सोनीपत में ग्रीवेंस कमेटी की मासिक बैठक का आयोजन शुक्रवार को किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री एवं कमेटी के अध्यक्ष महिपाल ढांडा करेंगे। इस दौरान वे आमजन की विभिन्न प्रकार की समस्याओं को मौके पर सुनेंगे और उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। सुबह 10:30 बजे होगी बैठक उपायुक्त नेहा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 26 जून, शुक्रवार को ग्रीवेंस कमेटी की मासिक बैठक सुबह करीब 10:30 बजे मिनी सचिवालय की तीसरी मंजिल पर आयोजित होगी। बैठक में हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री एवं कमेटी के अध्यक्ष महिपाल ढांडा मौजूद रहेंगे। आमजन की समस्याएं सुनेंगे मंत्री बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा आमजन की अलग-अलग प्रकार की समस्याओं को मौके पर सुनेंगे। प्राप्त शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे, ताकि लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। सभी विभागों के अधिकारी रहेंगे मौजूद ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे। बैठक में प्रस्तुत होने वाली शिकायतों पर संबंधित विभागों की ओर से रिपोर्ट पेश की जाएगी और मौके पर ही समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बिल जमा होने के बाद भी काट दी बिजली शिक्षा विभाग का कामकाज दिनभर ठप
भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा शहर की बिजली व्यवस्था संभाल रहीं कंपनी सिक्योर की कथित लापरवाही के चलते गुरुवार को जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) प्रारंभिक कार्यालय का कामकाज दिनभर ठप रहा। हैरत की बात यह रही कि विभाग की ओर से बिजली बिल समय पर जमा कराने के बावजूद कनेक्शन काट दिया। जिससे आरटीई पुनर्भरण सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए। जानकारी के अनुसार सुबह करीब 10.30 बजे जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) प्रारंभिक कार्यालय की बिजली अचानक बंद हो गई। शुरुआत में कर्मचारियों ने इसे सामान्य कटौती समझा, लेकिन काफी देर तक आपूर्ति बहाल नहीं होने पर सिक्योर कार्यालय से संपर्क किया गया। वहां से बताया गया कि बिजली बिल जमा नहीं होने के कारण कनेक्शन काटा गया है। इस पर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने 23 जून को 18,967 रुपए का बिजली बिल जमा कराने की जानकारी देते हुए भुगतान रसीद उपलब्ध कराई। इसके बाद सिक्योर के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और कार्यालय की विद्युत लाइन की जांच की, जहां सब कुछ सामान्य मिला। विभाग की ओर से बिल राशि जमा कराने के बावजूद कंपनी स्तर पर उसका टोकन जनरेट ही नहीं किया था। महत्वपूर्ण काम प्रभावित बिजली बंद रहने से कार्यालय में पूरे दिन कोई कार्य नहीं हो सका। वर्तमान में निजी विद्यालयों के आरटीई पुनर्भरण की प्रक्रिया चल रही है। वहीं तृतीय श्रेणी शिक्षकों की वरिष्ठता निर्धारण से संबंधित कार्य भी जारी है। इसके लिए विभिन्न ब्लॉकों से बाबुओं और कार्मिकों को डीईओ कार्यालय बुलाया था, लेकिन बिजली नहीं होने से सभी कार्य प्रभावित रहे। कर्मियों का कहना है कि यदि टोकन जनरेट होने में देरी हुई तो बिजली बहाली में सोमवार तक का समय लग सकता है। ^सिक्योर के लेवल पर लापरवाही नहीं रहीं। डीईओ कार्यालय में प्री पेड मीटर लगा है। उसका बिल ट्रेजरी के माध्यम से जमा हुआ है। इसका हमको पता नहीं चलता। ट्रेजरी से जमा बिल को के-नंबर से जोड़ा। इसके बाद बिजली निगम ने टोकन नंबर जनरेट किया। शाम 6 बजे डीईओ कार्यालय को टोकन दे दिया गया। -सुनीत माथुर, सिक्योर हेड भीलवाड़ा
शारीरिक शिक्षक भर्ती 2026 : पदों में बढ़ोतरी के लिए सीएम-शिक्षा मंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन
उदयपुर| राजस्थान शारीरिक शिक्षक संघ और बेरोजगारों ने जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल को ज्ञापन देकर शारीरिक शिक्षक भर्ती 2026 में पदों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 5000 करने और परीक्षा जल्द कराने की मांग की। प्रदेश महामंत्री डॉ. भेरू सिंह राठौड़ व जिलाध्यक्ष गोवर्धन सिंह झाला के नेतृत्व में 150 से अधिक अभ्यर्थियों ने खाली पदों को भरने की आवाज उठाई ताकि युवाओं का असमंजस दूर हो सके।
डिजाइन शिक्षा का नया अध्याय... राज्यपाल कटारिया ने की वीसीडी कॉलेज की शुरुआत
उदयपुर } वीसीडी कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग में आयोजित समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासन के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने भारतीय फैशन एवं आंतरिक सज्जा संस्थान, भोपाल रचना एवं डिज़ाइन विद्यालय तथा वीसीडी कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग के मध्य शैक्षणिक सहयोग का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि कौशल आधारित एवं व्यवहारिक शिक्षा भी प्रदान की जानी चाहिए, जिससे उनकी रोजगार क्षमता बढ़ सके। महामहिम के महाविद्यालय पहुंचने पर पारंपरिक राजस्थानी रीति-रिवाजों के अनुसार ढोल-नगाड़ों, तिलक, पुष्पगुच्छ एवं साफा पहनाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुआ। महाविद्यालय के निदेशक अंकुर मेहता एवं निदेशिका सुलभा मेहता ने शॉल ओढ़ाकर उनका सम्मान किया। समारोह में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए अतिथियों का सम्मान किया गया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। शैक्षणिक सहयोग के अंतर्गत विद्यार्थियों को कौशल आधारित तथा उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा और प्रशिक्षण के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इस अवसर पर 15 विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उपाधियां प्रदान कर सम्मानित किया गया।राज्यपाल कटारिया ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को ऐसे आयोजन नियमित रूप से करने चाहिए, जिससे विद्यार्थी व्यावहारिक रूप से अधिक सक्षम बन सकें। समारोह में INIFD चंडीगढ़ से अनीता कौशिक, मानव कौशिक एवं भानु शर्मा, BRDS से डॉ. भंवर राठौड़, INIFD अहमदाबाद से एस. भंसाली एवं प्रीति भंसाली सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों का भी सम्मान किया गया।
जयपुर| प्रदेश की राजनीति में इन दिनों पीसीसी चीफ डोटासरा और कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के बीच तीखी राजनीतिक लड़ाई चर्चा का केंद्र है। एसीबी एफआईआर और भ्रष्टाचार के आरोपों से शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत टिप्पणियों और खुले राजनीतिक हमलों तक पहुंच गया है। दोनों प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेता भी इस टकराव में खुलकर उतर आए हैं। इससे प्रदेश की राजनीति का तापमान लगातार बढ़ रहा है। उधर, डोटासरा की ओर से किरोड़ीलाल पर लगातार दिए जा रहे बयानों को लेकर शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने शिक्षा संकुल में कहा कि डोटासरा जी जिस प्रकार की बातें कर रहे हैं वैसी कोई महामूर्ख ही कर सकता है। डोटासरा खुद भ्रष्टाचार के दलदल में डूबे हैं और दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। ACB-FIR से शुरू हुई जंग, अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुंची कुछ नियुक्तियों में गलती हुई : डोटासरा डोटासरा ने स्वीकारा कि कांग्रेस सरकार के दौरान मुझसे गलतियां हो गईं, कुछ बेईमान लोगों को अच्छी जगह पर रखवा दिया। शिक्षा व्यवस्था पर हमला बोलते हुए कहा, जिसे शिक्षा का “श’ नहीं आता, उसे शिक्षामंत्री बना दिया गया है। कहानियों से पाप नहीं धुलेंगे: किरोड़ी डोटासरा के आरोपों पर किरोड़ी लाल मीणा ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। कहानियां गढ़ने से राजनीतिक पाप नहीं धुल सकते। डोटासरा के समर्थन में उतरे गहलोत पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने इस विवाद में हस्तक्षेप करते डोटासरा का बचाव किया। दावा किया कि अब जब स्वयं किरोड़ी पर सवाल उठे हैं तो वे तिलमिला गए हैं और जांच एजेंसियों पर दबाव में काम करने के आरोप लगा रहे हैं। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का कांग्रेस पर वार भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी कांग्रेस और अशोक गहलोत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता से बाहर रहने के कारण बेचैन है और उसकी राजनीति आज भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। डोटासरा बनाम किरोड़ी: प्रदेश की राजनीति में छिड़ा नया संग्राम; गहलोत, दिलावर व राठौड़ मैदान में
चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों के लिए जारी की गई एसओपी पर काम शुरू हो गया है। शुक्रवार तक सभी एचओडी को रिपोर्ट पेश करनी है। पीबीएम अस्पताल की 89 साल पुरानी बिल्डिंग में उसका कितना पालन हो सकेगा, कहना मुश्किल है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी ऑपरेशन थिएटर की एसओपी में स्पष्ट लिखा है कि मरीज को ऑपरेशन थिएटर में भेजने से पहले सफेद गाउन पहनाना जरूरी है, लेकिन भास्कर पड़ताल में सामने आया कि पीबीएम अस्पताल में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। खासकर जनाना विंग की बात करें तो प्रसूताएं जिस हालत में आती हैं, उसी हालत में उन्हें ऑपरेशन थिएटर में लिया जाता है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद उन्हीं वस्त्रों में बाहर भेजा जाता है, जो प्रसूता घर से पहनकर आई थी। आम तौर पर हरे रंग की एक चद्दर से प्रसूता को ढका जाता है, जिसे सफाईकर्मी वापस ले जाती है। वही चद्दर दूसरी प्रसूता के काम आती है। वार्ड में बेडशीट भी मैली मिलती है। उस पर खून के सूखे हुए दाग-धब्बे नजर आते हैं। ऐसा ही हाल लेबर रूम का है। वहां तो एक बेड पर दो-दो प्रसूताओं को लेटना पड़ता है। गौरतलब है कि पीबीएम जनाना अस्पताल में डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी फेल हुई थी, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। कोटा, जोधपुर और नागौर में भी इस प्रकार की घटनाएं होने पर सरकार ने सरकारी अस्पतालों के लिए एसओपी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में ओटी का प्रोटोकॉल गाइडलाइन के तहत संचालित होता है, जबकि अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ के कारण इसकी अनदेखी कर दी जाती है। भास्कर इनसाइट- 90 हजार की ओपीडी, 27 हजार महिलाएं भर्ती हो रहीं पीबीएम अस्पताल की बिल्डिंग 89 साल पुरानी है। जाहिर है जनाना ओटी भी उतना ही पुराना है। इन सालों में मरीजों की संख्या बढ़कर साल में 90 हजार तक पहुंच गई है, लेकिन आधारभूत सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं। जनाना में पांच ऑपरेशन थिएटर हैं। रोज औसत 50 महिलाओं के विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन होते हैं, जिनमें 20 मेजर और 30 माइनर सर्जरी होती है। इनमें 30 से 40 का आंकड़ा प्रसव का है। एक साल में करीब 27 हजार महिलाएं भर्ती होती हैं। दस हजार के नॉर्मल और लगभग सात हजार महिलाओं के सिजेरियन डिलीवरी होती हैं। वार्डों में वेंटिलेशन तक नहीं है। जनाना टॉयलेट की सफाई ही नहीं होती। वहां डिब्बा तक नहीं मिलता। महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। चिकित्सा मंत्री और प्रमुख शासन सचिव के दौरे के बाद यह कमियां सामने आईं तो प्रशासन हरकत में आया है। नोडल प्रभारी से लेकर वार्ड इंचार्ज तक को नोटिस जारी प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के दौरे के दौरान पीबीएम अस्पताल में सामने आई खामियों को लेकर अधीक्षक की जमकर खिंचाई की थी। वापस जयपुर लौटते वक्त भी उन्होंने अस्पताल में व्यवस्थाओं को सुधारने की हिदायत दी। राठौड़ के दौरे का असर अब नजर आने लगा है। अधीक्षक ने ताबड़तोड़ नोटिस देने शुरू कर दिए हैं। एमएनडीवाई के नोडल अधिकारी डॉ. संजय लोहड़ा, वार्ड इंचार्ज और सुपरवाइजर से लेकर सफाई ठेकेदार तक को नोटिस जारी किए हैं। व्यवस्थाओं में सुधार करना तो दूर की बात, मीडिया में आ रही खबरों के लिए भी नर्सिंग स्टाफ को दोषी ठहराया जा रहा है। आईसीयू में भर्ती कमला की हालत गंभीर सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से मेडिसिन आईसीयू में भर्ती की गई कमला की हालत गंभीर बनी हुई है। उसके खून की उल्टी हुई है। कमला के 15 दिन के अंतराल में दो बार ऑपरेशन हो चुके हैं। उसे एम्स जैसे उच्च संस्थान में रेफर करने पर विचार किया जा रहा है। उधर, तारा की हालत में काफी सुधार है। उसे एक-दो दिन में छुट्टी दी जा सकती है। चिकित्सा निदेशालय ने एसओपी जारी की है। उसका पालन कराया जाएगा। ऑपरेशन वाले मरीजों के लिए गाउन और अलग से कपड़ों के लिए सरकार से बजट मांगा जाएगा। -डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल
गोपालगंज में कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश गर्ग ने नीट और सीबीएसई पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने जिला मुख्यालय स्थित कांग्रेस कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित की। यह प्रेस वार्ता कांग्रेस के देशव्यापी 'छात्रों की गूंज' अभियान का हिस्सा थी। इसमें जिलाध्यक्ष ने भाजपा सरकार की कथित छात्र विरोधी नीतियों की आलोचना की। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी विफल गर्ग ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में देश की शिक्षा प्रणाली ध्वस्त हो गई है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की शुचिता समाप्त हो चुकी है और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाएं विफल साबित हुई हैं। उन्होंने आगे कहा, सालों तक दिन-रात मेहनत करने वाले लाखों छात्रों का भविष्य चंद माफियाओं और भ्रष्टाचारियों के हाथों में बेच दिया गया है। पेपर लीक अब कोई इकलौती घटना नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क बन चुका है। प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल जिलाध्यक्ष ने सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और माफियाओं तक पहुंच जाते हैं, तो सरकार और शिक्षा मंत्रालय क्या कर रहा था? उन्होंने यह भी पूछा कि नीट और सीबीएसई की गड़बड़ियों के कारण करोड़ों छात्रों में पैदा हुए अविश्वास और मानसिक तनाव की भरपाई कौन करेगा। गर्ग ने राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा कराने वाली एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण दिए जाने पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस पार्टी युवाओं के साथ खड़ी प्रेस वार्ता के अंत में, जिलाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के युवाओं और छात्रों के साथ खड़ी है। उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार नहीं किया और छात्रों को न्याय नहीं मिला, तो 'छात्रों की गूंज' आंदोलन सड़क से लेकर संसद तक और उग्र रूप लेगा।
सीवान जिला कांग्रेस कार्यालय में गुरुवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की शिक्षा, परीक्षा और रोजगार नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला। इस दौरान पार्टी की ओर से ‘छात्रों की गूंज’ नामक अभियान की शुरुआत की घोषणा की गई। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि यह अभियान 25 जून से 9 अगस्त तक चलेगा और इसके माध्यम से छात्रों, युवाओं तथा अभिभावकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के छात्रों की समस्याओं और उनकी आवाज़ को सरकार तक पहुंचाने का आंदोलन है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और छात्रों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल बन गया है। शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल सुशील कुमार ने कहा कि देश में लाखों छात्र उच्च शिक्षा और रोजगार की उम्मीद के साथ तैयारी करते हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम को अवसर मिल पाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में शिक्षा छात्रों के लिए सफलता का माध्यम बनने के बजाय निराशा और असफलता का कारण बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली तथा सम्मानजनक रोजगार की मांग को लेकर संघर्ष को और तेज करेगी। पार्टी का उद्देश्य छात्रों और युवाओं की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। पेपर लीक ने छात्रों का भविष्य किया प्रभावित जिला उपाध्यक्ष शशि कुमार ने कहा कि लगातार सामने आ रही पेपर लीक और परीक्षा में कथित धांधली की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद भी छात्रों को निष्पक्ष अवसर नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनमें निराशा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को तनाव, अनिश्चितता और असुरक्षा नहीं बल्कि अवसर, अधिकार और पारदर्शी व्यवस्था मिलनी चाहिए। कांग्रेस इसी मांग को लेकर अभियान चला रही है। छात्रों की समस्याओं को मिलेगा मंच अति पिछड़ा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राधेश्याम शर्मा ने कहा कि यदि किसी छात्र ने पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितता या महंगी फीस की समस्या झेली है तो ‘छात्रों की गूंज’ उसी छात्र की आवाज़ बनेगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान छात्रों की वास्तविक समस्याओं को सामने लाने और उनके समाधान की मांग करने का प्रयास है। मैरवा प्रखंड अध्यक्ष पवन यादव ने दावा किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्र और उनके परिवार हर साल भारी आर्थिक बोझ उठाने को मजबूर हैं। कोचिंग, आवेदन शुल्क और अन्य खर्चों के कारण गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। बेरोजगारी और भविष्य की चिंता भी प्रमुख मुद्दा युवा नेता अमित कुशवाहा ने कहा कि करोड़ों युवा लंबे समय तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के बावजूद बेरोजगारी, तनाव और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण युवाओं में निराशा बढ़ रही है। पचरूखी प्रखंड अध्यक्ष विकास तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज उठाने वालों को निशाना बना रही है। वहीं सदर प्रखंड अध्यक्ष कृष्णकांत गुप्ता ने कहा कि सरकार से सवाल पूछने वालों को अलग-अलग नाम देकर बदनाम करने की राजनीति की जा रही है। 9 अगस्त तक चलेंगे विभिन्न कार्यक्रम कांग्रेस नेताओं ने बताया कि ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके माध्यम से छात्रों, युवाओं और अभिभावकों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी और उन्हें आंदोलन से जोड़ा जाएगा। पार्टी का कहना है कि शिक्षा, परीक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर जनदबाव बनाकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।
बुरहानपुर में ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक रविंद्र महाजन ने गुरुवार को शाहपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी विद्यार्थियों और युवाओं के ज्वलंत मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू कर रही है। इस अभियान के तहत युवाओं और विद्यार्थियों के मुद्दों को आमजन तक पहुंचाया जाएगा। महाजन ने शिक्षा प्रणाली की आलोचना की और नीट पेपर लीक मामले में सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार पेपर लीक होने दे रही है ताकि युवाओं को नौकरी न देनी पड़े। कांग्रेस की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है और परीक्षाओं में सरकार को लाभ हो रहा है, जबकि विद्यार्थियों और अभिभावकों का पैसा खर्च हो रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को ही खकनार में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थी और शिक्षाविद् मौजूद रहे। कांग्रेस ग्रामीण जिलाध्यक्ष रविंद्र महाजन ने छात्रों से संवाद करते हुए वर्तमान में हुए पेपर लीक घोटाले, शिक्षा के व्यवसायीकरण और मौजूदा सरकार की शिक्षा नीतियों की कमियों पर चर्चा की। इस अवसर पर कांग्रेस नेता अशोक पाटील, निखिल खंडेलवाल, किशोर खांडवेकर, मुरलीधर महाजन, शैलेश इंगले, मुकेश महाजन, बलवंत पाटील, गिरीश बाविस्कर और आरती लांडे सहित कई अन्य उपस्थित थे।
मधेपुरा में गुरुवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने देश में लगातार हो रहे पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की। इस दौरान जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सौरभ ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। सौरभ ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था अब छात्रों के चयन का नहीं, बल्कि उन्हें बाहर करने का माध्यम बन गई है। उन्होंने इसे 'रिजेक्शन सिस्टम' करार दिया। 3,000 छात्रों में से केवल 1 आईएएस बनता उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 3,000 छात्रों में से केवल एक आईएएस, 30 आईआईटी और 180 डॉक्टर बन पाते हैं, जबकि हजारों युवाओं की वर्षों की मेहनत और सपने अधूरे रह जाते हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े भारी आर्थिक बोझ पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एक छात्र पर औसतन छह लाख रुपये तक खर्च होते हैं। देशभर के 22 लाख नीट अभ्यर्थियों के परिवार हर साल लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो पूरे देश के शिक्षा बजट (लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये) के लगभग बराबर है। परीक्षाओं की तैयारी में करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च सौरभ ने दावा किया कि एसएससी, यूपीएससी, आरआरबी, जेईई और नीट जैसी शीर्ष पांच परीक्षाओं की तैयारी पर हर साल करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह राशि कई मंत्रालयों के संयुक्त बजट और शिक्षा बजट से भी अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था स्कूल, ट्यूशन, कोचिंग, हॉस्टल, पेपर लीक, सीबीएसई की गड़बड़ियों और 18 प्रतिशत जीएसटी के बीच फंसकर पूरी तरह से वसूली तंत्र बन गई है। पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं से बढ़ा तनाव उन्होंने आगे कहा कि लगातार पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के कारण छात्रों में मानसिक तनाव बढ़ा है। इसके परिणामस्वरूप आत्महत्या के मामलों में भी लगभग 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह व्यवस्था छात्रों और उनके अभिभावकों से पैसे वसूलने का एक तंत्र बन चुकी है। रोजगार की स्थिति को भी चिंताजनक बताते हुए उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत किए। 1,000 छात्रों में से सिर्फ 12 को ही स्थायी नौकरी मिल पाती है। वहीं, 691 युवा गिग वर्क, मनरेगा और स्वरोजगार जैसे असंगठित क्षेत्रों में काम करने को मजबूर हैं, जबकि 297 युवा पूरी तरह से बेरोजगार हैं। उन्होंने दावा किया कि देश के लगभग 80 प्रतिशत इंजीनियर भी रोजगार से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार देने में पूरी तरह विफल रही है। जिलाध्यक्ष बोले-सरकार पारदर्शी परीक्षाएं कराने में असफलजिलाध्यक्ष ने कहा कि नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है। सरकार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं कराने में असफल साबित हुई है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही पारदर्शी एवं जवाबदेह परीक्षा प्रणाली लागू करने, कोचिंग उद्योग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की। प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता अनिल कुमार, संजय कुमार यादव आदि मौजूद थे।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष शंकर लाल धूपड़ ने कहा कि 4 और 5 जुलाई को आयोजित होने वाली हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट)-2025 के सफल, पारदर्शी एवं नकल-विहीन संचालन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसी क्रम में बोर्ड मुख्यालय पर प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) के साथ एक वर्चुअल बैठक आयोजित की गई, जिसमें परीक्षा प्रबंधन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष एचटेट परीक्षा में प्रदेशभर के 2 लाख 33 हजार 294 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा के लिए 383 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सभी केंद्रों पर सुरक्षा और निगरानी के व्यापक प्रबंध किए गए हैं ताकि परीक्षा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। तीन स्तरों की परीक्षा में शामिल होंगे अभ्यर्थी बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि 4 जुलाई को सायंकालीन सत्र में लेवल-3 (पीजीटी) की परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें 73,091 अभ्यर्थी भाग लेंगे। इसके बाद 5 जुलाई को प्रातःकालीन सत्र में लेवल-2 (टीजीटी) की परीक्षा होगी, जिसमें 1,19,141 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। वहीं 5 जुलाई को ही सायंकालीन सत्र में लेवल-1 (पीआरटी) की परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें 41,062 अभ्यर्थी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि एचटेट अभ्यर्थी वीरवार सायं से बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपने परीक्षा शहर की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। प्रवेश-पत्र बाद में जारी किए जाएंगे। नकल रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था शंकर लाल धूपड़ ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा संचालन में पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा बरती जाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है। नकल और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विशेष उड़नदस्तों की नियुक्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर बोर्ड की ओर से एक अधिकारी, कर्मचारी अथवा प्रतिनिधि नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से भी एक प्रशासनिक अथवा राजपत्रित अधिकारी की तैनाती की जाएगी, जो परीक्षा की निगरानी करेगा। डीसी की अध्यक्षता में होगी अधिकारियों की बैठक बोर्ड सचिव मुनीश शर्मा ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा से पूर्व जिला उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में प्रमुख केंद्र अधीक्षक, केंद्र अधीक्षक तथा प्रशासनिक एवं राजपत्रित अधिकारियों की बैठक आयोजित की जाए। बैठक की तिथि, समय और स्थान की सूचना बोर्ड मुख्यालय को भेजी जाएगी ताकि बोर्ड भी अपने अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कर सके। 3 से 5 जुलाई तक जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि प्रत्येक जिले में 3 जुलाई से 5 जुलाई तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। इस कंट्रोल रूम में एक अधिकारी, दो सहायक या लिपिक तथा एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति की जाएगी। यह नियंत्रण कक्ष बोर्ड मुख्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम के साथ लगातार संपर्क में रहेगा। सभी उड़नदस्तों की निरीक्षण रिपोर्ट एकत्रित कर उसी दिन बोर्ड मुख्यालय को भेजना अनिवार्य होगा ताकि परीक्षा की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके। दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिलेगा अतिरिक्त समय बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि नेत्रहीन एवं अन्य दिव्यांग अभ्यर्थियों को 20 मिनट प्रति घंटे के हिसाब से कुल 50 मिनट अतिरिक्त समय दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिला अभ्यर्थियों को केवल मंगलसूत्र, बिंदी और सिंदूर लगाने की अनुमति होगी। इसके अलावा अंगूठी, चैन, बालियां अथवा अन्य आभूषण परीक्षा केंद्र में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। सिख अभ्यर्थियों को उनके धार्मिक चिह्न साथ रखने की छूट दी गई है। सभी उड़नदस्तों और ऑब्जर्वरों को जैमर, बायोमैट्रिक प्रणाली, वीडियोग्राफी और सीसीटीवी कैमरों की कार्यक्षमता समय-समय पर जांचने के निर्देश दिए गए हैं। पहचान-पत्र के बिना नहीं मिलेगा प्रवेश बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या तकनीकी स्टाफ को बिना फोटोयुक्त पहचान-पत्र के परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। केंद्रों पर नियुक्त सभी कर्मचारियों के लिए गले में पहचान-पत्र पहनना अनिवार्य होगा। कैमरा ऑपरेटर, बायोमैट्रिक कर्मी और सीसीटीवी संचालन से जुड़े कर्मचारियों पर भी यह नियम लागू रहेगा। बोर्ड मुख्यालय में भी बनेगा कंट्रोल रूम परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना अथवा समस्या की सूचना तत्काल बोर्ड मुख्यालय में स्थापित नियंत्रण कक्ष को देनी होगी। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 01664-254302, 254304, 254601, 254604 तथा व्हाट्सएप नंबर 8816840349 जारी किया गया है। बोर्ड ने सभी अधिकारियों को परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 9वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में आपातकाल के दौर के बारे में एक सेक्शन शामिल किया है। इसको लेकर चंडीगढ़ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि NCERT ने सही किया है क्योंकि ऐसे काले कारनामे के बारे में देश की अगली पीढ़ी की जानना चाहिए, ताकि दोबारा ऐसा न हो। बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी इस फैसला का समर्थन किया है। वहीं कांग्रेस ने इस पर कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जहां भी सत्ता में होती है, वहां वह अपने हिसाब से इतिहास को पेश करने की कोशिश करती है। इंडिया एंड बियॉन्ड' में इमरजेंसी पर एक सेक्शन शामिल किया है। अब इसी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। बीजेपी के तमाम नेता जहां इसके लिए कांग्रेस को कोसते हुए NCERT की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस के नेता इसे लेकर बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं। 2 प्वाइंटर में समझते हैं प्रधान के बयान को... 1. इमरजेंसी को पाठ्यक्रम में शामिल करने का समर्थन केंद्रीय मंत्री ने NCERT द्वारा स्कूली किताबों में आपातकाल (1975 की इमरजेंसी) से जुड़े घटनाक्रमों को शामिल करने या उसे पढ़ाए जाने के फैसले का खुलकर बचाव किया। उन्होंने आपातकाल को देश के इतिहास का एक काला कारनामा बताया। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ियों (भविष्य की पीढ़ी) को यह जानना, पढ़ना और समझना बेहद जरूरी है कि उस दौर में क्या हुआ था। 2. 'A' टीम और 'B' टीम का जिक्र जब एक पत्रकार ने उनसे इस फैसले को लेकर राजनीतिक दलों के विरोध या किसी 'प्लान बी' के बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने विरोध करने वालों पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि देश में कुछ ऐसे लोग या राजनीतिक दल हैं, जिनके मन में देश की प्रगति और विकास को लेकर एक तरह की कुंठा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के हर फैसले का विरोध करने वाले लोग अलग-अलग रूप बदलकर सामने आते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इनमें से कोई 'A' टीम (मुख्य विपक्षी दल) बनकर आता है, तो कोई 'B' टीम (उन्हें परोक्ष रूप से समर्थन देने वाले दल या संगठन) बनकर एजेंडा चलाता है। बयान से ये दिया मैसेज धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान का सीधा मैसेज यह है कि सरकार इतिहास के उन हिस्सों (जैसे आपातकाल) को नई पीढ़ी के सामने लाने के पक्ष में है जिसे वह कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार की बड़ी भूल मानती है, और इस पर राजनीति करने वालों को वे देश के विकास में बाधक या 'कुंठित' मानसिकता का हिस्सा मानते हैं।
जयपुर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा- कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हुए हैं। वे अपनी छवि बचाने के लिए दूसरे नेताओं पर आरोप लगाते रहते हैं। दिलावर ने कहा- मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है। दिलावर ने कहा- डोटासरा महामूर्ख और बेईमान हैं। शिक्षा संकुल में स्टेट ओपन स्कूल कार्यालय में गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे मीडिया से बातचीत के दौरान मदन दिलावर ने यह कहा। दिलावर ने कहा- समझदार व्यक्ति इस तरह की बयानबाजी नहीं करता, लेकिन डोटासरा लगातार राजनीतिक आरोप लगाकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। दिलावर ने कहा- जिस प्रकार कोई चरित्रहीन किसी पतिव्रता महिला पर आरोप लगाए, डोटासरा का रवैया भी वैसा ही है। कहा- किरोड़ी लाल सोने की तरह खरे मदन दिलावर ने कहा- डोटासरा भ्रष्टाचार के दलदल में डूबे हुए हैं। जनता का ध्यान अपने मामलों से हटाने के लिए लगातार दूसरे लोगों पर आरोप लगाते रहते हैं। शिक्षा मंत्री ने किरोड़ी लाल मीणा का बचाव करते हुए कहा- वे सोने की तरह खरे हैं। उन पर लगाया गया कोई भी आरोप टिकने वाला नहीं है। दिलावर ने कहा- डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का सार्वजनिक जीवन और कार्यशैली पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों में कोई दम नहीं है। जांच एजेंसियां अपना काम कर रहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा- कानून अपना काम करेगा और जांच एजेंसियां अपना कार्य कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि जो लोग आज खुद को बेगुनाह बता रहे हैं, उन्हें भी जांच का सामना करना पड़ेगा। इसी दौरान दिलावर ने कांग्रेस नेता महेश जोशी का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी पहले खुद को निर्दोष बताते थे। बाद में उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। ……… यह खबर भी पढ़ें... डोटासरा बोले-गहलोत के पैरों में गिरकर रोए थे किरोड़ी:बेनीवाल को चैलेंज किया था,10 मिनट में सरेंडर हो गए; नैतिकता है तो इस्तीफा देना चाहिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर निशाना साधा। डोटासरा ने आरोप लगाया है कि किरोड़ी लाल मीणा तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैरों में गिरकर गिड़गिड़ाए थे। साथ ही डोटासरा ने किरोड़ी लाल पर खाद-बीज छापों के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपए की अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से जांच की मांग की है। (पूरी खबर पढ़ें)
चंडीगढ़ के सेक्टर-18 से यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो के नारे लगाए जा रहे थे। पुलिस ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान चंडीगढ़ के सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। यह कार्यक्रम 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के विरोध में आयोजित किया गया था। आज ही के दिन वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लागू किया गया था। भाजपा की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में इस संबंध में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हमारी लड़ाई ऐसे ही जारी रहेगी कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रदर्शन पुलिस ने रोका है। पता नहीं उन्हें क्या प्रॉब्लम है। इनके बच्चे परीक्षा नहीं देते। इनके परिवार से नीट का कोई एग्जाम नहीं देता। कांग्रेस पार्टी की लड़ाई जारी रहेगी। हम ऐसे ही लड़ाई जारी रखेंगे। इस दौरान उन्होंने जोर-जोर से नारे लगाए। नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर मंत्री का विरोध यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता हाल ही में हुए नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का विरोध कर रहे थे। यह विरोध प्रदर्शन यूथ कांग्रेस की ओर से पहले से तय किया गया था। सेक्टर-19 में युवा कार्यकर्ताओं को एकत्रित होने का आह्वान किया गया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहीं से हिरासत में ले लिया।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत आवेदन मंगवाए
बलरामपुर| अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों से आवेदन मांगे गए हैं। योजना छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग की है। मकसद श्रमिक परिवारों के बच्चों को राज्य के प्रतिष्ठित निजी आवासीय स्कूलों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण, निःशुल्क शिक्षा देना है। जिला श्रम अधिकारी के मुताबिक आवेदन 22 जून से लिए जा रहे हैं।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के लिए 3 तक करें आवेदन
बेनूर| श्रम विभाग जिला नारायणपुर द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों से 22 जून से 3 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। योजना का लाभ छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को मिलेगा। चयनित विद्यार्थियों को उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निशुल्क शिक्षा, आवास एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। विद्यार्थियों पर होने वाले समस्त निर्धारित व्यय का वहन मंडल कार्यालय रायपुर द्वारा किया जाएगा। विभाग ने पात्र हितग्राहियों से निर्धारित अवधि में आवेदन करने की अपील की है।
युवा, शिक्षा के मुद्दों पर कल कांग्रेस का जन प्रस्तुति कार्यक्रम
दौसा| शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली की विसंगतियों, बढ़ती बेरोजगारी तथा युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी दौसा की ओर से 26 जून को जिला स्तरीय जन प्रस्तुति कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे कांग्रेस कार्यालय, खान भाकरी रोड स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओढ़ करेंगे। इसमें दौसा सांसद मुरारी लाल मीणा, जिला प्रभारी राकेश पारीक, पूर्व मंत्री परसादीलाल मीणा, ममता भूपेश, दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा तथा पूर्व विधायक ओमप्रकाश हुड़ला सहित कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भाग लेंगे।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को बारहखड़ी और 20 तक के पहाड़े, जबकि माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को 25 तक के पहाड़े याद होने चाहिए। इसके साथ ही बच्चों की हिंदी और अंग्रेजी में फ्लूएंट रीडिंग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं और इसकी नियमित निगरानी हो। मंत्रालय में आयोजित संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों की समीक्षा बैठक में मंत्री ने स्कूलों की साफ-सफाई, मरम्मत, पाठ्यपुस्तक वितरण, गणवेश और साइकिल वितरण जैसे कार्य समय पर पूरा करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों को शासन की सभी सुविधाएं तय समय-सीमा में मिलनी चाहिए। बैठक में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को 31 जुलाई तक विशेष अभियान चलाकर ड्रॉपआउट बच्चों का दोबारा प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जुलाई से VSK ऐप पर उपस्थिति के आधार पर वेतनविभाग ने शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए VSK ऐप के उपयोग को अनिवार्य करने का फैसला लिया है। हालांकि जून माह की उपस्थिति के आधार पर किसी का वेतन नहीं काटा जाएगा। शिक्षकों और कर्मचारियों को ऐप पर पंजीयन के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। विभाग के अनुसार जुलाई से सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों का VSK ऐप पर पंजीयन अनिवार्य होगा। जुलाई माह का वेतन ऐप में दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही जारी किया जाएगा।कार्यालयों में अटैच शिक्षकों की होगी वापसी बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों को उनके मूल स्कूलों में वापस भेजने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा अधिकारियों को नियमित स्कूल निरीक्षण कर पढ़ाई और व्यवस्थाओं की निगरानी करने को कहा गया। जर्जर भवनों की बनेगी सूची राज्यभर के जर्जर स्कूल भवनों की सूची तैयार कर चरणबद्ध तरीके से उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं भवनविहीन स्कूलों की समीक्षा जिला कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी करेंगे। 2027-28 से 1 अप्रैल से शुरू होगा नया सत्रबैठक में एक बड़ा फैसला लेते हुए तय किया गया कि शैक्षणिक सत्र 2027-28 से प्रदेश के सभी स्कूलों में नया सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। इसी दिन विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश और साइकिल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षा मंत्री का कहना है कि इससे सरकारी स्कूलों में भी निजी स्कूलों की तरह समय पर पढ़ाई शुरू होगी, पाठ्यक्रम समय पर पूरा होगा और परीक्षा परिणामों में सुधार आएगा।
राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ के प्रज्ञा सागर पब्लिक स्कूल में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से राजगढ़ जिले के स्कूलों में मरम्मत और खरीदी राशि में कथित घोटाले को लेकर सवाल किया गया। मंत्री ने कहा कि सरकार को इन गड़बड़ियों की जानकारी मिली है और पूरे प्रदेश में इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि अगर राजगढ़ में भी इस तरह की गड़बड़ी सामने आई तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने पूछे सवाल मंत्री बुधवार को नरसिंहगढ़ स्थित प्रज्ञा सागर पब्लिक स्कूल के नए बने भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे राजगढ़ जिले, खासकर नरसिंहगढ़ ब्लॉक में शिक्षा विभाग के तहत स्कूलों में मरम्मत और खरीदी के लिए जारी राशि में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल किया। इस पर मंत्री ने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस (भ्रष्टाचार पर कोई छूट नहीं) की नीति पर काम कर रही है। मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा, “हमारे पास इसकी जानकारी आई है। पूरे मध्यप्रदेश में इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। शुरुआती तौर पर जो तथ्य सामने आए हैं, उनकी जांच आईएएस स्तर के अधिकारी से कराई जा रही है। अगर राजगढ़ में भी इस तरह का मामला हुआ है तो किसी भी दोषी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा। कानून अपना काम करेगा और जिन लोगों ने कोई घोटाला या गड़बड़ी की है, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढील नहीं बरती जाएगी। स्कूल के नए भवन का हुआ उद्घाटन बुधवार को प्रज्ञा सागर पब्लिक स्कूल में नए बने भवन के उद्घाटन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें मंत्री राव उदय प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। कार्यक्रम में राजगढ़ सांसद रोडमल नागर, नरसिंहगढ़ विधायक मोहन शर्मा, स्कूल अध्यक्ष नवरंग धाकड़, डायरेक्टर हरीश मुलानी और अन्य अतिथि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने पौधे लगाए। स्वागत भाषण नवरंग धाकड़ ने दिया, जबकि हरीश मुलानी ने आभार व्यक्त किया। संचालन पूजा धाकड़ और हर्चिता मुलानी ने किया।
बांसवाड़ा के हरिदेव जोशी रंगमंच में 'शिक्षा बचाओ भविष्य बचाओ' संवाद कार्यक्रम बुधवार को हुआ। यहां सुबह 11:00 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत कई छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विचारों और देश के एजुकेशन सिस्टम को सुदृढ़ व पारदर्शी बनाने की सोच को युवाओं तक पहुंचाना था। कोटा प्रेजेंटेशन की वीडियो क्लिप दिखाई संवाद कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कोटा में दिए गए प्रेजेंटेशन की एक विशेष वीडियो क्लिप दिखाई गई। इस वीडियो के जरिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता को लेकर उनके दृष्टिकोण को साझा किया गया, जिसे युवाओं ने काफी ध्यान से सुना। दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की रही मौजूदगी जिला कांग्रेस कमेटी बांसवाड़ा के प्रवक्ता रामलाल डिंडोर ने बताया- कार्यक्रम में लाल सिंह झाला (सचिव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी राजस्थान एवं जिला प्रभारी, बांसवाड़ा), विधायक व जिलाध्यक्ष अर्जुनसिंह बामणिया, पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया, विधायक नानालाल निनामा, पीसीसी सदस्य राकेश सेठिया, निवर्तमान अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार, जिला उपाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह सिसोदिया व केशवचन्द निनामा सहित अन्य उपस्थित रहे। संगठन और जनप्रतिनिधियों ने दिखाया दम कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी के सदस्यों सहित सभी ब्लॉकों के ब्लॉक अध्यक्ष, कार्यकारिणी सदस्य, शहर कांग्रेस अध्यक्ष और अग्रिम संगठनों के पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही युवा नेता विकास बामनिया, रोहित खड़िया, जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए सरपंच, प्रशासक, प्रधान, उपप्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति और सहयोग से कार्यक्रम को सफल बनाया।
भदोही में जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में हरिहरपुर (सुरियावां) में छात्र-युवा संवाद एवं कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा, कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन में शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और संगठन की मजबूती जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। राहुल गांधी के निर्देशन में चलाए जा रहे छात्रों की गूंज अभियान पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोऑर्डिनेटर एवं भदोही प्रभारी दयाशंकर पांडेय ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि देश का युवा आज शिक्षा, रोजगार और अवसरों के संकट से जूझ रहा है। कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से युवाओं की आवाज बुलंद कर रही है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी का छात्रों की गूंज अभियान छात्रों और युवाओं की समस्याओं को सीधे सुनने और उन्हें संघर्ष की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है। पांडेय ने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और घर-घर जाकर युवाओं को संगठन से जोड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी भदोही के अध्यक्ष वसीम अंसारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा युवाओं, किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लड़ती रही है। उन्होंने देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और सामाजिक असमानता को गंभीर चिंता का विषय बताया। अंसारी ने कार्यकर्ताओं से जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने और संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त बनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम के संयोजक प्रेम बिहारी उपाध्याय ने सभी अतिथियों, छात्रों, युवाओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संगठन की वास्तविक ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं। प्रेम बिहारी उपाध्याय ने जोर दिया कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही कांग्रेस का जनाधार और मजबूत होगा तथा जनसरोकारों की लड़ाई को नई ऊर्जा मिलेगी।
कांग्रेस पार्टी ने शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा है। देशव्यापी अभियान के तहत उदयपुर देहात और शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने तितरड़ी स्थित कॉलेज परिसर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान कोटा में आयोजित रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत मूल प्रस्तुति को प्रोजेक्टर के माध्यम से छात्रों को दिखाया गया। ‘देश का युवा शिक्षा और रोजगार के गंभीर संकट से जूझ रहा’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि देश का युवा शिक्षा और रोजगार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक, परीक्षाओं का रद्द होना, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बढ़ती बेरोजगारी ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को अनिश्चित बना दिया है। मीणा ने केंद्र और राज्य सरकार पर इन मुद्दों पर गंभीर न होने का आरोप लगाया। उदयपुर देहात और शहर जिला कांग्रेस सह-प्रभारी डिंपल कुंवर राठौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और संस्थागत विफलताओं से छात्रों में निराशा और असुरक्षा का माहौल बना है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों को लेकर राज्यभर में जनजागरण अभियान चला रही है। जिला अध्यक्ष बोले- पेपर लीक से छात्रों के सपने टूट रहे उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कहा कि पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, बढ़ती फीस और निजीकरण जैसी समस्याओं से छात्रों के सपने टूट रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों की गूंज केवल एक अभियान नहीं, बल्कि युवाओं के अधिकारों और बेहतर भविष्य के लिए एक जनआंदोलन है। इस कार्यक्रम में पीसीसी उपाध्यक्ष हीरालाल दरांगी, लोकसभा प्रत्याशी ताराचंद मीणा, पूर्व विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत, पीसीसी महासचिव पंकज शर्मा, पीसीसी सचिव भीम सिंह चुंडावत सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और छात्र उपस्थित रहे।
टोंक जिले की गलोद संस्कृत विद्यालय की तीन छात्राओं को डीडवाना-कुचामन जिले के 'सुप्रीम फाउंडेशन' जसवंतगढ़ द्वारा सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान इन्हें संस्कृत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिया जाएगा। सम्मान में हर छात्रा को 2100 रुपए और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। इन होनहार छात्राओं का सम्मान विद्यालय विकास एवं प्रबन्धन समिति (SDMC) के विशेष सहयोग से 30 जून को सुप्रीम फाउंडेशन, जसवंतगढ़ द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में किया जाएगा। जिला शिक्षा कार्यालय के आर्यन खंडेलवाल ने बताया कि राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय गलोद की तीन छात्राओं को बोर्ड परीक्षा में संस्कृत विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया जाएगा। गलोद के संस्कृत स्कूल की सोफिया (95.60%), आरती प्रजापत (91.20%) और कृष्णा बैरवा (90.40%) ने 90 प्रतिशत से अधिक प्राप्त कर विद्यालय व क्षेत्र का नाम रोशन किया है। विद्यालय के प्रधानाचार्य जगदीश प्रसाद शर्मा,SDMC सचिव आर. पी. मीना, समन्वयक विष्णु शर्मा और स्वयंसेवक योगेश यादव ने भी खुशी जाहिर की है। खंडेलवाल ने बताया कि इनका चयन परिजनों और विद्यालय प्रशासन की ओर से आवेदन करने पर किया है। 31 संस्कृत स्कूलों में चल रहा शिक्षा उन्नयन कार्यक्रम फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य राजकीय स्कूलों में अध्ययनरत छात्र- छात्राओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2016 से लाडनूं ,सुजानगढ़ व बीदासर तहसील के समस्त सामान्य शिक्षा के स्कूलों सहित डीडवाना-कुचामन, अजमेर, भीलवाडा, टोंक, नागौर, बीकानेर, झुंझुनू, चुरू, हनुमानगढ़, गंगानगर के राजकीय संस्कृत स्कूलों व राजस्थान के 31 कॉलेजों में शिक्षा उन्नयन का कार्यक्रम चल रहा है। सुप्रीम फाउंडेशन के मुख्य संरक्षक बजरंगलाल तापडिया एवं महावीर प्रसाद तापडिया नें शिक्षा के स्तर को गिरते हुए देखा, तब उन्होंने इसको संबल प्रदान करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम की रूपरेखा बनाकर 11 नवम्बर 2016 को राजस्थान सरकार के साथ अनुबंध कर सरकारी स्कूलों व संस्कृत कॉलेजों में शिक्षा उन्नयन की परियोजना शुरू की, जो फिलहाल चल रही है।
पीलीभीत में आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद, एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राम सिंह राठौर के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षामित्रों ने अपनी समस्याओं के तत्काल निस्तारण और भविष्य को सुरक्षित करने की गुहार लगाई है। शिक्षामित्रों ने बताया कि वे साल 2001 से बेसिक शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, और उन्हें कार्य करते हुए लगभग 26 वर्ष बीत चुके हैं। अब अधिकांश शिक्षामित्र सेवानिवृत्ति की उम्र के करीब पहुँच चुके हैं, लेकिन उनका अध्यापक बनने का सपना आज भी अधूरा है। संगठन ने मांग की है कि जो शिक्षामित्र टीईटी पास नहीं हैं, उन्हें या तो टीईटी से छूट दी जाए अथवा एक विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित कराकर उन्हें अध्यापक बनाया जाए। वहीं, जो शिक्षामित्र पहले से टीईटी पास हैं, उन्हें शीघ्र ही सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया जाए। एसोसिएशन का तर्क है कि प्राथमिक विद्यालयों में नियमित अध्यापक और शिक्षामित्र एक ही छत के नीचे समान रूप से शिक्षण कार्य करते हैं, ऐसे में दोनों के बीच सौतेला व्यवहार न्यायसंगत नहीं है। शिक्षामित्रों ने मांग की है कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत उन्हें केवल मानदेय देने के बजाय पूर्ण वेतनमान दिया जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने नियमित अध्यापकों की भांति 12 महीने का वेतन और 62 वर्ष की आयु तक सेवा करने का अवसर दिए जाने की मांग की। शिक्षामित्रों ने सुपर टीईटी परीक्षा में पूर्व की तरह भारांक का लाभ देने और साल भर में अध्यापकों की तरह ही 14 आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने की भी मांग की है। सरकार से न्याय की उम्मीदजिला अध्यक्ष राम सिंह राठौर ने कहा कि वर्तमान शासनकाल में समाज के सभी वर्गों को समान न्याय मिल रहा है, इसलिए उन्हें पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री शिक्षामित्रों के हित में सकारात्मक निर्णय लेकर उनके भविष्य को सुरक्षित और संरक्षित करेंगे। इस दौरान मुख्य रूप से रवि कुमार, विनय पांडेय, हर प्रसाद राठौर और गिरिजा शंकर सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे।
हरदा बुधवार को कांग्रेस कार्यालय में नीट (NEET-UG) पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन साई, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष हेमंत टाले और कांग्रेस प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने केंद्र सरकार के काम करने के तरीके की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पारदर्शिता (साफ-सुथरी व्यवस्था) और विश्वसनीयता सबसे जरूरी होती है, लेकिन लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के कारण देश के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता का भरोसा टूट रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग जिलाध्यक्ष मोहन साई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि दोबारा कराई गई परीक्षा में जिस तरह से वायु सेना की मदद ली गई है, उससे साफ पता चलता है कि केंद्र सरकार का शिक्षा मंत्रालय पूरी तरह से फेल हो चुका है। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है। करोड़ों रुपये की वसूली और छात्रों की आत्महत्या का आरोप जिला प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि परीक्षा निरस्त (कैंसिल) होने के चलते देश में अब तक करीब 21 होनहार छात्र-छात्राओं ने डिप्रेशन (अवसाद) में आकर आत्महत्या कर ली है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साल 2014 से 2016 तक करीब 93 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। फीस का गणित समझाते हुए गार्गव ने बताया कि एक बार की परीक्षा के लिए लगभग 22 लाख छात्रों ने फॉर्म भरे थे। इसमें सामान्य वर्ग से 1700 रुपये, पिछड़े वर्ग से 1600 रुपये और एससी/एसटी वर्ग के छात्रों से 1000 रुपये लिए गए। इस हिसाब से परीक्षा के नाम पर छात्रों से करोड़ों रुपये की वसूली की गई है। 25 जून से कांग्रेस चलाएगी 'गूंज अभियान' जिलाध्यक्ष मोहन साई ने एलान किया कि नीट और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस और एनएसयूआई (NSUI) मिलकर 25 जून से 9 अगस्त तक पूरे देश में 'गूंज अभियान' चलाएंगे। इस अभियान के तहत कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाएंगे और छात्रों के भविष्य के साथ हुए इस खिलवाड़ को लेकर चौपाल लगाकर चर्चा करेंगे। पूर्व नपा अध्यक्ष बोले- 2029 के चुनाव में युवा देंगे जवाब पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष हेमंत टाले ने कहा कि आज देश का युवा जागरूक हो चुका है और वह शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार से सीधे जवाब मांग रहा है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं के अंदर बढ़ रहा यह गुस्सा आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से सामने आएगा और साल 2029 के आम चुनाव में युवा वोटर्स इसका करारा जवाब देंगे।
नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और शिक्षा माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आज नगर निगम टाउन हॉल में छात्र युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर ने कहा- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ पर कांग्रेस अब चुप नहीं बैठेगी और सड़क पर उतरकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी। केंद्र सरकार ने देश के युवाओं के सपनों को तार-तार करने का काम किया है। लड़ाई कांग्रेस-भाजपा की नहीं धीरज गुर्जर ने दावा किया, जिस दिन नीट का पेपर लीक हुआ, राहुल गांधी ने उससे दो साल पहले ही सचेत कर दिया था कि सरकार इस गंभीर विषय पर ध्यान दे। लेकिन जब-जब राहुल गांधी ने युवाओं के हक में आवाज उठाई, तब तब भारत सरकार ने उसे नजरअंदाज किया। यह लड़ाई राजनीतिक नफे नुकसान या कांग्रेस भाजपा की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। शिक्षा व्यवस्था सिलेक्शन की नहीं, रिजेक्शन की व्यवस्था जब कोई युवा सालों तक लगन से पढ़ाई करता है और परिणाम आने से पहले ही पेपर लीक हो जाता है, तो उसके सारे सपने धरे रह जाते हैं। युवाओं का कीमती समय और उम्र बर्बाद हो रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कोटा में दिए बयान को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था अब सिलेक्शन की नहीं, बल्कि रिजेक्शन की व्यवस्था बन चुकी है। जवाबदारी लेने वाला कोई नहीं गुर्जर ने कहा कि पहले रेल हादसों पर जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए मंत्री इस्तीफा दे देते थे, लेकिन आज सरेआम पेपर लीक हो रहे हैं। कोचिंग में हादसे हो रहे और जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस का यह अभियान महज फोटो खिंचाने, नारे लगाने या राजनीति के लिए नहीं है, बल्कि युवाओं के हक के लिए सड़क पर आर-पार की लड़ाई होगी। शिक्षा मंत्री बर्खास्त हों, एनटीए भंग करे सरकार जिला प्रभारी पूर्व शिक्षा मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ ने कहा कि नीट पेपर बार-बार लीक हो रहे। इसे रोकने की जिम्मेदारी सरकार की है। छात्रों के हितों पर केंद्र सरकार कुठाराघात कर रही। एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) भंग होनी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करना चाहिए। शिक्षा का व्यवसायीकरण रुके, अच्छी और क्वालिटी वाली शिक्षा मिले, इसके लिए अच्छे इंस्टीट्यूट खुलने चाहिए। पूर्व मंत्री नसीम अख्तर ने राहुल गांधी के विजन को समर्थन देने के लिए सबके हाथ खड़े करवाए। उन्होंने सबसे छात्रों व युवाओं के साथ खड़े होने का आह्वान किया। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस बोर्ड बनाएगी कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष शिवराम जीपी खटीक ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि आने वाले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस बोर्ड बनाएगी।अगले विधानसभा चुनाव में भीलवाड़ा की सीट कांग्रेस की झोली में डालेंगे। युवाओं ने लहराए तिरंगे कार्यक्रम में लोकसभा सचेतक राहुल गांधी के गत दिनों कोटा में छात्र संवाद में दिए संदेश को एलईडी स्क्रीन पर सभी को दिखाया सुनाया गया। युवाओं ने हाथों में तिरंगे लहराए। आयोजन में पूर्व नगर परिषद सभापति मंजू पोखरना, पीसीसी मेंबर मनोज पालीवाल, याकूब मोहम्मद, महिला जिलाध्यक्ष रेखा हिरण सहित कार्यकर्ता एवं छात्र, युवा मौजूद रहे।
ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त के बाद स्कूल खुलने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शिक्षा विभाग की डिप्टी डायरेक्टर अनीता चौधरी बुधवार को उकलाना ब्लॉक पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने गांव कंडूल तथा उकलाना के विभिन्न राजकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का गहनता से अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान डिप्टी डायरेक्टर अनीता चौधरी ने स्कूल परिसर की साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, शौचालयों की स्थिति, भवनों के रखरखाव तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय स्टाफ को निर्देश दिए कि नए शैक्षणिक सत्र के आरंभ से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अनीता चौधरी ने कहा कि प्रदेशभर में स्कूल खुलने से पूर्व सभी सरकारी विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की जा रही है। निरीक्षण के दौरान अधिकांश व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं, हालांकि कुछ विद्यालयों में कमरों एवं सफाई कर्मियों की कमी का मुद्दा सामने आया है। संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान विद्यालयों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों से भी विभिन्न आवश्यकताओं और सुविधाओं से संबंधित मांग पत्र प्राप्त किए गए हैं, जिन पर विभागीय स्तर पर विचार किया जाएगा। उकलाना ब्लॉक के प्रधानाचार्यों संग की मीटिंग इस अवसर पर उकलाना ब्लॉक के स्कूल प्रधानाचार्यों के साथ एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में शिक्षकों को आगामी सत्र में शैक्षणिक गुणवत्ता और परीक्षा परिणामों को और बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मेहनत और विद्यार्थियों की लगन के कारण इस वर्ष सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम काफी बेहतर रहा है और आने वाले समय में इसे और ऊंचाई तक ले जाने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। अभिभावकों से बच्चों का दाखिला कराने की अपील डिप्टी डायरेक्टर ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में करवाएं। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में प्रशिक्षित एवं योग्य शिक्षकों के साथ-साथ बेहतर भवन, आधुनिक सुविधाएं, स्वच्छ वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। नाममात्र शुल्क में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी स्कूल मिलकर नए शैक्षणिक सत्र को सफल बनाएंगे और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाएंगे।
उत्तर प्रदेश के अशासकीय और सरकारी सहायता प्राप्त (Aided) डिग्री कॉलेजों में प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) ने विभिन्न कॉलेजों में खाली पड़े पदों को भरने की कवायद युद्ध स्तर पर शुरू कर दी है।शासन के निर्देश पर उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेशभर के कॉलेजों से रिक्त पदों की विस्तृत और बिंदुवार जानकारी मांगी थी। इस कूटनीतिक कदम के बाद अब विभिन्न कॉलेजों से मिली रिक्तियों की रिपोर्ट का अंतिम सत्यापन (Final Verification) कर उसे उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा जा रहा है, जिससे साफ है कि जल्द ही भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है।१६०० से अधिक पदों पर आ सकती है वैकेंसी, बढ़ सकता है अंतिम आंकड़ाउच्च शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों के मुताबिक, अब तक मिली रिपोर्ट के आधार पर सहायता प्राप्त कॉलेजों में १६०० से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली पाए गए हैं।पदों में बढ़ोतरी की उम्मीद: निदेशालय ने सभी संबंधित कॉलेजों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने यहाँ खाली पड़े पदों की बिल्कुल सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं।नई रिपोर्ट का इंतजार: कई संस्थानों ने हाल ही में नई रिक्तियों की सूचना निदेशालय को भेजी है। अधिकारियों का मानना है कि चूंकि अभी कुछ कॉलेजों से अंतिम वेरिफिकेशन रिपोर्ट आना बाकी है, इसलिए मुख्य विज्ञापन जारी होने तक खाली पदों का यह अंतिम आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ सकता है।कॉलेजों में 'प्राचार्य' (Principal) के पदों पर भी होगी सीधी भर्तीइस आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत युवाओं को न केवल असिस्टेंट प्रोफेसर, बल्कि डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य (Principal) बनने का भी सुनहरा मौका मिलेगा।१११ पदों की सूची तैयार: उच्च शिक्षा विभाग ने फिलहाल प्राचार्य के १११ रिक्त पदों का पूरा ब्योरा तैयार कर नए शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेज दिया है।वेरिफिकेशन जारी: इस विंग में भी कई कॉलेजों से आंतरिक रिपोर्ट आनी बाकी है, जिसके बाद प्राचार्य के पदों की संख्या में भी इजाफा होना तय माना जा रहा है।मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों में सृजित होंगे शिक्षकों के हजारों नए पदउत्तर प्रदेश में बुनियादी और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार 'मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय' (CM Model Composite Schools) का निर्माण तेजी से करा रही है।प्री-नर्सरी से १२वीं तक की पढ़ाई: ये अत्याधुनिक स्कूल प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा १२वीं तक के होंगे।नए पदों का सृजन: इन नए मॉडल स्कूलों में सुचारू रूप से पढ़ाई संचालित करने के लिए शासन ने शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से एक विस्तृत कार्ययोजना रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के आधार पर स्कूलों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता (PGT), सहायक अध्यापक (TGT) और प्री-प्राइमरी शिक्षकों के हजारों नए पद सृजित (Create) करने की तैयारी चल रही है।शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के बंपर द्वारउच्च शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग की इस संयुक्त सक्रियता से उत्तर प्रदेश के नेट (NET), स्लेट (SLET) और पीएचडी (PhD) पास कर चुके हजारों योग्य अभ्यर्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। इस महा-भर्ती प्रक्रिया के पूरी होने से जहाँ एक तरफ प्रदेश के युवाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक सरकारी नौकरी मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से चली आ रही फैकल्टी की कमी को भी हमेशा के लिए दूर किया जा सकेगा।
आईएमएस बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में सर्जरी के लिए उपयोग होने वाली मशीन की खरीद पर सवा उठ रहा है। इस मामले में शिक्षा मंत्रालय, विजलेंस, रजिस्ट्रार सहित कई जगह शिकायत हुई है। आरोप है कि जिस मशीन को दो अन्य मेडिकल कॉलेज में 60 से 66 लाख में खरीदा, उसे आईएमएस में 3.64 करोड़ में क्यों खरीदा गया।सर्जिकल वर्क के लिए आईएमएस बीएचयू ने टेंडर निकाला था। शिकायतकर्ता ने शिक्षा मंत्रालय को लिखा है पत्र दिल्ली की एक कंपनी के माध्यम से छह मशीनें खरीदी गई हैं। शिकायतकर्ता सत्येंद्र कुमार का आरोप है कि शेर-ए-कश्मीर मेडिकल कॉलेज में ये मशीन 60 लाख और एम्स में यही मशीन 66 लाख रुपये में खरीदी गई है। यही मशीन आईएमएस में 3.64 करोड़ रुपये में खरीदी गई है। आरोप है कि इस तरह छह मशीनें 21.89 करोड़ रुपये में खरीदी गईं। हालांकि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। आरोप है कि कई विभागों में वित्त मंत्रालय और सीवीसी के आदेशों को दरकिनार कर टेंडर एवं भुगतान कराया गया है। डायरेक्टर बोले- छवि को धूमिल किया जा रहा प्रो. एसएन संखवार ने कहा - आईएमएस की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। जो भी आरोप हैं, वे गलत हैं। जो कंपनी मशीन उपलब्ध कराती है वह लिखकर देती है कि इससे कम में मैंने कहीं मशीन नहीं दी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुख (Result-oriented) बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव ( ACS), बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने एक विशेष यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से सीधा संवाद किया और सरकार की आगामी प्राथमिकताओं को साझा किया।इस संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों (सरकारी स्कूलों) के संचालन, शिक्षकों के कल्याण और छात्र नामांकन को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा की गई है।गर्मी के कारण पढ़ाई के नुकसान की भरपाई: अब हर साल 25 जून से खुलेंगे स्कूलअपर मुख्य सचिव ने बताया कि अक्सर अत्यधिक गर्मी और लू के कारण बार-बार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान होता है।220 शिक्षण दिवस का लक्ष्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानदंडों के अनुरूप बच्चों के लिए न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना अनिवार्य है।नया नियम: इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब उत्तर प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे (यानी आज से स्कूल खुल चुके हैं)। उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि वे स्कूल आने वाले बच्चों का आत्मीय स्वागत करें और भीषण गर्मी को देखते हुए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा का विशेष प्रबंध करें।1 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण: ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोरराज्य में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (Dropout) बच्चों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए सरकार नई रणनीति अपना रही है:स्थानीय डेटा की मदद: 1 जुलाई से शुरू हो रहे 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण में स्कूल से बाहर (Out of School) रह गए बच्चों की पहचान की जाएगी। इसके लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के पास उपलब्ध जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय सूचनाओं की मदद ली जाएगी।निर्बाध प्रवेश: कक्षा 5 पास करने वाले प्रत्येक छात्र का कक्षा 6 में निर्बाध और अनिवार्य दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। जो बच्चे सीखने में पीछे रह गए हैं, उनके लिए विशेष 'कैच-अप शिक्षण' (Catch-up Classes) संचालित किए जाएंगे।निपुण भारत मिशन का कक्षा 5 तक विस्तार: 6 जुलाई को 'निपुण संकल्प'बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने वाले 'निपुण भारत मिशन' को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है:दायरा बढ़ा: पहले यह मिशन शुरुआती कक्षाओं के लिए था, लेकिन अब इसका दायरा कक्षा 5 तक बढ़ा दिया गया है। अब कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन (EVS) के स्पष्ट लर्निंग आउटकम (अधिगम लक्ष्य) तय किए गए हैं।शिक्षकों की ट्रेनिंग: इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है, जो ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को ट्रेंड करेंगे। आगामी 6 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में 'निपुण संकल्प कार्यशाला' का आयोजन होगा, जिसमें पूरे प्रशासनिक और अकादमिक तंत्र को झोंककर 'निपुण जनपद' बनाने का संकल्प लिया जाएगा।'DEAR' अभियान और वर्ष में दो बार मिलेगी होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्टअपर मुख्य सचिव ने स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर करने के लिए कई नए निर्देश दिए हैं:DEAR अभियान: स्कूलों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड’ (DEAR) जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां एक निश्चित समय के लिए सभी काम रोककर सिर्फ किताबें पढ़ने की संस्कृति विकसित की जाएगी।अभिभावक सहभागिता: बच्चों की 'होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट' (Holistic Progress Report) को अब और अधिक प्रभावी बनाकर वर्ष में दो बार अभिभावकों (Parents) के साथ अनिवार्य रूप से साझा किया जाएगा ताकि वे भी बच्चे की प्रगति का हिस्सा बन सकें।शिक्षकों के लिए बड़ी सौगात: ₹5 लाख की कैशलेस इलाज सुविधा और 21,000 नई भर्तियांमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षा विभाग के मानव संसाधन को मजबूत करने और शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए दो अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं:श्रेणी / योजनामुख्य विवरण और लाभकैशलेस चिकित्सा सुविधासभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा।नगरीय क्षेत्रों में नई भर्तीशहरी क्षेत्रों के स्कूलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।मुंशी प्रेमचंद का संदेश: संवाद के अंत में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए सभी शिक्षकों से निरंतर अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक बेहतर शिक्षक वही है जो खुद हमेशा पढ़ता रहता है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षकों की निष्ठा के दम पर उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरेगी।
नई शिक्षा नीति को समझें, छात्र-छात्राओं पर विषय चयन का दबाव न डालें : प्राचार्य
सिटी रिपोर्टर | बोकारो एमजीएम हायर सेकेंड्री स्कूल, सेक्टर-4 एफ में शनिवार को अभिभावक परिचय सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य फादर डॉ. जोशी वर्गीस ने किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिन्हें अभिभावकों के लिए समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करें और उनकी रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता दें। सत्र में विषय विशेषज्ञों ने सीबीएसई की 10वीं बोर्ड परीक्षा में होने वाले बदलावों की जानकारी दी। बताया गया कि वर्ष 2027 से 10वीं बोर्ड परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित होगी। पहला चरण फरवरी-मार्च और दूसरा चरण मई-जून में होगा। दोनों परीक्षाएं पूरे सिलेबस पर आधारित रहेंगी। अंक सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी अधिकतम तीन विषयों में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। अंतिम मार्कशीट में दोनों परीक्षाओं में प्राप्त सर्वोत्तम अंक शामिल किए जाएंगे। विशेषज्ञों ने 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता, बच्चों के स्वास्थ्य, खान-पान और भावनात्मक विकास पर भी चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में अभिभावकों और शिक्षकों की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मौके पर उप प्राचार्य राखी बनर्जी, हेडमिस्ट्रेस सपना जोशी, शिक्षिका ममता कुमारी, संगीता सिंह, चंदा कुमारी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।
नाराजगी . विधानसभा समिति ने सूचना, सेवा व शिक्षा के अधिकार की समीक्षा की
सिटी रिपोर्टर | बोकारो मंगलवार को सर्किट हाउस के सभागार में झारखंड विधानसभा की प्रत्यायुक्त विधान समिति की बैठक विधायक सह समिति अध्यक्ष सरयू राय की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सूचना का अधिकार, सेवा की गारंटी और शिक्षा के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समीक्षा की गई। इसके साथ ही जिले के अस्पतालों की स्थिति, पेयजल सुविधा, कचरा निष्पादन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों की भी विस्तृत जानकारी ली गई। बैठक के दौरान समिति के अध्यक्ष सरयू राय ने बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कचरा निस्तारण, सीवरेज ट्रीटमेंट और दामोदर नद के प्रदूषण को लेकर बीएसएल का रवैया सहयोगात्मक नहीं है। बोकारो में प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न मानकों पर सही तरीके से काम नहीं हो रहा है। बोकारो इस्पात संयंत्र ने दामोदर नद में रासायनिक पानी के डिस्चार्ज को शून्य करने का वादा किया था, लेकिन इसके बावजूद गाहे-बगाहे रासायनिक पानी छोड़े जाने की खबरें सामने आती रहती हैं। कागजी दावों और खुले में कचरा फेंकने पर खिंचाई सरयू राय ने कहा कि बीएसएल की विभिन्न सेक्टरों में बंटी एक बड़ी टाउनशिप है, लेकिन इसके सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को लेकर धरातल पर कुछ नहीं किया गया है। हर बार केवल कागजी बातें की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, प्रबंधन द्वारा खुले में कचरा फेंककर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ा जा रहा है। बैठक में अन्य उद्योगों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि सुंदरम स्टील प्लांट की शिकायत क्षेत्र भ्रमण के दौरान सही नहीं पाई गई, वहीं बीटीपीएस (बीटीपीएस) ने छाई निस्तारण की समस्या को दूर कर लिया है।
उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों सहायक अध्यापकों के लिए प्रवक्ता पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। शासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पदोन्नति संबंधी व्यावहारिक बाधाओं को दूर कर दिया है। अब 09 सितंबर 2025 से पहले नियुक्त सहायक अध्यापक बिना किसी असमंजस के प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के पात्र होंगे। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि इस संबंध में शासन ने 18 जून 2026 को एक शासनादेश जारी किया है। दरअसल, माध्यमिक शिक्षा परिषद के प्रस्ताव पर शासन ने 09 सितंबर 2025 को शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अर्हताओं को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के मानकों के अनुरूप करने का निर्णय लिया था। इस नए बदलाव के लागू होने के बाद उन शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएँ उत्पन्न हो गई थीं, जिनकी नियुक्ति उस तिथि से पहले तत्कालीन प्रचलित नियमों के आधार पर हुई थी। शिक्षक लंबे समय से इस असमंजस में थे कि क्या वे नई अर्हताओं के दायरे में आएंगे या नहीं। शासन ने इस समस्या का संज्ञान लिया और अब यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन सहायक अध्यापकों की नियुक्ति 09 सितंबर 2025 से पहले हुई है, वे पूर्व में प्रचलित व्यवस्था के तहत ही पदोन्नति पाने के लिए पूरी तरह अर्ह (Eligible) माने जाएंगे। इस निर्णय से प्रदेश के हजारों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो गया है, जो पात्रता संबंधी नियमों के कारण पदोन्नति की प्रक्रिया से बाहर होने की आशंका जता रहे थे। परिषद ने इस आशय की सूचना सभी संबंधित अधिकारियों, जिला विद्यालय निरीक्षकों और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेज दी है, ताकि पदोन्नति की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
मंदसौर जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में युवक कांग्रेस और एनएसयूआई 25 जून से 9 अगस्त तक जिले में 'छात्रों की गूंज' अभियान चलाएगी। यह अभियान नीट पेपर लीक प्रकरण और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर होगा। इस दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, पेपर लीक माफिया से संबंधों की निष्पक्ष जांच और परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई जाएगी। यह जानकारी मंगलवार देर शाम जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्रसिंह गुर्जर ने दी। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर देशभर में यह अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कोटा में छात्रों से संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना था। जिलाध्यक्ष बोले- छात्रों पर मानसिक बोझ डालाजिला अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव छात्रों पर मानसिक और आर्थिक बोझ डाल रहा है। कई विद्यार्थी परीक्षा में असफलता के भय और तनाव के कारण मानसिक परेशानियों से गुजर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में परिवारों का भारी आर्थिक खर्च हो रहा है। कोचिंग, हॉस्टल, भोजन और अध्ययन सामग्री पर होने वाला व्यय आम परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। महेंद्र गुर्जर ने कहा कि नीट की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर होने वाला निजी खर्च लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपए है, जबकि केंद्र सरकार का शिक्षा बजट करीब 1.4 लाख करोड़ रुपए है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे 'वसूली तंत्र' का रूप लेती जा रही है। आत्महत्या, रोजगार संकट जैसे मुद्दों को भी उठायाकांग्रेस नेताओं ने पेपर लीक, पुनर्मूल्यांकन संबंधी समस्याएं, बढ़ती छात्र आत्महत्याएं और रोजगार संकट जैसे मुद्दों को भी उठाया। अभियान के दौरान छात्र संवाद, जनसंपर्क अभियान, सोशल मीडिया गतिविधियां, सार्वजनिक प्रस्तुतियां और प्रेस वार्ताओं का आयोजन किया जाएगा। पत्रकार वार्ता में संगठन महासचिव अजय लोढ़ा ने कहा कि अभियान के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों से सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे। साथ ही ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग उठाई जाएगी जो युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर प्रदान करे तथा कम लागत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराए। शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इष्टा भाचावत ने भी शिक्षा पर बढ़ते निजी खर्च का मुद्दा उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई। इस दौरान जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष दुर्गेश पटेल, कांग्रेस नेता प्रवीण मांगरिया, शहर ब्लॉक युवक कांग्रेस अध्यक्ष सम्यक जैन सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की शिक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाते हुए, भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) से जुड़े स्कूलों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी ला रही है। इसके लिए यूडीआईएसई+ (शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली) कोड आवंटित किए जा रहे हैं और स्कूलों की श्रेणियों को अपग्रेड किया जा रहा है।
कांग्रेस ने देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। बस्ती में मंगलवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश प्रवक्ता पुनीत पाठक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। पुनीत पाठक ने केंद्र सरकार की चुप्पी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएं सामने आने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। पुनीत पाठक ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है, जबकि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर मौन है। पुनीत पाठक ने नीट परीक्षा के अलावा लेखपाल भर्ती, यूपीएसआई, पुलिस सिपाही भर्ती, आरओ-एआरओ, एसएससी जीडी और सहायक प्रोफेसर भर्ती जैसी कई परीक्षाओं में पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोप लगने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के दबाव और विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार को कुछ मामलों में पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव जिलाध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने पेपर लीक और परीक्षा संबंधी तनाव के कारण विभिन्न राज्यों में छात्रों की मौतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। चौधरी ने बताया कि जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लीक प्रश्नपत्रों के लिए अभ्यर्थियों से हजारों से लेकर लाखों रुपये तक वसूले गए। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में 23 राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं और देशभर में 90 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न होने से युवाओं में निराशा बढ़ रही है। कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के हितों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर देशव्यापी छात्रों की गूंज अभियान चलाने की घोषणा की। इस प्रेस वार्ता में साधू शरण आर्य, अलीम अख्तर, सुधीर यादव, राहुल चौधरी, प्रशांत पाठक, संजय कुमार, अवनीश पांडेय सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
चंदौली जिला मुख्यालय पर मंगलवार को कांग्रेस की जिला और शहर कमेटी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट परीक्षा में बड़े पैमाने पर प्रश्न पत्र लीक हुए थे। इस परीक्षा में 22 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए थे। सोशल मीडिया के माध्यम से यह खबर पूरे देश में सार्वजनिक होने के बाद केंद्र सरकार को दबाव में आकर परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा। जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2018 से 2026 के बीच कई बार नीट परीक्षा में गड़बड़ियां और पेपर लीक हुए हैं। इससे पहले 2015 में एआईपीएमटी (वर्तमान में नीट) का पेपर भी लीक हो चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीट के अलावा सीबीएसई की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में गड़बड़ियों, लेखपाल भर्ती परीक्षा, यूपी एसआई, आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा, एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा और सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी पेपर लीक के कारण भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। कहा कि नीट पेपर लीक से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण देश के विभिन्न राज्यों से अब तक 12 छात्रों ने अपनी जान गंवाई है। कांग्रेस पार्टी इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि सरकार उत्प्रेरित हत्या मानती है। दावा किया कि नीट पेपर लीक के बाद कांग्रेस द्वारा आवाज उठाने और सड़कों पर संघर्ष करने के चलते ही सरकार को पुनः परीक्षा करानी पड़ी। बताया कि पिछले 12 वर्षों में 23 प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले न के बराबर हैं। इस त्रासदी के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे न देने पर सवाल उठाया। इस बैठक में नगर अध्यक्ष बृजेश गुप्ता, मधु राय, दयाराम पटेल, मुनीर खान, माधवेंद्र मूर्ति ओझा, शिवेंद्र मिश्रा, मो. आजम, अमरदेव राम, मदन लाल, ज्ञानप्रकाश तिवारी और संतोष चौबे सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
गाजीपुर में कांग्रेस ने NEET और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। मंगलवार को सकलेनाबाद कैंप कार्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान जिलाध्यक्ष सुनील राम और शहर अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। जिलाध्यक्ष सुनील राम ने आरोप लगाया कि 2015 में AIPMT का पेपर लीक हुआ था, और उसके बाद 2018, 2021, 2022, 2024 तथा 2026 में NEET परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए। राम ने NEET पेपर लीक के मानसिक तनाव से 12 छात्रों की मौत का जिक्र करते हुए इसे सरकार की गलत नीतियों से प्रेरित 'हत्या' करार दिया। उन्होंने मांग की कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के सड़क पर उतरने के बाद ही सरकार को परीक्षा दोबारा कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। सुनील राम ने केंद्र सरकार पर शिक्षा बजट आधा करने का भी आरोप लगाया, जिससे गरीब छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। शहर अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा ने कहा कि पिछले 12 सालों में 23 राष्ट्रीय परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं और 90 से ज्यादा मामले सामने आए, लेकिन किसी को सजा नहीं मिली। उन्होंने इसे सरकार की नाकामी बताया। विश्वकर्मा ने इस दौरान लखनऊ अग्निकांड में मारे गए छात्रों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा बजट में कटौती से गरीब छात्रों का भविष्य अंधकार में है। प्रेस वार्ता में प्रमुख रूप से अजय कुमार श्रीवास्तव, चंद्रिका सिंह, हामिद अली, गुलबास यादव, वीरेंद्र यादव और आलोक जी सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बिहार के प्रशासनिक और शैक्षणिक गलियारों से इस वक्त की एक बेहद बड़ी, सनसनीखेज और सुधारवादी खबर सामने आ रही है। राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने और भ्रष्टाचार व लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री ने एक बहुत बड़ा और कड़क एक्शन लिया है। विभाग में लंबे समय से चल रही अनियमिताओं और कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोपों में कुल छह बड़े शिक्षा अधिकारियों पर एक साथ गाज गिरी है। इस बड़ी कार्रवाई के तहत एक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है, जबकि अन्य दागी और लापरवाह अधिकारियों की सीधे नौकरी से बर्खास्तगी (Dismissal) के लिए सक्षम प्राधिकार को कड़ी सिफारिश भेज दी गई है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो इस ऐतिहासिक कार्रवाई ने पूरे सूबे के शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा दिया है और कामचोर कर्मचारियों के हौसले पूरी तरह पस्त हो गए हैं।औचक निरीक्षण में खुली पोल: गायब मिले साहब और फाइलों में मिली भारी गड़बड़ीइस पूरे हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक एक्शन की इनसाइड स्टोरी को समझें तो शिक्षा मंत्री के निर्देश पर विभाग की उच्च स्तरीय टीमों ने राज्य के विभिन्न जिलों और प्रखंडों (ब्लॉक्स) के शिक्षा कार्यालयों और सरकारी स्कूलों का अचानक औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया था। इस विशेष चेकिंग अभियान के दौरान कई चौंकाने वाली हकीकतें सामने आईं। जांच टीम को पता चला कि कई अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना या आधिकारिक छुट्टी के अपने दफ्तरों से गायब थे, जिससे आम जनता और शिक्षकों के जरूरी काम हफ्तों से लटके पड़े थे। इसके अतिरिक्त, जब कार्यालयों के वित्तीय रिकॉर्ड, छात्रवृत्ति वितरण और मिड-डे मील से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों को खंगाला गया, तो उनमें व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं और गंभीर कमियां पाई गईं। इसी पुख्ता जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा मंत्री ने सीधे एक्शन की फाइल पर अपनी मुहर लगा दी।एक बीईओ तत्काल प्रभाव से निलंबित, बाकी अधिकारियों को नौकरी से हटाने की पुरजोर तैयारीशिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, कर्तव्य में लापरवाही बरतने, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने और अपने कार्यक्षेत्र में लगातार अनुपस्थित रहने के ठोस सबूत मिलने पर संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को तुरंत सस्पेंड कर विभागीय मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनके खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी चलाई जाएगी। वहीं, अन्य पांच अधिकारियों का मामला इससे भी अधिक गंभीर पाया गया है। इन अधिकारियों पर सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और लंबे समय से बिना किसी वैध कारण के ड्यूटी से नदारद रहने (Long Absenteeism) के संगीन आरोप सिद्ध हुए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्री ने इन्हें सेवा से पूरी तरह बर्खास्त करने की अंतिम सिफारिश सामान्य प्रशासन विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी है।बिहार की भौगोलिक और सुदूर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की बड़ी कवायदभौगोलिक और स्थानीय (Geographical Optimization) दृष्टिकोण से देखा जाए तो बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों जैसे उत्तर बिहार और सीमांचल के जिलों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। प्रखंड स्तर के अधिकारियों (BEO) और जिला शिक्षा कार्यालयों की सुस्ती के कारण पटना मुख्यालय से जारी होने वाली जनकल्याणकारी योजनाएं धरातल पर सही समय से नहीं पहुंच पाती हैं। शिक्षा मंत्री की इस कड़क कार्रवाई का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों पर पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर इस कड़े संदेश से यह साफ हो गया है कि अब पटना से दूर बैठे अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को भी निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षा विभाग के कार्यों की नियमित समीक्षा करें और गड़बड़ी मिलने पर तुरंत रिपोर्ट भेजें।आधुनिक एआई सर्च और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण है यह कदमआधुनिक जेनेरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) और डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स के लिहाज से 'Bihar Education Department Action' इस वक्त इंटरनेट पर तेजी से सर्च किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार राज्य में सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर लगातार कड़े कदम उठा रही है। शिक्षा मंत्री के इस हालिया फैसले को राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को सुधारने और शिक्षकों व अधिकारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के एक बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षाविदों और आम जनता ने सरकार के इस साहसिक कदम का स्वागत किया है। अब देखना यह होगा कि इस कड़े हंटर के बाद बिहार की चरमराई शिक्षा व्यवस्था की रफ्तार में कितना बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को दहशतगर्तों की B टीम बताया। NDTV को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा- जिन्हें डेमोक्रेसी में रिजेक्ट कर दिया गया था, वे भेष बदलकर आए हैं और अब सिस्टम के पीछे पड़े हैं। वे उन लोगों के लिए नारे लगाते हैं जो देश को बांटना चाहते हैं। उनकी पहचान हो गई है। दरअसल, सोशल मीडिया संगठन CJP पिछले 4 दिन से दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहा है। फाउंडर अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। प्रधान के इंटरव्यू की खास बातें… राहुल ने कहा- शिक्षा व्यवस्था आज वसूली तंत्र बना राहुल गांधी ने 17 जून को कोटा में स्टूडेंट्स के साथ एक रैली की थी। सुसाइड करने वाले स्टूडेंट्स की फोटो भी मंच पर लगाई गई थी। इस दौरान उन्होंने कहा था- भारत की शिक्षा व्यवस्था वसूली तंत्र बन गई है। देश का एजुकेशन सिस्टम युवाओं के सपने पूरे नहीं करता, सिर्फ उन्हें ऑप्शन देता है। आज लाखों युवा कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है। नीट पेपर लीक में अब तक 13 गिरफ्तारी 3 मई 2026 को नीट-यूजी का पेपर हुआ था। कुछ दिन पेपर के लीक होने का मामला सामने आया था। इसके बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया था। कई राज्यों में अभ्यर्थियों और विपक्षी दलों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। सरकार ने 12 मई को मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें डॉक्टर, कोचिंग संस्थानों के शिक्षक, स्कूल प्रधानाचार्य और अन्य आरोपी शामिल हैं। --------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… NEET री-एग्जाम; AIIMS से PMCH तक के छात्र सॉल्वर बने, 15-20 लाख में MP-UP समेत 6 राज्यों से मेडिकल स्टूडेंट हायर किए AIIMS, PMCH और गया मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों से MBBS की पढ़ाई कर रहे छात्र बिहार के लखीसराय में फर्जी परीक्षार्थी के रूप में पकड़े गए। जालसाजों ने 40 लाख रुपए में डॉक्टर बनाने का ठेका लिया था। इसका काम असली परीक्षार्थी की जगह फर्जी परीक्षार्थी बैठाना है। पूरी खबर पढ़ें…
स्कूल शिक्षा विभाग की ऑनलाइन स्वैच्छिक तबादला नीति शिक्षकों के लिए राहत के बजाय परेशानी बनती जा रही है। तबादला पोर्टल में कई तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिससे हजारों शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी पति-पत्नी के आधार पर तबादला चाहने वाले शिक्षकों को हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि तबादला नीति में कहीं भी मैरिज सर्टिफिकेट अनिवार्य नहीं बताया गया था। इसके बावजूद पोर्टल पर विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र अपलोड करने की शर्त आ रही है। कई शिक्षकों के पास यह दस्तावेज नहीं है, क्योंकि इसकी पहले कभी जरूरत नहीं पड़ी। आवेदन की अंतिम तारीख 24 जून होने से उनकी चिंता और बढ़ गई है। पहले से ही कई शिक्षक बाहर हो चुके शासकीय शिक्षक संगठन का कहना है कि 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता, जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों पर रोक और तीन साल की सेवा अवधि जैसी शर्तों के कारण पहले ही बड़ी संख्या में शिक्षक तबादला प्रक्रिया से बाहर हो चुके हैं। अब पोर्टल की तकनीकी समस्याओं ने बाकी शिक्षकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। 6 पॉइंट्स में समझिए टीचर्स की प्रमुख दिक्कतें म्युचुअल ट्रांसफर में आ रही तकनीकी दिक्कत रामप्रकाश सिंह और उनकी पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी हैं। वे पति-पत्नी आधार पर तबादला चाहते हैं, लेकिन पोर्टल पर मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है। उनका कहना है कि सर्विस बुक में पति-पत्नी की पूरी जानकारी दर्ज रहती है, फिर अलग से विवाह प्रमाण पत्र मांगने का औचित्य क्या है। जबलपुर के प्राथमिक शिक्षक दीपक शरणागत पारस्परिक तबादला (म्यूचुअल ट्रांसफर) करना चाहते हैं। लेकिन, जिन शिक्षक के साथ वे तबादला करना चाहते हैं, उनका नाम पोर्टल पर नहीं आ रहा। इससे उनका आवेदन पूरा नहीं हो पा रहा है। आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि पोर्टल की तकनीकी खामियां तुरंत दूर की जाएं। साथ ही आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए, ताकि सभी पात्र शिक्षकों को आवेदन का अवसर मिल सके। संगठन का कहना है कि समस्याएं समय पर नहीं सुलझीं तो बड़ी संख्या में शिक्षक तबादला प्रक्रिया से बाहर रह जाएंगे। ……………………………………. ये खबर भी पढ़ें… MP में मिनिस्टर के बंगले पर ट्रांसफर डील, SDO के 15, नर्स के 5 लाख फिक्स मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए प्रशासनिक तबादलों में कई विसंगतियां सामने आई हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग में नियमों की अनदेखी का खुलासा दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में भी हुआ था। स्टिंग में ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगते बाबू कैमरे में कैद हुए थे। भोपाल में 24 पटवारियों ने भी अपने तबादला आदेश निरस्त करवा लिए। नगरीय विकास एवं आवास विभाग में भी ऐसे अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए गए, जो कोर्ट से स्टे लेकर बैठे थे। एक सब-इंजीनियर का दो जगह तबादला कर दिया गया और रिटायरमेंट में दो महीने बचे अधिकारी को भी ट्रांसफर लिस्ट में शामिल किया गया। पूरी खबर पढ़ें…
शिक्षा का महाउत्सव: CM भूपेंद्र पटेल ने PM मोदी के वडनगर स्कूल से किया शाला प्रवेशोत्सव का शुभारंभ
गुजरात में शिक्षा के प्रति जागरूकता लाने और बच्चों का स्वागत करने के लिए 'कन्या केलवणी महोत्सव और शाला प्रवेशोत्सव' के 24वें संस्करण का आज (23 जून) से उत्साहपूर्वक शुभारंभ हो गया है। वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र ...
सहरसा विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता उर्फ आईपी गुप्ता ने सोमवार देर शाम वीडियो जारी कर बताया कि उन्होंने बिहार विधानसभा की याचिका समिति की बैठक में भाग लिया। बैठक में पांच महत्वपूर्ण विभागों की समीक्षा की गई, जिसमें सहरसा जिले के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों को उठाया गया। विधायक ने बताया कि बैठक में उठाए गए मामलों पर विभागीय स्तर से सकारात्मक पहल का आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा कि सहरसा के विकास को लेकर विभिन्न योजनाओं और लंबित मुद्दों को प्राथमिकता के साथ रखा गया। हर पंचायत में खेल मैदान निर्माण की पहल विधायक ने बताया कि खेल विभाग की समीक्षा प्रधान सचिव की अनुपस्थिति के कारण नहीं हो सकी। इसके बावजूद सहरसा जिले की प्रत्येक पंचायत में खेल मैदान निर्माण की दिशा में पहल की गई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाएं विकसित होने से युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे। सहरसा को परिवहन प्रमंडल बनाने की मांग परिवहन विभाग की समीक्षा के दौरान विधायक ने सहरसा को पूर्णिया के स्थान पर अलग परिवहन प्रमंडल बनाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सहरसा को परिवहन प्रमंडल का दर्जा मिलने से कोसी क्षेत्र के लोगों को काफी सुविधा होगी। समिति के माध्यम से इस प्रस्ताव को विभाग को भेजने पर सहमति बनी है। इसके अलावा वर्तमान बस अड्डे के स्थानांतरण और आधुनिक बस टर्मिनल निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया। साथ ही राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने की मांग की गई। पीएम आवास योजना की राशि जल्द मिलने का दावा नगर विकास एवं आवास विभाग की समीक्षा में विधायक ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहरसा के लिए राशि आवंटन को लेकर आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा कि अगले चार से पांच दिनों में राशि उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं बुडको और नगर निगम में एक-एक सहायक अभियंता की तैनाती एक से दो माह के अंदर किए जाने की बात कही गई। वेंडिंग जोन के लिए भी जल्द राशि आवंटित करने का आश्वासन मिला है। स्टॉर्म ड्रेनेज परियोजना और सैटेलाइट टाउनशिप पर चर्चा विधायक ने बताया कि 137 करोड़ रुपये की लागत वाली स्टॉर्म ड्रेनेज परियोजना से जुड़े मामले में कोर्ट से एक से दो माह के अंदर टेंडर निरस्तीकरण संबंधी आदेश प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा सैटेलाइट टाउनशिप के मास्टर प्लान पर भी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि इससे प्रभावित किसान अपनी जमीन केवल बिहार राज्य आवास बोर्ड को ही बेच सकेंगे। कृषि क्षेत्र में बाजार समिति और ग्रामीण हाट की मांग कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान विधायक ने सहरसा को बाजार समिति निर्माण योजना में शामिल करने की मांग उठाई। इस पर विभाग की ओर से सकारात्मक पहल का भरोसा दिया गया। उन्होंने मुंडन भारती कृषि महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने और जिले में ग्रामीण हाट विकसित करने की बात भी रखी। शिक्षा व्यवस्था सुधार को लेकर रखे प्रस्ताव शिक्षा विभाग की बैठक में विधायक ने बस्ती स्थित उर्दू मध्य विद्यालय को पीएम श्री योजना के तहत अपग्रेड करने का मुद्दा उठाया। इसके अलावा नीट और जेईई मेन्स जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के परीक्षा केंद्र पूर्णिया के बजाय सहरसा में स्थापित करने की मांग भी रखी गई। विधायक ने कहा कि समिति की बैठक में सहरसा के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से रखा गया है और आने वाले समय में इन योजनाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास किया जाएगा।
दरभंगा में बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि पीएम रेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत शिक्षा, अधोसंरचना, डिजिटल परिवर्तन और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा है और भारत वैश्विक स्तर पर अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है। उन्होंने विकसित भारत के संकल्प को जनभागीदारी के माध्यम से सफल बनाने का आह्वान किया। दरभंगा सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सुशासन, आधारभूत संरचना, डिजिटल क्रांति, शिक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं। सांसद ने प्रधानमंत्री जनधन योजना, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि और उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचा है। ये बातें मंत्री और सांसद ने मिथिला विश्वविद्यालय स्थित जुबली हॉल में जिला स्तरीय संगोष्ठी में कही। विकसित भारत का सपना साकार होगा सांसद ने दरभंगा क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने दरभंगा एयरपोर्ट के विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और एम्स से संबंधित पहलों को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रबुद्ध समाज विकसित भारत अभियान का सबसे मजबूत आधार है और युवाओं, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। विकसित भारत अभियान में सक्रिय योगदान देने की अपील कीकार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएमसीएच की पूर्व अधीक्षक डॉ. शीला साहु ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं, शिक्षाविदों और प्रबुद्ध वर्ग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी नागरिकों से विकसित भारत अभियान में सक्रिय योगदान देने की अपील की।पूर्व विधायक अमरनाथ गामी ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनभागीदारी में है। विकसित भारत के निर्माण में समाज के सभी वर्गों को अपनी सकारात्मक भूमिका निभानी होगी। कार्यक्रम में ये रहे शामिल कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री सुजीत मल्लिक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पूर्व जिला अध्यक्ष जीवछ सहनी ने किया।इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य रामनिहोरा राय, उमेश झा, प्रदेश मंत्री अंजनी निषाद, प्रदेश सह-कोषाध्यक्ष अंकुर गुप्ता, पूर्व महापौर गौड़ी पासवान, जिला प्रभारी उमेश चंद्र कुशवाहा, अभयानंद झा, राजेश रंजन, श्रवण मिश्र, संगीता साह, विकास चौधरी, संतोष पोद्दार, विजय चौधरी, रिंकी देवी, मीरा मेहता, जिला मीडिया प्रभारी मुकुंद चौधरी, साक्षी तिवारी, अमरनाथ सिंह, मुकेश महासेठ, वीरेंद्र पासवान, गुलशन चौधरी, सुमित मंडल, अवधेश झा, दीपक पंजियार सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं बुद्धिजीवी उपस्थित थे।
सीटी यूनिवर्सिटी में 30 से अधिक देशों के छात्रों व विशेषज्ञों ने साझा किए वैश्विक शिक्षा के अनुभव
भास्कर न्यूज़ | लुधियाना सीटी यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के विभाग ने प्रथम यूनाइटेड वर्ल्ड एजुकेशन कॉन्क्लेव (UWEC) 2026 का सफल आयोजन किया। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में शिक्षा, उद्योग और सरकारी क्षेत्र से जुड़े विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कॉन्क्लेव का उद्देश्य शिक्षा, कौशल विकास और वैश्विक कार्यबल की तैयारी को लेकर सहयोग, नवाचार और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में 30 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 300 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रणालियों, उभरते औद्योगिक रुझानों, करियर अवसरों और वैश्विक शिक्षण अनुभवों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। कॉन्क्लेव में जिम्बाब्वे उच्चायोग की मंत्री काउंसलर सोफिया होप तफाद्जवा चिम्बा, तृतीय सचिव निक्सन चिरेका, लेसोथो उच्चायोग के प्रथम सचिव बोहलोएकी त्लहाकु मोरोजेले, सिग्नेट इंस्टीट्यूट ऑस्ट्रेलिया की सीईओ नवदीप कौर रूपन, प्रबंध निदेशक पुष्पिंदर सिंह, बोर्ड निदेशक माइकल कैर तथा उद्योग विशेषज्ञ स्टीफन होहमैन सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत सीटी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नितिन टंडन के उद्घाटन संबोधन से हुई। उन्होंने छात्रों को वैश्विक स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार करने में अंतरराष्ट्रीय अनुभव, उद्योग-अकादमिक सहयोग और रोजगारोन्मुखी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर चांसलर सरदार चरणजीत सिंह चन्नी, प्रो-चांसलर डॉ. मनबीर सिंह, वाइस चेयरमैन हरप्रीत सिंह, कुलपति डॉ. नितिन टंडन, रजिस्ट्रार संजय खंडूरी और डीएसडब्ल्यू निदेशक इंजीनियर दविंदर सिंह भी उपस्थित रहे। चांसलर सरदार चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि यूनाइटेड वर्ल्ड एजुकेशन कॉन्क्लेव, सीटी यूनिवर्सिटी की वैश्विक स्तर पर जुड़े शिक्षण वातावरण के निर्माण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं, प्रो-चांसलर डॉ. मनबीर सिंह ने कहा कि आज शिक्षा राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है और ऐसे मंच छात्रों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं तथा उद्योग जगत को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर मिलकर काम करने का अवसर प्रदान करते हैं।
जिले के 86 निजी स्कूलों पर शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त दाखिला नहीं देने पर बड़ी कार्रवाई होने जा रही है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के अति-आवश्यक आदेश के बाद पूरे जिले के शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। दरअसल, इन स्कूलों ने चालाकी दिखाते हुए अपने यहां शुरुआती कक्षाओं में आरटीई के तहत होने वाले दाखिलों को शून्य (0) दिखाया था। इन्हें लगा था कि सरकार से फीस का पैसा (पुनर्भरण राशि) मिलने में देरी होती है। जांच में सामने आया कि इन्हीं स्कूलों ने उसी दौरान मोटी फीस लेकर दूसरे बच्चों को धड़ल्ले से एडमिशन दिए। यानी पैसे वाले बच्चों के लिए सीटें थीं, लेकिन गरीबों के लिए दाखिला बंद कर दिया गया। पूरा मामला हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (उज्ज्वल शर्मा बनाम राजस्थान राज्य) के बाद सामने आया। कोर्ट ने गत 27 मई को आदेश दिया कि आरटीई पोर्टल पर शून्य सीटें दिखाने वाले स्कूलों के पिछले दो सालों के रिकॉर्ड की गहन जांच की जाए। अब जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर टीमें इन स्कूलों में जाकर छात्र उपस्थिति रजिस्टर, परीक्षा परिणाम, फीस रिकॉर्ड और एस.आर. (स्कॉलर रजिस्टर) की आमने-सामने जाकर भौतिक जांच करेंगी। सभी चिन्हित स्कूलों को 7 दिन के भीतर अपनी सही रिपोर्ट विभाग को ईमेल के जरिए भेजने का सख्त निर्देश दिया गया है। शहरी क्षेत्र के सर्वाधिक 53 स्कूलों में गड़बड़ी नियम : गरीब बच्चों की सीटें शून्य नहीं रख सकतेआरटीई-2009 के नियम के तहत हर प्राइवेट स्कूल को अपनी शुरुआती कक्षा (जैसे नर्सरी या क्लास 1) में 25% सीटें गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। इन बच्चों की फीस सरकार देती है। नियम यह है कि अगर स्कूल में फीस देकर पढ़ने वाले बच्चों की सीटें भरी हैं तो गरीब बच्चों की सीटें शून्य नहीं रखी जा सकतीं। ऐसा करना सीधे तौर पर बच्चों के अधिकारों का हनन और धोखाधड़ी है। सामान्य बच्चों की फीस का 25 प्रतिशत हिस्सा वसूलेंगे जिन स्कूलों ने यह गड़बड़ी की है, उनसे आरटीई नियमों के तहत भारी जुर्माना वसूला जाएगा। इन स्कूलों ने गरीब बच्चों की जो सीटें छिपाई हैं, उन सीटों पर सामान्य बच्चों से ली जाने वाली फीस का 25% हिस्सा जुर्माने के रूप में वसूला जाएगा। विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है और जल्द ही निदेशालय के निर्देशानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. लोकेश भारती, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), उदयपुर
महासमुंद में छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और गृह मंत्री को भेजा गया है। महासंघ ने ड्राइवरों के सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है। महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के हजारों वाहन चालक दिन-रात सड़क परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनके हितों और सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुविधाएं मुहैया नहीं हैं। अपनी मांगों को लेकर ड्राइवरों ने पहले बस स्टैंड से पोस्टर-बैनर के साथ रैली निकाली। इसके बाद नारेबाजी करते हुए वे कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने संबंधित मंत्रियों के नाम ज्ञापन सौंपा। महासंघ की प्रमुख मांगों में वाहन चालक की दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में 20 लाख रुपए का बीमा शामिल है। इसके अलावा गंभीर रूप से घायल होने पर 10 लाख रुपए तक की सहायता राशि मुहैया कराने की मांग की गई है, ताकि पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल मिल सके। सड़क सुरक्षा और विशेष कानून बनाने पर जोर ज्ञापन में सड़क सुरक्षा नियमों को हाईवे पर सख्ती से लागू करने, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था विकसित करने और नियमित सुरक्षा अभियान चलाने पर जोर दिया गया है। महासंघ ने वाहन चालकों के लिए विशेष सामाजिक सुरक्षा कानून बनाने की भी आवश्यकता बताई है, जिससे उनके अधिकारों और सुरक्षा को कानूनी संरक्षण मिल सके। वर्दी भत्ता और पेंशन सुविधा की मांग ड्राइवर महासंघ ने सभी वाहन चालकों के लिए वर्दी, भत्ता योजना लागू करने और 55 वर्ष की आयु के बाद पेंशन सुविधा देने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले चालकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। हाईवे पर विश्राम गृह और टॉयलेट की व्यवस्था महासंघ ने लंबी दूरी तय करने वाले ड्राइवरों की सुविधा के लिए प्रत्येक 100 किलोमीटर पर विश्राम गृह, शेड और स्वच्छ टॉयलेट की व्यवस्था करने की मांग रखी है। इसके अलावा सार्वजनिक सड़कों पर चालकों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग भी की गई है। आवास और बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान की मांग ज्ञापन में प्रधानमंत्री आवास या अन्य आवासीय योजनाओं के तहत वाहन चालकों को घर निर्माण के लिए 5 लाख रुपए की सहायता राशि देने की मांग की गई है। साथ ही ड्राइवरों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा की विशेष व्यवस्था और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। लाइसेंस शुल्क में राहत और स्थानीय ड्राइवरों को प्राथमिकता महासंघ ने आर्थिक रूप से कमजोर चालकों को राहत देने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित निर्धारित 12 हजार रुपए की राशि समाप्त करने या उसका पुनर्मूल्यांकन करने की मांग की है। इसके अलावा प्रदेश के उद्योगों और संस्थानों में छत्तीसगढ़ के ड्राइवरों को 70 प्रतिशत प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई गई है। हर जिले में ट्रेनिंग और फिटनेस सेंटर खोलने की मांग ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में ड्राइविंग प्रशिक्षण की पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से चालकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए प्रत्येक जिले में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएं। साथ ही वाहनों की नियमित जांच के लिए फिटनेस सेंटर भी खोले जाएं, जिससे दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। आपातकालीन सेवा और रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग महासंघ ने सड़क दुर्घटनाओं में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जिले की पुलिस चौकियों में आपातकालीन सेवा वाहन अथवा फायर यूनिट की सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। इसके अलावा हाईवे के संवेदनशील क्षेत्रों में रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग की गई है, ताकि डीजल चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। 1 सितंबर को ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित करने की मांग महासंघ ने 1 सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित करने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि देश की परिवहन व्यवस्था में ड्राइवरों की महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने के लिए यह पहल आवश्यक है। मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और गृह मंत्री से मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि मांगें पूरी होने से प्रदेश के लाखों वाहन चालकों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा तथा सड़क परिवहन व्यवस्था और अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बन सकेगी।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के साथ दोहरा रवैया अपनाने का आरोप एक बार फिर लगा है। यह स्थिति लोक शिक्षण आयुक्त द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों के लिए एक जुलाई से हमारे एप के माध्यम से ई अटेंडेंस लगाने की अनिवार्यता के चलते बनी है। इसे देखते हुए शिक्षकों और शिक्षक संगठनों का कहना है कि ऐसी ही व्यवस्था शिक्षकों के मामले में भी लागू हो। शिक्षकों की ई-अटेंडेंस के लिए विभाग ने जानबूझकर जनवरी से मार्च 2026 तक का टाइम 90 प्रतिशत तय किया है। जबकि इस अवधि में शिक्षकों द्वारा विद्यालयों में परीक्षा लेने, मूल्यांकन करने, एसआईआर जैसी ड्यूटी की गई है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी नए आदेश में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले समस्त कार्यालयों एवं प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यरत शासकीय कर्मचारियों के लिए 1 जुलाई 2026 से हमारे शिक्षक एप के माध्यम से ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने कहा कि आदेश से स्पष्ट हो गया है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग के सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर समान रूप से लागू होगी। कौशल ने कहा कि जब ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता पूरे विभाग के लिए लागू की जा रही है, तब स्थानांतरण नीति में केवल शिक्षकों पर 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त लगाना न्यायसंगत नहीं है। जनवरी, फरवरी एवं मार्च माह 2026 के दौरान शिक्षक बोर्ड परीक्षा, मूल्यांकन कार्य, प्रशिक्षण, जनगणना एवं अन्य शासकीय दायित्वों में संलग्न रहे हैं, जिसके कारण तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं से उनकी ई-अटेंडेंस प्रभावित हुई है। 'तबादले में ई अटेंडेंस की अनिवार्यता की शर्त पर पुनर्विचार करे सरकार' उपेन्द्र कौशल ने कहा कि शासन से मांग की गई है कि स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति में ई-अटेंडेंस संबंधी कठोर एवं अव्यावहारिक शर्तों पर पुनर्विचार किया जाए और शिक्षकों को स्थानांतरण प्रक्रिया से वंचित न किया जाए। संगठन का मानना है कि स्थानांतरण नीति शिक्षक हितैषी, पारदर्शी एवं न्यायपूर्ण होनी चाहिए। शासकीय शिक्षक संगठन ने आशा व्यक्त की है कि प्रदेश सरकार शिक्षकों की समस्याओं एवं सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए स्थानांतरण नीति में आवश्यक संशोधन करेगी, जिससे हजारों शिक्षक अनावश्यक रूप से प्रभावित होने से बच सकें। इसके लिए स्कूल शिक्षा मंत्री और विभाग के सीनियर अफसरों से पुनर्विचार करने को कहा गया है।
भिवानी में सोमवार को कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी व शहरी अध्यक्ष प्रदीप गुलिया ने पत्रकार वार्ता की। देश भर में नीट परीक्षा रविवार ही समाप्त हो चुकी है। वहीं इसको लेकर कांग्रेस पार्टी ने भाजपा को घेरा। ग्रामीण प्रधान अनिरूद्ध चौधरी व शहरी प्रधान प्रदीप गुलिया ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर नीट परीक्षा लीक होने के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। भिवानी के शहरी व ग्रामीण जिला प्रधानों ने आरोप लगाया कि नीट में जिस प्रकार से घोटाला हुआ है। उसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दे। पूर्व में हुए इस पेपर के लीक होने के चलते देश के बहुत से प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को सुसाइड करना पड़ा तथा बड़ी संख्या में छात्र दोबारा पेपर के तनाव में रहे, इसकी जिम्मेदार सरकार को लेना चाहिए। हालही में राहुल गांधी ने कोटा में कोचिंग ले रहे परीक्षार्थियों के बीच जाकर उनकी आवाज को उठाया तथा इस बात पर चिंता व्यक्त की कि देश में जितना शिक्षा का बजट है, उससे अधिक धन बच्चों के अभिभावकों को उनकी कोचिंग पर खर्च करना पड़ता है। यह देश की शिक्षा प्रणाली के लिए सोचने का विषय है। जिस प्रकार एयरफोर्स का प्रयोग नीट के दूसरी बार हुए पेपर को लाने-ले जाने में किया गया, यह दर्शाता है कि शिक्षा तंत्र फेल था, इसीलिए एयरफोर्स की मदद लेनी पड़ी। नई शिक्षा नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता ग्रामीण प्रधान अनिरूद्ध चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी देश में रोजगार व अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जता चुके है कि देश का पैसा ऐसी जगह निवेश किया जाता है, जहां लेबर आधारित उद्योग नहीं है। जिसके चलते बेरोजगारी बढ़ी है। हालांकि इस व्यवस्था से अल्पकालीन तौर पर अर्थव्यवस्था के आंकड़े भले ही दिखे, परन्तु दीर्घकालीन में इससे बेरोजगारी बढ़ेगी। जो कि भविष्य के लिए चिंता की बात है। अनिरूद्ध चौधरी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में फिर से पुनर्विचार की आवश्यकता है। क्योंकि नई शिक्षा नीति में बच्चों में 8वीं से ही बोर्ड लाना शुरू किया गया है तथा परीक्षाओं का दबाव बढ़ने से उनका नैचुरल टैलेंट दब रहा है। बच्चे गलत कदम ना उठाएंजिला शहरी प्रधान प्रदीप गुलिया ने परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों से अपील की कि वे परीक्षाओं के लिए तैयारी भले ही करें, परन्तु इसके साथ चिंता ना ले। चिंता करना बात का हल नहीं है तथा सुसाइड जैसे कदम बच्चों के अभिभावकों सहित पूरे परिवार को पीड़ित करते है। ऐसे में बच्चों को ऐसे कदम उठाने से दूर रहना चाहिए तथा तनाव मुक्त तरीके से परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए तथा जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गौर करना चाहिए।
बिहार सरकार ने 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत सूबे के चिह्नित 24 हजार 471 बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार प्रशिक्षण देने के लिए विशेष केंद्र खोले जाएंगे, जिनमें अकेले नालंदा जिले के 311 और शेखपुरा के 640 बच्चे शामिल हैं। शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार के अनुसार, इन सभी बच्चों को उम्र सापेक्ष प्रशिक्षण देने के बाद नजदीकी स्कूलों से जोड़ दिया जाएगा। ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आगामी 10 जुलाई तक हर हाल में विशेष केंद्र चालू करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है, जहां छह से नौ महीने के भीतर बच्चों को नई और रोचक विधियों से उनकी उम्र के अनुसार कक्षा के स्तर तक लाया जाएगा। मैपिंग का काम 30 जून को पूरा करना होगा नालंदा के डीईओ आनंद विजय ने बताया कि इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए विद्यालय से बाहर के बच्चों के उपलब्ध आंकड़ों का सत्यापन कर उसे प्रबंध पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। बच्चों की संख्या के आधार पर केंद्रों की मैपिंग का कार्य 30 जून तक हर हाल में पूरा कर लिया जाना है। इसके बाद प्रत्येक केंद्र के लिए एक नोडल शिक्षक का चयन होगा, जिन्हें कम समय में बच्चों को उम्र के अनुसार दक्ष बनाने के लिए एक से छह जुलाई तक विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिन स्थानों पर ये केंद्र खुलेंगे, वहां केंद्र का नाम, नामांकित शिक्षक का नाम, संचालन की अवधि और बच्चों की सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। केंद्र शुरू होने से तीन दिन पहले बच्चों की दक्षता का बेसलाइन सर्वे होगा और उनके शैक्षणिक स्तर की प्रोफाइल केंद्र खुलने के सात दिनों के भीतर तैयार कर ली जाएगी। इसके साथ ही, यदि संबंधित क्षेत्र में इस श्रेणी का कोई अन्य बच्चा मिलता है, तो उसे भी इस केंद्र में शामिल कर लाभ दिया जाएगा। समस्तीपुर में सबसे अधिक बच्चे बिहार के विभिन्न जिलों में स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में काफी अंतर है। सूबे में सबसे अधिक समस्तीपुर में 1560, कटिहार में 1454, जहानाबाद में 1296, सारण में 1279, पटना में 1275, वैशाली में 1083, सुपौल में 1082 और सीतामढ़ी में 1281 बच्चे स्कूल से बाहर हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर में सबसे कम 68, पूर्णिया में 70 और पूर्वी चंपारण में केवल 74 बच्चे इस श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर बात की जाए तो पूरे देश में ऐसे बच्चों की संख्या 11 लाख 70 हजार 182 है, जिसमें सबसे बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश की है, जहां सर्वाधिक 7 लाख 73 हजार 835 बच्चे स्कूल से बाहर हैं। इसके विपरीत, देश में केरल, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप जैसे राज्य व केंद्र शासित प्रदेश भी हैं, जहां का एक भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं है।
हरियाणा के सेकेंडरी शिक्षा विभाग ने टीचिंग और नॉन टीचिंग कर्मचारियों के कैजुअल पेड लीव (CPL) से जुड़े एक विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। महानिदेशक सेकेंडरी शिक्षा कार्यालय की ओर से जारी नए आदेश में 9 मार्च 2026 के निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है। पहले जारी आदेश के तहत कर्मचारियों की CPL से संबंधित फाइलों को जिला उपायुक्त (DC) की अनुशंसा के बाद मुख्यालय भेजने की व्यवस्था की गई थी। विभाग ने अब इस शर्त को वापस लेते हुए पुराने आदेश को समाप्त कर दिया है। क्या था पुराने आदेश में 9 मार्च 2026 को जारी आदेश में कहा गया था कि शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के CPL से जुड़े मामलों को जिला स्तर पर उपायुक्त की अनुशंसा के बाद ही मुख्यालय भेजा जाएगा। इस व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और संगठनों में असंतोष था। उनका तर्क था कि इससे अवकाश संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी और अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया बढ़ रही है। अब क्या बदला 18 जून को महानिदेशक सेकेंडरी शिक्षा जितेंद्र कुमार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि, 09 मार्च 2026 के आदेश के तहत शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के CPL से संबंधित मामलों को जिला उपायुक्त की अनुशंसा के बाद मुख्यालय भेजने संबंधी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाते हैं। यानी अब CPL मामलों में DC की अनुशंसा वाली बाध्यता समाप्त हो गई है। आदेश की कॉपी किन अधिकारियों को भेजी नए आदेश की प्रतियां राज्य के सभी उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों, एससीईआरटी निदेशक, स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और निदेशालय की विभिन्न शाखाओं को भेजी गई हैं, ताकि तत्काल प्रभाव से इसका पालन सुनिश्चित किया जा सके।
शिक्षा-रोजगार के मुद्दों पर राज्यव्यापी अभियान चलाएगी कांग्रेस
सोनीपत | सुभाष चौक स्थित कांग्रेस भवन में शनिवार को प्रेस वार्ता हुई। अध्यक्षता ग्रामीण जिला अध्यक्ष संजीव दहिया ने की। मुख्य वक्ता सांसद सतपाल ब्रह्मचारी रहे। ब्रह्मचारी ने कहा कि युवा शिक्षा और रोजगार के दोहरे संकट से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और एनटीए से जुड़े विवादों ने छात्रों व अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस इन मुद्दों पर राज्यव्यापी जनजागरण अभियान शुरू करेगी। अभियान में राहुल गांधी के कोटा फैक्ट्री कार्यक्रम के बिंदुओं को छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग में वर्ष 2015 में लागू किए गए स्टाफिंग पैटर्न की पिछले 11 वर्षों से समीक्षा नहीं होने का असर अब सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। नियमों के अनुसार हर दो वर्ष में समीक्षा होनी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने अब तक एक बार भी संशोधन नहीं किया। इसके चलते कई विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के बावजूद शिक्षक नहीं हैं, जबकि कुछ स्कूलों में नामांकन घटने से शिक्षक अधिशेष हो गए हैं। राज्य में 2021-22 में 475 उच्च प्राथमिक स्कूलों को माध्यमिक स्तर तक क्रमोन्नत किया गया। फिर बजट 2022-23 की घोषणा के तहत सभी 3833 माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक स्तर तक क्रमोन्नत कर दिया गया। इससे पूर्व तथा इसके पश्चात सैकड़ों स्कूलों को क्रमोन्नत किया गया, नए संकाय और नए विषय खोले गए। मगर इन स्कूलों में स्टाफिंग पैटर्न के मुताबिक आज तक सभी शैक्षिक पद स्वीकृत नहीं किए जा सके हैं। पिछले 5 साल से लगातार नामांकन में गिरावट आ रही है। साल-दर-साल सरकारी स्कूलों में घटता-बढ़ता नामांकन न्यू स्टाफिंग पैटर्न में पदों का प्रावधान स्टाफिंग पैटर्न 30 अप्रैल 2015 के तहत नव क्रमोन्नत उच्च माध्यमिक स्कूलों में 1 प्रधानाचार्य, 3 व्याख्याता, 3 वरिष्ठ अध्यापक सहित 3 अध्यापक लेवल-द्वितीय, 1 शारीरिक शिक्षा अध्यापक, 2 अध्यापक लेवल प्रथम पद आवश्यक हैं। वहीं न्यू स्टाफिंग पैटर्न 2015 लागू करते समय यह प्रावधान किया गया था कि दो वर्ष बाद कक्षा 11 और 12 में निर्धारित छात्र संख्या होने पर अनिवार्य हिंदी तथा अनिवार्य अंग्रेजी के व्याख्याता पद स्वीकृत किए जाएंगे, लेकिन ये पद भी स्वीकृत नहीं किए जा सके हैं। पिछले साल सरकार को भेजे प्रस्ताव, मंजूरी नहीं शिक्षा विभाग ने वर्ष 2022-23 में क्रमोन्नत किए गए 3833 स्कूलों में 11,499 व्याख्याताओं सहित टीचिंग-नॉन टीचिंग के स्टाफ के 20,803 पदों के प्रस्ताव शिक्षा निदेशालय ने पिछले साल राज्य सरकार को भिजवाए थे। लेकिन वित्त विभाग से अभी तक पदों की मंजूरी नहीं मिली है। 13 हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों में हिंदी-अंग्रेजी व्याख्याता नहीं प्रदेश में वर्ष 2013 के बाद क्रमोन्नत किए गए किसी भी विद्यालय में अनिवार्य विषय हिंदी और अंग्रेजी के व्याख्याता पद स्वीकृत नहीं किए गए। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 19 हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों में से केवल 6 हजार विद्यालयों में ही इन विषयों के व्याख्याता पद स्वीकृत हैं। शेष 13 हजार विद्यालयों में केवल वैकल्पिक विषयों के व्याख्याता पद स्वीकृत हैं, जिससे भाषा विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 29 जून से स्कूल खुलेंगे। राज्य सरकार को चाहिए कि सभी स्कूलों में स्टाफिंग पैटर्न के मुताबिक शैक्षिक पद स्वीकृत किए जाएं। इस संबंध में राज्य सरकार को संगठन की ओर से ज्ञापन भेजा गया है। -महेंद्र पांडे, मुख्य महामंत्री, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
दो साल तक पोर्टल पर चलता रहा बंद स्कूल:एक तबादले ने उजागर की शिक्षा विभाग की बड़ी चूक
मप्र का स्कूल शिक्षा विभाग अक्सर अपने अजीबोगरीब कारनामों के लिए चर्चा में रहता है। अशोकनगर जिले से सामने आए एक मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जो स्कूल सालों पहले डूब क्षेत्र में आकर पूरी तरह बंद हो चुका था, उसे सरकारी रिकॉर्ड और पोर्टल पर सक्रिय दिखाकर वहां बकायदा एक शिक्षक का तबादला कर दिया। जब पीड़ित शिक्षक ने इस अस्तित्वहीन स्कूल में जाने से मना किया, तो अधिकारियों ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उसे परेशान करना शुरू कर दिया। यह प्रशासनिक तानाशाही तब थमी जब मामला कोर्ट और कलेक्टर की चौखट पर पहुंचा। जबकि विभाग ने दिसंबर 2025 में एक साथ 11 सरकारी और 27 निजी स्कूलों के साथ ही पगरा स्कूल को पोर्टल से बंद किया जहां शिक्षक का ट्रांसफर किया गया था। शिक्षक बोलता रहा जहां भेज रहे हो वह स्कूल अस्तित्व में ही नहीं फिर भी कर दिया ट्रांसफर यह पूरा मामला प्राथमिक शिक्षक रामगोपाल शिवहरे से जुड़ा है, जो शासकीय प्राथमिक विद्यालय मढ़ी तूमैन (विकासखंड अशोकनगर) में पदस्थ थे। 11 दिसंबर 2023 को विभाग द्वारा जारी एक मनमाने आदेश के तहत उनका तबादला शासकीय प्राथमिक विद्यालय पगरा विकासखंड चंदेरी (डाइस कोड: 23460509701) में कर दिया। हकीकत में शासकीय प्राथमिक विद्यालय पगरा कोई चलता हुआ स्कूल नहीं था। कम नामांकन और डूब क्षेत्र में आ जाने के कारण यह स्कूल पूरी तरह से बंद हो चुका था और धरातल पर इसका कोई वजूद ही नहीं बचा था। लेकिन विभाग के एजुकेशन पोर्टल पर बैठे जिम्मेदारों ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के इस बंद हो चुके स्कूल को जीवित दर्शा रखा था। । पोर्टल पर चालू थे 11 सरकारी, 27 निजी स्कूल जिले में पगरा प्राथमिक शाला अकेला ऐसा स्कूल नहीं था, जो चालू हो। जिले के विभिन्न विकासखंडों में कुल 11 सरकारी स्कूल पूरी तरह बंद हो चुके थे, लेकिन वे सभी पोर्टल पर चालू थे। इसके पीछे बीआरसीसी द्वारा बरती जा रही ढील थी, जो काम 2 साल पहले हो जाना था उसकी फाइल अफसरों तक 2 साल बाद पहुंचाई। इसके चलते पीएस माधोपुर, एमएस एन लिधोरा, पीएस आदिवासी लिधोरा, पीएस चक महोली, पीएस पगरा, पीएस ब्रजपुरा, पीएस गोकुलपुरा चक्क, पीएस ओखारीखेड़ा, पीएस रामनगर कॉलोनी इंडोर, पीएस शीतलपुर, पीएस ओझरपुर स्कूल जो बंद हो चुके थे पोर्टल पर चालू दिखाई दे रहे थे। इनकी प्रक्रिया 2 साल से चल रही थी 11 शालाएं शासकीय और 27 शालाएं अशासकीय थी जहां 0 नामांकन था। इन स्कूलों को बंद कर दिया था। इनकी प्रक्रिया 2 साल से चल रही थी जिसकी नोटशीट सभी बीआरसीसी ने बढ़ाई थी, डीईओ साहब के सिग्नेचर करके अस्थाई रूप से इन शालाओं को दिसंबर 2025 में बंद कर दिया। -राहुल शर्मा, डीपीसी अशोकनगर।
नीट (NEET) परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों को लेकर कांग्रेस पार्टी और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने शनिवार को शिवहर में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने शिवहर जीरोमाइल चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने नीट परीक्षा में पारदर्शिता की मांग करते हुए सरकार पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने और प्रभावित छात्रों को न्याय व मुआवजा देने की मांग उठाई। जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष अधिवक्ता मोहम्मद अफरोज आलम ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि नीट जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला : कांग्रेस कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहम्मद अफरोज आलम ने कहा कि नीट परीक्षा में सामने आए विवादों से छात्र और अभिभावक परेशान हैं। उन्होंने कहा कि बिहार सहित देश के कई राज्यों में छात्र और युवा इस मुद्दे को लेकर आवाज उठा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में छात्रों की समस्याओं को लेकर देशभर में अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा में अगर पारदर्शिता नहीं रहेगी तो मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय होगा। “क्या अब बच्चों को परीक्षा देने विदेश जाना पड़ेगा?” कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने नीट री-एग्जाम को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई छात्रों के परीक्षा केंद्र विदेशों तक में दिए गए हैं। उन्होंने सवाल करते हुए कहा, “क्या अब देश के बच्चों को परीक्षा देने के लिए यूएई के अबू धाबी जाना पड़ेगा? यह छात्रों के साथ अन्याय है। सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे छात्रों को परेशानी न हो और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले। एनटीए को भंग करने की मांग प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मांग की कि नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जब लाखों छात्रों के करियर का सवाल हो तो सरकार को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। साथ ही परीक्षा संचालन करने वाली संस्था एनटीए की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि छात्रों का विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे। पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश के युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल बयान देने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे भविष्य में इस तरह के विवाद दोबारा न हों। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
नंदपुरी स्थित राजपुरोहित समाज भवन में रविवार को 1008 संत खेताराम महाराज मंदिर की स्थापना वर्षगांठ श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मंदिर में नई ध्वजा चढ़ाई गई और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने भाग लेकर संत खेताराम महाराज के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। समारोह में पूर्व कोषाध्यक्ष भागीरथ सिंह ने लगातार तीसरी बार मंदिर में नई ध्वजा चढ़ाकर परंपरा का निर्वहन किया। विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद समाजबंधुओं ने दिव्य ज्योति के दर्शन किए और समाज में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। बताया गया कि इसी दिन नंदपुरी स्थित राजपुरोहित समाज भवन में मंदिर की स्थापना की गई थी। वर्षगांठ के अवसर पर ध्वजा परिवर्तन की परंपरा सालों से निभाई जा रही है। भागीरथ सिंह ने कहा कि समाज की ओर से उन्हें आजीवन मंदिर में वर्षगांठ के मौके पर नई ध्वजा चढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे वे पूरी श्रद्धा से निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनके बाद उनके पुत्र और आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज और मंदिर के प्रति अपना दायित्व निभाएंगी। कार्यक्रम के दौरान समाजबंधुओं ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प भी लिया। वक्ताओं ने समाज में शिक्षा के प्रसार और विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। समारोह में ओपी राजपुरोहित, बाबू सिंह, जालम सिंह, भंवर सिंह, दिलीप सिंह, अमर सिंह, गोपाल सिंह खेड़ी, रत्न सिंह रूपावास, लालसिंह मथानियां सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि भागीरथ सिंह का शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इससे पूर्व उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय वणदार के विद्यार्थियों को वर्षभर की शिक्षण सामग्री वितरित की थी। उनके इस योगदान की विद्यालय प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने सराहना की थी। उन्होंने विद्यालय को भविष्य में भी हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया था।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अंशकालिक अनुदेशक और शिक्षामित्रों को बड़ी राहत दी है। उन्हें जून महीने का मानदेय 15 दिन के बजाय पूरे महीने का मिलेगा। बलिया के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मनीष कुमार सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा के तहत कार्यरत अनुदेशक और शिक्षामित्रों के जून व जुलाई माह के मानदेय की लिमिट राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा जारी कर दी गई है। राज्य परियोजना कार्यालय के निर्देशों के अनुसार, अनुदेशक और शिक्षामित्रों को जून माह का मानदेय पूरे महीने का दिया जाएगा। 15 दिन की अतिरिक्त धनराशि जुलाई माह की जारी लिमिट से समायोजित की जाएगी। बीएसए ने यह भी बताया कि पूरे जून माह का मानदेय 25 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से भुगतान कर दिया जाएगा।
NEET पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर रविवार को दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर रातभर जंतर-मंतर पर बैठे रहे। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके और उनके समर्थक शनिवार रात से जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने शनिवार शाम 5 बजे के बाद प्रदर्शन की अनुमति खत्म होने की बात कहकर जगह खाली करने के लिए कहा था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी रातभर जंतर-मंतर पर बैठे रहे। दीपके ने लोगों से आंदोलन का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने NEET री-एग्जाम देने वाले छात्रों से भी परीक्षा के बाद प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। इससे पहले शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे 27 जून से अनशन शुरू करेंगे। CJP के प्रदर्शन की 5 तस्वीरें… पानी और लाइट को लेकर शिकायत अभिजीत ने आरोप लगाया कि शनिवार रात जंतर-मंतर पर टॉयलेट्स में पानी नहीं आ रहा था। उन्होंने X पर लिखा- अधिकारियों से अपील करता हूं कि जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल के शौचालयों का पानी बंद न किया जाए। शनिवार रात से सार्वजनिक शौचालयों में पानी नहीं आ रहा है। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना था कि रात में कुछ समय के लिए लाइट बंद कर दी गई थी, जिसके चलते टॉयलेट तक पहुंचने में दिक्कत हुई। शनिवार को जंतर-मंतर पर पहुंचे सैकड़ों समर्थकों ने थाली और चम्मच बजाकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। दीपके ने NEET पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपए मुआवजा देने की भी मांग की है। CJP का 15 दिनों में 8 शहरों में प्रदर्शन 39 दिनों में 15 छात्रों ने सुसाइड किया देश में पिछले 39 दिनों में NEET एग्जाम से जुड़े 15 छात्र-छात्राएं सुसाइड कर चुके। हैदराबाद में शनिवार को 19 साल की NEET अभ्यर्थी शेख सना ने आत्महत्या कर ली। मौके से एक सुसाइड नोट मिला है। पुलिस का मानना है कि वह परीक्षा के दबाव में थी। सना आज होने वाले NEET री-एग्जाम में शामिल होने वाली थी। CJI की टिप्पणी के बाद बनी CJP, युवाओं को कॉकरोच कहा था कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई। 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं। इस टिप्पणी के अगले दिन, 16 मई को अमेरिका में रह रहे अभिजीत दीपके ने CJP की शुरुआत की और सोशल मीडिया पर पार्टी के अकाउंट बनाए। 22 मई को उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका शुरू की, जिसे 8 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिलने का दावा किया गया। 10 जून तक CJP ते इंस्टाग्राम पर 2.27 करोड़ फॉलोअर्स थे। अब इसमें दो लाख की गिरावट आई है। फिर भी यह संख्या भाजपा के 94 लाख और कांग्रेस के 1.37 करोड़ फॉलोअर्स से ज्यादा है। एक्स पर CJP के 2.79 लाख फॉलोअर्स हैं। महाराष्ट्र के रहने वाले अभिजीत AAP से जुड़े रहे 30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन रात को भी जारी: शाम तक की परमिशन थी; फाउंडर दीपके बोले- शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे तक नहीं हटेंगे NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन कर रही है। CJP को शनिवार शाम 5 बजे तक ही प्रदर्शन की अनुमति थी लेकिन फाउंडर अभिजीत दीपके समेत प्रदर्शनकारी रातभर वहां मौजूद रहे। पूरी खबर पढ़ें…
जन्म से नहीं, शिक्षा के कर्म से पिता:1000 बच्चों का सहारा बने ‘बाबूजी’, सपनों को दे रहे हैं उड़ान
पिता सिर्फ वह नहीं होता, जो उंगली पकड़कर अपने बच्चे को चलना सिखाए। पिता वह भी होता है, जो उन बच्चों का हाथ थाम ले, जिनके पास सहारा देने वाला कोई नहीं होता। शहर की स्लम बस्तियों में रहने वाले एक हजार से अधिक बच्चों के लिए राकेश श्रीवास्तव ऐसे ही बाबूजी हैं। 67 वर्षीय बाबूजी कोरोना के समय अनाथ बच्चों का जीवन संवारने का संकल्प लिया। यही से शुरू हुआ उनका सफर। वह अभी तक एक हजार से ज्यादा बच्चों को पढ़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि साल 2021 में राज्य स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संचार संस्थान में मैनेजमेंट की नौकरी से रिटायर होने के बाद बेसहारा बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उनकी कक्षाएं सिकंदर कंपू, कैंसर पहाड़िया, चंद्रवदनी का नाका सहित शहर में पांच स्थानों पर चलती हैं। उन्होंने स्लम बस्तियों में रहने वाली बेटियों का दाखिला कॉलेजों में अपने खर्चे से कराया। अब वे 8 बेटियां शहर के अलग-अलग स्थानों पर संचालित कक्षाओं में पढ़ाती हैं। बाबूजी ने जब इस काम की शुरुआत की तो उनके साथ 3 से 4 लोग थे। धीरे-धीरे उनके पढ़ाए बच्चे ही इस कार्य में जुड़ गए। जिसकी बदौलत करीब एक हजार से ज्यादा बच्चों को शिक्षा से जोड़ा है। उनके गुरुकुल से निकलकर कई बच्चे कॉलेजों में पहुंच रहे हैं।
फोरम की बैठक में शिक्षा व लीज नीति पर चर्चा
सिटी रिपोर्टर | बोकारो बोकारो अनएडेड स्कूल्स मैनेजमेंट फोरम की जनरल बॉडी मीटिंग सेक्टर-1 स्थित एक होटल में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। बैठक में शहर के विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्राचार्यों, प्रबंधकों एवं शिक्षा जगत से जुड़े सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में फोरम के अध्यक्ष एसपी सिंह, सचिव डॉ. डीएन प्रसाद, कोषाध्यक्ष अक्षत गुप्ता, समन्वयक महेश त्रिपाठी तथा अन्य सम्मानित सदस्यों की उपस्थिति रही। शुभारंभ अभिषेक कुमार प्राचार्य जीजीपीएस बोकारो ने अतिथियों के स्वागत के साथ किया। पिछली बैठक की समीक्षा की गई। इस दौरान शिक्षा संस्थानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेष रूप से चल रहे न्यायालयीन मामलों तथा सेल नई लीज नवीनीकरण नीति पर विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित सदस्यों ने अपने विचार साझा किए तथा विद्यालयों के हितों की रक्षा के लिए संभावित समाधान और रणनीतियों पर चर्चा की। इसके अलावा वार्षिक सदस्यता शुल्क, नए सदस्यों के स्वागत तथा शिक्षा एवं प्रशासन से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर भी सार्थक संवाद हुआ। अंत में सभी सदस्यों ने बोकारो के शैक्षिक विकास एवं अनएडेड विद्यालयों के हितों की सुरक्षा हेतु सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प दोहराया।
बैठक में शिक्षा गुणवत्ता, एप पर हाजिरी व पौधरोपण पर हुई चर्चा
भास्कर न्यूज | कुकदूर नए शैक्षणिक सत्र को सुव्यवस्थित व गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से कुई संकुल में संचालित शासकीय, अशासकीय प्राथमिक तथा माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान पाठकों की समीक्षा बैठक संकुल प्राचार्य ने ली। शिक्षक जितेंद्र कुमार कश्यप ने बताया कि समीक्षा बैठक का उद्देश्य नए शिक्षा सत्र की तैयारी की समीक्षा करना तथा विद्यालयों में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना था। बैठक में शाला प्रवेश उत्सव व संकुल स्तरीय प्रवेश अभियान को सफल बनाने पर जोर दिया गया। पाठ्यपुस्तकों की स्कैनिंग, वितरण तथा शेष बची पुस्तकों के समुचित प्रबंधन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए। विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, सभी आवश्यक पंजी को अद्यतन रखने तथा यू-डाइस पोर्टल पर विद्यार्थियों के प्रोग्रेस की समय पर प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए पौधरोपण, वाटर हार्वेस्टिंग एवं सोखता गड्ढों के निर्माण, न्योता भोजन कार्यक्रम व 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। वीएसके एप में उपस्थिति दर्ज करें: वीएसके एप के माध्यम से शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की प्रतिदिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने, मध्याह्न भोजन (एमडीएम) की ऑनलाइन एंट्री नियमित रूप से करने तथा ऑनलाइन अवकाश प्रणाली का पालन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। जर्जर विद्यालय भवनों में शाला संचालन नहीं करने तथा भवन एवं किचन शेड के रंगरोगन कार्य को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए। छात्रवृत्ति, आईपीआर अपलोड, शिक्षक दैनंदिनी का नियमित संधारण, पाठ्यक्रम विभाजन पंजी, जाति, निवास व आय प्रमाण पत्र संबंधी कार्य पर चर्चा की।
शिक्षा ग्रहण कर बेहतर करियर बनाने किया प्रेरित
भास्कर न्यूज | कुकदूर शासकीय नवीन कॉलेज कुई-कुकदूर ने संस्थागत सामाजिक दायित्व (आईएसआर) के तहत ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के प्रति जागरूक और प्रेरित करने के उद्देश्य से शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल ग्राम कामठी में विशेष अकादमिक कार्यक्रम किया। प्राचार्य डॉ.जीए घनश्याम के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने स्कूली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और बेहतर करियर की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्राध्यापकों एवं स्टाफ ने विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों पर विशेष कक्षाओं के माध्यम से मार्गदर्शन दिया। अंग्रेजी सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों की जटिल अवधारणाओं को सरल एवं सहज भाषा में समझाया गया, जिससे विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और विषयों के प्रति रुचि बढ़ी। विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसिलिंग सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें उच्च शिक्षा के विभिन्न विकल्पों, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों तथा व्यक्तित्व विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने और शिक्षा को सफलता का सबसे प्रभावी माध्यम मानने के लिए प्रेरित किया गया। संयुक्त बैठक में शिक्षा संबंधित हुई चर्चा: अकादमिक सत्र के बाद शासकीय नवीन कॉलेज कुई-कुकदूर के प्राध्यापकों व ग्राम कामठी स्कूल के प्रबंधन और शिक्षकों के बीच संयुक्त बैठक हुई। स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, विद्यार्थियों को कॉलेज जीवन के लिए तैयार करने तथा उनके सर्वांगीण विकास के लिए साझा प्रयासों पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों संस्थानों ने भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कोटपूतली-बहरोड़ जिले के पावटा उपखंड स्थित ग्राम सुजातनगर में नट समाज उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने नट समुदाय को शिक्षा के माध्यम से अपने कौशल को निखारने और उत्थान की ओर बढ़ने का आह्वान किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर श्री दादी रूपा सती के वार्षिक मेले में भी शिरकत की। कार्यक्रम में नट समाज उत्थान सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञान सिंह और प्रदेश अध्यक्ष कुशाल नट सहित समाज के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल का 51 किलो फूलों की माला, साफा और प्रतीक चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया। अपने संबोधन में राज्यपाल बागडे ने घुमंतू समुदायों के ऐतिहासिक योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि नट समाज ने महाराणा प्रताप के संघर्षों और स्वतंत्रता आंदोलन सहित विभिन्न ऐतिहासिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्यपाल ने नट समुदाय की पारंपरिक कला और कौशल को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बताया। युवा कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों की प्रशंसा राज्यपाल ने नट समाज के युवा कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों और उनके एकाग्रता कौशल की प्रशंसा की, जिससे उनका उत्साहवर्धन हुआ। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह बौद्धिक क्षमता विकसित करने, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर प्रदान करने का माध्यम है। राज्यपाल ने समुदाय के लोगों से अपने बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा से जोड़ने और सरकारी स्कूलों व छात्रावासों में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला। युवाओं से सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का आह्वान उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया, साथ ही परंपराओं को संजोते हुए आधुनिकता के साथ आगे बढ़ने को सशक्त समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। इस अवसर पर राज्यपाल ने नट समुदाय की विभिन्न मांगों को भी सुना। उन्होंने चिकित्सा, आवास और शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
होशियारपुर की प्रसिद्ध लेखिका, अध्यापिका और समाज सेविका श्रीमती अंजू वी. रत्ती को कनाडा की धरती पर एक विशेष अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है। उन्हें कनाडा की सांसद रूबी सहोता द्वारा उनके ब्रैम्पटन स्थित कार्यालय में 'सर्टिफिकेट ऑफ रिकॉग्निशन' (Certificate of Recognition) प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें पंजाबी साहित्य, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में दिए गए उनके बहुमूल्य योगदान के लिए मिला है। सांसद रूबी सहोता द्वारा सौंपे गए सम्मान पत्र में अंजू वी. रत्ती की उत्कृष्ट सेवाओं की भरपूर सराहना की गई है। उन्हें एक समर्पित अध्यापिका, प्रतिभाशाली लेखिका और समाज के प्रति प्रतिबद्ध नेतृत्वकर्ता के रूप में मान्यता दी गई है, जिन्होंने अपने ज्ञान और रचनात्मकता से समाज को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। अंजू वी. रत्ती की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि से उनके गृह जिले होशियारपुर, मित्रों और पूरे पंजाबी साहित्य व शिक्षा जगत में खुशी की लहर है। इस विशेष मुलाकात के दौरान अंजू वी. रत्ती ने अपनी लिखी हुई पुस्तकें भी सांसद रूबी सहोता को भेंट कीं। सांसद ने विशेष रूप से उनके द्वारा बाल साहित्य और शिक्षा के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की तारीफ की और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। 25 वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय हैं अंजू रत्ती उल्लेखनीय है कि अंजू वी. रत्ती पिछले करीब 25 वर्षों से साहित्य सृजन, अध्यापन और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। इस लंबे सफर में उन्हें देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा पहले भी सम्मानित किया जा चुका है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर खुशी जताते हुए अंजू रत्ती ने कहा कि कनाडा की धरती पर सांसद के हाथों यह सम्मान पाना उनके लिए बेहद गर्व की बात है। इस सम्मान ने साहित्य और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ा दिया है। उन्होंने अपनी इस सफलता के लिए अपने परिवार, मित्रों, पाठकों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया।
मोतिहारी में जिला कांग्रेस कमेटी ने नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में प्रदर्शन किया। कचहरी चौक पर आयोजित इस एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि भूषण राय उर्फ गप्पू राय ने किया। धरना के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने नीट परीक्षा में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर चिंता व्यक्त की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में है, और सरकार इस गंभीर मुद्दे पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। ''देश का युवा कई मोर्चों पर संकट का सामना कर रहा'' जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि भूषण राय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश का युवा कई मोर्चों पर संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने बेरोजगारी के चरम पर होने और महंगाई से आम लोगों की कमर टूटने का जिक्र किया। राय ने शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं, विशेषकर प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, को युवाओं के विश्वास पर गहरा आघात बताया। उन्होंने कहा कि इससे मेहनती छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है और उनकी वर्षों की तैयारी व्यर्थ जा रही है। नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग उठाई धरना-प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
दरभंगा में नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, बढ़ती बेरोजगारी और बेलगाम महंगाई के विरोध में आज जिला कांग्रेस कमेटी अर्बन के देखरेख में लहेरियासराय स्थित पोलो मैदान धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व अर्बन जिलाध्यक्ष डॉ. जमाल हसन ने किया। धरना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लहेरियासराय टावर तक मार्च निकाला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कर विरोध जताया। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता हुए शामिल धरना-प्रदर्शन में बिहार विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता डॉ. मदन मोहन झा, जिला कांग्रेस कमेटी रूरल के जिलाध्यक्ष मिथिलेश चौधरी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए। धरना को संबोधित करते हुए डॉ. जमाल हसन ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। नीट परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि देश का युवा बेरोजगारी से त्रस्त है और पढ़े-लिखे नौजवान रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। वहीं लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। खाद्य पदार्थों, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता डॉ. मदन मोहन झा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता के अधिकारों और युवाओं के भविष्य की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ती रहेगी। उन्होंने नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा डॉ. झा ने कहा कि लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। अभिभावक जमीन बेचकर और कठिन परिश्रम कर बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएं उनके सपनों को तोड़ देती हैं। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है और इस मामले में प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। रूरल जिलाध्यक्ष मिथिलेश चौधरी ने कहा कि देश और प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से परेशान है। युवाओं के सपनों को लगातार कुचला जा रहा है, जबकि किसानों, मजदूरों और गरीबों की समस्याओं पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनहित के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष करती रहेगी और जनता की आवाज बुलंद करती रहेगी। मिथिलेश चौधरी से कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है। परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही गड़बड़ियों से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। दोनों नेताओं ने कहा कि देश का छात्र न्याय मांग रहा है,युवा रोजगार मांग रहा है और जनता महंगाई से राहत मांग रही है,लेकिन सरकार जवाब देने से बच रही है। कार्यक्रम के अंत में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि युवाओं, छात्रों और आम जनता से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
मुजफ्फरपुर में NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और छात्र हितों की अनदेखी के विरोध में आज जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरैयागंज टावर पर शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कर उनके इस्तीफे की मांग उठाई। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने किया। प्रदर्शन से पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय से सरैयागंज टावर तक विरोध मार्च निकाला। मार्च में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल मार्च में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की। सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि NEET समेत अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी वक्ताओं ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि परीक्षा संचालन में गड़बड़ियां हुई हैं, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना चाहिए। कार्यक्रम में जूही प्रीतम समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने छात्र हितों की रक्षा, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की। पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
कांग्रेस पार्टी ने आज गयाजी में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों के विरोध में प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष रजनीश कुमार झुना के नेतृत्व में राजेंद्र आश्रम स्थित कांग्रेस कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा भगाओ, देश बचाओ, महंगाई पर लगाम लगाओ और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो जैसे नारे लगाए। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा, जिसमें विभिन्न जनसमस्याओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। केंद्र सरकार पर हमला बोला सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रजनीश कुमार झुना ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई ने आम जनता का जीवन कठिन कर दिया है। खाद्य पदार्थों, गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से गरीब और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। झुना ने बेरोजगारी की समस्या को भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि लाखों युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन सरकार उनके लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बार-बार लीक हो रहे हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। देश के युवाओं का विश्वास तोड़ा उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने देश के युवाओं का विश्वास तोड़ा है। छात्र सालों तक मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। झुना ने इसे केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए इस मामले में जवाबदेही तय करने की बात कही। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के कारण आम लोगों का जीवन संकट में है। सरकार को जनता की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पूरे बिहार में व्यापक जनआंदोलन चलाएगी। प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनता के हितों की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में राज्यभर में सड़क पर उतरकर चक्का जाम और बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस भाई ओमकार, विद्या शर्मा, युगल किशोर सिंह, सुनील पासवान, नवाव अली, मोहम्मद समालदूण, अशोक प्रसाद भारती समेत कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
शिक्षा में एक नये युग एवं शैक्षिक क्रांति की आहट
आज पूरी दुनिया शिक्षा के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां ज्ञान का विस्तार तो अभूतपूर्व हुआ है, लेकिन जीवन मूल्यों का क्षरण भी उतनी ही तेजी से दिखाई देता है। विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधासंपन्न बनाया है, लेकिन मानसिक तनाव, हिंसा, प्रतिस्पर्धा, नैतिक संकट और मानवीय संवेदनाओं के क्षय जैसी ... Read more
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को बीच में ही पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) से रोकने के लिए केजरीवाल सरकार के शिक्षा निदेशालय ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब परीक्षाओं में असफल या फेल होने वाले छात्रों को स्कूल से बाहर नहीं निकाला जाएगा और न ही उनकी पढ़ाई अधूरी छूटेगी। अक्सर देखा जाता था कि नौवीं या ग्यारहवीं कक्षा में फेल होने के बाद छात्र निराश होकर स्कूल छोड़ देते थे या स्कूल प्रशासन उन्हें दोबारा दाखिला देने में आनाकानी करता था। इस गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने अब नीतिगत स्तर पर बड़ा बदलाव कर दिया है।क्लास में फेल होने वाले हर बच्चे को मिलेगा दोबारा रेगुलर एडमिशन दिल्ली शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education) द्वारा जारी किए गए नए सर्कुलर के अनुसार, अब राजधानी के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रिंसिपलों को यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे फेल होने वाले किसी भी छात्र को री-एडमिशन (दोबारा दाखिला) देने से मना नहीं कर सकते। इन बच्चों को भी अन्य नियमित छात्रों की तरह ही स्कूल आने, कक्षाओं में बैठने और सभी शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने का पूरा अधिकार होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन से असफलता का डर निकालना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़े रखना है।कमजोर छात्रों के लिए स्कूलों में चलेंगी स्पेशल रेमेडियल क्लासेज सिर्फ दोबारा दाखिला देना ही इस नियम का हिस्सा नहीं है, बल्कि फेल हुए छात्रों की पढ़ाई को मजबूत करने के लिए स्कूलों को विशेष रणनीति बनाने को कहा गया है। इन बच्चों के लिए स्कूल के समय के दौरान या बाद में स्पेशल रेमेडियल क्लासेज (अतिरिक्त कक्षाएं) आयोजित की जाएंगी। इसमें शिक्षकों द्वारा उन विषयों पर खास ध्यान दिया जाएगा जिनमें छात्र कमजोर हैं या फेल हुए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यक्तिगत ध्यान और अतिरिक्त सहयोग से छात्र न केवल अपनी कमियों को सुधार सकेंगे, बल्कि अगली परीक्षा में बेहतर अंकों के साथ पास भी हो सकेंगे।ड्रॉपआउट रेट को जीरो पर लाने के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली सरकार का यह फैसला नई शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षा के अधिकार (RTE) के मूल सिद्धांतों को जमीन पर उतारने जैसा है। अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे एक बार फेल होने के बाद मजदूरी या अन्य कामों में लग जाते थे, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता था। इस नए नियम के आने के बाद दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। दिल्ली के अभिभावकों और शिक्षक संगठनों ने सरकार के इस छात्र-हितैषी फैसले का स्वागत किया है और इसे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला कदम बताया है।
बचपन को श्रम नहीं, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार मिलें
बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026 हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। ... Read more
त्रिभाषा फार्मूला है भारत की शिक्षा का नया क्षितिज
भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा व्यवस्था को किस भाषा में संचालित किया जाए और बच्चों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़ाई जाएं, यह ... Read more
ललित सुरजन की कलम से - शिक्षा और परीक्षा
'जब हम पढ़ रहे थे, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम तब भी थे।
सरकारी स्कूलों की चुनौतियां और बदलता शिक्षा परिदृश्य
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, सामाजिक गतिशीलता और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की आधारशिला है।
Fact Check: क्या बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा लड़कियों को शिक्षा की जरूरत नहीं? सच जानिए
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
कन्नड़ मूवी 'केडी: द डेविल' के गाने 'सरके चुनर' पर विवाद अभी भी जारी है। इस गाने के बोल और फिल्मांकन पर बढ़ते विवाद के बाद नोरा फतेही को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के समक्ष पेश होना पड़ा। नोरा ने न केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि भविष्य के लिए एक ...
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु का रिश्वत लेते हुए वीडियो फर्जी और एआई जनरेटेड है
बूम ने पाया कि ब्रात्य बसु का वीडियो गूगल के SynthId का उपयोग करके एआई द्वारा जनरेट किया गया है.
समानता और शिक्षा की क्रांतिकारी मशाल: सावित्रीबाई फुले
10मार्च सावित्रीबाई फुले महापरिनिर्वाण दिवस भारतीय समाज में जब भी शिक्षा,समानता और सामाजिक न्याय की बात उठती है,तो एक नाम इतिहास के पन्नों से निकलकर हमारे सामने खड़ा हो जाता है—सावित्रीबाई फुले।10मार्च को उनका महापरिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है,बल्कि यह दिन उस सामाजिक चेतना को याद करने का अवसर है,जिसने सदियों ... Read more
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समर्थन से भारत शिक्षा के सभी स्तरों पर एआई शिक्षण और रिसर्च को एकीकृत करके खुद को एक वैश्विक एआई महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है
शिक्षा को हिंसक नहीं, संवेदनशील बनाना होगा
देश में इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और सामान्य परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा का मौसम केवल प्रश्नपत्रों और परिणामों का नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, चिंता और असुरक्षा का मौसम बनता जा रहा है। छात्रों के चेहरों पर भविष्य की चिंता साफ पढ़ी जा ... Read more
4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषाल 12 मार्च को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं। अपनी सुरीली आवाज से लाखों लोगों को दिवाना बनाने वाली श्रेया का जन्म 1984 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में अपनी सुरीली आवाज से बड़ी ...
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

