झज्जर का ऐतिहासिक गुरुकुल अपने 110वें वार्षिक समारोह को लेकर विशेष चर्चा में है। समारोह का दूसरा दिन आज आयोजित हो रहा है, जिसमें परंपरा, शिक्षा, संस्कार और वैदिक विचारधारा की झलक एक साथ देखने को मिलेगी। वर्षों पुरानी सनातनी परंपरा को संजोए यह गुरुकुल आज भी नैतिकता, अनुशासन और भारतीय संस्कृति की शिक्षा देने में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। आज होगा समारोह का समापन, सुबह 9 बजे हवन वार्षिक समारोह का समापन आज धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल के बीच होगा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे हवन से होगी, जिसके बाद विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। इस दौरान विद्यार्थियों और विद्वानों का सम्मान भी किया जाएगा। समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, पूर्व छात्रों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों के पहुंचने की संभावना है। 1916 में रखी गई थी वैदिक शिक्षा की मजबूत नींव झज्जर गुरुकुल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि वैदिक परंपरा, नैतिक शिक्षा और सनातनी विचारधारा का जीवंत केंद्र है। वर्ष 1916 में स्थापित इस गुरुकुल की नींव स्वामी श्रद्धानंद जी ने रखी थी, जबकि इसकी स्थापना करवाने में पंडित विशम्बर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 110 वर्षों की यह यात्रा आज भी भारतीय संस्कृति और संस्कारों की मजबूत मिसाल बनी हुई है। 8 एकड़ परिसर और 400 गायों के साथ आत्मनिर्भर परंपरा झज्जर गुरुकुल का परिसर करीब 8 एकड़ में फैला हुआ है। यहां लगभग 400 गायें हैं, जो गुरुकुल की गौसेवा और आत्मनिर्भर व्यवस्था की परंपरा को दर्शाती हैं। शिक्षा के साथ-साथ यहां सेवा, अनुशासन और भारतीय जीवन मूल्यों को व्यवहार में उतारने पर जोर दिया जाता है। स्वामी रामदेव से योगानंद शास्त्री तक, कई नामी हस्तियां रही हैं छात्र झज्जर गुरुकुल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समृद्ध परंपरा और गौरवशाली इतिहास है। यहां से योग गुरु स्वामी रामदेव से लेकर योगानंद शास्त्री, आचार्य बलदेव जैसे कई प्रसिद्ध व्यक्तित्व शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं। यही नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पूर्व राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर वीरेंद्र भी इस गुरुकुल के विद्यार्थी रह चुके हैं। यह बात अपने आप में बताती है कि गुरुकुल ने केवल छात्र नहीं, बल्कि विचारवान और समाज को दिशा देने वाले व्यक्तित्व तैयार किए हैं। 200 के करीब विद्यार्थी दे रहे परीक्षा गुरुकुल में इस समय करीब 200 विद्यार्थी परीक्षा दे रहे हैं। यहां शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, संस्कारों और आत्मानुशासन से भी जुड़ी है। यही वजह है कि यहां का वातावरण आधुनिक शिक्षा से अलग एक विशेष भारतीयता का अनुभव कराता है। संस्कारों के साथ आत्मनिर्भरता की भी शिक्षा झज्जर गुरुकुल में विद्यार्थियों को सनातन परंपरा, वैदिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों के साथ-साथ जीवन जीने की व्यावहारिक शिक्षा भी दी जाती है। यह गुरुकुल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि एक ऐसी पाठशाला है जहां व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष जोर दिया जाता है। यहां विद्यार्थियों को अनुशासन, सेवा, संयम और संस्कृति से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया जाता है। आचार्य विजयपाल संभाल रहे गुरुकुल की बागडोर गुरुकुल की व्यवस्था और संचालन की जिम्मेदारी इस समय आचार्य विजयपाल संभाल रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में गुरुकुल अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का काम कर रहा है। 110 वर्षों की यह यात्रा गुरुकुल की मजबूत वैचारिक नींव और समर्पित नेतृत्व का प्रमाण है। च्यवनप्राश के लिए भी पहचान झज्जर गुरुकुल केवल शिक्षा और संस्कारों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने च्यवनप्राश के लिए भी खास पहचान रखता है। क्षेत्र में गुरुकुल का च्यवनप्राश काफी प्रसिद्ध माना जाता है, जो इसकी पारंपरिक आयुर्वेदिक पहचान को भी मजबूत करता है। बेरी विधायक डॉ. रघुबीर कादियान के पहुंचने की संभावना समारोह में बेरी से विधायक डॉ. रघुबीर कादियान के पहुंचने का कार्यक्रम है। उनके अलावा भी कई सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोग इस समापन समारोह में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में आज का दिन गुरुकुल परिवार के लिए बेहद खास माना जा रहा है।
सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था संकट के भंवर में फंसी हुई है
भास्कर न्यूज|गुमला जिले की स्कूली शिक्षा व्यवस्था इन दिनों बुरे दौर से गुजर रही है। अधिकारियों की भारी कमी ने जिले के शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे को चरमरा दिया है। स्थिति यह है कि जिले के 12 प्रखंडों में शिक्षा व्यवस्था की कमान संभालने के लिए स्वीकृत 13 प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों के पदों में मात्र एक ही बीईईओ कार्यरत हैं। रायडीह प्रखंड में पदस्थापित बीईईओ घनश्याम चौबे वर्तमान में पूरे जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। जिले में एईओ के चार पद स्वीकृत हैं। लेकिन केवल प्रियांशी भगत ही कार्यरत हैं। उन्हें भी कई अतिरिक्त प्रखंडों का प्रभार दिया गया है। जिससे उन पर कार्य का अत्यधिक दबाव है। इन दो अधिकारियों के भरोसे ही पूरे जिले के छात्रों व शिक्षकों का भविष्य टिका हुआ है। अधिकारियों के अभाव में प्रखंडों का शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य लगभग ठप है। पूरी व्यवस्था वर्तमान में बीपीओ, बीआरपी, सीआरपी और आउटसोर्सिंग कर्मियों के भरोसे चल रही है। हालांकि ये कर्मी अपने स्तर पर व्यवस्था संभालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इनके पास न तो कोई प्रशासनिक अधिकार हैं और न ही निर्णय लेने की शक्ति। विडंबना यह है कि कई जगहों पर इन कर्मियों को वे कार्य भी करने पड़ रहे हैं, जो संवैधानिक रूप से केवल एक राजपत्रित अधिकारी ही कर सकता है। एक बीईईओ के जिम्मे विद्यालय मानदेय का भुगतान, पुस्तक व पोशाक वितरण, नामांकन अभियान, मध्याह्न भोजन योजना, छात्रवृत्ति और साक्षरता कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण इन योजनाओं का कार्यन्वयन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। शिक्षकों को अपने वेतन, सेवा पुस्तिका के संधारण और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अधिकारियों के हस्ताक्षर कराने के िलए दर-दर भटकना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मुख्य काम स्कूलों का नियमित निरीक्षण करना है। प्रभावी निरीक्षण न होने पर स्कूलों में शिक्षकों की समयबद्धता और उपस्थिति कम होने लगती है।अधिकारियों की कमी के कारण स्कूलों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच नहीं हो पाती। एक अधिकारी पर जब कई ब्लॉकों या क्षेत्रों का अतिरिक्त प्रभार होता है, तो कागजी कार्रवाई धीमी हो जाती है। शिक्षकों के वेतन, एरियर और सेवानिवृत्त लाभों के निपटान में महीनों की देरी होती है, जिससे शिक्षकों का मनोबल गिरता है। सरकार द्वारा चलाई जा रही छात्रवृत्ति, पोशाक वितरण और साइकिल वितरण जैसी योजनाओं का लाभ छात्रों तक समय पर नहीं पहुंच पाता। निरीक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। जमीनी स्तर पर स्कूलों में पढ़ाई की क्या गुणवत्ता है। इसकी निगरानी करने वाला कोई नहीं है। जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड कार्यालयों तक शिक्षा व्यवस्था केवल ऑनलाइन रिपोर्टिंग तक सिमट कर रह गई है। कागजों पर सब कुछ दुरुस्त दिखाया जा रहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि बिना प्रशासनिक नेतृत्व के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था संकट के भंवर में फंसी है। जिला स्तर पर डीइओ कविता खलखो और डीएसई नूर आलम खां पदस्थापित हैं। लेकिन प्रखंड स्तर पर अधिकारियों की कमी के कारण कार्य प्रभावित हो रहे है। डीएसई नूर आलम खां ने स्वयं इसपर चिंता जताई है। कहा है कि कई बार रिव्यू मीटिंग में जिला स्तर पर कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं होने पर स्पष्ट किया गया है कि बीईईओ व एईओ की कमी है। किंतु अब तक विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई है। यदि स्वीकृत बल के विरूद्ध मैन पावर उपलब्ध हो, तो निश्चित कार्य प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा।
यूपी बोर्ड के कापियों के मूल्यांकन कार्य में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। वाराणसी में संडे को चारों मूल्यांकन केंद्रों पर महज 444 परीक्षक ही मूल्यांकन कार्य के लिए पहुंचे थे, जबकि 2430 परीक्षक केंद्रों पर पहुंचे ही नहीं थे। संडे को ही सहायक समीक्षा अधिकारी पद के लिए परीक्षा आयोजित हुई थी। यही कारण था कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह की ओर से स्पष्ट निर्देश दिया गया था जिन मूल्यांकन केंद्रों पर परीक्षा केंद्र बने हैं वहां दोपहर परीक्षा खत्म होने पर यानी एक बजे के बाद से मूल्यांकन कार्य शुरू होगा। शहर के भारतीय शिक्षा मंदिर इंटर कॉलेज में तो स्थिति यह रही है कि यहां एक भी परीक्षक कापियां जांचने के लिए नहीं पहुंचे थे। यहां पर हाईस्कूल विषय की कापियां जांची जा रही है लेकिन संडे को यहां कोई पहुंचा नहीं है। 24118 कापियाें का हो सका मूल्यांकन कार्य संडे को कुल 24118 कापियों का मूल्यांकन किया गया। इसमें हाईस्कूल की 3216 कापियां और इंटरमीडिएट की 20902 कापियां थी। पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज में 5727 कापियां, पीएम श्री प्रभु नारायण इंटर कालेज 15175 कापियां व जेपी मेहता नगर निगम इंटर कॉलेज में 3216 कापियों का मूल्यांकन हुआ। भारतीय शिक्षा मंदिर कोई भी परीक्षक कापियाें के मूल्यांकन के लिए नहीं पहुंचा है। संडे तक हाईस्कूल की 18.59% और इंटरमीडिएट में 29.31% उत्तरपुस्तिकाएं जांची गई हैं। अभी हाईस्कूल की 290524 और इंटरमीडिएट की 172007 कापियों का मूल्यांकन कार्य होना है।
रामपुर में सैनी, मौर्य, शाक्य और कुशवाहा सभा ने होली मिलन एवं सम्राट अशोक जन्मोत्सव समारोह का आयोजन किया। यह कार्यक्रम उत्सव पैलेस, रामलीला ग्राउंड में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के कई गणमान्य व्यक्तियों और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला सहकारी बैंक लिमिटेड रामपुर के चेयरमैन मोहनलाल सैनी थे। उन्होंने अपने संबोधन में सम्राट अशोक के व्यक्तित्व और उनके विशाल साम्राज्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। सैनी ने कहा कि अशोक विश्व के महानतम और शक्तिशाली सम्राटों में से एक थे। उन्होंने युवाओं से महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने और उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। पूर्व समाज कल्याण अधिकारी वीके सैनी ने कलिंग युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस युद्ध की भयावहता के बाद सम्राट अशोक ने हिंसा त्याग दी और धम्म विजय का मार्ग अपनाया। पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह सैनी ने समाज के गौरवशाली इतिहास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस समाज का इतिहास मजबूत होता है, वही आगे बढ़ता है। उन्होंने युवाओं से अपने पूर्वजों के संघर्षों को जानने और उनसे प्रेरणा लेने की अपील की। पूर्व भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी सैनी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से महिला शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि एक शिक्षित महिला ही परिवार और समाज को सशक्त बना सकती है। सभा अध्यक्ष पन्नालाल सैनी ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। समारोह में कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
पतंजलि योगपीठ के संस्थापक बाबा रामदेव रविवार को अल्प प्रवास पर वाराणसी पहुंचे। लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनके प्रशंसकों और समर्थकों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। हवाई अड्डे से वे सीधे सड़क मार्ग द्वारा मऊ जनपद के लिए रवाना हुए। मऊ स्थित लिटिल फ्लावर चिल्ड्रन स्कूल में आयोजित 'योग व शिक्षा संवाद' कार्यक्रम में बाबा रामदेव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए शिक्षा के साथ योग के महत्व पर प्रकाश डाला। मऊ से वाराणसी वापसी के दौरान चौबेपुर थाना क्षेत्र के कैथी टोल प्लाजा पर भी समर्थकों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मार्कंडेय महादेव के पुजारी मुन्ना गिरी, रिंकू गिरी और गौरव गिरी ने वैदिक मंत्रोच्चार किया। डॉ. विजय यादव के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक और छात्र भी स्वागत के लिए उपस्थित रहे। बाबा रामदेव ने लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। शाम करीब 4 बजे बाबा रामदेव वापस वाराणसी हवाई अड्डे पहुंचे। उनके साथ संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा भी मौजूद रहे। हवाई अड्डे के वीआईपी लाउंज में कुछ देर रुककर उन्होंने लोगों से भेंट की और फिर इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट से दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गए।
पीथमपुर में महाराष्ट्र समाज ने हिंदू नव वर्ष गुड़ी पड़वा के अवसर पर एक भव्य स्नेह मिलन समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम में धार के पूर्व विधायक श्रीमंत करण सिंह पवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम में करियर मार्गदर्शक और इंदौर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संजीव गवते ने युवक-युवतियों को भविष्य के प्रति जागरूक किया। उन्होंने उच्च शिक्षा के साथ-साथ युवाओं में स्वरोजगार और व्यवसाय के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए 'मालिक बनने की चाह' पर जोर दिया। समारोह का मुख्य आकर्षण मुंबई से आए प्रसिद्ध हास्य कलाकार सुबोध चितले रहे। मराठी सीरियल्स और 'आर्टिस्ट ऑफ द ईयर' से सम्मानित चितले ने अपने चुटकुलों और हास्य नाटकों के अनुभवों से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया, जिससे पूरा माहौल खुशनुमा हो गया। इंदौर मराठी समाज के उपाध्यक्ष चंद्रकांत पराड़कर ने समाज को संगठित करने की महत्ता पर प्रकाश डाला। वहीं, महाराष्ट्र समाज पीथमपुर के अध्यक्ष यशवंत पैठणकर ने संस्था का परिचय देते हुए सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर नितिन पाटिल, सुजय घोरपड़े, सुनील ठोसरे सहित समाज के बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे उपस्थित थे।
राजस्थान के शैक्षणिक भविष्य को एक नई परिभाषा देने और राज्य की समृद्ध ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से जयपुर में दो दिवसीय 'राजस्थान ज्ञान सभा का आगाज हुआ। यह विशेष समागम राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय,शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास और जेईसीआरसी के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विख्यात शिक्षाविद डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा न केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम है, बल्कि संस्कार, चरित्र और समाज निर्माण की आधारशिला है। जब तक भौतिक विकास के साथ आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का समावेश नहीं होगा, तब तक भारत ‘विश्व गुरु’ बनने की दिशा में आगे नहीं बढ़ सकता। कोठारी ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और जीवन मूल्यों पर आधारित रही है। ‘ज्ञानसभा’ उसी परंपरा को वर्तमान संदर्भ में पुनर्जीवित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो समाज के दुखी, पीड़ित और वंचित वर्ग के प्रति संवेदनशील हों। यही सच्चे अर्थों में ‘विश्व गुरु’ बनने की कसौटी है, न कि केवल आर्थिक या सामरिक शक्ति। संस्कार आधारित शिक्षा पर सरकार का भी जोर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारें संस्कार एवं नैतिकता आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने ‘ज्ञानसभा’ जैसे आयोजनों को शिक्षा जगत के लिए नई दिशा देने वाला बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय बौद्धिक प्रमुख सुनील सुखदेव भाई मेहता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, लेकिन आधुनिकता के प्रभाव में हम उनसे दूर होते गए हैं। उन्होंने औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर भारतीयता को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। जालोर के नवाचार को राष्ट्रीय मंच पर सराहना कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेशचंद्र पोखरियाल ने जालोर के शिक्षाविद संदीप जोशी के नवाचारों-इतिहास संकलन, कन्या पूजन और मल्टीटैलेंट पोस्टर की सराहना की। उन्होंने इसे संस्कारयुक्त और प्रयोगधर्मी शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। अपने संबोधन में संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख सुनील भाई मेहता ने भी जालोर के शिक्षक के नवाचारों का उल्लेख करते हुए सराहना की। देशभर से आए शिक्षाविदों ने भी इन प्रयासों को प्रेरणादायी माना। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत को पुनः विश्वगुरू बनाने का मार्गदर्शक बताते हुर रमेश पोखरियाल निशंक (पूर्व शिक्षा मंत्री, भारत सरकार) ने बताया की हमारा उद्देश्य एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करना है जो वैक्षिक स्तर पर प्रति लेकिन जिसकी जड़े भारतीय मूल्यों और संस्कृति में गहरी जमी हों। उनके अनुसार, मातृभाषा शिक्षा और अनुसंधान पर जोर देना हमारे युवाओं के में सांगीण विकास के लिए अनिवार्य है। ज्ञान का संगम बना आयोजन कार्यक्रम में जयपुर, बांसवाड़ा, सीकर, कोटा सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, केंद्रीय संस्थाओं के निदेशक सहित प्रदेशभर से शिक्षाविद, कॉलेज शिक्षा सचिव ओ.पी. बैरवा और जेईसीआरसी के प्रेजिडेंट विक्टर गंभीर सहित सहित प्रदेशभर से शिक्षाविद् उपस्थित रहे। जिनमें जोधपुर प्रांत से संदीप जोशी, चंद्रशेखर कछवाहा,देवाराम गोदारा, दीपिका शर्मा, भारतीय भाषा अभियान के अश्विन राजपुरोहित, न्यास के शांतिलाल दवे, वचनाराम काबावत, विक्रमसिंह रावलोत, राणीदान सिंह, नटवर नांगल, विष्णु शर्मा सहित अनेक शिक्षाविद मौजूद रहे।
जिला स्तरीय महिला जागृति शिविर में प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने महिलाओं को उनके अधिकारों, क्षमताओं और समाज में महत्व के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास महिलाओं की जागरूकता में बड़ी बाधा है। डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा, अंधविश्वास के कारण कई महिलाएं अपने अधिकार और क्षमताएं समझ नहीं पातीं, जिससे वे अपने भविष्य को संवारने में असमर्थ रहती हैं। कार्यक्रम धरसीवां विकासखंड, ग्राम गोढ़ी मोहदी के सरकारी स्कूल में आयोजित किया गया। डॉ. मिश्र ने कहा कि बालिका शिक्षा महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। एक शिक्षित बालिका न केवल खुद बल्कि अपने पूरे परिवार को शिक्षित करती है। महिलाओं के अधिकार और समाज का समर्थन जरूरी उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी के साथ परिवार और समाज का समर्थन भी जरूरी है। इससे महिलाएं अपने फैसले लेने और अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरित और सक्षम बनती हैं। स्थानीय महिला समूह, संगठन और मीडिया महिलाओं को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा, समाज का समर्थन, संगठनों और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलकर ही महिलाओं की स्थिति में सुधार ला सकता है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। अंधविश्वास महिलाओं की जागरूकता में बाधा डॉ. मिश्र ने कहा कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियां जैसे जादू-टोना, टोनही, डायन कहने जैसी बातें महिलाओं के अधिकारों और जागरूकता में बाधा डालती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई महिला टोनही नहीं होती, बीमारियों का इलाज केवल सही जांच और चिकित्सा से हो सकता है, कथित तंत्र मंत्र या झाड़ फूंक से नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि आज भी कुछ समाजों में महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा जाता है, उन्हें पर्दे में रखा जाता है, बाल विवाह और दहेज जैसी प्रथाएं जारी हैं। यह सब बंद होना चाहिए और महिलाओं को उनके अधिकारों और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। कार्यक्रम में आयुक्त महादेव कावरे, पूर्व आईएएस इंदिरा मिश्र और महिला बाल विकास विभाग की ए. श्रीवास्तव उपस्थित थीं।
झज्जर जिले में स्वामी दयानंद ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार और ज्ञान से उजाला करने को समर्पित कर दिया। उनकी सुधारवादी विचारधारा से ही स्वदेशी और स्वराज का मंत्र मिला। स्वामी जी के इसी मंत्र से प्रेरित होकर देश की आजादी के लिए अनेक देशवासियों ने त्याग और बलिदान दिया। स्वामी जी विचारधारा आज भी हमें नवाचार की ओर अग्रसर करती है। भारत वर्ष की इस समृद्ध परंपरा को गुरुकुल आगे बढ़ा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़ ने गुरुकुल झज्जर के 110 वें वार्षिक समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। सनातनी शिक्षा के नवाचार से भारत हुआ मजबूतधनखड़ ने कहा कि झज्जर गुरुकुल ने इस क्षेत्र में सनातनी परंपरा और नैतिकता की शिक्षा को निरंतर आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य किया है। ओमानंद सरस्वती जी ने स्वामी दयानंद जी की विचारधारा के प्रचार प्रसार में अपना जीवन समर्पित कर दिया। ओमानंद जी ने विपरित परिस्थितियों में भी सनातनी परपंरा को आगे बढ़ाने का काम किया। सनातनी शिक्षा सुधार की ओर अग्रसर करती है धनखड़ ने कहा कि मैकाले शिक्षा नीति दूसरों के पीछे-पीछे चलना सिखाती है। हमारे वेद व सनातनी शिक्षा नवाचार और सुधार की ओर अग्रसर करती है। हमारी सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए विश्वस्तरीय सम्मेलन कराने जैसे निर्णय हमें नई तकनीक और नये ज्ञान के साथ आगे बढ़ने को प्रेरित करते हैं। शक्तिशाली देश अब से लगाए उम्मीद धनखड़ ने कहा कि सनातनी शिक्षा की बदौलत ही दुनिया के शक्तिशाली देश अब भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखने लगे हैं। पश्चिम एशिया युद्ध को रोकने के लिए कई बड़े देश भारत को आगे आने की बात कर रहे हैं। यह आगे बढ़ते भारत की ताकत है संस्कृति, संस्कार और नवाचार हमारी ताकत धनखड़ ने कहा कि भारत के युवा अपनी संस्कृति और संस्कारों को तकनीक के साथ समावेश करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। भाजपा की रीति और नीति में सनातनी संस्कृति के साथ राष्ट्र विकास सर्वोपरि है । आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। वैदिक परंपरा से किया गया स्वागत पीएम मोदी के सशक्त नेतृत्व में हर भारतीय का सपना वर्ष 2047 तक विकसित भारत हो अपना। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने संस्कारों और संस्कृति के साथ नवाचार को अपनाएं। गुरुकुल महाविद्यालय पहुंचने पर आचार्य विजयपाल जी ने भाजपा राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़ का वैदिक परंपरा से स्वागत किया।इस अवसर पर आचार्य विजयपाल , स्वामी प्रद्युम्न ,स्वामी देवव्रत , स्वामी पूर्णानंद डॉ योगानंद शास्त्री,आचार्य विजयानंद, सहित सैकड़ों की संख्या में आचार्य ,शिक्षाविद् और छात्र मौजूद रहे।
पानीपत जिले में उपमंडल इसराना के गांव नौल्था स्थित लक्ष्य इंटरनेशनल स्कूल में ग्रेजुएशन डे का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में इसराना थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर महिपाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। गीता यूनिवर्सिटी के कुलपति एसपी बंसल विशिष्ट अतिथि रहे और उन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर छोटे बच्चों के लिए 'कुला कुब्स क्लास' नामक एक नई पहल शुरू की गई। इसमें बच्चों को शुरुआती सात वर्षों में विभिन्न गतिविधियां और कार्यक्रम सिखाए जाएंगे। स्कूल ने भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की भी जानकारी दी। शिक्षकों के मार्गदर्शन का पालन करने पर जोर मुख्य अतिथि सब इंस्पेक्टर महिपाल ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि शुरुआती सात वर्षों की शिक्षा बच्चे के भविष्य की नींव रखती है। उन्होंने जोर दिया कि 12वीं के बाद कॉलेज में भी बच्चे अपने अभिभावकों और शिक्षकों के मार्गदर्शन का पालन करें। डिग्रियां प्रदान कर सम्मानित किया महिपाल ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि देश के विकास और विभिन्न उद्योगों में भविष्य तलाशने का भी जरिया है। विशिष्ट अतिथि एसपी बंसल ने बच्चों के कार्यक्रम की सराहना की और उन्हें डिग्रियां प्रदान कर सम्मानित किया। दो तरह की किताबें उपलब्ध कराता है संस्थान उन्होंने बताया कि लक्ष्य इंटरनेशनल स्कूल बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दो तरह की किताबें उपलब्ध कराता है: एक अभिभावकों के लिए और एक स्कूल के लिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अभिभावक और स्कूल मिलकर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकें, जिससे उन्हें ट्यूशन की आवश्यकता न पड़े।
नूंह जिले में शिक्षा सहायकों को नियमित करने की मांग जोर पकड़ रही है। भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने इन शिक्षा सहायकों को स्थायी करने की अपील की है, जो कई वर्षों से अस्थायी व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए शिक्षा सहायकों की नियुक्ति की गई थी। हालांकि, हर साल मार्च आते ही इनकी नौकरी पर संकट मंडराने लगता है, जिससे उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। शिक्षा सहायकों को नियमित करने की मांग भारतीय मजदूर संघ से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि इन शिक्षा सहायकों का चयन लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और प्रशिक्षण के बाद हुआ है। वे नियमित शिक्षकों की तरह ही अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक स्थायित्व नहीं मिला है। आंदोलन की चेतावनी संघ ने मांग की है कि शिक्षा सहायकों को पहले हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के तहत लाया जाए और फिर उन्हें नियमित शिक्षक का दर्जा दिया जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस संबंध में जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग इस बीच, नूंह जिले में एक और समस्या सामने आई है। यहां कई चयनित स्थायी शिक्षक अपनी नियुक्ति के बाद भी कार्यभार ग्रहण नहीं करते, जिससे स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली रह जाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भर्ती अभियान चलाने और क्षेत्र के युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग भी उठ रही है।
छत्तीसगढ़ में प्रांतीय अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी मांगों को लेकर रविवार को दुर्ग में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करते नजर आए। बड़ी संख्या में पहुंचे अतिथि शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सरगुजा, कांकेर सहित कई जिलों से शिक्षक बड़ी संख्या में दुर्ग पहुंचे। शिक्षकों का कहना है कि वे कक्षा शिक्षण, आईसीटी प्रशिक्षण, निर्वाचन कार्य, एनएसएस, बोर्ड परीक्षाओं में ड्यूटी और पेपर मूल्यांकन जैसे सभी कार्य नियमित शिक्षकों की तरह कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें न तो स्थायी दर्जा मिल रहा है और न ही समान वेतन। प्रदर्शनकारी बोले- 2015-16 से दे रहे सेवाएं प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने बताया कि वे सत्र 2015-16 से स्कूल शिक्षा विभाग में लगातार सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे व्याख्याता के स्वीकृत पदों पर कार्य कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिला है।प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मंत्री निवास के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। तीन थाना प्रभारियों के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। हालांकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। शिक्षकों ने अपनी मांगों को ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया और जल्द समाधान की उम्मीद जताई। मंत्री ने सुनी समस्याएं शिक्षकों ने बताया कि हाल ही में विधानसभा में अतिथि शिक्षकों को हटाए जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद उनके बीच चिंता बढ़ गई। इस खबर से शिक्षकों में असमंजस और असुरक्षा का माहौल बन गया। इसी मुद्दे को लेकर अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के निवास का घेराव किया। उन्होंने सरकार से इस मामले में स्पष्ट निर्णय लेने और अपनी स्थिति साफ करने की मांग की। प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अतिथि शिक्षकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों की समस्याएं ध्यान से सुनीं और उनकी बातों को समझने का प्रयास किया। हटाने का कोई फैसला नहीं मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि अतिथि शिक्षकों को हटाने की बातें बेबुनियाद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है। मंत्री ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से देख रही है और उचित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। केबिनेट में चर्चा के बाद फैसला शिक्षकों ने बताया कि मंत्री से चर्चा हुई है। शिक्षकों के अनुसार मंत्री ने कहा कि अतिथि शिक्षकों के मानदेय का निर्धारण उनकी पात्रता के अनुसार किया जाएगा और इस पूरे मामले पर कैबिनेट में चर्चा होगी। कैबिनेट की बैठक के बाद अतिथि शिक्षकों के भविष्य को लेकर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जल्द ही इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। अपनी मुख्य मांगों को रखा मंत्री के सामने अतिथि शिक्षकों ने मंत्री के सामने अपनी मुख्य मांगें रखीं, जिनमें स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन, ग्रीष्मकालीन अवधी का मानदेय, समान कार्य के बदले समान वेतन और सरकारी कर्मचारियों की तरह अवकाश की सुविधा शामिल है। शिक्षकों ने बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट ने भी ग्रीष्मकालीन मानदेय और अवकाश देने के संबंध में निर्देश दिए हैं, इसलिए सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए। मंत्री से चर्चा के बाद शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला होगा। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से अस्थायी स्थिति में काम कर रहे हैं और अब स्थायी समाधान चाहते हैं।
राज्यपाल ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की जानकारी ली
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.) सैयद अता हसनैन ने मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से बिहार में शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्रों में चल रहीं योजनाओं व कार्यक्रमों की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने बताया कि शिक्षा विभाग से उच्च शिक्षा को अलग कर उच्च शिक्षा विभाग बनाया गया है। उन्होंने बिहार में उच्च शिक्षा की स्थिति, समर्थ पोर्टल, विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय, उच्च शिक्षा से संबंधित योजनाओं के बारे में बताया। सरकारी स्कूलों, शिक्षकों एवं नामांकित बच्चों की संख्या, विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति एवं अन्य डीबीटी योजनाओं, स्कूली शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल पहल, प्रधानमंत्री पोषण योजना आदि के बारे में राज्यपाल को अवगत कराया। मुख्य सचिव ने उन्हें बाल हृदय योजना, बाल श्रवण योजना, भव्या एप्लीकेशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राज्य स्वास्थ्य समिति, मेडिकल शिक्षा, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आदि के विषय में विस्तार से बताया। स्वास्थ्य विभाग में ‘दीदी की रसोई’ के क्रियान्वयन पर राज्यपाल ने खुशी जाहिर की।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर सेमिनार
अमृतसर | खालसा कॉलेज फॉर वूमेन में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : विस्तार और कौशल विकास के लिए एक रूपरेखा’ विषय पर नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन के सहयोग से एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन खालसा यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर और खालसा कॉलेज गवर्निंग काउंसिल के मानद सचिव रजिंदर मोहन सिंह छीना ने किया। इस दौरान प्रो. डॉ. अनिल मोंगा, यूजीसी, नई दिल्ली से कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन के पूर्व निदेशक प्रो. जीडी शर्मा, प्रो. डॉ. अमनदीप वर्मा तथा खालसा यूनिवर्सिटी की अकादमिक डीन डॉ. सुरिंदर कौर उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मानद सचिव छीना ने फैकल्टी सदस्यों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए पहल करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य स्नातकों के कौशल को बढ़ाना है, जिससे वे अधिक रोजगार योग्य और आत्मनिर्भर बन सकें।
बाल मैत्री: शिक्षा व संस्कारों का संदेश दिया
आंगनवाड़ी केन्द्र- 01 कुमदाबस्ती और प्राथमिक शाला कुमदाबस्ती में बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रख बाल मैत्री कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और शिक्षकों के बीच संवाद को मजबूत करना और शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के साथ मित्रवत माहौल में बातचीत की, जिसमें उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य, स्वच्छता और दैनिक गतिविधियों से जुड़ी बातों पर चर्चा हुई। बच्चों ने भी खुलकर अपनी समस्याएं और अनुभव साझा किए, जिससे कार्यक्रम और अधिक प्रभावी बना। इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मनबसिया सिंह, ममता राजवाड़े और फुलेश्वरी राजवाड़े व प्राथमिक शाला कुमदाबस्ती की शिक्षिका ईरीना कुजूर, सुनीता यादव और शिक्षक पन्नेलाल उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनकी जरूरतों और समस्याओं को समझने का प्रयास किया। कार्यक्रम में बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। शिक्षकों ने कहा कि नियमित रूप से विद्यालय आना, मन लगाकर पढ़ाई करना और अनुशासन का पालन करना सफलता की कुंजी है। इसके साथ ही बच्चों को स्वच्छता बनाए रखने, पौष्टिक आहार लेने और आपसी सहयोग की भावना विकसित करने भी प्रेरित किया। संवाद सत्र के दौरान कई बच्चों ने पढ़ाई में आने वाली कठिनाइयों, खेल सामग्री की कमी और अन्य जरूरतों को साझा किया। इस पर शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में नैतिक शिक्षा, अच्छे व्यवहार और अनुशासन के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। प्रश्न-उत्तर सत्र में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित शिक्षकों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इस प्रकार के बाल मैत्री कार्यक्रम आगे भी आयोजित किए जाएंगे।
17 हजार 338 शिक्षार्थी देंगे परीक्षा महापरीक्षा
भास्कर न्यूज | कवर्धा जिले में आज राष्ट्रव्यापी नवभारत साक्षरता महापरीक्षा का आयोजन किया जाएगा। परीक्षा सुबह 10से शाम 5 बजे तक आयोजित होगी, जिसमें जिले के 17,338 शिक्षार्थी शामिल होंगे। परीक्षा 15 वर्ष से अधिक आयु के उन शिक्षार्थियों के लिए है, जिन्होंने उल्लास साक्षरता केंद्रों में अध्ययन किया है। तीन घंटे की परीक्षा में पढ़ना, लिखना और गणित विषय शामिल होंगे, प्रत्येक विषय 50 अंकों का होगा। सफल अभ्यर्थियों को एनआईओएस और एनआईएलपी से प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए केंद्राध्यक्ष और मूल्यांकनकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही जिला और विकासखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। कलेक्टर द्वारा विकासखंडवार अधिकारियों को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। शत-प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिले में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। जागरूकता अभियान जारी है।
जिला शिक्षा रैंकिंग में उदयपुर 11 स्थान फिसला, 40वें नंबर पर पहुंचा
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा फरवरी 2026 की जारी जिला शिक्षा रैंकिंग में उदयपुर का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। प्रदेश के 41 जिलों की सूची में उदयपुर 40वें पायदान पर खिसक गया है। पिछले महीने जनवरी में उदयपुर 29वें स्थान पर था। फरवरी माह के लिए जिले का कुल स्कोर 18 रहा, जबकि इसी अवधि में करौली 54.00 के स्कोर के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। हालत ऐसी है कि हम नए जिलों के साथ आकर खड़े हो गए हैं। मौजूदा रैंकिंग को विभाग ने अत्यंत चिंताजनक माना है। इस गिरावट पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ) ने जिले के सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और संबंधित प्रभारियों को फटकार लगाई है। जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक चंद्रशेखर जोशी के अनुसार ये स्थिति बेहद बुरी है। प्रारंभिक इसमें शामिल नहीं है। पैरामीटर्स में सभी सीबीइओ शामिल हैं। हम मॉनिटरिंग का हिस्सा हैं। हमारे लक्ष्य हम पूरा करते हैं। ब्लॉकवार स्थिति क्रम ब्लॉक वर्तमान स्कोर 1 खेमली (उदयपुर) 35.00 2 वल्लभनगर (उदयपुर 29.00 3 नयागांव (उदयपुर) 25.00 4 कुराबड़ (उदयपुर) 24.00 5 बड़गांव (उदयपुर) 23.00 6 फलासिया (उदयपुर) 22.00 7 खेरवाड़ा (उदयपुर) 21.00 8 गिर्वा (उदयपुर) 21.00 9 मावली (उदयपुर) 20.00 10 ऋषभदेव (उदयपुर) 20.00 11 झाड़ोल (उदयपुर) 18.00 12 गोगुंदा (उदयपुर) 18.00 13 सायरा (उदयपुर) 16.00 14 भिंडर (उदयपुर) 12.00 15 कोटड़ा (उदयपुर) 8.00 16 देवला (उदयपुर) 3.00 औसत 19.69 उदयपुर जिले का प्रदर्शन... 12 मानकों में सिर्फ 18 नंबर मिले 1. विद्यार्थी उपस्थिति n पात्र संख्या 2,08,482 n मानक पूरा 1,55,553 •स्कोर 0/10 2. सीबीए रिजल्ट n पात्र संख्या 1,99,180 n •मानक पूरा 45,107 •स्कोर 0/7 3. ओआरएफ रिजल्ट • n पात्र संख्या 1,88,532 • n मानक पूरा 1,00,278 •स्कोर 1/7 4. बोर्ड रिजल्ट • n पात्र संख्या 2,916 • n मानक पूरा 75 •स्कोर 0/10 5. टेक्स्ट बुक और वर्कबुक करेक्शन n •पात्र संख्या 752 n मानक पूरा 722 स्कोर 5/5 6. एबीएल लिट यूजेज • n पात्र संख्या 756 • n मानक पूरा 748 स्कोर 1/3 7. होम वर्क n पात्र संख्या 756 n मानक पूरा 376 स्कोर 0/3 8. मिशन स्टार्ट n पात्र संख्या 739 n मानक पूरा 93 स्कोर 0/5 9. विजिट टारगेट n पात्र संख्या 752 n मानक पूरा 295 स्कोर 0/15 10. शिक्षक एप एंगेजमेंट n पात्र संख्या 2,639 n मानक पूरा 1,227 स्कोर 0/15 11. टॉयलेट और वाटर एवलेबिलिटी n पात्र संख्या 756 n मानक पूरा 584 n स्कोर 10/10 नोट : एक नंबर अन्य मानक के मिले हैं। बाकी सभी मानकों में उदयपुर का प्रदर्शन खराब है। -प्रतिभा गुप्ता, सीडीईओ उदयपुर -लोकेश भारती, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक टॉप और बॉटम फाइव जिले n टॉप: करौली- 54, झुन्झुनू- 44, हनुमानगढ़- 42, डूंगरपुर- 41, सीकर- 39 n बॉटम: डीग- 18, खैरथल- 18, बारा- 18, उदयपुर -18, जोधपुर- 17
चित्तौड़गढ़: ईदगाह में हजारों ने अदा की ईद की नमाज, शिक्षा और भाईचारे का दिया संदेश
चित्तौड़गढ़ की गंभीरी नदी तट स्थित ईदगाह में उमड़ा जनसैलाब, मुफ्ती उस्मान अजहरी ने बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने और देश की उन्नति में योगदान देने पर दिया जोर।
हिंडीन सिटी: शिक्षाविद ज्वाला सिंह बेनीवाल का आकस्मिक निधन, शोक की लहर
सौरभ एज्यूकेशन के प्रबंध निदेशक ज्वाला सिंह के निधन पर अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, सोमवार को उनके निवास पर आयोजित होगी तीये की बैठक।
कपूरथला जिले के रहने वाले और राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने राज्यसभा में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को स्कूल से ही किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह प्रथा आम परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रही है और शिक्षा के व्यवसायीकरण को बढ़ावा दे रही है। प्रश्न संख्या 2920 के माध्यम से संत सीचेवाल ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या उसे इस बात की जानकारी है कि निजी स्कूल अभिभावकों को महंगी किताबें और वर्दी स्कूल से ही खरीदने के लिए क्यों बाध्य करते हैं। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में इस संबंध में प्राप्त शिकायतों की संख्या और शिक्षा में बढ़ते व्यावसायिक रुझान को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी जानकारी मांगी। मंत्री ने दिया सांसद के प्रश्न का जवाब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि शिक्षा एक समवर्ती विषय है। इसलिए इस पर कार्रवाई करना राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने 'बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' की धारा 12(1)(सी) का उल्लेख किया। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के हो रहे प्रयास इसके तहत निजी स्कूलों में कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। सरकार ने यह भी बताया कि अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत देश में सभी के लिए समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसी भी दुकान से सामान खरीदने का नहीं बना सकते दबाव केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सीबीएसई ने वर्ष 2018 में एक परिपत्र जारी किया था, जिसमें निजी स्कूलों को किताबों, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म की बिक्री को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूल अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने का दबाव नहीं बना सकते।
पोर्टा केबिन कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग:बस्तर सांसद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से की मुलाकात
बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद महेश कश्यप ने नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर पोर्टा केबिन विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा उठाया। मुलाकात के दौरान सांसद कश्यप ने बस्तर के अत्यंत दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में संचालित पोर्टा केबिन विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों एवं भृत्यों के सुरक्षित पुनर्वास और स्थायी समायोजन के संबंध में एक पत्र सौंपा। सांसद ने मंत्री को बताया कि इन क्षेत्रों में कर्मचारी पिछले करीब 15 वर्षों से विपरीत परिस्थितियों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद, उनके भविष्य को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से मानवीय आधार पर इन कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की। सांसद ने तर्क दिया कि इससे न केवल कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।
बीजापुर जिले में एक ही कार्यालय में दो जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) की पदस्थापना का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। क्षेत्रीय विधायक विक्रम मंडावी ने शुक्रवार को विधानसभा के शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाया और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। विधायक मंडावी ने आरोप लगाया कि जिले में एक ही समय पर दो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यरत हैं, जिससे प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने इसे 'अव्यवस्थित व्यवस्था' बताते हुए कहा कि इसका सीधा असर जिले की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है, जो अब पटरी से उतरती दिख रही है। मंडावी ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र मंडावी ने इस मामले को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि वर्तमान में बीजापुर में एन.एल. धनेलिया जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं, वहीं राजकुमार कठौते सहायक संचालक और प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। बताया गया है कि 10 जुलाई 2025 से दोनों अधिकारी एक ही कार्यालय से कार्य संचालन कर रहे हैं। इससे विभागीय कार्यों में टकराव और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। विधायक ने मंत्री से मांग की है कि स्थिति स्पष्ट करते हुए एक ही अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। इस पूरे मामले ने जिले की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।
केवी सुकमा में इए शिक्षा सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू
सुकमा| केंद्रीय विद्यालय सुकमा में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रभारी प्राचार्य दिनेश कुमार ने बताया कि कक्षा पहली में प्रवेश हेतु अभिभावक 20 मार्च से 2 अप्रैल तक केवल ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कुल 80 सीटों पर चयन लॉटरी के माध्यम से होगा और पहली सूची 9 अप्रैल को जारी की जाएगी। कक्षा पहली में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 31 मार्च 2026 तक न्यूनतम 6 वर्ष होनी चाहिए। वहीं कक्षा 2 से 12वीं में रिक्त सीटों पर 2 से 8 अप्रैल तक ऑफलाइन आवेदन किए जा सकेंगे।
परांजपे सर की स्मृति में दो पुरस्कारों की घोषणा, शिक्षा की अलख जगाने वाले होंगे सम्मानित
श्री सत्यसाईं विद्या विहार में शिक्षक और संस्था के निदेशक स्व. माधव परांजपे की स्मृति में शुक्रवार को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन व शिक्षाविद् शामिल हुए। संस्था चेयरमैन डॉ. रमेश बाहेती ने कहा कि परांजपे सर के जाने का हमें वियोग नहीं मानना चाहिए, क्योंकि उनकी जैसी विलक्षण प्रतिभाएं देवताओं की पंक्ति का हिस्सा बन जाती हैं। परांजपे सर देवताओं की पंक्ति में बैठकर वहां से हमें आशीर्वाद दे रहे हैं। उनका आशीर्वाद हम पर बना हुआ है। ‘श्री माधव परांजपे स्वर्ण पदक’ मिलेगा श्रद्धांजलि सभा में डॉ. बाहेती ने स्व. माधव परांजपे की स्मृति में दो पुरस्कारों की घोषणा की। एक पुरस्कार एक लाख रुपए मूल्य का प्रदेश के उन शिक्षकों को प्रतिवर्ष प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने पिछड़े इलाकों में शिक्षा की अलख जगाई है। इसमें सत्य साईं विद्यालयों के शिक्षकों को छोड़कर अन्य शिक्षकों को चयनित किया जाएगा। वहीं सत्य साईं स्कूल के छात्रों के लिए उन्होंने ‘श्री माधव परांजपे स्वर्ण पदक’ की भी घोषणा की। इस पदक को प्राप्त करने वाले छात्रों के चयन की रूपरेखा स्कूल प्राचार्या अंजू चोपड़ा द्वारा तय की जाएगी।
जबलपुर में शिक्षा विभाग के पनागर विकासखंड में पदस्थ एकाउंटेंट ने शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाकर ना सिर्फ अपने और परिवार की जेब भरी, रिटायर हो चुके कर्मचारियों को कई सालों तक हर माह वेतन भी दिया। खुलासा होने के बाद पनागर थाने में तीन शिक्षा अधिकारियों सहित 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि जल्द ही सभी की गिरफ्तारी होगी। इधर फर्जीवाड़ा से घिरे लोगों को जैसे ही एफआईआर को पता चला, तो सभी अंडरग्राउंड हो गए हैं, जिनकी पुलिस ने तलाश शुरू कर दी है। ऐसे हुआ घोटाला उजागर दरअसल कोष लेखा विभाग भोपाल से जबलपुर कलेक्टर को इनपुट मिला कि स्कूल शिक्षा विभाग के पनागर ब्लाक में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है, जिसमें कि अतिथि शिक्षकों के नाम पर 2018 से वेतन निकाला जा रहा है, जो कि उन लोगों को दिया जा रहा है, जो कि या तो रिटायर हो गए हैं, या फिर कभी नौकरी ही नहीं की हो। यह राशि एकाउंटेंट विजय कुमार भलावी ने लागइन-पासवर्ड से निकाली और फिर अलग-अलग खातों में जमा करवाई। कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा और लेखा विभाग की टीम गठित की और जब विजय कुमार सहित अन्य लोगों के बैंक खाते चेक किए, तो सभी के खातों में लाखों रुपए निकले। शिक्षा विभाग में पदस्थ विजय कुमार के साथ-साथ उनकी पत्नी दो बेटी के खातों में कई लाख रुपए मिले। तीन पूर्व शिक्षा अधिकारी शैलबाला डोंगरे,त्रयंबक गणेश खरे और नरेंद्र तिवारी शामिल के नाम भी इस घोटाले मे सामने आए हैं, इसके अलावा जयंती भलावी, माधुरी भलावी, रागिनी भलावी, रानू भलावी, समीर कोष्ठा, माला कोष्ठा, अंकुश नेमा एवं पूर्व अतिथि शिक्षक सुचित्रा पटेल के बैंक खातों में राशि भेजी गई है, जो कि करीब 1 करोड़ 11 लाख रुपए हैं। मास्टरमाइंड था एकाउंटेंटजांच के दौरान यह भी पता चला कि विजय कुमार भलावी 2016 से पनागर ब्लाक में पदस्थ था। तभी से उसने यह घोटाला हर माह करना शुरू कर दिया था। 2018 से 2026 के बीच तीन शिक्षा अधिकारी पदस्थ रहे, जिनकी लागइन-पासवर्ड से यह राशि निकाली गई और बाद में फिर अलग-अलग 16 खातों में ट्रांसफर की गई। बीईओ कार्यालय पनागर में पदस्थ अकाउंटेंट विजय कुमार भलावी ब्लॉक के शिक्षकों की सूची में फर्जी तरीके से ऐसे नाम जोड़ देता था, जो कि कहीं शिक्षक हैं ही नहीं। इसके बाद उनके नाम की सैलरी जब आती थी, तो उसे निकालकर अपने और पत्नी, दो बेटियों सहित अन्य साथियों के खातों में डाल लेता था। यह पूरा कारनामा वह बेहद शातिर तरीके से किया गया था, जिसकी विभाग में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी को भनक ही नहीं लगी। हाल ही में जब कोषलेखा विभाग भोपाल में राशि का मिलान नहीं हुआ तब मामला सामने आया और शिकायत कलेक्टर तक पहुंची। बड़े अधिकारी भी शक के घेरे में शिक्षा विभाग से लेकर जिला कोषालय भी शक के दायरे में बताया जाता है कि इस मामले में जहां स्कूल शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी शंका जाहिर की जा रही है, वहीं जिला कोषालय के अधिकारी और कर्मचारी भी निशाने पर हैं। इतना बड़ा मामला बिना सहभागिता के संभव नहीं है। शिक्षा विभाग के पास भी शिक्षकों की सूची होती है और उनमें नए नाम शामिल होने की जानकारी अधिकारियों को नहीं मिल पाई यह चौंकाने वाली बात है। वहीं जिला कोषालय ने भी बिना सत्यापन लगातार सैलरी निकाली, इस पर भी संदेह जताया जा रहा है। बैंक खातों पर रोक लगाई बताया जाता है कि घपले की सूचना मिलने के बाद कलेक्टर ने बीईओ कार्यालय के बैंक खातों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही वर्ष 2016 से अभी तक के रिकॉर्ड भी बीईओ कार्यालय से मांगे गए हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी सोनम कटारे ने पनागर थाने में प्रतिवेदन देते हुए बताया कि विकासखंड की पूर्व शिक्षा अधिकारी शैलबाला डोंगरे, त्रयंबक गणेश खरे,नरेंद्र कुमार तिवारी, सहायक ग्रेड विजय कुमार भलावी, शिक्षक गणेश प्रसाद शुक्ला,अनिल कुमार ने 2018 से 2025 के बीच कई फर्जी नाम जोड़े और बकायदा उनके खाते में वेतन का भुगतान भी किया गया। 16 खातों में रुपए हुए ट्रांसफर जांच के दौरान यह भी सामने आया कि एकाउंटेंट विजय कुमार भलावी कई सालों से शिक्षकों की सूची में गड़बड़ी कर रहा था। वह शिक्षकों की सूची में किसी का भी नाम जोड़कर उन्हें शिक्षक बना देता था, और फिर उसके नाम की सैलरी ना सिर्फ अपने खाते बल्कि पत्नी और बेटियों के नाम पर ट्रांसफर करता था। अभी तक 16 खातों की पहचान हो गई है, जिसमें 1 करोड़ से अधिक शासकीय राशि भेजी गई है। विजय कुमार के 4, पत्नी और दो बेटियों के 1-1 खाते के अलावा रिटायर हो चुके शिक्षकों के खाते भी सामने आए हैं। इन पर हुई एफआईआर विकासखंड शिक्षा अधिकारी की शिकायत पर पनागर थाना पुलिस ने मास्टरमाइंड विजय कुमार भलावी सहित शैलबाला डोंगरे,त्रयंबक गणेश खरे, नरेंद्र तिवारी,जयंती भलावी, माधुरी भलावी, रागिनी भलावी, रानू भलावी, समीर कोष्ठा, माला कोष्ठा, अंकुश नेमा, पूर्व अतिथि शिक्षक सुचित्रा पटेल के बैंक खातों में रुपए ट्रांसफर किए गए हैं, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पनागर थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार का कहना है कि विजय कुमार ने बड़ी ही चालाकी से यह फर्जीवाड़ा किया है। विजय कुमार ने ऐसे लोगों के नाम पर भी वेतन निकाला था, जो कि या तो रिटायर हो चुके थे, या फिर कभी नौकरी ही नहीं की थी।
टीईटी अनिवार्य करने के सरकारी आदेश के खिलाफ शिक्षकों ने शुक्रवार को वारासिवनी विधायक विवेक पटेल से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों ने विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के नाम ज्ञापन देकर इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की। विधायक पटेल ने शिक्षकों की मांगों का समर्थन करते हुए शासन को पत्र लिखकर परीक्षा समाप्त करने का आग्रह किया है। 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर आदेश का विरोध ब्लॉक अध्यक्ष रोशनलाल नगपुरे ने बताया कि यह आदेश विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए चिंताजनक है जिनकी नियुक्ति वर्ष 2009 से पहले हुई थी। शिक्षकों का तर्क है कि वे तत्कालीन निर्धारित योग्यता और मापदंडों को पूरा करने के बाद ही शासकीय सेवा में आए थे। दशकों की सेवा के बाद पुनः पात्रता परीक्षा देना उनके अनुभव और वरिष्ठता का अपमान है। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की मांग शिक्षक संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाए। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लेती है और कानूनी राहत प्रदान नहीं करती है, तो उन्हें सामूहिक रूप से 'इच्छा मृत्यु' की अनुमति प्रदान की जाए। इस आदेश से हजारों शिक्षकों में नौकरी की असुरक्षा और मानसिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। विधायक बोले- शिक्षकों को मिले पूरा सम्मान विधायक विवेक पटेल ने शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि जो शिक्षक 20-25 वर्षों से अध्यापन कार्य करा रहे हैं, उनसे दोबारा परीक्षा लेना उनके अनुभव का निरादर है। उन्होंने कहा कि अनुभवी शिक्षकों को मानसिक प्रताड़ना देने के बजाय उन्हें पूरा सम्मान मिलना चाहिए। विधायक ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि वे इस मुद्दे को शासन स्तर पर प्रमुखता से उठाएंगे।
उदाकिशुनगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में कार्यरत दो चिकित्सा पदाधिकारियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु विभाग द्वारा अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया गया है। इस अवसर पर शुक्रवार को संजीवनी फिजियोथेरेपी क्लिनिक परिसर में एक विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जहां उनके योगदान को याद करते हुए भावभीनी विदाई दी गई। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अंकित सौरभ को तीन वर्षों का अध्ययन अवकाश मिला है। वे उड़ीसा के राउरकेला में पीजी की पढ़ाई करेंगे और फैमिली मेडिसिन शाखा में उच्च शिक्षा प्राप्त करेंगे। वहीं, पीएचसी में पदस्थापित डॉ. नवीन कुमार को दो वर्षों के अध्ययन अवकाश की अनुमति मिली है। वे सहरसा स्थित लार्ड बुद्धा मेडिकल कॉलेज में उच्च शिक्षा ग्रहण करेंगे। समारोह में उपस्थित लोगों ने दोनों चिकित्सकों के कार्यकाल की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विश्वास व्यक्त किया कि उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। मुख्य अतिथि डॉ. अंकित सौरभ ने अपने संबोधन में कहा कि यह जुदाई नहीं बल्कि विदाई है। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों से जो प्यार और सम्मान मिला है, वह जीवनभर उनके साथ रहेगा। उन्होंने सभी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस दौरान नवनियुक्त प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रूपेश कुमार का फूल-मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया गया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, सुदृढ़ और बेहतर बनाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार विनोद विनीत ने किया, जबकि अध्यक्षता पूर्व प्रखंड प्रमुख विकास चंद्र यादव ने की। समारोह में रजनीकांत ठाकुर, विकास कुमार, नितीश शर्मा, प्रदीप मंडल, समाजसेवी गौरव कबीर, नीतीश राणा, जदयू नगर अध्यक्ष संतोष मंडल, वार्ड पार्षद अजय मंडल, अनुराग सिंह, समरेंद्र कुमार, गौरव कुमार, अमर आशीष, डॉ. जय कुमार, सीएचओ मु. शकील अख्तर, अवधेश मेहता सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
समाहरणालय सुपौल में शुक्रवार को आयोजित जिला जनता दरबार में जिलाधिकारी सावन कुमार ने आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके त्वरित निष्पादन के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। इस जनता दरबार में कुल 42 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें भूमि विवाद, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आपूर्ति तथा अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़ी शिकायतें शामिल थीं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि जनता दरबार का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राप्त आवेदनों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करते हुए समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करें। जल्दी समाधान का भरोसा दियासाथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। इस दौरान उप विकास आयुक्त सारा अशरफ, अपर समाहर्ता सच्चिदानंद सुमन, विशेष कार्य पदाधिकारी (गोपनीय शाखा) विकास कुमार कर्ण, वरीय उप समाहर्ता मुकेश कुमार सहित कई अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने जिलाधिकारी के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया। जनता दरबार में आए फरियादियों ने अपनी-अपनी समस्याएं सीधे जिलाधिकारी के समक्ष रखीं, जिससे उन्हें त्वरित समाधान की उम्मीद जगी। सीधा संवाद एक प्रभावी माध्यमप्रशासन की इस पहल को लोगों ने सराहा और इसे आम जनता के लिए राहतदायक कदम बताया। जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से आयोजित जनता दरबार कार्यक्रम आम नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने में भी मदद मिल रही है।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से 80 स्टूडेंट्स का जवाहर नवोदय विद्यालय में चयन हुआ है। सत्र 2026-27 में कक्षा छठवीं में प्रवेश के लिए आयोजित चयन परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। जिला शिक्षा विभाग की ओर से जारी सूची के अनुसार, चयनित स्टूडेंट्स में 55 शासकीय विद्यालयों से और 25 अशासकीय विद्यालयों से हैं। शासकीय स्कूलों से अधिक संख्या में छात्रों का चयन जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। विकासखंडवार आंकड़ों के अनुसार, नगरी विकासखंड से सर्वाधिक 27 स्टूडेंट्स चयनित हुए हैं। वहीं कुरूद विकासखंड से 22, मगरलोड से 20 और धमतरी विकासखंड से 11 स्टूडेंट्स ने सफलता प्राप्त की है। जिला शिक्षा विभाग ने चयनित विद्यार्थियों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। जवाहर नवोदय विद्यालय में चयन को ग्रामीण और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
गुजरात: भाजपा अध्यक्ष ने विकास, आदिवासी कल्याण और शिक्षा के क्षेत्र में कांग्रेस को 'शून्य' बताया
गुजरात भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने गुरुवार को दाहोद में बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित किया
आगरा में मिशन शक्ति अभियान के तहत एक मेधावी छात्रा को एक दिन के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक बनाया गया। इस दौरान छात्रा ने बालिका शिक्षा से जुड़े मुद्दों को करीब से समझा और सुधार के सुझाव दिए। मिशन शक्ति अभियान के छठवें चरण में बृहस्पतिवार को श्री गोपीचंद शिवहरे बालिका इंटर कॉलेज की कक्षा 12 की छात्रा हर्षिता अवस्थी को एक दिन के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक की जिम्मेदारी दी गई। श्रमिक पिता की बेटी हर्षिता ने जिम्मेदारी संभालते ही राजकीय इंटर कॉलेज के मूल्यांकन केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों से संवाद कर शिक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। हर्षिता ने खास तौर पर बालिका विद्यालयों में पुलिस सुरक्षा बढ़ाने, निर्धन छात्राओं को आर्थिक सहायता देने, फीस कम करने और अनुशासन सख्त करने की जरूरत बताई। कार्यक्रम के दौरान संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने ‘यश आई नो’ पुस्तक का विमोचन भी किया। इस मौके पर मंडलीय वित्त एवं लेखाधिकारी राजेश कुमार, वीरेंद्र सिंह, प्रधानाचार्य डॉ. शालिनी बंसल और आनंद वीर सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
दिव्यांग बच्चों के लिए हर प्रमंडल में खुलेगा सेंटर, इलाज-शिक्षा फ्री
झारखंड में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता और मल्टीपल डिसेबिलिटी से जूझ रहे बच्चों और युवाओं के लिए सरकार बड़ी पहल करने जा रही है। राज्य के सभी प्रमंडलों में विशेष आवासीय सह डे-केयर पुनर्वास केंद्र खोलने की तैयारी है। इसे अप्रैल से शुरू करने की योजना है। समाज कल्याण विभाग की इस योजना को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली कमेटी ने भी प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इन केंद्रों का संचालन अनुभवी गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से किया जाएगा। राज्य में फिलहाल करीब 1.35 लाख बच्चे विकासात्मक दिव्यांगता से प्रभावित हैं। इनमें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम और बहु-दिव्यांगता के मामले अधिक हैं। नई व्यवस्था के तहत इन बच्चों को नि:शुल्क इलाज, प्रशिक्षण, शिक्षा और पुनर्वास की सुविधा एक ही छत के नीचे मिलेगी। हर प्रमंडल में एक केंद्र स्थापित होगा। इस पर सालाना करीब 4.5 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस योजना का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों और युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। अभी ऐसी समेकित सुविधाओं की कमी के कारण परिजनों को काफी परेशानी होती है, जिसे यह योजना दूर करेगी। भोजन और आवासीय सुविधा के साथ विशेषज्ञों की टीम भी रहेगीयहां भोजन के साथ 24 घंटे देखभाल की व्यवस्था होगी। टीम में प्रधानाचार्य, विशेष शिक्षक, फिजियोथेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, नर्स, आया और सुरक्षा कर्मी शामिल होंगे। 18 साल के बाद भी एडल्ट होम की सुविधाकेंद्रों में 18 वर्ष से अधिक आयु पूरी कर चुके दिव्यांगों के लिए भी एडल्ट होम की व्यवस्था होगी। यहां उनके लिए अलग से विशेष चिकित्सीय देखभाल की जाएगी। माता-पिता को भी मिलेगा प्रशिक्षणविशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती वर्षों में दिव्यांगता की पहचान और हस्तक्षेप से इसके प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है। इस योजना के तहत अर्ली इंटरवेंशन पर जोर दिया जाएगा, जिससे बच्चों को समय रहते उपचार मिल सके और वे समावेशी शिक्षा के लिए तैयार हो सकें। माता-पिता को भी प्राथमिक देखभालकर्ता के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। वह सब कुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है जानिए...किन्हें मिलेगा लाभ:इस योजना के तहत ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, सेरेब्रल पाल्सी, इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी और मल्टीपल डिसेबिलिटी से पीड़ित बच्चों और युवाओं को लाभ मिलेगा। ऐसे बच्चों को विशेष देखभाल, थेरेपी और प्रशिक्षण की जरूरत होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए ये केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
भास्कर संवाददाता| इंदौर कॉलेजों में पीजी में एडमिशन के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा के लिए पूरे प्रदेश में कॉमन व्यवस्था लागू रहेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने अहम फैसला लेते हुए उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी यह परीक्षा नहीं लेगी। पहले डीएवीवी सहित हर यूनिवर्सिटी को अपने स्तर पर यह परीक्षा आयोजित करने का जिम्मा सौंपा गया था। अब इसमें बड़ा बदलाव कर दिया गया है। उज्जैन यूनिवर्सिटी जल्द इसके लिए प्रक्रिया शुरू करेगी। जिन छात्रों को संकाय बदलकर या मेजर-माइनर विषय बदलकर पीजी करना है, उन्हें यह परीक्षा देना होगी। जल्द ही आवेदन की तारीखें घोषित होंगी। परीक्षा अप्रैल में संभव है। दरअसल, (2026-27) से व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। पहली बार कॉलेजों में पात्रता परीक्षा के जरिये प्रवेश होंगे। ऐसे छात्र (थर्ड ईयर पासआउट) जो संकाय बदलकर किसी दूसरे संकाय में पीजी करना चाहते हैं, उन्हें यह यूनिवर्सिटी एलिजिबिलिटी टेस्ट देना होगा। जैसे बीकॉम व बीएससी के छात्र को किसी भी स्पेशलाइजेशन में एमए करना है तो उन्हें यह पात्रता परीक्षा देना होगी। बीए के भी उन छात्रों को पात्रता परीक्षा देना होगी, जो मेजर या माइनर सब्जेक्ट से हटकर किसी अन्य विषय में पीजी करना चाहते हैं। वहीं, दूसरी तरफ जो छात्र संबंधित विषय में सीयूईटी पीजी में क्वालिफाई होंगे, उन्हें भी कॉलेजों में पीजी में प्रवेश मिल जाएगा। डीएवीवी से जुड़े कॉलेजों में एमए में 28 स्पेशलाइजेशन हैं। एमएससी में भी 22 हैं। अब छात्र इन्हें अपनी मर्जी से नहीं चुन सकेंगे। एमए में हिस्ट्री, हिंदी, अंग्रेजी, इकोनॉमिक्स, पॉलिटिकल साइंस, सोशल साइंस, सोशियोलॉजी, जियोग्राफी सहित स्पेशलाइजेशन हैं। वहीं एमएससी के स्पेशलाइजेशन में माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, कम्प्यूटर साइंस, बॉटनी, मैथ्स सहित अन्य स्पेशलाइजेशन हैं। प्रवेश परीक्षा में पास होने के बाद छात्र पात्र माने जाएंगे, लेकिन एडमिशन उन्हें अॉनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के तहत ही मिलेगा। यानी ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया में रजिस्ट्रेशन व चॉइस फिलिंग व मेरिट के आधार पर कॉलेज अलॉट होगा। कॉलेजों में एडमिशन के लिए दस्तावेज सत्यापन से लेकर रजिस्ट्रेशन तक की पूरी प्रक्रिया वैसी ही रहेगी। प्रोफेसर डॉ. सरिता राणा कहती हैं, छात्रों को प्रवेश परीक्षा की तैयारी अभी से करना चाहिए। पूरे प्रदेश के लिए एक जैसी एग्जाम होने से छात्रों की चुनौती बढ़ गई है। ग्रेजुएशन का सिलेबस ही पूछा जाएगा तो आसानी रहेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रवीन्द्र भवन में 'ब्रह्म ध्वज' की स्थापना कर नव संवत्सर 2083 की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने 2 हजार साल पहले जिस लोकतांत्रिक सुशासन और कर्जमुक्त समाज की नींव रखी थी, प्रदेश सरकार उसी मार्ग पर आगे बढ़ रही है। कोटि सूर्य उपासना और 'विक्रमोत्सव-2026' के तहत सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित नाटक का मंचन हुआ। सीएम ने वैदिक घड़ी और शोधपीठ की स्थापना को सांस्कृतिक पुनरुत्थान का हिस्सा बताया। पं. कुंजीलाल दुबे की 130वीं जयंती पर श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री डॉ. यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष स्व. पं. कुंजीलाल दुबे को पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा में हिंदी भाषा को प्रतिष्ठित स्थान दिलाने और संसदीय परंपराओं को समृद्ध करने में उनका योगदान अतुलनीय है। नरसिंहपुर में जन्मे पं. दुबे लगातार तीन बार (1956-1967) विधानसभा अध्यक्ष रहे। शिक्षा और कानून के क्षेत्र में उनकी सेवाओं के लिए उन्हें पद्मभूषण और डी-लिट जैसी उपाधियों से सम्मानित किया गया था। कांग्रेस का आरोप- 39 हजार का कंप्यूटर 1.39 लाख में खरीदा कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिक्षा विभाग के टेंडर में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। नायक के अनुसार, 2023 और 2025 के टेंडरों में 40 करोड़ की राशि बढ़ाकर 90 करोड़ कर दी गई और किसी खास वेंडर को लाभ पहुंचाने के लिए 'भोपाल में ऑफिस' जैसी अजीब शर्तें थोपी गईं। मुकेश नायक ने कहा- रेट लिस्ट का अंतर: कांग्रेस ने दावा किया कि 1800 का यूपीएस 9000 में और 25 हजार का प्रिंटर 1 लाख रुपए में खरीदा गया। इस शर्त के कारण अंतरराष्ट्रीय कंपनियां प्रक्रिया से बाहर हो गईं और बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दाम पर खरीदारी की गई।
IIM इंदौर उद्यम संवाद से मिली लीडरशिप सोच:AI- रोबोटिक्स और शिक्षा में नवाचार की प्रेरणा
जब शिक्षा में नई तकनीक और दूरदर्शी नेतृत्व जुड़ता है, तब एक स्कूल पूरे क्षेत्र के लिए बदलाव का केंद्र बन सकता है। पोल स्टार द स्कूल, डीडवाना के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज सैनी इसी सोच के साथ शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2005 में स्थापित यह स्कूल अपने क्षेत्र का पहला इंग्लिश मीडियम सीबीएसई संस्थान है, जो छात्रों को आधुनिक शिक्षा और बेहतर अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से आगे बढ़ रहा है। IIM इंदौर में आयोजित उद्यम संवाद लीडरशिप प्रोग्राम में भाग लेने के बाद उन्हें शिक्षा प्रबंधन और नेतृत्व के नए आयाम समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम से मिली सीख को वे अपने संस्थान में लागू कर स्कूल की कार्यप्रणाली और शैक्षणिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाना चाहते हैं। उनका मानना है कि आने वाले समय में एआई, रोबोटिक्स और डिजिटल लर्निंग शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेंगे। इसलिए वे इन तकनीकों को अपने स्कूल में लाकर क्षेत्र के बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में काम करना चाहते हैं।
मुझे नंबर जनता देगी। पार्टी मौका देगी तो चुनाव मैदान में उतरूंगा। मैंने आखिरी छोर तक काम किया है। तहसील बनवानी थी, लेकिन सर्वे में गांवों की संख्या कम मिली। इसलिए नहीं हो पाया। यह बात पीलीभीत जिले के बरखेड़ा से भाजपा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने कही। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में विधायक ने सवालों के बेबाकी से जवाब दिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: पिछले 4 साल के अपने कामकाज को आप 10 में से कितने नंबर देंगे?जवाब: नंबर देना जनता का काम है। उन्होंने अपने कार्यकाल में शिक्षा और सड़क निर्माण के क्षेत्र में व्यापक काम कराया है। दर्जनों सड़कों का निर्माण हुआ है और उनकी विधानसभा में मुख्यमंत्री का मॉडल स्कूल भी बन रहा है। सवाल: सबसे बड़ा काम आपने कौन सा कराया?जवाब: स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करते हुए पीलीभीत में मेडिकल कॉलेज दिलवाना मेरी बड़ी उपलब्धि है, जिससे पूरे जिले को फायदा मिलेगा। सवाल: ऐसा कौन सा काम है जिसे आप नहीं करा पाए?जवाब: अधिकांश विकास कार्य पूरे हुए हैं, लेकिन चाहता हूं कि क्षेत्र में एक कृषि डिग्री कॉलेज स्थापित हो, ताकि छात्रों को पढ़ाई के लिए बाहर न जाना पड़े। सवाल: क्या इस बार भी आप टिकट के दावेदार हैं?जवाब: अपने कार्यकाल में बेहतर काम किया है। चुनाव लड़ना या नहीं, यह पार्टी तय करेगी। भारतीय जनता पार्टी एक बड़ा संगठन है और वे एक कार्यकर्ता के रूप में काम करते हैं। पार्टी मौका देगी तो चुनाव मैदान में उतरूंगा। सवाल: आपके विधानसभा क्षेत्र में तहसील नहीं है, इस पर क्या कहेंगे?जवाब: विधानसभा क्षेत्र में तहसील नहीं है। गजरौला में तहसील बनवाने के लिए प्रयास किए थे, लेकिन सर्वे के दौरान ग्राम पंचायतों की संख्या कम होने के कारण तहसील का निर्माण संभव नहीं हो पाया।
बहराइच के रामगांव में नवनिर्मित एवीएम ग्लोबल स्कूल का उद्घाटन किया गया। भारतीय जनता पार्टी की एमएलसी प्रज्ञा त्रिपाठी और 'नारियल मैन' के नाम से प्रसिद्ध धर्मेंद्र राजभर ने संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक गिरजा शंकर शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत किया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए एमएलसी डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज की उन्नति का आधार है और यह नया स्कूल बच्चों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। धर्मेंद्र राजभर ने भी बच्चों को खेल और साहस के प्रति प्रोत्साहित किया। समारोह का मुख्य आकर्षण स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने स्वागत गीत, लोक नृत्य और देशभक्ति कार्यक्रमों से उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यालय के आधुनिक परिवेश और उसके प्रबंधन की सराहना की। अंत में, विद्यालय के प्रबंधक गिरिजा शंकर शुक्ला ने सभी अतिथियों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
यूपी पर कनाडा की नजर: रक्षा, ऊर्जा और शिक्षा में रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम
उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश हब बनाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाते हुए कनाडा ने राज्य के साथ रक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि दिखाई है
बच्चों को शिक्षा की अहमियत समझाई
भास्कर न्यूज | जालंधर स्टेट पब्लिक स्कूल में किंडरगार्टन के छोटे बच्चों के अभिभावकों के लिए एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को स्कूल के वातावरण, पाठ्यक्रम, पढ़ाने के तरीकों और बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़ी गतिविधियों की पूरी जानकारी देना था। कार्यक्रम की शुरुआत छात्रों द्वारा शबद गायन से हुई, जिसके बाद प्रिंसिपल सवीना बहल ने प्रारंभिक शिक्षा की अहमियत और खेल-आधारित व रचनात्मक शिक्षण पद्धति के बारे में बताया। शिक्षकों ने अभिभावकों को बच्चों की दैनिक दिनचर्या, सुरक्षा व्यवस्था और स्कूल के साथ संवाद करने के माध्यमों के बारे में विस्तार से समझाया । साथ ही, उन्हें यह भी बताया गया कि वे घर पर बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में कैसे मदद कर सकते हैं ।
ओबीसी कल्याण का अलग से दफ्तर शिक्षा योजनाओं पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद की बैठक में राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए अलग से संचालनालय गठन, नवीन हॉस्टल भवन निर्माण एवं विकास संबंधित अनेक विषयों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा सरकार पिछड़ा वर्ग समाज के विकास लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग की बड़ी संख्या निवास करती है, जिनमें लगभग 95 जातियां एवं उनके उपसमूह है। सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के शैक्षणिक एवं सामाजिक आर्थिक विकास की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है। शिक्षा पर फोकस बढ़ाते हुए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का भुगतान ऑनलाइन सीधे विद्यार्थियों के खातों में किया जा रहा है। इसके लिए 150 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी, जिससे वे इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। सरकार ने छात्रावास सुविधा बढ़ाने पर भी जोर दिया है। वर्तमान में 55 छात्रावास संचालित हैं, जबकि नए बजट में छह जिलों में नए पोस्ट मैट्रिक छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना के तहत ऐसे छात्रों को भी आर्थिक मदद मिलेगी, जिन्हें छात्रावास में जगह नहीं मिल पाती। बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि गण एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।
सुपौल में प्रशासनिक सख्ती के तहत जिला पदाधिकारी सावन कुमार के एक्शन मोड का असर लगातार देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में शिक्षा विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, लक्ष्मीनियां (प्रखंड-छातापुर) में पदस्थापित विशिष्ट शिक्षक जयशंकर सिंह को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उनके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों और विभागीय जांच के आधार पर की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयशंकर सिंह पर विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने, भौतिक रूप से अनुपस्थित रहने के बावजूद प्रधानाध्यापक की मिलीभगत से उपस्थिति दर्ज कराने तथा शिक्षण कार्य छोड़कर सहरसा में मेडिकल दुकान चलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। यह शिकायत लक्ष्मीनियां निवासी अभिषेक झा द्वारा लिखित रूप में विभाग को दी गई थी। निरीक्षण में शिक्षक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए मामले की जांच के दौरान प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, छातापुर द्वारा 16 मार्च 2026 को किए गए निरीक्षण में शिक्षक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए। जब उनसे दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने स्वयं को सुपौल में होने की बात कही, लेकिन लाइव लोकेशन मांगने पर उनका स्थान सहरसा में पाया गया, जिससे आरोप और भी पुख्ता हो गए। इसके अलावा ई-शिक्षा कोष की समीक्षा में भी यह सामने आया कि संबंधित शिक्षक बीते माह और शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान लगातार अनुपस्थित रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड में ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ दिखाया गया था। इस संबंध में विभाग द्वारा 16 मार्च 2026 को स्पष्टीकरण भी मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय तक कोई जवाब नहीं दिया गया। मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, किशनपुर निर्धारित किया गया इन सभी तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 की धारा 09 के तहत जयशंकर सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, किशनपुर निर्धारित किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों के तहत उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही, अलग से आरोप पत्र जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और अन्य कर्मियों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि लापरवाही और अनियमितता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में 12वीं बोर्ड परीक्षा का हिंदी पेपर एग्जाम से 10 घंटे पहले लीक हो गया। ये बात उन स्टूडेंट्स ने एक्सेप्ट की है, जिन्होंने टेलीग्राम पर एक लिंक के जरिए आया वायरल पेपर कई स्टडी ग्रुप्स पर शेयर किया था। इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। लेकिन इस मामले में फिलहाल कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि, मामले की जांच की जा रही है। लेकिन इस बीच बुधवार ने NSUI के कार्यकर्ताओं ने प्रभारी महामंत्री हेमंत पाल के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का पुतला फूंक दिया। NSUI ने पूरे मामले में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम बनाने की मांग की है। मंत्री ने कहा था- छात्र भ्रम फैला रहे दरअसल, एक मीडिया हाउस को दिए बयान में मंत्री यादव ने यह कह दिया था कि छात्र संगठन पेपर लीक के मामले भ्रम फैला रहा है। इसके बाद NSUI के कार्यकर्ताओं ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और लापरवाही का आरोप लगाते हुए मंत्री यादव का पुतला दहन किया। मंत्री बंगले का घेराव करेगी NSUI NSUI लीडर हेमंत पाल ने कहा कि, हम पूरी जांच में पुलिस का सहयाेग कर रहे हैं। हमारे कार्यकर्ताओं के सामने और भास्कर डिजिटल पर पब्लिश खबर में छात्रों ने खुद स्वीकारा है पेपर लीक हुआ था। बावजूद शिक्षा मंत्री का ये कहना कि भ्रम फैलाया जा रहा है, उनके खराब और लापरवाह रवैये को दर्शाता है। NSUI ने चेतावनी दी है कि अगर पूरे मामले में जल्द एक्शन नहीं लिया गया तो, NSUI शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव करेगी।
किशनगंज में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक गोपाल अग्रवाल ने जिले में शिक्षा संस्थानों की स्थिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की मिलीभगत से दर्जनों विद्यालय बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। विधायक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर कोचिंग संस्थानों को विद्यालय का रूप देकर चलाया जा रहा है, जबकि कुछ विद्यालय के नाम पर कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। इन अनियमितताओं की कोई जांच या निगरानी नहीं हो रही है। ''बिना मान्यता वाले संस्थानों को चलने देना अपराध'' उन्होंने बताया कि नियमों की पूरी तरह अनदेखी कर ऐसे संस्थान संचालित हो रहे हैं, जिससे छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ रहा है। विधायक ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। अग्रवाल ने घोषणा की कि वे जल्द ही इस संबंध में मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे और विधानसभा में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा, शिक्षा बच्चों का भविष्य है। ऐसे में बिना मान्यता वाले संस्थानों को चलने देना अपराध है। विभाग की जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई हो। सफाई घोटाले जैसी विभागीय अनियमितताओं पर सवाल उठाए यह बयान किशनगंज जिले की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों को उजागर करता है। इससे पहले भी विधायक अग्रवाल ने स्कूल सफाई घोटाले जैसी विभागीय अनियमितताओं पर सवाल उठाए थे। स्थानीय लोग इस मुद्दे पर विधायक के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं और विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं।
बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की ओर से आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर नालंदा जिला प्रशासन ने तैयारी कर ली है। शहर के 15 चुनिंदा केंद्रों पर आयोजित होने वाली इस परीक्षा में कुल 8,700 परीक्षार्थी शामिल होंगे। त्रिस्तरीय जांच के बाद ही अभ्यर्थियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि बीपीएससी के सचिव से प्राप्त पत्र के आलोक में परीक्षा केंद्रों पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा, जिसमें मोबाइल जैमर लगाना और सीसीटीवी कैमरों से पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना शामिल है। परीक्षार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए हॉल में प्रवेश से पूर्व बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जाएगा। यह परीक्षा आगामी 14 अप्रैल से शुरू होकर विभिन्न चरणों में संपन्न होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण में 14 और 15 अप्रैल को परीक्षा ली जाएगी, जिसके बाद 17 और 18 अप्रैल तथा अंतिम चरणों में 20 और 21 अप्रैल को परीक्षार्थी परीक्षा में बैठेंगे। परीक्षार्थियों की संख्या निर्धारित कर दी गई प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, शहर के अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में परीक्षार्थियों की संख्या निर्धारित कर दी गई है। सबसे अधिक 1200 परीक्षार्थी सरदार पटेल कॉलेज में परीक्षा देंगे, जबकि नालंदा कॉलेज में 1032 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। इसी प्रकार, सोगरा कॉलेज में 516, बिहार टाउन हाई स्कूल शालूगंज में 816, एसएस बालिका स्कूल में 588 और पीएल साहू हाई स्कूल में 396 परीक्षार्थी शामिल होंगे। कहां कितने परीक्षार्थी देंगे एग्जामअन्य केंद्रों में सोगरा हाई स्कूल के लिए 564, बिहार टाउन हाई स्कूल मणिराम अखाड़ा के लिए 588, नेशनल शेखाना के लिए 540, सोहसराय बालिका हाई स्कूल के लिए 600, जवाहर कन्या विद्यालय के लिए 480 और कमरुद्दीनगंज बालिका हाई स्कूल के लिए 636 परीक्षार्थी आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा भैंसासुर आवासीय मॉडल स्कूल में 696, रोजमैरी लैंड में 552 और सनबीम स्कूल कोसुक में 528 परीक्षार्थी अपनी परीक्षा देंगे। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर शांतिपूर्ण परीक्षा संचालन के लिए पुख्ता दावों के साथ सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
निवाड़ी जिले में केंद्रीय विद्यालय का सपना 16 महीने बाद भी साकार नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में 7 दिसंबर 2022 को जिले को केंद्रीय विद्यालय की सौगात मिली थी। इसके लिए भूमि भी आवंटित हो चुकी थी और उम्मीद थी कि जल्द ही बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी, लेकिन अब तक विद्यालय का संचालन शुरू नहीं हो सका है। विद्यालय के संचालन को लेकर प्रारंभिक स्तर पर सक्रियता दिखाई गई थी। तत्कालीन डीपीसी राजेश पटेरिया ने इस दिशा में कई कदम उठाए थे। पहले ग्राम कुलुवा के छात्रावास भवन को चुना गया, लेकिन आवश्यक सुविधाओं के अभाव में यह योजना बदल दी गई। बाद में जिला मुख्यालय स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पुराने भवन का चयन किया गया। निरीक्षण के बाद टीम ने पांच कमरों के निर्माण के निर्देश दिए थे, जो अब पूरे हो चुके हैं। दिसंबर 2022 के बाद से अब तक लगभग छह बार जिला शिक्षा अधिकारी बदले जा चुके हैं। इतना ही नहीं, केंद्रीय विद्यालय के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों को भी बीच में हटा दिया गया। इस कारण हर बार योजना नई शुरुआत करती है और फिर अधूरी रह जाती है, जिससे परियोजना में लगातार देरी हो रही है। प्रदेश में जिन 11 केंद्रीय विद्यालयों को मंजूरी मिली थी, उनमें से अधिकांश स्थानों पर संचालन शुरू हो चुका है, लेकिन निवाड़ी में आज भी इंतजार जारी है। नया शिक्षा सत्र शुरू होने में अब महज 15 दिन शेष हैं, लेकिन न तो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हुई है और न ही प्रशासन की ओर से कोई तैयारी दिखाई दे रही है। इस पूरे मामले पर जिला पंचायत सीईओ रोहन सक्सेना ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय के लिए अस्थाई तौर पर स्कूल शुरू करने हेतु जो आवश्यकताएं मांगी गई थीं, वे पूरी कर दी गई हैं। इसके अलावा, स्थायी विद्यालय के निर्माण के लिए जमीन भी आवंटित कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्रीय विद्यालय इसी शैक्षिक सत्र में शुरू कर दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने बालोद में हुए जंबूरी कार्यक्रम में अनियमितता का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्कूल शिक्षामंत्री से सवाल पूछा कि आयोजन के लिए टेंडर से पहले काम कैसे शुरू हुआ और 4 दिन के अंदर काम कैसे पूरा हो गया। जवाब में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शायरी पढ़ी और कहा कि नेशनल का काम अलग है और हमारा काम अलग है। इसके साथ ही स्कूलों के युक्तियुक्तकरण पर सरकार से जवाब मांगा गया। अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर विपक्ष ने वॉकआउट किया। बता दें कि आज सरकार भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने और व्यापम को खत्म कर कर्मचारी चयन मंडल (SSB) बनाने से जुड़े अहम विधेयक भी सदन में पेश करेगी। पढ़िए विधानसभा की कार्यवाही 1. जंबूरी कार्यक्रम में अनियमितता का मुद्दा वफा जानते जब तुम, तो मेरी वफा समझा पाताप्रेम में कितना समर्पण था मेरे, यह तुझे मैं बता पाताबार-बार बेगुनाही की अपनी, कितना भरोसा दिलाऊं ऐ हमदमरूठकर बैठ जाते हो हर बार, कैसे मनाऊं ऐ हमदमजानते हो तुम बेदाग हैं हम, तुम्हारी इस महफिल मेंफिर भी इतने सवालात, ज़हन में क्यों आते हैं हमदम 2. MLA सुनील सोनी ने उठाया युक्तियुक्तकरण का मुद्दा 3. विधायक विक्रम मंडावी ने उठाया अतिथि शिक्षकों का मुद्दा ……………………………….. बजट सत्र से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… CM बोले-ऐसा कोई सगा नहीं जिसे कांग्रेसियों ने ठगा नहीं: विधानसभा में अवैध प्लॉटिंग, ‘जी राम जी’ पर हंगामा; भूपेश ने मनरेगा को बताया बेहतर छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के 12वें दिन सदन में अवैध प्लॉटिंग और ‘जी राम जी’ के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने मनरेगा को बेहतर बताया। जवाब में सत्ता पक्ष से अजय चंद्राकर ने कहा सदन विपक्ष की राजनीति का अड्डा नहीं है। जिसके बाद विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…
राजस्थान दिवस महोत्सव के उपलक्ष्य में राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय विशेष कार्यक्रम मंगलवार को शास्त्री नगर स्थित क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र एवं विज्ञान पार्क में समापन हुआ। अकादमी के इतिहास में पहली बार आयोजित इस दीक्षांत एवं सम्मान समारोह में प्रदेश के वैदिक शिक्षा परिदृश्य की एक नई तस्वीर उभर कर सामने आई। पहली बार प्रदेश के 37 वेद विद्यालयों के विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान कर उन्हें उपाधियां और दीक्षांत संस्कार से जोड़ा गया है। वेदों का संरक्षण गुरु-शिष्य परंपरा को जीवत रखने से होगा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदन मोहन झा ने अकादमी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि वेदों का संरक्षण केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा को जीवित रखने से होगा। आज जिन विद्यार्थियों को ‘बाल शंकराचार्य’ सम्मान मिला है, वे भविष्य के धर्म रक्षक और विद्वान हैं। इन श्रेणियों में हुआ पुरस्कार वितरण; राजस्थान संस्कृत अकादमी की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली ने बताया कि प्रदेश के 37 वेद विद्यालयों में पंचम वर्ष की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को बाल शंकराचार्य सम्मान प्रदान किया गया। पूरे राजस्थान में निशुल्क वैदिक संस्कार शिविर आयोजित करने वाली संस्थाओं और प्रशिक्षकों को वैदिक संस्कार सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम सेठ श्री सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय जसवंतगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में प्रो. राजेंद्र प्रसाद शर्मा, डॉ. नरोत्तम पुजारी, राकेश कुमार नेहरा, श्यामसुंदर शर्मा, कौशलेंद्र शास्त्री आदि वैदिक विद्वान मौजूद रहे।
वित्त रहित शिक्षा : अनुदान वृद्धि समेत 4 मांगों को लेकर महाधरना, अगले माह जैक का घेराव
रांची | झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले लंबित मांगों के निराकरण की मांग को लेकर शिक्षकों ने मंगलवार को विधानसभा के सामने महाधरना दिया। कहा कि अनुदान वृद्धि, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और शिक्षण संस्थानों के के नाम पर अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। मोर्चा के सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, रघुनाथ सिंह, गणेश महतो, मनीष कुमार समेत अन्य ने संयुक्त रूप से कहा कि 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि, सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देने की मांग पूरी नहीं हो जाती है, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। धरना को अरविंद सिंह, देवनाथ सिंह, अनिल तिवारी, मनीष कुमार और गणेश महतो ने संबोधित करते हुए कहा कि कम अनुदान के कारण शिक्षक आर्थिक दबाव में हैं। वहीं फजलुल कदीर अहमद, संजय कुमार और देवराज मिश्र सहित अन्य ने कहा कि विस में घोषणा के बाद भी वेतनमान देने से संबंधित प्रस्ताव लंबित है। मांडू विधायक निर्मल महतो ने मांग का समर्थन किया। धरना स्थल पर हुई बैठक में अप्रैल के पहले सप्ताह में राजभवन के समक्ष महाधरना, दूसरे सप्ताह में जैक का घेराव करने का निर्णय लिया गया।
इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 5.88 करोड़ रुपए की जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन (एनजीएस) की खरीद को लेकर उठे विवाद के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और पूरे मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। इस समिति में अपर संचालक (वित्त) को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वरिष्ठ संयुक्त संचालक, उपसंचालक, प्रोफेसर और इंजीनियर भी शामिल हैं। समिति को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में ईओडब्ल्यू और विभागीय स्तर पर पहले ही शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। आदेश के मुताबिक, यह समिति न सिर्फ खरीद प्रक्रिया की परत-दर-परत जांच करेगी, बल्कि तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन से जुड़े हर दस्तावेज की बारीकी से पड़ताल भी करेगी। जांच के दौरान MDRU गाइडलाइंस, भंडार क्रय नियम और सरकारी निर्देशों के पालन की भी सख्ती से जांच होगी। वहीं मामले से जुड़े सभी दस्तावेज भी जब्त करने के लिए अधिकृत होगी। अनुपयोगी मशीन पर खरीदी प्रक्रिया कैसे? पुरानी मशीन के लिए रिजेंट खरीदने का प्रस्ताव स्वशासी समिति की पिछले साल हुई बैठक में मंजूर किया गया था। इसके विपरीत एमजीएम के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने दावा किया था कि मशीन अनुपयोगी हो चुकी है और उसके रिजेंट का उत्पादन बंद हो गया है। हालांकि 9 मार्च 2026 की बैठक में एमजीएम प्रबंधन ने कमिश्नर हेल्थ की मौजूदगी में उसी पुरानी मशीन के लिए सामग्री खरीद प्रक्रिया को प्रचलन में बताया। इस विरोधाभास ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मशीन अनुपयोगी है तो उसके लिए सामग्री खरीद की प्रक्रिया जारी कैसे है और यदि प्रक्रिया चल रही है तो मशीन को बेकार बताने का आधार क्या है? इसे लेकर अब स्पष्ट जवाब की जरूरत है। NGS खरीदी: सर्टिफिकेट और मॉडल नंबर पर सवाल एमजीएम मेडिकल कॉलेज को 4 साल पहले WHO से दान में एनजीएस मशीन मिली थी। जिससे एक भी टेस्ट नहीं किया गया और 5.88 करोड़ में नई मशीन खरीद ली। EOW में दर्ज शिकायत में आरोप लगाए गए थे कि मशीन की खरीदी प्रक्रिया में जमकर गड़बड़ी की गई है वहीं, वैध सर्टिफिकेट भी नहीं है। इसके साथ ही जो मॉडल कागजों में बताया गया था उसकी जगह सप्लाई हुई मशीन पर दूसरा मॉडल नंबर लिखा है। टेंडर कमेटी अध्यक्ष रही डॉ. शिखा घनघोरिया ने सभी दस्तावेज वैध होने का दावा किया था।
देवरिया में गौरीबाजार-हाटा मार्ग पर रामपुर के पास मंगलवार शाम एक सड़क हादसे में स्कूटी सवार शिक्षामित्र की मौत हो गई। इस दुर्घटना में एक पूर्व प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। गौरीबाजार थाना क्षेत्र के पचोहिया निवासी पूर्व प्रधान इंद्रजीत प्रसाद (50) और शिक्षामित्र अमित प्रसाद (45) मंगलवार शाम स्कूटी से गौरीबाजार गए थे। वापस लौटते समय शाम करीब साढ़े छह बजे रामपुर के पास उनकी स्कूटी एक ढलाई मशीन की चपेट में आ गई। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलने पर ग्रामीण और यूपी डायल पुलिस मौके पर पहुंची। घायलों को एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए महर्षि मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान शिक्षामित्र अमित प्रसाद की मौत हो गई। घायल पूर्व प्रधान इंद्रजीत प्रसाद को बेहतर उपचार के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। अमित प्रसाद रतनपुर में शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत थे। उनके परिवार में पत्नी सुमन, दो बेटियां आंचल (10), अन्नू (6) और एक पुत्र आलोक हैं।
राष्ट्र हित, समाज हित, संस्कृति हित एवं शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वावधान में शिवाजी नगर स्थित पुरुषार्थ सभागार में “विद्यालयीन शिक्षा में नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन” विषय पर शैक्षिक विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राजधानी के सैकड़ों प्राचार्य एवं शिक्षकों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर ओमजी शर्मा, भरत व्यास, रामसागर मिश्र, धीरेन्द्र सिंह भदौरिया, डॉ. अभय गुप्ता, डॉ. अनित राय, यशवंत गोयल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसे विभा दुबे, रश्मि शर्मा, प्रीति लखेरा, सुमन सिंह, अनामिका सेन एवं योगिता दीक्षित ने मधुर स्वर में प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अतिथि देवो भवः की परंपरा के तहत सभी अतिथियों का सम्मान किया गया। इस दौरान रामकिशोर टेलकर, डी.डी. पवार, राजकुमार जाटव, डंडोतिया जी, रविन्द्र गुप्ता, डॉ. वेदिका, डॉ. अरविंद जैन, विभा दुबे, लक्ष्मी गौड़, गुंजा साहू, प्रीति गुप्ता, अनीता दुबे सहित अन्य सदस्यों ने सम्मान-अभिनंदन किया। अपने उद्बोधन में रामसागर मिश्र ने कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के उद्देश्यों को साकार करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। मुख्य अतिथि भरत व्यास ने प्रेरणादायक प्रसंगों के माध्यम से उपस्थितजनों को जागरूक किया। कार्यक्रम में “देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें” गीत को लक्ष्मी गौड़ एवं गुंजा साहू ने अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत कर देशभक्ति का भाव जागृत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्य वक्ता ओमजी शर्मा ने कहा कि राष्ट्र, समाज और शिक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों के हाथ में है, इसलिए नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन में सभी को सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन संयोजक डॉ. सी.के. सिंह चौरसिया ने किया। वहीं डॉ. वी.के. सिंह चौरसिया ने घोषणा की कि न्यास द्वारा प्रत्येक माह के चौथे रविवार को बैठक आयोजित कर भोपाल महानगर में शिक्षा, समाज एवं संस्कृति उत्थान के लिए सतत प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रम के अंत में प्रीति गुप्ता एवं साथियों द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात स्वल्पाहार एवं न्यास की विभागीय बैठक संपन्न हुई। कार्यक्रम को लेकर उपस्थित शिक्षकों ने इसे प्रेरणादायक बताते हुए शिक्षा एवं समाज के उत्थान की दिशा में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।
बैतूल में एसटी, एससी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा और समस्त आदिवासी समाज संगठन ने मंगलवार को रैली निकाली। यह रैली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम, 2026 के समर्थन में आयोजित की गई थी। रैली के बाद, कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संगठन ने 13 जनवरी 2026 को यूजीसी द्वारा जारी अधिसूचना का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने इस विनियम को संविधान की भावना के अनुरूप एक ऐतिहासिक कदम बताया। इस ज्ञापन की प्रतियां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और अन्य संबंधित संस्थाओं को भी भेजी गई हैं। संगठन ने बताया कि यह विनियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4), 15(5), 16(4), 21, 38 और 46 में निहित समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करता है। उन्होंने जोर दिया कि आदिवासी समाज लंबे समय से उच्च शिक्षा में भेदभाव और अवसरों की कमी का सामना कर रहा है। ऐसे में, समता प्रकोष्ठ की स्थापना, भेदभाव निवारण तंत्र और निगरानी व्यवस्था जैसे प्रावधान अत्यंत आवश्यक हैं। ज्ञापन में संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें विनियम का स्पष्ट समर्थन, इसके प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए केंद्र व राज्य स्तर पर दिशा-निर्देश जारी करना, और समता प्रकोष्ठों की नियमित निगरानी व सोशल ऑडिट सुनिश्चित करना शामिल है। संगठन का मानना है कि यह पहल उच्च शिक्षा को अधिक न्यायपूर्ण, समतामूलक और संवेदनशील बनाएगी। इससे आदिवासी सहित अन्य वंचित वर्गों के लिए शिक्षा वास्तविक सशक्तिकरण का माध्यम बन सकेगी।
यमुनानगर शहर में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षा के दौरान सामने आए छात्राओं से छेड़छाड़ के गंभीर मामले में अब बड़ा एक्शन लिया गया है। महिला थाना पुलिस ने आरोपी निरीक्षक के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। मामला मॉडल कॉलोनी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के परीक्षा केंद्र का है, जहां सोमवार को एसएसटी की परीक्षा के दौरान सात छात्राओं ने ड्यूटी पर तैनात टीचर पर गलत तरीके से छूने और गंदे इशारे करने के आरोप लगाए थे। उधर शिक्षक विभाग ने भी आरोपी पर कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला शिक्षा अधिकारी प्रेम लता ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित क्लस्टर इंचार्ज से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद इसे मुख्यालय भेजा जाएगा, जहां से प्राप्त निर्देशों के अनुसार आरोपी शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बैड टच और गंदे इशारों के आरोप 15 से 17 साल की सात छात्राओं का आरोप है कि उनकी बोर्ड परीक्षाएं मॉडल कॉलोनी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रही थीं। सोमवार को उनका एसएसटी का पेपर था। बताया कि जिस कमरे में वे परीक्षा दे रही थीं, वहां दडवा गांव के राजकीय स्कूल के टीचर सुखदेव की बतौर निरीक्षक ड्यूटी लगी हुई थी। आरोप है कि परीक्षा के दौरान निरीक्षक ने छात्राओं को गलत तरीके से छुआ और आंखों व हाथों से गंदे इशारे किए। परिजनों का सेंटर के बाहर हंगामा छात्राओं ने परीक्षा के दौरान पानी पीने के बहाने बाहर निकलकर अन्य स्टाफ को पूरी घटना की जानकारी दी। स्कूल स्टाफ ने तुरंत पुलिस और छात्राओं के संबंधित स्कूल को सूचना दी। जिसके बाद परिजनों को भी इस बारे में बताया गया। सूचना मिलते ही रामपुरा चौकी और महिला थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्कूल प्रशासन ने आरोपी टीचर को पुलिस के हवाले कर दिया। परीक्षा खत्म होने के बाद जब अभिभावक केंद्र के बाहर पहुंचे, तो छात्राओं ने रोते हुए उन्हें पूरी घटना बताई। इससे गुस्साए परिजनों ने स्कूल के बाहर जमकर हंगामा किया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज महिला थाना पुलिस ने सातों छात्राओं की शिकायत पर आरोपी टीचर सुखदेव के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। छात्राओं के बयान दर्ज कर साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं शिक्षा विभाग अपनी कार्रवाई में जुट गया है।
जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और विधिक संगठनों से जुड़े नागरिकों, छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नीतियों के समर्थन में राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से उच्च शिक्षा में समान अवसर, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की गई। छात्रों ने कहा कि वे समाज के सभी वर्गों- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और सामान्य वर्ग- के छात्रों के शैक्षणिक भविष्य के प्रति समान रूप से चिंतित और प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने जोर दिया कि UGC भारत सरकार द्वारा स्थापित एक वैधानिक संस्था है, जिसका मुख्य लक्ष्य देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर, पारदर्शिता और शैक्षणिक मानकों को बनाए रखना है। ज्ञापन में UGC की नीतियों से होने वाले सर्वसामान्य लाभों पर प्रकाश डाला गया। इसमें बताया गया कि UGC सभी वर्गों के छात्रों को समान अवसर प्रदान करता है। इसके दिशा-निर्देश यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी छात्र के साथ जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो, जिससे योग्य छात्रों को उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। UGC की नीतियों के तहत आरक्षण एवं समावेशन की संतुलित व्यवस्था है। इसके माध्यम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अवसर मिलते हैं। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त होता है, जिससे समाज के हर वर्ग की शिक्षा में भागीदारी सुनिश्चित होती है। ज्ञापन में छात्रवृत्ति, फेलोशिप और आर्थिक सहयोग के महत्व पर भी बल दिया गया। UGC की विभिन्न योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में सहायता करती हैं और प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करती हैं, जिससे ड्रॉप-आउट की समस्या कम होती है। इसके अतिरिक्त, UGC उच्च शिक्षण संस्थानों में मनमानी फीस पर नियंत्रण रखता है और निजी एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जिससे अभिभावकों और छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। अंत में, ज्ञापन में शिक्षा की गुणवत्ता और डिग्री की विश्वसनीयता को बनाए रखने में UGC की भूमिका को रेखांकित किया गया। UGC द्वारा निर्धारित नीतियां पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और डिग्री की गुणवत्ता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
वार्षिक सम्मेलन में वरिष्ठजनों का सम्मान और बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए किया प्रेरित गया
मुकडेगा | रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम लिबरा में रविवार को अखिल भारतीय अघरिया केंद्रीय समिति रायगढ़ की ओर से वार्षिक सम्मेलन (बाल सभा) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में अघरिया समाज के लोग, युवा और महिलाएं शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई और बच्चों व युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक कुमार सिदार मौजूद रहे। वहीं जनपद पंचायत अध्यक्ष ज्योति भगत, मुकडेगा मंडल अध्यक्ष संजय पटेल, पूर्व विधायक चक्रधर सिंह सिदार, रोशन पाणडा सहित समाज के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अघरिया समाज की केंद्रीय अध्यक्ष उषा पटेल ने समाज के संगठन और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार रखे।
एनएसएस शिविर में स्वच्छता, सर्वे और डिजिटल शिक्षा के बारे में दी जानकारी
भास्कर न्यूज | बाड़मेर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय माल गोदाम रोड में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के द्वितीय व तृतीय दिवस पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अधिकारी चेतना पुरोहित ने बताया कि शिविर के दौरान स्वयंसेविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सामाजिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम दिया। विकसित राजस्थान रन मैराथन में एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने भाग लिया, जिसमें उनका नेतृत्व अरुणा सोलंकी व वीणा डूंगरानी ने किया। शिविर के दौरान स्वयंसेविकाओं ने विद्यालय परिसर में सघन स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छता का संदेश दिया। साथ ही विद्यालय प्रांगण में लगाए गए पौधों को पानी देकर उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया। शिविर के तीसरे दिन स्वयंसेविकाओं ने व्याख्याता अर्जुन कुमार और कार्यक्रम अधिकारी चेतना पुरोहित के मार्गदर्शन में गोद ली गई कच्ची बस्ती रातानाडा गणेश मंदिर क्षेत्र में सर्वे का कार्य किया। इस दौरान बस्ती के लोगों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी जुटाई गई। उप-प्रधानाचार्य किशनलाल प्रजापत ने छात्राओं को डिजिटल शिक्षा के महत्व और उसके उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक नृत्य, शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में आगे बढ़ने का आह्वान
उदयपुर। राजस्थान आदिवासी महासभा भवन, सेक्टर-14 में आदिवासी समाज का होली मिलन समारोह सोमवार को आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इसके बाद महिलाओं ने ढोल-कुंडी की थाप पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। समारोह में राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया मुख्य अतिथि और पूर्व सांसद अर्जुनलाल मीणा विशिष्ट अतिथि रहे। अतिथियों का स्वागत संस्था अध्यक्ष सोमेश्वर मीणा और कार्यकारिणी सदस्यों ने किया। अतिथियों ने शिक्षा को प्राथमिकता देने और युवाओं से उच्च शिक्षा लेकर प्रशासनिक सेवाओं में जाने का आह्वान किया। कहा कि शिक्षा के बिना उत्थान संभव नहीं है। कार्यक्रम में पूर्व प्रधान जयसमंद गंगाराम मीणा और शंकर तावड़ ने भी विचार रखे। संचालन महासचिव सी.एल. परमार ने किया।
शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ाए कदम, खाद्य सामग्री बांटी
उदयपुर| लाइफ प्रोग्रेसिव सोसायटी, सहार चेरिटेबल फाउंडेशन एवं अन्य सहयोगियों के माध्यम से 250 से अधिक जरूरतमंद परिवारों और विकलांगों को इफ्तारी के बाद दो बार खाद्य सामग्री बांटी गई। सचिव फातिमा अगवानी ने बताया कि उदयपुर के अलावा महुवाड़ा, पलाना, फतहनगर, कपासन, नाथद्वारा और राजसमंद में भी सामग्री वितरण किया गया। अध्यक्ष डॉ. खलील अगवानी ने कहा कि मई में सर्वधर्म विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि फरवरी-मार्च 2026 में सात छात्रों की फीस सीधे उनके स्कूल/कॉलेज में जमा कराई गई, जिनमें बीएससी नर्सिंग, नीट कोचिंग, फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट, जनरल नर्सिंग और बीए के छात्र शामिल हैं।
शिक्षा विभाग का एक अप्रैल से नया सत्र प्रारंभ, 20 मार्च को आ सकता है 10वीं बोर्ड का रिजल्ट
विनोद मित्तल | जयपुर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इस बार दसवीं का रिजल्ट जारी करने को लेकर बड़ी तैयारी में जुटा है। ऐसा पहली बार होगा जब दसवीं का परिणाम मार्च के महीने में जारी होगा। वरन तो अमूमन मार्च के महीने में दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं का समापन होता है। इस बार शिक्षा विभाग एक अप्रैल से नया सत्र प्रारंभ कर रहा है। इसको देखते हुए दसवीं बोर्ड का रिजल्ट 20 मार्च को जारी हो सकता है। दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं 12 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 10 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। राजस्थान बोर्ड ने दसवीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए 35 हजार शिक्षकों की ड्यूटी लगा रखी है। सामान्यता दसवीं का परिणाम हमेशा 12वीं कक्षा के बाद जारी होता रहा है। ऐसा भी पहली बार होगा जब 12वीं के पहले 10वीं का परिणाम जारी होगा। विभाग के इस निर्णय का अभिभावकों ने भी स्वागत किया है। उनका कहना है कि परीक्षा के बाद परिणाम जारी होने में देरी से विद्यार्थी भी परेशान रहते हैं। जब तक परिणाम नहीं आता विद्यार्थी स्कूल भी नहीं जा पाते है। अब जल्दी परिणाम आने से बच्चों की आगे की कक्षा की पढ़ाई समय पर प्रारंभ हो सकेगी।
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं
महिला दिवस पर विशेष:- अजमेर राजस्थान आधुनिकी ओर शिक्षा के दौर में नित नई ऊंचाइयों पर पहुँचने के बाद भी हिंसा की शिकार होती महिलाएं:- देश-प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध ओर इन अपराधों में पिछले वर्षो में अपराध की दर तीव्र ही हुई है ओर “भारत मे अपराध ” नामक रिपोर्ट बताती है ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
विश्व शिक्षा दिवसः 24 जनवरी 2026 ? शिक्षा रोजगार का टिकट नहीं, जीवन का दर्शन बने
विश्व शिक्षा दिवस कोरा उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है, यह सोचने का क्षण कि शिक्षा क्या है, किसके लिए है और किस दिशा में समाज को ले जा रही है। भारत इस संदर्भ में केवल एक देश नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है, जिसने शिक्षा को कभी भी मात्र रोजगार या सूचना का ... Read more
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

