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दिब्येंदु बोले- रेस्पेक्ट मांगी नहीं जाती, काम से मिलती है:कई बार रिजेक्शन झेले, स्ट्रगल में दोस्तों के घरों में गुजरे कठिन दिन

‘मामला लीगल है’ के दूसरे सीजन के साथ दिब्येंदु भट्टाचार्य फिर चर्चा में आए। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान उन्होंने करियर, स्ट्रगल और नए प्रोजेक्ट्स पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि इस सीजन में कहानी पहले से ज्यादा गहरी हो जाती है। इसमें इंटरनेशनल रिलेशन, फिलॉसफी और कैपिटल पनिशमेंट जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। शो सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, सोचने पर मजबूर करने वाला अनुभव बनता है। उन्होंने ‘अनदेखी 4’, ‘अल्फा’ और ‘गुलाबी’ पर अपडेट दिए। अमिताभ बच्चन, आमिर खान और हुमा कुरैशी के साथ काम के अनुभव साझा किए। मुंबई के शुरुआती संघर्ष और घर बनाने की जद्दोजहद भी याद की। सवाल: ‘मामला लीगल है’ के दूसरे सीजन में क्या खास है, और दर्शकों को क्या नया देखने को मिलेगा? जवाब: ज्यादा बताऊंगा तो स्पॉइलर हो जाएगा, लेकिन पहले सीजन में एक मजबूत दुनिया बनाई गई थी। दूसरे सीजन में वही दुनिया और गहरी हो जाती है। इस बार इंटरनेशनल रिलेशनशिप, फिलॉसफी और मेरे किरदार के जरिए अहम मैसेज देने की कोशिश की गई है। कैपिटल पनिशमेंट जैसे मुद्दों पर भी बात होती है। कॉमिक एलिमेंट के साथ यह सीजन डीप है और दर्शकों को एंटरटेनमेंट के साथ बहुत कुछ सिखाता है। सवाल: फिल्म ‘अल्फा’ और आलिया भट्ट के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: फिल्म के बारे में अभी ज्यादा नहीं कह सकता, क्योंकि एनडीए में है। यह एक बड़ी फिल्म है। आलिया भट्ट बहुत अच्छी एक्ट्रेस और शानदार इंसान हैं। उनसे मुलाकात वेब सीरीज ‘पोचर’ के दौरान हुई थी, जहां वो एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर थीं। सवाल: वेब सीरीज ‘अनदेखी 4’ में क्या नया देखने को मिलेगा? जवाब: ‘अनदेखी’ की दुनिया वही है, लेकिन कहानी में नए ट्विस्ट आते हैं। यह बिंज-वॉच शो है। एक बार देखना शुरू करेंगे तो खत्म करके ही उठेंगे। जैसे जिंदगी बदलती है, वैसे ही ‘अनदेखी’ की दुनिया भी बदलती रहती है। सवाल: फिल्म ‘गुलाबी’ में हुमा कुरैशी के साथ आपकी केमिस्ट्री कैसी रही? जवाब: हुमा कुरैशी शानदार एक्ट्रेस और बहुत अच्छी इंसान हैं। उनके साथ काम करना आसान और मजेदार होता है। हम सेट पर खूब एंजॉय करते हैं। साथ में खाना-पीना चलता रहता है। सवाल: आप खाने-पीने के कितने शौकीन हैं? जवाब: मैं खाने का बहुत शौकीन हूं। जहां जाता हूं, वहां का लोकल खाना ट्राय करता हूं। आउटडोर शूट में समय मिले तो खुद भी कुछ बना लेता हूं। सवाल: आपने कई दिग्गजों के साथ काम किया है। कुछ अनुभव बताइए? जवाब: मेरी पहली फिल्म ‘मॉनसून वेडिंग’ थी, जिसमें नसीरुद्दीन शाह थे। उन्होंने मुझे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ाया भी था। फिल्म में हमारे साथ कोई सीन नहीं था, जो मेरे लिए अफसोस की बात रही। करियर के शुरुआती दिनों में अमिताभ बच्चन और आमिर खान जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने का मौका मिला। सवाल: अमिताभ बच्चन के साथ आपका अनुभव कैसा रहा? जवाब: मेरी पहली कमर्शियल फिल्म ‘ऐतबार’ थी, जिसमें मुझे अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला। जब मैं नया-नया मुंबई आया था, तब उन्हें सेट पर देखना ही बड़ी बात थी। वो तीन-चार कुर्सियां लगाकर बैठते थे और किताब पढ़ते रहते थे। उनका डिसिप्लिन और ऑरा कमाल का है। एक एक्शन सीन में मैंने ज्यादा एग्रेसिव होकर परफॉर्म किया, तो उन्होंने हंसते हुए कहा- “आराम से, आराम से… मैं एक बूढ़ा आदमी हूं।.” यह उनका ह्यूमर और सादगी दिखाता है। उनकी फिटनेस देखकर मैं हैरान रह गया। एक किक सीन में उनका पैर मेरे कंधे से ऊपर पहुंच गया था। उनसे मैंने सीखा कि रेस्पेक्ट मांगी नहीं जाती, अपने काम से कमाई जाती है। सवाल: आमिर खान के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: आमिर खान के साथ फिल्म ‘मंगल पांडे’ में काम किया। वह बेहद डेडिकेटेड एक्टर हैं और स्क्रिप्ट पर गहराई से काम करते हैं। उनका सोचने का तरीका इंटरनेशनल है। वह को-एक्टर्स की मदद करते हैं। खुद क्यू देते हैं ताकि सीन बेहतर बन सके। उनका मानना है कि एक्टिंग पूरी तरह टीमवर्क है। सवाल: आपके करियर की शुरुआत और स्ट्रगल कैसा रहा? जवाब: मैं 1994–97 तक NSD में था और 2000 तक रेपर्टरी में काम किया। वहां की पॉलिटिक्स से परेशान होकर छोड़ दिया। पहले कोलकाता गया, लेकिन वहां काम नहीं मिला। फिर दिल्ली में ‘मॉनसून वेडिंग’ की कास्टिंग के दौरान मौका मिला। पहले किसी और को कास्ट किया गया था, लेकिन बाद में ऑडिशन के जरिए मुझे रोल मिला, यहीं से सफर शुरू हुआ। सवाल: आप ‘मॉनसून वेडिंग’ के बाद मुंबई आए। यहां आने पर पुराने दोस्तों का कितना सहारा मिला? जवाब: मुझे दोस्तों का बहुत सपोर्ट मिला। मेरा एक बैचमेट राजीव कुमार है, जो टीवी इंडस्ट्री में बड़ा नाम है। वह हमारे बैच का पहला इंसान था जिसने लोखंडवाला की कृष्णा कावेरी सोसाइटी में घर खरीदा था। मैंने उससे कहा था कि मैं तीन साल बाद आऊंगा और उसी के पास रहूंगा। लेकिन जब मैं मुंबई पहुंचा, उसे पता नहीं था कि मैं आ रहा हूं, क्योंकि उस समय फोन-पेजर का दौर था। कॉल करना भी सोच-समझकर होता था। वह शूटिंग के लिए 10 दिन बाहर था, तो मैं अपने दोस्त राजपाल यादव के घर चला गया। उस समय हम सब स्ट्रगल कर रहे थे और एक-दूसरे के साथ रहकर काम चलता था। सवाल: मुंबई में शुरुआती रहने का सफर कैसा रहा? जवाब: शुरुआत में कहीं टिककर रहना मुश्किल था। दोस्त ही सहारा थे। जब थोड़ा काम मिलने लगा, तब लगा कि अपना घर होना चाहिए। सबसे बड़ी दिक्कत लोन को लेकर आई। उस समय इनकम स्टेबल नहीं थी, इसलिए बैंक लोन देने को तैयार नहीं थे। बार-बार रिजेक्शन मिलता था। फिर जुगाड़ करके, थोड़ा सेविंग, थोड़ा उधार और भरोसे के दम पर आखिरकार मुंबई में अपना घर लिया। यह बड़ा मोमेंट था, क्योंकि स्ट्रगल के बाद घर लेना सेटल होने जैसा था। सवाल: इतने सालों बाद भी क्या शूटिंग के पहले दिन नर्वसनेस होती है? जवाब: आज भी लगता है कि यह मेरा पहला दिन है, पहला कैरेक्टर है। सोचता हूं इसे कैसे डेवलप करूंगा। सेट पर इतने लोग देखते हैं। कैमरामैन, साउंड वाले, तो अलग दबाव होता है। कॉन्फिडेंस होता है, लेकिन ओवरकॉन्फिडेंस नहीं लेता। मैं हमेशा संतुलित रहने की कोशिश करता हूं, क्योंकि वही सही स्थिति है। सवाल: कब लगा कि अब लोग आपको पहचानने लगे हैं? जवाब: थोड़ी पहचान ‘ब्लैक फ्राइडे’ और ‘देव डी’ के बाद मिलनी शुरू हुई। उस समय लोग चेहरे से पहचानते थे, नाम से नहीं। आज भी कई लोग कहते हैं, “आपको कहीं देखा है,” लेकिन सही जगह याद नहीं आती। कभी-कभी लोग गलत फिल्म या सीरीज का नाम भी बोल देते हैं। फिर मुझे कहना पड़ता है कि “भाई, गूगल कर लो।” असल में सही पहचान OTT के आने के बाद मिली। जब काम ज्यादा लोगों तक पहुंचता है और उन्हें पसंद आता है, तभी लोग दिल में जगह देते हैं। सवाल: शुरुआत में जब काम कम मिलता था, तब क्या करते थे? जवाब: कुछ खास नहीं करता था। घर पर समय बिताता था। बच्चों के साथ खेलना, उन्हें स्कूल छोड़ना, पियानो और डांस क्लास ले जाना, खाना बनाना, किताबें पढ़ना, फिल्में देखना। मैं फैमिली वाला इंसान हूं। काम नहीं होता था तो कोलकाता चला जाता था और वहां समय बिताकर वापस आता था। सवाल: क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग भी दी है? जवाब: मैंने कभी इंस्टिट्यूट खोलकर ट्रेनिंग नहीं दी, लेकिन जरूरत पड़ने पर वर्कशॉप और वन-ऑन-वन कोचिंग की। मैंने अर्जुन कपूर, परिणीति चोपड़ा, वाणी कपूर जैसे कलाकारों एक्टिंग की ट्रेनिंग दी है। कई फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में भी कोचिंग दी। वर्कशॉप आमतौर पर 7 से 15 दिन, और कभी-कभी एक महीने तक की होती थी। सवाल: आप एक्टिंग सिखाते समय किन बातों पर जोर देते हैं? जवाब: मैं सिर्फ डायलॉग या सीन नहीं सिखाता, बल्कि सोच सिखाता हूं। एक्टर की सोच अलग होनी चाहिए कि कैसे ऑब्जर्व करना है, चीजों को समझना है, ज्ञान इकट्ठा करना है और उसे परफॉर्मेंस में बदलना है। एक्टिंग जिम जाने जैसी चीज नहीं है। यह बड़ा और गहरा क्राफ्ट है। सवाल: जब आप इंडस्ट्री में आए, तो हीरो-विलेन को लेकर एक तय छवि होती है। क्या बचपन में आपने कभी सोचा था कि आप एक्टर बनेंगे? जवाब: नहीं, बचपन में मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक्टर बनूंगा। मैं पूरी तरह स्पोर्ट्स में था। फुटबॉल और क्रिकेट खेलता था। मुझे साहित्य में भी रुचि थी। मैं ‘लिटिल मैगजीन’ चलाता था, आर्टिकल लिखता था और कॉलेज मैगजीन में लिखता था। साथ ही थिएटर भी करता था। कोलकाता में मेरे दो थिएटर ग्रुप थे, एक में डायरेक्शन करता था और दूसरे में एक्टिंग। 2-3 और ग्रुप्स के साथ भी जुड़ा था। मैं स्टूडेंट यूनियन में भी एक्टिव था, इसलिए दिनभर व्यस्त रहता था। सवाल: तो एक्टिंग का ख्याल कब आया? जवाब: जब ग्रेजुएशन खत्म होने वाला था, तब लगा कि जिंदगी में कुछ खास नहीं किया। सिर्फ बीकॉम करके क्या करूंगा? उस समय उम्र 21-22 साल थी और स्पोर्ट्स में उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया था, जहां तक पहुंचना चाहता था। तभी लगा कि एक्टिंग ऐसी चीज है, जो मैं कर सकता हूं। सवाल: इसके बाद आपका सफर कैसे आगे बढ़ा? जवाब: मैंने थिएटर को गंभीरता से लेना शुरू किया। 1993 में IPTA (वेस्ट बंगाल) की तरफ से बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। 1994 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) जॉइन किया। एनएसडी में आने के बाद भी कभी नहीं सोचा था कि मुंबई जाऊंगा। मैं थिएटर ही करना चाहता था, इसलिए रिपर्टरी कंपनी जॉइन की। वाल: रिपर्टरी और थिएटर का अनुभव कैसा रहा? जवाब: रिपर्टरी में थिएटर करना मेरे लिए खास अनुभव था, क्योंकि वहां इज्जत और पैसे- दोनों के साथ काम करने का मौका मिलता था। सरकारी संस्था होने के कारण बड़े बजट में अलग-अलग तरह के नाटक करने का मौका मिलता था। यहां कॉमर्शियल दबाव नहीं होता था- टिकट बिके या न बिके, फर्क नहीं पड़ता था। हम ऐसे प्रयोग करते थे, जो बाहर इंडिपेंडेंट थिएटर में करना मुश्किल होता है। सवाल: फिर थिएटर छोड़कर आगे बढ़ने का फैसला कैसे लिया? जवाब: कुछ समय बाद माहौल अलग होने लगा। मुझे लगा कि हर किसी का अपना एजेंडा है और मेरा अपना। मैं बेवजह लड़ाई-झगड़े में समय खराब नहीं करना चाहता। इसलिए अपनी राह अलग बनाना बेहतर लगा और वहां से निकल आया। सवाल: आपके आने वाले प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से हैं? जवाब: कुछ प्रोजेक्ट्स लाइन में हैं। एक ‘राख’ है, जो अमेजन पर आएगी और उसका टीजर आ चुका है। इसके अलावा एक सीरीज साल के अंत तक आएगी। ‘गुलाबी’, ‘रुका हुआ फैसला’, ‘अल्फा’ जैसे प्रोजेक्ट्स भी हैं। साथ ही ‘चकदा एक्सप्रेस’ भी है, लेकिन उसकी रिलीज तय नहीं है। अगर सब सही से रिलीज हो जाएं, तो दर्शकों को अच्छी चीजें देखने को मिलेंगी।

दैनिक भास्कर 15 Apr 2026 5:30 am

गीतकार हसरत जयपुरी की 104वीं बर्थ एनिवर्सरी:भांजे डब्बू मलिक बोले- आखिरी सांस तक मामा के हाथ में कलम और किताब थी

हिंदी सिनेमा के दिग्गज गीतकार हसरत जयपुरी की 104वीं बर्थ एनिवर्सरी पर उनके भांजे डब्बू मलिक ने उनसे जुड़ी कई खास यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि हसरत जयपुरी न सिर्फ बेहतरीन शायर थे, बल्कि अपनी निजी जिंदगी में बेहद सादगी और अपनापन रखने वाले इंसान भी थे। चौपाटी पर खिलौने बेचने और बस कंडक्टर की नौकरी से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के शीर्ष गीतकारों में ले आया। शंकर-जयकिशन और राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने कई यादगार गाने दिए। आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब रही, जो उनके काम के प्रति जुनून को दिखाती है। लोग इतना इंपोर्टेंस उन्हें क्यों दे रहे हैं, यह जानने के लिए वर्षों लगे डब्बू मलिक बताते हैं- हम बहुत छोटे थे, तब खार स्थिति मामा हसरत जयपुरी के घर पर जाते थे। घर से बालकनी से सटा उनका बेड होता था, जहां बैठकर वे पोयट्री लिखते थे। हमारी बचपन की यादें यह है कि बड़े-बड़े डायरेक्टर, प्रोडूसर, एक्टर का हुजूम उनसे मिलने के लिए घर आते थे। हम छोटे थे, तब इतना क्लीयर नहीं होता था कि लोग उन्हें इतना रिस्पेक्ट या इतना इंपोर्टेंस क्यों दे रहे हैं। यह जानने के लिए हमें वर्षों लगे। फिर धीरे-धीरे पता चला कि मामाजी बहुत बड़े गीतकार हैं। अब पीछे मुड़कर देखता हूं, तब पाता हूं कि बाप रे! इस इंसान ने इतना बेहतरीन काम किया। उनकी सबसे खूबसूरत चीज यह होती थी कि उनको किमाम पान और परफ्यूम का बड़ा शौक था। उसी तरह उनकी खुशबूदार पर्सनालिटी भी थी। उनका बहन-बहनोई आदि का काफी बड़ा कुनबा था और वे सबको बड़ा प्यार देते थे। सबका खयाल रखते थे, उनकी यह सबसे बड़ी विशेषता थी। लोगों की जिंदगी के बारे में सोचते थे और उसमें मग्न रहते थे। हम लोग सोचते थे कि उनका अटेंशन लेना भी बहुत मुश्किल था। बिकॉज, वे दिन भर गीत लिखने में लगे रहते थे। जयकिशन की डेथ पर दिन भर रोते रहे मुझे उनकी एक शाम की बात याद है, जो कभी भूलता नहीं हूं। वह यह है कि जय किशन की डेथ हुई थी। उस दिन नेशनल रेडियो पर उनका लिखा गीत पूरे हिंदुस्तान में बज रहा था। वह गीत था- ‘गीतों का कन्हैया चला गया, अब गीत मेरे विरान हुए...’, इसे सुनकर उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। मुझे पता नहीं, शायद इसकी कम्पोजिशन शंकर-जयकिशन जी ने की होगी। लेकिन वह लम्हा कभी भुलाए भुला नहीं जाता। उनके गीतों पर शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने बड़ा दिलकश काम किया है। आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब थी मामा हसरत जयपुरी, मुझसे बेहद प्यार करते थे। मैं उनका लाडला था, क्योंकि घर में सबसे छोटा मैं ही था। मुझे उनसे बहुत प्यार मिला। हालांकि उस समय वे काफी ओल्ड हो चुके थे, लेकिन उन्होंने मुझे प्रेडिक्ट किया था कि तुम्हारे अंदर भी एक संगीतकार छुपा है, तुम गाने बना सकते हो। मैंने बोला कि मैं तो कुछ सीखा ही नहीं हूं। उस समय तक वे जुहू स्थिति अपने बंगले में रहने के लिए आ गए थे। जुहू में उनका भव्य बंगला था। फाइनेंशियली बहुत ही सिक्योर इंसान थे। वे और उनकी वाइफ ने फैमिली के लिए बड़े-बड़े डिसीजन लिये। अपने जमाने में उनकी बहुत ही सक्सेसफुल फैमिली रही है। वे आने वाली 10 जेनरेशन को सिक्योर करके चले गए। इतने महान आदमी थे। लेकिन मैंने एक चीज देखी है कि आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब थी। अपनी बहन यानी मेरी मम्मी के लिए लिखा गीत मेरी मम्मी मिल्किस, हसरत जयपुरी की सबसे छोटी बहन थीं। वे मेरी मम्मी को बहुत प्यार करते थे। प्यार से मम्मी को नन्हूं (छोटी) बुलाते थे। उन्होंने गीत- ‘सुनो छोटी-सी गुड़िया की लंबी कहानी...’, मेरी मम्मी के लिए लिखा था। मेरी मम्मी के जीवन में जो संघर्ष था, उसे ध्यान रखते हुए लिखा था। पापा ने काफी स्ट्रगल देखा था। उनके लिए तो मम्मी 15-16 साल की बहन थी, जिनकी शादी 18 साल की उम्र में हो गई। उन्होंने बहन की सारी जिंदगी देखी। हालांकि अपने हिसाब से वे जो कुछ भी कर सकते थे, वह किया। लेकिन मम्मी को देखकर वे हमेशा कहते थे कि यह मेरी गुड़िया है। उनको इन सब चीजों की तकलीफ उठाने की जरूरत नहीं थी, तब उन्होंने यह गाना लिखा था। अपने काम के प्रति फोकस्ड थे उनकी बहुत ही क्रिएटिव और बड़े कमाल की पर्सनालिटी थी। अपने काम के प्रति इतना फोकस्ड और इतना लीन होना उनसे सीखा जा सकता है। मतलब उनके पास किसी तरह का कोई डायवर्जन ही नहीं था। दिन भर लफ्जों की कहानी में बिजी रहते थे। उन्होंने कभी नॉर्मल जिंदगी जिया ही नहीं। हर एक पल, हर एक क्षण उनको सिर्फ म्यूजिक, लिरिक्स, गीत-गाने, मुखड़े ही सुनते थे। कमाल की शख्सियत थी। डायरेक्टर वगैरह से मिलना हो, तभी वे पार्टी-फंक्शन में जाते थे। अपने जमाने में राइटिंग कि हिसाब से कमर्शियल सक्सेसफुल इंसान रहे। उन्होंने अपने दौर में जो समय देखा है, वह कोई देख ही नहीं सकता। इतना पॉवर, इतनी कमर्शियल सक्सेस, बाप रे बाप! वॉव!! आज अतीत में जाएंगे, तब पाएंगे कि क्या गाने और क्या पिक्चर, क्या काम किया है। मैंने भी सुना है कि चौपाटी पर बैठकर खिलौने बेचते थे उनके बारे जितना सुना है, वह यह है कि वे अपनी फैमिली को संभालने जयपुर से मुंबई आए थे। यहां चौपाटी पर बैठकर खिलौने बेचते थे। फिर उनको बस कंडक्टर की नौकरी मिली। फिर किसी मुशायरे में बतौर पोएट उनको पृथ्वी राज कपूर मिले। पृथ्वी राज कपूर ने उन्हें रेकमेंड किया है कि मेरे बेटे राज कपूर से मिलिए। वहां से कहानी शुरू हुई। मैंने इतना मेहनत करने वाला इंसान अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा। ‘बाहरों फूल बरसाओ...’, ‘लिखे जो खत तुझे...’, ‘तुम मुझे यूं न भुला पाओगे...’, ‘एहसास तेरा होगा मुझ पर...’ ‘जिंन्दगी एक सफर है सुहाना...’ आदि उनके लिखे मेरे पसंदीदा गानों की लिस्ट ही खत्म नहीं होगी। आज सोचता हूं कि इतना दिग्गज इंसान इस पृथ्वी पर आया और इतने अच्छे रोमेंटिक गाने लिखकर चला गया। खुशकिश्मत हूं कि उन्हें गले लगाने का मौका मिला हम तो सारी जिंदगी उनके मुरीद ही बने रहेंगे। कभी-कभी खुद को खुशकिस्मत समझते हैं, जो उनको दिल से दिल गले लगाने मौका मिला। हम उनको किस कर सके और वे हमारे माथे को चूम सके। यह हमारी किस्मत थी कि इतने बड़े आदमी का हमें प्यार मिला। उन्हें वेज-नॉन वेज सब पसंद था। उनके बेटे भी कहते हैं कि गाना और खाना उनका फेवरिट रहा है। वे अपनी बहन यानी मेरी मम्मी के हाथ का खाना खाने के लिए शंकर-जयकिशन, राज कपूर आदि के साथ घर आया करते थे। मेरी मम्मी बहुत अच्छा नॉन वेजिटेरियन बनाती थी। वे घर पर फोन करके बोलते थे कि नंदो से कहना कि आज शाही कबाब बना दें। मेरी मम्मी के खाने पकाने पर उनको बड़ा गर्व था। वे बड़े साधारण तरीके जन्मदिन मनाते थे। जन्मदिन पर गरीबों को खाना बांटते थे।

दैनिक भास्कर 15 Apr 2026 4:30 am

रणबीर-आलिया की शादी की चौथी एनिवर्सरी:बर्फबारी के बीच सेलब्रैशन की तस्वीरें शेयर की; एक्ट्रेस ने लिखा- तू साथ है तो दिन रात है

बॉलीवुड कपल आलिया भट्ट और रणबीर कपूर ने 14 अप्रैल को अपनी शादी की चौथी एनिवर्सरी सेलिब्रेट की। इस मौके पर आलिया ने सोशल मीडिया पर अपने वेकेशन की कई अनसीन तस्वीरें और वीडियो शेयर किए हैं। इन तस्वीरों में यह कपल बर्फीली वादियों के बीच सुकून के पल बिताता नजर आ रहा है। आलिया ने इंस्टाग्राम पर अपनी स्कीइंग ट्रिप की झलक दिखाई है। शेयर किए गए वीडियो में दोनों पहाड़ों पर स्कीइंग करते और बर्फीली वादियों का लुत्फ उठाते दिख रहे हैं। एक फोटो में दोनों साथ बैठकर गर्म ड्रिंक्स एन्जॉय कर रहे हैं। हालांकि आलिया ने लोकेशन का खुलासा नहीं किया है, लेकिन विजुअल्स देखकर फैंस कयास लगा रहे हैं कि यह कपल स्विट्जरलैंड के गस्ताद में छुट्टियां मना रहा है। बेटी राहा संग नजर आए रणबीर कपूरतस्वीरों में रणबीर कपूर अपनी बेटी राहा के साथ नजर आ रहे हैं। रणबीर, राहा को साथ में लेकर 'एल्पका' (एक तरह का पहाड़ी जानवर) को खाना खिलाते दिख रहे हैं। आलिया ने पोस्ट के साथ एक इमोशनल नोट भी लिखा फिसलने और गिरने, चलने और बहुत सारी बातें करने के बीच... हमने अपने लिए एक बहुत ही शानदार लाइफ बना ली है। शॉर्ट में कहूं तो... तू साथ है तो दिन रात है। आलिया ने इस पोस्ट के बैकग्राउंड में अपनी फिल्म 'हाईवे' का म्यूजिक इस्तेमाल किया है। फैमिली ने दी बधाईआलिया की इस पोस्ट पर परिवार और बॉलीवुड सितारों ने खूब प्यार बरसाया। रणबीर की मां नीतू कपूर ने इसे 'परफेक्ट' बताया, वहीं आलिया की मां सोनी राजदान ने कमेंट किया यह सब कितना जादुई और प्यारा है। रणबीर की बहन रिद्धिमा ने भी दिल वाला इमोजी शेयर किया। अयान की फिल्म से शुरू हुई थी लव स्टोरीआलिया और रणबीर की प्रेम कहानी अयान मुखर्जी की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' के सेट पर शुरू हुई थी। कई सालों तक डेटिंग के बाद 14 अप्रैल 2022 को दोनों ने मुंबई में अपने घर 'वास्तु' में सादगी से शादी की थी। उसी साल नवंबर में उन्होंने बेटी राहा का स्वागत किया। अब यह जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ नजर आने वाली है। संजय लीला भंसाली की अगली फिल्म 'लव एंड वॉर' में रणबीर-आलिया के साथ विक्की कौशल भी लीड रोल में होंगे।

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 8:02 pm

बड़े डायरेक्टर्स को लगा था धुरंधर-2 सोमवार को बैठ जाएगी:फिल्म मेकर कुणाल कोहली का दावा, कहा- इंडस्ट्री ने इस फिल्म का सपोर्ट नहीं किया

आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बना रही है। इसी बीच फिल्म मेकर कुणाल कोहली ने धुरंधर 2 पर एक बड़ा खुलासा किया है। कुणाल ने बताया कि फिल्म की रिलीज से पहले इंडस्ट्री के कई बड़े निर्देशकों का मानना था कि यह फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। कुणाल कोहली ने स्क्रीन से बातचीत में कहा कि जब फिल्म रिलीज होने वाली थी, तब उन्होंने कई बड़े निर्देशकों से बात की थी। कुणाल के मुताबिक, इंडस्ट्री ने इस फिल्म का सपोर्ट नहीं किया था। मैंने जिन बड़े डायरेक्टर्स से बात की, उनका कहना था कि फिल्म सोमवार को बैठ जाएगी। लेकिन सोमवार को फिल्म बैठने के बजाय और ज्यादा चलने लगी। कुणाल ने आगे कहा कि किसी फिल्म की सफलता के लिए इंडस्ट्री का सपोर्ट होना जरूरी नहीं है, दर्शक खुद तय करते हैं कि फिल्म कैसी है। 'फेक कलेक्शन' पर कुणाल का तंजकुणाल ने फिल्म के 'जेनुइन कलेक्शन' की तारीफ करते हुए उन फिल्मों पर निशाना साधा जो आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ करती हैं। उन्होंने कहा, कुछ फिल्में फेक कलेक्शन दिखाती हैं, फिर भी अपने पूरे लाइफटाइम में 100 करोड़ नहीं जुटा पातीं। वहीं, धुरंधर 2 ने बिना किसी दिखावे के एक दिन में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की है। उन्होंने आदित्य धर, रणवीर सिंह और जियो स्टूडियोज को भारतीय सिनेमा की असली क्षमता दिखाने के लिए बधाई दी। हीरो को 'मर्द' होना चाहिएकुणाल कोहली ने फिल्म में रणवीर सिंह के किरदार की तारीफ करते हुए कहा कि हिंदी फिल्मों के हीरो को 'मर्द' दिखना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें विदेशी विषयों से प्रभावित होने के बजाय देसी कहानियां बनानी चाहिए। हमारे हीरो को खोया हुआ या कंफ्यूज लड़का नहीं होना चाहिए। जैसा 'सैयारा' और 'धुरंधर' में दिखाया गया, हीरो वैसा ही होना चाहिए। कुणाल ने 'बॉर्डर 2' का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह फिल्म 300 करोड़ पार कर गई थी, तब भी लोगों ने उसकी आलोचना की थी, जबकि वह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म थी।

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 5:44 pm

ग्लोबल बॉक्स ऑफिस:‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ बनी 2026 की सबसे बड़ी फिल्म; दुनियाभर में कमाए ₹5,200 करोड़

हॉलीवुड में 2026 की बॉक्स ऑफिस रेस में ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ ने बाजी मार ली है। मारियो फ्रेंचाइज की इस नई फिल्म ने दुनियाभर में 629 मिलियन डॉलर (लगभग 5,200 करोड़ रुपए) की कमाई के साथ साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का खिताब अपने नाम कर लिया है और अब यह 1 बिलियन डॉलर क्लब की ओर तेजी से बढ़ रही है। फिल्म ने रिलीज के दूसरे वीकेंड में ही जबरदस्त रफ्तार पकड़ी। अमेरिका और कनाडा के 4,284 थिएटर्स से इसे 69 मिलियन डॉलर करीब 570 करोड़ रुपए) की कमाई मिली, जिससे इसका घरेलू कलेक्शन 308.1 मिलियन डॉलर (लगभग 2,550 करोड़ रुपए) तक पहुंच गया। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में भी फिल्म ने 81 देशों से 83.5 मिलियन डॉलर (करीब 690 करोड़ रुपए) जुटाकर अपनी ग्लोबल पकड़ मजबूत कर ली है। हालांकि, फ्रेंचाइज की पिछली फिल्म ‘द सुपर मारियो ब्रॉस’ ने दूसरे वीकेंड तक 2,930 करोड़ रुपए लगभग की घरेलू कमाई की थी। आखिर में 10,800 करोड़ का आंकड़ा पार किया था।

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 4:24 pm

हॉलीवुड एक्टर जॉन सीना ने आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी:मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम बोले- संगीत जगत का बड़ा नुकसान हुआ

हॉलीवुड एक्टर और पूर्व रेसलर जॉन सीना ने सिंगर आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी है। सीना ने सोमवार को अपने इंस्टाग्राम पर आशा भोसले की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह स्टेज पर परफॉर्म करती नजर आ रही हैं। जॉन सीना की फिल्म हेड्स ऑफ स्टेट की को-स्टार प्रियंका चोपड़ा ने पोस्ट पर कमेंट करते हुए आशा भोसले को 'क्वीन' बताया। मलेशिया के प्रधानमंत्री ने भी दुख जताया वहीं, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने महान सिंगर आशा भोसले के निधन पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने इसे संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आशा भोसले की आवाज ने कई पीढ़ियों को जोड़ा। उन्होंने हजारों गानों के जरिए भावनाएं, परंपराएं और कहानियां दुनिया तक पहुंचाईं। उनकी आवाज में खास जादू था, जिसने दुनियाभर के लोगों के दिलों को छुआ।उन्होंने यह भी कहा कि लता मंगेशकर की छोटी बहन होने के बावजूद आशा भोसले ने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने हमेशा कुछ नया करने की कोशिश की और अपनी खास स्टाइल से लोगों के बीच बनी रहीं। अनवर इब्राहिम ने यह भी कहा कि मलेशिया की ओर से उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आशा भोसले की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 4:20 pm

माइथोलॉजिकल हॉरर कॉमेडी में नजर आएंगी यामी:‘नई नवेली’ की कहानी मॉडर्न है पर पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी हैं जड़ें

कंटेंट-ड्रिवेन सिनेमा के लिए जानी जाने वाली यामी गौतम अब अपने करियर के सबसे अलग और साहसी प्रोजेक्ट की ओर बढ़ चुकी हैं। फिल्म गलियारों में चर्चा है कि उन्होंने दिग्गज निर्माता-निर्देशक आनंद एल. राय के साथ एक मायथोलॉजिकल हॉरर कॉमेडी ‘नई नवेली’ के लिए हाथ मिलाया है। यह फिल्म लोक कथाओं और आधुनिक कहानी कहने के फॉर्मेट का अनोखा मेल होगी, जिसमें तकनीकी स्तर पर दक्षिण भारतीय सिनेमा की मजबूत भागीदारी देखने को मिलेगी। मालवणी में चल रही शूटिंग, 2 साल की तैयारी सीक्रेट रही सूत्रों के मुताबिक, फिल्म की शूटिंग मुंबई के मालवणी इलाके में पिछले एक हफ्ते से तेजी से जारी है। यह प्रोजेक्ट आनंद एल. राय के बैनर कलर येलो प्रोडक्शंस के तहत बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस फिल्म पर लगभग दो वर्षों से सीक्रेटली प्रोडक्शन का काम चल रहा था। कहानी वर्तमान समय में सेट है, लेकिन इसकी जड़ें हजारों साल पुरानी पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी हुई बताई जा रही हैं, जो इसे एक अलग सिनेमाई पहचान देंगी। मेरठ की पृष्ठभूमि में रहस्य और फैमिली ड्रामा भी दिखेगा फिल्म का कैनवास मॉडर्न-डे में है, जहां मेरठ के बैकग्राउंड में एक नवविवाहित बहू के घर में आने के बाद रहस्यमयी घटनाओं का सिलसिला शुरू होता है। यह कहानी किसी लुटेरी दुल्हन या ग्रे शेड वाले किरदार पर नहीं है, बल्कि एक फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें हॉरर और कॉमेडी के साथ इमोशनल एलिमेंट्स भी हैं। टेक्निकल क्रू में साउथ से जुड़े बड़े दिग्गज नाम होंगे शामिल फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका टेक्निकल क्रू है, जिसमें साउथ सिनेमा के बड़े नाम शामिल हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संगीतकार जी.वी. प्रकाश कुमार इससे हिंदी सिनेमा में डेब्यू करने जा रहे हैं और चूंकि फिल्म म्यूजिकल टोन लिए हुए है, इसलिए उनका संगीत इसकी आत्मा माना जा रहा है। ‘आर्टिकल 370’ के बाद यामी एक बार फिर एक्शन अवतार में दिखेंगी। दिव्य निधि ने लिखी है स्क्रिप्ट, दिखाएगी लोक कथाओं का गहरा पक्ष फिल्म की स्क्रिप्ट दिव्य निधि शर्मा ने लिखी है। उन्होंने इस स्क्रिप्ट में हॉरर और कॉमेडी के बीच एक बारीक संतुलन तैयार किया है। कहानी सिर्फ डराने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय लोक कथाओं के उस गहरे पक्ष को सामने लाती है, जो हजारों साल पुरानी मिथकीय कहानियों को आज से जोड़ता है। ‘धुरंधर 2' के लिए भी सराही गई यामी, आगे फिर पति आदित्य की फिल्म में दिखेंगी यामी फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में भी दिखीं। इसकी सफलता ने उनके करियर को नई मजबूती दी है। ‘धुरंधर 2' में उनके कैमियो को जिस तरह सराहा गया, उसने उनके एक्शन-ब्रांड को और मजबूत किया है। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि ‘नई नवेली’ 2026 के अंत तक रिलीज हो सकती है और अपने कॉन्सेप्ट के चलते स्लीपर हिट बनने की क्षमता रखती है। सूत्रों के मुताबिक, यामी का 2027 का शेड्यूल पूरी तरह से बड़े प्रोजेक्ट्स से भरा हुआ है। साल की शुरुआत में वह एक स्पाई थ्रिलर में दिखेंगी। इसमें उनका किरदार एक हाई-प्रोफाइल इंटेलिजेंस ऑफिसर का होगा। फिर 2027 के अंत तक पति आदित्य धर के निर्देशन में एक भव्य एक्शन फिल्म भी आएगी जो ‘धुरंधर’ यूनिवर्स को और विस्तार देगी।

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 4:00 pm

आशा भोसले को लेकर पोती जनाई का इमोशनल पोस्ट:लोगों ने दादी को अंतिम संस्कार में मिले सम्मान और प्यार पर जताया आभार

आशा भोसले की पोती जनाई भोसले उनकी दादी के अंतिम संस्कार में मिले सम्मान को देखकर इमोशनल हो गईं। जनाई ने सोमवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर कुछ तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें आशा भोसले के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लिपटा हुआ था। साथ ही उन्होंने लिखा कि मैं अभी इमोशन्स से ओवरवेल्म्ड हूं… जब संभव होगा, तब कुछ लिखूंगी। लेकिन इतना जरूर कहना चाहती हूं कि आज और उससे आगे भी बहुत से लोगों ने उनका सम्मान किया और उन्हें इतना प्यार दिया। मैं दिल की गहराइयों से आप सभी का धन्यवाद करती हूं। जनाई ने आगे लिखा, वह इस सब की पूरी हकदार थीं। मुझे एहसास है कि वह हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी और ऊपर से सब कुछ देख रही हैं। आशा भोसले का निधन आशा भोसले का रविवार को 92 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। सोमवार को उनका राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। उन्हें महाराष्ट्र पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। अंतिम संस्कार में आमिर खान, विक्की कौशल, अनु मलिक, शान समेत कई सेलेब्स श्रद्धांजलि देने पहुंचे। देखें आशा भोसले के अंतिम संस्कार की तस्वीरें- आशा भोसले के घर कई सेलेब्स पहुंचे शिवाजी पार्क श्मशान घाट में अंतिम संस्कार से पहले सोमवार सुबह आशा भोसले के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मुंबई स्थित उनके निवास ‘कासा ग्रांडे’ में रखा गया। सचिन तेंदुलकर, रणवीर सिंह, जैकी श्रॉफ, रितेश देशमुख सहित कई सेलेब्स अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। देखें अंतिम दर्शन के दौरान की तस्वीरें-

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 2:42 pm

एक्टर राम चरण बोले- मैं सख्त पिता हूं:बच्चों को रिस्क लेना और मिट्टी में खेलना सिखाता हूं, पत्नी उपासना घर में केयरिंग रोल निभाती हैं

साउथ एक्टर राम चरण इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी पेरेंटिंग स्टाइल यानी बच्चों को पालने के तरीके पर खुलकर बात की। तीन बच्चों के पिता राम चरण ने खुद को एक ‘रफ’ (एक तरह से सख्त) पिता बताया है। उनका मानना है कि बच्चों को बचपन से ही चुनौतियों का सामना करना और जोखिम लेना सीखना चाहिए। बच्चों को जोखिम लेना सिखाते हैं एक्टरएस्क्वायर इंडिया के साथ बातचीत में राम चरण ने बताया कि वे अपने बच्चों के लिए किस तरह के पिता हैं। उन्होंने कहा, मैं वह पिता हूं जो बच्चों को कूदने, गंदा होने और रिस्क लेने के लिए मोटिवेट करता है। मैं चाहता हूं कि वे बेझिझक बाहर खेलें और मिट्टी में गंदे होने से न डरें। एक्टर के मुताबिक, जब उनके बच्चों को हिम्मत की जरूरत होती है, तो वे उनके पास आते हैं। उपासना और राम चरण के बीच पेरेंटिंग बैलेंसराम चरण ने अपनी पत्नी उपासना कामिनेनी के रोल के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि उनके घर में पेरेंटिंग का एक सही बैलेंस है। उपासना बच्चों के लिए ममता और केयर का सेंटर हैं। जब बच्चों को आराम और सुकून चाहिए होता है, तो वे अपनी मां के पास जाते हैं, लेकिन किसी भी मुश्किल चुनौती का सामना करने के लिए वे अपने पिता की ओर देखते हैं। कहा- बच्चों के लिए ‘प्रेजेंट’ रहना जरूरीएक्टर ने पेरेंटिंग को लेकर एक जरूरी सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि बच्चे सलाह सुनने से ज्यादा अपने माता-पिता के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। राम चरण ने कहा, मैं सबसे पहले एक ऐसा पिता बनना चाहता हूं जो हर पल अपने बच्चों के साथ मौजूद रहे। 2012 में हुई थी शादी, तीन बच्चों के पिताराम चरण और उपासना की निजी जिंदगी की बात करें तो दोनों ने 2012 में शादी की थी। कपल ने 2023 में अपनी पहली बेटी 'क्लिन कारा' का स्वागत किया। इसके बाद जनवरी 2026 में उनके घर जुड़वां बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) का जन्म हुआ। अब राम चरण दो बेटियों और एक बेटे के पिता हैं। अपकमिंग फिल्म ‘पेद्दी’ में आएंगे नजरराम चरण इन दिनों अपनी फिल्म ‘पेद्दी’ की तैयारी में बिजी हैं। यह एक स्पोर्ट्स एक्शन ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन बुच्ची बाबू सना कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ जान्हवी कपूर, शिवराजकुमार और जगपति बाबू जैसे कलाकार अहम रोल में नजर आएंगे।

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 2:27 pm

'धुरंधर' के दोनों पार्ट ने वर्ल्डवाइड ₹3000 करोड़ कमाए:ऐसा करने वाली पहली भारतीय फिल्म; पहले पार्ट ने ₹1307 करोड़, दूसरे ने ₹1718 करोड़ कमाए

रणवीर सिंह स्टारर फिल्म धुरंधर और धुरंधर 2 ने मिलकर दुनियाभर में 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली, जिसके बाद यह 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म फ्रेंचाइजी बन गई है। जब किसी एक फिल्म की सफलता के बाद उसके एक से ज्यादा पार्ट बनाए जाते हैं, तो वह एक फ्रेंचाइजी का रूप ले लेती है। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, धुरंधर 2 का इंडिया में नेट कलेक्शन ₹1,088.62 करोड़ और इंडिया ग्रॉस ₹1,303.37 करोड़ हो चुका है। ओवरसीज में फिल्म ने ₹415.25 करोड़ की कमाई की है। इसके साथ ही फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹1,718.62 करोड़ पहुंच गया है। बता दें कि ग्रॉस कलेक्शन टिकट से कुल कमाई और नेट कलेक्शन टैक्स के बाद की कमाई होती है। दोनों फिल्मों का वर्ल्डवाइड कलेक्शन ₹3,025.97 करोड़ पहुंचा 5 दिसंबर 2025 में रिलीज हुई धुरंधर ने दुनियाभर में करीब ₹1,307.35 करोड़ का कलेक्शन किया था। वहीं, 19 मार्च 2026 में रिलीज हुए इसके सीक्वल धुरंधर 2 ने महज 26 दिनों के भीतर लगभग ₹1,718.62 करोड़ की कमाई कर ली। इस तरह दोनों फिल्मों का कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन ₹3,025.97 करोड़ पहुंच गया है। खास बात यह है कि धुरंधर 2 अभी सिनेमाघरों में चल रही है। धुरंधर ने कमाई के मामले में भारतीय सिनेमा की अन्य बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। पुष्पा की दोनों पार्ट की कुल कमाई करीब ₹2,192 करोड़ के आसपास रही थी। पुष्पा ने करीब ₹350.10 करोड़ और दूसरे पार्ट ने ₹1,742.10 करोड़ दुनियाभर में कमाए थे वहीं, बाहुबली के दोनों पार्ट ने करीब ₹2,438 करोड़ का बिजनेस किया था। बाहुबली ने करीब ₹650.00 करोड़ और दूसरे पार्ट ने ₹1,788.10 करोड़ दुनियाभर में कमाए थे। धुरंधर को शानदार रिस्पॉन्स मिला था धुरंधर के पहले पार्ट ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपए कमाए। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 1,005.85 करोड़ रुपए रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए हुआ। वहीं, 894.49 करोड़ रुपए की कमाई के साथ ही यह हिंदी भाषा में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। विदेशी बाजारों में भी फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब 299.5 करोड़ रुपए कमाए। अमेरिका और कनाडा में 193.06 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर बाहुबली 2 का रिकॉर्ड भी तोड़ा। दिलचस्प बात यह थी कि फिल्म को खाड़ी देशों में रिलीज की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद शानदार सफलता मिली। साथ ही यह भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘A’ रेटेड फिल्म बनी। ……..……..……..…….. धुरंधर 2 से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर 2 रिव्यू; रणवीर की फिर दमदार परफॉर्मेंस: नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 12:43 pm

पंजाब किंग्स के शानदार प्रदर्शन की सलमान ने की तारीफ:प्रीति जिंटा को बधाई देते हुआ कहा- टीम बहुत अच्छा खेल रही है

बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने सोमवार को एक्ट्रेस प्रीति जिंटा को उनकी टीम पंजाब किंग्स (PBKS) के IPL 2026 में अब तक के शानदार प्रदर्शन को लेकर बधाई दी। बता दें कि IPL 2026 में PBKS का प्रदर्शन अब तक काफी शानदार रहा है। टीम फिलहाल 4 मैचों में 3 जीत और 1 बेनतीजा (No Result) मैच के साथ 7 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल में दूसरे स्थान पर है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सलमान खान ने लिखा, “शाबाश जिंटा! बधाई हो जिंटा, टीम बहुत अच्छा खेल रही है…।” फैंस ने पुराने ट्वीट की याद आई सलमान का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। दरअसल, फैंस ने इस ट्वीट की तुलना साल 2014 में किए गए सलमान के पुराने पोस्ट से की, जिसमें उन्होंने पूछा था, “जिंटा की टीम जीती क्या?” सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे “12 साल बाद आया सबसे अच्छा सीक्वल” बताते हुए फनी रिएक्शन दिए। कुछ यूजर्स ने “टाइगर जिंटा है” जैसे कमेंट भी किए। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया सलमान खान और प्रीति जिंटा लंबे समय से दोस्त हैं और उन्होंने कई फिल्मों में साथ काम किया है, जिनमें चोरी चोरी चुपके चुपके, जान-ए-मन, और हर दिल जो प्यार करेगा शामिल हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान जल्द ही अपकमिंग फिल्म मातृभूमि में नजर आएंगे। वहीं इसके अलावा एक्टर जल्द ही दिल राजू के साथ अपकमिंग फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। इस फिल्म में नयनतारा भी नजर आएंगी और इसका डायरेक्शन वामशी पेडिपल्ली करेंगे। इस बीच, प्रीति जिंटा आने वाली फिल्म लाहौर 1947 में सनी देओल, शबाना आजमी, अली फजल और करण देओल के साथ नजर आएंगी। फिल्म का म्यूजिक ए. आर. रहमान ने बनाया है और गाने के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं। वह वाइब नाम के एक प्रोजेक्ट में भी नजर आएंगी।

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 12:02 pm

लता मंगेशकर-आशा भोसले की याद में बनेगा अस्पताल:भाई हृदयनाथ बोले- पुणे में एशिया का सबसे बड़ा हॉस्पिटल बनाने की कोशिश कर रहे हैं

सिंगर लता मंगेशकर और आशा भोसले की याद में पुणे में एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाया जाएगा। दोनों सिंगर्स के भाई और म्यूजिक डायरेक्टर हृदयनाथ मंगेशकर ने सोमवार को यह जानकारी दी। हृदयनाथ मंगेशकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका जन्म पुणे में हुआ और उनकी मां और लता मंगेशकर ने इसी शहर में गरीबों की सेवा के लिए अस्पताल बनाने का सपना देखा था। उन्होंने बताया कि करीब 25 साल पहले परिवार और डॉक्टरों ने इस अस्पताल को बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उस समय यह पूरा नहीं हो सका। हृदयनाथ ने कहा कि बाद में परिवार ने निर्णय लिया कि अस्पताल लता मंगेशकर के नाम पर बनाया जाएगा और इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई थीं। 16 तारीख के दिन इसके मुहूर्त की योजना थी, लेकिन इसी बीच अचानक आशा भोसले का निधन हो गया। उन्होंने कहा कि अब परिवार ने तय किया है कि अस्पताल लता मंगेशकर और आशा भोसले दोनों के नाम पर बनाया जाएगा। हम इसे एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आशा भोसले का निधन आशा भोसले का रविवार को 92 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। सोमवार को सिंगर आशा भोसले का राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। उन्हें महाराष्ट्र पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। अंतिम संस्कार में आमिर खान, विक्की कौशल, अनु मलिक, शान समेत कई सेलेब्स श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। देखें आशा भोसले के अंतिम संस्कार की 6 तस्वीरें- आशा भोसले के घर कई सेलेब्स पहुंचे शिवाजी पार्क श्मशान घाट में अंतिम संस्कार से पहले सोमवार सुबह आशा भोसले के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मुंबई स्थित उनके निवास ‘कासा ग्रांडे’ में रखा गया। सचिन तेंदुलकर, रणवीर सिंह, जैकी श्रॉफ, रितेश देशमुख सहित कई सेलेब्स अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। देखें अंतिम दर्शन के दौरान की तस्वीरें-

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 9:49 am

सारा अली खान ने उत्तराखंड में की ट्रैकिंग:तीन दिन तक 18km पैदल चली, मंडवे की रोटी और लिंगड़ी की सब्जी खाई

सारा अली खान तीन दिन के लिए उत्तराखंड में ट्रैकिंग के लिए पहुंचीं। इस दौरान वे टिहरी में 18 किलोमीटर पैदल चलीं। उन्होंने पंवाली कांठा बुग्याल में ट्रैकिंग कर बर्फबारी और पहाड़ी की खूबसूरत वादियों का दीदार किया। इस दौरान सारा ने स्थानीय लोगों के साथ समय बिताकर वहां के पहाड़ी खाना भी खाया। वह यहां तीन दिन रुकीं। स्काईहाइक कंपनी के ट्रैकर कुलदीप रावत ने बताया कि सारा अली खान टिहरी के घुत्तू क्षेत्र पहुंचीं। उन्होंने ग्वाणा गांव से लगभग 18 किलोमीटर लंबे पैदल ट्रैक की शुरुआत की। यह ट्रैक प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच से होकर गुजरता है। ट्रैक के दौरान सारा ने दोफन नामक स्थान पर रात्रि विश्राम किया। यहां होटल या रेस्टोरेंट जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसके बावजूद सारा ने बर्फबारी के बीच टेंट में रुककर रात बिताई। सारा ने लाल चावल, मंडवे की रोटी और लिंगड़ी की सब्जी खाई अगले दिन सुबह वह पंवाली कांठा बुग्याल पहुंचीं, जहां इन दिनों ताजा बर्फबारी के कारण पूरा क्षेत्र सफेद चादर से ढका हुआ है। उन्होंने बुग्यालों की मनमोहक वादियों और बर्फीले नजारों के बीच काफी समय बिताया। देर शाम वह दोफन वापस लौटीं और अगले दिन घुत्तू के लिए रवाना हो गईं। वे शनिवार को आई थीं और सोमवार शाम को वापस लौट गईं। ट्रैक के दौरान सारा अली खान ने स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया और पहाड़ी व्यंजनों जैसे लाल चावल, मंडवे की रोटी और लिंगड़ी की सब्जी का स्वाद भी लिया। ट्रैकर्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह स्थान बेहद खूबसूरत है। यहां आकर उन्हें बहुत सुकून मिला और यह अनुभव उनके लिए यादगार रहा। उन्होंने भविष्य में दोबारा यहां आने की इच्छा भी जताई। सारा ने अक्टूबर में किए थे रुद्रनाथ धाम के दर्शन सारा अली खान ने चमोली में स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले अक्टूबर में दर्शन किए थे। इस दौरान सारा 20 किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुंची थी। सारा ने अपनी ये यात्रा चमोली के गोपेश्वर के गंगोल गांव से शुरू की थी। इसके बाद एक दिन बाद वह ल्वींटी बुग्याल पहुंची, जहां पर रात्रि विश्राम के बाद उन्होंने फिर से ट्रैकिंग शुरू की और फिर रुद्रनाथ बाबा के मंदिर तक पहुंच गईं थी। इस पूरी यात्रा के दौरान सारा कई पथरीले और संकरे रास्तों से गुजरीं, बीच में उन्हें कई स्थानीय ग्रामीण भी मिले, जो सारा को देखकर काफी खुश हो गए। सारा अली खान ने ट्रेकिंग के दौरान झोपड़ीनुमा ढाबों पर रुककर चाय पी और स्थानीय लोगों से बातचीत की। उन्होंने यहां के धार्मिक विश्वास, लोक जीवन और पारंपरिक व्यंजनों के बारे में जाना। अभिनेत्री ने पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता और ग्रामीण संस्कृति से खासा प्रभावित होकर इसे यादगार अनुभव बताया था। सारा अली खान कई बार पहुंच चुकी हैं केदारनाथ सारा अली खान का केदारनाथ धाम से खास जुड़ाव रहा है। फिल्म ‘केदारनाथ’ के बनने के बाद वह कई बार धाम में दर्शन के लिए पहुंच चुकी हैं और अब तक बिना किसी रोक-टोक के पूजा-अर्चना करती रही हैं। हालांकि प्रस्तावित नई व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें भी अन्य श्रद्धालुओं की तरह तय प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है। सारा का केदारनाथ से पहला आध्यात्मिक और पेशेवर जुड़ाव साल 2017 में उनकी डेब्यू फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग के दौरान हुआ था। इसके बाद वह लगातार यहां आती रही हैं। अक्टूबर 2024 में दिवाली से ठीक पहले उन्होंने केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और फोटो शेयर की थीं। वहीं 2023 में उन्होंने दो बार धाम की यात्रा की 6 मई 2023 को केदारनाथ और तुंगनाथ के दर्शन किए, जबकि करीब छह महीने बाद अक्टूबर 2023 में वह फिर केदारनाथ पहुंचीं। इसके अलावा नवंबर 2021 में सारा अली खान अपनी दोस्त और अभिनेत्री जान्हवी कपूर के साथ भी केदारनाथ दर्शन के लिए पहुंची थीं। 6 साल पहले सारा अली खान ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए थे सारा अली खान ने 2020 में काशी में श्री विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन की थी। वो उन दिनों मां अमृता सिंह के साथ वाराणसी में फिल्म की शूटिंग कर रही थी। सारा इससे दो दिन पहले गंगा आरती में शामिल हुईं और काशी विश्वनाथ मंदिर में षोडशोपचार पूजा अर्चना की और शिवलिंग को स्पर्श किया। इस पर संतों व विद्वानों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। 3 साल पहले की थी महाकाल की पूजा सारा अली खान 2022 में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुईं थी। भस्म आरती के बाद उन्होंने गर्भगृह में जाकर शिवलिंग के दर्शन किए थे। नंदी हॉल में बैठकर करीब आधा घंटे तक मंत्रों का जाप किया था।

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 8:41 am

आशा-लता से कहा जाता- शमशाद जैसे गाओ:पिता की शर्त पर ताउम्र बुर्खा पहनकर गाया, फोटो खिंचवाने की मनाही थी, किशोर कुमार उठाते थे इनकी कुर्सी

1931 की बात थी भारत-पाकिस्तान उन दिनों एक था और कोई सीमाएं-सरहद नहीं थी। लाहौर-बॉम्बे और कोलकाता में फिल्में बनना शुरू हो चुकी थीं, रेडियो का दौर भी आ चुका था और कुछ म्यूजिक कंपनियां गाने रिकॉर्ड कर बेचा करती थीं। लाहौर की जेनोफोन म्यूजिक कंपनी उन दिनों काफी मशहूर हुआ करती थी। एक दोपहर एक नौजवान शख्स 12 साल की बच्ची का हाथ थामे स्टूडियो में पहुंचा। बच्ची का पहनावा एक दम आम था, जैसे किसी गरीब परिवार से हो। देखकर मालूम पड़ता था कि उसे अचानक ही वहां ऑडिशन में लाया गया हो। साथ पहुंचे शख्स ने साफ किया कि वो बच्ची को उसके परिवार से छिपाकर यहां लाया था। लीजेंड्री म्यूजिक कंपोजर गुलाम हैदर सामने बैठे थे। वही गुलाम हैदर, जिन्होंन लता मंगेशकर को ब्रेक दिया था। अब गाने की बारी थी, बच्ची ने झिझकते हुए पॉजिशन ली, स्टूडियो में सन्नाटा पसरा और बच्ची ने बहादुर शाह जफर की गजल मेरा यार मुझे मिले अगर गाना शुरू किया। उस बच्ची ने दो लाइन गाई ही थीं कि गुलाम हैदर ने गाना रुकवा दिया। बच्ची डर गई। मन में बस यही ख्याल था कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गई। गुलाम हैदर ने पास खड़े असिस्टेंट को देखा और कहा- बच्ची के साथ 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट बनवा लो। साथ ही कहा गया कि बच्ची को हर वो लग्जरी सुविधा दो, जो टॉप सिंगर्स को दी जाती है। उस बच्ची ने हुनर और गूंजती आवाज से वो कमाल दिखाया कि भारत की पहली प्लेबैक सिंगर बनीं और ‘सैंया दिल में आना रे…’, ‘कजरा मोहब्बत वाला….’ और ‘मुगल-ए-आजम’ का मशहूर गाना ‘तेरी महफिल में किस्मत आजमां कर हम भी देखेंगे…’, जैसे 6 हजार गाने गाए। करीब 100 साल बाद भी उनके गाने सुने और रीमिक्स किए जाते हैं। उस बच्ची का नाम था शमशाद बेगम, जिनकी लेजेंड्री सिंगर लता मंगेशकर भी फैन थीं। जब लता नई-नई गायिकी में आईं तो उन्हें शमशाद की तरह गाने की सलाह दी जाती थी। एक दौर वो भी आया जब किशोर कुमार जैसे लीजेंड्री सिंगर भी शमशाद की खिदमद में कुर्सी उठाए पीछे-पीछे चलते थे। जब सिंगर्स को एक गाने के लिए 100 रुपए फीस दी जाती थी, तब फिल्ममेकर्स शमशाद को 2000 रुपए फीस देने के लिए भी राजी हो जाया करते थे। पिता की शर्त में ताउम्र बुर्का पहनकर गाया। पाबंदी ऐसी कि जवानी के दिनों में कोई तस्वीर तक क्लिक नहीं करवाई। फिल्मों में हीरोइन बनने के बड़े मौके भी पिता के गुस्से के भेंट चढ़े। आज शमशाद बेगम की 107वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर जानिए, हिंदी सिनेमा के इतिहास में गायिकी की मिसाल शमशाद बेगम की समाजिक बेड़ियों से निकलकर इतिहास रचने की कहानी- बचपन में स्कूल और शादियों में गाने से हुनर को मिली पहचान जलियावाला हत्याकांड के ठीक एक दिन बाद 14 अप्रैल 1919 को शमशाद बेगम का जन्म ब्रिटिश इंडिया के लाहौर में हुआ। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि शमशाद का जन्म लाहौर नहीं बल्कि अमृतसर में हुआ। उनके पिता मियां हुसैन बख्श के मिस्त्री थे। उन्होंने तंगहाली में 8 बच्चों की परवरिश की। शमशाद महज 10 साल की थीं, जब उन्होंने शादियों में गाना शुरू कर दिया। नन्ही सी बच्ची की आवाज इतनी बुलंद थी कि हर बार उन्हें ही गाने के लिए बुलाया जाने लगा। कुछ रिश्तेदार खुद होकर एक आना दे दिया करते थे। एक दिन शमशाद ने स्कूल के प्रोग्राम में कोरस में गाना गाया। प्रिंसिपल आवाज सुनकर दंग रह गईं। उन्होंने पास बुलाकर कहा- देखना, एक दिन तुम परिवार का नाम रौशन करोगी। इसके बाद उन्हें स्कूल प्रेयर की हेड सिंगर बना दिया गया। 12 की उम्र में 2 लाइनें सुनकर बडे़ म्यूजिक डायरेक्टर ने दिए 12 गाने शमशाद की आवाज आस-पड़ोस में पहचान बना रही थी, लेकिन पिता मियां हुसैन इससे काफी चिढ़ते। उन्हें बेटी का गाना पसंद न था। रूढ़िवादी परिवार में गाना सुनना भी हराम था। घर में रेडियो तक नहीं था। लेकिन 1931 में उनके चाचा आमिर गजल, कव्वाली के बड़े फैन थे। एक रोज उन्होंने शमशाद को गाते सुना और उन्हें हुनर परखने में देर न लगी। जैसे ही उन्हें पता चला कि लाहौर में जेनोफोन म्यूजिक कंपनी के ऑडिशन हो रहे हैं, वो परिवार से छिपकर शमशाद को अपने साथ ले गए। ऑडिशन में मशहूर सिगंर गुलाम हैदर, जो कंपनी के म्यूजिक डायरेक्टर थे ने 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट दिया। तय हुआ कि हर गाने के 12 रुपए मिलेंगे। घर लौटकर जब चाचा ने ये खबर पिता को दी, तो वो खूब नाराज हुए। नाराजगी चरम पर थी। लंबी बहस के बाद चाचा ने भाई मियां हुसैन को समझाया कि ये हुनर हर किसी में नहीं होता, अगर पूरी दुनिया गाना गा रही है तो तुम्हें क्यों ऐतराज है। आखिरकार वो मान गए, लेकिन शर्तों पर। शर्त कि शमशाद का चेहरा कोई न देखे, उन्हें हमेशा बुर्का पहनकर गाना होगा। वो कभी तस्वीर क्लिक न करवाएं और न ही उनकी पहचान दुनिया के सामने आए। गायिकी के लिए उतावलीं शमशाद बेगम ने हर एक शर्त मानी और जेनोफोन म्यूजिक कंपनी केे साथ जुड़ गईं। शमशाद बेगम के शुरुआती कुछ गाने बिना उनके नाम के रिलीज किए गए। आरती गाने पर उनकी जगह सिंगर का नाम उमा देवी लिखा जाता और पंजाबी गानों में सुरंदिर कौर। उस समय रिकॉर्डिंग कंपनियों का मानना था कि लोग अपने धर्म के लोगों के ही गाने सुनना पसंद करते थे। जेनोफोन का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद उन्हें कंपनी की तरफ से 5000 रुपए दिए गए थे। जेनोफोन म्यूजिक कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद उन्हें पेशावर रेडियो और फिर दिल्ली के एयर इंडिया रेडियो में काम मिल गया। उनके गाने और प्रोग्राम काफी हिट हुआ करते थे। परिवार के खिलाफ जाकर की हिंदू लड़के से शादी साल 1932, शमशाद 13 साल की थीं, जब उनकी मुलाकात पड़ोस में रहने वाले वकालत के स्टूडेंट गणपत लाल बट्टो से हुई। दोनों की उम्र में बड़ा फासला था, लेकिन विचार जल्द ही एक होने लगे। शमशाद अक्सर चोरी-छिपे उनसे मिला करती थीं। ये वो दौर था, जब कम उम्र में ही शादी करवाने की कवायद थी, ऊपर से शमशाद का रूढ़िवादी परिवार। 13 की उम्र में ही उनके लिए लड़के देखे जाने लगे। एक रोज घरवालों तक शमशाद और गणपत लाल के रिश्ते की भनक लग गई। घर में हंगामा हुआ और लड़के देखने की गति बढ़ा दी गई। पिता की हर छोटी-बड़ी बात और शर्त मान लेने वालीं शमशाद इस बार अड़ गईं। उन्होंने कह दिया कि वो गणपत से ही शादी करेंगी। घरवाले इस रिश्ते के खिलाफ रहे, लेकिन इसके बावजूद शमशाद ने महज 15 साल की उम्र में गणपत लाल बट्टो से 1935 में शादी कर ली। हीरोइन बनने का मिला ऑफर, पिता की सख्ती के चलते ठुकराया साल 1937 में शमशाद बेगम के गानों की बदौलत उन्हें लाहौर के ऑल इंडिया रेडियो में काम मिला। उनके हर गाने और हर प्रोग्राम जबरदस्त हिट रहे। ये वो दौर था, जब फिल्में बनना शुरू हो चुकी थीं, लेकिन रिकॉर्डिंग और एडिटिंग की तकनीकें नहीं आई थीं। उस समय हीरो-हीरोइन अपने गाने खुद गाया करते थे। जब दलसुख पंचोली ने एक रोज रेडियो में शमशाद की आवाज सुनी तो उन्होंने तय कर लिया कि वो उन्हें अपनी फिल्म की हीरोइन बनाएंगे और उनकी आवाज में गाने भी डालेंगे। जबकि उन्होंने कभी शमशाद को असल में देखा तक नहीं था। उन्होंने ये ऑफर दिया, तो शमशाद ने भी हामी भर दी। शमशाद ने एक स्क्रीन टेस्ट भी दिया, जो सफल रहा। लेकिन जैसे ही ये बात उनके पिता तक पहुंची, उनका गुस्सा फट पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि अगर उन्होंने ऐसी कोई ख्वाहिश पाली तो उनका गाना भी बंद करवा दिया जाएगा। उस दिन शमशाद ने गायिकी को चुना और पिता से कहा कि वो वादा करती हैं कि कभी कैमरे के सामने नहीं आएंगी। वादे के मुताबिक, शमशाद हमेशा बुर्के में ही प्रोग्राम करती थीं। कुछ साथ काम करने वालों ने उन्हें देखा था, लेकिन उन्होंने कभी तस्वीर क्लिक नहीं करवाई। महबूब खान ने मुंबई आने के लिए दिया बंगले, गाड़ी, नौकर का ऑफर साल 1941 में रेडियो में शमशाद की आवाज सुनकर डायरेक्टर महबूब खान इतने इंप्रेस हुए कि उन्होंने शमशाद को बॉम्बे लाने का फैसला कर लिया। वो सीधे उनके लाहौर स्थित घर पहुंचे। पति के सामने बात रखी, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। इस पर महबूब खान ने कहा कि अगर शमशाद उनके साथ बॉम्बे आएंगी, तो बदले में वो उन्हें बंगला, गाड़ी और हर सामान के साथ नौकर भी देंगे। अगर शमशाद चाहें तो अपने साथ 3-4 लोग भी ला सकती हैं। पति राजी हो गए, लेकिन पिता फिर अड़ गए। इस पर महबूब खान ने उनसे कहा- 'आखिर कब तक बेटी को कुएं का मेंढ़क बनाए रखेंगे? इसे समुद्र में छोड़िए।' जब शमशाद ने खुद भी जाने का फैसला कर लिया, तो पिता को भी मानना ही पड़ा। भले ही शमशाद को महबूब खान बॉम्बे लाए, लेकिन उन्हें पहली बार फिल्मों में गाने का मौका गुलाम हैदर ने फिल्म खजानची (1941) दिया। इस फिल्म के लिए शमशाद को हर एक गाने के लिए 200 रुपए फीस दी जाने वाली थी, लेकिन वो इससे नाखुश थीं। एक दिन उन्होंने फीस बढ़ाने की बात कही। प्रोड्यूसर ने पूछा वो क्या उम्मीद करती हैं। जवाब मिला- ‘हर गाने के लिए 700 रुपए।’ प्रोड्यूसर ने हामी भरते हुए हंसकर कहा- 'अगर आप हर गाने के 2 हजार भी मांगतीं तो हम वो भी देते।' फीस बढ़ने पर जहां एक तरफ खुशी थी, दूसरी तरफ नाराजगी थी कि उन्होंने ज्यादा क्यों नहीं मांगे, लेकिन समय के साथ आगे खानदान (1942), तकदीर (1943), पूंजी, जमींदार जैसी फिल्में करते हुए उनकी फीस लगातार बढ़ती चली गई। उस दौर में जब हीरोइन खुद अपने गाने गाती थीं, तब शमशाद बेगम ने दूसरी एक्ट्रेसेस के लिए गाने रिकॉर्ड किए और इस तरह वो भारत की पहली प्लेबैक सिंगर बनीं। लोगों की डिमांड में शमशाद की कॉपी करती थीं लता मंगेशकर शमशाद बेगम के बाद और भी कई सिंगर्स हिंदी सिनेमा से जुड़ने लगीं। 40 के दशक में सुरैया, मुबारक बेगम पहचान बना चुकी थीं और आशा भोसले, लता मंगेशकर नई-नई आई थीं। लता मंगेशकर, शमशाद के कई गानों में कोरस सिंगर रही थीं। लता मंगेशकर पतली और सुरीली आवाज में गाती थीं, जबकि शमशाद की आवाज में खनक थी और भारीपन। तब लता से अक्सर कहा जाता था कि शमशाद की ही तरह गाओ। जब लता मंगेशकर को 1949 की फिल्म महल का गाना आएगा, आएगा, आनेवाला…, मिला तो उन्होंने इसे शमशाद की कॉपी करते हुए ही गाया था। इसी तरह आशा भोसले ने भी 1948 की फिल्म मुकद्दर का गाना आती है याद हमको भी.., शमशाद की स्टाइल में गाया। पीछे-पीछे कुर्सी उठाए चलते थे किशोर कुमार, भविष्यवाणी हुई थी सच स्क्रीन मैगजीन को दिए एक पुराने इंटरव्यू में शमशआद बेगम ने गायिकी के दिनों को याद कर कहा था, मैं कभी फिल्मी पार्टियों में नहीं जाती थी, लेकिन स्टूडियो में मेरी कई यादें हैं। फिल्मिस्तान स्टू़डियो में रिकॉर्डिंग करती थी, तो दो युवा लड़के कोरस में काम करते थे। दोनों रिकॉर्डिंग के समय मेरी कुर्सी उठाए पीछे-पीछे चलते थे। एक लड़का सलीके वाला था और दूसरा अजीब सा दिखता, मजाक करता और खुद को नाकाम कहता था। बात करने पर खुद का मजाक उड़ाकर कहता था कि मेरे बड़े भाई बड़े अभिनेता हैं। लेकिन आवाज ऐसी थी कि कोरस में भी अलग सुनाई देती थी। मैं हमेशा उससे कहती थी कि देखना एक दिन तुम अपने भाइयों से भी बहुत आगे जाओगे। आगे वो अजीब सा लड़का संगीत जगत के सबसे महान सिंगर्स में शआमिल हुआ, बताइए क्या कोई किशोर कुमार के बिना भारतीय संगीत की कल्पना कर सकता है। समय के साथ किशोर कुमार इतने हिट हुए कि उन्हें शमशाद बेगम के साथ फिल्म अंगारे के गाने गोरी के नैनों में नींद भरी और नया अंदाज का गाना मेरी नींदों में तुम गाने का मौका मिला। कभी नौशाद भी थे ऑफिस बॉय, कई न्यूकमर्स के लिए गाए गाने जिस समय शमशाद बेगम ऑल इंडिया रेडियो में गाती थीं, तब उनके ऑफिस बॉय नौशाद हुआ करते थे। उन्हें शमशाद की देखरेख और खिदमद का काम दिया गया था। जब नौशान ने कंपोजिशन शुरू किया और उन्हें पहली फिल्म मंगू मिली, तो वो इसके लिए सीधे शमशाद के पास ही गए। नौशाद नए थे, लेकिन शमशाद मान गईं और उनके लिए ‘मोहब्बत दिल के बस इतने से अफसाने’ और ‘जरा प्यार कर ले बाबू’ को आवाज दी। 1941 में एसडी बर्मन भी जब सिनेमा से जुड़े तो उन्होंने पहली बड़ी फिल्म बहार (1941) मिलने पर शमशाद से ही मदद मांगी। शमशाद ने फिल्म के लिए ‘सैंया दिल में आना रे’ गाना गाया, जो आज भी सुना जाता है। जब राज कपूर ने कहा- मैं इतनी फीस नहीं दे सकता साल 1948 में आई फिल्म आग में राज कपूर, शमशाद की आवाज चाहते थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनकी फीस दूसरे सिंगर्स से 10 गुना ज्यादा है तो वो कतराने लगे। एक दिन हिम्मत कर राज कपूर, शमशाद के पास पहुंच गए। उन्होंने कहा- मैं चाहता हूं कि आप मेरी फिल्म आग में गाना गाएं, लेकिन मैं आपको इतनी फीस नहीं दे सकता। ये बेबाकी और जुनून शमशाद को भा गया। एक समय में वो राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर की फैन भी हुआ करती थीं। उन्होंने राज कपूर से कहा कि वो कम फीस में ही उनके लिए गाएंगी। पति की मौत से ऐसी बिखरीं कि लगा दिया सिंगिंग पर विराम साल 1955 में शमशाद बेगम के पित गणपत लाल बट्टो का एक रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया। पति की मौत के बाद शमशाद ने गायिकी से दूरी बना ली। कई प्रोड्यूसर्स, कंपोजर ने शमशाद ने विनती की, लेकिन वो नहीं मानीं। शमशाद की गैरमौजूदगी में ही लता मंगेशकर को लगातार मौके मिलने लगे और स्टारडम मिला। साल 1957 में जब महबूब खान ने मदर इंडिया बनाना शुरू की, तो नरगिस की आवाज बनने के लिए शमशाद के अलावा किसी दूसरे सिंगर के बारे में न सोचा। शमशाद गायिकी छोड़ चुकी थीं, लेकिन महबूब खान भी उनसे गंवाने की जिद पर अड़े रहे। डेढ़ साल की मशक्कत के बाद आखिरकार शमशाद राजी हो ही गईं। 1957 में वो सफेद साड़ी पहनकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचीं। पहला गाना गाया, पी के घर आज प्यारी दुल्हनिया चली। गाना सुनते ही स्टूडियो में मौजूद हर कोई रो पड़ा। गाना खत्म करते करते, उन्होंने गायिकी छोड़ने की जिद भी खत्म कर दी। और कहा- रोने के लिए सारा दिन, सारी रात है, मैं एक आर्टिस्ट हूं। फिल्म मदर इंडिया का गाना ‘दुख भरे दिन बीते रे भैया’, ‘होली आई रे’, ‘पी के घर आज प्यारी दुल्हनिया चली’ हिट रहे। आगे उन्होंने हावड़ा ब्रिज, जाली नोट, लव इन शिमला, और मुगल-ए-आजम जैसी सुपरहिट फिल्मों को आवाज दी। फिल्म मुगल-ए-आजम का गाना तेरी महफिल में किस्मत आजमां कर हम भी देखेंगे…, शमशाद बेगम ने लता मंगेशकर के साथ गाया था। शमशाद ने निगार सुल्ताना को आवाज दी, जबकि लता मंगेशकर मधुबाला की आवाज बनीं। 1965 में शमशाद ने हमेशा के लिए फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया। हालांकि कुछ कंपोजर्स की जिद पर उन्होंने चंद फिल्मों में आवाज दी। रिटायरमेंट के बाद 1968 की फिल्म किस्मत का गाना कजरा मोहब्बत वाला जबरदस्त हिट रहा था। बेटी को नहीं दी गायिकी की इजाजत गायिकी छोड़ने के बाद शमशाद बेटी ऊषा और दामाद लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश रत्र के साथ मुंबई में रहने लगीं। शमशाद बेगम की इकलौती बेटी ऊषा भी सिंगर बनना चाहती थीं, लेकिन शमशाद ताउम्र इसके खिलाफ रहीं। उनका मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री में बहुत राजनीति बढ़ चुकी है। 6 सालों तक शमशाद को मृत समझते रहे लोग 1998 में खबर आई कि सिंगर शमशाद बेगम गुजर गईं। फिर 2004 में खबर आई कि जिसे 1998 में लोगों ने मरा हुआ मान लिया था, वो शमशाद अभी जिंदा है। पहले जिस शमशाद बेगम का इंतकाल हुआ था, वो सायरा बानो की दादी थीं। आखिरकार 23 अप्रैल 2012 में लेजेंड्री सिंगर शमशाद बेगम का 94 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी मौत की खबर कम लोगों को ही दी गई। वैसे तो शमशाद बेगम मुस्लिम थीं, लेकिन उनकी आखिरी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किया जाए।(नोट- ये कहानी शमशाद बेगम के राइटर गजेंद्र खन्ना को दिए गए इंटरव्यू, स्क्रीन को दिए गए इंटरव्यू और रिसर्च के आधार पर लिखी गई है।)

दैनिक भास्कर 14 Apr 2026 4:30 am

थलापति विजय की 'जन नायकन' लीक करने पर 6 गिरफ्तार:300 से ज्यादा पाइरेटेड लिंक हटाए गए, क्लाउड स्टोरेज के जरिए बांटी गई थी फिल्म

थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के इंटरनेट पर लीक होने के मामले में तमिलनाडु साइबर क्राइम विंग ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर फिल्म के क्लिप्स और मूवी को ऑनलाइन लीक करने का आरोप है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार इन लोगों ने क्लाउड स्टोरेज और शेयर्ड ड्राइव लिंक के जरिए फिल्म को सोशल मीडिया पर फैलाया था। 300 से ज्यादा पाइरेटेड लिंक हटाए गएसाइबर क्राइम विंग ने फिल्म की पायरेसी को रोकने के लिए स्पेशल टीमें बनाई थीं। इन टीमों ने अब तक इंटरनेट से 300 से ज्यादा अवैध लिंक ट्रैक करके उन्हें हटा दिया है। पुलिस गिरफ्तार किए गए लोगों के फोन और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। अथॉरिटीज अभी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, वेबसाइट्स और फाइल-शेयरिंग ऐप्स पर नजर रखे हुए हैं ताकि फिल्म को और ज्यादा लीक होने से बचाया जा सके। आरोपियों ने क्लाउड स्टोरेज का किया इस्तेमालइंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट, कॉपीराइट एक्ट और सिनेमैटोग्राफ एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने फिल्म को शेयर करने के लिए क्लाउड स्टोरेज डिजिटल तकनीक का सहारा लिया था ताकि वे पकड़ में न आ सकें। फिलहाल सभी 6 आरोपी न्यायिक हिरासत में भेज दिए गए हैं। प्रोडक्शन हाउस ने दी चेतावनीफिल्म के मेकर्स 'KVN प्रोडक्शंस' ने एक आधिकारिक बयान जारी कर लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अवैध लिंक को शेयर न करें। उन्होंने कहा, हम 'जन नायकन' के एक्सक्लूसिव कॉपीराइट मालिक हैं। हमारे संज्ञान में आया है कि कुछ लोगों ने गैरकानूनी तरीके से फिल्म के सीन और क्लिप्स को कॉपी करके सर्कुलेट किया है, जो डिजिटल पायरेसी का गंभीर मामला है। क्या है फिल्म का बैकग्राउंडएच. विनोद के निर्देशन में बनी फिल्म ‘जन नायकन’ एक बड़े बजट की एक्शन फिल्म है। इसमें थलापति विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, प्रकाश राज और गौतम वासुदेव मेनन जैसे बड़े स्टार्स नजर आएंगे। थलापति विजय की यह फिल्म उनकी आखिरी फिल्मों में से एक मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद वे राजनीति में सक्रिय होने वाले हैं।

दैनिक भास्कर 13 Apr 2026 6:13 pm

धुरंधर 2 ने 25 दिनों में कमाए ₹1712 करोड़:विदेशों में ₹415 करोड़ बटोरे; पुष्पा 2 का वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड तोड़ने से ₹30 करोड़ दूर

रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर द रिवेंज’ सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म को रिलीज हुए 26 दिन हो गए हैं और चौथे हफ्ते के बाद भी इसकी कमाई में मजबूती बनी हुई है। सैक्निल्क के मुताबिक, फिल्म अब अल्लू अर्जुन की 'पुष्पा 2: द रूल' के वर्ल्डवाइड कलेक्शन के रिकॉर्ड को तोड़ने के बेहद करीब पहुंच गई है। 25वें दिन तक धुरंधर 2 का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 1,712.98 करोड़ रुपए हो गया है। पुष्पा 2 का लाइफटाइम वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1,742.10 करोड़ रुपए है। फिल्म को यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए अब 30 करोड़ रुपए से भी कम की जरूरत है। भारत में कमाई में अब भी 150 करोड़ पीछेटिकटों की बिक्री के मामले में 'धुरंधर 2' फिलहाल 'पुष्पा 2' से पीछे चल रही है। बुकमायशो के डेटा के मुताबिक, धुरंधर 2 के अब तक 1.71 करोड़ टिकट बिके हैं। वहीं पुष्पा 2 के 1.92 करोड़ टिकट बिके थे। भारत में कमाई की बात करें तो पुष्पा 2 ने 1,234.10 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया था। धुरंधर 2 अब तक 1,083.67 करोड़ रुपए ही कमा पाई है। यानी घरेलू बाजार में फिल्म अभी 150.43 करोड़ रुपए पीछे है। हिंदी बेल्ट में दबदबा, साउथ में सुस्तधुरंधर 2 की सबसे ज्यादा कमाई हिंदी बेल्ट से हो रही है। फिल्म के कुल कलेक्शन का 94% हिस्सा यानी 1,017.79 करोड़ रुपए सिर्फ हिंदी मार्केट से आया है। तुलना करें तो पुष्पा 2 को साउथ के साथ-साथ हिंदी बेल्ट (812.14 करोड़) से भी भारी सपोर्ट मिला था। हालांकि, धुरंधर 2 को तेलुगु मार्केट से सिर्फ 41.85 करोड़ रुपए ही मिले हैं। यही कारण है कि फिल्म इंडिया नेट कलेक्शन में पुष्पा 2 से पीछे है। विदेशों में धुरंधर की जबरदस्त कमाईधुरंधर 2 के वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड के करीब पहुंचने की सबसे बड़ी वजह इसका ओवरसीज कलेक्शन है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस फिल्म ने पुष्पा 2 को काफी पीछे छोड़ दिया है। धुरंधर 2 ने विदेशों में 415.50 करोड़ रुपए बटोरे हैं, जबकि पुष्पा 2 का विदेशी कलेक्शन 259.50 करोड़ रुपए था। विदेशों से हुई 156 करोड़ की ज्यादा कमाई ने भारत में हुए कलेक्शन के अंतर को कम कर दिया है।

दैनिक भास्कर 13 Apr 2026 3:29 pm

गुरुग्राम में एंबियंस मॉल पहुंचे एक्टर राव राजकुमार:फिल्म टोस्टर की को-स्टार सानिया के साथ दी परफॉर्मेंस, फैंस संग ली सेल्फी

गुरुग्राम शहर में रविवार देर शाम बॉलीवुड स्टार राजकुमार राव और उनकी को-स्टार सान्या मल्होत्रा एंबियंस मॉल पहुंचे। उन्होंने फैंस के साथ खूब वक्त बिताया और आगामी फिल्म टोस्टर के बारे में रोचक चर्चा की। राजकुमार राव गुरुग्राम के मूल निवासी हैं और एक पुराने स्कूल के दोस्त ने उनसे पूछा, “भाई, ब्लू बेल्स के दिन याद हैं। राजकुमार राव ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि “हां यार, मुझे सब याद है। इस बातचीत ने पूरे माहौल को और भी गर्म कर दिया। अभिनेता ने फैंस के साथ सेल्फी ली, ऑटोग्राफ दिए और फिल्म की कहानी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि फिल्म 'टोस्टर' एक डार्क कॉमेडी है, जिसमें राजकुमार राव कंजूस (मिजर) रामकांत की भूमिका में हैं। कहानी एक साधारण टोस्टर गिफ्ट से शुरू होती है, जो धीरे-धीरे हत्या और अराजकता तक पहुंच जाती है। 5 अप्रैल को आएगी टोस्टर कोस्टार सान्या मल्होत्रा उनकी पत्नी की भूमिका में हैं। फिल्म में अर्चना पूरन सिंह, अभिषेक बनर्जी, फराह खान समेत कई दिग्गज कलाकार भी शामिल हैं। यह फिल्म राजकुमार राव और उनकी पत्नी पात्रालेखा के प्रोडक्शन हाउस कंपा फिल्म की पहली प्रोडक्शन है। यह 15 अप्रैल 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है। राजकुमार-सान्या की जोड़ी देखने पहुंचे फैंस एंबियंस मॉल में आयोजित इस इवेंट में काफी भीड़ उमड़ी। फैंस ने दोनों अभिनेताओं का जोश भरा स्वागत किया। राजकुमार राव ने कहा कि गुरुग्राम उनके लिए हमेशा खास रहा है और यहां के लोगों से मिलना उन्हें हमेशा एनर्जी देता है। सान्या कई बार गुरुग्राम आ चुकी सान्या मल्होत्रा ने बताया कि 'टोस्टर' में हंसी के साथ-साथ कई अनोखे ट्विस्ट हैं, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखेंगे। गुरुग्राम में वह पहले भी कई बार आ चुकी है और जब भी वह यहां आती है तो माॅल्स में घूमना मिस नहीं करती। फैंस के साथ इंटरैक्टिव सेशन भी किया एंबियंस मॉल में आयोजित इस इवेंट में माहौल बेहद उत्साही रहा। राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा ने फैंस के साथ इंटरैक्टिव सेशन भी किया, जिसमें दर्शकों ने फिल्म से जुड़े सवाल पूछे। राजकुमार राव ने बताया कि 'टोस्टर' उनकी सबसे अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिका है, क्योंकि इसमें उन्हें एक बेहद कंजूस व्यक्ति का किरदार निभाना पड़ा है। इवेंट के दौरान फिल्म का एक छोटा-सा मजेदार क्लिप भी दिखाया, जिससे फैंस और ज्यादा उत्साहित हो गए। इस मौके पर मॉल में सिक्योरिटी के कड़े इंतजाम किए गए थे। कई युवा फैंस ने कहा कि राजकुमार राव को अपने शहर में देखकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है।

दैनिक भास्कर 13 Apr 2026 6:44 am

आशा भोसले का अंतिम संस्कार आज:मुंबई के शिवाजी पार्क में शाम 4 बजे राजकीय सम्मान के साथ होगा; मल्टी-ऑर्गन फेल्योर से निधन हुआ था

सिंगर आशा भोसले का आज 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था। वे 92 साल की थीं। आशा को कई मेडिकल समस्याएं होने के चलते शनिवार रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मल्टी-ऑर्गन फेल्योर (शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था) के कारण डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके। आशा भोसले ने 82 साल के सिंगिंग करियर में 9 फिल्फमेयर समेत 100 से अधिक अवॉर्ड जीते। उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित थीं। इसलिए उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। 10 साल की उम्र में गाया पहला गानाआशा भोसले क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था। इस कारण लता की तरह आशा को भी कम उम्र में ही सिंगिंग की शुरुआत करनी पड़ी। आशा ने पहला गाना 10 साल की उम्र में गाया था। आशा भोसले ने अपने करियर में 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके गाने 'इन आंखों की मस्ती', 'दम मारो दम', 'पिया तू अब तो आजा' और 'चुरा लिया है तुमने' आज भी लोकप्रिय हैं। पीएम मोदी समेत कई लोगों ने दुख जताया आशा भोसले के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी, शाहरुख खान, हेमा मालिनी समेत कई लोगों ने दुख जताया। नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक आशा भोसले जी के निधन से मैं बेहद दुखी हूं।उनका असाधारण संगीत सफर, जो दशकों तक चला, हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करता रहा और दुनिया भर के अनगिनत दिलों को छू गया। चाहे उनकी भावपूर्ण धुनें हों या जीवंत रचनाएं, उनकी आवाज में एक कालातीत चमक थी।मैं उनके साथ हुई मुलाकातों को हमेशा संजोकर रखूंगा। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के साथ हैं। वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे। शाहरुख खान ने कहा, आशा ताई के निधन की खबर बेहद दुखद है। उनकी आवाज भारतीय सिनेमा के स्तंभों में से एक रही है और सदियों तक दुनिया भर में गूंजती रहेगी। वह ऐसी प्रतिभा थीं, जो समय से परे है। उन्होंने हमेशा मुझ पर अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखा, मैं उन्हें बहुत मिस करूंगा। रेस्ट इन पीस आशा ताई। लव यू। आशा भोसले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया स्कूल जाते हुए महज दो दिन ही हुए थे कि मास्टरजी ने चोरी पकड़ ली। उन्होंने दोनों को क्लासरूम से बाहर कर दिया और कहा कि एक फीस में एक ही बच्चा स्कूल आ सकता है। दोनों घर लौट गए। पूरी खबर यहां पढ़ें… इंदौर में बीता आशा भोसले का बचपन:सराफा की गुलाब जाबुन और रबड़ी से था खास लगाव; सीहोर के शरबती गेहूं की रोटियां थीं पसंद आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार शाम उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 13 Apr 2026 4:30 am

अलविदा आशा भोसले, रिजेक्शन से वर्ल्ड रिकॉर्ड तक का सफर:82 साल के सिंगिंग करियर में 100+ अवॉर्ड जीते; 20 भाषाओं में 12 हजार गाने

भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल और दिग्गज सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। आशा जी बीते 70 सालों से अधिक समय से हिंदी सिनेमा का अभिन्न हिस्सा थीं और शनिवार रात उन्हें चेस्ट इन्फेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। 10 साल की उम्र में अपना पहला गाना गाने वाली आशा का सिंगिंग करियर 82 साल का रहा, जिसमें उन्होंने 12 हजार से ज्यादा गाने गाकर अपना नाम 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज कराया। शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, पॉप, जैज और गजल तक, हर विधा में उन्होंने अपनी महारत साबित की। आशा भोसले ने 9 फिल्मफेयर जीते हैं। इनमें 7 बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, आशा को 100 से ज्यादा प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स मिले। आशा को कुल 18 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया। आशा का आखिरी गाना 2026 में रिलीज हुआ। पहले पढ़िए आशा जी के जीवन से जुड़े कुछ अनोखे किस्से… जब शाहरुख ने उठाया आशा जी का झूठा कप साल 2023 के क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान शाहरुख, आशा भोसले के साथ बैठे थे। जब आशा जी ने चाय पी ली, तो शाहरुख ने बड़े सम्मान के साथ उनके हाथ से खाली कप लिया और खुद उठाकर दूसरी तरफ रखने चले गए। आशा जी और उनकी पोती जनाई ने उन्हें मना भी किया, लेकिन किंग खान ने अपनी सीट से उठकर यह काम किया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो उनके निधन के बाद दोबारा वायरल हो रहा है। रफी साहब से लगी 500 की शर्त आशा भोसले ने एक बार बताया था कि 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा' गाने को लेकर उन्होंने मोहम्मद रफी से 500-500 रुपए की शर्त लगाई थी कि दोनों में से कौन बेहतर गाएगा। यह शर्त आशा जी ने जीती थी। इसी गाने के रियाज को लेकर उन्होंने मजेदार किस्सा सुनाया था कि वे इस गाने का इतना अभ्यास कर रही थीं कि उनके ड्राइवर को लगा उन्हें सांस लेने की कोई दिक्कत हो रही है। सोनू निगम ने धोए थे पैर सिंगर सोनू निगम ने आशा जी के निधन पर यादगार तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे आशा भोसले के पैर पानी से धोते हुए नजर आ रहे हैं। फोटो में तो सोनू खुशी-खुशी आशा जी के पैरों को पानी से धो रहे हैं। इसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी बैठे नजर आते हैं। वहीं दूसरी फोटो में वो स्टेज पर आशा भोसले के पांव को छू रहे हैं। रोते हुए रिकॉर्ड किया 'अब के बरस भेज भैया' फिल्म 'बंदिनी' का गाना 'अब के बरस भेज भैया' औरतों के दर्द को बयां करता था। आशा जी ने बताया था कि इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें अपने भाई की इतनी याद आई कि वे रो पड़ी थीं। उन्होंने रोते हुए ही इस गाने को सिर्फ एक टेक में रिकॉर्ड कर दिया था। वहीं, उनके मशहूर गाने 'दम मारो दम' को रेडियो और टीवी पर बैन कर दिया गया था, लेकिन इसी गाने के लिए उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला। लता दीदी के साथ प्रेशर और दूध-मलाई का शौक आशा जी बचपन में खेल-कूद और खाने-पीने की शौकीन थीं, खासकर दूध और मलाई उनकी कमजोरी थी। गायिकी के दौरान अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ उनके रिश्ते खास थे। उन्होंने बताया था कि जब वे दीदी के साथ 'मन क्यों बहका' गाना गाती थीं, तो एक-दूसरे की नजरों को देखकर लाइन उठाती थीं। उन्हें हमेशा लगता था कि दीदी के सामने उनकी गायिकी कम न पड़े। अब पढ़िए जन्म से आखिरी गाने तक की कहानी… सांगली में जन्म और गरीबी का संघर्ष 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोसले का बचपन बेहद तंगहाली में बीता। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक रंगमंच कलाकार और शास्त्रीय गायक थे। घर में संगीत का माहौल तो था, लेकिन आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। गरीबी का आलम यह था कि फीस न होने के चलते उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। बचपन का एक भावुक किस्सा है कि बड़ी बहन लता मंगेशकर जब स्कूल जाती थीं, तो वे आशा को चोरी-छिपे अपने साथ ले जाकर क्लास में बैठा लेती थीं। मास्टरजी से छिपकर दो दिन तो पढ़ाई चली, लेकिन तीसरे दिन पकड़ी गईं। मास्टरजी ने साफ कह दिया कि एक फीस में एक ही बच्चा पढ़ सकता है और दोनों को बाहर कर दिया।उस दिन लता ने फैसला किया कि वह खुद नहीं पढ़ेंगी बल्कि छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने अपना नाम कटवाकर आशा का एडमिशन कराया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब आशा महज 9 साल की थीं (1942), तब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार पर अचानक आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा। तब बड़ी बहन लता ने जिम्मेदारी संभाली और मंगेशकर परिवार पुणे से मुंबई आकर बस गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा दोनों ने ही कम उम्र में फिल्मों में गाना और छोटी भूमिकाएं करना शुरू कर दिया। करियर की शुरुआत और 1947 में रिजेक्शन आशा ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत 1943 में मराठी फिल्म 'माझा बाळ' के गाने ‘चला चला नव बाड़ा’ से की थी। इसके बाद 15 साल की उम्र में उन्हें 1948 में हिंदी फिल्म 'चुनरिया' का गाना 'सावन आया' मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम और गीता दत्त जैसी बड़ी गायिकाओं का दबदबा था। आशा को केवल वही गाने मिलते थे जिन्हें बड़ी सिंगर्स या तो छोड़ देती थीं या उनकी फीस फिल्ममेकर्स नहीं दे पाते थे। इसी संघर्ष के दौरान 1947 में आशा भोसले के साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। वे किशोर कुमार के साथ 'फेमस स्टूडियो' में फिल्म ‘जान पहचान' के लिए गाना रिकॉर्ड करने गई थीं। संगीतकार खेमचंद प्रकाश वहां मौजूद थे। जैसे ही आशा और किशोर दा ने माइक के सामने गाना शुरू किया, रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने म्यूजिक डायरेक्टर से बंगाली में कहा- इन दोनों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही, इनका गला खराब है, किसी और को बुलाओ। उन्हें अपमानित कर स्टूडियो से निकाल दिया गया। रात के 2 बज रहे थे, आशा और किशोर दा महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन के पास बैठकर अपनी किस्मत पर रो रहे थे और चर्चा कर रहे थे कि आखिर उनसे चूक कहां हुई। लेकिन आशा ने हार नहीं मानी। उन्होंने किशोर दा को ढांढस बंधाते हुए कहा था कि उनकी आवाज को कोई नहीं रोक सकता। 16 की उम्र में भागकर शादी और घरेलू हिंसा का दर्द आशा की निजी जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही। महज 16 साल की उम्र में उन्हें अपनी बड़ी बहन लता के सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से प्यार हो गया, जो उम्र में उनसे 15 साल बड़े थे। परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने घर से भागकर शादी कर ली। इस फैसले से मंगेशकर परिवार और खासकर लता दीदी से उनके रिश्ते बिगड़ गए। ससुराल में आशा को खुशियां नहीं मिलीं। उन्हें पति और ससुराल वालों के खराब व्यवहार और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। शक और तनाव के चलते यह रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया। 1960 में, जब आशा दो बच्चों के साथ थीं और तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं, गणपत राव ने उन्हें घर से निकाल दिया। मजबूरी में उन्हें अपने मायके लौटना पड़ा। इस कठिन समय में भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने बच्चों की परवरिश के लिए गायकी को अपना हथियार बनाया। ओपी नैयर का साथ, जब लता के साये से बाहर निकलीं आशा 1950 के दशक में संगीतकार ओपी नैयर ने आशा भोसले की आवाज की उस 'खनक' को पहचाना जिसे दुनिया खराब समझ रही थी। नैयर साहब ने ही पहली बार उनकी आवाज के 'वेस्टर्न मॉड्यूलेशन' का सही इस्तेमाल किया। 1954 में 'मंगू' से शुरू हुआ उनका सफर 1957 में फिल्म 'नया दौर' के साथ शिखर पर पहुंच गया। 'उड़े जब जब जुल्फें तुम्हारी' और 'मांग के साथ तुम्हारा' जैसे गानों ने आशा को सुपरस्टार बना दिया। नैयर साहब ने कसम खाई थी कि वे केवल आशा के साथ काम करेंगे और कभी लता मंगेशकर की ओर रुख नहीं करेंगे। उन्होंने आशा के लिए 324 गाने बनाए, जिनमें 'हावड़ा ब्रिज' का 'आइए मेहरबां' जैसा कल्ट क्लासिक शामिल है। इन्हीं गानों ने आशा को लता के साये से निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने में मदद की। दिलचस्प बात यह है कि जब आशा कामयाब हो गईं, तो वे उसी स्टूडियो में रिकॉर्डिंग के लिए पहुंचीं जहां से उन्हें निकाला गया था। वहां रॉबिन चटर्जी भी मौजूद थे। तब किशोर कुमार ने रिकॉर्डिस्ट को टोकते हुए कहा था- क्यों, आपने तो कहा था कि हम गा नहीं सकते। अब देख लीजिए हम कहां हैं। आरडी बर्मन (पंचम दा) और 'क्वीन ऑफ इंडिपॉप' का दौर 1960 और 70 के दशक में आरडी बर्मन के साथ आशा भोसले की जोड़ी ने भारतीय संगीत में क्रांति ला दी। पंचम दा ने आशा की आवाज को कैबरे, जैज और रॉक संगीत के लिए तराशा। 'दम मारो दम' (हरे रामा हरे कृष्णा) और 'पिया तू अब तो आजा' (कारवां) जैसे गानों ने आशा को 'क्वीन ऑफ इंडिपॉप' की उपाधि दिलाई। प्रोफेशनल रिश्ता जल्द ही प्यार में बदल गया। पंचम दा उम्र में आशा से 6 साल छोटे थे। जब उन्होंने शादी का फैसला किया, तो आरडी बर्मन की मां सख्त खिलाफ हो गईं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर शादी करनी है, तो मेरी लाश पर से गुजरना होगा। पंचम दा ने इंतजार किया और 1980 में, जब उनकी मां की स्थिति बदल गई, तब दोनों ने शादी कर ली। हालांकि 1994 में पंचम दा के निधन ने आशा को फिर अकेला कर दिया। उमराव जान और क्लासिकल सिंगिंग से जीता दिल जब दुनिया को लगने लगा था कि आशा केवल चुलबुले या कैबरे गाने ही गा सकती हैं, तब 1981 में फिल्म 'उमराव जान' आई। संगीतकार खय्याम के निर्देशन में उन्होंने 'दिल चीज क्या है' और 'इन आंखों की मस्ती के' जैसी गजलें गाकर साबित कर दिया कि वे शास्त्रीय गायन में भी लता मंगेशकर के बराबर खड़ी हैं। उपलब्धियां और वर्ल्ड रिकॉर्ड्स गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: 2011 में उन्हें दुनिया में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग (12,000+ गाने) करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता मिली। अवॉर्ड्स: उन्होंने 9 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स जीते (7 बेस्ट फीमेल प्लेबैक)। 1979 में उन्होंने अपना नाम नॉमिनेशन से वापस ले लिया ताकि नई सिंगर्स को मौका मिल सके। उन्हें 100 से ज्यादा प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। सर्वोच्च सम्मान: साल 2000 में 'दादा साहब फाल्के' और 2008 में 'पद्म विभूषण' से नवाजा गया। जुगलबंदी: उन्होंने मोहम्मद रफी के साथ करीब 900 और किशोर कुमार के साथ 600 से ज्यादा गाने गाए। सिंगिंग के साथ सफल बिजनेस आशा भोसले एक बेहतरीन कुक भी थीं। उनके हाथ के बने 'कढ़ाई गोश्त' और 'बिरयानी' के शौकीन राज कपूर और ऋषि कपूर जैसे दिग्गज थे। उन्होंने 'Asha's' नाम से रेस्तरां की एक ग्लोबल चैन शुरू की, जो दुबई, कुवैत और अबू धाबी जैसे शहरों में आज भी मशहूर है। हालांकि, उनके जीवन में दुखों का सिलसिला थमा नहीं। उनके बड़े बेटे हेमंत भोसले का 2015 में कैंसर से निधन हो गया। उनकी बेटी वर्षा भोसले ने 55 साल की उम्र में आत्महत्या कर ली थी। उनके छोटे बेटे आनंद भोसले ही उनके करियर को संभालते थे। इंटरनेशनल कोलैबोरेशन और आखिरी गाना आशा की आवाज सरहदों के पार भी गूंजी। 2006 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रेट ली के साथ 'यू आर द वन फॉर मी' गाना गाया, जो सुपरहिट रहा। उनके करियर का आखिरी गाना मार्च 2026 में ब्रिटिश वर्चुअल बैंड 'गोरिल्लाज' की एल्बम 'द माउंटेन' के लिए रिलीज हुआ। द शैडोई लाइट नाम के इस ट्रैक में वे हरी साड़ी पहने पोस्टर पर नजर आईं। 'गोरिल्लाज' के डेमन अलबर्न उनकी आवाज के बड़े प्रशंसक थे। 92 साल की उम्र तक उनकी आवाज में वही ताजगी और खनक बनी रही जो 1950 में थी।

दैनिक भास्कर 13 Apr 2026 4:00 am

आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

सिंगर आशा भोसले का शुक्रवार को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कई भाषाओं में गाने गए। इनमें से राजस्थानी भी एक है। उन्होंने अपने करियर में 14 राजस्थानी फिल्मों के 45 गाने गाए। 8 से ज्यादा राजस्थानी भजनों को भी अपनी आवाज दी। वहीं, 2019 में वे जयपुर में हुए एक कार्यक्रम में भी आई थीं। जहां उन्होंने गीतकार प्रसून जोशी के साथ अपने दिल की बात की थी। आशा भोसले को याद करते हुए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- मेरी राजस्थानी फिल्म के लिए उन्होंने गाना गाया था। गाने से पहले मुंबई में राजस्थानी शब्दों को लेकर उनकी ट्रेनिंग हुई। इसके लिए मैंने उन्हें सिर्फ 7 हजार रुपए दिए थे, लेकिन उन्होंने बिना रोक टोक के वो ले लिए। जानिए कैसे राजस्थानी फिल्मों में शुरू हुआ आशा भोसले का सफर… राजस्थानी फिल्मों में आशा भोसले की गायकी का श्रेय संगीतकार पंडित शिवराम को जाता है। उन्होंने 1961 में फिल्म ‘बाबासा री लाडली’ में आशाजी से पहली बार राजस्थानी भाषा में पांच गीत गवाए। इनमें ‘ओ रंग रंगीलो आलीजो...’, ‘बोल पंछीड़ा रे…’, ‘सूती थी रंग म्हैल में…’ और महेंद्र कपूर के साथ सुपरहिट डुएट ‘हिवड़ै सूं दूर मत जा….’ गीत गाए। इसके बाद ‘नानीबाई को मायरो’ में भी आशाजी ने अपनी आवाज दी। इसमें “म्हारो छैलभंवर केसरियो बनड़ो...” और “म्हाने चूनड़ी ओढ़ाजा...” जैसे गीत लोकप्रिय हुए। कभी रीजनल के रूप मे नहीं देखा राजस्थानी फिल्म विशेषज्ञ एमडी सोनी ने बताया- उस दौर में आशाजी ने ‘धणी लुगाई’, ‘गणगौर’, ‘गोपीचंद भरथरी’ और ‘ढोला मरवण’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी से चार चांद लगाए। राजस्थानी सिनेमा के दूसरे दौर में संगीतकार नारायण दत्त ने फिल्म ‘म्हारी प्यारी चनणा’ (1983) के सभी आठ गीत आशाजी से गवाकर इतिहास रच दिया। इनमें ‘सावण आयो रे…’, ‘चांदड़लो चढ़ आयो गिगनार…’ और ‘झिरमिर झिरमिर रे…’ जैसे गीत श्रोताओं की जुबां पर कई साल तक रहे। आशा भोसले ने कभी राजस्थानी सिनेमा को रीजनल के रूप में नहीं देखा, वे हमेशा अच्छी कंपोजिशन के साथ जुड़ना चाहती थीं। 14 राजस्थानी फिल्मों में 45 गाने गाए इसके बाद ‘थारी म्हारी’, ‘घर में राज लुगायां को’, ‘चूनड़ी’, ‘बेटी हुई पराई रे’, ‘बीनणी होवै तो इसी’ और ‘राधू की लिछमी’ (1996) जैसी फिल्मों में भी उनकी आवाज ने राजस्थानी सिनेमा को समृद्ध किया। कुल मिलाकर 14 फिल्मों में करीब 45 गीतों को आशाजी ने अपनी आवाज दी। फिल्मों के अलावा आशाजी ने राजस्थानी भजनों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 1981 में जारी एलपी रिकॉर्ड ‘म्हारा थे ही धणी हो गोपाल’ को मास्टरपीस माना जाता है, जिसमें गीतकार भरत व्यास के लिखे भजनों को उन्होंने अपनी आवाज दी। गाने के लिए दिए थे सात हजार रुपए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- 1996 में आई मेरी राजस्थानी फिल्म राधू की लक्ष्मी का गाना ‘रात ढलती जाए’ आशा जी ने गाया था। आरडी बर्मन साहब की डेथ हो गई थी, उसी समय में आशाजी से मिलने के लिए डेट ले रहा था। एक महीने बाद उनकी तरफ से समय दिया, जब वहां गया तो मैंने इस गाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पूछा- क्या यह बच्चों का गाना है। मैंने मना कर दिया। हारमोनियम पर गाकर बताया तो वे गाने की कंपोजिशन से बेहद प्रभावित हुईं। इस गाने पर दो घंटे तक हमारी बातचीत चली। मुम्बई में ही इसे रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने एक-एक शब्द की जानकारी ली। घर पर कई दिनों तक राजस्थानी शब्दों की ट्रेनिंग भी हुई। कंपोजिंग पसंद आ जाती तो वह किसी भी इंडस्ट्री को छोटा बड़ा नहीं समझती। रिेकॉडिंग के बाद मुझे कहा- तुम मुम्बई में नए हो, किसी प्रकार की कोई परेशानी हो तो सीधे बताना। अब मैं आपको एक रोचक बात बताता हूं। इस गाने के लिए हमारी 25 हजार पर बात हुई थी, लेकिन मैंने सात हजार रुपए ही दिए। उन्होंने बिना किसी रोक-टोक के वह ले लिए। गाने की दी सहमति, रिकॉर्ड नहीं करने का मलाल वीणा म्यूजिक के डायरेक्टर केसी मालू ने बताया- मैं गाना उनके साथ करना चाहता था। इसी सिलसिले में आशाजी से मिलने भी गया था। उन्होंने राजस्थानी गाने के लिए हामी भी भरी थी, लेकिन मैं ही गाना तैयार नहीं कर पाया। उन्होंने मुझे बताया कि जयपुर से महिपाल और भरत व्यास उनके मित्र थे। आशाजी ने ही मुझे बताया था कि राजस्थानी में आठ भजन उन्होंने गाए थे। मैं यह सुनकर हैरान था। ये भजन भरत व्यास ने लिखे थे। उन्होंने कहा कि आशाजी के हामी भरने के बाद भी मैं काम नहीं कर पाया। मैं उनके लिए गाना बनवा नहीं पाया। इसका आज तक अफसोस रहेगा। उन्होंने कई राजस्थानी फिल्मों में गाने गाए है। जब भी किसी ने गाने के लिए कहा, किसी को उन्होंने कभी मना नहीं किया। हमारी मैग्जीन स्वर सरिता लगातार पढ़ती थीं, उसी आधार पर मेरी मुलाकात हुई थी। ये भी पढ़ें… दोस्तों ने रुपए दिए, घर से भागकर मुंबई गए असरानी:जयपुर में काम किया, अजमेर में कहा था- सिंधी ने कभी भी भीख नहीं मांगी बॉलीवुड के हास्य अभिनेता असरानी का मुंबई में निधन हो गया। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति गहरी लगन की मिसाल रहा है। उनका असली नाम गोवर्धन असरानी था। वे एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार से थे। उनके पिता भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से जयपुर आ बसे और यहां कालीन की दुकान खोली। (पूरी खबर पढ़ें)

दैनिक भास्कर 12 Apr 2026 5:48 pm

आशा भोसले को कभी खराब आवाज बताकर स्टूडियो से निकाला:12,000 गानों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया; लता के साये से निकलकर बनाई पहचान

भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने अपनी आवाज से सात दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। लेकिन9 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद अपना करियर शुरू करने वाली आशा ताई को शुरुआती दौर में भारी संघर्ष करना पड़ा। 1947 में एक रिकॉर्डिस्ट ने उन्हें 'खराब गला' कहकर रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने 20 भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए और अपना नाम 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज कराया। आशा जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की 'आदर्श' छवि के बीच खुद को साबित करना था। उन्होंने चतुराई से अपनी आवाज में वेस्टर्न टच और मॉड्यूलेशन को पिरोया, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाता था। जब लोगों को लगा कि वे सिर्फ कैबरे गा सकती हैं, तब उन्होंने 'उमराव जान' की गजलें गाकर अपनी गायिकी को साबित किया। आशा भोसले ने शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, पॉप और गजल तक हर शैली में अपनी महारत साबित की। महाराष्ट्र के सांगली में जन्म, पिता शास्त्रीय गायक रहे आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वह प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और थिएटर कलाकार पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं। घर में संगीत का माहौल शुरू से ही था। उनके भाई-बहन लता मंगेशकर, मीना खडीकर, उषा मंगेशकर और हृदयनाथ मंगेशकर भी संगीत की दुनिया से ही जुड़े रहे। जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तब 1942 में उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा ने बहुत कम उम्र में गाना और फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाना शुरू कर दिया था। मराठी फिल्म से बॉलीवुड तक का सफर आशा भोसले ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत 1943 में एक मराठी फिल्म 'माझा बाळ' के गाने ‘चला चला नव बाड़ा’ से की थी। हिंदी सिनेमा में उन्हें पहला मौका 1948 में फिल्म 'चुनरिया' के गाने 'सावन आया' से मिला। शुरुआती दौर में आशा को वे गाने मिलते थे जिन्हें प्रमुख गायिकाएं जैसे लता मंगेशकर, शमशाद बेगम या गीता दत्त छोड़ देती थीं। उस समय उन्हें अक्सर फिल्मों में विलेन, डांसर या साइड किरदारों के लिए गाने के लिए बुलाया जाता था। आवाज को खराब बताया, स्टूडियो से रिजेक्शन मिला आज जो आवाज दुनिया भर में पहचानी जाती है, एक समय उसे भी नकारा गया था। 1947 में, जब आशा अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं, तब फिल्म ‘जान पहचान' (संगीतकार: खेमचंद प्रकाश) के एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए वे किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियो गई थीं। वहां के रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने उनकी आवाज सुनने के बाद कहा था, यह आवाज नहीं चलेगी, इनका गला खराब है, किसी और को बुलाओ। उस समय आशा को यह कहकर स्टूडियो से बाहर कर दिया गया था कि उनकी आवाज अच्छी नहीं है। इस घटना से किशोर कुमार काफी दुखी हुए थे। रात के 2 बज चुके थे और दोनों महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन पर उदास बैठे थे। तब आशा ने ही किशोर दा को ढांढस बंधाते हुए कहा था कि उनकी आवाज को कोई नहीं रोक सकता। इस रिजेक्शन ने आशा को तोड़ा नहीं, बल्कि और बेहतर बनने की प्रेरणा दी। आरडी बर्मन रहे करियर के बड़े टर्निंग पॉइंट्स 50 और 60 के दशक में बॉलीवुड में लता मंगेशकर, शमशाद बेगम और गीता दत्त का दबदबा था। शमशाद बेगम अपनी खनकदार आवाज और गीता दत्त अपने दर्द भरे और वेस्टर्न अंदाज वाले गानों के लिए मशहूर थीं। जब गीता दत्त अपनी निजी जिंदगी की परेशानियों के चलते रिकॉर्डिंग से दूर होने लगीं, तब ओ.पी. नैयर और एस.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों ने आशा भोसले की तरफ रुख किया। 1950 के दशक में नैयर ने आशा की आवाज की खनक को पहचाना। 1954 में फिल्म 'मंगू' से शुरू हुआ उनका साथ 'सीआईडी' (1956) और 'नया दौर' (1957) तक आते-आते ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। नया दौर का गाना 'मांग के साथ तुम्हारा' और 'उड़े जब जब जुल्फें तुम्हारी' ने उन्हें मुख्यधारा की टॉप सिंगर्स में शामिल कर दिया। इसके बाद 1960 और 70 के दशक में संगीतकार आरडी बर्मन (पंचम दा) के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत की परिभाषा बदल दी। पंचम दा ने आशा से 'दम मारो दम' (हरे रामा हरे कृष्णा) और 'पिया तू अब तो आजा' (कारवां) जैसे वेस्टर्न और जैज स्टाइल के गाने गवाए, जिन्होंने आशा को 'क्वीन ऑफ इंडिपॉप' बना दिया। जब लता के साये से बाहर आईं आशा आशा भोसले के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही बहन लता मंगेशकर के साथ कॉम्पिटिशन करना था। उस दौर में लता जी की आवाज को 'आदर्श' माना जाता था। आशा ने चतुराई से अपनी आवाज के साथ प्रयोग किए। उन्होंने महसूस किया कि अगर वह लता जैसी ही शैली अपनाएंगी, तो वह कभी अपनी पहचान नहीं बना पाएंगी। उन्होंने वेस्टर्न टच, मॉड्यूलेशन को अपनी आवाज में पिरोया, जो उस समय किसी अन्य सिंगर के पास नहीं था। उन्होंने गीता दत्त और शमशाद बेगम जैसे सिंगर्स को उनके ही दौर में कड़ी टक्कर दी और बाद में अलका याग्निक, कविता कृष्णमूर्ति और सुनिधि चौहान जैसी पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनीं। जब लोगों को लगा कि वे सिर्फ कैबरे गा सकती हैं, तब 1981 में फिल्म 'उमराव जान' आई। संगीतकार खय्याम के निर्देशन में आशा ने 'दिल चीज क्या है' और 'इन आंखों की मस्ती के' जैसी बेहतरीन गजलें गाकर क्लासिकल गायिकी में भी लता मंगेशकर के बराबर अपनी जगह पक्की कर ली। आशा भोसले का पहला बड़ा सम्मान और वर्ल्ड रिकॉर्ड आशा भोसले के करियर के सबसे हिट गाने सिंगिंग के अलावा कुकिंग और सफल रेस्तरां बिजनेस आशा भोसले केवल एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि एक शानदार कुक भी थीं। वह अक्सर कहती थीं कि अगर वह सिंगर न होतीं, तो एक रसोइया होतीं। उनके हाथ के बने 'कढ़ाई गोश्त' और 'बिरयानी' के मुरीद राज कपूर से लेकर ऋषि कपूर तक रहे। अपने इसी शौक को उन्होंने बिजनेस में बदला। उन्होंने 'Asha's' नाम से रेस्तरां की एक ग्लोबल चैन शुरू की। उनका पहला रेस्तरां दुबई में खुला, जिसके बाद कुवैत, बर्मिंघम, मैनचेस्टर और अबू धाबी जैसे शहरों में भी इसे विस्तार मिला। वह अपने रेस्तरां के शेफ्स को खुद ट्रेनिंग देती थीं। ब्रिटिश बैंड के साथ गाया आखिरी गाना आशा भोसले की आवाज सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं थी, बल्कि इंटरनेशनल म्यूजिक वर्ल्ड में भी उनका उतना ही सम्मान था। मार्च 2026 में रिलीज हुई मशहूर ब्रिटिश वर्चुअल बैंड ‘गोरिल्लाज’ की नौवीं एल्बम ‘द माउंटेन’ (पर्वत) में उनका गाना शामिल है। द शैडोई लाइट नाम के इस ट्रैक को अब उनके शानदार करियर के आखिरी अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। इसमें उन्होंने ब्रिटिश आर्टिस्ट ग्रफ राइस और सरोद उस्ताद अमान-अयान अली बंगश के साथ काम किया था। गोरिल्लाज बैंड बनाने वाले डेमन अलबर्न असल में 70 के दशक के बॉलीवुड संगीत और आरडी बर्मन के बहुत बड़े फैन हैं। उन्होंने कई इंटरव्यू में आशा भोसले की आवाज को 'साइकडेलिक' और 'एक्सपेरिमेंटल' बताया था। यही वजह थी कि उन्होंने अपनी इस नई एल्बम को भारत में रिकॉर्ड किया। इस एल्बम में आशा ताई के अलावा अनुष्का शंकर ने भी साथ काम किया है। वहीं आशा अपने अंतिम वर्षों में म्यूजिक रियलिटी शोज में जज के रूप में और लाइव कॉन्सर्ट्स में सक्रिय रहीं। 2023 में भी उन्होंने अपने 90वें जन्मदिन पर दुबई में परफॉर्म किया था। उनकी आवाज में जो ताजगी 1950 में थी, वही 92 साल की उम्र तक बरकरार रही।

दैनिक भास्कर 12 Apr 2026 3:21 pm

नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया

सुरों की मल्लिका आशा भोसले का आज 92 साल की उम्र में निधन हो गया। सिंगर को शनिवार रात चेस्ट इन्फेक्शन के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। आशा भोसले बीते 70 सालों से हिंदी सिनेमा का हिस्सा थीं। उन्होंने कई भाषाओं में रिकॉर्ड 12 हजार गाने गाए। उनके बिना हिंदी सिनेमा की कल्पना करना भी मुश्किल है, हालांकि एक समय ऐसा था जब ये कहकर आशा भोसले को रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाल दिया गया कि उनकी आवाज खराब है। आज दुनियाभर के कई होटलों की मालकिन आशा भोसले का बचपन गरीबी में बीता। तंगहाली का वो आलम था कि वो बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, जिससे पिता को फीस न देना पड़े। हालांकि पकड़े जाने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। पढ़िए आशा भोसले की जिंदगी से जुड़े ऐसे ही अनसुने किस्से- बहन के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं आशा भोसले 8 सितंबर 1933 में आशा भोसले का जन्म ब्रिटिश इंडिया के सांगली में हुआ। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर, रंगमंच कलाकार थे। घर में तंगहाली का वो आलम था कि बड़ी बहन लता मंगेशकर का जब स्कूल में दाखिला करवाया गया, तो वो आशा को चोरी-छिपे स्कूल ले जाने लगीं। मास्टर से छिपकर वो आशा को साथ बैठा लेती थीं। स्कूल जाते हुए महज दो दिन ही हुए थे कि एक रोज मास्टरजी ने चोरी पकड़ ली। उन्होंने दोनों को क्लासरूम से बाहर कर दिया और कहा कि एक फीस में एक ही बच्चा स्कूल आ सकता है। दोनों घर लौट गए। अगले दिन लता ने फैसला किया कि वो छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने पिता से बात कर स्कूल से अपना नाम कटवा दिया और अपनी जगह बहन आशा का एडमिशन करवाया। आशा महज 9 साल की थीं, जब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। ऐसे में लता ने ही संघर्ष कर हिंदी सिनेमा में कदम रखा और बहन की परवरिश की। परिवार पहले पुणे और फिर मुंबई आकर बसा। यहां महज 10 साल की उम्र में आशा भोसले ने गाना शुरू कर दिया। उन्हें पहला ब्रेक मराठी फिल्म माझा बल (1943) के गाने चला चला नाव बला से मिला। आशा महज 15 साल की थीं, जब उन्हें हिंदी फिल्म चुनरिया का सावन आया गाने का मौका मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम जैसी सिंगर्स की इंडस्ट्री में पकड़ थी। लता मंगेशकर भी धीरे-धीरे पहचान बना रही थीं, लेकिन आशा इस लिस्ट में कहीं नहीं थीं। उन्हें सिर्फ तब ही मौके मिलते थे, जब फिल्ममेकर्स या तो बड़ी सिंगर्स की फीस चुका नहीं पाते थे या दूसरी सिंगर्स इनकार कर देती थीं। गाना रिकॉर्ड करने पहुंचीं, तो आवाज पर ताना देकर स्टूडियो से निकाला गया आशा भोसले को एक बार खराब आवाज बताकर किशोर कुमार के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियों से बाहर निकाल दिया गया था। 1947 की बात है। आशा, किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियों में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म ‘जान पहचान' के लिए एक गाना रिकॉर्ड करने गई थी। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे। तब स्टूडियो में कोई खास सुविधा नहीं होती थी, माइक भी सिर्फ एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था। आशा और किशोर दा ने जैसे ही गाना शुरू किया, वहां रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने धीरे से म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद्र से बंगाली में कहा- इन दोनों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही, दूसरे सिंगर लाओ। पास खड़े किशोर दा ये बात समझ गए और उन्होंने आशा से कहा कि यहां कुछ गड़बड़ है। उनका गाना भी रोक दिया गया और थोड़ी देर में ही उन्हें वहां से निकल जाने को कहा गया। रात के 2 बज चुके थे। दोनों इस अपमान से टूट गए और वहां से निकलकर महालक्ष्मी स्टेशन के पास बैठे और ये चर्चा करने लगे कि आखिर उनसे कहां चूक हुई। सालों बाद किशोर कुमार ने लिया था, अपने और आशा के अपमान का बदला 1957 तक आशा भोसले हिंदी सिनेमा में पहचान बना चुकी थीं। उनके गाने उड़ें जब-जब जुल्फें तेरी काफी हिट रहा था। किशोर कुमार भी अपनी पहचान बना चुके थे। कामयाबी मिलने के बाद एक रोज उन्हें फिर उसी स्टूडियो में रिकॉर्ड करने का मौका मिला। वहां रॉबिन चटर्जी भी मौजूद थे, जिन्होंने सालों पहले उन्हें और आशा को स्टूडियो से निकलवाया था। आशा ताई तो झिझक में कुछ कह नहीं सकीं, लेकिन किशोर कुमार ने मौके का फायदा उठाया और रिकॉर्डिस्ट से कहा- क्यों, आपने तो कहा था कि हम गा नहीं सकते। आप देख लीजिए कि अब हम कहां हैं। 16 की उम्र में की भागकर शादी, बहन से बिगड़े रिश्ते 10 साल की उम्र में गाना शुरू करने वालीं आशा भोसले को महज 16 साल की उम्र में अपने सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से प्यार हो गया। गणपत राव उम्र में 15 साल बड़े थे। वो जानती थीं कि परिवार इस रिश्ते को कभी नहीं अपनाएगा, तो उन्होंने 16 की उम्र में घर से भागकर गणपत राव से शादी की। यह फैसला उनके लिए खुशियों से ज्यादा तकलीफें लेकर आया। शादी के बाद उन्हें अपने पति और ससुराल वालों से अच्छा व्यवहार नहीं मिला। वक्त बीतता गया, लेकिन रिश्ते में कड़वाहट बढ़ती ही रही। षादी से आशा को 3 बच्चे हुए। कुछ साल बाद, शक और तनाव से भरे इस रिश्ते ने आखिरकार दम तोड़ दिया। गणपतराव ने उन्हें घर से निकाल दिया। उस वक्त आशा दो बच्चों के साथ थीं और तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। मजबूरी में उन्हें अपने मायके लौटना पड़ा। साल 1960 में दोनों अलग हो गए। बेटी ने गोली मारकर की आत्महत्या, बेटे की कैंसर से हुई मौत आशा भोसले और गणपत राव के तीन बच्चे थे। उनके बड़े बेटे हेमंत भोसले ने शुरुआत में पायलट के तौर पर काम किया, लेकिन बाद में संगीत की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने कुछ यादगार गाने भी दिए, हालांकि उनका सिंगिंग करियर ज्यादा लंबा नहीं चला। 2015 में कैंसर के कारण उनका निधन हो गया। आशा की बेटी वर्षा भोसले, एक जानी-मानी कॉलमनिस्ट थीं। उन्होंने पति से तलाक के बाद 55 साल की उम्र में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उनके सबसे छोटे बेटे आनंद भोसले ने बिजनेस और फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की और आज वे अपनी मां के करियर को संभालते थे। आरडी बर्मन की मां ने कहा था, आशा से शादी करनी है, तो लाश से होकर गुजरना होगा गणपत राव से तलाक लेने के बाद आशा भोसले की जिंदगी में आरडी बर्मन हमसफर बनकर आए। दोनों की मुलाकात 1966 में हुई, जब वो तीसरी मंजिल में साथ काम कर रहे थे। दोनों ने ओ हसीना जुल्फों वाली…, और ओ मेरे सोना रे सोना रे को आवाज दी। आरडी बर्मन, पिता एसडी बर्मन की लेगेसी से कुछ अलग करना चाहते थे। जैज, कैबरे का ट्रेंड लाते हुए उन्हें आशा भोसले की आवाज का सहारा मिला। दोनों ने पिया तू अब तो आजा…, दम मारो दम…. जैसे गानों बनाए, जिसे आशा भोसले को कैबरे क्वीन कहा जाने लगा। प्रोफेशनल रिश्ता जल्द ही नजदीकियां बढ़ने की वजह बना। पंचम दा, उम्र में आशा से 6 साल छोटे थे और 1971 में उनका पहली पत्नी रीटा से तलाक हो चुका था। उनकी शादी विवादों में थी। घरेलु झगड़े बढ़ने से वो घर छोड़कर होटल में रहने लगे थे। 9 साल बाद जब उन्होंने आशा से शादी करने का फैसला किया तो परिवार खिलाफ हो गया। मां ने साफ इनकार कर दिया। आरडी बर्मन की मां दोनों के रिश्ते से इतनी खफा दी कि उन्होंने साफ कह दिया कि जब तो वो जिंदा हैं, तब तक दोनों की शादी नहीं हो सकती और अगर वो ये शादी करना चाहते हैं तो आशा को अपनी मां की लाश के ऊपर से घर में लाना होगा। ये सुनकर आरडी बर्मन बिना कुछ कहे ही वहां से चले गए। दोनों शादी करना चाहते थे, हालांकि मां की नाराजगी के चलते ऐसा मुमकिन नहीं था। कुछ सालों के बाद आरडी बर्मन की मां बेहद बीमार रहने लगीं और उन्होंने किसी को भी पहचाना बंद कर दिया, जिसके बाद आरडी बर्मन और आशा ने 1980में शादी कर ली। शादी के महज 14 सालों बाद ही 1994 में आरडी बर्मन का निधन हो गया, और आशा फिर एक बार अकेली हो गईं। आरडी के निधन से पहले उनकी फाइनेंशिल कंडीशन ठीक नहीं थी जिसके चलते आशा और वो अलग रहा करते थे।

दैनिक भास्कर 12 Apr 2026 2:39 pm

विराट कोहली की जर्सी पाकर खुश हुईं कोरियन कंटेंट क्रिएटर:RCB की जर्सी को किस किया, कहा- मैं कोरियन RCB फैन हूं

IPL टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की फैन और दक्षिण कोरियाई कंटेंट क्रिएटर मिशेल का एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है। हाल ही में उन्होंने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे भारत से आए एक पार्सल को अनबॉक्स करती नजर आईं। पार्सल में RCB की लाल जर्सी थी, जिस पर नंबर 18 और विराट कोहली लिखा हुआ था। जर्सी देखते ही मिशेल ने इसे गले से लगाया और पहनकर अपनी खुशी जाहिर की। मिशेल ने अपने वीडियो में कहा कि लोग कहते हैं RCB के पास ग्लोबल फैंस नहीं हैं, लेकिन वे कोरिया से टीम को पूरा सपोर्ट करती हैं। कंटेंट क्रिएटर ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, 'मैं एक कोरियन RCB फैन हूं। मुझे जर्सी भले ही देर से मिली हो, लेकिन टीम के लिए मेरा प्यार कभी देर से नहीं आया।' वीडियो पर लोगों के जबरदस्त रिएक्शन सामने आए मिशेल के वीडियो पर कई लोगों ने रिएक्शन दिया। एक यूजर ने लिखा, “RCB का फैन होकर मैं बहुत खुश हूं।” वहीं, दूसरे ने कहा, “RCB सिर्फ एक फ्रेंचाइजी नहीं, हमारी भावनाएं हैं।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “कोई इन्हें RCB मैच का टिकट दिला दो।” मिशेल RCB पर कई वीडियो बना चुकी हैं मिशेल इंस्टाग्राम पर @sausabe के नाम से जानी जाती हैं। उनके इंस्टाग्राम हैंडल पर करीब 32.6K फॉलोअर्स हैं। वो अपने इंस्टाग्राम पर मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, ट्रैवल से जुड़े वीडियो शेयर करती हैं। उन्होंने RCB, विराट कोहली और भारतीय क्रिकेट टीम से रिलेटेड कई कंटेंट भी पोस्ट किए हैं। वे अक्सर RCB की जर्सी पहनकर वीडियो बनाती हैं। मिशेल भारत की यात्रा कर चुकी हैं और उन्होंने यहां की कई ट्रैवल रील्स शेयर की हैं।

दैनिक भास्कर 12 Apr 2026 12:16 pm

दावा- सलमान की 'मातृभूमि' में चीन का नाम नहीं होगा:रक्षा मंत्रालय की आपत्ति के बाद कंटेंट में बदलाव, 40% फिल्म रीशूट

सलमान खान की अपकमिंग फिल्म मातृभूमि को लेकर नई खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में कई बदलाव किए गए हैं ताकि भारत-चीन के बेहतर होते कूटनीतिक संबंधों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। गौरतलब है कि फिल्म का नाम पहले बैटल ऑफ गलवान रखा गया था, जिसे इस साल बदलकर मातृभूमि कर दिया गया। यह फिल्म 2020 में भारत और चीन के बीच हुए संघर्ष पर आधारित थी। हाल ही में दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हुए हैं, इसलिए रक्षा मंत्रालय को फिल्म के कंटेंट को लेकर कुछ आपत्ति थी। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में बताया गया है कि मंत्रालय के निर्देश के अनुसार फिल्म में चीन का नाम नहीं लिया जाएगा। करीब 40% फिल्म दोबारा शूट की गई रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया, “पहले यह फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय के कहने पर सलमान खान और डायरेक्टर अपूर्व लाखिया ने फिल्म को दोबारा शूट किया और कहानी में थोड़ा फिक्शन एंगल जोड़ दिया। लगभग 40% फिल्म दोबारा शूट की गई, जिसमें रोमांटिक सीन और बैकस्टोरी भी जोड़ी गई। मेकर्स ने नई फिल्म मंत्रालय को भेजी ताकि उन्हें NOC मिल सके, लेकिन मंत्रालय को अभी भी कुछ चिंताएं हैं।” सूत्र ने आगे बताया, “सलमान खान से यह भी कहा गया कि फिल्म में चीन का नाम बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यह बात पहले ही मेकर्स को बता दी गई थी। इस महीने जो नया वर्जन जमा किया गया है, उसमें चीन का कहीं जिक्र नहीं है।” फिल्म 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन शूटिंग और कंटेंट में बदलाव के कारण इसे टाल दिया गया। वहीं दूसरी तरफ, सलमान खान जल्द ही दिल राजू के साथ अपनी अगली फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। इस फिल्म में नयनतारा भी नजर आएंगी और इसका डायरेक्शन वामशी पेडिपल्ली करेंगे।

दैनिक भास्कर 12 Apr 2026 10:15 am

सिंगर आशा भोसले अस्पताल में भर्ती:ज्यादा थकान और छाती के इन्फेक्शन से बिगड़ी तबीयत; पोती जनाई ने दी हेल्थ अपडेट

बॉलीवुड की दिग्गज सिंगर आशा भोसले को शनिवार शाम मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्हें ज्यादा थकान और छाती में इन्फेक्शन की शिकायत है। पहले जानकारी आई थी कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। हालांकि, उनकी पोती जनाई भोसले ने इंस्टाग्राम पर बताया- मेरी दादी आशा भोसले, बहुत ज्यादा थकान और छाती के इन्फेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती हैं। उनका इलाज चल रहा है और उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा। हम आपको जल्द ही अच्छी खबर देंगे। 12,000 से ज्यादा गाने गाए आशा भोसले ने अपने करियर में 12,000 से ज्यादा गाने गा चुकी हैं। उनके दम मारो दम, पिया तू अब तो आजा और चुरा लिया है तुमने जैसे गाने आज भी सदाबहार हैं। आशा भोसले के लिए संगीत का सफर इतना भी आसान नहीं था। आशा भोसले मशहूर थिएटर एक्टर और क्लासिकल सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन हैं। जब वो सिर्फ 9 साल की थीं तब उनके पिता का निधन हो गया था, जिसकी वजह से उन्होंने बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर परिवार को सपोर्ट करने के लिए सिंगिंग शुरू कर दी थी। 16 साल की उम्र में जब आशा भोसले ने भागकर परिवार वालों के खिलाफ बड़ी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से शादी की थी। लता जी और उनका परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था, जिसके कारण उन्होंने आशा से लंबे समय तक बातचीत बंद कर दी थी। शादी के बाद आशा भोसले को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और वह घरेलू हिंसा का शिकार भी हुईं। इतना ही नहीं, जिंदगी से इतना निराश हो गई थीं कि खुद को खत्म करना चाहती थीं। 1960 में वह पहले पति से अलग हो गईं और अपने तीन बच्चों (हेमंत, वर्षा और आनंद) की जिम्मेदारी अकेले ही उठाई। जब आशा भोसले की पहली शादी टूट गई और वह अपने तीन बच्चों के साथ वापस अपने परिवार के पास आईं, तब धीरे-धीरे दूरियां कम होनी शुरू हुईं। आर डी बर्मन की मां ने कहा था शादी मेरी लाश पर ही होगी आशा भोसले ने दूसरी शादी संगीतकार आर डी बर्मन से 1980 में की। दोनों की पहली मुलाकात 1966 में फिल्म तीसरी मंजिल के गाने के दौरान हुई थी। इसके बाद आशा भोसले ने आर.डी. बर्मन की कई फिल्मों में गीत गाए। लगातार काम करते हुए दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई और ये दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला। आर.डी. बर्मन ने एक दिन मौका पाते ही आशा के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। आशा ने इसके लिए तुरंत हां भी कर दिया था, लेकिन बर्मन की मां ने शादी से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने बर्मन से कहा कि अगर ये शादी होगी तो मेरी लाश पर ही होगी। बर्मन की मां शादी से इसलिए इनकार कर रही थीं, क्योंकि आशा बर्मन से 6 साल बड़ी थीं और वो 3 बच्चों की मां थीं। तब बर्मन ने चुपचाप मां की बात मान ली। हालांकि, जब बर्मन के पिता एस.डी. बर्मन का निधन हुआ, तो मां की मानसिक स्थिति बिगड़ गई। ऐसे में मां की हालत में सुधार के लिए बर्मन ने आशा भोसले से 1980 में शादी कर ली थी। रिकॉर्डिंग स्टूडियो से बेकार आवाज कहकर निकाल दिया गया था आशा भोसले ने 50 से 90 के दशक के बीच ओपी नैयर, आरडी बर्मन, खय्याम और बप्पी लहरी जैसे कई संगीतकारों के साथ काम किया। कई सदाबहार गाने गाए। हालांकि, एक समय ऐसा भी था जब इसी आवाज को खराब बताकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो से वापस भेज दिया गया था। आरजे अनमोल के साथ बातचीत के दौरान आशा भोसले ने बताया था कि एक बार खराब आवाज बताकर किशोर कुमार के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियों से निकाल दिया गया था। उन्होंने बताया था कि 1947 में किशोर कुमार के साथ वो फेमस स्टूडियों में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म जान पहचान के लिए एक गाना रिकॉर्ड करने गई थी। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे। आजकल स्टूडियो एयर-कंडीशन्ड होते हैं और उनमें ढेर सारी मशीनें होती हैं। उन दिनों दो ट्रैक वाली मशीनें हुआ करती थीं। एक ट्रैक संगीतकार और दूसरा ट्रैक गायक के लिए होता था। माइक भी सिर्फ एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था। आशा भोसले और किशोर कुमार ने गाना शुरू किया। आशा भोसले ने बताया कि इसके बाद साउंड रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने बंगाली में कहा कि आप लोगों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही है। किशोर दा समझ गए क्योंकि वह बंगाली जानते थे। उन्होंने मुझसे कहा कि कुछ गड़बड़ है। मैं कुछ नहीं बोली। रॉबिन चटर्जी ने म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश से कहा कि आप दूसरे सिंगर लाओ। इनकी आवाज गाने के लायक ही नहीं है। आशा के बने कढ़ाई गोश्त और बिरयानी के मुरीद कई सेलेब्स आशा भोसले की आवाज जितनी मदहोश करने वाली है, उतना ही उनके हाथ का बना खाना है। आशा भोसले खाना पकाने की बहुत शौकीन हैं, उनके हाथों के बने कढ़ाई गोश्त और बिरयानी के मुरीद कई सेलेब्स हैं। दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर को आशा भोसले के हाथों का बना खाना बेहद पसंद था। एक इंटरव्यू के दौरान आशा भोसले ने कहा था कि ऋषि कपूर को उनके हाथ का शामी कबाब, कड़ाई गोश्त और काली दाल बहुत पसंद थी। इंटरव्यू के दौरान आशा भोसले ने यह भी बताया था कि अगर सिंगर नहीं होती तो पक्का कुक होतीं। गायिकी के साथ-साथ आशा भोसले ने अपने कुकिंग के शौक को भी जिंदा रखा। खाना पकाने के प्यार ने आशा भोसले को एक सफल रेस्तरां व्यवसायी के रूप में भी पहचान दिलाई है। सबसे पहले उन्होंने दुबई में आशाज नाम से रेस्टोरेंट खोला। इसे खुले दो दशक बीत चुके हैं। आशा भोसले के रेस्टोरेंट में उत्तर पश्चिमी भारतीय व्यंजन परोसा जाता है। आशा भोसले का रेस्टोरेंट दुबई के अलावा कुवैत, अबुधाबी, दोहा और बहरीन जैसे कई देशों में है। इन रेस्टोरेंट का संचालन वाफी ग्रुप द्वारा किया जाता है जिसमें आशा भोसले की 20 प्रतिशत भागीदारी है।

दैनिक भास्कर 12 Apr 2026 4:30 am