मणिपुर में सियासी सस्पेंस खत्म, मैतेई समाज से होगा बीजेपी का मुख्यमंत्री, राज्य में बनेंगे 2 डिप्टी CM

President Rule In Manipur: मणिपुर में बीते 1 साल से लगे राष्ट्रपति शासन के बाद अब सरकार बनने की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि यहां भाजपा सरकार बना सकती है.

ज़ी न्यूज़ 2 Feb 2026 7:54 pm

बजट के बीच अचानक क्यों मची इस राज्य में खलबली, 20 से ज्यादा बीजेपी-NDA के नेता आए दिल्ली

Manipur New Government News: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज देश का आम बजट पेश किया. उस पर तारीफ-आलोचनाओं का दौर जारी है. इसी बीच पूर्वोत्तर के एक राज्य में खलबली मच गई है. वहां के 20 से ज्यादा एनडीए विधायकों को एकाएक दिल्ली बुलाया गया है.

ज़ी न्यूज़ 1 Feb 2026 8:53 pm

बांस बने 'बम' और पहाड़ बनी 'चिमनी'! नगालैंड से मणिपुर पहुंची जंगल की आग, क्या है चिमनी इफेक्ट?

Dzoku Valley Forest Fire: नागालैंड की जुकोऊ घाटी में लगी आग अब मणिपुर के माउंट एस्सी तक पहुंच गई है. इस स्थिति को काफी गंभीर बताया जा रहा है. इस आग के तेजी से फैलने की पीछे 2 वजह है जिसमें चिमनी इफेक्ट और सूखा बांस शामिल है.

ज़ी न्यूज़ 30 Jan 2026 6:54 am

उदयपुर की तनुश्री मणिपुर महिला फुटबॉल लीग में चयनित, 10 साल की उम्र से खेल रहीं

शहर की बेटी तनुश्री सोनी का मणिपुर में आयोजित प्रतिष्ठित महिला फुटबॉल लीग के लिए चयन हुआ है। 10 साल की उम्र से फुटबॉल खेल रही तनुश्री ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और उनका यह चयन जिले के लिए गर्व का विषय है। जिले के आदिवासी बहुल्य क्षेत्र जावर माइंस की रहने वाली फुटबॉल खिलाड़ी तनुश्री गुरुवार को मणिपुर के लिए रवाना हुईं। वे वर्तमान में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से बीए की पढ़ाई कर रही हैं और पढ़ाई के साथ-साथ खेल को भी गंभीरता से समय दे रही हैं। तनुश्री बताती हैं कि उनके फुटबॉल सफर में सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता नरेंद्र सोनी रहे हैं। पिता ने उन्हें फुटबॉल की बारीकियां सिखाने के साथ हर कदम पर प्रोत्साहित किया। नरेंद्र सोनी स्वयं राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं और 1990 व 1997 की संतोष ट्रॉफी में कंटेंडर प्लेयर के रूप में खेल चुके हैं। उन्होंने राजस्थान महिला फुटबॉल टीम का तीन बार प्रतिनिधित्व भी किया है, जिससे तनुश्री को घर से ही खेल का मजबूत माहौल मिला।

दैनिक भास्कर 30 Jan 2026 4:00 am

उदयपुर की बेटी मणिपुर में दिखाएंगी दमखम:तनुश्री सोनी महिला फुटबॉल लीग में लहराएगी परचम, 10 साल की उम्र से खेल रही

उदयपुर की बेटी तनुश्री सोनी का मणिपुर में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित महिला फुटबॉल लीग के लिए चयन हुआ है। वे गुरुवार को वहां के लिए रवाना हो गई है। 10 साल की उम्र से तनुश्री फुटबॉल खेल रही हैं और अब मणिपुर में खेलेगी। उदयपुर से करीब 38 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र जावर माइंस की रहने वाली फुटबॉल खिलाड़ी तनुश्री सोनी सामान्य परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना चुकी हैं। उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से बीए की पढ़ाई कर रही तनुश्री साथ-साथ में इस खेल को लेकर भी समय देती है। सबसे बड़ी प्रेरणा और मार्गदर्शन पिता से मिला तनुश्री कहती है कि इस सफर में सबसे बड़ी प्रेरणा और मार्गदर्शन उन्हें अपने पिता नरेंद्र सोनी से मिला, जिन्होंने उन्हें खेल की बारीकियां सिखाई और हर कदम पर सकारात्मक रूप से प्रोत्साहित किया। तनुश्री ने 2017 में नेशनल स्तर पर भागीदारी की, इसके अलावा अंडर-17 वर्ग में भी शानदार प्रदर्शन किया। एक नेशनल सीनियर टूर्नामेंट में भी वे हिस्सा ले चुकी हैं। उनका सपना भारतीय टीम से खेलना है और इसके लिए वे लगातार मेहनत कर रही हैं। तनुश्री को घर से ही खेल का मजबूत माहौल और प्रेरणा मिली वह बताती है कि उनके पिता नरेंद्र सोनी खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं और 1990 और 1997 की संतोष ट्रॉफी में कंटेंडर प्लेयर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्होंने राजस्थान महिला फुटबॉल टीम का तीन बार प्रतिनिधित्व भी किया है। ऐसे में तनुश्री को घर से ही खेल का मजबूत माहौल और प्रेरणा मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी करेगी देश का नाम रोशन जिला फुटबॉल संघ के सचिव शकील अहमद ने बताया कि मणिपुर की लीग में राजस्थान की बेटी का चयन पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि तनुश्री जैसी प्रतिभाएं आने वाले समय में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोशन करेगी।

दैनिक भास्कर 29 Jan 2026 5:22 pm

कैप्टन डॉ. धाकड़ को मणिपुर ऑपरेशन में वीरता सम्मान

विदिशा| भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी कैप्टन डॉ. अभिषेक धाकड़ को उनकी अदम्य वीरता और उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रतिष्ठित मेंशन-इन-डिस्पैच से सम्मानित किया गया। डॉ. धाकड़ ग्राम मढ़िया कला के निवासी हैं। वे असम राइफल्स 1-AR में आर्मी मेडिकल कोर के अधिकारी हैं। मणिपुर में उग्रवाद विरोधी ऑपरेशन हिफाजत के दौरान अग्रिम मोर्चे पर रहते हुए उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया और साथी जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की। कठिन भौगोलिक और अशांत परिस्थितियों में उन्होंने चिकित्सीय सूझबूझ और वीरता का परिचय दिया, जिससे ऑपरेशन सफल हुआ। उनकी इस बहादुरी की सराहना सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने की और उनके नाम को वीरता पुरस्कार हेतु अनुशंसित किया।

दैनिक भास्कर 29 Jan 2026 4:00 am