मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से छह दोस्तों की मौत
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे-45 पर सड़क किनारे खड़े छह दोस्तों को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
अलीमा खान के सनसनीखेज खुलासे से हिला पाकिस्तान: ऑपरेशन सिंदूर' पर बड़ा सच आया सामने
पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर से बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। इस बार इस सियासी तूफान के केंद्र में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई (PTI) प्रमुख इमरान खान की बहन अलीमा खान हैं। अलीमा खान ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर कुछ बेहद चौंकाने वाले और सनसनीखेज खुलासे किए थे। उन्होंने सीधे तौर पर देश की सैन्य स्थापना और मौजूदा सरकार की गुप्त रणनीतियों पर उंगली उठाई है। अलीमा खान के इस बेबाक बयान ने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय (GHQ) तक हड़कंप मचा दिया है।पाकिस्तान सरकार का बड़ा एक्शन: सच बोलते ही थमाया गया कानूनी नोटिसजैसे ही अलीमा खान का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मुख्यधारा की मीडिया की सुर्खियों में आया, पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार तुरंत एक्शन मोड में आ गई। संघीय जांच एजेंसी (FIA) और सरकारी वकीलों की ओर से बिना वक्त गंवाए अलीमा खान को एक कड़ा कानूनी नोटिस भेज दिया गया है। सरकार का आरोप है कि अलीमा खान देश की सुरक्षा एजेंसियों और राज्य के महत्वपूर्ण संस्थानों के खिलाफ झूठा प्रोपेगैंडा फैला रही हैं और जनता को भड़काने की कोशिश कर रही हैं। इस नोटिस के बाद पाकिस्तान में मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।आखिर क्यों डरे सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर? इनसाइड स्टोरी आई सामनेइस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस खुलासे से पाकिस्तान के शक्तिशाली सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर क्यों असहज हो गए हैं? रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' का सीधा संबंध पाकिस्तान सेना के कुछ ऐसे गुप्त ऑपरेशन्स या राजनीतिक जोड़-तोड़ से है, जिसे सेना हर हाल में दुनिया की नजरों से छिपाकर रखना चाहती थी। अलीमा खान ने सीधे तौर पर सेना की इसी दुखती रग पर हाथ रख दिया है। इमरान खान की बढ़ती लोकप्रियता और जेल में होने के बावजूद उनकी बहन के इन तीखे तेवरों से सैन्य नेतृत्व बैकफुट पर नजर आ रहा है।इमरान खान की पार्टी PTI ने संभाला मोर्चा: शहबाज सरकार को दी खुली चुनौतीअलीमा खान को नोटिस मिलने के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पीटीआई के प्रवक्ताओं का कहना है कि यह सरकार और सेना की घबराहट को दर्शाता है। इमरान खान के परिवार को डराने और चुप कराने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नजरें भी अब इस मामले पर टिक गई हैं, क्योंकि पाकिस्तान में विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों पर कानूनी कार्रवाई का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है।
महायुद्ध की दहलीज पर अमेरिका और ईरान, मिडिल ईस्ट में घातक हमलों से दहला इलाका
पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा अमेरिका और ईरान का तनाव अब पूरी तरह से एक विनाशकारी युद्ध के रूप में तब्दील हो चुका है। दोनों ही महाशक्तियों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपने सबसे घातक और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ईरानी समर्थित गुटों के रणनीतिक केंद्रों पर लगातार रॉकेट, मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन से हमले किए जा रहे हैं। युद्ध का यह नया चरण इतना आक्रामक है कि इसने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की आहट तेज हो गई है।निर्दोष और बेकसूर देश बन रहे निशाना: वैश्विक सप्लाई चेन तबाहइस युद्ध की सबसे भयावह बात यह है कि इसका शिकार अब वे देश और क्षेत्र भी बन रहे हैं, जिनका इस भू-राजनीतिक दुश्मनी से कोई वास्ता नहीं है। ईरान और अमेरिका की इस जंग के कारण लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं। वाणिज्यिक जहाजों और कार्गो शिप्स पर हो रहे लगातार घातक हमलों की वजह से कई एशियाई और यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। आवश्यक वस्तुओं, दवाओं और खाद्यान्न की सप्लाई रुकने से उन देशों में भी महंगाई और भुखमरी का खतरा मंडराने लगा है जो इस युद्ध में पूरी तरह तटस्थ थे।घातक हवाई हमलों से टूटी कमर: सैन्य और आर्थिक मोर्चे पर भारी नुकसानपेंटागन और ईरानी सैन्य कमांडरों की ओर से जारी बयानों के मुताबिक, दोनों पक्षों को इस टकराव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जहां एक तरफ अमेरिका ने ईरान के तेल डिपो, अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटर्स और कमांड पोस्टों को निशाना बनाकर उसकी आर्थिक और सैन्य कमर तोड़ने का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ ईरानी ड्रोन हमलों ने अमेरिकी गठबंधन सेना के कई महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस भीषण गोलाबारी और बमबारी के कारण स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका है और बड़े पैमाने पर मानवीय संकट खड़ा हो गया है।भारत सहित पूरी दुनिया पर क्या होगा इसका सीधा असर?इस युद्ध के खतरनाक दौर में पहुंचने का सीधा असर भारत सहित दुनिया के तमाम बड़े देशों पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और महंगाई अनियंत्रित होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनकी आजीविका पर भी इस संकट के काले बादल मंडरा रहे हैं, जिसने नई दिल्ली की चिंताएं बेहद बढ़ा दी हैं।
ईरानी हमलों की आहट से सहमा अमेरिका! ट्रंप ने कतर से फाइटर जेट्स हटाने के दिए निर्देश
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर आ गया है, जिसने पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इंटेलिजेंस इनपुट और खुफिया एजेंसियों से मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों पर बड़े और भीषण मिसाइल व ड्रोन हमलों की आशंका जताई गई है। इस संभावित खतरे को देखते हुए वॉशिंगटन और पेंटागन में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने खाड़ी देशों में मौजूद अपने सभी बेस और सुरक्षा बलों को चौबीसों घंटे पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे इस पूरे रीजन में युद्ध जैसी गंभीर स्थिति बन गई है।राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा एक्शन: कतर एयरबेस से हटाए जा रहे हैं अमेरिकी लड़ाकू विमानहालात की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिना वक्त गंवाए एक बेहद आपातकालीन और बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। कतर में स्थित अल उदेद (Al Udeid) एयरबेस, जो मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य केंद्र माना जाता है, वहां से अमेरिकी फाइटर जेट्स और भारी बमवर्षक विमानों को तेजी से हटाकर सुरक्षित और रणनीतिक रूप से सुरक्षित ठिकानों पर ट्रांसफर किया जा रहा है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान की मिसाइल रेंज से अपने सबसे महंगे और घातक हवाई हथियारों को दूर रखना चाहता है ताकि किसी भी संभावित हमले में नुकसान को कम से कम किया जा सके।50,000 अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर: पेंटागन ने कसी कमरविमानों की शिफ्टिंग के साथ-साथ अमेरिका ने जमीनी मोर्चे पर भी अपनी किलेबंदी बेहद मजबूत कर दी है। मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों जैसे इराक, सीरिया, कुवैत और बहरीन में तैनात लगभग 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों को कॉम्बैट रेडी यानी हाई ऑपरेशनल अलर्ट पर रख दिया गया है। एयर डिफेंस सिस्टम, जिसमें पैट्रियट मिसाइल डिफेंस शामिल है, को एक्टिवेट कर दिया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) सीधे तौर पर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सैनिकों को किसी भी आक्रामक कार्रवाई का तुरंत और आक्रामक जवाब देने की पूरी छूट दे दी गई है।वैश्विक बाजारों और भारत पर क्या होगा इसका असर?अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस सीधे टकराव का सीधा और बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। खाड़ी देशों में तनाव बढ़ने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती हैं। भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर भी नई दिल्ली में चिंताएं बढ़ गई हैं।
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इस समय बेहद गंभीर आर्थिक संकट (Economic Crisis) के दौर से गुजर रही है। ड्रैगन की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले रियल एस्टेट सेक्टर (Property Market) में अभूतपूर्व मंदी आ चुकी है। एवरग्रैंड (Evergrande) और कंट्री गार्डन जैसी चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां भारी कर्ज के बोझ तले दबकर दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। करोड़ों की तादाद में बिना बिके और अधूरे पड़े अपार्टमेंट्स के कारण प्रॉपर्टी की कीमतें रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई हैं। आम चीनी नागरिकों की जीवन भर की कमाई प्रॉपर्टी में फंसी होने के कारण उनका भरोसा पूरी तरह डगमगा गया है, जिससे पूरे देश में एक तरह का वित्तीय आपातकाल जैसा माहौल बन गया है।कमजोर घरेलू मांग और फैक्ट्रियों में पसरा सन्नाटा: जीडीपी ग्रोथ हुई सुस्तप्रॉपर्टी संकट का सीधा असर चीन की घरेलू खपत पर पड़ा है। चीनी उपभोक्ता अब पैसे खर्च करने से बच रहे हैं, जिससे देश में 'डिफ्लेशन' (Deflation) यानी मंदी की स्थिति पैदा हो गई है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) के आंकड़ों के मुताबिक, देश की जीडीपी (GDP) ग्रोथ रेट सरकार के तय वार्षिक लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। रिटेल सेल्स और इंडस्ट्रियल आउटपुट के आंकड़े बेहद कमजोर आए हैं। इसके साथ ही, चीन की फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन काफी धीमा हो गया है क्योंकि अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा चीनी सामानों पर लगाए जा रहे भारी टैरिफ (Tariffs) के कारण चीन का एक्सपोर्ट (निर्यात) बिजनेस भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।युवाओं में रिकॉर्ड बेरोजगारी: बीजिंग की हर रणनीति हो रही फेलआर्थिक सुस्ती का सबसे बड़ा खामियाजा चीन की युवा आबादी को भुगतना पड़ रहा है। चीन में शहरी युवाओं की बेरोजगारी दर (Youth Unemployment Rate) ऐतिहासिक रूप से उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। कॉलेज और विश्वविद्यालयों से पास आउट होने वाले लाखों युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग की सरकार द्वारा ब्याज दरों में कटौती और बैंकों को ज्यादा लोन देने के निर्देश जैसे तमाम राहत पैकेज (Economic Stimulus) भी इस आर्थिक सुस्ती को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भी चीन के इकोनॉमिक आउटलुक को 'स्थिर' से घटाकर 'नकारात्मक' (Negative) श्रेणी में डाल दिया है।भारत और ग्लोबल मार्केट पर क्या होगा इसका असर?ग्लोबल इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन की इस कमजोरी का वैश्विक और खासकर भारतीय बाजारों (Indian Market) पर दोहरा असर देखने को मिल सकता है। एक तरफ जहां चीन में मंदी के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) और स्टील-एल्युमिनियम जैसी कमोडिटीज की वैश्विक मांग घटेगी, जिससे इनके दाम कम हो सकते हैं और भारत का इम्पोर्ट बिल घटेगा। वहीं दूसरी तरफ, वैश्विक कंपनियां अब चीन से अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस हटाकर भारत, वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों में शिफ्ट कर रही हैं, जिससे भारत के 'मेक इन इंडिया' (Make in India) अभियान और लोकल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स को एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) करीब 600 अंकों की भारी गिरावट के साथ 77,600 के स्तर के पास आ गया। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी लगभग 140 अंकों से ज्यादा टूटकर 24,200 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार के इस रुख से ट्रेडर्स और रिटेल निवेशकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि पिछले कारोबारी सत्र में बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था।प्राइवेट बैंकों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव: HDFC और Axis Bank में बड़ी गिरावटआज की इस मार्केट गिरावट में सबसे बड़ा विलेन बैंकिंग सेक्टर साबित हुआ है। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 2% से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में सामने आए तिमाही नतीजों (Q1 Results) के बाद प्राइवेट बैंकों के मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। दिग्गजों की बात करें तो एक्सिस बैंक (Axis Bank) के शेयरों में लगभग 5% से 6% तक का क्रैश देखा गया, जबकि देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank के शेयर भी 4.5% से ज्यादा टूट गए। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक और बजाज फाइनेंस के शेयरों ने भी बाजार को नीचे खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी।बाजार क्यों गिरा? इन 3 बड़े कारणों ने बिगाड़ा खेलग्लोबल मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घरेलू बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे तीन मुख्य वजहें काम कर रही हैं। पहला कारण, वीकेंड पर आए बैंकिंग दिग्गजों के पहली तिमाही के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, जिससे निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग की। दूसरा बड़ा कारण, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इरान के बीच जारी जियोपॉलिटिकल क्राइसिस के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। कच्चे तेल का महंगा होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निगेटिव माना जाता है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का डर रहता है। तीसरा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली है, जिससे लिक्विडिटी पर असर पड़ा है।क्या है निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की राय?मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,200 का स्तर बेहद अहम था, और इसके नीचे जाने पर बाजार में गिरावट और बढ़ सकती है जो निफ्टी को 24,000 या 23,800 के स्तर तक ले जा सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस गिरावट के बीच भी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में थोड़ी मजबूती देखी जा रही है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस उतार-चढ़ाव वाले माहौल में निवेशकों को हड़बड़ी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही धीरे-धीरे (SIP मोड में) खरीदारी करनी चाहिए।
HDFC Bank Share Price: शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच ब्रोकरेज फर्मों ने जताया बड़ा भरोसा
भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े दिग्गजों में से एक एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के शेयरों में हाल ही में 5% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस अचानक आई गिरावट से जहां आम निवेशक थोड़े चिंतित हैं, वहीं बाजार के बड़े एक्सपर्ट्स और ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज इसे एक बड़े निवेश के मौके के रूप में देख रहे हैं। दिग्गज वित्तीय विश्लेषकों का दावा है कि मौजूदा स्तर से इस बैंकिंग स्टॉक में 57% तक की शानदार तेजी (Upside Potential) देखने को मिल सकती है।आखिर क्यों गिरा देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक का शेयरबाजार के जानकारों के मुताबिक, वैश्विक दबाव, तिमाही नतीजों के बाद कुछ तकनीकी सुधार और बड़े संस्थागत निवेशकों (FIIs) की मुनाफावसूली के चलते HDFC Bank के शेयरों में यह 5 फीसदी का करेक्शन देखने को मिला है। हालांकि, बैंक के बुनियादी ढांचे (Fundamentals) में कोई कमी नहीं आई है। लोन ग्रोथ, डिपॉजिट मोबिलाइजेशन और एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर बैंक की स्थिति लगातार मजबूत बनी हुई है, जिसके कारण लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक बेहतरीन 'बाय ऑन डिप्स' (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति साबित हो सकती है।ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज की रिपोर्ट और 57% मुनाफे का बड़ा दावाशेयर में आई इस गिरावट के तुरंत बाद कई नामी ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों ने HDFC Bank पर अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट जारी की है। अधिकांश विश्लेषकों ने इस स्टॉक को 'बाय' (Buy) या 'आउटपरफॉर्म' की रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि बैंक की क्रेडिट ग्रोथ आने वाले समय में और रफ्तार पकड़ेगी। वर्तमान प्राइस लेवल से इसके टारगेट प्राइस को काफी ऊपर रखा गया है, जो मौजूदा भाव से लगभग 57% तक के रिटर्न का संकेत देता है। विश्लेषकों के अनुसार, जो निवेशक अगले 12 से 18 महीनों के नजरिए से बाजार में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह स्टॉक पोर्टफोलियो को मजबूती देने वाला साबित हो सकता है।भारतीय रिटेल निवेशकों और लोकल मार्केट के लिए क्या है सलाहअगर आप दिल्ली, मुंबई, लखनऊ या देश के किसी भी हिस्से से घरेलू शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो बैंकिंग सेक्टर के इस लीडर पर नजर रखना फायदेमंद हो सकता है। लोकल वेल्थ मैनेजर्स और फाइनेंशियल एडवाइजर्स का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और HDFC Bank उसमें सबसे आगे है। ऐसे में रिटेल निवेशकों को घबराहट में पैनिक सेलिंग (बिक्री) करने के बजाय, धीरे-धीरे सिस्टेमैटिक तरीके से इस शेयर को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग के विस्तार और ग्रामीण इलाकों में मजबूत पैठ का सीधा फायदा बैंक के मुनाफे और इसके शेयर प्राइस पर दिखने वाला है।
संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को विपक्षी दलों ने छात्रों की समस्याओं, नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, प्रश्न-पत्र लीक, बेरोजगारी और अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जनता और युवाओं की समस्याओं को सुनने के लिए तैयार नहीं है। वहीं, भाजपा ने कहा कि सरकार छात्रों के हितों को लेकर संवेदनशील है और परीक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए कदम उठा रही है।
CJP के संसद मार्च के बीच दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। संसद भवन के आसपास पुलिस अलर्ट पर रही, अभिजीत दीपके ने 23 दिन बाद अनशन समाप्त किया, जबकि सोनम वांगचुक ने संसद मार्च में शामिल होने की अनुमति मांगी।
महंत दिनेन्द्र दास निर्मोही अखाड़े से बेदखल, जा सकती हैं राम मंदिर ट्रस्ट की सदस्यता
mahant dinendra das expelled nirmohi akhada: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेन्द्र दास को अखाड़े के महंत पद से हटा दिया गया है। इसके चलते अब उनके राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सदस्यता से भी बाहर ...
कलकत्ता हाई कोर्ट से ममता बनर्जी को बड़ा झटका, 440 करोड़ रुपये वाले बैंक खातों पर रोक बरकरार
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 440.42 करोड़ रुपये वाले फ्रीज बैंक खातों पर राहत देने से इनकार किया। ED की PMLA जांच जारी, विमान और हेलीकॉप्टर खरीद से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच तेज।
जंतरमंतर पर लाठीचार्ज कर रही पुलिस के सामने खड़ा हो चिल्लाया युवक “मारो… मुझे मारो और मारो…”
कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च को लेकर दिल्ली सड़क से संसद तक बवाल मचा हुआ है। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों पर झड़प की खबरें हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पुलिस लाठीचार्ज करती दिखाई दे रही है। जंतर मंतर के ...
जवाहर भवन की चौथी मंजिल पर लगी आग, फायर ब्रिगेड ने पाया काबू; कोई हताहत नहीं: ब्रजेश पाठक
राजधानी लखनऊ स्थित जवाहर भवन की एक इमारत में सोमवार सुबह आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। प्रशासन के अनुसार, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
संसद के मानसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) ने केंद्र सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। सपा प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार अहंकार के साथ काम कर रही है और उसे छात्रों व आम लोगों की समस्याओं को सुनना चाहिए।
CJP Protest Jantar Mantar Live Updates: दिल्ली के जंतर-मंतर पर अचानक माहौल क्यों बिगड़ा? जानिए ग्राउंड से एक्सक्लूसिव अपडेट्स, पुलिस की कार्रवाई, ट्रैफिक एडवाइजरी और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें।
जम्मू-कश्मीर के डोडा में दर्दनाक हादसा: रग्गी नाला में भूस्खलन, कई वाहनों पर गिरे पत्थर
जम्मू कश्मीर के डोडा जिले के रग्गी नाला में सोमवार को एक यात्री बस और कई अन्य गाड़ियों पर तेजी से गिरते पत्थरों की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन NEET पेपर लीक पर चर्चा की मांग को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष का जोरदार हंगामा। दोनों सदनों की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित।
IMD Weather Alert: उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर समेत 15 से अधिक राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट। कई पहाड़ी जिलों में रेड अलर्ट, भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ा।
आज से मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र, UCC बिल पेश करेगी सरकार, जानें बिल का खास बातें?
मध्यप्रदेश विधानसभा के आज से शुरु हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार में समान नागरिक संहिता से जुड़ा अहम विधेयक लाने जा रही है। विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन ही आज सरकार UCC से जुड़ा अहम बिल सदन में पेश कर सकती है। जिस पर मंगलवार को सदन ...
वैश्विक स्तर पर जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता और शेयर बाजार में मचे उतार-चढ़ाव के बीच सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। आज सोमवार, 20 जुलाई 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार खुलते ही सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी का रुख देखने को मिला है। शादियों के सीजन के साथ-साथ सावन के इस पावन महीने में सोने की खरीदारी करने वालों के लिए यह हफ्ता काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो अलग-अलग राज्यों में स्थानीय वैट (VAT) और मेकिंग चार्ज के कारण गहनों के रेट में थोड़ा अंतर दर्ज किया गया है। आइए जानते हैं 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से देश के प्रमुख शहरों की बिल्कुल ताजा रेट लिस्ट।शुद्ध 24 कैरेट और जेवर वाले 22 कैरेट सोने का क्या है भाव?आज देश के मुख्य महानगरों में 10 ग्राम सोने की कीमतें अपनी पुरानी बंद कीमतों के मुकाबले बढ़त के साथ ट्रेड कर रही हैं:नई दिल्ली (New Delhi): देश की राजधानी में आज 24 कैरेट शुद्ध सोना ₹74,850 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, वहीं आभूषण बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला 22 कैरेट सोना ₹68,620 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिक रहा है।मुंबई (Mumbai): आर्थिक राजधानी मुंबई में आज 24 कैरेट सोने का भाव ₹74,700 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने का रेट ₹68,470 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है।कोलकाता और चेन्नई (Kolkata/Chennai): कोलकाता में आज 24K सोना ₹74,700 पर है, जबकि चेन्नई में दक्षिण भारतीय बाजारों की भारी मांग के कारण 24K सोना ₹75,120 प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर ट्रेड कर रहा है।उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों की रेट लिस्ट (आगरा, जयपुर, पटना)हिंदी बेल्ट के प्रमुख शहरों और सराफा मंडियों में भी आज सुबह से ही ग्राहकों की भारी चहल-पहल के बीच नए रेट लागू हो चुके हैं:आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा के सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट सोने की कीमत ₹74,800 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट जेवरी सोने का भाव ₹68,580 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है।जयपुर (Jaipur): राजस्थान की राजधानी और पिंक सिटी जयपुर में आज 24 कैरेट सोना ₹74,950 और 22 कैरेट सोना ₹68,710 प्रति 10 grams पर मिल रहा है।पटना (Patna): बिहार की राजधानी पटना में आज 24 कैरेट शुद्ध सोने का खुदरा भाव ₹74,750 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट का दाम ₹68,520 प्रति 10 ग्राम के करीब बना हुआ है।बजट के अनुकूल 18 कैरेट सोने के दाम और हॉलमार्किंग का नियमआजकल मध्यम वर्ग और कामकाजी महिलाओं के बीच हल्के वजन (लाइटवेट) के डेली वियर गहनों के लिए 18 कैरेट सोने की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है। आज देश के अधिकांश हिस्सों में 18 कैरेट सोने का भाव औसतन ₹56,140 से ₹56,350 प्रति 10 ग्राम के बीच बना हुआ है, जो बजट के लिहाज से काफी किफायती बैठता है।भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों के अनुसार, अब देश में किसी भी कैरट का सोना खरीदते समय उस पर 6 अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक HUID (हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन) कोड देखना बेहद अनिवार्य है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा पक्का बिल लें और सोने की शुद्धता जांचने के लिए सरकारी 'BIS Care App' का इस्तेमाल जरूर करें। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि डॉलर इंडेक्स में आ रही कमजोरी को देखते हुए आने वाले दिनों में सोने की कीमतों पर तेजी का दबाव और बढ़ सकता है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका-ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है। वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में 90 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुका है। कच्चे तेल की इन बढ़ती कीमतों के बीच, भारतीय सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आज मंगलवार, 21 जुलाई 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल के नए खुदरा भाव अपडेट कर दिए हैं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो ईंधन की दैनिक समीक्षा प्रणाली (Dynamic Fuel Pricing) के तहत आज भी देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय टैक्स (VAT) व माल ढुलाई लागत के आधार पर तेल के दामों में मामूली फेरबदल दर्ज किया गया है।देश के चार मुख्य महानगरों में आज क्या हैं ईंधन के रेट?अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में आई इस उछाल के बावजूद राहत की बात यह है कि तेल कंपनियों ने देश के चार बड़े महानगरों में बेस प्राइस को स्थिर रखा है। इन शहरों में आज सुबह 6 बजे से प्रभावी दरें इस प्रकार हैं:नई दिल्ली (New Delhi): देश की राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल का भाव ₹95.20 प्रति लीटर पर टिका हुआ है।मुंबई (Mumbai): आर्थिक राजधानी मुंबई में हमेशा की तरह टैक्स अधिक होने के कारण ईंधन सबसे महंगा है। यहाँ आज पेट्रोल ₹111.21 प्रति लीटर और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।कोलकाता (Kolkata): कोलकाता के निवासियों को आज एक लीटर पेट्रोल के लिए ₹113.51 और डीजल के लिए ₹99.82 का भुगतान करना होगा।चेन्नई (Chennai): दक्षिण भारत के इस महानगर में आज पेट्रोल का रेट ₹107.76 प्रति लीटर और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर के स्तर पर स्थिर है।उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में तेल का ताजा भावउत्तर प्रदेश (UP) के विभिन्न जिलों में राज्य सरकार के वैट और जिला परिवहन शुल्क के कारण आज तेल की कीमतों में शहरवार थोड़ा अंतर देखने को मिल रहा है:लखनऊ (Lucknow): नवाबों के शहर लखनऊ में आज पेट्रोल का औसत भाव ₹101.86 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹95.36 प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है।नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Noida): दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर जिले में आज पेट्रोल ₹101.96 प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है, जबकि डीजल का दाम ₹95.44 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।गाजियाबाद (Ghaziabad): गाजियाबाद में आज पेट्रोल की कीमत ₹101.80 प्रति लीटर और डीजल ₹95.25 प्रति लीटर के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।वाराणसी (Varanasi): धार्मिक नगरी वाराणसी में आज पेट्रोल का रेट ₹102.40 प्रति लीटर और डीजल ₹95.60 प्रति लीटर के करीब बना हुआ है।ऐसे घर बैठे चेक करें अपने शहर का बिल्कुल सटीक दामअगर आप आज अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने का मन बना रहे हैं, तो पेट्रोल पंप पर जाने से पहले एक साधारण SMS के जरिए भी अपने नजदीकी डीलर का बिल्कुल लाइव और सटीक रेट जान सकते हैं। इंडियन ऑयल (IOCL) के उपभोक्ता अपने मोबाइल से RSP डीलर कोड (जैसे लखनऊ के लिए RSP 155054 या दिल्ली के लिए RSP 102090) लिखकर 92249 92249 पर भेज सकते हैं। इसी तरह बीपीसीएल (BPCL) के ग्राहक RSP डीलर कोड लिखकर 92231 12222 पर मैसेज भेजकर तुरंत अपने फोन पर ताजा रेट लिस्ट प्राप्त कर सकते हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचा, तो आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।
खुशनुमा बारिश और सावन के रिमझिम मौसम का मजा हर कोई लेना चाहता है, लेकिन अपने साथ यह मौसम एक बड़ी आफत भी लेकर आता है— हवा में अत्यधिक नमी यानी चिपचिपी उमस (Humid Weather)। मानसून के दिनों में होने वाले पसीने के कारण न सिर्फ कपड़े जल्दी गीले हो जाते हैं, बल्कि शरीर से एक अजीब सी बेसिक्स गंध या बदबू आने लगती है। इस मौसम में सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि आपका पसंदीदा और महंगा परफ्यूम भी लगाने के महज एक से दो घंटे के भीतर हवा में गायब हो जाता है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो इस उमस भरे मौसम में साधारण परफ्यूम काम नहीं आते, बल्कि आपको अपनी ग्रूमिंग किट में कुछ खास नोट्स वाले परफ्यूम शामिल करने की जरूरत है। आइए जानते हैं मानसून में दिनभर तरोताजा और सुगंधित रहने के 4 बेस्ट परफ्यूम ऑप्शंस और खुशबू को लंबे समय तक टिकाए रखने के सीक्रेट हैक्स।मानसून के लिए बेस्ट हैं ये 4 परफ्यूम नोट्सबरसात के दिनों में हमेशा स्ट्रॉन्ग, फ्रेश और क्रिस्प खुशबू वाले परफ्यूम्स का चुनाव करना चाहिए, जो नमी के बाद भी अपनी जगह बनाए रखें:सिट्रस नोट्स (Citrus Fragrances): नींबू, संतरा, बरगामोट और मौसमी फलों के अर्क वाले परफ्यूम इस मौसम के लिए सबसे बेहतरीन माने जाते हैं। इनकी खट्टी और ताजी खुशबू पसीने की बदबू को पूरी तरह दबा देती है और आपको तुरंत एनर्जी से भर देती है।एक्वाटिक और मरीन नोट्स (Aquatic/Oceanic Perfumes): समंदर की लहरों और ठंडी हवाओं का अहसास कराने वाले एक्वाटिक परफ्यूम मानसून की भारी उमस को कम करने का मानसिक अहसास कराते हैं। यह खुशबू बेहद हल्की, साफ और लंबे समय तक टिकने वाली होती है।वुडी और स्पाइसी नोट्स (Woody & Spicy Notes): अगर आपको मीठी खुशबू पसंद नहीं है, तो आप चंदन (Sandalwood), देवदार (Cedarwood) या हल्की दालचीनी की खुशबू वाले परफ्यूम चुन सकते हैं। मिट्टी की सोंधी खुशबू के साथ मिलकर यह नोट्स बेहद रॉयल लुक और फील देते हैं।फ्लोरल मस्क (Floral Musk): चमेली, लैवेंडर या गुलाब के साथ मस्क (कस्तूरी) का बेस नोट वाले परफ्यूम नमी के दिनों में वाष्पीकृत (Evaporate) नहीं होते। मस्क खुशबू को त्वचा से चिपकाए रखता है, जिससे खुशबू घंटों तक बनी रहती है।परफ्यूम लगाने का सही तरीका: कैसे टिकाएं खुशबू?सिर्फ अच्छा परफ्यूम खरीदना काफी नहीं है, मानसून में उसे लगाने का तरीका भी खास होना चाहिए ताकि वह पसीने में बह न जाए:पल्स पॉइंट्स पर लगाएं: परफ्यूम को हमेशा शरीर के गर्म हिस्सों यानी पल्स पॉइंट्स जैसे कलाई के अंदरूनी हिस्से, गर्दन के दोनों तरफ, कानों के पीछे और कोहनी के मोड़ पर स्प्रे करें। यहाँ रक्त संचार तेज होने से खुशबू धीरे-धीरे दिनभर रिलीज होती रहती है।वैसलीन या मॉइस्चराइजर का हैक: रूखी त्वचा पर परफ्यूम जल्दी उड़ जाता है। मानसून में परफ्यूम स्प्रे करने से पहले उस जगह पर थोड़ा सा बिना खुशबू वाला (Unscented) पेट्रोलियम जेली या मॉइस्चराइजर लगा लें। यह ऑयल बेस परफ्यूम के मॉलिक्यूल्स को लॉक कर देता है, जिससे खुशबू दोगुनी देर तक टिकती है।कपड़ों पर स्प्रे करने से बचें: बरसात में कपड़ों पर सीधे परफ्यूम छिड़कने से हवा की नमी के कारण कपड़ों से अजीब सी सीलन भरी गंध आ सकती है और दाग भी लग सकते हैं। हमेशा नहाने के तुरंत बाद साफ त्वचा पर ही इसका इस्तेमाल करें।
सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल ले जाने की मांग फिर हाई कोर्ट पहुंची, पत्नी ने डबल बेंच में दी चुनौती
सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने उन्हें निजी अस्पताल शिफ्ट करने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच में अपील दायर की। जानिए अदालत में क्या दलीलें दी गईं और स्वास्थ्य बुलेटिन में क्या कहा गया।
जब भी हम वीकेंड पर दिल्ली की भागदौड़ और प्रदूषण से दूर किसी शांत जगह पर घूमने का मन बनाते हैं, तो सबसे पहला ख्याल अपनी कार से रोड ट्रिप पर निकलने का आता है। खुद ड्राइव करके पहाड़ों या ऐतिहासिक शहरों की तरफ जाना रोमांचक तो लगता है, लेकिन हाइवे का भारी ट्रैफिक, घंटों स्टीयरिंग व्हील थामे रहने की थकान और अनजान रास्तों पर पार्किंग की जद्दोजहद कई बार पूरे वेकेशन का मजा किरकिरा कर देती है। हालिया ट्रैवल ट्रेंड्स और यात्रियों के अनुभवों के विश्लेषण के मुताबिक, अब दिल्ली से कई बेहतरीन रास्तों के लिए 'लक्जरी स्लीपर और वॉल्वो बसों' (Luxury Buses) का सफर आपकी पर्सनल कार राइड से भी कहीं ज्यादा आलीशान और रिलैक्सिंग साबित हो रहा है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह बदलता ट्रेंड दिल्ली के वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए घूमने के अंदाज को पूरी तरह बदल रहा है।कार से ज्यादा आलीशान क्यों है लक्जरी बस का अनुभव?आजकल की आधुनिक लक्जरी बसों में यात्रियों को वे सभी सुख-सुविधाएं मिल रही हैं, जो कभी सिर्फ फ्लाइट के बिजनेस क्लास या प्रीमियम होटलों में ही देखने को मिलती थीं:फ्लाइट जैसी सुविधाएं और रिक्लाइनर सीट्स: इन बसों में 140 डिग्री तक झुकने वाली आलीशान एर्गोनॉमिक सीट्स या पूरी तरह से आरामदायक स्लीपर बर्थ होते हैं, जहां आप लेटकर आराम से सो सकते हैं।ऑन-बोर्ड एंटरटेनमेंट और वाई-फाई: हर सीट के सामने पर्सनल स्क्रीन, हाई-स्पीड इंटरनेट वाई-फाई, चार्जिंग पॉइंट्स और पर्सनल रीडिंग लाइट्स मौजूद होती हैं, जिससे सफर के दौरान आप बोर नहीं हो सकते।ड्राइविंग के तनाव से मुक्ति: कार ट्रिप में ड्राइवर को लगातार सड़क पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है, जिससे वह थक जाता है। वहीं लक्जरी बस में आप पूरी रात आराम से सोते हुए बिता सकते हैं और सुबह बिना किसी थकान के बिल्कुल फ्रेश होकर अपनी मंजिल पर पहुंच सकते हैं।दिल्ली से लक्जरी बस के लिए 3 सबसे बेहतरीन और आरामदायक रूट्सयदि आप इस वीकेंड किसी आलीशान सफर का अनुभव लेना चाहते हैं, तो दिल्ली से इन डेस्टिनेशंस के लिए बस बुकिंग करना सबसे बेस्ट विकल्प है:दिल्ली से शिमला/मनाली (हिमाचल प्रदेश): पहाड़ों के घुमावदार रास्तों पर रात के समय कार चलाना बेहद जोखिम भरा और थकाऊ हो सकता है। दिल्ली से चलने वाली प्रीमियम वॉल्वो बसें उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी आपको घर के सोफे जैसा अहसास कराती हैं और सुबह सीधे पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में उतारती हैं।दिल्ली से जयपुर/उदयपुर (राजस्थान): पिंक सिटी और झीलों की नगरी उदयपुर के लिए दिल्ली से बेहद आलीशान मल्टी-एक्सल बसें चलती हैं। एक्सप्रेसवे पर इन बसों का सफर बेहद स्मूथ होता है और आपको राजस्थान के राजसी ठाट-बाट का अहसास सफर से ही होने लगता है।दिल्ली से देहरादून/मसूरी (उत्तराखंड): वीकेंड लवर्स के लिए यह सबसे पसंदीदा रूट है। रात 11 बजे दिल्ली से लक्जरी बस पकड़कर आप सुबह 5 बजे बिना किसी ड्राइविंग स्ट्रेस के देहरादून पहुंच सकते हैं।बजट के अनुकूल और पर्यावरण के लिए भी बेहतरकार से सफर करने पर पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दामों, भारी टोल टैक्स और गाड़ी की मेंटेनेंस का खर्च मिलाकर ट्रिप काफी महंगी बैठती है। इसके विपरीत, लक्जरी बस का टिकट इन सभी खर्चों के मुकाबले काफी किफायती होता है। इसके अलावा, एक ही बड़े वाहन में कई लोगों के सफर करने से कार्बन फुटप्रिंट भी कम होता है, जो पर्यावरण के लिहाज से भी एक जिम्मेदार टूरिज्म (Responsible Tourism) को बढ़ावा देता है। तो अगली बार जब आप दिल्ली से बाहर निकलने की प्लानिंग करें, तो अपनी कार की चाबी घर पर छोड़कर एक बार इस आलीशान बस सफर का लुत्फ जरूर उठाएं।
देश की राजधानी दिल्ली में आज मानसून सत्र के पहले दिन सुरक्षा व्यवस्था और यातायात (ट्रैफिक) दोनों ही मोर्चों पर भारी दबाव देखने को मिल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 'चलो संसद' मार्च और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ के जमावड़े को देखते हुए दिल्ली पुलिस की ट्रैफिक विंग ने एक विस्तृत और सख्त ट्रैफिक एडवाइजरी (Traffic Advisory) जारी की है। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती प्रख्यात शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों और युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो नई दिल्ली के कनेक्टिंग रास्तों पर आज सफर करने वाले आम दफ्तर जाने वालों और यात्रियों को भारी जाम से बचने के लिए पुलिस द्वारा बताए गए वैकल्पिक मार्गों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।सफदरजंग अस्पताल में सोनम वांगचुक की स्थिति: सिर्फ पानी पर हैं निर्भरइस पूरे आंदोलन के केंद्र में रहे सोनम वांगचुक की तबीयत को लेकर भी बड़ा अपडेट सामने आया है। उनके अनशन के 21वें दिन स्वास्थ्य में लगातार आ रही गिरावट के कारण उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की विशेषज्ञ सलाह पर सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।अस्पताल के सूत्रों और उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो के मुताबिक, वांगचुक की हालत स्थिर बनी हुई है लेकिन उन्होंने अभी भी डॉक्टरों की सलाह के बावजूद किसी भी प्रकार का जूस, सूप या तरल पदार्थ लेने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। वह केवल पानी पीकर अपना अनिश्चितकालीन उपवास जारी रखे हुए हैं। वांगचुक ने अस्पताल के वॉर्ड से ही सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी कर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को संसद तक पहुंचाने की बात दोहराई है, जिसके बाद जंतर-मंतर पर समर्थकों का जोश और बढ़ गया है।दिल्ली पुलिस की ट्रैफिक एडवाइजरी: इन मुख्य रास्तों पर जाने से बचेंप्रदर्शनकारियों द्वारा संसद भवन की तरफ कूच करने की घोषणा और भारी सुरक्षा घेरेबंदी के कारण नई दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात को पूरी तरह बंद या डायवर्ट कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने वाहन चालकों को निम्नलिखित रास्तों से बचने की हिदायत दी है:पूरी तरह बंद मार्ग: संसद मार्ग (टॉल्स्टॉय मार्ग क्रॉसिंग से कनाट प्लेस की तरफ), जंतर-मंतर रोड और रायसिना रोड के कुछ हिस्सों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित है।अत्यधिक व्यस्त और धीमा ट्रैफिक: अशोक रोड, केजी मार्ग, फिरोजशाह रोड, जनपथ (विंडसर प्लेस के पास) और बाबा खड़क सिंह मार्ग पर भारी सुरक्षा चेकिंग के कारण गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और ट्रैफिक बेहद धीमा चल रहा है।वैकल्पिक मार्ग: पुलिस ने कनाट प्लेस या इंडिया गेट की तरफ जाने वाले वाहनों को डीडीयू मार्ग, जवाहरलाल नेहरू मार्ग (JLN) या रिंग रोड का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।जंतर-मंतर पर सुरक्षा का अभेद्य चक्र और पुलिस की पैनी नजरजंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य युवा नेताओं के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवानों ने पूरे इलाके को कई लेयर की बैरिकेडिंग से घेर लिया है। नई दिल्ली के एंट्री पॉइंट्स और मेट्रो स्टेशनों के बाहर भी अतिरिक्त चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सम्मान करते हैं, लेकिन बिना अनुमति के कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने या प्रतिबंधित वीवीआईपी सुरक्षा जोन (संसद भवन) की तरफ बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
झाबुआ के किसानों से ऑनलाइन मिले सीएम डॉ. मोहन यादव, कहा- अन्नदाता के साथ खड़ी सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ में बलराम कृषि महोत्सव के अंतर्गत किसानों से ऑनलाइन चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ...
इंटरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक संकट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में लगातार हलचल मची हुई है। वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। इन सबके बीच, भारतीय सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आज सोमवार, 20 जुलाई 2026 को देश के सभी प्रमुख महानगरों और राज्यों के लिए एलपीजी (LPG) सिलेंडर के नए रेट्स जारी कर दिए हैं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह खबर हर उस गृहिणी और कारोबारी के लिए बेहद काम की है जो आज नया गैस सिलेंडर बुक करने की सोच रहे हैं। राहत की बात यह है कि इस महीने घरेलू गैस सिलेंडरों के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है।दिल्ली से मुंबई तक घरेलू गैस (14.2 KG) के दामदेश के मुख्य महानगरों में आम उपभोक्ताओं के घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें आज स्थिर बनी हुई हैं। अलग-अलग शहरों में ट्रांसपोर्टेशन और स्थानीय टैक्स के कारण इसके दाम इस प्रकार हैं:नई दिल्ली (New Delhi): देश की राजधानी में आज घरेलू रसोई गैस सिलेंडर का भाव ₹942.00 पर बरकरार है।मुंबई (Mumbai): आर्थिक राजधानी मुंबई के निवासियों को आज प्रति सिलेंडर ₹941.50 चुकाने होंगे।कोलकाता (Kolkata): कोलकाता में आज 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत ₹968.00 दर्ज की गई है।चेन्नई (Chennai): दक्षिण भारत के इस प्रमुख महानगर में आज घरेलू गैस का रेट ₹957.50 के स्तर पर स्थिर है।लखनऊ (Lucknow): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज घरेलू सिलेंडर का भाव ₹979.50 पर ट्रेड कर रहा है।कमर्शियल गैस (19 KG) इस्तेमाल करने वालों को मिली है बड़ी राहतहोटल, रेस्तरां, ढाबा और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में की गई ₹183.50 की बड़ी कटौती के बाद आज भी बाजार में दाम नीचे बने हुए हैं। आज चारों महानगरों में कमर्शियल सिलेंडर का ताजा भाव इस प्रकार है:दिल्ली: व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत ₹3,113.50 से घटकर अब ₹2,930.00 के स्तर पर आ चुकी है।मुंबई: मुंबई में आज 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर ₹2,885.50 के भाव पर मिल रहा है।चेन्नई: चेन्नई में व्यापारियों को आज एक सिलेंडर के लिए ₹3,106.00 का भुगतान करना होगा।कोलकाता: कोलकाता में आज कमर्शियल गैस सिलेंडर का रेट ₹3,081.50 पर आ गया है।जानिए हर महीने क्यों बदलते हैं एलपीजी के दाम?भारत में रसोई गैस की कीमतें काफी हद तक वैश्विक बाजार पर निर्भर करती हैं। हमारे देश में एलपीजी के आयात की लागत सीधे तौर पर सऊदी अनुबंध मूल्य (Saudi Contract Price) और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी होती है। वर्तमान में मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्गों पर सुरक्षा चिंताओं के कारण वैश्विक स्तर पर गैस और तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि, भारतीय तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका सीधा बोझ नहीं डाला है। यदि आप भी आज गैस बुकिंग करने जा रहे हैं, तो अपने गैस प्रदाता (Indane, HP या Bharat Gas) की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर अपने नजदीकी डिस्ट्रीब्यूटर का बिल्कुल सटीक रेट जरूर री-वेरिफाई कर लें।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के ठीक साथ ही देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आज सोमवार, 20 जुलाई 2026 को घोषित किए गए 'चलो संसद' मार्च (Chalo Sansad March) के मद्देनजर पूरी नई दिल्ली को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हाई-अलर्ट (High Alert) जारी किया है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह सुरक्षा व्यवस्था हाल के दिनों की सबसे कड़ी घेराबंदी में से एक है, क्योंकि पुलिस बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रदर्शनकारी को देश के सबसे संवेदनशील हाई-सिक्योरिटी जोन यानी संसद भवन की तरफ बढ़ने नहीं देना चाहती।दिल्ली पुलिस का सख्त आदेश: नहीं दी गई मार्च की कोई अनुमतिदिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट किया है कि सीजेपी (CJP) के इस मार्च को लेकर पुलिस विभाग से न तो कोई आधिकारिक अनुमति मांगी गई थी और न ही ऐसी किसी यात्रा या जुलूस की इजाजत दी गई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी भी प्रकार का मार्च पूरी तरह से गैर-कानूनी (Illegal) माना जाएगा। पुलिस ने जंतर-मंतर को छोड़कर नई दिल्ली संभाग में किसी भी तरह के जमावड़े पर रोक लगा दी है।BNSS की धारा 163 लागू, इन हरकतों पर लगी पूरी पाबंदीसुरक्षा की दृष्टि से दिल्ली पुलिस ने पूरे नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (जो पहले क्रिमिनल प्रोसीजर कोड यानी CrPC की धारा 144 हुआ करती थी) लागू कर दी है। इस सख्त आदेश के तहत निम्नलिखित पाबंदियां तत्काल प्रभाव से लागू हैं:एकत्र होने पर रोक: किसी भी सार्वजनिक स्थान पर 5 या उससे अधिक व्यक्तियों के एक साथ इकट्ठा होने या समूह बनाने पर पूरी तरह पाबंदी है।भड़काऊ भाषण और नारेबाजी: जिले की सीमाओं के भीतर किसी भी प्रकार की नारेबाजी करने, सार्वजनिक भाषण देने या धरने पर बैठने की मनाही है।हथियार और बैनर ले जाना प्रतिबंधित: सार्वजनिक सड़कों पर लाठी, डंडे, बैनर, तख्तियां (Placards) या किसी भी प्रकार के धारदार हथियार लेकर चलने पर सख्त रोक लगाई गई है। इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।5,000 से अधिक जवान और वॉटर कैनन तैनात, एंट्री पॉइंट्स पर पैनी नजरजंतर-मंतर और संसद भवन के आस-पास के सभी मुख्य चौराहों (जैसे संसद मार्ग, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और शंकर चौक) पर सोमवार तड़के 4 बजे से ही भारी पुलिस बल मुस्तैद है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) और रैपिड रिस्पांस टीमों के 5,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है।भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रणनीतिक स्थानों पर वॉटर कैनन (पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां) और वज्र वाहनों को खड़ा किया गया है। दिल्ली की सीमाओं और नई दिल्ली में प्रवेश करने वाले हर एक वाहन की सघन चेकिंग की जा रही है। खुफिया एजेंसियां और दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच हर घंटे जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों की संख्या और उनकी गतिविधियों की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेज रही हैं।पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारीदरअसल, यह पूरा विवाद देश में हाल ही में हुई नीट (NEET) परीक्षा की कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामलों को लेकर शुरू हुआ है। सीजेपी और उनके समर्थक इस मुद्दे पर देश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अस्पताल से एक संदेश जारी कर युवाओं और छात्रों से इस मार्च को सफल बनाने की अपील की थी, जिसके बाद दिल्ली में सुरक्षा को इस स्तर पर बढ़ाना पड़ा। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत भीड़ का हिस्सा न बनें और शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करें।
संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन CJP के संसद मार्च को लेकर दिल्ली में हाई अलर्ट रहा। जंतर-मंतर से कई प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए, पांच मेट्रो स्टेशन बंद रहे और भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया।
दतिया उपचुनाव में जीतू पटवारी ने लगाया गले तो आशुतोष तिवारी ने मंच से ही मांग लिए बीजेपी के लिए वोट
मध्य प्रदेश की हाईप्रोफाइल दतिया विधानसभा उपचुनाव के रण में राजनीतिक सरगर्मियों के बीच लोकतंत्र की एक बेहद खूबसूरत और दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। विधानसभा के चिरूला गांव में चुनावी जनसंपर्क के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और भाजपा ...
अमेरिका के नॉर्थ डकोटा से एक ऐसी अजीबोगरीब और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसे सुनकर किसी भी माता-पिता का दिल दहल जाए। यहाँ 38 साल पहले अस्पताल प्रशासन की एक कथित लापरवाही के कारण दो नवजात बच्चे आपस में बदल गए थे। दशकों तक दोनों बच्चे अलग-अलग परिवारों में पलकर बड़े हुए और खुद को उन्हीं का खून समझते रहे। लेकिन हाल ही में हुए एक घरेलू डीएनए (DNA) टेस्ट ने इस गहरे राज से पर्दा उठा दिया, जिसके बाद दोनों पीड़ित पुरुषों और उनके परिवारों ने अस्पताल पर उनकी 'असली जिंदगी छीनने' का आरोप लगाते हुए भारी-भरकम मुकदमा दायर कर दिया है।क्रिसमस के एक मामूली तोहफे से खुला दशकों पुराना राजइस पूरी कहानी की शुरुआत तब हुई जब काइल बाइलिन नाम के शख्स को क्रिसमस पर उपहारों के लेन-देन के दौरान एक 'एट-होम DNA टेस्ट किट' मिली। काइल ने महज उत्सुकता वश अपना टेस्ट कर लिया और उसके नतीजे एक वंशावली (Genealogy) वेबसाइट पर अपलोड कर दिए। वहां उन्हें एक महिला के प्रोफाइल से मैच मिला, जो उनकी सगी बुआ की तरह दिख रही थीं। जब उस महिला के असल भतीजे जेरेमी मॉरिसन को इस बात का पता चला, तो उसने भी अपना डीएनए टेस्ट कराया। दोनों के टेस्ट के परिणाम पूरी तरह अचंभित करने वाले थे—काइल और जेरेमी असल में जन्म के समय एक-दूसरे के माता-पिता से बदल चुके थे। जेरेमी को इस बात का पूरा भरोसा तब हुआ जब उन्होंने काइल के भाई की तस्वीर देखी, जिसकी शक्ल हूबहू जेरेमी से मिलती थी।26 जनवरी 1988 की वो एक रात, जिसने बदल दी किस्मतकोर्ट में दाखिल किए गए केस के दस्तावेजों के मुताबिक, यह पूरी घटना 26 जनवरी 1988 की है। नॉर्थ डकोटा के ग्राफ्टन में स्थित 'यूनिटी मेडिकल सेंटर' में उस दिन केवल इन दो ही बच्चों का जन्म हुआ था। अस्पताल के स्टाफ की किसी बड़ी चूक की वजह से दोनों बच्चे गलत माता-पिता के साथ उनके घर भेज दिए गए। काइल (जो असल में जेरेमी के रूप में जन्मे थे) ने बताया कि उनके पास आज भी बचपन का वो हॉस्पिटल ब्रेसलेट मौजूद है, जिस पर गलत पहचान दर्ज थी। इस सच के सामने आने के बाद दोनों ही परिवार गहरे सदमे और असमंजस में हैं।'अस्पताल ने मुझसे मेरा असली बेटा छीन लिया'इस खुलासे ने दोनों माताओं को बुरी तरह तोड़ कर रख दिया है। काइल का पालन-पोषण करने वाली मां एवलिन न्यूटन ने बेहद भावुक होते हुए कहा, काइल हमेशा मेरा बेटा रहेगा, यह प्यार कभी कम नहीं हो सकता। लेकिन मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि मानो किसी ने मुझसे मेरी वो जिंदगी छीन ली जो मुझे अपने जैविक (Biological) बेटे के साथ जीनी चाहिए थी। मैं अब वापस 1988 में जाकर अपने असली बेटे का पहला कदम देखना, उसे कार सिखाना या उसकी शादी देखना तो वापस नहीं पा सकती। वहीं दूसरी तरफ जेरेमी का कहना है कि इस टेस्ट से उनके उस परिवार के प्रति प्यार में कोई कमी नहीं आएगी जिसने उन्हें 38 सालों तक पाला-पोसा और अच्छी शिक्षा दी।अस्पताल ने झाड़ा पल्ला: रिकॉर्ड्स ही गायबमुकदमा दर्ज होने के बाद यूनिटी मेडिकल सेंटर ने एक बयान जारी कर माना कि बच्चों की अदला-बदली तो हुई है, लेकिन उन्होंने अपने स्टाफ की गलती मानने से साफ इनकार कर दिया है। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि इस घटना को करीब चार दशक बीत चुके हैं, इसलिए उस दौर के न तो मेडिकल और स्टाफिंग रिकॉर्ड्स सुरक्षित बचे हैं और न ही उस डिलीवरी टीम का कोई सदस्य आज यहां कार्यरत है। ऐसे में यह साबित करना मुश्किल है कि गलती किसकी थी। फिलहाल, यह मामला कोर्ट में है और आधुनिक जेनेटिक्स तकनीक के इस दौर में यह घटना दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले शिक्षा सुधारों को लेकर दिल्ली में डटे प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन ने एक नया और बेहद दिलचस्प मोड़ ले लिया है। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती होने के दो दिन बाद भी वांगचुक ने अपना उपवास नहीं तोड़ा है। इस बीच उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता अस्पताल पहुंचकर यह लिखित या ठोस भरोसा दिलाते हैं कि वे संसद के भीतर 'शिक्षा जवाबदेही' और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी वांगचुक आज 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह आंदोलन अब सीधे तौर पर संसद की दहलीज पर राजनीतिक दलों की नीयत को परखने की परीक्षा बन गया है।सोनम वांगचुक ने 'एक्स' पर पोस्ट कर रखीं ये 3 बड़ी शर्तेंसफदरजंग अस्पताल से ही सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी मांगों को सार्वजनिक करते हुए लिखा कि वह 20 जुलाई को अपना अनशन तोड़ने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उनकी निम्नलिखित शर्तें पूरी की जाएं:सरकार ले जिम्मेदारी: सरकार हाल के दिनों में देश की शिक्षा व्यवस्था में हुई बड़ी नाकामियों, व्यापक स्तर पर हुए पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करे।संसद मार्च की अनुमति: वांगचुक और उनके साथी प्रदर्शनकारी नेताओं को संसद तक शांतिपूर्वक पहुंचने दिया जाए, जहां अलग-अलग पार्टियों के सांसद उन्हें संसद में इस आवाज को उठाने का खुला आश्वासन दें।अस्पताल में आकर दें भरोसा: यदि स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य पाबंदी के चलते वह खुद बाहर नहीं जा पाते हैं, तो विभिन्न दलों के नेता सफदरजंग अस्पताल के वॉर्ड में आकर उन्हें यह भरोसा दिलाएं।नजरबंदी से आजादी: वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें अस्पताल में एक तरह से गैर-कानूनी रूप से नजरबंद रखा गया है, जहां उनके आने-जाने, बोलने और लोगों से बातचीत करने की आजादी पर रोक है। इससे उन्हें तत्काल मुक्त किया जाए।वांगचुक की जगह पत्नी गीतांजलि संभालेंगी संसद मार्च का मोर्चासोमवार को दिल्ली में प्रस्तावित बड़े संसद मार्च को लेकर रणनीति बदल गई है। अस्पताल में डॉक्टरों की सख्त निगरानी में होने के कारण सोनम वांगचुक स्वयं इस मार्च में शामिल नहीं हो सकेंगे। उनकी अनुपस्थिति में आंदोलन की कमान उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो संभालेंगी। गीतांजलि ने कहा कि आंदोलन की आवाज को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उन्होंने जंतर-मंतर और संसद मार्च में शामिल होने आ रहे छात्रों, युवाओं और अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे हर हाल में शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई या राजनीति का हिस्सा न बनें। उन्होंने बताया कि वांगचुक डॉक्टरों की सलाह के बाद भी जूस या अन्य तरल पदार्थ नहीं ले रहे हैं, वे सिर्फ पानी पीकर अपना उपवास जारी रखे हुए हैं।दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली तत्काल अंतरिम राहतइस बीच कानूनी मोर्चे पर वांगचुक के परिवार को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गीतांजलि आंगमो की उस याचिका पर तत्काल अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से हटाकर किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की इजाजत मांगी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण अनशन के दौरान पुलिस ने वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध जबरन सरकारी अस्पताल में लाकर कैद कर दिया है। हालांकि, अदालत ने रिकॉर्ड्स को देखते हुए कहा कि चूंकि वांगचुक की पत्नी, भाई और परिजनों को उनसे मिलने की पूरी छूट है और उनके रुकने का इंतजाम भी वहीं किया गया है, इसलिए इसे अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 24 जुलाई की तारीख तय की है। अब सारा दारोमदार इस बात पर है कि आज मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष और सरकार शिक्षा सुधार के इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल क्षेत्र से कुदरत के कहर की बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। पुंछ और राजौरी जिलों में रविवार को हुई भीषण मूसलाधार बारिश, अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। पहाड़ों से आए पानी, मलबे और पत्थरों के तेज सैलाब ने देखते ही देखते दर्जनों आशियानों को अपनी चपेट में ले लिया। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि मलबे में दबे कई लोगों की तलाश जारी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए कटरा में श्री माता वैष्णो देवी, अमरनाथ और शिव खोड़ी यात्राओं को एहतियातन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपना दिल्ली दौरा छोटा कर तुरंत जम्मू पहुंच चुके हैं।सुरनकोट में बादल फटने से एक ही परिवार के 8 लोग बहेइस त्रासदी की सबसे खौफनाक तस्वीर पुंछ जिले के सुरनकोट तहसील स्थित लोअर मुराह गांव में देखने को मिली। यहां तड़के सुबह करीब 3:30 बजे बादल फटने से अचानक सैलाब आ गया। गांव के रहने वाले मोहम्मद लतीफ अपनी एसयूवी गाड़ी को सुरक्षित जगह पार्क करने के लिए घर से बाहर निकले ही थे कि नाले के पास बना उनका तीन मंजिला मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस हादसे में घर के अंदर मौजूद उनके परिवार के 8 सदस्य मलबे और पानी के तेज बहाव में बह गए। अब तक 60 वर्षीय बानो बी और 2 साल के मासूम सुफियान का शव बरामद किया जा चुका है, जबकि परिवार के 6 अन्य सदस्यों की तलाश के लिए सेना और एसडीआरएफ (SDRF) का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद और नदियों में हाई अलर्टमौसम विभाग (IMD) ने जम्मू-कश्मीर में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश और खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। भारी लैंडस्लाइड के कारण जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) पर ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया है। इधर, रियासी में सलाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट और रामबन में बागलियाड़ डैम के गेट खोल दिए जाने के कारण चिनाब नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है, जिसके बाद पूरे जम्मू संभाग में फ्लड अलर्ट जारी कर दिया गया है। सांगला गांव में भी बाढ़ की चपेट में आने से चार अन्य लोगों की मौत की खबर है।उफनती नदियों के बीच भारतीय सेना का जांबाज रेस्क्यूभारी तबाही के बीच भारतीय सेना की 'व्हाइट नाइट कॉर्प्स', पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला है। जम्मू में तवी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने पर पीर खो मंदिर के पास फंसे तीन बच्चों को जवानों ने सूझबूझ से बाहर निकाला। वहीं राजौरी के धांगरी नदी किनारे और थनामंडी में बाढ़ के बीच फंसे 5 बच्चों समेत 11 नागरिकों को सेना ने रेस्क्यू किया है। राजौरी जिले में बेला बस स्टैंड का करीब 90 फीसदी हिस्सा पानी में बह गया है और सैकड़ों घरों में बिजली व पानी की सप्लाई ठप हो गई है।नेटवर्क ठप और करोड़ों की संपत्ति खाकप्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में अब तक 93 से ज्यादा मकान, 17 स्कूल और 24 पनचक्कियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। राजौरी में भी 42 घरों और 56 वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित इलाकों में एयरटेल और बीएसएनएल के मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो चुके हैं, जिससे राहत कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू सिविल सचिवालय में आपातकालीन बैठक बुलाई है, वहीं उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए प्रभावितों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और हर संभव आर्थिक सहायता देने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल के बीच एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में कमर दर्द के मरीजों की संख्या बिजली की रफ्तार से बढ़ रही है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2050 तक दुनिया भर के लगभग 843 मिलियन (यानी 84 करोड़ से ज्यादा) लोग लोअर बैक पेन (कमर के निचले हिस्से में दर्द) की गंभीर समस्या से जूझ रहे होंगे। एक रिपोर्टर के तौर पर अगर इस डेटा का विश्लेषण करें तो यह स्थिति आने वाले समय में एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बनने वाली है, जो लोगों को शारीरिक रूप से लाचार बना सकती है।महिलाओं और 50 पार के लोगों को सबसे ज्यादा खतराविश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 तक दुनिया भर में लगभग 61 करोड़ लोग इस समस्या से परेशान थे, लेकिन अब यह आंकड़ा तेजी से ग्राफ ऊपर ले जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ कमर दर्द का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है। आमतौर पर 50 से 55 साल की उम्र के लोगों में यह समस्या सबसे अधिक देखी जा रही है। इस रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में लोअर बैक पेन की समस्या कहीं ज्यादा देखने को मिल रही है।क्या है लोअर बैक पेन और क्यों मानसिक सेहत पर पड़ रहा असर?लोअर बैक पेन दरअसल पसलियों के निचले हिस्से (Ribcage) और हिप्स के बीच होने वाले तेज या धीमे दर्द को कहते हैं। यह दर्द कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक लगातार परेशान कर सकता है। इसकी वजह से न सिर्फ उठने-बैठने और चलने-फिरने में भारी दिक्कत आती है, बल्कि रात की नींद भी पूरी तरह हराम हो जाती है। लंबे समय तक इस दर्द को झेलने के कारण मरीजों की मानसिक सेहत और कार्यक्षमता पर भी बेहद बुरा असर पड़ रहा है।दो श्रेणियों में बांटा गया है यह दर्दचिकित्सकों और डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कमर दर्द को मुख्य रूप से दो भागों में समझा जा सकता है:विशिष्ट कमर दर्द (Specific Back Pain): यह दर्द किसी खास मेडिकल वजह से होता है, जैसे रीढ़ की हड्डी में कोई गंभीर बीमारी होना, रीढ़ की हड्डी का टूटना (फ्रैक्चर) या शरीर के किसी दूसरे अंदरूनी अंग की बीमारी का दर्द फैलकर पीठ तक आ जाना।गैर-विशिष्ट कमर दर्द (Non-Specific Back Pain): इस दर्द के पीछे कोई एक विशेष बीमारी नहीं होती, बल्कि यह मुख्य रूप से गलत तरीके से बैठने, घंटों एक ही जगह कंप्यूटर के सामने काम करने और शारीरिक निष्क्रियता के कारण होता है। आज के समय में अधिकांश लोग इसी दूसरे प्रकार के दर्द से सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।समय रहते अगर लाइफस्टाइल में सुधार न किया गया, तो आने वाले सालों में यह समस्या हर घर में अपनी जगह बना लेगी।
हम में से बहुत से लोगों की यह आदत होती है कि रात को समय पर दवा लेने या सुबह उठते ही सबसे पहले टैबलेट खाने के चक्कर में दवाइयों का डिब्बा या पोटली अपने सिरहाने या बेड के बगल वाले टेबल पर रख लेते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो आपको तुरंत संभल जाने की जरूरत है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, अनजाने में की गई यह छोटी सी सुविधा आपके पूरे परिवार की सेहत और सुख-शांति पर भारी पड़ सकती है। आइए एक रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि आखिर बिस्तर के पास दवाइयां रखना क्यों अशुभ माना गया है और इन्हें घर में कहां रखना सबसे सही होता है।सिरहाने दवा रखने से बढ़ती है बीमारीवास्तु विज्ञान के अनुसार, हर वस्तु की अपनी एक ऊर्जा होती है। चूंकि दवाइयों का सीधा संबंध बीमारी और शारीरिक कष्ट से है, इसलिए इनसे लगातार नकारात्मक तरंगे निकलती हैं। जब आप सोते समय इन दवाइयों को अपने सिरहाने, तकिए के नीचे या बेड के बेहद करीब रखते हैं, तो आपकी मानसिक स्थिति पर इसका सीधा असर पड़ता है। व्यक्ति के अवचेतन मन में बीमारी को लेकर एक अनजाना डर और तनाव हमेशा बना रहता है। इस नकारात्मक ऊर्जा के कारण मरीज कभी पूरी तरह ठीक नहीं महसूस कर पाता और घर में बेचैनी का माहौल बना रहता है।भूलकर भी इन 3 जगहों पर न रखें मेडिकल किटवास्तु एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घर के कुछ खास हिस्सों में दवाइयां रखना सेहत और बरकत दोनों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है:रसोई घर (किचन): किचन को घर का सबसे पवित्र और ऊर्जावान स्थान माना जाता है, जहां माता अन्नपूर्णा का वास होता है। यहां दवाइयां रखने से घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अक्सर खराब रहने लगता है।पूजा स्थल (मंदिर): पूजा घर में दवाइयां रखने से सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा बाधित होती है, जिससे घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है।तिजोरी या धन रखने का स्थान: जहां आप अपने गहने या पैसे रखते हैं, वहां भूलकर भी दवाइयां न रखें। ऐसा करने से आपका कमाया हुआ धन बीमारी और कोर्ट-कचहरी के कामों में खर्च होने लगता है, जिससे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।आरोग्यता के लिए यह है दवाइयां रखने की सही दिशायदि आप चाहते हैं कि दवाइयां अपना असर जल्दी दिखाएं और घर का कोई सदस्य लंबे समय तक बीमार न रहे, तो दवाइयों को हमेशा एक साफ-सुथरी और सुरक्षित दराज या कैबिनेट में बंद करके रखें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, दवाइयों को रखने के लिए घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा यानी North-East) सबसे उत्तम माना गया है। इस दिशा में रखी गई दवाइयां बीमारी को जड़ से खत्म करने में मदद करती हैं और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ाती हैं। इसके अलावा आप इसे बेडरूम के बाहर किसी बंद अलमारी में भी व्यवस्थित कर सकते हैं।
बॉलीवुड के मेगास्टार सलमान खान अक्सर अपनी फिटनेस और बेहतरीन लुक के लिए जाने जाते हैं, लेकिन हाल ही में वे जब मुंबई में आयोजित एक सरकारी इवेंट में शामिल हुए, तो उनका बदला हुआ रूप देखकर फैंस हैरान रह गए. इस कार्यक्रम के वीडियो इंटरनेट पर सामने आते ही हर तरफ हंगामा मच गया. सोशल मीडिया पर लोग सुपरस्टार के चेहरे की झुर्रियों और थके हुए लुक को देखकर कयास लगाने लगे कि शायद भाईजान की तबीयत ठीक नहीं है या वे किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या से गुजर रहे हैं. कुछ फैंस तो उनकी तुलना दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र से भी करने लगे थे.अफवाहों के बीच सलमान खान का मजेदार पलटवारइंटरनेट पर चल रही इन तमाम तरह की अटकलों और हेल्थ रूमर्स के बीच सलमान खान ने बिल्कुल अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने रविवार को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी कुछ शानदार ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें पोस्ट कर दीं, जिन्होंने देखते ही देखते सोशल मीडिया का पारा बढ़ा दिया. इन तस्वीरों से ज्यादा ध्यान उनके अनोखे कैप्शन ने खींचा. भाईजान ने अपनी सेहत पर परेशान हो रहे फैंस से ही उल्टा सवाल पूछते हुए लिखा— आप लोगों की तबीयत कैसी है?आगामी फिल्मों में व्यस्त हैं बॉलीवुड के सुल्तानसुपरस्टार के इस मजाकिया और सीधे जवाब ने यह साफ कर दिया है कि वे पूरी तरह से तंदुरुस्त हैं और अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय अपने काम पर फोकस कर रहे हैं. वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' (जिसका पूर्व नाम बैटल ऑफ गलवान था) को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं. अपूर्व लखिया के निर्देशन में बन रही इस देशभक्ति से लबरेज फिल्म में उनके साथ मशहूर अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं.
देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र यानी संसद आज से एक नए सियासी संग्राम का गवाह बनने जा रही है। साल 2026 का मानसून सत्र आज (20 जुलाई) से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, लेकिन सत्र की शुरुआत से पहले ही राजधानी दिल्ली का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सरकार जहां बदले हुए समीकरणों के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने पहले ही दिन से सदन की कार्यवाही को घेरने का पूरा मन बना लिया है। रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में जो तीखे तेवर देखने को मिले, उससे साफ है कि इस बार का सत्र बेहद हंगामी होने वाला है।सर्वदलीय बैठक में हंगामा और विपक्ष का वॉकआउटसदन को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपना लिया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के गुट को बैठक में आमंत्रित किए जाने पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), डीएमके (DMK), आम आदमी पार्टी (AAP), जेएमएम और शिवसेना (UBT) सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया। विपक्ष का आरोप है कि जिन सांसदों के विलय पर लोकसभा स्पीकर का फैसला अभी पेंडिंग है, उन्हें किस आधार पर न्योता दिया गया। इसी मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए विपक्षी गुट ने बैठक से सांकेतिक वॉकआउट कर दिया, जिसने सत्र के पहले ही दिन बड़े हंगामे का ट्रेलर दिखा दिया है।संसद के भीतर बदला सीटों का भूगोलइस बार मानसून सत्र में सिर्फ राजनीतिक बहस ही नहीं बदलेगी, बल्कि संसद के भीतर का नजारा भी बदला हुआ दिखेगा। लोकसभा में कुल 48 सांसदों की बैठने की जगह (सीटिंग अरेंजमेंट) में बड़ा बदलाव किया गया है। टीएमसी के 20 बागी सांसद अब एनसीपी (अजीत पवार गुट) के साथ सीटों पर दिखाई देंगे, जबकि शिवसेना के उद्धव गुट से अलग हुए 6 सांसद अब शिंदे गुट के पाले में बैठे नजर आएंगे। इसके अलावा डीएमके के 22 सांसद भी विपक्षी ब्लॉक से अलग बैठेंगे। सीटों का यह नया समीकरण सदन के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच एक नया राजनीतिक संदेश दे रहा है।इन 5 बड़े बिलों को पेश करेगी सरकार24 दिनों तक चलने वाले इस सत्र के दौरान मोदी सरकार पांच नए और बेहद महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रखने जा रही है। सरकारी एजेंडे में शामिल इन बिलों की सूची इस प्रकार है:इनकम-टैक्स (संशोधन) बिल, 2026: मौजूदा अध्यादेश की जगह लेने के लिए।सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026: अध्यादेश को रिप्लेस करने के लिए।जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026महंगाई और बेरोजगारी पर तीखी सियासी भिड़ंत के आसारविशेषज्ञों की मानें तो सदन में इन बिलों के अलावा देश के बुनियादी मुद्दों पर सबसे ज्यादा तकरार होने की आशंका है। विपक्षी खेमा महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और देश के ताजा हालातों को लेकर सरकार को चौतरफा घेरने की रणनीति बना चुका है। बंगाल चुनाव के बाद बदले हुए सियासी हालातों के बीच विपक्ष को इस बात की चिंता है कि सरकार संख्या बल के आधार पर किसी भी बड़े बिल को आसानी से पास न करा ले। यही वजह है कि पहले ही दिन से दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।लोकसभा और राज्यसभा का नया संख्या बलसंसद के दोनों सदनों में इस समय बहुमत और सीटों का गणित कुछ इस प्रकार है, जो यह तय करेगा कि बिल पास कराने में सरकार कितनी सहज रहेगी:सदन (House)कुल मौजूदा सीटेंएनडीए (NDA)इंडिया ब्लॉक (INDIA)अन्य (OTH)बहुमत का आंकड़ालोकसभा54031818339272राज्यसभा2441526428122आंकड़ों के इस खेल और सर्वदलीय बैठक के घटनाक्रम को देखकर यह साफ है कि सत्ता पक्ष के लिए इस सत्र को बिना बाधा के चलाना एक बड़ी परीक्षा होगी, जबकि विपक्ष अपनी एकजुटता से सरकार को बैकफुट पर लाने का हरसंभव प्रयास करेगा।
LIVE: CJP संसद मार्च पर अड़ी, दिल्ली में धारा 163 लागू
Latest News Today Live Updates in Hindi : संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी संसद मार्च पर अड़ी। दिल्ली में धारा 163 लागू। पल पल की जानकारी...
मुंबई/लखनऊ। साल दिसंबर 2026 का आखिरी महीना बॉक्स ऑफिस पर इतिहास के सबसे बड़े और सबसे भीषण महामुकाबले (Biggest Box Office Clash) का गवाह बनने जा रहा है। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष एंटरटेनमेंट रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सिनेमा के तीन सबसे बड़े दिग्गज—पैन-इंडिया सुपरस्टार प्रभास (Prabhas), बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार (Akshay Kumar) और एक्शन स्टार अजय देवगन (Ajay Devgn)—दिसंबर के पहले हफ्ते में अपनी-अपनी मेगा-बजट फिल्मों के साथ आमने-सामने आने के लिए तैयार हैं。 इस त्रिकोणीय टक्कर में फिल्म ट्रेड एनालिस्ट्स के मुताबिक करीब 600 करोड़ रुपये का विशाल बिजनेस दांव पर लगा हुआ है।अज्ञातपर्व का अंत, दिसंबर 3 को होगी प्रभास की 'फौजी' की दहाड़'कल्कि 2898 AD' जैसी ब्लॉकबस्टर देने वाले प्रभास अपनी अगली पीरियड एक्शन-ड्रामा फिल्म 'फौजी' (Fauzi) के साथ पर्दे पर एक बार फिर तहलका मचाने आ रहे हैं:रिलीज डेट लॉक: फिल्म के मेकर्स (मैथरी मूवी मेकर्स) और निर्देशक हनु राघवपुडी ने एक बेहद आक्रामक नया पोस्टर जारी कर आधिकारिक घोषणा कर दी है कि 'फौजी' 3 दिसंबर 2026 (गुरुवार) को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी。क्या है कहानी: यह फिल्म स्वतंत्रता-पूर्व भारत (Pre-Independent India) की पृष्ठभूमि पर आधारित एक काल्पनिक सैन्य गाथा है, जिसमें प्रभास एक ब्रिटिश-भारतीय सैनिक (Soldier) के लुक में बेहद रफ-एंड-टफ अंदाज में नजर आएंगे। इस फिल्म से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर 'इमानवी' अपना डेब्यू कर रही हैं, जबकि मिथुन चक्रवर्ती और अनुपम खेर जैसे दिग्गज भी मुख्य भूमिकाओं में हैं।4 दिसंबर को अक्षय कुमार और अनीस बज्मी की 'कॉमेडी' देगी कड़ी टक्करप्रभास के ठीक एक दिन बाद, यानी 4 दिसंबर 2026 को बॉलीवुड की तरफ से पहला बड़ा वार होगा:अनीस बज्मी का निर्देशन: 'भूल भुलैया 3' की ऐतिहासिक सफलता के बाद निर्देशक अनीस बज्मी एक बार फिर अक्षय कुमार के साथ मिलकर एक बड़ी फैमिली एंटरटेनर एक्शन-कॉमेडी (Action-Comedy Masala) फिल्म लेकर आ रहे हैं。स्टार कास्ट: हालांकि इस फिल्म का शीर्षक अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन इसमें अक्षय के साथ विद्या बालन और राशी खन्ना मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाली हैं。 माना जा रहा है कि यह फिल्म 2025 की एक ब्लॉकबस्टर तेलुगु फिल्म से प्रेरित है, जिसे उत्तर भारत के दर्शक बेहद पसंद करने वाले हैं。अजय देवगन की 'रेंजर' ने मुकाबले को बनाया त्रिकोणीयबॉलीवुड सिर्फ अक्षय कुमार के भरोसे नहीं है, बल्कि उसी दिन यानी 4 दिसंबर को ही अजय देवगन और संजय दत्त की बहुप्रतीक्षित एक्शन-एडवेंचर फिल्म 'रेंजर' (Ranger) भी सिनेमाघरों में उतरने वाली है। 'मिशन मंगल' फेम डायरेक्टर जगन शक्ति के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में तमन्ना भाटिया भी लीड रोल में हैं। हालांकि, ट्रेड गलियारों में अफवाहें हैं कि इस 3-वे क्लैश से बचने के लिए 'रेंजर' की रिलीज को थोड़ा आगे खिसकाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल के लिए दिसंबर का पहला वीकेंड बेहद व्यस्त है。प्रभास को मिलेगा बड़ा 'पैन-इंडिया' एडवांटेज?फिल्म विशेषज्ञों और निर्देशकों का मानना है कि इस भयंकर क्लैश में प्रभास का पलड़ा दोनों बॉलीवुड सितारों के मुकाबले थोड़ा भारी रह सकता है। इसके पीछे मुख्य तर्क यह है कि:नॉर्थ बेल्ट में पकड़: प्रभास की 'फौजी' मूल रूप से एक बड़े बजट की पैन-इंडिया फिल्म है जो उत्तर भारत में सीधे एक शुद्ध हिंदी बेल्ट फिल्म की तरह बड़े स्तर पर रिलीज होगी।साउथ में एकतरफा राज: दूसरी तरफ, अक्षय और अजय देवगन की फिल्मों के डब वर्जन को दक्षिण भारत (तेलुगु और तमिल राज्यों) में वैसी स्वीकार्यता नहीं मिल पाती है, जैसी प्रभास की फिल्मों को मिलती है।खैर, अंततः जीत उसी फिल्म की होगी जिसकी कहानी (Content) में सबसे ज्यादा दम होगा। लेकिन एक बात पूरी तरह तय है कि दिसंबर 2026 का यह वीकेंड सिनेमाघरों के मालिकों और दर्शकों के लिए एक उत्सव जैसा होने वाला है।
कमजोर हो सकती है दुनिया की सबसे असरदार पर्यावरण नीति 'ईटीएस'
यूरोपीय आयोग ने यूरोप के 'एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम' (ईटीएस) को पहले से कमजोर करने का प्रस्ताव रखा है। कार्बन की कीमत तय करने और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटाने की यह व्यवस्था दुनिया के लिए एक मॉडल मानी जाती है।
श्रीडूंगरगढ़ में बोलेरो-बस की भिड़ंत में 3 लोगों की मौत, 8 घायल
बीकानेर। राजस्थान में बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र में रविवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-11 पर बस और बोलेरो की टक्कर से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हाे गए। पुलिस सूत्रों ने बताया हादसा अपराह्न करीब तीन बजे बस बीकानेर से जयपुर जा रही थी,जबकि बोलेरो श्रीडूंगरगढ़ की तरफ से आ […] The post श्रीडूंगरगढ़ में बोलेरो-बस की भिड़ंत में 3 लोगों की मौत, 8 घायल appeared first on Sabguru News .
रोहित शर्मा का शतक, लेकिन भारत निर्णायक मैच और सीरीज 1-2 से हारा
लंदन। सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने अपना आखिरी मैच खेलने की चर्चाओं के बीच शानदार शतक (138) जड़ा, लेकिन भारत को इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक वनडे में रविवार को 27 रन से और तीन मैचों की सीरीज में 1-2 से हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बेन डकेट […] The post रोहित शर्मा का शतक, लेकिन भारत निर्णायक मैच और सीरीज 1-2 से हारा appeared first on Sabguru News .
अलवर में साइबर ठगों को खाते उपलब्ध कराने वाले 6 आरोपी अरेस्ट
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले में पुलिस ने साइबर ठगों को कमीशन पर बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस मामले में चार मामले दर्ज करके नौ एंड्रॉयड मोबाइल, 17 सिम कार्ड और छह एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। मामले की जांच जारी है। पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी […] The post अलवर में साइबर ठगों को खाते उपलब्ध कराने वाले 6 आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
Top News 20 July: संसद का मानसून सत्र, CJP का संसद मार्च, स्पेन बना फीफा वर्ल्ड चैंपियन
Top News 20 July : संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी का संसद मार्च आज, दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति। ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक में ईरान को भी शामिल करने की मांग की है। स्पेन ने 16 ...
बच्चों के यौन शोषण-दुर्व्यवहार से जुड़ा मटीरियल शेयर करने के आरोप में 10 अरेस्ट
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली पुलिस ने बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ा मटीरियल शेयर करने के आरोप में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण से बचाने और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से एक बड़ा अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में उन लोगों […] The post बच्चों के यौन शोषण-दुर्व्यवहार से जुड़ा मटीरियल शेयर करने के आरोप में 10 अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
दीपक भार्गव बने श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर समिति के सचिव, भव्य स्वागत
अजमेर। श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर प्रबंधक समिति, शास्त्री नगर की कार्यकारिणी की बैठक रविवार को अध्यक्ष डॉ. एस.डी. मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से शास्त्री नगर निवासी समाजसेवी दीपक भार्गव को मंदिर समिति का सचिव नियुक्त किया गया। यह पद लंबे समय से रिक्त था, जिस पर नियुक्ति होने से समिति […] The post दीपक भार्गव बने श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर समिति के सचिव, भव्य स्वागत appeared first on Sabguru News .
स्पेन ने अर्जेंटीना के 1-0 से हराकर दूसरी बार फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया। टीम ने न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। स्पेन के लिए एक्स्ट्रा टाइम में फेरन टोरेस ने गोल किया। स्पेन ...
केशव प्रसाद मौर्य ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के युवक-युवतियों एवं कृषकों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अधिकाधिक प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र रोजगार सृजन, किसानों की आय में वृद्धि तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन पूरी गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित किया जाए।उपमुख्यमंत्री श्री मौर्य के निर्देश कि खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थापित राजकीय खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केन्द्रों एवं सामुदायिक फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्रों के माध्यम से युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने निर्देशित किया कि निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम समय से पूर्ण कराए जाएं तथा इच्छुक नवयुवकों, नवयुवतियों एवं किसानों तक इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचाई जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।श्री मौर्य जी ने अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिकता तक सीमित न रहें, बल्कि प्रशिक्षणार्थियों को व्यावहारिक एवं आधुनिक तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराया जाए। प्रशिक्षण अवधि के दौरान नियमित निरीक्षण एवं सतत निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनी रहे। साथ ही प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले युवाओं को स्वरोजगार, उद्यम स्थापना एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेशवासियों की सहूलियत के लिए योजनाएं बनने से लेकर लागू होने तक की कार्यवाही तेजी से पूरी हो रही है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। मार्च ...
भाजपा परीक्षा पेपर लीक नेटवर्क को संरक्षण दे रही है: कर्नाटक कांग्रेस
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर देश भर में कथित परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार पर लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में स्वतंत्र राष्ट्रीय जांच की मांग की।
भारत के विकास के लिए धार्मिक सद्भाव महत्वपूर्ण: मनोज सिन्हा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि धार्मिक सद्भाव वह आधारशिला है जिस पर एक मजबूत समाज, एक मजबूत जम्मू-कश्मीर और एक विकसित भारत का निर्माण हो सकता है।
क्या अनशन खत्म करेंगे सोनम वांगचुक, अस्पताल में ही चलेगा इलाज, अनशन को लेकर क्या बोली पत्नी?
Sonam Wangchuk News : पिछले 22 दिनों से भूख हड़ताल पर डटे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन कल यानी सोमवार को खत्म हो सकता है। खबरों के अनुसार, सोनम की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने कहा कि यदि राजनीतिक दल उनसे मिलकर मानसून सत्र में शिक्षा में ...
मुंबई/लखनऊ। 80 और 90 के दशक में अपनी बेमिसाल खूबसूरती, दमदार अदाकारी और लाजवाब क्लासिकल डांस के दम पर बॉलीवुड पर राज करने वाली दिग्गज अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि (Meenakshi Seshadri) एक बार फिर लाइमलाइट में आ गई हैं। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष एंटरटेनमेंट रिपोर्ट के मुताबिक, 62 साल की उम्र में भी मीनाक्षी की फुर्ती और डांस के प्रति उनका जुनून बिल्कुल पहले जैसा ही बरकरार है। अभिनेत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक बेहद शानदार वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह अपनी 37 साल पुरानी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'नाचे नागिन गली गली' (1989) के आइकॉनिक नागिन लुक और डांस स्टेप्स को रीक्रिएट करती नजर आ रही हैं। इंटरनेट पर आते ही यह वीडियो आग की तरह फैल गया है और फैंस उनकी फिटनेस और कातिलाना मूव्स की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।37 साल बाद वही कातिलाना अंदाज, सफेद लिबास में ढाया कहरवीडियो में मीनाक्षी शेषाद्रि ने अपने पुराने दिनों की यादें ताजा करने के लिए खास तैयारी की थी, जिसने दर्शकों को सीधे 1989 के दौर में पहुंचा दिया:सफेद नागिन लुक: मीनाक्षी ने फिल्म के मूल गाने की तरह ही एक खूबसूरत सफेद पोशाक (White Outfit) पहनी हुई थी और बालों में वही पुरानी नागिन स्टाइल की ज्वेलरी कैरी की थी।आइकॉनिक धुन पर थिरके कदम: जैसे ही बैकग्राउंड में 'नाचे नागिन गली गली' का सदाबहार संगीत बजा, मीनाक्षी ने अपने पारंपरिक हाव-भाव और सधे हुए क्लासिकल डांस मूव्स (Classical Dance Moves) से समां बांध दिया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके एक्सप्रेशंस और आंखों का जादू बिल्कुल वैसा ही दिखा, जिसने दशकों पहले करोड़ों सिनेप्रेमियों को दीवाना बनाया था।'दामिनी' की वापसी देख भावुक हुए फैंस, सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़मीनाक्षी शेषाद्रि पिछले काफी समय से फिल्मी पर्दे से दूर हैं, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए वह अपने फैंस से लगातार जुड़ी रहती हैं। उनके इस डांस वीडियो ने नेटिजन्स (Netizens) को पुरानी यादों (Nostalgia) से भर दिया है:उम्र बस एक नंबर है: फैंस लगातार कमेंट कर रहे हैं कि मीनाक्षी ने यह साबित कर दिया है कि उम्र बढ़ने से हुनर कम नहीं होता। एक यूजर ने लिखा, आप आज की अभिनेत्रियों से कहीं बेहतर और ग्रेसफुल हैं।दामिनी और घातक की यादें: कई प्रशंसकों ने उनकी सुपरहिट फिल्मों जैसे 'दामिनी' (Damini), 'घातक' (Ghatak) और 'हीरो' (Hero) के डायलॉग्स लिखकर कमेंट सेक्शन को भर दिया है। लोग उनकी इस बात के लिए सराहना कर रहे हैं कि उन्होंने खुद को इतना फिट और ऊर्जावान बनाए रखा है।फिल्मी गलियारों में चर्चा: क्या जल्द होगा कमबैक?आपको बता दें कि मीनाक्षी शेषाद्रि एक प्रशिक्षित भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और ओडिसी डांसर हैं। शादी के बाद वे अमेरिका (टेक्सास) शिफ्ट हो गई थीं, जहां वे अपना एक सफल डांस स्कूल चलाती थीं। हाल ही में वे भारत वापस लौटी हैं और कई रियलिटी शोज़ में बतौर गेस्ट नजर आ चुकी हैं। सिनेमा जगत और गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि मीनाक्षी जल्द ही किसी बड़े ओटीटी प्रोजेक्ट या फिल्म के जरिए बॉलीवुड में अपना ऑफिशियल कमबैक (Bollywood Comeback) कर सकती हैं। उनका यह ताजा डांस वीडियो मेकर्स और दर्शकों दोनों के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि बॉलीवुड की यह 'दामिनी' आज भी बड़े पर्दे पर तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
गरुड़ पुराण में बासी भोजन (Stale Food) को 'प्रेत भोजन' (Pret Bhojan) की संज्ञा दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति नियमित रूप से बासी या जूठा भोजन ग्रहण करता है, उसके घर से सुख-समृद्धि हमेशा के लिए चली जाती है। सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद भी बासी भोजन को सेहत के लिए एक धीमा जहर मानते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इसके पीछे का धार्मिक रहस्य और वैज्ञानिक कारण क्या है।गरुड़ पुराण में क्यों कहा गया इसे 'प्रेत भोजन'?सनातन धर्म में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि ऊर्जा और संस्कारों का माध्यम माना गया है। गरुड़ पुराण में इसके तीन मुख्य कारण बताए गए हैं:नकारात्मक शक्तियों का आकर्षण: गरुड़ पुराण के अनुसार, जब भोजन पकने के बाद बहुत अधिक समय (जैसे रात भर) तक रखा रहता है, तो उसकी सात्विक ऊर्जा पूरी तरह समाप्त हो जाती है। ऐसे भोजन की तरफ प्रेत आत्माएं और नकारात्मक ऊर्जाएं (Negative Energies) आकर्षित होने लगती हैं। यही वजह है कि इसे 'प्रेत भोजन' कहा जाता है।दरिद्रता का वास: मान्यता है कि जो परिवार या व्यक्ति नियमित रूप से बासी भोजन खाता है, उस पर माता लक्ष्मी की कृपा समाप्त हो जाती है। घर में आर्थिक तंगी, क्लेश और अकाल मृत्यु का भय मंडराने लगता है।बौद्धिक क्षमता का ह्रास: ऐसा भोजन करने से मनुष्य की बुद्धि तामसिक (अज्ञान और आलस से भरी) हो जाती है। व्यक्ति का मन अच्छे कामों में नहीं लगता और वह हमेशा चिड़चिड़ा रहता है।आयुर्वेद और विज्ञान का दृष्टिकोण: बीमारियों का घर है बासी खानाधार्मिक मान्यताओं से अलग, अगर हम विज्ञान और आयुर्वेद की कसौटी पर देखें, तो पका हुआ भोजन 3 से 4 घंटे के भीतर अपनी पौष्टिकता खोने लगता है:तामसिक भोजन (Ayurveda View): आयुर्वेद के अनुसार, 8 घंटे से ज्यादा पुराना भोजन 'तामसिक' हो जाता है। यह शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगाड़ देता है, जिससे आलस, सुस्ती और डिप्रेशन बढ़ता है।बैक्टीरिया का हमला (Scientific Fact): विज्ञान कहता है कि भोजन पकने के बाद यदि उसे लंबे समय तक रखा जाए, तो उसमें बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं। फ्रिज में रखने से बैक्टीरिया के बढ़ने की गति केवल धीमी होती है, वे पूरी तरह नष्ट नहीं होते।पेट की बीमारियां: बासी भोजन को बार-बार गर्म करके खाने से फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning), एसिडिटी, कब्ज और पेट में भयंकर इन्फेक्शन का खतरा रहता है।सुखी जीवन के लिए गरुड़ पुराण की अहम सलाहशास्त्रों में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि हमेशा ताजा, गर्म और सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए (जैसा कि ऊपर चित्र में दिखाया गया है)। भोजन करने से पहले भगवान को भोग लगाना और अग्नि ग्रास (पहला निवाला भगवान या गाय के लिए निकालना) निकालना अत्यंत शुभ माना जाता है। भोजन बनाने वाले व्यक्ति के मन के भाव भी शुद्ध होने चाहिए, क्योंकि 'जैसा अन्न, वैसा मन' की कहावत पूरी तरह सच है। यदि आप भी अपने जीवन में सफलता, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति चाहते हैं, तो गरुड़ पुराण के इन नियमों को अपनाएं और बासी भोजन करने की आदत को आज ही अलविदा कहें।
लखनऊ। सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है, जिसमें सोमवार का दिन भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना के लिए सर्वोपरि माना गया है। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष आध्यात्मिक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्योतिष शास्त्र में सोमवार के दिन किए जाने वाले कुछ बेहद सरल और अचूक उपायों (Somwar ke Upay) का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि यदि कोई भक्त सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ सोमवार को शिवलिंग (Shivling) पर कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करता है, तो महादेव प्रसन्न होकर उसके जीवन के सभी संकटों, राहु-केतु के दोषों और आर्थिक बाधाओं को पल भर में दूर कर देते हैं। आइए जानते हैं कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के लिए सोमवार के दिन शिवलिंग पर कौन सी चीजें मुख्य रूप से चढ़ानी चाहिए।1. जल और कच्चा दूध: मानसिक शांति और चंद्र दोष से मुक्तियदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में है या आप हमेशा मानसिक तनाव और अज्ञात भय से घिरे रहते हैं, तो यह उपाय आपके लिए अमृत समान है:अक्षत मिश्रित जल: सोमवार की सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में साफ जल लें और उसमें थोड़े से साबुत चावल (अक्षत) मिलाकर शिवलिंग पर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए चढ़ाएं।कच्चा दूध: जल के बाद शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध अर्पित करें। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है।2. बेलपत्र और शहद: हर मनोकामना पूर्ति और आरोग्यता का वरदानभोलेनाथ को बेलपत्र (Belpatra) अत्यंत प्रिय हैं और इसके बिना शिव जी की पूजा अधूरी मानी जाती है:तीन पत्तियों वाला बेलपत्र: सोमवार को शिवलिंग पर कम से कम 3 या 5 बेलपत्र चढ़ाएं। ध्यान रहे कि बेलपत्र कहीं से भी कटे-फटे या टूटे हुए न हों।शहद का लेप: यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार है या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, तो सोमवार को शिवलिंग पर शहद (Honey) चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। शहद चढ़ाने से आरोग्यता का आशीर्वाद मिलता है और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं।3. चंदन और अक्षत: आर्थिक तंगी होगी दूर, चमकेगा भाग्यधन लाभ और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए सोमवार के दिन किया गया यह उपाय बेहद अचूक माना जाता है:सफेद चंदन का तिलक: शिवलिंग पर हमेशा सफेद चंदन का तिलक लगाएं। शिव जी को कभी भी रोली या सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता है। चंदन लगाने से जीवन में स्थिरता आती है।साबुत चावल (अक्षत): चंदन लगाने के बाद शिवलिंग पर अक्षत (बिना टूटे हुए चावल) अर्पित करें। शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर अक्षत चढ़ाने से दरिद्रता का नाश होता है और रुका हुआ धन वापस मिलने के योग बनते हैं।धार्मिक मान्यता और ध्यान रखने योग्य बातेंज्योतिषविदों का कहना है कि भगवान शिव बहुत ही भोले हैं और वे केवल एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं, बशर्ते आपकी भक्ति निष्कपट हो। सोमवार की पूजा के दौरान कभी भी काले रंग के कपड़े न पहनें, हमेशा साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। शिवलिंग की परिक्रमा करते समय ध्यान रखें कि कभी भी पूरी परिक्रमा न करें, जहाँ से जल बाहर निकलता है (जलाधारी), उसे कभी नहीं लांघना चाहिए, हमेशा आधी परिक्रमा (चंद्र परिक्रमा) ही करें। सोमवार के इन नियमों और उपायों का पालन करने से भोलेनाथ की कृपा आप पर और आपके पूरे परिवार पर हमेशा बनी रहती है।
लखनऊ। किसी भी रिश्ते की बुनियाद आपसी भरोसे, सम्मान और मीठी बातचीत पर टिकी होती है। लेकिन कई बार हम अनजाने में या अत्यधिक उत्सुकता (Curiosity) के वश में आकर अपनों से कुछ ऐसी बातें पूछ बैठते हैं, जो उनके दिल को गहरी ठेस पहुँचाती हैं। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे समाज में बातचीत के दौरान मर्यादा और प्राइवेसी (Privacy Boundaries) का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है।मनोवैज्ञानिकों और संबंध विशेषज्ञों का कहना है कि 4 ऐसे संवेदनशील सवाल हैं, जिन्हें यदि आप किसी दोस्त, रिश्तेदार या पार्टनर से पूछते हैं, तो वे आपके हंसते-खेलते रिश्ते को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकते हैं। इन सवालों को पूछने से न केवल सामने वाला व्यक्ति असहज महसूस करता है, बल्कि वह आपसे दूरी भी बनाने लगता है। आइए जानते हैं कि बातचीत के दौरान आपको किन बातों को पूछने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।1. 'अभी तक शादी क्यों नहीं की?' या 'बच्चे कब हो रहे हैं?'यह हमारे समाज में पूछा जाने वाला सबसे आम लेकिन सबसे ज्यादा मानसिक तनाव देने वाला सवाल है:निजी फैसलों पर हमला: शादी करना या न करना, या माता-पिता बनना किसी का भी नितांत व्यक्तिगत फैसला (Personal Choice) होता है।गहरे दर्द की वजह: हो सकता है कि सामने वाला व्यक्ति किसी ब्रेकअप से गुजर रहा हो, या वह किसी मेडिकल/फर्टिलिटी समस्या का सामना कर रहा हो। ऐसे में आपका यह सवाल उनके पुराने जख्मों को कुरेद देता है और वे आपके सामने आने से कतराने लगते हैं।2. 'आपकी सैलरी या कमाई कितनी है?'पैसों से जुड़ा यह सवाल अक्सर लोगों को असहज और हीन भावना (Inferiority Complex) का शिकार बना देता है:जज किए जाने का डर: जब आप किसी से उसकी तनख्वाह (Salary Package) पूछते हैं, तो उसे लगता है कि आप उसकी योग्यता का आकलन केवल पैसों से कर रहे हैं।रिश्ते में कड़वाहट: यदि सामने वाले की कमाई कम है, तो वह शर्मिंदगी महसूस करेगा और यदि ज्यादा है, तो उसे लगेगा कि आप किसी स्वार्थ या जलन की भावना से यह पूछ रहे हैं। पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों ही रिश्तों में इस सवाल को 'रेड फ्लैग' माना जाता है।3. 'तुम्हारा वजन इतना ज्यादा (या कम) क्यों हो गया है?'किसी के शारीरिक रंग-रूप या बॉडी शेमिंग (Body Shaming) से जुड़े सवाल सीधे इंसान के आत्मसम्मान पर चोट करते हैं:मेंटल हेल्थ पर असर: 'तुम इतने मोटे क्यों हो गए हो?' या 'कुछ खाते-पीते नहीं हो क्या?' जैसे सवाल किसी को भी गहरे डिप्रेशन में डाल सकते हैं।अदृश्य बीमारियां: वजन का बढ़ना या घटना अक्सर थायराइड, पीसीओडी या भारी मानसिक तनाव (Stress) के कारण हो सकता है। बिना पूरी बात जाने किसी के लुक पर कमेंट करना आपके रिश्ते को तुरंत खत्म कर सकता है।4. 'तुम्हारे पास्ट (अतीत) में क्या हुआ था?'अतीत के पन्नों को जबरन पलटने की कोशिश करना किसी भी वर्तमान रिश्ते के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है:सुरक्षा की भावना को खतरा: हर इंसान का एक अतीत होता है, जिसे शायद वह भुलाकर आगे बढ़ चुका होता है।जबरदस्ती न करें: यदि आपका पार्टनर या दोस्त खुद से अपनी कोई पुरानी बात साझा नहीं करना चाहता, तो बार-बार उनके पुराने रिश्तों या गलतियों के बारे में पूछना उनके भीतर असुरक्षा की भावना पैदा करता है।विशेषज्ञों की सलाह है कि एक हेल्दी रिलेशनशिप (Healthy Relationship) बनाए रखने के लिए सामने वाले की व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करें। बातचीत को हमेशा सकारात्मक और सपोर्टिव रखें, ताकि लोग आपके साथ सुरक्षित और खुश महसूस करें।
नई दिल्ली/सिलिकॉन वैली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में आया तकनीकी उछाल केवल सॉफ्टवेयर और कोडिंग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कुशल श्रमिकों की तक़दीर भी पूरी तरह बदल दी है। ज़ी न्यूज़ (Zee News) की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, जहाँ अमेज़न, मेटा, ओरेकल जैसी दिग्गज टेक कंपनियाँ अपने हज़ारों वाइट-कॉलर (White-Collar) आईटी इंजीनियरों की छंटनी (Layoffs) कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर एक नया 'लेबर फ्लिप' (Labour Flip) देखने को मिल रहा है। एआई मॉडल को चलाने के लिए बनाए जा रहे विशाल AI डेटा सेंटर्स (AI Data Centers) के कारण इलेक्ट्रिशियन (Electricians), वेल्डर्स और एचवीएसी (HVAC) टेक्नीशियनों की मांग में ऐतिहासिक उछाल आया है। आलम यह है कि युवा और कुशल इलेक्ट्रिशियन अब सालाना करोड़ों रुपये का बंपर पैकेज हासिल कर रहे हैं, जिसने पारंपरिक कॉर्पोरेट नौकरियों को भी पीछे छोड़ दिया है।सालाना 2.7 करोड़ रुपये तक की सैलरी, बिना किसी स्टूडेंट लोन का बोझ'डर्टी जॉब्स' टीवी शो के प्रसिद्ध होस्ट और उद्योग विशेषज्ञ माइक रोवे (Mike Rowe) द्वारा एक पोडकास्ट में किए गए खुलासे के बाद यह मामला पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है:प्लेनो, टेक्सास का चौंकाने वाला वाकया: माइक रोवे ने बताया कि टेक्सास के एक डेटा सेंटर में काम कर रहे कई ऐसे इलेक्ट्रिशियन (Gen Z Electricians) मिले जिनकी उम्र 30 साल से कम थी। वे अपनी कुशलता और भारी मांग के दम पर सालाना $240,000 (लगभग ₹2.3 करोड़) से $280,000 (लगभग ₹2.7 करोड़) तक की मोटी कमाई कर रहे हैं।कर्ज मुक्त और हाई डिमांड: इन युवा टेक्नीशियनों के सिर पर न तो महंगे अमेरिकी विश्वविद्यालयों के स्टूडेंट लोन (Student Loans) का कोई बोझ है और न ही मंदी का कोई डर। एआई कंपनियों के बीच इनकी मांग इतनी ज़्यादा है कि पिछले 18 महीनों में उन्हें तीन-तीन बार दूसरी कंपनियों द्वारा भारी वेतन वृद्धि देकर 'पोच' (नौकरी से खींचना) किया जा चुका है।क्यों अचानक बढ़ गई है इलेक्ट्रिशियनों की इतनी भारी मांग?एआई का पूरा इकोसिस्टम केवल क्लाउड या कोडिंग पर नहीं, बल्कि हज़ारों शक्तिशाली जीपीयू (GPUs) और विशालकाय फिजिकल सर्वर फॉर्म्स पर काम करता है।बिजली और कूलिंग की भारी खपत: एआई डेटा सेंटर्स को चौबीसों घंटे चालू रखने के लिए भारी मात्रा में हाई-वोल्टेज बिजली और कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। ट्रांसफार्मर अपग्रेड करने, ग्रिड इंटरकनेक्शन और जटिल वायरिंग के लिए केवल अनुभवी और प्रमाणित इलेक्ट्रिशियन ही काम आ सकते हैं, जिसे कोई एआई बॉट रिप्लेस नहीं कर सकता।कुशल श्रमिकों का भारी टोटा: वैश्विक स्तर पर 71 प्रतिशत से अधिक तकनीकी बाज़ारों में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुशल श्रमिकों की भारी कमी (Labor Shortage) देखी जा रही है। डेलॉयट (Deloitte) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में डेटा सेंटर जॉब पोस्टिंग्स में 64% और इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियनों की मांग में 180% से अधिक का उछाल आया है।भारत में भी शुरू हो चुका है यह 'ब्लू-कॉलर गोल्ड रश'वैश्विक स्तर के साथ-साथ भारत में भी यह ट्रेंड तेज़ी से पैर पसार रहा है। गूगल (Google) द्वारा विशाखापत्तनम में $15 बिलियन का एआई हब बनाने और मेटा (Meta) द्वारा रिलायंस जियो के साथ साझेदारी में घरेलू डेटा सेंटर्स स्थापित करने की घोषणा के बाद देश में भी यह क्रांति आ चुकी है।टैलेंट फर्म रैंडस्टैड (Randstad) के एक हालिया विश्लेषण के मुताबिक, भारत में पिछले चार वर्षों के भीतर कुशल इलेक्ट्रिशियनों की मांग में 242% और रोबोटिक्स टेक्नीशियनों की मांग में 500% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत में ब्लू-कॉलर श्रमिकों की मजदूरी सालाना 5.7% की दर से बढ़ रही है, जबकि एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर (ऑफिस डेस्क जॉब) की सैलरी महज 4% की रफ्तार से बढ़ रही है। इस अभूतपूर्व बदलाव ने यह साबित कर दिया है कि एआई के इस दौर में भविष्य केवल सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का ही नहीं, बल्कि उन हुनरमंदों का भी है जो इस विशालकाय डिजिटल साम्राज्य के फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपने हाथों से खड़ा करते हैं।
जम्मू/लखनऊ। मानसून के रौद्र रूप के कारण पहाड़ी राज्य जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के सीमावर्ती जिलों में इस वक्त जलप्रलय जैसे हालात बने हुए हैं। मनीकंट्रोल हिंदी (Moneycontrol Hindi) की एक विशेष ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू संभाग के दो जुड़वां सीमावर्ती जिलों पुंछ (Poonch) और राजौरी (Rajouri) में रात भर हुई मूसलाधार बारिश और बादल फटने के बाद आई अचानक बाढ़ (Flash Floods) और भीषण भूस्खलन (Landslides) ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है और कई अन्य लापता बताए जा रहे हैं।घाटी में बिगड़ते हालातों और मची तबाही की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपना दिल्ली दौरा बीच में ही रद्द कर दिया और रविवार दोपहर तुरंत जम्मू लौट आए। उन्होंने जम्मू के सिविल सेक्रेटेरिएट में एक हाई-लेवल इमरजेंसी मीटिंग (High-Level Review Meeting) की अध्यक्षता करते हुए पूरे राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।पुंछ के सुरनकोट में सबसे ज्यादा तबाही, मलबे में दबे परिवारप्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मानसूनी आफत का सबसे क्रूर रूप पुंछ जिले के सुरनकोट (Surankote) तहसील में देखने को मिला है:एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत: सुरनकोट के लोअर मर्राह इलाके में एक बड़ा भूस्खलन सीधे रिहायशी मकान पर आ गिरा, जिसकी चपेट में आने से एक ही परिवार के 6 सदस्यों समेत 9 लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई।नदियों का रौद्र रूप: राजौरी शहर में भी उफनती नदी का पानी रिहायशी कॉलोनियों (बेला कॉलोनी) और न्यू बस स्टैंड क्षेत्र में घुस गया, जिससे वहां खड़े करीब 200 से अधिक वाहन ताश के पत्तों की तरह पानी में बह गए या मलबे में दब गए.'जनहानि रोकना पहली प्राथमिकता' — दिल्ली से लौटकर एक्शन में CM उमर अब्दुल्लामुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक पूर्व निर्धारित राजनीतिक प्रदर्शन (Statehood Protest) के सिलसिले में दिल्ली में थे, लेकिन राज्य के नागरिकों पर आए इस संकट को देखते हुए वे तुरंत वापस लौटे. जम्मू पहुंचते ही उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा:सुबह से ही मैं राजौरी शहर और आसपास के इलाकों में हुई अत्यधिक बारिश से उत्पन्न स्थिति पर नजर रख रहा हूं। स्थानीय विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों से मेरा सीधा संपर्क बना हुआ है। इस समय पूरी सरकार और प्रशासन की सबसे पहली प्राथमिकता बहुमूल्य मानव जीवन को सुरक्षित बचाना (Safeguard Precious Lives) है। जिन लोगों की संपत्तियों और मकानों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें सरकार तुरंत हर संभव वित्तीय सहायता और पुनर्वास सामग्री उपलब्ध कराएगी।मुख्यमंत्री ने पुलिस, सेना, स्थानीय वालंटियर्स और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) को युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operations) चलाने और लापता लोगों की तलाश तेज करने के निर्देश दिए हैं.एलजी मनोज सिन्हा ने जताया दुख, गृह मंत्री अमित शाह ने दिया मदद का भरोसाइस भीषण त्रासदी पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एलजी मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर बात की और केंद्र सरकार की ओर से एनडीआरएफ (NDRF) की अतिरिक्त टीमें भेजने और हर संभव राहत व पुनर्वास सहायता (Central Assistance) देने का पूरा भरोसा दिलाया है. मौसम विभाग (IMD) ने पुंछ, राजौरी और रियासी जिलों के लिए अभी भी ऑरेंज अलर्ट जारी रखा है और चिनाब नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय इलाकों को पूरी तरह खाली करा लिया गया है.
नई दिल्ली/लखनऊ। देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत अब कर्मचारियों की नई सैलरी और पेंशन की रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है।मनीकंट्रोल हिंदी (Moneycontrol Hindi) की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए वेतन आयोग में कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी का पूरा दारोमदार 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) पर निर्भर करेगा। यह एक ऐसा गुणांक (Multiplier) होता है, जिससे कर्मचारियों की वर्तमान बेसिक सैलरी को गुणा करके नई रिवाइज्ड बेसिक सैलरी (Revised Basic Pay) तय की जाती है। कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों के बीच इसके संभावित आंकड़ों को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं।क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और कैसे बदलती है सैलरी?साधारण शब्दों में समझें तो जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी को एक निश्चित नंबर से गुणा किया जाता है, जिसे फिटमेंट फैक्टर कहते हैं।7वें वेतन आयोग का गणित: गौरतलब है कि साल 2016 में जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ था, तब सरकार ने 2.57x का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। इसके कारण केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर सीधे ₹18,000 प्रति माह हो गई थी।8वें वेतन आयोग में क्या हैं उम्मीदें: वर्तमान में चल रही चर्चाओं और विशेषज्ञ अनुमानों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर का दायरा 1.92x से लेकर 2.86x के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, विभिन्न कर्मचारी यूनियनों (Staff Unions) की मांग है कि महंगाई के बढ़ते स्तर को देखते हुए इसे न्यूनतम 3.00x या 3.25x तक रखा जाए।सैलरी कैलकुलेशन का फॉर्मूला (Expected Scenarios)अगर सरकार अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी देती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी पर इसका क्या असर पड़ेगा, इसे नीचे दिए गए गणित से समझा जा सकता है:यदि 2.57x फिटमेंट फैक्टर रहता है (7वें CPC के समान):कैलकुलेशन: ₹18,000 (वर्तमान न्यूनतम बेसिक) 2.57संभावित नई बेसिक सैलरी: ₹46,260यदि 2.28x फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिलती है:कैलकुलेशन: ₹18,000 2.28संभावित नई बेसिक सैलरी: ₹41,040यदि 3.00x फिटमेंट फैक्टर (कर्मचारियों की मांग) को अपनाया जाता है:कैलकुलेशन: ₹18,000 3.00संभावित नई बेसिक सैलरी: ₹54,000महत्वपूर्ण नोट: नया फिटमेंट फैक्टर लागू होते ही कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (Dearness Allowance - DA), जो कि 7वें वेतन आयोग के तहत 60% के पार चल रहा है, वह नए बेसिक पे के साथ मर्ज होकर शून्य (0%) पर रीसेट कर दिया जाएगा। इसके बाद भविष्य के डीए की गणना नई बेसिक सैलरी के आधार पर की जाएगी।कब तक लागू होगा नया नियम और किसे मिलेगा फायदा?8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सैद्धांतिक रूप से 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा रही हैं। हालांकि, वेतन आयोग के गठन और उसकी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा (18 महीने) को देखते हुए वास्तविक रूप से संशोधित वेतनमान का भुगतान और बढ़ा हुआ पैसा साल 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में मिलने की उम्मीद है।प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया है कि भले ही रिपोर्ट आने में थोड़ी देरी हो, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2026 से ही पूरा एरियर (Arrears) दिया जाएगा。 इस बड़े फैसले का सीधा लाभ देश के लगभग 48.62 लाख से अधिक सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों और 67.85 लाख से ज्यादा पेंशनर्स को मिलेगा, जिससे न केवल उनका रहन-सहन बेहतर होगा बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जैसी अन्य सुविधाएं भी इसी अनुपात में बढ़ जाएंगी।
लखनऊ में आज केशव प्रसाद मौर्य ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के युवक-युवतियों एवं कृषकों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अधिकाधिक प्रशिक्षित कर उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र रोजगार सृजन, किसानों की आय में वृद्धि तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन पूरी गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित किया जाए।उपमुख्यमंत्री श्री मौर्य के निर्देश कि खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थापित राजकीय खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केन्द्रों एवं सामुदायिक फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्रों के माध्यम से युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने निर्देशित किया कि निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम समय से पूर्ण कराए जाएं तथा इच्छुक नवयुवकों, नवयुवतियों एवं किसानों तक इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी व्यापक स्तर पर पहुंचाई जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।श्री मौर्य जी ने अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिकता तक सीमित न रहें, बल्कि प्रशिक्षणार्थियों को व्यावहारिक एवं आधुनिक तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराया जाए। प्रशिक्षण अवधि के दौरान नियमित निरीक्षण एवं सतत निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनी रहे। साथ ही प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले युवाओं को स्वरोजगार, उद्यम स्थापना एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।
मानसून सत्र से पहले लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक, कई अहम विधेयकों पर चर्चा का समय तय
मानसून सत्र से पहले लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में FCRA, आयकर, MSME और राष्ट्रीय सम्मान संशोधन समेत कई विधेयकों पर चर्चा का समय तय किया गया। जानिए पूरा एजेंडा।
टीएमसी के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय के बाद लोकसभा में अलग सीटें आवंटित की गईं। पार्टी ने एनडीए के साथ रहने का ऐलान किया और मॉनसून सत्र की रणनीति तय की।
लखनऊ। हमारे दैनिक आहार में नमक (Salt) एक ऐसा अनिवार्य हिस्सा है, जिसके बिना हर लजीज व्यंजन का स्वाद अधूरा और फीका लगता है। यह न केवल भोजन का जायका बढ़ाता है, बल्कि इसमें मौजूद सोडियम शरीर के लिक्विड बैलेंस को बनाए रखने में भी मदद करता है। हालांकि, स्वाद के चक्कर में आज की आधुनिक जीवनशैली में लोग अनजाने में जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं। टीवी9 हिंदी की एक विशेष हेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक नमक का सेवन शरीर के लिए एक 'साइलेंट किलर' (Silent Killer) की तरह काम करता है, जो धीरे-धीरे अंगों को खोखला कर देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Health Experts) ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नमक की मात्रा पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह कई जानलेवा बीमारियों को न्योता दे सकता है।ज्यादा नमक खाने से शरीर को होते हैं ये 4 गंभीर नुकसान:1. हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां (Hypertension & Heart Attack): नमक में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब हम ज्यादा नमक खाते हैं, तो शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ जाता है, जिसे बैलेंस करने के लिए रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) में पानी का दबाव बढ़ता है। इसके कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा होती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक (Heart Attack) और स्ट्रोक का मुख्य कारण बनती है।2. किडनी पर पड़ता है अत्यधिक दबाव (Kidney Damage): हमारे शरीर से अतिरिक्त सोडियम और गंदगी को फिल्टर करने का काम किडनियां करती हैं। जब आहार में नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, तो किडनियों को उसे बाहर निकालने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक ऐसा होने से किडनी की कार्यक्षमता घटने लगती है और किडनी स्टोन या किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।3. शरीर में सूजन और वॉटर रिटेंशन (Bloating & Water Retention): अत्यधिक सोडियम के कारण शरीर के ऊतकों (Tissues) में पानी जमा होने लगता है। इसकी वजह से हाथ, पैर, टखनों और चेहरे पर असामान्य सूजन दिखाई देने लगती है, जिसे मेडिकल भाषा में 'वॉटर रिटेंशन' या ब्लोटिंग कहा जाता है।4. हड्डियों का कमजोर होना (Osteoporosis): ज्यादा नमक खाने से पेशाब के जरिए शरीर का कैल्शियम तेजी से बाहर निकलने लगता है। शरीर में कैल्शियम की कमी होने के कारण हड्डियां अंदर से खोखली और कमजोर होने लगती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) और जोड़ों के दर्द की समस्या समय से पहले ही घेर लेती है।एक्सपर्ट गाइडेंस: 1 दिन में कितना नमक खाना है पूरी तरह सुरक्षित?विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और आहार विशेषज्ञों के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को पूरे दिन में 5 ग्राम से कम (लगभग एक छोटा चम्मच) नमक का ही सेवन करना चाहिए। इसमें वह नमक भी शामिल है जो सब्जियों, दालों या सलाद में ऊपर से डाला जाता है।दुर्भाग्य से, भारतीय खानपान में औसतन प्रति व्यक्ति रोज 10 से 12 ग्राम नमक का सेवन कर रहा है, जो तय सीमा से दोगुने से भी अधिक है।डाइट में नमक की मात्रा कम करने के 4 आसान व्यावहारिक उपाय:ऊपर से नमक डालना बंद करें: डाइनिंग टेबल पर नमकदानी (Salt Shaker) रखना तुरंत बंद कर दें। सलाद, रायता या फलों के ऊपर कच्चा नमक छिड़क कर खाने की आदत पूरी तरह छोड़ दें।पैकेटबंद फूड्स से बनाएं दूरी: बाजार में मिलने वाले चिप्स, नमकीन, सॉस, डिब्बाबंद सूप, अचार और पापड़ में प्रेषण (Preservation) के लिए भारी मात्रा में 'छिपा हुआ नमक' (Hidden Salt) होता है। इन्हें खरीदने से पहले पैकेट पर सोडियम की मात्रा जरूर चेक करें।मसालों और जड़ी-बूटियों का लें सहारा: खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए केवल नमक पर निर्भर न रहें। भोजन में नींबू का रस, अमचूर पाउडर, काली मिर्च, लहसुन, धनिया और पुदीना जैसी प्राकृतिक चीजों का उपयोग बढ़ाएं, जिससे कम नमक में भी खाना लजीज लगेगा।सेंधा नमक का सीमित विकल्प: कई लोग साधारण नमक की जगह पूरी तरह सेंधा नमक (Pink Salt) का इस्तेमाल करने लगते हैं। हालांकि सेंधा नमक स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, लेकिन इसमें भी सोडियम होता है, इसलिए इसकी मात्रा भी सीमित ही होनी चाहिए।
लखनऊ। हिंदू कैलेंडर और सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव (Lord Shiva) की कृपा पाने का सबसे उत्तम और कल्याणकारी व्रत माना गया है। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। टीवी9 हिंदी की एक विशेष धार्मिक रिपोर्ट के मुताबिक, 26 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो कि आषाढ़ महीने का आखिरी प्रदोष व्रत होगा। चूंकि इस बार त्रयोदशी तिथि रविवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे 'रवि प्रदोष व्रत' (Ravi Pradosh Vrat) के नाम से जाना जाएगा। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत का पालन करने से मनुष्य को न केवल महादेव का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि सूर्य देव की कृपा से समाज में मान-सम्मान, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की भी प्राप्ति होती है।रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्वशास्त्रों में बताया गया है कि प्रदोष काल (Pradosh Kaal) के दौरान महादेव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और कैलाश पर्वत पर रजत भवन में नृत्य करते हैं। इस विशिष्ट समय में की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है:आरोग्य और दीर्घायु का वरदान: रविवार का संबंध सूर्य देव से है, जो आत्मा, पिता और अच्छी सेहत के कारक हैं। जब रविवार और त्रयोदशी का यह पावन संयोग बनता है, तो व्रत करने वाले जातक की कुंडली में सूर्य और चंद्रमा दोनों मजबूत होते हैं, जिससे पुराने रोगों से मुक्ति मिलती है।मानसिक शांति: जो जातक नियमित रूप से प्रदोष व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन से अज्ञात भय, मानसिक अवसाद और दरिद्रता पूरी तरह समाप्त हो जाती है।पूजा का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat 2026)वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 जुलाई 2026 को दोपहर के समय होगी और इसका समापन अगले दिन होगा। चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए उदयातिथि के नियमों के तहत यह व्रत 26 जुलाई, रविवार को ही रखा जाएगा।इस दिन महादेव की पूजा के लिए सबसे विशेष और कल्याणकारी शुभ मुहूर्त शाम 07:12 बजे से लेकर रात 09:18 बजे तक रहेगा। इस सवा दो घंटे की अवधि के भीतर शिव आराधना करना सर्वोत्तम और महापुण्यदायी माना गया है।रवि प्रदोष व्रत की सरल और प्रामाणिक पूजा विधि:प्रदोष व्रत के दिन भक्तों को पूरी निष्ठा के साथ निम्नलिखित पूजन प्रक्रिया का पालन करना चाहिए:प्रातः काल नियम: रविवार की सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। सबसे पहले तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।दिनभर का संयम: पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर भगवान शिव के मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जाप करते रहें। इस दिन किसी की निंदा न करें और क्रोध से बचें।प्रदोष काल पूजा: शाम को शुभ मुहूर्त शुरू होने से पहले दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर पवित्र हो जाएं। घर के मंदिर या किसी शिवालय में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, गाय के कच्चे दूध, दही, शहद और घी से (पंचामृत) अभिषेक करें।प्रिय सामग्रियां करें अर्पित: महादेव को चंदन का तिलक लगाएं, अक्षत (साबुत चावल), बेलपत्र, धतूरा, भांग और मदार के फूल अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।कथा और आरती: शुद्ध देसी घी का दीपक जलाकर 'रवि प्रदोष व्रत कथा' का श्रवण या पाठन करें। अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और कपूर से महादेव की आरती उतारकर सभी में प्रसाद वितरित करें।
लखनऊ। घर की सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक समृद्धि में वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) का बहुत बड़ा योगदान होता है। अक्सर लोग घर के वास्तु दोषों को दूर करने के लिए महंगे उपाय या तोड़-फोड़ करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रकृति ने हमें कुछ ऐसे पेड़-पौधे दिए हैं जिन्हें सही दिशा में लगाने मात्र से ही घर के सारे दोष दूर हो जाते हैं? टीवी9 हिंदी की एक विशेष धार्मिक और वास्तु रिपोर्ट के मुताबिक, कनेर का पौधा (Kaner Plant) एक ऐसा ही बेहद चमत्कारी और पवित्र पौधा है।आमतौर पर कनेर के फूलों का इस्तेमाल भगवान शिव और अन्य देवी-देवताओं की पूजा में किया जाता है, लेकिन वास्तु शास्त्र में इस पौधे को 'धन को आकर्षित करने वाला चुंबक' माना गया है। मान्यता है कि जिस घर में कनेर का पौधा सही नियमों के साथ लगा होता है, वहां कभी भी दरिद्रता पैर नहीं पसार सकती। आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स के अनुसार कनेर के पौधे से मिलने वाले अद्भुत वास्तु लाभ (Vastu Benefits) और इसे लगाने की सही दिशा।कनेर के पौधे का धार्मिक महत्व: त्रिदेवों का मिलता है आशीर्वादसनातन परंपरा में कनेर के पौधे को साक्षात देवस्वरूप माना गया है। इसके फूलों के रंगों के आधार पर इसका संबंध अलग-अलग देवी-देवताओं से है:सफेद कनेर: सफेद रंग के फूलों वाली कनेर मां लक्ष्मी और विद्या की देवी मां सरस्वती को अत्यंत प्रिय है। इसे घर में लगाने से मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।पीली कनेर: पीले रंग के फूलों वाली कनेर में साक्षात भगवान विष्णु और धन के देवता कुबेर का वास माना गया है। इसे लगाने से घर में धन-धान्य के भंडार हमेशा भरे रहते हैं।लाल कनेर: लाल या गुलाबी कनेर के फूल सूर्य देव और हनुमान जी को ऊर्जा व शक्ति के प्रतीक के रूप में अर्पित किए जाते हैं, जिससे घर के सदस्यों का यश और आत्मविश्वास बढ़ता है।वास्तु के अनुसार किस दिशा में लगाएं कनेर का पौधा?वास्तु विज्ञान के अनुसार, किसी भी पवित्र पौधे का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा में स्थापित किया जाए:उत्तर या पूर्व दिशा (North or East): कनेर के पौधे को लगाने के लिए घर की उत्तर या पूर्व दिशा सबसे उत्तम और मंगलकारी मानी गई है। चूंकि उत्तर दिशा के स्वामी कुबेर देव हैं, इसलिए इस दिशा में पीली कनेर लगाने से धन का आगमन तेजी से होता है।ईशान कोण (North-East): घर का उत्तर-पूर्व कोना (ईशान कोण) देवताओं का स्थान होता है। इस कोने में सफेद या पीली कनेर का पौधा लगाने से घर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) नष्ट हो जाती है और सकारात्मकता का संचार होता है।कनेर के पौधे से मिलने वाले 4 जादुई वास्तु लाभ:1. आर्थिक तंगी से परमानेंट छुटकारा: यदि आपके घर में पैसा आता तो है लेकिन टिकता नहीं है या बेवजह के खर्चों में बह जाता है, तो कुबेर देव की प्रिय पीली कनेर घर में लाएं। यह आय के नए स्रोत बनाती है और कर्ज से मुक्ति दिलाती है।2. पारिवारिक कलह और तनाव का नाश: जिन घरों में अक्सर बिना किसी बात के छोटी-मोटी बहस या गृह क्लेश होता रहता है, वहां सफेद कनेर का पौधा रामबाण का काम करता है। यह पारिवारिक सदस्यों के विचारों को शांत कर आपसी प्रेम को बढ़ाता है।3. समाज में यश और कीर्ति की प्राप्ति: लाल कनेर का पौधा घर के सदस्यों के जीवन में मान-सम्मान और तरक्की के द्वार खोलता है। विशेषकर नौकरीपेशा और बिजनेसमैन के लिए यह बहुत फलदायी माना गया है।4. औषधीय गुणों से भरपूर: वास्तु के अलावा आयुर्वेद में भी कनेर को एक महत्वपूर्ण पौधा माना गया है। हालांकि, यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि कनेर का पौधा आंतरिक रूप से विषैला (Toxic) होता है, इसलिए इसके फूलों या पत्तियों का सेवन भूलकर भी न करें और इसे छोटे बच्चों व पालतू जानवरों की पहुंच से हमेशा दूर रखें।
लखनऊ। वैदिक ज्योतिष में शनि देव को न्याय और कर्मफल का दाता माना गया है। नवग्रहों में शनि सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं, इसलिए जब भी वे अपनी चाल बदलते हैं, तो उसका गहरा और व्यापक असर सभी 12 राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है। टीवी9 हिंदी की एक विशेष ज्योतिषीय रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 का एक सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ग्रह गोचर 27 जुलाई 2026 को होने जा रहा है, जब शनि देव वक्री (Saturn Retrograde) यानी उल्टी चाल चलना शुरू करेंगे।ज्योतिष आचार्यों का मानना है कि शनि की इस टेढ़ी या वक्री चाल का प्रभाव इसके शुरू होने से कुछ दिन पहले ही महसूस होने लगता है। इस दौरान लोगों को अपने करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक रिश्तों में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 27 जुलाई से शुरू हो रही शनि की वक्री चाल के कारण मेष और तुला सहित 5 विशेष राशियों के जातकों को बेहद सतर्क रहने और संभलकर कदम बढ़ाने की सलाह दी गई है, क्योंकि उन्हें इस अवधि में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।शनि की वक्री चाल का क्या है मतलब?खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से वक्री होने का मतलब यह कतई नहीं है कि शनि वास्तव में अंतरिक्ष में पीछे की ओर भागने लगते हैं। दरअसल, पृथ्वी और शनि की गति में अंतर होने के कारण धरती से देखने पर ऐसा आभास होता है कि शनि देव पीछे की ओर चल रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि की इस वक्री अवधि को 'कठिन आत्ममंथन, धैर्य की परीक्षा और कर्मों की समीक्षा' का समय माना गया है।इन 5 राशियों को रहना होगा 'रेड अलर्ट' पर, बढ़ सकती हैं परेशानियां:1. मेष राशि (Aries): शनि की वक्री चाल के प्रभाव से मेष राशि के नौकरीपेशा लोगों पर काम का दबाव (Work Pressure) अचानक बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इस दौरान किसी भी महत्वपूर्ण व्यावसायिक या व्यक्तिगत मामले में जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें। पैसों के लेन-देन और निवेश के मामलों में अत्यधिक सावधानी बरतें, अन्यथा धन हानि हो सकती है।2. कर्क राशि (Cancer): कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और परिवार के बीच संतुलन (Balance) बनाने में कठिनाई पैदा कर सकता है। कार्यक्षेत्र में अनचाही अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। इस अवधि में किसी भी तरह के वाद-विवाद, बहस या कानूनी झमेले से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें और अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखें।3. तुला राशि (Libra): तुला राशि वाले जातकों के फिजूलखर्चों में अचानक भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ सकता है। यदि आप किसी बड़े प्रोजेक्ट या शेयर बाजार में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो विशेषज्ञों की सलाह के बिना आगे न बढ़ें। नौकरी में सहकर्मियों या किसी बाहरी व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है।4. मकर राशि (Capricorn): चूंकि शनि देव मकर राशि के ही स्वामी हैं, इसलिए उनकी इस चाल का सबसे ज्यादा और सीधा असर इस राशि पर देखने को मिलेगा। मकर राशि वालों के बनते हुए कार्यों में बेवजह की देरी (Delays) हो सकती है और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना ही सफलता की एकमात्र कुंजी होगी।5. मीन राशि (Pisces): मीन राशि के जातकों को इस गोचर के दौरान अत्यधिक मानसिक तनाव और अज्ञात भय की समस्या हो सकती है। पुराने कानूनी या पारिवारिक विवाद दोबारा उभरकर सामने आ सकते हैं, जिससे चिंता बढ़ेगी। कोई भी नया व्यापार शुरू करने या बड़ा वित्तीय जोखिम लेने के लिए यह समय अनुकूल नहीं है।शनि के प्रकोप और कष्टों से बचने के 4 अचूक ज्योतिषीय उपाय:यदि आपकी राशि भी इन 5 प्रभावित राशियों में शामिल है, तो शनि देव के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए ज्योतिषियों ने ये सरल उपाय बताए हैं:शनिवार का व्रत और दान: प्रत्येक शनिवार को शनि देव के मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। काले तिल, काली उड़द की दाल, छाता या लोहे की वस्तुओं का किसी जरूरतमंद को दान करें।हनुमान चालीसा का पाठ: शनि देव परम हनुमान भक्त हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करता है, शनि देव उसे कभी प्रताड़ित नहीं करते।महामृत्युंजय मंत्र का जाप: प्रतिदिन सुबह या शाम को भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।कर्मों में शुचिता: शनि देव न्याय के देवता हैं, इसलिए इस अवधि में किसी भी गरीब, असहाय, मजदूर या बेजुबान जानवर को परेशान न करें। ईमानदारी से अपना काम करें, जिससे शनि देव स्वतः शुभ फल देने लगेंगे।
लखनऊ। सावन (Sawan 2026) का पवित्र महीना शुरू होते ही देश भर के शिवालयों में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' की गूंज सुनाई देने लगती है। भगवान शिव के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक के साथ-साथ कई तरह की पूजन सामग्रियां अर्पित करते हैं। लेकिन सनातन परंपरा में महादेव की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक उन्हें भांग और धतूरा (Bhang and Dhatura) न चढ़ाया जाए। टीवी9 हिंदी की एक विशेष धार्मिक रिपोर्ट के मुताबिक, जहां अन्य देवी-देवताओं को छप्पन भोग और अत्यंत सुगंधित फूल चढ़ाए जाते हैं, वहीं देवों के देव महादेव को कड़वा धतूरा और नशीली भांग प्रिय है। कई लोग इसे सिर्फ एक लोक परंपरा मानते हैं, लेकिन इसके पीछे बेहद गंभीर पौराणिक कथाएं (Mythology) और आयुर्वेद से जुड़े गहरे वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आइए जानते हैं कि सावन में शिव जी को ये चीजें अर्पित करने का असली रहस्य क्या है।पौराणिक कथा: समुद्र मंथन और हलाहल विष का प्रभावपौराणिक ग्रंथों और शिव पुराण (Shiva Purana) के अनुसार, सावन के महीने में भांग-धतूरा चढ़ाने की परंपरा का सीधा संबंध देव-असुर संग्राम और समुद्र मंथन से है:हलाहल विष की उत्पत्ति: जब देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो उसमें से चौदह रत्नों के साथ-साथ 'हलाहल' नामक अत्यंत विनाशकारी और भयंकर विष भी निकला। उस विष की गर्मी से ब्रह्मांड जलने लगा।महादेव का विषपान: सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस हलाहल विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका नाम 'नीलकंठ' पड़ा।जलन शांत करने का उपाय: विषपान करते ही महादेव का शरीर और मस्तिष्क अत्यधिक गर्म हो गए और वे तीव्र जलन से व्याकुल होने लगे। तब देवताओं और जड़ी-बूटी के ज्ञाता ऋषियों ने शिव जी के सिर की गर्मी और शरीर की तपन को शांत करने के लिए उन पर जल की अविरल धारा (जलाभिषेक) चढ़ाई और शीतल प्रवृत्ति वाली औषधियां जैसे—भांग, धतूरा और बेलपत्र अर्पित किए। इन औषधियों के प्रभाव से महादेव के शरीर की जलन शांत हुई। तभी से सावन मास में उन्हें ये चीजें चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।धार्मिक महत्व: अहंकार और कड़वाहट का समर्पणआध्यात्मिक दृष्टिकोण से, शिव जी को भांग और धतूरा चढ़ाना इंसानी विकारों के त्याग का प्रतीक है। धतूरा एक कांटेदार और अत्यंत कड़वा फल होता है, जिसे आम लोग किसी काम में नहीं लाते। महादेव को इसे अर्पित करने का अर्थ है कि मनुष्य अपने भीतर की कड़वाहट, ईर्ष्या, क्रोध और अहंकार जैसी बुराइयों को भगवान के चरणों में सौंप दे और सात्विक जीवन अपनाए। वहीं भांग मन को पूरी तरह शांत और एकाग्र करने का संदेश देती है, ताकि भक्त बाहरी दुनिया के आकर्षणों को भूलकर पूरी तरह शिव भक्ति में लीन हो सके।वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक पहलू: असाधारण जड़ी-बूटियांटीवी9 हिंदी की रिपोर्ट में इसके वैज्ञानिक पहलू पर भी प्रकाश डाला गया है। आयुर्वेद (Ayurveda) में भांग और धतूरे को बेहद शक्तिशाली और महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों की श्रेणी में रखा गया है:तापमान को नियंत्रित करना: सावन के महीने में बारिश के कारण वातावरण में नमी और तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है, जिससे कई तरह की संक्रामक बीमारियां फैलती हैं। धतूरा और भांग स्वभाव से बेहद गर्म और वात-कफ नाशक होते हैं।सीमित मात्रा में औषधि: आयुर्वेद के अनुसार, यदि अत्यंत सीमित और शुद्ध रूप में इनका औषधीय इस्तेमाल किया जाए, तो ये जोड़ों के दर्द, अस्थमा, त्वचा रोग और मानसिक तनाव को दूर करने में रामबाण सिद्ध होते हैं। चूंकि सावन में प्रकृति इन पौधों को बहुतायत में उगाती है, इसलिए प्राचीन ऋषियों ने इन्हें प्रकृति और ईश्वर के प्रति सम्मान प्रकट करने के रूप में पूजा पद्धति से जोड़ दिया।शिव भक्तों के लिए आवश्यक सावधानीधार्मिक जानकारों और डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि शिव जी को भांग और धतूरा चढ़ाना पूरी तरह से एक आध्यात्मिक क्रिया है। भक्तों को पूजा के नाम पर अत्यधिक भांग का सेवन (Intoxication) करने या नशे के रूप में इसका गलत इस्तेमाल करने से पूरी तरह बचना चाहिए। शिव पूजा का वास्तविक अर्थ मन को शुद्ध, शांत और संयमित रखना है, न कि नशे में डूबना। इस सावन, भोलेनाथ की पूजा पूरी श्रद्धा से करें और इन पवित्र औषधियों को केवल उनके चरणों में अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
लखनऊ। हर माता-पिता का यह सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़ाई-लिखाई में अव्वल आए, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करे और उसका करियर शानदार बने। इसके लिए वे हर संभव सुविधाएं और अच्छे से अच्छे स्कूल-कोचिंग का इंतजाम भी करते हैं। लेकिन कई बार देखा जाता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता, वह थोड़ी देर बैठते ही ऊब जाता है या फिर उसे पढ़ा हुआ याद नहीं रहता। टीवी9 हिंदी की एक विशेष वास्तु रिपोर्ट के मुताबिक, इस समस्या के पीछे एक बड़ा कारण बच्चे के स्टडी रूम का वास्तु दोष (Vastu Dosh) हो सकता है। वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञों (Vastu Experts) का मानना है कि पढ़ाई के कमरे में ऊर्जा का प्रवाह यदि नकारात्मक है, तो यह सीधे तौर पर बच्चे की एकाग्रता (Concentration) और मानसिक क्षमता को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स के अनुसार स्टडी रूम के लिए कौन से अचूक वास्तु नियम अपनाने चाहिए।पढ़ाई के लिए सबसे उत्तम दिशा: ईशान कोण और पूर्व दिशा का महत्ववास्तु विज्ञान में दिशाओं का विशेष महत्व है, और जब बात बुद्धि व विद्या की हो, तो सही दिशा का चुनाव और भी महत्वपूर्ण हो जाता है:ईशान कोण (North-East Corner): स्टडी रूम के लिए घर का उत्तर-पूर्व हिस्सा यानी ईशान कोण सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह दिशा देवी-देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र है, जो मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ाती है।उत्तर या पूर्व दिशा (North or East): यदि ईशान कोण में जगह न हो, तो बच्चे का स्टडी रूम उत्तर या पूर्व दिशा में भी बनाया जा सकता है। पढ़ते समय बच्चे का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। मान्यता है कि इससे ज्ञानार्जन में वृद्धि होती है और कॉस्मिक एनर्जी का सीधा लाभ मिलता है।स्टडी टेबल का सही लेआउट: एक्सपर्ट्स ने बताए ये 4 जरूरी नियम1. दीवार से सटाकर न रखें टेबल: वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, स्टडी टेबल को कभी भी सामने की दीवार से पूरी तरह सटाकर (Blocked) नहीं रखना चाहिए। टेबल और दीवार के बीच थोड़ी खाली जगह होनी चाहिए। सामने खुली जगह होने से बच्चे के विचारों में स्पष्टता आती है और नए विचारों का जन्म होता है।2. पीठ के पीछे न हो खिड़की या दरवाजा: पढ़ते समय बच्चे की पीठ ठीक मुख्य दरवाजे या बड़ी खिड़की की तरफ नहीं होनी चाहिए। इससे ध्यान भटकने (Distraction) की संभावना सबसे ज्यादा होती है और बच्चा असुरक्षित महसूस करता है। पीठ के पीछे एक मजबूत दीवार का होना सबसे अच्छा माना जाता है।3. बीम के नीचे बैठने से बचें: ध्यान रहे कि स्टडी टेबल या बच्चे की कुर्सी किसी भी प्रकार के ओवरहेड बीम (छत की पिलर लाइन) के ठीक नीचे न हो। बीम के नीचे बैठने से बच्चे पर मानसिक दबाव (Mental Stress) बढ़ता है, जिससे सिरदर्द और एकाग्रता में कमी की शिकायत हो सकती है।4. टेबल को रखें क्लटर-फ्री: स्टडी टेबल पर किताबों का अंबार या कबाड़ जमा न होने दें। केवल वही किताबें टेबल पर रखें जिनकी उस समय जरूरत हो। टूटे हुए पेन, बंद घड़ियां या अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तुरंत हटा दें, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं।रंगों का चयन और रोशनी की सही व्यवस्थास्टडी रूम में रंगों का तालमेल बच्चे के मूड को बहुत हद तक प्रभावित करता है। इस कमरे में कभी भी गहरे, चमकीले या बहुत गहरे काले, नीले रंगों का प्रयोग न करें। विशेषज्ञों के अनुसार, स्टडी रूम के लिए हल्का पीला, क्रीम, लाइट ग्रीन (हरा) या सफेद रंग सबसे उत्तम है। हरा रंग बुद्धिमत्ता और पीला रंग ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा, कमरे में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा (Ventilation) आनी चाहिए। टेबल पर लाइट हमेशा बाईं ओर (Left Side) से आनी चाहिए ताकि पढ़ते या लिखते समय हाथ की परछाईं किताबों पर न पड़े।माता-पिता के लिए विशेष टिप्स: इन मूर्तियों को कमरे में दें स्थानबच्चे के स्टडी रूम में माता-पिता को ज्ञान की देवी मां सरस्वती या बुद्धि के देवता भगवान गणेश की एक छोटी सी सुंदर मूर्ति या तस्वीर जरूर लगानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, कमरे के उत्तर-पूर्व कोने में एक क्रिस्टल ग्लोब (Crystal Globe) रखना भी बेहद शुभ माना जाता है, जिसे बच्चे को दिन में एक-दो बार घुमाना चाहिए। यह सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय करता है। इन सरल मगर जादुई वास्तु उपायों को अपनाकर आप अपने बच्चे के अध्ययन कक्ष को सफलता का केंद्र बना सकते हैं।
नई दिल्ली/लखनऊ। ग्लोबल टेक दिग्गज सैमसंग (Samsung) अपने प्रीमियम मुड़ने वाले स्मार्टफोन्स की नई जनरेशन को ग्लोबल मार्केट में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है। टेक्नोलॉजी गलियारों और लीक्स के अनुसार, कंपनी अगले हफ्ते 22 जुलाई 2026 को लंदन में अपना बहुप्रतीक्षित ‘Galaxy Unpacked 2026’ इवेंट आयोजित करने जा रही है। इस मेगा इवेंट में सैमसंग के अगले क्लैमशेल फोल्डेबल फोन Samsung Galaxy Z Flip 8 को आधिकारिक तौर पर पेश किया जाएगा। हालांकि, इस आधिकारिक लॉन्चिंग से ठीक पहले टीवी9 हिंदी और टेक लीक्स के माध्यम से इस अपकमिंग फ्लिप फोन की संभावित कीमत, लॉन्च डेट और सभी धांसू स्पेसिफिकेशन्स (Roundup) की पूरी कुंडली सामने आ गई है।लॉन्च डेट और कब आ रहा है यह फोन?सैमसंग ने पहले ही इस बात के संकेत दे दिए हैं कि उसका गैलेक्सी अनपैक्ड इवेंट 22 जुलाई को लंदन में आयोजित किया जाएगा। भारतीय समयानुसार यह इवेंट शाम 6:30 बजे से शुरू होगा, जिसे फैंस सैमसंग की ऑफिशियल वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर लाइव देख सकेंगे। गैलेक्सी जेड फ्लिप 8 के साथ-साथ इस इवेंट में Galaxy Z Fold 8, Galaxy Z Fold 8 Ultra और नई Galaxy Watch 9 सीरीज से भी पर्दा उठाया जाएगा।Samsung Galaxy Z Flip 8 के संभावित स्पेसिफिकेशन्स (Expected Specs):बड़ी और क्रीज-फ्री डिस्प्ले: लीक्स के मुताबिक, इस नए फ्लिप फोन में 120Hz एडेप्टिव रिफ्रेश रेट और 2,600 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ 6.9-इंच का प्राइमरी फोल्डेबल AMOLED डिस्प्ले मिल सकता है। वहीं, इसका बाहरी कवर डिस्प्ले भी अपग्रेड होकर 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ 4.1-इंच का हो सकता है।प्रोसेसर और परफॉर्मेंस: सैमसंग इस बार भी डुअल-चिप स्ट्रेटेजी (Dual-Chip Strategy) अपना सकता है। अमेरिकी बाजार में इसमें स्नैपड्रैगन 8 एलीट जनरेशन 5 (Snapdragon 8 Elite Gen 5) चिपसेट मिलने की उम्मीद है, जबकि भारत और यूरोपीय देशों में यह फोन 2nm आर्किटेक्चर पर आधारित Exynos 2600 प्रोसेसर के साथ आ सकता है।स्टोरेज और रैम: डिवाइस में स्टैंडर्ड के तौर पर 12GB LPDDR5X रैम दी जा सकती है, जिसके साथ 256GB और 512GB UFS 4.1 इंटरनल स्टोरेज के विकल्प मिलेंगे।अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर: यह डिवाइस आउट-ऑफ-द-बॉक्स Android 17 पर आधारित One UI 9 इंटरफेस पर रन करेगा। कंपनी इसके साथ पूरे 7 साल के ओएस और सिक्योरिटी अपडेट्स की गारंटी दे सकती है।कैमरा और बैटरी बैकअप: फोटोग्राफी के लिए इसके रियर में 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा और 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड लेंस मिल सकता है। सेल्फी के लिए 10 मेगापिक्सल का फ्रंट शूटर होगा। पावर बैकअप के लिए इसमें 4,300mAh की बैटरी दी जाएगी, जो 25W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करेगी।भारत और ग्लोबल मार्केट में क्या होगी इसकी संभावित कीमत?कीमतों को लेकर लीक रिपोर्ट्स का दावा है कि सैमसंग इस बार अपने फोल्डेबल लाइनअप को पहले से थोड़ा प्रीमियम सेगमेंट में रख सकता है। यूरोप में इसके 256GB बेस वेरिएंट की संभावित कीमत EUR 1,299 (लगभग ₹1,41,000) और 512GB मॉडल की कीमत EUR 1,499 (लगभग ₹1,60,000) के आसपास हो सकती है।हालांकि, भारतीय बाजार में ऑफर्स और लोकल असेंबलिंग के चलते इसकी शुरुआती कीमत ₹1,19,999 के आसपास रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। सटीक और आधिकारिक कीमतों के लिए हमें 22 जुलाई को होने वाले इवेंट का इंतजार करना होगा।
लखनऊ। आज के आधुनिक दौर में जहां मेडिकल साइंस ने अपार तरक्की कर ली है, वहीं दूसरी ओर भारतीय युवाओं में एक बेहद गंभीर और साइलेंट हेल्थ क्राइसिस पैर पसार रहा है। यह संकट है—इनफर्टिलिटी (Infertility) यानी बांझपन का बढ़ता जोखिम। टीवी9 हिंदी की एक विशेष हेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याएं रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स और आईवीएफ (IVF) स्पेशलिस्ट्स का स्पष्ट मानना है कि इस खतरे के पीछे कोई जेनेटिक या जन्मजात बीमारी नहीं, बल्कि युवाओं की रोजमर्रा की खराब लाइफस्टाइल (Bad Lifestyle Habits) सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। अनजाने में की जाने वाली कुछ सामान्य आदतें हमारे शरीर के हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ रही हैं, जो अंततः माता-पिता बनने के सुख में एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही हैं।एक्सपर्ट्स के अनुसार इनफर्टिलिटी का जोखिम बढ़ाने वाली 5 सबसे खराब आदतें:1. अत्यधिक मानसिक तनाव और एंग्जायटी (Chronic Stress): आज की कॉर्पोरेट लाइफ और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन न बना पाने के कारण युवा लगातार तनाव में जी रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब शरीर लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो 'कोर्टिसोल' (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन जैसे आवश्यक रीप्रोडक्टिव हार्मोन्स के प्राकृतिक स्राव को बुरी तरह प्रभावित करता है, जिससे फर्टिलिटी घटने लगती है।2. सिगरेट, शराब और नशीले पदार्थों का सेवन (Smoking & Alcohol): युवाओं में सोशल ड्रिंकिंग और स्मोकिंग का बढ़ता चलन प्रजनन अंगों के लिए जहर के समान साबित हो रहा है। तंबाकू में मौजूद निकोटीन और अन्य हानिकारक केमिकल्स पुरुषों में स्पर्म काउंट (Sperm Count) व उसकी गतिशीलता (Motility) को तेजी से घटाते हैं। वहीं, महिलाओं में यह अंडों की गुणवत्ता (Egg Quality) को खराब कर देता है, जिससे कंसीव करने में भारी कठिनाई होती है।3. प्रोसेस्ड फूड और अनहेल्दी डाइट (Junk Food & Obesitiy): जंक फूड, अत्यधिक ऑयली, डिब्बाबंद भोजन और मैदे से बनी चीजों का लगातार सेवन करने से शरीर में न्यूट्रिशन की कमी हो जाती है। इसके कारण मोटापा (Obesity) तेजी से बढ़ता है। महिलाओं में मोटापा सीधे तौर पर पीसीओडी (PCOD) और पीसीओएस (PCOS) जैसी बीमारियों को जन्म देता है, जो अनियमित पीरियड्स और इनफर्टिलिटी का सबसे मुख्य कारण हैं।4. देर रात तक जागना और अधूरी नींद (Poor Sleep Cycle): लैपटॉप, मोबाइल स्क्रीन और ओटीटी के चक्कर में रातभर जागना आज के युवाओं की पहचान बन चुका है। डॉक्टरों के अनुसार, जब हम रात में गहरी नींद में होते हैं, तो हमारा शरीर हार्मोन्स को रेगुलेट और टिश्यूज को रिपेयर करता है। स्लीप साइकिल बिगड़ने से शरीर का नेचुरल बॉडी क्लॉक (Circadian Rhythm) तबाह हो जाता है, जिसका सीधा असर फर्टिलिटी साइकिल्स पर पड़ता है।5. फिजिकल एक्टिविटी की कमी (Sedentary Lifestyle): ऑफिस में 8 से 10 घंटे लगातार बैठकर काम करना और दिनभर में कोई भी शारीरिक व्यायाम, योग या वॉक न करना भी एक बड़ी वजह है। निष्क्रिय जीवनशैली के कारण पेल्विक एरिया (प्रजनन अंगों के आसपास के हिस्से) में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं हो पाता, जिससे पुरुषों में एग्रेसिव स्पर्म प्रोडक्शन और महिलाओं में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया बाधित होती है।डॉक्टरों की सलाह: समय रहते लाइफस्टाइल में करें ये जरूरी सुधारफर्टिलिटी विशेषज्ञों का कहना है कि इस गंभीर खतरे से बचने का एकमात्र और सबसे सुलभ तरीका यह है कि युवा तुरंत अपनी आदतों में सुधार करें। अपनी दैनिक दिनचर्या में कम से कम 30 से 45 मिनट का व्यायाम या योग जरूर शामिल करें। घर का बना शुद्ध सात्विक, हरी पत्तेदार सब्जियों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन लें। चीनी और मैदे से पूरी तरह दूरी बना लें। यदि शादी के एक साल बाद तक प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में समस्या आ रही है, तो बिना किसी सामाजिक संकोच या शर्म के, पति-पत्नी दोनों को एक साथ किसी योग्य गायनेकोलॉजिस्ट या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से मिलकर जरूरी मेडिकल असेसमेंट (जैसे सीमेन एनालिसिस और ओवेरियन रिजर्व टेस्ट) कराना चाहिए, क्योंकि इनफर्टिलिटी केवल महिला केंद्रित समस्या नहीं है।
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में विकास प्राधिकरण (LDA) और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (UPAVP) दो ऐसे बड़े महकमे हैं, जिनसे आम जनता का हित और उनके जीवन की गाढ़ी कमाई सीधे तौर पर जुड़ी होती है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि ये दोनों ही विभाग अक्सर अपनी कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार (Corruption) को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। ताजा तरीन और बेहद चौंकाने वाला मामला लखनऊ के पॉश इलाके इंदिरा नगर (Indira Nagar) से सामने आया है, जहां आवास विकास विभाग की नाक के नीचे नियमों को ताक पर रखकर आवासीय क्षेत्रों में धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सीलिंग और ध्वस्तीकरण (Demolition order) के कड़े आदेशों के बावजूद भी विभाग के कथित भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कारोबार बिना किसी डर के फल-फूल रहा है।सीलिंग के आदेश और नोटिस के बाद भी चल रही 'बटर स्टोरी' जैसी दुकानेंपूरा मामला इंदिरा नगर के शालीमार चौराहे (Shalimar Chauraha) पर स्थित आवासीय भवन संख्या A-1020 से जुड़ा हुआ है। इस भवन में नियमों के विपरीत जाकर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के विरुद्ध उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा बाकायदा ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इस संबंध में 27 अक्टूबर 2025 को एक आधिकारिक नोटिस भी विभाग द्वारा जारी किया गया था।लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस नियमविरुद्ध व्यवसायिक भवन में 'बटर स्टोरी' (Butter Story Shop) सहित कई नामचीन दुकानें और कमर्शियल एक्टिविटीज बिना किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से चल रही हैं। एक सजग शिकायतकर्ता ने जब इस परिसर की जांच और शिकायत की, तब जाकर इस भवन के खिलाफ पूर्व में जारी हुए ध्वस्तीकरण के आदेशों का बड़ा खुलासा हुआ।भेदभावपूर्ण सीलिंग: 'जिसने दिया सुविधा शुल्क उसे छूट, बाकी पर ताला'ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, शालीमार चौराहे के आस-पास का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। पूरे इलाके में कई ऐसे आवासीय भवन (Residential Properties) हैं, जहां नियमों के विपरीत धड़ल्ले से कमर्शियल आउटलेट्स खुल चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां कुछ भवनों पर आवास विकास की बड़ी-बड़ी सील और लंबी-चौड़ी नोटिस चस्पा हैं, वहीं ठीक उनके अगल-बगल के भवनों में खुलेआम दुकानें चल रही हैं।स्थानीय शिकायतकर्ताओं और अध्याशियों का सीधा आरोप है कि बिना आवास विकास विभाग के भ्रष्ट अफसरों के संरक्षण और 'सुविधा शुल्क' (रिश्वत) के खेल के यह बिल्कुल भी संभव नहीं है। पीड़ित नागरिकों का कहना है कि जिसने विभाग के इस भ्रष्ट तंत्र के आगे घुटने टेक दिए और उनके मनमुताबिक 'डील' कर ली, उन्हें अवैध निर्माण और कमर्शियल काम की पूरी छूट दे दी गई। वहीं, जो व्यक्ति इन भ्रष्ट अफसरों के आगे नहीं झुका, उसकी संपत्तियों को तुरंत टारगेट कर उस पर ताला लटका दिया गया।आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण बना भ्रष्ट तंत्र की कमाई का मुख्य जरियाविशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि बिना किसी ठोस नियम-कानून के आवासीय क्षेत्रों में अवैध रूप से व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़े करवाना आवास विकास के भ्रष्ट नेटवर्क की कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। यह तंत्र इतनी मजबूती से फैल चुका है कि चाहे आवासीय क्षेत्र हो या कमर्शियल, यदि आपकी संपत्ति आवास विकास परिषद के अधीन आती है, तो देर-सबेर इनके भ्रष्ट अफसर किसी न किसी तकनीकी खामी का बहाना बनाकर आपको घेर ही लेते हैं। बिना मोटी रिश्वत दिए आम आदमी के वैध काम के रास्ते में भी सैकड़ों कानूनी अड़चनें और अवरोध पैदा कर दिए जाते हैं। इंदिरा नगर के नागरिकों ने अब इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार और उच्चाधिकारियों से कड़ी विजिलेंस जांच और दोषियों के निलंबन की मांग की है।
यूपी में ब्लॉक प्रमुख बने प्रशासक, सरकार ने जारी किया आदेश; नए चुनाव तक संभालेंगे जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त किया। पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए चुनाव तक रूटीन प्रशासनिक कार्य करेंगे, नीतिगत फैसलों पर रहेगी रोक।
IMD Weather Alert: दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर समेत 22 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट। कई इलाकों में तेज हवाएं, बिजली गिरने और भूस्खलन की चेतावनी जारी।
Chief Minister Dr. Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के लिए 19 जुलाई का दिन ऐतिहासिक रहा। अब राज्य में किसी के लिए कोई विशेष कानून नहीं होगा। सभी धर्मों के लोग एक ही कानून के तहत जीवन-यापन करेंगे। चाहे लिव-इन हो या जीवन से जुड़ा कोई भी मामला, सब एक ही नियम ...
अभिषेक बनर्जी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई पर लगी रोक
कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत देते हुए आमतला स्थित उनके कार्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। प्रशासन को भवन से जुड़े दस्तावेज पेश करने के निर्देश।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग खारिज कर दी। फिलहाल उनका इलाज सफदरजंग अस्पताल में जारी रहेगा। सरकार ने कहा कि सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
लखनऊ में बोले सीएम योगी, यूपी में आकाशीय बिजली और वन्यजीव हमलों पर सरकार का बड़ा एक्शन प्लान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में ₹200 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम लागत से बनकर तैयार हुए यूपी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) के भव्य और नवीन मुख्यालय भवन का आधिकारिक लोकार्पण किया। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश दिया कि किसी भी प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदा के समय जन-धन की बड़ी हानि को समय रहते पुख्ता तैयारी, जन-जागरूकता और आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आपदा प्रबंधन केवल एक सरकारी तंत्र या विभाग का दायित्व नहीं है, बल्कि देश और प्रदेश के प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक का एक परम कर्तव्य होना चाहिए।शहीद पथ पर बना ₹200 करोड़ का हाईटेक डिजिटल कमांड सेंटर: 24 घंटे सातों दिन काम करेगा आपातकालीन तंत्रलखनऊ के शहीद पथ स्थित डायल-112 मुख्यालय के बिल्कुल पास निर्मित यह नया मुख्यालय भवन पूरी तरह से अत्याधुनिक विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस है। आपदा प्रबंधन को नए युग में ले जाने वाले इस परिसर के भीतर 24 घंटे और सातों दिन लगातार संचालित होने वाला एक हाईटेक राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र बनाया गया है। इसके अलावा, भवन में 200 से अधिक लोगों की बैठने की क्षमता वाला एक विशाल सभागार, हाईटेक क्लासरूम, व्याख्यान कक्ष, आपदा राहत कर्मियों के लिए छात्रावास, एक समृद्ध पुस्तकालय तथा उत्तर प्रदेश की संपूर्ण आपदा प्रबंधन प्रणाली को एक छत के नीचे मजबूत करने के लिए एक केंद्रीय डिजिटल कमांड, कंट्रोल एवं समन्वय केंद्र की अभूतपूर्व व्यवस्था की गई है।सीएम योगी की दोटूक: सही जानकारी से टाली जा सकती हैं बड़ी से बड़ी दुर्घटनाएं, स्कूलों में मिलेगी ट्रेनिंगमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन-जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि पहले के समय में आग, भूकंप और बाढ़ जैसी गंभीर आपदाओं के दौरान बरती जाने वाली सामान्य सावधानियों की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाती थी। उचित ज्ञान के अभाव में लोगों का सामान्य व्यवहार भी बड़े नुकसान का कारण बन जाता था, जबकि सही और सटीक जानकारी होने से बड़ी से बड़ी दुर्घटना को भी आसानी से टाला जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्रदेश भर में ऐसे व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं, जिनसे सामान्य ग्रामीण और शहरी नागरिक भी आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन का सक्रिय सहयोग कर सकें। जब राज्य में कोई आपदा न हो, तब ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए तथा प्रदेश के सभी स्कूलों के छात्रों और शिक्षकों को भी आपदा प्रबंधन के प्रति अनिवार्य रूप से जागरूक किया जाना चाहिए।मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा घोषित करने वाला देश का पहला राज्य बना यूपी: बहराइच और बिजनौर का दिया उदाहरणमुख्यमंत्री ने गर्व से उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश पूरे देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) को भी आधिकारिक रूप से प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में शामिल किया है। हाल ही में बहराइच में मगरमच्छ के हमले में एक 12 वर्षीय मासूम बालक की हुई दुखद मौत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि नदियों और मगरमच्छ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से ही आवश्यक सावधानियों की ट्रेनिंग दी जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। यूपी में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में अब तक 4,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि अन्य प्राकृतिक आपदाओं में लगभग 5,000 लोग प्रभावित हुए हैं। अपने हालिया बिजनौर दौरे का संदर्भ देते हुए सीएम योगी ने बताया कि जिले में गन्ने के खेतों से अब तक 80 तेंदुओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बाघ और तेंदुए के व्यवहार में बड़ा अंतर होता है, और इसकी सही पहचान के बारे में स्थानीय जनता को जागरूक करना जीवन रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।तकनीक का अधिकतम उपयोग और शाकंभरी देवी मंदिर का सफल ऑपरेशन: आकाशीय बिजली से मौतों पर चिंताआकाशीय बिजली (Lightning) के कहर से होने वाली जनहानि पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सीएम योगी ने लाइटनिंग अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसी उन्नत तकनीक के अधिकतम उपयोग पर बल दिया। उन्होंने हाल ही में आए भयंकर तूफान और आकाशीय बिजली से एक ही दिन में हुई 111 से अधिक लोगों की मौत का हवाला देते हुए कहा कि इस घटना के तुरंत बाद सरकार ने तकनीक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक प्रभावी और सटीक बनाने का काम शुरू कर दिया। उन्होंने सहारनपुर के प्रसिद्ध शाकंभरी देवी मंदिर का एक सफल उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ समय पहले मौसम विभाग द्वारा समय पर जारी किए गए हाई-अलर्ट के कारण स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया था। इसके कुछ ही देर बाद शिवालिक की पहाड़ियों से भयंकर जलप्रलय और तेज बहाव के साथ पानी आया। यदि समय रहते लोगों को वहां से सुरक्षित हटाया नहीं जाता, तो राज्य में एक बहुत बड़ी और भयावह जनहानि हो सकती थी।
सोने से पहले 2 मिनट ये काम किया तो हेल्थ होगी इंप्रूव, फटाफट आएगी नींद
आधुनिक जीवनशैली में खराब खानपान और मानसिक तनाव के कारण आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति अनिद्रा (Insomnia) और थकान की समस्या से जूझ रहा है। अच्छी सेहत के लिए केवल पौष्टिक भोजन और हैवी वर्कआउट ही काफी नहीं होता, बल्कि आयुर्वेद में बताए गए कुछ छोटे-छोटे नियम भी शरीर को निरोगी रखने में बेहद चमत्कारी भूमिका निभाते हैं। इन्हीं में से एक बेहद असरदार और आसान तरीका है—रात को सोने से पहले पैर के तलवों की मालिश करना (Foot Massage Before Sleep)। हर रोज रात को बिस्तर पर जाने से ठीक पहले यदि आप केवल 2 मिनट निकालकर अपने पैरों के तलवों में हल्का गर्म तेल लगाकर मालिश करते हैं, तो इससे न केवल आपकी नींद की क्वालिटी में गजब का सुधार होगा बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी परमानेंट राहत मिल सकती है।एक्टिवेट होता है पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम: दिमाग को शांत कर तुरंत आती है गहरी और सुकून भरी नींदरोजाना रात को पैरों की मालिश करने का सबसे पहला और बड़ा फायदा आपकी स्लीप साइकिल (Sleep Cycle) को मिलता है। दिनभर भागदौड़ करने के कारण हमारे पैर पूरे शरीर का बोझ उठाते हैं, जिससे पैरों की मांसपेशियों में भारी थकान आ जाती है। विज्ञान के अनुसार, हमारे पैरों के तलवों में शरीर की कई महत्वपूर्ण नसों के अंतिम छोर (Nerve Endings) होते हैं। जब आप गुनगुने तेल से तलवों की मालिश करते हैं, तो शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic Nervous System) तुरंत एक्टिवेट हो जाता है। यह सिस्टम सीधे आपके मस्तिष्क को शांत होने का सिग्नल भेजता है, जिससे मानसिक तनाव और दिनभर की एंग्जायटी दूर होती है और आप बहुत जल्द एक गहरी व आरामदायक नींद के आगोश में चले जाते हैं।शरीर का वात दोष होता है बैलेंस: आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताए तलवों की मालिश के छिपे हुए राजप्रसिद्ध आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर मनीषा मिश्रा के मुताबिक, नियमित रूप से रात को सोने से पहले पैरों की मालिश करने से शरीर का वात दोष (Vata Dosha) पूरी तरह संतुलित रहता है। आयुर्वेद में माना जाता है कि शरीर में वात के बिगड़ने से ही अनिद्रा, जोड़ों का दर्द और घबराहट जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। जब तलवों में गर्म तेल से हल्की मालिश की जाती है, तो ग्राउंड नर्व्स रिलैक्स होती हैं जिससे वात नियंत्रित होता है। इसके साथ ही, पैरों में मौजूद विभिन्न एक्यूप्रेशर पॉइंट्स (Acupressure Points) पर हल्का दबाव बनने से ब्लड सर्कुलेशन में तेजी से सुधार होता है। कई शोधों में यह भी सामने आया है कि तलवों की मालिश करने से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) को भी प्राकृतिक रूप से कम करने में बड़ी मदद मिलती है।पैरों की सूजन (एडिमा) और एड़ी के पुराने दर्द से परमानेंट राहत: इन मरीजों के लिए है वरदानअगर किसी व्यक्ति को पैरों में लिक्विड जमा होने के कारण होने वाली सूजन, जिसे मेडिकल भाषा में एडिमा (Edema) कहा जाता है, की समस्या है तो यह 2 मिनट की थेरेपी उनके लिए एक अचूक दवा है। यही वजह है कि दिल के मरीजों (Heart Patients) और गर्भवती महिलाओं को अक्सर डॉक्टरों द्वारा रात में हल्के हाथों से पैरों की मालिश करने की सलाह दी जाती है ताकि पैरों का भारीपन दूर हो सके। इसके अलावा, जो लोग प्लांटर फेशिआइटिस (Planter Fasciitis) यानी तलवों की झिल्ली में सूजन या लो-आर्च के कारण एड़ी के पुराने और असहनीय दर्द से परेशान रहते हैं, उनके लिए सरसों, तिल या नारियल के गुनगुने तेल की मालिश एड़ी के दर्द को जड़ से खत्म करने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक उपचार साबित होती है।
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों की लगातार बदलती चाल हर दिन मानव जीवन को गहराई से प्रभावित करती है। कल यानी 20 जुलाई को सावन मास का बेहद पवित्र सोमवार है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सोमवार का दिन देवों के देव महादेव भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस विशेष दिन भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करने पर जातकों के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट, मानसिक तनाव और आर्थिक संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, कल का दिन मेष, मिथुन, कर्क और सिंह सहित 4 प्रमुख राशियों के जीवन में बहुत बड़ी हलचल और सकारात्मक बदलाव लेकर आ रहा है। वहीं, कुछ अन्य राशि के जातकों को कल के दिन विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।मेष, वृषभ और मिथुन राशि का कल का भाग्य: आत्मविश्वास में होगी भारी वृद्धिमेष राशि: कल का दिन आपके लिए जबरदस्त आत्मविश्वास से भरा रहेगा। आपके जीवन में कई सकारात्मक और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जो आपके भविष्य को संवारेंगे। पारिवारिक सदस्यों के साथ आपके संबंध पहले से अधिक मजबूत होंगे। अपने परिवार और करीबी दोस्तों के साथ खुशनुमा वक्त बिताने का मौका मिलेगा, लेकिन बदलते मौसम में अपने स्वास्थ्य की अनदेखी करने से बचें।वृषभ राशि: कल आपकी रोमांटिक लाइफ में थोड़ी उथल-पुथल मचने की संभावना है। प्रेम-संबंधों में मधुरता बनाए रखने के लिए संयम से काम लें। व्यवसाय से जुड़े किसी भी बड़े मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला न लें। आर्थिक मोर्चे पर कल किसी भी तरह की प्रॉपर्टी में हैवी इन्वेस्टमेंट करने से बचना ही आपके लिए सुरक्षित रहेगा। किसी छोटी यात्रा या ट्रिप पर जाने का प्लान बन सकता है।मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातक कल दृढ़ संकल्प और गजब के आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। कार्यक्षेत्र या व्यापार के सिलसिले में किसी लंबी यात्रा पर जाने का योग बन रहा है। आपकी आर्थिक स्थिति स्थिर और मजबूत रहेगी, लेकिन फिर भी फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है। काम के दबाव के बीच अपनी मेंटल हेल्थ और मानसिक शांति का विशेष ध्यान रखें।कर्क, सिंह और कन्या राशि का करियर ग्राफ: शेयर बाजार में लाभ और कार्यक्षेत्र में चुनौतियांकर्क राशि: कल का दिन आपके करियर में बड़ी सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगा। खासकर जो लोग लंबे समय से शेयर बाजार (Share Market) या लॉटरी में निवेश करने की सोच रहे हैं, उनके लिए कल का दिन बेहद लाभदायक सिद्ध हो सकता है। ऑफिस में अपने काम पर पूरा फोकस बनाए रखें। शाम का समय अपने लाइफ पार्टनर और घर के सदस्यों के साथ बिताने से रिश्ते और मजबूत होंगे।सिंह राशि: सिंह राशि के जातकों के लिए कल का दिन बेहद रोमांचक और नई ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में सीनियर अधिकारियों की मदद से आपको मनचाही सफलता मिलने के पूरे आसार हैं। स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी भाग्य आपका पूरा साथ देगा। प्रेम संबंध काफी मजबूत होंगे और दिन के अंत तक आपको अपने पार्टनर से कोई बेहद स्पेशल या सरप्राइजिंग मैसेज मिल सकता है।कन्या राशि: कल का दिन आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। परिवार के कुछ सदस्यों के साथ किसी पुरानी बात को लेकर वैचारिक मतभेद या बहस होने की संभावना है। कार्यस्थल पर कॉम्पिटिशन की कमी के कारण आपकी व्यक्तिगत प्रोडक्टिविटी पर सीधा असर पड़ सकता है। कल आपकी आर्थिक स्थिति थोड़ी कमजोर रह सकती है, इसलिए कोई भी बड़ा वित्तीय निर्णय बहुत सूझ-बुझ के साथ ही लें।तुला, वृश्चिक और धनु राशि के लिए कूटनीतिक सलाह: रिश्तों को दें समय, आर्थिक फैसलों में बरतें सूझ-बुझतुला राशि: आर्थिक मामलों में कल किस्मत आपका पूरा साथ देने वाली है, जिससे अचानक धन लाभ के योग बनेंगे। कुछ जातकों के लिए विदेश या किसी हिल स्टेशन पर घूमने जाने के सुंदर योग बन रहे हैं, हालांकि यात्रा के दौरान अपने सामान और सेहत को लेकर थोड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। अपने प्रेम-संबंधों को टूटने से बचाने के लिए अपने पार्टनर से बैठकर खुलकर बातचीत करें।वृश्चिक राशि: लव लाइफ के मामले में कल आपको अपने पार्टनर का हर कदम पर पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे आपका मन प्रसन्न रहेगा। जो लोग अभी सिंगल हैं और जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं, उन्हें कल थोड़ी निराशा झेलनी पड़ सकती है। कार्यक्षेत्र में आपको प्रगति के कुछ नए और बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे, जिनका आपको पूरा फायदा उठाना चाहिए।धनु राशि: कल आपके सामने अचानक कुछ छोटी-मोटी चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन आप अपनी बुद्धिमानी और सूझ-बुझ से उन्हें आसानी से पार कर लेंगे। अपने जीवनसाथी के साथ कल एक बेहतरीन और यादगार वक्त बीतेगा। कोई भी नया बिजनेस शुरू करने या बड़ा फाइनेंशियल डिसीजन लेने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना आपके भविष्य के लिए बेहतर रहेगा।मकर, कुंभ और मीन राशि का भविष्य: प्रॉपर्टी में निवेश के योग और आय में बंपर बढ़ोतरीमकर राशि: कल आपको अपने घर-परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान वाणी में मधुरता और व्यवहार में शालीनता बनाए रखनी होगी। अपनी भविष्य की आर्थिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आप किसी नई जमीन या प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट कर सकते हैं। अपने शरीर को पूरी तरह दुरुस्त और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए योग करें और हेल्दी डाइट लें।कुंभ राशि: कुंभ राशि के कुछ जातक कल परिवार के साथ किसी धार्मिक या मनोरंजक ट्रिप पर जा सकते हैं। किसी बेहद करीबी मित्र या रिश्तेदार से आपको कोई कीमती गिफ्ट मिलने की प्रबल संभावना है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को पूरा मन लगाकर पढ़ाई करने की सख्त सलाह दी जाती है। नौकरीपेशा लोगों की आय में वृद्धि होगी और पारिवारिक बंधन मजबूत होंगे।मीन राशि: मीन राशि के जातकों के लिए कल का समय रोमांस और खुशियों से भरपूर रहने वाला है। कॉलेज या ऑफिस के सहपाठियों के साथ मेल-जोल और नेटवर्क बढ़ाना आपकी प्रोफेशनल लाइफ के लिए आने वाले समय में मील का पत्थर साबित हो सकता है। काम से वक्त निकालकर अपने माता-पिता और फैमिली मेंबर्स के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें।
EPFO 3.0 में मिलेगी नई फ्लेक्सिबल पेंशन की सौगात, गिग वर्कर्स और फ्रीलांसर्स को भी तगड़ा फायदा
देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स (Gig Workers) के लिए रिटायरमेंट के बाद की सामाजिक सुरक्षा को लेकर एक बेहद बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आगामी चरण यानी EPFO 3.0 के तहत एक बेहद आधुनिक, लचीली और योगदान आधारित (Contributory) नई पेंशन योजना पर तेजी से काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नई प्रस्तावित पेंशन स्कीम मौजूदा ईपीएस (Employees' Pension Scheme) की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और पारदर्शी होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यह केवल पारंपरिक संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके दायरे में डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवर्स, फ्रीलांसर्स और अधिक वेतन पाने वाले उन उच्च आय वर्ग के कर्मचारियों को भी शामिल किया जाएगा जो वर्तमान में ईपीएस के नियमों से बाहर हैं।कर्मचारी के नाम से खुलेगा बिल्कुल अलग पेंशन अकाउंट: निवेश पर हर साल जुड़ेगा सुरक्षित ब्याजइस नई योजना के ढाँचे को लेकर जो जानकारियां सामने आई हैं, उसके मुताबिक यह पूरी तरह से निर्धारित योगदान मॉडल (Defined Contribution Model) पर आधारित होगी। इसके तहत प्रत्येक पात्र कर्मचारी के नाम से एक बिल्कुल अलग और समर्पित पेंशन खाता खोला जाएगा। इस खाते में समय-समय पर जमा होने वाली राशि को पूरी तरह से सुरक्षित और सरकार समर्थित निवेश विकल्पों में लगाया जाएगा, ताकि बाजार के जोखिमों से फंड सुरक्षित रहे। इस सुरक्षित निवेश पर मिलने वाले ब्याज को हर साल कर्मचारी के खाते में जोड़ दिया जाएगा। जब भी कोई सदस्य अपनी उम्र के 60 साल पूरे कर लेगा, तो उसके खाते में जमा हुई कुल संचित राशि के आधार पर उसे एक निश्चित और नियमित मासिक पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी। इससे कर्मचारियों को अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को खुद मैनेज करने का बेहतर मौका मिलेगा।क्या है यह नया TRS कॉन्सेप्ट: खुद तय करिए कि रिटायरमेंट पर कितनी पेंशन चाहिएEPFO 3.0 के इस नए प्रस्ताव की सबसे क्रांतिकारी और आकर्षित करने वाली विशेषता इसका टीआरएस यानी 'टार्गेट रिटायरमेंट सम' (Target Retirement Sum) का कॉन्सेप्ट है। इस अनूठी प्रणाली के अंतर्गत कोई भी कर्मचारी नौकरी के दौरान ही यह पहले से निर्धारित कर सकेगा कि उसे 60 वर्ष की आयु के बाद हर महीने कितनी पेंशन राशि की आवश्यकता है। कर्मचारी द्वारा तय किए गए इसी वित्तीय लक्ष्य के आधार पर ईपीएफओ का सिस्टम खुद-ब-खुद यह कैलकुलेट करके बता देगा कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर महीने या सालाना कितना अंशदान (Contribution) करना होगा। इसके अलावा, सदस्यों को एक हाई-टेक डिजिटल डैशबोर्ड की सुविधा भी मिलेगी, जहां वे अपने लाइव योगदान, कुल जमा राशि और रिटायरमेंट लक्ष्य की वास्तविक प्रगति को रियल टाइम में ट्रैक कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर अपने लक्ष्य को अपडेट भी कर सकेंगे।एक ही UAN से जुड़ेंगे कई एम्प्लॉयर: एग्रीगेटर कंपनियां और सरकार भी करेंगी मददइस नई व्यवस्था की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल कर्मचारी और उसका मुख्य नियोक्ता ही पैसे जमा नहीं करेंगे। कम आय वाले और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इसमें सरकार, गिग इकोनॉमी की एग्रीगेटर कंपनियां, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड और गैर-सरकारी संगठन (NGO) भी अपनी तरफ से आर्थिक योगदान दे सकेंगे। इसके साथ ही, ईपीएफओ एक ऐसी एडवांस सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था पर काम कर रहा है जिसमें एक ही यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) को एक साथ कई नियोक्ताओं या अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म से लिंक किया जा सकेगा। इसका सीधा फायदा उन युवाओं और फ्रीलांसर्स को होगा जो एक ही समय में कई कंपनियों या ऐप्स के लिए काम करते हैं, क्योंकि उनकी सभी पीएफ और पेंशन राशि एक ही जगह सुरक्षित दिखेगी।एनपीएस (NPS) से कितनी अलग होगी यह योजना: 55 की उम्र के बाद मिलेंगे शानदार विकल्पयह नई प्रस्तावित योजना वर्तमान में चल रही नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से भी काफी अलग और अधिक फ्लेक्सिबल होने की उम्मीद है। जहां एनपीएस में रिटायरमेंट के समय एक बड़ी राशि को अनिवार्य रूप से एन्युटी में बदलना पड़ता है, वहीं ईपीएफओ की इस योजना में 55 वर्ष की आयु पार करने के बाद सदस्यों को यह चुनने का पूरा अधिकार मिलेगा कि वे अपने फंड का इस्तेमाल कैसे करना चाहते हैं। कर्मचारी चाहें तो अपनी मूल राशि को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए केवल उसके ब्याज को हर महीने पेंशन के रूप में ले सकते हैं। यदि उन्हें अधिक पैसों की जरूरत है, तो वे मूल राशि का कुछ हिस्सा निकालने का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसके अलावा, सरकार परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें पति-पत्नी, बच्चों और अनाथ आश्रितों के लिए भी फैमिली व सर्वाइवर पेंशन की मजबूत व्यवस्था शामिल करने पर विचार कर रही है। हालांकि, यह पूरी योजना अभी सरकारी स्तर पर विचाराधीन है और इसके लागू होने की आधिकारिक तारीख की घोषणा होना अभी बाकी है।
8 महीने के बेटे विहान संग शेयर कीं बेहद लाडली तस्वीरें, पति विक्की कौशल को लेकर कही ये बड़ी बात
बॉलीवुड की खूबसूरत 'डीवा' कटरीना कैफ (Katrina Kaif) इन दिनों अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत और अनमोल दौर यानी मदरहुड फेज (Motherhood Phase) का आनंद ले रही हैं। मां बनने के बाद से भले ही कटरीना फिल्म इंडस्ट्री और चकाचौंध से थोड़ी दूरी बनाकर अपने परिवार पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से वह समय-समय पर अपने फैंस को अपनी व्यक्तिगत जिंदगी की खुशियों से रूबरू कराती रहती हैं। हाल ही में, कटरीना कैफ ने 16 जुलाई को अपना जन्मदिन मनाया था, जो उनके जीवन का अब तक का सबसे अनोखा जन्मदिन साबित हुआ। अपने इस खास दिन के तीन दिन बाद, एक्ट्रेस ने अपने 8 महीने के लाडले बेटे विहान (Vihaan) के साथ सेलिब्रेशन की कुछ बेहद दिल छू लेने वाली और अनदेखी तस्वीरें इंटरनेट पर साझा की हैं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं।लाडले विहान संग कटरीना का पहला जन्मदिन: तस्वीरों में दिखा मां-बेटे का बेहद अटूट और निश्छल प्यारकटरीना कैफ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जो तस्वीरें पोस्ट की हैं, उनमें मां और बच्चे के बीच का एक बेहद पावन और गहरा रिश्ता साफ नजर आ रहा है। एक तस्वीर में बॉलीवुड की यह टॉप एक्ट्रेस अपने नन्हे बेबी ब्वॉय विहान के छोटे-छोटे पैरों पर बेहद प्यार से किस (Kiss) करती हुई दिखाई दे रही हैं, तो वहीं एक अन्य मनमोहक तस्वीर में नन्हा विहान अपनी मां के चेहरे को अपने छोटे हाथों से छूकर खेलता हुआ नजर आ रहा है। इन सभी तस्वीरों में कटरीना के चेहरे पर मां बनने का सुकून और एक अनोखी चमक साफ देखी जा सकती है। हालांकि, प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इस स्टार कपल ने अभी तक अपने बेटे का पूरा चेहरा फैंस के सामने रिवील नहीं किया है, जिससे फैंस विहान की एक पूरी झलक पाने के लिए काफी उत्सुक हैं।पति विक्की कौशल के साथ भी बिताया क्वालिटी टाइम: कटरीना ने लिखा एक बेहद इमोशनल और दिल छू लेने वाला नोटजन्मदिन के इस खास एल्बम में केवल मां-बेटे का ही प्यार नहीं, बल्कि पति-पत्नी की खूबसूरत बॉन्डिंग भी देखने को मिली। कुछ तस्वीरों में कटरीना अपने पति और बॉलीवुड स्टार विक्की कौशल (Vicky Kaushal) के साथ फुर्सत के पल बिताती और मुस्कुराती नजर आ रही हैं। इन बेहद हसीन तस्वीरों को दुनिया के साथ साझा करते हुए कटरीना कैफ ने एक बेहद भावुक कैप्शन भी लिखा। उन्होंने अपने बेटे और पति को संबोधित करते हुए लिखा, आप मेरे जीवन के लिए भगवान का सबसे अनमोल और खूबसूरत आशीर्वाद हैं, जिसके लिए मैं हर पल शुक्रगुजार रहती हूं। यह मेरा अब तक का सबसे बेस्ट जन्मदिन है और विक्की, आप भी मेरे लिए किसी अनमोल तोहफे से कम नहीं हैं। कटरीना के इस प्यार भरे संदेश पर फैंस और बी-टाउन के सेलेब्स लगातार दिल वाले इमोजी बनाकर अपना प्यार बरसा रहे हैं।2025 में गूंजी थी इस स्टार कपल के घर किलकारी: बड़े पर्दे पर कटरीना की वापसी का फैंस को है बेसब्री से इंतजारगौरतलब है कि कटरीना कैफ और विक्की कौशल की शादी दिसंबर 2021 में राजस्थान में बेहद शाही अंदाज में हुई थी। इसके बाद, शादी के करीब चार साल बाद 7 नवंबर 2025 को इस स्टार कपल के घर पहली बार किलकारी गूंजी और उन्होंने अपने जीवन में बेटे विहान का स्वागत किया। तब से लेकर अब तक, यानी पिछले 8 महीनों से दोनों ही कलाकार माता-पिता के इस नए फर्ज को पूरी जिम्मेदारी और लगन के साथ निभा रहे हैं। मां बनने की वजह से कटरीना कैफ फिलहाल फिल्मों और शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल से पूरी तरह दूर हैं और अपना पूरा समय विहान की परवरिश में लगा रही हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अपने इस ब्रेक के बाद कटरीना कैफ किस धमाकेदार प्रोजेक्ट के साथ बड़े पर्दे पर वापसी करती हैं।
बॉलीवुड सुपरस्टार आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और शरवरी वाघ (Sharvari Wagh) स्टारर हाई-बजट स्पाई थ्रिलर फिल्म 'अल्फा' (Alpha) को लेकर फैंस और ट्रेड एक्सपर्ट्स के बीच रिलीज से पहले जैसा जबरदस्त बज देखा जा रहा था, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर वैसा करिश्मा दोहराने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। यशराज फिल्म्स (YRF Spy Universe) की इस महत्वाकांक्षी फिल्म से मेकर्स को उम्मीद थी कि यह बड़े पर्दे पर तहलका मचाएगी, लेकिन 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद से ही फिल्म दर्शकों को खींचने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। रही-सही कसर हालिया रिलीज फिल्मों ने पूरी कर दी है। अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर 'वेलकम टू द जंगल' के बाद अब सिनेमाघरों में अजय देवगन की मच-अवेटेड कॉमेडी ड्रामा 'धमाल 4' (Dhamaal 4) दस्तक दे चुकी है, जिसने 'अल्फा' के बॉक्स ऑफिस पर टिके रहने की बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।तीसरे वीकेंड में भी बेदम रही 'अल्फा': 16वें दिन का शनिवार कलेक्शन आया सामनेफिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ के ताबड़तोड़ एक्शन और विलेन के रूप में बॉबी देओल (Bobby Deol) की शानदार एक्टिंग को क्रिटिक्स व दर्शकों की तरफ से मिली-जुली (Mixed) प्रतिक्रिया तो मिली, लेकिन यह तारीफ बिजनेस में तब्दील नहीं हो पाई। भारी-भरकम बजट में बनी यह फिल्म अपने तीसरे वीकेंड में भी दर्शकों को थिएटर्स तक लाने में हांफती नजर आई। बॉक्स ऑफिस ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क (Sacnilk.com) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म 'अल्फा' ने अपने रिलीज के 16वें दिन (शनिवार) को महज ₹0.45 करोड़ (45 लाख रुपये) का बेहद कमजोर कलेक्शन दर्ज किया है। इससे ठीक एक दिन पहले, यानी 15वें दिन (शुक्रवार) को फिल्म का बिजनेस सिर्फ ₹0.25 करोड़ पर सिमट गया था, जो साफ दिखाता है कि अब दर्शकों ने इस फिल्म से पूरी तरह दूरी बना ली है।दो हफ्तों में ही बोरिया-बिस्तर समेटने की नौबत: बजट निकालना भी मेकर्स के लिए हुआ मुश्किलअगर फिल्म के अब तक के सफर पर नजर डालें, तो 'अल्फा' ने बॉक्स ऑफिस पर अपने ओपनिंग डे पर ₹9.25 करोड़ के साथ एक औसत शुरुआत की थी। इसके बाद पहले हफ्ते में फिल्म ने किसी तरह ₹47.45 करोड़ का नेट बिजनेस किया। लेकिन असली गिरावट इसके दूसरे हफ्ते में देखने को मिली, जब फिल्म का कलेक्शन धड़ाम से गिरकर केवल ₹8.95 करोड़ पर आकर रुक गया। 16 दिनों की लगातार कोशिशों के बाद भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 'अल्फा' का कुल नेट कलेक्शन (India Net Collection) अब तक लगभग ₹57.10 करोड़ रुपये तक ही पहुंच सका है। फिल्म के भारी-भरकम प्रोडक्शन और वीएफएक्स कॉस्ट को देखते हुए इस आंकड़े को ट्रेड पंडित एक बड़ी विफलता मान रहे हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि फिल्म बहुत जल्द सिनेमाघरों से पूरी तरह उतर जाएगी।वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स का हिस्सा है फिल्म: ऋतिक रोशन का कैमियो भी नहीं बचा पाया नैया'अल्फा' को नेटफ्लिक्स की बेहद लोकप्रिय और सराहनीय सीरीज 'द रेलवे मैन' फेम डायरेक्टर शिव रवैल (Shiv Rawail) ने निर्देशित किया है। वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला केंद्रित इस फिल्म में आलिया और शरवरी के अलावा अनिल कपूर और बॉबी देओल जैसे पावरहाउस परफॉर्मर्स मुख्य भूमिकाओं में हैं। दर्शकों को सरप्राइज देने के लिए फिल्म में सुपरस्टार ऋतिक रोशन (Hrithik Roshan) का एक स्पेशल कैमियो भी रखा गया था, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और सुस्त कहानी के चलते यह स्टार पावर भी फिल्म को डूबने से नहीं बचा सकी।बॉक्स ऑफिस पर 'धमाल 4' और 'वेलकम टू द जंगल' का डबल अटैक: कॉम्पिटिशन में पिछड़ी 'अल्फा''अल्फा' के फ्लॉप होने के पीछे सिनेमाघरों में लगातार हो रही बड़ी रिलीज को भी एक मुख्य कारण माना जा रहा है। इस फिल्म का मुकाबला रिलीज के साथ ही शाहिद कपूर की सस्पेंस ड्रामा 'कॉकटेल 2', अक्षय कुमार की भारी भरकम 'वेलकम टू द जंगल', कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता', दिलजीत दोसांझ की 'मैं वापस आऊंगा' और हॉरर जॉनर की 'हॉन्टेड 3डी इकोज ऑफ द पास्ट' से हुआ। इस मल्टी-कॉम्पिटिशन के बीच हाल ही में रिलीज हुई अजय देवगन की 'धमाल 4' ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तगड़ा कब्जा जमाया है कि 'अल्फा' के लिए अब स्क्रीन्स और शोज बचा पाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि जन-जागरूकता और समय रहते की गई तैयारी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम, बेहतर समन्वय और लोगों में जागरूकता के जरिए जन-धन की हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस समय की एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राज्य के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (CM C. Joseph Vijay) की करप्शन के खिलाफ जारी मुहिम ने अब बेहद आक्रामक रूप अख्तियार कर लिया है। भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री के निर्देश पर चेन्नई नगर निगम (GCC) के सात वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (Suspended) कर उनके खिलाफ आपराधिक एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। इन सभी अधिकारियों पर सरकारी पदों का दुरुपयोग कर भारी भ्रष्टाचार और संदिग्ध लेन-देन करने के गंभीर आरोप हैं। विजिलेंस टीम द्वारा पिछले हफ्ते चेन्नई के दो प्रमुख जोन में अचानक की गई छापेमारी के बाद यह बड़ी प्रशासनिक गाज गिरी है, जिसने पूरे सूबे के भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया है।गूगल पे (GPay) पर खुली रिश्वत की पोल: असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के फोन ने उगले सारे राजइस पूरी छापेमारी और विजिलेंस जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला और आधुनिक डिजिटल भ्रष्टाचार का मामला तब सामने आया, जब जांच टीम ने एक असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के मोबाइल फोन की बारीकी से पड़ताल की। नगर निगम के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि छापेमारी के वक्त यह इंजीनियर अपने गूगल पे (Google Pay) अकाउंट पर प्राप्त हुए ₹2.39 लाख के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन का कोई भी वैध वित्तीय हिसाब-किताब नहीं दे पाया। तकनीकी जांच में यह साफ हो गया कि यह रकम रिश्वत के तौर पर सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी डीवीएसी (DVAC) ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट चेन्नई नगर निगम कमिश्नर को सौंपी, जिसके तुरंत बाद इन सभी सात अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए।उत्तर और मध्य चेन्नई के इन वीआईपी इलाकों में हुई छापेमारी: लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतेंविजिलेंस और डीवीएसी की यह संयुक्त गुप्त छापेमारी उत्तर और मध्य चेन्नई के दो सबसे व्यस्त और वीआईपी जोन में एक साथ की गई थी। इस कार्रवाई के दायरे में मुख्य रूप से जोन-6 (जिसके अंतर्गत कोलाथुर, अयानवरम और पेराम्बुर इलाके आते हैं) और जोन-9 (जिसमें मायलापुर, थाउजेंड लाइट्स और नुंगमबक्कम जैसे पॉश इलाके शामिल हैं) आए हैं। इन क्षेत्रों के स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों द्वारा लंबे समय से सरकारी कामों के एवज में अवैध वसूली और प्रताड़ना की शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को मिल रही थीं, जिसके बाद विजिलेंस विभाग ने पूरी योजना बनाकर इन भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथों दबोचने के लिए जाल बिछाया था।नौकरी के बदले घूस और फर्जी बिलिंग का खेल: अब सिर्फ सस्पेंशन नहीं, सीधे होगी परमानेंट बर्खास्तगीचेन्नई नगर निगम के भीतर पिछले कुछ दिनों के भीतर सरकार का यह दूसरा सबसे बड़ा और कड़ा क्रैकडाउन माना जा रहा है। इससे महज कुछ दिन पहले ही छह अन्य अधिकारियों को गंभीर रिश्वतखोरी, फर्जी बिलिंग घोटाले और युवाओं से नौकरी के बदले मोटी रकम वसूलने वाले रैकेट में संलिप्त पाए जाने के बाद सस्पेंड किया गया था। सचिवालय के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने साफ कर दिया है कि यदि विभागीय और न्यायिक जांच के दौरान इन अधिकारियों पर लगे आरोप पूरी तरह सिद्ध हो जाते हैं, तो सरकार इन्हें सिर्फ सस्पेंशन की मामूली सजा देकर नहीं छोड़ेगी। इन सभी दागी और भ्रष्ट कर्मचारियों को सरकारी सेवा से हमेशा के लिए सीधे बर्खास्त (Dismissed from Service) करने की कानूनी तैयारी पूरी कर ली गई है।अपनी ही पार्टी टीवीके (TVK) के नेता को भी नहीं बख्शा: सीएम विजय ने पेश की ईमानदारी की मिसालमुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की यह भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम सिर्फ सरकारी दफ्तरों या अधिकारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह संदेश दे दिया है कि करप्शन के मामले में वह अपनों को भी कतई नहीं बख्शेंगे। हाल ही में मुख्यमंत्री की अपनी राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के एक स्थानीय पंचायत नेता का सरेआम रिश्वत लेते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम विजय ने पुलिस में औपचारिक एफआईआर दर्ज होने से पहले ही त्वरित एक्शन लिया और उस नेता को प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिसने जनता के बीच उनकी जीरो-टॉलरेंस नीति की साख को और मजबूत कर दिया है।जनता सीधे विजिलेंस को भेजेगी वीडियो: सरकार ने जारी किया ऑफिशियल व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबरभ्रष्टाचार की इस लड़ाई में आम जनता को सीधे भागीदार बनाने के लिए विजय सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है। डीवीएसी (DVAC) की सीधी देखरेख में एक आधिकारिक और विशेष व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर (WhatsApp Helpline Number) जारी किया गया है। अब राज्य का कोई भी नागरिक यदि किसी भी सरकारी दफ्तर में काम कराने के एवज में रिश्वत मांगे जाने की समस्या से जूझता है, तो वह सीधे इस नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इस आधुनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतकर्ता घूसखोरी से जुड़े लाइव फोटो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो या कोई भी डिजिटल सबूत सीधे उच्च विजिलेंस अधिकारियों को सुरक्षित भेज सकते हैं, जिस पर 24 घंटे के भीतर तुरंत कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
ओमिक्रॉन RF.5 ने बढ़ाई कडप्पा जिले में टेंशन, एक्सपर्ट्स ने बताया यह कितना है खतरनाक
देश में कोरोना वायरस (Covid-19) के मामलों में एक बार फिर से उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हो गया है, जिसने स्वास्थ्य विभागों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य के कडप्पा जिले में अचानक बढ़े कोविड मरीजों के पीछे कोरोना के एक बिल्कुल नए सब-वेरिएंट 'ओमिक्रॉन आरएफ.5' (Omicron RF.5) को जिम्मेदार पाया गया है। जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक बदलाव) के कारण सामने आए इस वेरिएंट की पुष्टि तब हुई जब कडप्पा जिले से लिए गए चार संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए पुणे स्थित देश की प्रतिष्ठित लैब 'नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी' (NIV Pune) भेजे गए थे। वहां की गई गहन जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) में आधिकारिक तौर पर ओमिक्रॉन आरएफ.5 वेरिएंट की मौजूदगी पाई गई है। इस नई रिपोर्ट के सामने आते ही मेडिकल जगत में हलचल तेज हो गई है।कितना जानलेवा है ओमिक्रॉन आरएफ.5: मेडिकल डायरेक्टर ने दी राहत भरी जानकारीपूरी दुनिया में समय-समय पर कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट के अलग-अलग रूप (सब-वेरिएंट) सामने आते रहे हैं। इस नए वायरस की घातकता को लेकर आंध्र प्रदेश के मेडिकल एजुकेशन डायरेक्टर विष्णुवर्धन ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि SARC-CoV-2 की नियमित सर्विलांस के दौरान इस सब-वेरिएंट पर पैनी नजर रखी जा रही थी और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी वैश्विक स्तर पर इस पर मॉनिटरिंग कर रहा है। इससे पहले यह वेरिएंट सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई अन्य देशों में भी तेजी से फैल चुका है। राहत की बात यह है कि अब तक हुए सभी वैज्ञानिक परीक्षणों और रिसर्च के मुताबिक, यह आरएफ.5 वेरिएंट ओमिक्रॉन के शुरुआती या अन्य वेरिएंट्स की तुलना में बिल्कुल भी ज्यादा खतरनाक नहीं है। इसलिए आम जनता को किसी भी तरह से घबराने या पैनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है।कैसे बना यह नया म्यूटेशन: स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को किया हाई अलर्टआंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा की गई तकनीकी जानकारी के अनुसार, ओमिक्रॉन का यह नया रूप पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से म्यूटेट होकर बना है। यह मूल रूप से जेएन.1 (JN.1) वेरिएंट के एलएफ.7 (LF.7) और पीवाई 1.1.1.1 (PY 1.1.1.1) ब्रांच से विकसित हुआ है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भले ही यह वायरस सामान्य लोगों के लिए घातक नहीं है, लेकिन जो लोग पहले से ही किसी गंभीर क्रोनिक बीमारी (जैसे शुगर, हार्ट या किडनी की समस्या) से ग्रसित हैं, उनके लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कमजोर कर देता है। आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने और सभी आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों व बिस्तरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।गले में खराश और बदन दर्द: इन लक्षणों को पहचानकर तुरंत कराएं कोविड टेस्टस्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ओमिक्रॉन आरएफ.5 सब-वेरिएंट के लक्षण भी कोरोना के पुराने वेरिएंट्स से काफी मिलते-जुलते हैं। यदि किसी व्यक्ति को लगातार गले में खराश, तेज बुखार, सिरदर्द, नाक बहना, अत्यधिक कमजोरी या पूरे शरीर और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो रही है, तो उसे इन लक्षणों को कतई हल्के में नहीं लेना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि ऐसे लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत अपनी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर कोविड-19 रैपिड या आरटी-पीसीआर जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट आने तक खुद को होम आइसोलेशन में रखना चाहिए ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को आंध्र प्रदेश में सक्रिय कोरोना मरीजों की कुल संख्या 16 दर्ज की गई थी, जिन पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के शासकीय चंद्रशेखर आजाद हायर सेकेंडरी स्कूल में कथित तौर पर एक छात्र द्वारा अपने साथियों को चॉकलेट बताकर संदिग्ध प्रतिबंधित दवा देने का मामला सामने आया है। दवा के सेवन के बाद आठ छात्र बीमार पड़ गए। सभी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जबकि एक छात्र की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया। पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
परिसीमन विधेयक पर NDA को मिला DMK का साथ! सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के वॉकआउट के बीच हुआ बड़ा खेला
संसद के आगामी मॉनसून सत्र 2026 (Monsoon Session) की शुरुआत से ठीक पहले बुलाई गई पारंपरिक सर्वदलीय बैठक में देश की राजनीति को प्रभावित करने वाला एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। सोमवार से शुरू हो रहे सत्र के सुचारू संचालन के लिए केंद्र सरकार द्वारा आयोजित इस रणनीतिक बैठक में विपक्ष ने शुरुआत में बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने का तीखा विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, कुछ ही समय बाद विपक्षी नेता चर्चा के लिए वापस लौटे, जिसके बाद विधायी कार्यों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक समीकरण देखने को मिला। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने देश के सबसे संवेदनशील 'परिसीमन विधेयक' (Delimitation Bill) पर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को एक खास शर्त के साथ समर्थन देने के संकेत दे दिए हैं, जिसने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है।महिला आरक्षण और परिसीमन पर डीएमके का नया रुख: दक्षिण भारत के हितों की रक्षा के लिए रखी बड़ी शर्तसर्वदलीय बैठक में डीएमके के वरिष्ठ नेता और सांसद तिरुची शिवा ने महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के पुनर्गठन यानी परिसीमन के मुद्दे को बेहद आक्रामक तरीके से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द लागू करना चाहिए। डीएमके की मांग है कि यह महिला आरक्षण वर्तमान निचले सदन (लोकसभा) के संख्याबल के आधार पर ही तुरंत दिया जाना चाहिए, न कि नए परिसीमन का इंतजार किया जाए। बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए तिरुची शिवा ने कहा कि परिसीमन की कवायद से दक्षिणी राज्यों (Southern States) के प्रतिनिधित्व पर कोई प्रतिकूल या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। यदि इस प्रक्रिया से दक्षिण भारत की राजनीतिक हिस्सेदारी कम होती है, तो सरकार को इस ऐतिहासिक कवायद को अगले 25 वर्षों के लिए पूरी तरह स्थगित कर देना चाहिए।तमिलनाडु के बदले राजनीतिक समीकरण: 'इंडिया' गठबंधन से दूरी और कांग्रेस से अलगाव की इनसाइड स्टोरीराजनीतिक गलियारों में डीएमके के इस बदले हुए रुख को तमिलनाडु की आंतरिक राजनीति में आए एक बड़े भूचाल से जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि इस साल 17 अप्रैल को डीएमके ने परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान किया था, लेकिन अब पार्टी का स्टैंड पूरी तरह बदलता दिख रहा है। हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, जहां कांग्रेस ने डीएमके का हाथ छोड़कर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के साथ एक नया और मजबूत गठबंधन बना लिया है। कांग्रेस के इस कदम के बाद डीएमके ने भी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन से अपनी दूरियां बढ़ा ली हैं, जिसके कारण अब संसद में मोदी सरकार के इस महत्वाकांक्षी विधेयक पर डीएमके का रुख बेहद निर्णायक और गेम-चेंजर साबित होने वाला है।राम मंदिर चढ़ावा चोरी, सोनम वांगचुक का अनशन और पेपर लीक: सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने सरकार को घेराइस हाई-प्रोफाइल सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू समेत विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, कोडिकुनिल सुरेश और समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव जैसे दिग्गज शामिल हुए। बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने के लिए कई ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों की झड़ी लगा दी। सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और चोरी का मामला, लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन, देश की विदेश नीति, हालिया पेपर लीक विवाद और बेरोजगारी जैसे विषयों पर विपक्ष ने सरकार से विस्तृत जवाब और संसद में विशेष चर्चा की मांग की है।'वंदे मातरम्' के अपमान पर जेल: मॉनसून सत्र 2026 में आ रहा है बेहद सख्त कानूनसंसद के इस मॉनसून सत्र के दौरान मोदी सरकार कई महत्वपूर्ण और नए विधायी कार्य पूरे करने के मूड में दिखाई दे रही है। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, इस सत्र में 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' को पेश करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह नया कानून मूल राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में एक बड़ा और कड़ा संशोधन करेगा। इस ऐतिहासिक विधेयक के माध्यम से सरकार देश के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का जानबूझकर अपमान करने, उसका अनादर करने या उसके सामूहिक गायन में किसी भी प्रकार की बाधा डालने की घटना को एक गंभीर और दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल करना चाहती है, जिस पर सदन में भारी बहस होने की पूरी उम्मीद है।
MP में UCC बिल को कैबिनेट की मंजूरी, CM डॉ. मोहन यादव ने बताई बड़ी बातें
मध्यप्रदेश में मोहन यादव कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) बिल को मंजूरी दे दी है। अब यह विधेयक 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश किया जाएगा। सीएम डॉ. यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज का दिन कई कारणों ...
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने यूसीसी ड्राफ्ट बिल को दी मंजूरी, अब विधानसभा के मानसून सत्र में होगा पेश
एमपी कैबिनेट ने यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है। अब यह विधेयक मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होगा। जानिए UCC ड्राफ्ट की प्रमुख बातें, आदिवासियों को मिली छूट और सरकार का पूरा प्लान।
संसद के मॉनसून सत्र से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। संसद मार्च को अनुमति नहीं मिली, संसद क्षेत्र में धारा 163 लागू, मल्टी-लेयर सुरक्षा और ट्रैफिक एडवाइजरी जारी।

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