जनगणना से पहले NRC लागू करने की मांग पर मणिपुर सरकार गंभीर, कहा- हरसंभव प्रयास जारी
मणिपुर सरकार ने जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की नागरिक समाज समूह की मांग पर गंभीरता दिखाई है।
Manipur में Census से पहले NRC लागू करने पर विचार, सरकार ने दिया आश्वासन
इंफाल, तीन अक्टूबर मणिपुर सरकार ने शनिवार को कहा कि वह राज्य में जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करने की एक संगठन की मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब संगठन ‘कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन’ (जेएफडी) के तहत एनआरसी की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है और उसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार से इस मुद्दे पर केंद्र के साथ विचार-विमर्श करने को कहा है। संगठन ने आगाह किया कि अगर 30 सितंबर तक उसकी मांग नहीं मानी गई, तो वह अपना विरोध प्रदर्शन तेज करेगा। मणिपुर सरकार के प्रवक्ता सपम रंजन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘अधिकारी इस मांग को लेकर पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध हैं कि जनगणना की प्रक्रिया से पहले एनआरसी कराया जाए।’’भाजपा विधायक रंजन ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए पूरी गंभीरता से’’ प्रयास कर रही है और ‘‘मणिपुर के लोगों की इच्छा पूरी करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।’’उन्होंने कहा, ‘‘मैं जेएफडी से अपील करना चाहता हूं कि वह लोगों के भविष्य और समाज के सभी वर्गों के हित के लिए मिलकर काम करे। हम सभी एक ही नाव में हैं।’’एनआरसी की मांग को लेकर मेइती और नगा संगठनों के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने मणिपुर में 2027 की जनगणना को स्थगित कर दिया था। राज्य में मई 2023 में घाटी में रहने वाले मेइती और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष शुरू हुआ था। इस जातीय संघर्ष में कम से कम 306 लोगों की जान गई, जबकि 49 लोग अब भी लापता हैं और हजारों लोग बेघर हो गए।
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Faridabad News: दोस्त से गांजा खरीदकर बेचने आया मणिपुर का युवक गिरफ्तार
Manipur youth arrested for selling cannabis bought from a friend
फरीदाबाद क्राइम ब्रांच AVTS भूपानी की टीम ने नशा तस्करी के मामले में मणिपुर निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने 5 किलो गांजा बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी दिल्ली में रह रहा था और वहां से गांजा लेकर फरीदाबाद में सप्लाई करने के लिए पहुंचा था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उसे शनिवार को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि क्राइम ब्रांच AVTS भूपानी की टीम को सूचना मिली थी कि सेक्टर-29 के पास एक युवक कट्टे में गांजा लेकर खड़ा है। वह नशे की खेप को फरीदाबाद में सप्लाई करने की फिराक में है। सूचना मिलने के बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर निगरानी शुरू की और बताए गए हुलिए के आधार पर युवक को काबू कर लिया। मणिपुर का रहने वाला, दिल्ली में रह रहा था पुलिस जांच में आरोपी की पहचान गॉफ्लुंग निवासी इम्फाल, मणिपुर के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि वह पिछले कुछ समय से दिल्ली में रह रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी पहले फरीदाबाद के एक होटल में काम कर चुका है, जिसके कारण शहर के कुछ इलाकों से वह परिचित भी था। दोस्त से 50 हजार में खरीदा था गांजा प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने 5 किलो गांजा अपने एक दोस्त से करीब 50 हजार रुपए में खरीदा था। इसके बाद वह इस गांजे को सप्लाई करने के लिए दिल्ली से फरीदाबाद आया था। आरोपी सेक्टर-29 के पास ग्राहक या संपर्क का इंतजार कर रहा था, इसी दौरान पुलिस को उसकी गतिविधि की सूचना मिल गई। नेटवर्क और पुराने रिकॉर्ड की जांच पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर गांजा सप्लाई करने वाले उसके साथी और फरीदाबाद में नशे की खेप लेने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है। पुलिस आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह इससे पहले कितनी बार फरीदाबाद में नशे की सप्लाई कर चुका है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड लिया जाएगा। रिमांड के दौरान गांजा सप्लाई करने वाले नेटवर्क और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी।
Manipur: फेसबुक पोस्ट मामले में जमानत मिलने के बाद व्यक्ति ने की खुदकुशी
इंफाल, दो अक्टूबर मणिपुर के इंफाल ईस्ट जिले में एक महिला के बारे में अश्लील और अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार 58 वर्षीय व्यक्ति ने जमानत पर रिहा होने के एक दिन बाद कथित रूप से जहरीले पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या कर ली। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। आरोपी की पत्नी का आरोप है कि व्यक्ति पर लगाए गए बेबुनियाद आरोपों और ‘‘मीडिया ट्रायल’’ के कारण उसने यह कदम उठाया। पुलिस ने बताया कि साइबर अपराध थाने की पुलिस ने पाओनम धनेश्वर को 29 सितंबर को उसके फेसबुक पोस्ट को लेकर गिरफ्तार किया था और मामले की जांच जारी थी। अधिकारियों ने बताया कि जहरीले पदार्थ के सेवन के बाद व्यक्ति को बुधवार दोपहर जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (जेएनआईएमएस) में भर्ती कराया गया था और बृहस्पतिवार को उसकी मौत हो गई। पुलिस में दर्ज शिकायत में आरोपी की पत्नी वाई संगीता देवी ने कहा कि उनके पति ने ‘‘चरित्र और छवि को ठेस’’ पहुंचने के कारण जहर का सेवन कर लिया। उन्होंने अपने पति की आत्महत्या के लिए इंफाल पश्चिम जिले के नाओरिया पाखंगलकपा विधानसभा क्षेत्र की एक स्थानीय निवासी द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई ‘‘आपराधिक धमकी, आपराधिक साजिश, मानसिक उत्पीड़न और बेबुनियाद आरोपों’’ को जिम्मेदार ठहराया। देवी ने उनके पति का ‘‘मीडिया ट्रायल’’ करने, सोशल मीडिया पर उन्हें अपराधी घोषित करने तथा उनके पति एवं उनके परिवार को बदनाम करने का आरोप लगाया और कहा कि इन्हीं सब चीजों से उन्हें ‘‘आत्महत्या के लिए उकसाया गया’’। नाओरिया पाखंगलकपा निवासी महिला ने कथित तौर पर एक महिला को निशाना बनाने के लिए व्यक्ति की कड़ी निंदा की थी।
मणिपुर की पहाड़ियों में जारी हिंसा अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर देश की सीमा सुरक्षा और संप्रभुता तक पहुंचता दिख रहा है। हम आपको बता दें कि तंगखुल अजे कतमनाओ लॉन्ग यानी सदर्न तंगखुल स्टूडेंट्स यूनियन ने केंद्र और मणिपुर सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर भारत-म्यांमार सीमा से सटे नागा इलाकों के लोगों को सुरक्षा नहीं मिली, तो वे मजबूरी में पड़ोसी देशों से, यहां तक कि चीन से भी मदद मांगने पर विचार कर सकते हैं। संगठन के अध्यक्ष यारचूइसो काशुंग का कहना है कि लगातार हिंसा और असुरक्षा से लोग अब बुरी तरह थक चुके हैं। बताया जा रहा है कि यह महज राजनीतिक नाराजगी वाला बयान नहीं है। इसके पीछे हाल में हुई कई हत्याओं और हमलों का संदर्भ है। काशुंग ने तामेंगलोंग में 17 वर्षीय लियांगमेई नागा युवक, सेनापति में तीन माओ नागा नागरिकों और कामजोंग के पिलोंग में चार तंगखुल नागा नागरिकों की हत्या का हवाला देते हुए जवाबदेही की मांग की है। उनका आरोप है कि सीमावर्ती गांव लगातार असुरक्षित हैं और सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। काशुंग ने यह भी कहा कि यदि मुख्यमंत्री राज्य और उसके लोगों की रक्षा करने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें स्वेच्छा से इस्तीफा दे देना चाहिए। इससे साफ है कि असंतोष अब केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य सरकार की राजनीतिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे भी पढ़ें: मणिपुर हिंसा में किसी बड़े नेटवर्क की साजिश की हो जांच: N Biren Singh मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह इलाका भारत-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा है। मई में भी कामजोंग के नामली, वांगली और चोरो जैसे तंगखुल गांवों पर सीमापार से हमलों के आरोप लगे थे। उस दौरान घरों में आग लगने और ग्रामीणों के जंगलों की ओर भागने की खबरें सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में म्यांमार स्थित सशस्त्र कुकी गुटों पर आरोप लगाए गए, हालांकि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मणिपुर में नागा-कुकी-जो तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार मई 2023 से शुरू हुई व्यापक जातीय हिंसा में अब तक 306 लोगों की मौत हुई है और 28 हजार से अधिक लोग अभी भी विस्थापित हैं। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र ने मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को भी एक अक्टूबर से अगले छह महीने के लिए बढ़ाया है। यानी एक तरफ सुरक्षा कानून का विस्तार हो रहा है, दूसरी तरफ सीमा पर रहने वाला एक नागा संगठन यह कह रहा है कि उसे सुरक्षा का भरोसा ही नहीं मिल रहा। यही विरोधाभास इस पूरे संकट को और गंभीर बनाता है। यहां सवाल यह भी उठता है कि जब सीमा पर रहने वाला कोई समुदाय यह कहने लगे कि उसे अपने ही देश में सुरक्षा नहीं मिल रही और वह चीन जैसे पड़ोसी से मदद लेने की बात कर रहा है, तो इसे केवल एक बयान मानकर खारिज करना जोखिम भरा हो सकता है। चीन का नाम इस पूरे मामले को स्थानीय जातीय संघर्ष से उठाकर राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीति के सवाल तक पहुंचा देता है। अब गेंद केंद्र और मणिपुर सरकार के पाले में है। अब सिर्फ शांति की अपील से काम नहीं चलेगा, बल्कि सीमावर्ती नागरिकों की सुरक्षा, जवाबदेही और भरोसा बहाल करने की ठोस कार्रवाई ही इस असंतोष को रोक सकती है। इसके अलावा, मणिपुर जैसे संवेदनशील और लंबे समय से हिंसा झेल रहे क्षेत्र में ऐसे बयानों को केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया मानकर छोड़ देना भी ठीक नहीं होगा। सरकार और आम लोगों को यह भी देखना होगा कि कहीं तनाव, असुरक्षा और कथित असंतोष का इस्तेमाल बाहरी प्रभाव बढ़ाने के लिए तो नहीं किया जा रहा। हम आपको बता दें कि इस प्रकार के आरोप लगते रहे हैं कि विदेशी चंदे से संचालित होने वाले संगठन भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे रहते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020 से 2023 के बीच मणिपुर की 43 संस्थाओं के विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम के पंजीकरण रद्द किए गए थे। इसीलिए चीन से मदद लेने की चेतावनी जैसे बयान के मामले में जांच जरूरी है। यह देखा जाना चाहिए कि क्या यह केवल स्थानीय समुदाय की वास्तविक सुरक्षा चिंता और सरकार पर दबाव बनाने का तरीका है? या फिर क्या कोई बाहरी संगठन, वित्तीय नेटवर्क या प्रतिबंधित उग्रवादी ढांचा इस असंतोष को अपने रणनीतिक हित के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है? मणिपुर में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के खिलाफ जांच एजेंसियां पहले से ही अलगाववादी गतिविधियों, अवैध धन जुटाने और भारत की संप्रभुता के खिलाफ हिंसक अभियान जैसे आरोपों की जांच करती रही हैं। बहरहाल, मणिपुर में चीन का नाम लेकर दिया गया ताजा बयान सरकार के लिए सतर्क रहने का संकेत भी माना जाना चाहिए। -नीरज कुमार दुबे
सोने-चांदी के जेवर चुराने वाले Bhavnagar के गिरोह का भंडाफोड़, Jhansi Railway Police ने दबोचा
गुजरात से उत्तर प्रदेश तक, सात रिश्तेदार एक परिवार की तरह साथ यात्रा करते थे ताकि किसी को शक न हो और वे ट्रेन यात्रियों से कैश, गहने और फ़ोन लूट सकें। झांसी रेलवे पुलिस ने मंगलवार को चार पुरुषों और तीन महिलाओं को गिरफ़्तार किया और उनसे चोरी का सामान बरामद किया। ये सभी सात आरोपी रिश्तेदार हैं और गुजरात के भावनगर ज़िले के रहने वाले हैं। झांसी रेलवे पुलिस के अनुसार, आरोपी ट्रेनों में साथ यात्रा करते थे और ऐसे यात्रियों पर नज़र रखते थे जो सो गए हों या कहीं जाते समय अपने बैग बिना किसी की देखरेख के छोड़ गए हों। वे कैसे पकड़े गए? गैंग की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने के बाद, पुलिस की एक टीम ने झांसी रेलवे स्टेशन पर रेल की पटरियों के पास घेराबंदी की। इसे भी पढ़ें: UP पुलिस SI भर्ती पर हाई कोर्ट का बड़ा चाबुक! नियुक्ति पत्र बांटने पर रोक, आंसर की के 'खेल' से फंसा 12 हजार युवाओं का भविष्य! मौके पर ही 7 आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया। उनकी पहचान इस प्रकार है: अमर (45), मनोज (45), संगीता (42), ज्योति (42), दिलीप (34), उषा (32) और कृष्णा अमर (20)। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि वे झांसी से आगरा, मथुरा, हाथरस और बरेली जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों को निशाना बनाते थे, और कभी-कभी अयोध्या जाने वाली ट्रेनों को भी निशाना बनाते थे। आरोपियों के ख़िलाफ़ झांसी रेलवे पुलिस स्टेशन में चोरी के दो मामले दर्ज किए गए हैं। दूसरे ज़िलों और राज्यों के रेलवे स्टेशनों पर उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। इसे भी पढ़ें: Manipur में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, PLA और PREPAK-Pro के चार उग्रवादी पकड़े गए महिलाओं के बैग मुख्य निशाने पर होते थे जांच में पाया गया कि आरोपी ट्रेन में यात्रा करते समय यात्रियों के बीच घुल-मिल जाते थे और महिलाओं के बैग और सामान पर खास नज़र रखते थे। पुलिस ने बताया कि जब कोई महिला यात्री सो जाती थी या उसका ध्यान कहीं और होता था, तो आरोपी इस मौके का फ़ायदा उठाकर उसका बैग खोलते थे और गहने व अन्य कीमती सामान चुरा लेते थे। पुलिस के अनुसार, चोरी किए गए गहनों को या तो बेच दिया जाता था या उनकी मंज़िल तक पहुँचा दिया जाता था। चोरी का सामान बरामद पुलिस ने आरोपियों से दो ब्रेसलेट, एक मंगलसूत्र, एक अंगूठी और लगभग 5,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस बरामद गहनों को पहले दर्ज चोरी के मामलों से जोड़ने और उन यात्रियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिनका यह सामान था। वे यह भी जाँच कर रहे हैं कि क्या आरोपी अन्य घटनाओं में भी शामिल हैं।
Manipur Violence: तीन समुदायों के बीच क्यों गहराया विवाद? जमीन और ST दर्जे से जुड़े मुद्दे समझिए
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Manipur में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, PLA और PREPAK-Pro के चार उग्रवादी पकड़े गए
इंफाल, एक अक्टूबर मणिपुर में अलग-अलग संगठनों से जुड़े चार उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ (पीएलए) के दो सदस्यों को तेंगनौपाल जिले में भारत-म्यांमा सीमा के पास शैबोल के निकट पकड़ा गया। उन्होंने कहा कि ये गिरफ्तारियां खुफिया जानकारी के आधार पर की गईं। ऐसी सूचना मिली थी कि पीएलए के दो सदस्य मिंथार कैंप से भाग गए हैं और उनके घुसपैठ करने की आशंका है। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सदस्यों की पहचान क्षेत्रिमायुम कृष्णा दास और खुनुमायुम संगर सिंह के तौर पर हुई है और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने बताया कि बुधवार को इंफाल ईस्ट जिले के खुराई पुथिबा लीकाई से पीएलए के 46 वर्षीय सदस्य को गिरफ्तार किया गया। नेप्रम सिंहजीत सिंह कथित रूप से उग्रवादी संगठन में नए सदस्यों को भर्ती करने में शामिल था। पुलिस ने बताया कि जब वह नए भर्ती सदस्यों के उखरुल जाने के वास्ते बस टिकट का इंतजाम करने के लिए इलाके में आया था तभी उसे पकड़ लिया गया। उखरुल की सीमा म्यांमार से लगती है। एक अन्य अभियान में सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित संगठन ‘पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेइपक’ (प्रेपाक-प्रो) के स्वयंभू कैप्टन को गिरफ्तार किया। उस पर बिष्णुपुर जिले से चार किशोरों की भर्ती कर उन्हें म्यांमा भेजने में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने बताया कि संगठन के एक वरिष्ठ कैडर के म्यांमा से कामजोंग के रास्ते घुसपैठ करने की सूचना के आधार पर थौबल जिले के चंद्रखोंग में यह गिरफ्तारी की गई। उन्होंने बताया कि आरोपी की पहचान मोइरांगथेम बोबॉय सिंह के रूप में हुई है और उसे वाहनों की जांच के दौरान पकड़ा गया।
Manipur के Loktak Lake पर बसा Floating Village Champu Khangpok पानी पर तैरता है
क्या आप कभी ऐसी जगह पर घूमने के लिए गए हैं, जहां पर कदम रखते ही जमीन डगमगाने लगे। आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप चल नहीं बल्कि तैर रहे हैं। ऐसा दृश्य सोचने पर एकदम सपने जैसा महसूस होता है। ऐसा ही कुछ मणिपुर का फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अनोखे और रोमांच से भरपूर जगह फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक के बारे में बताने जा रहे हैं। फ्लोटिंग विलेज है चंपू खंगपोक भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में एक तैरता हुआ गांव है। जिसका नाम चंपू खंगपोक है। यह भारत की फेमस लोकटक झील पर बसा है, जोकि करीब 240 वर्ग किमी के आकार में फैली है। इस गांव के लोगों ने पानी के साथ जीना सीख लिया है, तभी तो आपको इस गांव में पानी पर चलते लोग, तैरते घर और द्वीप देखने को मिलेंगे। इसे भी पढ़ें: Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल जानें डगमगाती जमीन का रहस्य चंपू खंगपोक गांव के तैरने के पीछे कोई जादू नहीं हैं। बल्कि इसके पीछे साइंस का कमाल है। इसके पीछे की वजह इस स्थान की प्रकृति और बायोमास का प्रोसेस है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस गांव की जमीन किसी चट्टान या मिट्टी से नहीं बनी है, बल्कि यह फुम्डी नाम की प्राकृतिक जमीन है। फुम्डी जमीन जड़ों, सड़े-गले पौधों, मिट्टी और जैविक पदार्थों की परत से बनी होती है। वहीं साल-दर-साल जब इन सभी चीजों का जमावड़ा शुरू होकर एक जगह पर एकत्र होता है। तो इसकी परत से जमीन बन जाती है। यह जमीन इतनी ज्यादा मजबूत होती है कि इन पर घरों तक का निर्माण किया जा सकता है। बदलती है घरों की लोकेशन यहां पर रहने वाले लोगों के घरों को फुमशंग कहा जाता है, जो अपनी लोकेशन को बदलते रहते हैं। क्योंकि यह घर जमीन पर नहीं बल्कि फुम्डी पर बने हैं, तो पानी के बहाव और हवा के दबाव की वजह से इनकी लोकेशन बदलती रहती है। यही कारण है कि चंपू खंगपोक दुनियाभर में अपनी इसी विशेषता की के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। देख सकेंगे तैरता हुआ नेशनल पार्क अनोखे गांव के अलावा आप लोकटक झील में तैरता हुआ कीबुल लामजाओ नेशनल पार्क भी देख सकेंगे। यह पार्क विष्णुपुर जिले में हैं, जोकि लोकटक झील के दक्षिण पश्चिम में करीब 40 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र फैला है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर विलुप्त हो रहे संगाई हिरण रहते हैं, यह उनका अकेला आवास स्थल है।
Imphal Trip: Kangla Fort से लेकर Ima Market तक, Imphal में देखने लायक हैं ये प्रमुख स्थल
इंफाल एयरपोर्ट को देखकर आपका दिल खुश हो जाएगा। मणिपुर शैली की हरी छतों वाला यह छोटा और बेहद खूबसूरत एयरपोर्ट इतना सहज है कि विमान से उतरकर पैदल ही आप भवन में दाखिल हुआ जा सकता है। महानगरों की भागदौड़ से दूर इस शहर की अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक छटा है। यहां के युवा जहां आधुनिक लिबास में नजर आता है, तो वहीं अधिकतर महिलाएं ब्लाउज, फनेक और महीन दुपट्टे जैसे अपने पारंपरिक परिधानों में दिखते हैं। नाक से माथे तक लगा चंदन का लंबा टीका उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। इमा मार्केट समाज में स्त्रियों की भागीदारी का प्रतीक शहर के बीचों-बीच बनी इमा मार्केट है। इमा यानी मां। माताओं द्वारा चलाए जाने वाला बाजार। इस मार्केट में सिर्फ स्त्रियों द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें हैं। यहां पर पारंपरिक परिधानों की दुकानें जैसे- ब्लाउज, शॉल, चादर, दुपट्टे, गमछे और भी कई तरह की चीजें हैं। वहीं मार्केट के एक हिस्से में सिर्फ पूजा का सामान है। इसे भी पढ़ें: Imphal Airport से अगवा पश्चिम बंगाल का युवक Bishnupur से सुरक्षित बचाया गया एक्सप्लोर करें कांगला किला इंफाल में दो जगहें आपको जरूर देखनी चाहिए। जिसमें पहला कांगला किला है और दूसरा लोकताक लेक है। कांगला फोर्ट या किला शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे स्थित है। मणिपुरी भाषा की भारत की 22 ऑफिशियल भाषाओं की लिस्ट में से एक है। कांगला फोर्ट यहां के राजवंश के शासकों की राजधानी हुआ करता था। वहीं आज भी मणिपुर के निवासियों के लिए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां बनी हैं। जिनको देवताओं का देव कहा जाता है। इसे भी पढ़ें: मणिपुर के Kangpokpi में 7 ग्रामीणों को हिरासत में लेने पर बवाल, रिहाई के बाद शांत हुआ प्रदर्शन सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर इसके साथ ही आप सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर देख सकते हैं। सानामाही मेतेई वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी है। इसको मेतेई लोग बेहद शुभ और पवित्र स्थल मानते हैं। यहां पर आपको कई और दर्शनीय स्थल भी देखने को मिल जाएंगे, जैसे महाराज नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति, राजा बोधचंद्र की समाधि आदि। राजाओं का महल और पोलो ग्राउंड भी इस फोर्ट है। महाराजा नरसिंह द्वारा श्री गोविंद जी मंदिर बनवाया गया है, जोकि इंफाल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। लोकताक लेक अगले दिन आप लोकताक लेक जा सकते हैं। यह पूरे नॉर्थ ईस्ट की सबसे बड़ी फ्रेश वाटर लेक है और इसकी खासियत झील के ऊपर आपको तैरते भूखंड दिखेंगे, जिनको स्थानीय भाषा में 'फुम्डी' कहते है। लोकताक झील मोइरांग के पास स्थित है, जहां INA का एक संग्रहालय है। इसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना से संबंधित वस्तुएं दिखाई जाती हैं। यहां से लौटने के दौरान आप इंडियन पीस मेमोरियल देख सकते हैं। रेड हिल के पास स्थित यह स्मारक उन भारतीय शहीदों की याद में बनाया गया है। जोकि सेंकेंड वर्ल्ड वॉर में आजाद हिंद फौज के तहत जापानी सेना के साथ मिलकर लड़े थे। इसी रेड हिल के पास उन्होंने ब्रिटिश सेना को हराया था। इंफाल में कई मंदिर, संग्रहालय, पार्क, झीलें, चिड़ियाघर और दर्शनीय स्थल हैं। अगर समय रहे, तो आप इन सबको भी देख सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Manipur के Kangpokpi में 6 ग्रामीणों की हिरासत पर हिंसक विरोध, बाद में हुए रिहा कुछ जरूरी बातें ट्रेन से इंफाल जाने के लिए गुवाहाटी या दीमापुर जाना होगा। यहां पर इंफाल के लिए बस मिल जाएगी। वहीं भारत के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा सीधे पहुंच सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान मणिपुर में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से इनर लाइप परमिट लेना जरूरी है। यह सुविधा अब ऑनलाइन भी मौजूद है। मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा कोलकाता, दिल्ली और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा यह सुविधा इंफाल एयरपोर्ट पर भी मिल जाएगी। इसके लिए पासपोर्ट या आधार कार्ड की कॉपी की जरूरत है। इसका शुल्क 100 रुपए है और विदेशी नागरिकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की जरूरत होगी।
Travel Tips: मणिपुर की सांस्कृतिक सुंदरता का प्रतीक है Kangla Fort, जानें कैसे पहुंचे Imphal
इंफाल एयरपोर्ट पर उतरते ही खुला आसमान और हवा की ताजगी आपका मोह लेगी। मणिपुर शैली की हरी छतों वाला यह छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हवाई अड्डा इतना सहज है कि विमान से उतरने के बाद पैदल भवन में एंटर किया जा सकता है। महानगरों की भागदौड़ से दूर बसा इंफाल शहर अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक छटा के लिए जाना जाता है। जहां एक तरफ युवा आधुनिक लिबास में नजर आते हैं। वहीं अधिकतर महिलाएं ब्लाउज, फनेक और महीन दुपट्टे जैसे पारंपरिक आउटफिट में दिखाई देती हैं। नाक से माथे तक लगा चंदन का लंबा टीका उन महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। इमा मार्केट यह समाज में स्त्रियों की भागीदारी का प्रतीक है। शहर के बीचो-बीच इमा मार्केट स्थित है। इमा यानी मां। माताओं द्वारा चलाए जाने वाला मार्केट। इस मार्केट में सिर्फ स्त्रियों द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें हैं। इसे भी पढ़ें: IRCTC Kashi Tirtha Yatra Package: 17 हजार में वाराणसी और Ayodhya घूमने का बजट फ्रेंडली अवसर पारंपरिक परिधानों की दुकानें जैसे ब्लाउज, फनेक, दुपट्टे, शॉल, चादर, गमछे और अन्य कई तरह की चीजें शामिल हैं। वहीं एक हिस्से सिर्फ पूजा का सामान है। कांगला किला की सैर इसके अलावा इंफाल में आपको दो जगहें और देखनी चाहिए। जिनमें पहला कांगला किला और दूसरा लोकताल लेक है। कांगला फोर्ट शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे है। मेतेई भाषा में कांगला का अर्थ होता है जमीन का मुख्य भाग। मेतेई वर्तमान मणिपुर का मूल नाम है। मणिपुरी भाषा भी भारत की 22 ऑफिशियल भाषाओं की लिस्ट में से एक है। कांगला फोर्ट यहां के राजवंश के शासकों की राजधानी हुआ करता था। आज भी मणिपुर के निवासियों के िए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां लगी हैं। जिनको देवताओं का देव कहा जाता है। यहां पर घूमने के लिए गोल्फ कार्ट की सुविधा मौजूद थी। लेकिन हमने पैदल घूमने का फैसला किया। इसके अंदर कई संग्रहालय हैं। कांगला संग्रहालय यहां प्राचीन शासकों से संबंधित वस्तुएं और इसका इतिहास देख सकते हैं। बोट म्यूजियम यहां पर प्राचीन शासकों की नावें और उनसे संबंधित जानकारी देखने को मिलेगी। पुरातत्व संग्रहालय पुरातत्व संग्रहालय को देखने से हमें मणिपुर के इतिहास के बारे में गहराई से जानकारी मिलती है। सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर सबसे सुंदर सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर लगे। सानामाही मेतेई वास्तुकला का उदाहरण है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी हुई है। जिसको मेतेई लोग शुभ और पवित्र मानते हैं। यहां पर कई और दर्शनीय स्थल है। जैसे - महाराजा नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति और राजा बोधचंद्र की समाधि है। राजाओं का महल और पोलो ग्राउंड भी इस फोर्ट में है। महाराजा नरसिंह द्वारा श्री गोविंद जी मंदिर का निर्माण कराया गया है। यह इंफाल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। जरूरी बातें ट्रेन से इंफाल पहुंचने के लिए आपको दीमापुर या गुवाहाटी जाना होगा। यहां से आप इंफाल के लिए बस ले सकते हैं। इसके अलावा देश के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा भी यहां पर आप सीधे पहुंच सकते हैं। यहां पर जाने के लिए सिंतबर से अप्रैल का समय सबसे अच्छा है। क्योंकि इस दौरान मौसम काफी सुहावना होता है। मणिपुर राज्य में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से इनर लाइन परमिट लेना जरूरी है। हालांकि यह सुविधा अब ऑनलाइन भी है। मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से भी इसको प्राप्त किया जा सकता है। यह सुविधा इंफाल एयरपोर्ट पर भी मौजूद है। इसके लिए पासपोर्ट या आधार कार्ड की प्रति जरूरी है। इसका शुल्क 100 रुपए है। विदेशी नागरिकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की जरूरत होती है।
Manipur Music Teacher Killed: Chongtham Vikram Singh को Delhi में पीट-पीटकर मारा, लोगों में गुस्सा!
आरोप है कि घर के बाहर शोर-शराबे को लेकर हुए विवाद के बाद उनके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के विरोध में मणिपुर के लोगों ने दिल्ली में कैंडल मार्च निकाला…

