लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार क्षेत्र से सोमवार को एक शिक्षामित्र संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए। सीसीटीवी कैमरे में वह पैदल ही जाते दिखे। उनका अंतिम लोकेशन जुग्गौर चिनहट के पास मिला। उन्होंने अपने ऑफिसियल ग्रुप और ममेरे भाई को मैसेज भेजा है। परिजनों का आरोप है कि एसआईआर के काम को लेकर वह दबाव में थे। भौली बख्शी का तालाब निवासी कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि उनका भांजा दिलीप कुमार सिंह उर्फ दीपू (46) पुत्र छत्रपाल सिंह, मूल निवासी ग्राम परसिया पोस्ट लाखन थाना खम्भरिया जनपद बीरी का रहने वाले हैं। वह मौजूदा समय मे भौली-2 में शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत हैं। मकान नंबर 3/550, जानकीपुरम विस्तार (सेंट्रल अकादमी के पीछे) लखनऊ में परिवार के साथ रहते हैं। घर से पैदल ही निकले थे परिजनों के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे दिलीप घर से पैदल यह कहकर निकले कि नाश्ता तैयार करो, अभी आकर करेंगे। काफी देर तक वापस न लौटने पर उनकी पत्नी दीपिका सिंह ने फोन मिलाया। फोन की घंटी गई लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। कुछ देर बाद मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। इसके बाद रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने काफी तलाश की लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लग सका। मामा के लड़के को मैसेज किया दिलीप सिंह ने अपने ममेरे भाई को मैसेज किया। उसमें लिखा- भाई मैं तुम्हारा कर्जदार बड़ा भाई। मामा-मामी का ख्याल रखना। हमारे भी माता-पिता हैं। पिंकू गाय जरूर रखना मामा-मामी चाहे जितना गुस्सा करें। पिंकू काम का प्रेशर बहुत है। ऑफिसियल ग्रुप पर भी किए मैसेज उसने ऑफिस के वाट्सऐप ग्रुप पर भी मैसेज भेजा है। उसमें लिखा- सुषमा मैडम सुपरवाइजर साहब भाग संख्या 191 बीएलओ दिलीप सिंह शिक्षा मित्र एसआईआर का कार्य छोड़कर जा रहा हूं। मेरे नोटिस फॉर्म मेरी बाइक के झोले में है। जो मेरे घर पर खड़ी है। जरूरत समझना तो ले लेना गुडबाय। इस पर सुषमा नाम से सेव नंबर से जवाब आया- दिलीप आप कहां हो। उसके बाद दिलीप ने लिखा- हां मैं एक बात कहना भूल गया। अपने एसडीएम बीकेटी से कह दो जाकर नौकरी ले लें। जो बार-बार दबाव बनाने के लिए कहते हैं कि नौकरी ले लूंगा। सिस्टम पर शिक्षामित्र दिलों और कुर्बान। इस पर सुषमा नाम से सेव नंबर से फिर जवाब आता है- आप का काम तो ठीक है। आप ऐसा क्यों कह रहे हैं।
सलूम्बर: लसाडिया की अग्गड पंचायत में शिक्षा जागरूकता बैठक आयोजित
बासुदेव कनोरिया सेवा संस्थान और प्रथम फाउंडेशन ने अभिभावकों को बच्चों को नियमित स्कूल भेजने और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया।
अमरोहा में जिला आर्य प्रतिनिधि सभा अमरोहा के पदाधिकारियों ने मंगलवार को अमरोहा कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। इस ज्ञापन में प्रदेश में शराबबंदी लागू करने और नई शिक्षा नीति में बदलाव करने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि शराबबंदी लागू होने से प्रदेश में अपराधों की वृद्धि को रोकने और परिवारों को बचाने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त, आर्य समाज ने नई शिक्षा नीति में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि इससे सभी वर्गों के बच्चे एक साथ बैठकर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और शिक्षा पर होने वाला व्यय सरकार को वहन करना चाहिए। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा अमरोहा के अध्यक्ष शर्मवीर सिंह आर्य ने बताया कि वे शराबबंदी और शिक्षा नीति में बदलाव के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज का विशेष योगदान रहा है, लेकिन उनके विचारों को सरकारी संस्थानों में पूरी तरह लागू नहीं किया गया है, जिससे आम जनता की भागीदारी कम हुई है। ज्ञापन में एक और महत्वपूर्ण मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर गरीब और कम पढ़े-लिखे व्यक्तियों की नियुक्ति की जाए। साथ ही, आजादी से पूर्व लागू चतुर्थ श्रेणी के लिए नियमित नियुक्ति की व्यवस्था को पुनर्जीवित कर लागू किया जाए।
विधायक सुरेश गुर्जर ने विधानसभा में वन और उच्च शिक्षा के मुद्दों पर सरकार को घेरा
खानपुर विधायक ने तारज प्लांटेशन घोटाले, बकानी में कॉलेज की कमी और आदिवासियों के वन अधिकार दावों के निरस्त होने पर कड़े सवाल उठाए।
सागर की खुरई विधानसभा क्षेत्र के खुरई, बांदरी और मालथौन कॉलेज में नए पाठ्यक्रम शुरू कराने, स्टाफ बढ़ाने और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का मुद्दा सोमवार को विधानसभा में गूंजा। खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से खुरई, मालथौन और बांदरी शासकीय महाविद्यालयों में संकाय व विषय बढ़ाने, स्टाफ बढ़ाने, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाने की मांग की। उन्होंने खुरई शासकीय महाविद्यालय में विधि संकाय और बीएड शुरू करने की मांग भी की। जिस पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने उत्तर में ज्यादातर मांगों पर अपनी सहमति प्रदान करते हुए अगले सत्र से पाठ्यक्रम शुरू करने और जगह की उपलब्धता होने पर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स स्वीकृत करने का आश्वासन दिया है। खुरई विधायक ने यह मांगें रखीध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए पूर्व गृहमंत्री व खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि खुरई महाविद्यालय में स्नातक में 1714 और स्नातकोत्तर में 363 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। खुरई कालेज में स्टेडियम नहीं है। भवन में भी कठिनाई हैं। यहां विज्ञान संकाय में वनस्पतिशास्त्र, रसायनशास्त्र, प्राणी शास्त्र, भौतिक शास्त्र और कला संकाय के अंग्रेजी साहित्य विषय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और वाणिज्य संकाय में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की आवश्यकता है। कुछ कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन प्रोग्राम शुरू करने की मांगइसके अलावा विधि संकाय में नवीन पाठ्यक्रम व बीएड भी शुरू किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मालथौन शासकीय महाविद्यालय में 1700 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिन्हें नवीन पाठ्यक्रमों की आवश्यकता है। उन्होंने मालथौन शासकीय महाविद्यालय में हिंदी, ज्योग्राफी, राजनीति विज्ञान, इतिहास और विज्ञान संकाय में वनस्पति विज्ञान, दूदाजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कक्षाओं की आवश्यकता है। बांदरी शासकीय महाविद्यालय की स्थिति बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां कुल 900 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिन्हें वाणिज्य संकाय में स्नातक और कला संकाय में पीजी पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाने की आवश्यकता है। कॉलेज में स्वीकृत पद हैं खालीविधायक भूपेंद्र सिंह ने ध्यानाकर्षण में कहा कि मालथौन शासकीय महाविद्यालय में 15 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 10 पद रिक्त हैं और बांदरी महाविद्यालय में 19 स्वीकृत पदों में से 14 पद रिक्त हैं। जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। जिससे उन पर आर्थिक बोझ आता है। महाविद्यालयों में नए विषय प्रोग्राम भी स्वीकृत उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने उक्त बिंदुओं पर जवाब देते हुए कहा कि स्ववित्तीय योजना में सरकार या विभाग से अनुमति की जरूरत नहीं है। 2023 में इस आशय का संशोधन कर दिया गया है। प्राचार्य ही संकाय में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्रारंभ कर सकते हैं। इन महाविद्यालयों में नवीन विषय, संकाय प्रारंभ करने के लिए प्राचार्य ही सक्षम है। इसके लिए प्राचार्यों को उचित कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जा रहा है। शासकीय महाविद्यालयों खुरई, मालथौन व बांदरी में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए कार्रवाई करते हुए वर्ष 2025 में शासकीय महाविद्यालय खुरई में 1 सहायक प्राध्यापक, बांदरी में 1 सहायक प्राध्यापक और मालथौन में 2 सहायक प्राध्यापकों को पदस्थ किया गया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से प्राप्त वर्ष 2022 की 2053 अभ्यर्थियों, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल व क्रीड़ा अधिकारी की चयन सूचियों के आधार पर नियुक्ति की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। इन महाविद्यालयों में अधोसंरचना विकास, नए विषय और संकाय शुरू करने और रिक्त पदों की पूर्ति के लिए नियमानुसार वित्तीय संसाधनों के अनुसार कार्रवाई और वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। मंत्री परमार ने बताया कि इन तीनों महाविद्यालयों का हमने परीक्षण करा लिया है जो कुछ विषय यहां से शुरू कराना होगा, वह यहां से कराने की तैयारी कर रहे हैं। शेष कुछ हम स्ववित्तीय योजना से संचालित कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एनटीपीसी लारा परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले प्रभावित परिवारों को अब तक नौकरी, बेरोजगारी भत्ता, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का लाभ नहीं मिला है। प्रभावित लोग लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे हैं। मंगलवार को लारा संघर्ष समिति एनटीपीसी के खिलाफ एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करेगी। पुसौर विकासखंड में करीब 15 साल पहले जिला प्रशासन ने राज्य की पुनर्वास नीति के तहत स्थानीय किसानों की जमीन अधिग्रहित कर एनटीपीसी लारा परियोजना को सौंप दी थी। इसके बाद भी विस्थापित परिवारों को नियमित रोजगार नहीं मिला। पुनर्वास नीति का पूरा पालन भी नहीं हुआ। कलेक्टर को सौंपा गया था ज्ञापन लारा संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने 19 जनवरी को कलेक्टर को भू-विस्थापित परिवारों की ओर से ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में योग्यतानुसार नियमित रोजगार देने की मांग की गई थी। रोजगार नहीं मिलने की स्थिति में रोजगार गारंटी योजना के तहत पिछले करीब 15 साल का बेरोजगारी भत्ता देने की मांग रखी गई थी। साथ ही अनियमितताओं की जांच की बात भी कही गई थी। इसके बाद भी जिला प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मुख्य गेट पर होगा धरना प्रदर्शन ऐसे में लारा संघर्ष समिति मंगलवार को छपोरा स्थित एनटीपीसी लारा परियोजना के मुख्य गेट के सामने धरना प्रदर्शन करेगी। समिति ने आंदोलन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। समिति ने क्षेत्र के लोगों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों से बड़ी संख्या में धरने में शामिल होने की अपील की है।
शिक्षा, संगठन और युवा जागरूकता पर दिया जोर, सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों ने मोहा मन
भास्कर न्यूज | बरही बरही के पटना रोड स्थित केसरवानी आश्रम के प्रांगण में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 23 फरवरी, सोमवार को 32वां केसरवानी मिलन समारोह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ बनाया गया। समारोह की अध्यक्षता समाज के अध्यक्ष बिनोद केशरी ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महासभा के संगठन मंत्री भगवान केशरी तथा विशिष्ट अतिथि झारखंड प्रदेश केसरवानी वैश्य सभा के उपाध्यक्ष कपिल केशरी व पूर्व संगठन मंत्री महेंद्र केशरी उपस्थित रहे। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गोत्राचार्य महर्षि कश्यप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात अतिथियों एवं समाज के गणमान्य व्यक्तियों का भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान समाज की एकता, शिक्षा के प्रसार, युवा वर्ग के मार्गदर्शन तथा सामाजिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। मुख्य अतिथि भगवान केशरी ने कहा कि समाज की मजबूती संगठन और एकता में निहित है। उन्होंने युवाओं से सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि कपिल केशरी ने कहा कि सामाजिक समरसता और पारस्परिक सहयोग ही किसी भी समाज की वास्तविक पूंजी होती है। उन्होंने प्रदेश स्तर पर चल रही विभिन्न सामाजिक व शैक्षणिक योजनाओं की जानकारी देते हुए समाज के लोगों से संगठित रहकर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर रहने का आग्रह किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में बिनोद केशरी ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी प्रेम, सहयोग व भाईचारे की भावना को और अधिक सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने समाज के सभी सदस्यों से एकजुट होकर समाज के उत्थान एवं प्रगति के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया। समारोह के दौरान आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में नंदिनी केशरी के नेतृत्व में आदर्श केशरी, ओम केशरी, पूजा केशरी, गुड्डू केशरी, आशीष केशरी, मून केशरी, अनमोल केशरी एवं रीतीक केशरी ने शानदार प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन राजेश केशरी व नंदिनी केशरी ने किया, जिन्होंने पूरे समारोह को प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। इस अवसर पर अध्यक्ष विनोद केशरी, महामंत्री उदय केशरी, कोषाध्यक्ष अशोक केशरी, संरक्षक सह मार्गदर्शक जगदीश साहू, रत्नेश्वर केशरी, दशरथ केशरी, मनोज केशरी, परमेश्वरी केशरी, इंद्रदेव केशरी, राजकुमार केशरी, नगर सभा के उपाध्यक्ष उमेश केशरी, संगठन मंत्री शंकर केशरी, सह सचिव आशीष केशरी, मीडिया प्रभारी राजेश केशरी उर्फ मेवालाल, नगर केसरवानी महिला सभा की संरक्षक संजू केशरी, अध्यक्ष जयंती केशरी, महामंत्री मंजू केशरी, कोषाध्यक्ष उर्मिला केशरी, उपाध्यक्ष रेखा केशरी, तरुण सभा के अध्यक्ष रंजीत केशरी, महामंत्री जयराम केशरी, कोषाध्यक्ष रोहित केशरी सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे। भास्कर न्यूज | हजारीबाग श्याम भक्त परिवार हजारीबाग का श्री श्याम फाल्गुन निशान शोभायात्रा मंगलवार की निकाला जाएगा। शोभा यात्रा की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। सोमवार को यात्रा शुरुआत स्थल पर भक्त तैयारी में लगे रहे। बाबा श्याम का मंदिर बिहारी दुर्गा स्थान के बगल में बना है। मंदिर का कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो गया है। जल्द ही प्राण प्रतिष्ठा की तिथि की घोषणा की जानी है। उक्त मंदिर परिसर से ही मंगलवार को निशान यात्रा निकाला जाना है। आज महिलाओं ने सामूहिक रूप से प्रभु श्री श्याम के पावन निशान की विधिवत रूप से उसकी सज्जा का किया। श्याम के मधुर भजनों को गुनगुनाते हुए महिलाएं पूरी श्रद्धा और समर्पण भाव से निशान को सजाने में लगी रहीं। मोर पंख, गेंदा फूल, रंगीन वस्त्र एवं आकर्षक सजावटी सामग्री से निशान को भव्य और मनोहारी स्वरूप प्रदान किया गया। दूसरी ओर आयोजक मंडली के सदस्य भी कार्यक्रम को सफल व सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने हेतु अंतिम तैयारियों में जुटे रहे। शोभायात्रा में सुसज्जित रथ, ध्वनि विस्तारक यंत्र, प्रकाश व्यवस्था की गई है। आयोजकों के अनुसार प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री श्याम फाल्गुन निशान ध्वज शोभायात्रा को ऐतिहासिक और यादगार बनाने का हमारा संकल्प है। इस बार यात्रा नवनिर्मित श्री श्याम मंदिर से निकाली जा रही है। यात्रा प्रातः 9:00 बजे विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत निकाली जाएगी। सुसज्जित रथ पर विराजमान प्रभु श्री श्याम के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। यात्रा शहर के विभिन्न प्रमुख चौक-चौराहों व मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर प्रांगण में पहुंचकर संपन्न होगी।
जगदीश शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश सहसंयोजक बने
बालोद| जिले के वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् जगदीश देशमुख को भारतीय जनता पार्टी के शिक्षा प्रकोष्ठ में प्रदेश सहसंयोजक मनोनीत किया गया है। यह मनोनयन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव सिंह, प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय तथा शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कांति लाल जैन की अनुशंसा पर किया गया। समसामयिक विषयों पर लेखन के लिए प्रसिद्ध जगदीश देशमुख की दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे लंबे समय से साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। देशमुख ने पार्टी के राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया।
भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ की कार्यसमिति में डॉ. अनिल शामिल
जांजगीर| जिले के शिक्षाविद् डॉ. अनिल तिवारी को भारतीय जनता पार्टी के शिक्षा प्रकोष्ठ की प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य के रूप में जिम्मेदारी दी है। डॉ. तिवारी लंबे समय से शिक्षा, सामाजिक गतिविधियों और जनहित से जुड़े विषयों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वे रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य भी हैं और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में अपनी सहभागिता देते रहे हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में वे ज्योतिष व वास्तु परामर्श के क्षेत्र में भी विशेष रूप से पहचाने जाते हैं।
लखनऊ के डिजिटल एक्सपर्ट्स दिल्ली में आयोजित सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन (सीएसएफ) इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के सैटेलाइट कार्यक्रम शामिल हुए। ‘एडटेक एंड एआई कन्वेनिंग: एजुकेशन डायलॉग्स’ का आयोजन किया गया जिसमें हर बच्चे के लिए समान लर्निंग सुनिश्चित करने के लिए भारत के एडटेक और एआई रोडमैप पर व्यापक चर्चा की गई । कार्यक्रम में सरकारी प्रतिनिधियों, शिक्षा विशेषज्ञों ने टेक्नोलॉजी और एआई को बड़े पैमाने पर शिक्षा सुधार के लिए कैसे प्रभावी बनाया जाए इस पर चर्चा किया। ‘पीएम मोदी डिजिटल इंडिया के प्रति गंभीर’ मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर चर्चा करते हुए कहा कि तकनीक और एआई गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को आसान बनाने में शिक्षकों को सशक्त करने और युवाओं को भविष्य के कार्यक्षेत्र के लिए तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान ने तकनीक को सशक्तीकरण का माध्यम बनाया है और शिक्षा में इसका समावेश अवसरों का विस्तार करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया को लेकर बेहद गंभीर हैं। हमारी सरकार चाहती है कि भारत का प्रत्येक बच्चा डिजिटल इंडिया का हिस्सा बने और टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करे। 90% परिवारों के पास स्मार्ट फोन इस अवसर पर ‘भारत सर्वे फॉर एडटेक 2025’ रिपोर्ट का दूसरा संस्करण लॉन्च किया गया। पूर्व नीति आयोग सीईओ अमिताभ कांत ने सर्वे जारी करते हुए बताया कि यह 10 राज्यों के 12,500 निम्न आय वर्गीय परिवारों और 2,500 शिक्षकों पर आधारित राष्ट्रीय स्तर का अध्ययन है। रिपोर्ट के अनुसार 90 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन है और 63 प्रतिशत बच्चे सीखने के लिए तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी से समाज में समानता आएगी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने प्रमाण-आधारित नीति निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट एडटेक के उपयोग, इंफ्रास्ट्रक्चर , चुनौतियों और अंतिम पंक्ति की जरूरतों को समझने में मदद करेगी। सीएसएफ के संस्थापक आशीष धवन और सीईओ श्वेता शर्मा-कुकरेजा ने कहा कि मजबूत डिजिटल आधार और जिम्मेदार एआई नवाचार के जरिए ही हर बच्चे तक समान और प्रभावी शिक्षा पहुंचाई जा सकती है। सम्मेलन में वैश्विक विशेषज्ञों ने भी एआई के उपयोग पर जोर दिया उन्होंने कहा कि समाज में समानता आएगी।
फतेहाबाद जिले के रतिया में स्थित शहीद देवेंद्र सिंह महिला गवर्नमेंट कॉलेज में कार्यरत 19 स्टाफ सदस्यों ने कॉलेज इंचार्ज (कार्यकारी प्रिंसिपल) के खिलाफ उच्चतर शिक्षा विभाग को सामूहिक शिकायत भेजी है। शिकायत में इंचार्ज पर शिक्षकों के पहनावे पर टिप्पणी, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और महिला स्टाफ को अकेले में बुलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत करने वालों में कुल 19 स्टाफ सदस्य हैं। इनमें से 4 एसोसिएट प्रोफेसर, 7 एक्सटेंशन लेक्चरर और 8 नॉन टीचिंग स्टाफ सदस्य शामिल हैं। सभी ने संयुक्त हस्ताक्षर कर उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक, फतेहाबाद के डीसी, रतिया के एसडीएम और जिला उच्चतर शिक्षा अधिकारी को शिकायत भेजी है। स्टाफ सदस्य बोले-कार्यस्थल का माहौल तनावपूर्ण बनाया शिकायत में कहा गया है कि इंचार्ज द्वारा महिला स्टाफ के पहनावे को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं। इसके अलावा कार्यस्थल का माहौल तनावपूर्ण बना दिया गया है, जिससे कर्मचारी मानसिक रूप से परेशान हैं। स्टाफ सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि महिला कर्मचारियों को कार्यालय में अकेले बुलाया जाता है, जिससे वे असहज महसूस करती हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई बार इस संबंध में मौखिक आपत्ति भी जताई गई, लेकिन व्यवहार में कोई सुधार नहीं हुआ। जानिए… स्टाफ सदस्यों ने शिकायत में क्या लिखा डीएचईओ बोले-शिकायत आई है, फॉरवर्ड कर दी मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्मचारियों ने उच्चतर शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत सौंपी है। जिला उच्चतर शिक्षा अधिकारी सज्जन कुमार ने बताया कि उन्हें स्टाफ सदस्यों की शिकायत मिली है, जिसमें कई आरोप लगाए हैं। शिकायत कॉपी डीसी डॉ. विवेक भारती को भी भेजी गई। उन्होंने कहा- मेरे पास फतेहाबाद का अतिरिक्त कार्यभार है। मैंने इस शिकायत को मुख्यालय को फॉरवर्ड कर दी है। अब मुख्यालय स्तर पर जांच कमेटी बनेगी। वही कमेटी आगे की जांच करके अपनी रिपोर्ट देगी। प्रिंसिपल बोले-मुझे तो मामले की जानकारी नहीं वहीं, इस मामले को लेकर कॉलेज के कार्यकारी प्रिंसिपल परमजीत संधा का कहना है कि उन्हें इस मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज में ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग में एक बार फिर प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल किया गया है। 9 प्राचार्य और सहायक प्राध्यापकों के तबादले किए गए हैं। उन्हें तत्काल प्रभाव से एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में स्थानांतरित किया गया है। इन अधिकारियों के हुए तबादले दिखिए लिस्ट
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के वेतन में वृद्धि, निशुल्क कैशलेस सुविधा और महिला शिक्षामित्रों को पति के निवास स्थान पर स्थानांतरण की घोषणा की गई है। इस घोषणा के बाद आज सोमवार को गोंडा में शिक्षामित्र संगठनों ने सांसदों और विधायकों से मुलाकात कर उन्हें धन्यवाद दिया। इस दौरान उन्होंने अपनी शेष समस्याओं के समाधान के लिए मांग पत्र भी सौंपे है। सोमवार को गोंडा जिले में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अवधेश मिश्रा के नेतृत्व में हजारों शिक्षामित्रों ने जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की है। उन्होंने कैसरगंज से बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह और गोंडा सदर से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह से भेंट की। शिक्षामित्रों ने इन तीनों नेताओं को भगवान की प्रतिमाएं और मिठाई भेंट कर सरकार की घोषणाओं के लिए धन्यवाद दिया। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अवधेश मिश्रा ने बताया कि इन जनप्रतिनिधियों ने ही उनकी समस्याओं को उठाया था, जिसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें ये सुविधाएं प्रदान की हैं। उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पहले की सरकारों ने उनकी बात नहीं सुनी थी। मिश्रा ने बताया कि जनप्रतिनिधियों ने शिक्षामित्रों की शेष समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से बात करने का आश्वासन भी दिया है। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, जिला संगठन मंत्री तेजेंद्र कुमार शुक्ला, ब्लॉक अध्यक्ष राजकुमार, दीपचंद मिश्रा, शिव वर्धन सिंह, शिव कुमार जायसवाल, राकेश कुमार सिंह, श्रीवर्धन सिंह, रमाकांत, बृजभूषण यादव, दुःख हरण नाथ यादव, शैलेश सिंह और राकेश कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित थे।
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैचों में जीतनी बार पाकिस्तान को हार मिली है, उससे ज्यादा बार कांग्रेस चुनाव हार चुकी है। ये बातें जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सोमवार को दरभंगा में कही। उन्होंने ये भी कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा को सुधारने की कोशिशें हुईं, लेकिन जैसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बदलाव चाहते थे, उस तरह का बदलाव नहीं हो पाया। दरअसल, राज्यसभा सांसद संजय झा आज बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी के आवास पर पहुंचकर उनकी मां को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वे श्यामा माई मंदिर पहुंचे, जहां पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में बने विवाह भवन के विस्तारीकरण कार्य का निरीक्षण किया। साथ ही अतिथि भवन का उद्घाटन भी किया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रयास किए, परंतु कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया में व्याप्त समस्याएं बड़ी बाधा रही हैं। बिहार सरकार पैसा देती है, लेकिन कुलपति किस एजेंडा के साथ आते हैं, उस पर नियंत्रण मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि हम उच्च शिक्षा को वैसा नहीं बना पाए जैसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते थे। बोले- कुलपति अपने स्तर पर निर्णय लेते हैं संजय झा ने आरोप लगाया कि कुलपति अपने स्तर पर निर्णय लेते हैं, जिनका छात्रों या राज्य सरकार की प्राथमिकताओं से सीधा संबंध नहीं रहता। उन्होंने विशेष रूप से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि वे स्वयं सिंडिकेट सदस्य के रूप में एक बैठक में मौजूद थे, जहां सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को पीएचडी की उपाधि देने का प्रस्ताव आया था। संजय झा के अनुसार, उन्होंने उस समय सवाल उठाया था कि मिथिला विश्वविद्यालय से उनका क्या संबंध है? बाद में उन्हें बताया गया कि यह निर्णय चांसलर की पैरवी पर लिया गया था।उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल मिथिला विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों की स्थिति की बात कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया में ही मूल समस्या है, क्योंकि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव है। संजय झा बोले- सिर्फ एक नहीं पूरे बिहार की यूनिवर्सिटी व्यवस्था में सुधार की जरूरत संजय झा ने कहा कि केवल एक विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे बिहार की विश्वविद्यालय व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। उन्होंने दावा किया कि सिंडिकेट सदस्य रहते हुए उन्होंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया, जहां बाहरी हस्तक्षेप की चर्चा सामने आई। “कुछ सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है। संजय झा ने बताया कि उन्होंने एक इस जमीन को श्यामा मन्दिर ट्रस्ट को देने की वकालत की थी, ताकि वहां “विवाह भवन” बनाया जा सके और गरीब परिवारों को शादी समारोह के लिए सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उद्घाटन के लिए भी बुलाया गया था और यह परियोजना सामाजिक हित में थी। राज्यसभा सांसद ने मिथिला की ऐतिहासिक विरासत पर भी चिंता जताई संजय झा ने मिथिला की ऐतिहासिक विरासत पर चिंता जताते हुए कहा कि हजारों वर्षों का इतिहास आज भी वैश्विक स्तर पर सही तरीके से प्रस्तुत नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि मिथिला रिसर्च इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग बन रही है, लेकिन असली काम दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन और शोध अभी शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मिथिला की विरासत बहुत बड़ी पूंजी है। हमारे पास ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिन पर गंभीर शोध की जरूरत है। अगर जरूरत पड़ी तो मैं अपने फंड से भी सहयोग करूंगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मिथिला के इतिहास को वैश्विक मानचित्र पर लाना उनकी प्राथमिकता है और संसद में भी इस दिशा में पहल की जा रही है। अंत में उन्होंने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना समय की मांग है। पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया, शोध को बढ़ावा और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, ये सभी राज्य के भविष्य के लिए जरूरी हैं। देश की 58 फीसदी आबादी युवा, ये देश की सबसे बड़ी पूंजी राज्यसभा सांसद संजय झा ने ग्लोबल AI समिट और देश की तकनीकी प्रगति के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत आज दुनिया के सामने एक नई ताकत के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की 58% आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है, जो भारत की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि अगर इस युवा आबादी को टेक्नोलॉजी और स्किलिंग से जोड़ा जाए तो भारत विश्व स्तर पर बड़ी छलांग लगा सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाकर राहुल गांधी ने अपना कपड़ा उतार दिया इससे बड़ा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता है। संजय झा ने कहा कि आज कई विकसित देशों में बुजुर्ग आबादी अधिक है और युवा जनसंख्या कम, जबकि भारत के पास युवा शक्ति का बड़ा आधार है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में निवेश और भागीदारी देश को नई दिशा दे सकती है। ‘देश की छवि को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है’ संजय झा ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में AI के माध्यम से कृषि क्षेत्र में क्रांति संभव है,स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और बेहतर रेगुलेशन हो सकता है,शिक्षा क्षेत्र में नई तकनीकी क्रांति लाई जा सकती है। उन्होंने कहा की ग्लोबल AI मंच पर दुनिया की शीर्ष कंपनियों और देशों की भागीदारी भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाती है। ऐसे अवसरों पर देश की छवि को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है। संजय झा ने विपक्ष और खासकर पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोध की राजनीति करते-करते अब कुछ नेता देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद में कांग्रेस की सीटें कम आईं, जिसे लेकर जनता सब देख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की छवि कांग्रेस पार्टी से बड़ी है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। गेस्ट टीचर के सवाल पर संजय झा ने कहा कि पहले अस्थायी तौर पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, बाद में परीक्षा के माध्यम से स्थायी शिक्षक नियुक्त किए गए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वे संबंधित मंत्री से दोबारा बात करेंगे।
बहराइच जिले के रामगांव इलाके में सरकारी स्कूलों में निशुल्क वितरित होने वाली किताबों की हेराफेरी का मामला सामने आया है। पुलिस ने कबाड़ी के गोदाम में खड़े एक ट्रक से बड़ी मात्रा में किताबें बरामद कीं। कार्रवाई के दौरान शिक्षा विभाग में तैनात एक अनुचर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से करीब 13 हजार सरकारी पुस्तकें बरामद की हैं। थाना प्रभारी के अनुसार, सरकारी पुस्तकों को कबाड़ में बेचने के प्रयास की जानकारी मिलने पर शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश की ओर से 17 तारीख को मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने जांच में सामने आए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। स्टॉक से किताबें निकालकर बेचने की थी साजिश जांच में पता चला कि विभाग में अनुचर पद पर तैनात आरोपी ने कबाड़ी और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर सरकारी स्टॉक से किताबों का गबन किया। आरोप है कि इन पुस्तकों को अवैध रूप से बेचने की तैयारी की जा रही थी। पुलिस के अनुसार यह किताबें सरकारी स्कूलों में छात्रों को निशुल्क वितरण के लिए आई थीं। चारों आरोपियों को भेजा गया जेल शिक्षा अधिकारी की तहरीर पर रामगांव पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 61(2)ए और 316(5) बीएनएस के तहत कार्रवाई की। सभी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। पुलिस कर रही सप्लाई चेन की जांच पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किताबों की हेराफेरी कितने समय से चल रही थी और इसमें अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डीडवाना में अखिल कायमखानी सभा की हुई बैठक:कौमी एकता, शिक्षा और युवाओं की भागीदारी पर दिया जोर
डीडवाना के स्थानीय कायमखानी छात्रावास में अखिल कायमखानी सभा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। सभा अध्यक्ष कप्तान महबूब खां ने बैठक की अध्यक्षता की। इसमें समाज की एकता को मजबूत करने, शिक्षा के स्तर में सुधार लाने और युवाओं को संगठन से सक्रिय रूप से जोड़ने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान समाज के सर्वांगीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए। मुराद खां ने ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया, यह कहते हुए कि शिक्षा ही समाज की प्रगति का आधार है। वहीं, अब्दुल हमीद पड़िहार ने जरूरतमंद विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने हेतु 'किताब संग्रह' अभियान शुरू करने का प्रस्ताव रखा। कमांडर मुराद खां पड़िहार ने कौमी एकता पर विशेष जोर दिया और युवाओं से संगठन की मुख्यधारा में शामिल होने का आह्वान किया। कप्तान रमजान खां पायली और सूबेदार महबूब खां ने समाज की मजबूती के लिए एकजुटता को अनिवार्य बताया और सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।बैठक का संचालन मुंशी खां ने किया। अंत में बुंदु खां मलवान ने अधिक से अधिक युवाओं से संस्था से जुड़कर समाज के विकास को नई दिशा देने की अपील की।
खजुराहो के बागेश्वर धाम में हिंदू गांव, कैंसर अस्पताल के बाद अब शस्त्र और शास्त्र की भी शिक्षा दी जाएगी। इसके तहत तलवारबाजी, तीरंदाजी, भाला चलाना, मलखंभ सिखाएंगे। 13 फरवरी 2026 को कथावाचक रमेश भाई ओझा, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और पंडित प्रदीप मिश्रा ने मिलकर वैदिक गुरुकुलम की शुरुआत की। इस गुरुकुल में हर जाति के छात्रों को शिक्षा मिलेगी। मुख्य उद्देश्य है- बटुकों को सनातन धर्म, राम-कृष्ण परंपरा और वैदिक संस्कृति से जोड़ना। यहां तीन मंजिला इमारत बनी है, जिसमें अभी 50 बटुकों को प्रवेश दिया गया है। कक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं। इसमें बनारस से आए शिक्षक पढ़ा रहे हैं। धाम से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर सुनसान इलाके में बनी यह तीन मंजिला इमारत अब लोगों को दूर-दूर से आकर्षित कर रही है। दैनिक भास्कर की टीम ने खुद बागेश्वर धाम पहुंचकर इस ड्रीम प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी जुटाई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सुबह 4 बजे से ही आने लगती है शंख की आवाज तड़के चार बज रहे हैं। गुरुकुल के अंदर से शंख बजने की आवाज आने लगती है। इतने में ही एक-एक कर सभी कमरों की लाइट जलने लगती है। इसके बाद चंद मिनटों में एक मंत्री की आवाज साफ-साफ सुनाई देती है। यहां शिक्षा लेने आए छात्र और दूसरे लोग ‘कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।, करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥’ का जप कर रहे हैं। ये वही मंत्र है, जिसे सुबह उठकर सबसे पहले अपने हाथों की हथेली देखते हुए किया जाता है। इसी परिसर में बागेश्वर धाम की गोशाला भी स्थित है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए यहां 10 कमरों के साथ विशाल हॉल बनाया गया है। परिसर में ही बागेश्वर बालाजी और अन्य देवी-देवताओं का मंदिर भी है। 10 मिनट ही हुए होंगे, गुरुकुल में चहल-पहल शुरू हो जाती है। छात्र अपने-अपने कपड़े लेकर वॉशरूम की ओर जाने लगते हैं। वहां मौजूद सेवादार ऋषि शुक्ला से पूछा- इतनी सुबह-सुबह सभी नहाने क्यों जा रहे हैं? वह कहते हैं- ये तो गुरुकुल की परंपरा है। 5 बजे से सबको सुबह की पूजा-पाठ शुरू करनी है। ठीक पांच बजे से कुछ मिनट पहले छात्रावास के बरामदे में छात्र अपना-अपना आसन और पूजन के लिए छोटे से तांबे के कलश में जल लेकर आ गए। पूजा-पाठ शुरू कर देते हैं। सुबह छह बजे के करीब पूजन-पाठ पूरा कर लिया। इसके बाद सभी ने एक-दूसरे को देखा। कुछ सहमति बनाते हुए जोर-जोर से हनुमान चालीसा गाने लगे। बनारस से आए हैं शिक्षक गुरुकुलम के प्रधानाचार्य आचार्य गोपाल चरण पांडे 'राजा शास्त्री' बताते हैं कि गुरुकुल का अर्थ ही है 'गुरु का घर'। भगवान राम ने वशिष्ठजी और श्रीकृष्ण ने सांदीपनि आश्रम जाकर शिक्षा ली थी। इसके बाद सदियों से ये परंपरा चली आ रही है। इस गुरुकुल में भी वही नियम हैं। अभी 50 बच्चों यहां प्रवेश ले चुके हैं। गुरुकुल में शिक्षा लेने आए बच्चों को बटुक कहा जाता है। फिलहाल गुरुकुलम में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और नेपाल के बटुक शामिल हैं। 20 कमरों में शिक्षक और ब्राह्मणों के रहने की व्यवस्था की गई है। ब्राह्मण बटुक सागर अधिकारी ने बताया कि मैं नेपाल के काठमांडू का रहने वाला हूं। यहां शस्त्र और वेद की शिक्षा ले रहा हूं। भविष्य में भगवताचार्य बनना चाहता हूं। सभी तरह की शिक्षा दी जाएगी आचार्य गोपाल चरण कहते हैं कि स्कूलों में शायद किताबी ज्ञान मिल जाए, लेकिन संस्कार केवल गुरुकुल में मिलते हैं। यहां विद्यार्थियों को सिखाया जाएगा कि कब उठना है, कब सोना है और कैसे मर्यादित जीवन जीना है। पाठ्यक्रम में केवल वेद-पुराण ही नहीं, बल्कि धनुर्विद्या, आयुर्वेद, ज्योतिष और प्राचीन मल्लविद्या भी शामिल होगी। वर्तमान में 5 शिक्षकों और 50 विद्यार्थियों से शुरुआत की गई है, जिसे आगे चलकर 250 विद्यार्थियों तक बढ़ाया जाएगा। अभी बटुकों को दिनचर्या और संस्कार सिखाए जा रहे हैं। अप्रैल से रेगुलर नियमित शिक्षा शुरू की जाएगी। शस्त्र की शिक्षा भी अप्रैल से ही शुरू होगी। भविष्य में 'वैदिक सनातन बोर्ड' से मान्यता प्राप्त शास्त्री और आचार्य की डिग्रियां भी यहां से दी जाएंगी। धीरेंद्र शास्त्री बोले- भावी पीढ़ी बने संस्कारवान-ज्ञानवान गोपाल चरण कहते हैं, बागेश्वर धाम पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का संकल्प है कि भावी पीढ़ी को संस्कारवान और ज्ञानवान बनाया जाए। उनका कहना है कि भोजन और धन का सहारा सीमित समय का होता है, लेकिन विद्या का दान जीवन भर काम आता है। मस्तक पर तिलक धारण करने से लेकर माता-पिता को प्रणाम करने तक के संस्कार इसी सनातनी विद्या से मिलेंगे। काशी के आचार्य कृष्ण कुमार दीक्षित (वेद), शिवम कुमार पांडे (ज्योतिष), दिव्यांशु द्विवेदी (व्याकरण) और प्रियांशु पांडे (यजुर्वेद) यहां बटुकों को शिक्षित करेंगे। आने वाले समय में देश के अन्य बड़े मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर भी इसी तरह के गुरुकुल स्थापित करने की योजना है। देशभर में बनाए जाएंगे गुरुकुल सेवादार ऋषि शुक्ला कहते हैं कि गुरुकुल का उद्देश्य युवा पीढ़ी को नशा, जुआ और अपराध जैसी बुराइयों से बचाकर उनका सर्वांगीण विकास करना है। यहां शिक्षा के साथ-साथ तीरंदाजी, साधना और योगासन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विद्यार्थियों की दिनचर्या भी अनुशासित होगी, जो सुबह 4 बजे जागरण से शुरू होकर रात 9:30 बजे शयन पर समाप्त होगी। इसमें तीन समय की संध्या, स्वाध्याय और बाल भोग का विशेष समय निर्धारित है। यह कोई सामान्य कोचिंग नहीं, बल्कि पूरा बोर्ड होगा। यहां 6वीं से 8वीं तक को 'प्रथमा', 9वीं-10वीं को 'पूर्व मध्यमा', 11वीं-12वीं को 'उत्तर मध्यमा' और ग्रेजुएशन को 'शास्त्री' कहा जाएगा। इसके बाद दो साल का 'आचार्य' कोर्स होगा। ये सभी डिग्रियां वैदिक सनातन बोर्ड से मान्यता प्राप्त होंगी। कैसी होती गुरुकुल की दिनचर्या गुरु-शिष्य संबंध- इस प्रणाली का केंद्रबिंदु गुरु और शिष्य के बीच घनिष्ठ, व्यक्तिगत और आत्मीय संबंध है। शिष्य, गुरु के परिवार के सदस्य की तरह रहते हैं। गुरु उन्हें बेटे की तरह स्नेह देते हैं। यह संबंध आपसी सम्मान, विश्वास और समर्पण पर आधारित रहता है। ब्रह्मचर्य- विद्यार्थी ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए, आमतौर पर 8 से 25 वर्ष की आयु तक, गुरुकुल में रहकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। निःशुल्क शिक्षा- गुरुकुल की शिक्षा पूरी तरह से निःशुल्क होती है। इसका संचालन समाज द्वारा दिए गए दान या किसी के संरक्षण से होता है। शिक्षा पूरी होने पर शिष्य अपनी क्षमतानुसार गुरु को गुरु दक्षिणा देते हैं। सामुदायिक जीवन और अनुशासन- छात्र आश्रम के दैनिक कार्यों में गुरु की मदद करते थे, जैसे लकड़ी लाना, भिक्षा मांगना, भोजन पकाना आदि। इन कार्यों से उनमें शारीरिक श्रम, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सेवा भाव के मूल्यों का विकास होता है। व्यक्तिगत ध्यान- गुरु प्रत्येक शिष्य की क्षमता, रुचि और ग्रहणशीलता के अनुसार उसे व्यक्तिगत मार्गदर्शन देते हैं। जिसे आज Student-centric learning कहा जाता है। कैसे होते हैं गुरुकुल? गुरुकुल प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली के आवासीय विद्यालय होते थे, जहां शिष्य गुरु के घर या आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे। यह शिक्षा की एक परंपरा है जहां गुरु-शिष्य संबंध, नैतिक चरित्र निर्माण, व्यावहारिक ज्ञान, प्रकृति से जुड़ाव और सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाता है, जिसे जीवन शैली का एक हिस्सा माना जाता है। कैसे पढ़ाई होती थी
राजा बली का प्रसंग दंभ व अहंकार त्यागने की शिक्षा देता है: पं. सुरेश
भास्कर न्यूज | खरोरा ग्राम गौरखेड़ा में साहू परिवार की ओर से आयोजित हो रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन रविवार को कथावाचक पंडित पंडित सुरेश कुमार शर्मा ने कथा प्रसंग में वामन, जन्मोत्सव, राम जन्म और कृष्ण अवतार की कथा सविस्तार बताया तो भक्त भावविभोर हो उठे। कथाव्यास ने पंडित सुरेश कुमार शर्मा व्यास पीठ से कहा कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से मनुष्य के कई जन्मों के पापों का क्षय हो जाता है। हमें भागवत कथा सुनने के साथ-साथ उसकी शिक्षाओं पर भी अमल करना चाहिए। प्रसंग में उन्होंने आगे बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बली को यह शिक्षा दी कि दंभ तथा अंहकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह भी बताया कि यह धन संपदा क्षणभंगुर होती है। इसलिए इस जीवन में परोपकार करो। उन्होंने कहा कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यदि हम संसार में पूरी तरह मोह ग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते है तो हमारी सारी भक्ति एक दिखावा ही रह जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि देवताओं को डर सताने लगा कि राजा इन्द्र की गददी पर आसीन नहीं हो जाए। इस पर देवताओं ने भगवान विष्णु के पास जाकर याचिका लगाई। भगवान विष्णु ने वामन अवतार का वेश धरा और राजा बली के पास पहुंचकर तीन पैर की जमीन मांग ली। राजा बली ने यह वचन दे दिया और भगवान ने विशालकाय रुप लेकर तीनों पैरों में ही संसार को नाप लिया। वामन अवतार प्रसंग में भगवताचार्य ने आगे बताया कि वामन विष्णु के 5वें तथा त्रेता युग के पहले अवतार थे। इसके साथ ही यह विष्णु के पहले ऐसे अवतार थे, जो मानव शरीर में बौने ब्राह्मण के रुप में प्रकट हुए। वामन ऋषि कश्यप तथा अदिति के पुत्र थे। वह आदित्यों में 12वें थे। ऐसी मान्यता है कि वह इंद्र के छोटे भाई थे। वामन को तीन पैरों वाला दर्शाया गया है। त्रिविक्रम रुप में एक पैर धरती पर दूसरा आकाश पर तथा तीसरा बली के सिर पर। भागवत कथा के अनुसार विष्णु ने इंद्र का देवलोक में पुन: अधिकार स्थापित करने के लिए यह अवतार लिया। कथा के दौरान वामन अवतार की आकर्षक झांकी भी सजाई गई थी। वहीं तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे रे झोली जैसे अनेक मधुर भजनों पर श्रद्घालु झूम उठे। कथा के कथावाचक पंडित सुरेश कुमार शर्मा कठिया वाले ने बताया कि 18फरवरी से 26फरवरी तक आयोजित हो रहे भागवत कथा का रसपान करने गांव सहित आसपास गांव से भी बड़ी संख्या में रसिक श्रोतागण पहुंच रहे है। कथा का समय दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक है।
शिक्षा विभाग में जिस काम के लिए सलाहकार लगाया गया, वही शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी विभागों में बकाया पेंशन प्रकरण को लेकर सबसे आगे है। हालात ये हो गए कि पहली बार वित्त विभाग अब साल में चार बार कैंप लगाएगा, ताकि पेंशन प्रकरणों का निस्तारण हो सके। अमूमन वित्त विभाग ऐसा नहीं करता, मगर पहली बार ये पहल की है। मगर सवाल ये है कि जिस महकमे में जिन कामों के लिए सलाहकार रखे गए, विभाग उसी में पिछड़ रहा है। शिक्षा निदेशालय में सुरेन्द्र कुमार पुरोहित को सलाहकार नियुक्त करने के साथ ही उनके जिन कामों का बंटवारा किया गया, उसमें पेंशन प्रकरणों का निस्तारण भी दिया गया है। मगर 18 फरवरी को वित्त विभाग ने जो परिपत्र जारी किया, उसमें साफ लिखा है कि शिक्षा विभाग के पेंशन प्रकरणों में सबसे ज्यादा कठिनाई हो रही है। शिक्षा विभाग से प्रतिवर्ष 11,000 कार्मिकों को पीपीओ जारी किए जाते हैं। 31 मार्च 2026 तक 2200 कार्मिक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 700 तो रिटायर हो भी चुके हैं, मगर उनके पेंशन प्रकरण अब तक विभाग को नहीं मिले। इस कारण उनकी पेंशन जारी नहीं हो पाई। इसलिए पहले चरण में शिक्षा विभाग में ही पेंशन अदालत लगाई जाएगी। संभाग स्तर पर पेंशन अदालतें लगेंगी और संबंधित व्यक्ति की समस्या का मौके पर निस्तारण करने का प्रयास होगा। इसमें संबंधित अधिकारियों की भी मौजूदगी अनिवार्य की गई है। ये आदेश वित्त विभाग के शासन सचिव राजन विशाल ने जारी किए। ओम थानवी संजय धवन नूतन हर्ष एक काम- दो सलाहकार नूतन हर्ष के जिम्मे जो काम मिला है, उसमें योजना-गैर योजना मदों में होने वाली बीएफसी की बैठक के प्रस्ताव तैयार करना है। साथ ही विधानसभा में पूछे गए बजट संबंधी सवालों के जवाब भी तैयार करना है। साथ ही साइकिल, टैबलेट क्रय के संबंध में भी जिम्मेदारी है। अब सुरेन्द्र पुरोहित के पास भी योजना मदों में बीएफसी के समय वित्त विभाग में प्रस्तुत करने का जिम्मा है। संजय धवन के पास पहला ही जिम्मेदारी वाला प्वाइंट है कि वे सरकार की बजट घोषणाओं का सफल संचालन कराएं। जन लेखा समिति की बैठक का जिम्मा धवन पर भी है। जन लेखा समिति का काम ओम थानवी पर भी है। सुरेन्द्र कुमार पुरोहित
जींद जिले में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा ही भावी पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य का असली आधार है। उन्होंने यह बात रविवार को विधानसभा क्षेत्र के गांव धरोदी स्थित भारत सीनियर सेकेंडरी स्कूल के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर कही। मंत्री बेदी ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार को एक पुण्य का कार्य बताया। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण परिवेश के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती है और उनमें संस्कार तथा सद्विचारों का समावेश होता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकारी शिक्षण संस्थाओं के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थान भी ग्रामीण छोर तक शिक्षा पहुंचाने की चुनौती को सफलतापूर्वक स्वीकार कर रहे हैं। शिक्षा का दीप प्रज्वलित करना चुनौतीपूर्ण कैबिनेट मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का दीप प्रज्वलित करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन अच्छे शिक्षण संस्थान संस्कार और सकारात्मक विचारों से युक्त शिक्षा का लगातार प्रसार कर रहे हैं, जो सराहनीय है। उन्होंने बच्चों के व्यक्तित्व में अनुशासन, संस्कृति और आत्मविश्वास की भावना के महत्व को रेखांकित किया, इसे युवा पीढ़ी के प्रगतिशील जीवन की आधारशिला बताया। वार्षिक जश्न मानकर करें परीक्षा की तैयारी कृष्ण कुमार बेदी ने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे परीक्षा को बोझ न मानकर इसे जीवन की तरक्की का एक सोपान समझें। आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास से जीवन का हर लक्ष्य पाना संभव है। लिहाजा विद्यार्थी परीक्षा को वार्षिक जश्न मानकर इसकी तैयारी करें। कैबिनेट मंत्री ने यह भी कहा कि किताबी शिक्षा के अलावा जीवन को उन्नति के शिखर पर पहुंचाने के लिए खेल, सांस्कृतिक विधा, तकनीकी कौशल तथा शोध जैसी अन्य महत्वपूर्ण प्रतिभाएं भी है, जिनपर फोकस कर विद्यार्थी अपना तथा समाज का नाम उंचा कर सकता हैं। स्कूल को 5.51 लाख देने की घोषणा कृष्ण बेदी ने अपने ऐच्छिक कोष से स्कूल को 5 लाख 51 हजार रुपए तथा हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मौजूद चार कलाकारों को 11-11 हजार रुपए देने की घोषणा की। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की भारी उपस्थिति रही और अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुतियां स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा दी गई। कैबिनेट मंत्री ने शिक्षा व खेल के क्षेत्र में प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित भी किया।
कोटपूतली में संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती:समाज सुधार, बालिका शिक्षा पर चर्चा कर दिया संदेश
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के कोटपूतली स्थित मोरीजावाली धर्मशाला में संत गाडगे महाराज की 150वीं जयंती मनाई गई। बसीठा रजक समाज समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज सुधार और बालिका शिक्षा पर चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता सूबेदार कैलाश चंद बेनिवाल ने की। इस अवसर पर संत गाडगे महाराज को पुष्पांजलि अर्पित की गई। उपस्थित सदस्यों ने समाज सुधार पर गहन विचार-विमर्श किया और अधिक से अधिक बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने का संदेश दिया। इस कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष सत्यनारायण, संरक्षक बद्री प्रसाद चौहान और लालचंद चौहान सहित मामचंद, रोहिताश, अशोक पंवार, जगदीश, परमानंद जी और हरफूल जैसे कई सदस्य उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में अन्य समिति सदस्य भी मौजूद थे।
भागलपुर में टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर नई-नई तकनीकों और नवाचार के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर रहे टीचरों को सम्मानित किया गया। समारोह का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मक प्रयोगों को बढ़ावा देना और शिक्षकों के सराहनीय प्रयासों को मंच देना था। कार्यक्रम के दौरान 'मेरा मोबाइल, मेरी शिक्षा' पहल की विशेष चर्चा रही। इसके तहत शिक्षक डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। मोबाइल, वीडियो सामग्री और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पढ़ाई को आसान और रोचक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल संसाधनों के उपयोग से बच्चों की सीखने की गति और समझ में सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है। समारोह में शिक्षकों की ओर से तैयार शैक्षणिक सामग्री और विभिन्न मॉडलों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कागज के टुकड़ों, चार्ट और स्थानीय संसाधनों से तैयार शिक्षण सामग्री ने सबका ध्यान खींचा। प्रदर्शनी में बच्चों की रचनात्मकता और शिक्षकों की मेहनत साफ झलक रही थी। बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ रही है टीचर अर्चना मिश्रा ने बताया कि बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जाती है ताकि पढ़ाई उनके लिए बोझ न बने। कक्षा में कराई गई गतिविधियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाता है, जिससे बच्चे घर पर भी अभ्यास कर सकें और अभिभावक भी उनकी प्रगति देख सकें। टीचर रंजीत कुमार ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक नवाचार के जरिए बच्चों में सीखने की रुचि जगा रहे हैं। स्थानीय सामग्री से तैयार मॉडल बच्चों को विषय समझने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं। समारोह में शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से शिक्षकों का मनोबल बढ़ता है और शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षिकाएं और शिक्षा से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
भागलपुर निवासी सत्यम मिश्रा को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिला है। 2025 की जून महीने में यह सम्मान उन्हें दिया गया था, जिसके बाद आज रविवार को वह भागलपुर स्थित अपने आवास पहुंचे। जहां उनके पिता-माता और अन्य परिजनों ने मिठाइयां खिलाकर बधाई दी। पिता ने अपने बेटे पर गर्व जताते हुए कहा बच्चे ने सीमित संसाधन में अपने माता-पिता के साथ-साथ भागलपुर और देश का नाम रोशन किया है। सत्यम मिश्रा को विश्वविख्यात Harvard University ने अपने प्रतिष्ठित फिलिस स्ट्रीमलिंग अवार्ड से सम्मानित किया। 2000 से दिए जा रहे इस सम्मान को पहली बार किसी भारतीय, वो भी बिहार के युवक को दिए जाने से खुली का माहौल है। सत्यम मिश्रा पिछले कई वर्षों से शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रहे हैं। महिलाओं और वंचित वर्ग की छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उनके प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। भारत के अलावा नाइजीरिया, इथियोपिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, लेबनान और जर्मनी समेत 20 से अधिक देशों की छात्र-छात्राओं को पढ़ाकर उन्होंने शिक्षा को सीमाओं से परे पहुंचाने का कार्य किया है। प्रतिष्ठित Fulbright Scholarship भी मिली है हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने उन्हें न केवल सम्मानित किया, बल्कि मानद डिग्री और विशेष स्कॉलरशिप भी प्रदान की। इससे पहले 2021 में उन्हें वैश्विक स्तर पर चर्चित Global Teacher Prize से नवाजा जा चुका है। इसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित Fulbright Scholarship भी प्राप्त हुई थी। लगातार मिल रहे इन सम्मानों ने भागलपुर के इस युवा को शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। हमें सत्यम पर गर्व है सत्यम मिश्रा मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले रविकांत मिश्रा के बेटे हैं। बेटे की इस उपलब्धि पर परिवार में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों ने भी इसे जिले के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। सत्यम मिश्रा ने बताया कि बिहार की मिट्टी से निकलकर हार्वर्ड के मंच पर सम्मानित होना सिर्फ मेरी नहीं, पूरे देश की जीत है। मेरा सपना है कि शिक्षा के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक अवसर पहुंचे और बेटियां आत्मनिर्भर बनें। सत्यम के पिता रविकांत मिश्रा ने कहा कि हमारे लिए यह अत्यंत भावुक क्षण है। सत्यम ने कठिन परिश्रम और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। हमें उस पर गर्व है।
टीईटी (TET) की अनिवार्य शर्त हटाने की मांग को लेकर एजुकेशन डिपार्टमेंट संघर्ष कमेटी ने तरनतारन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला अध्यक्ष हरजीत सिंह संधू को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन भारत सरकार के केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक अपनी बात पहुंचाने के उद्देश्य से दिया गया। बता दे कि मास्टर कैडर यूनियन के प्रदेश महासचिव गुरमीत सिंह भुल्लर, एलिमेंट्री टीचर यूनियन के जिला अध्यक्ष गुरविंदर सिंह बब्बू, लेक्चरर यूनियन के जिला अध्यक्ष मनजिंदर सिंह ढिल्लों, सुखविंदर सिंह धामी और रणजीत सिंह मालिया के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल भाजपा जिला अध्यक्ष से मिला। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2011 से पहले भर्ती हुए अध्यापकों के लिए लगाई गई टीईटी पास की अनिवार्य शर्त का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय से शिक्षक परेशान संगठन के नेताओं ने भाजपा जिला अध्यक्ष को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2011 से पहले भर्ती हुए अध्यापकों का पक्ष सुने बिना पदोन्नति और नौकरी में बने रहने के लिए टीईटी पास करने की शर्त लगाई है। अध्यापकों का कहना है कि इस शर्त से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले में समाधान निकालने की मांग ज्ञापन के माध्यम से अध्यापकों ने भाजपा जिला अध्यक्ष से केंद्रीय शिक्षा मंत्री से अपील की है कि इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि अध्यापकों के पक्ष में संसद में अध्यादेश जारी करके 2011 से पहले भर्ती हुए अध्यापकों को राहत प्रदान की जाए। कई लोग रहे मौजूद ज्ञापन सौंपते समय प्रतिनिधिमंडल में रशपाल सिंह, दिलबाग सिंह, जुगराज सिंह, संदीप सिंह, राजपाल सिंह, राजन कुमार, सतपाल सिंह, गुरलवदीप सिंह, मनजीत पारस, जसकरण संधू और प्रशोत्तम सिंह सहित अन्य शिक्षक भी मौजूद थे।
कोटा में SIR की फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन कर दिया है। अब जिले में 14 लाख 6 हजार 672 वोटर है। इनमें पुरुष मतदाता 7 लाख 26 हजार 54 और महिला मतदाता 6 लाख 80 हजार 580 है। वहीं 38 थर्ड जेंडर वोटर है। वोटर्स की संख्या के हिसाब से लाडपुरा जिले की सबसे बड़ी विधानसभा है। यहां 275,678 मतदाता है। जबकि सांगोद सबसे छोटी विधानसभा है। यहां 2,00388 वोटर है। 2,49,097 वोटर के हिसाब से कोटा दक्षिण दूसरी, 2,45,177 वोटर के हिसाब से रामगंजमंडी तीसरी, 2,30,387 वोटर के हिसाब कोटा उत्तर चौथी, 2,05,945 वोटर के हिसाब से पीपल्दा जिले की पांचवी बड़ी विधानसभा है। 52,537 दावे आपत्ति दर्ज, 3242 रिजेक्ट हुई 16 दिसंबर से 20 जनवरी में कुल 52,537 दावे आपत्ति दर्ज हुई। जिनमें से 3242 रिजेक्ट हुई। जिले में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म न. 6 के कुल 33,180 आवेदन आए। जबकि नाम हटवाने के लिए फॉर्म न. 7 के कुल 5967 आवेदन आए। शिफ्टिंग व संशोधन के लिए फॉर्म न. 8 के कुल 13,387 आवेदन आए। ओवरसीज वाटर (बाहर के एनआरआई) के लिए फॉर्म न. 6A के 3 आवेदन आए। एप्लीकेशन खारिज हुई शिक्षा मंत्री के क्षेत्र से सबसे कम दावे आपत्ति शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के विधानसभा क्षेत्र रामगंज मंडी से सबसे कम 5325 दावे आपत्ति आए। जबकि कोटा उत्तर से कांग्रेस विधायक व पूर्व मंत्री शांति धारीवाल व भाजपा विधायक कल्पना देवी के लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र से 12-12 हजार से ज्यादा आवेदन आए। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के विधानसभा क्षेत्र सांगोद से सबसे ज्यादा 819 एप्लीकेशन खारिज हुई। पीपल्दा विधानसभा सांगोद विधानसभा कोटा उत्तर विधानसभा कोटा दक्षिण विधानसभा लाडपुरा विधानसभा रामगंजमंडी विधानसभा कटने वाले नाम और जीत का अंतर......... ---------- ये खबर पढ़ें-कोटा में SIR की फाइनल लिस्ट, 33,910 नाम बढ़े:शांति धारीवाल और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के क्षेत्र में बढ़े मतदाता ; जिले में अब कुल 14,06,672 वोटर कोटा में निर्वाचन विभाग ने जिले की सभी 6 सीटों की एसआईआर के बाद फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन कर दिया है। SIR के फाइनल लिस्ट के अनुसार जिले में 1,25, 878 के करीब वोटर कट गए है। 16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट लिस्ट के बाद जिले में 33,910 नाम जुड़े हैं। ये खबर पढ़े
गरीबी व बीमारी समाज की बड़ी चुनौती, इन्हें शिक्षा के माध्यम से दूर करना संभव
आपको ये समझना होगा कि ‘गरीबी और बीमारी समाज की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। इनको शिक्षा के माध्यम से दूर किया जा सकता है।’ मैंने कुष्ठ रोगियों के इलाज और पुनर्वास में प|ी के गहने तक बेच दिए। तनख्वाह और पेंशन को दाव पर लगा दिया। समाज से आपको जो मिला है, उसे समाज के लिए लौटाएं भी, तभी समाज भी आपको याद रखेगा। वहीं ‘मासूमियत’, ‘आश्चर्य’ और ‘चमत्कार’ जीवन के तीन प्रमुख भाव हैं। यह कहना था पद्मश्री अवॉर्डी व सोशल वर्कर प्रेम सिंह का। वे शनिवार को जेईसीआरसी फाउंडेशन में आयोजित इनोसेंस प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे। गौरतलब है कि उन्होंने एमबीए के बाद 13,000 से अधिक कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास का काम किया। इन रोगियों के लिए बनाए गए 97 नियमों में से कई में सरकारी स्तर पर सुधार करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्व आईएएस तनु जैन ने कहा- इंसान के रूप में जन्म लिया है तो एक दूसरे की मदद करने को धर्म बनाइए। मनुष्य में त्याग और दूसरों की मदद करने की भावना होती है। सफल होने को सच बोलें, सभी का सम्मान करें और मोबाइल का सीमित उपयोग करें। स्टूडेंट्स को शपथ दिलाई कि वे रोजाना आधे घंटे से अधिक मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करेंगे। इंसान होने के नाते एक दूसरे की मदद करें }पूजा मत करो, बराबरी का दर्जा दो ; डॉ. कीर्ति भारती ने कहा- मैं महिलाओं की पूजा नहीं, उन्हें समान अधिकार व बराबरी का दर्जा देने की उम्मीद करती हूं। गौरतलब है कि इन्होंने अभी तक 53 बाल विवाह रुकवाए, 2200+ बाल विवाह समय रहते रोके। इसके लिए इनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। }दिनभर की गतिविधियां; ‘पाइप क्लीनर फ्लॉवर्स’ वर्कशॉप में स्टूडेंट्स ने रंग-बिरंगे पाइप क्लीनर से फूल बनाने सीखे। पेपर प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी में कागज पर प्रिंटिंग की विभिन्न तकनीकों के बारे में बताया गया। पॉटरी वर्कशॉप में स्टूडेंट्स ने मिट्टी से आकार और वस्तुएं बनाना सीखा।
उच्च शिक्षा विभाग:अब 50 हजार ज्यादा फीस देकर 11वें साल भी टेम्प्रेरी NOC ले सकेंगे कॉलेज
उच्च शिक्षा विभाग ने टेम्प्रेरी एनओसी लेने वाले प्राइवेट कॉलेजों को शिथिलता दी है। प्राइवेट कॉलेज नीति 2021-22 में छूट देते हुए विभाग ने कॉलेजों को 11वें और 12वें साल में भी टेम्प्रेरी एनओसी लेने का मौका दिया है, लेकिन इसके लिए हर साल पेनल्टी फीस में 50 हजार रुपए ज्यादा जमा कराने होंगे। पहले 10 वर्ष तक का ही नियम था। कॉलेजों को प्रथम अस्थायी प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के बाद 5 साल में स्थायी अनापत्ति प्रमाण-पत्र के मापदंड पूरे न करने पर छठे साल में 2.5 लाख, सातवें साल में 3 लाख, आठवें साल में 3.5 लाख, नौवें में 4 लाख और 10वें साल में 4.5 लाख रुपए लगते थे। अब 50 हजार रुपए अधिक पेनल्टी के साथ 2 साल का और मौका दिया गया है।
शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि से 1.68 लाख कर्मियों को राहत
Chief Minister Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े दो बड़े वर्गों, शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि करके लगभग 1.68 लाख कर्मियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत दी है। विधानसभा के बजट सत्र ...
पंजाब की भगवंत मान सरकार लगातार शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयास कर रही है. इसके परिणाण भी आने शुरू हो गए हैं. राज्य के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि सरकारी स्कूलों के 305 विद्यार्थियों ने जेईई मेन्स की परीक्षा को पास किया है.
देहरादून में विधायक की उपस्थिति में समर्थकों ने की प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की पिटाई
देहरादून। उत्तराखंड के देहरादू में स्थानीय विधायक उमेश शर्मा काऊ की उपस्थिति में उनके समर्थकों ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल की शनिवार को पिटाई कर दी। इस घटना के समय शर्मा नौडियाल से मिलने के लिए पहुंचे थे। घायल अवस्था में निदेशक को कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि विधायक ने […] The post देहरादून में विधायक की उपस्थिति में समर्थकों ने की प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की पिटाई appeared first on Sabguru News .
कानपुर के घाटमपुर नगर स्थित मॉडल स्कूल सिहारी में शनिवार दोपहर वार्षिकोत्सव 'अभ्युदय' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची विधायक सरोज कुरील ने बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रहने और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह कुंजी है जिससे सभी अपने सपने पूरे कर सकते हैं। यह कार्यक्रम छोटे सपने बड़ी उड़ान थीम पर आधारित था। इसका शुभारंभ आयुर्वेदिक राजकीय चिकित्सालय की डॉक्टर संध्या सिंह और IDBI बैंक की शाखा प्रबंधक शजसविंदर कौर ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण कर किया। मुख्य अतिथि विधायक सरोज कुरील का स्वागत माल्यार्पण, बैच अलंकरण और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन सहायक अध्यापिका अंकिता मेहरा ने किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। छात्रा दिव्या ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जबकि अन्य बच्चों ने 'चक धूम धूम', 'बम बम भोले', 'सितारे जमीं पर' और 'ना मांगें सोना चांदी' जैसे गीतों पर प्रदर्शन किया। हास्य नाटक और 'निपुण भारत का सपना, सब बच्चे सीखें भाषा और गणना' संदेश के माध्यम से शिक्षा के महत्व और बच्चों की प्रतिभा को उजागर किया गया। मोबाइल और इंटरनेट के दुरुपयोग पर आधारित 'यादों की बारात' प्रस्तुति भी दी गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कार और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में विधायक सरोज कुरील ने विद्यालय कार्यालय के सुंदरीकरण का फीता काटकर उद्घाटन किया। उन्होंने बच्चों को अध्ययन पर ध्यान देने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रत्ना यादव ने कहा कि उनके विद्यालय के बच्चे किसी निजी स्कूल के बच्चों से कम नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य हमेशा बच्चों को हर क्षेत्र में उत्कृष्ट बनाना है। यह लोग रहे मौजूद इस अवसर पर ARP सोनी सोनकर, मीनू सिंह, ARP शिव शंकर कटियार, विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष रेणु, छात्र-छात्राओं के अभिभावक, सभासद सत्यम चौहान और विजय कुमार वाल्मीकि सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबंधित 19 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने राइट टाउन से होम साइंस कॉलेज तक पैदल मार्च निकालकर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को ज्ञापन सौंपा। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने होम साइंस कॉलेज के बाहर नारेबाजी की। एबीवीपी के नगरीय महामंत्री आर्यन पूंज ने बताया कि इन मांगों को लेकर परिषद ने पहले भी रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन दिया था। उन्होंने यह भी बताया कि दो दिन पूर्व विश्वविद्यालय प्रशासन को 'सद्बुद्धि' देने के लिए यज्ञ का आयोजन भी किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मंत्री परमार ने मांगों पर दिया आश्वासन आर्यन पूंज ने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर सुनवाई न होने के कारण संगठन ने तत्काल समाधान के लिए उच्च शिक्षा मंत्री के समक्ष अपनी मांगें रखीं। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखा जाएगा और जल्द निर्णय कराने का प्रयास किया जाएगा। प्रदर्शन में ये रहे शामिल इस प्रदर्शन में केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य माखन शर्मा, महानगर मंत्री आर्यन पुंज, प्रांत सह मंत्री अनमोल सोनकर, ऐश्वर्य सोनकर, शोभित मिश्रा, अक्षत ताम्रकार, भास्कर पटेल, प्रफुल तिवारी, दिव्यांक पचौरी, लखन मांझी, आशुतोष पटेल, आयुष बारी, कृष्ण ग्वालवंश, यश पटेल, आयुष पटेल, अंकित सिंह, पुष्कर शुक्ला, सोम यादव, आदित्य पावर, प्रक्ष सिसोदिया, अनिकेत श्रीवास्तव, राज नेमा और आभास दुबे सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
कोटा में निर्वाचन विभाग ने जिले की सभी 6 सीटों की एसआईआर के बाद फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन कर दिया है। SIR के फाइनल लिस्ट के अनुसार जिले में 1,25, 878 के करीब वोटर कट गए है। 16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट लिस्ट के बाद जिले में 33,910 नाम जुड़े हैं। SIR की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अब जिले में 14 लाख 6 हजार 672 वोटर है। इनमें पुरुष मतदाता 7 लाख 26 हजार 54 और महिला मतदाता 6 लाख 80 हजार 580 है। वहीं 38 थर्ड जेंडर वोटर है। SIR शुरू होने से पहले कुल 15 लाख 32 हजार 550 वोटर थे। 16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में 13 लाख 72 हजार 772 वोटर थे। SIR की फाइनल सूची में सबसे ज्यादा कोटा दक्षिण में 7 हजार वोटर बढ़े है। ड्राफ्ट सूची में 2 लाख 42 हजार 81 मतदाता का वोटर लिस्ट में नाम था। दावे-आपत्तियों के बाद जारी फाइनल मतदाता सूची में अब यहां 2 लाख 49 हजार 97 मतदाता है। कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री शांति धारीवाल की विधानसभा कोटा उत्तर में साढ़े 5 हजार व शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के क्षेत्र रामगंजमंडी में साढ़े 4 हजार नाम बढ़े है। कोटा उत्तर में ड्राफ्ट सूची में 2,24,519 का नाम वोटर लिस्ट में था। फाइनल सूची में 2 लाख 30 हजार 387 का नाम वोटर लिस्ट में है। इधर रामगंज मंडी में ड्राफ्ट सूची में 2,40,637 के नाम वॉटर लिस्ट में थे। फाइनल सूची में 2,45,177 के नाम वोटर लिस्ट में है। कोटा जिले में कितने लोगों के नाम कटे....… --- ये खबर भी पढ़िए- कोटा में 1.59 लाख नाम वोटर लिस्ट से कटे:कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री की विधानसभा में 40 हजार नाम, शिक्षा मंत्री के क्षेत्र से 21 हजार नाम हटे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में जिन वोटर्स के नाम काटे गए हैं, उनकी लिस्ट जारी कर दी गई है। इसके अनुसार कोटा जिले में (कुल 6 विधानसभा क्षेत्र) 1 लाख 59 हजार 788 वोटर्स के नाम कटे हैं।इनमें 1 लाख 629 वोटर्स दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं। 25 हजार 65 की मौत हो चुकी। 7 हजार 6 डबल वोटर्स थे। इसके अलावा 26 हजार 153 संबंधित पते पर एब्सेंट (अनुपस्थित) मिले। 935 वोटर्स के नाम अन्य कारणों से कटे है। खबर पढ़े
नीति आयोग अधिकारी ने बड़वानी का दौरा किया:शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका योजनाओं का लिया जायजा
बड़वानी में भारत सरकार की संयुक्त सचिव और नीति आयोग की केंद्रीय प्रभारी अधिकारी निधि केसरवानी ने शनिवार को बड़वानी जिले के आकांक्षी विकासखंड पाटी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला बाल विकास और आजीविका से संबंधित कई गतिविधियों का गहन अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर जयति सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। केसरवानी ने सर्वप्रथम शासकीय माध्यमिक विद्यालय बनमाली का दौरा किया। यहां उन्होंने स्कूल की शैक्षणिक गुणवत्ता, भोजन व्यवस्था और परिसर का अवलोकन किया। कुक्कुटपालन इकाई का निरीक्षण उन्होंने ग्राम बनमाली में आजीविका मिशन के तहत संचालित स्व-सहायता समूह की सदस्य जहांबाई खरते की कुक्कुटपालन इकाई का निरीक्षण किया। जहांबाई वर्तमान में 500 मुर्गियों का पालन कर रही हैं और जैविक खेती भी करती हैं। केसरवानी ने महिला सशक्तिकरण और आजीविका के इन प्रयासों की सराहना की। आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक 2 लिम्बी में उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद किया। इस दौरान ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं पोषण के कार्यों, उनकी पहचान और निगरानी के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने जमीनी चुनौतियों को भी समझा और टीबी तथा सिकल सेल के मरीजों से भी बातचीत की। लेबर रूम और जनरल वार्ड का निरीक्षण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोसर में, निधि केसरवानी ने लेबर रूम और जनरल वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करने के निर्देश दिए और उत्कृष्ट कार्य करने वाली ममता ब्रिगेड वॉलंटियर्स को सम्मानित भी किया। शासकीय जनजातीय कन्या आश्रम रोसर में, उन्होंने छात्राओं से सीधी बात की और उनकी पढ़ाई तथा आश्रम की सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने रसोई घर और शयन कक्षों का भी निरीक्षण किया। अंत में, निधि केसरवानी ने क्रियाशील पंचायत भवन रोसर का निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर शासकीय योजनाओं के लाभ और उनकी समस्याओं पर प्रतिक्रिया ली। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे शासन की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना सुनिश्चित करें। केंद्रीय प्रभारी अधिकारी ने लिया जगह जायजा…
हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) के प्रधान सतपाल सिंह संधू की अगुवाई में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पवन कुमार के साथ बैठक हुई। बैठक का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं, प्रायोगिक परीक्षाओं, उड़नदस्ता, अंकन (मार्किंग) एवं अन्य शैक्षणिक व प्रशासनिक विषयों से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं पर समाधान करवाना था। बोर्ड अध्यक्ष ने एसोसिएशन के मांग पत्र में दिए गए बिंदुओं को गंभीरता के साथ सुना। बैठक में अधिकांश मांगों पर बोर्ड स्तर पर सैद्धांतिक सहमति बनी। बोर्ड अध्यक्ष ने सभी प्रकार की बोर्ड परीक्षा ड्यूटी, उड़नदस्ता एवं उत्तरपुस्तिका अंकन के मानदेय में वृद्धि करने एवं परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी देने वाले शिक्षकों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने बारे ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया। बोर्ड अध्यक्ष ने संगठन से अपील करते हुए कहा कि शिक्षक न केवल निरीक्षक के रूप में कार्य करें, बल्कि परीक्षार्थियों को परीक्षा के तनाव से मुक्त रखने और ईमानदारी से परीक्षा देने के लिए प्रेरित भी करें। हसला प्रधान सतपाल संधू ने कहा कि हसला संगठन का उद्देश्य सदैव पारदर्शी, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि बैठक में बनी सहमति के अनुरूप शीघ्र ही ठोस निर्णय एवं कार्रवाई देखने को मिलेगी, जिससे शिक्षक-विद्यार्थी दोनों को लाभ होगा। इस अवसर पर बोर्ड के अधिकारी एवं हसला संगठन के कई पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। एसोसएिशन पदाधिकारियों ने पुन: आश्वस्त किया कि वह बोर्ड द्वारा संचालित करवाई जाने वाली वार्षिक परीक्षाओं का नकल रहित एवं पारदर्शी संचालन करवाने में पूर्ण सहयोग एवं सहभागिता के लिए तत्पर रहेगा।
बाल विकास शिक्षा निकेतन विद्यालय के तीन छात्रों का नेतरहाट आवासीय विद्यालय में चयन
सरायकेला| जिला मुख्यालय स्थित सरायकेला के बाल विकास शिक्षा निकेतन विद्यालय के लिए गौरव का क्षण है। विद्यालय के तीन मेधावी छात्रों का चयन राज्य के प्रतिष्ठित विद्यालय नेतरहाट आवासीय विद्यालय, नेतरहाट में वर्ग छह में नामांकन के लिए हुआ है। चयनित छात्रों में अर्जुन गोप, करमचंद महतो व कैलाश अल्डा शामिल हैं। बताया गया कि इन छात्रों ने प्रवेश परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय परिवार व अभिभावकों में हर्ष का माहौल है। विद्यालय के प्रधानाचार्य विद्या भूषण सिंह ने चयनित छात्रों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने इसे विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता का परिणाम बताया। विद्यालय प्रबंधन ने आशा व्यक्त की कि ये छात्र नेतरहाट में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले और विद्यालय का नाम रोशन करेंगे।
विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों को दिया गया प्रशिक्षण
किशनगंज| जिले के कोचाधामन प्रखंड स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोहरा में विद्यालय शिक्षा समिति सदस्यों के लिए तीन दिवसीय गैर आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को शुरू हुआ। प्रशिक्षण के पहले दिन सीआरसी यूएमवी मोहरा के अंतर्गत आने वाले सभी सात प्राथमिक विद्यालयों के प्रधान, अध्यक्ष और सचिव सदस्यों ने भाग लिया। इस दौरान विद्यालय स्तर पर संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही, निपुण बिहार कार्यक्रम पर भी चर्चा की गई, जिसका लक्ष्य 2026-2027 तक कक्षा एक से तीन के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान की समझ विकसित करना है। प्रतिभागियों को अक्षरों और संख्याओं की समझ विकसित करने के तरीकों के बारे में बताया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सीआरसी संचालक सह प्रधानाध्यापक अयोध्या प्रसाद सिंह, ट्रेनर इनहेसार राही और ट्रेनर अशोक कुमार ठाकुर द्वारा आयोजित किया जा रहा है। वे प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान कर रहे हैं।
प्रशिक्षण में विद्यालय शिक्षा समिति को सशक्त बनाने पर दिया गया जोर
सिटी रिपोर्टर| वजीरंगज शिक्षा विभाग के निर्देश पर बिहार शिक्षा परियोजना समग्र शिक्षा, गया द्वारा विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों का तीन दिवसीय गैर-आवासीय प्रशिक्षण शुक्रवार को वजीरगंज प्रखंड के जयप्रकाश उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कुर्किहार स्थित संकुल संसाधन केंद्र में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण में समिति के अध्यक्ष, सचिव एवं अन्य सदस्यों ने भाग लिया। प्रशिक्षक कृष्ण कुमार पासवान एवं शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य समिति के सदस्यों को विद्यालय की गतिविधियों से जोड़ना तथा उन्हें यह अहसास कराना है कि विद्यालय उनकी अपनी संस्था है और उसकी प्रगति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जाती है। इसके लिए समिति के सदस्यों का सक्रिय, संवेदनशील और सशक्त होना आवश्यक है। साथ ही अभिभावकों एवं समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। प्रशिक्षण में संकुल स्तर के मध्य विद्यालय नौदिहा, मध्य विद्यालय रेंगना, चरवाहा प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय उमन बिगहा तथा प्राथमिक विद्यालय कुर्किहार के पदेन सदस्यों सहित पांच सदस्य शामिल हुए। मौके पर संकुल संचालक जयशंकर प्रसाद, समन्वयक अजय कुमार हारित, शिक्षक कौशल सिंह, रामकिशोर शर्मा, विपिन बिहारी, बिंदु कुमारी, कृति कुमारी, लवली कुमारी सहित समिति के सदस्य वीणा कुमारी, सीमा देवी, राधा देवी, राधा रुक्मिणी देवी, मनोरमा देवी, ऋणी देवी, मुन्नी देवी आदि उपस्थित थे।
शिक्षा गुणवत्ता की परख करने के लिए बूजराज गांव के प्राइमरी स्कूल पहुंचा प्रशासनिक अमला
भास्कर न्यूज| महासमुंद शासकीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं को परखने के लिए शुक्रवार को डिप्टी कलेक्टर शुभम देव व तेजपाल ध्रुव ने पीएमश्री शासकीय प्राथमिक शाला बृजराज, महासमुंद का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने न केवल व्यवस्थाएं जांची, बल्कि क्लास में बैठकर बच्चों की बौद्धिक क्षमता का आकलन भी किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न घटकों की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने स्कूल में उपलब्ध स्मार्ट क्लास, इंटरनेट सुविधा, फर्नीचर और पुस्तकालय का निरीक्षण किया। विशेष रूप से जादुई पिटारा, टीएलएम (शिक्षण सामग्री) के उपयोग और बैगलेस डे गतिविधियों की जानकारी ली। इसके साथ ही मिशन लाइफ के तहत युवा व इको क्लब के गठन और बाला पेंटिंग की स्थिति का अवलोकन किया गया। दोनों डिप्टी कलेक्टरों ने बच्चों के अधिगम स्तर को परखने के लिए उनसे पठन और गणितीय कौशल से जुड़े सवाल किए। बच्चों के सही जवाबों से प्रसन्न होकर अधिकारियों ने उनके साथ जादुई अंक का खेल भी खेला। अधिकारियों ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना की और विद्यार्थियों के पूछे गए जिज्ञासापूर्ण सवालों के बड़े उत्साह के साथ जवाब दिए। बुनियादी सुविधाओं के बारे में भी लिया जायजा प्रशासनिक अधिकारियों ने स्कूल में स्वच्छ पेयजल, क्रियाशील टॉयलेट्स और हाथ धोने की सुविधा का भी निरीक्षण किया। उन्होंने शिक्षकों और बच्चों को प्रदाय किए गए आई-कार्ड तथा रिकॉर्ड संधारण के लिए संधारित पंजियों की जांच की। इस मौके पर डीएमसी रेखराज शर्मा, एपीसी संपा बोस, बीआरसीसी जागेश्वर सिन्हा, संकुल समन्वयक सुरेन्द्र चन्द्राकर, प्रधान पाठक गोमती साहू सहित अन्य मौजूद थे।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती; दस्तावेज सत्यापन कार्य शिक्षा विभाग करेगा
भास्कर संवाददाता | झुंझुनूं राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से की गई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 के दस्तावेज सत्यापन की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग को मिली है। विभाग की ओर से मंडल स्तर पर चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन का काम किया जाएगा। बोर्ड ने विभाग को दस्तावेज सत्यापन के लिए 145250 अभ्यर्थियों की सूची सौंपी है। विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। प्रत्येक मंडल को अनुमानित 16 हजार अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन करने होंगे। दस्तावेज सत्यापन का काम 9 मार्च से 13 अप्रैल तक चलेगा। यानी इन 36 दिनों में से 22 दिन सत्यापन का काम होगा। बाकी दिन अवकाश रहेगा। बोर्ड ने 53750 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन किया था। पिछले दिनों इस भर्ती का प्रारंभिक परिणाम जारी किया गया था। इसमें पदों के मुकाबले दो गुणा अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए सूचीबद्ध किया गया था। कई अभ्यर्थियों के समान अंक होने के कारण अभ्यर्थियों की संख्या 1.45 लाख तक पहुंच गई। 9 मार्च से 13 अप्रैल तक होंगे सत्यापन : 24 फरवरी तक दस्तावेज सत्यापन करने वाली टीमों का गठन होगा। 7 चरणों में सत्यापन होगा। पहले चरण में 9 से 13 मार्च तक होंगे। दूसरे के 16 से 19 मार्च, तीसरे के 23 से 25 मार्च तक, चौथे के 27 मार्च को, पांचवे के 30 मार्च को, छठे में 1 से 2 अप्रैल तक और सातवें चरण में सत्यापन 6 से 10 तक होंगे।
शिक्षा से संवरता है भविष्य, बनता है सशक्त समाज : चौधरी
भास्कर न्यूज | छुरा नगर स्थित कचना ध्रुवा निजी महाविद्यालय का 21वां वार्षिक उत्सव एवं सम्मान समारोह शुक्रवार को गारिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद रुपकुमारी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही, जबकि नगर पंचायत अध्यक्ष तुकेश्वरी निषाद ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पूजा-अर्चना से हुआ। महाविद्यालय परिवार ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। सांसद रुपकुमारी चौधरी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा, “जिस जीवन में शिक्षा का प्रकाश होता है, वहां संभावनाओं की कोई सीमा नहीं रहती। शिक्षा व्यक्ति को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाती है और आत्मविश्वास प्रदान करती है।” उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे उपलब्ध अवसरों की पहचान करें और अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों को संबोधित करते हुए कहा कि लड़कियां हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं और उनकी सफलता पूरे समाज का गौरव बनेगी। समारोह में प्रबंध समिति एवं प्राचार्य ने महाविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों और विकास पर प्रकाश डाला। शिक्षा को केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने तक सीमित न मानते हुए उन्होंने व्यक्तित्व विकास और संस्कार निर्माण को प्राथमिकता बताया। इस अवसर पर प्रबंध समिति अध्यक्ष जितेंद्र साहू, सदस्य तेजस्वी यदु, लवण साहू, अश्वनी साहू, प्राचार्य डॉ. डी.के. साहू, वरिष्ठ प्राध्यापक तरुण निर्मलकर, आर.आर. कुर्रे, पवन कुमार यादव, कैलाश साहू, धनराज ध्रुव, विनोद यादव, प्राध्यापिका निर्मला यादव, आरती साहू, रश्मि ध्रुव, टेकेश्वरी साहू, टिकेश्वर निर्मलकर, छात्र संघ अध्यक्ष कु. सोनिया साहू, जागृत गिरी गोस्वामी, ज्योति ध्रुव, टेमिन पटेल सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक उपस्थित रहे। समारोह ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान का सशक्त माध्यम है।
शेखपुरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने नगर के सेवा बस्ती गिरिहिंडा में परिषद् की पाठशाला का शुभारंभ किया है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन एसडीपीओ सह एएसपी राकेश कुमार और नगर परिषद शेखपुरा के कार्यपालक पदाधिकारी विनय कुमार ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। उद्घाटन समारोह में विभाग संयोजक आकाश कश्यप, जिला सह संयोजक निशांत कुमार, नगर मंत्री बबन राय, नगर सह मंत्री रौशन कुमार और कॉलेज अध्यक्ष बिट्टू सम्राट सहित कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर Impact Spark Foundation के अंजनी कुमार के सहयोग से जरूरतमंद विद्यार्थियों को कॉपी और पेन वितरित किए गए। एएसपी राकेश कुमार ने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति को सशक्त बनाकर समाज और राष्ट्र के विकास में भागीदार बनाती है। उन्होंने एबीवीपी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से वंचित और जरूरतमंद बच्चों को नई दिशा मिलेगी। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विनय कुमार ने भी इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने 'परिषद् की पाठशाला' को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। वक्ताओं ने बताया कि 'परिषद् की पाठशाला' का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। इसका लक्ष्य उन्हें मुख्यधारा में शामिल कर अपने सपनों को साकार करने में मदद करना है। एबीवीपी के पदाधिकारियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के सामाजिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया। उपस्थित सभी लोगों ने इस पहल को समाज के लिए एक सकारात्मक और सराहनीय कदम बताया।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार इस मौलिक अधिकार की खुली अनदेखी कर रही है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की बदहाली, शिक्षा बजट में कटौती, RTE सीटों में कमी और शिक्षकों की भर्ती नहीं किए जाने के मुद्दे पर AAP ने सरकार पर तीखा हमला बोला।प्रदेश में शिक्षा को 86वें संविधान संशोधन (2002) के जरिए मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है। संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी दी गई है। 1 अप्रैल 2010 से लागू इस प्रावधान के तहत शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 अस्तित्व में आया। आत्मानंद स्कूलों में फंड की कमी, संसाधन ठप प्रदेश महासचिव वदूद आलम ने कहा कि आत्मानंद स्कूलों को मिलने वाले फंड में लगातार कटौती की जा रही है। कई स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। शिक्षकों की भारी कमी है, बिजली बिल बकाया हैं, संसाधनों का अभाव है और बच्चों को ड्रेस व किताबें तक समय पर नहीं मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार करोड़ों रुपये प्रचार-प्रसार पर खर्च कर रही है, लेकिन स्कूलों को नियमित और पर्याप्त बजट नहीं दिया जा रहा। फंड की कमी के चलते कई जगह मरम्मत, रंग-रोगन, प्रयोगशाला और शैक्षणिक गतिविधियां ठप पड़ी हैं। राजधानी रायपुर के आत्मानंद स्कूलों को बिजली बिल के नोटिस, राजनांदगांव में शिक्षकों के खाली पद और कम बजट, तथा बस्तर संभाग में संसाधनों की भारी कमी का उदाहरण देते हुए पार्टी ने कहा कि यह स्थिति पूरे प्रदेश की हकीकत है। RTE की 24 हजार से ज्यादा सीटें खत्म प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ ने बताया कि हाल ही में राज्य सरकार ने RTE के तहत 44,173 सीटों के बजाय सिर्फ 19,466 सीटों पर ही प्रवेश देने का फैसला किया है। यानी 24 हजार से अधिक सीटें समाप्त कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि पहले RTE के तहत निजी स्कूलों में नर्सरी, पीपी-1, पीपी-2 से लेकर कक्षा पहली तक प्रवेश मिलता था। अब नियम बदलकर सीधे कक्षा पहली में ही भर्ती अनिवार्य कर दी गई है। इससे गरीब परिवारों को नर्सरी और पीपी-1 में बच्चों का दाखिला कराने के लिए निजी स्कूलों की भारी फीस चुकानी पड़ेगी। 10 हजार स्कूल बंद, 50 हजार शिक्षकों की भर्ती लंबित प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय कुमार झा ने आरोप लगाया कि सरकार सुनियोजित तरीके से बच्चों का भविष्य खराब कर रही है। युक्तियुक्तकरण के नाम पर 10 हजार स्कूल बंद कर दिए गए हैं। ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की हालत जर्जर है और 50 हजार शिक्षकों की भर्ती लंबित है। उन्होंने कहा कि सरकारी मुफ्त शिक्षा को कमजोर कर निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह सरकार शिक्षा विरोधी है। सरकार के सामने AAP की तीन बड़ी मांगें प्रदेश मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी ने कहा कि पार्टी सरकार से मांग करती है कि: सभी आत्मानंद स्कूलों को तत्काल नियमित और पूरा फंड जारी किया जाए। RTE के तहत नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 से प्रवेश की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा में पुराने फीडिंग कैडर सिस्टम के तहत नए शिक्षकों की भर्ती की जाए। शिक्षा के मुद्दे पर जनआंदोलन की चेतावनी आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शिक्षा के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो पार्टी आने वाले दिनों में इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी।
शाजापुर के ग्राम पिपलिया गोपाल स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को कक्षा 5वी और 8वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्रों को टपकती छत के नीचे बैठना पड़ा। हिंदी का पहला पेपर दे रहे 144 विद्यार्थी टाटपट्टी पर बैठकर परीक्षा दे रहे थे, तभी बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण परीक्षा कक्ष की छत से पानी टपकने लगा, जिससे बच्चों को भीगते हुए परीक्षा देने को मजबूर होना पड़ा। परीक्षा का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक था। तस्वीरों में साफ दिख रहा था कि बाल्टी और मग रखकर पानी को फैलने से रोकने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन इसके बावजूद टाटपट्टी और फर्श गीले हो गए थे। बच्चों के कपड़ों पर भी पानी टपक रहा था। यह शासकीय स्कूल तीन दिन पहले भी बच्चों से शौचालय की सफाई कराने के मामले में चर्चा में आया था। अब एक बार फिर शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आई है, जहां छात्रों को ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में परीक्षा देनी पड़ी। अचानक से आया पानी इस मामले में स्कूल की शिक्षिका शबाना परवीन ने बताया कि उन्हें बारिश होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि परीक्षा शुरू होते ही बारिश भी आ गई। अचानक छत के रास्ते क्लास में पानी आना शुरू हो गया।
यूपी में पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले 1.70 लाख शिक्षा मित्र और अनुदेशकों को योगी सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। शिक्षा मित्रों को अब 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार रुपए हर महीने मिलेंगे। अभी तक शिक्षा मित्रों को 10 और अनुदेशकों को 9 हजार रुपए ही मिल रहे थे। सीएम योगी ने विधानसभा में इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा, सरकार ने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के हित में यह कदम उठाया है। पहले सपा सरकार में इन्हें मात्र 3 हजार रुपए मिलते थे। हमारी सरकार ने 2017 में ही 10 हजार किया था। अब महंगाई को देखते हुए एक साथ 8 हजार रुपए की बढ़ोतरी की गई है। 9 साल बाद शिक्षा मित्रों की सैलरी बढ़ी है। अब उनका ट्रांसफर भी होगा। सरकार ने शिक्षा मित्रों को और उनके परिवार को पांच लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा भी दी है। सीएम ने स्वास्थ्य विभाग में 75 हज़ार नौकरी की भी घोषणा की। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा- पहली बार सरकार ने एक साथ 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी की है। इस महंगाई के दौर में शिक्षा मित्रों को इससे बड़ी राहत मिलेगी। हमारी मांग 30 हजार रुपए की थी, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए यह भी बहुत है। सरकार ने हमारी लंबे समय से चली आ रही मांग पर अमल किया है। हम शिक्षा मित्रों की ओर से योगी सरकार को बधाई देते हैं। 'दैनिक भास्कर' ने 24 दिन पहले खुलासा किया था- यूपी में शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ेगा:बुजुर्गों-दिव्यांगों और विधवाओं की पेंशन में भी होगा इजाफा; बजट के जरिए वोटबैंक साधेगी सरकार सीएम के फैसले पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा, मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने का निर्णय निश्चय ही अत्यंत सराहनीय एवं ऐतिहासिक है। अप्रैल से शिक्षामित्रों को 18,000 और अनुदेशकों को 17,000 मानदेय दिया जाएगा। यह निर्णय प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के अथक परिश्रम, समर्पण तथा शिक्षा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का सम्मान है। 2017 में दोगुना हुआ था अनुदेशकों का मानदेय, नहीं हुआ लागूअनुदेशकों का मानदेय वर्ष 2017 में करीब 9 हजार रुपए से बढ़ाकर 17,000 रुपए किया गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इस निर्णय को लागू नहीं किया गया। इसके विरोध में अनुदेशकों ने लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच में याचिका दायर की थी। लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के तत्कालीन न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने अनुदेशकों को 17,000 रुपए मानदेय 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने केवल एक वर्ष के लिए 17,000 रुपए मानदेय भुगतान का निर्देश दिया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की वह अपील खारिज कर दी है, जिसमें यूपी सरकार अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने के खिलाफ थी। साथ ही यह आदेश दिया है कि अनुदेशकों की नौकरी खत्म न की जाए। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने साफ कहा है कि संविदा की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी अनुदेशकों की नौकरी खत्म नहीं होगी। 10 साल से लगातार काम करने की वजह से यह पद ऑटोमैटिक तरीके से सृजित है। अनुदेशकों को 17 हजार रुपए मानदेय 2017 से लागू किया जाए। शिक्षा मित्रों का 25 जुलाई 2017 को हुआ था समायोजन रद्दयूपी में 2001 से शिक्षामित्रों की नियुक्ति शुरू हुई थी। सपा की सरकार ने 2013-14 में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया था। जिनका समायोजन नहीं हुआ उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने 12 सितंबर 2015 को इन शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने का आदेश दिया। सपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया। सहायक अध्यापक से फिर शिक्षामित्र बना दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक साथ 1.78 लाख सहायक अध्यापक फिर शिक्षामित्र बना दिए गए। 50 हजार रुपए वेतन पाने वाले फिर 3500 रुपए महीने के मानदेय पर आ गए। इसके खिलाफ प्रदेश भर से आए शिक्षामित्रों ने लखनऊ में गोमती के तट पर बड़ा आंदोलन किया। आंदोलन के बाद सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 से बढ़ाकर 10 हजार रुपए महीने करने की घोषणा की। शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक भर्ती में वरीयता देने के लिए 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती की घोषणा भी की। शिक्षामित्रों को आयु सीमा के साथ 25 बोनस अंक भी दिए गए। उसके बाद 2019 में फिर 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती की घोषणा की। इसमें भी शिक्षामित्रों को आयु सीमा में छूट के साथ बोनस अंक दिए गए। दोनों भर्ती में करीब 13 हजार से अधिक शिक्षामित्र सहायक अध्यापक बने। भाजपा सरकार ने 2017 में समाधान का किया था वादाप्रदेश के परिषदीय स्कूलों में करीब 1.42 लाख शिक्षामित्र हैं। प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक छात्र अनुपात 1:30 होना चाहिए। शिक्षामित्रों की संख्या के कारण ही परिषदीय स्कूलों में यह अनुपात 1:22 है। शिक्षा मित्रों की संख्याबल के कारण ही शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि फिलहाल सहायक टीचर भर्ती की आवश्यकता नहीं है। शिक्षामित्रों के संख्या बल की ताकत को देखते हुए भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2017 के संकल्प पत्र में शिक्षामित्रों की समस्या के विधिक समाधान का वादा भी किया था। -------------- यह खबर भी पढ़िए- योगी बोले- जाति-मजहब देखना सरकार के लिए पाप:सपा गरीब ब्राह्मणों को ही स्कॉलरशिप दे देती; माता प्रसाद ने कहा- वे जीने तो पाएं योगी ने कहा, हमने किसी की जाति, मत और मजहब नहीं देखा। यदि सरकार ये सब देखे तो यह पाप है। सीएम योगी ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद से कहा- अरे पांडेय जी, गरीब ब्राह्मणों को भी दे दिया होता, जो गरीब ब्राह्मण स्कॉलरशिप तक नहीं पाते थे। माता प्रसाद ने जवाब दिया- गरीब ब्राह्मण जीने तो पाएं। पढ़ें पूरी खबर…
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की घोर लापरवाही सामने आई है। शुक्रवार को हुई आठवीं कक्षा की परीक्षा के साइंस विषय के पेपर में तीन प्रश्न पंजाबी में प्रकाशित कराना भूल गया। बोर्ड की इस गलती का खामियाजा पंजाबी मीडियम के विद्यार्थियों को झेलना पड़ा। सुबह परीक्षा केंद्रों में जब आठवीं कक्षा का प्रश्न पत्र खोला गया तो उसमें पंजाबी में 27 प्रश्न प्रिंट थे, जबकि अंग्रेजी व हिंदी में 30-30 प्रश्न थे। मामला पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों तक पहुंचा तो उन्होंने वाट्सएप के जरिए सेंटर सुपिरंटेंडेंट को मैसेज जारी किया। मैसेज में कहा गया कि परीक्षा में ड्यूटी दे रहे अध्यापकों को कहकर पंजाबी मीडियम के विद्यार्थियों को तीनों प्रश्न पंजाबी में लिखवाएं, ताकि बच्चे परीक्षा दे सकें। कुछ परीक्षा केंद्रों में मैसेज तो पहुंचे, लेकिन विद्यार्थियों को इस बारे में पता नहीं चला तो वो प्रश्न छोड़कर आ गए। टीचर्स ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से पंजाबी मीडियम के विद्यार्थियों के लिए ग्रेस मार्क्स की डिमांड करनी शुरू कर दी। स्कूल टीचर्स ने इस संबंध में पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड को लेटर भी लिखने शुरू कर दिए। तीनों भाषाओं में प्रिंट होता है पेपर पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड आठवीं, दसवीं व बारहवीं के प्रशनपत्रों को पंजाबी, हिंदी व अंग्रेजी माध्यम में प्रिंट करता है, ताकि तीनों मीडियम के विद्यार्थी इसे हल कर सकें। तीनों मीडियम के विद्यार्थी अपनी भाषा में प्रश्न पत्र पढ़ते हैं और उसे हल करते हैं। पंजाबी में 27, अंग्रेजी व हिंदी में 30-30 प्रश्न साइंस के प्रश्न पत्र में पंजाबी सेक्शन में 27 प्रश्न दिए गए। 27 वें प्रश्न के बाद कुछ जगह खाली छोड़ी गई है। वहीं हिंदी व अंग्रेजी सेक्शन में 30-30 प्रश्न प्रिंट किए गए हैं। कई परीक्षा केंद्रों में पंजाबी मीडियम के विद्यार्थी 27 प्रश्न हल करके आ गए। 15 नंबर के प्रश्न मिस प्रिंट साइंस के प्रश्न पत्र में प्रश्न संख्या 28 से 30 तक पांच पांच नंबर के प्रश्न आते हैं। हर प्रश्न में एक विकल्प दिया रहता है। पंजाबी के प्रश्न पत्र में कुल 15 अंक के प्रश्न मिस प्रिंट रहे। अब देखना होगा कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क्स देता है या नहीं। विद्यार्थियों को नहीं बताए गए पंजाबी में प्रश्न : जोधा सिंह स्कूल संघ पंजाब के गोराया इकाई के प्रमुख जोधा सिंह ने बताया कि परीक्षा केंद्रों में प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों को पंजाबी में तीन प्रश्न नहीं बताए गए। जिसकी वजह से ज्यादातर बच्चे 15 नंबर के प्रश्न छोड़कर आ गए। उन्होंने कहा कि वो बारे में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को शिकायत भी भेजेंगे। विद्यार्थी बोले, उन्हें लगा 27 ही प्रश्न हैं लुधियाना के किचलू नगर स्थित सरकारी स्कूल के विद्यार्थी वंश व प्रिंस ने बताया कि प्रश्नपत्र में पंजाबी मीडियम में 27 प्रश्न थे। उन्हें हल करके आ गए। बाद में पता चला कि 15 अंक के प्रश्न रह गए। उन्हें नहीं पता था कि तीन प्रश्न प्रिंट ही नहीं हुए।नकल विरोधी फ्रंट ने की ग्रेस मार्क्स की डिमांडनकल विरोधी अध्यापक फ्रंट के अध्यक्ष सुखदर्शन सिंह ने बताया कि सरकारी हाई स्कूल धरौड़ में उनकी ड्यूटी बतौर सुपरिंटेंडेंट लगी है। उन्होंने बताया कि जब वो राउंड पर थे तो एक बच्चे ने उन्हें कहा कि उनके पेपर में 15 अंक के प्रश्न ही नहीं है। सुखदर्शन सिंह ने बताया कि जब उन्होंने पेपर चेक किया तो उसमें प्रश्न मिस थे। उन्होंने अपने स्तर पर बच्चों को पंजाबी में प्रश्न लिखवाने शुरू किए। इसी बीच बोर्ड का भी मैसेज आ गया। उन्होंने बताया कि इस कारण बच्चों का काफी समय बर्बाद हुआ। जबकि कई जगह टीचर्स ने ट्रांसलेट करके प्रश्न नहीं लिखवाए। सुखदर्शन सिंह ने बताया कि उन्होंने चेयरमैन व शिक्षामंत्री को पत्र लिखा है कि बच्चों को ग्रेस मार्क दिए जाएं। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने मानी गलती पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने पंजाबी में मिस प्रिंट होने की गलती मानी है। बोर्ड के सेंटर सुपरिंटेंडेंट को लिखे मैसेज में कहा है कि प्रश्न संख्या 28, 29 व 30 तकनीकी कारणों से प्रिंट नहीं हो सका। इसलिए सुपरवाइजरों को कहकर अंग्रेजी या हिंदी माध्यम से पंजाबी में ट्रांसलेट करवाकर प्रश्न बच्चों को लिखवाए जाएं।
समग्र शिक्षा व पीएमश्री योजना की होगी समीक्षा
सागर | समग्र शिक्षा अभियान एवं पीएमश्री योजना के तहत चयनित सभी शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों को आवंटित राशि एवं लोक िशक्षण संचालनालय द्वारा दिए गए निर्देशों के शत प्रतिशत पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। लोक शिक्षण के अपर संचालक मनीष वर्मा ने आदेश जारी किए हैं कि इन सभी के क्रियान्वयन की संभाग, जिला एवं विकासखंडवार समीक्षा 23 फरवरी को संचालनालय द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की जाएगी। इसके आधार पर स्कूल शिक्षा विभाग, विभागाध्यक्ष कार्यालय के निर्देशों की अवहेलना करने एवं दी गई आवंटन राशि का नियमानुसार उपयोग नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारी के विरूद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिसके लिए वे स्वयं उत्तरदायी रहेंगे।
छात्राओं को मिली उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी
लुधियाना। गुरु नानक खालसा कॉलेज फॉर वुमेन के प्लेसमेंट सेल ने अंतिम वर्ष की छात्राओं के लिए ग्रेजुएशन के बाद करियर मार्गदर्शन विषय पर सेमिनार आयोजित किया। इसमें निदेशक रिम्पी अरोड़ा और मानसी गर्ग ने छात्राओं को उच्च शिक्षा, प्रवेश परीक्षाओं और करियर विकल्पों की जानकारी दी। उन्होंने कैट, जीमैट, जीआरई, क्लैट, क्यूएटी व विभिन्न सरकारी परीक्षाओं की तैयारी संबंधी टिप्स साझा किए। छात्राओं को विदेश में पढ़ाई के अवसरों पर भी मार्गदर्शन मिला। प्रिंसिपल डॉ. मनीता काहलो ने प्लेसमेंट सेल की समन्वयक डॉ. नीतू प्रकाश और डॉ. निधि शर्मा के प्रयासों की सराहना की। सेमिनार ज्ञानवर्धक रहा।
शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक गतिविधि में उत्कृष्ट प्रदर्शन वाले छात्रों का सम्मान
भास्कर न्यूज | राजनांदगांव शिक्षा मंडल द्वारा संचालित पंडित किशोरी लाल शुक्ला विधि महाविद्यालय राजनांदगांव में वार्षिक समारोह आरोहण उत्साह और उमंग के साथ हुआ। उक्त समारोह सत्र भर की उपलब्धियों के उत्सव तथा शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और विभिन्न स्पर्धा, प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान सम्मान करने के लिए आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर मधुसूदन यादव ने न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की अधिकता पर न्यायिक जवाबदेही अधिनियम की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने महाविद्यालय और विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की। विश्वविद्यालय की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं अंकिता शर्मा (6वीं रैंक) यांशिका अग्रवाल (8वीं रैंक) जिन्होंने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग की शीर्ष दस मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया उन्हें स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। महापौर ने कॉलेज परिसर में बारिश में जल भराव की समस्या को सुलझाने उचित व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है। आयोजन की सराहना की गई। इस क्षेत्र में नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ें विशिष्ट अतिथि राज्य रत्न सम्मान से अलंकृत एवं विधि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट केसी जैन थे। उन्होंने विधि महाविद्यालय के इतिहास का उल्लेख किया। विद्यार्थियों को विधि के क्षेत्र में नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने प्रेरित किया। उपाध्यक्ष श्रीकिशन खंडेलवाल ने कहा कि विद्यार्थियों ने आज अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर महाविद्यालय का नाम गौरवान्वित किया। महाविद्यालयीन विद्यार्थियों द्वारा ट्रांस जेंडर के केस पर आधारित नालसा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया को मंचित किया गया।
राजस्थान के विद्यार्थियों को भविष्य में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए चल रही व्यावसायिक शिक्षा के शिक्षक खुद बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। स्कूलों में संविदा पर लगने वाले इन शिक्षकों को 20 से 22 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। यह मानदेय भी उन्हें कई महीनों से नहीं मिला है। यही नहीं प्रदेश में 4019 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा चल रही है, लेकिन 2081 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। बिना शिक्षक के यहां पढाई कर रहे विद्यार्थियों को का भविष्य भी अंधकारमय है। अब सरकार ने बजट में 500 नए स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू करने की घोषणा की है। जब पहले से जिन स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है, वहां इस शिक्षा का बेहाल है तो नए स्कूलों में शिक्षक कहां से आएंगे। इसको देखते हुए प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षकों ने हरियाणा मॉडल पर यहां शिक्षकों की भर्ती की मांग उठाई है। व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति के अध्यक्ष पवन गर्ग और संरक्षक कमलेश कुमार का कहना है कि राजस्थान में हरियाणा मॉडल लागू करके व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत किया जाए। व्यावसायिक शिक्षकों में जॉब को लेकर असुरक्षा की भावना रहेगी तो इसका असर विद्यार्थियों पर भी पड़ेगा। इसलिए सरकार को राजस्थान में नियमित भर्ती करनी चाहिए। भर्ती के लिए टेंडर किया पर भ्रष्टाचार की शिकायतों पर निरस्त: प्रदेश में 4019 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है। इसमें अलग अलग ट्रेड (विषय) में करीब 3 हजार शिक्षक कार्यरत है। इन स्कूलों में से 2081 स्कूलों में कोई व्यावसायिक शिक्षक नहीं है। क्योंकि पिछले दिनों यहां शिक्षक लगाने के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने जो टेंडर जारी किया था। वह अनियमितता व भ्रष्टाचार की शिकायतों के चलते निरस्त कर दिया गया था। अभी फिर से जारी नहीं हुआ। यहां 9वीं से 12वीं कक्षा तक 3.50 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत है। यहां प्रमुख रूप से हेल्थ केयर, ब्यूटी वैलनेस, इलेक्ट्रिक एंड हार्डवेयर, ऑटोमोटिव, आईटी, एग्रीकल्चर, सिक्यूरिटी, मल्टीमीडिया, ट्यूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग सहित कई ट्रेड की पढ़ाई हो रही है। यहां निजी फर्म संविदा पर लगा रही यहां स्कूल शिक्षा परिषद शिक्षक लगाने के लिए टेंडर जारी करता है। इसके बाद फर्म के जरिए शिक्षक लगाए जाते हैं। जो पूरी तरह से संविदा पर होते हैं। उनको 20 से 22 हजार रुपए प्रतिमाह फिक्स वेतन दिया जाता है। उन्हें कभी भी नौकरी से हटाया जा सकता है। मानदेय बढ़ोतरी का कोई प्रावधान नहीं है। यहां मातृत्व अवकाश नहीं मिलता है। यहां जॉब सिक्यूरिटी नहीं है। हरियाणा: विभाग खुद करता है भर्ती हरियाणा में विभाग खुद शिक्षकों की भर्ती करता है। वहां वेतन 38 हजार से अधिक मिलता है। शिक्षकों को 60 वर्ष का होने तक जॉब सिक्यूरिटी मिलती है। हर साल वेतन में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी होती है। वहां सरकारी कर्मचारी की तरह अवकाश की सुविधाएं मिलती है और मातृत्व अवकाश भी मिलता है।
स्थानीय निकायों नगरीय निकाय और पंचायतों को विभाग से बजट ट्रांसफर न होने का खुलासा हुआ है। कई विभागों ने कागजों में तो विषय पंचायतों और नगरीय निकायों को सौंप दिए, लेकिन उसने जुड़ा बजट अपने नियंत्रण में ही रखा। अनुदान की राशि स्थानीय निकायों के नाम पर दिखाई गई है पर उनसे जुड़े बजट पर अपना ही नियंत्रण रखा। कैग की रिपोर्ट में यह सामने आया है। अनुसूची 11 और12 के तहत सौंपे गए विषयों से संबंधित राशि और कर्मचारियों का विधिवत हस्तांतरण स्थानीय निकायों को नहीं किया गया। इससे पंचायतें केवल कार्यान्वयन एजेंसी बनकर रह गई। रिपोर्ट में पाया गया कि राशि सीधे पंचायतों या नगरीय निकायों के खाते में नहीं डाली गई। भुगतान और आहरण का अधिकार विभागीय अफसरों ने अपने पास ही रखा। इस वजह से स्थानीय निकायों को वित्तीय निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं मिली। स्कूल शिक्षा से जुड़े मामलों में भी विद्यालय का भवन, भूमि, चल-अचल संपत्ति और स्टाफ का पूर्ण हस्तांतरण पंचायतों और नगरीय निकायों को नहीं किया गया। जबकि विभाग इस हस्तांतरण का दावा करता रहा। संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत यह स्थिति संविधान के 73 वे संशोधन की भावना के विपरीत रही है, जिसमें पंचायतों को स्वशासी इकाई के रूप में कार्य करने के लिए विषय, कर्मचारी और बजट तीनों सौंपने का प्रावधान है। प्रदेश में स्थानीय निकायों को बजट ट्रांसफर न किए जाने से यह बात सामने आई कि यदि बजट नियंत्रण स्कूल शिक्षा जैसे विभाग अपने पास रखेंगे तो पंचायतों कैसे स्वायत्त होंगी। सवाल ये भी उठे हैं कि बिना अधिसूचना और पालन प्रतिवेदन के हस्तांतरण को कैसे हो गया। क्या था 73 वें संविधान संशोधन में 73 वें संविधान संशोधन के अनुसार स्थानीय निकाय और पंचायत एवं नगरीय निकायों को पंचायत अधिनियम 1993 के व नगरीय निकायों को पंचायत अधिनियम 1993 व नगरीय निकाय अधिनियम 1956 एवं 1961 के तहत स्वतंत्र सरकार के रूप में कार्य करने के लिए संविधान में जोड़ी गई अनुसूची 11 एवं 12 के तहत विषय स्थानीय निकायों को दिए गए थे, जिनमें विभाग कार्यालय, विद्यालय, अधोसंरचना, चल-अचल संपत्तियां स्टाफ तथा फंड का 1995 से 2018 तक विधिवत रूप से स्थानांतरण स्थानीय निकायों को विभागों द्वारा नहीं किया गया।
जैजैपुर न्यायालय ने कूटरचित अंकसूची और फर्जी खेलकूद प्रमाण पत्र के जरिए शिक्षाकर्मी की नौकरी पाने के मामले में आरोपी चितरंजन प्रसाद कश्यप को दोषी मानते हुए सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय जैजैपुर के राजेश खलखो ने सुनाया। न्यायालय ने आरोपी चितरंजन प्रसाद कश्यप को धारा 420 के तहत 2 साल, 468 के तहत 1 साल और 474 के तहत 1 साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड नहीं देने की स्थिति में अलग से कारावास भुगतना होगा। सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी जांजगीर (वर्तमान प्रभारी जैजैपुर) एस. अग्रवाल ने बताया कि आरोपी ने साल 2007 में माल्दा स्थित पीतांबर हायर सेकेंडरी स्कूल से हायर सेकेंडरी की परीक्षा विज्ञान विषय से दी थी। नंबर बढ़ाकर किया आवेदन आरोपी को परीक्षा में 500 में 257 नंबर मिले थे। लेकिन उसने शिक्षाकर्मी पद के लिए आवेदन करते समय गलत जानकारी देकर अपने अंक 500 में से 405 दिखाए। फर्जी अंकसूची बनाकर नौकरी करता रहा आरोपी ने आवेदन के साथ फर्जी अंकसूची लगाई। इसमें भौतिकी विषय में सप्लीमेंट्री की जगह डिस्टिंक्शन दिखाया गया। साथ ही अन्य विषयों के अंक भी बढ़ा दिए गए। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर आरोपी नौकरी करता रहा। 2018 में शिकायत के बाद खुला मामला वर्ष 2018 में ग्राम सेमरिया थाना जैजैपुर निवासी पोथीराम कश्यप ने पुलिस अधीक्षक जांजगीर से शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया कि चितरंजन कश्यप ने फर्जी अंकसूची और फर्जी खेलकूद प्रमाण पत्र लगाकर शिक्षाकर्मी की नौकरी हासिल की है। जांच में शिकायत सही पाई गई। इसके बाद थाना हसौद में आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया। 2019 में कोर्ट में पेश हुआ चालान पुलिस ने धारा 420, 467, 468, 471, 474 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर जांच पूरी की। इसके बाद वर्ष 2019 में चालान न्यायालय जैजैपुर में पेश किया गया। गवाहों के बयान के बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और जिरह के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी ने फर्जी अंकसूची और खेलकूद प्रमाण पत्र का उपयोग कर नौकरी पाने के लिए गलत जानकारी दी थी।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सचिव मुनीष शर्मा को 3 दिन के लिए भिवानी का डीसी बनाया गया है। यह अतिरिक्त चार्ज उन्हें भिवानी के डीसी आईएएस साहिल गुप्ता के ट्रेनिंग पर जाने के कारण दिया गया है। वे 3 दिन के लिए ट्रेनिंग पर जा रहे हैं। 2017 बैच के आईएएस अधिकारी साहिल गुप्ता ने एक जुलाई 2025 को भिवानी के उपायुक्त का पदभार संभाला था। भिवानी डीसी से पहले वे फरीदाबाद में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के प्रशासक और अर्बन एस्टेट के अतिरिक्त निदेशक के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने फरवरी में 38वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का सफल आयोजन किया। उनकी जगह पर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सचिव मुनीष शर्मा को 23 से 25 फरवरी के बीच भिवानी डीसी का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। इन जगहों पर दे चुके सेवाएं गुप्ता ने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। वे रेवाड़ी में अतिरिक्त उपायुक्त, पानीपत में नगर निगम आयुक्त, जींद और पलवल में अतिरिक्त उपायुक्त, मानेसर में नगर निगम आयुक्त, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण में अतिरिक्त सीईओ और करनाल में अतिरिक्त उपायुक्त रह चुके हैं।
सीकर जिले के भढाडर गांव की सरकारी स्कूल में नकल करवाने को लेकर बहस करती लेक्चरर्स के वीडियो मामले में शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। शिक्षा विभाग ने 2 टीचर्स को सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंशन काल में दोनों लेक्चरर्स का हैडक्वार्टर सेकेंडरी एजुकेशन डायरेक्ट्रेट, बीकानेर रहेगा। वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने एक जांच कमेटी बनाई थी, जांच में दोनों लेक्चरर्स को दोषी पाया गया। राजस्थान सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड के डायरेक्टर सीताराम जाट ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार भढाडर स्थित गवर्नमेंट हाई सैकेंडरी स्कूल में पॉलिटिकल साइंस की लेक्चरर सुमन और जियोग्राफी की लेक्चरर बबीता को सस्पेंड कर दिया है। गौरतलब है कि गत 15 फरवरी को एक वीडियाे सामने आया था जिसमें 12वीं बोर्ड परीक्षा के सेंटर भढाडर स्कूल में महिला टीचर्स नकल करवाने का दावा करते हुए बहस करती नजर आ रहीं थीं। वीडियो सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी मुकेश कुमार जैमन ने तत्काल प्रभाव से एग्जाम सेंटर सुप्रीटेंडेंट और असिस्टेंट सेंटर सुप्रीटेंडेंट को हटा दिया था। उसके बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में 4 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। जांच कमेटी ने उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी, रिपोर्ट में दोनों महिला लेक्चरर दोषी पाई गईं। इसके बाद विभाग के डायरेक्टर ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है।
गोरखपुर में शिक्षा विभाग के एक प्रशासनिक अधिकारी ने RTI और IGRS पोर्टल के जरिए लगातार शिकायत कर उत्पीड़न और धमकी देकर धन उगाही की कोशिश का आरोप लगाया है। प्रशासनिक अधिकारी की तहरीर और उच्च न्यायालय के आदेश के बाद थाना राजघाट पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। नियुक्ति को लेकर कई साल से चल रही शिकायतें संयुक्त शिक्षा निदेशक सप्तम मंडल गोरखपुर के कार्यालय में तैनात प्रशासनिक अधिकारी राजेश चन्द्र श्रीवास्तव, जो गांधी नगर वनकटवा रोड थाना गोरखनाथ क्षेत्र के रहने वाले हैं, ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि संतकबीर नगर जनपद के मेहदावल क्षेत्र के रहने वाले विनोद प्रताप सिंह उनकी नियुक्ति को लेकर कई साल से RTI और IGRS पोर्टल के माध्यम से लगातार शिकायतें करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर बार नियमानुसार जवाब देने के बावजूद बार-बार नई सूचनाएं मांगकर दबाव बनाया जाता रहा, जिससे उन्हें मानसिक रूप से भी परेशानी हुई और कामकाज प्रभावित हुआ। कारण पूछने पर अभद्रता और धमकी का आरोप तहरीर में आरोप लगाया गया है कि जब उन्होंने बार-बार सूचना मांगने का कारण जानना चाहा तो आरोपी ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जान-माल की धमकी दी। प्रशासनिक अधिकारी ने आशंका जताई है कि उन्हें डराकर और दबाव बनाकर धन उगाही की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों से शिकायत के बाद पहुंचे उच्च न्यायालय प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार उन्होंने पहले पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को देते हुए सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिस पर 15 दिसंबर 2025 को आदेश पारित हुआ। न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में दोबारा कार्रवाई की मांग करने पर थाना राजघाट पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
गला घोटिया शिक्षा का विश्वगुरु बन चुका देश
पिछले 12 सालों से देश को विश्वगुरु बनाने का जो झूठ फैलाया जा रहा था, अब उसका गुबार ऐसा फूटा है कि दुनिया भर में शर्मिंदगी का सबब बन गया है।
गोरखपुर में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन दिलाने के लिए RTE के तहत प्रक्रिया तेजी से चल रही है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत RTE Act 2009 के प्रावधानों के अनुसार जिले के सभी नॉन-एडेड और रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटों पर एडमिशन दिया जा रहा है। पैरेंट्स से ऑनलाइन एप्लिकेशन लिए जा रहे हैं और सेलेक्शन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जा रहा है। पहले चरण की ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं और चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अब अगले चरण के लिए तैयारी शुरू हो गई है। पहले चरण का रिजल्ट पहले चरण की लॉटरी में कुल 6277 एप्लिकेशन प्राप्त हुए। दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद 4241 एप्लिकेशन अप्रूव किए गए, जबकि 2036 एप्लिकेशन रिजेक्ट कर दिए गए। अप्रूव एप्लिकेशन के आधार पर लॉटरी में 2708 बच्चों को स्कूल अलॉट किया गया, जबकि सीटें फुल होने के कारण 1533 बच्चों को स्कूल नहीं मिल सका। तीन फेज में पूरी होगी एडमिशन प्रक्रिया एडमिशन के लिए आवेदन प्रक्रिया तीन फेज में तय की गई है। पहला फेज पूरा हो चुका है। दूसरे फेज के लिए 21 फरवरी से 7 मार्च तक ऑनलाइन एप्लिकेशन किए जाएंगे, जबकि तीसरे फेज में 12 मार्च से 25 मार्च तक आवेदन का मौका मिलेगा। हर फेज के बाद लॉटरी निकालकर सेलेक्टेड बच्चों की लिस्ट जारी की जाएगी। इन बच्चों को मिलेगा फायदा स्कीम के तहत SC, ST, OBC, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे, दिव्यांग बच्चे, अनाथ बच्चे और गंभीर बीमारी से प्रभावित पैरेंट्स के बच्चे एप्लाई कर सकते हैं। एलिजिबिलिटी संबंधित सर्टिफिकेट के आधार पर तय की जाएगी। योजना के तहत 3 साल से 7 साल तक के बच्चों को प्री-प्राइमरी और क्लास-1 में एडमिशन दिया जाएगा, जिससे छोटे बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलेगा। ऑनलाइन करना होगा आवेदनपैरेंट्स को rte25.upsdc.gov.in वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन एप्लिकेशन करना होगा। एप्लिकेशन के दौरान बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट, फोटो, पैरेंट्स का आईडी प्रूफ, इनकम सर्टिफिकेट, कास्ट सर्टिफिकेट और रेसिडेंस सर्टिफिकेट अपलोड करना अनिवार्य होगा।सभी एप्लिकेशन की जांच के बाद ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए लॉटरी सिस्टम अपनाया जा रहा है। सेलेक्शन लिस्ट में नाम आने के बाद पैरेंट्स को तय समय में संबंधित स्कूल में जाकर एडमिशन प्रोसेस पूरा करना होगा। जिला प्रशासन ने पैरेंट्स से अपील की है कि वे तय समय सीमा के भीतर आवेदन करें और लास्ट डेट का इंतजार न करें, ताकि पात्र बच्चों को योजना का लाभ मिल सके।
खगड़िया जिला के बेलदौर प्रखंड अंतर्गत बैलैठा पंचायत में जिलाधिकारी नवीन कुमार ने बुधवार को विभिन्न स्थलों का सघन निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य कोसी नदी के कटाव की स्थिति, शैक्षणिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और पंचायत स्तर पर संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी समीक्षा करना था। जिलाधिकारी ने अपने निरीक्षण की शुरुआत कोसी नदी से प्रभावित कटाव क्षेत्रों से की। उन्होंने कटाव की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि कटाव निरोधी कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर तेजी से पूरा किया जाए। भविष्य में किसी भी प्रकार की जन-धन की क्षति रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके बाद, जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय, बैलैठा का दौरा किया। उन्होंने पठन-पाठन की गुणवत्ता, बच्चों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन योजना, विद्यालय परिसर की स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया। शिक्षकों को निर्देश दिए गए कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और बच्चों को नियमित, सुरक्षित तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश निरीक्षण के क्रम में, जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र, बैलैठा का भी दौरा किया। यहां उन्होंने दवाओं की उपलब्धता, टीकाकरण कार्यक्रम, मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ-सफाई की स्थिति की समीक्षा की। स्वास्थ्यकर्मियों को समय पर उपचार, नियमित उपस्थिति और ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कार्यालय के कामों में लापरवाही न बरतने की हिदायत दी अंत में, जिलाधिकारी ने पंचायत सरकार भवन, बैलैठा का निरीक्षण किया और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मियों को निर्देश दिया कि आम जनता को योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, कार्यालयीन कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी गई। इस सघन निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के वरीय पदाधिकारी, प्रखंड स्तरीय अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। जिलाधिकारी के इस कदम से प्रशासनिक सक्रियता स्पष्ट रूप से दिखी है और क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नीमच शहर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 परिसर में दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण वितरित किए गए। यह वितरण जनपद शिक्षा केंद्र द्वारा आयोजित एक विशेष शिविर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष सज्जन सिंह चौहान और नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग बच्चों की सेवा महत्वपूर्ण है और ये उपकरण उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक होंगे। शिविर के दौरान बड़ी संख्या में जरूरतमंद बच्चों को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुसार ट्रायसिकल, व्हीलचेयर, कान की मशीन और अन्य सहायक शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। उपकरण मिलते ही बच्चों के चेहरों पर खुशी और आत्मविश्वास दिखाई दिया। इस अवसर पर योगेश कंडारा सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। इस पहल से बच्चों की आवाजाही आसान होगी और वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
शिक्षा और जन-जागरूकता ही भिक्षावृत्ति रोकने का सबसे बड़ा हथियार है। अगर बच्चों को सही शिक्षा मिले और समाज जागरूक बने, तो बाल भिक्षावृत्ति जैसी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह बात डॉ शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कही। विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग और राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान के सहयोग में 'भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों की विशेष सेवाएं' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि भीख मांगने की समस्या अक्सर लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी न होने से बढ़ती है। कई मामलों में बच्चों के पीछे वयस्कों की भूमिका होती है, इसलिए भिक्षावृत्ति के असली कारणों को समझना और अभिभावकों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। चित्र प्रदर्शनी देखकर प्रतिभागियों से बात-चीत की कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लगाई गई चित्र प्रदर्शनी देखकर प्रतिभागियों से बात-चीत भी किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के प्रो. अनूप कुमार भारतीय रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान के सलाहकार संजय पवार मौजूद रहे। विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. रुपेश कुमार सिंह ने किया। बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए हस्तक्षेप जरूरी विशिष्ट अतिथि संजय पवार ने बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए चलाई जा रही ‘इस्माइल योजना’ की जानकारी दी। मुख्य अतिथि प्रो. अनूप कुमार भारतीय ने जे.जे एक्ट के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए व्यापक स्तर पर हस्तक्षेप जरूरी है। दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. मोहम्मद नईम ने की। उन्होंने बाल भिक्षावृत्ति से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर चर्चा की। पहले दिन के कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्याम सिंह ने किया। इस मौके पर बाल कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि आर.एस जादौन, डॉ. अवधेश कुमार सहित कई गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि, सीबीओ, जे.जे. बोर्ड, डीसीपीयू, एसजेपीयू के प्रतिनिधि, शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ में 15 लाख से अधिक स्कूल, 96 लाख शिक्षक और 26 करोड़ छात्रों के डेटा का इस्तेमाल करने वाला विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप न्यायालयीन विवादों में पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने एक शिक्षक की याचिका पर VSK ऐप को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। जस्टिस एनके चंद्रवंशी के इस आदेश के बाद याचिकाकर्ता शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन को ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। साथ ही याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी रोक रहेगी। फिलहाल हाईकोर्ट का यह आदेश कोर्ट ने सिर्फ याचिकाकर्ता शिक्षक के संदर्भ में ही जारी किया गया है, इसका लाभ अन्य शिक्षकों को भी मिलेगा या नहीं, ये अभी साफ नहीं है। जानिए क्या है पूरा मामला दरअसल, शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने VSK ऐप की अनिवार्यता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें बताया कि, सरकार किसी भी थर्ड पार्टी ऐप को शिक्षकों पर जबरन लागू नहीं कर सकती। इसे शिक्षकों की निजता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि, शिक्षकों के व्यक्तिगत मोबाइल का इस्तेमाल शासकीय कार्यों के लिए बाध्यकारी रूप से नहीं कराया जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता की तरफ से प्रस्तुत तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत जवाब पेश करने कहा है। टीचर ने खुद की केस की पैरवी मामले में याचिकाकर्ता कमलेश सिंह बिसेन ने खुद अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि, याचिका में दो प्रमुख मुद्दों को उठाया गया है। पहला, शिक्षकों की निजता का प्रश्न और दूसरा, निजी संसाधनों के अनिवार्य उपयोग का विषय। उनके अनुसार, यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय है। जानिए क्या है VSK ऐप ? विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) 15 लाख से अधिक स्कूलों, 96 लाख शिक्षकों और 26 करोड़ छात्रों के डेटा का उपयोग कर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा विश्लेषण के माध्यम से शिक्षा गुणवत्ता की रीयल-टाइम निगरानी करने वाला एक अभिनव केंद्र है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कार्यरत है, जो 50 मीटर की जियो-फेंसिंग तकनीक से शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करता है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का नाम जेफ्री एपस्टीन फाइल्स से जुड़े होने के दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता इस मामले में झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। खेड़ा ने X पर पोस्ट में लिखा- जिस दस्तावेज का हवाला दिया जा रहा है, वह 59 पन्नों का एक कैलेंडर है, जिसमें न्यूयॉर्क में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों, कॉन्फ्रेंस और फंडरेजर की लिस्ट है। यह दस्तावेज कथित तौर पर 10 सितंबर 2010 को मार्गॉक्स रोजर्स ने एपस्टीन की निजी सहायक लेस्ली ग्रॉफ को भेजा था। उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल का नाम इस लिस्ट के पेज 55 पर एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां इंटरनेशनल एजुकेशन इंस्टीट्यूट ने वैश्विक शिक्षा सहयोग में योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया था। खेड़ा ने स्पष्ट किया कि इस सम्मान समारोह का एपस्टीन से कोई संबंध नहीं था और सिब्बल की एपस्टीन के साथ किसी बैठक या निजी संपर्क का कोई रिकॉर्ड नहीं है। दरअसल, भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी और शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया है कि एपस्टीन से जुड़े फंड वाले संस्थान ने सिब्बल को सम्मानित किया था और कांग्रेस को इस पर जवाब देना चाहिए। कार्यक्रम का एपस्टीन से कोई लेना-देना नहीं खेड़ा ने कहा कि एपस्टीन ने इस संस्थान को 2002 से 2006 के बीच दान दिया था, जो सिब्बल को 2010 में दिए गए सम्मान से कई वर्ष पहले की बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता पूरी फाइल पढ़े बिना स्क्रीनशॉट के आधार पर विपक्षी नेताओं को विवाद में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं। पवन खेड़ा ने कहा है कि भाजपा नेता पूरी फाइल पढ़े बिना केवल स्क्रीनशॉट के आधार पर विपक्षी नेताओं को विवाद में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे को उठाकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। एपस्टीन से 3-4 बार मिले थे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 11 फरवरी को बताया था कि वह यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे। यह बातचीत पूरी तरह से प्रोफेशनल थी, जो इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म और दूसरे इंटरनेशनल कामों से जुड़ी थी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एपस्टीन के आपराधिक मामलों से अपना कोई संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। पुरी ने कहा, जब मैंने मई 2009 से न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला था, तब से लेकर 2017 में मंत्री बनने तक की अवधि के 30 लाख ईमेल जारी किए गए हैं। इस दौरान, केवल तीन या चार बैठकों का ही जिक्र मिलता है और मेरी बातचीत पूरी तरह से पेशेवर थी। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं। इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए। इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर '#MeToo' लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं। इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की। ………….. एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भारतीय लड़की भी यौन अपराधी एपस्टीन का शिकार हुई: नई फाइल्स में खुलासा; अमेरिकी अधिकारी मुआवजा देने के लिए तलाश रहे थे यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइलों में खुलासा हुआ है कि एक भारतीय लड़की भी उसका शिकार हुई थी। दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने उसे पीड़ित मुआवजा फंड से भुगतान दिलाने के लिए भारत में तलाश शुरू की थी। 13 जनवरी 2020 की एक ईमेल में अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत सामने आई है। पूरी खबर पढ़ें…
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट की परीक्षाएं बुधवार को शुरू हो गईं। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी के गृह जनपद संभल में कुल 51,427 परीक्षार्थी इन परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। प्रशासन ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संभल जनपद में बुधवार को हाईस्कूल के 27,786 और इंटरमीडिएट के 23,436 छात्र-छात्राएं परीक्षा में बैठे। जिले में कुल 77 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षार्थियों को गहन जांच के बाद प्रवेश दिया गया, जिसमें उनके कॉलेज के पहचान पत्र भी उतरवाए गए। परीक्षा केंद्रों के 100 मीटर के दायरे में फोटोस्टेट और मोबाइल की दुकानें पहली पाली के दौरान बंद रहीं। पहले दिन सुबह 8:30 बजे से 11:30 बजे तक हिंदी और प्रारंभिक हिंदी का पेपर आयोजित किया गया। डीआईओएस सर्वेश कुमार ने बताया कि परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। परीक्षा के लिए तीन जोनल मजिस्ट्रेट, 14 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 77 स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 77 केंद्र व्यवस्थापक और 77 बाह्य केंद्र व्यवस्थापक भी नियुक्त किए गए हैं। इन परीक्षा केंद्रों में 12 राजकीय, 35 सहायता प्राप्त और 30 वित्तविहीन विद्यालय शामिल हैं। इनमें से दो केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया गया है, जहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। डीआईओएस के अनुसार, परीक्षा ड्यूटी के लिए लगभग 3335 अध्यापकों को लगाया गया है। नकलविहीन और शांतिपूर्ण परीक्षा संपन्न कराने के लिए डीआईओएस कार्यालय में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां से सभी परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। परीक्षार्थियों ने परीक्षा केंद्र के बाहर लगे नोटिस बोर्ड पर अपने रोल नंबर की जांच की और गहन तलाशी के बाद उन्हें परीक्षा हॉल में प्रवेश दिया गया। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि 2024 के कानून के तहत, यदि कोई नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, उसे जेल होगी और उसकी पूरी संपत्ति कुर्क की जाएगी। परीक्षा के दौरान किसी भी समस्या के समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।
गाडरी समाज में मृत्युभोज व डीजे पर रोक:खर्च कम, शिक्षा पर जोर; समाज जुटाएगा छात्रावास के लिए धन
नाथद्वारा के निकट कुंठवा गांव स्थित खांखलदेवजी मंदिर परिसर में अखिल भारतीय धनगर मेवाड़ा गाडरी समाज की पांच चौकला की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज के पंच-पटेलों के साथ बड़ी संख्या में युवा भी मौजूद रहे। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। छात्रावास निर्माण के लिए भूमि आवंटन का प्रस्ताव पारित संत अमरा भगत गाडरी समाज विकास संस्था के जिलाध्यक्ष किशन लाल ने बताया कि बैठक में समाज के विकास और शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला स्तरीय छात्रावास भवन निर्माण का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके लिए भूमि आवंटन करवाने की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी।साथ ही जिले के सभी चौकलों और समाज के भामाशाहों के सहयोग से आर्थिक राशि एकत्रित करने का भी निर्णय लिया गया, ताकि छात्रावास निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जा सके। मृत्युभोज पर पूर्ण प्रतिबंध, सामूहिक विवाह को बढ़ावा बैठक में सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए मृत्युभोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई। इसके साथ ही समाज स्तर पर जिला स्तरीय सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिससे आर्थिक बोझ कम होगा और समाज में समानता बढ़ेगी। शादी में आभूषण की सीमा तय, डीजे साउंड पर रोक समाज ने विवाह समारोह में फिजूलखर्ची रोकने के लिए स्पष्ट नियम तय किए। सामूहिक सहमति से निर्णय लिया गया कि वर पक्ष वधू से दो तोला सोना और एक किलोग्राम चांदी से अधिक आभूषण नहीं लेगा।इसके अलावा पांचों चौकलों में विवाह समारोह के दौरान डीजे साउंड पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। बैठक में यह भी आह्वान किया गया कि जन्मदिन जैसे आयोजनों में अनावश्यक खर्च करने के बजाय वह राशि समाज के छात्रावास निर्माण में सहयोग के रूप में दी जाए। समाजहित से जुड़े सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
देश की सबसे बड़ी यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा आज से शुरू हो गई है। लखनऊ में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी ने स्कूली बच्चियों का वेलकम किया। उन्हें तिलक लगाया, गुलाब का फूल देकर मिठाई खिलाई। वाराणसी के हरिश्चंद्र बालिका इंटर कॉलेज में शिक्षकों ने छात्राओं पर पुष्पवर्षा की। बच्चों ने स्कूल के शिक्षकों के पैर झुककर आशीर्वाद लिया। आज हिंदी का पेपर है। पहली पाली की परीक्षा सुबह 8:30 से 11:45 बजे और दूसरी पाली दोपहर 2:00 से 5:15 बजे तक चलेगी। इस बार नकल को रोकने के लिए CCTV से निगरानी की जाएगी। रंग बिरंगी कॉपी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाईस्कूल की कॉपी का रंग पिंक और 12वीं की कॉपी का रंग भूरा है। लखीमपुर खीरी के एक इंटर कॉलेज में फीस न जमा होने पर बच्चों को प्रवेश पत्र नहीं दिए। इसके चलते बच्चों ने हंगामा कर दिया। हालांकि, बाद में प्रवेश पत्र दे दिया। प्रदेशभर के 8 हजार से ज्यादा केंद्र बनाए हैं। इस बार 5337778 परीक्षार्थी एग्जाम देंगे। इसमें हाईस्कूल में 27 लाख और इंटरमीडिएट में 25 लाख परीक्षार्थी हैं।पिछले साल 5437174 परीक्षार्थियों ने एग्जाम दिाय था। यानी इस बार 2 लाख की कमी आई है। 10वीं की परीक्षा 12 मार्च यानी 15 दिन तक चलेगी। वहीं, 12वीं की परीक्षा 11 मार्च तक होगी। यानी सिर्फ 14 दिनों में एग्जाम खत्म होगा। तस्वीरें देखिए… यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के पल-पल के अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने माछीवाड़ा के ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर (BPEO) को तुरंत प्रभाव से संस्पेंड कर दिया है। बैंस ने माछीवाड़ा के इंदिरा कॉलोनी सरकारी प्राइमरी स्कूल में छापा मारा था। औचक निरीक्षण दौरान चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। निरीक्षण के दौरान अधिकतर छात्र साधारण पंजाबी पाठ पढ़ने में भी असमर्थ मिले। इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए मंत्री ने माछीवाड़ा के ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर (BPEO) को तुरंत प्रभाव से संस्पेंड कर दिया। 3 शिक्षकों को कारण बताओं नोटिस भी जारीमंत्री बैंस ने स्कूल में तैनात तीन शिक्षकों को भी न्यूनतम शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित न करने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के बाद उन्होंने स्थिति को “बेहद चिंताजनक” बताते हुए कहा कि अगर बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत नहीं हुई तो पूरी पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो सकता है। मंत्री बैंस ने कहा-जो मैंने आज देखा, वह स्वीकार्य नहीं है। बच्चे अपनी मातृभाषा तक नहीं पढ़ पा रहे। ऐसे में वे भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर या जिम्मेदार नागरिक कैसे बनेंगे? निरीक्षण के दौरान मंत्री ने स्कूल की आधिकारिक शैक्षणिक रिपोर्ट भी देखी, जिसमें सभी छात्रों के प्रदर्शन को अच्छा दिखाया गया था। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कागजों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है और इसकी जांच करवाई जाएगी। रिकॉर्ड में हेरफेर करना जनता के विश्वास के साथ धोखाबैंस ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि रिकॉर्ड में हेरफेर करना जनता के विश्वास के साथ धोखा है। स्कूल के कुछ कमरों में खराब रोशनी और गंदगी देखने के बाद मंत्री ने तुरंत बुनियादी सुविधाएं सुधारने और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए। शिक्षकों ने स्टाफ की कमी का हवाला दिया, लेकिन मंत्री ने स्पष्ट कहा कि जिम्मेदारी और अनुशासन से समझौता नहीं किया जा सकता। पंजाब सरकार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि नई भर्तियां और सख्त मॉनिटरिंग जारी रहेगी। साथ ही राज्यभर में ऐसे औचक निरीक्षण आगे भी किए जाएंगे ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
कोचिंग सेंटर्स और बड़े शैक्षणिक संस्थानों की तरह सरकारी स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिलों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसमें बताया गया है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की पहचान करने के लिए शिक्षकों को भी मनोवैज्ञानिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जाएगी। परीक्षाओं के मद्देनजर शिक्षा विभाग ने जारी निर्देशों में बताया है कि एनसीईआरटी की मनोदर्पण से जुड़ी गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ मानसिक वातावरण बनाना जरूरी है। इसके लिए अभिभावकों के साथ भी लगातार संपर्क में रहने को कहा है। बच्चों के मानसिक दबाव को समझने और उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार के लिए अभिभावकों के लिए भी नियमित रूप से ऑनलाइन तथा ऑफलाइन संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए खेल, चित्रकला और व्यक्तित्व विकास जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। शिक्षकों के साथ गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को वर्ष में कम से कम दो बार मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा और चेतावनी संकेतों की पहचान के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षित कर्मचारियों की जिम्मेदारी रहेगी कि वंचित वर्गों, दिव्यांग और मानसिक आघात से जूझ रहे छात्रों के साथ स्कूल में किसी तरह का भेदभाव न हो। प्रत्येक स्कूल में शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के लिए एक आंतरिक समिति होगी। स्कूलों को वर्ष भर की गतिविधियों, कार्रवाई और प्रशिक्षण का रिकॉर्ड रखना होगा। इसकी वार्षिक रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेजनी होगी। इसी तरह परीक्षाओं के दौरान निरंतर बच्चों का मनोवैज्ञानिक सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। प्रार्थना सभाओं और अभिभावक-शिक्षक बैठकों में अभिभावकों से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी साझा की जाए। काउंसलिंग के कई डिजिटल विकल्प मौजूद विद्यार्थी और अभिभावक किसी भी मानसिक समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन (844-844-0632) पर सुबह 8 से रात 8 बजे तक विशेषज्ञों से निशुल्क परामर्श ले सकते हैं। प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 2:30 से 4 बजे तक पीएम ई विद्या चैनल और एनसीईआरटी के यू ट्यूब चैनल पर विशेषज्ञों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर की जाने वाली चर्चा से भी समाधान पा सकते हैं। इसी तरह सोमवार से शुक्रवार शाम 5 से 5:30 बजे तक चलने वाले सहयोग सत्र में तनाव प्रबंधन और पढ़ाई की चुनौतियों पर मार्गदर्शन ले सकते हैं।
कलश यात्रा में 1100 महिलाओं ने नशा मुक्ति शिक्षा व महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया
भास्कर न्यूज | लुधियाना मंगलवार को दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं संस्कृति मंच की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के उपलक्ष्य में भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली गई। पीतांबरी वस्त्रों में सजी महिलाओं और गूंजते जयकारों के बीच वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। यात्रा का शुभारंभ सेक्टर 32-ए के ग्राउंड से मुख्य यजमान साजन अग्रवाल, शुभकरन स्वामी, संजय जैन, दविंदर अग्रवाल, जनक राज गोयल एवं मुकेश कपूर ने सपरिवार प्रभु पूजन के साथ किया। इसके पश्चात स्वामी प्रकाशानंद, विधायक दलजीत सिंह भोला और मेयर इंदरजीत कौर ने भगवा झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया। इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसके तीन प्रमुख भाग रहे, जिन्होंने समाज को एक बड़ा संदेश दिया। प्रथम भाग में 1100 सौभाग्यवती स्त्रियां सिर पर मंगल कलश धारण कर पूर्ण अनुशासन के साथ चल रही थीं। द्वितीय भाग में संस्थान के मंथन प्रकल्प के तहत अभावग्रस्त बच्चों ने शिक्षा के महत्व को जीवंत रूप में दर्शाया। वहीं तृतीय भाग में बोध प्रकल्प के जरिए युवाओं ने नशा मुक्ति और संतुलन प्रकल्प के माध्यम से बहनों ने नारी सशक्तिकरण का संकल्प दोहराया। यात्रा के दौरान बाल कृष्ण और बलराम की जीवंत झांकियों ने भक्तों का मन मोह लिया। पूरे मार्ग में क्षेत्रवासियों ने पुष्प वर्षा कर और जलपान की व्यवस्था कर यात्रियों का भव्य स्वागत किया। स्वामी कृपानन्द ने इस अवसर पर बताया कि कलश हमारे मस्तिष्क और अमृत कुंड का प्रतीक है, जो हमें ईश्वर के दीदार का आमंत्रण देता है। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष रजनीश धीमान, पूर्व प्रधान जतिंदर मित्तल, पार्षद निधि गुप्ता सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। यह भव्य कथा 19 से 25 फरवरी तक प्रतिदिन शाम 7 से रात 10 बजे तक चलेगी। गुरु आशुतोष महाराज की शिष्या, विश्व विख्यात भागवत भास्कराचार्य विदुषी साध्वी वैष्णवी भारती कथा का वाचन करेंगी।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रगति का सशक्त आधार : प्राचार्य
आरटीसी कॉलेज दड़दाग के समाजशास्त्र व मानवशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को ‘सामाजिक गतिशीलता में शिक्षा की भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने समाज के समग्र उत्थान और सकारात्मक बदलाव के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सबसे प्रभावी माध्यम बताया। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बालिका शिक्षा की महत्ता पर जोर दिया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. भीम महतो ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक विकास की धुरी है। उन्होंने कहा, “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा वह कुंजी है, जो युवाओं के लिए प्रगति के नए द्वार खोलती है और उन्हें समाज में सम्मानित स्थान दिलाने में सहायक होती है।
कोचिंग सेंटर्स और बड़े शैक्षणिकसंस्थानों की तरह सरकारी स्कूलीबच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भीविशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षानिदेशालय ने इस संबंध में सभीजिलों को दिशा निर्देश जारी किए हैं।इसमें बताया गया है कि बच्चों केमानसिक स्वास्थ्य की पहचान करनेके लिए शिक्षकों को भीमनोवैज्ञानिक चिकित्सा की ट्रेनिंग दीजाएगी। परीक्षाओं के मद्देनजर शिक्षाविभाग ने जारी निर्देशों में बताया हैकि एनसीईआरटी की मनोदर्पण सेजुड़ी गतिविधियों का व्यापकप्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए।विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकासके लिए केवल किताबी ज्ञान ही नहीं,बल्कि एक स्वस्थ मानसिकवातावरण बनाना जरूरी है। इसकेलिए अभिभावकों के साथ भीलगातार संपर्क में रहने को कहा है।बच्चों के मानसिक दबाव कोसमझने और उनके साथसहानुभूतिपूर्ण व्यवहार के लिए अभिभावकों के लिए भी नियमितरूप से ऑनलाइन तथा ऑफलाइन संवाद कार्यक्रम आयोजित किएजाएंगे। छात्रों का आत्मविश्वासबढ़ाने के लिए खेल, चित्रकला और व्यक्तित्व विकास जैसी गतिविधियोंको बढ़ावा दिया जाएगा।शिक्षकों के साथ गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को वर्ष में कम से कमदो बार मनोवैज्ञानिक प्राथमिकचिकित्सा और चेतावनी संकेतों कीपहचान के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षितकरेंगे। प्रशिक्षित कर्मचारियों कीजिम्मेदारी रहेगी कि वंचित वर्गों,दिव्यांग और मानसिक आघात सेजूझ रहे छात्रों के साथ स्कूल मेंकिसी तरह का भेदभाव न हो।प्रत्येक स्कूल में शिकायतों परतत्काल कार्रवाई के लिए एकआंतरिक समिति होगी। स्कूलों कोवर्ष भर की गतिविधियों, कार्रवाईऔर प्रशिक्षण का रिकॉर्ड रखनाहोगा। इसकी वार्षिक रिपोर्ट शिक्षानिदेशालय को भेजनी होगी।इसी तरह परीक्षाओं के दौराननिरंतर बच्चों का मनोवैज्ञानिकसहयोग करने के निर्देश दिए हैं।प्रार्थना सभाओं औरअभिभावक-शिक्षक बैठकों मेंअभिभावकों से बच्चों के मानसिकस्वास्थ्य की जानकारी साझा कीजाए। साथ ही स्कूल के बोर्ड परहेल्पलाइन नंबर भी लिखने होंगे। उल्लेखनीय है कि शिक्षणसंस्थानों में आत्महत्या के बढ़तेमामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट केआदेश के बाद प्रत्येक जिलों मेंकमेटियां बनाई हैं । सभी संस्थानोंमें उम्मीद गाइडलाइन, मनोदर्पणपहल और राष्ट्रीय आत्महत्यारोकथाम रणनीति के अनुरूप राज्यस्तरीय मानसिक स्वास्थ्य नीतिलागू की जाएगी। इसके अंतर्गतबाल और किशोर मानसिकस्वास्थ्य में प्रशिक्षित परामर्शदाता,मनोवैज्ञानिक नियुक्त होंगे। विद्यार्थी और अभिभावक किसी भी मानसिक समस्या के समाधान के लिएराष्ट्रीय टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन(844-844-0632) पर सुबह 8 से रात8 बजे तक विशेषज्ञों से निशुल्क परामर्शले सकते हैं। प्रत्येक शुक्रवार दोपहर2:30 से 4 बजे तक पीएम ई विद्याचैनल और एनसीईआरटी के यू ट्यूबचैनल पर विशेषज्ञों द्वारा मानसिकस्वास्थ्य पर की जाने वाली चर्चा से भी समाधान पा सकते हैं। इसी तरहसोमवार से शुक्रवार शाम 5 से 5:30 बजे तक चलने वाले सहयोग सत्र मेंतनाव प्रबंधन और पढ़ाई की चुनौतियों पर मार्गदर्शन ले सकते हैं।
राजधानी में एक प्रिंसिपल की सेवा पुस्तिका शिक्षा विभाग के दो कार्यालयों सीबीईओ झोटवाड़ा शहर और सीबीओ जयपुर ईस्ट के बीच फुटबाल बनी हुई है। इस सर्विस बुक में 7 साल से सीबीईओ जयपुर ईस्ट कार्यालय ने एंट्री ही नहीं की। प्रिंसिपल का तबादला जब सीबीईओ जयपुर ईस्ट से सीबीईओ झोटवाड़ा शहर के अधीन स्कूल हुआ तो अधूरी सेवा पुस्तिका के कारण वेतन अटक गया। मामला प्रिंसिपल मोनी रंगवानी का है, जो विधवा महिला है। चार माह से वेतन को तरस रही हैं। अपने वेतन के लिए शिक्षा अधिकारियों के चक्कर काट रही है। मोनी ने अपनी पीड़ा शिक्षा सचिव और निदेशक को भी भेजी है, लेकिन अभी तक उनकी सेवा पुस्तिका को पूर्ण नहीं किया गया है। रंगवानी ने बताया कि मैं एक विधवा महिला हूं और मेरी आय का स्रोत केवल वेतन है। अब वेतन के अभाव में मुझे मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मैंने 1 सितंबर 2018 को श्री जसोदा देवी रेवाचन्द गुरनानी राजकीय सिंधी उच्च माध्यमिक विद्यालय फतेहटीबा में प्रधानाचार्य पद पर कार्यग्रहण किया था। बाद में उनका समायोजन नेताजी सुभाष राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मोती कटला में हुआ, जहां 20 दिसंबर 2023 को कार्यग्रहण किया। यह दोनों स्कूल जयपुर ईस्ट के अधीन आते हैं। मोती कटला से पिछले साल 22 सितंबर 2025 को तबादला कुडली फागी में हो गया। मोती कटला से प्रिंसिपल मोनी कार्यमुक्त तो हो गई, लेकिन कुडली में कार्यग्रहण नहीं किया। इसके बाद 6 जनवरी को जारी हुई सूची में तबादला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मानपुर सड़वा में हो गया। तब से इसी स्कूल में कार्यरत हैं। यह झोटवाड़ा शहर सीबीईओ कार्यालय के अधीन आता है। उन्होंने बताया कि जयपुर ईस्ट से जब मेरी सर्विस बुक झोटवाड़ा शहर कार्यालय गई तो वह अधूरी थी। इसमें 7 साल से कोई एंट्री ही नहीं की गई। सत्र 2018-19 से 2024-25 तक मेरी सेवा पुस्तिका में न तो सेवा सत्यापन हुआ, न कार्यग्रहण, कार्य मुक्ति की प्रविष्टियां दर्ज की गईं और न ही पर्सनल फाइल पूरी की गई, जबकि यह जिम्मेदारी सीबीईओ कार्यालय के अधिकारियों की थी। अधूरी सर्विस बुक के कारण उनका वेतन अटक गया। अब मुझे 4 माह से वेतन नहीं मिला है। इस मामले पर सीबीईओ जयपुर ईस्ट बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि इस पद पर मेरी नियुक्ति 2 महीने पहले ही हुई है। यह पुराना प्रकरण है। इसको हम प्राथमिकता से निपटा रहे हैं।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से की गई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 के दस्तावेज सत्यापन की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग को मिली है। विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। विभाग की ओर से मंडल स्तर पर दस्तावेज सत्यापन का काम किया जाएगा। बोर्ड ने विभाग को दस्तावेज सत्यापन के लिए 1,45,250 अभ्यर्थियों की सूची सौंपी है। शिक्षा विभाग के प्रदेश में 9 मंडल है। ऐसे में प्रत्येक मंडल को अनुमानित 16 हजार अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन करने होंगे। दस्तावेज सत्यापन का काम 9 मार्च से प्रारंभ होगा और 13 अप्रैल तक चलेगा। इन 36 दिनों में 22 दिन सत्यापन का काम होगा। बाकी दिन अवकाश के कारण सत्यापन नहीं होगा। बोर्ड ने 53750 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन किया था। पिछले दिनों इस भर्ती का प्रारंभिक परिणाम जारी किया गया था। इसमें पदों के मुकाबले दो गुणा अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए सूचीबद्ध किया गया था। कई अभ्यर्थियों के समान अंक होने के कारण दस्तावेज सत्यापन के लिए अभ्यर्थियों की संख्या 1.45 लाख तक पहुंच गई। विभाग ने जारी किया टाइम टेबल, 9 मार्च से 13 अप्रैल तक होंगे दस्तावेज सत्यापन माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार 24 फरवरी तक मंडल स्तर पर दस्तावेज सत्यापन करने वाली टीमों का गठन होगा। इसके बाद इन टीमों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिर 7 चरणों में सत्यापन होगा। जरूरत पड़ने पर 8वां चरण होगा। पहले चरण के दस्तावेज सत्यापन 9 से 13 मार्च तक होंगे। दूसरे चरण के 16 से 19 मार्च, तीसरे चरण के 23 से 25 मार्च तक, चौथे चरण के 27 मार्च को, पांचवे चरण के 30 मार्च को, छठा चरण के 1 से 2 अप्रैल तक और सातवें चरण में दस्तावेज सत्यापन 6 से 10 अप्रैल तक व 13 अप्रैल को होंगे। जरुरत पड़ने पर आठवां चरण 15 से 16 अप्रैल तक चलेगा। मंडल स्तर पर बनेगी टीमें; प्रत्येक मंडल को 16 हजार अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन करने होंगे। 30 टीमों का गठन होगा। हर टीम को हर दिन 25 अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन करने होंगे। सभी 9 मंडलों के अभ्यर्थियों की संख्या देखी जाए प्रतिदिन करीब 6750 अभ्यर्थियों के सत्यापन होंगे।
How to apply for RBI Assistant 2026 : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक और नई भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया है। आरबीआई ने 650 पदों पर असिस्टेंट की रिक्तियां निकाली हैं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट opportunities.rbi.org.in पर भर्ती विज्ञापन जारी हो ...
गुरुवार को ही क्यों आरंभ होती हैं शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं?
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं गुरुवार 12 फरवरी 2026 से राज्यभर में आरंभ हो गईं। क्या आपको पता है कि सालों से बोर्ड की परीक्षाएं हर बार गुरुवार से ही क्यों आरंभ होती हैं? हालांकि परीक्षाएँ अक्सर गुरुवार से शुरू होने के पीछे कोई एक आधिकारिक, लिखित “धार्मिक नियम” नहीं है, बल्कि यह परंपरा, ... Read more
शिक्षा में समता या नई असमानताः यूजीसी नियमों पर न्यायिक विराम
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बार फिर गहरी हलचल पैदा कर दी है। जिस नीति को ‘समता’, ‘समान अवसर’ और ‘समावेशी शिक्षा’ की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया ... Read more
शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ ने शिक्षा की आत्मा पर गहरा आघात किया ... Read more
विश्व शिक्षा दिवसः 24 जनवरी 2026 ? शिक्षा रोजगार का टिकट नहीं, जीवन का दर्शन बने
विश्व शिक्षा दिवस कोरा उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है, यह सोचने का क्षण कि शिक्षा क्या है, किसके लिए है और किस दिशा में समाज को ले जा रही है। भारत इस संदर्भ में केवल एक देश नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है, जिसने शिक्षा को कभी भी मात्र रोजगार या सूचना का ... Read more
सावित्रीबाई फुलेः शिक्षा से सामाजिक क्रांति तक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सावित्रीबाई फुले केवल पहली महिला शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे उस सामाजिक क्रांति की धुरी थीं, जिसने सदियों से जकड़ी रूढ़ियों, जातिवाद ... Read more
दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले एक पिता ने, जो चाय बेचते हैं, उन्होंने अपनी बेटी को आखिरकार CA बना दिया। जहां एक ओर लोगों ने कहा, क्यों अपनी बेटी को जरूरत से ज्यादा पढ़ा रहे हो, इसकी शादी करवा देनी चा
NEET UG रिजल्ट को लेकर अभी भी जारी है गुस्सा, छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय के पास किया विरोध प्रदर्शन
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए छात्रों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के पास विरोध प्रदर्शन किया और परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। आइए जानते हैं, क्या है पूरा म
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का 10 फीसदी भी डाटा नहीं हुआ अपलोड
ई-शिक्षा कोष पर छात्रों का डाटा अपलोड करने में जिले के कई स्कूल ढील दे रहे हैं, वे 10 फीसदी छात्रों का भी डाटा अभी तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। डाटा अपलोड करने में आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से छ
बेसिक शिक्षा : दो महीने बाद भी 1.38 लाख छात्रों का डेटा नहीं हुआ अपडेट
बेसिक शिक्षा विभाग के यू डायस पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। हाल ये है कि दो महीने में महज 1.38 लाख छात्रों डेटा भी अपडेट नहीं हुआ। विभाग ने अब 5 जून तक इसे पूरा करने क
स्कूलों में कैसे पढ़ा रहे हैं शिक्षक, वीडियो में देखेगा शिक्षा विभाग, होगी रिकॉर्डिंग
शिक्षा विभाग वीडियो के जरिए देखेगा कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षक छात्रों को कैसे पढ़ाते हैं। बता दें. छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षकों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। आइए जानते हैं विस्तार से।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति : यूपी बोर्ड ने दिए निर्देश, एनईपी लागू करने को स्कूल बनाएंगे प्लान
यूपी बोर्ड से जुड़े 27 हजार से अधिक स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 लागू करने के लिए स्कूल स्तर पर योजना बनाई जाएगी। एनईपी 2020 के विषय में विद्यालयों में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
बॉलीवुड का ये सुपरस्टार युवाओं को IAS बनाने के लिए मुफ्त में देगा शिक्षा, योजना से अबतक जुड़ चुके है7000 युवा
राम बनने के लिएधनुष-बाण चलाने की शिक्षा ले रहे है Ranbir Kapoor, एक्टर केआर्चरी ट्रेनर ने शेयर की तस्वीरें

