उज्बेकिस्तान में राघव चड्ढा ने भारत के डिजिटल परिवर्तन और यूपीआई की जमकर तारीफ की
भाजपा सांसद राघव चड्ढा ने उज्बेकिस्तान में आयोजित 12वें आइपीयू वैश्विक युवा सांसद सम्मेलन में भारत के डिजिटल परिवर्तन और यूपीआइ की सराहना की।
42 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी मामले में CBI का एक्शन, 5 ठगों को किया गिरफ्तार
सीबीआई ने 42 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी मामले में पांच और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या आठ हो गई है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का ऑफिस शिफ्ट करने को 6.17 करोड़ रुपये आवंटित, RTI में खुलासा
तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय को सचिवालय से नामक्कल कविंगर मलिगाई की 10वीं मंजिल पर स्थानांतरित करने के लिए 6.17 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसका खुलासा आरटीआई से हुआ है।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी 2029 के लोकसभा चुनाव में इंडी गठबंधन का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने तमिलनाडु के सीएम विजय को पीएम उम्मीदवार बनाए जाने की खबरों को खारिज किया।
ईरान पर ट्रंप का अजीबोगरीब हमला, तेहरान के नक्शे पर लगाई अपनी तस्वीर
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सोशल मीडिया पर सात पोस्ट कीं. इन पोस्ट में उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था, तेल और करेंसी को निशाना बनाया. एक पोस्ट में तेहरान के नक्शे पर ट्रंप की तस्वीर भी लगाई गई. एक पोस्ट में दावा किया गया कि ईरान का तेल निर्यात तेजी से गिर रहा है.
50 साल पुरानी इमारत, हादसे के वक्त बेसमेंट में काम... दिल्ली में 6 मौतों का गुनहगार कौन?
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में जो इमारत गिरी, हादसे के वक्त उसके बेसमेंट में पानी भरा होने के बावजूद काम चल रहा था. उस समय छात्र कमरों में मौजूद थे तो अब सवाल उठता है इन मौतों का जिम्मेदार कौन है?
नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए भारतीय मूल के उद्यमी, शुरू किया स्टेबलक्वाइन दान अभियान
भारतीय मूल के उद्यमी संदीप नैलवाल ने नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन पीड़ितों की मदद के लिए स्टेबलक्वाइन आधारित दान अभियान शुरू किया है।
ट्रंप की सोच लेकर भारत आया हूं, अब नतीजों पर फोकस : सर्जियो गोर
बेंगलुरु में अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया. इस दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ संबंधों को किस दिशा में ले जाना चाहता है. राजदूत गोर और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से भी मुलाकात की.
ऐमेजॉन का कार्गो प्लेन मियामी एयरपोर्ट पर क्रैश, कई वाहनों को मारी टक्कर
इस हादसे के बाद मियामी एयरपोर्ट के सभी रनवे और टैक्सी-वे बंद कर दिए गए. उड़ानों का संचालन भी प्रभावित हुआ. मामले की जांच की जा रही है.
IIT मद्रास ने पॉलिमर तकनीक का कराया पेटेंट, बिना केमिकल नष्ट होंगे जीवाणु
आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक रसायन-मुक्त जीवाणुरोधी सतह का पेटेंट कराया है जो नैनो-पॉलिमर का उपयोग करके जीवाणुओं को नष्ट करती है।
'न निजीकरण होगा, न महत्व घटेगा', निजी भागीदारी विवाद पर ISRO का स्पष्टीकरण
ISRO ने स्पष्ट किया है कि उसका न तो निजीकरण होगा और न ही महत्व कम होगा, बल्कि निजी भागीदारी से वह अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
'न्यू मैक्सिको' अब 'न्यू अमेरिका'... ट्रंप ने नाम बदलकर फिर चौंकाया
यह राज्य अमेरिका और मैक्सिको की सीमा से लगा है. इस दक्षिण-पश्चिमी राज्य का नाम बदलने का संकेत ट्रंप के पुराने आदेश की याद दिलाता है.
'भारत अपने लिए तेल खरीदता है, मॉस्को की मदद...' US को रूस की दो टूक
अलीपोव ने कहा कि भारत पहले भी दिखा चुका है कि बाहरी दबाव का सामना होने पर वह अपने हितों की रक्षा करने के लिए तैयार है. भारत को जितना तेल चाहिए, रूस उतना देने के लिए तैयार है.
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TMC नेता काजल घोष गिरफ्तार, 72 साल की महिला की जमीन पर कब्जे का आरोप
सिलीगुड़ी से TMC के पूर्व बूथ अध्यक्ष काजल घोष को जमीन फर्जीवाड़े के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.काजल घोष को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है. उनकी पत्नी का नाम भी FIR में शामिल है. वह अभी फरार है.
एक फ्लाइट कैंसिल, दो हो गईं डायवर्ट... अमृतसर के आसमान में दिखी ड्रोन जैसी चीज
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि आसमान में दिखाई दी संदिग्ध वस्तु ड्रोन थी या कुछ और. हालांकि, एहतियात के तौर पर इन तीनों फ्लाइट्स के संचालन में बदलाव किया गया है.
भागलपुर-मुंगेर में बाढ़ से भारी तबाही, कई गांव जलमग्न, घरों में 5-6 फीट पानी
बाढ़ की वजह से भागलपुर और मुंगेर के कई घरों में करीब 5 से 6 फीट तक पानी भर गया है. बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं.
पंजाब टू राजस्थान: सचिन पायलट का 'मिशन पंजाब' तय करेगा जयपुर की भावी सियासत!
सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी मिली है. पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. अगर पंजाब में पायलट का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो इसका असर राजस्थान की सियासत पर भी देखने को मिलेगा.
‘हिंदुत्व का आधार नफरत नहीं, शुद्ध सात्त्विक प्रेम है’, लंदन में बोले मोहन भागवत
ब्रिटेन के लंदन में एकता का जश्न कार्यक्रम आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शामिल हुए. उन्होंने हिंदुत्व, सेवा और समाज के भविष्य पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने संघ की सोच का आधार शुद्ध सात्त्विक प्रेम और अपनापन बताया. भागवत ने कहा कि हिंदू सोच में परिवार, समाज, मानवता और प्रकृति एक-दूसरे से जुड़े हैं.
नेपाल के सूचना और संचार मंत्री विक्रम तिमिलसिना ने कहा कि इस समय नेपाल जलवायु न्याय की मांग कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बारे में गंभीर होना चाहिए.
मौसम का सितम: मानसून की विदाई के समय भी जारी बारिश का आपातकाल
यूं तो मानसून की विदाई का समय आ गया है, लेकिन बाढ़-बारिश से कई राज्यों के हालात खतरे के निशान से ऊपर के बने हुए हैं. बिहार में उफनती नदियां लाखों लोगों के सामने जीवन का संकट खड़ा कर रही हैं तो यूपी में दो दर्जन से ज्यादा जिले बाढ़ की चपेट में हैं. मध्य प्रदेश में मंदाकिनी और नर्मदा का जलस्तर अलग चुनौती पेश कर रहा है. तो उत्तराखंड और हिमाचल के कई गांव अब भी मूसलाधार और लैंडस्लाइड से त्रस्त हैं. मौसम का मिजाज संकेत दे रहा है कि आने वाले दिन अभी मुश्किलों भरे बने रहेंगे.
अरुणाचल में भारत-चीन के बीच पहली कोर कमांडर वार्ता, सीमा से जुड़े विवादित मुद्दों पर हुई बात
भारत और चीन की सेनाओं के बीच अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास पहली कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई।
'भारत अपनी जरूरत के लिए तेल खरीदता है, हमारी मदद के लिए नहीं', प्रतिबंधों के बीच रूसी राजदूत का बयान
रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी तेल खरीदता है, न कि यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को फंड देने के लिए।
CM हाउस से फोन आते ही 10 थानों की पुलिस मुस्तैद! मोबाइल लूट पर हड़कंप
MP News: इंदौर में उज्जैन के अनमोल वर्मा से मोबाइल लूट के बाद FIR में देरी पर सवाल उठे हैं. CM हाउस से फोन की चर्चा के बीच पुलिस ने 10 थानों की टीमें लगाकर बदमाशों की तलाश तेज की है.
Jharkhand में मंत्री Sudivya Kumar के निधन पर SIR सुनवाई टली, 2 दिन का राजकीय शोक घोषित
रांची, छह सितंबर झारखंड में राज्य के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन के बाद सोमवार को निर्धारित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की सुनवाई स्थगित कर दी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत सरकार ने छह और सात सितंबर को दो दिन का राजकीय शोक घोषित किया है और इस दौरान अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। सोमवार को झारखंड सरकार के सभी कार्यालय भी बंद रहेंगे। झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार ने पीटीआई-को बताया , “राजकीय शोक और सरकारी अवकाश के मद्देनजर सोमवार को राज्यभर में होने वाली एसआईआर की सुनवाई स्थगित कर दी गई है।”निर्वाचन आयोग ने राज्य में एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 15 सितंबर कर दी है, जबकि संशोधित मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख बढ़ाकर 19 अक्टूबर कर दी गई है। यह पूछे जाने पर कि क्या समयसीमा और बढ़ाई जाएगी, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि इस पर बाद में फैसला लिया जाएगा। कुमार (56) को देर रात करीब ढाई बजे उनके गृह नगर गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां चिकित्सकों ने करीब चार बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जर्मनी में जीत की ओर बढ़ी रही दक्षिणपंथी पार्टी AFD, क्या बना पाएगी सरकार?
जर्मनी के सैक्सोनी-एनहाल्ट राज्य में हालिया चुनावों में धुर दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने लगभग 44% वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की है.
सत्य निकेतन हादसे में ABVP ने MCD दफ्तर में किया प्रदर्शन
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई. हादसे के बाद एबीवीपी सदस्यों ने एमसीडी के खिलाफ प्रदर्शन किया और सिविक सेंटर में तोड़फोड़ की. पुलिस ने करीब 15 लोगों को हिरासत में लिया. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मजिस्ट्रेट जांच और इमारत मालिक के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया है. एनडीआरएफ की टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं. बचाव अभियान जारी है.
जीतन राम मांझी की फिर बिगड़ी तबीयत, दिल्ली AIIMS के ICU में कराया भर्ती
Jitan Ram Manjhi News : हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को रविवार शाम दिल्ली के AIIMS में भर्ती करवाया गया है। सांस लेने में दिक्कत की शिकायत के बाद उन्हें इमरजेंसी में भर्ती करवाया गया। रात में उन्हें ...
बिजनौर में बारिश का कहर, मकान का छज्जा गिरा, नीचे दबी i20 कार
बिजनौर के स्योहारा में लगातार बारिश के बीच मकान का कमजोर छज्जा अचानक गिर गया. नीचे खड़ी i20 कार मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई. गनीमत रही कि कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ.
Jammu Kashmir में सामान्य स्थिति के दावे पर Tarigami ने उठाए सवाल
जम्मू, छह सितंबर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि उनके राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने से न तो देश के हितों की पूर्ति होगी और न ही इससे स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने केंद्रशासित प्रदेश में सामान्य स्थिति होने के केंद्र के दावों पर भी सवाल उठाया और कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि अगर क्षेत्र में शांति लौट आई है, तो कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों को आतंकवादियों से एक बार फिर धमकियां क्यों मिल रही हैं। तारिगामी ने यहां 12 सितंबर को पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी की दूसरी पुण्यतिथि से पहले उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने जम्मू और श्रीनगर में हाल के प्रदर्शनों को लेकर भाजपा की आलोचना की। कुलगाम के विधायक ने कहा, ‘‘भाजपा भी प्रदर्शन कर रही है, जैसे नेशनल कॉन्फ्रेंस (राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए) कर रही है, लेकिन मुझे खुद समझ नहीं आया कि भाजपा आखिर किस बात को लेकर प्रदर्शन कर रही है। जहां तक भाजपा का सवाल है, केंद्र सरकार उनके साथ है और यहां की सरकार भी प्रभावी रूप से उनके हाथ में है—यहां का प्रशासन और अधिकारी भी।’’उन्होंने पूछा कि शासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के लिए भाजपा किसे जिम्मेदार ठहराएगी। उन्होंने कहा, ‘‘तो वे शिकायत किससे करने जा रहे हैं? वे किसे जिम्मेदार ठहराएंगे? वे आखिर कहना क्या चाहते हैं?’’तारिगामी ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के तरीके की भी आलोचना की और क्षेत्र के उन अधिकारों को बहाल करने की मांग की, जिनका वह उल्लेख कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को बहुत लंबे समय तक गुमराह नहीं किया जा सकता। समय बदल रहा है, कश्मीर में भी और यहां जम्मू में भी।’’विधायिका का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने उसे शक्तिहीन कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि विधायिका को उसका उचित स्थान फिर से प्राप्त होगा। विधायिका को शक्तिहीन कर दिया गया है, उसे शक्तिहीन किसने किया? भारत सरकार ने।’’उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि यह क्षेत्र के भविष्य के लिए जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने कहा कि वन अधिकार और पेसा अधिनियमों के सही से लागू न होने के कारण आदिवासियों को भूमि व प्राकृतिक संसाधनों पर पर्याप्त अधिकार नहीं मिल पाए हैं।
स्किलिंग का नया मंत्र: डिजिटल पासपोर्ट, स्किल एक्सचेंज और स्किल स्कोर पर काम करेगी सरकार
सरकार डिजिटल स्किलिंग पासपोर्ट, स्किलिंग एक्सचेंज और स्किलिंग स्कोर जैसे नए मंत्रों के साथ कौशल विकास पर काम कर रही है।
दिल्ली हादसा: ABVP कार्यकर्ताओं ने MCD दफ्तर के बाहर की नारेबाजी
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे में दो छात्रों की मौत की खबर है. वहीं अभी भी कई छात्रों के मबले में दबे होने की आशंका है. सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास बसा प्रमुख छात्र इलाका है. यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं. इलाके में कई छात्र आवास हैं. हादसे को लेकर ABVP कार्यकर्ताओं ने MCD दफ़्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. देखें वीडियो.
नो-पार्किंग के नाम पर दोहरे मापदंड: अस्पतालों पर नरमी और मॉल्स पर क्रेन का कहर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नगर निगम और यातायात पुलिस के संयुक्त प्रवर्तन अभियान के तहत संचालित होने वाली क्रेन टोइंग (गाड़ी उठाने की व्यवस्था) गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। शहर के नागरिकों, स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों और क्रेन ठेकेदारों के बीच कथित सांठगांठ का खुला आरोप लगाया है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शहर में अवैध पार्किंग और अतिक्रमण हटाने के नाम पर खुलेआम दोहरा चरित्र अपनाया जा रहा है। एक तरफ जहां शहीद पथ स्थित मेदांता अस्पताल और फैजाबाद रोड स्थित चंदन अस्पताल जैसे बड़े निजी चिकित्सा संस्थानों के बाहर सर्विस लेन और मुख्य सड़कों पर दिनभर बेतरतीब तरीके से दर्जनों गाड़ियां खड़ी रहने के बावजूद नगर निगम की क्रेनें वहां फटकती तक नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ लूलू मॉल, गोमती नगर स्थित फन रिपब्लिक मॉल, आईनॉक्स (INOX) और हजरतगंज के आसपास चंद मिनटों के लिए रुकी आम जनता की गाड़ियों को तुरंत क्रेन से खींच लिया जाता है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि जो संस्थान या इलाके कथित तौर पर 'महीना' या अनुचित लाभ नहीं पहुंचाते, केवल वहीं कड़ा अभियान चलाया जाता है, जबकि मिलीभगत वाले क्षेत्रों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।अस्पताल बनाम मॉल: आखिर क्यों बदल जाते हैं नगर निगम के टोइंग नियम?राजधानी की सड़कों पर क्रेन संचालन की पड़ताल करने पर कार्रवाई में साफ विषमता नजर आती है:मेदांता और चंदन अस्पताल के बाहर का हाल: शहीद पथ और फैजाबाद रोड पर स्थित इन दोनों बड़े सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों में रोजाना हजारों मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं। अस्पतालों के भीतर तय पार्किंग क्षमता कम पड़ने पर गाड़ियां सर्विस लेन, फुटपाथ और मुख्य कैरिजवे तक पार्क कर दी जाती हैं, जिससे पीक आवर्स में भीषण जाम की स्थिति बन जाती है। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर कथित प्रशासनिक समझ-बूझ के चलते यहां टोइंग गाड़ियां कभी कार्रवाई नहीं करतीं।लूलू मॉल, फन मॉल और आईनॉक्स के बाहर सख्त पहरा: इसके विपरीत, शहीद पथ पर लूलू मॉल या गोमती नगर में फन मॉल और मल्टीप्लेक्सों के आसपास बाहर से आने वाले मुसाफिर यदि किसी को ड्रॉप करने या थोड़ी देर के लिए सड़क किनारे रुकते हैं, तो क्रेन कर्मी बिना कोई चेतावनी दिए या अनाउंसमेंट किए गाड़ी को जबरन टो कर ले जाते हैं।वसूली और जुर्माने का खेल: गाड़ी उठाने के बाद चालकों से ₹1,000 से ₹2,500 तक का भारी जुर्माना और टोइंग चार्ज वसूला जाता है। आरोप है कि यह पूरी कवायद ट्रैफिक सुधारने के लिए नहीं, बल्कि निजी क्रेन ठेकेदारों के डेली टार्गेट और अवैध कमीशन के तंत्र को भरने के लिए की जा रही है।नगर आयुक्त और शीर्ष नेतृत्व पर सवाल: विजिलेंस जांच की उठी मांगइस पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को लेकर नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आक्रोश अब सीधे विभाग के मुखिया और नगर आयुक्त की कार्यशैली पर केंद्रित हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक पार्किंग और टोइंग के नाम पर चल रही यह संगठित मनमानी बंद नहीं होगी।नागरिक संगठनों और कानूनी जानकारों ने उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (Vigilance Department) और शासन के उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच की मांग उठाई है:क्रेन टेंडर और राजस्व का ऑडिट: नगर निगम द्वारा निजी क्रेन ऑपरेटरों को दिए गए अनुबंधों, गाड़ियों के दैनिक चालान के अनुपात और सरकारी खजाने में जमा होने वाली राशि की गहन वित्तीय पड़ताल की जाए।क्षेत्रीय पक्षपात की वीडियो मॉनिटरिंग: सीसीटीवी और जीपीएस डेटा के आधार पर जांच की जाए कि पिछले 6 महीनों में क्रेनें किन विशिष्ट सड़कों पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहीं और बड़े निजी संस्थानों के सामने से कितनी गाड़ियां उठाई गईं।कमीशनखोरी के सिंडिकेट की जांच: इस बात की पड़ताल कराई जाए कि क्या क्रेन माफिया और नगर निगम के प्रवर्तन दस्ते के बीच कथित मासिक उगाही का कोई गुप्त चैनल चल रहा है।निजी क्रेन ठेकेदारों की कार्यप्रणाली: नियमों की खुली अनदेखीयातायात और नगर निगम के नियमों के तहत किसी भी वाहन को उठाने से पहले कुछ अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता है, जिसे जमीन पर पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है:लाउडस्पीकर पर चेतावनी अनिवार्य: नियम के अनुसार, नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ी को क्रेन पर चढ़ाने से पहले लाउडहाइलर/माइक से गाड़ी का नंबर बोलकर 2 से 3 मिनट का समय मालिक को दिया जाना चाहिए। लेकिन क्रेन कर्मी छिपकर आते हैं और मालिक के आते-आते गाड़ी खींचकर ले जाते हैं।गाड़ी के भीतर व्यक्ति की मौजूदगी: यदि गाड़ी के भीतर कोई बुजुर्ग, महिला, बच्चा या बीमार व्यक्ति बैठा हो, तो उसे किसी भी सूरत में टो नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद कई बार जबरन गाड़ी खींचने के प्रयास में गंभीर विवाद और दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।गाड़ी को होने वाला नुकसान: अनाड़ी क्रेन ऑपरेटरों द्वारा क्लैंप लगाने या हाइड्रो-लिफ्ट करते समय लग्जरी और ऑटोमैटिक कारों के बंपर, सस्पेंशन और गियरबॉक्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिसका कोई हर्जाना निगम या ठेकेदार नहीं देता।यदि गलत तरीके से उठाई जाए आपकी गाड़ी, तो क्या हैं कानूनी अधिकार?यदि किसी वाहन चालक को लगता है कि उसकी गाड़ी को अवैध तरीके से उठाया गया है या उससे नियमों के विपरीत वसूली की जा रही है, तो वह इन कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकता है:ऑन-द-स्पॉट चालान का नियम: मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के अनुसार, यदि क्रेन द्वारा गाड़ी को बांधने या उठाने की प्रक्रिया के दौरान ही वाहन स्वामी मौके पर पहुंच जाता है, तो क्रेन उसे जबरन टो करके यार्ड में नहीं ले जा सकती। ऐसी स्थिति में केवल निर्धारित नो-पार्किंग का चालान काटकर गाड़ी को वहीं छोड़ना अनिवार्य है।डिजिटल साक्ष्य और वीडियो रिकॉर्डिंग: क्रेन कर्मियों द्वारा बदसलूकी या गाड़ी खींचने का तुरंत वीडियो बनाएं। पर्ची पर सरकारी मुहर, क्रेन नंबर और ई-चालान रसीद की मांग करें।आईजीआरएस और जनसुनवाई पोर्टल: मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल (IGRS Portal) पर लोकेशन, समय और क्रेन के नंबर के साथ पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की सीधी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।हेल्पलाइन पर सूचना: जबरन वसूली या विवाद की स्थिति में तत्काल यूपी 112 और नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 1533 पर कॉल करके घटना की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएं।
'संघ का सिद्धांत अपनापन और सात्विक प्रेम', लंदन में बोले मोहन भागवत
मोहन भागवत ने संघ का मतलब बताते हुए कहा कि अगर उन्हें इस संगठन के एक सिद्धांत को बताना हो, तो वह ‘अपनापन’ है. हर किसी के प्रति शुद्ध और सात्विक प्रेम संघ की विचारधारा है.
CM Vishnu Deo Sai ने झीरम घाटी हमले पर NIA फैसले के बाद Congress से सबूतों पर सवाल पूछे
रायपुर, छह सितंबर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमला मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की अदालत के फैसले की आलोचना को लेकर रविवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पूछा कि पार्टी ने जांच एजेंसी को अपने दावों का कोई सबूत क्यों नहीं सौंपा। साय ने एक बयान में कहा कि राजनीतिक बयानबाजी से सच नहीं बदल सकता। जगदलपुर की एक विशेष एनआईए अदालत ने इस हमले के सिलसिले में गिरफ्तार सभी 10 आरोपियों को शनिवार को दोषी ठहराया। इस हमले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता, विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा सहित 29 लोग मारे गए थे। अदालत ने सजा की अवधि तय करने के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की है। यह घातक हमला 25 मई, 2013 को हुआ था, जब माओवादियों ने बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के अंतर्गत झीरम घाटी में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांग्रेस की परिवर्तन रैली पर घात लगाकर हमला किया था। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे ‘‘अधूरा न्याय’’ करार दिया था। उन्होंने कहा कि हमले के पीछे की कथित बड़ी राजनीतिक साजिश की जांच नहीं की गई है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा था कि 10 आरोपियों को दोषी ठहराया जाना बस्तर, पीड़ितों के परिवारों या कांग्रेस के साथ न्याय नहीं है। इस आलोचना का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह मामला तब एनआईए को सौंपा गया था, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार सत्ता में थी। मुख्यमंत्री साय ने कहा, ‘‘जांच और न्यायिक प्रक्रिया लगभग 13 वर्षों तक चली, सौ से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए और अदालत ने सभी तथ्यों तथा सबूतों की जांच करने के बाद अपना फैसला सुनाया। अदालत ने 10 लोगों को दोषी ठहराया है और यह 16 सितंबर को उनकी सजा तय करेगी।’’उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह भी याद रखना चाहिए कि एनआईए देश की शीर्ष जांच एजेंसी है, किसी राज्य सरकार की एजेंसी नहीं। बघेल पर तंज कसते हुए साय ने कहा कि जब कांग्रेस नेता विपक्ष में थे, तब वह दावा किया करते थे कि वह ‘‘अपनी जेब में सबूत लेकर घूम रहे हैं।’’साय ने बघेल पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘सवाल यह है कि अगर उनके पास सबूत थे, तो उन्होंने इसे एनआईए को क्यों नहीं सौंपा? उनके पास जांच एजेंसी के सामने तथ्यों को रखने के लिए पर्याप्त समय था। आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए तथ्यों और सबूतों की आवश्यकता होती है।’’उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक कार्यवाही सबूतों और तथ्यों पर आधारित होती है, राजनीतिक बयानों पर नहीं।
UP, बिहार, MP समेत 9 राज्यों में बाढ़ का अलर्ट, सेंट्रल वॉटर कमीशन ने जारी की चेतावनी
सेंट्रल वॉटर कमीशन ने बिहार, यूपी, एमपी समेत 9 राज्यों में गंभीर बाढ़ का अलर्ट जारी किया है. बिहार में पटना के गांधीघाट समेत कई स्टेशनों पर गंगा उफान पर है. यूपी और मध्य प्रदेश की नदियों में जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव की संभावना है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
BRICS देशों के प्रतिनिधिमंडल ने निहारा ताजमहल, कराया खास फोटो सेशन
BRICS देशों के 65 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को भारी बारिश के बीच ताजमहल का दीदार किया. इस दौरान प्रतिनिधियों ने ताज महल की खूबसूरती की सराहना की और फोटो सेशन भी कराया.
दिल्ली के सत्य निकेतन में ढही इमारत, PM मोदी ने जताया दुख!
दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पुरानी इमारत भरभराकर गिर गई. हादसे में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि छात्रों और मजदूरों समेत छह लोग घायल हैं. पुलिस के मुताबिक, बेसमेंट में मरम्मत और खुदाई का काम चल रहा था, इसी दौरान पिलर खिसकने से इमारत ढह गई. एनडीआरएफ, दमकल और प्रशासन की टीमें राहत बचाव में जुटी हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने भी हादसे पर दुख जताया है
सागर जहरीली शराब कांड: 10 मौतों के बाद एक्शन में CM यादव, आबकारी अफसरों से लेकर TI तक सस्पेंड
सागर में जहरीली और नकली शराब पीने से हुई 10 मौतों के मामले में आबकारी अफसरों से लेकर TI तक पांच अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया है.
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक का मेगा भर्ती प्लान: 12,000 पदों पर बहाली और 250 नई शाखाओं का ऐलान
देश के बैंकिंग इतिहास में रोजगार की राह देख रहे लाखों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 'भारतीय स्टेट बैंक' (State Bank of India - SBI) ने वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए अपने व्यापक व्यावसायिक विस्तार और कार्यबल वृद्धि (Workforce Expansion) की रूपरेखा तैयार कर ली है। बैंक प्रबंधन और शीर्ष नेतृत्व द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, एसबीआई आगामी वित्तीय वर्ष के दौरान विभिन्न संवर्गों में लगभग 12,000 नए कर्मचारियों की भर्ती करने जा रहा है।इस मेगा रिक्रूटमेंट ड्राइव के साथ-साथ बैंक देश के ग्रामीण, अर्ध-शहरी और उभरते औद्योगिक गलियारों में अपनी भौतिक पहुंच को मजबूत करने के लिए 250 नई शाखाएं (New Branches) खोलने की योजना पर काम कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर हुए सेवानिवृत्ति (Retirements), डिजिटल बैंकिंग के अभूतपूर्व फैलाव और क्रेडिट ग्रोथ (कर्ज मांग) में आए उछाल को संभालने के लिए बैंक को बड़े पैमाने पर कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है। एसबीआई के इस फैसले से बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) और एसबीआई परीक्षाओं की तैयारी कर रहे देश भर के युवाओं में भारी उत्साह की लहर दौड़ गई है।पदों का संभावित वर्गीकरण: क्लर्क, पीओ और स्पेशलिस्ट ऑफिसर्स की होगी भर्तीएसबीआई द्वारा प्रस्तावित 12,000 पदों की भर्ती को बैंक की विभिन्न परिचालन और तकनीकी आवश्यकताओं के आधार पर विभाजित किया गया है। बैंक न केवल सामान्य बैंकिंग कामकाज के लिए भर्तियां करेगा, बल्कि आईटी, डेटा एनालिटिक्स और रिस्क मैनेजमेंट जैसे आधुनिक क्षेत्रों के लिए भी विशेषज्ञों को सीधे नियुक्त करेगा।पद संवर्ग (Post Category)संभावित रिक्तियांमुख्य भूमिका और कार्यक्षेत्रन्यूनतम योग्यताजूनियर एसोसिएट (Clerk - Customer Support & Sales)7,500 - 8,000शाखाओं में कैश हैंडलिंग, ग्राहक सेवा, खाता खोलना, रिटेल उत्पाद वितरणकिसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation)प्रोबेशनरी ऑफिसर (SBI PO)2,000 - 2,500शाखा संचालन, क्रेडिट अप्रूवल, टीम प्रबंधन और भविष्य का नेतृत्वकिसी भी विषय में स्नातक (अंतिम वर्ष के छात्र भी पात्र)स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर (SCO / IT & Tech)1,200 - 1,500साइबर सुरक्षा, क्लाउड आर्किटेक्चर, नेटवर्क इंजीनियरिंग, एआई/एमएलB.Tech / BE / MCA / M.Sc (IT / CS)अन्य विशेषज्ञ (Wealth, Legal, CA)400 - 500वेल्थ मैनेजमेंट, कानूनी मामले, कॉरपोरेट अकाउंटिंग और ऑडिटLLB, CA, ICWA, या MBA (Finance)'डिजिटल क्रांति' के बीच 250 नई फिजिकल शाखाएं क्यों? समझिए एसबीआई का 'फिजिकल+डिजिटल' मॉडलअक्सर यह सवाल उठाया जाता है कि जब मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई का दौर है, तो बैंक नई भौतिक शाखाएं (Brick-and-Mortar Branches) क्यों खोल रहा है। एसबीआई के रणनीतिकारों का मानना है कि भारत की विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था में केवल डिजिटल मौजूदगी पर्याप्त नहीं है। आज भी देश की आधी से अधिक आबादी कृषि, एमएसएमई (MSME) और अनौपचारिक व्यापार से जुड़ी है, जहां बड़े कर्ज, जटिल दस्तावेज, गिरवी संपत्ति का सत्यापन और व्यक्तिगत संबंध स्थापित करने के लिए एक भौतिक बैंक शाखा की अनिवार्य आवश्यकता होती है।एसबीआई द्वारा खोली जाने वाली 250 नई शाखाओं की मुख्य रणनीतिक दिशा इस प्रकार होगी:टियर-2 और टियर-3 शहरों पर फोकस: तेजी से विकसित हो रहे छोटे शहरों और उप-नगरों में रिटेल बैंकिंग की भारी मांग है। बैंक इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ाकर नए ग्राहकों को जोड़ेगा।कमर्शियल और लॉजिस्टिक कॉरिडोर्स: देश में बन रहे नए एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स और पीएम गतिशक्ति प्रोजेक्ट्स के आसपास उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में कॉर्पोरेट और व्यापारिक शाखाएं खोली जाएंगी।डिपॉजिट मोबिलाइजेशन (जमा पूंजी जुटाना): वर्तमान में पूरे भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सामने कम लागत वाले चालू और बचत खातों (CASA Deposits) को बढ़ाने की कड़ी चुनौती है। नई शाखाएं स्थानीय स्तर पर ग्राहकों से सीधा संपर्क बनाकर बैंक के डिपॉजिट बेस को मजबूती प्रदान करेंगी।'फिगिटल' (Phygital) दृष्टिकोण: ये नई 250 शाखाएं पारंपरिक शाखाओं जैसी नहीं होंगी, बल्कि इनमें कैश डिपॉजिट मशीनें (CDM), स्वयं पासबुक प्रिंटर और डिजिटल हेल्पडेस्क जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, जहां कर्मचारी ग्राहकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में मदद करेंगे।टेक और साइबर सिक्योरिटी पर विशेष जोर: YONO अपग्रेडेशन और फिनटेक इनोवेशन के लिए भर्तीएसबीआई का प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म 'योनो' (YONO - You Only Need One) देश के सबसे बड़े वित्तीय ऐप्स में से एक बन चुका है, जिसके 7 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। बैंक इस समय 'YONO 2.0' के अत्याधुनिक नेक्स्ट-जनरेशन वर्जन पर काम कर रहा है, जो क्लाउड-नेटिव आर्किटेक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर संचालित होगा।यही कारण है कि 12,000 पदों की इस भर्ती में एक बड़ा हिस्सा तकनीकी प्रतिभाओं (Tech Talents) के लिए आरक्षित किया जा रहा है। बैंक अब पारंपरिक आउटसोर्सिंग के बजाय अपनी आंतरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डेटा इंजीनियरिंग टीम को मजबूत कर रहा है। भर्ती किए जाने वाले नए तकनीकी विशेषज्ञ रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन, साइबर डिफेंस ऑपरेशंस, एपीआई बैंकिंग और एल्गोरिद्मिक क्रेडिट अंडरराइटिंग जैसे संवेदनशील प्रोजेक्ट्स पर सीधे काम करेंगे। इससे बैंक की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और डिजिटल सर्वर डाउनटाइम की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।चयन प्रक्रिया, शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा: बैंकिंग एस्पिरेंट्स के लिए पूरा रोडमैपएसबीआई में शामिल होने के लिए आयोजित की जाने वाली चयन प्रक्रिया देश की सबसे पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिनी जाती है। भर्ती अभियान के तहत पदों के अनुसार चयन प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी:प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) चयन प्रक्रिया: यह परीक्षा तीन चरणों में आयोजित होगी।प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): 100 अंकों का ऑनलाइन ऑब्जेक्टिव टेस्ट (रीजनिंग, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड और इंग्लिश)।मुख्य परीक्षा (Mains): 200 अंकों का वस्तुनिष्ठ पेपर और 50 अंकों का विवरणात्मक (Descriptive Test - Essay & Letter Writing)।साइकोमेट्रिक टेस्ट, ग्रुप एक्सरसाइज और इंटरव्यू: मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का व्यक्तिगत साक्षात्कार और जीडी (Group Discussion) लिया जाएगा।जूनियर एसोसिएट (Clerk) चयन प्रक्रिया: क्लर्क पद के लिए केवल दो चरण होते हैं—प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा। इसमें कोई इंटरव्यू नहीं होता। मुख्य परीक्षा के अंकों के आधार पर अंतिम मेरिट सूची जारी की जाती है और इसके बाद स्थानीय भाषा की परीक्षा (Local Language Test) आयोजित होती है।आयु सीमा: क्लर्क के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की आयु 20 से 28 वर्ष और पीओ के लिए 21 से 30 वर्ष निर्धारित होती है। ओबीसी वर्ग को 3 वर्ष तथा एससी/एसटी वर्ग को 5 वर्ष की नियमानुसार छूट प्राप्त होगी।वेतनमान और सुविधाएं: एसबीआई पीओ का शुरुआती बेसिक पे लगभग ₹41,960 (चार अग्रिम वेतन वृद्धियों के साथ) होता है, और भत्ते व लीज अकोमोडेशन मिलाकर कुल ग्रॉस सीटीसी ₹16 से ₹18 लाख प्रति वर्ष तक पहुंच जाता है। वहीं जूनियर एसोसिएट का शुरुआती वेतन भत्तों सहित लगभग ₹35,000 से ₹40,000 प्रति माह रहता है।अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सेवाओं पर प्रभाव: युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसरस्टेट बैंक ऑफ इंडिया का यह विशाल भर्ती और शाखा विस्तार अभियान भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेतक है। जब किसी देश का सबसे बड़ा ऋणदाता बैंक 12,000 नए रोजगार सृजित करता है और 250 नए केंद्र खोलता है, तो यह स्पष्ट करता है कि घरेलू उपभोग, लोन ग्रोथ और औद्योगिक गतिविधियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।शाखाओं में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से आम उपभोक्ताओं को बैंक काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी, वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर व्यक्तिगत सहायता प्राप्त होगी और ग्रामीण इलाकों में जन-धन खातों व सरकारी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।बैंकिंग विशेषज्ञों का सुझाव है कि जो उम्मीदवार एसबीआई की इस भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित होना चाहते हैं, वे अभी से अपनी बुनियादी गणितीय अवधारणाओं, करंट अफेयर्स, बैंकिंग अवेयरनेस और डेटा इंटरप्रिटेशन के अभ्यास को तेज कर दें, क्योंकि आने वाले महीनों में जारी होने वाले आधिकारिक नोटिफिकेशन के बाद परीक्षा की समयसीमा अत्यंत संक्षिप्त रहने की संभावना है।
नाबालिग से रेप के 2 आरोपी एनकाउंटर में घायल, पुलिस ने तमंचों के साथ दबोचा
मुजफ्फरनगर में 14 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. रेता नंगला के जंगल में घेराबंदी के दौरान दो वांछित आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी. जवाबी कार्रवाई में दोनों के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर अस्पताल भेजा गया. पुलिस ने दोनों के पास से दो तमंचे और कारतूस बरामद किए हैं.
सत्य निकेतन हादसे पर भड़का ABVP का गुस्सा, सिविक सेंटर का गेट तोड़कर MCD मुख्यालय में घुसे छात्र
सत्य निकेतन हादसे के विरोध में ABVP कार्यकर्ताओं ने MCD मुख्यालय का घेराव कर मुख्य गेट तोड़ दिया और परिसर के अंदर धरने पर बैठ गए. छात्रों ने हादसे के लिए MCD की कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराते हुए कमिश्नर की बर्खास्तगी तथा दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की.
अब लद्दाख में भी होगी जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की बेंच, जानें कब से शुरू होगी सुनवाई
लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की बेंच बैठने का रास्ता साफ हो गया है. इससे दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए हाई कोर्ट तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है.
वैश्विक मंदी, टैरिफ और तकनीक का बदलाव: ऑटोमोबाइल और टेक सेक्टर में शुरू हुआ छंटनी का नया महा-दौर
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की सुस्त मांग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दखल ने दुनिया की शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने खर्चों में भारी कटौती करने पर विवश कर दिया है। ऑटोमोबाइल और फिनटेक सेक्टर से एक साथ आए बड़े छंटनी के फैसलों ने दुनिया भर के जॉब मार्केट में सनसनी फैला दी है। भारत के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने टाटा समूह की ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली ब्रिटिश लक्जरी कार निर्माता जगुआर लैंड रोवर (Jaguar Land Rover - JLR) ने अपने यूके वर्कफोर्स में लगभग 4,000 नौकरियों की कटौती करने की घोषणा की है। वहीं दूसरी ओर, यूरोप की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन (Volkswagen) ने अपने 89 साल के इतिहास का सबसे बड़ा पुनर्गठन पैकेज मंजूर करते हुए कुल 1,00,000 कर्मचारियों की छंटनी की रूपरेखा तैयार की है। ऑटो सेक्टर के इस झटके के समानांतर वैश्विक डिजिटल भुगतान दिग्गज पेपाल (PayPal) ने भी अपने कुल कार्यबल में 20 प्रतिशत तक की कटौती करने के तहत भारत, अमेरिका और इजरायल में सैकड़ों वरिष्ठ इंजीनियरों और प्रबंधकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। कॉरपोरेट जगत में एक साथ आई इस 'डाउनसाइज़िंग' की आंधी ने साफ संकेत दे दिया है कि कंपनियां अब आक्रामक विस्तार के बजाय मुनाफा बचाने और लागत घटाने के 'सर्वाइवल मोड' में आ चुकी हैं।टाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर में 4,000 नौकरियां खत्म: जानिए यूके में क्यों उठाना पड़ा यह कदमब्रिटिश मीडिया और 'द टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, जगुआर लैंड रोवर (JLR) आगामी दो वर्षों में ब्रिटेन में अपने प्रबंधकीय और वेतनभोगी (Salaried & Management) कर्मचारियों के लिए एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति कार्यक्रम (Voluntary Redundancy Programme) शुरू कर रही है, जिसके दायरे में लगभग 4,000 पद समाप्त किए जाएंगे। जेएलआर इस समय ब्रिटेन में वेस्ट मिडलैंड्स के तीन बड़े विनिर्माण संयंत्रों और हेलेवुड (मर्सिसाइड) कारखाने में लगभग 34,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देती है, जबकि इसकी सप्लाई चेन पर 1,20,000 से अधिक नौकरियां निर्भर हैं। कंपनी नेतृत्व ने साफ किया है कि वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं से निपटने और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए यह फैसला अपरिहार्य हो चुका था।इस व्यापक कटौती के पीछे कंपनी ने कुछ महत्वपूर्ण वित्तीय और रणनीतिक लक्ष्य तय किए हैं:1.7 बिलियन की लागत बचत: जेएलआर ने अगले दो वर्षों में अपने परिचालन खर्चों में लगभग 1.7 बिलियन पाउंड (लगभग ₹21,700 करोड़) बचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।ब्रेक-इवेन सीमा में कटौती: कंपनी अपनी लाभप्रदता की सीमा (Break-even Point) को घटाकर सालाना 3,00,000 वाहनों के उत्पादन स्तर पर लाना चाहती है, ताकि यदि बिक्री में और मंदी आए तब भी कंपनी घाटे में न जाए।मुनाफे में भारी गिरावट: जून 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही में जेएलआर का राजस्व लगभग 10 प्रतिशत गिरा है, जबकि कर-पूर्व लाभ (Pre-tax profit) दो-तिहाई से अधिक लुढ़ककर मात्र 109 मिलियन पाउंड पर सिमट गया।अमेरिकी टैरिफ और साइबर अटैक की दोहरी मार: जेएलआर की कुल वैश्विक बिक्री में उत्तरी अमेरिका की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत है। अमेरिका द्वारा ब्रिटेन से आयात होने वाले वाहनों पर 10 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क (Tariff) लगाए जाने से जेएलआर की मार्जिन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा पिछले वर्ष हुए एक भीषण साइबर हमले ने कंपनी के उत्पादन को कई हफ्तों तक ठप कर दिया था, जिसके चलते आउटपुट में 27 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। ब्रिटेन की प्रमुख श्रमिक यूनियन 'यूनाइट' (Unite) ने इस छंटनी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए ब्रिटिश सरकार और जेएलआर प्रमुख पीबी बालाजी के साथ आपात वार्ता शुरू करने की मांग की है।फॉक्सवैगन में ऐतिहासिक भूचाल: 1 लाख नौकरियों में कटौती और जर्मन प्लांट बंद होने का सायाऑटोमोबाइल सेक्टर का संकट केवल जेएलआर तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन (Volkswagen) ने वैश्विक ऑटो उद्योग के इतिहास का सबसे बड़ा पुनर्गठन शुरू कर दिया है। फॉक्सवैगन के सुपरवाइजरी बोर्ड ने 'फ्यूचर प्लान' (Future Plan) नामक परिवर्तन पैकेज को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत कंपनी अपने वैश्विक कार्यबल से कुल 1,00,000 नौकरियों की कटौती करने जा रही है, जो उसके कुल 6.6 लाख कर्मचारियों का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें 50,000 पदों की ताजा कटौती शामिल है, जो पहले तय की गई 50,000 की छंटनी के अतिरिक्त है।फॉक्सवैगन के सामने सबसे बड़ा संकट चीन के बाजार में घरेलू इलेक्ट्रिक कार कंपनियों (जैसे BYD) से मिल रही आक्रामक प्रतिस्पर्धा, जर्मनी में औद्योगिक ऊर्जा की आसमान छूती कीमतें और पारंपरिक पेट्रोल-डीजल से इलेक्ट्रिक कारों की ओर धीमी गति से हो रहा बदलाव है। कंपनी अपने 89 साल के इतिहास में पहली बार जर्मनी की अपनी घरेलू धरती पर स्थित चार प्रमुख विनिर्माण संयंत्रों—हनोवर, एमडेन, ज्विकाउ और नेकारसुलम को पूरी तरह बंद करने या उनके वैकल्पिक इस्तेमाल पर विचार कर रही है। इसके अलावा फॉक्सवैगन ने साल 2035 तक अपने पोर्टफोलियो में वाहनों के मॉडल्स की संख्या को आधा करने और पोर्श (Porsche) में भी 20 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी कर ली है।टेक और फिनटेक में भी तलवार: PayPal ने भारत और अमेरिका में वरिष्ठ इंजीनियरों को निकालाऑटोमोबाइल के साथ-साथ टेक और फिनटेक जगत भी गंभीर पुनर्गठन के दौर से गुजर रहा है। डिजिटल भुगतान की अग्रणी कंपनी पेपाल (PayPal) ने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एनरिक लोरेस के नेतृत्व में अपने वैश्विक कार्यबल में लगभग 20 प्रतिशत (करीब 4,760 कर्मचारियों) की कटौती का मल्टी-ईयर प्लान लागू कर दिया है। कंपनी का लक्ष्य अगले दो से तीन वर्षों में 1.5 बिलियन डॉलर और चालू वर्ष के अंत तक 400 मिलियन डॉलर के परिचालन खर्चों में कटौती करना है।पेपाल की इस छंटनी का सीधा असर भारत और अमेरिका पर पड़ा है:भारत में 220 कर्मचारियों की विदाई: पेपाल ने बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित अपने टेक सेंटर्स से लगभग 220 कर्मचारियों की छंटनी की है, जो भारत में उसके कुल कर्मचारियों का लगभग 4 प्रतिशत है। यह छंटनी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स और पेमेंट्स ऑपरेशंस की टीमों में की गई है।कैलिफोर्निया में टॉप लीडरशिप पर गाज: अमेरिका के सैन जोस स्थित मुख्यालय में पेपाल ने 50 से अधिक डायरेक्टर्स, 40 से अधिक सीनियर मैनेजर्स और 100 से अधिक वरिष्ठ सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को 'वार्न' (WARN) नोटिस जारी करते हुए बाहर कर दिया है।एआई और ऑटोमेशन का दबाव: पेपाल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि कंपनी संगठनात्मक परतों (Organizational Layers) को खत्म कर रही है और उन प्रशासनिक व कोडिंग भूमिकाओं को ऑटोमेटेड एआई एजेंट्स से बदल रही है, ताकि फिनटेक प्रतिद्वंद्वियों (Apple Pay, Google Pay और Stripe) के मुकाबले अपनी मार्जिन को मजबूत रखा जा सके।वैश्विक ऑटो और टेक सेक्टर में छंटनी की मुख्य वजहें: क्या है इस महा-संकट का गणित?यदि हम जेएलआर, फॉक्सवैगन और पेपाल जैसी वैश्विक दिग्गजों द्वारा उठाए गए इन कदमों का व्यापक विश्लेषण करें, तो इसके पीछे चार प्रमुख वैश्विक आर्थिक और तकनीकी कारक सीधे तौर पर जिम्मेदार नजर आते हैं:1. इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ट्रांजिशन का वित्तीय झटका: यूरोपीय और अमेरिकी सरकारों ने कड़े शून्य-उत्सर्जन नियम (Zero Emission Mandates) थोप दिए हैं। लेकिन हकीकत यह है कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और महंगे मॉडल्स के कारण आम उपभोक्ता ईवी खरीदने से कतरा रहा है। कंपनियों ने ईवी रिसर्च में खरबों रुपये झोंक दिए, लेकिन उस अनुपात में बिक्री न होने से मुनाफे का ढांचा चरमरा गया है।2. चीनी कंपनियों की सस्ती और आक्रामक चुनौती: चीन की बीवायडी (BYD), गीली और श्याओमी जैसी कंपनियां यूरोप और विकासशील देशों में यूरोपीय व अमेरिकी कारों की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत सस्ती और आधुनिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां उतार रही हैं। इस अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा ने फॉक्सवैगन और जेएलआर जैसी पारंपरिक कंपनियों के बाजार पर कब्जा कर लिया है।3. संरक्षणवाद और अमेरिकी टैरिफ वॉर: अमेरिका द्वारा विदेशी कारों और कलपुर्जों पर 10 से 25 प्रतिशत तक के नए टैरिफ लगाने से यूरोप और ब्रिटेन की लक्जरी कार इंडस्ट्री की सप्लाई चेन की लागत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वर्कफोर्स ऑप्टिमाइजेशन: टेक और ऑटोमोबाइल दोनों ही क्षेत्रों में कोडिंग, डिजाइनिंग, कस्टमर सपोर्ट और सप्लाई चेन मैनेजमेंट का काम इंसानों से हटाकर जनरेटिव एआई और ऑटोमेशन सॉफ्टवेयरों को सौंपा जा रहा है। कंपनियां अब कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम निकालने के मॉडल को प्राथमिकता दे रही हैं।भारतीय बाजार और टाटा मोटर्स के शेयर पर क्या पड़ेगा असर?टाटा मोटर्स के निवेशकों के लिए जेएलआर में 4,000 नौकरियों की कटौती एक मिला-जुला संकेत लेकर आई है। अल्पावधि में सेवरेंस पे (Severance Pay) और पुनर्गठन के कारण कंपनी को एकमुश्त लागत उठानी पड़ सकती है, लेकिन दीर्घावधि में 1.7 बिलियन पाउंड की बचत टाटा मोटर्स के कंसोलिडेटेड बैलेंस शीट और मुक्त नकदी प्रवाह (Free Cash Flow) को मजबूती प्रदान करेगी। हालांकि, यूके के प्लांटों में छंटनी से टाटा के ब्रिटिश ऑपरेशंस और सप्लाई चेन में कुछ समय के लिए अस्थिरता आ सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 का यह उत्तरार्ध वैश्विक रोजगार बाजार के लिए एक कठिन परीक्षा साबित हो रहा है। चाहे ऑटोमोबाइल का पारंपरिक विनिर्माण हो या सिलीकॉन वैली का अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर उद्योग—कंपनियां अब भारी-भरकम वेतन बिलों को ढोने के मूड में नहीं हैं। आने वाले महीनों में यदि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों में नरमी नहीं आई, तो अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी इसी तरह के कड़े छंटनी कदमों का ऐलान कर सकती हैं।
दिवाली और छठ महापर्व पर घर जाने की टेंशन खत्म: भारतीय रेलवे ने शुरू की फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें
देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक पर्वों—दशहरा, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के अवसर पर लाखों प्रवासियों के घर लौटने की राह आसान करने के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, पुणे और बेंगलुरु जैसे औद्योगिक महानगरों में रहने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुसाफिरों के लिए त्योहारों के दौरान ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। नियमित एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों में 60 दिन पहले की सामान्य बुकिंग विंडो खुलते ही चंद मिनटों में सीटें फुल हो गईं और वेटिंग लिस्ट 200 से 300 के पार पहुंच चुकी है। इस भीषण मांग और यात्रियों की परेशानी को देखते हुए रेलवे बोर्ड के निर्देश पर उत्तर रेलवे (Northern Railway), पूर्व मध्य रेलवे (East Central Railway), उत्तर मध्य रेलवे (North Central Railway) और पश्चिम रेलवे (Western Railway) ने मिलकर फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों (Festival Special Trains) के पहले चरण का आधिकारिक परिचालन शुरू करने का निर्णय लिया है। इन विशेष ट्रेनों के संचालन से दिल्ली-एनसीआर और अन्य बड़े शहरों से पूर्वांचल, मिथिलांचल और सीमांचल के शहरों के लिए हजारों अतिरिक्त सीटें और बर्थ उपलब्ध हो गई हैं, जिससे यात्रियों की यात्रा सुगम और तनावमुक्त बनेगी।दिल्ली-एनसीआर से यूपी-बिहार के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान: वाराणसी, अयोध्या और मुजफ्फरपुर के लिए चलेंगी ये गाड़ियांउत्तर रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली के प्रमुख टर्मिनलों (नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और आनंद विहार टर्मिनल) से उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख स्टेशनों के लिए कई महत्वपूर्ण फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की समय-सारणी घोषित कर दी गई है:वाराणसी - दिल्ली - वाराणसी फेस्टिवल स्पेशल (ट्रेन संख्या 04209/04210): पूर्वांचल जाने वाले यात्रियों के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण ट्रेन है। गाड़ी संख्या 04209 वाराणसी से 2 अक्टूबर से 27 नवंबर 2026 तक प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलेगी। वहीं वापसी में गाड़ी संख्या 04210 दिल्ली जंक्शन से 3 अक्टूबर से 28 नवंबर 2026 तक प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को रवाना होगी। दोनों दिशाओं में इसके कुल 25-25 फेरे संचालित किए जाएंगे, जिससे लखनऊ, सुल्तानपुर और वाराणसी रूट के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।अयोध्या कैंट - आनंद विहार टर्मिनल स्पेशल (ट्रेन संख्या 04213/04214): रामनगरी अयोध्या और आसपास के जिलों के लिए यह विशेष ट्रेन चलाई जा रही है। ट्रेन नंबर 04213 अयोध्या कैंट से 1 अक्टूबर से 29 नवंबर 2026 तक और ट्रेन नंबर 04214 आनंद विहार से 2 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलेगी। दोनों छोर से इसके 18-18 फेरे लगाए जाएंगे।आनंद विहार टर्मिनल - मुजफ्फरपुर फेस्टिवल स्पेशल (ट्रेन संख्या 04028/04027): उत्तर बिहार के यात्रियों के लिए आनंद विहार से मुजफ्फरपुर के बीच यह स्पेशल ट्रेन 13 अक्टूबर से 24 नवंबर 2026 के बीच चलाई जाएगी। मुजफ्फरपुर से वापसी में यह ट्रेन 14 अक्टूबर से 25 नवंबर 2026 तक चलेगी। यह ट्रेन गोरखपुर, हाजीपुर और छपरा के रास्ते चलेगी, जिससे इन सभी स्टेशनों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।आनंद विहार टर्मिनल - जोगबनी स्पेशल (ट्रेन संख्या 04008/04007): सीमांचल क्षेत्र के पूर्णिया, कटिहार और अररिया के यात्रियों के लिए यह ट्रेन आनंद विहार से 10 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 तक और जोगबनी से 11 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 के बीच दोनों दिशाओं में पांच-पांच विशेष फेरे लगाएगी।दिल्ली - सीतामढ़ी फेस्टिवल स्पेशल: उत्तर बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र को साधने के लिए पुरानी दिल्ली से सीतामढ़ी के बीच भी विशेष आरक्षित ट्रेन का शेड्यूल जारी किया गया है, जो दरभंगा और रक्सौल रूट के यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी देगी।मुंबई, गुजरात और दक्षिण भारत के प्रवासियों के लिए भी राहत: बेंगलुरु-कानपुर और सूरत-बिहार रूट्स पर गाड़ियांदिल्ली के साथ-साथ दक्षिण और पश्चिमी भारत से उत्तर भारत की ओर आने वाले रेल मार्गों पर भी ट्रेनों का दबाव सर्वाधिक रहता है। इसे संतुलित करने के लिए क्षेत्रीय रेलवे जोनों ने लंबी दूरी की विशेष सेवाएं घोषित की हैं:कानपुर सेंट्रल - एसएमवीटी बेंगलुरु पूजा स्पेशल (ट्रेन संख्या 04131/04132): उत्तर मध्य रेलवे (NCR) ने कानपुर सेंट्रल और सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया टर्मिनल (बेंगलुरु) के बीच विशेष ट्रेन चलाने की घोषणा की है। गाड़ी संख्या 04131 कानपुर से प्रत्येक रविवार शाम 4:30 बजे प्रस्थान कर प्रयागराज जंक्शन होते हुए मंगलवार शाम 6:30 बजे बेंगलुरु पहुंचेगी (4 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026)। वापसी में 04132 बेंगलुरु से प्रत्येक बुधवार सुबह 7:10 बजे चलकर गुरुवार रात 11:10 बजे प्रयागराज और देर रात कानपुर पहुंचेगी (7 अक्टूबर से 18 नवंबर 2026)। यह ट्रेन मानिकपुर, सतना, कटनी, जबलपुर, इटारसी, नागपुर और विजयवाड़ा के रास्ते चलेगी, जिससे दक्षिण भारत में कार्यरत उत्तर भारतीय युवाओं को दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पर घर आने की सीधी सुविधा मिलेगी।मुंबई और गुजरात से यूपी-बिहार स्पेशल: पश्चिम रेलवे (WR) और मध्य रेलवे (CR) द्वारा बांद्रा टर्मिनस, मुंबई सेंट्रल, लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT), सूरत, वडोदरा और अहमदाबाद से गोरखपुर, छपरा, पटना, दानापुर, बरौनी और भागलपुर के लिए विशेष ट्रेनों के संचालन की रूपरेखा तैयार की गई है। इनमें वापी, वलसाड और उधना जंक्शन से चलने वाली कई अनारक्षित जनसाधारण और स्पेशल फेयर ट्रेनें शामिल हैं, जो कपड़ा उद्योग व हीरा कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए जीवनरेखा साबित होंगी।स्पेशल ट्रेनों में टिकट कैसे बुक करें? IRCTC पर कंफर्म सीट पाने के जरूरी टिप्सफेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणा के बाद सबसे अहम सवाल यह होता है कि इनमें टिकट की बुकिंग कब और कैसे शुरू होती है। नियमित ट्रेनों के विपरीत, रेलवे द्वारा घोषित स्पेशल ट्रेनों के लिए बुकिंग की तारीखें अलग-अलग बैचों में निर्धारित की जाती हैं। जैसे ही किसी स्पेशल ट्रेन का नोटिफिकेशन सिस्टम में फीड होता है, आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट और पीआरएस काउंटरों पर उसके टिकट तुरंत लाइव हो जाते हैं।यदि आप भी स्पेशल ट्रेनों में कंफर्म टिकट पाना चाहते हैं, तो इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें:ट्रेन नंबर से सर्च करें: जब भी नई स्पेशल ट्रेन घोषित हो, आईआरसीटीसी पोर्टल पर स्टेशन कोड के साथ-साथ सीधे 5 अंकों का स्पेशल ट्रेन नंबर (जो आमतौर पर '0' से शुरू होता है) डालकर उपलब्धता जांचें।मास्टर लिस्ट तैयार रखें: बुकिंग शुरू होते ही नाम भरने में समय बर्बाद न हो, इसके लिए आईआरसीटीसी प्रोफाइल में 'Master List' पहले से बनाकर रखें।फास्ट पेमेंट गेटवे: आईआरसीटीसी ई-वॉलेट (IRCTC e-Wallet) या ऑटो-पे यूपीआई का इस्तेमाल करें, जिससे बैंक ओटीपी के इंतजार में लगने वाला समय बचे और ट्रांजैक्शन 5 से 10 सेकंड में पूरा हो जाए।'विकल्प' (VIKALP) का चयन: टिकट बुक करते समय फॉर्म में 'विकल्प स्कीम' को जरूर टिक करें। यदि स्पेशल ट्रेन में आपकी टिकट आरएसी या वेटिंग में रह जाती है, तो रेलवे का सिस्टम उसी रूट की किसी अन्य स्पेशल ट्रेन में खाली सीट आपको स्वतः आवंटित कर सकता है।रेलवे का महा-अभियान: हजारों अतिरिक्त फेरे, अमृत भारत कोच और स्टेशनों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामरेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पूजा के कुल 45 दिनों के त्योहारी सीजन के दौरान देश भर में रिकॉर्ड संख्या में विशेष ट्रेन सेवाएं संचालित की जा रही हैं। पिछले वर्षों के अनुभवों से सबक लेते हुए रेलवे ने इस बार केवल प्रीमियम या एसी स्पेशल ट्रेनों पर ही जोर नहीं दिया है, बल्कि सामान्य आय वर्ग के यात्रियों की सुविधा के लिए बड़ी संख्या में स्लीपर और अनारक्षित (General) कोचों वाली ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है।इसके साथ ही, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अत्यधिक व्यस्त रेल मार्गों पर हाल ही में पेश की गई अत्याधुनिक 'अमृत भारत एक्सप्रेस' (Amrit Bharat Express) के अतिरिक्त फेरे भी शामिल किए जा रहे हैं। नई दिल्ली, आनंद विहार, पुरानी दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, पटना जंक्शन, दानापुर और गोरखपुर जैसे अति-संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर भगदड़ की स्थिति से निपटने के लिए विशालकाय होल्डिंग एरिया (Waiting Enclosures) बनाए जा रहे हैं।स्टेशनों पर यात्रियों को कतारबद्ध तरीके से जनरल कोचों में चढ़ाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और आरपीएसएफ की अतिरिक्त कंपनियां तैनात की जा रही हैं। प्लेटफॉर्मों पर अतिरिक्त टिकट काउंटर, 24 घंटे काम करने वाले मेडिकल बूथ, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था और 'मे आई हेल्प यू' डेस्क सक्रिय कर दिए गए हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे दलालों के झांसे में आने से बचें, केवल आईआरसीटीसी के अधिकृत पोर्टल या रेलवे काउंटर से ही टिकट खरीदें और यात्रा से पूर्व 139 हेल्पलाइन या 'रेल मदद' ऐप पर अपनी ट्रेन का लाइव रनिंग स्टेटस जरूर चेक कर लें।
2003 का वह ऐतिहासिक फैसला: जब रूढ़ियों को तोड़कर बिपाशा ने चुना 'जिस्म' का रास्ता
सदी के शुरुआती दौर यानी साल 2000 के आसपास का हिंदी सिनेमा पारंपरिक खांचों में बुरी तरह जकड़ा हुआ था। उस दौर में किसी भी मुख्यधारा की शीर्ष अभिनेत्री से यह उम्मीद की जाती थी कि वह बड़े पर्दे पर केवल 'सती-सावित्री', संस्कारी या फिर मासूम और बबली प्रेमिका के रूप में ही नजर आए। लेकिन साल 2001 में 'अजनबी' से बतौर ग्रे-शेड किरदार धमाकेदार डेब्यू करने और 2002 में हॉरर ब्लॉकबस्टर 'राज' (Raaz) से रातों-रात सुपरस्टार बनने वाली बिपाशा बसु ने उस बने-बनाए ढर्रे को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। ठीक उसी समय जब उनका करियर शीर्ष की ओर बढ़ रहा था, बिपाशा के पास निर्देशक अमित सक्सेना और निर्माता महेश भट्ट व पूजा भट्ट की इरोटिक थ्रिलर फिल्म 'जिस्म' (Jism) का ऑफर आया। फिल्म की स्क्रिप्ट बेहद बोल्ड, असंकोची और अपने दौर से कहीं आगे की थी। बिपाशा ने जब इस फिल्म को साइन करने का मन बनाया, तो बॉलीवुड गलियारों में जैसे भूचाल आ गया। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बिपाशा बसु ने उस दौर की कड़वी सच्चाइयों को याद करते हुए साझा किया कि कैसे इस फिल्म को स्वीकार करना उनके पूरे करियर का सबसे बड़ा और जोखिम भरा जुआ बन गया था।'सब बोले तुम्हारा करियर खत्म हो जाएगा': इंडस्ट्री की चेतावनियों और वैंप बनने का खौफबिपाशा बसु ने खुलासा किया कि जब उन्होंने फिल्म 'जिस्म' करने का फैसला अपने करीबियों, कुछ निर्देशकों और इंडस्ट्री के जानकारों से साझा किया, तो लगभग हर किसी ने उन्हें इसे तुरंत छोड़ने की सलाह दी थी। बिपाशा ने बताया कि लोग उनसे कह रहे थे कि वह अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जा रही हैं। उस दौर में इंडस्ट्री की आम धारणा थी कि यदि कोई मुख्य अभिनेत्री पर्दे पर अपनी कामुकता (Sexuality) को खुलकर प्रदर्शित करती है या किसी नकारात्मक व स्वार्थी किरदार को निभाती है, तो उसे हमेशा के लिए 'वैंप' या बी-ग्रेड फिल्मों का ठप्पा दे दिया जाता है। लोग कह रहे थे कि इस रोल के बाद कोई भी बड़ा निर्माता उन्हें पारिवारिक या पारंपरिक फिल्मों में मुख्य नायिका के रूप में कास्ट नहीं करेगा और उनका उभरता हुआ करियर चंद दिनों में तबाह हो जाएगा। लेकिन बिपाशा बसु ने अपनी सहज अंतरात्मा (Gut Feeling) पर भरोसा किया। उन्हें फिल्म की कहानी, पटकथा की गहराई और 'सोनिया खन्ना' के किरदार की जटिलता में एक ऐसा खिंचाव नजर आया जिसे वह एक कलाकार के तौर पर ठुकरा नहीं सकती थीं। उन्होंने समाज और इंडस्ट्री के दकियानूसी डर को दरकिनार करते हुए इस चुनौती को दोनों हाथों से स्वीकार कर लिया।'सोनिया खन्ना' का वह सम्मोहक किरदार: जिसने हिंदी सिनेमा में बदल दी फीमेल लीड की परिभाषाफिल्म 'जिस्म' में बिपाशा बसु द्वारा निभाया गया 'सोनिया खन्ना' का किरदार केवल ग्लैमर और अंग-प्रदर्शन तक सीमित नहीं था, बल्कि वह हॉलीवुड की क्लासिक 'फेम फताल' (Femme Fatale) परंपरा पर आधारित एक बेहद महत्वाकांक्षी, चालाक और मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत महिला का चरित्र था। फिल्म में सोनिया खन्ना अपने अमीर पति की हत्या कराने के लिए एक शराबी और सीधे-साधे वकील कबीर लाल (जॉन अब्राहम) को अपनी खूबसूरती और सम्मोहन के जाल में फंसाती है। बिपाशा ने इस किरदार में जिस ठहराव, रहस्य और आत्मविश्वास के साथ काम किया, उसने दर्शकों और समीक्षकों दोनों को सन्न कर दिया। वह पर्दे पर किसी लाचार या पुरुषों की दया पर निर्भर रहने वाली नायिका नहीं थीं, बल्कि अपने जीवन और अपनी प्राथमिकताओं के फैसले खुद करने वाली एक जटिल महिला थीं। एम. एम. कीरावनी के मधुर संगीत और श्रेया घोषाल की मखमली आवाज में फिल्माया गया गीत 'जादू है नशा है' और 'चलो तुमको लेकर चलें' आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में कामुकता और सौंदर्य के सबसे कलात्मक और गरिमामय चित्रणों में गिना जाता है।जॉन अब्राहम संग ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री और बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त धमाकाफिल्म 'जिस्म' ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस के तमाम पुराने समीकरणों और भविष्यवाणियों को ध्वस्त कर दिया। जिस फिल्म को ट्रेड पंडित 'करियर किलर' बता रहे थे, उसने टिकट खिड़की पर जबर्दस्त मुनाफा कमाया और साल 2003 की सबसे बड़ी स्लीपर हिट फिल्मों में शुमार हो गई। इस फिल्म ने सुपरमॉडल जॉन अब्राहम को बॉलीवुड में बतौर मुख्य अभिनेता स्थापित किया। फिल्म में बिपाशा और जॉन की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी तीव्र, स्वाभाविक और दमदार थी कि उसने बड़े पर्दे पर आग लगा दी। दर्शक सिनेमाघरों में खिंचे चले आए और फिल्म को युवाओं व परिपक्व दर्शकों दोनों का भरपूर समर्थन मिला। समीक्षकों ने बिपाशा बसु के अभिनय की जमकर सराहना की और उन्हें उस साल फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ नकारात्मक भूमिका (Best Villain) श्रेणी में नामांकित भी किया गया। इस ऐतिहासिक सफलता ने साबित कर दिया कि दर्शक केवल घिसी-पिटी कहानियां नहीं देखना चाहते, बल्कि यदि कोई महिला कलाकार बोल्ड और ग्रे किरदार को पूरी शिद्दत और प्रामाणिकता के साथ निभाए, तो उसे पूरे सम्मान के साथ सिर-आंखों पर बिठाया जाता है।आज के सिनेमा में बिपाशा के फैसले की गूंज: क्यों मील का पत्थर साबित हुई 'जिस्म'आज दो दशक से अधिक का समय बीत जाने के बाद जब पीछे मुड़कर देखा जाता है, तो बिपाशा बसु का वह फैसला बॉलीवुड में महिला सशक्तिकरण और किरदारों की विविधता के लिहाज से एक ऐतिहासिक मील का पत्थर नजर आता है। बिपाशा के इस साहसिक कदम ने उन रूढ़ियों को हमेशा के लिए तोड़ दिया जो यह मानती थीं कि बोल्डनेस केवल वैंप्स के लिए आरक्षित होती है। उनके द्वारा खोले गए इस रास्ते पर चलकर ही आगे चलकर प्रियंका चोपड़ा ने 'ऐतराज' में सोनिया रॉय का साहसी नकारात्मक किरदार निभाया, करीना कपूर ने 'फिदा' में काम किया, और विद्या बालन ने 'इश्किया' व 'द डर्टी पिक्चर' जैसी फिल्मों में अपनी कामुकता और स्वतंत्र सोच को बेबाकी से पेश किया। बिपाशा बसु का यह मानना है कि एक कलाकार को कभी भी स्टीरियोटाइप्स या लोगों की दी गई सीमाओं में कैद नहीं होना चाहिए। जोखिम उठाना और लीक से हटकर कहानियों को चुनना ही एक साधारण अभिनेता को एक यादगार और क्रांतिकारी कलाकार बनाता है, और 'जिस्म' उनके उस निडर सफर का सबसे चमकदार सितारा बनी रहेगी।
उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने अमेठी की गरीब महिलाओं को बेहतर जीवन देने के लिए आवास स्वीकृति किये, गरीब व वंचित वर्ग की महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार लाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 18 पात्र लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र एवं ₹1.20 लाख के डेमो चेक वितरित किए।घर-घर जाकर सहायता: उपमुख्यमंत्री ने ओदारी गांव पहुंचकर योजना की लाभार्थी कृष्णा मौर्य को स्वयं उनके घर जाकर आवास स्वीकृति पत्र और चेक सौंपा। अन्य योजनाओं का लाभ: गांव में निर्मला, सियाराजी, सीमा, शान्ती देवी, सुमित्रा आदि लाभार्थियों को आवास स्वीकृति पत्र, विधवा पेंशन का लाभ, आय व जाति प्रमाण पत्र तथा कृषक दुर्घटना योजना के अंतर्गत ₹5 लाख का स्वीकृति पत्र वितरित किया गया।उपमुख्यमंत्री जी ने ओदारी गांव पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास योजना की लाभार्थी श्रीमती कृष्णा मौर्य के घर जाकर उन्हें स्वीकृति पत्र एवं डेमो चेक प्रदान किया तथा परिवार से संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए।उपमुख्यमंत्री जी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में विकास और जनकल्याण का डबल इंजन पूरी गति से चल रहा है। गरीबों को आवास, निःशुल्क खाद्यान्न, उज्ज्वला गैस, आयुष्मान भारत, बिजली, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य निरंतर जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। डबल इंजन की भाजपा सरकार का संकल्प है कि गरीब, वंचित, निराश्रित और जरूरतमंद परिवारों को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिले। सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए अधिकारी और जनप्रतिनिधि लगातार कार्य कर रहे हैं। गरीब महिलाओं और कमजोर वर्गों के परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराकर सरकार उनके जीवन में स्थायी बदलाव ला रही है। आवास केवल चार दीवारों का निर्माण नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की नींव है। प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है।
'हमारा महत्व नहीं होगा कम...', निजीकरण की अटकलों पर ISRO का रिएक्शन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने निजीकरण की अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि उसकी भूमिका और महत्व में कोई कमी नहीं होगी.
सक्रिय मानसून का नया दौर: अगले 6-7 दिनों तक देश के बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के विशाल भूभाग पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के अत्यंत सक्रिय चरण में प्रवेश करने के बाद एक विस्तृत और दीर्घकालिक मौसम बुलेटिन जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत, मध्य भारत, पूर्वोत्तर और पूर्वी तटीय राज्यों में अगले 6 से 7 दिनों तक लगातार रुक-रुक कर भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) का सिलसिला जारी रहेगा। वायुमंडलीय परिस्थितियों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर एक सुस्पष्ट चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation) बना हुआ है, जबकि मानसूनी ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर झुकते हुए कई मौसमी प्रणालियों को ऊर्जा दे रही है। इसके साथ ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से भारी मात्रा में नमी का प्रवाह गंगा के मैदानी इलाकों और पश्चिमी हिमालय की तलहटी तक पहुंच रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले एक सप्ताह के दौरान मौसम का यह उग्र मिजाज न केवल तापमान में गिरावट लाएगा, बल्कि निचले इलाकों में भीषण जलभराव, नदियों के उफान, आकाशीय बिजली (वज्रपात) और पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन जैसी गंभीर आपदाओं को भी जन्म दे सकता है।उत्तर प्रदेश में पश्चिमी से पूर्वी छोर तक आफत की फुहारें: वज्रपात और जलभराव का दोहरा संकटउत्तर प्रदेश के लिए आगामी 6 से 7 दिन मौसम के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील रहने वाले हैं। मौसम केंद्र लखनऊ द्वारा जारी किए गए ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के पश्चिमी संभाग से लेकर अवध, रुहेलखंड और पूर्वांचल के 30 से अधिक जिलों में भारी बारिश का येलो और ऑरेंज अलर्ट प्रभावी किया गया है। सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में अगले 72 घंटों के दौरान तेज हवाओं के साथ मूसलाधार वर्षा दर्ज की जा सकती है। वहीं राजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया और गोरखपुर में गरज-चमक के साथ लगातार बौछारें पड़ने का अनुमान है। बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर और जालौन में भी मध्यम से भारी बारिश का साया बना हुआ है। मौसम विभाग ने पूर्वांचल और तराई के जनपदों में आकाशीय बिजली गिरने (ठनका) की गंभीर आशंका जताई है। खेतों में काम कर रहे किसानों को चेताया गया है कि बादलों की तेज गर्जना के दौरान वे पक्के मकानों में शरण लें, क्योंकि खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे वज्रपात की घटनाएं जानलेवा साबित हो सकती हैं।उत्तराखंड और हिमाचल में पहाड़ों पर भूस्खलन का साया: नदियां उफान पर, चारधाम यात्रा पर एडवाइजरीपर्वतीय राज्यों में मौसम का मिजाज पहले से ही विकराल बना हुआ है और आगामी 6-7 दिनों तक यहां राहत मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, चंपावत, उधम सिंह नगर, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चमोली जिलों के लिए भारी से बहुत भारी वर्षा का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के चलते अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी, पिंडर और काली नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं। पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी के कटाव और बोल्डर गिरने (Landslides) के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-7), केदारनाथ मार्ग और ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर कई स्थानों पर यातायात बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और जिला प्रशासन ने चारधाम तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम की सटीक जानकारी लिए बिना यात्रा शुरू न करें और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर रात के समय सफर करने से पूरी तरह बचें। पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, शिमला, कांगड़ा, सिरमौर और चंबा में भी अगले 5 से 6 दिनों तक तेज बारिश और अचानक बाढ़ (Flash Floods) की चेतावनी जारी की गई है।दिल्ली-एनसीआर से लेकर मध्य भारत और पूर्वोत्तर तक: जानिए किन-किन राज्यों में होगा बादलों का डेरादेश की राजधानी नई दिल्ली और एनसीआर के शहरों—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में अगले 6 से 7 दिनों तक आसमान में घने मानसूनी बादलों का डेरा रहेगा। दिल्ली में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली झोंकेदार हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश के कई स्पेल देखने को मिल सकते हैं, जिससे दिन का अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच सिमट जाएगा। हालांकि, लगातार होने वाली फुहारों से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, धौला कुआं, आईटीओ और निचले अंडरपासों में गंभीर जलभराव और भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो सकती है।मध्य भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी मौसमी उथल-पुथल तेज रहेगी:बिहार और झारखंड: बिहार के 20 से अधिक जिलों (पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया) में पहले से जारी बाढ़ के संकट के बीच अगले 4 से 5 दिनों तक भारी बारिश और ठनका गिरने का अलर्ट है। झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद और दुमका में 40 किमी की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ झमाझम बारिश होगी।मध्य प्रदेश और राजस्थान: पूर्वी राजस्थान (जयपुर, कोटा, भरतपुर, उदयपुर) और मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर और सागर संभागों में आगामी 6 दिनों तक मानसून पूरी ताकत से बरसेगा।पूर्वोत्तर भारत और तटीय क्षेत्र: असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बंगाल की खाड़ी से आ रही मानसूनी हवाओं के प्रभाव से भारी से अति-भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है, जिससे ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर और अधिक बढ़ सकता है।मौसमी तंत्र का वैज्ञानिक विश्लेषण: चक्रवाती घेरे और पुरवैया हवाओं के संगम से क्यों बनी यह स्थिति?मौसम विज्ञानियों के अनुसार, सितंबर के पहले और दूसरे पखवाड़े में इस तरह की व्यापक और लगातार होने वाली मानसूनी बारिश के पीछे एक जटिल वायुमंडलीय प्रणाली सक्रिय है। सामान्यतः इस समय मानसून की विदाई की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू होने की ओर बढ़ती है, लेकिन इस वर्ष बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक के बाद एक लगातार बने निम्न दबाव के क्षेत्रों (Low-Pressure Systems) ने मानसून की वापसी की गति को पूरी तरह थाम दिया है। इस समय पश्चिमोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश पर केंद्रित साइक्लोनिक सर्कुलेशन वायुमंडल के निचले और मध्यम स्तरों तक फैला हुआ है।इसके साथ ही, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा एक मध्यम तीव्रता का पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) पूर्व से आने वाली नम हवाओं के साथ सीधा संपर्क बना रहा है। जब ठंडी और शुष्क पश्चिमी हवाएं अत्यधिक गर्म और नम पूर्वी हवाओं से टकराती हैं, तो वायुमंडल में तीव्र अस्थिरता (Atmospheric Instability) पैदा होती है। इसी टकराव के चलते ऊंचे वर्टिकल विस्तार वाले क्यूम्युलोनिम्बस (Cumulonimbus) बादल विकसित हो रहे हैं, जो एक छोटे से दायरे में कुछ ही घंटों के भीतर भारी मात्रा में पानी गिराने और भयंकर बिजली कड़कड़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वेदर सिस्टम अगले 150 से 160 घंटों तक सक्रिय बना रहेगा, जिसके कारण उत्तर और पूर्वी भारत को लगातार बादलों के पहरे में रहना पड़ेगा।आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम केंद्र की सुरक्षा एडवाइजरी: आंधी, पानी और बिजली से कैसे बचें?खराब मौसम और विशेष रूप से आकाशीय बिजली (Lightning) व अचानक आने वाले उफान को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और संबंधित राज्य सरकारों ने नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं:आकाशीय बिजली से सतर्कता: यदि आसमान में बादल गरज रहे हों या बिजली चमक रही हो, तो खुले मैदान, खेत, तालाब के किनारे या ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने की भूल कतई न करें। किसी पक्के कंक्रीट के मकान या बंद वाहन के भीतर ही शरण लें।इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का उपयोग: वज्रपात के दौरान घरों के मुख्य टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर और वाई-फाई मॉडम के प्लग बिजली के सॉकेट से अलग कर दें। चार्जिंग पर लगे मोबाइल फोन का उपयोग करने से बचें।पहाड़ों पर यात्रा से परहेज: पर्यटकों और वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के दुर्गम नदी किनारों और जलप्रपातों (Waterfalls) के पास सेल्फी लेने या पिकनिक मनाने न जाएं, क्योंकि अचानक आने वाले फ्लैश फ्लड में बचने का मौका नहीं मिलता।शहरी जलभराव और वाहन संचालन: भारी वर्षा के दौरान दोपहिया वाहन चालक जलमग्न सड़कों और खुले मेनहोलों से सावधान रहें। उफनते रपटों, पुलियों और अंडरपासों को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं।किसानों के लिए कृषि सलाह: धान की फसलों में अतिरिक्त जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। आगामी 5 दिनों तक खेतों में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों का छिड़काव रोक दें और कटी हुई फसलों को सुरक्षित शेड में पहुंचाएं।दामिनी मोबाइल ऐप: ग्रामीण और कस्बाई नागरिक अपने फोन में भारत सरकार का 'दामिनी' ऐप इंस्टॉल रखें, ताकि बिजली गिरने से आधा घंटा पहले मिलने वाले अलर्ट से जान बचाई जा सके।
आजादी के बाद भी ऐसे हालात! MP के इस गांव में नाले से गुजरी शवयात्रा
Agar Malwa Molyakhedi Crematorium Issue: आगर-मालवा के मोल्याखेड़ी गांव में श्मशान और रास्ता न होने से नाले से निकली शवयात्रा, बारिश में चिता पर चद्दर बांधकर किया गया अंतिम संस्कार.
क्या दिल्ली में जो बिल्डिंग गिरी, वो डीयू का हॉस्टल है? वायरल दावे का Fact Check
इमारत गिरने की घटना सत्य है और इसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, रविवार शाम तक हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 5 हो गई। पुलिस ने बताया कि घटना के संबंध में जल्द FIR दर्ज की जाएगी।
रिटायरमेंट के बाद नियमित आय और पूंजी सुरक्षा: जीवन की दूसरी पारी के लिए सटीक वित्तीय योजना
नौकरी या व्यवसाय से सेवानिवृत्त (Retire) होने के बाद हर व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी प्राथमिकता नियमित मासिक आमदनी (Regular Monthly Income) और अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। रिटायरमेंट के साथ ही जहां नियमित वेतन का आना बंद हो जाता है, वहीं बढ़ती उम्र के साथ मेडिकल खर्चे, घरेलू जरूरतें और महंगाई की मार लगातार बढ़ती रहती है। ऐसे में यदि रिटायरमेंट फंड (जैसे पीएफ, ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट) को बिना सोचे-समझे किसी जोखिम भरे या कम रिटर्न वाले साधन में छोड़ दिया जाए, तो कुछ ही वर्षों में पूंजी तेजी से घटने लगती है।वित्तीय योजनाकारों (Financial Planners) का मानना है कि एक सफल रिटायरमेंट पोर्टफोलियो वह है जो जोखिम को न्यूनतम रखे, सरकारी सुरक्षा प्रदान करे, बैंक खाते में नियमित अंतराल पर ब्याज ट्रांसफर करे और साथ ही टैक्स देनदारी को भी कम रखे। भारतीय वित्तीय बाजार में वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी 5 प्रमुख योजनाएं मौजूद हैं जो सुरक्षा, गारंटीड रिटर्न और नियमित नकदी प्रवाह का बेहतरीन संतुलन बनाती हैं।1. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS): 8.2% की ब्याज दर और भारत सरकार की संप्रभु गारंटीवरिष्ठ नागरिकों के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित 'सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम' (SCSS) देश की सबसे लोकप्रिय और सर्वाधिक रिटर्न देने वाली लघु बचत योजना है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के कोई भी भारतीय नागरिक किसी भी डाकघर या अधिकृत बैंक शाखा में यह खाता खोल सकते हैं।ब्याज दर: इस योजना पर वित्त मंत्रालय द्वारा 8.2% प्रति वर्ष का आकर्षक ब्याज दिया जा रहा है।ब्याज भुगतान: इसका ब्याज हर तिमाही (31 मार्च, 30 जून, 30 सितंबर और 31 दिसंबर) सीधे निवेशक के बचत खाते में जमा किया जाता है।अधिकतम निवेश सीमा: एक व्यक्ति या पति-पत्नी मिलकर इसमें अधिकतम ₹30 लाख तक की एकमुश्त राशि जमा कर सकते हैं।अवधि व एक्सटेंशन: योजना की मूल परिपक्वता अवधि 5 वर्ष है, जिसे 3-3 साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।टैक्स लाभ: आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत जमा राशि पर ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ मिलता है।कमाई का गणित: यदि कोई वरिष्ठ नागरिक इसमें अधिकतम ₹30 लाख का निवेश करता है, तो उसे 8.2% की दर से सालाना ₹2,46,000 का ब्याज मिलता है, यानी प्रत्येक तीन महीने में ₹61,500 की गारंटीड आमदनी तय हो जाती है (लगभग ₹20,500 प्रति माह)।2. पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS): हर महीने बंधी-बंधाई पेंशन जैसा रिटर्नयदि आप तिमाही के बजाय हर महीने अपने खाते में निश्चित आमदनी चाहते हैं, तो डाकघर की 'मंथली इनकम स्कीम' (POMIS) सबसे सुरक्षित और सरल विकल्प है। यह योजना इंडिया पोस्ट द्वारा संचालित होती है और इसमें बाजार के किसी भी उतार-चढ़ाव का कोई जोखिम नहीं होता।ब्याज दर: वर्तमान में डाकघर एमआईएस पर 7.4% प्रति वर्ष का ब्याज दिया जा रहा है।ब्याज भुगतान: ब्याज का भुगतान सीधे निवेशक के पोस्ट ऑफिस या लिंक्ड बैंक खाते में प्रति माह (Monthly) किया जाता है।निवेश सीमा: सिंगल अकाउंट में अधिकतम ₹9 लाख और जॉइंट अकाउंट (पति-पत्नी) में अधिकतम ₹15 लाख तक निवेश किया जा सकता है।परिपक्वता अवधि: यह योजना 5 साल की अवधि के लिए होती है, जिसके बाद मूलधन पूरा वापस मिल जाता है या इसे दोबारा निवेश किया जा सकता है।कमाई का गणित: यदि पति-पत्नी मिलकर ₹15 लाख का जॉइंट खाता खोलते हैं, तो 7.4% की दर से सालाना ₹1,11,000 का ब्याज बनता है, जिससे हर महीने निश्चित ₹9,250 की आय घर बैठे प्राप्त होती है। ₹9 लाख के सिंगल खाते पर मासिक ब्याज ₹5,550 बनता है।3. सीनियर सिटीजन बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): मासिक ब्याज और लिक्विडिटी का मजबूत आधारदेश के प्रमुख सरकारी (जैसे SBI, PNB, BoB) और शीर्ष निजी बैंक (HDFC, ICICI, Axis) 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य नागरिकों की तुलना में 0.50% से 0.75% तक अतिरिक्त ब्याज दर प्रदान करते हैं।ब्याज दर: वर्तमान में वरिष्ठ नागरिकों के लिए 2 से 5 वर्ष की बैंक एफडी पर 7.25% से लेकर 7.80% तक ब्याज मिल रहा है, जबकि 80 वर्ष से अधिक के 'सुपर सीनियर सिटीजन्स' के लिए कुछ बैंक 8.00% से अधिक दर दे रहे हैं।पेआउट विकल्प: बैंक एफडी में निवेशक को मासिक (Monthly), तिमाही (Quarterly) या परिपक्वता (Cumulative) पर ब्याज लेने की पूरी आजादी होती है।सुरक्षा कवच: आरबीआई की अनुषंगी संस्था 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (DICGC) के नियमों के तहत प्रत्येक बैंक में मूलधन और ब्याज मिलाकर ₹5 लाख तक की जमा राशि पूरी तरह बीमित और सुरक्षित होती है।टैक्स नियम: आयकर की धारा 80TTB के तहत वरिष्ठ नागरिकों को बैंक व पोस्ट ऑफिस एफडी से मिलने वाले ₹50,000 तक के वार्षिक ब्याज पर पूर्ण टैक्स छूट मिलती है और इस सीमा तक कोई टीडीएस (TDS) नहीं काटा जाता।4. RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स (FRSB): 8.05% का सॉवरेन रिटर्न और कोई अधिकतम सीमा नहींभारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी 'फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स' उन सेवानिवृत्त लोगों के लिए वरदान साबित होते हैं जिनके पास बड़ा फंड है और वे सरकारी सुरक्षा के साथ 8% से अधिक ब्याज कमाना चाहते हैं।ब्याज दर: वर्तमान में इन बॉन्ड्स पर 8.05% वार्षिक ब्याज मिल रहा है। यह दर राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) की दर से 0.35% अधिक पर बांधी गई है, जो हर 6 महीने में समीक्षा के बाद रीसेट होती है।संप्रभु सुरक्षा: यह बॉन्ड सीधे भारत सरकार की संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) के अंतर्गत आता है, इसलिए इसमें डिफॉल्ट का शून्य जोखिम होता है।निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं: जहां SCSS और POMIS में निवेश की अधिकतम सीमाएं हैं, वहीं आरबीआई बॉन्ड्स में न्यूनतम ₹1,000 से शुरुआत कर बिना किसी अधिकतम सीमा के करोड़ों रुपये तक निवेश किए जा सकते हैं।अवधि व पेआउट: इसकी परिपक्वता अवधि 7 वर्ष होती है और ब्याज का भुगतान प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को सीधे बैंक खाते में अर्धवार्षिक आधार पर किया जाता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयु के आधार पर 4 से 6 वर्ष के बाद समयपूर्व निकासी (Premature Withdrawal) की विशेष छूट उपलब्ध है।5. म्यूचुअल फंड सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP): महंगाई को मात देने वाला स्मार्ट कैश-फ्लो मॉडलफिक्स्ड डिपॉजिट और सरकारी योजनाओं की सबसे बड़ी सीमा यह होती है कि उनका रिटर्न फिक्स्ड रहता है, जिससे 6-7% की दर से बढ़ने वाली महंगाई (Inflation) से निपटना मुश्किल हो जाता है। इसके समाधान के लिए वित्तीय विशेषज्ञ रिटायरमेंट फंड का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा हाइब्रिड या कंजरवेटिव म्यूचुअल फंड्स में लगाकर सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) शुरू करने की सलाह देते हैं।कैसे काम करता है SWP: आप अपने चुने हुए फंड में एकमुश्त राशि जमा करते हैं और फंड हाउस को हर महीने एक निश्चित राशि (जैसे ₹10,000 या ₹25,000) आपके बैंक खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश देते हैं।पूंजी वृद्धि और नियमित आय: यदि आपका फंड 9 से 11% का औसत रिटर्न दे रहा है और आप 6 से 7% की दर से मासिक निकासी कर रहे हैं, तो आपके खाते में नियमित आमदनी भी आती रहती है और शेष बची पूंजी भी समय के साथ बढ़ती रहती है।अभूतपूर्व टैक्स लाभ: बैंक एफडी के ब्याज पर पूरी टैक्स स्लैब के अनुसार कर लगता है, लेकिन SWP में केवल आपके द्वारा निकाले गए मुनाफे के हिस्से पर ही कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। इक्विटी ओरिएंटेड हाइब्रिड फंड्स में ₹1.25 लाख तक का सालाना लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों की भारी टैक्स बचत होती है।5 प्रमुख रिटायरमेंट स्कीमों की सीधी तुलनास्कीम का नामवर्तमान ब्याज/रिटर्नब्याज भुगतान का तरीकाअधिकतम निवेश सीमामैच्योरिटी अवधिमुख्य आकर्षणसीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS)8.20% प्रति वर्षत्रैमासिक (Quarterly)₹30 लाख5 वर्ष (3 साल एक्सटेंशन)धारा 80C छूट और सर्वाधिक सरकारी ब्याजपोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS)7.40% प्रति वर्षमासिक (Monthly)₹9 लाख (सिंगल) / ₹15 लाख (जॉइंट)5 वर्षहर महीने निश्चित आय, शून्य जोखिमसीनियर सिटीजन बैंक एफडी7.25% - 7.80%मासिक / तिमाही / परिपक्वताकोई सीमा नहीं (₹5 लाख बीमा)1 से 10 वर्षआपातकाल में तत्काल लिक्विडिटी व लोन सुविधाआरबीआई फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स (FRSB)8.05% प्रति वर्षअर्धवार्षिक (Semi-annual)कोई अधिकतम सीमा नहीं7 वर्ष100% सॉवरेन गारंटी, बड़े फंड के लिए उपयुक्तहाइब्रिड फंड SWP (म्यूचुअल फंड)9.00% - 11.00% (अनुमानित)मासिक (अपनी इच्छानुसार)कोई अधिकतम सीमा नहींओपन-एंडेड (जब तक चाहें)महंगाई से सुरक्षा और न्यूनतम टैक्स देनदारीसुरक्षित रिटायरमेंट पोर्टफोलियो बनाने के 3 सुनहरे नियम: कभी न रखें सारे अंडे एक ही टोकरी मेंवित्तीय सलाहकारों का स्पष्ट सुझाव है कि रिटायरमेंट के समय मिलने वाले पूरे फंड को किसी एक ही स्कीम में लगाने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय एक संतुलित पोर्टफोलियो फॉर्मूला अपनाना चाहिए:बकेट 1 (गारंटीड मंथली खर्च): कुल कॉर्पस का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा SCSS, POMIS और सीनियर सिटीजन बैंक एफडी में लगाएं, जिससे परिवार के अनिवार्य मासिक खर्चे (राशन, बिजली-पानी का बिल, दवाएं) बिना किसी चिंता के सुचारु रूप से चलते रहें।बकेट 2 (दीर्घकालिक व बड़ा फंड): कुल फंड का 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा आरबीआई फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स जैसे 100% सुरक्षित और उच्च ब्याज वाले साधनों में रखें, जो लंबी अवधि के लिए पूंजी को स्थिर विकास दे सकें।बकेट 3 (महंगाई से बचाव व इमरजेंसी फंड): शेष 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा लिक्विड फंड और कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड (SWP मॉडल) में रखें। यह बकेट भविष्य में मेडिकल इमरजेंसी में काम आएगी और साथ ही मुद्रास्फीति को पछाड़कर आपके पैसों की वास्तविक क्रय शक्ति को बनाए रखेगी।
भारत अपने लिए तेल खरीदता है, हमारी मदद के लिए नहीं: रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव
राजदूत की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब पश्चिमी देशों के प्रतिबंध और कड़े हो रहे हैं और उन देशों पर संभावित 'सेकेंडरी टैरिफ' (अतिरिक्त शुल्क) लगाने की बात हो रही है जो रूसी तेल का आयात जारी रखे हुए हैं.
बाइक पर बिना हेलमेट पीछे बैठने वालों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, 3 लाख चालान
गुरुग्राम में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी का बड़ा आंकड़ा सामने आया है. मई से अगस्त 2026 के बीच यातायात पुलिस ने बिना हेलमेट और ट्रिपल राइडिंग के 2 लाख 92 हजार 866 चालान किए. इनमें सबसे ज्यादा कार्रवाई पीछे बैठने वाले लोगों पर हुई. अगस्त में उल्लंघन के मामले सबसे अधिक रहे. पुलिस ने अब नियम तोड़ने वालों पर सख्ती बढ़ाने की चेतावनी दी है.
जंतर मंतर हमले के मामले में Swatantra Bhardwaj से Delhi Police ने पूछे 100 से अधिक सवाल
नयी दिल्ली, छह सितंबर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले के मामले में गिरफ्तार स्वयंभू हिंदूवादी ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत के दौरान उसके वायरल वीडियो दिखाकर कई पुलिस टीम ने पूछताछ की। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि 22 वर्षीय भारद्वाज से हिरासत के दौरान 100 से अधिक सवाल पूछे गए। सूत्र ने बताया कि उसने कुछ सवालों के जवाब दिए, जबकि कई अन्य सवालों का जवाब नहीं दिया। सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने पूछताछ के दौरान भारद्वाज के कई वायरल वीडियो उसे दिखाए और वीडियो में उसके द्वारा दिए गए बयानों तथा किए गए दावों को लेकर उससे सवाल-जवाब किए। सूत्रों ने कहा कि पूछताछ के दौरान भारद्वाज में अपने कृत्य को लेकर कोई पछतावा नहीं दिखा। भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हिरासत में लिए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। शनिवार को दिल्ली की एक अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। उसे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर के आवास पर अपराह्न करीब दो बजे पेश किया गया, जबकि कानूनी सहायता के लिए नियुक्त वकील वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए न्यायाधीश के समक्ष पेश हुआ। यह घटनाक्रम दिल्ली पुलिस द्वारा कथित हमले के संबंध में दर्ज प्राथमिकी में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं और आपराधिक धमकी का आरोप जोड़े जाने के एक दिन बाद हुआ। नाबालिग छात्र कार्यकर्ता की शिकायत पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत एक अलग प्राथमिकी भी दर्ज की गई। छात्रा ने आरोप लगाया कि अपने पिता पर हुए हमले के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उसे ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। पुलिस की कार्रवाई एक वीडियो पॉडकास्ट को लेकर हुए आक्रोश के बाद हुई, जिसमें भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान उसने नाबालिग छात्र कार्यकर्ता के पिता की ‘‘खोपड़ी फोड़ दी’’ थी। बाद में उसने दावा किया कि उसने आत्मरक्षा में ऐसा किया। दिल्ली पुलिस ने इससे पहले कहा था कि छात्र कार्यकर्ता के पिता को लगी चोटें ‘‘साधारण प्रकृति’’ की थीं। अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ता मामले की जांच के तहत भारद्वाज के सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की भी पड़ताल कर रहे हैं। स्वयंभू हिंदुत्व ‘इन्फ्लुएंसर’ के कई समर्थक शनिवार को संसद मार्ग थाने के बाहर एकत्र हुए और भारद्वाज के खिलाफ मामला वापस लेने तथा निष्पक्ष जांच की मांग की। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का एक प्रतिनिधिमंडल, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के साथ, शुक्रवार को पुलिस अधिकारियों से मिला और भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने प्राथमिकी में हत्या के प्रयास और आपराधिक धमकी के आरोप तथा एससी/एसटी अधिनियम की धाराएं जोड़ने की मांग की। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक अलग घटनाक्रम में उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने छात्र कार्यकर्ता के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अधिकारी ने बताया कि इसमें आरोप लगाया गया है कि छात्रा ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट के जरिए हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया। अधिकारी ने कहा कि इस मामले में अभी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।
इसरो के निजीकरण की खबरें पूरी तरह 'बेबुनियाद': स्पेस एजेंसी ने अफवाहों को सिरे से किया खारिज
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण और इसके पुनर्गठन को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया मंचों पर चल रही अटकलों और भ्रामक रिपोर्टों पर स्पेस एजेंसी ने औपचारिक रूप से पूर्ण विराम लगा दिया है। इसरो के शीर्ष नेतृत्व और अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) ने एक स्पष्ट और कड़ा बयान जारी करते हुए इन सभी खबरों को पूरी तरह 'निराधार, तथ्यहीन और बेबुनियाद' करार दिया है। एजेंसी ने दो-टूक शब्दों में साफ किया है कि भारत सरकार या अंतरिक्ष विभाग के पास इसरो के किसी भी केंद्र, संपत्ति या उसके प्रशासनिक ढांचे को निजी हाथों में सौंपने या उसका निजीकरण (Privatisation) करने का कोई प्रस्ताव न तो विचाराधीन है और न ही भविष्य में ऐसी कोई योजना है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया कि देश में लागू किए गए प्रगतिशील अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों (Space Sector Reforms) को कुछ वर्गों द्वारा गलत तरीके से 'निजीकरण' का नाम देकर प्रस्तुत किया जा रहा है। इसरो ने देशवासियों और अंतरिक्ष प्रेमियों को आश्वस्त किया है कि भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी के रूप में उसका दर्जा, स्वायत्तता और संप्रभु महत्व हमेशा पहले की तरह सर्वोच्च बना रहेगा।'हमारी अहमियत हमेशा बरकरार रहेगी': डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन और भविष्य के महा-मिशनों पर इसरो का फोकसइसरो नेतृत्व ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि निजीकरण की बात सोचना भी हास्यास्पद है, क्योंकि आने वाले दशकों में इसरो की राष्ट्रीय और रणनीतिक जिम्मेदारी घटने के बजाय कई गुना बढ़ने जा रही है। एजेंसी ने जोर देकर कहा कि नियमित उपग्रहों के निर्माण और वाणिज्यिक रॉकेट लॉन्चिंग के बोझ से मुक्त होकर इसरो अब अपना पूरा ध्यान और वैज्ञानिक संसाधन उन 'अत्यधिक जटिल और अभूतपूर्व मिशनों' पर केंद्रित कर रहा है जिन्हें कोई भी निजी कंपनी अपने दम पर करने का जोखिम नहीं उठा सकती। भारत का महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन 'गगनयान' (Gaganyaan), चंद्रमा से नमूने वापस लाने का ऐतिहासिक मिशन 'चंद्रयान-4' (Chandrayaan-4), मंगल और शुक्र ग्रह (Shukrayaan) के वैज्ञानिक अन्वेषण तथा वर्ष 2035 तक पृथ्वी की कक्षा में भारत का अपना 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (Bharatiya Antariksh Station - BAS) स्थापित करने जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स का संपूर्ण नेतृत्व पूरी तरह इसरो के कुशल वैज्ञानिकों के हाथों में ही रहेगा। इसके अलावा देश की सीमाओं की रक्षा, सैन्य निगरानी, उन्नत रडार इमेजिंग और आपदा प्रबंधन उपग्रहों के संवेदनशील डेटा का नियंत्रण भी हमेशा इसरो के विशेष अधिकार क्षेत्र में रहेगा, जहां किसी भी निजी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जा सकती।निजीकरण नहीं, बल्कि 'निजी क्षेत्र की भागीदारी': IN-SPACe और NSIL का असली मॉडल समझिएइसरो ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार की 'भारतीय अंतरिक्ष नीति' (Indian Space Policy) का मूल उद्देश्य इसरो का निजीकरण करना नहीं, बल्कि देश में एक मजबूत और आत्मनिर्भर निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम (Private Space Ecosystem) तैयार करना है। इस पूरी व्यवस्था को तीन प्रमुख स्तंभों के जरिए समझा जा सकता है:इसरो (ISRO): देश का मुख्य अनुसंधान एवं विकास (R&D) संस्थान, जो नई तकनीकों, अगली पीढ़ी के हेवी-लिफ्ट रॉकेट (Next-Gen Launch Vehicle - NGLV), डीप-स्पेस रोबोटिक्स और जटिल वैज्ञानिक खोजों का नेतृत्व करेगा।इन-स्पेस (IN-SPACe): भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र एक स्वतंत्र सिंगल-विंडो नियामक संस्था के रूप में कार्य करता है। इसका काम निजी स्टार्टअप्स (जैसे स्काईरूट, अग्निकुल, पिक्सल, ध्रुव स्पेस) को इसरो की सुविधाओं (लॉन्च पैड, टेस्टिंग फैसिलिटी) का उपयोग करने की अनुमति देना और उनके रॉकेट व सैटेलाइट्स को मंजूरी देना है, न कि इसरो को बेचना।न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL): यह अंतरिक्ष विभाग के अधीन भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व वाला सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (CPSE) है। इसका मुख्य कार्य उन परिपक्व तकनीकों (जैसे पीएसएलवी और एसएसएलवी रॉकेट निर्माण) का उद्योग जगत के साथ मिलकर व्यावसायिक उत्पादन करना है, ताकि इसरो के वैज्ञानिक फैक्टरी की तरह रॉकेट बनाने के बजाय नए अनुसंधानों में अपना समय लगा सकें।नासा और स्पेसएक्स मॉडल की तर्ज पर वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में छलांग लगाने की तैयारीइसरो द्वारा अपनाई जा रही यह रणनीति ठीक उसी सफल वैश्विक मॉडल पर आधारित है जिसे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी 'नासा' (NASA) ने दशकों पहले अपनाया था। अमेरिका में नासा ने कभी अपना निजीकरण नहीं किया, बल्कि उसने स्पेसएक्स (SpaceX), बोइंग और नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन जैसी निजी अमेरिकी कंपनियों को व्यावसायिक कार्गो, रॉकेट निर्माण और संचार उपग्रहों के क्षेत्र में उतरने का अवसर दिया। परिणामस्वरूप, नासा का ध्यान जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप, आर्टेमिस मून मिशन और मार्स रोवर्स जैसे विशाल अनुसंधानों पर केंद्रित हो सका, जबकि निजी कंपनियों ने अंतरिक्ष प्रक्षेपण को सस्ता बनाकर वैश्विक बाजार पर कब्जा कर लिया। भारत भी ठीक इसी राह पर अग्रसर है। वर्तमान में 500 अरब डॉलर से अधिक की वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Global Space Economy) में भारत की हिस्सेदारी मात्र 2 से 3 प्रतिशत के आसपास है। भारत सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 8 से 10 प्रतिशत तक पहुंचाना है। यह लक्ष्य तभी हासिल हो सकता है जब देश के निजी स्टार्टअप्स और उद्योग जगत भी अंतरिक्ष की दौड़ में शामिल हों और इसरो उन्हें अपनी मेंटरशिप और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करे।वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के भविष्य पर भ्रम दूर: बजट, भर्ती और बुनियादी ढांचे का लगातार विस्तारइसरो ने अपने कर्मचारियों, इंजीनियरों और वैज्ञानिक संगठनों की चिंताओं को भी पूरी तरह निराधार बताया है। कुछ अफवाहों में यह दावा किया गया था कि निजी कंपनियों के आने से इसरो के कर्मचारियों की नौकरियों, पेंशन और भर्ती प्रक्रियाओं पर असर पड़ेगा। इस पर अधिकारियों ने साफ किया कि इसरो के सभी वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी पहले की तरह ही केंद्र सरकार के स्थायी कार्मिक बने रहेंगे और उनकी सेवा शर्तों में रत्ती भर भी बदलाव नहीं हुआ है। वास्तव में, इसरो के सभी प्रमुख केंद्रों—जैसे तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), बेंगलुरु स्थित यूआर राव उपग्रह केंद्र (URSC), श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC SHAR) और अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (SAC)—के बुनियादी ढांचे का लगातार विस्तार किया जा रहा है। सरकार ने अंतरिक्ष विभाग के वार्षिक बजट आवंटन में लगातार वृद्धि की है ताकि तमिलनाडु के कुलशेखरपट्टिनम में देश के दूसरे स्पेसपोर्ट का निर्माण, सेमी-क्रायोजेनिक इंजनों का विकास और मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रयोगशालाओं को विश्वस्तरीय बनाया जा सके। इसरो ने आम जनता और युवाओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें और देश की इस गौरवशाली संस्था की उपलब्धियों पर गर्व बनाए रखें।
एक पॉडकास्ट में बड़े-बड़े दावे करने वाला स्वतंत्र भारद्वाज अब पुलिस की गिरफ्त में है. पूछताछ के दौरान पुलिस टीमों ने उससे कई बार पूछताछ की है.
पत्नी का कत्ल... 3 घंटे तक बेटे को गोद में लेकर घूमता रहा हेड कांस्टेबल
Lucknow Mahanagar Constable Murder Case: लखनऊ के महानगर में यूपी पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल हिमांशु श्रीवास्तव ने लोहे की रॉड से पत्नी रश्मि की हत्या की. कत्ल के बाद 1 साल के बेटे को लेकर टहलता रहा. पुलिस हिरासत में आरोपी.
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में परिजनों का धरना जारी है. परिजन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, इसी बीच सरकार की ओर से अस्पताल के डीन का तबादला कर दिया गया है.
'भारत और चीन के रिश्तों पर टिका है एशिया का भविष्य', पूर्व जनरल अनिल चौहान का बड़ा बयान
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत और चीन एशिया की बड़ी ताकतें हैं और इस क्षेत्र का भविष्य उनके संबंधों पर निर्भर करता है।
'होर्मुज में अमेरिकी जहाज को निशाना बनाया', ईरान का दावा, US ने बताया झूठ
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका के एक बिना चालक वाले जहाज पर हमला करने का दावा किया है. हालांकि अमेरिका ने इस दावे को झूठा बताते हुए खारिज किया है.
Moscow में Putin से मिलने के बाद Kyiv पहुंचे अमेरिकी दूत, शांति वार्ता पर चर्चा
कीव, छह सितंबर (एपी) अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने रूस -यूक्रेन युद्ध खत्म करने के प्रयासों के तहत रविवार को कीव में “उत्साहजनक” बातचीत की। दोनों की यह यात्रा शनिवार को मास्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बैठक के बाद हुई है। इस बीच दोनों पक्षों ने हवाई हमले तेज कर दिए हैं ऐसे में चार साल से भी ज्यादा समय से जारी जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रयासों की गति धीमी पड़ती दिख रही है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन पिछले छह महीने से ईरान युद्ध पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। रूस हाल में तेज गति से उड़ने में सक्षम जेट इंजन वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है और हवाई हमलों की चेतावनी देने वाले सायरन की आवाज कीव में रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है। सैनिकों को 1,250 किलोमीटर लंबी अग्रिम पंक्ति पर ज्यादा बढ़त हासिल करने में मुश्किल हो रही है। अमेरिकी अधिकारियों के साथ दो दौर की बातचीत के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि लक्ष्य “न्यायपूर्ण व उचित शांति” कायम करना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि “यूक्रेन के खिलाफ दोबारा हमला करने का कभी मौका न बने”। उन्होंने ट्रेन से कीव पहुंचे अमेरिकी वार्ताकारों का यूक्रेन आने के लिए धन्यवाद किया। विटकॉफ और कुशनर की यह पहली यूक्रेन यात्रा है। जेलेंस्की ने कहा कि रविवार को बाद में होने वाली अगली बातचीत में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी शामिल होंगे। विटकॉफ ने कहा, “हमने बहुत सार्थक, महत्वपूर्ण और विस्तृत चर्चा की है और हम बहुत उत्साहित हैं।”कुशनर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि केवल मौजूदा युद्ध को खत्म करने का रास्ता ही न निकाला जाए, बल्कि ऐसी व्यवस्था भी बनाई जाए जिससे लंबे समय तक शांति बनी रहे। शनिवार को मास्को में तीन घंटे से ज्यादा समय तक बंद कमरे में बैठक हुई और यह बिना किसी बड़ी सफलता की घोषणा के खत्म हो गई। पुतिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने बैठक के बाद इसे रचनात्मक, स्पष्ट व उपयोगी बताया, लेकिन किसी विशेष नतीजे के बारे में जानकारी नहीं दी। पुतिन और जेलेंस्की ने बातचीत के दौरान एक-दूसरे की राजधानियों पर हमले रोकने पर सहमति जताई थी। हालांकि अधिकारियों के अनुसार, रविवार तड़के तक दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले किए। यूक्रेन की राज्य आपात सेवा ने बताया कि रविवार तड़के तक यूक्रेन के कई क्षेत्रों में रूस के हमलों में एक व्यक्ति की मौत हुई और कम से कम 10 लोग घायल हुए। जापोरिज्जिया में ड्रोन हमलों में 74-वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन लोग घायल हुए। यूक्रेन की वायुसेना ने रविवार को कहा कि रूस ने रात में 108 ड्रोन और छह मिसाइल दागीं, जिनमें से उसने 82 ड्रोन को रोक दिया। रूस में बेलगोरोद सीमा क्षेत्र के स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि यूक्रेन के ड्रोन हमले में एक वाहन को निशाना बनाया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में रूस के 14 क्षेत्रों, कब्जे वाले क्रीमिया और काला सागर तथा आजोव सागर के इलाकों में 258 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए।
कंगना-विक्रमादित्य में जुबानी जंग, हिमाचल में विकास कार्यों में देरी का जिम्मेदार कौन?
जानकारी के लिए बता दें कि कंगना रनौत और विक्रमादित्य सिंह राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन अब चुनाव से ज्यादा दोनों के बीच जारी रस्साकशी इस बात को लेकर हो चुकी है कि विकास कार्यों में हो रही देरी के लिए जिम्मेदार कौन है-राज्य सरकार या फिर सांसद?
बढ़ती प्याज की कीमतों पर लगाम, सरकार ने 10 दिन में बेचा हजारों टन बफर प्याज
सरकार ने बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 10 दिनों में 17 शहरों में लगभग 4,000 टन बफर प्याज रियायती दर पर बेचा है।
चाय में नहीं आ रहा टपरी वाला स्वाद? इन 9 मसालों से बनाएं चाय मसाला
Homemade Chai Masala: घर पर चाय टपरी जैसी कड़क और स्वादिष्ट नहीं बनती? जानें सूखी अदरक, इलायची, दालचीनी, सौंफ और काली मिर्च जैसे मसालों से होममेड चाय मसाला बनाने का आसान तरीका. इसे एक बार बनाकर एयरटाइट डिब्बे में स्टोर कर लें और जब मन करे, चाय में डालकर हर कप में टपरी जैसा मजेदार स्वाद और खुशबू पाएं.
100 साल पुराना मंदिर तोड़ा... अब सहारनपुर में अवैध मस्जिद ढहाने पर बिलबिलाया पाकिस्तान
सहारनपुर में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को अदालत के आदेश पर प्रशासन ने गिरा दिया. पाकिस्तान ने इसे इस्लामी विरासत को मिटाने का प्रयास बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की.
ISRO में 'सब कुछ प्राइवेट' होने की खबर कितनी सच? एजेंसी ने अब साफ-साफ बताया
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मीडिया में उसके निजीकरण या अंतरिक्ष क्षेत्र में उसकी भूमिका घटाने से जुड़ी खबरों को पूरी तरह से गलत बताया है। आइये जानते हैं कि इसरो ने क्या कहा है....
नागपुर में नितिन गडकरी के बयान से मची खलबली
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नागपुर में दिया बयान चर्चा में है. उन्होंने कहा कि उनके चुनाव में पढ़े लिखे इलाकों की तुलना में अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट इलाकों से ज्यादा वोट मिले. गडकरी के मुताबिक, इन क्षेत्रों में उन्हें करीब 92 प्रतिशत मतदान मिला था. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी से संबंध होने का मतलब उसकी गतिविधियों का समर्थन करना नहीं है. सड़क निर्माण और सामाजिक कामों को उन्होंने समर्थन की वजह बताया.
कमाई पर ध्यान, हॉस्टल बना 'श्मशान'; देखें दिल्ली हादसे की पोल खोलती रिपोर्ट
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को एक दुखद घटना सामने आई. यहां एक बहुमंजिला इमारत गिर गई. इस हादसे में कई छात्र घायल बताए जा रहे हैं. 9 छात्रों को मलबे से निकाला गया है, जबकि दो छात्रों की मौत की खबर है. वहीं अभी भी कई छात्रों के मबले में दबे होने की आशंका है. देखें इस हादसे के पीछे की पोल खोलती आजतक की रिपोर्ट
हार्दिक संग नाम जुड़ा, अमीषा को कहा 'आंटी', मिला जवाब
हार्दिक पंड्या को हाल ही में अमीषा पटेल के साथ पार्टी करते देखा गया, जिसके बाद लोगों ने दोनों का नाम साथ जोड़ना शुरू किया. इसपर एक्ट्रेस काफी नाराज हुईं हैं, उन्होंने ट्रोल्स को जवाब दिया है.
BSP में फिर किनारे हुए आकाश आनंद! छोटे भाई ईशान को बड़ी जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बहुजन समाज पार्टी (BSP) में महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव हुए हैं. पार्टी प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी नियुक्त किया है.
कानपुर में शादी के 2 महीने बाद पति ने की पत्नी की हत्या
कानपुर देहात में घरेलू विवाद के बाद पति ने पत्नी के सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया. गंभीर चोट लगने के बाद 29 वर्षीय सपना उर्फ आसमा की इलाज के दौरान मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी पति गजेंद्र संखवार को हिरासत में लिया है. दोनों ने करीब दो महीने पहले कोर्ट मैरिज की थी. पुलिस घटना की वजह और परिस्थितियों की जांच कर रही है. पोस्टमार्टम प्रक्रिया जारी है.
ट्रेन से Bike कर रहे पार्सल? जान लें रेलवे का नियम, फायदे में रहेंगे
Indian Railway Bike Parcel Rule: अगर आप अपनी बाइक को ट्रेन के जरिए एक शहर से दूसरे शहर भेजने का प्लान कर रहे हैं, तो फिर इसके लिए इंडियन रेलवे द्वारा तय किए गए नियमों को जान लेना आपके लिए जरूरी है.
दिल्ली के सत्य निकेतन में कैसे अचानक ढह गई इमारत? देखें आजतक की रिपोर्ट
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 50 साल पुरानी इमारत गिरने से बड़ा हादसा घट गया. हादसे में कई छात्र घायल बताए जा रहे हैं. 9 छात्रों को मलबे से निकाला गया है, जबकि दो छात्रों की मौत की खबर है. बताया जाता है कि इस 5 मंजिला इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था. आजतक ने घटनास्थल पर पहुंचकर खंगाले तमाम सवालों के जवाब. देखें
दीवार गिरने से बुलंदशहर में बड़ा हादसा, एक ही परिवार के 2 लोगों की मौत
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में रविवार को दीवार गिरने से दर्दनाक हादसा हो गया. अनूपशहर क्षेत्र के ऐंचोरा गांव में मलबे के नीचे दबकर 62 वर्षीय ओमवती और 12 साल की कुमकुम की मौत हो गई. हादसे के बाद परिवार में मातम छा गया. सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया.
ट्राई-सीरीज में होगा भारत-पाक का मुकाबला? ICC ने बनाया प्लान!
भारत और पाकिस्तान के बीच ज्यादा से ज्यादा क्रिकेट मैच कराने के लिए आईसीसी एक नया प्लान तैयार कर रही है. इस खबर के सामने आने के बाद दोनों देशों के क्रिकेट फैन्स बेहद खुश दिखाई पड़ रहे हैं.
ISRO की भूमिका नहीं होगी कम, IN-SPACe प्रमुख Pawan Goenka ने दिया स्पष्टीकरण
नयी दिल्ली, छह सितंबर भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने रविवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की भूमिका किसी भी तरह कम नहीं हो रही है और वह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की आधारशिला बना रहेगा। अंतरिक्ष विभाग के तहत एक स्वायत्त एजेंसी इन-स्पेस गैर-सरकारी संस्थाओं की विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, सक्षम बनाने, अधिकृत करने और उनकी निगरानी का काम करता है। गोयनका ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘2020 से किए गए सुधार भारत के समग्र अंतरिक्ष परिवेशी तंत्र का विस्तार करने से जुड़े हैं। इसका उद्देश्य उद्योग को परिपक्व प्रक्षेपण यानों, उपग्रहों और अन्य प्रणालियों के निर्माण तथा बड़े पैमाने पर उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ने का अवसर देना है।’’उन्होंने कहा कि वहीं, इसरो का ध्यान उन्नत अनुसंधान एवं विकास, वैज्ञानिक मिशन, रणनीतिक अभियानों, नई प्रौद्योगिकियों और ऐसे बुनियादी ढांचे पर रहेगा, जिसे निजी क्षेत्र अपने दम पर विकसित करने में सक्षम नहीं है। गोयनका की यह टिप्पणी इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों द्वारा अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष वी नारायणन को पत्र लिखकर इसरो के विनिर्माण और परिचालन कार्यों को निजी संस्थाओं को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद आई है। चार सितंबर को लिखे पत्र में कर्मचारी संगठनों ने गोयनका की 21 अगस्त की टिप्पणियों का उल्लेख किया। गोयनका ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कथित तौर पर कहा था, ‘‘अंतत: इसरो कोई भी प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा और न ही किसी प्रक्षेपण यान का निर्माण करेगा। यह सब निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) द्वारा किया जाएगा।’’कर्मचारी संगठनों ने दावा किया कि इन टिप्पणियों के बाद अंतरिक्ष विभाग की ओर से कोई ऐसी आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई जिसमें स्वीकृत नीति, उसके कानूनी और प्रशासनिक आधार, उसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया तथा मौजूदा कर्मचारियों और भविष्य की सरकारी भर्तियों पर पड़ने वाले असर को स्पष्ट किया गया हो। पत्र में कहा गया है, ‘‘इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय संपत्ति है। इसका हस्तांतरण पारदर्शी एवं जवाबदेह होना चाहिए तथा यह रणनीतिक, सुरक्षा और रोजगार संबंधी पहलुओं के अनुरूप होना चाहिए तथा कर्मचारियों को इसकी जानकारी समाचार पत्रों की खबरों के जरिये नहीं मिलनी चाहिए।’’गोयनका ने रविवार को इससे पहले सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत को 2030 तक हर साल 50 प्रक्षेपण के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए इसरो और निजी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इतने बड़े लक्ष्य को कोई एक संगठन अकेले हासिल नहीं कर सकता।’’इन-स्पेस के अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि इसरो का अनुसंधान क्या संभव है, इसकी सीमाओं को लगातार आगे बढ़ाता रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘निजी उद्योग को इस गति को बड़े पैमाने पर विनिर्माण में बदलना होगा—अधिक रॉकेट, अधिक उपग्रह, अधिक प्रक्षेपण क्षमता और नई प्रौद्योगिकियां।
हाई कोर्ट्स में जजों की नियुक्ति पर फैसला बाकी, कोलेजियम की 25 सिफारिशें सरकार के पास लंबित
सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम द्वारा पांच हाई कोर्टों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए अनुशंसित 25 नाम सरकार के पास लंबित हैं। इनमें वकील सौरभ कृपाल का मामला अक्टूबर 2017 से सबसे पुराना लंबित है, जिनकी फाइल कोलेजियम द्वारा दोहराई गई सिफारिश के बाद भी अटकी है।
किसानों पर पड़ सकता है महंगी चीनी का बोझ, समय से पहले गन्ना पेराई से वजन और रिकवरी दर पर पड़ेगा असर
केंद्र सरकार चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए गन्ने की पेराई एक महीना पहले शुरू करने पर जोर दे रही है। हालांकि, इससे किसानों को गन्ने के कम वजन और रिकवरी दर के कारण आर्थिक नुकसान हो सकता है।
नोएडा छलेरा बांगर गांव के 600 भू-स्वामियों को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया जमीन का मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के छलेरा बांगर गांव के 600 से अधिक भू-मालिकों को बड़ी राहत दी है, उनकी अधिग्रहित जमीन का मुआवजा 340 रुपये से बढ़ाकर 403 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया है।
दिल्ली इमारत हादसे पर अमित शाह ने दिए सख्त निर्देश
दिल्ली के सत्य निकेतन में भारी बारिश के बीच बहुमंजिला इमारत ढह गई. हादसे में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौके पर पहुंचीं. एनडीआरएफ, पुलिस और दमकल की टीमें राहत बचाव में जुटी हैं. इमारत में पीजी चलने से छात्रों के दबे होने की आशंका भी जताई गई है. जांच लगातार जारी है.
निजी एयरलाइनों के किराये पर नकेल कसने की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट करेगा याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट निजी एयरलाइनों द्वारा हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्कों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।
राकेश कुमार शर्मा: 1,984 अमानतें लौटाकर बनाया भरोसे का रिकॉर्ड, सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी है सेवा
नई दिल्ली — 6 सितंबर, 2026 — नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर राकेश कुमार शर्मा ने 1998 से शुरू कर 6 अप्रैल 2016 से व्यवस्थित रिकॉर्ड रखते हुए 1,984 यात्रियों की अमानतें उनके मालिकों तक वापस पहुंचाई हैं। इनमें 42 विदेशी यात्री और 18 देशों के लोग शामिल हैं। उनकी उपलब्धि India Book of Records और Asia Book of Records में दर्ज है; अनुमानित ₹5 करोड़ से अधिक का सामान लौटाया गया। सेवानिवृत्ति के बाद भी यह सेवा जारी है।
बांग्लादेशियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ पुलिस का बड़ा एक्शन, 23 संदिग्ध हिरासत में
छत्तीसगढ़ में बांग्लादेशी अप्रवासियों के खिलाफ पुलिस ने अभियान छेड़ा हुआ है. बिलासपुर SSP ने बताया कि इस अभियान के तहत कुल 1162 लोगों की जांच की गई, जिसमें 23 लोग संदिग्ध पाए गए.
बारिश में सीलन और बदबू से हैं परेशान? घर ले आएं ये 5 इंडोर प्लांट्स
मानसून में घर के अंदर नमी और उमस बढ़ जाती है. ऐसे में कुछ तरीके के इंडोर पौधे घर को फ्रेश और हरा-भरा लुक देते हैं. इस मौसम में पौधों में ड्रेनेज का ध्यान रखें और ज्यादा पानी देने से बचाकर घर का वेंटिलेशन सही बनाए रखें.
SSB में 10 बार हुआ फेल, फिर लेफ्टिनेंट बनकर ही माना बिहार का लड़का, हार को जीत में कैसे बदला?
बिहार के नवादा जिले के रहने वाले विजेता विशाल ने लगातार 10 बार SSB इंटरव्यू में असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी. 11वें प्रयास में सफलता हासिल कर वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने और अपने पिता का सेना अधिकारी बनने का अधूरा सपना पूरा किया.
Tier-2 और Tier-3 शहरों के Startup में भारी नवाचार क्षमता, बोले Jitendra Singh
कोलकाता, छह सितंबर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को ‘‘तेजी से विस्तार कर रहे’’ भारत के स्टार्टअप परिवेशी तंत्र को महानगरों से आगे ले जाने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों की नवाचार क्षमता को पहचानने की आवश्यकता बढ़ रही है। सिंह ने यहां ‘आरआईएसई (रिसर्च, इनोवेशन, स्टार्ट-अप एंड एंटरप्रेन्योरशिप) कॉन्क्लेव 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि देश में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को प्रयोगशालाओं से बाजार तक तेजी से पहुंचाने के लिए विज्ञान, स्टार्टअप और उद्योग के बीच मजबूत संबंध स्थापित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘टीयर-2 और टीयर-3 शहरों की नवाचार क्षमता को पहचानने की जरूरत बढ़ रही है। भारत के 50-60 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप महानगरों से नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘छोटे शहरों के युवा नवोन्मेषक तेजी से बड़े शहरों के अपने समकक्षों की बराबरी कर रहे हैं और कई मामलों में उनसे बेहतर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक संस्थानों और नवाचार परिवेशी तंत्र के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे इन युवाओं तक पहुंचें, न कि उनसे स्थापित प्रौद्योगिकी केंद्रों तक आने की उम्मीद करें।’’उन्होंने यह भी कहा कि भारत करीब 2,40,000 ‘स्टार्ट-अप’ के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ‘स्टार्ट-अप’ परिवेशी तंत्र बनकर उभरा है। सिंह ने कहा कि आरआईएसई कॉन्क्लेव के आयोजन स्थल के रूप में कोलकाता का चयन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि भारत की वैज्ञानिक और शैक्षणिक यात्रा में इस शहर का ऐतिहासिक योगदान रहा है। बंगाल की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और संस्थान निर्माण की लंबी परंपरा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कोलकाता ने कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों और संस्थानों को जन्म दिया तथा उनका पोषण किया है, जिन्होंने भारत की बौद्धिक और वैज्ञानिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सिंह ने पश्चिम बंगाल की वैज्ञानिक और बौद्धिक विरासत को पुनर्स्थापित करने का आह्वान करते हुए कहा कि कोलकाता ऐतिहासिक रूप से ‘‘नए चलन की शुरुआत करने वाला’’ रहा है और देश के भविष्य को आकार देने में अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि भारत के वैश्विक प्रौद्योगिकी और स्टार्ट-अप के प्रमुख शक्ति केंद्र बनने की यात्रा में उसके ऐतिहासिक उत्कृष्टता केंद्रों की विरासत को फिर से हासिल करना भी शामिल होना चाहिए। डॉ. बिधान चंद्र रॉय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी समेत अन्य प्रमुख हस्तियों का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि मौजूदा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह इस असाधारण विरासत को आगे बढ़ाए और कोलकाता को वैज्ञानिक एवं तकनीकी उत्कृष्टता के प्रमुख केंद्र के रूप में फिर से स्थापित करने में मदद करे। सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार का ‘समग्र सरकारी’ दृष्टिकोण अब तेजी से ‘समग्र विज्ञान’ दृष्टिकोण में बदल रहा है, जिसके तहत विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण जगत और उद्योग को एक साथ लाया जा रहा है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने हाल के वर्षों में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए उन क्षेत्रों में नए अवसर पैदा किए हैं, जो पहले बड़े पैमाने पर उद्योग के लिए बंद थे। इनमें अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी शामिल हैं। इन क्षेत्रों को खोलने से स्टार्टअप और कारोबारी इकाइयों के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी विकास में भाग लेने का नया माहौल बना है।’’मंत्री ने उद्योग जगत से आगे आने और भारतीय प्रयोगशालाओं से विकसित हो रही स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को अपनाने, समर्थन देने, वित्त पोषित करने तथा उनका व्यावसायीकरण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक परियोजनाओं और स्टार्टअप को अलग-थलग रहकर कायम नहीं रखा जा सकता तथा उनके लिए कारोबार और उद्योग के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध जरूरी हैं। सिंह ने कहा कि पूर्वी भारत की वैज्ञानिक एवं तकनीकी ताकत, उसके मजबूत शैक्षणिक और औद्योगिक आधार के साथ मिलकर देश की प्रौद्योगिकी आधारित वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के प्रमुख माध्यम बन सकते हैं, जबकि इस्पात, एल्युमिनियम, खनन, जूट, सूचना प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में स्थापित उद्योग स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर अपनाने में महत्वपूर्ण भागीदार बन सकते हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, सम्मेलन में आठ समझौता ज्ञापन (एमओयू) और चार प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहल प्रमुख आकर्षण रहीं।
DM ने घर पहुंचकर सुनी दिव्यांग ज्योति की पुकार, दिया ट्राई साइकिल
बलिया के डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने दिव्यांग युवती ज्योति की परेशानी को समझते हुए उसके घर पहुंचकर बैटरी चालित ट्राई साइकिल दी. आने-जाने की दिक्कत के कारण 8वीं के बाद उसकी पढ़ाई छूट गई थी. अब DM ने स्कूल में दाखिला कराने का निर्देश दिया है, जिससे शिक्षक बनने का उसका सपना फिर से उम्मीदों के साथ आगे बढ़ सके.

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