पीतांबरा पीठ में खुले में जप-साधना पर पूरी तरह रोक:दलाली रोकने मणिपुर धाम और साधना केंद्र ही तय स्थल
दतिया में श्री पीतांबरा पीठ परिसर में अब खुले में बैठकर साधना (जप) करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पीठ प्रबंधन ने साधकों और पंडितों के लिए दो निर्धारित स्थल तय किए हैं। मणिपुर धाम और नया स्वामी साधना केन्द्र। अब केवल इन्हीं स्थानों पर बैठकर साधना की अनुमति होगी। इस संबंध में परिसर में सूचना चस्पा कर दी गई है, वहीं निगरानी के लिए एक समिति भी गठित की गई है। प्रबंधन का साफ उद्देश्य है। पीठ पर बढ़ती पंडागिरी और दलाली पर प्रभावी रोक लगाना। श्रद्धालुओं से वसूली की शिकायतें हो रही थींदरअसल, बीते कुछ समय से पीठ परिसर में दर्शन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से पैसे वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। लाल-पीले वस्त्र पहनकर कई अनाधिकृत लोग खुले परिसर में साधना का दिखावा करते थे और श्रद्धालुओं को भ्रमित कर उनसे लेन-देन करते थे। हैरानी की बात यह रही कि इनमें से अधिकांश का न तो पीठ से कोई संबंध था और न ही वे मंत्र दीक्षित थे। इस वजह से पीठ परिसर में आए दिन विवाद, मुंहवाद और यहां तक कि मारपीट की घटनाएं भी होने लगी थीं। स्थिति बिगड़ती देख पीठ प्रबंधन ने पहले एक समिति का गठन किया। समिति ने कार्रवाई करते हुए अनाधिकृत लोगों को परिसर से बाहर किया। इसके बाद अगला बड़ा फैसला लिया गया। खुले परिसर में साधना पर पूर्ण प्रतिबंधअब पीठ से मंत्र दीक्षा प्राप्त साधकों को केवल मणिपुर धाम और नव निर्मित स्वामी साधना केन्द्र में ही बैठने की अनुमति दी गई है। ताकि माई के सामने का मुख्य चौक खाली रहे और दर्शनार्थियों को किसी तरह की असुविधा न हो। प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन दोनों स्थानों पर वही साधक बैठ सकेंगे, जिनके पास पीठ से प्राप्त मंत्र दीक्षा होगी। पहचान के तौर पर सभी को अपनी मंत्र पुस्तिका साथ रखना अनिवार्य किया गया है। समिति इन नियमों के पालन पर लगातार नजर रखेगी। पीठ पर देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिनमें से अधिकांश को यहां की परंपराओं और पूजा विधियों की पूरी जानकारी नहीं होती। इसी का फायदा उठाकर दलाल सक्रिय हो जाते थे। हाल ही में एक घटना में व्यवस्था में लगी रैलिंग तक उखाड़कर वीआईपी दर्शन कराए जाने का मामला सामने आया था। इसी के बाद से प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाया है। नए नियमों से उम्मीद है कि पीठ की व्यवस्था सुधरेगी और श्रद्धालु बिना किसी दबाव या भ्रम के दर्शन कर सकेंगे।
मुश्किल मुद्दों की वजह से मणिपुर समस्या के समाधान में हो रही है देरी
मणिपुर का पूरा इलाका- पहाड़ियां और घाटियां दोनों- हमेशा मणिपुर के राजाओं, राज्य दरबार और बाद में, राज्य सरकार के प्रशासन में था

