कपल ने शरीर के कुछ हिस्सों को पकाने के बाद बाकी टुकड़ों को सूटकेस में रखकर ट्रेन से भेज दिया और खुद भागने की कोशिश की. मृतक महिला की पहचान हैथुल निशा के रूप में हुई है. वह तांबरम के पास एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थी.
चेन्नई : महिला की हत्या के बाद शरीर के टुकड़े बिरयानी बर्तन में पकाए, मणिपुर से आरोपी कपल गिरफ्तार
चेन्नई : महिला की हत्या के बाद शरीर के टुकड़े बिरयानी बर्तन में पकाए, मणिपुर से आरोपी कपल गिरफ्तार
भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस के गलियारों और राजनीतिक प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक बहुत बड़ी और अहम नियुक्ति को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसने राजस्थान से लेकर उत्तर पूर्व के संवेदनशील राज्य मणिपुर तक का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राजस्थान कैडर के एक बेहद वरिष्ठ और अनुभवी आईएएस अधिकारी को केंद्र सरकार द्वारा देश के एक महत्वपूर्ण राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था की सर्वोच्च बागडोर सौंपने की पुख्ता तैयारी कर ली गई है। पिछले लगभग एक दशक यानी दस लंबे वर्षों से केंद्र सरकार की विभिन्न प्रतिनियुक्ति और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाल रहे सीनियर आईएएस अधिकारी राजीव सिंह ठाकुर को अब मणिपुर राज्य का नया मुख्य सचिव बनाए जाने का पूरा ताना-बाना बुन लिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक फेरबदल के तहत इंटर-कैडर डेपुटेशन के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को केंद्र की सक्षम अधिकार प्राप्त कमेटी द्वारा हरी झंडी दे दी गई है और अब केवल केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी डीओपीटी के आधिकारिक आदेश का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही यह औपचारिक आदेश सार्वजनिक होगा, राजीव सिंह ठाकुर देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की पूरी ब्यूरोक्रेसी के मुखिया के तौर पर कार्यभार संभाल लेंगे और राज्य के प्रशासनिक संचालन की कमान अपने हाथों में ले लेंगे।केंद्र सरकार में लंबी सेवाएं और मजबूत प्रशासनिक पकड़आईएएस अधिकारी राजीव सिंह ठाकुर की गिनती प्रशासनिक महकमे के उन चुनिंदा और दक्ष अधिकारियों में की जाती है, जिन्हें जटिल और नीतिगत मामलों को सुलझाने में महारत हासिल है। मूल रूप से राजस्थान कैडर से ताल्लुक रखने वाले राजीव सिंह ठाकुर पिछले करीब दस वर्षों से केंद्र सरकार में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा और कुशलता के साथ दे रहे हैं। इस लंबी अवधि के दौरान उन्होंने केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली है, जहां उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक सूझबूझ की सराहना उच्च स्तर पर की जाती रही है। केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में काम करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की नीतियों के क्रियान्वयन और प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यही कारण है कि उनकी इसी कार्यकुशलता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बिठाने के लिए उन्हें मणिपुर जैसे सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्य के मुख्य सचिव के पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में चुना गया है।मणिपुर की प्रशासनिक चुनौतियों के बीच संभालेंगे सर्वोच्च कमानदेश का उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर पिछले कुछ समय से लगातार विभिन्न आंतरिक चुनौतियों, सुरक्षाीयों और सामाजिक-प्रशासनिक संवेदनशीलता के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में वहां की नौकरशाही को एक ऐसे नेतृत्व की सख्त जरूरत है जो अनुभवी होने के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों में भी कड़े और सटीक प्रशासनिक निर्णय ले सके। राज्य के मौजूदा हालात को पटरी पर लाने और विकास तथा शांति की बहाली के लिए मुख्य सचिव का पद सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि प्रशासनिक मशीनरी को निर्देश देने और सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने की मुख्य जिम्मेदारी इसी पद पर बैठे अधिकारी के कंधों पर होती है। राजीव सिंह ठाकुर के पास जिस तरह का लंबा प्रशासनिक अनुभव और राष्ट्रीय स्तर पर काम करने की महारत है, उसे देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि उनके कार्यभार संभालने के बाद मणिपुर की ब्यूरोक्रेसी में एक नया अनुशासन और तेजी देखने को मिलेगी। राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय स्थापित करने में भी उनका यह अनुभव बेहद कारगर साबित होगा, जिससे प्रशासनिक स्तर पर आ रही अड़चनों को दूर करने में बड़ी मदद मिलेगी।इंटर-कैडर डेपुटेशन के प्रस्ताव को सेंट्रल कमेटी की मंजूरीकिसी भी अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी को उसके मूल कैडर से हटाकर किसी दूसरे राज्य में डेपुटेशन पर भेजने की प्रक्रिया बेहद लंबी, तकनीकी और कड़ी प्रशासनिक कसौटियों से होकर गुजरती है। राजीव सिंह ठाकुर के मामले में भी राजस्थान कैडर से मणिपुर कैडर में उनके अंतर-राज्यीय प्रतिनियुक्ति यानी इंटर-कैडर डेपुटेशन के प्रस्ताव को तमाम प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं से गुजारा गया है। केंद्र सरकार की सर्वोच्च स्तर की कमेटियों ने इस पूरे प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन करने के बाद इसे अपनी अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस मंजूरी के मिलने के बाद अब केवल औपचारिकताएं शेष रह गई हैं, जिन्हें कार्मिक विभाग द्वारा पूरा किया जा रहा है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के डेपुटेशन देश की संघीय व्यवस्था और अखिल भारतीय सेवाओं की मूल भावना के अनुकूल होते हैं, जहां अनुभवी अधिकारियों को देश के किसी भी हिस्से में उनकी विशेषज्ञता के आधार पर सेवा देने का अवसर प्रदान किया जाता है।राजस्थान कैडर के अधिकारियों के लिए गर्व का क्षणराजीव सिंह ठाकुर को मणिपुर जैसे महत्वपूर्ण राज्य का मुख्य सचिव बनाए जाने की इस खबर से राजस्थान के प्रशासनिक हलकों और उनके बैच के साथियों के बीच भी काफी उत्साह और गर्व का माहौल है। राजस्थान कैडर के अधिकारियों ने हमेशा से ही राष्ट्रीय पटल पर अपनी मेहनत, कर्तव्यनिष्ठा और बेहतरीन प्रशासनिक कौशल का लोहा मनवाया है, और इस सूची में अब एक और नया और बड़ा नाम जुड़ने जा रहा है। राजस्थान में अपनी शुरुआती सेवाओं के दौरान उन्होंने जिन जिलों और विभागों की कमान संभाली थी, वहां उनकी कार्यशैली की छाप आज भी देखने को मिलती है। अब जब वे देश के एक सुदूर और चुनौतीपूर्ण राज्य में मुख्य सचिव के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं, तो राजस्थान के प्रशासनिक तंत्र के लिए भी यह एक गौरवशाली उपलब्धि मानी जा रही है, जो यह दर्शाती है कि यहां के अधिकारी देश के किसी भी कोने में जाकर अपनी नेतृत्व क्षमता का श्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं।डीओपीटी के आदेश का इंतजार और भविष्य की रूपरेखाअब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर टिकी हुई हैं कि वह कब इस नियुक्ति का आधिकारिक और अंतिम आदेश जारी करता है। आदेश के जारी होते ही राजीव सिंह ठाकुर औपचारिक रूप से इम्फाल पहुंचकर अपना कार्यभार संभालेंगे और मणिपुर के प्रशासनिक ढांचे की कमान अपने हाथों में ले लेंगे। उनके सामने राज्य में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने, विकास कार्यों को गति देने और आम जनता का शासन-प्रशासन पर विश्वास और अधिक मजबूत करने जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। जिस तरह से उन्होंने केंद्र में रहते हुए अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया है, उससे यह पूरी उम्मीद की जा रही है कि वे मणिपुर की मौजूदा प्रशासनिक चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटते हुए राज्य को विकास के एक नए मार्ग पर ले जाने में पूरी तरह सफल साबित होंगे।
Guwahati में STF ने जब्त की 3 करोड़ की Heroin, मणिपुर और असम के तीन तस्कर गिरफ्तार
असम के गुवाहाटी में तीन लोगों को तीन करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने यह जानकारी दी। शर्मा ने बताया कि एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने यहां बेहारबारी इलाके में एक गाड़ी से तीन संदिग्ध तस्करों को पकड़ा और उनके पास से 379 ग्राम हेरोइन बरामद की। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आज सुबह एक गुप्त सूचना के आधार पर चलाये गये अभियान में एसटीएफ ने तीन तस्करों पर कार्रवाई की, जो 379 ग्राम हेरोइन ले जा रहे थे। इस हेरोइन की कीमत तीन करोड़ रुपये से ज़्यादा है।’’शर्मा ने बताया कि उन्हें पकड़ लिया गया एवं आगे की कार्रवाई के लिए हिरासत में ले लिया गया। एसटीएफ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि हेरोइन को गाड़ी के अंदर बने एक गुप्त खाने में साबुन की 37 डिब्बियों में छिपाकर रखा गया था। उसने बताया कि गिरफ्तार लोगों में दो मणिपुर के इंफाल पूर्वी और चुराचांदपुर जिलों के हैं तथा तीसरा असम के कछार जिले का रहने वाला है।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने 15 सालों से मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त एक लाख रुपए के इनामी कुख्यात तस्कर को फिल्मी अंदाज में 20 किलोमीटर तक पीछा कर पकड़ा। आरोपी श्यामसुंदर उर्फ सांवरिया राजस्थान, मध्य प्रदेश, मणिपुर और मिजोरम तक फैला तस्करी का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। आईजी विकास कुमार ने बताया कि ANTF को सूचना मिली थी कि आरोपी बाड़मेर से जोधपुर की तरफ आ रहा है। इस पर टीम ने जोधपुर-बाड़मेर रोड पर धवा गांव और बोरानाडा पेप्पी सर्किल पर सीक्रेट नाकाबंदी की। संदिग्ध कार को आते देख पुलिस ने पीछा शुरू किया। आरोपी ने पुलिस को देखकर कार को नारनाडी गांव के कच्चे रास्ते पर उतारा और कार छोड़कर बबूल की झाड़ियों में भागने लगा। टीम ने करीब 20 किलोमीटर तक पीछा कर उसे पकड़ लिया। ANTF को 10 महीनों में तीन बार दिया था चकमाआईजी ने बताया कि तस्कर बेहद शातिर है, जिसने पिछले 10 महीनों में तीन बार पुलिस को चकमा दिया। सांचौर में दबिश के दौरान और बारां में पीछा किए जाने पर वह अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा था, हालांकि उसके साथियों को पकड़ लिया गया था। मणिपुर से गाड़ियां खरीदकर लाता था 30-60 किलो अफीमशुरुआत में राजस्थान-एमपी सीमा से छोटे स्तर पर तस्करी शुरू करने वाले सांवरिया का संपर्क 2026 में जैसलमेर और फिर मणिपुर के तस्करों से हुआ। वह मणिपुर और आइजोल (मिजोरम) से सेकंड हैंड गाड़ियां खरीदकर उनमें 30 से 60 किलोग्राम अफीम भरकर लाता और मारवाड़ क्षेत्र में सप्लाई करता था। पुलिस से बचने के लिए वह लंबी दूरी के दौरान वाहन बदल लेता था। 15 सालों में दर्ज हैं 15 गंभीर मामलेआरोपी तस्कर पूर्व में कुख्यात तस्कर बिरदाराम और गोवर्धन का शिष्य रह चुका है। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट, मारपीट, वाहन चोरी, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के 15 मामले दर्ज हैं। सिरोही और जालोर (बागरा) में नाकाबंदी के दौरान वह पुलिस पर फायरिंग कर भाग चुका है। आरोपी अवैध मादक-पदार्थ से भरे वाहनों की एस्कोर्टिग करता था। पुलिस की नाकाबंदी देखते हुए नाकाबंदी तोड़ फायर कर भाग निकलता था। पुलिस पर फायरिंग किए जाने के भी गंभीर मामले दर्ज हैं। आरोपी को 2024 में जोधपुर रेंज की साइक्लोनर सेल ने भी पकड़ा था, लेकिन जेल से बाहर आते ही उसने अपना नेटवर्क फिर से सक्रिय कर लिया था।
Manipur के Kangpokpi में उग्रवादियों ने वाहन पर किया हमला, 4 लोगों की मौत
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बृहस्पतिवार को सशस्त्र उग्रवादियों द्वारा घात लगाकर एक वाहन पर किये गये हमले में नगा समुदाय के कम से कम चार लोग मारे गए, जबकि एक घायल हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मकुई अशांग और थाबंबा नगा इलाकों के बीच एक सुनसान जगह पर सुबह करीब साढ़े आठ बजे उग्रवादियों ने घात लगाकर एक गाड़ी पर हमला किया, जिसमें चार लोग मारे गये एवं एक व्यक्ति घायल हो गया। उन्होंने बताया कि जान गंवाने वालों में एक निजी विद्यालय के प्राचार्य थे। मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने बृहस्पतिवार को सुरक्षा अधिकारियों को कांगपोकपी जिले में चार लोगों की हत्या में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया। चार नागरिकों की हत्या की निंदा करते हुए ‘यूनाइटेड नगा काउंसिल’ ‘यूएनसी’ ने इन हमलों के पीछे कुकी उग्रवादी संगठनों -- कुकी नेशनल फ्रंट (पी) और कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी (केआरए)-- का हाथ होने का आरोप लगाया। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों की पहचान टैडसोंगबोउ रिंगकांगमाई (एक निजी विद्यालय के संस्थापक और प्राचार्य), एम विजुनमाई, अनिल विजुनमाई और विसोबोउ चारेनामाई (जो चावांगकिइनिंग विलेज अथॉरिटी के अध्यक्ष थे) के तौर पर हुई है। पांचों लियांगमई नगा समुदाय से थे। अधिकारियों ने कहा कि शवों को सेनापति ज़िला अस्पताल लाया जा रहा है। इस हमले के बाद, ‘नगा पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन’ ने सेनापति ज़िला मुख्यालय शहर में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद करवा दिया। यूएनसी ने शुक्रवार को राज्य के सभी नगा इलाकों में सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक एक दिन के बंद की घोषणा की। इस हड़ताल से पर्वतीय जिलों में जनजीवन प्रभावित रहने की संभावना है। मई 2023 से मणिपुर में घाटी में रहने वाले मेइती और पहाड़ी ज़िलों में रहने वाले कुकी लोगों के बीच हुई जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए हैं और 58,800 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। लगातार जातीय टकराव जारी रहने और मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफा दे देने के बाद, 13 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। लगभग एक साल बाद चार फरवरी को राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया। शुरुआत में, नगा समुदाय मेइती और कुकी समुदायों के बीच हुई झड़पों से दूर रहा। हालांकि, इस साल हालात बदल गए और वे भी हिंसा की चपेट में आ गए। अधिकारियों के अनुसार, इस साल फरवरी से मुख्य रूप से कांगपोकपी और उखरुल ज़िलों में गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओं में 20 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं। मुख्यमंत्री ने कुकी-बहुल ज़िले में चार नगा लोगों की हत्या के सिलसिले में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की। एक बयान में कहा गया, ‘‘सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा की है... मुख्यमंत्री ने सुरक्षा अधिकारियों को अपराध में शामिल लोगों को पकड़ने और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया।’’बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अवैध हथियार रखने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ, उसके समुदाय की परवाह किए बिना, कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम, सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह, पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह और अन्य अधिकारी मौजूद थे।
Mirabai Chanu एशियाई खेलों की चुनौती के लिए तैयार, पदक जीतने के बाद ही मणिपुर जाएंगी
भारतीय भारोत्तोलक और ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में ओलंपिक जैसी चुनौती के लिए पूरी तरह से तैयार हैं जहां उन्हें चीन, उत्तर कोरिया और थाईलैंड के शीर्ष खिलाड़ियों का सामना करना होगा। भारत की इस 32 वर्ष की खिलाड़ी ने विश्व स्तर पर लगभग प्रत्येक पदक जीता है जिसमें 2021 में ओलंपिक खेलों में जीता गया रजत पदक भी शामिल है। लेकिन वह अभी तक एशियाई खेलों में पदक नहीं जीत पाई हैं। मीराबाई ने हाल में ही राष्ट्रमंडल खेलों में तीसरी बार स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने कहा एशियाई खेल बिल्कुल अलग तरह की प्रतियोगिता है, जिसमें राष्ट्रमंडल खेलों की तुलना में कहीं अधिक कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना है। मीराबाई ने 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियाई खेलों से पहले साइ (भारतीय खेल प्राधिकरण) मीडिया से कहा, ‘‘राष्ट्रमंडल खेलों में मेरे लिए प्रतिस्पर्धा कठिन नहीं थी। ग्लास्गो में मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। असली परीक्षा तो अब होनी है।’’उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह देखना चाहती हूं कि जापान में मैं कितने आगे तक बढ़ सकती हूं। एशियाई खेल मेरे लिए सबसे कठिन रहे हैं। इस बार एशियाई खेलों में आपको शायद ओलंपिक जैसी प्रतिस्पर्धा देखने को मिले क्योंकि मेरे भार वर्ग में सबसे मजबूत भारोत्तोलक एशिया से हैं।’’मीराबाई का सर्वश्रेष्ठ एशियाई खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2023 में हांगझोऊ में रहा, जहां उन्होंने 49 किलोग्राम वर्ग में चौथा स्थान हासिल किया था। वह चोटिल होने के कारण 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाई थी। मीराबाई जानती हैं कि एशियाई खेलों में अपना पहला पदक जीतने के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। इसके लिए वह किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती हैं। यही वजह है कि वह कोच विजय शर्मा और अमेरिका के ‘स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग’ कोच डॉ. आरोन हॉर्शिंग द्वारा निर्धारित दिनचर्या का पालन कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रत्येक बृहस्पतिवार को उनके साथ वीडियो कॉल करते हैं और प्रशिक्षण, रिकवरी और भविष्य के कार्यक्रम को लेकर चर्चा करते हैं। हर चीज की बारीकी से समीक्षा की जाती है। डॉ. हॉर्शिंग खुद एक भारोत्तोलक रह चुके हैं, इसलिए उन्हें शरीर की हर मांसपेशी की जानकारी है। इससे मैं फिटनेस बनाए रखने में सफल रही हूं।’’मीराबाई एशियाई खेलों में पदक जीतने के लिए इतनी बेताब है कि उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों से लौटने के बाद विश्राम नहीं किया और सीधे मोदीनगर स्थित अपने अभ्यास केंद्र के लिए रवाना हो गईं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अभ्यास करने के लिए सीधे मोदीनगर वापस आ गई। दरअसल, मैं घर (मणिपुर) नहीं गई और मैं एशियाई खेलों में पदक जीतने के बाद ही घर जाऊंगी।
Explainer: मणिपुर में जनगणना से पहले NRC की मांग क्यों उठी, पूरा विवाद क्या है?
मणिपुर में जनगणना से पहले NRC की मांग क्यों उठी? 1951 के आंकड़े, अवैध प्रवासन, नागरिकता और परिसीमन से जुड़े इस विवाद को आसान भाषा में समझिए.
हथियार, विस्फोटक और लैंडमाइंस बरामद... मणिपुर में 12 उग्रवादी गिरफ्तार
मणिपुर में सुरक्षाबलों ने पिछले 48 घंटों में 12 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारियां सोरेपा, केवाईकेएल, यूपीपीके, आरपीएफ पीएलए और प्रीपाक जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी हैं. इन पर जबरन वसूली और अपहरण जैसे आरोप हैं.
Manipur में UPPK के 5 उग्रवादी गिरफ्तार, वसूली और अपहरण की वारदातों में थे शामिल
मणिपुर में इंफाल घाटी के जिलों में जबरन वसूली, धमकी और अपहरण की वारदातों में कथित रूप से शामिल पांच उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके साथ एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी ऑफ कांगलेइपाक (यूपीपीके) से जुड़े इन उग्रवादियों को मंगलवार को बिष्णुपुर, इंफाल पूर्व और इंफाल पश्चिम जिलों के अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के एक बयान के अनुसार, पकड़े गए उग्रवादियों में से एक की पहचान 51 वर्षीय पी. कोइरेंग सिंह के रूप में हुई है। उसे इंफाल पश्चिम जिले के कोइरेंगई फॉरेस्ट गेट से गिरफ्तार किया गया। वह राज्य के वन विभाग में ‘माली’ के पद पर कार्यरत है। बयान में कहा गया कि गिरफ्तार उग्रवादियों के कब्जे से यूपीपीके के कुल 23 लेटरहेड बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान उग्रवादियों ने अपहरण, जबरन वसूली और धमकी देने की घटनाओं में शामिल होने की बात कबूल की। इस बीच, बयान के अनुसार, सुरक्षा बलों ने कांगपोकपी जिले के ताफोउ कुकी और उससे सटे सेनापति जिले के ताफोउ लियांगमई में घेराबंदी और तलाशी अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। मौके से दो एसबीबीएल बंदूकें, 12-बोर के 78 कारतूस और एके-47 तथा .22 बंदूक के कारतूसों के खाली खोखे बरामद किए गए। यह अभियान मंगलवार को मणिपुर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त टीम ने चलाया। बयान में कहा गया कि अभियान के दौरान ताफोउ कुकी में दो और ताफोउ लियांगमई में एक बंकर भी नष्ट कर दिया गया।
Manipur School Closed: एनआरसी विवाद के बीच मणिपुर में स्कूल-कॉलेज बंद, 22 अगस्त तक जारी रहेगा आदेश
School Closed: एनआरसी विवाद को लेकर बढ़ते तनाव के बीच मणिपुर सरकार ने स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का फैसला लिया है। राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थान 22 अगस्त तक बंद रहेंगे।
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के घुसपैठ के दावे से मणिपुर का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो 25 अप्रैल 2026 का मणिपुर के हूमी गांव में असम राइफल्स और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प का है.

