कोलकाता में विरोध मार्च के दौरान ममता बनर्जी ने खोया आपा, पार्टी कार्यकर्ता को जड़ा थप्पड़
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना आपा खो दिया और बारुईपुर में एक नाबालिग के कथित रेप और हत्या के विरोध में कोलकाता में अपनी पार्टी के विरोध जुलूस के दौरान मचे हंगामे के बीच एक पार्टी कार्यकर्ता को थप्पड़ जड़ दिया।
'वीबी-जी राम जी' हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है: सीएम सुक्खू
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' को लागू करना राज्य के हित में नहीं है।
मुझे नेता प्रतिपक्ष से उम्मीद है, वो देश की सुरक्षा के मुद्दे को उठाएंगे : प्रकाश आंबेडकर
वंचित बहुजन अघाड़ी पार्टी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने देश की सुरक्षा का जिक्र करके केंद्र सरकार को घेरा। साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे नेता प्रतिपक्ष से उम्मीद है कि वो इस मुद्दे को उठाने का काम करेंगे।
भक्तों पर गोली चलाने का आदेश देने वालों को रातोंरात राम याद आने लगे : अनुराग ठाकुर
अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा विवाद में कांग्रेस नेताओं के बयान पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने पलटवार किया
त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026 में शामिल होंगे सिंधिया, निवेश और औद्योगिक विकास पर रहेगा फोकस
केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 9 जुलाई को एक दिवसीय दौरे पर त्रिपुरा जाएंगे। इस दौरान वह अगरतला के हापानिया स्थित अंतरराष्ट्रीय मेला मैदान में आयोजित त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
'नरसिम्हा राव ने कांग्रेस को बचाया, कांग्रेस ने उन्हें मिटा दिया', पोते एन.वी. सुभाष का बड़ा आरोप
कांग्रेस पार्टी के मौजूदा नेतृत्व की कड़ी आलोचना करते हुए, पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के पोते एन.वी. सुभाष ने कहा कि 'गांधी युग खत्म हो चुका है
महाराष्ट्र: विपक्ष ने महिला डॉक्टरों पर शिवसेना पार्षद के हमले की कड़ी निंदा की, बताया गुंडागर्दी
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम क्षेत्र में शिवसेना के एक नगरसेवक द्वारा महिला डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है
प्रयागराज स्थित सर्किट हाउस में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में जनसामान्य से भेंट कर उनकी समस्याओं को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना। कार्यक्रम में जनपद सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में शिकायतकर्ता अपनी समस्याओं एवं मांगों को लेकर पहुंचे। कार्यक्रम में भाजपा महानगर अध्यक्ष श्री संजय गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री राजेश शुक्ल एवं श्रीमती निर्मला पासवान, सांसद श्री प्रवीण पटेल, विधायक श्री गुरु प्रसाद मौर्य एवं श्री दीपक पटेल, महापौर श्री गणेश केसरवानी, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वी. के. सिंह, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सुरेश मौर्य, सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं अनेक प्रतिष्ठित नागरिक गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे।श्री मौर्य ने अधिकारियों से कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनहित के कार्य पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान ही सुशासन की पहचान है और सभी अधिकारी इस दिशा में पूरी निष्ठा से कार्य करें। इसके उपरांत उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने संगठनात्मक बैठक भी की। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव एवं वार्ड-वार्ड तक पहुंचकर केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएं तथा पात्र लाभार्थियों को इन योजनाओं का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठन की मजबूती का आधार जनता के बीच निरंतर संवाद एवं सेवा भाव है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों एवं जनहितकारी योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से पहुंचाकर आमजन को उनके लाभों से अवगत कराएं, ताकि प्रत्येक पात्र व्यक्ति शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सके।
महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी तथा विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण, केशव प्रसाद मौर्य
आज प्रयागराज मेंउप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने परिश्रम, कौशल और आत्मनिर्भरता के माध्यम से समाज एवं प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने प्रदर्शनी में शामिल महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उत्पादों की गुणवत्ता और नवाचार की प्रशंसा की तथा उन्हें भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के प्रयासों की सराहना की। प्रदर्शनी में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प सामग्री, खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उत्पाद तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया, जिन्हें उप मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि के साथ देखा।श्री मौर्य ने प्रदर्शनी में सहभागी महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उनके परिश्रम, समर्पण और उद्यमशीलता से प्रदेश के ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अधिकाधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी तथा विकसित भारत एवं विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के प्रयासों की सराहना की।
उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कैशलेस चिकित्सा योजना के शुभारम्भ पर लाभार्थियों को प्रतीकात्मक डमी कार्ड वितरित करते हुए सभी शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह योजना प्रदेश के लाखों शिक्षक परिवारों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी तथा उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।श्री मौर्य जी ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा योजना के दायरे का विस्तार करते हुए अब प्रधानाचार्यों, शिक्षकों के साथ-साथ रसोइयों को भी इस योजना में सम्मिलित किया गया है। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों एवं उनके परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का कैशलेस एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना शिक्षा विभाग से जुड़े लाखों परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं जनकल्याणकारी कदम है।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
West Asia Crisis : अमेरिका-ईरान में बढ़ते तनाव के बीच भारत का पहला रिएक्शन, जानिए क्या कहा
भारत ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत सरकार ने अमेरिका और ईरान से संयम बरतने, तनाव कम करने और बातचीत के जरिए विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। साथ ही ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय ...
चुनाव आयोग का हर काम भारत के संविधान और पारदर्शी तरीके से होता है: ज्ञानेश कुमार
भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को मीडिया और कम्युनिकेशन अधिकारियों के लिए एक दिन का सम्मेलन आयोजित किया।
ओप्पो इंडिया ने अपने स्मार्टफोन की रेनो 1616 सीरीज लॉन्च की
जयपुर। ओप्पो इंडिया ने बुधवार को अपनी रेनो 1616 सीरीज (स्मार्टफोन) लॉन्च की। इस सीरीज में भारत के पहले होलोवर्स थ्री डी डिजाइन, 50 एमपी के मेन और 3.5एक्स टेलीफोटो लेंस वाले एआई पोर्ट्रेट कैमरा, नैचुरल टोन इमेजिंग और ऑल-फोकल-लेंथ के साथ दो स्मार्टफोन रेनो 1616 और रेनो 1616 सी पेश किए गए हैं। इस […] The post ओप्पो इंडिया ने अपने स्मार्टफोन की रेनो 1616 सीरीज लॉन्च की appeared first on Sabguru News .
नंदीग्राम एक्सप्रेस में सजाई सुहागरात की सेज, टीटीई निलंबित
नई दिल्ली। रेलवे ने महाराष्ट्र में बल्हारशाह से दादर (मुंबई) के बीच चलने वाली नंदीग्राम एक्सप्रेस के एक प्रथम श्रेणी वातानुकूलित कूपे को सुहागरात की सेज के रूप में सजाने के मामले को गंभीरता से लिया है और इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में ट्रेन टिकट निरीक्षक (टीटीई) को निलंबित कर विस्तृत विभागीय […] The post नंदीग्राम एक्सप्रेस में सजाई सुहागरात की सेज, टीटीई निलंबित appeared first on Sabguru News .
दरभंगा में स्पा सेंटर की आड़ में चल रहे देह व्यापार का भंडाफोड़
दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले में पुलिस ने स्पा सेंटर की आड़ में कथित रूप से चल रहे देह व्यापार का भंडाफोड़ करते हुए कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच के पुलिस उपाधीक्षक उदय शंकर ने बुधवार को बताया कि सूचना मिली थी कि लहेरियासराय थाना क्षेत्र के जीएन गंज स्थित पंजाब […] The post दरभंगा में स्पा सेंटर की आड़ में चल रहे देह व्यापार का भंडाफोड़ appeared first on Sabguru News .
ग्वालियर : शादी का झांसा देकर युवती से रेप, प्रेगनेंट होने पर दिया धोखा
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जिम में हुई दोस्ती के बाद शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म करने तथा गर्भवती होने पर विवाह से इनकार करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार गोला का मंदिर थाना क्षेत्र निवासी […] The post ग्वालियर : शादी का झांसा देकर युवती से रेप, प्रेगनेंट होने पर दिया धोखा appeared first on Sabguru News .
दिल्ली समाचार:दिल्ली में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब गंभीर यातायात नियम तोड़ने वालों को सिर्फ चालान भरने या ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित होने की सजा ही नहीं मिलेगी। इसके साथ ही, लाइसेंस बहाल कराने के लिए उन्हें अनिवार्य रूप से दो दिन का प्रशिक्षण और परामर्श भी पूरा करना होगा। दिल्ली परिवहन विभाग ने इस नई व्यवस्था की लगभग सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं और अंतिम मंजूरी के बाद इसे अधिकृत प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से लागू किया जाएगा।क्या बात क्या बात?परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले यातायात नियमों के उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित किया जाता था, लेकिन बाद में इस अवधि को बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया। इसके बावजूद, कई चालकों के व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। विभाग के रिकॉर्ड से ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जहां एक ही चालक ने कई बार नियमों का उल्लंघन किया, जुर्माना भरा और लाइसेंस निलंबित होने के बाद भी वही गलती दोहराई।सुधार पर भी जोर देने का निर्णय लिया गयाइस स्थिति को देखते हुए, विभाग ने अब दंड के साथ-साथ सुधार पर भी जोर देने का निर्णय लिया है। नई प्रणाली के तहत, ड्राइवरों को अपना लाइसेंस बहाल करवाने से पहले दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेना अनिवार्य होगा। इस कार्यक्रम के दौरान, विशेषज्ञ सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों, सुरक्षित ड्राइविंग तकनीकों, दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों और एक जिम्मेदार चालक की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे। लापरवाही से गाड़ी चलाने के संभावित खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए परामर्श भी दिया जाएगा।सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण?दिल्ली में प्रतिदिन औसतन 25 से 30 ड्राइविंग लाइसेंस गंभीर यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए निलंबित किए जाते हैं। इनमें तेज गति से वाहन चलाना, शराब पीकर वाहन चलाना, गलत साइड पर वाहन चलाना और खतरनाक मोड़ लेना शामिल हैं। विशेष रूप से, गलत दिशा में वाहन चलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसे सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण माना जाता है।सिफारिशें लगातार प्राप्त हो रही हैंदिल्ली परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों के उल्लंघन का यह चलन केवल राजधानी तक ही सीमित नहीं है। दिल्ली के लाइसेंस धारकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अन्य राज्यों से भी सिफारिशें प्राप्त हो रही हैं। उदाहरण के लिए, पुलिस रिपोर्टों और अदालती आदेशों के आधार पर राजस्थान से औसतन 6 से 7 मामले प्रतिदिन दिल्ली भेजे जाते हैं, और विभाग उन पर आगे की कार्रवाई करता है।यातायात प्रशिक्षण केंद्र शुरू कर दिए गए हैं।इस बीच, यातायात पुलिस जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान भी चला रही है। एक महीने तक चलने वाले जन जागरूकता अभियान के तहत, शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक स्कूल शुरू किए गए हैं। चालकों को यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा और ज़िम्मेदार ड्राइविंग के बारे में शिक्षित किया जा रहा है। पुलिस का लक्ष्य केवल कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि नियमों के बारे में जनता में जागरूकता बढ़ाकर सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करना है।यातायात दुर्घटनाएं लापरवाही के कारण होती हैं।परिवहन विभाग का मानना है कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएँ मानवीय लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण होती हैं। विशेष रूप से, सड़क के गलत साइड पर गाड़ी चलाना और तेज़ गति से वाहन चलाना जैसी गलतियाँ अक्सर जानलेवा साबित हो सकती हैं। नई प्रशिक्षण और परामर्श प्रणाली से चालकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और राजधानी की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।
ऑस्ट्रेलिया वीजा शुल्क में बढ़ोतरी:ऑस्ट्रेलिया सरकार ने वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों को बड़ा झटका दिया है। अब ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करना उनके लिए और भी महंगा हो जाएगा। ऑस्ट्रेलिया ने विदेशी छात्रों और पढ़ाई के बाद काम करने के लिए आवेदन करने वालों के लिए वीजा शुल्क में काफी वृद्धि की है। इसका सीधा असर उन भारतीय छात्रों पर पड़ेगा जो यहां पढ़ रहे हैं या ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करने आ रहे हैं।यहां के विश्वविद्यालयों और शिक्षा से संबंधित संस्थानों ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस कदम से शिक्षा के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया का महत्व कम हो जाएगा और वह अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएगा। गृह मंत्रालय द्वारा घोषित नई फीस 1 जुलाई, 2026 से लागू हो गई है, बिना अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र से कोई पूर्व परामर्श किए।ऑस्ट्रेलिया में वीजा शुल्क में कितनी वृद्धि हुई है?उच्च शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा (VET) के छात्रों के लिए छात्र वीजा (सबक्लास 500) का आवेदन शुल्क 2,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.32 लाख रुपये) से बढ़कर 2,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.65 लाख रुपये) हो गया है। ICEF मॉनिटर की रिपोर्ट के अनुसार, आसियान देशों के छात्रों के लिए शुल्क 2,050 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ही रहेगा। चूंकि भारत आसियान का हिस्सा नहीं है, इसलिए भारतीयों को अब वीजा शुल्क के रूप में 2,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का भुगतान करना होगा।अंग्रेजी भाषा (ELICOS) के छात्रों के लिए शुल्क भी बढ़कर 2,050 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.35 लाख रुपये) हो गया है।अध्ययन के बाद काम करने की अनुमति देने वाले अस्थायी स्नातक वीजा (उपश्रेणी 485) के लिए शुल्क 4,600 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 3 लाख रुपये) से बढ़कर 5,750 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 3.79 लाख रुपये) हो गया है।पार्टनर वीजा की फीस भी A$9,365 (लगभग ₹6 लाख) से बढ़कर A$11,710 (लगभग ₹7.73 लाख) हो गई है।नियोक्ता द्वारा प्रायोजित कौशल वीज़ा के लिए आवश्यक वेतन सीमा भी बढ़ा दी गई है। यह वीज़ा अब तभी दिया जाएगा जब वेतन 79,499 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 5.24 लाख रुपये) हो। पहले यह सीमा 76,515 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर थी।ऑस्ट्रेलिया पढ़ाई के लिए सबसे महंगे देशों में से एक बन गया है।हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद, ऑस्ट्रेलियाई छात्र वीजा आवेदन शुल्क अब अन्य प्रमुख देशों की तुलना में काफी अधिक हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में छात्र वीजा की लागत अब लगभग 2,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है, जबकि ब्रिटेन में लगभग 935 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, न्यूजीलैंड में 790 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, अमेरिका में 775 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और कनाडा में 240 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है।ऑस्ट्रेलिया में छात्र वीजा शुल्क 2022 से 285% बढ़ गया है, जबकि अध्ययन के बाद कार्य वीजा शुल्क में 148% की वृद्धि हुई है। वहीं, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों ने अपने छात्र वीजा शुल्क को लगभग अपरिवर्तित रखा है, जबकि ब्रिटेन में यह वृद्धि काफी कम रही है।
बालों की देखभाल के टिप्स:जब केमिकल शैम्पू या कंडीशनर का चलन नहीं था, तब भी उनके बाल बेहद चमकदार थे। उनकी खूबसूरती का राज पूरी तरह से आयुर्वेदिक और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर आधारित था। बिना किसी दुष्प्रभाव के अपने बालों को पोषण देने का उनका तरीका यहाँ बताया गया है:चम्पी और प्राकृतिक तेलों का जादू:प्राचीन काल में, तेल मालिश, या चम्पी, रानियों की बाल देखभाल दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। वे अपने बालों को मजबूत और रूसी मुक्त रखने के लिए नीम के तेल और नारियल तेल के मिश्रण का उपयोग करती थीं। नारियल तेल बालों को अंदर से नमी और पोषण देता था, जबकि नीम का तेल अपने जीवाणुरोधी गुणों से खोपड़ी को संक्रमण से बचाता था। चम्पी उपचार खोपड़ी में रक्त संचार बढ़ाता है, जिससे बाल जड़ों से मजबूत होते हैं।आंवला, शिकाकाई और मेहंदी का उपयोग:रानियां अपने बालों को प्राकृतिक रूप से धोने और कंडीशनिंग करने के लिए आंवला, रीठा और शिकाकाई पाउडर का मिश्रण तैयार करती थीं। यह एक प्राकृतिक शैम्पू की तरह काम करता था, गंदगी को हटाता था और बालों की प्राकृतिक चमक बनाए रखता था। आंवले में मौजूद विटामिन सी और फैटी एसिड बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकते हैं। इसके साथ ही, मेहंदी का उपयोग बालों को सुंदर रंग और मजबूती देने के लिए किया जाता था।मोरिंगा पेस्ट और लोबान की खुशबू का चमत्कार:रानियों के लंबे बालों का एक और राज मोरिंगा (नग्गे) की पत्तियां थीं। प्रोटीन और विटामिन से भरपूर मोरिंगा पेस्ट को बालों पर मास्क की तरह लगाया जाता था। इसके अलावा, बाल धोने के बाद उन्हें सुखाने और खुशबू देने के लिए लोबान की खुशबू का इस्तेमाल किया जाता था। गीले बालों को लोबान के धुएं में सुखाने से न केवल बाल सुगंधित होते थे, बल्कि सिर की त्वचा पर नमी के कारण होने वाले फंगल संक्रमण का खतरा भी पूरी तरह खत्म हो जाता था।आजकल हम जिन रासायनिक उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं, वे भले ही अस्थायी चमक देते हों, लेकिन लंबे समय में बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन अगर हम आंवला, शिकाकाई, नीम, नारियल तेल और मोरिंगा जैसे अपने स्थानीय आयुर्वेदिक तरीकों का पालन करें, तो हम बिना किसी दुष्प्रभाव के घने और स्वस्थ बाल पा सकते हैं।
वायनाड में प्रकृति का प्रकोप फिर देखने को मिला! भूस्खलन में कई लोगों की मौत, 7 लापता!
वायनाड भूस्खलन:केरल के वायनाड जिले में पिछले साल हुए विनाशकारी भूस्खलन की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि एक और प्राकृतिक आपदा ने दहशत फैला दी है। वायनाड के कल्लाडी-मेप्पडी इलाके में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है। सात लोग लापता हैं और कई अन्य घायल हो गए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), दमकल विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है क्योंकि आशंका है कि कुछ और लोग मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।यह भूस्खलनमेप्पड़ीके पास मीनाक्षी पुल के नजदीक हुआ , जहां मलम्पुरम-वायनाडु को जोड़ने वाली अनाक्कम्पोइल-मेप्पड़ी सुरंग सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। सुरंग निर्माण स्थल पर मिट्टी और चट्टानों के अचानक खिसकने से श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है। स्थानीय निवासियों ने शुरुआती चरण में कुछ लोगों को बचाया, जिसके बाद बचाव दल ने अभियान तेज कर दिया।केरल सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान ने बचाव अभियान की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की है। उन्होंने कहा कि लापता लोगों का जल्द से जल्द पता लगाने के लिए सभी विभाग समन्वय से काम कर रहे हैं। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है और उनका इलाज चल रहा है।इस घटना के संबंध में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि जिला कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों ने पहले सुरंग निर्माण क्षेत्र में जमा हुई भारी मात्रा में मिट्टी को हटाने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि, आरोप है कि ठेकेदारों ने उन निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया। आशंका है कि मिट्टी न हटाने की वजह से ही भूस्खलन इतना भीषण हुआ होगा, और इस मामले की जांच होने की संभावना है।लगातार बारिश और कीचड़ भरे हालातों के कारण बचाव अभियान में बाधा आ रही है। हालांकि, भारी मशीनों, खोज उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों की मदद से कीचड़ में फंसे लोगों की तलाश जारी है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे अनावश्यक रूप से जोखिम भरे क्षेत्रों में न जाएं।वायनाड भूस्खलन के खतरे के लिए पहले से ही जाना जाता है। पिछले साल एक भीषण भूस्खलन में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। उस आपदा के बाद भी, इस क्षेत्र में मानसून सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचागत कार्यों को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। अब, इस ताजा घटना ने पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए सुरक्षा मानकों पर एक नई बहस छेड़ दी है।दूसरी ओर, मौसम विभाग ने केरल के कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान लगाया है और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करने का अनुरोध किया गया है।लापता लोगों और मृतकों की सही संख्याबचाव अभियान पूरा होने के बाद ही पता चल पाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति ...
आज के दौर में पेट लवर्स के बीच बिल्ली पालने का क्रेज काफी तेजी से बढ़ रहा है। अपनी क्यूटनेस और चुलबुली हरकतों से बिल्लियां किसी का भी दिल जीत लेती हैं। लेकिन अगर आप भी एक कैट ओनर हैं या घर में बिल्ली लाने की सोच रहे हैं, तो हाल ही में आई एक मेडिकल रिसर्च आपको हैरान कर सकती है। ऑस्ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दावा है कि बिल्लियों के संपर्क में रहने से गंभीर मानसिक विकार (मेंटल डिसऑर्डर) का खतरा दोगुना हो सकता है।क्वींसलैंड विश्वविद्यालय की स्टडी में सिजोफ्रेनिया का दावाऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित क्वींसलैंड विश्वविद्यालय (University of Queensland) द्वारा किए गए एक व्यापक विश्लेषण में बिल्ली पालने और मानसिक बीमारी 'सिजोफ्रेनिया' (Schizophrenia) के बीच एक गहरा संबंध पाया गया है। शोधकर्ताओं ने पिछले 44 सालों में दुनिया के 11 अलग-अलग देशों में हुई 17 बड़ी स्टडीज के डेटा का बारीकी से अध्ययन किया। इस कंबाइंड रिसर्च के नतीजों में सामने आया कि जो लोग बचपन में या वयस्क होने पर बिल्लियों के ज्यादा करीब रहे हैं, उनमें सिजोफ्रेनिया विकसित होने की संभावना आम लोगों की तुलना में दोगुनी पाई गई।बिल्ली के मल में छिपा है 'टोक्सोप्लाज्मा गोंडी' परजीवीआखिर एक प्यारी सी बिल्ली मानसिक बीमारी की वजह कैसे बन सकती है? डॉक्टरों के मुताबिक, इसका असली विलेन बिल्ली के मल (पूप) में पाया जाने वाला एक बेहद सूक्ष्म परजीवी (पैरॉसाइट) है, जिसका नाम टोक्सोप्लाज्मा गोंडी ($Toxoplasma gondii$) है। जब कोई इंसान अनजाने में इस परजीवी के संपर्क में आता है, तो यह शरीर के अंदर पहुंचकर सीधे ब्रेन हेल्थ (दिमागी स्वास्थ्य) पर हमला करता है। यह हमारे दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर (विशेषकर डोपामिन केमिकल) को असंतुलित कर देता है और मस्तिष्क में सूजन (इन्फ्लेमेशन) पैदा कर सकता है, जिससे भ्रम और गंभीर मानसिक रोगों का रिस्क बढ़ जाता है।क्या हैं सिजोफ्रेनिया के अन्य मुख्य कारण?विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ बिल्ली पालना ही सिजोफ्रेनिया का एकमात्र कारण नहीं है। यह एक जटिल दिमागी बीमारी है जो कई अन्य वजहों से भी ट्रिगर हो सकती है:आनुवंशिक कारण (Genetics): अगर परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही हो।अत्यधिक मानसिक तनाव (Severe Stress): लंबे समय तक डिप्रेशन या ट्रॉमा में रहना।केमिकल इम्बैलेंस: दिमाग में न्यूरोकेमिकल्स का संतुलन बिगड़ जाना।कैट लवर्स संक्रमण से बचने के लिए जरूर बरतें ये सावधानियांअगर आपके घर में पहले से ही बिल्ली मौजूद है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप कुछ बेहद आसान हाइजीन टिप्स अपनाकर इस जानलेवा परजीवी के संक्रमण से खुद को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं:बिल्ली के लिटर बॉक्स (मलमूत्र की जगह) को साफ करते समय हमेशा डिस्पोजेबल ग्लव्स (दस्ताने) पहनें।सफाई करने के तुरंत बाद अपने हाथों को एंटीसेप्टिक साबुन या हैंडवॉश से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं।अपनी पालतू बिल्ली के समय-समय पर वैक्सीनेशन (टीकाकरण) और रेगुलर वेटरनरी चेकअप का पूरा ध्यान रखें।घर के फर्श और बिल्ली के बैठने की जगहों को डिसइंफेक्टेंट से साफ करते रहें।
बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रामगढ़वा थाना क्षेत्र के पचभीड़िया गांव में बीती 23 मई को हुई अर्जुन पंडित की निर्मम हत्या की गुत्थी को स्थानीय पुलिस ने सुलझा लिया है। रक्सौल डीएसपी मनीष आनंद के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वैज्ञानिक अनुसंधान की मदद से इस 'ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री' का महज 15 दिनों के भीतर सनसनीखेज खुलासा किया है।कड़ाही वाले 'फाइटर' से अर्जुन पर किया था ताबड़तोड़ हमलापुलिस की जांच में जो सच सामने आया, उसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। कत्ल की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने 'फाइटर' यानी हाथ में पहने जाने वाले लोहे के घातक हथियार का इस्तेमाल किया था। मुख्य आरोपी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर अर्जुन को अकेले में घेरा और उसके चेहरे व सिर पर फाइटर से ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया।पत्नी से नाजायज ताल्लुकात बने कत्ल की वजहरक्सौल डीएसपी मनीष आनंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि इस मर्डर का मुख्य कारण अवैध संबंध था। पुलिस की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी धनेश महतो (30 वर्ष) की पत्नी के साथ मृतक अर्जुन पंडित का प्रेम प्रसंग चल रहा था। धनेश को जब अपनी पत्नी और अर्जुन के अवैध संबंधों की भनक लगी, तो वह अंदर ही अंदर सुलगने लगा। इसके बाद धनेश ने अपने दो दोस्तों—रूपेश कुमार (21 वर्ष) और राजेश यादव (35 वर्ष) के साथ मिलकर अर्जुन को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।रक्सौल डीएसपी की टीम ने 3 हत्यारों को दबोचाइस अंधे कत्लकांड का पर्दाफाश करने के लिए रामगढ़वा थानाध्यक्ष राजीव कुमार साह, अपर थानाध्यक्ष सुमित कुमार और महिला सब-इंस्पेक्टर (SI) प्रिया कुमारी की एक विशेष टीम बनाई गई थी। पुलिस टीम ने मोबाइल लोकेशन और स्थानीय इनपुट के आधार पर पचभीड़िया गांव में छापेमारी कर तीनों शातिर आरोपियों को दबोच लिया। आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। महज दो हफ्ते में हत्याकांड का खुलासा करने पर मोतिहारी के स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन की जमकर सराहना की है।
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा एलान किया है। अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) समिट के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता (सीजफायर) अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए संकेत दिए कि अमेरिकी सेना आज रात ही ईरान पर दोबारा विनाशकारी हवाई हमले कर सकती है।अमेरिका और ईरान के बीच भीषण सैन्य टकरावदरअसल, यह विवाद तब और गहरा गया जब ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में मौजूद करीब 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के 80 से ज्यादा रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। अमेरिकी हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार साइट्स और आईआरजीसी की कई सैन्य नावें तबाह हो गईं।सरकार बदलना मकसद नहीं, परमाणु हथियार पर रोक जारीट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और नाटो महासचिव मार्क रुटे की मौजूदगी में कहा कि वे ईरानियों के इस बर्ताव से बेहद खफा हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन तेहरान में सत्ता परिवर्तन (गवर्नमेंट चेंज) नहीं चाहता, लेकिन वह ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने नहीं देगा। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान के नेता धोखेबाज हैं और बातचीत करना सिर्फ समय की बर्बादी है।पावर प्लांट और बुनियादी ढांचों को तबाह करने की चेतावनीअमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अभी तक अमेरिका ने ईरान पर अपने सबसे घातक स्तर (हाईएस्ट लेवल) से हमला नहीं किया है। उन्होंने कहा, अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो हम उनके बिजली घर (पावर प्लांट) और पानी साफ करने वाले प्लांट जैसे बुनियादी ढांचों को पूरी तरह नष्ट कर देंगे। मैं ऐसा करना नहीं चाहता, लेकिन जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना पीछे नहीं हटेगी।भाषण के दौरान बड़ी चूक: ईरान को बोल गए 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान'इस बेहद गंभीर नाटो समिट के दौरान डोनाल्ड ट्रंप एक मजाकिया विवाद में भी घिर गए। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (USS अब्राहम लिंकन) पर हुए मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने ईरान की जगह 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान' बोल दिया। ट्रंप ने कहा, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान ने हम पर 111 मिसाइलें दागीं, जिन्हें हमारे पैट्रियट सिस्टम ने मार गिराया। ट्रंप की इस बड़ी जुबान फिसलने (Gaffe) का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और लोग उनकी बढ़ती उम्र और याददाश्त पर सवाल उठा रहे हैं।
पाकिस्तान का अशांत प्रांत बलूचिस्तान एक बार फिर भीषण आतंकी हमलों से दहल उठा है। इस हफ्ते की शुरुआत में हुए अलग-अलग घात लगाकर किए गए हमलों में 11 सैनिकों और 18 पुलिसकर्मियों सहित कुल 29 सुरक्षाकर्मियों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। इस खूनी खेल के बाद पूरे इलाके में तनाव है और सेना ने बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।जियारत में पुलिस चौकी पर हमला और अपहरणपाकिस्तानी सेना के अनुसार, बलूचिस्तान के जियारत जिले में आतंकियों ने एक पुलिस चौकी को निशाना बनाया था। हमले के दौरान आतंकियों ने नौ पुलिसकर्मियों की मौके पर ही हत्या कर दी, जबकि 18 अन्य जवानों को अगवा कर लिया गया था, जिनके शव बाद में बरामद हुए। दूसरी तरफ, बलूचिस्तान के ही एक मुख्य राजमार्ग पर सेना के काफिले को निशाना बनाया गया, जिसमें 11 सैनिकों की मौत हो गई।सेना की जवाबी कार्रवाई में 54 विद्रोही ढेरपाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया कि सोमवार से अब तक बलूचिस्तान में तीन बड़े आतंकी हमले हुए हैं, जिनमें कई बेकसूर लोगों ने भी जान गंवाई है। हमलों के बाद सेना ने आक्रामक जवाबी कार्रवाई की। सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इस ऑपरेशन में अब तक 54 विद्रोहियों को मार गिराया गया है। पाकिस्तान ने इन हमलों के तार अफगानिस्तान से जुड़े होने का दावा किया है, हालांकि तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।खुले टैंपो में शव ले जाने पर सोशल मीडिया पर फूटा गुस्साइस दर्दनाक घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद बवाल मच गया है। वीडियो में दिख रहा है कि बलूचिस्तान सरकार शहीद पुलिसकर्मियों के शवों को सम्मानजनक एम्बुलेंस के बजाय एक खुले टैंपो में लादकर ले जा रही है। ताबूतों को इस तरह गाड़ी में भरे देख लोग पाकिस्तानी हुक्मरानों और सेना के रवैये पर तीखे सवाल उठा रहे हैं। बता दें कि बलूचिस्तान में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और अनदेखी को लेकर लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है।
भारत के डिजिटल मार्केट में इस समय एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कभी सिर्फ एक बाइक टैक्सी के रूप में पहचानी जाने वाली कंपनी रैपिडो (Rapido) अब देश की सबसे बड़ी कंज्यूमर इंटरनेट ऐप बन चुकी है। डिजिटल इंटेलिजेंस फर्म 'सेंसर टावर' (Sensor Tower) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से मई 2026 के बीच रैपिडो के मंथली एक्टिव यूजर्स (MAU) का आंकड़ा 8.2 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 67% ज्यादा है।दिग्गज कंपनियों को पछाड़ारैपिडो ने इस शानदार ग्रोथ के साथ न सिर्फ राइड-हेलिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों उबर (Uber) और ओला (Ola) को मात दी है, बल्कि क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी की बड़ी कंपनियों जैसे स्विगी (Swiggy), जोमैटो (Zomato), ब्लिंकिट (Blinkit) और जेप्टो (Zepto) को भी यूजर बेस के मामले में काफी पीछे छोड़ दिया है।मंथली एक्टिव यूजर्स (MAU) के आंकड़ेRapido: 8.2 करोड़Blinkit: 7.9 करोड़Swiggy: 6.7 करोड़Zomato: 6.3 करोड़Zepto: 5.8 करोड़Uber: 3.9 करोड़Ola: 2.7 करोड़लेन-देन करने वाले यूजर्स में भी सबसे आगेसिर्फ ऐप खोलने या देखने के मामले में ही नहीं, बल्कि एक्टिव ट्रांजैक्शन करने वाले ग्राहकों (MTU) की सूची में भी रैपिडो टॉप पर है। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के दौरान रैपिडो के मंथली ट्रांसैक्टिंग यूजर्स लगभग 3.6 करोड़ रहे। इसके मुकाबले ब्लिंकिट के पास 2.7 करोड़, जोमैटो और स्विगी दोनों के पास 2.5-2.5 करोड़ यूजर्स दर्ज किए गए। वहीं ओला और उबर ने अपनी ट्रांजैक्शन संख्या को सार्वजनिक नहीं किया है।हर दिन 65 लाख राइड्स का रिकॉर्डमार्केट में अपनी मजबूत पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मार्च 2026 में रैपिडो ने हर दिन औसतन 65 लाख राइड्स पूरी कीं। इस मामले में भी यह बाकी कंपनियों से बहुत आगे है, जहां उबर पर रोजाना 37 लाख और ओला पर करीब 15 लाख राइड्स ही बुक हो रही हैं।ड्राइवर्स को पसंद आ रहा बिजनेस मॉडलरैपिडो की इस तेज रफ्तार सफलता के पीछे उसकी एक खास रणनीति है। पारंपरिक कंपनियां जैसे ओला और उबर अपने ड्राइवरों से हर राइड पर 20% से 30% तक का मोटा कमीशन लेती हैं। इसके विपरीत, रैपिडो ने एक नया सब्सक्रिप्शन मॉडल पेश किया है। इसमें ड्राइवरों को केवल एक तय मंथली या डेली फीस देनी होती है, जिसके बाद वे अपनी पूरी कमाई खुद रख सकते हैं। इस पारदर्शी नीति के कारण देश भर के ड्राइवर्स तेजी से इस ऐप से जुड़ रहे हैं।सिर्फ बाइक नहीं, अब हर सर्विस उपलब्धसाल 2015 में एक छोटे से बाइक टैक्सी स्टार्टअप से शुरू हुई रैपिडो अब एक 'सुपर ऐप' बनने की राह पर है। कंपनी ने समय के साथ ऑटो, कैब सर्विस, ई-रिक्शा, पार्सल डिलीवरी, फूड डिलीवरी, फाइनेंशियल सर्विसेज और कार-पूलिंग जैसे कई क्षेत्रों में कदम रख दिया है। इसी मल्टी-सर्विस अप्रोच की वजह से आज यह देश के हर वर्ग की जरूरत बन चुकी है।
वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) परिदृश्य में आए एक अचानक और बड़े भूचाल ने भारत सहित दुनिया भर के वित्तीय और कमोडिटी बाजारों को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे अंतरिम शांति समझौते (Ceasefire Deal) को 'पूरी तरह खत्म' बताने वाले बयान के बाद पश्चिम एशिया (West Asia) में युद्ध का तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) में दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य झड़पों के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 5% से अधिक का तेज उछाल आया है। तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई (Inflation) बढ़ने की आशंका गहरा गई है, जिसके चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय और भारतीय वायदा बाजार (MCX) दोनों जगह सोने की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट और फ्यूचर्स गोल्ड औंधे मुंह गिरेअमेरिकी राष्ट्रपति के इस कड़े बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतों में तेज बिकवाली देखी गई।स्पॉट गोल्ड (Spot Gold): अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 1.2% की बड़ी गिरावट के साथ 4,057.09 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स (Comex Gold): अमेरिकी वायदा बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला सोना 94.69 डॉलर (2.28%) की भारी टूट के साथ 4,062.71 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।इसके चलते लंदन और वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं का खनन करने वाली बड़ी कंपनियों (Miners) के शेयरों में भी 4% से लेकर 8% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई।भारतीय वायदा बाजार (MCX) में सोना ₹2,308 टूटावैश्विक बाजारों से मिले कमजोर और निराशाजनक संकेतों के कारण भारतीय घरेलू वायदा बाजार में भी सोने के भाव बुरी तरह क्रैश हो गए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 2,308 रुपये (1.59%) की बड़ी गिरावट के साथ 1,43,084 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। बाजार में मचे इस भारी हड़कंप के बीच बुधवार के सत्र के दौरान रिकॉर्ड 10,440 लॉट का भारी-भरकम कमोडिटी कारोबार दर्ज किया गया।क्यों बढ़ रहा है सोने पर दबाव? समझिए बाजार का गणितआमतौर पर जब भी दुनिया में युद्ध या तनाव के हालात बनते हैं, तो सोने की कीमतें बढ़ती हैं क्योंकि इसे सबसे सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Asset) माना जाता है। लेकिन इस बार बाजार का गणित थोड़ा अलग काम कर रहा है:कच्चे तेल में उछाल और महंगाई: पश्चिम एशिया संकट के चलते ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चे तेल के दाम अचानक 5% से ज्यादा बढ़ गए हैं। कच्चे तेल की यह तेजी दुनिया भर में महंगाई को दोबारा हवा दे सकती है।फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव: यदि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' (US Federal Reserve) पर ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने या उनमें दोबारा बढ़ोतरी करने का दबाव बढ़ जाएगा।मजबूत डॉलर का दबाव: ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद और वैश्विक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) को भारी मजबूती मिली है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति जैसे सोने की मांग को कमजोर कर देती हैं। यही वजह है कि निवेशकों ने सोने से पैसा निकालकर डॉलर और अन्य संपत्तियों में लगाना शुरू कर दिया है।एक्सपर्ट्स की राय: एक बेहद अहम मोड़ पर खड़ा है सोनाविदेशी ब्रोकरेज फर्म FXTM के मार्केट रिसर्च प्रमुख लुकमैन ओटुनुगा (Lukman Otunuga) के मुताबिक, वैश्विक बाजार में सोना फिलहाल एक बेहद नाजुक और अहम मोड़ पर खड़ा है। पश्चिम एशिया का जियो-पॉलिटिकल तनाव निश्चित रूप से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को एक बुनियादी सपोर्ट दे रहा है, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतों में आई यह तेजी महंगाई को बढ़ाती है और अमेरिकी फेड की ओर से सख्त मौद्रिक नीति के संकेत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में भी सोने की कीमतों पर यह दबाव और गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है। ट्रेडर्स की नजरें अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों के मिनट्स पर टिकी हैं।
दुनिया का सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (WhatsApp) अपने यूजर्स और व्यापारियों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर नए-नए फीचर्स लाता रहता है। इसी कड़ी में वॉट्सऐप ने छोटे और बड़े दोनों तरह के व्यापारियों (Business Users) के लिए एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा फीचर पेश किया है। कंपनी ने 'मेटा बिजनेस एजेंट' (Meta Business Agent) नाम का एक एडवांस एआई (AI) टूल लॉन्च कर दिया है। यह टूल बिना किसी अतिरिक्त फीस या चार्ज के, हफ्ते के 24 घंटे और सातों दिन (24x7) आपके ग्राहकों के हर सवाल का सटीक जवाब दे सकता है और बिजनेस को ऑटोमेट करने में मदद कर सकता है।मुंबई में आयोजित वॉट्सऐप के तीसरे एनुअल बिजनेस समिट (WhatsApp Annual Business Summit) में मेटा ने इस धांसू फीचर की आधिकारिक घोषणा की है।कैटलॉग और वेबसाइट देखकर खुद डील्स फाइनल करेगा AIअगर आप वॉट्सऐप पर कोई छोटा या बड़ा व्यापार चलाते हैं, तो अब आप इस एआई एजेंट को बेहद आसानी से सेट कर सकते हैं। यह एआई एजेंट आपके बिजनेस कैटलॉग, आधिकारिक वेबसाइट, बिजनेस प्रोफाइल और दुकान की टाइमिंग जैसी जरूरी जानकारियों का गहराई से विश्लेषण करेगा। इसके बाद जब भी कोई कस्टमर आपसे वॉट्सऐप पर संपर्क करेगा, तो यह एआई खुद ही उनके सवालों के जवाब देगा, प्रोडक्ट की उपलब्धता बताएगा और डील को फाइनल करने में मदद करेगा।सबसे खास बात यह है कि इस चैट पर बिज़नेस ओनर का पूरा कंट्रोल रहेगा। यदि किसी मोड़ पर जरूरत पड़ती है, तो असली इंसान (Human Agent) भी बीच में आकर चैट को अपने हाथ में ले सकता है।क्या भारत के सभी यूजर्स को यह फीचर मिल गया है?इस घोषणा के बाद भारतीय व्यापारियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह फीचर भारत में लाइव हो चुका है? इसका जवाब है— हाँ, मेटा ने इसे भारतीय बाजार के लिए आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। हालांकि, अभी इसका पूर्ण रोलआउट होना बाकी है। फिलहाल यह फीचर कुछ चुनिंदा बीटा और सीमित यूजर्स को ही टेस्टिंग के लिए मिल रहा है। यदि आपके वॉट्सऐप बिजनेस ऐप में यह विकल्प अभी दिखाई नहीं दे रहा है, तो आप ऐप को अपडेट करके इसके लिए 'वेटलिस्ट' (Waitlist) जॉइन कर सकते हैं।यह AI एजेंट कैसे काम करता है? ट्रेनिंग देना है बेहद आसानमेटा के इस एआई एजेंट को एक्टिवेट और कस्टमाइज करने की प्रक्रिया बहुत ही सरल और यूजर-फ्रेंडली है:टूल्स टैब में मिलेगा विकल्प: आपको अपने वॉट्सऐप बिजनेस ऐप के 'टूल्स' (Tools) टैब में जाना होगा, जहां आपको 'AI एजेंट' का नया विकल्प दिखाई देगा। स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करके आप इसे ऑन कर सकते हैं।बिजनेस डेटा से करें ट्रेन: बिजनेस के मालिक अपने जरूरी डॉक्यूमेंट्स, तस्वीरें, पहले से तय सैंपल जवाब (FAQ) और सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट्स (Best-Sellers) की जानकारी अपलोड करके इस एआई को अपने बिजनेस के हिसाब से कस्टमाइज और ट्रेन कर सकते हैं।कंट्रोल आपके हाथ में: आप यह खुद तय कर सकते हैं कि एआई को कब एक्टिव होना चाहिए। जैसे कि सभी नई चैट्स पर, या फिर सिर्फ उन ग्राहकों पर जो फेसबुक और इंस्टाग्राम विज्ञापनों (Click-to-WhatsApp Ads) के जरिए आपके पास आ रहे हैं। आप जब चाहें किसी भी चैट से एआई को हटा या म्यूट कर सकते हैं। यदि कोई कस्टमर किसी गंभीर समस्या में है, तो एआई तुरंत बिजनेस ओनर को एक नोटिफिकेशन भेज देगा ताकि कोई इंसान बात संभाल सके।ग्राहकों की प्राइवेसी और सुरक्षा का कैसे चलेगा पता?मेटा ने प्राइवेसी और पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा है। जब भी कोई ग्राहक पहली बार किसी ऐसे बिजनेस अकाउंट से चैट शुरू करेगा जहां एआई एजेंट एक्टिव है, तो उसे स्क्रीन पर एक स्पष्ट डिस्क्लेमर मैसेज दिखेगा:मेटा का एआई, एआई की क्वालिटी सुधारने और इस बिजनेस के लिए मैसेज जेनरेट करने के लिए चैट्स रिसीव करता है।टूल को ऑन करने से पहले ध्यान रखें ये जरूरी बातेंडेटा कलेक्शन: एआई एल्गोरिदम को बेहतर बनाने के लिए शुरुआती दौर में इस चैट के मैसेज कलेक्ट किए जा सकते हैं। हालांकि, अगर आप इस एआई एजेंट को डिलीट कर देते हैं, तो भविष्य की नई चैट्स का इस्तेमाल डेटा ट्रेनिंग के लिए नहीं किया जाएगा।लिंक्ड डिवाइसेज होंगे डिस्कनेक्ट: जब आप पहली बार इस एआई एजेंट को ऑन करेंगे, तो सुरक्षा और कॉन्फ़िगरेशन के चलते आपके मौजूदा सभी लिंक्ड डिवाइसेज (WhatsApp Web या अन्य फोन) अपने आप डिस्कनेक्ट हो जाएंगे, जिन्हें आपको दोबारा स्कैन करना होगा।पुराने फीचर्स पर असर: इस एआई को ऑन करने पर ब्रॉडकास्ट लिस्ट, डिसअपीयरिंग मैसेज और ग्रीटिंग/अवे मैसेज जैसे कुछ पारंपरिक फीचर्स स्थाई या अस्थाई रूप से प्रभावित हो सकते हैं।छोटे बिजनेस के लिए फ्री, बड़े ब्रांड्स के लिए लगेगा 'टोकन चार्ज'मेटा ने स्पष्ट किया है कि छोटे और मध्यम उद्योगों (SMBs) के लिए वॉट्सऐप बिजनेस ऐप के भीतर यह सर्विस पूरी तरह मुफ्त (Free) रहेगी। वहीं दूसरी ओर, बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों और ब्रांड्स के लिए मेटा ने 'मेटा बिजनेस एजेंट प्लेटफॉर्म' लॉन्च किया है, जहां कंपनियां बड़े पैमाने पर कस्टमाइज्ड एआई एजेंट एपीआई (API) तैयार कर सकती हैं। इसके लिए मेटा प्रति-टोकन (Per-Token Pricing) के हिसाब से चार्ज करेगी, ठीक उसी तरह जैसे ओपनएआई (OpenAI) या एंथ्रोपिक जैसी वैश्विक एआई कंपनियां अपनी सेवाओं के लिए चार्ज करती हैं।
भारत में डॉक्टर बनने और एक प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट यूजी (NEET UG) परीक्षा को अच्छे रैंक से पास करना अनिवार्य होता है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा हर साल आयोजित की जाने वाली इस परीक्षा में लाखों की संख्या में देश के होनहार छात्र बैठते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण चंद हजार छात्र ही सरकारी कॉलेजों में जगह बना पाते हैं। इसके बाद बचे हुए छात्रों के पास या तो अगले साल दोबारा तैयारी करने का विकल्प होता है या फिर देश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को चुनने का। हालांकि, भारत के प्राइवेट कॉलेजों की बेहद महंगी और आम बजट से बाहर की फीस के कारण हर साल हजारों छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेशों (Foreign Countries) का रुख कर लेते हैं।लेकिन, विदेश से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री लेकर भारत लौटना और यहाँ डॉक्टर के रूप में अपनी प्रैक्टिस शुरू करना उतना आसान नहीं है, जितना सोशल मीडिया या कन्सल्टेंट्स के विज्ञापनों में दिखाया जाता है। हाल ही में जारी हुए ताजा सरकारी आंकड़ों ने विदेशी डिग्रियों की सफलता दर पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।जून 2026 परीक्षा में सिर्फ 12.38% उम्मीदवार ही हुए सफलनेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा 7 जुलाई 2026 को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) जून सत्र का परिणाम घोषित किया गया है। इस परीक्षा के नतीजों ने हर किसी को चौंका दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून सत्र की परीक्षा में कुल 37,448 विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स शामिल हुए थे, जिनमें से महज 4,635 छात्र ही पास होने में कामयाब रहे। यानी इस बार का कुल पासिंग प्रतिशत सिर्फ 12.38% रहा है। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले साल दिसंबर में आयोजित हुई एफएमजीई परीक्षा का पासिंग रेट 23.93% था, जो इस बार गिरकर लगभग आधा रह गया है।क्या है भारत में प्रैक्टिस करने का नियम और FMGE का क्राइटेरिया?भारत के कानून और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश के किसी भी विश्वविद्यालय से मेडिकल की पढ़ाई करके लौटता है, तो वह भारत में तब तक सीधे मरीजों का इलाज या सरकारी नौकरी नहीं कर सकता, जब तक वह FMGE परीक्षा पास करके 'पंजीकरण प्रमाण पत्र' (Registration Certificate) हासिल न कर ले।परीक्षा का स्वरूप: NBEMS द्वारा यह परीक्षा साल में दो बार (जून और दिसंबर) आयोजित की जाती है।पासिंग मार्क्स: यह परीक्षा कुल 300 अंकों की होती है, जिसमें किसी भी प्रकार की माइनस मार्किंग नहीं होती। परीक्षा को पास करने के लिए उम्मीदवार को न्यूनतम 150 अंक (यानी पूरे 50 प्रतिशत) लाना अनिवार्य होता है।अटेम्प्ट्स की सीमा: इस परीक्षा को पास करने के लिए प्रयासों (Attempts) की कोई निश्चित सीमा नहीं है। फेल होने वाले छात्र अगली छमाही में दोबारा आवेदन कर परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।आखिर भारत के प्राइवेट कॉलेजों को छोड़ क्यों विदेश जाते हैं छात्र?इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण दोनों जगह की पढ़ाई के खर्च में जमीन-आसमान का अंतर होना है। वर्तमान में भारत के अधिकांश टॉप प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स की कुल फीस ₹60 लाख से लेकर ₹1 करोड़ से भी अधिक तक पहुंच जाती है। इसके विपरीत, भारत के पड़ोसी देशों और पूर्वी यूरोप जैसे नेपाल, कजाकिस्तान, बांग्लादेश, उज्बेकिस्तान, रूस और जॉर्जिया में यही पूरी डॉक्टरी की पढ़ाई ₹40 लाख से ₹50 लाख के कुल बजट (रहने और खाने के खर्च सहित) में पूरी हो जाती है। यही कारण है कि मिडिल क्लास परिवारों के बच्चे इन देशों को ज्यादा तरजीह देते हैं।एक्सपर्ट्स की राय: क्यों लगातार गिर रहा है FMGE का पासिंग ग्राफ?मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस खराब रिजल्ट के पीछे की बुनियादी कड़ी खुद नीट (NEET) परीक्षा से जुड़ी है। दरअसल, विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाने वाले अधिकांश छात्र वही होते हैं, जो या तो भारत की नीट परीक्षा में शामिल नहीं होते या फिर बहुत ही कम अंकों के साथ बॉर्डर लाइन पर क्वालीफाई होते हैं।चूंकि FMGE परीक्षा का सिलेबस और प्रश्नों का स्तर भारत की नीट पीजी (NEET PG) और देश के कड़े क्लिनिकल मानकों के समान ही बेहद कठिन होता है, इसलिए बेसिक मेडिकल कॉन्सेप्ट्स कमजोर होने और विदेशों में भाषा व क्लिनिकल एक्सपोजर की कमी के कारण छात्र भारत लौटकर इस 50% के पासिंग क्राइटेरिया को भी पार नहीं कर पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशों में दाखिला लेने से पहले छात्रों को कॉलेज के इतिहास और भारत के परीक्षा पैटर्न को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेना चाहिए।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू बनारसी दास जी की 114वीं जयंती के पावन अवसर पर आज नवाबों के शहर लखनऊ में सेवा और जनकल्याण से जुड़े कई गरिमामयी कार्यक्रम आयोजित किए गए। राजनीति में सादगी और शुचिता के प्रतीक रहे बाबू बनारसी दास जी को याद करते हुए आज समाज के जरूरतमंद तबके के लिए विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों (Free Health Camps) का आयोजन किया गया।डॉ. अखिलेश दास गुप्ता फाउंडेशन की अनूठी पहलबाबू बनारसी दास जी के प्रपौत्र विराज सागर दास के सौजन्य से 'डॉ. अखिलेश दास गुप्ता फाउंडेशन' द्वारा लखनऊ के अलग-अलग क्षेत्रों में इन स्वास्थ्य शिविरों का सफल आयोजन किया गया। शिविर में आए नागरिकों के लिए निःशुल्क नेत्र परीक्षण (Free Eye Check-up), चश्मा वितरण, दंत जांच (Dental Check-up) और सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण की व्यापक व्यवस्था की गई थी।यह दोनों ही शिविर सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक पूरी सक्रियता से संचालित हुए। शहर और आस-पास के ग्रामीण इलाकों से आए सैकड़ों लोगों और बुजुर्गों ने इन शिविरों में पहुंचकर आधुनिक चिकित्सा सेवाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह का भरपूर लाभ उठाया।गणमान्य नागरिकों ने साझा किए संस्मरणबाबू बनारसी दास जी का पूरा जीवन राष्ट्र निर्माण और गरीब-मजलूमों की सेवा में बीता। आज की राजनीति में उनके आदर्श और मूल्य बेहद प्रासंगिक हैं। इस स्वास्थ्य शिविर के जरिए उनकी विरासत को आगे बढ़ाना समाज के लिए एक सराहनीय कदम है।जयंती के मुख्य समारोह का आयोजन ऐतिहासिक विक्रमादित्य कोठी में किया गया था। इस श्रद्धांजलि सभा में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी उपस्थित अतिथियों ने बाबू बनारसी दास जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए देश की आजादी और उत्तर प्रदेश के विकास व राष्ट्र निर्माण में दिए गए उनके ऐतिहासिक योगदान को अत्यंत आदर के साथ याद किया।
जन-कल्याण के लिए 2300 करोड़ स्वीकृत, जानें सीएम डॉ. मोहन की कैबिनेट ने क्या-क्या लिए फैसले?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 8 जुलाई को कैबिनेट की बैठक में कई अहम निर्णय लिए। उनकी अध्यक्षता में कैबिनेट ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक और प्रस्ताव अनुसार ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2023 के संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी। पंचायत ...
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के 'पराक्रम' वाले बयान पर घमासान, युवाओं को लेकर क्या कह गईं UP गवर्नर?
Anandiben Patel Parakram Bayan: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल अपने एक बयान को लेकर चौतरफा विवादों से घिर गई हैं। लखनऊ के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं के घर से भागने और ...
सीएम डॉ. मोहन यादव ने 10 साल बाद दिया प्रमोशन, गदगद हुए कर्मचारी, ढोल-नगाड़ों से किया स्वागत
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों-कर्मचारियों को दस साल से अपेक्षित बड़ी सौगात दी है। उन्होंने एक दशक बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया शुरू होने पर अधिकारियों-कर्मचारियों ने सीएम डॉ. यादव का स्वागत किया। इस बीच ...
रिलायंस जियो ने अपने ग्राहकों के लिए एक नया और किफायती मनोरंजन प्लान पेश किया है। कंपनी ने मात्र ₹55 में JioTV Pro Pack लॉन्च किया है, जिसकी वैधता 30 दिनों की होगी। इस पैक के जरिए यूजर्स अपने मोबाइल फोन पर JioTV ऐप के माध्यम से 1000 से अधिक लाइव ...
CM योगी ने चित्रकूट में योजनाओं के लाभार्थियों को वितरित किए चेक, मेधावी छात्रों का भी किया सम्मान
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक व अन्य सहायता प्रदान की। इसमें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मेधावी सम्मान योजना, मुख्यमंत्री कृषक ...
2023 में कनाडा में खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जांच कर रही कनाडाई पुलिस ने बड़ा बयान दिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि अब तक उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे भारतीय सरकार या उसके अधिकारियों का इस हत्या से संबंध साबित ...
सोशल मीडिया कंपनी Meta अपने अगली पीढ़ी के AI स्मार्ट ग्लास पर काम कर रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, ये स्मार्ट ग्लास सिर्फ फोटो या वीडियो लेने तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि आसपास की आवाज और दृश्यों को लगातार समझकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ...
ममता बनर्जी को बड़ा झटका, ED ने फ्रीज किए 440 करोड़, क्या होगा TMC पर इसका असर
ED Freeze TMC Bank Accounts: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ...
ममता बनर्जी को बड़ा झटका, ईडी ने फ्रीज किए टीएमसी से जुड़े 3 खातों में जमा 440 करोड़ रुपये
टीएमसी से जुड़े कथित फंड मामले में ईडी ने 440 करोड़ रुपये वाले खातों पर रोक लगाई और संदिग्ध लेन-देन की जांच तेज कर दी है। पार्टी ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
विवाद : यूपी विधानसभा चुनाव से पहले डैमेज कंट्रोल में जुटे भाजपा-आरएसएस
लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) उत्तर प्रदेश में व्यापक जनसंपर्क अभियान की तैयारी में जुट गए हैं। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि यह विवाद आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्ष का बड़ा मुद्दा बन सकता है और इसका […] The post विवाद : यूपी विधानसभा चुनाव से पहले डैमेज कंट्रोल में जुटे भाजपा-आरएसएस appeared first on Sabguru News .
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर कांग्रेस के सरकार से तीखे सवाल, चंपत राय की गिरफ्तारी की मांग
कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तुरंत भंग करने के साथ ही शंकराचार्य जी, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि और साधु-संत मिलकर एक नए ट्रस्ट का निर्माण करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ...
EPFO से जुड़ी खुशखबर सामने आई है। ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पीएफ जमा राशि पर ब्याज जमा करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल फील्ड वेरिफिकेशन का काम चल रहा है, जो अगले कुछ दिनों में पूरा होने की संभावना है।
आज हमारे पास सुविधाएं अधिक हैं, लेकिन मन की शांति कम होती जा रही है। संपर्क बहुत हैं, लेकिन मन की बात कहने वाले लोग कम हैं। घर बड़े हो रहे हैं, पर साथ बैठने का समय घट रहा है। कमाई बढ़ रही है, लेकिन चिंताएं भी साथ-साथ बढ़ती जा रही हैं। समस्या आगे ...
केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों को लिखा पत्र, E20 पेट्रोल पर मांगा जवाब
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, हीरो मोटोकॉर्प समेत 29 ऑटो कंपनियों को पत्र लिखकर E20 पेट्रोल को लेकर लिखित जवाब मांगा। उन्होंने 2023 से पहले बनी गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल और संभावित नुकसान पर सवाल ...
ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता समाप्त घोषित किया, परमाणु वार्ता पर जताई निराशा
अंकारा। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तीन सप्ताह पहले हुए युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित करते हुए कहा है कि यह समझौता अब प्रभावी नहीं रहा। इसके व्यावहारिक परिणामों को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। ट्रंप ने अंकारा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि युद्धविराम समझौता अब […] The post ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता समाप्त घोषित किया, परमाणु वार्ता पर जताई निराशा appeared first on Sabguru News .
सारण में नाबालिग लड़की के साथ प्रेमी समेत दो दोस्तों ने किया रेप
छपरा। बिहार में सारण जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों ने बुधवार को बताया कि मगाईडीह गांव की एक नाबालिग लड़की अपने प्रेमी से मिलने चंवर में गई थी। जहां उसके प्रेमी ने जब गलत […] The post सारण में नाबालिग लड़की के साथ प्रेमी समेत दो दोस्तों ने किया रेप appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा में खातन खेड़ी विद्यालय की बदहाली से नाराज ग्रामीणों ने मुख्य द्वार पर जड़ा ताला
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा क्षेत्र के खातन खेड़ी राजकीय विद्यालय की बदहाली से बुधवार को छात्रों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्यालय की बदहाल स्थिति, जर्जर भवन और शिक्षकों की भारी कमी से नाराज विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन […] The post भीलवाड़ा में खातन खेड़ी विद्यालय की बदहाली से नाराज ग्रामीणों ने मुख्य द्वार पर जड़ा ताला appeared first on Sabguru News .
भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस का डेडलाइन प्रेशर और घर-बाहर की दोहरी जिम्मेदारी के बीच आज की कामकाजी महिलाएं अपनी सेहत को सबसे पीछे छोड़ देती हैं। समय की कमी के चलते कई बार छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर बीमारियों का रूप ले लेती हैं। डॉक्टर्स का मानना है कि 30 की उम्र पार करते ही वर्किंग महिलाओं को अपनी हेल्थ को लेकर 'प्रोएक्टिव' होने की जरूरत है। आज हम आपको उन 5 अनिवार्य हेल्थ चेकअप्स के बारे में बता रहे हैं, जो हर कामकाजी महिला के लिए साल में एक बार बेहद जरूरी हैं, ताकि आप न केवल स्वस्थ रहें बल्कि अपनी कार्यक्षमता भी बरकरार रख सकें।1. थायराइड फंक्शन टेस्ट (TFT): वजन और ऊर्जा के लिए जरूरीज्यादातर वर्किंग महिलाएं अक्सर थकान, अचानक वजन बढ़ने या घटने और बालों के झड़ने की समस्या से जूझती हैं। इसे अक्सर काम का तनाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यह थायराइड असंतुलन का लक्षण हो सकता है। साल में एक बार टीएसएच (TSH), टी3 (T3) और टी4 (T4) टेस्ट कराना अनिवार्य है ताकि थायराइड ग्रंथि सही से काम कर रही है या नहीं, इसका पता चल सके।2. बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan): हड्डियों की मजबूती की जांचऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने और धूप की कमी के कारण महिलाओं में विटामिन-डी और कैल्शियम की भारी कमी देखी जा रही है। उम्र के साथ महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। डेक्सा स्कैन (DEXA Scan) के जरिए आप अपनी हड्डियों के घनत्व की जांच करा सकती हैं और भविष्य में होने वाले फ्रैक्चर या जोड़ों के दर्द से बच सकती हैं।3. पैप स्मीयर और ब्रेस्ट स्क्रीनिंग (Mamography): कैंसर से बचाव के लिएमहिलाओं में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन शुरुआती स्टेज में पकड़े जाने पर इनका इलाज पूरी तरह संभव है। 30-35 वर्ष की आयु के बाद हर महिला को साल में एक बार गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेकर 'पैप स्मीयर टेस्ट' और 'मेमोग्राफी' करानी चाहिए। यह छोटी सी सतर्कता जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा कवच का काम करती है।4. लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर टेस्ट: दिल की सेहत के लिएवर्कप्लेस का स्ट्रेस सीधे आपके दिल और ब्लड शुगर लेवल पर असर डालता है। खराब लाइफस्टाइल और बाहर के खाने की वजह से कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना और डायबिटीज का खतरा आम है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट से आपको अपने हार्ट हेल्थ की स्थिति पता चलेगी, वहीं HbA1c टेस्ट के जरिए आप अपने पिछले तीन महीनों के शुगर लेवल का सही आकलन कर सकती हैं।5. विटामिन प्रोफाइल और हीमोग्लोबिन चेक: एनीमिया से मुक्तिक्या आपको काम के दौरान बार-बार चक्कर आते हैं या सांस फूलती है? यह एनीमिया यानी खून की कमी का सीधा संकेत है। कामकाजी महिलाओं में हीमोग्लोबिन और विटामिन-बी12 की कमी सबसे आम है, जो आपकी प्रोडक्टिविटी को घटाती है। साल में एक बार सीबीसी (CBC) और विटामिन प्रोफाइल टेस्ट करवाकर आप अपनी एनर्जी लेवल को हमेशा हाई रख सकती हैं।
ईरान ने कुवैत एवं बहरीन में अमरीकी ठिकानों पर किए हमले
तेहरान। ईरान ने बुधवार को कहा कि उस पर अमरीकी हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन में अमरीकी ठिकानों पर हमला किया है। अमरीका के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने मंगलवार रात कहा था कि अमरीका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में ईरान के खिलाफ सिलसिलेवार हमले […] The post ईरान ने कुवैत एवं बहरीन में अमरीकी ठिकानों पर किए हमले appeared first on Sabguru News .
फिर भड़केगी महायुद्ध की आग? ट्रंप का बड़ा एलान- ईरान के साथ समझौता खत्म, रातभर बरसे बम
Donald Trumps statement: पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े युद्ध की आहट तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्किये (अंकारा) में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान बेहद तीखा बयान देते हुए ईरान के साथ हुए हालिया संघर्ष-विराम ...
पंजाब में मानसून की एंट्री तो हो चुकी है, लेकिन बादलों की सुस्ती ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राज्य के कई हिस्सों में मानसून पहुंचने के बाद भी उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हो रही है, जिससे उमस और गर्मी ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है। पिछले 24 घंटों के दौरान पंजाब के औसत तापमान में 1.3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, इस भीषण उमस के बीच मौसम विभाग (IMD) ने एक राहत भरी खबर दी है। विभाग ने राज्य के अधिकांश जिलों के लिए 12 जुलाई तक भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान में कोई मजबूत वेदर सिस्टम एक्टिव न होने के कारण मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। स्थानीय स्तर पर बन रहे बादलों की वजह से छिटपुट बूंदाबांदी तो हो रही है, लेकिन वह गर्मी से राहत दिलाने के बजाय उमस को और अधिक बढ़ा रही है। चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर और पटियाला सहित पंजाब के अधिकांश मुख्य शहरों में सुबह से ही तेज धूप और उमस का मिलाजुला असर देखा जा रहा है, जिससे बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।मानसून आया पर बादल क्यों नहीं बरस रहे? समझें इसके पीछे का बड़ा कारणपंजाब के किसान इस समय धान की रोपाई के काम में पूरी तरह जुटे हुए हैं, ऐसे में मानसून का इस तरह रूठना उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं उत्तर भारत की ओर बढ़ तो रही हैं, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbiance) का मजबूत सपोर्ट न मिलने के कारण वे पंजाब के मैदानी इलाकों में पूरी तरह से बरस नहीं पा रही हैं।तापमान में आई 1.3 डिग्री की इस बढ़ोतरी ने मैदानी इलाकों को हीट पॉकेट में बदल दिया है। भटिंडा और फिरोजपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में पारा एक बार फिर 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। डॉक्टरों ने भी इस मौसम में उमस जनित बीमारियों और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए लोगों को विशेष सावधानी बरतने और अधिक से अधिक पानी पीने की सलाह दी है।12 जुलाई तक के लिए मौसम विभाग का नया अलर्ट: इन जिलों में होगी मूसलाधार बारिशचंडीगढ़ मौसम केंद्र द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, पंजाब की जनता को इस चिपचिपी गर्मी से बहुत जल्द निजात मिलने वाली है। 10 जुलाई की रात से मानसूनी हवाएं एक बार फिर सक्रिय होंगी, जिसका असर 12 जुलाई तक पूरे राज्य में दिखाई देगा। मौसम विभाग ने पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, रूपनगर और एसएएस नगर (मोहाली) सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई है।इस आगामी स्पेल (दौर) के दौरान कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए खेतों में पानी के प्रबंधन की उचित व्यवस्था कर लें ताकि धान की नई फसलों को कोई नुकसान न पहुंचे। आने वाले 48 घंटे पंजाब के मौसम के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
पंजाब पुलिस के एक सीनियर इंस्पेक्टर पर अमेरिकी नागरिक (NRI) परिवार को डरा-धमकाकर करोड़ों रुपये वसूलने की कोशिश का बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह विवाद अब सिर्फ पंजाब या भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें दुनिया की सबसे बड़ी जांच एजेंसियों में से एक अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) की एंट्री हो गई है। एफबीआई ने पंजाब पुलिस के इस बदनाम इंस्पेक्टर को अपनी जांच में नामजद किया है, जिसके बाद से ही पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।आरोप है कि आरोपी इंस्पेक्टर ने पंजाब के एक मूल निवासी, जो अब सिएटल (अमेरिका) में सपरिवार बस चुके हैं, उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने और भारत आने पर जेल भेजने की धमकी दी थी। इस धमकी के बदले इंस्पेक्टर ने सीधे 3 करोड़ रुपये की मोटी रंगदारी की मांग की थी। पीड़ित परिवार ने इस पूरी ब्लैकमेलिंग की शिकायत अमेरिकी प्रशासन और एफबीआई से की, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजाब पुलिस की साख दांव पर लग गई है।एनआरआई परिवार को झूठे केस की धमकी और 3 करोड़ की डिमांड: समझें पूरा खेलजांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला मोहाली और जालंधर से जुड़े एक जमीन विवाद से शुरू हुआ था। पीड़ित एनआरआई परिवार की पंजाब में कुछ पुश्तैनी संपत्ति है, जिस पर स्थानीय भूमाफिया की नजर थी। आरोप है कि आरोपी इंस्पेक्टर ने भूमाफिया के साथ साठगांठ करके इस एनआरआई परिवार पर दबाव बनाना शुरू किया। इंस्पेक्टर ने अमेरिका फोन करके पीड़ित को धमकाया कि अगर उन्होंने पंजाब में दर्ज एक फर्जी शिकायत को रफा-दफा करने के लिए 3 करोड़ रुपये नहीं दिए, तो उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवा दिया जाएगा।इतना ही नहीं, इंस्पेक्टर ने यह भी धमकी दी कि यदि परिवार का कोई भी सदस्य भारत की धरती पर पैर रखेगा, तो उन्हें एयरपोर्ट से ही सीधे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग से तंग आकर पीड़ित परिवार ने अमेरिका में ही कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया और सारे कॉल रिकॉर्ड्स और डिजिटल सबूत एफबीआई को सौंप दिए।अमेरिकी धरती पर जांच: एफबीआई (FBI) ने कैसे कसा पंजाब के इंस्पेक्टर पर शिकंजा?चूंकि रंगदारी और धमकी के लिए अमेरिकी टेलीकॉम नेटवर्क और इंटरनेशनल कॉल्स का इस्तेमाल किया गया था, इसलिए अमेरिकी कानूनों के तहत यह मामला सीधे एफबीआई के अधिकार क्षेत्र में आ गया। एफबीआई ने शुरुआती तकनीकी जांच और डिजिटल फॉरेंसिक के बाद पाया कि धमकियां वास्तव में पंजाब से ही दी जा रही थीं। अमेरिकी जांच एजेंसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर को अपनी ऑफिशियल चार्जशीट/जांच डायरी में नामजद कर लिया है।इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बाद अमेरिकी दूतावास के जरिए भारत सरकार और पंजाब के गृह मंत्रालय को भी एक सीक्रेट इनपुट भेजा गया है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री और पंजाब पुलिस महानिदेशक (DGP) ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपी इंस्पेक्टर को तुरंत सस्पेंड करने और उसके खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू करने के आदेश दे दिए हैं। इस मामले ने एक बार फिर विदेशों में रहने वाले पंजाबियों (NRIs) की सुरक्षा और पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पंजाब कांग्रेस के भीतर पिछले कई दिनों से चल रही खींचतान और बगावती सुरों पर आलाकमान ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व और पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी भूपेश बघेल ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि पंजाब में लीडरशिप को लेकर किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ही पंजाब कांग्रेस के 'राजा' बने रहेंगे। दिल्ली में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद आए इस फैसले ने जहां विरोधी गुट के हौसले पस्त कर दिए हैं, वहीं राजा वड़िंग के समर्थकों में जश्न का माहौल है।पंजाब में लगातार मिल रही चुनावी चुनौतियों और नेताओं की आपसी बयानबाजी के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि हाईकमान राज्य इकाई में कोई बड़ा फेरबदल कर सकता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने साफ शब्दों में अनुशासनहीनता बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी का पूरा फोकस आगामी रणनीतियों पर है, न कि आंतरिक गुटबाजी को हवा देने पर।सिद्धू और वड़िंग गुट में आर-पार! क्यों सुलग रही थी पंजाब कांग्रेस की सियासत?पंजाब कांग्रेस में कलह कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से राजा वड़िंग और नवजोत सिंह सिद्धू के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक बयानबाजी तेज हो गई थी। विरोधी खेमे का तर्क था कि राज्य में पार्टी को नए और आक्रामक चेहरे की जरूरत है। इस खींचतान के बीच कई वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली दरबार में डेरा डाल दिया था।नेताओं को उम्मीद थी कि प्रभारी बदलने के बाद पंजाब संगठन के ढांचे में भी बदलाव होगा। हालांकि, भूपेश बघेल ने सभी असंतुष्ट नेताओं की क्लास लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना सही है, लेकिन पार्टी लाइन से बाहर जाकर अनुशासन तोड़ना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कड़े रुख के बाद साफ है कि आलाकमान राजा वड़िंग के सांगठनिक काम और उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा जता रहा है।भूपेश बघेल का 'मिशन पंजाब': गुटबाजी खत्म करने के लिए बनाया नया 'पावर प्लान'पंजाब का प्रभार संभालते ही भूपेश बघेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिखरी हुई कांग्रेस को एक मंच पर लाना था। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई बंद कमरे की बैठक में बघेल ने दोटूक कहा, पार्टी एक व्यक्ति से नहीं, संगठन से चलती है। जिन्हें राजा वड़िंग के नेतृत्व से दिक्कत है, वे अपनी शिकायत सीधे मुझसे करें, न कि मीडिया के सामने जाकर तमाशा बनाएं।इस फैसले के जरिए कांग्रेस आलाकमान ने राज्य के कैडर को एक मजबूत संदेश दिया है कि लीडरशिप पूरी तरह स्थिर है। अब राजा वड़िंग के पास संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने की पूरी छूट होगी। जानकारों का मानना है कि इस कड़े फैसले से पंजाब कांग्रेस का आंतरिक क्लेश कुछ समय के लिए शांत जरूर हो सकता है, लेकिन असंतुष्ट गुट की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
PK की एंट्री से पलटा बांकीपुर का खेल? समर्थकों का दावा- '1 लाख वोटों से जीत तय
बिहार की सियासत में इस समय सबसे बड़ा भूचाल पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर आ चुका है। जहां एक तरफ भाजपा इस क्षेत्र को अपना अभेद्य किला मानती रही है, वहीं जन सुराज पार्टी के चुनावी मैदान में उतरने और खुद प्रशांत किशोर (PK) के यहां से सीधे ताल ठोकने के बाद पूरी बाजी पलटती हुई दिख रही है।चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही बांकीपुर की गलियों में राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। प्रशांत किशोर के समर्थकों ने अभी से एकतरफा माहौल का दावा करते हुए नारा बुलंद कर दिया है कि 'इस बार जीत 1 लाख से अधिक वोटों के अंतर से होगी।' यह दावा महज एक चुनावी नारा है या जमीनी हकीकत, इसने भाजपा और राजद (RJD) दोनों खेमों की नींद जरूर उड़ा दी है।प्रशांत किशोर का 'फर्स्ट इलेक्शन' और भाजपा के किले में सेंध की तैयारीचुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर पहली बार खुद किसी चुनाव में उम्मीदवार के रूप में जनता के सामने हैं। बांकीपुर सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि यहां से लगातार 5 बार जीत दर्ज करने वाले भाजपा के कद्दावर नेता नितिन नवीन को राज्यसभा भेजकर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय कर दिया गया है।भाजपा ने इस सीट को बचाने के लिए युवा चेहरे अभिषेक कुमार को मैदान में उतारा है, जबकि राजद की ओर से रेखा गुप्ता चुनौती दे रही हैं। लेकिन प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री ने इस पारंपरिक मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प बना दिया है। पीके के समर्थकों का कहना है कि बांकीपुर की जनता अब जाति और धर्म की पुरानी राजनीति से ऊब चुकी है और इस बार बदलाव के लिए रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग करेगी।बांकीपुर उपचुनाव: नीतीश-सम्राट सरकार के लिए 'लिटमस टेस्ट'प्रशांत किशोर ने इस चुनाव को महज एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि बिहार की मौजूदा एनडीए (NDA) सरकार के कामकाज पर एक 'रेफरेंडम' यानी जनमत संग्रह करार दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह उपचुनाव साख की लड़ाई बन चुका है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि बांकीपुर पटना का सबसे शिक्षित और शहरी इलाका माना जाता है, इसलिए यहां का वोटर जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर वोट करता रहा है। यही वजह है कि भाजपा जहां अपने पुराने विकास कार्यों और मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट्स के दम पर जीत का दावा कर रही है, वहीं जन सुराज पार्टी शिक्षा, रोजगार और व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे पर सीधे वोटरों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश कर रही है।क्या त्रिकोणीय मुकाबले में बिखर जाएगा विपक्ष का वोट बैंक?बांकीपुर का चुनावी इतिहास गवाह है कि यहां भाजपा को हमेशा करीब 60% के आसपास एकमुश्त वोट मिलते रहे हैं, जबकि विपक्ष 30% के फेर में फंसा रहता है। इस बार आरजेडी की रेखा गुप्ता और जनशक्ति जनता दल की ओर से वीना मानवी भी मैदान में हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशांत किशोर भाजपा के पारंपरिक शहरी वोट बैंक (विशेषकर कायस्थ और वैश्य मतदाता) में सेंध लगा पाएंगे, या फिर विपक्ष के वोटों का बिखराव एक बार फिर भाजपा के लिए राह आसान कर देगा?फिलहाल, समर्थकों का '1 लाख वोटों से जीत' का यह बड़ा दावा जमीन पर कितना तब्दील होता है, यह तो आने वाली 3 अगस्त को नतीजों के साथ ही साफ हो पाएगा।
बिहार की सियासत और आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर राजधानी पटना से सामने आ रही है। कांग्रेस के फायरब्रांड नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बहुप्रतीक्षित पटना दौरा अचानक रद्द (स्थगित) कर दिया गया है। राहुल गांधी पटना के मुसल्लहपुर हाट में युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद करने के लिए एक बड़ी पदयात्रा और 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की शुरुआत करने वाले थे। ऐन वक्त पर इस हाई-प्रोफाइल दौरे के टलने से बिहार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में निराशा है, तो वहीं दूसरी तरफ सियासी गलियारों में कयासों और अंदरखाने की चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है।कांग्रेस ने दी आधिकारिक सफाई, तारीखों में बदलाव की कही बातदौरा टलने की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और मीडिया चैनलों पर सुर्खियां बनी, कांग्रेस आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व तुरंत एक्टिव मोड में आ गया। पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अपरिहार्य कारणों और संगठनात्मक व्यस्तताओं के चलते इस कार्यक्रम की तारीखों में आंशिक बदलाव किया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी अब नई तारीख (संभावित 15 जुलाई) को पटना आएंगे और छात्रों के साथ उनका संवाद कार्यक्रम पहले से भी अधिक भव्य तरीके से आयोजित किया जाएगा। पार्टी ने साफ किया है कि इसे दौरा रद्द होना नहीं, बल्कि तारीख आगे बढ़ना माना जाए।अंदरखाने की चर्चा कुछ और, क्या सीट शेयरिंग और अंदरूनी कलह बनी वजह?भले ही पार्टी इसे केवल तारीखों का फेरबदल बता रही हो, लेकिन राजनीति के जानकारों और अंदरूनी सूत्रों का दावा कुछ और ही है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस दौरे के टलने के पीछे इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) के भीतर सीटों के तालमेल को लेकर चल रही खींचतान और बिहार कांग्रेस की हालिया अंदरूनी गुटबाजी एक मुख्य कारण हो सकती है। हाल ही में प्रदेश कांग्रेस की बैठकों में नेताओं के बीच आपसी तनातनी और टिकटों के बंटवारे को लेकर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए थे। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान पहले राज्य इकाई के इन आपसी मतभेदों को सुलझाना चाहता है, ताकि राहुल गांधी के दौरे के वक्त एकजुटता का संदेश दिया जा सके।'छात्रों की गूंज' और पेपर लीक मामले पर सरकार को घेरने की थी तैयारीआपको बता दें कि राहुल गांधी का यह बिहार दौरा राज्य के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को साधने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। देश में नीट (NEET) पेपर लीक और अन्य भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधलियों को लेकर राहुल गांधी पटना के मुसल्लहपुर हाट जैसे बड़े कोचिंग हब में जाकर छात्रों से सीधा संवाद करने वाले थे। इस रणनीति के जरिए कांग्रेस देश और प्रदेश की सरकार को युवाओं के रोजगार और परीक्षा प्रणाली के मुद्दे पर चौतरफा घेरने की तैयारी में थी। अब देखना यह होगा कि नई तारीखों के ऐलान के बाद बिहार में कांग्रेस इस फ्लैगशिप कार्यक्रम को किस तरह जमीन पर उतारती है।
बिहार के सीमांचल क्षेत्र को लेकर देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल के सुरक्षा, जनसांख्यिकी और विकास से जुड़े मुद्दों पर एक बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल बैठक करने जा रहे हैं। इस अचानक बुलाई गई बैठक के बाद से ही राजनीतिक पंडितों के बीच कयासों का दौर शुरू हो गया है कि आखिर सीमांचल में क्या बड़ा होने वाला है। इस बैठक में गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल हो सकते हैं।आखिर क्यों गृह मंत्री अमित शाह की रडार पर है सीमांचल?बिहार का सीमांचल क्षेत्र (जिसमें पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया जैसे जिले शामिल हैं) भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के नजदीक होने के कारण इस इलाके में घुसपैठ, अवैध प्रवासन और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां हमेशा बनी रहती हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य एजेंडा सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना और आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से उठ रहे गंभीर मुद्दों की समीक्षा करना है।विकास कार्यों की समीक्षा या कोई बड़ा रणनीतिक फैसला?इस अहम बैठक को लेकर यह भी चर्चा है कि केंद्र सरकार सीमांचल के विकास को लेकर कोई बड़ा रोडमैप तैयार कर रही है। पिछले कुछ समय से इस पिछड़े इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और रोजगार को लेकर मांगें उठती रही हैं। गृह मंत्री अमित शाह इस बैठक में केंद्रीय योजनाओं की जमीनी हकीकत का जायजा ले सकते हैं। हालांकि, जिस तरह से अचानक इस बैठक की रूपरेखा तैयार हुई है, उससे साफ संकेत मिलते हैं कि इसमें सिर्फ विकास ही नहीं, बल्कि कुछ कड़े और दूरगामी रणनीतिक फैसले भी लिए जा सकते हैं।राजनीतिक हलकों में मची खलबली, टिकी सबकी नजरेंविधानसभा चुनाव के समीकरणों और क्षेत्र की बदलती डेमोग्राफी को लेकर सीमांचल हमेशा से ही बिहार की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। ऐसे में देश के गृह मंत्री द्वारा इस क्षेत्र को लेकर सीधी दिलचस्पी दिखाने से विपक्षी दलों के खेमे में भी बेचैनी बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन और खुफिया तंत्र को भी इस बैठक के इनपुट्स को लेकर अलर्ट पर रखा गया है। बहरहाल, अमित शाह की इस बैठक की मेज से क्या निकलकर सामने आता है, इस पर न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
47 साल पुराना नर्मदा जल विवाद खत्म! राजस्थान सरकार गुजरात को देगी ₹550 करोड़
राजस्थान और गुजरात के बीच पिछले करीब पांच दशकों से चला आ रहा नर्मदा नदी के पानी और बिजली से जुड़ा बड़ा विवाद आखिरकार पूरी तरह से सुलझ गया है। 47 साल पुराने इस जटिल कानूनी और प्रशासनिक गतिरोध के खत्म होने से मरुधरा, विशेषकर पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के लिए विकास के नए द्वार खुल गए हैं। दोनों राज्यों के बीच बनी इस ऐतिहासिक सहमति के तहत राजस्थान सरकार गुजरात को ₹550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। इस बड़े फैसले के बाद जालोर और बाड़मेर जिले के लाखों किसानों और आम जनता के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है।आखिर क्या था 47 साल पुराना यह नर्मदा नदी विवाद?इस विवाद की शुरुआत दशकों पहले नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (NWDT) के फैसलों और उसके बाद नहर निर्माण की लागत व बिजली उत्पादन के हिस्सेदारी को लेकर हुई थी। राजस्थान को नर्मदा मुख्य नहर से अपने हिस्से का पानी तो मिल रहा था, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत, रखरखाव और गुजरात द्वारा किए गए दावों के वित्तीय सेटलमेंट को लेकर दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी। यह मामला लंबे समय से फाइलों और बैठकों में अटका हुआ था, जिसके कारण कई तकनीकी काम और पानी की सुचारू आपूर्ति प्रभावित हो रही थी।जालोर और बाड़मेर के रेगिस्तानी इलाकों को कैसे मिलेगा बड़ा फायदा?इस विवाद के हमेशा के लिए खत्म होने का सबसे सीधा और बड़ा फायदा पश्चिमी राजस्थान के जालोर और बाड़मेर जिलों को मिलने जा रहा है। इन दोनों ही जिलों के सैकड़ों गांवों की प्यास बुझाने और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई के लिए नर्मदा नहर ही एकमात्र सबसे बड़ा सहारा है। अब विवाद सुलझने के बाद नहर की क्षमता बढ़ाने, सिल्ट सफाई और टेल एंड (आखिरी छोर) तक पानी पहुंचाने के प्रोजेक्ट्स बिना किसी बाधा के पूरे हो सकेंगे। इससे क्षेत्र में ड्रिप इरिगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई) को बढ़ावा मिलेगा और रबी व खरीफ की फसलों का उत्पादन कई गुना बढ़ जाएगा।₹550 करोड़ के भुगतान के साथ ऐतिहासिक समझौते पर लगी मुहरदोनों राज्यों के शीर्ष अधिकारियों और सरकारों के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ताओं के बाद इस सेटलमेंट पर अंतिम मुहर लगी है। तय समझौते के अनुसार, राजस्थान सरकार गुजरात को बकाया और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग के रूप में ₹550 करोड़ रुपये अदा करने के लिए राजी हो गई है। राजनीतिक और प्रशासनिक पंडितों का मानना है कि यह फैसला न केवल दो राज्यों के बीच बेहतर अंतःराज्यीय संबंधों की मिसाल है, बल्कि यह देश के विकास में वाटर मैनेजमेंट और जनहित को सर्वोपरि रखने का एक बेहतरीन उदाहरण भी है।
किशनगढ़बास में अवैध पेट्रोलियम पदार्थ तस्करी का भंडाफोड़, 4400 लीटर पेट्रोलियम पदार्थ जब्त
अलवर। राजस्थान में खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़बास थाना क्षेत्र में पुलिस ने दो पिकअप वाहनों में भरे 4400 लीटर अवैध पेट्रोलियम पदार्थ जब्त करके दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। थाना प्रभारी बनवारी लाल मीणा ने बुधवार को बताया कि मंगलवार को देर शाम मुखबिर से सूचना मिली कि दो पिकअप वाहनों में बड़ी मात्रा […] The post किशनगढ़बास में अवैध पेट्रोलियम पदार्थ तस्करी का भंडाफोड़, 4400 लीटर पेट्रोलियम पदार्थ जब्त appeared first on Sabguru News .
हाड़ौती में आसमान से बरसेगी आफत! कोटा-झालावाड़ और बारां के लोग रहें सावधान, अगले 48 घंटे बेहद भारी
राजस्थान में मानसून की एंट्री के बाद अब मेघों ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों में अगले 48 घंटों के लिए बेहद डराने वाली चेतावनी जारी की है। खासकर हाड़ौती अंचल के कोटा, बारां और झालावाड़ जिलों में प्रकृति का सबसे भारी प्रहार देखने को मिल सकता है। मौसम केंद्र जयपुर ने इन तीनों जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी करते हुए आम जनता से बेहद सतर्क रहने और बिना किसी जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी है।कोटा, बारां और झालावाड़ में मूसलाधार बारिश का कहरमौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक नए वेदर सिस्टम के सक्रिय होने से हाड़ौती क्षेत्र में बादलों का भारी जमावड़ा हो रहा है। इसके प्रभाव से बारां, कोटा और झालावाड़ में अगले दो दिनों तक मूसलाधार से लेकर अत्यंत भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है। इस दौरान कुछ इलाकों में 8 इंच से भी ज्यादा पानी बरस सकता है, जिससे नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं और निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।नदी-नाले उफान पर, प्रशासन ने जारी की एडवायजरीलगातार हो रही बारिश के चलते चंबल, कालीसिंध और परवन जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन टीमों (SDRF) को अलर्ट मोड पर रख दिया है। जिला कलेक्टर्स ने लोगों से अपील की है कि वे उफनते हुए नालों, रपटों और जलभराव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें। पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों में रह रहे लोगों को सुरक्षित पक्के स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाओं की भी चेतावनीरेड अलर्ट वाले जिलों के अलावा जयपुर, उदयपुर, अजमेर और जोधपुर संभाग के कई जिलों में भी मध्यम से भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी रहेगा। मौसम विभाग ने साफ किया है कि इस बारिश के दौरान तेज रफ्तार से हवाएं चलेंगी और गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का भी पूरा खतरा बना हुआ है। बिजली कड़कने के समय पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचें। इस झमाझम बारिश से जहां एक तरफ लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ आम जनजीवन के अस्त-व्यस्त होने का संकट भी मंडरा रहा है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर से इस वक्त की एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे देश के चिकित्सा जगत और पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है। जयपुर के सबसे बड़े सवाई मानसिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष (HOD) डॉ. एनएल डिसानिया का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका हुआ मिला है। जो डॉक्टर खुद सालों से हत्या और आत्महत्या जैसे पेचीदा मामलों की गुत्थी सुलझाने के लिए फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम करते थे, उनकी इस तरह अचानक मौत की खबर से हर कोई हैरान है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी और साथी डॉक्टर मौके पर पहुंच गए हैं।कमरे में इस हाल में मिला शव, अस्पताल प्रशासन में मचा हड़कंपमिली जानकारी के अनुसार, घटना की भनक तब लगी जब डॉ. डिसानिया काफी देर तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकले और न ही किसी का फोन उठाया। अनहोनी की आशंका होने पर जब उनके कमरे के दरवाजे को खोला गया, तो अंदर का नजारा देखकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। डॉ. एनएल डिसानिया का शव फंदे से झूल रहा था। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। देखते ही देखते एसएमएस अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परिसर में साथी डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और स्टाफ की भारी भीड़ जमा हो गई।पुलिस जांच में जुटी, मौके पर बुलाई गई फोरेंसिक और FSL की टीमघटना की गंभीरता को देखते हुए जयपुर पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। चूंकि मामला खुद फोरेंसिक विभाग के इतने बड़े डॉक्टर की मौत से जुड़ा है, इसलिए पुलिस बेहद बारीकी से हर पहलू की जांच कर रही है। साक्ष्य जुटाने के लिए मौके पर फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को बुलाया गया है, जो कमरे से उंगलियों के निशान और अन्य तकनीकी सबूत इकट्ठा कर रही है। पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कमरे से कोई सुसाइड नोट मिला है या इस आत्मघाती कदम के पीछे की असली वजह क्या है।मेडिकल जगत में शोक की लहर, उठ रहे हैं कई गंभीर सवालडॉ. एनएल डिसानिया राजस्थान के चिकित्सा जगत के एक बेहद सम्मानित और अनुभवी डॉक्टर थे। उन्होंने अपने करियर में कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों में फोरेंसिक जांच कर न्याय दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उनके इस तरह अचानक दुनिया छोड़ जाने से उनके साथी डॉक्टर्स और छात्र गहरे सदमे में हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वह पिछले कुछ समय से किसी मानसिक तनाव या काम के भारी दबाव से गुजर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है और विस्तृत जांच व रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।
छत्तीसगढ़ में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी! 19 राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अधिकारियों का बंपर तबादला
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य शासन ने ब्यूरोक्रेसी में कसावट लाने और मैदानी स्तर पर कामकाज को और अधिक पारदर्शी व गतिशील बनाने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के तहत राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के 19 वरिष्ठ अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया है। अचानक जारी हुई इस बड़ी सूची के बाद पूरे प्रशासनिक अमले में भारी हलचल देखने को मिल रही है।मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक बदले गए कई चेहरेमहानदी भवन (नवा रायपुर) स्थित मंत्रालय से जारी इस तबादला सूची में कई वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों के नाम शामिल हैं। सरकार ने इस फेरबदल के जरिए न केवल मंत्रालय स्तर के विभागों को री-स्ट्रक्चर करने का प्रयास किया है, बल्कि कई जिलों में अनुविभागीय अधिकारी (SDM), संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर स्तर के पदों पर भी नए चेहरों की तैनाती की है। तबादला नीति के तहत कई ऐसे अफसरों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है जो लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे हुए थे।इन प्रमुख अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में हुआ अहम बदलावशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारी राजीव कुमार पांडेय को उच्च शिक्षा संचालनालय में नई पोस्टिंग दी गई है। वहीं, प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए भारती चंद्राकर को मार्कफेड और दिनेश कुमार नाग को छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर भेजा गया है। इसके अलावा, नयनतारा सिंह तोमर को चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि आशुतोष चतुर्वेदी को जिला पंचायत बलरामपुर-रामानुजगंज और अभिषेक कुमार गुप्ता को जिला पंचायत मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है।खेल और इंफ्रास्ट्रक्चर विभागों में भी नए चेहरों की एंट्रीइस प्रशासनिक सर्जरी के तहत प्रभाकर पांडेय को खेल एवं युवा कल्याण विभाग में पदस्थ किया गया है, जहां उन पर युवाओं से जुड़ी खेल योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। दूसरी तरफ, शशांक पांडेय को छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में नई जिम्मेदारी दी गई है। सरकार के इस कड़े कदम से साफ संकेत मिलता है कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी 19 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पुराने प्रभार सौंपकर नए स्थानों पर ज्वाइन करने का सख्त निर्देश जारी किया है।
छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त और अधिक गतिशील बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ब्यूरोक्रेसी में एक बहुत बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। शासन द्वारा जारी ताजा आदेश के तहत भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के कई वरिष्ठ और युवा अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। इस बड़े फेरबदल की सबसे खास बात यह है कि राज्य के पांच महत्वपूर्ण जिलों के जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) को बदल दिया गया है, जबकि कई अन्य वरिष्ठ आईएएस अफसरों को नई और बड़ी जिम्मेदारियों से नवाजा गया है।प्रशासनिक कसावट लाने के लिए राज्य सरकार का बड़ा कदममुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से जारी इस आधिकारिक सूची के बाद पूरे प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि मैदानी स्तर पर विकास कार्यों में तेजी लाने, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कसावट को मजबूत करने के लिए ही यह कदम उठाया गया है। तबादला सूची में शामिल सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए पदों का कार्यभार संभालने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।इन पांच जिलों के जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बदलेशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, जिन पांच जिला पंचायतों के सीईओ बदले गए हैं, उनमें राज्य के प्रमुख विकासखंड और ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। इन पदों पर नए और ऊर्जावान आईएएस अधिकारियों की तैनाती की गई है ताकि ग्रामीण विकास योजनाओं, मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को जमीनी स्तर पर नई गति दी जा सके। इसके साथ ही, कुछ जिलों के सीईओ को प्रमोट करके मंत्रालय और अन्य विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को मिली नई और अतिरिक्त जिम्मेदारीइस प्रशासनिक सर्जरी के तहत न केवल मैदानी स्तर के अधिकारियों के तबादले हुए हैं, बल्कि मंत्रालय (महानदी भवन) स्तर पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कुछ वरिष्ठ आईएएस अफसरों के विभागों में फेरबदल करते हुए उन्हें अतिरिक्त प्रभार सौंपे गए हैं। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि जनहित के कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई न हो और नए विजन के साथ अधिकारी अपनी भूमिका निभाएं। आने वाले दिनों में कुछ और विभागों में भी इसी तरह के आंशिक फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।
दुबई के बाद ओमान में दबोचा गया सट्टेबाजी किंग! महादेव ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार
करोड़ों रुपये के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप (Mahadev Betting App Case) घोटाले से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। भारत की केंद्रीय जांच एजेंसियों की रडार पर चल रहे ऐप के मुख्य संचालक और मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान में कानून के रखवालों ने दबोच लिया है। लंबे समय से लुकआउट नोटिस और रेड कॉर्नर नोटिस का सामना कर रहे इस भगोड़े आरोपी पर इस बार फर्जी दस्तावेजों के सहारे सीमा पार करने का गंभीर आरोप लगा है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने राहत की सांस ली है और उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है।फर्जी पासपोर्ट का जाल बिछाकर ओमान में मारी थी एंट्रीमिली जानकारी के अनुसार, सौरभ चंद्राकर अपनी पहचान छिपाने और वैश्विक जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए लगातार नए-नए पैंतरे बदल रहा था। वह दुबई से भागकर फर्जी नाम और जाली पासपोर्ट के जरिए ओमान में दाखिल होने की फिराक में था। हालांकि, ओमान के सुरक्षा अधिकारियों और एयरपोर्ट इमिग्रेशन को उसके दस्तावेजों पर गहरा शक हुआ। जब कड़ाई से जांच की गई तो उसकी असली पहचान का खुलासा हो गया, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया।भारतीय जांच एजेंसियां अलर्ट, प्रत्यर्पण के लिए दस्तावेज तैयारजैसे ही सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी की सूचना इंटरपोल के माध्यम से भारत पहुंची, वैसे ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम पूरी तरह सक्रिय हो गई है। विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर भारतीय खुफिया एजेंसियां ओमान सरकार से संपर्क साध रही हैं। चूंकि चंद्राकर के खिलाफ भारत में मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों की धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत मौजूद हैं, इसलिए उसे जल्द से जल्द भारत डिपोर्ट या प्रत्यर्पित (Extradite) कराने की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं ताकि उसे भारतीय अदालत के सामने पेश किया जा सके।फिल्म सितारों से लेकर सट्टेबाजों तक, सबकी बढ़ेगी मुश्किलेंसौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी से भारत के कई रसूखदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। महादेव ऐप मामले की जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि सट्टेबाजी के इस काले पैसे का इस्तेमाल बॉलीवुड के कई बड़े अभिनेताओं, मशहूर हस्तियों और राजनेताओं को प्रमोट करने और इवेंट्स आयोजित करने में किया गया था। चंद्राकर के भारत आते ही इस सिंडिकेट के कई बड़े और नए राज खुलेंगे, जिससे आने वाले दिनों में देश के कई बड़े चेहरों पर कानून का शिकंजा कसना बिल्कुल तय माना जा रहा है।
झारखंड की सियासत और ब्यूरोक्रेसी से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी खबर राजधानी रांची से सामने आ रही है। राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले (Liquor Scam Case) की जांच की आंच अब कांग्रेस के बड़े नेताओं तक पहुंच चुकी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और सूबे के पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव आज रांची स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे हैं। ईडी की टीम उनसे इस पूरे कथित घोटाले के सिंडिकेट और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं को लेकर गहन पूछताछ कर रही है, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।सुबह ही ईडी दफ्तर पहुंचे रामेश्वर उरांव, बढ़ाई गई सुरक्षामिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी द्वारा जारी समन के बाद कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव निर्धारित समय पर रांची के हिनू स्थित ईडी दफ्तर पहुंचे। उनके आगमन को देखते हुए ईडी कार्यालय के बाहर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। रामेश्वर उरांव के दफ्तर के भीतर जाते ही अधिकारियों की एक विशेष टीम ने उनसे पूछताछ का सिलसिला शुरू कर दिया, जो पिछले कई घंटों से लगातार जारी है।आखिर क्या है झारखंड का यह बहुचर्चित शराब घोटाला?यह पूरा मामला झारखंड में नई उत्पाद नीति (Liquor Policy) के लागू होने के दौरान हुए करोड़ों रुपये के कथित राजस्व नुकसान और अवैध कमाई से जुड़ा हुआ है। ईडी का आरोप है कि इस नीति को तैयार करने और लागू कराने में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं, जिसका फायदा कुछ खास सिंडिकेट और बिचौलियों को पहुंचाया गया। इस मामले में जांच एजेंसी पहले भी कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है और कुछ प्रमुख आरोपियों से मिली जानकारियों के आधार पर ही अब रामेश्वर उरांव को पूछताछ के दायरे में लिया गया है।राजनीतिक बयानबाजी तेज, अगले कदम पर टिकी सबकी नजरेंझारखंड विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े राज्य में इस तरह की कार्रवाई ने राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। सत्ताधारी गठबंधन जहां इसे विपक्ष को परेशान करने वाली केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग बता रहा है, वहीं विपक्षी दल बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रही है। बहरहाल, ईडी कार्यालय के भीतर रामेश्वर उरांव से हो रही इस पूछताछ से क्या नए तथ्य निकलकर सामने आते हैं और जांच एजेंसी का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री में विस्फोट, 3 श्रमिकों की मौत
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित थ्रीडी फैक्ट्री में मंगलवार की शाम भीषण विस्फोट से तीन श्रमिकों की मौत हो गई। घटना इतनी भयावह थी कि एक श्रमिक का पैर कटकर करीब 10 फीट दूर जा गिरा। घटना के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस के अनुसार, हादसे की […] The post रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री में विस्फोट, 3 श्रमिकों की मौत appeared first on Sabguru News .
झारखंड की राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में इन दिनों उल्लास और भक्ति का माहौल है। भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के भव्य रथ यात्रा महोत्सव की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। हर साल की तरह इस साल भी रांची के धुर्वा स्थित जगन्नाथपुर में विशाल मेले का आयोजन होने जा रहा है। इस बार का यह आयोजन इसलिए भी बेहद खास होने वाला है, क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद इस पावन रथ यात्रा महोत्सव में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेंगे और राज्यवासियों की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।16 जुलाई से सजेगा आस्था का ऐतिहासिक मेलास्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस भव्य महोत्सव का आगाज 16 जुलाई से होने जा रहा है। आपको बता दें कि रांची का जगन्नाथपुर मेला सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का एक बहुत बड़ा केंद्र है। 16 जुलाई से शुरू होने वाले इस मेले में लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। मंदिर परिसर को बेहद खूबसूरती से सजाया जा रहा है और रथ को भी पारंपरिक तरीके से अंतिम रूप दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाममुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रथ यात्रा में शामिल होने की पुष्टि के बाद रांची जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। वीआईपी मूवमेंट और लाखों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों से पूरे मेला परिसर की निगरानी की जाएगी। प्रशासन का मुख्य फोकस इस बात पर है कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।झारखंड की संस्कृति और परंपरा का दिखेगा अनूठा संगमजगन्नाथपुर रथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, कला और परंपरा का एक जीवंत उदाहरण है। मेले में सजने वाली स्थानीय हस्तशिल्प की दुकानें, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल इस महोत्सव की रौनक को और बढ़ा देते हैं। सीएम हेमंत सोरेन की मौजूदगी से इस आयोजन की भव्यता में और भी इजाफा होगा। रांची समेत पूरे राज्य के लोगों को 16 जुलाई का बेसब्री से इंतजार है, जब भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए रथ पर सवार होकर निकलेंगे।
झारखंड में आज आसमान से बरसेगी आफत! रांची-देवघर समेत 15 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट
झारखंड के कई इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम विभाग की ओर से एक बेहद जरूरी और बड़ी चेतावनी सामने आई है। राज्य में मानसून की सक्रियता बढ़ने के कारण मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। रांची स्थित मौसम केंद्र ने प्रदेश के 15 जिलों में झमाझम बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं चलने और खतरनाक आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का येलो अलर्ट जारी किया है। अगर आप भी आज घर से बाहर निकलने वाले हैं, तो मौसम का हाल और अपने जिले की स्थिति को जानना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।इन 15 जिलों में जारी हुआ हाई अलर्ट, छाए रहेंगे काले बादलमौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, जिन जिलों में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है, उनमें राजधानी रांची, बाबा नगरी देवघर, दुमका, धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रामगढ़, हजारीबाग, जामताड़ा, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज शामिल हैं। इन इलाकों में सुबह से ही बादलों की आवाजाही शुरू हो चुकी है और कई जगहों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश की प्रबल संभावना जताई गई है।वज्रपात को लेकर मौसम विभाग की खास अपील, भूलकर भी न करें ये गलतीझारखंड में मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से हर साल जान-माल का बड़ा नुकसान होता है। इसे देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने आम जनता से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। चेतावनी में साफ कहा गया है कि जब मौसम खराब हो या बिजली कड़क रही हो, तो किसान और आम नागरिक खेतों में जाने से बचें। इस दौरान भूलकर भी ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों या कच्चे मकानों के नीचे शरण न लें। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल बंद कर दें और सुरक्षित पक्के मकानों के अंदर ही रहें।खेती-किसानी के लिए राहत, तापमान में आएगी भारी गिरावटजहां एक तरफ वज्रपात का डर बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ इस बारिश से झारखंड के अन्नदाताओं के चेहरे खिल उठे हैं। धान की रोपनी के सीजन में इस बारिश को फसलों के लिए अमृत माना जा रहा है। लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के कारण पूरे राज्य के अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे पिछले कुछ दिनों से उमस और गर्मी झेल रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। स्थानीय प्रशासन ने भी प्रभावित जिलों के अधिकारियों को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं।
दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश के लिए मशहूर मेघालय मानसून के दौरान किसी जन्नत से कम नहीं लगता। चारों तरफ फैली हरी-भरी वादियां, बादलों की लुकाछिपी और पहाड़ों से गिरते दूधिया झरने हर किसी को अपनी ओर खींचते हैं। यही वजह है कि बरसात शुरू होते ही देश-विदेश से सैलानी शिलांग, चेरापूंजी और मावलिननोंग की तरफ रुख करने लगते हैं। लेकिन याद रखिए, मानसून में पूर्वोत्तर (North East India) का यह खूबसूरत राज्य जितना आकर्षक होता है, उतनी ही चुनौतियां भी पेश करता है। अगर आप भी इस मौसम में मेघालय का दीदार करने जा रहे हैं, तो इन 5 बेहद जरूरी बातों को बिल्कुल न भूलें।1. अत्यधिक और अनप्रेडिक्टेबल बारिश के लिए रहें तैयारमेघालय का नाम ही 'मेघों का आलय' यानी बादलों का घर है। मानसून के महीनों में यहां इतनी मूसलाधार बारिश होती है जिसका अंदाजा लगाना आम मैदानी इलाकों के लोगों के लिए मुश्किल है। यहां मिंटों में धूप गायब हो जाती है और घने बादल पूरे रास्ते को ब्लॉक कर देते हैं। इसलिए अपने साथ मजबूत छाता, हाई-क्वालिटी रेनकोट और वाटरप्रूफ बैग कवर हमेशा रखें। आपकी पैकिंग ऐसी होनी चाहिए कि भारी से भारी बारिश में भी आपका मोबाइल, कैमरा और कपड़े पूरी तरह सुरक्षित रहें।2. लैंडस्लाइड और रास्तों के लाइव अपडेट पर रखें नजरभारी बारिश के चलते मेघालय के पहाड़ी रास्तों, खासकर शिलांग-गुवाहाटी हाईवे और चेरापूंजी के अंदरूनी रूटों पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) का खतरा काफी बढ़ जाता है। कई बार सड़कों पर बड़े-बड़े पत्थर गिरने से ट्रैफिक घंटों ठप रहता है। यात्रा पर निकलने से पहले और सफर के दौरान स्थानीय समाचारों, सोशल मीडिया ट्रैफिक अपडेट्स और मौसम विभाग (IMD) की चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखें।3. विजिबिलिटी की समस्या और ड्राइविंग की चुनौतियांबरसात के दिनों में मेघालय की सड़कों पर अचानक इतना घना कोहरा और बादल छा जाते हैं कि चंद मीटर आगे का देख पाना भी नामुमकिन हो जाता है। अगर आप खुद गाड़ी ड्राइव कर रहे हैं या बाइक ट्रिप पर हैं, तो बेहद सतर्क रहें और गाड़ी की फॉग लाइट्स व इंडिकेटर्स को दुरुस्त रखें। पहाड़ों पर घुमावदार और फिसलन भरे रास्तों पर गाड़ी चलाने का अनुभव न होने पर, स्थानीय टैक्सी या अनुभवी लोकल ड्राइवर की मदद लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।4. वाटरप्रूफ ट्रैकिंग शूज और एक्स्ट्रा नकद (Cash) साथ रखेंमेघालय की सबसे खूबसूरत जगहें जैसे डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज या प्रसिद्ध गुफाएं (Caves) तक पहुंचने के लिए आपको काफी पैदल चलना और ट्रैकिंग करनी पड़ती है। मानसून में इन रास्तों और सीढ़ियों पर काई जम जाती है, जिससे भारी फिसलन होती है। इसलिए सामान्य जूतों के बजाय अच्छी ग्रिप वाले वाटरप्रूफ ट्रैकिंग शूज ही पहनें। इसके अलावा, अंदरूनी इलाकों में नेटवर्क की भारी समस्या के चलते ऑनलाइन पेमेंट (UPI) फेल हो जाते हैं, इसलिए अपने पास पर्याप्त कैश जरूर रखें।5. एडवांस बुकिंग और स्थानीय प्रशासन की गाइडलाइंस का पालनमानसून के सीजन में भी मेघालय में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसके कारण अच्छे होटल्स और होमस्टे जल्दी फुल हो जाते हैं। ऐन वक्त पर भटकने से बचने के लिए अपनी बुकिंग पहले से कन्फर्म करके ही घर से निकलें। इसके साथ ही मेघालय टूरिज्म और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए सेफ्टी रूल्स और हेल्पलाइन नंबरों को अपने पास नोट करके रखें ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।
कांच जैसा साफ पानी और जन्नत सा नजारा! लद्दाख से सिक्किम तक ये हैं भारत की 6 सबसे खूबसूरत झीलें
भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रदूषण से दूर अगर आप किसी ऐसी जगह जाने की सोच रहे हैं जहां कुदरत का असली जादू देखने को मिले, तो भारत की ये खूबसूरत झीलें आपका दिल जीत लेंगी। हमारे देश में प्राकृतिक सौंदर्य का ऐसा खजाना छुपा है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं। लद्दाख के बर्फीले पहाड़ों से लेकर सिक्किम की हरी-भरी वादियों तक, भारत में कई ऐसी झीलें हैं जिनका पानी इतना साफ और पारदर्शी है कि आप उसमें अपना चेहरा तक देख सकते हैं। आइए जानते हैं देश की उन 6 सबसे स्वच्छ और जादुई झीलों के बारे में, जिन्हें हर ट्रैवलर को अपनी बकेट लिस्ट में जरूर शामिल करना चाहिए।1. पैंगोंग त्सो झील (लद्दाख) - रंगों को बदलता कुदरत का अजूबालद्दाख में स्थित पैंगोंग त्सो झील दुनिया की सबसे खूबसूरत और मशहूर झीलों में से एक है। लगभग 14,270 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस झील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका पानी दिन के अलग-अलग समय पर अपना रंग बदलता नजर आता है। नीले, हरे और हल्के भूरे रंग की दिखने वाली यह झील सर्दियों में पूरी तरह जम जाती है। इसका साफ और क्रिस्टल क्लियर पानी चारों तरफ फैले पहाड़ों के साथ मिलकर एक अकल्पनीय दृश्य पैदा करता है।2. गुरुडोंगमार झील (सिक्किम) - पवित्रता और सौंदर्य का बेजोड़ संगमउत्तरी सिक्किम में स्थित गुरुडोंगमार झील भारत की सबसे ऊंची झीलों में शुमार है। लगभग 17,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस झील को बेहद पवित्र माना जाता है। इस झील का पानी इतना पारदर्शी और शुद्ध है कि कड़ाके की ठंड में भी इसका एक हिस्सा कभी नहीं जमता। बौद्ध और सिख धर्म के लोगों के लिए आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ यह जगह एडवेंचर के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।3. उमंगोट झील (मेघालय) - जहां हवा में तैरती हुई दिखती हैं नावेंमेघालय के दावकी कस्बे में स्थित उमंगोट झील को भारत की सबसे साफ झील का दर्जा प्राप्त है। इस झील का पानी इस कदर पारदर्शी है कि जब इस पर नावें चलती हैं, तो ऐसा भ्रम होता है जैसे वे किसी कांच के ऊपर या हवा में तैर रही हों। झील के नीचे पड़े पत्थर, कंकड़ और मछलियां सतह से बिल्कुल साफ नजर आती हैं। स्वच्छता के मामले में इस जगह का मुकाबला पूरी दुनिया में कोई नहीं कर सकता।4. त्सोमगो झील (सिक्किम) - पहाड़ों के बीच छुपी एक जादुई दुनियापूर्वी सिक्किम में स्थित त्सोमगो झील, जिसे स्थानीय लोग 'चांगू लेक' भी कहते हैं, अपनी अलौकिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। बर्फ से ढकी चोटियों के बीच घिरी यह झील सर्दियों में पूरी तरह बर्फ की सफेद चादर में तब्दील हो जाती है, जबकि गर्मियों में इसके आसपास खिले रंग-बिरंगे फूल इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। इस झील का पानी पहाड़ों के ग्लेशियर से आता है, जिसके कारण यह बेहद शुद्ध और साफ रहता है।5. पराशर झील (हिमाचल प्रदेश) - तैरते हुए द्वीप का रहस्यहिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित पराशर झील अपने आप में एक बड़ा रहस्य और आकर्षण का केंद्र है। चारों तरफ से धौलाधार की पहाड़ियों से घिरी इस गहरी नीली झील के बीच में एक छोटा सा घास का द्वीप है, जो समय-समय पर अपनी जगह बदलता रहता है यानी पानी पर तैरता है। इस झील के किनारे तीन मंजिला भव्य पैगोडा शैली का मंदिर भी स्थित है, जो इस जगह को बेहद शांत और आध्यात्मिक बनाता है।6. डल झील (श्रीनगर, कश्मीर) - धरती का स्वर्ग और साफ पानी का सम्मोहनकश्मीर की वादियों का जिक्र हो और डल झील का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। हालांकि पर्यटन के कारण इस पर दबाव बढ़ा है, लेकिन इसके कुछ अंदरूनी हिस्से आज भी बेहद साफ और शांत हैं। सुबह के वक्त जब सूरज की किरणें इसके साफ पानी पर पड़ती हैं, तो तैरते हुए शिकार और हाउसबोट्स का नजारा देखने लायक होता है। यह झील कश्मीर की संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का सबसे बड़ा प्रतीक है।
गुजरात में 5 वेदर सिस्टम सक्रिय होने से भारी आफत, समंदर में बदला नवसारी शहर
Navsari floods: गुजरात पर एक साथ पांच शक्तिशाली मौसम प्रणालियों (Weather Systems) के सक्रिय होने से दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र में प्रकृति ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। मूसलाधार बारिश के चलते नवसारी शहर पूरी तरह जलमग्न होकर समंदर में तब्दील हो गया ...
बॉक्स ऑफिस पर 'ऐल्फा' का जलवा! 5वें दिन पकड़ी ऐसी रफ्तार कि 70 करोड़ के पार पहुंची कमाई
स्पाई थ्रिलर फिल्म 'ऐल्फा' ने सिनेमाघरों में आते ही धमाल मचा दिया है। रिलीज के पांचवें दिन इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ और भी मजबूत कर ली है। आंकड़ों की मानें तो फिल्म की कमाई में 10 फीसदी का जबरदस्त उछाल देखने को मिला है, जिसने ट्रेड पंडितों को भी हैरान कर दिया है। न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के बाजारों में इस फिल्म का क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है। महज कुछ ही दिनों में 'ऐल्फा' का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 70 करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर चुका है, जो इस स्पाई थ्रिलर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।क्यों 'ऐल्फा' बनी दर्शकों की पहली पसंद?'ऐल्फा' की सफलता के पीछे मुख्य कारण इसका सस्पेंस और हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस हैं। दर्शकों को फिल्म की कहानी इतनी पसंद आ रही है कि वे इसे बार-बार देख रहे हैं, जिसका सीधा असर इसके 'माउथ पब्लिसिटी' पर पड़ा है। पांचवें दिन भी थिएटरों में ऑक्यूपेंसी रेट काफी बेहतर रहा है। फिल्म के एक्शन और किरदारों की दमदार अदाकारी को क्रिटिक्स से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। 'ऐल्फा' का स्पाई थ्रिलर जॉनर हमेशा से दर्शकों को आकर्षित करता रहा है, और इस फिल्म ने उस उम्मीद पर पूरी तरह खरा उतरकर बॉक्स ऑफिस पर अपनी बादशाहत कायम की है।दुनियाभर में 'ऐल्फा' का दमफिल्म का ग्लोबल प्रदर्शन लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है। विदेशों में भी भारतीय मूल की इस स्पाई फिल्म को काफी पसंद किया जा रहा है। 70 करोड़ का आंकड़ा पार करने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या फिल्म आने वाले वीकेंड तक 100 करोड़ के क्लब में शामिल हो पाएगी? ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस गति से फिल्म आगे बढ़ रही है, यह आंकड़ा हासिल करना नामुमकिन नहीं है। सोशल मीडिया पर भी #AlphaMovie को लेकर फैंस लगातार उत्साह दिखा रहे हैं, जिससे फिल्म की लोकप्रियता और बढ़ती जा रही है।वीकेंड पर और बढ़ेगा कारोबार?आने वाले दिनों में 'ऐल्फा' के लिए बॉक्स ऑफिस की राह और भी आसान हो सकती है। अगर फिल्म इसी तरह अपनी रफ्तार बरकरार रखती है, तो यह साल की सबसे बड़ी स्पाई थ्रिलर फिल्मों में से एक बनकर उभरेगी। थिएटर मालिकों का कहना है कि अगले वीकेंड के लिए भी बुकिंग में काफी इजाफा देखा जा रहा है। अगर आप भी अभी तक इस सस्पेंस से भरी फिल्म को नहीं देख पाए हैं, तो सिनेमाघरों में यह फिल्म एक बेहतरीन अनुभव साबित हो सकती है। 'ऐल्फा' ने साबित कर दिया है कि अगर कंटेंट दमदार हो, तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान रच सकती है।
देश भर के मेधावी छात्रों के लिए खुशखबरी! जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) में कक्षा 6 में प्रवेश के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। जो छात्र और अभिभावक अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए इस प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे अब आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इन विद्यालयों में एडमिशन की दौड़ शुरू हो चुकी है, और परीक्षा की तारीखों का भी ऐलान कर दिया गया है। 28 नवंबर को आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा के जरिए छात्र नवोदय के सुनहरे सफर की शुरुआत कर सकते हैं।ऐसे करें आवेदन और महत्वपूर्ण तारीखेंनवोदय विद्यालय समिति (NVS) की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार, आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नवोदय विद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट navodaya.gov.in पर जाकर समय रहते रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें। आवेदन करते समय कक्षा 5 की मार्कशीट, निवास प्रमाण पत्र और आधार कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज अपने पास रखें। आवेदन की अंतिम तिथि को लेकर किसी भी प्रकार की चूक न करें, क्योंकि निर्धारित समय के बाद किसी भी फॉर्म को स्वीकार नहीं किया जाएगा। परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड भी निर्धारित समय पर वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे।प्रवेश परीक्षा का स्वरूप और तैयारी के टिप्सजवाहर नवोदय विद्यालय सिलेक्शन टेस्ट (JNVST) की परीक्षा में मुख्य रूप से तीन सेक्शन होते हैं: मानसिक योग्यता (Mental Ability), अंकगणित (Arithmetic) और भाषा परीक्षण (Language Test)। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास जरूर करें। परीक्षा पूरी तरह से ओएमआर (OMR) आधारित होगी, इसलिए छात्रों को समय प्रबंधन (Time Management) पर विशेष ध्यान देना चाहिए। चूंकि नवोदय विद्यालयों में दाखिला काफी प्रतिस्पर्धी होता है, इसलिए परीक्षा की तैयारी में पूरी एकाग्रता और नियमित अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।क्यों खास है नवोदय विद्यालय में पढ़ाई?नवोदय विद्यालय ग्रामीण इलाकों के प्रतिभाशाली बच्चों को मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं। यहाँ पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, आर्ट्स और पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर भी उतना ही जोर दिया जाता है। एक बार सिलेक्शन होने के बाद छात्र को कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा, रहने और खाने की सुविधा मिलती है। यह ग्रामीण भारत के छात्रों के लिए एक बेहतरीन अवसर है। अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इस मौके को हाथ से न जाने दें और जल्द ही आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें।
JEE Main की परीक्षा में लाखों रैंक आने के बाद अक्सर छात्र उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन एक छात्र की कहानी ने इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया में सबको चौंका दिया है। 13.90 लाख जैसी बड़ी रैंक लाने के बाद भी एक छात्र ने NIT (National Institute of Technology) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में सीट हासिल कर ली है। यह खबर उन लाखों युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है जो रैंक कम आने पर हताश हो जाते हैं। इस छात्र ने केमिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में दाखिला लेकर यह साबित कर दिया है कि सही गाइडेंस और काउंसलिंग के जरिए नामुमकिन को भी मुमकिन बनाया जा सकता है।कैसे मिली 13 लाख रैंक पर NIT में एंट्री?इंजीनियरिंग के जानकारों के अनुसार, यह कमाल 'स्पेशल राउंड काउंसलिंग' (CSAB) और कैटेगरी कोटा का सही उपयोग करने से संभव हुआ है। अक्सर छात्र मुख्य काउंसलिंग (JoSAA) के बाद रुक जाते हैं, लेकिन CSAB राउंड में कई बार उन सीटों पर भी दाखिला मिल जाता है जो सामान्य राउंड में खाली रह जाती हैं। छात्र ने अपनी कैटेगरी, होम स्टेट कोटा और ब्रांच के प्रति अपनी प्राथमिकता का बेहतर तालमेल बिठाया। यह उदाहरण उन छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है जो केवल टॉप ब्रांच या टॉप कॉलेज के चक्कर में अपनी सीट गंवा देते हैं। केमिकल इंजीनियरिंग में सीट का मिलना भी इसी रणनीतिक चुनाव का हिस्सा रहा।'नीची रैंक' वाले छात्रों के लिए काउंसलिंग का महत्वNIT जैसे प्रीमियम संस्थानों में एडमिशन केवल टॉप रैंकर्स का हक नहीं है, बल्कि यह काउंसलिंग की एक कला है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 13.90 लाख रैंक पर सीट मिलना यह दर्शाता है कि छात्र ने चॉइस फिलिंग बहुत ही बारीकी से की थी। इसमें लोअर एनआईटी और कम डिमांड वाली लेकिन करियर के लिहाज से बेहतरीन केमिकल जैसी ब्रांच को चुनने की समझदारी दिखाई गई। अगर आप भी JEE Main में औसत रैंक लाए हैं, तो घबराने के बजाय काउंसलिंग के हर राउंड और वैकेंट सीटों (Vacant Seats) पर अपनी नजर रखें।केमिकल इंजीनियरिंग: भविष्य के लिए एक बेहतरीन विकल्पकेमिकल इंजीनियरिंग आज के दौर में तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। इसमें न केवल सरकारी नौकरियों के मौके हैं, बल्कि निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में भी केमिकल इंजीनियर्स की भारी मांग रहती है। 13.90 लाख रैंक पर भी NIT में दाखिला पाने वाले इस छात्र ने दिखाया है कि डिग्री की अहमियत रैंक से कहीं ज्यादा होती है। यह एडमिशन न केवल उसकी मेहनत का फल है, बल्कि यह भी बताता है कि सही समय पर लिया गया सही निर्णय आपके करियर को एक नई दिशा दे सकता है। अब यह छात्र देश के सबसे बेहतरीन शैक्षणिक माहौल में अपने इंजीनियरिंग सफर की शुरुआत करेगा।
इतिहास के पन्नों को एक बार फिर से पलटा जा रहा है। NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों में भारत के विभाजन और उस दौरान कांग्रेस की भूमिका को लेकर किए गए बदलावों ने राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। क्या 1947 का बंटवारा एकमात्र समाधान था? या क्या इसे टाला जा सकता था? नई किताबों में इन संवेदनशील विषयों को नए सिरे से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उस दौर की परिस्थितियों और कांग्रेस के फैसलों का विश्लेषण अधिक गहराई से किया गया है। यह बदलाव न केवल छात्रों के लिए एक नया नजरिया लेकर आया है, बल्कि इतिहास लेखन की आधुनिक व्याख्या को भी प्रदर्शित करता है।बंटवारे की मजबूरी और कांग्रेस का रुखनई NCERT की किताबों में विभाजन से जुड़े उन पहलुओं को प्रमुखता से रखा गया है, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के इतिहास में कमतर आंका गया था। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि 1947 की स्थिति कितनी जटिल थी और तत्कालीन नेतृत्व के सामने क्या चुनौतियां थीं। नई पाठ्यपुस्तकें इस बहस को जन्म देती हैं कि क्या उस समय के राजनीतिक निर्णयों में दूरदर्शिता की कमी थी, या फिर देश की अखंडता और संप्रभुता के लिए बंटवारा एक 'अपरिहार्य सत्य' बन गया था। कांग्रेस की भूमिका को अब उन घटनाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिन्होंने उस समय के भारत के मानचित्र को बदलने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।क्यों हो रहा है इतिहास का पुनर्मूल्यांकन?इतिहास को वर्तमान के आईने में देखने की प्रक्रिया हमेशा से विवादास्पद रही है। NCERT के इन नए संशोधनों का उद्देश्य छात्रों को केवल 'क्या हुआ' से आगे बढ़ाकर 'क्यों हुआ' की समझ विकसित करना है। इन किताबों में उन तर्कों को भी स्थान दिया गया है जो विभाजन के लिए सीधे तौर पर ब्रिटिश शासन के साथ-साथ तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व की असमर्थता की ओर इशारा करते हैं। इस नए कंटेंट को अकादमिक और तकनीकी दोनों दृष्टि से तैयार किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ी यह समझ सके कि बंटवारे के घाव और उसके राजनीतिक कारणों की जड़ें कितनी गहरी थीं।छात्रों और विशेषज्ञों के लिए क्या हैं मायने?शिक्षा जगत में इस बदलाव को एक 'ऐतिहासिक सुधार' के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए सिरे से लिखी गई यह सामग्री न केवल अधिक निष्पक्ष है, बल्कि यह उन तथ्यों को भी सामने लाती है जिन्हें दशकों तक दबाया गया था। डिजिटल सर्च और AI आधारित सर्च इंजन पर भी अब इस विषय से जुड़ी नई जानकारी को प्राथमिकता मिल रही है। यह बदलाव न केवल स्कूली शिक्षा का हिस्सा है, बल्कि यह सार्वजनिक विमर्श को भी नया आकार दे रहा है, जहां भारत की आजादी और बंटवारे के दर्द को एक नए तार्किक दृष्टिकोण से समझा जा रहा है।
क्या एकनाथ खडसे की बीजेपी में होगी 'घर वापसी'? फडणवीस से दूरियां और तावड़े से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर पुराने दिग्गज नेता एकनाथ खडसे का नाम चर्चा के केंद्र में आ गया है। देवेंद्र फडणवीस के साथ मतभेदों के चलते बीजेपी छोड़ने वाले खडसे की हालिया मुलाकात पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े से हुई है। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है कि क्या एकनाथ खडसे एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम सकते हैं? खासकर राज्य में ओबीसी राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच खडसे की संभावित वापसी को पार्टी के लिए एक बड़े रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।खडसे की वापसी: क्या है ओबीसी कार्ड का गणित?एकनाथ खडसे महाराष्ट्र में ओबीसी समुदाय का एक कद्दावर चेहरा माने जाते हैं। जब उन्होंने बीजेपी छोड़ी थी, तो पार्टी को उत्तरी महाराष्ट्र (खानदेश) में एक बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था। अब जबकि राज्य में आगामी चुनाव और संगठन की मजबूती पर जोर दिया जा रहा है, बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को लगता है कि खडसे जैसे अनुभवी नेता की वापसी से ओबीसी वोटबैंक को फिर से एकजुट किया जा सकता है। फडणवीस के साथ उनके विवाद लंबे समय से रहे हैं, लेकिन तावड़े के साथ हुई इस मुलाकात को इस पुराने विवाद को सुलझाने की दिशा में एक 'ब्रोकर' प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।फडणवीस से विवाद बनाम तावड़े से मुलाकातएकनाथ खडसे ने लंबे समय तक फडणवीस के साथ काम किया था, लेकिन बाद में गंभीर मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। हालांकि, अब बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि नाराज नेताओं को साथ लेकर चला जाए। विनोद तावड़े, जो खुद महाराष्ट्र की राजनीति को गहराई से समझते हैं, के साथ खडसे की गर्मजोशी से हुई बातचीत यह संकेत दे रही है कि पार्टी के भीतर 'ऑपरेशन घर वापसी' पर चर्चा शुरू हो चुकी है। अगर यह मुलाकात किसी निष्कर्ष पर पहुंचती है, तो यह महाराष्ट्र बीजेपी में एक बड़ा फेरबदल साबित हो सकता है।पार्टी की अगली रणनीति क्या होगी?सूत्रों का कहना है कि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने खडसे को फिर से मुख्यधारा में लाने का मन बना लिया है। सवाल यह है कि यदि खडसे वापस आते हैं, तो उनका फडणवीस खेमे के साथ तालमेल कैसे बैठेगा? खडसे के समर्थक लंबे समय से उनकी वापसी की मांग कर रहे हैं। तावड़े के साथ हुई इस गुप्त मुलाकात ने उन सभी अटकलों को और तेज कर दिया है कि बीजेपी जल्द ही महाराष्ट्र में अपने ओबीसी चेहरों को मजबूत करने के लिए कोई बड़ा ऐलान कर सकती है। राज्य की सियासत पर नजर रखने वालों का मानना है कि खडसे की वापसी बीजेपी को न केवल संगठनात्मक रूप से मजबूती देगी, बल्कि विपक्षी खेमे में भी खलबली मचा सकती है।
उद्धव ठाकरे को मिली बड़ी राहत! शिवसेना UBT को नहीं लगा और झटका, संजय राउत ने पेश किए सबूत
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए यह दिन बड़ी राहत लेकर आया है। पार्टी और कार्यकर्ताओं में लंबे समय से चल रही खींचतान और कानूनी संकटों के बीच, उद्धव ठाकरे के खेमे को एक बड़ी कामयाबी मिली है। बीते कई दिनों से चल रही अटकलों और राजनीतिक गलियारों में तैर रही चर्चाओं पर उस समय पूर्ण विराम लग गया, जब पार्टी को एक और बड़ा झटका लगने का खतरा टल गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और उद्धव ठाकरे के करीबी, संजय राउत ने इस मौके पर मोर्चा संभाला और पार्टी की तरफ से ठोस सबूत पेश करते हुए तमाम विरोधियों के दावों को बेदम साबित कर दिया।संजय राउत का 'सबूत' बना संजीवनीसंजय राउत ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन सभी कयासों को खारिज कर दिया, जिनमें शिवसेना (UBT) के टूटने या किसी बड़े संकट की बात कही जा रही थी। राउत ने न केवल मीडिया के सामने अपनी बात रखी, बल्कि कुछ ऐसे कागजी दस्तावेज और सबूत पेश किए, जिनसे यह साफ हो गया कि पार्टी का आधार अभी भी मजबूती से उद्धव ठाकरे के साथ टिका हुआ है। इन सबूतों के पेश होने के बाद पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अब मनोबल काफी ऊंचा है। संजय राउत का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि शिवसेना की विचारधारा की लड़ाई है, जिसे वे मजबूती से लड़ रहे हैं।क्या था वो संकट जो टल गया?पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में यह चर्चा जोरों पर थी कि उद्धव ठाकरे की पार्टी में एक और बड़ी टूट होने वाली है। विरोधी गुटों द्वारा लगातार किए जा रहे दावों के बाद कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति थी। लेकिन आज की स्थिति के बाद यह साफ हो गया है कि ठाकरे परिवार का प्रभाव अभी भी शिवसेना के पुराने कैडर और कार्यकर्ताओं के बीच बना हुआ है। पार्टी नेतृत्व ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया था, जिसे आज पेश किए गए सबूतों ने पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। राहत की इस खबर के बाद मुंबई से लेकर पूरे महाराष्ट्र में मौजूद उद्धव समर्थकों में खुशी की लहर है।उद्धव ठाकरे का अगला कदम क्या होगा?पार्टी पर अपना दावा और पकड़ मजबूत करने के बाद अब उद्धव ठाकरे आगामी रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। संजय राउत के साथ मिलकर उद्धव अब उन इलाकों में अपनी सक्रियता बढ़ाएंगे, जहां पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस राहत के बाद अब उद्धव ठाकरे चुनावी मैदान में और आक्रामक तरीके से उतरेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या यह सबूत भविष्य की कानूनी और राजनीतिक लड़ाइयों में पार्टी को सुरक्षित रखने में कारगर साबित होते हैं या फिर विरोधी खेमा इसके खिलाफ कोई नई रणनीति तैयार करता है।
पेट्रोल गाड़ियों पर गडकरी का 'ओपन चैलेंज': बोले- 'एक भी कार दिखाओ जो एथेनॉल से खराब हुई हो
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। एक बार फिर उन्होंने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol) को लेकर चल रही सभी अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। गडकरी ने देश के वाहन मालिकों और आलोचकों को खुला चैलेंज देते हुए कहा कि एथेनॉल से इंजन खराब होने की बात केवल एक मिथक है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर कोई एक भी पेट्रोल गाड़ी ऐसी दिखा दे जो एथेनॉल के कारण खराब हुई है, तो वे अपनी बात पर पुनर्विचार करने को तैयार हैं। यह बयान उन लोगों के लिए बड़ा जवाब है जो सरकार की 'ग्रीन फ्यूल' नीति पर लगातार सवाल उठा रहे थे।क्या है एथेनॉल को लेकर आम धारणा?अक्सर कार मालिकों के बीच यह चर्चा रहती है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट इंजन की उम्र घटाती है या उसके पार्ट्स को नुकसान पहुंचाती है। इसी भ्रांति को दूर करते हुए नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल एक उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन है। सरकार ने न केवल इसकी टेस्टिंग की है, बल्कि इसे वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया के कई विकसित देशों में काफी लंबे समय से उच्च प्रतिशत में एथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है और वहां गाड़ियों के इंजन पूरी तरह से सुरक्षित हैं। एथेनॉल का मुख्य उद्देश्य न केवल प्रदूषण कम करना है, बल्कि आयातित तेल पर भारत की निर्भरता को खत्म करना भी है।एथेनॉल से कैसे होगा देश को फायदा?गडकरी के अनुसार, एथेनॉल नीति केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि एक आर्थिक क्रांति है। भारत हर साल हजारों करोड़ रुपये का कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। एथेनॉल का उत्पादन भारत के किसानों द्वारा गन्ने और अनाज से किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा हमारे किसानों को मिल रहा है और देश का बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार भी बच रहा है। उनका तर्क है कि जब एथेनॉल सस्ता, इको-फ्रेंडली और देश में ही उपलब्ध है, तो इसके विरोध का कोई ठोस आधार नहीं बचता है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण और बढ़ाया जाए, जिससे ग्रीन मोबिलिटी की ओर भारत तेजी से बढ़ सके।भ्रम फैलाने वालों को मंत्री का सीधा जवाबनितिन गडकरी ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो बिना किसी तकनीकी जानकारी के सोशल मीडिया पर एथेनॉल को लेकर नकारात्मकता फैला रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ मिलकर इंजन के डिजाइन में बदलाव किए हैं ताकि वे फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) के अनुकूल बन सकें। गडकरी का यह चैलेंज न केवल विश्वास को बढ़ाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर अब 'सस्टेनेबल एनर्जी' की दिशा में पूरी तरह तैयार है। अगर आप भी पेट्रोल पंप पर 'इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल' को लेकर उलझन में हैं, तो सरकार का यह दावा एक राहत भरी खबर है कि आपकी कार पूरी तरह सुरक्षित है।
वांटेड गोल्डी बराड़: अब अमेरिका में भी बढ़ी मुश्किल, FBI ने रखा 50,000 डॉलर का इनाम
कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ की मुसीबतें अब भारत से बाहर सात समंदर पार भी बढ़ गई हैं। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) ने गोल्डी बराड़ के खिलाफ शिकंजा कसते हुए उस पर 50,000 डॉलर का भारी-भरकम इनाम घोषित किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर अपराधी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। FBI द्वारा इनाम की घोषणा यह साफ करती है कि अब बराड़ अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है और उसकी गिरफ्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।क्या है FBI का प्लान और इनाम की शर्तें?FBI ने अपनी आधिकारिक सूचना में गोल्डी बराड़ के ठिकाने की सटीक जानकारी देने वाले को 50,000 डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 40 लाख रुपये से अधिक) देने का ऐलान किया है। एजेंसी ने उसे एक खतरनाक अपराधी के रूप में चिह्नित किया है, जो न केवल भारत में वांछित है, बल्कि अब उसके अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की भी खबरें हैं। इस इनाम के जरिए FBI उन लोगों को प्रेरित कर रही है जो उसकी संदिग्ध गतिविधियों या हालिया ठिकानों के बारे में कोई भी पुख्ता जानकारी रखते हैं। एजेंसियों का मानना है कि इस इनाम के बाद बराड़ का छिपना और भी मुश्किल हो जाएगा।भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीतगोल्डी बराड़ के खिलाफ FBI का यह कदम भारत सरकार और उसकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खालिस्तानी समर्थक और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ सबूत साझा कर रहा था। अब अमेरिका द्वारा इनाम घोषित करने का मतलब है कि अमेरिका ने भी यह मान लिया है कि बराड़ का नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था के लिए खतरा है। यह कार्रवाई भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी, जिससे भविष्य में अन्य वांछित अपराधियों की धरपकड़ भी आसान हो सकती है।कहां-कहां है गोल्डी बराड़ का खौफ?गोल्डी बराड़ का नाम पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी आपराधिक घटनाओं और हाई-प्रोफाइल हत्याओं के साथ जुड़ा रहा है। पंजाब सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में उसके खिलाफ मकोका (MCOCA) और यूएपीए (UAPA) जैसे कड़े कानून लागू हैं। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। अब अमेरिका में इनाम घोषित होने से बराड़ के लिए दुनिया का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं रह गया है। सुरक्षा जानकारों का कहना है कि जिस तरह से दाऊद इब्राहिम या अन्य अपराधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां सक्रिय हुई थीं, वैसा ही अब गोल्डी बराड़ के साथ होता दिख रहा है। उसके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए यह एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने गर्भवती महिला आईपीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण पर रोक लगाने वाले 1993 के नियम पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा और मेडिकल फिटनेस के आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मध्यप्रदेश भाजपा प्रदेश कार्यसमिति बैठक ओरछा में, दतिया उपचुनाव और पार्टी की आगामी रणनीति पर मंथन
हेमंत खंडेलवाल के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने एक साल बाद बीजेपी की पहली कार्यसमिति की बैठक 18 जुलाई से ओरछा में होगी। दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक में गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय नितिन नबीन भी शामिल हो सकते है। कार्यसमिति की बैठक ओरछा ...
PGI 2.0 रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ ने 761 से 820 अंकों के दायरे में प्रदर्शन करते हुए ‘उत्तम-3’ ग्रेड प्राप्त किया। यह श्रेणी लगभग 61 से 70 प्रतिशत प्रदर्शन का प्रतिनिधित्व करती है। हालांकि चंडीगढ़ देश में शीर्ष पर रहा, लेकिन वह अब भी सर्वोच्च श्रेणियों से काफी पीछे है। इससे स्पष्ट होता है कि देश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में अभी और सुधार की जरूरत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर में पूजा की। भारत और इंडोनेशिया ने यूनेस्को धरोहर स्थल के संरक्षण के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
इस वर्ष न्यायपालिका की छवि को लेकर उठे विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। अदालत ने NCERT को संबंधित पाठ्यपुस्तक वापस लेने और उसकी समीक्षा करने के निर्देश दिए थे।
दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में मानसून सक्रिय हो गया है। अगले सप्ताह तक तेज बारिश, आंधी और तापमान में गिरावट के आसार हैं।
बंपर लिस्टिंग: Knack Packaging ने निवेशकों को किया मालामाल, 10% प्रीमियम के साथ हुई धमाकेदार एंट्री
शेयर बाजार में आज नई कंपनी 'नैक पैकेजिंग' (Knack Packaging) ने दमदार शुरुआत की है। आईपीओ के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह दिन बेहद खास रहा, क्योंकि कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग उम्मीद के मुताबिक शानदार रही। लिस्टिंग के साथ ही निवेशकों के चेहरे खिल गए हैं। बाजार में सुस्ती के बावजूद नैक पैकेजिंग ने निवेशकों को 10% का मुनाफा देकर यह साबित कर दिया है कि बेहतर फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश हमेशा फायदे का सौदा होता है।निवेशकों के लिए मुनाफावसूली का मौका या होल्ड करें?लिस्टिंग के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निवेशक अपना मुनाफा लेकर बाहर निकल जाएं या लंबी अवधि के लिए बने रहें? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि नैक पैकेजिंग का बिजनेस मॉडल काफी मजबूत है और आने वाले समय में कंपनी की ग्रोथ की संभावनाएं काफी अधिक हैं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि जिन निवेशकों को अलॉटमेंट मिला है, उन्हें फिलहाल घबराहट में शेयर नहीं बेचना चाहिए। कंपनी के कारोबार में जो विस्तार देखने को मिल रहा है, वह संकेत देता है कि यह शेयर आने वाले समय में और भी अच्छी रिटर्न दे सकता है।क्या है कंपनी की मजबूती का राज?पैकेजिंग सेक्टर में अपनी पैठ जमाने वाली नैक पैकेजिंग ने पिछले कुछ समय में अपने वित्तीय प्रदर्शन में निरंतर सुधार दिखाया है। कंपनी जिस सेगमेंट में काम करती है, वहां मांग लगातार बनी रहती है। निवेशकों का भरोसा इस बात पर भी टिका है कि कंपनी का प्रबंधन आने वाले समय में कैपेक्स (CAPEX) पर ध्यान दे रहा है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। तकनीकी रूप से भी शेयर का चार्ट स्ट्रक्चर लिस्टिंग के बाद मजबूत बना हुआ है, जो संकेत दे रहा है कि इसमें आगे भी तेजी का रुझान रह सकता है।एक्सपर्ट्स की आगे की रायमार्केट एनालिस्टों के मुताबिक, लिस्टिंग के बाद थोड़ी बहुत प्रॉफिट बुकिंग स्वाभाविक है, लेकिन यदि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो धैर्य रखना फायदेमंद होगा। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि शेयर लिस्टिंग प्राइस से थोड़ा नीचे भी आता है, तो इसे एक मौका मानकर पोर्टफोलियो में बनाए रखें। हालांकि, किसी भी निर्णय से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से चर्चा कर लेनी चाहिए और स्टॉप लॉस का सख्ती से पालन करना चाहिए।
इंडोनेशिया में पीएम मोदी की शिव भक्ति, प्रम्बानन मंदिर में ॐ नमः शिवाय
इंडोनेशिया दौरे के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशियाई राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ प्रम्बानन मंदिर पहुंचे। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी यात्रा से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए ओम नम: शिवाय भी लिखा। इस धरोहर को देखने के बाद ...
Q1 नतीजों में दम दिखाएंगे बैंक शेयर! HDFC और SBI समेत इन स्टॉक्स पर ब्रोकरेज की बड़ी खरीदारी की सलाह
शेयर बाजार में अब पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों का सीजन शुरू होने वाला है, जिसे लेकर निवेशकों और एक्सपर्ट्स में खासा उत्साह देखा जा रहा है। इस तिमाही में बैंकिंग सेक्टर से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है। बाजार के जानकारों और प्रमुख ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि लोन ग्रोथ में मजबूती और एसेट क्वालिटी में सुधार के चलते बैंक शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में दिग्गज सरकारी और निजी बैंकों के शेयरों को पोर्टफोलियो में शामिल करने के लिए टॉप पिक के तौर पर देखा जा रहा है।बैंकिंग सेक्टर के लिए कैसी है उम्मीदें?Q1 की रिपोर्ट कार्ड में बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर बाजार की पैनी नजर रहने वाली है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट ऑफटेक में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसका सीधा असर बैंकों के मुनाफे पर दिखाई देगा। ब्रोकरेज हाउसों का अनुमान है कि बड़े बैंकों ने अपने ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर किया है, जिससे उनका शुद्ध लाभ उम्मीद से बेहतर रह सकता है। यह तिमाही विशेष रूप से रिटेल और कॉर्पोरेट लोन बुक की सेहत को दर्शाएगी, जो बैंकिंग स्टॉक्स के लिए बड़े ट्रिगर का काम करेगी।HDFC और SBI समेत इन शेयरों पर दांवब्रोकरेज हाउसेज ने Q1 प्रीव्यू के आधार पर कई बैंकिंग स्टॉक्स पर बुलिश रुख अपनाते हुए उन्हें टॉप पिक में जगह दी है। लिस्ट में सबसे ऊपर देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और दिग्गज निजी बैंक HDFC बैंक शामिल हैं। इनके अलावा, ICICI बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक पर भी विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि इन बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट और गिरता एनपीए (NPA) उन्हें मौजूदा बाजार की अस्थिरता में भी निवेश के लिए सुरक्षित और आकर्षक बनाता है।निवेशकों के लिए क्या है संकेत?अगर आप भी नतीजों के सीजन में बैंक शेयरों पर दांव लगाने की सोच रहे हैं, तो यह समय पोर्टफोलियो की समीक्षा के लिए सही है। ब्रोकरेज की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग इंडेक्स में आने वाले दिनों में अच्छी रिकवरी देखी जा सकती है। हालांकि, बाजार में किसी भी बड़े निवेश से पहले नतीजों के साथ-साथ बैंकों के प्रबंधन की भविष्य की गाइडेंस को समझना भी बेहद जरूरी है। उम्मीद की जा रही है कि Q1 के नतीजों के बाद बैंकिंग सेक्टर में एक नया मोमेंटम देखने को मिलेगा, जो निवेशकों के लिए लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन का मौका बन सकता है।
बड़ा फैसला: अब रुपये में होगी FPI फीस पेमेंट, म्यूचुअल फंड नियमों में हुआ अहम बदलाव
भारतीय शेयर बाजार और निवेश जगत से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और म्यूचुअल फंड सेक्टर को लेकर नए नियमों का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद अब FPIs को अपनी फीस का भुगतान करने के लिए विदेशी मुद्रा पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। यह कदम भारतीय मुद्रा 'रुपये' (INR) की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ाने और निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।अब रुपये में होगा FPI फीस का भुगतानअभी तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को अपनी पंजीकरण फीस और अन्य शुल्क का भुगतान आमतौर पर विदेशी मुद्रा में करना पड़ता था। लेकिन अब सेबी ने इसे आसान बना दिया है। नई गाइडलाइन के तहत, FPIs अब भारतीय रुपये में अपना भुगतान कर सकेंगे। इससे न केवल विदेशी निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि उन्हें करेंसी कन्वर्जन के झंझट और उससे जुड़ी लागत से भी राहत मिलेगी। यह फैसला भारत के पूंजी बाजार को अधिक सुलभ बनाने के लिए लिया गया है।म्यूचुअल फंड नियमों में भी बड़े बदलावFPI नियमों के साथ-साथ म्यूचुअल फंड सेक्टर के लिए भी नई नियमावली जारी की गई है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पारदर्शिता बढ़ाना और निवेशकों के हितों की रक्षा करना है। नए नियमों के अनुसार, फंड हाउसों को अब अपने पोर्टफोलियो और जोखिम प्रबंधन (Risk Management) पर और अधिक स्पष्टता देनी होगी। म्यूचुअल फंड के परिचालन खर्च और निवेश से संबंधित मानदंडों में जो बदलाव किए गए हैं, वे लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।निवेशकों और बाजार पर क्या होगा असर?विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से भारतीय बाजार में निवेश का प्रवाह बढ़ सकता है। जब प्रक्रियाएं सरल होती हैं, तो विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है। रुपये में भुगतान की सुविधा मिलने से FPIs के लिए निवेश की लागत कम होगी। वहीं, म्यूचुअल फंड नियमों में बदलाव से पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे आम रिटेल निवेशकों का म्यूचुअल फंड के प्रति आकर्षण और बढ़ेगा। यह पूरे वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूत और वैश्विक स्तर के अनुकूल बनाने का एक प्रयास है।
एथनॉल मिश्रित ईंधन पर मंथन तेज, पेट्रोल पंपों पर बिना एथनॉल पेट्रोल का विकल्प देने पर विचार
केंद्र सरकार ई-20 पेट्रोल पर उठ रही शिकायतों के बीच पेट्रोल पंपों पर बिना एथनॉल वाले पेट्रोल का विकल्प देने पर विचार कर रही है। कीमत और ढांचे को लेकर मंथन जारी है।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में नाबालिग से रेप और मर्डर का एक आरोपी प्रभास मंडल को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस के मुताबिक, एनकाउंटर उस समय हुआ जब आरोपी पूछताछ के दौरान पुलिस कर्मी की बंदूक छिनकर पुलिस हिरासत से भागने ...

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