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Kochi में शराब के लिए पैसे न मिलने पर बेटे ने मां को पीट-पीटकर मार डाला, आरोपी गिरफ्तार

कोच्चि, एक नवंबर केरलम के फोर्ट कोच्चि में शराब खरीदने के लिए पैसे नहीं देने पर 52 वर्षीय व्यक्ति ने कथित तौर पर 78 वर्षीय मां की हत्या कर दी। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। मृतका की पहचान फोर्ट कोच्चि के अमरावती निवासी लक्ष्मी (78) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कन्नन अक्सर अपनी मां से झगड़ा करता था और जब भी वह उसे शराब खरीदने के लिए पैसे देने से मना करती थीं तो वह उनके साथ मारपीट करता था। प्राथमिकी के अनुसार शनिवार रात को उसने शनिवार रात को उसने अमरावती के विशाक्षी लेन स्थित अपने घर में मां से झगड़ा किया और उन्हें पीटा तथा लात मारी। इससे उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिनके कारण उनकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि आरोपी इस बात से भी नाराज था कि उसकी मां ने घर का एलपीजी सिलेंडर उसके भाई को दे दिया था। घटना के बाद रिश्तेदार और पड़ोसी उनके घर पहुंचे जहां उन्होंने लक्ष्मी को मृत पाया। इसके तुरंत बाद फोर्ट कोच्चि पुलिस भी मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने बताया कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हत्या के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। रिमांड प्रक्रिया के तहत कन्नन को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

प्रभासाक्षी 1 Nov 2026 9:53 am

वोट चोरी नहीं जनता का फैसला है, Congress के खराब शासन पर बोले BJP नेता Rajeev Chandrasekhar

केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने गुरुवार को विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की चुनावी हार का कारण 'वोट चोरी' के उनके दावे नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और उनका शासन रिकॉर्ड है। ANI से बात करते हुए, चंद्रशेखर ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कई राष्ट्रीय और विधानसभा चुनाव हार चुकी है, हालांकि हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल जैसे कुछ राज्यों में इसके अपवाद रहे हैं। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि इससे किसी को हैरानी हुई है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल के कुछ चुनावों को छोड़कर, हर चुनाव हारी है। वे हर राष्ट्रीय चुनाव और हर विधानसभा चुनाव हारे हैं - 2014, 2019, 2024। और यह सिलसिला दशकों तक जारी रहेगा, जिसकी वजह एक सीधा-सा सच है। इसे भी पढ़ें: Kerala Model का काला सच! 115 दिनों से प्रोटेस्ट, सिर मुंडवाया लेकिन कांग्रेस चुप क्यों? उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए कांग्रेस अपने वादों को पूरा करने में विफल रही। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर 2004-2014 के अपने कार्यकाल के दौरान अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और लोगों का शोषण करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इस देश और कई राज्यों की जनता ने कांग्रेस पार्टी को शासन करने और अपने जीवन में बदलाव लाने का मौका दिया था। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने क्या किया? 2004 से 2014 का ही उदाहरण ले लीजिए। कांग्रेस पार्टी जहां भी जाती है, वहां अर्थव्यवस्था को बर्बाद करती है, भ्रष्टाचार फैलाती है और लोगों का शोषण करती है। फिर वे वापस आते हैं और झूठ बोलकर वोट मांगते हैं। जनता यह बात जानती है। यह 'वोट चोरी' का मुद्दा नहीं है, बल्कि जनता का यह फैसला है कि अब 'चोरों' को वोट नहीं देना है। और हर चुनाव में यही देखने को मिल रहा है। भाजपा नेता ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी आरोप लगाया कि वे चुनावी धांधली के आरोप लगाकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करके अपनी हताशा जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने कहा, राहुल गांधी और खड़गे की हताशा उनके झूठ, उनकी धोखाधड़ी वाली राजनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों और अपशब्दों में साफ झलकती है। चंद्रशेखर ने जोर देकर कहा कि लोग मोदी का समर्थन करना जारी रखेंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री लोगों के जीवन और देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के काम करने के तरीकों की तुलना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जनहित के बजाय अपने परिवार के सदस्यों के हितों को प्राथमिकता दी है। इसे भी पढ़ें: Kochi Car Accident केस में चार पुलिसकर्मी सस्पेंड, Commissioner बदलने के बाद जज को राहत उन्होंने कहा भारत का भविष्य 'विकसित भारत' है। भारत की जनता नरेंद्र मोदी जी का समर्थन करती रहेगी, क्योंकि वे हाल के इतिहास के इकलौते ऐसे नेता हैं जो लोगों के जीवन और देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। वे सिर्फ अपने दामाद, साले, बहू या पोते-पोतियों को फायदा पहुंचाने का काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस चुनाव हारती रहेगी क्योंकि वह अपनी हार के असली कारणों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, इसीलिए वे चुनाव हारेंगे, लेकिन चूंकि वे इस सच्चाई का सामना नहीं कर सकते, इसलिए वे लगातार धोखाधड़ी और झूठ की कहानियां गढ़ते रहेंगे। इस बीच, बुधवार को प्रधानमंत्री... नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में हुए MLC चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी। एक्स पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा कि 4 बड़े राज्यों - उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में 28 सीटों पर MLC चुनाव हुए। ये चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए गए थे। अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?

प्रभासाक्षी 29 Oct 2026 6:05 pm

Kochi Car Accident केस में चार पुलिसकर्मी सस्पेंड, Commissioner बदलने के बाद जज को राहत

केरल हाई कोर्ट ने गुरुवार को कोच्चि के एक जज को अग्रिम जमानत दे दी। उन पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था, क्योंकि उनके 17 वर्षीय बेटे ने कथित तौर पर मर्सिडीज-बेंज कार से एक स्कूटर को टक्कर मार दी थी, जिससे कोच्चि में सड़क किनारे खाना बेचने वाले 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ की एकल-न्यायाधीश पीठ ने कहा कि जांचकर्ताओं ने न्यायिक अधिकारी से पहले ही चार घंटे तक पूछताछ कर ली है, और न्यायाधीश जांच में सहयोग करेंगे। जस्टिस एडप्पागाथ ने कहा हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए। वह एक न्यायिक अधिकारी हैं और वे सहयोग करेंगे। पुलिस ने उनसे चार घंटे तक पूछताछ की थी। यह अंतरिम राहत उस घटना के एक दिन बाद मिली है, जब मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के जज से अलुवा पुलिस क्लब में क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने कई घंटों तक पूछताछ की थी। उन्हें गुरुवार को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इसे भी पढ़ें: Rajasthan में 12 लाख रुपये लेकर दूसरे की जगह भर्ती परीक्षा देने वाला कनिष्ठ सहायक गिरफ्तार यह हादसा 25 अक्टूबर की तड़के हुआ, जिसमें कोच्चि के चित्तूर इलाके में स्ट्रीट फूड कार्ट चलाने वाले जयाबालकृष्णन की मौत हो गई। घटना स्थल से ही उस किशोर को पकड़ लिया गया था, जिसे बाद में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने जमानत दे दी। उस पर गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) और लापरवाही से गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया गया है। शुक्रवार को एर्नाकुलम की एक विशेष अदालत में उस किशोर की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई होगी। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत दर्ज एक मामले में जज का नाम शामिल था। यह धारा तब लागू होती है जब कोई नाबालिग अपराध करता है, और इसके तहत वाहन के मालिक या अभिभावक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान में तीन साल तक की कैद, 25,000 रुपये का जुर्माना और 12 महीनों के लिए वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की सजा का प्रावधान है। इस प्रावधान के तहत अदालत को यह मान लेना होगा कि नाबालिग ने वाहन का इस्तेमाल उसके मालिक या अपने अभिभावक की सहमति से किया था। इसे भी पढ़ें: CEC Gyanesh Kumar के खिलाफ INDIA गठबंधन का जन महाभियोग, Meira Kumar करेंगी अध्यक्षता राज्य सरकार ने इस जानलेवा हादसे की जांच में पुलिस की ओर से हुई चूक को स्वीकार किया है और चेरानल्लूर पुलिस स्टेशन से जुड़े चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। बुधवार को सरकार ने कोच्चि शहर के पुलिस कमिश्नर कालीराज महेश कुमार को हटा दिया और उनकी जगह 2008 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी आर. निशांतिनी को नियुक्त किया।

प्रभासाक्षी 29 Oct 2026 4:58 pm

Kerala Model का काला सच! 115 दिनों से प्रोटेस्ट, सिर मुंडवाया लेकिन कांग्रेस चुप क्यों?

सिर के गिरते हुए बाल और आंखों में छलकता आक्रोश... यह महज एक तस्वीर नहीं, हमारे सिस्टम के मुंह पर लगा एक जोरदार तमाचा है। जब व्यवस्था बहरी हो जाए, तो अपनी आवाज़ सुनाने के लिए एक नौजवान को किस हद तक जाना पड़ता है? जवाब है-113 दिनों की भूख और एक महिला का मुंडवाया हुआ सिर! केरल में सरकारी नौकरी की लिस्ट में नाम आने के बावजूद नियुक्तियों के इंतजार में एक महिला अभ्यर्थी ने अपना सिर मुंडवा लिया। 113 दिन... जी हां, 113 दिन से यह आंदोलन चल रहा है, मगर सत्ता के गलियारों तक इसकी गूंज नहीं पहुंची। यह विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है? देश के तमाम पेशेवर एक्टिविस्ट, मोमबत्ती ब्रिगेड और सुबह-सुबह लोकतंत्र बचाने का ठेका लेने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने एक मिसाल कायम कर दी है। मिसाल खामोशी की, मिसाल चुप्पी की भी और डबल स्टैंडर्ड की भी। जिस पर गिनीज बुक वाले भी शोध कर सकते हैं। देश के सबसे साक्षर राज्य केरल जिसका एजुकेशन और हेल्थ मॉडल आए दिन सोशल मीडिया के पन्नों पर ऐसा चिपकाया जाता है मानो बाकी दुनिया तो अभी अक्षरों की पहचान ही कर रही है। लेकिन उसी केरल में पिछले 113 दिन से ज्यादा दिनों से शिक्षक भर्ती को लेकर धरना चल रहा है। भूख हड़तालें हो रही है और नौबत यह आ गई है कि हमारी बहनें और महिलाएं विरोध में अपने सिर के बाल मुंडवा रही हैं। लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर्स एलपीएसटी की केपीएससी परीक्षा पास करके मेरिट लिस्ट में रैंक लाकर यह पढ़े लिखे युवा नियुक्ति पत्र मांग रहे हैं। लेकिन सरकार के कानों तक आवाज पहुंचने भी तो कैसे? आखिर क्यों 115 दिन से सड़कों पर हैं केरल के युवा? क्या कर रही है वहां की लेफ्ट सरकार? सवाल उन विपक्षी पार्टियों से भी चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी जो दिल्ली में कुछ और बोलती हैं और राज्यों में उनका स्टैंड कुछ और हो जाता है! ऐसे में बिना किसी लाग-लपेट के राजनीति के इस डबल स्टैंर्डर और केरल के ज्वलित सवाल का एमआरआई स्कैन करते हैं जिसे मेनस्ट्रीम मीडिया ने नजरअंदाज कर दिया। इसे भी पढ़ें: दलाल स्ट्रीट पर राज, सबसे बड़े IPO और सरप्राइज लिस्टिंग के साथ 13 नए रिकॉर्ड का सरताज, सभी ने कहा 'Jio मेरे लाल' क्या है पूरा मामला प्रदर्शन केरलम की राजधानी तिरुवंतपुरम में राज्य सचिवालय के बाहर चल रहा है। 29 अक्टूबर को इस प्रदर्शन का 115वां दिन है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती के रैंक लिस्ट में नाम आने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। सरकार से बातचीत हुई, मांगों पर सहमति की बात भी कही गई। लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई भी जरूरी कारवाई नहीं हुई है। यह लोग केरल में लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर यानी एलपीएसटी की नौकरी के लिए जारी रैंक लिस्ट में शामिल उम्मीदवार हैं। केरलम में सरकारी नौकरियों की भर्ती के लिए पब्लिक सर्विस कमीशन यानी पीएससी काम करता है। भर्ती प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की रैंक लिस्ट जारी होती है। इसके बाद खाली पदों और नियमों के हिसाब से नियुक्ति की जाती है। इस मामले में शिक्षक भर्ती की रैंक लिस्ट मई 2025 में जारी हुई थी। लेकिन प्रदर्शन कर रहे लोगों का यह कहना है कि इस लिस्ट में नाम होने के बावजूद खाली पदों पर नियुक्ति नहीं हो रही है। मांग है कि नई भर्ती शुरू करने से पहले मौजूदा रैंक लिस्ट से खाली पदों को भरा जाए। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। रैंक लिस्ट में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि हर उम्मीदवार को नौकरी मिलना तय है। रैंक लिस्ट में शामिल कितने कैंडिडेट्स को नौकरी मिलेगी? यह अवेलेबल सीट्स पर निर्भर करता है। क्या है प्रदर्शनाकी की 4 बड़ी मांगें एक शिक्षक पर 30 बच्चों की बजाए 25 बच्चों की जिम्मेदारी हो। इससे ज्यादा शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी और नियुक्तियों के मौके बढ़ सकते हैं। हेड टीचर या हेड मास्टर के खाली पदों को भी पीएससी के जरिए भरा जाए। मौजूदा रैंक लिस्ट की समयसीमा बढ़ाई जाए ताकी उम्मीदवारों को इस लिस्ट के जरिए नौकरी पाने का मौकका और समय दोनों ही मिल सके। मौजूदा रैंक लिस्ट से नियुक्तियां पूरी होने तक नई नौकरी का नोटिफिकेशन जारी न किया जाए। यानी उम्मीदवारों का कहना है कि पहले मौजूदा लिस्ट से खाली पदों पर भर्ती की जाए और उसके बाद नई भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। इसे भी पढ़ें: WPL 2027: 146 खिलाड़ियों की नीलामी आज Kochi में, खाली 27 स्लॉट भरने उतरेंगी 5 टीमें सिर मुंडवाकर विरोध ऑल केरल लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर (LPST) रैंक होल्डर्स एसोसिएशन की सचिव वलारमथी ने नियुक्तियों में देरी के विरोध में अपना सिर मुंडवा लिया। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को टेंट लगाने से रोक दिया, जिसकी वजह से भूख हड़ताल पर बैठे लोग बारिश में भीगने को मजबूर हो गए। सरकार ने यह कहा कि जिन सरकारी स्कूलों के लोअर प्राइमरी सेक्शन में 150 से ज्यादा छात्र हैं, वहां हेड टीचर के पदों को भरने के लिए पीएससी को भेजा जाएगा। इन पदों पर मौजूदा रैंक लिस्ट से नियुक्तियां करने की बात भी कही गई। रैंक लिस्ट की समय सीमा बढ़ाने तक की बात हुई। लेकिन इसके बाद भी प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ। इसकी वजह समझने के लिए 30 सितंबर की बैठक को लेकर एसोसिएशन के सचिव वलारमती का पक्ष जानना जरूरी है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए इंटरव्यू में वलारमती ने बताया कि बैठक के दौरान अधिकारियों ने कहा था कि अगर प्रदर्शनकारी प्रदर्शन खत्म कर लेते हैं तो उनकी मांगे स्वीकार करने का आदेश जारी किया जाएगा। उनका कहना है कि मंत्री उनकी मांगों को मानने के लिए तैयार थे लेकिन लिखित में आश्वासन देने को तैयार नहीं थे। इसी नाराजगी के बीच 27 अक्टूबर को वलारम ने अपना सिर मुंडवा लिया और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका कहना है कि सरकार ने मांगों पर कारवाई करने का भरोसा तो दिया था लेकिन अब तक उन्हें उसका कोई नतीजा देखने को नहीं मिला था। बलारमती ने एक वीडियो साझा कर यह आरोप भी लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बारिश से बचने के लिए छतरी या शेड लगाने की अनुमति नहीं दी थी। उनका कहना है कि भूख हड़ताल पर बैठे लोगों को बारिश में बैठना पड़ा। अब इस पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। सूबे में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ यानी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार है। वि डी सतीशन राज्य के मुख्यमंत्री हैं। सरकार के आश्वासन के बाद पिछली भूख हड़ताल खत्म हुई यह पहली बार नहीं है जब वलारमथी ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की है। अगस्त में, उन्होंने 13 दिनों का उपवास तब खत्म किया था, जब सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने संघ के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनकी मांगों पर विचार करने के लिए 45 दिन का समय मांगा। उस समय तक यह व्यापक आंदोलन 37 दिनों से चल रहा था। 30 सितंबर को सरकार ने कहा कि वह अधिकांश मांगों को मानने के लिए सहमत हो गई है। सरकार ने बताया कि जिन सरकारी स्कूलों के लोअर प्राइमरी सेक्शन में 150 से अधिक छात्र हैं, वहां प्रधानाध्यापक के पदों के लिए PSC को सूचित किया जाएगा, ताकि मौजूदा रैंक लिस्ट से नियुक्तियां की जा सकें। मंत्री ने यह भी कहा कि लिस्ट की वैधता खत्म होने के बाद, इसे बढ़ाने के अनुरोधों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। देशभर में प्रदर्शन का झंडा लेकर घूमने वालों को क्यों सांप सूंघ गया देश भर में घूम-घूम कर युवाओं के रोजगार और शिक्षा पर लंबी चौड़ी भाषण बाजी करने वाली कांग्रेस को अचानक केरल के इस मामले में सांप क्यों सूंघ गया है? क्या वहां हाथ मिलाने की कोई मजबूरी है या वहां शिक्षकों का दर्द पॉलिटिकल माइलेज नहीं दे रहा। जब अपनी सहूलियत हो तो शिक्षा देश को आगे बढ़ाएगी और जब अपनी राजनीति पर बात आए तो शिक्षकों को सड़क पर मुंडन करवाने के लिए छोड़ दीजिए। केरल में प्रदर्शन आज भी जारी है। लड़कियां अपने बाल कटवाकर सवाल पूछ रही हैं। युवा भूख से निढाल होकर अपने हक का लेटर मांग रहे हैं। लेकिन अब देखना यह है कि वामपंथी सरकार के कान में पर्दा कब फटता है और इन सेलेक्टिव एक्टिविस्ट का इंटरनेट पैक कब रिन्यू होता है ताकि वह केरल के इन शिक्षकों के हक में भी कम से कम एक ट्वीट ही कर सके।

प्रभासाक्षी 29 Oct 2026 2:31 pm

Mahua Moitra को Supreme Court का सुझाव, Parliament में चर्चा की मांग करें

सुप्रीम कोर्ट ने वैकल्पिक निवेश कोषों के अंतिम लाभार्थी मालिकों और पोर्टफोलियो का सार्वजनिक खुलासा करने संबंधी सेबी को निर्देश देने के अनुरोध वाली महुआ मोइत्रा की याचिका का निपटारा किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी कानूनी ढांचे के अभाव में अदालत सेबी को अंतिम लाभार्थी मालिकों के बारे में इस तरह की सार्वजनिक जानकारी देने का निर्देश नहीं दे सकती। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी याचिका दायर करने के लिए तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा से सवाल किया और सुझाव दिया कि वह इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग कर सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Women Health के लिए वरदान है Shatavari, Hormonal Balance और बेहतर नींद में मददगार याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इन निवेश माध्यमों के 'अंतिम लाभार्थी मालिकों' (अल्टीमेट बेनिफिशियल ओनर्स) का खुलासा न किए जाने से शेयर बाजार में अस्पष्टता पैदा हुई है और इससे हेरफेर (मैनिपुलेशन) की गुंजाइश बन गई है। भूषण ने कहा कि विदेशी इकाइयों के जरिए भारतीय कंपनियों में बड़ी रकम निवेश की जा रही है, लेकिन असल निवेशकों की पहचान का पता नहीं है। उन्होंने कहा, जो लोग विदेशी इकाइयों के जरिए हमारी कंपनियों में निवेश कर रहे हैं, हमें नहीं पता कि वे कौन हैं और क्या वे सेबी (SEBI) के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। आज इस बात का काफी संदेह है कि भारी निवेश करने वाली इन कंपनियों के जरिए शेयर बाजार में हेरफेर की जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि 'अल्टीमेट बेनिफिशियल ओनर' (वास्तविक लाभार्थी मालिक) की जानकारी देने की जो अनिवार्यता पहले थी, उसे 2018 में खत्म कर दिया गया। इसके बाद, इकाइयों (entities) के लिए केवल 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) का पालन करना ही जरूरी रह गया। अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति की टिप्पणियों का हवाला देते हुए, भूषण ने दलील दी कि जानकारी देने की इस अनिवार्यता को हटाने से नियामक ढांचा कमजोर हो गया है। इसे भी पढ़ें: नाबालिग बेटे के Kochi Mercedes हादसे में फंसे Judge को अग्रिम जमानत, Kerala High Court का आदेश उन्होंने कहा: “मान लीजिए कि किसी कंपनी के शेयर बहुत तेज़ी से और बहुत ज़्यादा ऊपर जा रहे हैं। तब कोई स्टॉक ब्रोकर किसी रिटेल निवेशक से कहता है कि शेयर की कीमत बढ़ रही है, तो क्यों न आप भी इसमें पैसा लगा दें... लेकिन उस निवेशक को यह नहीं पता होता कि शेयर की कीमत इसलिए बढ़ रही है क्योंकि उसी कंपनी के प्रमोटर AIF या FPI के ज़रिए शेयर खरीद रहे हैं, जिससे शेयर की कीमत ऊपर जा रही है। अगर उसे यह पता चल जाए, तो वह शेयर नहीं खरीदेगा। भूषण ने इस बात पर जोर दिया कि सूचना का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और कई देशों में 'बेनिफिशियल ओनरशिप' (लाभकारी स्वामित्व) का सार्वजनिक रूप से खुलासा करना अनिवार्य है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया, जिनमें ADR और PUCL मामले शामिल हैं। इन मामलों में, कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपनी संपत्ति, देनदारियों, आपराधिक रिकॉर्ड और शैक्षणिक योग्यताओं का खुलासा करने का निर्देश दिया था, भले ही उस समय इसके लिए कोई कानूनी ढांचा मौजूद नहीं था।

प्रभासाक्षी 29 Oct 2026 1:24 pm

Instagram Account बंद होने पर High Court में रिट नहीं, Civil Suit ही उचित विकल्प

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि संचार और सामाजिक मेलजोल के लिए केवल एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना, अपने आप में कोई सरकारी कार्य या सार्वजनिक कर्तव्य नहीं है। अदालत ने माना कि मेटा प्लेटफॉर्म्स इंडिया को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के रिट अधिकार क्षेत्र में नहीं लाया जा सकता, भले ही इसका प्लेटफॉर्म जानकारी फैलाने और जनमत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हो। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने सार्थक भगत द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। सार्थक भगत ने बिना किसी पूर्व सूचना या जवाब देने का मौका दिए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को बंद किए जाने को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि हालांकि इंस्टाग्राम सार्वजनिक चर्चा में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन इसका मुख्य काम अभिव्यक्ति के लिए एक मंच प्रदान करना है; सार्वजनिक चर्चा तो इसके कामकाज का एक परिणाम है, न कि कोई सार्वजनिक कर्तव्य। इसे भी पढ़ें: Allahabad High Court ने Azam Khan और Abdullah Azam को दी जमानत, सजा पर लगाई रोक 27 अक्टूबर के अपने आदेश में अदालत ने कहा प्रतिवादी संख्या 3 न तो किसी सार्वजनिक कर्तव्य के तहत ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है और न ही अपनी सेवाएं देने के लिए कानूनी रूप से मजबूर है; ये सेवाएं स्वैच्छिक हैं और उपयोगकर्ताओं द्वारा संचालित होती हैं। अदालत ने आगे कहा कि मेटा का कामकाज निजी प्रकृति का है और सरकार का कोई भी आदेश कंपनी को राज्य का कोई पारंपरिक कार्य नहीं सौंपता है। अदालत ने माना कि 'मेटा प्लेटफॉर्म्स इंडिया' ऐसा कोई सार्वजनिक कार्य या कर्तव्य नहीं निभाती है, जिसके कारण वह संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत 'रिट अधिकार क्षेत्र' (writ jurisdiction) के दायरे में आ सके। अदालत ने कहा कि इस निजी इकाई के खिलाफ याचिकाकर्ता के लिए 'सिविल मुकदमा' (civil suit) दायर करना ज्यादा उचित होगा, जिसमें वह (यदि कोई नुकसान हुआ हो तो) मुआवजे की मांग कर सकता है। भगत ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट बिना किसी पूर्व सूचना या जवाब देने के मौके के बिना ही बंद (disable) कर दिए गए। उन्हें भेजे गए नोटिफिकेशन में कहा गया था कि इंस्टाग्राम के 'कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स' (community standards) का उल्लंघन करने के आरोप में अकाउंट बंद किए गए हैं और इसकी जानकारी हमेशा के लिए हटा दी जाएगी। इसमें यह भी कहा गया था कि वह इस फैसले की दोबारा समीक्षा (review) के लिए अनुरोध नहीं कर सकते। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उसने इंस्टाग्राम के इन-ऐप मैकेनिज्म के जरिए समीक्षा की मांग की थी, लेकिन उसके अकाउंट बहाल नहीं किए गए और न ही उन्हें बंद करने का कोई ठोस कारण बताया गया। उसने अदालत को यह भी बताया कि उसने 11 सितंबर, 2026 को 'सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021' के नियम 3A के तहत 'शिकायत अपीलीय समिति' (Grievance Appellate Committee) के समक्ष अपील दायर की थी। उनके अनुसार, नियमों के तहत तय 30 दिन की अवधि बीत जाने के बावजूद उनकी अपील लंबित रही। इसे भी पढ़ें: नाबालिग बेटे के Kochi Mercedes हादसे में फंसे Judge को अग्रिम जमानत, Kerala High Court का आदेश अदालत ने 'भारत संघ' (Union of India) के खिलाफ भी कोई राहत देने से इनकार कर दिया, क्योंकि ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला कि सरकार ने अपने किसी कानूनी कर्तव्य (statutory duty) की अनदेखी की हो। अदालत ने कहा कि 'रिट ऑफ मैंडमस' (writ of mandamus) - जो एक विशेष न्यायिक उपाय है - तब जारी किया जा सकता है जब किसी सार्वजनिक प्राधिकरण को उसका कानूनी कर्तव्य निभाने के लिए बाध्य करना हो, जिसे निभाने में वह विफल रहा हो। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए तर्कों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि सरकार ने अपने किसी कानूनी दायित्व को निभाने में कोई ठोस लापरवाही बरती है या वह इसमें विफल रही है। इसलिए, अदालत ने माना कि 'रिट ऑफ मैंडमस' जारी करने के लिए जरूरी आधार मौजूद नहीं हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता की इस शिकायत को देखते हुए कि 'ग्रिवेंस अपीलेट कमिटी' (शिकायत अपीलीय समिति) के समक्ष उसकी अपील पर निर्णय लेने में देरी हो रही है, अदालत ने समिति को निर्देश दिया कि वह इस अपील पर जल्द से जल्द फैसला ले। उच्च न्यायालय ने इन निर्देशों के साथ याचिका और उसमें लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया।

प्रभासाक्षी 29 Oct 2026 1:03 pm

नाबालिग बेटे के Kochi Mercedes हादसे में फंसे Judge को अग्रिम जमानत, Kerala High Court का आदेश

केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश को अग्रिम जमानत दे दी, जिनके बेटे का हाल ही में एक कार दुर्घटना में हाथ था, जिसमें एक स्कूटर सवार की मौत हो गई थी। जमानत के मामले में, जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया और कहा कि जज को जांच में सहयोग करना होगा। बार एंड बेंच के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक पुलिस आवेदक को गिरफ्तार नहीं करेगी। हालांकि, उसे आज दोपहर 1:00 बजे जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा और जरूरत पड़ने पर, बुलाए जाने पर फिर से आना होगा। आवेदक से पूछताछ सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी। आरोपी जज की ओर से पेश हुए सीनियर वकील पी विजय भानु ने हाई कोर्ट को बताया कि मर्सिडीज दुर्घटना के संबंध में पुलिस स्टेशन में जज से चार घंटे तक पूछताछ की गई थी। अदालत ने कहा उसे 4 घंटे तक पूछताछ करने की क्या ज़रूरत थी, और अब फिर से पूछताछ क्यों? उसकी गिरफ़्तारी की क्या ज़रूरत है? वह एक न्यायिक अधिकारी हैं। वह जांच में सहयोग करेंगे। हादसे के पीड़ितों की ओर से पेश वकील ने इस फ़ैसले का विरोध किया। उन्होंने उस जज पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है, जो त्रिशूर ज़िले के इरानजालकुडा में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में तैनात हैं। इसे भी पढ़ें: स्पोर्ट्स कॉलेज के शिक्षक सरकारी कर्मचारी नहीं, High Court ने अधिकरण की कार्यवाही रद्द की मामले के बारे में त्रिशूर में MACT जज के 17 वर्षीय बेटे ने मर्सिडीज-बेंज चलाते हुए, इस हफ्ते की शुरुआत में कोच्चि में एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी। इस हादसे में स्कूटर सवार की मौत हो गई। नाबालिग के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) जैसे आरोपों में मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। कोच्चि पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या, जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती) और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MVA) की धाराओं 181, 183, 199A(1) तथा 199A(2) के तहत एक FIR दर्ज की है। MVA की धारा 199A के तहत, यदि कोई नाबालिग मोटर वाहन से जुड़ा कोई अपराध करता है, तो उसके अभिभावक या वाहन मालिक पर मुकदमा चलाया जाता है और उन्हें ही इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है।

प्रभासाक्षी 29 Oct 2026 12:55 pm

IRCTC लाया Kochi से Amazing Hyderabad Tour Package, 12 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा

घुमक्कड़ लोग घूमने के लिए नई-नई जगहों को खोज में लगे रहते हैं। अगर हैदराबाद आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में है, तो IRCTC का नया टूर पैकेज, आपकी छोटी यात्रा की प्लानिंग को आसान बना सकता है। 'अमेजिंग हैदराबाद' नाम का यह चार दिन का पैकेज कोच्चि से 12 से 15 अक्टूबर, 2026 के लिए तय किया गया है। इस पैकेज की कीमत 27,150 रुपये प्रति व्यक्ति है। 4 दिन के टूर पैकेज - इस यात्रा की शुरुआत 12 अक्टूबर को कोच्चि से हैदराबाद के लिए सुबह की फ्लाइट से है। यहां पहुंचने के बाद, यात्री रात के लिए होटल में चेक-इन करने से पहले 'स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी', चारमीनार और गोलकुंडा फोर्ट जाएंगे। - दूसरे दिन रामोजी फिल्म सिटी घूमाया जाएगा। ब्रेकफास्ट के बाद यात्री को फिल्म स्टूडियो के विशाल कॉम्प्लेक्स जाएंगे। - तीसरे दिन पर्यटकों को मक्का मस्जिद और चौमहल्ला पैलेस ले जाएगा। जिसके बाद उन्हें हैदराबाद की आर्किटेक्चरल और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई जाएगी। दोपहर का समय यात्रियों के लिए खाली होगा ताकि वे अपनी मर्जी से धूम सके। - चौथे दिन यानी के 15 अक्तूबर को सैलर जंग म्यूजियम और बिड़ला मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। लंच के बाद, यात्री कोच्चि के लिए देर रात की वापसी वाली फ्लाइट से अपने शहर जा सकते हैं। IRCTC हैदराबाद टूर पैकेज की कीमत कितनी है? सिंगल ऑक्यूपेंसी: ₹34,450 प्रति व्यक्ति डबल ऑक्यूपेंसी: ₹28,200 प्रति व्यक्ति ट्रिपल ऑक्यूपेंसी: ₹27,150 प्रति व्यक्ति 5-11 साल के बच्चे: अलग बिस्तर के साथ ₹22,950 और बिना बिस्तर के ₹18,750 2-4 साल के बच्चे: बिना बिस्तर के ₹18,750 ₹27,150 प्रति व्यक्ति की शुरुआती कीमत ट्रिपल ऑक्यूपेंसी के लिए है। पैकेज में मिलने वाली सुविधाएं IRCTC टूर पैकेज में कोच्चि और हैदराबाद के बीच इकॉनमी-क्लास की फ़्लाइट, एयर-कंडीशंड होटल में तीन रात ठहरने की सुविधा, तीन बार नाश्ता और तीन बार डिनर शामिल हैं। यात्रियों को घूमने-फिरने के लिए एयर-कंडीशन्ड गाड़ियां मिलेंगी और कुछ खास दिनों पर गाइड की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

प्रभासाक्षी 2 Oct 2026 5:26 pm