CJP ने फिर किया आंदोलन का ऐलान; दिल्ली छोड़ अब कहां बनाने जा रहे जंतर-मंतर? दीपके भी होंगे शामिल
CJP Protest at Kochi: 7 नवंबर को कोच्चि में होने वाले इस विरोध प्रदर्शन में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। उनके अलावा समूह के दक्षिण क्षेत्र प्रमुख विजय मल्लंगी और राष्ट्रीय सचिव आफरीन नवाज़ भी मौजूद रहेंगे।
Kochi Mercedes Car Accident मामले में जज के नाबालिग बेटे की जमानत बरकरार, याचिका खारिज
कोच्चि, पांच नवंबर केरलम की एक अदालत ने मर्सिडीज-बेंज कार से चेरानल्लूर में हुए सड़क हादसे में एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आरोपी 17 वर्षीय बेटे को मिली जमानत के खिलाफ पुलिस और मृतक के परिवार की ओर से दाखिल याचिकाएं बृहस्पतिवार को खारिज कर दीं। हादसे में जान गंवाने वाले स्कूटर सवार जयबालकृष्णन (55) के परिजनों ने अदालत के फैसले पर निराशा जताई। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार एवं यौन हिंसा के मामलों से जुड़ी अतिरिक्त जिला अदालत की न्यायाधीश कविता गंगाधरन ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें किशोर न्याय बोर्ड द्वारा नाबालिग को दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी को पेश होने का निर्देश दिया और यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या किसी नाबालिग द्वारा सड़क दुर्घटना में संलिप्त होने से जुड़े ऐसे ही मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 लागू की गई है। अदालत के सवाल पर, अभियोजन पक्ष ने जानकारी जुटाई और न्यायाधीश को सूचित किया कि इससे पहले नौ मामलों में भी ऐसी ही कार्रवाई की गई थी। यह हादसा 24 अक्टूबर की देर रात हुआ, जब चेरानल्लूर के साउथ चित्तूर के रहने वाले जयबालकृष्णन को मारापरम्बु के पास कंटेनर रोड पर एक तेज रफ़्तार मर्सिडीज-बेंज ने टक्कर मार दी जिसे कथित तौर पर नाबालिग चला रहा था। पुलिस ने शुरुआत में लापरवाही से मौत होने से जुड़ी बीएनएस की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया और नाबालिग को थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया। इस कदम के बाद चेरानल्लूर पुलिस थाना के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। मृतक के बेटे और बेटी ने कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मांग की कि आरोपी को गिरफ्तार किया जाए और उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाए। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप किया। शुरुआती जांच के बाद, पुलिस ने प्राथमिकी में बीएनएस की धारा 105 जोड़ी जो गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है। बाद में किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग को जमानत दे दी। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में उसके पिता को भी आरोपी बनाया। इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को न्यायाधीश को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत द्वारा अपील खारिज किये जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, जयबालकृष्णन की बेटी भद्रकीर्ति ने कहा कि उन्हें निराशा हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘यहां चल रही कार्यवाही किसी नाटक जैसी लग रही है। हमें उम्मीद थी कि चीजें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगी, लेकिन इसमें इतने उतार-चढ़ाव आए हैं कि एक आम इंसान यह नहीं समझ सकता कि आखिर हो क्या रहा है। हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा।’’भद्रकीर्ति ने कहा कि इन घटनाओं ने न्यायपालिका में जनता के भरोसे को हिला दिया है।
मतदाता सूची SIR रद्द करने की मांग, Kochi में 7 नवंबर को प्रदर्शन करेगी CJP
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार को घोषणा की कि वह 7 नवंबर को केरल के कोच्चि में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को रद्द करने की अपनी मांग को फिर से दोहराया है। CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि जंतर-मंतर एट कोच्चि नाम का यह विरोध प्रदर्शन राजेंद्र मैदान में शाम 4 बजे से आयोजित किया जाएगा। लोकतंत्र बचाएं! SIR रद्द करें! हमारे साथ जुड़ें - 7 नवंबर - शाम 4 बजे | राजेंद्र मैदान, कोच्चि, पोस्ट में लिखा था। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। पार्टी के दक्षिण ज़ोन प्रमुख विजय मल्लंगी और राष्ट्रीय सचिव आफ़रीन नवाज़ भी 7 नवंबर को कोच्चि में SIR-विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा लेंगी। कोच्चि में हुआ यह विरोध प्रदर्शन, CJP का पहला बड़ा कदम है। इससे पहले, दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) के SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने की कोशिश के दौरान, CJP के नेताओं को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसे भी पढ़ें: Jitendra Singh के Foreign Funding दावों पर CJP का पलटवार, सबूत दिखाने की दी चुनौती पिछले महीने, आशुतोष रंका और सौरव दास समेत CJP के अन्य नेताओं के साथ मिलकर, दिपके को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। वे जंतर-मंतर पर बिना अनुमति के ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद सरकार ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित (नोटिफाई) करने का दर्जा वापस ले लिया। हालाँकि, दास और रंका ने इस फैसले के विरोध में, जंतर-मंतर पहुँचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और वे एक सप्ताह तक जेल में रहे। बाद में, उन्होंने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने यह लिखित वचन दिया कि जब तक जंतर-मंतर का दर्जा बहाल नहीं हो जाता, तब तक वे वहाँ कोई और विरोध-प्रदर्शन आयोजित नहीं करेंगे; इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इसे भी पढ़ें: Delhi Police Crime Branch के दफ्तर पहुंचे CJP नेता सौरव दास, Jantar Mantar मामले में पूछताछ दीपके पिछले महीने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा कार्यक्रम की घोषणा की थी, उन्हें दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। बाद में SEM ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी। इस शर्त में एक मुख्य बात यह थी कि उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि अगले एक साल तक उनकी ओर से शांति भंग न हो। CJP ने 1 नवंबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन के मार्च को अपना समर्थन दिया, लेकिन रामलीला मैदान में राहुल गांधी के नेतृत्व में आयोजित रैली में हिस्सा नहीं लिया।

