मुरमुरे से बनाएं कुरकुरी टिक्की, शाम की चाय के साथ लगेगी बेहद टेस्टी
Murmura Tikki Recipe: शाम की चाय के साथ कुछ कुरकुरा और चटपटा खाने का मन है तो मुरमुरे से बनी टिक्की ट्राई कर सकते हैं. बेसन, चावल के आटे और मसालों से तैयार होने वाली यह टिक्की बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम बनती है.
मूसेवाला, दिशा पाटनी, अब टाइगर श्रॉफ... फिर चर्चा में जिगाना पिस्तौल
टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग में 7.62 मिमी के सात राउंड दागे गए. पुलिस को तुर्की की जिगाना पिस्तौल का शक है. इसी का इस्तेमाल सिद्धू मूसेवाला, अतीक अहमद, बाबा सिद्दीकी के मर्डर में हुआ था.
जिगाना पिस्टल में खराबी और सात गोलियां... टाइगर श्रॉफ गोलीकांड में नया खुलासा
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में हथियार को लेकर नई जानकारी मिली है. शुरुआती जांच में एक विदेशी पिस्तौल के इस्तेमाल का शक जताया गया है.
SUV जैसी ताकत... हाई-टेक फीचर्स! तूफानी बाइक लॉन्च, कीमत इतनी
Kawasaki Z1100 को कंपनी ने नए अपडेट के साथ इंडियन मार्केट में लॉन्च किया है. इस बाइक में 1,099 सीसी का इनलाइन-फोर, लिक्विड-कूल्ड इंजन दिया गया है. जो किसी कॉम्पैक्ट एसयूवी की तरह 136hp की पावर जेनरेट करता है.
10,000mAh बैटरी वाला Vivo फोन कल से बिकेगा, बना चुका है वर्ल्ड रिकॉर्ड
Vivo S2 FE की बिक्री भारत में कल यानी 19 अक्टूबर से शुरू हो रही है. इस फोन में वैसे तो काफी कुछ है, लेकिन ये फोन 10000mAh बैटरी की वजह से भी चर्चा में है. आइए जानते हैं इस फोन में क्या कुछ है खास.
Dushyant Gautam ने संभाला Sikkim के नए Governor का पद, Gangtok में ली शपथ
दुष्यंत कुमार गौतम ने सोमवार को सिक्किम के 19वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। उन्होंने ओम प्रकाश माथुर का स्थान लिया है। सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए. मोहम्मद मुश्ताक ने यहां लोक भवन में आयोजित समारोह में गौतम को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, मंत्रिपरिषद के सदस्य, न्यायाधीश, विधायक और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इससे पहले, मुख्य सचिव आर. तेलांग ने राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति आदेश पढ़कर सुनाया। गौतम ने बाद में औपचारिक रूप से राज्य के संवैधानिक प्रमुख का कार्यभार संभाला। समारोह के बाद मुख्यमंत्री तमांग ने पारंपरिक ‘खादा’ (स्कार्फ) भेंट कर नए राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने गौतम का विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मंत्रिमंडल के सदस्यों, न्यायाधीशों, विधायकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से परिचय कराया। इसके बाद सिक्किम सशस्त्र पुलिस ने गौतम को औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया था। माथुर ने 31 जुलाई 2024 को पदभार संभाला था और वह राज्य के 18वें राज्यपाल थे।
गाजियाबाद में नाले के ऊपर बनेगी सड़क, खुलेगा ग्रेटर नोएडा वेस्ट का रास्ता
Ghaziabad Shahberi Road Project: गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बीच 131 करोड़ की लागत से नाले पर बनेगी 12 मीटर चौड़ी सड़क. मेयर सुनीता दयाल ने दी पूरी जानकारी. पढ़ें रिपोर्ट.
Congress नेता Shama Mohamed ने Asaduddin Owaisi पर वार, भारत में पाकिस्तान बनाने का लगाया आरोप
कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने सोमवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने युवा मुसलमानों को नेता के रूप में सशक्त बनाने की बात कही थी। मोहम्मद ने सवाल उठाया कि ओवैसी के गृह राज्य तेलंगाना में, AIMIM विधानसभा की 119 सीटों में से केवल 9 सीटों पर ही चुनाव क्यों लड़ती है। ANI से बातचीत में, मोहम्मद ने ओवैसी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि तेलंगाना में 119 सीटें हैं। AIMIM असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी है और यह तेलंगाना से ही आती है। तो फिर वे वहां सिर्फ 9 सीटों पर ही चुनाव क्यों लड़ते हैं? वे सभी 119 सीटों पर चुनाव क्यों नहीं लड़ते और मुस्लिम युवाओं को टिकट क्यों नहीं देते? इसे भी पढ़ें: Congress में लौटे Ram Sharan Nautiyal, कुमारी शैलजा ने किया स्वागत, BJP पर साधा निशाना उन्होंने तेलंगाना के बाहर अपनी राजनीतिक गतिविधियों का विस्तार करने के लिए ओवैसी की आलोचना करते हुए कहा कि वह दूसरे राज्यों में जाकर इस तरह की बातें क्यों कर रहे हैं और डींगें क्यों हांक रहे हैं? मुझे लगता है कि वह भारत के भीतर ही एक पाकिस्तान बनाना चाहते हैं; असदुद्दीन ओवैसी यही हैं—यह ज़हरीला है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले, रविवार को रामपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी युवा मुसलमानों को नेता के रूप में उभरने और पीड़ितों के लिए न्याय मांगने का मंच दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समुदाय में प्रतिभा और क्षमता तो है, लेकिन उन्हें मौके नहीं मिल रहे हैं। इसे भी पढ़ें: देश और दुनिया की दोपहर की बड़ी खबरें, पढ़ें प्रमुख राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम उन्होंने कहा कि हम नेहरू, गांधी या यादव में से किसी को अपना नेता नहीं बनाएंगे। हमारे ये युवा बेटे-बेटियां सबसे आगे होंगे... युवा मुसलमानों में भी उतनी ही क्षमता है जितनी अन्य समुदायों के लोगों में होती है। आपमें भी प्रतिभा है, लेकिन आपको कोई मंच नहीं दिया जाता। ओवैसी ने आगे कहा कि AIMIM युवाओं को नेतृत्व की भूमिका निभाने और शोषितों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का मौका दे रही है। उन्होंने कहा कि AIMIM आपको आगे आने, नेता बनने, भारत का नेतृत्व करने और शोषित समुदाय को न्याय दिलाने के लिए एक मंच दे रही है। AIMIM यही काम कर रही है। आज इसी वजह से वे AIMIM से परेशान हैं। असल दिक्कत यह है कि वे 'अब्दुल' को नेता नहीं बनने देना चाहते।
नई दिल्ली/पटना/लखनऊ (बिजनेस डेस्क): आज के डिजिटल दौर में आधार कार्ड के बाद अगर कोई दस्तावेज सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, तो वह है 'पैन कार्ड' (PAN Card - Permanent Account Number)। चाहे बैंक में नया खाता खुलवाना हो, शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करना हो, प्रॉपर्टी खरीदनी हो या फिर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना हो, बिना पैन कार्ड के कोई भी वित्तीय काम पूरा नहीं हो सकता। आजकल उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली और मुंबई तक, माता-पिता अपने बच्चों के नाम पर सुकन्या समृद्धि योजना, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए बचपन में ही उनका 'माइनर पैन कार्ड' (Minor PAN Card) बनवा देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब बच्चा 18 साल का यानी बालिग (Adult) हो जाता है, तो उसका वह पुराना माइनर पैन कार्ड आधिकारिक और कानूनी कामों के लिए पूरी तरह से मान्य नहीं रहता? जी हां, आयकर विभाग (Income Tax Department) के नियमों के मुताबिक, 18 साल की उम्र पूरी होते ही माइनर पैन कार्ड को अपडेट करके 'मेजर पैन कार्ड' (Major PAN Card) में बदलवाना अनिवार्य होता है। आइए इस खास रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि बच्चों के पैन कार्ड पर किसकी फोटो होती है और बालिग होने पर इसे घर बैठे ऑनलाइन कैसे अपडेट किया जा सकता है।माइनर पैन कार्ड पर क्यों नहीं होती फोटो और सिग्नेचर? समझें नियमअक्सर लोगों के मन में यह भ्रम होता है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के पैन कार्ड पर उनके माता-पिता की फोटो छपी होती है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, जब किसी नाबालिग (18 वर्ष से कम आयु) का माइनर पैन कार्ड बनाया जाता है, तो उस कार्ड पर न तो बच्चे की फोटो छपी होती है और न ही माता-पिता की फोटो होती है। कार्ड पर फोटो वाली जगह खाली रहती है या वहां स्पष्ट रूप से 'Minor' लिखा होता है। इसी तरह उस पर बच्चे के हस्ताक्षर (Signature) के बजाय उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक (Representative Assessee) के सिग्नेचर होते हैं, क्योंकि नाबालिग बच्चा कानूनी रूप से खुद किसी वित्तीय दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत नहीं होता। यही वजह है कि यह माइनर पैन कार्ड किसी भी सरकारी काम या बैंक केवाईसी (Bank KYC) में एक वैध 'फोटो आईडी प्रूफ' (Photo Identity Proof) के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जैसे ही युवा 18 साल की दहलीज पार करता है, उसे अपने पैन कार्ड पर अपनी ताजा फोटो और अपने खुद के सिग्नेचर अपडेट कराने पड़ते हैं।18 साल का होने पर अपडेट कराने से क्या पैन नंबर बदल जाता है?जब भी कोई युवा अपने माइनर पैन कार्ड को मेजर पैन कार्ड में अपडेट कराने जाता है, तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या नया कार्ड बनने पर उसका 10 अंकों का अल्फान्यूमेरिक पैन नंबर (PAN Number) बदल जाएगा? तो इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है—बिल्कुल नहीं! आयकर विभाग एक व्यक्ति को जीवन भर के लिए केवल एक ही पैन नंबर जारी करता है। जब आप 18 साल के होने पर अपने पैन कार्ड को अपडेट (PAN Card Correction/Update) कराते हैं, तो आपका पुराना पैन नंबर पहले जैसा ही रहता है। बदलाव केवल इतना होता है कि विभाग के डेटाबेस से आपके माता-पिता को 'प्रतिनिधि' (Representative) के पद से हटा दिया जाता है और नए प्लास्टिक पीवीसी कार्ड पर आपकी अपनी पासपोर्ट साइज फोटो और आपके खुद के डिजिटल सिग्नेचर छपकर आ जाते हैं, जिसके बाद वह जीवन भर के लिए एक वैध आईडी प्रूफ बन जाता है।माइनर पैन कार्ड को मेजर में बदलने के लिए कौन से डॉक्यूमेंट्स लगेंगे?अगर आपकी या आपके बच्चे की उम्र 18 साल पूरी हो चुकी है, तो पैन कार्ड अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले कुछ जरूरी दस्तावेज (Documents Required) अपने पास स्कैन करके रख लें। इसमें पहचान के प्रमाण (Proof of Identity), पते के प्रमाण (Proof of Address) और जन्मतिथि के प्रमाण (Proof of Date of Birth) की जरूरत होती है। इन तीनों के लिए सबसे आसान और सर्वमान्य दस्तावेज आपका अपडेटेड 'आधार कार्ड' (Aadhaar Card) है। इसके अलावा आप वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, 10वीं कक्षा की मार्कशीट (जन्मतिथि के लिए), बैंक पासबुक या निवास प्रमाण पत्र का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही, आपको अपनी दो ताजा रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो और एक सफेद कागज पर काले या नीले पेन से किए गए अपने साफ हस्ताक्षर की स्कैन कॉपी (JPEG फॉर्मेट में) और पुराने माइनर पैन कार्ड की कॉपी की आवश्यकता होगी।घर बैठे ऑनलाइन माइनर पैन कार्ड को अपडेट करने का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेसमाइनर पैन कार्ड को मेजर में अपडेट करने के लिए आपको किसी सरकारी दफ्तर या एजेंट के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप से NSDL (अब Protean) या UTIITSL की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए इसे मात्र 10 मिनट में अपडेट कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले Protean (onlineservices.nsdl.com) के पोर्टल पर जाएं। वहां 'Application Type' में जाकर 'Changes or Correction in existing PAN Data' के विकल्प को चुनें। इसके बाद 'Category' में 'Individual' सिलेक्ट करें और अपना पूरा नाम, जन्मतिथि, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और अपना पुराना पैन नंबर दर्ज करके सबमिट करें। अब आपकी स्क्रीन पर एक टोकन नंबर जनरेट होगा, उसके जरिए आगे बढ़ते हुए 'Submit scanned images through e-Sign' का विकल्प चुनें। फॉर्म में नीचे जाने पर आपको 'Photo Mismatch' और 'Signature Mismatch' के दो बॉक्स दिखाई देंगे, इन दोनों पर टिक (Tick) करना बिल्कुल न भूलें। इसके बाद अपनी ताजा फोटो, सिग्नेचर और आधार कार्ड की पीडीएफ अपलोड करें।कितनी लगेगी फीस और कितने दिनों में घर पहुंचेगा नया पैन कार्ड?सारे दस्तावेज और फोटो-सिग्नेचर अपलोड करने के बाद आपको फॉर्म सबमिट करना होगा और ऑनलाइन शुल्क (Fee) का भुगतान करना होगा। यदि आप भारत के किसी भी राज्य या शहर के पते पर अपना भौतिक पैन कार्ड (Physical PAN Card) मंगवाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको मात्र 107 रुपये से 110 रुपये के आसपास का ऑनलाइन पेमेंट (UPI, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से) करना होगा। पेमेंट सफल होने के बाद आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, जिससे आपका फॉर्म ई-वेरीफाई (e-Verify) हो जाएगा। इसके बाद आपको एक 15 अंकों का एकनॉलेजमेंट नंबर (Acknowledgement Number) मिलेगा, जिससे आप अपने पैन कार्ड का स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं। आवेदन के मात्र 3 से 5 दिनों के भीतर आपकी ईमेल आईडी पर नया 'ई-पैन' (e-PAN) पीडीएफ फॉर्मेट में आ जाएगा, और करीब 15 से 20 दिनों के अंदर स्पीड पोस्ट के जरिए चमचमाता हुआ नया मेजर पैन कार्ड आपके घर के पते पर डिलीवर हो जाएगा।
Drinking Water Standing Up: क्या वाकई खड़े होकर पानी पीने से खराब हो जाते हैं घुटने और जोड़? जानें दादी-नानी की इस बात पर क्या कहते हैं डॉक्टर और साइंस!मेटा डिस्क्रिप्शन (Meta Description):क्या आपको भी बड़े-बुजुर्ग खड़े होकर पानी पीने से टोकते हैं? क्या सच में खड़े होकर पानी पीने से घुटनों में दर्द (Knee Pain) और गठिया की बीमारी होती है? जानिए आयुर्वेद और मॉडर्न मेडिकल साइंस के एक्सपर्ट्स ने इस पर क्या बड़ा खुलासा किया है।नई दिल्ली/लखनऊ/जयपुर (हेल्थ डेस्क): बचपन से लेकर आज तक हम सभी ने अपने घर के बड़े-बुजुर्गों और दादी-नानी से एक बात जरूर सुनी है कि खड़े होकर पानी मत पियो, वरना बुढ़ापे में घुटने खराब हो जाएंगे और जोड़ों में दर्द रहने लगेगा। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली और मुंबई तक, भारत के लगभग हर घर में इस नियम को बहुत सख्ती से माना जाता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब लोग ऑफिस के लिए लेट हो रहे होते हैं, जिम में वर्कआउट कर रहे होते हैं या सफर में होते हैं, तो अक्सर बोतल उठाकर खड़े-खड़े ही गटागट पानी पी जाते हैं। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि क्या वाकई खड़े होकर पानी पीने से हमारे घुटनों (Knees) और जोड़ों (Joints) को कोई नुकसान पहुंचता है? या फिर यह सदियों से चला आ रहा सिर्फ एक अंधविश्वास और मिथक (Myth) है? आज की इस विशेष स्वास्थ्य रिपोर्ट में हम आयुर्वेद और आधुनिक मेडिकल साइंस (Modern Medical Science) के जाने-माने एक्सपर्ट्स व डॉक्टरों की राय के जरिए इस सवाल की पूरी सच्चाई आपके सामने रखेंगे।खड़े होकर पानी पीने और घुटनों के दर्द पर क्या कहता है मॉडर्न मेडिकल साइंससबसे पहले बात करते हैं आधुनिक चिकित्सा विज्ञान यानी एलोपैथी के डॉक्टरों और ऑर्थोपेडिक सर्जन्स (हड्डी रोग विशेषज्ञों) की। मेडिकल साइंस के एक्सपर्ट्स का साफ तौर पर कहना है कि खड़े होकर पानी पीने से घुटनों के खराब होने या जोड़ों में दर्द (Joint Pain) होने का कोई भी सीधा वैज्ञानिक प्रमाण (Scientific Evidence) मौजूद नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक, जब हम पानी पीते हैं, तो वह हमारी भोजन नली (Esophagus) से होते हुए सीधे पेट (Stomach) में जाता है और वहां से आंतों के जरिए अवशोषित होकर खून में मिलता है और अंत में किडनी द्वारा फिल्टर किया जाता है। मानव शरीर में ऐसी कोई भी पाइपलाइन नहीं है जिससे पिया गया पानी सीधे गुरुत्वाकर्षण बल (Gravity) के कारण फिसलकर घुटनों में चला जाए। घुटनों में दर्द होने के असली वैज्ञानिक कारण बढ़ती उम्र, शरीर में कैल्शियम और विटामिन D की कमी, यूरिक एसिड का बढ़ना, मोटापा (Obesity), आर्थराइटिस (गठिया) या फिर घुटनों की कार्टिलेज का घिसना होता है। इसलिए मेडिकल साइंस की नजर में खड़े होकर पानी पीने से घुटने खराब होने की बात महज एक मिथक है।आयुर्वेद के अनुसार खड़े होकर पानी पीना क्यों माना जाता है खतरनाकभले ही मॉडर्न साइंस घुटनों के दर्द से इसका सीधा संबंध न मानता हो, लेकिन भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति 'आयुर्वेद' (Ayurveda) में खड़े होकर पानी पीने (Drinking Water While Standing) को सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक बताया गया है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स के अनुसार, मानव शरीर वात, पित्त और कफ—इन तीन दोषों पर टिका होता है। जब कोई व्यक्ति खड़े होकर और तेजी से पानी पीता है, तो शरीर में 'वात दोष' (Vata Dosha) का संतुलन बिगड़ जाता है। आयुर्वेद में वात दोष को ही शरीर के सभी प्रकार के दर्द, विशेषकर जोड़ों के दर्द, गठिया (Arthritis) और घुटनों की समस्याओं का मुख्य जनक माना गया है। इसके अलावा, आयुर्वेद कहता है कि खड़े होने की मुद्रा में हमारा शरीर और मांसपेशियां तनाव (Tension) में होती हैं। ऐसे में जब हम तेजी से पानी पीते हैं, तो शरीर में तरल पदार्थों (Fluids) का संतुलन बिगड़ता है, जिससे लंबे समय बाद जोड़ों में मौजूद लुब्रिकेंट (ग्रीस) पर बुरा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि हमारे बुजुर्गों ने आयुर्वेद के इसी सिद्धांत को सरल भाषा में घुटनों के दर्द से जोड़कर हमें बैठकर पानी पीने की सलाह दी थी।पाचन तंत्र और किडनी पर पड़ता है सीधा और बुरा असरहेल्थ एक्सपर्ट्स और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पेट रोग विशेषज्ञ) इस बात पर एकमत हैं कि खड़े होकर पानी पीने से भले ही घुटने तुरंत खराब न हों, लेकिन इससे हमारा पाचन तंत्र (Digestive System) जरूर प्रभावित होता है। जब हम खड़े होकर बड़ी-बड़ी घूंट में पानी पीते हैं, तो पानी बहुत तेजी से अन्नप्रणाली से गुजरते हुए पेट के निचले हिस्से की दीवार (Lower Stomach Wall) से टकराता है। इस तेज बहाव के कारण पेट के आसपास के अंगों और पाचन नली को झटका लगता है। लगातार ऐसा करने से पेट में एसिडिटी, सीने में जलन (Heartburn), अपच, गैस और पेट फूलने (Bloating) जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इतना ही नहीं, पानी के साथ-साथ हवा भी पेट में चली जाती है। इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि खड़े होकर तेजी से पानी पीने पर पानी बिना ठीक से फिल्टर हुए किडनी (Kidneys) से तेजी से गुजर जाता है, जिससे खून और मूत्राशय (Bladder) में गंदगी जमा होने का खतरा बढ़ सकता है और आपकी प्यास भी पूरी तरह नहीं बुझती।नर्वस सिस्टम और फेफड़ों के लिए भी सही नहीं है यह आदतडॉक्टरों के मुताबिक, जब हम खड़े रहते हैं, तो हमारा नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) 'फाइट ऑर फ्लाइट' मोड में यानी थोड़ा अलर्ट और तनावपूर्ण स्थिति में रहता है। इसके विपरीत, जब हम आराम से बैठते हैं, तो हमारा 'पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम' एक्टिव हो जाता है, जो शरीर को रिलैक्स करता है। शांत और रिलैक्स अवस्था में पिया गया पानी ही शरीर के अंगों को सही तरीके से हाइड्रेट कर पाता है। इसके अलावा, खड़े होकर हरबड़ी में पानी पीने से सांस की नली (Windpipe) और भोजन नली में ऑक्सीजन की सप्लाई कुछ सेकंड के लिए बाधित होती है। कई बार खड़े होकर तेजी से पानी पीते समय पानी सांस की नली में जाने का भी खतरा रहता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'चोकिंग' (Choking) या धसका लगना कहते हैं, जो फेफड़ों और दिल के लिए जोखिम भरा हो सकता है।पानी पीने का सबसे सही और वैज्ञानिक तरीका क्या है? जानें एक्सपर्ट टिप्सअगर आप चाहते हैं कि आपके द्वारा पिया गया पानी आपके शरीर के लिए अमृत का काम करे, तो एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए इन नियमों को आज से ही अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें। सबसे पहला नियम यह है कि जब भी पानी पिएं, कुर्सी पर या जमीन पर आराम से बैठकर ही पिएं, इससे आपकी मांसपेशियां और नर्वस सिस्टम शांत रहते हैं और पाचन बेहतरीन होता है। दूसरा नियम यह है कि पानी को कभी भी बोतल से ऊपर से गटागट न पिएं; हमेशा गिलास में लेकर छोटे-छोटे घूंट (Sip by Sip) भरकर धीरे-धीरे पिएं। ऐसा करने से मुंह में मौजूद लार (Saliva), जो कि क्षारीय (Alkaline) होती है, पानी के साथ मिलकर पेट में जाती है और पेट के एसिड को शांत रखती है। तीसरा नियम, फ्रिज का बहुत ज्यादा ठंडा (Chilled Water) पानी पीने से बचें, हमेशा सामान्य तापमान (Room Temperature) या हल्का गुनगुना पानी ही पिएं। और अंत में, खाना खाने के तुरंत बाद ढेर सारा पानी न पिएं, बल्कि खाने के कम से कम 30 से 45 मिनट बाद ही पानी का सेवन करें।
टाइगर पर हमले से लॉरेंस फिर रडार पर, साबरमती जेल में होगी पूछताछ?
टाइगर श्रॉफ पर हुए हमलों के बाद लॉरेंस बिश्नोई फिर सुर्खियों में है. इतने समय में बॉलीवुड पर कई हमले हुए. ऐसे में क्या मुंबई पुलिस साबरमती जेल में कैद गैंगस्टर लॉरेंस से इस पूरे मामले में पूछताछ कर सकती है? क्या कहता है कानून?
गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा वेस्ट जाना होगा आसान, शाहबेरी में बनेगी नई सड़क
शाहबेरी में नाले के ऊपर सड़क बनने से एनएच-9 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ओर जाने वाले लोगों को एक अतिरिक्त मार्ग मिलने की उम्मीद है. हालांकि, जाम से कितनी राहत मिलेगी, यह सड़क बनने और उसके इस्तेमाल शुरू होने के बाद ही पता चलेगा.
Delhi Police का Peace Bond नोटिस अवैध? Urgent Hearing की मांग लेकर High Court पहुंचीं नेहा बोरा
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के एक नोटिस को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। इस नोटिस में उनसे कहा गया है कि वे एक चल रही जांच के दौरान शांति बनाए रखने की गारंटी के तौर पर, एक ज़मानतदार के साथ 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड जमा करें। उनकी कानूनी टीम ने पुष्टि की है कि एक याचिका दायर की गई है और कोर्ट की वेकेशन बेंच के समक्ष इसकी तत्काल सुनवाई की मांग की गई है। इसे भी पढ़ें: Jaishankar और Chidambaram की भिड़ंत देखकर मजा आ जायेगा ! Regime Change को लेकर दोनों के बीच हुई गर्मागर्म बहस से चढ़ गया सियासी पारा यह कदम 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस द्वारा नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद उठाया गया है। यह घटना कनॉट प्लेस (राजीव चौक) में आयोजित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले हुई थी। पुलिस के अनुसार, 16 अक्टूबर की शाम को जब बोरा मार्च में शामिल होने जा रही थीं, तब उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। अगले दिन दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। यह मार्च चुनाव आयोग की 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच निकाला गया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जवाबदेही की भी मांग की। विरोध प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके को भी मार्च से पहले हिरासत में ले लिया गया था। उन्हें एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने और शांति बनाए रखने का मुचलका (पीस बॉन्ड) देने के बाद रिहा कर दिया गया। इसे भी पढ़ें: AISA अध्यक्ष Neha Bora रिहा, Delhi Police ने अभिजीत दीपके को किया गिरफ्तार दिल्ली पुलिस के बयानों के अनुसार, 16 अक्टूबर की शाम को बोरा और दिपके, दोनों को विरोध-प्रदर्शन से जुड़े एहतियाती प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था। इसके बाद, दिपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई।
कानपुर में नकली सीमेंट का कारोबार! तीन वर्षों में 11 लाख बोरी नकली सीमेंट की सप्लाई
Kanpur fake cement factory: औद्योगिक नगरी कानपुर के पनकी में नकली सीमेंट फैक्ट्री के खुलासे ने प्रदेश भर के निर्माण तंत्र और प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। नामी कंपनियों की साख की आड़ में पिछले तीन सालों से चल रहे इस अवैध खेल में न सिर्फ 10 लाख ...
पटना/लखनऊ/मुंबई (एंटरटेनमेंट डेस्क): भोजपुरी सिनेमा जगत के 'पावर स्टार' कहे जाने वाले पवन सिंह (Pawan Singh) जब भी स्क्रीन पर आते हैं, तो कोई न कोई नया रिकॉर्ड जरूर बनता है। उनकी आवाज का जादू और दबंग अंदाज केवल बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई, झारखंड और देश-विदेश में बैठे करोड़ों भोजपुरी श्रोताओं के सिर चढ़कर बोलता है। एक बार फिर पवन सिंह अपने फैंस के लिए एक ऐसा धमाकेदार तोहफा लेकर आए हैं, जिसने रिलीज होते ही इंटरनेट का तापमान बढ़ा दिया है। पवन सिंह का नया भोजपुरी गाना ‘बिहारी के दम’ (Bihari Ke Dum) रिलीज हो चुका है और इस गाने में उनके साथ नजर आ रही हैं भोजपुरी की 'धक-धक गर्ल' और 'बिग बॉस' (Bigg Boss) से नेशनल क्रश बनीं खूबसूरत अदाकारा नीलम गिरी (Neelam Giri)। इस गाने के वीडियो में पवन सिंह की बाहों में नीलम गिरी जिस तरह से रोमांस और डांस करती नजर आ रही हैं, उसने सोशल मीडिया पर आग लगा दी है। रिलीज के कुछ ही घंटों के भीतर यह गाना यूट्यूब (YouTube) के ट्रेंडिंग चार्ट्स में अपनी जगह बना चुका है और फैंस दोनों की केमिस्ट्री की जमकर तारीफ कर रहे हैं।बिहारी के दम’ में पवन सिंह का दबंग स्वैग और नीलम गिरी का कातिलाना अंदाज‘बिहारी के दम’ गाना जैसा कि इसके नाम से ही साफ है, बिहार के लोगों के स्वाभिमान, उनके दबंग अंदाज और पावर स्टार पवन सिंह के सिग्नेचर स्वैग से भरपूर है। गाने के म्यूजिक वीडियो को बेहद भव्य और आधुनिक तरीके से शूट किया गया है। वीडियो में पवन सिंह हमेशा की तरह अपने रॉयल और दबंग लुक में नजर आ रहे हैं, जबकि नीलम गिरी कभी लहंगे-चोली में तो कभी ग्लैमरस वेस्टर्न आउटफिट में अपनी कातिलाना अदाओं से बिजली गिरा रही हैं। गाने के एक दृश्य में जब नीलम गिरी पवन सिंह की बाहों में आकर ठुमके लगाती हैं, तो दोनों के बीच की सिजलिंग केमिस्ट्री (Sizzling Chemistry) देखते ही बनती है। नीलम गिरी के फेस एक्सप्रेशंस और उनके लटके-झटकों ने इस हाई-वोल्टेज डांस नंबर में चार चांद लगा दिए हैं। यह गाना पूरी तरह से एक पार्टी और वेडिंग एंथम (Wedding Song) बन चुका है, जो आने वाले शादी-ब्याह के सीजन में यूपी-बिहार के हर डीजे पर बजता हुआ सुनाई देगा।बिग बॉस के बाद नीलम गिरी की बढ़ी लोकप्रियता, पवन सिंह के साथ जोड़ी है सुपरहिटअभिनेत्री नीलम गिरी के लिए यह गाना इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि रियलिटी शो 'बिग बॉस' के मंच से पूरे देश में अपनी पहचान बनाने के बाद उनकी फैन फॉलोइंग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि नीलम गिरी को भोजपुरी इंडस्ट्री में लाने और उन्हें रातों-रात स्टार बनाने में खुद पवन सिंह का ही सबसे बड़ा हाथ रहा है। पवन सिंह के सुपरहिट गाने 'धनिया हमार नया बाड़ी हो' से अपने करियर की शुरुआत करने वाली नीलम गिरी आज इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेसेस में शुमार हैं। इससे पहले भी पवन सिंह और नीलम गिरी की जोड़ी 'लहंगवा लस लस करता', 'राजा जी के दिलवा' और 'बलमुआ के बल्म' जैसे कई ब्लॉकबस्टर गानों में साथ नजर आ चुकी है, जिन्हें यूट्यूब पर करोड़ों (Millions) व्यूज मिले हैं। यही वजह है कि जब भी यह जोड़ी साथ आती है, तो दर्शकों की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच जाती हैं और ‘बिहारी के दम’ गाने में एक बार फिर दोनों ने साबित कर दिया है कि वे भोजपुरी की सबसे हिट ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में से एक हैं।शानदार गायिकी और धमाकेदार म्यूजिक ने गाने को बनाया चार्टबस्टरकिसी भी गाने के सुपरहिट होने के पीछे उसकी गायिकी, बोल और संगीत का सबसे बड़ा योगदान होता है। ‘बिहारी के दम’ गाने को खुद पावर स्टार पवन सिंह ने अपनी दमदार आवाज में गाया है और इसमें उनका साथ दिया है भोजपुरी की स्टार सिंगर शिल्पी राज (Shilpi Raj) या शिवानी सिंह जैसी सुरीली आवाज ने, जिनकी जुगलबंदी आजकल हर गाने को हिट कराने की गारंटी मानी जाती है। गाने के बोल (Lyrics) बेहद कैची और जोश से भर देने वाले हैं, जो सीधे युवाओं के दिल को छू रहे हैं। वहीं, इसका म्यूजिक (Music) इतना जबरदस्त और पेप्पी है कि इसे सुनते ही किसी के भी पैर अपने आप थिरकने पर मजबूर हो जाते हैं। गाने की कोरियोग्राफी भी कमाल की है, जिसमें पवन सिंह अपने खास हुक-स्टेप्स करते नजर आ रहे हैं, जिस पर इंस्टाग्राम रील्स (Instagram Reels) और यूट्यूब शॉर्ट्स बनने का सिलसिला भी तेजी से शुरू हो गया है।यूट्यूब पर व्यूज की हो रही बारिश, फैंस बोले- ‘पावर यहीं से शुरू होता है’गाना रिलीज होते ही यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पवन सिंह के फैंस (Pawan Singh Fans) ने इसे हाथों-हाथ लिया है। रिलीज के चंद घंटों में ही गाने ने लाखों व्यूज का आंकड़ा पार कर लिया है और लाइक्स व कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। पटना से लेकर आरा, छपरा, गोरखपुर और बनारस तक के फैंस कमेंट सेक्शन में अपने चहेते स्टार पर प्यार लुटा रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, भोजपुरी इंडस्ट्री में पावर पवन भैया से शुरू होता है और उन्हीं पर खत्म होता है, यह गाना बवाल है। वहीं दूसरे फैन ने नीलम गिरी की तारीफ करते हुए लिखा, बिग बॉस फेम नीलम गिरी और पवन सिंह की केमिस्ट्री का कोई तोड़ नहीं है, दोनों ने स्क्रीन पर आग लगा दी है। जिस रफ्तार से इस गाने के व्यूज बढ़ रहे हैं, ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि बहुत जल्द यह गाना 100 मिलियन क्लब में शामिल होकर भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री में एक नया इतिहास रच देगा।
Weather Update : उत्तर भारत में हल्की ठंडक, दक्षिण में भारी बारिश का अलर्ट, कैसा है मुंबई का मौसम?
Weather Update 19 October: देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। उत्तर भारत में जहां सुबह-शाम गुलाबी ठंडक ने दस्तक दे दी है, वहीं पश्चिमी भारत (विशेषकर मुंबई) में गर्मी और उमस परेशान कर रही है। इसके साथ ही, दक्षिण ...
मिसाइल स्टोरेज से डेटा सेंटर तक... यूक्रेन में रूस ने रातभर की बमबारी
रूस ने सोमवार रात कीव और आसपास के इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और 269 ड्रोन से बड़ा हमला किया. हमले में 1 व्यक्ति की मौत, 8 लोग घायल और तीन जिलों में इमारतों तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा.
‘मुझे मर जाने दो’, राखी के शो में ‘नपुंसक’ कहने के बाद मां से कहता था लक्ष्मण
झांसी के लक्ष्मण अहिरवार की मौत के मामले में कोर्ट ने फिल्म अभिनेत्री राखी सावंत के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है. 2010 में ‘राखी का इंसाफ’ शो में लक्ष्मण को नपुंसक कहे जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ने और मौत का मामला सामने आया था. लक्ष्मण के मामा बलवीर ने कहा कि उन्हें कोर्ट पर भरोसा है और अब न्याय मिलने की उम्मीद है.
कन्नौज में खाली कुर्सियां देख भड़के अखिलेश, पूरी जिला इकाई कर दी भंग
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं. वे पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुटबाजी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं. हाल ही में कन्नौज में आयोजित पीडीए कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान यह सख्ती देखने को मिली. इस कार्यक्रम में मंच पर सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल और कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन जनसभा में जनता और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति बेहद निराशाजनक रही. सभागार में खाली पड़ी कुर्सियों को देखकर अखिलेश यादव का गुस्सा भड़क उठा. लखनऊ पहुंचते ही उन्होंने तत्काल प्रभाव से कन्नौज की पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया. कन्नौज के जिला अध्यक्ष कलीम खान और उनकी पूरी टीम को पदमुक्त कर दिया गया है.
सिर्फ 500 रुपये से अमीर बन सकता है Gen Z, बस करना होगा ये काम!
जेन जी हर महीने सिर्फ 500 रुपये की एसआईपी से भी लंबे समय में अच्छा पैसा जमा कर सकती है. हर महीने पैसे निवेश करने और हर साल निवेश की रकम बढ़ाने से धीरे-धीरे बड़ा फंड बन सकता है. हालांकि, कितना पैसा मिलेगा, यह बाजार पर निर्भर करता है. इसलिए निवेश करने से पहले म्यूचुअल फंड और उससे जुड़े जोखिम को समझना जरूरी है.
वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया में मौका क्यों नहीं मिला?
वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज 2-2 से बराबर रहने के बाद अब टीम इंडिया न्यूजीलैंड दौरे की तैयारी में है। इस सीरीज में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग-11 में मौका नहीं मिला।
मुंगेर में पवन सिंह ने अक्षरा सिंह और उनके माता-पिता से मांगी माफी
बिहार के मुंगेर जिले के कल्याणपुर में रविवार रात पावर स्टार पवन सिंह का जलवा देखवे को मिला। इस दौरान पवन सिंह ने अक्षरा सिंह के प्रति अपनापन जताते हुए पुरानी बातों के लिए माफी मांगी।
राजस्थान पुलिस vs मुंबई पुलिस: वारदात के चंद घंटों बाद टाइगर श्रॉफ की गिरफ्तारी का क्रेडिट किसको?
राजस्थान पुलिस की ओर से क्रेडिट लिए जाने की कोशिश पर मुंबई पुलिस ने भी सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन संकेतों में पूरी बात कह दी.
सोना-चांदी के दाम में आज बड़ा फेरबदल, कहीं महंगा तो कहीं घटे दाम
Gold-Silver Rate Big Change Today: सोमवार को सोना-चांदी की कीमतों में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज से लेकर घरेलू बाजार तक में कीमतें बदली हैं, ऐसे में खरीदारी से पहले लेटेस्ट रेट जान लेना जरूरी है.
मुंबई/नई दिल्ली/अहमदाबाद (एंटरटेनमेंट डेस्क): भारतीय टेलीविजन की दुनिया में जब भी सबसे लोकप्रिय और दमदार अभिनेत्रियों का जिक्र होता है, तो रश्मि देसाई (Rashami Desai) का नाम उस लिस्ट में सबसे ऊपर आता है। कलर्स टीवी के सुपरहिट सीरियल 'उतरन' में तपस्या ठाकुर का आइकॉनिक किरदार निभाकर घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाली रश्मि ने उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात से लेकर मुंबई और दिल्ली तक करोड़ों दर्शकों के दिलों पर राज किया है। हालांकि, पिछले करीब चार सालों से रश्मि देसाई अचानक छोटे पर्दे के डेली सोप (Daily Soaps) से पूरी तरह गायब रहीं। उनके फैंस लगातार यह सवाल पूछ रहे थे कि आखिर इतनी बड़ी स्टार अचानक टीवी स्क्रीन से कहां ओझल हो गईं? इस लंबी गैरमौजूदगी के दौरान इंडस्ट्री के गलियारों में यहां तक चर्चा होने लगी थी कि अब रश्मि का एक्टिंग करियर खत्म हो चुका है। लेकिन अब खुद रश्मि देसाई ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इन चार सालों के अंधेरे, अपने स्वास्थ्य संबंधी संघर्षों और इंडस्ट्री के कड़वे सच पर खुलकर बात की है। रश्मि का यह भावुक खुलासा हर उस इंसान को झकझोर कर रख देगा जो उन्हें पर्दे पर मुस्कुराते हुए देखता आया है।लोगों ने मान लिया था मेरा करियर खत्म हो गया है: रश्मि देसाई का छलका दर्दहाल ही में दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रश्मि देसाई ने अपने चार साल के ब्रेक पर बात करते हुए इंडस्ट्री की मानसिकता को बेनकाब किया। रश्मि ने बेहद बेबाकी से कहा कि ग्लैमर की दुनिया में 'जो दिखता है, वही बिकता है' का नियम बहुत क्रूरता से लागू होता है। एक्ट्रेस ने खुलासा किया कि जब उन्होंने कुछ समय के लिए टीवी से दूरी बनाई, तो इंडस्ट्री के कई लोगों और कास्टिंग डायरेक्टर्स ने यह मान लिया कि अब उनका करियर पूरी तरह से खत्म हो गया है (Career is Over) या फिर अब उन्हें पैसों और काम की जरूरत नहीं है। रश्मि ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, मैंने बचपन से लेकर आज तक बिना रुके लगातार काम किया है। जब मैंने कुछ वक्त के लिए कदम पीछे खींचे, तो लोगों ने अफवाहें उड़ानी शुरू कर दीं कि मुझे काम नहीं मिल रहा है और मेरा दौर खत्म हो चुका है। किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि एक कलाकार के तौर पर मैं किस दौर से गुजर रही हूं। रश्मि ने स्पष्ट किया कि उन्होंने टीवी को कभी अलविदा नहीं कहा था, बल्कि यह ब्रेक उनकी अपनी मर्जी और कुछ ऐसी परिस्थितियों की वजह से था, जिन पर उनका कोई बस नहीं था।आखिर क्यों 4 साल तक छोटे पर्दे और डेली सोप से दूर रहीं रश्मि देसाईचार साल तक टीवी से गायब रहने के पीछे की असली वजह बताते हुए रश्मि देसाई ने कहा कि 'बिग बॉस 13' (Bigg Boss 13), 'बिग बॉस 15' और 'नागिन 6' (Naagin 6) में कैमियो करने के बाद वह मानसिक और शारीरिक रूप से काफी थक चुकी थीं। टीवी पर डेली सोप करने का मतलब होता है महीने के 30 दिन और दिन में 14 से 16 घंटे की लगातार शूटिंग। रश्मि के मुताबिक, उनके पास कई बड़े टीवी शोज के ऑफर आ रहे थे, लेकिन वे सभी घिसे-पिटे और एक जैसे किरदारों वाले थे। वह एक कलाकार के तौर पर खुद को दोहराना नहीं चाहती थीं। रश्मि ने बताया कि वह अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर ओटीटी (OTT Platforms), वेब सीरीज और रीजनल सिनेमा (खासकर गुजराती और पंजाबी फिल्मों) में कुछ नया एक्सप्लोर करना चाहती थीं। इसके अलावा, बार-बार एक ही तरह का रोना-धोना और सास-बहू की साजिशों वाले रोल करके वह ऊब चुकी थीं, इसलिए उन्होंने जानबूझकर टीवी के बड़े ऑफर्स को ठुकराया और खुद को री-इन्वेंट (Re-invent) करने के लिए यह लंबा ब्रेक लिया।गंभीर बीमारी सोरायसिस और बढ़ते वजन की वजह से करना पड़ा ट्रोलिंग का सामनारश्मि देसाई के इस चार साल के ब्रेक के पीछे सिर्फ काम की तलाश ही नहीं, बल्कि उनकी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं (Health Issues) भी एक बहुत बड़ा कारण थीं। बहुत कम लोग जानते हैं कि रश्मि पिछले कुछ सालों से 'सोरायसिस' (Psoriasis) नाम की एक गंभीर ऑटोइम्यून स्किन बीमारी से जूझ रही थीं। इस बीमारी के इलाज के दौरान उन्हें हैवी स्टेरॉयड्स और दवाइयां लेनी पड़ीं, जिसका सीधा असर उनके शरीर पर पड़ा और उनका वजन अचानक काफी ज्यादा बढ़ गया। डॉक्टरों ने उन्हें धूप में निकलने और ज्यादा तनाव लेने से सख्त मना किया था, जो कि टीवी सीरियल की आउटडोर शूटिंग के दौरान असंभव था। जब रश्मि का वजन बढ़ा, तो सोशल मीडिया पर लोगों ने बिना सच जाने उन्हें बुरी तरह से बॉडी शेम (Body Shame) और ट्रोल करना शुरू कर दिया। रश्मि ने बताया कि कैसे लोग उनके लुक्स और मोटापे पर भद्दे कमेंट्स करते थे, जबकि वह उस वक्त अपने शरीर और बीमारी से एक जंग लड़ रही थीं। इस दौर ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी सेहत को प्राथमिकता दी और खुद को ठीक करने में समय लगाया।निजी जिंदगी के तूफानों से लेकर भोजपुरी, टीवी और फिल्मों तक का संघर्षपूर्ण सफररश्मि देसाई की जिंदगी हमेशा से ही किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी रही है। असम के नगांव में जन्मीं और मुंबई में पली-बढ़ीं रश्मि ने अपने परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए बहुत कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत असमिया और भोजपुरी फिल्मों (Bhojpuri Movies) से की थी, जहां वह एक बड़ी स्टार बन गईं। इसके बाद उन्होंने हिंदी टेलीविजन का रुख किया और 'उतरन' की तपस्या बनकर इतिहास रच दिया। इसके बाद सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनका शो 'दिल से दिल तक' भी सुपरहिट रहा। हालांकि, जितनी सफलता उन्हें प्रोफेशनल लाइफ में मिली, उनकी पर्सनल लाइफ उतनी ही उतार-चढ़ाव भरी रही। नंदीश संधू के साथ उनकी शादी का टूटना, तलाक का दर्द, फिर 'बिग बॉस 13' के घर के अंदर अरहान खान के साथ रिश्ते में मिला धोखा और सिद्धार्थ शुक्ला के साथ उनके विवादों ने उन्हें नेशनल टेलीविजन पर तोड़कर रख दिया था। यहां तक कि एक दौर ऐसा भी आया जब रश्मि कर्ज में डूब गई थीं और उन्हें अपनी गाड़ी में रातें गुजारनी पड़ी थीं, लेकिन इस बहादुर अदाकारा ने हर बार जीरो से शुरुआत कर खुद को साबित किया।धमाकेदार वापसी को तैयार हैं रश्मि, फैंस को जल्द मिलेगा बड़ा सरप्राइजचार साल के इस लंबे वनवास और आत्ममंथन के बाद, अब रश्मि देसाई एक बार फिर से पूरी ऊर्जा के साथ मनोरंजन जगत में धमाकेदार वापसी (Comeback) कर चुकी हैं। हाल ही में उन्हें गुजराती फिल्म 'मॉम तने नई समझाय' (Mom Tane Nai Samjhay) और बॉलीवुड व ओटीटी के कई प्रोजेक्ट्स में देखा गया है, जहां उनके अभिनय की जमकर तारीफ हो रही है। टीवी पर वापसी को लेकर रश्मि का कहना है कि टेलीविजन उनका पहला प्यार है और उसी ने उन्हें आज 'रश्मि देसाई' बनाया है, इसलिए वह टीवी को कभी नहीं छोड़ सकतीं। बस उन्हें इंतजार है तो एक ऐसी दमदार कहानी और किरदार का, जो उनके स्टारडम और अभिनय क्षमता के साथ न्याय कर सके। रश्मि ने अपने करोड़ों फैंस को भरोसा दिलाया है कि उनका करियर खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह तो उनकी दूसरी और पहले से कहीं ज्यादा मजबूत पारी की शुरुआत है। वह जल्द ही कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए एक बार फिर से दर्शकों के दिलों पर राज करने के लिए तैयार हैं।
सीईसी नियुक्ति प्रक्रिया पर जगन का यू-टर्न, तेदेपा और बीजेपी ने बताया 'अवसरवादी'
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए 2023 में बने कानून का समर्थन करने वाले वाईएसआरसीपी प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अब इसका विरोध करते हुए कहा है कि चयन समिति में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और सीजेआई को शामिल होना चाहिए.
अपनी पत्नी को खुश कैसे रखें? रिश्ते में प्यार बनाए रखने के लिए अपनाएं ये 5 नियम
पति-पत्नी की रिश्ता सबसे अच्छा और खूबसूरत रिश्ता होता है, लेकिन आज की भागदौड़ और काम की व्यस्तता के चलते रिश्तों को पहले जैसे मजबूत बनाए रखना बहुत मुश्किल हो गया है. यहां जानिए पत्नी को खुश कैसे रखें?
अकेले शिमला गया पत्रकार, समझ आई ये बात, अब लोगों को दी सलाह
बर्नआउट के बाद 31 साल के एक पत्रकार ने शिमला में 7 दिन अकेले बिताए और वहां कैफे मालिकों से बात की. इस सफर से उन्हें समझ आया कि नौकरी के साथ खुद के लिए समय निकालना भी जरूरी है. साथ ही, उन्होंने अपने कैफे और बुकस्टोर खोलने के पुराने सपने को गंभीरता से पूरा करने का फैसला किया.
नीता अंबानी ने बहू राधिका संग खेला गरबा, नवरात्रि का VIDEO वायरल
जामनगर के रिलायंस ग्रीन्स में नवरात्रि सेलिब्रेशन के दौरान नीता अंबानी ने छोटी बहू राधिका मर्चेंट के साथ स्टेज पर गरबा किया. इस मौके पर मुकेश और अनंत अंबानी भी ट्रेडिशनल आउटफिट में नजर आए. अंबानी परिवार का गरबा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
Congress में लौटे Ram Sharan Nautiyal, कुमारी शैलजा ने किया स्वागत, BJP पर साधा निशाना
AICC की महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा ने राम शरण नौटियाल का कांग्रेस पार्टी में वापस स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) में काम करने का उनका अनुभव, उस पार्टी की कार्यप्रणाली को समझने में मददगार साबित होगा। दिल्ली में बात करते हुए, शैलजा ने बताया कि नौटियाल कांग्रेस में वापस आकर बहुत खुश हैं—वही पार्टी जिसकी विचारधारा का वे पहले भी समर्थन करते थे। इसे भी पढ़ें: अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी पर Jairam Ramesh का हमला, BJP और SIT जांच पर उठाए सवाल शैलजा ने कहा कि उन्होंने करीब से देखा है कि BJP के भीतर चीजें कैसे चलती हैं। वे खुद आपको इस बारे में बताएंगे। वे अपनी पार्टी और अपनी विचारधारा के बीच वापस आकर सच में बहुत खुश हैं। उन्होंने नौटियाल की वापसी को कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के एक मौके के रूप में देखा, खासकर उन लोगों के लिए जो पार्टी के सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं। शैलजा ने उन लोगों को भी पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया जो कांग्रेस की विचारधारा से सहमत हैं और राहुल गांधी तथा मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि हम ऐसे सभी लोगों को कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं जो कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखते हैं और राहुल गांधी जी तथा मल्लिकार्जुन खड़गे जी जैसे नेताओं पर भरोसा करते हैं। उत्तराखंड के मुद्दों पर बात करते हुए, शैलजा ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और जनता के बीच भारी असंतोष का आरोप लगाया। उन्होंने निवेश के अधूरे वादों, खराब शासन और न्याय न मिलने जैसी समस्याओं का जिक्र किया, जिनकी वजह से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता में राज्य सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी है। चाहे निवेश के नाम पर धोखा हो या न्याय न मिलना, हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi के Expiry Date वाले बयान पर भड़के Shivraj Singh, बोले- 99 बार फेल नेता दे रहा नसीहत शैलजा ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और आरोप लगाया कि कोई भी महिला—चाहे उसका रिश्ता कुछ भी हो—सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कानून-व्यवस्था को संभालने के तरीके को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि वह जनता की इन चिंताओं को दूर करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि वहां कोई भी महिला सुरक्षित नहीं है, चाहे वह बेटी हो, बहन हो या बहू। हर तरफ भ्रष्टाचार फैला हुआ है। इन बयानों से पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी उत्तराखंड में शासन, पारदर्शिता, महिला सुरक्षा और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को चुनौती देने की कोशिश कर रही है, ताकि राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत किया जा सके।
क्या पैकेट वाला जूस पीने से लिवर खराब हो सकता है? डॉक्टर ने बताया
बाजार में मिलने वाले पैकेट वाले फ्रूट जूस में चीनी होती है जो शरीर में तेजी से शुगर लेवल बढ़ा सकती है. जूस पीने की बजाय पूरा फल खाएं और पैकेट वाले जूस से बचें, खासकर यदि आपका वजन ज्यादा है या आपको डायबिटीज़ है.
90 के दशक में एक गाना आया था, जो देखते ही देखते लोगों की जुबान पर छा गया था. यह गाना आज भी ऑटो रिक्शा, बस-ट्रक में सुनने को मिल जाता है. इस गाने का नाम ‘तेरी मोहब्बत ने दिल में मकाम कर दिया’ है.
यूट्यूब देखकर गर्भपात की कोशिश करना कितना खतरनाक? डॉक्टर ने बताए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम
बिना डॉक्टर की सलाह गर्भपात की कोशिश क्यों है जोखिम भरी? एक्सपर्ट ने बताए बड़े खतरे.
कल या परसों, कब है दशहरा? रावण दहन का मुहूर्त भी नोट कर लें
आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर दशहरे के पर्व 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा.
अविका गौर लंबे समय से अलग अलग रियलिटी शो और फिल्मों का हिस्सा रही हैं लेकिन फाइनली उन्होंने छोटे पर्दे पर डेली सोप की दुनिया में लौटने का फैसला लिया और इस शो की पहली झलक काफी प्रॉमिसिंग भी लग रही है.
DSLR जैसी फोटो! अंधेरे में भी दिन जैसी तस्वीर खींचते हैं ये स्मार्टफोन, भूल जाएंगे iPhone
अगर आप बेहतरीन कैमरा वाला फोन खरीदना चाहते हैं तो आपके पास आईफोन के अलावा भी कई ऑप्शन्स हैं. यहां पर आपको ऐसे दमदार फोन के बारे में बता रहे हैं जिनके कैमरे DSLR जैसी क्वालिटी के साथ आते हैं.
Asian Para Games: कोकिला ने जूडो में जीता सिल्वर, कपिल परमार को ब्रॉन्ज
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत के दृष्टिबाधित जूडो खिलाड़ियों ने दो पदक जीते. कोकिला ने महिलाओं के जे2 कैटेगरी के 52 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल अपने नाम किया, जबकि कपिल परमार ने पुरुषों के जे1 कैटेगरी के 70 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया
विजय की पार्टी को मिले 13.3 करोड़, सिर्फ दो नेताओं ने दिए 99% डोनेशन
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK को वित्त वर्ष 2025-26 में 13.3 करोड़ रुपये का स्वैच्छिक चंदा मिला. चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक, पार्टी के दो मंत्रियों आधव अर्जुन और आरवी रंजीतकुमार ने कुल चंदे का करीब 99 फीसदी हिस्सा दिया.
'अक्षरा मेरा बाबू है', पवन सिंह को याद आया पुराना प्यार, सरेआम मांगी माफी
मुंगेर के दुर्गा पूजा महोत्सव में पवन सिंह ने मंच से अक्षरा सिंह और उनके परिवार से माफी मांगी. अक्षरा को ‘मेरा बाबू, मेरा बेटा’ कहकर संबोधित किया और दोनों के फिर साथ नजर आने का इशारा किया. क्या भोजपुरी की यह चर्चित जोड़ी फिर साथ काम करेगी?
'दुनिया की ठांय-ठांय' का ट्रेलर रिलीज, अब बदले की आग में जलेगा 'प्यार'
अभिनेता ऋषभ जैसवाल और अभिनेत्री दीपाली शर्मा स्टारर 'दुनिया की ठांय-ठांय' के मेकर्स ने सोमवार को ट्रेलर रिलीज कर दिया है। यह सीरीज प्यार, धोखे और सस्पेंस से भरपूर ट्विस्ट वाली एक इंटेंस ड्रामा है।
हिंसा, आगजनी और अराजकता... फ्रांस में प्रोटेस्ट के नाम पर ये क्या हो रहा? Photos
फ्रांस की राजधानी पेरिस में विरोध प्रदर्शनों ने सड़कों पर तनाव बढ़ा दिया है. आगजनी, आंसू गैस, पुलिस के साथ झड़प और जले हुए वाहनों की तस्वीरें डरा देने वाली हैं. बैनर और नारों के साथ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों का आक्रोश प्रशासन के लिए चुनौती बनता दिख रहा है.
Aaj Ka Rashifal 20 October 2026: आचार्य मदन मोहन ने बताया कि मेष, मकर और मीन राशि वालों को धन लाभ और तरक्की के अवसर मिल सकते हैं. जानें सभी 12 राशियों का भविष्य, शुभ रंग, भाग्य अंक और दान.
Patna के Maner में पैक्स अध्यक्ष संजीत कुमार की गोली मारकर हत्या
बिहार के पटना जिले में रविवार रात अज्ञात हमलावरों ने प्राथमिक कृषि साख समिति (पैक्स) के अध्यक्ष की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि हमले में प्रखंड प्रमुख के पति गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। दानापुर-2 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) अमरेंद्र कुमार झा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि घटना रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे की है। मनेर के पैक्स अध्यक्ष संजीत कुमार बेयर गांव स्थित अपने घर के बाहर मनेर की प्रखंड प्रमुख के पति पिंटू कुमार के साथ बैठे हुए थे, तभी मोटरसाइकिल सवार हमलावर वहां पहुंचे और अंधाधुंध गोलीबारी करने के बाद फरार हो गए। उन्होंने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को नजदीकी अस्पताल ले गई, जहां संजीत कुमार ने दम तोड़ दिया। पिंटू कुमार का इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया घटना के पीछे व्यक्तिगत रंजिश का मामला प्रतीत होता है। मामले की आगे जांच की जा रही है।’’पैक्स ग्रामीण स्तर की सहकारी ऋण संस्थाएं हैं, जो भारत की अल्पकालिक सहकारी ऋण व्यवस्था की बुनियाद मानी जाती हैं।
ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत और 40 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद जहां हर कोई शोक में डूबा हुआ था। वहीं जिन पर समय पर घायलों के इलाज का जिम्मा था वह नेताओं की आवभगत में जुटे हुए थे। पूरा मामला ...
सिक्किम के नए राज्यपाल बने दुष्यंत कुमार गौतम, अंकिता भंडारी मामले पर विवाद के बीच हुई शपथ
दुष्यंत कुमार गौतम ने गंगटोक लोक भवन में सिक्किम के 19वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली. इस दौरान चीफ जस्टिस ए मोहम्मद मुस्ताक ने शपथ दिलाई.
'क्या आप बच्चा प्लान करने वाली हैं?' नौकरी के इंटरव्यू में HR ने महिला से पूछा सवाल
Pregnancy Plan Question In Interview: एक महिला ने अपने जॉब इंटरव्यू को लेकर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उसने बताया कि एचआर राउंड के दौरान उससे प्रेग्नेंसी प्लानिंग को लेकर सवाल किया गया.
UP चुनाव के लिए सपा का रोडमैप तैयार, अखिलेश इस दिन जारी करेंगे मैनिफेस्टो
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी ने अपनी तैयारियां बढ़ा दी हैं और 26 नवंबर को पार्टी अपना घोषणापत्र जारी करने वाली है.
TVK और IUML का गठबंधन निकाय चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव में रहेगा बरकरार: मंत्री शाहजहां
तमिलनाडु के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ए एम शाहजहां ने कहा है कि तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का गठबंधन आगामी स्थानीय निकाय चुनाव, उपचुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में भी जारी रहेगा। आईयूएमएल के सचिव शाहजहां रविवार को तेनकासी के दौरे पर थे। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि पार्टी की ‘प्रदेश सामान्य परिषद’ ने टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन में बने रहने के फैसले की पुन: पुष्टि की है। मंत्री ने कहा, ‘‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की प्रदेश सामान्य परिषद में एक स्पष्ट प्रस्ताव पारित किया गया है। हमने फैसला किया है कि आईयूएमएल आगामी स्थानीय निकाय चुनाव, 2029 के लोकसभा चुनाव और उपचुनावों में टीवीके के नेतृत्व वाले ‘धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय विजय गठबंधन’ (एसएसजेवीए) में बनी रहेगी। स्थानीय निकाय चुनावों में भी यह गठबंधन जारी रहेगा।’’राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम पर बात करते हुए मंत्री ने दावा किया कि विधानसभा के कई सदस्य टीवीके में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धारापुरम और मदुरंतकम जैसे पुराने गढ़ों में बड़े झटकों के बाद अन्नाद्रमुक के नेतृत्व से पार्टी कार्यकर्ताओं का भरोसा उठ गया है, संबंधित विधायक लोकतांत्रिक और संवैधानिक नियमों के अनुसार अपने पदों और इस्तीफे के बारे में फैसला करेंगे। लंबे समय से जेल में बंद मुस्लिम कैदियों की रिहाई के बारे में पूछे जाने पर शाहजहां ने कहा कि आईयूएमएल अध्यक्ष प्रोफेसर के एम खादर मोहिद्दीन ने 12 मांगों का एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें स्थायी रिहाई या अंतरिम पैरोल की मांग शामिल है। उन्होंने बताया कि इन मांगों को उठाए जाने के बाद लंबे समय से जेल में बंद कैदियों को रिहाई मिलने लगी है। उन्होंने बताया कि छह कैदियों को पहले ही पैरोल पर रिहा किया जा चुका है और आगे भी क्रमशः अन्य कैदियों को रिहा किए जाने की उम्मीद है।
17 साल का रिश्ता छोड़ फेसबुक प्रेमी संग चली गई दो बच्चों की मां, पति ने खुद मंदिर ले जाकर कराई शादी!
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक पति ने अपनी पत्नी की शादी उसके प्रेमी से करवाई है. जिसके बाद दोनों के 17 साल पुराने रिश्ते का अंत हो गया. महिला अब पति और दो बच्चों को छोड़कर प्रेमी के साथ रहेगी.
अंतरिक्ष में सैटेलाइट का कचरा हटाने की तैयारी, भारत-जापान की साझेदारी
अंतरिक्ष में सैटेलाइट भले ही काम करना बंद कर दें, लेकिन उनका मलबा वहीं रह जाता है. अब भारत और जापान की दो कंपनियां इस पुराने कबाड़ से निपटने के लिए हाथ मिला रही हैं.
टाइगर श्रॉफ पर हमले को लेकर विपक्ष ने फडणवीस सरकार को घेरा
महाराष्ट्र में बॉलीवुड हस्तियों और प्रमुख लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पीड़ित अभिनेता से मुलाकात की और उनकी सेहत का जायजा लिया. इस मामले को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार और गृह विभाग की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि मुंबई में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है.
Arvind Kejriwal का Centre पर हमला: देश के Gangster को बना लिया दामाद
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रविवार को बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की और अपराध तथा सुरक्षा को संभालने के उसके तरीके पर सवाल उठाए। 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने एक गैंगस्टर को आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सुविधाएं मुहैया कराई हैं। इसे भी पढ़ें: Punjab में शासन से लोगों का भरोसा उठ रहा, Sachin Pilot ने AAP सरकार को घेरा केजरीवाल ने कहा कि वे अपने राज्यों में भी कानून-व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे हैं। उन्होंने देश के सबसे बड़े गैंगस्टर (लॉरेंस बिश्नोई) को अपना 'दामाद' बना लिया है और उसे न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में अपराध करने के लिए हर तरह की सुविधा दे रखी है। केजरीवाल ने चेतावनी दी कि इस पार्टी को वोट देने का मतलब पंजाब में उस गैंगस्टर को न्योता देना होगा। उन्होंने आगे कहा कि और कल ये लोग पंजाब आकर कानून-व्यवस्था पर भाषण देंगे। पंजाब की जनता जानती है कि इन्हें वोट देने का मतलब अपने 'दामाद' को पंजाब में बुलाने जैसा होगा। पुलिस के अनुसार, जब अभिनेता अपनी गाड़ी से एक मैदान से निकल रहे थे, तो उनकी कार पर तीन से चार राउंड फायरिंग की गई। वहां उन्हें देखने के लिए काफी भीड़ जमा थी, और इसी भीड़ के बीच से फायरिंग की गई। अभिनेता को कोई गोली नहीं लगी और वे सुरक्षित बच गए। पुलिस इस घटना की जांच कर रही है और फायरिंग से जुड़े हालात का पता लगाने की कोशिश कर रही है। इस फायरिंग में दो लोग घायल हुए हैं, जिनमें टाइगर श्रॉफ के ड्राइवर फिरदौस भी शामिल हैं; उनके बाएं हाथ में गोली लगी है। इसे भी पढ़ें: Punjab में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त, SAD प्रमुख Sukhbir Badal का CM Bhagwant Mann पर हमला घटना के चश्मदीद गवाह और ऑटो-रिक्शा चालक राकेश कुमार ने ANI से बात करते हुए बताया कि उन्होंने क्या देखा। राकेश ने बताया कि मैं मुंबई में रिक्शा चलाता हूं... मैं शाम करीब 7:00 बजे अपनी गाड़ी निकालने वहां पहुंचा था... वहां तीन लोग थे: एक मोटरसाइकिल पर था, जबकि दो लोग बाहर खड़े थे - एक गेट के पास और दूसरा उससे थोड़ा आगे। जब फायरिंग शुरू हुई, तो एक व्यक्ति ने सामने से उस सीट को निशाना बनाकर गोली चलाई, जहां टाइगर श्रॉफ बैठे थे... वहीं, गेट के पास खड़े दूसरे व्यक्ति ने गोली चलाई, जो ड्राइवर के हाथ में लगी। यह घटना शाम करीब 7:00 बजे हुई। इस बीच, मुंबई पुलिस ने घटना की जांच के लिए 15 टीमें बनाई हैं।
नई दिल्ली/मुंबई/लखनऊ (बिजनेस डेस्क): हर इंसान का सपना होता है कि जब वह अपनी नौकरी या व्यापार से रिटायर हो, तो बुढ़ापे में उसे पैसों के लिए किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। बढ़ती महंगाई के इस दौर में चाहे आप दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में रहते हों या उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसी छोटे शहर में, 60 साल की उम्र के बाद घर का खर्च चलाने और दवाइयों के लिए एक नियमित आय (Regular Income) का होना बेहद जरूरी है। अक्सर प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों को इस बात की चिंता सताती है कि रिटायरमेंट के बाद उनकी जिंदगी कैसे कटेगी, क्योंकि उनके पास सरकारी कर्मचारियों जैसी पुरानी पेंशन की सुविधा नहीं होती। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केंद्र सरकार की एक ऐसी शानदार और सुरक्षित स्कीम मौजूद है, जिसमें अगर आप सही समय पर निवेश शुरू कर दें, तो रिटायरमेंट के बाद आपको हर महीने 50,000 रुपये की गारंटीड पेंशन मिल सकती है? जी हां, हम बात कर रहे हैं 'नेशनल पेंशन सिस्टम' यानी एनपीएस (National Pension System - NPS) की। इस योजना में न केवल आपको हर महीने तगड़ी पेंशन मिलती है, बल्कि रिटायरमेंट के दिन आपके हाथ में लाखों-करोड़ों रुपये का एकमुश्त फंड (Lump Sum Amount) भी आता है। आइए, आज की इस विशेष रिपोर्ट में बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि 50 हजार रुपये महीना पेंशन पाने का पूरा गणित क्या है।क्या है नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और इसमें पैसा लगाना क्यों है सबसे सुरक्षितनेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक स्वैच्छिक और दीर्घकालिक रिटायरमेंट बचत योजना है, जिसे पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा रेगुलेट किया जाता है। पहले यह योजना केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए थी, लेकिन साल 2009 में सरकार ने इसे देश के हर नागरिक के लिए खोल दिया। 18 साल से लेकर 70 साल तक का कोई भी भारतीय नागरिक (चाहे वह नौकरीपेशा हो, खुद का बिजनेस करता हो या गृहिणी हो) इस स्कीम में अपना खाता खुलवा सकता है। एनपीएस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक मार्केट-लिंक्ड स्कीम (Market-Linked Scheme) है, जहां आपका पैसा इक्विटी (शेयर बाजार), कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है। यही वजह है कि इसमें पीपीएफ (PPF) या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तुलना में कहीं ज्यादा रिटर्न मिलता है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो एनपीएस ने निवेशकों को औसतन 10 फीसदी से लेकर 12 फीसदी तक का शानदार सालाना रिटर्न दिया है। सरकारी निगरानी में होने के कारण इसमें आपके पैसे के डूबने का खतरा नहीं रहता और लंबी अवधि में चक्रवृद्धि ब्याज (Power of Compounding) का जबरदस्त फायदा मिलता है।हर महीने 50 हजार रुपये की पेंशन पाने का क्या है पूरा कैलकुलेशन (गणित)अब सीधे उस सवाल पर आते हैं कि आखिर हर महीने 50,000 रुपये की पेंशन पाने के लिए आपको अपनी जेब से कितना पैसा लगाना होगा। मान लीजिए कि आपकी मौजूदा उम्र 25 साल है और आप इसी उम्र से अपने रिटायरमेंट की प्लानिंग शुरू कर देते हैं। एनपीएस के नियमों के मुताबिक यह स्कीम 60 साल की उम्र में मैच्योर होती है, यानी आपके पास निवेश करने के लिए पूरे 35 साल का लंबा समय है। अगर आप 25 साल की उम्र से हर महीने एनपीएस में मात्र 5,000 रुपये (यानी रोजाना के हिसाब से करीब 166 रुपये) का निवेश करना शुरू करते हैं, तो 35 सालों में आपकी जेब से कुल निवेश मात्र 21 लाख रुपये होगा। अब चूंकि यह पैसा मार्केट और बॉन्ड्स में लगता है, तो अगर हम इस पर औसतन 10 प्रतिशत का अनुमानित सालाना रिटर्न भी मानकर चलें, तो 60 साल की उम्र होते-होते आपका यह 21 लाख रुपया बढ़कर करीब 1 करोड़ 91 लाख 41 हजार रुपये (लगभग 1.91 करोड़ रुपये) का विशाल फंड बन जाएगा। इसमें सिर्फ ब्याज से ही आपको करीब 1 करोड़ 70 लाख रुपये का सीधा मुनाफा होगा।रिटायरमेंट पर एकमुश्त मिलेंगे 76 लाख रुपये और आजीवन आएगी पेंशनजब आप 60 साल की उम्र में रिटायर होंगे और आपके एनपीएस खाते में 1.91 करोड़ रुपये जमा हो जाएंगे, तब एनपीएस का निकासी नियम काम करेगा। नियमों के अनुसार, आप अपने कुल फंड का अधिकतम 60 प्रतिशत हिस्सा एकमुश्त (Lump Sum) निकाल सकते हैं, जो पूरी तरह से टैक्स-फ्री होता है, और कम से कम 40 प्रतिशत हिस्से से आपको एन्युटी प्लान (Annuity Plan) यानी पेंशन प्लान खरीदना अनिवार्य होता है। लेकिन अगर आपका लक्ष्य हर महीने 50,000 रुपये की पक्की पेंशन पाना है, तो आपको एक छोटी सी स्मार्ट ट्रिक अपनानी होगी। आप अपने कुल कॉर्पस (1.91 करोड़ रुपये) में से 60 प्रतिशत निकालने के बजाय 40 प्रतिशत हिस्सा एकमुश्त निकाल लें और बाकी का 60 प्रतिशत हिस्सा एन्युटी (पेंशन फंड) में डाल दें। इस गणित के हिसाब से, 40 प्रतिशत के तौर पर आपको रिटायरमेंट के दिन ही करीब 76 लाख 56 हजार रुपये नकद आपके बैंक खाते में मिल जाएंगे, जिससे आप बच्चों की शादी, घर या दुनिया घूमने का सपना पूरा कर सकते हैं। वहीं, बचे हुए 60 प्रतिशत हिस्से यानी करीब 1 करोड़ 14 लाख 85 हजार रुपये से जब आप एन्युटी प्लान खरीदेंगे और उस पर अगर आपको सालाना औसतन 6 प्रतिशत का सामान्य रिटर्न भी मिलता है, तो आपको हर महीने करीब 57,400 रुपये (यानी 50 हजार रुपये से भी ज्यादा) की गारंटीड पेंशन आजीवन मिलती रहेगी।अगर आपकी उम्र 30 या 35 साल है तो कितना करना होगा निवेशकई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि अगर उनकी उम्र 25 साल से ज्यादा हो चुकी है, तो वे 50 हजार की पेंशन कैसे पा सकते हैं। इसका सीधा सा नियम है कि आप जितनी देर से निवेश शुरू करेंगे, आपको हर महीने अपनी किस्त (SIP) की रकम उतनी ही बढ़ानी होगी। उदाहरण के लिए, अगर आपकी उम्र 30 साल है और आपके पास रिटायरमेंट के लिए 30 साल बचे हैं, तो 50 हजार रुपये मासिक पेंशन और करीब 1.13 करोड़ रुपये का एकमुश्त फंड पाने के लिए आपको हर महीने लगभग 8,500 रुपये से 10,000 रुपये के बीच निवेश करना होगा। वहीं, अगर आप 35 साल की उम्र में यह प्लान शुरू करते हैं, तो आपको अगले 25 सालों तक हर महीने करीब 15,000 रुपये का निवेश करना पड़ेगा। कहने का तात्पर्य यह है कि एनपीएस में समय ही सबसे बड़ी दौलत है; आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे, आपकी जेब पर बोझ उतना ही कम पड़ेगा और रिटर्न उतना ही बड़ा मिलेगा।NPS में मिलते हैं दो तरह के अकाउंट और बंपर टैक्स छूट का फायदानेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करने वाले नागरिकों को दो तरह के अकाउंट खोलने की सुविधा मिलती है: पहला टियर-1 (Tier-1) अकाउंट और दूसरा टियर-2 (Tier-2) अकाउंट। टियर-1 एक अनिवार्य रिटायरमेंट अकाउंट है, जिसमें जमा पैसे को आप 60 साल की उम्र से पहले केवल विशेष परिस्थितियों (जैसे गंभीर बीमारी, बच्चों की उच्च शिक्षा या घर बनाने) में ही आंशिक रूप से निकाल सकते हैं। वहीं, टियर-2 अकाउंट एक सामान्य बचत खाते की तरह होता है, जिसे केवल वही लोग खोल सकते हैं जिनका पहले से टियर-1 अकाउंट है; इसमें से आप जब चाहें पैसा निकाल सकते हैं। इसके अलावा, एनपीएस टैक्स बचाने (Tax Saving) के मामले में देश की सबसे बेहतरीन स्कीम मानी जाती है। पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) के तहत इसमें निवेश करने पर आपको इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। इसके अतिरिक्त, धारा 80CCD(1B) के तहत आपको 50,000 रुपये की अलग से टैक्स छूट मिलती है। यानी एक वित्त वर्ष में आप कुल 2 लाख रुपये तक के निवेश पर सीधा टैक्स बचा सकते हैं। साथ ही, मैच्योरिटी पर मिलने वाली 60 फीसदी एकमुश्त रकम पर भी सरकार आपसे एक रुपया टैक्स नहीं लेती।घर बैठे ऑनलाइन या नजदीकी बैंक में ऐसे खुलवाएं अपना NPS खाताअगर आप भी अपने बुढ़ापे को सुरक्षित करना चाहते हैं और एनपीएस में निवेश शुरू करने का मन बना चुके हैं, तो खाता खुलवाने की प्रक्रिया बेहद आसान है। आप ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं। ऑफलाइन तरीके के लिए आप अपने शहर या कस्बे के किसी भी बड़े सरकारी या प्राइवेट बैंक (जैसे SBI, PNB, HDFC, ICICI आदि) या फिर नजदीकी पोस्ट ऑफिस (Point of Presence - PoP) में जाकर केवाईसी दस्तावेजों (आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक) के साथ फॉर्म भर सकते हैं। वहीं, अगर आप घर बैठे ऑनलाइन खाता खोलना चाहते हैं, तो आपको 'eNPS' की आधिकारिक वेबसाइट (enps.nsdl.com या गुड़गांव/मुंबई स्थित केफिनटेक और कैम्स के पोर्टल) पर जाना होगा। वहां अपने आधार नंबर और पैन कार्ड की मदद से रजिस्ट्रेशन करें, मोबाइल पर आए ओटीपी को वेरीफाई करें और ऑनलाइन पेमेंट (नेट बैंकिंग या UPI) के जरिए मात्र 500 रुपये या 1000 रुपये से अपना खाता शुरू करें। खाता खुलते ही आपको एक 12 अंकों का 'प्रान' (PRAN - Permanent Retirement Account Number) मिल जाएगा, जो जीवन भर आपके काम आएगा।
दिल्ली पुलिस के खिलाफ HC पहुंचीं नेहा बोरा, 10 हजार के बॉन्ड नोटिस को चुनौती
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के कारण बताओ नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. पुलिस ने शांति बनाए रखने के नाम पर 10,000 रुपये का मुचलका और जमानत राशि जमा करने को कहा था, जिसे नेहा बोरा ने चुनौती दी है.
टाइगर श्रॉफ की कार पर हमले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच करेगी
मुंबई के जुहू इलाके में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुए हमले के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है. इस हाई प्रोफाइल मामले की विस्तृत जांच अब मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है. जांच के दौरान पुलिस ने अंधेरी स्टेशन के पास से वह बाइक भी बरामद कर ली है, जिसका इस्तेमाल हमलावरों ने वारदात के समय किया था.
Suryaa Teaser: देश के मेडिकल सिस्टम के खिलाफ लड़ेंगे सनी देओल, रिलीज हुआ सूर्या का धमाकेदार टीजर
Suryaa Teaser: 19 अक्टूबर को सनी देओल अपना 69वां जन्मदिन मना रहे हैं. फैंस उन्हें सोशल मीडिया के जरिए बधाई दे रहे हैं. इन सबके बीच दिग्गज एक्टर ने अपने जन्मदिन पर फैंस को खास गिफ्ट दिया है.
नई दिल्ली/पटना/लखनऊ (विशेष संवाददाता): देश के करोड़ों अन्नदाताओं के चेहरे पर एक बार फिर से मुस्कान लौटने वाली है। केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना' (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) की 24वीं किस्त को लेकर कृषि मंत्रालय की तरफ से तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा सहित देश के तमाम राज्यों के किसान बेसब्री से अपने बैंक खातों में 2000 रुपये के आने का इंतजार कर रहे हैं। जमीनी स्तर से मिल रही ताजा जानकारी और कृषि विभाग के सूत्रों के मुताबिक, सरकार बहुत जल्द डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों के खाते में यह राशि भेजने जा रही है। लेकिन इस खुशखबरी के बीच एक चिंताजनक खबर भी सामने आ रही है। हर बार की तरह इस बार भी लाखों किसानों के खाते में 24वीं किस्त के पैसे अटक सकते हैं। कृषि विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन किसानों ने सरकार द्वारा निर्धारित जरूरी औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया है, उन्हें इस बार योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ सकता है। ऐसे में अगर आप भी एक लाभार्थी किसान हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि एक छोटी सी चूक आपके हक के 2000 रुपये रोक सकती है।पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त कब जारी होगी और क्या है ताजा अपडेटप्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत केंद्र सरकार देश के पात्र किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। यह राशि किसानों को हर चार महीने के अंतराल पर तीन समान किस्तों में 2000-2000 रुपये करके दी जाती है ताकि वे अपनी खेती-किसानी के छोटे-मोटे खर्चों, जैसे खाद, बीज और कीटनाशक का इंतजाम बिना किसी कर्ज के कर सकें। अब तक किसानों को सफलतापूर्वक 23 किस्तें मिल चुकी हैं और अब सभी की निगाहें 24वीं किस्त पर टिकी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और विभागीय सूत्रों की मानें तो सरकार आगामी कुछ ही दिनों में एक विशेष कार्यक्रम के तहत बटन दबाकर करोड़ों किसानों के खातों में 24वीं किस्त की रकम ट्रांसफर कर सकती है। हालांकि, अभी तक कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से किसी आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन राज्य सरकारों द्वारा लाभार्थियों की अंतिम सूची (Beneficiary List) को लॉक करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यह राशि जारी कर दी जाएगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और नियमित रूप से आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर अपना स्टेटस चेक करते रहें।इन तीन बड़ी गलतियों की वजह से अटक सकते हैं आपके 2000 रुपयेसरकार ने पीएम किसान योजना में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए नियमों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दिया है। अगर आपके खाते में पिछली किस्त आई थी, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 24वीं किस्त भी बिना किसी रुकावट के आ जाएगी। पैसे अटकने का सबसे पहला और बड़ा कारण 'ई-केवाईसी' (e-KYC) का अधूरा होना है। सरकार ने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि बिना ई-केवाईसी के किसी भी किसान को अगली किस्त नहीं दी जाएगी। दूसरा सबसे प्रमुख कारण 'भूलेखों का सत्यापन' (Land Seeding) न होना है। कई राज्यों में स्थानीय पटवारी या राजस्व अधिकारियों द्वारा किसानों की जमीन का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। अगर आपके स्टेटस में Land Seeding के आगे 'No' लिखा आ रहा है, तो आपकी किस्त पक्के तौर पर रुक जाएगी। तीसरी बड़ी वजह बैंक खाते का आधार से लिंक न होना और एनपीसीआई (NPCI) से मैपिंग न होना है। चूंकि सरकार अब आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम (ABPS) के जरिए ही पैसा भेजती है, इसलिए अगर आपका बैंक अकाउंट डीबीटी (DBT) के लिए इनेबल नहीं है, तो सरकार द्वारा पैसा भेजे जाने के बावजूद रकम आपके खाते में क्रेडिट नहीं हो पाएगी।अपात्र किसानों पर सरकार का शिकंजा और आवेदन फॉर्म में गलतियांउपरोक्त तीन तकनीकी कारणों के अलावा, कई बार किसानों द्वारा फॉर्म भरते समय की गई छोटी-छोटी गलतियां भी किस्त रुकने की वजह बन जाती हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि आपके आधार कार्ड में लिखे नाम की स्पेलिंग और पीएम किसान पोर्टल पर दर्ज नाम की स्पेलिंग में अंतर है, तो सिस्टम आपके डेटा को रिजेक्ट कर देता है। इसी तरह गलत बैंक अकाउंट नंबर या गलत IFSC कोड होने पर भी भुगतान फेल हो जाता है। इसके साथ ही केंद्र सरकार उन लोगों पर भी लगातार शिकंजा कस रही है जो अपात्र होने के बावजूद गलत तरीके से इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। नियमों के मुताबिक, यदि किसी किसान परिवार में कोई सदस्य आयकर (Income Tax) भरता है, किसी संवैधानिक पद पर है, सरकारी नौकरी में है (चतुर्थ श्रेणी को छोड़कर), या फिर डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पेशेवर हैं, तो उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता। साथ ही, जिन लोगों को महीने में 10,000 रुपये या उससे अधिक की पेंशन मिलती है, उनके नाम भी लाभार्थी सूची से काटे जा रहे हैं। एक ही परिवार में पति और पत्नी दोनों को यह लाभ नहीं मिल सकता, ऐसी स्थिति में भी किस्त रोकी जा रही है।घर बैठे तुरंत पूरा करें e-KYC और जमीन का सत्यापन ताकि न रुके पैसाअगर आपने अभी तक अपनी ई-केवाईसी पूरी नहीं की है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप यह काम घर बैठे अपने स्मार्टफोन से मात्र दो मिनट में कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आपको पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाना होगा। वहां होमपेज पर आपको 'Farmers Corner' के तहत 'e-KYC' का विकल्प दिखाई देगा। उस पर क्लिक करने के बाद अपना आधार नंबर दर्ज करें। इसके बाद आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, जिसे दर्ज करते ही आपकी ई-केवाईसी सफलतापूर्वक पूरी हो जाएगी। यदि आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है, तो आप अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या वसुधा केंद्र पर जाकर बायोमेट्रिक तरीके (अंगूठे का निशान लगाकर) से अपनी केवाईसी करवा सकते हैं। इसके अलावा, आप गूगल प्ले स्टोर से 'PMKISAN GOI' और 'AadhaarFaceRD' ऐप डाउनलोड करके अपने चेहरे को स्कैन (Face Authentication) करके भी केवाईसी पूरी कर सकते हैं। वहीं, अगर आपके स्टेटस में लैंड सीडिंग (Land Seeding) 'No' दिखा रहा है, तो इसके लिए आपको अपने ब्लॉक के कृषि अधिकारी या हल्का लेखपाल/पटवारी से मिलकर अपनी जमीन के कागजात (खतौनी/खेसरा) जमा करने होंगे, जिसके बाद वे इसे ऑनलाइन अपडेट कर देंगे।पीएम किसान बेनिफिशियरी लिस्ट में अपना नाम और स्टेटस कैसे चेक करेंअपनी 24वीं किस्त की स्थिति जानने के लिए प्रत्येक किसान को अपना बेनिफिशियरी स्टेटस (Beneficiary Status) जरूर चेक करना चाहिए। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल पर जाएं और 'Know Your Status' के विकल्प पर क्लिक करें। यहां आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर डालना होगा। अगर आपको रजिस्ट्रेशन नंबर याद नहीं है, तो आप अपने मोबाइल नंबर या आधार नंबर की मदद से इसे तुरंत निकाल सकते हैं। कैप्चा कोड भरने और ओटीपी सबमिट करने के बाद आपकी स्क्रीन पर आपकी पूरी कुंडली खुल जाएगी। यहां आपको तीन चीजें विशेष रूप से देखनी हैं: पहली e-KYC Status, दूसरी Eligibility Status और तीसरी Land Seeding। इन तीनों के आगे हरे रंग में 'Yes' लिखा होना अनिवार्य है। साथ ही 'Aadhaar Bank Account Seeding Status' में भी 'Yes' होना चाहिए। अगर आप यह देखना चाहते हैं कि आपके गांव की नई लिस्ट में आपका नाम है या नहीं, तो होमपेज पर 'Beneficiary List' पर क्लिक करें। वहां अपना राज्य (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश आदि), अपना जिला, अपनी तहसील या ब्लॉक और अंत में अपने गांव का नाम चुनकर 'Get Report' पर क्लिक करें। आपके सामने पूरे गांव के लाभार्थियों की सूची खुल जाएगी, जिसमें आप अपना नाम आसानी से ढूंढ सकते हैं। अगर सब कुछ सही होने के बाद भी कोई समस्या आ रही है, तो किसान भाई-बहन पीएम किसान हेल्पलाइन नंबर 155261 या 011-24300606 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और तुरंत समाधान पा सकते हैं।
Airtel का ₹185 Voice-Only प्लान, जानिए कैसे होगी पैसों की बचत!
माता-पिता के फोन में सिर्फ कॉलिंग के लिए रिचार्ज कराते हैं? एयरटेल का ₹185 वाला वॉइस-ओनली प्लान आपके पैसे बचा सकता है. इसमें 28 दिन की वैलिडिटी, अनलिमिटेड कॉलिंग और 300 SMS मिलते हैं. लेकिन क्या यह प्लान आपके लिए सबसे सस्ता विकल्प है? जानिए इसके फायदे.
Ramban में खाद और विस्फोटक सामग्री की दुकानों पर Police ने की सघन जांच
दशहरा और अन्य त्योहारों से पहले कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में उर्वरक, बीज और विस्फोटक सामग्री बेचने वाली दुकानों पर तलाशी ली और निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान पुलिस ने नियंत्रित सामग्री की अवैध बिक्री, दुरुपयोग और उन्हें अवैध रूप से अन्यत्र पहुंचाने पर रोक लगाने के लिए दुकानों में उपलब्ध भंडार, लाइसेंस और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। अधिकारियों के अनुसार, ह अभियान त्योहारों के दौरान शांति, सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए जा रहे एहतियाती उपायों के तहत यचलाया गया। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने दुकानदारों और कारोबारियों से लागू कानूनों का पालन करने तथा अधिकारियों के साथ सहयोग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि लोगों से भी संदिग्ध गतिविधियों या नियंत्रित सामग्रियों की अवैध बिक्री की सूचना निकटतम पुलिस थाने या आपातकालीन नंबर 112 पर देने का आग्रह किया गया। रामबन पुलिस ने कहा कि वह कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए त्योहारों के दौरान सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
MP के CM Mohan Yadav ने दिए निर्देश, Simhastha 2028 के सभी कार्य समय पर हों
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 19 अक्टूबर को उज्जैन में 'सिहस्थ 2028' की तैयारियों और चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा के लिए एक बैठक बुलाई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करें, आवागमन को सुगम बनाएं और सभी परियोजनाओं को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करें। बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और इस बात पर जोर दिया कि कार्यक्रम में आने वाले अनुमानित 30 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए कुशल योजना बनाना बहुत जरूरी है। इसे भी पढ़ें: अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी पर Jairam Ramesh का हमला, BJP और SIT जांच पर उठाए सवाल पत्रकारों से बात करते हुए, मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि आज हमने उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ के लिए विकास कार्यों की समीक्षा की। सिंहस्थ न केवल देश का, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। इसकी बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि उज्जैन आने वाले लगभग 30 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं को सभी जरूरी सुविधाएं मिलें, और वे बिना किसी परेशानी के पवित्र स्नान कर सकें तथा अन्य धार्मिक गतिविधियों में भाग ले सकें। उन्होंने बताया कि सरकार स्थायी बुनियादी ढांचा तैयार करने पर जोर दे रही है, ताकि इस आयोजन के बाद भी विकास कार्यों का लाभ मिलता रहे। इन तैयारियों में उज्जैन जिले, संभाग और पूरे राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। मुख्यमंत्री यादव ने मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में धार्मिक स्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में लगभग 16 गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि पिछले तीन वर्षों में धार्मिक स्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या लगभग 16 गुना बढ़ गई है। यह हमारे लिए बहुत संतोष की बात है। 2022 में 'महाकाल लोक' के विकास के बाद, उज्जैन में आने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, और यह शहर कई अन्य जगहों के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। इसे भी पढ़ें: Jaishankar और Chidambaram की भिड़ंत देखकर मजा आ जायेगा ! Regime Change को लेकर दोनों के बीच हुई गर्मागर्म बहस से चढ़ गया सियासी पारा बैठक में भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए परिवहन सुविधाओं, शैक्षणिक संस्थानों, हवाई अड्डे और इससे जुड़े बुनियादी ढांचे की समीक्षा भी की गई। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्यक्रम के लिए सभी आवश्यक जरूरतों की पहचान करने और उन्हें मंजूरी देने का निर्देश दिया। उन्होंने घोषणा की कि काम की प्रगति की हर महीने समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि आज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, हमने शैक्षणिक संस्थानों, परिवहन सुविधाओं, हवाई अड्डे और हवाई अड्डे से जुड़े अन्य बुनियादी ढांचा कार्यों की विस्तृत समीक्षा की है। संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करके भविष्य की आवश्यक जरूरतों को मंजूरी देने के बाद, अब हम हर महीने काम की प्रगति की समीक्षा करेंगे। मैं इस कार्यक्रम की तैयारियों में शामिल सभी लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों से फिर से आग्रह करता हूं कि वे बेहतर योजना बनाएं और यह सुनिश्चित करें कि सभी काम तय समय सीमा के भीतर पूरे हो जाएं।
म्यूजिक डायरेक्टर ने खुद एक पॉडकास्ट में बताया कि उन्हें किसी भी फिल्म में गाने बनाने में इतनी मुश्किल नहीं हुई. उनका काम तुरंत एक्सेप्ट हो जाता था लेकिन इस एक फिल्म के लिए उन्हें बार बार रिजेक्शन मिला.
बूढ़ा हो रहा बीजिंग, चीन की राजधानी से युवा आबादी हो जाएगी साफ?
बीजिंग डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, 2035 तक राजधानी के हर तीन निवासियों में से एक की उम्र 60 साल या उससे अधिक होगी. बढ़ती बुजुर्ग आबादी से पेंशन व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है, जबकि सरकार जन्म दर बढ़ाने और घरेलू खपत संभालने की दोहरी चुनौती से जूझ रही है.
unisex Salon at Railways station: ट्रेनें लेट होने पर या स्टेशन पर जल्दी पहुंचने पर यात्रियों को घंटों खाली बैठकर इंतजार करना पड़ता है. इसी समय का सदुपयोग करने के उद्देश्य से रेलवे परिसरों में मॉडर्न यूनिसेक्स सैलून खोलने की योजना बनाई गई है. जानिए क्या हैं इसकी मुख्य विशेषताएं और पूरा प्लान.
Starlink के भारत प्रवेश पर बोले Shashi Tharoor, सभी कंपनियों के लिए एक जैसी प्रक्रिया
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को कहा कि स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क की स्टारलिंक और भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रवेश करने की इच्छुक अन्य कंपनियों को एक जैसी प्रक्रिया से गुजरने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का कहना है कि सभी कंपनियों को एक जैसी देरी का सामना करना पड़ रहा है। स्टारलिंक को लेकर मस्क की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, थरूर ने ANI से कहा कि अगर सरकार की सफाई को अक्षरशः माना जाए, तो इस प्रक्रिया में न तो मस्क को और न ही रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को कोई फायदा मिल रहा है। इसे भी पढ़ें: भारतीय मूल की Navi Pillay को Nobel Peace Prize मिलने पर India क्यों नहीं दे रहा बधाई? कारण जानकर चौंक जाएँगे! उन्होंने कहा कि मैंने इस मुद्दे पर सरकार की सफाई सुनी है। सरकार का कहना है कि एक तय प्रक्रिया है, जिसमें बोली लगाने वाली सभी कंपनियां शामिल हैं और सभी को एक जैसी देरी का सामना करना पड़ रहा है। अगर सरकार की इस बात को सच मानें, तो इसका मतलब है कि मस्क कतार में पीछे नहीं हैं और अंबानी आगे नहीं हैं। मुझे लगता है कि हमें बस इस प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार करना चाहिए। थरूर ने कहा कि तकनीक, सुरक्षा संबंधी चिंताएं, तकनीकी विवरण और लागत जैसे कई कारक इसके नतीजे तय करेंगे, जबकि अंतिम फैसला उपभोक्ताओं के हाथ में होगा। उन्होंने कहा कि इसके कई पहलू हैं। इसमें तकनीक से जुड़े सवाल हैं, सुरक्षा संबंधी कुछ चिंताएं हैं, अपलिंकिंग से जुड़ी कई तरह की बातें हैं और अंत में लागत का सवाल है। लागत के मामले में फैसला आम जनता करेगी। अगर आप मुझे कोई सेवा दे रहे हैं और कोई दूसरा व्यक्ति वही सेवा 10 गुना कीमत पर दे रहा है, तो हो सकता है कि मैं आपसे ही वह सेवा लूं। या फिर, अगर मुझे सच में लगे कि वह जो सेवा दे रहा है, वह 10 गुना कीमत के लायक है, तो मैं उसे वह रकम दे दूंगा। हर ग्राहक को खुद ही यह तय करना होगा। इसे भी पढ़ें: Shashi Tharoor ने Delhi में Internet और Metro बंदी पर केंद्र को घेरा, CJP सदस्यों की मांगी रिहाई थरूर ने आगे कहा कि वह अपने मौजूदा इंटरनेट कनेक्शन से संतुष्ट हैं और व्यक्तिगत रूप से स्टारलिंक (Starlink) सेवाओं की तलाश नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर, मैं अपने मौजूदा इंटरनेट कनेक्शन से काफी खुश हूं। मैं खुद स्टारलिंक नहीं लेना चाहता। लेकिन अगर कुछ लोगों को लगता है कि ये चीजें उनके काम की हैं, तो एक स्वतंत्र देश में उन्हें यह मौका मिलना चाहिए। इससे पहले 9 अक्टूबर को, लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने मस्क के उन आरोपों पर अपनी बात रखी, जिनमें कहा गया था कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी (स्टारलिंक) ने भारत के सभी कानूनों और शर्तों का पालन किया है, फिर भी उसे भारत में लाइसेंस नहीं मिल पाया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने भारतीय बाजार में प्रवेश करने की स्टारलिंक की कोशिशों से जुड़ी स्थिति को चिंताजनक बताया। मस्क ने 'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि धन्यवाद, राहुल। यह वाकई चिंताजनक है।
अनिरुद्ध की दुल्हनिया काव्या मारन के शाही ठाठ, लुक्स हैं कमाल
काव्या मारन जल्द ही अनिरुद्ध रविचंदर के साथ शादी को लेकर चर्चा में हैं. इस बीच हम आज आपको काव्या के ऐसे 5 लुक्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें देखकर आप उनके अंदाज के फैन हो जाएंगे.
US ने बनाया 'हैमर ऑफ द गॉड्स', दुश्मन का GPS कर देता है बंद
अमेरिकी ‘हैमर ऑफ द गॉड्स’ सिस्टम जीपीएस सिग्नल जाम करता है. जुलाई में इसका सफल समुद्री परीक्षण हुआ. ये दुश्मन के पूरे पोजिशनिंग सिस्टम को बर्बाद कर देता है.
VTR में पर्यटन सत्र के पहले दिन ही उमड़ी पर्यटकों की भारी भीड़
बिहार के इकलौते और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बेहद उत्साहजनक और रोमांचित करने वाली खबर सामने आ रही है। पर्यटकों के लंबे इंतजार के बाद जैसे ही इस नए सत्र के लिए वीटीआर के गेट सैलानियों के लिए खोले गए, वैसे ही प्रकृति की गोद में समाए इस रिजर्व में देश के कोने-कोने से पहुंचे पर्यटकों का तांता लग गया। सत्र के पहले ही दिन जंगल सफारी और नेचर ट्रेल का आनंद लेने के लिए भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे, जिससे पूरे वन परिसर में एक अलग ही रौनक देखने को मिली। सबसे खास बात यह रही कि पहले ही दिन कई पर्यटकों को जंगल के राजा कहे जाने वाले रॉयल बंगाल टाइगर (बाघ), तेंदुए, जंगली सुअर और हिरणों के झुंड के बेहद करीब से दीदार हुए, जिन्हें देखकर सैलानी खुशी से झूम उठे और उनके चेहरे पर एक अलग ही रोमांच साफ झलक रहा था।मानसून ब्रेक के बाद पर्यटकों के लिए खुले वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के दरवाजेहर साल मानसून के मौसम (बरसात के दिनों) में वन्यजीवों के प्रजनन काल और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश के अधिकांश टाइगर रिजर्व की तरह वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में भी पर्यटकों की एंट्री और जंगल सफारी पर कुछ महीनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इस दौरान जंगल अपनी प्राकृतिक रिकवरी करता है और घास-फूस तथा जल स्रोतों का विकास होता है। इस साल भी मानसून की समाप्ति के बाद प्रशासनिक तैयारियों को पूरा करते हुए जैसे ही वीटीआर के कपाट पर्यटकों के लिए दोबारा खोले गए, वैसे ही टूरिज्म इंडस्ट्री और स्थानीय कारोबारियों ने राहत की सांस ली। पहले दिन पर्यटकों के स्वागत के लिए वन विभाग के अधिकारियों ने विशेष इंतजाम किए थे, जिसमें पर्यटकों को पर्यावरण संरक्षण और जंगल के नियमों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ उनका पारंपरिक स्वागत भी शामिल था।पहले ही दिन पर्यटकों को मिले बाघ और वन्यजीवों के शानदार दीदारजंगल सफारी के दौरान पर्यटकों का सबसे बड़ा सपना किसी जंगली जानवर, खासकर बाघ को अपनी आंखों से देखने का होता है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व इस मामले में बहुत भाग्यशाली साबित हुआ क्योंकि सत्र के पहले ही दिन जब जिप्सियां जंगलों के अंदरूनी रास्तों (जैसे गोनौली और मंगुराहा रेंज) की ओर बढ़ीं, तो कई भाग्यशाली पर्यटकों को बाघिन और उसके शावकों की कलकारी देखने को मिल गई। इसके अलावा खुले में दौड़ते हुए चीतल, सांभर, भालू और विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे पक्षियों को देखकर सैलानियों ने अपने कैमरों और मोबाइल में इन पलों को हमेशा के लिए कैद कर लिया। पर्यटकों का कहना था कि उन्होंने जितनी उम्मीद की थी, उससे कहीं अधिक रोमांचक अनुभव उन्हें वीटीआर के पहले ही दिन मिल गया, जो उनके पूरे परिवार के लिए एक यादगार ट्रिप बन गया है।स्थानीय रोजगार और पर्यटन को मिल रही है एक नई रफ्तारवाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की यह भारी भीड़ केवल वन्यजीव प्रेमियों के लिए ही खुशी की बात नहीं है, बल्कि यह पश्चिम चंपारण क्षेत्र के स्थानीय लोगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत बड़ा वरदान साबित हो रही है। वीटीआर के खुलने से स्थानीय युवाओं के लिए जिप्सियां चलाने, गाइडिंग करने, होमस्टे संचालित करने और पारंपरिक हस्तशिल्प बेचने के नए अवसर पैदा होते हैं। वन विभाग और जिला प्रशासन भी लगातार यह प्रयास कर रहा है कि यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिल सकें ताकि वे बिना किसी परेशानी के प्रकृति का आनंद उठा सकें। इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को बढ़ावा मिलने से न केवल स्थानीय निवासियों की आजीविका चलती है, बल्कि जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति स्थानीय लोगों की जागरूकता भी तेजी से बढ़ती है।इस सीजन वीटीआर आने का बना रहे हैं प्लान, तो इन बातों का रखें विशेष ध्यानयदि आप भी आने वाले छुट्टियों के दिनों में या विंटर सीजन में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व घूमने का मन बना रहे हैं, तो यह समय वहां जाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान यहां का मौसम सुहाना होता है और सुबह-शाम की ठंडक जंगल की सैर के मजे को दोगुना कर देती है। हालांकि, पर्यटकों की भारी मांग को देखते हुए वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन जिप्सारी सफारी की बुकिंग पहले ही कर लेना समझदारी होगी। साथ ही, जंगल के भीतर प्रवेश करते समय प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध और वन विभाग के सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का यह शानदार आगाज इस बात की गवाही देता है कि इस बार का पर्यटन सत्र इतिहास के सबसे सफल सत्रों में से एक होने वाला है।
'मैं अपना Aura खो रही हूं', 9 घंटे की शिफ्ट से परेशान हुई Gen Z एम्प्लॉय
जेन जी की पहली जॉब का एक्सपीरियंस कैसा होता है? सोशल मीडिया पर शीतल ने अपनी जेन जी कजन का एक्सपीरियंस किया, जो ऑफिस में लंबे टाइम तक काम करने, मैनेजर की उम्मीदों और गलतियों के डर से परेशान हो गई.शीतल की कजन कहती हैं कि जॉब के चक्कर में उसका ऑरा खत्म हो रहा है और मेंटल हेल्थ भी खराब हो रही है.
नवरात्रि में 9 दिन भूखे रहने के बाद पेट भरकर खा रहे हैं? बिगड़ जाएगी तबीयत, जानें कैसी रखें डाइट
9 दिन व्रत के बाद सीधे पूड़ी या कचौड़ी खा रहे हैं? आज ही रुक जाएं, नहीं तो पड़ जाएंगे लेने के देने. जानिए इतने दिन भूखे रहने के बाद क्या खाएं और क्या नहीं.
राजस्थान यात्रा के दौरान रणकपुर को अपनी बकेट लिस्ट में जरूर शामिल करें
राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरा पर जब भी सबसे खूबसूरत और शांत पर्यटन स्थलों की बात आती है, तो अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसे रणकपुर का नाम बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है। दुनिया भर में रणकपुर को मुख्य रूप से इसके अति-प्राचीन और वास्तुकला के बेजोड़ नमूने वाले संगमरमर के जैन मंदिरों के लिए जाना जाता है। हर साल लाखों की संख्या में देश-विदेश के सैलानी इन भव्य मंदिरों की नक्काशी को देखने के लिए यहां खींचे चले आते हैं। लेकिन यदि आप यह सोचते हैं कि रणकपुर का आकर्षण सिर्फ जैन मंदिरों तक ही सीमित है, तो आप इस खूबसूरत जगह के एक बहुत बड़े हिस्से से अनजान हैं। जैन मंदिरों की भव्यता के अलावा रणकपुर में कई ऐसी अद्भुत और रोमांचक जगहें मौजूद हैं जो आपकी यात्रा को हमेशा-हमेसा के लिए यादगार बना सकती हैं। यहां का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर, कलकल बहते पानी वाले खूबसूरत बांध और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास तौर पर तैयार की गई जंगल सफारी इस जगह को एक परफेक्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाती है।अरावली की वादियों में छिपा वास्तुकला का चमत्कार: रणकपुर के जैन मंदिरअपनी यात्रा की शुरुआत रणकपुर के सबसे प्रसिद्ध आकर्षण यानी जैन मंदिरों से ही करते हैं। चौमुखा मंदिर के नाम से मशहूर यह जैन तीर्थस्थल भगवान आदिनाथ को समर्पित है। सफेद संगमरमर के पत्थरों को काटकर जिस बारीकी से इस मंदिर का निर्माण किया गया है, उसे देखकर आधुनिक इंजीनियर और वास्तुकार भी हैरान रह जाते हैं। इस मंदिर में लगभग 1444 खंभे (Pillars) बने हुए हैं, और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि किसी भी दो खंभे की नक्काशी एक जैसी नहीं है। जब सूरज की किरणें इन संगमरमर के खंभों पर पड़ती हैं, तो दिनभर में उनका रंग बदलता हुआ प्रतीत होता है। शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह स्थान किसी भी पर्यटक के मन को मोह लेता है और उन्हें इतिहास के एक अलग ही युग में ले जाता है।सूर्य मंदिर: इतिहास और प्राचीन वास्तुकला का एक और बेजोड़ नमूनाजैन मंदिरों के परिसर से थोड़ी ही दूरी पर स्थित ऐतिहासिक सूर्य मंदिर (Sun Temple) यहां आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। भगवान सूर्य को समर्पित यह मंदिर अपनी अनूठी षटकोणीय (Hexagonal) वास्तुकला और दीवारों पर की गई बेहद सुंदर मूर्तिकला के लिए जाना जाता है। हालांकि समय के साथ इस मंदिर का कुछ हिस्सा खंडित भी हुआ है, लेकिन इसके गुंबद और दीवारों पर उकेरे गए घोड़े के रथ और देवी-देवताओं के चित्र आज भी तत्कालीन कलाकारों की अद्भुत कलाकारी की गवाही देते हैं। इतिहास प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए यह सूर्य मंदिर किसी खजाने से कम नहीं है। यहां शांति से बैठकर अरावली की पहाड़ियों के नजारों को देखना अपने आप में एक बेहद सुकून भरा अनुभव होता है।रणकपुर बांध और प्रकृति का मनमोहक सौंदर्ययदि आप प्राकृतिक सुंदरता और वाटर बॉडीज के शौकीन हैं, तो रणकपुर बांध (Ranakpur Dam) आपके लिए एक आदर्श जगह है। घने जंगलों और पहाड़ों के बीच स्थित यह बांध मानसून और सर्दियों के मौसम में बेहद खूबसूरत नजर आता है। बांध के चारों तरफ फैला शांत पानी और उस पर मंडराते प्रवासी पक्षी इस जगह को पिकनिक मनाने के लिए एक बेहतरीन स्थान बनाते हैं। यहां बैठकर आप पानी की कलकल आवाज और ठंडी हवाओं के झोंके का आनंद ले सकते हैं। शहर की भागदौड़ और शोरगुल से दूर प्रकृति के आंचल में कुछ पल शांति से बिताने के लिए यह जगह पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। फोटोग्राफी के लिहाज से भी यह लोकेशन इंस्टाग्राम और ट्रैवल ब्लॉगर्स की पहली पसंद बनती जा रही है।थार और अरावली का रोमांच: रणकपुर की जंगल सफारी और वन्यजीवरणकपुर सिर्फ इतिहास और मंदिरों का शहर नहीं है, बल्कि यह एडवेंचर लवर्स के लिए भी किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां स्थित कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य (Kumbhalgarh Wildlife Sanctuary) के अंतर्गत आने वाले जंगलों में पर्यटकों के लिए रोमांचक जंगल सफारी का शानदार प्रबंध किया जाता है। घने जंगलों के बीच सफारी के दौरान सैलानियों को तेंदुए (Leopard), जंगली सुअर, भालू, सांभर, और विभिन्न प्रकार के दुर्लभ पक्षी देखने का अवसर मिलता है। प्रकृति के इतने करीब जाकर वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना एक अलग ही रोमांच पैदा करता है। स्थानीय गाइड पर्यटकों को जंगल के कोने-कोने से जुड़ी रोमांचक जानकारियां और इतिहास साझा करते हैं, जिससे सफारी का मजा और भी अधिक बढ़ जाता है।यदि आप आने वाले दिनों में राजस्थान घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो उदयपुर और जोधपुर के बीच स्थित रणकपुर की एक दिन की यात्रा आपकी पूरी ट्रिप में चार चांद लगा सकती है। यहां की बेहतरीन आबोहवा, लजीज राजस्थानी भोजन, स्थानीय हस्तशिल्प और घूमने के लिए एक से बढ़कर एक ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल इस जगह को हर वर्ग के पर्यटकों के लिए खास बनाते हैं। इतिहास, आध्यात्म, रोमांच और प्रकृति का यह अनूठा संगम आपको बार-बार यहां आने के लिए मजबूर कर देगा। तो देर किस बात की, अपना अगला वेकेशन प्लान कीजिए और रणकपुर की इन अनकही खूबसूरती से भरी वादियों का दीदार कीजिए।
नोबेल शांति पुरस्कार मिलते ही क्या किसी व्यक्ति के सारे पुराने बयान और विवाद भुला दिए जाने चाहिए? क्या भारत सरकार का यह फर्ज है कि वह हर उस शख्स को बधाई दे, जिसने अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल किया है, भले ही उसका भारत के प्रति रवैया कैसा भी रहा हो? यह सवाल इसलिए उठे रहे हैं क्योंकि कांग्रेस नेता शशि थरूर और विश्लेषक तथा अर्बन नक्सल के रूप में देखे जाने वाले सी. उदय भास्कर इस बारे में नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं कि भारत सरकार ने अब तक नावि पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर बधाई क्यों नहीं दी है? शशि थरूर, सी उदय भास्कर तथा उन जैसे कुछ और लोगों के तर्कों को देखकर तो यही लगता है कि कुछ लोगों के लिए भारत सरकार का हर फैसला गलत है और विदेशों से मिलने वाला हर सम्मान भारत के लिए सिर झुकाने का आदेश बन जाता है। इस बीच, नावि पिल्लै के मामले में पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने तथ्यों के साथ जो सवाल उठाए हैं, वे शशि थरूर और सी. उदय भास्कर जैसे लोगों को आईना दिखाने के लिए काफी हैं। सिब्बल ने साफ कर दिया है कि किसी को नोबेल शांति पुरस्कार मिल जाने भर से भारत सरकार पर उसे बधाई देने की बाध्यता नहीं आ जाती। इसे भी पढ़ें: Nobel Peace Prize विजेता Navi Pillay को बधाई न देने पर Shashi Tharoor ने केंद्र को घेरा हम आपको बता दें कि पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किये गये संदेश में लिखा है कि छह दिन बीत गए और भारत सरकार ने बधाई नहीं दी। शशि थरूर के शब्दों में यह शर्मनाक फैसला है। लेकिन यहां सवाल उठता है कि क्या किसी पुरस्कार विजेता की भारतीय मूल की पहचान ही उसके प्रति भारत सरकार के औपचारिक अभिनंदन का पर्याप्त आधार है? क्या पुरस्कार विजेता का सार्वजनिक रिकॉर्ड, भारत के प्रति उसका रवैया और उसके विवादास्पद वक्तव्य कोई मायने नहीं रखते? शशि थरूर को समझना होगा कि राष्ट्र की विदेश नीति भावनाओं के आवेग पर नहीं, विवेक और राष्ट्रीय हित के आकलन पर चलती है। हम आपको बता दें कि कंवल सिब्बल ने याद दिलाया है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में 2008 से 2014 तक नावि पिल्लै ने भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड, कश्मीर, कथित सामूहिक कब्रों और गुमशुदगियों, सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA), यौन हिंसा तथा जातिगत और लैंगिक भेदभाव जैसे मुद्दों पर भारत की आलोचना की थी। कंवल सिब्बल का दूसरा सवाल और अधिक गंभीर है। उन्होंने एक्स पर लिखा है कि नावि पिल्लै ने अपने कार्यकाल में पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद की स्पष्ट निंदा नहीं की थी और 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के संदर्भ में पाकिस्तान का नाम लेकर स्पष्ट निंदा करने से परहेज किया था। इसकी बजाय, उन्होंने आतंकवाद के बाद पड़ोसी देशों पर उंगली उठाने की प्रवृत्ति पर सवाल किया और घरेलू जिम्मेदारी पर जोर दिया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि मुंबई में निर्दोष लोगों का खून बहाने वाले आतंकवाद के संदर्भ में ऐसी भाषा क्या भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के प्रति पर्याप्त संवेदनशील थी? वहीं, सी. उदय भास्कर का रुख भी कम दिलचस्प नहीं है। वह पिल्लै को साहसी न्यायविद बताते हुए भारत सरकार के बधाई न देने पर आश्चर्य जता रहे हैं और इसे सिद्धांतों के सम्मान से जोड़ रहे हैं। लेकिन उनसे पूछा जाना चाहिए कि सिद्धांतों की यह कसौटी आखिर एकतरफा क्यों दिखाई देती है? जब भारत आतंकवाद के प्रायोजन, सीमा पार से होने वाली हिंसा और निर्दोष नागरिकों की हत्या का प्रश्न उठाता है, तब क्या वही अंतरराष्ट्रीय नैतिकता उतनी ही दृढ़ता से लागू होती है? क्या कानून और जवाबदेही की बातें केवल भारत को कटघरे में खड़ा करने के लिए हैं, या आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के लिए भी हैं? भास्कर जिस अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था की बात करते हैं, उसका समर्थन होना चाहिए। लेकिन नियम-आधारित व्यवस्था का अर्थ यह नहीं कि किसी देश की सुरक्षा चिंताओं को गौण कर दिया जाए। हम आपको यह भी बता दें कि कंवल सिब्बल ने यह भी रेखांकित किया है कि पिल्लै अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की न्यायाधीश रह चुकी हैं, जबकि भारत इस न्यायालय का सदस्य नहीं है। यह तथ्य अपने आप में उनके प्रति बधाई न देने का निर्णायक कारण नहीं है, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ भारत के संबंधों का अपना कानूनी और कूटनीतिक संदर्भ है। इसलिए हर अंतरराष्ट्रीय पद या पुरस्कार को भारत की स्वीकृति का स्वतः प्रमाण मान लेना गलत होगा। साथ ही यहां सबसे बड़ा सवाल थरूर और भास्कर से ही नहीं, बल्कि उस मानसिकता से है जो भारत सरकार को पहले दोषी ठहराती है और उसके बाद तथ्यों की तलाश करती है। क्या सरकार का हर असहमति वाला फैसला शर्मनाक है? क्या किसी विदेशी मंच पर भारत की आलोचना करने वाला व्यक्ति अपने आप निष्पक्ष और महान हो जाता है? और क्या भारतीय मूल का होना किसी व्यक्ति के सार्वजनिक आचरण पर सवाल उठाने से रोक देता है? थरूर स्वयं विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की समझ रखने वाले नेता हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वह किसी मामले को केवल भावनात्मक अंतरराष्ट्रीयतावाद के चश्मे से न देखें। भास्कर से भी अपेक्षा है कि वह सिद्धांतों की बात करते समय आतंकवाद के प्रश्न पर समान कठोरता दिखाएं। देखा जाये तो किसी व्यक्ति के योगदान को नकारने या मानवाधिकारों के महत्व को कम करने की जरूरत नहीं है। जरूरत है दोहरे मानदंडों से बचने की। इसमें कोई दो राय नहीं कि कंवल सिब्बल ने शोर का जवाब तथ्यों और कूटनीतिक संदर्भ से दिया है। उन्होंने एक जरूरी प्रश्न उठाया है कि बधाई न देने पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने से पहले क्या यह नहीं देखना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति का भारत के प्रति सार्वजनिक रुख क्या रहा है? बहरहाल, सवाल उठाना कोई गलत काम नहीं है। परेशानी तब होती है, जब कुछ लोग हर मुद्दे पर भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, लेकिन भारत की सुरक्षा और हितों पर सवाल उठाने वालों से जवाब मांगने पर उन्हें बुरा लगने लगता है। अंतरराष्ट्रीय सम्मान अपनी जगह है, लेकिन देश का स्वाभिमान और राष्ट्रहित भी उतने ही जरूरी हैं। आखिर भारत हर बार दूसरों की कसौटी पर ही क्यों खरा उतरे? उसे अपने हितों के हिसाब से फैसले लेने का भी पूरा अधिकार है। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने बस यही बात याद दिलाई है। इसलिए उनके सवालों को खारिज करने के बजाय उन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
माउंट आबू की इस शांत झोपड़ी में 12 साल रहीं थीं मीराबाई
राजस्थान की पावन और ऐतिहासिक धरती अपने भीतर अनगिनत रहस्यों, राजवंशों के गाथाओं और महान संतों के इतिहास को समेटे हुए है। जब भी कृष्ण भक्ति की पराकाष्ठा और समर्पण की बात आती है, तो मेवाड़ की रानी और महान संत मीराबाई का नाम सबसे पहले लिया जाता है। मीराबाई के जीवन से जुड़े कई स्थल देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चित्तौड़गढ़ और वृंदावन के अलावा राजस्थान के प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू में भी उनका एक बेहद गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है? माउंट आबू की हसीन वादियों और शांत पहाड़ियों के बीच एक ऐसी छोटी सी ऐतिहासिक झोपड़ी मौजूद है, जहां मीराबाई ने अपने जीवन के पूरे 12 वर्ष एकांत साधना और कृष्ण भक्ति में बिताए थे। समय के पहिए के साथ यह स्थान आज पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक बेहद खास और दर्शनीय पहचान बन चुका है।माउंट आबू के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच मीराबाई की साधना स्थली का रहस्यअरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी और अपनी ठंडी आबोहवा के लिए मशहूर माउंट आबू हमेशा से पर्यटकों की पहली पसंद रहा है। लेकिन इस पर्यटक स्थल के आंचल में एक ऐसा आध्यात्मिक इतिहास भी छुपा है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। शहर की भागदौड़ और आधुनिकता से दूर, प्रकृति की गोद में स्थित वह ऐतिहासिक स्थान आज भी उन पलों की गवाही देता है जब मीराबाई ने संसार के तमाम बंधनों को त्यागकर अपनी आराध्य भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उस कालखंड में जब मीराबाई को महलों के सुख-वैभव और पारिवारिक प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ा था, तब उन्होंने शांति और एकांत की तलाश में इस शांत क्षेत्र को अपनी साधना स्थली के रूप में चुना था। चारों तरफ ऊंचे पहाड़ों, हरे-भरे जंगलों और कलकल करते झरनों के बीच स्थित यह झोपड़ी उनकी अटूट भक्ति का प्रतीक है।पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है यह ऐतिहासिक स्थलपिछले कुछ वर्षों में राजस्थान पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों के चलते इस ऐतिहासिक धरोहर को संवारने का काम किया गया है, जिसके बाद से देश के कोने-कोने से आने वाले पर्यटक माउंट आबू आने पर इस जगह की यात्रा अवश्य करते हैं। जो लोग सामान्य तौर पर माउंट आबू का मतलब केवल नक्की झील, सनसेट पॉइंट और नक्की बाजार समझते थे, वे अब इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर के बारे में जानकर यहां खींचे चले आते हैं। इस झोपड़ी के आसपास का पूरा वातावरण बेहद शांत और सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। पर्यटक जब यहां पहुंचते हैं, तो वे उस युग की कल्पना में खो जाते हैं जब मीराबाई ने यहां बैठकर अपने अमर पदों और भजनों की रचना की होगी। स्थानीय गाइड पर्यटकों को इस जगह के इतिहास और मीराबाई के जीवन से जुड़ी अनसुनी कहानियों के बारे में विस्तार से बताते हैं।राजस्थान पर्यटन के मानचित्र पर एक अनूठा और शांत गंतव्यराजस्थान सरकार और पर्यटन विकास निगम लगातार ऐसे अनछुए ऐतिहासिक स्थलों को प्रमोट कर रहा है जो राज्य की संस्कृति और विरासत को दुनिया के सामने रखते हैं। माउंट आबू की यह झोपड़ी उसी सांस्कृतिक कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और आध्यात्मिक यात्रियों के लिए यह स्थान किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। यहां आने वाले पर्यटक न केवल माउंट आबू की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाते हैं, बल्कि वे मीराबाई के जीवन के उस संघर्षपूर्ण और भक्तिमय अध्याय से भी रूबरू होते हैं जो आज की पीढ़ी को प्रेरणा देता है। रखरखाव और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के कारण यहां साल भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे स्थानीय पर्यटन को भी एक नया आयाम मिला है।भक्ति और इतिहास का अनूता संगम देखने पहुंच रहे हैं देश-विदेश के सैलानीयदि आप भी आने वाले दिनों में राजस्थान की यात्रा की योजना बना रहे हैं और भीड़भाड़ से दूर किसी शांत तथा ऐतिहासिक जगह की तलाश में हैं, तो माउंट आबू की यह ऐतिहासिक झोपड़ी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यहां पहुंचकर आपको न केवल प्रकृति की गोद में सुकून का अहसास होगा, बल्कि मीराबाई के उस अमर प्रेम और समर्पण की अनुभूति भी होगी जिसने सदियों से भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया है। इतिहास के पन्नों में दर्ज यह छोटी सी झोपड़ी आज इस बात का प्रमाण है कि सच्चे प्रेम और भक्ति की यादें समय की धूल में कभी धुंधली नहीं पड़तीं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहती हैं।
दुर्गा पूजा पंडाल की महिला वॉलंटियर से यौन उत्पीड़न, आरोपी ASI गिरफ्तार
कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल की एक महिला वॉलंटियर के यौन उत्पीड़न के आरोप में आरोपी ASI को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया है.
टाइगर श्रॉफ केस में CM फडणवीस ने विदेशी कनेक्शन का जताया अंदेशा
मुंबई में टाइगर श्रॉफ की कार पर हुए हमले के मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान सामने आया है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस को इस पूरे मामले की जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं. इसके साथ ही उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि इस हमले की साजिश के पीछे विदेशों में बैठे ऑपरेटर्स का हाथ हो सकता है.
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 2026 में शांति, समृद्धि और बिहार की लगातार प्रगति की कामना करते हुए नवमी पर पटना के
अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी और अदाणी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने नवरात्रि के दौरान दक्षिण गुजरात
2 साल तक जीरो काम, फिर भी मिली 4.7 करोड़ रुपये सैलरी, पूरा दिन देखता रहता था YouTube-Netflix
टेक कर्मचारी ने दावा किया कि करीब 2 साल तक उसे कोई खास काम नहीं मिला, फिर भी कंपनी से लगभग 4.7 करोड़ रुपये सैलरी मिली. कर्मचारी ने Reddit पर अपना अनुभव शेयर किया.
वर्ल्ड कप से एक साल पहले वही पुराने सवाल से जूझ रहा मैनेजमेंट
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या एक बार फिर से अपनी फिटनेस और लगातार चोटिल होने की प्रवृत्ति के कारण चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। जैसे-जैसे आगामी आईसीसी विश्व कप की तैयारियां शुरू हो रही हैं और टीम प्रबंधन भविष्य के रोडमैप पर काम कर रहा है, वैसे-वैसे चयनकर्ताओं का सिरदर्द लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय क्रिकेट के गलियारों में यह पुराना और डरावना सवाल फिर से गूंजने लगा है कि क्या हार्दिक पांड्या एक बार फिर महत्वपूर्ण टूर्नामेंट से ठीक पहले टीम को बीच मझधार में छोड़ देंगे? वर्ष 2023 के वनडे विश्व कप के दौरान जिस तरह से बांग्लादेश के खिलाफ मैच में गेंदबाजी करते वक्त वे चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे, उस कड़वी याद को भारतीय फैंस और चयनकर्ता अभी तक भूल नहीं पाए हैं। आज जब टीम को एक संतुलन देने वाले भरोसेमंद तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब हार्दिक की अनिश्चित फिटनेस ने टीम इंडिया के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है।क्या है हार्दिक पांड्या की फिटनेस का वह पुराना इतिहास जो चयनकर्ताओं को डराता है?हार्दिक पांड्या की प्रतिभा और मैच जिताने की उनकी क्षमता पर किसी को कोई संदेह नहीं है। जब वे अपनी पूरी लय में होते हैं, तो वे अपनी तूफानी बल्लेबाजी और शुरुआती ओवरों में विकेट चटकाने की क्षमता से अकेले दम पर मैच का पासा पलट सकते हैं। लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा अभिशाप उनकी लगातार रहने वाली चोटें रही हैं। पीठ की गंभीर सर्जरी और उसके बाद से गेंदबाजी के दौरान उनके शरीर का साथ न देना हमेशा से भारतीय टीम के लिए एक बड़ा जोखिम रहा है। साल 2023 के विश्व कप में जब भारत खिताब जीतने के प्रबल दावेदार के रूप में उतर रहा था, तब हार्दिक का बीच टूर्नामेंट में चोटिल होना टीम के संयोजन को पूरी तरह बिगाड़ गया था। टीम को मजबूरन अपने प्लेइंग इलेवन में बड़े बदलाव करने पड़े थे। अब एक बार फिर आगामी बड़े टूर्नामेंट से ठीक पहले वही पुरानी चिंताएं टीम मैनेजमेंट के सामने आ खड़ी हुई हैं।टीम के संतुलन पर पड़ता है सबसे बड़ा असर, क्या है विकल्प की तलाश?आधुनिक लिमिटेड ओवरों के क्रिकेट में एक गुणवत्तापूर्ण तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर (Fast Bowling All-rounder) किसी भी टीम की सबसे बड़ी ताकत होता है। हार्दिक पांड्या लंबे समय से भारतीय टीम के लिए इस भूमिका को निभाते आए हैं। जब वे टीम में होते हैं, तो कप्तान को गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों विभागों में एक अतिरिक्त विकल्प मिल जाता है, जिससे टीम का संयोजन बेहद मजबूत हो जाता है। लेकिन उनके अनफिट होने या गेंदबाजी न कर पाने की स्थिति में कप्तान के सारे समीकरण धरे के धरे रह जाते हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और चयन समिति के सामने इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हार्दिक समय पर पूरी तरह फिट नहीं होते हैं, तो उनके विकल्प के रूप में किस युवा खिलाड़ी को तैयार किया जाए। घरेलू सर्किट में कुछ प्रतिभाशाली ऑलराउंडर अपनी चमक बिखेर रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हार्दिक के अनुभव की बराबरी करना आसान नहीं है।चयनकर्ताओं और कोच के सामने खड़ी हुई है एक बड़ी रणनीतिक दुविधाटीम प्रबंधन और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के लिए यह फैसला लेना आसान नहीं होगा कि वे अपनी पूरी योजनाएं एक ऐसे खिलाड़ी पर केंद्रित रखें जिसकी फिटनेस हमेशा सवालों के घेरे में रहती है। विश्व कप जैसे महामुकाबले से एक साल पहले टीम का खाका तैयार किया जाता है और खिलाड़ियों के रोल स्पष्ट किए जाते हैं। ऐसे में यदि मुख्य ऑलराउंडर ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा हो, तो रणनीतिक योजनाएं प्रभावित होना स्वाभाविक है। जानकारों का मानना है कि चयनकर्ताओं को अब स्पष्ट रूप से हार्दिक पांड्या से उनकी फिटनेस और कार्यभार प्रबंधन (Workload Management) को लेकर बात करनी होगी। साथ ही, बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करने के लिए द्वितीय पंक्ति के ऑलराउंडर्स को लगातार पर्याप्त मौके देने होंगे ताकि ऐन वक्त पर टीम को किसी संकट का सामना न करना पड़े।क्या हार्दिक पांड्या अपने आलोचकों को जवाब देकर करेंगे दमदार वापसी?क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक और जुझारू शैली के लिए पहचाने जाने वाले हार्दिक पांड्या के सामने यह उनके करियर का एक बहुत बड़ा इम्तिहान है। उनके चाहने वाले और पूरा देश यह उम्मीद कर रहा है कि वे अपनी फिटनेस से जुड़ी सभी आशंकाओं को दरकिनार करते हुए एक बार फिर मैदान पर पूरी ताकत से लौटेंगे और अपनी शत-प्रतिशत फिटनेस साबित करेंगे। विश्व कप में भारत की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि हार्दिक किस प्रकार अपनी भूमिका निभाते हैं। चयनकर्ताओं की टेढ़ी नजर और फैंस की उम्मीदों के बीच अब सारा दारोमदार खुद हार्दिक पांड्या के प्रदर्शन और उनकी फिटनेस रिपोर्ट पर टिका हुआ है, जिसका फैसला आने वाले महीनों में होने वाले दौरों पर तय होगा।
ZIM vs BAN: जिम्बाब्वे के लिए सिर्फ दो ही खिलाड़ी कर सके ऐसा
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान पर जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम के अनुभवी कप्तान और दिग्गज ऑलराउंडर सिकंदर रजा ने एक बार फिर अपनी शानदार और धमाकेदार खेल शैली से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए रोमांचक मुकाबले के दौरान सिकंदर रजा ने अपने क्रिकेट करियर में एक ऐसी बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है, जो इससे पहले जिम्बाब्वे के क्रिकेट इतिहास में गिने-चुने खिलाड़ियों के नाम ही दर्ज हो सकी है। अपनी बेहतरीन गेंदबाजी और दमदार बल्लेबाजी के दम पर अंतरराष्ट्रीय पटल पर जिम्बाब्वे की पहचान को मजबूत करने वाले रजा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे आधुनिक दौर के सबसे बेहतरीन और असरदार ऑलराउंडर्स में से एक क्यों माने जाते हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद से ही खेल जगत में उनकी जमकर तारीफ हो रही है और फैंस सोशल मीडिया पर उन्हें बधाइयां दे रहे हैं।बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में रजा ने रचा नया इतिहासजिम्बाब्वे और बांग्लादेश के बीच जब भी मुकाबला होता है, मैदान पर रोमांच और संघर्ष अपने चरम पर होता है। हालिया सीरीज के दौरान जब दोनों टीमें आमने-सामने थीं, तब अनुभवी ऑलराउंडर सिकंदर रजा ने अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से न सिर्फ मैच का रुख मोड़ा, बल्कि व्यक्तिगत मील के पत्थर भी हासिल किए। मैच के दौरान उन्होंने अपनी फिरकी गेंदबाजी का जादू बिखेरते हुए विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया। इसी मैच के दौरान उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में एक ऐसा खास मुकाम हासिल कर लिया, जिसके बाद वे अपने देश के चुनिंदा दिग्गजों की खास सूची में शामिल हो गए हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए, बल्कि पूरी जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम के लिए एक बहुत बड़ा प्रेरणास्त्रोत है।वनडे क्रिकेट में 4000 से अधिक रन और 100 विकेट का अनूठा डबलसिकंदर रजा ने इस मुकाबले के दौरान वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में 4000 से अधिक रन बनाने के साथ-साथ गेंदबाजी में 100 विकेट पूरे करने का गौरव हासिल कर लिया है। वनडे फॉर्मेट में चार हजार से ज्यादा रन बनाने और सौ विकेट झटकने का यह करिश्माई आंकड़ा छूने वाले वे जिम्बाब्वे के इतिहास के चुनिंदा खिलाड़ियों में शुमार हो गए हैं। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि सीमित ओवरों के खेल में इस प्रकार का निरंतर प्रदर्शन करना और लंबे समय तक टीम के लिए संकटमोचन की भूमिका निभाना हर खिलाड़ी के बस की बात नहीं होती है। रजा ने अपनी मेहनत, अनुशासन और जुझारू तेवर के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।जिम्बाब्वे क्रिकेट के दिग्गजों की सूची में शीर्ष पर पहुंचे सिकंदर रजाजिम्बाब्वे क्रिकेट के इतिहास पर अगर नजर डाली जाए, तो एंड्री फ्लावर, हीथ स्ट्रीक और ब्रेंडन टेलर जैसे महान खिलाड़ियों ने देश के लिए कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए हैं। लेकिन ऑलराउंड प्रदर्शन की बात करें तो सीमित ओवरों के क्रिकेट में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों मोर्चों पर इस स्तर का प्रभुत्व स्थापित करना बहुत बड़ी चुनौती रहा है। सिकंदर रजा ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा के बल पर न केवल टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है, बल्कि मु्श्किल परिस्थितियों में आगे आकर टीम को कई मुकाबले भी जिताए हैं। उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि विदेशी लीगों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक उनका सफर कितना शानदार रहा है।भविष्य के युवाओं के लिए प्रेरणा बने सिकंदर रजा का सफरजिस तरह से सिकंदर रजा ने अपने करियर के इस पड़ाव पर आकर भी मैदान पर अपनी ऊर्जा और फिटनेस का स्तर बनाए रखा है, वह युवा खिलाड़ियों के लिए सीखने योग्य है। संकट के समय में टीम को संभालना और गेंदबाजी तथा बल्लेबाजी दोनों से मैच का पासा पलट देना उनकी परिपक्वता को बयां करता है। बांग्लादेश के खिलाफ बने इस रिकॉर्ड के बाद जिम्बाब्वे के तमाम फैंस को उम्मीद है कि रजा आने वाले समय में टीम को और भी कई बड़ी और ऐतिहासिक जीत दिलाएंगे तथा देश के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करते रहेंगे।
लड़कों में रोहित ने जलाई थी मसाल, लड़कियों में मंधाना ने भरा नया जज्बा
भारतीय क्रिकेट इतिहास में इस वक्त एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसने देश के खेल प्रेमियों और क्रिकेट पंडितों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कुछ समय पहले तक जहां भारतीय पुरुष टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने मैदान पर पारंपरिक और रक्षात्मक क्रिकेट को छोड़कर एक पूरी तरह से आक्रामक, निडर और 'बिना किसी डर के' (Fearless Cricket) खेलने की जो मसाल जलाई थी, ठीक उसी प्रेरणादायक राह पर अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान और स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना तथा पूरी महिला ब्रिगेड भी पूरी मजबूती से आगे बढ़ रही है। हाल ही में खेली गई सीरीज के शुरुआती शुरुआती दो मैचों में ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिस प्रकार का विस्फोटक और बेखौफ अंदाज मैदान पर दिखाया है, उसने विरोधी टीमों के होश उड़ा दिए हैं। इस बदलाव ने यह साबित कर दिया है कि आने वाले समय में हमारी बेटियां किसी भी परिस्थिति में दबाव में खेलने के बजाय अपनी शर्तों पर मैच जीतने का माद्दा रखती हैं।रोहित शर्मा के उस ऐतिहासिक मंत्र की गूंज अब महिला क्रिकेट में भी साफ सुनाई दे रही हैजब से रोहित शर्मा ने भारतीय पुरुष टीम की कमान संभाली और टेस्ट तथा सीमित ओवरों के क्रिकेट में 'इंटेंट' (Intent) यानी इरादे को सर्वोपरि रखा, तब से भारतीय क्रिकेट की परिभाषा ही बदल गई। पावरप्ले का भरपूर इस्तेमाल करना, शुरुआती ओवरों में गेंदबाजों पर मानसिक दबाव बनाना और विकेट खोने की परवाह किए बिना तेजी से रन बनाना—यह रोहित का वह मंत्र था जिसने विश्व क्रिकेट में भारत का दबदबा कायम किया। अब ठीक यही आक्रामक डीएनए भारतीय महिला टीम की बल्लेबाजी में भी गहराई तक उतरता हुआ दिखाई दे रहा है। स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा और कप्तान हरमनप्रीत कौर जैसे खिलाड़ियों के बयानों और मैदान पर उनके कदमों के तालमेल से यह साफ झलकता है कि टीम मैनेजमेंट ने खिलाड़ियों के मन से हार का डर पूरी तरह निकाल दिया है। अब खिलाड़ी सिर्फ क्रीज पर टिकने के लिए नहीं, बल्कि मैच का रुख बदलने के इरादे से मैदान पर उतरती हैं।शुरुआती दो मैचों में ही नजर आया वह विध्वंसक अंदाज, विरोधी खेमे में मचा हड़कंपहाल ही में शुरू हुई इस रोमांचक सीरीज के शुरुआती दो मुकाबलों में ही भारतीय महिला बल्लेबाजों ने जिस तरह का तांडव मचाया, उसने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। पहले मैच की पहली गेंद से ही बल्लेबाजों ने विपक्षी गेंदबाजों के खिलाफ कड़े तेवर अपनाए और बाउंड्री की बरसात कर दी। पावरप्ले के शुरुआती छह ओवरों में ही जिस गति से रन बटोरे गए, उसने यह दिखा दिया कि अब हमारी बेटियां धीमा खेलने के पुराने ढर्रे को पीछे छोड़ चुकी हैं। क्रीज पर पैर जमाने के लंबे इंतजार के बजाय सीधे बड़े शॉट्स खेलने की यह कला इस बात का प्रमाण है कि टीम ने आधुनिक टी-20 और वनडे क्रिकेट की जरूरतों को पूरी तरह आत्मसात कर लिया है। विरोधी टीमों के कप्तान और रणनीतिकार इस बात से हैरान हैं कि भारतीय बल्लेबाजों को रोकने के लिए उनके पास कोई सटीक योजना काम नहीं आ रही है।मानसिक मजबूती और फिटनेस बन रही है इस नए आक्रामक युग की सबसे बड़ी ताकतइस प्रकार के निडर और आक्रामक खेल को मैदान पर उतारने के लिए केवल तकनीकी कौशल काफी नहीं होता, बल्कि इसके लिए गजब की मानसिक मजबूती और शारीरिक फिटनेस की भी जरूरत होती है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पिछले कुछ सालों में अपनी फिटनेस के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बहुत ऊंचा उठाया है। मैदान पर तेजी से रन दौड़ना, खराब गेंदों को कैच में तब्दील करना और मुश्किल परिस्थितियों में भी घबराए बिना लगातार बड़े शॉट खेलने का यह साहस इसी कड़ी मेहनत का नतीजा है। स्मृति मंधाना ने हाल ही में एक इंटरव्यू में भी इस बात का जिक्र किया था कि जब टीम के भीतर डर की भावना खत्म हो जाती है, तो खिलाड़ी अपनी असली क्षमता से कहीं बेहतर प्रदर्शन करने में सफल हो जाती हैं। कोच और सहयोगी स्टाफ का यह खुला समर्थन खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा टॉनिक साबित हो रहा है।भविष्य के बड़े टूर्नामेंट्स के लिए एक बेहद सकारात्मक और शानदार संकेतआगामी विश्व कप और अन्य बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम प्रबंधन की यह रणनीति बेहद दूरदर्शी और सराहनीय मानी जा रही है। दुनिया की तमाम बड़ी टीमें जैसे ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड हमेशा से ही अपने आक्रामक और निडर खेल के लिए जानी जाती रही हैं, और अब भारत ने भी उसी राह पर कदम रखकर बराबरी का संदेश दे दिया है। पुरुष क्रिकेट में रोहित शर्मा द्वारा जलाई गई उस मसाल की रोशनी अब महिला क्रिकेट के रास्ते पूरे देश को गौरवान्वित कर रही है। खेल प्रेमियों को अब पूरा भरोसा है कि आने वाले मुकाबलों में भारतीय बेटियां इसी तरह का धमाकेदार प्रदर्शन जारी रखेंगी और विश्व पटल पर देश का तिरंगा हमेशा ऊंचा लहराती रहेंगी।
अधूरा रहा दर्शन, छिन गई ज़िंदगी, अपनों को खोने वालों की आपबीती
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में सप्तमी की शाम हुए हादसे ने कई परिवारों को ऐसा जख्म दिया, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा. मुजफ्फरपुर के अभिषेक श्रीवास्तव और उनके बेटे अयांश की मौत से लेकर दो सहेलियों की दर्दनाक कहानी तक, हादसे के बाद सामने आ रही हर जानकारी दिल दहला रही है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूली बच्चों और शिक्षकों को दिया दिवाली का बड़ा तोहफा
देशभर में इस बार दीपावली के पावन पर्व को लेकर तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं, और त्योहारों के इस उल्लास के बीच छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य के स्कूली बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के चेहरों पर एक बड़ी मुस्कान ला दी है। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने दीपावली के अवकाश को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और राहत भरा संशोधन आदेश जारी किया है। पहले जहां प्रशासनिक और शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार दीपावली के अवसर पर स्कूलों में 6 नवंबर से 10 नवंबर तक यानी कुल 5 दिनों की छुट्टियों का प्रावधान तय किया गया था, वहीं अब सरकार ने बच्चों और शिक्षकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस अवकाश में एक दिन की और बढ़ोतरी कर दी है। इस ताजा संशोधन के बाद अब छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में दीपावली के मौके पर कुल 6 दिनों की लंबी छुट्टियां मिलेंगी, जिससे छात्र-छात्राएं और शिक्षक अपने परिवार के साथ बिना किसी जल्दबाजी के त्योहार का भरपूर आनंद उठा सकेंगे।पहले तय कार्यक्रम में हुआ बदलाव, क्यों बढ़ाई गई छुट्टियों की संख्या?अक्सर देखा जाता है कि दीपावली जैसे बड़े और पांच दिवसीय महापर्व के दौरान (धनतेरस से लेकर भाईदूज तक) दूर-दराज रहने वाले लोग और अपने घर से दूर शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षक अपने पैतृक गांवों और शहरों की ओर यात्रा करते हैं। ऐसे में 5 दिनों का अवकाश कई बार कम पड़ जाता था और आने-जाने की भागदौड़ में ही छुट्टियां खत्म हो जाती थीं। बच्चों, अभिभावक संघों और शिक्षक संगठनों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि त्योहारी सीजन की व्यस्तता और सुगम आवागमन को देखते हुए छुट्टियों के दायरे को थोड़ा और बढ़ाया जाए। राज्य सरकार ने जनभावनाओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को गंभीरता से समझते हुए कैलेंडर में संशोधन किया और एक एक्स्ट्रा दिन की छुट्टी जोड़ने का फैसला लिया। सरकार के इस जनहितैषी कदम की हर तरफ सराहना हो रही है।बच्चों और शिक्षकों को मिलेगा परिवार के साथ सुकून से समय बिताने का मौकास्कूलों में 6 दिनों की लंबी छुट्टियां घोषित होने से सबसे ज्यादा खुशी नन्हे-मुन्ने स्कूली बच्चों के चेहरों पर साफ झलक रही है। लगातार पढ़ाई के बोझ और परीक्षाओं के तनाव के बीच यह ब्रेक बच्चों के लिए मानसिक ताजगी पाने का बेहतरीन जरिया साबित होगा। बच्चे अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ दीये जलाने, रंगोली बनाने, नए कपड़े खरीदने और मिठाइयों का लुत्फ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसके अलावा, राज्यभर के सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले हजारों शिक्षकों को भी इस फैसले से बड़ी राहत मिली है। वे अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कर सकेंगे। दीपावली और गोवर्धन पूजा जैसे लोक पर्वों का असली आनंद तभी आता है जब व्यक्ति अपने परिवार के बीच बिना किसी समय सीमा के दबाव के मौजूद हो।शिक्षा विभाग का आदेश जारी, सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशछत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए संशोधित आदेश को राज्य के सभी जिलों में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। प्रदेश के सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश भेज दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाएं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित तिथियों के दौरान यदि कोई स्कूल खुला पाया जाता है या नियमों की अनदेखी की जाती है, तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। इस आधिकारिक पुष्टि के बाद स्कूलों में पढ़ाई का शेड्यूल भी तदनुसार समायोजित कर लिया गया है ताकि छुट्टियों के बाद कोर्स पूरा करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।त्योहारी बाजार और आर्थिक गतिविधियों को भी मिलेगी एक नई गतिजब स्कूलों में लगातार 6 दिनों की छुट्टियां होती हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव केवल घरों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा लाभ स्थानीय व्यापार और आर्थिकी को भी मिलता है। बच्चे और उनके परिवार छुट्टियों के दौरान बाजारों में खरीदारी के लिए अधिक समय निकाल पाते हैं। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव और जगदलपुर सहित छत्तीसगढ़ के तमाम छोटे-बड़े बाजारों में कपड़ों, दीपों, पटाखों, सजावटी सामानों और उपहारों की दुकानों पर रौनक अभी से बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दी गई इस एक दिन की अतिरिक्त छुट्टी ने न केवल बच्चों और शिक्षकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी है, बल्कि पूरे राज्य में दीवाली के इस पावन पर्व के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है।
टीचर ने किया दशहरे पर रावण का पुतला जलाने का विरोध
देशभर में जहां एक तरफ विजया दशमी का पर्व और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रावण दहन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के एक इलाके से बेहद संवेदनशील और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल के शिक्षक द्वारा दशहरे के पावन पर्व पर रावण का पुतला जलाने का खुलेआम विरोध किए जाने और साथ ही हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणियां किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। जब इस मामले की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी शिक्षक से पूछताछ करने की कोशिश की, तो उसने पुलिस दल को देखकर वहां से भागने का प्रयास किया, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है और मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।क्या है पूरा मामला और कैसे भड़का स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा?प्राप्त जानकारी और स्थानीय लोगों द्वारा दी गई शिकायतों के अनुसार, यह घटना एक स्थानीय विद्यालय और उससे जुड़े ग्रामीण इलाके में घटी। विजय दशमी के दिन जब आसपास के लोग रावण दहन की तैयारियों में जुटे हुए थे और पारंपरिक उत्सव का माहौल था, तब वहां मौजूद एक शिक्षक ने अचानक इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया। चश्मदीदों का आरोप है कि शिक्षक ने न केवल रावण दहन को गलत बताया, बल्कि सनातन धर्म और हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में ऐसी अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जिससे वहां मौजूद लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो गईं। त्योहार के माहौल में इस तरह के बयानों को सुनकर वहां मौजूद युवा और ग्रामीण भड़क गए और उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस थाने को दी। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और शिक्षक के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।पुलिस को आते देख भागने की फिराक में था आरोपी शिक्षकमामले की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय थाना पुलिस और चौकी प्रभारी तुरंत भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने भीड़ को शांत कराते हुए जब आरोपी शिक्षक को अपने संरक्षण में लेकर पूछताछ करने की कोशिश की, तो उसने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय वहां से भागने की कोशिश की। पुलिस कर्मियों और वहां मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे भागने से रोक लिया और अपनी गिरफ्त में ले लिया। आरोपी के इस प्रकार भागने की कोशिश करने से ग्रामीणों का गुस्सा और अधिक सातवें आसमान पर पहुंच गया। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी शिक्षक को थाने ले आई ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय या हिंसक घटना से बचा जा सके।हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों की मांग- शिक्षक पर हो रा NSDL या बर्खास्तगी की कार्रवाईइस घटना के तूल पकड़ने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने थाने के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक शिक्षक, जो समाज के नौनिहालों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देने के लिए जिम्मेदार होता है, यदि वही इस प्रकार की द्वेषपूर्ण और धार्मिक उन्माद फैलाने वाली हरकतें करेगा, तो समाज में क्या संदेश जाएगा। संगठनों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जाए और उसके खिलाफ सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।प्रशासनिक अधिकारियों की अपील- शांति और संयम बनाए रखें नागरिकघटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जिले के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। पुलिस अधिकारियों ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ संबंधित गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। प्रशासन ने क्षेत्र के सभी नागरिकों और समुदायों के लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और इलाके में शांति एवं सौहार्द का माहौल बनाए रखें। पुलिस का कहना है कि कानून अपने हाथ में लेने वाले या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी पक्ष को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
वैभव की तरह बिहार के अनमोल ने खेली तूफानी पारी! 86 गेंद पर कूटे 184 रन
बिहार से आने वाले एक युवा बल्लेबाज ने विनू मांकड़ ट्रॉफी में बल्ले से तहलका मचा दिया है. ताबड़तोड़ अंदाज में 184 रनों की धमाकेदार पारी खेलने के बाद फैन्स अब इस बल्लेबाज की तुलना वैभव सूर्यवंशी से कर रहे हैं.
दशहरा पर दावत की थी तैयारी, वन विभाग ने चौपट किया प्लान
विजया दशमी और त्योहारी सीजन की खुशियों के बीच झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा से वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर के घने जंगलों में वन्यजीवों का अवैध शिकार करने की ताक में बैठे तस्करों के नापाक मंसूबों पर वन विभाग और एंटी-पोचिंग सेल की संयुक्त टीम ने पानी फेर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानीय शिकारी और पेशेवर तस्कर दशहरा के पावन अवसर पर बड़े पैमाने पर जंगली जानवरों की दावत और मांस की अवैध खरीद-फरोख्त की योजना बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने जंगलों के बीच सुनसान रास्तों पर बेहद खतरनाक हथियारों और फंदों का जाल बिछा रखा था। लेकिन समय रहते खुफिया तंत्र से मिली सटीक सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने इलाके में ताबड़तोड़ छापेमारी कर दी, जिससे तस्करों की पूरी योजना धरी की धरी रह गई।झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा के जंगलों में बिछाया गया था मौत का जालदोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाके अपनी जैव विविधता, घने जंगलों और वन्यजीवों (जैसे जंगली सुअर, हिरण और अन्य प्रजातियों) के लिए देश भर में जाने जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इन इलाकों में सक्रिय शिकारी गिरोहों द्वारा वन्यजीवों को निशाना बनाए जाने की खबरें लगातार मिल रही थीं। दशहरा और दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली मांस की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाने के लिए तस्कर जंगलों में सक्रिय हो जाते हैं। इस बार भी तस्करों ने बेहद शातिर तरीके से जंगलों के उन हिस्सों को चुना जहां इंसानों की आवाजाही कम होती है। उन्होंने वन्यजीवों के आने-जाने वाले मुख्य रास्तों पर जमीन से लेकर झाड़ियों के बीच ऐसे जाल बिछाए थे कि कोई भी जानवर वहां फंसकर आसानी से उनका शिकार बन सके।200 फीट लंबा घातक फंदा और आधुनिक तीर-धनुष बरामदवन विभाग के अधिकारियों ने जब झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर से सटे संदिग्ध जंगली इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया, तो उनके होश उड़ गए। छापेमारी के दौरान टीम ने लगभग 200 फीट लंबा विशेष रूप से तैयार किया गया नायलॉन और तार का फंदा बरामद किया, जिसका उपयोग बड़े वन्यजीवों को दौड़ते वक्त जकड़ने के लिए किया जाता था। इसके अलावा मौके से कई जहरीले तीर, पारंपरिक धनुष और धारदार हथियार भी लावारिस हालत में मिले। अधिकारियों के अनुसार, यह फंदा इतना मजबूत और खतरनाक था कि यदि कोई भारी-भरकम वन्यजीव इसके दायरे में आ जाता, तो उसका बच पाना नामुमकिन था। वन विभाग की टीम ने इन सभी अवैध उपकरणों को मौके पर ही जब्त कर लिया और उन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।वन विभाग की मुस्तैदी से टला बड़ा वन्यजीव संकट, तस्करों की तलाश तेजइस सफल कार्रवाई के बाद से वन विभाग के महकमे ने राहत की सांस ली है, लेकिन साथ ही सीमावर्ती इलाकों में गश्त और चौकसी को और अधिक बढ़ा दिया गया है। वन अधिकारियों का कहना है कि भले ही इस बार मुख्य आरोपी मौके से भागने में सफल रहे, लेकिन उनके ठिकानों और नेटवर्क के बारे में कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। स्थानीय मुखबिरों की मदद से उन लोगों की पहचान की जा रही है जो इस अवैध शिकार के धंधे को परोक्ष या अपरोक्ष रूप से बढ़ावा दे रहे थे। झारखंड और छत्तीसगढ़ के वन विभाग के अधिकारियों ने आपसी समन्वय बैठक कर यह तय किया है कि त्योहारी सीजन के बचे हुए दिनों में जंगलों के भीतर विशेष नाइट पेट्रोलिंग (Night Patrol) की जाएगी ताकि किसी भी वन्यजीव की जान को खतरा न हो सके।पर्यावरण प्रेमियों ने की कार्रवाई की सराहना, कड़े कानूनों की मांगझारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर वन विभाग द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई की पर्यावरण प्रेमियों, वन्यजीव कार्यकर्ताओं और स्थानीय जागरूक नागरिकों ने खुलकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि त्योहारों की आड़ में प्रकृति और मूक जीवों का शिकार करने वाले ऐसे तत्वों के खिलाफ पुलिस और वन विभाग को इसी तरह की सख्त और निर्णायक कार्रवाई जारी रखनी चाहिए। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इन मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराएं लगाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जंगलों के इस अनमोल धरोहर को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत न कर सके।
रोहिणी ने लालू से पूछा- हम कौन हैं? फिर बेटी के चेहरे को गौर से देखने लगे आरजेडी सुप्रीमो
भारतीय राजनीति के गलियारों में अपने बेबाक अंदाज और मजबूत बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार से जुड़ा एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाला वाकया सामने आया है। राजनीति की तमाम धूप-छांव, उतार-चढ़ाव और संघर्षों के बीच परिवार के भीतर के रिश्ते कैसे इंसान को अंदर तक झकझोर देते हैं, इसकी एक बानगी हाल ही में देखने को मिली। लालू प्रसाद यादव की लाडली बेटी और सिंगापुर में किडनी डो करके अपने पिता को नया जीवनदान देने वाली रोहिणी आचार्य ने अपने पिता से अचानक एक ऐसा सीधा और मासूम सा सवाल पूछ लिया, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। रोहिणी ने पिता से पूछा कि 'पापा, हम कौन हैं?' इस अप्रत्याशित और गहरे सवाल को सुनते ही आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव कुछ पल के लिए अवाक रह गए और फिर अपनी बेटी के चेहरे को बेहद गौर से और टकटकी लगाकर देखने लगे।राजनीति की व्यस्तता और पारिवारिक रिश्तों के बीच का वह भावुक पललालू प्रसाद यादव का पूरा जीवन राजनीतिक आंदोलनों, सामाजिक न्याय की लड़ाइयों और चुनावी रणनीतियों के बीच बीता है। उनके चारों तरफ हमेशा कार्यकर्ताओं, नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और मीडिया का भारी जमावड़ा लगा रहता है। ऐसे व्यस्त और तनावपूर्ण माहौल के बीच जब कभी परिवार के अपने लोग पास आते हैं, तो राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधर भी एक आम पिता और दादा की भूमिका में नजर आने लगते हैं। रोहिणी आचार्य, जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने पिता को अपनी किडनी डोनेट की थी और उन्हें मौत के मुंह से खींचकर वापस लाई थीं, उनका अपने पिता के साथ एक अलग ही आध्यात्मिक और भावनात्मक जुड़ाव है। उस दिन जब दोनों के बीच अनौपचारिक बातचीत चल रही थी, तब रोहिणी ने प्यार और हल्के-फुल्के अंदाज में अपने पिता से वह सवाल पूछ लिया, जिसके बाद वहां का पूरा माहौल ही बदल गया।जब आरजेडी सुप्रीमो ने बेटी को पहचान की नजरों से देखारोहिणी आचार्य के मुंह से 'हम कौन हैं?' यह सवाल सुनते ही लालू प्रसाद यादव ने अपनी चिर-परिचित शैली में पहले तो थोड़ा अचरज जताया, और फिर वे अपनी बेटी के चेहरे को बहुत ही गौर से देखने लगे। उस एक पल के लिए जैसे समय वहीं थम गया हो। एक पिता की नजरों में बेटी के प्रति अपार स्नेह, कृतज्ञता, चिंता और उस अहसास की झलक साफ दिखाई दे रही थी कि यह वही बेटी है जिसने उनके प्राण बचाए हैं। लालू यादव ने अपने जीवन में अपनों के धोखे, राजनीतिक साजिशों और कई मुकदमों का सामना किया है, लेकिन परिवार का यह सच्चा और निश्छल प्यार ही उनकी असली ताकत रहा है। बेटी के चेहरे को निहारते हुए आरजेडी सुप्रीमो की आंखें नम हो गईं और उन्होंने दुलारते हुए उसे जो जवाब दिया, उसने वहां मौजूद सभी पारिवारिक सदस्यों की आंखें भर दीं।सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वाकया, समर्थकों में उमड़ी भावनाओं की लहरयह पूरा वाकया और इससे जुड़ी चर्चाएं जब धीरे-धीरे सोशल मीडिया के माध्यम से बाहर आईं, तो राजद समर्थकों और आम लोगों के बीच यह तेजी से वायरल हो गया। लोग लालू प्रसाद यादव और रोहिणी आचार्य के इस पवित्र रिश्ते की मिसाल देने लगे। इंटरनेट यूजर्स का कहना है कि राजनीति में भले ही वैचारिक मतभेद और तीखी बयानबाजी चलती हो, लेकिन एक पिता और पुत्री के बीच का यह रिश्ता इन सब से बहुत ऊपर और पावन है। रोहिणी आचार्य अक्सर सोशल मीडिया के जरिए अपने पिता के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को जाहिर करती रहती हैं, और इस बार का यह संस्मरण इस बात की गवाही देता है कि कठिन समय में परिवार की ममता ही इंसान का सबसे बड़ा संबल होती है।संघर्षों के बाद भी अटूट है लालू परिवार का यह पारिवारिक बंधनचारे घोटाले से जुड़े मुकदमों, स्वास्थ्य समस्याओं और लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे लालू प्रसाद यादव के लिए उनका परिवार और उनके बच्चे हमेशा ढाल बनकर खड़े रहे हैं। तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और रोहिणी आचार्य समेत पूरा परिवार हर मुश्किल घड़ी में अपने पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा नजर आता है। रोहिणी द्वारा पिता से पूछा गया वह छोटा सा सवाल और उसके बाद लालू यादव का अपनी बेटी को गौर से देखना इस बात का प्रतीक है कि सियासत के दांव-पेच चाहे जितने भी जटिल क्यों न हों, अपनों का प्यार और पहचान हमेशा सबसे ऊपर रहती है। यह घटना राजनीतिक गलियारों में एक ऐसा मानवीय पहलू बनकर उभरी है, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
पूर्व छात्रा को आपत्तिजनक संदेश देने के आरोप में Symbiosis Nagpur के प्रोफेसर पर गिरी गाज
सिम्बियोसिस विश्वविद्यालय ने अपने नागपुर परिसर के एक प्रोफेसर को संस्थान की एक पूर्व छात्रा को कथित तौर पर अनुचित संदेश भेजने और उसे इस्लामी धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए कहने के आरोपों के बाद अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया है। संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस मामले को लेकर कुछ दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध-प्रदर्शन के बाद सिम्बियोसिस इंटरनेशनल (मानद विश्वविद्यालय) ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि आरोपों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, प्रोफेसर ने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि, नागपुर पुलिस के अनुरोध के बावजूद छह महीने पहले संस्थान छोड़ चुकी छात्रा और उसके पिता ने अब तक न तो औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और न ही कथित संदेशों से जुड़ा कोई सबूत दिया है। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि आरोपों में छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजना और इस्लामी रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। हालांकि, शिकायत या सहायक साक्ष्य नहीं होने के कारण इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है। इस मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के सदस्यों ने विरोध-प्रदर्शन किया और प्रोफेसर को हटाने तथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस उपायुक्त नित्यानंद झा ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे विभिन्न संगठनों के 15 से 17 लोग विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र हुए। पुलिस ने हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारियों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बीच बातचीत कराई। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मुलाकात की। विश्वविद्यालय ने कहा कि उसने सोशल मीडिया पर सामने आई खबरों और शिकायत का संज्ञान लेते हुए आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। संस्थान ने कहा कि वह विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा तथा गरिमा के प्रति प्रतिबद्ध है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्व छात्रा का परिवार इस मुद्दे को दक्षिणपंथी संगठनों के समक्ष उठाता रहा है, लेकिन तीन बार अनुरोध किए जाने के बावजूद पुलिस के पास नहीं पहुंचा। पुलिस की जांच में पता चला कि छात्रा ने छह महीने पहले संस्थान छोड़ दिया था।
इस राज्य में रात में भी डॉक्टर्स की लगेगी अटेंडेंस, वरना कटेगी सैलरी!
कर्नाटक सरकार 1 नवंबर, 2026 से डॉक्टरों की रात की मौजूदगी कर्तव्य ऐप और जियोफेंसिंग से दर्ज करेगी. पायलट के नतीजों के बाद दायरा बढ़ेगा, जबकि संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों का भुगतान भी ऐप की हाजिरी रिपोर्ट से जोड़ा जाएगा.
बाइक पर ही खोल ली दुकान, एक दिन की कमाई 6 हजार
न दुकान की जरूरत, न भारी-भरकम सेटअप... एक शख्स ने बाइक को ही पंचर की दुकान बना डाला. महज 60 हजार रुपये के सिस्टम से शुरू हुए इस अनोखे बिजनेस का तरीका देखकर लोग भी हैरान हैं.
कोटा की पुलिस अधीक्षक (SP) तेजस्वनी गौतम ने सोमवार को अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन लोगों के बारे में नई जानकारी दी। एक खुफिया सूचना के आधार पर, राजस्थान के कोटा शहर में मुंबई से आ रही एक ट्रेन से तीन लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। कोटा पुलिस के अनुसार, इन तीनों को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के एक साथी अनिल पंडित ने काम पर रखा था। इससे गैंग के उन दावों की पुष्टि होती है, जो उन्होंने फायरिंग के तुरंत बाद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए किए थे। इसे भी पढ़ें: Tiger Shroff की कार पर Mumbai में फायरिंग, FWICE ने उठाई सुरक्षा की मांग मीडिया से बात करते हुए अधिकारी ने आगे बताया कि घटना के तुरंत बाद ये तीनों पुणे-जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हो गए थे और जनरल बोगी में यात्रा कर रहे थे। मीडिया से बात करते हुए अधिकारी ने आगे बताया कि घटना के तुरंत बाद तीनों पुणे-जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हो गए थे और जनरल बोगी में यात्रा कर रहे थे। उनकी योजना जयपुर स्टेशन पर उतरने, फिर बस से दिल्ली जाने और वहां से नेपाल भाग जाने की थी। हालांकि, तीनों को ट्रेन से ही पकड़ लिया गया। कोटा की SP तेजस्वनी गौतम ने कहा कि अभी तक हथियार नहीं मिले हैं। हालांकि, उनसे पूछताछ की जाएगी कि उन्होंने हथियारों का क्या किया, और फिर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनकी योजना नेपाल भागने की थी। कोटा सिटी पुलिस ने उन्हें रेलवे स्टेशन पर हिरासत में लिया। शुरुआती पूछताछ से पता चला है कि अनिल पंडित, रेहान के संपर्क में था। अनिल पंडित का संबंध लॉरेंस बिश्नोई से है... वे पुणे-जयपुर एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में सफर कर रहे थे। उनकी योजना दिल्ली पहुंचकर नेपाल की तरफ भागने की थी। अब मुंबई पुलिस आ गई है, और हम उन्हें सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Tiger Shroff की कार पर फायरिंग मामले में FIR दर्ज, Mumbai Crime Branch को सौंपी गई जांच उन्होंने कहा कि आरोपी को पकड़ने के लिए हमने निकास बिंदुओं, प्लेटफॉर्म और कई अन्य जगहों पर घेराबंदी की। यह पुणे-जयपुर एक्सप्रेस थी। हमें सुबह लगभग 9:45 बजे सूचना मिली। मुंबई पुलिस आ गई है और हम आरोपी को उन्हें सौंप देंगे। शुरुआती पूछताछ के आधार पर पता चला है कि आरोपियों में से एक रैपिडो राइडर है। आगे की विस्तृत पूछताछ से और स्पष्टता आएगी। बाकी दो लोगों में से एक नाबालिग है, और दूसरा, रेहान, सोनीपत में मजदूर के तौर पर काम करता है। शुरुआती पूछताछ से पता चला कि उनकी योजना इस ट्रेन से दिल्ली जाने और वहां से नेपाल भाग जाने की थी। रेहान पहले भी अनिल पंडित के संपर्क में था।

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