गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
गोरखपुर में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन दिलाने के लिए RTE के तहत प्रक्रिया तेजी से चल रही है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत RTE Act 2009 के प्रावधानों के अनुसार जिले के सभी नॉन-एडेड और रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटों पर एडमिशन दिया जा रहा है। पैरेंट्स से ऑनलाइन एप्लिकेशन लिए जा रहे हैं और सेलेक्शन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जा रहा है। पहले चरण की ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं और चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अब अगले चरण के लिए तैयारी शुरू हो गई है। पहले चरण का रिजल्ट पहले चरण की लॉटरी में कुल 6277 एप्लिकेशन प्राप्त हुए। दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद 4241 एप्लिकेशन अप्रूव किए गए, जबकि 2036 एप्लिकेशन रिजेक्ट कर दिए गए। अप्रूव एप्लिकेशन के आधार पर लॉटरी में 2708 बच्चों को स्कूल अलॉट किया गया, जबकि सीटें फुल होने के कारण 1533 बच्चों को स्कूल नहीं मिल सका। तीन फेज में पूरी होगी एडमिशन प्रक्रिया एडमिशन के लिए आवेदन प्रक्रिया तीन फेज में तय की गई है। पहला फेज पूरा हो चुका है। दूसरे फेज के लिए 21 फरवरी से 7 मार्च तक ऑनलाइन एप्लिकेशन किए जाएंगे, जबकि तीसरे फेज में 12 मार्च से 25 मार्च तक आवेदन का मौका मिलेगा। हर फेज के बाद लॉटरी निकालकर सेलेक्टेड बच्चों की लिस्ट जारी की जाएगी। इन बच्चों को मिलेगा फायदा स्कीम के तहत SC, ST, OBC, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे, दिव्यांग बच्चे, अनाथ बच्चे और गंभीर बीमारी से प्रभावित पैरेंट्स के बच्चे एप्लाई कर सकते हैं। एलिजिबिलिटी संबंधित सर्टिफिकेट के आधार पर तय की जाएगी। योजना के तहत 3 साल से 7 साल तक के बच्चों को प्री-प्राइमरी और क्लास-1 में एडमिशन दिया जाएगा, जिससे छोटे बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलेगा। ऑनलाइन करना होगा आवेदनपैरेंट्स को rte25.upsdc.gov.in वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन एप्लिकेशन करना होगा। एप्लिकेशन के दौरान बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट, फोटो, पैरेंट्स का आईडी प्रूफ, इनकम सर्टिफिकेट, कास्ट सर्टिफिकेट और रेसिडेंस सर्टिफिकेट अपलोड करना अनिवार्य होगा।सभी एप्लिकेशन की जांच के बाद ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए लॉटरी सिस्टम अपनाया जा रहा है। सेलेक्शन लिस्ट में नाम आने के बाद पैरेंट्स को तय समय में संबंधित स्कूल में जाकर एडमिशन प्रोसेस पूरा करना होगा। जिला प्रशासन ने पैरेंट्स से अपील की है कि वे तय समय सीमा के भीतर आवेदन करें और लास्ट डेट का इंतजार न करें, ताकि पात्र बच्चों को योजना का लाभ मिल सके।
खगड़िया जिला के बेलदौर प्रखंड अंतर्गत बैलैठा पंचायत में जिलाधिकारी नवीन कुमार ने बुधवार को विभिन्न स्थलों का सघन निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य कोसी नदी के कटाव की स्थिति, शैक्षणिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और पंचायत स्तर पर संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी समीक्षा करना था। जिलाधिकारी ने अपने निरीक्षण की शुरुआत कोसी नदी से प्रभावित कटाव क्षेत्रों से की। उन्होंने कटाव की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि कटाव निरोधी कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर तेजी से पूरा किया जाए। भविष्य में किसी भी प्रकार की जन-धन की क्षति रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके बाद, जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय, बैलैठा का दौरा किया। उन्होंने पठन-पाठन की गुणवत्ता, बच्चों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन योजना, विद्यालय परिसर की स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया। शिक्षकों को निर्देश दिए गए कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और बच्चों को नियमित, सुरक्षित तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश निरीक्षण के क्रम में, जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र, बैलैठा का भी दौरा किया। यहां उन्होंने दवाओं की उपलब्धता, टीकाकरण कार्यक्रम, मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ-सफाई की स्थिति की समीक्षा की। स्वास्थ्यकर्मियों को समय पर उपचार, नियमित उपस्थिति और ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कार्यालय के कामों में लापरवाही न बरतने की हिदायत दी अंत में, जिलाधिकारी ने पंचायत सरकार भवन, बैलैठा का निरीक्षण किया और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मियों को निर्देश दिया कि आम जनता को योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, कार्यालयीन कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी गई। इस सघन निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के वरीय पदाधिकारी, प्रखंड स्तरीय अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। जिलाधिकारी के इस कदम से प्रशासनिक सक्रियता स्पष्ट रूप से दिखी है और क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
माधव विश्वविद्यालय में उन्नत भारत अभियान के तहत शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
स्वरूपगंज स्थित विश्वविद्यालय में ग्रामीणों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने और सामाजिक सुधार के लिए प्रेरित करने हेतु व्याख्यान का आयोजन किया गया।
नीमच शहर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 परिसर में दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण वितरित किए गए। यह वितरण जनपद शिक्षा केंद्र द्वारा आयोजित एक विशेष शिविर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष सज्जन सिंह चौहान और नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग बच्चों की सेवा महत्वपूर्ण है और ये उपकरण उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक होंगे। शिविर के दौरान बड़ी संख्या में जरूरतमंद बच्चों को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुसार ट्रायसिकल, व्हीलचेयर, कान की मशीन और अन्य सहायक शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। उपकरण मिलते ही बच्चों के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास दिखाई दिया। इस अवसर पर योगेश कंडारा सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। इस पहल से बच्चों की आवाजाही आसान होगी और वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
शिक्षा और जन-जागरूकता ही भिक्षावृत्ति रोकने का सबसे बड़ा हथियार है। अगर बच्चों को सही शिक्षा मिले और समाज जागरूक बने, तो बाल भिक्षावृत्ति जैसी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह बात डॉ शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कही। विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग और राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान के सहयोग में 'भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों की विशेष सेवाएं' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि भीख मांगने की समस्या अक्सर लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी न होने से बढ़ती है। कई मामलों में बच्चों के पीछे वयस्कों की भूमिका होती है, इसलिए भिक्षावृत्ति के असली कारणों को समझना और अभिभावकों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। चित्र प्रदर्शनी देखकर प्रतिभागियों से बात-चीत की कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लगाई गई चित्र प्रदर्शनी देखकर प्रतिभागियों से बात-चीत भी किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के प्रो. अनूप कुमार भारतीय रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान के सलाहकार संजय पवार मौजूद रहे। विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. रुपेश कुमार सिंह ने किया। बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए हस्तक्षेप जरूरी विशिष्ट अतिथि संजय पवार ने बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए चलाई जा रही ‘इस्माइल योजना’ की जानकारी दी। मुख्य अतिथि प्रो. अनूप कुमार भारतीय ने जे.जे एक्ट के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए व्यापक स्तर पर हस्तक्षेप जरूरी है। दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. मोहम्मद नईम ने की। उन्होंने बाल भिक्षावृत्ति से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर चर्चा की। पहले दिन के कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्याम सिंह ने किया। इस मौके पर बाल कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि आर.एस जादौन, डॉ. अवधेश कुमार सहित कई गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, सीबीओ, जे.जे. बोर्ड, डीसीपीयू, एसजेपीयू के प्रतिनिधि, शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का नाम जेफ्री एपस्टीन फाइल्स से जुड़े होने के दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता इस मामले में झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। खेड़ा ने X पर पोस्ट में लिखा- जिस दस्तावेज का हवाला दिया जा रहा है, वह 59 पन्नों का एक कैलेंडर है, जिसमें न्यूयॉर्क में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों, कॉन्फ्रेंस और फंडरेजर की लिस्ट है। यह दस्तावेज कथित तौर पर 10 सितंबर 2010 को मार्गॉक्स रोजर्स ने एपस्टीन की निजी सहायक लेस्ली ग्रॉफ को भेजा था। उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल का नाम इस लिस्ट के पेज 55 पर एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां इंटरनेशनल एजुकेशन इंस्टीट्यूट ने वैश्विक शिक्षा सहयोग में योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया था। खेड़ा ने स्पष्ट किया कि इस सम्मान समारोह का एपस्टीन से कोई संबंध नहीं था और सिब्बल की एपस्टीन के साथ किसी बैठक या निजी संपर्क का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल, भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी और शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया है कि एपस्टीन से जुड़े फंड वाले संस्थान ने सिब्बल को सम्मानित किया था और कांग्रेस को इस पर जवाब देना चाहिए। कार्यक्रम का एपस्टीन से कोई लेना-देना नहीं खेड़ा ने कहा कि एपस्टीन ने इस संस्थान को 2002 से 2006 के बीच दान दिया था, जो सिब्बल को 2010 में दिए गए सम्मान से कई वर्ष पहले की बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता पूरी फाइल पढ़े बिना स्क्रीनशॉट के आधार पर विपक्षी नेताओं को विवाद में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं। पवन खेड़ा ने कहा है कि भाजपा नेता पूरी फाइल पढ़े बिना केवल स्क्रीनशॉट के आधार पर विपक्षी नेताओं को विवाद में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे को उठाकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। एपस्टीन से 3-4 बार मिले थे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 11 फरवरी को बताया था कि वह यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे। यह बातचीत पूरी तरह से प्रोफेशनल थी, जो इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म और दूसरे इंटरनेशनल कामों से जुड़ी थी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एपस्टीन के आपराधिक मामलों से अपना कोई संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। पुरी ने कहा, जब मैंने मई 2009 से न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला था, तब से लेकर 2017 में मंत्री बनने तक की अवधि के 30 लाख ईमेल जारी किए गए हैं। इस दौरान, केवल तीन या चार बैठकों का ही जिक्र मिलता है और मेरी बातचीत पूरी तरह से पेशेवर थी। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं। इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए। इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर '#MeToo' लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं। इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की। ………….. एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भारतीय लड़की भी यौन अपराधी एपस्टीन का शिकार हुई: नई फाइल्स में खुलासा; अमेरिकी अधिकारी मुआवजा देने के लिए तलाश रहे थे यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइलों में खुलासा हुआ है कि एक भारतीय लड़की भी उसका शिकार हुई थी। दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने उसे पीड़ित मुआवजा फंड से भुगतान दिलाने के लिए भारत में तलाश शुरू की थी। 13 जनवरी 2020 की एक ईमेल में अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत सामने आई है। पूरी खबर पढ़ें…
गोरखपुर में माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं जिले के 197 परीक्षा केंद्रों पर बुधवार से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बहुस्तरीय निगरानी के बीच शुरू हो गईं। परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और नकलविहीन बनाने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। सभी केंद्रों पर स्टैटिक मजिस्ट्रेट, केंद्र व्यवस्थापक और पुलिस बल की तैनाती की गई है, जबकि संवेदनशील केंद्रों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। परीक्षा के पहले दिन सुबह से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर हलचल रही। निर्धारित समय से पहले ही बड़ी संख्या में परीक्षार्थी केंद्रों पर पहुंच गए। प्रवेश प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा कराया गया, जिससे कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी और परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हुई। पूजा-अर्चना और दही-चीनी के साथ बढ़ाया हौसलाकई छात्र-छात्राएं परीक्षा से पहले भगवान के सामने पूजा-अर्चना और आरती करते नजर आए। अभिभावकों ने बच्चों को दही-चीनी खिलाकर शुभकामनाएं दीं और उनका हौसला बढ़ाया। कई परीक्षार्थी अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचे। शुरुआत में हल्का तनाव जरूर दिखा, लेकिन परीक्षा शुरू होते ही माहौल सामान्य और अनुशासित हो गया। 1.33 लाख से अधिक परीक्षार्थी हो रहे शामिलइस बार जिले में कुल एक लाख 33 हजार 534 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। इनमें हाईस्कूल के 67 हजार 642 और इंटरमीडिएट के 65 हजार 892 परीक्षार्थी हैं। परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होकर 12 मार्च तक चलेगी। पहले दिन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों का पहला प्रश्नपत्र हिंदी का है। निर्धारित समय पर संपन्न हुई परीक्षाहाईस्कूल की परीक्षा सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक आयोजित की गई, जबकि इंटरमीडिएट की परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक निर्धारित समय सारणी के अनुसार संपन्न हुई। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई और अधिकारियों की टीमें लगातार भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेती रहीं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट की परीक्षाएं बुधवार को शुरू हो गईं। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी के गृह जनपद संभल में कुल 51,427 परीक्षार्थी इन परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। प्रशासन ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संभल जनपद में बुधवार को हाईस्कूल के 27,786 और इंटरमीडिएट के 23,436 छात्र-छात्राएं परीक्षा में बैठे। जिले में कुल 77 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षार्थियों को गहन जांच के बाद प्रवेश दिया गया, जिसमें उनके कॉलेज के पहचान पत्र भी उतरवाए गए। परीक्षा केंद्रों के 100 मीटर के दायरे में फोटोस्टेट और मोबाइल की दुकानें पहली पाली के दौरान बंद रहीं। पहले दिन सुबह 8:30 बजे से 11:30 बजे तक हिंदी और प्रारंभिक हिंदी का पेपर आयोजित किया गया। डीआईओएस सर्वेश कुमार ने बताया कि परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। परीक्षा के लिए तीन जोनल मजिस्ट्रेट, 14 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 77 स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 77 केंद्र व्यवस्थापक और 77 बाह्य केंद्र व्यवस्थापक भी नियुक्त किए गए हैं। इन परीक्षा केंद्रों में 12 राजकीय, 35 सहायता प्राप्त और 30 वित्तविहीन विद्यालय शामिल हैं। इनमें से दो केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया गया है, जहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। डीआईओएस के अनुसार, परीक्षा ड्यूटी के लिए लगभग 3335 अध्यापकों को लगाया गया है। नकलविहीन और शांतिपूर्ण परीक्षा संपन्न कराने के लिए डीआईओएस कार्यालय में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां से सभी परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। परीक्षार्थियों ने परीक्षा केंद्र के बाहर लगे नोटिस बोर्ड पर अपने रोल नंबर की जांच की और गहन तलाशी के बाद उन्हें परीक्षा हॉल में प्रवेश दिया गया। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि 2024 के कानून के तहत, यदि कोई नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, उसे जेल होगी और उसकी पूरी संपत्ति कुर्क की जाएगी। परीक्षा के दौरान किसी भी समस्या के समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।
सरकारी नौकरी और शिक्षा से खत्म हुआ मुस्लिमों का 5% आरक्षण, महाराष्ट्र सरकार ने रद्द किए सभी आदेश
Muslim Quota: महाराष्ट्र सरकार ने 2014 के अध्यादेश के तहत मुस्लिमों को दिए गए 5% आरक्षण से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं और आदेश रद्द कर दिए हैं. बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा स्टे के बाद यह अध्यादेश कानून नहीं बन सका था. अब इस श्रेणी में नए जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं होंगे और शिक्षण संस्थानों व नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा.
गाडरी समाज में मृत्युभोज व डीजे पर रोक:खर्च कम, शिक्षा पर जोर; समाज जुटाएगा छात्रावास के लिए धन
नाथद्वारा के निकट कुंठवा गांव स्थित खांखलदेवजी मंदिर परिसर में अखिल भारतीय धनगर मेवाड़ा गाडरी समाज की पांच चौकला की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज के पंच-पटेलों के साथ बड़ी संख्या में युवा भी मौजूद रहे। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। छात्रावास निर्माण के लिए भूमि आवंटन का प्रस्ताव पारित संत अमरा भगत गाडरी समाज विकास संस्था के जिलाध्यक्ष किशन लाल ने बताया कि बैठक में समाज के विकास और शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला स्तरीय छात्रावास भवन निर्माण का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके लिए भूमि आवंटन करवाने की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी।साथ ही जिले के सभी चौकलों और समाज के भामाशाहों के सहयोग से आर्थिक राशि एकत्रित करने का भी निर्णय लिया गया, ताकि छात्रावास निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जा सके। मृत्युभोज पर पूर्ण प्रतिबंध, सामूहिक विवाह को बढ़ावा बैठक में सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए मृत्युभोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई। इसके साथ ही समाज स्तर पर जिला स्तरीय सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिससे आर्थिक बोझ कम होगा और समाज में समानता बढ़ेगी। शादी में आभूषण की सीमा तय, डीजे साउंड पर रोक समाज ने विवाह समारोह में फिजूलखर्ची रोकने के लिए स्पष्ट नियम तय किए। सामूहिक सहमति से निर्णय लिया गया कि वर पक्ष वधू से दो तोला सोना और एक किलोग्राम चांदी से अधिक आभूषण नहीं लेगा।इसके अलावा पांचों चौकलों में विवाह समारोह के दौरान डीजे साउंड पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। बैठक में यह भी आह्वान किया गया कि जन्मदिन जैसे आयोजनों में अनावश्यक खर्च करने के बजाय वह राशि समाज के छात्रावास निर्माण में सहयोग के रूप में दी जाए। समाजहित से जुड़े सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
देश की सबसे बड़ी यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा आज से शुरू हो गई है। लखनऊ में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी ने स्कूली बच्चियों का वेलकम किया। उन्हें तिलक लगाया, गुलाब का फूल देकर मिठाई खिलाई। वाराणसी के हरिश्चंद्र बालिका इंटर कॉलेज में शिक्षकों ने छात्राओं पर पुष्पवर्षा की। बच्चों ने स्कूल के शिक्षकों के पैर झुककर आशीर्वाद लिया। आज हिंदी का पेपर है। पहली पाली की परीक्षा सुबह 8:30 से 11:45 बजे और दूसरी पाली दोपहर 2:00 से 5:15 बजे तक चलेगी। इस बार नकल को रोकने के लिए CCTV से निगरानी की जाएगी। रंग बिरंगी कॉपी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाईस्कूल की कॉपी का रंग पिंक और 12वीं की कॉपी का रंग भूरा है। लखीमपुर खीरी के एक इंटर कॉलेज में फीस न जमा होने पर बच्चों को प्रवेश पत्र नहीं दिए। इसके चलते बच्चों ने हंगामा कर दिया। हालांकि, बाद में प्रवेश पत्र दे दिया। प्रदेशभर के 8 हजार से ज्यादा केंद्र बनाए हैं। इस बार 5337778 परीक्षार्थी एग्जाम देंगे। इसमें हाईस्कूल में 27 लाख और इंटरमीडिएट में 25 लाख परीक्षार्थी हैं।पिछले साल 5437174 परीक्षार्थियों ने एग्जाम दिाय था। यानी इस बार 2 लाख की कमी आई है। 10वीं की परीक्षा 12 मार्च यानी 15 दिन तक चलेगी। वहीं, 12वीं की परीक्षा 11 मार्च तक होगी। यानी सिर्फ 14 दिनों में एग्जाम खत्म होगा। तस्वीरें देखिए… यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के पल-पल के अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने माछीवाड़ा के ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर (BPEO) को तुरंत प्रभाव से संस्पेंड कर दिया है। बैंस ने माछीवाड़ा के इंदिरा कॉलोनी सरकारी प्राइमरी स्कूल में छापा मारा था। औचक निरीक्षण दौरान चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। निरीक्षण के दौरान अधिकतर छात्र साधारण पंजाबी पाठ पढ़ने में भी असमर्थ मिले। इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए मंत्री ने माछीवाड़ा के ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर (BPEO) को तुरंत प्रभाव से संस्पेंड कर दिया। 3 शिक्षकों को कारण बताओं नोटिस भी जारीमंत्री बैंस ने स्कूल में तैनात तीन शिक्षकों को भी न्यूनतम शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित न करने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के बाद उन्होंने स्थिति को “बेहद चिंताजनक” बताते हुए कहा कि अगर बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत नहीं हुई तो पूरी पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो सकता है। मंत्री बैंस ने कहा-जो मैंने आज देखा, वह स्वीकार्य नहीं है। बच्चे अपनी मातृभाषा तक नहीं पढ़ पा रहे। ऐसे में वे भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर या जिम्मेदार नागरिक कैसे बनेंगे? निरीक्षण के दौरान मंत्री ने स्कूल की आधिकारिक शैक्षणिक रिपोर्ट भी देखी, जिसमें सभी छात्रों के प्रदर्शन को अच्छा दिखाया गया था। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कागजों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है और इसकी जांच करवाई जाएगी। रिकॉर्ड में हेरफेर करना जनता के विश्वास के साथ धोखाबैंस ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि रिकॉर्ड में हेरफेर करना जनता के विश्वास के साथ धोखा है। स्कूल के कुछ कमरों में खराब रोशनी और गंदगी देखने के बाद मंत्री ने तुरंत बुनियादी सुविधाएं सुधारने और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए। शिक्षकों ने स्टाफ की कमी का हवाला दिया, लेकिन मंत्री ने स्पष्ट कहा कि जिम्मेदारी और अनुशासन से समझौता नहीं किया जा सकता। पंजाब सरकार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि नई भर्तियां और सख्त मॉनिटरिंग जारी रहेगी। साथ ही राज्यभर में ऐसे औचक निरीक्षण आगे भी किए जाएंगे ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
कोचिंग सेंटर्स और बड़े शैक्षणिक संस्थानों की तरह सरकारी स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिलों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसमें बताया गया है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की पहचान करने के लिए शिक्षकों को भी मनोवैज्ञानिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जाएगी। परीक्षाओं के मद्देनजर शिक्षा विभाग ने जारी निर्देशों में बताया है कि एनसीईआरटी की मनोदर्पण से जुड़ी गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ मानसिक वातावरण बनाना जरूरी है। इसके लिए अभिभावकों के साथ भी लगातार संपर्क में रहने को कहा है। बच्चों के मानसिक दबाव को समझने और उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार के लिए अभिभावकों के लिए भी नियमित रूप से ऑनलाइन तथा ऑफलाइन संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए खेल, चित्रकला और व्यक्तित्व विकास जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। शिक्षकों के साथ गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को वर्ष में कम से कम दो बार मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा और चेतावनी संकेतों की पहचान के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षित कर्मचारियों की जिम्मेदारी रहेगी कि वंचित वर्गों, दिव्यांग और मानसिक आघात से जूझ रहे छात्रों के साथ स्कूल में किसी तरह का भेदभाव न हो। प्रत्येक स्कूल में शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के लिए एक आंतरिक समिति होगी। स्कूलों को वर्ष भर की गतिविधियों, कार्रवाई और प्रशिक्षण का रिकॉर्ड रखना होगा। इसकी वार्षिक रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेजनी होगी। इसी तरह परीक्षाओं के दौरान निरंतर बच्चों का मनोवैज्ञानिक सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। प्रार्थना सभाओं और अभिभावक-शिक्षक बैठकों में अभिभावकों से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी साझा की जाए। काउंसलिंग के कई डिजिटल विकल्प मौजूद विद्यार्थी और अभिभावक किसी भी मानसिक समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन (844-844-0632) पर सुबह 8 से रात 8 बजे तक विशेषज्ञों से निशुल्क परामर्श ले सकते हैं। प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 2:30 से 4 बजे तक पीएम ई विद्या चैनल और एनसीईआरटी के यू ट्यूब चैनल पर विशेषज्ञों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर की जाने वाली चर्चा से भी समाधान पा सकते हैं। इसी तरह सोमवार से शुक्रवार शाम 5 से 5:30 बजे तक चलने वाले सहयोग सत्र में तनाव प्रबंधन और पढ़ाई की चुनौतियों पर मार्गदर्शन ले सकते हैं।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रगति का सशक्त आधार : प्राचार्य
आरटीसी कॉलेज दड़दाग के समाजशास्त्र व मानवशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को ‘सामाजिक गतिशीलता में शिक्षा की भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने समाज के समग्र उत्थान और सकारात्मक बदलाव के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सबसे प्रभावी माध्यम बताया। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बालिका शिक्षा की महत्ता पर जोर दिया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. भीम महतो ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक विकास की धुरी है। उन्होंने कहा, “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा वह कुंजी है, जो युवाओं के लिए प्रगति के नए द्वार खोलती है और उन्हें समाज में सम्मानित स्थान दिलाने में सहायक होती है।
कोचिंग सेंटर्स और बड़े शैक्षणिकसंस्थानों की तरह सरकारी स्कूलीबच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भीविशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षानिदेशालय ने इस संबंध में सभीजिलों को दिशा निर्देश जारी किए हैं।इसमें बताया गया है कि बच्चों केमानसिक स्वास्थ्य की पहचान करनेके लिए शिक्षकों को भीमनोवैज्ञानिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दीजाएगी। परीक्षाओं के मद्देनजर शिक्षाविभाग ने जारी निर्देशों में बताया हैकि एनसीईआरटी की मनोदर्पण सेजुड़ी गतिविधियों का व्यापकप्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए।विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकासके लिए केवल किताबी ज्ञान ही नहीं,बल्कि एक स्वस्थ मानसिकवातावरण बनाना जरूरी है। इसकेलिए अभिभावकों के साथ भीलगातार संपर्क में रहने को कहा है।बच्चों के मानसिक दबाव कोसमझने और उनके साथसहानुभूतिपूर्ण व्यवहार के लिए अभिभावकों के लिए भी नियमितरूप से ऑनलाइन तथा ऑफलाइन संवाद कार्यक्रम आयोजित किएजाएंगे। छात्रों का आत्मविश्वासबढ़ाने के लिए खेल, चित्रकला और व्यक्तित्व विकास जैसी गतिविधियोंको बढ़ावा दिया जाएगा।शिक्षकों के साथ गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को वर्ष में कम से कमदो बार मनोवैज्ञानिक प्राथमिकचिकित्सा और चेतावनी संकेतों कीपहचान के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षितकरेंगे। प्रशिक्षित कर्मचारियों कीजिम्मेदारी रहेगी कि वंचित वर्गों,दिव्यांग और मानसिक आघात सेजूझ रहे छात्रों के साथ स्कूल मेंकिसी तरह का भेदभाव न हो।प्रत्येक स्कूल में शिकायतों परतत्काल कार्रवाई के लिए एकआंतरिक समिति होगी। स्कूलों कोवर्ष भर की गतिविधियों, कार्रवाईऔर प्रशिक्षण का रिकॉर्ड रखनाहोगा। इसकी वार्षिक रिपोर्ट शिक्षानिदेशालय को भेजनी होगी।इसी तरह परीक्षाओं के दौराननिरंतर बच्चों का मनोवैज्ञानिकसहयोग करने के निर्देश दिए हैं।प्रार्थना सभाओं औरअभिभावक-शिक्षक बैठकों मेंअभिभावकों से बच्चों के मानसिकस्वास्थ्य की जानकारी साझा कीजाए। साथ ही स्कूल के बोर्ड परहेल्पलाइन नंबर भी लिखने होंगे। उल्लेखनीय है कि शिक्षणसंस्थानों में आत्महत्या के बढ़तेमामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट केआदेश के बाद प्रत्येक जिलों मेंकमेटियां बनाई हैं । सभी संस्थानोंमें उम्मीद गाइडलाइन, मनोदर्पणपहल और राष्ट्रीय आत्महत्यारोकथाम रणनीति के अनुरूप राज्यस्तरीय मानसिक स्वास्थ्य नीतिलागू की जाएगी। इसके अंतर्गतबाल और किशोर मानसिकस्वास्थ्य में प्रशिक्षित परामर्शदाता,मनोवैज्ञानिक नियुक्त होंगे। विद्यार्थी और अभिभावक किसी भी मानसिक समस्या के समाधान के लिएराष्ट्रीय टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन(844-844-0632) पर सुबह 8 से रात8 बजे तक विशेषज्ञों से निशुल्क परामर्शले सकते हैं। प्रत्येक शुक्रवार दोपहर2:30 से 4 बजे तक पीएम ई विद्याचैनल और एनसीईआरटी के यू ट्यूबचैनल पर विशेषज्ञों द्वारा मानसिकस्वास्थ्य पर की जाने वाली चर्चा से भी समाधान पा सकते हैं। इसी तरहसोमवार से शुक्रवार शाम 5 से 5:30 बजे तक चलने वाले सहयोग सत्र मेंतनाव प्रबंधन और पढ़ाई की चुनौतियों पर मार्गदर्शन ले सकते हैं।
3.50 लाख विद्यार्थी हो रहे प्रभावित: हरियाणा मॉडल पर शिक्षक लगाने की उठी मांग विनोद मित्तल | जयपुर राजस्थान के विद्यार्थियों को भविष्य में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए चल रही व्यावसायिक शिक्षा के शिक्षक खुद बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। स्कूलों में संविदा पर लगने वाले इन शिक्षकों को 20 से 22 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। यह मानदेय भी उन्हें कई महीनों से नहीं मिला है। यही नहीं प्रदेश में 4019 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा चल रही है, लेकिन 2081 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। बिना शिक्षक के यहां पढाई कर रहे विद्यार्थियों को का भविष्य भी अंधकारमय है। अब सरकार ने बजट में 500 नए स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू करने की घोषणा की है। जब पहले से जिन स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है, वहां इस शिक्षा का बेहाल है तो नए स्कूलों में शिक्षक कहां से आएंगे। इसको देखते हुए प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षकों ने हरियाणा मॉडल पर यहां शिक्षकों की भर्ती की मांग उठाई है। व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति के अध्यक्ष पवन गर्ग और संरक्षक कमलेश कुमार का कहना है कि राजस्थान में हरियाणा मॉडल लागू करके व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत किया जाए। व्यावसायिक शिक्षकों में जॉब को लेकर असुरक्षा की भावना रहेगी तो इसका असर विद्यार्थियों पर भी पड़ेगा। इसलिए सरकार को राजस्थान में नियमित भर्ती करनी चाहिए। राजस्थान में निजी फर्म के जरिए संविदा पर लगते हैं शिक्षक - यहां स्कूल शिक्षा परिषद शिक्षक लगाने के लिए टेंडर जारी करता है। इसके बाद फर्म के जरिए शिक्षक लगाए जाते हैं। जो पूरी तरह से संविदा पर होते हैं। उनको 20 से 22 हजार रुपए प्रतिमाह फिक्स वेतन दिया जाता है। उन्हें कभी भी नौकरी से हटाया जा सकता है। मानदेय बढ़ोतरी का कोई प्रावधान नहीं है। यहां मातृत्व अवकाश नहीं मिलता है। यहां जॉब सिक्यूरिटी नहीं है। हरियाणा में विभाग खुद करता है शिक्षकों की भर्ती - हरियाणा में विभाग खुद शिक्षकों की भर्ती करता है। वहां वेतन 38 हजार से अधिक मिलता है। शिक्षकों को 60 वर्ष का होने तक जॉब सिक्यूरिटी मिलती है। हर साल वेतन में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी होती है। वहां सरकारी कर्मचारी की तरह अवकाश की सुविधाएं मिलती है और मातृत्व अवकाश भी मिलता है। भर्ती के लिए टेंडर किया पर भ्रष्टाचार की शिकायतों पर निरस्त प्रदेश में 4019 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है। इसमें अलग अलग ट्रेड (विषय) में करीब 3 हजार शिक्षक कार्यरत है। इन स्कूलों में से 2081 स्कूलों में कोई व्यावसायिक शिक्षक नहीं है। क्योंकि पिछले दिनों यहां शिक्षक लगाने के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने जो टेंडर जारी किया था। वह अनियमितता व भ्रष्टाचार की शिकायतों के चलते निरस्त कर दिया गया था। अभी फिर से जारी नहीं हुआ। यहां 9वीं से 12वीं कक्षा तक 3.50 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत है। यहां प्रमुख रूप से हेल्थ केयर, ब्यूटी वैलनेस, इलेक्ट्रिक एंड हार्डवेयर, ऑटोमोटिव, आईटी, एग्रीकल्चर, सिक्यूरिटी, मल्टीमीडिया, ट्यूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग सहित कई ट्रेड की पढ़ाई हो रही है।
राजधानी में एक प्रिंसिपल की सेवा पुस्तिका शिक्षा विभाग के दो कार्यालयों सीबीईओ झोटवाड़ा शहर और सीबीओ जयपुर ईस्ट के बीच फुटबाल बनी हुई है। इस सर्विस बुक में 7 साल से सीबीईओ जयपुर ईस्ट कार्यालय ने एंट्री ही नहीं की। प्रिंसिपल का तबादला जब सीबीईओ जयपुर ईस्ट से सीबीईओ झोटवाड़ा शहर के अधीन स्कूल हुआ तो अधूरी सेवा पुस्तिका के कारण वेतन अटक गया। मामला प्रिंसिपल मोनी रंगवानी का है, जो विधवा महिला है। चार माह से वेतन को तरस रही हैं। अपने वेतन के लिए शिक्षा अधिकारियों के चक्कर काट रही है। मोनी ने अपनी पीड़ा शिक्षा सचिव और निदेशक को भी भेजी है, लेकिन अभी तक उनकी सेवा पुस्तिका को पूर्ण नहीं किया गया है। रंगवानी ने बताया कि मैं एक विधवा महिला हूं और मेरी आय का स्रोत केवल वेतन है। अब वेतन के अभाव में मुझे मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मैंने 1 सितंबर 2018 को श्री जसोदा देवी रेवाचन्द गुरनानी राजकीय सिंधी उच्च माध्यमिक विद्यालय फतेहटीबा में प्रधानाचार्य पद पर कार्यग्रहण किया था। बाद में उनका समायोजन नेताजी सुभाष राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मोती कटला में हुआ, जहां 20 दिसंबर 2023 को कार्यग्रहण किया। यह दोनों स्कूल जयपुर ईस्ट के अधीन आते हैं। मोती कटला से पिछले साल 22 सितंबर 2025 को तबादला कुडली फागी में हो गया। मोती कटला से प्रिंसिपल मोनी कार्यमुक्त तो हो गई, लेकिन कुडली में कार्यग्रहण नहीं किया। इसके बाद 6 जनवरी को जारी हुई सूची में तबादला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मानपुर सड़वा में हो गया। तब से इसी स्कूल में कार्यरत हैं। यह झोटवाड़ा शहर सीबीईओ कार्यालय के अधीन आता है। उन्होंने बताया कि जयपुर ईस्ट से जब मेरी सर्विस बुक झोटवाड़ा शहर कार्यालय गई तो वह अधूरी थी। इसमें 7 साल से कोई एंट्री ही नहीं की गई। सत्र 2018-19 से 2024-25 तक मेरी सेवा पुस्तिका में न तो सेवा सत्यापन हुआ, न कार्यग्रहण, कार्य मुक्ति की प्रविष्टियां दर्ज की गईं और न ही पर्सनल फाइल पूरी की गई, जबकि यह जिम्मेदारी सीबीईओ कार्यालय के अधिकारियों की थी। अधूरी सर्विस बुक के कारण उनका वेतन अटक गया। अब मुझे 4 माह से वेतन नहीं मिला है। इस मामले पर सीबीईओ जयपुर ईस्ट बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि इस पद पर मेरी नियुक्ति 2 महीने पहले ही हुई है। यह पुराना प्रकरण है। इसको हम प्राथमिकता से निपटा रहे हैं।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से की गई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 के दस्तावेज सत्यापन की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग को मिली है। विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। विभाग की ओर से मंडल स्तर पर दस्तावेज सत्यापन का काम किया जाएगा। बोर्ड ने विभाग को दस्तावेज सत्यापन के लिए 1,45,250 अभ्यर्थियों की सूची सौंपी है। शिक्षा विभाग के प्रदेश में 9 मंडल है। ऐसे में प्रत्येक मंडल को अनुमानित 16 हजार अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन करने होंगे। दस्तावेज सत्यापन का काम 9 मार्च से प्रारंभ होगा और 13 अप्रैल तक चलेगा। इन 36 दिनों में 22 दिन सत्यापन का काम होगा। बाकी दिन अवकाश के कारण सत्यापन नहीं होगा। बोर्ड ने 53750 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन किया था। पिछले दिनों इस भर्ती का प्रारंभिक परिणाम जारी किया गया था। इसमें पदों के मुकाबले दो गुणा अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए सूचीबद्ध किया गया था। कई अभ्यर्थियों के समान अंक होने के कारण दस्तावेज सत्यापन के लिए अभ्यर्थियों की संख्या 1.45 लाख तक पहुंच गई। विभाग ने जारी किया टाइम टेबल, 9 मार्च से 13 अप्रैल तक होंगे दस्तावेज सत्यापन माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार 24 फरवरी तक मंडल स्तर पर दस्तावेज सत्यापन करने वाली टीमों का गठन होगा। इसके बाद इन टीमों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिर 7 चरणों में सत्यापन होगा। जरूरत पड़ने पर 8वां चरण होगा। पहले चरण के दस्तावेज सत्यापन 9 से 13 मार्च तक होंगे। दूसरे चरण के 16 से 19 मार्च, तीसरे चरण के 23 से 25 मार्च तक, चौथे चरण के 27 मार्च को, पांचवे चरण के 30 मार्च को, छठा चरण के 1 से 2 अप्रैल तक और सातवें चरण में दस्तावेज सत्यापन 6 से 10 अप्रैल तक व 13 अप्रैल को होंगे। जरुरत पड़ने पर आठवां चरण 15 से 16 अप्रैल तक चलेगा। मंडल स्तर पर बनेगी टीमें; प्रत्येक मंडल को 16 हजार अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन करने होंगे। 30 टीमों का गठन होगा। हर टीम को हर दिन 25 अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन करने होंगे। सभी 9 मंडलों के अभ्यर्थियों की संख्या देखी जाए प्रतिदिन करीब 6750 अभ्यर्थियों के सत्यापन होंगे।
भाजपा बताए, शिक्षा मंत्री आशीष सूद का एपीजे स्कूल से क्या रिश्ता? सौरभ भारद्वाज
सोमवार देर रात तक बच्चों का एडमिट कार्ड लेकर शिक्षा मंत्री के घर क्यों बैठे थे एपीजे स्कूल के प्रिंसिपल?- सौरभ भारद्वाज
इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल शिक्षा और सेवाओं के विस्तार से तंदुरुस्त हुआ प्रदेश
Uttar Pradesh Health Services: प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में पिछले नौ वर्षों के दौरान व्यापक और संरचनात्मक परिवर्तन आया है। योगी सरकार ने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने, मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने और ग्रामीण क्षेत्रों तक ...
प्रयागराज के यूपीएस कन्या हनुमानगंज में मंगलवार को शिक्षक संकुल बैठक का आयोजन किया गया। संकुल के अंतर्गत आने वाले सभी विद्यालयों के शिक्षक इस बैठक में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद बालिकाओं ने मैं बेटी हूँ गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी, जिसकी सभी ने सराहना की। बैठक में आए सभी प्रतिभागियों का स्वागत इंचार्ज प्रधानाध्यापक हीरालाल कुशवाहा ने किया। बैठक के प्रमुख एजेंडा पर विस्तृत चर्चा वंदना श्रीवास्तव ने की। उन्होंने शैक्षिक गुणवत्ता, नवाचार गतिविधियों और विद्यालयों में बच्चों की सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। इसके पश्चात इंद्रभान सिंह, पूनम, कंचन, निहारिका, सुधा, संजीव और रमेश गुप्ता ने अपने-अपने विद्यालयों की प्रमुख उपलब्धियों एवं शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने नामांकन वृद्धि, बच्चों की उपस्थिति, नवाचार शिक्षण पद्धतियों और सह-शैक्षिक कार्यक्रमों की प्रगति पर प्रकाश डाला। बैठक में कम्पोजिट विद्यालय हनुमानगंज, प्राथमिक विद्यालय यरना, प्राथमिक विद्यालय बिकापुर, प्राथमिक विद्यालय जुनैदपुर, प्राथमिक विद्यालय लोढ़ा तथा यूपीएस कन्या हनुमानगंज के शिक्षक उपस्थित रहे। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री कमला सिंह ने भी अपने केंद्र पर संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। बैठक में निर्णय लिया गया कि आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए विशेष शैक्षिक गतिविधियां संचालित की जाएं, जिससे उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा सके। सकारात्मक और सार्थक चर्चा के साथ बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
यूपी के प्राइमरी स्कूलों में नौकरी की आस लगाए 20 से 25 लाख अभ्यर्थियों को तगड़ा झटका लगा है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विधानसभा में मंगलवार को कहा, सरकार बेसिक शिक्षा परिषद में नए शिक्षकों की भर्ती नहीं करेगी। मंत्री संदीप सिंह ने यह जवाब सपा विधायक अनिल प्रधान के सवाल पर लिखित में दिया। अनिल प्रधान ने पूछा था कि क्या सरकार बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती करेगी। मंत्री ने कहा, बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में सहायक अध्यापक के 46944 पद खाली हैं। सरकार 2022 के बाद TET पास अभ्यर्थियों के लिए शिक्षक भर्ती के नए पद सृजित करने पर कोई विचार नहीं करेगी। परिषदीय विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक और शिक्षा मित्र कार्यरत हैं। यूपी में हर महीने 200 से अधिक शिक्षक रिटायर हो जाते हैं। हर साल सवा दो लाख बीएड और दो लाख अभ्यर्थी बीटीसी उत्तीर्ण करते हैं। अब अगर सरकार भर्ती नहीं करेगी तो इन अभ्यर्थियों के सामने निजी स्कूल में ही काम करने या शिक्षण के अलावा कोई अन्य कार्य करने का ही विकल्प है। मंत्री का जवाब लिखित में पढ़िए… सपा विधायक ने कहा- यूपी के बच्चे दूसरे राज्यों में जा रहेसपा विधायक अनिल प्रधान ने मंगलवार को विधानसभा में प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती का मुद्दा उठाया। कहा, मैंने जब भी बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती का मुद्दा उठाया, हर बार मंत्री जी ने अनुपात-समानुपात बराबर होने की बात कह दी। 20 से 25 लाख युवा डीएलएड पास करके शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे हैं, यहां भर्ती नहीं निकल रही, इसलिए वह दूसरे राज्यों में भर्ती परीक्षा देने जा रहे हैं। अनिल प्रधान ने शिक्षा मंत्री से सवाल किया कि कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि जो टीचर TET पास नहीं हैं, उनके लिए TET पास करना अनिवार्य है। जबकि हमारे यहां बहुत सारे पुराने टीचर हैं। क्या इस विषय पर सरकार विधिक राय लेकर अध्यापकों को राहत दिलाने काम करेंगे या नहीं। इसके अलावा शिक्षा मित्र व अनुदेशक की सैलरी बढ़ाने काम करेंगे या नहीं? इसके अतिरिक्त नए शिक्षकों की भर्ती होगी या नहीं? भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं… शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाने का मामला विचाराधीनमंत्री संदीप सिंह ने सदन में स्पष्ट किया कि विभाग में शिक्षामित्र और अनुदेशक कार्यरत हैं। जिससे शिक्षक-छात्र अनुपात बना हुआ है। विपक्षी सदस्य ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए कम से कम ₹25,000 मानदेय करने की मांग उठाई। इसपर मंत्री ने जवाब दिया कि सरकार ने हाल ही में शिक्षामित्रों के लिए 5 लाख की कैशलेस चिकित्सा सुविधा और मनचाहे स्थान पर तबादले (समायोजन) की व्यवस्था लागू की है। मानदेय बढ़ाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि यह विषय फिलहाल मंत्रिपरिषद और मुख्यमंत्री के विचाराधीन है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार परिषदीय विद्यालयों को मर्ज या बंद कर रही है। मंत्री ने कहा, एक भी परिषदीय विद्यालय बंद नहीं किया गया है। पुराने शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दाखिल कर चुकी है, ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके। 8 साल से प्रदेश में भर्ती नहीं निकलीयूपी सरकार ने 2019 में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती कराई थी। इनमें 5,886 अभ्यर्थियों को कोर्ट के आदेश पर 2022 में नियुक्ति दी गई है। इसके बाद से अब तक कोई भर्ती नहीं आई है। 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हाईकोर्ट ने भर्ती की मेरिट नए सिरे से जारी करने का आदेश दिया था। 2 से 4 जुलाई के बीच TET एग्जाम कराएगी सरकारयूपी सरकार 2-4 जुलाई को TET परीक्षा का आयोजन करने जा रही है। इससे पहले टेट 23 जनवरी, 2022 को TET परीक्षा हुई थी। यूपी टीईटी (UPTET) 2021-22 परीक्षा में कुल 6,60,592 उम्मीदवार पास हुए थे। प्राथमिक स्तर पर 4,43,598 (लगभग 38.67%) और उच्च प्राथमिक स्तर पर 2,16,994 (28.33%) परीक्षार्थी सफल हुए। कुल मिलाकर, परीक्षा में 34.53% उम्मीदवार पास हुए। यूपी में स्कूल और टीचरों की संख्या क्या है, जानिएयूपी में करीब 1.32 लाख परिषदीय विद्यालय (कक्षा- 8 तक) हैं। इनमें 4.34 लाख सहायक अध्यापक, 1.42 लाख शिक्षामित्र और 24 हजार से अधिक अनुदेशक कार्यरत हैं। वहीं, 1.49 करोड़ छात्र हैं। छात्रों की संख्या के लिहाज से प्राइमरी स्कूलों में औसत से अधिक शिक्षक हैं। इनमें शिक्षामित्र और अनुदेशकों की संख्या जोड़ने पर तो शिक्षकों की संख्या बहुत अधिक हो जाती है। मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए छात्र शिक्षक औसत निर्धारित है। प्राथमिक विद्यालय में 30 स्टूडेंट पर एक टीचर और उच्च प्राथमिक विद्यालय में 35 स्टूडेंट पर एक टीचर होना चाहिए। -------------------- यह खबर भी पढ़िए:- 'टीचर TET पास करें, वरना नौकरी से बाहर होंगे':हरियाणा सरकार के आदेश के बाद यूपी के 1.86 लाख टीचर टेंशन में हरियाणा सरकार के आदेश ने यूपी के बिना TET पास 1.86 लाख शिक्षकों की टेंशन बढ़ा दी है। हरियाणा में राज्य के टीचर्स को मार्च 2027 तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET) पास करना होगा। ऐसा आदेश 16 फरवरी को वहां की सरकार ने दिया। कहा गया है कि परीक्षा पास न करने वालों को नौकरी से बाहर किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर…
पंजाब के लुधियाना में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने आज माछीवाड़ा क्षेत्र के विभिन्न सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। शिक्षा मंत्री की चेकिंग का पता चलते ही अन्य सरकारी स्कूलों में भी हड़कंप मचा रहा। उन्होंने स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और सुविधाओं का जायजा लिया। हरजोत मंत्री बैंस ने बताया कि माछीवाड़ा से स्कूलों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। मीडिया ने भी इस मुद्दे को उठाया था और कई अभिभावकों ने भी स्कूलों के निरीक्षण की मांग की थी। इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर वे स्वयं स्थिति का आकलन करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान मंत्री बैंस ने पाया कि कुछ स्कूलों में बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के मामले में अच्छा काम हुआ है। हालांकि, उन्होंने कुछ और सुधारों की आवश्यकता भी महसूस की, जिन्हें नोट कर लिया गया है। कुछ स्कूलों में शिक्षकों की कमी सामने आई हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि कुछ स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी सामने आई है। मंत्री ने कहा कि 'बेट एरिया' (नदी के किनारे का क्षेत्र) होने के कारण शिक्षक यहां रहना पसंद नहीं करते और उनका तबादला हो जाता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस समस्या का समाधान जल्द ही किया जाएगा। मंत्री हरजोत बैंस ने माछीवाड़ा के निवासियों को भरोसा दिलाया कि क्षेत्र के स्कूलों में जल्द ही गुणात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
How to apply for RBI Assistant 2026 : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक और नई भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया है। आरबीआई ने 650 पदों पर असिस्टेंट की रिक्तियां निकाली हैं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट opportunities.rbi.org.in पर भर्ती विज्ञापन जारी हो ...
जमुई, सिकंदरा प्रखंड के मध्य विद्यालय धरमपुर के छात्र-छात्राओं ने सोमवार को शिक्षा के अधिकार की मांग को लेकर एक अनोखा प्रदर्शन किया। दर्जनों बच्चे अपने अभिभावकों, ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ स्कूल परिसर से पैदल मार्च पर निकले और जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने जर्जर स्कूल भवन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। लगभग सात घंटे की लंबी पदयात्रा के बाद बच्चे दोपहर करीब 1 बजे जमुई समाहरणालय स्थित डीएम कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने जिलाधिकारी श्री नवीन को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं। मार्च के दौरान उनके हाथों में तख्तियां थीं और वे हमें ठेकेदार नहीं, हमें शिक्षा चाहिए तथा पढ़ेंगे तो तभी बढ़ेंगे जैसे नारे लगा रहे थे। 2 कमरों में 300 बच्चों की चलती है क्लास ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय में लगभग 300 बच्चों का नामांकन है, लेकिन भवन की स्थिति अत्यंत जर्जर है। स्कूल में कुल तीन कमरे हैं, जिनमें से एक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और अब पढ़ाई के लायक नहीं है। शेष दो कमरों में से एक में बच्चों की कक्षाएं संचालित होती हैं, जिसकी छत और दीवारों से अक्सर कंक्रीट के टुकड़े गिरते रहते हैं। इससे हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। तीसरा कमरा प्रधानाध्यापक के कार्यालय के रूप में उपयोग होता है, जहां महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे जाते हैं। सड़क किनारे बैठाकर होती है पढ़ाई अभिभावकों ने बताया कि बच्चों को अक्सर खुले आसमान के नीचे या सड़क किनारे बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। अभिभावक राकेश कुमार ने कहा कि बच्चे खुद पढ़ना चाहते हैं, लेकिन व्यवस्था उनकी राह में बाधा बन रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इससे पहले भी जमुई के सांसद अरुण भारती, डीईओ और डीएम को इस संबंध में आवेदन दिए जा चुके हैं। सांसद अरुण भारती ने स्थल का निरीक्षण भी किया था और जल्द ही भवन निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। एक महीने तक बच्चों को स्कूल भेजने से रोका उसने बताया कि दिसंबर माह में ग्रामीणों ने बैठक कर एक महीने तक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से रोक दिया था उसके बावजूद भी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई । 65 वर्षीय गुड़िया कुमारी भावुक होकर बोलीं कि वे अपने पोता-पोती के लिए सुरक्षित स्कूल चाहती हैं। गांव के लोगों ने वर्षों से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई, पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। वहीं राजाराम और भूपेश कुमार ने प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जिले में मंत्री रहे हैं, तब भी बच्चों को सुरक्षित भवन न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। आखिरकार बच्चों और अभिभावकों ने प्रशासन से जल्द पक्का विद्यालय भवन निर्माण की मांग की। उनका साफ संदेश है—घोषणाएं नहीं, मजबूत स्कूल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य की असली नींव है।
तमिलनाडु अंतरिम बजट: शिक्षा, कल्याण और संस्कृति पर जोर
तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने मंगलवार को फोर्ट सेंट जॉर्ज स्थित विधानसभा में राज्य का 2026-27 का अंतरिम बजट पेश किया
नमस्कार, कल की बड़ी खबर राजस्थान की केमिकल फैक्ट्री में हुए धमाके से जुड़ी रही। हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। दूसरी बड़ी खबर सुप्रीम कोर्ट के बयान को लेकर रही। अदालत ने शादी से पहले सेक्स पर हैरानी जताई। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात करेंगे। मैक्रों एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की याचिका पर सुनवाई करेगा। कल की बड़ी खबरें... 1. राजस्थान में अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 8 लोग जिंदा जले; 4 गंभीर झुलसे राजस्थान के भिवाड़ी की केमिकल फैक्ट्री में तेज धमाके में 8 मजदूर जिंदा जल गए। जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें दिल्ली एम्स रेफर किया गया है। इस फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। मौके से बारूद, पटाखे और पैकिंग के डिब्बे मिले हैं। फैक्ट्री मैनेजर से पुलिस पूछताछ कर रही है। पॉलीथीन में ले जाने पड़े शव: कई शवों के कंकाल भर बचे थे। बॉडी पाट्र्स के टुकड़े बिखरे मिले। रेस्क्यू टीम ने इन टुकड़ों को पॉलीथीन में इकट्ठा किया। फैक्ट्री मैनेजर को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। वहीं, फैक्ट्री मालिक समेत दो लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पूरी खबर पढ़ें... 2. मणिशंकर अय्यर बोले- कांग्रेस पार्टी मूर्ख है, मैं गांधीवादी-नेहरूवादी हूं, राहुलवादी नहीं कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने अपनी ही पार्टी को मूर्ख बताया। उन्होंने कहा कि कोई पार्टी इतनी मूर्ख कैसे हो सकती है कि पवन खेड़ा को प्रवक्ता बना दे। पवन खेड़ा वही दोहराते हैं, जो जयराम रमेश उन्हें बताते हैं। उन्होंने आगे कहा कि राहुल भूल गए हैं कि मैं पार्टी का मेंबर हूं। मैं गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं हूं। खेड़ा ने कहा- कांग्रेस से कोई संबंध नहीं: अय्यर बोले- थरूर विदेश मंत्री बनना चाहते हैं: कांग्रेस नेता ने कहा कि शशि थरूर एंटी-पाकिस्तान हैं। वे अगले विदेश मंत्री बनना चाहते हैं। हालांकि, अय्यर के बयान के बाद पवन खेड़ा ने X पर लिखा- मणिशंकर अय्यर का पिछले कुछ सालों से कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है। वे अपनी व्यक्तिगत क्षमता से बोलते और लिखते हैं। पूरी खबर पढ़ें… 3. यूपी में 1.56 लाख शिक्षामित्र-अनुदेशकों की सैलरी बढ़ेगी, सीएम योगी ने किया ऐलान यूपी विधान परिषद में सीएम योगी ने कहा- शिक्षा मित्र, अनुदेशक, आंगनवाड़ी वर्कर्स और आशा कार्यकत्रियों की सैलरी हम बढ़ाएंगे। निराश्रित महिलाओं, दिव्यांगजनों की पेंशन भी बढ़ाने जा रहे हैं। कोई भी शिक्षक हो, हम लोगों ने इनको 5 लाख तक की कैशलेस स्वास्थ्य की सुविधा उपलब्ध करवाई है। 1 अप्रैल से यह लागू भी हो जाएगा। यूपी में 1.47 लाख शिक्षामित्र और 28 हजार से अधिक अनुदेशक: सरकार करीब 9 साल बाद मानदेय बढ़ाने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, शिक्षामित्र और अनुदेशक के मानदेय में 2 हजार रुपए महीने की बढ़ोतरी हो सकती है। भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र में शिक्षामित्रों की समस्या का समाधान करने का वादा किया था। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद से समायोजन रद्द हो गया था। पूरी खबर पढ़ें… 4. सुप्रीम कोर्ट बोला- शादी से पहले सेक्स समझ से परे, जब तक शादी नहीं, तब तक लड़का-लड़की अजनबी सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान शादी से पहले सेक्स पर हैरानी जताई। कोर्ट ने कहा कि हम यह नहीं समझ पाते कि एक लड़का और लड़की शादी से पहले शारीरिक संबंध कैसे बना सकते हैं। हो सकता है हम पुराने ख्यालों के हों लेकिन शादी से पहले लड़का और लड़की अजनबी होते हैं। आपको बहुत सावधान रहना चाहिए, किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए। क्या है पूरा मामला: जस्टिस नागरत्ना के साथ जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर एक महिला से शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का आरोप है। वहीं, व्यक्ति पर पहले से शादीशुदा होने और बाद में दूसरी महिला से शादी करने का आरोप भी है। पूरी खबर पढ़ें… 5. भारतीय लड़की भी एपस्टीन का शिकार हुई, अमेरिकी अधिकारियों ने मुआवजा देने के लिए ढूंढा एक भारतीय लड़की भी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का शिकार हुई थी। एपस्टीन फाइल्स के एक मेल से यह खुलासा हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने पीड़ित लड़की को ढूढने की कोशिश की थी, ताकि उसे मुआवजा दिया जा सके। रिलीज दस्तावेजों में इस मेल का टाइटल ‘एपस्टीन विक्टिम्स’ है, हालांकि अधिकारियों के नाम और कुछ जानकारियां छुपा दी गई हैं। एपस्टीन फाइल्स के बारे में पढ़िए: जेफ्री एपस्टीन नाबालिग लड़कियों की तस्करी करता था और उनका यौन शोषण करता था। वो पार्टियां करता था और इसमें बड़े-बड़े नेताओं और सेलिब्रेटीज को बुलाता था, जहां नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण होता था। इसमें ट्रम्प, बिल गेट्स समेत दुनियाभर के कई बड़े नेताओं के नाम आए हैं। 2019 में एपस्टीन की जेल में मौत हो गई थी। लेकिन उसकी फाइल्स अब खुल रही हैं। पूरी खबर पढ़ें… 6. थोक महंगाई 10 महीने में सबसे ज्यादा, जनवरी में बढ़कर 1.81% पर पहुंची; खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं थोक महंगाई 10 महीने में सबसे ज्यादा रिकॉर्ड की गई है। जनवरी में 1.81% पर दर्ज हुई, जो दिसंबर में 0.83% थी। रोजमर्रा के सामान और खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं, जिससे प्राइमरी आर्टिकल्स 2.21% और फूड इंडेक्स 1.55% पर पहुंचा। मैन्युफैक्चरिंग महंगाई 2.86% रही, जबकि फ्यूल और पावर में गिरावट जारी रही। रिटेल महंगाई 8 महीनों के हाई पर: जनवरी में रिटेल महंगाई पिछले महीने के मुकाबले बढ़कर 2.75% पर पहुंच गई है। दिसंबर में ये 1.33% पर थी। 8 महीनों में सबसे ज्यादा है। मई 2025 में महंगाई 2.82% पर पहुंच गई थी। पूरी खबर पढ़ें… 7. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के 7 अधिकारी सस्पेंड किए, SIR में लापरवाही-पावर के गलत उपयोग के आरोप चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 7 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। सभी पर SIR में गंभीर लापरवाही और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप है। आयोग ने कहा है कि वोटर लिस्ट जुड़ा काम बहुत संवेदनशील है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या अधिकारों के दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। TMC और भाजपा आमने-सामने: TMC का कहना है कि निर्वाचन आयोग केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है। पार्टी ने कहा कि बिना पारदर्शी जांच के अधिकारियों को निलंबित करना राज्य प्रशासन को डराने की कोशिश है। वहीं, भाजपा ने कहा कि पहली बार निर्वाचन आयोग ने सीधे निलंबन की कार्रवाई की है और आगे जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है। पूरी खबर पढ़ें… 8. महाराष्ट्र में मुस्लिम विधायक शिवरात्रि पर मंदिर पहुंचे, दावा- उनके जाने के बाद शिव मंदिर में गोमूत्र छिड़ककर शुद्धिकरण किया गया महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार के महाशिवरात्रि पर मंदिर दर्शन को लेकर विवाद हो गया। दावा किया जा रहा है कि सत्तार के दर्शन के बाद कुछ युवकों ने मंदिर परिसर में गौमूत्र छिड़ककर शुद्धिकरण किया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: युवकों का गौमूत्र छिड़कने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। युवकों का कहना है कि सत्तार मांसाहारी भोजन करते हैं। उनके अनुसार, महाशिवरात्रि जैसे पवित्र दिन ऐसे व्यक्ति का मंदिर में प्रवेश उचित नहीं था। हालांकि, इस घटना पर अब्दुल सत्तार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पूरी खबर पढ़ें… 9. PM मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे सस्पेंड PCS अफसर, देवरिया में कहा- ये देश में सिर्फ हिंदू-मुस्लिम करा रहे बरेली के सस्पेंड सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का बड़ा बयान सामने आया है। देवरिया में उन्होंने कहा- प्रधानमंत्री मोदी 2029 से पहले इस्तीफा देंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ और मोदी 2029 में वाराणसी से चुनाव लड़े, तो मैं उनके खिलाफ चुनाव लड़ूंगा और उन्हें हराऊंगा। ये लोग अयोध्या में बेइज्जत होकर बुरी तरह हारे थे। आने वाले समय में काशी और मथुरा में भी हारने वाले हैं। कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री: ब्राह्मण वर्ग से आने वाले अलंकार अग्निहोत्री 2019 में PCS अफसर बने थे। उनकी 15वीं रैंक आई थी। अलंकार अपने ऑफिस में भगवान बजरंगबली की तस्वीर लगाकर चर्चा में आए थे। उस समय भीम आर्मी ने कलेक्ट्रेट में हंगामा भी किया था। इस दौरान अफसर से नोकझोंक भी हुई थी। पूरी खबर पढ़ें… आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… बॉलीवुड: रोहित शेट्टी फायरिंग केस में हरियाणा से 4 आरोपी गिरफ्तार: मुख्य शूटर हरि बॉक्सर और आरजू के संपर्क में था; अब तक 11 अरेस्ट (पूरी खबर पढ़ें) राजस्थान: ऑपरेशन सिंदूर की तर्ज पर होगी बमबारी: बॉर्डर इलाकों में पहली बार आसमान में बाज की तरह हमला करने वाला एयरक्राफ्ट दिखेगा (पूरी खबर पढ़ें) नेशनल: गुजरात के 32 स्कूलों में बम की धमकी: ईमेल में लिखा- बस को उड़ा देंगे, हिंदुस्तान टुकड़ों में बंट जाएगा; पैरेंट्स बच्चे लेकर लौटे (पूरी खबर पढ़ें) स्पोर्ट्स: पाकिस्तान की हार पर सहवाग बोले- फुल कंबल कुटाई: दिल्ली पुलिस ने लिखा- गलत जगह यू-टर्न लोगे तो यूं ही मुंह की खाओगे (पूरी खबर पढ़ें) नेशनल: ईशान किशन की लव स्टोरी परिवार के सामने कैसे आई:6 साल डेटिंग; दादा ने रखी शादी की शर्त, कहा- इंटरकास्ट मैरिज से ऐतराज नहीं (पूरी खबर पढ़ें) बॉलीवुड: राजपाल यादव को हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत:1.5 करोड़ रुपए डिमांड ड्राफ्ट से जमा करने के बाद मिली राहत, कोर्ट की सख्ती के बीच आदेश (पूरी खबर पढ़ें) बॉलीवुड: दावा- रश्मिका मंदाना-विजय देवरकोंडा 26 फरवरी को करेंगे शादी:इंटिमेट वेडिंग की तैयारी शुरू, ऑफिशियल ऐलान का फैंस को इंतजार (पूरी खबर पढ़ें) नेशनल: हिमंता शूटिंग वीडियो मामला, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार:कहा- चुनाव से पहले कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ट्रेंड बन गया है, इसे प्लेग्राउंड मत बनाइए (पूरी खबर पढ़ें) इंटरनेशनल: अमेरिकी राजदूत इंडियन आर्मी के कमांड ऑफिस जाएंगे: यूबीटी सांसद ने सवाल उठाए, लिखा- भारत के फैसले अमेरिका से प्रभावित होते हैं, ये उसका उदाहरण (पूरी खबर पढ़ें) नेशनल: दिल्ली ब्लास्ट, डॉक्टरों ने 'अंसार अंतरिम' संगठन बनाया था:2016 में कट्टरपंथी विचारधारा अपनाई, वाइट कॉलर मॉड्यूल का मकसद अटैक करना (पूरी खबर पढ़ें) नेशनल: भुवनेश्वर में छत पर धमाका, CCTV में घटना कैद:बदला लेने के लिए बम बना रहा था परिवार; 4 लोग बुरी तरह झुलसे, दो की मौत (पूरी खबर पढ़ें) नेशनल: राजनाथ बोले- भारतीय सेना भगवान शंकर से प्रेरणा लेती है:लोगों की मदद भी करती है और जरूरत पर ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाई भी (पूरी खबर पढ़ें) ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... गुजरात में शादी में नोटों की बारिश, लोग पैसों के लिए इमारतों से कूदे गुजरात के मेहसाना में भाजपा महिला सदस्य के भतीजे की शादी में लाखों रुपये के नोट हवा में उछाले गए। जिससे वहां हंगामा हो गया और लोग उड़ते हुए नोटों को पकड़ने के लिए गलियारों और ऊंची इमारतों से कूदने लगे। फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… आज का एक्सप्लेनर: क्या 1 लाख तक गिर सकता है सोना, रूस ने अमेरिका को ऐसा क्या ऑफर दिया, जिससे भारत में सस्ता होगा गोल्ड मंडे मेगा स्टोरी: 114 राफेल की डील क्यों जरूरी: एयरफोर्स के पास 13 स्क्वाड्रन कम, आगे और घटेंगे; पाकिस्तान-चीन की एयर पावर कितनी मजबूत बांग्लादेश से भास्कर: ‘भारत को बांग्लादेशी हिंदुओं की कोई फिक्र नहीं‘: BNP के हिंदू सांसद बोले- हसीना राज में टॉर्चर हुए, तब इंडिया ने कुछ नहीं कहा फिजिकल हेल्थ- क्या अचानक झड़ रहे हैं बाल: हो सकता है एलोपेशिया, जानें क्या है ये ऑटोइम्यून बीमारी, क्या है इसका इलाज ईशान किशन की लव स्टोरी परिवार के सामने कैसे आई: 6 साल डेटिंग; दादा ने रखी शादी की शर्त, कहा- इंटरकास्ट मैरिज से ऐतराज नहीं करेंट अफेयर्स करेंट अफेयर्स से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए यहां क्लिक करें... ⏳आज के दिन का इतिहास बाजार का हाल ️ मौसम का मिजाज कर्क राशि वालों को रुका पैसा मिल सकता है। बिजनेस के लिहाज से भी अनुकूल दिन है। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में स्पष्ट किया है कि कंप्यूटर अनुदेशक कैडर में बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक एवं वरिष्ठ कंप्यूटर अनुदेशक के नवीन पदों के सृजन का फिलहाल कोई विचार नहीं है। वहीं, कंप्यूटर विज्ञान विषय को कक्षा 6 से 10 तक न तो अनिवार्य विषय घोषित किया जाएगा न ही मार्कशीट में इस विषय के अंकों को शामिल करेंगे। सीबीएसई की तर्ज पर मार्कशीट में सम्मिलित करने का कोई भी निर्णय सरकार या विभाग की ओर से नहीं लिया गया है। न ही कोई ऐसा मामला प्रक्रियाधीन है। शिक्षा विभाग ने एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी है। सरकार ने कहा कि वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा विभाग अंतर्गत 9862 बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक पदनाम को कंप्यूटर शिक्षक ग्रेड द्वितीय एवं 1182 वरिष्ठ कंप्यूटर अनुदेशक को व्याख्याता कंप्यूटर शिक्षा के नवीन पद सृजित कर समायोजित करने का कोई विचार नहीं है। इन पदों के पदीय दायित्व में कक्षा एक से 12 तक विद्यार्थियों को कंप्यूटर संबंधित विषयवस्तु का शिक्षण सम्मिलित है। लेकिन इस विषय का शिक्षण तकनीकी प्रकृति का है। यही वजह है कि इन्हें शिक्षक के स्थान पर अनुदेशक पदनाम दिया गया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि कंप्यूटर विषय में योग्यताधारी आशार्थियों को इसी कारण बीएड पाठ्यक्रम के लिए पात्र नहीं माना जाता है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से वर्ष 2001 से कक्षा 9 एवं 10 में कंप्यूटर विषय पढ़ाया जा रहा है। परीक्षा के बाद मार्कशीट में कंप्यूटर के अंकों को इंद्राज किया जाता है। लेकिन विद्यार्थी के श्रेणी निर्धारण में कंप्यूटर के अंकों को सम्मिलित नहीं किया है। इन दोनों कक्षाओं में यह एच्छिक विषय के रुप में संचालित है। स्टाफिंग पैटर्न के माध्यम से कैडर विस्तार राज्य सरकार ने लिखित उत्तर में बताया है कि वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा विभाग में स्टाफिंग पैटर्न के माध्यम से कैडर विस्तार की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जिसमें बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक एवं वरिष्ठ कंप्यूटर अनुदेशक के पदीय दायित्वों का समामेश भी किया गया है। लेकिन विभाग स्तर पर कंप्यूटर अनुदेशक कैडर पुनर्गठन एवं पदोन्नति लाभ दिए जाने का कोई भी प्रस्ताव न विचाराधीन है न ही कोई प्रक्रियाधीन।
ये सभी सेवानिवृत्त लेखा अधिकारी उसी प्रारंभिक-माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में तय राशि में तैनात किए गए हैं, जहां पहले से सरकार ने 30 लेखा विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों की फौज तैनात की है। ये वही विभाग हैं, जहां करीब 41,178 स्कूल, 83,783 कक्षाएं और 16,765 शौचालय जर्जर स्थिति में हैं। 20 हजार करोड़ रुपए का बजट चाहिए, मगर सरकार के पास बजट नहीं है। बीते बजट में सिर्फ 500 करोड़ रुपए ही दिए गए। उसी निदेशालय में लेखा शाखाओं में 30 नियमित कार्मिक लगे होने के बाद भी सिर्फ सलाह लेने-देने के लिए 3 लाख 15 हजार 700 रुपए प्रति माह ऐसे अधिकारियों को दिए जा रहे हैं, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं। हैरानी की बात ये है कि निदेशालय में ही इन सेवानिवृत्त लेखाधिकारियों के समकक्ष कार्मिक हैं, फिर भी सिर्फ सलाह लेने के लिए ये आदेश जारी किए गए। निदेशालय से लेकर जयपुर सचिवालय तक ये बात चर्चा में है कि आखिर शिक्षा विभाग ऐसा क्या काम करता है, जिसके लिए उसे इतने सलाहकारों की जरूरत है। इन लेखाधिकारियों की ताकत ऐसी कि इनके सामने यहां नियमित काम करने वाले उनके समकक्ष अधिकारी खुद को बौना समझते हैं, क्योंकि सेवानिवृत्त के बाद उनका वापस सलाहकार बनना उनका रसूख बढ़ा रहा है और उसी रसूख के आगे सारे नतमस्तक भी हो गए हैं। नियम कहते हैं कि सेवानिवृत्त कार्मिकों को पुनर्नियुक्ति देने पर आमतौर पर “अंतिम आहरित मूल वेतन में से मूल पेंशन को घटाकर” शेष राशि का भुगतान किया जाता है। कुछ मामलों में यह अंतिम मूल वेतन का लगभग 40% या समेकित पारिश्रमिक के रूप में भी निर्धारित किया जा सकता है। इन नियुक्त किए गए ज्यादातर लोगों को मूल वेतन के 50 प्रतिशत से ज्यादा राशि मिल रही है। ये हैं चार सलाहकार… ऐसे हुई इनकी नियुक्ति ओम कुमार थानवी : 2 सितंबर 2024 को आदेश जारी किया कि 25-7-2024 के क्रम में इस विभाग के समसंख्यक पत्र 23-8-2024 व एसपीपीपी पोर्टल पर प्रकाशित एकल स्रोत निविदा पर सहमति होने के बाद थानवी, सेवानिवृत्त लेखाधिकारी, को लेखा कार्यों के संपादन के लिए कार्यग्रहण की तिथि से 24 माह की अवधि तक सलाहकार के रूप में 67,500 रुपए प्रति माह की दर से लगाया जाता है। सेवानिवृत्त के समय इनका अंतिम वेतन 90,000 रुपए था। नूतन कुमार हर्ष : 2 सितंबर 2024 को आदेश जारी किया कि 25-7-2024 के क्रम में इस विभाग के समसंख्यक पत्र 23-8-2024 व एसपीपीपी पोर्टल पर प्रकाशित एकल स्रोत निविदा पर सहमति होने के बाद हर्ष, सेवानिवृत्त लेखाधिकारी, को लेखा कार्यों के संपादन के लिए कार्यग्रहण की तिथि से 24 माह की अवधि तक सलाहकार के रूप में 63,700 रुपए प्रति माह की दर से लगाया जाता है। सेवानिवृत्त के समय इनका अंतिम वेतन 84,900 रुपए था। सुरेन्द्र कुमार पुरोहित : एक ओर आदेश जारी किया कि 25-7-2024 के क्रम में इस विभाग के समसंख्यक पत्र 5-9-2024 व एसपीपीपी पोर्टल पर प्रकाशित एकल स्रोत निविदा पर सहमति होने के बाद पुरोहित, सेवानिवृत्त लेखाधिकारी, को लेखा कार्यों के संपादन के लिए कार्यग्रहण की तिथि से 24 माह की अवधि तक सलाहकार के रूप में 56,600 रुपए प्रति माह की दर से लगाया जाता है। सेवानिवृत्त के समय इनका अंतिम वेतन 75,400 रुपए था। संजय धवन : एक अलग से आदेश जारी किया कि 14-10-2025 के क्रम में इस विभाग के समसंख्यक पत्र 14-11-2025 पर सहमति प्राप्त होने के उपरांत संजय धवन, सेवानिवृत्त वित्तीय सलाहकार, को लेखा कार्यों के संपादन के लिए कार्यग्रहण की तिथि से एक वर्ष की अवधि तक सलाहकार के रूप में 1,26,900 रुपए प्रति माह की दर से लगाया जाता है। सेवानिवृत्त के समय इनका अंतिम वेतन 1 लाख 60 हजार 600 रुपए था। भास्कर इनसाइट- मंत्री-सचिव के बीच सब कुछ ठीक नहीं शिक्षा विभाग में ये चर्चा अब आम हो गई है कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और सचिव कृष्ण कुणाल के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। इसके उदाहरण के रूप में लोग तर्क दे रहे हैं कि प्रिंसिपल और लेक्चरर ट्रांसफर सूची मंत्री के यहां से सीएमओ पहुंचने के बाद भी दो-दो महीने तक सूची अटकी रही। खबरनवीस बताते हैं कि 14 साल पहले जब कुणाल भरतपुर कलेक्टर थे, तब से भजनलाल शर्मा से उनके रिश्ते मजबूत हो गए थे। कहा जाता है कि हर ट्रांसफर सूची में जैसा मंत्री चाहते हैं, वह होने नहीं दिया जा रहा, क्योंकि सचिव को सीएमओ से ताकत मिली है। वही स्थिति अब संशोधन सूची में भी बन रही है। मंत्री के पास आरएसएस का दबाव है कि उनके कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी गई, इसलिए संशोधन सूची निकाली जाए, मगर सचिव इसके पक्ष में नहीं हैं। मंत्री-सचिव के बीच सब कुछ ठीक न होने का असर डायरेक्टरेट पर भी हो रहा है। मंत्री के आदेश यहां नहीं माने जा रहे। “ये मामला गंभीर है। मैंने पहले भी इस संबंध में आदेश दिए थे। चलिए, मैं इनकी रिपोर्ट मंगाता हूं और जल्दी ही कोई निर्णय करूंगा।”-मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री निदेशालय ने मंत्री के आदेश भी नहीं माने 11 जुलाई 2025 को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को एक कर्मचारी संगठन की ओर से निदेशालय से जुड़ी कुछ शिकायतें की गई थीं, जिनमें हितकारी निधि समेत अन्य पदों पर लगे शैक्षिक स्टाफ को हटाकर मंत्रालय स्टाफ को लगाने जैसे मामले सामने थे। हालांकि इस शिकायत से पहले ही मंत्री मदन दिलावर ने खुद के हस्ताक्षर से 6 फरवरी 2024 को एक पत्र निदेशक माध्यमिक शिक्षा को भेजा था और कहा था कि माध्यमिक शिक्षा में नियुक्त अनुभाग में 10 अध्यापक तथा पंजीयक शिक्षा विभागीय कार्यालय में 10 अध्यापक प्रतिनियुक्ति पर हैं। इन्हें तत्काल हटाया जाए। हितकारी निधि में 16 कार्मिक कार्य कर रहे हैं, जबकि 6 की भी जरूरत नहीं है। 3 तो 65 साल से ऊपर के काम कर रहे हैं और हितकारी निधि से पैसा उठा रहे हैं। इसमें मंत्री ने 3 कार्मिकों के नाम भी हटाने के लिए दिए थे, मगर उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ। इससे लगता है कि निदेशालय मंत्री की पहुंच से दूर है और यहां निदेशक की मनमर्जी चलती है। पांच साल से ऊपर वाले भी डायरेक्टरेट में डटे पिछले साल मंत्री मदन दिलावर बीकानेर आए थे। डायरेक्टरेट में मीटिंग ली और बाद में बयान दिया कि पांच साल से ऊपर का कोई कर्मचारी डायरेक्टरेट में नहीं रहेगा, मगर हैरानी हुई कि मंत्री के इतना कहने के बाद भी कोई नहीं हटा। मौजूदा स्टाफ में करीब 80 प्रतिशत स्टाफ ऐसा है, जो 5 साल से ऊपर का है। कुछ तो ऐसे हैं, जो पूरी नौकरी ही डायरेक्टरेट में करने वाले हैं। इससे साफ है कि मंत्री की डायरेक्टरेट में कम सुनी जा रही है, क्योंकि कुछ लोगों के सीधे तार जयपुर सचिवालय से जुड़े हैं।
शिक्षाविद् व कांग्रेस नेता डॉ. मधुसूदन शर्मा का निधन
कोटा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और उदयपुर शहर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मधु सुदन शर्मा का सोमवार सुबह निधन हो गया। 74 वर्षीय शर्मा पिछले कुछ समय से बीमार थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही सुबह उदयपुर के सुथारवाड़ा स्थित उनके आवास पर कांग्रेस नेता पहुंचे। उनके निधन पर कांग्रेसजनों और शिक्षाविदों ने दुख जताया। वे सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) में विज्ञान संकाय के डीन और जूलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष भी रहे। इसके साथ ही विवि के सेंट्रल लाइब्रेरी के ऑफिस इंचार्ज और सुविवि के स्पोर्ट्स बोर्ड के चेयरमैन भी रहे। उनकी अंतिम यात्रा सुथारवाड़ा स्थित उनके आवास से दोपहर 12:30 बजे अशोक नगर मोक्षधाम गई, जहां पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। 15 अगस्त 1951 को उदयपुर में जन्मे डॉ. शर्मा ने 1973 में प्राणीशास्त्र (जूलॉजी) में लिम्नोलॉजी एवं मत्स्य विज्ञान विशेषज्ञता के साथ प्रथम श्रेणी में एमएससी की। वर्ष 1980 में उन्होंने राजस्थान के जल स्रोतों में प्लवक एवं उत्पादकता विषय पर पीएचडी प्राप्त की। डॉ. शर्मा ने 1975 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, ट्रॉम्बे में सी-14 तकनीक द्वारा प्राथमिक उत्पादकता अध्ययन का प्रशिक्षण लिया। वे डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड्स और दक्षिण अफ्रीका में शोध एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से जुड़े रहे और 2010 में दक्षिण अफ्रीका में हुए एसआईएल सम्मेलन में हिस्सा लिया। उन्हें 33 वर्षों का शिक्षण और 36 वर्षों का शोध अनुभव है। 10 वर्ष प्रोफेसर रहे आैर 21 पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। 2011 से 2014 तक कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर रहते हुए शैक्षणिक विकास को नई दिशा दी। डॉ. शर्मा को एमिनेंट साइंटिस्ट अवार्ड, नेशनल फेलोशिप अवार्ड सहित कई राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। पर्यावरण शिक्षा और जन-जागरूकता में उनके योगदान के कारण उन्हें इस क्षेत्र का अग्रणी विशेषज्ञ माना जाता था। अंतिम यात्रा में शामिल शिक्षाविद् व कांग्रेसजन। डॉ. मधु सूदन।
मध्यप्रदेश में 62% सरकारी स्कूल एआई शिक्षा से बेहद दूर हैं। बिना इंटरनेट और आईसीटी लैब या डिजिटल क्लासरूम के एआई शिक्षा संभव नहीं है और प्रदेश का हाल ये है कि यहां लैब्स और स्मार्ट क्लासरूम बनाने के लिए मिला फंड पांच साल में भी 85 फीसदी खर्च नहीं हो सका है। केंद्र सरकार ने पिछले पांच साल में प्रदेश को 318.52 करोड़ रुपए दिए, ताकि स्कूलों को डिजिटल बनाया जा सके। लेकिन राज्य इस फंड का सिर्फ 49.15 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाया। प्रदेश में 8,489 कंप्यूटर लैब और 12,573 स्मार्ट क्लास बनाने की मंजूरी तो मिली, लेकिन ज्यादातर आज भी फाइलों तक सीमित हैं। कक्षा 6वीं और उससे ऊपर वाले 34,152 सरकारी स्कूलों में से सिर्फ 12,933 स्कूलों तक ही इंटरनेट पहुंच पाया है। यानी हर तीन में से करीब दो स्कूल आज भी डिजिटल दुनिया से कटे हुए हैं। जहां इंटरनेट है तो वहां क्लासेस स्मार्ट नहीं प्रदेश के जिन सरकारी स्कूलों में इंटरनेट है, वहां भी तस्वीर पूरी नहीं है। इन 12,933 स्कूलों में से केवल 2,610 स्कूल ऐसे हैं, जहां कंप्यूटर लैब या स्मार्ट क्लास सही तरीके से चल रही है। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 यह भी संकेत देता है कि जहां इंटरनेट पहुंच भी है, वहां डिजिटल पढ़ाई की बुनियादी तैयारी पूरी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में सिर्फ 34% छात्रों के पास घर पर लैपटॉप या टैबलेट है। विशेषज्ञों के मुताबिक डिजिटल उपकरण और नियमित उपयोग के बिना एआई जैसी शिक्षा सिर्फ नीति दस्तावेजों तक सिमट कर रह जाती है। केंद्र सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम में कक्षा 6वीं से 12वीं तक अलग-अलग स्तर पर एआई से जुड़े अध्याय शामिल किए हैं। कक्षा 6–8 में डिजिटल साक्षरता और एआई की बुनियादी समझ, कक्षा 9–10 में डेटा, लॉजिक और एआई एप्लिकेशन, जबकि कक्षा 11–12 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। लेकिन प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में इंटरनेट, कंप्यूटर और लैब की कमी के कारण एआई किताबों तक सीमित रह गया है, पढ़ाई व्यवहार में नहीं उतर पा रही। इंजीनियरिंग में भी एआई : राज्यसभा में सरकार ने बताया है कि इंजीनियरिंग और तकनीकी पढ़ाई में एआई से जुड़े कौशल औपचारिक रूप से जोड़े जा रहे हैं। इसके तहत राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) में एआई आधारित कंटेंट क्रिएशन, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एआई डेवलपमेंट, प्रोग्रामिंग और स्ट्रीमिंग जैसे कौशलों को मान्यता दी गई है। सरकार का कहना है कि यह ढांचा इंजीनियरिंग छात्रों को उद्योग-उपयोगी एआई स्किल्स देने के लिए बनाया गया है, ताकि पढ़ाई और रोजगार के बीच की दूरी कम हो सके। मंत्रालय के मुताबिक एआई से जुड़े इन कौशलों को शामिल किया गया है।
बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने विधानसभा में स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल बरूधन का मुद्दा स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि इस घटना सहित कोटा संभाग में 480 से अधिक ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनका शीघ्र समाधान आवश्यक है। विधायक शर्मा ने मॉडल स्कूल बरूधन की 9 वर्षीय छात्रा तृप्ति सेन को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। विधायक शर्मा ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बूंदी दौरे के दौरान दिए गए एक बयान पर चिंता व्यक्त की। मंत्री ने कहा था, डॉग्स तो किसी को भी काट सकते हैं। शर्मा ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री को दुर्घटनाग्रस्त 9 वर्षीय बालिका तृप्ति सेन और उसके परिवार से मिलकर कुशलक्षेम पूछना चाहिए था और सहायता करनी चाहिए थी, न कि ऐसा वक्तव्य देना। शर्मा ने शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया कि वे ऐसे बयान देने के बजाय परिवारजनों से मिलें, उनकी सहायता करें और इस समस्या के शीघ्र समाधान के लिए कार्य योजना बनाएं। विधायक हरिमोहन शर्मा ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा बूंदी दौरे के दौरान की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी जवाब दिया। शर्मा ने आरोप लगाया कि मंत्री ने बजट का ठीक से अध्ययन नहीं किया है। उन्होंने बताया कि बूंदी के लिए बजट में घोषित 100 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्य हुडको के लोन प्लान के तहत पूर्व में बनाई गई कार्य सूची का हिस्सा हैं। ये कार्य लोन लेकर करवाए जाएंगे, जिसका कर्ज बूंदी की जनता को चुकाना होगा। शर्मा ने बूंदी की लगातार उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि मिनी सचिवालय की स्थापना का झूठा आश्वासन दिया गया है और न तो यूआईटी की स्थापना हुई है और न ही केडीए से मुक्ति मिली है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उच्च शिक्षा को रोजगारपरक बनाने पर दिया जोर
जयपुर में आयोजित अखिल भारतीय संस्थागत नेतृत्व समागम-2026 में मुख्यमंत्री ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली में तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा के संगम का आह्वान किया।
कैथल में रियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा कैबिनेट मंत्री अनिल विज के पक्ष में आए। ग्रीवांस कमेटी की बैठक में मंत्री विज और एसपी कैथल उपासना के बीच हुई नौकझोंक पर बालते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि मंत्री को ब्यूरोक्रेसी से काम लेना है। क्या मंत्री किसी के सस्पेंशन के लिए भी न कहें। मंत्री और अधिकारी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों को लोगों की समस्याओ का समाधान करना है। कहा- अभियान से न जोड़ें बात शिक्षा मंत्री सोमवार को कैथल में महाराजा सूरजमल जन्मोत्सव कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। एक एक आईपीएस से मंत्री द्वारा इस प्रकार का व्यवहार करने व बेटियों को बचाने के सवाल पर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को इस घटना से न जोड़ा जाए। बेटी पढ़ लिखकर आगे बढ़े। महिपाल ढांडा बोले कि मंत्री की भी एक जिम्मेदारी है अधिकारी की भी एक जिम्मेदारी है। दोनों का एक ही मकसद है कि लोगों को सेवाएं दें और कठिनाइयों को दूर करें। बाद में भी तो SP ने माना कि उनकी पॉवर नहीं है लेकिन लिखकर भेज देंगी। यही बात मंत्री कह रहे थे कि लिखकर भेजिए। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि केंद्र की RTE नीति के तहत प्राइवेट स्कूलों को 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होंगी। उन्होंने स्कूलों को डेटा उपलब्ध कराने और जुर्माना भरने का निर्देश दिया, अन्यथा मान्यता रद्द करने की चेतावनी दी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नियमों का पालन जरूरी है, जरूरत पड़ी तो कार्रवाई होगी। बजरंग पुनिया के खिलाड़ियों के विदेश जाने वाले बयान पर मंत्री ने कटाक्ष किया कि अगर देश में व्यवस्था खराब है तो गजब है। हर व्यक्ति की अपेक्षाएं अलग हैं, लेकिन सामूहिक निर्णय सबके हित में होते हैं। पेंशन मुद्दे पर बोले इनेलो के अभय चौटाला के पेंशन कटने वाले बयान पर ढांडा ने कहा कि पेंशन योजना में आय सीमा 10 हजार से 3 लाख तक बढ़ाई, जो ज्यादा लोगों को लाभ देगी। पुरानी सरकारों ने सीमा क्यों नहीं बढ़ाई, उंगली उठाने से पहले आईना देखें। ढांडा ने तंज कसते हुए कहा कि पहले बोलना सीखें। उनकी सरकार में 10 हजार आय सीमा थी, तब क्यों नहीं बदली। उंगली कटा कर शहीद न बनें।
भीलवाड़ा के कॉलेज में नशे की हालत में एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ और बदतमीजी के मामले में महिलाओं का गुस्सा आज फूट पड़ा। बड़ी संख्या में महिलाओं ने पार्षद के नेतृत्व में आरोपी प्रोफेसर को सस्पेंड करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कालेज प्रशासन को असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। शिक्षा के मंदिर में स्वीकार नहीं पार्षद शर्मा ने बताया कि छात्रा के साथ शिक्षा के मंदिर में जो गलत हरकत की गई है वो किसी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ अगर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो मातृशक्ति उग्र आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेगी। यह था मामला शुक्रवार को एग्जाम के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर पर स्टूडेंट ने जांच के बहाने नशे में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। छात्रा ने इसका विरोध किया। इसके बाद कॉलेज की सीढ़ियों पर चढ़ने लगी तो प्रोफेसर ने थप्पड़ मारने की कोशिश की थी। आरोपी 1998 से कॉलेज में है पुलिस ने आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर को शराब के नशे में कार चलते हुए पकड़ा था। जिसकी मेडिकल जांच में पुष्टि भी हुई, पुलिस ने धारा 151 के तहत गिरफ्तार भी किया था। इस दौरान आरती कोगटा, सुनीता कटारिया, इंदु बंसल, मंजू पालीवाल, शोभिक जागेटिया, गरिमा जैन, रेखा शर्मा, सुलक्षणा पंडित सहित बड़ी संख्या में महिलाएं इकट्ठा हुई और विरोध प्रदर्शन किया। इस मामले में एबीवीपी और कॉलेज की अन्य छात्राओं ने भी प्रिंसिपल को ज्ञापन सौंप कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को पत्र लिखकर प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि पिछले 13 वर्षों से प्रतिपूर्ति राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस संबंध में हाईकोर्ट बिलासपुर में दायर याचिका क्रमांक WPC 4988/2025 पर 19 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश में कोर्ट ने छह माह के भीतर मांगों पर निर्णय लेने को कहा है। कितनी बढ़ोतरी की मांग एसोसिएशन ने मांग की है कि प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति विद्यार्थी/प्रति वर्ष राशि 7,000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए की जाए। माध्यमिक कक्षाओं में 11,500 रुपए से बढ़ाकर 22,000 रुपए किया जाए। हाई और हायर सेकेंडरी की अधिकतम सीमा 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए तय की जाए। साथ ही बढ़ी हुई राशि पिछले तीन वर्षों से प्रभावी करने की भी मांग की गई है। वेतन बढ़ा, RTE राशि जस की तस एसोसिएशन ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि पिछले 13 वर्षों में अन्य क्षेत्रों में वेतन और खर्चों में भारी वृद्धि हुई है। उदाहरण देते हुए बताया गया कि 2012 में विधायक का मासिक वेतन लगभग 45 हजार रुपए था, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 1.60 लाख रुपए हो गया। इसी तरह आईएएस और अन्य ग्रेड के अधिकारियों के वेतन में भी दोगुनी-तिगुनी वृद्धि हुई है। इसके मुकाबले RTE के तहत प्रतिपूर्ति राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया, जिससे निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कोर्ट के आदेश की याद दिलाई एसोसिएशन ने कहा है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसे गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा के प्रति संवेदनहीनता बताया गया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन असहयोग आंदोलन के लिए विवश होगा।
बेतिया में एसोसिएशन ऑफ मुस्लिम डॉक्टर्स के 17वें वार्षिक उत्सव में अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी अब्दुल राशीद ने मुस्लिम समुदाय में शिक्षा की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तालीम की बुनियाद पर ही मुसलमानों की कामयाबी संभव हो सकती है। राशीद ने विशेष रूप से मुस्लिम बच्चियों में शिक्षा के निम्न स्तर को रेखांकित किया। उन्होंने उपस्थित मुस्लिम बुद्धिजीवियों से समाज में शिक्षा की अलख जगाने और बच्चियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की। 'बच्चों को शिक्षा अवश्य दिलाएं' पटना से आए एसोसिएशन ऑफ मुस्लिम डॉक्टर्स के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रोफेसर मो. अतहर अंसारी ने भी शिक्षा को बढ़ावा देने की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को शिक्षित बनाने के लिए एक वक्त का खाना छोड़ना पड़े, तो भी बच्चों को शिक्षा अवश्य दिलाएं। डॉ. अंसारी ने चेतावनी दी कि जब तक समाज शिक्षित नहीं होगा, तब तक वह पिछड़ा रहेगा और अपनी आवाज बुलंद नहीं कर पाएगा। उन्होंने समाज के लोगों से आगे आकर शिक्षा का अलख जगाने का आह्वान किया। सरकारी मदद पर निर्भरता की आलोचना की एम. शकील ने अपने संबोधन में सरकारी मदद पर निर्भरता की आलोचना की और जमीनी स्तर पर व्यक्तिगत प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल दूसरों की शिकायत करना तरक्की की निशानी नहीं है, बल्कि हमें स्वयं काम करना होगा। शकील ने प्रत्येक व्यक्ति से अपने परिवार, रिश्तेदारों और मोहल्ले के किसी एक गरीब बच्चे या बच्ची की शिक्षा में मदद करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि इस सेमिनार का विषय 'उम्मत का हाल और हमारी जिम्मेदारियां' इसी बात पर केंद्रित है कि हम शिकायत से बचते हुए एक बच्चे को भी कामयाब बनाने में मदद करें, यही हमारी असल जिम्मेदारी है।
भास्कर न्यूज | राजसमंद राज्य सरकार के बजट 2026-27 को ऐतिहासिक बताते हुए विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने शनिवार को प्रेस ब्रीफिंग कर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 का बजट आकार 6 लाख 10 हजार 956 करोड़ रुपये है, जो 2023-24 की तुलना में 41 प्रतिशत अधिक हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के लिए 32,526 करोड़ रुपये, शिक्षा के लिए 69 हजार करोड़ रुपये तथा कृषि क्षेत्र में 1 लाख 19 हजार 408 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ग्रीन बजट में 33,476 करोड़ रुपये रखे हैं। उन्होंने बताया कि राजसमंद झील की नहर प्रणाली के जीर्णोद्धार के लिए 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जिला मुख्यालय पर अन्नपूर्णा माताजी मंदिर से दयाशाह किला तक रोप-वे निर्माण और मुखर्जी चौराहे से इरिगेशन पाल होते हुए द्वारिकाधीश मंदिर तक एलिवेटेड/रिंग रोड के लिए फिजिबिलिटी अध्ययन कराया जाएगा। एसआरके कॉलेज में नए संकाय शुरू होंगे तथा जिला मुख्यालय पर मेंटल हेल्थ केयर सेल की स्थापना की जाएगी। भीम, कुंभलगढ़ और नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्रों में सड़क, जीएसएस, खेल स्टेडियम व पुलिस चौकी जैसी विकास परियोजनाओं की घोषणाएं भी शामिल हैं। माहेश्वरी ने कहा कि पूर्व बजट घोषणाओं में 86 से 93 प्रतिशत तक क्रियान्विति हो चुकी है और सरकार का लक्ष्य सभी घोषणाओं को समयबद्ध पूरा करना है। भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल ने कहा कि सरकार अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और किसान हित में ठोस कदम उठा रही हैं। समग्र विकास और जनकल्याण ही सरकार का मूल ध्येय है। इस दौरान कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा सहित जनप्रतिनिधि व अधिकारी मौजूद थे।
समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, सद्भाव की अलख जगा रहा है डायोसिस : बिशप
चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) के आदर्श वाक्य ‘एकता, गवाही और सेवा’ को समर्पित डायोसिस ऑफ अमृतसर ने एलेक्जेंड्रा स्कूल कैंपस में 74वां स्थापना दिवस मनाया। ‘आभारी हृदय, विश्वास योग्य साक्षी’ थीम पर आधारित इस महोत्सव में आयोजित ‘फन-फेयर’ भारत की सांस्कृतिक विविधता का एक शानदार मेल रहा। इस अवसर पर राइट रेवरेंड मनोज चरन ने ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1947 में विभाजन के बाद भूतपूर्व एंग्लिकन चर्च की लाहौर डायोसिस से अलग होकर यह अस्तित्व में आया और बाद में सीएनआई में सम्मिलित हुआ। बिशप चरन ने कहा कि आज यह डायोसिस पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास के जरिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। शांति पहल, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों के माध्यम से यह संस्था समाज में न्याय और सद्भाव को बढ़ावा दे रही है।
आरटीई के तहत इस साल सीटों में बड़ी कटौती को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि भर्ती नियम बदलकर गरीब बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर चोट की गई है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि, पहले आरटीई के तहत निजी स्कूलों में नर्सरी, पीपी-वन, पीपी-टू से लेकर कक्षा पहली तक प्रवेश दिया जाता था। अब नियम बदलकर सीधे क्लास-1 में ही भर्ती अनिवार्य कर दी गई है। 24 हजार से ज्यादा सीटें खत्म उनके मुताबिक, पिछले साल 44,173 सीटों पर प्रवेश हुआ था, जबकि इस बार सिर्फ 19,466 सीटों पर ही एडमिशन होगा। यानी 24 हजार से ज्यादा सीटें खत्म कर दी गईं। कांग्रेस का दावा है कि इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्हें बच्चों को नर्सरी और पीपी-वन में निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए मोटी फीस चुकानी होगी। जिसके बाद उसी स्कूल में आरटीई के तहत प्रवेश मिल सके। कांग्रेस ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून बनाते समय स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि निजी स्कूलों में नर्सरी से क्लास-1 तक प्रवेश मिलेगा। भाजपा सरकार ने 2014 में लागू अपने ही पूर्व फैसले को बदल दिया है। धनंजय सिंह ठाकुर ने सवाल उठाया कि, जब सरकारी स्कूलों की हालत खराब है, तब गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा कैसे मिलेगी? उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम योजना को भी बंद कर दिया गया, जबकि कई स्कूलों में शिक्षकों को वेतन तक नहीं मिल रहा है। कांग्रेस ने मांग की है कि आरटीई के तहत नर्सरी, पीपी-वन और पीपी-टू से प्रवेश की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि गरीब बच्चों का शिक्षा का अधिकार सुरक्षित रह सके।
हरदा में बंजारा समाज ने रविवार को अपने आराध्य संत शिरोमणि श्री सेवालाल महाराज की 287वीं जयंती सादगीपूर्वक मनाई। इस अवसर पर बंजारा युवा संघ द्वारा आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में समाज के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण संकल्प लिए गए। समाज के अध्यक्ष कैलाश पंवार और बंजारा युवा संघ के प्रदेश मंत्री दिलीप नायक ने युवाओं को नशामुक्ति का संकल्प दिलवाया। अध्यक्ष पंवार ने अपने संबोधन में बालिका शिक्षा को विशेष महत्व देने का आह्वान किया और युवाओं को संत महापुरुषों के उपदेशों को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में दूध डेयरी के पास स्थित संत सेवालाल महाराज की प्रतिमा का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद महाआरती आयोजित की गई और उपस्थित सभी लोगों को प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान समाज से जुड़ी बुराइयों को दूर करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का भी संकल्प लिया गया। समाज के वरिष्ठ सदस्य रंजीत सिंह बंजारा और शिवानी नायक ने बताया कि जयंती महोत्सव के दौरान समाज ने संत सेवालाल महाराज के आदर्शों को दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया है। संत सेवालाल महाराज ने संगठित रहने, अच्छे सिद्धांतों से जीवन जीने, नशे से दूर रहने और अपने अधिकारों के लिए तत्पर रहने का संदेश दिया था। इस अवसर पर समाज ने सरकार से महाराष्ट्र की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी 'टांडा विकास योजना' तत्काल लागू करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उच्च शिक्षा के लिए उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो समाज द्वारा आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ रंजीत नायक और बाचुसिंह पंवार ने किया। इस मौके पर मुकेश नायक, छगन हलवाई, भारत पेंटर, सुभाष हलवाई, विमल नायक, जितेंद्र नायक, रवि पटू नायक सहित बड़ी संख्या में समाज के पुरुष, महिलाएं और युवा उपस्थित थे।
इंदौर के पूर्व कुलपति, वरिष्ठ शिक्षाविद् और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन डॉ. भरत छापरवाल का रविवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। डॉ. छापरवाल शिक्षा के क्षेत्र से लंबे समय तक जुड़े रहे और अपने कार्यकाल में उन्होंने अकादमिक गुणवत्ता, अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता को विशेष प्राथमिकता दी। डॉ. छापरवाल को एक सरल, सुलझे हुए और दूरदर्शी शिक्षाविद् के रूप में जाना जाता था। उन्होंने विश्वविद्यालयीन शिक्षा को समाज से जोड़ने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उनके नेतृत्व में शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा मिली और शोध, नवाचार तथा मूल्यपरक शिक्षा को बढ़ावा मिला। उनके निधन पर शिक्षा जगत से जुड़े कई वरिष्ठ शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और पूर्व छात्रों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
गुरु हर राय ने श्री गुरुनानक देव की शिक्षाओं पर जोर दिया : जिवेंदर सिंह
विशेष संवाददाता | रांची श्री गुरुनानक सत्संग सभा ने सिखों के सातवें नानक श्री गुरु हर राय का शनिवार की रात 396वां प्रकाशोत्सव मनाया। कृष्णा नगर कालोनी गुरुद्वारा में विशेष दीवान सजाया गया। स्त्री सत्संग सभा की शीतल मुंजाल ने कर किरपा तेरे गुण गांवा...शबद गाकर दीवान की शुरुआत की। इसके बाद हजूरी रागी भाई महिपाल सिंह और उनके साथियों ने रसना गुण गोपाल निध गाएण सांत सहज रहस मन उपजिओ सगले दुख पलाएण... शबद गाकर संगत को निहाल किया। हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेंदर सिंह ने बताया कि सिखों के सातवें गुरु गुरु हर राय साहिब ने अपने दादा गुरु हरगोविंद साहिब के सिख योद्धाओं के दल को पुनर्गठित किया और सिख योद्धाओं में नवीन प्राण संचारित किए। दीवान में शिरकत करने पहुंचे भाई गुरदीप सिंह निककु ने शबद गायन कर संगत को गुरुवाणी से जोड़ा। पटना साहिब से विशेष रूप से आए रागी भाई हरजीत सिंह ने कई शबद गाकर संगत को प्रभ चरणों से जोड़ा। संगत को वाहेगुरू वाहेगुरु जी जाप भी कराया। सभा के अध्यक्ष अर्जुन देव मिड्ढा और सचिव सुरेश मिड्ढा ने भाई गुरदीप सिंह निककु और भाई हरजीत सिंह को गुरु घर का सरोपा ओढ़ाकर सम्मानित किया। मंच संचालन मनीष मिड्ढा ने किया। इस अवसर पर गुरु का अटूट लंगर भी चलाया गया।
22 जिलों के डीपीओ को नोटिस, मांगा जवाब:फाइलों में कैद शिक्षा का पैसा, स्कूलों का विकास कार्य रुका
बिहार में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए जारी बजट को खर्च करने में भारी लापरवाही सामने आई है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने बजट का 60 प्रतिशत हिस्सा भी खर्च न करने वाले नालंदा समेत 22 जिलों के डीपीओ से दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने सख्त लहजे में कहा है कि तय सीमा में संतोषजनक व्यय न होना कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए वेतन मद को छोड़कर विकास कार्यों के लिए कुल ₹1044.44 करोड़ की ‘ड्रॉइंग लिमिट’ तय की गई थी। लेकिन 9 फरवरी 2026 तक गूगल ड्राइव पर मिली रिपोर्ट के मुताबिक, केवल ₹633.80 करोड़ (60.66%) ही खर्च किए जा सके हैं। कई जिलों में तो यह आंकड़ा 60% से भी नीचे है। इस कार्रवाई के बाद जिलों में हड़कंप है। नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने सभी प्रखंडों को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर खर्च की गई राशि को 75 प्रतिशत तक पहुंचाएं। समय पर बजट खर्च न होने का सीधा असर स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राज्य स्तरीय कार्यालय द्वारा समय-समय पर पत्र, मार्गदर्शन एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिए गए थे। राज्य परियोजना निदेशक ने संबंधित जिलों के कार्यक्रम पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि पत्र प्राप्ति के दो दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। साथ ही एक सप्ताह में उपलब्ध न्यूनतम 75 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित करें। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है क्या है ड्राइंग लिमिट?वेतन मद की राशि को छोड़ अन्य जो भी स्कूलों के विकास मद में खर्च की जाने वाली राशि को बजटीय भाषा में ड्रॉइंग लिमिट कहा जाता है। इसमें केंद्र की भी राशि होती है, जो ड्रॉइंग लिमिट के तहत खर्च राशि के अनुसार मिलती है। इसका असर क्या?यह बजट स्कूलों की मरम्मत, पेयजल, लाइब्रेरी, और खेलकूद के सामान जैसे विकास कार्यों के लिए था। 22 जिलों में खर्च कम होने का मतलब है कि वहां के हज़ारों बच्चे आधुनिक सुविधाओं से वंचित रह गए। किन जिलों ने 60% से कम खर्च किया?पटना, नालंदा, लखीसराय, शिवहर, औरंगाबाद, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, गया, बक्सर, मधुबनी, गोपालगंज, मुंगेर, शेखपुरा, समस्तीपुर, अरवल, बांका, किशनगंज, खगड़िया, सहरसा, सीवान एवं सारण। आनन-फानन में फंड जारी होने से गुणवत्ता प्रभावित होगी सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए जारी बजट का फरवरी के दूसरे सप्ताह तक केवल 60% खर्च होना यह बताता है कि अधिकांश जिलों में प्लानिंग की कमी थी। अब नोटिस के डर से अगले 15-20 दिनों में आनन-फानन में फंड जारी किए जाएंगे, जिससे काम की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। बजट के निर्धारण में ड्रॉइंग लिमिट की भूमिका काफी अहम होती है। कम खर्च पर अगले वर्ष आवंटन में कटौती हो जाएगी। भास्कर एक्सपर्ट तय राशि से कम खर्च पर बजट में कटौती की जाएगी केंद्र सरकार द्वारा ड्राइंग लिमिट निर्धारित किया जाता है। इसी के अनुसार शिक्षकों और कर्मियों के वेतन को छोड़कर अन्य सभी मदों में खर्च करने के लिए अलग-अलग राशि आवंटित की जाती है। केंद्र सरकार पीएफएमएस पोर्टल से आवंटित राशि के खर्च पर नजर रखती है। इस साल के बजट में खर्च राशि के आधार पर ही अगले साल के बजट में अगली किश्त की राशि मिलेगी। कम राशि खर्च होने पर कटौती होती है। -रितेश वर्मा, एमआईएस प्रभारी,नालंदा किस जिले ने कितना खर्च किया... लखीसराय-47.18%, शिवहर-50.38, औरंगाबाद-51.03%, मधेपुरा-52.23%, मुज्जफरपुर-52.33%, सीतामढ़ी-52.81%, गया-53.73%, बक्सर-54.10%, मधुबनी-54.21%, नालंदा-55.24%, गोपालगंज-55.68%, मुंगेर-56.13%, शेखपुरा-56.22% ,समस्तीपुर-56.30%, अरवल-56.66%, बांका-57.44%, पटना-57.63%, किशनगंज-57.73%, खगड़िया-58.73%, सहरसा-58.76%, सीवान-59.97%, सुपौल-60.49%, जहानाबाद-60.72%, अररिया-61.05%, भागलपुर-61.25%, कैमूर-64.40%, वैशाली-65.01%, भोजपुर-66.11%, दरभंगा-66.69%, पूर्वी चम्पारण-66.77%, पूर्णिया-68.13%, कटिहार-68.72%, जमुई-68.74%, प. चम्पारण-69.05%, नवादा-72.13%,बेगूसराय-72.57%, रोहतास-80.14%
बिहार के बेतिया में प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने अपना 13वां वर्षगांठ समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसमें जेडीयू के वरिष्ठ नेता डॉ. एन.एन. शाही, बेतिया की महापौर गरिमा देवी शिकारिया, चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन और प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद समायल अहमद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह को संबोधित करते हुए चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन ने कहा कि वे भले ही विपक्ष के विधायक हों, लेकिन सबसे पहले जनता के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। आज सरकारी स्कूल कई समस्याओं से जूझ रहेविधायक रंजन ने सरकारी विद्यालयों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज सरकारी स्कूल कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई सकारात्मक या प्रगतिशील नीति नहीं अपना रही है। उन्होंने सदन की स्थिति पर भी चिंता जताई, यह कहते हुए कि विपक्ष कमजोर है और सत्ता पक्ष के विधायक भी शिक्षा की वास्तविक समस्याओं को प्रभावी ढंग से नहीं उठा पा रहे हैं। विधायक ने सरकारी विद्यालयों में कक्षाओं, शिक्षकों और अन्य संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाया और सरकार से इस दिशा में ठोस पहल करने की मांग की।
भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामले निदेशक तथा केंद्रीय प्रभारी अधिकारी सुनील कुमार यादव की अध्यक्षता में विकास भवन स्थित शताक्षी सभागार में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में आकांक्षात्मक विकास खण्ड जैथरा और अवागढ़ में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की अद्यतन स्थिति एवं प्रगति का विस्तृत जायजा लिया गया। दो दिवसीय जनपद भ्रमण के तहत आयोजित इस बैठक में निदेशक ने स्वास्थ्य, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवाएँ अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुँचें और कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे। विद्यालयों से ड्रॉप आउट हो रहे बच्चों की पहचान कर अभिभावकों के साथ बैठकें आयोजित करने और उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित करने को कहा गया। यादव ने विकास खण्डों में सामाजिक एवं आर्थिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने आशा, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए। साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र लाभार्थियों को चिन्हित कर उन्हें आवास उपलब्ध कराने और भारत नेट की व्यवस्था जल्द सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य एवं पोषण, टीकाकरण, आयुष्मान कार्ड, आईसीडीएस, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण पेयजल योजना, कौशल विकास, भारत नेट, बेसिक शिक्षा, कृषि, पंचायती राज और सोशल डेवलपमेंट सहित विभिन्न संकेतकों पर विस्तृत चर्चा हुई। कुछ योजनाओं में ऑनलाइन डेटा फीडिंग और वास्तविक प्रगति में अंतर पाए जाने पर सुधार के निर्देश दिए गए। शिक्षा एवं स्वास्थ्य के संकेतकों में अपेक्षित प्रगति न होने पर विशेष सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों के गठन की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। जरूरतमंद महिलाओं को इन समूहों से जोड़कर उनकी आजीविका में वृद्धि करने और उन्हें जन जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ने पर भी बल दिया गया। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने केंद्रीय प्रभारी अधिकारी को आश्वस्त किया कि उनके निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आकांक्षात्मक विकास खण्डों में विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी। बैठक में परियोजना निदेशक सुरेंद्र कुमार गुप्ता, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद, उपायुक्त एनआरएलएम प्रतिमा निमेष, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी प्रदीप कुमार, उप कृषि निदेशक समित कुमार, जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह, एलडीएम, जिला पंचायत राज अधिकारी मो. राशिद, बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी अजयपाल सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय कुमार सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आर.पी. शर्मा, अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण, खंड विकास अधिकारी जैथरा अजीत सिंह, खंड विकास अधिकारी अवागढ़ पी.एस. आनंद, खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार, एमओआईसी अवागढ़ डॉ. ब्रजेश कुमार, एमओआईसी जैथरा डॉ. राहुल चतुर्वेदी, अपर जिला सांख्यिकी अधिकारी डॉ. मुनीश कुमार, वरिष्ठ सहायक श्रवण कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे है।
सलूंबर में मां बाड़ी शिक्षा सहयोगियों ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। विरोध स्वरूप उन्होंने अपने-अपने केंद्रों पर ताला लगा दिया और सलूंबर पहुंचे। सरकार के खिलाफ जताया विरोध जिले के सभी मां बाड़ी डे केयर के शिक्षा सहयोगियों ने प्रदेश सरकार के प्रति विरोध जताते हुए यह कदम उठाया। उन्होंने जिला कलेक्टर अवधेश मीणा को ज्ञापन देकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। ज्ञापन में बताया गया कि टीएसपी, टाडा माडा और सहरिया क्षेत्रों में टीएडी विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा 3006 मां बाड़ी डे केयर योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वर्तमान में ये योजनाएं स्वच्छ परियोजना के तहत चल रही हैं, जिनमें लगभग 4600 शिक्षा सहयोगी कार्यरत हैं। ये है मुख्य मांगें शिक्षा सहयोगियों की मुख्य मांग है कि उन्हें जनजाति ग्राम विकास समिति से हटाकर वरिष्ठता के आधार पर कैडर निर्धारण किया जाए। साथ ही, सभी को राजस्थान कॉन्ट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स 2022 में शामिल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बजट एप्रोप्रिएशन बिल में उनकी यह मांग पूरी नहीं होती है, तो मां बाड़ी डे केयर केंद्र पूरी तरह बंद रहेंगे। इसके अलावा, सभी शिक्षा सहयोगी पेन डाउन स्ट्राइक पर रहेंगे। इन्होंने सौंपा ज्ञापन ज्ञापन सौंपते समय संगठन के जिलाध्यक्ष उदय लाल मीणा, थावरचंद, रामलाल, केशव लाल, दिनेश मीणा, रमेश मीणा, लक्ष्मण और नाथू लाल सहित बड़ी संख्या में शिक्षा सहयोगी मौजूद थे।
जहानाबाद में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने 'गुरु गोष्ठी' कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) सरस्वती कुमारी ने प्रधानाचार्यों के साथ बैठक कर भविष्य का रोडमैप तैयार किया और कई कड़े निर्देश दिए। इस पहल का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाना और शिक्षण गतिविधियों की समीक्षा करना है। यह कार्यक्रम जहानाबाद, मखदुमपुर, मोदनगंज, घोसी, काको और हुलासगंज प्रखंडों में आयोजित किया गया, जहां शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रधानाचार्यों से सीधा संवाद किया। मखदुमपुर प्रखंड के कन्या मध्य विद्यालय में आयोजित मुख्य गोष्ठी को संबोधित करते हुए DEO सरस्वती कुमारी ने स्पष्ट किया कि अब शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने लगभग 200 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रधानशिक्षकों को बच्चों को नियमित होमवर्क देने और शिक्षकों द्वारा उसकी प्रतिदिन जांच अनिवार्य रूप से करने का निर्देश दिया। विद्यालय का वातावरण ऐसा हो, कि बच्चे स्वयं आकर्षित हों DEO ने इस बात पर भी जोर दिया कि विद्यालय का वातावरण ऐसा होना चाहिए जिससे बच्चे स्वयं आकर्षित हों। इसके लिए उन्होंने साफ-सफाई की उचित व्यवस्था, बच्चों का अनिवार्य रूप से यूनिफॉर्म में आना और वर्ग-सापेक्ष शिक्षण पद्धतियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने अनुशासन और प्रेरणादायक माहौल को बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम बताया। प्रधानाध्यापकों ने विद्यालयों की समस्याएं बताईं जिले के अन्य प्रखंडों में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुष्मिता भारद्वाज और गोविंद कुमार ने भी प्रधानाध्यापकों के साथ विस्तृत चर्चा की। गोष्ठी के दौरान प्रधानाध्यापकों ने अपने विद्यालयों की समस्याओं, संसाधनों की कमी और नवाचारी सुझाव अधिकारियों के समक्ष रखे। DEO सरस्वती कुमारी ने कई प्रधानाचार्यों द्वारा प्रस्तुत किए गए रचनात्मक कार्यों और नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों की सराहना की और उन्हें अन्य विद्यालयों के लिए रोल मॉडल बताया।
श्रावस्ती जनपद की अचरौरा शाहपुर और खलीफतपुर ग्राम पंचायतों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। आगा खान फाउंडेशन ने टाटा मोटर्स के सहयोग से इन पंचायतों में ऑनलाइन एलसीडी टीवी के माध्यम से कक्षाएं संचालित की हैं। लगभग एक माह पहले शुरू हुई इस पहल के सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। पहले विद्यालयों में बच्चों का नामांकन तो पर्याप्त था, लेकिन उनकी उपस्थिति कम रहती थी। ऑनलाइन टीवी क्लास शुरू होने के बाद बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह और रुचि बढ़ी है। डिजिटल माध्यम से शिक्षा मिलने के कारण बच्चे अब नियमित रूप से विद्यालय आ रहे हैं, जिससे उपस्थिति दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और शिक्षण व्यवस्था में भी सुधार हुआ है। इन कक्षाओं में हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान सहित अन्य विषय पढ़ाए जा रहे हैं। एलसीडी स्क्रीन के माध्यम से दृश्य-श्रव्य पाठ बच्चों को आसानी से समझ आ रहे हैं। आधुनिक तकनीक का उपयोग जटिल विषयों को सरल बनाने में मदद कर रहा है, जिससे बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। इस पहल को ग्रामीण अभिभावकों और स्थानीय समुदाय का भी समर्थन मिल रहा है। अभिभावक बच्चों की बढ़ती रुचि और नियमित उपस्थिति से संतुष्ट हैं। आगा खान फाउंडेशन से जुड़े सुशील यादव ने बताया कि टाटा मोटर्स के सहयोग से अचरौरा शाहपुर और खलीफतपुर में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले नामांकन अधिक था, लेकिन उपस्थिति कम रहती थी। ऑनलाइन एलसीडी से पढ़ाई शुरू होने के बाद बच्चों का आकर्षण बढ़ा है और वे रुचि के साथ विद्यालय आ रहे हैं। यादव ने बताया कि संस्था हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान की शिक्षा प्रदान कर रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर मजबूत हो रहा है। इस पहल को ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है।
यूपी विधानमंडल बजट सत्र के 5वें दिन विधानसभा स्पीकर सतीश महाना भाजपा विधायक केतकी सिंह पर भड़क उठे। उन्होंने हेडफोन निकालकर फेंक दिया। सीएम योगी ने सपा के शिक्षा मंत्री की कहानी सुनाई। फिर खिलखिलाकर हंसे तो भाजपा तो क्या सपा के भी विधायक ठहाके मारकर हंस पड़े। VIDEO देखिए…
पटना में NEET स्टूडेंट से रेप-मौत मामले में हॉस्टल का लाइसेंस रद्द किया जाएगा। केन नॉट रन…वह कभी हॉस्टल नहीं चला सकते हैं। सामान्य से सामान्य घटना की भी जानकारी थाने पर देना चाहिए, लेकिन शंभू गर्ल्स हॉस्टल ने कोई जानकारी नहीं दी है। एक्शन मोड में आकर बिहार पुलिस के मुखिया DGP विनय कुमार का यह दावा भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में झूठा निकला है। जिस तरह पटना SSP ने बिना जांच पड़ताल के स्टूडेंट से रेप की बात को खारिज कर दिया था, ठीक ऐसे ही DGP ने भी घटना के 28 दिन बाद 4 फरवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल का लाइसेंस रद्द करने का दावा कर दिया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने 6 विभागों के 12 से अधिक अधिकारियों से मिलकर पड़ताल की है, जिसमें पता चला कि DGP जिस शंभू गर्ल्स हॉस्टल का लाइसेंस रद्द करने का दावा कर रहे हैं, उसका लाइसेंस किसी विभाग से जारी ही नहीं हुआ था। घटना के बाद सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की, लेकिन रजिस्ट्रेशन कहां होगा, इसका भी किसी विभाग में कहीं कोई निर्देश नहीं है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए DGP विनय कुमार के दावे पर पड़ताल में विभागों ने क्या जवाब दिया...। सबसे पहले हम पटना के VIP और DGP ऑफिस कवर करने वाले शास्त्री नगर थाना पहुंचे। हॉस्टल संचालक बनकर पहुंचे अंडर कवर रिपोर्टर की मुलाकात सब इंस्पेक्टर अभय से हुई। हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन के सवाल पर सब इंस्पेक्टर ने हमें नगर निगम और DM ऑफिस का रास्ता दिखा दिया। बोले- रजिस्ट्रेशन कराकर उसकी कॉपी दीजिए, फिर थाने से आगे की प्रक्रिया होगी। रिपोर्टर - मुझे हॉस्टल चलाना है, रजिस्ट्रेशन का नियम आ गया है। अभय - अच्छा, आप हॉस्टल चलाते हैं? रिपोर्टर - चलाते नहीं हैं, चलाने का पूरा प्लान है। अभय - अच्छा, आपको हॉस्टल चलाना है? रिपोर्टर - जी हां, सर। अभय - प्रक्रिया है कि आप DM साहब के यहां या नगर निगम से हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कराइए। रिपोर्टर - इसके बाद क्या करना होगा? अभय - इसके बाद थाने से एक फॉर्मेट दिया जाएगा, उसी के अनुसार काम करना होगा। रिपोर्टर - अच्छा, इसमें क्या होगा। अभय - उसमें यह दर्ज रहेगा कि कब लड़कियां बाहर निकल रही हैं, कब वापस आ रही हैं, कहां जा रही हैं। रिपोर्टर - जी, अब बदल गया सब। अभय - इसके अलावा CCTV लगाना होगा, थाने में सूचना के लिए एक रजिस्टर होगा। रिपोर्टर - थाने के रजिस्टर में क्या भरना होगा। अभय - इसमें छात्राओं का पर्सनल कॉन्टैक्ट नंबर, पेरेंट्स के नंबर के साथ पूरी डिटेल होगी। रिपोर्टर - ठीक है सर अभय - अब आपको अथॉरिटी से पता करना होगा कि रजिस्ट्रेशन कैसे होगा। रिपोर्टर - सर, आपको पता नहीं है कहां होगा रजिस्ट्रेशन? अभय - नगर निगम या जिला कार्यालय होगा वहां पता कर लीजिए। रिपोर्टर - ठीक है सर, पता कर लेते हैं। अभय - रजिस्ट्रेशन कराकर उसकी कॉपी हमें दीजिए, फिर हम यहां से फॉर्मेट के अनुसार काम करेंगे। शास्त्री नगर थाने के सब इन्सपेक्टर अभय से बातचीत के बाद हम DM ऑफिस पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात हेल्प डेस्क पर बैठे कर्मचारी से हुई। इसके बाद हम स्थापना शाखा पहुंचे, जहां हमारी मुलाकात प्रधान लिपिक के पद पर तैनात चंद्रभूषण कुमार आरोही से हुई। रिपोर्टर - गर्ल्स हॉस्टल का जो रजिस्ट्रेशन होना है, वह कहां से करना होगा? चंद्रभूषण - यह शिक्षा विभाग से जुड़ा मामला है, DEO ऑफिस जाइए। रिपोर्टर - थाने से बताया जा रहा है कि यहीं से रजिस्ट्रेशन होगा। चंद्रभूषण - यहां से ऐसा कुछ नहीं होता है। रिपोर्टर - फिर कहां जाना होगा, प्रक्रिया कहां से शुरू करें? चंद्रभूषण - यहां कोई प्रक्रिया नहीं है, यह पूरा मामला शिक्षा विभाग का है। रिपोर्टर - अब समझ में नहीं आ रहा कि कहां से होगा। चंद्रभूषण - मुझे कोई आइडिया नहीं है कि कहां से होगा, कौन करेगा। रिपोर्टर - जिलाधिकारी कार्यालय से तो सब काम होता है, बताया भी यही जा रहा है। चंद्रभूषण - आप डीडीसी कार्यालय में जाकर पता कीजिए। DM ऑफिस के प्रधान लिपिक के बताए अनुसार हम DDC ऑफिस पहुंच गए। यहां हेल्प डेस्क पर बैठे व्यक्ति ने बताया कि गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन यहां नहीं होता है। आप कहीं और जाकर देखिए। उन्होंने कहा कि डीएम कार्यालय जाइए, वहीं से होगा या फिर ऊपर जाकर प्रधान लिपिक से बात कीजिए, जो दूसरे तल्ले पर मिलेंगे। यहां हमारी मुलाकात क्लर्क मधुकर प्रसाद सिन्हा से हुई। रिपोर्टर - गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से हो रहा है? मधुकर सिन्हा - यहां से नहीं हो रहा है। रिपोर्टर - जिलाधिकारी कार्यालय से बताया गया कि यहीं होता है। मधुकर सिन्हा - यहां पर नहीं होता, किसने बताया आपको यहां के बारे में? रिपोर्टर - स्थापना शाखा से हमें यहां भेजा गया है। मधुकर सिन्हा - यहां ऐसा कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होता है भाई। पड़ताल के दौरान विकास भवन में हमारी मुलाकात एक महिला कर्मचारी से हुई जिसने बताया कि अभी जब तय ही नहीं हुआ कि कहां किस विभाग से रजिस्ट्रेशन होगा तो शंभू गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा। रिपोर्टर - हॉस्टल चलाना है, उसी का रजिस्ट्रेशन कराना है। महिला कर्मी - रजिस्ट्रेशन का अभी कोई डिसाइड ही नहीं हुआ है? रिपोर्टर - कैसे होगा, कुछ पता ही नहीं चल पा रहा है। महिला कर्मी - नहीं, कुछ तय नहीं हुआ है। रिपोर्टर - कब तक होने की संभावना है? महिला कर्मी - कहा नहीं जा सकता है। रिपोर्टर - आगे क्या होगा? महिला कर्मी - जब डीएम निर्देश देंगे, तभी तय होगा। रिपोर्टर - अभी कोई संभावना है? महिला कर्मी - अभी इसकी कोई फाइल नहीं आई तो शंभू हॉस्टल का कैसे होगा। रिपोर्टर - तब क्या किया जाए। महिला कर्मी - DM कार्यालय में जाइए वहीं होगा, नहीं तो SDM कार्यालय चले जाइए। महिला कर्मी से बातचीत के बाद हम SDM कार्यालय पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात पीयूष से हुई। वह भी कोई जानकारी नहीं दे पाए, किसी दूसरे कार्यालय में जाकर पता करने की सलाह दी। रिपोर्टर - गर्ल्स हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन की जानकारी चाहिए, यहां हो जाएगा क्या? पीयूष - हमें नहीं पता है कि हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा। रिपोर्टर - ऊपर से हमें आपके पास भेजा गया है। पियूष - यहां से कुछ नहीं होगा, आप कहीं और देखिए, किसी दूसरे कार्यालय में पता कीजिए। रिपोर्टर - कैसे होगा फिर, यहीं तो लोग भेज रहे हैं। पियूष - यहां करने का कोई आदेश नहीं, आप पटना नगर निगम में जाकर देख लीजिए। SDM कार्यालय में पीयूष से बातचीत के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पटना नगर निगम पहुंची। यहां हमारी मुलाकात नगर निगम में कार्यरत बड़े बाबू संजय से हुई। संजय ने भी रजिस्ट्रेशन में हमारी कोई मदद नहीं की। रिपोर्टर - गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा, यहां हो पाएगा क्या? संजय - गर्ल्स हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कराना है? रिपोर्टर - जी गर्ल्स हॉस्टल चलाने के लिए। संजय - नगर निगम में इस संबंध में कोई पेपर आया है क्या? रिपोर्टर - हमें जानकारी मिली है कि यहीं से हो रहा है, इसलिए आए हैं। संजय - ऊपर आर्य टीम है, पवन जी हैं, उनसे मिलिए, वह बताएंगे। इस दफ्तर से उस दफ्तर घुमाया, कहीं जानकारी नहीं नगर निगम के कर्मचारी संजय के बताने के बाद हम ऊपर आर्य टीम के पास पहुंचे, लेकिन यहां न पवन मिले और ना पंकज से मुलाकात हुई। वहां मौजूद लोगों ने हमें फिर नीचे दोबारा संजय के पास भेज दिया। संजय ने फिर हमें सी ब्लॉक भेज दिया। संजय - आप सी ब्लॉक जाइए, वहीं पर होगा। रिपोर्टर - हम लोग हर जगह घूम चुके हैं, सभी लोग एक-दूसरे के पास भेज रहे हैं। संजय - वही लोग यहीं भेज रहे होंगे। रिपोर्टर - हां, सब लोग यही कह रहे, नगर निगम में होगा। संजय - तब तो यह गलत जानकारी दी जा रही है आप लोगों को। रिपोर्टर - तब क्या करें सर। संजय - हां, अब याद आया, जहां नगर आयुक्त बैठते हैं, उनके सामने पीएसए बैठते हैं, वहां जाकर पूछ लीजिए। नगर निगम के बड़े बाबू संजय के बताए अनुसार भास्कर रिपोर्टर नगर निगम के अमीन रविरंजन के पास पहुंचा। रवि रंजन ने बातचीत में कहा शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े कई खुलासे कर दिए। क्योंकि नगर निगम में पता चला था कि पहले बिल्डिंग का नक्शा पास होगा तब हो सकता है कहीं हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन भी हो जाए। रिपोर्टर - हमें गर्ल्स हॉस्टल के लिए नक्शा पास कराना है। रविरंजन - कहां का नक्शा है? रिपोर्टर - सर, बोरिंग रोड का। रविरंजन - अप्रूवल बहुत जरूरी होता है, सड़क कितनी चौड़ी है? रिपोर्टर - 16 फीट रास्ता है। रविरंजन - पहले अपना परिचय दीजिए। रिपोर्टर - हम बाहर से आए हैं, यहां हॉस्टल बना रहे हैं। रविरंजन - देखिए, रोड की चौड़ाई, ऊंचाई और आसपास की स्थिति देखी जाती है। रिपोर्टर - मुआयना होगा क्या पहले? रविरंजन - हां, इसके बाद ही नक्शा पास होता है, पहले जमीन का वेरिफिकेशन करा लीजिए, फिर आगे बढ़िए। रिपोर्टर - हम चाहते हैं कि पहले घर बनाएं और उसी में हॉस्टल चलाएं। रविरंजन - देखिए, हॉस्टल कमर्शियल होता है, कमर्शियल भवन के लिए न्यूनतम 40 फीट रास्ता चाहिए। रिपोर्टर - अच्छा, ऐसा नहीं पता था। रविरंजन - रेजिडेंशियल का अलग नक्शा होता है। रिपोर्टर - हम सोच रहे हैं कि पहले घर बनवा लें, फिर उसमें हॉस्टल चलाएं। रविरंजन - ऐसा मत कीजिए, हॉस्टल मत चलाइए। रिपोर्टर - शंभू हॉस्टल भी तो ऐसे ही बना होगा ना जिसमें अभी घटना हुई है। रविरंजन - उसकी बात छोड़ दीजिए, कैसे बना है। रिपोर्टर - तो क्या शंभू गलत तरीके से बना था? रविरंजन - गलत तो बहुत लोग करते हैं, जो पकड़ा जाता है वही कुसूरवार होता है। रिपोर्टर - यानि यहां बहुत ऐसे हॉस्टल फर्जी तरीके से चल रहे हैं? रविरंजन - बोरिंग रोड में बहुत निर्माण गलत है, जब निगरानी होती है तो काम रुक जाता है। रिपोर्टर - जिसका पता नहीं चलता उसका क्या होता है? रविरंजन - जिसका पता नहीं चलता, वह बनवा लेता है। लेकिन पकड़ा गया तो इतना जुर्माना होता है। रिपोर्टर - शंभू हॉस्टल में भी तो ऐसा ही है। रविरंजन - इसलिए हम कह रहे हैं कि आप सोच समझकर काम कीजिए। रविरंजन ने किया शंभू गर्ल्स हॉस्टल का खुलासा शंभू गर्ल्स हॉस्टल में कैसे खेल चल रहा, रजिस्ट्रेशन के नाम पर क्या था। इसका खुलासा रविरंजन ने किया। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल की तरह एक दो नहीं कई हॉस्टल चल रहे हैं। कहीं रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था भी नहीं है, इसलिए सब हॉस्टल ऐसे ही चल रहा है। रविरंजन ने बताया कि अगर हॉस्टल चलाना है तो कम से कम 10 कट्ठा जमीन चाहिए, तभी नियम पूरे होंगे। पटना में किसी भी हॉस्टल के पास ऐसा नहीं है। रिपोर्टर - पटना में तो ज्यादातर हॉस्टल मकान के नक्शे पर ही चल रहे हैं। रविरंजन - बिल्कुल, बोरिंग रोड में कई हॉस्टल ऐसे हैं, जिनका अप्रूवल मकान का है और हॉस्टल चल रहा है। रिपोर्टर - शंभू हॉस्टल इसी वजह से फंसा है? रविरंजन - शंभू वाला बहुत बुरी तरह फंसा है। रिपोर्टर - उसका मकान का भी नक्शा पास नहीं था? रविरंजन - उसका तो किसी तरह का नक्शा पास नहीं था। देखिए, जैसे अस्पताल चलते रहते हैं, लेकिन घटना होने पर जांच शुरू होती है, वैसे ही यह मामला है। रिपोर्टर - आप सही जानकारी दे रहे हैं, इसलिए मैं आपके पास आया हूं। रिपोर्टर - हॉस्टल के लिए 40 फीट रास्ता जरूरी है? रविरंजन - नियम बहुत हैं, आगे, पीछे, बगल की दूरी, एरिया का कैटेगरी लाल, पीला, ग्रीन सब कुछ देखा जाता है। इसी आधार पर नक्शा पास होता है। नगर निगम में ही हमारी मुलाकात एक पटल के इंचार्ज अमरेश से हुई। अमरेश से जब शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बारे में पूछा गया तो वह भड़क गए और बोले शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बात ही मत कीजिए। रिपोर्टर - गर्ल्स हॉस्टल बनाने के लिए नक्शा कैसे और कहां से पास होगा? अमरेश - बायलॉज के हिसाब से नक्शा बनवाइए, पास हो जाएगा। रिपोर्टर - फिर शंभू हॉस्टल और दूसरे लोग कैसे चला रहे हैं? अमरेश - तो आप भी कर लीजिए ना। रिपोर्टर - हम तो बस जानकारी ले रहे हैं। अमरेश - करने के लिए तो कुछ भी हो जाता है, हमारा पदाधिकारी घूमेगा, जानकारी होगी तो कार्रवाई होगी। रिपोर्टर - मैं सिर्फ जानकारी के लिए पूछ रहा था। अमरेश - आप उसका उदाहरण क्यों दे रहे हैं? पहले तो उसकी बात मत कीजिए। रिपोर्टर - क्यों क्या हो गया? अमरेश - जिसका नक्शा ही पास नहीं हुआ है तो उस घर में हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कहां होगा। अमरेश से बातचीत के बाद हम पटना नगर निगम के टाउन प्लानर अमित से मिले। अमित ने साफ कर दिया कि जिस घर का नक्शा नहीं पास है वहां कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। अब ऐसे में हमने सवाल किया कि जब शंभू गर्ल्स हॉस्टल का कोई नक्शा ही नहीं पास है तो डीजीपी ने किस रजिस्ट्रेशन को कैंसिल करने की बात कही है। इस पर अमित ने चुप्पी साध ली। रिपोर्टर - हमें नक्शा पास कराना है कैसे और कहां होगा। अमित - जमीन के कागजात दिखाइए, अमीन से प्रक्रिया शुरू होती है। रिपोर्टर - थोड़ा प्रोसेस बता दीजिए। अमित - ऑनलाइन आवेदन करना होता है। रिपोर्टर - ठीक है। अमित - एक आर्किटेक्ट पकड़ना होता है, वही नक्शा बनाएगा। समझदार आर्किटेक्ट होना चाहिए। रिपोर्टर - ठीक है, तो बिना नक्शा से हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन होगा क्या? अमित - सवाल ही नहीं है, ऐसे कैसे काम होगा नियम विरुद्ध। नगर निगम से पड़ताल के बाद हम दानापुर नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। वहां हमारी मुलाकात सहायक आर्किटेक्ट सुनील से मुलाकात हुई। सुनील ने बताया कि नियम के बिना ही सब हॉस्टल चल रहे हैं, जिस भवन का नक्शा पास नहीं है, वहां हॉस्टल चल रहा है तो वह गलत है। रिपोर्टर - हॉस्टल खोलने का रजिस्ट्रेशन कहां से होगा? सुनील - यहां हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन नहीं होता है, यहां सिर्फ बिल्डिंग का नक्शा पास किया जाता है। रिपोर्टर - उसके परमिशन लेने के लिए कहां जाना होगा? सुनील - यहां नहीं होता, हॉस्टल चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन डीएम ऑफिस जाना होगा। रिपोर्टर - अच्छा, जो बिल्डिंग होगी वह आपके यहां से पास होगी? सुनील - हां, बिल्डिंग का नक्शा पास होगा तब हॉस्टल का काम होगा। रिपोर्टर - अच्छा। सुनील - जैसे सिनेमा हॉल खोलना हो तो हमारा स्ट्रक्चर पास हो जाएगा, उसके बाद आप बिल्डिंग बनाइए, लेकिन उसमें सिनेमा हॉल चलाने की अनुमति जिला अधिकारी ही देंगे। उसी तरह हॉस्टल में भी प्रक्रिया है। रिपोर्टर - मतलब स्ट्रक्चर के लिए आपके पास आना होगा? सुनील - हां, पहले नक्शा पास कराइए, बिल्डिंग खड़ी कीजिए, फिर हॉस्टल में बच्चियों को रखने की अनुमति जिलाधिकारी से लीजिए। रिपोर्टर - हॉस्टल के लिए क्या-क्या करना जरूरी है? सुनील - बायलॉज के हिसाब से काम कीजिए। रिपोर्टर - बायलॉज कहां मिलेगा? सुनील - सचिवालय के पास किसी दुकान पर देख लीजिए या किसी आर्किटेक्ट से मिल लीजिए। रिपोर्टर - ठीक है, हमारे पास खाली जमीन भी है और एक घर भी है। सुनील - घर रेजिडेंशियल है या हॉस्टल के लिए बना है? रिपोर्टर - नहीं, रेजिडेंशियल है। सुनील - तो उसमें हॉस्टल नहीं चल सकता। खाली जमीन पर पहले हॉस्टल बनवाइए, फिर उसका रजिस्ट्रेशन कराइए। रिपोर्टर - मतलब पुराने भवन में नहीं चलेगा? सुनील - हम मना नहीं कर रहे हैं, लेकिन जो नियम है वही बता रहे हैं। रिपोर्टर - ठीक है। सुनील - हम लोग सिर्फ यह परमिशन देते हैं कि बिल्डिंग कैसे खड़ी करनी है। रहने की परमिशन यहां से नहीं मिलेगी। रिपोर्टर - यानी जितने लोग हैं, सब मनमाने तरीके से रह रहे हैं? सुनील - दूसरे को देखने की क्या जरूरत है, आप अपना देखिए। रिपोर्टर - मतलब सब वैसे ही रह रहे हैं? सुनील - जब प्रशासन का डंडा चलेगा तो सब ठंडे हो जाएंगे। रिपोर्टर - हां, शंभू हॉस्टल वाला देख लीजिए। सुनील - हां, जिस दिन सरकार सख्त हुई, उसी दिन मामला हो जाएगा। रिपोर्टर - यहां हॉस्टल वाले नक्शा पास कराकर बनाए हैं या नहीं? सुनील - कुछ लोगों ने बनाया होगा। आपके पास जमीन है न? रिपोर्टर - हां, है। सुनील - तो आप हॉस्टल का नक्शा पास कराइए, फिर आगे का काम कराइए। कई विभागों की पड़ताल के बाद भी कहीं हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन की कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद भास्कर रिपोर्टर पटना के फायर ब्रिगेड ऑफिस पहुंचा। यहां भी हॉस्टल की कोई लिस्ट नहीं मिली। यहां भी वही पता चला कि सब हवा हवाई वाला हिसाब किताब है। शंभू हॉस्टल की भी यहां कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसा लगा कि उसकी भी यहां कोई सूचना दी ही नहीं गई थी कि पटना में कोई शंभू गर्ल्स हॉस्टल भी चल रहा है। रिपोर्टर - हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन कराना है, इसके लिए क्या करना होगा? सतीश - कहां होगा यह नहीं पता हम तो सिर्फ NOC दे सकते हैं। रिपोर्टर - क्या प्रक्रिया है? सतीश - ऑनलाइन आवेदन कीजिए। रिपोर्टर - क्या-क्या चाहिए? सतीश - साइट पर जाकर सब कुछ ऑनलाइन कर दीजिए, हो जाएगा। रिपोर्टर - मतलब रूम का साइज और जिस घर में हॉस्टल खोलना है, वह कैसा होना चाहिए? सतीश - सब कुछ ऑनलाइन है, साइट पर फॉर्म भरने के दौरान जैसा-जैसा मांगा जाएगा, उसी तरह से करना होगा। जब कहीं रजिस्ट्रेशन होता ही नहीं तो DGP क्यों बोल गए बड़ी बात भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में 6 विभागों में पड़ताल के दौरान कहीं भी ऐसा नहीं मिला जहां से रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन लिया जाता हो। हर विभाग में बस यही बोला गया कि हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन को लेकर न पहले से कोई गाइडलाइन थी और ना ही शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाद कोई आदेश मिला है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने हर पटल पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल का नाम लिया, लेकिन उस पर कोई खुलकर बात करने को भी तैयार नहीं हुआ। इससे यह साफ हो गया कि जिस घर में शंभू गर्ल्स हॉस्टल चल रहा था, उस घर का भी नक्शा पूरी तरह से पास नहीं था। क्योंकि भास्कर की पड़ताल में कहीं कोई अधिकारी या निगमकर्मी ये नहीं बताया कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग का नक्शा पास था। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब पटना में किसी भी हॉस्टल का रजिस्ट्रेशन नहीं है और ना ही पहले था तो DGP कैसे दावे के साथ शंभू गर्ल्स हॉस्टल के रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की बात कह रहे हैं।
नई नीति बनने तक ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादले नहीं हो सकेंगे : शिक्षामंत्री
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों को लेकर हंगामा हुआ। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जूली ने कहा कि सरकार थर्ड ग्रेड शिक्षकों को गुमराह कर रही है। भाजपा ने घोषणा पत्र में तबादला नीति बनाने की बात कही थी, लेकिन आधा कार्यकाल बीत चुका है। नीति कब बनेगी और तबादले कब होंगे? अभी तक स्पष्ट नहीं है। इस पर पलटवार करते हुए दिलावर ने कहा कि भाजपा सरकार के समय 2200 से अधिक तबादले किए गए थे, जबकि कांग्रेस शासन में एक भी तबादला नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘आप लोग तब कहां थे?’ शिक्षा मंत्री ने बताया कि नई तबादला नीति प्रक्रियाधीन है। इसके अंतिम रूप लेने के बाद ही तबादलों पर विचार किया जाएगा। विधायकों की अभद्र भाषा और गलत इशारों का मुद्दा उठा कोर्ट में मामला : जेजेएम घोटाले वाले इलाकों में पेयजल योजनाओं के काम बंद जल जीवन मिशन घोटाले का मामला प्रश्नकाल और शून्यकाल दोनों में उठा। जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने बताया कि जेजेएम में फर्जी प्रमाण पत्रों पर काम लेने वाली फर्म मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल और गणपति ट्यूबवेल को ब्लैकलिस्ट किया गया था। दोनों फर्में अदालत से अन्य ठेकेदारों को काम आवंटित नहीं करने का आदेश ले आईं। विभाग ने हाईकोर्ट में अपील की है, लेकिन मामला डेढ़ साल से लंबित है। फर्जी डिग्रियों पर सख्ती; निजी विविके लिए बनेगा नियामक आयोग प्रश्नकाल में निजी विश्वविद्यालयों में भर्तियों में अनियमितता और बैकडेट में फर्जी डिग्रियां जारी करने का मुद्दा उठा। उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि 10 विश्वविद्यालयों की जांच के आदेश दिए हैं। विधायक कालीचरण सराफ ने पूछा कि क्या अन्य राज्यों की तर्ज पर निजी विश्वविद्यालयों के नियंत्रण के लिए नियामक आयोग गठित किया जाएगा? मंत्री ने कहा कि प्रारूप तैयार है। विधि विभाग को भेजने के बाद कैबिनेट में रखा जाएगा। शून्यकाल में अभद्र भाषा के इस्तेमाल और आपत्तिजनक इशारे करने वाले विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की मांग उठी। स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कहा कि मामला गंभीर है और सोशल मीडिया पर प्रदेश की आठ करोड़ जनता विधानसभा की कार्यवाही देखती है। भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि पहले धारीवाल ने दो बार गालियां दीं, फिर राजाखेड़ा से विधायक रोहित बोहरा ने आपत्तिजनक व्यवहार किया। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पर संसदीय मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पीकर से कहा कि ऐसे सदस्यों को सदन में रहने का अधिकार नहीं है। वहीं, कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कहा कि मामला इतना गंभीर नहीं है। स्पीकर ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि वे वीडियो देखने के बाद उचित कार्रवाई करेंगे। दिलावर : हमने 2200 तबादले किए, आपने एक भी नहीं किए जूली : 2 साल में भी तबादला नीति नहीं
नेतृत्व शिखर सम्मेलन 16 सेदेशभर के शिक्षाविद् जुटेंगे, 28 सत्र में परंपरा से AI तक मंथन
जयपुर | राजस्थान विश्वविद्यालय, राज्य सरकार एवं विद्या भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में झालाना स्थित आरआईसी में राष्ट्रीय संस्थागत नेतृत्व शिखर सम्मेलन-2026 सोमवार को आयोजित होगा। इसमें देशभर के केन्द्रीय एवं डीम्ड विवि के कुलपति, आईआईटी, आईआईएम संस्थानों के निदेशक समेत शिक्षाविद् शामिल होंगे। आरयू की कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा, आयुक्त (उच्च शिक्षा) डॉ. ओ.पी.बैरवा ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि दो दिन में विभिन्न विषयों पर 28 सत्र होंगे। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, एआई, भारतीय भाषा परिवार, शिक्षक-शिक्षा में भविष्य जैसे अनेक मुद्दों पर मंथन किया जाएगा। विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के क्षेत्रीय संयोजक डॉ.संजय शर्मा के अनुसार इसकी रिपोर्ट तैयार कर राज्यपाल हरिभाऊ किशन राव बागड़े को सौंपी जाएगी। इसके बाद में केन्द्र सरकार को भेजी जाएगी। उद्घाटन समारोह में डिप्टी सीएम डॉ.प्रेमचंद बैरवा, एनसीटीई के चेयरमैन प्रो.पंकज अरोड़ा मौजूद रहेंगे। दूसरे दिन समापन सत्र में राज्यपाल और विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी उपस्थित रहेंगे। ये प्रमुख वक्ता सम्मेलन में अनुभव करेंगे साझा प्रो.राजीव आहूजा ( निदेशक, आईआईटी रोपड़), प्रो. धनंजय सिंह (सदस्य सचिव, आईसीएसएसआर), प्रो.गांती.एस.मूर्ति (राष्ट्रीय समन्वयक, आईकेएस प्रभाग), चामू कृष्ण शास्त्री (अध्यक्ष, भारतीय भाषा समिति), प्रो. अरुण मोहन शैरी (निदेशक, आईआईटी लखनऊ), प्रो.जगदीश कुमार (पूर्व अध्यक्ष, यूजीसी), प्रो.श्रीनिवास वरखेड़ी (कुलगुरु, केन्द्रीय संस्कृत विवि) अपने अनुभव साझा करेंगे।
गणेश शंकर विध्यार्थी मेडिकल कॉलेज के फार्मेसी विभाग की ओर से 13 फरवरी 2026 को महाविद्यालय परिसर में एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और चिकित्सा महाविद्यालयों से आए हुए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य औषधि विज्ञान, क्लीनिकल रिसर्च, फार्माकोलॉजी, फार्मास्युटिक्स और औषधीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध कार्यों, उभरती तकनीकों, नैतिक शोध पद्धतियों तथा रोगी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही एकेडमिक, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। दीप प्रज्ज्वलन से शुरुआत, राष्ट्रगान के साथ समापन कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। स्वागत भाषण प्रो. अमिता तिलक ने दिया और कार्यक्रम का संचालन भी किया। GSVM के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन छात्रों को शोध के नए आयामों से जोड़ते हैं और संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करते हैं। इस कार्यक्रम में राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह विधानसभा सत्र के कारण उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने संदेश भेजकर सम्मेलन की सफलता की शुभकामनाएं दीं और औषधि शिक्षा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। पोस्टर और मौखिक प्रस्तुतियों में दिखा छात्रों का उत्साह सम्मेलन के दौरान शोधार्थियों ने नैनो-प्रौद्योगिकी, क्लीनिकल फार्मेसी, हर्बल दवाओं और दवा सुरक्षा से संबंधित शोध कार्य पोस्टर और मौखिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रस्तुत किए। विशेषज्ञ समिति द्वारा सभी शोध सारों का मूल्यांकन किया गया और उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। समापन अवसर पर आयोजन सचिव डॉ. सुधीर सिंह गंगवार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। फार्मेसी के विभागाध्यक्ष ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे शोधोन्मुख और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और व्यावसायिक नैतिकता को बढ़ावा मिल सके।
बांका में जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास निगम ने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना और ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के तहत चांदन प्रखंड के नावाडीह स्थित संगम जीविका महिला विकास स्वाबलंबी सहकारी समिति लिमिटेड में हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला हब फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीमेन (DHEW) के लैंगिक विशेषज्ञ और वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान महिलाओं को बेटियों के महत्व, समान अधिकार, ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना, वन स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन, जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र (DHEW) और ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। DHEW के लैंगिक विशेषज्ञ मो.महबूब आलम ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ शेखर कुमार दास ने बचत, बैंकिंग, डिजिटल लेनदेन, बाल विवाह रोकथाम और दहेज उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी प्रदान की। लैंगिक विशेषज्ञ श्रीकांत कुमार ने उपस्थित जीविका दीदियों को बेटियों की शिक्षा सुनिश्चित करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बेटियाँ समाज की शक्ति हैं और उनके संरक्षण, शिक्षा तथा सशक्तिकरण से ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। इस अवसर पर जीविका समूह की अध्यक्ष सावित्री देवी, बुक कीपर श्रीमती मंजू पांडेय सहित कई सदस्य मौजूद रहे।
बेतिया जिले के मैनाटांड प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय बेलवाटोला में हाजिरी बनाकर घर जा रहे एक शिक्षक को ग्रामीणों ने रास्ते में रोककर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान शिक्षक ने स्वीकार किया कि वे किसी जरूरी कार्य से घर जा रहे थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार, संबंधित शिक्षक प्रतिदिन सुबह हाजिरी बनाकर विद्यालय से चले जाते हैं और शाम में लौटकर चेक आउट करते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। शौचालय पर हमेशा लगा रहता है ताला ग्रामीणों ने अन्य शिक्षकों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विद्यालय का शौचालय हमेशा ताला बंद रहता है, जिससे बच्चों को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता दोनों के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा ग्रामीणों का आरोप है कि मध्याह्न भोजन के बाद बच्चों से ही उनकी थालियां साफ कराई जाती हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। अभिभावकों ने इसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन बताया है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। शिक्षा पदाधिकारी ने कार्रवाई का दिया आश्वासन इस मामले में प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। दैनिक भास्कर इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
बिहार विधानसभा में बजट सत्र के 9वें दिन शुक्रवार को संदीप सौरभ, अख्तरुल ईमान समेत 6 सदस्यों से स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी ध्यानाकर्षण सूचना पर सरकार का जवाब होगा। विधान मंडल के दोनों ही सदनों विधान सभा और विधान परिषद में विपक्ष सरकार को घेरेगा। विधानसभा में शिक्षा विभाग से जुड़े आलोक कुमार मेहता, भाई वीरेन्द्र और अन्य तीन सदस्यों से प्राप्त ध्यानाकर्षण पर सरकार का जवाब होगा। नगर आवास विभाग और पंचायती राज विभाग की ओर से राजू तिवारी, विनय कुमार और अन्य सात सदस्यों के सवालों का जवाब दिया जाएगा। इसके अलावा प्रश्नोत्तर काल के तहत अल्प सूचित और तारांकित प्रश्नों के उत्तर होंगे। वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रभारी मंत्री बिहार सरकारी सेवक संशोधन नियमावली 2025, बिहार सरकारी सेवक की परिवीक्षा अवधि नियमावली 2024, बिहार सरकारी सेवक की परिवीक्षा अवधि संशोधन नियमावली 2025 और बिहार प्रशासनिक सेवा भर्ती और सेवा शर्त नियमावली 2025 की प्रति सदन की मेज पर रखेंगे। विधान परिषद में ध्यानाकर्षण बिहार विधान परिषद की कार्यवाही में प्रश्न काल के अलावा नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड पटना के वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 का वार्षिक प्रतिवेदन की प्रति सदन की मेज पर रखी जानी है। ध्यानाकर्षण के तहत डॉ. मदन मोहन झा, वंशीधर ब्रजवासी, प्रो. वीरेन्द्र नारायण यादव, नवल किशोर यादव, डॉ. संजीव कुमार सिंह के सवाल हैं। कल सीएम और राजद विधायक में हुई थी नोकझोंक बजट सत्र के आठवें दिन गुरुवार को नीतीश कुमार और राजद विधायक भाई वीरेंद्र में नोक-झोंक हुई थी। दरअसल, राजद विधायक पानी में आर्सेनिक का मुद्दा उठा रहे थे, इसी बीच मुख्यमंत्री ने उनके स्वेटर को देख कर कहा- ‘इतने कपड़े क्यों पहने हो।’ इस पर भाई वीरेंद्र ने कहा- ‘आपने ही तो दिया है, छोटे भाई को भूल जाते हैं। इसलिए कहते हैं समय पर दवा खाया कीजिए।’ जिसके बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी सीएम को डिफेंड करने उठे और कहा, ‘सीएम की चिंता है कि इतना कपड़ा क्यों पहने हैं, इतनी तो ठंढ नहीं है।’ काली पट्टी बांधकर पहुंचे थे विपक्ष के नेता सदन की कार्यवाही से पहले कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन मुंह पर काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने कहा, ‘सरकार भी अपराध पर बोलने से ऐसे ही बच रही है।’ वहीं पोर्टिको में राजद विधायकों ने बैनर-पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। बैनर पर लिखा था- ‘मोदी-नीतीश से बिहार को बचाओ।’ ‘बिहार अपराध-बेरोजगारी में नंबर वन है।’
प्रदेश में करीब 3768 स्कूल जर्जर हैं। इनको जीर्ण-शीर्ण घोषित किया गया। इनमें से 2558 भवनों को औपचारिक रूप से जर्जर घोषित किया जा चुका है और 1210 को प्रक्रिया में रखा गया है। वैसे असुरक्षित की श्रेणी में 5667 स्कूलों को रखा गया है। झालावाड़ घटना के बाद ठीक कराने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाया गया, मगर बुधवार को बजट में सिर्फ 500 करोड़ रुपए ही आवंटित हुए। हालांकि शिक्षा विभाग इसको लेकर वाहवाही बता रहा है, मगर कम राशि मिलने का मतलब साफ है कि आने वाले मानसून में मरम्मत से वंचित होने वाले जर्जर स्कूलों में बच्चों को बैठना होगा। दरअसल, झालावाड़ स्कूल की घटना के बाद शिक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया था। सामने आया कि प्रदेश में 5667 स्कूल पूरी तरह असुरक्षित हैं। एक प्रारंभिक सर्वे में पाया गया कि लगभग 5667 स्कूल इतने खराब हैं कि उन्हें पूरी तरह असुरक्षित माना गया, जहां पूरी तरह भवन का उपयोग करना खतरनाक है। 86,934 कक्षाएं पूरी तरह जर्जर हैं। राज्य के सरकारी स्कूलों की कुल 63,018 स्कूलों में से लगभग 86,934 कक्षाएं पूरी तरह असुरक्षित और जर्जर हैं। 41,178 स्कूलों को छोटे से बड़े स्तर पर मरम्मत की आवश्यकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 41,178 स्कूलों में मरम्मत की आवश्यकता है, हालांकि ये पूरी तरह असुरक्षित तो नहीं, पर मरम्मत जरूरी है। प्रदेश के स्कूलों में 17,109 शौचालयों को जर्जर घोषित किया गया है। इसके साथ ही 29,093 शौचालयों को मरम्मत की जरूरत खुद शिक्षा विभाग ने माना है। अब सवाल ये है कि शिक्षा विभाग ने जो 20 हजार करोड़ का प्रस्ताव भेजा था, उसमें से सिर्फ 500 करोड़ से क्या होगा। एक हजार करोड़ से तो शौचालयों की ही मरम्मत हो सकेगी, क्योंकि हाल ही में न्यायालय में सुनवाई हुई थी, जिसमें अधिकारियों से सवाल-जवाब हुए थे। “स्कूलों के लिए जो बजट आवंटित हुआ है, उसके अलावा विधायक निधि, डीएमएफटी, सांसद कोटा समेत भामाशाहों से भी मदद ली जाएगी। बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार चिंतित है और इसके लिए कदम उठाएगी।”-रामलाल शर्मा,भाजपा प्रवक्ता ने बजट पर सफाई दी
संभल जिले के चंदौसी स्थित अलावलपुर गांव के कंपोजिट विद्यालय के सामने कूड़े का ढेर लगा है। इस ढेर में अक्सर आग लगा दी जाती है, जिससे उठने वाला धुआं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और राहगीरों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। यह समस्या शिक्षा के स्तर में सुधार और विद्यालयों के कायाकल्प के दावों के बावजूद बनी हुई है। गुरुवार दोपहर लगभग 2 बजे, गांव से गुजरते समय कंपोजिट विद्यालय के ठीक सामने, एक 6 फीट की सड़क पार कर कूड़े का अंबार देखा गया। इस कूड़े में आग लगी हुई थी और उससे घना धुआं उठ रहा था, जो स्कूल के बच्चों के साथ-साथ वहां से गुजर रहे ग्रामीणों के लिए भी जोखिम भरा था। यह गांव यूपी सरकार की माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी के चंदौसी विधानसभा क्षेत्र में आता है, इतना ही नहीं उनकी बेटी डॉ. सुगंधा सिंह इसी क्षेत्र से ब्लॉक प्रमुख है। स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन ने इस समस्या पर चिंता व्यक्त की है। गांव की प्रधान मंगलवती और ग्राम सचिव ने पहले जेसीबी लगाकर स्कूल के सामने से गंदगी हटवाई थी। हालांकि, कुछ समय बाद गांव के लोगों ने फिर से स्कूल के सामने कूड़े का ढेर लगाना शुरू कर दिया। कंपोजिट विद्यालय की प्रधानाध्यापक भावना सागर ने बताया कि विद्यालय के ठीक सामने कूड़े का ढेर लगा रहता है और अक्सर उसमें आग भी लगा दी जाती है। उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत की है और बीडीओ को लिखित आवेदन भी दे चुकी हैं। उन्होंने गांव वालों को जागरूक करने की भी कोशिश की है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि मैंने बच्चों के साथ मिलकर हाथों में म्यूजिक सिस्टम लेकर प्रेरक गाने बजाए और बाकायदा अनाउंसमेंट भी किया कि 'स्कूल के सामने गंदगी न फैलाएं, इससे आपके अपने बच्चे ही बीमार होंगे।' स्कूल के सामने सफाई रखना ही बेहतर है। लेकिन इसके बावजूद गांव वाले मानने को तैयार नहीं हैं। अभी हाल ही में 8-10 लड़के मेरे पास आए थे और कहने लगे, 'मैम, कुछ भी कीजिये पर इस कूड़े को हटवाइये।' इसके बाद उन लोगों ने मीटिंग की और अपने स्तर पर पैसे इकट्ठे करके जेसीबी से कूड़ा साफ करवाया। लेकिन अफसोस, फिर से वही स्थिति बन गई है। गांव वाले समझने को तैयार ही नहीं हैं। अब मैं क्या करूँ? मेरी तरफ से कोशिशों में कोई कमी नहीं है। भावना सागर पिछले 12 वर्षों से अलावलपुर गांव के इस कंपोजिट विद्यालय में तैनात हैं। विद्यालय में कुल 176 बच्चे पढ़ने आते हैं। गांव की आबादी लगभग 3500 है। राहुल कुमार, दीप्ति शर्मा, विपिन कुमार, रीना कुमारी, शाहना परवीन और धर्मेंद्र कुमार यहां बच्चों को पढ़ाते हैं।
हरियाणा के शिक्षा विभाग में 2014 की रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत नियमित किए गए प्रोग्रामर पर विवाद खड़ा हो गया है। जिसका खुलासा शिक्षा विभाग की सीनियर अधिकारी और सहायक निदेशक द्वारा हरियाणा सरकार को लिखे गए पत्र से हुआ है। विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर ने सरकार को भेजे लेटर में लिखा है कि साल 2014 की रेगुलराइजेशन नीति के तहत शिक्षा विभाग में प्रोग्रामर को नियमित करते हुए बहुत सारी अनियमितता बरती गई हैं। जिसमें वरूण अग्रवाल प्रोग्रामर के मामले में विभाग ने नियमों और जरूरी शर्तों व क्राइटेरिया को दरकिनार करते हुए नियमित किया गया पाया गया। पत्र में आगे लिखा गया है कि जिन कर्मचारी/अधिकारियों द्वारा ये अनियमितताएं की गई है उन पर सख्त अनुशासनिक कार्यवाही होनी चाहिए। ऐसे प्रोग्रामर जिनको 3 वर्ष के अनुभव और बिना शैक्षणिक योग्यता पूर्ण करते हुए नियमित किया गया है, को तुरंत प्रभाव से रिवर्ट किया जाना बनता है ताकि हरियाणा सरकार पर जो वर्ष 2014 से अब तक वित्तीय हानि हुई है उससे बचा जा सके। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये नियम वर्ष 2014 से पहले लागू थे और कानूनी रूप से अनिवार्य हैं। इन नियमों में 'या समकक्ष शब्द नहीं है। इसलिए इनके अलावा किसी अन्य योग्यता को मान्य नहीं माना जा सकता। 3 पॉइंट में समझिए 2 केसों का उदाहरण.. तीन बिंदुओं पर जांच की मांग…
गुरुवार को ही क्यों आरंभ होती हैं शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं?
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं गुरुवार 12 फरवरी 2026 से राज्यभर में आरंभ हो गईं। क्या आपको पता है कि सालों से बोर्ड की परीक्षाएं हर बार गुरुवार से ही क्यों आरंभ होती हैं? हालांकि परीक्षाएँ अक्सर गुरुवार से शुरू होने के पीछे कोई एक आधिकारिक, लिखित “धार्मिक नियम” नहीं है, बल्कि यह परंपरा, ... Read more
प्रॉक्सी शिक्षकों पर सख्ती के निर्देश, शिक्षा विभाग ने गठित की जांच समितियां और फ्लाइंग स्क्वॉड
उदयपुर| अब यदि कोई शिक्षक अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति (प्रॉक्सी) को स्कूल में पढ़ाने के लिए भेजता है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार ऐसे शिक्षकों को सीधे सेवा से अलग कर सकती है। दरअसल, कई जिलों में जनप्रतिनिधियों से लेकर आमजन तक की ओर से प्रॉक्सी शिक्षकों से संबंधित शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इसी को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों में आकस्मिक निरीक्षण के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड गठित करें। इसके साथ ही संपर्क पोर्टल पर प्राप्त प्रॉक्सी शिक्षकों से संबंधित शिकायतों की भी गहन जांच की जाएगी। निदेशालय ने इस प्रकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दो दिन के भीतर अनिवार्य रूप से कार्यालय को भेजी जाए। जांच रिपोर्ट ईमेल आईडी samparkpor tal.ele@gm ail.com पर प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं। निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी इन आदेशों का उद्देश्य शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा फर्जी तरीके से कार्यरत शिक्षकों पर रोक लगाना है। उच्चाधिकारियों ने सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यालयों पर फोकस किया जाए। उच्च न्यायालय द्वारा मंजू गर्ग बनाम राजस्थान राज्य याचिका में दिए गए आदेशों की पालना में निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा ने राज्य के सभी जिलों में जांच समितियों और फ्लाइंग स्क्वॉड के गठन के निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने 31 जुलाई 2024 और 28 अक्टूबर 2025 की सुनवाई के दौरान स्कूलों में प्रॉक्सी शिक्षकों की उपस्थिति पर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने विभाग को आवश्यक कार्रवाई कर पालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में निदेशालय ने जिला स्तर पर विशेष निगरानी टीमें तैनात करने का निर्णय लिया है। तीन सदस्यीय जांच समिति का स्वरूप : प्रॉक्सी शिक्षकों की पहचान और जांच के लिए प्रत्येक जिले में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी। इसमें अध्यक्ष: मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (सीडीईओ), सदस्य: जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय, प्रारंभिक शिक्षा) और सदस्य के रूप में संबंधित ब्लॉक के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) को शामिल करना है।
शिक्षा सेवकों की मांगों के लिए केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी को सौंपा जाएगा ज्ञापन
सिटी रिपोर्टर|रजौली रजौली प्रखंड क्षेत्र के उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय बलिया में शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दायित्वों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। विद्यालय के एकमात्र विज्ञान शिक्षक शन्नी कुमार को मतदान केंद्र संख्या-360 बलिया पश्चिम भाग के लिए बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) नियुक्त किए जाने के बाद पठन-पाठन प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। प्रधानाध्यापक सतीश कुमार ने बताया कि शन्नी कुमार कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को विज्ञान विषय की पढ़ाई कराते हैं। ऐसे में उनकी बीएलओ ड्यूटी लगने से विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ेगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानाध्यापक ने सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी को पत्र लिखकर शिक्षक को चुनावी कार्य से मुक्त करने की मांग की है। नवादा|बिहार मुसहर भुईंया शिक्षा सेवक महासंघ के प्रदेश सचिव सह जिला अध्यक्ष मुकेश मांझी ने बताया कि सोमवार को केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी एक दिवसीय दौरे पर जिले के कौआकोल प्रखंड के महुडर गांव पहुंचेंगे। इस दौरान उनके साथ बिहार सरकार के मंत्री संतोष मांझी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के भी आने की संभावना है। कार्यक्रम के क्रम में वे हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा सेकुलर के जिला अध्यक्ष अशोक मांझी की माता के श्राद्धकर्म में शामिल होंगे। इस अवसर पर शिक्षा सेवक महासंघ का एक शिष्टमंडल अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपेगा। पठन-पाठन पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव प्रधानाध्यापक ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि वर्तमान में विद्यालय में विज्ञान विषय के लिए शन्नी कुमार ही एकमात्र शिक्षक हैं। वे न केवल उच्च कक्षाओं की नियमित पढ़ाई संचालित करते हैं, बल्कि विज्ञान प्रयोगशाला (लैब) से संबंधित सभी कार्यों की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। यदि वे बीएलओ कार्य में व्यस्त रहते हैं, तो कक्षा 9 से 12 तक की विज्ञान कक्षाएं बाधित हो जाएंगी। इससे विशेषकर बोर्ड परीक्षार्थियों की तैयारी प्रभावित हो सकती है, जो छात्रों के भविष्य के लिए चिंताजनक है। इस संबंध में बीडीओ संजीव झा ने बताया कि वे फिलहाल इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारियों में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
विश्व शिक्षा दिवसः 24 जनवरी 2026 ? शिक्षा रोजगार का टिकट नहीं, जीवन का दर्शन बने
विश्व शिक्षा दिवस कोरा उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है, यह सोचने का क्षण कि शिक्षा क्या है, किसके लिए है और किस दिशा में समाज को ले जा रही है। भारत इस संदर्भ में केवल एक देश नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है, जिसने शिक्षा को कभी भी मात्र रोजगार या सूचना का ... Read more
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

