा...
मुंबई इंडियंस ने लिया बड़ा फैसला, मलिंगा समेत इन कोचों से तोड़ा नाता
आईपीएल 2027 से पहले मुंबई इंडियंस ने कोचिंग स्टाफ में बड़ा बदलाव किया है. लसिथ मलिंगा, पारस म्हाम्ब्रे और कार्ल हॉपकिंसन अब टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा नहीं होंगे.
सुहाग के जोड़े के साथ खूब जंचेंगे झुमके वाले कंगन, ऐसे करें स्टाइल
Karwa Chauth Styling Tips: अगर आप भी आज करवा चौथ पर सबसे सुंदर और स्टाइलिश दिखना चाहती हैं तो सोलह श्रृंगार के दौरान कांच की रंग-बिरंगी चूड़ियों के साथ झुमके वाले कंगन जरूर पहनें. ये आजकल काफी ट्रेंड में हैं. ये साड़ी, लहंगा और सूट हर किसी के साथ खूब जचते हैं.
चांद के नाम पर बच्चों के नाम, यहां देखें लिस्ट
यहां हम आपके लिए चांद के नाम पर कुछ यूनिक नामों की लिस्ट लेकर आए हैं. आइए एक नजर डालते हैं इनपर-
पति, पत्नी और जिम ट्रेनर... गाजियाबाद का दहला देने वाला CCTV
Ghaziabad Gym Trainer Case: गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में प्रेम संबंधों के चलते दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. जिम ट्रेनर ने घर में घुसकर महिला के पति पर चाकू से ताबड़तोड़ कई वार किए. इस मामले में पुलिस ने आरोपी जिम ट्रेनर और महिला मित्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ने का वीडियो एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है बांग्लादेश एयरफोर्स के पूर्व अधिकारी केएम तहसीफ सूरी की मौत। 28 वर्षीय सूरी का शव 28 अक्टूबर को ढाका की तुराग नदी में मिला। उनके परिवार ने हत्या का आरोप […] यह लेख शेख हसीना के भागने का वीडियो साझा करने वाले पूर्व एयरफोर्स अफसर की मौत, परिवार ने लगाया हत्या का आरोप सर्वप्रथम tfipost.in पर प्रकाशित हुआ है
मॉक संसद नहीं अब महाभियोग, खरगे के घर आयोजन का बदला एजेंडा- 4.30 घंटे, 30 स्पीकर
जन महाभियोग की शुरुआत राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे और समापन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी करेंगे. इस जन महाभियोग में कुल 19 पार्टियां के नेता बोलेंगे जिन्हें 5 -5 मिनट का वक्त निर्धारित किया गया है. मगर समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस को 10-10 मिनट का वक्त मिलेगा.
करवा चौथ पर ‘रामायण’ का बड़ा धमाका! जुड़ी जोड़ी गाना रिलीज
रणबीर कपूर और साई पल्लवी की फिल्म ‘रामायण’ का नया गाना ‘जुड़ी जोड़ी’ करवा चौथ पर रिलीज हो गया है. एआर रहमान के संगीत और कुमार विश्वास के बोल से सजे इस गाने में राम-सीता के प्रेम की झलक है. जानिए गाने की खास बातें.
महोबा में महिला की नसबंदी फेल, तीसरे बच्चे को दिया जन्म, सरकारी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले की कुलपहाड़ तहसील में नसबंदी फेल होने का मामला सामने आया है. परिजनों का आरोप है कि जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही के कारण नसबंदी सफल नहीं हुई.
बलोचिस्तान में मिलिट्री कैंप पर अटैक, 18 पाकिस्तानी सैनिक मार गिराने का दावा
बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने बलोचिस्तान में फ्रंटियर कोर के एक कैंप पर हमले की जिम्मेदारी ली है. संगठन का दावा है कि इस हमले में 18 पाकिस्तानी जवान मारे गए और कई घायल हुए. हमले में BLF की नई महिला यूनिट करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन और क़ुरबान यूनिट शामिल थीं.
CM सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव बन सकते हैं IAS संजय कुमार सिंह, बिहार वापसी की प्रक्रिया शुरू
1997 बैच के IAS अधिकारी संजय कुमार सिंह की बिहार वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है. केंद्र ने उनकी विजिलेंस रिपोर्ट मांगी है. चर्चा है कि बिहार लौटने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का प्रधान सचिव बनाया जा सकता है, हालांकि अभी आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है.
एक लाख मेजबान को, ₹50 हजार मेहमान को; शादी की दावत पर कर्नाटक के गांवों का सख्त फरमान
कर्नाटक के कई गांवों ने शादी के बाद होने वाली बड़ी नॉन-वेज दावत बीगर ऊटा पर बैन लगा दिया है। शिकारीपुरा तालुक के गुडवी गांव में गांववालों ने फैसला किया है कि दावत कराने वाले परिवार पर 1 लाख रुपये और इसमें शामिल होने वाले लोगों पर 50000 रुपये का जुर्माना लगेगा।
Rajasthan में 12 लाख रुपये लेकर दूसरे की जगह भर्ती परीक्षा देने वाला कनिष्ठ सहायक गिरफ्तार
राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 में 12 लाख रुपये लेकर दूसरे स्थान पर परीक्षा देने के आरोप में एक सरकारी कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विशेष आपरेशन समूह) विशाल बंसल ने बताया कि आरोपी वीरमा राम बिश्नोई (45) सांचौर का रहने वाला है। उसने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने बताया कि जालोर जिले के जसवंतपुरा उपखंड कार्यालय में कनिष्ठ सहायक वीरमाराम अभ्यर्थी भारमल राम की जगह कथित तौर पर परीक्षा में बैठा था। बाद में भारमल राम को शारीरिक शिक्षक के रूप में सरकारी नौकरी मिल गई। बंसल ने बताया कि यह परीक्षा राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा 25 दिसंबर, 2022 को आयोजित की गई थी। उन्होंने बताया कि जांच में यह भी सामने आया है कि भारमल राम ने चयन प्रक्रिया के दौरान सिहोर स्थित श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री का इस्तेमाल किया था। एसओजी ने इस फर्जी डिग्री गिरोह के सिलसिले में विश्वविद्यालय के कुलपति समेत तीन लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि वीरमाराम 2004 में उच्च माध्यमिक परीक्षा में भी फर्जी अभ्यर्थी के तौर पर शामिल हुआ था, जिसके लिए जालोर जिले में एक मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
बस्तर में बाढ़ और बेमौसम बारिश से धान की फसल पर संकट
बस्तर में बाढ़ और बेमौसम बारिश: बस्तर में बाढ़ और बेमौसम बारिश, मौसम ब्रेकिंग (बस्तर): इंद्रावती नदी की बाढ़ और चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश ने बस्तर के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धान की खड़ी फसल को हुए भारी नुकसान और मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने 6 नवंबर को जिला कलेक्ट्रेट का घेराव करने का ऐलान किया है।
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी को लेकर योगी सरकार ने चरित्र सत्यापन के नियमों को सख्त करने का फैसला किया है। योगी सरकार के नए आदेश के मुताबिक, सत्ता परिवर्तन के नाम पर हिंसक गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी से वंचित किया जा सकता है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ‘व्यवस्था परिवर्तन’ और ‘सत्ता परिवर्तन’ जैसे नारों को लेकर सियासी टकराव तेज है। हालांकि, योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी अभ्यर्थी की राजनीतिक विचारधारा मात्र के आधार पर उसे नौकरी के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। हम आपको बता दें कि योगी सरकार के आदेश में राजनीतिक विचारों और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है। किसी अभ्यर्थी के खिलाफ केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने को सरकारी नौकरी से वंचित करने का स्वतः आधार नहीं बनाया जाएगा। अधिकारियों को मामले की परिस्थितियों, आरोपों की प्रकृति और संबंधित अभ्यर्थी की वास्तविक भूमिका का आकलन करना होगा। इसका सीधा अर्थ है कि सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन अब केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि अभ्यर्थी के आचरण और संबंधित मामले की परिस्थितियों की जांच से जुड़ा विषय होगा। हालांकि, अंतिम निर्णय निर्धारित नियमों और मामले के तथ्यों के आधार पर ही लिया जाएगा। इसे भी पढ़ें: Mission 2027 से पहले UP BJP की चुनावी रणनीति तय करेंगे Amit Shah, सीट शेयरिंग पर मंथन देखा जाये तो उत्तर प्रदेश में यह फैसला ऐसे समय आया है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के जरिए मतदाता सूचियों के संशोधन को लेकर भाजपा सरकार और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के अन्य दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग से जवाबदेही तय करने की मांग की है। 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। अब विपक्षी गठबंधन एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली करने जा रहा है। इस रैली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कार्रवाई की मांग उठाए जाने की बात कही गई है। इस तरह, एक ओर विपक्ष मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर केंद्र और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती के लिए चरित्र सत्यापन के नियमों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि संबंधित अधिकारी नए निर्देशों को किस तरह लागू करते हैं और अभ्यर्थियों के मामलों में परिस्थितियों के आधार पर किस प्रकार निर्णय लेते हैं। फिलहाल तो यह मामला राजनीतिक रूप से तूल पकड़ चुका है। दूसरी ओर, योगी सरकार के इस फैसले पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। सपा प्रवक्ता उदयवीर ने नए आदेश की तुलना अंग्रेजों के शासनकाल की व्यवस्था से करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में विरोध-प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है और सरकारें बदलने का फैसला चुनावों के जरिए होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का रवैया डर पैदा करने वाला है। वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में फैसला करने का अधिकार सरकार को है या अदालतों को? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार Gen-Z के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर चिंतित है। इस तरह, जहां सरकार का आदेश हिंसक गतिविधियों और राजनीतिक विचारधारा के बीच अंतर स्पष्ट करता है, वहीं विपक्ष इसे विरोध की आवाज पर अंकुश लगाने की आशंका से जोड़कर देख रहा है।
नवादा में अर्नब चक्रवात का असर, बादल और बूंदाबांदी से बदला मौसम
अर्नब चक्रवात: अर्नब चक्रवात, मौसम ब्रेकिंग (नवादा): बंगाल की खाड़ी से उठे गंभीर चक्रवाती तूफान अर्नब के अवशेषों के प्रभाव से नवादा जिले में मौसम का मिजाज बदल गया है। यहाँ बादलों की आवाजाही के बीच हल्की से मध्यम बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है।
₹8 हजार से भी सस्ता 32 इंच का TV, Flipkart पर मिल रही डील
दिवाली सेल में अगर आप कम बजट में नया टीवी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो Flipkart पर मिल रही इस डील पर नजर डाल सकते हैं. Billion के 32 इंच वाले LED TV की कीमत ₹8 हजार से भी कम है. जानिए इसकी कीमत, डिस्प्ले, साउंड और कनेक्टिविटी फीचर्स.
कौन हैं सपा नेता महेंद्र कुमार? अब खुद एफआईआर के शिकंजे में फंसे
उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है—सपा नेता महेंद्र कुमार। एक समय ऐसा था जब पुलिस महकमे में महेंद्र कुमार का जबरदस्त दबदबा हुआ करता था और खाकी वर्दी में उनका रोब-दाब हर तरफ दिखाई देता था। वर्दी में रहते हुए कानून का शिकंजा कसने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी महेंद्र कुमार आज खुद गंभीर आरोपों में घिर गए हैं और उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद पुलिसिया जांच का शिकंजा कसता जा रहा है। प्रशासनिक नौकरी छोड़कर समाजवादी पार्टी (SP) का दामन थामने वाले महेंद्र कुमार के खिलाफ हुई इस कानूनी कार्रवाई ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, वहीं लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर एक दबंग और रसूखदार छवि वाले पूर्व पुलिस अधिकारी इस स्थिति में कैसे पहुंचे।खाकी से खादी तक का सफर: पुलिस महकमे में दबदबा और महेंद्र कुमार का राजनीतिक उभारमहेंद्र कुमार का अतीत प्रशासनिक और खाकी वर्दी के दबदबे से भरा रहा है। अपने सेवाकाल के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में वे एक सख्त और प्रभावशाली अधिकारी के रूप में पहचाने जाते थे। कई महत्वपूर्ण जिलों में तैनात रहने के कारण उनका अधिकारियों और प्रशासनिक गलियारों में खासा असर माना जाता था। सेवानिवृत्ति अथवा वीआरएस (VRS) के बाद उन्होंने अपनी दूसरी पारी के रूप में राजनीति को चुना और समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। सपा में शामिल होने के बाद अपनी पुरानी प्रशासनिक पकड़ और क्षेत्र में मजबूत जनाधार के बल पर उन्होंने बहुत ही कम समय में संगठन के भीतर अच्छी पैठ बना ली। उनके खाकी से खादी तक के इस सफर ने उन्हें स्थानीय राजनीति में एक बड़ा चेहरा बना दिया था।किस मामले में दर्ज हुई एफआईआर? जानें कानून के शिकंजे में कसने की मुख्य वजहहाल ही में दर्ज हुई एफआईआर के बाद सपा नेता महेंद्र कुमार की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उनके खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद, राजनीतिक रसूख और पुराने प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए किसी विवादित मामले में हस्तक्षेप किया अथवा कानून-व्यवस्था को चुनौती दी। शिकायकर्ता की तहरीर पर स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज कर लिया है और कानूनी जांच शुरू कर दी है। एक समय में दूसरों पर एफआईआर दर्ज करने वाले महेंद्र कुमार का खुद आरोपी के कटघरे में खड़े होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।एफआईआर पर सियासत तेज: सपा का आरोप तो सत्ता पक्ष का कड़ा रुखमहेंद्र कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के स्थानीय और प्रांतीय नेताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक द्वेष भावना से काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। सपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष की आवाज को दबाने और पार्टी के जनाधार वाले नेताओं को हतोत्साहित करने के लिए पुलिस का गलत इस्तेमाल करके झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे कोई पूर्व अधिकारी हो या किसी राजनीतिक दल का नेता। यदि किसी ने कानून का उल्लंघन किया है तो उस पर निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई होना तय है।पुलिस की आगे की कार्रवाई और महेंद्र कुमार के पास क्या हैं कानूनी विकल्प?मामला दर्ज होने के बाद स्थानीय पुलिस अब साक्ष्य जुटाने और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जुट गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई (जैसे बयान दर्ज करना या गिरफ्तारी) की जाएगी। दूसरी ओर, सपा नेता महेंद्र कुमार और उनकी लीगल टीम कोर्ट से अग्रिम जमानत (Anticipated Bail) पाने या एफआईआर को रद्द (Quash) कराने के लिए कानूनी विकल्प खंगाल रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और महेंद्र कुमार इस कानूनी व राजनीतिक संकट से खुद को कैसे उबार पाते हैं।
हाथों में मेहंदी और छलनी, दुल्हन की तरह सज-धजकर अस्पताल में बैठीं नर्सें
देशभर में जहां एक ओर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए करवा चौथ का पवित्र निर्जला व्रत रख रही हैं और शाम को सज-धजकर चाँद के दीदार का इंतजार कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अपनी लंबित मांगों, बकाया वेतन और प्रमोशन की सुस्त रफ्तार को लेकर स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारियों ने विरोध का एक ऐसा अनूठा और हैरान करने वाला तरीका अपनाया कि देखने वाले भी दंग रह गए। हाथों में मेहंदी रचाए, सुहागिनों की तरह सोलह शृंगार किए और हाथ में छलनी व पूजा की थाली थामे महिला नर्सों ने अस्पताल परिसर के बाहर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। करवा चौथ के पावन पर्व पर पतियों के बजाय सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ अनोखा रोष प्रदर्शन करते हुए इन महिला कर्मियों का यह रूप अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है और हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है।करवा चौथ के दिन क्यों सड़कों पर उतरीं नर्से? जानिए क्या है उनकी मुख्य मांगें और नाराजगी की वजहएक तरफ जहां परिवार के साथ खुशियां मनाने का दिन होता है, वहीं इन महिला स्वास्थ्य कर्मियों को अपनी हक की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों और अस्पतालों के बाहर बैठना पड़ा। प्रदर्शन कर रही महिला नर्सों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से अपनी जायज मांगों को लेकर प्रशासन के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उनकी प्रमुख मांगों में समय पर वेतन भुगतान, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, जोखिम भत्ता (Risk Allowance) देना और नर्सिंग कैडर में लंबे समय से लंबित पड़े प्रमोशन शामिल हैं। नर्सों का कहना है कि सरकार और विभाग बार-बार आश्वासन देकर सिर्फ समय बर्बाद कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति और मानसिक चैन दोनों तबाह हो चुके हैं। मजबूरी में उन्हें अपने सबसे बड़े त्योहार के दिन भी धरने पर बैठकर विरोध जताना पड़ रहा है।दुल्हन की तरह सजकर सांकेतिक विरोध: छलनी और मेहंदी के जरिए सरकार को दिया कड़ा संदेशप्रदर्शन के दौरान का नजारा बेहद भावुक और आंखें खोल देने वाला था। हाथों में सुंदर मेहंदी के डिजाइन, लाल-गुलाबी साड़ियां और सुहाग के प्रतीक चिन्हों से सजी इन नर्सों ने हाथ में करवा चौथ की छलनी और पूजा की थाली पकड़ रखी थी। मीडिया से बात करते हुए महिला कर्मियों ने कहा कि वे भी अपने घर पर अपने पति के साथ इस पर्व को उल्लाس के साथ मनाना चाहती थीं, लेकिन उनकी बेकद्री और सरकारी तंत्र की उदासीनता ने उन्हें इस स्थिति में ला खड़ा किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह वे छलनी से चांद का दीदार कर अपने सुहाग की लंबी उम्र मांगती हैं, उसी तरह वे इस प्रदर्शन के जरिए सोई हुई प्रशासनिक व्यवस्था को जगाना चाहती हैं ताकि उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके।अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा असर, मरीजों और तीमारदारों को उठानी पड़ी भारी परेशानीनर्सों के इस अचानक और उग्र प्रदर्शन के कारण सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था पर भी गहरा असर देखने को मिला। ओपीडी (OPD) से लेकर वार्डों तक में नर्सों की अनुपस्थिति के चलते मरीजों को अपने इलाज और दवाइयों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने आपातकालीन सेवाओं (Emergency Services) को पूरी तरह बाधित न करने की बात कही, लेकिन रूटीन चेकअप और जांच के लिए आने वाले मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों और मरीजों के तीमारदारों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द इन महिला कर्मचारियों की मांगों का समाधान किया जाए ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।प्रशासन में मचा हड़कंप, अधिकारियों ने बातचीत के लिए बुलाई बैठककरवा चौथ के दिन महिला नर्सों द्वारा किए गए इस अनोखे और हाई-प्रोफाइल प्रदर्शन की भनक जैसे ही स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन को लगी, महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द से जल्द प्रशासनिक स्तर पर उचित आदेश जारी किए जाएंगे। फिलहाल प्रदर्शनकारी नर्सों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी केवल कोरे आश्वासन मिले, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगी और पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का चक्का जाम कर देंगी।
वाराणसी में समाजवादी पार्टी की जीत पर ओमप्रकाश राजभर का बड़ा बयान
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने बेबाक बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले सुभासपा (SBSP) प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने वाराणसी में हाल ही में संपन्न हुए एक चुनाव परिणाम को लेकर बेहद तीखा और सियासी सरगर्मी बढ़ाने वाला बयान दिया है। वाराणसी में समाजवादी पार्टी (SP) की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि यह आम जनता का नहीं, बल्कि केवल पढ़े-लिखे और खास वर्ग के लोगों का वोट है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। एनडीए (NDA) गठबंधन के प्रमुख घटक दल के नेता राजभर के इस कटाक्ष को विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला माना जा रहा है, जिस पर राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।वाराणसी में सपा की जीत और ओमप्रकाश राजभर के बयान के सियासी मायनेउत्तर प्रदेश के राजनीतिक केंद्र बिंदु माने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में समाजवादी पार्टी की हालिया चुनावी सफलता ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। इस जीत के बाद जब पत्रकारों ने सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से उनकी प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि इस चुनाव में जो मतदान हुआ है, वह आम गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग का नहीं बल्कि शहरी व पढ़े-लिखे तबके का वोट था। राजभर के इस बयान को विरोधी दलों द्वारा आम जनता और शिक्षित वर्ग का अपमान बताया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजभर का यह बयान शहरी मतदाताओं के मिजाज और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर उनकी खास रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह एनडीए के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर सकता है।'गरीब जनता हमारे साथ है': सपा का ओमप्रकाश राजभर पर पलटवारओमप्रकाश राजभर के इस बयान के सामने आते ही समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है। सपा प्रवक्ताओं और स्थानीय नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि ओमप्रकाश राजभर अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने से बौखला गए हैं और अब वे जनता का अपमान करने पर उतर आए हैं। सपा का कहना है कि वाराणसी की जनता ने भाजपा और उसके सहयोगियों की नीतियों से त्रस्त होकर बदलाव के पक्ष में मतदान किया है और यह जीत आम आदमी, किसान, युवा और शोषित वर्ग की सच्ची जीत है। विपक्षी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि जब चुनाव हार जाते हैं तो जनता पर सवाल उठाए जाते हैं और जब जीत जाते हैं तो उसे पढ़ा-लिखा वर्ग बताकर खारिज करने की कोशिश की जाती है।उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर और आगामी समीकरणओमप्रकाश राजभर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय और अन्य राजनीतिक गतिविधियों की सुगबुगाहट तेज है। एनडीए गठबंधन के भीतर भी राजभर के इस तरह के बयानों को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। अपने बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले राजभर ने इस बार जिस तरह से मतदाताओं के वर्ग विशेष को लेकर टिप्पणी की है, उससे जातिगत और वर्गगत राजनीति की बहस एक बार फिर से केंद्र में आ गई है। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस बयान पर अन्य राजनीतिक दल किस तरह की रणनीति अपनाते हैं और यह बयान यूपी की राजनीति में कितना तूल पकड़ता है।
Maharashtra MLC Election Results: महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की 5 सीटों पर आए नतीजों ने राज्य की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर जारी अंदरूनी कलह को सतह पर ला दिया है। कुल 5 सीटों में से गठबंधन को केवल 2 सीटों (भाजपा 1, शिवसेना 1) पर ही संतोष ...
महिलाओं में भी चुपचाप बढ़ रहा है हाई कोलेस्ट्रॉल
आमतौर पर हमारे समाज में यह एक आम धारणा बनी हुई है कि हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या केवल पुरुषों को या फिर अधिक उम्र के बुजुर्गों को ही अपना शिकार बनाती है। लेकिन मेडिकल रिसर्च और हेल्थ एक्सपर्ट्स के आंकड़े इस मिथक को पूरी तरह तोड़ते हुए चौंकाने वाला सच सामने लाते हैं। आज के भागदौड़ भरे जीवन, तनावपूर्ण कार्यशैली, बिगड़ी हुई खान-पान की आदतों और शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते महिलाओं में भी 'साइलेंट किलर' यानी खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर चुपचाप तेजी से बढ़ने लगा है। शुरुआती दौर में महिलाओं के शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कोई खास या स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके कारण इसे 'खामोश बीमारी' भी कहा जाता है। जब तक महिलाओं को इस समस्या का पता चलता है, तब तक यह धमनियों में जमकर दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का बड़ा खतरा पैदा कर चुका होता है। समय रहते शरीर के इन बारीक संकेतों को पहचानना हर महिला के लिए बेहद जरूरी है ताकि किसी भी बड़े खतरे से पहले सावधानी बरती जा सके।आखिर क्यों महिलाओं में खतरनाक साबित हो रहा है बढ़ता हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल?खराब कोलेस्ट्रॉल यानी लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) जब खून की नसों (Arteries) में जमा होने लगता है, तो रक्त का प्रवाह बाधित होने लगता है। महिलाओं में मेनोपॉज (Menopause) के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जो प्राकृतिक रूप से उनके दिल की रक्षा करता था। इसके बाद महिलाओं में भी पुरुषों की तरह हार्ट अटैक और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है। इसके अलावा थायराइड की समस्या, पीसीओडी (PCOS), गर्भनिरोधक गोलियों का अत्यधिक सेवन, जेनेटिक कारण और जंक फूड का अंधाधुंध सेवन महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाता है। चूंकि महिलाओं में इसके लक्षण पुरुषों से अलग या बेहद सामान्य लग सकते हैं, इसलिए अक्सर वे इसे मामूली थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो आगे चलकर भारी पड़ सकता है।महिलाओं में हाई कोलेस्ट्रॉल के शुरुआती और सबसे अहम छिपे हुए संकेतमहिलाओं को अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर हमेशा पैनी नजर रखनी चाहिए। हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर शरीर कुछ छुपे हुए संकेत देने लगता है, जिन्हें भूलकर भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं उन प्रमुख लक्षणों के बारे में जो कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का संकेत देते हैं:लगातार और असाधारण थकान: यदि बिना किसी भारी काम के भी आपको हर समय शरीर में भारीपन और गंभीर थकान महसूस होती है, तो यह खराब ब्लड सर्कुलेशन का संकेत हो सकता है।थोड़ी दूर चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना: अगर सामान्य रूप से घर का काम करते हुए या थोड़े से कदमों पर सांस फूलने लगे और छाती में हल्का भारीपन लगे, तो सावधान हो जाएं।पैथोलॉजिकल जकड़न और पैरों में दर्द: पैरों की नसों में ठीक से खून न पहुंचने के कारण पिंडलियों में लगातार दर्द, ऐंठन या सुन्नपन (Numbness) महसूस होना हाई कोलेस्ट्रॉल की निशानी हो सकती है।त्वचा पर पीले चकत्ते या धब्बे (Xanthomas): आंखों के आसपास या शरीर के जोड़ों पर छोटे-छोटे पीले रंग की चर्बी के उभार दिखाई देना शरीर में अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल होने का प्रमाण है।त्वचा और नाखूनों के रंग में बदलाव: खराब रक्त संचार के कारण उंगलियों और पैर के पंजों का ठंडा पड़ जाना या नाखूनों का रंग फीका पड़ जाना भी एक बड़ा संकेत है।समय रहते कैसे करें बचाव और कौन से टेस्ट कराना है जरूरी?यदि आप इन लक्षणों को खुद में महसूस कर रही हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करना शुरू कर दें। साल में कम से कम एक बार अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test) जरूर करवाएं, जिसमें कुल कोलेस्ट्रॉल, एचडीएल, एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर की सटीक जानकारी मिल जाती है। अपने आहार से ट्रांस फैट, रिफाइंड ऑयल, मैदे से बनी चीजें और जंक फूड को पूरी तरह बाहर कर दें। इसकी बजाय अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, ओट्स, फल, अखरोट, बादाम और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज करने से शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर बढ़ने लगता है और धमनियां साफ रहती हैं। समय पर सतर्कता अपनाकर आप अपने दिल को हमेशा स्वस्थ और सुरक्षित रख सकती हैं।
हवा में झूलने वाले 'बंगी वर्कआउट' से तेजी से घटेगा वजन और मजबूत होगा कोर
फिटनेस की दुनिया में इन दिनों एक बेहद रोमांचक, अनोखा और एनर्जेटिक वर्कआउट ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसका नाम है 'बंगी वर्कआउट' (Bungee Workout)। अगर आप जिम में पारंपरिक डंबल उठाने या ट्रेडमिल पर दौड़-दौड़कर बोर हो चुके हैं, तो हवा में रस्सी के सहारे झूलते हुए किया जाने वाला यह फिटनेस रूटीन आपके लिए एकदम परफेक्ट साबित हो सकता है। सर्कस या एडवेंचर स्पोर्ट्स की तरह दिखने वाला यह वर्कआउट आजकल फिटनेस फ्रीक युवाओं और सेलेब्रिटीज के बीच क्रेज बना हुआ है। इसमें इलास्टिक बंगी कॉर्ड्स की मदद से हवा में उछलते, कूदते और कलाबाजियां खाते हुए वर्कआउट किया जाता है। लेकिन इस मजेदार और फन-फिल्ड फिटनेस फॉर्म को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले इसके फायदों, चुनौतियों और जरूरी सावधानियों के बारे में विस्तार से जान लेना बेहद आवश्यक है।आखिर क्या है बंगी वर्कआउट और कैसे की जाती है हवा में यह अनोखी फिटनेस ट्रेनिंग?बंगी वर्कआउट की शुरुआत मुख्य रूप से थाईलैंड से हुई थी, जिसने देखते ही देखते पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। इस फिटनेस फॉर्म में छत से एक मजबूत इलास्टिक बंगी कॉर्ड लटकाई जाती है, जिसे एक विशेष हार्नेस (Harness) की मदद से व्यक्ति की कमर और शरीर से मजबूती से बांधा जाता है। बंगी की इलास्टिसिटी और खिंचाव के कारण शरीर का वजन काफी हद तक हल्का महसूस होता है, जिससे आप बिना अपने जोड़ों (Joints) पर अत्यधिक दबाव डाले हवा में आसानी से ऊंचे-ऊंचे जंप, पुश-अप्स, स्क्वाट्स और डांस मूव्स कर सकते हैं। यह एरोबिक्स, पिलाटेस और जिमनास्टिक का एक अद्भुत मिश्रण है, जो कार्डियोवैस्कुलर एंड्यूरेंस को बढ़ाने में कमाल का असर दिखाता है।बंगी वर्कआउट करने के अद्भुत फायदे: कोर स्ट्रेंथ से लेकर तेजी से फैट बर्निंग तकबंगी वर्कआउट केवल दिखने में मजेदार नहीं है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए इसके अनगिनत फायदे हैं। जब आप बंगी कॉर्ड के प्रतिरोध (Resistance) के खिलाफ हवा में उछलते हैं, तो शरीर के संतुलन को बनाए रखने के लिए आपके एब्डॉमिनल मसल्स यानी कोर (Core) पर सबसे ज्यादा जोर पड़ता है। इससे कुछ ही हफ्तों में एब्डॉमिनल स्ट्रेंथ मजबूत होती है और बैली फैट तेजी से पिघलता है। एक घंटे के इस वर्कआउट सेशन में लगभग 500 से 800 कैलोरी तक आसानी से बर्न की जा सकती है। इसके अलावा, यह एक्सरसाइज रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाती है, स्ट्रेस हार्मोन को कम करती है और शरीर के पोश्चर को सुधारने में बेहद मददगार साबित होती है।क्या बंगी वर्कआउट हर किसी के लिए है सुरक्षित? शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यानबंगी वर्कआउट भले ही बेहद आकर्षक और रोमांचक लगता है, लेकिन इसे शुरू करने से पहले कुछ अहम सावधानियों को बरतना बहुत जरूरी है। चूंकि यह एक हाई-इम्पैक्ट और बैलेंसिंग आधारित ट्रेनिंग है, इसलिए दिल की गंभीर बीमारी, चक्कर आने की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर या हाल ही में सर्जरी से गुजरे लोगों को इसे करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, रीढ़ की हड्डी या घुटनों की गंभीर चोट से पीड़ित व्यक्तियों को भी डॉक्टर या किसी सर्टिफाइड ट्रेनर की सलाह के बिना इसे नहीं करना चाहिए। शुरुआत में संतुलन बनाने में थोड़ी परेशानी हो सकती है, इसलिए हमेशा किसी अनुभवी और प्रोफेशनल इंस्ट्रक्टर की देखरेख में ही बंगी स्टूडियो में इसकी शुरुआत करें।सही गियर और प्रोफेशनल गाइडेंस के साथ अपने फिटनेस सफर की करें नई शुरुआतयदि आप भी अपनी सामान्य फिटनेस रूटीन से ऊब चुके हैं और कुछ नया व रोमांचक ट्राई करना चाहते हैं, तो बंगी वर्कआउट आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। इसके लिए किसी महंगे जिम की नहीं, बल्कि एक अच्छे सर्टिफाइड फिटनेस सेंटर की जरूरत होती है जो बंगी हार्नेस और सुरक्षा मानकों का पूरा पालन करता हो। आरामदायक स्पोर्ट्सवियर पहनकर और अपने ट्रेनर के निर्देशों का पालन करके आप इस हवा में झूलने वाले वर्कआउट का पूरा आनंद ले सकते हैं। यह न केवल आपके शरीर को चुस्त-दुरुस्त बनाएगा, बल्कि आपके मानसिक तनाव को दूर कर आपको तरोताजा और ऊर्जावान महसूस कराएगा।
UP Rain, Weather Update 29 October: 29-30 अक्टूबर के पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाकों में बहुत भारी बारिश होगी। इसके अलावा, 29 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, 30 अक्टूबर को उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश और 29-30 अक्टूबर के दौरान पूर्वी राजस्थान में कहीं कहीं ओले भी गिरेंगे।
एक मैच और... फिर सोऊंगा! Gen Z में गेमिंग का जानलेवा जुनून
आज की युवा पीढ़ी यानी जेन जी (Gen Z) के जीवन में डिजिटल क्रांति ने मनोरंजन के मायनों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। देर रात तक स्मार्टफोन, लैपटॉप या गेमिंग कंसोल की जगमगाती स्क्रीन के सामने आंखें गड़ाए बैठे युवाओं का सिर्फ एक ही डायलॉग सुनने को मिलता है— बस एक मैच और... फिर पक्का सोऊंगा! लेकिन यह 'एक मैच' कब पूरी रात को लील जाता है और कब यह एक बेकाबू लत का रूप धारण कर लेता है, इसका अंदाजा खुद गेमर्स को भी नहीं हो पाता। ऑनलाइन गेमिंग का यह जुनून युवाओं की सेहत, मानसिक संतुलन, पढ़ाई और व्यक्तिगत जीवन पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता जताते हुए युवाओं व अभिभावकों को आगाह किया है कि गेमिंग का यह बेलगाम शौक अब एक गंभीर मानसिक विकार की श्रेणी में आ चुका है।जेन जी में गेमिंग का बढ़ता खुमार और 'बस एक मैच और' का चक्रव्यूहगेमिंग अब केवल टाइमपास या मनोरंजन का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह आज के युवाओं के लिए एक वर्चुअल दुनिया बन चुका है जहां वे अपनी वास्तविक जिंदगी के तनाव से दूर भागने की कोशिश करते हैं। PUBG, BGMI, Call of Duty, Free Fire और Valorant जैसे मल्टीप्लेयर बैटल रॉयल गेम्स युवाओं को अपनी ओर खींचते हैं। इन गेम्स की संरचना इस तरह से डिजाइन की जाती है कि हर लेवल के बाद खिलाड़ी को डोपामाइन (Dopamine) का अहसास होता है, जो उन्हें बार-बार खेलने के लिए उकसाता है। हारने पर 'जीतने की जिद्द' और जीतने पर 'रैंक बढ़ाने का लालच' युवाओं को स्क्रीन से बांधकर रखता है। इसके चक्कर में नींद पूरी न होना, खान-पान में लापरवाही और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं आम बात बन चुकी हैं।कब मनोरंजन बन जाता है मानसिक बीमारी? WHO की चेतावनी और 'गेमिंग डिसऑर्डर' के लक्षणविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अंतर्राष्ट्रीय बीमारी वर्गीकरण (ICD-11) में 'गेमिंग डिसऑर्डर' (Gaming Disorder) को आधिकारिक तौर पर एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के रूप में शामिल किया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह कैसे पहचानें कि गेमिंग कब एक सामान्य शौक से बढ़कर बीमारी बन चुकी है? मनोचिकित्सकों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी दैनिक जिम्मेदारियों, पढ़ाई, नौकरी और पारिवारिक संबंधों को दरकिनार करके केवल गेमिंग को प्राथमिकता देने लगे, तो यह एक बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) है। जब गेम न खेलने पर बेचैनी, गुस्सा, एंग्जायटी या आक्रामकता महसूस होने लगे, या फिर नींद न आने की समस्या (Insomnia) और डिप्रेशन के लक्षण दिखाई देने लगें, तो समझ जाना चाहिए कि गेमिंग अब बीमारी का रूप ले चुकी है।शारीरिक और मानसिक सेहत पर गेमिंग के साइड इफेक्ट्स: आंखें, रीढ़ की हड्डी और दिल पर असरलगातार कई घंटों तक एक ही जगह बैठकर गेम खेलने का असर केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे शरीर को अंदर से खोखला कर देता है। देर रात तक स्क्रीन देखने से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे स्लीप हार्मोन 'मेलाटोनिन' के स्राव को रोक देती है, जिससे अनिद्रा की शिकायत हो जाती है। इसके अलावा, गलत पॉश्चर में बैठने से रीढ़ की हड्डी और गर्दन में दर्द (Text Neck Syndrome), आंखों में सूखापन व कमजोर रोशनी, और वजन बढ़ने (Obesity) जैसी शारीरिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लगातार स्क्रीन से जुड़े रहने के कारण युवाओं का सामाजिक दायरा सिमट रहा है और वे अकेलापन (Isolation) व अवसाद का शिकार हो रहे हैं।गेमिंग की लत से कैसे पाएं मुक्ति? डिजिटल डिटॉक्स और अभिभावकों के लिए जरूरी टिप्सयदि आप या आपके घर का कोई सदस्य इस स्थिति से गुजर रहा है, तो समय रहते सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले 'डिजिटल डिटॉक्स' (Digital Detox) की रणनीति अपनानी होगी। दिनभर में गेमिंग का एक निश्चित समय तय करें और सोने से कम से कम 2 घंटे पहले स्क्रीन बंद कर दें। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों पर बेवजह चिल्लाने या डांटने के बजाय उनसे दोस्ताना बातचीत करें और उनकी मानसिक स्थिति को समझें। बच्चों को मैदानी खेलों, आउटडोर एक्टिविटीज, योग और पेंटिंग या म्यूजिक जैसे अन्य रचनात्मक शौकों से जोड़ना एक कारगर उपाय साबित हो सकता है। अगर स्थिति हाथ से निकलती दिखे, तो बिना देर किए किसी प्रोफेशनल काउंसलर या मनोचिकित्सक की मदद जरूर लें।
करवा चौथ का व्रत कैसे खोलें? जानें चांद निकलने का सही टाइम और मुहूर्त
करवा चौथ पर संध्या काल में भगवान गणेश, माता पार्वती और करवा माता की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:53 बजे से लेकर शाम 6:56 बजे तक रहने वाला है. वहीं राजधानी दिल्ली में चांद निकलने का समय रात 8 बजकर 17 मिनट बताया गया है. लेकिन देश के विभिन्न राज्यों और बड़े शहरों में चांद अलग-अलग समय पर दिखाई दे सकता है.
संदीप समझकर साथ रही, 3 बच्चों के बाद ऐसे खुली सलमान की पोल
बिजनौर के धामपुर क्षेत्र में पहचान छिपाकर सात साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का आरोप सामने आया है. देवरिया की 28 वर्षीय युवती का आरोप है कि सलमान ने अपना नाम संदीप बताकर उससे शादी का वादा किया. दोनों के तीन बच्चे हुए. गांव में आधार कार्ड से असली पहचान सामने आने के बाद विवाद हुआ. पुलिस ने आरोपी को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया है.
UP में अब 10 Expressway और 17 Airport, CM Yogi बोले- 2017 के बाद बदली तस्वीर
(फाइल फोटो के साथ)लखनऊ, 29 अक्टूबर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद राज्य में सड़क, रेल, मेट्रो और हवाई संपर्क का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, जिससे विकास, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नयी गति मिली है। आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि सड़क, रेल और हवाई संपर्क केवल दूरियां नहीं घटाते बल्कि ये सुविधा, समय की बचत और समृद्धि की नयी संभावनाएं लेकर आते हैं लेकिन वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में विकास की इन जीवन रेखाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। मुख्यमंत्री ने पोस्ट में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यशस्वी मार्गदर्शन में ‘डबल इंजन’ सरकार ने रफ्तार, पैमाना और संपर्क के मंत्र से इस तस्वीर को बदला है।’’उन्होंने कहा कि भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार बनने से पहले देश की सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश में मात्र डेढ़ एक्सप्रेस-वे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश में 10 एक्सप्रेस-वे संचालित हैं। उन्होंने कहा कि तब हवाई सेवाएं चुनिंदा शहरों तक सिमटी थीं, लेकिन आज 12 घरेलू और पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से प्रदेश की उड़ान नयी ऊंचाइयों पर है। आदित्यनाथ ने पोस्ट में कहा, ‘‘तब प्रदेश के एक भी शहर में मेट्रो नहीं चलती थी। वहीं, आज सात शहरों में मेट्रो जनजीवन को नयी गति दे रही है। इस परिवर्तन से किसान की उपज को बड़ा बाजार और उद्यमिता को नए अवसर मिल रहे हैं। युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार तक पहुंच सुगम हो रही है।’’उन्होंने कहा कि इससे कामकाजी लोगों का समय बच रहा है तथा पर्यटन का भी विस्तार हो रहा है, जिससे स्थानीय परिवारों की आजीविका को नयी शक्ति मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘विकास की यह गति आज गांव से कस्बे और कस्बे से शहर तक नागरिकों के जीवन को बदल रही है। हर क्षेत्र को अवसर, हर उद्यम को सामर्थ्य और हर परिवार के जीवन में बढ़ती खुशहाली नए भारत के नए उत्तर प्रदेश की नयी पहचान है।’’
भले कांग्रेस नेता राहुल गांधी जनता से रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में आने की अपील कर रहे हों लेकिन दिल्ली में प्रदूषण की रोकथाम के लिए 1 नवंबर से लागू होने जा रहे नए वाहन प्रतिबंध कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की रामलीला मैदान में होने वाली रैली के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। रैली में शामिल होने के लिए दूसरे राज्यों और एनसीआर से आने वाले कार्यकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि वे दिल्ली पहुंचेंगे कैसे? जिन बसों और निजी वाहनों से हजारों कार्यकर्ताओं को राजधानी लाने की तैयारी है, उनमें से अगर कोई निर्धारित बीएस-6 उत्सर्जन मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसे दिल्ली की सीमा के भीतर प्रवेश नहीं मिल सकेगा। यानी रैली में शामिल होने का उत्साह रखने वाले कार्यकर्ताओं को अपनी गाड़ियां दिल्ली बॉर्डर पर ही छोड़नी पड़ सकती हैं। हम आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने सर्दियों में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-6 मानकों से नीचे के पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की है। यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेंगे। सीएनजी, इलेक्ट्रिक और निर्धारित मानकों वाले वाहनों को छूट है। वहीं, अनुबंधित और पर्यटक परमिट वाली बसों के लिए भी अलग से बीएस-6 डीजल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक होने की शर्त लागू है। ऐसे में कांग्रेस की रैली के लिए दूसरे राज्यों से आने वाली बसों की पात्रता जांचना आयोजकों के लिए बेहद जरूरी होगा। इसे भी पढ़ें: Tata Group पर राजनीति करते ही फँस गये Rahul Gandhi, Aircel Founder के पुराने बयान ने खोली Congress के जमाने की पोल साथ ही मुश्किल केवल दिल्ली में प्रवेश की नहीं, दिल्ली पहुंचने के बाद की भी है। मान लीजिए, उत्तर प्रदेश, हरियाणा या राजस्थान से कार्यकर्ताओं को लेकर चली कोई बस निर्धारित उत्सर्जन मानकों पर खरी नहीं उतरती। ऐसी बस को दिल्ली में प्रवेश नहीं मिलेगा। कार्यकर्ताओं को सीमा के आसपास उतरना पड़े, तो उन्हें वहां से रैली स्थल तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक बसों, मेट्रो या दूसरे सार्वजनिक परिवहन का इंतजाम करना होगा। यदि यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं हुई, तो लोगों को लंबी दूरी पैदल तय करने की परेशानी भी उठानी पड़ सकती है। यही वह व्यावहारिक चुनौती है, जो कांग्रेस के संगठनात्मक इंतजामों की परीक्षा लेगी। रैली के लिए भीड़ जुटाने की रणनीति बनाना अलग बात है और उस भीड़ को प्रदूषण संबंधी प्रतिबंधों का पालन करते हुए सुरक्षित तरीके से रामलीला मैदान तक पहुंचाना अलग। देखा जाये तो अब केवल बसों की संख्या गिनने से काम नहीं चलेगा; यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हर वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और उसके पास दिल्ली में प्रवेश की पात्रता हो। साथ ही इसका असर केवल रैली में आने वाले कार्यकर्ताओं तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। यदि बड़ी संख्या में बसों और निजी वाहनों को दिल्ली की सीमाओं के आसपास निर्धारित पार्किंग स्थलों की ओर भेजा जाता है, तो गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे इलाकों में यातायात का दबाव बढ़ सकता है। पार्किंग स्थलों तक पहुंचने वाली सड़कों और प्रमुख चौराहों पर वाहनों की कतारें लगने की स्थिति बन सकती है। हालांकि, जाम की वास्तविक स्थिति पार्किंग के स्थान, वाहनों की संख्या और यातायात प्रबंधन पर निर्भर करेगी। ऐसे में कांग्रेस के सामने असली सवाल यह है कि रैली में लोगों को बुलाने से पहले उन्हें पहुंचाने की मुकम्मल योजना कितनी तैयार है? रिपोर्टें हैं कि दिल्ली पुलिस ने आयोजन के लिए वाहनों को निर्धारित स्थानों पर पार्क करने की शर्त भी रखी है। ऐसे में प्रदूषण संबंधी प्रतिबंध और पार्किंग के नियम, दोनों को ध्यान में रखकर व्यवस्था करनी होगी। साथ ही दिल्ली सरकार के लिए भी यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन हो, लेकिन सीमावर्ती सड़कों पर अव्यवस्था न फैले। दूसरी ओर, कांग्रेस को समय रहते कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश देने होंगे कि वे किस तरह के वाहन लेकर आएं, कहां पार्किंग होगी और वहां से रामलीला मैदान तक पहुंचने की क्या व्यवस्था होगी। बहरहाल, 1 नवंबर की रैली में राजनीतिक भाषणों और भीड़ के आंकड़ों से पहले एक बुनियादी सवाल का जवाब जरूरी है। सवाल यह है कि क्या कार्यकर्ता अपनी गाड़ियों में सीधे रामलीला मैदान तक पहुंच पाएंगे, या नए प्रदूषण नियमों के कारण उन्हें दिल्ली की सीमा पर उतरकर आगे का रास्ता खुद तय करना पड़ेगा? यही चुनौती इस रैली की तैयारियों का सबसे अहम पहलू बन सकती है।
श्रीनगर से देहरादून तक कार से सफर... मजदूरों को देख सीएम ने रोका काफिला
उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी हवाई सफर छोड़कर श्रीनगर से देहरादून तक कार से सफर कर रहे थे. इस दौरान उनका अलग अंदाज देखने को मिला. रास्ते में कुछ मजदूरों पर उनकी नजर पड़ी. धामी ने काफिला रुकवाया, गाड़ी से उतरे और सीधे मजदूरों के पास पहुंच गए. उनसे हालचाल पूछा और बातचीत की. इसके बाद देवप्रयाग में स्थानीय लोगों से मिले, बस अड्डे के टॉयलेट का जायजा लिया और उसे हाईटेक बनाने के निर्देश दिए.
अर्नब साइक्लोन ने मचाई तबाही... तो मदद को आई ये कार
आंध्र प्रदेश में चक्रवाती तूफान 'अर्नब' ने दस्तक दी. इस दौरान हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी. तूफान के चलते कई इलाकों में पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से बिजली सप्लाई प्रभावित हुई. लेकिन इस आसमानी आफत के बीच टाटा की इलेक्ट्रिक कार Tata Curvv EV चर्चा में है, आइये जानें क्या है मामला-
गोपालगंज में बेमौसम बारिश और ठंडी हवाओं से धान की फसल पर मंडराया संकट
गोपालगंज में बेमौसम बारिश: गोपालगंज जिले में गुरुवार की सुबह से मौसम का मिजाज अचानक बदल गया और कार्तिक महीने में सावन जैसा नजारा देखने को मिला। कहीं बूंदाबांदी तो कहीं हल्की बारिश से वातावरण में ठंडक घुल गई है तथा ठंडी हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 31.8 डिग्री सेल्सियस था.
सोनीपत में 31 अक्टूबर तक खराब रहेगा मौसम, बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
सोनीपत मौसम: सोनीपत मौसम, मौसम ब्रेकिंग (सोनीपत): सोनीपत में 31 अक्टूबर तक मौसम खराब रहने की आशंका जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के चंडीगढ़ केंद्र ने गरज-चमक, आकाशीय बिजली, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और प्रशासन ने सतर्कता बरतने की अपील की है।
कल का मौसम 30 अक्टूबर: 11 घंटे के भीतर 24 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, 85 की स्पीड से हवा
कल का मौसम 30 अक्टूबर: मानसून का चक्र पूरा होने के बाद भी लोगों की आसमानी मुसीबत कम नहीं हो रही है। मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 24 राज्यों में कल मूसलाधार बारिश और 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी जारी की है।
PM मोदी का गुजरात दौरा, ₹407 करोड़ के प्रोजेक्ट का करेंगे लोकार्पण
प्रधानमंत्री मोदी 30 से 31 अक्टूबर को गुजरात के दौरे पर रहेंगे. इस दौरे के दौरान वे बनासकांठा के भीलड़ी से 407.56 करोड़ रुपए की तीन अहम परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे.
Pawan Khera का आरोप, Jamia Millia Islamia में छात्रों का दमन कर रही BJP
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जामिया मिलिया इस्लामिया को लंबे समय तक बंद रखने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने इसे असहमति के प्रति भाजपा के डर का नतीजा बताया है। विश्वविद्यालय 13 जनवरी, 2027 तक बंद रहेगा, जिसका मतलब है कि घोषणा की तारीख से यह कुल 78 दिनों तक बंद रहेगा। 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, खेड़ा ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों पर सरकार की प्रतिक्रिया की निंदा करते हुए कहा, जब छात्र अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करते हैं, तो उन्हें बातचीत के बजाय दमन का सामना करना पड़ता है। इसे भी पढ़ें: UP MLC Results: SP ने बढ़ाई अपनी ताकत, Varanasi और Lucknow की हार से BJP की 2027 की राह में बढ़ी चुनौती उन्होंने मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में पिछले कई महीनों से जो अघोषित आपातकाल चल रहा है, उसने अब जामिया मिलिया इस्लामिया में एक अधिक औपचारिक रूप ले लिया है। खेड़ा ने इन पाबंदियों के औचित्य पर सवाल उठाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्र अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत मिले अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसके तहत वे संगठन और यूनियन (जिसमें चुनी हुई छात्र यूनियन भी शामिल है) बना सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि असहमति को लेकर बीजेपी का डर ऐसा ही दिखता है। युवाओं के प्रति उनकी दुश्मनी कुछ ऐसी ही है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हाल ही में घोषणा की है कि ऑनलाइन कक्षाएं 24 नवंबर तक जारी रहेंगी, और इसी तारीख को ऑड-सेमेस्टर कोर्सेज की पढ़ाई पूरी हो जाएगी। 25 से 30 नवंबर तक प्रैक्टिकल सेशन, फील्ड वर्क और प्रोजेक्ट वाइवा ऑनलाइन होंगे। इसके बाद 1 दिसंबर से 24 दिसंबर तक थ्योरी परीक्षाएं होंगी। 25 दिसंबर से 12 जनवरी 2027 तक विंटर वेकेशन (सर्दियों की छुट्टियां) रहेंगी, और 13 जनवरी 2027 से ईवन सेमेस्टर के लिए फिजिकल कक्षाएं शुरू होंगी। इसे भी पढ़ें: Mission 2027 से पहले UP BJP की चुनावी रणनीति तय करेंगे Amit Shah, सीट शेयरिंग पर मंथन बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई हिंसा की निंदा की। उन्होंने इसमें शामिल लोगों को उपद्रवी बताया और उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि छात्र यूनियन चुनाव का मुद्दा 2006 से चला आ रहा है, और इस दौरान कोई चुनाव नहीं हुआ है।
'रोलरॉयस में बैठकर भी शांति नहीं' मेंटल पीस पर बोले चिदानंद सरस्वती
HealthWealth Summit 2026 में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने आधुनिक लाइफस्टाइल और भौतिक सुखों पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि इंसान चाहे रोल्स-रॉयस जैसी लग्जरी गाड़ी में घूम ले, लेकिन अगर भीतर शांति नहीं है, तो सब व्यर्थ है. असली सुख मेडल या गाड़ियां जुटाने में नहीं, बल्कि खुद को जानने और भीतर के सुकून में है.
आजम खान की वापसी से UP में बदलेगा सियासी खेल?
UP Election 2027 से पहले आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दो पैन कार्ड मामले में कोर्ट ने दोनों की जमानत मंजूर करते हुए सजा निलंबित कर दी, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी।

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