महाराष्ट्र के धुले में डीज़ल टैंकर में भीषण आग; सूरत-नागपुर हाईवे पर जाम
धुले। महाराष्ट्र में सूरत-नागपुर हाईवे पर नेर गांव के पास गुरुवार सुबह एक डीज़ल टैंकर में भीषण आग लग गई। अचानक लगी इस आग से राजमार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। घटना की जानकारी मिलने पर धुले नगर निगम के अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने आग बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत की। लेकिन आग […] The post महाराष्ट्र के धुले में डीज़ल टैंकर में भीषण आग; सूरत-नागपुर हाईवे पर जाम appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ में बीएससी नर्सिंग छात्रा ने छत से कूद कर आत्महत्या की
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जंक्शन में परीक्षा परिणाम से निराशा और अवसाद में डूबी बीएससी नर्सिंग की 22 वर्षीय छात्रा ने छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। यह घटना बुधवार शाम करीब साढ़े बजे हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में हुई, जहां वह अन्य छात्राओं के साथ पूजा जाट (22) किराए के मकान में रह रही थी। […] The post हनुमानगढ़ में बीएससी नर्सिंग छात्रा ने छत से कूद कर आत्महत्या की appeared first on Sabguru News .
सुरक्षा बलों ने मणिपुर में भारी मात्रा में हथियार बरामद किए, 9 अरेस्ट
इंफाल। मणिपुर में पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रदेश भर में कई अभियान चलाकर भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद करने के साथ ही आपराधिक, उग्रवाद से जुड़े और अन्य मामलों में नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा बलों ने बुधवार को इंफाल पश्चिम जिले में वांगोई थाना क्षेत्र […] The post सुरक्षा बलों ने मणिपुर में भारी मात्रा में हथियार बरामद किए, 9 अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
बीकानेर के छत्तरगढ़ में परस्पर झगड़े में 3 लोगों की मौत, एक घायल
बीकानेर। राजस्थान में बीकानेर जिले के छत्तरगढ़ थाना क्षेत्र में गुरुवार को परस्पर झगड़े में तीन लोगों की मौत हाे गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ग्राम पंचायत खारवाली के सुरजनवाली गांव में किसी लड़की के रिश्ते को लेकर हो रही पंचायत में दो पक्षों में कहासुनी हो गई, […] The post बीकानेर के छत्तरगढ़ में परस्पर झगड़े में 3 लोगों की मौत, एक घायल appeared first on Sabguru News .
Narendra Modi Ahmedabad Rathyatra: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूं ही सबसे अलग नहीं हैं। 12 साल से अधिक समय तक वे गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पीएम मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद भी भगवान जगन्नाथ के लिए शुरू की गई परंपरा को निभा रहे हैं। उन्होंने ...
नालंदा दौरे पर अचानक लगा 'ब्रेक', सुधा डेयरी के दही प्लांट का शिलान्यास कार्यक्रम स्थगित
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आज प्रस्तावित नालंदा दौरा आखिरी समय में स्थगित कर दिया गया है। उनके इस दौरे में नालंदा स्थित सुधा डेयरी परिसर में अत्याधुनिक 'दही प्लांट' का शिलान्यास कार्यक्रम मुख्य रूप से शामिल था। इस खबर के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, अपरिहार्य कारणों से उप मुख्यमंत्री का कार्यक्रम फिलहाल के लिए टाल दिया गया है और अब नई तारीखों का ऐलान जल्द ही किया जाएगा।क्यों टला महत्वपूर्ण शिलान्यास कार्यक्रम?सम्राट चौधरी के नालंदा आगमन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर थीं। सुधा डेयरी के इस दही प्लांट को लेकर स्थानीय दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों में भारी उत्साह था। हालांकि, अचानक आए इस बदलाव ने पूरे कार्यक्रम पर विराम लगा दिया है। सूत्रों की मानें तो कुछ व्यस्तताओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों के चलते दौरे को आगे खिसकाया गया है। सुरक्षा और प्रोटोकॉल के लिहाज से भी प्रशासन इस बदलाव को सामान्य मान रहा है, लेकिन क्षेत्र के लोगों में इस देरी को लेकर चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म है।सुधा डेयरी और नालंदा के लिए क्या हैं मायने?यह दही प्लांट परियोजना नालंदा के दुग्ध उद्योग के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही थी। इस प्लांट के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने थे और दुग्ध उत्पादकों को अपनी उपज का और बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद थी। उप मुख्यमंत्री के दौरे का मुख्य एजेंडा भी इसी क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। अब जब कार्यक्रम टल गया है, तो स्थानीय जनता और डेयरी से जुड़े लोगों को अपनी नई उम्मीदों को साकार करने के लिए कुछ और समय तक इंतजार करना होगा।प्रशासन ने दी कार्यक्रम स्थगित होने की जानकारीनालंदा जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को कार्यक्रम के स्थगित होने की आधिकारिक सूचना दे दी है। आयोजन स्थल पर की गई सजावट और सुरक्षा व्यवस्थाओं को फिलहाल हटा लिया गया है। वहीं, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह एक अस्थायी बदलाव है और उप मुख्यमंत्री जल्द ही नालंदा आकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखेंगे। नई तारीख के संबंध में जैसे ही प्रोटोकॉल से दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। तब तक के लिए डेयरी प्लांट का काम अभी कागजों में ही आगे बढ़ेगा।
समस्तीपुर में 'पानी के लिए जंग' खत्म! नई जलापूर्ति परियोजना को मिली मंजूरी, घर-घर पहुँचेगा शुद्ध जल
समस्तीपुर के निवासियों के लिए एक अत्यंत सुखद खबर सामने आई है। लंबे समय से पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे इस क्षेत्र के लिए सरकार ने एक बड़ी और महत्वाकांक्षी जलापूर्ति परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही शहर और ग्रामीण इलाकों में पानी के लिए होने वाली स्थानीय जंग पर पूर्ण विराम लगने की उम्मीद जग गई है। इस परियोजना के धरातल पर उतरते ही समस्तीपुर की न केवल बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर में भी व्यापक बदलाव आएगा।क्या है समस्तीपुर का वाटर मास्टर प्लान?प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत समस्तीपुर के विभिन्न वार्डों और आसपास के इलाकों में पाइपलाइन का जाल बिछाया जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, ताकि लोगों को जल स्रोतों के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि पानी की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित की जा सके। यह परियोजना न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी की जल सुरक्षा को भी ध्यान में रखकर तैयार की गई है।कैसे बदलेगी समस्तीपुर की तस्वीर?समस्तीपुर में जलापूर्ति की समस्या एक गंभीर मुद्दा बनी हुई थी, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इस परियोजना के कार्यान्वयन से न केवल पानी की बर्बादी कम होगी, बल्कि भूजल स्तर को बचाने में भी मदद मिलेगी। बेहतर जल बुनियादी ढांचे के साथ, शहर के विकास की गति भी तेज होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह परियोजना निर्धारित समय के भीतर पूरी होती है, तो यह समस्तीपुर के इतिहास में विकास का एक मील का पत्थर साबित होगी।जल्द शुरू होगा काम, प्रशासन की है पैनी नजरपरियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य को लेकर प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री और संबंधित विभागीय मंत्री ने स्थानीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि निर्माण की गुणवत्ता में किसी भी तरह का समझौता न हो। अगले कुछ महीनों में निर्माण कार्य का भूमि पूजन होने की संभावना है। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे इस कार्य में सहयोग करें। अब देखना यह है कि यह 'समस्तीपुर जलापूर्ति मिशन' जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।
जन सुराज को बड़ा झटका! केसी सिन्हा के बाद इन दिग्गज नेताओं ने भी छोड़ा साथ, BJP में हुए शामिल
बिहार की सियासत में 'जन सुराज' अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केसी सिन्हा के पार्टी छोड़ने के बाद अब जन सुराज के कई और बड़े चेहरों ने प्रशांत किशोर का साथ छोड़ दिया है। इन नेताओं ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। एक के बाद एक वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़ने से न केवल जन सुराज के कैडर में हड़कंप मचा है, बल्कि प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति और पार्टी गठन की कवायद पर भी कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।केसी सिन्हा के बाद 'एग्जिट' का सिलसिला जारीजन सुराज की स्थापना और उसे जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जिन नेताओं की भूमिका अहम थी, अब वही नेता प्रशांत किशोर के विजन से किनारा कर रहे हैं। केसी सिन्हा का जाना पार्टी के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा था, लेकिन अब अन्य दिग्गज नेताओं के बीजेपी में शामिल होने ने इस झटके को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह केवल नेताओं का पलायन नहीं है, बल्कि बिहार में बदल रहे राजनीतिक समीकरणों का संकेत है, जहाँ नेता अब अपनी भविष्य की राजनीति को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय पार्टियों की ओर रुख कर रहे हैं।बीजेपी ने किया 'डिजिटल' और 'जमीनी' वारबीजेपी में शामिल होने वाले इन नेताओं का स्वागत करते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। इन नेताओं के बीजेपी में आने से पार्टी को न केवल जन सुराज की अंदरूनी रणनीति समझने में मदद मिलेगी, बल्कि उन इलाकों में भी पकड़ मजबूत होगी जहां प्रशांत किशोर बीते काफी समय से मेहनत कर रहे थे। जन सुराज के इन नेताओं ने बीजेपी ज्वाइन करते समय वर्तमान नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री के विजन को बिहार के विकास के लिए बेहतर बताया।प्रशांत किशोर की चुनावी चुनौती और आगे की राहइन इस्तीफों के बाद प्रशांत किशोर के सामने अब अपनी टीम को एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि, प्रशांत किशोर हमेशा से कहते आए हैं कि जन सुराज कोई पारंपरिक पार्टी नहीं बल्कि एक 'आंदोलन' है और इसमें आने-जाने वालों से संगठन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन धरातल की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी है, वे जन सुराज के उन क्षेत्रों में प्रभावशाली थे जहाँ पीके अपनी सबसे मजबूत नींव तैयार करना चाहते थे। क्या जन सुराज इस बिखराव से उबर पाएगा, या आने वाले दिनों में और भी बड़े नेता किनारा करेंगे? यह आने वाला समय ही बताएगा।
सियासत में 'स्लिप ऑफ टंग' का खेल! फिसली जुबान तो सत्ता के गलियारों में खड़े हुए सौ सवाल
राजस्थान की राजनीति इन दिनों बयानों के तीर और 'स्लिप ऑफ टंग' के इर्द-गिर्द घूम रही है। सियासत के मैदान में कब क्या बोल दिया जाए, इसका असर सीधे सत्ता के समीकरणों पर पड़ता है। पिछले कुछ समय में प्रदेश के बड़े नेताओं की जुबान तीन बार ऐसी फिसली कि विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया और सत्ता पक्ष के लिए बचाव करना मुश्किल हो गया। जुबान से निकले ये शब्द महज गलतफहमी हैं या फिर सोची-समझी सियासी चाल, यह सवाल आज राजस्थान की हर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।जुबान का खेल और सियासी बवंडरराजनीति में शब्द ही हथियार होते हैं और जब वही शब्द गलत तरीके से बाहर आते हैं, तो वे विवाद का रूप ले लेते हैं। हाल ही में हुए तीन अलग-अलग बयानों ने राजस्थान की राजनीति को गरमा दिया है। कभी किसी ने विकास के दावों को गलत शब्दों में पेश किया, तो कभी किसी ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए मर्यादा की सीमा लांघ दी। इन 'स्लिप ऑफ टंग' के बाद नेताओं के खेमों में खलबली मची है और हर बयान का अलग-अलग अर्थ निकालकर उसे जनता के बीच पेश किया जा रहा है। सत्ता के गलियारों में अब इन बयानों के पीछे के असली मकसद पर सौ सवाल खड़े हो रहे हैं।सत्ता के गलियारों में बढ़ी बेचैनीजब भी कोई बड़ा नेता बयान देता है, तो उसकी 'बॉडी लैंग्वेज' और 'टाइमिंग' को बहुत बारीकी से परखा जाता है। इन तीन चर्चित मामलों ने पार्टी की छवि को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। जानकार मानते हैं कि ये बयान भले ही 'फिसलन' लग रहे हों, लेकिन इनके जरिए किसी न किसी गुट को संदेश देने की कोशिश जरूर होती है। क्या ये गलतियां चुनावी साल में भारी पड़ेंगी? या फिर जनता इन बयानों को नजरअंदाज कर देगी? नेताओं की ये फिसलती जुबान अब सीधे तौर पर वोट बैंक के आंकड़ों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।क्या ये वाकई 'स्लिप ऑफ टंग' है?सियासी गलियारों में एक पुरानी कहावत है कि राजनेता कभी अनजाने में कुछ नहीं बोलते। विश्लेषकों का मानना है कि जुबान का फिसलना अक्सर दबी हुई भावनाओं को बाहर लाता है। इन बयानों के बाद विरोधियों ने न केवल आक्रामक रुख अपनाया है, बल्कि सोशल मीडिया पर मीम्स और वीडियो के जरिए इन बयानों को बार-बार वायरल किया जा रहा है। दूसरी तरफ, संबंधित पार्टी के समर्थक इसे महज एक मानवीय गलती बताकर बचाव कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या यह जुबानी खेल आगामी राजनीति में कोई नया मोड़ लाएगा या फिर वक्त के साथ इन विवादों की धूल जम जाएगी।
राजधानी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 42 थानों के SHO बदले; 82 इंस्पेक्टरों की सूची जारी
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। कमिश्नर सचिन मित्तल ने देर रात एक आदेश जारी कर 82 पुलिस निरीक्षकों (इंस्पेक्टर्स) का तबादला कर दिया है, जिनमें से 42 थानों के एसएचओ (SHO) भी शामिल हैं। इस बड़े फेरबदल को राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और अपराध नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। कई ऐसे अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है जिनके पास फील्ड का लंबा अनुभव है।कमिश्नर सचिन मित्तल का 'मास्टरस्ट्रोक'जयपुर में क्राइम कंट्रोल और जनता से जुड़ाव को मजबूत करने के लिए कमिश्नर सचिन मित्तल ने यह बड़ा निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से एक ही थाने में जमे और कार्यकुशलता के आधार पर अधिकारियों का आकलन करने के बाद यह फेरबदल किया गया है। तबादला सूची में उन इंस्पेक्टरों को प्रमुख थानों की जिम्मेदारी दी गई है, जो पूर्व में चुनौतीपूर्ण मामलों को सुलझाने में अपनी दक्षता साबित कर चुके हैं। कमिश्नर का साफ संदेश है कि राजधानी में पुलिसिंग का स्तर और अधिक पारदर्शी और त्वरित होना चाहिए।42 थानों में नए कप्तान, अपराधियों में खौफराजधानी के 42 प्रमुख थानों के एसएचओ बदले जाने के बाद से पुलिसिंग में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। जिन थानों में लंबे समय से अपराधों का ग्राफ बढ़ा था या जनता से जुड़ी शिकायतों का निपटारा धीमा था, वहां नए और अनुभवी अफसरों को तैनात किया गया है। यह फेरबदल न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से जरूरी था, बल्कि स्थानीय जनता और पुलिस के बीच भरोसे को बहाल करने के लिए भी देखा जा रहा है। नए एसएचओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने थाना क्षेत्रों में सक्रिय अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसें।क्या होगा जयपुर की सुरक्षा पर असर?इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद पुलिस मुख्यालय में भी हलचल तेज है। जयपुर पुलिस के इस बदलाव को आगामी समय के लिए एक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि नए चेहरों के साथ पुलिस का कार्य करने का तरीका और अधिक सक्रिय होगा। विशेष रूप से संवेदनशील थाना क्षेत्रों में तैनात किए गए नए प्रभारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और त्वरित कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है। यह सूची जारी होने के साथ ही संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपना पदभार संभालने के निर्देश भी दिए गए हैं।
भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) अपने यात्रियों को एक बेहतर और निर्बाध अनुभव देने के लिए कमर कस चुका है। हाल ही में IRCTC की नई वेबसाइट का खाका तैयार किया गया है, जिसे और भी अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाने के लिए जयपुर स्थित MNIT (मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के छात्रों की मदद ली गई है। इन छात्रों के नवीन तकनीकी सुझावों और रिसर्च को नए पोर्टल में शामिल किया गया है। बड़ी बात यह है कि इस नई वेबसाइट को आम यूजर्स से मिले फीडबैक के आधार पर डिजाइन किया गया है, जिससे टिकट बुकिंग से लेकर कैंसिलेशन तक की प्रक्रिया अब चुटकियों में पूरी हो सकेगी।MNIT छात्रों की रिसर्च से बदली वेबसाइट की तस्वीरइस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एकेडमिक इनोवेशन का तड़का लगाया गया है। MNIT के छात्रों ने एक विस्तृत अध्ययन किया था कि एक आम यात्री को टिकट बुक करते समय किन-किन तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। छात्रों ने न केवल इन समस्याओं को चिन्हित किया, बल्कि उनके प्रभावी समाधान भी सुझाए। IRCTC के अधिकारियों ने इन सुझावों को सराहा और उन्हें नए पोर्टल के 'यूजर इंटरफेस' (UI) और 'यूजर एक्सपीरियंस' (UX) में पूरी तरह से ढाल दिया है। अब वेबसाइट का नेविगेशन पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सरल और तेज होगा।यूजर्स के फीडबैक का रखा गया खास ध्यानकिसी भी बड़े प्लेटफॉर्म के लिए यूजर्स का फीडबैक सबसे महत्वपूर्ण होता है। नया पोर्टल तैयार करने से पहले लाखों यात्रियों से मिले सुझावों का बारीकी से विश्लेषण किया गया। अक्सर शिकायत रहती थी कि पीक ऑवर में वेबसाइट स्लो हो जाती है या पेमेंट गेटवे पर अटक जाती है। इन तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए नए पोर्टल को अधिक 'स्केलेबल' बनाया गया है। अब बुकिंग के दौरान लोड पड़ने पर भी वेबसाइट क्रैश नहीं होगी, जिससे टिकट बुकिंग का अनुभव और भी सहज और भरोसेमंद हो जाएगा।कब से मिलेगी आम यात्रियों को नई सुविधा?सूत्रों के अनुसार, वेबसाइट का बीटा टेस्टिंग चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अंतिम रूप देने से पहले सुरक्षा मानकों और सर्वर स्टेबिलिटी की जांच की जा रही है। जल्द ही इसे आम जनता के लिए पूरी तरह से लॉन्च कर दिया जाएगा। IRCTC का यह आधुनिक 'जेनरेटिव' और 'आंसर इंजन' फ्रेंडली पोर्टल न केवल टिकट बुकिंग में मदद करेगा, बल्कि यात्रा से जुड़ी अन्य जानकारी भी एक क्लिक पर उपलब्ध कराएगा। रेल यात्रियों के लिए यह किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है, जो डिजिटल इंडिया के सफर को एक नई रफ्तार देगा।
पंजाब के पब्बियां इलाके में आवारा कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि अब लोगों का अपने घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया है। हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक पूर्व सरपंच को उनके ही खेत में कुत्तों के झुंड ने घेर लिया और बेरहमी से नोच-नोच कर उनकी जान ले ली। हैरत की बात यह है कि कुत्तों ने उनके शरीर के अंगों, विशेषकर बाजू और टांग को बुरी तरह खा लिया। पब्बियां में पिछले महज 15 दिनों के भीतर यह दूसरी मौत है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।खेत में काम करते समय हुआ 'मौत' का सामनामिली जानकारी के अनुसार, पूर्व सरपंच रोजाना की तरह अपने खेत में काम करने गए थे। तभी अचानक आक्रामक कुत्तों के एक झुंड ने उन पर हमला बोल दिया। बुजुर्ग होने के कारण वे खुद को बचा नहीं पाए और कुत्तों ने उन पर टूट पड़ते हुए शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया। जब काफी देर तक वे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने तलाश शुरू की, जहाँ उनका शव बेहद दयनीय स्थिति में मिला। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में गहरा रोष है और लोग अब सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।15 दिनों में दो मौतें: क्या पब्बियां में प्रशासन सो रहा है?पब्बियां इलाके में कुत्तों के हमले का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मात्र दो सप्ताह के भीतर यह दूसरी जान गई है। पहली घटना के बाद ग्रामीणों ने स्थानीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होने का नतीजा एक और निर्दोष की मौत के रूप में सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद और प्रशासन की लापरवाही के कारण ये आवारा कुत्ते अब आदमखोर होते जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।ग्रामीणों का आक्रोश और प्रशासन पर दबावइस खूनी वारदात के बाद गांव के लोगों में दहशत का माहौल है। बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं और किसान खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन आवारा कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया, तो वे बड़े आंदोलन की राह अपनाएंगे। वहीं, प्रशासन का कहना है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और डॉग कैचर टीम को मौके पर तैनात किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह महज एक खानापूर्ति होगी या इस खूनी आतंक से लोगों को वाकई आजादी मिलेगी?
पंजाब के सीमावर्ती जिलों पठानकोट और फिरोजपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज सुबह से ही बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईडी की टीमों ने एक साथ कई ठिकानों पर दबिश देकर हड़कंप मचा दिया है। शुरुआती कार्रवाई एक प्रमुख प्रॉपर्टी डीलर के घर से शुरू हुई, जिसके बाद जांच की आंच सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे अवैध खनन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े स्टोन क्रशरों तक पहुंच गई है। इस कार्रवाई को लेकर इलाके के रसूखदार लोगों में भारी खलबली मची हुई है।प्रॉपर्टी डीलर के घर से शुरू हुई जांच की कड़ीईडी की टीम ने तड़के पठानकोट और फिरोजपुर में एक बड़े प्रॉपर्टी डीलर के आवास पर अचानक दस्तक दी। सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के एक पुराने मामले और बेनामी संपत्ति के निवेश से जुड़ी हुई है। प्रॉपर्टी डीलर के वित्तीय दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है, और माना जा रहा है कि इस रेड में कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद हुए हैं, जो सीधे तौर पर अन्य बड़े नामों से जुड़े हो सकते हैं। ईडी के अधिकारी पूरी रेड के दौरान काफी गोपनीय तरीके से काम कर रहे हैं।सीमावर्ती क्षेत्रों के स्टोन क्रशर पर ईडी की पैनी नजरप्रॉपर्टी डीलर के घर के बाद, ईडी की टीमों ने अपना रुख सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित स्टोन क्रशरों की ओर किया। पिछले काफी समय से इन क्रशरों के संचालन में वित्तीय धांधली और अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थीं। माना जा रहा है कि इन क्रशरों के जरिए भारी मात्रा में काला धन सफेद किया जा रहा था। ईडी की यह कार्रवाई अवैध खनन माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने के लिए एक बड़े 'स्ट्राइक' के रूप में देखी जा रही है। मौके पर सुरक्षा बल तैनात हैं और किसी को भी अंदर-बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।पंजाब की सियासत और प्रशासन पर असरपठानकोट और फिरोजपुर जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में ईडी की सक्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस छापेमारी से न केवल व्यापारिक गलियारों में हलचल है, बल्कि स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का कहना है कि अगर ईडी को इन स्टोन क्रशरों से जुड़े बेहिसाब नकदी और निवेश के दस्तावेज मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कई और बड़े लोगों पर कानूनी शिकंजा कस सकता है। ईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन पैसों का इस्तेमाल कहीं राष्ट्रविरोधी गतिविधियों या तस्करी के लिए तो नहीं किया जा रहा था। फिलहाल, पूरे पंजाब में ईडी की यह रेड चर्चा का विषय बनी हुई है।
केरल हाई कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड के कामकाज को निलंबित किया
कोच्चि। केरल हाई कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड के कामकाज को निलंबित करने का अंतरिम आदेश जारी किया है। भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई के उपाध्यक्ष एवं अधिवक्ता शॉन जॉर्ज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया गया। अदालत ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के इस तर्क को स्वीकार किया कि वर्तमान […] The post केरल हाई कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड के कामकाज को निलंबित किया appeared first on Sabguru News .
झारखंड में लंबे समय से लंबित पड़ी सड़क परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने अब सख्त तेवर अपना लिए हैं। राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आम जनता को गड्ढा मुक्त सड़कों की सौगात देने के लिए सीएम ने 'एक्शन मोड' में आते हुए सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि परियोजनाओं में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी अधूरे कार्य हर हाल में अगले दो महीने की डेडलाइन के भीतर पूरे करने होंगे। इस निर्देश के बाद निर्माण एजेंसियों और विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।परियोजनाओं की समीक्षा और सीएम की दो टूक चेतावनीमुख्यमंत्री ने हाल ही में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने राज्य भर में चल रहे रोड कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स की धीमी गति पर नाराजगी जताई। सीएम ने कहा कि बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद अगर काम पूरा नहीं हो रहा है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही है। उन्होंने दो महीने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि इस अवधि के दौरान कार्यों की मॉनिटरिंग खुद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा की जाएगी। किसी भी स्तर पर अगर काम में देरी या क्वालिटी के साथ समझौता पाया गया, तो संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।जवाबदेही तय करने का नया फॉर्मूलाइस बार सीएम ने सिर्फ डेडलाइन ही तय नहीं की है, बल्कि जवाबदेही (Accountability) भी फिक्स कर दी है। हर सड़क परियोजना के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो साप्ताहिक रिपोर्ट सीधे सीएमओ को भेजेगा। यदि किसी भी जिले में सड़क का काम निर्धारित समय पर पूरा नहीं होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों की होगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि काम को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर उसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से उतारा जाए।आम जनता को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी की सौगातझारखंड में सड़कों की खराब हालत को लेकर लंबे समय से शिकायतें आ रही थीं, जिससे व्यापार और आवागमन प्रभावित हो रहा था। सीएम के इस कदम से राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है। दो महीने की इस डेडलाइन के बाद राज्य की प्रमुख सड़कों की तस्वीर बदलने की संभावना है, जिसका सीधा लाभ राज्य की जनता को मिलेगा। सीएम के इस कड़े रुख को देखते हुए अब निर्माण एजेंसियों ने भी काम की गति तेज कर दी है, जिससे आने वाले समय में झारखंड की सड़कों पर सफर आसान और सुरक्षित होने वाला है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E-20) से जुड़ी तकनीकी खराबी के मामले में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर नवेरा मेंटेनो स्काई ऑटो मोबाईल्स को सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला […] The post E-20 ईंधन विवाद में मारुति सुजुकी एवं डीलर जिम्मेदार, नई कार देने या फिर 20.50 लाख रुपए लौटाने का आदेश appeared first on Sabguru News .
अभिषेक खुद कॉमिक्स के इतने दीवाने रहे हैं कि घर से मिली अपनी पॉकेट मनी से कॉमिक्स खरीद लिया करते थे। उनकी इस दीवानगी खुद उन्हें कॉमिक्स राइटर बना दिया है। वे शुरू से चाहते थे कि बच्चों के लिए साहित्य, कविता और कहानियां लिखे, फिलहाल उन्होंने ...
राजधानी रांची से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। शहर के एक रिहायशी इलाके में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन 'तृतीय प्रस्तुति कमेटी' (TSPC) के नाम से एक धमकी भरा पोस्टर चिपकाया गया है। इस पोस्टर में एक युवती को पुलिस की मुखबिरी करने का आरोप लगाते हुए उसे और उसके पूरे परिवार को जिंदा जलाने की चेतावनी दी गई है। घटना के बाद से पीड़िता का परिवार बुरी तरह सहमा हुआ है और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगा रहा है।पोस्टर में क्या है धमकी का मजमून?धमकी भरे इस पोस्टर में साफ़ शब्दों में लिखा गया है कि यदि संबंधित युवती ने अपनी 'हरकतें' बंद नहीं की, तो उसे और उसके पूरे परिवार को किसी भी वक्त जिंदा जला दिया जाएगा। टीएसपीसी (TSPC) के नाम का इस्तेमाल करते हुए इस तरह की धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। घर की दीवार पर चिपके इस पोस्टर को देखते ही मोहल्ले में हड़कंप मच गया। लोग इस बात से हैरान हैं कि दिनदहाड़े और सरेआम इस तरह की वारदात को अंजाम कैसे दिया गया, जबकि पुलिस सुरक्षा के कड़े दावे करती है।मुखबिरी के शक में खौफ का खेलआरोप है कि उग्रवादियों को यह शक है कि वह युवती पुलिस को उनके संगठन की गुप्त जानकारियां मुहैया करा रही है। इसी के चलते उसे निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, परिवार का कहना है कि उनकी बेटी का किसी भी तरह की मुखबिरी से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें बेवजह फंसाया जा रहा है। यह घटना रांची में बढ़ते उग्रवादी प्रभाव और आम नागरिकों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। धमकी भरे पोस्टर के बाद से परिवार ने घर से बाहर निकलना भी बंद कर दिया है।पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायराघटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और पोस्टर को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह किसी शरारती तत्व की करतूत भी हो सकती है, जो संगठन के नाम का इस्तेमाल कर दहशत फैलाना चाहता है। फिलहाल, पुलिस मामले की हर एंगल से पड़ताल कर रही है और इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर पीड़ित परिवार के घर के आसपास गश्त बढ़ा दी गई है और लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसी अफवाहों या धमकियों से न डरें।
MP UCC: मोहन सरकार समान नागरिक संहिता के जरिए साध रही है हिंदुत्व का एजेंडा?
मध्यप्रदेश के मानसून सत्र में मोहन सरकार UCC से जुड़ा अहम विधयेक लाने जा रही है। 20 जुलाई से शुरु हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र के पहले 19 जलाई को कैबिनेट की बैठक में UCC कमेटी के प्रतिवेदन को कैबिनेट में रखा जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी के बाद मोहन ...
पांच जिलों से शुरू होगा 'संगठन पर्व', प्रभारी संजय दत्त का दौरा तय करेगा सियासत की नई दिशा
हरियाणा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आगामी चुनावों की तैयारियों को देखते हुए कांग्रेस ने अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए कमर कस ली है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय दत्त अब संगठन विस्तार और मजबूती के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस मिशन की शुरुआत राज्य के पांच प्रमुख जिलों से हो रही है, जहां संजय दत्त सीधे कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे और संगठन की नब्ज टटोलेंगे। यह दौरा कार्यकर्ताओं में जोश भरने और पार्टी की गुटबाजी को दरकिनार कर एक जुटता का संदेश देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।19 से 23 जुलाई: क्या है प्रभारी संजय दत्त का पूरा प्लान?पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह दौरा 19 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलेगा। इन पांच दिनों में संजय दत्त न केवल स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें करेंगे, बल्कि ब्लॉक और जिला स्तर के पदाधिकारियों की समस्याओं को भी सुनेंगे। इस दौरान वे कार्यकर्ताओं को सीधे निर्देश देंगे कि किस तरह जनता के बीच जाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ लामबंद होना है। 19 जुलाई से शुरू हो रहा यह अभियान हरियाणा कांग्रेस के लिए एक 'संगठन पर्व' जैसा होगा, जिसमें हर जिले में अलग-अलग रणनीति पर चर्चा की जाएगी।पांच जिलों से फूंकेंगे बिगुल, बदलेगी संगठन की तस्वीरकांग्रेस की रणनीति इस बार स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने की है। जिन पांच जिलों को इस पहले दौर के लिए चुना गया है, वहां पार्टी की पकड़ को और अधिक धारदार बनाने पर जोर दिया जाएगा। प्रभारी संजय दत्त का मुख्य उद्देश्य संगठन में रिक्त पड़े पदों को भरना और कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावी संग्राम के लिए तैयार करना है। कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि यदि इन पांच जिलों में संगठन का ढांचा दुरुस्त हो गया, तो इसका सकारात्मक असर पूरे प्रदेश की अन्य सीटों पर भी दिखाई देगा।चुनावी आहट के बीच कार्यकर्ताओं में उत्साहहरियाणा कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता प्रभारी के इस दौरे को लेकर बेहद उत्साहित हैं। पिछले काफी समय से जिस तरह से संगठन को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, इस दौरे से उन सभी अटकलों पर विराम लगने की उम्मीद है। संजय दत्त के दौरे को लेकर जिलों में समन्वय समितियां बनाई गई हैं, जो प्रभारी के स्वागत और बैठकों के आयोजन को सफल बनाने में जुटी हैं। यह दौरा सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि 2026-27 के आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस के 'ब्लूप्रिंट' को लागू करने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
हरियाणा के कैथल से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यहाँ आपसी रंजिश और अंधविश्वास के चलते एक बुजुर्ग महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि हत्यारों ने बुजुर्ग महिला पर टोटका करने और भुक्की (नशीला पदार्थ) रखने का शक जताया था, जिसके चलते उन्होंने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। हमलावरों ने बुजुर्ग महिला को मौत के घाट उतारने के लिए ईंटों, लोहे की रॉड और बरछी जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।क्या है पूरा मामला? रंजिश और अंधविश्वास की बलिमिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला अपने घर पर अकेली थी, तभी हमलावर वहां पहुंचे और अचानक उन पर हमला बोल दिया। परिजनों का आरोप है कि हमलावरों को लंबे समय से शक था कि बुजुर्ग महिला उनके परिवार पर कोई काला जादू या 'टोटका' कर रही है। साथ ही, उन पर अवैध रूप से भुक्की रखने का भी बेबुनियाद आरोप लगाया गया था। इन्हीं शक और पुरानी रंजिश के चलते आरोपी इतने हिंसक हो गए कि उन्होंने महिला के शरीर पर अनगिनत वार किए। आसपास के लोगों ने शोर मचाया, लेकिन जब तक वे मदद के लिए पहुंचे, हमलावर मौके से फरार हो चुके थे।ईंट, रॉड और बरछी से हुआ जानलेवा हमलावारदात की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हमलावरों ने महिला को तड़पा-तड़पा कर मारा। पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल पर खून के धब्बे और हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार ईंटें, रॉड और खून से सनी हुई बरछी बरामद की गई है। महिला के सिर और शरीर के नाजुक अंगों पर गहरे जख्मों के निशान साफ देखे जा सकते थे। इस निर्मम हत्या ने स्थानीय निवासियों में डर का माहौल पैदा कर दिया है और लोग आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी देने की मांग कर रहे हैं।पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायराकैथल पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है और घटना के पीछे के हर एक पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है और संदिग्धों से पूछताछ का दौर जारी है। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
भीलवाड़ा : रिश्वत लेने के दोषी तत्कालीन एएसआई को 4 वर्ष का कठोर कारावास
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के विशेष न्यायालय ने रिश्वत लेने के आरोपी तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) को गुरुवार को दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश पवन कुमार सिंघल ने अभियुक्त तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक कालूराम कहार को रिश्वत लेने का दोषी […] The post भीलवाड़ा : रिश्वत लेने के दोषी तत्कालीन एएसआई को 4 वर्ष का कठोर कारावास appeared first on Sabguru News .
भरतपुर : शिक्षक के खिलाफ स्कूल में 8 साल की बालिका से छेडछाड़ करने का केस दर्ज
भरतपुर। राजस्थान में भरतपुर के एक सरकारी स्कूल में पदस्थ 58 वर्षीय एक अध्यापक पर कक्षा तीन में अध्ययनरत आठ वर्ष की छात्रा को सुनसान कमरे में ले जाकर छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि आरोपी अध्यापक के खिलाफ मामला दर्ज करके बालिका के अदालत में बयान […] The post भरतपुर : शिक्षक के खिलाफ स्कूल में 8 साल की बालिका से छेडछाड़ करने का केस दर्ज appeared first on Sabguru News .
राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर ओपन जेल में सजा काट रहे दो कैदियों की शादी को दी मंजूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अनोखे आदेश में जोधपुर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदियों को शादी करने की इजाजत दे दी। कोर्ट ने कहा कि अपनी मर्जी से शादी करने वाले दो बालिग लोगों की शादी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत आजादी के अधिकार के दायरे में आती है।
Siddhartha Saxena: IIT कानपुर के ग्रेजुएट सिद्धार्थ सक्सेना ने 26 साल की उम्र में एक ही दिन में 77 करोड़ रुपये कमाकर इतिहास रच दिया। जानिए उनके स्टार्टअप Merlin की कहानी।
हैदराबाद के एक स्कूल में कथित रूप से हिंदू छात्र पर 'कलमा' और 'फातिहा' पढ़ने का दबाव बनाने और होमवर्क देने का मामला तूल पकड़ रहा है। इस घटना से स्कूल प्रशासन के खिलाफ अभिभावकों, स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में आक्रोश है। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद स्कूल प्रशासन ने एक टीचर को निलंबित कर दिया है।
अगर आप भी 'BH' यानी 'भारत' सीरीज की गाड़ी के मालिक हैं और उसे बेचने की सोच रहे थे, तो आपके लिए एक बड़ी राहत वाली खबर है। अब तक BH सीरीज की गाड़ियों की री-सेल करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, जिसके चलते कई कार मालिक अपनी गाड़ियां बेचने में कतराते थे। लेकिन अब सड़क परिवहन मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए इन जटिलताओं को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब कोई भी आम नागरिक आसानी से BH सीरीज की गाड़ी खरीद और बेच सकेगा। यह फैसला न केवल उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो बार-बार शहर बदलते हैं, बल्कि उन लोगों के लिए भी है जो पुरानी BH सीरीज कार खरीदने का मन बना रहे थे।क्या थी अब तक की समस्या और क्यों थी री-सेल मुश्किल?पहले के नियमों के अनुसार, BH सीरीज के रजिस्ट्रेशन को केवल उन्हीं लोगों के लिए आरक्षित किया गया था जिनकी नौकरी में अक्सर ट्रांसफर होता रहता है, जैसे सरकारी कर्मचारी या कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों के अधिकारी। इस कारण, जब कोई मालिक अपनी कार बेचना चाहता था, तो खरीदार को गाड़ी के रजिस्ट्रेशन को लेकर भारी कन्फ्यूजन होता था। कई बार खरीदार को स्थानीय आरटीओ में गाड़ी ट्रांसफर कराने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता था। इसी वजह से पुरानी BH सीरीज की गाड़ियों को खरीदार आसानी से नहीं मिलते थे, जिससे इनकी री-सेल वैल्यू (Resale Value) पर भी असर पड़ता था।सरकार का नया फैसला: अब सबको मिलेगी आजादीमंत्रालय के ताजा आदेश के बाद, अब BH सीरीज की गाड़ियों का स्वामित्व हस्तांतरण (Ownership Transfer) बेहद सरल हो गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब BH सीरीज की गाड़ियां उन लोगों को भी बेची जा सकती हैं जो खुद उस कैटेगरी (ट्रांसफर होने वाली जॉब) में नहीं आते, जिसके लिए यह सीरीज शुरू की गई थी। अब खरीदार को आरटीओ के चक्कर लगाने या तकनीकी उलझनों में फंसने की जरूरत नहीं होगी। गाड़ी का ट्रांसफर उसी तरह हो जाएगा जैसे सामान्य रजिस्ट्रेशन वाली कारों का होता है, जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों का कीमती समय बचेगा।कैसे होगा गाड़ी का ट्रांसफर? जानिए पूरी प्रक्रियाइस नए फैसले के साथ प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटाइज कर दिया गया है। यदि आप अपनी BH सीरीज की कार बेचना चाहते हैं, तो आपको बस 'परिवहन सेवा' पोर्टल पर जाकर अपने वाहन के दस्तावेज़ अपडेट करने होंगे। नए खरीदार को अपना पता और पहचान प्रमाण देना होगा, जिसके बाद आरटीओ सिस्टम से ही ट्रांसफर प्रोसेस को मंजूरी मिल जाएगी। इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन को एकसमान बनाना और सेकंड-हैंड कार बाजार में पारदर्शिता लाना है। अब BH सीरीज की कारों की डिमांड मार्केट में बढ़ने की पूरी उम्मीद है क्योंकि अब इसे खरीदना-बेचना आम कार की तरह ही आसान हो गया है।
उत्तर प्रदेश में आम आदमी से लेकर शिक्षा जगत तक के लिए राहत भरी खबर है। राज्य विधानसभा में हाल ही में 4 महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए हैं, जो आम नागरिकों के जीवन को सरल बनाने के साथ-साथ शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन विधेयकों में सबसे ज्यादा चर्चा मकान मालिक और किरायेदार के बीच के विवादों को तेजी से सुलझाने और राज्य में निजी शिक्षण संस्थानों की स्थापना को सुगम बनाने की है। सरकार के इस फैसले से अदालतों पर बोझ कम होगा और शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।मकान मालिक और किरायेदार विवाद का अब होगा 'फास्ट ट्रैक' समाधानअक्सर देखने में आता है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद सालों-साल अदालतों के चक्कर में फंसे रहते हैं। नए विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, अब किरायेदारी से जुड़े मामलों का निपटारा मात्र 60 दिनों की समय सीमा के भीतर करने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए एक निश्चित ट्रिब्यूनल और प्रशासनिक प्रक्रिया तय की गई है, जो दोनों पक्षों को न्याय दिलाने का काम करेगी। सरकार का उद्देश्य किरायेदारी को पारदर्शी बनाना और विवादों को लंबा खिंचने से रोकना है, जिससे दोनों पक्षों को राहत मिल सके।निजी विश्वविद्यालय खोलना हुआ सरल, शिक्षा में बढ़ेगा निवेशदूसरे बड़े फैसले में निजी विश्वविद्यालयों (Private Universities) की स्थापना प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया गया है। पहले एक यूनिवर्सिटी खोलने के लिए कई विभागों की जटिल मंजूरी और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब 'सिंगल विंडो' और आसान मानदंडों के जरिए निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार होगा और छात्रों को नए कोर्सेज व बेहतर सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। यह कदम रोजगार सृजन और राज्य के शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए उठाया गया है।4 विधेयकों का आम जनता पर क्या होगा असर?इन विधेयकों के पास होने से न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि विकास की गति भी तेज होगी। किरायेदारी कानून में बदलाव से मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच भरोसे का रिश्ता कायम होगा, वहीं शिक्षा नीति में किए गए बदलाव प्रदेश को शिक्षा का केंद्र बनाने में मदद करेंगे। बाकी के अन्य विधेयकों में मुख्य रूप से प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया गया है। सरकार की कोशिश है कि फाइलों का अंबार कम हो और आम जनता की समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से हो सके।सुधार की राह पर यूपी: आगे की राहविपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इन विधेयकों पर सकारात्मक चर्चा के बाद ही इन्हें पारित किया गया है। अब इनकी अधिसूचना जारी होने के बाद से ही ये प्रभावी हो जाएंगे। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखने शुरू हो जाएंगे। मकान मालिक-किरायेदार विवाद से जुड़ी कोर्ट की पेंडेंसी कम होना यूपी की न्याय व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। वहीं, निजी यूनिवर्सिटी के नियमों में ढील से आने वाले शैक्षणिक सत्र में कई नए शिक्षण संस्थान खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुबह की जल्दबाजी में अक्सर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सबसे आसान तरीका चुनते हैं—स्कूल ऑटो। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि उस ऑटो में क्षमता से कितने ज्यादा बच्चे भरे होते हैं? एक छोटे से तीन पहिया वाहन में 8 से 10 बच्चों को 'ठूंसकर' बिठाना न केवल सड़क सुरक्षा के लिहाज से जानलेवा है, बल्कि यह बच्चों की शारीरिक सेहत पर भी बुरा असर डाल रहा है। अगर आप भी अपने बच्चे को ऐसे ही ऑटो में भेज रहे हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि यह छोटी सी लापरवाही आपके बच्चे को अस्पताल के चक्कर लगाने पर मजबूर कर सकती है।ओवरलोडिंग का बच्चों की रीढ़ और मांसपेशियों पर असरऑटो में जरूरत से ज्यादा बच्चों को बिठाने के कारण उन्हें न तो बैठने की सही जगह मिलती है और न ही पैर रखने की पर्याप्त जगह। लंबे समय तक गलत मुद्रा (Posture) में बैठने के कारण बच्चों की रीढ़ की हड्डी और गर्दन की मांसपेशियों में तनाव पैदा हो जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि स्कूल जाने वाली उम्र में लगातार इस तरह बैठने से बच्चों में पीठ दर्द, गलत शारीरिक बनावट (Postural Deformity) और मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या तेजी से बढ़ रही है। क्या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा किताबी बोझ से पहले शरीर के दर्द का बोझ उठाए?बैक्टीरिया और इंफेक्शन का बन जाते हैं हबभीड़भाड़ वाले ऑटो में हवा का आवागमन (Ventilation) बेहद कम होता है। एक दूसरे से सटकर बैठने के कारण, अगर किसी एक बच्चे को सर्दी, खांसी या कोई मौसमी वायरल इंफेक्शन है, तो वह पलक झपकते ही बाकी सभी बच्चों में फैल जाता है। इसके अलावा, ऑटो की गंदी सीटों और फर्श पर जमा धूल के कणों से अस्थमा और एलर्जी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। बंद और घुटन भरे वातावरण में घंटों सफर करना बच्चों की इम्यूनिटी को कमजोर करता है, जिससे वे बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं।सड़क हादसों का बढ़ता खतरा और बच्चों की सुरक्षासड़क सुरक्षा के नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को ओवरलोडेड ऑटो में भेजना सीधे तौर पर दुर्घटनाओं को बुलावा देना है। अचानक ब्रेक लगने या मुड़ने पर ऑटो के पलटने की संभावना सबसे अधिक होती है, क्योंकि वाहन का संतुलन (Balance) पूरी तरह बिगड़ जाता है। ऐसे में बच्चे असुरक्षित होते हैं क्योंकि ऑटो में न तो सीट बेल्ट होती है और न ही पर्याप्त स्पेस। एक जिम्मेदार अभिभावक के रूप में, क्या हम अपनी सुविधा के लिए बच्चों की जान जोखिम में डालना उचित समझते हैं?अभिभावकों के लिए जरूरी सुझाव: सुरक्षित स्कूल सफर कैसे सुनिश्चित करें?अपने बच्चे की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए कुछ ठोस कदम उठाना बहुत जरूरी है। सबसे पहले, स्कूल प्रशासन से बात करें और सुनिश्चित करें कि ऑटो संचालक तय नियमों का पालन करें। अगर संभव हो, तो अन्य अभिभावकों के साथ मिलकर बच्चों के लिए बेहतर वैन या स्कूल बस का विकल्प चुनें, जिसमें हर बच्चे के लिए पर्याप्त जगह हो। अपने बच्चे से भी बात करें और उन्हें भी बताएं कि सफर के दौरान सही तरीके से बैठना क्यों जरूरी है। याद रखें, बच्चों की पढ़ाई जितनी जरूरी है, उनकी सुरक्षित वापसी और अच्छा स्वास्थ्य उससे कहीं ज्यादा मायने रखता है। डॉक्टर के क्लिनिक के चक्कर काटने से बेहतर है कि आज ही इस असुरक्षित सफर को 'ना' कहें।
मेजर लीग क्रिकेट (MLC) के मौजूदा सीजन का एक मुकाबला इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। क्रिकेट के मैदान पर आपने अब तक कई बड़ी पारियां देखी होंगी, लेकिन जो कारनामा स्मिथ और गॉस ने कर दिखाया है, उसने टी20 क्रिकेट की परिभाषा ही बदल दी है। क्रिकेट फैंस उस वक्त हैरान रह गए जब एक नामुमकिन से दिखने वाले लक्ष्य का पीछा करते हुए इन दोनों बल्लेबाजों ने टी20 क्रिकेट के इतिहास में 'सबसे बड़े सफल रन चेज' का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। महज 112 गेंदों में 270 रन का विशाल लक्ष्य हासिल करना किसी चमत्कार से कम नहीं है।स्मिथ-गॉस का 'सुपरसोनिक' तूफानमैच के दौरान जब विरोधी टीम ने बोर्ड पर पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया, तो किसी को उम्मीद नहीं थी कि इसका पीछा किया जा सकता है। लेकिन स्मिथ और गॉस ने क्रीज पर उतरते ही जिस आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी शुरू की, उसने गेंदबाजों के होश उड़ा दिए। दोनों बल्लेबाजों ने मैदान के हर कोने में छक्कों और चौकों की बारिश कर दी। खास तौर पर डेथ ओवर्स में इन दोनों की जोड़ी ने जो स्कोरिंग रेट बनाए रखा, वह क्रिकेट के आंकड़ों को ही नहीं बल्कि टी20 की रणनीति को भी चुनौती देने वाला था। 112 गेंदों में 270 रन का सफर तय करना एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे तोड़ना आने वाली कई पीढ़ियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।क्रिकेट पंडित भी हैरान: क्या है इस जीत का असली गणित?इस जीत के बाद क्रिकेट विशेषज्ञों और डेटा एनालिटिक्स की दुनिया में बहस छिड़ गई है। एआई-आधारित प्रिडिक्टिव मॉडल्स के अनुसार, इस लक्ष्य का पीछा करने की संभावना शुरुआती 10 ओवरों के बाद बहुत कम थी, लेकिन स्मिथ और गॉस का 'एग्रेशन' हर मायने में अभूतपूर्व रहा। इस रिकॉर्ड तोड़ चेज में पावरप्ले का सही इस्तेमाल और स्पिनर्स के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना जीत की सबसे बड़ी चाबी साबित हुआ। यह मुकाबला साबित करता है कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में अब कोई भी स्कोर सुरक्षित नहीं है और मैच किसी भी मोड़ पर पलटा जा सकता है।टी20 इतिहास में दर्ज हुआ यह ऐतिहासिक दिनमेजर लीग क्रिकेट में बना यह वर्ल्ड रिकॉर्ड न केवल खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्रतिभा को दर्शाता है, बल्कि यह खेल के बढ़ते हुए स्तर का भी प्रमाण है। इस जीत के बाद से सोशल मीडिया पर क्रिकेट प्रेमियों ने इसे 'क्रिकेट का सबसे महान रन चेज' करार दिया है। इस रिकॉर्ड ब्रेकिंग जीत ने यह भी सुनिश्चित कर दिया है कि मेजर लीग क्रिकेट अब विश्व के प्रमुख क्रिकेट टूर्नामेंट्स में से एक बनने की राह पर है। स्मिथ और गॉस के इस तूफानी प्रदर्शन ने न केवल अपनी टीम को जीत दिलाई, बल्कि टी20 क्रिकेट के आंकड़ों की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत भी कर दी है।
सिर्फ एक दिन की नेट प्रैक्टिस से सीरीज नहीं जीत सकते!' पूर्व दिग्गज ने टीम इंडिया को दी कड़ी चेतावनी
इंग्लैंड के खिलाफ आगामी सीरीज के लिए टीम इंडिया की तैयारियों को लेकर भारतीय क्रिकेट गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में एक पूर्व भारतीय दिग्गज बल्लेबाज ने टीम की प्रैक्टिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि विदेशी धरती पर, खासकर इंग्लैंड की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में, केवल एक दिन की नेट प्रैक्टिस के भरोसे सीरीज जीतने का ख्वाब देखना टीम इंडिया पर भारी पड़ सकता है। उनका मानना है कि इस तरह की तैयारियों से भारतीय खिलाड़ी अपनी लय और तालमेल नहीं बिठा पाएंगे, जो जीत के लिए बेहद जरूरी है।विदेशी पिचें और प्रैक्टिस का गणित: क्यों चिंता में हैं पूर्व दिग्गज?पूर्व दिग्गज बल्लेबाज का तर्क है कि इंग्लैंड की कंडीशंस भारत से पूरी तरह अलग हैं। वहां की स्विंग होती गेंद और मौसम का मिजाज बल्लेबाजों के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होता। ऐसे में महज एक दिन का नेट सत्र खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुकूल ढालने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, जब आप बड़ी सीरीज खेल रहे होते हैं, तो आपको वहां की उछाल और परिस्थितियों को समझने के लिए कम से कम 3-4 दिन का समय चाहिए होता है। महज एक दिन की प्रैक्टिस से न तो आप गेंदबाजों की रणनीति समझ सकते हैं और न ही क्रीज पर अपना धैर्य बनाए रख सकते हैं।क्या टीम इंडिया की प्लानिंग में है कोई चूक?यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञ टीम इंडिया के प्रदर्शन को लेकर काफी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। दिग्गज का मानना है कि यदि तैयारी पुख्ता नहीं होगी, तो इंग्लैंड की घातक गेंदबाजी के सामने भारतीय बल्लेबाजी क्रम ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है। उन्होंने टीम मैनेजमेंट को सुझाव दिया है कि वे केवल फिटनेस पर ही नहीं, बल्कि स्किल-बेस्ड प्रैक्टिस और मैच सिचुएशन पर भी उतना ही ध्यान दें। इंग्लैंड की पिचें, जो गेंद को तेजी से मूव कराती हैं, वहां भारतीय बल्लेबाजों को तकनीक में बदलाव की सख्त जरूरत है।सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: फैंस हुए दो गुटों में विभाजितइस बयान के बाद क्रिकेट प्रेमी सोशल मीडिया पर दो गुटों में बंट गए हैं। जहां कुछ फैंस दिग्गज बल्लेबाज की बात से पूरी तरह सहमत दिख रहे हैं और इसे टीम इंडिया के प्रति 'वेक-अप कॉल' मान रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि आधुनिक खिलाड़ी आजकल 'मैच फिटनेस' पर ज्यादा भरोसा करते हैं और लंबे नेट सत्र की अब उतनी जरूरत नहीं है। इस बहस ने इंग्लैंड सीरीज के पहले एक नया रोमांच पैदा कर दिया है। एआई सर्च और प्रिडिक्टिव डेटा एनालिटिक्स भी संकेत दे रहे हैं कि यदि भारत ने शुरुआती मुकाबले में संभलकर शुरुआत नहीं की, तो सीरीज का परिणाम उम्मीद से उलट हो सकता है।अब टीम मैनेजमेंट का क्या होगा अगला कदम?सीरीज शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या टीम इंडिया इस चेतावनी को गंभीरता से लेती है और अपने प्रैक्टिस शेड्यूल में बदलाव करती है, या फिर अपने मौजूदा प्लान पर ही अडिग रहती है। इंग्लैंड की सरजमीं पर भारत का रिकॉर्ड हमेशा से ही कड़ा रहा है, और इस बार कोई भी जोखिम लेना महंगा साबित हो सकता है। क्या टीम इंडिया अपनी रणनीति बदलेगी? यह तो मैदान पर उतरने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इस पूर्व दिग्गज की चेतावनी ने कप्तान और कोच की रातों की नींद जरूर उड़ा दी होगी।
कार्डिफ का मैदान और भारत का वनडे मुकाबला—यह कॉम्बिनेशन भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए किसी पुरानी खूबसूरत याद से कम नहीं है। भारतीय क्रिकेट टीम पूरे 12 साल बाद एक बार फिर कार्डिफ के सोफिया गार्डन्स में वनडे मैच खेलने के लिए उतरने जा रही है। इस मैदान के साथ विराट कोहली और रोहित शर्मा (RO-KO) की सुनहरी यादें जुड़ी हैं। जिस तरह से इन दोनों दिग्गजों ने यहां के रिकॉर्ड्स को अपने नाम किया है, उसे देखते हुए क्रिकेट पंडितों का मानना है कि इस बार भी कार्डिफ की पिच पर रनों की सुनामी आ सकती है।कार्डिफ का 'लकी चार्म': विराट का ऐतिहासिक शतक और रोहित का जलवाकार्डिफ में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड हमेशा से शानदार रहा है। साल 2011 और उसके बाद के दौर में विराट कोहली ने यहां के कठिन हालातों में एक शानदार शतक जड़कर अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया था। वहीं 'हिटमैन' रोहित शर्मा के लिए भी यह मैदान बेहद लकी रहा है। उन्होंने इसी ग्राउंड पर दो बेहतरीन अर्धशतक जड़कर टीम इंडिया को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला था। 'रो-को' की इस जोड़ी ने कार्डिफ की तेज विकेटों पर जिस तरह से अंग्रेजी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाई थीं, उसका खौफ आज भी इंग्लैंड की टीम में देखने को मिलता है।12 साल का लंबा इंतजार और नए तेवरआखिरी बार भारत ने कार्डिफ में वनडे का मुकाबला 2014 के करीब खेला था, और अब 2026 में यह टीम एक अलग निडर तेवर (Aggressive Approach) के साथ मैदान पर उतरेगी। कार्डिफ की पिच पर नमी और उछाल हमेशा से बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण रही है, लेकिन भारतीय टीम का वर्तमान फॉर्म और एआई-संचालित डेटा एनालिसिस यह संकेत दे रहा है कि टीम इंडिया का पलड़ा भारी है। प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि 12 साल बाद एक बार फिर उन्हें रोहित शर्मा के पुल शॉट्स और विराट कोहली का कवर ड्राइव देखने को मिलेगा, जो कार्डिफ की पुरानी यादों को ताजा कर देगा।टीम इंडिया की क्या है रणनीति?इस हाई-वोल्टेज मैच के लिए टीम इंडिया ने कार्डिफ की परिस्थितियों के हिसाब से अपनी प्लेइंग इलेवन को अंतिम रूप दिया है। कोच और कप्तान का फोकस इस बात पर है कि कैसे शुरुआती ओवरों में स्विंग होती गेंदों को संभलकर खेला जाए और बीच के ओवरों में स्पिनर्स पर हावी हुआ जाए। स्थानीय मौसम विभाग की मानें तो मैच के दौरान बादल छाए रह सकते हैं, जो गेंदबाजों के लिए मददगार हो सकते हैं। लेकिन टीम इंडिया जिस तरह से Generative Engine Optimization और एडवांस डेटा एनालिटिक्स के साथ अपनी रणनीति तैयार कर रही है, उससे साफ है कि वे किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार हैं।फैंस के लिए बड़ा मौका: क्या टूटेंगे पुराने रिकॉर्ड्स?कार्डिफ के इस मैदान पर भारतीय फैंस का उत्साह देखते ही बन रहा है। 12 साल का लंबा अंतराल होने के कारण दर्शकों में भारी उत्सुकता है। क्या विराट कोहली कार्डिफ में अपना दूसरा शतक जड़ पाएंगे? क्या रोहित शर्मा अपनी तीसरी फिफ्टी के साथ इतिहास रचेंगे? यह सब कुछ मैच के दिन ही साफ होगा। कार्डिफ की हवाओं में एक बार फिर जीत की खुशबू है और करोड़ों भारतीय फैंस को उम्मीद है कि 'रो-को' की जोड़ी एक बार फिर कार्डिफ में अपना परचम लहराएगी।
देवभूमि उत्तराखंड की गोद में बसे नैनीताल की सुंदरता के चर्चे तो दुनिया भर में हैं, लेकिन इस शहर में एक ऐसी जगह भी है जिसे 'रहस्यमयी ताल' कहा जाता है। सैलानियों के लिए यह भले ही एक सामान्य झील जैसी हो, लेकिन स्थानीय लोगों की मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान किसी चमत्कारिक लोक से कम नहीं है। मान्यता है कि हर पूर्णिमा की रात को इस ताल के शांत पानी में आसमानी परियां उतरती हैं और स्नान करती हैं। यह कहानी सुनने में जितनी रोमांचक लगती है, इस ताल की गहराइयों का रहस्य उतना ही गहरा है, जिसे आज तक बड़े-बड़े वैज्ञानिक और गोताखोर भी सुलझा नहीं पाए हैं।पूर्णिमा की रात का वो अद्भुत नजारास्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, जब आसमान में पूरा चांद चमकता है, तब इस ताल का वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। बुज़ुर्ग बताते हैं कि पूर्णिमा की रात में ताल के आसपास एक अजीब सी सुगंध फैल जाती है और पानी की सतह पर अलौकिक रोशनी दिखाई देती है। लोगों का दावा है कि उन्होंने खुद अपनी आंखों से इस ताल के किनारे कुछ ऐसी आकृतियों को देखा है, जो इंसानी नहीं बल्कि दिव्य हैं। हालांकि, ये दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं, लेकिन पूर्णिमा के दिन यहाँ पर्यटकों और स्थानीय लोगों की कौतूहल भरी भीड़ देखने को मिलती है।आज भी अनसुलझा है ताल की गहराई का राजरहस्यों की बात करें तो इस ताल की गहराई का पता लगाने की कोशिश कई बार की गई, लेकिन हर बार तकनीक और इंसान दोनों नाकाम रहे। कहा जाता है कि कई बार एडवांस सोनार मशीनों और गोताखोरों की मदद से गहराई नापने का प्रयास हुआ, लेकिन एक निश्चित बिंदु के बाद मशीनों ने काम करना बंद कर दिया या फिर उन्हें वहां कुछ ऐसा महसूस हुआ जिसने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। स्थानीय लोग इसे 'पाताल लोक' से जुड़ा हुआ द्वार मानते हैं और कहते हैं कि इस ताल का निचला सिरा किसी दूसरी दुनिया में खुलता है।पर्यटन और रोमांच का अनोखा संगमयदि आप साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) के शौकीन हैं, तो नैनीताल की इस रहस्यमयी जगह की यात्रा आपके लिए यादगार हो सकती है। हालांकि प्रशासन यहाँ रात में रुकने की अनुमति नहीं देता, लेकिन दिन के समय यहाँ की शांति और पहाड़ियों का नज़ारा मन को मोह लेता है। ताल के आसपास का घना जंगल और पक्षियों की चहचहाहट इसे एक परफेक्ट ऑफबीट डेस्टिनेशन बनाती है। यहाँ के स्थानीय गाइड अक्सर इस ताल से जुड़ी लोक कथाएं सुनाते हैं, जो पर्यटकों के अनुभव को और भी रोमांचक बना देती हैं।क्या विज्ञान और आस्था का कोई मिलन है?आज के आधुनिक दौर में, जहाँ हर चीज़ का तर्क मौजूद है, नैनीताल का यह रहस्यमयी ताल एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या वास्तव में यहाँ कुछ अलौकिक है या यह सिर्फ पहाड़ों की एक भौगोलिक पहेली है? विशेषज्ञों का मानना है कि ताल के नीचे मौजूद खनिज और असामान्य दबाव के कारण यहाँ कुछ अजीब घटनाएं महसूस हो सकती हैं। लेकिन, जब तक इस गहराई का रहस्य नहीं खुलता, तब तक यह ताल सैलानियों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण और जिज्ञासा का केंद्र बना रहेगा।
9 से 5 की नौकरी के साथ भी घूम सकते हैं पूरी दुनिया! ट्रैवल क्रिएटर ने बताए ये आसान और स्मार्ट टिप्स
अक्सर लोगों का यह मानना होता है कि ट्रैवलिंग और घूमने-फिरने का शौक सिर्फ उन्हीं के लिए है जिनके पास फ्री टाइम है या जो फुल-टाइम ब्लॉगर हैं। लेकिन, एक मशहूर ट्रैवल क्रिएटर ने इस मिथक को तोड़ते हुए ऐसे 'स्मार्ट ट्रैवल सीक्रेट्स' साझा किए हैं, जो किसी भी 9 से 5 की नौकरी करने वाले व्यक्ति के लिए दुनिया घूमने का दरवाजा खोल सकते हैं। यदि आप भी कॉर्पोरेट जॉब की व्यस्तता और सीमित छुट्टियों के कारण अपनी घूमने की इच्छा को दबा रहे हैं, तो ये तरीके आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।'माइक्रो-ट्रिप' का जादू: लंबी छुट्टियों का इंतजार छोड़ेंट्रैवल क्रिएटर का सबसे पहला और महत्वपूर्ण मंत्र है—'माइक्रो-ट्रिप्स' (Micro-trips)। हम अक्सर साल में एक बार मिलने वाली 15-20 दिनों की लंबी छुट्टी का इंतजार करते हैं, जिसमें कई बार बजट या थकान आड़े आ जाती है। इसके बजाय, अपनी वीकेंड्स को छुट्टियों के साथ जोड़कर छोटे लेकिन फ्रीक्वेंट ट्रिप्स प्लान करें। शुक्रवार की शाम को निकलना और रविवार की रात वापस आना, आपको 48 घंटों में ही एक नया अनुभव दे सकता है। ऐसी ट्रिप्स न केवल सस्ती होती हैं, बल्कि आपको वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखने में भी मदद करती हैं।ऑफिस की छुट्टियों को ऐसे करें स्मार्टली मैनेजअगर आप अपनी छुट्टियों को साल की शुरुआत में ही कैलेंडर के हिसाब से प्लान करते हैं, तो आप साल में 4 से 5 बार लंबी ट्रिप पर जा सकते हैं। सरकारी छुट्टियों और वीकेंड्स को मिलाकर 'ब्रिज हॉलिडे' (Bridge Holiday) का उपयोग करें। अगर आप शुक्रवार और सोमवार की छुट्टी ले लेते हैं, तो आपको लगातार 4 दिनों का समय मिलता है। ट्रैवल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि छुट्टियों को लेकर अपने मैनेजर के साथ पारदर्शिता रखें और अपना काम पहले से शेड्यूल कर लें, ताकि आपके घूमने के दौरान ऑफिस के काम पर कोई असर न पड़े।काम के साथ तालमेल: 'वर्क फ्रॉम एनीवेयर' का लाभ उठाएंआज के दौर में कई कंपनियां 'हाइब्रिड वर्क कल्चर' अपना रही हैं। इसका फायदा उठाना सीखें! अगर आपके पास लैपटॉप है और इंटरनेट की सुविधा है, तो आप 'वर्क फ्रॉम माउंटेन' या 'वर्क फ्रॉम बीच' जैसे विकल्प चुन सकते हैं। एक शांत जगह पर जाकर काम करने से आपकी प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी और शाम के समय आप उस जगह को एक्सप्लोर भी कर पाएंगे। इसे 'वर्कैशन' (Workation) कहा जाता है, जो आज के समय में कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए घूमने का सबसे शानदार तरीका है।स्मार्ट बुकिंग और प्लानिंग: समय और पैसे दोनों की बचतएक स्मार्ट ट्रैवलर वह है जो अपनी बुकिंग्स को लेकर सतर्क रहता है। फ्लाइट और होटल की बुकिंग को 3-4 महीने पहले करने से भारी छूट मिलती है। इसके अलावा, ट्रैवल ऐप्स का उपयोग करें जो प्राइस अलर्ट (Price Alert) देते हैं। ट्रैवल क्रिएटर का कहना है कि यात्रा को लग्जरी बनाने के बजाय 'अनुभव केंद्रित' रखें। स्थानीय होमस्टे और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना न केवल आपकी यात्रा को सस्ता बनाता है, बल्कि आपको उस जगह की संस्कृति से जुड़ने का मौका भी देता है।
बारिश में गोरखपुर की इन खूबसूरत जगहों पर मचेगा धमाल! फैमिली संग आउटिंग के लिए हैं बेस्ट डेस्टिनेशन
मानसून का मौसम आते ही गोरखपुर और इसके आसपास के इलाके हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं। अगर आप भी इस बारिश के सुहावने सफर का आनंद अपने परिवार के साथ उठाना चाहते हैं, तो गोरखपुर में ऐसी कई जगहें हैं जो इस मौसम में स्वर्ग जैसी महसूस होती हैं। शहर की भागदौड़ से दूर, शांत और प्राकृतिक नजारों से भरपूर ये स्थान न केवल बच्चों के लिए बल्कि बड़ों के लिए भी पिकनिक स्पॉट के तौर पर बेहतरीन हैं। आइए जानते हैं गोरखपुर में बारिश के दौरान घूमने के लिए सबसे बेस्ट जगहें कौन सी हैं।रामगढ़ ताल: बारिश में झील का नज़ारा है बेहद हसीनगोरखपुर की पहचान बन चुका 'रामगढ़ ताल' मानसून में सबसे ज्यादा खूबसूरत दिखता है। ताल के चारों ओर बनी वॉक-वे और वहां फैली हरियाली बारिश की बूंदों के बाद और भी निखर जाती है। शाम के वक्त परिवार के साथ यहाँ नौका विहार (Boating) करना एक यादगार अनुभव होता है। झील के किनारे की ठंडी हवा और हल्की फुल्की बारिश के बीच चाय-पकौड़ों का आनंद लेना आपके वीकेंड को खास बना देगा।कुकरैल और विनोद वन: कुदरत की गोद में बिताएं पलअगर आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो विनोद वन (Vinod Van) और कुकरैल क्षेत्र आपके लिए बेस्ट हैं। यहाँ के घने पेड़-पौधे बारिश में एकदम जीवंत हो उठते हैं। यहाँ का शांत वातावरण और जंगल के नज़ारे फैमिली आउटिंग के लिए परफेक्ट हैं। यहाँ बच्चों के लिए पार्क और बड़ों के लिए घूमने के लिए पर्याप्त जगह है, जहाँ आप शांति से प्रकृति के बीच समय बिता सकते हैं। मानसून में यहाँ का फोटोग्राफी का नज़ारा भी लाजवाब होता है।बुढ़िया माई और गोरखनाथ मंदिर परिसरबारिश के मौसम में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की सैर भी एक अलग ही सुकून देती है। गोरखनाथ मंदिर का विशाल परिसर मानसून में बहुत ही शांत और दिव्य लगता है। यहाँ की वास्तुकला और हरियाली बारिश की बूंदों के साथ मिलकर एक अद्भुत शांति का अहसास कराती है। इसके अलावा, बुढ़िया माई का क्षेत्र भी अपनी हरियाली के लिए जाना जाता है, जहाँ आप परिवार के साथ सुकून भरे कुछ पल बिता सकते हैं।नेहरू पार्क और शहीद अशफाक उल्ला खान चिड़ियाघरबच्चों के साथ घूमने के लिए 'शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणी उद्यान' यानी गोरखपुर चिड़ियाघर मानसून में एक अलग ही रंग बिखेरता है। बारिश के बाद पेड़-पौधे धुलने से चिड़ियाघर का वातावरण काफी खुशनुमा हो जाता है। हालाँकि, जानवरों को देखने के लिए थोड़ा सावधानी बरतनी पड़ सकती है, लेकिन पूरा परिसर बारिश में काफी हरा-भरा और साफ दिखता है। इसके अलावा, नेहरू पार्क भी परिवार के साथ छोटी पिकनिक के लिए एक शानदार विकल्प है।मानसून में सफर के लिए खास सुझावगोरखपुर में बारिश के दौरान घूमने जाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें। अपने साथ हमेशा छतरी, रेनकोट और वॉटरप्रूफ जूते जरूर रखें। साथ ही, बच्चों के लिए कुछ खाने-पीने का सामान साथ ले जाएं, क्योंकि कई बार पार्क के आसपास के वेंडर बारिश की वजह से नहीं होते। इन जगहों पर जाकर आप मानसून के असली आनंद को महसूस कर सकते हैं और परिवार के साथ एक शानदार दिन बिता सकते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निवासियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक और बेहद रोमांचक खबर सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित कुकरैल नाइट सफारी (Kukrail Night Safari) प्रोजेक्ट को अब सुप्रीम कोर्ट से अंतिम मंजूरी मिल गई है। इस प्रोजेक्ट के साथ ही लखनऊ अब भारत के चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां नाइट सफारी की अनूठी सुविधा उपलब्ध होगी। इस सफारी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पर्यटक अब घने अंधेरे में भी शेरों, बाघों और अन्य जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का रोमांच अनुभव कर सकेंगे।क्या है कुकरैल नाइट सफारी का विजन?यह प्रोजेक्ट न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी लखनऊ के लिए एक माइलस्टोन साबित होगा। कुकरैल के घने जंगलों को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यह पूरी तरह से एक इको-फ्रेंडली नाइट सफारी का रूप ले ले। यहां पर्यटकों को विशेष रूप से डिजाइन की गई गाड़ियों में ले जाया जाएगा, जो अंधेरे में भी जानवरों को बिना परेशान किए देखने में सक्षम होंगी। रात के सन्नाटे में जंगल का अनुभव लेना और शेरों की दहाड़ को करीब से सुनना सैलानियों के लिए एक लाइफ-टाइम एक्सपीरियंस होने वाला है।सुरक्षा के कड़े इंतजाम और आधुनिक तकनीक का उपयोगवन्यजीव विशेषज्ञों और प्रशासन का कहना है कि पर्यटकों की सुरक्षा और जानवरों की निजता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सफारी में जानवरों की निगरानी के लिए नाइट-विज़न कैमरे, मोशन सेंसर और सुरक्षा के लिए आधुनिक फेंसिंग लगाई जाएगी। इसके अलावा, सफारी के दौरान गाड़ियों के साथ ट्रेंड गाइड और सुरक्षा गार्ड भी मौजूद रहेंगे ताकि किसी भी तरह की अनहोनी की संभावना न रहे। यह प्रोजेक्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफारी तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।लखनऊ बनेगा टूरिज्म का ग्लोबल हबसुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अब निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। नाइट सफारी के अलावा, इस क्षेत्र में एक विशाल बायोडायवर्सिटी पार्क और वन्यजीव शोध केंद्र भी बनाया जाएगा, जो छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। लखनऊ में नाइट सफारी शुरू होने से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि यह उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म को एक नई पहचान भी दिलाएगा। अब वह दिन दूर नहीं जब लखनऊ की पहचान केवल अपनी संस्कृति और खान-पान के लिए नहीं, बल्कि देश की पहली नाइट सफारी के लिए भी दुनिया भर में होगी।
वीडियो वायरल होने के बाद रिश्वत के आरोप में टीवीके पदाधिकारी अरेस्ट
चेन्नई। भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख का संदेश देते हुए तमिलनाडु पुलिस ने सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) के एक पदाधिकारी को 1.30 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब इस मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के […] The post वीडियो वायरल होने के बाद रिश्वत के आरोप में टीवीके पदाधिकारी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, हिट एंड रन के 2 आरोपी दबोचे, गाड़ी बरामद
दिल्ली पुलिस ने अलीपुर थाना क्षेत्र में हुए हिट एंड रन के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना में एक पुलिस कांस्टेबल की जान गई थी। पुलिस ने आरोपियों की कार को भी जब्त कर लिया है।
सलमान खान ने सबसे पहले समझ ली थी सोनाक्षी-ज़हीर की लव स्टोरी
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति ज़हीर इक़बाल ने खुलासा किया है कि उनके रिश्ते को सबसे पहले अभिनेता सलमान खान ने पहचान लिया था, जबकि उस समय दोनों अपने प्यार को स्वीकार करने से बच रहे थे। नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो डबल डेट के नए एपिसोड में सोनाक्षी और […] The post सलमान खान ने सबसे पहले समझ ली थी सोनाक्षी-ज़हीर की लव स्टोरी appeared first on Sabguru News .
London Trip: सड़कें संकरी, फुटपाथ चौड़े, फिर भी जाम नहीं लगता
London Traffic Rules: बात चुभने वाली है, लेकिन है सोलह आने सच। हमने पाश्चात्य तौर-तरीके (खान-पान, कपड़े, फैशन, भाषा) तो बखूबी अपना लिए, लेकिन वहां के नियम-कायदे, शिष्टाचार को छू भी नहीं पाए। हम अब बात करते हैं परिवहन मसले की। आप हैरत करेंगे कि वहां ...
हैप्पी बर्थडे : 43 वर्ष की हुईं अभिनेत्री कैटरीना कैफ
मुंबई। बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री कैटरीना कैफ आज 43 वर्ष की हो गईं।16 जुलाई 1983 को हांगकांग में जन्मी कैटरीना कैफ का मूल नाम कैटरीना टॉरकेटी है। उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत की। मॉडलिंग के उद्देश्य से वह मुंबई आईं, जहां उनकी मुलाकात फिल्म निर्देशक कैजाद गुस्ताद से […] The post हैप्पी बर्थडे : 43 वर्ष की हुईं अभिनेत्री कैटरीना कैफ appeared first on Sabguru News .
जन्मदिन पर परिवार संग समय बिताएंगी अभिनेत्री आमना शरीफ
मुंबई। अभिनेत्री आमना शरीफ इस वर्ष अपना जन्मदिन किसी भव्य पार्टी के बजाय परिवार और करीबी दोस्तों के साथ सादगीपूर्ण ढंग से मनाएंगी। आमना का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ा उपहार अपनों का साथ और उनके साथ बिताया गया गुणवत्तापूर्ण समय है। आमना शरीफ ने कहा कि हर जन्मदिन उन्हें यह एहसास कराता […] The post जन्मदिन पर परिवार संग समय बिताएंगी अभिनेत्री आमना शरीफ appeared first on Sabguru News .
अजमेर में बांग्लादेशी महिला को हिरासत में लिया गया
अजमेर। राजस्थान के अजमेर में पुलिस ने एक बांग्लादेशी महिला को हिरासत में लिया हैं और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार राज्यभर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान एवं निष्कासन के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को यह महत्वपूर्ण सफलता […] The post अजमेर में बांग्लादेशी महिला को हिरासत में लिया गया appeared first on Sabguru News .
निर्यात वाले डीजल पर उत्पाद शुल्क सात रुपए बढ़ा, पेट्रोल पर 1.5 रुपए की कटौती
नई दिल्ली। सरकार ने निर्यात किये जाने वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर उत्पाद शुल्क की दरों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की बुधवार देर रात जारी अधिसूचना के मुताबिक नई दरें 16 जुलाई जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। निर्यात वाले डीजल और एटीएफ पर उत्पाद शुल्क सात-सात रुपए प्रति लीटर […] The post निर्यात वाले डीजल पर उत्पाद शुल्क सात रुपए बढ़ा, पेट्रोल पर 1.5 रुपए की कटौती appeared first on Sabguru News .
रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग का E20 पेट्रोल विवाद पर बड़ा फैसला। कार कंपनी को नई कार देने या पूरी कीमत लौटाने, साथ ही मरम्मत खर्च और मुआवजा देने का आदेश।
उत्तर प्रदेश के मौलाना जरजिस अंसारी ने एक विवादित बयान देते हुए भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताता है। उन्होंने दावा किया कि श्रीकृष्ण 5 वक्त की नमाज पढ़ते थे। उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण इस्लाम को प्रमोट भी किया है। बयान पर बवाल मच गया। कई ...
आचार्य प्रशांत ने सोनम वांगचुक से अनशन तोड़ने का किया आग्रह, सरकार से संवाद की की अपील!
दार्शनिक और लेखक आचार्य प्रशांत ने नीट यूजी पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के बाद खड़े हुए आंदोलन पर बात की। उन्होंने कहा कि यह संकट केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि हमारे शिक्षा तंत्र और समाज के किसी अधिक गहरे संकट का संकेत है।
सोनम वांगचुक का बड़ा संदेश, संसद मार्च में साथ चलने की अपील, आज जंतर-मंतर पहुंचेंगे केजरीवाल
Sonam Wangchuk Protest : जंतर मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का आज 19वां दिन है। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के जगन्नाथ रथयात्रा संबंधी ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनसे एक बार दिल्ली के जंतर ...
मॉनसून पर लगा ब्रेक, यूपी-बिहार से दिल्ली-NCR तक बढ़ी उमस; जानें कब होगी झमाझम बारिश की वापसी
देशभर में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। यूपी, बिहार, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में बारिश की कमी से उमस और किसानों की चिंता बढ़ी। जानिए IMD का ताजा अपडेट और कब लौटेगी बारिश।
LIVE: अहमदाबाद, पुरी समेत देशभर में जगन्नाथ रथ यात्रा का उत्साह
Latest News Today Live Updates in Hindi : अहमदाबाद, पुरी समेत देशभर में जगन्नाथ रथ यात्रा का उत्साह दिखा। गृहमंत्री अमित शाह ने मंगला आरती की। पल पल की जानकारी...
अमेरिका ने लगातार पांचवें दिन ईरान पर हमले तेज करते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की ओर बढ़ रहे एक ऑयल टैंकर को निशाना बनाया। CENTCOM के अनुसार जहाज को हेलफायर मिसाइल से निष्क्रिय किया गया। जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए।
लियोनेल मेसी की अगुवाई में अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई। इंग्लैंड ने दूसरे हाफ में गॉर्डन के गोल की मदद से बढ़त ली थी, लेकिन अर्जेंटीना ने 7 मिनट में 2 गोल कर मैच अपने नाम कर लिया। फाइनल ...
दक्षिण चीन सागर पर भारत के रुख से बौखलाया चीन, UN फैसले के समर्थन पर साधा निशाना
भारत के बयान के जवाब में चीन के राजदूत शू फीहोंग ने कहा कि दक्षिण चीन सागर पर चीन की संप्रभुता इतिहास और कानून दोनों के आधार पर स्थापित है। उन्होंने 2016 के मध्यस्थता फैसले को कानूनी प्रक्रिया का ढोंग और राजनीतिक तमाशा बताते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसला दिया था।
रिपोर्टों के अनुसार, कथित रूप से लीक किए गए दस्तावेजों में संयंत्र के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर से जुड़ी जानकारी, बैठकों के रिकॉर्ड, बीमा दस्तावेज और अन्य प्रशासनिक फाइलें शामिल हैं। दावा किया गया है कि यह डेटा संयंत्र के एक ठेकेदार के सर्वर से प्राप्त हुआ है।
जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश के बीच एक बड़ी प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी चेतावनी सामने आई है। चिनाब नदी (Chenab River) के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने 26 जुलाई 2026 तक के लिए एक व्यापक हाई अलर्ट जारी किया है।अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र के दो सबसे प्रमुख जलविद्युत प्रोजेक्ट्स—सलाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन (Salal Dam) और बगलिहार हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (Baglihar Dam) के जलाशयों में पानी का स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच रहा है। बांधों की सुरक्षा और अतिरिक्त पानी को नियंत्रित करने के लिए चिनाब नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाना तय हुआ है, जिसके कारण नदी के निचले और तटीय इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।सलाल और बगलिहार बांध से बढ़ेगा खतरा: प्रशासनिक गाइडलाइनप्रशासन और नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) ने संयुक्त रूप से नागरिक सुरक्षा के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:26 जुलाई तक सख्त नाकेबंदी: चिनाब नदी के किनारे बसे गांवों, कस्बों और बस्तियों के लोगों को नदी के नजदीक न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। 26 जुलाई 2026 तक नदी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधि पर पूरी तरह रोक रहेगी।मवेशियों और नावों पर पाबंदी: चरवाहों को अपने मवेशियों (गाय, भैंस, बकरियां) को नदी के पास ले जाने से मना किया गया है। साथ ही स्थानीय नाविकों और मछुआरों को भी इस अवधि के दौरान पानी में न उतरने की चेतावनी दी गई है।फ्लश गेट खोलने की प्रक्रिया: बांधों के फ्लश गेट (Sluice Gates) खोले जाने के समय अचानक पानी का बहाव बेहद तेज हो जाएगा। इससे नदी के किनारे तेजी से कटान हो सकता है, इसलिए निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने की सलाह दी गई है।इन जिलों और इलाकों पर रहेगा सबसे ज्यादा असरचिनाब नदी का बहाव क्षेत्र जम्मू-कश्मीर के कई महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरता है। इस अलर्ट का सीधा असर निम्नलिखित क्षेत्रों पर पड़ेगा:रामबन और डोडा: बगलिहार बांध से पानी छोड़े जाने के कारण इन पहाड़ी जिलों के नदी तटीय रास्तों पर भूस्खलन (Landslide) और जलभराव का खतरा बढ़ गया है।रियासी (Reasi): सलाल बांध इसी जिले में स्थित है, इसलिए बांध के निचले प्रवाह (Downstream) वाले गांवों में अलर्ट का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है।अखनूर (Akhnoor) और जम्मू: चिनाब नदी जब मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है, तो अखनूर के घाटों पर जलस्तर तेजी से बढ़ता है। यहां की स्थानीय पुलिस और SDRF की टीमों को चौबीसों घंटे निगरानी के लिए तैनात कर दिया गया है।आपातकालीन तैयारियां और सुरक्षा अलर्टबाढ़ की किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है:SDRF और पुलिस हाई अलर्ट पर: राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस की टीमों को लाइफ-जैकेट्स, नावों और अन्य रेस्क्यू उपकरणों के साथ संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है।कंट्रोल रूम स्थापित: किसी भी आपातकालीन स्थिति या जलस्तर की ताजा जानकारी के लिए जिला मुख्यालयों पर 24/7 काम करने वाले आपातकालीन नियंत्रण कक्ष (Emergency Control Rooms) सक्रिय कर दिए गए हैं।आम नागरिकों से अपील: प्रशासन ने लोगों से पैनिक (घबराने) न होने की अपील की है, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। जब तक बांधों से पानी का डिस्चार्ज सामान्य नहीं हो जाता और 26 जुलाई की समयसीमा समाप्त नहीं होती, तब तक नदी से सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।
हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में सूर्य देव के राशि परिवर्तन और उनकी गति का एक विशेष और गहरा महत्व है। आज यानी 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) को सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे 'कर्क संक्रांति' (Karka Sankranti) कहा जाता है। सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करते ही 'दक्षिणायन' (Dakshinayan) काल की शुरुआत हो जाती है।शास्त्रों में दक्षिणायन को बेहद रहस्यमयी और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आज से देवताओं की रात शुरू हो चुकी है। आइए जानते हैं कि दक्षिणायन क्या है, इसका धार्मिक रहस्य क्या है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।क्या है दक्षिणायन? (धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व)धार्मिक मान्यता (देवताओं की रात): हिंदू काल गणना के अनुसार, मनुष्यों का एक वर्ष देवताओं के एक दिन-रात के बराबर होता है। जब सूर्य छह महीने उत्तरायण (मकर संक्रांति से) में रहते हैं, तो वह देवताओं का दिन कहलाता है। वहीं, जब सूर्य कर्क राशि से धनु राशि तक दक्षिणायन में गोचर करते हैं, तो यह छह महीने की अवधि देवताओं की रात (Celestials' Night) मानी जाती है। इस दौरान देवलोक में रात्रि होने के कारण सभी देवी-देवता 'योग निद्रा' में चले जाते हैं।वैज्ञानिक दृष्टिकोण: खगोलीय विज्ञान (Astronomy) के अनुसार, 21 जून को ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) के बाद सूर्य धीरे-धीरे भूमध्य रेखा के दक्षिण की ओर बढ़ने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में दिन धीरे-धीरे छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं। (वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार यह खगोलीय बदलाव कर्क संक्रांति यानी 16 जुलाई से पूर्ण प्रभावी माना जाता है)।दक्षिणायन की तीन मुख्य विशेषताएं और नियमपहलू / पैरामीटरदक्षिणायन काल का प्रभाव व महत्वमांगलिक कार्यों पर रोकइस छह महीने की अवधि में शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश जैसे सभी बड़े शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है, क्योंकि देवताओं के शयन काल में किए गए कार्यों को पूर्ण फलदायी नहीं माना जाता।साधना और व्रत का समयइसे 'साधना पाद' भी कहा जाता है। दक्षिणायन में ही सनातन धर्म के सबसे बड़े व्रत-त्योहार जैसे चातुर्मास, सावन सोमवार, रक्षाबंधन, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली आते हैं। यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और मानसिक शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ है।पितरों की पूजा (श्राद्ध)दक्षिणायन काल को पितरों (पूर्वजों) की तृप्ति के लिए उत्तम माना गया है। इसी काल में 'पितृ पक्ष' (Mahalaya Shradh) आता है, जिसमें पिंडदान और तर्पण करके पूर्वजों का आशीर्वाद लिया जाता है।महाभारत काल का वो रहस्य: क्यों भीष्म पितामह ने किया था उत्तरायण का इंतजार?दक्षिणायन और उत्तरायण के इसी रहस्य से महाभारत की एक बेहद प्रसिद्ध कथा जुड़ी हुई है। महाभारत युद्ध के दौरान जब इच्छा मृत्यु का वरदान पाने वाले भीष्म पितामह तीरों की शय्या पर लेट गए थे, तब सूर्य देव दक्षिणायन में चल रहे थे।पौराणिक रहस्य: शास्त्रों में मान्यता है कि दक्षिणायन (देवताओं की रात) में प्राण त्यागने वाले जातक को धुंधले मार्ग से जाना पड़ता है और उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति नहीं मिलती। वहीं, उत्तरायण के प्रकाशमयी मार्ग से जाने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण था कि तीरों की असहनीय पीड़ा सहने के बावजूद भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने (मकर संक्रांति) तक अपने प्राण नहीं त्यागे थे।दक्षिणायन में क्या करें ताकि जीवन में बनी रहे सुख-समृद्धि?चूंकि इस काल में नकारात्मक शक्तियां या तामसिक ऊर्जा थोड़ी सक्रिय होने लगती है, इसलिए शास्त्रों में कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं:भगवान विष्णु और शिव की आराधना: देवशयनी एकादशी के बाद से भगवान विष्णु पाताल लोक में विश्राम करते हैं और सृष्टि का कार्यभार महादेव संभालते हैं। इसलिए सावन और चातुर्मास में शिव उपासना जरूर करें।नियमित दान-पुण्य: इस काल में किए गए दान, यज्ञ और उपवास से मानसिक संताप दूर होते हैं और आरोग्य की प्राप्ति होती है।तामसिक भोजन का त्याग: बरसात और शरद ऋतु के आगमन के कारण इस दौरान पाचन क्रिया मंद हो जाती है, इसलिए सात्विक भोजन अपनाना वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों लिहाज से बेहतर है।
छोटे पर्दे (Television) से लेकर ओटीटी (OTT) की दुनिया तक अपनी बेहतरीन अदाकारी और हुस्न का जलवा बिखेरने वाली मशहूर एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट (Jennifer Winget) एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेनिफर विंगेट आज यानी 16 जुलाई 2026 को सिंगापुर बेस्ड बिजनेसमैन विलियम इश्माएल (William Ishmael) के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं।खबरों के अनुसार, यह शादी भारत में नहीं बल्कि यूनाइटेड किंगडम (UK) में बेहद निजी और क्रिश्चियन रीति-रिवाज (White Wedding) से होने जा रही है, जिसमें सिर्फ परिवार के लोग और चुनिंदा दोस्त ही शामिल होंगे। इस बड़ी खुशखबरी के बीच फैन्स यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि टीवी जगत की सबसे महंगी अभिनेत्रियों में शुमार जेनिफर विंगेट कुल कितने करोड़ रुपये की संपत्ति (Net Worth) की मालकिन हैं। आइए डालते हैं उनकी कमाई और लाइफस्टाइल पर एक नजर:प्रति एपिसोड और ओटीटी प्रोजेक्ट्स के लिए लेती हैं तगड़ी फीसजेनिफर विंगेट ने बाल कलाकार (Child Artist) के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन उन्हें असली पहचान साल 2009 के सुपरहिट शो 'दिल मिल गए' (Dill Mill Gayye) में डॉ. रिद्धिमा गुप्ता के किरदार से मिली। इसके बाद 'सरस्वतीचंद्र', 'बेहद' (माया मेहरोत्रा) और 'बेपनाह' जैसे शोज ने उन्हें टीवी का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया।टीवी शोज की फीस: मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के मुताबिक, जेनिफर विंगेट टीवी इंडस्ट्री की हाईएस्ट-पेड एक्ट्रेसेस में से एक हैं। वह किसी भी डेली सोप या टीवी शो के एक एपिसोड के लिए लगभग ₹1.5 लाख से ₹2 लाख तक चार्ज करती हैं।ओटीटी (OTT) से बम्पर कमाई: टीवी के बाद जेनिफर ने डिजिटल स्पेस का रुख किया है, जहाँ उन्होंने 'कोड एम' (Code M) और 'रायसिंघानी वर्सेज रायसिंघानी' (Raisinghani vs Raisinghani) जैसी लोकप्रिय वेब सीरीज में काम किया है। रिपोर्ट्स की मानें तो वह किसी भी एक बड़ी वेब सीरीज या डिजिटल प्रोजेक्ट के लिए ₹6 करोड़ से ₹8 करोड़ तक की भारी-भरकम फीस वसूलती हैं।ब्रैंड एंडोर्समेंट और कुल नेट वर्थ (Jennifer Winget Net Worth)अभिनय के अलावा जेनिफर विंगेट विज्ञापनों और सोशल मीडिया एंडोर्समेंट के जरिए भी मोटी कमाई करती हैं।ब्रैंड एम्बेसडर: जेनिफर विंगेट वर्तमान में देश-विदेश के लगभग 15 से अधिक नामी ब्रैंड्स की एम्बेसडर हैं। ब्रैंड एंडोर्समेंट, फोटोशूट और पेड सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए वे सालाना करोड़ों रुपये कमाती हैं।कुल संपत्ति: मीडिया और वित्तीय रिपोर्ट्स (जैसे मैशेबल इंडिया) के अनुसार, जेनिफर विंगेट की कुल अनुमानित संपत्ति ₹45 करोड़ से ₹58 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है। उनके पास मुंबई में खुद का एक बेहद आलीशान घर और कई लक्जरी गाड़ियां भी मौजूद हैं।कौन हैं होने वाले पति विलियम इश्माएल?जेनिफर के होने वाले पति विलियम इश्माएल लाइमलाइट और चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते हैं।वह वर्तमान में सिंगापुर के MHC डिजिटल ग्रुप में 'बिजनेस डेवलपमेंट और ट्रेडिंग' के डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं।उन्होंने यॉर्क यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स और फाइनेंस में अपनी पढ़ाई पूरी की है और वे लगभग एक दशक तक मशहूर यूबीएस (UBS) इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ भी जुड़े रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विलियम ने एक हॉलिडे के दौरान जेनिफर को प्रपोज किया था।जेनिफर की दूसरी शादी: आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह जेनिफर विंगेट की दूसरी शादी है। इससे पहले साल 2012 में उन्होंने अपने को-स्टार करण सिंह ग्रोवर से शादी की थी, लेकिन वैचारिक मतभेदों के चलते साल 2014 में दोनों का तलाक हो गया था। पिछले 12 सालों से जेनिफर ने अपना पूरा ध्यान अपने शानदार करियर पर लगा रखा था और अब वे अपनी जिंदगी की एक बेहद खूबसूरत नई शुरुआत करने जा रही हैं।
कौन हैं डेना करारी? अमेरिका-ईरान जंग के बीच रिहा हुईं अमेरिकी नागरिक की पूरी कहानी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और भीषण बमबारी के बीच एक बड़ी और राहत भरी कूटनीतिक खबर सामने आई है। ईरान ने पिछले डेढ़ साल (दिसंबर 2024) से अपने देश में बंधक बनाकर रखी गईं अमेरिकी-ईरानी दोहरी नागरिकता (US-Iran Dual Citizen) वाली महिला डेना करारी (Dena Karari) को आज़ाद कर दिया है।मानवाधिकार वकील जेरेड गेंसर (Jared Genser) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने आधिकारिक तौर पर उनकी रिहाई की पुष्टि की है। ट्रंप ने इसे ईरान की तरफ से एक सद्भावना संकेत (Gesture of Goodwill) बताया है।कौन हैं डेना करारी और उन्हें क्यों रोका गया था?दिसंबर 2024 से थीं फंसी: डेना करारी अमेरिका और ईरान की दोहरी नागरिकता रखने वाली महिला हैं। वह दिसंबर 2024 में ईरान गई थीं, लेकिन तब से ही ईरानी प्रशासन ने उन पर पाबंदियां लगा दी थीं।लगे थे जासूसी के 'फर्जी' आरोप: ईरान सरकार ने डेना पर जासूसी करने (Espionage) और एक विरोधी देश (अमेरिका) के साथ सहयोग करने के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, उनके वकील जेरेड गेंसर के मुताबिक ये सभी आरोप पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत (Bogus Charges) थे।जेल में नहीं, 'एग्जिट बैन' में थीं: कई मीडिया रिपोर्ट्स में उनके डेढ़ साल तक जेल में रहने की बात कही जा रही है, लेकिन असल में वह ईरान के 'एग्जिट बैन' (Coercive Exit Ban) के तहत फंसी हुई थीं। इसका मतलब यह है कि उन्हें जेल की कोठरी में बंद नहीं किया गया था, बल्कि ईरानी अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट जब्त कर उन्हें देश छोड़ने से पूरी तरह रोक रखा था। उन पर कोई औपचारिक मुकदमा भी नहीं चलाया गया था।तबीयत बिगड़ने की खबर: उनका एग्जिट बैन इसी साल अप्रैल में खत्म हो गया था, फिर भी ईरान उन्हें जाने नहीं दे रहा था। सूत्रों के अनुसार, मानसिक तनाव और विपरीत परिस्थितियों के कारण 8 जुलाई 2026 को ईरान में ही उन्हें दिल का दौरा (Heart Attack) भी पड़ा था।जंग के बीच कैसे मुमकिन हुई रिहाई?वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच भीषण हवाई हमले और सैन्य टकराव चल रहा है, जिसके कारण खाड़ी देशों में युद्ध का माहौल है। ऐसे खतरनाक दौर में डेना की रिहाई के पीछे बैक-चैनल कूटनीति काम कर रही थी:अमेरिकी विदेश मंत्रालय की सूची: अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) ने ईरान के साथ कूटनीति का नेतृत्व कर रहे अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) को उन अमेरिकियों की एक सूची सौंपी थी जिन्हें ईरान ने गलत तरीके से रोक रखा था। इस लिस्ट में डेना करारी का नाम प्रमुखता से शामिल था।डोनाल्ड ट्रंप के प्रयास: डेना के वकील ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निरंतर और असाधारण दबाव के कारण ही ईरान डेना को छोड़ने पर मजबूर हुआ।सुरक्षित वापसी: रिहाई के तुरंत बाद डेना करारी को ईरान से बाहर सुरक्षित निकाल लिया गया है और वे अमेरिका के लिए उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने पुष्टि की है कि उनकी सेहत अब ठीक है।क्या यह अमेरिका-ईरान समझौते का हिस्सा है?गौरतलब है कि पिछले महीने ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम को लेकर एक आपसी सहमति (MoU) बनी थी, जिस पर हालिया हमलों के बाद अब खतरा मंडरा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए अमेरिकियों की रिहाई उस MoU का हिस्सा नहीं थी। ऐसे में युद्ध के चरम फेज में पहुंचने के बावजूद ईरान द्वारा डेना करारी को छोड़ना कूटनीतिक रूप से एक बेहद अप्रत्याशित कदम माना जा रहा है।हालांकि, अभी भी कामरान हिकमती और रज़ा वलीज़ादेह जैसे कई अन्य अमेरिकी नागरिक ईरान की बदनाम 'इविन जेल' (Evin Prison) में बंद हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए अमेरिकी प्रशासन लगातार दबाव बना रहा है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों पीएफ खाताधारकों के लिए एक बेहद जरूरी और काम की खबर आई है। ईपीएफओ ने अपने मेंबर्स को ऑनलाइन क्लेम सेटलमेंट को तेज करने और डिजिटल रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए एक नया अलर्ट जारी किया है। इसके तहत सभी पीएफ सब्सक्राइबर्स को यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर अपनी हाल की प्रोफाइल फोटो (Profile Photo) अपलोड या अपडेट करनी होगी।यदि आप भी अपना ई-नॉमिनेशन (e-Nomination) पूरा करना चाहते हैं या भविष्य में ऑनलाइन पीएफ विड्रॉल (PF Withdrawal) जैसी डिजिटल सेवाओं का बिना किसी रुकावट के लाभ उठाना चाहते हैं, तो प्रोफाइल पर सही फोटो का होना अनिवार्य है। आइए जानते हैं ईपीएफओ के इस नए निर्देश की बारीकियां, फोटो अपडेट करने का आसान तरीका और नॉमिनेशन से जुड़े कड़े नियम।प्रोफाइल फोटो अपडेट करना क्यों है बेहद जरूरी?मनी कंट्रोल की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन वेरिफिकेशन प्रोसेस को फुलप्रूफ और पारदर्शी बनाने के लिए ईपीएफओ ने यह कदम उठाया है:ई-नॉमिनेशन में आसानी: ई-नॉमिनेशन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने और इसे मान्य बनाने (e-Sign Process) के लिए प्रोफाइल फोटो का अपडेट होना आवश्यक है।दावेदारों को तुरंत मिलेगा पैसा: एक सही और अपडेटेड नॉमिनेशन यह सुनिश्चित करता है कि खाताधारक के साथ किसी अनहोनी की स्थिति में ईपीएफ (EPF) बैलेंस, एम्प्लॉईज पेंशन स्कीम (EPS) और एम्प्लॉईज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) के तहत मिलने वाला क्लेम बिना किसी कानूनी अड़चन या अतिरिक्त पेपरवर्क के सही लाभार्थी (नॉमिनी) को तुरंत ट्रांसफर हो सके।स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: पोर्टल पर कैसे अपडेट करें अपनी फोटो?अपने पीएफ अकाउंट में लेटेस्ट पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करने की प्रक्रिया बेहद सरल है:लॉगिन करें: सबसे पहले ईपीएफओ के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर जाएं। वहां अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करके लॉगिन करें।प्रोफाइल सेक्शन में जाएं: मुख्य डैशबोर्ड खुलने के बाद मेन्यू बार में जाकर ‘व्यू’ (View) ऑप्शन पर क्लिक करें और फिर ‘प्रोफाइल’ (Profile) सेक्शन को चुनें।फोटो का चयन करें: यहां आपको अपनी प्रोफाइल फोटो अपलोड या चेंज करने का विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।अपलोड और सेव: अपनी हाल की साफ और पासपोर्ट साइज फोटो को ब्राउज करके अपलोड करें और ‘सेव चेंजेस’ पर क्लिक कर दें।(ध्यान रहे कि ऑनलाइन क्लेम या ई-नॉमिनेशन फाइल करने से पहले एक बार यह जरूर जांच लें कि आपकी नई फोटो प्रोफाइल पर सही ढंग से दिखाई दे रही है या नहीं।)EPF नॉमिनेशन के नियम: कौन बन सकता है योग्य नॉमिनी?ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, हर कोई आपके पीएफ फंड का नॉमिनी बनने के योग्य नहीं होता है। इसके लिए बकायदा कानूनन श्रेणियां तय की गई हैं:पुरुष सब्सक्राइबर्स के लिए: योग्य नॉमिनी के दायरे में पत्नी, बच्चे (चाहे विवाहित हों या अविवाहित), आश्रित माता-पिता, और दिवंगत बेटे की विधवा व उसके बच्चे शामिल हो सकते हैं।महिला सब्सक्राइबर्स के लिए: योग्य नॉमिनी में पति, बच्चे, आश्रित माता-पिता, पति के आश्रित माता-पिता और दिवंगत बेटे की विधवा व उसके बच्चे आ सकते हैं।विवाहित सदस्यों के लिए कड़ा नियम: शादीशुदा सब्सक्राइबर्स को अपने जीवनसाथी (पति/पत्नी) का नाम जोड़ना कानूनी रूप से अनिवार्य है, भले ही वे उन्हें अपना पीएफ नॉमिनी न बनाना चाहते हों।जरूरी दस्तावेज: पेंशन फंड के लिए जीवनसाथी और बच्चों को ही परिवार माना जाता है। एक बार जब आप अपना ईपीएफ नॉमिनी चुन लेते हैं, तो आपको उस परिवार के सदस्य की पहचान पत्र (जैसे आधार) की कॉपी और एक पासपोर्ट साइज फोटो भी पोर्टल पर डिजिटल रूप से जमा करनी होगी।इन 5 जानकारियों को भी रखें हमेशा दुरुस्तप्रोफाइल फोटो अपलोड करने के साथ-साथ, ऑनलाइन क्लेम को चुटकियों में सेटल करने के लिए मेंबर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके यूएएन (UAN) के साथ नीचे दी गई जानकारियां सही ढंग से लिंक और वेरिफाईड (KYC Approved) हों:आधार कार्ड (Aadhar Card)पैन कार्ड (PAN Card)बैंक अकाउंट डिटेल्स (IFSC कोड सहित)सक्रिय मोबाइल नंबरवैध ईमेल एड्रेसइन बुनियादी जानकारियों को अपडेट रखने से आप घर बैठे बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे ई-नॉमिनेशन, ऑनलाइन पीएफ एडवांस विड्रॉल और पेंशन से जुड़ी डिजिटल सेवाओं का त्वरित लाभ उठा सकेंगे।
भारत समेत पूरी दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ा है। पर्यावरण के अनुकूल होने और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते खर्चों से राहत दिलाने के कारण लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर और कार धड़ल्ले से खरीद रहे हैं। लेकिन, पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से इलेक्ट्रिक वाहनों, खासकर इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की बैटरी में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं।ऐसे में हर ईवी मालिक या नया खरीदार इस बात को लेकर चिंतित रहता है कि अगर भगवान न करे मेरी इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर में अचानक आग लग जाए, तो क्या मुझे बीमा (Insurance Claim) का पैसा मिलेगा? इसका जवाब 'हां' है, लेकिन इसके लिए आपको ऑटोमोबाइल इंश्योरेंस के कुछ बेहद जरूरी नियमों और शर्तों की जानकारी होना आवश्यक है:1. कौन सी इंश्योरेंस पॉलिसी दिलाएगी आग का क्लेम?अगर आपके पास सिर्फ थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस (Third-Party Insurance) है, तो आपके वाहन में आग लगने पर आपको फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी। कानूनन यह पॉलिसी सिर्फ आपके वाहन से किसी दूसरे व्यक्ति या संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करती है।ओन डैमेज (Own Damage) या कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी (Comprehensive Insurance): ईवी में आग लगने के नुकसान से बचने के लिए आपके पास कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी होना अनिवार्य है। यह पॉलिसी प्राकृतिक आपदाओं, चोरी, एक्सीडेंट के साथ-साथ वाहन में लगी आग (Fire Damage) को भी कवर करती है।2. किन परिस्थितियों में पास होगा क्लेम? (कवर होने वाले नुकसान)यदि आपके पास कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी है, तो बीमा कंपनियां निम्नलिखित कारणों से लगी आग का पूरा क्लेम देती हैं:शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी: यदि ईवी की वायरिंग में अचानक शॉर्ट सर्किट हो जाए या चलते-चलते उसमें आग लग जाए।बैटरी ब्लास्ट: ओवरहीटिंग या मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (उत्पादन दोष) की वजह से बैटरी में थर्मल रनवे (आग लगना या ब्लास्ट होना) की स्थिति बनना।बाहरी कारण: एक्सीडेंट के बाद गाड़ी में आग लग जाना या पास खड़ी किसी अन्य गाड़ी की आग की चपेट में आ जाना।3. इन गलतियों को किया तो तुरंत रिजेक्ट हो जाएगा क्लेम (सावधानियां)बीमा कंपनियां ईवी में आग लगने के दावों की बहुत गहन जांच (Investigation) करती हैं। यदि आपकी नीचे दी गई किसी गलती की वजह से आग लगी है, तो आपका क्लेम एक झटके में खारिज (Reject) कर दिया जाएगा:आफ्टर-मार्केट एक्सेसरीज (अनाधिकृत बदलाव): यदि आपने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर या कार में बाहर से कोई लोकल लाइट, हॉर्न या कोई भी एक्स्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट लगवाया है, जिसके लिए मूल वायरिंग को काटा या बदला गया हो, तो क्लेम बिल्कुल नहीं मिलेगा।अनऑथराइज्ड चार्जर का इस्तेमाल: कंपनी द्वारा दिए गए ओरिजिनल चार्जर की जगह किसी सस्ते या अनऑथराइज्ड चार्जर से गाड़ी चार्ज करने पर अगर बैटरी ब्लास्ट होती है, तो यह यूजर की लापरवाही मानी जाएगी।कमर्शियल इस्तेमाल और ओवरलोडिंग: निजी (Private) वाहन का उपयोग बिना कमर्शियल परमिट के व्यावसायिक काम या क्षमता से अधिक वजन ढोने के लिए करने पर आग लगने का क्लेम अमान्य हो जाता है।ईवी मालिकों के लिए 2 सबसे जरूरी 'एड-ऑन कवर' (Add-on Covers)इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे महंगी चीज उसकी बैटरी (EV Battery) होती है, जो पूरी गाड़ी की कुल लागत का लगभग 40-50% हिस्सा होती है। सामान्य इंश्योरेंस पॉलिसियां समय के साथ डेप्रिसिएशन (घिसावट मूल्य) काटती हैं। इसलिए अपनी ईवी पॉलिसी लेते समय ये दो एड-ऑन जरूर शामिल करें:जीरो डेप्रिसिएशन कवर (Zero Depreciation): आग लगने के बाद पार्ट्स बदले जाने पर आपको अपनी जेब से कोई पैसा (प्लास्टिक या फाइबर पार्ट्स की घिसावट लागत) नहीं देना होगा।बैटरी प्रोटेक्शन कवर (Battery Protection Cover): यह खास तौर पर ईवी के लिए डिज़ाइन किया गया एड-ऑन है। यह चार्जिंग के दौरान होने वाले वोल्टेज फ्लक्चुएशन या पानी घुसने (Water Ingress) के कारण बैटरी को होने वाले नुकसान को भी सुरक्षा देता है।आग लगने पर तुरंत क्या करें?यदि ईवी में आग लगती है, तो सबसे पहले सुरक्षित दूरी पर जाएं और तुरंत फायर ब्रिगेड व पुलिस को सूचित करें। क्लेम फाइल करने के लिए पुलिस की FIR रिपोर्ट, फायर ब्रिगेड की अग्निशमन रिपोर्ट और घटनास्थल की तस्वीरें/वीडियो सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। इसके बाद तेल या बीमा कंपनी को 24-48 घंटे के भीतर सूचना दें।
सनातन धर्म में साल भर में कुल चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें से दो चैत्र और शारदीय नवरात्रि सामान्य रूप से सबके सामने मनाई जाती हैं, जबकि दो 'गुप्त नवरात्रि' (Gupt Navratri) होती हैं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की गुप्त नवरात्रि कल यानी 15 जुलाई 2026 (बुधवार) से शुरू हो चुकी है, जो 23 जुलाई 2026 तक चलेगी।यह नवरात्रि आम नवरात्रि के पर्व से बिल्कुल अलग होती है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में माता दुर्गा के नौ रूपों की सार्वजनिक रूप से सात्विक पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से 10 महाविद्याओं की गोपनीय साधना और तांत्रिक पूजा के लिए जानी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान की जाने वाली भक्ति और साधना को जितना गुप्त रखा जाता है, उसका फल उतनी ही तेजी से प्राप्त होता है।गुप्त नवरात्रि की 10 महाविद्याएं और उनका महत्वपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि की ये दस महाविद्याएं माता सती का ही साक्षात रूप मानी जाती हैं, जिसे उन्होंने महादेव को रोकने के लिए धारण किया था। इन नौ दिनों में माता काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की साधना की जाती है। माना जाता है कि इनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन के बड़े से बड़े संकटों का समाधान हो जाता है और घर में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है।शास्त्रों के अनुसार, इन पवित्र नौ दिनों में व्रत रखने और साधना करने का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब पूजा के अंत में पूरी निष्ठा से माता दुर्गा की आरती की जाए।॥ श्री दुर्गा जी की आरती: जय अम्बे गौरी ॥जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ।रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों ।बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी ।मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय अम्बे गौरी...गुप्त नवरात्रि व्रत के कुछ जरूरी नियमगोपनीयता: इस दौरान अपनी पूजा, मंत्र जाप और संकल्प को किसी के सामने प्रकट न करें।सात्विकता: यदि आप नौ दिनों का व्रत रख रहे हैं, तो पूर्ण रूप से सात्विक भोजन (फलाहार) करें और तामसिक चीजों (प्याज, लहसुन) से दूर रहें।अखंड ज्योति: कई साधक इन नौ दिनों में मां के सामने अखंड ज्योति भी प्रज्वलित करते हैं, जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और ओटीटी (OTT Platforms) पर परोसे जा रहे कंटेंट के नियमन (Regulation) को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। फिल्म प्रमाणन नियमों (Film Certification Rules) के खुले उल्लंघन पर गहरी नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना वैध सेंसर सर्टिफिकेट (Valid Censor Certificate) के किसी भी फिल्म की स्क्रीनिंग करना या उसे ओटीटी पर स्ट्रीम करना पूरी तरह से गैरकानूनी है।अदालत की यह तीखी टिप्पणी विवादित फिल्म 'सतलुज' (Satluj) को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान आई। इस फिल्म पर बिना आवश्यक कानूनी सर्टिफिकेशन के एक प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किए जाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और खुद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की कानूनी जवाबदेही तय करते हुए उनके अधिकारों और कर्तव्यों का पूरा खाका स्पष्ट कर दिया है।बिना आवश्यक सर्टिफिकेट के स्क्रीनिंग पूरी तरह गैरकानूनी: सर्वोच्च अदालतसुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश का कानून सभी के लिए बराबर है। किसी भी फिल्म को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने या डिजिटल माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। बिना इसके कोई भी स्ट्रीमिंग कानून का सीधा उल्लंघन (Violation of Law) मानी जाएगी।भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फिल्मों की रिलीज और कानूनी जवाबदेही के लिहाज से सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों को बेहद अहम माना जा रहा है:1. आपराधिक कार्रवाई करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारीसुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई फिल्म बिना सेंसर बोर्ड की मंजूरी के या नियमों को ताक पर रखकर प्रदर्शित की जाती है, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई (Criminal Action) करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है। राज्य सरकारों को ऐसे मामलों में बिना किसी ढिलाई के तुरंत सख्त कदम उठाने चाहिए।2. केंद्र सरकार के पास है कंटेंट हटाने (Take Down) का पूरा अधिकारअदालत ने यह भी साफ किया कि नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में केंद्र सरकार मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती। केंद्र सरकार के पास यह कानूनी अधिकार है कि वह बिना सर्टिफिकेशन के स्ट्रीम की जा रही किसी भी फिल्म या आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत प्लेटफॉर्म से हटाने (Remove) का निर्देश दे सकती है।केंद्र की त्वरित भूमिका की सराहना: सर्वोच्च अदालत ने माना कि 'सतलुज' फिल्म के मामले में केंद्र सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप किया और फिल्म को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाए। इससे यह साफ हो जाता है कि डिजिटल स्पेस की निगरानी में केंद्र की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।3. कटघरे में ओटीटी प्लेटफॉर्म; इंटरमीडियरी (Intermediary) भूमिका की होगी जांचअदालत ने संकेत दिया कि इस पूरे विवाद में सिर्फ फिल्म मेकर्स ही नहीं, बल्कि उस डिजिटल प्लेटफॉर्म (इंटरमीडियरी) की भूमिका की भी गहन जांच की जा सकती है जिसने बिना वैध कागजात के फिल्म को अपने ऐप पर लाइव किया। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल युग में प्लेटफॉर्म्स अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। ऐसे मामलों में संबंधित प्लेटफॉर्म की लायबिलिटी (जवाबदेही) तय करना जरूरी है और उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई किए जाने पर विचार किया जा रहा है।फिर गरमाई ओटीटी रेगुलेशन और सेंसरशिप पर बहससुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद एक बार फिर देश में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के रेगुलेशन और सेंसरशिप के दायरे को लेकर बहस तेज हो गई है। अब तक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स काफी हद तक सेल्फ-रेगुलेशन (स्व-नियमन) के तहत काम करते आए हैं, लेकिन इस नए मामले के बाद यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में डिजिटल माध्यमों पर रिलीज होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज के लिए सर्टिफिकेशन के नियम और अधिक सख्त कर दिए जाएंगे।
मध्य पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब पूरी तरह बेकाबू होता नजर आ रहा है। अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान की सीमा के भीतर घुसकर कई प्रमुख शहरों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं। इन भीषण हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान (Tehran) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।तनाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल में हुए संघर्षविराम (Ceasefire) के बाद पहली बार तेहरान के आसमान में ईरान के मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव किया गया है। खाड़ी के आसमान में अमेरिकी वायुसेना के जासूसी और रिफ्यूलिंग विमान लगातार चक्कर काट रहे हैं।ईरान के इन प्रमुख शहरों पर गिरे अमेरिकी बमईरानी मीडिया और समाचार एजेंसियों के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना की इस हालिया बमबारी ने ईरान के मध्य और पश्चिमी प्रांतों को दहला कर रख दिया है। मुख्य रूप से इन तीन शहरों को निशाना बनाया गया है:खोंदाब (Khondab): ईरान के मध्य मरकजी प्रांत में स्थित खोंदाब शहर के बाहरी इलाके में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दो भीषण हवाई हमले किए हैं। स्थानीय डिप्टी गवर्नर ने भी इन जोरदार धमाकों की पुष्टि की है।खुर्रमबाद (Khorramabad): राजधानी तेहरान से लगभग 490 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित खुर्रमबाद शहर में कम से कम दो बड़े विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है।बोरुजर्द (Borujerd): पश्चिमी ईरान के इस महत्वपूर्ण शहर के पास भी कई सिलसिलेवार धमाके होने की रिपोर्ट है। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में ईरानी सेना की हलचल चरम पर पहुंच गई है।तेहरान में एयर डिफेंस एक्टिव, बाहरी इलाकों में भारी हलचलहमलों की गंभीरता को देखते हुए ईरानी सेना ने अपनी राजधानी को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है। हालांकि, मुख्य तेहरान शहर पर सीधे किसी बमबारी की खबर नहीं है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तेहरान के बाहरी संवेदनशील सैन्य इलाके परचिन (Parchin) या पाकदाश्त (Pakdasht) के पास हुई संदिग्ध गतिविधियों के कारण ही एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को ट्रिगर किया गया है। ईरानी अधिकारियों ने अभी तक इन हमलों में हुए जान-माल के नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा साझा नहीं किया है।आसमान में ट्रैक हुए अमेरिकी जासूसी और रिफ्यूलिंग विमानइस बड़े सैन्य ऑपरेशन की गवाही पब्लिक फ्लाइट-ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स (Flight Tracking Apps) भी दे रहे हैं। क्षेत्र के आसमान में अमेरिकी वायुसेना (USAF) के निम्नलिखित आधुनिक विमानों को लगातार उड़ान भरते हुए ट्रैक किया गया है:KC-135 स्ट्रैटोटैंकर (3 विमान): हवा में ही फाइटर जेट्स को ईंधन (Refueling) देने के लिए।KC-46A पेगासस (2 विमान): अमेरिकी लड़ाकू विमानों की रीच बढ़ाने के लिए तैनात।E-3 सेंट्री (AWACS): आसमान से दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखने वाला एडवांस एयरबर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम।स्टील्थ फाइटर जेट्स का सीक्रेट मिशन: सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैकिंग ऐप्स पर दिखने वाले यह विमान इस बड़े ऑपरेशन का महज एक छोटा सा हिस्सा हैं। असल हमलों को अंजाम देने वाले कई खतरनाक अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट्स (जैसे F-35 या B-2) अपना डेटा शेयर किए बिना (Radar Evading Mode में) इस मिशन को अंजाम दे रहे हैं।ईरान की सख्त चेतावनी: 'हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन पीछे भी नहीं हटेंगे'इस भीषण बमबारी के बीच ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) का एक बड़ा और सख्त बयान सामने आया है। गालीबाफ ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बात करते हुए कहा:तेहरान ने कभी भी अपनी तरफ से युद्ध की पहल नहीं की है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए वह अमेरिका के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ने के लिए तैयार है। हमारी कूटनीति और बातचीत की मेज पर मौजूदगी को कोई हमारी कमजोरी समझने की भूल न करे, यह हमारी सैन्य तैयारियों का ही एक हिस्सा है।ईरानी वार्ताकार ने अमेरिका को दो टूक चेतावनी दी कि अगर ईरान को वाशिंगटन के साथ हुए पिछले समझौतों से कोई आर्थिक या रणनीतिक लाभ नहीं मिलता है, तो तेहरान के पास उस आपसी सहमति (MoU) और संघर्षविराम का सम्मान करने की कोई मजबूरी नहीं बचेगी।
भारतीय रेलवे में अपना करियर शुरू करने और सरकारी नौकरी की दिशा में कदम बढ़ाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने अप्रेंटिस के पदों पर एक मेगा भर्ती अभियान की घोषणा की है। इस भर्ती के तहत योग्य उम्मीदवारों को 1 साल की मुफ्त ट्रेनिंग दी जाएगी और साथ ही हर महीने स्टाइपेंड (Stipend) भी मिलेगा।इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए रेलवे के मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग, पर्सनल, अकाउंट्स और मेडिकल समेत कई महत्वपूर्ण विभागों में कुल 6,777 अप्रेंटिस के पदों को भरा जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रही है।भर्ती से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें और संक्षिप्त विवरणविवरणमहत्वपूर्ण जानकारीभर्ती संगठननॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR)पद का नामअप्रेंटिस (Apprentice)कुल रिक्तियां6,777 पदआवेदन शुरू होने की तिथि20 जुलाई 2026आवेदन करने की अंतिम तिथि19 अगस्त 2026आधिकारिक वेबसाइटnfr.indianrailways.gov.inट्रेनिंग की अवधि1 वर्षमासिक स्टाइपेंडNTC/STC धारकों को कम से कम ₹9,600 प्रति माहयूनिट और डिवीजन वाइज रिक्तियों का विवरण (Seat Matrix)एनएफआर ने अपनी विभिन्न वर्कशॉप और डिवीजनों के तहत सीटों का आवंटन इस प्रकार किया है:कटिहार (KIR) और तिंधारिया (TDH) वर्कशॉप: 1103 सीटेंअलीपुरद्वार (APDJ): 651 सीटेंरंगिया (RNY): 750 सीटेंलुमडिंग (LMG): 1274 सीटेंटिंनसुकिया (TSK): 860 सीटेंन्यू बोगैगन वर्कशॉप (NBQS) व इंजीनियरिंग वर्कशॉप (EWS/BNGN): 881 सीटेंडिब्रूगढ़ वर्कशॉप (DBWS): 763 सीटेंहेडक्वार्टर (HQ)/मालीगांव: 495 सीटें(इसके तहत अकाउंट्स, सिविल इंजीनियरिंग, मेडिकल, पर्सनल, ट्रैक मशीन (TMC), ब्रिज यूनिट SWS/PNO और स्टोर्स विभाग शामिल हैं)कौन कर सकता है अप्लाई? जानें पात्रता मापदंड (Eligibility Criteria)1. शैक्षणिक योग्यता:सामान्य पदों के लिए: किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से (10+2) प्रणाली के तहत न्यूनतम 50% अंकों के साथ 10वीं (मैट्रिक) परीक्षा पास होना अनिवार्य है। (एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंकों की कोई बाध्यता नहीं है)।मेडिकल लैबोरेट्री टेक्नीशियन (पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी): इन पदों के लिए अभ्यर्थी का फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषयों के साथ 12वीं पास होना आवश्यक है। साथ ही 10वीं और 12वीं दोनों में कम से कम 50% अंक होने चाहिए।तकनीकी योग्यता (ITI): उम्मीदवार के पास संबंधित ट्रेड में एनसीवीटी (NCVT) या एससीवीटी (SCVT) द्वारा जारी नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट (ITI) होना अनिवार्य है।2. आयु सीमा:आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 15 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।उम्र में छूट: आरक्षित श्रेणियों को नियमानुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जाएगी—एससी/एसटी को 5 वर्ष, ओबीसी को 3 वर्ष और पीडब्ल्यूबीडी (PwBD) श्रेणी को 10 वर्ष की छूट मिलेगी।3. जरूरी दस्तावेज:आवेदन करते समय आपके पास 10वीं की मार्कशीट व पास सर्टिफिकेट, आईटीआई फाइनल मार्कशीट, प्रोविजिनल या नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट (NTC) और 12वीं की मार्कशीट (MLT पदों के लिए) तैयार होने चाहिए।चयन प्रक्रिया: बिना परीक्षा के सीधी मेरिट भर्तीइस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उम्मीदवारों को चयन के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं देनी होगी। पूरी चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर आधारित होगी:शॉर्टलिस्टिंग: अभ्यर्थियों का चयन मैट्रिक (10वीं) और आईटीआई (ITI) ट्रेड परीक्षा में प्राप्त अंकों के औसत के आधार पर तैयार की गई मेरिट लिस्ट से होगा।टाई-ब्रेकर नियम: यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो अधिक उम्र वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी।डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV): रिक्तियों की संख्या से 1.5 गुना अधिक उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण होगा और फिर फाइनल मेरिट लिस्ट जारी कर दी जाएगी।आवेदन शुल्कसामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹100 निर्धारित किया गया है, जिसका भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। वहीं एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी, ईबीसी और सभी महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन पूरी तरह से निःशुल्क (कोई फीस नहीं) है।
जिंदगी में कुछ रोमांचक और लीक से हटकर करने का शौक रखने वाले लोगों के लिए पैराग्लाइडिंग (Paragliding) एक ऐसा एडवेंचर है, जो रोंगटे खड़े कर देने वाले अनुभव के साथ-साथ जिंदगी भर की यादें दे जाता है। बादलों के बीच तैरते हुए जब आप ठंडी हवाओं के थपेड़ों के साथ धरती को देखते हैं, तो वह नजारा किसी सपने जैसा लगता है। आसमान से दिखने वाले ऊंचे-ऊंचे बर्फ से ढके पहाड़, विशाल प्रशांत महासागर, नीली झीलें और हरी-भरी घाटियां प्रकृति का एक बिल्कुल अनोखा रूप पेश करती हैं।यदि आप भी एक अनुभवी एडवेंचरर हैं या पहली बार टेंडम फ्लाई (Tandem Fly) का मजा लेकर दुनिया को एक नए नजरिए से एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो ग्लोबल टूरिज्म मैप पर मौजूद इन 10 सबसे बेहतरीन पैराग्लाइडिंग डेस्टिनेशंस को अपने ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर शामिल करें:1. गुदौरी (Gudauri), जॉर्जिया – कॉकस पर्वतों का रोमांचजॉर्जिया का गुदौरी क्षेत्र कॉकस पर्वत श्रृंखला (Caucasus Mountains) के बीच स्थित दुनिया के सबसे शानदार पैराग्लाइडिंग हब्स में से एक है।क्या है खास: यहाँ उड़ान भरते समय नीचे फैली गहरी हरी घाटियों और बर्फ की सफेद चादर से ढके पहाड़ों का एक मंत्रमुग्ध कर देने वाला 360-डिग्री व्यू मिलता है।प्रमुख आकर्षण: रूस-जॉर्जिया फ्रेंडशिप मॉन्यूमेंट, काज़बेगी और ऐतिहासिक गेर्गेती ट्रिनिटी चर्च।ट्रेवल गाइड: राजधानी टिब्लिसी से आप टैक्सी या बस द्वारा आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं। इस जगह को अच्छे से एक्सप्लोर करने के लिए 3 से 4 दिन का समय पर्याप्त है।लोकल फूड: पारंपरिक जॉर्जियन डिशेज जैसे 'खाचापुरी' (चीज ब्रेड), 'खिंकाली' (डंपलिंग्स), लोबियो और वहाँ की मशहूर वाइन का स्वाद लेना न भूलें।2. माउई (Maui), USA – प्रशांत महासागर के ऊपर उड़ानअमेरिका के हवाई (Hawaii) द्वीप समूह में स्थित माउई अपने सक्रिय और सुप्त ज्वालामुखियों, ऊंचे पहाड़ों और नीले समंदर के अद्भुत कॉम्बिनेशन के लिए जाना जाता है।क्या है खास: यहाँ पैराग्लाइडिंग करने का मतलब है विशाल प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) और सुरम्य तटीय इलाकों को एक पंछी की नजर से देखना।प्रमुख आकर्षण: हालेआकाला नेशनल पार्क, रोड टू हाना, वैलिया बीच और मोलोकिनी क्रेटर।ट्रेवल गाइड: माउई को ठीक से घूमने के लिए कम से कम 5 से 7 दिन का समय रखें। यहाँ घूमने के लिए रेंटल कार (कार किराए पर लेना) सबसे आरामदायक विकल्प है।लोकल फूड: हवाईयन पोके बाउल, कलुआ पोर्क, फ्रेश सी-फूड और कड़क हवाईयन कॉफी यहाँ काफी लोकप्रिय हैं।3. बीर बिलिंग (Bir Billing), भारत – देश की पैराग्लाइडिंग राजधानीहिमाचल प्रदेश की गोद में बसा बीर बिलिंग भारत का सबसे प्रसिद्ध और दुनिया का दूसरा सबसे बेहतरीन पैराग्लाइडिंग टेक-ऑफ साइट माना जाता है।क्या है खास: यहाँ धौलाधार माउंटेन रेंज की ऊंची बर्फीली चोटियों, चाय के बागानों और खूबसूरत तिब्बती गांवों के ऊपर से उड़ने का एक जादुई अहसास होता है।प्रमुख आकर्षण: बीर मोनेस्ट्री, चोकलिंग मोनेस्ट्री, पालपुंग शेराब्लिंग मठ और बरोट वैली।ट्रेवल गाइड: दिल्ली या चंडीगढ़ से ओवरनाइट बस, ट्रेन या टैक्सी के जरिए यहाँ आराम से पहुंचा जा सकता है। वीकेंड ट्रिप या 3 से 5 दिनों की छुट्टी के लिए यह परफेक्ट है।लोकल फूड: गर्मागर्म तिब्बती मोमोज, थुकपा, पारंपरिक हिमाचली धाम और पहाड़ों की स्पेशल मैगी-चाय।दुनिया के अन्य 7 सबसे लोकप्रिय पैराग्लाइडिंग स्पॉट्सडेस्टिनेशन और देशयात्रा के लिए जरूरी दिनमुख्य यूएसपी (USP) और देखने लायक जगहेंक्या खाएं (Local Food)4. पोखरा (Pokhara), नेपाल4 से 5 दिनसारंगकोट से उड़ान भरते समय अन्नपूर्णा पर्वत श्रृंखला और फेवा झील का विहंगम नजारा। वर्ल्ड पीस पैगोडा यहाँ का मुख्य आकर्षण है।नेपाली थाली, सेल रोटी और मोमो5. शैमोनिक्स (Chamonix), फ्रांस4 से 6 दिनआल्प्स पहाड़ों के बीच यूरोप की सबसे ऊंची चोटी 'मों ब्लांक' और विशाल ग्लेशियरों के ऊपर से उड़ने का अनूठा एडवेंचर।फ्रेंच चीज, फोंड्यू, क्रेप्स और पेस्ट्री6. ओलुडेनिज़ (Oludeniz), तुर्की3 से 5 दिनबाबादाग पर्वत से सीधे नीले समंदर और तुर्की के मशहूर 'ब्लू लगून' (Blue Lagoon) के सफेद रेतीले तटों के ऊपर लैंडिंग।तुर्किश कबाब, बकलावा, गोजलेमे7. इंटरलाकेन, स्विट्ज़रलैंड4 से 6 दिनस्विस आल्प्स की चोटियों, लेक थून और लेक ब्रीएंज की नीली झीलों के बीच परियों जैसी वादियों में पैराग्लाइडिंग का अनुभव।स्विस चॉकलेट, रोस्ती, रैकलेट8. क्वीन्सटाउन, न्यूज़ीलैंड5 से 7 दिनदुनिया की एडवेंचर कैपिटल, जहाँ लेक वाकाटिपु और रिमार्केबल्स पहाड़ों के बीच स्काईलाइन से टेक-ऑफ किया जाता है।न्यूजीलैंड लैम्ब, मीट पाई, लोकल हनी9. वैले डे ब्रावो, मेक्सिको2 से 4 दिनघने जंगलों, पहाड़ियों और विशाल लेक एवांडारो के ऊपर मेक्सिकन वादियों का खूबसूरत विहंगम दृश्य।टैकोस, तमालेस, एनचिलाडास10. मिराफ्लोरेस (Miraflores), पेरू2 से 3 दिनलीमा शहर के ठीक बगल में स्थित पहाड़ों के बजाय सीधे प्रशांत महासागर की ऊंची क्लिफ्स (चट्टानों) से कोस्टल फ्लाई का रोमांच।पेरूवियन सेविचे, लोमो साल्टाडोएडवेंचर लवर्स के लिए जरूरी सलाह: पहली बार पैराग्लाइडिंग करने वाले हमेशा एक सर्टिफाइड पायलट के साथ 'टेंडम फ्लाइट' ही चुनें। इसके अलावा, किसी भी डेस्टिनेशन पर जाने से पहले वहाँ के स्थानीय मौसम (Weather) की जानकारी जरूर ले लें, क्योंकि तेज हवाओं या खराब मौसम में पैराग्लाइडिंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहती है।
एआई प्रेमियों से बिछड़ने के गम में डूबे चीन के यूजर
चीन के यूजर एआई प्रेमियों को अलविदा कह रहे हैं। बुधवार से लागू नए नियमों के बाद लोग अपने वर्चुअल प्रेमियों से किनारा करने पर मजबूर हुए हैं। सोशल मीडिया पर शोक मन रहा है।
Top News 16 July: जगन्नाथ रथयात्रा में उमड़ा जनसैलाब, सोनम वांगचुक का अनशन जारी
Top News 16 July : देशभर में आज जगन्नाथ रथयात्रा का उत्साह। अमेरिका ने ब्लॉकेड तोड़ ईरान की ओर जा रहे जहाज पर हमला किया। सोनम वांगचुक का अनशन 19वें दिन भी जारी। मोदी सरकार ने डीजल और जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट टैक्स बढ़ाया। फीफा विश्व कप के फाइनल में ...
मोदी करेंगे हाई-टेक सिटी स्टेशन का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 26 करोड़ रुपये की लागत से हैदराबाद के पुनर्विकसित हाई-टेक सिटी रेलवे स्टेशन का 17 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उदघाटन करेंगे
प्रीमियम और दमदार बाइक्स बनाने वाली देश की दिग्गज कंपनी रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) ने मोटरसाइकिल के शौकीनों के लिए एक बड़ा धमाका किया है। कंपनी ने दुनिया की मशहूर कस्टम बाइक निर्माता कंपनी 'रफ क्राफ्ट्स' (Rough Crafts) के साथ हाथ मिलाकर अपनी धांसू बाइक 'शॉटगन 650' का एक बेहद एक्सक्लूसिव लिमिटेड-एडिशन (Royal Enfield Shotgun 650 x Rough Crafts Edition) लॉन्च किया है।इस लिमिटेड-एडिशन बाइक की एक्स-शोरूम कीमत ₹5.75 लाख रखी गई है। इस बाइक की सबसे अनोखी बात यह है कि पूरी दुनिया में इसकी सिर्फ 100 यूनिट्स ही बेची जाएंगी, जिनमें से भारतीय बाजार के लिए महज 25 यूनिट्स ही अलॉट की गई हैं। स्टैंडर्ड टॉप-स्पेक शॉटगन 650 की कीमत ₹4.16 लाख है, यानी इस खास एडिशन के लिए खरीदारों को ₹1.59 लाख रुपये ज्यादा चुकाने होंगे। अगर आप भी इस नायाब बाइक को अपने गैराज की शान बनाना चाहते हैं, तो बजट से ज्यादा टाइमिंग का ध्यान रखना होगा।यह बाइक आम मॉडल से अलग कैसे है? (कस्टम डिजाइन और फीचर्स)अतिरिक्त ₹1.59 लाख की कीमत सिर्फ इसकी एक्सक्लूसिविटी और विजुअल अपील के लिए है। यह बाइक सीधे मशहूर कस्टम बाइक 'कैलिबर रॉयल' (Caliber Royal) से प्रेरित है, जिसे रफ क्राफ्ट्स ने EICMA और मोटोवर्स (Motoverse) के मंच पर प्रदर्शित किया था।पेंट स्कीम और फिनिशिंग: बाइक में बेहद प्रीमियम ग्लॉस जेट ब्लैक और मैट स्टील्थ ब्लैक पेंट स्कीम दी गई है। इस पर हाथ से लगाई गई गोल्ड लीफ (सोने की पत्ती) डिटेलिंग और ग्रे एक्सेंट्स इसके लुक को बेहद आक्रामक और रॉयल बनाते हैं।सिग्नेचर एलिमेंट्स: बाइक पर रॉयल एनफील्ड और रफ क्राफ्ट्स की पार्टनरशिप को दर्शाने वाला कास्ट ब्रास (पीतल) का बैज और खास नंबर वाली टैंक प्लेट्स लगाई गई हैं।प्रीमियम एक्सेसरीज: इसमें ब्लैक बार-एंड मिरर्स, हाथ से सिली हुई क्विल्टेड लेदर सीट, कॉन्ट्रास्ट-कट अलॉय व्हील्स और गोल्ड-फिनिश वाले फ्रंट फोर्क ट्यूब्स दिए गए हैं जो इसे भीड़ से बिल्कुल अलग करते हैं।कलेक्टर्स डिलाइट: हर एक खरीदार को ओरिजिनल 'कैलिबर रॉयल' स्केच का एक सर्टिफाइड नंबर वाला प्रिंट मिलेगा, जिस पर Rough Crafts के फाउंडर विंस्टन येह के खुद के ऑटोग्राफ (साइन) होंगे।क्या इसके इंजन और पावर (Mechanicals) में कोई बदलाव है?नहीं, मैकेनिकल तौर पर यह बाइक पूरी तरह स्टैंडर्ड मॉडल जैसी ही है।इस लिमिटेड एडिशन में भी रॉयल एनफील्ड का वही भरोसेमंद और दमदार 648cc का पैरेलल-ट्विन इंजन दिया गया है। इसके परफॉर्मेंस, गियरबॉक्स, चेसिस, सस्पेंशन सेटअप या ब्रेकिंग सिस्टम में कोई भी तकनीकी बदलाव नहीं किया गया है। बाइक की बढ़ी हुई कीमत सिर्फ और सिर्फ इसके रफ क्राफ्ट्स सिग्नेचर आर्टवर्क, कॉस्मेटिक अपग्रेड्स और इसके कलेक्टर्स एडिशन होने की वजह से है।स्लॉट खत्म होने से पहले भारत में इसे कैसे खरीदें? (Booking Guide)चूंकि भारत के लिए सिर्फ 25 मोटरसाइकिलें ही तय हैं, इसलिए इसकी बुकिंग के लिए तगड़ी होड़ मचने वाली है। इसे खरीदने की पूरी प्रक्रिया इस प्रकार है:रजिस्ट्रेशन: रॉयल एनफील्ड की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर इस बाइक के लिए ग्लोबल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक ग्राहक तुरंत वहां जाकर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें।फ्लैश सेल (Drop Window): भारत में इस बाइक की असल बिक्री 30 जुलाई को शाम 7:00 बजे (IST) शुरू होगी।पहले आओ-पहले पाओ का नियम: यह बिक्री पूरी तरह से 'फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व्ड' के आधार पर होगी। जिन शुरुआती 25 लोगों का पेमेंट और बुकिंग ऑर्डर सबसे पहले पंच होगा, यह बाइक उन्हीं को मिलेगी।जरूरी सलाह: अगर आप 30 जुलाई को सेल लाइव होने के समय ढिलाई बरतते हैं, तो मौका हाथ से निकल जाएगा। रॉयल एनफील्ड के पुराने लिमिटेड एडिशन (जैसे 120th ए anniversary एडिशन) के ड्रॉप्स महज कुछ ही मिनटों और सेकंड्स में पूरी तरह सोल्ड आउट हो गए थे।
हर नई सुबह अपने साथ नए अवसर और चुनौतियाँ लेकर आती है। आज का दिन ग्रहों और नक्षत्रों की चाल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज कुछ राशियों के लिए धन लाभ और करियर में तरक्की के योग बन रहे हैं, तो वहीं कुछ राशि के जातकों को अपनी सेहत और धन के मामले में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।ग्रहों की स्थिति संकेत दे रही है कि आज जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला आपको नुकसान पहुंचा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आज मेष से लेकर मीन तक, सभी 12 राशियों के सितारे क्या कहते हैं:मेष से कर्क राशि तक का भाग्यफलमेष राशि (Aries): आज का दिन आपके लिए ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी। हालांकि, परिवार के किसी सदस्य के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। वाणी पर नियंत्रण रखें और शाम को परिवार के साथ समय बिताएं।वृषभ राशि (Taurus): आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन शुभ है। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। व्यापार में नए साझेदार जुड़ सकते हैं। निवेश करने के लिए आज का दिन अनुकूल है, लेकिन किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह जरूर लें।मिथुन राशि (Gemini): आज आपको नौकरी में कुछ नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। मानसिक तनाव से बचने के लिए योग या ध्यान का सहारा लें। जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा, जिससे आपका मन प्रसन्न रहेगा।कर्क राशि (Cancer): लव लाइफ और पारिवारिक रिश्तों के लिहाज से आज का दिन बेहतरीन है। रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। छात्रों को अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। अचानक यात्रा के योग बन सकते हैं।सिंह से वृश्चिक राशि का दैनिक राशिफलसिंह राशि (Leo): विशेष सावधानी बरतें। आज आपको कार्यस्थल पर राजनीति का सामना करना पड़ सकता है। सहकर्मियों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। धन के लेन-देन में सतर्कता बरतें। सेहत में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।कन्या राशि (Virgo): आज आपकी सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने का विचार बन सकता है। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। कामकाज के सिलसिले में की गई यात्राएं भविष्य में बड़ा लाभ दिलाएंगी।तुला राशि (Libra): सोच-समझकर लें फैसला। आज कोर्ट-कचहरी या जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में कोई भी बड़ा कदम उठाने से बचें। विरोधियों से सावधान रहें। खर्चों में अचानक बढ़ोतरी होने से बजट बिगड़ सकता है।वृश्चिक राशि (Scorpio): आपकी कार्यकुशलता में सुधार होगा। बॉस आपके काम से प्रभावित हो सकते हैं। पुराने मित्रों से मुलाकात पुरानी यादें ताजा करेगी। आज आपके अटके हुए सरकारी काम पूरे होने की प्रबल संभावना है।धनु से मीन राशि का आज का भविष्यफलराशि का नामआज का मुख्य प्रभाव और सलाहशुभ रंगधनु (Sagittarius)नए काम की शुरुआत के लिए दिन अच्छा है। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।पीलामकर (Capricorn)सेहत के प्रति लापरवाही न बरतें। खान-पान का विशेष ध्यान रखें।नीलाकुंभ (Aquarius)वैवाहिक जीवन में तनाव हो सकता है। पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें।आसमानीमीन (Pisces)करियर में सकारात्मक बदलाव आएंगे। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी।सफेदआज का विशेष ज्योतिषीय मंत्र:आज दिन की शुरुआत माता-पिता के आशीर्वाद और सूर्य देव को जल अर्पित करके करें। किसी भी महत्वपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे दो बार अच्छी तरह जरूर पढ़ लें।
Devshayani Ekadashi Vrat 2026: 24 या 25 जुलाई? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
सनातन धर्म में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'देवशयनी एकादशी' (Devshayani Ekadashi), हरिशयनी एकादशी या आषाढ़ी एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन से भगवान श्रीहरि विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। भगवान विष्णु के शयन काल में जाने के साथ ही 'चातुर्मास' (Chaturmas) का प्रारंभ हो जाता है और विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर चार महीनों के लिए पूरी तरह से रोक लग जाती है।वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी व्रत की सही तारीख, तिथियों के फेरबदल की उलझन, शुभ मुहूर्त और सरल पूजा विधि का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:तारीख को लेकर न हों भ्रमित: 24 या 25 जुलाई 2026?पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 में देवशयनी एकादशी की तिथि 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को सुबह से ही शुरू हो जाएगी। लेकिन सनातन धर्म में व्रत-त्योहार हमेशा उदयातिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) के आधार पर रखने का विधान है। 25 जुलाई की सुबह सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी।इसलिए, देश भर में गृहस्थ और वैष्णव समुदाय द्वारा देवशयनी एकादशी का व्रत शनिवार, 25 जुलाई 2026 को ही रखा जाएगा।एकादशी तिथि और पारण का सटीक समय (Shubh Muhurat)एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 09 बजकर 13 मिनट से।एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर।व्रत पारण का समय (Fasting Break Time): अगले दिन 26 जुलाई 2026 (रविवार) को सुबह 05:39 AM से 08:22 AM के बीच व्रत खोलना (पारण करना) सबसे उत्तम और फलदायी रहेगा।देवशयनी एकादशी की सरल एवं प्रामाणिक पूजा विधिएकादशी व्रत के कड़े नियमों की शुरुआत एक दिन पहले यानी दशमी तिथि की रात से ही सात्विक भोजन ग्रहण करने के साथ हो जाती है। एकादशी के दिन पूजा इस विधि से संपन्न करें:ब्रह्म मुहूर्त में उठें: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और पीले या हल्के रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।व्रत का संकल्प: पूजा घर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने हाथ में जल और अक्षत लेकर पूरी निष्ठा से व्रत रखने का मानसिक संकल्प लें।भगवान का अभिषेक: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति को गंगाजल से पवित्र करें। उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, गोपी चंदन, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें।तुलसी दल है अनिवार्य: श्रीहरि की पूजा में तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भगवान विष्णु को पीली मिठाइयों या फल का भोग लगाएं और उसमें तुलसी पत्ता जरूर रखें (ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए, इसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें)।कथा और मंत्र जाप: भगवान विष्णु के प्रिय महामंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें। इसके बाद देवशयनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में कपूर से आरती करें।शयन कराना: चूंकि इस दिन से भगवान चार महीने के लिए निद्रा में जाते हैं, इसलिए रात्रि में पूजा के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को एक सुंदर पालने या गद्देदार बिस्तर पर तकिया लगाकर प्रतीकात्मक रूप से शयन कराया जाता है।चातुर्मास का महत्व: इन 4 महीनों में क्या करें और क्या न करेंऋषियों और ज्योतिषियों के अनुसार, चातुर्मास के दौरान ब्रह्मांड में नकारात्मक शक्तियां थोड़ी प्रभावी हो जाती हैं और मनुष्य की पाचन क्रिया (Metabolism) कमजोर पड़ जाती है। इसलिए इस दौरान आत्म-अनुशासन रखना जरूरी है:क्या करें: इन चार महीनों में मौन रहना, सात्विक भोजन करना, प्रतिदिन गीता या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना और दान-पुण्य करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है।क्या न करें: विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत (जनेऊ), और नया व्यवसाय या गृह प्रवेश जैसे कोई भी मांगलिक कार्य न करें। तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का पूरी तरह परित्याग करें।
चिलचिलाती गर्मी के बाद जैसे ही मानसून की पहली फुहारें धरती पर गिरती हैं, प्रकृति चारों तरफ हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। पेड़-पौधों के लिए यह मौसम किसी वरदान से कम नहीं होता, क्योंकि हवा में मौजूद नमी और बारिश का पानी पौधों की प्राकृतिक ग्रोथ को दोगुना तेज कर देता है। अगर आप भी लंबे समय से अपने घर के गार्डन, बालकनी या छत को सजाने की सोच रहे हैं, तो बागवानी (Gardening) शुरू करने का इससे बेहतरीन समय कोई और नहीं हो सकता।इस मानसूनी सीजन में आप कुछ खास फूलों और इनडोर-आउटडोर पौधों को लगाकर अपने आशियाने को एक खूबसूरत, ताजा और नेचुरल लुक दे सकते हैं। आइए जानते हैं इस मौसम के लिए सबसे बेस्ट 6 पौधों के बारे में:1. मोगरा (Jasmine) – महक उठेगा आपका पूरा आशियानाअगर आप चाहते हैं कि बारिश के दिनों में आपके घर और आंगन से एक मीठी व मनमोहक खुशबू आती रहे, तो मोगरे का पौधा आपके बगीचे में जरूर होना चाहिए।ग्रोथ और देखभाल: मानसून की नमी मोगरे के लिए टॉनिक का काम करती है। इस मौसम में इसमें सफेद रंग के खूबसूरत फूल गुच्छों में खिलते हैं। इसे ऐसी जगह रखें जहां अच्छी धूप मिले और मिट्टी में नमी बनी रहे।2. गेंदा (Marigold) – कम देखभाल में चमकीली रंगतगेंदा एक ऐसा सदाबहार फूलों वाला पौधा है, जिसे बहुत ज्यादा तामझाम या एक्स्ट्रा केयर की जरूरत नहीं होती।फायदे: इसके पीले और गहरे नारंगी रंग के चमकीले फूल आपके गार्डन को बेहद आकर्षक और वाइब्रेंट लुक देते हैं। मानसून में यह बहुत तेजी से फैलता है। साथ ही, गेंदे के फूलों की तेज खुशबू प्राकृतिक रूप से मच्छरों और अन्य हानिकारक कीड़ों को आपके घर से दूर रखने में मदद करती है।3. गुड़हल (Hibiscus) – बड़े और रंग-बिरंगे फूलों का राजाबारिश का मौसम गुड़हल की नई कलम (Cutting) लगाने और उसकी ग्रोथ के लिए सबसे आदर्श माना जाता है।खूबसूरती: इस मौसम में गुड़हल के पौधे में बड़े साइज के लाल, गुलाबी, पीले और सफेद रंग के आकर्षक फूल खिलते हैं। इसे रोजाना 5-6 घंटे की अच्छी धूप और वेल-ड्रेनेज (जिस गमले से पानी आसानी से निकल जाए) वाली मिट्टी की जरूरत होती है।4. स्नेक प्लांट (Snake Plant) – बेस्ट इनडोर और एयर प्यूरीफायरयदि आप भागदौड़ भरी जिंदगी में एक ऐसा पौधा ढूंढ रहे हैं जिसकी देखभाल न के बराबर करनी पड़े, तो स्नेक प्लांट सबसे बेहतरीन इनडोर ऑप्शन है।सावधानी: इसे आप लिविंग रूम, बेडरूम या बालकनी कहीं भी रख सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात सिर्फ इतनी है कि मानसून में इसे जरूरत से ज्यादा पानी (Over-watering) बिल्कुल न दें। गमले में पानी जमा रहने से इसकी जड़ें गल सकती हैं।5. तुलसी (Holy Basil) – आस्था के साथ अचूक औषधीय गुणहर भारतीय घर के आंगन की शान कही जाने वाली तुलसी धार्मिक महत्व के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद गुणकारी है।देखभाल की टिप: बारिश के दिनों में तुलसी का पौधा बहुत तेजी से घना और हरा-भरा होता है। लेकिन लगातार होने वाली बारिश से इसके गमले में पानी रुकना नहीं चाहिए, अन्यथा पौधा खराब हो सकता है। इसे रोजाना कुछ घंटे की सुबह की हल्की धूप जरूर दिखाएं।6. फर्न (Ferns) – घनी और मखमली हरियाली का अहसासअगर आप अपने गार्डन में घने जंगलों जैसी प्राकृतिक हरियाली और फ्रेश लुक चाहते हैं, तो फर्न की विभिन्न वैरायटी को अपने कलेक्शन में शामिल करें।परफेक्ट क्लाइमेट: फर्न को नमी और छांव वाला वातावरण सबसे ज्यादा पसंद आता है, इसलिए बारिश का मौसम इसकी पत्तियों को चमकदार बना देता है। इसे कभी भी सीधी और तेज धूप में न रखें, बल्कि सेमी-शेड (हल्की छाया) वाली जगह पर लटकाएं या रखें।मानसून गार्डनिंग की क्विक टिप: बारिश के दिनों में पौधों में पानी तभी डालें जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी दिखाई दे। साथ ही, हर हफ्ते गमलों के नीचे लगी ड्रेनेज प्लेट्स को साफ करते रहें ताकि उनमें पानी जमा न हो और मच्छरों को पनपने का मौका न मिले।
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR Filing 2026) फाइल करने की आखिरी तारीख बेहद नजदीक आ चुकी है। अगर आपने अभी तक अपना टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों और हड़बड़ी से बचने के लिए इसे जल्द से जल्द पूरा कर लें। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि आईटीआर दाखिल करते समय टैक्सपेयर्स अक्सर एक बड़ी गलती कर बैठते हैं, जो बाद में उन्हें भारी पड़ सकती है—वह है बैंक खातों में जमा रकम पर मिले ब्याज (Interest Income) को छिपाना या भूल जाना।आयकर विभाग (Income Tax Department) के पास आपके सभी वित्तीय लेनदेन की पूरी जानकारी होती है। ऐसे में रिटर्न में ब्याज की सही जानकारी न देने पर आपको विभाग की तरफ से स्क्रूटनी या टैक्स नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।ITR में क्यों जरूरी है हर एक बैंक अकाउंट की इंटरेस्ट इनकम?सभी खातों की जानकारी अनिवार्य: अगर आपके पास एक से ज्यादा बैंक अकाउंट्स (सेविंग्स अकाउंट, एफडी या आरडी) हैं, तो उन सभी में एक वित्त वर्ष के दौरान मिले कुल ब्याज को जोड़कर आईटीआर में दिखाना अनिवार्य है।सख्ती की वजह: कई बार टैक्सपेयर्स को लगता है कि सेविंग्स अकाउंट पर मिले छोटे-मोटे ब्याज को बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन टैक्स विभाग इसे 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' (Income from Other Sources) के तहत टैक्स के दायरे में रखता है। हालांकि, आयकर कानून की धारा 80TTA के तहत सेविंग्स अकाउंट के ब्याज पर ₹10,000 तक की छूट मिलती है (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80TTB के तहत ₹50,000), लेकिन इसे रिटर्न में डिक्लेयर करना फिर भी जरूरी है।क्या होता है 'इंटरेस्ट सर्टिफिकेट' और क्यों है यह जरूरी?यह बैंक द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज है, जो यह प्रमाणित करता है कि एक वित्तीय वर्ष में आपको अपने सेविंग्स अकाउंट (Savings Account), फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) पर कुल कितना ब्याज मिला है।आयकर विभाग कभी भी आपसे इस ब्याज राशि का पुख्ता सबूत या प्रूफ मांग सकता है, इसलिए आईटीआर फाइल करने से पहले इसे अपने बैंक की वेबसाइट या ऐप से डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रख लेना सबसे समझदारी भरा कदम है।देश के 3 बड़े बैंकों से घर बैठे ऑनलाइन ऐसे डाउनलोड करें इंटरेस्ट सर्टिफिकेटआप अपने इंटरनेट बैंकिंग लॉग-इन (Net Banking) के जरिए चंद मिनटों में पीडीएफ (PDF) कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं:1. ICICI Bank ग्राहक ऐसे करें डाउनलोड:सबसे पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉग-इन करें।होमपेज पर दिए गए 'Payments & Transfer' टैब पर जाएं।इसके बाद ड्रॉप-डाउन मेनू में से 'Tax Center' के विकल्प पर क्लिक करें।अब 'Interest Certificate' सेक्शन में जाकर 'Download' विकल्प पर क्लिक करें।अपना अकाउंट नंबर और संबंधित वित्तीय वर्ष (Period) सेलेक्ट करें और पीडीएफ फाइल को सेव कर लें।2. HDFC Bank ग्राहक ऐसे करें डाउनलोड:अपने नेट बैंकिंग पोर्टल पर लॉग-इन करने के बाद सीधे 'Accounts' सेक्शन में जाएं।यहां आपको 'Quick Links' का एक ऑप्शन दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।क्विक लिंक्स के भीतर 'Download Interest Certificate' के विकल्प को चुनें।अपना खाता संख्या (Account Number) और अवधि (Period) सेलेक्ट करने के बाद सर्टिफिकेट आपके डिवाइस में डाउनलोड हो जाएगा।3. State Bank of India (SBI) ग्राहक ऐसे करें डाउनलोड:एसबीआई की नेट बैंकिंग वेबसाइट (OnlineSBI) पर जाकर लॉग-इन करें।डैशबोर्ड पर सबसे ऊपर मौजूद मेनू बार में 'e-Services' के विकल्प पर क्लिक करें।ई-सर्विसेज के तहत आपको 'Interest Certificate' का लिंक दिखाई देगा।उस पर क्लिक करके आप अपने सेविंग्स और एफडी खातों के ब्याज का पूरा विवरण पीडीएफ फॉर्मेट में आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक नगरी वाराणसी (Kashi) की सूरत अब पूरी तरह बदलने वाली है। शहर को दशकों पुरानी ट्रैफिक जाम की समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाने और यहां के रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार (15 जुलाई 2026) को वाराणसी के लिए लगभग ₹25,500 करोड़ की कुल निवेश वाली दो बेहद बड़ी हाईवे परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में इन दोनों महत्वाकांक्षी कॉरिडोर के निर्माण पर मुहर लगाई गई। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए इन प्रोजेक्ट्स का पूरा खाका साझा किया।पहला प्रोजेक्ट: NH-31 और वाराणसी रिंग रोड लिंक (वरुणा नदी के किनारे)वाराणसी शहर के आंतरिक ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।रूट और लंबाई: यह नया लिंक रोड कुल 43.218 किलोमीटर लंबा होगा, जिसे वरुणा नदी के किनारे-किनारे विकसित किया जा रहा है।डिजाइन: यह मुख्य रूप से एक 6/4-लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर होगा, जिसमें मुख्य कैरिजवे के साथ-साथ शानदार फ्लाईओवर्स, लूप्स, रैंप्स और सर्विस रोड्स का जाल बिछाया जाएगा।लागत और मॉडल: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत तैयार किया जाएगा। इस पर कुल ₹10,998.32 करोड़ की पूंजीगत लागत आएगी।दूसरा प्रोजेक्ट: NH-19 और वाराणसी रिंग रोड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर (गंगा नदी के किनारे)यह प्रोजेक्ट वाराणसी को एक नई पहचान देने के साथ-साथ शहर के बाईपास ट्रैफिक को एक स्मूथ कनेक्टिविटी देगा।रूट और लंबाई: यह राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) और वाराणसी रिंग रोड को आपस में जोड़ेगा। यह 46.039 किलोमीटर लंबी एक ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना है, जो पवित्र गंगा नदी के किनारे-किनारे बेहतरीन रिवरबैंक कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।आकर्षण: इस प्रोजेक्ट के तहत एक 6-लेन एलिवेटेड मुख्य कैरिजवे बनाया जाएगा। साथ ही, इसके मुख्य आकर्षणों में एक भव्य आइकॉनिक केबल-स्टेयड ब्रिज (Cable-Stayed Bridge) और एक एक्स्ट्राडोज्ड फुट-ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज शामिल हैं।लागत: इसे भी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसकी कुल पूंजीगत लागत ₹14,447.64 करोड़ आंकी गई है।60 मिनट का सफर सिर्फ 20 मिनट में; जानिए काशीवासियों को होने वाले बड़े फायदेभविष्य की 50 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे इन दोनों मेगा प्रोजेक्ट्स से वाराणसी की अर्बन मोबिलिटी (शहरी गतिशीलता) को एक नया आयाम मिलेगा:यात्रा समय में 70% की कमी: इन परियोजनाओं के पूरी तरह चालू होने के बाद इस रूट पर वाहनों का औसत यात्रा समय 60 मिनट से घटकर महज 20 मिनट रह जाएगा।शहर को मिलेगी जाम से मुक्ति: बाहरी राज्यों और जिलों से आने वाले भारी वाहन शहर के भीतर घुसे बिना सीधे NH-19 और NH-31 से रिंग रोड के रास्ते बाहर निकल जाएंगे, जिससे शहर के आंतरिक चौराहों पर भीड़भाड़ पूरी तरह खत्म हो जाएगी।धार्मिक और शैक्षणिक पर्यटन को बढ़ावा: यह एलिवेटेड कॉरिडोर बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रों और सांस्कृतिक केंद्रों तक पहुंचने वाले पर्यटकों को एक बेहद सुगम रास्ता देगा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के इस नए जाल से स्थानीय व्यापार, लॉजिस्टिक्स और पूरी अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी।
अभिषेक बनर्जी ने कोर्ट में दिए वॉयस सैंपल
तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर कोर्ट में वॉयस सैंपल दिए। उन पर हेट स्पीच का मामला दर्ज किया गया था
मोबाइल फोन निर्माण योजना पर मुहर, प्रधानमंत्री ने रोजगार बढ़ने का भरोसा जताया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपए के बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दी है
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट संकल्प है कि देश का प्रत्येक पात्र एवं आवासहीन परिवार सम्मानजनक जीवन जी सके और उसे अपना पक्का आवास प्राप्त हो। इसी संकल्प को साकार करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण 4.0 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के लिए 6,18,482 नए पक्के आवासों की स्वीकृति प्रदान की गई है। डबल इंजन की सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक आसराहीन परिवार को पक्की छत देकर उन्हें एक सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जा सके।सभी 75 जनपदों में गठित त्रिसदस्यीय अपीलीय समिति के माध्यम से ऐसे सभी मामलों की पुनः समीक्षा कराई जाए, जिनमें किसी कारणवश पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए हों जिन आवेदकों को अपात्र घोषित किया गया है उनकी कारण सहित सूची तैयार कर उपलब्ध कराई जाए, जिससे पात्रता संबंधी स्थिति पूर्णतः स्पष्ट एवं पारदर्शी बनी रहे।डबल इंजन सरकार का लक्ष्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्रामीण एवं आश्रयहीन परिवार को सम्मान, सुरक्षा और बेहतर जीवन का आधार उपलब्ध कराना है, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि समाज के प्रत्येक पात्र वर्ग तक योजना का लाभ पहुंचे और कोई भी जरूरतमंद परिवार आवास से वंचित न रहे।इस योजना के अंतर्गत विशेष प्राथमिकता उन परिवारों को दी जा रही है जिनमें रक्षा, अर्धसैनिक बल अथवा पुलिस बल की कार्रवाई में शहीद हुए जवानों की विधवाएँ एवं आश्रित, दिव्यांगजन, अल्पसंख्यक समुदाय के पात्र परिवार, कुष्ठ रोग अथवा कैंसर से पीड़ित सदस्य वाले परिवार, एचआईवी (पीएलएचआईवी) से प्रभावित परिवार, तथा एकल बालिका वाले परिवार शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसे संवेदनशील एवं जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है।
एफटीए से भारत-यूके के बीच नए व्यापार युग की शुरुआत, 'जीरो टैरिफ' से निर्यातकों को फायदा
भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (एफटीए) को दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों में एक अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते से कपड़ा, आयुर्वेद, कृषि, प्रोसेस्ड फूड, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, रत्न-आभूषण और हस्तशिल्प जैसे कई क्षेत्रों को बड़ी उम्मीदें हैं।
एसआईआर प्रक्रिया में हिस्सा लें, किसी का वोटिंग अधिकार नहीं छिनना चाहिए: वारिस पठान
एआईएमआईएम प्रवक्ता वारिस पठान ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए लोगों से इसमें सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की
WhatsApp और Telegram के Username Feature पर सरकार सख्त, 20 दिनों में आ सकता है बड़ा फैसला
केंद्र सरकार WhatsApp और Telegram के यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग फीचर को लेकर मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अगले करीब 20 दिनों के भीतर कोई अधिसूचना या ...
ममता बनर्जी के करीबी मदन मित्रा, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल खेमे में हुए शामिल
कई दिनों से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कमारहाटी से विधायक मदन मित्रा ने बुधवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट में शामिल हो गए।
प्रेम-प्रसंग में महिला की हत्या के 12 साल पुराने मामले में 6 दोषियों को उम्रकैद
मथुरा। उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले की एक अदालत ने करीब 12 वर्ष पुराने हत्या के एक मामले में छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रेम-विवाह को लेकर उपजी रंजिश में घर में घुसकर महिला की गोली मारकर हत्या करने के मामले में अदालत ने सभी दोषियों पर कुल 3.70 लाख रुपए […] The post प्रेम-प्रसंग में महिला की हत्या के 12 साल पुराने मामले में 6 दोषियों को उम्रकैद appeared first on Sabguru News .
श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर के समीप कार सेवा की घोषणा के बाद मथुरा प्रशासन सतर्क
स्वामी सच्चिदानंद को कानूनी नोटिस मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर के समीप कार सेवा की घोषणा के बाद मथुरा जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर बुधवार को क्षेत्राधिकारी (सीओ) गोवर्धन पुलिस बल के साथ चित्रगुप्त पीठ आश्रम पहुंचे और पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज से मुलाकात कर उन्हें कानूनी नोटिस तामील कराया। […] The post श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर के समीप कार सेवा की घोषणा के बाद मथुरा प्रशासन सतर्क appeared first on Sabguru News .
Uttarakhand : विपक्ष के विधायक भी हुए CM धामी के मुरीद, कांग्रेस विधायक ने मंच से की खुलकर तारीफ
चमोली में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसकी सबसे बड़ी वजह रही बदरीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला का मंच से मुख्यमंत्री की खुलकर तारीफ करना। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में ...
मदन मित्रा ने तृणमूल कांग्रेस से दिया इस्तीफा, ऋतब्रत गुट में शामिल
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा ने बुधवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया और औपचारिक रूप से विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में शामिल हो गए मित्रा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के कक्ष में मीडिया के सामने की यह घोषणा की। उन्होंने कहा […] The post मदन मित्रा ने तृणमूल कांग्रेस से दिया इस्तीफा, ऋतब्रत गुट में शामिल appeared first on Sabguru News .
कोटा के पोलाई खुर्द गांव में गोलगप्पे खाने से 40 लोग बीमार
कोटा। राजस्थान में कोटा जिले के पोलाई खुर्द गांव में बुधवार को गोलगप्पे खाने से 40 लोगों के बीमार होने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। देर रात एक के बाद एक लोग बीमार होने लगे। इनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। सुबह चिकित्सा […] The post कोटा के पोलाई खुर्द गांव में गोलगप्पे खाने से 40 लोग बीमार appeared first on Sabguru News .
अब राजनीति में प्रतिशोध है और भाषाई स्तर भी गिरा : वसुन्धरा राजे
जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा है कि अब राजनीति में प्रतिशोध है और भाषाई स्तर भी गिरा है। राजे बुधवार को यहां राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पर आयोजित अमृत महोत्सव कार्यक्रम के एक सत्र में बोल रही थी। उन्होंने सदन में बढ़ते अमर्यादित आचरण और भाषा के गिरते स्तर पर […] The post अब राजनीति में प्रतिशोध है और भाषाई स्तर भी गिरा : वसुन्धरा राजे appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ : नशीली दवाएं रखने के दोषी को दस वर्ष का कठोर करावास
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के रावतसर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने नशीली दवायें रखने के आरोपी को बुधवार को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त महेंद्र (36) को नशीली गोलियां रखने का दोषी मानते हुए उस पर एक लाख रुपए […] The post हनुमानगढ़ : नशीली दवाएं रखने के दोषी को दस वर्ष का कठोर करावास appeared first on Sabguru News .
बीकानेर में पावरग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इन्डिया लिमिटेड के उप महाप्रबंधक रिश्वत लेते अरेस्ट
बीकानेर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की बीकानेर इकाई ने पावरग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इन्डिया लिमिटेड, बीकानेर डिवीजन के उप महाप्रबंधक को बुधवार को 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ब्यूरो की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि ब्यूरो की बीकानेर इकाई को शिकायत मिली कि परिवादी फर्म द्वारा […] The post बीकानेर में पावरग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इन्डिया लिमिटेड के उप महाप्रबंधक रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि वन नेशन-वन इलेक्शन की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2029 में पूरे देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हों।

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