झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के संशोधित परिणाम जारी होने के बाद स्कूली शिक्षा विभाग ने काउंसिलिंग की तैयारी शुरू कर दी है।
उत्तराखंड में 20 हजार शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी से शिक्षा पर संकट
उत्तराखंड में 20 हजार शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाए जाने से सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। शिक्षक संगठन इस पर नाराजगी जता रहे हैं, क्योंकि इससे शिक्षण कार्य और बच्चों की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा, खासकर एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में।
प्रदेश की महिला शिक्षिकों को मिलने वाले संतान पालन अवकाश (Child Care Leave) की पूरी प्रोसेस ऑनलाइन किए जाने की मांग स्कूल शिक्षा विभाग से की गई है। संतान पालन अवकाश स्वीकृति की ऑफलाइन प्रोसेस में टीचर्स को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। साथ ही कई बार पात्र शिक्षकों को इसका फायदा भी नहीं मिल पाता है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने कहा कि वर्तमान में जिला स्तर पर संतान पालन अवकाश स्वीकृति की ऑफलाइन प्रक्रिया के कारण महिला शिक्षिकाओं को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पारदर्शिता का अभाव आवेदन से लेकर स्वीकृति तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहता है। साथ ही, अनावश्यक विलंब और कथित अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आती हैं। इसके चलते कई बार वास्तविक रूप से पात्र महिला शिक्षिकाओं को भी उनके वैधानिक अधिकार के अनुरूप संतान पालन अवकाश का लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि संतान पालन अवकाश महिला शिक्षिकाओं के लिए केवल एक विभागीय सुविधा नहीं, बल्कि बच्चों की देखभाल, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन से जुड़ा महत्वपूर्ण अधिकार है। इसकी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाना आवश्यक है। उपेन्द्र कौशल ने स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं राज्य शासन से मांग की है कि महिला शिक्षिकाओं की इस महत्वपूर्ण समस्या को गंभीरता से लेते हुए संतान पालन अवकाश की ऑनलाइन व्यवस्था शीघ्र लागू की जाए, ताकि पात्र महिला शिक्षिकाओं को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें सम्मानपूर्वक अपने अधिकार का लाभ मिल सके।
जम्मू-कश्मीर निजी विश्वविद्यालय नियम-2026 लागू, सीएम उमर अब्दुल्ला ने शिक्षा मंत्री को दी बधाई
जम्मू, 7 नवंबर . Chief Minister उमर अब्दुल्ला ने शिक्षा मंत्री शमीम फिरदौस को जम्मू-कश्मीर निजी विश्वविद्यालय नियम, 2026 (प्राइवेट यूनिवर्सिटीज रूल्स, 2026) की अधिसूचना जारी होने पर…
ओडिशा में KG से PG तक मुफ्त शिक्षा योजना से छात्रों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि!
ओडिशा सरकार की KG से PG तक मुफ्त शिक्षा योजना ने इस वर्ष 14,758 नए छात्रों के प्रवेश के साथ शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी है। कलाहांडी और कोरापुट जैसे प्रेरणादायक जिलों में प्रवेश दर 99.09 प्रतिशत और 98.82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस योजना का उद्देश्य योग्य परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा तक पहुंच प्रदान करना है। जानें इस योजना के तहत किए गए अन्य महत्वपूर्ण विकासों के बारे में।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अरुण प्रताप सिंह परमार बनाम सुरेंद्र तिवारी, सचिव, व अन्य के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका में कहा है कि अभिलेखों से प्रथमदृष्टया प्रतिवादियों द्वारा आदेश की जानबूझकर अवहेलना स्पष्ट है। न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ के समक्ष राज्य के अधिवक्ता ने बेसिक शिक्षा सचिव के निर्देश पढ़ते हुए कहा कि 69000 सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जो 18 नवंबर को सूचीबद्ध है। इसलिए अंतिम सूची तैयार नहीं की जा सकती। याची के अधिवक्ता ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने बताया कि लखनऊ पीठ की एक अवमानना कार्यवाही में सुप्रीम कोर्ट से नोटिस मिलते ही विभाग ने 7 मई 2026 को एक याची को नियुक्ति दे दी थी। उनका आरोप था कि विभाग चुनिंदा तरीके से कार्य कर रहा है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को अनुकूल आदेश प्रस्तुत करने या अगली तिथि पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया, ताकि अवमानना कार्यवाही शुरू की जा सके। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर 2026 को होगी।
J&K Bank Recruitment 2026: 1397 PO और बैंकिंग एसोसिएट पदों पर निकली भर्ती, चेक करें डिटेल्स
PC: kalingatv जम्मू और कश्मीर बैंक लिमिटेड ने प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) और बैंकिंग एसोसिएट्स की भर्ती के लिए एप्लीकेशन मंगाए हैं। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के रहने वाले कैंडिडेट ही इस भर्ती के लिए अप्लाई कर सकते हैं। ऑफिशियल नोटिफिकेशन के मुताबिक, इस भर्ती का मकसद 1,397 वैकेंसी भरना है, जिसमें PO के 343 पोस्ट और बैंकिंग एसोसिएट के 1,054 पोस्ट शामिल हैं। नोटिफिकेशन 06 नवंबर, 2026 को जारी किया गया था। ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेस 07 नवंबर, 2026 से शुरू होगा और एलिजिबल कैंडिडेट 26 नवंबर, 2026 तक अपनी एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं और तय फीस दे सकते हैं। इंस्टिट्यूट ऑफ़ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) ऑनलाइन एग्जाम कराएगा। वैकेंसी का बंटवारा 1,397 वैकेंसी में से 1,356 जम्मू और कश्मीर और 41 लद्दाख को दी गई हैं। PO भर्ती में जम्मू और कश्मीर में 323 और लद्दाख में 20 वैकेंसी शामिल हैं। बैंकिंग एसोसिएट्स के लिए, जम्मू और कश्मीर में 1,033 और लद्दाख में 21 पोस्ट उपलब्ध हैं। एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया एप्लीकेंट के पास किसी भी सब्जेक्ट में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए और उनकी उम्र 20 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। उम्र की लिमिट 01 जनवरी, 2026 के हिसाब से कैलकुलेट की जाएगी। कैंडिडेट का उस UT का डोमिसाइल होना ज़रूरी है और वे सिर्फ़ अपने डोमिसाइल के लिए दी गई वैकेंसी के लिए ही अप्लाई कर सकते हैं। उम्र में छूट में SC/ST कैंडिडेट के लिए पाँच साल, ALC/IB कैंडिडेट के लिए तीन साल और PwBD कैंडिडेट के लिए 10 साल शामिल हैं, जो लागू रिज़र्वेशन नियमों के अधीन हैं। J&K बैंक के पुराने अप्रेंटिस जिन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है, उन्हें उम्र में एक साल की एक्स्ट्रा छूट और बैंकिंग एसोसिएट परीक्षा के मैक्सिमम मार्क्स के 2.5% के बराबर एक्स्ट्रा मार्क्स मिलते हैं। एप्लीकेशन फीस जनरल, EWS और दूसरे कैंडिडेट के लिए PO पोस्ट के लिए एप्लीकेशन फीस Rs 1,200 प्लस GST और बैंकिंग एसोसिएट पोस्ट के लिए Rs 800 प्लस GST है। एससी, एसटी, एसईबीसी और पीडब्ल्यूबीडी उम्मीदवारों को पीओ के लिए 1,000 रुपये प्लस जीएसटी और बैंकिंग एसोसिएट पदों के लिए 600 रुपये प्लस जीएसटी का भुगतान करना होगा। पूर्व सैनिकों को भी कम बैंकिंग एसोसिएट शुल्क के अंतर्गत कवर किया गया है। चयन प्रक्रिया बैंकिंग एसोसिएट चयन में 60 मिनट की 100 अंकों की ऑनलाइन परीक्षा शामिल है, जिसमें अंग्रेजी, मात्रात्मक योग्यता और तर्क शामिल हैं, इसके बाद दस्तावेज़ सत्यापन होता है। पीओ चयन में 100 अंकों की योग्यता प्रारंभिक परीक्षा, 200 वस्तुनिष्ठ और 25 वर्णनात्मक अंकों की मुख्य परीक्षा और एक साक्षात्कार शामिल है। प्रारंभिक परीक्षा के बाद रिक्तियों के 10 गुना और मुख्य परीक्षा के बाद तीन बार शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। वेतन विवरण पीओ के लिए शुरुआती मूल वेतन 48,480 रुपये और बैंकिंग एसोसिएट्स के लिए 24,050 रुपये है छह महीने के लिए 1 लाख का बॉन्ड। ऑनलाइन अप्लाई कैसे करें कैंडिडेट ऑफिशियल वेबसाइट jkb.bank.in पर जाकर करियर सेक्शन खोल सकते हैं। उन्हें अपनी पोस्ट और डोमिसाइल के आधार पर सही नोटिफिकेशन चुनना होगा, रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा और पर्सनल, कैटेगरी और ग्रेजुएशन डिटेल्स डालनी होंगी। एप्लीकेंट को बताए गए फॉर्मेट में अपनी फोटो, सिग्नेचर, बाएं अंगूठे का निशान और हाथ से लिखा हुआ डिक्लेरेशन अपलोड करना होगा। उपलब्ध पेमेंट तरीकों से ऑनलाइन फीस देने के बाद, कैंडिडेट को एप्लीकेशन जमा कर देना चाहिए और उसका प्रिंटआउट रख लेना चाहिए।
job news :12वीं पास के लिए निकली हैं भर्ती, आप भी कर सकते हैं इस तारीख तक आवेदन
इंटरनेट डेस्क। आपको भी एक अच्छी नौकरी की तलाश हैं तो फिर ये खबर आपके लिए काम की है। जी हां बिहार विधान सभा सचिवालय की ओर से कनीय सचिवालय सहायक के पदों पर निकाली गई भर्ती के लिए आज से आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए 06 दिसंबर, 2026 तक आवेदन करने का मौका होगा। पदों का नाम- कनीय सचिवालय सहायक कुल पद- आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी प्राप्त करें। आयु सीमा- उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 37 वर्ष निर्धारित है। आवेदन करने की आखिरी तारीख- 06 दिसंबर, 2026 योग्यता-12वीं पास सैलेरी-पदों के अनुसार ज्यादा जानकारी के लिए आप वेबसाइट देख सकते हैं pc-thriveinspi.org
जबलपुर में खुला प्रदेश का पहला संभागीय उच्च शिक्षा कार्यालय, 5.40 करोड़ रुपये से बना भव्य भवन
मंत्री राकेश सिंह लोकार्पण कर बोले- संभाग के विद्यार्थियों को शिक्षा के जरिए नई दिशा देने में निभाएगा अहम भूमिका। भवन की आधारशिला से लेकर निर्माण तक जनप्रतिनिधियों और अतिथियों का सहयोग मिला।
बिहार शिक्षा विभाग में IAS सीके अनिल का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
पटना, 07 नवंबर 2026 | बिहार के शिक्षा विभाग में नए प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले हैं। IAS सीके अनिल के शिक्षा विभाग में आने के बाद पटना समेत राज्य के 10 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) का तबादला कर दिया गया है। इस फेरबदल के बाद शिक्षा विभाग में प्रशासनिक हलचल तेज हो […] The post बिहार शिक्षा विभाग में IAS सीके अनिल का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल appeared first on Rashtriya Ujala .
job news 2026: इंजीनियर ट्रेनी के पदों पर निकली हैं पावर ग्रिड में भर्ती, कर सकते हैं आप भी आवेदन
इंटरनेट डेस्क। आपको एक अच्छी नौकरी की तलाश हैं तो फिर ये खबर आपके लिए काम की है। जी हां सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने इंजीनियर ट्रेनी के पदों पर बंपर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 319 पदों को भरा जाएगा। पदों का नाम-इंजीनियर ट्रेनी आवेदन- ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट- 18 नवंबर 2026 कुल पद- 319 योग्यता- फुल टाइम भी बीई, बीटेक या बीएससी इंजीनियरिंग की डिग्री होना अनिवार्य है। आयु सीमा- अधिकतम आयु 28 वर्ष सैलेरी- 40,000 रुपये से 1,40,000 रुपये ज्यादा जानकारी के लिए आप वेबसाइट देख सकते हैं
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के विशेष सहायक (निजी स्थापना) ब्रजेश कुमार बाजपेई को हटा दिया गया है। राज्य शासन ने 29 अक्टूबर को आदेश जारी किया था, जो अब सामने आया है। बाजपेई को मंत्री की निजी स्थापना से कार्यमुक्त कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ब्रजेश कुमार बाजपेई राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा में उप संचालक के पद पर पदस्थ थे। उन्हें स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की निजी स्थापना में विभागीय कार्यों के संपादन के लिए आदेशित किया गया था। अब राज्य शासन ने उन्हें मंत्री की निजी स्थापना से कार्यमुक्त करते हुए उनकी सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर लेकर उप संचालक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) शंकर नगर रायपुर में पदस्थ किया है। उनकी यह पदस्थापना आगामी आदेश तक रहेगी। 29 अक्टूबर 2026 को जारी इस आदेश पर स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव मनीष मिश्रा के डिजिटल हस्ताक्षर हैं। आदेश सामने आने के बाद मंत्री की निजी स्थापना में हुए इस बदलाव की चर्चा है।
सरकारी नौकरी: इन तीन सरकारी नौकरियों का फॉर्म भरने की अंतिम तिथि आज, एक लाख+ सैलरी, तुरंत करें आवेदन
Government Jobs 2026: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए आज आवेदन का आखिरी मौका है। पश्चिम बंगाल लोक सेवा आयोग में स्टेनोग्राफर के 266 पदों, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में स्टेनोग्राफर के तीन पदों और एम्स रेवाड़ी में फैकल्टी के पदों पर
आईएएस अधिकारी सीके अनिल की शिक्षा विभाग में धमाकेदार एंट्री
बिहार के कड़क, अनुशासनप्रिय और सख्त प्रशासनिक छवि वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सीके अनिल ने शिक्षा विभाग की कमान संभालते ही अपनी कार्यशैली और सख्त तेवरों का प्रत्यक्ष प्रमाण दे दिया है। विभाग का पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने राज्य की चरमराती स्कूली शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति और जिलों में चल रही प्रशासनिक शिथिलता को दुरुस्त करने के लिए एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। सीके अनिल के निर्देश पर राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राजधानी पटना समेत प्रदेश के 10 प्रमुख जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) का एक साथ तबादला कर दिया है। इस अचानक और व्यापक फेरबदल की खबर जैसे ही शिक्षा विभाग के गलियारों में पहुंची, पूरे प्रशासनिक तंत्र और जिला स्तरीय अफसरों में हड़कंप मच गया है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद सभी नए अधिकारियों को तुरंत अपने-अपने संबंधित जिलों में पदभार ग्रहण करने का सख्त हुक्म जारी किया गया है।पटना समेत 10 प्रमुख जिलों के डीईओ बदले गए, जानिए किस अधिकारी को मिली किस जिले की कमानशिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक तबादला सूची के अनुसार, राजधानी पटना के प्रशासनिक संतुलन और निगरानी को मजबूत करने के लिए नए जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, सारण (छपरा), रोहतास, बेगूसराय और समस्तीपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में भी नए और सख्त अफसरों को डीईओ पद पर तैनात किया गया है। विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय उन जिलों की प्रदर्शन समीक्षा (Performance Audit) और हालिया प्रशासनिक शिकायतों के आधार पर लिया गया है जहां योजनाओं के क्रियान्वयन और शिक्षकों की समय पर बायोमेट्रिक हाजिरी में लापरवाही देखी जा रही थी। आईएएस सीके अनिल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल कागजी रिपोर्टिंग से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर अधिकारी को अपने जिले के दूर-दराज के सरकारी स्कूलों का धरातल पर जाकर औचक निरीक्षण करना होगा। जिन अफसरों का ट्रैक रिकॉर्ड पिछले कुछ समय में सुस्त पाया गया था, उन्हें लूप लाइन या कम महत्वपूर्ण पदों पर भेज दिया गया है, जबकि बेहतर कार्य संस्कृति वाले अफसरों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।बायोमेट्रिक हाजिरी, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और पारदर्शी तंत्र पर रहेगा मुख्य फोकस, लापरवाही पर होगी सीधी बर्खास्तगीआईएएस अधिकारी सीके अनिल अपनी बेबाक कार्यशैली और नियमों के सख्त पालन के लिए जाने जाते हैं। पदभार संभालते ही उन्होंने विभागीय समीक्षा बैठक में साफ कर दिया कि सरकारी विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाना, मिड-डे मील योजना (MDM) की गुणवत्ता में सुधार करना और शिक्षकों की शत-प्रतिशत समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी जिले में यदि बिना पूर्व सूचना के शिक्षक या कर्मचारी गायब पाए जाते हैं, तो संबंधित जिले के डीईओ की भी जवाबदेही तय की जाएगी। इसके साथ ही, विद्यालयों के ढांचागत विकास और केंद्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के फंड के पारदर्शी इस्तेमाल को लेकर भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। सीके अनिल के इस आक्रामक रुख से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में बिहार का शिक्षा विभाग बड़े सुधारात्मक बदलावों का साक्षी बनने जा रहा है, जहां सुस्ती और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं होगी।
दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बजाय खुद नौकरी छोड़ने का विकल्प दे रही हैं। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियां इसके लिए वित्तीय पैकेज भी दे रही हैं। इस तरीके को वॉलंटरी एग्जिट कहा जाता है। आखिर कंपनियां ऐसा
जम्मू-कश्मीर बैंक ने प्रोबेशनरी ऑफिसर और बैंकिंग एसोसिएट के कुल 1,397 पदों पर भर्ती निकाली है। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 7 नवंबर 2026 से शुरू हो गई है। योग्य उम्मीदवार 26 नवंबर तक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं।
बिहार शिक्षा विभाग में फेरबदल, पटना समेत 6 जिलों के DEO बदले; कई DPO की भी प्रतिनियुक्ति
बिहार शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है, जिसमें कई शिक्षा पदाधिकारियों को दूसरे जिलों में डीईओ और डीपीओ के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया है।
Bilaspur News: शिक्षा, खेल और कला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी नवाजे
आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल बागा में वार्षिक उत्सव सकुरा-शिवालिक कनेक्ट हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
पुरानी पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे शिक्षकों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मप्र हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शुक्रवार को कहा कि जब सरकार शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवाओं को मान्य कर क्रमोन्नति और वरिष्ठता का लाभ दे रही है, तो उन्हें पुरानी पेंशन से वंचित नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने 2018 में संवर्ग संविलियन को नई नियुक्ति मानने की सरकारी दलील खारिज कर दी। इस फैसले का फायदा 1998 से 2005 के बीच पंचायत एवं नगरीय निकाय के माध्यम से नियुक्त 99 हजार से अधिक शिक्षकों को मिल सकता है। शिक्षिका करुणा शर्मा की याचिका पर कोर्ट ने एनपीएस फंड ओपीएस में ट्रांसफर करने का आदेश दिया। 2005 के पहले नियुक्ति; 99 हजार शिक्षकों को दायरे से बाहर किया था मप्र में करीब पौने चार लाख शिक्षक हैं। इनमें 1998 से 2005 के बीच नियुक्त हुए 99 हजार से अधिक अध्यापक/शिक्षक शामिल हैं। मप्र में 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) अनिवार्य की गई थी। लेकिन इन शिक्षकों की मूल नियुक्ति 1998 से 2001 या 2003 के दौरान शिक्षाकर्मी के रूप में हुई थी। इसलिए इस आदेश के तहत उनकी नियुक्ति तिथि 2005 से पहले की मानी गई। इसी आधार पर सरकार ने उन्हें पुरानी पेंशन देने से इनकार किया था।
भारतीय सिनेमा के सबसे मंझे हुए एक्टर माने जाने वाले कमल हासन आज 72 साल के हो चुके हैं। फिल्मों में सबसे ज्यादा एक्सपैरिमेंट करने वाले कमल हासन से कई फिल्ममेकर इस बात पर झगड़ चुके हैं कि उनकी परफेक्शन की ललक से कई बार फिल्म का बजट दोगुना हो जाता है। लेकिन यही परफेक्शन कारण है कि वो इकलौते एक्टर हैं, जिनकी 7 फिल्में ऑस्कर गईं। इन्हें 19 बार बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला, वहीं पद्मश्री, पद्मभूषण जैसे बड़े सम्मान भी उनके हिस्से आए। लेकिन यही कामल हासन कई मौकों पर अपने बेबाक बयानों और निजी रिश्तों के चलते बड़े विवादों में फंस चुके हैं। कभी नाथूराम गोडसे को देश का पहला हिंदू आतंकवादी कहने पर उनकी आलोचना हुई, तो कभी सत्ता, धर्म और व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। हर बार बयान पर कायम रहे और कोर्ट से चेतावनी मिलने के बावजूद उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया। आज उनके बर्थडे के खास मौके पर जानिए कमल हासन की निजी जिंदगी और समाजिक मुद्दों पर हुए बड़े विवादों की कहानी- 2025 में फिल्म 'ठग लाइफ' के ऑडियो लॉन्च इवेंट में कमल हासन ने कहा, 'उइरे उरावे तमीज', यानी तमिल उनके जीवन और रिश्तों का हिस्सा है। इवेंट में कन्नड़ सुपरस्टार शिवराजकुमार को संबोधित करते हुए कमल हासन ने कहा कि शिवराजकुमार भी उनके परिवार का हिस्सा हैं, क्योंकि उनकी भाषा कन्नड़, तमिल से पैदा हुई है। टिप्पणी ने कर्नाटक में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। बीजेपी नेताओं और कन्नड़ समर्थक संगठनों ने सार्वजनिक माफी की मांग की। कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने इसे कन्नड़ भाषा और करोड़ों कन्नड़ भाषियों का अपमान बताया। कुछ संगठनों ने फिल्म बैन की मांग कर 'ठग लाइफ' के पोस्टर फाड़े गए। कमल हासन के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हुईं। कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी उनकी फिल्म ठग लाइफ की रिलीज का विरोध किया। 3 जून 2025 को सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट ने कमल हासन को माफी मांगकर विवाद खत्म करने की सलाह दी। लेकिन कमल हासन ने इनकार कर दिया। कोर्ट ने तब कड़े शब्दों में कमल की निंदा की। 5 जून 2025 को फिल्म रिलीज हुई, लेकिन इसे कर्नाटक में बैन कर दिया गया। कमल सुप्रीम कोर्ट गए, जहां उन्हें राहत दी गई, लेकिन विवाद के बीच कर्नाटक के डिस्ट्रीब्यूटर्स ने फिल्म रिलीज से इनकार कर दिया। गोडसे को आतंकवादी कहने पर विवाद कहा- 'आजाद भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था। उसका नाम नाथूराम गोडसे था।' 2019 में कमल हासन ने मक्कल नीधि मय्यम नाम से पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा। तमिलनाडु की अरवाकुरिची विधानसभा सीट पर उपचुनाव के प्रचार में कमल हासन ने कहा, 'आजाद भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था। उसका नाम नाथूराम गोडसे था।' हिंदू संगठनों से जुड़े कई लोगों ने उनके बयान पर आपत्ति जताई। आरोप लगाया गया कि वह चुनाव के दौरान धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उनके खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई गईं। कमल हासन ने सफाई में कहा कि उन्होंने तमिल में 'थीविरावादी' शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसका अर्थ अतिवादी या उग्रवादी होता है। लेकिन हिंदी और अंग्रेजी की कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसका अनुवाद 'आतंकवादी' किया गया। फिल्म 'विश्वरूपम' विवाद कहा- एमएफ हुसैन जैसे मेरे सामने भी देश छोड़ने की स्थिति पैदा की गई, धर्मनिरपेक्ष देश में बसूंगा 2013 की फिल्म 'विश्वरूपम' को कमल हासन ने खुद लिखा, लीड रोल निभाया, निर्देशित और प्रोड्यूस किया था। फिल्म के कुछ दृश्यों और मुस्लिम किरदारों के चित्रण पर कई मुस्लिम संगठनों का आरोप था कि फिल्म में मुस्लिम समुदाय को आतंकवाद से जोड़कर दिखाया गया है और इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। फिल्म को सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन विवाद के बाद तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका का हवाला देते हुए 23 जनवरी 2013 को इसकी रिलीज पर दो हफ्ते का प्रतिबंध लगा दिया। कमल हासन ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। शुरुआत में उन्हें राहत मिली, लेकिन बाद में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रतिबंध बरकरार रखा। रिलीज लगातार टलती रही और कमल हासन पर आर्थिक दबाव बढ़ता गया। कमल हासन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने फिल्म के लिए घर गिरवी रखा है। अगर फिल्म रिलीज नहीं हुई तो वह दिवालिया हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि मशहूर पेंटर एमएफ हुसैन को जैसे देश छोड़ना पड़ा, वैसी ही स्थिति अब उनके सामने है। उन्होंने कहा कि वो तमिलनाडु छोड़ धर्मनिरपेक्ष राज्य ढूंढेंगे, अगर नहीं मिला तो धर्मनिरपेक्ष दूसरे देश में बसेंगे। विवाद के बीच उन्होंने मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों को फिल्म दिखाने की पहल भी की। आखिरकार राज्य सरकार की मध्यस्थता में कमल हासन और मुस्लिम संगठनों के बीच छह घंटे चली बैठक के बाद समझौता हुआ। कमल हासन फिल्म के 7 विवादित सीन म्यूट किए। तब जाकर 7 फरवरी 2013 को फिल्म सिनेमाघरों में पहुंची। विवादों के बावजूद 'विश्वरूपम' को दर्शकों ने पसंद किया। फिल्म को 2 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिले। एलन मस्क से विवाद कहा 'भारत किसी का गुलाम नहीं, अरबपति किसी देश की नीतियां तय नहीं कर सकता' अक्टूबर 2026 में एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी पर दावा किया था कि कंपनी 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस हासिल कर चुकी है और भारत में भी करीब पांच साल से सरकारी प्रक्रियाएं पूरी करने की कोशिश कर रही है। मस्क ने सोशल मीडिया पर मुकेश अंबानी की ओर इशारा करते हुए पूछा, 'क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?' जवाब में कमल हासन ने जवाब देते हुए कहा कि कोई भी अरबपति किसी देश की नीतियां तय नहीं कर सकता, चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी। साथ ही उन्होंने लिखा, 'भारत एक आजाद लोकतंत्र है, किसी का गुलाम नहीं। भारत का भविष्य भारत की जनता तय करेगी, न कि पश्चिम के स्वार्थी तत्व, उनके दोहरे मापदंड या कोई अरबपति।' तब कंगना रनोट ने भी कमल के बयान का समर्थन किया था। सनातन पर बयान से विवाद “तानाशाही और सनातन की बेड़ियां तोड़ने का हथियार शिक्षा है” अगस्त 2025 में कमल राज्यसभा सांसद बने। चेन्नई में एक्टर सूर्या की संस्था अग्रम फाउंडेशन के इवेंट में उन्होंने शिक्षा की जरूरत पर कहा कि शिक्षा ही वह हथियार है, जिससे तानाशाही और सनातन की बेड़ियों को तोड़ा जा सकता है। बीजेपी की तमिलनाडु की उपाध्यक्ष खुशबू सुंदर ने कहा कि शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताने वाली बात से सहमति हो सकती है, लेकिन उसके साथ सनातन धर्म को जोड़ना अनावश्यक था। दूसरे बीजेपी नेताओं ने भी कमल हासन के बयान की आलोचना की। धर्म पर विवाद “बेटियों के एडमिशन फॉर्म में धर्म-जाति का कॉलम खाली छोड़ा, नई पीढ़ी को जाति की पहचान से ऊपर उठना चाहिए” 2018 में कमल ने सोशल मीडिया पर बताया था कि उन्होंने अपनी दोनों बेटियों के स्कूल एडमिशन फॉर्म में जाति और धर्म का कॉलम खाली छोड़ दिया था। उनका मानना था कि नई पीढ़ी को जाति की पहचान से ऊपर उठना चाहिए। इस बयान के बाद उनकी बेटी श्रुति हासन का एक पुराना इंटरव्यू वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने खुद को अयंगर समुदाय से जुड़ा बताया था। इस पर कमल हासन की जमकर आलोचना हुई। तमिलनाडु सरकार से बाढ़ पर विवाद कहा- बाढ़ राहत के लिए चंदा क्यों मांगा, सरकार के पास पर्याप्त संसाधन होने चाहिए दिसंबर 2015 में चेन्नई और आसपास के इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। हजारों लोग प्रभावित हुए और राज्य सरकार की तैयारियों पर सवाल उठने लगे थे। कमल हासन ने राहत कार्यों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सरकारी व्यवस्था को नाकाम बताते हुए सवाल उठाया कि राहत के लिए लोगों से चंदा क्यों मांगा जा रहा है, जबकि सरकार के पास पर्याप्त संसाधन होने चाहिए। उनकी इस टिप्पणी पर तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता की सरकार के वित्त मंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम भड़क गए। उन्होंने कमल हासन पर निशाना साधते हुए कहा कि अभिनेता को जमीनी हालात की जानकारी नहीं है। उन्होंने कमल को 'कन्फ्यूज्ड' बताते हुए कहा कि वह बिना पूरी जानकारी के बेतुकी बातें कर रहे हैं। कमल हासन ने इसके बाद सफाई दी और माफी मांगी। 7. नायकन डायरेक्टर्स से विवाद कहा- “प्रोड्यूसर पुराने तरीके से सोचते थे और फिल्मों को कला के बजाय कारोबार की तरह देखते थे” कमल हासन को भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में गिना जाता है जो अपनी फिल्मों की कहानी, तकनीक, मेकअप और दूसरे क्रिएटिव पहलुओं में गहरी दिलचस्पी लेते हैं। लेकिन उनकी यही दखलंदाजी कई बार दूसरे फिल्ममेकर्स के साथ मतभेद की वजह भी बनी। मणिरत्नम के निर्देशन में बनी यह फिल्म नायकन 1987 में रिलीज हुई थी और इसे भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म की रिलीज के 25 साल पूरे होने पर कमल हासन ने अखबार 'द हिंदू' में इसकी मेकिंग पर एक लेख लिखा। इसमें उन्होंने फिल्म के प्रोड्यूसर मुक्ता श्रीनिवासन के काम करने के तरीके पर लिखा था कि प्रोड्यूसर पुराने तरीके से सोचते थे और फिल्मों को कला के बजाय कारोबार की तरह देखते थे। यह बात मुक्ता श्रीनिवासन को पसंद नहीं आई। उन्होंने कमल हासन को लीगल नोटिस भेज दिया। उनका आरोप था कि कमल ने लेख में उनके योगदान को कम करके दिखाया और फिल्म की सफलता का श्रेय खुद लेने की कोशिश की। ऐसे ही मतभेद दूसरे निर्देशकों के साथ भी सामने आए। फिल्म 'गुना' के निर्देशन की जिम्मेदारी शुरुआत में मलयालम फिल्ममेकर सिबी मलयिल को दी जानी थी। लेकिन बाद में दोनों के बीच तालमेल नहीं बैठा और सिबी इस प्रोजेक्ट से अलग हो गए। फिल्म 'थेवर मगन' की शूटिंग के दौरान भी निर्देशक भरतन के साथ कमल के मतभेदों की चर्चा रही। इसके अलावा मलयालम फिल्ममेकर बालचंद्र मेनन ने भी एक फिल्म इसलिए अधूरी छोड़ दी, क्योंकि कमल फिल्ममेकिंग में हस्तक्षेप कर रहे थे। निजी जिंदगी से जुड़े ये विवाद भी पढ़िए 16 साल की एक्ट्रेस को बिना सहमति किस किया साल 1986 में रिलीज हुई फिल्म 'पुन्नगई मन्नन' के एक सीन में कमल हासन और एक्ट्रेस रेखा हैरिस के बीच किसिंग सीन था। उस समय रेखा की उम्र करीब 16 साल थी। रेखा हैरिस ने 2020 में एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि उन्हें इस सीन के बारे में पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। उनके मुताबिक, शूटिंग के दौरान अचानक यह सीन फिल्माया गया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पहले से पता होता कि ऐसा सीन शूट किया जाएगा तो वह इसके लिए सहमति नहीं देतीं। रेखा ने यह भी दावा किया कि उन्होंने बाद में निर्देशक के. बालाचंदर से इस बारे में बात की थी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए उन्हें कभी माफी भी नहीं मिली। एक्स गर्लफ्रेंड का आरोप, प्रोडक्शन में काम करवाया, पैसे नहीं दिए कमल हासन की पूर्व पार्टनर और एक्ट्रेस गौतमी ने भी उन पर फीस रोकने के आरोप लगाए। दोनों करीब 13 साल तक साथ रहे और अक्टूबर 2016 में अलग हो गए। फरवरी 2018 में गौतमी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि कमल हासन और उनकी प्रोडक्शन कंपनी राजकमल फिल्म्स इंटरनेशनल पर उनके कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग के काम का भुगतान बकाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 'दशावतारम' और 'विश्वरूपम' जैसी फिल्मों में काम करने के बावजूद अक्टूबर 2016 तक उनकी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा नहीं मिला था। गौतमी ने ये भी आरोप लगाया कि कमल ने उन्हें दूसरे फिल्ममेकर्स के साथ काम करने से रोका, जिससे उन्हें फिल्मों में काम मिलना भी बंद हो गया। एक्ट्रेस श्रीविद्या से किया शादी का वादा, फिर क्लासिकल डांसर से हुआ अफेयर करियर की शुरुआत में कमल हासन को उस दौर की बेहतरीन एक्ट्रेस श्रीविद्या के साथ के.बालाचंदर की फिल्म अपूर्वा रंगागल में कास्ट किया गया। ये रजनीकांत की पहली फिल्म थी, जिसमें उनका साइड रोल था। साथ काम करते हुए कमल हासन और श्रीविद्या एक-दूसरे को पसंद करने लगे। फिल्म हिट रही और इससे दोनों को स्टारडम मिला। जल्द ही दोनों की नजदीकियों की खबरें भी फैलीं। दोनों परिवारों को भी इससे आपत्ति नहीं थी, लेकिन फिर अचानक श्रीविद्या को पता चला कि कमल हासन उनके साथ-साथ एक्ट्रेस और क्लासिकल डांसर वाणी गणपति को भी डेट कर रहे हैं। कमल वाणी के साथ कुछ फिल्मों में काम कर चुके थे। अफेयर की खबर आने पर श्रीविद्या ने परिवार के दबाव पर कमल से दूरी बना ली। श्रीविद्या से अलग होने के बाद कमल ने 24 की उम्र में 1978 में 4 साल बड़ीं वाणी से शादी की। एक्ट्रेस सारिका से लिव-इन में रहे, श्रुति हासन के जन्म के बाद की शादी कमल और वाणी की शादी 10 साल बाद टूट गई। इसी बीच कमल, एक्ट्रेस सारिका के साथ लिव-इन में रहने लगे। इस रिश्ते से उन्हें 1986 में एक बेटी हुईं, श्रुति हासन, जो अब जानी-मानी एक्ट्रेस हैं। श्रुति के जन्म के बाद कमल ने 1988 में सारिका से शादी की। 1991 में सारिका ने दूसरी बेटी अक्षरा को जन्म दिया। 2002 में कमल-सारिका अलग हुए और 2004 में उनका आधिकारिक तौर पर तलाक हुआ। 2005 में कमल की जिंदगी में एक्ट्रेस गौतमी आईं, जिनके साथ वो 13 सालों तक लिव-इन में रहे। 2018 में गौतमी ने कमल पर पेमेंट न देने का आरोप लगाया।
Pilibhit News: बेसिक शिक्षा कल्याण समिति ने बीएसए से की मुलाकात
पीलीभीत। धनतेरस पर बेसिक शिक्षा कल्याण समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रोशनी सिंह से मुलाकात की।
शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान याद किया जाएगा : शिक्षा मंत्री
His contribution to the field of education will be remembered: Education Minister
Panchkula News: शिक्षा विभाग की मामले में जांच पूरी, स्कूल में बताैड़ के अतिरिक्त प्रिंसिपल को चार्ज
शिक्षा विभाग की मामले में जांच पूरी, स्कूल में बताैड़ के अतिरिक्त प्रिंसिपल को चार्ज
नई प्रशासनिक भुगतान प्रणाली की जटिलता के कारण उत्तर प्रदेश के 53 जिलों के शिक्षामित्रों को धनतेरस पर अक्टूबर का मानदेय नहीं मिल सका। पहले पीएफएमएस पोर्टल से भुगतान तेज था।
Aligarh News: दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और देखभाल पर दिया जोर
टप्पल ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) पर आयोजित तीन दिवसीय कोलोकेटेड आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रशिक्षण का शुक्रवार को समापन हो गया।
Mau News: 50 दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा के लिए किया जागरूक
Parents of 50 children with disabilities were sensitized regarding education.
पटना समेत 10 जिलों के डीईओ बदले, 9 डीपीओ का भी ट्रांसफर; बिहार शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल
बिहार शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव हुआ है। 10 जिलों के डीईओ बदल दिए गए हैं, जबकि 9 जिलों में नए डीपीओ की तैनाती हुई है। 19 अधिकारियों के तबादले की सूचना शुक्रवार को जारी की गई।
प्राथमिक शिक्षा से बदलेगा समाज, हर पंचायत में बनेगा आदर्श स्कूल: सीएम माझी
प्राथमिक शिक्षा से बदलेगा समाज, हर पंचायत में बनेगा आदर्श स्कूल: सीएम माझी
भीलवाड़ा में समग्र शिक्षा के जेई का दलाल 50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार, एसीबी का ट्रैप
राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने भीलवाड़ा में समग्र शिक्षा कार्यालय के एक कनिष्ठ अभियंता के कथित दलाल को 50 हजार रुपये...
अररिया में बिहार राज्य शिक्षा सेवक एवं शिक्षा सेवक तालिमी मरकज संघ की जिला इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को सांसद प्रदीप कुमार सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज कर्मियों की मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इसमें 18 साल से सेवा दे रहे कर्मियों को स्थायी करने और राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग की गई। संघ के आवेदन के अनुसार, शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज कर्मियों की नियुक्ति 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर हुई थी। तब से कर्मी स्कूलों और स्कूलों के बाहर शिक्षा व साक्षरता से जुड़े कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा वे विभागीय और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां भी निभाते हैं। संघ का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिला है। आश्वासन के बाद भी नहीं हुई पहल प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अलग-अलग कार्यक्रमों में शिक्षा सेवकों का भविष्य बेहतर बनाने और सरकारी सेवक का दर्जा देने की बात कही थी। संघ के मुताबिक, इन आश्वासनों के बावजूद अब तक मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई है। नियमावली में संशोधन कर राज्यकर्मी बनाने की मांग ज्ञापन में 2018 की नियमावली में संशोधन कर सभी कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग की गई है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग या किसी अन्य विभाग में समायोजित करने और सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग भी रखी गई। एक करोड़ का बीमा और अनुकंपा नौकरी संघ ने विकास मित्रों की तरह एक करोड़ रुपये का ग्रुप बीमा कराने की मांग की। सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर परिजनों को अनुग्रह अनुदान के साथ 36 महीने का अतिरिक्त मानदेय देने और अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। इसके अलावा सरकारी खर्च पर डीएलएड (D.El.Ed.) प्रशिक्षण कराने की मांग की गई। चार महीने से मानदेय नहीं मिलने का मुद्दा प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कर्मियों को पिछले चार महीने से मानदेय नहीं मिला है। इससे शिक्षा सेवकों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने सांसद से मांगों को सरकार तक पहुंचाकर जल्द समाधान कराने की अपील की।
बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स BSF में सब-इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती के लिए योग्य एवं इच्छुक उम्मीदवारों से ऑफलाइन माध्यम में आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं...
शिक्षामित्रों को नहीं मिला अक्टूबर का मानदेय:बहराइच में बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन
बहराइच में अक्टूबर का मानदेय नहीं मिलने पर शिक्षामित्रों ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के बैनर तले उन्होंने लंबित भुगतान की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। शिक्षा मित्रो का कहना है कि वेतन न मिलने से उनकी दीपवाली फीकी हो रही है । संघ के ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षामित्रों को पहले से ही कम मानदेय मिलता है। दूसरे जिलों में तबादले की प्रक्रिया तय अक्टूबर का मानदेय अब तक उनके खातों में नहीं पहुंचा है। इससे उनके परिवारों को आर्थिक परेशानी हो रही है। ज्ञापन में शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी और दूसरे जिलों में तबादले की प्रक्रिया तय समय पर पूरी नहीं होने की बात भी कही गई है। संघ के मुताबिक, इससे शिक्षामित्र असमंजस और परेशानी में हैं। संघ ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से अक्टूबर का लंबित मानदेय जल्द जारी कराने और मूल विद्यालय वापसी की प्रक्रिया समन्वय के साथ पूरी कराने की मांग की। शिक्षामित्रों ने अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार को भी ज्ञापन सौंपकर समस्या का समाधान कराने की मांग की। इस दौरान संघ के प्रांतीय प्रतिनिधि शिव श्याम मिश्रा, जिला महामंत्री राहुल पाण्डेय, जिलाध्यक्ष प्रभारी रिजवान अली, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष अनिल सिंह, जिला उपाध्यक्ष मोहम्मद सलीम, राजेश सिंह और जिला महिला प्रभारी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
job news 2026: जूनियर इंजीनियर के 1156 पदों पर निकली हैं भर्ती, आवेदन प्रक्रिया हुई शुरू
इंटरनेट डेस्क। आपको भी नौकरी करनी हैं तो फिर ये खबर आपके लिए काम की है। जी हां उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) मुख्य परीक्षा के 1,156 पदों पर बंपर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे है। आप भी इसके लिए आवेदन कर सकते है। कुल पद- 1156 पदों का नाम- जूनियर इंजीनियर योग्यता-उम्मीदवार का यूपी प्रारंभिक अर्हता परीक्षा में शामिल होना और पास होना जरूरी है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा आयु सीमा- पदों के अनुसार सैलेरी- पदों के अनुसार आवेदन- ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट- 25 नवंबर 2026 ज्यादा जानकारी के लिए वेबसाइट upsssc.gov.in देख सकते हैं pc- economictimes.in
भारतीय तटरक्षक बल: सीजीईपीटी परीक्षा की शहर सूचना पर्ची जारी, ऐसे चेक करें कहां मिला परीक्षा केंद्र
भारतीय तटरक्षक बल ने सीजीईपीटी 01/2027 और 02/2027 भर्ती परीक्षा की शहर सूचना पर्ची जारी कर दी है। नविक जीडी, डीबी, यांत्रिक और हाइजीनिस्ट पदों के लिए परीक्षा 17 और 18 नवंबर को होगी। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करके अपना परीक्षा
बिहारः हजारों गुरुजी को मिल गया डबल वेतन, 10 जिलों में 3644 मामले उजागर; शिक्षा निदेशक सख्त
एचआरएमएस के माध्यम से वेतन भुगतान की जांच में 10 जिलों में सरकारी राशि की अवैध निकासी के 3644 मामले चिह्नित किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 783 मामले गोपालगंज में मिले हैं।
AI का शिक्षा में उपयोग: छात्रों की सीखने की क्षमता में सुधार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का शिक्षा में उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे छात्रों की सीखने की क्षमता में सुधार हो रहा है। OECD की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि AI ट्यूटर का उपयोग करने वाले छात्रों ने पारंपरिक कक्षाओं की तुलना में बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं। अध्ययन में पाया गया कि AI ट्यूटर ने छात्रों की प्रेरणा और संलग्नता को भी बढ़ाया। इसके अलावा, ट्यूटरों के लिए विकसित AI उपकरणों ने छात्रों की सफलता दर में सुधार किया है। जानें कि AI का सही डिज़ाइन और अनुप्रयोग कैसे महत्वपूर्ण है।
बिहार में मातृभाषा में शिक्षा का नया अध्याय: 2026-27 से शुरू होगा बदलाव
बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा के तरीके में बड़ा बदलाव लाने का निर्णय लिया है। 2026-27 से कक्षा 1 और 2 के छात्रों को उनकी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई का अवसर मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को उनकी घरेलू भाषा में शिक्षा प्रदान करना और सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि इस योजना के तहत छह क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्य सामग्री तैयार की जाएगी। जानें इस योजना के लाभ और विस्तार की संभावनाओं के बारे में।
राजस्थान शिक्षा विभाग में 1.08 लाख से ज्यादा पद खाली, फिर भी पदोन्नति के इंतजार में शिक्षक
राजस्थान शिक्षा विभाग में 1.08 लाख से ज्यादा पद खाली, फिर भी पदोन्नति के इंतजार में शिक्षक
लखनऊ में 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का शिक्षा मंत्री के आवास पर प्रदर्शन, शंख और घंटियां बजाकर मांगी नियुक्ति
भारत की प्राथमिक शिक्षा में संभावित बदलाव: नई रिपोर्ट से खुलासा
भारत की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है, जैसा कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की नई रिपोर्ट में बताया गया है। रिपोर्ट में 5 से 9 वर्ष के बच्चों की संख्या में कमी, प्रजनन दर में गिरावट और स्कूलों में दाखिले के रुझान पर चर्चा की गई है। यह अध्ययन शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूल क्लस्टर मॉडल के महत्व को भी उजागर करता है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या जानकारी दी गई है।
नई शिक्षा नीति के बूते उत्तराखंड की लंबी छलांग की तैयारी, 32% से 92% तक पहुंचा हाईस्कूल पास रेट
उत्तराखंड शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, जिसमें नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) बड़े बदलाव लाने की उम्मीद है।
एम्स रेवाड़ी में एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 15 पदों पर भर्ती के लिए आज यानी 7 नवंबर आवेदन की आखिरी तारीख है। योग्य उम्मीदवारों को आज ही आवेदन की हार्ड कॉपी निर्धारित पते पर पहुंचानी होगी।
बीटेक अंतिम सेमेस्टर में इंटर्नशिप हुई अनिवार्य, नई शिक्षा नीति के तहत फैसला
एमएनएनआईटी प्रयागराज में बीटेक के छात्र-छात्राओं को अब अंतिम सेमेस्टर में इंटर्नशिप करनी होगी। इंटर्नशिप नहीं मिलने की स्थिति में भी छात्र संस्थान में रहकर अपना शैक्षणिक कार्य पूरा कर सकेंगे।
शिक्षा बोर्ड में दीपावली मेला और शहीदों के नाम एक दीप कार्यक्रम
भिवानी| हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड परिसर में बोर्ड अध्यक्ष डॉ. शंकर लाल धूपड़ की अध्यक्षता में दीपावली के अवसर पर दीपावली मेला उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड अध्यक्ष डॉ. शंकर लाल धूपड़ ने की तथा बोर्ड सचिव दीपक बाबूलाल करवा की उपस्थिति रही। इस अवसर पर बोर्ड के अधिकारी, कर्मचारी एवं उनके परिवारजन तथा सर्वपल्ली राधाकृष्णन् स्कूल के अध्यापक, बच्चे व उनके अभिभावक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान दीपावली के पारंपरिक महत्व को रेखांकित करते हुए दीप प्रज्वलित किए गए तथा परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। मेले के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपराओं एवं सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।
संस्कृति की प्रासंगिकता पर युवाओं ने रखे तर्क, नई शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुई बहस
भास्कर संवाददाता| बड़वानी डिजिटल दौर में जहां युवाओं की दिनचर्या तकनीक व आधुनिक जीवनशैली के इर्द-गिर्द घूम रही है, वहीं भारतीय संस्कृति, परंपराओं और प्राचीन ज्ञान की आज के समय में उपयोगिता को लेकर भी नई पीढ़ी के बीच मंथन हो रहा है। इसी सोच को केंद्र में रखकर बड़वानी व पानसेमल के शासकीय कॉलेज में तीन दिनी युवा उत्सव आयोजित हुए। जिनमें विद्यार्थियों ने केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं दीं, बल्कि भाषण और वाद-विवाद के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सार्थकता पर अपने विचार भी रखे। प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य ने बताया कि किसी ने डिजिटल युग में भारतीय संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया तो किसी ने नई शिक्षा पद्धति में पारंपरिक ज्ञान को शामिल करने के पक्ष और विपक्ष में तर्क दिए। वहीं रंगोली और पोस्टर के जरिए विद्यार्थियों ने भारतीय विरासत को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस एसबीएन शासकीय पीजी कॉलेज में युवा उत्सव के तीसरे और अंतिम दिन साहित्यिक गतिविधियों के तहत विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। भाषण प्रतियोगिता का विषय डिजिटल युग में भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का महत्व रखा। प्रतियोगिताओं में डॉ. एमएस मोरे, डॉ. चंदा यादव और डॉ. सपना गोयल ने निर्णायक की भूमिका निभाई। युवा उत्सव की संयोजक डॉ. सुप्रिया चौहान और साहित्यिक विधा के संयोजक प्रो. कदम सिंह डोडवा रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अविनाश वानखेड़े ने किया तथा आभार डॉ. करण सिंह बघेल ने माना। वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय नई शिक्षा पद्धति में भारतीय ज्ञान परंपरा की सार्थकता था। इसमें विद्यार्थियों ने इस बात पर पक्ष और विपक्ष में विचार रखे कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान, दर्शन व परंपराओं को किस तरह स्थान मिलना चाहिए। प्रतियोगिता में अंग्रेजी भाषण में विधांशु यादव प्रथम और स्नेहा कुमावत द्वितीय रहीं। हिंदी भाषण में अर्नी गुप्ता ने पहला और भोलू बामनिया ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। अंग्रेजी वाद-विवाद में विधांशु यादव प्रथम और स्नेहा कुमावत द्वितीय रहीं। हिंदी वाद-विवाद के पक्ष में हंसा धनगर प्रथम और ओमप्रकाश आवास्या द्वितीय रहे, जबकि विपक्ष में सुमित चौहान प्रथम और भोलू बामनिया द्वितीय रहे।
स्कूल शिक्षा विभाग; प्रदेश में 1.08 लाख पद खाली:सेवा अनुभव में 2 साल की छूट के बाद भी डीपीसी नहीं
राजस्थान के स्कूल शिक्षा विभाग में 1 लाख 8 हजार 955 पद रिक्त हैं, लेकिन पात्र शिक्षक पदोन्नति के लिए इंतजार कर रहे हैं। वरिष्ठ अध्यापक से लेकर प्राचार्य तक के विभिन्न संवर्गों में विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की बैठकें नहीं होने से प्रक्रिया अटकी हुई है। खास बात यह है कि राज्य सरकार ने बजट वर्ष 2026-27 में सेवा अनुभव में दो वर्ष तक की छूट देने की घोषणा की थी। इसके लिए 17 अगस्त को अधिसूचना भी जारी हो चुकी है, लेकिन पात्र कार्मिकों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। अब कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को 15 नवंबर तक सभी संवर्गों की नियमित डीपीसी कर पदोन्नति संबंधी कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं। कार्मिक विभाग की शासन सचिव अर्चना सिंह ने 28 अक्टूबर को इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। इससे पदोन्नति की आस लगाए बैठे शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। वरिष्ठ अध्यापक संवर्ग में सबसे ज्यादा 51 हजार पद खाली पड़े शाला दर्पण के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 44,892 और उच्च माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 19,807 है। शिक्षा विभाग में कुल 4 लाख 54 हजार 22 स्वीकृत पदों में से 3 लाख 45 हजार 67 पर कार्मिक कार्यरत हैं, जबकि 1 लाख 8 हजार 955 पद रिक्त हैं। इनमें सबसे ज्यादा 51 हजार 191 पद वरिष्ठ अध्यापक संवर्ग में खाली हैं। इसके अलावा अध्यापक लेवल-1 के 20 हजार 758, लेवल-2 के 15 हजार 896, व्याख्याता के 14 हजार 674 और प्राचार्य के 6 हजार 436 पद रिक्त हैं। इतनी बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद पदोन्नति प्रक्रिया लंबित है। वरिष्ठ अध्यापक के 51 हजार और प्राचार्य के 6436 पद रिक्त मई तक पूरी होनी थी प्रक्रिया, अब 15 नवंबर की डेडलाइन कार्मिक विभाग ने 26 अगस्त 2023 के परिपत्र का हवाला देते हुए वरिष्ठता सूची तैयार करने और पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने की वार्षिक समय-सारणी का पालन करने को कहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 31 मई तक पदोन्नति संबंधी कार्रवाई पूरी होनी थी, लेकिन कई संवर्गों में डीपीसी नहीं होने से प्रक्रिया लंबित है। अब विभागों को 15 नवंबर तक सभी संवर्गों की नियमित डीपीसी आयोजित कर पदोन्नति संबंधी कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता, प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), उपनिदेशक और संयुक्त निदेशक संवर्गों में पदोन्नति का इंतजार है। कुछ मामलों में न्यायालयीन प्रकरण और कॉमन सीनियॉरिटी से जुड़ी जटिलताएं प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, जिन संवर्गों में कोई बाधा नहीं है, उनकी डीपीसी समय-सीमा में पूरी की जानी चाहिए। 15 नवंबर तक आदेश जारी करना बड़ी चुनौती दो साल की अनुभव छूट की अधिसूचना और कार्मिक विभाग के नए निर्देशों के बाद पदोन्नति का इंतजार कर रहे कार्मिकों की उम्मीदें बढ़ी हैं। अब संबंधित विभागों को वरिष्ठता सूची, रिक्तियों और पात्रता संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। 15 नवंबर तक डीपीसी के साथ पदोन्नति संबंधी कार्रवाई पूरी करना सरकार के लिए चुनौती होगी। देखना होगा कि लंबे समय से इंतजार कर रहे पात्र शिक्षकों को इस बार राहत मिलती है या पदोन्नति की प्रक्रिया फिर आगे खिसकती है। 5 नवंबर तक सभी संवर्गों की डीपीसी पूरी करने के निर्देश के बाद अब विभाग को वरिष्ठता सूची, पात्रता-रिक्तियों से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान करना होगा। अलग-अलग संवर्गों में पात्र कार्मिकों की संख्या व उपलब्ध पदों का आकलन भी जरूरी है। पदोन्नति में देरी से कार्मिकों का मनोबल प्रभावित: प्रदेशाध्यक्ष जब सरकार सेवा अनुभव में दो वर्ष की छूट देने की अधिसूचना जारी कर चुकी है और शिक्षा विभाग में 1 लाख 8 हजार 955 पद रिक्त हैं, तो पात्र शिक्षकों को पदोन्नति के लिए अनावश्यक इंतजार करवाना उचित नहीं है। 15 नवंबर की समय-सीमा का सख्ती से पालन करवाकर सभी पात्र संवर्गों की डीपीसी पूरी की जाए। -मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, (रेसटा)
मेवात... स्कूली शिक्षा की सच्चाई: मां की हसरत, बेटी की फरमाइश, और अब पूरे देश की ख्वाहिश
मां हसरत खुद कभी कुछ न बन सकीं। चार साल तक हर दिन डेढ़ किमी पैदल चलकर बेटियों को स्कूल छोड़ती रहीं, ताकि गांव अंगुली न उठाए।
Lakhimpur Kheri News: शिक्षा में धौरहरा का प्रदर्शन चमका, डेढ़ करोड़ का मिला इनाम
शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन पर धौरहरा ब्लॉक को शासन ने डेढ़ करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। वर्ष 2025-26 की शिक्षा डेल्टा रैंकिंग में लखीमपुर खीरी और बलिया संयुक्त रूप से प्रदेश में प्रथम रहे।
Faridabad News: स्कूलों में बच्चों के व्यवहार पर नजर रखेगा शिक्षा विभाग
The Education Department will monitor children's behavior in schools.
47 volunteers trained to bring out-of-school children into the educational mainstream
खेलों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना समय की जरूरत : प्रो. दीप्ति धर्माणी
यह बात चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी ने संत शिरोमणि श्री सैन भगत राजकीय महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।
Bijnor News: स्कूल की जर्जर छत के नीचे शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थी
Students receiving an education beneath the dilapidated roof of a school
Shahjahanpur News: दीपावली से पहले 2918 शिक्षामित्रों व 659 अनुदेशकों का मानदेय जारी
शाहजहांपुर। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयाें में कार्यरत 2918 शिक्षामित्रों और 659 अनुदेशकों के लिए राहत भरी खबर है। त्योहार के मौके पर विभाग ने उनका मानदेय जारी कर दिया है।
Shahjahanpur News: दीपावली के बाद 482 शिक्षामित्रों को मिलेगी मूल विद्यालय में तैनाती
शाहजहांपुर। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों के समायोजन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।
छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों को मिलने वाली फीस की राशि बढ़ सकती है। इस मांग पर विचार करने के लिए राज्य सरकार ने 7 अधिकारियों की कमेटी बनाई है। यह कमेटी निजी स्कूलों में RTE के तहत पढ़ने वाले बच्चों पर होने वाले खर्च का आकलन करेगी। इसके बाद फीस की कितनी राशि दी जानी चाहिए, इस पर सरकार को अपनी राय देगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है। दरअसल, निजी स्कूल लंबे समय से सरकार से मांग कर रहे हैं कि RTE के तहत बच्चों को पढ़ाने के बदले मिलने वाली राशि बढ़ाई जाए। इसी मांग पर विचार करने के लिए यह कमेटी बनाई गई है। रायपुर के संयुक्त संचालक होंगे अध्यक्ष सरकार की ओर से बनाई गई कमेटी में रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव के शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं। रायपुर के संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। कमेटी में ये 7 अधिकारी शामिल हैं- निजी स्कूलों ने किया था असहयोग आंदोलन कमेटी का गठन होने के पर छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री का अभार व्यक्त किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि शिक्षा RTE कानून के तहत सरकारी स्कूलों में होने वाले खर्च का आकलन करने और फीस की राशि के पुनर्निर्धारण के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी सरकारी स्कूलों में शिक्षा पर होने वाले खर्च का आकलन करेगी। इसके आधार पर शिक्षा के अधिकार कानून के तहत दी जाने वाली नई राशि तय की जाएगी। राज्य सरकार इस राशि की जानकारी केंद्र सरकार को देगी। निर्धारित राशि का 70 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देगी। उन्होंने कहा कि फीस के पुनर्निर्धारण और फीस कमेटी के गठन की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 1 मार्च से 17 मई तक असहयोग आंदोलन किया था। अब कमेटी का गठन होने के साथ एसोसिएशन की मांग पूरी हुई है।
भीलवाड़ा में समग्र शिक्षा विभाग का कनिष्ठ अभियंता रिश्वत प्रकरण, 50 हजार लेते दलाल अरेस्ट
8.82 लाख रुपए के रनिंग बिल को पास कराने के बदले मांगी गई थी रिश्वत भीलवाड़ा। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सरकारी निर्माण कार्यों के भुगतान के बदले रिश्वत मांगने के मामले में कार्रवाई करते हुए भीलवाड़ा में समग्र शिक्षा कार्यालय के एक कनिष्ठ अभियंता के कथित दलाल को 50 हजार रुपए की […] The post भीलवाड़ा में समग्र शिक्षा विभाग का कनिष्ठ अभियंता रिश्वत प्रकरण, 50 हजार लेते दलाल अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार ने स्कूलों में रील्स और वीडियो बनाने वाले शिक्षकों को कड़ी चेतावनी दी है.
खगड़िया में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने को लेकर गुरुवार को समाहरणालय सभागार में समीक्षा बैठक हुई। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जिले में संचालित शैक्षणिक योजनाओं, विद्यालयों की स्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। डिजिटल लर्निंग और फिल्मों-कहानियों से पढ़ेंगे बच्चे बैठक में डीएम विक्रम विरकर ने शिक्षा मंत्री को जिले की विशेष पहल ‘पढ़तै खगड़िया’ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करना और उनके शैक्षणिक स्तर में सुधार लाना है। इसके तहत डिजिटल लर्निंग, पढ़ाई मित्र और अन्य नवाचारी माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बच्चों को फिल्म और कहानियों के जरिए रोचक अंदाज में पढ़ाने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे सहजता से नई चीजें सीख सकें। डीएम ने बताया कि विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों की शिक्षण क्षमता बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए ‘डिजिटल टीचर्स’ के माध्यम से शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और गुणवत्ता में सुधार का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ बच्चों तक पहुंचाकर उनकी शैक्षणिक प्रगति सुनिश्चित की जा रही है। गरीब परिवारों के मेधावी बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार बैठक में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की योजना पर भी चर्चा हुई। डीएम ने बताया कि ऐसे मेधावी बच्चों की पहचान की जा रही है, जिनमें आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने की क्षमता है। चयनित विद्यार्थियों की पढ़ाई का पूरा खर्च बिहार सरकार की ओर से वहन किए जाने की व्यवस्था है। इससे गरीब, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी बेहतर संस्थानों में पढ़ने का अवसर मिल सकेगा। बाढ़ से क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों की होगी मरम्मत समीक्षा के दौरान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि खगड़िया में शिक्षा व्यवस्था बेहतर है और इसे आने वाले दिनों में और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने डीएम विक्रम विरकर के नेतृत्व में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ विद्यालयों में जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुए विद्यालय भवनों की जरूरत के अनुसार मरम्मत और पुनर्स्थापन कराने का निर्देश दिया, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। साथ ही विभागीय अधिकारियों को शिक्षा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने, विद्यालयों में पढ़ाई का बेहतर माहौल बनाने और शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार सुधार लाने को कहा। बैठक में डीएम विक्रम विरकर सहित शिक्षा विभाग के संबंधित पदाधिकारी और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ में 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव किया और पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को धार में अवैध शराब माफियारों के हाथों शहीद हुए खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को श्रद्धांजलि अर्पित की। मीडिया से बात करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि दिलीप पुरी का असमय निधन अत्यंत दुखद ...
NCERT की नई किताबों में आर्थिक शिक्षा का समावेश: छात्रों को सिखाएंगे पैसे का प्रबंधन
NCERT ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की नई किताब में अर्थशास्त्र से जुड़े दो नए अध्याय जोड़े हैं, जो छात्रों को पैसे का प्रबंधन, निवेश, टैक्स और उद्यमिता के बारे में सिखाएंगे। इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की आर्थिक चुनौतियों के लिए तैयार करना है। नई किताबों में पर्सनल फाइनेंस और उद्यमिता पर आधारित अध्याय शामिल हैं, जो छात्रों को आर्थिक रूप से जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
हरियाणा में जारी त्योहारी सीजन के मद्देनजर स्वास्थ्य और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग निरंतर मिलावटखोरों पर नकेल कसने का दावा कर रहे हैें। इसी बीच सामने आया है कि सैंपल भरने, इनकी चैकिंग और फिर मिलावटखोरों के खिलाफ जरुरी कार्रवाई सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में फूड सेफ्टी ऑफिसर्स (एफएसओ) की सेंकशंड पोस्ट ही लंबे समय से खाली हैं जिसको लेकर सवाल तो खड़े हो ही रहे हैं, साथ में विभाग की कार्यशैली भी प्रभावित होती है। कई विभागों के डेप्युटेटिड अधिकारियों से चलाया जा रहा काम एफएसओ की पोस्ट पर एनिमल हस्बेंडरी विभाग से वेटरनरी सर्जन, कृषि विभाग से एडीओ और शिक्षा विभाग से टीचर्स डेप्युटेशन पर आए अधिकारियों से काम चलाया जा रहा है। उपरोक्त विभागों के अधिकारी एफएसओ द्वारा किए जाने वाले जॉब संबंधी क्राइटिरिया को पूरा करते हैं तो ऐसे में वो डेप्युटेशन पर यहां हैं। एफएसओ को फूड टेक्नोलॉजी, डेयरी टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, कृषि विज्ञान वेटरनरी साइंस, माइक्रोबायोलॉजी, केमिस्ट्री या संबंधित विषय में डिग्री/पोस्ट-ग्रेजुएशन होना जरुरी है। इसी कारण उपरोक्त विभागों से जो अधिकारी डेप्युटेशन पर एफएडए में सेवाएं दे रहे हैें, वो जरुरी योग्यता पैमाना पूरा करते हैं। ज्वाइंट कमिश्नर ने माना दिक्कत पेश आती है फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर पृथ्वी सिंह ने कहा कि विभाग में स्वीकृत में 57 एफएसओ के पद हैं जिनमें से 27 पर दूसरे विभागों के डेप्युटेड एफएसओ हैं। इसके अलावा एफओ के स्वीकृत 22 पदों में से केवल 5 तैनात हैं, वो भी यहां डेप्युटेशन पर हैं। विभाग में डेप्युटेशन पर अधिकारियों को तैयार करने में समय, ट्रैनिंग और पैसा लगता है। आगे उन्होंने कहा कि कई तरह की दिक्कत पेश आती है। जब डेप्युटेशन पर आए एफएसओ पूरी तरह तैयार हो जाते हैं तो फिर नियमानुसार पांच साल बाद उनको वापिस उनके विभाग में जाना पड़ता है। इसके चलते विभागीय काम भी प्रभावित होता है। भर्ती प्रक्रिया जारी है और जल्दी ही सेंकशंड पोस्ट भर दी जाएंगी। कई बार भर्ती नियम बदले जाने के चलते भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई। एफएसओ के 57 और डीओ के सभी 22 स्वीकृत पद खाली, दूसरे विभागों के भरोसे विभाग विभाग की आधाकारिक जानकारी अनुसार यहां एफएसओ की कुल स्वीकृत पोस्ट की संख्या 57 है जो खाली हैं। इनमें से फिलहाल 27 पदों पर दूसरे विभागों से डेप्युटेशन पर आए या लाए गए एफएसओ से काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा डेसिगनेटिड ऑफिसर्स (डीओ) की बात करें तो स्वीकृत 22 सभी पदों में से 5 अधिकारी तैनात हैं और वो भी डेप्टयुटेशन पर आए दूसरे विभागों के अधिकारी हैं। लंबे समय से जारी है भर्ती प्रक्रिया, जल्द पूरी होने की उम्मीद एफएसओ की भर्ती हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन (एचपीएससी) की ओर से कंडक्ट की जाती है। एचपीएससी द्वारा फूड सेफ्टी ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किए जान के बाद प्रक्रिया जारी है। इसको लेकर विभाग द्वारा उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द पूरी होगी लेकिन बता दें कि फिलहाल तक सालों बीत जाने के बाद पद खाली हैं और डेप्युटेशन से काम चलाया जा रहा है।
समग्र शिक्षा के कनिष्ठ अभियंता का दलाल 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार
अजमेर रेंज के डीआईजी नारायण टोगस के सुपरविजन में एसीबी चौकी भीलवाड़ा प्रथम के उप अधीक्षक पुलिस पारसमल के नेतृत्व में ट्रैप कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान श्रेणीक चौधरी को परिवादी से 50 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। एसीबी टीम ने मौके से रिश्वत राशि बरामद की, जिसमें 10 हजार रुपये असली भारतीय मुद्रा और 40 हजार रुपये डमी करेंसी शामिल है।
UGC के नए नियमों की समीक्षा करेगी सरकार, सुप्रीम कोर्ट को बताया- बनाएंगे स्पेशल कमेटी
यूजीसी के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा कि इन पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाने जा रही है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को दूर करना चाहती है. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नए नियमों के तहत किसी भी वर्ग के छात्र को ऐसा महसूस न हो कि उसे बाहर रखा जा रहा है या उसके साथ भेदभाव हो रहा है.
श्रीनगर के निजी स्कूल बकाया फीस के कारण छात्रों को कक्षाओं में बैठने, परीक्षा परिणाम जारी करने और स्कूल वाहन सुविधा देने से मना कर रहे हैं। इससे छात्र और अभिभावक परेशान हैं, जबकि प्रशासन शिक्षा को प्राथमिकता देने के अपने दावों पर चुप्पी साधे हुए है।
बिहार विधानसभा सचिवालय में 12वीं पास युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का मौका, 6 दिसंबर तक करें आवेदन
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। बिहार विधान सभा सचिवालय की ओर से कनीय सचिवालय सहायक के पदों पर भर्ती के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी...
प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर गंगापुर सिटी के दो सगे भाइयों ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिससे पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ गया है...
हरियाणा सरकार ने दिवाली से पहले प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 5 HCS अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां की हैं। सरकार ने 5 नवंबर को इसके आदेश जारी किए। HCS अधिकारी धीरज चहल को हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद में ज्वाइंट प्रोजेक्ट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। वहीं, संजय बिश्नोई को रेवेन्यू एंड डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट में डिप्टी सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा 3 अधिकारियों को उनके वर्तमान कार्यभार के साथ फतेहाबाद, हिसार और सिरसा में डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर-कम-सेक्रेटरी की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी धीरज चहल: हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद में ज्वाइंट प्रोजेक्ट डायरेक्टर नियुक्त। संजय बिश्नोई: रेवेन्यू एंड डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट में डिप्टी सेक्रेटरी नियुक्त। यह पद खाली था। गौरव गुप्ता: वर्तमान कार्यभार के अतिरिक्त फतेहाबाद में डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर-कम-सेक्रेटरी की जिम्मेदारी। रोहित कुमार: वर्तमान दायित्व के अलावा हिसार में डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर-कम-सेक्रेटरी नियुक्त। अजय सिंह: वर्तमान कार्यभार के अतिरिक्त सिरसा में डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर-कम-सेक्रेटरी की जिम्मेदारी।
job news 2026: एनआईसीएल में निकली हैं अप्रेंटिस के कुल 200 पदों पर वैकेंसी, कर सकते हैं आवेदन
इंटरनेट डेस्क। आपको भी नौकरी करनी हैं तो फिर ये खबर आपके लिए काम की है। जी हां बीमा क्षेत्र में सरकारी नौकरी की शुरुआत करने का मन बना रहे ग्रेजुएट युवाओं के लिए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एक शानदार अवसर लेकर आई है। एनआईसीएल ने अप्रेंटिस के कुल 200 पदों पर बंपर वैकेंसी निकाली है। पदों का नाम- अप्रेंटिस कुल पद- 200 कब करें अप्लाई- अप्रेंटिस के इन सभी पदों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 18 नवंबर तक तय की गई है योग्यता- किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में पूर्णकालिक ग्रेजुएशन की डिग्री या कोई समकक्ष योग्यता आयु सीमा- न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष सैलेरी-15,000 रुपए प्रति माह स्टाइपेंड आवेदन-ऑनलाइन ज्यादा जानकारी के लिए आप वेबसाइदट देख सकते हैं pc- desikaanoon.in
आंगनवाड़ी केंद्र सिर्फ राशन बांटने तक सीमित नहीं, मां और बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य से लेकर शुरुआती शिक्षा तक निभाते हैं अहम भूमिका
रेलवे में ग्रुप डी के करीब 30 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी शुरू हो गई है। रेलवे भर्ती बोर्ड नवंबर 2026 के अंतिम सप्ताह से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इस भर्ती में ट्रैक मेंटेनर, पॉइंट्समैन और तकनीकी विभाग के पद शामिल हो सकते हैं।
भोपाल समाचार का असर: माध्यमिक शिक्षक विशेष शिक्षा दस्तावेज सत्यापन सूची जारी
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बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह की होने वाली दुल्हनिया कौन होंगी, यह राज अब सामने आ गया है। अलीगढ़ के गोंडा ब्लॉक के तारापुर गांव से जुड़ीं मेघना चौधरी के साथ संदीप सिंह 14 नवंबर को सगाई करने जा रहे हैं।
रेलवे भर्ती बोर्ड ने मिनिस्ट्रियल और आइसोलेटेड श्रेणी के 195 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन शुरू कर दिए हैं। उम्मीदवार आज यानी 5 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। भर्ती में जूनियर ट्रांसलेटर, लैब असिस्टेंट, स्टाफ एवं वेलफेयर इंस्पेक्टर
2300 पदों पर सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थी पिछले दस महीने से तूता धरना स्थल नवा रायपुर में आमरण अनशन कर रहे हैं।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शारीरिक शिक्षा शिक्षकों (पीईटी) की अब राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान होगी। केंद्र सरकार ने देशभर के शारीरिक शिक्षा शिक्षकों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए फिजिकल एजुकेशन (पीई) पोर्टल लॉन्च किया है। इसके माध्यम से राजस्थान सहित देश के सभी राज्यों के शारीरिक शिक्षा शिक्षकों का पंजीकरण कर उनकी जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल से शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार होगा, जिससे उनकी पहचान, कार्यक्षेत्र और उपलब्ध जानकारी को व्यवस्थित रूप से संकलित किया जा सकेगा। यह पहल केंद्र सरकार की खेलो भारत नीति एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत राष्ट्रीय खेल भंडार प्रणाली (नेशनल स्पोर्ट्स रिपॉजिटरी सिस्टम-एनएसआरएस) के अंतर्गत की गई है। इसके तहत समर्पित पीई पोर्टल विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य देश में खेल और शारीरिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही इस क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों का राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करना है। माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर के निदेशक ललित कुमार ने 22 अक्टूबर 26 को प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (मुख्यालय), माध्यमिक शिक्षा को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि प्रत्येक जिले में कार्यरत शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को पोर्टल पर पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी संबंधित शिक्षक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना पंजीकरण करवाएं। शारीरिक शिक्षा जगत को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान शारीरिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. भेरू सिंह राठौड़ ने बताया कि विद्यालयी शिक्षा में खेलों को अभिन्न हिस्सा बनाने और विद्यार्थियों की खेल प्रतिभाओं को निखारने में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर उनका पंजीकरण और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होना शारीरिक शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण पहल है। इससे शिक्षकों को एक राष्ट्रीय डिजिटल पहचान मिलेगी और इस क्षेत्र को व्यवस्थित एवं मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए विद्यालय स्तर पर शारीरिक शिक्षा को मजबूत करना जरूरी है। राष्ट्रीय स्तर पर तैयार होने वाला यह रिकॉर्ड भविष्य में इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है। एक प्लेटफॉर्म पर होगी शारीरिक शिक्षा की जानकारी अब तक अलग-अलग जिलों और राज्यों में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों से जुड़ी जानकारी विभागीय स्तर पर उपलब्ध रहती है। राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से शिक्षकों की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकेगी। इससे शारीरिक शिक्षा से जुड़े मानव संसाधन का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी। भविष्य में खेल एवं शारीरिक शिक्षा से संबंधित योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों के नियोजन में भी यह डेटाबेस उपयोगी साबित हो सकता है।
Udham Singh Nagar News: एक साल बाद शिक्षा विभाग को मिले चार अधिकारी
एक साल बाद शिक्षा विभाग को मिले चार अधिकारी
Aligarh News: गोंडा की बेटी मेघना बनेंगी शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की दुल्हनिया
अभी तक जिस रिश्ते को परिवार ने निजी रखा था, अब उससे जुड़ी तस्वीर साफ हो गई है।
Bilaspur News: शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों में अव्वल रहने वाले विद्यार्थी किए सम्मानित
राजकीय उच्च विद्यालय स्वाणा में बुधवार को वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ आयोजित किया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में शामिल करने की मांग अस्वीकार कर दी है। कोर्ट ने कहा कि नियमित पदों पर नियुक्त सहायक अध्यापक और शिक्षामित्रों की सेवा की स्थिति अलग-अलग है। इसलिए विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किए जाने को भेदभाव नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने शिक्षामित्रों को टीईटी पास करने के लिए पर्याप्त अवसर देने के उद्देश्य से राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को 31 अगस्त 2028 तक कम से कम छह नियमित टीईटी परीक्षाएं कराने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद की विशेष अपील पर यह आदेश दिया। क्या है पूरा मामला जानिये , याचिका में दो सितंबर 2026 के शासनादेश और तीन सितंबर को जारी विज्ञापन को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत विशेष टीईटी परीक्षा में केवल कार्यरत शिक्षकों और संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को शामिल करने की व्यवस्था की गई थी। अपीलकर्ताओं का कहना था कि वे 20 वर्षों से अधिक समय से शिक्षामित्र के रूप में काम कर रहे हैं। विशेष शिक्षकों को संविदा पर होने के बावजूद परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया है, जबकि शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि सभी पात्र अभ्यर्थियों को टीईटी पास करने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। आयोग ने अपनी बात रखी आयोग ने बताया गया कि तीन नवंबर से शुरू विशेष टीईटी में करीब 86 हजार नियमित सहायक अध्यापकों और विशेष शिक्षकों को अवसर दिया गया है। शिक्षामित्रों की संख्या करीब डेढ़ लाख है। वे नियमित पदों पर नियुक्त नहीं हैं, बल्कि मानदेय पर कार्यरत हैं। विशेष शिक्षकों को अलग श्रेणी में रखने का आधार दिव्यांग बच्चों और विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को शिक्षा देना है। बताया गया कि अगली नियमित टीईटी परीक्षा 26 और 27 फरवरी 2027 को कराई जाएगी। इसके बाद जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी में भी परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। आयोग ने वर्ष 2028 में भी परीक्षा कराने का भरोसा दिया। खंडपीठ ने पूछे सवाल खंडपीठ ने कहा कि शिक्षामित्रों को वर्ष 2026, 2027 और 2028 में टीईटी पास करने के लिए प्रत्येक वर्ष दो अवसर दिए जाने चाहिए। आयोग के आश्वासन के बावजूद अवसरों की संख्या पूरी करने के लिए वर्ष 2028 में 31 अगस्त से पहले एक और नियमित टीईटी परीक्षा कराई जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित तारीख के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कोई अतिरिक्त अवसर नहीं मिलेगा। इन्हीं निर्देशों के साथ विशेष अपील निस्तारित कर दी गई।
शिक्षामित्रों को अवसर देने के लिए 2028 तक कराएं 6 टीईटी, हाईकोर्ट का यूपी सरकार को आदेश
हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में शामिल करने की मांग नामंजूर कर दी है। हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया है कि शिक्षामित्रों को अवसर देने के लिए 2028 तक 6 टीईटी कराएं।
बंगाल के शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: दफ्तरों में प्रमुख स्थान पर लगेगी नेताजी की तस्वीर
पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने सभी सरकारी कार्यालयों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर प्रमुखता से लगाने का निर्देश दिया है।
भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा और विज्ञान को दिशा देने वाला आधार भी है। आर्यभट्ट से लेकर चरक संहिता तक भारतीय ज्ञान की परंपरा ने विश्व को नई राह दिखाई है। यह बात लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने विद्यांत हिंदू पीजी कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही। कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग और उत्तर प्रदेश स्टेट काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन के सहयोग में बुधवार को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा पर सामाजिक विमर्श एवं समकालीन शिक्षा’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि ग्रहों की गति के अध्ययन से लेकर खगोल विज्ञान तक भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्राचीन भारतीय ज्ञान आज भी वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक है और विज्ञान के क्षेत्र में नए विचारों को प्रेरित कर रहा है। दुनिया में हो रहा भारतीय ग्रंथों का अनुवाद विशिष्ट अतिथि राज्य सूचना आयुक्त डॉ . दिलीप अग्निहोत्री ने कहा कि भारतीय ग्रंथों का विभिन्न देशों में अनुवाद हो रहा है। इससे भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक विस्तार हो रहा है। मुख्य वक्ता प्रो. आरके सिन्हा ने बीज वक्तव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा के सामाजिक पहलुओं और समकालीन शिक्षा में इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा की। कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. धर्म कौर ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन प्रो. बृजेन्द्र पाण्डेय और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. भूपेंद्र सचान ने किया। संगोष्ठी में संयोजक प्रो. ध्रुव त्रिपाठी, समन्वयक प्रो. अंबरीश त्रिपाठी, सहसंयोजक डॉ. भूपेंद्र सचान और डॉ. प्रीती सिंह सहित प्रो. अमित वर्धन, प्रो. श्रवण कुमार, प्रो. नरेंद्र सिंह, प्रो. आलोक भारद्वाज, प्रो. राजीव शुक्ल और प्रो. बृजेश श्रीवास्तव शामिल रहे।
बिजनौर के नजीबाबाद में बुधवार शाम 6 बजे अंबेडकर स्मृति द्वार और फव्वारे का उद्घाटन किया गया। यह निर्माण नगर पालिका परिषद नजीबाबाद ने कोटद्वार रोड पर नवीन कृषि मंडी समिति के पास कराया है। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद और नगर पालिका परिषद नजीबाबाद के अध्यक्ष इंजीनियर मुअज्ज़म ने सभासदों की मौजूदगी में उद्घाटन किया। कार्यक्रम में नागरिक और पालिका कर्मचारी भी मौजूद रहे। चंद्रशेखर आजाद ने इस काम के लिए अध्यक्ष इंजीनियर मुअज्ज़म और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अंबेडकर स्मृति द्वार समाज को समानता, शिक्षा और संविधान के मूल्यों की प्रेरणा देगा। कार्यक्रम में सांसद ने सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाए और समान शिक्षा नीति लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बनने पर सरकारी नौकरी करने वाले लोगों, सांसदों और मंत्रियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि समान शिक्षा का अधिकार लागू किया जाएगा, ताकि अमीर-गरीब का भेद खत्म हो और हर बच्चे को बराबर अवसर मिले।
बिहार के शिक्षकों और कर्मियों को छठ से पहले मिलेगी पेंडिंग सैलरी, शिक्षा मंत्री का निर्देश
बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को छठ पर्व से पहले लंबित वेतन का भुगतान किया जाएगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अधिकारियों को इस संबंध में तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
गोपालगंज के बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र के सदौवा स्थित सरस्वती विद्या निकेतन का शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। मंत्री ने कमियों को दूर कर व्यवस्था बेहतर बनाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान शिक्षा मंत्री ने कक्षाओं, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और खेल परिसर का मुआयना किया। उन्होंने शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन से बातचीत कर पढ़ाई की गुणवत्ता और शैक्षणिक व्यवस्था की जानकारी ली। किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक शिक्षा जरूरी मंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ नैतिक और व्यावहारिक शिक्षा भी मिलनी चाहिए। इससे बच्चों का मानसिक और बौद्धिक विकास मजबूत होगा। साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था सुधारने के निर्देश निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों को विद्यालय में साफ-सफाई, पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था और खेल मैदान को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए। ग्रामीण स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं प्राथमिकता मिथिलेश तिवारी ने कहा कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में भी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर मिल सकेंगे। तय समयसीमा में दूर करें सभी कमियां शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देना सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है। मजबूत शैक्षणिक संस्थान विकसित बिहार और उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास कार्यों में लापरवाही नहीं हो और तय समयसीमा के भीतर सभी कमियों को दूर किया जाए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा नीति तैयार की जाए। यह नीति विद्यार्थियों की मातृभाषा को सम्मान देने के साथ-साथ उनके ज्ञान, कौशल और अभिव्यक्ति की क्षमता को भी मजबूत बनाए। शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम, आत्मविश्वासी और प्रतिस्पर्धी बनाना भी होना चाहिए। मुख्यमंत्री बुधवार को झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा 'झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति' के प्रारूप प्रस्तुतीकरण से संबंधित बैठक में अधिकारियों को निदेशित कर रहे थे। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य की भाषाई विविधता, विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों, कौशल विकास, डिजिटल दक्षता और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक व्यावहारिक एवं दूरदर्शी शिक्षा नीति तैयार की जाए। 'झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति' की आवश्यकताउन्होंने कहा कि झारखंड में भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता अत्यंत व्यापक है। राज्य के बच्चे अपने घर और समुदाय में अपनी मातृभाषा एवं विभिन्न स्थानीय भाषाओं का प्रयोग करते हैं, जबकि विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रायः हिंदी या अंग्रेजी माध्यम से होता है। भाषाओं के इस अंतर के कारण प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति, सहभागिता और सीखने की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से 'झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति' की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की भाषाई विविधता राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान है। इसे शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर ऐसी पद्धति विकसित की जाए, जिससे विद्यार्थी अपनी भाषा में सहजता से सीख सकें और शिक्षा के क्षेत्र में नए एवं अभिनव प्रयोगों का मार्ग प्रशस्त हो सके। विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल मुख्यमंत्री ने राज्य के विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ विद्यार्थियों की रुचि, प्रतिभा और व्यावहारिक कौशल को भी विकसित किया जाना चाहिए। कौशल आधारित शिक्षा के अंतर्गत हॉकी को भी शामिल करने पर विचार किया जाए। झारखंड के बच्चे-बच्चियां हॉकी के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। अंग्रेजी स्पोकन की कक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित हो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी स्पोकन की कक्षाएं संचालित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा, रोजगार, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को देश के अलग-अलग राज्यों में जाना पड़ता है। ऐसे में अंग्रेजी बोलने और संवाद करने का आत्मविश्वास उनके लिए काफी लाभकारी साबित होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने से पहले ही विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी स्पोकन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे भाषाई रूप से दक्ष और आत्मविश्वासी बन सकें। इससे विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे तथा वे संवाद कौशल के क्षेत्र में भी दक्ष बन सकेंगे। विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से भी समृद्ध बनाने की आवश्यकता पर जोर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से भी दक्ष एवं समृद्ध बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी किसी प्रकार की परेशानी न हो। कक्षाओं में शिक्षण व्यवस्था से लेकर विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा नीति तैयार की जाए। मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी को परस्पर सहयोगी भाषा समूह के रूप में देखते हुए नीति को स्वरूप दें मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा नीति संवर्धनात्मक बहुभाषिकता के सिद्धांत पर आधारित हो। इसके अंतर्गत पहली भाषा को हटाए बिना दूसरी और तीसरी भाषा को जोड़ते हुए विद्यार्थियों को शिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी को परस्पर सहयोगी भाषा समूह के रूप में देखते हुए नीति को स्वरूप देने का निर्देश दिया। तीन शैक्षणिक चरणों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है प्रारूप बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अवगत कराया कि झारखंड में भाषा शिक्षा नीति तैयार करने के उद्देश्य से वर्ष 2025 में भाषा शिक्षा नीति निर्माण समिति का गठन किया गया था। समिति ने झारखंड के साथ-साथ अन्य राज्यों की शिक्षा पद्धतियों का अध्ययन कर नीति का प्रारूप तैयार किया है। प्रारूप के प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि इस शिक्षा नीति में तीन प्रमुख शैक्षणिक चरणों को शामिल किया गया है। इनमें पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा से कक्षा 2 तक, कक्षा 3 से कक्षा 5 तक तथा कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के चरण शामिल हैं। इन तीनों चरणों में विद्यार्थियों की मातृभाषा एवं स्थानीय भाषाओं को स्कूली शिक्षा में समाहित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि विद्यार्थी अपनी भाषा में सहजता से पढ़ाई कर सकें और बेहतर शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल कर सकें। अधिकारियों ने बताया कि इस शिक्षा नीति से राज्य की स्थानीय भाषाओं का संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। इससे विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बनेगी तथा शिक्षा के क्षेत्र में स्थानीय भाषाओं के उपयोग को भी नई दिशा मिलेगी। बैठक में शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों एवं प्रारूप के बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में इनकी रही उपस्थिति 'झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति' के प्रारूप प्रस्तुतीकरण से संबंधित बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री उमाशंकर सिंह, झारखंड शिक्षा परियोजना के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन, टीआरआई के निदेशक आलोक शिकारी कच्छप, जैक के सचिव एस.डी. तिग्गा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
ABVP ने कॉलेज का नाम बदलने की मांग की:गोपालगंज में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को मेमोरैंडम सौंपा
गोपालगंज। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने विक्टोरिया मेमोरियल इंटर कॉलेज का नाम बदलकर स्वामी विवेकानंद के नाम पर करने और विद्यालय परिसर में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है। इस संबंध में परिषद के कार्यकर्ताओं ने सूबे के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को ज्ञापन सौंपा। अभाविप के प्रतिनिधिमंडल ने उठाई मांग अभाविप के जिला संयोजक हरिओम राय के नेतृत्व में छात्र पत्रिका प्रांत संयोजक अनीश कुमार, खेलो भारत प्रांत संयोजक प्रिंस सिंह, सोशल मीडिया प्रांत सह-संयोजक रोहित जायसवाल सहित परिषद के कई पूर्व एवं वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने इस मांग को प्रमुखता से उठाया। युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं स्वामी विवेकानंद : अभाविप परिषद कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन, उनके विचार और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। शिक्षण संस्थान का नाम उनके नाम पर रखने और परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित करने से विद्यार्थियों को उनके आदर्शों, राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण और शिक्षा के महत्व से प्रेरणा मिलेगी। अभाविप ने इस मांग को गोपालगंज की शैक्षणिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए शिक्षा मंत्री से सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया। परिषद कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करेगी। सदर विधायक ने भी किया सहयोग, अभाविप ने जताया आभार इस मांग को आगे बढ़ाने में गोपालगंज के सदर विधायक सुभाष सिंह ने भी सहयोग दिया। अभाविप के अनुसार, विधायक ने इस मांग को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के समक्ष मजबूती से रखने की पहल की। इस सहयोग के लिए परिषद ने सदर विधायक के प्रति आभार व्यक्त किया।
हाईकोर्ट के जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत ने बच्चे की कस्टडी को लेकर अहम फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने पिता अपील खारिज करते हुए कहा कि केवल शिक्षक होना और बेहतर शिक्षा देने की क्षमता रखना बच्चे की कस्टडी का आधार नहीं हो सकता। मां के साथ रह रहे बच्चे की देखभाल और पढ़ाई में कोई लापरवाही साबित नहीं होने पर उसे मौजूदा माहौल से हटाना उचित नहीं होगा। मामला बलौदाबाजार जिले का है। बलौदाबाजार निवासी टीचर पति ने पत्नी से विवाद के बाद तलाक ले लिया। फिर उसने ने दूसरी रचा ली। इधर, बचपन से पिता के प्यार से अनजान बेटे की उसने कस्टडी मांगी। फैमिली कोर्ट में सात साल के बेटे ने पिता की तरफ देखा तक नहीं। उसने पिता के साथ जाने की इच्छा भी नहीं जताई तो कोर्ट ने बेटे की कस्टडी देने से इंकार कर दिया। कस्टडी के लिए हाईकोर्ट में की थी अपील इस दंपती की शादी 28 अप्रैल 2015 को हुई थी। उनका एक बेटा है। इस दौरान पति-पत्नी में झगड़ा शुरू हुआ तो पति ने तलाक ले लिया। इसके बाद से बेटा मां के साथ रहने लगा। जिसके बाद पिता ने फैमिली कोर्ट में आवेदन देकर बेटे की कस्टडी मांगी थी। भरण-पोषण देने से बचने के लिए मांगी कस्टडी उन्होंने कहा कि वे शिक्षक हैं और संयुक्त परिवार में रहते हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी बच्चे की देखभाल कर सकते हैं। वे बेटे को अंग्रेजी माध्यम स्कूल में बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं। दूसरी तरफ मां ने बताया कि वह बेटे की पढ़ाई और परवरिश ठीक तरह से कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिता बेटे के जन्म के बाद से उसे देखने या अपने साथ ले जाने नहीं आए और भरण-पोषण की राशि भी नहीं दे रहे हैं। भरण पोषण की राशि देने से बचने के लिए बेटे की कस्टडी मांगी जा रही है। मां ने स्कूल फीस की रसीदें पेश कीं हाईकोर्ट ने पाया कि मां ने कक्षा दूसरी में पढ़ रहे बेटे की पढ़ाई से संबंधित फीस की रसीदें पेश की थीं। इससे स्पष्ट हुआ कि बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़ रहा है। पिता ने अपनी दूसरी शादी की बात भी क्रॉस एग्जामिनेशन में स्वीकार की थी। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि बच्चे की कस्टडी तय करने में माता-पिता के अधिकारों से ज्यादा बच्चे का कल्याण महत्वपूर्ण है। जब बच्चे की शिक्षा और देखभाल ठीक से हो रही है, तो केवल पिता की आर्थिक या शैक्षणिक क्षमता के आधार पर कस्टडी नहीं बदली जा सकती। त्योहार और जन्मदिन पर मिल सकेंगे पिता हाईकोर्ट ने पिता को बेटे से मिलने का अधिकार दिया है। वे त्योहारों, बेटे के जन्मदिन और स्कूल की लंबी छुट्टियों के दौरान मिल सकेंगे। इसके लिए पिता को पहले मां को सूचना देनी होगी और मुलाकात के समय व स्थान पर सहमति लेनी होगी। मुलाकात सार्वजनिक स्थान पर होगी। हाईकोर्ट ने मां से भी कहा है कि वे बच्चे के हित को ध्यान में रखते हुए मुलाकात के अनुरोध पर सकारात्मक रूप से विचार करें। कोई निश्चित दिन या समय तय नहीं किया। माता- पिता का अधिकार नहीं, बच्चे का हित अहम बच्चे की कस्टडी का फैसला करते समय अदालतें माता-पिता के अधिकार से ज्यादा बच्चे के हित को महत्व देती है। गार्डियंस एंड वार्ड्स एक्ट, 1890 की धारा 17 के अनुसार बच्चे की उम्र, शिक्षा, देखभाल और भलाई को ध्यान में रखकर कस्टडी तय की जाती है। वहीं हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 की धारा 13 में भी बच्चे का कल्याण सर्वोपरि माना गया है। सुप्रीम कोर्ट ने नील रतन कुंडू विरुद्ध अभिजीत कुंडू के मामले में कहा था कि बच्चे का हित माता-पिता के कानूनी अधिकारों से ऊपर है। केवल पिता के पास अधिक पैसा होना या बेहतर शिक्षा देने की क्षमता होना कस्टडी पाने का आधार नहीं बन सकता।
नवादा के गोविंदपुर प्रखंड के नक्सल प्रभावित इलाके में महिलाओं को जागरूक और सशक्त बनाने के उद्देश्य से नूतन उदया फाउंडेशन की ओर से विशेष अभियान चलाया गया। भारत सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की संचालिका प्रगति श्रीवास्तव और सचिव संध्या सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया। इस दौरान सामाजिक कुरीतियों, महिला अधिकारों, शिक्षा और बाल विवाह जैसे मुद्दों पर जानकारी दी गई। बाल विवाह के दुष्परिणामों की दी जानकारी संस्था की सचिव संध्या सिंह और टीम के सदस्यों ने महिलाओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में बताया। घरेलू उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, भेदभाव और महिलाओं के सम्मान व अधिकारों से जुड़े विषयों पर भी जागरूक किया गया। टीम ने महिलाओं से अंधविश्वास से दूर रहने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की अपील की। बेटी और बहू को समान सम्मान देने का संदेश अभियान में बेटी और बहू के बीच भेदभाव खत्म करने पर विशेष जोर दिया गया। महिलाओं को बताया गया कि परिवार में बेटी और बहू दोनों को समान सम्मान, अधिकार और अवसर मिलने चाहिए। किसी भी महिला के साथ भेदभाव सामाजिक विकास में बाधा है। बच्चों की शिक्षा पर दिया विशेष जोर टीम ने बच्चों की शिक्षा को बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बताया। अभिभावकों से बेटा और बेटी दोनों की पढ़ाई पर समान ध्यान देने की अपील की गई। कहा गया कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलने से उनके भविष्य के अवसर बेहतर हो सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में अभियान को बताया सराहनीय जदयू की प्रदेश नेतृत्व से जुड़ी अफरोजा खातून ने संस्था की सचिव संध्या सिंह और पूरी टीम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं के बीच पहुंचकर जागरूकता अभियान चलाना सराहनीय पहल है। इससे महिलाओं में अधिकारों के प्रति समझ विकसित होगी और वे सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित होंगी। सामाजिक योगदान के लिए महिलाओं को सम्मान संस्था की टीम ने महिलाओं से खुद जागरूक बनने और परिवार व समाज की अन्य महिलाओं को शिक्षा, सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूक करने की अपील की। कार्यक्रम में अफरोजा खातून ने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सम्मानित किया। प्रगति श्रीवास्तव, संध्या सिंह, डॉ. रितु वर्मा, सरिता गुप्ता, मंजुला गुप्ता, मंजू देवी, निशिता बर्मन और शिक्षिका रेनू कुमारी सहित कई महिलाओं को सम्मान देकर उनके सामाजिक योगदान की सराहना की गई।

