अतीक से जब्त जमीन पर बसे 76 परिवार, PM के जन्मदिन पर मनाएंगे 'दिवाली'
प्रयागराज के लूकरगंज में अतीक अहमद के कब्जे से छुड़ाई गई जमीन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को आवंटित किए गए हैं. इस जमीन पर बने 76 फ्लैटेस में रहने वाले परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर दीपोत्सव मनाएंगे. इस कार्यक्रम को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है. सपा ने इसे लेकर बीजेपी पर ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगाया है.
1,399 शव बरामद, नेपाल बाढ़ के 21 दिन बाद भी तबाही का मंजर!
नेपाल में तबाही के 21 दिन बाद भी कई परिवार अपनों की तलाश में हैं.बाढ़ का पानी उतर चुका है,लेकिन मलबे और टूटी सड़कों के बीच मुश्किलें अभी कम होती नहीं दिख रहीं. सेना, पुलिस और सशस्त्र बल के करीब 21 हजार जवान लगातार तलाश में जुटे हैं.
कुलगाम में महिला समेत 3 कथित ड्रग तस्कर गिरफ्तार, हेरोइन जैसा पदार्थ बरामद
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान के तहत महिला समेत तीन कथित ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है. दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 190.5 ग्राम हेरोइन जैसा पदार्थ बरामद किया गया. पढ़ें पूरी कहानी.
आम-नींबू छोड़िए, साबुत मसाले डालकर बनाएं लाल मिर्च का भरवां अचार
Lal Mirch Bharwan Achar: अगर आपको भी अचार खाना पसंद है तो यहां हम आपको लाल मिर्च का भरवां अचार बनाना सिखा रहे हैं. ये झटपट तैयार हो जाता है और इसे लंबे समय तक धूप में रखने की भी जरूरत नहीं होती है.
तेज आवाज में साउंड सिस्टम बजाना पड़ा भारी, वाहन और बॉक्स जब्त
इंदौर में तेज आवाज में साउंड सिस्टम बजाना वाहन चालक को भारी पड़ गया. विजय नगर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए साउंड सिस्टम लगे वाहन को जब्त कर लिया. पुलिस के मुताबिक वाहन से साउंड मशीन और साउंड बॉक्स भी बरामद किए गए हैं. शहर में ध्वनि प्रदूषण और तेज आवाज में डीजे या साउंड सिस्टम बजाने वालों पर निगरानी बढ़ाई गई है.
घर पर झींगुर से कैसे छुटकारा पाएं? झींगुरों को भगाने के लिए कौन सी दवा है, जानिए यहां
How to Get Rid of Crickets from House: गर्मी और उमस में झींगुर घर में घुसकर रात की नींद खराब कर सकते हैं. सफाई, नमी और पानी का रिसाव रोकना, दरारें बंद करना और खिड़कियों पर जाली लगाना इनके प्रवेश को कम कर सकता है. जानें झींगुरों को दूर रखने के आसान तरीके.
मक्का के पास हूती ड्रोन हमले का दावा, शहबाज ने फिर बहाए घड़ियाली आंसू
मक्का पर हूती ड्रोन हमले के सऊदी दावे के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कड़ी निंदा की है. उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभुता और हरमैन शरीफैन की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात कही.
भारतीय वॉरशिप के सामने आ गई PAK नेवी शिप, समंदर में टकराव की नौबत
15 सितंबर की शाम उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के जहाज ने भारतीय युद्धपोत से तेज रफ्तार से असुरक्षित तरीके से टक्कर मारी. भारत ने पाकिस्तान के चार्ज द अफेयर्स को बुलाकर कड़ा विरोध जताया. कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.
विधायक की भतीजी को बिना काम किए ही मिली 70 हजार रुपये महीने की सैलरी, जानें क्या है पूरा मामला
कर्नाटक में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक सरकारी क्लिनिक में तैनात डॉक्टर को उस समय भी सैलरी दी गई, जब पर पोस्ट ग्रेजुएशन की पढाई कर रही थी. आरोपी डॉक्टर विधायक की भतीजी है. प्रशासन इस मामले की जांच कर रहा है.
आंसू की बूंद जैसा दिखता है बंगाराम आइलैंड, क्रिस्टल क्लियर पानी में रात को चमकते हैं नीले 'तारे'
Most Beautiful Islands of India: कनिष्क के मुताबिक यह लक्षद्वीप का ऐसा आइलैंड का यहां कोई घर नहीं है. दूर-दूर तक सिर्फ लहरों का शोर है. पानी इतना साफ है कि आप बोट में बैठकर समंदर के तल को साफ-साफ देख सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों की जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी को फिर से बनाने से इनकार कर दिया है।
रोहतास से सामने आई यह कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. जिस महिला को 2014 में मृत मानकर उसके पति और परिवार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया गया था, वह 12 साल बाद झारखंड में जिंदा मिल गई. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उस समय नहर से मिला शव आखिर किसका था?
पाकिस्तान के अखबार डॉन के अनुसार शहबाज सरकार सरकारी और प्राइवेट ऑफिस में हफ्ते में 4 दिन काम करने के प्रस्ताव पर चर्चा की है, जिसके तहत शुक्रवार शनिवार और रविवार को दफ्तर बंद रहें.
बिना सांचे के बनाएं बाजार जैसे सॉफ्ट चावल के मोदक, ये रही उकडीचे मोदक की रेसिपी वीडियो
बप्पा के भोग के लिए घर पर बनाएं बाजार जैसे सॉफ्ट उकडीचे मोदक, नोट कर लें Nisha Madhulika की बताई ये आसान सात्विक रेसिपी.
समंदर में भारतीय युद्धपोत से टकराया पाकिस्तानी नेवी का जहाज, भारत ने राजनयिक को किया तलब
भारत-पाकिस्तान की नौसेना के जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में टकरा गए। अब भारत ने पाकिस्तानी कार्यवाहक राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। जानिए पूरा मामला क्या है आखिर?
UCC पर अमित शाह के एजेंडे पर टीडीपी-शिवसेना-मांझी तैयार, नीतीश क्यों कर रहे इनकार?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर जहां टीडीपी, शिवसेना और जीतन राम मांझी जैसी सहयोगी पार्टियां अमित शाह के साथ खड़ी हैं तो जेडीयू ने अलग स्टैंड लिया है. बीजेपी द्वारा 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के एजेंडे पर नीतीश कुमार तैयार नहीं हैं.
महाराष्ट्र में एफडीए चीफ तुकाराम मुंडे ने होटल-रेस्तरां के खराब खाद्य पदार्थों के बाद अब दवा कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने सर्जिकल उपकरणों के मनमाने रेट का भंडाफोड़ किया है.
Post Office की धांसू स्कीम... भूले तो नहीं आप? पैसा कर देती है डबल
Post Office Best Money Double Scheme: पोस्ट ऑफिस की स्कीम्स में निवेश पर रिस्क 'Zero' होता है और इनपर रिटर्न जोरदार मिलता है. यही नहीं ये पैसा भी डबल कर सकती हैं.
चाचा विधायक हैं हमारे! भतीजी स्टूडेंट, फिर भी उठाते रही 70 हजार की सैलरी
कर्नाटक के बागलकोट विधायक उमेश मेटी की भतीजी डॉ. अंकिता यारगल के खिलाफ जांच चल रही है. आरोप है कि वे नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर रहते हुए एक निजी कॉलेज से पीजी कोर्स कर रही थीं और साथ ही सरकारी वेतन भी ले रही थीं. वे 3 मार्च से सितंबर तक क्लिनिक से गायब रहीं. पहली सुनवाई में वे हाजिर नहीं हुईं, अब 18 सितंबर को उन्हें दस्तावेजों के साथ पेश होना है.
देश के सबसे अमीर IPS गुरप्रीत सिंह भुल्लर कौन हैं? इतने करोड़ की संपत्ति के हैं मालिक
Indias Richest IPS Officer: गुरप्रीत सिंह भुल्लर के पिता और दादा भी पुलिस में अधिकारी रह चुके हैं. वो पंजाब के हाई प्रोफाइल आईपीएस अधिकारियों में से एक हैं, जिन्होंने SSP से लेकर पुलिस कमिश्नर के पद पर काम किया है.
'अगर ऐसा हुआ तो मैं इस्तीफा दे दूंगा...': प्रियांक खरगे ने वंदे मातरम पर दी BJP को चुनौती
कर्नाटक में वंदे मातरम को लेकर विवाद गहरा गया है. प्रियांक खरगे ने कहा कि देश के नेताओं ने पहले ही तय कर दिया था कि वंदे मातरम के केवल दो श्लोक ही गाए जाएंगे.
गुरुग्राम हिट-एंड-रन केस की पीड़िता सिया बोलीं- कैमरे में सब रिकॉर्ड
गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड हिट-एंड-रन मामले में पीड़िता सिया ने आरोपी कल्याण बैंसला के कथित बयान पर प्रतिक्रिया दी है. सिया ने कहा कि कैमरे में रेड लाइट तोड़ने और टक्कर मारकर भागने की घटना रिकॉर्ड है. पढ़ें पूरी कहानी.
अहमदाबाद से वलसाड, बारिश-बाढ़ से किस कदर बेहाल, देखें गुजरात आजतक
गुजरात में भारी बारिश और बाढ़ से कहां-कहां बिगड़े हालात, प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन को लेकर क्या है बीजेपी की खास तैयारियां और जामनगर के रहने वाले 9 साल के विहान ने कैसे रच दिया है इतिहास? गुजरात आजतक के इस बुलेटिन में आपको दिखाएंगे सूबे से जुड़ी तमाम खबरें, लेकिन सबसे पहले हेडलाइंस.
मां बनने के 6 दिन बाद ही काम पर लौट आई यह कलेक्टर, कौन हैं IAS मेघाश्री?
IAS कलेक्टर मेघाश्री ने 25 अगस्त को तीसरी बेटी को जन्म दिया और 1 सितंबर से काम संभाल लिया। अब वह दो महीने की मैटरनिटी लीव पर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मैटरनिटी लीव लेना जरूरी नहीं। जानिए कौन हैं ये IAS?
बटेर पालन फायदे का सौदा! ₹25-30 पूंजी और 30 दिन में कमाई शुरू!
Quail Farming Tips: कम पूंजी में कारोबार शुरू करने वालों के लिए बटेर पालन ऐसा विकल्प है, जिसे 1010 फीट जगह और करीब 25 से 30 हजार रुपये में छोटी यूनिट के तौर पर शुरू किया जा सकता है. लेकिन असली नतीजा फीड, तापमान, साफ-सफाई, चूजों की उपलब्धता, खर्च और स्थानीय बाजार की मांग पर निर्भर करेगा.
कौन थे भरत? जिनका किरदार रामायण फिल्म में आदिनाथ कोठारे निभाएंगे
Ramayana: रामायण फिल्म के गाने 'जय जय राम' में सबसे दिल को छू लेने वाला पल वह है, जब श्रीराम (रणबीर कपूर) अपने छोटे भाई भरत (आदिनाथ कोठारे) से गले मिलते हैं. तो चलिए जानते हैं कि कौन थे भरत, जिनके त्याग को दुनिया आजतक याद रखती है.
राजस्थान के खैरथल निकाय में खेल की तैयारी? बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस नेता विक्रम चौधरी
राजस्थान निकाय चुनाव में कई नगर परिषदों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में कांग्रेस से लेकर बीजेपी बहुमत की जुगत में जुट गई है.
बंगाल में भाजपा विधायक का परिवार परेशान, CBI से हताश; बेटी के साथ हुआ था बुरा
सितंबर 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के सभागार में ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला था। जांच में पता चला था कि उनके साथ दुष्कर्म किया गया था। फिलहाल, CBI ने इस मामले की स्टेट रिपोर्ट कोर्ट में दी है।
अमिताभ बच्चन अयोध्या में बनवाएंगे धर्मशाला, 15 करोड़ की जमीन पर श्रद्धालुओं के लिए बनेगा आसरा
अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में अपनी प्रॉपर्टी को लेकर खास प्लानिंग की है. इसका उनके थोड़ा खास महत्व इसलिए है क्योंकि इसे वो अपने पिता हरिवंश राय बच्चन को समर्पित करना चाहते हैं.
'शरीयत के खिलाफ कानून स्वीकार नहीं', UCC पर अरशद मदनी ने जताया विरोध
UCC के खिलाफ कई नेताओं ने विरोध जताया है. जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान का मैं विरोध करता हूं. ये संविधान सर्वोच्चता और नागरिकों के धार्मिक अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश है.
दीमक, सीलन और क्रैक्स नहीं आएंगे.... सीमेंट में मिला दें ये 3 केमिकल!
घर बनाते वक्त मसाले और नींव में कुछ केमिकल के इस्तेमाल से हमेशा के लिए दीमक, सीलन और दरार जैसी समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है. चलिए जानते हैं ये कौन- कौन से केमिकल हैं.
क्या ग्रेड-1 फैटी लिवर में चाय पी सकते हैं? डॉक्टर ने बताया सच
क्या फैटी लिवर ग्रेड-1 में चाय पी सकते हैं? आपके मन में भी ये सवाल है, तो यहां गैस्ट्रॉलोजिस्ट से जानते हैं इसका जवाब-
टीवी के मशहूर स्टार विवेक दहिया ने बयां किया संघर्ष का कड़ा दौर: बार में किया काम
टेलीविजन इंडस्ट्री की दुनिया से एक बेहद प्रेरणादायक और चौंकाने वाली कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं। छोटे पर्दे के जाने-माने और चहेते अभिनेता विवेक दहिया, जो अपनी शानदार एक्टिंग और दमदार पर्सनैलिटी के लिए जाने जाते हैं, ने अपने शुरुआती जीवन और संघर्ष के दिनों का एक ऐसा पन्ना खोला है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। लोकप्रिय अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी के पति विवेक दहिया ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने स्ट्रगल के उन काले दिनों को याद किया जब वे विदेश में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले और अपनी मेहनत के दम पर अभिनय की दुनिया में मुकाम हासिल करने वाले विवेक ने बताया कि सफलता की चमक के पीछे किस तरह के कड़े इम्तिहान, रात-दिन की मेहनत और मानसिक तनाव छिपे होते हैं। उन्होंने बिना किसी झिझक के स्वीकार किया कि उन्होंने अपना पेट पालने और अपने खर्चों को उठाने के लिए बार में काम करने से लेकर टॉयलेट पेपर फैक्ट्री में मजदूरी और लोगों के घरों तक सामान की डिलीवरी करने तक के छोटे-छोटे काम किए हैं। उनके इस खुलासे ने उनके फैंस के दिलों में उनके प्रति सम्मान और अधिक बढ़ा दिया है, क्योंकि यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल है जो बिना शॉर्टकट के अपनी मेहनत के दम पर जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं।विदेश में पढ़ाई के बाद शुरू हुआ असली संघर्ष, जब जेब में नहीं थे पैसेविवेक दहिया के जीवन का यह कड़ा संघर्ष तब शुरू हुआ जब वे अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश गए थे। अमूमन लोगों को लगता है कि विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्र काफी संपन्न परिवारों से होते हैं और उन्हें कभी किसी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता, लेकिन विवेक की कहानी इससे बिल्कुल अलग थी। विदेश पहुंचने के बाद जब उन्हें वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा और घर से पैसे मिलने बंद हो गए, तो उनके सामने अस्तित्व की एक बड़ी लड़ाई खड़ी हो गई। अपने रहने का किराया चुकाने, कॉलेज की फीस भरने और अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए उनके पास काम करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। उस दौर को याद करते हुए विवेक बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्हें अंग्रेजी बोलने के लहजे और वहां के माहौल में ढलने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। किसी भी काम को छोटा न समझने की सोच ने ही उन्हें विदेशी धरती पर टिके रहने की हिम्मत दी, क्योंकि उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि यदि वे जीवित रहना चाहते हैं और अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं, तो उन्हें हर तरह की शारीरिक मेहनत करने के लिए तैयार रहना होगा।बार में नौकरी से लेकर टॉयलेट पेपर फैक्ट्री और डिलीवरी बॉय तक की कड़वी सच्चाईजीविकोपार्जन के लिए विवेक दहिया ने जिन कामों को चुना, वे किसी भी फिल्मी कहानी से कम नहीं थे। उन्होंने एक बार में ग्लास साफ करने और वेटर के रूप में काम करने से लेकर एक इंडस्ट्रियल टॉयलेट पेपर फैक्ट्री में शिफ्टों के दौरान मजदूरी करने तक का काम किया। फैक्ट्री के उस दौर को याद करते हुए वे बताते हैं कि वहां काम का माहौल बेहद कठिन और शारीरिक रूप से थका देने वाला होता था, जहां मशीन की गड़गड़ाहट के बीच उन्हें घंटों खड़े रहकर काम करना पड़ता था। इसके अलावा, उन्होंने शहर की गलियों में सामान और पार्सल की डिलीवरी करने वाले डिलीवरी बॉय की भूमिका भी निभाई, ताकि वे शाम को कुछ पैसे कमा सकें जिससे उनके अगले दिन का चूल्हा जल सके। ठंड के मौसम में साइकिल या पैदल चलकर घर-घर सामान पहुंचाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उनकी जिजीविषा और कुछ कर दिखाने के जज्बे ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। इन तमाम मुश्किलों और अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करते हुए भी उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई और अपने अभिनय के सपने को मरने नहीं दिया, जो उनकी मजबूत इच्छाशक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है।दिव्यांका त्रिपाठी के साथ मिलने के बाद कैसे बदली जिंदगी और मिला नया मुकामइन तमाम कठिनाइयों और संघर्षों का सामना करने के बाद जब विवेक दहिया भारत लौटे और उन्होंने मॉडलिंग व एक्टिंग की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया, तो उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया। टेलीविजन के लोकप्रिय शो 'ये है मोहब्बतें' के सेट पर काम करने के दौरान उनकी मुलाकात प्रसिद्ध अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी से हुई, जो पहले से ही इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम थीं। दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया, जिसके बाद साल 2016 में दोनों ने शादी कर ली। कई लोग अक्सर यह मानते हैं कि दिव्यांका जैसी बड़ी स्टार से शादी करने के बाद विवेक को रातों-रात शोहरत मिल गई, लेकिन विवेक ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर ही अपना मुकाम बनाया है। दिव्यांका ने हमेशा उनके संघर्ष के दिनों की कद्र की और उनके हर फैसले में एक मजबूत जीवनसाथी की तरह उनका साथ दिया। आज विवेक दहिया टीवी इंडस्ट्री के एक स्थापित अभिनेता हैं और कई लोकप्रिय शोज़ व वेब सीरीज में अपनी अदायगी का लोहा मनवा चुके हैं, जिससे यह साबित होता है कि सच्ची मेहनत का फल हमेशा मिलता है।असफलता से घबराने वालों के लिए प्रेरणा बने विवेक दहिया के संघर्ष के दिनआज के दौर में जब युवा जरा सी असफलता या परेशानी से घबराकर शॉर्टकट अपनाने की सोचते हैं, तब विवेक दहिया की यह जीवन यात्रा एक मजबूत प्रेरणा के रूप में सामने आती है। उनका यह सफर हमें यह सिखाता है कि जीवन में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि आपकी ईमानदारी और लगन ही आपके भविष्य की दिशा तय करती है। बार में काम करने से लेकर टॉयलेट पेपर फैक्ट्री के फर्श पर पसीना बहाने और डिलीवरी बॉय बनने तक के सफर ने विवेक को जमीन से जुड़े रहना सिखाया है। उनकी पत्नी दिव्यांका त्रिपाठी भी कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनके इस कड़े संघर्ष की तारीफ कर चुकी हैं और गर्व महसूस करती हैं कि उनके पति ने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। विवेक की यह कहानी केवल एक सेलिब्रिटी का किस्सा नहीं है, बल्कि यह हर उस आम इंसान की दास्तान है जो अपने सपनों को सच करने के लिए विपरीत परिस्थितियों से लड़ रहा है और अंततः सफलता के शिखर को छूकर ही दम लेता है।
BRICS समिट में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक का बड़ा खुलासा
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक राजनीति के गलियारों में हमेशा से कौतूहल का केंद्र रहे भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच के संवाद को लेकर आखिरकार केंद्र सरकार ने आधिकारिक और विस्तृत पर्दा उठा दिया है। ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बहुचर्चित द्विपक्षीय बैठक के संबंध में सरकार ने संसद के पटल पर आधिकारिक ब्योरा साझा किया है, जिसने देश-विदेश के राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पिछले कुछ वर्षों से पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रहे सीमा विवाद और तनावपूर्ण संबंधों के बीच हुई इस उच्च स्तरीय आमने-सामने की बातचीत में किन-किन गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई थी, इसको लेकर देश की जनता और विपक्षी दलों के मन में लगातार कई सवाल उठ रहे थे। सरकार द्वारा दिए गए इस आधिकारिक विवरण से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत ने अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर ड्रैगन के सामने कितनी दृढ़ता और स्पष्टता के साथ अपना पक्ष रखा है, जिससे द्विपक्षीय कूटनीति के मोर्चे पर एक नया संदेश पूरी दुनिया में गया है।ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और इस उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की पृष्ठभूमियह पूरा कूटनीतिक घटनाक्रम उस समय सामने आया जब दोनों देशों के शीर्ष नेता ब्रिक्स समूह के वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक ही मंच पर एकत्र हुए थे। लंबे समय से कूटनीतिक गतिरोध और सैन्य स्तर की वार्ताओं के दौर के बाद दुनिया भर की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि क्या भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कोई औपचारिक द्विपक्षीय संवाद होता है या नहीं। वैश्विक शांति, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों की महत्ता को समझते हुए दोनों नेताओं ने इस सम्मेलन के इतर आपसी बातचीत के लिए समय निकाला, ताकि दोनों पड़ोसी देशों के बीच जमे हुए बर्फ को पिघलाया जा सके। हालांकि कूटनीतिक बैठकों में अक्सर औपचारिक शिष्टाचार निभाया जाता है, लेकिन भारत की तरफ से यह साफ कर दिया गया था कि जब तक सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल नहीं होती, तब तक सामान्य संबंधों की बहाली संभव नहीं है। इसी पृष्ठभूमि में हुई इस महाबैठक के हर एक पल और शब्द का भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्व माना जा रहा है, क्योंकि एशिया की इन दो महाशक्तियों के संबंध पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।संसद में सरकार द्वारा साझा किया गया ब्योरा: सीमा विवाद और सेनाओं के पीछे हटने पर मुख्य फोकससंसद में पेश किए गए आधिकारिक विवरण के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई इस द्विपक्षीय बैठक में बहुत ही दो टूक शब्दों में यह बात रखी कि भारत-चीन संबंधों के समग्र विकास के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति, स्थिरता और एलएसी (LAC) का पूर्ण सम्मान होना सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है। पीएम मोदी ने पूर्वी लद्दाख के शेष बचे विवादित बिंदुओं से सैनिकों के पूर्ण पीछे हटने (Disengagement) और पैट्रोलिंग के अधिकारों को जल्द से जल्द बहाल करने की पुरजोर वकालत की। सरकार की ओर से संसद को यह भी अवगत कराया गया कि दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए, ताकि सीमा पर किसी भी प्रकार के तनाव की पुनरावृत्ति न हो सके। इस बैठक के बाद से ही दोनों देशों के राजनयिकों और सैन्य कमांडरों के बीच जमीन पर तनाव कम करने की दिशा में जो नए समझौते और गश्त व्यवस्था पर सहमति बनी है, उसे इसी उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद का प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है।द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक असंतुलन और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी हुई गंभीर चर्चाकेवल सैन्य और सीमा मामलों तक ही यह बैठक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक असंतुलन और आर्थिक मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा की गई। भारत द्वारा चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) और भारतीय बाजारों में चीनी सामानों की पैठ को लेकर समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है, जिस पर इस शिखर सम्मेलन के दौरान भी भारतीय पक्ष ने अपनी बात मजबूती से रखी। इसके अलावा, वैश्विक मंचों पर आपसी सहयोग, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी दोनों नेताओं के बीच विचारों का आदान-प्रदान हुआ। हालांकि भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग तभी आगे बढ़ सकते हैं जब राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए, जो कि भारतीय विदेश नीति की एक बड़ी और दृढ़ सफलता के रूप में देखा जा रहा है।इस संवाद के दूरगामी परिणाम और भविष्य में भारत-चीन संबंधों की नई दिशापीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई इस द्विपक्षीय बातचीत और सरकार द्वारा संसद में दिए गए इस ब्योरे ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब अपनी शर्तों पर कूटनीति संचालित करने में पूरी तरह सक्षम है। पड़ोसी देश के साथ दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए जहां एक ओर सैन्य और कूटनीतिक रास्ते खुले रखे गए हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा से कभी भी समझौता न करने के रुख को और अधिक मजबूत किया गया है। आने वाले महीनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि चीनी प्रशासन जमीन पर इन वार्ताओं के नतीजों को कितनी ईमानदारी से लागू करता है और क्या दोनों देशों के बीच सामान्य रिश्तों की बहाली का रास्ता पूरी तरह से साफ हो पाता है। फिलहाल, इस आधिकारिक खुलासे ने विपक्ष के सवालों पर विराम लगाने के साथ-साथ यह भी दिखा दिया है कि वर्तमान भारतीय नेतृत्व देश के सामरिक हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और हर वैश्विक मंच पर भारत की धमक स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है।
पुतिन के रूस लौटते ही भारत के सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की मॉस्को यात्रा से दुनिया भर में भूचाल
वैश्विक कूटनीति और रक्षा गलियारों में उस समय सनसनी फैल गई जब भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रूस का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सामरिक दौरा शुरू किया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया अंतरराष्ट्रीय दौरों से लौटने के तुरंत बाद भारतीय सेना प्रमुख का मॉस्को पहुंचना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक और अटूट सैन्य संबंधों को एक नया और आक्रामक आयाम मिलने जा रहा है। दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों और पश्चिमी देशों की पैनी निगाहें इस समय इस उच्च स्तरीय सैन्य दौरे पर टिकी हुई हैं, क्योंकि बदलते हुए भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और रूस की यह डिफेंस पार्टनरशिप वैश्विक रक्षा बाजार के पुराने समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर रख सकती है। इस रणनीतिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष सैन्य कमांडरों और रक्षा अधिकारियों के बीच अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति, रक्षा तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और भविष्य के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर बेहद गोपनीय और विस्तृत बातचीत होने की पूरी संभावना है।भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का पुराना इतिहास और वर्तमान सामरिक जरूरतेंभारत और रूस की मित्रता किसी से छिपी नहीं है, और दशकों से मॉस्को नई दिल्ली का सबसे भरोसेमंद और संकट का साथी रक्षा साझीदार रहा है। जब भी भारत को अपनी पश्चिमी या उत्तरी सीमाओं पर किसी बड़े सामरिक संकट का सामना करना पड़ा है, रूस ने हमेशा एक मजबूत ढाल बनकर भारत का साथ निभाया है। वर्तमान समय में जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बाधित हो रही है और दुनिया के कई देश रक्षा उपकरणों की कमी से जूझ रहे हैं, तब जनरल धीरज सेठ का यह रूस दौरा इस बात को सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम है कि भारतीय थल सेना को समय पर आधुनिक बख्तरबंद गाड़ियां, टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम और स्पेयर पार्ट्स बिना किसी रुकावट के मिलते रहें। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल पुराने करारों को आगे बढ़ाना नहीं है, बल्कि भविष्य की आधुनिक युद्धनीति (Modern Warfare) को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के बीच रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना भी है, जिससे मेक इन इंडिया पहल को भी बल मिल सके।मॉस्को में उच्च स्तरीय सैन्य बैठकें: रक्षा सौदों और तकनीकी ट्रांसफर पर होगी खास चर्चाअपनी इस मॉस्को यात्रा के दौरान थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ रूसी सशस्त्र बलों के वरिष्ठ जनरलों, रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों और रूस के प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के प्रमुखों के साथ मैराथन बैठकें कर रहे हैं। इन वार्ताओं में मुख्य रूप से रूस में बने अत्याधुनिक हथियारों के रख-रखाव, भारतीय कारखानों में उनके स्पेयर पार्ट्स के स्थानीय निर्माण और भविष्य की संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं (Joint R&D) पर फोकस किया जा रहा है। भारतीय सेना पिछले कुछ समय से अपनी युद्धक क्षमताओं को और अधिक घातक और तकनीक-युक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, जिसमें रूसी हथियारों की भूमिका हमेशा से रीढ़ की हड्डी जैसी रही है। इस उच्च स्तरीय मंथन के दौरान दोनों देशों के रक्षा विशेषज्ञों द्वारा उन तमाम बाधाओं को दूर करने पर भी विचार किया जा रहा है जो पिछले कुछ समय से वैश्विक प्रतिबंधों और भुगतान प्रणालियों (Payment Mechanisms) के कारण उत्पन्न हुई थीं।पश्चिमी देशों की पैनी नजर और वैश्विक भू-राजनीति पर इस दौरे का दूरगामी असरजनरल धीरज सेठ के इस रूस दौरे से अमेरिका और पश्चिमी देशों के रणनीतिक गलियारों में हलचल तेज होना स्वाभाविक है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से पश्चिमी देश चाहते हैं कि भारत रूस के साथ अपने रक्षा संबंधों को पूरी तरह से सीमित कर ले। लेकिन भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और 'स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी' (Strategic Autonomy) का परिचय देते हुए हमेशा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है। नई दिल्ली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की रक्षा जरूरतें और राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी बाहरी दबाव के अधीन नहीं हो सकती हैं। मॉस्को के साथ इस मजबूत होती सैन्य साझेदारी से यह संदेश भी दुनिया को मिल जाता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी पारंपरिक और परीक्षित मित्र देश के साथ हाथ मिलाने से पीछे नहीं हटेगा, चाहे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दबाव कितना भी क्यों न हो।भारत की थल सेना का आधुनिकीकरण और भविष्य की रणनीतिक तैयारियांभारतीय थल सेना वर्तमान में दुनिया की सबसे पेशेवर और ताकतवर सेनाओं में गिनी जाती है, लेकिन आधुनिक तकनीक, ड्रोन वारफेयर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रोबोटिक्स के इस दौर में सेना को लगातार अपग्रेड करने की आवश्यकता बनी हुई है। जनरल धीरज सेठ का यह रूस दौरा इसी आधुनिकीकरण अभियान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके जरिए भारत अपनी थल सेना की स्ट्राइक कोर और इन्फैंट्री ब्रिगेड को और अधिक शक्तिशाली बनाना चाहता है। रूस के पास दुनिया की सबसे उन्नत तोपखाना प्रणालियां, टैंक रोधी मिसाइलें और सामरिक रक्षा तकनीक मौजूद हैं, जिनके अनुभवों का लाभ भारतीय सेना को मिल सकता है। इस दौरे के सफल समापन के बाद आने वाले महीनों में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई बड़े और ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगने की उम्मीद है, जो आने वाले दशकों में भारत की सैन्य ताकत को और अधिक अजेय बना देंगे।
राहुल गांधी, सोनिया गांधी और लालू यादव समेत कई दिग्गज नेताओं की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
भारतीय राजनीतिक गलियारों और कानूनी जगत में उस समय भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (ED) ने देश के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामलों को लेकर अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया। केंद्रीय जांच एजेंसी अब अपनी जांच के दायरे को लंबा खींचने के बजाय मामलों को अत्यंत तेजी से आगे बढ़ा रही है, जिसके चलते कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी, सोनिया गांधी, राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू यादव और कई अन्य दिग्गज राजनेताओं की मुश्किलें आने वाले दिनों में काफी बढ़ सकती हैं। पिछले लंबे समय से लंबित चल रहे इन संवेदनशील मामलों में ईडी अब पूरी तरह से आक्रामक रुख अपनाते हुए विशेष अदालतों में ट्रायल को तेज करने और अगले 6 से 8 महीने के भीतर अदालती प्रक्रिया पूरी कर आरोपियों को सजा दिलाने के लिए ठोस कानूनी कदम उठा रही है। जांच एजेंसी की इस सख्त कार्यशैली और पुख्ता सबूतों को अदालत में पेश करने की तैयारी ने राजनीतिक दलों के खेमे में भारी हलचल पैदा कर दी है, और इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले महीनों में देश की सियासत में कोई बहुत बड़ा और अप्रत्याशित कानूनी फैसला देखने को मिलेगा।क्या है PMLA एक्ट की धाराएं और क्यों ईडी के इस नए तेवर से बढ़ी विपक्षी नेताओं की धड़कनेंधनशोधन निवारण अधिनियम यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) को देश के सबसे कड़े और सख्त कानूनों में से एक माना जाता है, जिसके प्रावधान सामान्य भारतीय दंड संहिता की तुलना में कहीं अधिक कठोर होते हैं। इस अधिनियम के तहत एक बार जब किसी व्यक्ति पर वित्तीय अनियमितता या अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप साबित हो जाता है या एजेंसी कोर्ट में पुख्ता चार्जशीट दाखिल कर देती है, तो आरोपी के लिए जमानत पाना बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया बन जाती है। हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी पीएमएलए के कई मामलों में त्वरित सुनवाई और मामलों को बिना वजह लटकाए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई थी, जिसके बाद से जांच एजेंसियों ने अपनी कार्यप्रणाली में तेजी ला दी है। ईडी का यह नया प्लान यह सुनिश्चित करना है कि ट्रायल कोर्ट्स में गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन के ट्रेल (Money Trail) को इस तरह से प्रस्तुत किया जाए कि বিচার प्रक्रिया में कोई अनावश्यक देरी न हो सके। यही कारण है कि जिन मामलों में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, लालू यादव और उनके परिवार के अन्य सदस्य पूछताछ या जमानत की राहत पर चल रहे हैं, उनमें अब कानूनी शिकंजा और अधिक कसता हुआ नजर आ रहा है।नेशनल हेराल्ड मामला और लैंड फॉर जॉब स्कैम: किन नेताओं पर लटकी है तलवारइस पूरी कानूनी कवायद के केंद्र में वे बड़े और पुराने मामले हैं जो पिछले कई वर्षों से राजनीतिक और न्यायिक बहस का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख रूप से कांग्रेस पार्टी से जुड़े चर्चित नेशनल हेराल्ड मामले (National Herald Case) का जिक्र आता है, जिसमें एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के अधिग्रहण और संपत्तियों के ट्रांसफर से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच चल रही है और इस सिलसिले में सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी से लंबी पूछताछ भी हो चुकी है। दूसरी तरफ, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार पर रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने के बहुचर्चित 'लैंड फॉर जॉब स्कैम' (Land for Jobs Scam) मामले में भी पीएमएलए के तहत शिकंजा कसा जा रहा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके पास इन मामलों में ऐसे अकाट्य डिजिटल और वित्तीय दस्तावेज मौजूद हैं जो यह साबित करते हैं कि किस तरह से सत्ता के दुरुपयोग से अवैध संपत्तियों का साम्राज्य खड़ा किया गया था। इन मामलों में ईडी द्वारा विशेष अदालतों से लगातार यह गुहार लगाई जा रही है कि वह दैनिक आधार पर सुनवाई (Day-to-day Hearing) करे ताकि मामलों का तार्किक और त्वरित निस्तारण किया जा सके।राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्षी दलों का आरोप, जांच एजेंसियों का हो रहा है राजनीतिक दुरुपयोगकानून और जांच एजेंसियों के इन कड़े कदमों पर देश का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, और विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और आरजेडी समेत तमाम विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार जानबूझकर केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करके विपक्षी नेतृत्व की छवि धूमिल करने और उन्हें राजनीतिक रूप से प्रताड़ित करने का काम कर रही है। उनका आरोप है कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं या सरकार के खिलाफ कोई बड़ा जनमुद्दा उठता है, तो इस तरह के पुराने मामलों को हवा देकर मीडिया में सनसनी फैलाई जाती है। हालांकि, दूसरी तरफ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और सरकारी हलकों की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए यह तर्क दिया जा रहा है कि कानून अपना काम कर रहा है और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी बड़े नेता को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। सरकार का यह रुख साफ संकेत देता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एजेंसी अपने कानूनी शिकंजे को और अधिक धारदार बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।आने वाले 6 से 8 महीनों में देश की राजनीति और न्यायपालिका पर क्या होगा इसका असरआने वाला समय भारतीय राजनीति और कानूनी इतिहास के पन्नों में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि यदि ईडी अपनी इस समयबद्ध कार्ययोजना में सफल रहती है और अदालतों से इन हाई-प्रोफाइल मामलों में फैसले आने शुरू होते हैं, तो इसका सीधा और दूरगामी असर देश की चुनावी राजनीति पर पड़ना तय है। एक तरफ जहां जांच एजेंसियां अपनी साख को बचाने और भ्रष्टाचार के मामलों में ठोस नतीजे देने के लिए जी-जान से जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के शीर्ष विपक्षी नेता इस कानूनी चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए अपने शीर्ष वकीलों की फौज के साथ अदालत में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। न्यायपालिका के स्तर पर भी यह एक बड़ी परीक्षा होगी कि वह इन संवेदनशील राजनीतिक मामलों की सुनवाई को किस गति से आगे बढ़ाती है। फिलहाल, देश भर के राजनीतिक विश्लेषकों और आम नागरिकों की निगाहें अदालत के कमरों और ईडी के अगले कानूनी कदमों पर टिकी हुई हैं, और यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले कुछ महीनों में देश की राजनीति का यह ऊँट किस करवट बैठता है।
यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज
भारतीय राजनीतिक गलियारों में इस समय चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच चुकी है, क्योंकि देश के पांच अहम राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों का काउंटडाउन आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है। चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने इन राज्यों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने के लिए अपनी प्रशासनिक तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों की उच्च स्तरीय टीम जल्द ही इन सभी चुनावी राज्यों का व्यापक दौरा करने वाली है, जिसके तहत ज़मीनी प्रशासनिक तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्थाओं और कानून-व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। इस घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों ने भी अपनी कमर कस ली है और राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बैठकों का दौर तेज हो गया है, जिससे यह साफ हो गया है कि आने वाले कुछ महीने देश की सियासत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।किन राज्यों में होने हैं अगले साल विधानसभा चुनाव और क्या है चुनावी टाइमलाइनभारतीय निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, अगले साल की शुरुआत में जिन पांच प्रमुख राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें उत्तर प्रदेश (UP), पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और पूर्वोत्तर का संवेदनशील राज्य मणिपुर शामिल हैं। इन सभी राज्यों में चुनावी हवा तेजी से बहने लगी है और राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम करना शुरू कर दिया है। चुनावी जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि फरवरी-मार्च के दौरान इन राज्यों में मतदान की प्रक्रिया संपन्न कराई जा सकती है, जिसके लिए चुनाव आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर जनगणना से जुड़ी गतिविधियों और मतदाता सूचियों (Voter List Revision) के पुनरीक्षण का काम भी युद्धस्तर पर शुरू करवा दिया है। हर राज्य का अपना अलग राजनीतिक मिजाज और भौगोलिक समीकरण है, जिसके चलते चुनाव आयोग की यह समीक्षा यात्रा इन राज्यों के संवेदनशील बूथों और सुरक्षा आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के दौरे का मुख्य उद्देश्य और प्रशासनिक बैठकेंमुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में चुनाव आयोग का यह आगामी दौरा इस बात की रूपरेखा तय करेगा कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के क्या इंतज़ाम रहेंगे और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMS) की सुरक्षा व आवाजाही को कैसे पुख्ता किया जाएगा। सीईसी (CEC) अपने इस दौरे के दौरान संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों (DGP), जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ मैराथन उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) को सख्ती से लागू करने, धनबल और बाहुबल के इस्तेमाल पर रोक लगाने तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, राज्य के प्रशासनिक तंत्र को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या गड़बड़ी न हो, विशेष तौर पर संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती समय पर पूरी कर ली जाए।राजनीतिक दलों की बढ़ी हलचल, टिकट बंटवारे और रैलियों की रणनीति पर मंथनचुनाव आयोग की तैयारियों के साथ ही इन पांचों राज्यों में राजनीतिक दलों की राजनीतिक गतिविधियाँ भी अब पूरी तरह से रफ्तार पकड़ चुकी हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब और उत्तराखंड तक, तमाम छोटी-बड़ी पार्टियाँ जनता को साधने के लिए रैलियों, जनसभाओं और विजय यात्राओं की योजना बना रही हैं। बैठकों का दौर शुरू हो चुका है जहाँ उम्मीदवारों के चयन, संभावित गठबंधनों और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने पर चर्चा की जा रही है। सत्ताधारी दल अपनी विकास योजनाओं और कल्याणकारी नीतियों के दम पर दोबारा वापसी का दावा कर रहे हैं, तो वहीं विपक्षी दल बेरोजगारी, महँगाई और स्थानीय कुप्रबंधन जैसे मुद्दों को हथियार बनाकर मतदाताओं के बीच जाने की तैयारी कर रहे हैं। इस बहुकोणीय राजनीतिक मुकाबले ने इन राज्यों के चुनावी माहौल को बेहद रोमांचक और संघर्षपूर्ण बना दिया है, जहाँ हर एक राजनीतिक दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा जोर लगा रहा है।चुनावी सुरक्षा, निष्पक्षता और मतदाताओं की भागीदारी को लेकर आयोग का खास फोकसभारतीय निर्वाचन आयोग का इस बार का पूरा जोर इस बात पर है कि लोकतंत्र के इस महापर्व में अधिक से अधिक मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए विशेष मतदाता जागरूकता अभियानों (SVEEP) के जरिए युवाओं और नए मतदाताओं को जोड़ने का काम किया जा रहा है। साथ ही, दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए घर से ही वोट डालने (Postal Ballot) की सुविधा को और अधिक सुगम बनाने के निर्देश भी जिला प्रशासन को दिए गए हैं। डिजिटल युग और सोशल मीडिया के दौर में फेक न्यूज और भड़काऊ बयानों पर नकेल कसने के लिए चुनाव आयोग की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल भी पूरी तरह से मुस्तैद कर दी गई है। जैसे-जैसे मुख्य चुनाव आयुक्त का दौरा नजदीक आ रहा है, प्रशासनिक मशीनरी और राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं, और आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि देश के ये पाँच अहम राज्य किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ने वाले हैं।
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भारतीय रेलवे (Indian Railways) से सफर करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों के लिए एक बड़ा और राहत भरी खबर है. दरअसल, सफर के दौरान यात्रियों की समस्याओं के तुरंत हल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले रेल मदद (RailMadad) ऐप को और ज्यादा स्मार्ट और हाईटेक बनाया जा रहा है. जानिए शिकायतों के समाधान से जुड़े ये 5 नए नियम किस तरह यात्रियों का सफर और आसान बनाएंगे.
तुर्की-पाकिस्तान ने मुंह मोड़ा तो सऊदी अरब के समर्थन में आया इजरायल, मदद के लिए रखी कड़ी शर्तें
मध्य पूर्व और एशियाई भू-राजनीति के गलियारों में इस समय एक ऐसा अभूतपूर्व और चौंकाने वाला कूटनीतिक भूचाल आया है जिसने पूरी दुनिया के रणनीतिकारों और रक्षा विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच जब पारम्परिक रूप से सऊदी अरब के साथ खड़े रहने वाले देशों जैसे तुर्की और पाकिस्तान ने क्षेत्रीय तनाव के समय रियाद से दूरी बनानी शुरू कर दी, तो ऐन मौके पर एक ऐसा देश खुलकर सऊदी अरब के समर्थन में आ गया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। यह देश कोई और नहीं बल्कि यहूदी राष्ट्र इजरायल है, जिसने अपनी सामरिक और कूटनीतिक प्राथमिकताओं को बदलते हुए सऊदी अरब को सुरक्षात्मक मदद और तकनीकी सहयोग देने का औपचारिक प्रस्ताव रख दिया है। हालांकि, इजरायल ने रियाद के सामने दोस्ती और मदद का हाथ बढ़ाने से पहले कुछ बेहद कड़ी और स्पष्ट शर्तें रख दी हैं, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति में एक नया उबाल आ गया है। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान द्वारा अपनी आक्रामक रणनीतियों के चलते एक बड़ी रणनीतिक भूल किए जाने की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी हैं, जिससे तेहरान के लिए आने वाले दिनों में मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।तुर्की और पाकिस्तान की बेरुखी और खाड़ी में बदलते हुए पारम्परिक समीकरणवैश्विक कूटनीति में पिछले कुछ दशकों से यह माना जाता रहा है कि इस्लामिक दुनिया के भीतर सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्ते भाईचारे और रणनीतिक सहयोग की एक मजबूत धुरी पर टिके हैं, जबकि तुर्की भी समय-समय पर खाड़ी के मामलों में मुखर भूमिका निभाता रहा है। लेकिन हालिया महीनों में मध्य पूर्व के भीतर हूती संघर्ष, यमन संकट और पश्चिम एशिया के जटिल भू-राजनीतिक मोर्चों पर जब हालात बिगड़ने लगे, तो तुर्की और पाकिस्तान की ओर से रियाद को वह अपेक्षित और ठोस रणनीतिक समर्थन नहीं मिला जिसकी सऊदी हुक्मरानों को उम्मीद थी। अंदरूनी राजनीतिक मजबूरियों, आर्थिक संकट और वैश्विक शक्तियों के दबाव के चलते इन दोनों देशों ने इस संवेदनशील क्षेत्रीय विवाद से अपने कदम पीछे खींच लिए। तुर्की और पाकिस्तान द्वारा इस तरह संकट के समय मुंह मोड़ लिए जाने से सऊदी नेतृत्व को गहरा झटका लगा, क्योंकि रियाद को यह महसूस होने लगा कि पारंपरिक सहयोगी जरूरत के वक्त साथ खड़े होने से कतरा रहे हैं। इस कूटनीतिक खालीपन और अकेलेपन ने सऊदी अरब को मजबूर कर दिया कि वह पश्चिम एशिया में अपने विकल्पों पर नए सिरे से विचार करे और अपनी सुरक्षा के लिए अन्य ताकतवर मुल्कों की तरफ देखे।इजरायल का ऐतिहासिक कदम: सऊदी अरब की मदद के ऑफर के पीछे की असली कूटनीतितुर्की और पाकिस्तान के पीछे हटने के बाद जिस देश ने सबसे आगे आकर सऊदी अरब को सुरक्षा कवच और आधुनिक तकनीकी सहायता देने की पेशकश की, वह इजरायल है। तेल अवीव और रियाद के बीच औपचारिक राजनैतिक संबंध भले ही अब तक स्थापित नहीं हुए हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से खुफिया और रक्षा स्तर पर दोनों देशों के बीच परदे के पीछे आपसी संवाद लगातार मजबूत हो रहा है। ईरान के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव, ड्रोन खतरों और मिसाइल हमलों से निपटने के लिए इजरायल के पास दुनिया की सबसे उन्नत एंटी-मिसाइल डिफेंस टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस सिस्टम मौजूद हैं। इसी का लाभ उठाते हुए इजरायली नेतृत्व ने सऊदी अरब को यह संदेश दिया है कि वह मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखने के लिए रियाद के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होने को तैयार है। हालांकि, कूटनीति में कुछ भी मुफ्त नहीं होता, और इजरायल ने इस सैन्य और खुफिया मदद के बदले सऊदी अरब के सामने कुछ बड़ी और रणनीतिक शर्तें रख दी हैं, जिसमें भविष्य के क्षेत्रीय शांति समझौतों और ईरान के खिलाफ साझा मोर्चाबंदी करने जैसे कड़े बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं।क्या ईरान ने चल दी कोई बहुत बड़ी भूल भरी चाल? तेहरान की बढ़ती मुश्किलेंइस पूरे कूटनीतिक ड्रामे के केंद्र में एक और बड़ा किरदार है, और वह है ईरान, जो मध्य पूर्व में अपने छद्म युद्ध (Proxy Wars) और शिया बहुल प्रभाव के जरिए लगातार अपनी ताकत का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के आक्रामक रवैये और हूती तथा अन्य मिलिशिया समूहों को मिलने वाले समर्थन ने ही खाड़ी क्षेत्र के बाकी देशों को एकजुट होने पर मजबूर कर दिया है। यमन और लाल सागर के मोर्चे पर जिस तरह से ईरान समर्थित ताकतों ने सऊदी अरब की आर्थिक और तेल परिसंपत्तियों को निशाना बनाया है, उसने रियाद को अपनी सुरक्षा नीति बदलने के लिए विवश कर दिया है। इसके जवाब में इजरायल और सऊदी अरब का वैचारिक दूरियों को दरकिनार करके एक-दूसरे के करीब आना ईरान के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका साबित हो रहा है। यदि तेहरान ने समय रहते अपनी आक्रामक क्षेत्रीय नीतियों पर लगाम नहीं लगाई, तो आने वाले समय में इजरायल और खाड़ी के देशों की यह नई धुरी ईरान के लिए पश्चिम एशिया में टिके रहना बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण बना देगी।मध्य पूर्व के नए भू-राजनीतिक भविष्य की तस्वीर और भारत पर इसका असरतुर्की-पाकिस्तान के हटने और इजरायल-सऊदी अरब के बीच बढ़ रही इस नई नजदीकी ने मध्य पूर्व के पूरे भू-राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया है। अब धर्म और पुरानी शत्रुता के पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर देश विशुद्ध रूप से अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक हितों और सामरिक जरूरतों के आधार पर फैसले ले रहे हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत के संबंध इजरायल के साथ भी उतने ही प्रगाढ़ हैं जितने कि सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों के साथ हैं। नई दिल्ली हमेशा से मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता की पक्षधर रही है, ताकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां रह रहे करोड़ों प्रवासियों के हित सुरक्षित रह सकें। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सऊदी अरब इजरायल की शर्तों पर किस तरह की प्रतिक्रिया देता है और क्या यह नया गठबंधन पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने में सफल होता है या फिर यह क्षेत्र किसी और बड़े संघर्ष की आग में झुलसने की तरफ आगे बढ़ता है।
BRICS शिखर सम्मेलन के वेज मेन्यू पर राजनीतिक विवाद के बीच आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति ओलाफुर राग्नार ग्रिमसन ने 2005 का किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज में भी पूरी तरह शाकाहारी भोजन परोसा गया था.
MBS बनाम MBZ की वर्चस्व की जंग में यमन से यूएई की बेदखली पड़ी भारी, क्या कंगाल हो जाएगा सऊदी अरब
मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक गलियारों में इस समय एक ऐसी खलबली मची हुई है जिसने खाड़ी देशों के दो सबसे ताकतवर मुल्कों—सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)—के आपसी संबंधों की कलई खोलकर रख दी है। सऊदी अरब के वली अहद यानी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) के बीच कूटनीतिक और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर चल रही खींचतान अब रियाद के लिए जी का जंजाल बनती जा रही है। जानकारों का मानना है कि प्रिंस सलमान ने यूएई को नीचा दिखाने और यमन के रणनीतिक मामलों से बाहर करने के चक्कर में एक ऐसी बड़ी सामरिक चूक कर दी है, जिसके परिणामस्वरूप ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास अपार बढ़त मिल गई है। यमन के रणक्षेत्र में खेली गई इस सियासी और कूटनीतिक चाल का खामियाजा अब सीधे तौर पर सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और तेल संपदा को भुगतना पड़ रहा है, जिससे यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या हूतियों का यह बढ़ता आतंक सऊदी साम्राज्य को आर्थिक रूप से तबाह कर देगा?MBS और MBZ की व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता ने कैसे तबाह किया यमन का समीकरण?इस पूरे संकट की पटकथा तब लिखी गई जब खाड़ी क्षेत्र में अपना आर्थिक और रणनीतिक दबदबा कायम करने की होड़ में सऊदी क्राउन प्रिंस MBS ने यूएई के खिलाफ आक्रामक नीतियां अपनानी शुरू कर दीं। वैश्विक व्यापार और विमानन के क्षेत्र में दुबई के बढ़ते रसूख को चुनौती देने के लिए सऊदी अरब ने विजन 2030 के तहत खरबों डॉलर झोंकना शुरू किया, जिसका असर दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों पर भी साफ दिखा। इसी व्यक्तिगत और रणनीतिक महत्वाकांक्षा के तहत MBS ने यमन के भीतर यूएई समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) और स्थानीय ताकतों को कमजोर करना शुरू कर दिया, जो वास्तव में दक्षिणी यमन में हूती विद्रोहियों को रोकने वाली एकमात्र मजबूत दीवार माने जाते थे। सऊदी वायु सेना द्वारा अपने ही सहयोगियों पर एयरस्ट्राइक करने और स्थानीय नेतृत्व को दरकिनार करने के इस फैसले ने यमन के रक्षा तंत्र को अंदर से खोखला कर दिया। जब यूएई समर्थित बल और अन्य स्थानीय ताकतें आपस में ही उलझ गईं, तो इसका सीधा फायदा उठाते हुए ईरान समर्थित हूतियों ने ताबड़तोड़ हमले कर सामरिक रूप से बेहद अहम मोचा बंदरगाह और लाल सागर के तटीय इलाकों पर कब्जा जमा लिया।बाब अल-मंडेब पर हूतियों का कब्जा और लाल सागर का बढ़ता सुरक्षा संकटयमन के रास्ते लाल सागर और बाब अल-मंडेब के अहम चोकपॉइंट पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण स्थापित होना पूरी दुनिया के साथ-साथ विशेष रूप से सऊदी अरब के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। यह वही समुद्री मार्ग है जहाँ से दुनिया का एक बहुत बड़ा तेल और व्यापारिक जहाजों का बेड़ा गुजरता है। पहले जहाँ यूएई के सहयोग से बनी स्थानीय फौजें इन विद्रोहियों को उनकी सीमाओं में बांधकर रखती थीं, वहीं अब सऊदी नीतियों के चलते वे ताकतें या तो बिखर चुकी हैं या मैदान छोड़कर पीछे हट चुकी हैं। नतीजतन, हूतियों ने आधुनिक ड्रोनों और मिसाइलों के जरिए सीधे सऊदी अरब की मुख्य भूमि और उसकी तेल परिसंपत्तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में हूती हमलों के बाद सऊदी अरब को अपनी 1200 किलोमीटर लंबी पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को भी एहतियातन बंद करना पड़ा है। सामरिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो सऊदी अरब के तेल निर्यात और उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ को गहरा आघात पहुँच सकता है, जिससे देश भारी वित्तीय संकट में घिर सकता है।ट्रंप प्रशासन से मदद की गुहार और वाशिंगटन से मिला झटकाअपनी ही रणनीतिक भूलों के कारण जब चारों तरफ से घिर गए, तो क्राउन प्रिंस MBS ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क साधकर हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हस्तक्षेप और हवाई हमले करने की पुरजोर अपील की। सऊदी नेतृत्व को पूरी उम्मीद थी कि अमेरिका हमेशा की तरह उसके समर्थन में सीधी सैन्य कार्रवाई करेगा, लेकिन वाशिंगटन की तरफ से रियाद को तगड़ा झटका मिला है। अमेरिकी प्रशासन ने सीधे तौर पर युद्ध के मैदान में उतरने या हूतियों के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान छेड़ने से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि, अमेरिका ने सऊदी अरब को केवल खुफिया जानकारी (Intelligence Sharing) और सीमित टारगेटिंग डेटा देने पर सहमति जताई है, ताकि सऊदी सेना खुद अपना बचाव कर सके। पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों से भी अपेक्षित मदद न मिलने के कारण अब सऊदी अरब खुद को कूटनीतिक मोर्चे पर काफी हद तक अकेला महसूस कर रहा है, जिससे रियाद के नीति-निर्माताओं की नींद उड़ गई है।क्या सऊदी अरब को कंगाल कर देंगे हूती विद्रोही? भविष्य की डरावनी तस्वीरआज के समय में यमन का रणक्षेत्र सऊदी अरब के लिए एक ऐसा दलदल बन चुका है जहाँ से निकलना प्रिंस सलमान के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ जहां देश के भीतर विजन 2030 के तहत मेगा प्रोजेक्ट्स पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय युद्ध और हूती मिसाइल हमलों से निपटने में अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं। यदि लाल सागर में हूतियों का दबदबा इसी तरह बढ़ता रहा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति बाधित हुई, तो सऊदी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि MBS ने अपनी जिद और यूएई के साथ चल रही अहंकार की लड़ाई को छोड़कर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सामूहिक कूटनीति का रास्ता नहीं अपनाया, तो यह संघर्ष सऊदी अरब को दीर्घावधि में भारी आर्थिक तबाही की ओर धकेल सकता है। आने वाला वक्त यह तय करेगा कि रियाद अपने इस कूटनीतिक संकट से कैसे बाहर निकलता है और क्या खाड़ी के दो दिग्गज देश अपने मतभेदों को भुलाकर इस साझा खतरे से निपट पाते हैं या नहीं।
LIVE: आज टीम इंडिया का ऐलान, रोहित-हार्दिक पर नजर, पंत की वापसी तय?
वेस्टइंडीज के खिलाफ ODI और T20I सीरीज के लिए आज टीम इंडिया का ऐलान होना है. रोहित शर्मा और विराट कोहली की वापसी, हार्दिक पंड्या की फिटनेस और ऋषभ पंत के चयन पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी. रविंद्र जडेजा की वापसी, स्पिन कॉम्बिनेशन और अजीत अगरकर की संभावित आखिरी चयन बैठक भी इस ऐलान को खास बना रही है.
Varanasi सीवर विवाद पर Ajay Rai का आरोप, जलभराव छिपाने के लिए BJP ने डलवाई रेत की बोरियां
वाराणसी में सीवर मैनहोल में रेत की बोरियां मिलने की घटना की जांच हो रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया है कि भारी बारिश के बाद जलभराव की समस्या से ध्यान हटाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने ये बोरियां वहां रखवाई थीं। राय ने वाराणसी में भारी जलभराव के मुद्दे पर बात करते हुए सवाल उठाया कि अधिकारियों को कैसे पता चला कि किस खास मैनहोल में रेत की बोरियां हैं। इसे भी पढ़ें: Congress बनी नाराज फूफा, BJP बोली- UPI और Digital Payment पर फैलाया जा रहा है Fake Narrative अजय राय ने कहा कि उन्हें कैसे पता चला कि उसी खास मैनहोल से रेत की बोरियां निकालनी हैं? इससे साफ पता चलता है कि बीजेपी के लोगों ने ही वहां ये बोरियां रखवाई थीं। अगर ऐसा नहीं है, तो वहां 12 CCTV कैमरे लगे हैं; फुटेज की जांच करें और सच सबके सामने आ जाएगा। रेत की बोरियां मिलने के बाद जल निगम ने FIR दर्ज कराई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को वाराणसी से वडनगर तक बीजेपी की प्रस्तावित 'सेवा संकल्प अभियान' बाइक रैली पर टिप्पणी करते हुए, राय ने पार्टी को राजनीतिक अभियान चलाने के बजाय पूरे हो चुके शहरी बुनियादी ढांचे को दिखाने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि बड़े नेता यहां आ रहे हैं। अगर उनमें हिम्मत है, तो वे वाराणसी रोपवे में बैठकर उसका उद्घाटन करें। जन्मदिन समारोह के बहाने, ये लोग केवल चुनाव की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि वे हमेशा चुनावी मोड में रहते हैं। राय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें कहा गया था कि 2029 से पहले सभी NDA-शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। इसे भी पढ़ें: UCC पर JDU बीजेपी के इशारे पर कर रही काम: Tejashwi Yadav उन्होंने बीजेपी पर समाज को बांटने के लिए सांप्रदायिक मुद्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे केवल हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करना जानते हैं। मस्जिदों को तोड़ा या निशाना बनाया जा रहा है, जैसा कि सहारनपुर में देखा गया, और तनाव भड़काने के लिए मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद को नोटिस भेजे जा रहे हैं। चाहे वे UCC लाएं या UGC, उनका एकमात्र मकसद समुदायों को एक-दूसरे से लड़वाना है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों में उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया जब पड़ोसी देश बांग्लादेश की अंतरिम और कार्यवाहक सरकार ने भारत के साथ अपने रिश्तों को लेकर एक बेहद सख्त और अप्रत्याशित कदम उठाया। पड़ोसी मुल्क में हुए बड़े राजनीतिक सत्ता परिवर्तन और उथल-पुथल के बाद अब वहाँ की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है, जहाँ बांग्लादेश ने भारत के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में सैन्य, सामरिक और प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अपने तमाम वरिष्ठ और मध्यम स्तर के अधिकारियों की उच्च स्तरीय जाँच शुरू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, पिछले कुछ दशकों के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच हुए कुल 101 द्विपक्षीय समझौतों, व्यापारिक करारों और रणनीतिक संधियों की व्यापक समीक्षा (Review of Agreements) करने का भी आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। इस कड़े और संदेहास्पद प्रशासनिक रुख के पीछे वहाँ की कमान संभाल रहे राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व की मंशा को लेकर दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से जुड़े पारंपरिक संबंधों में एक नया तनाव और अनिश्चितता का दौर शुरू होता हुआ दिखाई दे रहा है।क्या है इस पूरी नीतिगत उठापटक की पृष्ठभूमि और क्यों उठाया गया यह कदम?इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें पिछले साल बांग्लादेश में हुए उस हिंसक छात्र आंदोलन और जनआंदोलन में निहित हैं जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपनी सत्ता छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। इसके बाद से ही देश की सत्ता पर काबिज हुए नए नेतृत्व और तारिक रहमान से जुड़े राजनीतिक समीकरणों के प्रभाव में वहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था में भारत विरोधी और पक्षपाती दृष्टिकोण रखने वाले तत्वों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। नई व्यवस्था का मानना है कि पिछले कई दशकों से भारत के नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (DSSC) और अन्य सिविल सेवा संस्थानों से ट्रेनिंग लेकर लौटे अधिकारी भारत के प्रति नरम रुख रखते हैं या दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में भारत के हितों को ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। इसी राजनीतिक और वैचारिक पूर्वाग्रह के चलते अब प्रशासनिक स्तर पर एक ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जहाँ हर उस अधिकारी की निष्ठा और पृष्ठभूमि पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है, जिसने कभी भारतीय जमीन पर रहकर पेशेवर प्रशिक्षण हासिल किया था। इस प्रकार की संकीर्ण राजनीतिक सोच न केवल प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित कर रही है, बल्कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच आपसी विश्वास के ताने-बाने को भी अंदर से खोखला करने का काम कर रही है।भारत में ट्रेंड अफसरों की जांच से बांग्लादेशी प्रशासनिक मशीनरी पर क्या पड़ेगा असर?भारत के विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक सैन्य व सिविल ट्रेनिंग संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त करना दुनिया भर के कई मित्र देशों के लिए हमेशा से गर्व की बात रही है, क्योंकि यहाँ से निकलने वाले अधिकारी अपनी अनुशासित कार्यशैली और पेशेवर दक्षता के लिए जाने जाते हैं। लेकिन बांग्लादेश सरकार द्वारा इन अधिकारियों की विशेष जाँच कराने के फैसले से वहाँ के प्रशासनिक ढांचे और सैन्य बलों (Bangladesh Armed Forces) के भीतर भारी असमंजस, अविश्वास और मानसिक तनाव का माहौल पैदा हो गया है। जब देश की रक्षा और सुरक्षा से जुड़े अनुभवी अफसरों को केवल इस आधार पर संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगे कि उन्होंने किस देश से ट्रेनिंग ली है, तो इससे पूरी कार्यप्रणाली का मनोबल गिरता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की राजनीतिक बदले की भावना या अनावश्यक संशय से बांग्लादेश की अपनी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत स्थिरता कमजोर होगी, क्योंकि योग्य और पेशेवर अधिकारियों को हाशिए पर धकेलने से प्रशासनिक सेवाओं में खालीपन और अक्षमता की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका खामियाजा अंततः खुद उसी देश की जनता को भुगतना पड़ेगा।101 द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा: व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर मंडराया संकटकेवल सैन्य अधिकारियों की जाँच तक ही मामला सीमित नहीं है, बल्कि बांग्लादेश सरकार द्वारा भारत के साथ हुए 101 महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों की व्यापक समीक्षा करने का निर्णय आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी गहरी चिंताएं पैदा कर रहा है। पिछले डेढ़ दशकों में भारत के सहयोग से दोनों देशों के बीच सीमा पार रेल संपर्क, अंतर्देशीय जलमार्ग, ऊर्जा आपूर्ति (बिजली और ईंधन के करार), बुनियादी ढांचा विकास और मुक्त व्यापार से जुड़े दर्जनों ऐसे प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतरे हैं जिन्होंने दोनों अर्थव्यवस्थाओं को करीब लाने में अहम भूमिका निभाई है। अब यदि राजनीतिक कारणों से इन सभी ऐतिहासिक समझौतों को रद्द करने, उनमें फेरबदल करने या उन्हें नए सिरे से उलझाने का प्रयास किया जाता है, तो इससे भारत के साथ-साथ बांग्लादेश के अपने आर्थिक विकास को भी तगड़ा झटका लगेगा। भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली, पारगमन सुविधाएं और व्यापारिक रियायतें यदि राजनीतिक सनक की भेंट चढ़ती हैं, तो इससे बांग्लादेश के भीतर महंगाई बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा, जिससे वहाँ का औद्योगिक और व्यावसायिक भविष्य गहरे संकट में पड़ सकता है।क्षेत्रीय भू-राजनीति और भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया: आगे क्या होगी कूटनीतिक चाल?इस पूरे घटनाक्रम पर भारत के विदेश मंत्रालय और रणनीतिक विशेषज्ञों की पैनी नजर बनी हुई है, और नई दिल्ली ने बेहद संयमित लेकिन दृढ़ रुख अपनाते हुए स्थिति पर नजर रखना शुरू कर दिया है। भारत हमेशा से यह मानता आया है कि किसी भी देश के साथ उसके कूटनीतिक और द्विपक्षीय संबंध वहाँ की किसी खास राजनीतिक पार्टी या सरकार के आने-जाने से ऊपर उठकर दोनों देशों की जनता के आपसी हितों पर टिके होने चाहिए। इसके बावजूद, यदि बांग्लादेश का वर्तमान नेतृत्व जानबूझकर भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देता है और रणनीतिक समझौतों को कमजोर करने की कोशिश करता है, तो भारत भी अपनी सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कड़े और आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। दक्षिण एशिया के इस संवेदनशील भू-राजनीतिक परिदृश्य में बांग्लादेश के इस रुख से क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ना तय माना जा रहा है, और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद के रास्ते और अधिक कठिन तथा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, जिस पर पूरी दुनिया के सामरिक विश्लेषकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
मिडिल ईस्ट में ईरान की चेतावनी के बाद हुआ बड़ा हादसा!
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर एल गैया क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई है. ईरानी मीडिया ने समुद्री बारूदी सुरंगों का दावा किया, जबकि अमेरिकी सेना ने इसे खारिज करते हुए पुराने मिसाइल हमले से जोड़ा है. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के मुताबिक टैंकर शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त हुआ और दो नाविक लापता हैं. ब्रिटिश समुद्री एजेंसी ने भी अज्ञात जहाज पर प्रोजेक्टाइल हमले की पुष्टि की थी.
जीव विज्ञान और वनस्पति जगत में उस समय अभूतपूर्व हलचल मच गई जब फिलीपींस के गहरे और घने जंगलों से एक ऐसी रोमांचक खबर सामने आई जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों, प्रकृति प्रेमियों और बोटैनिस्ट्स को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। लगभग 130 साल यानी एक सदी से अधिक लंबे अंतराल के बाद फिलीपींस की धरती पर एक ऐसा दुर्लभ और रहस्यमयी फूल दोबारा खिल उठा है जिसे वैज्ञानिक जगत में पूरी तरह से विलुप्त या 'खोया हुआ' मान लिया गया था। इस चमत्कारिक पौधे का नाम एक्सकम लोहेरी (Exacum Loeweri) है, जिसकी खोज और पुनरुत्पत्ति ने बोटैनिकल रिसर्च में नए आयाम खोल दिए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह अनोखा पौधा अपनी जिंदगी और पोषण के लिए सूरज की धूप या प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं रहता है, जो प्रकृति के स्थापित नियमों से हटकर एक अनूठा उदाहरण पेश करता है। फिलीपींस के स्थानीय जंगलों में इस अद्भुत वनस्पति के फिर से पाए जाने के बाद से ही पर्यावरणविदों और शोधकर्ताओं की टीमें इस पर गहन अध्ययन करने में जुट गई हैं, और इसकी चर्चा पूरी दुनिया में तेजी से फैल रही है।क्या है एक्सकम लोहेरी फूल का इतिहास और क्यों इसे माना जा रहा था विलुप्त?एक्सकम लोहेरी (Exacum Loeweri) के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस दुर्लभ प्रजाति का दस्तावेजीकरण आखिरी बार लगभग 130 साल पहले औपनिवेशिक काल के दौरान कुछ विदेशी वनस्पतिशास्त्रियों द्वारा किया गया था। उसके बाद से लगातार बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य, अंधाधुंध वनों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग और इंसानी दखल के कारण यह पौधा प्राकृतिक आवास से पूरी तरह गायब हो गया था। दशकों तक दुनिया भर के बोटैनिकल सर्वे और वैज्ञानिक अभियानों में इस पौधे का कोई सुराग नहीं मिला, जिसके चलते इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) और अन्य शोध संस्थानों ने इसे विलुप्त होने की कगार पर मान लिया था। लेकिन हाल ही में फिलीपींस के एक विशिष्ट और संरक्षित वन क्षेत्र में स्थानीय शोधकर्ताओं की एक टीम को गश्त के दौरान कुछ ऐसे अनोखे पौधे नजर आए, जिनके फूल पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स से पूरी तरह मेल खाते थे। जब अत्याधुनिक डीएनए सीक्वेंसिंग और लेबोरेटरी परीक्षण के जरिए इन फूलों की गहन जांच की गई, तो यह पुष्टि हो गई कि यह वही 'खोया हुआ' एक्सकम लोहेरी फूल है, जिसे दुनिया सदियों पहले अलविदा कह चुकी थी।सूरज की रोशनी का मोहताज नहीं: कैसे जिंदा रहता है यह अनोखा पौधा?इस पौधे की सबसे बड़ी और वैज्ञानिक रूप से सबसे चौंकाने वाली विशेषता यह है कि यह सूरज की किरणों से अपना भोजन तैयार नहीं करता है। सामान्य तौर पर प्रकृति के अधिकांश पेड़-पौधे और फूल जीवित रहने और अपने विकास के लिए फोटोसिंथेसिस यानी प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया पर पूरी तरह निर्भर होते हैं, जिसके लिए धूप का होना अनिवार्य माना जाता है। इसके विपरीत, एक्सकम लोहेरी एक मायकोहेरोट्रॉफिक (Mycoheterotrophic) प्रवृत्ति का पौधा है, जो अपनी जड़ों के माध्यम से जमीन के नीचे मौजूद खास तरह की कवक यानी फंगस और सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से सीधे अपना पोषण और ऊर्जा खींचता है। जंगल की घनी छांव और अंधेरे माहौल में पनपने की इस अनोखी क्षमता के कारण ही यह सूरज की रोशनी के बिना भी पूरी तरह सुरक्षित और जीवंत रहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रकृति का यह अनूठा अनुकूलन (Adaptation) इस बात का जीवंत प्रमाण है कि पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र में जीवन को बनाए रखने के कितने अनगिनत और रहस्यमयी तरीके मौजूद हैं, जिनके बारे में इंसानी समझ अभी भी शुरुआती दौर में है।फिलीपींस की जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए क्या है इसके मायने?फिलीपींस अपने आप में दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जो अपनी अत्यधिक समृद्ध और अद्वितीय जैव विविधता (Biodiversity) के लिए जाने जाते हैं। यहाँ के उष्णकटिबंधीय वर्षावन ऐसे कई दुर्लभ जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों का घर हैं जो पृथ्वी पर अन्यत्र कहीं नहीं पाए जाते हैं। 130 साल बाद एक्सकम लोहेरी का दोबारा प्रकट होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यहाँ के जंगलों का इकोसिस्टम अभी भी कुछ मायनों में अपनी प्राकृतिक अवस्था को बचाए रखने में सक्षम है, हालांकि इस पर जलवायु परिवर्तन का खतरा लगातार मंडरा रहा है। स्थानीय पर्यावरणविदों और सरकार के कंजर्वेशन विभागों ने इस दुर्लभ पौधे के मिलने के बाद उस पूरे इलाके को सख्त सुरक्षा घेरे में ले लिया है ताकि अवैध कटाई, तस्करों या पर्यटकों की आवाजाही से इस नाजुक पौधे को कोई नुकसान न पहुँचे। बोटैनिकल गार्डन्स और यूनिवर्सिटीज के वैज्ञानिक अब इसके बीजों और टिशू कल्चर के माध्यम से इसे संरक्षित करने की उन्नत तकनीकों पर काम कर रहे हैं ताकि इस प्रजाति को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सके।आधुनिक विज्ञान और वनस्पति अनुसंधान के लिए क्यों मील का पत्थर है यह खोज?यह पूरी घटना केवल एक फूल के मिलने भर की नहीं है, बल्कि यह आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और बॉटनी के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रही है। जब भी कोई विलुप्त मानी जाने वाली प्रजाति दोबारा मिलती है, तो वह वैज्ञानिकों को यह समझने का मौका देती है कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बीच जीव-जंतु और वनस्पतियां खुद को कैसे ढालती हैं या कैसे भूमिगत रहकर जीवित रहती हैं। इस खोज के बाद दुनिया भर के यूनिवर्सिटीज के शोधकर्ता फिलीपींस की इस अनूठी वनस्पति पर रिसर्च पेपर तैयार कर रहे हैं, जिससे पौधों के विकास क्रम (Evolutionary Biology) और उनके पोषण तंत्र के बारे में कई नई जानकारियां सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में यह खोज पर्यावरण संरक्षण नीतियों को और अधिक मजबूत बनाने में मदद करेगी, जिससे हमारे ग्रह पर मौजूद अन्य दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए नए वैश्विक प्रयास शुरू किए जा सकेंगे।
सेवा पखवाड़ा, 'आशीर्वाद का दीया'... BJP कैसे मनाएगी PM मोदी का बर्थडे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में बीजेपी 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देशव्यापी 'सेवा पखवाड़ा' मनाएगी. इसके तहत 1,000 जिलों में रक्तदान शिविर, 75 शहरों में 'नमो युवा दौड़' और घर-घर 'आशीर्वाद का दीया' जलाने जैसे सामाजिक व कल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
अब जानवरों से भी संबंध बनाने वाला बन सकता है FBI एजेंट! अमेरिका में ट्रंप सरकार के फैसले ने चौंकाया
अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने इस साल की शुरुआत में चुपचाप नियम बदल दिए थे. इनमें जानवरों से संबंध बाने और प्रॉस्टिट्यूशन में पहले शामिल रहे उम्मीदवारों को नौकरी देने पर लगी पूरी तरह की रोक हटा दी गई थी. जानिए FBI के डायरेक्टर किस आधार पर इसे सही बता रहे हैं.
CBI को देखते ही रेलवे के अधिकारी फेंकने लगे रिश्वत के नोट
झारखंड के रामगढ़ में रिश्वतखोरी के मामले में रेलवे के दो अधिकारियों को रांची की विशेष अदालत ने तीन-तीन साल की सजा सुनाई है. मामला 2018 में पतरातू डीजल शेड का है, जहां ठेकेदार से 6.26 लाख रुपये का बिल पास कराने के बदले रिश्वत मांगी गई थी.
उम्र के साथ कितना बूढ़ा होता है दिमाग? AI से वैज्ञानिक लगाएंगे पता
नई रिसर्च में पता चला है कि उम्र बढ़ने के साथ दिमाग की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है और स्वस्थ जीवनशैली इसका प्रभाव कम कर सकती है. कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से MRI स्कैन के जरिए दिमाग की उम्र का पता लगाने की तकनीक विकसित की है
दिशा सालियान केस: सीबीआई की चर्चित अफसर सीमा पाहूजा करेंगी जांच, हाथरस-गुड़िया जैसे चर्चित मामलों का कर चुकी हैं खुलासा
मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखी. ये पोस्ट दिवंगत संगीतकार जयकिशन को लेकर है. जयकिशन का निधन 12 सितंबर 1971 को सिर्फ 41 वर्ष की आयु में हुआ था.
पंचामृत बनाने का सही तरीका क्या है? एस्ट्रोलॉजर जय मदान ने बताया पूजा के लिए पंचामृत कैसे बनाएं
एस्ट्रोलॉजर जय मदान बताती हैं, पंचामृत को हमेशा बढ़ते क्रम में बनाना चाहिए. आइए जानते हैं कैसे-
बिजली बिल, OTT और मोबाइल रिचार्ज... इन पेमेंट पर भी लगेगा UPI चार्ज?
UPI MDR charges 2026: सरकार ने UPI ट्रांजैक्शन पर MDR चार्ज का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत 2 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर कुछ परसेंट चार्ज वसूला जाएगा. अब कई लोगों के बीच में कंफ्यूजन है कि बिजली बिल, OTT और अन्य UPI ऑटो पेमेंट पर कोई चार्ज लगेगा क्या? आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
फेसबुक पर दोस्ती, फिर हनीट्रैप... कारोबारी से लाखों की ठगी, 3 गिरफ्तार
भावनगर में फेसबुक पर दोस्ती कर व्यापारी को सारंगपुर दर्शन के बहाने बुलाया गया. खुद को क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर एनकाउंटर की धमकी दी और 3.05 लाख रुपये ऐंठे. महिला समेत तीन गिरफ्तार, दो फरार आरोपियों की तलाश जारी. पढ़ें ये सनसनीखेज कहानी.
Congress बनी नाराज फूफा, BJP बोली- UPI और Digital Payment पर फैलाया जा रहा है Fake Narrative
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पार्टी पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) नेटवर्क पर ट्रांज़ैक्शन चार्ज के बारे में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है और कहा है कि ग्राहकों को डिजिटल पेमेंट के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि वह हमेशा से डिजिटल ट्रांज़ैक्शन का विरोध करती रही है। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम द्वारा पहले UPI के फायदों और आम नागरिकों तक इसकी पहुँच पर उठाए गए सवालों का भी ज़िक्र किया। इसे भी पढ़ें: UPI Transactions पर चार्ज: Jairam Ramesh बोले- US Card कंपनियों के दबाव में Modi Govt प्रदीप भंडारी ने कहा कि देखिए, कांग्रेस पार्टी एक ‘नाराज़ फूफा’ जैसी पार्टी बन गई है। और यह वही कांग्रेस पार्टी है जिसने तब सवाल उठाए थे जब भारत UPI के ज़रिए दुनिया में डिजिटल फाइनेंशियल क्रांति का नेतृत्व कर रहा था; राहुल गांधी के कहने पर पी. चिदंबरम ने पूछा था कि क्या देश का कोई गरीब आदमी या आम नागरिक कभी डिजिटल फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन कर पाएगा। यानी, कांग्रेस हमेशा से डिजिटल फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन की विरोधी रही है। और आज, यह ‘नाराज़ फूफा’ पार्टी झूठ फैला रही है। आज हर आम नागरिक QR स्कैनर का इस्तेमाल करके पेमेंट कर रहा है और आगे भी स्कैनर के ज़रिए ही पेमेंट करेगा। किसी भी ग्राहक को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। भंडारी ने आगे कहा कि सभी UPI ट्रांज़ैक्शन में से 90 प्रतिशत से ज़्यादा 2,000 रुपये से कम के होते हैं, और इससे ज़्यादा रकम वाले ट्रांज़ैक्शन पर भी ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि करीब 90 प्रतिशत या उससे ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन 2,000 रुपये से कम के होते हैं। और उस सीमा से ज़्यादा होने पर भी ग्राहक से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसके बावजूद, कांग्रेस पार्टी झूठी खबरें क्यों फैला रही है? इसे भी पढ़ें: Haryana में ब्लॉक सम्मेलनों से जमीनी स्तर पर मजबूत होगी Congress, संजय दत्त ने बताई रणनीति लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व अक्सर झूठी बातें फैलाता है। उन्होंने कहा कि आजकल राहुल गांधी को एक आदत हो गई है: उनकी टीम उन्हें हर सुबह कहती है, ‘सर, आज आपको एक झूठ दोहराना है, या तो कोई झूठा ट्वीट करना है या किसी मुद्दे पर गुमराह करने वाला बयान देना है।’ हालांकि, राजस्थान की जनता ने राहुल गांधी को दिखा दिया है कि भले ही झूठ गूंजता हो, लेकिन सच की दहाड़ ही जीतती है। ठीक उसी तरह, इस देश के आम नागरिक राहुल गांधी को साबित कर रहे हैं कि वे डिजिटल फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन का सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं; UPI के बारे में उनके झूठ काम नहीं आएंगे।
Netflix ने कपिल शर्मा के पांचवे सीजन के प्रोमो को रिलीज कर उस तारीख का ऐलान कर दिया है जब आप ओटीटी प्लैटफॉर्म पर इस हिट कॉमेडी शो का नया सीजन देख सकेंगे.
सऊदी के इन शहरों पर हूतियों का हमला! जानिए वहां कितने भारतीय रहते हैं
अबहा से जाजान तक हूती संघर्ष की खबरें सामने आ रही हैं. ऐसे में जानिए इन इलाकों समेत पूरे सऊदी अरब में रहने वाले भारतीयों की संख्या और उनके कामकाज की पूरी तस्वीर.
Houthi Attack on Saudi: सऊदी Prince ने किससे मांगी मदद? Mecca पर हमले को लेकर हूतियों ने दिया बयान
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UCC पर रुख तय करने से पहले कानून की समीक्षा करेगी JD(U), Nitish Kumar ने बुलाई बैठक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर किए गए ऐलान के बाद बिहार में नई राजनीतिक सरगर्मी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और JD(U) प्रमुख नीतीश कुमार ने पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों की बैठक बुलाई है। यह बैठक 18 सितंबर को पटना में JD(U) दफ्तर में होगी। खबरों के मुताबिक, बैठक में UCC पर चर्चा होने की उम्मीद है और एजेंडे में फरक्का जल संधि (Farakka Water Treaty) भी शामिल हो सकती है। इसे भी पढ़ें: UCC पर JDU बीजेपी के इशारे पर कर रही काम: Tejashwi Yadav यह घटनाक्रम शाह के उस बयान के कुछ दिनों बाद हुआ है जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले BJP के नेतृत्व वाले NDA की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। इस घोषणा ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है, खासकर JD(U) जैसे NDA सहयोगियों के बीच। यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि JD(U) ने अब तक UCC पर सावधानी भरा रुख अपनाया है। बिहार के डिप्टी सीएम और सीनियर JD(U) नेता विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को कहा कि पार्टी अपना रुख तय करने से पहले प्रस्तावित कानून की जांच करेगी। चौधरी ने कहा कि पार्टी को अभी UCC कानून की डिटेल्स के बारे में जानकारी नहीं है और वह अपनी कोई भी चिंता केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुंचाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जल्दबाजी करने की कोई वजह नहीं है। चौधरी ने कहा कि अगर हमें इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगता है, तो हम बिना किसी वजह के इसका विरोध क्यों करेंगे? और अगर चिंता की कोई बात होगी, तो उसे केंद्रीय गृह मंत्री को बताया जाएगा। इसे भी पढ़ें: Vishnupad Temple Corridor और नदी जोड़ समेत Bihar Cabinet ने 17 प्रस्तावों को दी मंजूरी JD(U) के नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट संजय कुमार झा ने भी संकेत दिया है कि पार्टी UCC के मुद्दे पर अमित शाह से बातचीत करेगी। JD(U), जिसके 12 लोकसभा सांसद हैं, BJP के नेतृत्व वाले NDA का एक अहम हिस्सा है और बिहार में BJP के साथ मिलकर सरकार चला रही है।
Gulzar Singh Suicide Case: पंजाब पुलिस की SIT जांच पर सवाल, हाई कोर्ट मांगी स्टेटस रिपोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस से गुलज़ार सिंह की आत्महत्या की चल रही जांच के बारे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें जांच को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंपने की मांग की गई थी। दिरबा निर्वाचन क्षेत्र के तुर बंजारा गांव के रहने वाले गुलज़ार सिंह ने ड्रग्स की लत से अपने परिवार पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताने और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल पूछने के बाद आत्महत्या कर ली थी। हालांकि राज्य पुलिस ने मामले की जांच के लिए पहले एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी, लेकिन विपक्षी दलों ने शुरुआती FIR में मंत्री का नाम शामिल न किए जाने को लेकर भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की कड़ी आलोचना की है। हाई कोर्ट ने अब तक हुई प्रगति के बारे में जानकारी मांगते हुए सही जांच सुनिश्चित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इसे भी पढ़ें: संगरूर में Gulzar Singh सुसाइड केस पर Congress का प्रदर्शन, मंत्री Harpal Cheema के इस्तीफे की मांग गौरतलब है कि पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से 'नशे की समस्या को रोकने में नाकाम रहने' पर सवाल पूछने के बाद कथित तौर पर परेशान किए जाने के कारण दलित मज़दूर गुलज़ार सिंह ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने AAP सरकार को मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल के चौतरफ़ा हमलों का सामना कर रही है। ऐसे समय में जब आप विपक्ष में अपनी अहमियत बनाए रखने के लिए देश में अपनी एकमात्र सरकार को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है, इस दुखद घटना ने उसके विरोधियों को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि पंजाब में अनुसूचित जातियों की आबादी लगभग 32% है, जो किसी भी राज्य में सबसे ज़्यादा है और वे वोटिंग के लिहाज़ से एक बहुत अहम वर्ग हैं। इसे भी पढ़ें: जो भूपेश बघेल नहीं कर पाए वो सचिन पायलट ने कर दिखाया? एक मंच पर दिखे चन्नी-राजा वडिंग समेत दिग्गज इस मामले पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में इस हफ़्ते सुनवाई होने की संभावना है और गुलज़ार सिंह का परिवार भी याचिकाकर्ताओं में शामिल है। अपने बेटे की नशे की लत से परेशान इस दलित मज़दूर ने AAP सरकार के एक प्रभावशाली नेता चीमा से एक जनसभा में सवाल पूछा था कि उनके चुनाव क्षेत्र में आने वाले गाँव में 'चिट्टा' (सिंथेटिक ड्रग) आसानी से क्यों मिल रहा है।
पेलेट गन से लेकर महिलाओं पर हिंसा तक, जंतर मंतर विवाद में अब होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर पर जुलाई में हुए छात्रों के प्रदर्शन की जांच के लिए बनी पांच सदस्यीय एचपीईसी को जांच शुरू करने का आदेश दिया है. समिति पेलेट गन के इस्तेमाल, महिलाओं के साथ हिंसा, पुलिस को लगी चोटों और संपत्ति नुकसान की जांच करेगी.
कहां है वैभव? दुनिया प्लेइंग XI में तलाशती रही, ‘बेबी बॉस’ तो कहीं और...
वैभव सूर्यवंशी अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में प्लेइंग XI में जगह का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली में उनके साथ पापा संजीव सूर्यवंशी का खास साथ है. तीन तस्वीरों में मैदान के ‘बेबी बॉस’ का एक बिल्कुल अलग चेहरा दिखा- कहीं पापा के कंधे पर सिर रखे वैभव नजर आए तो कहीं दोनों एक ही कंबल में सुकून के पल बिताते दिखे.
क्या बाल काटने वाला दे रहा है AI को ट्रेनिंग? जल्द खत्म हो जाएगी जॉब!
सिर पर कैमरा लगाए एक बार्बर को ग्राहक की दाढ़ी बनाते हुए दिखाया गया, जिसके दौरान उसकी गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा रहा था. जैसे ही ये सोशल मीडिया पर आया, वैसे ही लोगों ने भी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया. कुछ लोगों ने जहां इसका समर्थन किया. वहीं, कुछ लोगों ने इसकी आलोचना भी की.
फ्री टाइम में रील्स, लूप या हॉबी? Doomscrolling कैसे छीन रही है टाइम
डूम्स्क्रॉलिंग यानी सोशल मीडिया पर लगातार कंटेंट देखते रहना, आज लोगों की हमारे डेली लाइफ की आदत बनती जा रही है. देर रात तक रील्स स्क्रॉल करने से नींद, फोकस और प्रोडक्टिविटी पर काफी अफेक्ट पड़ता है. लेकिन डूम्स्क्रॉलिंग के इस लूप में फंसे जेन जी इससे बाहर निकले कैसे?
Vande Mataram विवाद पर Priyank Kharge की BJP को खुली चुनौती, बिना देखे पूरा गाएं नेता
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर. अशोक को चुनौती दी है कि वे बिना किसी कागज़ या टेलीप्रॉम्प्टर की मदद के 'वंदे मातरम' के चारों पद गाकर दिखाएं। यह चुनौती राष्ट्रीय गीत को गाने को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रहे विवाद के बीच आई है। केंद्र सरकार के हालिया कानून में 'वंदे मातरम' को पूरा गाने का नियम होने के बावजूद, कांग्रेस का कहना है कि वह इसके केवल शुरुआती दो पद ही गाएगी। कर्नाटक के कलबुर्गी में पार्टी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए खड़गे ने कहा कि अगर विजयेंद्र और अशोक बिना देखे चारों पद गा पाए, तो वह इस्तीफ़ा दे देंगे। इसे भी पढ़ें: UPI Transactions पर चार्ज: Jairam Ramesh बोले- US Card कंपनियों के दबाव में Modi Govt क्या बीजेपी नेता और मोदी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस या नोबेल पुरस्कार पाने वाले रवींद्रनाथ टैगोर से भी बड़े हैं? गृह मंत्री ने कहा मैं विजयेन्द्र और अशोक को चुनौती देता हूँ। वे किसी सार्वजनिक सभा में बिना किसी कागज़ या टेलीप्रॉम्प्टर के पूरा 'वंदे मातरम' गाकर दिखाएँ। अगर वे ऐसा कर पाएँ, तो मैं इस्तीफ़ा दे दूँगा। क्या वे ऐसा करेंगे? खरगे ने कहा कि बीजेपी राज्य सरकार के उस फ़ैसले का विरोध करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सिर्फ़ शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के पास विरोध करने के लिए कोई और मुद्दा नहीं है, इसलिए वह राष्ट्रीय गीत का मामला उठा रही है। कांग्रेस का तर्क है कि 'वंदे मातरम' के बाद के छंद, जिनमें मातृभूमि की तुलना दुर्गा और लक्ष्मी जैसी हिंदू देवियों से की गई है, अल्पसंख्यक समुदायों की मान्यताओं के विपरीत हो सकते हैं। अक्टूबर 1937 में, कांग्रेस कार्य समिति ने सिफारिश की थी कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में केवल शुरुआती दो छंद ही गाए जाएं। इसे भी पढ़ें: P Chidambaram Birthday: Harvard से लेकर 7 बार संसद में Budget पेश करने तक, ऐसा रहा P Chidambaram का सफर हाल ही में, कांग्रेस ने 1937 के उस प्रस्ताव को फिर से दोहराया। इसके बाद, कर्नाटक सरकार ने भी आदेश दिया कि राज्य सरकार के ज़्यादातर कार्यक्रमों में केवल शुरुआती दो छंद ही गाए जाएं; हालांकि, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में यह नियम लागू नहीं होगा। खड़गे ने कहा कि वह विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध करेंगे कि वे बीजेपी विधायकों को विधानसभा में अलग से 'वंदे मातरम' गाने की अनुमति दें, और उन्होंने उन्हें चारों छंद याद करके गाने की चुनौती भी दी।
हूतियों से घिरा सऊदी, मदद मांगने मिस्र पहुंचे थे MBS... क्या मिला साथ?
यमन के हूतियों के लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान मिस्र पहुंचे. काहिरा में उन्होंने राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब में समुद्री आवाजाही की सुरक्षा को लेकर साथ खड़े रहने की बात कही.
PF पेंशन पर अहम बैठक, ₹15000 से ₹25000 हो सकती है सैलरी लिमिट
पीएफ पेंशन को लेकर आज एक बड़ी बैठक होने जा रही है, जिसके तहत सरकार 15000 रुपये ईपीस की अनिवार्य सैलरी लिमिट को बढ़ाकर 25000 रुपये कर सकती है.
‘पंजाब और पंजाबियों की भलाई प्राथमिकता’, भगवंत मान ने गिनाईं उपलब्धियां, विपक्ष पर भी बरसे
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब के जिंदवड़ी गांव में आयोजित लोक मिलनी कार्यक्रम में अपनी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियां गिनाईं.
UPI Transactions पर चार्ज: Jairam Ramesh बोले- US Card कंपनियों के दबाव में Modi Govt
बुधवार को कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह ज़ीरो MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) को खत्म करने और UPI ट्रांज़ैक्शन पर चार्ज लगाने की अमेरिका की मांग के आगे झुक गई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NOTA का नया मतलब नरेंद्र का ट्रंप को खुश करने का लगातार प्रयास बताया है। कांग्रेस के कम्युनिकेशन इंचार्ज और महासचिव जयराम रमेश ने यह भी पूछा कि क्या मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर सरकार का यह कदम अमेरिकी कार्ड कंपनियों को UPI से मुकाबला करने में मदद करने के लिए उठाया गया था। इसे भी पढ़ें: व्यापारियों के 2000 रुपये से अधिक UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू जयराम रमेश ने कहा कि कल अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स एक बिल पर वोट करेगा, जिसके तहत भारत पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सीनेट पहले ही इस कठोर कानून को मंज़ूरी दे चुकी है। रमेश ने 'X' पर कहा कि ट्रंप सरकार भारतीय प्रवासियों के खिलाफ भी सख्ती बरत रही है और उनके लिए कड़े कानून बना रही है। उन्होंने कहा कि H-1B वीज़ा की लागत बढ़ा दी गई है और नौकरी छूटने पर ऐसे वीज़ा धारकों को तुरंत देश से निकाला जा सकता है; उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे वीज़ा धारक ज़्यादातर IT प्रोफ़ेशनल होते हैं। रमेश ने कहा कि यहाँ मोदी सरकार ने US की उस माँग को मान लिया है जिसमें ज़ीरो MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) को खत्म करने और UPI के लिए शुल्क लगाने की बात कही गई थी। US ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव ने इस साल की शुरुआत में UPI के मुफ़्त होने और इसकी वजह से Visa और Mastercard के बाहर हो जाने की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि MDR 0.4% ही क्यों? क्या इसलिए कि डेबिट कार्ड का MDR भी 0.4% है? क्या ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि US की कार्ड कंपनियाँ UPI से मुक़ाबला कर सकें? इसे भी पढ़ें: Haryana में ब्लॉक सम्मेलनों से जमीनी स्तर पर मजबूत होगी Congress, संजय दत्त ने बताई रणनीति कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या इससे UPI सस्टेनेबल (लंबे समय तक चलने वाला) बनेगा, जैसा कि सरकार का दावा है। रमेश ने कहा कि पूरे UPI इकोसिस्टम को चलाने की अनुमानित लागत सालाना लगभग 20,000 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि यह उस रकम का 10% से भी कम है जो RBI पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार को ट्रांसफर करता रहा है, ताकि मोदी सरकार के लिए बेहतर सार्वजनिक वित्तीय स्थिति दिखाई जा सके। रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने NOTA का नया मतलब निकाला है - नरेंद्र का लगातार ट्रंप को खुश करने का प्रयास (Narendra's Ongoing Trump Appeasement)।
'लड़की छुएगी तो फाड़ दूंगा',एक्ट्रेस को कहा नचनिया, गेमर ने लांघी मर्यादा
'बिग बॉस' के घर में टास्क के दौरान बवाल मच गया. अरिश्फा खान और स्काउट ओपी (तन्मय सिंह) के बीच हुई तीखी बहस में सारी सीमाएं टूट गईं. गुस्से में स्काउट के बिगड़े बोल ने मेकर्स और फैंस दोनों को हैरान कर दिया है. अरिश्फा को धमकी देने पर वो ट्रोल हो रहे हैं.
'अगर माई के लाल हो...', ओवैसी का BJP MLA रामेश्वर शर्मा को सीधा चैलेंज
मध्य प्रदेश के भोपाल में UCC के विरोध में हुई सभा के दौरान AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा को सीधी चुनौती दे दी है. रामेश्वर शर्मा ने 4 सितंबर को जन्माष्टमी के कार्यक्रम में विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि भोपाल के करोंद इलाके से काजी कैंप की तरफ मिसाइल दागेंगे. कल बारी ओवैसी के पलटवार की थी. उन्होंने रामेश्वर शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि उनमें दम है तो बताएं कि मिसाइल कब लॉन्च करेंगे.
PM Modi से मिले 81 वर्षीय सहपाठी Asghar Vora, BJP MLA ने वापस की भायंदर की विवादित ज़मीन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 81 साल के स्कूल दोस्त असगर अली वोरा को महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में एक BJP विधायक से अपनी ज़मीन वापस मिल गई। यह ज़मीन दशकों पुराने प्रॉपर्टी विवाद का हिस्सा थी और वोरा को यह ज़मीन प्रधानमंत्री से मिलने और इस मामले में उनके दखल की गुज़ारिश करने के कुछ ही दिनों बाद वापस मिली। मंगलवार को BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने कहा कि वह विवादित प्लॉट का कब्ज़ा छोड़ रहे हैं और उसके लिए मिली कंस्ट्रक्शन की मंज़ूरी भी वापस कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद उन्होंने वोरा के ख़िलाफ़ दर्ज पुलिस शिकायत भी वापस ले ली। वोरा, जिन्होंने गुजरात के वडनगर के BN स्कूल में PM मोदी के साथ पढ़ाई की थी, ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री से मुलाकात की और आरोप लगाया कि मेहता से जुड़े बिल्डरों ने भायंदर ईस्ट में उनकी ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है। इसे भी पढ़ें: PM Modi के 25 साल पूरे होने पर Vadnagar से Varanasi तक निकलेगी बाइक रैली, Amit Shah करेंगे शुरुआत PM मोदी के साथ अपनी मुलाकात के दौरान, वोरा ने दावा किया कि उन्होंने 1989 में एक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के ज़रिए नवघर, भायंदर ईस्ट में लगभग 2,810 वर्ग मीटर ज़मीन खरीदी थी और उसे कभी बेचा या ट्रांसफर नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 में नकली दस्तावेज़ तैयार किए गए और बाद में उनकी जानकारी के बिना प्रॉपर्टी को दो हिस्सों में बांट दिया गया। वोरा के अनुसार, एक हिस्से पर स्वयं बिल्डर्स का कब्ज़ा दिखाया गया था, जबकि दूसरा हिस्सा मेहता से जुड़ी कंपनी 'सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स' से जुड़ा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मीरा-भायंदर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट ने ज़मीन पर उनके मालिकाना हक के दावे के बावजूद निर्माण की मंज़ूरी दे दी। वोरा ने कथित धोखाधड़ी और बिल्डरों व सरकारी अधिकारियों की भूमिका की CBI जांच की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका, राजस्व और पुलिस विभागों के अधिकारियों ने उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि उन्होंने 2015 में कथित धोखाधड़ी को लेकर FIR दर्ज कराई थी, लेकिन दावा किया कि इस मामले में CID की रिपोर्ट इसी साल सौंपी गई। उन्होंने इस देरी पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इसमें राजनीतिक दबाव की भूमिका हो सकती है। इसे भी पढ़ें: मेलोडी, ठेकुआ, मखाना-सत्तू— भारत की 'फूड डिप्लोमेसी' का नया दौर अधिकारियों की कार्रवाई: BJP विधायक ने विवादित ज़मीन छोड़ी PM मोदी के साथ वोरा की मुलाक़ात के बाद, महाराष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर कार्रवाई शुरू की। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में एक बैठक हुई, जिसमें वोरा, मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम की कमिश्नर राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे शामिल हुए। बैठक के दौरान, मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपा जिसमें कहा गया कि वह विवादित ज़मीन का कब्ज़ा छोड़ रहे हैं और निर्माण की अनुमति वापस कर रहे हैं। पत्र में उन्होंने बताया कि यह ज़मीन 2019 में मर्विन फर्नांडीस से खरीदी गई थी।
LJP(R) घर का ताला तोड़कर फिल्मी अंदाज में ले गई बिहार पुलिस, हाजीपुर मर्डर केस में जारी हुआ था वारंट
चिराग पासवान की पार्टी एलजेपीआर के नेता अंट्टू ईस्सर को STF और नगर थाने की पुलिस ने बहादुरपुर आवास से गिरफ्तार किया. पुलिस ने 3 घंटे छापेमारी के बाद दरवाजा तोडकर गिरफ्तार किया.
राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद बीजेपी और कांग्रेस में जोर आजमाइश चल रही है. कई ऐसे निगम हैं जहां दोनों दल बहुमत से दूर हैं, वहां निर्दलीय पार्षदों पर नजर.
मादा की तलाश में सीमाएं लांघ जाते हैं ये कुत्ते... चले गए 4000 KM
अफ्रीकी जंगली कुत्ते मादा खोजने के लिए 4000 KM से ज्यादा सफर करते हैं. इससे पता चलता है कि खतरे में पड़ी यह प्रजाति खुद का वंश बढ़ाने के लिए कितना मेहनत कर रही है.
132 साल बाद लाइब्रेरी को वापस की मैगजीन, लगने ही वाली थी 11.5 लाख की पेनाल्टी
अमेरिका के न्यू हैम्पशायर की एक लाइब्रेरी का मामला. यहां 1894 में ली गई एक मैगजीन आखिरकार 132 साल बाद वापस लौटा दी गई. यह सितंबर 1894 की द सेंचुरी इलस्ट्रेटेड की मंथली मैगजीन थी.
बांध किनारे मिली युवती की लाश, एक हफ्ते पहले भी मिला था शव
बिहार के बेगूसराय में एक हफ्ते के भीतर बांध किनारे दो अज्ञात युवतियों के शव मिले हैं. मामला पिढ़ौली पंचायत के जमींदारी बांध का है, जहां करीब 22 वर्षीय युवती का शव पानी के किनारे मिला. इससे कुछ दिन पहले इसी इलाके में करीब 26 वर्षीय युवती का शव बरामद हुआ था. दोनों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है.
421 दिन से इस वेब सीरीज ने ओटीटी की दुनिया में गदर काटा हुआ है. 2018 से अब तक इसके 3 सीजन और 29 एपिसोड आ चुके हैं. यही नहीं, हाल ही में रिलीज हुई इसकी फिल्म तो 300 करोड़ के कलेक्शन की तरफ कदमताल कर रही है.
Mother lived as man for 36 years: हाथ में बीड़ी, बदन पर धोती-कुर्ता और सीने में ममता का समंदर. अपनी कोख से जन्मी बच्ची की आबरू बचाने के लिए इस बेबस मां को आखिर क्यों बनना पड़ा मर्द, झकझोर देगी यह दास्तान.
सुबह नाश्ते में ट्राई करें पालक पनीर उत्तपम, स्वाद है लाजवाब
Palak Paneer Uttapam Recipe: नाश्ते में रोज एक जैसी डिश खाकर बोर हो गए हैं तो इस बार पालक पनीर उत्तपम ट्राई कर सकते हैं. सूजी, दही, पालक और पनीर से तैयार यह उत्तपम खाने में टेस्टी होने के साथ-साथ बनाने में भी काफी आसान है.
यूपीआई चार्ज: PhonePe, GPay या बैंक, कौन फायदे में? अशनीर ग्रोवर ने क्यों लिया सुभाष चंद्र का नाम
UPI से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगेगा। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बिजनसेमैन से लिया जाएगा। लेकिन इससे किसकी तिजोरी भरेगी। अशनीर ग्रोवर अब UPI पर एमडीआर चार्ज विवाद में कूद पड़े हैं।
अमेरिका एक बार फिर भारत और चीन समेत कई देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा। इस फैसले से भारत और चीन जैसे बड़े देशों की मुश्किलें काफी ...
गर्म खाने से जीभ जल जाए तो तुरंत क्या करें? एक्सपर्ट ने बताया कैसे जल्दी होगी ठीक
डेंटल केयर एक्सपर्ट डॉक्टर सायंतिका ने बताया है कि जीभ जलने के बाद तुरंत क्या करना चाहिए या क्या करने से आपको जल्दी राहत मिल सकती है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
कुकी महिलाओं की हत्या से मणिपुर में तनाव: उग्रवादियों ने रातभर की गोलीबारी- दो घर फूंके, सीआरपीएफ हुई तैनात Tension Manipur over killing Kuki women Militants engage in overnight firing, torch two houses; CRPF deployed.
11 मंजिल, 3 बेसमेंट और 500+ पार्किंग… ऐसा होगा CRPF का नया HQ
सालों से जगह की कमी से जूझ रहे CRPF मुख्यालय को अब नया ठिकाना मिलने वाला है.लोधी रोड के CGO कॉम्प्लेक्स में नया भवन तेजी से आकार ले रहा है. 11 मंजिल की इस इमारत में कई आधुनिक सुविधाएं होंगी. तैयार होने के बाद दिल्ली में बिखरी CRPF की कई शाखाएं एक जगह आ सकेंगी.
राजस्थान कांग्रेस पार्षद पर हमला-खुद वीडियो बनाकर सुनाई कहानी
रियांबड़ी नगर पालिका में बोर्ड गठन को लेकर चल रही राजनीतिक रस्साकशी के बीच कांग्रेस पार्षदों की गाड़ी पर कथित हमले का मामला सामने आने से सियासत गरमा गई है. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुष्कर से लौटते समय उनकी गाड़ी को फॉर्च्यूनर सवार लोगों ने टक्कर मारने और रोकने की कोशिश की.
17 सितंबर को सूर्य बदलेंगे चाल, 3 राशियों पर बरसेगा कहर!
Surya Gochar 2026: दिक ज्योतिष में मान-सम्मान और आत्मा के कारक सूर्य देव 17 सितंबर 2026 को अपनी स्वराशि सिंह से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. कन्या संक्रांति के इस गोचर से कई राशियों को सावधान रहना होगा.
UPI पेमेंट के लिए दुकानदार ऐंठ रहा है एक्स्ट्रा चार्ज, तो 2 मिनट में ऐसे सिखाएं सबक !
देशभर में यूपीआई पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है. मौजूदा वक्त में सब्जी के ठेले से लेकर बड़े सुपरमार्केट तक में UPI से पेमेंट करना आम हो चुका है. ऐसे में अगर कोई दुकानदार आपसे यूपीआई पेमेंट लेने से मना करता है या एक्स्ट्रा चार्ज की मांग करता हो, तो तुरंत इसकी शिकायत करें. जानिए शिकायत का तरीका.

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