प्रतियोगी परीक्षाओं में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विप्र फाउंडेशन ने की विशेष पहल : दवे
सबगुरू न्यूज-आबूरोड। विप्र फाउंडेशन की नव घोषित जिला कार्यकारिणी का अभिनंदन और शपथ ग्रहण समारोह रविवार को हुआ। इसमें उपस्थित समाज बंधुओं को संबोधित करते हुए फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष चिरंजीलाल दवे ने कहा कि समाज के बच्चों के लिए कोचिंग के लिए परशुराम ज्ञानपीठ भवन में जयपुर में रहने की व्यवस्था। उन्हों बताया कि […] The post प्रतियोगी परीक्षाओं में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विप्र फाउंडेशन ने की विशेष पहल: दवे appeared first on Sabguru News .
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान मौजूद 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। जांच में सामने आया कि 989 ...
महाराष्ट्र के पालघर स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने 2017 के एक मामले में घायल व्यक्ति को 1.06 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। 2017 में मुंबई-अहमदाबाद राजमार्ग पर एक सड़क दुर्घटना में 31 वर्षीय व्यक्ति लकवाग्रस्त हो गया था। पीड़ित, ऋषभ विजय कुमार चोपड़ा, होटल प्रबंधन के पूर्व छात्र हैं। MACT सदस्य ए.आर. रहाणे ने ऋषभ की कार को टक्कर मारने वाले ट्रक के मालिक और उसकी बीमा कंपनी 'न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड' को संयुक्त रूप से पीड़ित को 1.06 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।यह दुर्घटना 31 दिसंबर, 2017 को वापी से मुंबई जाते समय हुई थी।मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने ट्रक मालिक और न्यू इंडिया एश्योरेंस को आवेदन दाखिल करने की तारीख से इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है। दावा आवेदन के अनुसार, होटल मैनेजमेंट के छात्र ऋषभ 31 दिसंबर, 2017 को अपने माता-पिता के साथ गुजरात के वापी से मुंबई जा रहे थे। उस समय उनके पिता गाड़ी चला रहे थे। इसी दौरान हलोली गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी। आवेदन में कहा गया है कि टक्कर के कारण कार तीन से चार बार पलट गई और सड़क के दूसरी ओर जा गिरी।ऋषभ की मां की एक दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है।इस दुर्घटना में ऋषभ की मां की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि वह गंभीर रूप से घायल हो गया और कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हो गया। इससे वह 70 प्रतिशत तक स्थायी रूप से विकलांग हो गया और तब से बिस्तर पर ही पड़ा है। बीमा कंपनी ने दावे का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि दुर्घटना पीड़ित के पिता की लापरवाही के कारण हुई थी। कंपनी ने ऋषभ की भविष्य की कमाई क्षमता और चिकित्सा खर्चों पर भी सवाल उठाए।एमसीटी ने न्यू इंडिया एश्योरेंस के सभी तर्कों को खारिज कर दिया।एमसीटी ने न्यू इंडिया एश्योरेंस के सभी तर्कों को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ केवल लापरवाही से गाड़ी चलाने और तेज गति से वाहन चलाने का आरोप पत्र दाखिल किया है। ट्रिब्यूनल ने कहा, आरोप पत्र दाखिल करने से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि ट्रक चालक लापरवाही से और तेज गति से गाड़ी चला रहा था। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने प्रतिवादियों को दो महीने के भीतर पूरी राशि जमा करने का निर्देश दिया है।
BSNL का सबसे सस्ता 6 महीने का प्लान! आपको मिलेगा हाई-स्पीड इंटरनेट और अनलिमिटेड कॉलिंग का लाभ
सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL अक्सर अपने ग्राहकों के लिए सस्ते प्लान पेश करती है। अगर आप अपने घर या ऑफिस के लिए बजट-फ्रेंडली वाई-फाई कनेक्शन ढूंढ रहे हैं, तो BSNL का एक प्लान आपके लिए काफी उपयोगी हो सकता है। कंपनी ₹1,449 में एक ब्रॉडबैंड प्लान दे रही है जिसकी वैलिडिटी छह महीने (180 दिन) है। इस प्लान में न सिर्फ इंटरनेट एक्सेस मिलता है, बल्कि अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग की सुविधा भी मिलती है। आइए इस प्लान की पूरी जानकारी देखें।इस प्लान की सबसे खास बात इसकी वैधता है। एक बार रिचार्ज करने के बाद, आपको छह महीने तक बार-बार रिचार्ज करने की झंझट से मुक्ति मिल जाती है।इस BSNL ब्रॉडबैंड प्लान के साथ ग्राहकों को 30 एमबीपीएस की इंटरनेट स्पीड मिलती है। इस प्लान में प्रति माह 700 जीबी हाई-स्पीड डेटा मिलता है। 500 जीबी डेटा लिमिट पूरी हो जाने पर भी इंटरनेट कनेक्शन बंद नहीं होगा; बल्कि स्पीड घटकर 4 एमबीपीएस हो जाएगी, जिससे आप बेसिक ब्राउज़िंग जारी रख सकेंगे।डेटा के साथ-साथ, BSNL इस प्लान में लैंडलाइन कनेक्शन के ज़रिए पूरे देश में अनलिमिटेड लोकल और STD कॉलिंग की सुविधा भी देता है। मासिक खर्च की बात करें तो, ₹1,449 का छह महीने का प्लान ₹241 प्रति माह पड़ता है।यदि आप घर पर इंटरनेट का उपयोग मुख्य रूप से पढ़ाई, ऑफिस के सामान्य काम, यूट्यूब वीडियो देखने या सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करने के लिए करते हैं, तो यह प्लान आपके लिए बिल्कुल सही है। इसमें मिलने वाला डेटा और स्पीड इन सभी गतिविधियों के लिए पर्याप्त है, और आपको ये सभी फायदे कम कीमत पर मिलते हैं।यह कनेक्शन कैसे प्राप्त करें? यदि आप इस BSNL ब्रॉडबैंड प्लान का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आप BSNL की आधिकारिक वेबसाइट या अपने निकटतम BSNL ग्राहक सेवा केंद्र/एक्सचेंज पर जाकर नए कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
मक्का खाने से आपको कौन-कौन से विटामिन मिलते हैं? यह मौसमी फल स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी खजाना
मक्का, जिसे हम पॉपकॉर्न या स्वीट कॉर्न के नाम से भी जानते हैं, मानसून के मौसम में खूब खाया जाता है। भारत में लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मक्का खाने से हमें कौन-कौन से विटामिन मिलते हैं?मक्का जितना स्वादिष्ट होता है, उतना ही स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। इसमें कई विटामिन और पोषक तत्व होते हैं जो शरीर के लिए आवश्यक हैं।मक्के में पाए जाने वाले प्रमुख पोषक तत्व: मक्के में विटामिन बी6, विटामिन ए, आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।विटामिन सी का उत्कृष्ट स्रोत: मक्का विटामिन सी से भरपूर होता है। विटामिन सी एक उत्कृष्ट एंटीऑक्सीडेंट है जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, त्वचा को स्वस्थ रखता है और शरीर की कोशिकाओं को क्षति से बचाता है।आँखों के लिए फायदेमंद: अगर आप पीला मक्का खा रहे हैं, तो उसमें कैरोटीनॉयड नामक तत्व होता है। यह तत्व शरीर में विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है, जो आँखों की रोशनी बढ़ाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तुलसी में जीवाणुरोधी गुण होते हैं। अदरक में सूजनरोधी गुण होते हैं। यह मिश्रण गले की खराश और सर्दी-जुकाम से तुरंत राहत दिला सकता है।बरसात के मौसम में पाचन क्रिया अक्सर धीमी हो जाती है। पुदीने की चाय न केवल पेट को आराम देती है, बल्कि इसमें मौजूद मेन्थॉल नाक खोलने और सिरदर्द से राहत दिलाने में भी सहायक होता है।दालचीनी और लौंग दोनों ही गर्म तासीर प्रदान करते हैं। इनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को संक्रमणों से लड़ने में मदद करते हैं।मुलेठी खांसी या गले में खराश होने पर एक बेहतरीन घरेलू उपाय है। यह गले की खराश से राहत दिलाती है। इसकी हर्बल चाय भी फायदेमंद हो सकती है।हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है। लेमनग्रास के साथ हल्दी की चाय पीने से बुखार और बदन दर्द से राहत मिल सकती है।नोट: यहां दी गई जानकारी रिपोर्टों पर आधारित है। टीवी9 गुजराती किसी भी जानकारी का समर्थन नहीं करता है।
मानसून शुरू होते ही हमारी जीवनशैली में बदलाव आने लगते हैं और इसका असर हमारे स्वास्थ्य पर भी दिखने लगता है। इस मौसम में कई लोगों को जोड़ों में अचानक तेज दर्द होने लगता है। मौसम, नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण शरीर इन बदलावों को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता। इस समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय इसके वास्तविक कारणों को जानना और उचित देखभाल करना जरूरी है।मानसून में जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ जाता है?वातावरण में नमी: मानसून के दौरान हवा में नमी बढ़ने से जोड़ों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे सूजन हो सकती है। विशेष रूप से गठिया से पीड़ित मरीजों को इस दौरान दर्द बढ़ जाता है।तापमान में अचानक परिवर्तन: भीषण गर्मी के बाद अचानक बारिश होने से तापमान में तेजी से गिरावट आती है। इस परिवर्तन से जोड़ों में सिनोवियल जोड़ों का चिकनाई स्तर कम हो जाता है, जिससे अकड़न और दर्द होता है।वायु दाब में परिवर्तन: मानसून के दौरान वायु दाब (वायु दाब) कम हो जाता है। इस परिवर्तन के कारण जोड़ों की कोशिकाओं में सूजन आ जाती है और दर्द की तीव्रता बढ़ जाती है।शारीरिक गतिविधि में कमी: बारिश के कारण लोग टहलने या दौड़ने के लिए बाहर नहीं जा पा रहे हैं। शारीरिक गतिविधि में कमी से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और जोड़ों में अकड़न बढ़ जाती है।जोड़ों के दर्द से राहत पाने के सरल तरीकेसक्रिय रहें: अगर बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर ही स्ट्रेचिंग, टहलना या हल्का व्यायाम करें। अपने वजन को नियंत्रण में रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिक वजन जोड़ों पर दबाव डालता है।पर्याप्त पानी पिएं: नियमित रूप से पानी पीने से जोड़ों में लचीलापन बना रहता है और अकड़न नहीं होती, जिससे चलना-फिरना आसान हो जाता है।सोडियम का सेवन कम करें: शरीर में पानी जमा होने और सूजन को कम करने के लिए अपने आहार में नमक की मात्रा सीमित करें।पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें: अपने आहार में अलसी, चिया सीड्स और ब्रोकली जैसे सूजन-रोधी खाद्य पदार्थों को शामिल करें। इसके अलावा, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो जोड़ों की सूजन और दर्द से तुरंत राहत दिलाते हैं।
मानसून का मौसम शुरू होते ही लोग पीने के पानी की शुद्धता को लेकर चिंतित हो जाते हैं। ऐसे समय में, ज्यादातर लोग विज्ञापन देखकर या दूसरों की नकल करके अपने घरों में आरओ वॉटर प्यूरीफायर लगवा लेते हैं और सोचते हैं कि उनका पानी सबसे सुरक्षित है। लेकिन क्या हर घर को आरओ की जरूरत है? सरकारी रिपोर्टों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसका जवाब है नहीं। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्यूरीफायर का चुनाव विज्ञापनों को देखकर नहीं, बल्कि घर में आने वाले पानी की गुणवत्ता की जांच करने के बाद ही करना चाहिए।आरओ (रिटॉक्स फिल्टर) कब लगवाना आवश्यक है? विशेषज्ञों के अनुसार, आरओ प्यूरीफायर केवल दो स्थितियों में आवश्यक होता है: जब पानी में कुल घुलनशील ठोस (टीडीएस) 500 मिलीग्राम/लीटर (पीपीएम) से अधिक हो। पीने के पानी के लिए 150 से 250 पीपीएम का टीडीएस सबसे उपयुक्त माना जाता है। जब प्रयोगशाला परीक्षणों में पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन, भारी धातु या कीटनाशकों के अंश पाए जाते हैं। इन दो स्थितियों के अलावा, घर में आरओ की कोई आवश्यकता नहीं है।कम टीडीएस वाले पानी में आरओ के नुकसान: यदि पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक नहीं है और रासायनिक प्रदूषण नहीं है, तो आरओ का उपयोग लाभ के बजाय नुकसानदायक हो सकता है। आरओ तकनीक पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों के साथ-साथ कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक खनिजों को भी हटा देती है। रिपोर्ट के अनुसार, आरओ द्वारा शुद्ध किए गए पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित न्यूनतम स्तर से नीचे चली जाती है। लंबे समय तक इन खनिजों के बिना पानी पीने से हृदय रोग, हड्डियों की कमजोरी और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।पानी की भारी बर्बादी: आरओ तकनीक की सबसे बड़ी खामी पानी की बर्बादी है। मशीन में डाले गए 1 लीटर पानी में से केवल 250 मिलीलीटर ही पीने योग्य होता है, जबकि 750 मिलीलीटर पानी बर्बाद हो जाता है। यानी लगभग 75 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने भी 500 पीपीएम से कम टीडीएस वाले क्षेत्रों में आरओ पर प्रतिबंध लगाने और पानी की बर्बादी को रोकने का सुझाव दिया है।यूवी और यूएफ प्यूरीफायर कब चुनें? यूवी प्यूरीफायर: यदि आपके घर में नगरपालिका या पाइपलाइन का पानी आता है और उसका टीडीएस 300 पीपीएम से कम है, लेकिन बैक्टीरिया या वायरस का खतरा है, तो यूवी प्यूरीफायर सबसे अच्छा विकल्प है। यह खनिजों को कम किए बिना सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देता है। यूएफ प्यूरीफायर: यूएफ प्यूरीफायर उन जगहों के लिए उपयोगी है जहां पानी में गंदगी या बैक्टीरिया मौजूद हैं लेकिन टीडीएस कम है। यह बिना बिजली के भी काम करता है और अपनी विशेष झिल्ली के माध्यम से गंदगी और बैक्टीरिया को हटाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि कोई भी प्यूरीफायर खरीदने से पहले, पानी की जांच 200-300 रुपये के साधारण टीडीएस मीटर से या किसी प्रयोगशाला में करवा लेनी चाहिए। स्वास्थ्य के लिए पानी की गुणवत्ता के आधार पर प्यूरीफायर चुनना बेहद जरूरी है।
बाल झड़ना कब एक गंभीर बीमारी बन जाता है? यदि आपको ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें
आजकल कई लोग बाल झड़ने की समस्या से परेशान हैं। कंघी करते समय, बाल धोते समय या तकिए पर टूटे हुए बाल दिखना आम बात है। कुछ हद तक बाल झड़ना सामान्य माना जाता है, क्योंकि बालों का अपना प्राकृतिक चक्र होता है, लेकिन अगर बाल लगातार बड़ी मात्रा में झड़ने लगें या पहले से पतले दिखने लगें, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।1/10बाल झड़ने के कई सामान्य कारण हो सकते हैं। बढ़ती उम्र, तनाव, शरीर में पोषक तत्वों की कमी, हार्मोन में बदलाव, कुछ दवाओं का असर या गलत हेयर केयर रूटीन भी इसका कारण हो सकते हैं। हालांकि, अक्सर लगातार बाल झड़ना किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में, सही समय पर कारण का पता लगाना ज़रूरी है, ताकि उचित उपचार शुरू किया जा सके। आइए जानते हैं कि बाल झड़ने के पीछे कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं और इनके दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।2/10एलोपेसिया एरेटा: मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से बालों के रोमों पर हमला करती है। इससे सिर या दाढ़ी के कुछ हिस्सों से अचानक बाल झड़ सकते हैं, जिससे गोल, खाली जगह बन जाती है। कुछ लोगों में, समय के साथ बाल वापस उग आते हैं, जबकि कुछ मामलों में उपचार की आवश्यकता होती है।3/10थायरॉइड संबंधी समस्याएं: थायरॉइड हार्मोन शरीर के कई कार्यों को नियंत्रित करता है। जब इस हार्मोन का उत्पादन बहुत अधिक या बहुत कम होने लगता है, तो इसका असर बालों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में बाल पतले होने लगते हैं और सामान्य से अधिक झड़ने लगते हैं। उचित उपचार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।4/10सिर की त्वचा में फंगल संक्रमण: सिर की त्वचा में फंगल संक्रमण से खुजली, लालिमा, पपड़ी बनना और बाल झड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में, सिर के कुछ हिस्सों से बाल पूरी तरह से झड़ सकते हैं। समय पर इलाज न कराने पर संक्रमण और भी गंभीर हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।5/10ल्यूपस: ल्यूपस एक स्वप्रतिरक्षित रोग है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही स्वस्थ ऊतकों पर हमला करना शुरू कर देती है। यह त्वचा, जोड़ों और अन्य अंगों के साथ-साथ बालों को भी प्रभावित कर सकता है। इस रोग में बालों के तेजी से झड़ने या पतले होने की शिकायत हो सकती है।6/10ट्राइकोटिलोमेनिया: यह एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जिसमें व्यक्ति बार-बार अपने बाल खींचता है। इससे सिर के कुछ हिस्सों में बाल झड़ने या गंजेपन के धब्बे हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।7/10डॉक्टर से कब मिलें: अगर आपके बाल अचानक बहुत ज़्यादा झड़ने लगें, सिर के कुछ हिस्सों से बाल झड़ने लगें, या बाल पतले होते जा रहे हों, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर बाल झड़ने के साथ-साथ खुजली, दर्द, सूजन, लालिमा या सिर की त्वचा पर पपड़ी जमने जैसी समस्या भी हो, तो भी जांच करवाना ज़रूरी है। अगर आपके पूरे शरीर से बाल झड़ने लगें या बच्चों में बाल झड़ने के लक्षण दिखें, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। इसके अलावा, अगर बाल झड़ने की वजह से आपका आत्मविश्वास कम होने लगे या आपको मानसिक तनाव होने लगे, तो भी आपको डॉक्टर से सलाह लेकर इसके सही कारण और इलाज के बारे में जानकारी लेनी चाहिए।8/10बाल झड़ने से रोकने के लिए क्या करें? बालों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लें जिसमें प्रोटीन, आयरन और अन्य आवश्यक पोषक तत्व शामिल हों। अत्यधिक तनाव से बचें और अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। बालों पर हीट स्टाइलिंग उत्पादों और कठोर रसायनों वाले उत्पादों का बार-बार इस्तेमाल कम करें।9/10बालों को बहुत कसकर बांधने से भी बचें, क्योंकि इससे बालों की जड़ों पर दबाव पड़ता है। यदि आपको लंबे समय से लगातार बाल झड़ने की समस्या हो रही है, तो घरेलू उपचारों पर निर्भर रहने के बजाय, डॉक्टर से परामर्श लें ताकि समस्या का वास्तविक कारण पता चल सके और उसके अनुसार उपचार कराया जा सके।
वजन घटाने (Weight Loss) की जर्नी में लोग तरह-तरह के तरीके आजमाते हैं। कोई जिम में घंटों पसीना बहाता है, तो कोई केवल अपनी डाइट में कटौती करने पर ही पूरा फोकस रखता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि—क्या सिर्फ डाइटिंग करके आसानी से और हमेशा के लिए वजन कम किया जा सकता है?सेलेब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. गीतिका चोपड़ा के अनुसार, केवल डाइट पर निर्भर रहना एक बड़ा मिथक हो सकता है। शुरुआती दौर में सिर्फ डाइट कंट्रोल करने से भले ही आपका वजन कुछ किलो कम हो जाए, लेकिन लंबे समय तक स्वस्थ, टिकाऊ और सुरक्षित वेट लॉस के लिए अकेले डाइट काफी नहीं है।वैज्ञानिक रिसर्च और एक्सपर्ट्स बताते हैं कि वजन घटाना केवल 'कम खाने' (Eat Less) का खेल नहीं है। यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्मोन्स, मसल मास, नींद की क्वालिटी, स्ट्रेस लेवल, गट हेल्थ (पाचन स्वास्थ्य) और फिजिकल एक्टिविटी का एक संतुलित मेल है।सिर्फ डाइटिंग करने के क्या हैं नुकसान?यदि आप बिना एक्सरसाइज और पर्याप्त न्यूट्रिशन के सिर्फ क्रैश डाइटिंग (Crash Dieting) करते हैं, तो शरीर को फायदे की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है:मसल मास में कमी (Muscle Loss): केवल खाना कम करने से शरीर फैट के साथ-साथ आपकी मांसपेशियों (Muscles) को भी घटाने लगता है।स्लो मेटाबॉलिज्म (Slow Metabolism): मसल मास कम होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि आप दिन भर में कम कैलोरी बर्न कर पाते हैं।वजन दोबारा बढ़ने का खतरा (Weight Regain): जैसे ही आप अपनी नॉर्मल डाइट पर लौटते हैं, स्लो मेटाबॉलिज्म के कारण वजन बहुत तेजी से वापस बढ़ जाता है, जिसे 'यो-यो इफेक्ट' (Yo-Yo Effect) कहा जाता है।डाइट के साथ इन 5 एक्टिविटी को भी करें फॉलोसही और सुरक्षित तरीके से फैट बर्न करने के लिए न्यूट्रिशनिस्ट्स कैलोरी डेफिसिट (Calorie Deficit) के साथ निम्नलिखित रूटीन अपनाने की सलाह देते हैं:हाई क्वालिटी प्रोटीन: अपने हर मील (आहार) में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल करें ताकि आपकी मांसपेशियां मजबूत रहें।स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: हफ्ते में कम से कम 2 से 4 दिन वेट ट्रेनिंग या बॉडीवेट एक्सरसाइज जरूर करें।डेली स्टेप्स काउंट: दिन भर एक्टिव रहने के लिए रोजाना 7,000 से 10,000 कदम चलने का लक्ष्य रखें।क्वालिटी स्लीप: रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी और आरामदायक नींद लें। नींद की कमी से हंगर हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं।स्ट्रेस मैनेजमेंट: तनाव और एंग्जायटी से शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है, जो जिद्दी बेली फैट (Belly Fat) को जमा करता है। ध्यान या योग से स्ट्रेस को कंट्रोल करें।गट हेल्थ और मेटाबॉलिक हेल्थ को सुधारना है जरूरीडॉ. गीतिका चोपड़ा बताती हैं कि हमारा मुख्य लक्ष्य सिर्फ वजन का आंकड़ा कम करना नहीं, बल्कि गट इंफ्लामेशन (Gat Inflammation) और मेटाबॉलिक हेल्थ को ठीक करना होना चाहिए।लंबे समय तक आंतों में रहने वाली सूजन (Chronic Inflammation) पाचन तंत्र को बिगाड़ती है, इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है और हार्मोनल इम्बैलेंस पैदा करती है। इतना ही नहीं, यह टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा सकती है। इसलिए एंटी-इंफ्लामेंट्री फूड्स (Anti-inflammatory Foods) और गट-हीलिंग न्यूट्रिशन पर ध्यान देना चाहिए।एक्सपर्ट का अचूक वेट लॉस फॉर्मूलायदि आप बिना बीमार पड़े हमेशा के लिए फिट रहना चाहते हैं, तो इस 7-स्टेप फॉर्मूले को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं:
सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव (महादेव) की भक्ति के लिए अत्यंत पावन और फलदायी माना जाता है। इस पूरे महीने में देश भर से लाखों शिवभक्त (कांवड़िये) अपनी भक्ति और आस्था का परिचय देते हुए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। इस साल 2026 में कांवड़ यात्रा की शुरुआत 30 जुलाई से होने जा रही है और इसका समापन 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के साथ होगा।कांवड़ यात्रा केवल एक पैदल यात्रा नहीं है, बल्कि यह बेहद कठिन साधना और कठोर संकल्पों का पर्व है। इस यात्रा के दौरान कई धार्मिक नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है। इन्हीं में से एक सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण नियम यह है कि कांवड़ को कभी भी जमीन पर नहीं रखा जाता।आइए जानते हैं कि कांवड़ को जमीन पर न रखने के पीछे क्या धार्मिक कारण है और यदि अनजाने में ऐसा हो जाए तो भक्त को क्या करना चाहिए।कांवड़ को जमीन पर रखने की मनाही क्यों है?धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार:गंगाजल की पवित्रता: कांवड़ में भरा गया गंगाजल या पवित्र नदियों का जल अत्यंत शुद्ध और पूजनीय होता है। भक्त संकल्प लेकर नदी तट से जल भरते हैं ताकि उसे सीधा शिवलिंग पर अर्पित किया जा सके।अशुद्धि से बचाव: माना जाता है कि यदि कांवड़ या उसमें रखा पवित्र जल जमीन को छू लेता है, तो वह अशुद्ध व अपवित्र हो जाता है। इसलिए जब तक जलाभिषेक न हो जाए, इसे भूमि से स्पर्श कराने से बचा जाता है।कंधे पर उठाने का नियम: कांवड़िये पूरी यात्रा के दौरान कांवड़ को अपने कंधों पर उठाकर ही चलते हैं। विश्राम के समय भी कांवड़ को जमीन पर रखने के बजाय रास्ते में बने विशेष कांवड़ स्टैंड (Stand) या किसी ऊंचे स्थान (पेड़ की शाखा या स्टैंड) पर ही टांगा जाता है।क्या कांवड़ जमीन पर रखने से यात्रा टूट जाती है?धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि कांवड़ में भरा पवित्र जल या कांवड़ का कोई हिस्सा गलती से भी जमीन को छू जाए, तो कांवड़ यात्रा का 'अखंड संकल्प' खंडित (बाधित) माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार, जमीन से छुए हुए उस जल से भगवान शिव का जलाभिषेक नहीं किया जाता है।अगर गलती से कांवड़ जमीन पर रख जाए तो क्या करें?यदि किसी कांवड़िया से अनजाने या भूलवश कांवड़ जमीन पर रख जाती है, तो धार्मिक नियमों के अनुसार निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:क्षमा याचना: सबसे पहले हाथ जोड़कर भगवान भोलेनाथ से अपनी भूल के लिए सच्चे मन से क्षमा मांगें।मंत्र जाप: किसी पवित्र स्थान पर बैठकर निष्ठापूर्वक 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।पुनः जल भरना (पुनः संकल्प): नियम का निष्ठा से पालन करने वाले श्रद्धालु ऐसी स्थिति में अपनी यात्रा को वहीं से आगे बढ़ाने के बजाय दोबारा हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री या निकटतम पवित्र नदी के तट पर जाते हैं, फिर से शुद्ध जल भरते हैं और नए सिरे से अपनी कांवड़ यात्रा शुरू करते हैं।
शिव मंदिर आदर्श नगर में गूंजे श्याम भजन, देर रात तक भक्ति में झूमते रहे श्रद्धालु
अजमेर। आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वादशी के पावन अवसर पर आदर्श नगर स्थित शिव मंदिर में रविवार को श्री श्याम परिवार, आदर्श नगर की ओर से भव्य श्री श्याम संकीर्तन एवं महाप्रसादी का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। संकीर्तन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर श्याम बाबा के भजनों का आनंद […] The post शिव मंदिर आदर्श नगर में गूंजे श्याम भजन, देर रात तक भक्ति में झूमते रहे श्रद्धालु appeared first on Sabguru News .
फसल कटाई संबंधी राज्य स्तरीय प्रशिक्षण राजस्व मंडल में शुरू
अजमेर। कृषि वर्ष 2026-27 के तहत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएम एफबीवाई) एवं सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण (जीसीईएस) संबंधी राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सोमवार से राजस्व मंडल में शुरू हुआ। इस चार दिवसीय प्रशिक्षण में राज्य के सभी 41 जिलों के सांख्यिकी विभाग एवं भू अभिलेख शाखाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस राज्य स्तरीय […] The post फसल कटाई संबंधी राज्य स्तरीय प्रशिक्षण राजस्व मंडल में शुरू appeared first on Sabguru News .
भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में शामिल है, जहां से लाखों युवा और कुशल श्रमिक बेहतर रोजगार, कारोबार और अपने परिवार के उज्ज्वल भविष्य की तलाश में हर साल विदेश जाते हैं। खासकर खाड़ी (गल्फ) देशों, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में भारतीय प्रवासियों की एक बड़ी आबादी बसती है। हालांकि, इस आर्थिक समृद्धि और चमकते अवसरों के पीछे एक दर्दनाक सच्चाई भी छिपी है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा संसद (लोकसभा) में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 से 2025 के बीच विदेशों में हजारों भारतीय नागरिकों की जान गई है।सरकार की इस समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रवासियों की मौतों में सबसे बड़ा कारण प्राकृतिक वजहें (Natural Causes) हैं, लेकिन कार्यस्थल पर हादसे (Workplace Accidents), आत्महत्याएं, आपराधिक घटनाएं और अन्य परिस्थितियां भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।किन देशों में दर्ज हुईं सबसे ज्यादा मौतें?विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जिन देशों में भारतीय प्रवासियों की संख्या सबसे अधिक है, वहीं मौतों के आंकड़े भी सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं:सऊदी अरब (Saudi Arabia): सूची में सबसे ऊपर है, जहां 2023 से 2025 के बीच कुल 7,981 भारतीयों की मौत हुई। इनमें 6,376 प्राकृतिक मौतें, 182 कार्यस्थल हादसे, 354 आत्महत्याएं, 29 आपराधिक घटनाएं और 1,040 अन्य कारण शामिल हैं।संयुक्त अरब अमीरात (UAE): दूसरे स्थान पर रहे यूएई में कुल 7,458 भारतीयों ने जान गंवाई। इनमें 5,702 प्राकृतिक मौतें, 128 कार्यस्थल दुर्घटनाएं, 511 आत्महत्याएं, 25 अपराध से जुड़ी मौतें और 1,092 अन्य कारण रहे।अमेरिका (USA): अमेरिका में कुल 2,850 भारतीय नागरिकों की मौत दर्ज हुई, जिनमें 2,340 प्राकृतिक वजहों से, 46 कार्यस्थल हादसों में, 62 आत्महत्या के कारण और 37 अपराध की वजह से थीं।अन्य प्रमुख देश: कुवैत में 2,191, ओमान में 1,498, मलेशिया में 1,437 और इटली में 1,057 भारतीय नागरिकों की मृत्यु दर्ज की गई।इसके अलावा शीर्ष 20 देशों में कतर, बहरीन, सिंगापुर, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, जर्मनी, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, चीन, नाइजीरिया और थाईलैंड जैसे देश भी शामिल हैं।प्राकृतिक मौतों और हादसों के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: खाड़ी देशों में अत्यधिक चिलचिलाती गर्मी, लंबे कामकाजी घंटे, शारीरिक परिश्रम, हृदय रोग (Heart Attacks), मधुमेह और लगातार तनाव की वजह से बड़ी संख्या में प्राकृतिक मौतें दर्ज की जाती हैं।जोखिम भरे कार्यस्थल: निर्माण क्षेत्र (Construction), तेल व गैस रिफाइनरी और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले नीले कॉलर (Blue-collar) श्रमिकों को सुरक्षा मानकों की कमी के चलते हादसों का सामना करना पड़ता है।मानसिक तनाव और अकेलापन: अपनों से दूरी, भारी कर्ज, कम वेतन, ठेकेदारों/नियोक्ताओं का दबाव और सामाजिक अलगाव के कारण कई श्रमिक डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, जो कई मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं की वजह बनता है।प्रवासियों की सुरक्षा के लिए सरकार की मुख्य व्यवस्थाएंलोकसभा में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए कई स्थायी प्रणालियां शुरू की गई हैं:प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK): दिल्ली, दुबई, रियाद और जेद्दा जैसे प्रमुख स्थानों पर सहायता केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जो दूतावासों के साथ मिलकर चौबीसों घंटे प्रवासियों को कानूनी और मानसिक परामर्श (Counseling) देते हैं।ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: शिकायतों के तुरंत समाधान के लिए MADAD, CPGRAMS और e-Migrate जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं।बीमा और वित्तीय सहायता: 'प्रवासी भारतीय बीमा योजना' (PBBY) के तहत ईसीआर (ECR) कामगारों को दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता पर 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। इसके अलावा इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (ICWF) के जरिए संकटग्रस्त भारतीयों को कानूनी और चिकित्सा सहायता दी जाती है।शव भारत लाने की त्वरित प्रक्रिया: स्वास्थ्य मंत्रालय का eCARe पोर्टल विदेशों से पार्थिव शरीर को भारत लाने की मंजूरी देने की प्रक्रिया को पेपरलेस बनाता है, जिससे 48 घंटे के भीतर सभी जरूरी मंजूरियां दी जा सकें।
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में जारी उथल-पुथल के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी (LPG) की आपूर्ति पर भारी दबाव देखा जा रहा है। भारत अपनी घरेलू एलपीजी जरूरतों का करीब 60% हिस्सा आयात (Import) के जरिए पूरा करता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत आता है। हालांकि, इस वैश्विक संकट के बीच भारत से एक बेहद चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जहां देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रिफिल बुकिंग में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है।राज्यसभा में 27 जुलाई 2026 को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को जनवरी 2026 में कुल 18.19 करोड़ रिफिल बुकिंग मिली थीं, जो जून तक गिरकर महज 12.80 करोड़ रह गईं। यानी केवल 6 महीनों में करीब 5.39 करोड़ (लगभग 30%) कम बुकिंग हुई हैं।महीने-दर-महीने कैसा रहा LPG बुकिंग का ग्राफ?पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में युद्ध छिड़ने के समय घबराहट में बुकिंग बढ़ी थी, लेकिन उसके बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई:जनवरी 2026: 18.19 करोड़ बुकिंगफरवरी 2026: 16.65 करोड़ बुकिंगमार्च 2026 (युद्ध की शुरुआत): 18.00 करोड़ बुकिंगअप्रैल 2026: 13.24 करोड़ बुकिंग (रिकॉर्ड गिरावट)मई 2026: 12.98 करोड़ बुकिंगजून 2026: 12.80 करोड़ बुकिंगउज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की बुकिंग में भी 34% की कमीप्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के गरीब और ग्रामीण लाभार्थियों की बुकिंग में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है:जनवरी: 4.37 करोड़फरवरी: 4.05 करोड़मार्च: 3.69 करोड़अप्रैल: 3.04 करोड़मई: 2.84 करोड़जून: 2.90 करोड़जनवरी की तुलना में जून 2026 में उज्ज्वला लाभार्थियों द्वारा करीब 1.47 करोड़ कम सिलेंडर बुक कराए गए, जो कि 34 फीसदी की सीधी कमी को दर्शाता है। हालांकि, मई के मुकाबले जून में बेहद मामूली सुधार देखने को मिला।एलपीजी रिफिल बुकिंग घटने के क्या हैं मुख्य कारण?हालांकि सरकार की ओर से किसी एक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों के अनुसार इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हो सकते हैं:कीमतों में बढ़ोतरी: 1 अप्रैल 2026 को दिल्ली में 14.2 किग्रा घरेलू सिलेंडर की कीमत ₹913 थी, जो 1 जुलाई 2026 से बढ़कर ₹942 हो गई। वहीं, ₹300 की सब्सिडी के बाद उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए इसकी कीमत ₹613 से बढ़कर ₹642 हो गई है।ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक ईंधनों का सहारा: फरवरी-मार्च में एलपीजी आपूर्ति के संकट की आशंका के चलते ग्रामीण इलाकों में लोगों ने एलपीजी के साथ-साथ लकड़ी, गोबर के उपले, बायोगैस और फसल अवशेषों का इस्तेमाल बढ़ा दिया। ईंधन के मिले-जुले इस्तेमाल से एक सिलेंडर लंबे समय तक चल रहा है।शहरी क्षेत्रों में विकल्पों का चलन: शहरों में इलेक्ट्रिक कुकटॉप्स (Induction), पीएनजी (PNG) कनेक्शन और सोलर/इलेक्ट्रिक कुकिंग का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिससे एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता कम हुई है।आर्थिक चुनौतियां: कई गरीब परिवारों के लिए मासिक बजट के चलते हर महीने रिफिल कराना मुश्किल हो रहा है, जिससे वे जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक साधनों का उपयोग कर रहे हैं।सरकार का क्या कहना है?केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि घरेलू एलपीजी की कमी या बुकिंग में गिरावट के कारणों का कोई आधिकारिक विश्लेषण अभी जारी नहीं किया गया है।सरकार का कहना है कि:देश में घरेलू एलपीजी की कोई किल्लत या कमी नहीं है।वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को दुनिया के कई अन्य देशों की तुलना में काफी सस्ती दर पर रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है।सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) प्रति सिलेंडर लगभग ₹700 तक का अंडर-रिकवरी बोझ खुद वहन कर रही हैं।इसके अलावा, सरकार उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को ₹300 प्रति सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी लगातार जारी रख रही है।
असम में बाढ़ के बाद मंजर खौफनाक: 68 की मौत, 5.24 लाख लोग बेघर; 5 फीट तक जमा कीचड़ देख रो पड़े पीड़ित
पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम इस समय सदी की सबसे भयावह बाढ़ की त्रासदी झेल रहा है। लगातार मूसलाधार बारिश और नदियों के रौद्र रूप ने लाखों परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह तबाह कर दिया है। राज्य में इस प्राकृतिक आपदा से मरने वालों का आधिकारिक आंकड़ा बढ़कर 68 तक पहुंच गया है, जबकि 5.24 लाख से ज्यादा लोग अब भी बेघर होकर राहत शिविरों या ऊंचे स्थानों पर तिरपाल तानकर दिन काटने को मजबूर हैं।हालांकि कई इलाकों में अब पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन अपने पीछे तबाही की जो दर्दनाक तस्वीर यह बाढ़ छोड़ गई है, उसे देखकर हर कोई भावुक हो रहा है।शिवसागर, चराईदेव और नाजिरा में सबसे ज्यादा तबाहीबाढ़ की सबसे भारी मार शिवसागर, चराईदेव और नाजिरा क्षेत्रों पर पड़ी है। यहाँ हजारों घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और कई गांवों में लोगों के आशियानों के अंदर 4 से 5 फीट तक गाद और कीचड़ जम चुका है। घरों में रखा सालभर का राशन, कपड़े, कीमती सामान और फर्नीचर सब कुछ पानी और मिट्टी में मिलकर सड़ चुका है। बदबू और सड़ांध के कारण घरों के अंदर रहना या सांस लेना भी दूभर हो गया है।नाव ही बनी एकमात्र सहारा, राहत सामग्री पहुंचाना बड़ी चुनौतीप्रभावित इलाकों में सड़कें और पुल पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क बाकी दुनिया से कट गया है। ऐसे इलाकों में NDRF, SDRF, सेना, स्थानीय प्रशासन, RSS और सेवा भारती जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता नावों (Boats) के जरिए पीने का पानी, सूखा राशन और जरूरी दवाइयां पहुंचाने में दिन-रात जुटे हुए हैं। फिर भी पीड़ितों का कहना है कि तबाही के इस बड़े पैमाने के आगे राहत सामग्री अब भी नाकाफी साबित हो रही है।उजड़े आशियाने और भविष्य की चिंता में सिसकते पीड़ितबाढ़ पीड़ितों की आंखों में अपने जीवनभर की गाढ़ी कमाई को मिट्टी में मिलते देखने का गहरा दर्द साफ झलक रहा है। कई बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में असम में इतनी भयावह बाढ़ पहले कभी नहीं देखी। सिर से छत छीन जाने के बाद अब लोगों के सामने सबसे बड़ा संकट पीने के साफ पानी, भोजन और आने वाले दिनों में फैलने वाली जलजनित बीमारियों (Epidemics) से निपटने का है।राहत-बचाव कार्य तेज, सामान्य जीवन की बहाली में लगेगा लंबा वक्तप्रशासन और विभिन्न राहत एजेंसियां लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई हैं और राज्य भर में सैकड़ों राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। हालांकि, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय देने, जमीनी स्तर पर फैली गंदगी को हटाने और उन्हें दोबारा सामान्य जिंदगी की ओर लौटाने में अभी कई महीनों का समय लग सकता है।
सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और विशेष स्थान रखता है। यह पावन दिन अपने गुरुजनों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस साल यह शुभ पर्व 29 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महान ग्रंथ महाभारत और वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस पर्व को 'व्यास पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से 5 प्रकार के गुरुओं का पूजन और सम्मान करने से जीवन में सुख, शांति, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।आइए जानते हैं कि वे 5 गुरु कौन से हैं जिनका आशीर्वाद लेना इस दिन बेहद फलदायी माना गया है:1. मां (जीवन की पहली गुरु)शास्त्रों में माता को बालक का प्रथम गुरु माना गया है। मां ही बच्चे को बोलना, चलना, सही और गलत का भेद तथा जीवन के प्राथमिक संस्कार सिखाती है।कैसे करें सम्मान: गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर सबसे पहले अपनी मां के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। उन्हें उनकी पसंद के वस्त्र या कोई भेंट देकर उनका आभार व्यक्त करें। माता के आशीर्वाद से जीवन में सुरक्षा और अमिट सुख प्राप्त होता है।2. पिता (कर्तव्य और संघर्ष सिखाने वाले गुरु)पिता बच्चे को दुनिया की चुनौतियों का सामना करना, कड़ा परिश्रम, अनुशासन और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना सिखाते हैं।कैसे करें सम्मान: इस दिन पिता के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें। उन्हें रोली का तिलक लगाएं, माला पहनाएं या उपहार देकर सम्मानित करें। पिता का आशीर्वाद जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।3. शिक्षा देने वाले गुरु (शिक्षक)विद्यालय, कॉलेज या किसी भी कला-कौशल की शिक्षा देने वाले शिक्षक हमें अज्ञानता के अंधेरे से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं और आजीविका कमाने योग्य बनाते हैं।कैसे करें सम्मान: गुरु पूर्णिमा पर अपने शिक्षकों और प्राध्यापकों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर या दूर होने पर फोन/संदेश के माध्यम से उनका आभार व्यक्त करें। गुरु का सम्मान करने से मेधा बुद्धि और करियर में प्रगति होती है।4. आध्यात्मिक गुरु (दीक्षा देने वाले गुरु)आध्यात्मिक गुरु वह दीपक हैं जो इंसान का परिचय ईश्वर से कराते हैं और मन को शांति व मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।कैसे करें सम्मान: इस दिन अपने दीक्षा गुरु के आश्रम या स्थान पर जाकर उनके दिए मंत्रों का जाप करें। उनकी पादुकाओं या चरणों का पूजन कर यथाशक्ति दान-दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।5. महर्षि वेदव्यास और त्रिदेवचूंकि गुरु पूर्णिमा मुख्य रूप से व्यास पूर्णिमा है, इसलिए इस दिन जगतगुरु महर्षि वेदव्यास जी का पूजन करना अनिवार्य माना गया है।कैसे करें पूजन: महर्षि वेदव्यास जी के चित्र या मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलित करें। इसके साथ ही भगवान दत्तात्रेय (जिन्हें सनातन परंपरा में पहला गुरु माना गया है), भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा-अर्चना अवश्य करें।
सबसे ज्यादा कांग्रेस राज में हुए पेपर लीक : अरुण चतुर्वेदी
अलवर। राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा है कि विपक्ष वास्तव में पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर गंभीर है तो संसद में बहस से भागने के बजाय चर्चा करे। चतुर्वेदी ने सोमवार को अलवर में कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा […] The post सबसे ज्यादा कांग्रेस राज में हुए पेपर लीक : अरुण चतुर्वेदी appeared first on Sabguru News .
साउथ सिनेमा से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड तक अपनी अदाकारी का परचम लहराने वाले सुपरस्टार धनुष (Dhanush) किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अपने अब तक के करियर में वे कुल 6 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) अपने नाम कर चुके हैं। हालांकि, जब उन्हें 2024 में एक साथ दो-दो नेशनल अवॉर्ड्स से नवाजा गया था, तब सोशल मीडिया पर उन्हें भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। कई सिनेमा प्रेमियों और अन्य एक्टर्स के फैंस का मानना था कि उस साल अन्य फिल्में भी थीं जो इन अवॉर्ड्स की बेहतर हकदार थीं।उस समय धनुष ने इस विवाद पर शांति बनाए रखी थी, लेकिन अब उन्होंने इस पूरे मामले और अपनी फिल्मों को लेकर अपनी दिल की बात खुलकर कही है।'कई बड़ी फिल्में थीं हकदार, मैं सभी के प्यार का सम्मान करता हूं'एक साथ दो नेशनल अवॉर्ड जीतने और उस पर हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए धनुष ने बड़ी शालीनता से कहा, उस साल मुझे फिल्म 'रायन' के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था। लेकिन यह सच है कि उस साल वाकई में उससे भी कई बड़ी और बेहतरीन फिल्में थीं। उन फिल्मों के फैंस ने अपने पसंदीदा सितारों और सिनेमा के प्रति अपना प्यार दिखाया। यह पूरी तरह से सही है और मैं उनके इस प्यार व भावनाओं का पूरा सम्मान करता हूं।इसके साथ ही धनुष ने सिनेमा प्रेमियों और अपने चाहने वालों से भावुक अपील करते हुए कहा कि जब उन्हें दो नेशनल अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया है, तो कृपया सभी को इसका विरोध करने के बजाय इसे मिलकर सेलिब्रेट करना चाहिए।'रायन' और 'कैप्टन मिलर' के लिए मिला था सम्मानआपको बता दें कि साल 2024 में धनुष को उनकी निर्देशित व अभिनीत फिल्म 'रायन' (Raayan) के लिए बेस्ट रीजनल फिल्म की श्रेणी में नेशनल अवॉर्ड मिला था। वहीं, उनकी पीरियड-एक्शन फिल्म 'कैप्टन मिलर' (Captain Miller) के लिए उन्हें स्पेशल मेंशन कैटेगरी (Special Mention Category) के तहत बेस्ट एक्टर के सम्मान से नवाजा गया था।'रांझणा' और 'कर्नन' जैसी फिल्मों को नहीं मिला अवॉर्ड: धनुषअपने नेशनल अवॉर्ड्स का बचाव करते हुए और करियर का उदाहरण देते हुए धनुष ने याद दिलाया कि उनकी कई ऐसी कल्ट क्लासिक फिल्में थीं, जिन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना चाहिए था लेकिन वे चूक गईं।धनुष ने कहा कि उनकी बेहतरीन फिल्में जैसे—पुधुपेट्टई (Pudhupettai), 3, मयक्कम एन्ना (Mayakkam Enna), वड़ा चेन्नई (Vada Chennai), करनान (Karnan), मार्यन (Maryan) और हिंदी फिल्म रांझणा (Raanjhanaa) ऐसी फिल्में थीं जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बहुत प्रशंसा मिली और वे नेशनल अवॉर्ड की पूरी हकदार थीं। लेकिन बावजूद इसके इनमें से किसी भी फिल्म को नेशनल अवॉर्ड नहीं मिल सका। इसलिए, जब अब उन्हें पुरस्कार मिला है तो इसे विवादित बनाने के बजाय सकारात्मक रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए।धनुष की आने वाली फिल्में (Upcoming Movies)धनुष के वर्कफ्रंट की बात करें तो उनके पास इस समय कई बड़े और दिलचस्प प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं। वे जल्द ही 'ओम चैप्टर 1' (OM Chapter 1), 'कारा' (Karaa) और 'थामिज मुरुगन' (Thamizh Murugan) जैसी बहुप्रतीक्षित फिल्मों में अपनी मुख्य भूमिकाओं के साथ बड़े पर्दे पर जलवा बिखेरते नजर आएंगे।
NEET पेपर लीक विवाद और लगातार हो रहे छात्र आंदोलनों के भारी राजनीतिक दबाव के बीच बिहार सरकार ने एक बड़ा और राहत देने वाला कदम उठाया है। बिहार गृह विभाग ने बड़ा निर्देश जारी करते हुए हालिया प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने, उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR), दर्ज शिकायतों और जारी सभी पुलिस नोटिसों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का आधिकारिक आदेश दे दिया है।इसके साथ ही राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की है कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक हुए छात्र आंदोलन से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अब कोई नई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।तेज प्रताप यादव समेत 355 लोग होंगे जेल से रिहाबिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, NEET पेपर लीक के विरोध में हुए उग्र प्रदर्शनों के दौरान राज्य भर में कुल 355 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जबकि 694 लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया था।जेल जाने वालों में जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव भी शामिल हैं। गृह विभाग के विशेष सचिव द्वारा जारी नए आदेश के बाद अब तेज प्रताप यादव समेत जेल में बंद सभी 355 लोगों की जल्द से जल्द रिहाई की प्रशासनिक प्रक्रिया संबंधित जिलों में शुरू कर दी गई है।बातचीत और समाधान का रास्ता: गृह विभाग की सफाईबिहार सरकार के गृह विभाग का कहना है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और छात्रों के भविष्य व हितों की रक्षा करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कड़े कानूनी और दंडात्मक कदमों के बजाय बातचीत, सहानुभूति और शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता अपनाना ज्यादा बेहतर है। सरकार के इस अप्रत्याशित फैसले से पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों, अभ्यर्थियों और उनके चिंतित परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली है।26 जुलाई शाम 6 बजे के बाद लागू नहीं होगी छूटगृह विभाग ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि:यह पूरी राहत और केस वापसी केवल 26 जुलाई 2026 को शाम 6 बजे से पहले हुई घटनाओं पर ही लागू होगी।26 जुलाई शाम 6 बजे के बाद यदि कोई हिंसा, उपद्रव या गैर-कानूनी गतिविधि होती है, तो उस पर यह छूट लागू नहीं होगी।राज्य में कानून-व्यवस्था (Law and Order) बनाए रखने के लिए पुलिस आवश्यकता पड़ने पर नई घटनाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगी।राजनीतिक तूफान शांत करने की बड़ी कोशिशराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र में मोदी सरकार द्वारा NTA में सुधार के कदमों, एंटी-पेपर लीक बिल और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिहार की राज्य सरकार पर भी भारी दबाव था। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर आक्रामक था। ऐसे में बिहार सरकार ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को रद्द करने का कार्ड खेलकर राज्य में उबल रहे राजनीतिक तूफान और छात्रों के असंतोष को शांत करने की दिशा में यह बड़ा दांव चला है।
दुबई से मुंबई जा रहे इंडिगो के विमान में आग की चेतावनी, आपात स्थिति में राजकोट में लैंडिंग
राजकोट। दुबई से मुंबई जा रहे इंडिगो के एक विमान को आग की चेतावनी के बाद राजकोट में आपात स्थिति में उतारा गया। विमान की राजकोट में सुरक्षित लैंडिंग हुई। इस उड़ान में यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को मिलाकर कुल 194 लोग सवार थे। राजकोट हवाई अड्डे से प्राप्त जानकारी के अनुसार इंडिगो […] The post दुबई से मुंबई जा रहे इंडिगो के विमान में आग की चेतावनी, आपात स्थिति में राजकोट में लैंडिंग appeared first on Sabguru News .
भोपाल में शादी का झांसा देकर 29 वर्षीय युवती से रेप
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर 29 वर्षीय युवती से दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार पीड़िता पेशे से मेकअप आर्टिस्ट है। उसकी करीब एक माह पहले सोशल मीडिया […] The post भोपाल में शादी का झांसा देकर 29 वर्षीय युवती से रेप appeared first on Sabguru News .
संगरूर भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला, पुलिस जांच में जुटी
संगरूर। पंजाब में संगरूर स्थित भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय पर रविवार देर रात कथित तौर पर पेट्रोल बम से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार अज्ञात हमलावरों ने कथित रूप से बीयर की बोतल में पेट्रोल भरकर उसे पेट्रोल बम के रूप में तैयार किया और भाजपा कार्यालय […] The post संगरूर भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला, पुलिस जांच में जुटी appeared first on Sabguru News .
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य प्रतिवादियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (क्रिमिनल रिविजन पिटीशन) पर जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया।
अगर आप अपने परिवार के लिए एक ऐसी मिड-साइज या कॉम्पैक्ट SUV की तलाश में हैं जो देखने में मॉडर्न हो, जिसमें फीचर्स की कोई कमी न हो और जिसकी रनिंग कॉस्ट (ईंधन खर्च) बेहद कम हो, तो Maruti Suzuki Brezza ZXi CNG आपके लिए एक परफेक्ट विकल्प साबित हो सकती है। हाल ही में मारुति सुजुकी ने ब्रेज़ा को नए अपडेट्स और स्टाइलिंग के साथ बाज़ार में उतारा है। हालांकि पूरी तरह से लोडेड ZXi+ वेरिएंट में सीएनजी का ऑप्शन नहीं आता, लेकिन ZXi CNG वेरिएंट उन सभी प्रैक्टिकल फीचर्स से लैस है जो एक आम कार खरीदार अपनी रोज़मर्रा की ड्राइविंग में इस्तेमाल करता है।₹11.65 लाख (एक्स-शोरूम) की कीमत पर आने वाला यह ZXi वेरिएंट फैक्ट्री-फिटेड S-CNG टेक्नोलॉजी के साथ लाइन-अप का सबसे टॉप मॉडल है।इंजन, पावर और अंडरबॉडी CNG टैंक का बड़ा कमालमारुति ब्रेज़ा सीएनजी में 1.5-लीटर K15C Dual Jet, Dual VVT इंजन दिया गया है, जो 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ आता है।पावर आउटपुट: पेट्रोल मोड में यह इंजन 103.05 PS की पावर और 139 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। वहीं, CNG मोड में यह 87.8 PS की पावर और 121.5 Nm का टॉर्क देता है।शानदार माइलेज: कंपनी के दावों के अनुसार, यह SUV 26.90 km/kg तक का बेहतरीन माइलेज देती है।डिग्गी में पूरा बूट स्पेस मिलेगा!पुरानी या आम सीएनजी गाड़ियों की सबसे बड़ी समस्या यह होती थी कि सीएनजी सिलेंडर डिग्गी (Boot) का पूरा स्पेस घेर लेता था। मारुति सुजुकी ने इस समस्या का तोड़ निकालते हुए Brezza CNG में अंडरबॉडी-माउंटेड सीएनजी टैंक (Underbody-Mounted Tank) तकनीक दी है। टैंक को गाड़ी के नीचे शिफ्ट करने से बूट स्पेस पूरी तरह खाली और सुरक्षित रहता है, जिससे लंबी दूरी के पारिवारिक सफर में सामान रखने की कोई दिक्कत नहीं होती।VXi CNG के मुकाबले ZXi CNG में क्या एक्स्ट्रा फीचर्स मिलते हैं?Brezza VXi CNG (₹9.99 लाख) से ZXi CNG (₹11.65 लाख) पर अपग्रेड करने के लिए करीब ₹1.66 लाख ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन बदले में आपको कई काम के प्रीमियम फीचर्स मिलते हैं:एक्सटीरियर अपग्रेड्स: डुअल LED प्रोजेक्टर हेडलैंप, फ्लोटिंग LED DRLs, रूफ रेल्स, 16-इंच के पेंटेड अलॉय व्हील्स, स्मोक क्रोम फ्रंट ग्रिल और डुअल-टोन कलर ऑप्शन।इंटीरियर और कम्फर्ट: इलेक्ट्रिक सनरूफ, कूलिंग पैड के साथ वायरलेस फोन चार्जर, पुश-बटन स्टार्ट/स्टॉप, टिल्ट और टेलीस्कोपिक स्टीयरिंग, रियर सेंटर आर्मरेस्ट (कपहोल्डर के साथ), 60:40 स्प्लिट-फोल्डिंग रियर सीट्स और एम्बिएंट लाइटिंग।इन्फोटेनमेंट: 7-इंच टचस्क्रीन सिस्टम, जिसमें वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay के साथ एक्स्ट्रा ट्वीटर भी दिए गए हैं।सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP), हिल होल्ड असिस्ट, रियर पार्किंग कैमरा व सेंसर और ISOFIX चाइल्ड सीट एंकर।ZXi+ वेरिएंट के मुकाबले क्या-क्या फीचर्स नहीं मिलते?चूंकि ZXi+ टॉप-ऑफ-द-लाइन वेरिएंट है (जो सिर्फ पेट्रोल में उपलब्ध है), उसमें कुछ अतिरिक्त लग्जरी सुविधाएं मिलती हैं जो ZXi CNG में नहीं हैं:बड़ा 10.1-इंच SmartPlay Pro X इंफोटेनमेंट सिस्टम और सराउंड ऑडियो।HD 360-डिग्री कैमरा और हेड-अप डिस्प्ले (HUD)।हवादार (Ventilated) फ्रंट सीटें और लेदरेट सीट्स।कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी (Suzuki Connect), बिल्ट-इन एलेक्सा और OTA अपडेट्स।सेफ्टी में 360-डिग्री व्यू के साथ ब्लाइंड स्पॉट वार्निंग और TPMS हाईलाइन।क्या Brezza ZXi CNG सबसे वैल्यू-फॉर-मनी वेरिएंट है?अधिकांश मिड-साइज फैमिली कार खरीदारों के लिए इसका जवाब 'हाँ' है।Brezza ZXi CNG आपको एक सुरक्षित और विश्वसनीय SUV का अनुभव देती है। अंडरबॉडी टैंक से बूट स्पेस की समस्या खत्म हो जाती है, जबकि इलेक्ट्रिक सनरूफ, वायरलेस चार्जिंग, अलॉय व्हील्स, पुश-बटन स्टार्ट और 6 एयरबैग्स जैसे फीचर्स इसे आधुनिक बनाते हैं। ZXi+ में मिलने वाली सुविधाएं (जैसे 360 कैमरा या वेंटिलेटेड सीट्स) लग्जरी का हिस्सा हैं, लेकिन दैनिक ड्राइविंग की बुनियादी जरूरतों में बाधा नहीं बनतीं।यदि आपकी मंथली रनिंग ज्यादा है और आप कम बजट में प्रीमियम कम्फर्ट, बेहतरीन रीसेल वैल्यू और स्पेस चाहते हैं, तो मारुति ब्रेज़ा ZXi CNG आपके बजट और जरूरतों का सबसे संतुलित विकल्प है।
श्रीगंगानगर : नशे में मामूली पर विवाद के चलते युवक की हत्या
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के भागसर गांव में रविवार देर रात एक मजदूर युवक ने झगड़ा हो जाने पर दूसरे युवक की गर्दन काट कर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों ने सोमवार का बताया कि मृतक की पहचान रमेश सोनी (37) निवासी भागसर के रूप में हुई है। आरोपी युवक को हिरासत में ले […] The post श्रीगंगानगर : नशे में मामूली पर विवाद के चलते युवक की हत्या appeared first on Sabguru News .
देश के अधिकांश राज्यों में इस समय मानसून अपने पूरे शबाब पर है। असम और गुजरात से लेकर ओडिशा तक नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर रखा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 जुलाई (मंगलवार) के लिए अपना ताजा मौसम बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 28 जुलाई को दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) का अलर्ट जारी किया गया है।इसके साथ ही, देश के 15 से अधिक अन्य राज्यों में भी मूसलाधार बारिश, 65 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं, आकाशीय बिजली और समुद्र में भीषण उथल-पुथल की चेतावनी दी गई है।दिल्ली-UP समेत इन 12 राज्यों में 'अति भारी बारिश' का अलर्टIMD के मुताबिक, 28 जुलाई को देश के 12 प्रमुख क्षेत्रों में तेज बादलों के जमावड़े के साथ भारी से बहुत भारी वर्षा दर्ज होने का अनुमान है:दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा व चंडीगढ़: मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ अति भारी बारिश होगी।उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश: पहाड़ी राज्यों में तेज बारिश के कारण लैंडस्लाइड (भूस्खलन) और नदियों के उफान पर आने की आशंका है।पंजाब: राज्य के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का पूर्वाकलन है।ओडिशा, छत्तीसगढ़ व विदर्भ: मध्य और पूर्वी भारत के इन हिस्सों में मानसून की गतिविधियां काफी उग्र रहेंगी।मध्य महाराष्ट्र व कर्नाटक: मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों और तटीय व दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश जारी रहेगी।इन 15 राज्यों में भी होगी मूसलाधार बरसातमौसम विभाग ने देश के 15 अन्य राज्यों में छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है:उत्तर व पश्चिम भारत: पूर्वी राजस्थान, गुजरात रीजन और कोंकण व गोवा में मूसलाधार बारिश हो सकती है।मध्य भारत: मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज बारिश का अलर्ट है।पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत: पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के पहाड़ी राज्यों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज होगी।दक्षिण भारत: तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर आंतरिक कर्नाटक और केरल व माहे में तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है।65 किमी/घंटा की तूफानी हवाएं और वज्रपात की चेतावनीबारिश के साथ-साथ कई राज्यों में आंधी, बिजली और समुद्री तूफानों का खतरा बना रहेगा:तूफानी हवाएं (40-50 किमी/घंटा): अंडमान-निकोबार, तटीय आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल और पूरे कर्नाटक में तेज हवाएं चलेंगी।वज्रपात (आकाशीय बिजली): उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में बिजली गिरने का खतरा है, इसलिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।समुद्री अलर्ट (मछुआरों के लिए चेतावनी): अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौसम बेहद खराब रहेगा। ओडिशा और पश्चिम बंगाल तटों पर 55 से 65 किमी/घंटा (झोंके 75 किमी/घंटा) की रफ्तार से भयंकर हवाएं चलेंगी। मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
एमसीडी टोल टैक्स टेंडर में 500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप, 'आप' ने टेंडर रद्द करने की मांग की
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में सोमवार को टोल टैक्स और ईसीसी कलेक्शन टेंडर को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा पर टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और करीब 500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाते हुए पूरे टेंडर को तत्काल रद्द कर दोबारा ओपन टेंडर जारी करने की मांग की।
भीलवाड़ा एसपी से महिला से अभद्र व्यवहार करने वाले युवक की शिकायत
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के गांधीनगर थाना क्षेत्र में एक महिला से कथित अभद्र व्यवहार काे लेकर पुलिस कार्रवाई में देरी से नाराज कई महिलाएं रविवार देर रात करीब 12 बजे पुलिस अधीक्षक आवास पहुंचीं और आरोपी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की। प्राप्त जानकारी के अनुसार कनक विहार कॉलोनी निवासी एक महिला […] The post भीलवाड़ा एसपी से महिला से अभद्र व्यवहार करने वाले युवक की शिकायत appeared first on Sabguru News .
पुष्कर घाटी पैदल यात्रा मार्ग पर कांवड़ यात्रियों की सुविधा के लिए 4 दिन चलेगा श्रमदान
अजमेर। आगामी श्रावण मास और कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए पुष्कर घाटी के पैदल यात्रा मार्ग पर विशेष सफाई अभियान शुरू किया गया है। वर्षों से सेवा कार्य कर रही टीम ने पहले दिन रविवार सुबह 7 बजे से करीब पांच घंटे तक श्रमदान कर मार्ग को साफ-सुथरा बनाया। अभियान के दौरान रास्ते […] The post पुष्कर घाटी पैदल यात्रा मार्ग पर कांवड़ यात्रियों की सुविधा के लिए 4 दिन चलेगा श्रमदान appeared first on Sabguru News .
रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर मिडिल ईस्ट के संघर्षों तक, आधुनिक युद्ध क्षेत्र में ड्रोन्स और लॉइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन्स) ने जंग का पूरा तरीका बदल दिया है। भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भी यह साबित किया था कि भविष्य की जंगों में मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) की भूमिका कितनी निर्णायक होगी। दुश्मन के इन्हीं हवाई खतरों और ड्रोन्स के झुंड (Swarm Drones) को समय रहते हवा में ही पूरी तरह तबाह करने के लिए भारत ने एक बड़ा और स्वदेशी मील का पत्थर हासिल कर लिया है। इस नई स्वदेशी तकनीक का नाम है—भार्गवास्त्र (Bhargavastra)।भारतीय सेना के सामने नागपुर फैसिलिटी में हुआ प्रदर्शनभारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने 24 जुलाई को नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) की फैसिलिटी में भार्गवास्त्र का सफलता पूर्वक प्रदर्शन किया गया। मेक-II (Make-II) कार्यक्रम के तहत विकसित यह एक वीकल-माउंटेड (गाड़ियों पर तैनात होने वाला) लेयर्ड हार्ड-किल काउंटर-ड्रोन सिस्टम है। इस प्रदर्शन के दौरान सिस्टम ने दुश्मन के ड्रोन्स के झुंड को सफलतापूर्वक डिटेक्ट किया, रियल-टाइम एयर पिक्चर जनरेट की और बिना किसी इंसानी चूक के टारगेट सेट कर लिया।10 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के ड्रोन्स की पहचानभार्गवास्त्र एक बेहद एडवांस्ड C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) आर्किटेक्चर पर काम करता है। इसमें त्रिस्तरीय (3-Tier) सेंसर तकनीक लगाई गई है:डिटेक्शन क्षमता: यह 10 किलोमीटर की दूरी से ही बड़े UAVs और कम दूरी पर छोटे ड्रोन्स का पता लगा लेता है।सेंसर तकनीक: इसमें दिन और रात दोनों समय सटीक ट्रैकिंग के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सेंसर दिए गए हैं।पैसिव RF सेंसर: यह बिना अपनी लोकेशन जाहिर किए दुश्मन के रेडियो-फ्रीक्वेंसी सिग्नल को ट्रैक कर लेता है।इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से आगे 'हार्ड-किल' तकनीकपारंपरिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या सिग्नल ब्लॉक करने पर निर्भर रहते हैं, लेकिन आधुनिक ऑटोनॉमस ड्रोन्स पर जैमिंग का असर नहीं होता। भार्गवास्त्र को विशेष रूप से 'हार्ड-किल' तकनीक से लैस किया गया है। इसका मतलब यह है कि यह अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स और बेहद सटीक गाइडेड माइक्रो-मिसाइलों के कॉम्बिनेशन से दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही सीधे हमला करके भौतिक रूप से नष्ट (Destroy) कर देता है।रेगिस्तान से लेकर 5,000 मीटर ऊंचे पहाड़ों पर तैनातीभार्गवास्त्र को भारत के हर तरह के दुर्गम इलाकों के हिसाब से तैयार किया गया है। इसे तपते रेगिस्तान, मैदानी इलाकों से लेकर 5,000 मीटर (करीब 16,000 फीट) से ज्यादा ऊंची बर्फीली चोटियों पर भी आसानी से तैनात किया जा सकता है। यह भारतीय सेना के मौजूदा कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क के साथ तुरंत जुड़ जाता है, जिससे भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध में काफी बढ़त मिलेगी।सस्ते रॉकेट्स से करोड़ों की बचतअक्सर देखा जाता है कि दुश्मन के कुछ लाख रुपये के सस्ते ड्रोन्स को गिराने के लिए सेनाओं को करोड़ों रुपये की सरफेस-टू-एयर मिसाइलें (SAMs) दागनी पड़ती हैं, जो आर्थिक रूप से काफी नुकसानदेह होता है। भार्गवास्त्र का सबसे बड़ा फायदा इसकी कम लागत है। यह सस्ते माइक्रो-रॉकेट्स का उपयोग करके दुश्मन के ड्रोन्स को नष्ट करता है, जिससे भारतीय सेना का रक्षा खर्च काफी कम हो जाएगा।ग्लोबल ड्रोन हब बनने की ओर भारत का कदमरक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विजन के अनुसार, भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण और एंटी-ड्रोन तकनीक में दुनिया का ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। भार्गवास्त्र का यह सफल प्रदर्शन साबित करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के दम पर भारत अब अपनी सीमाओं की सुरक्षा पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर करने के लिए तैयार है।
हिंदू धर्म में सावन के महीने को बेहद पवित्र और भगवान शिव का सबसे प्रिय मास माना जाता है। इस पूरे महीने में करोड़ों शिवभक्त महादेव की भक्ति में लीन रहते हैं, व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान शिव का रूप अन्य सभी देवी-देवताओं से काफी अलग और निराला है। उनके शरीर पर विभूति, गले में सांप, सिर पर आधा चांद और जटाओं में गंगा विराजमान हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव के ये सभी प्रतीक सिर्फ उनके रूप का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनमें ज्ञान, धैर्य, साहस और संतुलन जैसे जीवन के सबसे बड़े सबक छिपे हैं?आइए जानते हैं भगवान शिव से जुड़े 11 प्रमुख प्रतीकों का असली आध्यात्मिक अर्थ:1. त्रिशूल: भूत, वर्तमान और भविष्य का संतुलनभगवान शिव का अस्त्र 'त्रिशूल' तीन कांटों से मिलकर बना है। यह सृष्टि के निर्माण, संरक्षण और विनाश को दर्शाता है। इसके अलावा यह काल के तीन रूपों—भूत, वर्तमान और भविष्य का प्रतीक है, जो हमें याद दिलाता है कि महादेव समय के चक्र से भी परे हैं।2. डमरू: ब्रह्मांड की पहली ध्वनि और निरंतरतामाना जाता है कि डमरू की ध्वनि से ही इस पूरी सृष्टि की शुरुआत हुई थी। डमरू का संगीत जीवन के लगातार चलने वाले चक्र और बदलाव को दर्शाता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में परिवर्तन ही एक स्वाभाविक नियम है।3. तीसरा नेत्र: अज्ञानता और नकारात्मकता का अंतमहादेव की तीसरी आंख ज्ञान, अंतर्दृष्टि और उच्च चेतना का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब शिव अपनी तीसरी आंख खोलते हैं, तो अज्ञानता, अहंकार और सभी नकारात्मक शक्तियों का विनाश हो जाता है।4. आधा चांद: मन की शांति और भावनात्मक संतुलनशिव के मस्तक पर सुशोभित आधा चांद (चंद्रमा) समय और मन के संतुलन का प्रतीक है। जिस तरह चंद्रमा घटता-बढ़ता रहता है, उसी तरह जीवन में सुख-दुख आते रहते हैं। यह प्रतीक हमें हर स्थिति में शांत रहने की सीख देता है।5. जटाओं में गंगा नदी: दया और अनियंत्रित शक्ति पर नियंत्रणशिव की जटाओं से निकलने वाली मां गंगा पवित्रता और करुणा का प्रतीक हैं। जब गंगा का वेग पृथ्वी के लिए विनाशकारी हो सकता था, तब शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समेटकर उनका वेग शांत किया था। यह हमें अपनी शक्ति और ऊर्जा को सही दिशा में नियंत्रित करने का पाठ पढ़ाता है।6. गले में सांप (वासुकि): निडरता और इच्छाओं पर काबूमहादेव के गले में लिपटा जहरीला कोबरा नाग यह दिखाता है कि एक साधक को अपने डर और बेकाबू इच्छाओं पर पूरी तरह से नियंत्रण रखना चाहिए। यह विपरीत परिस्थितियों में भी शांत और सजग रहने का संदेश देता है।7. नीलकंठ: त्याग, साहस और दूसरों की रक्षासमुद्र मंथन के दौरान जब संपूर्ण ब्रह्मांड को बचाने के लिए शिव ने हलाहल विष पिया था, तब उनका कंठ नीला पड़ गया था। शिव का 'नीलकंठ' स्वरूप आत्म-बलिदान, साहस और समाज के कल्याण के लिए विष पीने (बुराइयों को सहने) की प्रेरणा देता है।8. शरीर पर विभूति (भस्म): नश्वरता और वैराग्यभगवान शिव अपने शरीर पर श्मशान की पवित्र राख लगाते हैं। यह भस्म हमें याद दिलाती है कि यह भौतिक संसार और शरीर नश्वर है। इसलिए इंसान को घमंड छोड़कर विनम्रता, वैराग्य और आध्यात्मिक उन्नति पर ध्यान देना चाहिए।9. बाघ की खाल: अहंकार और वासना पर जीतशिवजी का बाघ की खाल पर विराजमान होना यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने अहंकार, घमंड और हिंसक इच्छाओं पर पूरी तरह से विजय प्राप्त कर ली है। यह आत्म-नियंत्रण से मिलने वाली आंतरिक शक्ति का प्रतीक है।10. रुद्राक्ष की माला: शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक जागृतिपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। रुद्राक्ष की माला मन को शांति, सुरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है। शिवभक्त इसे अपनी साधना और जप के लिए धारण करते हैं।11. नंदी और शिवलिंग: अनन्य भक्ति और अनंत ऊर्जानंदी: शिवजी का वाहन नंदी धैर्य, विश्वास और वफादारी का प्रतीक है। मंदिरों में नंदी का मुख हमेशा शिवलिंग की ओर होता है, जो ईश्वर के प्रति अटूट ध्यान को दर्शाता है।शिवलिंग: शिवलिंग भगवान शिव के निराकार और अनंत स्वरूप का प्रतीक है। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) और सृष्टि के मूल आधार को प्रदर्शित करता है।
हम सब अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में जींस पहनते हैं और लगभग हर नीली जींस की दाईं जेब के अंदर एक छोटी सी जेब बनी होती है। आजकल लोग इसमें सिक्के, चाबियां, पेनड्राइव या वायरलेस ईयरबड्स जैसी छोटी चीजें रख लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब पहली बार जींस डिजाइन की गई थी, तब यह छोटी जेब किसलिए बनाई गई थी? अगर आपको लगता है कि यह सिक्के रखने के लिए बनी है, तो आप गलत हैं। दरअसल, इस छोटी पॉकेट का इतिहास 19वीं सदी के आखिर से जुड़ा है और इसे काम के दौरान पॉकेट वॉच (Pocket Watch या जेब में रखने वाली घड़ी) को सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया था।1873 में लेवी स्ट्रॉस ने क्यों बनाई थी यह खास जेब?इस छोटी जेब की शुरुआत साल 1873 में हुई थी, जब लेवी स्ट्रॉस (Levi Strauss) और दर्जी जैकब डेविस ने मिलकर दुनिया की पहली मजबूत डेनिम वर्क पैंट का पेटेंट कराया था। उस दौर में इसे वेस्ट ओवरऑल कहा जाता था, जिसे खदानों में काम करने वाले मजदूरों, काउबॉय, बढ़ई और रेलवे कर्मचारियों के लिए बनाया गया था।19वीं सदी में लोग कलाई घड़ी नहीं, बल्कि चेन वाली पॉकेट वॉच का इस्तेमाल करते थे। खदानों और निर्माण स्थलों पर काम करते समय अगर इस घड़ी को पैंट की सामान्य जेब में रखा जाता, तो औजारों, कीलों और पत्थरों से टकराकर उसका शीशा टूटने या उस पर खरोंच आने का डर रहता था। इसी समस्या का हल निकालते हुए लेवीज़ (Levi's) ने सामने वाली दाईं जेब के अंदर एक छोटी और टाइट पॉकेट बनाई, ताकि घड़ी एक जगह स्थिर रहे, बाहर न गिरे और काम करते वक्त सुरक्षित रहे। मजदूर आसानी से चेन खींचकर घड़ी बाहर निकालते और समय देख लेते थे।द्वितीय विश्व युद्ध और स्टील की कमी का असर20वीं सदी के मध्य तक दौर बदला और लोगों ने पॉकेट वॉच की जगह कलाई पर घड़ी पहनना शुरू कर दिया। इसके साथ ही इस छोटी जेब का असल मकसद तो खत्म हो गया, लेकिन यह जींस के क्लासिक डिजाइन का हिस्सा बनी रही। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब अमेरिका में स्टील की भारी कमी हुई, तब लेवीज़ ने सेना के लिए धातु बचाने के मकसद से कुछ समय के लिए इस छोटी जेब पर लगे रिवेट्स (धातु के मजबूत जोड़) हटा दिए थे। युद्ध खत्म होने के बाद इन्हें दोबारा जोड़ा गया।आज 150 साल बाद भी बनी हुई है जींस की पहचानहालांकि आज पॉकेट वॉच का दौर बीत चुका है और लोग इस जेब में छोटी-मोटी चीजें रखते हैं, फिर भी जींस बनाने वाली ब्रांड्स ने 150 साल पुराने इस ओरिजिनल डिजाइन को नहीं बदला। जो जेब कभी खदानों के मजदूरों की घड़ी बचाने के लिए बनाई गई थी, वह आज मॉडर्न जींस और फैशन की एक प्रतिष्ठित पहचान बन चुकी है।
कॉकरोच जनता पार्टी (cjp) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं लेने और विभिन्न राज्यों में कथित पुलिस कार्रवाई जारी रहने का आरोप लगाते हुए दोबारा बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। इस बीच, किसी भी संभावित विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली ...
दतिया उपचुनाव में भले ही आशुतोष तिवारी प्रत्याशी हैं, लेकिन चुनाव प्रचार के दौर में हम सभी प्रत्याशी हैं। यहां लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच है। कांग्रेस 5 पीढ़ियों में केवल एक ही परिवार में सिमट गई। कभी किसी को मौका नहीं दिया। दतिया में भी ...
गुरु पूर्णिमा पर शिष्य और गुरु, दोनों भूमिका में दिखेंगे सीएम योगी
सनातन विचार दर्शन एवं संस्कृति में गुरु-शिष्य के रिश्ते को प्रतिष्ठित करने वाले पावन पर्व गुरु पूर्णिमा गोरक्षपीठ के लिए विशेष होती है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव वह अवसर होता है जब गोरक्षपीठाधीश्वर, शिवावतार एवं नाथपंथ के आदिगुरु महायोगी गोरखनाथ सहित ...
श्रावण की आस्था, शिवभक्तों का उत्साह… कांवड़ यात्रा-2026 के स्वागत को मेरठ पूरी तरह तैयार
Meerut Kanwar Yatra: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र काल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष का पान करने के बाद भगवान शिव के शरीर की तपन शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर पवित्र नदियों का जल ...
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुख शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण-2024 की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर ...
CJP ने सरकार पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
अयोध्या राम मंदिर में बड़ा बदलाव, ऑनलाइन दान करते ही तुरंत मिलेगी डिजिटल रसीद
Ram Mandir online donation: अयोध्या में श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के हालिया मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राम भक्तों के लिए ऑनलाइन ...
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, आरोपों से मुक्ति के लिए चंपत राय की कठोर साधना!
Champat Rai Chaturmas: राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवादों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने आध्यात्मिक साधना का मार्ग चुन लिया है। अपने ऊपर लगे आरोपों से मुक्ति और आत्मिक शांति के लिए 80 वर्षीय चंपत राय ने ...
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहल और सदन में लगातार बनाए गए संवाद का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 पर गतिरोध समाप्त हो गया है और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने मंगलवार से इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा शुरू करने पर सहमति व्यक्त की है।
यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) पर छिड़ी एक अंतहीन बहस बन गया है। देश की साहित्यिक और लेखक बिरादरी इस मुद्दे पर दो स्पष्ट और विपरीत ध्रुवों पर बंट गई है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने बच्चों और बेटियों के भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए एक छोटी बच्ची से हुई मुलाकात का जिक्र किया।
भारत सरकार ने ब्लैक सी (Black Sea) में वाणिज्यिक जहाज MV OMORFI पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत के बाद यूक्रेन के भारत स्थित राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक (Oleksandr Polishchuk) को सोमवार को तलब किया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना पर गहरी ...
जस्टिस उज्जल भुइयां बोले, गंगा में नाव पर बिरयानी खाना अपराध नहीं, तो लोगों को गिरफ्तार क्यों किया
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि देश में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और अपनी बात रखने के अधिकार का दायरा कई बार सीमित होता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों की गिरफ्तारी और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों के साथ कठोर व्यवहार जैसे मामलों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को चेतावनी दी कि यदि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेगी। पार्टी का आरोप है कि देशव्यापी प्रदर्शन वापस लेने के बाद केंद्र के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया ...
श्रावण मास में शाक खाना क्यों है वर्जित?
Why leafy vegetables are avoided in Shravan: श्रावण मास/ सावन में हरे पत्तेदार साग या शाक न खाने का नियम केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी है। इसे धार्मिक ग्रंथों और आधुनिक विज्ञान दोनों ...
फर्जी Air Suvidha 2.0 वेबसाइटों से रहें सावधान, सरकार ने यात्रियों के लिए जारी की चेतावनी
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने शनिवार को हवाई यात्रियों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी करते हुए फर्जी Air Suvidha 2.0 वेबसाइटों और पोर्टलों से सतर्क रहने की अपील की है। मंत्रालय ने कहा है कि कुछ अनधिकृत वेबसाइटें खुद को Air ...
श्रेयस अय्यर थे तो बच गए... वरना रोहित-विराट के सामने इस हरकत पर ईशान किशन की खटिया खड़ी होना तय
भारतीय क्रिकेट टीम के ड्रेसिंग रूम का माहौल और मैदान पर खिलाड़ियों के बीच की आपसी मस्ती अक्सर कैमरे में कैद हो जाती है, जो फैंस के बीच चर्चा का बड़ा केंद्र बनती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन (Ishan Kishan) से जुड़ा एक मजेदार और दिलचस्प वाकया तेजी से वायरल हो रहा है। मैदान पर खेल के दौरान ईशान द्वारा की गई एक अनूठी हरकत को देखकर क्रिकेट प्रेमियों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि गनीमत रही कि उस समय क्रीज पर समझदार और शांत स्वभाव के श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) मौजूद थे। अगर उनकी जगह कप्तान रोहित शर्मा या दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली होते, तो मैदान पर ही ईशान की क्लास लग जाती और उनकी खटिया खड़ी होना पूरी तरह तय था।मैदान पर क्या थी वह हरकत जिसने खींचा सबका ध्यान?भारतीय खिलाड़ी अपनी आक्रामक ऊर्जा और मैदान पर हाई-वोल्टेज मनोरंजन के लिए जाने जाते हैं। मैच के दौरान जब माहौल थोड़ा तनावपूर्ण या रोमांचक होता है, तो खिलाड़ी आपस में हल्का-फुल्का मजाक करके दबाव को कम करने की कोशिश करते हैं। ईशान किशन अक्सर अपनी जिंदादिल और नटखट शैली के लिए जाने जाते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने मैदान पर कुछ ऐसा कर दिया जिसे देखकर वहां मौजूद साथी खिलाड़ी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। हालांकि, इस तरह की गैर-गंभीर हरकतें कई बार सीनियर खिलाड़ियों को रास नहीं आती हैं, और यही वजह है कि इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद से ही फैंस इस पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।श्रेयस अय्यर के शांत स्वभाव ने कैसे बचा लिया मामला?घटना के वक्त मैदान पर मौजूद श्रेयस अय्यर ने जिस तरह से परिपक्वता दिखाते हुए इस पूरी स्थिति को संभाला, उसकी सराहना की जानी चाहिए। श्रेयस अपने शांत और कूल अंदाज के लिए जाने जाते हैं, जो दबाव के क्षणों में भी अपना आपा नहीं खोते हैं। उन्होंने ईशान की इस हरकत को बड़े ही दोस्ताना अंदाज में टाल दिया और खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। यदि श्रेयस की जगह टीम के सीनियर और सख्त अनुशासन वाले कप्तान रोहित शर्मा या रन मशीन विराट कोहली होते, तो खेल की गरिमा को ध्यान में रखते हुए वे मैदान पर ही अपनी नाराजगी जाहिर करने से बिल्कुल नहीं चूकते।सीनियर खिलाड़ियों का अनुशासन और युवा खिलाड़ियों की मस्तीभारतीय टीम में अनुशासन और मैदान पर आक्रामकता का एक लंबा इतिहास रहा है। जहां एक तरफ टीम के युवा खिलाड़ी अपनी ऊर्जा और मस्ती भरे अंदाज से ड्रेसिंग रूम का माहौल हल्का रखते हैं, वहीं रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी हर गेंद पर सौ प्रतिशत एकाग्रता और अनुशासित रवैये की वकालत करते हैं। यही कारण है कि क्रिकेट प्रेमी इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि युवा खिलाड़ियों को सीनियरों के सामने हमेशा अपनी हरकतों पर थोड़ा नियंत्रण रखना पड़ता है, जबकि श्रेयस अय्यर जैसे दोस्तों के साथ उन्हें थोड़ी छूट मिल जाती है।
क्या विपक्ष के नेता पद से बर्खास्त होंगे राहुल गांधी, निशिकांत दुबे ने उठाए सवाल
Nishikant Dubey Attacks Rahul Gandhi : भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरों पर सवाल उठाते हुए उन्हें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पद से बर्खास्त करने की मांग की है।
भारतीय क्रिकेट टीम के भीतर इन दिनों मैदान के बाहर चल रही रणनीतिक चर्चाएं और बयानों के तीर सुर्खियों में छाए हुए हैं। इसी कड़ी में विस्फोटक बल्लेबाज श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) का एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने क्रिकेट गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां उन्होंने नेशनल क्रिकेट एकेडमी के प्रमुख और समय-समय पर टीम के साथ जुड़ने वाले वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) की शांत और सपोर्टिव कार्यशैली की जमकर तारीफ की है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) के कोचिंग कल्चर और मौजूदा सेटअप पर उनके इस बयान को एक बड़ा कटाक्ष या निशाना माना जा रहा है। कप्तान और खिलाड़ियों के साथ तालमेल को लेकर दिए गए इस इंटरव्यू ने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।वीवीएस लक्ष्मण की शांत कमान और 'टेंपरेरी कोच' वाले अंदाज के मु मुरीद हुए श्रेयसजब भी टीम इंडिया के साथ वीवीएस लक्ष्मण बतौर कार्यवाहक या अंतरिम कोच (Temporary Coach) जुड़े हैं, खिलाड़ियों के साथ उनका तालमेल हमेशा से बेहद सौहार्दपूर्ण रहा है। श्रेयस अय्यर ने खुलकर बात करते हुए बताया कि कैसे लक्ष्मण दबाव के क्षणों में खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत करते हैं और ड्रेसिंग रूम का माहौल एकदम तनावमुक्त रखते हैं। खिलाड़ियों पर बिना किसी अतिरिक्त दबाव के खुलकर अपना स्वाभाविक खेल खेलने की छूट देने का उनका यह अंदाज युवाओं और सीनियर खिलाड़ियों दोनों को बेहद पसंद आता है। श्रेयस के इन शब्दों को लक्ष्मण के प्रति गहरे सम्मान और उनकी कोचिंग शैली की सराहना के रूप में देखा जा रहा है।क्या गौतम गंभीर की आक्रामक कार्यशैली पर साधा गया है निशाना?गौतम गंभीर अपनी सख्त अनुशासनप्रियता, स्पष्टवादी रवैये और आक्रामक क्रिकेट शैली के लिए जाने जाते हैं। मुख्य कोच के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद से ही टीम के भीतर और बाहर लगातार समीकरण बदलते रहे हैं। ऐसे में श्रेयस अय्यर द्वारा 'टेंपरेरी कोच' मॉडल और शांत स्वभाव वाले नेतृत्व की इतनी खुलकर तारीफ करना कई राजनीतिक और क्रिकेट पंडितों के कान खड़े कर रहा है। इसे गंभीर के कड़े तेवरों और मैनेजमेंट के साथ खिलाड़ियों के बीच चल रही वैचारिक असहजता के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिससे यह साफ होता है कि ड्रेसिंग रूम के अंदर विचारों के कई स्तर पर अलग-अलग आयाम मौजूद हैं।कप्तान की प्राथमिकताओं और टीम के भविष्य पर पड़ेगा इसका असरभारतीय क्रिकेट टीम इस समय भविष्य के कई बड़े दौरों और आईसीसी प्रतियोगिताओं की तैयारियों में जुटी हुई है। ऐसे समय में खिलाड़ियों के इस तरह के बयान टीम के भीतर चल रही आंतरिक स्थिति की एक झलक पेश करते हैं। मैनेजमेंट और खिलाड़ियों के बीच का यह संवाद आगामी दौरों में चयन और रणनीतिक फैसलों पर कितना असर डालेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इस बयानबाजी ने फिलहाल क्रिकेट फैंस के बीच चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म कर दिया है।
Honda ने हाल ही में अपना नया फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर Honda QC3 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह स्कूटर लंबी रेंज और बेहतर प्रैक्टिकलिटी के साथ आता है। वहीं, भारत में पहले से मौजूद Honda Activa e स्वैपेबल बैटरी टेक्नोलॉजी के साथ उपलब्ध है। आइए ...
भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों एक ऐसे युवा खिलाड़ी की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है जिसने अपनी प्रतिभा के दम पर बड़े-बड़े दिग्गजों को हैरान कर दिया है। महज़ कुछ साल पहले दुनिया के सामने आए इस कम उम्र के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी और अद्भुत कला से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उनकी इसी असाधारण सफलता और लगातार बढ़ती लोकप्रियता ने टीम इंडिया के स्टाइलिश विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन (Sanju Samson) के समर्थकों और क्रिकेट पंडितों की नींद उड़ा दी है। सोशल मीडिया से लेकर खेल विशेषज्ञों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि आखिर कैसे यह छोटा सा बच्चा संजू सैमसन के इंटरनेशनल और घरेलू करियर के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती और टेंशन बनता जा रहा है।कम उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने दिखाई ऐसी आक्रामक प्रतिभाक्रिकेट के मैदान पर जब भी कोई असाधारण प्रतिभा कम उम्र में उतरती है, तो वह स्थापित खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्पर्धा का दायरा तुरंत बदल देती है। वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी और रिकॉर्डतोड़ पारियों से यह साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। चाहे घरेलू क्रिकेट हो या फिर फ्रेंचाइजी सर्किट, उनके द्वारा खेली जा रही पारियों में वह परिपक्वता और आक्रामकता नजर आती है जो आमतौर पर लंबे समय से खेल रहे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में दिखती है। गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने की उनकी क्षमता ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर पूरी तरह से आकर्षित कर लिया है, जिससे आने वाले समय में चयन के समीकरण पूरी तरह बदलने लगे हैं।संजू सैमसन के लिए क्यों बन गई है एक बड़ी सिरदर्दी?भारतीय टीम में अपने पैर जमाने और विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष कर रहे संजू सैमसन के लिए यह स्थिति बेहद पेचीदा होती जा रही है। संजू को पहले से ही अत्यधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था, और अब इस युवा खिलाड़ी के तेजी से उभरने के कारण टीम प्रबंधन के पास विकल्पों की भरमार हो गई है। जब कोई बेहद युवा खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन कर कम उम्र में ही मैच जिताने की क्षमता दिखाने लगता है, तो चयनकर्ताओं का झुकाव स्वाभाविक रूप से भविष्य की योजनाओं की ओर हो जाता है। यही कारण है कि क्रिकेट प्रेमी और विश्लेषक यह चर्चा कर रहे हैं कि वैभव की यह रफ्तार संजू सैमसन के करियर के रास्ते में कितनी बड़ी बाधा बन सकती है।भविष्य के मुकाबलों और चयन पर पड़ेगा गहरा असरआगामी दौरों और राष्ट्रीय टीम के चयन को लेकर भारतीय क्रिकेट में जो रेस चल रही है, उसमें टिके रहने के लिए अब हर खिलाड़ी को अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म दिखानी होगी। वैभव सूर्यवंशी की यह तूफानी दस्तक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य बहुत आक्रामक हाथों में सुरक्षित है। हालांकि, इसके चलते संजू सैमसन जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी जगह बचाने के लिए दोगुनी मेहनत करनी होगी। आने वाले महीनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि चयनकर्ता अनुभव और युवा जोश के इस संतुलन को कैसे साधते हैं और संजू इस बढ़ती हुई टेंशन से पार पाने के लिए क्या नई रणनीति अपनाते हैं।
छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का तांडव! मौसम विभाग ने प्रदेश के इन 7 जिलों में जारी किया येलो अलर्ट
मॉनसून के रफ्तार पकड़ने के साथ ही छत्तीसगढ़ (CG Weather Update) के मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई संभागों में आगामी दिनों में मूसलाधार बारिश की संभावना जताते हुए बड़ा अपडेट जारी किया है। खासकर प्रदेश के सात चुनिंदा जिलों में बादलों के आक्रामक तेवर को देखते हुए मौसम विभाग (IMD) ने 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) घोषित किया है। पिछले कुछ दिनों से उमस और गर्मी से बेहाल आम जनता को बारिश से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लगातार बरस रहे पानी के कारण निचले इलाकों में जलभराव और आवागमन बाधित होने की पूरी आशंका बनी हुई है।इन 7 जिलों में झमाझम बरसेंगे बदरा, मौसम विभाग की कड़ी चेतावनीमौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, छत्तीसगढ़ के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के सात जिलों में भारी बारिश (Heavy Rain Warning) का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। इन जिलों में लगातार हो रही मानसूनी गतिविधियों के चलते मेघगर्जन, तेज हवाओं के साथ झमाझम पानी गिरने की उम्मीद है। प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर इन सभी इलाकों के स्थानीय प्रशासनिक अमले को पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपदा या जलभराव की स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि एक्टिव वेदर सिस्टम के कारण बादलों का डेरा इन क्षेत्रों में अगले कुछ घंटों तक और अधिक गहरा सकता है।नदियों का बढ़ा जलस्तर और निचले इलाकों में बढ़ी मुश्किलेंभौगोलिक दृष्टि से वनों और पहाड़ों से घिरे छत्तीसगढ़ में लगातार भारी बारिश होने से कई स्थानीय नदियों, नालों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से ऊपर उठने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों की निचली बस्तियों में पानी भरने की समस्याएं सामने आने लगी हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की है कि वे खेतों में पानी के उचित निकास का प्रबंध रखें और वज्रपात (Thunderstorm) की चेतावनी के दौरान पेड़ों या खुले मैदानों में शरण लेने से बचें।सफर करने से पहले एक बार जरूर चेक कर लें मौसम का हालयदि आप छत्तीसगढ़ के इन सात जिलों या आसपास के रूटों पर यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर ले लें। सड़कों पर जलभराव और खराब विजिबिलिटी के कारण ट्रैफिक धीमी गति से चल सकता है, जिससे समय अधिक लग सकता है। आपदा प्रबंधन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि बहुत जरूरी होने पर ही खराब मौसम के दौरान अपने घरों से बाहर निकलें और पूरी सावधानी बरतें।
बंद पड़े जीएसटी नंबरों से चल रहा था करोड़ों का फर्जी कारोबार! विभाग ने की 3 हजार नंबरों की पहचान
देशभर में टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग नेटवर्क के खिलाफ चल रहे देशव्यापी अभियानों के बीच कर विभाग (GST Department) की तरफ से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ा खुलासा सामने आया है। टैक्स इंटेलिजेंस और डेटा एनालिसिस के जरिए विभाग ने ऐसे करीब तीन हजार जीएसटी (GST) नंबरों की पहचान की है जो आधिकारिक तौर पर काफी पहले बंद या रद्द (Cancelled) किए जा चुके थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कागजों और सिस्टम में बंद होने के बावजूद इन नंबरों के जरिए धड़ल्ले से करोड़ों रुपये का कारोबार (Turnover) किया जा रहा था। इस भारी-भरकम फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद से व्यापारिक और औद्योगिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने इन सभी संदिग्ध जीएसटी नंबर धारकों को कड़े नोटिस जारी कर दिए हैं और चेतावनी दी है कि यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो बिना किसी देरी के सीधी एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।कैसे चल रहा था बंद जीएसटी नंबरों से करोड़ों के लेनदेन का खेल?जीएसटी विंग के शुरुआती तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि शातिर ठगों और फर्जी फर्मों ने उन कारोबारियों के पैन या जीएसटी पंजीकरण को निशाना बनाया जिन्होंने अपने व्यवसाय बंद कर दिए थे या जिनके रजिस्ट्रेशन कैंसल हो चुके थे। इन बंद नंबरों का इस्तेमाल करके बिना किसी वास्तविक माल की आवाजाही (Goods Movement) के केवल फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जा रहे थे। इसके जरिए करोड़ों रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करके सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई जा रही थी। इस तरह के सुनियोजित सिंडिकेट यह उम्मीद कर रहे थे कि बंद हो चुके नंबरों पर विभाग की पैनी नजर नहीं जाएगी, लेकिन एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स और एआई-बेस्ड टूल्स ने इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया।विभाग की दो टूक: नोटिस का जवाब नहीं दिया तो होगी सीधी कानूनी कार्रवाईकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जिन लगभग तीन हजार संदिग्ध जीएसटी नंबरों की सूची तैयार की गई है, उनके संचालकों और फर्म मालिकों को तुरंत प्रभाव से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) भेज दिए गए हैं। विभाग ने इन सभी मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने वित्तीय लेनदेन और कारोबार का वैध प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई भी व्यक्ति या फर्म नोटिस का जवाब देने में असफल रहती है या फर्जीवाड़ा सही पाया जाता है, तो उनके खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा और स्थानीय थानों में तुरंत एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।भौगोलिक और व्यापारिक स्तर पर बढ़ाई गई निगरानीइस बड़े खुलासे के बाद से देश के विभिन्न वाणिज्यिक केंद्रों और औद्योगिक जिलों में टैक्स अधिकारियों की टीमें पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गई हैं। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि इस फर्जी नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से बड़े मास्टरमाइंड और सीए (Chartered Accountants) या सिंडिकेट सक्रिय हैं। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और बोगस बिलिंग के इस नासूर को जड़ से खत्म करने के लिए आने वाले दिनों में इस तरह की औचक जांच और सख्त चेकिंग का अभियान और अधिक तीव्र किया जाएगा।
मॉनसून की सक्रियता के बीच बिहार (Bihar Weather Update) के मौसम का मिजाज एक बार फिर से पूरी तरह बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने राज्य के कई जिलों में आगामी 28 जुलाई को मूसलाधार बारिश की संभावना जताते हुए 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी किया है। पिछले कुछ दिनों से उमसभरी गर्मी और तीखी धूप से परेशान लोगों को बारिश से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लगातार हो रही बरसात के चलते जनजीवन प्रभावित होने की पूरी आशंका है। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद हो गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।इन जिलों में झमाझम बरसेंगे बदरा, मौसम विभाग की कड़ी चेतावनीमौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर बिहार और तराई वाले क्षेत्रों के साथ-साथ दक्षिण-मध्य बिहार के कई जिलों में बादलों का डेरा रहेगा। राजधानी पटना सहित मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया जैसे जिलों में भारी बारिश और वज्रपात (Thunderstorm) की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में मेघगर्जन के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं और कुछ स्थानों पर झमाझम पानी बरसने से सड़कें पानी से लबालब हो सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून ट्रफ लाइन के गुजरने के कारण बादलों का यह नया दौर शुरू हुआ है, जो अगले कुछ दिनों तक राज्य के मौसम को प्रभावित करता रहेगा।नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में मंडराया खतराभौगोलिक और जल संसाधनों से समृद्ध बिहार में लगातार भारी बारिश होने से प्रमुख नदियों और सहायक धाराओं का जलस्तर तेजी से ऊपर चढ़ने लगा है। कई ग्रामीण और शहरी निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) की समस्या उत्पन्न होने लगी है, जिससे आवागमन करने वाले राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने किसानों को भी सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी का उचित प्रबंध रखें और वज्रपात की चेतावनी के दौरान खुले खेतों या पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें।सफर करने से पहले चेक करें अपने जिले का मौसम हालयदि आप 28 जुलाई यानी कल कहीं बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो अपने स्थानीय मौसम के मिजाज की जानकारी जरूर ले लें। सड़कों पर जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति से बचने के लिए समय से पहले घर से निकलें। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की ई 20 नीति को लेकर एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश के युवाओं से एकजुट होकर इस मुद्दे पर अपनी राय रखने और आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की है।
बिहार की हॉट सीट माने जाने वाली बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bankipur Assembly By-Election) का राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच चुका है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, राज्य का सियासी समीकरण बहुत तेजी से बदलता हुआ नजर आ रहा है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर मुख्य विपक्षी दल आरजेडी (RJD) के नेता तेजस्वी यादव की आक्रामक एंट्री ने मुकाबले को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। तेजस्वी के मैदान में उतरने के बाद से जहाँ पारंपरिक विरोधी दल एक्टिव मोड में आ गए हैं, वहीं चुनावी रणनीतिकार से राजनीतिक खिलाड़ी बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी के लिए यहाँ वजूद बचाने और तीसरे नंबर पर फिसलने का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। इसके उलट, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राह बेहद सुरक्षित और आसान दिख रही है।तेजस्वी यादव की एंट्री से कैसे बदला बांकीपुर का सियासी समीकरण?बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से शहरी और पारंपरिक रूप से एक खास राजनीतिक मिजाज वाला इलाका माना जाता रहा है, जहाँ बीजेपी का मजबूत कैडर बेस रहा है। हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी यादव की ओर से धुआंधार रैलियों और जनसंपर्क अभियानों ने इस सीट पर समीकरणों को पूरी तरह हिला दिया है। तेजस्वी के मैदान में आने से आरजेडी का कोर वोटर और युवा वर्ग पूरी एकजुटता के साथ पार्टी के पक्ष में लामबंद होता दिख रहा है। उनकी आक्रामक भाषण शैली और जमीनी मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने की रणनीति ने अन्य विपक्षी दलों की नींद उड़ा दी है, जिससे इस चुनावी मुकाबले में सीधा संघर्ष और अधिक पेचीदा हो गया है।प्रशांत किशोर (PK) के लिए क्यों बढ़ गया तीसरे नंबर पर खिसकने का जोखिम?अपनी चुनावी रणनीतियों के दम पर बड़े-बड़े दलों को मात देने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी के लिए बांकीपुर की यह लड़ाई अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे ही इस सीट पर मुकाबला दो ध्रुवीय (Bipolar) यानी बीजेपी बनाम आरजेडी की तर्ज पर सिमटने लगा है, वैसे ही तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रही पीके की पार्टी हाशिए पर जाती दिख रही है। यदि शहरी मतदाताओं का ध्रुवीकरण पारंपरिक दलों के पक्ष में मजबूती से हो जाता है, तो प्रशांत किशोर समर्थित प्रत्याशी के लिए वोटों के समीकरण साधना बेहद मुश्किल हो जाएगा और उनका तीसरे स्थान पर खिसक जाना तय माना जा रहा है।बीजेपी की राह बांकीपुर में क्यों दिखाई दे रही है बेहद आसान?भौगोलिक और सामाजिक रूप से शहरी मतदाताओं के बहुल्य वाले बांकीपुर क्षेत्र में बीजेपी की पकड़ पारंपरिक रूप से काफी मजबूत रही है। विपक्षी खेमे में वोटों के बिखराव और तेजस्वी यादव की एंट्री से गैर-आरजेडी वोटों के और अधिक एकजुट होने की संभावना बढ़ गई है, जिसका सीधा फायदा भगवा पार्टी को मिलता दिख रहा है। डबल इंजन सरकार की नीतियों, स्थानीय विकास कार्यों और मजबूत सांगठनिक ढांचे के दम पर बीजेपी इस सीट पर अपनी बादशाहत बरकरार रखने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। यही वजह है कि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस उठापटक के बीच बांकीपुर में बीजेपी की जीत की राह काफी हद तक सुगम होती जा रही है।
बिहार की राजनीति के लिहाज से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में आगामी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bankipur Assembly Election) की सरगर्मियों के बीच विपक्षी दलों और नए सियासी रणनीतिकारों को एक के बाद एक करारे झटके लग रहे हैं। राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव और राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की पार्टी को बड़ा झटका देते हुए कई नामचीन दिग्गज नेताओं और स्थानीय पदाधिकारियों ने अपने पुराने दलों का साथ छोड़ दिया है। इन सभी ने राजधानी पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में एक भव्य मिलन समारोह के दौरान आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली है, जिससे सियासी गलियारों में भारी हलचल मच गई है।बांकीपुर उपचुनाव से पहले सियासी समीकरणों में बड़ा बदलावकिसी भी चुनाव से ठीक पहले इस तरह का दलबदल विरोधी खेमे की रणनीति को कमजोर करने के लिए काफी माना जाता है। बांकीपुर सीट को राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और वीआईपी सीट माना जाता है, जहाँ हर दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। ऐसे में चुनाव की तारीखों के नजदीक आते ही तेजस्वी यादव के पाले से कई प्रभावशाली नेताओं का छिटक जाना और प्रशांत किशोर के संगठन से जुड़े चेहरों का बीजेपी का दामन थामना, विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा मानसिक और रणनीतिक झटका साबित हो रहा है।बीजेपी मुख्यालय में हुआ दिग्गजों का स्वागत, पार्टी का कुनबा हुआ मजबूतपार्टी में शामिल होने वाले इन दिग्गज नेताओं का स्वागत करने के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ प्रदेश पदाधिकारी और स्थानीय विधायक मौके पर मौजूद रहे। बीजेपी नेताओं ने नए शामिल हुए सदस्यों को पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर विधिवत स्वागत किया और विश्वास जताया कि उनके आने से बांकीपुर समेत आसपास के शहरी क्षेत्रों में पार्टी का जनाधार और अधिक मजबूत होगा। शामिल होने वाले नेताओं का कहना था कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासवादी नीतियों, डबल इंजन सरकार के कार्यों और राज्य के चहुंमुखी विकास से प्रभावित होकर बीजेपी परिवार का हिस्सा बने हैं।चुनावी मैदान में असर और आगे की राजनीतिक रणनीतियाँभौगोलिक और सामाजिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में इस राजनीतिक उठापटक का सीधा असर आगामी मतदान पर देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि इन नेताओं के अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छे खासे व्यक्तिगत प्रभाव और कैडर बेस होने के कारण, विपक्षी दलों के वोटों में सेंध लग सकती है। चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बिहार की राजनीति में जोड़-तोड़ और रणनीतिक बदलाव का दौर और अधिक तेज होने की पूरी संभावना है।
परिवहन और यात्रा के लिहाज से राजस्थान के आम नागरिकों के लिए एक बेहद राहतभरी और अच्छी खबर सामने आई है। लंबे समय से पुरानी बसों के खस्ताहाल होने और फ्लीट में गाड़ियों की भारी कमी से जूझ रहे राजस्थान रोडवेज (Rajasthan Roadways) का बेड़ा अब आखिरकार मजबूत होने लगा है। राज्य सरकार और रोडवेज प्रबंधन की ओर से शुरू किए गए आधुनिकीकरण और फ्लीट विस्तार अभियान के तहत नई बसों का संचालन शुरू कर दिया गया है। इस सौगात के तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों को बसें आवंटित की गई हैं, जिसमें यात्रियों के भारी दबाव और भौगोलिक महत्व को देखते हुए कोटा संभाग (Kota) को सबसे अधिक 19 नई बसें तोहफे में दी गई हैं, जिससे इस क्षेत्र के यात्रियों को आवागमन में जबरदस्त सहूलियत मिलेगी।बसों की भारी किल्लत से जूझ रहा था रोडवेज, अब मिली राहतपिछले कुछ वर्षों में राजस्थान रोडवेज के पास संचालित होने वाली बसों की संख्या में लगातार कमी आ रही थी, जिसके चलते ग्रामीण और शहरी रूटों पर चलने वाली कई बसें बंद करनी पड़ी थीं या फिर यात्रियों को ठसाठस भरी पुरानी बसों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ता था। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने रोडवेज के बेड़े को अपग्रेड करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए। नई और आधुनिक सुविधाओं से लैस इन बसों के आने से न सिर्फ रोडवेज की वित्तीय सेहत सुधरेगी, बल्कि समय पर बसों के संचालन से यात्रियों का सफर भी सुगम और सुरक्षित हो सकेगा।कोटा को मिली सबसे ज्यादा 19 बसें, डिपो में खुशी का माहौलरोडवेज प्रशासन द्वारा जारी आवंटन सूची के अनुसार, विभिन्न संभागों और डिपो में नई बसों का वितरण किया गया है, जिसमें कोटा जिले और आसपास के क्षेत्रों की मांग को सर्वोपरि रखते हुए सबसे अधिक 19 नई बसें कोटा डिपो को सौंपी गई हैं। कोटा से जयपुर, दिल्ली, उदयपुर और अन्य प्रमुख मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। इन आधुनिक बसों के बेड़े में शामिल होने से फेरों की संख्या बढ़ेगी और यात्रियों को लंबी कतारों या टिकट की मारामारी से राहत मिलेगी। डिपो के अधिकारियों का कहना है कि इन नई बसों को तुरंत प्रभाव से विभिन्न रूटों पर यात्रियों की सुविधा के लिए उतार दिया गया है।ग्रामीण और अंतर-राज्यीय मार्गों पर भी सुधरेगी कनेक्टिविटीभौगोलिक दृष्टि से फैले हुए राजस्थान राज्य में बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी हमेशा से एक बड़ी प्राथमिकता रही है। रोडवेज के इस नए बेड़े के जुड़ने से न केवल मुख्य मार्गों बल्कि ग्रामीण अंचल को जोड़ने वाले लिंक रूट्स पर भी बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन नई बसों में पुश-बैक सीटें, बेहतर लाइटिंग, सुरक्षा के लिहाज से जीपीएस और पैनिक बटन जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों का सफर बेहद सुरक्षित हो सके।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ राजघाट पहुंचे। उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अहिंसा और संवाद का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक है।
चंडीगढ़ से एक बेहद हैरान करने वाली, दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर और शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक 32 साल की महिला टीचर अपने ही स्कूल के एक छात्र के इश्क में इस कदर अंधी हो गई कि उसने अपने परिवार, समाज और वैवाहिक जीवन की तमाम मर्यादाओं को ताक पर रख दिया। टीचर की इस जिद और धोखे से बुरी तरह आहत होकर उसके पति ने आखिरकार अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मरने से पहले पति ने जो दर्द बयां किया, उसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन के पास पहुंचा यह हाई-प्रोफाइल मामला अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ लोग एक शादीशुदा महिला शिक्षिका के इस गैर-कानूनी और अनैतिक कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।टीचर-स्टूडेंट का अवैध रिश्ता और पत्नी की जिद ने उजाड़ा घरप्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला टीचर का नाम कोमल है, जो चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाती थी। शिक्षण कार्य के दौरान उसका संपर्क एक छात्र (सनी) के साथ जरूरत से ज्यादा गहरा हो गया। देखते ही देखते यह मेल-जोल एक गहरे और अवैध प्रेम प्रसंग में तब्दील हो गया। जब कोमल के पति को अपनी पत्नी और छात्र के इस रिश्ते के बारे में भनक लगी, तो घर में कोहराम मच गया। पति ने अपनी पत्नी को समझाने और परिवार को बचाने की लाख कोशिश की, लेकिन कोमल अपने इस पागलपन में इस कदर आगे निकल चुकी थी कि उसने साफ कह दिया कि वह अब अपने पति के साथ नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ सनी के साथ ही अपनी पूरी जिंदगी बिताएगी।पत्नी के धोखे और धमकियों से टूट चुका था पतिकोमल के इस बेतुके और क्रूर रवैये ने उसके पति को अंदर से पूरी तरह तोड़ कर रख दिया था। एक तरफ समाज का डर और दूसरी तरफ अपनी ही पत्नी द्वारा दिए गए धोखे का गहरा सदमा, पति सहन नहीं कर सका। महिला का अपनी जिद पर अड़े रहना और लगातार छात्र के समर्थन में खड़े होने से आजिज आकर पति ने अंततः मौत को गले लगाने का खौफनाक रास्ता चुन लिया। आत्महत्या करने से पहले उसने अपने सुसाइड नोट और परिजनों के सामने अपनी पत्नी के इस अवैध रिश्ते का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया, जिससे यह साबित हो गया कि किस तरह एक शिक्षक और छात्र के रिश्ते की आड़ में इस घर को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया।पुलिस जांच और समाज के लिए एक गंभीर सबकइस दर्दनाक घटना के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है और महिला शिक्षिका तथा उस छात्र से जुड़े तमाम पहलुओं को खंगाला जा रहा है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में यदि कोई नाबालिग संलिप्त है, तो इसमें कानूनी पेंच और भी ज्यादा गंभीर हो जाते हैं। यह घटना आज के आधुनिक समाज, नैतिक मूल्यों के पतन और रिश्तों में आ रही दरार पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है, जहाँ एक पल की सनक और गलत अफेयर ने हंसते-खेलते परिवार को मातम में बदल दिया।
उत्तर प्रदेश के दो सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त शहरों के बीच सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी और शानदार खबर सामने आ रही है। बहुत जल्द बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (Lucknow Kanpur Expressway) पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की हाई-स्पीड रोडवेज बसें फर्राटा भरती हुई नजर आएंगी। इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों औद्योगिक और शैक्षणिक राजधानियों के बीच की दूरी सिमट जाएगी, जिससे यात्रियों का कीमती समय बचेगा। खास बात यह है कि इस सुपरफास्ट सफर के लिए यात्रियों को अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि बसों का किराया बेहद किफायती रखा गया है, जिससे आम जनता आसानी से इसका लाभ उठा सकेगी।महज 1 घंटे 45 मिनट में तय होगा लखनऊ से कानपुर का सफरपारंपरिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम और भारी वाहनों की भीड़भाड़ से परेशान होने वाले यात्रियों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा। परिवहन विभाग की योजना के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ से कानपुर या कानपुर से लखनऊ की पूरी दूरी मात्र 1 घंटे 45 मिनट में आसानी से पूरी कर ली जाएगी। तेज रफ्तार और सिग्नल-फ्री सफर होने के कारण बसों की औसत गति बेहतरीन रहेगी, जिससे यात्रियों को रोजाना के आने-जाने (Daily Commute) में भारी सहूलियत मिलेगी। नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और छात्रों के लिए यह सेवा आवागमन का सबसे सुगम माध्यम बन जाएगी।किफायती किराया और यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएंआम यात्रियों के बजट को ध्यान में रखते हुए रोडवेज बसों का किराया बेहद कम और सुलभ तय किया गया है, ताकि हर वर्ग के लोग इस आधुनिक सड़क मार्ग का फायदा उठा सकें। साधारण रोडवेज बसों के साथ-साथ इस रूट पर एसी (AC) बसों का संचालन भी किया जाएगा, जिससे यात्री आरामदायक सफर का आनंद ले सकेंगे। एक्सप्रेसवे पर बसों के संचालन से न केवल सड़क यात्रा सुरक्षित होगी, बल्कि समय की भी भारी बचत होगी। स्थानीय प्रशासनिक और परिवहन अधिकारियों द्वारा इस रूट के टोल प्लाजा और बस स्टॉप्स के निर्धारण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि सेवा शुरू होते ही यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे और लोकल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावाभौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश के विकास में लखनऊ और कानपुर का यह नया एक्सप्रेसवे मील का पत्थर साबित हो रहा है। इसके शुरू होने से दोनों शहरों के बीच व्यापारिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास और पर्यटन को एक नया पंख मिलेगा। एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर भविष्य में होने वाले विकास कार्यों से लोकल रोजगार और आर्थिकी को भी बढ़ावा मिलेगा। यदि आप भी अक्सर लखनऊ से कानपुर की यात्रा करते हैं, तो आने वाले दिनों में इस एक्सप्रेसवे पर रोडवेज बस का सफर आपके लिए बेहद आरामदायक, तेज और किफायती होने वाला है।
अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण और उससे जुड़े धन संग्रह अभियान को लेकर समय-समय पर कई तरह के विवाद सामने आते रहे हैं। इसी कड़ी में राम मंदिर चंदा चोरी और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े संवेदनशील मामले की जांच को गति देने के लिए एक नई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाए गए हैं। नई एसआईटी में शामिल तेज-तर्रार और अनुभवी पुलिस अधिकारियों ने मामलों की फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया है। इन अधिकारियों ने अभी तक अपनी जांच में क्या-क्या अहम सबूत जुटाए हैं और आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, इसकी एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की जाएगी।नई एसआईटी में शामिल किए गए हैं उत्तर प्रदेश के अनुभवी और तेज-तर्रार अफसरराम मंदिर चंदा चोरी और धोखाधड़ी के मामलों की तह तक जाने के लिए बनाई गई इस नई एसआईटी में उत्तर प्रदेश पुलिस के चुनिंदा और बेदाग छवि वाले अधिकारियों को जगह दी गई है। स्थानीय भौगोलिक और कानूनी पेचीदों को बारीकी से समझने वाले इन अधिकारियों को विशेष तौर पर इसलिए जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके। एसआईटी के गठन के बाद से ही जांच टीम ने अपनी कार्यप्रणाली तेज कर दी है और उन सभी शिकायतों की दोबारा समीक्षा की जा रही है, जिनमें चंदे के नाम पर हेराफेरी या फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगाए गए थे।अफसरों ने अब तक क्या-क्या एक्शन लिया? सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्टजांच अधिकारियों ने पिछले कुछ हफ्तों में कई संदिग्ध ठिकानों पर दस्तावेजों की छानबीन की है और इस घोटाले से जुड़े प्रमुख गवाहों व पीड़ितों के बयान दर्ज किए हैं। बैंक खातों के ट्रांजैक्शन, डिजिटल मनी ट्रेल और चंदा जुटाने वाली संस्थाओं के रिकॉर्ड्स को खंगालकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े इस पवित्र धन का दुरुपयोग कहाँ और कैसे हुआ। एसआईटी के इन तमाम अब तक के प्रयासों और बरामद किए गए सबूतों का पूरा कच्चा-चिट्ठा तैयार कर लिया गया है, जिसे आने वाले दिनों में सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपा जाएगा।देश भर के राम भक्तों की टिकी निगाहें, आगे क्या होगी कार्रवाई?इस बहुचर्चित मामले पर देश भर के करोड़ों राम भक्तों और कानूनी जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है। कोर्ट की निगरानी में चल रही इस जांच के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा तथा इस प्रकार के संवेदनशील मामलों में फर्जीवाड़ा करने वाले दोषियों को कानून के शिकंजे में कसकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। एसआईटी की यह रिपोर्ट आने वाले दिनों में इस पूरे कानूनी प्रकरण का रुख तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाली है।
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भले ही अभी विधानसभा चुनाव (UP Chunav 2027) में वक्त हो, लेकिन सूबे की राजनीति का तापमान अभी से सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) के बीच जुबानी जंग और तंज कसने का दौर रोज नए आयाम छू रहा है। प्रदेश की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के बीच सोशल मीडिया से लेकर चुनावी मंचों तक एक अलग ही राजनीतिक 'मल्लयुद्ध' छिड़ा हुआ है। दोनों दिग्गज नेता एक-दूसरे के बयानों पर तीखा पलटवार करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, जिससे उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्माया हुआ है।सीएम योगी की आक्रामक कार्यशैली और तीखे बयानों के वारमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी आक्रामक भाषण शैली और प्रशासनिक फैसलों के दम पर विपक्ष पर लगातार कड़े प्रहार कर रहे हैं। कानून व्यवस्था, विकास कार्यों और तुष्टिकरण के मुद्दों पर सीएम योगी का अंदाज हमेशा से आक्रामक रहा है, जिससे वे विपक्ष को डिफेंसिव होने पर मजबूर कर देते हैं। उनके बयानों में राज्य की सुरक्षा और पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर सवाल उठाए जाते हैं, जो बीजेपी के काडर और कोर वोटर के बीच जोश भरने का काम करते हैं। जनता के बीच उनकी छवि एक सख्त प्रशासक के रूप में है, जो विपक्षी दलों के हर हमले का जवाब आंकड़ों और जमीनी विकास के जरिए देते हैं।अखिलेश यादव का सोशल मीडिया वार और पीडीए (PDA) का दांवदूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस चुनावी मुकाबले में पूरी तरह से आक्रामक रुख अपना लिया है। वे हर छोटे-बड़े मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पीडीए (PDA - पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और बेरोजगारी-महंगाई जैसे मुद्दों को आधार बनाकर अखिलेश लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके चुटीले तंज और व्यंग्यात्मक अंदाज वाले बयान अक्सर इंटरनेट पर तेजी से वायरल होते हैं, जो युवाओं और ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं का ध्यान खींचने में सफल साबित हो रहे हैं।जनता के दरबार में कौन पड़ रहा है भारी? सियासी जानकारों की रायभौगोलिक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में यह मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। स्थानीय जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां एक तरफ सीएम योगी की मजबूत लीडरशिप और प्रशासनिक पकड़ उन्हें प्रशासनिक मोर्चे पर बढ़त दिलाती है, वहीं अखिलेश यादव का आक्रामक विपक्ष का तेवर और जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति उन्हें कड़ी टक्कर दे रही है। 2027 के इस सियासी रण में कौन किस पर भारी पड़ेगा, इसका फैसला तो आने वाला वक्त ही करेगा, लेकिन फिलहाल इन दोनों नेताओं की जुबानी जंग ने यूपी की राजनीति को बेहद रोमांचक बना दिया है।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर गोरखपुर से नेपाल बॉर्डर से सटे सोनौली तक का सफर करने वाले यात्रियों और पर्यटकों के लिए एक बहुत ही रोमांचक और खूबसूरत अपडेट सामने आ रही है। गोरखपुर से सोनौली हाईवे (Gorakhpur to Sonauli Route) पर सफर करना अब केवल एक आम यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम का अहसास कराने वाला एक बेहतरीन अनुभव बन गया है। इस नेशनल हाईवे पर सफर के दौरान रास्ते में मिलने वाले 4 ऐसे मंत्रमुग्ध कर देने वाले और रमणीय नजारे देखने को मिलते हैं, जिन्हें देखते ही पर्यटकों का दिल बाग-बाग हो जाता है। अगर आप भी इस रूट से गुजरने का प्लान बना रहे हैं, तो रास्ते के इन खास आकर्षणों के बारे में जरूर जान लें।1. घने जंगलों और हरियाली से गुजरती सड़क का सुहाना अहसासगोरखपुर से सोनौली मार्ग पर आगे बढ़ते ही तराई क्षेत्र के जंगलों और प्रकृति की गोद का अद्भुत नजारा शुरू हो जाता है। सड़क के दोनों ओर फैली लंबी और हरी-भरी पेड़-पौधों की कतारें इस सफर को बेहद शांत और मनमोहक बना देती हैं। खासकर मानसून और सर्दियों के मौसम में इस रास्ते की हरियाली और ठंडी हवाएं यात्रियों की सारी थकान पल भर में दूर कर देती हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह हरा-भरा रास्ता किसी जन्नत से कम नहीं है, जहां वाहन से गुजरते हुए कुदरत के बेहद करीब होने का अहसास होता है।2. स्थानीय संस्कृति और जीवंत ग्रामीण बस्तियों की झलकइस हाईवे के सफर की दूसरी सबसे बड़ी खासियत यहाँ के पारंपरिक तराई वाले गांव और स्थानीय जीवनशैली है। सड़क मार्ग के दोनों तरफ सजे छोटे-छोटे बाजार, मिट्टी के खूबसूरत घर और पारंपरिक रहन-सहन उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की गहरी छाप छोड़ते हैं। यहाँ की स्थानीय जीवनशैली को देखना और ग्रामीण भारत की सादगी को महसूस करना पर्यटकों के लिए एक अलग ही अनुभव होता है, जो शहरी कोलाहल से कोसों दूर मानसिक शांति प्रदान करता है।3. रास्तों में बहने वाली शांत नदियाँ और जल स्रोतों के खूबसूरत घाटगोरखपुर-सोनौली रूट पर सफर के दौरान कई छोटी-छोटी नदियाँ और जल स्रोत रास्ते में पड़ते हैं, जिन पर बने पुलों से गुजरते वक्त पानी का कल-कल करता बहाव बहुत ही आकर्षक लगता है। पानी के इन प्राकृतिक स्रोतों के आसपास का शांत वातावरण और डूबते सूरज का नजारा इस यात्रा में चार चांद लगा देता है। स्थानीय भौगोलिक और प्राकृतिक बनावट के कारण यहाँ का मौसम हमेशा सुहाना बना रहता है, जो यात्रियों को कुछ पल ठहरकर प्रकृति का आनंद लेने के लिए मजबूर कर देता है।4. भारत-नेपाल सीमा के पास पहुँचते ही बदलता सांस्कृतिक परिदृश्यजैसे-जैसे वाहन सोनौली बॉर्डर के करीब पहुंचते हैं, वैसे-वैसे यहाँ की संस्कृति और माहौल में एक नया रोमांच घुलने लगता है। नेपाल सीमा से सटा यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, संस्कृति और मेल-जोल का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहाँ का चहल-पहल भरा माहौल और भारत-नेपाल के बीच की सांस्कृतिक साझ को देखना इस पूरी रोड ट्रिप का सबसे शानदार क्लाइमैक्स साबित होता है। यदि आप भी वीकेंड पर किसी सड़क मार्ग की रोमांचक यात्रा पर निकलने की सोच रहे हैं, तो गोरखपुर से सोनौली का यह मार्ग आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
राजस्थान की खूबसूरती और शाही संस्कृति की जब भी बात आती है, तो झीलों की नगरी 'उदयपुर' का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है। अरावली की पहाड़ियों की गोद में और पिछोला झील के तट पर स्थित उदयपुर का 'सिटी पैलेस' (Udaipur City Palace) राजस्थान की सबसे भव्य, विशाल और ऐतिहासिक धरोहरों में शुमार है। इस शानदार महल की वास्तुकला और इसका इतिहास इतना समृद्ध है कि यहाँ आने वाला हर देसी-विदेशी पर्यटक इसकी भव्यता को देखकर हैरान रह जाता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस विशाल महल का निर्माण किसी एक राजा ने नहीं, बल्कि मेवाड़ के सात अलग-अलग महाराणाओं के शासनकाल में क्रमिक रूप से पूरा किया गया था, जो इसकी अनूठी निर्माण शैली को दर्शाता है।महाराणा उदय सिंह द्वितीय से शुरू हुआ था इस भव्य महल का सफरइतिहास के पन्नों के अनुसार, उदयपुर शहर की स्थापना करने वाले महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने साल 1559 में इस भव्य पैलेस की नींव रखी थी। उनके बाद मेवाड़ के सिंहासन पर बैठने वाले अन्य प्रतापी महाराणाओं ने अपनी सूझबूझ और कलाप्रेम के चलते इस महल में अपनी पसंद के अनुसार नए महलों, कक्षों, बालकनियों और मीनारों का निर्माण करवाया। लगभग चार सौ वर्षों से अधिक समय तक चले इस निर्माण कार्य में कुल सात महाराणाओं का योगदान रहा है। यही वजह है कि सिटी पैलेस के भीतर राजस्थानी, मुगल, यूरोपीय और चीनी वास्तुकला (Architecture) का एक अद्भुत और बेजोड़ संगम देखने को मिलता है, जो देश-विदेश के इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।सिटी पैलेस के अंदर छिपे हैं इतिहास के अनगिनत हैरान करने वाले राजपिछोला झील के पानी के ठीक ऊपर खड़े इस विशाल संगमरमर और ग्रेनाइट के महल के भीतर प्रवेश करते ही राजा-महाराजाओं के वैभवशाली जीवन की झलक मिलने लगती है। यहाँ स्थित 'मोर चौक' (Mor Chowk), 'शीश महल' और 'दिलकुश महल' अपनी नायाब कांच की कारीगरी और मोजेक टाइल्स के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। इसके अलावा, पैलेस का 'जनाना महल' और 'मर्दानी महल' उस दौर की शाही जीवनशैली, कला और युद्ध कौशल की कहानियों को बयां करते हैं। यहाँ का 'म्यूज़ियम' (Amar Vilas & Museum) पुरानी तलवारें, शाही पोशाकें, कलाकृतियां और मेवाड़ के शूरवीरों के इतिहास को संजोकर रखता है, जिसे देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है।पर्यटन और स्थानीय संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्रभौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देखा जाए, तो उदयपुर का यह सिटी पैलेस राजस्थान के पर्यटन उद्योग का सबसे बड़ा मुकुट मणि है। हर साल लाखों की संख्या में सैलानी इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने के लिए राजस्थान के इस खूबसूरत शहर का रुख करते हैं। शाम के समय पैलेस पर होने वाली लाइटिंग और यहाँ से झील का नज़ारा पर्यटकों के दिलों पर एक कभी न मिटने वाली छाप छोड़ता है। यदि आपने अभी तक इस ऐतिहासिक और जादुई धरोहर का दीदार नहीं किया है, तो अपनी अगली वेकेशन लिस्ट में उदयपुर के इस भव्य सिटी पैलेस को जरूर शामिल करें।
झारखंड की औद्योगिक नगरी और स्टील सिटी के रूप में मशहूर जमशेदपुर (Jamshedpur) अपनी आधुनिक जीवनशैली के बीच प्राकृतिक सुंदरता का एक अनूठा संगम समेटे हुए है। अगर आप शहर की भागदौड़, भारी ट्रैफिक और शोर-शराबे से दूर किसी ऐसी शांत जगह की तलाश में हैं जहां मानसिक शांति और प्रकृति का असली अहसास मिल सके, तो आपको ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है। जमशेदपुर शहर से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक बेहद खूबसूरत और रमणीय पर्यटक स्थल इन दिनों ट्रेवलर्स और नेचर लवर्स के बीच सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वीकेंड की छुट्टियों या शाम के वक्त सुकून के कुछ पल बिताने के लिए यह जगह पर्यटकों की पहली पसंद बन चुकी है।प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है यह डेस्टिनेशनझारखंड के इस खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट की खासियत यह है कि यह चारों तरफ से हरी-भरी पहाड़ियों, कलकल बहती धाराओं और शांत वातावरण से घिरा हुआ है। यहाँ आने वाले पर्यटकों को शहर की चकाचौंध से दूर एक अलग ही दुनिया का अनुभव होता है। मानसून या सर्दियों के मौसम में इस जगह की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, जब चारों तरफ हरियाली और बादलों का नजारा देखने लायक होता है। फोटोग्राफी के शौकीनों और बर्ड वॉचर्स के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है, जहां प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में नजर आती है।स्थानीय संस्कृति और घूमने के लिए खास आकर्षणस्थानीय भौगोलिक और सांस्कृतिक परिवेश से जुड़ा यह पर्यटक स्थल परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए एक आइडियल स्पॉट माना जाता है। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और खान-पान का भी अनुभव करते हैं। शहर के करीब होने के कारण यहाँ पहुँचना बेहद आसान है, जिससे पर्यटकों को लंबी यात्रा की थकान नहीं झेलनी पड़ती। वीकेंड के दिनों में यहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी बड़ी संख्या में सैलानी घूमने के लिए पहुंचते हैं।कैसे पहुंचे और घूमने का सबसे सही समय क्या है?यदि आप भी इस खूबसूरत और शांत जगह की सैर करना चाहते हैं, तो जमशेदपुर शहर से आसानी से कैब, ऑटो या निजी वाहन के जरिए मात्र आधे घंटे में यहाँ पहुँच सकते हैं। साल के किसी भी समय यहाँ जाया जा सकता है, लेकिन अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहाँ घूमने के लिए सबसे सुहावना माना जाता है। अगर आप भी इस वीकेंड कुछ नया और शांत तलाश रहे हैं, तो अपने परिवार और दोस्तों के साथ इस अद्भुत पर्यटक स्थल की यात्रा का प्लान जरूर बनाएं।
मानसून का मौसम आते ही चिलचिलाती गर्मी से राहत तो मिलती है, लेकिन अपने साथ कई तरह की बीमारियां और इंफेक्शन भी लेकर आता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा संवेदनशील बच्चों का नाजुक स्वास्थ्य होता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) वयस्कों के मुकाबले कमजोर होती है। नमी भरे इस मौसम में पानी से होने वाली बीमारियां, सर्दी-जुकाम और पेट का संक्रमण तेजी से फैलता है। यही वजह है कि बाल रोग विशेषज्ञों और डाइटीशियन का मानना है कि बरसात के दिनों में बच्चों की डाइट (Kids Diet in Monsoon) पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है। यदि इस दौरान खान-पान में जरा सी भी लापरवाही बरती जाए, तो बच्चों की सेहत को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।मानसून में बच्चों को भूलकर भी न खिलाएं ये चीजेंडाइटीशियन और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, बरसात के मौसम में बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेजी से पनपते हैं, इसलिए बाहर का खुला खाना या स्ट्रीट फूड बच्चों को बिल्कुल नहीं देना चाहिए। बाजार में मिलने वाली कटी हुई फल-सब्जियां, चाट-पकौड़ी और बाहर की तली-भुनी चीजें बच्चों के पेट में इंफेक्शन का मुख्य कारण बनती हैं। इसके अलावा सी-फूड और पानी में उगने वाली हरी पत्तेदार सब्जियों (जैसे पालक या पत्ता गोभी) को इस सीजन में खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें नमी के कारण कीड़े और जर्म्स छिपे होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। जंक फूड और पैक्ड स्नैक्स भी बच्चों की इम्युनिटी को कमजोर करते हैं।बच्चों की थाली में क्या शामिल करना है सबसे फायदेमंद?बरसाती मौसम में बच्चों को अंदर से मजबूत रखने के लिए उनकी डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें। ताजे फल जैसे पपीता, अनार, सेब और उबली हुई सब्जियां बच्चों को दें। खाना हमेशा ताजा और घर का बना हुआ ही खिलाएं, जिसमें हल्दी, जीरा और लहसुन जैसे नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल मसालों का इस्तेमाल किया गया हो। हाइड्रेशन का खास ख्याल रखें और बच्चों को हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ गुनगुना पानी ही पीने के लिए दें। सूप, दलिया, खिचड़ी और नींबू पानी जैसी चीजें बच्चों की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती हैं।पैरेंट्स के लिए जरूरी टिप्स: इम्युनिटी बढ़ाने के आसान उपायस्थानीय और मौसमी बदलावों को ध्यान में रखते हुए पैरेंट्स को बच्चों की साफ-सफाई और खान-पान को लेकर अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए। बच्चों को बाहर खेलने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह साबुन से धोने की आदत डालें। सुबह के समय उन्हें दूध के साथ हल्दी या च्यवनप्राश जैसी चीजें दें ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राकृतिक रूप से मजबूत हो सके। थोड़ी सी सावधानी और सही डाइट चार्ट अपनाकर आप अपने बच्चों को इस मानसून सीजन में हर तरह के वायरल इंफेक्शन और बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भाजपा सांसद की बेटी की पोस्ट से विवाद, ओडिशा भाजपा में बढ़ी हलचल
सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के कार्यालय की ओर से संपर्क किए जाने के बाद सांसद अपराजिता सारंगी ने अपनी बेटी से संबंधित पोस्ट हटाने के लिए कहा था। हालांकि, आरोप है कि अर्चिता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। फिलहाल, हाईकोर्ट ने गडकरी की याचिका को मंजूर किया है और अंतरिम राहत की मांग पर सुनवाई तय की है।
Foreign media on CJP: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन ने न सिर्फ भारत की राजनीति में हलचल मचा दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी खींच लिया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार के झुकने को लेकर विदेशी अखबारों और चैनलों ने ...
मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक, बोले- अब राजघाट जाकर गांधीजी को दूंगा श्रद्धांजलि
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में वह अस्पताल के कमरे में कुर्सी पर बैठे दिखाई देते हैं और मुस्कुराते हुए अपनी सेहत में सुधार की जानकारी देते हैं।
दिल्ली की राऊज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई का पक्ष रखने के लिए एक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति का निर्देश दिया है। इसी बीच, कोर्ट ने आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी। अब इस मामले में सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
लखनऊ, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें छात्रों को सच और झूठ में अंतर पता करना, सोशल मीडिया के दुष्प्रचार से बचने का तरीका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकों का ...
केजरीवाल का E20 पेट्रोल के खिलाफ नेशनल टाउनहॉल, कहा- माइलेज घटा, इंजन खराब
Arvind Kejriwal National Townhall: नीट विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने सबसे बड़ा मोर्चा खोल दिया है। देश के युवाओं की ताकत के आगे सरकार के झुकने का दावा करते ...
योगी सरकार की बड़ी सौगात, 48.79 करोड़ से काशी की तर्ज पर संवरेगा लोधेश्वर महादेव धाम
बाराबंकी, 26 जुलाई। जिले के प्राचीन लोधेश्वर महादेव मंदिर को शीघ्र ही काशी जैसा भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत लगभग 48.79 करोड़ रुपये की समेकित पर्यटन विकास परियोजना के तहत मंदिर परिसर ...
केसरिया और भगवा कपड़ों से समाजवादी पार्टी की जन्मजात दुश्मनी: मुख्यमंत्री योगी
लखनऊ, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी कहती थी, कांवड़ यात्रा में शिव भक्त आएंगे तो दंगा हो जाएगा। सपा शंख व घंटा भी नहीं बजाने देती थी। समाजवादी पार्टी की केसरिया और भगवा कपड़ों से मानो जन्मजात दुश्मनी थी। हालांकि अब ...
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' के बीच चल रहे विवाद मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और यूट्यूब पर मौजूद फिल्म से जुड़े लिंक हटाने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, अदालत ने फिल्म के निर्माता अमित जानी के रवैये पर भी नाराजगी जताई और उन्हें कड़ी फटकार लगाई।
मुलायम सिंह यादव का सपना था सैफई ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान, भाजपा ने पूरा किया : मुख्यमंत्री योगी
इटावा, 26 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सैफई मेडिकल संस्थान का जिक्र करते हुए कहा कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने सैफई ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद अखिलेश यादव उसे आगे ...
देश की राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े धरना स्थल जंतर-मंतर पर जारी एक बड़े विरोध प्रदर्शन के मामले में देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ी और ऐतिहासिक टिप्पणी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक नई और बेहद स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींच दी है। अदालत ने दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि सिर्फ इसलिए कि कहीं कोई आंदोलन या विरोध प्रदर्शन चल रहा है, सुरक्षा बल नागरिकों पर सीधे लाठीचार्ज या बल प्रयोग नहीं कर सकते।लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवालसुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए एक प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान सीजेआई (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि भारत के संविधान में हर नागरिक को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने व विरोध जताने का मौलिक अधिकार मिला हुआ है। कोर्ट ने कहा कि जब तक प्रदर्शनकारी किसी भी तरह की हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करने में लिप्त न हों, तब तक पुलिस बल को बेहद संयम बरतने की जरूरत है।कानून व्यवस्था और पुलिस बल के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी व्याख्यामुख्य न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के लिए गाइडलाइंस की ओर इशारा करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था (Law and Order) बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि नागरिकों की आवाज को दबाने के लिए लाठीचार्ज या आंसू गैस के गोलों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जाए। अदालत ने साफ किया कि प्रशासन को किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बल प्रयोग की बजाय बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस टिप्पणी को भविष्य में होने वाले तमाम जन आंदोलनों और पुलिसिया एक्शन के लिहाज से एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है।दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कानून के मोर्चे पर बड़ा बदलावभौगोलिक और स्थानीय सुरक्षा के नजरिए से देखें तो जंतर-मंतर, लुटियंस दिल्ली और संसद भवन के आसपास का पूरा इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ हर छोटे-बड़े आंदोलन पर पूरे देश की नजर रहती है। सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद अब दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को अपनी रणनीतियों में बड़ा बदलाव करना होगा। आने वाले दिनों में नई दिल्ली जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक और अहिंसक तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि देश की राजधानी से सुरक्षा के मोर्चे पर कोई भी नकारात्मक संदेश न जाए।
सोने-चांदी की कीमतों में लगी आग! सोना ₹757 महंगा, चांदी ₹2266 उछली; क्रूड ऑयल की नरमी का बड़ा असर
घरेलू सर्राफा बाजार में आज एक बार फिर रौनक लौट आई है, जिससे सोना और चांदी खरीदने वालों को बड़ा झटका लगा है। लगातार कुछ दिनों की सुस्ती के बाद हफ्ते के शुरुआती कारोबारी दिन ही कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोने का भाव 757 रुपये प्रति 10 ग्राम तक चढ़ गया है, वहीं चांदी में भी 2,266 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी तेजी देखी जा रही है। इस बड़ी रिकवरी के बाद सर्राफा बाजार के व्यापारियों और निवेशकों की धड़कनें बढ़ गई हैं।कच्चे तेल की सुस्ती ने सोने और चांदी को दिया तगड़ा बूस्टरबाजार के जानकारों का कहना है कि आज सोने और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई नरमी है। दरअसल, वैश्विक स्तर पर क्रूड की कीमतों में गिरावट आने से अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर दबाव देखा जा रहा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर कमजोर पड़ता है या कच्चे तेल के दाम घटते हैं, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की तरफ रुख करते हैं। इसी का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार में देखने को मिल रहा है।आपके शहर में क्या है आज 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड का रेट?इस ताजा उछाल के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत देश के तमाम बड़े शहरों के रिटेल接收 बाजार में भी सोने के दाम बदल गए हैं। 24 कैरेट (शुद्ध सोने) का भाव एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर की तरफ बढ़ता दिख रहा है, जबकि 22 कैरेट (ज्वेलरी गोल्ड) की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार से मिले मजबूत संकेतों के कारण चांदी की चमक भी काफी बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है या डॉलर में कमजोरी जारी रहती है, तो सोने-चांदी की कीमतों में और तेजी आ सकती है।फेस्टिव सीजन से पहले खरीदारी या निवेश का सही मौका?भारत में फेस्टिव और शादियों का सीजन शुरू होने से पहले सोने-चांदी के दामों में आ रहे इस उतार-चढ़ाव ने आम उपभोक्ताओं को सोच में डाल दिया है। जेम एंड ज्वेलरी काउंसिल से जुड़े जानकारों का मानना है कि जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह डिजिटल गोल्ड या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिए निवेश का एक बेहतरीन मौका हो सकता है। हालांकि, रिटेल बाजार में गहने खरीदने वालों को सलाह दी जाती है कि वे हॉलमार्क (HUID) देखकर ही शुद्धता की पूरी जांच करने के बाद खरीदारी का फैसला लें।
वेदांता की इस दिग्गज कंपनी ने खोला ₹25,000 करोड़ का पिटारा, बाजार में मचेगी हलचल
भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार के निवेशकों के लिए वेदांता समूह की ओर से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप की प्रमुख सहयोगी कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc) ने देश के माइनिंग और मेटल सेक्टर में एक नया इतिहास रचने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। कंपनी ने भारतीय बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए अगले 3 से 5 सालों में 25,000 करोड़ रुपये के विशालकाय निवेश (Mega Investment Plan) की घोषणा की है। इस भारी-भरकम निवेश की खबर के बाद से ही बाजार के जानकारों और निवेशकों के बीच हलचल काफी तेज हो गई है।क्या है हिंदुस्तान जिंक का यह 25 हजार करोड़ का मेगा प्लान?हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य अपनी उत्पादन क्षमता को दोगुना करना है। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से राजस्थान के उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद जिलों में स्थित अपनी प्रमुख खदानों (Mines) और स्मेल्टिंग प्लांट्स के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए करेगी। कंपनी का लक्ष्य अपने मौजूदा मेटल प्रोडक्शन को 1.2 मिलियन टन से बढ़ाकर सीधे 2 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंचाना है। इस विस्तार योजना में पर्यावरण अनुकूल और सस्टेनेबल माइनिंग तकनीकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।वेदांता ग्रुप और शेयर बाजार के निवेशकों पर क्या होगा असर?हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड का यह कदम मूल कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वेदांता समूह इस समय अपने कर्ज को कम करने और विभिन्न सेक्टरों में डिमर्जर (Dimerger) की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। ऐसे में हिंदुस्तान जिंक से मिलने वाला मजबूत कैश फ्लो और भविष्य की ग्रोथ वेदांता के बैलेंस शीट को भारी सपोर्ट देगी। इस बड़े निवेश की खबर से आने वाले दिनों में वेदांता और हिंदुस्तान जिंक दोनों के शेयरों में निवेशकों की तगड़ी खरीदारी देखने को मिल सकती है, जिससे शेयर बाजार के सूचकांकों को भी बूस्ट मिलेगा।स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा जबरदस्त बूस्टर डोजभौगोलिक और स्थानीय स्तर पर देखें तो इस मेगा प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा राजस्थान को मिलने वाला है। 25,000 करोड़ रुपये के निवेश से स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खदानों के आस-पास के ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा और लोकल वेंडर्स व एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बड़े पैमाने पर बिजनेस मिलेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार को रॉयल्टी और टैक्स के रूप में भारी राजस्व (Revenue) मिलने की उम्मीद है, जिससे पूरे प्रदेश की आर्थिक तस्वीर में एक सकारात्मक बदलाव आएगा।
शेयर बाजार में बंपर तेजी! सेंसेक्स 600 अंक उछला, निफ्टी 23,950 पार, CarTrade Tech के शेयर रॉकेट बने
घरेलू शेयर बाजार में लगातार जारी उतार-चढ़ाव के बीच आज निवेशकों के लिए बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत जबरदस्त तेजी और हरियाली के साथ हुई है। शुरुआती कारोबार में ही बम्बई स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) 600 से अधिक अंकों की छलांग लगाकर मजबूत स्थिति में ट्रेड कर रहा है। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty 50) भी 180 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज करते हुए 23,950 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। बाजार में आए इस बूम से दलाल स्ट्रीट में रौनक लौट आई है।वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेत और घरेलू खरीदारी का बूस्टर डोजबाजार के विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि आज की इस बड़ी तेजी के पीछे अमेरिकी बाजारों (Nasdaq और S&P 500) से मिले सकारात्मक संकेत और एशियाई बाजारों में लौटी मजबूती सबसे बड़ी वजह है। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से बिकवाली का दबाव कम होने और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) द्वारा बैंकिंग, ऑटो और आईटी सेक्टर्स में की जा रही चौतरफा खरीदारी ने बाजार को तगड़ा सपोर्ट दिया है। अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स आज हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं, जिससे रिटेल निवेशकों का सेंटिमेंट भी काफी मजबूत हुआ है।कारट्रेड टेक (CarTrade Tech) के शेयरों में 11% का जोरदार ब्लास्टआज के शुरुआती सत्र में सबसे ज्यादा सुर्खियां ऑनलाइन ऑटो क्लासिफाइड प्लेटफॉर्म कारट्रेड टेक (CarTrade Tech) के शेयर बटोर रहे हैं। कंपनी के शेयरों में शुरुआती ट्रेड में ही 11% से ज्यादा का तूफानी उछाल दर्ज किया गया है, जिसके बाद यह शेयर अपने नए शॉर्ट-टर्म हाई पर पहुंच गया है। हाल ही में आए मजबूत तिमाही नतीजों (Quarterly Results) और कंपनी द्वारा भविष्य की विकास योजनाओं को लेकर किए गए बड़े बदलावों के चलते निवेशकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। वॉल्यूम में भारी बढ़ोतरी के साथ इस शेयर में जमकर खरीदारी हो रही है।आज के टॉप गेनर्स और किन सेक्टर्स में दिख रही है चमक?कारट्रेड टेक के अलावा आज बाजार को ऊपर ले जाने में टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी दिग्गज कंपनियों का बड़ा योगदान है। निफ्टी के टॉप गेनर्स में ऑटो और आईटी स्टॉक्स सबसे आगे चल रहे हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1.5% तक की तेजी दर्ज की जा रही है, जो यह दर्शाती है कि बाजार में ब्रॉडर लेवल पर रिकवरी हो रही है। जानकारों के मुताबिक, अगर निफ्टी 23,950 के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहता है, तो बहुत जल्द यह 24,000 के ऐतिहासिक स्तर को दोबारा छू सकता है।
अमेरिका में फिर खूनी खेल! सिएटल फूड फेस्टिवल में अंधाधुंध गोलीबारी, 2 लोगों की मौत, कई घायल
अमेरिका में गन कल्चर और मास शूटिंग का खूनी सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वॉशिंगटन राज्य के प्रमुख शहर सिएटल से एक बेहद दर्दनाक और डराने वाली खबर सामने आई है। यहाँ आयोजित एक बेहद लोकप्रिय और भारी भीड़भाड़ वाले फूड फेस्टिवल के दौरान अज्ञात बंदूकधारियों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा त्योहार का माहौल चीख-पुकार और दहशत में बदल गया। स्थानीय पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस भीषण गोलीबारी में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।जश्न के बीच अचानक बरसीं गोलियां और मच गई भगदड़सिएटल के डाउनटाउन इलाके के पास आयोजित इस कम्युनिटी फूड फेस्टिवल में सप्ताहांत की छुट्टी होने के कारण सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग और सैलानी मौजूद थे। चश्मदीदों के मुताबिक, लोग खाने-पीने और संगीत का लुत्फ उठा रहे थे कि अचानक एक के बाद एक कई राउंड गोलियां चलने की आवाजें आईं। गोलीबारी शुरू होते ही लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, जिससे कार्यक्रम स्थल पर भारी भगदड़ मच गई। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावर ने बिना किसी चेतावनी के भीड़ पर सीधे गोलियां बरसाना शुरू कर दिया था, जिससे किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।सिएटल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा सर्च ऑपरेशन जारीइस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही सिएटल पुलिस विभाग की भारी फोर्स और स्पेशल स्वैट टीमें एम्बुलेंस के साथ मौके पर पहुंच गईं। सुरक्षा बलों ने तुरंत पूरे फेस्टिवल एरिया को सील कर दिया और घायलों को इलाज के लिए हार्बरव्यू मेडिकल सेंटर भेजा, जहां कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस प्रमुख ने स्थानीय मीडिया को बताया कि हमलावर वारदात को अंजाम देकर भीड़ का फायदा उठाते हुए मौके से फरार होने में कामयाब रहा। हमलावर की पहचान और उसकी धरपकड़ के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और आसपास के लोकल इलाकों में नाकेबंदी कर दी गई है।अमेरिका में बढ़ते गन वायलेंस ने फिर खड़े किए गंभीर सवालसिएटल में हुई इस मास शूटिंग ने एक बार फिर अमेरिका में सख्त गन कंट्रोल कानूनों की बहस को हवा दे दी है। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और मानवाधिकार संगठनों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है। फेडरल इनवेस्टिगेशन एजेंसियां भी इस बात की जांच कर रही हैं कि यह किसी आपसी रंजिश का नतीजा था या फिर एक सोची-समझी आतंकी या हेट-क्राइम की साजिश। इस दुखद घटना के बाद सिएटल के इस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है और लोगों को फिलहाल इस रूट पर न जाने की सलाह दी गई है।
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली राजनयिक खबर सामने आ रही है। वैश्विक महाशक्तियों के बीच जारी शह-मात के खेल में ईरान ने एक ऐसा बड़ा दांव चल दिया है, जिसने इजरायल और अमेरिका दोनों की रणनीतिक चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है। ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने लेबनान के सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के साथ पूरी ताकत से खड़े होने का आधिकारिक एलान कर दिया है। इसके साथ ही तेहरान ने नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के सामने बातचीत को लेकर एक नई और बेहद सख्त शर्त रख दी है, जिसके बाद इस पूरे क्षेत्र में युद्ध के समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं।अयातुल्ला खामेनेई का खुला एलान और हिजबुल्लाह को संजीवनीईरान की राजधानी तेहरान से जारी एक कड़े और सीधे संदेश में अयातुल्ला अली खामेनेई ने साफ कर दिया है कि हिजबुल्लाह को कमजोर या अलग-अलग समझने की भूल न की जाए। ईरान अपनी पूरी सैन्य, वित्तीय और कूटनीतिक ताकत के साथ लेबनानी प्रतिरोध के पीछे मुस्तैदी से खड़ा है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई के इस कड़े रुख से इजरायल के उत्तरी मोर्चे पर तनाव और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है। ईरान का यह कदम सीधे तौर पर तेल अवीव को यह चेतावनी है कि हिजबुल्लाह के कमांड स्ट्रक्चर पर किए जा रहे हमलों का जवाब अब और अधिक संगठित तरीके से दिया जाएगा, जिससे इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) पर दबाव काफी बढ़ गया है।डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान की नई शर्त ने वाशिंगटन में मचाई हलचलइस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ईरानी प्रशासन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित बातचीत या समझौतों को लेकर एक नई शर्त मेज पर रख दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत तभी आगे बढ़ सकती है, जब वाशिंगटन मिडिल ईस्ट में इजरायल की सैन्य आक्रामकता पर पूरी तरह से लगाम लगाए और ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। ट्रंप प्रशासन के लिए यह शर्त एक बड़ी राजनयिक चुनौती बन गई है, क्योंकि ट्रंप एक तरफ इजरायल के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं और दूसरी तरफ वे क्षेत्र में नए युद्धों को टालने का वादा भी कर चुके हैं।रणनीतिक चक्रव्यूह में फंसा इजरायल, अब क्या होंगे आगे के रास्ते?ईरान और हिजबुल्लाह की इस जुगलबंदी और अमेरिका के सामने रखी गई नई शर्त ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने एक नई सुरक्षा चुनौती खड़ी कर दी है। इजरायल इस समय गाजा से लेकर लेबनान तक कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका ईरान की शर्तों के दबाव में आकर अपनी नीतियों में थोड़ा भी बदलाव करता है, तो इजरायल खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पा सकता है। लोकल और ग्लोबल इंटेलिजेंस एजेंसियों की मानें तो आने वाले कुछ दिन बेहद संवेदनशील होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप प्रशासन का अगला कदम ही यह तय करेगा कि यह क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आग में झुलस जाएगा।
जोहरान ममदानी की खुली धमकी पर बेंजामिन नेतन्याहू का पलटवार, बोले- 'न्यूयॉर्क आकर ही रहूंगा
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिकी राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और न्यूयॉर्क के चर्चित असेंबली मेंबर जोहरान ममदानी के बीच जारी जुबानी जंग ने वैश्विक स्तर पर तूल पकड़ लिया है। दरअसल, भारतीय मूल के अमेरिकी राजनेता और डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट जोहरान ममदानी ने नेतन्याहू के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें न्यूयॉर्क आने पर गिरफ्तार करने और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की खुली चेतावनी दी थी। अब इस धमकी पर इजरायली पीएमओ ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि नेतन्याहू किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और वे अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक न्यूयॉर्क का दौरा जरूर करेंगे।अंतरराष्ट्रीय वारंट और जोहरान ममदानी की तीखी घेराबंदीइस पूरे विवाद की जड़ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) द्वारा बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जारी किए गए अरेस्ट वारंट से जुड़ी हुई है। गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत के इस फैसले के बाद, न्यूयॉर्क से विधायक जोहरान ममदानी ने अमेरिकी प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों से मांग की थी कि अगर इजरायली प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क की धरती पर कदम रखते हैं, तो उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाना चाहिए। ममदानी ने साफ किया था कि मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपी किसी भी नेता का न्यूयॉर्क में स्वागत नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान ने अमेरिका में मौजूद इजरायल समर्थकों और विरोधियों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया था।नेतन्याहू का दोटूक जवाब और संयुक्त राष्ट्र में आने का पक्का इरादाजोहरान ममदानी और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों की ओर से मिल रही धमकियों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। यरूशलेम से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने कहा है कि लोकतांत्रिक देशों के नेताओं को इस तरह की धमकियों से डराया नहीं जा सकता। वे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में हिस्सा लेने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजरायल का पक्ष मजबूती से रखने के लिए न्यूयॉर्क की यात्रा पर अडिग हैं। इजरायली सुरक्षा एजेंसियों ने इस दौरे को देखते हुए अपनी तैयारियां और पुख्ता कर दी हैं, ताकि अमेरिकी धरती पर सुरक्षा में कोई चूक न हो सके।न्यूयॉर्क की सड़कों पर भारी तनाव की आशंका और सुरक्षा के कड़े इंतजामबेंजामिन नेतन्याहू के इस कड़े रुख के बाद न्यूयॉर्क सिटी पुलिस डिपार्टमेंट (NYPD) और अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के सामने एक बहुत बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई है। जोहरान ममदानी के नेतृत्व में कई फिलिस्तीन समर्थक और वामपंथी संगठन मैनहट्टन और संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति बना रहे हैं। स्थानीय खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, नेतन्याहू के आगमन के दौरान न्यूयॉर्क की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन और रैलियां देखने को मिल सकती हैं। स्थानीय प्रशासन संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और सुरक्षा घेरा मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है।
पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम इस समय कुदरत की भारी मार झेल रहा है। हालांकि, रविवार (26 जुलाई) को जारी आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक असम में बाढ़ की स्थिति में आंशिक सुधार देखा गया है, लेकिन इसके बावजूद दो और मासूमों की जान चली गई। इसके साथ ही इस मानसून सीज़न में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 68 तक पहुंच गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य के 5 जिलों में 5.24 लाख (5,24,700) से ज्यादा लोग अब भी बाढ़ के गंदे पानी के बीच जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।चराइदेव जिले में सबसे ज्यादा तबाही, 2 लोगों की डूबने से मौतASDMA द्वारा देर रात जारी बुलेटिन के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान चराइदेव जिले में बाढ़ के पानी में डूबने से दो लोगों की मौत हो गई। इस त्रासदी में सबसे ज्यादा प्रभावित भी चराइदेव जिला ही हुआ है, जहां करीब 1.9 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इसके बाद शिवसागर जिले का नंबर आता है, जहां 1.5 लाख से अधिक लोग और जोरहाट में लगभग 1.4 लाख लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। इनके अलावा गोलाघाट और नागांव जिलों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि शनिवार के मुकाबले (जब 6 जिलों में 6.55 लाख लोग प्रभावित थे) कुल प्रभावितों की संख्या में कुछ कमी आई है।राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर 37 हजार से अधिक लोगबाढ़ के तांडव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। चार सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में प्रशासन की ओर से 354 राहत शिविर (Relief Camps) और राहत वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं। इन शिविरों में वर्तमान में 37,724 विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं, जिन्हें भोजन, साफ पानी और दवाइयां मुहैया कराई जा रही हैं।सेना और NDRF का मोर्चा, 763 गांव पानी में डूबेऊपरी असम के संवेदनशील और दूर-दराज के इलाकों में भारतीय सेना (Indian Army), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और असम पुलिस की संयुक्त टीमें राहत और बचाव अभियानों में जुटी हुई हैं। ASDMA के अनुसार, वर्तमान में राज्य के 763 गांव पूरी तरह से जलमग्न हैं, जबकि 48,742 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि में लगी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।धनसिरी नदी खतरे के निशान के पार, इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसानबाढ़ के प्रचंड वेग के कारण राज्य के कई जिलों में तटबंध (Embankments), सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी (Dhansiri River) अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जो आसपास के इलाकों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है। इंसानों के साथ-साथ इस प्राकृतिक आपदा की गाज बेजुबानों पर भी गिरी है—असम भर में 88,240 से अधिक पालतू मवेशी और मुर्गियां भी इस भयावह बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
राजधानी दिल्ली में रविवार (26 जुलाई) को मौसम सामान्य से अधिक गर्म और उमस भरा रहा, जिससे दिल्लीवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज (सोमवार, 27 जुलाई) के लिए राहत भरी खबर दी है। मौसम विभाग के अनुसार, आज दिल्ली-एनसीआर में दिनभर बादल छाए रहेंगे और कई इलाकों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान जताया गया है।रविवार को 36.6C तक पहुंचा तापमान, उमस से छूटे पसीनेIMD की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.7 डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस रहा। शाम के समय हवा में नमी का स्तर (सापेक्ष आर्द्रता) 63 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिससे वास्तविक तापमान के मुकाबले काफी ज्यादा चिपचिपी गर्मी महसूस हुई। हालांकि, उमस के बावजूद दिल्ली की हवा साफ बनी रही और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 83 के साथ 'संतोषजनक' श्रेणी में दर्ज किया गया।सोमवार को कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?मौसम विभाग ने सोमवार को सुबह से लेकर दोपहर के बीच राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है, जबकि रात के समय हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है।तापमान: दिन का अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।हवा की रफ्तार: सुबह के समय दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 15 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो दोपहर और शाम तक बढ़कर 15 से 20 किमी/घंटा हो सकती हैं।अगले 3 दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौरदिल्लीवासियों को मंगलवार से गर्मी और उमस से और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है। IMD के अनुसार:मंगलवार और बुधवार: राजधानी में मौसम की गतिविधियां तेज होंगी और ज्यादातर इलाकों में मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की जा सकती है।सप्ताह का तापमान: बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और पूरे हफ्ते अधिकतम पारा 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा।यात्रियों के लिए सावधानी की सलाहभले ही बारिश से तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन IMD ने निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) और सड़कों पर धीमी रफ्तार वाले ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) की चेतावनी दी है। ऐसे में दफ्तर या काम पर निकलने वाले लोगों को थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।

31 C
