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Manipur हिंसा: Kangpokpi के नगा गांव पर बदमाशों ने किया हमला, 9 घरों में लगाई आग

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में हथियारबंद बदमाशों ने नगा समुदाय के एक गांव पर हमला कर दिया और नौ घरों में आगजनी की। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना मंगलवार रात करीब साढ़े नौ बजे तोकपा लियांगमई नगा गांव में हुई। उन्होंने बताया कि बदमाशों ने गोलीबारी की और फिर नौ घरों में आग लगा दी। इनमें अधिकांश कच्चे मकान थे। अधिकारियों ने बताया कि पास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे और उन्होंने आग पर काबू पाने में मदद की। उन्होंने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। ‘द लियांगमई नगा काउंसिल, मणिपुर’ ने इस घटना की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि इस हमले में दूसरे समुदाय के हथियारबंद लोग शामिल थे। काउंसिल ने दावा किया कि इस हमले में 10 घरों और एक गिरजाघर में आगजनी की गई। उसने एक बयान में कहा, ‘‘निर्दोष आम नागरिकों, आवासीय संपत्तियों और आराधना स्थल को जानबूझकर निशाना बनाना हिंसा का एक गंभीर और निंदनीय कृत्य है।’’नगा संगठन ने आगजनी के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी किए जाने और उन पर मुकदमा चलाए जाने की मांग की। उसने इलाके में सुरक्षा को तत्काल मजबूत करने की भी मांग की।

प्रभासाक्षी 12 Aug 2026 10:51 am

Manipur: कांगपोकपी जिले के नगा गांव में हथियारबंद बदमाशों का आतंक; कई राउंड फायरिंग के बाद, घरों में लगाई आग

Armed miscreants burn down several houses in Naga village in Manipur's Kangpokpi - Manipur: कांगपोकपी जिले के नगा गांव में हथियारबंद बदमाशों का आतंक; कई राउंड फायरिंग के बाद, घरों में लगाई आग

अमर उजाला 12 Aug 2026 7:48 am

Manipur के Kangpokpi जिले में उपद्रवियों ने जलाए घर, छात्र संगठन ने जताया विरोध

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सोमवार दोपहर हथियारबंद बदमाशों ने कुछ घरों को आग लगा दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुकी बहुल जिले में हुई इस घटना से जुड़ीं परिस्थितियों का पता नहीं चल पाया है। उन्होंने कहा कि नुकसान कितना हुआ है, इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बल इलाके में पहुंच गए हैं। इस बीच, कांगपोकपी जिला कुकी छात्र संगठन सदर हिल्स ने हथियारबंद समूहों द्वारा आम लोगों के घर जलाए जाने की कड़ी निंदा की। छात्र संगठन ने एक बयान में कहा, यह कृत्य शांति को नुकसान पहुंचाने और निर्दोष ग्रामीणों में डर फैलाने का प्रत्यक्ष प्रयास है। संगठन ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से दोषियों को गिरफ्तार करने की अपील की। मणिपुर में जातीय हिंसा में 3 मई 2023 से अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। लगातार जातीय हिंसा और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में 13 फरवरी, 2025 को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। करीब एक साल बाद चार फरवरी को इसे हटा दिया गया।

प्रभासाक्षी 11 Aug 2026 8:22 am

असम में ट्रैक खराब होने से त्रिपुरा, मिजोरम और मणिपुर के लिए रेल सेवा एक महीने से बाधित

गुवाहाटी/अगरतला, 10 अगस्त . भारी बारिश और जमीन धंसने के कारण असम के रणनीतिक रूप से अहम लुमडिंग-बदरपुर पहाड़ी सेक्शन में रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचा है, जिससे दक्षिणी असम, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर और देश के बाकी हिस्सों के बीच रेल सेवा लगभग एक महीने से बाधित है. नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) के एक वरिष्ठ ... Read more

डेली किरण 10 Aug 2026 7:02 pm

'बड़े भाई की भूमिका निभाएं मैतेई...', मणिपुर में शांति के लिए CM की अपील

मणिपुर में शांति की अपील करते हुए मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने मैतेई समुदाय से 'बड़े भाई' की भूमिका निभाने को कहा. उन्होंने सभी समुदायों से मिलकर राज्य के विकास के लिए काम करने की अपील की.

आज तक 9 Aug 2026 10:37 pm

Manipur में SoO समूहों ने 7 शिविर स्थानांतरित करने पर जताई सहमति, घटाई जाएगी संख्या

इंफाल, आठ अगस्त मणिपुर में ‘अभियान निलंबन’ (एसओओ) समझौते में शामिल उग्रवादी संगठनों ने संघर्ष प्रभावित इलाकों से सात नामित शिविरों को स्थानांतरित करने और ऐसे शिविरों की कुल संख्या घटाने पर शनिवार को सहमति जताई। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के मुताबिक, यह फैसला नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय, राज्य सरकार और दो उग्रवादी संगठनों-कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) तथा यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ)-के प्रतिनिधियों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में लिया गया। बयान के अनुसार, बैठक एक संशोधित त्रिपक्षीय एसओओ समझौते पर हस्ताक्षर के साथ संपन्न हुई, जिसमें नयी शर्तें और नियम शामिल हैं, जो हस्ताक्षर वाले दिन से एक साल की अवधि के लिए लागू होंगे। एसओओ संघर्ष-विराम के लिए तीन पक्षों के बीच हुआ एक समझौता है, जिसमें केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और केएनओ तथा यूपीएफ जैसे संगठनों के तहत काम करने वाले कुकी और जोमी उग्रवादी समूह शामिल हैं। यह समझौता पहली बार 2008 में किया गया था। बयान के मुताबिक, बैठक में मणिपुर में स्थायी शांति और स्थिरता लाने के लिए बातचीत के जरिये समाधान निकालने पर भी सहमति बनी। इसमें कहा गया है कि बैठक में “केएनओ और यूपीएफ सात शिविरों को संघर्ष की आशंका वाले इलाकों से दूर दूसरी जगह ले जाने और तय शिविरों की संख्या घटाने पर भी सहमत हो गए हैं”, साथ ही हथियारों को भी पास के सीआरपीएफ/बीएसएफ शिविरों में ले जाया जाएगा। सरकारी अनुमान के अनुसार, एसओओ में शामिल संगठन पहाड़ी जिलों-खासकर चूड़ाचांदपुर और कांगपोकपी-में 14 शिविर संचालित कर रहे हैं, जिनमें केएनओ और यूपीएफ के लगभग 2,200 कैडर रह रहे हैं। ये शिविर निगरानी वाली रिहायशी जगहें हैं, जहां उन उग्रवादी गुटों के सदस्यों को रखा जाता है, जिन्होंने सरकार के साथ एसओओ या शांति समझौते पर दस्तखत किए हैं। ऐसे शिविर हथियारबंद गुटों को तय नियमों के दायरे में सीमित और नियंत्रित रखते हैं।

प्रभासाक्षी 9 Aug 2026 8:52 am