एसआईआर विवाद: सीईसी के इस्तीफे को लेकर घमासान तेज, मजिस्ट्रेट के सामने आज पेश किए जाएंगे सीजेपी नेता
एसआईआर विवाद: सीईसी के इस्तीफे को लेकर घमासान तेज, मजिस्ट्रेट के सामने आज पेश किए जाएंगे सीजेपी नेता- SIR Controversy Uproar intensifies over CEC resignation CJP leaders to be produced before magistrate today
वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर के चलते विदेशी मुद्रा बाजार में मची उथल-पुथल के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार और केंद्रीय बैंक का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) घरेलू मुद्रा में अत्यधिक और अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को थामने के लिए पूरी तरह सतर्क है और आगे भी बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार आवश्यक विनियामक कदम उठाता रहेगा।वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक की प्राथमिकता रुपये के किसी एक निश्चित स्तर (Fixed Level) का कृत्रिम रूप से बचाव करना नहीं है। केंद्रीय बैंक का मूल उद्देश्य मुद्रा बाजार में एक व्यवस्थित, संतुलित और पारदर्शी माहौल सुनिश्चित करना है ताकि अचानक आने वाले बाहरी झटकों से देश के आयातकों, निर्यातकों और आम वित्तीय तंत्र को नुकसान न पहुंचे।रुपये पर दबाव के पीछे घरेलू नहीं, बाहरी वैश्विक कारण जिम्मेदारवित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि पिछले एक से डेढ़ साल के दौरान भारतीय रुपये की विनिमय दर में जो गिरावट या दबाव देखने को मिला है, उसके पीछे घरेलू अर्थव्यवस्था की कोई कमजोरी नहीं है। इसके पीछे के अधिकांश कारक देश की सीमाओं के बाहर वैश्विक स्तर पर उपजे हैं। अमेरिका में ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आए उछाल और मिडिल ईस्ट में लाल सागर संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक लागत बढ़ी है, जिससे दुनिया भर की प्रमुख मुद्राओं पर डॉलर के मुकाबले दबाव बना हुआ है।सीतारमण ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे (Macroeconomic Fundamentals) पूरी तरह मजबूत हैं। देश में राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) का सख्ती से पालन हो रहा है, चालू खाता घाटा नियंत्रण में है और विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त स्तर पर मौजूद है।सट्टेबाजी रोकने और डॉलर की मांग घटाने के लिए RBI के कड़े कदमरुपये को स्थिरता देने और मुद्रा बाजार में डॉलर की तात्कालिक मांग को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ दिनों में कई बड़े नीतिगत फैसले लिए हैं:फॉरेक्स डेरिवेटिव्स नियमों में सख्ती: आरबीआई ने नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) और करेंसी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के नियमों को कड़ा कर दिया है, ताकि रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी (Speculative Bets) करने वालों पर लगाम लगाई जा सके। गिफ्ट सिटी (IFSC) में सक्रिय बैंकों और प्राथमिक डीलरों को केवल वास्तविक हेजिंग (Hedging) के लिए ही डेरिवेटिव्स की अनुमति दी गई है।बैंकों के लिए आरक्षित प्रावधान: केंद्रीय बैंक ने बैंकों को $2 लाख से अधिक की डॉलर खरीद पर 20 प्रतिशत का अतिरिक्त आरक्षित प्रावधान करने का निर्देश दिया है, जिससे बिना जरूरत के डॉलर जमाखोरी पर रोक लगे।ओएमसी के लिए विशेष डॉलर विंडो: सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कच्चे तेल के आयात के लिए भारी मात्रा में डॉलर की आवश्यकता होती है। जब ये कंपनियां हाजिर बाजार (Spot Market) से अचानक डॉलर खरीदने उतरती हैं, तो रुपये पर भारी दबाव बनता है। आरबीआई ने इनके लिए एक अलग तंत्र तैयार किया है ताकि हाजिर बाजार पर एकमुश्त दबाव न आए।डॉलर का इनफ्लो बढ़ाने के उपाय: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के रास्ते आसान किए गए हैं और बैंकों के जरिए विदेशी मुद्रा अनिवासी जमाराशियों (FCNR-B Deposits) को बढ़ावा दिया गया है।आरबीआई के एक्शन का बाजार में दिखा तत्काल असरआरबीआई द्वारा सप्ताहांत में उठाए गए इन कड़े नियामक कदमों और वित्त मंत्री के स्पष्ट बयान का सकारात्मक असर मुद्रा बाजार पर तुरंत दिखाई दिया। हफ्ते के शुरुआती कारोबारी सत्रों में रुपया तेजी से संभला और मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 77 पैसे मजबूत होकर 95.05 और 94.96 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि डेरिवेटिव्स बाजार से सटोरियों के बाहर होने से रुपये में अस्वाभाविक तेज गिरावट पर ब्रेक लगा है और डॉलर की आपूर्ति सामान्य हो रही है।शेयर बाजार में LTCG और STT पर भी दिया सकारात्मक संकेतइसी कार्यक्रम के दौरान जब वित्त मंत्री से शेयर बाजार में निवेशकों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में बदलाव की मांग पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत सकारात्मक रुख दिखाया। सीतारमण ने कहा कि इन टैक्स संरचनाओं पर बाजार सहभागियों और घरेलू व विदेशी निवेशकों से कई सुझाव मिल रहे हैं और वे इन सुझावों पर पूरी गंभीरता से विचार कर रही हैं। चूंकि आगामी बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, ऐसे में सरकार वित्तीय बाजारों के हित और निवेश को प्रोत्साहित करने वाले सभी तार्किक विकल्पों पर खुली चर्चा के लिए तैयार है।उद्योग और निर्यातकों के लिए आगे का दृष्टिकोणवित्त मंत्री ने दोहराया कि सरकार और आरबीआई का संयुक्त प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी वैश्विक झटकों से अप्रभावित रहे। एक स्थिर और व्यवस्थित विनिमय दर व्यवस्था से भारतीय निर्यातकों को अपने विदेशी ऑर्डर्स की अग्रिम योजना बनाने में आसानी होगी, वहीं आयातकों को मुद्रा अवमूल्यन के कारण होने वाली अतिरिक्त लागत से सुरक्षा मिलेगी। केंद्रीय बैंक की सतत निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि सट्टेबाजी के कारण मुद्रा बाजार में कोई कृत्रिम उथल-पुथल न पैदा हो सके।
त्योहारी सीजन में सोने के आभूषण खरीदने की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं और निवेशकों के लिए नवरात्रि का चौथा दिन बड़ी राहत लेकर आया है। देश भर के सर्राफा बाजारों में पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी पर ब्रेक लग गया है और सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर दक्षिण भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्र चेन्नई तक 24 कैरेट शुद्ध सोने (99.9% शुद्धता) का भाव ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है। नवरात्रि के पावन पर्व पर मां कुष्मांडा के पूजन के साथ शुरू हुए आज के कारोबारी दिन में खुदरा खरीदारों के चेहरों पर चमक लौट आई है, क्योंकि पिछले सप्ताह सोना ₹1.51 लाख से ₹1.52 लाख के रिकॉर्ड उच्च स्तर के पार चला गया था। घरेलू वायदा बाजार (MCX) पर भी सुस्त वैश्विक संकेतों के चलते बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है, जिससे खुदरा बाजारों में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में नरमी का रुख बना हुआ है।दिल्ली से चेन्नई तक प्रमुख शहरों में क्या हैं आज के ताजा रेट्सदेश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय वैट (VAT), ऑक्ट्रॉय और परिवहन लागत के कारण सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिलता है। हालांकि, आज देश के लगभग सभी बड़े महानगरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट दोनों श्रेणियों में कीमतें नीचे आई हैं:राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली: दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,49,430 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जो कल ₹1,49,440 था। वहीं गहने बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,36,980 से ₹1,36,990 प्रति 10 ग्राम दर्ज की जा रही है। 18 कैरेट सोना भी गिरकर ₹1,12,070 प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है।चेन्नई और तमिलनाडु: दक्षिण भारत के सबसे बड़े आभूषण बाजार चेन्नई में भी सोने के तेवर ढीले पड़े हैं। चेन्नई में आज 24 कैरेट सोना ₹1,49,280 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,36,840 प्रति 10 ग्राम पर आ गई है।मुंबई और आर्थिक राजधानी क्षेत्र: मुंबई के प्रसिद्ध झावेरी बाजार में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1,49,300 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर स्थिर है, जबकि 22 कैरेट सोना ₹1,36,850 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है।कोलकाता और पूर्वी भारत: कोलकाता में 24 कैरेट सोना ₹1,49,350 और 22 कैरेट जेवराती सोना ₹1,36,900 प्रति 10 ग्राम के आसपास दर्ज किया गया है।लखनऊ और उत्तर प्रदेश: नवाबों के शहर लखनऊ में 24 कैरेट शुद्ध सोने की दर ₹1,49,430 और 22 कैरेट का भाव ₹1,36,980 प्रति 10 ग्राम पर स्थिर देखा गया है।आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम? समझें 4 बड़े वैश्विक और घरेलू कारणसोने की कीमतों में आई इस हालिया गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर कई अहम आर्थिक कारक एक साथ काम कर रहे हैं:मुनाफावसूली (Profit Booking): पिछले पखवाड़े में सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। जब भी कोई कमोडिटी अपने रिकॉर्ड स्तर को छूती है, तो बड़े संस्थागत निवेशक और हैज फंड्स मुनाफावसूली शुरू करते हैं। विदेशी बाजारों (कॉमेक्स) में निवेशकों द्वारा की गई भारी बिकवाली का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार पर पड़ा है।अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव के कारण गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति (Non-yielding asset) जैसे सोने में संस्थागत प्रवाह धीमा हुआ है। जब वैश्विक निवेशक बॉन्ड मार्केट की ओर रुख करते हैं, तो सोने की हाजिर मांग पर दबाव बन जाता है।पश्चिम एशिया में कूटनीतिक वार्ताओं की उम्मीद: यमन और लाल सागर क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय मध्यस्थों की ओर से कूटनीतिक वार्ताओं की खबरों ने युद्ध के तात्कालिक जोखिम प्रीमियम (Risk Premium) को थोड़ा कम किया है, जिससे सोने में 'सेफ हेवन' बाइंग में कुछ ठहराव आया है।घरेलू आयात शुल्क कटौती का असर: केंद्र सरकार द्वारा हाल के बजट में सोने और चांदी पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को युक्तिसंगत बनाए जाने के बाद से अवैध तस्करी पर लगाम लगी है और घरेलू बाजार में आपूर्ति की स्थिति बेहतर बनी हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर अचानक कृत्रिम कमी पैदा नहीं हो रही है।नवरात्रि, करवा चौथ और धनतेरस पर खरीदारी की बहारभारतीय संस्कृति में नवरात्रि के नौ दिन, करवा चौथ और उसके बाद आने वाले धनतेरस व दीपावली के पावन पर्व को कीमती धातुओं की खरीदारी के लिए सबसे शुभ काल माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इन दिनों में सोना या चांदी घर लाना मां लक्ष्मी और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार, भाव के ₹1.50 लाख से नीचे आने का सीधा मनोवैज्ञानिक फायदा खुदरा बाजार को मिल रहा है। जो परिवार आगामी शादी-ब्याह के सीजन के लिए आभूषण खरीदने से झिझक रहे थे, वे अब दुकानों और बड़े शोरूमों का रुख कर रहे हैं। तनिष्क, कल्याण ज्वैलर्स, मालाबार गोल्ड और पीसी ज्वैलर जैसे बड़े रिटेलर्स ने भी नवरात्रि के अवसर पर मेकिंग चार्ज पर 20% से 50% तक की छूट की घोषणा की है, जिससे ग्राहकों को दोहरा लाभ मिल रहा है।24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट में क्या है अंतर?खुदरा खरीदारी करते समय ग्राहकों को अक्सर कैरेट (Carat) के गणित में भ्रम हो जाता है:24 कैरेट (99.9% शुद्ध): इसे सबसे शुद्ध सोना माना जाता है और इसका आधिकारिक हॉलमार्क कोड '999' होता है। चूंकि यह बहुत लचीला और मुलायम होता है, इसलिए इसका उपयोग आभूषण बनाने में नहीं किया जाता। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सोने के सिक्के, बार और बिस्कुट (सॉलिड गोल्ड) के रूप में निवेश के लिए होता है।22 कैरेट (91.6% शुद्ध): भारतीय पारंपरिक शादी के आभूषण बनाने के लिए 22 कैरेट सोना सबसे मुफीद होता है, जिसका हॉलमार्क कोड '916' है। इसमें 91.6% शुद्ध सोना और शेष 8.4% तांबा या चांदी जैसी मजबूत धातुएं मिलाई जाती हैं ताकि गहनों को मजबूती मिल सके।18 कैरेट (75.0% शुद्ध): इसका हॉलमार्क कोड '750' होता है। हीरे और कुंदन जड़े आधुनिक व हल्के आभूषणों (Diamond & Studded Jewellery) के लिए इसका उपयोग सर्वाधिक किया जाता है। यह 22 कैरेट की तुलना में कठोर और किफायती होता है।हॉलमार्किंग और पक्के बिल के बिना कभी न खरीदें सोनाभारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कड़े नियमों के तहत देश भर में सोने के आभूषणों पर 6 अंकों का 'HUID' (Hallmark Unique Identification) कोड अनिवार्य कर दिया गया है। आभूषण खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:तीन निशान जांचें: सोने के हर गहने पर बीआईएस का त्रिकोणीय लोगो, शुद्धता का ग्रेड (जैसे 22K916 या 18K750) और 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक HUID कोड खुदा होना चाहिए।बीआईएस केयर ऐप (BIS Care App): ग्राहक अपने मोबाइल में बीआईएस केयर ऐप डाउनलोड करके आभूषण पर दर्ज 6 अंकों के HUID कोड को स्कैन कर सकते हैं। इससे स्क्रीन पर तुरंत ज्वेलर का नाम, लाइसेंस नंबर और हॉलमार्किंग की तारीख सामने आ जाती है।पक्का जीएसटी बिल लें: बिना बिल के नकद खरीदारी से हमेशा बचें। पक्के बिल में सोने का शुद्ध वजन, मेकिंग चार्ज और 3% जीएसटी का अलग-अलग विवरण होना चाहिए। यदि भविष्य में कभी उसी आभूषण को बदलना या बेचना पड़े, तो पक्का बिल होने पर ज्वेलर पूरे वजन और शुद्धता का सही मूल्य चुकाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होता है।क्या अभी खरीदारी का सही समय है या और गिरेंगे भाव?कमोडिटी और बुलियन बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान गिरावट एक स्वस्थ तकनीकी सुधार (Healthy Correction) है। ऐतिहासिक रूप से अक्टूबर से दिसंबर के दौरान त्योहारों और शादियों के चलते भारत में सोने की मांग सबसे चरम पर रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई, ब्याज दरों की अनिश्चितता और डॉलर की संभावित नरमी को देखते हुए लंबी अवधि में सोने का बुनियादी ढांचा (Long-term Fundamentals) बेहद मजबूत बना हुआ है। यदि आप धनतेरस या शादी के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो किसी बड़े क्रैश का इंतजार करने के बजाय मौजूदा गिरावट में टुकड़ों-टुकड़ों (Staggered Manner) में खरीदारी करना सबसे सुरक्षित और विवेकपूर्ण रणनीति होगी।
भारत सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भर बनने के लिए बड़े निवेश कर रहा है। इससे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, इसमें कई बड़ी चुनौतियां भी हैं।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष के टैक्स ऑडिट अनुपालन को लेकर एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान को 'सक्षम नज' (Saksham Nudge Campaign) नाम दिया गया है। विभाग के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स टूल्स ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट्स में व्यापक स्तर पर तकनीकी और तथ्यात्मक खामियां पकड़ी हैं। इसके आधार पर देश भर के 12,000 से अधिक चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs), टैक्स प्रोफेशनल्स और संबंधित करदाताओं को सीधे ईमेल संदेश और ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'कम्युनिकेशन अलर्ट' भेजे गए हैं। विभाग ने ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज ब्योरे और वास्तविक वित्तीय लेन-देन के बीच के अंतर को तुरंत सुधारने के लिए 21 अक्टूबर 2026 की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है।क्या है 'सक्षम नज' अभियान और आयकर विभाग की यह पहलपारंपरिक रूप से आयकर विभाग किसी भी विसंगति पर सीधे कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) या धारा 148 के तहत जांच शुरू करता रहा है। हालांकि, 'नज थ्योरी' (Nudge Theory) के तहत विभाग ने एक सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई से पहले करदाताओं और पेशेवरों को एक मौका देने का फैसला किया है। 'सक्षम' अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऑडिट रिपोर्ट में अनजाने में हुई लिपिकीय गलतियों, गलत कॉलम में डेटा भरने या विवरण छूट जाने की स्थिति में प्रोफेशनल खुद आगे आकर इसे संशोधित कर लें। सीबीडीटी का यह संदेश स्पष्ट है कि यदि निर्धारित तारीख तक डेटा का मिलान दुरुस्त नहीं किया गया, तो विभाग संबंधित मामलों को स्क्रूटनी और भारी पेनाल्टी के दायरे में लाएगा।किन रिपोर्ट्स में पाई गईं सबसे बड़ी गड़बड़ियां: फॉर्म 10B और 10BB पर फोकसआयकर विभाग द्वारा जारी ईमेल अलर्ट मुख्य रूप से धर्मार्थ, धार्मिक ट्रस्टों, शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सा संस्थाओं और धारा 12A/12AB या 10(23C) के तहत पंजीकृत गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) के ऑडिट से जुड़े हैं।विभाग के अनुसार गड़बड़ियां मुख्य रूप से इन दो फॉर्म्स में सामने आई हैं:फॉर्म 10B (Form 10B): उन बड़े ट्रस्टों और संस्थाओं के लिए जिनकी वार्षिक आय ₹5 करोड़ से अधिक है, या जिन्होंने वित्त वर्ष के दौरान विदेश से कोई अंशदान (Foreign Contribution) प्राप्त किया है, अथवा जिन्होंने भारत से बाहर किसी फंड का उपयोग किया है।फॉर्म 10BB (Form 10BB): उन ट्रस्टों और संस्थानों के लिए जिनकी कुल आय ₹5 करोड़ तक है और जिन्होंने कोई विदेशी चंदा या विदेशी खर्च नहीं किया है।विभाग के विश्लेषण में पाया गया कि कई संस्थाओं ने अपनी आय और विदेशी योगदान की सीमा के आधार पर गलत फॉर्म का चयन कर लिया। इसके अतिरिक्त, टीडीएस (TDS) कटौती के नियमों के अनुपालन, धारा 40A(3) के तहत ₹10,000 से अधिक के नकद भुगतानों के प्रकटीकरण (Disclosure) और निर्धारित 85% आय के धर्मार्थ कार्यों में उपयोग के विवरण में कई विसंगतियां दर्ज की गई हैं।21 अक्टूबर तक सुधार न करने पर क्या होगा कानूनी नुकसानआयकर विभाग ने प्रोफेशनल्स और ट्रस्टों को सचेत किया है कि 21 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा समाप्त होने के बाद संशोधित ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने का यह त्वरित विकल्प बंद हो जाएगा। यदि कोई संस्था या ऑडिटर इस ईमेल अलर्ट को नजरअंदाज करता है, तो उसे निम्नलिखित गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है:टैक्स छूट (Exemption) रद्द होना: धारा 11 और 12 के तहत मिलने वाली कर छूट केवल तभी मान्य होती है जब वैध ऑडिट रिपोर्ट समय पर दाखिल की जाए। गलत या अधूरी रिपोर्ट के चलते ट्रस्ट की संपूर्ण सकल प्राप्तियों (Gross Receipts) को सामान्य व्यावसायिक आय मानकर 30% की अधिकतम सीमांत दर (MMR) से भारी टैक्स लगाया जा सकता है।धारा 271B के तहत भारी जुर्माना: आयकर अधिनियम की धारा 271B के अनुसार निर्धारित समय पर सही ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत न करने पर कुल बिक्री, टर्नओवर या सकल प्राप्तियों का 0.5% या अधिकतम ₹1,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।संशोधित आईटीआर दाखिल करने में अड़चन: टैक्स ऑडिट रिपोर्ट (TAR) का यूडीआईएन (UDIN) और पावती संख्या आयकर रिटर्न (ITR-7) के साथ सीधे मैप होती है। गलत ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दाखिल रिटर्न को 'दोषपूर्ण रिटर्न' (Defective Return under Section 139(9)) घोषित कर दिया जाएगा।चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स प्रोफेशनल्स के लिए जरूरी कदमसीबीडीटी द्वारा ईमेल प्राप्त करने वाले प्रोफेशनल्स को बिना घबराए निम्नलिखित प्रक्रियात्मक कदम उठाने की सलाह दी गई है:ई-फाइलिंग पोर्टल पर 'Compliance Portal' जांचें: अपने ई-फाइलिंग क्रेडेंशियल्स के साथ लॉगिन करें और 'Pending Actions' के तहत 'Compliance Portal' या 'e-Campaign' टैब पर जाएं। वहां विभाग द्वारा फ्लैग की गई विशिष्ट विसंगति (Mismatch) का विवरण देखें।फॉर्म के चयन का पुनर्मूल्यांकन: जांच लें कि क्या ट्रस्ट की कुल प्राप्तियां ₹5 करोड़ की सीमा के भीतर थीं या बाहर, और क्या कोई एफसीआरए (FCRA) या विदेशी अंशदान था। यदि फॉर्म 10BB के स्थान पर 10B की आवश्यकता थी, तो सही फॉर्म को नए सिरे से अपलोड करें।इंस्टीट्यूट (ICAI) के यूडीआईएन पोर्टल पर अपडेट: नई संशोधित ऑडिट रिपोर्ट जारी करने से पहले आईसीएआई के यूडीआईएन पोर्टल पर पुरानी रिपोर्ट के संबंध में कारण दर्ज करें और नई संशोधित रिपोर्ट के लिए नया यूडीआईएन (UDIN) जनरेट कर उसे आयकर पोर्टल पर 15 दिनों के भीतर प्रमाणित करें।जवाब (Response) सबमिट करें: यदि सीए या करदाता का मानना है कि उनकी मूल रिपोर्ट में दी गई जानकारी नियमों के अनुसार पूर्णतः सही है, तो वे पोर्टल पर 'Disagreement' का विकल्प चुनकर दस्तावेजों के साथ अपना विधिवत स्पष्टीकरण दर्ज कर सकते हैं।डेटा मिलान पर एआई (AI) का सख्त पहरायह अभियान दर्शाता है कि आयकर विभाग अब कागजी या औपचारिकता वाले अनुपालन से आगे बढ़कर पूरी तरह डेटा-ड्रिवन सिस्टम पर काम कर रहा है। एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS), जीएसटी रिटर्न और बैंकिंग लेन-देन का ऑडिट फॉर्म में दर्ज आंकड़ों से सीधा क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा रहा है। प्रोफेशनल्स और ट्रस्ट प्रबंधन को 21 अक्टूबर तक इन त्रुटियों को सुधारकर अपने अनुपालन को शत-प्रतिशत त्रुटिहीन बना लेना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई और कर नोटिस से बचा जा सके।
हालिया हफ्तों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और खुदरा महंगाई के दबाव से जूझ रहे भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत भरी और बेहद सकारात्मक रिपोर्ट सामने आई है। वित्तीय शोध एवं ब्रोकरेज फर्म मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल (Monarch Networth Capital - MNCL) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) गौरव भंडारी के अनुसार, अगले 4 से 5 महीनों के भीतर घरेलू शेयर बाजार में एक मजबूत री-बाउंड देखने को मिलेगा। इस नई तेजी के दम पर बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 (Nifty 50) वर्तमान स्तरों से करीब 16 से 18 प्रतिशत की छलांग लगाकर 26,000 से 26,500 के नए ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की दिशा में संभावित यू-टर्न भारतीय बाजारों के लिए लिक्विडिटी का नया दरवाजा खोलने जा रहा है।पहला बड़ा ट्रिगर: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का अपने चरम से नीचे आनावैश्विक बाजारों में हालिया बिकवाली की सबसे बड़ी जड़ अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आया अप्रत्याशित उछाल रही है। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.35 प्रतिशत के पार पहुंच गई, जो पिछले 24 वर्षों का उच्चतम स्तर है। जब सुरक्षित अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में 5% से अधिक का रिटर्न मिलने लगता है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं।हालांकि, जानकारों का स्पष्ट मानना है कि 5.35% की यील्ड कोई 'न्यू नॉर्मल' नहीं है, बल्कि यह चरम स्तर (Peak) है जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अंदर से नुकसान पहुंचा रहा है। अमेरिका का कुल सार्वजनिक कर्ज $35 ट्रिलियन को पार कर चुका है और उस पर सालाना ब्याज का खर्च $1.8 ट्रिलियन तक पहुंच गया है, जिसे अमेरिकी सरकार लंबे समय तक वहन नहीं कर सकती। अमेरिका में 30-वर्षीय मॉर्गेज दर 7.03% के पार पहुंचने से वहां का रियल एस्टेट और उपभोक्ता मांग सुस्त पड़ रही है। ऐसे में अमेरिकी फेडरल रिजर्व और ट्रेजरी विभाग पर ब्याज दरों और यील्ड को नीचे लाने का भारी दबाव है। जैसे ही यील्ड में नरमी आएगी, वैश्विक लिक्विडिटी तुरंत रिस्क-ऑन मोड में आएगी और भारत जैसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों में विदेशी पूंजी का प्रवाह तेजी से लौटेगा।दूसरा बड़ा ट्रिगर: यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) में कमजोरी और 95 का स्तरशेयर बाजार में तेजी का दूसरा मुख्य आधार अमेरिकी डॉलर में आने वाली संभावित कमजोरी है। अमेरिका के भारी-भरकम राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) और लगातार बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) के कारण डॉलर का वैश्विक दबदबा दबाव में आ रहा है।डॉलर इंडेक्स (DXY) पहले ही 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे आ चुका है और इसके आगे फिसलकर 95 के स्तर तक जाने की संभावना जताई जा रही है। जब भी डॉलर इंडेक्स कमजोर होता है, तो वैश्विक फंड मैनेजर अपने पोर्टफोलियो का री-एलोकेशन करते हैं और डॉलर आधारित संपत्तियों से पैसा निकालकर उभरते बाजारों की इक्विटीज में डाइवर्सिफाई करते हैं। डॉलर के कमजोर होने से भारतीय रुपया मजबूत होगा, जिससे कच्चे तेल का आयात सस्ता होगा, चालू खाता घाटा (CAD) घटेगा और कंपनियों के इनपुट मार्जिन में सुधार आएगा। यह परिस्थितियां सीधे तौर पर दलाल स्ट्रीट पर विदेशी पूंजी के नए चक्र को जन्म देंगी।तीसरा बड़ा ट्रिगर: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की शॉर्ट कवरिंग और नई खरीदारीअक्टूबर और सितंबर के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में आक्रामक बिकवाली की थी, जिसमें केवल छह कारोबारी सत्रों में ₹45,000 करोड़ से अधिक की निकासी देखी गई थी। लेकिन बाजार को सहारा दिया देश के घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और खुदरा निवेशकों की मासिक एसआईपी (SIP) ने, जिन्होंने विदेशी बिकवाली को पूरी तरह सोख लिया।विदेशी निवेशक वर्तमान में भारतीय डेरिवेटिव्स और कैश मार्केट में बेहद 'लाइट' (कम एक्सपोजर) और शॉर्ट पोजिशंस पर बैठे हैं। जैसे ही वैश्विक बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स से राहत के संकेत स्पष्ट होंगे, एफआईआई को मजबूरन अपनी शॉर्ट पोजिशंस काटनी पड़ेंगी (Short Covering)। घरेलू म्यूचुअल फंड्स की निरंतर खरीदारी और विदेशी निवेशकों की वापसी का यह 'डबल इंजन' निफ्टी को मौजूदा 22,500-22,700 के दायरे से सीधे 26,000 और फिर 26,500 के स्तर पर धकेलने के लिए पर्याप्त बारूद उपलब्ध कराएगा।वैल्यूएशन री-रेटिंग: 18x से बढ़कर 22-24x तक जा सकता है निफ्टी का पीईबाजार विश्लेषकों के अनुसार, हालिया करेक्शन ने कई दिग्गज लार्ज-कैप शेयरों के मूल्यांकन को बेहद आकर्षक बना दिया है। वर्तमान में निफ्टी का वन-ईयर फॉरवर्ड पीई (P/E Ratio) करीब 18 से 19 गुना के उचित दायरे में आ चुका है। भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत के आसपास मजबूत बनी हुई है और आगामी तिमाहियों में कॉरपोरेट अर्निंग्स (प्रति शेयर आय - EPS) में दोहरे अंकों की वृद्धि का अनुमान है। जब अर्निंग्स ग्रोथ और लिक्विडिटी का संगम होता है, तो बाजार में 'मल्टीपल री-रेटिंग' शुरू होती है। यह री-रेटिंग निफ्टी के वैल्यूएशन को 18 गुना से बढ़ाकर 22 से 24 गुना के हिस्टोरिकल पीक की ओर ले जा सकती है, जिससे इंडेक्स के स्तर में सीधी बढ़ोतरी दर्ज होगी।किन सेक्टर्स और स्टॉक्स में देखने को मिल सकता है सबसे तगड़ा आउटपरफॉर्मेंसआगामी 4-5 महीनों की इस संभावित रैली में केवल पूरा बाजार ही नहीं दौड़ेगा, बल्कि चुनिंदा सेक्टर्स निवेशकों को सबसे बड़ा मुनाफा बनाकर दे सकते हैं:बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज: ब्याज दरों के पीक आउट होने और क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रहने से एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई जैसे दिग्गज बैंक इस रैली का नेतृत्व करेंगे।कैपिटल गुड्स, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकारी पूंजीगत व्यय (Capex) और निजी निवेश में तेजी से एलएंडटी, बीएचईएल और डिफेंस पीएसयू स्टॉक्स में तेज मोमेंटम बना रहेगा।एनर्जी, पावर और रिन्यूएबल्स: बिजली की निरंतर बढ़ती मांग और ग्रीन एनर्जी विस्तार के चलते एनटीपीसी और पावर ग्रिड जैसी कंपनियां मजबूत कैश फ्लो जनरेट कर रही हैं।ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी: ग्रामीण मांग में सुधार और त्योहारी व शादी-ब्याह के सीजन की मजबूत बिक्री से ऑटो और रिटेल सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा।निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह: डिफेंसिव होने के बजाय चुनिंदा खरीदारी का समयशेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार मंदी का रोना रोने या डरकर शेयर बेचने का नहीं, बल्कि अगले बुल-रन की तैयारी करने का है। जब भी बाजार में कोई वैश्विक अनिश्चितता या अल्पकालिक गिरावट आती है, वही समय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों को सस्ते भाव पर अपने पोर्टफोलियो में जोड़ने का स्वर्णिम अवसर होता है। निवेशकों को किसी एक पेनी स्टॉक में सट्टा लगाने के बजाय लार्ज-कैप और डायवर्सिफाइड फ्लेक्सी-कैप म्यूचुअल फंड्स में अपनी नियमित एसआईपी जारी रखनी चाहिए। अगले 4 से 5 महीनों में जैसे-जैसे मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियां अनुकूल होंगी, धैर्यवान निवेशकों को 26,500 के नए निफ्टी शिखर के साथ शानदार वेल्थ क्रिएशन का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की दुनिया में वित्तीय स्वतंत्रता (Financial Freedom) हासिल करने का सबसे बड़ा हथियार सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) को माना जाता है। जब कोई निवेशक ₹24,000 प्रति माह की बचत के साथ 22 साल के लंबे समय क्षितिज (Time Horizon) पर ₹6 करोड़ का विशाल फंड बनाने का सपना देखता है, तो सबसे पहला सवाल यह उठता है कि इसका गणित वास्तव में कैसे काम करता है?यदि आप बिना किसी बदलाव के 22 साल तक फ्लैट ₹24,000 प्रति माह जमा करते हैं, तो 22 साल (264 महीने) में आपकी जेब से कुल निवेश मात्र ₹63.36 लाख होगा और 12% वार्षिक रिटर्न पर यह बढ़कर लगभग ₹2.85 करोड़ तक ही पहुंचेगा। ऐसे में कुल ₹1.15 करोड़ का निवेश और ₹6 करोड़ का शुद्ध कॉर्पस हासिल करने के पीछे का असली 'हिडन फॉर्मूला' कोई जादुई स्कीम नहीं, बल्कि स्टेप-अप एसआईपी (Step-Up SIP) की ताकत है।हिडन फॉर्मूला: 10% सालाना स्टेप-अप और कंपाउंडिंग का संगमइस वित्तीय लक्ष्य को पाने का सबसे व्यावहारिक रास्ता अपनी एसआईपी में हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करना है। जैसे-जैसे आपकी आय, सैलरी या बिजनेस का मुनाफा बढ़ता है, वैसे-वैसे आपको अपनी मासिक बचत भी बढ़ानी होती है।प्रारंभिक मासिक SIP: ₹24,000 प्रति माह (पहले वर्ष)सालाना स्टेप-अप दर: 10% प्रति वर्ष (यानी दूसरे वर्ष ₹26,400/माह, तीसरे वर्ष ₹29,040/माह आदि)कुल निवेश अवधि: 22 वर्ष22 साल में आपकी कुल जमा पूंजी (Total Investment): लगभग ₹1,15,25,000 (लगभग ₹1.15 करोड़)अनुमानित वार्षिक रिटर्न (CAGR): 12.5% से 13% प्रति वर्षकंपाउंडिंग से अर्जित कुल मुनाफा (Capital Gains): लगभग ₹4.85 करोड़ से ₹5.00 करोड़22 साल बाद कुल मैच्योरिटी कॉर्पस: लगभग ₹6.00 करोड़ से ₹6.15 करोड़इस गणना की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें आपकी जेब से केवल ₹1.15 करोड़ जाते हैं, जबकि बाकी के लगभग ₹4.85 करोड़ से ₹5 करोड़ रुपये शुद्ध कंपाउंडिंग ब्याज और बाजार की वृद्धि से पैदा होते हैं।साल-दर-साल कैसे बढ़ती है पूंजी: फ्लैट बनाम स्टेप-अप का अंतरसमयावधि (वर्ष)फ्लैट SIP (₹24,000/माह स्थिर)10% स्टेप-अप SIP (प्रारंभिक ₹24,000)जेब से लगा कुल निवेश (स्टेप-अप)5 साल बाद₹20.30 लाख₹24.80 लाख₹17.58 लाख10 साल बाद₹57.25 लाख₹86.40 लाख₹45.89 लाख15 साल बाद₹1.24 करोड़₹2.25 करोड़₹91.49 लाख20 साल बाद₹2.46 करोड़₹4.98 करोड़₹1.64 करोड़22 साल बाद₹2.95 करोड़₹6.15 करोड़₹1.15 करोड़ (22 वर्ष कुल)(नोट: यह गणना डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में 12.5% के दीर्घकालिक औसत वार्षिक चक्रवृद्धि रिटर्न के आधार पर की गई है।)₹6 करोड़ जुटाने के लिए पोर्टफोलियो का सही एसेट एलोकेशन22 साल की लंबी अवधि में केवल एक फंड पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। 12% से 13% का टिकाऊ रिटर्न पाने के लिए आपको अपने ₹24,000 की मासिक किस्त को विभिन्न म्यूचुअल फंड श्रेणियों में इस प्रकार विभाजित करना चाहिए:फ्लेक्सी कैप फंड (Flexi Cap Funds - 40% यानी ₹9,600/माह): फंड मैनेजर को बाजार के हालात के अनुसार लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में स्विच करने की पूरी आजादी मिलती है। यह पोर्टफोलियो का मुख्य ग्रोथ इंजन बनता है।लार्ज व मिडकैप फंड (Large & Mid Cap Funds - 30% यानी ₹7,200/माह): देश की शीर्ष 250 कंपनियों में निवेश से पोर्टफोलियो को स्थिरता और तेज वृद्धि दोनों का संतुलन मिलता है।मिड व स्मॉल कैप फंड (Mid & Small Cap Funds - 20% यानी ₹4,800/माह): लंबी अवधि में उभरते हुए सेक्टरों की तेज ग्रोथ से हाई अल्फा (अतिरिक्त रिटर्न) हासिल करने के लिए।इंडेक्स या गोल्ड फंड (Index/Gold ETF - 10% यानी ₹2,400/माह): निफ्टी 50 इंडेक्स या गोल्ड में आवंटन से बाजार के तेज क्रैश के समय पोर्टफोलियो में डाउनसाइड प्रोटेक्शन रहता है।टैक्स का गणित: ₹6 करोड़ पर कितना कटेगा LTCG टैक्स?इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर मौजूदा आयकर नियमों के अनुसार 1 वर्ष से अधिक समय तक होल्ड किए गए निवेश पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स 12.5% की दर से लगता है, जिसमें प्रति वित्तीय वर्ष ₹1.25 लाख तक का मुनाफा पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है।22 साल बाद जब आप ₹6 करोड़ का फंड रिडीम करेंगे, तो एकमुश्त निकालने के बजाय सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) अपनाएं। एसडब्ल्यूपी के जरिए हर महीने अपनी जरूरत के हिसाब से ₹2.5 लाख से ₹3 लाख निकालते रहें। ऐसा करने से बाकी बची रकम पर कंपाउंडिंग जारी रहेगी और हर साल ₹1.25 लाख की टैक्स छूट का लाभ उठाकर आप टैक्स देनदारी को न्यूनतम रख सकेंगे।22 साल के सफर में वेल्थ डिस्ट्रॉय करने वाली 3 गलतियों से बचेंबाजार गिरने पर SIP रोकना: जब भी बाजार में 10% से 20% का करेक्शन आए, एसआईपी कभी बंद न करें। मंदी के दौर में आपको सस्ती एनएवी (NAV) पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो भविष्य में सबसे ज्यादा मुनाफा बनाती हैं।सालाना 10% स्टेप-अप भूल जाना: बिना स्टेप-अप के आप 22 साल में ₹3 करोड़ भी मुश्किल से छू पाएंगे। हर साल अपनी सैलरी इंक्रीमेंट के साथ एसआईपी टॉप-अप को ऑटोमेट रखें।समय से पहले गैर-जरूरी निकासी: कार खरीदने या छुट्टियों पर जाने के लिए इस रिटायरमेंट/वेल्थ फंड से पैसे निकालने की गलती कभी न करें। इस फंड को कम से कम 20 साल तक अनछुआ रहने दें।
टॉयलेट पेपर में छिपा था रिकॉर्डिंग डिवाइस, ChatGPT का इंजीनियर पकड़ा
ChatGPT मेकर OpenAI के ऑफिस में चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग करने का मामला सामने आया है, जिसपर आरोप है कि सऊदी के एक इंजीनियर ने टॉयलेट पेपर में छिपाकर जासूसी को अंजाम दिया. डिवाइस को रिकॉर्डिंग और कैमरे से भी कनेक्ट किया. FBI ने उस शख्स को गिरफ्तार कर लिया है.
आठवें वेतन आयोग में लेवल-4 के कर्मचारियों की सैलरी में ऐतिहासिक उछाल
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के गठन और संभावित वेतन वृद्धि को लेकर सुगबुगाहट लगातार तेज हो रही है। हर दस साल में लागू होने वाले वेतन आयोग की परंपरा के अनुसार वर्ष 2026 केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे के पुनर्गठन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सातवें वेतन आयोग (7th CPC) के पे-मैट्रिक्स के तहत जो कर्मचारी पे-लेवल 4 में अपनी सेवा के अंतिम पड़ाव यानी स्टेज 40 तक पहुंच चुके हैं, उनकी सैलरी में आठवें वेतन आयोग के लागू होने पर लगभग 30.15 प्रतिशत का सीधा उछाल देखने को मिल सकता है। नए वेतन फॉर्मूले, फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ते (DA) के समायोजन, बढ़े हुए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA) के समावेश के बाद लेवल-4 के स्टेज 40 पर कार्यरत वरिष्ठ कर्मचारियों की कुल ग्रॉस सैलरी बढ़कर ₹1,92,710 प्रति माह तक पहुंचने का अनुमान है।7th CPC में क्या है लेवल-4 स्टेज 40 का मौजूदा वेतन ढांचाइस भारी वेतन वृद्धि को समझने के लिए सबसे पहले सातवें वेतन आयोग के तहत लेवल-4 के वर्तमान ढांचे का विश्लेषण करना जरूरी है। 7th CPC पे-मैट्रिक्स में लेवल-4 (ग्रेड पे ₹2,400) की शुरुआत बेसिक पे ₹25,500 (स्टेज 1) से होती है। हर साल 3 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) मिलने के साथ-साथ यह स्टेज आगे बढ़ती है। जो कर्मचारी दशकों की निरंतर सेवा के बाद स्टेज 40 पर पहुंच चुके हैं, उनका वर्तमान बेसिक वेतन ₹81,100 प्रति माह है।वर्तमान में 7th CPC के तहत 53% से 54% महंगाई भत्ता (DA), 'X' श्रेणी के महानगरों के लिए 30% HRA तथा लेवल-4 के लिए निर्धारित ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA) जोड़कर इन कर्मचारियों की मौजूदा ग्रॉस सैलरी लगभग ₹1.48 लाख प्रति माह के आसपास बैठती है।फिटमेंट फैक्टर और 8वें वेतन आयोग में नई बेसिक पे का फॉर्मूलावेतन आयोग के तहत वेतन वृद्धि का सबसे मुख्य आधार 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) होता है। सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिसमें तत्कालीन महंगाई भत्ते को समाहित करके नई बेसिक तय की गई थी। विशेषज्ञों और कर्मचारी संगठनों द्वारा 8वें वेतन आयोग के लिए न्यूनतम 1.92 से लेकर 2.86 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग की जा रही है।यदि 1.92 के संभावित यथार्थवादी फिटमेंट फैक्टर और 50%+ डीए मर्जर के संतुलित मॉडल को आधार बनाया जाए:मौजूदा 7th CPC बेसिक पे (स्टेज 40): ₹81,100प्रस्तावित फिटमेंट गुणक: 1.92 (लगभग)8वें वेतन आयोग में नई संशोधित बेसिक पे: लगभग ₹1,26,000 प्रति माहइस प्रकार कर्मचारियों की केवल बुनियादी बेसिक सैलरी में ही सीधे ₹44,900 से अधिक का इजाफा हो जाएगा, जो सीधे तौर पर भविष्य के प्रोविडेंट फंड (PF), ग्रेच्युटी और पेंशन गणना को मजबूती प्रदान करेगा।HRA, TPTA और DA के साथ ₹1,92,710 की ग्रॉस सैलरी का पूरा ब्रेकअपजब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो मौजूदा महंगाई भत्ते को शून्य कर दिया जाता है या उसे न्यूनतम 3 से 6 प्रतिशत से नए सिरे से शुरू किया जाता है, लेकिन इसके साथ ही अन्य सभी भत्ते भी संशोधित बेसिक पे पर निर्धारित होते हैं। लेवल-4 के स्टेज 40 के लिए 'X' क्लास शहर (जैसे दिल्ली, मुंबई आदि) के आधार पर संभावित मासिक वेतन ब्रेकअप इस प्रकार तैयार होता है:वेतन का घटक (Salary Component)7th CPC (वर्तमान अनुमान)8th CPC (प्रस्तावित अनुमान)बेसिक सैलरी (Basic Pay)₹81,100₹1,26,000महंगाई भत्ता (DA - प्रारंभिक 6%)₹43,794 (54% पर)₹7,560 (प्रारंभिक 6% पर)मकान किराया भत्ता (HRA - X क्लास 30%)₹24,330₹37,800ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA + DA)₹5,544₹8,640अन्य अनुलाभ व भत्ते₹13,300₹12,710कुल ग्रॉस सैलरी (Gross Salary)₹1,48,068₹1,92,710इस गणना के अनुसार वर्तमान ₹1.48 लाख की तुलना में कर्मचारियों की मासिक आमदनी में सीधे ₹44,642 प्रति माह का जबर्दस्त शुद्ध लाभ दर्ज होगा, जो प्रतिशत के लिहाज से 30.15% की वास्तविक ग्रॉस वृद्धि को दर्शाता है।लेवल-4 के अंतर्गत कौन-कौन से केंद्रीय पद आते हैं?केंद्रीय मंत्रालयों, रक्षा प्रतिष्ठानों, डाक विभाग और रेलवे में लेवल-4 एक बेहद महत्वपूर्ण कार्यकारी संवर्ग (Operational Cadre) माना जाता है। इस पे-लेवल के अंतर्गत आने वाले प्रमुख पदों में:केंद्रीय सचिवालय और मंत्रालयों में अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) / सीनियर सेक्रेटेरियट असिस्टेंट (SSA)रेलवे में सीनियर ट्रेन क्लर्क, टिकट चेकर (टीटीई शुरुआती स्तर), और वरिष्ठ तकनीकी स्टाफडाक विभाग (India Post) में पोस्टल असिस्टेंट और सोर्टिंग असिस्टेंटकेंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CRPF, BSF, CISF आदि) में हेड कांस्टेबल और एएसआई रैंक के कार्मिकविभिन्न तकनीकी प्रयोगशालाओं और आयुध डिपो के वरिष्ठ ड्राफ्ट्समैन व लैब सहायकइन संवर्गों में जो कर्मचारी कई दशकों से कार्यरत हैं और पदोन्नति के सीमित अवसरों के चलते उसी कैडर में लगातार एनुअल इंक्रीमेंट लेकर स्टेज 40 तक पहुंच गए हैं, उनके लिए यह वेतन वृद्धि उनके जीवनकाल का सबसे बड़ा वित्तीय संबल साबित होगी।पेंशन और रिटायरमेंट फंड (Gratuity & Leave Encashment) पर बंपर असरइस वेतन वृद्धि का सबसे सुखद पहलू यह है कि स्टेज 40 पर पहुंचे कर्मचारी आम तौर पर अपनी सेवानिवृत्ति के करीब होते हैं। केंद्रीय नियमों के तहत पेंशन की गणना कर्मचारी के अंतिम आहरित मूल वेतन (Last Drawn Basic Pay) के 50 प्रतिशत पर की जाती है।पेंशन में उछाल: बेसिक ₹81,100 से बढ़कर ₹1,26,000 होने पर मूल मासिक पेंशन ₹40,550 से सीधे बढ़कर ₹63,000 प्रति माह हो जाएगी।ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट: 8वें वेतन आयोग में संशोधित बेसिक के आधार पर रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और 300 दिनों के अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) का भुगतान कई लाख रुपये अधिक होगा। केंद्र सरकार द्वारा ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को हाल ही में ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख किया गया है, जिसका पूरा लाभ इस वेतन संशोधन के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को मिलेगा।कब तक लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग और आगे की राहनियमों के अनुसार 7वें वेतन आयोग की 10-वर्षीय सिफारिशों की समय-सीमा 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है, जिससे 8वें वेतन आयोग का क्रियान्वयन 1 जनवरी 2026 से देय माना जा रहा है। हालांकि, आयोग के गठन के बाद रिपोर्ट तैयार करने और सिफारिशें सौंपने में आमतौर पर 12 से 18 महीने का समय लगता है। कर्मचारी यूनियनों (जैसे NC-JCM) ने सरकार से तत्काल आयोग का गठन करने का आग्रह किया है। यदि आयोग की सिफारिशें स्वीकार होने में वर्ष 2026 के अंत या 2027 तक का समय भी लगता है, तो भी परंपरा के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर (Arrears) के रूप में एकमुश्त बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों की जेब में वित्तीय उछाल आना तय है।
घर पर तेज पत्ता उगाना है बहुत ही आसान, जान लें तरीका
How To Grow Tej Patta In Pots: सब्जी, पुलाव और बिरयानी का स्वाद बढ़ाने वाले तेज पत्ते को अब बाजार से खरीदने के बजाय घर के गमले में उगाएं. 12 से 15 इंच के गमले में अच्छी ड्रेनेज वाली मिट्टी, वर्मीकंपोस्ट और धूप की मदद से तेज पत्ते का पौधा तेजी से बढ़ता है. जानिए नर्सरी से पौधा चुनने, सही पॉटिंग मिक्स तैयार करने और पत्तियों को छांव में सुखाकर स्टोर करने का आसान तरीका.
जब किसी व्यक्ति के पास बचत, बोनस, ग्रेच्युटी या पैतृक संपत्ति से ₹5,00,000 की एकमुश्त पूंजी आती है, तो सबसे आम गलती यह होती है कि वह पूरा पैसा किसी एक ही जगह लगा देता है। कुछ लोग बाजार के डर से पूरी रकम बैंक एफडी (Fixed Deposit) में डाल देते हैं, जहां टैक्स कटने के बाद मिलने वाला रिटर्न महंगाई दर (Inflation) को भी मात नहीं दे पाता। वहीं दूसरी ओर, अधिक रिटर्न के लालच में कुछ निवेशक पूरा ₹5 लाख शेयर बाजार के किसी एक पेनी स्टॉक, स्मॉल-कैप फंड या अनरेगुलेटेड क्रिप्टो व रियल एस्टेट स्कीम में झोंक देते हैं। बाजार में जब भी कोई बड़ा करेक्शन आता है, तो ऐसे निवेशकों की मूल पूंजी में 30 से 40 प्रतिशत तक की भारी गिरावट हो जाती है और घबराहट में वे भारी नुकसान उठा लेते हैं।वित्तीय दुनिया का सबसे पहला और अकाट्य नियम यही है—'नेवर पुट ऑल योर एग्स इन वन बास्केट' (Never put all your eggs in one basket)। वित्तीय योजनाकारों (Financial Planners) के अनुसार, यदि आप अपने ₹5 लाख को वैज्ञानिक एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) और डाइवर्सिफिकेशन के फॉर्मूले से 4 अलग-अलग संपत्तियों में बांट देते हैं, तो न केवल आपकी मूल पूंजी का जोखिम लगभग शून्य हो जाता है, बल्कि दीर्घावधि में 11% से 13% का शानदार औसत चक्रवृद्धि रिटर्न भी तैयार होता है।स्मार्ट निवेश का '50-30-10-10' वेल्थ फॉर्मूला: ₹5 लाख का सटीक बंटवारायदि आपका नजरिया मध्यम से लंबी अवधि (कम से कम 5 से 7 वर्ष) का है और आप जोखिम को पूरी तरह नियंत्रित रखते हुए वेल्थ बनाना चाहते हैं, तो ₹5,00,000 की पूंजी को इन 4 मजबूत स्तंभों में विभाजित करना सबसे व्यावहारिक माना जाता है:50% हिस्सा (₹2,50,000) — ग्रोथ इंजन (इक्विटी म्यूचुअल फंड्स): देश की आर्थिक वृद्धि का सीधा लाभ उठाने और महंगाई को मात देने के लिए।30% हिस्सा (₹1,50,000) — सुरक्षा कवच (फिक्स्ड इनकम / डेट व सरकारी बॉन्ड): बाजार के उतार-चढ़ाव में पूंजी को स्थिर रखने और तय रिटर्न के लिए।10% हिस्सा (₹50,000) — संकटमोचक हेजिंग (गोल्ड ईटीएफ / सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड): युद्ध, वैश्विक मंदी और मुद्रा अवमूल्यन से सुरक्षा के लिए।10% हिस्सा (₹50,000) — आपातकालीन लिक्विडिटी (आर्बिट्राज / लिक्विड फंड): किसी भी अप्रत्याशित वित्तीय संकट या मेडिकल जरूरत के लिए चौबीस घंटे उपलब्ध फंड।50% यानी ₹2.50 लाख: इक्विटी फंड्स में STP रूट से करें निवेशइक्विटी में ₹2.5 लाख लगाते समय सबसे बड़ी सावधानी यह बरतनी है कि पूरा पैसा एक ही दिन किसी फंड में एकमुश्त (Lump sum) न डालें। यदि अगले दिन बाजार गिर गया, तो मनोवैज्ञानिक रूप से नुकसान का डर सताने लगेगा। इसके लिए सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) का उपयोग करें। पूरा ₹2.5 लाख पहले उसी फंड हाउस के किसी सुरक्षित 'अल्ट्रा शॉर्ट-टर्म' या 'लिक्विड फंड' में पार्क कर दें, और वहां से अगले 10 से 12 महीनों के दौरान हर महीने लगभग ₹20,000 से ₹25,000 इक्विटी फंड्स में ट्रांसफर होने दें:लार्ज व मिडकैप या फ्लेक्सी कैप फंड (₹1,50,000): भारत की शीर्ष 100-150 दिग्गज कंपनियों (जैसे एचडीएफसी बैंक, रिलायंस, टीसीएस) में निवेश कर पोर्टफोलियो को मजबूती दें। ऐतिहासिक रूप से ऐसे फंड्स 12% से 14% तक का दीर्घकालिक रिटर्न डिलीवर करते हैं।मल्टी-एसेट या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (₹1,00,000): यह फंड बाजार के मूल्यांकन के आधार पर अपने आप इक्विटी और डेट के बीच पैसे को शिफ्ट करता रहता है। जब बाजार महंगा होता है तो यह डेट में चला जाता है और जब बाजार सस्ता होता है तो शेयर खरीदता है, जिससे गिरावट में डाउनसाइड रिस्क सीमित रहता है।30% यानी ₹1.50 लाख: सुरक्षित डेट और सरकारी बचत योजनाएंइस हिस्से का उद्देश्य रिटर्न की दौड़ लगाना नहीं, बल्कि मूलधन को चट्टान की तरह सुरक्षित रखना है। यदि इक्विटी बाजार में 2-3 साल तक मंदी भी रहती है, तो यह हिस्सा आपके पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू को कभी गिरने नहीं देगा:बैंक/पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट या कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स (₹1,00,000): 7% से 7.5% के सुरक्षित और गारंटीड ब्याज के लिए 3 से 5 साल की अवधि में लॉक करें।टार्गेट मैच्योरिटी फंड्स या गिल्ट फंड्स (₹50,000): भारत सरकार के बॉन्ड्स (Sovereign Guarantee) में निवेशित रहने से डिफॉल्ट का जोखिम शून्य रहता है और ब्याज दरों में गिरावट आने पर पूंजी वृद्धि का अतिरिक्त लाभ भी मिलता है।10% यानी ₹50,000: डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ में हेजिंगसोना केवल पारंपरिक आभूषण नहीं, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के समय सबसे बड़ा रक्षा कवच है। इतिहास गवाह है कि जब-जब शेयर बाजारों में भारी क्रैश आया है, सोने की कीमतों में जबर्दस्त उछाल दर्ज किया गया है। भौतिक (फिजिकल) आभूषण खरीदने के बजाय, जहां 15-20% मेकिंग चार्ज और जीएसटी में कट जाता है, आप गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) या गोल्ड म्यूचुअल फंड में ₹50,000 का आवंटन करें। इसमें 100% शुद्धता, शून्य मेकिंग चार्ज और डीमैट खाते में एक क्लिक पर खरीद-फरोख्त की पूरी तरलता (Liquidity) मिलती है।10% यानी ₹50,000: इमरजेंसी लिक्विड फंड (तुरंत निकासी की सुविधा)किसी भी वित्तीय योजना में आकस्मिक निधि (Emergency Fund) का होना अनिवार्य है। यदि अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी, गाड़ी की मरम्मत या नौकरी का संकट आ जाए, तो आपको अपने लॉन्ग-टर्म इक्विटी या एफडी को समय से पहले नुकसान में न तोड़ना पड़े। इस ₹50,000 को किसी अच्छे लिक्विड फंड, आर्बिट्राज फंड या हाई-यील्ड बचत खाते में रखें, जहां बैंक एफडी से बेहतर रिटर्न भी मिले और जरूरत पड़ने पर 24 घंटे के भीतर पैसा आपके बैंक खाते में आ जाए।₹5 लाख के स्मार्ट पोर्टफोलियो का संपूर्ण आवंटन और अनुमानित रिटर्नएसेट क्लासआवंटित राशि (रुपये)पोर्टफोलियो शेयर (%)निवेश का सही माध्यमअनुमानित रिटर्न (CAGR)जोखिम का स्तरग्रोथ इक्विटी₹2,50,00050%फ्लेक्सी कैप और हाइब्रिड फंड (STP रूट)12% - 14%मध्यम से उच्चस्थिर डेट / बॉन्ड्स₹1,50,00030%पोस्ट ऑफिस TD, बॉन्ड फंड्स7.0% - 7.5%अत्यंत कमगोल्ड हेज₹50,00010%गोल्ड ईटीएफ / डिजिटल गोल्ड9% - 10%कम से मध्यमइमरजेंसी लिक्विड₹50,00010%लिक्विड फंड / आर्बिट्राज फंड6.5% - 7.0%शून्य के करीब
सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवालों के बाद हॉस्पिटल शेयरों में मचा हड़कंप
भारतीय शेयर बाजार में हेल्थकेयर और निजी अस्पताल क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में उस समय तेज बिकवाली देखने को मिली जब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने निजी अस्पतालों में दवाओं, मेडिकल उपकरणों और विशेष रूप से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की दवाओं पर वसूले जाने वाले भारी-भरकम मुनाफे (Mark-ups) पर केंद्र सरकार और अस्पतालों को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने इलाज के नाम पर मरीजों और उनके तीमारदारों से लागत मूल्य से दस गुना तक अधिक कीमत वसूलने को अत्यंत गंभीर और चिंताजनक करार दिया। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट की यह तीखी मौखिक टिप्पणी और सुनवाई का ब्योरा वित्तीय बाजारों तक पहुंचा, दलाल स्ट्रीट पर हेल्थकेयर और हॉस्पिटल सेक्टर के शेयरों में अफरा-तफरी मच गई। बीएसई हॉस्पिटल्स इंडेक्स और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के एक ही कारोबारी सत्र में हजारों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।किस हॉस्पिटल स्टॉक को लगा सबसे तगड़ा झटका: गिरावट की पूरी फेहरिस्तसुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख का सबसे बुरा असर देश की प्रमुख हॉस्पिटल चेन्स के शेयरों पर पड़ा, जहां सबसे बड़ी गिरावट फोर्टिस हेल्थकेयर (Fortis Healthcare) के शेयरों में दर्ज की गई। फोर्टिस हेल्थकेयर का शेयर इंट्रा-डे कारोबार के दौरान 6.3 प्रतिशत से अधिक टूटकर दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। दूसरे नंबर पर देश की सबसे बड़ी निजी अस्पताल नेटवर्क अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज (Apollo Hospitals Enterprise Ltd.) का स्टॉक रहा, जिसमें 5.7 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आई। तीसरे स्थान पर मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट (Max Healthcare Institute Ltd.) रहा, जिसके शेयर 5.3 प्रतिशत से अधिक फिसल गए। इसके अलावा मिड-कैप और क्षेत्रीय स्तर पर तेजी से उभर रहे यथार्थ हॉस्पिटल (Yatharth Hospital) के शेयरों में भी 4 से 6 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखी गई। वहीं एस्टर डीएम हेल्थकेयर (Aster DM Healthcare) के शेयर 4.2 प्रतिशत, कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी किम्स (KIMS) में 3.8 प्रतिशत तथा मेदांता ब्रांड का संचालन करने वाली ग्लोबल हेल्थ (Global Health Ltd.) और नारायण हृदयालय (Narayana Hrudayalaya) के शेयरों में भी 3 से 5 प्रतिशत तक की तीव्र बिकवाली दर्ज की गई।सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्या कहा जिससे हिल गया पूरा हेल्थकेयर सेक्टरशीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका और दवा मूल्य नियंत्रण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने निजी अस्पतालों की बिलिंग प्रणाली और दवाओं की वास्तविक खरीद लागत तथा मरीजों से ली जाने वाली एमआरपी (MRP) के भारी अंतर पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने उल्लेख किया कि कैंसर और आईसीयू में इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवाओं पर अस्पताल 800 से 1000 प्रतिशत तक का भारी मार्जिन वसूल रहे हैं। पीठ ने इस स्थिति पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक ही दवा जब बाजार में कम दाम पर उपलब्ध है, तो अस्पताल अपने इन-हाउस फार्मेसी के जरिए मरीजों को कई गुना महंगे दामों पर वही दवा खरीदने के लिए विवश क्यों करते हैं? अदालत ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) से पूछा कि क्या सरकार आवश्यक दवाओं और अस्पतालों द्वारा लिए जाने वाले कंज्यूमेबल्स पर ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (TMR) या अधिकतम मूल्य सीमा (Price Cap) लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।अस्पतालों के बिजनेस मॉडल पर क्यों मंडराया संकट: इन-हाउस फार्मेसी का गणितबाजार विशेषज्ञों और इक्विटी विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से निजी अस्पतालों के समूचे वित्तीय और ऑपरेटिंग मॉडल (EBITDA Margins) पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, भारत के बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों की कुल आय का लगभग 25 से 35 प्रतिशत हिस्सा उनकी इन-हाउस फार्मेसी, डायग्नोस्टिक्स और मेडिकल कंज्यूमेबल्स (जैसे सिरिंज, कैथेटर, ग्लव्स और इम्प्लांट्स) की बिक्री से आता है। इस सेगमेंट में अस्पतालों का ऑपरेटिंग मार्जिन 40 से 50 प्रतिशत तक ऊंचा रहता है। अगर सरकार या अदालत के आदेश के बाद दवाओं और जांचों पर ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत या किसी तय सीमा में बांध दिया जाता है, तो अस्पतालों के मुनाफे में 15 से 25 प्रतिशत तक की सीधी सेंध लग सकती है। यही डर था जिसके चलते संस्थागत विदेशी निवेशकों (FIIs) और घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने तुरंत हॉस्पिटल शेयरों में अपनी होल्डिंग्स को कम करना शुरू कर दिया।पहले भी इलाज की दरों के मानकीकरण (Standardization) को लेकर सुप्रीम कोर्ट दे चुका है चेतावनीयह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने निजी अस्पतालों की मनमानी पर चाबुक चलाया हो। इससे पहले भी शीर्ष अदालत ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (Clinical Establishments Act) के तहत पूरे देश में विभिन्न मेडिकल प्रक्रियाओं, सर्जरी और आईसीयू बिस्तरों के लिए एक समान और पारदर्शी दरें तय करने का निर्देश दिया था। उस समय अदालत ने स्पष्ट किया था कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें निजी अस्पतालों के साथ मिलकर विभिन्न बीमारियों के इलाज की न्यूनतम और अधिकतम दरें तय नहीं करती हैं, तो अदालत केंद्र सरकार की सीजीएचएस (CGHS) दरों को निजी अस्पतालों पर अनिवार्य रूप से लागू करने का आदेश दे सकती है। सीजीएचएस की दरें निजी अस्पतालों की वर्तमान दरों से 50 से 70 प्रतिशत तक कम हैं। ऐसे में यदि इलाज की दरों और दवाओं के मार्जिन दोनों पर एक साथ कानूनी अंकुश लगता है, तो कॉरपोरेट अस्पतालों का प्रति बेड औसत राजस्व (ARPOB) बुरी तरह गिर सकता है।ब्रोकरेज हाउसेज का नजरिया: क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या बढ़ेगा रिस्क?इस भारी गिरावट के बाद प्रमुख घरेलू और वैश्विक ब्रोकरेज हाउसों की राय विभाजित हो गई है। जेफरीज (Jefferies) और मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) जैसे विदेशी ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से अल्पावधि में हॉस्पिटल शेयरों पर विनियामक दबाव (Regulatory Overhang) बना रहेगा, जब तक कि अगली सुनवाई में सरकार अपना स्पष्ट हलफनामा दाखिल नहीं कर देती। हालांकि कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का मानना है कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी मांग बेहद मजबूत है। देश में बढ़ती बुजुर्ग आबादी, मेडिकल इंश्योरेंस का तेज विस्तार और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के चलते बेड ऑक्यूपेंसी लगातार 65 से 75 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी हुई है। यदि सरकार दवाओं के मार्जिन पर कोई कैप लगाती भी है, तो अस्पताल उसकी भरपाई अपने परामर्श शुल्क (Doctor Consultation) या रूम रेंट में मामूली समायोजन करके कर सकते हैं।हेल्थकेयर निवेशकों को अब आगे क्या रणनीति अपनानी चाहिए?शेयर बाजार के जानकारों की सलाह है कि खुदरा निवेशकों को इस समय घबराहट में आकर पूरी तरह बिकवाली करने या तुरंत बॉटम फिशिंग (सस्ते भाव में भारी खरीदारी) करने से बचना चाहिए। निवेशकों को आगामी दिनों में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक रुख पर नजर रखनी चाहिए। जिन निवेशकों के पास अपोलो हॉस्पिटल्स, मैक्स हेल्थकेयर या फोर्टिस जैसे मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर लंबी अवधि के लिए मौजूद हैं, वे इस गिरावट में धीरे-धीरे (एसआईपी मोड में) सीमित पूंजी जोड़ सकते हैं। लेकिन शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए यह सेक्टर अभी उच्च जोखिम वाला बना हुआ है, क्योंकि विनियामक जांच और संभावित मूल्य नियंत्रण की तलवार जब तक लटक रही है, तब तक शेयरों में किसी भी तकनीकी उछाल पर बिकवाली का दबाव हावी रह सकता है।
PAK से ईरान तक... कर्ज पर इन देशों में तगड़ा ब्याज, जानें भारत कहां?
Highest Interest Rate Countries: भारत में भले ही बीते दिनों केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट हाइक किया है, लेकिन Rate Hike के बावजूद भारत सबसे ज्यादा ब्याज दरों वाले देशों की लिस्ट में बहुत नीचे हैं, जबकि वेनेजुएला से लेकर ईरान, पाकिस्तान काफी ऊपर हैं.
बड़े नेताओं से कनेक्शन और अंडरवर्ल्ड... शिवा की डायरी खोलेगी श्रद्धा के राज?
लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 10 गंभीर आंतरिक चोटें मिलने की बात सामने आई है. शिवा की मां ने लिव-इन पार्टनर श्रद्धा दुबे पर प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग और हत्या के आरोप लगाए हैं. परिवार के मुताबिक, शिवा रोज डायरी लिखता था और उसमें प्रताड़ना का जिक्र है.
खुदरा महंगाई दर 2 साल के उच्चतम स्तर पर: आम आदमी की जेब पर दोहरा झटका
देश में आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट और रोजमर्रा की जिंदगी पर महंगाई की मार एक बार फिर तेज हो गई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर उछलकर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले महीने (अगस्त) में 4.83 प्रतिशत थी। यह उछाल पिछले लगभग दो वर्षों में खुदरा महंगाई का सबसे उच्च स्तर है। हालांकि यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 (+/- 2) प्रतिशत के ऊपरी संतोषजनक दायरे (Upper Tolerance Band) यानी 6 प्रतिशत के भीतर है, लेकिन 5.5 प्रतिशत को पार कर जाना केंद्रीय बैंक के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। सब्जियों, खाद्य तेलों, मसालों और रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं में आई इस तेज तेजी ने त्योहारी सीजन से ठीक पहले परिवारों के मासिक खर्च को बुरी तरह प्रभावित किया है।थाली से बिगड़ा पूरा खेल: खाद्य महंगाई दर में बेतहाशा बढ़ोतरीमहंगाई में आए इस अचानक उछाल की सबसे बड़ी वजह खाद्य टोकरी (Consumer Food Price Index) की कीमतों में आई भारी तेजी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत के पार निकल गई है। मॉनसून के अंतिम चरण में देश के कई राज्यों में अत्यधिक वर्षा और जलभराव के चलते खरीफ फसलों की आवक प्रभावित हुई, जिससे हरी सब्जियों, विशेषकर टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में 40 से 60 प्रतिशत तक की जबर्दस्त तेजी दर्ज की गई। ग्रामीण इलाकों में महंगाई का दबाव शहरी इलाकों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर रहा है, जहां ग्रामीण महंगाई दर 6.08 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.88 प्रतिशत के आसपास रही। खाद्य पदार्थों के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और रुपये की विनिमय दर में नरमी के कारण आयातित महंगाई (Imported Inflation) ने भी इस आंकड़े को ऊपर धकेलने में अहम भूमिका निभाई है।आरबीआई का अगला कदम क्या होगा? ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर फिरा पानीदेश भर के कर्जदारों और कॉरपोरेट जगत की सबसे बड़ी उम्मीद यह थी कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती शुरू किए जाने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक भी अक्टूबर या दिसंबर की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में कटौती करके राहत देगा। लेकिन महंगाई के 5.54 प्रतिशत तक पहुंच जाने के बाद अब रेपो रेट में किसी भी प्रकार की कटौती की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है। आरबीआई गवर्नर और एमपीसी के सदस्यों का प्राथमिक रुख हमेशा से महंगाई को टिकाऊ तरीके से 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर स्थिर करने का रहा है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई 'हॉकिश' (कड़ा) रुख बनाए रखेगा। जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक अब ब्याज दरों में कटौती को कम से कम अगली 2 से 3 तिमाहियों के लिए टाल सकता है, और यदि खाद्य महंगाई जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो सिस्टम से अतिरिक्त नकदी (Liquidity) खींचने के लिए नीतिगत दरों को और कड़ा किया जा सकता है।होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन की EMI पर कितना पड़ेगा असरजब भी महंगाई दर ऊपर जाती है और रेपो रेट में कटौती टलती है, तो इसका सीधा असर आम नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर पड़ता है:ईएमआई में राहत का इंतजार बढ़ा: जो लोग उम्मीद कर रहे थे कि अक्टूबर-दिसंबर में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट घटेगा और उनकी होम लोन की मासिक किस्त कम होगी, उन्हें अब लंबे समय तक ऊंची ईएमआई भरते रहना होगा।एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR): बैंकों के अधिकांश नए होम लोन और फ्लोटिंग रेट लोन सीधे आरबीआई के रेपो रेट से लिंक्ड होते हैं। यदि केंद्रीय बैंक दरों में कोई बढ़ोतरी करता है, तो बैंकों द्वारा तुरंत लोन की ब्याज दरें बढ़ा दी जाएंगी।लोन टेन्योर और कुल ब्याज का बोझ: उदाहरण के तौर पर, यदि किसी का ₹50 लाख का होम लोन 20 साल के लिए 8.75% की ब्याज दर पर चल रहा है, तो उसकी वर्तमान ईएमआई लगभग ₹44,186 है। यदि दरों में महज 0.25% की भी वृद्धि होती है, तो मासिक ईएमआई बढ़कर लगभग ₹45,000 हो जाएगी, या फिर लोन की अवधि 12 से 18 महीने और लंबी खिंच जाएगी, जिससे ग्राहक को लाखों रुपये का अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ेगा।प्रमुख ब्रोकरेज हाउसों और अर्थशास्त्रियों की क्या है रायमहंगाई के इस ताजे झटके के बाद प्रमुख वैश्विक और घरेलू ब्रोकरेज फर्मों ने अपने अनुमानों में बड़ा बदलाव किया है:नोमुरा (Nomura): जापानी ब्रोकरेज हाउस नोमुरा का आकलन है कि खाद्य और ऊर्जा कीमतों का दबाव आने वाले महीनों में भी बना रह सकता है। नोमुरा के अनुसार, अगर प्रतिकूल बेस इफेक्ट और कमजोर रुपये का दबाव जारी रहा, तो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत सीपीआई महंगाई 5.2% तक जा सकती है। नोमुरा ने संकेत दिया है कि आरबीआई दरों में कटौती करने के बजाय नीतिगत सख्ती को लंबे समय तक जारी रख सकता है या जरूरत पड़ने पर 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी पर भी विचार कर सकता है।मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley): ग्लोबल ब्रोकरेज मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों का मानना है कि उच्च खाद्य महंगाई हेडलाइन मुद्रास्फीति को अस्थिर बनाए रखेगी। मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक, कोर इन्फ्लेशन (जिसमें खाद्य और ईंधन शामिल नहीं है) भले ही नियंत्रित दायरे में हो, लेकिन गैर-खाद्य श्रेणियों में मांग दबाव बढ़ने से आरबीआई को दर कटौती का चक्र शुरू करने के लिए 2027 के मध्य तक इंतजार करना पड़ सकता है।एसबीआई रिसर्च (SBI Research): भारतीय स्टेट बैंक के अर्थशास्त्रियों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि जब तक सब्जियों और दालों की आवक सामान्य नहीं होती और खुदरा महंगाई 4.5% से नीचे नहीं आती, तब तक नीतिगत दरों में किसी भी प्रकार की ढील देना वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम भरा होगा।आम उपभोक्ताओं के लिए आगे की राह और बजट प्रबंधनमहंगाई के इस दौर में वेतनभोगी और मध्यमवर्गीय परिवारों को अपने मासिक बजट को पुनर्गठित करने की सख्त आवश्यकता है। जब तक आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम सामान्य स्तर पर नहीं आते, तब तक अनावश्यक गैर-जरूरी (Discretionary) खर्चों पर अंकुश लगाना ही समझदारी होगी। फ्लोटिंग होम लोन धारकों के लिए सबसे व्यावहारिक वित्तीय सलाह यह है कि वे ईएमआई में कटौती का इंतजार करने के बजाय, हर साल अपने मूलधन (Principal) का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा प्री-पेमेंट के रूप में जमा करें। ऐसा करने से न केवल लोन का कुल कार्यकाल छोटा होगा, बल्कि ऊंची ब्याज दरों के इस लंबे दौर में लाखों रुपये के अतिरिक्त ब्याज के नुकसान से भी बचा जा सकेगा।
घूमा वक्त का पहिया! नामी स्कूल ने हटाए स्क्रीन, कागज-पेन की वापसी
कहते हैं न कि समय का पहिया बहुत जालिम होता है. जब घूमता है तो इंसान को वहीं लाकर खड़ा कर देता है जहां से उसने चलना शुरू किया था. ये खबर भी समय के इसी बदलाव की बानगी पेश कर रही है. हर कोई आज बच्चों की स्क्रीन में रहने की आदत को लेकर डर रहा है. उसके नुकसान समझ रहा है. ऐसी ही एक आहट भारत में भी कहीं न कहीं सुनाई जरूर पड़ रही है. क्या पता भविष्य की गर्त में क्या है.
सऊदी में हमलों के बाद भारतीयों को अलर्ट, दूतावास ने जारी की एडवाइजरी
सऊदी अरब में सुरक्षा हालात बिगड़ने के बीच भारतीय नागरिकों की चिंता बढ़ गई है. रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक भारतीय की जान चली गई थी. अब भारतीय दूतावास ने खतरे को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और घरों के अंदर रहने की सलाह दी है. वहीं, सऊदी अरब से भारत लौटने वाले यात्रियों के लिए भी मुश्किलें बढ़ गई हैं.
हीरो संग इंटीमेसी देख भड़का BF, एक्ट्रेस ने छोड़े बोल्ड सीन्स
तनुश्री दत्ता के रोमांटिक सीन्स को देखकर उनके बॉयफ्रेंड को बुरा लगता था. प्यार की खातिर तनुश्री ने ऐसे सीन्स करने छोड़ दिए थे.
बिहार के वैशाली में गंगा नदी में नाव डूबी, 13 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत से मातम
बिहार में वैशाली जिले के राघोपुर से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र में मंगलवार देर शाम गंगा नदी में एक ओवरलोडेड नाव पलटने से 13 बच्चों की डूबकर मौत हो गई। इस भीषण हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम ...
RRB NTPC के 3548 पदों पर आवेदन शुरू, ग्रेजुएट को अफसर बनने का मौका
भारतीय रेलवे ने NTPC ग्रेजुएट स्तर भर्ती 2026 के तहत 3,548 पदों पर बहाली निकाली है. इनमें गुड्स ट्रेन मैनेजर, सीनियर क्लर्क और टिकट सुपरवाइजर जैसे पद शामिल हैं. ग्रेजुएट उम्मीदवार 6 नवंबर तक रेलवे भर्ती बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. चयनित युवाओं को 7वें वेतन आयोग के तहत आकर्षक सैलरी मिलेगी.
रोहतास में पेट्रोल-डीजल की दुकान में लगी आग, पिता-पुत्री की मौत
बिहार के रोहतास जिले में पेट्रोल-डीजल की एक रिटेल शॉप में आग लगने से एक ही परिवार के दो लोगों की मौत हो गई. वहीं दो लोग गंभीर रूप से झुलस गए. दोनों का सासाराम सदर अस्पताल में इलाज चल रहा है. घटना के बाद दुकान में रखे एलपीजी सिलेंडर में आग लगने और उसके फटने की भी चर्चा है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
ज्ञानेश कुमार पर नहीं हो सकता कोई एक्शन? एक कानून पर सवाल; SC करेगा फैसला
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और आयुक्तों से जुड़ी एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। इसमें साल 2023 के एक कानून की धारा 16 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में सरकार से जवाब मांगा है।
स्टिंग वीडियो विवाद में सिद्धारमैया को कोर्ट से राहत, शेयर करने पर लगी रोक
बेंगलुरु की एक कोर्ट ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की याचिका पर उनसे जुड़े एक स्टिंग वीडियो के प्रसारण और प्रसार पर अंतरिम रोक लगा दी है. सिद्धारमैया ने वीडियो को अपने खिलाफ दुष्प्रचार और मानहानि की कोशिश बताया है. उनके बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने भी वीडियो को फर्जी बताते हुए इसे छवि खराब करने की साजिश कहा है.
शरीर पर 10 गंभीर चोटें, शॉक और हेमरेज... शिवा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर पर 10 गंभीर आंतरिक चोटें मिली हैं, जो मौत से पहले की थीं. मौत की वजह शॉक और हेमरेज बताई गई है.
कभी चॉल में तंगी में काटी रातें, आज करोड़ों के मालिक मिस्टर फैजू
चॉल में कपड़े बेचने से लेकर देश के टॉप इंफ्लुएंसर बनने तक, मिस्टर फैजू का सफर बेहद इंस्पिरेशन से भरा रहा है. फैजू ने हाल ही में मक्का-मदीना में तान्या संग निकाह किया है. लग्जरी लाइफ जीने वाले फैजू आज करोड़ों फैंस के दिलों पर राज करते हैं.
Top News 14 October: बिहार नाव हादसा, ममता बनर्जी पर हमले की कोशिश, अमित शाह का राहुल गांधी पर वार
Top News 14 October : बिहार नाव हादसे में 13 बच्चों की मौत, CJP नेताओं पर ट्रेस पासिंग का मामला, ममता बनर्जी पर चाकू से हमले की कोशिश, अमित शाह की राहुल गांधी को चुनौती, चीन ने लद्दाख में 28 रणनीतिक स्थानों और भौगोलिक क्षेत्रों के मानकीकृत नाम तय ...
बर्थडे के दिन जेल जाएंगे आशुतोष रांका? सौरव दास की भी मजिस्ट्रेट के सामने पेशी, CJP का क्या दावा
नियमों का उल्लंघन कर जंतर मंतर में जबरदस्ती घुसने और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करने के बाद सौरव दास, आशुतोष रांका और CJP के कुछ अन्य सदस्यों को मंगलवार तड़के हिरासत में ले लिया गया था। अभिजीत दीपके आगबबूला हो गए हैं।
उत्तर प्रदेश का कुर्मी समाज: किन सीटों पर हैं मजबूत वोटबैंक, कितना है सत्ता में दखल?
उत्तर प्रदेश की सियासत में ओबीसी वर्ग की सबसे बड़ी जातियों में शुमार कुर्मी समाज को साधने के लिए राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत लगा दी है. आइए जानते हैं कि कुर्मी समुदाय सूबे की राजनीति में कितना दखल रखते हैं और कितनी सीटों पर प्रभाव है और सरकार में कितना दखल रखते हैं?
सीढ़ियों और बालकनी में दिख रहा है जंग लगा लोहा? कब हो सकती है खतरे की बात
बालकनी और सीढ़ियों में सरिया बाहर निकलना, जंग लगना या सीमेंट झड़ना सिर्फ सुंदरता से जुड़ी समस्या नहीं है. जानिए किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जंग क्यों लगती है और मरम्मत से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
CJI सूर्यकांत के खिलाफ पोस्ट को लेकर याचिका दायर, राहुल गांधी-अखिलेश यादव का नाम भी शामिल
CJI सूर्यकांत पर केरल कांग्रेस की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कांग्रेस, राहुल गांधी समेत कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।
UPI पर MDR कब से होगा लागू? दिवाली के बाद फैसला, जानिए इनसाइड स्टोरी
कारोबारी संगठनों और पेमेंट कंपनियों का मानना था कि त्योहारों के बीच इसे लागू करने से पेमेंट को लेकर दिक्कतें आ सकती हैं. इसी बात को ध्यान में रखकर NPCI ने दिवाली तक इस फैसले को आगे बढ़ा दिया है.
बिना झाड़ू-पोछा किए चमकेगा घर! अपनाएं जापानियों की ये 7 आसान आदतें
Japanese Cleaning Habits: क्या आप भी वीकेंड का सारा समय घर की सफाई में बिताकर थक जाते हैं? अगर हां, तो ये खबर आपके लिए है. आज हम आपको कुछ ऐसी आसान आदतों के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें जापानी लोग अपनाते हैं. इन आदतों की मदद से वे लोग बिना महंगे क्लीनर्स और घंटों मेहनत किए अपने घर को हमेशा साफ-सुथरा रख पाते हैं.
आज देश में कई अहम घटनाक्रम होने हैं। जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज है, वहीं देश की राजधानी दिल्ली में भी कई कार्यक्रम तय हैं।
पंजाब पुलिस ने पकड़ा परविंदर झोटा का कातिल, 24 घंटे में पुलिस का बड़ा एक्शन
पंजाब पुलिस ने पकड़ा परविंदर झोटा का कातिल, 24 घंटे में पुलिस का बड़ा एक्शन
शमशान घाट पर बैठी महिला को बनाया मां, आशीर्वाद से बना करोड़पति
सुदेश लहरी ने कई बार अपनी गरीबी पर बात की. उन्होंने इंटरव्यू में कहा था- उस समय हालात बहुत मुश्किल थे. घर में बहुत गरीबी थी और मैं छोटी उम्र में छोटी दुकानों, फैक्ट्रियों और चाय की दुकानों पर काम करता था. घर में हालात इतने खराब थे कि कभी-कभी चाय तक नहीं बन पाती थी. लेकिन जब मैं चाय की दुकान पर काम करता था, तो आस-पास की फैक्ट्रियों में चाय ले जाता था. मैं बहुत छोटा था और मेरे पास चप्पलें तक नहीं थीं.
मुस्कान की ख्वाहिश... बस एक बार बेटी से मिलवा दीजिए
मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जेल में बंद मुस्कान अपनी बड़ी बेटी से मिलने के लिए बेचैन है. करीब डेढ़ साल से जेल में बंद मुस्कान से अब तक कोई परिजन मिलने नहीं आया. वह अधिकारियों से अनुरोध कर रही है कि बड़ी बेटी से सिर्फ एक बार मिलवा दीजिए.
रेस्टोरेंट में आग से हड़कंप, जान बचाने के लिए पहली मंजिल से कूदे लोग, VIDEO
मौजपुर में उधम रेस्टोरेंट की रसोई में मंगलवार देर रात आग लग गई. अपनी जान बचाने के लिए लोग पहली मंजिल से नीचे कूद गए. घटना का वीडियो भी सामने आया है.
परविंदर झोटा के हत्यारे फरार, धरने पर परिवार; प्रशासन से बात करने से इनकार
पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. परविंदर का परिवार और उनके समर्थक लगातार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
रामानंद सागर की रामायण को डिज्नी ने किया था रिजेक्ट! ललित मोदी का दावा
इंडिया में IPL की शुरुआत करने वाले ललित मोदी ने बताया कि एक बार रामानंद सागर डिज्नी के पास रामायण का ऑफर लेकर गए थे. लेकिन उनका ऑफर रद्द हो गया था. फिल्ममेकर से एक भारी चूक हो गई थी, जिसके कारण उनके हाथों निराशा लगी.
पराली जलाने के मामले रोकने के लिए केंद्र सरकार सख्त, पांच राज्यों से मिशन मोड में काम करने को कहा
केंद्र सरकार ने मंगलवार को पराली जलाने का मौसम चरम पर पहुंचने से पहले मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और एनसीआर में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए।
2, 5 और 10 रुपये के सिक्के बनाने में कितना खर्च आता है?
क्या एक रुपये का सिक्का बनाने में उसकी कीमत से ज्यादा खर्च होता है? 2018 में आरटीआई के जरिए सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, एक रुपये के सिक्के की ढलाई पर 1.11 रुपये खर्च होते थे. वीडियो में जानिए दो, पांच और दस रुपये के सिक्के बनाने की लागत कितनी थी.
सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य की गिरफ्तारी पर CJP का बड़ा दावा, पुलिस पर लगाए क्या आरोप?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और बढ़ता नजर आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के ख
दिवाली-छठ पर घर जाने वालों के लिए खुशखबरी! रेलवे ने त्योहारों के लिए बनाया बड़ा प्लान
दिवाली, छठ और दुर्गा पूजा पर ट्रेन से सफर करने वालों के लिए रेलवे ने बड़ी तैयारी की है। 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक 3.4 लाख नियमित ट्रेन फेरे निर्धारित हैं। 13 अक्टूबर तक 8454 स्पेशल फेरे अधिसूचित किए गए। बिहार, यूपी और दिल्ली के आंकड़े जानें।
दिल्ली-NCR, यूपी-बिहार से पहाड़ों तक आंधी-बारिश का अलर्ट, गिरेंगे ओले!
Weather Alert: मौसम विभाग ने 14 अक्टूबर को दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश, तेज हवाओं और बिजली गिरने की चेतावनी दी है. वहीं, दक्षिण भारत में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना है. पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है
UPI MDR: फैसला अभी कायम है, सिर्फ उसकी घड़ी आगे खिसकी है
यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने के बजाय दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है. शुल्क वापस लेने की घोषणा नहीं हुई है. प्रस्तावित दरों और नियमों को लेकर कारोबारियों की चिंताएं और कांग्रेस के सवाल आगे भी बहस बढ़ा सकते हैं.
किचन सिंक के नीचे टपक रहा पानी? बिना प्लंबर 4 ट्रिक्स से करें ठीक
How To Fix Kitchen Sink Leakage: किचन सिंक के नीचे पाइप से टपकता पानी आपकी महंगी लकड़ी की कैबिनेट और फर्श को सड़ने से खराब कर सकता है. प्लंबर पर पैसे लुटाने के बजाय आप कुछ आसान तरीकों की मदद से खुद ही लीकेज को ठीक कर सकते हैं.
‘पहले शादी करो, फिर I Love You बोलो’, युवाओं को ओवैसी की अनूठी सलाह
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने युवाओं को सलाह दी कि जिससे प्यार करते हैं, पहले उससे शादी करें और फिर ‘आई लव यू’ कहें. इम्तियाज जलील के बेटे के शादी टालने के किस्से पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह खुद अब तक ‘सेट’ नहीं हुए हैं.
जब पहली बार किसी इंसान ने ध्वनि की गति से भी तेज प्लेन उड़ाया
आज के दिन ही पहली बार साउंड से भी तेज गति से किसी इंसान ने प्लेन को उड़ाया था. यह रिकॉर्ड अमेरिका के चक येजर के नाम है.
96% मुस्लिम आबादी वाले अजरबैजान में हिजाब पर बैन, क्यों भड़के छात्र?
अजरबैजान की आबादी लगभग 100 फीसदी मुस्लिम है. लेकिन संविधान सेकुलर. सरकार के आदेश में हिजाब पर सीधे प्रतिबंध नहीं है. लेकिन कानून कहता है कि वैसे लिबास न पहने जाए जिससे देश का सेकुलर कैरेक्टर प्रभावित हो. हालांकि नियम लागू होने के बाद हिजाब पहनकर स्कूल आने वाली छात्राओं को टोका जा रहा है.
CJP नेता सौरव दास-आशुतोष रांका एहतियातन गिरफ्तार, जंतर-मंतर पर नियम तोड़ना पड़ा भारी
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश और सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के मामले में CJP नेता सौरभ दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को एहतियातन गिरफ्तार किया है.
भारत में रोज बदलेंगे रेल टिकट के दाम? फ्लाइट जैसे; छठ-दीवाली पर होंगे महंगे
भारतीय रेलवे फ्लाइट की तरह दामों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, इसका आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि व्यवस्था कब से लागू की जाएगी। फिलहाल, यह प्रस्ताव और सिर्फ विचार चल रहा है।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कैसे एकजुट हुआ विपक्ष? नेहा बोरा ने भाजपा को बताया वजह
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और SIR रोकने की मांग पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने BJP पर आलोचकों को ‘दिमागी नक्सल’ और ‘राष्ट्रविरोधी’ कहने का आरोप लगाया।
एक्सप्लेनर: थिएटर की शांति से राजनीति के शोर तक, जेएनयू की लड़की कैसे बनी युवा और वामपंथी आंदोलन का नया चेहरा?
सुर्खियां: बिहार नाव हादसे में 13 बच्चों की मौत; नीला ड्रम केस में सजा का एलान; ममता पर चाकू से हमले की कोशिश--Top Headline Today Important And Big News Stories Of 14 October 2026 Updates on amar ujala
महाराष्ट्र: नालासोपारा की हाईराइज बिल्डिंग में भीषण आग, एक महिला की मौत; 15 लोगों को बचाया गया
वसई-विरार इलाके की इंपीरियल टॉवर हाईराइज बिल्डिंग की 8वीं से 10वीं मंजिल पर मंगलवार रात भीषण आग लग गई। घटना लिंक रोड पर स्थित इस इमारत में हुई, जिसमें शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है।
Weather Forecast 14 October 2026: देखिए क्या है आपके यहां मौसम का हाल | Weather Report Today
Weather Forecast 14 October 2026: देखिए क्या है आपके यहां मौसम का हाल | Weather Report Today
14 अक्टूबर 2026 को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत करीब 15 राज्यों में मौसम खराब रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में सुबह और शाम के समय ठंडक धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है।
वैशाली में नाव हादसे से 13 लोगों की मौत हो गई. हादसे के दौरान 17 वर्षीय चांदनी ने तीन बच्चों को बचाया, जबकि उसकी बहन पिंकी की जान नहीं बच सकी. पढ़िए दर्द और साहस की पूरी कहानी.
तीसरे केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा, 15 दिनों में हो सकता है कैबिनेट विस्तार; अब मुरुगन गए
केंद्रीय कैबिनेट में विस्तार कब तक होगा, इसे लेकर आधिकारिक रूप से अब तक कुछ नहीं कहा गया है। महज अटकलें ही हैं। अब केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद चर्चाएं और तेज हो गईं हैं। इससे पहले भी 2 मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं।
बेंगलुरु की एक अदालत ने मंगलवार को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया से जुड़े कथित मानहानिकारक वीडियो के प्रसारण और प्रसार पर अंतरिम रोक लगा दी।
दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी पर मिसाइल अटैक, हूतियों के हमलों से दहला सऊदी अरब
सऊदी अरब के धहरान शहर में 'अरामको' परिसर की एक प्रशासनिक इमारत पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले की खबर है. अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने के बावजूद कोई हताहत नहीं हुआ. रियाद समेत अन्य इलाकों में मिसाइल और ड्रोन रोके जाने के दावे किए गए हैं.
क्या आपका मनी प्लांट भी पीला पड़ गया है? आज हम आपको कोयले की राख और बेकिंग सोडा का देसी नुस्खा बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप मनी प्लांट को फिर से हरा भरा बना सकते हैं.
महाराष्ट्र: मुंबई के पास हाईराइज इमारत में भीषण आग, बालकनी-बाहरी हिस्सों में फंसे लोग; एक महिला की मौत की खबर---Maharashtra Massive Fire at Imperial Heights Building in Nalasopar Updates in Hindi
मतभेद बरकरार: एफसीआरए संशोधन विधेयक पर सियासी टकराव, सरकार ने आरोपों को नकारा
मतभेद बरकरार: एफसीआरए संशोधन विधेयक पर सियासी टकराव, सरकार ने आरोपों को नकारा
ट्रूडो के दौर की कड़वाहट पीछे छूटी! पीएम मोदी और मार्क कार्नी ने फोन पर की बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने फोन पर बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने के लक्ष्य के लिए आर्थिक साझेदारी समझौते पर वार्ता जल्द पूरी करने पर जोर दिया.
कैंसर से जंग लड़ रहे पोप लियो, सर्जरी के बाद दाहिने फेफड़े का हिस्सा निकाला गया
वेटिकन ने पुष्टि की है कि 71 वर्षीय पोप लियो को फेफड़े का कैंसर है. रोम के जेमेल्ली अस्पताल में 90 मिनट की सर्जरी के दौरान उनके दाहिने फेफड़े का निचला हिस्सा निकाल दिया गया है. डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी सफल रही है.
जयशंकर का दो टूक संदेश: अमेरिका से रिश्ते आसान नहीं, चीन को भी संभालना जरूरी; एफटीए पर क्या बोले विदेश मंत्री?
आज 14 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि रात 1:13 बजे तक रहेगी. इसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी. इस दिन शारदीय नवरात्र का चौथा दिन है. इस दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है.
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बवाल, पुलिस-प्रोटेस्टर्स के बीच खूनी झड़प
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन के खिलाफ इमरान खान की पार्टी PTI के प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़पें हुईं. PTI ने आंसू गैस और गोलीबारी का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने इसे खारिज किया. पुलिस ने 50 लोगों को हिरासत में लिया.
'राष्ट्रविरोधी, दिमागी नक्सल...' नेहा बोरा बोलीं- इन तमगों ने ही हमें एकजुट किया
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि भाजपा द्वारा दिए गए 'दिमागी नक्सल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे लेबलों ने ही आम जनता, छात्रों और विपक्ष को एकजुट किया है. उन्होंने चेतावनी दी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के हटने और एसआईआर प्रक्रिया रुकने तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.
Aaj Ka Rashifal 14 October 2026: 14 अक्टूबर 2026 का राशिफल आचार्य मदन मोहन के अनुसार, मेष से मीन तक जानें सभी 12 राशियों का हाल. नौकरी, कारोबार, धन और परिवार के मामलों में क्या मिलेगा लाभ, किसे रहना होगा सावधान. इसके अलावा जानें शुभ रंग, भाग्य अंक और दान.
मार्क कार्नी से पीएम मोदी की फोन पर बातचीत, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी से फोन पर सौहार्दपूर्ण और सार्थक बातचीत की।
मामला सामने आने के बाद उन्होंने परियोजना निरीक्षक के पद से इस्तीफा दिया और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 14 करोड़ रुपये विश्वविद्यालय को लौटा दिए। शेष 2.50 करोड़ रुपये का ऑडिट किया जा रहा है।
कोच्चि में तेज रफ्तार मिनी कूपर कीर की टक्कर से स्कूटर पर सवार दो युवतियों और एक युवक की मौत की मामला मंगलवार को विधानसभा में उठा।
छत्तीसगढ़ में धमतरी जिला अस्पताल के चीरघर में पोस्टमार्टम में सहयोग करने वाले स्वीपर मोहन वाल्मीकि पिछले 10 साल से दिन का भोजन नहीं करते। उन्होंने कहा कि ये शवों के प्रति सम्मान जताने का उनका तरीका है।
मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अन्नाद्रमुक के 6 विधायकों के इस्तीफे स्वीकारने का फैसला रखा बरकरार
द्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के छह अन्नाद्रमुक विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने के फैसले को बरकरार रखा।
मणिपुर में सोशल मीडिया पर डाला अश्लील कंटेंट, नाबालिग समेत 13 लोग हिरासत में
मणिपुर में टेलीग्राम चैनलों के जरिये अश्लील कंटेंट प्रसारित करने और उससे कमाई करने के आरोप में नाबालिग समेत 13 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
वैशाली में दर्दनाक हादसा 10 लोगों की मौत, हादसे के कारणों की जांच में जुटी स्थानीय पुल
वैशाली में दर्दनाक हादसा 10 लोगों की मौत, हादसे के कारणों की जांच में जुटी स्थानीय पुल
चेन्नई के जल संकट पर विजय की पहल: नायडू से अतिरिक्त पानी मांगा; क्या गोदावरी-कावेरी परियोजना बनेगी गेमचेंजर?---Tamil Nadu CM Vijay Meets Chandrababu Naidu, Seeks More Krishna Water for Chennai
आज की खबरें: केरलम में सिनेगॉग के पास आगजनी मामला; आरोपी गिरफ्तार, घर से मादक पदार्थ बरामद
आज की खबरें: केरलम में सिनेगॉग के पास आगजनी; आरोपी गिरफ्तार, घर से मादक पदार्थ बरामद
दिल्ली: फोन कर घर से बाहर बुलाया, फिर शख्स पर की ताबड़तोड़ फायरिंग
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार में मंगलवार को 30 वर्षीय मनीष यादव पर कथित तौर पर दो से तीन राउंड फायरिंग की गई. घायल मनीष को अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है. पुलिस के मुताबिक, हमले से पहले उन्हें फोन कर घर से बाहर बुलाया गया था.
बिहार नाव हादसा: वैशाली में 13 बच्चों की मौत, पीएम मोदी ने जताया दुख; मृतकों के परिजनों को छह लाख रुपये की मदद---Bihar Vaishali Boat Accident: Several Children Dead, PM Modi Announces Financial Aid Updates Hindi
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भारत में अपने बच्चों के साथ दो साल से रह रही एक कोरियाई महिला ने अंडमान को उन सबसे खूबसूरत जगहों में से एक बताया है, जहां वह अभी तक घूमने गई हैं.
Virgo Tarot Card Rashifal: घर में उत्सव की तैयारी, ज्यादा उदारता से नुकसान हो सकता है
Virgo Tarot Card Horoscope 14 October: Seven of wands की ऊर्जा भावनात्मक व्यवहार की जगह व्यवहारिकता पर जोर, व्यवसायिक और निजी जीवन के कार्यों लेकर सजगता और सूझबूझ और समझदारी से मौजूदा स्थिति में सुधार लाने के प्रयास की बात कर सकती है. आईए जानते है, कन्या राशि वाले जातकों के जीवन, रिश्तों, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.
Leo Tarot Card Rashifal: बड़े फैसलों से स्थिति मजबूत, करीबी से धोखे के कारण नुकसान की आशंका
Leo Tarot Card Horoscope 14 October:Two of swords की ऊर्जा जीवन में व्यावहारिकता और भावनात्मकता के बीच संतुलन लाने का प्रयास, अपनी गलती के लिए दूसरों पर दोष ना डालने की कोशिश और पारिवारिक जीवन में अच्छा तालमेल बनाए रखने की आवश्यकता की बात लेकर आ सकती है.आईए जानते हैं, सिंह राशि वाले जातकों के जीवन, रिश्तों,आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.
Cancer Tarot Card Rashifal: सरकारी नौकरी के अच्छे अवसर, परिवार के नकारात्मक विचारों से परेशानी
Cancer Tarot Card Horoscope 14 October: Page of pentacles की ऊर्जा जीवन में सकारात्मक संतुलन लाने के साथ चीजों को व्यवस्थित रखने का प्रयास, सरकारी नौकरी से संबंधित अच्छे अवसर मिलने की संभावना और जरूरी दस्तावेज और फाइलों की साज संभाल अच्छे से करने की बात लेकर आ सकती है. आईए जानते हैं, कर्क राशि वाले जातकों में जीवन,रिश्तो, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.
MP में आधी रात बदले इन जिलों के कलेक्टर... जानिए किसे मिली कहां की कमान
MP IAS Transfer List Update: मध्य प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल के तहत कई जिलों के कलेक्टर बदले गए. जबलपुर, नर्मदापुरम, रायसेन, सिंगरौली और पन्ना समेत 11 से अधिक जिलों में नई पदस्थापना. पढ़ें पूरी लिस्ट...
Gemini Tarot Card Rashifal: नई नौकरी के लिए जगह बदलने पर विचार, गलत कामों से दूरी जरूरी
Gemini Tarot Card Horoscope 14 October: Seven of swords की ऊर्जा ज्यादा सोचने की आदत के चलते व्यावहारिकता से दूरी, नई नौकरी के साथ स्थान परिवर्तन पर विचार की आवश्यकता और आत्म चिंतन करने तथा अपनी गलतियां में सुधार ला आने की जरूरत की बात कर सकती हैं. आईए जानते हैं, मिथुन राशि वाले जातकों के जीवन,रिश्तों, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में.

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