Kochi में शराब के लिए पैसे न मिलने पर बेटे ने मां को पीट-पीटकर मार डाला, आरोपी गिरफ्तार
कोच्चि, एक नवंबर केरलम के फोर्ट कोच्चि में शराब खरीदने के लिए पैसे नहीं देने पर 52 वर्षीय व्यक्ति ने कथित तौर पर 78 वर्षीय मां की हत्या कर दी। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। मृतका की पहचान फोर्ट कोच्चि के अमरावती निवासी लक्ष्मी (78) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कन्नन अक्सर अपनी मां से झगड़ा करता था और जब भी वह उसे शराब खरीदने के लिए पैसे देने से मना करती थीं तो वह उनके साथ मारपीट करता था। प्राथमिकी के अनुसार शनिवार रात को उसने शनिवार रात को उसने अमरावती के विशाक्षी लेन स्थित अपने घर में मां से झगड़ा किया और उन्हें पीटा तथा लात मारी। इससे उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिनके कारण उनकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि आरोपी इस बात से भी नाराज था कि उसकी मां ने घर का एलपीजी सिलेंडर उसके भाई को दे दिया था। घटना के बाद रिश्तेदार और पड़ोसी उनके घर पहुंचे जहां उन्होंने लक्ष्मी को मृत पाया। इसके तुरंत बाद फोर्ट कोच्चि पुलिस भी मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने बताया कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हत्या के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। रिमांड प्रक्रिया के तहत कन्नन को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
Kerala Model का काला सच! 115 दिनों से प्रोटेस्ट, सिर मुंडवाया लेकिन कांग्रेस चुप क्यों?
सिर के गिरते हुए बाल और आंखों में छलकता आक्रोश... यह महज एक तस्वीर नहीं, हमारे सिस्टम के मुंह पर लगा एक जोरदार तमाचा है। जब व्यवस्था बहरी हो जाए, तो अपनी आवाज़ सुनाने के लिए एक नौजवान को किस हद तक जाना पड़ता है? जवाब है-113 दिनों की भूख और एक महिला का मुंडवाया हुआ सिर! केरल में सरकारी नौकरी की लिस्ट में नाम आने के बावजूद नियुक्तियों के इंतजार में एक महिला अभ्यर्थी ने अपना सिर मुंडवा लिया। 113 दिन... जी हां, 113 दिन से यह आंदोलन चल रहा है, मगर सत्ता के गलियारों तक इसकी गूंज नहीं पहुंची। यह विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है? देश के तमाम पेशेवर एक्टिविस्ट, मोमबत्ती ब्रिगेड और सुबह-सुबह लोकतंत्र बचाने का ठेका लेने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने एक मिसाल कायम कर दी है। मिसाल खामोशी की, मिसाल चुप्पी की भी और डबल स्टैंडर्ड की भी। जिस पर गिनीज बुक वाले भी शोध कर सकते हैं। देश के सबसे साक्षर राज्य केरल जिसका एजुकेशन और हेल्थ मॉडल आए दिन सोशल मीडिया के पन्नों पर ऐसा चिपकाया जाता है मानो बाकी दुनिया तो अभी अक्षरों की पहचान ही कर रही है। लेकिन उसी केरल में पिछले 113 दिन से ज्यादा दिनों से शिक्षक भर्ती को लेकर धरना चल रहा है। भूख हड़तालें हो रही है और नौबत यह आ गई है कि हमारी बहनें और महिलाएं विरोध में अपने सिर के बाल मुंडवा रही हैं। लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर्स एलपीएसटी की केपीएससी परीक्षा पास करके मेरिट लिस्ट में रैंक लाकर यह पढ़े लिखे युवा नियुक्ति पत्र मांग रहे हैं। लेकिन सरकार के कानों तक आवाज पहुंचने भी तो कैसे? आखिर क्यों 115 दिन से सड़कों पर हैं केरल के युवा? क्या कर रही है वहां की लेफ्ट सरकार? सवाल उन विपक्षी पार्टियों से भी चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी जो दिल्ली में कुछ और बोलती हैं और राज्यों में उनका स्टैंड कुछ और हो जाता है! ऐसे में बिना किसी लाग-लपेट के राजनीति के इस डबल स्टैंर्डर और केरल के ज्वलित सवाल का एमआरआई स्कैन करते हैं जिसे मेनस्ट्रीम मीडिया ने नजरअंदाज कर दिया। इसे भी पढ़ें: दलाल स्ट्रीट पर राज, सबसे बड़े IPO और सरप्राइज लिस्टिंग के साथ 13 नए रिकॉर्ड का सरताज, सभी ने कहा 'Jio मेरे लाल' क्या है पूरा मामला प्रदर्शन केरलम की राजधानी तिरुवंतपुरम में राज्य सचिवालय के बाहर चल रहा है। 29 अक्टूबर को इस प्रदर्शन का 115वां दिन है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती के रैंक लिस्ट में नाम आने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। सरकार से बातचीत हुई, मांगों पर सहमति की बात भी कही गई। लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई भी जरूरी कारवाई नहीं हुई है। यह लोग केरल में लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर यानी एलपीएसटी की नौकरी के लिए जारी रैंक लिस्ट में शामिल उम्मीदवार हैं। केरलम में सरकारी नौकरियों की भर्ती के लिए पब्लिक सर्विस कमीशन यानी पीएससी काम करता है। भर्ती प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की रैंक लिस्ट जारी होती है। इसके बाद खाली पदों और नियमों के हिसाब से नियुक्ति की जाती है। इस मामले में शिक्षक भर्ती की रैंक लिस्ट मई 2025 में जारी हुई थी। लेकिन प्रदर्शन कर रहे लोगों का यह कहना है कि इस लिस्ट में नाम होने के बावजूद खाली पदों पर नियुक्ति नहीं हो रही है। मांग है कि नई भर्ती शुरू करने से पहले मौजूदा रैंक लिस्ट से खाली पदों को भरा जाए। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। रैंक लिस्ट में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि हर उम्मीदवार को नौकरी मिलना तय है। रैंक लिस्ट में शामिल कितने कैंडिडेट्स को नौकरी मिलेगी? यह अवेलेबल सीट्स पर निर्भर करता है। क्या है प्रदर्शनाकी की 4 बड़ी मांगें एक शिक्षक पर 30 बच्चों की बजाए 25 बच्चों की जिम्मेदारी हो। इससे ज्यादा शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी और नियुक्तियों के मौके बढ़ सकते हैं। हेड टीचर या हेड मास्टर के खाली पदों को भी पीएससी के जरिए भरा जाए। मौजूदा रैंक लिस्ट की समयसीमा बढ़ाई जाए ताकी उम्मीदवारों को इस लिस्ट के जरिए नौकरी पाने का मौकका और समय दोनों ही मिल सके। मौजूदा रैंक लिस्ट से नियुक्तियां पूरी होने तक नई नौकरी का नोटिफिकेशन जारी न किया जाए। यानी उम्मीदवारों का कहना है कि पहले मौजूदा लिस्ट से खाली पदों पर भर्ती की जाए और उसके बाद नई भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। इसे भी पढ़ें: WPL 2027: 146 खिलाड़ियों की नीलामी आज Kochi में, खाली 27 स्लॉट भरने उतरेंगी 5 टीमें सिर मुंडवाकर विरोध ऑल केरल लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर (LPST) रैंक होल्डर्स एसोसिएशन की सचिव वलारमथी ने नियुक्तियों में देरी के विरोध में अपना सिर मुंडवा लिया। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को टेंट लगाने से रोक दिया, जिसकी वजह से भूख हड़ताल पर बैठे लोग बारिश में भीगने को मजबूर हो गए। सरकार ने यह कहा कि जिन सरकारी स्कूलों के लोअर प्राइमरी सेक्शन में 150 से ज्यादा छात्र हैं, वहां हेड टीचर के पदों को भरने के लिए पीएससी को भेजा जाएगा। इन पदों पर मौजूदा रैंक लिस्ट से नियुक्तियां करने की बात भी कही गई। रैंक लिस्ट की समय सीमा बढ़ाने तक की बात हुई। लेकिन इसके बाद भी प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ। इसकी वजह समझने के लिए 30 सितंबर की बैठक को लेकर एसोसिएशन के सचिव वलारमती का पक्ष जानना जरूरी है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए इंटरव्यू में वलारमती ने बताया कि बैठक के दौरान अधिकारियों ने कहा था कि अगर प्रदर्शनकारी प्रदर्शन खत्म कर लेते हैं तो उनकी मांगे स्वीकार करने का आदेश जारी किया जाएगा। उनका कहना है कि मंत्री उनकी मांगों को मानने के लिए तैयार थे लेकिन लिखित में आश्वासन देने को तैयार नहीं थे। इसी नाराजगी के बीच 27 अक्टूबर को वलारम ने अपना सिर मुंडवा लिया और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका कहना है कि सरकार ने मांगों पर कारवाई करने का भरोसा तो दिया था लेकिन अब तक उन्हें उसका कोई नतीजा देखने को नहीं मिला था। बलारमती ने एक वीडियो साझा कर यह आरोप भी लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बारिश से बचने के लिए छतरी या शेड लगाने की अनुमति नहीं दी थी। उनका कहना है कि भूख हड़ताल पर बैठे लोगों को बारिश में बैठना पड़ा। अब इस पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। सूबे में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ यानी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार है। वि डी सतीशन राज्य के मुख्यमंत्री हैं। सरकार के आश्वासन के बाद पिछली भूख हड़ताल खत्म हुई यह पहली बार नहीं है जब वलारमथी ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की है। अगस्त में, उन्होंने 13 दिनों का उपवास तब खत्म किया था, जब सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने संघ के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनकी मांगों पर विचार करने के लिए 45 दिन का समय मांगा। उस समय तक यह व्यापक आंदोलन 37 दिनों से चल रहा था। 30 सितंबर को सरकार ने कहा कि वह अधिकांश मांगों को मानने के लिए सहमत हो गई है। सरकार ने बताया कि जिन सरकारी स्कूलों के लोअर प्राइमरी सेक्शन में 150 से अधिक छात्र हैं, वहां प्रधानाध्यापक के पदों के लिए PSC को सूचित किया जाएगा, ताकि मौजूदा रैंक लिस्ट से नियुक्तियां की जा सकें। मंत्री ने यह भी कहा कि लिस्ट की वैधता खत्म होने के बाद, इसे बढ़ाने के अनुरोधों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। देशभर में प्रदर्शन का झंडा लेकर घूमने वालों को क्यों सांप सूंघ गया देश भर में घूम-घूम कर युवाओं के रोजगार और शिक्षा पर लंबी चौड़ी भाषण बाजी करने वाली कांग्रेस को अचानक केरल के इस मामले में सांप क्यों सूंघ गया है? क्या वहां हाथ मिलाने की कोई मजबूरी है या वहां शिक्षकों का दर्द पॉलिटिकल माइलेज नहीं दे रहा। जब अपनी सहूलियत हो तो शिक्षा देश को आगे बढ़ाएगी और जब अपनी राजनीति पर बात आए तो शिक्षकों को सड़क पर मुंडन करवाने के लिए छोड़ दीजिए। केरल में प्रदर्शन आज भी जारी है। लड़कियां अपने बाल कटवाकर सवाल पूछ रही हैं। युवा भूख से निढाल होकर अपने हक का लेटर मांग रहे हैं। लेकिन अब देखना यह है कि वामपंथी सरकार के कान में पर्दा कब फटता है और इन सेलेक्टिव एक्टिविस्ट का इंटरनेट पैक कब रिन्यू होता है ताकि वह केरल के इन शिक्षकों के हक में भी कम से कम एक ट्वीट ही कर सके।
IRCTC लाया Kochi से Amazing Hyderabad Tour Package, 12 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा
घुमक्कड़ लोग घूमने के लिए नई-नई जगहों को खोज में लगे रहते हैं। अगर हैदराबाद आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में है, तो IRCTC का नया टूर पैकेज, आपकी छोटी यात्रा की प्लानिंग को आसान बना सकता है। 'अमेजिंग हैदराबाद' नाम का यह चार दिन का पैकेज कोच्चि से 12 से 15 अक्टूबर, 2026 के लिए तय किया गया है। इस पैकेज की कीमत 27,150 रुपये प्रति व्यक्ति है। 4 दिन के टूर पैकेज - इस यात्रा की शुरुआत 12 अक्टूबर को कोच्चि से हैदराबाद के लिए सुबह की फ्लाइट से है। यहां पहुंचने के बाद, यात्री रात के लिए होटल में चेक-इन करने से पहले 'स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी', चारमीनार और गोलकुंडा फोर्ट जाएंगे। - दूसरे दिन रामोजी फिल्म सिटी घूमाया जाएगा। ब्रेकफास्ट के बाद यात्री को फिल्म स्टूडियो के विशाल कॉम्प्लेक्स जाएंगे। - तीसरे दिन पर्यटकों को मक्का मस्जिद और चौमहल्ला पैलेस ले जाएगा। जिसके बाद उन्हें हैदराबाद की आर्किटेक्चरल और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई जाएगी। दोपहर का समय यात्रियों के लिए खाली होगा ताकि वे अपनी मर्जी से धूम सके। - चौथे दिन यानी के 15 अक्तूबर को सैलर जंग म्यूजियम और बिड़ला मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। लंच के बाद, यात्री कोच्चि के लिए देर रात की वापसी वाली फ्लाइट से अपने शहर जा सकते हैं। IRCTC हैदराबाद टूर पैकेज की कीमत कितनी है? सिंगल ऑक्यूपेंसी: ₹34,450 प्रति व्यक्ति डबल ऑक्यूपेंसी: ₹28,200 प्रति व्यक्ति ट्रिपल ऑक्यूपेंसी: ₹27,150 प्रति व्यक्ति 5-11 साल के बच्चे: अलग बिस्तर के साथ ₹22,950 और बिना बिस्तर के ₹18,750 2-4 साल के बच्चे: बिना बिस्तर के ₹18,750 ₹27,150 प्रति व्यक्ति की शुरुआती कीमत ट्रिपल ऑक्यूपेंसी के लिए है। पैकेज में मिलने वाली सुविधाएं IRCTC टूर पैकेज में कोच्चि और हैदराबाद के बीच इकॉनमी-क्लास की फ़्लाइट, एयर-कंडीशंड होटल में तीन रात ठहरने की सुविधा, तीन बार नाश्ता और तीन बार डिनर शामिल हैं। यात्रियों को घूमने-फिरने के लिए एयर-कंडीशन्ड गाड़ियां मिलेंगी और कुछ खास दिनों पर गाइड की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

