केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा, कहा हाल के घटनाक्रम से मन दुःखी
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले विद्यार्थियों के धरना-प्रदर्शन और विपक्षी दलों के दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आज दोपहर […] The post केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा, कहा हाल के घटनाक्रम से मन दुःखी appeared first on Sabguru News .
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और भविष्य में पेपर लीक जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार संसद में सख्त कानून लाएगी।
देवशयनी एकादशी से शुरू हुआ चातुर्मास: 4 महीने तक न करें ये काम, इन राशियों की चमकेगी किस्मत
आज देवशयनी एकादशी है और इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत हो चुकी है। मान्यता है कि यह वह समय होता है जब भगवान विष्णु पूरे चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि के संचालन का कार्यभार अन्य देवी-देवताओं, विशेषकर भगवान शिव के हाथों में होता है।चातुर्मास (जिसे चौमासा भी कहा जाता है) के इन चार महीनों में शादी-विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। अब सभी शुभ कार्यों की शुरुआत 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन से होगी। भले ही यह समय सांसारिक उत्सवों का नहीं है, लेकिन पूजा-पाठ, जप और साधना के लिए इसे बहुत फलदायी माना गया है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चातुर्मास के ये चार महीने 4 विशेष राशियों के लिए बहुत लकी साबित होने वाले हैं। आइए जानते हैं किन राशियों पर रहेगी भगवान विष्णु की विशेष कृपा:वृष राशि (Taurus): तरक्की और मुनाफावृष राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से काफी मजबूती लेकर आ रहा है। अगर आपका कोई काम लंबे समय से रुका हुआ था, तो अब उसे गति मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों के काम की ऑफिस में सराहना होगी और बॉस की तरफ से नई जिम्मेदारियां भी मिल सकती हैं। वहीं, व्यापार से जुड़े लोगों को इस दौरान अच्छा मुनाफा होने की पूरी उम्मीद है।कर्क राशि (Cancer): अटका हुआ धन मिलेगाइस दौरान कर्क राशि के जातकों का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ रहेगा। आपकी सही फैसले लेने की क्षमता मजबूत होगी, जिसका सीधा फायदा आपको अपने कार्यक्षेत्र (Workplace) में मिलेगा। सबसे अच्छी खबर यह है कि अगर आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था या किसी ने उधार लिया था, तो वह इस समय वापस मिल सकता है।सिंह राशि (Leo): मान-सम्मान और बड़ी सफलतासिंह राशि वालों के लिए यह समय अपनी मेहनत का मीठा फल चखने का है। आपके करियर में अच्छी प्रगति देखने को मिलेगी, जिससे परिवार और समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। अगर आप किसी बड़े लक्ष्य या प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, तो उसमें आपको बड़ी सफलता मिल सकती है।तुला राशि (Libra): नए आय के स्रोत और पारिवारिक शांतितुला राशि के जातकों के लिए चातुर्मास का यह समय करियर और निजी जीवन, दोनों ही मोर्चों पर शानदार रहने वाला है। आपको कमाई के कुछ नए रास्ते मिल सकते हैं, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति में बड़ा और सकारात्मक सुधार आएगा। इसके अलावा, अगर परिवार में कोई अनबन या मतभेद चल रहा था, तो वह भी सुलझ जाएगा और घर में शांति का माहौल रहेगा।क्या आप इस लेख में पाठकों की जानकारी बढ़ाने के लिए चातुर्मास के दौरान किए जाने वाले कुछ विशेष उपायों या पूजा-विधि को भी शामिल करना चाहेंगे?
स्मार्टफोन की कीमतें क्यों छू रही हैं आसमान? इन 5 कारणों से समझें क्या आगे और महंगे होंगे मोबाइल
पिछले कुछ महीनों में बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक लगभग हर स्मार्टफोन की कीमत में जबरदस्त उछाल आया है। फोन के महंगे होने की वजह सिर्फ आम महंगाई नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दखल, महंगी मेमोरी चिप्स और मैन्युफैक्चरिंग लागत में हुई बढ़ोतरी है।अगर आप भी नया फोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं और बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो आइए एक टेक और बिजनेस एनालिस्ट के नजरिए से समझते हैं स्मार्टफोन के महंगे होने के 5 सबसे बड़े कारण।स्मार्टफोन के महंगे होने की 5 मुख्य वजहें1. AI के कारण मेमोरी चिप्स का महंगा होनादुनिया भर में AI डेटा सेंटर और सर्वर की मांग तेजी से बढ़ रही है।चिप बनाने वाली कंपनियां अब स्मार्टफोन के बजाय AI के लिए इस्तेमाल होने वाली चिप्स के निर्माण पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।इससे स्मार्टफोन की रैम (RAM) और स्टोरेज की लागत 2 से 3 गुना तक बढ़ गई है। पहले फोन की कुल लागत में मेमोरी का हिस्सा 10-15% होता था, जो अब बढ़कर 30-40% हो गया है।2. ऑन-डिवाइस AI और उन्नत हार्डवेयरआजकल हर नया फोन ऑन-डिवाइस AI फीचर्स, हाई-एंड कैमरा और ज्यादा रैम के साथ आ रहा है। इन एडवांस्ड फीचर्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए ताकतवर प्रोसेसर और महंगे हार्डवेयर की आवश्यकता होती है, जिससे कंपनियों का प्रोडक्शन खर्च सीधा बढ़ जाता है।3. कमजोर रुपया और सप्लाई चेन का दबावस्मार्टफोन के कई अहम कंपोनेंट्स आज भी आयात किए जाते हैं।अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी ने आयात लागत को काफी बढ़ा दिया है।इसके साथ ही ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव और लॉजिस्टिक्स (परिवहन) खर्च में हुई बढ़ोतरी ने भी कंपनियों को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर किया है।4. बजट स्मार्टफोन बाजार पर सबसे भारी असरबढ़ती लागत की सबसे बड़ी मार 15,000 रुपये से कम कीमत वाले बजट स्मार्टफोन्स पर पड़ी है।काउंटरपॉइंट रिसर्च (Counterpoint Research) के अनुसार, इस बजट सेगमेंट की बिक्री में सालाना आधार पर 45% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन का भी कहना है कि फोन महंगे होने से खुदरा (रिटेल) बिक्री काफी धीमी पड़ गई है।5. क्या भविष्य में और महंगे होंगे फोन?इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की मानें तो फिलहाल आम आदमी को मोबाइल की कीमतों से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।चिप्स की कमी और AI सर्वर की बढ़ती मांग के कारण कंपोनेंट्स आगे भी महंगे बने रह सकते हैं।लागत को संतुलित करने के लिए कंपनियां अब फोन के बॉक्स से चार्जर हटाने, 4G मॉडल्स पर दोबारा जोर देने और ग्राहकों को फाइनेंस/EMI ऑफर्स देने जैसे कदम उठा रही हैं।क्या आप इस लेख को अपने पाठकों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया (जैसे Facebook या X) के लिए एक छोटा और आकर्षक पोस्ट भी तैयार करवाना चाहेंगे?
देशभर में नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर चल रहे भारी बवाल और लगातार बढ़ते राजनीतिक व सामाजिक दबाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे पहले दिन से ही इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी ले रहे थे। आपको बता दें कि सीजेपी (CJP) के नेतृत्व में छात्र पिछले एक महीने से भी अधिक समय से उनके इस्तीफे पर अड़े थे। यहां तक कि मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के समर्थन में लंबी भूख हड़ताल की थी। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, आइए एक नजर डालते हैं धर्मेंद्र प्रधान के बतौर शिक्षा मंत्री कार्यकाल की प्रमुख सफलताओं और विवादों पर।धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धियांउनके कार्यकाल में भारतीय शिक्षा प्रणाली में कई दूरगामी और सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं, जिन्होंने एजुकेशन सिस्टम की दिशा बदल दी।CUET की शुरुआत: देश के सभी केंद्रीय और प्रमुख विश्वविद्यालयों में अंडरग्रेजुएट एडमिशन को पारदर्शी और एक समान बनाने के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) को सफलतापूर्वक लागू किया गया।सस्ती और सुलभ पाठ्यपुस्तकें: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत NCERT की नई किताबें तैयार की गईं। इनकी छपाई क्षमता तीन गुना तक बढ़ाई गई, जिससे बाजार में किताबों के दाम कम हुए और अभिभावकों को बड़ी आर्थिक राहत मिली।विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में एंट्री: उच्च शिक्षा को ग्लोबल स्टैंडर्ड का बनाने के लिए NEP 2020 के तहत 19 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने की ऐतिहासिक मंजूरी दी गई।हायर एजुकेशन और सिंगल रेगुलेटर: मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) और 4 साल के ग्रेजुएशन प्रोग्राम (FYUP) पर खास जोर दिया गया। इसके अलावा यूजीसी और एआईसीटीई जैसी संस्थाओं को मिलाकर एक सिंगल रेगुलेटर बनाने के लिए ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पेश किया गया।कार्यकाल से जुड़े वो विवाद, जिन्होंने बढ़ाई सरकार की चिंताजहां एक ओर शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधार हुए, वहीं कुछ बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई धांधली ने सरकार को बैकफुट पर भी धकेला।NEET-UG 2024 और 2026 का पेपर लीक: नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में धांधली और अनियमितताओं के आरोपों ने लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए। देशभर में हुए उग्र विरोध प्रदर्शनों ने सरकार की चिंताएं काफी बढ़ा दीं।डिजिटल मूल्यांकन में तकनीकी खामी: सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में पहली बार इस्तेमाल हुई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली तकनीकी खराबी और धुंधली कॉपियों के कारण काफी विवादों में रही।त्रिभाषा फॉर्मूले और UGC नियमों पर तकरार: कक्षा 9 में त्रिभाषा नीति लागू करने पर तमिलनाडु समेत कई गैर-हिंदी भाषी राज्यों ने केंद्र पर 'हिंदी थोपने' का आरोप लगाया। वहीं, यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को लेकर भी शिक्षा जगत और सामाजिक हलकों में भारी विरोध देखा गया।इन तमाम महत्वपूर्ण उपलब्धियों और गंभीर विवादों के बीच धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।
नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर देश भर में जारी भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। लगभग 37 दिनों से जंतर-मंतर पर डटे छात्रों के लगातार बढ़ते दबाव के बाद आखिरकार भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।इस्तीफा देते हुए उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर पर जो स्थिति बनी हुई है, उससे देश की एकता और अखंडता को खतरा हो सकता है। युवाओं का भविष्य बर्बाद न हो और वे कानूनी पेचीदगियों में न फंसे, इसी को देखते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंपने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान ऐसे पहले मंत्री हैं, जिन्हें किसी विरोध-प्रदर्शन के दबाव में अपना पद छोड़ना पड़ा है। 2014 से सरकार में रहे प्रधान को मोदी कैबिनेट का काफी कद्दावर मंत्री माना जाता था और वे इससे पहले पेट्रोलियम व इस्पात जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके थे।धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के 5 मुख्य कारण1. छात्र और विपक्ष का कड़ा रुखजंतर-मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ी रही। सीजेपी के प्रतिनिधियों (सौरव दास और आशुतोष रांका) ने स्पष्ट कर दिया था कि प्रदर्शन तभी खत्म होगा जब शिक्षा मंत्री पद छोड़ेंगे। इसके साथ ही 10 जनपथ से छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।2. संसद से लेकर सड़क तक मची अफरा-तफरी20 जुलाई से शुरू हुए संसद सत्र के शुरुआती 5 दिनों में लगातार हंगामे के कारण राज्यसभा और लोकसभा दोनों की कार्यवाही ठप रही। वहीं, दिल्ली के अलावा बिहार (पटना, सीवान), महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बीजेपी शासित राज्यों में भी छात्रों का विरोध-प्रदर्शन उग्र रूप लेने लगा था, जिससे केंद्र सरकार पर दबाव बहुत अधिक बढ़ गया था।3. डैमेज कंट्रोल में नाकामी3 मई को हुए नीट पेपर लीक के बाद खड़े हुए इस विवाद को शिक्षा मंत्रालय ठीक से नहीं संभाल सका। शुरुआती दौर में सरकार की ओर से प्रदर्शन को नजरअंदाज किया गया। जब विवाद बेकाबू हो गया, तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हस्तक्षेप करते हुए सख्त कानून बनाने की घोषणा करनी पड़ी, जबकि शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान डैमेज कंट्रोल करने में असफल रहे।4. अड़ियल रवैया और छात्रों से संवाद का अभावधर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे उनका अड़ियल रवैया और छात्रों से सीधे संवाद न बनाना भी बड़ी वजह माना जा रहा है। जहां कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जैसे नेताओं ने किसान आंदोलनों के दौरान चंडीगढ़ जाकर बातचीत से मसले सुलझाए, वहीं धर्मेंद्र प्रधान इस पूरे विवाद के दौरान प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं से पूरी तरह कटे रहे।5. एनटीए की लापरवाही और सिफारिशों को लागू न करनावर्ष 2024 में भी नीट पेपर लीक होने के बाद डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी। कमेटी द्वारा दिए गए सुझावों को पूर्ण रूप से लागू न किए जाने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की लगातार हो रही लापरवाहियों की नैतिक जिम्मेदारी भी आखिरकार शिक्षा मंत्री के सिर आई, जिसके चलते उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।
देशभर में नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर चल रहे भारी आक्रोश और छात्र आंदोलन ने आखिरकार एक नया मोड़ ले लिया है। एक महीने से अधिक समय तक जंतर-मंतर पर चले विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बाद, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। छात्रों की अहम मांग पूरी होने के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल है और युवा इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बता रहे हैं।धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की क्या वजह बताई?सोशल मीडिया पर अपने विस्तृत पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले दिन से इस स्थिति की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने लिखा कि वे नहीं चाहते कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया या कानूनी पेचीदगियों में उलझे। देश में भ्रम का फायदा राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठाएं, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। उन्होंने यह भी संकल्प दोहराया कि वे आगे भी देश और ओडिशा के युवाओं के लिए काम करते रहेंगे। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नागपुर से अचानक दिल्ली बुलाया गया है।विपक्ष और छात्र संगठनों ने बताया 'लोकतंत्र की जीत'शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर आते ही विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखा प्रहार किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे सत्य की जीत और 'सत्ता के हठ की हार' करार दिया। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री को उन छात्रों से माफी मांगनी चाहिए जिन पर लाठियां और पैलेट गन (Pellet Guns) चलाई गईं। वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इसे युवा शक्ति की जीत बताया। दिग्गज नेता शरद पवार ने भी छात्रों के लगातार 28 दिनों के अटूट संघर्ष की सराहना करते हुए इसे अन्याय के खिलाफ बड़ी सफलता माना है।सोनम वांगचुक और CJP की प्रतिक्रियासामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्होंने इस मुद्दे पर 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी, ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे देश की 'जेन ज़ेड' (Gen Z) और शांतिपूर्ण आंदोलन की जीत बताया। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी जंतर-मंतर पर जश्न मनाते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है। CJP ने अपनी मांगों की लिस्ट अपडेट कर दी है, जिसमें पीड़ित परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा, छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने और पुलिस द्वारा सार्वजनिक माफी की मांगें अभी भी पेंडिंग हैं, जिन पर जंतर-मंतर और पूरा देश सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
देश भर में नीट (NEET) पेपर लीक मामले और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से फैलाया जा रहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कतिपय पोस्ट्स और संदेशों में कहा जा रहा है कि जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों, भूख हड़ताल और विभिन्न संगठनों की मांगों के दबाव में आकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है।सरकार और PIB ने खारिज की इस्तीफे की अफवाहआधिकारिक सूत्रों और पीआईबी (PIB Fact Check) ने इस तरह के सभी बयानों और वायरल संदेशों का पूरी तरह खंडन किया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से कोई इस्तीफा नहीं दिया है। सोशल मीडिया पर चल रहे बयानों और टेक्स्ट मैसेजेस में कई मनगढ़ंत बातें, काल्पनिक संगठनों के नाम और असत्य दावे जोड़े गए हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।परीक्षा प्रणाली में सुधार और कड़े कानून पर सरकार का जोरकेंद्र सरकार का स्पष्ट कहना है कि मंत्री के पद छोड़ने के बजाय प्राथमिकता परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की है। सरकार NTA के पुनर्गठन, पेपर लीक रोधी कड़े कानून (Public Examinations Bill) को लागू करने और धांधली में शामिल भू-माफिया व कोचिंग सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
नीट पेपर लीक मामले में छात्र आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में छात्र संगठनों के आह्वान पर शनिवार को बुलाए गए बिहार बंद के दौरान कई जिलों में प्रदर्शन हिंसक हो गया। राजधानी पटना, सीवान, छपरा और औरंगाबाद समेत कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक बोले- यह लोकतंत्र की जीत, अब शिक्षा सुधारों की बारी
गुरुग्राम: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण जनभागीदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों की सफलता का प्रतीक है। मेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए आंदोलन में शामिल युवाओं, छात्रों और देशभर के नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब मजबूत होता है, जब नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हैं और व्यवस्था उनकी आवाज सुनती है। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम जनता की एकजुटता और लोकतांत्रिक जवाबदेही का उदाहरण है। शांति, धैर्य और निरंतर संघर्ष की जीत अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने लिखा कि यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत है, जो सड़कों से उठकर लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि यह शांति, धैर्य और लगातार किए गए संघर्ष की भी सफलता है। वांगचुक ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में सकारात्मक बदलाव तभी संभव होता है, जब नागरिक अहिंसक और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखें। उन्होंने आंदोलन में भाग लेने वाले युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद संयम बनाए रखा और अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखा। युवाओं और नागरिकों को दी बधाई वांगचुक ने अपने संदेश में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), देश की जेन-ज़ेड पीढ़ी और उन सभी नागरिकों को बधाई दी, जिन्होंने आंदोलन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भागीदारी निभाई। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने बिना भय के अपनी आवाज उठाई और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग किया। उनके अनुसार, जनता की एकजुटता ने यह संदेश दिया है कि शांतिपूर्ण जनआंदोलन भी जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है। जवाबदेही के बाद अब सुधारों पर जोर सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा किसी आंदोलन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा कि अब जवाबदेही तय होने के बाद शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और स्थायी सुधार लागू करने का समय है। उनके मुताबिक, यह अवसर केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि छात्रों का विश्वास बहाल करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। परीक्षा प्रणाली में सुधार की उठाई मांग वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए सुधारों का उद्देश्य विद्यार्थियों में भरोसा कायम करना और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करना होना चाहिए। NEET-UG विवाद की पृष्ठभूमि में आया बयान धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्र आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों की ओर से परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग लगातार उठाई जाती रही है। इसी संदर्भ में सोनम वांगचुक का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। लोकतंत्र में संवाद और सुधार की आवश्यकता अपने संदेश के अंत में वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की आवाज और व्यवस्था की जवाबदेही में निहित होती है। उन्होंने कहा कि अब समय विरोध और जवाबदेही से आगे बढ़कर सकारात्मक बदलाव लाने का है। उनके अनुसार, यदि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वास को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो यह छात्रों और देश दोनों के हित में होगा।
केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल उस पोस्ट को भ्रामक बताया जिसमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन के पीछे किसी विदेशी ताकत, पाकिस्तान या चीन की भूमिका से इनकार कर दिया है।
झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले अभिजीत दीपके
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल है। अभिजीत दीपके ने कहा- कहते थे क्रांति नहीं होगी, लेकिन सरकार झुक गई। पढ़ें पूरी खबर।
धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP का धरना जारी, क्या है उनकी 2 अन्य बड़ी मांगें
Dharmendra Pradhan Resigns : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान के इस्तीफे की खबर से जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों में हर्ष की लहर दौड़ गई। हालांकि इस्तीफे के बाद भी जंतर मंतर पर कॉकरोच ...
भागदौड़ भरी जिंदगी और दिनभर की थकान के बाद हर व्यक्ति चाहता है कि उसे अपने बेडरूम में जाकर सुकून की नींद मिले, ताकि अगले दिन के लिए खुद को तरोताजा कर सके। लेकिन कई बार तमाम कोशिशों के बावजूद रातभर नींद नहीं आती, मन बेचैन रहता है और सुबह उठने पर भारीपन महसूस होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे की वजह आपकी सेहत या काम का तनाव ही नहीं, बल्कि आपके बेडरूम का वास्तु दोष भी हो सकता है? खासकर आपके सोने वाले बेड (Bed) और उसके ठीक नीचे रखी चीजें आपके जीवन की ऊर्जा को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। वास्तु शास्त्र के जानकारों के अनुसार, पलंग के नीचे का स्थान हमेशा साफ-सुथरा और ऊर्जा के प्रवाह से मुक्त होना चाहिए, अन्यथा यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है।बेड के नीचे क्या रखना और क्या नहीं रखना है जरूरी?अक्सर लोग घर में जगह की कमी के कारण पलंग के नीचे बने बॉक्स या खाली जगह में फालतू सामान, पुराने बक्से, जूतों के डिब्बे, लोहे का कबाड़ या इलेक्ट्रॉनिक का सामान ठूंस-ठूंस कर भर देते हैं। वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, बेड के नीचे कभी भी जंग लगा हुआ सामान, धूल-मिट्टी से भरा कबाड़ या भारी और बेकार की वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। ऐसा करने से उस स्थान पर नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का दायरा बढ़ने लगता है, जो सोते समय इंसान के औरा (Aura) को प्रभावित करता है। इसके परिणामस्वरुप व्यक्ति को बुरे सपने आना, अज्ञात भय बने रहना, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना और मानसिक बेचैनी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।कौन सी चीजें तुरंत निकाल देनी चाहिए बाहर?यदि आपको भी लंबे समय से बिना किसी कारण के तनाव, सिरदर्द या अनिद्रा की शिकायत महसूस हो रही है, तो सबसे पहले अपने बेडरूम की और अपने पलंग की ताक-झांक करें। पलंग के नीचे रखी टूटी-फूटी वस्तुएं, पुरानी दवाइयां, काले या गंदे कपड़े और भारी चमड़े के सामान तुरंत बाहर कर दें। इसके अलावा कई लोग सोते समय अपने सिरहाने के पास पानी की बोतल या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स रख लेते हैं, जो वास्तु और स्वास्थ्य दोनों के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जाता है। बेड के आसपास और नीचे का वातावरण जितना खुला, स्वच्छ और हवादार रहेगा, आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह उतना ही बेहतर होगा।वास्तु दोष दूर करने के आसान और प्रभावी उपायअपने बेडरूम के वास्तु को सुधारने और मानसिक शांति पाने के लिए सबसे पहले बेड के नीचे की पूरी सफाई करें। यदि वहां कोई अनावश्यक सामान रखा है, तो उसे तुरंत हटाकर कबाड़ को बाहर का रास्ता दिखाएं। कमरे में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए रोजाना पोछा लगाते समय पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक (Rock Salt) मिला सकते हैं, जिससे कोने-कोने की नकारात्मकता दूर होती है। इसके अलावा बेडरूम में हल्के और soothing रंगों का प्रयोग करें और सोने से पहले कमरे में हल्का कपूर या लैवेंडर एसेंशियल ऑयल जलाएं। इन छोटे-छोटे वास्तु बदलावों को अपनाकर आप न केवल अपनी बेचैनी से छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि चैन की गहरी नींद भी हासिल कर सकते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव (Shani Dev) को न्याय का देवता और कर्मफलदाता माना गया है। जब किसी जातक की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती (Shani Sadesati) या ढैय्या का प्रभाव शुरू होता है, तो जीवन में कई प्रकार की मानसिक, शारीरिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जगत के पालनहार भगवान श्री राम के परम भक्त संकटमोचन हनुमान जी की शरण में जाने मात्र से शनि का कुप्रभाव स्वतः शांत हो जाता है। हनुमान जी की पूजा करने वालों पर शनिदेव कभी भी कष्टकारी प्रभाव नहीं डालते, बल्कि उन्हें हर संकट से उबार लेते हैं। आइए जानते हैं कि शनि की साढ़ेसाती के दौरान हनुमान जी की पूजा किस विधि से करनी चाहिए और किन उपायों से जीवन के सारे कष्ट दूर हो सकते हैं।किन राशियों पर रहता है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव?प्रत्येक समय चक्र में शनि की साढ़ेसाती एक साथ तीन अलग-अलग राशियों पर प्रभाव डालती है। किसी भी राशि के लिए यह चक्र लगभग साढ़े सात वर्षों का होता है, जिसमें जन्म राशि से ठीक पहले, उस राशि पर और उसके बाद की राशि पर शनि का गोचर होता है। इसके अलावा जिन राशियों पर शनि की ढैय्या चल रही होती है, उन्हें भी जीवन के विभिन्न मोर्चों पर संघर्षों का सामना करना पड़ता है। यदि आपकी राशि पर भी शनि का ऐसा कोई प्रभाव चल रहा है, तो आपको नियमित रूप से हनुमान जी की आराधना को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लेना चाहिए, जिससे ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।हनुमान जी की उपासना की विशेष विधि और अचूक मंत्रशनि के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें और हनुमान जी के मंदिर या घर के पूजा घर में चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। उन्हें सिंदूर, चोला और चमेली के तेल का अर्पण करना बेहद फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान हनुमान जी के चमत्कारी मंत्रों का सच्चे मन से जाप करना चाहिए। 'ॐ हं हनुमते नमः' या 'राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे सहस्रनाम त तुल्यं राम नाम वरानने' मंत्र का नियमित जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और शनि का भय समाप्त हो जाता है।हनुमान चालीसा का पाठ और अन्य अचूक उपायहनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) में तुलसीदास जी ने लिखा है बाल समय रवि भयो लहि यो ताहीं, मधुर फल जानि हनुमान जी ने भोजन किया था और संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। रोजाना सुबह और शाम के समय कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं। इसके अलावा शनिवार के दिन गरीबों को दान देना, सुंदरकांड का पाठ करना और हनुमान जी को गुड़-चने का भोग लगाना भी अत्यंत लाभकारी उपाय माना गया है। इन छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी उपायों से न सिर्फ शनिदेव प्रसन्न होते हैं, बल्कि जीवन में आ रही सभी बाधाएं भी हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं।
वैभव सूर्यवंशी की आतिशी बैटिंग और मयंक-अशोक की पेस से थरथराएगी विरोधी टीम
भारतीय क्रिकेट का भविष्य अब पूरी तरह से सुरक्षित हाथों में नजर आ रहा है, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण घरेलू सर्किट से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पटल पर छाने वाले युवा सितारे हैं। भारत और जिम्बाब्वे (IND vs ZIM) के बीच होने वाले मुकाबलों को लेकर क्रिकेट प्रेमियों के बीच उत्साह चरम पर है, क्योंकि इस बार टीम में ऐसे युवा धुरंधरों को मौका मिलने की उम्मीद है जो अपनी आक्रामक शैली से मैच का रुख पलटने का दम रखते हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) का है, जिनकी विस्फोटक बल्लेबाजी शैली किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी मानी जाती है। वहीं दूसरी तरफ, गेंदबाजी विभाग में मयंक और अशोक की खौफनाक रफ्तार विपक्षी बल्लेबाजों की शामत लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।वैभव सूर्यवंशी का खौफ: क्रीज पर उतरते ही गेंदबाजों की उड़ जाती है नींदकम उम्र में ही अपनी शानदार और बेखौफ बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत में तहलका मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए हैं। उनकी बल्लेबाजी तकनीक और मैदान के चारों तरफ बड़े शॉट खेलने की कला ने चयनकर्ताओं और विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जब वह क्रीज पर उतरते हैं, तो विरोधी गेंदबाजों के माथे पर शिकन साफ देखी जा सकती है। जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज में उनकी यह आक्रामक शैली टीम इंडिया को पावरप्ले में ही एक मजबूत शुरुआत दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है, जिससे फैंस को मैदान पर चौकों-छक्कों की बारिश देखने को मिलने की पूरी उम्मीद है।मयंक और अशोक की तेज रफ्तार से कांपेगा विपक्षी खेमासिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी के मोर्चे पर भी भारत के पास ऐसे युवा तेज गेंदबाज हैं जिनकी रफ्तार और स्विंग अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों को बैकफुट पर धकेलने का माद्दा रखती है। मयंक और अशोक (Mayank and Ashok) की जोड़ी अपनी तीव्र गति (Pace and Bounce) के लिए जानी जाती है। पिच पर थोड़ी सी भी मदद मिलने पर ये गेंदबाज विपक्षी टीम के टॉप ऑर्डर को तहस-नहस करने की क्षमता रखते हैं। जिम्बाब्वे की पिचों पर इन गेंदबाजों की बाउंस और यॉर्कर गेंदों का सामना करना किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होगा, और यही वजह है कि मैदान पर इन दोनों का गदर देखने को मिल सकता है।युवा ब्रिगेड से सजी टीम इंडिया का नया अंदाजभारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की युवा खिलाड़ियों को तराशने की रणनीति का यह एक बेहतरीन नमूना है। सीनियर खिलाड़ियों के साथ-साथ इन युवा प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच देना यह साबित करता है कि आने वाले समय में भारतीय टीम हर प्रारूप में दबदबा बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीरीज के आगाज से पहले ही जिस तरह से इन युवा खिलाड़ियों की चर्चा हो रही है, उसने मुकाबलों के रोमांच को कई गुना बढ़ा दिया है। क्रिकेट फैंस यह देखने के लिए बेताब हैं कि मैदान पर उतरकर ये युवा सितारें अपनी चमक बिखेरने में कितने कामयाब होते हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के भविष्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया पर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। खासकर इंग्लैंड दौरे के दौरान उनके फॉर्म और टीम की भविष्य की योजनाओं को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही थीं। इस बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के शीर्ष अधिकारियों ने इन तमाम कयासों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। बोर्ड के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल रोहित शर्मा के संन्यास या उन्हें टीम से बाहर किए जाने को लेकर कोई चर्चा नहीं है और वह टीम की योजनाओं में पूरी तरह शामिल हैं।बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने खारिज की संन्यास की खबरेंबीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया है कि रोहित शर्मा के अंतरराष्ट्रीय भविष्य को लेकर जो भी बातें फैलाई जा रही हैं, उनका कोई मतलब नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में रोहित के संन्यास का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। बोर्ड के मुताबिक, 'हिटमैन' रोहित शर्मा टीम इंडिया का अभिन्न हिस्सा हैं और जब तक वह चयन के लिए उपलब्ध हैं और स्कीम ऑफ थिंग्स में हैं, तब तक उनका सफर जारी रहेगा। बोर्ड के इस आधिकारिक रुख के बाद उन तमाम रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया गया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि प्रबंधन अब सीनियर खिलाड़ियों से आगे बढ़ने की सोच रहा है।2027 वनडे वर्ल्ड कप खेलना है रोहित का मुख्य लक्ष्यरोहित शर्मा पहले ही टी20 और टेस्ट फॉर्मेट को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन उनका पूरा फोकस इस समय वनडे क्रिकेट पर है। वह अपनी फिटनेस पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं और उनका सबसे बड़ा सपना साल 2027 में होने वाले अगले वनडे वर्ल्ड कप में देश के लिए मैदान पर उतरना है। हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई सीरीज के दौरान लॉर्ड्स के मैदान पर शानदार शतकीय पारी खेलकर रोहित ने यह साबित कर दिया कि उनके बल्ले की धार अभी कम नहीं हुई है। मैच के बाद उन्होंने खुद भी यह स्पष्ट किया था कि बाहरी शोर और आलोचनाओं से उनका ध्यान नहीं भटकता, उनका काम सिर्फ मैदान पर जाकर देश के लिए रन बनाना और टीम को जिताना है।फैंस के लिए राहत की बड़ी खबरक्रिकेट के गलियारों में इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई थी कि क्या चयनकर्ता युवा खिलाड़ियों को लंबा मौका देने के लिए सीनियर खिलाड़ियों को दरकिनार करेंगे। हालांकि, बीसीसीआई के इस स्पष्टीकरण के बाद यह तय माना जा रहा है कि रोहित शर्मा अपनी शानदार लय और अनुभव के दम पर आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में टीम इंडिया की अगुवाई और बल्लेबाजी क्रम को मजबूती देते रहेंगे। उनके फैंस के लिए यह किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है कि उनका यह चहेता खिलाड़ी अभी मैदान पर चौके-छक्के बरसाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वेस्टइंडीज सीरीज से बाहर होंगे श्रेयस अय्यर समेत 8 धुरंधर खिलाड़ी! बीसीसीआई की नई योजना से मची हलचल
भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य और आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) एक बार फिर बड़े और कड़े फैसले लेने की तैयारी में जुट गया है। क्रिकेट गलियारों से सामने आ रही ताजा खबरों के अनुसार, वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली जाने वाली आगामी सीरीज के लिए टीम इंडिया में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस संभावित बदलाव के तहत मिडिल ऑर्डर के स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) समेत लगभग 8 प्रमुख खिलाड़ियों को इस सीरीज से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। चयनकर्ताओं और बीसीसीआई का यह कदम भविष्य के लिए युवा खिलाड़ियों को तराशने और एक नई संतुलित टीम तैयार करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।क्या है खिलाड़ियों के बाहर होने की असली वजह?बीसीसीआई के सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से खिलाड़ियों का वर्कलोड मैनेजमेंट (Workload Management), हालिया फॉर्म और आगामी व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को मुख्य आधार बनाया गया है। लगातार क्रिकेट खेलने के कारण सीनियर खिलाड़ियों पर शारीरिक थकान का दबाव बढ़ रहा है, जिसे कम करने के लिए बोर्ड रोटेशन पॉलिसी अपनाने पर जोर दे रहा है। इसके अलावा, घरेलू क्रिकेट और इंडिया-ए की तरफ से शानदार प्रदर्शन करने वाले युवा खिलाड़ियों को अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका देने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।युवा खिलाड़ियों को मिलेगा मौका, टीम का बदलेगा कॉम्बिनेशनवेस्टइंडीज दौरे के लिए चुनी जाने वाली संभावित नई टीम में कई युवा चेहरों को शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है। घरेलू सर्किट में धमाकेदार पारियां खेलने वाले युवा बल्लेबाजों और गेंदबाजों को स्क्वाड में जगह मिल सकती है ताकि टीम की बेंच स्ट्रेंथ को और अधिक मजबूत किया जा सके। चयन समिति यह स्पष्ट कर चुकी है कि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए टीम में फ्रेश टैलेंट को प्रमोट करना बेहद जरूरी है, जिससे टीम की ऊर्जा और फील्डिंग का स्तर दोनों बेहतर हो सकें।चयन समिति और टीम प्रबंधन का अगला कदमश्रेयस अय्यर जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का बाहर होना और नई युवा टीम का गठन भारतीय क्रिकेट में एक नए बदलाव का संकेत दे रहा है। हालांकि, इन खिलाड़ियों को पूरी तरह से बाहर किया गया है या इन्हें केवल इस विशिष्ट सीरीज के लिए आराम दिया गया है, इस पर आधिकारिक घोषणा टीम चयन के समय ही स्पष्ट हो पाएगी। क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों की नजरें अब बीसीसीआई की आगामी चयन बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि वेस्टइंडीज के खिलाफ मैदान पर उतरने वाली नई टीम का फाइनल ब्लूप्रिंट क्या होगा।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh Weather Update) में मानसून का दौर एक बार फिर बेहद आक्रामक और सक्रिय हो गया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बादलों की आवाजाही के बीच अब मानसूनी सिस्टम पूरी तरह से मजबूत हो चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) की ताजा अपडेट के मुताबिक, राज्य में अगले 48 घंटों के भीतर मौसम का मिजाज एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। प्रदेश के कई जिलों में झमाझम बारिश तो कुछ चुनिंदा इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy Rainfall Alert) होने की प्रबल संभावना जताई गई है। लगातार हो रही इस मानसूनी गतिविधि से जहां एक ओर गर्मी और उमस से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ जलभराव और नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।एक्टिव मानसूनी सिस्टम का असर, इन जिलों में गिरेगा सबसे ज्यादा पानीमौसम विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में बने मानसूनी सिस्टम और चक्रवाती घेरे के प्रभाव के कारण छत्तीसगढ़ के मध्य और उत्तरी हिस्सों में बारिश का जोर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा और बस्तर संभाग के कई जिलों में झमाझम बौछारें पड़ने का अनुमान है। पिछले दिनों जिन जिलों में बारिश का आंकड़ा कम दर्ज किया गया था, वहां भी अब बादलों के बरसने से किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। हालांकि, मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए मैदानी इलाकों और निचले स्तर पर बसे बस्तियों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।उफान पर आ सकते हैं नदी-नाले, प्रशासन ने जारी की चेतावनीलगातार होने वाली मूसलाधार बारिश के चलते राज्य के कई इलाकों में नदी-नाले उफ़ान पर आने की आशंका बढ़ गई है। सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय प्रशासन ने पहले से ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कई बड़े जलाशयों और बांधों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते पानी छोड़ा जा सके। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में लोगों से अपील की गई है कि वे तेज बहाव वाले पुल-पुलियों या उफनते नालों को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।किसानों के लिए राहत, आम जनजीवन के लिए एहतियात की जरूरतधान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इस झमाझम बारिश का सीधा फायदा कृषि कार्यों और खरीफ की फसलों, विशेषकर धान की रोपाई को मिल रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मानसूनी बारिश फसलों के लिए संजीवनी का काम कर रही है। हालांकि, लगातार बारिश से शहर की सड़कों पर जलभराव और यातायात धीमा होने जैसी समस्याओं का सामना आम जनता को करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि आप अगले दो दिनों के दौरान सफर पर निकलने की सोच रहे हैं, तो मौसम के ताज़ा अपडेट पर नजर जरूर बनाए रखें।
देश और राज्यों में डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh News) के एक सरकारी स्कूल से सामने आई ताजा तस्वीर ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले परिसरों में बुनियादी सुविधाओं का ऐसा अभाव है कि लगभग 867 मासूम छात्र बिना बिजली और पंखे के चिलचिलाती गर्मी और घुटन भरे माहौल में पढ़ने को मजबूर हैं। गनीमत यह रही कि जब इस गंभीर लापरवाही की खबर प्रमुखता से मीडिया में आई, तब जाकर सोई हुई अफसरशाही की नींद टूटी और जिम्मेदारों ने सुध लेना शुरू किया है।बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर स्कूल, छात्रों का हाल बेहालप्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल में पढ़ने वाले इन सैकड़ों बच्चों को पिछले काफी समय से बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कक्षाओं में बिजली कनेक्शन न होने या तकनीकी खराबी के चलते पंखे तक नहीं चलते हैं, जिससे उमस भरे मौसम में बच्चों का क्लास में बैठना भी मुहाल हो जाता है। पढ़ाई के दौरान बच्चे पसीने से तरबतर नजर आते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि कई बार स्थानीय अधिकारियों और शिक्षा विभाग के सामने गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।मीडिया रिपोर्ट्स का असर: एक्शन में आए जिम्मेदार अधिकारीजैसे ही इस बदहाली और बच्चों की परेशानी की खबरें मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुँची, महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लिया और संबंधित स्कूल की स्थिति की जांच के आदेश दे दिए। लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं, और अब युद्धस्तर पर स्कूल में बिजली आपूर्ति व पंखों की व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही जा रही है।डिजिटल दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाईयह मामला केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण है। एक तरफ सरकारें स्मार्ट एजुकेशन, टैबलेट और डिजिटल बोर्ड के जरिए शिक्षा का स्तर सुधारने के दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, पानी और पंखे के लिए बच्चों का संघर्ष यह सोचने पर मजबूर करता है कि सिस्टम की प्राथमिकताएं असल में कहां हैं। मीडिया के दखल के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि इन 867 मासूमों को जल्द ही राहत मिलेगी और उनकी कक्षाएं बेहतर माहौल में संचालित हो सकेंगी।
देशभर में सनसनी फैलाने वाले और अरबों रुपयों के अवैध कारोबार से जुड़े बहुचर्चित महादेव बेटिंग ऐप (Mahadev Betting App Case) घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके काले राज एक के बाद एक बाहर आ रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार तेज बनी हुई है। मामले से जुड़े अहम किरदार विकास गर्ग से हाल ही में की गई गहन पूछताछ के दौरान एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि ऐप के जरिए कमाए गए अवैध और बेहिसाब पैसों को किस तरह से चालाकी से अलग-अलग लोगों और मुख्य चेहरों की पत्नियों के बैंक खातों में डायवर्ट किया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।कैसे होता था पैसों का हेरफेर और किन खातों का होता था इस्तेमाल?जांच एजेंसियों को लंबे समय से इस बात की तलाश थी कि महादेव ऐप के प्रमोटर्स और उनके सिंडिकेट के सदस्य अवैध रूप से कमाए गए करोड़ों रुपयों को ठिकाने कैसे लगाते हैं। विकास गर्ग से हुई पूछताछ के सूत्रों के अनुसार, हवाला चैनलों और फर्जी कंपनियों के जरिए आने वाले पैसों को छुपाने के लिए कई बेनामी और संदिग्ध बैंक खातों का जाल बुना गया था। इनमें कई ऐसे बैंक खाते भी शामिल थे जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों की पत्नियों या करीबी रिश्तेदारों के नाम पर संचालित हो रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल केवल पैसे छिपाने के लिए नहीं, बल्कि आगे की अवैध सट्टेबाजी गतिविधियों में फंड सर्कुलेट करने के लिए भी किया जाता था।मनी लॉन्ड्रिंग के इस जाल से जुड़े कई और बड़े नाम आ सकते हैं सामनेविकास गर्ग द्वारा दिए गए इनपुट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ईडी अब उन सभी बैंक खातों की एक-एक डिटेल खंगाल रही है जिनमें यह पैसा ट्रांसफर किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे खेल में सिर्फ कुछ लोग ही नहीं, बल्कि कई बड़े हवाला कारोबारियों, स्थानीय सहयोगियों और प्रभावशाली चेहरों की संलिप्तता हो सकती है। पत्नियों और करीबियों के खातों में करोड़ों रुपए जमा कराने के इस खुलासे के बाद अब आने वाले दिनों में कुछ और हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियों और संपत्तियों की जब्ती का सिलसिला तेज होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।कानूनी शिकंजा और देशव्यापी जांच का दायरामहादेव बेटिंग ऐप घोटाला पिछले कुछ सालों से देश की सबसे बड़ी जांचों में से एक बन चुका है। सीमा पार तक फैले इस सट्टेबाजी नेटवर्क के तार कई बॉलीवुड हस्तियों, राजनेताओं और बड़े व्यापारियों से भी जुड़ते नजर आए हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विकास गर्ग के खुलासे के बाद इस मनी ट्रेल (Money Trail) की अंतिम कड़ी तक कैसे पहुंचा जाए, ताकि इस अवैध साम्राज्य को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा सके। इस ताजा खुलासे ने एक बार फिर से इस पूरे मामले में सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
बिहार बंद पर सरकार की दो टूक चेतावनी: हिंसा और तोड़फोड़ की तो होगी तत्काल गिरफ्तारी
बिहार की राजनीति में चल रहे गरमागरम माहौल के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों द्वारा आहूत किए गए बिहार बंद को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने साफ शब्दों में चेतावनी जारी कर दी है कि बंद के नाम पर यदि किसी ने भी कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश की, सार्वजनिक या निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और हिंसा फैलाई, तो बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे उपद्रवियों को तुरंत चिन्हित कर गिरफ्तार करने के कड़े निर्देश सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SPs) को दे दिए गए हैं। राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर लगातार निगरानी रखी जा रही है।प्रशासन का सख्त फरमान: शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार, लेकिन अराजकता बर्दाश्त नहींसरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि लोकतांत्रिक देश में हर किसी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में आम जनजीवन को बाधित करना, गाड़ियों में तोड़फोड़ करना या कानून-व्यवस्था को खतरे में डालना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा। पिछले दिनों कुछ जिलों में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पों की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए इस बार खुफिया तंत्र और पुलिस प्रशासन को पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी फुटेज के जरिए हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि हुड़दंगियों से सख्ती से निपटा जा सके।आम जनजीवन और यातायात को सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजामबिहार बंद के मद्देनजर राज्य के प्रमुख शहरों, बाजारों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि आम नागरिकों, यात्रियों और व्यापारियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि यातायात बाधित न हो और स्कूल-कॉलेज तथा दफ्तर आने-जाने वाले लोगों को सुरक्षित माहौल मिले। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार फील्ड में उतरकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं और शांति समितियों के साथ बैठक कर सौहार्द बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।राजनीतिक सरगर्मी के बीच जनता से शांति की अपीलएक तरफ जहां राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता की सुरक्षा और शांति बनाए रखना प्रशासन की पहली प्राथमिकता बनी हुई है। सरकार और पुलिस की इस कड़ी चेतावनी के बाद अब यह देखना अहम होगा कि बंद का असर जमीन पर कैसा रहता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने में ज़रा भी देर नहीं लगाई जाएगी, जिससे अराजक तत्वों में खौफ का माहौल साफ देखा जा सकता है।
देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा देने वाले वीर सपूतों की शहादत और निधन की खबरें हमेशा हर देशवासी का दिल झकझोर देती हैं। हरियाणा (Haryana) में भारतीय नौसेना (Indian Navy) के एक जांबाज जवान रविकांत के आकस्मिक निधन के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। देश सेवा में समर्पित रहे रविकांत को उनके पैतृक गांव में राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं और हर जुबान पर 'रविकांत अमर रहें' के नारे गूंज रहे थे। माता-पिता के इकलौते बेटे और महज तीन साल पहले ही शादी के बंधन में बंधे इस युवा जवान के जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।माता-पिता के इकलौते बुढ़ापे का सहारा और देश सेवा का जज्बाकिसी भी परिवार के लिए अपना इकलौता बेटा खो देना दुनिया का सबसे बड़ा और असहनीय दर्द होता है। नौसेना के जवान रविकांत अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और पूरे परिवार की उम्मीदें उन पर टिकी थीं। बचपन से ही देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाले रविकांत ने अपनी मेहनत के दम पर भारतीय नौसेना में सेवा का अवसर पाया था। वे अपनी कर्तव्यनिष्ठा और मिलनसार स्वभाव के कारण अपने यूनिट और गांव दोनों जगह बेहद लोकप्रिय थे। उनकी इस अचानक क्षति ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरे गांव और समाज को झकझोर कर रख दिया है।तीन साल पहले गूंजी थी शहनाई, घर में पसरा मातमरविकांत की जिंदगी में खुशियों का दौर कुछ साल पहले ही शुरू हुआ था जब उनकी धूमधाम से शादी हुई थी। शादी के महज तीन साल ही बीते थे कि यह बड़ी ट्रेजेडी हो गई। जवान की पत्नी, माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में कुछ समय पहले तक खुशियों का माहौल हुआ करता था, आज वहां चीख-पुकार और मातम छाया हुआ है। सांत्वना देने के लिए पहुंचने वाले हर रिश्तेदार और स्थानीय नागरिक की आंखें इस दुखद घटना को देखकर नम हो जा रही हैं।राजकीय सम्मान के साथ अंतिम यात्रा और सैन्य श्रद्धांजलिजब देश के वीर जवान की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पहुंची, तो पूरा इलाका भारत माता के नारों से गूंज उठा। जिला प्रशासन और भारतीय नौसेना के अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। नम आंखों और भारी मन से परिजनों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। इस मुश्किल वक्त में पूरा प्रशासनिक अमला और स्थानीय लोग शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े नजर आए, ताकि इस दुख की घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया जा सके।
हरियाणा में मतदाता सूचियों को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्यभर में चुनाव आयोग के निर्देश पर बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर किया जाने वाला डोर-टू-डोर सर्वे और सत्यापन का काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस व्यापक प्रशासनिक कवायद के बाद जो नई ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार की गई है, उसमें लगभग 33 लाख 84 हजार मतदाताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। इस बड़े बदलाव के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और क्यों की गई यह कार्रवाई?भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों की गुणवत्ता सुधारने और उनमें मौजूद अशुद्धियों को दूर करने के लिए एसआईआर अभियान चलाया जा रहा है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मृत मतदाताओं, स्थाई रूप से अन्य स्थानों पर बस चुके लोगों (Shifted), और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को मतदाता सूची से हटाना है, ताकि लोकतंत्र के इस महापर्व में सूचियां पूरी तरह त्रुटिहीन बनी रहें। हरियाणा में इस अभियान के तहत जब बीएलओ ने घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया, तो बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता मिले जो लंबे समय से अपने तय पते पर नहीं रह रहे थे या जिनकी पुष्टि नहीं हो पाई।ड्राफ्ट सूची से नाम हटने के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, डोर-टू-डोर अभियान के दौरान कई तरह के मामले सामने आए हैं। सत्यापन प्रक्रिया में मृत व्यक्तियों, प्रदेश या देश छोड़कर अन्य स्थानों पर स्थाई रूप से बस चुके नागरिकों और कई जगहों पर एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को चिन्हित किया गया। नियमानुसार जब इन मामलों में पुख्ता डेटा मैच नहीं हुआ, तो उन्हें ड्राफ्ट सूची में जगह नहीं मिली। हालांकि, निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक जिन वैध मतदाताओं के नाम किन्हीं तकनीकी कारणों से इस सूची में छूट गए हैं, उनके लिए दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) दर्ज कराने का प्रावधान रखा गया है ताकि किसी भी वास्तविक नागरिक का अधिकार न छिन सके।राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेजमतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम बाहर होने की खबर सामने आते ही राज्य में राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर नेता और कार्यकर्ता इस बात का आकलन करने में जुट गए हैं कि उनके अपने विधानसभा क्षेत्रों में इस फेरबदल का चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पूरी पारदर्शिता के साथ नियमानुसार यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है और अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले सभी पात्र नागरिकों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा ताकि मतदाता सूची पूरी तरह से त्रुटिमुक्त और विश्वसनीय बन सके।
देशभर में संतों और महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राजनीतिक दल लगातार नए-नए अभियान चला रहे हैं। इसी कड़ी में हरियाणा (Haryana) की राजनीति में आगामी गुरु रविदास जयंती (Guru Ravidas Jayanti) के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बेहद भव्य और व्यापक मेगा प्लान तैयार किया है। इस रणनीतिक योजना के तहत उत्तर प्रदेश के पवित्र धार्मिक शहर वाराणसी से गुरु रविदास की जन्मस्थली से जुड़ी पवित्र मिट्टी हरियाणा लाई जाएगी। राज्य के हर कोने और गांव-गांव तक इस मिट्टी को पहुंचाकर 'समरसता संकल्प अभियान' (Samarsata Sankalp Abhiyan) का आगाज किया जाएगा। इस सियासी और सामाजिक रूप से बड़े कदम के जरिए पार्टी का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना और सामाजिक समरसता का संदेश देना है।वाराणसी से हरियाणा तक जुड़ेगी आस्था की डोरसंत शिरोमणि गुरु रविदास की पावन जन्मस्थली काशी यानी वाराणसी (Varanasi) से लाई जाने वाली इस पवित्र मिट्टी का हरियाणा के प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र में भव्य स्वागत करने की तैयारी की जा रही है। बीजेपी संगठन के वरिष्ठ नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की देखरेख में यह यात्रा निकाली जाएगी। इस पूरी पहल के पीछे का मुख्य उद्देश्य संत रविदास के समानता, भाईचारे और समरसता के संदेश को जमीनी स्तर पर आम जनता तक पहुंचाना है। हरियाणा की राजनीति में अनुसूचित जाति और दलित मतदाताओं की मजबूत पकड़ को देखते हुए इस अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।गांव-गांव पहुंचेगा 'समरसता संकल्प अभियान' और सियासी समीकरणहरियाणा के गांवों और ढाणियों तक इस अभियान के पहुंचने से बीजेपी को जमीनी स्तर पर एक नया वैचारिक आधार मिलने की उम्मीद है। 'समरसता संकल्प अभियान' के तहत चौपालों पर गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें गुरु रविदास के जीवन दर्शन और उनके उपदेशों पर चर्चा होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के जातीय समीकरणों और बयानों की काट के लिए बीजेपी का यह सांस्कृतिक और सामाजिक आउटरीच प्रोग्राम बेहद असरदार साबित हो सकता है। चुनाव के लिहाज से इस प्रकार के आयोजनों से पार्टी को मतदाताओं के साथ सीधा और भावनात्मक जुड़ाव बनाने में बड़ी मदद मिलती है।सामाजिक समरसता और राजनीतिक संदेश का अनूठा संगमसंतों की वाणी और उनके विचारों को राजनीति के साथ जोड़कर सकारात्मक संदेश देने की यह अनूठी पहल हरियाणा के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में इस अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली गई है और स्थानीय कार्यकर्ताओं को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आने वाले दिनों में वाराणसी की इस पवित्र मिट्टी के साथ शुरू होने वाला यह महाअभियान राज्य की राजनीति में कितना बड़ा प्रभाव डालेगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल इस मेगा प्लान ने राजनीतिक तापमान को जरूर बढ़ा दिया है।
बीजेपी का मास्टर सोशल इंजीनियरिंग प्लान, क्या अखिलेश यादव की पीडीए रणनीति पर पड़ेगा भारी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में साल 2027 के विधानसभा चुनाव (UP Elections 2027) की सुगबुगाहट अभी से तेज हो चुकी है और सभी राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरणों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रमुख अखिलेश यादव लगातार 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिएजमीनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उनके इस दांव की काट के लिए एक नया और बेहद धारदार सोशल इंजीनियरिंग प्लान तैयार किया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि बीजेपी का यह नया चुनावी ब्लूप्रिंट विपक्ष की हर चाल को नाकाम करने और सभी जातियों को साधने के लिए पूरी तरह से तैयार किया गया है, जो आने वाले समय में चुनावी नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है।बीजेपी का नया सोशल इंजीनियरिंग प्लान और जातियों का नया समीकरणउत्तर प्रदेश की सियासत हमेशा से जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। बीजेपी हाईकमान और राज्य नेतृत्व ने मिलकर एक ऐसा नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला तैयार किया है जिसके तहत केवल सवर्ण और पारंपरिक पिछड़ी जातियों के अलावा उन अति पिछड़ी और बेहद छोटी जातियों (Most Backward Castes) को प्रमुखता दी जा रही है, जो अब तक राजनीतिक रूप से हाशिए पर थीं। इस रणनीति के तहत स्थानीय स्तर पर क्षेत्रीय क्षत्रपों को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि विपक्षी दलों के कोर वोटर माने जाने वाले तबके में सेंध लगाई जा सके। बीजेपी की यह खामोश लेकिन बेहद मजबूत रणनीति जमीन पर बूथ स्तर तक काम करना शुरू कर चुकी है।अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला बनाम बीजेपी की चक्रव्यूह रचनाअखिलेश यादव ने पिछले कुछ चुनावों से जिस तरह से पिछ, दलित और अल्पसंख्यकों को जोड़कर एक नया धारदार मोर्चा तैयार किया है, उसने बीजेपी के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है। लोकसभा चुनावों में इस रणनीति के बेहतर परिणाम मिलने के बाद से सपा खेमे का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। हालांकि, बीजेपी के नए सोशल इंजीनियरिंग प्लान का मकसद इसी पीडीए समीकरण की हवा निकालना है। पार्टी उन छोटी-छोटी जातियों और उप-जातियों को साध रही है जिन्हें सपा या अन्य दल लंबे समय से नजरअंदाज करते आए हैं। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक इसे अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति पर एक भारी और सुनियोजित प्रहार मान रहे हैं।2027 के दंगल में धरातल पर होगी असली परीक्षाआगामी 2027 के चुनावी रण में कौन सी रणनीति किस पर भारी पड़ेगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश का राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुंचने लगा है। लखनऊ से लेकर पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी तक के गांवों और चौपालों पर अब इसी बात की चर्चा है कि क्या बीजेपी का नया सोशल इंजीनियरिंग प्लान विपक्ष के हर वार को बेअसर कर पाएगा या फिर अखिलेश यादव का PDA चक्रव्यूह एक बार फिर बाजी मार ले जाएगा। चुनाव से पहले चल रही इन सियासी चालों ने यह साफ कर दिया है कि इस बार का मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला होने वाला है।
देश भर में NEET-UG, UGC-NET और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक व धांधली को लेकर मचे भारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और दोषियों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026' [Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026] पेश करेगी।इस संशोधित विधेयक में पेपर लीक में शामिल अपराधियों, कोचिंग सेंटरों, सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों और संगठित गिरोहों (Organized Crime Syndicates) के लिए सजा और जुर्माने की रकम में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। आइए एक नेशनल अफेयर्स और एजुकेशन-पॉलिसी रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं इस नए प्रस्तावित कानून के 5 सबसे कड़े प्रावधान।1. परीक्षा घोटालों में सजा और जुर्माने की नई सीमासरकार ने इस संशोधित कानून में दोषियों के लिए सजा और वित्तीय जुर्माने का दायरा बहुत बढ़ा दिया है:अपराध श्रेणीपुरानी सजा / जुर्मानानया प्रस्तावित कानून (2026)अनुचित साधनों का इस्तेमालकम सजा / ₹10 लाख जुर्माना5 से 10 साल की जेल + ₹50 लाख तक जुर्मानासर्विस प्रोवाइडर एजेंसियां4 साल बैन / ₹1 करोड़ जुर्माना8 साल का बैन + ₹5 करोड़ तक जुर्मानाकंपनी के निदेशक / वरिष्ठ अधिकारीकम कठोर नियमकम से कम 5 साल जेल + ₹5 करोड़ तक जुर्मानासंगठित माफिया / गिरोह5 साल जेल / ₹1 करोड़ जुर्माना7 से 10 साल जेल + ₹10 करोड़ न्यूनतम जुर्माना2. स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट और 3 महीने में न्याय का लक्ष्यअदालतों में मुकदमों के सालों-साल खिंचने की समस्या को खत्म करने के लिए विधेयक में बहुत ही सख्त समय-सीमा (Timeline) तय की गई है:स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट: हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (UT) में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा, जहां केवल परीक्षा घोटालों के मामलों की रोजाना सुनवाई (Daily Hearing) होगी।3 महीने में फैसला: चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत को 3 महीने (90 दिन) के भीतर अपना अंतिम फैसला देना होगा। कानून बनने के बाद पुराने लंबित मामलों को भी इन्हीं अदालतों में शिफ्ट किया जाएगा।हाई कोर्ट में अपील की समय-सीमा: फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच में अपील की जा सकेगी, जिस पर भी 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी।3. STF करेगी जांच, 2 महीने में देनी होगी रिपोर्टपेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों की निष्पक्ष और तेज जांच के लिए केंद्र सरकार आवश्यकता पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन कर सकेगी।2 महीने की समय-सीमा: पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी (जैसे CBI) या गठित STF को किसी भी सूरत में 2 महीने (60 दिन) के भीतर अपनी जांच पूरी करके चार्जशीट दाखिल करनी होगी, ताकि दोषियों को तुरंत कानूनी शिकंजे में लाया जा सके।स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर: राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को इन मामलों को मजबूती से लड़ने के लिए विशेष सरकारी वकील (Special Public Prosecutor) नियुक्त करने का अधिकार भी दिया गया है।लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा का लक्ष्यहाल के महीनों में नीट और यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुई धांधली से लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों के मन में परीक्षा प्रणाली के प्रति अविश्वास की स्थिति बन गई थी। केंद्र सरकार का मानना है कि फास्ट-ट्रैक अदालतों, भारी आर्थिक जुर्माने और कठोर जेल की सजा जैसे प्रावधानों के लागू होने के बाद परीक्षा माफिया और कोचिंग सिंडिकेट पर नकेल कसेगी और सरकारी परीक्षाओं की पवित्रता फिर से बहाल हो सकेगी
देश की राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों छात्र प्रदर्शनों और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दों को लेकर सियासत अपने उफान पर है। जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए CJP प्रोटेस्ट और विभिन्न छात्र संगठनों के उग्र प्रदर्शनों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने नकल माफियाओं और शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को लेकर एक बार फिर बेहद कड़े तेवर दिखाए हैं। अपने सख्त प्रशासनिक फैसलों और 'बुलडोजर मॉडल' के लिए पहचाने जाने वाले सीएम योगी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी नकल माफिया को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें पूरी तरह से मिट्टी में मिला दिया जाएगा। उनके इस आक्रामक रुख ने राज्य की राजनीति का पारा और अधिक बढ़ा दिया है।जंतर-मंतर के CJP प्रोटेस्ट और छात्र आंदोलन की गूंज लखनऊ तकदिल्ली में आयोजित CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) प्रोटेस्ट और देश भर के छात्रों द्वारा नीट-पेपर लीक व परीक्षा में धांधली को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों की तपिश अब सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक महसूस की जा रही है। देश के सबसे बड़े युवा मतदाता राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता हमेशा से एक संवेदनशील और बड़ा चुनावी मुद्दा रही है। दिल्ली के मंचों से जब विपक्षी दलों और छात्र नेताओं ने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, तो उसके जवाब में सीएम योगी का यह कड़ा रुख सीधे तौर पर विरोधियों पर एक बड़ा राजनीतिक पलटवार माना जा रहा है।'मिट्टी में मिला देंगे' वाला पुराना अंदाज और जीरो टॉलरेंस नीतिअपने आक्रामक बयानों के लिए मशहूर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों की तरह ही नकल माफियाओं के लिए भी कोई जगह नहीं है। सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पिछले दशकों में मेधावी छात्रों के अधिकारों को बेचा है और नकल के दम पर शिक्षा व्यवस्था को कलंकित किया है, उनकी जड़ों पर सख्त कार्रवाई का हथौड़ा लगातार चलता रहेगा। सीएम के इस बयान ने यह साबित कर दिया है कि आगामी चुनावों से पहले सरकार युवाओं के मुद्दों पर किसी भी तरह की defensive मुद्रा में आने के बजाय पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में डटी हुई है।यूपी के युवाओं और प्रतियोगी छात्रों के बीच छिड़ी नई बहसमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस कड़ी हुंकार के बाद प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी और लखनऊ जैसे प्रमुख छात्र hubs पर युवाओं के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां छात्र परीक्षाओं के समय पर आयोजन और पेपर लीक मुक्त व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार द्वारा उठाए जा रहे कड़े प्रशासनिक कदमों की सराहना भी हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CJP प्रोटेस्ट और इस हाई-प्रोफाइल छात्र आंदोलन के बीच सीएम योगी का यह बयान 2027 के चुनावी एजेंडे को पूरी तरह से सेट करने का काम कर रहा है, जहां 'कानून का राज' और 'युवाओं का भविष्य' सबसे बड़े केंद्र बिंदु बने हुए हैं।
यूपी चुनाव 2027: जानिए कैसे सीएम योगी के 'फायरिंग रेंज' में सीधे आ गए अखिलेश यादव
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर देश भर के छात्रों, युवाओं और विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा हाल ही में किए गए जोरदार प्रदर्शन ने राष्ट्रीय राजनीति की हवा बदल दी है। NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में धांधली और देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों पर हुए इस बड़े गदर ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 (UP Elections 2027) के सियासी समीकरणों और एजेंडे को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रमुख अखिलेश यादव की सक्रियता ने सत्तारूढ़ दल को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि इस हाई-प्रोफाइल छात्र आंदोलन के सहारे अखिलेश ने भले ही युवाओं को साधने की कोशिश की हो, लेकिन रणनीतिक रूप से वे सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के 'फायरिंग रेंज' में आ गए हैं।जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन और यूपी की सियासत पर इसका कनेक्शनदिल्ली की सरजमीं पर चल रहे इस युवा और छात्र आंदोलन की तपिश अब सीधे तौर पर लखनऊ और उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान तक महसूस की जा रही है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा युवा मतदाता राज्य है, जहां बेरोजगारी, पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाएं हमेशा से चुनावी हार-जीत की बड़ी वजह रही हैं। जंतर-मंतर पर जिस तरह से विभिन्न छात्र संगठनों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे नए दलों के साथ विपक्षी नेता खड़े नजर आए, उसने स्पष्ट कर दिया है कि 2027 के दंगल में 'शिक्षा और युवा' सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाला है। इस पूरे विरोध प्रदर्शन ने स्थानीय स्तर पर यूपी के युवाओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर राज्य के हर जिले और कोचिंग हब में देखा जा रहा है।कैसे सीएम योगी के 'फायरिंग रेंज' में घिर गए अखिलेश यादव?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जंतर-मंतर के इस मंच पर मुखर होकर कूदना अखिलेश यादव के लिए सियासी नफा-नुकसान दोनों तय कर सकता है। सीएम योगी आदित्यनाथ अपनी आक्रामक कार्यशैली और कानून-व्यवस्था के सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं। जब बात युवाओं के मुद्दों और प्रशासनिक पारदर्शिता की आती है, तो बीजेपी सरकार हमेशा से विपक्ष पर हमलावर रही है। जंतर-मंतर के बहाने अखिलेश यादव के सीधे मैदान में उतरने से सत्तारूढ़ दल को उन पर और पुरानी सरकारों के कार्यकाल में हुई भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाने का एक बड़ा मौका मिल गया है। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बीजेपी ने जिस तरह से माफियाओं और नकल माफियाओं पर बुलडोजर एक्शन लिया है, उसके मुकाबले विपक्ष के इन तेवरों को अब सीधे तौर पर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के 'फायरिंग रेंज' में सेट कर दिया गया है।2027 के दंगल में युवाओं का वोट बैंक और जमीन पर सियासी गर्मीउत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक के छात्र और युवा इस समय बहुत बारीकी से दिल्ली और लखनऊ की इन राजनीतिक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े छात्र केंद्रों पर युवा इस बात को लेकर बहस कर रहे हैं कि आखिर उनके भविष्य के लिए कौन सा दल ज्यादा संवेदनशील है। समाजवादी पार्टी जहां इसे बीजेपी सरकार की नाकामी के रूप में भुनाने की कोशिश कर रही है, वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल राजनीतिक स्टंट बताकर खारिज कर रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि जंतर-मंतर की यह चिंगारी 2027 के चुनावी रण में कितना बड़ा सियासी भूचाल लाती है, लेकिन फिलहाल इस महासंग्राम ने यूपी के राजनीतिक तापमान को अपने चरम पर पहुंचा दिया है।
नीट (NEET-UG) पेपर लीक विवाद और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधारों की मांग को लेकर देश भर में छात्रों का गुस्सा अब चरम पर पहुंच चुका है। शनिवार (25 जुलाई 2026) को राजधानी दिल्ली से लेकर बिहार, यूपी, उत्तराखंड और केरल तक छात्र संगठनों ने बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर हो रहे इन प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और छात्रों के बीच तीखी झड़प, लाठीचार्ज और पथराव की घटनाएं सामने आई हैं।1. दिल्ली (जंतर-मंतर): फिर बढ़ा तनाव, लाठीचार्ज और पथरावदिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन शनिवार को अचानक उग्र हो गया:पुलिस संग झड़प: प्रदर्शनकारी छात्र संसद मार्ग की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। इस दौरान बैरिकेड तोड़ने को लेकर छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प शुरू हो गई।लाठीचार्ज और वाटर कैनन: स्थिति बेकाबू होते देख सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया।पथराव की खबरें: भीड़ की ओर से पुलिस पर पथराव किए जाने के बाद जंतर-मंतर क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके जवाब में पुलिस ने कई छात्र नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।हाई-टेक निगरानी: दिल्ली पुलिस ने पूरे जंतर-मंतर क्षेत्र को हाई-टेक सीसीटीवी (CCTV) कैमरों, मोबाइल सर्विलांस वैन और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के कड़े घेरे में ले लिया है।2. बिहार में 'बिहार बंद' का व्यापक असर: कई शहरों में हिंसक झड़पेंदिल्ली में छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के विरोध में वामपंथी छात्र संगठन आईसा (AISA) और अन्य छात्र मोर्चों द्वारा शनिवार को 'बिहार बंद' का आह्वान किया गया था, जिसका राज्य के कई जिलों में व्यापक और हिंसक असर देखा जा रहा है:सड़कों और रेल मार्गों पर जाम: पटना, बेगुसराय, कटिहार, दरभंगा और मुजफ्फरपुर में छात्रों ने सुबह से ही मुख्य सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और रेलवे पटरियों पर उतरकर आवाजाही ठप कर दी।पथराव और झड़प: कटिहार और बेगुसराय में प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच तीखी झड़पें हुईं, जहां पुलिस पर पथराव की घटनाएं सामने आईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले और लाठियां भांजनी पड़ीं।पटना में भारी बल तैनाती: राजधानी पटना में डाकबंगला चौराहा और अशोक राजपथ के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने कई स्थानों से प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लिया है।छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगे क्या हैं?शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: छात्र संगठन लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।NTA का पुनर्गठन: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाने और पेपर लीक रोधी कड़े कानून लागू करने की मांग की जा रही है।मुआवजे और मुकदमों की वापसी: आंदोलन के दौरान पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज पुलिस केसों को वापस लेने की मांग उठाई जा रही है।देश भर के विभिन्न राज्यों (केरल, महाराष्ट्र, यूपी और राजस्थान) में भी छात्र संगठनों का समर्थन बढ़ता जा रहा है, जिससे केंद्र सरकार और प्रशासन पर दबाव बेहद बढ़ गया है।
पश्चिम बंगाल की धरती से इस वक्त की एक बेहद संवेदनशील और बड़ी सामाजिक-धार्मिक खबर सामने आ रही है। राज्य में एक प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर को लेकर अचानक विवाद गहरा गया है। करीब 650 साल पुराने एक ऐतिहासिक मंदिर परिसर और उसकी जमीनी विरासत को लेकर हिंदू संगठनों ने अब सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। तनावपूर्ण माहौल के बीच भारी संख्या में जुटे हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं और स्थानीय श्रद्धालुओं ने मंदिर के ठीक पास में ही बड़े स्तर पर पूजा-अर्चना और महा-आरती का आयोजन किया है, जिसके बाद से इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और बैकस्टेज एक बहुत बड़ी धार्मिक रणनीति की तैयारी चल रही है।प्राचीन विरासत को बचाने के लिए एकजुट हुए संगठनस्थानीय सूत्रों और ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, यह 650 साल पुराना मंदिर क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। हिंदू संगठनों का आरोप है कि इस प्राचीन मंदिर की भूमि और इसके ऐतिहासिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंदिर की सुरक्षा और इसके जीर्णोद्धार की मांग को लेकर संगठनों ने एक बड़ी जन-जागृति मुहिम शुरू कर दी है। पास में ही की गई इस विशेष पूजा-अर्चना के जरिए शासन-प्रशासन को एक सीधा संदेश देने का प्रयास किया गया है कि बहुसंख्यक समाज अपनी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है।इलाके में सुरक्षा सख्त और आगे के आंदोलन की बड़ी तैयारीइस औचक धार्मिक आयोजन और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए बंगाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और खुफिया विभाग भी स्थिति पर पैनी नजर रख रहा है। वहीं दूसरी ओर, हिंदू संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में इस 650 साल पुराने मंदिर के गौरव को वापस लौटाने और इसके आसपास के अतिक्रमण को पूरी तरह मुक्त कराने के लिए एक बड़े राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिसमें देश भर के संतों को भी आमंत्रित करने की योजना है।लोकल सेंटीमेंट्स और बंगाल की राजनीति पर सीधा असरइस नए विवाद का सीधा असर कोलकाता, हुगली और हावड़ा जैसे पश्चिम बंगाल के प्रमुख जिलों के स्थानीय बाजारों और सामाजिक ताने-बाने पर भी देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोग अपनी सदियों पुरानी विरासत को लेकर काफी भावुक हैं, जिसके चलते सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति का एक मुख्य केंद्र बन सकता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ इस प्राचीन मंदिर के ऐतिहासिक तथ्यों की जांच के लिए स्थानीय बुद्धिजीवियों और पुरातत्व प्रेमियों ने भी सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज कर दी है।
ब्रांड HMD (Human Mobile Devices) ने चीनी बाजार में अपना एक अनोखा और स्मार्ट फीचर फोन HMD Touch AI पेश किया है। यह फोन उन यूजर्स के लिए तैयार किया गया है जो पुराने नोकिया लूमिया (Nokia Lumia) सीरीज़ वाले एस्थेटिक और कॉम्पैक्ट साइज को पसंद करते हैं, लेकिन साथ ही आज के आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स का भी इस्तेमाल करना चाहते हैं।यह एक हाइब्रिड-स्टाइल फीचर फोन है जिसमें कीपैड की जगह 3.2-इंच की टचस्क्रीन दी गई है और यह बाइटडांस (ByteDance) के प्रसिद्ध Doubao AI मॉडल पर काम करता है। आइए एक टेक रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं इस नए फोन की कीमत, फीचर्स और डिजाइन की मुख्य बातें।1. कीमत, रंग और डिजाइन (Price & Design)कीमत: IT Home की रिपोर्ट के अनुसार, चीन में HMD Touch AI की कीमत 469 चीनी युआन (लगभग ₹6,700 रुपये) रखी गई है। फिलहाल इसे चीन में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध कराया गया है।लूमिया इंस्पायर्ड लुक: फोन का बॉडी स्ट्रक्चर और घुमावदार किनारे पुराने मशहूर Nokia Lumia स्मार्टफोन्स (Fabula Design) की याद दिलाते हैं।इंटरचेंजेबल कवर्स: यह हैंडसेट क्लासिक सियान (Cyan) रंग में पेश हुआ है। इसके अलावा, यूजर अपनी पसंद के अनुसार लुक बदलने के लिए पीले (Yellow), नीले (Blue) और सफेद (White) रंग के रियर कवर अलग से खरीद सकते हैं।2. Doubao AI और स्मार्ट फीचर्सइस छोटे से 3.2-इंच टचस्क्रीन डिवाइस में AI की कई उन्नत क्षमताएं जोड़ी गई हैं:छह एआई असिस्टेंट: फोन में बाइटडांस का Doubao AI मॉडल मौजूद है। यह यूजर्स को रियल-टाइम ट्रांसलेशन, कहानियों का वाचन, भाषा सीखने और बच्चों के होमवर्क को समझाने में मदद करता है।AI आर्टवर्क और इमेज जनरेशन: यूजर केवल लिखकर (Text Prompts) AI की मदद से तस्वीरें जनरेट कर सकते हैं।क्लीन OS और पैरेंटल कंट्रोल: यह ऑपरेटिंग सिस्टम पूरी तरह डिस्ट्रेक्शन-फ्री रखा गया है। इसमें थर्ड-पार्टी ऐप्स या शॉर्ट-वीडियो ऐप्स (टॉकटॉक/रील्स) डाउनलोड नहीं किए जा सकते। इसमें पैरेंटल कंट्रोल, एमपी3 प्लेयर, स्नेक गेम और कैलकुलेटर जैसी जरूरी सुविधाएं दी गई हैं।3. कैमरा, बैटरी और कनेक्टिविटी (Specs & Hardware)कैमरा: फोन में रियर और फ्रंट दोनों तरफ 2-मेगापिक्सल के कैमरे दिए गए हैं। रियर कैमरा AI इमेज रिकग्निशन के साथ-साथ फोटोज को कॉमिक, एनीमेशन या ट्रेडिशनल चाइनीज पेंटिंग स्टाइल में बदलने का काम भी करता है।बैटरी और SOS बटन: इसमें 1,950 mAh की रिमूवेबल बैटरी मिलती है जो USB Type-C पोर्ट से चार्ज होती है। फोन के टॉप पर एक कस्टमाइज़ होने वाला बटन दिया गया है, जिसे इमरजेंसी में टॉर्च या SOS बटन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।कनेक्टिविटी: यह डुअल 4G, VoLTE, डुअल नैनो सिम, वाई-फाई (Wi-Fi), हॉटस्पॉट शेयरिंग और मोबाइल पेमेंट (Alipay) सपोर्ट के साथ आता है।
देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक और सामाजिक खबर आ रही है। देश में पिछले काफी समय से चल रहे नीट (NEET) और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक विवाद ने अब एक उग्र राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस बार सीधे पीड़ित छात्राओं और महिला अभ्यर्थियों की टोली को लेकर जंतर-मंतर पर मैदान में उतर आए हैं। केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राहुल गांधी ने सीधे देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग की है और साफ कर दिया है कि उन्हें सिर्फ मंत्रालय का फेरबदल कतई मंजूर नहीं होगा।पीड़ित छात्राओं के आंसू देख भावुक हुए राहुल, सरकार को घेराजंतर-मंतर पर आयोजित इस विशाल विरोध प्रदर्शन में देश के कोने-कोने से आई उन छात्राओं ने हिस्सा लिया, जिनकी सालों की मेहनत परीक्षाओं में हुई धांधली की वजह से बेकार हो गई। छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए राहुल गांधी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ किसी एक परीक्षा का फेलियर नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और विशेष रूप से हमारी बेटियों के भविष्य के साथ किया गया एक क्रूर मज़ाक है। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन विपक्ष अब चुप बैठने वाला नहीं है।मंत्रालय बदलना सिर्फ लीपापोती, अब सीधे इस्तीफे पर अड़ा विपक्षप्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता ने एक बेहद आक्रामक रुख अपनाया। राजनीतिक गलियारों में चल रही उन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए, जिसमें शिक्षा मंत्री का विभाग बदलने की अटकलें लगाई जा रही थीं, राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि देश के छात्रों को सरकार की यह लीपापोती मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से पूरी तरह से बर्खास्त नहीं किया जाता, तब तक यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। विपक्ष का मानना है कि परीक्षा सिस्टम में बैठे बड़े चेहरों पर कार्रवाई किए बिना सिस्टम को नहीं सुधारा जा सकता।दिल्ली-NCR और लोकल युवाओं के बीच बढ़ा उबालराहुल गांधी के इस जंतर-मंतर मार्च के बाद दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम सहित पूरे देश के कोचिंग हब्स में पढ़ने वाले छात्रों के बीच एक नई ऊर्जा और उबाल देखने को मिल रहा है। स्थानीय छात्र संगठनों ने भी इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि युवाओं और विशेषकर महिला छात्रों से जुड़ा यह मुद्दा अब सीधे तौर पर आने वाले विधानसभा चुनावों और देश के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने की ताकत रखता है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों नौकरीपेशा सदस्यों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तय 8.25% की वार्षिक ब्याज दर की राशि सदस्यों के कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खातों में क्रेडिट (जमा) करना शुरू कर दिया है। देश भर के कई पीएफ खाताधारकों को ब्याज जमा होने का आधिकारिक एसएमएस (SMS) मिलना शुरू हो चुका है।यदि आपके मोबाइल पर अभी तक ब्याज जमा होने का मैसेज नहीं आया है, तो घबराने या परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। EPFO ब्याज जमा करने की इस प्रक्रिया को चरणबद्ध (Phase-wise/Batch-wise) तरीके से पूरा करता है। आइए एक पर्सनल फाइनेंस और टेक रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि आप बिना SMS के भी अपने पीएफ खाते का बैलेंस और ब्याज कैसे चेक कर सकते हैं।15 जुलाई से प्रक्रिया शुरू: इन 3 तरीकों से मिनटों में चेक करें पीएफ बैलेंसEPFO ने 15 जुलाई 2026 से ब्याज की रकम खातों में ट्रांसफर करना शुरू किया है। यदि आपके पासबुक में अभी अपडेटेड बैलेंस नहीं दिख रहा है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों से कभी भी अपने बैलेंस की जांच कर सकते हैं:1. EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल (Online Portal)EPFO के आधिकारिक Unified Member Portal पर जाएं और 'Member Passbook' के विकल्प को चुनें।अपना UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) और पासवर्ड दर्ज करके लॉग इन करें।अपनी मेंबर आईडी (Member ID) चुनें और पासबुक डाउनलोड या व्यू करें। यदि ब्याज क्रेडिट हो चुका होगा, तो वह पासबुक के अंतिम क्रेडिट कॉलम में स्पष्ट दिखेगा।2. मिस्ड कॉल सेवा (Missed Call Service)यदि आपका मोबाइल नंबर आपके UAN के साथ पंजीकृत है, तो अपने रजिस्टर्ड नंबर से 011-22901406 पर मिस्ड कॉल दें।दो घंटी बजने के बाद कॉल अपने आप कट जाएगी और कुछ ही सेकंड में आपको SMS के जरिए कुल पीएफ बैलेंस, आखिरी योगदान और ब्याज की जानकारी मिल जाएगी।(ध्यान दें: इस सेवा के लिए आपका UAN आधार, पैन और बैंक खाते से लिंक/सीडेड होना अनिवार्य है।)3. SMS भेजकर जानें बैलेंसअपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर एक टेक्स्ट मैसेज भेजें।मैसेज फॉर्मेट दर्ज करें: EPFOHO UAN ENGयदि आप हिंदी या किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा में जानकारी चाहते हैं, तो 'ENG' की जगह उस भाषा के शुरुआती तीन अक्षर लिखें (जैसे हिंदी के लिए HIN, मराठी के लिए MAR)।क्या ब्याज देर से क्रेडिट होने पर कोई आर्थिक नुकसान होगा?कई खाताधारकों के मन में यह सवाल रहता है कि यदि उनके पीएफ खाते में ब्याज का पैसा देर से क्रेडिट होता है, तो क्या उन्हें ब्याज का नुकसान उठाना पड़ेगा?इसका जवाब है—बिलकुल नहीं!EPF योजना 1952 (पैराग्राफ 60) का नियम: ईपीएफ नियमों के अनुसार, ब्याज की गणना हर महीने के रनिंग बैलेंस (Monthly Running Balance) के आधार पर की जाती है।भले ही ब्याज का पैसा खाते में देर से दिखे या प्रोसेस हो, EPFO आपको 1 अप्रैल से लेकर पूरे वित्त वर्ष के लिए घोषित 8.25% की पूरी दर से ही ब्याज देगा। देरी होने की स्थिति में भी सदस्य का एक रुपये का भी नुकसान नहीं होता है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के सबसे अशांत समुद्री रास्ते लाल सागर (Red Sea) से इस वक्त की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली भू-राजनीतिक खबर आ रही है। सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के बीच एक बार फिर सीधी और खतरनाक जंग छिड़ गई है। सऊदी अरब द्वारा हूतियों के खिलाफ शुरू की गई इस नई सैन्य कार्रवाई के बाद हूती कमांडरों ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए सऊदी शासन को खुली धमकी दी है। हूतियों ने सीधे लफ्जों में कहा है कि वे सऊदी अरब को 'जहन्नुम की आग' दिखाएंगे, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल गहरे हो गए हैं।लाल सागर बना बारूद का ढेर, जहाजों की आवाजाही ठपसऊदी अरब की वायुसेना और नौसेना ने हूतियों के रणनीतिक ठिकानों और मिसाइल लॉन्च पैड्स पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं। इस जवाबी और आक्रामक कार्रवाई से बौखलाए हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और सऊदी के तेल टैंकरों को निशाना बनाने की कसम खाई है। लाल सागर, जो वैश्विक व्यापार का एक लाइफलाइन रूट माना जाता है, इस समय पूरी तरह से बारूद के ढेर में तब्दील हो चुका है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस रूट से अपने जहाजों को हटाना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह चरमराने की कगार पर पहुंच गई है।हूतियों की 'जहन्नुम' वाली धमकी से दुनिया भर के देश अलर्टहूती विद्रोहियों के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सऊदी अरब को चेतावनी दी है कि उनके पास ऐसे घातक ड्रोन और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं जो रियाद और जेद्दा जैसे बड़े सऊदी शहरों के आर्थिक ठिकानों को पल भर में तबाह कर सकती हैं। हूतियों ने कहा कि सऊदी ने इस जंग को छेड़कर अपने लिए तबाही का रास्ता चुन लिया है। इस गंभीर धमकी के बाद अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेना बल भी लाल सागर में अत्यधिक सक्रिय हो गए हैं, जिससे यह टकराव अब केवल दो देशों के बीच न रहकर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप लेता जा रहा है।भारत सहित वैश्विक तेल बाजारों पर टूटेगा बड़ा संकटलाल सागर में बढ़े इस भीषण बवाल का सीधा और बड़ा असर भारत के स्थानीय बाजारों और घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना तय है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते के जरिए आयात और निर्यात करता है। मुंबई और गुजरात के बंदरगाहों पर आने वाले माल ढुलाई (Freight Rates) के दामों में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। अगर यह जंग लंबी खिंचती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और महंगाई का एक नया दौर शुरू होने का सीधा खतरा मंडराने लगा है।
ईरान पर टूट पड़ा महासंकट: 2 मुस्लिम देशों ने मिलकर किया भीषण हमला, UAE ने भी थाम लिया हाथ
मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व के अशांत और तनावपूर्ण माहौल से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली भू-राजनीतिक (Geopolitical) खबर सामने आ रही है। ईरान के खिलाफ अब एक बिल्कुल नया और बेहद खतरनाक सैन्य मोर्चा खुल चुका है। हमेशा पश्चिमी देशों या इजरायल के निशाने पर रहने वाले ईरान पर इस बार दो बड़े मुस्लिम देशों ने मिलकर एक बड़ा रणनीतिक हमला बोल दिया है। इस चौंकाने वाले सैन्य घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इस गठबंधन को अपना खुला समर्थन दे दिया, जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा समीकरण को हिलाकर रख दिया है।खाड़ी देशों के इस औचक हमले से ईरान में हड़कंपतेहरान से आ रही शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला ईरान के सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया है। दो पड़ोसी मुस्लिम मुल्कों के इस संयुक्त सैन्य एक्शन ने ईरान के रक्षा तंत्र को पूरी तरह से चौंका दिया है। अब तक ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के सीधे सैन्य एक्शन से बचने वाले खाड़ी देशों (Gulf Countries) का यह आक्रामक रुख यह साफ दर्शाता है कि क्षेत्र में क्षेत्रीय संप्रभुता और सुरक्षा को लेकर पानी सिर से ऊपर जा चुका है। हमले के बाद ईरान की सीमाओं और प्रमुख सैन्य अड्डों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।UAE के पीछे से समर्थन देने के क्या हैं मायने?इस पूरे विवाद में यूएई (UAE) की भूमिका ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों को हैरान कर दिया है। आर्थिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले यूएई का इस मोर्चे में शामिल होना यह साफ संकेत देता है कि ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और प्रॉक्सी वॉर से खाड़ी के देश अब बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यूएई ने न केवल इस हमले को अपना रणनीतिक समर्थन दिया है, बल्कि खुफिया सूचनाएं साझा करने और लॉजिस्टिक्स के स्तर पर भी सहयोग किया है। यह कदम ईरान को पूरी दुनिया और विशेष रूप से मुस्लिम जगत में अलग-थलग करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।लोकल और ग्लोबल मार्केट पर मंडराया युद्ध का खतराइस नए मोर्चे के खुलने का सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के तेल बाजारों (Crude Oil Markets) और मुंबई-दिल्ली जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्रों पर देखने को मिल सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के करीब बढ़ते इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है। स्थानीय बाजारों में लॉजिस्टिक्स और शिपिंग कंपनियों ने अपनी रूटिंग बदलना शुरू कर दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस हमले का ईरान ने कोई बड़ा पलटवार किया, तो यह सीमित सैन्य कार्रवाई एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है, जिससे पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट में आ जाएगी।
देश की कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और करदाता-अनुकूल (Taxpayer-Friendly) बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियमों का ईमानदारी से पालन करने वाले करदाताओं पर किसी भी तरह का अनावश्यक दबाव या बोझ नहीं पड़ना चाहिए।वित्त मंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि टैक्स चोरी करने वालों और फर्जी क्लेम करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहनी चाहिए, लेकिन देश के ईमानदार करदाताओं के लिए टैक्स असेसमेंट और नोटिस की प्रक्रिया बेहद सरल, सुविधाजनक और भरोसेमंद होनी चाहिए। आइए एक इकोनॉमिक्स और टैक्स पॉलिसी रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं वित्त मंत्री के इन नए निर्देशों के 4 सबसे बड़े पहलू।1. 'टैक्स वसूली ही मकसद नहीं, भरोसा बनाना प्राथमिकता'वित्त मंत्री ने आयकर अधिकारियों को अपना कार्य रवैया (Work Culture) बदलने का निर्देश देते हुए कहा कि कर प्रशासन का उद्देश्य केवल राजस्व या टैक्स वसूलना नहीं है, बल्कि करदाता और विभाग के बीच 'भरोसे का रिश्ता' कायम करना है।अनुपालन (Compliance) आसान बने: सरकार का जोर स्वैच्छिक कर अनुपालन पर है। जब नियम सरल और पारदर्शी होंगे, तो लोग खुद आगे आकर टैक्स भरेंगे।अनावश्यक जांच से राहत: ईमानदार टैक्सपेयर्स को छोटी-छोटी कमियों या क्लैरिफिकेशन के लिए बार-बार स्क्रूटनी (Scrutiny) या आयकर विभाग के चक्कर नहीं कटवाए जाएंगे।2. टैक्स चोरी पकड़ने के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमालसीतारमण ने कहा कि तकनीक के दौर में ईमानदार और बेईमान के बीच फर्क करना बेहद आसान हो गया है:डेटा एनालिटिक्स से निगरानी: आयकर विभाग को आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए ताकि जहां वास्तविक टैक्स चोरी हो रही है, केवल वहीं सटीक कार्रवाई की जा सके।सटीक नोटिस: एआई आधारित निगरानी से एक ओर टैक्स चोरी पर शिकंजा कसेगा, तो दूसरी ओर सामान्य टैक्सपेयर्स को बेवजह के नोटिसों से राहत मिलेगी।3. असेसमेंट ईयर 2026-27: 3.34 करोड़ ITR दाखिल, 2 करोड़ का त्वरित निपटारासरकार द्वारा बीते कुछ वर्षों में किए गए डिजिटल सुधारों (फेशलेस असेसमेंट, ई-फाइलिंग पोर्टल और तेज रिफंड सिस्टम) का असर आंकड़ों में साफ दिख रहा है:3.34 करोड़ से अधिक ITR: चालू आकलन वर्ष (AY 2026-27) के लिए अब तक 3.34 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न सफलतापूर्वक दाखिल किए जा चुके हैं।2 करोड़ रिफंड/प्रोसेसिंग पूरे: दाखिल किए गए रिटर्न में से करीब 2 करोड़ ITR का प्रोसेसिंग और निपटारा विभाग द्वारा रिकॉर्ड समय में पूरा भी कर लिया गया है।4. लंबित टैक्स विवादों के जल्द निपटारे पर जोरवित्त मंत्री ने ट्रिब्यूनल और अदालतों में लंबित पड़े हजारों करोड़ रुपये के टैक्स विवादों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में फंसे राजस्व को निकालने के लिए टाइम-बाउंड (समयबद्ध) समाधान निकाले जाएं। इससे न केवल सरकार को अपना राजस्व (Revenue) समय पर मिलेगा, बल्कि कारोबारियों और करदाताओं को भी सालों-साल चलने वाले मुकदमों से मुक्ति मिलेगी।
अमेरिका में खसरे के बाद डायरिया का हाहाकार: अमेरिकी डॉक्टर्स अब दे रहे भारत के आयुर्वेद की सलाह
सुपरपावर अमेरिका इस समय एक के बाद एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहा है। हाल ही में फैले खसरे (Measles) के गंभीर मामलों के बाद, अब पूरे अमेरिका में डायरिया (Diarrhea) यानी दस्त का भीषण प्रकोप देखने को मिल रहा है। वहां के प्रमुख शहरों में पेट के इन्फेक्शन और डिहाइड्रेशन के मामलों में अचानक भारी उछाल आया है। इस गंभीर संकट के बीच सबसे हैरान और गर्व करने वाली बात यह सामने आ रही है कि अमेरिकी डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स अब इस बीमारी से निपटने के लिए भारत की सदियों पुरानी पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और घरेलू उपचारों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं।अमेरिकी अस्पतालों में बढ़े मरीज, मॉडर्न मेडिसिन के साथ आयुर्वेद का मेलन्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे बड़े अमेरिकी राज्यों के अस्पतालों में पेट से संबंधित बीमारियों और गंभीर डायरिया से पीड़ित मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ी है। अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक संस्थाओं के लिए यह स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने और शरीर में पानी की कमी (Dehydration) को तुरंत रोकने के लिए वहां के पीडियाट्रिशियन और फिजिशियन अब भारतीय आयुर्वेद का रुख कर रहे हैं। डॉक्टर्स का मानना है कि पेट के इन्फेक्शन को शांत करने और आंतों (Gut Health) को मजबूत बनाने में भारत के पारंपरिक तरीके बेहद कारगर साबित हो रहे हैं।डॉक्टर बता रहे भारत के ये अचूक आयुर्वेदिक और घरेलू इलाजअमेरिकी स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा मरीजों को रिकमेंड किए जा रहे भारतीय इलाज में सबसे ऊपर ओआरएस (ORS) के देसी विकल्प के रूप में नींबू-पानी, नमक और चीनी का घोल शामिल है। इसके अलावा, आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार आंतों के गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए छाछ (Buttermilk), भुना हुआ जीरा, सोंठ (सूखा अदरक) और बेल के शर्बत के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। अमेरिकी डॉक्टर्स अब मरीजों को हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे मूंग की दाल की खिचड़ी और केला खाने की सलाह दे रहे हैं, जो भारत के हर घर में डायरिया के दौरान सदियों से इस्तेमाल होता आ रहा है।क्यों हो रहा है भारतीय आयुर्वेद की तरफ वैश्विक झुकाव?ग्लोबल मेडिकल साइंस अब धीरे-धीरे यह स्वीकार कर रहा है कि पेट से जुड़ी बीमारियों में केमिकल युक्त दवाओं के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपचार शरीर को बिना किसी साइड इफेक्ट के जल्दी ठीक करते हैं। अमेरिका के स्थानीय क्लीनिकों में अब 'बैलेंस्ड डाइट' और 'हर्बल रेमेडीज' के नाम पर भारतीय नुस्खों का बकायदा पर्चा बनाया जा रहा है। लोकल अमेरिकी नागरिकों के बीच भी इन भारतीय उपचारों को लेकर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और योग-आयुर्वेद की साख एक बार फिर आसमान छू रही है।
असम में बाढ़ से हालात गंभीर, अब तक 61 लोगों की मौत और 11 लाख से अधिक लोग प्रभावित। पीएम नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से बात कर राहत और पुनर्वास के लिए हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।
Instagram की बड़ी कार्रवाई, Meta Smart Glass से बने आपत्तिजनक POV वीडियो हटाए जाएंगे
इंस्टाग्राम का यह फैसला प्लेटफॉर्म की अब तक की सबसे सख्त कंटेंट मॉडरेशन कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। हाल के महीनों में स्मार्ट ग्लास से रिकॉर्ड किए गए ऐसे वीडियो तेजी से वायरल हो रहे थे, जिससे गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे थे।
राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। कहा- सरकार मेट्रो, सड़कें और दुकानें बंद कर सकती है, लेकिन पेपर लीक नहीं रोक पाई।
आस्था की विजय: जब पंढरपुर में एक बालक के रक्षक बने स्वयं विट्ठल
एक पारिवारिक संस्मरण, जो बताता है कि श्रद्धा का सबसे बड़ा प्रमाण अनुभव होता है, भारत की सांस्कृतिक परंपरा में कुछ पर्व केवल तिथियां नहीं होते, वे लोकजीवन की आत्मा बन जाते हैं। आषाढ़ी एकादशी ऐसा ही एक महापर्व है, जो महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश के ...
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में बड़ी सफलता, मुख्य आरोपी वीरेंद्र कुमार गुप्ता बिहार से गिरफ्तार
मुंबई महाराष्ट्र के चर्चित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने मुख्य आरोपियों में शामिल वीरेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश के लिए महाराष्ट्र पुलिस की विशेष टीम लगातार कई राज्यों में छापेमारी कर रही थी। आखिरकार भिवंडी पुलिस की विशेष टीम ने बिहार में अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
सीजेपी प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा, 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र घायल; 15 एफआईआर दर्ज
दिल्ली में सीजेपी के 20 जुलाई के 'संसद चलो' प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा। 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र घायल, 15 एफआईआर दर्ज, एफआरएस कैमरों से 2,000 से अधिक लोगों की पहचान।
गुजरात में मानसून के और भी अधिक सक्रिय होने के साथ, अब बारिश का एक और जोरदार दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में एक साथ 5 वर्षा प्रणालियां सक्रिय होने के कारण पूरे गुजरात में भारी व्यापक वर्षा की भविष्यवाणी की ...
दिल्ली में सुरक्षा कारणों से शराब की दुकानों का समय बदला। अब सप्ताहांत तक सभी सरकारी शराब की दुकानें रात 8 बजे बंद होंगी। CJP प्रदर्शन के बीच प्रशासन ने लिया फैसला।
सरकार का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब देश में परीक्षा प्रणाली और शिक्षा सुधार को लेकर विभिन्न स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध वाले क्षेत्रों में इस प्रकार की तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी, परिवार, मातृत्व और भारतीय संस्कृति पर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे हर बात का तर्क चाहते हैं और परिवारों में संवाद बढ़ाने की जरूरत है।
6 दिन बाद फिर शुरू हुई अमरनाथ यात्रा, 6,269 श्रद्धालुओं का जत्था बालटाल मार्ग से रवाना
लगातार छह दिनों तक स्थगित रहने के बाद, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित अमरनाथ गुफा, कटड़ा में माता वैष्णो देवी मंदिर और जम्मू क्षेत्र के रियासी जिले में स्थित शिव खोड़ी मंदिर की यात्रा भी आज शुरू हो गई हैं।
दिल्ली में आज 18 मेट्रो स्टेशन बंद, जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच DMRC का बड़ा फैसला
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए आज सुबह 7.30 बजे से अगली सूचना तक 18 मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे। पिछले कई दिनों से मेट्रो बंद होने की वजह से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राजधानी दिल्ली में जारी प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी (Traffic Advisory) जारी की है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील इलाकों में भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत सख्त पाबंदियां लागू की गई हैं।पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे नई दिल्ली जिले के मुख्य क्षेत्रों में बिना किसी बेहद जरूरी काम के जाने से बचें और अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाकर निकलें।इन इलाकों में यात्रा से बचने की सलाहदिल्ली पुलिस ने विशेष रूप से निम्नलिखित संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक आवाजाही न करने का आग्रह किया है:जंतर-मंतर और संसद भवन परिसरसेंट्रल विस्टा (Central Vista)कनॉट प्लेस (Connaught Place)संपूर्ण नई दिल्ली जिलावाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे इन क्षेत्रों की तरफ जाने वाले रास्तों के बजाय वैकल्पिक मार्गों (Alternate Routes) का चयन करें और चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।कैब, फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाओं के लिए निर्देशदिल्ली पुलिस ने ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स (जैसे- ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी और क्विक-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स) को भी विशेष सलाह जारी की है:सेवाओं पर नियंत्रण: कंपनियों से कहा गया है कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में अपनी डिलीवरी और राइड सेवाओं को जरूरत के अनुसार नियंत्रित रखें।जियो-फेंसिंग (Geo-Fencing) तकनीक: कंपनियों को संवेदनशील क्षेत्रों में जियो-फेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल करने या अस्थायी रूप से सेवाएं निलंबित रखने की सलाह दी गई है।सुरक्षा प्राथमिकता: पुलिस के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवरों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।आपातकालीन सेवाएं और हेल्पलाइन नंबरइमरजेंसी गाड़ियां रहेंगी फ्री: दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अधिकृत सरकारी वाहनों जैसी सभी आपातकालीन सेवाओं पर कोई रोक नहीं रहेगी और वे बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी।अफवाहों से बचें: लोगों से केवल आधिकारिक घोषणाओं और पुलिस अपडेट पर ही भरोसा करने को कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति या सहायता के लिए नागरिक दिल्ली पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर संपर्क कर सकते हैं।
हिंदू धर्म में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी (हरिशयनी एकादशी) का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज 25 जुलाई 2026 को भगवान श्री हरि विष्णु पाताल लोक में योग निद्रा के लिए चले जाते हैं और इसी के साथ चार महीनों का चतुर्मास (सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) प्रारंभ हो जाता है।चतुर्मास के दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है और सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। अब कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी 'देवउठनी एकादशी' पर भगवान विष्णु के जागने के बाद ही पुनः शुभ कार्य शुरू होंगे।देवशयनी एकादशी पर भद्रा का समयपंचांग के अनुसार, आज देवशयनी एकादशी पर सुबह से ही भद्रा काल लग रहा है:भद्रा काल का समय: सुबह 05:27 बजे से सुबह 11:34 बजे तक।राहत की बात: इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेंगे, जिससे ज्योतिषीय गणना के अनुसार भद्रा का निवास पाताल/स्वर्ग लोक में होगा और पृथ्वी लोक पर इसका अशुभ प्रभाव नहीं माना जाएगा।एकादशी तिथि और पारण का समयएकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजेएकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजेव्रत का पारण (26 जुलाई): 26 जुलाई 2026 को सुबह 05:28 बजे से सुबह 08:10 बजे के बीच द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करना शुभ रहेगा।आज पूजा के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:03 बजे से 04:45 बजे तकअभिजित मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक (पूजा के लिए अति श्रेष्ठ)विजय मुहूर्त: दोपहर 02:28 बजे से दोपहर 03:22 बजे तकगोधूलि मुहूर्त: शाम 06:58 बजे से शाम 07:19 बजे तकअमृत काल: रात 09:41 बजे से रात 11:29 बजे तकदेवशयनी एकादशी: क्या करें और क्या न करें?क्या करें (Dos):सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या सात्विक वस्त्र धारण करें।भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा में पीले फल, पीले फूल, चंदन और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अवश्य चढ़ाएं।'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल या फल का दान करें।क्या न करें (Don'ts):एकादशी के दिन चावल (अक्षत) का सेवन भूलकर भी न करें (व्रत न रखने वालों के लिए भी वर्जित)।तुलसी के पौधे में जल न चढ़ाएं, न ही आज के दिन तुलसी पत्र तोड़ें (पूजा के लिए एक दिन पहले ही तोड़ कर रखें)।तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से दूर रहें।किसी के प्रति मन में गलत विचार न लाएं और न ही किसी का अपमान करें।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली ने विज्ञापन संख्या 103/2026 के तहत नर्सिंग ऑफिसर रिक्रूटमेंट कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (NORCET)-11 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके जरिए एम्स नई दिल्ली समेत देश भर के भाग लेने वाले अन्य एम्स संस्थानों में ग्रुप-B के तहत नर्सिंग ऑफिसर (Nursing Officer) के पदों पर भर्ती की जाएगी।इच्छुक और योग्य उम्मीदवार एम्स के आधिकारिक परीक्षा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 13 अगस्त 2026 (शाम 5:00 बजे तक) तय की गई है।महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तिथि: जुलाई 2026आवेदन की अंतिम तिथि: 13 अगस्त 2026 (शाम 5:00 बजे तक)NORCET-11 प्रीलिमिनरी परीक्षा (Stage-1): 12 सितंबर 2026NORCET-11 मेन्स परीक्षा (Stage-2): 30 सितंबर 2026कौन कर सकता है आवेदन? (Eligibility Criteria)शैक्षणिक योग्यता:उम्मीदवार के पास बी.एससी. (ऑनर्स) नर्सिंग / बी.एससी. नर्सिंग या पोस्ट-बेसिक बी.एससी. नर्सिंग की डिग्री होनी चाहिए और वह राज्य/भारतीय नर्सिंग काउंसिल में नर्स एवं मिडवाइफ के रूप में पंजीकृत हो। अथवाजीएनएम (GNM) डिप्लोमाधारक उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे पंजीकृत हों और उनके पास कम से कम 50 बेड वाले अस्पताल में कार्य करने का 2 वर्ष का अनुभव हो।आयु सीमा: 13 अगस्त 2026 तक उम्मीदवार की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जाएगी।वेतनमान (Salary/Pay Scale)चयनित उम्मीदवारों को पे मैट्रिक्स के लेवल-07 के तहत वेतन दिया जाएगा (प्री-रिवाइज्ड पे बैंड-2: ₹9,300 - ₹34,800 + ग्रेड पे ₹4,600)। इसके अलावा अन्य भत्ते व सुविधाएं भी लागू होंगी।आवेदन शुल्क (Application Fee)जनरल / ओबीसी (UR/OBC): ₹3,000एससी / एसटी / ईडब्ल्यूएस (SC/ST/EWS): ₹2,400दिव्यांग (PwD): कोई शुल्क नहीं (निःशुल्क)(नोट: परीक्षा में शामिल होने वाले SC/ST उम्मीदवारों का आवेदन शुल्क रिजल्ट के बाद और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा होने पर वापस (Refund) कर दिया जाएगा।)चयन प्रक्रिया और आवेदन कैसे करें?चयन प्रक्रिया: उम्मीदवारों का चयन दो चरणों के कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) – प्रीलिमिनरी और मेन्स परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर होगा। इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट आयोजित किया जाएगा।आवेदन कैसे करें: उम्मीदवार एम्स के आधिकारिक परीक्षा पोर्टल norcet11.aiimsexams.ac.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें, फॉर्म भरें, फोटो व सिग्नेचर अपलोड करें और फीस का भुगतान कर सबमिट करें। भविष्य के लिए प्रिंटआउट संभाल कर रखें।
देशभर के सराफा बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। 25 जुलाई 2026 की सुबह राजधानी दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट गोल्ड के दामों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिल्ली में 24 कैरेट सोना फिसलकर ₹1,44,470 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है, जबकि एक दिन पहले ही इसमें ₹2,000 की भारी नरमी दर्ज की गई थी।घरेलू बाजार में कमजोर खरीदारी और स्थानीय मांग में आई सुस्ती के चलते सोने पर दबाव बना हुआ है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) $4,052.78 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से नीचे आने के कारण वैश्विक बाजार में सोने को हल्का सहारा मिला है, लेकिन घरेलू बाजार में कमजोरी हावी है।देश के प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड रेट (₹/10 ग्राम)शहर22 कैरेट सोने का भाव (₹)24 कैरेट सोने का भाव (₹)दिल्ली₹1,32,440₹1,44,470मुंबई₹1,32,290₹1,44,320कोलकाता₹1,32,290₹1,44,320चेन्नई₹1,32,290₹1,44,320लखनऊ₹1,32,440₹1,44,470जयपुर₹1,32,440₹1,44,470अहमदाबाद₹1,32,340₹1,44,370भोपाल₹1,32,340₹1,44,370चंडीगढ़₹1,32,440₹1,44,470हैदराबाद₹1,32,290₹1,44,320चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावटसोने के साथ-साथ चांदी (Silver) की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 25 जुलाई की सुबह घरेलू बाजार में 1 किलोग्राम चांदी की कीमत ₹2,34,900 प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है, जबकि इससे पहले दिल्ली सराफा बाजार में चांदी ₹5,000 तक टूट चुकी है।वैश्विक बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पॉट सिल्वर मामूली बढ़त के साथ $58.11 प्रति औंस और प्लेटिनम $1,587.17 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।क्यों बदलती हैं सोने-चांदी की कीमतें?भारत में सोने और चांदी के भाव केवल घरेलू मांग और आपूर्ति पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इन मुख्य कारकों से भी तय होते हैं:वैश्विक आर्थिक स्थिति व अंतरराष्ट्रीय दरें: अमेरिका और वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों का असर।डॉलर-रुपया विनिमय दर: भारतीय रुपये के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी।कच्चे तेल की कीमतें: ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले उतार-चढ़ाव।इंपोर्ट ड्यूटी और टैक्स: भारत सरकार द्वारा लगाए जाने वाले सीमा शुल्क और स्थानीय वैट (VAT)/जीएसटी।
राजधानी दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शनिवार, 25 जुलाई 2026 को मौसम सुहावना बना रहेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आज दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और हल्की से बहुत हल्की बारिश होने की संभावना है।शुक्रवार को हुई बूंदाबांदी और हल्की फुहारों के बाद दिल्लीवासियों को काफी समय से परेशान कर रही उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग का अनुमान है कि शनिवार को भी बारिश और ठंडी हवाओं के चलते तापमान नियंत्रण में रहेगा।आज कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम और तापमान?मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक:बादल और बारिश: शनिवार सुबह से ही आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच हल्की से मध्यम फुहारें पड़ सकती हैं, जबकि दोपहर और शाम के वक्त भी रुक-रुक कर हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है।तेज हवाएं: दिन के दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जिनके झोंके 40 किमी/घंटा तक पहुंच सकते हैं।तापमान में गिरावट: आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 33C से 35C के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 24C से 26C के आसपास दर्ज किया जा सकता है।बीते 24 घंटों में कैसा रहा मौसम?शुक्रवार को दिनभर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में छिटपुट बारिश दर्ज की गई, जिससे पारा सामान्य से नीचे बना रहा:सफदरजंग: अधिकतम तापमान 34.6C दर्ज किया गया।पालम: अधिकतम तापमान 32.9C रहा।लोधी रोड और रिज: दोनों मौसम केंद्रों पर तापमान 33.3C रिकॉर्ड हुआ।आया नगर: अधिकतम तापमान 33.3C रहा।बारिश के आंकड़ों की बात करें तो बीते 24 घंटों के दौरान पालम में 3.3 मिमी, सफदरजंग में 0.6 मिमी और रिज क्षेत्र में 3.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।दिल्ली की हवा हुई साफ, AQI 'संतोषजनक' श्रेणी मेंमानसून की लगातार गतिविधियों और बारिश के कारण दिल्ली की आबोहवा में बड़ा सुधार देखने को मिला है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार शाम को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 70 दर्ज किया गया, जो 'संतोषजनक' (Satisfactory) श्रेणी में आता है। साफ हवा और सुहावने मौसम के कारण सप्ताहांत (Weekend) पर लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।
बॉलीवुड के 'दबंग' स्टार सलमान खान (Salman Khan) इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और देश के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं। हाल ही में उन्होंने नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर एक पोस्ट शेयर किया था, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।अब सलमान खान ने देर रात (तड़के सुबह 3 बजे) इंस्टाग्राम पर एक क्रिप्टिक पोस्ट शेयर कर अपने आलोचकों और ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है।सुबह 3 बजे शेयर की शर्टलेस फोटो और क्रिप्टिक कैप्शनसलमान खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी दो तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें वे अपने मस्कुलर एब्स और टोन्ड फिजीक दिखाते नजर आ रहे हैं। इस शर्टलेस फोटो के साथ उन्होंने जो कैप्शन लिखा है, उसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है।सलमान खान ने लिखा:सलमान खान डर गया... हम्म्म! जो डर गया वो समझो मर गया।यह क्रिप्टिक कैप्शन तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रहा है और फैंस इसे ट्रोलर्स के लिए सलमान का 'डायरेक्ट अटैक' मान रहे हैं।क्यों ट्रोल हुए थे सलमान खान?दरअसल, सलमान खान ने गुरुवार को नीट पेपर लीक मामले और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर एक लंबा-चौड़ा नोट शेयर किया था।पीएम मोदी के ट्वीट का हवाला: सलमान ने लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, इसलिए अब छात्रों और उनके माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है।सोनम वांगचुक से अपील: उन्होंने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की गुजारिश करते हुए लिखा था: सोनम भाई, अब सब हो गया, इसे आगे मत बढ़ाइए। अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो फिर लड़ाई लड़ेंगे। अब कुछ खा लीजिए, चाहें तो मैं अपने घर से खाना भिजवा दूंगा।सलमान की इस पोस्ट पर कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने उन्हें आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि वे गंभीर मुद्दे को हल्का बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी ट्रोलिंग के जवाब में सलमान ने अपना नया पोस्ट शेयर किया है।सलमान खान की अपकमिंग फिल्मेंकाम के मोर्चे की बात करें तो सलमान खान आखिरी बार पैन-इंडिया फिल्म 'सिकंदर' (Sikandar) में नजर आए थे, जिसमें उनके साथ रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिका में थीं।अब सलमान अपनी अगली बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मातृभूमि' (Matrubhoomi) की तैयारियों में जुटे हैं, जो 2020 के ऐतिहासिक 'बैटल ऑफ गलवान' (Galwan Valley Clash) पर आधारित एक देशभक्ति एक्शन ड्रामा फिल्म है।
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय (Thalapathy Vijay) की बहुप्रतीक्षित और सिनेमाई करियर की आखिरी फिल्म 'जना नायकन' (Jana Nayagan) आखिरकार भारी विवादों और सर्टिफिकेशन की अड़चनों के बाद सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। बॉक्स ऑफिस पर इसका मुकाबला 'द ओडिसी', 'धमाल 4' और 'इविल डेड बर्न' जैसी बड़ी फिल्मों से देखने को मिल रहा है।जहां पहले दिन फिल्म ने ₹41.6 करोड़ का धमाकेदार ओपनिंग कलेक्शन किया था, वहीं दूसरे दिन (शुक्रवार) इसकी कमाई में लगभग 50% की गिरावट दर्ज की गई है। ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने रिलीज के दूसरे दिन भारत में लगभग ₹21.15 करोड़ का नेट कलेक्शन किया है।2 दिनों में 50 करोड़ पार, 100 करोड़ क्लब पर नजरदूसरे दिन की कमाई को मिलाकर 'जना नायकन' ने महज 2 दिनों के भीतर भारत में ₹63.85 करोड़ नेट का आंकड़ा पार कर लिया है।पहला दिन (Day 1): ₹42.70 करोड़दूसरा दिन (Day 2): ₹21.15 करोड़कुल भारत कलेक्शन (Net): ₹63.85 करोड़वर्ल्डवाइड ग्रॉस (Worldwide Gross): ओवरसीज मार्केट के शानदार रिस्पॉन्स के बदौलत फिल्म का दुनियाभर में कुल ग्रॉस कलेक्शन ₹112.50 करोड़ पहुंच गया है।₹300-350 करोड़ का बजट और वीकेंड से उम्मीदेंमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'जना नायकन' का अनुमानित बजट ₹300 से ₹350 करोड़ के आसपास है। शुक्रवार को वर्किंग डे होने की वजह से कलेक्शन में कमी देखी गई, लेकिन ट्रेड एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि शनिवार और रविवार के वीकेंड पर इसकी कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। अगर वीकेंड पर रफ्तार बनी रही तो यह फिल्म जल्द ही 200 करोड़ क्लब की ओर कदम बढ़ा सकती है।थलपति विजय की आखिरी फिल्म'जना नायकन' थलपति विजय की फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म है, क्योंकि वे अब पूरी तरह से राजनीति में कदम रख चुके हैं।निर्देशक व निर्माता: फिल्म का निर्देशन एच. विनोद (H. Vinoth) ने किया है और इसे केवीएन प्रोडक्शंस (KVN Productions) के बैनर तले वेंकट के. नारायणन ने प्रोड्यूस किया है।स्टारकास्ट: फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, प्रकाश राज, प्रियमाणी और ममिता बैजू जैसे सितारे मुख्य भूमिकाओं में हैं।क्या है फिल्म की कहानी?फिल्म की कहानी एक पूर्व पुलिस अधिकारी (थलपति विजय) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने दिवंगत दोस्त की बेटी का लालन-पालन करता है और उसे भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है। इस दौरान उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। इसके साथ ही फिल्म में समाज में फैली भ्रष्टाचार और राजनीतिक अव्यवस्था जैसी गंभीर समस्याओं पर भी कड़ा प्रहार किया गया है।
आमतौर पर जब भी देश में रिकॉर्ड तोड़ और मूसलाधार बारिश का जिक्र होता है, तो मेघालय के चेरापूंजी और मौसिनराम का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। लेकिन इस बार दक्षिण गुजरात के वलसाड (Valsad) जिले ने बारिश के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।वलसाड में महज कुछ ही घंटों के भीतर 46 इंच (लगभग 1,200 मिलीमीटर) रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई, जिसने पूरे क्षेत्र को जलमग्न कर दिया। इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व जलप्रलय के कारण अब वलसाड को देश का नया 'चेरापूंजी' कहा जा रहा है।भारत के इतिहास की तीसरी सबसे भीषण बारिशवलसाड से भाजपा सांसद धवल लक्ष्मणभाई पटेल के अनुसार, दक्षिण गुजरात और विशेषकर वलसाड में हुई यह बारिश कोई सामान्य मानसूनी गतिविधि नहीं है। यह भारत के आधुनिक इतिहास की तीसरी सबसे भीषण बारिश मानी जा रही है।अचानक हुई 46 इंच बारिश के कारण वलसाड का संपर्क आसपास के जिलों से पूरी तरह कट गया है। नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, बस्तियां, सड़कें, सरकारी इमारतें और कृषि योग्य भूमि कई-कई फीट पानी में डूबी हुई हैं।12,000 से अधिक लोगों का रेस्क्यू और राहत कार्यबाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) ने युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चलाया:सुरक्षित रेस्क्यू: बाढ़ के पानी में फंसे 12,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया।राशन व मेडिकल किट: दूर-दराज के जलमग्न गांवों में फंसे परिवारों तक बोट्स और हेलीकॉप्टरों के माध्यम से सूखा राशन और इमरजेंसी फूड किट्स पहुंचाए जा रहे हैं।गृह मंत्री का दौरा: गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने स्वयं प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी स्तर पर राहत कार्यों का जायजा लिया।मुआवजा व सर्वे: सरकार द्वारा बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है, जिसके बाद प्रभावित परिवारों को सीधे बैंक खातों में वित्तीय सहायता दी जाएगी।वलसाड में क्यों हुई इतनी भयानक और रिकॉर्ड तोड़ बारिश?मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वलसाड में हुई इस ऐतिहासिक बारिश के पीछे कई मौसमी और भौगोलिक कारण एक साथ सक्रिय थे:अरब सागर का मजबूत वेदर सिस्टम: अरब सागर के ऊपर बना एक बेहद कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) दक्षिण गुजरात के तटीय क्षेत्र के ऊपर आकर स्थिर (Stationary) हो गया।मानसून ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ का मिलना: मानसून ट्रफ रेखा और पश्चिमी विक्षोभ के एक साथ सक्रिय होने से वलसाड के आसमान पर अत्यधिक नमी वाले घने बादलों का जमावड़ा हो गया।भौगोलिक स्थिति (ओरोग्राफिक इफ़ेक्ट): वलसाड पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के करीब स्थित एक तटीय जिला है। जब अरब सागर से उठी मानसूनी हवाएं इन पहाड़ियों से टकराईं, तो बादलों को आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिला और वे एक ही जगह रुककर बरसते रहे।ग्लोबल वार्मिंग का असर: समुद्र के तापमान में वृद्धि के कारण बादलों की नमी सोखने और धारण करने की क्षमता कई गुना बढ़ गई, जिसके कारण कम समय में इतना बड़ा बादल फटने जैसी बारिश हुई।
Top News : 26 दिन के अनशन समाप्त होने के बाद ईमानदारी पर उठ रहे सवालों पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भड़क गए। जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए 18 मेट्रो स्टेशन बंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों और युवाओं ...
आज 25 जुलाई 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र है। आज से भगवान श्री हरि विष्णु 4 महीनों के लिए योगनिद्रा में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे हरिशयनी या देवशयनी एकादशी कहा जाता है। यह समय मन की शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने का माना जाता है।ग्रहों और नक्षत्रों की चाल के अनुसार, आज का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर, आर्थिक लाभ और सफलता लेकर आ रहा है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय भांबी के अनुसार आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों का आज का राशिफल, शुभ रंग, भाग्यशाली अंक और अचूक उपाय:1. मेष राशि (Aries)आज का दिन: किसी शुभचिंतक की प्रेरणा से लक्ष्य हासिल होगा। संतान पक्ष से खुशखबरी मिल सकती है। बीमा व कमीशन से जुड़े लोग टारगेट पूरा करेंगे। अत्यधिक काम से थकान महसूस हो सकती है।उपाय: शिवालय जाकर सुगंधित जल से भगवान शिव का अभिषेक करें।भाग्यशाली रंग: बादामी | भाग्यशाली अंक: 72. वृष राशि (Taurus)आज का दिन: संपत्ति से जुड़ा रुका हुआ काम हल होगा। कार्यक्षेत्र में किए गए बदलावों के निकट भविष्य में शुभ परिणाम मिलेंगे। पुराने मित्र से मुलाकात होगी। पेट का थोड़ा ध्यान रखें।उपाय: लक्ष्मी-नारायण भगवान के स्वरूप के दर्शन करें और मंत्र जाप करें।भाग्यशाली रंग: पीला | भाग्यशाली अंक: 53. मिथुन राशि (Gemini)आज का दिन: भाइयों के साथ चल रही गलतफहमियां दूर होंगी। व्यापारिक व्यवस्था में सुधार के प्रयास सफल होंगे। प्रेम संबंधों में एक-दूसरे का सम्मान करें। एसिडिटी से बचें।उपाय: प्रातः काल प्रकृति के सानिध्य में कुछ समय व्यतीत करें।भाग्यशाली रंग: हरा | भाग्यशाली अंक: 44. कर्क राशि (Cancer)आज का दिन: घर के रखरखाव पर चर्चा होगी। अपनी योग्यता के बल पर बाजार में नई उपलब्धियां मिलेंगी। दोस्तों के साथ गेट-टुगेदर का प्लान बनेगा। दांतों में दर्द की समस्या हो सकती है।उपाय: जरूरतमंद लोगों को फल या दूध का दान करें।भाग्यशाली रंग: बादामी | भाग्यशाली अंक: 15. सिंह राशि (Leo)आज का दिन: बच्चों की उपलब्धियों से मन प्रसन्न रहेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए पदोन्नति के योग हैं। आय अच्छी रहेगी, हालांकि खर्च भी बढ़ेंगे। गैस या पेट दर्द से सावधान रहें।उपाय: शिव-पार्वती के स्वरूप के दर्शन कर पूजा-अर्चना करें।भाग्यशाली रंग: लाल | भाग्यशाली अंक: 66. कन्या राशि ( कन्या - Virgo)आज का दिन: सपनों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का दिन है। व्यक्तिगत जीवन में किसी का हस्तक्षेप न होने दें। फाइनेंस और कंसल्टेंसी के काम में बड़ी सफलता मिलेगी।उपाय: मंदिर जाकर देव दर्शन करें और बुजुर्गों या ब्राह्मणों का आशीर्वाद लें।भाग्यशाली रंग: गुलाबी | भाग्यशाली अंक: 37. तुला राशि (Libra)आज का दिन: अनुभवी लोगों के सानिध्य में सीखने को मिलेगा। नया काम शुरू करने के लिए उचित समय है। दाम्पत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी। पैसों को लेकर किसी रिश्तेदार से विवाद से बचें।उपाय: भगवान गणेश का ध्यान करें और मोदक/लड्डू का भोग लगाएं।भाग्यशाली रंग: लाल | भाग्यशाली अंक: 58. वृश्चिक राशि (Scorpio)आज का दिन: चुनौतियों का डटकर सामना करेंगे। व्यापार में कर्मचारियों से जुड़ा मुद्दा सुलझ जाएगा। प्रेम संबंध विवाह में बदलने के योग हैं। शारीरिक थकान व बदन दर्द हो सकता है।उपाय: जल को व्यर्थ बहाने से बचाएं और संरक्षण करें।भाग्यशाली रंग: केसरिया | भाग्यशाली अंक: 39. धनु राशि (Sagittarius)आज का दिन: अपनी पसंद के कामों के लिए समय निकालें, मानसिक शांति मिलेगी। फाइनेंस से जुड़े फैसलों में खुद पर भरोसा रखें। प्रेम संबंधों में पुरानी गलतफहमियां दूर होंगी।उपाय: श्री सूक्त या पुरुष सूक्त का पाठ करें अथवा श्रवण करें।भाग्यशाली रंग: आसमानी | भाग्यशाली अंक: 210. मकर राशि (Capricorn)आज का दिन: रुके हुए व्यक्तिगत मामले हल होंगे। विरोधी सक्रिय हो सकते हैं, इसलिए अपनी योजनाएं गुप्त रखें। व्यावसायिक गतिविधियों में लापरवाही न बरतें। घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।उपाय: एकांत में प्रकृति के करीब कुछ समय बिताएं।भाग्यशाली रंग: हरा | भाग्यशाली अंक: 811. कुंभ राशि (Aquarius)आज का दिन: अस्त-व्यस्त दिनचर्या में सुधार आएगा। व्यापार के विस्तार को लेकर अहम चर्चा होगी। व्यर्थ के प्रेम संबंधों में समय व पैसा बर्बाद न करें। सेहत का ध्यान रखें।उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें।भाग्यशाली रंग: ऑरेंज | भाग्यशाली अंक: 712. मीन राशि (Pisces)आज का दिन: भविष्य की योजनाओं में निवेश से अच्छा मुनाफा होगा। दूसरों के गुस्से के सामने शांत रहें। घर में मेहमानों के आने से उत्सव जैसा माहौल रहेगा। जोड़ों के दर्द से बचें।उपाय: अपनी बहन या बेटियों का सत्कार करें और उन्हें उपहार दें।भाग्यशाली रंग: नीला | भाग्यशाली अंक: 9
अनशन समाप्त होने के बाद ईमानारी पर उठ रहे सवालों पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भड़क गए। उन्होंने सवाल किया कि छात्रों के लिए 26 दिन तक भूखा रहने के बाद, 11 किलो वजन कम हो गया, मसल्स चले गए और मेरे ऑर्गन्स और ब्रेन डैमेज हो गए। क्या उन्हें किसी से ...
सरकार के साथ CJP की बैठक आज, संसद मार्च पर हो सकता बड़ा ऐलान
आज यानि शनिवार को जंतर-मंतर पर सुरक्षा के इंतजाम और सख्त कर दिए गए हैं। आज केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के साथ तीसरे दौर की बैठक तय है
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से युवक घायल, दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई हो: अलका लांबा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान एक युवक पेलेट गन से घायल हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को युवक को मीडिया के सामने लाकर यह दावा किया
बांकीपुर में भाजपा को रोकने के लिए तेज प्रताप यादव ने किया प्रशांत किशोर का समर्थन
बिहार में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम में जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को अपनी पार्टी का समर्थन देने की घोषणा की है
सोनम वांगचुक का टूटा दिल, बोले- अनशन पर सवाल उठाने वालों पर धिक्कार
नीट पेपर लीक विरोध और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 26 दिनों तक अनशन पर बैठे रहे सोनम वांगचुक का दिल टूट गया है
सोनम वांगचुक के अनशन खत्म होने पर कांग्रेस का तंज, 'छात्रों की मांग अब भी बरकरार'
कांग्रेस नेता कुलदीप राठौर ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल समाप्त करने के घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा।
राहुल गांधी ने घायल छात्र को पेशकर लगाया आरोप, छात्रों पर पेलेट गन चलाकर सच छिपा रही सरकार
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन पर अपना हमला तेज करते हुए शुक्रवार को केंद्र पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। यह आरोप जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले विरोध कर रहे छात्रों पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर लगाया गया
कैबिनेट ने 'भव्य-रसायन योजना' को मंजूरी दी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन या भव्य-रसायन योजना को मंजूरी दी है
भारत में उड़ानों की सुरक्षा के जिम्मेदार DGCA में नेपोटिज्म के आरोप
इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, DGCA के कई अधिकारियों ने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने रिश्तेदारों को एविएशन सेक्टर में नौकरी दिलाई. रिपोर्ट के मुताबिक इसकी जानकारी सरकार को भी है
PM मोदी ने छात्रों के लिए जारी किया एक और वीडियो, बोले- Thank you friends
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए उन युवाओं का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनका वीडियो देखा और उस पर अपने सुझाव दिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों और युवाओं की सकारात्मक प्रतिक्रिया तथा ...
कोर्ट की कार्यवाही को अनधिकृत रूप से सोशल मीडिया मंचों पर डालने, साझा करने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अंतरिम आदेश जारी कर न्यायालय की कार्यवाही के ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना संबंधित न्यायालय की पूर्व अनुमति के सोशल मीडिया तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डालने, एडिट करने, शेयर करने या उससे कमाई करने पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची […] The post कोर्ट की कार्यवाही को अनधिकृत रूप से सोशल मीडिया मंचों पर डालने, साझा करने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक appeared first on Sabguru News .
रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा स्वीकार, पीएम मोदी और राष्ट्रपति का जताया आभार
रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है
रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया
नई दिल्ली। केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि भारत के […] The post रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया appeared first on Sabguru News .
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और परीक्षा सुधारों को लेकर लगातार जारी छात्रों का आंदोलन अब देश की शीर्ष अदालत पहुंच गया है। गत 20 जुलाई को संसद मार्च ('चलो संसद') के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार, 27 जुलाई 2026 को सुनवाई करने की सहमति दे दी है।सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों ने रखा पक्षशुक्रवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले को मेंशन किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत का ध्यान छात्रों पर हुई पुलिस बर्बरता की ओर आकर्षित किया।वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ से तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा:पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा सख्त और हिंसक बल प्रयोग किया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी घटनाएं रोजाना हो रही हैं। ऐसे में पुलिस और आम छात्रों के बीच सिर्फ अदालत ही सुरक्षा का सहारा है।अदालत को सूचित किया गया कि रजिस्ट्री की ओर से याचिकाओं को नंबर आवंटित कर दिए गए हैं, जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले को 27 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।क्या हुआ था 20 जुलाई की झड़प में?गौरतलब है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य छात्र संगठनों के नेतृत्व में हजारों छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिस ने भीड़ को तीतर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।इस झड़प में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। छात्रों की प्रमुख मांग है कि:नीट परीक्षा और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में पारदर्शिता और कड़े सुधार लाए जाएं।पेपर लीक विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।दिल्ली हाई कोर्ट में भी जारी है सुनवाईइससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में भी 20 जुलाई की घटना को लेकर याचिकाएं दायर की गई थीं। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और वीडियोग्राफी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं।अब देखना यह होगा कि 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले और पुलिस की कार्रवाई पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।
देश की सबसे बड़ी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने स्वतंत्रता दिवस से पहले ही अपने होम ब्रॉडबैंड ग्राहकों को एक बड़ा सरप्राइज दिया है। अगर आप भी हर महीने ब्रॉडबैंड, टीवी या OTT सब्सक्रिप्शन का रिचार्ज कराने के झंझट से परेशान रहते हैं, तो जियो का नया प्लान आपके लिए बेहद काम का साबित हो सकता है।कंपनी ने अपने JioFiber और Jio AirFiber यूजर्स के लिए चुपके से ₹10,000 की कीमत वाला Freedom Pack लॉन्च किया है। इस प्लान की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि इसमें यूजर्स को पूरे 15 महीने की लंबी वैलिडिटी के साथ 100 Mbps की हाई-स्पीड इंटरनेट सर्विस और ढेरों एंटरटेनमेंट ऐप्स का सपोर्ट मिलता है।Jio ₹10,000 Freedom Pack के प्रमुख फायदेजियो के इस ऑल-इन-वन फ्रीडम पैक में यूजर्स को निम्नलिखित सुविधाएं दी जा रही हैं:100 Mbps की हाई-स्पीड इंटरनेट: पूरे 15 महीने तक 100 Mbps की डाउनलोड और अपलोड स्पीड बिना किसी रुकावट के मिलेगी।अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग: लैंडलाइन या फ्री वॉइस कॉलिंग का लाभ भी इसमें शामिल है।फ्री सेट-टॉप बॉक्स (STB): प्लान के साथ जियो यूजर्स को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के फ्री 4K स्मार्ट सेट-टॉप बॉक्स दिया जाएगा, जिससे अलग से DTH कनेक्शन की जरूरत खत्म हो जाएगी।1000+ लाइव टीवी चैनल्स: JioTV ऐप के माध्यम से 1,000 से अधिक लाइव टीवी चैनल्स देखने को मिलेंगे।12 प्रीमियम OTT एप्लिकेशंस: प्लान में मनोरंजन के लिए 12 प्रमुख OTT ऐप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन मिलेगा, जिनमें JioHotstar, SonyLIV, ZEE5, SunNXT, HoiChoi, Discovery+, TimesPlay, TarangPlus, ErosNow, Lionsgate Play, ShemarooMe और ETV Win शामिल हैं।JioPC का सपोर्ट: टीवी पर क्लाउड कंप्यूटिंग के जरिए JioPC फीचर का उपयोग किया जा सकता है।बचत के हिसाब से क्यों खास है यह प्लान?जियो वर्तमान में 100 Mbps स्पीड वाले 3 महीने (तिमाही) के प्लान ₹3,333 और ₹4,444 की कीमत पर ऑफर करता है। अगर हिसाब लगाएं, तो 12 महीने के रिचार्ज की कुल लागत ₹13,000 से भी अधिक हो जाती है। वहीं, ₹10,000 के फ्रीडम पैक में यूजर्स को पूरे 15 महीने (1 साल + 3 महीने) की वैलिडिटी मिल रही है, जो आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद और बचत कराने वाला सौदा है।
स्वप्न शास्त्र (Dream Astrology) के अनुसार, सोते समय देखे गए हर सपने का एक खास अर्थ और संकेत होता है। ऐसा माना जाता है कि हमारे सपने भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पहले से ही पूर्वाभास करा देते हैं। खासकर जब सपने में देवी-देवता या उनसे जुड़ी चीजें दिखाई दें, तो इन्हें बेहद शुभ माना जाता है।यदि शनिवार की रात (Saturday Night) आपको शनिदेव से जुड़े कुछ विशेष सपने आते हैं, तो यह सीधे तौर पर शनिदेव के प्रसन्न होने और उनकी कृपा प्राप्त होने का अद्भुत संकेत है। आइए जानते हैं कि शनिवार की रात दिखने वाले कौन-से 4 सपने आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं:1. सपने में काला कुत्ता देखनाशनिवार की रात को अगर सपने में काला कुत्ता दिखाई दे, तो स्वप्न शास्त्र में इसे बेहद फलदायी माना गया है। काला कुत्ता शनिदेव को अत्यंत प्रिय है। यह सपना संकेत देता है कि शनिदेव आपसे प्रसन्न हैं और जल्द ही आपकी कड़ी मेहनत और कर्मों का सकारात्मक फल आपको मिलने वाला है।2. सपने में काले रंग का शिवलिंग दिखनाअगर शनिवार की रात आपको काले रंग का शिवलिंग नजर आता है, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके जीवन पर भगवान शिव और शनिदेव दोनों की संयुक्त कृपा होने वाली है। यह सपना करियर में रुकी हुई तरक्की के दरवाजे खोलता है और आर्थिक व पारिवारिक स्थिति में मजबूती लाता है।3. सपने में शनि मंदिर के दर्शन होनाशनिवार की रात सपने में शनिदेव का मंदिर दिखना भी एक सकारात्मक संकेत है। इसका सीधा अर्थ है कि आपके कष्टों और परेशानियों का अंत निकट है। यह सपना दुर्भाग्य के दूर होने और जीवन में भाग्य का साथ मिलने का प्रतीक माना जाता है।4. स्वयं को शनिदेव की पूजा करते देखनायदि आप शनिवार की रात देखते हैं कि आप स्वयं शनिदेव की विधिवत पूजा-अर्चना कर रहे हैं, तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह दर्शाता है कि शनिदेव आपकी भक्ति से प्रसन्न हैं। ऐसा सपना आने पर सुबह उठकर शनिदेव के दर्शन करें, ओम शं शनैश्चराय नमः का जाप करें और काले तिल या उड़द की दाल का दान करें। इससे व्यापार और नौकरी में बड़ी सफलता मिलती है।
Vastu Tips: बिना वजह घर में हो रहे हैं झगड़े? कपूर और नमक का यह आसान उपाय दूर करेगा नकारात्मक ऊर्जा
अक्सर हम देखते हैं कि सब कुछ ठीक चलते-चलते अचानक घर का माहौल बदलने लगता है। बिना किसी ठोस वजह के परिवार के सदस्यों के बीच अनबन और झगड़े होने लगते हैं, बनते काम बिगड़ने लगते हैं या लोग बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं।वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार, ऐसा घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) के प्रवेश करने या किसी की बुरी नजर लगने के कारण हो सकता है। जब घर में नकारात्मकता बढ़ती है, तो परिवार के सदस्यों में सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा (नींद न आना) और थकान जैसी समस्याएं दिखने लगती हैं। इसका सीधा असर मानसिक शांति, सेहत और व्यापार पर पड़ता है।हालांकि, वास्तु शास्त्र में कुछ बेहद आसान और अचूक घरेलू उपाय बताए गए हैं, जिनसे आप घर की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं:1. खास धूप से दूर करें घर का क्लेश और तनावअगर आपके घर में बार-बार तनाव या भारीपन महसूस होता है, तो रोजाना शाम के समय यह खास देसी उपाय आजमाएं:सामग्री: एक कंडा (उबला/उपला), कपूर, 2 लौंग, पीली सरसों और तेजपत्ता।विधि: कंडे को जलाकर उस पर कपूर, लौंग, पीली सरसों और तेजपत्ता रखें। जब इसमें से धुआं निकलने लगे, तो इसे घर के हर कमरे और कोने में घुमाएं।लाभ: इस धूप के धुएं से घर का वातावरण शुद्ध होता है, छिपी हुई नकारात्मक तरंगें बाहर निकलती हैं और कुछ ही दिनों में परिवार के बीच शांति व मिठास लौटने लगती है।2. कपूर और नमक का पानी: नेगेटिविटी सोखने का रामबाण तरीकारोजाना जलाएं कपूर: शाम के समय घर में कपूर जलाना बेहद शुभ माना जाता है। कपूर की सुंगध से घर की उदासी, डिप्रेशन और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।नमक और फिटकरी के पानी का पोछा: घर में जब भी पोछा लगाएं, तो पानी में थोड़ा सा खड़ा (समुद्री) नमक या फिटकरी मिला लें। नमक और फिटकरी हवा में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। इससे घर का माहौल हल्का और पॉजिटिव हो जाता है।इन छोटे और आसान वास्तु उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप अपने घर में खुशहाली, सकारात्मकता और सुख-समृद्धि को हमेशा बरकरार रख सकते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 बेहद करीब आ गई है। आयकर विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3 करोड़ से अधिक करदाता अपना रिटर्न फाइल कर चुके हैं।यदि आप नौकरीपेशा हैं या आपकी आय कर योग्य सीमा (Taxable Income) में नहीं भी आती है, तब भी ITR दाखिल करना आपके वित्तीय रिकॉर्ड के लिए बेहद फायदेमंद होता है। कई करदाता इस उम्मीद में बैठे हैं कि आयकर विभाग अंतिम तिथि आगे बढ़ाएगा, लेकिन बिना किसी आधिकारिक घोषणा के अंतिम समय का इंतजार करना भारी पड़ सकता है।31 जुलाई की डेडलाइन मिस होने पर क्या होगा?अगर आप 31 जुलाई 2026 तक अपना ITR फाइल करने में असफल रहते हैं, तो आयकर नियमों के तहत आपको बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) दाखिल करने का अवसर मिलता है। हालांकि, बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने पर आपको भारी वित्तीय नुकसान, लेट फीस और ब्याज का भुगतान करना पड़ता है।डेडलाइन छूटने पर होने वाले प्रमुख नुकसान31 जुलाई के बाद रिटर्न फाइल करने पर करदाताओं को निम्नलिखित परेशानियों और पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है:धारा 234F के तहत लेट फीस (Late Fee):यदि आपकी कुल वार्षिक आय ₹5 लाख से अधिक है, तो 31 जुलाई के बाद ITR फाइल करने पर ₹5,000 तक की लेट फीस देनी होगी।यदि आपकी कुल आय ₹5 लाख या उससे कम है, तो लेट फीस की राशि ₹1,000 होगी।बकाया टैक्स पर ब्याज (Interest under Section 234A):अगर आपका कोई टैक्स बकाया (Tax Due) निकलता है, तो 31 जुलाई की तारीख बीतने के बाद धारा 234A के तहत हर महीने या महीने के हिस्से पर 1% की दर से अतिरिक्त ब्याज वसूला जाएगा।TDS रिफंड में देरी:यदि आपका टीडीएस (TDS) कटा हुआ है और आप रिफंड के हकदार हैं, तो डेडलाइन मिस करने पर रिफंड मिलने में काफी देरी होगी और आपको मिलने वाले ब्याज का भी नुकसान हो सकता है।आयकर विभाग का नोटिस:समय पर ITR फाइल न करने की स्थिति में आयकर विभाग आपको धारा 142(1) के तहत नोटिस या स्क्रूटनी (Scrutiny) का नोटिस जारी कर सकता है।क्या है समझदारी भरा कदम?अंतिम समय में इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के कारण तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। किसी भी तरह के कानूनी झंझट, आर्थिक पेनल्टी और स्क्रूटनी से बचने के लिए समय रहते 31 जुलाई 2026 से पहले ही अपना ITR सफलता पूर्वक सबमिट और ई-वेरिफाई (e-Verify) कर लें।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन अब बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस के मार्च के बाद, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा की गई एक विस्तृत पोस्ट में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की मंशा और पुलिस कार्रवाई पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगाने वाले मामले में शिक्षा मंत्री का बचाव करने के लिए इतनी उतावली क्यों दिख रही है।छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई बर्बरममता बनर्जी ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई की सख्त निंदा की। उन्होंने लिखा:अस्वीकार्य कार्रवाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस का बल प्रयोग, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ना और पैलेट गन का इस्तेमाल बेहद परेशान करने वाला और पूरी तरह से अमानवीय है।भविष्य की लड़ाई: यह लड़ाई केवल एक परीक्षा घोटाला (NEET Scam) में न्याय पाने की नहीं है, बल्कि देश के हर युवा के भविष्य को सुरक्षित करने का आंदोलन है।लोकतांत्रिक आंदोलन से क्यों डरी हुई है सरकार?केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित करना तथा प्रदर्शनकारी छात्रों पर कड़े कानून लगाना यह दर्शाता है कि सरकार इस लोकतांत्रिक आंदोलन से घबराई हुई है।उन्होंने पूछा कि अगर लाखों अभ्यर्थियों का जीवन और करियर प्रभावित करने वाले आरोपी खुले घूम रहे हैं और जवाबदेही से बच रहे हैं, तो सरकार आखिर किस-किस को बचाने का प्रयास कर रही है।छात्रों के साथ खड़ा है पूरा विपक्षपूर्व सीएम ने देश के युवाओं के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि पूरा विपक्ष इस कठिन परिस्थिति में छात्रों और अभ्यर्थियों के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने लाठियों, पुलिस कार्रवाई और सरकारी दबाव के आगे न झुकने के लिए युवाओं के अटूट साहस को सलाम किया।आपको बता दें कि इससे पहले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी छात्रों की मांगों के समर्थन में अनशन पर थे, जिन्होंने हाल ही में सरकार से मिले आश्वासन के बाद अपनी 26 दिन पुरानी भूख हड़ताल खत्म की है। हालांकि, जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा सुधारों को लेकर विभिन्न संगठनों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है।
देशभर के कई राज्यों में मानसून पूरी तरह से मेहरबान है, लेकिन गुजरात में इस समय बारिश ने हाहाकार मचा रखा है। खासकर दक्षिण गुजरात (South Gujarat) में तो महज एक ही दिन में इतनी भीषण मूसलाधार बारिश हुई कि कई इलाकों में जलप्रलय और बाढ़ जैसे भयावह हालात पैदा हो गए।घर, दुकानें, मुख्य सड़कें, गाड़ियां और रेलवे ट्रैक सब पानी में डूब गए। आखिर गुजरात के एक ही हिस्से में अचानक इतनी भयानक बारिश क्यों हुई और मौसम विभाग (IMD) का इस पर क्या कहना है? आइए समझते हैं।क्यों हुई गुजरात में इतनी भयावह बारिश?भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस अप्रत्याशित और मूसलाधार बारिश के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े मौसमी कारण (Weather Systems) जिम्मेदार हैं:मजबूत दक्षिण-पश्चिम मानसून: गुजरात के ऊपर दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय अपने चरम पर है।अरब सागर से उठती नमी: अरब सागर से लगातार नमी से भरी मानसूनी हवाएं बिना किसी रुकावट के गुजरात के तटीय अंचलों की ओर आ रही हैं।एक ही जगह पर रुका वेदर सिस्टम: पश्चिमी भारत के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure System) एक ही जगह पर स्थिर हो गया। इसके चलते दक्षिण गुजरात के सीमित दायरे में लगातार बादलों का जमावड़ा बना रहा और कई घंटों तक मूसलाधार बारिश होती रही।इन इलाकों में हुई सबसे ज्यादा रिकॉर्ड तोड़ बारिशस्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के आंकड़ों के मुताबिक, बारिश ने बीते 24 घंटों में सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:उंबरगांव (Umargam): सबसे ज्यादा 906 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से कई गुना अधिक और बेहद दुर्लभ श्रेणी में आती है।कपाराडा: 731 मिलीमीटरनानापोंधा: 643 मिलीमीटरधरमपुर: 499 मिलीमीटरपारडी: 448 मिलीमीटरवापी व वलसाड: वापी में 413 mm और वलसाड में 403 mm बारिश दर्ज हुई।तापी व डांग: तापी के डोलवन में 378 mm और डांग के वघई में 369 mm बारिश हुई।सामान्य से 4 गुना ज्यादा बरसा पानी, आगे भी राहत नहींमौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि किसी क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर 204.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश होती है, तो उसे 'अत्यधिक भारी बारिश' (Extremely Heavy Rainfall) की श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन गुजरात के उंबरगांव, कपराडा और वलसाड जैसे इलाकों में इस मानक से 3 से 4 गुना ज्यादा पानी एक ही दिन में बरस गया।भारी बारिश के कारण नदियों-नालों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, पटरियों पर पानी भरने से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक गुजरात में मानसूनी सिस्टम ऐसा ही बना रहेगा और भारी बारिश से फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं हैं।
देशभर में नीट (NEET) परीक्षा धांधली को लेकर मचे बवाल और छात्रों के लगातार जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच पूर्व मिस वर्ल्ड और बॉलीवुड अभिनेत्री मानुषी छिल्लर ने अभ्यर्थियों के हक में अपनी आवाज उठाई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा करते हुए मानुषी ने कहा कि जो लोग इस स्थिति में आसानी से कह देते हैं कि 'बस परीक्षा दोबारा लिख लो', वे असल में एक छात्र के संघर्ष, रातों की नींद और सालों की कड़ी मेहनत को नहीं समझ पा रहे हैं।'2015 में मुझे भी दोबारा देनी पड़ी थी परीक्षा'मानुषी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए खुलासा किया कि साल 2015 में जब वे खुद मेडिकल की तैयारी कर रही थीं, तब पेपर लीक होने के कारण उन्हें भी दोबारा परीक्षा देनी पड़ी थी।उन्होंने लिखा कि एक एस्पिरेंट के लिए यह सिर्फ एक एग्जाम नहीं होता, बल्कि यह सालों की तपस्या, अनगिनत त्यागों और अपने सपनों को पूरा करने की जिद होती है। बार-बार परीक्षा रद्द होने या लीक होने से छात्रों का मनोबल पूरी तरह टूट जाता है।सिस्टम की खामियों और मिडिल क्लास के संघर्ष पर उठाए सवालमानुषी ने उन वित्तीय और मानसिक चुनौतियों का खास जिक्र किया, जिनसे एक परीक्षार्थी का पूरा परिवार गुजरता है। उन्होंने कहा:माता-पिता का त्याग: डॉक्टर बनने का सपना सिर्फ बच्चे का नहीं होता। कोचिंग सेंटरों में उन माता-पिता को देखना दर्दनाक होता है जो अपनी हैसियत से ज्यादा कर्ज लेकर बच्चों की फीस भरते हैं।समानता का जरिया: इस असमानता से भरी दुनिया में शिक्षा ही मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आगे बढ़ने और बराबरी हासिल करने का एकमात्र जरिया है।सिस्टम में सुधार जरूरी: परीक्षा प्रणाली की इन गहरी और पुरानी समस्याओं को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।'संवाद और सुधार ही समाधान'अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी यह अपील किसी संस्थान के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के विश्वास पर टिकी है। भारत के लोकतंत्र और संविधान में आस्था जताते हुए उन्होंने कहा कि कड़े से कड़े संकट का समाधान आपसी बातचीत, करुणा और सम्मान से ही निकल सकता है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से युवाओं के भविष्य की खातिर संवेदनशील रुख अपनाने की अपील की।12वीं में 96% मार्क्स और ऑल इंडिया टॉपर रही हैं मानुषीआपको बता दें कि अभिनय जगत में कदम रखने से पहले मानुषी छिल्लर एक बेहद होनहार मेडिकल स्टूडेंट थीं:12वीं में शानदार रिकॉर्ड: उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 96% अंक हासिल किए थे और CBSE के इंग्लिश विषय में ऑल इंडिया टॉपर रही थीं।मेडिकल कॉलेज में एडमिशन: NEET की परीक्षा सफलतापूर्वक क्रैक करने के बाद उन्होंने सोनीपत (हरियाणा) के प्रतिष्ठित 'भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज' में MBBS में दाखिला लिया था।मिस वर्ल्ड का ताज: अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने साल 2017 में मिस वर्ल्ड (Miss World 2017) का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया, जिसके बाद उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा।
जब भी हम किसी मंदिर में भगवान के दर्शन करने जाते हैं, तो एक खास बात अक्सर देखने को मिलती है। गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने के बाद श्रद्धालु तुरंत पीछे मुड़कर नहीं चलते, बल्कि उल्टे कदमों से पीछे हटते हुए बाहर आते हैं। यानी जब तक वे मंदिर परिसर या गर्भगृह से बाहर न निकल जाएं, तब तक वे भगवान की तरफ पीठ नहीं करते हैं।यह केवल सदियों पुरानी कोई अंध परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे बेहद गहरे धार्मिक, आध्यात्मिक, मानसिक और व्यावहारिक कारण छिपे हैं। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि दर्शन के बाद उल्टे पैर पीछे हटने के पीछे क्या वजहें हैं:1. ईश्वर के प्रति सर्वोच्च सम्मान और आदर की भावनाहमारी भारतीय संस्कृति में बड़ों, माता-पिता और गुरुओं का आदर करना सबसे पहला धर्म माना गया है। जैसे हम किसी पूजनीय या बड़े व्यक्ति से बात करने के बाद तुरंत उनके सामने पीठ मोड़कर नहीं भागते, ठीक वैसे ही भगवान तो पूरी सृष्टि के स्वामी हैं। उनके सामने से अचानक पीठ फेरकर चले जाना अनादर का प्रतीक माना जाता है। जब तक हम मंदिर परिसर से बाहर नहीं आते, हमारा ध्यान और चेहरा ईश्वर की ओर ही रहता है, जो हमारी सच्ची श्रद्धा को दर्शाता है।2. सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) को अपने अंदर समेटनाविज्ञान और अध्यात्म दोनों मानते हैं कि मंदिर का गर्भगृह और मूर्ति स्थल सकारात्मक ऊर्जा का बहुत बड़ा केंद्र होता है। जब हम हाथ जोड़कर ईश्वर के समक्ष खड़े होते हैं, तो वह पवित्र ऊर्जा हमारे शरीर और आभामंडल (Aura) में प्रवेश करती है। यदि हम दर्शन के तुरंत बाद सीधे मुड़ जाते हैं, तो उस ऊर्जा का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो जाता है। उल्टे कदमों से बाहर आने का सांकेतिक अर्थ यही है कि हम उस दिव्य शांति, शक्ति और आशीर्वाद को अपने भीतर सहेजकर घर ले जा रहे हैं।3. अहंकार और घमंड का नाशसीधे पीठ मोड़कर चले जाना कभी-कभी इंसान के अनजाने अहंकार को दर्शाता है—मानो काम खत्म हुआ और हम चलते बने। इसके विपरीत, धीरे-धीरे पीछे की तरफ कदम बढ़ाना हमारी नम्रता और समर्पण भाव को प्रकट करता है। यह परंपरा इंसान को यह याद दिलाती है कि ईश्वर के सामने हमारा अस्तित्व बहुत छोटा है और जो कुछ भी हमारे पास है, वह सब उन्हीं की कृपा है।4. ध्यान और मन की एकाग्रता बनाए रखनाजैसे ही इंसान मंदिर से बाहर जाने के लिए पीठ मोड़ता है, उसका ध्यान तुरंत सांसारिक बातों—जैसे बाहर खड़े जूते-चप्पल, गाड़ियां या रोजमर्रा की चिंताओं में उलझ जाता है। लेकिन जब हम भगवान के श्रीविग्रह को देखते हुए पीछे हटते हैं, तो हमारा ध्यान अंतिम समय तक मूर्ति पर ही टिका रहता है। इससे मंदिर में मिली असीम मानसिक शांति लंबे समय तक मन में बनी रहती है।
अगर आप भी शहर की भागदौड़, भारी ट्रैफिक और रोजमर्रा के तनाव से ब्रेक लेकर कुछ दिन सुकून के बिताना चाहते हैं, तो उत्तर-पूर्व (North-East) की खूबसूरत वादियां आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। ऊंचे-बर्फ से ढके पहाड़, घने जंगल, शांत वातावरण और कुदरती सुंदरता से भरपूर यह क्षेत्र छुट्टियां बिताने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है।पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने एक खास 'अरुणोदय अरुणाचल' (Arunoday Arunachal) फ्लाइट टूर पैकेज लॉन्च किया है। इस पैकेज के जरिए आप बिना किसी झंझट के उत्तर-पूर्व के सबसे खूबसूरत स्थलों की यात्रा कर सकते हैं।किन-किन खूबसूरत जगहों को करेंगे एक्सप्लोर?IRCTC के इस स्पेशल फ्लाइट टूर पैकेज के तहत पर्यटकों को असम और अरुणाचल प्रदेश के कई प्रसिद्ध और दर्शनीय स्थलों की सैर कराई जाएगी:गुवाहाटी (Guwahati): असम का यह प्रमुख शहर उत्तर-पूर्व का प्रवेश द्वार माना जाता है, जहां से इस यादगार यात्रा की शुरुआत होगी।तेजपुर (Tezpur): पवित्र ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिक शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, चाय के बागानों और शांत माहौल के लिए जाना जाता है।दिरांग (Dirang): अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत घाटियों में बसा यह छोटा सा कस्बा अपनी हरियाली, ठंडे मौसम और सुरम्य नजारों के लिए पर्यटकों का दिल जीत लेता है।तवांग (Tawang): समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित तवांग अपने बर्फ से ढके पहाड़ों, विशाल व प्राचीन बौद्ध मठों (Tawang Monastery) और खूबसूरत झीलों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।क्यों खास है यह 'अरुणोदय अरुणाचल' टूर पैकेज?अनछुई प्राकृतिक सुंदरता: शहर के प्रदूषण से दूर साफ हवा, कल-कल बहते झरने और हरियाली आपको पूरी तरह से तरोताजा कर देगी।हिमालय के विहंगम दृश्य: बादलों से ढकी चोटियां, गहरी घाटियां और पहाड़ियों के नजारे आपके सफर को जीवनभर के लिए यादगार बना देंगे।आध्यात्मिक शांति: तवांग के प्रसिद्ध बौद्ध मठों में जाकर आपको अनोखी मानसिक शांति और संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलेगा।एडवेंचर और रोड ट्रिप: घुमावदार पहाड़ी रास्ते और ऊंचे दर्रे एडवेंचर और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं।कितना आएगा खर्च और क्या मिलेंगी सुविधाएं?IRCTC के इस 'अरुणोदय अरुणाचल' फ्लाइट टूर पैकेज की शुरुआती कीमत ₹53,500 प्रति व्यक्ति रखी गई है।इस पैकेज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एयर टिकट (आने-जाने की फ्लाइट), होटल में ठहरने की व्यवस्था, स्थानीय ट्रांसफर के लिए कैब/बस, और भोजन (BreakFast & Dinner) जैसी प्रमुख सुविधाएं शामिल हैं। यानी आपको अलग-अलग बुकिंग करने की कोई टेंशन नहीं लेनी होगी। अगर आप नॉर्थ-ईस्ट के शांत माहौल में एक बजट-फ्रेंडली और आरामदायक ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो यह IRCTC पैकेज आपके लिए एकदम परफेक्ट विकल्प साबित हो सकता है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के लाखों सेवारत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के गठन को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों के पे-स्ट्रक्चर, महंगाई भत्ते (DA), पेंशन लाभ और सेवा शर्तों की व्यापक समीक्षा की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।पूर्व केंद्रीय आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में इस 4 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। आयोग को 6 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें और अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिसे आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार आगे भी बढ़ा सकती है।वेतन आयोग का मुख्य कार्य और उद्देश्यवेतन आयोग सरकार द्वारा गठित एक समीक्षा समिति होती है, जो महंगाई, आर्थिक स्थिति और राज्य की वित्तीय क्षमता के आधार पर सरकारी कर्मचारियों के पे-स्केल, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों में संशोधन की आवश्यकता की जांच करती है। केंद्र सरकार जहां अपने कर्मियों के लिए केंद्रीय वेतन आयोग का गठन करती है, वहीं राज्य सरकारें अपनी वित्तीय क्षमता और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार अपने आयोग गठित करती हैं।किन-किन विषयों की जांच करेगा 7वां वेतन आयोग?पश्चिम बंगाल के 7वें वेतन आयोग को कर्मचारियों के सेवा ढांचे की विस्तृत जांच का अधिकार दिया गया है। आयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी सिफारिशें तैयार करेगा:मूल वेतन (Basic Pay) और महंगाई भत्ता (DA): बेसिक पे, विशेष भत्तों और डीए के पुनरीक्षण पर जोर।अन्य भत्ते व लाभ: यात्रा भत्ता, प्रमोशन पॉलिसी, डेथ-कम-रिटायरमेंट बेनिफिट्स और मेडिकल लाभ।प्रतिभा और दक्षता: सरकारी सेवाओं में कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस बनाने के लिए आकर्षक पैकेज का सुझाव देना।पेंशन पुनरीक्षण: सेवानिवृत्त कर्मियों और पेंशनभोगियों की पेंशन संशोधन प्रक्रिया को सरल बनाना।महंगाई भत्ता (DA) की समीक्षा क्यों है बेहद खास?पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों के लिए डीए की समीक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। वर्तमान में राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के डीए में अंतर है। राज्य सरकार की मंशा एक ही बार में भारी बढ़ोतरी करने के बजाय केंद्र और राज्य के डीए अंतर को चरणबद्ध (धीरे-धीरे) तरीके से खत्म करने की है। आयोग इसके लिए एक उपयुक्त और स्थायी फॉर्मूले की सिफारिश करेगा।क्या कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन तुरंत बढ़ जाएगी?नहीं, इस चरण में वेतन तुरंत नहीं बढ़ेगा।वेतन आयोग का गठन होने का अर्थ तुरंत सैलरी या पेंशन में वृद्धि होना नहीं है। प्रक्रिया के तहत:आयोग पहले मौजूदा वेतन ढांचे का गहन अध्ययन करेगा।विभिन्न कर्मचारी संगठनों और हितधारकों से बातचीत कर परामर्श मांगेगा।6 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगा।सिफारिशें मिलने के बाद राज्य सरकार वित्तीय आंकलन कर उन्हें लागू करने का अंतिम फैसला लेगी।8वें केंद्रीय वेतन आयोग का क्या पड़ेगा असर?राज्य सरकार के संकल्प के मुताबिक, आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय केंद्र सरकार के 8वें वेतन आयोग (8th CPC) के फैसलों को ध्यान में रख सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य सरकार केंद्रीय पे-स्ट्रक्चर को पूरी तरह अपनाएगी। राज्य आयोग स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा और सिफारिशें राज्य की प्रशासनिक जरूरतों व बजट पर आधारित होंगी।
आजकल नेल आर्ट, नेल एक्सटेंशन और जेल नेल पॉलिश का ट्रेंड काफी पॉपुलर हो चुका है। अलग-अलग रंगों की नेल पॉलिश आपके हाथों को स्टाइलिश और अट्रैक्टिव लुक देती है। हालांकि, हर नेल कलर हर स्किन टोन पर एक जैसा नहीं दिखता। खासकर डार्क या डस्की (Dusky) स्किन टोन वाली लड़कियों के लिए सही शेड चुनना पूरे लुक में बड़ा फर्क ला सकता है।ब्यूटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय ऐसे नेल शेड्स चुनने चाहिए जो आपकी नेचुरल रंगत को उभारें। आइए जानते हैं ऐसे ही नेल पॉलिश शेड्स के बारे में, जो डार्क और डस्की स्किन टोन पर सबसे ज्यादा खूबसूरत नजर आते हैं:1. एवरीडे एलिगेंस के लिए न्यूड शेड्स (Nude Shades)अगर आप ऐसी नेल पॉलिश चाहती हैं जिसे रोजाना ऑफिस, कॉलेज या रूटीन में लगाया जा सके, तो वार्म न्यूड शेड्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हैं:कैरामेल न्यूड (Caramel Nude) और मौका (Mocha)वार्म बेज (Warm Beige) और टेराकोटा (Terracotta)ये रंग डार्क स्किन पर बेहद सॉफ्ट, एलिगेंट और नेचुरल लुक देते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि ये शेड्स लगभग हर तरह के वेस्टर्न और एथनिक आउटफिट्स के साथ आसानी से मैच हो जाते हैं।2. फेस्टिव सीजन के लिए शिमरी और मेटैलिक लुकत्योहार, शादी या किसी खास सेलिब्रेशन में आपके हाथों की चमक बढ़ाने के लिए मेटैलिक शेड्स परफेक्ट रहते हैं:गोल्ड शिमर (Gold Shimmer)ब्रॉन्ज (Bronze) और कॉपर (Copper)ये रंग रोशनी में अलग ही चमक बिखेरते हैं और डस्की हाथों को ज्यादा रॉयल, रीगल और अट्रैक्टिव लुक देते हैं।3. बोल्ड और ब्राइट कलर्स से बढ़ाएं स्टाइलअक्सर लोग मानते हैं कि डार्क स्किन टोन पर चमकीले या ब्राइट कलर्स अच्छे नहीं लगते, लेकिन एक्सपर्ट्स की राय इससे अलग है। सही ब्राइट शेड्स आपके हाथों को इंस्टेंट फ्रेश लुक देते हैं:ब्रिक रेड (Brick Red) और चेरी रेड (Cherry Red)फ्यूशिया पिंक (Fuchsia Pink)मस्टर्ड येलो (Mustard Yellow)एमराल्ड ग्रीन (Emerald Green)ये कलर्स आपकी डार्क स्किन टोन के साथ एक बोल्ड और अट्रैक्टिव कॉन्ट्रास्ट बनाते हैं।4. रिच और क्लासी लुक के लिए डार्क टोन (Dark Tones)अगर आपको इवनिंग पार्टी या किसी स्पेशल डिनर डेट के लिए रिच और क्लासी लुक पसंद है, तो गहरे शेड्स ट्राई करें:बरगंडी वाइन (Burgundy Wine)डीप प्लम (Deep Plum)चॉकलेट ब्राउन (Chocolate Brown)मिडनाइट ब्लू (Midnight Blue)ये शेड्स डस्की कॉम्पलेक्शन पर बेहद निखर कर आते हैं और हाथों को एक मॉडर्न व एलिगेंट टच देते हैं।ब्यूटी टिप: हमेशा स्किन टोन को देखकर करें चुनावनेल पॉलिश या जेल नेल आर्ट चुनते समय केवल ट्रेंड पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्किन के अंडरटोन का ध्यान रखें। सही रंग न सिर्फ आपके हाथों को साफ और ग्लोइंग दिखाता है, बल्कि आपके ओवरऑल पर्सनालिटी को भी निखारता है।
देशभर में मानसूनी हवाओं के असर से मौसम का मिजाज बेहद आक्रामक हो गया है। यूपी से लेकर गुजरात और असम तक नदियां उफान पर हैं और कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा मौसम बुलेटिन जारी कर गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत देश के 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश, आंधी-तूफान और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है।मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और आसपास के इलाकों में बने कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure Area) की वजह से गुजरात और मध्य महाराष्ट्र में असाधारण रूप से भारी बारिश का खतरा बना हुआ है।बीते 24 घंटों में रिकॉर्ड तोड़ बारिशIMD के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में गुजरात रीजन के कुछ स्थानों पर 230 सेमी तक की रिकॉर्ड तोड़ असाधारण बारिश दर्ज की गई।अत्यंत भारी बारिश (21 सेमी): कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, सौराष्ट्र और कच्छ।बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी): गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, तटीय व दक्षिण आंतरिक कर्नाटक।भारी बारिश (7-11 सेमी): जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पूर्वी यूपी, राजस्थान, एमपी, असम और केरल।क्षेत्रवार मौसम का विस्तृत पूर्वानुमान और अलर्ट1. पश्चिम भारत: गुजरात और महाराष्ट्र में रेड अलर्टदक्षिण-पूर्वी राजस्थान पर बने दबाव के चलते गुजरात राज्य में 24 और 25 जुलाई को असाधारण रूप से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। सौराष्ट्र-कच्छ में 26 जुलाई तक और गुजरात रीजन में 27 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहेगा। मध्य महाराष्ट्र में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कोंकण और गोवा में 25 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश होगी।2. उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली, यूपी और पहाड़ी राज्यों का हालपहाड़ी राज्य: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में 30 जुलाई तक अधिकांश स्थानों पर बारिश जारी रहेगी। उत्तराखंड में 27 से 29 जुलाई के दौरान अत्यंत तेज बारिश का अनुमान है।मैदानी इलाके: पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 28 और 29 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 29-30 जुलाई और पूर्वी यूपी में 28-29 जुलाई को भारी बारिश का पूर्वानुमान है।राजस्थान: पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 24-25 जुलाई को भारी बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।3. मध्य भारत: एमपी और छत्तीसगढ़पश्चिम और पूर्वी मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में 26 से 30 जुलाई के दौरान व्यापक और भारी बारिश का अलर्ट है। विदर्भ क्षेत्र में 28 और 29 जुलाई को मूसलाधार बारिश दर्ज हो सकती है।4. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारतगांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और झारखंड में 28 जुलाई तक गरज-चमक और 30-40 किमी/घंटा की तूफानी हवाओं के साथ भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में 30 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।5. दक्षिण भारत: आंधी और बिजली गिरने का अलर्टतटीय कर्नाटक, केरल और माहे में 30 जुलाई तक बारिश जारी रहेगी। इसके अलावा तमिलनाडु, पुडुचेरी, रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश में 40 से 50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा) की तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) तथा सुशासन की नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में मा० उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी के निर्देशों के अनुपालन में गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के संबंध में संयुक्त आयुक्त (मनरेगा), ग्राम्य विकास, संजय कुमार पाण्डेय के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया है।संजय कुमार पाण्डेय द्वारा जनपद उन्नाव में उपायुक्त (स्वतः रोजगार), राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के पद पर तैनाती के दौरान वित्तीय अनियमितताएं किए जाने के आरोपों की जांच में प्रथमदृष्टया उन्हें गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाए जाने पर मा० उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए।साथ ही, संजय कुमार पाण्डेय के विरुद्ध प्रस्तावित अनुशासनिक कार्यवाही को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-4 के अंतर्गत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है तथा वे नियमानुसार ग्राम्य विकास विभाग मुख्यालय सम्बद्ध रहेंगे।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए शुक्रवार को 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई एजेंसी में व्यापक सुधार प्रक्रिया के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई केवल सेवा […] The post राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त appeared first on Sabguru News .
उदयपुर में बिजली के टूटे तार की चपेट में आने से युवक की मौत
उदयपुर। राजस्थान में उदयपुर के हिरन मगरी थाना क्षेत्र में लकड़वास गांव में शुक्रवार को 11 केवी बिजली लाइन के तार की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि लहरी लाल बागरिया (48) शुक्रवार सुबह दूध लेने के लिए घर से निकला, जहां पास ही बिजली की […] The post उदयपुर में बिजली के टूटे तार की चपेट में आने से युवक की मौत appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ में संदिग्ध उर्वरक कारखाने में कृषि विभाग की कार्रवाई
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र में किसानों को नकली या अवैध री-पैक उर्वरक बेचने वाले एक संदिग्ध कारखाने पर कृषि विभाग ने कार्रवाई की है। खुफिया सूचना के आधार पर हुई इस छापेमारी में फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में खाद, उर्वरक और पैकिंग सामग्री जब्त की गई है। प्रारंभिक जांच में लाइसेंस […] The post हनुमानगढ़ में संदिग्ध उर्वरक कारखाने में कृषि विभाग की कार्रवाई appeared first on Sabguru News .

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