मटका किंग अपनी दमदार कहानी और 60-70 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इस सीरीज में जुए की दुनिया के जरिए पहचान, इज्जत और सत्ता के खेल को दिखाने की कोशिश की गई है। इसी बीच दैनिक भास्कर ने फिल्म के डायरेक्टर नागराज मंजुले और स्टारकास्ट विजय वर्मा, कृतिका कामरा और साईं तम्हंकर से खास बातचीत की। इस दौरान सभी ने न सिर्फ अपने किरदारों के बारे में खुलकर बात की, बल्कि सीरीज की कहानी, उसके दौर और उसके सामाजिक पहलुओं पर भी दिलचस्प बातें साझा कीं। यह सीरीज सिर्फ एक खेल की नहीं, बल्कि उस दौर और उससे जुड़े लोगों की कहानी को सामने लाने का प्रयास है। नागराज मंजुले- आप हमेशा समाज को रॉ और अनफिल्टर्ड तरीके से दिखाते हैं। मटका किंग में आपने क्या एक्सप्लोर किया है? यह कहानी सिर्फ जुए के खेल की नहीं है, बल्कि उस दुनिया की है जो इसके इर्द-गिर्द बनती है। हम जानते हैं कि मटका खेला जाता था, लेकिन जो लोग इसे खेलते थे, उनकी जिंदगी कैसी थी, यह कम लोग जानते हैं। यह खेल कैसे इतना बड़ा और आकर्षक बना हमने उसी समाज, उस दौर और उन लोगों की कहानी बताने की कोशिश की है। 60-70 के दशक को पर्दे पर जीवंत बनाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा और इतनी दमदार स्टारकास्ट के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा? नागराज मंजुले- यह ज्यादा मुश्किल से पहले सोचने का काम होता है। जब आप उस दौर को लिख लेते हैं, तो पूरी टीम उसे साकार करने में जुट जाती है। हमारे पास कॉस्ट्यूम, प्रोडक्शन डिजाइन, म्यूजिक और डीओपी जैसे विभागों में बेहद टैलेंटेड लोग थे, जिन्होंने मिलकर उस समय को जीवंत बनाने की कोशिश की। वहीं स्टारकास्ट के साथ काम करने का अनुभव शानदार रहा, पहली बार इतने बड़े और नामी कलाकारों के साथ काम किया। हर किरदार मजबूत है, ऐसा लगता है जैसे हर खिलाड़ी अपने आप में मैच जिताने वाला है। स्क्रिप्ट में ऐसा क्या खास था और आपके किरदार में ऐसी कौन-सी बात थी, जिसकी वजह से आपने तुरंत इस प्रोजेक्ट के लिए हां कह दी और आप उससे कितना रिलेट कर पाए? विजय वर्मा- सबसे बड़ी वजह थी नागराज मंजुले के साथ काम करने का मौका। मैं उनके काम का हमेशा से फैन रहा हूं, और उनके साथ काम करना अपने आप में खास अनुभव है। स्क्रिप्ट में जो किरदार था, उसमें एक शांत लेकिन गहरी इंटेंसिटी है वह अपने काम को पूरी ईमानदारी से करता है, लेकिन जिस दुनिया का वह हिस्सा है, उसे समाज खुलकर स्वीकार नहीं करता, यही उसका सबसे बड़ा संघर्ष है। जहां तक रिलेट करने की बात है, यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही कभी मैं किरदार के बहुत करीब महसूस करता था, तो कभी उससे दूर। कई बार ऐसा भी हुआ कि हम दोनों कहीं बीच में आकर मिले, और वहीं से उस किरदार को समझने का रास्ता बना। ट्रेलर में आपके किरदार के रिश्तों में एक जटिलता और कई परतें नजर आती हैं, इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगी?कृतिका कामरा- इस कहानी में सभी किरदार और उनके रिश्ते जटिल हैं। मेरा किरदार गुलरुख दुबाश एक अलग दुनिया से आता है, लेकिन उसे इस खेल और विजय के किरदार की दुनिया आकर्षित करती है। उसकी अपनी कमियां और इच्छाएं हैं, जो उसे इस सफर का हिस्सा बनाती हैं। आपके किरदार में कितनी लेयर्स देखने को मिलेंगी? साईं तम्हंकर- बहुत सारी लेयर्स हैं। मेरा किरदार ‘बरखा’ ऐसा है जो अपनी भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकती। अगर वह कुछ महसूस करती है, तो उसे व्यक्त करना जरूरी है। यह उसकी सबसे बड़ी खासियत है। आजकल ओटीटी और सिनेमा में महिला किरदारों को ज्यादा गहराई मिल रही है। इस पर आपकी राय? साईं तम्हंकर- यह बहुत अच्छा बदलाव है। अब महिला किरदार सिर्फ सजावट नहीं हैं, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा हैं। हालांकि अभी भी सुधार की गुंजाइश है। ट्रेलर में एक लाइन है ‘जिंदगी उम्मीद पर टिकी है’। आपकी जिंदगी में उम्मीद का क्या मतलब है? नागराज मंजुले- बस चलते रहना चाहिए। उम्मीद यही है कि आगे अच्छा होगा। विजय वर्मा- मुश्किल वक्त में सिर्फ उम्मीद ही साथ देती है। समय हमेशा बदलता है, और यही भरोसा हमें आगे बढ़ाता है। कृतिका कामरा- उम्मीद ही वह भावना है जो हमें जिंदा रखती है। अगर उम्मीद नहीं, तो कुछ भी नहीं। साईं तम्हंकर- उम्मीद जीवन की ड्राइविंग फोर्स है। इसके बिना जीना मुश्किल है। आखिरी सवाल दर्शक जानना चाहते हैं कि विजय वर्मा कब तक सिंगल रहने वाले हैं? विजय वर्मा- दुनिया उम्मीद पर टिकी है… फिलहाल उम्मीद ही पेट्रोल है!
हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ की स्टार कास्ट में शामिल वामिका गब्बी और मिथिला पालकर ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने शूटिंग अनुभव साझा किए हैं। दोनों ने बताया कि सेट पर जहां एक तरफ प्रोफेशनल डिसिप्लिन था, वहीं दूसरी तरफ मस्ती और हल्के-फुल्के माहौल की कोई कमी नहीं थी। अक्षय कुमार के मजेदार प्रैंक्स और पूरी टीम की बॉन्डिंग ने शूट को यादगार बना दिया। साथ ही, दोनों अभिनेत्रियों ने अपनी जर्नी, शुरुआती संघर्ष और इंडस्ट्री में अपने अनुभवों पर भी खुलकर बात की है। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट का माहौल कैसा था?वामिका गब्बी- बिल्कुल, बाहर से देखने पर यही लगता है कि सब कुछ मस्ती-मजाक में हुआ होगा। लेकिन असल में सेट पर बहुत सीरियस काम भी चल रहा था। हां, मस्ती बहुत होती थी और वही माहौल हमें और सहज बना देता था। मेरे लिए तो ये एक फैमिली जैसा एक्सपीरियंस बन गया था। आपका किरदार कैसा है? क्या ये एक टिपिकल बहन है या उसमें कोई ट्विस्ट भी देखने को मिलेगा? मिथिला पलकर- मैं ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहूंगी, वो तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा। लेकिन हां, ये एक ऐसी बहन है जिसकी कोई भी जिद हो, उसका भाई उसे जरूर पूरा करता है उनके रिश्ते में वही खूबसूरती है। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करना जैसे अक्षय कुमार, परेश रावल और निर्देशक प्रियदर्शन कैसा अनुभव रहा? वामिका गब्बी- शुरुआत में थोड़ा इंटिमिडेशन था क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा स्क्रीन पर देखा है। लेकिन सेट पर उन्होंने माहौल इतना आसान और कम्फर्टेबल बना दिया कि कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं इतने बड़े लोगों के साथ काम कर रही हूं। हर कोई बहुत सपोर्टिव था। इतने टैलेंटेड लोगों के बीच रहना ही अपने आप में एक सीख है। उनकी एनर्जी, उनका काम करने का तरीका सब कुछ बहुत इंस्पायरिंग था। अपने किरदार की तैयारी के दौरान कोई चैलेंज आया? मिथिला पलकर- नहीं, क्योंकि प्रियदर्शन सर ने सब कुछ बहुत आसान बना दिया। उन्होंने मुझे हर चीज में गाइड किया, जैसे हैंड-होल्डिंग करते हुए। मेरा सिर्फ एक ही डर था इतने बड़े कलाकारों के सामने परफॉर्म करना, लेकिन उन्होंने वो भी आसान कर दिया। इतने बड़े स्टार कास्ट के साथ काम करने का अनुभव और आपकी पर्सनल जर्नी यूट्यूब से फिल्मों तक,आप इसे कैसे देखती हैं? मिथिला पलकर- सच कहूं तो विश्वास ही नहीं होता है। इतने लेजेंड्स के साथ काम करना एक सपना जैसा है। शुरुआत में थोड़ा डर था, लेकिन सभी ने बहुत प्यार से अपनाया। जहां तक मेरी जर्नी की बात है, मेरा हमेशा से एक ही गोल था एक अच्छा एक्टर बनना। इंटरनेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है और उसी की वजह से मुझे ये मौका भी मिला। मैं बस अच्छा काम करना चाहती हूं, चाहे वो किसी भी भाषा या प्लेटफॉर्म पर हो। सेट पर अक्षय कुमार के मशहूर प्रैंक्स का अनुभव कैसा रहा? क्या आप भी कभी उनका शिकार बनीं? वामिका गब्बी- एक सीन था जहां मुझे टेबल पर जंप करना था। मैं पूरी तैयारी के साथ शॉट दे रही थी, तभी अक्षय सर ने मुझे हल्का सा पुश कर दिया और मैं पूरी तरह चौंक गई! सब लोग हंसने लगे और मुझे तब समझ आया कि ये एक प्रैंक था। इसके अलावा हम सब सेट पर कार्ड्स, लूडो और अलग-अलग गेम्स खेलते थे। एक लेजर गेम भी खेलते थे, जिसमें ऊपर लगे बॉक्स पर निशाना लगाना होता था। उसमें तो मैं हारते-हारते करीब 12,000 रुपये की ‘कर्जदार’ हो गई थी! मिथिला पलकर- नहीं, मेरे साथ उन्होंने कोई प्रैंक नहीं किया। शायद वो एक प्रोटेक्टिव भाई की तरह थे। लेकिन हम सेट पर बहुत गेम्स खेलते थे जैसे लूडो। उसमें मैंने काफी पैसे हार दिए थे! लेकिन आखिरी दिन अक्षय सर के साथ खेलते-खेलते मैंने सब जीत लिए और मेरा ‘कर्ज’ उतर गया।
एक समय बॉलीवुड में अपनी स्टाइल और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस के लिए पहचाने जाने वाले अर्जुन रामपाल का करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। मॉडलिंग से फिल्मों में आए अर्जुन ने शुरुआत में पहचान बनाई, लेकिन लंबे समय तक उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। इस दौर में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और घर का किराया भरना भी मुश्किल हो गया था। करीब 14 फिल्मों की असफलता ने उनके करियर पर सवाल खड़े किए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। संघर्ष के दौर में उन्होंने खुद को तराशा और अभिनय पर काम जारी रखा। समय के साथ उन्हें ‘रॉक ऑन’ जैसी फिल्मों से सराहना मिली और अब ‘धुरंधर’ के जरिए उनकी किस्मत फिर चमकती नजर आ रही है। आज की सक्सेस स्टोरी में अर्जुन रामपाल के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें जानते हैं। सेना का अनुशासन और मां के संस्कारों का उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव अर्जुन रामपाल का जन्म 26 नवंबर 1972 को जबलपुर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन दिल्ली में बीता, जहां उन्होंने पढ़ाई पूरी की। उनके पिता अमरजीत रामपाल भारतीय सेना में अधिकारी थे, जबकि उनकी मां ग्वेन रामपाल स्कूल टीचर थीं। सेना के अनुशासन और मां के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर डाला। इसी वजह से उनमें अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना बचपन से ही मजबूत होती गई। अर्जुन रामपाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि फैशन और विज्ञापनों की ओर बढ़ी। शुरुआत में उनका इरादा मॉडलिंग में आने का नहीं था, लेकिन उनकी पर्सनालिटी और लुक्स ने उन्हें इस ओर खींच लिया। मिस इंडिया और मॉडल मेहर जेसिया ने मॉडलिंग इंडस्ट्री से परिचित कराया दरअसल एक पार्टी में उनकी मुलाकात पूर्व मिस इंडिया और मॉडल मेहर जेसिया से हुई। उन्होंने उन्हें मॉडलिंग इंडस्ट्री से परिचित कराया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने बड़े फैशन डिजाइनर्स और ब्रांड्स के लिए रैंप वॉक शुरू किया और जल्द ही भारत के वे प्रमुख मेल मॉडल्स में शामिल हो गए। 1990 के दशक में वे कई विज्ञापनों और फैशन शोज का हिस्सा बने। इससे उनकी पहचान तेजी से बढ़ी और बॉलीवुड में आने से पहले ही उन्होंने मॉडलिंग में मजबूत नाम बना लिया। पहली फिल्म में मनीषा कोइराला के साथ मौका मिला मॉडलिंग के दौरान उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और विज्ञापनों की लोकप्रियता ने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान खींचा। इसी दौरान अशोक मेहता ने उन्हें फिल्म ‘मोक्ष’ (2001) में मनीषा कोइराला के अपोजिट कास्ट किया। दूसरी फिल्म ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ में निर्देशक राजीव राय ने उन्हें एक विज्ञापन में देखा और प्रभावित होकर कास्ट किया। हालांकि यह फिल्म ‘मोक्ष’ से पहले रिलीज हुई थी। इसमें अर्जुन रामपाल के साथ सुनील शेट्टी, आफताब शिवदासनी और कीर्ति रेड्डी नजर आए। घर का किराया भरने के भी पैसे नहीं थे पॉप डायरीज को दिए इंटरव्यू में अर्जुन ने बताया था- मैं अपने करियर की शुरुआत में एक बेहद सफल मॉडल था। उसी दौरान अशोक मेहता मेरे पास फिल्म ‘मोक्ष’ लेकर आए, जिसमें मुझे शानदार अभिनेत्री मनीषा कोइराला के साथ काम करने का मौका मिला। उस समय वह अपने करियर के शिखर पर थीं। मुझे याद है, हम चंबल घाटी में एक सीन शूट कर रहे थे। जब मैंने शूटिंग का फुटेज देखा, तो खुद को देखकर मुझे खुद से ही नफरत हो गई। मैंने सोचा, ‘हे भगवान, मैं कितना खराब दिख रहा हूं।’ उसी वक्त मैंने फैसला किया कि अब मैं मॉडलिंग नहीं करूंगा। लेकिन मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि इस फिल्म को बनने में छह साल लग जाएंगे। उस दौरान मेरे पास आय का कोई स्रोत नहीं था। मैं मुंबई के अंधेरी स्थित सेवन बंगलों में रहता था। मेरे मकान मालिक सरदारजी बहुत अच्छे इंसान थे। हर महीने की पहली तारीख को वे आते, मुझे देखते और मैं उन्हें देखता। वे मुस्कुराकर पूछते, ‘नहीं है ना?’ और मैं सिर हिला देता। तब वे कहते, ‘कोई बात नहीं, तू दे देगा।’ जिंदगी में ऐसे अच्छे लोग और ऐसे पल बहुत मायने रखते हैं।” फेस ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया बहरहाल, ‘मोक्ष’ और ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं, लेकिन आलोचकों ने अर्जुन रामपाल के अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस की सराहना की। इससे उन्हें इंडस्ट्री में संभावनाशील अभिनेता के रूप में देखा जाने लगा। बैक टू बैक 14 फ्लॉप फिल्में दीं ‘मोक्ष’ और ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ के बाद अर्जुन रामपाल ने ‘दीवानापन’, ‘तहजीब’, ‘दिल है तुम्हारा’, ‘दिल का रिश्ता’, ‘असंभव’, ‘वादा’, ‘आंखें’, ‘हमको तुमसे प्यार है’, ‘यकीन’, ‘डरना जरूरी है’, ‘ऐलान’ और ‘एक अजनबी’ जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन इन फिल्मों को कमर्शियल सफलता नहीं मिली। ‘दिल है तुम्हारा’ की कहानी और संगीत को पसंद किया गया था। अर्जुन रामपाल को अक्सर स्टाइलिश हीरो के तौर पर देखा गया, न कि गंभीर अभिनेता के रूप में। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अलग-अलग किरदारों में खुद को आजमाते रहे। विलेन अवतार ने स्टारडम दिलाया शाहरुख खान की ‘डॉन’ (2006) में अर्जुन रामपाल ने अपने निगेटिव किरदार से दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींचा। इस फिल्म में उन्होंने सख्त और प्रभावशाली किरदार निभाया, जिसने उनकी स्टाइलिश हीरो वाली छवि से अलग एक गंभीर अभिनेता की पहचान मजबूत की। इसके बाद ‘ओम शांति ओम’ (2007) में उनका विलेन अवतार और ज्यादा चर्चा में रहा। इस फिल्म में उनके किरदार की स्क्रीन प्रेजेंस, डायलॉग डिलीवरी और खलनायक वाली ऊर्जा को पसंद किया गया। इसी वजह से उन्हें सिर्फ मॉडल-टर्न-एक्टर नहीं, बल्कि ऐसे अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा जो निगेटिव भूमिकाओं में मजबूत असर छोड़ सकता है। उनके विलेन अवतार ने उन्हें स्टारडम दिलाया। रॉक ऑन के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला 'रॉक ऑन’ अर्जुन रामपाल के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में फरहान अख्तर, प्राची देसाई, ल्यूक केनी और पूरब कोहली भी थे, लेकिन अर्जुन रामपाल ने अपने गहरे किरदार से खास पहचान बनाई। इस फिल्म से पहले तक उन्हें अक्सर स्टाइलिश चेहरे के रूप में देखा जाता था, लेकिन ‘रॉक ऑन’ ने यह धारणा बदल दी। फिल्म में उनके अभिनय ने दिखाया कि वे ग्लैमर या निगेटिव रोल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भावनात्मक और परिपक्व किरदार भी असरदार तरीके से निभा सकते हैं। ‘रॉक ऑन’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और दर्शकों ने इसकी कहानी, संगीत और कलाकारों की परफॉर्मेंस को सराहा। इसी फिल्म के लिए अर्जुन रामपाल को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जिससे वे एक गंभीर और प्रतिभाशाली अभिनेता के रूप में स्थापित हो गए। मल्टीस्टारर फिल्मों का अहम चेहरा बने अर्जुन रामपाल को ‘रॉक ऑन’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद मजबूत अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा। इस फिल्म ने उनके करियर को नई दिशा दी, लेकिन इसके बाद उनका सफर लगातार सफल नहीं रहा। ‘हाउसफुल’ और ‘राजनीति’ सफल रहीं, जबकि ‘वी आर फेमिली’ और ‘रा: वन’ औसत रहीं। हालांकि इस दौर में वे मल्टीस्टारर फिल्मों का अहम चेहरा बने और इंडस्ट्री में उनकी मांग बढ़ी। लेकिन 2012 के बाद उनकी फिल्मों का प्रदर्शन गिरता गया। कई बड़े प्रोजेक्ट्स बॉक्स ऑफिस पर नहीं चले। ‘इनकार’, ‘डी-डे’, ‘सत्याग्रह’, ‘रॉक ऑन 2’, ‘डैडी’ और ‘पलटन’ असफल रहीं। ‘डैडी’ के प्रोड्यूसर अर्जुन रामपाल खुद थे। लगातार असफल फिल्मों ने उनके स्टारडम को कमजोर कर दिया और वह बॉक्स ऑफिस पर भरोसेमंद नाम नहीं रह पाए। बहरहाल, असफल फिल्मों पर अर्जुन रामपाल का नजरिया कुछ अलग ही है। उनका मानना है कि हर असफलता केवल एक रुकावट नहीं होती है। फ्लॉप फिल्मों के बाद OTT प्लेटफॉर्म की ओर कदम बढ़ाया फिल्मों में ग्राफ नीचे जाने के बाद अर्जुन रामपाल ने ओटीटी पर अपनी नई शुरुआत की, जहां उन्हें नए तरह के किरदार निभाने का मौका मिला। ‘द फाइनल कॉल’ में उन्होंने पायलट का इमोशनल और साइकॉलॉजिकल किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने सराहा। ‘लंदन फाइल्स’ में उन्होंने जांच अधिकारी की भूमिका निभाई, जिसमें उनकी इंटेंस एक्टिंग की तारीफ हुई। OTT पर उन्हें फिल्मों के मुकाबले ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। ‘धुरंधर’ से मिली बड़ी पहचान इंडस्ट्री में माना जाता है कि OTT पर काम करने के बाद कलाकारों को नए और मजबूत किरदारों के ऑफर मिलते हैं। अर्जुन रामपाल के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी हालिया स्क्रीन प्रेजेंस और गंभीर भूमिकाओं ने फिल्ममेकर्स का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स में शामिल किया गया। इसी कड़ी में उनका नाम फिल्म ‘धुरंधर’ से जुड़ा, जो उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। ‘धुरंधर’ में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया है, जिसे 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड के रूप में दिखाया गया है। इस किरदार के जरिए उन्होंने उस दर्द को अभिनय में उतारा, जिसे वे सालों से महसूस कर रहे थे। अर्जुन रामपाल कहते हैं कि जब निर्देशक आदित्य दर ने उन्हें ‘धुरंधर’ की कहानी सुनाई, तो 26/11 से जुड़ा सीन सुनते ही उन्होंने फिल्म करने का फैसला कर लिया। उनके मुताबिक, उसी समय उन्हें लगा कि यह उनके अंदर की पीड़ा और गुस्से को बाहर निकालने का मौका है। अर्जुन रामपाल ने कहा कि 26 नवंबर 2008 का दिन उनकी जिंदगी का सबसे डरावना दिन था। यह उनका 36वां जन्मदिन था और वह दोस्तों के साथ जश्न मनाने निकले थे। वे वर्ली के एक होटल में रुके, जहां अचानक धमाके की आवाज सुनाई दी। शुरुआत में लगा कि गैंगवार हुआ है, लेकिन कुछ ही देर में पूरे शहर में आतंक फैल गया। उन्होंने बताया कि होटल को तुरंत बंद कर दिया गया और सभी को अंदर रहने के निर्देश दिए गए। बाहर हालात बेहद खराब थे। रामपाल ने कहा, “मेरे जन्मदिन पर मैंने 26/11 की भयावहता अपनी आंखों से देखी।” इस घटना का उन पर गहरा मानसिक असर पड़ा। अगले दिन घर लौटते समय उन्हें कई बार गाड़ी रोकनी पड़ी, क्योंकि उनकी तबीयत खराब हो रही थी। ______________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... रणवीर सिंह ने कास्टिंग काउच का सामना किया:थिएटर में झाड़ू-पोंछा लगाया, उनकी दोनों धुरंधर की कुल कमाई लगभग 3 हजार करोड़ रुपए बचपन से अमिताभ बच्चन जैसा बनने का सपना देखने वाले रणवीर सिंह का सफर संघर्ष, जुनून और आत्मविश्वास की मिसाल है। फिल्मों में जगह बनाने के दौरान उन्हें कास्टिंग काउच का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने समझौता करने से इनकार कर दिया।पूरी खबर पढ़ें..
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनोट ने 'धुरंधर' फ्रेंचाइजी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में नई जान फूंकने का काम किया है। कंगना के मुताबिक, पिछले कुछ समय से बॉलीवुड दर्शकों से कट रहा था, लेकिन रणवीर सिंह स्टारर इस फिल्म ने लोगों को सिनेमाघरों तक वापस खींच लिया है। यह फ्रेंचाइजी अब 3,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली पहली भारतीय फिल्म सीरीज बन गई है। बॉलीवुड और दर्शकों के बीच खत्म हो रही थी दूरीANI से बातचीत में कंगना ने कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री धीरे-धीरे देश की संस्कृति और कहानियों से दूर होती जा रही थी। उन्होंने बताया, इंडस्ट्री एक तरह से देश से कट रही थी। दर्शकों की भागीदारी कम हो गई थी और लोग फिल्में देखना नहीं चाह रहे थे। इसी वजह से साउथ इंडियन फिल्मों को ज्यादा पहचान मिली, क्योंकि वे अपनी संस्कृति और स्थानीय कहानियों पर फोकस कर रहे थे। कंगना का मानना है कि 'धुरंधर' जैसी फिल्मों ने दर्शकों को उनकी अपनी कहानियां दिखाई हैं। आर माधवन और अजीत डोभाल का जिक्रकंगना ने फिल्म में आर माधवन के काम की विशेष रूप से सराहना की। फिल्म में उनका किरदार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से प्रेरित बताया जा रहा है। कंगना ने कहा, माधवन ने शानदार काम किया है। मैं अजीत डोभाल जी से मिल चुकी हूं, उनका व्यक्तित्व बहुत बड़ा है। मुझे लगता है कि डोभाल जी पर एक पूरी अलग फिल्म बननी चाहिए, तभी उनके किरदार के साथ पूरा न्याय हो पाएगा। फिर भी माधवन उनके काफी करीब पहुंचे, वे बहुत अच्छे अभिनेता हैं। 3000 करोड़ का ऐतिहासिक रिकॉर्ड'धुरंधर' फ्रेंचाइजी ने भारतीय सिनेमा में नया इतिहास रचा है। सीरीज की दोनों फिल्मों ने मिलकर वर्ल्डवाइड 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली है। 'धुरंधर 2: द रिवेंज' मार्च में रिलीज हुई थी और इसने अकेले ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 1700 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया है।
फिल्म इंडस्ट्री में काम के घंटों (वर्किंग आवर्स) को लेकर चल रही बहस के बीच एक्ट्रेस कंगना रनोट ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया है। हाल ही में खबरें आई थीं कि दीपिका पादुकोण ने अपनी शर्तों और फिक्स्ड वर्किंग शेड्यूल के कारण कुछ बड़े बजट के प्रोजेक्ट्स छोड़ दिए हैं। दीपिका की मांग है कि वे दिन में केवल 8 घंटे ही काम करेंगी। अब इस मामले पर कंगना ने दीपिका का पक्ष लेते हुए कहा है कि उनका कहना बिल्कुल सही है और उन्होंने यह मुकाम मेहनत से कमाया है। कंगना बोलीं- अब दीपिका रिप्लेसेबल नहीं हैंANI को दिए एक इंटरव्यू में कंगना रनोट ने कहा कि समय के साथ प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। कंगना ने कहा मुझे नहीं लगता कि इस बात पर कोई विवाद होना चाहिए। दीपिका आज जिस मुकाम पर हैं, वह उन्होंने अपनी मेहनत से हासिल किया है। वे अब एक मां हैं, उनकी एक बेटी है। अगर आज वे 8 घंटे काम करना चाहती हैं, तो उन्होंने यह हक कमाया है। कंगना ने साफ किया कि जब कोई नया कलाकार होता है, तो उसे रिप्लेस (बदला) किया जा सकता है, लेकिन दीपिका जैसी स्टार के लिए मेकर्स को उनके समय के हिसाब से तालमेल बिठाना चाहिए। पुराने दिनों में 12-14 घंटे करती थीं कामकंगना ने अपने और दीपिका के शुरुआती संघर्ष के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में वे दोनों ही सफलता के लिए काफी जुनूनी थीं। कंगना ने कहा, एक वक्त था जब हम 12 से 14 घंटे की शिफ्ट से कम पर राजी नहीं होते थे। दीपिका ने एक बार मुझसे इम्तियाज अली की फिल्म के दौरान कहा था कि वे 12 घंटे काम कर रही हैं। मैंने तब कहा था कि मैं 10 घंटे काम करती हूं। तब हमारे अंदर एक भूख थी, हम कामयाब होना चाहते थे। महिलाओं पर काम के दबाव पर जताई चिंतावर्क-लाइफ बैलेंस पर बात करते हुए कंगना ने कहा कि आज के समय में महिलाओं पर बहुत ज्यादा दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा, हम अपनी महिलाओं पर बच्चों के साथ-साथ दोगुना काम करने का बोझ डाल रहे हैं। फिर हम गिरती फर्टिलिटी रेट और टूटती शादियों की बात करते हैं। अगर दीपिका जैसी टॉप एक्ट्रेस अपने परिवार और काम के बीच तालमेल बिठाने के लिए समय मांग रही हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म छोड़ने की थी चर्चाबता दें कि पिछले साल ऐसी खबरें आई थीं कि दीपिका पादुकोण ने डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'स्पिरिट' छोड़ दी है। इसका मुख्य कारण काम करने की शर्तें और 8 घंटे की शिफ्ट की मांग को बताया गया था। इसके बाद से ही सोशल मीडिया और फिल्म गलियारों में इस बात पर बहस छिड़ गई थी कि क्या एक्टर्स को शिफ्ट के घंटे तय करने चाहिए।
एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनोट ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ अपने रिश्तों को पर खुल कर बात की है। उन्होंने साफ किया है कि उनके और चिराग के बीच कोई रोमांटिक एंगल नहीं है। ANI को दिए इंटरव्यू में कंगना से चिराग पासवान के साथ उनके कथित अफेयर को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर मुस्कुराते हुए कंगना ने कहा, नहीं, चिराग सिर्फ मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त हैं। जब भी मैं उनके बारे में सोचती हूं, मुझे उनमें सिर्फ एक दोस्त ही नजर आता है। कहा- रोमांस होता तो बच्चे हो गए होतेबातचीत के दौरान कंगना ने बेहद बेबाक और मजाकिया अंदाज अपनाया। उन्होंने कहा, हमने करीब 10 साल पहले एक फिल्म साथ की थी। अगर हमारे बीच वाकई कुछ होना होता, तो अब तक हमारे बच्चे हो चुके होते। कंगना ने आगे कहा कि अगर रोमांस होना होता, तो अब तक हो चुका होता। फिल्म 'मिले ना मिले हम' से शुरू हुई दोस्तीकंगना और चिराग पासवान के बीच की बॉन्डिंग काफी पुरानी है। साल 2011 में आई फिल्म 'मिले ना मिले हम' से चिराग पासवान ने बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इस फिल्म में कंगना रनौत उनकी लीड एक्ट्रेस थीं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो खास कमाल नहीं कर पाई, लेकिन यहीं से दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई। आज दोनों राजनीति के मैदान में सक्रिय हैं और अक्सर संसद में एक-दूसरे के साथ हंसते-मुस्कुराते नजर आते हैं। 'इमरजेंसी' के बाद 'क्वीन 2' की तैयारीकंगना की हालिया रिलीज फिल्म 'इमरजेंसी' थी, जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभाया था। इस फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने खुद ही किया था। आने वाले समय में कंगना अपनी फ्रेंचाइजी की अगली कड़ियों 'क्वीन 2' और 'तनु वेड्स मनु 3' में नजर आएंगी। वहीं, चिराग पासवान अब फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर पूरी तरह से राजनीति और अपने मंत्रालय की जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं।
एक्टर शाहरुख खान के पूर्व बॉडीगार्ड यासीन खान ने हाल ही में बताया कि सेलेब्स के बॉडीगार्ड्स की दो से ढाई करोड़ रुपए सालाना सैलरी के दावे गलत हैं। यासीन खान ने हिंदी रश को दिए इंटरव्यू में कहा कि सोशल मीडिया पर बॉडीगार्ड्स की कमाई को लेकर जो आंकड़े बताए जाते हैं, वे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी बड़े स्टार के साथ काम करने वाले बॉडीगार्ड की एक फिक्स सैलरी होती है। इसके अलावा फिल्मों या विज्ञापनों के दौरान अलग से कॉन्ट्रैक्ट के जरिए कुछ अतिरिक्त पैसा मिल सकता है, लेकिन यह रकम उतनी बड़ी नहीं होती जितनी अक्सर बताई जाती है। पहले बॉडीगार्ड्स को फिल्मों से पैसा नहीं मिलता था यासीन ने बताया कि पहले फिल्म इंडस्ट्री में बॉडीगार्ड्स को फिल्मों से अलग से कोई पैसा नहीं मिलता था। उस समय सिर्फ ड्राइवर, मेकअप आर्टिस्ट और पर्सनल असिस्टेंट को ही प्रोड्यूसर की तरफ से पेमेंट की जाती थी। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने शाहरुख खान के साथ काम करना शुरू किया, तब उन्हें लगा कि फिल्म के दौरान बॉडीगार्ड भी काम करते हैं, इसलिए उन्हें भी पेमेंट मिलनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने प्रोड्यूसर्स से बात की और धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों और विज्ञापनों के लिए अलग से पैसे मिलने लगे। उनकी इस पहल के बाद इंडस्ट्री में एक नया ट्रेंड शुरू हुआ। दूसरे बॉडीगार्ड्स ने भी प्रोडक्शन हाउस से एक्स्ट्रा पेमेंट की मांग करनी शुरू कर दी और यह धीरे-धीरे प्रचलन में आ गया। एवरेज सैलरी करीब एक लाख महीने तक होती है हालांकि, यासीन ने साफ कहा कि सालाना दो से ढाई करोड़ रुपए कमाने जैसी बातें सही नहीं हैं। उनके अनुसार, इतनी ज्यादा सैलरी मिलना संभव नहीं है। अगर किसी बॉडीगार्ड को ज्यादा पैसा मिलता भी है, तो वह किसी खास व्यक्तिगत समझ या स्टार की तरफ से दी गई मदद हो सकती है, न कि रेगुलर सैलरी। यासीन के अनुसार, इस फील्ड में अनुभवी सिक्योरिटी स्टाफ को भी आमतौर पर करीब 1 लाख रुपए प्रति महीने तक की सैलरी मिलती है, जो इंटरनेट पर बताए जा रहे 10 लाख रुपए प्रति महीने के दावों से काफी कम है।
भारतीय सिनेमा में 3,000 करोड़ रुपए की कमाई का रिकॉर्ड बनाने वाली फ्रेंचाइजी 'धुरंधर' में एक चेहरा इन दिनों खूब चर्चा में है। धुरंधर 2 में एसपी असलम चौधरी को मारने वाला यह किरदार हिरव मेहता ने निभाया है। फिल्म में बिना एक भी डायलॉग बोले हिरव ने अपनी ड्राइविंग और हाव-भाव से दर्शकों का दिल जीत लिया है। फिल्म में हिरव का कार से संजय दत्त (एसपी असलम चौधरी) को मारना कहानी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। दिव्य भास्कर ने हिरव से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए। मुकेश छाबड़ा के ऑफिस से चमकी किस्मतहिरव बताते हैं कि उन्हें यह रोल एक कॉल के जरिए मिला। उन्होंने मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के ऑफिस में अपना परिचय और प्रोफाइल दिया था। वहां से डेटा निकालकर उन्हें ऑनलाइन ऑडिशन और लुक टेस्ट के लिए बुलाया गया। हिरव ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि फिल्म में रणवीर सिंह, संजय दत्त और अक्षय खन्ना जैसे बड़े सितारे हैं, तो वे दंग रह गए। उन्हें लगा कि यह उनके करियर का सबसे बड़ा मौका है। लेह से मुंबई तक हुई फिल्म की शूटिंगफिल्म की शूटिंग अगस्त 2025 में लेह-लद्दाख से शुरू हुई थी। हिरव ने बताया कि अक्षय खन्ना का वायरल वॉक वाला सीन लद्दाख में ही शूट हुआ था। उनके खुद के ड्राइविंग वाले सीन की शूटिंग चंडीगढ़ में हुई, जबकि चेहरे के क्लोज-अप शॉट्स आधे चंडीगढ़ और आधे मुंबई की गोरेगांव फिल्म सिटी में शूट किए गए। हिरव के मुताबिक, संजय दत्त जैसे दिग्गज को पर्दे पर मारने का सीन शूट करना डरावना और सुखद, दोनों तरह का अनुभव था। रणवीर सिंह का व्यवहार और 'मास्टर क्लास'शूटिंग के दौरान रणवीर सिंह के साथ अपने अनुभव को साझा करते हुए हिरव ने बताया कि रणवीर सबको बराबरी का सम्मान देते हैं। हिरव ने कहा, जब मेरा क्लोज-अप सीन था, तब रणवीर ने कैमरे के पीछे से चिल्लाकर मेरा उत्साह बढ़ाया और कहा चलो हिरव, करते हैं। एक सुपरस्टार को मेरा नाम याद था, यह मेरे लिए बड़ी बात थी। उन्होंने बताया कि अक्षय खन्ना अपने काम में डूबे रहते हैं, वहीं संजय दत्त दिखने में गंभीर हैं लेकिन बात करने में बहुत विनम्र हैं। पाकिस्तान से आ रहे 'ड्राइविंग स्कूल' के मैसेजहिरव के ड्राइविंग सीन और एक्टिंग की तारीफ सीमा पार पाकिस्तान में भी हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें 'फेवरेट ड्राइवर' बता रहे हैं। हिरव ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान से कई मैसेज मिल रहे हैं, जिनमें लोग कह रहे हैं 'हमें भी ड्राइविंग सिखा दो।' हालांकि, फिल्म को लेकर उठ रहे प्रोपेगेंडा के सवालों पर हिरव का कहना है कि यह फिल्म किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ है और इसमें कुछ भी गलत नहीं दिखाया गया है। फाइनेंस प्रोफेशनल से 'मसल मेहता' तक का सफरहिरव का फिल्मी सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने फाइनेंस में एमबीए किया है और शेयर बाजार में भी काम किया है। बाल कलाकार के रूप में बूस्टर के विज्ञापन से शुरुआत करने वाले हिरव ने फिटनेस की दुनिया में भी नाम कमाया है। वे 'मसल मेहता' नाम से इंस्टाग्राम पेज चलाते हैं, जहां वे लोगों को ऑनलाइन ट्रेनिंग देते हैं। फिल्म की सफलता के बाद 15 दिनों में उनके फॉलोअर्स 29 हजार से बढ़कर 1 लाख हो गए हैं। हिरव को अब कुछ और बड़ी फिल्मों के ऑफर भी मिल रहे हैं।
आमिर खान प्रोडक्शन्स की फिल्म एक दिन का दूसरा ट्रेलर गुरुवार को रिलीज हुआ। फिल्म में साई पल्लवी और जुनैद खान लीड रोल में हैं। इस ट्रेलर में एक लव स्टोरी दिखाई गई है, जिसमें जुनैद एक शर्मीले युवक के किरदार में हैं, जो साई पल्लवी के किरदार से प्यार करते हैं। दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं, लेकिन वह उनसे बात नहीं कर पाते। कहानी में मोड़ तब आता है जब दोनों ऑफिस ट्रिप के लिए जापान जाते हैं। वहां साई का एक्सीडेंट हो जाता है और उसे ट्रांजिएंट ग्लोबल एमनेशिया (TGA) हो जाता है। इस स्थिति में उन्हें सिर्फ जुनैद याद रहते हैं, जिन्होंने उनकी जान बचाई थी। जापान में दोनों को साथ समय बिताने का मौका मिलता है। लड़का जानता है कि मीरा अगले दिन सब भूल जाएगी, फिर भी वह उस एक दिन को खास बना देता है। फिल्म ‘एक दिन’ के ट्रेलर में साई पल्लवी और जुनैद खान की केमिस्ट्री बेहद इमोशनल दिखाई गई है। दोनों की केमिस्ट्री की खास बात यह है कि इसमें अधूरापन और दर्द दोनों हैं। जुनैद का किरदार जानता है कि यह रिश्ता हर दिन नया शुरू होगा, फिर भी वह हर पल को पूरी शिद्दत से जीता है। यही इमोशनल डेप्थ कहानी को खास बना रही है। आमिर और मंसूर खान फिर साथ आए यह फिल्म 1 मई, 2026 को थिएटर में रिलीज होगी। 'एक दिन' को सुनील पांडे ने डायरेक्ट किया है और आमिर खान, मंसूर खान और अपर्णा पुरोहित ने प्रोड्यूस किया है। इस फिल्म में आमिर खान और मंसूर खान लंबे समय के बाद साथ आ रहे हैं। इससे पहले, वे 'कयामत से कयामत तक', 'जो जीता वही सिकंदर', 'अकेले हम अकेले तुम' और 'जाने तू... या जाने ना' जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं।
फिल्ममेकर अशोक पंडित लेंसकार्ट के कर्मचारियों के लिए जारी स्टाइल गाइड को लेकर भड़क गए और उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कंपनी के बायकॉट करने की अपील की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अशोक पंडित ने स्टाइल गाइड की फोटो शेयर कर लिखा, पीयूष बंसल अपने कर्मचारियों से कहते हैं कि हिजाब ठीक है, लेकिन बिंदी/तिलक/कलावा नहीं। लेंसकार्ट एक ऐसी कंपनी है जो हिंदू बहुल भारत में काम करती है, जहां अधिकतर कर्मचारी और उपभोक्ता हिंदू हैं। आप इस पर क्या कहेंगे? यह लेंसकार्ट के कर्मचारियों के लिए स्टाइल गाइड का पेज 11 है। इसका लिंक यहां देख सकते हैं: scribd.com/document/90118… पगड़ी और हिजाब केवल काले रंग में मंजूर बता दें कि अशोक पंडित ने स्टाइल गाइड की फोटो शेयर की। उसके मुताबिक, हिजाब पहनने की अनुमति है, लेकिन उसका रंग काला होना चाहिए और वह कंपनी के लोगो को कवर नहीं करना चाहिए। पगड़ी भी केवल काले रंग में ही पहनने की अनुमति दी गई है। वहीं, धार्मिक टीका, तिलक, बिंदी या स्टिकर लगाने की अनुमति नहीं है और मेहंदी लगाने पर भी रोक लगाई गई है। गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की टोपी या हैट पहनने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, स्टोर में ब्लू टॉर्च और स्प्रे बोतल रखना, बाल अस्त-व्यस्त होने पर हेयर नेट का उपयोग करना और टैटू छिपाने के लिए काली फिटेड टी-शर्ट पहनना अनिवार्य बताया गया है। बता दें कि अशोक पंडित एक फिल्ममेकर हैं, साथ ही वो सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपने विचार रखते रहते हैं। उन्होंने करियर की शुरुआत में नुक्कड़, सर्कस और ये जो है जिंदगी जैसे फेमस शो में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने फिल्मी चक्कर जैसे शो का डायरेक्शन किया और कोलगेट टॉप 10 व तेरे मेरे सपने जैसे शो भी बनाए। साथ ही उन्होंने द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर और 72 हूरें जैसी फिल्मों को प्रोड्यूस किया है।
एक्ट्रेस अवनीत कौर ने हाल ही में उनके लुक्स को लेकर चल रही प्लास्टिक सर्जरी और बोटॉक्स की अफवाहों पर रिएक्ट किया। उन्होंने साफ किया कि उनके लुक में बदलाव उम्र के साथ नैचुरली हुआ है। गौरतलब है कि अवनीत कौर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी फोटो शेयर करती रहती हैं। समय के साथ उनके लुक में आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा बोटॉक्स या प्लास्टिक सर्जरी कराने के दावे किए जाते हैं। बचपन और अब की फोटो की तुलना करने की सलाह दी हाल ही में पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में अवनीत ने इन दावों को लेकर कहा कि वह ऐसे कमेंट्स पर ध्यान नहीं देतीं, लेकिन अगर लोग ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें अपने बचपन और वर्तमान की तस्वीरों की तुलना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इंसान बड़ा होता है, उसके फीचर्स में बदलाव आना एक नार्मल प्रोसेस है। उन्होंने कहा कि हर कोई उम्र के साथ बदलता है और यह पूरी तरह नेचुरल है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि उनकी नाक, आंखें और बाकी फीचर्स पहले जैसे ही हैं। उन्होंने अपने ब्यूटी मोल (तिल) का जिक्र करते हुए कहा कि वह आज भी वैसा ही है। अवनीत ने अपनी ब्यूटी का श्रेय अपनी मां को दिया और कहा कि जो भी है, वह उन्हें नेचुरली मिला है। वर्क फ्रंट की बात करें तो अवनीत आखिरी बार शांतनु माहेश्वरी के साथ फिल्म लव इन वियतनाम में नजर आई थीं। राहत शाह काजमी द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसमें अवनीत ने सिमी की भूमिका निभाई थी।
एक्टर गुलशन ग्रोवर ने बताया कि हाल ही में शत्रुघ्न सिन्हा ने उनसे कहा था कि फिल्म धुरंधर में अक्षय खन्ना द्वारा निभाया गया रहमान डकैत का रोल उन्हें करना चाहिए था। दरअसल, गुलशन ग्रोवर इन दिनों अपनी आने वाली सीरीज मटका किंग का प्रमोशन कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने इंडस्ट्री में पुराने ट्रेंड्स की वापसी पर बात की। इंडिया टुडे से बातचीत में ग्रोवर ने कहा कि सिनेमा एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां पुराने स्टाइल, किरदार और कहानी कहने के तरीके फिर से लौट रहे हैं। उनके मुताबिक, फैशन से लेकर फिल्मों तक, नॉस्टेल्जिया का असर साफ दिख रहा है। एक्टर ने कहा कि आजकल बेल-बॉटम जैसे पुराने फैशन ट्रेंड वापस आ रहे हैं। साथ ही कई पुराने गाने रीमेक के रूप में लौट रहे हैं और परफॉर्मेंस-ड्रिवन सिनेमा भी फिर से देखने को मिल रहा है। ग्रोवर बोले- पब्लिक भी इस बात से सहमत है ग्रोवर ने हाल ही में हुए एक डिनर का जिक्र किया, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा, राकेश रोशन मौजूद थे। उन्होंने बताया कि डिनर में शत्रुघ्न ने फिल्म धुरंधर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें उसमें होना चाहिए था। ग्रोवर के मुताबिक, सिन्हा ने यह भी कहा कि अगर वह रहमान डकैत का रोल निभाते, तो और बेहतर होता। इस पर ग्रोवर ने सहमति जताई और कहा कि पब्लिक भी इस बात से सहमत है। ग्रोवर ने धुरंधर का उदाहरण देते हुए कहा कि पुराने दौर के रोल और फिल्मी एलिमेंट्स आज फिर से फिल्मों में लौट रहे हैं। उनके अनुसार, उस दौर की कई खासियतें अब दोबारा दिखाई दे रही हैं।
बॉलीवुड एक्टर अविनाश तिवारी और एक्ट्रेस मेधा शंकर की फिल्म ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ जल्द रिलीज होगी। यह सिर्फ लव स्टोरी नहीं, बल्कि रिश्तों, परिवार और आज के दौर की उलझनों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में मेधा शंकर ने कहा कि स्क्रिप्ट सुनते ही वह कहानी से जुड़ गईं। गिन्नी का किरदार उन्हें बेहद रिलेटेबल लगा, जिसकी जिंदगी, प्यार और परिवार असली जैसे हैं। अविनाश तिवारी ने कहा कि शुरुआत में वह कंफ्यूज थे, लेकिन कहानी की ताजगी और ह्यूमर ने उन्हें बांध लिया। दोनों का कहना है कि फिल्म में कॉमेडी के साथ मजबूत इमोशन भी हैं, जो दर्शकों को हंसाने के साथ छूएंगे। रिश्तों की सच्चाई, शादी का दबाव और प्यार की उलझनें फिल्म को खास बनाते हैं। अविनाश तिवारी और मेधा शंकर ने पर्सनल लाइफ, रिश्तों और एक-दूसरे की खूबियों-कमियों पर बात की। पेश हैं कुछ खास अंश। सवाल : ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ आपके लिए क्या है? स्क्रिप्ट में ऐसा क्या था, जिससे आपने इसे चुना? जवाब (मेधा शंकर): यह स्क्रिप्ट राइटर और डायरेक्टर प्रशांत वर्मा ने सुनाई थी। मैं बहुत कम बार इतनी जोर से हंसी हूं जितनी इसे सुनते वक्त हंसी। तभी लगा कि यह फिल्म खास है। मुझे गिन्नी का किरदार अपने जैसा लगा। उसकी लव स्टोरी और परिवार बहुत रिलेटेबल हैं। फिल्म का परिवार थोड़ा पागलपन भरा लेकिन असली लगता है। हर किरदार असली है और प्यार की कहानी दिल छूने वाली है। फिल्म में मजा और कॉमेडी है। स्क्रिप्ट सुनकर ही मैं तैयार हो गई थी। सवाल : अविनाश, आपको फिल्म में क्या खास लगा? जवाब (अविनाश तिवारी): जब प्रशांत ने कहानी सुनाई, तो मैं हर 3-4 मिनट में हंस रहा था। सच बताऊं, शुरू में मन था कि फिल्म मना कर दूं, क्योंकि मैं कुछ अलग करना चाहता था। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ी, लगा कि मैं यही तलाश कर रहा था। यह शादी वाली फिल्म है, लेकिन अलग और ताजा तरीके से बनाई गई है। सवाल : कहानी में आपको क्या सबसे ज्यादा रिलेटेबल लगा? जवाब (अविनाश तिवारी): इसमें दो लोगों की कहानी है, जिनकी शादी नहीं हो रही। क्यों नहीं हो रही, यही दिलचस्प है। रिश्ते की उलझनें और परिवार के ताने असली लगते हैं। लगा जैसे मेरे घर के लोग ऐसी बातें करते हैं। रिश्तों की आज की समस्याएं इसमें साफ दिखती हैं। इसलिए लगा कि लोग इस कहानी से जुड़ पाएंगे। सवाल : क्या इस फिल्म ने आपको भावनात्मक रूप से प्रभावित किया? जवाब (अविनाश तिवारी): हां, इस कहानी ने मुझे हंसाया और रुलाया। पहली बार सुनकर सभी भावनाएं महसूस हुईं। बाद में स्क्रिप्ट पढ़ी और पता चला कि गिन्नी के लिए मेधा को लिया जा रहा है, तो यह और खास हो गया। साथ ही निर्माता विनोद बच्चन जुड़े थे, जिनका मैं सम्मान करता हूं। इन वजहों से मैंने फिल्म करने का फैसला किया। सवाल : क्या आपने रिश्ते में कोई मजेदार झूठ बोला है, जिससे बड़ी स्थिति बनी हो? जवाब (मेधा शंकर): नहीं, मैंने झूठ नहीं बोला। लेकिन रिश्तों में उलझनें और हल्का कन्फ्यूजन हुआ है। अविनाश तिवारी: मुझमें इतनी हिम्मत नहीं हुई कि रिश्ते में झूठ बोलूं। लेकिन फिल्म की तरह अलग और जोखिम भरा प्यार खूबसूरत होता है। सवाल: आपको आपका एक्शन अवतार पसंद किया जाता है, क्या इसमें कुछ ऐसा देखने को मिलेगा? जवाब (अविनाश तिवारी): इस फिल्म में भी मैंने एक्शन किया है। लोगों को उठाकर पटका भी है। अब दर्शक देखेंगे कि किसे किसने पटका! सवाल : शादी करने और न करने के तीन-तीन फायदे क्या हैं? जवाब (अविनाश तिवारी): शादी के फायदे हैं कि जीवन में उद्देश्य मिलता है, अनुशासन आता है और जिंदगी साझा करने का मौका मिलता है। न करने के फायदे हैं कि जवाब नहीं देना पड़ता, अपनी मर्जी से जी सकते हैं और कोई टोकने वाला नहीं होता। मेधा शंकर: मेरे लिए शादी और रिश्ता लगभग एक जैसे हैं। सही इंसान के साथ हों, तो जिंदगी में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। सबसे खूबसूरत बात है कि कोई आपकी जिंदगी का गवाह बनता है, खुशियां और तकलीफें साझा होती हैं। सवाल : रिश्ते में किन चीजों का नहीं होना चाहिए? जवाब (अविनाश तिवारी): व्यक्ति को डिफेंसिव नहीं होना चाहिए। गलती बताने पर उसे स्वीकार कर सुधार करना चाहिए। साथ ही वैल्यू सिस्टम मिलना चाहिए और हास्य भाव होना चाहिए। सवाल : आदर्श साथी में कौन-सी खूबियां होनी चाहिए? जवाब (मेधा शंकर): मेरे लिए यह बेसिक चीजें हैं- प्यार, ईमानदारी और वफादारी। कोई ऐसा हो जो जिंदगी समझे, साथ खड़ा रहे और खुशी-दुख का हिस्सा बने। सवाल : रिश्ते से आपकी क्या उम्मीदें हैं? जवाब (अविनाश तिवारी): मुझे साफ नहीं है कि क्या उम्मीद करनी चाहिए। लगता है सच्चा प्यार होगा, तभी मैं सामने वाले को समझूंगा और खुद को बेहतर बना पाऊंगा। सवाल: आप दोनों एक-दूसरे की दो अच्छी बातें और एक कमी बताएं? जवाब (मेधा शंकर): अविनाश समझदार हैं और अच्छी बातें करते हैं। कविता भी अच्छी करते हैं। वह संवेदनशील इंसान हैं। कमी यह है कि कभी-कभी डिफेंसिव हो जाते हैं। अविनाश तिवारी: मेधा मुश्किल समय में भी अपनी कोमलता बनाए रखती हैं। वह अपने विचारों पर मजबूती से खड़ी रहती हैं और जहां जाती हैं, वहां खुशी का माहौल बनाती हैं। जहां तक कमी की बात है, मुझे उनकी कोई कमी नहीं दिखी।
साउथ एक्टर राम चरण की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'पेद्दी' (Peddi) रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई है। मेकर्स ने बेहतर थिएट्रिकल एक्सपीरियंस और पोस्ट-प्रोडक्शन के काम को पूरा करने के लिए यह फैसला लिया है। अब यह फिल्म इसी साल जून में सिनेमाघरों में दस्तक देगी। पहले फिल्म 27 मार्च को थिएटर्स में रिलीज की जानी थी। फिल्म के डायरेक्टर बुची बाबू ने बताया की रिलीज डेट जल्द ही जारी की जाएगी। पोस्ट-प्रोडक्शन में लगेगा समयफिल्म का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन एक छोटा सा हिस्सा अभी बाकी है। मेकर्स का कहना है कि वे दर्शकों को बेहतरीन अनुभव देना चाहते हैं, इसलिए टेकनीशियन और पोस्ट-प्रोडक्शन टीम को थोड़ा और समय दिया गया है। फिल्म की टीम ने सोशल मीडिया पर एक नोट शेयर कर फैंस को इस बदलाव की जानकारी दी। फिल्म में ए.आर. रहमान का म्यूजिक फिल्म की रिलीज से पहले ही इसके गानों ने इंटरनेट पर ट्रेंड कर रहे हैं। दिग्गज संगीतकार ए.आर. रहमान द्वारा तैयार किया गया पहला गाना 'चिकिरी चिकिरी' सभी प्लेटफॉर्म्स पर 200 मिलियन (20 करोड़) से ज्यादा व्यूज पार कर चुका है। वहीं, दूसरा गाना 'राय राय रा रा' एक हाई-एनर्जी ट्रैक है, जिसे यूट्यूब पर अब तक 47 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। पहलवान के अवतार में दिखेंगे राम चरणफिल्म में राम चरण का एक बिल्कुल अलग और दमदार अवतार देखने को मिलेगा। हाल ही में 'पेद्दी पहलवान' लुक रिलीज किया गया थाफिल्म के टीजर और पोस्टर्स ने पहले ही फिल्म की दमदार कहानी की झलक दे दी है। जाह्नवी कपूर और दिव्येंदु भी आएंगे नजरबुची बाबू सना द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म में जाह्नवी कपूर लीड रोल में हैं। उनके अलावा फिल्म में कन्नड़ सुपरस्टार शिव राजकुमार, दिव्येंदु शर्मा और जगपति बाबू जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण वृद्धि सिनेमा और मैत्री मूवी मेकर्स के बैनर तले किया जा रहा है। फिल्म की नई रिलीज डेट आने के बाद अब फैंस जून का इंतजार कर रहे हैं।
नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण ’ में रावण का किरदार निभा रहे एक्टर यश ने खुलासा किया है कि फिल्म के पहले पार्ट में उनका और राम बने रणबीर कपूर का कोई भी सीन साथ में नहीं होगा। यश ने बताया कि पहले पार्ट में दोनों किरदारों को उनके अपने-अपने राज्यों में दिखाया जाएगा, इसलिए पर्दे पर कोई फेस-ऑफ (आमना-सामना) नहीं होगा। रावण का अपना साम्राज्य होगा, राम का अपनाहाल ही में यश और फिल्म के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा 'रामायण ' के प्रमोशन के लिए सिनेमाकॉन इवेंट में शामिल हुए। वहां यश से पूछा गया कि रणबीर कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करने का अनुभव कैसा रहा। इस पर यश ने साफ कर दिया कि फिलहाल फैंस को दोनों को एक साथ देखने के लिए इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि चूंकि यह दो पार्ट वाली फिल्म है, इसलिए पहले पार्ट में रावण का अपना साम्राज्य होगा और राम का अपना। रणबीर के साथ तालमेल पर क्या बोले यशभले ही दोनों ने पहले पार्ट में साथ में स्क्रीन शेयर न की हो, लेकिन यश ने रणबीर कपूर की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, रणबीर एक शानदार एक्टर हैं। हम कई बार मिल चुके हैं और हमारे बीच गहरा आपसी सम्मान है। जब आप रामायण जैसी किसी बड़ी और असाधारण फिल्म पर काम करते हैं, तो सबका लक्ष्य एक ही होता है- कहानी को बेहतरीन तरीके से पेश करना। हमारी सोच मिलती-जुलती है, इसलिए तालमेल बिठाने में कोई दिक्कत नहीं आई। दो हिस्सों में आएगी फिल्म रिपोर्ट्स के मुताबिक, नितेश तिवारी की 'रामायण' एक बड़े स्तर पर बनाई जा रही फ्रैंचाइजी होगी। इसे दो भागों में रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पहला हिस्सा दिवाली 2026 में सिनेमाघरों में दस्तक देगा। वहीं, कहानी का दूसरा और अंतिम भाग अगले साल दिवाली 2027 में रिलीज करने की योजना है। फिल्म 'रामायण' से जुड़ी अहम बातें-
बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र के निधन को करीब 140 दिन बीत चुके हैं। उनके छोटे बेटे बॉबी देओल ने पिता के जाने के बाद अपना पहला इंटरव्यू दिया है। बॉबी ने बताया कि उनके पापा की मौत ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। इस दौरान उन्होंने अपने पछतावे और सौतेली बहनों ईशा और अहाना देओल के साथ बदलते रिश्तों पर भी खुलकर बात की। पापा के साथ और वक्त बिताने का है पछतावाबॉबी देओल ने एस्क्वायर इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे अपने पापा के साथ और भी क्वालिटी टाइम बिताना चाहते थे। बॉबी ने भावुक होते हुए कहा,कई ऐसे दिन होते हैं जब मुझे लगता है कि काश मैं पापा के साथ और बैठता। काश मैंने उनसे और सवाल पूछे होते। अब मैं अपने बेटों, पत्नी और परिवार के साथ रहने को लेकर ज्यादा सजग रहता हूं। बॉक्स ऑफिस, रिव्यूज और रोल्स... ये सब आखिर में मायने नहीं रखते। इंस्टाग्राम पर आज भी देखते हैं धर्मेंद्र की रील्ससफलता के मायने बताते हुए बॉबी ने कहा कि कामयाबी इस बात से मापी जाती है कि आप अपने प्रियजनों के साथ कितना वक्त बिता पाते हैं। उन्होंने कहा, बिना किसी अपने के शोहरत और दौलत का क्या फायदा? मैं आज भी इंस्टाग्राम पर उनकी (धर्मेंद्र) रील्स देखता रहता हूं। वे बहुत ही सादगी भरे और गर्मजोशी से भरे इंसान थे। कभी-कभी लगता है कि वे रील के जरिए सीधे मुझसे ही बात कर रहे हैं। दुख ने ईशा और अहाना के करीब लायाधर्मेंद्र के निधन के बाद देओल परिवार में एक सकारात्मक बदलाव आया है। बॉबी ने बताया कि इस दुख ने उन्हें अपनी सौतेली बहनों ईशा और अहाना देओल के करीब ला दिया है। बॉबी ने कहा, हम सभी अपने-अपने तरीके से इस दुख से निपट रहे हैं। कभी-कभी दुख की वजह से लोग एक-दूसरे को गलत समझ लेते हैं, लेकिन वक्त के साथ सब ठीक हो जाता है। किसी अपने को खोना परिवार को करीब लाने का अपना तरीका जानता है। धर्मेंद्र को भी था अपने पिता के लिए मलालबॉबी ने एक पुरानी याद साझा करते हुए बताया कि उनके पिता अक्सर कविताएं और छंद सुनाते थे। उन कविताओं में धर्मेंद्र का अपने पिता के साथ ज्यादा वक्त न बिता पाने का दर्द और पछतावा झलकता था। बॉबी ने कहा, उनकी बातों ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मुझे लगता है कि यह जीवन का एक चक्र है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है। 24 नवंबर को हुआ था निधनबता दें कि धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर को मुंबई में 89 साल की उम्र में हुआ था। ब्रीच कैंडी अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 12 दिन बाद उन्होंने आखिरी सांस ली थी। उनके अंतिम संस्कार में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और सलमान खान समेत बॉलीवुड के कई बड़े सितारे पहुंचे थे।
रेटिंग: 2/5 कास्टः राजकुमार राव, सान्या मल्होत्रा डायरेक्टरः विवेक दास चौधरी टोस्टर का कॉन्सेप्ट सुनने में दिलचस्प है और फिल्म की शुरुआत भी उम्मीद जगाती है। पहले कुछ मिनटों में एक अलग तरह का टोन दिखता है, जिसमें हल्की कॉमेडी के साथ एक अजीब सा सस्पेंस भी है। लेकिन यह इंटरेस्ट ज्यादा देर टिक नहीं पाता। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, अपनी पकड़ खोती चली जाती है और जो शुरुआत में ताजगी लगती है, वही बाद में बोझ बन जाती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी रमाकांत (राजकुमार राव) की है, जो बेहद कंजूस इंसान है और अपनी दी हुई चीजें भी वापस लेने से नहीं हिचकता। शादी में दिया हुआ एक टोस्टर जब वह वापस मांगता है, तो वही टोस्टर एक मर्डर केस से जुड़ जाता है। इसके बाद रामाकांत उसे छुपाने और वापस पाने की कोशिश में उलझता जाता है। कहानी में मर्डर, ब्लैकमेल और सीक्रेट्स जैसे कई एलिमेंट्स आते हैं, लेकिन ये सब बार-बार रिपीट होते रहते हैं, जिससे कहानी आगे बढ़ने के बजाय वहीं घूमती नजर आती है। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? एक्टिंग की बात करें तो राजकुमार राव पूरी फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं और कई जगहों पर सफल भी होते हैं। उनका किरदार इरिटेटिंग होते हुए भी रिलेटेबल लगता है और कुछ सीन में वे हंसाने में कामयाब रहते हैं। सान्या मल्होत्रा का रोल सीमित है और उन्हें ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं मिलता। अभिषेक बनर्जी, सीमा पाहवा और अर्चना पूरन सिंह जैसे कलाकार भी कमजोर लेखन की वजह से असर नहीं छोड़ पाते। कैसा है फिल्म का डायरेक्शन? डायरेक्शन की बात करें तो विवेक दास चौधरी का आइडिया नया जरूर था, लेकिन उसे पर्दे पर सही तरह से उतारने में कमी रह गई। फिल्म का सेकेंड हाफ खिंचा हुआ लगता है और स्क्रीनप्ले बिखरा हुआ नजर आता है। क्लाइमैक्स में बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन है, जिससे कहानी का असर खत्म हो जाता है। तकनीकी तौर पर सिनेमैटोग्राफी ठीक है, लेकिन एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को सपोर्ट नहीं कर पाते। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? संगीत और बैकग्राउंड स्कोर दोनों ही कमजोर हैं और फिल्म के इमोशनल या कॉमिक मोमेंट्स को उभार नहीं पाते। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? कुल मिलाकर, टोस्टर एक अच्छा आइडिया लेकर आती है, लेकिन कमजोर लेखन और ढीले निर्देशन की वजह से असर नहीं छोड़ पाती। फिल्म के कुछ हिस्से मनोरंजन करते हैं, लेकिन फिल्म पूरे समय बांधे रखने में नाकाम रहती है। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे बेहतर बनाया जा सकता था, लेकिन वह मौका गंवा दिया गया।
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार इन दिनों अपकमिंग फिल्म भूत बंगला के प्रमोशन में व्यस्त चल रहे हैं। एक्टर फिल्म प्रमोट करने के लिए एकता कपूर के सुपरनैचुरल टीवी शो नागिन 7 में कैमियो करते दिखे। हालांकि अब शो से एक क्लिप वायरल हो रहा है, जिसमें अक्षय कुमार टेली प्रॉम्पटर की मदद से डायलॉग पढ़ते नजर आ रहे हैं। नागिन 7 के वीकेंड में टेलीकास्ट किए गए एपिसोड में अक्षय कुमार ने नाग गुरू के रूम में कैमियो किया। एपिसोड में वो नागिन बनीं एक्ट्रेस प्रियंका चहर को ड्रैगन यमन से लड़ने का सुझाव दे रहे हैं। अब एपिसोड का एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिस पर एक्टर को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। क्लिप में साफ देखा जा रहा है कि अक्षय कुमार अपने डायलॉग्स याद किए बिना ही टेली प्रॉम्पटर से पढ़ रहे हैं। उनकी आंखें प्रॉम्पटर के शब्दों को फॉलो करती हुई साफ दिखाई दीं। वीडियो सामने आने के बाद अक्षय को ट्रोल किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, 30 साल के करियर के बाद भी अगर 60 साल का एक्टर डायलॉग याद न रखे, तो कुछ लोगों को यह अजीब या शर्मनाक लग सकता है। हालांकि, कई कलाकार काम की स्पीड और प्रैक्टिकल कारणों की वजह से टेलीप्रॉम्प्टर का इस्तेमाल करते हैं। वहीं एक यूजर ने लिखा है, इस तरह आप एक साल में 4 फिल्में करते हैं। बता दें कि अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म भूत बंगला 17 अप्रैल को रिलीज हो रही है, जिसे एकता कपूर ने अक्षय कुमार के साथ को-प्रोड्यूस किया है। यही वजह है कि एक्टर एकता के टेलीविजन शो में फिल्म प्रमोट करने पहुंचे हैं।
वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े स्टारर फिल्म है जवानी तो इश्क होना है, 22 मई को रिलीज होने वाली है। हाल ही में फिल्म का फर्स्ट लुक जारी कर दिया गया। फर्स्ट लुक आने के बाद एक इन्फ्लूएंसर ने दावा किया कि वरुण धवन की टीम लोगों से फर्जी रिव्यू करवा रहे हैं। इसके अलावा इन्फ्लूएंसर ने कई और आरोप भी लगाए, लेकिन वरुण धवन इस पर भड़क गए और इन्फ्लूएंसर की क्लास लगा दी। सिमरन भट्ट नाम की इन्फ्लूएंसर ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर दावा किया कि कुछ लोग उनके पास आए और कहा कि वो है जवानी तो इश्क होना है के टीजर का रिव्यू करें। जब इन्फ्लूएंसर ने कहा कि उन्होंने टीजर नहीं देखा, तो टीम ने कहा कि वीडियो में जो कहना है, वो उन्हें बताया जाएगा। इस पर इन्फ्लूएंसर ने आपत्ति जताई और कहा कि अगर टीम को वाकई रिव्यू चाहिए तो ऐसे लोगों से लें, जिन्होंने असल में टीजर देखा है। इन्फ्लूएंसर ने आखिर में कहा, ‘क्या वरुण धवन के इतने खराब दिन आ गए हैं कि वो ऐसे फेक रिव्यू करवा रहे हैं।’ वीडियो वायरल होने के बाद वरुण धवन की भी इस पर नजर पड़ी। उन्होंने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट पर कमेंट कर लिखा, ‘आशा है कि आपको इस वीडियो से जो व्यूज चाहिए थे, वो मिल गए होंगे।’ विवाद यहां भी नहीं रुका। इस पर इन्फ्लूएंसर ने वरुण धवन के कमेंट का रिप्लाई कर लिखा, ‘सर पूरी रिस्पेक्ट के साथ कहना है कि मुझे व्यूज के लिए इस तरह की चीजों की जरुरत नहीं है। मैं पहले ही अपने नंबर्स से संतुष्ट हूं।’ बता दें कि वरुण धवन की फिल्म है जवानी तो इश्क होना है, डेविड धवन की डायरेक्टोरियल कमबैक फिल्म है। इस फिल्म में वरुण के साथ मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े लीड रोल में हैं। फर्स्ट लुक के मुताबिक वरुण धवन डबल ट्रबल में होने वाले हैं। टीजर में एआई किड्स का इस्तेमाल किया गया है। फिल्म 22 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म भूत बंगला 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म से भूल भुलैया, हेरा फेरी बना चुकी अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन की आइकॉनिक जोड़ी वापसी कर रही है, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन ट्रेलर को मिले फीके रिस्पॉन्स और स्लो एडवांस बुकिंग से उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो डायरेक्टर प्रियदर्शन ने रिलीज के 2 दिन पहले तक फिल्म में बदलाव किए हैं और इसकी लेंथ भी कम की है। इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म भूत बंगला ने अब तक 14.3 लाख का ही एडवांस बुकिंग कलेक्शन किया है। ये फिल्म अक्षय कुमार की पिछले साल रिलीज हुईं फिल्मों जॉली एलएलबी 3, हाउसफुल 5 और केसरी चैप्टर 2 के एडवांस कलेक्शन से फिलहाल काफी पीछे है। 2025 में आईं अक्षय की फिल्मों की फर्स्ट डे एडवांस बुकिंग फिलहाल फिल्म को रिलीज होने में 2 दिन बाकी हैं, तो फिल्म का एडवांस कलेक्शन बढ़ने के अनुमान हैं। देखना होगा कि ये पिछली फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ पाती है या नहीं। सेंसर ने कई सीन पर चलाई कैंची 2 अप्रैल को फिल्म को सेंसर बोर्ड की तरफ से UA 16+ सर्टिफिकेट मिला है। इसके लिए मेकर्स को फिल्म में कई बड़े बदलाव करने का सुझाव दिया गया था। इन सीन पर चली सेंसर की कैंची आखिरी समय तक बदलाव करते रहे डायरेक्टर प्रियदर्शन सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाव के कट लगने के बाद फिल्म का रनटाइम 174.57 मिनट (2 घंटे 54 मिनट) था। हालांकि बाद में फिल्म के डायरेक्टर प्रियदर्शन ने फिल्म के कुछ हिस्सों से नाखुश होकर स्वेच्छा से उनमें कट लगा दिया है। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने फिल्म सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के 10 दिन बाद फिल्म में एक-दो नहीं बल्कि पूरे 63 कट्स लगाए हैं। उन्होंने फिल्म के गानों ओ सुंदरी, ओ रे ओ सावरिया में भी बदलाव किया और 27 सेकंड के शॉट हटा दिए। इन सभी बदलाव के बाद फिल्म से 10 मिनट 5 सेकंड कम कर दिए गए हैं। ट्रेलर को भी नहीं मिला पॉजिटिव रिस्पॉन्स फिल्म भूत बंगला का ट्रेलर 6 अप्रैल को रिलीज हुआ है। फिल्म के ट्रेलर से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन मेकर्स ने इसमें कोई नयापन नहीं दिखाया। अक्षय कुमार हेरा-फेरी और भूल भुलैया जैसे किरदार में ही नजर आए। वहीं सेट भव्य, लेकिन पुरानी फिल्मों से काफी मिलता-जुलता लगता है। फिल्म के डायलॉग और गाने भी कोई खास कमाल नहीं कर पाए हैं। धुरंधर 2 के चलते बार-बार बदली गई रिलीज डेट फिल्म भूत बंगला 2 अप्रैल को रिलीज होने के लिए शेड्यूल थी, हालांकि धुरंधर 2 की सक्सेस के बाद क्लैश से बचने के लिए इसे 15 मई को रिलीज करने के लिए पोस्टपोन कर दिया गया था। इसके बाद इसे प्री-पोन कर 10 अप्रैल के लिए शेड्यूल किया गया, लेकिन फिर फाइनल तारीख 17 अप्रैल तय हुई।
30 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप में दिसंबर से फरवरी तक जेल में रहे फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने जेल के दर्दनाक दिनों को याद किया है। फिल्ममेकर की मानें तो उन्हें कड़ाके की ठंड की वजह से तेज बुखार हुआ, वो दर्द से कराह रहे थे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसवाले उन्हें डॉक्टर के पास तक नहीं ले गए। जेल के कैदियों ने ही मदद की। ऐसे में वो भगवान से लगातार कहते थे कि वो जेल में नहीं मरना चाहते। विक्रम भट्ट ने जेल के दिनों को याद कर ऑफिशियल सोशल मीडिया से लिखा है, पावर ऑफ प्रेयर्स। उदयपुर जेल में मेरी कैद के लगभग तीन हफ्ते बाद, जनवरी की कड़ाके की ठंड में, एक रात मैं बैरक नंबर 10 में तेज बुखार के साथ कांपते हुए उठा। चार कंबल ओढ़ने के बाद भी ऐसा लग रहा था जैसे शरीर पर कुछ भी नहीं है। पास में सो रहे कैदियों ने मेरे लिए और कंबल जुटाए। मैंने पैरासिटामोल ली और सोचा कि ठीक हो जाऊंगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगली सुबह मैं जेल के अस्पताल गया। वहां थर्मामीटर तक नहीं था। उन्होंने ऑक्सीजन चेक की और कहा कि सब ठीक है। आगे फिल्ममेकर ने लिखा, ‘मैंने कहा, ये मजाक है क्या? मुझे एक्सियल स्पॉनडिलोआर्थिटिस है, जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है, और मेरे लिए तेज बुखार खतरनाक हो सकता है। आखिरकार डॉक्टर ने मुझे बाहर अस्पताल ले जाने के लिए एक नोट लिख दिया। लेकिन कोई आया ही नहीं। पहले पुलिस एक VIP की सुरक्षा में व्यस्त थी। फिर एक आदिवासी मेले में। दिन पर दिन मैं बैरक में इंतजार करता रहा। मेरे दिन दर्द में बीतते थे, और रातें बुखार में।’ आगे भावुक होकर फिल्ममेकर ने लिखा, ‘एक समय ऐसा आया जब मुझे समझ आ गया कि मैं कहीं नहीं जा रहा हूं। तो मैंने वही किया जो मैं कर सकता था। मैंने तेल और नमक खाना बंद कर दिया, जितना हो सके पानी पिया, और बैरक में लगी देवी की एक बड़ी तस्वीर के सामने बैठ गया। और मैंने प्रार्थना की। मैंने कहा, “अगर आप हैं, अगर मेरी प्रार्थनाओं का कभी कोई मतलब रहा है, तो मुझे एक चमत्कार दिखाइए। मैं यहां मरना नहीं चाहता। मेरे बच्चों को मेरी जरूरत है। मेरी पत्नी को मेरी जरूरत है। मेरे 90 साल के पिता को मेरी जरूरत है।”’ आखिर में फिल्ममेकर ने लिखा, ‘हर दिन मैं प्रार्थना करता रहा। और धीरे-धीरे, कुछ बदलने लगा। बुखार कम होने लगा। दर्द धीरे-धीरे घटने लगा। दिन-ब-दिन मैं ठीक होने लगा। एक सुबह मैंने देवी की ओर देखा और बस इतना कहा, “मुझे मेरी जिंदगी वापस देने के लिए धन्यवाद।”’ जेल अधिकारियों पर लापरवाही करने के आरोप भी लगाए अपनी पोस्ट में विक्रम भट्ट ने जेल प्रशासन पर लापरवाही करने के भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा है कि शिकायत करने के 15 दिन बाद पुलिसवाले उन्हें अस्पताल ले जाने आए थे, लेकिन तब तक वो ठीक हो चुके है। इस पर उन्होंने पुलिसवालों से कहा था, “जनाब, आप करीब 15 दिन देर से आए हैं। शायद आप मेरे भूत को देखने आए हैं।” जब उन्होंने अधिकारी से पूछा कि अगर ये इमरजेंसी होती तो वो क्या करते, जवाब मिला, “ओह, तब हम आपको जेल गार्ड्स के साथ भेज देते।” इस पर विक्रम लिखते हैं, ‘वे मुझे पहले भी भेज सकते थे। शायद उन्होंने नहीं भेजा। या शायद भगवान मुझे पहले कुछ सिखाना चाहते थे। इसलिए जब लोग कहते हैं कि भगवान नहीं है, तो मैं बहस नहीं करता। मैं बस मुस्कुरा देता हूं। क्योंकि कुछ चमत्कार सिर्फ उसी को दिखाई देते हैं, जिसे उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।’ ढाई महीने जेल में रहे, जानिए क्या था विवाद राजस्थान के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR उदयपुर में दर्ज कराई थी। डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप है कि एक इवेंट में उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया से हुई थी। दिनेश कटारिया ने उन्हें पत्नी की बायोपिक बनाने का प्रस्ताव दिया। इस सिलसिले में दिनेश कटारिया ने 24 अप्रैल 2024 को मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया था। कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया, जहां भट्ट से बायोपिक बनाने पर चर्चा हुई थी। कुछ दिन बाद विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने डॉक्टर अजय मुर्डिया को कहा- 7 करोड़ रुपए और फाइनेंस करके वे 4 फिल्में 47 करोड़ में बना सकते हैं। इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा। इसके बाद उनके स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर अली, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए। इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए। वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि चार फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था।
मलयाली एक्टर और मॉडल शियास करीम पर जबरदस्ती एक्ट्रेस को बीफ खिलाने के आरोप लगे हैं। इस घटना का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद उनकी जमकर आलोचना भी की जा रही है। एक्टर शियास करीम का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो और एक्ट्रेस अनुमोल अनुकुट्टी, एक पार्टी में बुफे से खाना लेते नजर आ रहे हैं। एक्ट्रेस अनुमोल आगे चलती हुईं खाना निकाल रही हैं, तभी उनके पीछे खड़े एक्टर शियास उनसे बार-बार पूछते हैं- बीफ खाएगी। एक्ट्रेस ने साफ इनकार किया, तो एक्टर ने उनका मजाक भी बनाया। मना करने के बावजूद शियाज जबरदस्ती बार-बार पूछते हैं। इस पर एक्ट्रेस उन्हें नजरअंदाज करते हुए आगे निकल गईं। बता दें कि सामने आए वीडियो में एक्ट्रेस बीफ खाती नजर नहीं आई हैं और न ही शियास ने उनकी प्लेट में सर्व किया है। हालांकि इसके बावजूद एक्टर की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि मुस्लिम शियास को वैसे ही पोर्क खाने के लिए मजबूर करना चाहिए, जैसे वो अनुमोल को बीफ खाने के लिए कर रहे हैं। एक्टर के सपोर्ट में उतरे कई यूजर्स वीडियो सामने आने के बाद जहां कई लोग शियाज के लिए भद्दी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ऐसे भी हैं, जो ये दावा कर रहे हैं कि एक्ट्रेस अनुमोली बीफ खाती हैं। अनुमोल की कई तस्वीरें भी वायरल की जा रही हैं, जिनमें वो खुद अपने हाथों से बीफ सर्व करती दिखी हैं। कुछ यूजर्स का ये भी कहना है कि केरल में बीफ खाना आम है और वहां 80-90 प्रतिशत हिंदू भी बीफ खाते हैं, ऐसे में मामले को गलत रूप देना बिल्कुल गलत है। विवाद बढ़ने पर एक्टर ने दी सफाई आलोचना होने और विवाद बढ़ने के बाद एक्टर शियाज करीम ने सफाई देते हुए ऑफिशियल इंस्टाग्राम से एक वीडियो पोस्ट की है, जिसमें वो साफ कह रहे हैं कि एक्ट्रेस अनुमोल बीफ खाती हैं, इसलिए उन्हें ऑफर किया गया था। शियाज ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी भी पोस्ट की है, जिसमें अनुमोली खुद बीफ खाती और सर्व करती नजर आई हैं। इसके अलावा भी उन्होंने बीफ की कई डिशेज के वीडियो पोस्ट किए हैं। बता दें कि शियास को बिग बॉस मलयाली सीजन 1 से पहचान मिली थी। इससे पहले भी वो विवादों में रह चुके हैं। 2024 में उनकी जिम ट्रेनर ने उन पर शादी का झासा देकर रेप करने के आरोप लगाए थे। वहीं एक्ट्रेस अनुमाल अनुकट्टी ने बिग बॉस मलयाली सीजन 7 जीता है।
‘मामला लीगल है’ के दूसरे सीजन के साथ दिब्येंदु भट्टाचार्य फिर चर्चा में आए। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान उन्होंने करियर, स्ट्रगल और नए प्रोजेक्ट्स पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि इस सीजन में कहानी पहले से ज्यादा गहरी हो जाती है। इसमें इंटरनेशनल रिलेशन, फिलॉसफी और कैपिटल पनिशमेंट जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। शो सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, सोचने पर मजबूर करने वाला अनुभव बनता है। उन्होंने ‘अनदेखी 4’, ‘अल्फा’ और ‘गुलाबी’ पर अपडेट दिए। अमिताभ बच्चन, आमिर खान और हुमा कुरैशी के साथ काम के अनुभव साझा किए। मुंबई के शुरुआती संघर्ष और घर बनाने की जद्दोजहद भी याद की। सवाल: ‘मामला लीगल है’ के दूसरे सीजन में क्या खास है, और दर्शकों को क्या नया देखने को मिलेगा? जवाब: ज्यादा बताऊंगा तो स्पॉइलर हो जाएगा, लेकिन पहले सीजन में एक मजबूत दुनिया बनाई गई थी। दूसरे सीजन में वही दुनिया और गहरी हो जाती है। इस बार इंटरनेशनल रिलेशनशिप, फिलॉसफी और मेरे किरदार के जरिए अहम मैसेज देने की कोशिश की गई है। कैपिटल पनिशमेंट जैसे मुद्दों पर भी बात होती है। कॉमिक एलिमेंट के साथ यह सीजन डीप है और दर्शकों को एंटरटेनमेंट के साथ बहुत कुछ सिखाता है। सवाल: फिल्म ‘अल्फा’ और आलिया भट्ट के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: फिल्म के बारे में अभी ज्यादा नहीं कह सकता, क्योंकि एनडीए में है। यह एक बड़ी फिल्म है। आलिया भट्ट बहुत अच्छी एक्ट्रेस और शानदार इंसान हैं। उनसे मुलाकात वेब सीरीज ‘पोचर’ के दौरान हुई थी, जहां वो एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर थीं। सवाल: वेब सीरीज ‘अनदेखी 4’ में क्या नया देखने को मिलेगा? जवाब: ‘अनदेखी’ की दुनिया वही है, लेकिन कहानी में नए ट्विस्ट आते हैं। यह बिंज-वॉच शो है। एक बार देखना शुरू करेंगे तो खत्म करके ही उठेंगे। जैसे जिंदगी बदलती है, वैसे ही ‘अनदेखी’ की दुनिया भी बदलती रहती है। सवाल: फिल्म ‘गुलाबी’ में हुमा कुरैशी के साथ आपकी केमिस्ट्री कैसी रही? जवाब: हुमा कुरैशी शानदार एक्ट्रेस और बहुत अच्छी इंसान हैं। उनके साथ काम करना आसान और मजेदार होता है। हम सेट पर खूब एंजॉय करते हैं। साथ में खाना-पीना चलता रहता है। सवाल: आप खाने-पीने के कितने शौकीन हैं? जवाब: मैं खाने का बहुत शौकीन हूं। जहां जाता हूं, वहां का लोकल खाना ट्राय करता हूं। आउटडोर शूट में समय मिले तो खुद भी कुछ बना लेता हूं। सवाल: आपने कई दिग्गजों के साथ काम किया है। कुछ अनुभव बताइए? जवाब: मेरी पहली फिल्म ‘मॉनसून वेडिंग’ थी, जिसमें नसीरुद्दीन शाह थे। उन्होंने मुझे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ाया भी था। फिल्म में हमारे साथ कोई सीन नहीं था, जो मेरे लिए अफसोस की बात रही। करियर के शुरुआती दिनों में अमिताभ बच्चन और आमिर खान जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने का मौका मिला। सवाल: अमिताभ बच्चन के साथ आपका अनुभव कैसा रहा? जवाब: मेरी पहली कमर्शियल फिल्म ‘ऐतबार’ थी, जिसमें मुझे अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला। जब मैं नया-नया मुंबई आया था, तब उन्हें सेट पर देखना ही बड़ी बात थी। वो तीन-चार कुर्सियां लगाकर बैठते थे और किताब पढ़ते रहते थे। उनका डिसिप्लिन और ऑरा कमाल का है। एक एक्शन सीन में मैंने ज्यादा एग्रेसिव होकर परफॉर्म किया, तो उन्होंने हंसते हुए कहा- “आराम से, आराम से… मैं एक बूढ़ा आदमी हूं।.” यह उनका ह्यूमर और सादगी दिखाता है। उनकी फिटनेस देखकर मैं हैरान रह गया। एक किक सीन में उनका पैर मेरे कंधे से ऊपर पहुंच गया था। उनसे मैंने सीखा कि रेस्पेक्ट मांगी नहीं जाती, अपने काम से कमाई जाती है। सवाल: आमिर खान के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: आमिर खान के साथ फिल्म ‘मंगल पांडे’ में काम किया। वह बेहद डेडिकेटेड एक्टर हैं और स्क्रिप्ट पर गहराई से काम करते हैं। उनका सोचने का तरीका इंटरनेशनल है। वह को-एक्टर्स की मदद करते हैं। खुद क्यू देते हैं ताकि सीन बेहतर बन सके। उनका मानना है कि एक्टिंग पूरी तरह टीमवर्क है। सवाल: आपके करियर की शुरुआत और स्ट्रगल कैसा रहा? जवाब: मैं 1994–97 तक NSD में था और 2000 तक रेपर्टरी में काम किया। वहां की पॉलिटिक्स से परेशान होकर छोड़ दिया। पहले कोलकाता गया, लेकिन वहां काम नहीं मिला। फिर दिल्ली में ‘मॉनसून वेडिंग’ की कास्टिंग के दौरान मौका मिला। पहले किसी और को कास्ट किया गया था, लेकिन बाद में ऑडिशन के जरिए मुझे रोल मिला, यहीं से सफर शुरू हुआ। सवाल: आप ‘मॉनसून वेडिंग’ के बाद मुंबई आए। यहां आने पर पुराने दोस्तों का कितना सहारा मिला? जवाब: मुझे दोस्तों का बहुत सपोर्ट मिला। मेरा एक बैचमेट राजीव कुमार है, जो टीवी इंडस्ट्री में बड़ा नाम है। वह हमारे बैच का पहला इंसान था जिसने लोखंडवाला की कृष्णा कावेरी सोसाइटी में घर खरीदा था। मैंने उससे कहा था कि मैं तीन साल बाद आऊंगा और उसी के पास रहूंगा। लेकिन जब मैं मुंबई पहुंचा, उसे पता नहीं था कि मैं आ रहा हूं, क्योंकि उस समय फोन-पेजर का दौर था। कॉल करना भी सोच-समझकर होता था। वह शूटिंग के लिए 10 दिन बाहर था, तो मैं अपने दोस्त राजपाल यादव के घर चला गया। उस समय हम सब स्ट्रगल कर रहे थे और एक-दूसरे के साथ रहकर काम चलता था। सवाल: मुंबई में शुरुआती रहने का सफर कैसा रहा? जवाब: शुरुआत में कहीं टिककर रहना मुश्किल था। दोस्त ही सहारा थे। जब थोड़ा काम मिलने लगा, तब लगा कि अपना घर होना चाहिए। सबसे बड़ी दिक्कत लोन को लेकर आई। उस समय इनकम स्टेबल नहीं थी, इसलिए बैंक लोन देने को तैयार नहीं थे। बार-बार रिजेक्शन मिलता था। फिर जुगाड़ करके, थोड़ा सेविंग, थोड़ा उधार और भरोसे के दम पर आखिरकार मुंबई में अपना घर लिया। यह बड़ा मोमेंट था, क्योंकि स्ट्रगल के बाद घर लेना सेटल होने जैसा था। सवाल: इतने सालों बाद भी क्या शूटिंग के पहले दिन नर्वसनेस होती है? जवाब: आज भी लगता है कि यह मेरा पहला दिन है, पहला कैरेक्टर है। सोचता हूं इसे कैसे डेवलप करूंगा। सेट पर इतने लोग देखते हैं। कैमरामैन, साउंड वाले, तो अलग दबाव होता है। कॉन्फिडेंस होता है, लेकिन ओवरकॉन्फिडेंस नहीं लेता। मैं हमेशा संतुलित रहने की कोशिश करता हूं, क्योंकि वही सही स्थिति है। सवाल: कब लगा कि अब लोग आपको पहचानने लगे हैं? जवाब: थोड़ी पहचान ‘ब्लैक फ्राइडे’ और ‘देव डी’ के बाद मिलनी शुरू हुई। उस समय लोग चेहरे से पहचानते थे, नाम से नहीं। आज भी कई लोग कहते हैं, “आपको कहीं देखा है,” लेकिन सही जगह याद नहीं आती। कभी-कभी लोग गलत फिल्म या सीरीज का नाम भी बोल देते हैं। फिर मुझे कहना पड़ता है कि “भाई, गूगल कर लो।” असल में सही पहचान OTT के आने के बाद मिली। जब काम ज्यादा लोगों तक पहुंचता है और उन्हें पसंद आता है, तभी लोग दिल में जगह देते हैं। सवाल: शुरुआत में जब काम कम मिलता था, तब क्या करते थे? जवाब: कुछ खास नहीं करता था। घर पर समय बिताता था। बच्चों के साथ खेलना, उन्हें स्कूल छोड़ना, पियानो और डांस क्लास ले जाना, खाना बनाना, किताबें पढ़ना, फिल्में देखना। मैं फैमिली वाला इंसान हूं। काम नहीं होता था तो कोलकाता चला जाता था और वहां समय बिताकर वापस आता था। सवाल: क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग भी दी है? जवाब: मैंने कभी इंस्टिट्यूट खोलकर ट्रेनिंग नहीं दी, लेकिन जरूरत पड़ने पर वर्कशॉप और वन-ऑन-वन कोचिंग की। मैंने अर्जुन कपूर, परिणीति चोपड़ा, वाणी कपूर जैसे कलाकारों एक्टिंग की ट्रेनिंग दी है। कई फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में भी कोचिंग दी। वर्कशॉप आमतौर पर 7 से 15 दिन, और कभी-कभी एक महीने तक की होती थी। सवाल: आप एक्टिंग सिखाते समय किन बातों पर जोर देते हैं? जवाब: मैं सिर्फ डायलॉग या सीन नहीं सिखाता, बल्कि सोच सिखाता हूं। एक्टर की सोच अलग होनी चाहिए कि कैसे ऑब्जर्व करना है, चीजों को समझना है, ज्ञान इकट्ठा करना है और उसे परफॉर्मेंस में बदलना है। एक्टिंग जिम जाने जैसी चीज नहीं है। यह बड़ा और गहरा क्राफ्ट है। सवाल: जब आप इंडस्ट्री में आए, तो हीरो-विलेन को लेकर एक तय छवि होती है। क्या बचपन में आपने कभी सोचा था कि आप एक्टर बनेंगे? जवाब: नहीं, बचपन में मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक्टर बनूंगा। मैं पूरी तरह स्पोर्ट्स में था। फुटबॉल और क्रिकेट खेलता था। मुझे साहित्य में भी रुचि थी। मैं ‘लिटिल मैगजीन’ चलाता था, आर्टिकल लिखता था और कॉलेज मैगजीन में लिखता था। साथ ही थिएटर भी करता था। कोलकाता में मेरे दो थिएटर ग्रुप थे, एक में डायरेक्शन करता था और दूसरे में एक्टिंग। 2-3 और ग्रुप्स के साथ भी जुड़ा था। मैं स्टूडेंट यूनियन में भी एक्टिव था, इसलिए दिनभर व्यस्त रहता था। सवाल: तो एक्टिंग का ख्याल कब आया? जवाब: जब ग्रेजुएशन खत्म होने वाला था, तब लगा कि जिंदगी में कुछ खास नहीं किया। सिर्फ बीकॉम करके क्या करूंगा? उस समय उम्र 21-22 साल थी और स्पोर्ट्स में उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया था, जहां तक पहुंचना चाहता था। तभी लगा कि एक्टिंग ऐसी चीज है, जो मैं कर सकता हूं। सवाल: इसके बाद आपका सफर कैसे आगे बढ़ा? जवाब: मैंने थिएटर को गंभीरता से लेना शुरू किया। 1993 में IPTA (वेस्ट बंगाल) की तरफ से बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। 1994 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) जॉइन किया। एनएसडी में आने के बाद भी कभी नहीं सोचा था कि मुंबई जाऊंगा। मैं थिएटर ही करना चाहता था, इसलिए रिपर्टरी कंपनी जॉइन की। वाल: रिपर्टरी और थिएटर का अनुभव कैसा रहा? जवाब: रिपर्टरी में थिएटर करना मेरे लिए खास अनुभव था, क्योंकि वहां इज्जत और पैसे- दोनों के साथ काम करने का मौका मिलता था। सरकारी संस्था होने के कारण बड़े बजट में अलग-अलग तरह के नाटक करने का मौका मिलता था। यहां कॉमर्शियल दबाव नहीं होता था- टिकट बिके या न बिके, फर्क नहीं पड़ता था। हम ऐसे प्रयोग करते थे, जो बाहर इंडिपेंडेंट थिएटर में करना मुश्किल होता है। सवाल: फिर थिएटर छोड़कर आगे बढ़ने का फैसला कैसे लिया? जवाब: कुछ समय बाद माहौल अलग होने लगा। मुझे लगा कि हर किसी का अपना एजेंडा है और मेरा अपना। मैं बेवजह लड़ाई-झगड़े में समय खराब नहीं करना चाहता। इसलिए अपनी राह अलग बनाना बेहतर लगा और वहां से निकल आया। सवाल: आपके आने वाले प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से हैं? जवाब: कुछ प्रोजेक्ट्स लाइन में हैं। एक ‘राख’ है, जो अमेजन पर आएगी और उसका टीजर आ चुका है। इसके अलावा एक सीरीज साल के अंत तक आएगी। ‘गुलाबी’, ‘रुका हुआ फैसला’, ‘अल्फा’ जैसे प्रोजेक्ट्स भी हैं। साथ ही ‘चकदा एक्सप्रेस’ भी है, लेकिन उसकी रिलीज तय नहीं है। अगर सब सही से रिलीज हो जाएं, तो दर्शकों को अच्छी चीजें देखने को मिलेंगी।
हिंदी सिनेमा के दिग्गज गीतकार हसरत जयपुरी की 104वीं बर्थ एनिवर्सरी पर उनके भांजे डब्बू मलिक ने उनसे जुड़ी कई खास यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि हसरत जयपुरी न सिर्फ बेहतरीन शायर थे, बल्कि अपनी निजी जिंदगी में बेहद सादगी और अपनापन रखने वाले इंसान भी थे। चौपाटी पर खिलौने बेचने और बस कंडक्टर की नौकरी से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के शीर्ष गीतकारों में ले आया। शंकर-जयकिशन और राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने कई यादगार गाने दिए। आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब रही, जो उनके काम के प्रति जुनून को दिखाती है। लोग इतना इंपोर्टेंस उन्हें क्यों दे रहे हैं, यह जानने के लिए वर्षों लगे डब्बू मलिक बताते हैं- हम बहुत छोटे थे, तब खार स्थिति मामा हसरत जयपुरी के घर पर जाते थे। घर से बालकनी से सटा उनका बेड होता था, जहां बैठकर वे पोयट्री लिखते थे। हमारी बचपन की यादें यह है कि बड़े-बड़े डायरेक्टर, प्रोडूसर, एक्टर का हुजूम उनसे मिलने के लिए घर आते थे। हम छोटे थे, तब इतना क्लीयर नहीं होता था कि लोग उन्हें इतना रिस्पेक्ट या इतना इंपोर्टेंस क्यों दे रहे हैं। यह जानने के लिए हमें वर्षों लगे। फिर धीरे-धीरे पता चला कि मामाजी बहुत बड़े गीतकार हैं। अब पीछे मुड़कर देखता हूं, तब पाता हूं कि बाप रे! इस इंसान ने इतना बेहतरीन काम किया। उनकी सबसे खूबसूरत चीज यह होती थी कि उनको किमाम पान और परफ्यूम का बड़ा शौक था। उसी तरह उनकी खुशबूदार पर्सनालिटी भी थी। उनका बहन-बहनोई आदि का काफी बड़ा कुनबा था और वे सबको बड़ा प्यार देते थे। सबका खयाल रखते थे, उनकी यह सबसे बड़ी विशेषता थी। लोगों की जिंदगी के बारे में सोचते थे और उसमें मग्न रहते थे। हम लोग सोचते थे कि उनका अटेंशन लेना भी बहुत मुश्किल था। बिकॉज, वे दिन भर गीत लिखने में लगे रहते थे। जयकिशन की डेथ पर दिन भर रोते रहे मुझे उनकी एक शाम की बात याद है, जो कभी भूलता नहीं हूं। वह यह है कि जय किशन की डेथ हुई थी। उस दिन नेशनल रेडियो पर उनका लिखा गीत पूरे हिंदुस्तान में बज रहा था। वह गीत था- ‘गीतों का कन्हैया चला गया, अब गीत मेरे विरान हुए...’, इसे सुनकर उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। मुझे पता नहीं, शायद इसकी कम्पोजिशन शंकर-जयकिशन जी ने की होगी। लेकिन वह लम्हा कभी भुलाए भुला नहीं जाता। उनके गीतों पर शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने बड़ा दिलकश काम किया है। आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब थी मामा हसरत जयपुरी, मुझसे बेहद प्यार करते थे। मैं उनका लाडला था, क्योंकि घर में सबसे छोटा मैं ही था। मुझे उनसे बहुत प्यार मिला। हालांकि उस समय वे काफी ओल्ड हो चुके थे, लेकिन उन्होंने मुझे प्रेडिक्ट किया था कि तुम्हारे अंदर भी एक संगीतकार छुपा है, तुम गाने बना सकते हो। मैंने बोला कि मैं तो कुछ सीखा ही नहीं हूं। उस समय तक वे जुहू स्थिति अपने बंगले में रहने के लिए आ गए थे। जुहू में उनका भव्य बंगला था। फाइनेंशियली बहुत ही सिक्योर इंसान थे। वे और उनकी वाइफ ने फैमिली के लिए बड़े-बड़े डिसीजन लिये। अपने जमाने में उनकी बहुत ही सक्सेसफुल फैमिली रही है। वे आने वाली 10 जेनरेशन को सिक्योर करके चले गए। इतने महान आदमी थे। लेकिन मैंने एक चीज देखी है कि आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब थी। अपनी बहन यानी मेरी मम्मी के लिए लिखा गीत मेरी मम्मी मिल्किस, हसरत जयपुरी की सबसे छोटी बहन थीं। वे मेरी मम्मी को बहुत प्यार करते थे। प्यार से मम्मी को नन्हूं (छोटी) बुलाते थे। उन्होंने गीत- ‘सुनो छोटी-सी गुड़िया की लंबी कहानी...’, मेरी मम्मी के लिए लिखा था। मेरी मम्मी के जीवन में जो संघर्ष था, उसे ध्यान रखते हुए लिखा था। पापा ने काफी स्ट्रगल देखा था। उनके लिए तो मम्मी 15-16 साल की बहन थी, जिनकी शादी 18 साल की उम्र में हो गई। उन्होंने बहन की सारी जिंदगी देखी। हालांकि अपने हिसाब से वे जो कुछ भी कर सकते थे, वह किया। लेकिन मम्मी को देखकर वे हमेशा कहते थे कि यह मेरी गुड़िया है। उनको इन सब चीजों की तकलीफ उठाने की जरूरत नहीं थी, तब उन्होंने यह गाना लिखा था। अपने काम के प्रति फोकस्ड थे उनकी बहुत ही क्रिएटिव और बड़े कमाल की पर्सनालिटी थी। अपने काम के प्रति इतना फोकस्ड और इतना लीन होना उनसे सीखा जा सकता है। मतलब उनके पास किसी तरह का कोई डायवर्जन ही नहीं था। दिन भर लफ्जों की कहानी में बिजी रहते थे। उन्होंने कभी नॉर्मल जिंदगी जिया ही नहीं। हर एक पल, हर एक क्षण उनको सिर्फ म्यूजिक, लिरिक्स, गीत-गाने, मुखड़े ही सुनते थे। कमाल की शख्सियत थी। डायरेक्टर वगैरह से मिलना हो, तभी वे पार्टी-फंक्शन में जाते थे। अपने जमाने में राइटिंग कि हिसाब से कमर्शियल सक्सेसफुल इंसान रहे। उन्होंने अपने दौर में जो समय देखा है, वह कोई देख ही नहीं सकता। इतना पॉवर, इतनी कमर्शियल सक्सेस, बाप रे बाप! वॉव!! आज अतीत में जाएंगे, तब पाएंगे कि क्या गाने और क्या पिक्चर, क्या काम किया है। मैंने भी सुना है कि चौपाटी पर बैठकर खिलौने बेचते थे उनके बारे जितना सुना है, वह यह है कि वे अपनी फैमिली को संभालने जयपुर से मुंबई आए थे। यहां चौपाटी पर बैठकर खिलौने बेचते थे। फिर उनको बस कंडक्टर की नौकरी मिली। फिर किसी मुशायरे में बतौर पोएट उनको पृथ्वी राज कपूर मिले। पृथ्वी राज कपूर ने उन्हें रेकमेंड किया है कि मेरे बेटे राज कपूर से मिलिए। वहां से कहानी शुरू हुई। मैंने इतना मेहनत करने वाला इंसान अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा। ‘बाहरों फूल बरसाओ...’, ‘लिखे जो खत तुझे...’, ‘तुम मुझे यूं न भुला पाओगे...’, ‘एहसास तेरा होगा मुझ पर...’ ‘जिंन्दगी एक सफर है सुहाना...’ आदि उनके लिखे मेरे पसंदीदा गानों की लिस्ट ही खत्म नहीं होगी। आज सोचता हूं कि इतना दिग्गज इंसान इस पृथ्वी पर आया और इतने अच्छे रोमेंटिक गाने लिखकर चला गया। खुशकिश्मत हूं कि उन्हें गले लगाने का मौका मिला हम तो सारी जिंदगी उनके मुरीद ही बने रहेंगे। कभी-कभी खुद को खुशकिस्मत समझते हैं, जो उनको दिल से दिल गले लगाने मौका मिला। हम उनको किस कर सके और वे हमारे माथे को चूम सके। यह हमारी किस्मत थी कि इतने बड़े आदमी का हमें प्यार मिला। उन्हें वेज-नॉन वेज सब पसंद था। उनके बेटे भी कहते हैं कि गाना और खाना उनका फेवरिट रहा है। वे अपनी बहन यानी मेरी मम्मी के हाथ का खाना खाने के लिए शंकर-जयकिशन, राज कपूर आदि के साथ घर आया करते थे। मेरी मम्मी बहुत अच्छा नॉन वेजिटेरियन बनाती थी। वे घर पर फोन करके बोलते थे कि नंदो से कहना कि आज शाही कबाब बना दें। मेरी मम्मी के खाने पकाने पर उनको बड़ा गर्व था। वे बड़े साधारण तरीके जन्मदिन मनाते थे। जन्मदिन पर गरीबों को खाना बांटते थे।
बॉलीवुड कपल आलिया भट्ट और रणबीर कपूर ने 14 अप्रैल को अपनी शादी की चौथी एनिवर्सरी सेलिब्रेट की। इस मौके पर आलिया ने सोशल मीडिया पर अपने वेकेशन की कई अनसीन तस्वीरें और वीडियो शेयर किए हैं। इन तस्वीरों में यह कपल बर्फीली वादियों के बीच सुकून के पल बिताता नजर आ रहा है। आलिया ने इंस्टाग्राम पर अपनी स्कीइंग ट्रिप की झलक दिखाई है। शेयर किए गए वीडियो में दोनों पहाड़ों पर स्कीइंग करते और बर्फीली वादियों का लुत्फ उठाते दिख रहे हैं। एक फोटो में दोनों साथ बैठकर गर्म ड्रिंक्स एन्जॉय कर रहे हैं। हालांकि आलिया ने लोकेशन का खुलासा नहीं किया है, लेकिन विजुअल्स देखकर फैंस कयास लगा रहे हैं कि यह कपल स्विट्जरलैंड के गस्ताद में छुट्टियां मना रहा है। बेटी राहा संग नजर आए रणबीर कपूरतस्वीरों में रणबीर कपूर अपनी बेटी राहा के साथ नजर आ रहे हैं। रणबीर, राहा को साथ में लेकर 'एल्पका' (एक तरह का पहाड़ी जानवर) को खाना खिलाते दिख रहे हैं। आलिया ने पोस्ट के साथ एक इमोशनल नोट भी लिखा फिसलने और गिरने, चलने और बहुत सारी बातें करने के बीच... हमने अपने लिए एक बहुत ही शानदार लाइफ बना ली है। शॉर्ट में कहूं तो... तू साथ है तो दिन रात है। आलिया ने इस पोस्ट के बैकग्राउंड में अपनी फिल्म 'हाईवे' का म्यूजिक इस्तेमाल किया है। फैमिली ने दी बधाईआलिया की इस पोस्ट पर परिवार और बॉलीवुड सितारों ने खूब प्यार बरसाया। रणबीर की मां नीतू कपूर ने इसे 'परफेक्ट' बताया, वहीं आलिया की मां सोनी राजदान ने कमेंट किया यह सब कितना जादुई और प्यारा है। रणबीर की बहन रिद्धिमा ने भी दिल वाला इमोजी शेयर किया। अयान की फिल्म से शुरू हुई थी लव स्टोरीआलिया और रणबीर की प्रेम कहानी अयान मुखर्जी की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' के सेट पर शुरू हुई थी। कई सालों तक डेटिंग के बाद 14 अप्रैल 2022 को दोनों ने मुंबई में अपने घर 'वास्तु' में सादगी से शादी की थी। उसी साल नवंबर में उन्होंने बेटी राहा का स्वागत किया। अब यह जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ नजर आने वाली है। संजय लीला भंसाली की अगली फिल्म 'लव एंड वॉर' में रणबीर-आलिया के साथ विक्की कौशल भी लीड रोल में होंगे।
आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बना रही है। इसी बीच फिल्म मेकर कुणाल कोहली ने धुरंधर 2 पर एक बड़ा खुलासा किया है। कुणाल ने बताया कि फिल्म की रिलीज से पहले इंडस्ट्री के कई बड़े निर्देशकों का मानना था कि यह फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। कुणाल कोहली ने स्क्रीन से बातचीत में कहा कि जब फिल्म रिलीज होने वाली थी, तब उन्होंने कई बड़े निर्देशकों से बात की थी। कुणाल के मुताबिक, इंडस्ट्री ने इस फिल्म का सपोर्ट नहीं किया था। मैंने जिन बड़े डायरेक्टर्स से बात की, उनका कहना था कि फिल्म सोमवार को बैठ जाएगी। लेकिन सोमवार को फिल्म बैठने के बजाय और ज्यादा चलने लगी। कुणाल ने आगे कहा कि किसी फिल्म की सफलता के लिए इंडस्ट्री का सपोर्ट होना जरूरी नहीं है, दर्शक खुद तय करते हैं कि फिल्म कैसी है। 'फेक कलेक्शन' पर कुणाल का तंजकुणाल ने फिल्म के 'जेनुइन कलेक्शन' की तारीफ करते हुए उन फिल्मों पर निशाना साधा जो आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ करती हैं। उन्होंने कहा, कुछ फिल्में फेक कलेक्शन दिखाती हैं, फिर भी अपने पूरे लाइफटाइम में 100 करोड़ नहीं जुटा पातीं। वहीं, धुरंधर 2 ने बिना किसी दिखावे के एक दिन में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की है। उन्होंने आदित्य धर, रणवीर सिंह और जियो स्टूडियोज को भारतीय सिनेमा की असली क्षमता दिखाने के लिए बधाई दी। हीरो को 'मर्द' होना चाहिएकुणाल कोहली ने फिल्म में रणवीर सिंह के किरदार की तारीफ करते हुए कहा कि हिंदी फिल्मों के हीरो को 'मर्द' दिखना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें विदेशी विषयों से प्रभावित होने के बजाय देसी कहानियां बनानी चाहिए। हमारे हीरो को खोया हुआ या कंफ्यूज लड़का नहीं होना चाहिए। जैसा 'सैयारा' और 'धुरंधर' में दिखाया गया, हीरो वैसा ही होना चाहिए। कुणाल ने 'बॉर्डर 2' का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह फिल्म 300 करोड़ पार कर गई थी, तब भी लोगों ने उसकी आलोचना की थी, जबकि वह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म थी।
ग्लोबल बॉक्स ऑफिस:‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ बनी 2026 की सबसे बड़ी फिल्म; दुनियाभर में कमाए ₹5,200 करोड़
हॉलीवुड में 2026 की बॉक्स ऑफिस रेस में ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ ने बाजी मार ली है। मारियो फ्रेंचाइज की इस नई फिल्म ने दुनियाभर में 629 मिलियन डॉलर (लगभग 5,200 करोड़ रुपए) की कमाई के साथ साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का खिताब अपने नाम कर लिया है और अब यह 1 बिलियन डॉलर क्लब की ओर तेजी से बढ़ रही है। फिल्म ने रिलीज के दूसरे वीकेंड में ही जबरदस्त रफ्तार पकड़ी। अमेरिका और कनाडा के 4,284 थिएटर्स से इसे 69 मिलियन डॉलर करीब 570 करोड़ रुपए) की कमाई मिली, जिससे इसका घरेलू कलेक्शन 308.1 मिलियन डॉलर (लगभग 2,550 करोड़ रुपए) तक पहुंच गया। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में भी फिल्म ने 81 देशों से 83.5 मिलियन डॉलर (करीब 690 करोड़ रुपए) जुटाकर अपनी ग्लोबल पकड़ मजबूत कर ली है। हालांकि, फ्रेंचाइज की पिछली फिल्म ‘द सुपर मारियो ब्रॉस’ ने दूसरे वीकेंड तक 2,930 करोड़ रुपए लगभग की घरेलू कमाई की थी। आखिर में 10,800 करोड़ का आंकड़ा पार किया था।
हॉलीवुड एक्टर और पूर्व रेसलर जॉन सीना ने सिंगर आशा भोसले को श्रद्धांजलि दी है। सीना ने सोमवार को अपने इंस्टाग्राम पर आशा भोसले की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह स्टेज पर परफॉर्म करती नजर आ रही हैं। जॉन सीना की फिल्म हेड्स ऑफ स्टेट की को-स्टार प्रियंका चोपड़ा ने पोस्ट पर कमेंट करते हुए आशा भोसले को 'क्वीन' बताया। मलेशिया के प्रधानमंत्री ने भी दुख जताया वहीं, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने महान सिंगर आशा भोसले के निधन पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने इसे संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आशा भोसले की आवाज ने कई पीढ़ियों को जोड़ा। उन्होंने हजारों गानों के जरिए भावनाएं, परंपराएं और कहानियां दुनिया तक पहुंचाईं। उनकी आवाज में खास जादू था, जिसने दुनियाभर के लोगों के दिलों को छुआ।उन्होंने यह भी कहा कि लता मंगेशकर की छोटी बहन होने के बावजूद आशा भोसले ने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने हमेशा कुछ नया करने की कोशिश की और अपनी खास स्टाइल से लोगों के बीच बनी रहीं। अनवर इब्राहिम ने यह भी कहा कि मलेशिया की ओर से उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आशा भोसले की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
रणवीर सिंह इन दिनों अपनी फिल्मों 'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' की सफलता के बाद सुर्खियों में हैं। अब एक्टर पहली बार अपने ससुर और पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण के साथ एक विज्ञापन में नजर आए हैं। लेकिन इसकी चर्चा की वजह सिर्फ ससुर-दामाद की जोड़ी नहीं है। वीडियो के बैकग्राउंड में एक फिल्म का पोस्टर लगा है। पोस्टर पर रणवीर सिंह की फोटो है और फिल्म का नाम 'बवंडर: द टॉरनेडो' (Bavandar: The Tornado) लिखा है। फैंस का दावा है कि इस विज्ञापन के जरिए रणवीर ने यूट्यूबर ध्रुव राठी पर निशाना साधा है। दरअसल, ध्रुव राठी ने रणवीर की फिल्म 'धुरंधर' की आलोचना करते हुए अपने वीडियो में एक काल्पनिक फिल्म 'ऑपरेशन बवंडर' का नाम लिया था। पोस्टर के जरिए ध्रुव राठी पर तंजRuPay के इस कमर्शियल में रणवीर सिंह और प्रकाश पादुकोण पेमेंट के फायदों पर बात कर रहे हैं। एक सीन में दोनों थिएटर में बैठे हैं, जहां बैकग्राउंड में एक फिल्म का पोस्टर लगा है। पोस्टर पर रणवीर सिंह की फोटो है और फिल्म का नाम 'बवंडर: द टॉरनेडो' (Bavandar: The Tornado) लिखा है। फैंस ने तुरंत इसे ध्रुव राठी से जोड़ दिया। फैंस ने पकड़ी 'पीक डिटेलिंग'सोशल मीडिया यूजर्स विज्ञापन की बारीकियों की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, रणवीर ने ध्रुव राठी के बवंडर वाले जोक को उन्हीं पर पलट दिया है, यह कमाल की डिटेलिंग है। विज्ञापन में रणवीर अपने ससुर को 'पप्पा' कहते दिखते हैं। बता दें कि दीपिका पादुकोण भी अपने पिता को इसी नाम से बुलाती हैं। एक अन्य सीन में रणवीर हाथ में यूनिकॉर्न पकड़े हैं, जिसे फैंस उनके 'गर्ल डैड' (बेटी के पिता) होने से जोड़कर देख रहे हैं। ध्रुव राठी ने बताया था 'चुनावी विज्ञापन'यूट्यूबर ध्रुव राठी ने अपने पिछले वीडियो में फिल्म 'धुरंधर' और इसके सीक्वल को सत्ताधारी पार्टी का प्रोपेगैंडा बताया था। ध्रुव ने कहा था कि 'धुरंधर 2' मनोरंजन के लिए नहीं बनी है, बल्कि यह बीजेपी का सबसे महंगा चुनावी विज्ञापन है, जिसे देखने के लिए दर्शक 500 रुपए दे रहे हैं। उन्होंने फिल्म में नोटबंदी को सही दिखाने के दावों पर भी सवाल उठाए थे।
कंटेंट-ड्रिवेन सिनेमा के लिए जानी जाने वाली यामी गौतम अब अपने करियर के सबसे अलग और साहसी प्रोजेक्ट की ओर बढ़ चुकी हैं। फिल्म गलियारों में चर्चा है कि उन्होंने दिग्गज निर्माता-निर्देशक आनंद एल. राय के साथ एक मायथोलॉजिकल हॉरर कॉमेडी ‘नई नवेली’ के लिए हाथ मिलाया है। यह फिल्म लोक कथाओं और आधुनिक कहानी कहने के फॉर्मेट का अनोखा मेल होगी, जिसमें तकनीकी स्तर पर दक्षिण भारतीय सिनेमा की मजबूत भागीदारी देखने को मिलेगी। मालवणी में चल रही शूटिंग, 2 साल की तैयारी सीक्रेट रही सूत्रों के मुताबिक, फिल्म की शूटिंग मुंबई के मालवणी इलाके में पिछले एक हफ्ते से तेजी से जारी है। यह प्रोजेक्ट आनंद एल. राय के बैनर कलर येलो प्रोडक्शंस के तहत बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस फिल्म पर लगभग दो वर्षों से सीक्रेटली प्रोडक्शन का काम चल रहा था। कहानी वर्तमान समय में सेट है, लेकिन इसकी जड़ें हजारों साल पुरानी पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी हुई बताई जा रही हैं, जो इसे एक अलग सिनेमाई पहचान देंगी। मेरठ की पृष्ठभूमि में रहस्य और फैमिली ड्रामा भी दिखेगा फिल्म का कैनवास मॉडर्न-डे में है, जहां मेरठ के बैकग्राउंड में एक नवविवाहित बहू के घर में आने के बाद रहस्यमयी घटनाओं का सिलसिला शुरू होता है। यह कहानी किसी लुटेरी दुल्हन या ग्रे शेड वाले किरदार पर नहीं है, बल्कि एक फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें हॉरर और कॉमेडी के साथ इमोशनल एलिमेंट्स भी हैं। टेक्निकल क्रू में साउथ से जुड़े बड़े दिग्गज नाम होंगे शामिल फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका टेक्निकल क्रू है, जिसमें साउथ सिनेमा के बड़े नाम शामिल हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संगीतकार जी.वी. प्रकाश कुमार इससे हिंदी सिनेमा में डेब्यू करने जा रहे हैं और चूंकि फिल्म म्यूजिकल टोन लिए हुए है, इसलिए उनका संगीत इसकी आत्मा माना जा रहा है। ‘आर्टिकल 370’ के बाद यामी एक बार फिर एक्शन अवतार में दिखेंगी। दिव्य निधि ने लिखी है स्क्रिप्ट, दिखाएगी लोक कथाओं का गहरा पक्ष फिल्म की स्क्रिप्ट दिव्य निधि शर्मा ने लिखी है। उन्होंने इस स्क्रिप्ट में हॉरर और कॉमेडी के बीच एक बारीक संतुलन तैयार किया है। कहानी सिर्फ डराने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय लोक कथाओं के उस गहरे पक्ष को सामने लाती है, जो हजारों साल पुरानी मिथकीय कहानियों को आज से जोड़ता है। ‘धुरंधर 2' के लिए भी सराही गई यामी, आगे फिर पति आदित्य की फिल्म में दिखेंगी यामी फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में भी दिखीं। इसकी सफलता ने उनके करियर को नई मजबूती दी है। ‘धुरंधर 2' में उनके कैमियो को जिस तरह सराहा गया, उसने उनके एक्शन-ब्रांड को और मजबूत किया है। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि ‘नई नवेली’ 2026 के अंत तक रिलीज हो सकती है और अपने कॉन्सेप्ट के चलते स्लीपर हिट बनने की क्षमता रखती है। सूत्रों के मुताबिक, यामी का 2027 का शेड्यूल पूरी तरह से बड़े प्रोजेक्ट्स से भरा हुआ है। साल की शुरुआत में वह एक स्पाई थ्रिलर में दिखेंगी। इसमें उनका किरदार एक हाई-प्रोफाइल इंटेलिजेंस ऑफिसर का होगा। फिर 2027 के अंत तक पति आदित्य धर के निर्देशन में एक भव्य एक्शन फिल्म भी आएगी जो ‘धुरंधर’ यूनिवर्स को और विस्तार देगी।
साउथ एक्टर राम चरण इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी पेरेंटिंग स्टाइल यानी बच्चों को पालने के तरीके पर खुलकर बात की। तीन बच्चों के पिता राम चरण ने खुद को एक ‘रफ’ (एक तरह से सख्त) पिता बताया है। उनका मानना है कि बच्चों को बचपन से ही चुनौतियों का सामना करना और जोखिम लेना सीखना चाहिए। बच्चों को जोखिम लेना सिखाते हैं एक्टरएस्क्वायर इंडिया के साथ बातचीत में राम चरण ने बताया कि वे अपने बच्चों के लिए किस तरह के पिता हैं। उन्होंने कहा, मैं वह पिता हूं जो बच्चों को कूदने, गंदा होने और रिस्क लेने के लिए मोटिवेट करता है। मैं चाहता हूं कि वे बेझिझक बाहर खेलें और मिट्टी में गंदे होने से न डरें। एक्टर के मुताबिक, जब उनके बच्चों को हिम्मत की जरूरत होती है, तो वे उनके पास आते हैं। उपासना और राम चरण के बीच पेरेंटिंग बैलेंसराम चरण ने अपनी पत्नी उपासना कामिनेनी के रोल के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि उनके घर में पेरेंटिंग का एक सही बैलेंस है। उपासना बच्चों के लिए ममता और केयर का सेंटर हैं। जब बच्चों को आराम और सुकून चाहिए होता है, तो वे अपनी मां के पास जाते हैं, लेकिन किसी भी मुश्किल चुनौती का सामना करने के लिए वे अपने पिता की ओर देखते हैं। कहा- बच्चों के लिए ‘प्रेजेंट’ रहना जरूरीएक्टर ने पेरेंटिंग को लेकर एक जरूरी सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि बच्चे सलाह सुनने से ज्यादा अपने माता-पिता के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। राम चरण ने कहा, मैं सबसे पहले एक ऐसा पिता बनना चाहता हूं जो हर पल अपने बच्चों के साथ मौजूद रहे। 2012 में हुई थी शादी, तीन बच्चों के पिताराम चरण और उपासना की निजी जिंदगी की बात करें तो दोनों ने 2012 में शादी की थी। कपल ने 2023 में अपनी पहली बेटी 'क्लिन कारा' का स्वागत किया। इसके बाद जनवरी 2026 में उनके घर जुड़वां बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) का जन्म हुआ। अब राम चरण दो बेटियों और एक बेटे के पिता हैं। अपकमिंग फिल्म ‘पेद्दी’ में आएंगे नजरराम चरण इन दिनों अपनी फिल्म ‘पेद्दी’ की तैयारी में बिजी हैं। यह एक स्पोर्ट्स एक्शन ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन बुच्ची बाबू सना कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ जान्हवी कपूर, शिवराजकुमार और जगपति बाबू जैसे कलाकार अहम रोल में नजर आएंगे।
रणवीर सिंह स्टारर फिल्म धुरंधर और धुरंधर 2 ने मिलकर दुनियाभर में 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली, जिसके बाद यह 3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म फ्रेंचाइजी बन गई है। जब किसी एक फिल्म की सफलता के बाद उसके एक से ज्यादा पार्ट बनाए जाते हैं, तो वह एक फ्रेंचाइजी का रूप ले लेती है। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, धुरंधर 2 का इंडिया में नेट कलेक्शन ₹1,088.62 करोड़ और इंडिया ग्रॉस ₹1,303.37 करोड़ हो चुका है। ओवरसीज में फिल्म ने ₹415.25 करोड़ की कमाई की है। इसके साथ ही फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹1,718.62 करोड़ पहुंच गया है। बता दें कि ग्रॉस कलेक्शन टिकट से कुल कमाई और नेट कलेक्शन टैक्स के बाद की कमाई होती है। दोनों फिल्मों का वर्ल्डवाइड कलेक्शन ₹3,025.97 करोड़ पहुंचा 5 दिसंबर 2025 में रिलीज हुई धुरंधर ने दुनियाभर में करीब ₹1,307.35 करोड़ का कलेक्शन किया था। वहीं, 19 मार्च 2026 में रिलीज हुए इसके सीक्वल धुरंधर 2 ने महज 26 दिनों के भीतर लगभग ₹1,718.62 करोड़ की कमाई कर ली। इस तरह दोनों फिल्मों का कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन ₹3,025.97 करोड़ पहुंच गया है। खास बात यह है कि धुरंधर 2 अभी सिनेमाघरों में चल रही है। धुरंधर ने कमाई के मामले में भारतीय सिनेमा की अन्य बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। पुष्पा की दोनों पार्ट की कुल कमाई करीब ₹2,192 करोड़ के आसपास रही थी। पुष्पा ने करीब ₹350.10 करोड़ और दूसरे पार्ट ने ₹1,742.10 करोड़ दुनियाभर में कमाए थे वहीं, बाहुबली के दोनों पार्ट ने करीब ₹2,438 करोड़ का बिजनेस किया था। बाहुबली ने करीब ₹650.00 करोड़ और दूसरे पार्ट ने ₹1,788.10 करोड़ दुनियाभर में कमाए थे। धुरंधर को शानदार रिस्पॉन्स मिला था धुरंधर के पहले पार्ट ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपए कमाए। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 1,005.85 करोड़ रुपए रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए हुआ। वहीं, 894.49 करोड़ रुपए की कमाई के साथ ही यह हिंदी भाषा में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। विदेशी बाजारों में भी फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब 299.5 करोड़ रुपए कमाए। अमेरिका और कनाडा में 193.06 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर बाहुबली 2 का रिकॉर्ड भी तोड़ा। दिलचस्प बात यह थी कि फिल्म को खाड़ी देशों में रिलीज की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद शानदार सफलता मिली। साथ ही यह भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘A’ रेटेड फिल्म बनी। ……..……..……..…….. धुरंधर 2 से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर 2 रिव्यू; रणवीर की फिर दमदार परफॉर्मेंस: नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने सोमवार को एक्ट्रेस प्रीति जिंटा को उनकी टीम पंजाब किंग्स (PBKS) के IPL 2026 में अब तक के शानदार प्रदर्शन को लेकर बधाई दी। बता दें कि IPL 2026 में PBKS का प्रदर्शन अब तक काफी शानदार रहा है। टीम फिलहाल 4 मैचों में 3 जीत और 1 बेनतीजा (No Result) मैच के साथ 7 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल में दूसरे स्थान पर है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सलमान खान ने लिखा, “शाबाश जिंटा! बधाई हो जिंटा, टीम बहुत अच्छा खेल रही है…।” फैंस ने पुराने ट्वीट की याद आई सलमान का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। दरअसल, फैंस ने इस ट्वीट की तुलना साल 2014 में किए गए सलमान के पुराने पोस्ट से की, जिसमें उन्होंने पूछा था, “जिंटा की टीम जीती क्या?” सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे “12 साल बाद आया सबसे अच्छा सीक्वल” बताते हुए फनी रिएक्शन दिए। कुछ यूजर्स ने “टाइगर जिंटा है” जैसे कमेंट भी किए। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया सलमान खान और प्रीति जिंटा लंबे समय से दोस्त हैं और उन्होंने कई फिल्मों में साथ काम किया है, जिनमें चोरी चोरी चुपके चुपके, जान-ए-मन, और हर दिल जो प्यार करेगा शामिल हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान जल्द ही अपकमिंग फिल्म मातृभूमि में नजर आएंगे। वहीं इसके अलावा एक्टर जल्द ही दिल राजू के साथ अपकमिंग फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। इस फिल्म में नयनतारा भी नजर आएंगी और इसका डायरेक्शन वामशी पेडिपल्ली करेंगे। इस बीच, प्रीति जिंटा आने वाली फिल्म लाहौर 1947 में सनी देओल, शबाना आजमी, अली फजल और करण देओल के साथ नजर आएंगी। फिल्म का म्यूजिक ए. आर. रहमान ने बनाया है और गाने के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं। वह वाइब नाम के एक प्रोजेक्ट में भी नजर आएंगी।
सिंगर लता मंगेशकर और आशा भोसले की याद में पुणे में एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाया जाएगा। दोनों सिंगर्स के भाई और म्यूजिक डायरेक्टर हृदयनाथ मंगेशकर ने सोमवार को यह जानकारी दी। हृदयनाथ मंगेशकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका जन्म पुणे में हुआ और उनकी मां और लता मंगेशकर ने इसी शहर में गरीबों की सेवा के लिए अस्पताल बनाने का सपना देखा था। उन्होंने बताया कि करीब 25 साल पहले परिवार और डॉक्टरों ने इस अस्पताल को बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उस समय यह पूरा नहीं हो सका। हृदयनाथ ने कहा कि बाद में परिवार ने निर्णय लिया कि अस्पताल लता मंगेशकर के नाम पर बनाया जाएगा और इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई थीं। 16 तारीख के दिन इसके मुहूर्त की योजना थी, लेकिन इसी बीच अचानक आशा भोसले का निधन हो गया। उन्होंने कहा कि अब परिवार ने तय किया है कि अस्पताल लता मंगेशकर और आशा भोसले दोनों के नाम पर बनाया जाएगा। हम इसे एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आशा भोसले का निधन आशा भोसले का रविवार को 92 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। सोमवार को सिंगर आशा भोसले का राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। उन्हें महाराष्ट्र पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। अंतिम संस्कार में आमिर खान, विक्की कौशल, अनु मलिक, शान समेत कई सेलेब्स श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। देखें आशा भोसले के अंतिम संस्कार की 6 तस्वीरें- आशा भोसले के घर कई सेलेब्स पहुंचे शिवाजी पार्क श्मशान घाट में अंतिम संस्कार से पहले सोमवार सुबह आशा भोसले के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मुंबई स्थित उनके निवास ‘कासा ग्रांडे’ में रखा गया। सचिन तेंदुलकर, रणवीर सिंह, जैकी श्रॉफ, रितेश देशमुख सहित कई सेलेब्स अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। देखें अंतिम दर्शन के दौरान की तस्वीरें-
सारा अली खान तीन दिन के लिए उत्तराखंड में ट्रैकिंग के लिए पहुंचीं। इस दौरान वे टिहरी में 18 किलोमीटर पैदल चलीं। उन्होंने पंवाली कांठा बुग्याल में ट्रैकिंग कर बर्फबारी और पहाड़ी की खूबसूरत वादियों का दीदार किया। इस दौरान सारा ने स्थानीय लोगों के साथ समय बिताकर वहां के पहाड़ी खाना भी खाया। वह यहां तीन दिन रुकीं। स्काईहाइक कंपनी के ट्रैकर कुलदीप रावत ने बताया कि सारा अली खान टिहरी के घुत्तू क्षेत्र पहुंचीं। उन्होंने ग्वाणा गांव से लगभग 18 किलोमीटर लंबे पैदल ट्रैक की शुरुआत की। यह ट्रैक प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच से होकर गुजरता है। ट्रैक के दौरान सारा ने दोफन नामक स्थान पर रात्रि विश्राम किया। यहां होटल या रेस्टोरेंट जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसके बावजूद सारा ने बर्फबारी के बीच टेंट में रुककर रात बिताई। सारा ने लाल चावल, मंडवे की रोटी और लिंगड़ी की सब्जी खाई अगले दिन सुबह वह पंवाली कांठा बुग्याल पहुंचीं, जहां इन दिनों ताजा बर्फबारी के कारण पूरा क्षेत्र सफेद चादर से ढका हुआ है। उन्होंने बुग्यालों की मनमोहक वादियों और बर्फीले नजारों के बीच काफी समय बिताया। देर शाम वह दोफन वापस लौटीं और अगले दिन घुत्तू के लिए रवाना हो गईं। वे शनिवार को आई थीं और सोमवार शाम को वापस लौट गईं। ट्रैक के दौरान सारा अली खान ने स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया और पहाड़ी व्यंजनों जैसे लाल चावल, मंडवे की रोटी और लिंगड़ी की सब्जी का स्वाद भी लिया। ट्रैकर्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह स्थान बेहद खूबसूरत है। यहां आकर उन्हें बहुत सुकून मिला और यह अनुभव उनके लिए यादगार रहा। उन्होंने भविष्य में दोबारा यहां आने की इच्छा भी जताई। सारा ने अक्टूबर में किए थे रुद्रनाथ धाम के दर्शन सारा अली खान ने चमोली में स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले अक्टूबर में दर्शन किए थे। इस दौरान सारा 20 किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुंची थी। सारा ने अपनी ये यात्रा चमोली के गोपेश्वर के गंगोल गांव से शुरू की थी। इसके बाद एक दिन बाद वह ल्वींटी बुग्याल पहुंची, जहां पर रात्रि विश्राम के बाद उन्होंने फिर से ट्रैकिंग शुरू की और फिर रुद्रनाथ बाबा के मंदिर तक पहुंच गईं थी। इस पूरी यात्रा के दौरान सारा कई पथरीले और संकरे रास्तों से गुजरीं, बीच में उन्हें कई स्थानीय ग्रामीण भी मिले, जो सारा को देखकर काफी खुश हो गए। सारा अली खान ने ट्रेकिंग के दौरान झोपड़ीनुमा ढाबों पर रुककर चाय पी और स्थानीय लोगों से बातचीत की। उन्होंने यहां के धार्मिक विश्वास, लोक जीवन और पारंपरिक व्यंजनों के बारे में जाना। अभिनेत्री ने पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता और ग्रामीण संस्कृति से खासा प्रभावित होकर इसे यादगार अनुभव बताया था। सारा अली खान कई बार पहुंच चुकी हैं केदारनाथ सारा अली खान का केदारनाथ धाम से खास जुड़ाव रहा है। फिल्म ‘केदारनाथ’ के बनने के बाद वह कई बार धाम में दर्शन के लिए पहुंच चुकी हैं और अब तक बिना किसी रोक-टोक के पूजा-अर्चना करती रही हैं। हालांकि प्रस्तावित नई व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें भी अन्य श्रद्धालुओं की तरह तय प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है। सारा का केदारनाथ से पहला आध्यात्मिक और पेशेवर जुड़ाव साल 2017 में उनकी डेब्यू फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग के दौरान हुआ था। इसके बाद वह लगातार यहां आती रही हैं। अक्टूबर 2024 में दिवाली से ठीक पहले उन्होंने केदारनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और फोटो शेयर की थीं। वहीं 2023 में उन्होंने दो बार धाम की यात्रा की 6 मई 2023 को केदारनाथ और तुंगनाथ के दर्शन किए, जबकि करीब छह महीने बाद अक्टूबर 2023 में वह फिर केदारनाथ पहुंचीं। इसके अलावा नवंबर 2021 में सारा अली खान अपनी दोस्त और अभिनेत्री जान्हवी कपूर के साथ भी केदारनाथ दर्शन के लिए पहुंची थीं। 6 साल पहले सारा अली खान ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए थे सारा अली खान ने 2020 में काशी में श्री विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन की थी। वो उन दिनों मां अमृता सिंह के साथ वाराणसी में फिल्म की शूटिंग कर रही थी। सारा इससे दो दिन पहले गंगा आरती में शामिल हुईं और काशी विश्वनाथ मंदिर में षोडशोपचार पूजा अर्चना की और शिवलिंग को स्पर्श किया। इस पर संतों व विद्वानों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। 3 साल पहले की थी महाकाल की पूजा सारा अली खान 2022 में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुईं थी। भस्म आरती के बाद उन्होंने गर्भगृह में जाकर शिवलिंग के दर्शन किए थे। नंदी हॉल में बैठकर करीब आधा घंटे तक मंत्रों का जाप किया था।
1931 की बात थी भारत-पाकिस्तान उन दिनों एक था और कोई सीमाएं-सरहद नहीं थी। लाहौर-बॉम्बे और कोलकाता में फिल्में बनना शुरू हो चुकी थीं, रेडियो का दौर भी आ चुका था और कुछ म्यूजिक कंपनियां गाने रिकॉर्ड कर बेचा करती थीं। लाहौर की जेनोफोन म्यूजिक कंपनी उन दिनों काफी मशहूर हुआ करती थी। एक दोपहर एक नौजवान शख्स 12 साल की बच्ची का हाथ थामे स्टूडियो में पहुंचा। बच्ची का पहनावा एक दम आम था, जैसे किसी गरीब परिवार से हो। देखकर मालूम पड़ता था कि उसे अचानक ही वहां ऑडिशन में लाया गया हो। साथ पहुंचे शख्स ने साफ किया कि वो बच्ची को उसके परिवार से छिपाकर यहां लाया था। लीजेंड्री म्यूजिक कंपोजर गुलाम हैदर सामने बैठे थे। वही गुलाम हैदर, जिन्होंन लता मंगेशकर को ब्रेक दिया था। अब गाने की बारी थी, बच्ची ने झिझकते हुए पॉजिशन ली, स्टूडियो में सन्नाटा पसरा और बच्ची ने बहादुर शाह जफर की गजल मेरा यार मुझे मिले अगर गाना शुरू किया। उस बच्ची ने दो लाइन गाई ही थीं कि गुलाम हैदर ने गाना रुकवा दिया। बच्ची डर गई। मन में बस यही ख्याल था कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गई। गुलाम हैदर ने पास खड़े असिस्टेंट को देखा और कहा- बच्ची के साथ 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट बनवा लो। साथ ही कहा गया कि बच्ची को हर वो लग्जरी सुविधा दो, जो टॉप सिंगर्स को दी जाती है। उस बच्ची ने हुनर और गूंजती आवाज से वो कमाल दिखाया कि भारत की पहली प्लेबैक सिंगर बनीं और ‘सैंया दिल में आना रे…’, ‘कजरा मोहब्बत वाला….’ और ‘मुगल-ए-आजम’ का मशहूर गाना ‘तेरी महफिल में किस्मत आजमां कर हम भी देखेंगे…’, जैसे 6 हजार गाने गाए। करीब 100 साल बाद भी उनके गाने सुने और रीमिक्स किए जाते हैं। उस बच्ची का नाम था शमशाद बेगम, जिनकी लेजेंड्री सिंगर लता मंगेशकर भी फैन थीं। जब लता नई-नई गायिकी में आईं तो उन्हें शमशाद की तरह गाने की सलाह दी जाती थी। एक दौर वो भी आया जब किशोर कुमार जैसे लीजेंड्री सिंगर भी शमशाद की खिदमद में कुर्सी उठाए पीछे-पीछे चलते थे। जब सिंगर्स को एक गाने के लिए 100 रुपए फीस दी जाती थी, तब फिल्ममेकर्स शमशाद को 2000 रुपए फीस देने के लिए भी राजी हो जाया करते थे। पिता की शर्त में ताउम्र बुर्का पहनकर गाया। पाबंदी ऐसी कि जवानी के दिनों में कोई तस्वीर तक क्लिक नहीं करवाई। फिल्मों में हीरोइन बनने के बड़े मौके भी पिता के गुस्से के भेंट चढ़े। आज शमशाद बेगम की 107वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर जानिए, हिंदी सिनेमा के इतिहास में गायिकी की मिसाल शमशाद बेगम की समाजिक बेड़ियों से निकलकर इतिहास रचने की कहानी- बचपन में स्कूल और शादियों में गाने से हुनर को मिली पहचान जलियावाला हत्याकांड के ठीक एक दिन बाद 14 अप्रैल 1919 को शमशाद बेगम का जन्म ब्रिटिश इंडिया के लाहौर में हुआ। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि शमशाद का जन्म लाहौर नहीं बल्कि अमृतसर में हुआ। उनके पिता मियां हुसैन बख्श के मिस्त्री थे। उन्होंने तंगहाली में 8 बच्चों की परवरिश की। शमशाद महज 10 साल की थीं, जब उन्होंने शादियों में गाना शुरू कर दिया। नन्ही सी बच्ची की आवाज इतनी बुलंद थी कि हर बार उन्हें ही गाने के लिए बुलाया जाने लगा। कुछ रिश्तेदार खुद होकर एक आना दे दिया करते थे। एक दिन शमशाद ने स्कूल के प्रोग्राम में कोरस में गाना गाया। प्रिंसिपल आवाज सुनकर दंग रह गईं। उन्होंने पास बुलाकर कहा- देखना, एक दिन तुम परिवार का नाम रौशन करोगी। इसके बाद उन्हें स्कूल प्रेयर की हेड सिंगर बना दिया गया। 12 की उम्र में 2 लाइनें सुनकर बडे़ म्यूजिक डायरेक्टर ने दिए 12 गाने शमशाद की आवाज आस-पड़ोस में पहचान बना रही थी, लेकिन पिता मियां हुसैन इससे काफी चिढ़ते। उन्हें बेटी का गाना पसंद न था। रूढ़िवादी परिवार में गाना सुनना भी हराम था। घर में रेडियो तक नहीं था। लेकिन 1931 में उनके चाचा आमिर गजल, कव्वाली के बड़े फैन थे। एक रोज उन्होंने शमशाद को गाते सुना और उन्हें हुनर परखने में देर न लगी। जैसे ही उन्हें पता चला कि लाहौर में जेनोफोन म्यूजिक कंपनी के ऑडिशन हो रहे हैं, वो परिवार से छिपकर शमशाद को अपने साथ ले गए। ऑडिशन में मशहूर सिगंर गुलाम हैदर, जो कंपनी के म्यूजिक डायरेक्टर थे ने 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट दिया। तय हुआ कि हर गाने के 12 रुपए मिलेंगे। घर लौटकर जब चाचा ने ये खबर पिता को दी, तो वो खूब नाराज हुए। नाराजगी चरम पर थी। लंबी बहस के बाद चाचा ने भाई मियां हुसैन को समझाया कि ये हुनर हर किसी में नहीं होता, अगर पूरी दुनिया गाना गा रही है तो तुम्हें क्यों ऐतराज है। आखिरकार वो मान गए, लेकिन शर्तों पर। शर्त कि शमशाद का चेहरा कोई न देखे, उन्हें हमेशा बुर्का पहनकर गाना होगा। वो कभी तस्वीर क्लिक न करवाएं और न ही उनकी पहचान दुनिया के सामने आए। गायिकी के लिए उतावलीं शमशाद बेगम ने हर एक शर्त मानी और जेनोफोन म्यूजिक कंपनी केे साथ जुड़ गईं। शमशाद बेगम के शुरुआती कुछ गाने बिना उनके नाम के रिलीज किए गए। आरती गाने पर उनकी जगह सिंगर का नाम उमा देवी लिखा जाता और पंजाबी गानों में सुरंदिर कौर। उस समय रिकॉर्डिंग कंपनियों का मानना था कि लोग अपने धर्म के लोगों के ही गाने सुनना पसंद करते थे। जेनोफोन का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद उन्हें कंपनी की तरफ से 5000 रुपए दिए गए थे। जेनोफोन म्यूजिक कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद उन्हें पेशावर रेडियो और फिर दिल्ली के एयर इंडिया रेडियो में काम मिल गया। उनके गाने और प्रोग्राम काफी हिट हुआ करते थे। परिवार के खिलाफ जाकर की हिंदू लड़के से शादी साल 1932, शमशाद 13 साल की थीं, जब उनकी मुलाकात पड़ोस में रहने वाले वकालत के स्टूडेंट गणपत लाल बट्टो से हुई। दोनों की उम्र में बड़ा फासला था, लेकिन विचार जल्द ही एक होने लगे। शमशाद अक्सर चोरी-छिपे उनसे मिला करती थीं। ये वो दौर था, जब कम उम्र में ही शादी करवाने की कवायद थी, ऊपर से शमशाद का रूढ़िवादी परिवार। 13 की उम्र में ही उनके लिए लड़के देखे जाने लगे। एक रोज घरवालों तक शमशाद और गणपत लाल के रिश्ते की भनक लग गई। घर में हंगामा हुआ और लड़के देखने की गति बढ़ा दी गई। पिता की हर छोटी-बड़ी बात और शर्त मान लेने वालीं शमशाद इस बार अड़ गईं। उन्होंने कह दिया कि वो गणपत से ही शादी करेंगी। घरवाले इस रिश्ते के खिलाफ रहे, लेकिन इसके बावजूद शमशाद ने महज 15 साल की उम्र में गणपत लाल बट्टो से 1935 में शादी कर ली। हीरोइन बनने का मिला ऑफर, पिता की सख्ती के चलते ठुकराया साल 1937 में शमशाद बेगम के गानों की बदौलत उन्हें लाहौर के ऑल इंडिया रेडियो में काम मिला। उनके हर गाने और हर प्रोग्राम जबरदस्त हिट रहे। ये वो दौर था, जब फिल्में बनना शुरू हो चुकी थीं, लेकिन रिकॉर्डिंग और एडिटिंग की तकनीकें नहीं आई थीं। उस समय हीरो-हीरोइन अपने गाने खुद गाया करते थे। जब दलसुख पंचोली ने एक रोज रेडियो में शमशाद की आवाज सुनी तो उन्होंने तय कर लिया कि वो उन्हें अपनी फिल्म की हीरोइन बनाएंगे और उनकी आवाज में गाने भी डालेंगे। जबकि उन्होंने कभी शमशाद को असल में देखा तक नहीं था। उन्होंने ये ऑफर दिया, तो शमशाद ने भी हामी भर दी। शमशाद ने एक स्क्रीन टेस्ट भी दिया, जो सफल रहा। लेकिन जैसे ही ये बात उनके पिता तक पहुंची, उनका गुस्सा फट पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि अगर उन्होंने ऐसी कोई ख्वाहिश पाली तो उनका गाना भी बंद करवा दिया जाएगा। उस दिन शमशाद ने गायिकी को चुना और पिता से कहा कि वो वादा करती हैं कि कभी कैमरे के सामने नहीं आएंगी। वादे के मुताबिक, शमशाद हमेशा बुर्के में ही प्रोग्राम करती थीं। कुछ साथ काम करने वालों ने उन्हें देखा था, लेकिन उन्होंने कभी तस्वीर क्लिक नहीं करवाई। महबूब खान ने मुंबई आने के लिए दिया बंगले, गाड़ी, नौकर का ऑफर साल 1941 में रेडियो में शमशाद की आवाज सुनकर डायरेक्टर महबूब खान इतने इंप्रेस हुए कि उन्होंने शमशाद को बॉम्बे लाने का फैसला कर लिया। वो सीधे उनके लाहौर स्थित घर पहुंचे। पति के सामने बात रखी, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। इस पर महबूब खान ने कहा कि अगर शमशाद उनके साथ बॉम्बे आएंगी, तो बदले में वो उन्हें बंगला, गाड़ी और हर सामान के साथ नौकर भी देंगे। अगर शमशाद चाहें तो अपने साथ 3-4 लोग भी ला सकती हैं। पति राजी हो गए, लेकिन पिता फिर अड़ गए। इस पर महबूब खान ने उनसे कहा- 'आखिर कब तक बेटी को कुएं का मेंढ़क बनाए रखेंगे? इसे समुद्र में छोड़िए।' जब शमशाद ने खुद भी जाने का फैसला कर लिया, तो पिता को भी मानना ही पड़ा। भले ही शमशाद को महबूब खान बॉम्बे लाए, लेकिन उन्हें पहली बार फिल्मों में गाने का मौका गुलाम हैदर ने फिल्म खजानची (1941) दिया। इस फिल्म के लिए शमशाद को हर एक गाने के लिए 200 रुपए फीस दी जाने वाली थी, लेकिन वो इससे नाखुश थीं। एक दिन उन्होंने फीस बढ़ाने की बात कही। प्रोड्यूसर ने पूछा वो क्या उम्मीद करती हैं। जवाब मिला- ‘हर गाने के लिए 700 रुपए।’ प्रोड्यूसर ने हामी भरते हुए हंसकर कहा- 'अगर आप हर गाने के 2 हजार भी मांगतीं तो हम वो भी देते।' फीस बढ़ने पर जहां एक तरफ खुशी थी, दूसरी तरफ नाराजगी थी कि उन्होंने ज्यादा क्यों नहीं मांगे, लेकिन समय के साथ आगे खानदान (1942), तकदीर (1943), पूंजी, जमींदार जैसी फिल्में करते हुए उनकी फीस लगातार बढ़ती चली गई। उस दौर में जब हीरोइन खुद अपने गाने गाती थीं, तब शमशाद बेगम ने दूसरी एक्ट्रेसेस के लिए गाने रिकॉर्ड किए और इस तरह वो भारत की पहली प्लेबैक सिंगर बनीं। लोगों की डिमांड में शमशाद की कॉपी करती थीं लता मंगेशकर शमशाद बेगम के बाद और भी कई सिंगर्स हिंदी सिनेमा से जुड़ने लगीं। 40 के दशक में सुरैया, मुबारक बेगम पहचान बना चुकी थीं और आशा भोसले, लता मंगेशकर नई-नई आई थीं। लता मंगेशकर, शमशाद के कई गानों में कोरस सिंगर रही थीं। लता मंगेशकर पतली और सुरीली आवाज में गाती थीं, जबकि शमशाद की आवाज में खनक थी और भारीपन। तब लता से अक्सर कहा जाता था कि शमशाद की ही तरह गाओ। जब लता मंगेशकर को 1949 की फिल्म महल का गाना आएगा, आएगा, आनेवाला…, मिला तो उन्होंने इसे शमशाद की कॉपी करते हुए ही गाया था। इसी तरह आशा भोसले ने भी 1948 की फिल्म मुकद्दर का गाना आती है याद हमको भी.., शमशाद की स्टाइल में गाया। पीछे-पीछे कुर्सी उठाए चलते थे किशोर कुमार, भविष्यवाणी हुई थी सच स्क्रीन मैगजीन को दिए एक पुराने इंटरव्यू में शमशआद बेगम ने गायिकी के दिनों को याद कर कहा था, मैं कभी फिल्मी पार्टियों में नहीं जाती थी, लेकिन स्टूडियो में मेरी कई यादें हैं। फिल्मिस्तान स्टू़डियो में रिकॉर्डिंग करती थी, तो दो युवा लड़के कोरस में काम करते थे। दोनों रिकॉर्डिंग के समय मेरी कुर्सी उठाए पीछे-पीछे चलते थे। एक लड़का सलीके वाला था और दूसरा अजीब सा दिखता, मजाक करता और खुद को नाकाम कहता था। बात करने पर खुद का मजाक उड़ाकर कहता था कि मेरे बड़े भाई बड़े अभिनेता हैं। लेकिन आवाज ऐसी थी कि कोरस में भी अलग सुनाई देती थी। मैं हमेशा उससे कहती थी कि देखना एक दिन तुम अपने भाइयों से भी बहुत आगे जाओगे। आगे वो अजीब सा लड़का संगीत जगत के सबसे महान सिंगर्स में शआमिल हुआ, बताइए क्या कोई किशोर कुमार के बिना भारतीय संगीत की कल्पना कर सकता है। समय के साथ किशोर कुमार इतने हिट हुए कि उन्हें शमशाद बेगम के साथ फिल्म अंगारे के गाने गोरी के नैनों में नींद भरी और नया अंदाज का गाना मेरी नींदों में तुम गाने का मौका मिला। कभी नौशाद भी थे ऑफिस बॉय, कई न्यूकमर्स के लिए गाए गाने जिस समय शमशाद बेगम ऑल इंडिया रेडियो में गाती थीं, तब उनके ऑफिस बॉय नौशाद हुआ करते थे। उन्हें शमशाद की देखरेख और खिदमद का काम दिया गया था। जब नौशान ने कंपोजिशन शुरू किया और उन्हें पहली फिल्म मंगू मिली, तो वो इसके लिए सीधे शमशाद के पास ही गए। नौशाद नए थे, लेकिन शमशाद मान गईं और उनके लिए ‘मोहब्बत दिल के बस इतने से अफसाने’ और ‘जरा प्यार कर ले बाबू’ को आवाज दी। 1941 में एसडी बर्मन भी जब सिनेमा से जुड़े तो उन्होंने पहली बड़ी फिल्म बहार (1941) मिलने पर शमशाद से ही मदद मांगी। शमशाद ने फिल्म के लिए ‘सैंया दिल में आना रे’ गाना गाया, जो आज भी सुना जाता है। जब राज कपूर ने कहा- मैं इतनी फीस नहीं दे सकता साल 1948 में आई फिल्म आग में राज कपूर, शमशाद की आवाज चाहते थे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनकी फीस दूसरे सिंगर्स से 10 गुना ज्यादा है तो वो कतराने लगे। एक दिन हिम्मत कर राज कपूर, शमशाद के पास पहुंच गए। उन्होंने कहा- मैं चाहता हूं कि आप मेरी फिल्म आग में गाना गाएं, लेकिन मैं आपको इतनी फीस नहीं दे सकता। ये बेबाकी और जुनून शमशाद को भा गया। एक समय में वो राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर की फैन भी हुआ करती थीं। उन्होंने राज कपूर से कहा कि वो कम फीस में ही उनके लिए गाएंगी। पति की मौत से ऐसी बिखरीं कि लगा दिया सिंगिंग पर विराम साल 1955 में शमशाद बेगम के पित गणपत लाल बट्टो का एक रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया। पति की मौत के बाद शमशाद ने गायिकी से दूरी बना ली। कई प्रोड्यूसर्स, कंपोजर ने शमशाद ने विनती की, लेकिन वो नहीं मानीं। शमशाद की गैरमौजूदगी में ही लता मंगेशकर को लगातार मौके मिलने लगे और स्टारडम मिला। साल 1957 में जब महबूब खान ने मदर इंडिया बनाना शुरू की, तो नरगिस की आवाज बनने के लिए शमशाद के अलावा किसी दूसरे सिंगर के बारे में न सोचा। शमशाद गायिकी छोड़ चुकी थीं, लेकिन महबूब खान भी उनसे गंवाने की जिद पर अड़े रहे। डेढ़ साल की मशक्कत के बाद आखिरकार शमशाद राजी हो ही गईं। 1957 में वो सफेद साड़ी पहनकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचीं। पहला गाना गाया, पी के घर आज प्यारी दुल्हनिया चली। गाना सुनते ही स्टूडियो में मौजूद हर कोई रो पड़ा। गाना खत्म करते करते, उन्होंने गायिकी छोड़ने की जिद भी खत्म कर दी। और कहा- रोने के लिए सारा दिन, सारी रात है, मैं एक आर्टिस्ट हूं। फिल्म मदर इंडिया का गाना ‘दुख भरे दिन बीते रे भैया’, ‘होली आई रे’, ‘पी के घर आज प्यारी दुल्हनिया चली’ हिट रहे। आगे उन्होंने हावड़ा ब्रिज, जाली नोट, लव इन शिमला, और मुगल-ए-आजम जैसी सुपरहिट फिल्मों को आवाज दी। फिल्म मुगल-ए-आजम का गाना तेरी महफिल में किस्मत आजमां कर हम भी देखेंगे…, शमशाद बेगम ने लता मंगेशकर के साथ गाया था। शमशाद ने निगार सुल्ताना को आवाज दी, जबकि लता मंगेशकर मधुबाला की आवाज बनीं। 1965 में शमशाद ने हमेशा के लिए फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया। हालांकि कुछ कंपोजर्स की जिद पर उन्होंने चंद फिल्मों में आवाज दी। रिटायरमेंट के बाद 1968 की फिल्म किस्मत का गाना कजरा मोहब्बत वाला जबरदस्त हिट रहा था। बेटी को नहीं दी गायिकी की इजाजत गायिकी छोड़ने के बाद शमशाद बेटी ऊषा और दामाद लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश रत्र के साथ मुंबई में रहने लगीं। शमशाद बेगम की इकलौती बेटी ऊषा भी सिंगर बनना चाहती थीं, लेकिन शमशाद ताउम्र इसके खिलाफ रहीं। उनका मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री में बहुत राजनीति बढ़ चुकी है। 6 सालों तक शमशाद को मृत समझते रहे लोग 1998 में खबर आई कि सिंगर शमशाद बेगम गुजर गईं। फिर 2004 में खबर आई कि जिसे 1998 में लोगों ने मरा हुआ मान लिया था, वो शमशाद अभी जिंदा है। पहले जिस शमशाद बेगम का इंतकाल हुआ था, वो सायरा बानो की दादी थीं। आखिरकार 23 अप्रैल 2012 में लेजेंड्री सिंगर शमशाद बेगम का 94 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी मौत की खबर कम लोगों को ही दी गई। वैसे तो शमशाद बेगम मुस्लिम थीं, लेकिन उनकी आखिरी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किया जाए।(नोट- ये कहानी शमशाद बेगम के राइटर गजेंद्र खन्ना को दिए गए इंटरव्यू, स्क्रीन को दिए गए इंटरव्यू और रिसर्च के आधार पर लिखी गई है।)

