जयपुर के रामनगर सोडाला के रहने वाले आशीष कुमार बैरवा ने दहेज प्रथा के खिलाफ खड़े होकर समाज को एक नई दिशा दिखाई है। तृतीय श्रेणी शिक्षक पद पर चयनित होने के बावजूद आशीष ने साफ शब्दों में तय कर लिया था कि वे दहेज मुक्त विवाह करेंगे। दहेज के नाम पर एक रुपया भी स्वीकार नहीं करेंगे। आशीष का मानना है कि जब वे स्वयं शिक्षक हैं और बच्चों को शिक्षा देना उनका दायित्व है तो पहले उन्हें वही शिक्षा अपने जीवन में उतारनी होगी। आए दिन दहेज को लेकर हो रही घटनाओं और समाचारों ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, जिसके बाद उन्होंने निश्चय किया कि वे केवल कन्या और कलश के पारंपरिक रिवाज के साथ ही विवाह करेंगे। साधारण परिवार, लेकिन असाधारण सोच आशीष के पिता चिरंजी लाल बैरवा पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं, जबकि माता गीता देवी गृहिणी हैं। दादा मोतीलाल बैरवा राजमिस्त्री रहे हैं और दादी गुलाब देवी गृहिणी। आर्थिक रूप से सामान्य परिवार होने के बावजूद, पूरे परिवार ने आशीष के इस निर्णय पर सहमति जताई, जो अपने आप में एक बड़ी बात है।सरकारी नौकरी लगने के बाद आशीष के लिए कई ऐसे रिश्ते भी आए, जिनमें कार और भारी दहेज की सीधी पेशकश की गई, लेकिन आशीष ने पहले ही दिन यह स्पष्ट कर दिया कि वे केवल सवा रुपया शगुन के रूप में लेंगे, उससे अधिक कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। ससुराल पक्ष की भी सराहनीय भूमिका जब आशीष को लड़की पसंद आई तो ससुराल पक्ष के किसान और राजमिस्त्री गोपाल बैरवा और उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी ने अपनी श्रद्धा के अनुसार दहेज देने की बात कही। इस पर आशीष और उनके परिजनों ने विनम्रता लेकिन दृढ़ता से दहेज लेने से इनकार कर दिया। शुरुआत में ससुराल पक्ष को लगा कि कहीं उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर समझकर दहेज मना तो नहीं किया जा रहा, लेकिन बातचीत के बाद जब उन्हें बताया गया कि यह आशीष का पहले से लिया गया निर्णय है तो उन्होंने भी इस सोच का सम्मान किया। बिना दहेज, सादगी से हुआ विवाह 4 फरवरी 2025 को वह शुभ दिन आया, जब आशीष ने आशा के साथ बिना किसी दहेज के विवाह कर समाज में एक सशक्त संदेश दिया कि ‘बिना दहेज के भी विवाह संभव है।’ दहेज लेना और देना दोनों ही कानूनन अपराध हैं, लेकिन इसके बावजूद आज भी बेटियों के पिता कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं। आशीष का यह कदम न सिर्फ एक परिवार, बल्कि कई परिवारों के लिए प्रेरणा बन गया है। बहन न होने के बावजूद भी दहेज से इनकार आशीष दो भाइयों में से एक हैं और उनकी कोई बहन नहीं है। यानी यह तर्क भी नहीं दिया जा सकता कि उन्हें भविष्य में बहन की शादी के लिए दहेज देना पड़ेगा। इसके बावजूद उन्होंने दहेज के पूरी तरह विरोध का रास्ता चुना। यह दिखाता है कि दहेज विरोध सिर्फ मजबूरी नहीं, बल्कि सोच और संस्कार का विषय है। समाज में मिली सराहना आशीष, उनके माता-पिता और पूरे परिवार के इस निर्णय की समाज के सभी वर्गों ने खुले दिल से सराहना की है। लोगों का कहना है कि यदि हर सरकारी कर्मचारी और शिक्षित युवा ऐसा संकल्प ले, तो दहेज जैसी कुप्रथा अपने आप समाप्त हो सकती है। आज जब लोग सरकारी नौकरी को दहेज कमाने का साधन बना चुके हैं, ऐसे समय में आशीष कुमार बैरवा ने सिर्फ सवा रुपये में विवाह कर यह साबित कर दिया कि बदलाव की शुरुआत एक व्यक्ति से भी हो सकती है।
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका के बाद शिक्षा विभाग ने 13 जिलों के 60 निजी कॉलेजों की जन्मकुंडली खंगालने का फैसला किया है। नालंदा जिले के पांच संस्थान भी इस जांच के दायरे में हैं। अप्रत्याशित रूप से बढ़ते आवेदनों और डाटा अपलोड में अनियमितता ने विभाग को चौकन्ना कर दिया है। 10 फरवरी तक रिपोर्ट देने का अल्टीमेटम जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) आनंद विजय ने बताया कि लेखा डीपीओ की अगुआई में पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की जाएगी, जो संस्थानों की धरातलीय हकीकत से लेकर कागजी जांच तक सूक्ष्मता से करेगी। हर हाल में 10 फरवरी तक जांच प्रतिवेदन योजना के राज्य प्रभारी पदाधिकारी मोहम्मद नसीम अहमद को सौंपना अनिवार्य किया गया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में सहयोग न करने या रिपोर्ट देरी से देने पर संबंधित संस्थानों के आवेदक छात्र-छात्राओं को योजना के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, ऐसे संस्थानों की मान्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है। लक्ष्य से 121 फीसदी आवेदन, लेकिन कुछ संस्थानों में संदिग्ध बढ़ोतरी डीईओ आनंद विजय ने बताया कि बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत जिला निबंधन सह परामर्श केंद्रों पर शैक्षणिक सत्र 2024-25 में वार्षिक लक्ष्य से 117 प्रतिशत, जबकि सत्र 2025-26 में 121 प्रतिशत आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा सकारात्मक लग सकता है, लेकिन चिंता की बात यह है कि कुछ चिह्नित संस्थानों में आवेदकों की संख्या अप्रत्याशित और संदिग्ध रूप से बढ़ी है। इससे यह आशंका पैदा हुई है कि कुछ निजी संस्थान योजना का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं या फर्जी आवेदन दाखिल करवा रहे हैं। यह योजना उच्च और तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, ताकि धन की कमी शिक्षा में बाधा न बने। लेकिन अब इसमें गड़बड़ी की आशंका ने विभाग को कड़ी कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। पांच सदस्यीय टीम करेगी जांच जांच के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (लेखा) की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित की गई है। इस समिति में डीआरसीसी (जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र) के प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और बिहार राज्य वित्त निगम के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। जांच टीम निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देगी भौतिक सत्यापन: संस्थान वास्तव में संचालित है या केवल कागजों पर मौजूद है? वैधानिक अनुमति: राज्य सरकार से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मिला है या नहीं। पाठ्यक्रम और नामांकन: सत्रवार पाठ्यक्रम, कुल आवंटित सीटें और वास्तविक नामांकन की स्थिति। संबद्धता दस्तावेज: विश्वविद्यालय से संबद्धता संबंधी सभी कागजात की जांच। शुल्क संरचना: शैक्षणिक शुल्क की पारदर्शिता। बुनियादी ढांचा: कक्षा, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, सेमिनार हॉल, प्रशासनिक भवन की विस्तृत जानकारी। उपस्थिति रिकॉर्ड: छात्रों की नियमित उपस्थिति का सत्यापन। शिक्षक योग्यता: स्थायी और अस्थायी शिक्षकों की योग्यता और संख्या। गैर-शैक्षणिक स्टाफ: कर्मचारियों की वास्तविक संख्या। जियो-टैगिंग: भवन, कक्षाओं, कैंटीन की जियो टैग तस्वीरें लेना। छात्र प्रतिक्रिया: छात्रों का सीधा फीडबैक लेना। वेबसाइट: संस्थान की वेबसाइट की कार्यशील स्थिति। किन जिलों के कितने संस्थान जांच के दायरे में पटना में सबसे ज्यादा 28 संस्थानों की जांच होगी। नालंदा के 5, मुजफ्फरपुर, गया और वैशाली के 4-4, पूर्वी चंपारण और औरंगाबाद के 4-4, बेगूसराय के 2, तथा अररिया, सीवान, जमुई, पूर्णिया और सीतामढ़ी के 1-1 संस्थान जांच के दायरे में आए हैं। जांच के दायरे में नालंदा के ये 5 संस्थान निभा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिक्स आरएल पॉलिटेक्निक कॉलेज केके विश्वविद्यालय डीपी सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) से एफिलएिटेड व एसोसिसएटेड स्कूल प्रिंसिपलों ने पंजाब सरकार के इंटरप्रन्यौर प्रोजेक्ट को गंभीरता से नहीं लिया। ज्यादातर स्कूल प्रिंसिपलों ने प्रोजेक्ट के तहत अपने बिजनेस आइडिया विभाग को नहीं भेजे। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के सेक्रेटरी ने प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपलों को नोटिस जारी कर सख्त चेतावनी दी है। बोर्ड स्कूल प्रिंसिपलों को साफ कह दिया कि जिसने बिजनेस आइडिया सब्मिट नहीं किए उन स्कूलों के स्टूडेंट्स का बोर्ड रिजल्ट रोक दिया जाएगा। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इंटरप्रन्योर प्रोजेक्ट के तहत सभी स्कूल प्रिंसिपल से बिजनेस आइडिया मांगे थे ताकि उन आइडियाज को स्टूडेंट्स के साथ शेयर करके उन्हें इंटरप्रन्योर बनने के लिए प्रेरित किया जा सके। स्कूल प्रिंसिपल को दिया लास्ट चांस पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने एफिलिएटेड व एसाेसिएटेड स्कूल प्रिंसिप्लस को कहा है कि 9 फरवरी तक सभी स्कूल्स प्रिंसिपल्स से स्टूडेंट्स से बिजनेस आईडिया बोर्ड को भेज दें। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और निर्देश बोर्ड ने तकनीकी सुविधा के लिए एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया है। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे व्हाट्सएप नंबर +91 9513477756 पर संदेश भेजकर खुद को रजिस्टर करें। प्रत्येक संस्थान के लिए कम से कम एक आइडिया सबमिट करना अनिवार्य है। स्कूल प्रिंसिपलों को ऑनलाइन ही सारी जानकारी देनी होगी। क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला? पंजाब सरकार और शिक्षा बोर्ड का मुख्य उद्देश्य छात्रों में इंटरप्रन्योर यानी बिजनेस माइंडसेट विकसित करना है। बोर्ड का मानना है कि केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु इस प्रोजेक्ट में उनकी भागीदारी अनिवार्य है। इस आदेश को गंभीरता से लें स्कूल प्रिंसिपल पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने स्कूल प्रिसंपल को नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि स्कूलों की लापरवाही का सीधा असर स्टूडेंट्स के शैक्षणिक भविष्य पर पड़ेगा, इसलिए इसे 'अति जरूरी' श्रेणी में रखा गया है। प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों पर केवल रिजल्ट रोकने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। बोर्ड ने संकेत दिया है कि निर्देशों की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है। महत्वपूर्ण बिंदु अंतिम तिथि: 09 फरवरी 2026 अनिवार्यता: कम से कम 1 बिजनेस आइडिया संपर्क माध्यम: व्हाट्सएप (+91 9513477756) कार्रवाई : 10वीं और 12वीं का रिजल्ट रुक सकता है और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। चेयरमैन करेंगे स्कूलों के साथ ऑनलाइन मीटिंग पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन अमरजीत सिंह हर जिले के स्कूल प्रिंसिपलों के साथ ऑनलाइन मीटिंग करेंगे। लुधियाना जिले के प्रिंसिपलों के साथ आज मीटिंग होगी मीटिंग में ग्यारहवीं क्लास के इंटरप्रन्योर सब्जेक्ट से संबंधित दिशा निर्देश दिए जाएंगे। अब नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे छात्र पंजाब सरकार ने प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए सरकारी स्कूलों में ‘इंटरप्रन्योरशिप’ को एक मुख्य विषय के रूप में शामिल किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य छात्रों को पारंपरिक रटंत विद्या से बाहर निकालकर उन्हें “बिजनेस माइंडसेट देना है। कैसे काम करता है यह प्रोजेक्ट? स्कूलों में 11 वीं 12 वीं के स्टूडेंट्स की टीमें बनाई जाती हैं। प्रत्येक टीम को एक यूनिक बिजनेस आइडिया सोचना होता है। सरकार इन छात्रों को प्रति छात्र 2,000 रुपये की 'सीड मनी' देती है ताकि वे अपना छोटा स्टार्टअप शुरू कर सकें। टीचर यहां 'बिजनेस कोच' की भूमिका निभाते हैं, जो छात्रों को बाजार के उतार-चढ़ाव और प्रबंधन की शिक्षा देते हैं। बिना परीक्षा का तनाव, प्रैक्टिकल पर जोर इस विषय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई पारंपरिक लिखित परीक्षा नहीं होती। छात्रों का मूल्यांकन उनके प्रोजेक्ट, टीम वर्क और उनके द्वारा बनाए गए मॉडल या प्रोटोटाइप के आधार पर किया जाता है। इसमें छात्र खुद का मूल्यांकन और अपने साथियों का मूल्यांकन भी करते हैं, जिससे उनमें नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। इस प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं: जॉब क्रिएटर मानसिकता: इसका उद्देश्य बच्चों को केवल नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाना है। सीड मनी : सरकार हर छात्र को अपना छोटा बिजनेस आइडिया शुरू करने के लिए 2,000 रुपये की शुरुआती राशि देती है। व्यावहारिक अनुभव: यह किताबी पढ़ाई से अलग है। इसमें छात्र खुद ग्रुप बनाते हैं, मार्केट रिसर्च करते हैं और अपना प्रोडक्ट या सर्विस बेचकर मुनाफा कमाना सीखते हैं। परीक्षा का कोई बोझ नहीं: इस विषय की कोई लिखित परीक्षा नहीं होती। छात्रों को उनके प्रोजेक्ट के प्रदर्शन और उनकी सीखने की प्रक्रिया के आधार पर ग्रेड दिए जाते हैं। कौशल विकास: इस प्रोजेक्ट के जरिए छात्र टीम वर्क, रिस्क लेना, बजट बनाना और पब्लिक स्पीकिंग जैसे जरूरी जीवन कौशल सीखते हैं।
भाटापारा वार्षिकोत्सव सुषिर में दिखा शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का संगम
भास्कर न्यूज | भाटापारा रामनारायण शिक्षण संस्थान, कमलाकांत इंस्टिट्यूट में आयोजित वार्षिकोत्सव सुषिर हर्षोल्लास, गरिमा एवं सांस्कृतिक वैभव के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए तथा शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से आत्मीय भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। वार्षिकोत्सव के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रतिभा से सजे मनमोहक संगीत-नृत्य एवं विविध सृजनात्मक कार्यक्रमों ने समारोह को यादगार बना दिया। मंच पर बच्चों का आत्मविश्वास, अनुशासन एवं कलात्मक अभिव्यक्ति दर्शकों को अत्यंत प्रभावित करती रही। शिक्षकों का समर्पित मार्गदर्शन एवं अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को और भी प्रेरणादायी बनाया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने छत्तीसगढ़ नवा बिहान पत्रिका का विधिवत विमोचन भी किया गया। पत्रिका के माध्यम से सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा वार्षिकोत्सव ‘सुषिर’ यह प्रमाण है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कार, संस्कृति और व्यक्तित्व निर्माण की मजबूत आधारशिला है। विद्यार्थियों की आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुतियां शिक्षकों के अथक परिश्रम और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम हैं। वहीं ‘छत्तीसगढ़ नवा बिहान’ पत्रिका का विमोचन सकारात्मक विचारों और रचनात्मक ऊर्जा के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विद्यालय परिवार को इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई देते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा कहा कि नगर पालिका शिक्षा, साहित्य और संस्कारों को प्रोत्साहित करने वाले सभी प्रयासों के साथ सदैव सहयोग करती रहेगी।
समग्र सेवा संस्था: बालिकाओं की शिक्षा के लिए करेगी कार्य
बांका | समग्र सेवा संस्था बिहार राज्य के अलग अलग जिलों के सुदूर क्षेत्रों में विगत 25 वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, आजीविका, बाल संरक्षण के विभिन्न मुद्दों पर जन जागरूकता पर समाज के साथ मिलकर कार्य करते हुए आ रही है। इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए समग्र सेवा बांका जिला में बालिका शिक्षा पर कार्य करने जा रही है, जिसके अंतर्गत जिला के सात प्रखंड क्रमशः बांका सदर, कटोरिया, चांदन, बौसी, धोरैया, फुल्लीडुमर एवं शंभूगंज को चयनित किया गया है। इन क्षेत्रों में फील्ड कोऑर्डिनेटर को चयनित कर दो दिवसीय प्रशिक्षण दी गई है, जिनका मुख्य उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की अनामांकित एवं ड्रापआउट बालिकाओं को चिह्नित कर विद्यालय में नामांकन और उनका ठहराव सुनिश्चित करना है।
योग और पंचमुखी शिक्षा से बच्चों को शिक्षित कर उन्हें राष्ट्र उपयोगी बनाना उद्देश्य: जैन
भास्कर संवाददाता|गुना एकल अभियान मध्य भारत संभाग चंबल भाग केंद्र की समीक्षा बैठक गुरुवार को अंचल कार्यालय गुना पर संपन्न हुई। इसमें डबरा, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना एवं बरेली (रायसेन) से अंचल अभियान प्रमुख एवं अंचल कार्यालय प्रमुख उपस्थित रहे। बैठक में मुख्य अतिथि एकल अभियान प्रभाग पी 7जागरण शिक्षा प्रभारी विकास जैन नखराली, महिला भाग समिति अध्यक्ष आशा रघुवंशी, चंबल भाग अभियान प्रमुख धर्मवीर सिंह गुर्जर, चंबल भाग प्रशिक्षण प्रमुख विजय सिंह आदिवासी, चंबल भाग गतिविधि प्रमुख नारायण सिंह मीणा, चंबल भाग कार्यालय प्रमुख विजय सिंह सहरिया मंचासीन रहे ओर उन्होंने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन कर संगठन विस्तार के मंत्र दिए। बैठक में जनवरी माह के कार्यों की समीक्षा की गई एवं आगामी कार्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई। जागरण शिक्षा प्रभारी जैन ने कहा कि एकल अभियान के कार्य विस्तार के लिए सभी अंचल समिति एवं संच समिति सहित हमारे आचार्य पूर्ण रूप से एकल का कार्य पूर्ण समर्पण भाव से करते हुए पंचमुखी शिक्षा को गांव गांव में पहुंचाकर ग्रामीणों को इसके लाभ से अवगत कराना है। प्रतिदिन नियमित विद्यालय लगे ओर हमारे कार्यकर्ताओं का अधिक से अधिक प्रवास हो। साथ ही विद्यालय पर की जाने वाली गतिविधि जिसमें खेल प्रतियोगिताएं, योग ओर पंचमुखी शिक्षा से बच्चों को शिक्षित कर उन्हें राष्ट्र उपयोगी बनाते हुए बच्चों का सर्वांगीण विकास करना ही एकल का उद्देश्य है।
यातायात-शिक्षा में समृद्ध पतासंग में नल जल व सिंचाई का संकट
रहुई प्रखंड के उस पंचायत की जहां की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर आश्रित है। यातायात सुविधाओं के मामले में पतासंग पंचायत समृद्ध है। पंचायत के गांव से एनएच 20, एसएच 78 और रेल लाइन होकर गुजरी है। सभी गांव में पक्की सड़क की सुविधा है। थोड़ी बहुत समस्या सिर्फ खेतों की सिंचाई और घरों तक नल जल का जल नहीं पहुंचने की है। 9 गांव वाले पंचायत में कुल 13 वार्ड है। पंचायत के 9 गांव में पतासंग, डिहरा, बड़की गोवरिया, कादीबीघा, धमासंग, अमरपुर, बंडोह, शाहपुर और छोटकी शामिल गोवरिया है। राजस्व गांव डिहरा, पतासंग, कादीबीघा, गोवरिया है। जबकि छोटकी गोवरिया, शाहपुर, अमरपुर, धमासंग प्रमुख टोले हैं। शिक्षा की दृष्टिकोण से भी पंचायत में सुविधाओं की कमी नहीं है। यहां एक प्लस-2 विद्यालय, एक मध्य विद्यालय और सात प्राथमिक विद्यालय है। सभी विद्यालयों तक पहुंचने के लिए आवागमन की समुचित व्यवस्था है। सभी 13 वार्डों में आंगनबाड़ी केन्द्र है। जिसमें एक निजी मकान में संचालित हो रहा है। डिहरा गांव में पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। मार्च 2026 के बाद पंचायत सरकार भवन में कार्य शुरू होने की संभावना है। सिंचाई की सरकारी सुविधा नहीं, बंद है पांच ट्यूबवेल : ग्रामीण सह पैक्स अध्यक्ष संतोष कुमार बताते हैं कि पंचायत की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर आश्रित है। बावजूद इसके सरकारी स्तर पर सिंचाई की सुविधा नहीं है। पंचायत के डिहरा गांव में 2, कादीबीघा में 1, बंडोह में 2 सरकारी ट्यूबवेल है। वर्तमान में सभी बंद पड़ा है। किसान निजी संसाधन से खेतों की सिंचाई करते हैं। हालांकि पंचाने नदी में डिहरा गांव के पास बराज का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। बराज में शटर लग जाने के बाद कुछ हद तक सिंचाई की समस्या खत्म हो जाएगी। { कनेक्टिविटी- सड़क मार्ग से बाइक, बस, ऑटो सहित सभी तरह के वाहन, ट्रेन। { धार्मिक स्थल- कादीबीघा में काली मंदिर और तालाब जिला मुख्यालय से दूरी- 10 किलोमीटर
पोसालिया कस्बे के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में 'स्पंदना 2025-26' वार्षिकोत्सव एवं विदाई समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रविंद्र सिंह और विशिष्ट अतिथि शिवगंज के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी जबर सिंह राव थे। इस अवसर पर ग्राम पंचायत पोसालिया की उपसरपंच अंशी देवी, वीरेंद्र मीणा, प्रताप राम गर्ग और प्रवीण सिंह राव भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन और अतिथियों के माल्यार्पण से हुआ। वार्षिकोत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। शैक्षिक, सहशैक्षिक और खेलकूद गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी जबर सिंह राव ने बोर्ड परीक्षार्थियों को परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए मार्गदर्शन दिया। प्रधानाचार्य शशि चौरडिया ने भी बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के तरीके बताए। इस दौरान कक्षा 12 के विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रधानाचार्य ने विद्यालय में श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर अभिभावक, पूर्व विद्यार्थी और विद्यालय के उप प्रधानाचार्य जैसाराम मीणा, कांतिलाल माली, वार्षिकोत्सव प्रभारी मनोज कुमार मीणा, मंच संचालक भरत सिंह, नरेन्द्र सिंह जोधा, प्रदीप कुमार, चंद्रकांत दवे, हरीश कुमार, जितेंद्र सिंह, कन्हैयालाल मीणा, रामदेव, मंजू गोस्वामी, स्वाति साहू, मुक्त वैष्णव, मंजू मीणा, जगराम कुम्हार, भगवान राम मेघवाल, गणेश राम मीणा, नरेंद्र सिंह चौहान, पारसमल, कुसुम और रामलाल सहित ग्रामीण उपस्थित थे।
क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय और आगरा कॉलेज के संयुक्त आयोजन में नवनिर्मित आचार्य गंगाधर शास्त्री मंडपम परिसर में आयोजित एक दिवसीय मंडल स्तरीय वृहद रोजगार मेले में लगभग 1400 छात्रों को रोजगार मिलने की खुशखबरी मिली। इस निःशुल्क रोजगार मेले में आगरा मंडल के विभिन्न जिलों से हजारों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और निजी क्षेत्र की 40 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियों के माध्यम से सीधे साक्षात्कार दिए गए। रोजगार मेले में कुल लगभग 3200 खाली पदों के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित की गई। मेले में छात्र-छात्राओं के लिए ₹8,000 से ₹40,500 तक मासिक वेतन वाले रोजगार अवसर उपलब्ध कराए गए। कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने फीता काटकर और मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। NCC कैडेट्स ने उन्हें सलामी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता आगरा कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने की, जबकि संचालन प्रो. शेफाली चतुर्वेदी ने किया। सेवायोजन विभाग के सहायक निदेशक चंद्रचूड़ दुबे ने बताया कि वर्ष 2020 से रोजगार मिशन के अंतर्गत इस प्रकार के रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है और अभ्यर्थियों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक दिनेश जी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से रोजगार सृजन की मजबूत व्यवस्था बनी है, जिससे युवाओं को रोजगार के साथ स्वरोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। मुख्य अतिथि मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा के साथ रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और प्रदेश सरकार “हर हाथ को रोजगार” के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं और अपने उज्ज्वल भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों को स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए। प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार हैं। इस अवसर पर समाजसेवी हितेश लवानिया ने आगरा कॉलेज को 5000 पौधे भेंट किए, जिनका वृक्षारोपण कॉलेज परिसर में शुरू कर दिया गया है। रोजगार मेले में सेवायोजन विभाग के अधिकारी, विभिन्न जिलों के रोजगार अधिकारी, आगरा कॉलेज के उप-प्राचार्य, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
रामानुजगंज में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 1976 से संचालित इस कार्यालय में कुल 26 कर्मचारी पदस्थ हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि रोजाना केवल चार से पांच कर्मचारी ही उपस्थित रहते हैं। अधिकांश कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण विभागीय कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कार्यालय की लगभग सभी शाखाओं की कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं। दूर-दराज से आने वाले शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन संबंधित कर्मचारी के न मिलने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। समाजसेवी विकाश दुबे ने बताया कि इस गंभीर स्थिति को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कई बार कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है। मौखिक और लिखित शिकायतें भी की गईं, लेकिन इसका कोई ठोस असर नहीं हुआ। पूर्व में कर्मचारियों की मनमानी और अनुपस्थिति के खिलाफ आंदोलन भी किए गए थे, परंतु कार्यालय की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर फाइलों का निपटारा न होना, नियुक्ति, वेतन, स्थानांतरण और शैक्षणिक योजनाओं से जुड़े कार्य लंबित पड़े रहना अब आम बात हो गई है। लोग अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन से आग्रह किया गया है कि कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कदम उठाए जां, ताकि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन कर सके।
राजस्थान विधानसभा के 16वीं विधानसभा के पंचम सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा के दौरान डीडवाना विधायक यूनुस खान ने प्रदेश के युवाओं के रोजगार, शिक्षा व्यवस्था, कस्टोडियन (निष्क्रान्त) भूमि और पेयजल-सीवरेज जैसी ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इन मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। सदन में बोलते हुए विधायक खान ने कहा कि राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के अभिभाषण में प्रस्तुत आंकड़े यदि विभागीय समन्वय और गहन अध्ययन के साथ तैयार किए जाते तो वे अधिक स्पष्ट और विश्वसनीय होते। उन्होंने 31 जनवरी 2025 और 28 जनवरी 2026 के अभिभाषणों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करते हुए रोजगार सृजन, भर्तियों, विभागीय रिपोर्टों और विधानसभा में दिए गए उत्तरों के आंकड़ों में विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने सरकार के सकारात्मक प्रयासों का स्वागत करते हुए तथ्यों की प्रस्तुति में पारदर्शिता और सटीकता की आवश्यकता पर जोर दिया। शिक्षा पर चर्चा करते हुए विधायक ने राजस्थान की साक्षरता दर को चिंताजनक बताया। उन्होंने सरकारी और निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों के आंकड़ों में भारी असमानता का मुद्दा उठाया और मांग की कि निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी सरकारी योजनाओं का समान लाभ मिलना चाहिए। उच्च शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों की कमी, विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से जुड़े आंकड़ों में असंगति तथा युवाओं के लिए स्पष्ट रोजगार नीति के अभाव पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। चर्चा के दौरान यूनुस खान ने कस्टोडियन (निष्क्रान्त) भूमि के लंबे समय से लंबित मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि 2008 में संबंधित कानून निरस्त होने के बाद यह भूमि सिवायचक घोषित हो गई थी, जिस पर वर्षों से गरीब परिवार निवास और खेती कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से नया कानून लाकर ऐसे परिवारों को विधिसम्मत भूमि आवंटन कर स्थायित्व प्रदान करने की मांग की। पेयजल संकट पर बोलते हुए विधायक खान ने कहा कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत फेस-2, सीडीएस-03 योजना में शामिल 240 ढाणियों और 34 गांवों के टेंडर पर 2022 से निर्णय लंबित है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या बनी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि डीडवाना शहर के लिए अमृत 2.0 योजना का कार्य आदेश भी लंबित है। इसके अलावा, सीवरेज व्यवस्था खराब होने से शहर में जलभराव और रिवर्स फ्लो जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। अंत में विधायक ने सरकार से इन सभी जनहित के मुद्दों पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई करने की मांग की, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके।
शिक्षा समाज की प्रगति का सबसे मजबूत आधार होती है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सुव्यवस्थित विद्यालय भवन, पर्याप्त कक्षा कक्ष, स्वच्छ वातावरण और मूलभूत सुविधाएं बहुत जरूरी है। यह कहना है जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ का। यह बात उन्होंने गुरुवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सारोला कलां में नवनिर्मित कक्षा कक्षों का उद्घाटन समारोह में कही। कलेक्टर ने इससे पहले फीता काटकर और पट्टिका का अनावरण कर विधिवत उद्घाटन किया। इन 2 कक्षा कक्ष और बरामदे का निर्माण लक्ष्मण मालव की स्मृति में उनके बेटों लोकेश कुमार मालव, शुभम मालव एवं विनय मालव ने 20 लाख की लागत से करवाया है।इस अवसर पर राठौड़ ने कहा कि ये नवनिर्मित कक्षा कक्ष विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल प्रदान करेंगे, जिससे उनका सर्वांगीण विकास संभव होगा। 'स्टूडेंट्स को नैतिक मूल्य भी सीखाएं'उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखने, बल्कि उन्हें अनुशासन, नैतिक मूल्यों और जीवनोपयोगी कौशलों से भी परिचित कराने का आह्वान किया। विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही वे अपना भविष्य उज्ज्वल बना सकते हैं और समाज व राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकते हैं। कलेक्टर ने बच्चों और आमजन को नशे व मोबाइल की लत से दूर रहने का आग्रह भी किया। फिजूलखर्ची को छोड़ने पर दिया जोरकार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व संसदीय सचिव व पूर्व विधायक नरेंद्र नागर ने भामाशाह परिवार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि कक्षा कक्षों का निर्माण करवाकर जो पुण्य काम उन्होंने किया है, वह प्रेरणादायक है, समाज के और भी लोग इनसे प्रेरणा लें। नागर ने फिजूलखर्ची और दिखावों को छोड़कर समाज सेवा के क्षेत्र में ऐसे सामाजिक सरोकार के पुण्य कार्य करने पर जोर दिया।इन कक्षा कक्षों का नाम स्वतंत्रता सेनानियों चंद्रशेखर आजाद और छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखा गया है। इस दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दी। इस मौके पर एसडीएम रजत कुमार विजयवर्गीय, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी राम सिंह मीणा, तहसीलदार हेमराज कपूर, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सियाराम नागर, विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र कुमार सामरिया, स्टाफ एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
ईएमआरएस के विस्तार से जनजातीय छात्रों को मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने सदन में बताया कि देशभर में 723 ईएमआरएस स्वीकृत हुए हैं और राजस्थान के सभी 31 विद्यालय वर्तमान में सुचारू रूप से कार्यशील हैं।
ब्यावर में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 2026 परीक्षा सामग्री पहुंची
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर द्वारा आयोजित 2026 की परीक्षाओं के प्रश्न पत्र कड़ी सुरक्षा के बीच ब्यावर पहुंचे और सिटी थाने में सुरक्षित रखवाए गए।
कोटपूतली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) की इकाई राजकीय एलबीएस पी.जी. कॉलेज ने राज-सीईएस महाविद्यालयों की वर्तमान संकल्पना और संचालन व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन किया। प्राध्यापकों ने कॉलेज के मुख्य द्वार पर काली पट्टी बांधकर और प्ले-कार्ड्स के माध्यम से अपनी मांगों को उठाया। महासंघ का कहना है कि राज-सीईएस योजना के तहत संचालित महाविद्यालयों का मौजूदा स्वरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना के विपरीत है। इन संस्थानों में स्थायी अकादमिक ढांचे का अभाव, अपर्याप्त अधोसंरचना और संसाधनों की कमी है। शोध और नवाचार की संभावनाओं की कमी व संविदा एवं अस्थायी नियुक्तियों पर आधारित अध्यापन व्यवस्था राज्य की उच्च शिक्षा को गुणवत्ता, बहुविषयकता और अकादमिक निरंतरता से दूर ले जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर टीचर्स ने उठाए सवाल महासंघ ने बताया- सत्र 2020-21 से 2022-23 के बीच राज-सीईएस योजना के तहत 303 नए महाविद्यालय खोले गए थे। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सत्र 2023-24 और 2024-25 में 71 अतिरिक्त राज-सीईएस महाविद्यालय खोले जा चुके हैं, जिससे इनकी कुल संख्या 374 हो गई है। इनमें से लगभग 260 राज-सीईएस महाविद्यालयों में आज भी एक भी स्थायी फैकल्टी मेंबर कार्यरत नहीं है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विधानसभा चुनाव-2023 के बाद गठित राज्य सरकार द्वारा राज-सीईएस महाविद्यालयों और विषयों के संचालन के संबंध में गठित सोडाणी समिति की सिफारिशें अब तक न तो सार्वजनिक की गई हैं और न ही लागू की गई हैं। महासंघ ने भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 के माध्यम से राज-सीईएस नियम-2023 में परिवर्तन कर पांच वर्षों के लिए 28,500 रुपए के नियत वेतन पर संविदा टीचिंग एसोसिएट और अशैक्षणिक पदों की चयन प्रक्रिया शुरू करने के प्रयास पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। टीचर्स ने रखी ये मांगे महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि राज-सीईएस महाविद्यालयों के संबंध में गठित सोडाणी समिति की सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाए। साथ ही, राज्य में संचालित सभी राज-सीईएस महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों के रूप में संचालित करने के स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं और संविदा नियुक्तियों की प्रस्तावित चयन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
पहले शिक्षा मंत्री सुनील कुमार 2 बयान पढ़िए… 22 सितंबर 2025- “TRE-4 में 26 हजार से ज्यादा पदों के लिए वैकेंसी निकाली जाएगी। अगले 4 से 5 दिन के भीतर रिक्तियां BPSC को भेज दी जाएंगी। इसके बाद अगर सीटें बचती हैं तो उन्हें TRE-5 में जोड़ा जाएगा।” 9 दिसंबर 2025- “हम अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाते हैं कि जनवरी के बाद TRE की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।” यह तो मंत्री के दावे थे, लेकिन क्या ऐसा हुआ? जवाब है- नहीं..। भर्ती अभी फाइलों में ही अटकी है। अगले एक साल तक बहाली होने की गुंजाइश कम है। दो साल से टीचरों की बहाली कहां अटकी है? मंत्री क्या झूठ बोल रहे हैं? कब आएगी बहाली? भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़ें…। BPSC के कैलेंडर में TRE-4 का जिक्र नहीं ऐसा इसलिए क्योंकि 2 फरवरी को BPSC ने 2026 में होने वाली अपनी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया। इसमें TRE-4 का जिक्र तक नहीं है। भास्कर ने 4 फरवरी को शिक्षा मंत्री सुनील कुमार से बात की। हमने सीधे पूछा कि TRE-4 BPSC कैलेंडर में क्यों नहीं है? उन्होंने जवाब दिया, ‘मंगलवार की रात (3 फरवरी) TRE-4 का रोस्टर क्लियर कर सामान्य प्रशासन विभाग को रिक्तियां भेज दी हैं। जल्द बहाली होगी।’ मंत्री के दावों पर भास्कर ने सामान्य प्रशासन विभाग से संपर्क किया। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अफसर ने बताया, ‘शिक्षा विभाग ने अभी कोई अधियाचना (रिकमंडेशन) ही नहीं भेजी है।’ क्यों अटकी शिक्षकों की बहाली? शिक्षकों की बहाली क्यों अटक रही है? TRE- 4 की फाइल शिक्षा विभाग में कहां फंस गई है? भास्कर ने इसकी पड़ताल की। हमने बिहार लोक सेवा आयोग के सचिव सत्य प्रकाश शर्मा ने बात की। उन्होंने कहा, ‘अभी BPSC के पास बिहार सरकार की ओर से रिकमेंडेशन नहीं आई है। यही वजह है कि BPSC-2026 के कैलेंडर में इस परीक्षा की चर्चा नहीं की गई है। सरकार नोटिफिकेशन भेजती है तो इसे आयोग के परीक्षा कैलेंडर में शामिल किया जाएगा।’ अब जानिए क्या कहते हैं शिक्षा मंत्री सुनील कुमार हमने बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बात की। उन्होंने कहा, ‘नीतीश सरकार ने व्यापक स्तर पर स्कूलों में शिक्षकों की बहाली की है। TRE-1, TRE-2, TRE-3 के बाद TRE-4 की बहाली होनी है।’ मंत्री ने कहा, ‘इसके लिए सभी जिलों से वैकेंसी की डिटेल मांगी गई। बीच में सिस्टम चुनावी मोड में चला गया था। एक-दो जिलों से रोस्टर का मामला फंसा हुआ था, लेकिन वह भी क्लियर हो चुका है। रोस्टर में कुछ गड़बड़ी थी, जिसे ठीक कर लिया गया है।’ 27 हजार सीटों पर होगी बहाली अब तक की जानकारी के अनुसार, करीब 27 हजार सीटों पर TRE-4 के तहत शिक्षकों की बहाली आएगी। बिहार विधान मंडल के जॉइंट सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने जानकारी दी थी कि कितने पदों पर शिक्षकों की बहाली हुई है। हालांकि उन्होंने TRE-4 का जिक्र नहीं किया था। राज्यपाल ने कहा था, ‘पहले शिक्षकों की काफी कमी थी। 2006 में स्थानीय निकायों के माध्यम से 3 लाख 68 हजार शिक्षकों का नियोजन किया गया था। 2023 के बाद बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा 2 लाख 58 हजार सरकारी शिक्षकों की बहाली की गई है। इनमें से 28 हजार 976 नियोजित शिक्षक BPSC के माध्यम से सरकारी शिक्षक बन गए।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार ने तय किया कि नियोजित शिक्षकों को BPSC की परीक्षा देने की जरूरत नहीं है। उन्हें मामूली परीक्षा लेकर सरकारी शिक्षक बनाया जाए, इसके लिए 5 मौके दिए। अब तक 4 परीक्षाओं का आयोजन हो चुका है, जिसमें 2 लाख 66 हजार नियोजित शिक्षक पास हो गए हैं। अब केवल 73 हजार शिक्षक बच गए हैं, जिन्हें एक मौका और दिया जाएगा। कुल मिलाकर सरकारी शिक्षकों की संख्या 5 लाख 24 हजार हो गई है।’ 3 फरवरी को पेश किए गए बिहार बजट 2026-27 में TRE- 4 का जिक्र किया गया है। कहा गया कि चौथे चरण में सरकारी प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया चल रही है। 16 फरवरी को विधानसभा का घेराव करेंगे छात्र BPSC कैलेंडर (2026 में ली जाने वाली परीक्षाओं की लिस्ट) जारी हुई, लेकिन इसमें TRE- 4 नहीं है। इससे शिक्षक भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं में आक्रोश है। छात्र-छात्राओं ने बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। 16 फरवरी को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। पटना कॉलेज से छात्रों का हुजूम निकलेगा। छात्र नेता दिलीप कुमार ने कहा, BPSC के कैलेंडर में TRE-4 का कोई जिक्र नहीं है। इसलिए मैट्रिक व इंटर की परीक्षा के बाद आंदोलन किया जाएगा। सरकार चुनाव के पहले किए गए वादे से मुकर रही है। अभी बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। विपक्ष की तैयारी दोनों सदनों में शिक्षक भर्ती मामला उठाने की है। विपक्ष के नेता इसे नीतीश सरकार की चुनावी वादाखिलाफी बता रहे हैं। TRE-4 में पहली बार ऐसी व्यवस्था तीन चरणों में बिहार सरकार अब तक 2.5 लाख शिक्षकों की बहाली कर चुकी है। TRE-4 में पहली बार व्यवस्था होगी कि बिहार के युवाओं के लिए लगभग 85 फीसदी सीटें रिजर्व रहेंगी। 15 फीसदी सीटों पर दूसरे राज्य के निवासी और बिहार के वैसे लोग जिनकी मैट्रिक और इंटर की डिग्री दूसरे राज्यों की है, की भर्ती होगी। डोमिसाइल लागू होने पर बिहार के अधिक युवाओं को शिक्षक बनने का अवसर मिल सकेगा। पहले की नियुक्तियों पर आरोप लगता रहा है कि बिहार से बाहर के युवाओं ने काफी सीटें ले लीं। खास तौर से यूपी के युवाओं ने काफी सीटों पर कब्जा कर लिया। नए नियम के तहत क्लास 5 तक के लिए शिक्षक भर्ती में 50 प्रतिशत और अन्य कोटि में 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सिर्फ बिहार की महिला अभ्यर्थियों को दिया जाएगा।
सुगम महोत्सव : शिक्षा और परिश्रम से ही सफलता, नशे से दूर रहने की सीख
टोंक| निजी शिक्षण संस्था की ओर से आयोजित सुगम महोत्सव में भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहकर सकारात्मक जीवन अपनाने की सीख दी। महोत्सव के दौरान बच्चों की ओर से प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारतीय संस्कृति, हमारी मिट्टी की महक और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान ने कहा कि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। शिक्षा व्यक्ति के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसके माध्यम से ही मनुष्य का सर्वांगीण विकास संभव है। शिक्षा के प्रति संस्थान का समर्पण और स्टाफ की कड़ी मेहनत ही क्षेत्र के भविष्य को उज्ज्वल व सशक्त बना रही है। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने और कुछ बनने के लिए शिक्षा जरुरी है। विद्यार्थियों को लक्ष्य तय कर पढ़ाई करनी चाहिए, क्योंकि बिना लक्ष्य के मंजिल हासिल नहीं होती। संस्था निदेशक जितेंद्र चौधरी, जिला उपाध्यक्ष प्रधान काबरा, मीडिया प्रभारी कमलेश यादव, कजोड़ जाजड़ा, लालचंद चौधरी सहित संस्था के अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
शिक्षा विभाग का मिशन स्टार्ट; शाला दर्पण पर दर्ज होगा स्मार्ट क्लास का टाइम-टेबल
उदयपुर | प्रदेश के सरकारी स्कूलों में तकनीक आधारित पढ़ाई को प्रभावी बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने मिशन स्टार्ट के तहत नई गाइडलाइन जारी की है। अब डिजिटल ई-कंटेंट से कराई जा रही पढ़ाई का साप्ताहिक टाइम-टेबल शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज करना होगा। उद्देश्य उन विद्यालयों में शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखना है, जहां शिक्षकों के पद रिक्त हैं या शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं। ऐसे स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों को हार्डडिस्क और अन्य डिजिटल संसाधनों से पढ़ा रहे हैं। जहां शिक्षक हैं, वहां भी कठिन विषयों को सरल बनाने के लिए ई-कंटेंट काम लेंगे। नया मॉड्यूल: अफसरों की ऑनलाइन नजर निर्देशों के अनुसार, स्कूल अपनी आवश्यकता के अनुसार समय-सारणी तैयार करेंगे और उसका प्रिंट नोटिस बोर्ड पर लगाएंगे। यह समय-सारणी हर शुक्रवार शाला दर्पण पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। शाला दर्पण पर इसके लिए नया मॉड्यूल बनाया गया है। स्कूल ‘विद्यालय-आईसीटी-साप्ताहिक स्मार्ट क्लास टाइम-टेबल’ पाथ से इसे अपडेट कर सकेंगे। उच्च अधिकारी मॉनिटरिंग रिपोर्ट (न्यू) सेक्शन से इसकी समीक्षा करेंगे। स्मार्ट क्लास का डेटा अब स्कूल स्तर पर जवाबदेही तय करने में भी उपयोग होगा। पोर्टल पर अपलोड किए गए टाइम-टेबल के आधार पर विभाग यह देख सकेगा कि डिजिटल कंटेंट का वास्तविक उपयोग हो रहा है या नहीं। डीईओ-माध्यमिक डॉ. लोकेश भारती ने बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान के तहत इस गतिविधि को प्राथमिकता दी है, ताकि शिक्षकों की कमी का विद्यार्थियों के परिणाम पर असर न पड़े।
लखनऊ में इरम एजुकेशनल सोसाइटी का स्थापना दिवस शिक्षा, संस्कृति और साहित्य के उत्सव के रूप में मनाया गया। इंदिरा नगर सी-ब्लॉक स्थित इरम कॉलेज परिसर में आयोजित इस समारोह में मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया और सांस्कृतिक व साहित्यिक प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र-छात्राएं और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और विशिष्ट अतिथि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी थे। दोनों अतिथियों ने विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इससे पूर्व,प्रबंधक डॉ. बाज़्मी यूनुस,निदेशक ख्वाजा फैज़ी यूनुस और सचिव सैफ़ी यूनुस ने अतिथियों का स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया। उनका उद्देश्य समाज को शिक्षित और सशक्त बनाना था उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने अपने संबोधन में इरम एजुकेशनल सोसाइटी के संस्थापक डॉ. ख्वाजा मोहम्मद यूनुस को याद किया।उन्होंने कहा कि 1970 में स्थापित इस संस्था ने शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा,बल्कि डॉ. यूनुस ने अपना पूरा जीवन गरीब,पिछड़े और वंचित वर्ग की शिक्षा के लिए समर्पित किया। उनका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित और सशक्त बनाना था।पाठक ने कहा कि सरकार संस्थान को हर संभव सहयोग देती रहेगी। अल्पसंख्यक समाज के लिए शिक्षा के नए रास्ते खोले अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि इरम संस्थान ने आम लोगों और अल्पसंख्यक समाज के लिए शिक्षा के नए रास्ते खोले हैं।उन्होंने विशेष रूप से इरम गर्ल्स डिग्री कॉलेज का उल्लेख किया,जो बेटियों को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है और मजबूत समाज की नींव रख रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद लोकनृत्य, सूफियाना कलाम और देशभक्ति गीतों सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया। छात्राओं के आत्मविश्वास और प्रतिभा की सभी उपस्थित लोगों ने सराहना की। मुशायरे का आयोजन किया गया शाम को कार्यक्रम ने साहित्यिक रूप ले लिया, जिसमें ‘एक शाम ख्वाजा यूनुस के नाम’ मुशायरे का आयोजन किया गया।इस मुशायरे में नवाज़ देवबंदी, डॉ. मंजर भोपाली, डॉ. महताब आलम और डॉ.अंजुम बाराबंकी जैसे प्रसिद्ध शायरों ने अपनी ग़ज़लों और नज़्मों से श्रोताओं का मन मोह लिया।
सीकर के लॉ कॉलेज में आज अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) की इकाई ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसाइटी (राजसेस) के अंतर्गत संचालित कॉलेजों के वर्तमान रेगुलेशन स्ट्रक्चर के विरोध में था। लॉ कॉलेज के शिक्षकों ने मुख्य द्वार पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करवाया। महासंघ इकाई सचिव विजय गठाला ने कहा कि राजसेस योजना के अंतर्गत संचालित कॉलेजों की वर्तमान व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना के विपरीत है। इन कॉलेजों में स्थाई एकेडमिक स्ट्रक्चर का अभाव है, और संविदा व अस्थाई शिक्षकों से अध्यापन की वजह से उच्च शिक्षा की क्वालिटी और एकेडमिक रेगुलरटी को नुकसान हुआ है। महासंघ के इकाई सचिव विजय गठाला ने कहा कि सत्र 2020-21 से 2022-23 के दौरान राजसेस योजना के अंतर्गत 303 नए कॉलेज खोले गए तथा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सत्र 2023-24 व 2024-25 में 71 नए राजसेस कॉलेज खोले गए हैं, जिससे इनकी कुल संख्या 374 हो गई है। इनमें से लगभग 260 राजसेस कॉलेजों में एक भी स्थाई स्टाफ कार्यरत नहीं है। विरोध प्रदर्शन के दौरान महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने ADM को मुख्यमंत्री व राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। महासंघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि जल्दी ही संविदा भर्तियों पर रोक नहीं लगी तो महासंघ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।
राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कोटा उत्तर विधायक और पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधा। धारीवाल ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का दस्तावेज होता है, लेकिन इसमें प्रदेश के विकास का कोई स्पष्ट विजन नजर नहीं आता। धारीवाल ने कहा कि आज कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी तक शिक्षा संस्थानों पर आरएसएस से जुड़े लोगों का कब्जा है। हालात यह हैं कि पूरा शैक्षणिक सत्र निकल गया है, लेकिन कई जगह छात्रों को अब तक प्रवेश नहीं मिला है। 2025-26 में निजी स्कूलों को आरटीई के तहत 996 करोड़ रुपये का भुगतान दिखाया गया, लेकिन इसमें 740 करोड़ रुपये पिछले साल का बकाया था। यानी इस साल वास्तविक भुगतान सिर्फ 256 करोड़ रुपये हुआ, इसी कारण निजी स्कूल आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं। उन्होंने स्कूल बैग और यूनिफॉर्म की राशि 1000 रुपये से घटाकर 800 रुपये करने को गरीब छात्रों के साथ अन्याय बताया। धारीवाल ने कहीं ये 3 बड़ी बातें… 1. महात्मा गांधी का नाम दुनिया के दिलों से नहीं हटेगाधारीवाल ने कहा- मनरेगा में ग्राम सभा को अपने क्षेत्र के काम तय करने का अधिकार था, जिसे छीनकर केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। नाथूराम गोडसे ने गांधी को दुनिया से हटाया, आपने गांधी के नाम हटाने की शुरुआत कर दी। लेकिन नाम हटाने से उस महात्मा का नाम दुनिया के दिलों से नहीं हटेगा। 2. कैपिटल एक्सपेंडिचर को लगातार घटाया गयाधारीवाल ने कहा- दीया कुमारी द्वारा बताए गए सड़क निर्माण के आंकड़े PWD की अपनी रिपोर्ट से मेल नहीं खाते। कैपिटल एक्सपेंडिचर को लगातार घटाया गया। ऊर्जा क्षेत्र में 3500 करोड़ खर्च होने थे, लेकिन सिर्फ 817 करोड़ ही खर्च किए गए। कई जीएसएस की घोषणाएं हुईं, लेकिन अधिकांश जमीन पर नहीं उतरीं। सैकड़ों मंदिरों के विकास की घोषणाएं की गईं, लेकिन पर्यटन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। 3. मंदिरों के विकास के नाम पर जीरोधारीवाल ने कहा- आपने अखबारों में अपनी फोटो और विज्ञापनों पर 100 करोड़ खर्च कर दिए, लेकिन मंदिरों के विकास के नाम पर जीरो। आप तो भगवान को भी धोखा दे रहे हो। आमेर किले में लगे अकबर-स्तुति शिलालेख का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सरकार इतिहास बदलने की कोशिश कर रही है, तो यह हिस्सा क्यों बचा हुआ है? ऐतिहासिक चीजें सही-गलत की श्रेणी में नहीं आतीं। धारीवाल ने कहा कि यह सरकार नाम बदलने को उपलब्धि मान रही है, जबकि गरीब, युवा, किसान और मजदूर की भलाई के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया।
शांति धारीवाल का सरकार पर हमला: कौशल विकास और शिक्षा बजट में धांधली का आरोप
पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में पीएम कौशल विकास योजना में घोटाले, आरटीई भुगतान में कटौती और शिक्षा बजट के कम उपयोग पर सवाल उठाए।
नाथद्वारा में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान इकाई के आह्वान पर सेठ मथुरादास बिनानी महाविद्यालय में राज सेस (Raj-CES) महाविद्यालयों की वर्तमान संकल्पना एवं संचालन व्यवस्था के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया गया। इस दौरान शिक्षकों ने महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर काली पट्टी बांधकर तथा मांगों से संबंधित प्ले-कार्ड हाथों में लेकर विरोध दर्ज कराया। संविदाकर्मी न लगाने की मांग संगठन के सचिव डॉ. शंकर शर्मा ने बताया कि राज सेस योजना के अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों का वर्तमान स्वरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के विपरीत है। संविदा एवं अस्थायी नियुक्तियों पर आधारित अध्यापन व्यवस्था उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, बहुविषयकता एवं अकादमिक निरंतरता को प्रभावित कर रही है। प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन उन्होंने बताया कि राज्य में 303 नवीन महाविद्यालय खोले गए, वहीं वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 71 अतिरिक्त महाविद्यालय प्रारंभ हुए हैं, जिससे कुल संख्या 374 हो गई है। इनमें से लगभग 260 महाविद्यालयों में आज भी एक भी स्थायी संकाय सदस्य कार्यरत नहीं है, जो नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रदर्शन के पश्चात संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी रक्षा पारीक के माध्यम से मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) के आह्वान पर बुधवार को जिले के प्राध्यापकों और शिक्षाविदों ने Raj-CES (राजसेस) महाविद्यालयों में संविदा नियुक्तियों के विरोध में स्वर मुखर किए। महासंघ ने राज्य सरकार द्वारा कॉलेज शिक्षा में लागू की जा रही संविदा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के विरुद्ध बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है। हाथों पर काली पट्टी बांधकर जताया विरोध विरोध प्रदर्शन के दौरान महासंघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर सरकार की नीतियों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। जिला कलेक्टर प्रतापसिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान चयन प्रक्रिया न केवल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को भी रसातल में ले जाने वाली है। बिना स्थायी ढांचे के कैसे लागू होगी NEP-2020? महासंघ के जिलाध्यक्ष डॉ. श्यामसुंदर मीणा ने बताया कि Raj-CES योजना के तहत संचालित महाविद्यालयों का वर्तमान स्वरूप और संचालन प्रणाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के विपरीत है। इन कॉलेजों में स्थायी अकादमिक ढांचे का अभाव है, शोध और नवाचार की कोई संभावना नहीं है और अपर्याप्त संसाधनों के भरोसे नए विषय घोषित किए जा रहे हैं। आंकड़ों में शिक्षा का संकट: कुल Raj-CES कॉलेज: 374 (पूर्व सरकार के 303 और वर्तमान सरकार के 71)। शून्य शिक्षक वाले कॉलेज: लगभग 260 महाविद्यालयों में एक भी स्थायी संकाय सदस्य नहीं है। विवाद का कारण: भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 में 5 वर्ष के लिए 'फिक्स्ड पे' पर संविदा नियुक्तियां करना। प्रमुख मांगें और चेतावनी महासंघ ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि: सोडाणी समिति की सिफारिशों को अविलंब लागू किया जाए। सभी 374 Raj-CES महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों में तब्दील कर नियमित पद सृजित किए जाएं। भर्ती कैलेंडर-2026 में शामिल टीचिंग एसोसिएट और अशैक्षणिक संवर्गों की संविदा चयन प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगे। डॉ. श्यामसुंदर मीणा, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बोले- संविदा आधारित अध्यापन व्यवस्था उच्च शिक्षा को अस्थाई बनाने का संस्थागत प्रयास है। यदि सरकार ने समय रहते सोडाणी समिति की सिफारिशों को लागू नहीं किया और संविदा भर्तियों को रद्द नहीं किया, तो प्रदेश भर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
शिक्षक बोले- संविदा भर्ती पर तुरंत रोक लगाई जाए:कहा- इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता खतरे में आ जाएगी
चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय, श्रीगंगानगर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से कॉलेजों में संविदा पर नियुक्तियां करने के विरोध में विरोध-प्रदर्शन किया गया। शिक्षकों ने प्रस्तावित चयन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने, सोडाणी समिति की सिफारिशों को लागू करने और सभी राज-सीईएस महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों की तरह संचालित करने की मांग की। बोले- उच्च शिक्षा खतरे में संगठन के प्रदेश सचिव प्रो. श्याम लाल ने कहा- राज-सीईएस योजना के तहत संचालित महाविद्यालयों का वर्तमान स्वरूप NEP-2020 की मूल भावना के खिलाफ है। यहां स्थायी अकादमिक ढांचे का अभाव है, अधोसंरचना और संसाधन अपर्याप्त हैं, शोध-नवाचार की कोई गुंजाइश नहीं और पूरी अध्यापन व्यवस्था संविदा एवं अस्थायी शिक्षकों पर टिकी है। इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, बहुविषयकता और अकादमिक निरंतरता खतरे में पड़ रही है। उन्होंने कहा- सत्र 2020-21 से 2022-23 के बीच 303 नए महाविद्यालय खोले गए, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 2023-24 और 2024-25 में 71 अतिरिक्त जोड़े गए। अब कुल संख्या 374 पहुंच गई है। इनमें से करीब 260 महाविद्यालयों में आज भी एक भी स्थाई संकाय सदस्य नहीं है, जो NEP-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री, राज्यपाल और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन में सोडाणी समिति की सिफारिशों को तत्काल लागू करने की मांग की गई, जो विधानसभा चुनाव-2023 के बाद गठित हुई थी लेकिन अब तक सार्वजनिक नहीं की गईं। महासंघ ने भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 के तहत राज-सीईएस नियम-2023 में बदलाव कर 5 साल के लिए 28,500 रुपये फिक्स वेतन पर संविदा टीचिंग एसोसिएट की भर्ती शुरू करने के प्रयास की कड़ी निंदा की। संगठन का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी, असुरक्षित और नीति-विरोधी है। अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को भेजी गई अभ्यर्थना को तत्काल रोका जाए। यदि समय रहते कोई फैसला नहीं लिया गया तो संगठन लोकतांत्रिक और आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
एक दशक में बदला देश का सामाजिक ढांचा; लिंग अनुपात और शिक्षा में दर्ज हुई ऐतिहासिक उपलब्धि
भारत में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान ने रचा इतिहास। वर्ष 2014 से 2024 के बीच राष्ट्रीय लिंग अनुपात 918 से बढ़कर 929 हुआ और माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों का नामांकन 80.2% तक पहुंचा। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने साझा किए खुशहाल भारत के आंकड़े। जानिए कैसे मिशन शक्ति के माध्यम से बदल रही है बेटियों की दुनिया और सामाजिक नजरिया।
डीआईओएस कार्यालय में वरिष्ठ सहायक से डीआईओएस डॉ. संतोष कुमार राय द्वारा गाली देने व जाति सूचक शब्द कहने का मामले में बुधवार को कर्मचारियों ने डीआईओएस आफिस में काम ठप कर दिया। हाथ में माइक लेकर नारेबाजी करते हुए कर्मचारियों ने कहा कि अभी तो यह अंगड़ाई है। आगे और लड़ाई है। आफिस में कामकाज रोककर सभी कर्मचारी आफिस के बाहर आकर खड़े हो गए। हालांकि, संयुक्त शिक्षा निदेशक राजेश कुमार वर्मा, डीआईओएस संतोष कुमार राय व बीएसए सुरजीत कुमार सिंह द्वारा कर्मचारियों के साथ हुई बैठक के बाद कर्मचारी कामकाज पर लौट और प्रदर्शन समाप्त हो गया है। डीआईओएस का पहली बार ऐसा रवैया नहीं अब कर्मचारियों का साफ तौर पर कहना है कि डीआईओएस का यह रवैया पहली बार नहीं है। वह यहां पर गाली सुनने के लिए नहीं आते हैं। पहले भी यह कई कर्मचारियों के साथ अभद्रता कर चुके हैं। मंगलवार को घटना के बाद कर्मचारियों ने डीआईओएस आफिस में नारेबाजी करने के बाद डीएम आफिस जाकर शिकायती पत्र सौंपा था। जो फाइल आई नहीं उसके निस्तारण का बना रहे थे दवाब यूपी एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफिसर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संजय गौतम ने बताया कि वरिष्ठ सहायक जितेंद्र पर दवाब बनाया गया कि जो फाइल आई नहीं है उसको निस्तारित करो। क्या लालच है कि बिना कागज के फाइल को चलाना चाहते हैं। डीआईओएस द्वारा गाली गलौज की गई, इसकी हम घोर निंदा करते हैं। डीआईओएस अग्रेसिव नेचर के हैं राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मंडल महामंत्री संतोष तिवारी ने बताया कि वरिष्ठ सहायक पर बिना सौंपे गए काम करने का दवाब बनाया जा रहा था। संगठन इसकी निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई की मांग करता है। डीआईओएस अग्रेसिव नेचर के हैं। पहले भी ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस तरह का व्यवहार अच्छा नहीं है। कर्मचारी बोलना नहीं चाहते क्योंकि अधीनस्थ हैं राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के क्षेत्रीय प्रभारी रजनीश प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि इससे पहले भी लेखाकार अमोल कुमार के साथ डीआईओएस ने इसी तरह का व्यवहार किया था। इनको उस समय भी ऐसा व्यवहार न करने के लिए कहा गया था। कर्मचारी बोलना नहीं चाहते क्योंकि अधीनस्थ हैं लेकिन इस तरह की शिकायतें लगातार आती रहती हैं। कामकाज चल रहा मामले में डीआईओएस डॉ. संतोष कुमार राय ने बताया कि कर्मचारी से गाली गलौज नहीं कि गई है। काम न करने पर उसको सिर्फ डांटा गया है। डीआईओएस आफिस में कामकाज सुचारु रुप से चल रहा है।
डीडवाना में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) की राजकीय बांगड़ महाविद्यालय इकाई ने राज-सेस (Raj-CES) महाविद्यालयों की मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्राध्यापकों ने महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर काली पट्टी बांधकर और प्ले-कार्ड्स के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराई। महासंघ का कहना है कि राज-सेस योजना के तहत संचालित महाविद्यालयों का वर्तमान स्वरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सिद्धांतों के विपरीत है। इन संस्थानों में स्थायी अकादमिक ढांचे की कमी, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, शोध एवं नवाचार के सीमित अवसर तथा संविदा पर आधारित शिक्षण व्यवस्था उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और अकादमिक निरंतरता को प्रभावित कर रही है। महासंघ ने बताया कि सत्र 2020-21 से 2022-23 के दौरान राज-सेस योजना के अंतर्गत 303 नए महाविद्यालय खोले गए थे। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सत्र 2023-24 और 2024-25 में 71 अतिरिक्त राज-सेस महाविद्यालय शुरू किए गए, जिससे इनकी कुल संख्या 374 हो गई है। इनमें से लगभग 260 महाविद्यालयों में अब तक एक भी स्थायी संकाय सदस्य कार्यरत नहीं है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदर्शन के बाद, संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी/जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, राज्यपाल और प्रधानमंत्री को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर तत्काल समाधान की मांग की। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विधानसभा चुनाव-2023 के बाद गठित राज्य सरकार द्वारा राज-सेस महाविद्यालयों के संचालन को लेकर बनाई गई सोडाणी समिति की सिफारिशें अभी तक न तो सार्वजनिक की गई हैं और न ही उन्हें लागू किया गया है। महासंघ ने भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 के जरिए राज-सेस नियम-2023 में बदलाव कर संविदा पर नियुक्तियां शुरू करने के प्रयास पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। इस प्रक्रिया के तहत 28,500 रुपए के नियत वेतन पर पांच वर्षों के लिए संविदा टीचिंग एसोसिएट और अशैक्षणिक पदों पर चयन की योजना है। महासंघ के अनुसार, यह व्यवस्था अस्थायी, असुरक्षित और नीति-विरोधी है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना के विपरीत है।
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म, अब नई प्राधिकरण तय करेगी अल्पसंख्यक शिक्षा का सिलेबस
उत्तराखंड सरकार जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड खत्म करने जा रही है। नई व्यवस्था में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है।
नालंदा जिले की छात्राओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुलने जा रहे हैं। केंद्रीय बजट में प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास खोलने के निर्णय के साथ ही बिहार सरकार ने भी वंचित वर्ग की छात्राओं के लिए विशेष हॉस्टल निर्माण की योजना को मंजूरी दे दी है। सावित्रीबाई फुले छात्रावास जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की छात्राओं के लिए पांच करोड़ रुपए की लागत से 100 छात्राओं की क्षमता वाले सावित्रीबाई फुले बालिका छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए शहर के करगिल चौक के निकट एक एकड़ भूमि की पहचान कर ली गई है। जिला कल्याण पदाधिकारी योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कैबिनेट से छात्रावास निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है। बिहारशरीफ सर्कल ऑफिसर की ओर से भूमि का अनापत्ति प्रमाण पत्र विभाग को उपलब्ध करा दिया गया है। अब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन मंजिला भवन का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा छात्रावास छात्रावास में छात्राओं को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। खेलकूद के लिए खेल मैदान, सुसज्जित पुस्तकालय और आधुनिक अध्ययन कक्षों की व्यवस्था की जाएगी। निशुल्क आवास सुविधा के साथ-साथ अनाज और अनुदान राशि भी प्रदान की जाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर छात्रावास में पुख्ता व्यवस्था रहेगी। गेट पर ही आगंतुकों का पूरा ब्योरा दर्ज किया जाएगा। जिले का पहला बालिका छात्रावास नालंदा जिले में अभी तक छात्राओं के लिए एक भी छात्रावास नहीं था। यह जिले का पहला बालिका छात्रावास होगा, जो वंचित वर्ग की बेटियों के लिए उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मार्ग प्रशस्त करेगा। हालांकि, राजगीर में डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय में अनुसूचित जाति और जनजाति की 600 छात्राएं पहली से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अब तक कोई छात्रावास सुविधा नहीं थी। केंद्रीय बजट से मिलेगी और मजबूती केंद्रीय बजट में बिहार के प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास खोलने के निर्णय से इस दिशा में और गति आएगी। इस छात्रावास की खास बात यह होगी कि इसमें सभी समाज और वर्ग की बालिकाएं एक साथ रहकर नीट, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगी। इसके लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा में समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम जिला कल्याण पदाधिकारी योगेंद्र कुमार सिंह ने इसे बेहद सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि दोनों छात्रावासों के निर्माण से न केवल वंचित वर्ग की छात्राओं को लाभ मिलेगा, बल्कि जिले की सभी वर्गों की बालिकाएं उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो सकेंगी।
झारखंड का शिक्षा विभाग गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। विभाग के पास शिक्षकों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। 10 जिलों के 68 उत्क्रमित (अपग्रेडेड) हाई स्कूलों के 161 शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिला है। इनके 6.18 करोड़ रुपए बकाया वेतन का भुगतान कब तक होगा, अधिकारी स्पष्ट रूप से यह भी नहीं बता पा रहे हैं। फंड की कमी का असर सिर्फ वेतन पर ही नहीं पड़ा रहा है। पैसों की कमी के कारण बच्चों की पोशाक योजना और स्कूल किट योजना भी प्रभावित हुई है। सत्र बीतने वाला है, लेकिन बच्चों को ड्रेस नहीं मिली है। कई स्कूलों में तो हैंड वॉश और सफाई जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। 2016-17 में अपग्रेड हुए थे 189 स्कूल वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में माध्यमिक शिक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए 189 स्कूलों को अपग्रेड किया था। इसके बाद 2022-23 में इन स्कूलों में पदों का सृजन कर शिक्षकों को पदस्थापित किया गया। लेकिन इनके वेतन भुगतान की स्थाई व्यवस्था नहीं की गई। वर्ष 2025-26 में योजना मद के लिए पर्याप्त आवंटन नहीं मिला और अनुपूरक बजट में भी राशि स्वीकृत नहीं हुई। इसी कारण वेतन का भुगतान अटक गया। ये योजनाएं भी बेपटरी... पोशाक योजना: प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के बच्चों के लिए पोशाक योजना चल रही है। लेकिन चालू वितीय वर्ष में कई जिलों को इसकी राशि नहीं मिली। नतीजा यह है कि हजारों बच्चों को बिना ड्रेस या पुरानी ड्रेस में स्कूल आना पड़ता है। या फिर अभिभावकों को अपनी जेब से ड्रेस पर खर्च करना पड़ता है। शिक्षकों का कहना है कि इससे बच्चों की उपस्थिति और आत्मविश्वास, दोनों प्रभावित हो रहे हैं। स्कूल किट: सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए लागू स्कूल किट योजना भी अधूरी है। योजना के तहत बच्चों को कॉपी, पेन, पेंसिल समेत अन्य शैक्षणिक सामग्री दी जानी थी। लेकिन बच्चों को अब तक यह किट नहीं मिली। इसके बिना पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए चुनौती बन गया है। इससे बच्चों की सीखने की प्रक्रिया बाधित हो रही है। विकास अनुदान: विद्यालयों के रोजमर्रा संचालन के लिए मिलने वाला अनुदान भी लंबे समय से नहीं मिला है। इसी राशि से हैंडवॉश, साबुन, साफ-सफाई, पेयजल और छोटे रखरखाव के कार्य होते हैं। इस मद में अनुदान नहीं मिलने से स्कूलों में स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है। इससे स्कूली बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
लखनऊ में 'पठन संस्कृति उत्सव':शिक्षा विभाग और नेशनल बुक ट्रस्ट ने किया आयोजन
लखनऊ के राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में सोमवार को 'पठन संस्कृति उत्सव' का आयोजन किया गया। इस उत्सव ने विद्यालय परिसर को शिक्षा, साहित्य और कला के केंद्र में बदल दिया। यह आयोजन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग और नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों में पठन, चिंतन तथा रचनात्मकता की संस्कृति को बढ़ावा देना था। अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा के मार्गदर्शन में यह उत्सव आयोजित हुआ। उन्होंने पठन संस्कृति को शिक्षा की आत्मा बताते हुए इसे केवल एक औपचारिक आयोजन के बजाय विचार और संवाद के उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया। पठन संस्कृति एक सतत प्रक्रिया है पार्थ सारथी सेन शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उनका तथा उपस्थित रचनाकारों, लेखकों और साहित्यकारों का सम्मान किया गया। पुस्तकालय प्रकोष्ठ की विशेष कार्याधिकारी सांत्वना तिवारी ने कहा कि पठन संस्कृति एक सतत प्रक्रिया है, जिसे विद्यालय, शिक्षक और पुस्तकालय मिलकर ही सकारात्मक रूप दे सकते हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि पुस्तकें विद्यार्थियों को कक्षा की सीमाओं से परे व्यापक ज्ञान से जोड़ती हैं। उप शिक्षा निदेशक रेखा दिवाकर ने पठन को व्यक्तित्व विकास की आधारशिला बताया। जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यालय को पुस्तक, कला और संवाद का केंद्र बनना चाहिए। विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया उत्सव के प्रथम सत्र में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने पठन संस्कृति और वर्तमान शिक्षा सुधारों पर अपने विचार साझा किए।द्वितीय सत्र में राष्ट्रीय कला उत्सव और स्कूल बैंड प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान वायलिन वादन, कथक और लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां हुईं। कथावाचक हिमांशु बाजपेई और वैष्णवी की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में भावनात्मक गहराई जोड़ी। मीडिया कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार ने बताया कि यह उत्सव इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि पुस्तकें समाज की चेतना और विवेक का आधार हैं।
धार जिले के राजगढ़ में भारतीय किसान यूनियन ने मंगलवार को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। किसान मजदूर जागरूकता अभियान के तहत बस स्टैंड पर आयोजित इस धरने के बाद नायब तहसीलदार के.एस. वास्केल को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। धरने में क्षेत्र के कई किसान और यूनियन के पदाधिकारी मौजूद रहे। ज्ञापन में देश में लागू तीन प्रकार की शिक्षा प्रणाली पर आपत्ति जताई गई। यूनियन ने कहा कि गरीबों के लिए हिंदी माध्यम, मध्यम वर्ग के लिए अंग्रेजी माध्यम और धनवान परिवारों के बच्चों के लिए सीबीएसई शिक्षा प्रणाली लागू है, जो भेदभावपूर्ण है। इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। ‘मजदूर किसानों के बच्चों के साथ अन्याय हो रहा’भारतीय किसान यूनियन ने 'एक देश, एक किताब, एक समान शिक्षा प्रणाली' लागू करने की मांग की। उनका तर्क है कि वर्तमान शिक्षा नीतियों से गरीब मजदूर किसानों के बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है। यदि सरकार यह लागू नहीं कर सकती, तो सभी नेताओं और सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के परिवारों के लिए सरकारी शिक्षा और सरकारी अस्पतालों में इलाज अनिवार्य किया जाए। ज्ञापन में किसान व मजदूरों के हित में कई अन्य मांगें भी शामिल थीं। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राकेश सोलंकी ने बताया कि यह 'किसान मजदूर जागरूकता अभियान' धार जिले की पांच तहसीलों में चलाया जा रहा है। इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और किसान हित के मुद्दों को लेकर धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में सभी वर्गों को एक समान शिक्षा मिलनी चाहिए और तीन प्रकार की शिक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान यूनियन के पदाधिकारी और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
मथुरा के वृंदावन स्थित एक आश्रम में एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। यह घटना उसके व्हाट्सएप स्टेटस अपडेट करने के बाद सामने आई। मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले सागर पांडे के रूप में हुई है। वह पिछले 7-8 महीनों से सियाराम दास महाराज के आश्रम में रहकर भागवत की शिक्षा ग्रहण कर रहा था। पुलिस के अनुसार, घटना की शुरुआत सागर द्वारा लगाए गए एक व्हाट्सएप स्टेटस से हुई। स्टेटस अपडेट करने के कुछ समय बाद उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। सागर का फोन बंद होने पर उसकी मां चिंतित हो गईं। उन्होंने सागर के एक मित्र को फोन कर स्थिति की जानकारी लेने को कहा। मित्र ने तुरंत आश्रम में संपर्क किया और सागर के कमरे तक पहुंचा। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद होने पर खिड़की से झांककर देखा गया, जहां सागर का शव फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही वृंदावन कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वृंदावन कोतवाल संजय कुमार पांडे ने बताया कि प्रारंभिक जांच में घटना का कारण पारिवारिक विवाद प्रतीत हो रहा है। पुलिस मृतक के मोबाइल फोन की जांच कर रही है ताकि आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह का पता चल सके।
आमेट: मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने बार एसोसिएशन पदाधिकारियों का किया स्वागत
सीबीईओ श्री नारायण सिंह राव और बार एसोसिएशन के बीच शैक्षिक एवं विधिक सहयोग के लिए बैठक आयोजित, संस्मरण साझा कर भविष्य की योजनाओं पर हुई चर्चा।
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने नंगल से कीरतपुर साहिब तक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को मंजूरी दिलाई है। श्री आनंदपुर साहिब विधानसभा क्षेत्र के विधायक हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इस परियोजना की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होने जा रही है। इसके जल्द शुरू होने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था और सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है। यह मार्ग पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा को जोड़ता है। यह माता बगलामुखी, बाबा बालक नाथ और माता चिंतपूर्णी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है। लगातार सड़क हादसों के कारण स्थानीय लोग इसे 'किलर रोड' भी कहते रहे हैं। परियोजना पूरी होने के बाद सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की संभावना है। 2022 में हुआ था सड़क का सर्वे मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने जानकारी दी कि जुलाई 2022 में इस सड़क परियोजना का सर्वे कराया गया था। इसके उपरांत केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सड़क की गंभीर स्थिति से अवगत कराया गया। वर्ष 2023 में परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की गई, जिसके बाद सभी आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृतियां प्राप्त की गईं। उन्होंने बताया कि 21 जनवरी को उन्होंने दिल्ली में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया। अब रिकॉर्ड समय में भूमि अधिग्रहण किया जाएगा और अगले दो महीनों के भीतर किसानों के खातों में मुआवजे की राशि जमा करा दी जाएगी। इसके तुरंत बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। मंत्री बोले- पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा मंत्री बैंस ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और आसपास के 100 से 150 गांवों की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ होगा। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में अन्य विकास कार्य भी तेजी से जारी हैं।
भीलवाड़ा: सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी राम सहाय सैनी का गंगापुर में सम्मान
शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी राम सहाय सैनी को माली सैनी समाज द्वारा सम्मानित किया गया और उन्होंने समाज सेवा का संकल्प लिया।
प्रदेश के लगभग 36 हजार निजी स्कूलों में आरटीई के तहत 1 अप्रैल से निशुल्क विद्यार्थियों को प्रवेश में संशय की स्थिति बन रही है। राज्य सरकार इस बार नया शिक्षा सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू करने जा रही है। जिसके तहत शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी निशुल्क सीटों पर होने वाले प्रवेश के लिए भी इस बार ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 10 जनवरी से शुरू होनी थी। फरवरी माह शुरू हो गया है मगर राज्य सरकार ने अभी तक निशुल्क प्रवेश का टाइम फ्रेम घोषित नहीं किया है। छात्र-छात्राएं पिछले एक माह से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में दिसंबर माह में राज्य सरकार को निशुल्क प्रवेश के प्रस्ताव भिजवाए थे। लेकिन राज्य सरकार ने उन प्रस्तावों पर मंजूरी नहीं देते हुए शिक्षा विभाग से दोबारा प्रस्ताव मांगे हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने दोबारा प्रस्ताव बना कर भेज दिए हैं। अब राज्य सरकार से हरी झंडी का इंतजार है। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से आरटीई टाइम फ्रेम घोषित किया जाएगा। उसी के मुताबिक ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी की तिथि निर्धारित की जाएगी। पिछले साल 9 अप्रैल को निकली लॉटरी पिछले साल 9 अप्रैल को ऑनलाइन लॉटरी के जरिए निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों का वरीयता क्रम निर्धारण किया गया। आरटीई के तहत सशुल्क बालकों के प्रवेश के आधार पर वरीयता में चयनित निशुल्क प्रवेश के अंतिम चरण का आवंटन 31 अगस्त को किया गया। जिसमें सामने आया कि 308064 अभ्यर्थियों में से 237407 को प्रदेश के 31720 स्कूलों में निशुल्क प्रवेश मिला है। “इस बार प्रवेश प्रक्रिया जनवरी के पहले या दूसरे सप्ताह से शुरू होने की जानकारी सामने आई थी। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया शुरू नहीं होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित होगी और प्रवेश में भी विलंब होगा। -गिरिराज खैरीवाल, प्रदेश समन्वयक, प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस “आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश को लेकर राज्य सरकार की मंजूरी के बाद आरटीई टाइम फ्रेम घोषित किया जाएगा। इस संबंध में तैयारियां चल रही है।-चंद्र किरण पंवार, आरटीई प्रभारी, प्रारंभिक शिक्षा
गुरु जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर समाज की तरक्की में योगदान का संकल्प लिया
भास्कर न्यूज | जालंधर श्री गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व के मौके पर सिविल सर्जन कार्यालय में धार्मिक कार्यक्रम करवाया गया। इस मौके सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग के नेतृत्व में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने गुरु रविदास जी की तस्वीर के आगे माथा टेका और उन्हें नमन किया। कार्यक्रम में जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. रमन गुप्ता, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. राकेश चोपड़ा, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा, जिला डेंटल स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलजीत कौर रूबी, अधीक्षक योगराज, अधीक्षक गुरपिंदर कौर और कार्यालय के अन्य स्टाफ ने हिस्सा लिया। सभी ने गुरु रविदास जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर समाज की तरक्की में सहयोग देने का संकल्प लिया। इस मौके सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग ने सभी को प्रकाश पर्व की बधाई दी और स्वस्थ समाज की कामना की। उन्होंने स्टाफ को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु रविदास जी ने हमें जात-पात और ऊंच-नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर मिल-जुलकर रहने का संदेश दिया है। हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। हमें बच्चों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना चाहिए और उन्हें अच्छी शिक्षा देनी चाहिए, ताकि वे बड़े होकर देश की तरक्की में अपना कीमती योगदान दे सकें।
गुरुद्वारा छठी पातशाही बस्ती शेख में कवि दरबार करवाया, संगत को गुरु महाराज की शिक्षाओं से जोड़ा
जालंधर | गुरुद्वारा छठी पातशाही बस्ती शेख में गुरु रविदास महाराज के प्रकाश पर्व को समर्पित विशेष दीवान सजाए गए। गुरु रविदास जी के जीवन को समर्पित पंजाबी लेखक सभा द्वारा कवि दरबार का आयोजन भी किया। कवि दरबार में मास्टर महिंदर सिंह अनेजा, कुलविंदर सिंह गाखल, उर्मिलजीत सिंह वालिया, बीबी कुलजीत कौर, गुरदीप सिंह उजाला, हरजिंदर सिंह जिंदी, सतपाल सिंह अलग, नगीना सिंह तथा सारंगी वादक सोहन सिंह ने अपनी रचनाओं के माध्यम से संगत को निहाल किया। इसके उपरांत चल रही सहज पाठों की शृंखला के तहत महिंदर सिंह धालीवाल और अजीत सिंह के परिवारों द्वारा सहज पाठों के भोग संपन्न करवाए। गुरु घर द्वारा दोनों परिवारों को सम्मानित किया गया। मासिक पूर्णिमा को समर्पित दोपहर तक दीवान सजाए गए, जिसमें कथा विचारों के माध्यम से गुरु जी के संघर्षपूर्ण जीवन से संगतों को अवगत करवाया। बीबी रजिंदर कौर और भाई मनसंजम सिंह के जत्थे ने कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया। स्टेज की सेवा जनरल सेक्रेटरी गुरमीत सिंह ने निभाई। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलवंतबीर सिंह कालड़ा, अमरीक सिंह, सेक्रेटरी इंदरपाल सिंह, जगजीत सिंह खजांची, चरणजीत सिंह लुबाणा, सुरिंदर सिंह सियाल, हरबंस सिंह, गुरजीत सिंह पोपली, गुरदीप सिंह बवेजा, बिशन सिंह, जसबीर सिंह सेठी मौजूद रहे।
शहर-जिले में विस्तार, शिक्षा-चिकित्सा पर जोर
पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी की वार्षिक योजना बैठक प्रधान कार्यालय, पिछोली में हुई। अध्यक्षता समाज अध्यक्ष यशवंत पालीवाल ने की। महामंत्री सुरेंद्र पालीवाल ने बताया कि इसमें वर्षभर के कार्यक्रम तय कर उन्हें अंतिम रूप दिया गया। बैठक में उदयपुर शहर को छह खंडों- पुराना शहर, हिरण मगरी, सुंदरवास, कालका माता रोड, शोभागपुरा मीरा नगर और बड़गांव बेदला में विभाजित किया गया। इसमें जिले के बाहर रहने वाले समाज बंधुओं को जोड़ने का भी निर्णय लिया गया। चिकित्सा क्षेत्र में हर माह दो निशुल्क परामर्श एवं जांच शिविर आयोजित होंगे। शिक्षा क्षेत्र में कोचिंग सेंटर प्रारंभ करने, संस्कारयुक्त शिक्षा पर संगोष्ठियां और परीक्षा अवधि में निशुल्क कोचिंग की योजना बनाई गई। वर्षभर के सामाजिक आयोजन के तहत मार्च में होली मिलन और नव संवत्सर स्वागत, अप्रैल में परशुराम जयंती, सितंबर में झल झूलनी एकादशी पर रामरेवाड़ी कार्यक्रम, अक्टूबर में नवरात्रि गरबा और कन्या पूजन, नवंबर में दीपावली स्नेह सम्मेलन तथा दिसंबर में संभाग स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इसमें समाज पत्रिका शुरू करने, सदस्यता और विज्ञापन संबंधी निर्णय लिए गए। रियायती दर पर भूमि लेकर छात्रावास, कौशल विकास केंद्र, वरिष्ठ नागरिक, महिला और बाल केंद्र स्थापित करने की योजना को अंतिम रूप दिया गया। प्रचार प्रमुख महेश जोशी ने बताया कि बैठक में निशुल्क चिकित्सा शिविर के बैनर-पोस्टर का विमोचन हुआ। इस मौके पर समाज कार्यकारिणी और संरक्षक मंडल के सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में निशुल्क चिकित्सा शिविर के बैनर-पोस्टर का विमोचन करते पदाधिकारी व सदस्य।
पालीवाल ब्राह्मण समाज की वार्षिक योजना बैठक संपन्न, शहर और जिले में विस्तार, शिक्षा-चिकित्सा पर फोकस
उदयपुर | पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी की वार्षिक योजना बैठक प्रधान कार्यालय, पिछोली में हुई। अध्यक्षता समाज अध्यक्ष यशवंत पालीवाल ने की। महामंत्री सुरेंद्र पालीवाल ने बताया कि इसमें वर्षभर के कार्यक्रम तय कर उन्हें अंतिम रूप दिया गया। बैठक में उदयपुर शहर को छह खंडों- पुराना शहर, हिरण मगरी, सुंदरवास, कालका माता रोड, शोभागपुरा मीरा नगर और बड़गांव बेदला में विभाजित किया गया। इसमें जिले के बाहर रहने वाले समाज बंधुओं को जोड़ने का भी निर्णय लिया गया। शिक्षा क्षेत्र में कोचिंग सेंटर प्रारंभ करने, संस्कारयुक्त शिक्षा पर संगोष्ठियां और परीक्षा अवधि में निशुल्क कोचिंग की योजना बनाई गई। वर्षभर के सामाजिक आयोजन के तहत मार्च में होली मिलन और नव संवत्सर स्वागत, अप्रैल में परशुराम जयंती, सितंबर में झल झूलनी एकादशी पर रामरेवाड़ी कार्यक्रम, अक्टूबर में नवरात्रि गरबा और कन्या पूजन, नवंबर में दीपावली स्नेह सम्मेलन तथा दिसंबर में संभाग स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी।
आदेश की पालना करें, अन्यथा माध्यमिक शिक्षा निदेशक आगामी सुनवाई पर हाजिर हों
जयपुर | हाईकोर्ट ने रिटायर स्कूल प्रिंसिपल के मामले में आदेश की पालना नहीं करने पर नाराजगी जताई है। वहीं आगामी सुनवाई तक आदेश की पालना नहीं होने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक को अदालत में हाजिर होने के लिए कहा है। अदालत ने कहा है कि वे बताएं कि उन्होंने आदेश की पालना क्यों नहीं की। अदालत ने यह निर्देश महेन्द्र तिवाड़ी की अवमानना याचिका पर दिया। मामले से जुड़े अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि प्रार्थी जयपुर जिले के राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल, राम नगर कोटखावदा से प्रिंसिपल पद से सितंबर 2022 में रिटायर हुआ था। इससे पहले शैक्षणिक सत्र 2018-19 का परीक्षा परिणाम तय मापदंड से कम होने पर उसे 2021 में नोटिस दिया।
बुरहानपुर में सहायक संचालक शिक्षा और अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक रोहिणी पवार को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) नियुक्त किया गया है। कलेक्टर हर्ष सिंह ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किए। यह पद 31 जनवरी को तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रविंद्र महाजन के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुआ था। इसके बाद रोहिणी पवार को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ यह अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उन्हें अगले आदेश तक अस्थायी रूप से बुरहानपुर के जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार और आहरण-संवितरण के अधिकार दिए गए हैं। पवार ने सोमवार को ही प्रभारी डीईओ के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया। कार्यभार संभालने के बाद कर्मचारी संगठनों और पालक महासंघ ने डीईओ कार्यालय पहुंचकर उनका स्वागत किया। पालक महासंघ की ओर से अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी, पंकज पटेल, प्रेमलता सांकले, राजीव खेड़कर, नंदकिशोर वाणे, अता उल्ला खान, मोहन दलाल, मंसूर सेवक, राजकुमार बच्छानी और रियाजुल हक अंसारी मौजूद थे। कर्मचारी संगठन की ओर से ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित, डॉ. अशफाक खान, धर्मेंद्र चौकसे और विजय राठौड़ आदि ने भी स्वागत किया।
गुलाबगंज में रविदास जयंती पर मंत्री अहिरवार शामिल:शिक्षा, नशामुक्ति और सामाजिक एकजुटता का दिया संदेश
विदिशा जिले के गुलाबगंज में संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने भाग लिया और संत रविदास जी के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। अपने संबोधन में मंत्री अहिरवार ने संत रविदास के जीवन, विचारों और समाज सुधार के संदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल संकट से संबंधित एक प्रेरक प्रसंग सुनाया, जिसमें संतों के मार्गदर्शन से पत्थर हटाने पर जलधारा फूट पड़ी थी। मंत्री ने इस कथा के माध्यम से बताया कि सही दिशा, मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयासों से बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है। मंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संत रविदास जयंती पर जालंधर में आयोजित कार्यक्रम में भी संत को सम्मानित किया गया और समाज के हित में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। उन्होंने जोर दिया कि सरकार समाज के हर वर्ग के उत्थान, सम्मान और विकास के लिए लगातार काम कर रही है। मंत्री बोले- नशामुक्त समाज की आवश्यकताअहिरवार ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिकार पहुंचाने का कार्य किया और आजादी के बाद उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना उनके महान योगदान का प्रतीक है। मंत्री ने शिक्षा को सामाजिक सम्मान और आत्मगौरव का सबसे बड़ा माध्यम बताया, इसलिए बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा, कोचिंग और मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्य मंत्री ने नशामुक्त समाज की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन समाज की भागीदारी के बिना यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बालिकाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की भी जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में सामाजिक, शैक्षणिक और जनहित के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को मेडल और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
बक्सर विधानसभा के पूर्व विधायक संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को बिहार विरोधी और जनविरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट से आम जनता को निराशा हाथ लगी है, क्योंकि यह न तो बक्सर की जरूरतों को समझता है और न ही बिहार की समस्याओं को। तिवारी ने आरोप लगाया कि बिहार की शिक्षा और रोजगार के साथ एक बार फिर गंभीर अन्याय हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्षों से पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग लंबित है, जिसे बजट में नजरअंदाज कर दिया गया। यह दर्शाता है कि सरकार बिहार के छात्रों के प्रति गंभीर नहीं है। शिक्षा मजबूत होगी तो समाज मजबूत होगापूर्व विधायक ने अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि “शिक्षा मजबूत होगी तभी समाज और प्रदेश मजबूत होगा।” उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस बजट में शिक्षा को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है और उच्च शैक्षणिक संस्थाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया है। किसानों के लिए इस बजट को पूरी तरह खोखला बताते हुए मुन्ना तिवारी ने कहा कि इसमें सिंचाई की स्थायी व्यवस्था, फसलों के वाजिब दाम की गारंटी और खाद, बीज व डीजल के बढ़ते खर्च से राहत देने का कोई ठोस प्रावधान नहीं है। बक्सर सहित पूरे बिहार के किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बजट में नौकरी देने की योजना नहींयुवाओं के संबंध में, तिवारी ने कहा कि बजट में केवल भाषण और घोषणाएं हैं, जबकि जमीन पर नौकरी देने की कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने बेरोजगारी के रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद सरकार को युवाओं के भविष्य के प्रति असंवेदनशील बताया और कहा कि यह बजट युवाओं के सपनों पर चोट करने वाला है। पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि यह बजट आम आदमी का नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों का है। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी जनसंघर्ष की विचारधारा पर चलते हुए ऐसे जनविरोधी बजट का पुरजोर विरोध करती है और जनता की आवाज सड़क से लेकर सदन तक पूरी ताकत से उठाती रहेगी। मझोले उद्योग बर्बादी के कगार परसाथ ही उन्होंने कहा कि बजट पेश करने के दौरान निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपए डूब जाना ये स्पष्ट करता है कि केंद्रीय नेतृत्व पर आम निवेशकों को भरोसा नहीं है। सोने चांदी के थोक मूल्य में लगातार महंगाई और बजट से पूर्व बिकवाली ने भी लगन के वक्त आम लोगों को अतिरिक्त बोझ में डाला। देश को पूरी तरीके से इस सरकार ने अस्थिर कर दिया है और छोटे और मझोले उद्योग पूरी तरीके से बर्बादी के कगार पर है। कपड़ा सिलाई और निर्माण उद्योग को अतिरिक्त मदद की आवश्यकता को भी इस बजट में दरकिनार किया गया।
मुंगेर में शिक्षकों ने मनाया कर्तव्य बोध दिवस:शिक्षा, शिक्षक और समाज की समरसता पर दिया जोर
मुंगेर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जिला इकाई ने 'कर्तव्य बोध दिवस' का आयोजन किया। यह कार्यक्रम नगर क्षेत्र स्थित एक विवाह भवन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश महामंत्री ज्ञानेंद्र नाथ सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री संजय कुमार आजाद और प्रदेश सचिव अभय नाथ कुमार ने दीप प्रज्वलित कर तथा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। इस अवसर पर सभी अतिथियों का अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राज्य, जिला, प्रखंड स्तर पर किया जाता प्रदेश महामंत्री ज्ञानेंद्र नाथ सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि 'कर्तव्य बोध दिवस' महासंघ का एक केंद्रीय कार्यक्रम है। इसका आयोजन देश के प्रत्येक राज्य, जिला, प्रखंड और संकुल स्तर पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों और समाज में कर्तव्य भावना को जागृत करना है। सिंह ने स्वीकार किया कि शिक्षक वर्तमान में कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं, लेकिन वे अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं हुए हैं। महासंघ का मानना है कि अधिकार और कर्तव्य दोनों साथ-साथ चलने चाहिए। संगठन 'राष्ट्रहित, शिक्षा और शिक्षकों के हित में काम करता प्रदेश संगठन मंत्री संजय कुमार आजाद ने महासंघ के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संगठन 'राष्ट्रहित में शिक्षा, शिक्षा हित में शिक्षक और शिक्षक हित में समाज' की भावना से कार्य करता है। आजाद ने कहा कि यह केवल शिक्षकों का संगठन नहीं, बल्कि एक समग्र शैक्षिक संगठन है जो शिक्षा व्यवस्था के सभी पहलुओं पर विचार करता है। प्रदेश सचिव अभय नाथ कुमार ने महासंघ की व्यापकता बताते हुए कहा कि यह केजी से पीजी तक के शिक्षकों को एक मंच पर लाने वाला संगठन है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सह मंत्री कृष्णकांत सिंह ने की, जबकि संचालन संयोजक अजय कुमार पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों और क्लासरूम को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की अदालत ने मामले में मौखिक टिप्पणी करते हुए शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल से कहा- आप स्वच्छ भारत मिशन की बात करते हो, लेकिन आप स्कूल में बच्चियों के लिए टॉयलेट की व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे हैं। टॉयलेट की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बच्चियां स्कूल में पानी भी नहीं पीती, क्योंकि उन्हें बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है। हम बच्चों और समाज को जवाब नहीं दे पा रहे हैं। कोर्ट में सोमवार को झालावाड़ स्कूल हादसे को लेकर स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई थी। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को निर्देश दिया कि वह मुख्य सचिव और वित्त सचिव से मिलकर बजट में इस फंड का प्रावधान करवाएं। कोर्ट ने कहा- यहां पेड़ भी गवाही देने आते हैं सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल और निदेशक सीताराम जाट मौजूद रहे। शिक्षा सचिव ने कहा- हम इस मुद्दे पर चिंतित है। फिलहाल हम पेड़ों के नीचे और निजी भवनों में बच्चों की पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा- आप 7 महीने से क्या चिंता कर रहे हैं, वो दिख रहा है। सितंबर से आप यही जवाब देते आ रहे हैं। कई स्थानों पर तो पेड़ ही नहीं है, वहां आपने क्या व्यवस्था कर रखी है। कोर्ट ने कहा- आज समय पहले जैसा नहीं रहा है। वास्तविक स्थिति जानने के लिए इस तरह की तकनीक आ गई है कि यहां पेड़ भी गवाही देने आते हैं। शिक्षा सचिव बोले- केंद्र सरकार बजट नहीं दे रही शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल ने कहा- सभी सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों की मरम्मत और नई बिल्डिंग के निर्माण के लिए 20 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता है। केंद्र सरकार हमें बजट नहीं दे रही है। राज्य सरकार अपने स्तर पर सीएसआर फंड से बजट जुटा रही है। हमने एमपी-एमएलए फंड से भी 20 प्रतिशत राशि स्कूलों में देने का आदेश दिया है। इस पर कोर्ट ने कहा- फिर भी आप लोग फंड की व्यवस्था नहीं कर पाए। राजनेता सिर्फ ट्रांसफर पर ध्यान रखते हैं कोर्ट ने कहा- रातभर में सड़क तैयार हो जाती है, लेकिन आप बच्चों के लिए व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारियों से कहा- आप राजनेताओं की बात मत करो। राजनेता तो सिर्फ ट्रांसफरों पर ध्यान रखते हैं। ………… यह खबर भी पढ़ें... हाईकोर्ट ने कहा- अधिकारी आग से नहीं खेलें:झालावाड़ हादसे के बाद भी जर्जर भवन में चल रहे स्कूल, शिक्षा सचिव और निदेशक तलब झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद भी जर्जर भवनों में स्कूलों के संचालन को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक जैन की अदालत ने मामले में मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा- विभाग के अधिकारी आग से नहीं खेलें। कोर्ट ने कहा- हमने जर्जर भवन में क्लासेज संचालित करने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। इसके बाद भी बूंदी के भैंसखेड़ा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने की घटना हो गई। (पूरी खबर पढ़ें)
सूरजपुर में स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए 'कपी ध्वज मोटिवेशनल गाइडेंस कार्यक्रम' का आयोजन किया गया। जिसमें महिला-बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े शामिल हुईं। साथ ही कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और शिक्षक शामिल हुए। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को प्रतिस्पर्धा के इस दौर में सही दिशा प्रदान करना था। आयोजकों का मानना है कि सही मार्गदर्शन के अभाव में कई होनहार बच्चे पीछे रह जाते हैं, जबकि वे कड़ी मेहनत करते हैं। आयोजकों ने इस प्रकार के आयोजन को बच्चों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने और जीवन में नए आयाम स्थापित करने में सहायता करते हैं। शिक्षा के साथ-साथ ऐसे मार्गदर्शन कार्यक्रमों की भी आवश्यकता है, जो छात्रों को सही दिशा देकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। अभिभावकों से बच्चों को सही मार्गदर्शन देने की अपील कार्यक्रम के दौरान छात्रों में प्रख्यात शिक्षक नितिन विजय को अपने बीच पाकर उत्साह देखा गया। उन्होंने बताया कि सूरजपुर के बच्चों में पढ़ाई के प्रति उनकी अपेक्षा से अधिक रुझान देखने को मिला है। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में पढ़ाई को सरल बनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। आगामी परीक्षाओं पर जोर देते हुए नितिन विजय ने कहा कि परीक्षा केवल एक प्रतिस्पर्धा है, इसे छात्रों की काबिलियत से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर छात्र अपने आप में खास होता है और सही दिशा मिलने पर वे अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।
लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी ने सोमवार को पलवल जिले के लघु सचिवालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम के समर्थन में राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। पार्टी के कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से यह ज्ञापन दिया। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से देवीदयाल सैनी, राधेश्याम सैनी और प्रहलाद पांचाल सहित कई सदस्य मौजूद थे। शिक्षा के भेदभाव को रोकना उद्देश्य ज्ञापन में बताया गया कि यूजीसी ने 'समता के संवर्द्धन से संबंधित विनियम, 2026' नामक एक नया नियम लागू किया है। यह नियम भारत के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों पर लागू होता है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित और अन्य प्रकार के भेदभाव को रोकना है। सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों पर उठाए सवाल ज्ञापन में कहा गया कि पिछले वर्षों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय के छात्रों के साथ भेदभाव, उत्पीड़न और असमान अवसरों के मामलों में वृद्धि देखी गई है। इन घटनाओं ने न केवल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों पर भी सवाल उठाए। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, यूजीसी ने 2026 में यह नया कानून लागू किया, जिसे भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में समानता, समावेशन और भेदभाव मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पार्टी ने इस कदम का दृढ़ समर्थन किया। भ्रामक प्रचार कर रहे स्वर्ण समाज के लोग लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी ने ज्ञापन में कहा कि स्वर्ण समाज के लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं। यह कमेटी ओबीसी और एससी समाज के छात्रों के लिए नौकरी और पदोन्नति में भेदभाव रोकने के लिए बनाई जा रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि स्वर्ण समाज के लोग यह भ्रामक प्रचार कर रहे हैं कि इस कमेटी से ओबीसी समाज के लोग स्वर्ण समाज के लोगों को एससी एक्ट की तरह इस्तेमाल करेंगे। निजी शिकायतों का कोई प्रावधान नहीं ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में यूजीसी कमेटी में निजी शिकायतों का कोई प्रावधान नहीं है। पार्टी ने कहा कि स्वर्ण समाज के लोग इसी कारण यूजीसी कमेटी को रद्द करने का प्रयास कर रहे हैं। लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी ने इस यूजीसी कमेटी की सुरक्षा के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।
केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के प्रयास जारी हैं। इसी क्रम में बिहार के सरकारी शिक्षकों और विद्यालयों में भी इसका प्रभाव दिख रहा है। नई तकनीक आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए मोतिहारी के डायट (DIET) भवन में टीबीटी (TBT) के माध्यम से एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में मुख्य अतिथियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मेरा मोबाइल मेरी शिक्षा पद्धति को बच्चों के बीच प्रचारित करने पर जोर दिया। वक्ताओं ने बताया कि डिजिटल युग में मोबाइल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा का एक सशक्त माध्यम बन गया है। गूगल को 24x7 उपलब्ध एक ऐसे शिक्षक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो बच्चों को किसी भी विषय पर जानकारी और ज्ञान प्रदान कर सकता है। नई तकनीक से भी परिचित होंगे बच्चे मुख्य अतिथियों ने कहा कि सरकारी विद्यालयों के बच्चे भी मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन वीडियो, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, शैक्षणिक ऐप्स और डिजिटल कंटेंट का उपयोग कर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इससे बच्चों की समझ बढ़ने के साथ-साथ वे नई तकनीक से भी परिचित होंगे। महिला शिक्षिकाओं ने TBT के तहत सुंदर गुलदस्ते बनाए कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने हस्तकला का भी प्रदर्शन किया। मेरा मोबाइल मेरी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से महिला शिक्षिकाओं ने टीबीटी के तहत सुंदर गुलदस्ते बनाए। इन गुलदस्तों को सम्मान व्यक्त करने के लिए डिजाइन किया गया था, जिसकी सभी ने सराहना की। सेमिनार में उपस्थित शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ रही है। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे सेमिनार भविष्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पाली शहर के निकट खेतावास रोड स्थित सिद्ध शक्ति पीठ शनिधाम (गोल नीमड़ा शनि तीर्थ क्षेत्र) में रविवार को नट, भाट व वादी समाज की ओर से कार्यक्रम हुआ। जिसमें शनिधाम के स्वामी निज स्वरूपानंद पुरी (दाती महाराज) के सानिध्य में करीब पांच हजार लोगों ने नशामुक्ति का सामूहिक संकल्प लिया।इस मौके दाती महाराज ने कहा कि नशा नाश की जड़ है, जो समाज, परिवार और विशेषकर युवाओं के भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रहा है। आज का युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है। नशे के कारण न केवल समाज की प्रगति बाधित हो रही है। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण में नारी शक्ति की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जब तक महिलाएं इस अभियान से नहीं जुड़ेंगी, तब तक समाज को नशामुक्त बनाना संभव नहीं है। नारी शक्ति की जागरूकता ही समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है।कार्यक्रम के दौरान समाज के महिला-पुरुषों व युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। समाज के युवाओं ने न केवल नशामुक्ति का प्रण लिया, बल्कि शिक्षा के व्यापक प्रचार-प्रसार, स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा समाज में व्याप्त अन्य कुरीतियों को समाप्त करने का भी संकल्प किया। रात में यहां भजन संध्या का आयोजन भी हुआ। दाती महाराज ने पाली व जोधपुर में समाज की प्रतिभाओं के लिए छात्रावास निर्माण में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में नटराज भगवान मंदिर निर्माण विकास समिति पुष्कर के अध्यक्ष कैलाशचंद राजावत, जोधपुर छात्रावास निर्माण समिति अध्यक्ष सुगनाराम ओमप्रकाश लवेरा, मदनलाल पेमावत, नृसिंह भोलेचा, बद्रीलाल माणेचा, सुखदेव माणेचा, दाती सेवा संस्थान के भेराराम, रमेश लानेरा, नेमाराम पेमावत, हनुमानराम पेमावत, मांगीलाल सहित कई जने मौजूद रहे।
शिक्षा, विज्ञान और रिसर्च में बड़ा निवेश : गिरिराज सिंह
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आम बजट पर कहा कि भविष्य की पीढ़ी के लिए शिक्षा, विज्ञान और अनुसंधान में बड़े निवेश का संदेश लेकर आया है
निजी विद्यालयों की मान्यता के लिए जिला शिक्षा कार्यालय भ्रम उत्पन्न कर रहा है : एसएन पाठक
गढ़वा | निजी विद्यालयों की मान्यता के लिए जिला शिक्षा कार्यालय भ्रम उत्पन्न कर रहा है। यह पूरी तरह नीतिगत मामला है। उसपर सचिव स्तर पर, कैबिनेट में या न्यायालय में निर्णय होता है। जिला शिक्षा कार्यालय को उसका अनुपालन करना होता है। उसके विपरीत जिला शिक्षा कार्यालय प्रतिकूल आचरण कर रहा है। उक्त बातें प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव एसएन पाठक ने एक प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि पूरी स्थिति में निजी विद्यालय संचालकों में भ्रम और आक्रोश उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि आरटीई कानून बनने के बाद और उसके उपरांत झारखंड सरकार की मान्यता के लिए नियमावली 2011 में बनी। इसके बाद विद्यालयों ने मान्यता के लिए आवेदन किया था। इस आलोक में कुछ विद्यालयों को मान्यता दी गई। शेष आज भी इंतजार कर रहे हैं। निरीक्षण के बाद कुछ लोगों की फाइल निदेशालय में पड़ी हुई है। करीब 16 वर्षों से विद्यालय मान्यता के इंतजार में हैं। इसी बीच पूर्ववर्ती रघुबर दास की सरकार ने 2019 में नई नियमावली लाई। उसमें कुछ प्रावधान कठिन थे। उसके खिलाफ उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। उस अधियाचना में राज्य सरकार के सचिव ने शपथ देकर कहा था कि 2019 का नियम पूर्व के विद्यालयों पर लागू नहीं होगा। यह 2019 के बाद के सरकारी और निजी सभी विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा। अब इस संबंध में दो मई को आए फैसले के बाद कुछ संगठन रिव्यू पिटीशन और कुछ लोग उच्चतम न्यायालय में भी गए। उच्चतम न्यायालय ने संदर्भ में झारखंड सरकार को नोटिस भी निर्गत किया है। वहीं रिव्यू पिटीशन को सुनते हुए झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। जबतक निर्णय नहीं आता तब तक 2019 के पहले के विद्यालयों पर उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक रहेगी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के स्टे के ऑर्डर के बाद भी जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय से जिले के सभी गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को एक निजी पत्र 25 नवंबर को सामूहिक पटल पर भेजा गया। उसमें मान्यता लेने का निर्देश दिया गया। मान्यता नहीं लेने पर बंद करने की धमकी थी। उसके बाद से विद्यालय संचालक ऊहापोह में हैं कि वह उच्च न्यायालय की सुनें या शिक्षा कार्यालय को। विदित हो कि टेंडर हार्ट के न्यायकर्ता ने उच्च न्यायालय में मान्यता नहीं देने के कारण रिट याचिका दाखिल किया है। उसमें उच्च न्यायालय ने सरकार को शपथ पत्र देने को कहा गया है।
श्री गुरु रविदास जी की शिक्षाओं का संदेश लेकर निकला नगर कीर्तन
श्री गुरु रविदास सामाजिक सुधार सभा की ओर से मुस्तफाबाद में श्री गुरु रविदास जी महाराज का नगर कीर्तन निकाला गया। यह नगर कीर्तन मुस्तफाबाद के विभिन्न बाजारों व इलाकों से होकर निकला। नगर कीर्तन में क्षेत्र की समस्त संगत ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और फूलों की वर्षा से नगर कीर्तन का स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्य सेवादार बाबा काशी राम उपस्थित रहे। निशान साहिब की सेवा सुखविंदर सिंह द्वारा निभाई गई। कार्यक्रम में प्रधान सिम्पल, चेयरमैन जोगिंदर पाल, सेक्रेटरी हंस राज, जगदीश सिंह, हरजीत लाल, नेका, करमजीत सिंह रिंटू, प्रधान विक्की, अमरजीत सिंह, विक्की, मनी, सूरज कुमार, रिंकू, रोबल, जगप्रीत सिंह, पवित्र, मोनू, पिंकी, पवन, सुषमा, रेशमा सहित बड़ी संख्या में संगत मौजूद रही।
शहर की गनी कॉलोनी स्थित नागौरी हाउस में 'ऑल इंडिया जमीतुल कुरैश' की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में समाज सुधार, फिजूलखर्ची पर लगाम और शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण पर विशेष मंथन किया गया। इस दौरान समाज की प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें मंच प्रदान करने के लिए आगामी प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम की रणनीति साझा की गई। मेहनत ही सफलता की एकमात्र कुंजी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और प्रदेश अध्यक्ष नईमुद्दीन कुरैशी ने समाज के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता का कोई विकल्प नहीं है, यह केवल कड़ी मेहनत से ही हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर में कर्नल सोफिया कुरैशी की उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि हमारी बेटियां किसी भी ऊंचे मुकाम को छूने में सक्षम हैं। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी सिराजुद्दीन कुरैशी के संदेश को दोहराते हुए अपील की कि समाज शादी-ब्याह के दिखावे और बेतहाशा खर्च को त्याग कर अपने बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दिलाने पर ध्यान केंद्रित करे। बिरला ऑडिटोरियम जयपुर में 15 फरवरी को जुटेगा प्रदेश भर का कुरैशी समाज जिला अध्यक्ष उमर कुरैशी ने आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 15 फरवरी 2026 को जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित होगा। इस समारोह में न केवल प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा, बल्कि समाज के उत्थान के लिए काम करने वाली संस्थाओं का भी सम्मान होगा। बैठक में इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर जिम्मेदारियां तय की गईं। आपसी मतभेद छोड़ समाज हित को दें प्राथमिकता बैठक में समाज के विकास के लिए ठोस सुझाव भी सामने आए नवलगढ़ के पार्षद खालिक लंगा ने सुझाव दिया कि समाज के उत्थान के लिए अब एक स्पष्ट रोड मैप तैयार कर संगठित तरीके से काम करने का समय आ गया है। अल कुरैश के सचिव इमरान बडगूजर ने कहा कि समाज के हित में काम करते समय व्यक्तिगत और आपसी राजनीति को पूरी तरह त्यागना होगा, तभी हम प्रगति कर पाएंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ हाजी सफी नागौरी द्वारा कुरान-ए-तिलावत से हुआ। इसके पश्चात उपस्थित समाजबंधुओं ने अतिथियों का शॉल, साफा पहनाकर और माल्यार्पण कर गर्मजोशी से स्वागत किया। मंच का सफल संचालन मास्टर मजीद कुरैशी द्वारा किया गया। जिले भर से आए प्रतिनिधि बैठक में झुंझुनूं जिले भर प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें मंडावा, बिसाऊ, चिड़ावा, नवलगढ़, मंड्रेला, सूरजगढ़, पपूरणा, केड, सुल्ताना, धनूरी, डूंडलोद और मलसीसर के सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि फसीहुद्दीन कुरैशी, सचिव हाजी शफी मोहम्मद नागौरी, हाजी फारुक कुरैशी, गफ्फार पपुरना, ठेकेदार नसरुद्दीन, मास्टर अब्दुल मजीद, वाइस चेयरमैन नवाब खत्री, डॉ. जब्बार कुरैशी, एडवोकेट नवाब खत्री, यूसुफ तंवर, आरिफ कुरैशी, शोएब गौरी, और रिजवान बेहलीम सहित अन्य गणमान्य नागरिक।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक बजट बताया है। उन्होंने कहा- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देता है। गरीब, वंचित व शोषित वर्गों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। इस बजट से समाज के हर वर्ग को लाभ मिलेगा। मंत्री मदन दिलावर ने बताया- बजट में महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया गया है। प्रत्येक जिले में गर्ल्स हॉस्टल की स्थापना, तीन नए आयुर्वेदिक एम्स, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए श्री मार्ट और लखपति दीदी योजना के विस्तार जैसी घोषणाएं महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देंगी। साथ ही खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से खेल क्षेत्र में रोजगार, स्किलिंग और नौकरी के अवसर बढ़ेंगे। मोटर यान दुर्घटना मुआवजे को कर मुक्त किया जाना भी आमजन के लिए राहतभरा कदम है। कोटा में 22 से ज्यादा जगह एलईडी लगाकर बजट देखा गया वहीं,, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर और विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने वाला है। उन्होंने बताया- कोटा शहर में 22 से अधिक स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाकर आमजन ने केंद्रीय बजट का लाइव प्रसारण देखा। भाजपा जिला कार्यालय जीएमए प्लाजा के बाहर बड़ी स्क्रीन पर कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने चाय-कचोरी के साथ बजट सुना और मिठाई बांटकर खुशी जताई। राकेश जैन ने कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। 7 प्रतिशत ग्रोथ रेट इसका प्रमाण है। बजट में एमएसएमई, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, हाई-स्पीड रेल, आयुष संस्थान, मेडिकल टूरिज्म, खादी और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के प्रस्ताव देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
रीवा में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रीवा दौरे के दौरान UGC को लेकर माहौल गरमा गया। बजट 2026 पर बयान देने पहुंचे पटवारी को सवर्ण समाज से जुड़े छात्रों ने घेर लिया और यूजीसी से जुड़े नए नियमों पर कांग्रेस का स्टैंड जानने की मांग की। छात्र इस मुद्दे पर जवाब लेने को लेकर अड़े रहे, जिससे कुछ देर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। छात्रों के सवालों पर जीतू पटवारी ने कहा कि यूजीसी से जुड़े फैसलों पर सवाल केंद्र सरकार और राज्य सरकार से पूछे जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों की सोच में किसी भी तरह का विभाजन लाना किसी भी देश के हित में नहीं है। मैं कोई गोल-मोल बात नहीं करता। मैं इधर उधर की बात भी नहीं करता। पटवारी के इस बयान के बाद प्रदर्शनकारी छात्र संतुष्ट हुए और मामला शांत हुआ। UGC के विरोध में रीवा बंद, सड़कों पर उतरे छात्रUGC के खिलाफ विरोध यहीं नहीं थमा। मंगलवार को छात्रों और सामाजिक संगठनों ने रीवा बंद का आव्हान किया। बंद के दौरान बाजारों की दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि UGC के जरिए शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़े स्तर पर लड़ा जाएगा। बजट 2026 में मध्य प्रदेश को कुछ नहीं मिला: पटवारीइस दौरान जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार के बजट 2026 पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस बजट में मध्य प्रदेश के हिस्से कुछ भी नहीं आया है। पटवारी ने कहा 12 साल पहले रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर जो बड़े वादे किए गए थे, आज हालात उनसे भी बदतर हैं।
इस बजट में सरकार ने डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सामाजिक कल्याण को केंद्र में रखते हुए कई बड़े एलान किए। वित्तीय अनुशासन के साथ विकास को गति देने की रणनीति स्पष्ट दिखी।
नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया
भास्कर न्यूज| लुधियाना देवकी देवी जैन मेमोरियल कॉलेज फॉर वुमन किदवई नगर के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की तरफ से विकसित भारत@2047: अवसर और चुनौतियां विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी को पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के डीन कॉलेज विकास परिषद की तरफ से प्रायोजित किया गया। कॉलेज प्रबंधक समिति के अध्यक्ष नंद कुमार जैन मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने युवाओं से भ्रष्टाचार और मिलावट के विरुद्ध संघर्ष का आह्वान करते हुए विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को साकार करने पर बल दिया। संगोष्ठी में कुल 135 शिक्षाविदों, शोधार्थियों और स्टूडेंट्स ने भाग लिया। लगभग 40 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें छात्र कल्याण, समावेशी शिक्षा, नवाचार तंत्र, सतत नीति निर्माण और मानव संसाधन विकास जैसे विषय शामिल रहे। उद्घाटन सत्र दीप प्रज्ज्वलन और नमोकार मंत्र के उच्चारण से आरंभ हुआ। प्राचार्या डॉ. सरिता बहल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विकसित भारत के निर्माण में शैक्षणिक संवाद की भूमिका पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्तव्य डॉ. राकेश शारदा, प्रधान वैज्ञानिक (प्लास्टिकल्चर), पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने युवाओं को विकसित भारत@2047 का सबसे मजबूत स्तंभ बताते हुए डिजिटल इंडिया, पीएम गति शक्ति और नई शिक्षा नीति जैसी पहलों का उल्लेख किया तथा नवाचार और संस्थागत सहयोग पर बल दिया। तकनीकी सत्र प्रथम में डॉ. नीना सेठ पजनी प्राचार्या, गोबिंदगढ़ पब्लिक कॉलेज, खन्ना और डॉ. एसपी शर्मा, प्रोफेसर मुख्य अर्थशास्त्री एनडीआईएम एनईओ रिसर्च सेंटर ने अपने विचार रखे। डॉ. पजनी ने उच्च शिक्षा सुधार, नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया। डॉ. एसपी शर्मा ने विकसित भारत@2047 के संदर्भ में भारत की सुधार-आधारित और नवाचार-प्रेरित आर्थिक वृद्धि को रेखांकित किया। तकनीकी सत्र दूसरे में डॉ. मोहम्मद सलीम, सेवानिवृत्त प्राचार्य, कमला लोहटिया सनातन धर्म कॉलेज, लुधियाना ने विकसित भारत के लिए शिक्षा, कौशल और समावेशी विकास की आवश्यकता पर बल दिया और युवाओं को तकनीक आधारित नवाचार के लिए प्रेरित किया। शोध-पत्र प्रस्तुतियों के उपरांत संगीता सिन्हा को सर्वश्रेष्ठ ऑनलाइन शोध-पत्र प्रस्तुतकर्ता तथा डॉ. प्राची बिष्ट एवं डॉ. रश्मी उपरति को सर्वश्रेष्ठ ऑफलाइन शोध-पत्र प्रस्तुतकर्ता घोषित किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अंतर ज्योति घई, एसोसिएट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रबंधक समिति ने आईक्यूएसी समन्वयकों डॉ. लोतिका गुप्ता (विभागाध्यक्ष, गृह विज्ञान) और डॉ. रोबिना (विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र) तथा उनकी टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
जबलपुर में मध्यप्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एमपीसीएसटी) और सेंट अलाॅयसियस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने एआई के वर्तमान और भविष्य के उपयोगों पर व्याख्यान दिए, जबकि विद्यार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। महाविद्यालय की प्रिंसिपल डॉ. रेनू पांडे ने कहा कि एआई भविष्य में रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में व्यापक बदलाव लाएगी। उन्होंने एआई के पांच फायदे और पांच नुकसान भी बताए। डॉ. पांडे ने बताया कि रोजगार के क्षेत्र में एआई कुछ पारंपरिक नौकरियों को कम कर सकता है, लेकिन साथ ही डेटा एनालिस्ट, एआई इंजीनियर, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और टेक्नोलॉजी मैनेजर जैसी नई संभावनाएं भी पैदा करेगा। ऑटोमेशन के कारण कर्मचारियों को नए कौशल सीखने की आवश्यकता होगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई बीमारी की प्रारंभिक पहचान, सटीक निदान, रोबोटिक सर्जरी और मरीजों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे इलाज अधिक तेज, सटीक और किफायती होगा, साथ ही टेलीमेडिसिन के माध्यम से दूर-दराज़ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी। शिक्षा के क्षेत्र में एआई व्यक्तिगत सीखने को बढ़ावा देगा। छात्रों की क्षमता के अनुसार पाठ्यक्रम, ऑनलाइन ट्यूटर, वर्चुअल क्लासरूम और स्मार्ट मूल्यांकन प्रणाली से शिक्षा अधिक प्रभावी बनेगी। कांफ्रेंस में सेंट अलॉयसियस कॉलेज सदर की छात्रा शिवांगी कुररिया और हर्षा जाटव ने मधुमेह (डायबिटीज) के उपचार में एआई के उपयोग पर एक शोध पत्र प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ. राकेश बाजपेई (रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर), डॉ. जे. बेन एंटॉस रोज (प्रिंसिपल, सेंट अलॉयसियस कॉलेज सदर), डायरेक्टर फादर थंकचन जोस सैट, डॉ. रश्मि जायसवाल, डॉ. आराधना धनराज, डॉ. हरकिरात कौर सहित अन्य गणमान्य अतिथि और प्राध्यापक उपस्थित रहे।
शेखपुरा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नौवीं बार लोकसभा में बजट पेश करेंगी। इस बजट को लेकर जिले में लोगों के साथ-साथ जमुई सांसद अरुण कुमार भारती ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आगामी केंद्रीय बजट में बिहार को एक बड़ा सौगात मिलेगा। सांसद भारती ने शनिवार को स्थानीय पत्रकारों से बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत की योजना तैयार की जा रही है, जिसमें बिहार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री कृषि, शिक्षा और आधारभूत संरचना के निर्माण सहित अन्य क्षेत्रों में बिहार को प्राथमिकता के आधार पर नई योजनाएं लाने की घोषणा करेंगी। नीट केस CBI को सौंपने के सरकार के कदम की सराहना की इसी बातचीत के दौरान, सांसद अरुण कुमार भारती ने पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की हत्या के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के सरकार के कदम की सराहना की। वह आकांक्षी जिला योजना के तहत संपूर्णता अभियान के द्वितीय चरण का विधिवत शुभारंभ करने शेखपुरा आए थे। 5 मानकों पर पहले भी बहुत अच्छा काम हुआ उन्होंने बताया कि सरकार ने जनता की भावनाओं को समझते हुए और उनमें विश्वास पैदा करने के लिए इस मामले की विस्तृत जांच का जिम्मा CBI को देने का निर्णय लिया है। सांसद भारती ने इस कदम को सराहनीय बताया। सांसद ने आगे कहा कि सरकार लगातार जनता के हित में बड़े कदम उठा रही है, जिसका उद्देश्य जनता में विश्वास पैदा करना और उनके जीवन को हर प्रकार से आसान बनाना है। उन्होंने जिले में आकांक्षी जिला योजना के तहत किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की और बताया कि इस योजना के तहत 5 मानकों पर पहले भी बहुत अच्छा काम हुआ है।
बगड़ नगर पालिका में आयोजित समारोह में क्षेत्र के विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकेश दाधीच बतौर अतिथि शामिल हुए। नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद सिंह राठौड़ ने सभी अतिथियों का साफा पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया। शिक्षा मंत्री के निशाने पर डोटासरा: “जेल तो भ्रष्टाचारी ही जाएंगे” कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर अपने आक्रामक अंदाज में नजर आए। पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि मिड-डे मील योजना में करीब 2 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि जांच की आंच उन मगरमच्छों तक जरूर पहुंचेगी जिन्होंने जनता की कमाई पर डाका डाला है। डोटासरा के 'जेल में मिलने' वाले बयान पर पलटवार करते हुए दिलावर ने कहा, मैं उनका स्वागत करता हूँ। अगर मैं जेल गया भी तो सुपरविजन (निरीक्षण) के लिए जाऊँगा, क्योंकि मैंने न तो पेपर लीक में पैसे खाए हैं और न ही तबादलों में। डोटासरा चिंता न करें, भ्रष्टाचारियों को पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया गया है। कांग्रेस सरकार पर प्रहार: उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार को 'गूंगी और बहरी' बताते हुए कहा कि उनके समय शिक्षकों ने खुद मुख्यमंत्री के सामने तबादलों में पैसे लेने की बात स्वीकार की थी। शिक्षा व्यवस्था में सुधार: 600 करोड़ का बजट और नई भर्तियाँ प्रदेश की जर्जर स्कूलों की स्थिति पर बोलते हुए शिक्षा मंत्री ने अपनी सरकार का रोडमैप साझा किया। स्कूलों की मरम्मत और नए भवनों के लिए राज्य सरकार 600 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 1000 करोड़ रुपये भी जल्द मिलने वाले हैं, जिससे चरणबद्ध तरीके से स्कूलों का कायाकल्प होगा। शिक्षक भर्ती: दिलावर ने बताया कि कांग्रेस ने बिना पद सृजित किए स्कूलों पर अंग्रेजी माध्यम के बोर्ड टांग दिए थे। हमारी सरकार ने 20 हजार पद भर दिए हैं और शेष रिक्तियों के लिए चयन बोर्ड को फाइलें भेज दी गई हैं। संगठन की मजबूती पर प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का जोर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने अपने झुंझुनूं दौरे के दौरान कार्यकर्ताओं में जोश भरा। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अंता से प्रत्याशी रहे मोरपाल सुमन के वायरल पत्र पर भी प्रतिक्रिया दी। हार की समीक्षा एक सतत प्रक्रिया है। कौन क्या कह रहा है और किन कारणों से चुनाव प्रभावित हुए, इसकी गहन विवेचना संगठन स्तर पर की जा रही है। प्रत्येक कार्यकर्ता की बात सुनी जाएगी और निष्पक्ष विश्लेषण के आधार पर भविष्य की रणनीति तैयार होगी। कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत जिले के विभिन्न स्थानों पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, भाजपा कार्यकर्ता और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
बीकानेर की बेटी शिक्षा सहारण ने जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। 15 वर्षीय शिक्षा सहारण का चयन 10 मीटर एयर पिस्टल सब-यूथ वूमन कैटेगरी में भारतीय शूटिंग टीम में हुआ है। वर्तमान में वह 12वीं कक्षा की छात्रा हैं। शिक्षा फरवरी माह में नई दिल्ली में आयोजित एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में वे देश के लिए पदक जीतने के इरादे से निशाने साधेंगी। महाराजा करणी सिंह शूटिंग रेंज में कर रहीं कड़ी तैयारी एशियन चैंपियनशिप को लेकर शिक्षा इन दिनों तुगलकाबाद स्थित महाराजा करणी सिंह शूटिंग रेंज में भारतीय शूटिंग दल के साथ कड़ी तैयारियों में जुटी हुई हैं। शिक्षा का कहना है कि वे देश के लिए मेडल जीतकर उसे हर उस बेटी को समर्पित करना चाहती हैं, जिसे आज भी बेटों से कम समझा जाता है। नेशनल और SGFI गेम्स में दिखा चुकी हैं दम शिक्षा सहारण इससे पहले भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।पिछली नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 1 गोल्ड, 2 ब्रॉन्ज सहित कुल 3 पदक अपने नाम किए थे। वहीं SGFI गेम्स, भोपाल में भी शिक्षा ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर बीकानेर का मान बढ़ाया। परिवार और कोच को किया गौरवान्वित शिक्षा के पिता मनोज सहारण बताते हैं कि इस उपलब्धि से दादा-दादी, माता-पिता, परिवारजनों और उनके शूटिंग कोच रघुवीर सिंह में खुशी का माहौल है। सभी ने शिक्षा की मेहनत और लगन की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
भंडारों में गायत्री परिवार ने चलाया शिक्षा व नशा उन्मूलन अभियान
भास्कर न्यूज |गिरिडीह जमुआ प्रखंड अंतर्गत भंडारों गांव में अखिल विश्व गायत्री परिवार के बैनर तले शिक्षा एवं नशा उन्मूलन आंदोलन के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व गायत्री परिवार के प्रखंड समन्वयक बलदेव प्रसाद ने किया।स्कूली बच्चों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों की विस्तार से जानकारी दी गई तथा उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया।बलदेव प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि नशा युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। बल्कि पढ़ाई, परिवार और समाज पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने बच्चों को समझाया कि नशे की लत व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति को कमजोर कर देती है और जीवन के लक्ष्य से भटका देती है। इसलिए विद्यार्थियों को शुरू से ही नशे से दूरी बनाकर रखनी चाहिए और अच्छे संस्कारों को अपनाना चाहिए।कार्यक्रम के दौरान बच्चों को सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करते हुए गायत्री मंत्र के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। बलदेव प्रसाद ने बताया कि गायत्री मंत्र का नियमित जप मन को शुद्ध करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मबल को मजबूत करता है।
जिपं सदस्य ने बच्चों को शिक्षा व विकास का महत्व बताया
पामगढ़ | भारतीय ज्ञान गंगा पूर्व माध्यमिक शाला हिर्री में वार्षिक उत्सव और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य संतोषी मनोज रात्रे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचे और बच्चों को शिक्षा ग्रहण कर अपने भविष्य को उज्जवल बनाने की प्रेरणा मिले। उन्होंने यह भी कहा कि जो विद्यार्थी विद्यालय नहीं आ रहे, उन्हें अधिक से अधिक संख्या में विद्यालय में प्रवेश दिलाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार वितरित किए गए। उन्होंने साथ ही स्कूल के शौचालय, भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं को पूर्ण करने का आश्वासन दिया। समारोह की अध्यक्षता उप सरपंच प्रभा देवी साहू ने की। कार्यक्रम में स्कूल संचालक विनोद खरे, रमेश खरे, मनोज ज्योति, शिक्षक-शिक्षिकाएं नेतराम खरे, नेहा लहरे, सीमा सुनहरे, निशा यादव, हेमा यादव, प्लाज्मा और सोनम खरे, माया भट्ट के साथ छात्र-छात्राओं, पालकों और ग्रामवासियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के जनक शर्मा (बाबूजी) को दी श्रद्धांजलि
उदयपुर | राजस्थान बाल कल्याण समिति झाड़ोल मुख्यालय पर संस्था के संस्थापक और आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के जनक पं. जीवतराम शर्मा (बाबूजी) की 10वीं पुण्यतिथि पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों, संत-महंतों, संस्था पदाधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने बाबूजी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित की। संस्था के मुख्य प्रबंध निदेशक डॉ. गिरिजाशंकर शर्मा ने इस अवसर पर बाबूजी के जीवन और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला और उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लिया। इस श्रद्धांजलि सभा में संस्था के संयुक्त निदेशक डॉ. एसबी सिंह, जनरल मैनेजर हेमकर शर्मा आदि मौजूद रहे।
पूर्वी राजस्थान के दस जिलों के क्षत्रियों का खेड़लीमें कल महासमागम, शिक्षा-रोजगार पर होगा मंथन
सामाजिक एकता मंच के तत्वावधान में पहली बार खेड़ली में रविवार को पूर्वी राजस्थान के दस जिलों के क्षत्रिय समाज का पूर्वी राजस्थान क्षत्रिय महासमागम का आयोजन होगा। महासमागम में प्रदेशभर से हजारों की संख्या में क्षत्रिय समाज के लोग खेड़ली स्थित कृषि उपज मंडी मैदान पहुंचेंगे। समाजबंधुओं के स्वागत के लिए हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाएगी। पिछले एक माह से सामाजिक एकता मंच के ध्वजवाहकों की ओर से गांव-गांव जाकर समाजबंधुओं को पीले चावल वितरित कर जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। मंच के मुख्य ध्वजवाहक शक्ति सिंह बांदीकुई ने बताया कि जनसंपर्क के दौरान समाज ने सामाजिक एकता के बल पर लोकतंत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति और सामूहिक ताकत प्रदर्शित करने का संकल्प लिया। इस आयोजन में पूर्वी राजस्थान से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार और मांगें रखी जाएगी।
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त गोयल ने नर्सिंग से जुड़े मुद्दों पर ली बैठक
राजकीय नर्सिंग कॉलेज में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने नर्सिंग शिक्षा एवं सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर बैठक ली। इस दौरान प्राचार्य एवं समस्त नर्सिंग फैकल्टी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य नर्सिंग शिक्षकों एवं नर्सिंग पेशेवरों की समस्याओं को समझना तथा उनके समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना था। बैठक में बजट आवंटन, छात्रावास एवं भवन संबंधी समस्याएं, नर्सिंग पेशेवरों के उन्नयन हेतु सीएनई/सेमिनार तथा शैक्षणिक संसाधनों के सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। राजकीय नर्सिंग कॉलेज, जयपुर के प्राचार्य डॉ. जोगेन्द्र शर्मा ने बताया कि आयुक्त ने सभी नर्सिंग शिक्षकों की समस्याओं को सुनकर शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। इस अवसर पर टीएनएआई राजस्थान राज्य शाखा की ओर से पत्र के माध्यम से यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया कि राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमेस) के अंतर्गत संचालित नर्सिंग कॉलेजों में भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) के नियमानुसार नियमित भर्ती की जाए। सभी नर्सिंग कॉलेजों में सिमुलेशन लैब की स्थापना की जाए। नर्सिंग पेशेवरों को अन्य राज्यों एवं एम्स की तर्ज पर सेमिनार में भाग लेने हेतु आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं।
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
विश्व शिक्षा दिवसः 24 जनवरी 2026 ? शिक्षा रोजगार का टिकट नहीं, जीवन का दर्शन बने
विश्व शिक्षा दिवस कोरा उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है, यह सोचने का क्षण कि शिक्षा क्या है, किसके लिए है और किस दिशा में समाज को ले जा रही है। भारत इस संदर्भ में केवल एक देश नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है, जिसने शिक्षा को कभी भी मात्र रोजगार या सूचना का ... Read more
राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड के नाम पर साइबर ठगी से रहें सावधान
Madhya Pradesh News : प्रदेश में राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड के परीक्षार्थियों के अभिभावकों से साइबर ठगों द्वारा ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। ठगों द्वारा स्वयं को बोर्ड से संबंधित बताकर परीक्षार्थियों को पास कराने के नाम पर धनराशि मांगी जा ...
10th board exams 2026: 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें?
10th board exams 2026: 10वीं बोर्ड की परीक्षा आपके शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। सही रणनीति और अनुशासन के साथ आप न केवल अच्छे अंक ला सकते हैं, बल्कि अपना आत्मविश्वास भी बढ़ा सकते हैं। यहीं से तय होता है छात्रों के करियर चुनने का रास्ता और ...
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

