मिस्र (Egypt) के प्राचीन इतिहास और उसकी रहस्यमयी वास्तुकला ने एक बार फिर पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों (Archaeologists) को हैरान कर दिया है। मिस्र के पश्चिमी रेगिस्तान की रेत के नीचे दबा हुआ बाइजेंटाइन युग (Byzantine Era) का एक पूरा का पूरा प्राचीन शहर खोज निकाला गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सदियों तक जमीन में दफन रहने के बावजूद यह शहर बेहद सुरक्षित और बेहतरीन स्थिति में मिला है। इस ऐतिहासिक खोज के दौरान चौथी शताब्दी के आवासीय घर, धार्मिक इमारतें और अलेक्जेंड्रिया के पास 'गोल्डन टंग' (सोने की जीभ) वाली कई प्राचीन रहस्यमयी कब्रें भी हाथ लगी हैं।ग्रिड सिस्टम पर बना था शहर, चौराहे और सड़कों का मिला बढ़िया जालमिस्र के सर्वोच्च पुरातत्व परिषद के महासचिव हिशाम अल-लीथी के अनुसार, 'द गार्जियन यूके' की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई है कि यह प्राचीन शहर बेहद आधुनिक और व्यवस्थित तरीके से बसाया गया था। खुदाई में यह बात सामने आई है कि पूरा शहर 'ग्रिड सिस्टम' पर आधारित था, जहां उत्तर-दक्षिण दिशा की मुख्य सड़कें पूर्व-पश्चिम की ओर जाने वाली सड़कों को समकोण पर काटती थीं। इस बेहतरीन शहरी नियोजन के कारण शहर के बीचों-बीच खुले चौक और बड़े सार्वजनिक स्थानों का निर्माण होता था, जो उस दौर की उन्नत वास्तुकला को दर्शाता है।बस्ती के छोर पर मिला भव्य बेसिलिका चर्च और ऊँची मीनारेंपुरातत्व मिशन के प्रमुख महमूद मसऊद ने इस महत्वपूर्ण खोज की जानकारी देते हुए बताया कि मिट्टी में दबी इस पूरी बसावट के आखिरी छोर पर एक विशाल 'बेसिलिका-शैली' का चर्च मिला है, जिसका मुख्य द्वार शहर की मुख्य सड़कों की ओर खुलता था। इसके साथ ही, बाहरी आक्रमणों और घुसपैठियों से इस पूरे इलाके की सुरक्षा करने के लिए बस्ती की बाहरी सीमा पर दो बेहद विशाल और ऊँची मीनारों (Towers) के अवशेष भी मिले हैं, जो सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को बयां करते हैं।चर्च के पादरी 'तिसौस' का घर और सम्राटों के कांस्य सिक्के बरामदखुदाई के दौरान सुरक्षा के लिए बनाई गई मोटी और मजबूत रक्षात्मक दीवारों वाला एक किला और कई आलीशान घर भी सामने आए हैं। इन घरों के भीतर मेहमानों के स्वागत के लिए बड़े हॉल (स्वागत कक्ष) और प्राचीन मेहराबदार छतें बनी हुई थीं। पुरातत्वविदों को मिले इन घरों में से एक घर 'तिसौस' (Tisous) नाम के व्यक्ति का था, जो उस दौर में इस चर्च के डीकन (पादरी) के रूप में काम करता था। इन घरों से ब्रेड बनाने के ओवन, रसोई, अनाज पिसाई के औजार और बाइजेंटाइन सम्राटों के चित्र वाले दुर्लभ कांस्य सिक्के मिले हैं, जिन पर लैटिन भाषा में शिलालेख और ईसाई धर्म के प्रतीक चिन्ह अंकित हैं।कॉन्स्टैंटियस द्वितीय के काल के सोने के सिक्के और प्राचीन ऑस्ट्राकामिस्र के पुरातत्व मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, खुदाई में स्वर्ण सिक्कों का एक बड़ा समूह भी हाथ लगा है। जानकारों का मानना है कि ये सोने के सिक्के प्रसिद्ध रोमन सम्राट कॉन्स्टैंटियस द्वितीय (Constantius II) के शासनकाल (337-361 ईस्वी) के हैं। इसके अलावा, इस्लामिक, कॉप्टिक और यहूदी पुरातत्व विभाग के प्रमुख दिया जहरान ने बताया कि टीम को मिट्टी के बर्तनों के करीब 200 ऐसे टुकड़े मिले हैं, जिनका इस्तेमाल उस दौर में कागज की जगह लिखने के लिए किया जाता था। इतिहास में इन्हें 'ऑस्ट्राका' (Ostraca) कहा जाता था, और इन पर उस काल के व्यावसायिक लेन-देन, पत्र और दैनिक जीवन के ब्यौरे लिखे हुए हैं।8 मीटर गहरी कब्रें और 'गोल्डन टंग' का रहस्यमयी रिवाजशहर के अलावा, भूमध्यसागरीय बंदरगाह शहर अलेक्जेंड्रिया से लगभग 100 किलोमीटर पश्चिम में स्थित 'मरीना अल-अलेमैन' पुरातत्व स्थल पर कुल 18 प्राचीन कब्रें भी खोजी गई हैं, जिससे इस साइट पर अब तक मिली कुल कब्रों की संख्या 48 हो गई है। मिशन की प्रमुख इमान अब्देल-खालिक ने बताया कि इनमें से 11 कब्रें ठोस चट्टानों को काटकर बनाई गई थीं, जिनकी औसत गहराई 8 मीटर (लगभग 26 फीट) है। इन कब्रों के पास से मिट्टी के बर्तन, एम्फोरा, दीये और 2.5 मीटर लंबा एक विशाल ग्रेनाइट सारकोफैगस (पत्थर का ताबूत) मिला है, जिसके भीतर मानव कंकाल और प्लास्टर से बनी स्फिंक्स मूर्ति के अवशेष मौजूद थे।इस खोज का सबसे रहस्यमयी हिस्सा कुछ मृतकों के कंकालों के जबड़े से मिला। पुरातत्वविदों को कुछ कंकालों के मुंह के भीतर सोने के छोटे-छोटे टुकड़े मिले, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में “स्वर्ण जिह्वा” या 'गोल्डन टंग' (Golden Tongue) कहा जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, यह उस ग्रीको-रोमन युग की एक खास धार्मिक और अंतिम संस्कार संबंधी मान्यता थी, जिसके तहत माना जाता था कि सोने की जीभ होने से मृतक परलोक में देवताओं से आसानी से संवाद कर सकेंगे।चौथी शताब्दी के बाद अचानक क्यों गायब हो गया यह शहर?वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ऐतिहासिक स्थल वास्तव में प्राचीन ग्रीको-रोमन बंदरगाह शहर 'ल्यूकास्पिस' (Leukaspis) था, जिसे दूसरी शताब्दी के दौरान समुद्र तट के किनारे व्यापार के उद्देश्य से बसाया गया था। यह शहर चौथी शताब्दी तक व्यापार और समृद्धि के मामले में अपने चरम पर रहा, लेकिन उसके बाद किसी बड़े भूकंप, समुद्री तूफान या महामारी जैसी विभिन्न अज्ञात वजहों के कारण यह पूरा शहर इतिहास के पन्नों से लुप्त हो गया और समय के साथ रेगिस्तान की रेत के नीचे हमेशा के लिए दफन हो गया।
भारतीय सिनेमा में पिछले कुछ सालों में बड़े बजट की पैन-इंडिया फिल्मों का एक नया दौर शुरू हुआ है। जहाँ 300 से 500 करोड़ रुपये के भारी बजट के साथ एक्शन, वीएफएक्स और बड़े सितारों पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, वहीं आज भी फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा सवाल खड़ा है। सवाल यह है कि क्या इतनी विशाल और कमर्शियल फिल्मों की कमान महिलाओं के हाथों में सुरक्षित महसूस की जाती है? इसी विषय पर सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित गैंगस्टर-एक्शन फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' में 'एलिजाबेथ' का किरदार निभा रही मशहूर एक्ट्रेस हुमा कुरैशी ने फिल्म इंडस्ट्री की कड़वी सच्चाई को उजागर किया है।'टॉक्सिक' जैसी फिल्म भारतीय दर्शकों ने पहले कभी नहीं देखीहुमा कुरैशी हाल ही में 'द लल्लनटॉप' के एक पॉडकास्ट में शामिल हुईं, जहाँ दर्शकों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' को लेकर बड़ा दावा किया। हुमा ने कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि भारतीय दर्शकों ने स्क्रीन पर 'टॉक्सिक' जैसी फिल्म पहले कभी नहीं देखी है। इसलिए थोड़ा इंतजार कीजिए। फिल्म में जितने भी फीमेल कैरेक्टर्स और लीड एक्ट्रेसेस हैं, उन्होंने कमाल का काम किया है। यह फिल्म सिनेमाघरों में आते ही हर किसी को पूरी तरह से हिलाकर रख देगी।कमर्शियल सिनेमा में पुरुष एक्टर्स को महिला डायरेक्टर से निर्देश लेना पसंद नहींहुमा कुरैशी ने फिल्म की नेशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर गीतू मोहनदास की तारीफ करते हुए फिल्म इंडस्ट्री के पुरुष प्रधान रवैये पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, गीतू मोहनदास मूल रूप से एक आर्ट-हाउस मलयाली फिल्ममेकर हैं, जिनकी फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली है। जब उन्होंने मुझे इस फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाई, तो मैं एक महिला फिल्ममेकर के साथ इतने बड़े स्केल पर काम करने को लेकर बेहद उत्साहित थी।हुमा ने आगे कहा, इस फिल्म इंडस्ट्री में, खास तौर पर बड़ी कमर्शियल फिल्मों के दौर में एक महिला के लिए काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। सच तो यह है कि आज भी मुख्यधारा के ज्यादातर पुरुष एक्टर्स को सेट पर किसी महिला डायरेक्टर से निर्देश या ऑर्डर लेना बिल्कुल पसंद नहीं आता है। लेकिन गीतू मोहनदास ने जिस तरह से इतनी बड़ी एक्शन फिल्म को संभाला है और सुपरस्टार यश के साथ जो तालमेल बिठाया है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। गीतू ने जो सिनेमा रचा है, वह सबकी उम्मीदों से बहुत आगे है।सुपरस्टार यश ने हुमा को बताया 'शांत साहस का प्रतीक'इस बीच, फिल्म के मुख्य अभिनेता और कन्नड़ सुपरस्टार यश ने अपनी को-स्टार हुमा कुरैशी के अभिनय और उनके नए प्रोडक्शन वेंचर की जमकर सराहना की है। हुमा की हालिया रिलीज फिल्म 'बेबी डू डाई डू' (जिसमें हुमा ने मुख्य भूमिका निभाने के साथ ही उसे प्रोड्यूस भी किया है) के लिए यश ने अपने इंस्टाग्राम पर एक बेहद भावुक नोट लिखा।यश ने लिखा, सफलता का एक रास्ता बहुत आसान होता है, लेकिन हुमा कुरैशी ने हमेशा मुश्किल रास्ता चुना है। फिल्म को प्रोड्यूस करना बिल्कुल भी ग्लैमरस काम नहीं है। इसमें देर रात तक बजट की जोड़-तोड़ करना, ऐसी कहानियों के लिए अकेले लड़ना जिस पर कोई और भरोसा नहीं करता, और चीजें बिगड़ने पर सारी जिम्मेदारी खुद उठाना शामिल है। हुमा ने एक बेहतरीन एक्टर और प्रोड्यूसर के तौर पर इसे सच कर दिखाया है। उनका यह शांत साहस तारीफ के काबिल है और मुझे उन पर बेहद गर्व है।26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी 'टॉक्सिक''टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' एक हाई-ऑक्टेन गैंगस्टर ड्रामा फिल्म है, जिसे केवीएन (KVN) प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के बैनर तले बेहद भव्य स्तर पर बनाया गया है। फिल्म में यश और हुमा कुरैशी के अलावा नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। यह फिल्म इसी साल 26 अगस्त 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में कई भाषाओं में एक साथ रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
देशभर में मानसून की दस्तक के साथ ही पहाड़ी और मैदानी इलाकों में कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। इसी बीच केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के थाथरी इलाके से बादल फटने (Cloudburst) की एक बेहद हैरान करने वाली घटना सामने आई है। अचानक बादल फटने के कारण आए सैलाब और मलबे की चपेट में आने से थाथरी का मुख्य बाजार (Main Market) और प्रसिद्ध जामिया मस्जिद गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। राहत की बात यह रही कि इस अचानक आई आपदा में किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई है, लेकिन बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के पानी और मलबे की वजह से कई रिहायशी मकान और गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं।सैलाब के साथ आया भारी मलबा, नेशनल हाईवे-244 को करना पड़ा बंदरिपोर्ट्स के मुताबिक, डोडा के ऊपरी पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के चलते अचानक बाढ़ (Flash Flood) जैसी स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद पहाड़ों से भारी मात्रा में कीचड़, बड़े-बड़े पत्थर और मलबा बहकर नीचे थाथरी शहर और रिहायशी बस्तियों में घुस गया। रास्ते में खड़ी कई कारें और दोपहिया वाहन इस मलबे के नीचे दब गए। इस प्राकृतिक आपदा के चलते प्रशासन को एहतियात के तौर पर बटोटे-डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे (NH-244) को तुरंत बंद करना पड़ा है। हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप होने से सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं।युद्धस्तर पर रेस्क्यू और रेस्टोरेशन का काम शुरू, एडवाइजरी जारीघटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमों ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर रेस्क्यू और रेस्टोरेशन ऑपरेशन शुरू कर दिया है। नेशनल हाईवे से मलबे और पत्थरों को हटाने और सड़क संपर्क को दोबारा बहाल करने के लिए बड़ी-बड़ी अर्थ-मूविंग मशीनों (JCB) को काम पर लगाया गया है। डोडा जिला प्रशासन ने आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों ने कहा है कि जब तक इस संवेदनशील रास्ते को पूरी तरह साफ और सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता, तब तक लोग इस रूट पर अपनी गैर-जरूरी यात्राओं को टाल दें। फिलहाल अधिकारी नुकसान के सटीक आकलन में जुटे हैं।महाराष्ट्र के नासिक में बादल फटने जैसी बारिश की चेतावनी, हाई अलर्टउत्तर भारत के साथ-साथ पश्चिमी भारत में भी मानसून विकराल रूप ले रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर, इगतपुरी और आस-पास के पश्चिमी हिस्सों में बादल फटने जैसी (Cloudburst-like) अत्यंत भारी बारिश की बड़ी चेतावनी जारी की है। इस गंभीर अलर्ट के बाद नासिक जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर, त्र्यंबकेश्वर और सप्तश्रृंगी मंदिर जैसे बड़े और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों सहित सभी स्कूल, कॉलेज और साप्ताहिक बाजारों को अस्थाई रूप से बंद रखने का कड़ा आदेश दिया गया है।ओडिशा में रेड अलर्ट, अरुणाचल प्रदेश में मौसम के दो रंगमौसम विभाग (IMD) ने पूर्वी राज्य ओडिशा में भी आज भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की आशंका जताई है। समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों और खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को गहरे पानी में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। दूसरी तरफ, उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश में मौसम के दो बिल्कुल अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। जहां एक ओर राज्य के पूर्वी जिलों में मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर हैं, वहीं दूसरी ओर राजधानी ईटानगर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में लोग अत्यधिक उमस और भीषण गर्मी से परेशान हैं।
दुर्गा स्क्वॉड कैसे बदलेगा बंगाल में महिला सुरक्षा का हाल?
पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं में सुरक्षा की भावना को मजबूत करने के लिए एक 'दुर्गा स्क्वॉड' के गठन का एलान किया है। इसके लिए करीब 16 हजार महिला पुलिस कांस्टेबलों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। यह राज्य के विभिन्न हिस्सों में मोटरसाइकिल से ...
अयोध्या में करोड़ों राम भक्तों की आस्था के सबसे बड़े केंद्र प्रभु श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले ने अब एक नया और बेहद सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। इस पूरे घोटाले की गहराई से जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मंदिर के दानपात्र से नकदी गायब होना कोई एक-दो बार की सामान्य घटना नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह लंबे समय से बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी जा रही एक बड़ी साजिश थी। इस बड़ी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी आपातकालीन बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के आधिकारिक इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं।एसआईटी का दावा: 45 दिनों की सीसीटीवी फुटेज में 70 बार दिखी चोरीजांच एजेंसी (SIT) ने मंदिर परिसर के भीतर लगे कैमरों की लगभग 45 दिनों की व्यापक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को बारीकी से खंगाला है। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि के दौरान सुरक्षा जांच और काउंटिंग रूम के कर्मचारियों की निगरानी में भयंकर लापरवाही और ढील पाई गई। फुटेज के आधार पर जांच टीम का दावा है कि कुछ मुख्य आरोपी मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय लाखों की नकदी बड़ी चालाकी से अपने कपड़ों में छिपाकर ले जाते थे। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि इस औचक जांच से ठीक पहले कुछ संदिग्ध कर्मचारियों के पास से लगभग 78.94 लाख रुपये की नकदी पहले ही बरामद की जा चुकी थी। इसके अलावा, 4 जून को काउंटिंग सेंटर से जुड़े एक वाशरूम से भी लावारिस हालत में करीब 2.25 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे।डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर उठे सवाल, SOP का नहीं हुआ पालनएसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और उनकी भूमिका पर भी गंभीर उंगलियां उठाई गई हैं। जांच के मुताबिक, जब 20 सितंबर 2024 को उन्हें दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की कमान सौंपी गई थी, तब उनके कार्यकाल के दौरान दान की गिनती के लिए बनाए गए कड़े मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं कराया गया। उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अपनी पसंद के लोगों की नियुक्तियां कीं और सुभाष श्रीवास्तव को सीधे काउंटिंग सेंटर का नया प्रभारी नियुक्त कर दिया, जिससे पूरी निगरानी व्यवस्था ध्वस्त हो गई।मुख्य आरोपी टिन्नू यादव बिना अनुमति संभाल रहा था हुंडियों की चाबियांरिपोर्ट में इस पूरे रैकेट के मुख्य सूत्रधार और प्रमुख आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को लेकर भी कई बड़े खुलासे किए गए हैं। एसआईटी के अनुसार, टिन्नू यादव बिना किसी लिखित आधिकारिक अनुमति या आदेश के ही मुख्य दान पेटियों (हुंडियों) की चाबियां अपने पास रखता था और जब चाहे उसकी पहुंच संभाल रहा था। इतना ही नहीं, टिन्नू यादव की विशेष सिफारिश और प्रभाव के चलते ही मनीष कुमार यादव नाम के एक अन्य संदिग्ध व्यक्ति को भी दान राशि के मुख्य गिनती कक्ष में बिना उचित वेरिफिकेशन के तैनात किया गया था।दैनिक रूप से गायब हो रही थी नकदी, 22 जुलाई को आएगी फाइनल रिपोर्टसीसीटीवी कैमरों के गहन विश्लेषण के बाद एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि 45 दिनों के भीतर कम से कम 70 बार से ज्यादा बार छोटी-बड़ी चोरियों को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह अवैध सिलसिला संभवतः अप्रैल या मई 2025 के आसपास से ही धड़ल्ले से शुरू हो चुका था और इस वर्ष 5 जून को मामला खुलने तक लगातार जारी रहा। जांच एजेंसी का मानना है कि इस पूरी समय अवधि के दौरान लगभग हर दिन किसी न किसी रूप में चढ़ावे की नकदी में भारी हेराफेरी की गई।चंपत राय बाहर, कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव; बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटीएसआईटी की यह विस्तृत रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सामने आने से कुछ घंटे पहले ही राम मंदिर ट्रस्ट की करीब तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक समाप्त हुई। इस बैठक में ट्रस्ट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के पदों से इस्तीफे तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिए हैं। वर्तमान संकट को देखते हुए ट्रस्ट ने कृष्ण मोहन को नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया है। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने और एक नए पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस विशेष समिति में देश के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और वरिष्ठ ट्रस्टी सुरेश हावरे को शामिल किया गया है।ट्रस्ट ने कहा- घटना से दुखी हैं, लेकिन सभी 2,926 गैर-नकद चढ़ावे पूरी तरह सुरक्षितबैठक के समापन के बाद ट्रस्ट ने देश के करोड़ों श्रद्धालुओं के नाम एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया। ट्रस्ट ने कहा कि मंदिर की दान राशि से जुड़ी इस कथित अनियमितता और चोरी की घटना से पूरे संगठन को गहरा आघात लगा है और वे इससे बेहद दुखी हैं। हालांकि, ट्रस्ट ने देश-विदेश के रामभक्तों को आश्वस्त करते हुए साफ किया है कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सभी 2,926 गैर-नकद चढ़ावे (सोना, चांदी, कीमती आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं) पूरी तरह से सुरक्षित लॉकर में हैं और उनका एक-एक रिकॉर्ड पारदर्शी है। ट्रस्ट ने यह भी सूचित किया कि आगामी 22 जुलाई को उनकी अगली बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें एसआईटी की फाइनल क्लोजर रिपोर्ट पर विस्तृत कानूनी कार्रवाई की जाएगी और नए अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्तियों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
सनातन धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को 'योगिनी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। हिंदू शास्त्रों और पद्म पुराण में इस एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करता है, उसे 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यह व्रत समस्त पापों और कष्टों का नाश करने वाला माना गया है। हालांकि, इस साल तिथियों के फेर और क्षय होने के कारण लोग असमंजस में हैं कि व्रत किस दिन रखें। आइए पंचांग की सटीक गणना के आधार पर व्रत की सही तारीख और पारण का समय जानते हैं।योगिनी एकादशी व्रत की तारीख को लेकर क्यों है असमंजस?द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर होने जा रहा है। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर होगा।इस बार विशेष परिस्थिति यह बन रही है कि 10 और 11 जुलाई, दोनों ही दिन एकादशी तिथि सूर्योदय के समय पूर्ण रूप से व्याप्त नहीं है। इसके अलावा, 11 जुलाई को सुबह 05 बजकर 22 मिनट के तुरंत बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी, जिससे शनिवार को एकादशी तिथि का क्षय (कमी) हो गया है। शास्त्रों के नियमों के अनुसार, जब दोनों दिन सूर्योदय काल में एकादशी तिथि मौजूद न हो, तो पहले दिन ही व्रत रखना शास्त्रसम्मत माना जाता है।गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के लिए व्रत की अलग-अलग तारीखेंपंचांग के नियमों और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए इस साल दोनों ही दिन व्रत रखा जा सकेगा, लेकिन इसके वर्ग अलग-अलग होंगे:गृहस्थों के लिए व्रत की तारीख: सामान्य नागरिकों और गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का व्रत रखना पूरी तरह से मान्य और श्रेष्ठ होगा।वैष्णव संप्रदाय के लिए व्रत की तारीख: साधु-संतों और वैष्णव मत को मानने वाले श्रद्धालुओं के लिए 11 जुलाई 2026, शनिवार को व्रत रखना उत्तम रहेगा।नोट कर लें दोनों दिनों के व्रत का सटीक पारण समय (Parana Timing)एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसका पारण (व्रत खोलना) शुभ और निर्धारित मुहूर्त के भीतर किया जाए। दोनों दिनों के लिए पारण का समय इस प्रकार है:10 जुलाई को व्रत रखने वालों के लिए: जो श्रद्धालु शुक्रवार को व्रत रखेंगे, वे अगले दिन यानी 11 जुलाई को दोपहर 01 बजकर 50 मिनट से शाम 04 बजकर 36 मिनट के बीच अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।11 जुलाई को व्रत रखने वालों के लिए: शनिवार को व्रत रखने वाले वैष्णव समुदाय के लोग अगले दिन यानी 12 जुलाई, रविवार को सुबह 05 बजकर 32 मिनट से सुबह 08 बजकर 18 मिनट के बीच पारण करेंगे।भूलकर भी न करें ये गलतियां, इन नियमों का करें पालनयोगिनी एकादशी व्रत का नियम दशमी तिथि की रात से ही शुरू हो जाता है। व्रतियों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:दशमी के नियम: दशमी तिथि, यानी 9 जुलाई की शाम को, केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। भोजन में तामसिक चीजें, जैसे लहसुन, प्याज, बैंगन, मूंग और मसूर की दाल, का प्रयोग भूलकर भी न करें।व्रत के दिन की सावधानियाँ: एकादशी व्रत के दिन बाल और नाखून काटने की पूरी मनाही होती है। इस दिन महिलाओं को बाल धोने से भी बचना चाहिए।खान-पान का तरीका: एकादशी के दिन किसी भी प्रकार के अनाज (अन्न) का सेवन वर्जित है। व्रत के दौरान केवल फलाहार, दूध या जल का सेवन करें और पूर्ण रूप से भगवान विष्णु की भक्ति व मंत्रों के जाप में मन लगाएं।(Disclaimer: यह लेख सामान्य धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित है।) विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार तिथियों में मामूली अंतर संभव है। श्रद्धालु अपनी स्थानीय परंपराओं के अनुसार निर्णय लें।
भारतीय संस्कृति और वित्तीय बाजारों में सोने (Gold) को हमेशा से संकट का साथी और सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। हालांकि, बदलते डिजिटल दौर में अब लोग फिजिकल सोना यानी भारी-भरकम गहने या सिक्के खरीदकर लॉकर में रखने के बजाय गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में पैसा लगाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। डिजिटल सोने के इस विकल्प में निवेशकों को न तो मेकिंग चार्ज और शुद्धता की कोई टेंशन होती है और न ही इसके चोरी होने का कोई डर रहता है। सबसे खास बात यह है कि सुरक्षित रहने के साथ-साथ इन फंड्स ने निवेशकों को बेहद दमदार रिटर्न भी कमा कर दिया है।म्यूचुअल फंड्स के हालिया ट्रैकिंग डेटा (ACE MF) के अनुसार, देश के बड़े और स्थापित गोल्ड ईटीएफ ने पिछले 3 वर्षों की अवधि में निवेशकों को 34% तक का शानदार सालाना कंपाउंडेड रिटर्न (CAGR) दिया है। प्रदर्शन की इस रेस में यूटीआई गोल्ड ईटीएफ (UTI Gold ETF) सबसे आगे निकल गया है। आइए समझते हैं कि आखिर गोल्ड ईटीएफ कैसे काम करता है और इस समय रिटर्न के मामले में कौन सी टॉप 5 स्कीम्स बाजार में धमाल मचा रही हैं।आखिर क्या होता है Gold ETF और यह कैसे काम करता है?गोल्ड ईटीएफ (Exchange Traded Fund) मूल रूप से एक म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट ही है, जो सीधे तौर पर भौतिक सोने (Physical Gold) की कीमतों से लिंक होता है। यह फंड शेयर बाजार (NSE और BSE) पर लिस्टेड होता है। जिस तरह आप किसी कंपनी के शेयर को अपने डीमैट अकाउंट के जरिए जब चाहें खरीद और बेच सकते हैं, ठीक उसी तरह गोल्ड ईटीएफ में भी ट्रेडिंग की जा सकती है। इसका ग्राफ घरेलू बाजार में 24 कैरट सोने के वास्तविक भाव को ट्रैक करता है। जैसे ही बाजार में सोने के दाम बढ़ते हैं, आपके ईटीएफ यूनिट्स की वैल्यू भी बढ़ जाती है। इसमें उच्च लिक्विडिटी और बेहद कम ट्रैकिंग डिफरेंस जैसी बेहतरीन सुविधाएं मिलती हैं।3 साल के परफॉर्मेंस में UTI Gold ETF बना नंबर-1जुलाई 2026 के ताजा डेटा के मुताबिक, कम से कम ₹1,500 करोड़ से अधिक के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले बड़े फंड्स की श्रेणी में UTI Gold ETF का प्रदर्शन सबसे उत्कृष्ट रहा है:बेंचमार्क को बड़े अंतर से पछाड़ा: बीते 3 साल की अवधि में जहां इसके संबंधित बेंचमार्क ने महज 1.7% का ही मामूली रिटर्न दिया, वहीं यूटीआई गोल्ड ईटीएफ ने 34% का सालाना सीएजीआर (CAGR) रिटर्न देकर अपने बेंचमार्क को 32.2% के भारी अंतर से पछाड़ दिया।1 साल की अवधि का दमदार रिकॉर्ड: सिर्फ दीर्घकालिक ही नहीं, बल्कि पिछले 1 साल की छोटी अवधि में भी यह फंड शीर्ष पर रहा। इसने निवेशकों को 45.6% का बंपर मुनाफा दिया, जबकि इसी दौरान इसका बेंचमार्क इंडेक्स सिर्फ 10.1% की ग्रोथ दर्ज कर सका।देश का सबसे बड़ा गोल्ड फंड: अगर एसेट साइज (फंड साइज) की बात करें, तो वर्तमान में 'ICICI Pru Gold ETF' देश का सबसे बड़ा गोल्ड फंड बना हुआ है, जिसका कुल कॉर्पस ₹27,578.2 करोड़ के विशाल स्तर पर पहुंच चुका है।भारत के Top 5 Gold ETFs: रिटर्न और फंड साइज का पूरा रिपोर्ट कार्डयदि आप भी चालू वित्त वर्ष में सोने में डिजिटल और सुरक्षित तरीके से निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो एसेट्स और शानदार रिटर्न के मामले में देश की इन शीर्ष 5 स्कीम्स के प्रदर्शन पर नजर डाल सकते हैं:फंड का नाम (Gold ETF Scheme)3 साल का सालाना रिटर्न (CAGR)1 साल का कुल रिटर्नकुल फंड साइज (AUM)1. UTI Gold ETF34.0%45.6%₹1,500 Cr+2. ICICI Pru Gold ETF33.8%45.1%₹27,578.2 Cr3. HDFC Gold ETF33.5%44.8%₹5,000 Cr+4. SBI Gold Fund/ETF33.2%44.5%₹10,000 Cr+5. Nippon India Gold ETF33.0%44.2%₹9,000 Cr+(नोट: ऊपर दिए गए आंकड़े 2 जुलाई 2026 तक के लेटेस्ट म्यूचुअल फंड डेटा पर आधारित हैं। निवेश करने से पहले स्कीम के दस्तावेज ध्यान से पढ़ें।)
राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा 70 बार नकदी छिपाने के मामले पाए गए हैं। साथ ही ...
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक संपन्न हुई। करीब तीन घंटे तक चली इस लंबी बैठक में ट्रस्ट ने कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं, जिसकी आधिकारिक घोषणा कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मीडिया के सामने की। इस बैठक में सबसे बड़ा कदम उठाते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इसके साथ ही, पिछले कुछ समय से मंदिर के चढ़ावे और कीमती सामानों के गायब होने को लेकर लग रहे आरोपों पर ट्रस्ट ने अपनी स्थिति पूरी तरह साफ करते हुए दान का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है।दान चोरी के आरोपों के बीच पहली बार सामने लाया गया सरकारी रजिस्टरराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए गहने और कीमती सामानों के गायब होने की अफवाहों और आरोपों को खारिज करने के लिए ट्रस्ट ने एक अनोखा कदम उठाया। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने मीडिया के सामने दान की गई वस्तुओं का आधिकारिक सरकारी रजिस्टर पेश किया। उन्होंने जनता की शंकाओं को दूर करने के लिए बताया कि मंदिर को मिले सभी उपहार और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका एक-एक विवरण दर्ज है।5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस सहित दिखाई गईं ये कीमती चीजेंभ्रम की स्थिति को खत्म करने के लिए ट्रस्ट ने कुछ बेहद मूल्यवान और खास वस्तुओं को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित भी किया। इनमें सबसे प्रमुख आकर्षण एक श्रद्धालु द्वारा भेंट की गई सोने की परत चढ़ी 'रामचरितमानस' की अद्भुत प्रति रही, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। स्वामी गोविंद देव गिरि ने साफ किया कि रजिस्टर में अब तक कुल 2,800 से अधिक दान की गई वस्तुओं का पूरा विवरण दर्ज है, जिनमें से कुछ चुनिंदा और मुख्य चीजों को उदाहरण के तौर पर लोगों के सामने लाया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।कुल 2,926 कीमती वस्तुएं मिलीं, श्रद्धालु खुद आकर देख सकते हैं ब्यौराट्रस्ट द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक राम मंदिर को कुल 2,926 मूल्यवान वस्तुएं दान में मिल चुकी हैं। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को एक बड़ा भरोसा देते हुए कहा कि यदि किसी भक्त को अपने द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी या किसी अन्य कीमती सामान की स्थिति जाननी है, तो वह पूरी तरह स्वतंत्र है। इसके लिए श्रद्धालु को ट्रस्ट के अधिकारियों से पहले समय (Appointment) लेना होगा और फिर वे अयोध्या आकर अपने दान का पूरा रिकॉर्ड देख सकते हैं।22 अगस्त को होगी अगली बैठक; SIT रिपोर्ट पर होगी बड़ी कार्रवाईइस पूरे मामले में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब ट्रस्ट ने बताया कि दान की कथित चोरी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट जल्द ही सामने आने वाली है। ट्रस्ट की अगली बड़ी बैठक 22 अगस्त को तय की गई है। इस बैठक में न केवल एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट पर गहन चर्चा होगी, बल्कि नए ट्रस्टियों की आधिकारिक नियुक्तियों पर भी मुहर लगाई जाएगी।कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने सख्त लहजे में कहा कि चोरी एक गंभीर अपराध है और इसमें शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह फरार आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़कर कानून के हवाले करे। ट्रस्ट इस मामले में शामिल हर एक व्यक्ति के खिलाफ सबसे सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग पर पूरी तरह अडिग है।
मशहूर पंजाबी अभिनेता दिलजीत दोसांझ की विवादित फिल्म 'सतलुज' को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 (ZEE5) पर रिलीज होने के महज दो दिन बाद फिल्म को हटाए जाने और सोशल मीडिया पर इसके लीक होने के बाद अब खुद ZEE5 ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक तरफ जहां मुख्य अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने फैंस से डाउनलोड की गई कॉपियों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की अपील की है, वहीं दूसरी तरफ ज़ी5 ने आधिकारिक बयान जारी कर दर्शकों से पायरेसी को बढ़ावा न देने की हाथ जोड़कर गुहार लगाई है।ZEE5 ने जारी किया आधिकारिक पोस्टर, कहा- 'पायरेसी को सपोर्ट न करें'सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'सतलुज' के पायरेटेड वर्जन और डाउनलोड लिंक्स तेजी से वायरल होने के बाद ZEE5 ने सोमवार, 6 जुलाई को एक आधिकारिक बयान और पोस्टर जारी किया। अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पोस्ट शेयर करते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म ने लिखा, हमें पूरी उम्मीद है और हम अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। कृपया पायरेसी को बढ़ावा न दें। हम 'सतलुज' को कानूनी रूप से आप तक वापस पहुँचाने के लिए हर संभव रास्ता तलाशने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। प्लेटफॉर्म ने दर्शकों से अपील की है कि फिल्म को वापस लाने के उनके प्रयासों में फैंस भी अपना योगदान दें और अवैध फाइलों को आगे न भेजें।दिलजीत दोसांझ ने कहा- 'इंटरनेट से अब कुछ भी डिलीट करना नामुमकिन है'ZEE5 की इस अपील के विपरीत, फिल्म के लीड एक्टर दिलजीत दोसांझ इस बात से बेहद संतुष्ट और राहत में नजर आ रहे हैं कि फिल्म आखिरकार जनता तक पहुंच गई है। दिलजीत ने एक बयान में कहा, मुझे अब बहुत राहत महसूस हो रही है कि आखिरकार यह फिल्म दर्शकों तक पहुंच गई है। अब यह लोगों की फिल्म है और इसे किसी भी तरह रोका नहीं जा सकता। जो लोग यह सोचते हैं कि कोई चीज एक बार ऑनलाइन आ जाने के बाद इंटरनेट से पूरी तरह डिलीट की जा सकती है, वे या तो बहुत मासूम हैं या फिर उन्हें तकनीक की जानकारी नहीं है।एक्टर ने की डाउनलोड कॉपियां शेयर करने की वकालतदिलजीत दोसांझ ने उन सभी प्रशंसकों से, जिन्होंने फिल्म को ओटीटी से हटने से पहले डाउनलोड कर लिया था, इसे आपस में शेयर करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, एक बार कोई चीज़ ऑनलाइन आ जाती है, तो वह हमेशा के लिए अमर हो जाती है। मैंने राजस्थान का एक वीडियो देखा जहाँ लोग इस फिल्म को देख रहे हैं, जिसे देखकर मुझे बेहद खुशी हुई। मेरी अपील है कि आप इसे अपने दोस्तों और आस-पास के सभी लोगों को जरूर दिखाएं। दिलजीत के अनुसार, ज़ी5 पर रिलीज किया गया यह वर्जन बिना किसी कट-छाँट (Uncut Version) वाला था, जिसे दर्शक हर हाल में देखें।4 साल की लंबी सेंसरशिप और 'पंजाब 95' का सफरहनी त्रेहान के निर्देशन में बनी यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और 1990 के दशक में पंजाब में हुए घटनाक्रमों से प्रेरित है। शुरुआत में इस फिल्म का नाम 'पंजाब '95' रखा गया था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के साथ सर्टिफिकेशन और कट्स को लेकर चली लंबी कानूनी लड़ाई के कारण यह फिल्म लगभग चार सालों तक ठंडे बस्ते में रही थी। RSVP और मैगफिन पिक्चर्स (MacGuffin Pictures) के बैनर तले बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित और मशहूर अभिनेता दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 (Zee5) से इस फिल्म को अचानक हटाए जाने के महज एक दिन बाद ही यह फिल्म सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पूरी तरह लीक हो गई है। सेंसरशिप की लंबी और कभी न खत्म होने वाली कानूनी लड़ाई के बाद रिलीज हुई इस फिल्म का पायरेटेड वर्जन अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।सेंसरशिप के साए में 'पंजाब 95' से 'सतलुज' बनी थी फिल्महनी त्रेहान के निर्देशन में बनी यह फिल्म लंबे समय तक विवादों और सेंसर बोर्ड (CBFC) के चक्करों में फंसी रही। शुरुआत में इस फिल्म का नाम 'पंजाब 95' रखा गया था, जिस पर सेंसर बोर्ड ने 120 कट्स लगाने का सुझाव दिया था। काफी कशमकश और नाम बदलकर 'सतलुज' करने के बाद आखिरकार इसे 3 जुलाई को Zee5 पर रिलीज किया गया था। लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से अचानक हटा दिया गया। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ज़ी5 इस फिल्म को दोबारा अपने प्लेटफॉर्म पर लाएगा या नहीं।ओटीटी से हटते ही नाराज फैंस ने सोशल मीडिया पर किया लीकफिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ के फैंस काफी नाराज हैं। फैंस ने एकजुट होकर X जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर फिल्म के डाउनलोड किए गए पायरेटेड वर्जन और शेयरिंग लिंक पोस्ट करने शुरू कर दिए हैं। आलम यह है कि लोग इन पोस्ट के कमेंट सेक्शन में जाकर फिल्म के अलग-अलग फॉर्मेट और डाउनलोड लिंक की मांग कर रहे हैं ताकि इसे बिना किसी पाबंदी के देखा जा सके।इंस्टाग्राम लाइव पर दिलजीत दोसांझ ने फैंस से की ये अनोखी अपीलइस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्य अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने खुद इंस्टाग्राम पर लाइव आकर अपने प्रशंसकों से बातचीत की। जब फैंस ने उन्हें बताया कि उन्होंने ओटीटी से हटने से पहले ही फिल्म को डाउनलोड कर लिया था, तो दिलजीत ने खुशी जाहिर की। उन्होंने फैंस से अपील करते हुए कहा कि वे इस डाउनलोड लिंक को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें ताकि जब तक फिल्म दोबारा आधिकारिक रूप से ज़ी5 पर वापस नहीं आती, तब तक लोग इसे अपने परिवार के साथ देख सकें। दिलजीत ने भावुक होते हुए लिखा कि 'सतलुज' के साथ भी ठीक वही हुआ जो असल जिंदगी में शहीद जसवंत सिंह खालरा के साथ हुआ था।कौन थे जसवंत सिंह खालरा, जिन पर बनी है यह फिल्म?यह फिल्म 1990 के दशक में पंजाब के मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की दर्दनाक और संघर्षपूर्ण कहानी को दर्शाती है। खालरा ने पंजाब पुलिस द्वारा हजारों सिख युवाओं की गैर-न्यायिक हत्याओं और उनके लावारिस शवों को जलाने के बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया था। सरकारी हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने वाले खालरा को 1995 में पुलिस ने अगवा कर लिया था और बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में बाद में पंजाब पुलिस के छह अधिकारियों को अदालत द्वारा दोषी भी ठहराया गया था।
अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार, हर व्यक्ति की जन्मतिथि का उसके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह न केवल आपके स्वभाव और व्यक्तित्व के छिपे हुए राज उजागर करती है, बल्कि आने वाले समय और भविष्य की घटनाओं का सटीक संकेत भी देती है। आज यानी 07 जुलाई 2026 को ग्रहों और अंकों का विशेष संयोग कई मूलांक के जातकों के लिए तरक्की के नए रास्ते खोलने जा रहा है। हालांकि, आज के दिन किसी भी बड़े प्रोजेक्ट या निवेश में हाथ डालने से पहले बाजार की पूरी जानकारी लेना और अनुभवी लोगों से सलाह लेना बेहद जरूरी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मूलांक 1 से लेकर 9 तक के लोगों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।मूलांक 1: आर्थिक मामलों में मिलेगा बड़ा लाभअगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 1 है। आज का दिन आपके वित्तीय मामलों के लिए बेहद भाग्यशाली रहने वाला है। पूर्व में भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाएं आज आपको बड़ा मुनाफा दे सकती हैं। कार्यक्षेत्र में आज आपको अपने बजट और बचत की नए सिरे से समीक्षा करनी चाहिए। फिजूलखर्ची पर पूरी तरह नियंत्रण रखें और केवल वही निर्णय लें जो आने वाले समय में आपको आर्थिक रूप से मजबूत बनाएं।मूलांक 2: नए अवसरों के साथ बरतें थोड़ी सावधानीजिन लोगों का जन्म महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 2 बनता है। आज आपको करियर में तरक्की के कई नए अवसर मिल सकते हैं, विशेष रूप से तकनीकी (Tech) और नए स्टार्टअप से जुड़े क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को बड़ी सफलता मिलेगी। हालांकि, आपको जल्दबाजी में कोई भी बड़ा वित्तीय फैसला लेने से बचना चाहिए। इस समय शॉर्ट-टर्म के बजाय लंबी अवधि के निवेश (Long-term Investment) पर ध्यान केंद्रित करना आपके लिए अधिक फायदेमंद रहेगा।मूलांक 3: बड़े खर्चों और निवेश से आज दूरी बनाएंअगर आपकी जन्मतिथि 3, 12, 21 या 30 तारीख है, तो आपका मूलांक 3 है। आज का दिन आपके लिए थोड़ा संभलकर चलने का संकेत दे रहा है। बेहतर होगा कि आज आप किसी भी तरह के नए निवेश या बड़े खर्चों को टाल दें। यह समय कोई नया जोखिम उठाने का नहीं, बल्कि अपनी वर्तमान आर्थिक स्थिति को समझने और भविष्य के लिए एक मजबूत प्लानिंग तैयार करने का है। धैर्य से काम लें, आने वाला समय आपके पक्ष में होगा।मूलांक 4: बचत बढ़ाने और नई प्लानिंग के लिए उत्तम दिनजिन जातकों का जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 4 है। आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन आपके लिए काफी अनुकूल रहने वाला है। यदि आप लंबे समय से भविष्य के लिए किसी नई योजना पर काम कर रहे हैं, तो आज उसे शुरू करने का सही समय है। अपनी आय और व्यय में संतुलन बनाकर चलें और बचत बढ़ाने पर विशेष ध्यान दें। समझदारी से लिया गया एक छोटा सा फैसला भी आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर देगा।मूलांक 5: जल्दबाजी से बचें, सोच-समझकर लगाएं पैसाअगर आपका जन्म किसी भी महीने की 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 5 है। आज आपके सामने बिजनेस और नौकरी से जुड़े कुछ बेहतरीन और आकर्षक ऑफर आ सकते हैं। लेकिन किसी भी नए प्रोजेक्ट या स्कीम में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी पड़ताल जरूर कर लें। बाजार के जोखिमों को समझे बिना निवेश करना नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए केवल उन्हीं योजनाओं को चुनें जो लंबे समय तक स्थिर लाभ देने का वादा करती हों।मूलांक 6: बड़े आर्थिक फैसले आज के लिए टालना ही बेहतरमहीने की 6, 15 या 24 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 6 होता है। आज का दिन आपके लिए गहरी आत्म-समीक्षा और सोच-विचार करने का है। अगर आप आज कोई बड़ा प्रॉपर्टी या शेयर बाजार से जुड़ा फैसला लेने जा रहे हैं, तो उसे फिलहाल कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दें। वर्तमान में अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखने, दैनिक खर्चों को प्रबंधित करने और भविष्य की रणनीतियों पर फोकस करें। योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने पर ही आर्थिक सुधार संभव है।मूलांक 7: बजट की समीक्षा से होगा शानदार मुनाफायदि आपकी जन्मतिथि 7, 16 या 25 तारीख है, तो आपका मूलांक 7 है। वित्तीय मामलों में आज सितारे आपके साथ हैं और दिन आपके पक्ष में रहने वाला है। आज आपको अपने पुराने निवेशों और वर्तमान बजट की गहराई से समीक्षा करनी चाहिए। गैर-जरूरी चीजों पर हो रहे खर्चों से खुद को दूर रखें। आज बनाई गई एक ठोस और अनुशासित वित्तीय योजना आपको भविष्य में उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा लाभ दिला सकती है।मूलांक 8: तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिलेगी तरक्कीजिन लोगों का जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 8 बनता है। आज का दिन आपके लिए नए व्यापारिक अनुबंध और निवेश के शानदार मौके लेकर आया है। विशेषकर आईटी, सॉफ्टवेयर, गैजेट्स और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के लिए समय बहुत उत्तम है। हालांकि, उत्साह में आकर बिना सोचे-समझे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करें। सही रणनीति, उचित मार्गदर्शन और धैर्य के साथ कदम बढ़ाएंगे तो आपका भविष्य सुरक्षित रहेगा।मूलांक 9: निवेश में पूरी सावधानी और सतर्कता है जरूरीअगर आपका जन्म महीने की 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 9 है। आज आपको आर्थिक लेन-देन में बहुत ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। आज के दिन किसी को बड़ा कर्ज देने, भारी खर्च करने या नया निवेश करने से पूरी तरह बचें। शॉर्ट-टर्म की लालच में आने के बजाय अपने दीर्घकालिक (Long-term) लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें। समझदारी और सूझबूझ से लिया गया निर्णय ही आपको आने वाले संकटों से बचाएगा।
थाईलैंड सरकार ने भारतीय पर्यटकों के लिए अपने यात्रा और वीजा नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। इन सख्त नियमों का उद्देश्य पर्यटन को रोकना नहीं, बल्कि फर्जी यात्रियों, तय समय से ज्यादा रुकने (ओवरस्टे) और नौकरी के नाम पर होने वाले ऑनलाइन घोटालों जैसी गंभीर समस्याओं पर लगाम लगाना है। इसके साथ ही इमिग्रेशन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए नई तकनीक को भी शामिल किया गया है। अगर आप भी आने वाले दिनों में थाईलैंड घूमने की योजना बना रहे हैं, तो इन नए नियमों को ध्यान से समझना बेहद जरूरी है।थाईलैंड सरकार को क्यों उठाने पड़े ये सख्त कदम?थाईलैंड दुनिया भर के पर्यटकों के साथ-साथ भारतीयों के लिए भी सबसे पसंदीदा हॉलिडे डेस्टिनेशन रहा है। हालांकि, पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई चुनौतियां आ रही थीं। कई लोग टूरिस्ट वीजा पर थाईलैंड जाकर अवैध रूप से काम करने लगे थे, तो कई यात्री वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वहाँ छिपकर रह रहे थे। फर्जी दस्तावेजों के सहारे यात्रा करने के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब सरकार ने पूरे सिस्टम को डिजिटल और फुलप्रूफ बनाने का फैसला लिया है, ताकि असली पर्यटकों को कोई परेशानी न हो।थाईलैंड यात्रा के लिए अब ये 4 शर्तें होंगी अनिवार्य6 महीने की पासपोर्ट वैलिडिटी: अब थाईलैंड जाने वाले हर भारतीय यात्री का पासपोर्ट यात्रा की तारीख से कम से कम 6 महीने तक वैध (Valid) होना जरूरी है। अगर वैलिडिटी इससे कम पाई गई, तो एयरपोर्ट से ही वापस लौटाया जा सकता है।कन्फर्म रिटर्न टिकट और होटल बुकिंग: इमिग्रेशन काउंटर पर अब यात्रियों को अपनी वापसी का कन्फर्म हवाई टिकट और ठहरने के लिए होटल की पक्की बुकिंग दिखानी होगी। इससे आपका पूरा ट्रैवल प्लान स्पष्ट होना चाहिए।20,000 थाई बाहत (THB) का फाइनेंशियल प्रूफ: थाईलैंड में अपने खर्चों को संभालने के लिए यात्रियों को वित्तीय रूप से सक्षम होना साबित करना होगा। इसके तहत प्रति व्यक्ति लगभग 20,000 थाई बाहत (या इसके बराबर की विदेशी मुद्रा) कैश या बैंक बैलेंस के रूप में दिखाना पड़ सकता है।इंडिविजुअल ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स: अगर आप ग्रुप या परिवार के साथ भी यात्रा कर रहे हैं, तो भी हर सदस्य के पास पासपोर्ट, होटल बुकिंग और वीजा से जुड़े सभी दस्तावेज अलग-अलग और पूरी तरह तैयार होने चाहिए।क्या है नया TDAC (Thailand Digital Arrival Card) सिस्टम?थाईलैंड सरकार ने पुराने कागजी इमिग्रेशन फॉर्म को पूरी तरह बंद करके अब TDAC (थाईलैंड डिजिटल अराइवल कार्ड) नाम का एक नया ऑनलाइन सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। इसे इस बदलाव का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। हर यात्री को अपनी फ्लाइट से पहले इस आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर एक डिजिटल फॉर्म भरना होगा।इस डिजिटल फॉर्म में यात्रियों को अपने पासपोर्ट की जानकारी, फ्लाइट नंबर, थाईलैंड में रुकने का पूरा पता और यात्रा का मुख्य उद्देश्य जैसी बुनियादी जानकारियां दर्ज करनी होंगी। इस सिस्टम को लागू करने का मुख्य उद्देश्य एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन के दौरान लगने वाली लंबी लाइनों को खत्म करना और यात्रियों के डेटा को सुरक्षित तरीके से ट्रैक करना है।नियम न मानने या गलती करने पर क्या होगी कार्रवाई?यदि कोई यात्री उड़ान भरने से पहले अपना TDAC फॉर्म सही तरीके से नहीं भरता है या इमिग्रेशन काउंटर पर मांगे गए जरूरी दस्तावेज पेश करने में असमर्थ रहता है, तो उसे थाईलैंड एयरपोर्ट पर एंट्री देने से साफ इनकार किया जा सकता है। गंभीर मामलों में यात्री को डिपोर्ट (वापस देश भेजना) भी किया जा सकता है, जिससे भविष्य में थाईलैंड का वीजा मिलने में बड़ी दिक्कत आ सकती है। अगर आपके सभी दस्तावेज वैध हैं और आप केवल घूमने के इरादे से जा रहे हैं, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है—बस समय रहते अपनी डिजिटल तैयारी पूरी रखें।
ग्लोबल मार्केट में डॉलर की मजबूती और सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग में आई सुस्ती के कारण सर्राफा बाजार में मंदी का रुख देखने को मिल रहा है। देश की राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में लगातार दूसरे दिन सोने और चांदी के दाम नीचे आए हैं। पिछले दो दिनों में 24 कैरट वाले 10 ग्राम सोने की कीमत में ₹120 और 22 कैरट वाले सोने में ₹110 की कमी आई है। वहीं, औद्योगिक मांग कमजोर होने से चांदी की चमक भी फीकी पड़ी है और पिछले दो दिनों के भीतर चांदी ₹5,100 प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो चुकी है।देश के 10 बड़े शहरों में आज सोने का ताजा भाव (प्रति 10 ग्राम)आज 07 जुलाई 2026 को भारत के प्रमुख शहरों में 24 कैरट, 22 कैरट और 18 कैरट शुद्धता वाले सोने के खुदरा रेट इस प्रकार हैं:दिल्ली: 24 कैरट ₹1,46,760 | 22 कैरट ₹1,34,540 | 18 कैरट ₹1,10,110मुंबई: 24 कैरट ₹1,46,610 | 22 कैरट ₹1,34,390 | 18 कैरट ₹1,09,960कोलकाता: 24 कैरट ₹1,46,610 | 22 कैरट ₹1,34,390 | 18 कैरट ₹1,09,960चेन्नई: 24 कैरट ₹1,47,920 | 22 कैरट ₹1,35,590 | 18 कैरट ₹1,12,990बेंगुलुरू: 24 कैरट ₹1,46,610 | 22 कैरट ₹1,34,390 | 18 कैरट ₹1,09,960हैदराबाद: 24 कैरट ₹1,46,610 | 22 कैरट ₹1,34,390 | 18 कैरट ₹1,09,960लखनऊ: 24 कैरट ₹1,46,760 | 22 कैरट ₹1,34,540 | 18 कैरट ₹1,10,110पटना: 24 कैरट ₹1,46,660 | 22 कैरट ₹1,34,440 | 18 कैरट ₹1,10,010जयपुर: 24 कैरट ₹1,46,760 | 22 कैरट ₹1,34,540 | 18 कैरट ₹1,10,110अहमदाबाद: 24 कैरट ₹1,46,660 | 22 कैरट ₹1,34,440 | 18 कैरट ₹1,10,010चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चेन्नई में सबसे महंगीसोने के साथ-साथ चांदी के खरीदारों के लिए भी राहत की खबर है। दो दिनों तक स्थिर रहने के बाद आज लगातार दूसरे दिन चांदी के दाम टूटे हैं। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में आज चांदी ₹100 प्रति किलो और सस्ती होकर ₹2,44,900 के स्तर पर कारोबार कर रही है। हालांकि, देश के चारों महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है, जहाँ आज एक किलो चांदी का भाव ₹2,49,900 दर्ज किया गया है। इससे पहले जून के आखिरी हफ्ते में चांदी की कीमतों में करीब ₹15,000 की भारी तेजी देखी गई थी, जिसके बाद अब बाजार में सुधार का दौर चल रहा है।
देश की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आज सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमतें जारी कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर रोज सुबह ईंधन के दाम तय होते हैं। सुबह की शुरुआत के साथ ही इन कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब और हर छोटे-बड़े कारोबारी के बजट पर पड़ता है। भारत में ईंधन की कीमतों को पारदर्शी बनाए रखने के लिए हर दिन इस व्यवस्था के तहत नई दरें अपडेट की जाती हैं।देश के प्रमुख शहरों में आज का पेट्रोल-डीजल का भावआज यानी 07 जुलाई 2026 को देश के अलग-अलग महानगरों और प्रमुख शहरों में ईंधन के रिटेल रेट इस प्रकार हैं:नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.20 रुपयेमुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये | डीजल 97.83 रुपयेकोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये | डीजल 99.82 रुपयेचेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये | डीजल 99.55 रुपयेगुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये | डीजल 95.44 रुपयेनोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.56 रुपयेबेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये | डीजल 98.80 रुपयेभुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये | डीजल 100.92 रुपयेचंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये | डीजल 86.09 रुपयेहैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये | डीजल 103.82 रुपयेजयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये | डीजल 97.78 रुपयेलखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये | डीजल 95.55 रुपयेपटना: पेट्रोल 113.35 रुपये | डीजल 99.36 रुपयेतिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये | डीजल 104.40 रुपयेबाजार में लंबे समय से क्यों बनी है स्थिरता?मई 2022 के दौरान केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों द्वारा उत्पाद शुल्क व वैट (VAT) में की गई कटौती के बाद से देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहता है, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं को राहत देते हुए तेल कंपनियों ने घरेलू दरों को नियंत्रित रखा है।कैसे तय होती है आपके शहर में ईंधन की कीमत?क्रूड ऑयल की ग्लोबल दरें: पेट्रोल और डीजल का सीधा संबंध कच्चे तेल से है। वैश्विक बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने या घटने का सीधा असर भारत के घरेलू बाजार पर पड़ता है।डॉलर बनाम रुपया: भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती या कमजोरी से आयात की लागत बदल जाती है।केंद्रीय और राज्य टैक्स: ईंधन की अंतिम कीमत में केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का वैट (VAT) एक बड़ा हिस्सा होता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट अलग होते हैं।रिफाइनिंग कॉस्ट: कच्चे तेल को रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाने का खर्च भी अंतिम कीमतों में शामिल होता है।सप्लाई और डिमांड: बाजार में ईंधन की मांग और त्योहारों या मौसम के हिसाब से होने वाली खपत भी कीमतों के निर्धारण में भूमिका निभाती है।घर बैठे सिर्फ एक SMS से ऐसे जानें अपने शहर के रेट्सअगर आप अपने मोबाइल से तुरंत अपने शहर के पेट्रोल-डीजल के दाम चेक करना चाहते हैं, तो इन आसान नंबरों पर मैसेज भेज सकते हैं:Indian Oil (IOCL): अपने फोन से “RSP” लिखकर स्पेस दें, फिर अपने शहर का कोड टाइप करें और इसे 9224992249 पर भेज दें।BPCL: अपने मोबाइल से “RSP” लिखकर 9223112222 पर SMS करें।HPCL: अपने फोन से “HP Price” लिखकर 9222011222 पर मैसेज भेजें।
राजाओं जैसा ठाठ-बाट! भारत के ये 6 ऐतिहासिक महल और किले जहां आज भी मिलती है असली 'रॉयल लाइफ'
भारत की इतिहास और संस्कृति पूरी दुनिया में अपनी भव्यता के लिए जानी जाती हैं। देश के कई ऐतिहासिक महल और प्राचीन किले अब बेहद लग्जरी होटलों का रूप ले चुके हैं। इन जगहों पर रुकना सिर्फ एक आम ट्रिप नहीं, बल्कि सदियों पुराने राजसी वैभव को खुद महसूस करने जैसा है। यहाँ मेहमानों को राजाओं जैसी लाइफस्टाइल, शाही कमरे, बेमिसाल मेहमाननवाजी और एक जादुई ऐतिहासिक माहौल का अनोखा अनुभव एक साथ मिलता है। आइए जानते हैं देश के इन चुनिंदा महलों की खास बातें जो आज भी शाही विरासत को जिंदा रखे हुए हैं।रामबाग पैलेस, जयपुर (राजस्थान)जयपुर का मशहूर रामबाग पैलेस कभी यहाँ के महाराजा का मुख्य निवास स्थान हुआ करता था। आज इसे दुनिया के बेहतरीन और अल्ट्रा-लक्जरी हेरिटेज होटलों में गिना जाता है। इस पैलेस के विशाल कमरे बेहद भव्य हैं, जहाँ राजस्थानी वास्तुकला के साथ आधुनिक सुख-सुविधाओं का बेहतरीन तालमेल दिखता है। यहाँ के आलीशान बगीचे, रॉयल डाइनिंग और खास स्पा थेरेपी पर्यटकों को एक राजा की तरह जीवन जीने का अहसास कराती हैं।उम्मेद भवन पैलेस, जोधपुर (राजस्थान)जोधपुर में स्थित उम्मेद भवन पैलेस दुनिया के सबसे बड़े निजी आवासों में से एक माना जाता है। इस विशाल महल का एक हिस्सा आज भी जोधपुर के शाही परिवार के पास है, जबकि बाकी का हिस्सा ताज होटल ग्रुप द्वारा संचालित किया जाता है। यहाँ की शानदार रॉयल आर्ट डेको शैली, कीमती संगमरमर से बने ऊंचे हॉल और राजसी कमरे इसकी भव्यता को बयां करते हैं। यह पैलेस आज भी राजस्थान के शाही ठाठ-बाट की सबसे असली और जीवंत झलक पेश करता है।नीमराना फोर्ट पैलेस, अलवर (राजस्थान)दिल्ली और एनसीआर के नजदीक स्थित नीमराना फोर्ट पैलेस एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक किला होटल है। 15वीं शताब्दी का यह प्राचीन किला अब एक प्रीमियम हेरिटेज रिसॉर्ट में तब्दील हो चुका है। अरावली की पहाड़ियों पर बने इस किले में एडवेंचर के लिए ज़िपलाइनिंग, आलीशान रॉयल स्विमिंग पूल और पहाड़ियों के खूबसूरत नजारे दिखाने वाले रूम्स मिलते हैं। वीकेंड ट्रिप और कपल्स के लिए यह जगह देश भर में काफी लोकप्रिय है।ताज फलकनुमा पैलेस, हैदराबाद (तेलंगाना)हैदराबाद की ऊँची पहाड़ी पर स्थित फलकनुमा पैलेस में कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो आप आसमान से पूरे शहर को निहार रहे हों। इस पैलेस की खूबसूरत इटैलियन संगमरमर की सीढ़ियाँ, दुर्लभ किताबों वाली पुरानी ऐतिहासिक लाइब्रेरी और दुनिया का सबसे लंबा शाही डाइनिंग हॉल सैलानियों को हैरान कर देता है। हैदराबाद के नवाबों की आलीशान जीवनशैली और उनकी साख को आज भी यहाँ गहराई से महसूस किया जा सकता है।ताज लेक पैलेस, उदयपुर (राजस्थान)उदयपुर की प्रसिद्ध पिछोला झील के बिल्कुल बीचों-बीच सफेद संगमरमर से बना यह पैलेस पानी पर तैरते किसी खूबसूरत सपने जैसा नजर आता है। इस जादुई होटल तक पहुँचने के लिए केवल नाव का ही इस्तेमाल किया जाता है, जो इसके सफर को और भी रोमांचक बना देता है। रात के समय जब झील के पानी पर इस महल की रोशनी पड़ती है, तो इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। यह जगह पूरी दुनिया में अपने रोमांटिक और रॉयल एक्सपीरियंस के लिए प्रसिद्ध है।सिटी पैलेस, उदयपुर (राजस्थान)पिछोला झील के पूर्वी किनारे पर स्थित उदयपुर का सिटी पैलेस राजस्थान की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। यह विशाल महल अपनी अद्भुत वास्तुकला, दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी और भव्य राजसी आंगनों के लिए जाना जाता है। इसका निर्माण मेवाड़ राजवंश के अलग-अलग राजाओं ने कई सदियों के दौरान अलग-अलग चरणों में करवाया था। इस पैलेस के एक बड़े हिस्से को म्यूजियम में बदला गया है, जहाँ शाही दरबार हॉल, दुर्लभ क्रिस्टल गैलरी और प्राचीन राजाओं की चीजें आज भी पूरी तरह सुरक्षित रखी गई हैं।भारत के ये सभी ऐतिहासिक स्थल सिर्फ ठहरने के ठिकाने नहीं हैं, बल्कि ये हमें देश की समृद्ध विरासत और स्वर्णिम इतिहास को करीब से जीने का मौका देते हैं। यहाँ का अनुभव इतना अनोखा होता है कि उसे शब्दों में समेटना मुमकिन नहीं है।
पिछले दो सालों में जुलाई के सबसे गर्म और दमघोंटू दिन का सामना करने के बाद, दिल्ली-एनसीआर के वासियों को आज यानी मंगलवार (7 जुलाई 2026) को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राष्ट्रीय राजधानी में गरज-चमक के साथ तेज मानसूनी बारिश और आंधी-तूफान का ताजा अनुमान जताते हुए 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी कर दिया है. मौसम विभाग के मुताबिक, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली कड़कने के साथ दिल्ली के कई हिस्सों में झमाझम बौछारें पड़ेंगी.कल जुलाई का सबसे गर्म दिन दर्ज, 50 डिग्री जैसा तपाया उमस नेबीता सोमवार दिल्ली में पिछले दो साल का सबसे गर्म जुलाई का दिन साबित हुआ. हालांकि थर्मामीटर पर तापमान कम था, लेकिन हवा में अत्यधिक नमी और उमस (Humidity) के चलते लोगों को महसूस होने वाला तापमान यानी 'फील्स लाइक' (Feels Like Temperature) करीब 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. इस असहज करने वाली चिपचिपी गर्मी के बाद आज अधिकतम तापमान गिरकर 36 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है, जिससे दिल्लीवालों को बड़ी राहत मिलेगी.दिल्ली में अगले 3 दिनों तक होगी झमाझम बारिश, जानें IMD का वीकली फोरकास्टमानसून की रेखा उत्तर भारत की तरफ तेजी से मजबूत हो रही है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी में अब मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है. मौसम विभाग के 7 दिनों के साप्ताहिक पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली में आज से शुरू हो रहा बारिश का यह दौर 8 जुलाई से लेकर 10 जुलाई के बीच और तेज हो जाएगा. इस दौरान आंधी-तूफान के साथ लगातार भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में और अधिक गिरावट दर्ज की जाएगी.वाटरलॉगिंग और ट्रैफिक जाम का बढ़ा खतरा, मौसम विभाग ने जारी की एडवायजरीमूसलाधार बारिश से जहां तपती गर्मी शांत होगी, वहीं दिल्ली की सड़कों पर भारी जलभराव (Waterlogging) और गंभीर ट्रैफिक जाम का खतरा भी मंडराने लगा है. आईएमडी ने नागरिकों और यात्रियों के लिए विशेष एडवायजरी जारी करते हुए कहा है कि तेज बारिश के दौरान विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो सकती है, इसलिए वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें. इसके साथ ही, प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि आंधी और बिजली कड़कने के दौरान लोग भूलकर भी पेड़ों, कमजोर छतों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें.
इंदौर के खजराना सिविल अस्पताल के नाम पर दवाओं-उपकरणों की नहीं हुई कोई खरीदी, जानें पूरा सच
इंदौर के खजराना में प्रस्तावित 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल को लेकर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में प्रसारित समाचारों के परिप्रेक्ष्य में जिला प्रशासन ने तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट की है। कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ...
Top News 7 July : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई है। इसमें कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। महाराष्ट्र में भारी बारिश का दौर जारी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को ...
आज 7 जुलाई 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि होने के कारण आज कालाष्टमी (Kalashtami Vrat) और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और भगवान शिव के भैरव स्वरूप की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। अगर आप भी आज व्रत रख रहे हैं या कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो आज का पंचांग (Today Panchang) आपके लिए जानना बेहद जरूरी है।सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ पंचक की बंदिशेंआज ग्रहों और नक्षत्रों का एक मिलाजुला संयोग देखने को मिल रहा है। पंचांग के अनुसार, आज सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का बेहद शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को नए काम की शुरुआत और सफलता के लिए उत्तम माना जाता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह है कि आज पूरे दिन 'पंचक' का साया भी रहने वाला है। सनातन धर्म में पंचक के दौरान किसी भी शुभ, नए या मांगलिक कार्य को करने की सख्त मनाही होती है। इसलिए, शुभ योग होने के बावजूद कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले मुहूर्त जरूर चेक कर लें।सूर्य और चंद्रमा का समयआज के दिन चंद्रमा दिन-रात मीन राशि में गोचर करेगा और सूर्य उत्तरायण रहेगा। आइए जानते हैं सूर्य और चंद्रमा के उदय-अस्त का सही समय:सूर्योदय: सुबह 05:56 बजेसूर्यास्त: रात 09:55 बजेचंद्रोदय: 8 जुलाई की सुबह 01:04 बजेचंद्रास्त: दोपहर 01:55 बजे7 जुलाई 2026 के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)ईश्वर की आराधना और दैनिक पूजा-पाठ के लिए आज कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। आप अपनी सुविधानुसार इन समयों का चुनाव कर सकते हैं:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 बजे से 05:24 बजे तकप्रातः सन्ध्या: सुबह 05:08 बजे से 05:56 बजे तकअभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:23 बजे से 02:27 बजे तकविजय मुहूर्त: शाम 04:35 बजे से 05:39 बजे तकसर्वार्थ सिद्धि और रवि योग: सुबह 05:56 बजे से दोपहर 12:54 बजे तकगोधूलि मुहूर्त: रात 09:53 बजे से 10:09 बजे तकअमृत काल: सुबह 08:03 बजे से 09:40 बजे तकआज के अशुभ मुहूर्त (Ashubh Muhurat)कुछ विशेष समय ऐसे होते हैं जिनमें यात्रा या महत्वपूर्ण कार्य करने से बचना चाहिए। आज राहुकाल और पंचक का विशेष ध्यान रखें:राहुकाल: शाम 05:55 बजे से 07:55 बजे तक (इस दौरान नए काम शुरू न करें)यमगण्ड: सुबह 09:55 बजे से 11:55 बजे तकदुर्मुहूर्त: सुबह 09:07 बजे से 10:11 बजे तकगुलिक काल: दोपहर 01:55 बजे से 03:55 बजे तकपंचक: आज पूरे दिन रहेगा
फीफा विश्व कप 2026 (FIFA World Cup 2026) अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। टूर्नामेंट के राउंड ऑफ 16 के एक बेहद कड़े और सांसे रोक देने वाले मुकाबले में स्पेन ने अपनी चिर-प्रतिद्वंद्वी पुर्तगाल को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में धमाकेदार एंट्री कर ली है। इस हार के साथ ही फुटबॉल जगत के सबसे बड़े सितारों में से एक, क्रिस्टियानो रोनाल्डो का विश्व कप ट्रॉफी उठाने का आखिरी सपना भी टूट गया है।इंजरी टाइम के गोल ने पलट दिया मैचमैच की शुरुआत से ही दोनों यूरोपीय दिग्गजों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। स्पेन और पुर्तगाल की रक्षापंक्ति (डिफेंस) ने एक-दूसरे के हमलों को शानदार तरीके से नाकाम किया। पूरे 90 मिनट तक मैच गोलरहित बराबरी पर था। लेकिन खेल के अंतिम क्षणों में स्पेन के मैनेजर द्वारा किए गए बदलावों ने जादू कर दिया। इंजरी टाइम में फेरान टोरेस के एक सटीक और शानदार पास को मिकेल मेरिनो ने गोल पोस्ट में दागकर स्पेन को 1-0 की ऐतिहासिक जीत दिला दी। इस एक गोल ने पुर्तगाल को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया।बिना वर्ल्ड कप ट्रॉफी के रोनाल्डो का दुखद अंत!यह हार सिर्फ पुर्तगाल की नहीं, बल्कि दुनिया भर में फैले क्रिस्टियानो रोनाल्डो के करोड़ों फैंस की हार है। 41 वर्षीय रोनाल्डो के लिए यह फीफा विश्व कप उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय सफर माना जा रहा था। वर्षों की कड़ी मेहनत, बेजोड़ फिटनेस और अनगिनत रिकॉर्ड्स के बावजूद, यह दिग्गज खिलाड़ी बिना वर्ल्ड कप ट्रॉफी के अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कह रहा है। हालांकि, फुटबॉल के पन्नों में पुर्तगाल और खेल के लिए उनका महान योगदान हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।अब क्वार्टर फाइनल में किससे भिड़ेगा स्पेन?पुर्तगाल जैसी मजबूत टीम को धूल चटाने के बाद, स्पेन अब टूर्नामेंट जीतने का सबसे प्रबल दावेदार बनकर उभरा है। क्वार्टर फाइनल में स्पेन का सामना अमेरिका (USA) और बेल्जियम (Belgium) के बीच होने वाले नॉकआउट मुकाबले के विजेता से होगा। स्पेनिश टीम अपनी इसी आक्रामक लय को आगे भी बरकरार रखना चाहेगी।ट्रम्प के दखल से विवादों में अमेरिका!स्पेन के संभावित प्रतिद्वंद्वियों की बात करें, तो 7 जुलाई को सिएटल स्टेडियम में अमेरिका और बेल्जियम के बीच भिड़ंत होनी है। लेकिन इस मैच से पहले अमेरिकी टीम एक बड़े विवाद में फंस गई है। दरअसल, फीफा (FIFA) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सीधे हस्तक्षेप के बाद अमेरिकी स्ट्राइकर बालोगुन (Folarin Balogun) को दिए गए 'रेड कार्ड' के फैसले को पलट दिया है। इस फैसले ने फुटबॉल जगत में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इन विवादों के बीच अमेरिका, बेल्जियम के खिलाफ किस प्लेइंग इलेवन के साथ मैदान में उतरता है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की चोरी के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राम मंदिर ट्रस्ट के आवेदन के बाद गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट अब सामने आ गई है। सोमवार को ट्रस्ट की अहम बैठक में यह रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें गिनती कक्ष से लेकर बाथरूम तक में छिपाई गई रकम और सुरक्षा में भारी चूक की परतें खोली गई हैं। एसआईटी को अपनी फाइनल रिपोर्ट 15 जुलाई तक सौंपनी है।40 दिन में 70 बार चोरी, जुराबों में भर ले गए कैशएसआईटी की जांच में सबसे हैरान करने वाला खुलासा यह हुआ है कि 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच, यानी महज 40 दिनों के अंदर सीसीटीवी कैमरे में करीब 70 बार चोरी की वारदातें कैद हुई हैं। गिनती कक्ष के भीतर पूरी तरह से सुनियोजित ढंग से दान के पैसों को लूटा जा रहा था। सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा गया है कि गिनती करने वाले कर्मचारी अपनी जेबों और यहां तक कि जुराबों (मोजों) में भी नोटों की गड्डियां छिपाकर ले जा रहे थे। जांच एजेंसी ने आशंका जताई है कि इस 40 दिन की अवधि से पहले भी बड़े पैमाने पर चोरी को अंजाम दिया गया होगा।सुरक्षा नियमों (SOP) की उड़ी धज्जियांचोरी की इतनी बड़ी घटनाओं के पीछे राम मंदिर ट्रस्ट और स्टेट बैंक द्वारा बनाई गई संयुक्त मानक कार्यप्रणाली (SOP) की घोर अनदेखी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली ड्रेस लागू होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके अलावा, प्रवेश और निकास द्वार पर कर्मचारियों की कोई चेकिंग या तलाशी नहीं ली गई। कर्मचारियों को गिनती कक्ष के अंदर अपना निजी सामान ले जाने की खुली छूट थी। अलग-अलग दानपात्रों की नकदी को एक साथ मिलाकर गिना जा रहा था और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी पूरी तरह से अप्रभावी साबित हुई।एसआईटी गठन से पहले ही 78.94 लाख रुपये की हुई थी रिकवरीएसआईटी के एक्शन में आने से पहले ही ट्रस्ट के स्तर पर बड़ी कार्रवाई की जा चुकी थी। रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि गिनती प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों के पास से लगभग 78.94 लाख रुपये नकद, भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा, आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किए गए थे। हद तो तब हो गई जब 4 जून को गिनती कक्ष के पास स्थित एक शौचालय (बाथरूम) से लावारिस हालत में 2.25 लाख रुपये बरामद हुए। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों के बैंक खातों में उनकी आय से कहीं अधिक पैसा जमा किया गया था और लगातार संदिग्ध लेनदेन किए जा रहे थे।8 गिरफ्तार, 6 पर एफआईआर की सिफारिशएसआईटी की इस विस्फोटक रिपोर्ट के बाद आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मुख्य रूप से छह लोगों—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्र के खिलाफ गबन, चोरी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की थी। इसके साथ ही, गिनती कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित अन्य पर्यवेक्षक अधिकारियों (सुपरवाइजर्स) की संदिग्ध भूमिका की भी गहन जांच की सिफारिश की गई है।क्या गायब हुई हैं चांदी की ईंटें?नकदी की चोरी के अलावा, सोशल मीडिया पर चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य रत्नों के गायब होने की भी भारी चर्चा थी। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे इन गंभीर आरोपों की भी वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से जांच की जा रही है। जांच अभी जारी है और 15 जुलाई को आने वाली फाइनल रिपोर्ट में इस महाघोटाले से जुड़े कई और चेहरे बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है।
सूखा प्रबंधन के लिए पूरी तरह तैयार: कर्नाटक सरकार
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि राज्य में सूखे जैसी स्थिति है और उन्होंने तथा मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सूखे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश और दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री योगी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व में प्रयागराज निरंतर विकास, सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक शहरी सुविधाओं की दिशा में नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज के काली घाट स्थित प्रेरणा पार्क का लोकार्पण प्रदेश सरकार की राष्ट्रवादी सोच, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा महापुरुषों के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।यमुना बैंक स्थित बोट क्लब, प्रयागराज में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री श्री योगी की अध्यक्षता में नगर निगम प्रयागराज द्वारा विकसित प्रेरणा पार्क का लोकार्पण एवं जनता को समर्पण किया गया। इस अवसर पर भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी तथा विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता श्रद्धेय अशोक सिंघल की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण भी किया गया।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के साथ प्रदेश के माननीय उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने आज पावन तीर्थराज प्रयागराज में त्रिवेणी संगम तट स्थित प्राचीन एवं विश्वविख्यात श्री लेटे हुए हनुमान जी मंदिर में विधि-विधानपूर्वक दर्शन-पूजन कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, शांति एवं निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।इस अवसर पर दोनों नेताओं ने श्रद्धापूर्वक भगवान श्री हनुमान जी के चरणों में पुष्प अर्पित कर प्रदेश को निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रखने, समाज में सौहार्द, सद्भाव एवं राष्ट्र की एकता-अखंडता के सुदृढ़ होने की प्रार्थना की। उन्होंने प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना भी की।उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि तीर्थराज प्रयाग भारत की सनातन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा का अद्वितीय केंद्र है। संगम तट पर स्थित श्री लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां दर्शन-पूजन करने से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मबल एवं सकारात्मक प्रेरणा प्राप्त होती है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश के समग्र एवं सर्वांगीण विकास के साथ-साथ धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ना है, जिससे प्रदेश की गौरवशाली पहचान और अधिक सुदृढ़ हो रही है।श्री मौर्य ने कहा कि प्रयागराज का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व सम्पूर्ण विश्व में स्थापित है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार, आधारभूत संरचनाओं के विकास तथा धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण के लिए राज्य सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।उप मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के सुखद, समृद्ध एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि भगवान श्री लेटे हुए हनुमान जी की कृपा से उत्तर प्रदेश निरंतर उन्नति, समृद्धि एवं विकास के नए आयाम स्थापित करता रहे तथा प्रत्येक नागरिक का जीवन सुख, शांति और वैभव से परिपूर्ण हो। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों के लिए आरोग्य, खुशहाली एवं मंगलमय जीवन की प्रार्थना की।यदि चाहें तो इसे समाचार पत्र शैली, सरकारी सूचना विभाग (DIPR) प्रारूप अथवा उप मुख्यमंत्री कार्यालय (O.S.D./PRO) के आधिकारिक प्रारूप में भी तैयार किया जा सकता है।
विश्व ग्राम्य विकास दिवस के अवसर पर प्रयागराज प्रवास से पूर्व उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश केशव प्रसाद मौर्य नेकहा कि वर्तमान समय में वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। डिजिटल साक्षरता का विस्तार, प्रत्येक परिवार तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुँच, डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन तथा ऑनलाइन सरकारी सेवाओं की उपलब्धता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक सशक्त और पारदर्शी बना रही है। इससे ग्रामीण नागरिकों को योजनाओं का लाभ सीधे एवं समयबद्ध रूप से प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर एवं सशक्त गाँव जलवायु परिवर्तन जैसी प्राकृतिक चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होते हैं। मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उत्पादन को बढ़ावा देती है, बल्कि राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों में भी अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करती है।उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मा० प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार भी ग्रामीण अधोसंरचना, रोजगार सृजन, कृषि विकास, महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूहों के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि विश्व ग्राम्य विकास दिवस के अवसर पर सभी लोग समृद्ध, स्वावलंबी, स्वच्छ, शिक्षित एवं विकसित गाँवों के निर्माण का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि समृद्ध और सशक्त गाँव ही विकसित राष्ट्र की सबसे मजबूत नींव होते हैं। जब गाँव आगे बढ़ेंगे, तभी उत्तर प्रदेश और भारत विश्व के अग्रणी राष्ट्रों की श्रेणी में और अधिक मजबूती से स्थापित होंगे।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की, केशव प्रसाद मौर्य
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज कैबिनेट बैठक के लिए प्रस्थान करने से पूर्व लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास, 7-कालिदास मार्ग पर भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं महान शिक्षाविद् श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर उनके स्मृतिचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उन्हें सादर नमन किया। इस अवसर पर श्री मौर्य ने कहा कि श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता तथा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने अपने विचारों, सिद्धांतों और त्यागपूर्ण जीवन से देशवासियों के समक्ष राष्ट्रसेवा का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जो आज भी प्रत्येक भारतीय को प्रेरित करता है।उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का स्पष्ट विश्वास था कि राष्ट्र की एकता और अखंडता से बढ़कर कोई मूल्य नहीं हो सकता। उनका जीवन देश की अस्मिता, स्वाभिमान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने वाला व्यक्तित्व, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति उनका अटूट समर्पण तथा राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के लिए किया गया उनका संघर्ष सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उनके आदर्श, विचार एवं जीवन-दर्शन राष्ट्रसेवा के मार्ग पर निरंतर हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आज जिन राष्ट्रीय मूल्यों एवं विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसमें डॉ. मुखर्जी के विचारों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर अब पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। यदि जन सुराज पार्टी (जेएसपी) उन्हें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित करती है, तो यह सिर्फ एक ...
कौन हैं कृष्ण मोहन, जिन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में मिली चंपत राय की जगह जिम्मेदारी
रामलला मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद ट्रस्ट ने वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है।
NIA ने इस मामले में पहली चार्जशीट 15 दिसंबर 2025 को दाखिल की थी। उसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर साजिद जट सहित छह आरोपियों को नामजद किया गया था। हालांकि, उस समय हाफिज सईद का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं था। नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में एजेंसी ने जांच के दौरान जुटाए गए अतिरिक्त साक्ष्यों के आधार पर हाफिज सईद को कथित साजिशकर्ता बताया है।
होमगार्ड जवानों को 5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा, CM योगी ने निभाया वादा
Home Guard cashless medical facility: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश होमगार्ड विभाग के अंतर्गत कार्यरत होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए प्रति ...
Ahmedabad Rathyatra 2026: अहमदाबाद में 16 जुलाई को निकलने वाली रथयात्रा से पहले शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार मनाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस सुरक्षा व्यवस्था के तहत ...
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दी गई। यह नीति 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई थी, इसलिए सरकार नई उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 लेकर आई है। इसका उद्देश्य उत्तर ...
तुला से मीन तक खुलेंगे तरक्की के रास्ते, वापस मिलेगा अटका पैसा! पढ़ें अपनी राशि का सटीक हाल
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजकुमार माने जाने वाले बुध 7 जुलाई 2026 को अपनी चाल बदलते हुए कर्क से मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस गोचर की सबसे अहम बात यह है कि 24 जुलाई तक बुध अपनी स्वराशि मिथुन में वक्री (उल्टी चाल) अवस्था में रहेंगे और इसके बाद मार्गी होकर 5 अगस्त को पुनः कर्क राशि में चले जाएंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, बुध का यह गोचर नए कामों की शुरुआत करने के बजाय पुराने पेंडिंग कामों को निपटाने, फंसा हुआ पैसा निकालने और कागजी कार्रवाई पूरी करने का सुनहरा अवसर है। आइए जानते हैं तुला से लेकर मीन राशि तक के जातकों के लिए यह अवधि कैसी रहने वाली है।तुला राशि: शिक्षा और भाग्य में होगी वृद्धितुला राशि वालों के लिए बुध नवम भाव (भाग्य व धर्म) में गोचर कर रहा है। यह समय उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिनकी पढ़ाई किसी कारणवश बीच में ही छूट गई थी। लंबी यात्राओं और कानूनी मसलों की समीक्षा करने का यह उत्तम समय है।रामबाण उपाय: कोई भी बड़ा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले किसी अनुभवी व्यक्ति से मार्गदर्शन अवश्य लें।वृश्चिक राशि: गुप्त धन और निवेश पर रखें पैनी नजरआपके अष्टम भाव में बुध की सक्रियता कर्ज, टैक्स और बीमा से जुड़े मामलों पर आपका ध्यान केंद्रित करेगी। इस दौरान किसी भी नए निवेश की गहराई से जांच करें। रिसर्च और जांच-पड़ताल से कोई ऐसी छिपी हुई जानकारी सामने आ सकती है, जो आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी।रामबाण उपाय: किसी भी तरह के जोखिम वाले निवेश से बचें और दस्तावेजों को अच्छी तरह पढ़कर ही हस्ताक्षर करें।धनु राशि: रिश्तों और पुरानी साझेदारी में होगा सुधारसप्तम भाव (विवाह व साझेदारी) में गोचर के चलते व्यापार से जुड़े पुराने सहयोगी या पुराने रिश्तेदार दोबारा आपके संपर्क में आ सकते हैं। अपने स्पष्ट और मधुर संवाद कौशल से आप लंबे समय से चली आ रही गलतफहमियों को आसानी से दूर कर पाएंगे।रामबाण उपाय: सामने वाले की बात को धैर्य से सुनें और पूरी बात समझने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया दें।मकर राशि: कार्यस्थल पर पुरानी गलतियों से मिलेगी सीखआपके छठे भाव में बुध का वक्री होना आपके पुराने और रुके हुए कार्यों को अचानक गति दे सकता है। इस दौरान नए प्रोजेक्ट्स हाथ में लेने के बजाय अगर आप अपने पुराने कामों की खामियां दूर करेंगे, तो कार्यस्थल पर आपका प्रदर्शन बेहतरीन होगा और अधिकारियों का सहयोग मिलेगा।रामबाण उपाय: अपने कामकाज के तरीके को व्यवस्थित रखें और अपनी दैनिक दिनचर्या में अनुशासन लाएं।कुंभ राशि: शिक्षा और रचनात्मकता का है स्वर्णिम समयपंचम भाव में बुध का प्रभाव विद्यार्थियों, लेखकों, शिक्षकों और कला जगत से जुड़े लोगों को शानदार परिणाम देने वाला है। अपने पुराने विचारों और आइडियाज पर दोबारा काम करें, आपको सफलता निश्चित मिलेगी। लव लाइफ में भी खुलकर संवाद करने से रिश्तों में मिठास बढ़ेगी।रामबाण उपाय: अपने उन रचनात्मक प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता के साथ पूरा करें, जिन्हें आपने अधूरा छोड़ दिया था।मीन राशि: पारिवारिक सुख और संपत्ति के मामलों में लाभचतुर्थ भाव (घरेलू सुख) में गोचर के प्रभाव से आपको पारिवारिक मुद्दों पर दोबारा विचार करने का अवसर मिलेगा। घर के रेनोवेशन या पैतृक संपत्ति से जुड़े पुराने फैसलों की समीक्षा करने से भविष्य में बड़े लाभ की नींव रखी जा सकेगी।रामबाण उपाय: परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर पुराने घरेलू फैसलों पर शांति से विचार-विमर्श करें।
सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य योजना) की कार्ययोजना एवं वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दे दी गई। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों ...
वैदिक ज्योतिष में 'जन्म पाया' एक बेहद प्राचीन और प्रामाणिक अवधारणा है। सरल शब्दों में कहें तो 'पाया' का अर्थ होता है आधार या नींव। जब किसी शिशु का जन्म होता है, तो उस समय आकाश मंडल में चंद्रदेव की स्थिति और जन्म नक्षत्र के आधार पर जातक का पाया निर्धारित किया जाता है। चूंकि चंद्रमा हमारे मन, भावनाओं और दैनिक जीवन के अनुभवों के कारक हैं, इसलिए पाया की गणना में उनकी स्थिति सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह जातक के जीवन के शुरुआती सफर, स्वास्थ्य और मिलने वाली सामान्य समृद्धि का एक मोटा ओवरव्यू देता है।ज्योतिष में पाए के चार मुख्य प्रकार और उनके संकेतपारंपरिक ज्योतिष शास्त्र में पाए को मुख्य रूप से चार भागों में विभाजित किया गया है, जो जीवन में आने वाली चुनौतियों और सफलताओं के अलग-अलग स्तरों को दर्शाते हैं:स्वर्ण पाया (Gold Paya): इसे ज्योतिष में सबसे उत्तम और मंगलकारी माना जाता है। इस पाए में जन्मे जातकों को जीवन में बेहतरीन अवसर, आर्थिक स्थिरता, मजबूत आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।रजत पाया (Silver Paya): रजत यानी चांदी का पाया भी अत्यंत शुभ और अनुकूल होता है। ऐसे लोग अपने धैर्य और निरंतर परिश्रम से धीरे-धीरे सफलता के शिखर पर पहुंचते हैं। इनका पारिवारिक जीवन सुखी और संतुलित रहता है।ताम्र पाया (Copper Paya): ताम्र पाया जातक को मिले-जुले परिणाम देता है। इन्हें जीवन के शुरुआती दौर में कड़ा संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन अपनी मेहनत के बल पर ये अंततः बेहतरीन प्रगति और धन लाभ हासिल करते हैं।लोह पाया (Iron Paya): इसे चारों में सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है। लोह पाए का मतलब कष्ट नहीं, बल्कि यह है कि जातक को हर काम में देरी और बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, लगातार डटे रहने से इन्हें बड़ी सफलता भी मिलती है।नक्षत्रों से संबंध और संपूर्ण कुंडली का महत्वपाया तय करने में जन्म नक्षत्र की भूमिका सबसे मुख्य होती है। हर नक्षत्र के अपने विशेष गुण और ऊर्जा होती है, जो पाए के साथ मिलकर जातक के स्वभाव को आकार देती है। लेकिन यहाँ यह समझना जरूरी है कि क्या अकेला पाया ही आपका भाग्य लिखता है? ज्योतिषविदों के अनुसार इसका जवाब है—नहीं।पाया कुंडली विश्लेषण का केवल एक हिस्सा है। यदि किसी का जन्म लोह पाए में हुआ है, लेकिन कुंडली में मजबूत राजयोग, धनयोग या शुभ ग्रहों की महादशा चल रही है, तो वह व्यक्ति फर्श से अर्श तक पहुंच सकता है। इसके विपरीत, स्वर्ण पाए में जन्म लेने के बाद भी यदि मुख्य ग्रह कमजोर या पीड़ित हों, तो जीवन में संघर्ष बढ़ जाता है। आज भी बच्चे के जन्म, नामकरण और वर्षफल के समय इसकी महत्ता बनी हुई है, लेकिन इसे अंतिम फल न मानकर केवल एक मार्गदर्शिका के रूप में देखा जाना चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की छुट्टी
Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद अहम और ऐतिहासिक बैठक में सोमवार को एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला लिया गया। राम मंदिर में दान चोरी को लेकर पिछले कुछ समय से मचे भारी बवाल के बीच, ट्रस्ट ...
भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वालों और बैंकिंग सेक्टर्स के निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय शुरू होने वाला है। जून तिमाही (Q1 FY27) के कॉरपोरेट नतीजों का सीजन दस्तक दे चुका है। इस बार बैंकों के तिमाही प्रदर्शन की तस्वीर पिछले कुछ क्वार्टर्स से काफी अलग और दिलचस्प नजर आ रही है। एक तरफ जहां देश में लोन (उधार) की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ बैंकों के पास जमा (Deposit) उस रफ्तार से नहीं बढ़ा है। क्रेडिट और डिपॉजिट के इसी अंतर के कारण कई दिग्गज बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव देखने को मिल सकता है, हालांकि खराब लोन के लिए पहले से किए गए मजबूत प्रावधानों (Provisions) के चलते ओवरऑल मुनाफा दमदार रहने की उम्मीद है।15 जुलाई से शुरू होगा नतीजों का महाकुंभ, ये हैं मुख्य तारीखेंबैंकिंग सेक्टर में पहली तिमाही के नतीजों की शुरुआत 15 जुलाई को जना स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana Small Finance Bank) के साथ होगी। इसके बाद 18 जुलाई को बाजार के चार सबसे बड़े दिग्गज— एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), एक्सिस बैंक (Axis Bank) और कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) एक साथ अपने वित्तीय नतीजे घोषित करेंगे। इसके बाद 20 जुलाई को करूर वैश्य बैंक, 22 जुलाई को सीएसबी बैंक, 23 जुलाई को उज्जिवन स्मॉल फाइनेंस बैंक और 25 जुलाई को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) के परिणाम सामने आएंगे। दिग्गज ब्रोकरेज हाउस सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, इस तिमाही में पूरे बैंकिंग सेक्टर का शुद्ध मुनाफा 13.7 फीसदी की दर से बढ़ सकता है।ये बड़े बैंक मचाएंगे धमाल, इस सरकारी बैंक से मिल सकता है बड़ा सरप्राइजब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तिमाही में कुछ चुनिंदा बैंक निवेशकों की चांदी करा सकते हैं। आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) मजबूत एसेट क्वालिटी और लोन ग्रोथ के दम पर सबसे टॉप पर बना हुआ है। वहीं, देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई (SBI) कॉपोरेट लोन और सरकारी योजनाओं के दम पर शानदार मुनाफा कमा सकता है। एचडीएफसी बैंक से 15.5% की लोन ग्रोथ और स्थिर मार्जिन के साथ मजबूत नतीजों की उम्मीद है। एक्सिस बैंक का मुनाफा कम प्रोविजनिंग के चलते 28 फीसदी तक उछल सकता है। सबसे बड़ा सरप्राइज इंडियन बैंक (Indian Bank) और बैंक ऑफ इंडिया से मिल सकता है, जहां मजबूत रेटिंग अपग्रेड देखा गया है।इन बैंकों के शेयर कर सकते हैं निराश, मुनाफे पर दबाव की आशंकाजहां एक तरफ कई बैंकों में रौनक है, वहीं कुछ बड़े बैंकों को लेकर निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस लिस्ट में बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) का नाम सबसे आगे है, जहां यूएई (UAE) से जुड़े वन-टाइम सेटलमेंट और कमजोर लोन ग्रोथ के कारण मुनाफे में गिरावट की आशंका है। फेडरल बैंक (Federal Bank) की फीस इनकम कमजोर रहने से तिमाही आधार पर मुनाफा घट सकता है। इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) के माइक्रोफाइनेंस (MFI) कारोबार में सुधार के बावजूद मार्जिन पर दबाव के चलते कोई बहुत बड़ी ग्रोथ देखने को नहीं मिलेगी।क्या है बैंकिंग सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती और कासा (CASA) का रोलइस तिमाही में बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके डिपॉजिट्स और कासा रेश्यो (Current Account & Savings Account) में आ रही सुस्ती है। रिटेल, हाउसिंग, व्हीकल और कॉर्पोरेट सेक्टर में लोन की मांग तो बंपर है, लेकिन बैंकों को लोन बांटने के लिए महंगे ब्याज पर फंड जुटाना पड़ रहा है। अगर आने वाले समय में भी डिपॉजिट ग्रोथ धीमी रहती है, तो बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव और ज्यादा गहरा सकता है, जिससे लोन ग्रोथ अच्छी होने के बाद भी बैंकों की शुद्ध कमाई प्रभावित हो सकती है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, केनरा बैंक, धनलक्ष्मी बैंक और आरबीएल बैंक जैसी संस्थाओं की लोन ग्रोथ पर इस बार विशेष नजर रहेगी।
समंदर का नया 'अदृश्य शिकारी': 11 जुलाई को नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरि'
भारतीय नौसेना की ताकत में एक ऐतिहासिक इजाफा होने जा रहा है। आगामी 11 जुलाई को स्वदेशी तकनीक से निर्मित अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' आधिकारिक तौर पर नौसेना के बेड़े में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रोजेक्ट 17A (शिवालिक-क्लास) के तहत बना यह छठा युद्धपोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।आत्मनिर्भर भारत की बुलंद तस्वीर और स्वदेशी ताकतपूर्वी घाट की प्रतिष्ठित पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया यह युद्धपोत भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का एक बड़ा उदाहरण है। नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन और मुंबई के मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसने देश के MSME और रक्षा उद्योगों को एक नई मजबूती दी है।आधुनिक हथियारों और स्टेल्थ तकनीक से लैस समरवीर'महेंद्रगिरि' को समंदर का एक अदृश्य शिकारी माना जा रहा है क्योंकि इसके उन्नत स्टेल्थ फीचर्स इसे दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचाते हैं। यह बहुआयामी फ्रिगेट सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। कंबाइंड डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली के कारण यह उच्च गति से हवाई, सतही और पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बनेगा भारत का 'अभेद्य कवच'यह युद्धपोत न केवल युद्ध की स्थिति में नौसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि आपदा राहत, खोज और बचाव अभियानों में भी अहम भूमिका निभाएगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और अन्य रणनीतिक चुनौतियों के बीच 'महेंद्रगिरि' भारतीय नौसेना के लिए एक अचूक 'फोर्स मल्टीप्लायर' साबित होगा, जो देश के समुद्री हितों की रक्षा करेगा।
Who is Bajrang Lal Bagda : राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव बने बजरंग लाल बागड़ा, जानिए कौन हैं
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। सोमवार, 6 जुलाई को आयोजित ट्रस्ट की अहम बैठक में महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ...
अगर आप अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सशस्त्र बल (Indian Armed Forces) अग्निपथ भर्ती योजना की समीक्षा कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, शहजाद भट्टी नेटवर्क के दो मॉड्यूल का पर्दाफाश; छह आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शहजाद भट्टी नेटवर्क के दो मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई में अवैध हथियार, पिस्तौल और पेट्रोल बम बरामद, नेटवर्क के अन्य लिंक की जांच जारी।
प्रशांत किशोर की पार्टी के खिलाफ कौन होगा बीजेपी का 'ट्रम्प कार्ड'? रेस में ये तीन बड़े नाम सबसे आगे
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस सीट पर चुनावी बिसात इसलिए भी दिलचस्प हो गई है क्योंकि चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की 'जन सुराज पार्टी' इस उपचुनाव में पूरे दमखम के साथ उतर रही है। प्रशांत किशोर की इस नई और मजबूत चुनौती का सामना करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने सबसे जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में जुट गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के इस मजबूत गढ़ को बचाने के लिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में मंथन का दौर जारी है और टिकट की रेस में तीन कद्दावर नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' ने बढ़ाई पारंपरिक दलों की धड़कनबांकीपुर सीट पारंपरिक रूप से बीजेपी और एनडीए का मजबूत किला मानी जाती रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं। प्रशांत किशोर जमीनी स्तर पर जाकर लगातार युवाओं, महिलाओं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर जनता के बीच पैठ बना रहे हैं। जन सुराज की इस आक्रामक चुनावी रणनीति ने बीजेपी के शीर्ष रणनीतिकारों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। बीजेपी अब किसी ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है जिसकी स्थानीय जनता के बीच गहरी पकड़ हो और जो जातिगत समीकरणों के साथ-साथ विकास के मुद्दे पर भी फिट बैठता हो।टिकट की रेस में शामिल ये तीन बड़े नाम, किसका पलड़ा भारी?बीजेपी के आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बांकीपुर उपचुनाव के लिए पार्टी के प्रदेश मुख्यालय से लेकर दिल्ली दरबार तक जिन तीन नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वे स्थानीय समीकरणों में बेहद फिट बैठते हैं। पहले दावेदार के रूप में क्षेत्र के एक अनुभवी और पुराने सांगठनिक नेता का नाम सामने आ रहा है, जिनकी कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ है। दूसरे नंबर पर एक युवा और सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय चेहरे को आगे किया जा रहा है, जो प्रशांत किशोर के युवा कार्ड की काट बन सके। वहीं, तीसरे नाम के रूप में एक ऐसे कद्दावर चेहरे की चर्चा है जो व्यापारिक और शहरी मतदाताओं के बीच बेहद लोकप्रिय है।बांकीपुर का भौगोलिक और लोकल सियासी गणितपटना जिले के अंतर्गत आने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट एक पूरी तरह से शहरी और जागरूक मतदाताओं वाली सीट है। यहां की बड़ी आबादी शिक्षित और व्यापार जगत से जुड़ी हुई है, जिसके कारण यहां राष्ट्रवाद, स्थानीय विकास, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दे हमेशा हावी रहते हैं। बीजेपी इस सीट को किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहती क्योंकि इसका सीधा असर सूबे की आगामी राजनीतिक दिशा पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि केंद्रीय चुनाव समिति इन तीनों नामों में से किस पर अपनी अंतिम मुहर लगाती है और बांकीपुर के इस महामुकाबले में कौन बाजी मारता है।
राम मंदिर ट्रस्ट में बहुत बड़ा फेरबदल, चंपत राय का इस्तीफा मंजूर; बजरंग बांगड़ा बने नए महासचिव
अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हाई-लेवल बैठक में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया गया है। ट्रस्ट के कद्दावर नेता और लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से लेकर निर्माण कार्य तक की मुख्य कमान संभाल रहे महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है। उनकी जगह अब बजरंग बांगड़ा को राम मंदिर ट्रस्ट का नया महासचिव नियुक्त किया गया है। भव्य राम मंदिर के निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक स्तर पर इसे अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।चंपत राय का इस्तीफा क्यों हुआ मंजूर, क्या रहे मुख्य कारण?राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत से लेकर मंदिर निर्माण के हर एक फैसले में चंपत राय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों और बढ़ती उम्र के कारण उन्होंने खुद ही संगठन के इस भारी-भरकम पद की जिम्मेदारी से मुक्त होने की इच्छा जताई थी। ट्रस्ट की विशेष बैठक में उनके इस आग्रह और समर्पण का सम्मान करते हुए उनके इस्तीफे को सहर्ष स्वीकार कर लिया गया। हालांकि, वे ट्रस्ट के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं और मार्गदर्शन आगे भी देते रहेंगे।कौन हैं बजरंग बांगड़ा जिन्हें मिली राम मंदिर ट्रस्ट की इतनी बड़ी जिम्मेदारी?चंपत राय की जगह नए महासचिव चुने गए बजरंग बांगड़ा सनातन समाज और सामाजिक संगठनों में एक जाना-माना और बेहद सम्मानित नाम हैं। कुशल प्रशासनिक क्षमता और सांगठनिक कार्यों में महारत रखने वाले बजरंग बांगड़ा को यह जिम्मेदारी मिलना बेहद अहम माना जा रहा है। राम मंदिर के पूर्ण निर्माण, परिसर के विस्तार, सुरक्षा व्यवस्था और देश-विदेश से अयोध्या आ रहे लाखों श्रद्धालुओं के सुचारू प्रबंधन को देखते हुए ट्रस्ट को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो पूरी ऊर्जा के साथ इन वैश्विक कार्यों को संभाल सके। बैठक में सभी सदस्यों ने उनके नाम पर अपनी अंतिम मुहर लगाई।अयोध्या में राम मंदिर के नए दौर की शुरुआतराजनीतिक और धार्मिक विश्लेषकों का मानना है कि बजरंग बांगड़ा की महासचिव पद पर नियुक्ति के साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन में एक नए युग की शुरुआत हो रही है। अब ट्रस्ट का मुख्य फोकस मंदिर के बचे हुए निर्माण कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने, डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और अयोध्या आने वाले भक्तों के लिए सुविधाओं को और अधिक आधुनिक व सुलभ बनाने पर होगा। इस बड़े बदलाव के बाद अब जल्द ही नई कमेटी की प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं का आधिकारिक खाका भी देश के सामने रखा जा सकता है।
अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर के निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब मंदिर के दीर्घकालिक प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर एक बड़ी मांग उठने लगी है। देश के वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों और विचारकों का मानना है कि अयोध्या राम मंदिर की व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे में ठीक वैसा ही कदम उठाया जाना चाहिए, जैसा उत्तर प्रदेश सरकार ने आज से करीब 44 साल पहले वाराणसी के ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए उठाया था। दरअसल, साल 1983 में काशी विश्वनाथ मंदिर में हुई एक सनसनीखेज चोरी ने तत्कालीन सरकार को एक ऐसा कड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया था, जिसने हमेशा के लिए वहां का पूरा सिस्टम बदल दिया।क्या था 44 साल पुराना वाकया जिसने हिला दी थी सरकार?यह बात साल 1983 की है, जब वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर से भगवान शिव का बेहद कीमती और ऐतिहासिक छत्र चोरी हो गया था। इस घटना के बाद पूरे देश के शिव भक्तों में भारी आक्रोश फैल गया और तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह हिल गई थी। उस समय तक मंदिर का प्रबंधन स्थानीय मठाधीशों और पुजारियों के एक निजी ट्रस्ट के हाथों में था। इस बड़ी सुरक्षा चूक और अव्यवस्था को देखते हुए यूपी सरकार ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने का फैसला किया।जब यूपी सरकार ने कानून बनाकर अपने हाथ में लिया था काशी का नियंत्रणचोरी की घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 'काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम, 1983' (Kashi Vishwanath Temple Act) लागू किया। इस कानून के तहत सरकार ने मंदिर का पूरा प्रबंधन, सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था अपने नियंत्रण में ले ली। इसके लिए एक आधिकारिक बोर्ड का गठन किया गया, जिसकी कमान कमिश्नर और जिलाधिकारी जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई। सरकार के इस फैसले का उस समय काफी विरोध भी हुआ, लेकिन बाद में देश की सर्वोच्च अदालत ने भी सरकार के इस कानून को पूरी तरह सही ठहराया। इसी सरकारी नियंत्रण का नतीजा है कि आज काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुकी है।अयोध्या राम मंदिर में 'काशी फॉर्मूला' लागू करने की क्यों हो रही है मांग?वर्तमान में अयोध्या राम मंदिर का संचालन 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' द्वारा किया जा रहा है। हालांकि, राम मंदिर में हर दिन उमड़ रही लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़, वैश्विक स्तर पर इसकी संवेदनशीलता और सुरक्षा खतरों को देखते हुए विशेषज्ञों का तर्क है कि इसे भी काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर एक विशेष राज्य अधिनियम (State Act) के दायरे में लाया जाना चाहिए। जानकारों का कहना है कि एक पूर्ण वैधानिक बोर्ड (Statutory Board) बनने से मंदिर की सुरक्षा, चढ़ावे का पारदर्शी ऑडिट और वीआईपी मैनेजमेंट सीधे सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में आ जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की चूक या विवाद की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
क्या 2027 में सीएम योगी लगाएंगे हैट्रिक या अखिलेश यादव का खत्म होगा वनवास
उत्तर प्रदेश की सियासत में जब भी चुनावों की सुगबुगाहट तेज होती है, तो राजनीतिक समीकरणों को भांपने वाले दिग्गजों के बयान सुर्खियां बन जाते हैं। यूपी की राजनीति में 'मौसम वैज्ञानिक' के नाम से मशहूर और हवा का रुख पहले ही पहचान लेने वाले एक बड़े राजनेता ने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर एक बेहद सनसनीखेज भविष्यवाणी कर दी है। इस सटीक अनुमान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हर कोई अब यह जानने को बेताब है कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार तीसरी बार रिकॉर्ड बनाकर हैट्रिक लगाएंगे या फिर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव का सत्ता से चला आ रहा लंबा वनवास इस बार खत्म होने जा रहा है।जमीनी समीकरणों को भांपकर मौसम वैज्ञानिक ने किया बड़ा इशाराराजनीति के इस मंझे हुए खिलाड़ी ने सूबे के मौजूदा हालात, हालिया उपचुनावों के नतीजों और जनता के मूड का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद यह दावा किया है। उनके मुताबिक, इस बार का मुकाबला बेहद कांटे का होने वाला है और उत्तर प्रदेश की जनता किसी भी दल को एकतरफा बहुमत देने के मूड में नहीं दिख रही है। मौसम वैज्ञानिक का मानना है कि जहां एक तरफ बीजेपी का मजबूत संगठन और ब्रांड योगी मैदान में है, वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव का 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और सॉफ्ट हिंदुत्व का नया प्रयोग जमीन पर काफी असर दिखा रहा है।क्या सीएम योगी आदित्यनाथ रचेंगे इतिहास और लगाएंगे हैट्रिक?बीजेपी खेमे की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी लगातार यूपी को अपना सबसे मजबूत किला मानकर चल रही है। अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2027 के इस महामुकाबले को जीतने में कामयाब रहते हैं, तो यह न सिर्फ उनकी लगातार तीसरी जीत होगी बल्कि भारतीय राजनीति में उनका कद बेहद मजबूत हो जाएगा। मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, बीजेपी सरकार की कानून-व्यवस्था की नीति और डबल इंजन सरकार के विकास कार्य उनके सबसे बड़े हथियार हैं, लेकिन एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को संभालना उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।क्या अखिलेश यादव का खत्म होगा सत्ता का लंबा वनवास?दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से लगातार जमीन पर पसीना बहा रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक ने अपनी भविष्यवाणी में इस बात का भी संकेत दिया है कि अगर विपक्ष पूरी तरह एकजुट रहा और टिकट बंटवारे में कोई गलती नहीं हुई, तो अखिलेश यादव सत्ता के बेहद करीब पहुंच सकते हैं। युवाओं में रोजगार का मुद्दा और किसानों की नाराजगी सपा के पक्ष में हवा बना सकती है। अब देखना यह होगा कि यूपी के इस 'मौसम वैज्ञानिक' की भविष्यवाणी कितनी सटीक बैठती है और 2027 का ताज किसके सिर सजता है।
तुरंत गिरफ्तारी की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- 'पहले देश के सिस्टम पर भरोसा रखना सीखें'
पैगंबर मोहम्मद पर कथित विवादित टिप्पणी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मामले के आरोपी के खिलाफ तत्काल सख्त एक्शन और गिरफ्तारी की मांग को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों को कानून और जांच एजेंसियों की व्यवस्था पर विश्वास रखना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे सीधे शीर्ष अदालत आने के बजाय कानूनी प्रक्रियाओं और देश के सिस्टम पर भरोसा रखें।याचिकाकर्ता की जल्द कार्रवाई की मांग पर अदालत की दो टूकमामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आरोपी द्वारा की गई टिप्पणी से समाज का माहौल खराब हो सकता है, इसलिए इस मामले में तुरंत गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। इस पर पीठ ने असहमति जताते हुए कहा कि हर मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करना सही नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि देश में जांच और कार्रवाई के लिए एक स्थापित प्रशासनिक और कानूनी ढांचा मौजूद है, जिसे अपना काम करने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।जांच एजेंसियों को अपना काम करने की आजादी जरूरीसर्वोच्च न्यायालय ने रेखांकित किया कि किसी भी एफआईआर (FIR) या शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों को मामले की निष्पक्षता से जांच करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि कानून के सामने हर नागरिक बराबर है और न्याय प्रणाली बिना किसी दबाव के साक्ष्यों के आधार पर काम करती है। ऐसे में कानून को अपने तय तरीके से काम करने देना चाहिए, न कि कोर्ट की तरफ से किसी त्वरित एक्शन के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए।कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने की दी नसीहतइस हाई-प्रोफाइल मामले में सुनवाई को आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित उचित कानूनी मंच या स्थानीय अदालत का रुख करने की सलाह दी। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को कानूनी विशेषज्ञों द्वारा बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि देश की न्याय व्यवस्था और कानून का शासन (Rule of Law) भावनाओं या जल्दबाजी के बजाय पूरी तरह से स्थापित प्रक्रियाओं और संवैधानिक नियमों के तहत ही संचालित होगा।
घर ला रहे हैं पंचमुखी गणेश की मूर्ति? स्थापना से पहले नोट कर लें ये बेहद जरूरी बातें, वरना
वास्तु शास्त्र और सनातन परंपरा में भगवान गणेश की पूजा हर शुभ कार्य से पहले की जाती है। माना जाता है कि बप्पा की कृपा से घर के सारे संकट दूर हो जाते हैं। इन दिनों घरों में पंचमुखी गणेश यानी पांच मुख वाले गणपति की प्रतिमा रखने का चलन काफी बढ़ा है। यह मूर्ति अत्यंत चमत्कारी और शक्तिशाली मानी जाती है, लेकिन इसे घर में स्थापित करने और इसकी पूजा करने के कुछ बेहद कड़े नियम हैं। अगर आप भी अपने घर में सुख-समृद्धि के लिए पंचमुखी गणेश की मूर्ति लाने की सोच रहे हैं, तो इसके वास्तु नियमों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।पांच मुखों का क्या है रहस्य और आध्यात्मिक महत्वपंचमुखी गणेश जी के पांच मुख केवल एक स्वरूप नहीं हैं, बल्कि ये सृष्टि के पांच तत्वों—पृथ्वी, आकाश, जल, वायु और अग्नि का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा इन्हें पंचकोश (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय) से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि पंचमुखी रूप में भगवान गणेश अपने भक्तों की पांचों दिशाओं से रक्षा करते हैं और घर में किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र या बुरी नजर को टिकने नहीं देते।किस दिशा में करें स्थापित और क्या हैं इसके वास्तु नियमवास्तु शास्त्र के अनुसार पंचमुखी गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर को हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में स्थापित करना सबसे उत्तम माना जाता है। मूर्ति स्थापित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान गणेश का मुख घर के मुख्य द्वार की तरफ हो, जिससे बाहर से आने वाली कोई भी नकारात्मक शक्ति घर में प्रवेश न कर पाए। दक्षिण दिशा में इस मंगलकारी मूर्ति को रखने से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि इस दिशा को वास्तु में शुभ नहीं माना गया है।नियम और शुचिता का पालन है सबसे जरूरीचूंकि पंचमुखी गणेश जी को बेहद जाग्रत और उग्र स्वरूप माना जाता है, इसलिए इनकी स्थापना के बाद घर में साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। रोज सुबह-शाम नियम से बप्पा की आरती, कपूर का दीया और मोदक या दुर्वा का भोग लगाना अनिवार्य है। यदि आप घर में कड़े नियमों का पालन नहीं कर सकते या घर में अक्सर कलह-कलेश रहता है, तो पंचमुखी गणेश के स्थान पर सामान्य एक मुख वाले गणपति की बैठी हुई प्रतिमा रखना अधिक श्रेयस्कर होता है।
ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा ने इस्तीफ़ा दिया
भुवनेश्वर। ओडिशा में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 2013 बैच के अधिकारी जगमोहन मीणा ने निजी कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। मीणा ने हाल ही में भुवनेश्वर में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के तौर पर काम किया था।श्री मीणा ने अपने फ़ैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके इस्तीफ़े […] The post ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा ने इस्तीफ़ा दिया appeared first on Sabguru News .
सनातन धर्म में मंदिर में प्रवेश करते ही सबसे पहले घंटी या घंटा बजाने का नियम है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को हम सब श्रद्धा से निभाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर मंदिर के प्रवेश द्वार पर घंटी क्यों टंगी होती है? इसके पीछे सिर्फ देवी-देवताओं को जाग्रत करने की धार्मिक मान्यता नहीं है, बल्कि आधुनिक विज्ञान और ध्वनि तरंगों का एक ऐसा गहरा रहस्य छिपा है, जो सीधे हमारे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है।देवताओं की उपस्थिति और नकारात्मक ऊर्जा का नाशधार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी बजाने से वहां मौजूद देवी-देवताओं की चेतना जाग्रत होती है। माना जाता है कि घंटी की आवाज से मंदिर परिसर के आसपास की सभी नकारात्मक शक्तियां और बुरी ऊर्जाएं दूर भाग जाती हैं। इस पवित्र ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और भक्तों के मन में सकारात्मक भावों का संचार होता है, जिससे वे पूरे ध्यान से भगवान की आराधना कर पाते हैं।गूंज का विज्ञान: दिमाग को तुरंत शांत करती है यह ध्वनिजब मंदिर की बड़ी पीतल की घंटी को बजाया जाता है, तो उससे निकलने वाली आवाज एक खास तरह की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) पैदा करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस घंटी की तेज और तीखी आवाज से जो कंपन उत्पन्न होता है, वह वातावरण में काफी दूर तक जाता है। खास बात यह है कि घंटी बजाने के बाद उसकी गूंज कम से कम 7 सेकंड तक हवा में बनी रहती है। यह 7 सेकंड की गूंज सीधे हमारे शरीर के सात हीलिंग चक्रों (ऊर्जा केंद्रों) को स्पर्श करती है।एकाग्रता बढ़ाने और तनाव दूर करने में मददगारचिकित्सा विज्ञान और ध्वनि थेरेपी (Sound Therapy) के नजरिए से देखें तो घंटी की आवाज सुनते ही हमारा इंसानी दिमाग तुरंत शांत और एकाग्र हो जाता है। यह ध्वनि मस्तिष्क के दाएं और बाएं दोनों हिस्सों (Left and Right Brain) के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाती है। जैसे ही यह आवाज हमारे कानों में पड़ती है, मन में चल रहे फालतू के विचार और तनाव पूरी तरह रुक जाते हैं और हम पूरी तरह वर्तमान क्षण में आ जाते हैं। यही वजह है कि प्राचीन काल के ऋषियों ने मंदिर की वास्तुकला में घंटी को एक अनिवार्य हिस्सा बनाया था।
अन्वय द्रविड़ ने श्रीलंका में मचाया धमाल, पिता राहुल द्रविड़ के अंदाज में खेली 'दि वॉल' जैसी पारी
भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज और पूर्व कोच राहुल द्रविड़ के बेटे अन्वय द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने नाम का डंका बजाना शुरू कर दिया है। श्रीलंका के खिलाफ चल रहे अंडर-19 मुकाबले में अन्वय ने बिल्कुल अपने पिता के अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए टीम को संभाला और फिर शानदार शॉट्स का तड़का लगाकर विरोधी टीम के पसीने छुड़ा दिए।'दि वॉल' की यादें हुईं ताजा, क्रीज पर जमकर की बल्लेबाजीमैच के दौरान जब भारतीय अंडर-19 टीम को एक मजबूत और संभली हुई पारी की जरूरत थी, तब अन्वय द्रविड़ क्रीज पर दीवार बनकर खड़े हो गए। उन्होंने अपनी बल्लेबाजी शैली से दर्शकों को राहुल द्रविड़ के सुनहरे दिनों की याद दिला दी। गेंद की मेरिट के हिसाब से डिफेंस करना और विकेट न गंवाने का जो हुनर उनके पिता में था, वही धैर्य अन्वय की इस पारी में भी साफ नजर आया।डिफेंस के बाद दिखाया आक्रामक रूप, लगाए चौके-छक्केपारी को एक बार पूरी तरह संभाल लेने और पिच का मिजाज समझने के बाद अन्वय ने गियर बदला। उन्होंने सिर्फ डिफेंस ही नहीं किया, बल्कि श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ मैदान के चारों तरफ शानदार कड़क शॉट्स भी खेले। उनकी इस सूझबूझ भरी और विस्फोटक पारी की बदौलत भारतीय टीम ने मुकाबले में अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है।पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं अन्वयराहुल द्रविड़ को दुनिया भर में उनकी मजबूत रक्षात्मक तकनीक के लिए जाना जाता था, और अब अन्वय भी उसी राह पर चलते दिख रहे हैं। श्रीलंका की धरती पर खेला गया यह मुकाबला उनके करियर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर भी फैंस अन्वय की इस पारी की तुलना उनके पिता राहुल द्रविड़ से कर रहे हैं और उन्हें भारतीय क्रिकेट का भविष्य बता रहे हैं।
घर के बाहर मौत बनकर पहुंचा शेर! चरवाहे को जमीन पर दबोचा, लोगों ने पत्थर बरसाकर बचाई जान, VIDEO वायरल
गुजरात के भावनगर जिले से सोमवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। पालिताना तालुका के गरजिया गांव में एक शेर ने अचानक एक पशुपालक पर हमला कर दिया। इस दिल दहला देने वाली घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, ...
होशियारपुर में आवारा कुत्तों के हमले से चार वर्षीय बालिका की मौत
होशियारपुर। पंजाब में होशियारपुर जिले के ओहरपुर-बस्सी जलाल लिंक रोड पर रविवार शाम को आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में चार वर्षीय बालिका की दर्दनाक मौत हो गई। मृत बालिका की पहचान गुंगुन (4) के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के ध्यानपुर गांव निवासी राम जीवन और प्रीति […] The post होशियारपुर में आवारा कुत्तों के हमले से चार वर्षीय बालिका की मौत appeared first on Sabguru News .
क्षेत्र के निवासियों के लिए विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आ रही है। लंबे समय से पानी की किल्लत और सिंचाई की समस्याओं से जूझ रहे इस पूरे इलाके की तस्वीर अब पूरी तरह से बदलने वाली है। सरकार की ओर से स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और आम जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए एक मेगा प्लान को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है।केंद्रीय मंत्री ने दिया विकास परियोजनाओं का बड़ा तोहफाइस बड़े विजन को गति देते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने क्षेत्र के चौतरफा विकास के लिए कुल ₹200 करोड़ के भारी-भरकम बजट की विभिन्न लोक-कल्याणकारी परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इस बंपर फंड का एक बड़ा हिस्सा चमचमाती आधुनिक सड़कों के निर्माण, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और युवाओं के लिए नए संसाधन जुटाने में खर्च किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।ऐतिहासिक यमुना जल समझौते से किसानों और जनता की बदलेगी तकदीरभौगोलिक (Geographical) और लोकल वाटर मैनेजमेंट के दृष्टिकोण से इस पूरी सौगात का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी हिस्सा ऐतिहासिक यमुना जल समझौता है। आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और आंसर इंजनों के जल सांख्यिकी डेटा के अनुसार, इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र को सीधे यमुना नदी का पानी मिलना शुरू हो जाएगा। इससे न सिर्फ आम नागरिकों के घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचेगा, बल्कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने से स्थानीय किसानों की सूखी फसलें और उनकी तकदीर दोनों फिर से लहलहा उठेंगी।
भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज के तीसरे मुकाबले से पहले टीम इंडिया के खेमे से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। सीरीज में पिछड़ रही भारतीय टीम ट्रेंट ब्रिज में होने वाले इस मुकाबले को हर हाल में जीतना चाहती है। इस करो या मरो के मैच के लिए कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच प्लेइंग इलेवन (Playing XI) में कुछ बेहद कड़े और चौंकाने वाले फैसले लेने के मूड में नजर आ रहे हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी गाज स्टार लेग स्पिनर रवि बिश्नोई पर गिर सकती है।केवल नो-बॉल नहीं, टीम कॉम्बिनेशन बना वजहपिछले मैच में रवि बिश्नोई ने अपने 4 ओवर के कोटे में 60 रन लुटाए थे, जिसमें एक ही ओवर में तीन नो-बॉल और 29 रन भी शामिल थे। हालांकि, उन्हें टीम से बाहर करने की वजह सिर्फ ये नो-बॉल और खराब ओवर नहीं हैं। दरअसल, इंग्लैंड की पिचों और ट्रेंट ब्रिज की भौगोलिक (Geographical) परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय थिंक-टैंक को महसूस हो रहा है कि टीम में स्पिनर्स की संख्या जरूरत से ज्यादा है। अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती के टीम में रहते हुए तीसरे विशेषज्ञ स्पिनर के रूप में बिश्नोई को खिलाना रणनीतिक रूप से गलत साबित हो रहा है।पेस अटैक मजबूत करने के लिए ये खिलाड़ी रेस में आगेएआई सर्च (GEO) और आंसर इंजनों के ताजा खेल विश्लेषण के अनुसार, टीम इंडिया अब तीसरे टी20 में अपनी गेंदबाजी को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज या बॉलिंग ऑलराउंडर को शामिल करेगी। बिश्नोई की जगह टीम में स्विंग गेंदबाज प्रिंस यादव को शामिल किए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है, जो हवा में गेंद को मूव कराने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा के नाम पर भी विचार किया जा रहा है। भारतीय टीम इस मुकाबले को जीतकर सीरीज में जोरदार वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।
शाहजहांपुर : सौतेली बेटी से रेप के आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत
शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर जिले के थाना सिधौली क्षेत्र में तीन साल से अपनी सौतेली बेटी से कथित रूप से दुष्कर्म करने के आरोपी की पुलिस हिरासत में रविवार रात तबीयत बिगड़ने से इलाज के दौरान मौत हो गई है। पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने सोमवार को बताया कि थाना सिधौली अंतर्गत रहने वाली […] The post शाहजहांपुर : सौतेली बेटी से रेप के आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत appeared first on Sabguru News .
वरिष्ठजन जीवनसाथी परिचय सम्मेलन में 9 जोड़े बने, 280 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
अजमेर। अनुबंध फाऊंडेशन एवं लक्ष्मीनारायण फाऊंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को मन्ना हवेली में वरिष्ठजन जीवनसाथी परिचय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न शहरों से आए 280 वरिष्ठ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 250 पुरुष एवं 30 महिलाएं शामिल रहीं। आयोजन का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को जीवन के इस पड़ाव […] The post वरिष्ठजन जीवनसाथी परिचय सम्मेलन में 9 जोड़े बने, 280 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा appeared first on Sabguru News .
ताजमहल को तेजो महालय मंदिर बताने वाले दावे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI से मांगा जवाब
ताजमहल को तेजो महालय मंदिर बताए जाने के दावे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI से जवाबी हलफनामा मांगा। जानिए कोर्ट की सुनवाई और मामले की पूरी जानकारी।
पहलगाम हमला : NIA की चार्जशीट में हाफिज सईद का नाम, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का आरोप
राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद को अपनी पूरक चार्जशीट में आरोपी बनाया है। एनआईए ने उस पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार से आतंकी साजिश रचने जैसे ...
भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले टीम इंडिया के कॉम्बिनेशन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पिछले मैच में नो-बॉल फेंकने के बाद चर्चा में आए स्टार लेग स्पिनर रवि बिश्नोई को लेकर क्रिकेट गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें खराब अनुशासन के कारण बाहर किया जा सकता है, लेकिन सच कुछ और ही है। रिपोर्टर सूत्रों के अनुसार, बिश्नोई को किसी गलती की सजा नहीं दी जा रही है, बल्कि इंग्लैंड के खिलाफ एक विशेष रणनीतिक मास्टरप्लान के तहत उन्हें प्लेइंग इलेवन से ड्रॉप किया जा सकता है।नो-बॉल का ड्रामा नहीं, रणनीतिक बदलाव है असली वजहपिछले मैच में भले ही बिश्नोई की कुछ गेंदें लाइन से बाहर गईं हों, लेकिन टीम मैनेजमेंट उन्हें इस वजह से बाहर नहीं कर रहा है। दरअसल, इंग्लैंड की टीम में कई धाकड़ दाएं हाथ के बल्लेबाज मौजूद हैं, जिन्हें देखते हुए कप्तान और कोच एक अलग गेंदबाजी कॉम्बिनेशन आजमाना चाहते हैं। पिच की स्थिति और विपक्षी टीम की कमजोरी को टारगेट करने के लिए टीम इंडिया किसी ऑफ-स्पिनर या अतिरिक्त तेज गेंदबाज को प्लेइंग XI में शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।प्लेइंग इलेवन में दिखेंगे कुछ और चौंकाने वाले बड़े बदलावकेवल रवि बिश्नोई ही नहीं, बल्कि इंग्लैंड के खिलाफ इस महत्वपूर्ण मैच के लिए भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में कुछ और बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। मिडिल ऑर्डर की मजबूती और टीम के बैलेंस को बेहतर करने के लिए बैटिंग लाइन-अप में भी बदलाव के संकेत मिले हैं। कप्तान पिच की नमी और उछाल को देखते हुए टॉस के वक्त अपनी अंतिम रणनीति का खुलासा करेंगे, जिससे फैंस को एक बिल्कुल नया टीम कॉम्बिनेशन देखने को मिल सकता है।इंग्लैंड के खिलाफ जीत के लिए भारत की नजरें संतुलित टीम परइंग्लैंड जैसी आक्रामक टीम को उनके घरेलू मैदान या न्यूट्रल वेन्यू पर मात देने के लिए भारतीय टीम मैनेजमेंट कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता। रवि बिश्नोई की जगह जिस भी खिलाड़ी को मौका मिलेगा, उस पर टीम को शुरुआती सफलता दिलाने का बड़ा दारोमदार होगा। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि यह मुकाबला पूरी तरह से रणनीतिक सूझबूझ का होने वाला है, जहां सही प्लेइंग इलेवन का चयन ही मैच का रुख तय करेगा।
लाइव मैच के दौरान श्रीलंकाई बल्लेबाज को आया हार्ट अटैक, अंपायर से बहस के तुरंत बाद हुई मौत
क्रिकेट के मैदान से एक बेहद झकझोर देने वाली और दुखद खबर सामने आ रही है, जिसने खेल जगत को सदमे में डाल दिया है। श्रीलंका में चल रहे एक स्थानीय क्रिकेट मैच के दौरान एक खिलाड़ी की लाइव पिच पर ही दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से अचानक मौत हो गई। खेल के दौरान हुआ यह दर्दनाक हादसा सोशल मीडिया और खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने खिलाड़ियों की फिटनेस और ऑन-फील्ड तनाव को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।अंपायर के फैसले पर विवाद और अचानक बिगड़ी तबीयतचश्मदीदों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैच के दौरान एक फैसले को लेकर मैदान पर स्थिति थोड़ी तनावपूर्ण हो गई थी। बल्लेबाजी कर रहे श्रीलंकाई क्रिकेटर, फील्डिंग टीम के खिलाड़ियों और अंपायर के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस (विवाद) शुरू हो गई। इस गहमागहमी के बीच अचानक उक्त बल्लेबाज असहज महसूस करने लगा और देखते ही देखते वह पिच पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा।मैदान पर ही थम गईं सांसेंखिलाड़ी के अचानक जमीन पर गिरते ही मैदान पर मौजूद अंपायर्स, साथी खिलाड़ी और मेडिकल स्टाफ तुरंत उसकी तरफ दौड़े। उसे प्राथमिक उपचार देने और जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक खिलाड़ी को बेहद गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था, जिसके कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस अचानक हुई मौत से पूरी खेल अकादमी और मृतक खिलाड़ी के परिवार में कोहराम मच गया है।खेल के मैदान पर बढ़ता तनाव और दिल के दौरे के मामलेहाल के दिनों में खेल के मैदानों पर खिलाड़ियों को हार्ट अटैक आने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। खेल विशेषज्ञ इस घटना के पीछे मैच के दौरान होने वाले अत्यधिक मानसिक तनाव, अचानक बढ़े ब्लड प्रेशर और अत्यधिक शारीरिक श्रम को मुख्य वजह मान रहे हैं। इस दुखद हादसे के बाद मैच को तुरंत रद्द कर दिया गया और पूरे देश में इस खिलाड़ी की असामयिक मृत्यु पर शोक व्यक्त किया जा रहा है।
क्या आपने देखा है दुनिया का पहला 'आइस होटल'? इसकी जादुई खूबसूरती सोशल मीडिया पर मचा रही है तहलका
सर्दियों के मौसम में दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जो अपनी खूबसूरती से लोगों को आकर्षित करती हैं, लेकिन क्या आपने कभी पूरी तरह बर्फ से बने होटल के बारे में सुना है? जी हां, स्वीडन के जुकासजर्वी (Jukkasjrvi) में स्थित 'आइसहोटल' (Icehotel) दुनिया का पहला और सबसे अनोखा आइस होटल है। इस होटल की मंत्रमुग्ध कर देने वाली तस्वीरें और कलाकृति इन दिनों इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही हैं, जिसे देखकर हर कोई हैरान है।हर साल नदी की बर्फ से होता है नया निर्माणइस होटल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे हर साल सर्दियों की शुरुआत में टॉर्न नदी (Torne River) से निकाली गई प्राकृतिक बर्फ और जमी हुई बर्फ की परतों से नए सिरे से बनाया जाता है। दुनिया भर के मशहूर कलाकार और मूर्तिकार यहां आकर दीवारों पर खूबसूरत नक्काशी करते हैं। जैसे ही वसंत ऋतु आती है, यह पूरा होटल पिघलकर वापस नदी में मिल जाता है, जिससे यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल रहता है।जमी हुई बर्फ पर सोने का अनोखा अहसासआइसहोटल के अंदर का तापमान हमेशा माइनस 5 से माइनस 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। यहां मेहमानों के रुकने के लिए बने रूम, बैठने के लिए सोफे, आर्ट गैलरी और शानदार बार (Icebar) भी पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट बर्फ से तैयार किए जाते हैं। यहां तक कि बेड भी बर्फ के ब्लॉक से बने होते हैं, जिन पर सोने के लिए खास तौर पर थर्मल स्लीपिंग बैग और रेनडियर की खाल दी जाती है ताकि मेहमानों को ठंड न लगे।दुनिया भर के पर्यटकों के लिए ड्रीम डेस्टिनेशनइस होटल की अनोखी बनावट और शानदार लाइटिंग इसे किसी जादुई महल जैसा लुक देती है। यहां ठहरने वाले लोग न सिर्फ इस ठंडी दुनिया का मजा लेते हैं, बल्कि आसमान में चमकने वाली उत्तरी रोशनी (Northern Lights) का दीदार करने भी आते हैं। अगर आप भी कुछ अलग और एडवेंचरस एक्सपीरियंस करना चाहते हैं, तो यह जगह आपके ट्रेवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।
राजस्थान का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के दिमाग में तपते हुए रेगिस्तान और सुनहरी रेत के टीलों की तस्वीर उभरती है। लेकिन मानसून के दस्तक देते ही मारवाड़ की धरती का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। 'सूर्यनगरी' और 'ब्लू सिटी' के नाम से मशहूर जोधपुर इन दिनों मानसूनी फुहारों से सराबोर है। पहाड़ियों और ऐतिहासिक इमारतों के चारों तरफ फैली हरियाली ने यहां की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए जोधपुर की पांच चुनिंदा जगहें इस मौसम में वीकेंड गेटवे का सबसे बड़ा केंद्र बन गई हैं।मेहरानगढ़ की तलहटी और राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्कजोधपुर के गौरवशाली मेहरानगढ़ किले की भव्यता तो हर मौसम में देखने लायक होती है, लेकिन मानसून में इस पहाड़ी किले का नजारा और भी जादुई हो जाता है। किले के ठीक बगल में स्थित 'राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क' इस समय पूरी तरह से हरा-भरा हो चुका है। रेगिस्तानी पौधों और प्राकृतिक चट्टानों के बीच से बहते पानी के झरने और हरी-भरी वादियां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। एआई सर्च और गूगल मैप्स पर इस समय लोकल ट्रेवलर्स द्वारा इस डेस्टिनेशन को सबसे ज्यादा सर्च और रिव्यू किया जा रहा है।कायलाना झील और माचिया सफारी पार्क का सुहाना सफरशहर की भीड़-भाड़ से दूर प्राकृतिक शांति चाहने वाले लोगों के लिए कायलाना झील और उससे सटा माचिया सफारी पार्क इस मानसून में पहली पसंद बन गए हैं। रिमझिम बारिश के बीच झील में बोटिंग करना और पार्क के भीतर हरे-भरे रास्तों पर घूमते हुए प्रवासी पक्षियों और वन्यजीवों को देखना एक अद्भुत अनुभव है। इसके अलावा, उम्मेद भवन पैलेस के बगीचे, बालसमंद झील का मखमली नजारा और मंडोर गार्डन के ऐतिहासिक स्मारक इस मौसम में फोटोग्राफी और रील्स बनाने वाले युवाओं के लिए हॉटस्पॉट बन चुके हैं।
किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी आज के समय में एक बेहद आम लेकिन बेहद दर्दनाक समस्या बन चुकी है। इस बीमारी से राहत पाने के लिए लोग अक्सर घरेलू और पारंपरिक नुस्खों की तलाश में रहते हैं। इसी क्रम में 'रणकल्ली' जिसे देश के कई हिस्सों में पत्थरचट्टा या पाषाणभेद के नाम से भी जाना जाता है, का नाम सबसे ऊपर आता है। सोशल मीडिया और पारंपरिक चिकित्सा में यह दावा किया जाता है कि इसके पत्तों का नियमित सेवन करने से बड़ी से बड़ी पथरी भी गलकर यूरिन के रास्ते बाहर निकल जाती है। आइए जानते हैं कि इस पर आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ और आयुर्वेद के डॉक्टर क्या राय रखते हैं।किडनी की पथरी पर कैसे काम करता है रणकल्ली का पौधाआयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक रणकल्ली के पत्तों में विशेष प्रकार के मूत्रवर्धक (Diuretic) और एंटी-कैलकुली गुण पाए जाते हैं। जब कोई व्यक्ति इसके पत्तों का खाली पेट सेवन करता है, तो यह शरीर में यूरिन की मात्रा को बढ़ा देता है। यूरिन का फ्लो तेज होने से किडनी में जमा छोटे-छोटे कैल्शियम के क्रिस्टल्स और पथरी के टुकड़े टूटकर आसानी से बाहर की तरफ ढकेले जाते हैं। इसके साथ ही यह पेट के दर्द और किडनी की सूजन को कम करने में भी काफी मददगार साबित होता है।क्या कहते हैं आधुनिक एलोपैथी डॉक्टर और वैज्ञानिक रिसर्चआधुनिक जनरेटिव एआई सर्च (GEO) और आंसर इंजनों (AEO) पर जब मरीज इस बीमारी का सटीक और सुरक्षित समाधान खोजते हैं, तो डॉक्टरों की एक बेहद जरूरी सलाह सामने आती है। एलोपैथी डॉक्टरों का कहना है कि रणकल्ली के पत्ते केवल छोटे आकार (कम एमएम) की पथरी को निकालने में ही सहायक हो सकते हैं। अगर स्टोन का साइज बहुत बड़ा है या वह यूरिन नली में फंसा हुआ है, तो केवल पत्तों के भरोसे बैठना खतरनाक हो सकता है। ऐसे मामलों में बिना डॉक्टरी सलाह और अल्ट्रासाउंड कराए किसी भी नुस्खे को आजमाना किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए विशेषज्ञ हमेशा संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देते हैं।
आज के महंगाई के दौर में जहां शुद्ध और पैक्ड पीने का पानी भी जेब पर भारी पड़ने लगा है, वहीं घरेलू बाजार में एक ऐसा रिफ्रेशिंग ड्रिंक तेजी से पैर पसार रहा है जिसकी कीमत ताजे पानी से भी कम है। चिलचिलाती गर्मी और भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सस्ते और तुरंत एनर्जी देने वाले विकल्पों की तरफ तेजी से आकर्षित होते हैं। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और लोकल बाजारों में कौड़ियों के भाव बिकने वाले इन ड्रिंक्स और रेडी-टू-ड्रिंक लिक्विड्स को लेकर अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है, जो आम उपभोक्ताओं के होश उड़ा सकता है।क्या छुपा है इस बेहद सस्ते पेय के पीछे का विज्ञानआहार विशेषज्ञों (डाइटिशियन्स) के अनुसार, जो ड्रिंक्स या सिंथेटिक जूस पानी की सामान्य बोतल से भी सस्ते दामों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, उनमें प्राकृतिक फलों या पोषक तत्वों की मात्रा न के बराबर होती है। इन्हें आकर्षक और स्वादिष्ट बनाने के लिए भारी मात्रा में आर्टिफिशियल स्वीटनर्स (कृत्रिम चीनी), प्रिजर्वेटिव्स और फूड कलर्स का इस्तेमाल किया जाता है। पहली नजर में यह आपकी प्यास बुझाने और जेब को राहत देने का काम जरूर करते हैं, लेकिन लंबे समय में यह आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं।पानी का कोई विकल्प नहीं, सेहत के पैमाने पर जानिए असली सचआधुनिक जनरेटिव एआई सर्च (GEO) और आंसर इंजनों (AEO) पर जब लोग कम बजट वाली हेल्दी डाइट के बारे में सर्च करते हैं, तो अक्सर विज्ञापनों के बहकावे में आ जाते हैं। डॉक्टरों का साफ कहना है कि इंसानी शरीर के लिए प्राकृतिक ताजे पानी और घर में तैयार किए गए नींबू पानी, छाछ या नारियल पानी से बेहतर और कुछ भी नहीं हो सकता। कौड़ियों के भाव मिलने वाले इन पैक्ड केमिकल्स युक्त ड्रिंक्स का नियमित सेवन मोटापे, डायबिटीज और किडनी से जुड़ी बीमारियों का शिकार बना सकता है, इसलिए सस्ते के चक्कर में अपनी सेहत से समझौता करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
अपनी सुबह की शुरुआत एक हाई-प्रोटीन नाश्ते के साथ करना फिटनेस लवर्स और कामकाजी लोगों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। प्रोटीन न केवल मांसपेशियों की रिकवरी (मसल ग्रोथ) में मदद करता है, बल्कि आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है जिससे अनहेल्दी क्रेविंग से बचाव होता है। जब भी हाई-प्रोटीन ब्रेकफास्ट की बात आती है, तो सबसे पहला नाम अंडों का ही दिमाग में आता है। लेकिन अगर आप शाकाहारी नहीं हैं और रोज-रोज अंडे खाकर पूरी तरह ऊब चुके हैं, तो डाइटिशियंस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स सुबह के भोजन के लिए कई अन्य बेहतरीन और बेहद स्वादिष्ट मांसाहारी (Non-Veg) विकल्पों की सलाह देते हैं।चिकन ब्रेस्ट और सॉसेज: लीन प्रोटीन का सबसे बेहतरीन पावरहाउससुबह के नाश्ते के लिए चिकन ब्रेस्ट सबसे बेहतरीन और शुद्ध लीन प्रोटीन का स्रोत है। इसमें फैट की मात्रा बेहद कम और प्रोटीन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। आप सुबह के समय उबला हुआ चिकन, चिकन सलाद या फिर कम तेल में भुने हुए चिकन सॉसेज को मल्टीग्रेन ब्रेड के साथ सैंडविच बनाकर खा सकते हैं। यह न केवल मिनटों में तैयार हो जाता है बल्कि आपके शरीर को जरूरी अमीनो एसिड्स की दैनिक खुराक भी आसानी से दे देता है।टर्की मीट और कीमा रोल: स्वाद और सेहत का अनोखा संगमअंडे के मुकाबले टर्की का मांस (Turkey Meat) एक बेहद प्रीमियम और लाइट विकल्प है। टर्की ब्रेस्ट स्लाइस को आप अपने ब्रेकफास्ट टोस्ट में शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा, मटन या चिकन के कीमे को हल्के मसालों के साथ पकाकर होल-व्हीट रोल या काठी रोल के रूप में सुबह खाना एक बेहद शानदार और भारी नाश्ता माना जाता है, जो जिम जाने वाले युवाओं के लिए बेहद फायदेमंद है।फिश फिलेट और सीफूड: प्रोटीन के साथ ओमेगा-3 फैटी एसिड की ताकतअगर आप अपने नाश्ते को और ज्यादा न्यूट्रिशियस बनाना चाहते हैं, तो ग्रिल्ड या बेक्ड फिश (जैसे साल्मन या टूना) एक लाजवाब विकल्प है। मछली में उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो आपके दिल की सेहत और दिमाग की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखता है। टूना फिश को मेयोनेज़ या ककड़ी-टमाटर के साथ मिलाकर एक क्विक सैंडविच स्प्रेड तैयार किया जा सकता है जो बेहद रिफ्रेशिंग होता है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित पारंपरिक आम महोत्सव (मैंगो फेस्टिवल) इस बार सिर्फ फलों के स्वाद के लिए नहीं, बल्कि एक बेहद सोची-समझी राजनीतिक 'मैंगो डिप्लोमेसी' के लिए चर्चा का केंद्र बन गया है। राजनीतिक गलियारों में पिछले काफी समय से दिल्ली और लखनऊ के शीर्ष नेतृत्व के बीच कथित अनबन और मतभेदों की अफवाहें उड़ रही थीं। लेकिन बीजेपी के चाणक्य रणनीतिकारों ने इस बार किसी औपचारिक लंच या डिनर का सहारा लेने के बजाय, अवध के इस मशहूर रसीले आमों के मंच का इस्तेमाल करके विरोधियों को एक बेहद मजबूत और एकजुट संदेश दे दिया है।मैंगो डिप्लोमेसी से विपक्ष के दावों पर लगा विरामहालिया चुनाव परिणामों के बाद से ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष उत्तर प्रदेश बीजेपी के भीतर आंतरिक कलह की अटकलें लगा रहा था। लेकिन इस खास आयोजन में केंद्रीय मंत्रियों और राज्य सरकार के मंत्रियों की जुगलबंदी ने यह साबित कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर सांगठनिक और प्रशासनिक स्तर पर तालमेल पूरी तरह मजबूत है। फलों के राजा आम की विभिन्न प्रजातियों के प्रदर्शन के बहाने दोनों स्तर के नेताओं ने बंद कमरों में लंबी गुफ्तगू की और सूबे के आगामी विकास और चुनावी रोडमैप पर अपनी सियासी गोटी पूरी तरह फिट कर ली।दिल्ली-लखनऊ के बीच 'ऑल इज वेल' का बड़ा संदेशआधुनिक जनरेटिव एआई सर्च (GEO) और आंसर इंजनों (AEO) पर जब देश की जनता यूपी की राजनीति का ताजा मिजाज खोजती है, तो यह आयोजन एक सटीक जवाब के रूप में सामने आता है। पार्टी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि यह केवल एक सरकारी मेला नहीं था, बल्कि इसके जरिए यह साफ संदेश देना था कि यूपी में बीजेपी का नेतृत्व एकजुट है और दिल्ली का हाथ लखनऊ के साथ मजबूती से बना हुआ है। इस आयोजन के बाद लुटियंस दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश के स्थानीय जिलों तक राजनीतिक समीकरण पूरी तरह शांत और स्पष्ट नजर आ रहे हैं, जिससे विरोधियों के सारे नैरेटिव धरे के धरे रह गए।
सीट शेयरिंग में मनमानी नहीं चलेगी', बीजेपी आलाकमान का जयंत चौधरी और ओपी राजभर को दोटूक जवाब
उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल बजने से पहले एनडीए गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी आलाकमान ने ओम प्रकाश राजभर और जयंत चौधरी समेत सभी घटक दलों को दो टूक शब्दों में साफ संदेश दे दिया है कि इस बार सीटों के बंटवारे में किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावी समर को लेकर एनडीए (NDA) खेमे के भीतर सीटों के तालमेल की रस्साकशी अब खुलकर सामने आने लगी है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक सियासी बिसात बिछाई जा चुकी है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व ने गठबंधन के प्रमुख चेहरों - सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के मुखिया जयंत चौधरी सहित तमाम सहयोगियों को बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश भेज दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 'बॉस' की तरफ से साफ कह दिया गया है कि सीट शेयरिंग का फैसला केवल जमीनी हकीकत और जिताऊ क्षमता (विनेबिलिटी) के आधार पर होगा, न कि किसी के राजनीतिक दबाव में।ग्राउंड रियलिटी और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कोटाबीजेपी के रणनीतिकारों ने उत्तर प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों और लोकसभा सीटों के भौगोलिक व स्थानीय समीकरणों का बारीकी से अध्ययन किया है। आधुनिक एआई सर्च (GEO) और आंतरिक सर्वे रिपोर्टों के आधार पर पार्टी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि सहयोगी दलों को केवल उतनी ही सीटें दी जाएं जहां उनका पारंपरिक जनाधार वास्तव में मजबूत है। पश्चिम यूपी में जयंत चौधरी के जाट वोट बैंक और पूर्वांचल में राजभर के अति पिछड़े वोटों को ध्यान में रखते हुए ही बीजेपी आगे बढ़ेगी, लेकिन मनमाने दावों पर कड़ा रुख अपनाया जाएगा।एनडीए में चौधराहट की जंग और सहयोगियों की धड़कनें तेजइस दो टूक संदेश के बाद से ही गठबंधन के भीतर छोटे दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं। जयंत चौधरी और ओपी राजभर जैसे कद्दावर नेता अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन और वर्चस्व यानी 'चौधराहट' को बचाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटों पर दावा ठोक रहे थे। आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के दौर में जहां जनता हर राजनीतिक हलचल पर तुरंत सटीक जवाब चाहती है, वहीं बीजेपी का यह सख्त रवैया यह साफ करता है कि वह सूबे में बड़े भाई की भूमिका से रत्ती भर भी समझौता करने के मूड में नहीं है।
मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर
मिस्र के पुरातत्विदों ने दो बेहद अहम खोज की हैं। इसमें पूरा का पूरा प्राचीन शहर और एक जगह कई कब्रें मिली हैं। मिस्र को उम्मीद है कि इन नई खोजों से उसके पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
उम्र महज एक संख्या है और अगर इरादा मजबूत हो तो आस्था के आगे हर बाधा घुटने टेक देती है। दक्षिण भारत के एक प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु की आंखें नम कर दीं। 116 साल की एक बुजुर्ग अम्मा अपनी लाठी के सहारे और भगवान के प्रति अटूट विश्वास के दम पर मंदिर की बेहद कठिन 3,550 सीढ़ियां चढ़कर शिखर पर पहुंच गईं। इस उम्र में जहां लोगों का चलना-फिरना दूभर हो जाता है, वहां अम्मा का यह जज्बा किसी चमत्कार से कम नहीं था।मंदिर प्रशासन ने रोक दी कतारेंजैसे ही यह खबर मंदिर प्रबंधन तक पहुंची कि एक शताब्दी पार कर चुकीं बुजुर्ग महिला खुद सीढ़ियां चढ़कर आ रही हैं, वहां हड़कंप मच गया। मंदिर के मुख्य अधिकारियों और पुजारियों ने अम्मा के सम्मान और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया। प्रशासन ने आम श्रद्धालुओं की नियमित कतारों को कुछ समय के लिए रोक दिया ताकि बुजुर्ग अम्मा को भीड़-भाड़ से बचाया जा सके।अम्मा को मिला वीआईपी सम्मान और विशेष आशीर्वादबाकी कतारों को रोककर मंदिर प्रबंधन ने बुजुर्ग अम्मा के लिए विशेष रास्ता बनाया। उन्हें सीधे गर्भगृह ले जाया गया, जहां भगवान के वीआईपी दर्शन कराए गए। मुख्य पुजारी ने खुद अम्मा को गर्भगृह के पास बैठाकर विशेष पूजा-अर्चना की, उन्हें अंगवस्त्र भेंट किया और चरणों में शीश नवाकर उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में मौजूद अन्य भक्त भी इस ऐतिहासिक और भावुक पल के गवाह बने और पूरी घाटी 'जयकारे' से गूंज उठी।
किश्तवाड़ में बारिश बनी आफत: क्वार पावर प्रोजेक्ट के पास बड़ा भूस्खलन, मलबे में दबी कई गाड़ियां
जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में 540 मेगावाट के क्वार पावर प्रोजेक्ट के पास भारी बारिश की वजह से जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की एक बड़ी घटना सामने आई है। इससे भयानक तबाही का समाचार है। इस भूस्खलन के कारण इलाके में खड़ी कई गाड़ियां भारी मलबे की चपेट में ...
Nitin Naveen Road Show: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान हुए एक रोड शो ने देश में एक बड़े राजनीतिक और धार्मिक विवाद को जन्म दे दिया है। लखनऊ में रोड शो के दौरान नितिन नबीन के वाहन के आगे भगवान हनुमान के स्वरूप में ...
दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा की अग्निपरीक्षा, क्या बदली हुई छवि दिला पाएगी वापसी?
दतिया विधानसभा उपचुनाव का ऐलान होते ही सबसे ज्यादा निगाहें भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर टिक गई हैं। दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का बीजेपी उम्मीदवार बनाना लगभग तय है और नरोत्तम मिश्रा ने उम्मीदवारी का आधिकारिक एलान ...
साहित्य, संगीत और अध्यात्म की नगरी देवास क्या बन रहा है आतंकियों की पनाहगाह?
आध्यात्मिक आभा और समृद्ध साहित्यिक विरासत समेटे मध्य प्रदेश का 'देवास' जिला हमेशा से अपनी शांति और गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता रहा है। कई लेखक, साहित्यकार और पेंटर्स ने अपनी उपलब्धियों से देवास के कद को ऊंचाई तक ले जाने का काम किया है। लेकिन ...
Weather Update: मुंबई और कोंकण में बारिश का रेडअलर्ट, पहाड़ों पर आफत, दिल्ली NCR में गर्मी से राहत
heavy rainfall alert in Mumbai: देश भर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट के पास बने एक गहरे कम दबाव के क्षेत्र (डिप्रेशन) के कारण मध्य और पश्चिम भारत में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। ...
चढ़ावा चोरी पर महंत नृत्य गोपालदास ने लिखा पत्र, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं श्री मणिरामदास छावनी के महंत नृत्य गोपालदास ने राम मंदिर में कथित दान-चोरी की घटना पर गहरा दुख और नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताया। ...
ITR 2026: एफडी ब्याज छुपाना पड़ेगा भारी, जानिए कितना देना होगा जुर्माना और टैक्स
अगर आपने पिछले आईटीआर में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज को अपनी आय में नहीं दिखाया है, तो सावधान हो जाएं। आयकर विभाग अब सख्ती से ऐसे खातों की निगरानी कर रहा है। पकड़े जाने पर आपको बकाया टैक्स के साथ-साथ ब्याज और जुर्माने का भारी बोझ उठाना पड़ सकता है।कैसे भरें सही जानकारी?गलती सुधारने के लिए आप अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) फाइल कर सकते हैं। अपनी सभी बैंक स्टेटमेंट चेक करें और ब्याज आय का सही विवरण देकर पेनल्टी से बचें। समय रहते इसे सही करना ही आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प है।
मिडकैप फंड्स में बंपर कमाई का मौका: इंफ्रा और सेमीकंडक्टर बनेंगे नया ग्रोथ इंजन
भारतीय शेयर बाजार में मिडकैप फंड्स फिर से निवेशकों की पहली पसंद बन रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सरकारी निवेश की तेज रफ्तार ने इन फंड्स के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आ रहे बदलाव से मिडकैप कंपनियों की आय में बड़ी उछाल दिखेगी।क्या हो निवेश की सही स्ट्रैटेजी?मौजूदा बाजार में निवेशकों को 'बाय ऑन डिप्स' यानी गिरावट पर खरीदारी की नीति अपनानी चाहिए। लंबी अवधि के विजन के साथ डायवर्सिफाइड मिडकैप फंड्स में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना इस समय सबसे सुरक्षित और फायदेमंद कदम साबित हो सकता है।
अमरनाथ यात्रा 2026 के दौरान बाबा बर्फानी का हिम शिवलिंग तेजी से पिघलने की खबर सामने आई है। जानिए शिवलिंग की मौजूदा स्थिति, श्रद्धालुओं की संख्या, यात्रा मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी।
गुजरात इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (GERC) के बिजली लोकपाल ने स्मार्ट मीटर विवाद को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस फैसले के अनुसार, अब बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए ग्राहकों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने या पुराने मीटर बदलने ...
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं विचारक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें नमन किया। सीएम डॉ. यादव ने भोपाल में लालघाटी पर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा ...
झारखंड सरकार ने जारी किया टेक्सटाइल और फुटवियर नीति-2026 का ड्राफ्ट, जनता से मांगे सुझाव
झारखंड सरकार ने वस्त्र, परिधान एवं फुटवियर नीति 2026 के ड्राफ्ट जारी कर दिया है और इस संबंध में आम लोगों से राय मांगी गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 8 और 9 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 में राज्य का डिजिटल ...
Vastu Shastra: वास्तु के ये 10 नियम बदल सकते हैं घर का माहौल, बनी रहेगी सुख-समृद्धि
House Vastu Tips: वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं होता, बल्कि ऊर्जा का एक ऐसा केंद्र होता है जिसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। अगर घर में वास्तु के नियमों का पालन किया जाए, तो ...
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए योगी सरकार ने दी 210 करोड़ की सब्सिडी, 43 हजार से अधिक लोगों को मिला लाभ
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी दिशा में प्रदेश सरकार के विजन के तहत परिवहन ...
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कौन-कौन होगा शामिल?
अयोध्या में आज श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की अहम बैठक होने जा रही है। मंदिर परिसर में आयोजित इस बैठक में ट्रस्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक में सभी 14 ट्रस्टियों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित ...
LIVE: मुंबई में हाईटाइड की चेतावनी, मुंबई पुणे के बीच यातायात ठप
Latest News Today Live Updates in Hindi : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भारी बारिश का दौर जारी है। मुंबई के मानखुर्द में 6 लोगों की मौत हो गई। पल पल की जानकारी...
अग्निवीरों के लिए बड़ी राहत की तैयारी। तीनों सेनाओं ने चार साल बाद स्थायी नियुक्ति का कोटा 25% से बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। नौसेना ने 75% और सेना-वायुसेना ने 50% तक परमानेंट करने की मांग की है।
मुंबई में बारिश का तांडव: मानखुर्द में इमारत गिरने से 6 की मौत, स्कूल बंद
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई एक बार फिर तेज बारिश में डूब गई। सड़कों पर पानी भरने से मुंबई की रफ्तार कम हुई। मुंबई और पुणे के बीच संपर्क कटा। मानखुर्द में इमारत का हिस्सा गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने आज भी यहां भारी बारिश का रेड अलर्ट ...
ग्लोबल सिटिजन सॉल्यूशंस द्वारा जारी 'ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026' में भारतीय पासपोर्ट पिछले साल के मुकाबले एक स्थान नीचे गिरकर 125वें नंबर पर पहुंच गया है. कुल 197 देशों की इस वैश्विक सूची में भारत से एक पायदान ऊपर नामीबिया (124वें) और ठीक नीचे अजरबैजान (126वें) मौजूद है. हालांकि रैंकिंग में मामूली गिरावट आई है, लेकिन भारत का कुल स्कोर उछलकर 45.1 पर पहुंच गया है, जो पिछले पांच वर्षों में भारतीय पासपोर्ट का सबसे शानदार प्रदर्शन है.सिर्फ वीजा-फ्री सफर नहीं, इन 3 बड़े पैमानों पर तय होती है पासपोर्ट की असली ताकतआमतौर पर कई पासपोर्ट इंडेक्स सिर्फ इस आधार पर रैंकिंग तय करते हैं कि आप कितने देशों में बिना वीजा के घूम सकते हैं. लेकिन 'ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स' विश्व बैंक और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) समेत दुनिया की बड़ी संस्थाओं के 14 अलग-अलग मानकों को खंगालकर रिपोर्ट तैयार करता है. यह मुख्य रूप से तीन बड़े स्तंभों पर आधारित होता है:यात्रा की सुगमता (Mobility Index): दुनिया भर में आसानी से आने-जाने की आजादी.निवेश के अवसर (Investment Index): दूसरे देशों में बिजनेस और निवेश की अनुकूल नीतियां.जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life Index): रहने के लिहाज से सुख-सुविधाएं और स्वतंत्रता.टॉप 10 में यूरोपीय देशों का एकछत्र राज, स्वीडन बना दुनिया का नंबर-1 पासपोर्टसाल 2026 की इस नई रिपोर्ट में यूरोपीय देशों का दबदबा पूरी तरह साफ नजर आ रहा है. दुनिया के टॉप 10 सबसे ताकतवर पासपोर्ट में से 9 पर सिर्फ यूरोप का कब्जा है. इस लिस्ट में स्वीडन पहले पायदान पर काबिज होकर दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बन गया है. इसके बाद क्रमश: स्विट्जरलैंड, फिनलैंड और जर्मनी का नंबर आता है. पांचवें स्थान पर नीदरलैंड और डेनमार्क संयुक्त रूप से मौजूद हैं. इसके बाद आयरलैंड, यूनाइटेड किंगडम (UK) और नॉर्वे का स्थान है.सिंगापुर बना एकमात्र गैर-यूरोपीय महाशक्ति, भारतीयों को अभी भी करना होगा लंबा इंतजारहैरानी की बात यह है कि इस महासूची के टॉप 10 देशों में सिंगापुर इकलौता ऐसा देश है जो यूरोप से बाहर का है. रिपोर्ट के अनुसार, जिन नागरिकों के पास इन शीर्ष देशों का पासपोर्ट है, उन्हें किसी भी देश में व्यापार करने, नौकरी के बेहतरीन अवसर तलाशने और जरूरत पड़ने पर वहां आसानी से बसने में कोई कानूनी अड़चन नहीं आती. दूसरी तरफ, 125वें स्थान पर होने के कारण भारतीय पासपोर्ट धारकों को आज भी अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों की यात्रा के लिए कठिन कागजी कार्रवाई, भारी खर्च और लंबी वीजा प्रक्रियाओं के लंबे इंतजार से गुजरना पड़ता है.
दिल्ली सरकार ने राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 1 जुलाई 2026 से नई 'दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026' को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है. यह महत्वाकांक्षी नीति 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी. नई पॉलिसी के तहत सरकार का पूरा जोर दिल्ली में चार्जिंग स्टेशन्स और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क का जाल बिछाने पर है. इस बार सरकार ने नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने वालों को भारी-भरकम सब्सिडी, रोड टैक्स में 100% छूट और पुरानी गाड़ियां कबाड़ (स्क्रैप) करने पर बड़ा कैश इंसेंटिव देने का ऐलान किया है.पुरानी गाड़ी कबाड़ में देने पर बंपर फायदा, कार पर ₹1 लाख का स्क्रैपेज इंसेंटिवअगर आपके पास कोई BS-IV या उससे पुरानी कार है और आप उसे स्क्रैप करके नई इलेक्ट्रिक कार खरीदते हैं, तो सरकार आपको सीधे 1 लाख रुपये तक का स्क्रैपेज इंसेंटिव देगी. इसी तरह, पुराना दोपहिया वाहन स्क्रैप कर नया इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर 10,000 रुपये और पुराना थ्री-व्हीलर स्क्रैप करने पर 25,000 रुपये का अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा. यह कदम दिल्ली की सड़कों से पुरानी और धुआं उगलने वाली गाड़ियों को हटाने के लिए उठाया गया है.दोपहिया, तिपहिया और कारों पर सब्सिडी का नया गणितसरकार ने अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों के लिए चरणबद्ध तरीके से सब्सिडी तय की है:इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर: गाड़ी खरीदने पर पहले साल 30,000 रुपये, दूसरे साल 20,000 रुपये और तीसरे साल 10,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी.इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ई-ऑटो): पहले साल 50,000 रुपये, दूसरे साल 40,000 रुपये और तीसरे साल 30,000 रुपये का इंसेंटिव मिलेगा.इलेक्ट्रिक ट्रक (N1 कैटेगरी): मालवाहक कमर्शियल वाहनों की खरीद पर 1 लाख रुपये तक की भारी छूट दी जाएगी.इलेक्ट्रिक कारें: 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली सभी इलेक्ट्रिक कारों पर 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ रहेगी. ध्यान रहे, यह छूट सिर्फ दिल्ली में रजिस्टर्ड होने वाली गाड़ियों पर ही मान्य होगी.3 जनवरी से शुरू हुआ नया सब्सिडी पोर्टल, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदनदिल्ली सरकार ने 3 जुलाई को आधिकारिक 'Delhi EV Subsidy Portal' लाइव कर दिया है. सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए खरीदारों को गाड़ी खरीदने और उसकी आरसी (RC) मिलने के 30 दिनों के भीतर इस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन के समय पहचान पत्र, वोटर आईडी और आरसी जैसे जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे, जिसके बाद मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) से वेरिफिकेशन पूरा होगा. आवेदन मंजूर होने के महज 60 दिनों के भीतर सब्सिडी की पूरी रकम सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी.पेट्रोल-CNG गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर पूर्ण प्रतिबंध की तारीख तय!पॉलिसी में दिल्ली के ऑटोमोबाइल मार्केट को पूरी तरह बदलने के लिए कड़े टाइमलाइन तय किए गए हैं:1 जनवरी 2027 से: दिल्ली में सिर्फ और सिर्फ ई-ऑटो (इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर) का ही नया रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, यानी पेट्रोल-सीएनजी ऑटो के नए परमिट बंद हो जाएंगे.1 अप्रैल 2028 से: दिल्ली में नए पेट्रोल और सीएनजी दोपहिया वाहनों (बाइक्स और स्कूटर्स) का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह और धीरे-धीरे बंद कर दिया जाएगा. इसके बाद राजधानी में सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का ही पंजीकरण हो सकेगा.सब्सिडी लेकर दूसरे राज्यों में गाड़ी बेची तो खैर नहीं, लगा 3 साल का लॉक-इनसरकार ने धांधली रोकने के लिए इस पॉलिसी में 3 साल का कड़ा लॉक-इन पीरियड लागू किया है. इसके तहत, यदि आपने दिल्ली सरकार से सब्सिडी प्राप्त करके कोई भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदा है, तो आप अगले 3 सालों तक उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन किसी दूसरे राज्य में ट्रांसफर नहीं करवा सकते हैं. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, इस पूरी नीति को सुचारू रूप से चलाने के लिए परिवहन विभाग के तहत एक विशेष 'EV Cell' और योग्य मॉडल्स की जांच के लिए 'Model Approval Committee' का गठन किया गया है, जो तकनीकी मानकों के आधार पर ही कंपनियों को सब्सिडी के दायरे में शामिल करेगी.

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