Travel Tips: मुन्नार से लेकर Coorg तक, बारिश में स्वर्ग जैसी दिखती हैं ये जगहें
मानसून आते ही घूमने का मजा दोगुना हो जाता है। क्योंकि इस दौरान चारों ओर हरियाली, रिमझिम ठंडी फुहारें, बादलों से ढके पहाड़ और ठंडी-ठंडी हवाएं लोगों को खूब भाती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस मानसून घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आप साउथ इंडिया की कुछ खास जगहों को अपने ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकती हैं। बारिश के मौसम में प्रकृति की खूबसूरत इस कदर बढ़ जाती हैं, जिसको देखकर ऐसा लगता है, मानों स्वर्ग धरती पर ही उतर आया है। साउथ इंडिया अपने खूबसूरत हिल स्टेशनों, झरनों, घने जंगलों और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है। वहीं यहां की वादियां भी बारिश में खूब हरी-भरी हो जाती हैं। वहीं कई-कई जगहों पर बादल इतने नीचे आ जाते हैं, मानों आप बादलों के बीच खड़े हों। तो आइए जानते हैं साउथ इंडिया के कुछ खूबसूरत हिस स्टेशनों के बारे में... इसे भी पढ़ें: Vagamon से लेकर Araku Valley तक, Monsoon Season में दक्षिण भारत की ये 3 वादियां हैं परफेक्ट Destination मुन्नार, केरल बारिश के मौसम में केरल के मुन्नार को कैसे भुलाया जा सकता है। मुन्नार के चाय के बागान, ठंडी हवाएं और धुंध से ढके पहाड़ आपका दिन बना देंगे। मानसून में यहां की हरियाली और भी निखर जाती हैं। ऐसे में अगर आप भी नेचर लवर हैं और आपको भी फोटोग्राफी का शौक है, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। कूर्ग, कर्नाटक प्राकृतिक सुंदरता के मामले में कर्नाटक का कुर्ग किसी से कम नहीं है। इसको भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। बारिश के मौसम में यहां पर पहाड़, कॉफी के बागानों और झरनों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। वहीं कुर्ग खूबसूरत होने के साथ-साथ शांत है, ऐसे में आप यहां पर प्रकृति के बीच सुकून के पल बिता सकती हैं। चिकमगलूर, कर्नाटक बता दें कि पिछले कुछ सालों में कर्नाटक का चिकमगलूर घुमक्कड़ों की पसंदीदा जगह बन चुका है। मानसून में यहां पर हरी भरी घाटियां और बादलों से ढके पहाड़ देखने लायक होते हैं। वहीं अगर आप भी शहर की भागदौड़ से दूर सुकून के दो पल बिताना चाहते हैं, तो आपको चिकमगलूर जरूर जाना चाहिए। कोडाइकनाल, तमिलनाडु यह तमिलनाडु का एक फेमस हिल स्टेशन है, जोकि मानसून में बेहद सुंदर लगता है। कोडाइकनाल की घाटियां, झीलें और व्यू पॉइंट बारिश के मौसम में बेहद शानदार लगते हैं। यहां पर पर्यटकों की भारी भीड़ मिलती है। जिनको प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद है, उसके लिए यह जगह परफेक्ट है। वायनाड, केरल केरल की खूबसूरती के बारे में तो आपने सुन ही रखा होगा। इसको God's Own Country भी कहा जाता है। केरल का वायनाड मानसून में बेहद खूबसरत लगता है। यहां के लेक, घने जंगल, गुफाएं और खूबसूरत झरने देखने लायक होते हैं। आप यहां पर नेचर वॉक और ट्रेकिंग आदि भी कर सकती हैं। ऊटी, तमिलनाडु सिर्फ कोडाइकनाल ही नहीं बल्कि ऊटी भी एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। मानसून में यहां के बगीचे, चाय के बागान और पहाड़ आदि की रौनक देखने लौयक होती है। वहीं अगर आप भी ऊटी घूमने का प्लान कर रही हैं, तो पायकारा फाल्स जाना न भूलें। इन बातों का रखें ध्यान मानसून में घूमने जाने से पहले मौसम की जानकारी जरूर लें और उसी के हिसाब से ट्रिप प्लान करें। छाता, रेनकोट और अच्छी ग्रिप वाले शूज अपने साथ रखना न भूलें। लोकल गाइडलाइंस को जरूर फॉलो करना चाहिए।
नीब करोरी बाबा के नाम से बना नया आध्यात्मिक सर्किट, यूपी पर्यटन के पांच खास टूर पैकेज
यूपी में नीब करोरी बाबा के नाम से नया आध्यात्मिक सर्किट बनाया गया है। महासमाधि दिवस पर यूपी पर्यटन ने इसके लिए खास टूर पैकेज का भी ऐलान किया है।
मंडी-कुल्लू फोरलेन पर डयोड और हणोगी सुरंगें यातायात के लिए खुलीं। जानिए सुरंगों की लंबाई, जाम से राहत और सफर का समय।
मिथिला के लिए एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना की पहल हुई है। नेपाल के पशुपतिनाथ धाम से झारखंड के वैद्यनाथ धाम तक प्रस्तावित हाई स्पीड कॉरिडोर को दरभंगा के कुशेश्वरस्थान-खगड़िया होकर बनाने की दिशा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंत्रालय को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डॉ. गोपालजी ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री के पत्र के हवाले से यह जानकारी दी। सांसद ने बताया कि नए राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की नीति के तहत यातायात घनत्व, माल ढुलाई, यात्री आवागमन, सामाजिक-आर्थिक महत्व और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है। इसी क्रम में पशुपतिनाथ-वैद्यनाथधाम हाई स्पीड कॉरिडोर को कुशेश्वरस्थान और खगड़िया होकर ले जाने की पहल की गई है। 3 अप्रैल को केंद्रीय मंत्री से की थी मांग डॉ. गोपालजी ठाकुर ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर 3 अप्रैल को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर पत्र सौंपा था और कॉरिडोर को कुशेश्वरस्थान होकर बनाने की दिशा में शीघ्र पहल करने का आग्रह किया था। इसके बाद मंत्रालय स्तर पर परियोजना से जुड़ी औपचारिकताओं, आंकड़ों और संभावनाओं का अध्ययन किया गया। सांसद के अनुसार, 7 सितंबर को केंद्रीय मंत्री ने इस कॉरिडोर को कुशेश्वरस्थान होकर बनाने के लिए मंत्रालय को निर्देश जारी किया है। कुशेश्वरस्थान के धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा सांसद ने कहा कि प्रस्तावित कॉरिडोर धार्मिक पर्यटन, भारत-नेपाल सीमा संपर्क और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होगा। कुशेश्वरस्थान उत्तर बिहार का प्रमुख धार्मिक स्थल है। इसे हाई स्पीड कॉरिडोर से जोड़ने पर देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन आसान होगा और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस सड़क संपर्क का लाभ केवल दरभंगा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के कई जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे क्षेत्र में व्यापार, रोजगार और आधारभूत संरचना के विकास को गति मिलने की संभावना है। नेपाल से झारखंड तक मजबूत होगा सड़क संपर्क डॉ. ठाकुर ने कहा कि नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से झारखंड के वैद्यनाथधाम तक बनने वाला हाई स्पीड कॉरिडोर दरभंगा के कुशेश्वरनाथ से जुड़ता है तो मिथिला का सीधा सड़क संपर्क नेपाल और झारखंड से हो जाएगा। इससे भारत-नेपाल के बीच व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के माध्यम से मिथिला की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का विस्तार नेपाल और झारखंड तक होगा। आने वाले समय में यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। निर्माणाधीन कोसी तटबंध सड़क से जोड़ने का सुझाव सांसद ने बताया कि कॉरिडोर को कुशेश्वरस्थान से जोड़ने में मौजूदा एवं निर्माणाधीन सड़क आधारभूत संरचना का भी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि करीब 301 करोड़ रुपये की लागत से 25 किलोमीटर लंबाई में निर्माणाधीन पश्चिमी कोसी तटबंध की सड़क के माध्यम से हाई स्पीड कॉरिडोर को कुशेश्वरस्थान से जोड़ा जा सकता है। इससे 25 किलोमीटर हिस्से में नए हाई स्पीड कॉरिडोर के निर्माण की लागत कम रखने में मदद मिल सकती है। उत्तर बिहार के विकास को मिलेगी नई गति सांसद ने कहा कि यह परियोजना उत्तर बिहार के उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें लंबे समय से बेहतर सड़क संपर्क की आवश्यकता रही है। हाई स्पीड कॉरिडोर बनने से यात्री और माल परिवहन सुगम होगा तथा क्षेत्रीय बाजारों को बड़े व्यापारिक केंद्रों से जोड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने मिथिला को इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार जताया। सांसद ने कहा कि आने वाले समय में पशुपतिनाथ-वैद्यनाथधाम हाई स्पीड कॉरिडोर उत्तर बिहार के आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
समय रैना की जिंदगी में आई ‘12वीं फेल’ वाली हसीना? वेकेशन की तस्वीरों से फैंस ने खोज निकाला क्लू
समय रैना और ‘12वीं फेल’ एक्ट्रेस मेधा शंकर के वेकेशन को लेकर डेटिंग की अटकलें तेज हैं। फैंस ने सोशल मीडिया पोस्ट में कई चीजें देखकर क्लू जोड़े, हालांकि दोनों ने अभी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
ट्रिप से पहले ये एक डॉक्यूमेंट जरूर बनवाएं, हर मुसीबत में काम आएगा ट्रैवल इंश्योरेंस!
ट्रिप का प्लान बनाते समय हम टिकट, होटल और घूमने की जगहों पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन ट्रैवल इंश्योरेंस के बारे में हमेशा बाद में सोचते हैं। इंटरनेशनल ट्रिप में छोटी सी परेशानी भी जेब पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में ट्रैवल इंश्योरेंस आपके लिए राहत का काम कर सकता है। पासपोर्ट खो जाना, अचानक तबीयत खराब होना, दुर्घटना होना या फ्लाइट से जुड़ी परेशानी आ जाना जैसी कंडीशन सफर का मजा खराब कर सकती है। इन हालात में पॉलिसी के रूल के हिसाब से आर्थिक सहायता मिल सकती है। यही वजह है कि ट्रिप कितनी भी छोटी हो, इंश्योरेंस लेने से पहले उसके फायदे और कवरेज को समझ लेना बेहतर रहता है। आइये जानते है अलग-अलग ट्रिप के हिसाब से सही प्लान क्या है।डोमेस्टिक ट्रैवल इंश्योरेंसट्रिप में घूमने के दौरान भी अचानक कोई परेशानी सामने आ सकती है। ऐसे में डोमेस्टिक ट्रैवल इंश्योरेंस दुर्घटना, सामान गुम या चोरी होने और ट्रिप में देरी जैसी सिचुएशन को संभालने में मदद कर सकता है। लेकिन मिलने वाली फैसिलिटी और कवर की रकम आपके चुने हुए प्लान पर निर्भर करती है। कुछ प्लान में दुर्घटना की वजह से मौत होने पर भी कवर दिया जाता है। इसलिए पॉलिसी लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि पॉलिसी में किन-किन चीजों को शामिल किया गया है।इंटरनेशनल ट्रैवल इंश्योरेंसइंटरनेशनल ट्रैवल में अचानक बीमारी या दुर्घटना होने पर इलाज का खर्च काफी बढ़ सकता है। ऐसे समय में इंटरनेशनल ट्रैवल इंश्योरेंस आपके लिए मददगार हो सकता है। पासपोर्ट या जरूरी डॉक्यूमेंट खोने, दुर्घटना, स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी या फ्लाइट में किसी तरह की दिक्कत होने पर पॉलिसी कवर मिल सकता है। कुछ प्लान में फ्लाइट हाईजैक जैसी सिचुएशन भी शामिल होती हैं। लेकिन हर कंपनी और प्लान की शर्तें अलग हो सकती हैं।फैमिली ट्रैवल इंश्योरेंसफैमिली के साथ घूमने का प्लान है तो फैमिली ट्रैवल इंश्योरेंस लिया जा सकता है। इसमें पॉलिसी की टर्म्स के अनुसार फैमिली मेंबर को एक ही प्लान में कवर किया जाता है। यात्रा के दौरान किसी सदस्य की तबीयत खराब होने, दुर्घटना होने या फ्लाइट कैंसिल होने जैसी सिचुएशन में मदद मिल सकती है। फैमिली के साथ फॉरेन ट्रिप करते समय इस तरह का प्लान काफी काम आ सकता है।ऐसे करें इंश्योरेंस क्लेमट्रिप पर जाते समय ट्रैवल इंश्योरेंस के सभी जरूरी डॉक्यूमेंट अपने पास रखें। इनकी एक कॉपी फोन, ई-मेल या किसी सेफ जगह पर भी सेव करके रखें, ताकि ओरिजिनल पेपर खो जाने पर परेशानी न हो। ट्रिप में ऐसी कंडीशन आने पर जो आपकी पॉलिसी में कवर है, तो तुरंत इंश्योरेंस कंपनी के कस्टमर केयर या दिए गए नंबर पर कांटेक्ट करें। इसके बाद कंपनी को घटना और हुए खर्च से जुड़े जरूरी डाक्यूमेंट्स देने होते हैं।ट्रैवल इंश्योरेंस में क्या-क्या कवर होता है?1. सामान खोना: ट्रैवल के दौरान बैग खो जाने या चोरी होने पर भी कुछ पॉलिसी में क्लेम मिलता है। इसकी रकम प्लान के हिसाब से 25,000 से 50,000 रुपये तक हो सकती है।2. पासपोर्ट खोना: विदेश में पासपोर्ट खो जाने पर नया पासपोर्ट बनवाने से जुड़ा खर्च भी कुछ ट्रैवल इंश्योरेंस प्लान में कवर किया जाता है।3. मेडिकल इमरजेंसी: विदेश में अचानक बीमारी या दुर्घटना होने पर हॉस्पिटल के खर्च में मदद मिल सकती है। कुछ पॉलिसी में 2 से 3 लाख रुपये या उससे ज्यादा का मेडिकल कवर भी मिलता है।4. फ्लाइट लेट या कैंसिल: फ्लाइट लेट होने या कैंसिल होने पर पॉलिसी के नियमों के अनुसार मुआवजा मिल सकता है। कुछ प्लान में 5,000 से 10,000 रुपये तक का कवर दिया जाता है।ध्यान रखने वाली 3 बातें1. मेडिकल कवर देखें: सिर्फ सस्ता प्लान लेने के बजाय ऐसा प्लान चुनें, जिसमें मेडिकल कवर अच्छी रकम का हो।2. जरूरी डॉक्यूमेंट शेयर करें: पॉलिसी का PDF और क्लेम नंबर अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ जरूर शेयर करके रखें।3. समय पर पॉलिसी लें: ट्रिप शुरू होने से पहले ही ट्रैवल इंश्योरेंस ले लें। पॉलिसी की शर्तों के अनुसार सही समय और कवरेज जरूर चेक करें।ट्रिप पर जाने से पहले इलाज या किसी दूसरे खर्च से जुड़ी रसीदें और रिपोर्ट संभालकर रखना भी जरूरी है, क्योंकि क्लेम के समय इनकी जरूरत पड़ सकती है। ट्रैवल इंश्योरेंस प्लान को कैंसिल करने की सुविधा मिल सकती है। पॉलिसी कैंसिल करने पर कंपनी रूल के हिसाब से मामूली चार्ज काटकर बाकी प्रीमियम वापस कर सकती है। वहीं, ऑनलाइन ट्रैवल इंश्योरेंस खरीदना आसान होता है और कई मामलों में एजेंट का कमीशन भी नहीं देना पड़ता, जिससे खर्च कम हो सकता है। पॉलिसी लेने से पहले कैंसिलेशन और रिफंड के रूल जरूर चेक कर लें।डिस्क्लेमर- ट्रैवल इंश्योरेंस के फायदे, कवरेज और क्लेम से जुड़े रूल अलग-अलग कंपनियों और पॉलिसी के अनुसार बदल सकते हैं। यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पॉलिसी लेने से पहले इंश्योरेंस कंपनी की ऑफिशियल इनफार्मेशन जरूर चेक कर लें।
महासमाधि दिवस पर यूपी पर्यटन की बड़ी पहल, नीब करोरी बाबा के नाम से बना नया आध्यात्मिक सर्किट
महासमाधि दिवस पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने नीब करोरी बाबा की आध्यात्मिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए नया ‘नीब करोरी बाबा सर्किट’ विकसित करने की पहल की है। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए पांच विशेष टूर पैकेज भी शुरू किए गए हैं। The post महासमाधि दिवस पर यूपी पर्यटन की बड़ी पहल, नीब करोरी बाबा के नाम से बना नया आध्यात्मिक सर्किट appeared first on Rashtriya Ujala .
चयनित ग्रामों में पर्यटकों को तारों, ग्रहों एवं अन्य खगोलीय पिंडों के सुरक्षित, स्पष्ट एवं उत्कृष्ट अवलोकन का अनुभव कराने के लिए आधुनिक आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
धामी सरकार का ऐतिहासिक कदम: श्यामलाताल लेक फ्रंट डेवलपमेंट से चंपावत बनेगा प्रमुख पर्यटन केंद्र
चंपावत: उत्तराखंड के समग्र विकास एवं पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में धामी सरकार के निरंतर ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में चंपावत विधानसभा क्षेत्र के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल श्यामलाताल में ₹490.94 लाख (4.90 करोड़ रुपये) की लागत से लेक फ्रंट डेवलपमेंट (Lake Front Development) का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर […]
दूरदर्शन (Doordarshan) पर 80 और 90 के दशक में एक से एक शो पेश किए, जो बच्चों, जवानों से लेकर बुजुर्गों तक को पसंद आए. ये शोज ज्ञान और मनोरंजन से भरपूर थे. 37 साल पहले ऐसा ही एक शो आया था, जो उस समय के टीनेज बच्चों को काफी पसंद आया था.
एयरपोर्ट पर फ्लाइट बदलते समय काम आएंगे ये 5 आसान ट्रैवल टिप्स! कनेक्टिंग फ्लाइट के लिए
कनेक्टिंग फ्लाइट में एक फ्लाइट से उतरने के बाद दूसरी फ्लाइट के गेट तक पहुंचना, एयरपोर्ट पर सही रास्ता ढूंढना और सामान या सिक्योरिटी चेक जैसी चीजों को संभालना कई बार जल्दबाजी वाला एक्सपीरियंस बन जाता है। यदि लेओवर का समय कम हो, तो छोटी सी देरी भी परेशानी बढ़ा सकती है। यही वजह है कि कनेक्टिंग फ्लाइट में सफर करते समय थोड़ी समझदारी और पहले से की गई तैयारी काफी काम आती है।जर्नी को आसान बनाने के लिए आपको हर छोटी बात को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। फ्लाइट में बदलाव या देरी होने की सिचुएशन के लिए भी थोड़ा तैयार रहें। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे, तो कनेक्टिंग फ्लाइट का सफर ज्यादा आराम से और बिना स्ट्रेस के पूरा किया जा सकता है, जैसे-1. इमिग्रेशन और सिक्योरिटी की इनफार्मेशन लेंकुछ इंटरनेशनल कनेक्टिंग फ्लाइट्स में दोबारा इमिग्रेशन या सिक्योरिटी चेक से गुजरना पड़ सकता है। यह पहले से पता हो तो आप उसी हिसाब से समय रख सकते हैं। ट्रैवल से पहले यह जान लें कि जिस एयरपोर्ट पर आपकी कनेक्टिंग फ्लाइट है, वहां ट्रांजिट में कौन-कौन सा प्रोसीजर पूरा करना होगा। इससे आखिरी समय में होने वाली जल्दबाजी और स्ट्रेस काफी कम हो सकता है।2. डॉक्यूमेंट्री चेक करेंकनेक्टिंग फ्लाइट में कई बार इमिग्रेशन, सिक्योरिटी चेक या सामान की दोबारा जांच हो सकती है। इसलिए पासपोर्ट, बोर्डिंग पास और दूसरे जरूरी कागज आसानी से मिलने वाली जगह पर रखें। इन्हें चेक-इन बैग में रखने के बजाय अपने केबिन बैग में रखना बेहतर है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाल सकें।3. हमेशा टर्मिनल और गेट की डिटेल रखेंबड़े एयरपोर्ट पर एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक पहुंचने में समय लग सकता है। कुछ जगहों पर शटल बस या ट्रेन से भी जाना पड़ता है। इसलिए एयरपोर्ट पहुंचते ही अपनी अगली फ्लाइट का टर्मिनल और गेट नंबर चेक कर लें। इससे आखिरी समय में रास्ता ढूंढने की परेशानी और भागदौड़ से बच सकते हैं।4. एयरलाइन का ऐप या डीजीयात्रा डाउनलोड करेंअपनी एयरलाइन का ऐप फोन में डाउनलोड करके रखें। इसमें फ्लाइट के समय, गेट में बदलाव, देरी और बोर्डिंग की इन्फॉर्मेशन मिलती रहती है। एयरपोर्ट पर हर अनाउंसमेंट सुन पाना हमेशा आसान नहीं होता, इसलिए फोन पर मिलने वाले अपडेट काफी काम आते हैं।5. जरूरी सामान केबिन बैग में रखेंकभी फ्लाइट लेट हो सकती है या चेक-इन सामान समय पर नहीं पहुंच पाता। ऐसी सिचुएशन में परेशानी कम करने के लिए कुछ जरूरी चीजें अपने केबिन बैग में रखें। इसमें मोबाइल चार्जर, जरूरी दवाइयां, पानी की बोतल, हल्के स्नैक्स और जरूरत के हिसाब से एक जोड़ी कपड़े रख सकते हैं।6. लेओवर का समय पहले देखेंदो फ्लाइट्स के बीच कितना समय है, यह टिकट बुक करते समय ही चेक कर लें। बहुत कम समय होने पर पहली फ्लाइट में थोड़ी भी देरी हुई, तो दूसरी फ्लाइट छूट सकती है। वहीं बहुत ज्यादा लंबा गैप होने पर आपको एयरपोर्ट पर काफी देर इंतजार करना पड़ सकता है। इसलिए दोनों फ्लाइट्स के बीच ऐसा समय रखें जिसमें आप आराम से अगले गेट तक पहुंच सकें।कनेक्टिंग फ्लाइट का सफर सही तैयारी के साथ काफी आसान हो सकता है। ट्रैवल में यदि फ्लाइट के समय या गेट में कोई चेंज हो, तो घबराने के बजाय आराम से इनफार्मेशन चेक करें और उसी के हिसाब से आगे प्लान बनाएं। इस तरह आप बिना ज्यादा भागदौड़ के अपनी ट्रिप पूरी कर सकते हैं।
Kullu News: पर्यटन नगरी मनाली में वीकेंड में उमड़ रहे पर्यटक
Tourists flocking to the tourist town of Manali over the weekend.
Agra News: स्टेशन के विकास से बटेश्वर में पर्यटन को लगेंगे पंख
स्टेशन के विकास से बटेश्वर में पर्यटन को लगेंगे पंख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेलवे की तीन महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है...
Lucknow, 9 सितंबर . उत्तर प्रदेश Government युवाओं को सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन से जोड़ने के लिए गांधी जयंती से ‘कल्चर टैलेंट हंट’ अभियान शुरू करेगी. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने Wednesday को अधिकारियों को निर्देश दिया कि 2 अक्टूबर से 25 दिसंबर तक स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को नवाचार, ऐतिहासिक धरोहरों और उनसे ... Read more
Meta Muse AI Agent: अब AI सिर्फ जवाब नहीं देगा, वीडियो में जाने आपके लिए काम भी करेगा; ईमेल से लेकर ट्रैवल बुकिंग तक संभालेगा
Travel Tips: मणिपुर की सांस्कृतिक सुंदरता का प्रतीक है Kangla Fort, जानें कैसे पहुंचे Imphal
इंफाल एयरपोर्ट पर उतरते ही खुला आसमान और हवा की ताजगी आपका मोह लेगी। मणिपुर शैली की हरी छतों वाला यह छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हवाई अड्डा इतना सहज है कि विमान से उतरने के बाद पैदल भवन में एंटर किया जा सकता है। महानगरों की भागदौड़ से दूर बसा इंफाल शहर अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक छटा के लिए जाना जाता है। जहां एक तरफ युवा आधुनिक लिबास में नजर आते हैं। वहीं अधिकतर महिलाएं ब्लाउज, फनेक और महीन दुपट्टे जैसे पारंपरिक आउटफिट में दिखाई देती हैं। नाक से माथे तक लगा चंदन का लंबा टीका उन महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। इमा मार्केट यह समाज में स्त्रियों की भागीदारी का प्रतीक है। शहर के बीचो-बीच इमा मार्केट स्थित है। इमा यानी मां। माताओं द्वारा चलाए जाने वाला मार्केट। इस मार्केट में सिर्फ स्त्रियों द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें हैं। इसे भी पढ़ें: IRCTC Kashi Tirtha Yatra Package: 17 हजार में वाराणसी और Ayodhya घूमने का बजट फ्रेंडली अवसर पारंपरिक परिधानों की दुकानें जैसे ब्लाउज, फनेक, दुपट्टे, शॉल, चादर, गमछे और अन्य कई तरह की चीजें शामिल हैं। वहीं एक हिस्से सिर्फ पूजा का सामान है। कांगला किला की सैर इसके अलावा इंफाल में आपको दो जगहें और देखनी चाहिए। जिनमें पहला कांगला किला और दूसरा लोकताल लेक है। कांगला फोर्ट शहर के बीच इंफाल नदी के किनारे है। मेतेई भाषा में कांगला का अर्थ होता है जमीन का मुख्य भाग। मेतेई वर्तमान मणिपुर का मूल नाम है। मणिपुरी भाषा भी भारत की 22 ऑफिशियल भाषाओं की लिस्ट में से एक है। कांगला फोर्ट यहां के राजवंश के शासकों की राजधानी हुआ करता था। आज भी मणिपुर के निवासियों के िए एक गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। इसके मुख्य द्वार पर सिंह की आकृति की दो मूर्तियां लगी हैं। जिनको देवताओं का देव कहा जाता है। यहां पर घूमने के लिए गोल्फ कार्ट की सुविधा मौजूद थी। लेकिन हमने पैदल घूमने का फैसला किया। इसके अंदर कई संग्रहालय हैं। कांगला संग्रहालय यहां प्राचीन शासकों से संबंधित वस्तुएं और इसका इतिहास देख सकते हैं। बोट म्यूजियम यहां पर प्राचीन शासकों की नावें और उनसे संबंधित जानकारी देखने को मिलेगी। पुरातत्व संग्रहालय पुरातत्व संग्रहालय को देखने से हमें मणिपुर के इतिहास के बारे में गहराई से जानकारी मिलती है। सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर सबसे सुंदर सानामाही मंदिर और पखंबा मंदिर लगे। सानामाही मेतेई वास्तुकला का उदाहरण है। इस मंदिर के ऊपर सींगों की आकृति बनी हुई है। जिसको मेतेई लोग शुभ और पवित्र मानते हैं। यहां पर कई और दर्शनीय स्थल है। जैसे - महाराजा नरसिंह की घोड़े पर सवार मूर्ति और राजा बोधचंद्र की समाधि है। राजाओं का महल और पोलो ग्राउंड भी इस फोर्ट में है। महाराजा नरसिंह द्वारा श्री गोविंद जी मंदिर का निर्माण कराया गया है। यह इंफाल के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है। जरूरी बातें ट्रेन से इंफाल पहुंचने के लिए आपको दीमापुर या गुवाहाटी जाना होगा। यहां से आप इंफाल के लिए बस ले सकते हैं। इसके अलावा देश के सभी प्रमुख शहरों से फ्लाइट द्वारा भी यहां पर आप सीधे पहुंच सकते हैं। यहां पर जाने के लिए सिंतबर से अप्रैल का समय सबसे अच्छा है। क्योंकि इस दौरान मौसम काफी सुहावना होता है। मणिपुर राज्य में यात्रा करने के लिए भारतीय नागरिकों को राज्य सरकार से इनर लाइन परमिट लेना जरूरी है। हालांकि यह सुविधा अब ऑनलाइन भी है। मणिपुर सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी स्थित मणिपुर भवन से भी इसको प्राप्त किया जा सकता है। यह सुविधा इंफाल एयरपोर्ट पर भी मौजूद है। इसके लिए पासपोर्ट या आधार कार्ड की प्रति जरूरी है। इसका शुल्क 100 रुपए है। विदेशी नागरिकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट की जरूरत होती है।
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धमतरी में बदलेगी पर्यटन की सूरत: कलेक्टर ने होटल ऑपरेटर्स संग बनाई योजना, बढ़ेंगे रोजगार के मौके
धमतरी अब सिर्फ प्राकृतिक पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित होगा। प्रशासन ने होटल और टूर ऑपरेटर्स के साथ बैठक कर कैंपिंग, ट्रैकिंग, होमस्टे और डिजिटल प्रमोशन की रणनीति तैयार की है।
रॉयल एनफील्ड हिमालयन 440 बनाम येज्दी एडवेंचर: इंजन, परफॉर्मेंस और फीचर्स में कौन है आपके लिए बेस्ट? ऐसे समझें
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UGC NET Re Exam 2026: दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को ट्रैफिक डायवर्जन के चलते NTA ने UGC NET री-एग्जाम के अभ्यर्थियों के लिए एडवाइजरी जारी कर समय से 2 घंटे पहले परीक्षा केंद्र की ओर निकलने की सलाह दी है।
Travel Tips: जा रहे अगर आप भी कैंची धाम तो फिर इन जगहों को भी करले अपनी यात्रा में शामिल
इंटरनेट डेस्क। उत्तराखंड का कैंची धाम बाबा नीम करोली के कारण हमेशा ही एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र रहा है। इस समय नीम करोली बाबा से जुड़ी फिल्म को लेकर भी यह जगह चर्चाओं में है। फिल्म हनुमान अंश की सफलता के बाद बाबा और उनसे जुड़े कैंची धाम को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। कैंची धाम नैनीताल के पास पहाड़ों के बीच स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक जगह है, जहां अगर आप भी यहां जाने का प्लान बना रहे हैं तो सिर्फ कैंची धाम घूमकर वापस आने की जरूरत नहीं है। इसके आसपास कई ऐसी जगहें हैं जहां घूम सकते है। भीमताल कैंची धाम की यात्रा में भीमताल की यात्रा को जरूर शामिल करें। यहां की बड़ी झील और उसके आसपास का पहाड़ी माहौल लोगों को काफी पसंद आता है। झील के पास बैठकर शांत वातावरण का आनंद लेने के अलावा यहां बोटिंग भी की जा सकती है। सातताल अगर आपको भीड़ से दूर शांत और हरियाली वाली जगहें पसंद हैं तो सातताल जरूर जाएं। यहां कई खूबसूरत झीलें पहाड़ों और जंगलों के बीच देखने को मिलती हैं। सुबह या शाम के समय यहां का मौसम और आसपास का नजारा काफी अच्छा लगता है। pc- stayvista.com
Long Weekend Trip: दिल्ली-NCR वालों के लिए बेस्ट ट्रैवल ऑप्शंस, ऐसे प्लान करें अपनी ट्रिप
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बिहार : गयाजी में पितृपक्ष मेला की तैयारी में जुटा पर्यटन विभाग, श्रद्धालुओं के लिए होंगे खास इंतजाम, ई-पिंडदान की भी सुविधा
लखनऊ के मेयर से उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बनने और राज्यसभा तक पहुंचने वाले डॉ. दिनेश शर्मा को नई जिम्मेदारी मिली है। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल बनाया है। वह नई सूचना के बाद लखनऊ के लोगों, प्रशासनिक हस्तियों से मिलकर सोमवार को लखनऊ से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। इस दौरान दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने उनसे खास बातचीत की। राजनीति में सौम्य कहे जाने वाले डॉ. दिनेश शर्मा ने भाजपा संगठन से लेकर प्रोफेसर, मेयर और अब उपराज्यपाल बनने के सफर को बताते हुए थोड़ा भावुक भी हुए। उन्होंने कहा- संगठन की वजह से युवा मोर्चा का 3 बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बना। मेयर, डिप्टी सीएम, नेता सदन बना। अब संगठन यह कहने में कष्ट हो रहा है कि संगठन से इस्तीफा देना पड़ेगा। अभ पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश… सवाल: नई जिम्मेदारी को किस तरह देखते हैं? जवाब: हर जिम्मेदारी अपने साथ एक नई चुनौती लेकर आती है। मेरा प्रयास हमेशा रहा है कि चुनौती में अवसर तलाशा जाए। मैंने शिक्षक, शैक्षणिक, संगठन और कार्यपालिका से जुड़ी अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। अब संवैधानिक जिम्मेदारी मिली है तो इसे पूरी निष्ठा और संविधान के अनुरूप निभाना मेरी प्राथमिकता होगी। सवाल: आपके लंबे अनुभव का नई भूमिका में कितना फायदा मिलेगा? जवाब: संगठन में काम करने से लोगों के साथ सीधे जुड़ने और उनकी अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है। लखनऊ नगर निगम में करीब 11 साल काम किया। शिक्षक रहा, फिर राजनीति में आया और कार्यपालिका की जिम्मेदारियां निभाईं। इन सभी अनुभवों ने मुझे अलग-अलग परिस्थितियों में काम करना सिखाया है। सवाल: जाति और संप्रदाय के आधार पर राजनीति को लेकर आपकी क्या सोच है? जवाब: मेरा मानना है कि देश को जाति और संप्रदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर देखना चाहिए। प्रधानमंत्री का विजन समग्र भारत का है, जिसमें राष्ट्र सर्वोपरि है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ईडब्ल्यूएस जैसी व्यवस्था इसी दिशा में एक उदाहरण है। समाज को बांटने के बजाय सबको साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है। सवाल: जेन-जी को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: मैं लंबे समय तक विद्यार्थियों के बीच रहा हूं, इसलिए युवाओं की आकांक्षाओं को करीब से समझता हूं। आज की पीढ़ी के सवाल और अपेक्षाएं अलग हैं। शिक्षा, अवसर और भविष्य को लेकर युवाओं की चिंता को गंभीरता से समझना होगा। प्रधानमंत्री भी हर पीढ़ी और हर वर्ग के भविष्य को लेकर काम कर रहे हैं। मैं इसे राजनीतिक बहस के बजाय युवाओं की आकांक्षाओं के नजरिए से देखता हूं। सवाल: अयोध्या में राम मंदिर के चंदे को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कहेंगे? जवाब: जो मामले न्यायालय के सामने हैं, उन पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। जांच और कार्रवाई भी हुई है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आना चाहिए। श्रीराम को लेकर राजनीति करने वालों को जनता अपने स्तर पर जवाब देती है। सवाल: राज्यसभा से इस्तीफे और नई जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी? जवाब: मैं दिल्ली जाकर वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करूंगा। पार्टी और नेतृत्व की ओर से जो निर्देश मिलेगा, उसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया होगी। राज्यसभा और संगठन से जुड़े दायित्वों के संबंध में भी नेतृत्व जो उचित समझेगा, उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा। लखनऊ से अंडमान तक के सफर सवाल-जवाब… सवाल: मेयर से उपमुख्यमंत्री और अब उपराज्यपाल तक के सफर में लखनऊ आपके लिए कितना महत्वपूर्ण रहा? जवाब: लखनऊ मेरे सार्वजनिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यहां के लोगों ने मुझे अलग-अलग जिम्मेदारियों में काम करने का अवसर दिया। मेयर से लेकर उपमुख्यमंत्री तक के सफर में लखनऊ के लोगों और कार्यकर्ताओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है। यह रिश्ता पद से नहीं, भावनाओं से जुड़ा है। सवाल: दो बार मेयर रहे। उस दौर की कौन-सी उपलब्धि आज भी सबसे ज्यादा संतोष देती है? जवाब: मेयर रहते मेरा जोर शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने और लखनऊ को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने पर रहा। कई विकास कार्य उस समय शुरू हुए। मेरे लिए सबसे संतोष की बात यही है कि उन प्रयासों से शहर के विकास को एक दिशा मिली। सवाल: शिक्षक से राजनीति और फिर संवैधानिक पद तक पहुंचने में लखनऊ ने आपको क्या सिखाया? जवाब: लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों के बीच रहने का अनुभव मिला। राजनीति में आने के बाद समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद हुआ। इस शहर ने मुझे विविधता के साथ काम करना और अलग-अलग विचारों को सुनना सिखाया। यही अनुभव आज भी मेरे लिए उपयोगी है। सवाल: अब अंडमान-निकोबार की जिम्मेदारी है। लखनऊ से आपका जुड़ाव कैसे बना रहेगा? जवाब: जिम्मेदारी का स्थान बदल सकता है, रिश्ते नहीं। लखनऊ मेरे जीवन का हिस्सा है। यहां के लोगों, कार्यकर्ताओं और मित्रों से वर्षों का जुड़ाव है। नई जिम्मेदारी के बावजूद यह संबंध कायम रहेगा। सवाल: आज के लखनऊ में विकास के साथ किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है? जवाब: लखनऊ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ट्रैफिक, पर्यावरण, स्वच्छता, जल निकासी और सार्वजनिक सुविधाओं पर लगातार काम करना जरूरी है। शहर के विस्तार को देखते हुए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा। सवाल: लखनऊ की तहजीब, साहित्य और खान-पान की कौन-सी चीजें अंडमान तक साथ जाएंगी? जवाब: लखनऊ की तहजीब उसकी सबसे बड़ी पहचान है। यहां की भाषा, अदब, साहित्य, खान-पान और लोगों का अपनापन लंबे समय तक साथ रहता है। अंडमान-निकोबार की नई जिम्मेदारी के साथ लखनऊ की ये यादें भी मेरे साथ रहेंगी। सवाल: लखनऊ की जनता और पुराने साथियों के लिए आपका संदेश क्या है? जवाब: यह मेरे सार्वजनिक जीवन में एक नई भूमिका है। अलग-अलग जिम्मेदारियों में काम करने के बाद अब संवैधानिक पद पर सेवा का अवसर मिला है। इसे मैं सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखता हूं। लखनऊ ने मुझे जो प्यार और विश्वास दिया, उसे मैं हमेशा याद रखूंगा। मेयर से लेकर उपमुख्यमंत्री और अब उपराज्यपाल की जिम्मेदारी तक यहां के लोगों का सहयोग मेरे साथ रहा है। मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूं। मेरी जिम्मेदारी भले ही दूसरे स्थान पर हो, लेकिन लखनऊ से मेरा रिश्ता हमेशा बना रहेगा। ------------------- इसे भी पढ़िए… यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम बने अंडमान निकोबार के उपराज्यपाल : डॉ. दिनेश शर्मा भाजपा से राज्यसभा सांसद हैं, डीके जोशी की जगह लेंगे यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम और वर्तमान में राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान निकोबार का उपराज्यपाल बनाया गया है। उनका राज्यसभा का कार्यकाल अभी 2 महीने (नवंबर, 2026 तक) बाकी है। वह एडमिरल डीके जोशी (सेवानिवृत्त) की जगह लेंगे। डॉ. शर्मा ने उपराज्यपाल बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का आभार जताया है। (पूरी खबर पढ़िए)
यूनीसेफ प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर बच्चों पर केंद्रित विकास में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की।
Mandi News: चालक ने ट्रैवलर दीवार से टकराकर बचाईं 10 जिंदगियां
Driver saves 10 lives by crashing the Traveller into a wall.
Lucknow News: बीबीए-एलएलबी और बीबीए पर्यटन का सीट आवंटन जारी
बीबीए-एलएलबी और बीबीए पर्यटन का सीट आवंटन जारी
Travel Tips: अगस्त-सितंबर में फूलों की घाटी की करें सैर, जानें Cost और Itinerary
उत्तराखंड में घूमने के लिहाज से एक से बढ़कर एक कई बेहतरीन जगहे हैं। वहीं उत्तराखंड के गढ़वाल की गोद में बसी खूबसूरत घाटी को 'Valley of Flowers' कहा जाता है। ऐसे में अगर आप भी रोजाना की भागदौड़ भरी जिंदगी से थक चुके हैं और पहाड़ों पर जाकर सुकून की तलाश में हैं। तो IRCTC का यह टूर पैकेज आपके लिए बेस्ट है। IRCTC आपके लिए 6 दिनों का टूर पैकेज आपके लिए बेस्ट है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस टूर पैकेज के बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं। वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक अगस्त-सिंतबर में होने वाली इस वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक की अवधि 6 दिन है। इस दौरान करीब 37 किमी की ट्रेकिंग करना होता है। वहीं ट्रेक का मैक्सिमम एल्टीट्यूड लेवल करीब 14,100 फीट है। इसकी डिफिकल्टी लेवल को ईजी टू मॉडरेट बताया गया है। इस ट्रिप की खासियत है कि प्रति व्यक्ति किराया 12,450 रखी गई है। इसे भी पढ़ें: Solo Traveler Safety Guide: अकेले घूमने से पहले जान लें ये 5 Essential Rules ट्रिप की जानकारी यह ट्रिप सुबह 06:00 बजे से ऋषिकेश के तपोवन स्थित बैक स्टेज होटल से शुरू होगी। वहीं पहले दिन करीब 9-10 घंटे की रोड ट्रिप तय करने के बाद आप 1,340 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पीपलकोटी पहुंचेंगे। यहां एक्स्ट्रा सामान को छोड़ने के लिए यहां पर क्लॉकरूम भी मौजूद है। इसके अगले दिन गोविंदघाट और पुलना तक गाड़ी से जाने के बाद आपका पैदल ट्रैक शुरू होगा। 9 किमी की ट्रैकिंग करने के बाद आप घांघरिया पहुंचेंगे। फिर अगले कुछ दिनों तक आपका यहीं पर स्टे होगा। फिर ट्रिप के तीसरे दिन आपको फूलों की घाटी के नजारे से रूबरू कराया जाएगा। यहां ब्लू पॉपी, हिमालयन रोज, रिवर एनेमोन और डॉग फ्लावर जैसे अद्भुत फूल आपका स्वागत करेंगे। वहीं ट्रिप के चौथे दिन पवित्र हेमकुंड साहिब की ट्रेकिंग करेंगे। ट्रिप के 5वें दिन घांघरिया से वापसी होगी। वहीं अच्छी बात यह है कि रास्ते में बिना किसी एक्स्ट्रा फेयर के आपको बद्रीनाथ धाम के दर्शन का भी मौका मिलेगा। वहीं ट्रिप के छठे दिन शाम को 06:30 से 07:30 बजे तक यात्रियों को वापस ऋषिकेश छोड़ दिया जाएगा। पहाड़ों पर मौसम कभी भी बिगड़ सकता है। इसलिए अपने टूर में 1 बफर डे जरूर रखें। वापसी की ट्रेन या फ्लाइट को छठे दिन की रात में 08:00 बजे के बाद ही बुक करें। फिटनेस है जरूरी अगर आपकी उम्र 9 साल या इससे ज्यादा है, वहीं आप पहली बार ट्रेकिंग कर रहे हैं, तो भी आप इस ट्रिप का हिस्सा बन सकते हैं। आप 45 मिनट में 5 किमी की जॉगिंग या 30 मिनट में 10 किमी साइकिल चलाने का दम रखते हों। अपना 10 से 12 किलो का बैग खुद उठाने की क्षमता होनी चाहिए। इसके अलावा आपका पल्स, बीपी और ब्रीदिंग रेट एकदम नॉर्मल होना चाहिए। दिल की बीमारी, अस्थमा, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह ट्रेक नहीं है। वहीं असामान्य BMI या साइनस वाले लोग ट्रिप की बुकिंग से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर ले लें। पैकेज में मिलने वाली सुविधाएं बता दें कि पीपलकोटी के हेस्ट हाउस और घांघरिया में सेफ टेंट में रहने की व्यवस्था है। पहले दिन के डिनर से लेकर 5वें दिन तक बेहतरीन वेज खाने के साथ चाय-स्नैक्स की व्यवस्था मिलेगी। सेफ्टी के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट-एड किट और तजुर्बेकार ट्रेक लीडर व शेफ रहेंगे। मुख्य सामान को उठाने के लिए खच्चर और ट्रेक पूरा करने पर एक सर्टिफिकेट मिलेगा। जानिए बुकिंग कैंसल करने के नियम अगर आप ट्रिप से 25 दिन पहले अपनी बुकिंग कैंसिल करते हैं, तो 5% कटौती होगी। वहीं 15 से 24 दिन के अंदर ट्रिप की बुकिंग कैंसिल करने पर 30% की कटौती होगी। 10 से 14 दिन पर बुकिंग कैंसिल करने पर 50% का नुकसान उठाना होगा। वहीं अगर आप ट्रिप शुरू होने से 9 दिन या इससे कम दिनों के अंदर अपनी बुकिंग को कैंसिल करते हैं, तो आपको कोई रिफंड नहीं मिलेगा। इसलिए प्लान हमेशा सोच-समझकर बनाएं। यहां तक कैसे आएं बता दें कि देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट या ऋषिकेश रेलवे स्टेशन यहां आने के बेस्ट ऑप्शन है। इसके अलावा आप दिल्ली से सरकारी या प्राइवेट बस से भी ऋषिकेश पहुंच सकते हैं।
बालीचौकी में टला बड़ा हादसा: ट्रैवलर की ब्रेक फेल, 10 यात्रियों की जान बचाने को दीवार से भिड़ाई गाड़ी
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन झारखंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति : कौशल मित्तल
जिला ट्रैवल एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सह डायरेक्टर न्यू मित्तल ट्रेवल्स कौशल मित्तल, अंकित मित्तल ने कहा कि झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है। उनके असामयिक निधन से झारखंड ने एक कर्मठ, ऊर्जावान, संवेदनशील एवं दूरदर्शी जनप्रतिनिधि को खो दिया है। विशेष रूप से झारखंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए उनका निधन अपूरणीय क्षति है। उनके कार्यकाल में झारखंड के पर्यटन को नई दिशा और नई गति देने के प्रयास किए जा रहे थे। राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, वन्य एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में उनका विशेष ध्यान था। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों के विकास, प्रचार-प्रसार और राज्य की समृद्ध कला-संस्कृति को देश के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में जिस गति से कार्य आगे बढ़ रहा था उनके निधन से पर्यटन जगत को गहरा आघात पहुंचा है।
पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सुखना लेक के पीछे का वन क्षेत्र वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है, जिसे चंडीगढ़ और पंजाब के लिए पर्यटन का बड़ा आधार बनाया जा सकता है।
धार जिले के आदिवासी अंचल में अब रेल सुविधा पहुंचने जा रही है। छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना के तहत टांडा रोड रेलवे स्टेशन तक नई रेल लाइन का काम पूरा हो चुका है। 8 सितंबर को टांडा रोड स्टेशन से बड़ोदरा के प्रतापनगर स्टेशन के बीच नई ट्रेन सेवा शुरू की जाएगी। रेल मंत्री ने सांसद को कार्यक्रम में बुलाया नई रेल सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने धार सांसद सावित्री ठाकुर को आमंत्रित किया है। इसी दौरान बड़ोदरा में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उद्घाटन भी किया जाएगा। कॉरिडोर पर चार मालगाड़ियों को भी रवाना किया जाएगा। 2014 से रेल कनेक्टिविटी के लिए प्रयास सांसद सावित्री ठाकुर 2014 में पहली बार सांसद चुने जाने के बाद से ही धार लोकसभा क्षेत्र को रेल सुविधा से जोड़ने के प्रयास करती रही हैं। उन्होंने क्षेत्र की रेल जरूरतों को लगातार रेल मंत्रालय और केंद्र सरकार के सामने रखा। अब टांडा रोड तक रेल लाइन का काम पूरा होने के बाद आदिवासी क्षेत्र के लोगों को रेल सुविधा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इससे क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। व्यापार, रोजगार और पर्यटन को मिलेगा फायदा टांडा रोड तक रेल पहुंचने से क्षेत्र में आवागमन आसान होने के साथ ही व्यापार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रेल कनेक्टिविटी से आदिवासी अंचल के लोगों को बड़े शहरों तक पहुंचने में भी सुविधा होगी। धार तक रेल पहुंचने की उम्मीद सांसद सावित्री ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि धार लोकसभा क्षेत्र के लोगों का वर्षों पुराना रेल का सपना अब पूरा हो रहा है। जल्द ही टांडा रोड से धार नगर तक रेल संपर्क का काम भी पूरा होने की उम्मीद है।
Solo Traveler Safety Guide: अकेले घूमने से पहले जान लें ये 5 Essential Rules
आजकल सोलो ट्रिप का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। लोगो घूमने के लिए कहीं न कहीं पहुंच ही जाते हैं। अकेले घूमते हुए आप बिना किसी दबाव या जल्दबाजी के आराम से घूम सकते हैं। जब आप अकेले घूमते हैं, तो बिना किसी दबाव या जल्दबाजी के आराम से घूम सकते हैं। वहीं, सोलो ट्रिप पर जाने से आपकी फैसले लेने की क्षमता और चुनौतियों का सामना करने की सूझ-बूझ भी बढ़ती है, लेकिन इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी है। वैसे तो सोलो ट्रिप मजेदार होती है, लेकिन इस दौरान कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए पहले से सावधानी और जानकारी बेहद जरुरी है। आइए आपको आपको बताते हैं सोलो ट्रिप पर जाने के लिए किन बातों का ध्यान रखें। सही डेस्टिनेशन और रिसर्च यदि आप पहली बार सोलो ट्रिप पर जा रहे हैं, तो ऐसी जगह का चयन करें, जो सेफ हो और वहां आना-जाना काफी आसान हो। ट्रिप शुरु करने से पहले उस जगह का मौसम, संस्कृति, खान-पान, भाषा और परिवहन के साधनों के बारे में अच्छी तरह से जानकारी इकट्ठा कर लें। इसके साथ ही यह जान लें कि किन जगहों पर जाना एकदम सुरक्षित नहीं है और किन जगहों पर जाने से बचें। घर वालों के साथ ट्रैवल आइटिनररी शेयर अकेले ट्रैवल करना काफी मजेदार माना जाता है। हालांकि, इसके लिए काफी ध्यान रखना पड़ता है। आप कहां रुक रहे हैं, आपकी फ्लाइट या ट्रेन का समय, आप कहां-कहां जा रहे हैं, ये सभी जरुरी जानकारियां अपने किसी भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्यों के साथ जरुर शेयर करें। रोजाना अपनी लोकेशन को घर वाले से जरुर शेयर करें। जरूरी डॉक्यूमेंट और इमरजेंसी कैश सोलो ट्रिप पर जाने के लिए अपना आई-डी प्रूफ, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, होटल बुकिंग आदि की हार्ड कॉपी के साथ-साथ डिजिटल कॉपी भी ईमेल पर जरुर सेव करें। पैसों के मामले में पूरी तरह ऑनलाइन पेमेंट पर निर्भर न रहें और अपने साथ कुछ इमरजेंसी कैश जरुर रखें। इस बात का ध्यान रखें कि सारा कैश एक जगह पर बिल्कुल न रखें। कुछ अपनी जेब में, तो कुछ बैग में छिपाकर रखें। जिससे नेटवर्क न रहने की स्थिति में आपको परेशान न हो। लाइट पैकिंग करें असल में सोलो ट्रिप पर जाने के लिए आपको सारा सामान खुद ही उठाना पड़ता है। इसलिए सिर्फ जरुरत का सामान अपने साथ रखें। रुकने के लिए महंगे होटलों की जगह हॉस्टल्स या डोर्मेट्री ऑप्शन दिया गया है। इनसे आपके पैसे भी बचेंगे और आपको दूसरे सोलो ट्रैवलर्स से भी मिलने का मौका मिलेगा। गट फीलिंग पर भरोसा रखें अक्सर ट्रिप पर आपको कई सारे लोग देखने को मिलेंगे। कुछ लोग आपकी मदद करेंगे, तो कुछ से आपको नेगेटिव वाइब्स भी आ सकती है। यदि आपको किसी इंसान या जगह पर अनकम्फर्टेबल महसूस हो सकता है, तो तुरंत वहां से दूर हो जाएं। फिर अपनी गट फीलिंग्स को ओवर थिंकिंग समझकर नजरअंदाज न करें।
हिमाचल की पर्वतारोही बलजीत कौर को तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड मिलेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें सम्मानित करेंगी। जानें उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियां।
गोवा-अमृतसर के बीच सीधी हवाई सेवा दोबारा शुरू होने की उम्मीद, अनछुए पर्यटन स्थलों को देश-विदेश में प्रमोट करने पर जोर
सीमलैस ट्रैवल और डेटा शेयरिंग पर बनेगी रणनीति:पहली बार पर्यटन को आउटकम से जोड़कर आगे बढ़ने पर जोर
पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बोले- 50 नए आइकोनिक डेस्टिनेशन विकसित किए जाएंगे पिछले दिनों जयपुर में पर्यटन और मध्य प्रदेश के भोपाल में संस्कृति पर ब्रिक्स देशों के पर्यटन और संस्कृति मंत्रियों की अलग-अलग बैठकों के दौर चले। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने साझा डिक्लेरेशन का खुलासा करते हुए भास्कर से बातचीत में कहा कि पहली बार पर्यटन को आउटकम से जोड़कर आगे बढ़ने पर जोर दिया गया है। सीमलैस ट्रैवल और डेटा शेयरिंग पर रणनीति बनाना तय हुआ है। पर्यटन पर किन प्रमुख विषयों को लेकर सहमति बनी?पर्यटन में एआई इनेबलर के रूप में किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, इस पर काम शुरू करेंगे। कोशिश कर रहे हैं कि एक देश से दूसरे देश में यात्रियों के लिए सीमलैस ट्रेवल हो। डेटा शेयरिंग यानी पर्यटन से जुड़ा डेटा एक-दूसरे देश के साथ किस तरह साझा किया जाए। इसमें पर्यटक कितने दिन रुकते हैं, कितना खर्च करते हैं, उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं, किस देश से कितने पर्यटक आते हैं... इस तरह के आंकड़े शामिल होंगे। अंततः बेहतर पॉलिसी प्लान करेंगे।पांडुलिपियों को डिजिटलाइज करने का क्या फायदा मिला?संस्कृति के स्पेक्ट्रम में देश की करीब एक करोड़ 22 लाख पांडुलिपियों को डिजिटलाइज किया गया है। इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।पर्यटकों के भारत में अनुभव को लेकर फीडबैक?टूरिस्ट के लिए ओवरऑल एक्सपीरियंस महत्वपूर्ण होता है। एयरपोर्ट से लेकर होटल, रास्ते की टैक्सी सहित सभी सुविधाओं की दुविधाएं उसे खराब अनुभव देती हैं। इसलिए पर्यटन स्थल को केवल डेस्टिनेशन की खूबसूरती के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसलिए हम पूरी व्यवस्था को सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं।डेस्टिनेशन मैनेजमेंट की खामी कई जगह देखी जाती है, कैसे निपट रहे?एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एक सफल उदाहरण है। वहां डेस्टिनेशन मैनेजमेंट अथॉरिटी बनाई गई है। इसका कॉन्सेप्ट यह है कि उस पर्यटन स्थल की सफाई, सिक्योरिटी, सेफ्टी और अन्य व्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी एक ही अथॉरिटी के एक अधिकारी की है। इसके अलावा सस्टनेबिलिटी पर हम बहुत काम कर रहे हैं। दुनिया के सभी पर्यटन स्थलों को सस्टेनेबल तरीके से विकसित करना जरूरी है। पर्यटन और संस्कृति में पिछले कुछ वर्षों के बड़े बदलाव क्या हैं?पर्यटकों के लिए। ई-वीजा व्यवस्था लागू की है। भारत में पर्यटन की बढ़ती मांग के मुकाबले हायर कैटेगरी के होटलों की कमी थी। हमने इसके लिए नीति बनाई और राज्यों के साथ साझा किया। केंद्र सरकार के स्तर पर हॉस्पिटेलिटी और टूरिज्म में निवेश को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया गया है। अब हम देश में 50 नए ग्लोबल स्टैंडर्ड के आइकोनिक डेस्टिनेशन विकसित करने जा रहे हैं।
Gorakhpur News: साइनेज बताएगा कहां है पर्यटन स्थल
Signage will indicate the location of the tourist spot.
Mau News: दोहरीघाट के लक्ष्मण मंदिर के दिन बहुरेंगे, 87.59 लाख से पर्यटन विकास होगा
Fortunes to turn around for Dohrighat's Lakshman Temple; tourism development to take place with an investment of 87.59 lakh.
अनियंत्रित पर्यटन और जलवायु परिवर्तन बना लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा संकट
5 सितंबर, शनिवार: मुजफ्फरपुर में बाबा गणिनाथ गोविंद जी महाराज के जन्मोत्सव पर ध्वजारोहण कर बिहार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने पलवैया मेला का शुभारंभ किया। भव्य उद्घाटन हुआ, पूजा के लिए महिला श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी।
चाहत खन्ना की मालदीव वेकेशन की तस्वीरें इंटरनेट पर छाईं
टीवी एक्ट्रेस चाहत खन्ना की मालदीव वेकेशन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। उन्होंने बीच और पूल से अपनी छुट्टियों की कई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वह वेकेशन एन्जॉय करती नजर आईं।
September Travel Plan: राजस्थान की Shekhawati Haveli में देखें कला और रॉयल्टी का बेजोड़ संगम
सितंबर का महीना घूमने के लिहाज से बेहद खास होता है क्योंकि इस महीने में न ज्यादा गर्मी होती है और न ज्यादा बारिश होती है। ऊपर से मौसम भी सुहावना होता है। इस दौरान लोग घूमने के लिए कहीं न कहीं जरुर जाते हैं। अगर आप भी घूमने का प्लान बना रही हैं और समझ नहीं आ रहा है, कहां जाएं, तो यह लेख आपके लिए है। इस बार सितंबर में इतिहास, कला और राजशाही ठाट-बाट से भरपूर इन हवेलियों का दीदार जरुर करें। शेखावाटी की प्रसिद्ध हवेलियां सितंबर के महीने में घूमने के लिए शेखावाटी की ये भव्य हवेलियां सबसे बेस्ट हैं। यहां पर आपको सैकड़ों साल पुराने राजसी दौर की झलक देखने को मिलेगी। आइए आपको बताते हैं शेखावाटी की इन चुनिंदा हवेलियों और अनोखी वास्तुकला के बारे में बताते हैं- मंडावा की कलात्मक हवेलियां शेखावाटी के मंडावा शहर की हर गली में आपको शानदार कलाकृति और अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं। यहां आप मंडावा किला, हवेली, मुरमुरिया हवेली और चौखानी हवेली जैसी कई शानदार हवेलियों को देख सकते हैं। इन हवेलियों की बाहरी दीवारों पर बनीं सुंदर पेंटिंग्स देखने लायक है। नवलगढ़ की ऐतिहासिक हवेलियां यदि आपको फोटग्राफी का सबसे ज्यादा क्रेज और शौक है, तो आप नवलगढ़ की पोद्दार हवेली और आनंदीलाल पोद्दार हवेली देखने जरुर जाएं। यहां पर आपको दीवारों पर बेहतरीन रंगों और सोने-चांदी की नक्काशी से बनी पेंटिंग फोटोग्राफी देखने को मिलेगी। वहीं, आपको यहां पर राजस्थानी की लोक संस्कृति और वास्तुकला की भी पूरी जानकारी मिलेगी। फतेहपुर शेखावाटी की नादिन ले प्रिंस हवेली अगर आप फ्रांसीसी कला का शानदार अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप फतेहपुर कीनादिन ले प्रिंस हवेली' जरुर विजिट करें, यहां पर आपको राजस्थानी रॉयल्टी देखने को मिलेंगे। इसके अलावा, आप यहां द्वारकाधीश हवेली और सिंघानिया हवेली के दर्शन करने जरुर जा सकते हैं। शेखावाटी की हवेलियों तक कैसे पहुंचे? - यहां जाने के लिए आप सबसे नजदीकी एयरपोर्ट 'जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट' जाएं। यहां से फिर मंडावा और नवलगढ़ से करीब 150 से 170 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से बाहर आते ही आपको कैब या टैक्सी मिल जाएगी, जो आपको इस लोकेशन पर पहुंचा देगी। - इसके अलावा, आप नवलगढ़, मुकुंदगढ़ या झुंझुनू रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं। ये तीनों रेलवे स्टेशन शेखावाटी के काफी नजदीक है। स्टेशन से बाहर आते ही आपको आसानी से लोकल बस या टैक्सी यहां पर जाने के लिए मिल जाएंगी।
कैमूर: प्रमुख पर्यटन स्थल करमचट डैम में दिखा मगरमच्छ, मोटरबोट की सुविधा वाले जलाशय में बढ़ा खतरा
3 सितंबर, गुरुवार: कैमूर के करमचट डैम में मगरमच्छ तैरता दिखाई दिया। डैम में मोटरबोट की सुविधा होने से पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
दिल थोड़ा डेयरिंग है? भारत में ये 5 एडवेंचर एक्टिविटी जरूर ट्राई करें
अगर आपको घूमने के साथ थोड़ा रोमांच भी पसंद है, तो भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां आप स्कीइंग से लेकर स्काइडाइविंग तक का मजा ले सकते हैं। ये 5 एडवेंचर जिंदगी में एक बार जरूर ट्राई करें।
Travel Tips: जन्माष्टमी पर द्वारकाधीश दर्शन के लिए जानें Train और Flight रूट
जन्माष्टमी के पर्व को लोग तरह-तरह की प्लानिंग करते हैं। कोई घरों में भगवान श्रीकृष्ण की झांकी को बनाता है, तो कुछ मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी का पर्व मनाने के लिए जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी इस जन्माष्टमी श्रीकृष्ण के दर्शन के प्लान बना रही हैं, तो आप गुजरात से लेकर द्वारका तक भगवान श्रीकृष्ण के कुछ फेमस मंदिरों के दर्शन के साथ एक यादगार ट्रिप प्लान कर सकती हैं। द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है, यहां पर जन्माष्टमी के मौके पर खास रौनक देखने को मिलती है। द्वारका में कहां-कहां घूमें द्वारका सिर्फ मंदिर घूमने की जगह नहीं है, बल्कि यहां पुराने मंदिर, समुद्र, बीच और आसपास के कई धार्मिक स्थल हैं, जिनको आप एक्सप्लोर कर सकती हैं। अगर आप दिल्ली से सिर्फ 2 से 3 दिन के लिए ट्रिप प्लान करती हैं, तो दर्शन के साथ-साथ यहां घूमने-फिरने का भी मजा ले सकती हैं। यहां द्वारकाधीश मंदिर के अलावा नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, बेट द्वारका, रुक्मिणी देवी मंदिर और शिवराजपुर बीच फेमस है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस पूरे ट्रिप के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Janmashtami 2026 | इस बार बनाएं खास प्लान, भारत के इन 5 प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में लें दिव्य दर्शन का आनंद | Best Krishna Temples India द्वारकाधीश मंदिर में करें दर्शन जब आप द्वारका पहुंच जाएं, तो होटल में चेकइन करें। फिर फ्रेश होकर सबसे पहले द्वारकाधीश मंदिर जाएं। इसको जगत मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इसकी स्थापना भगवान श्रीकृ्ष्ण के पोते वज्रनाभ ने कराया था। यह मंदिर एक ऊंचाई पर बना है, यहां तक पहुंचने के लिए 50 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। मंदिर के दर्शन का समय सुबह 07 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम को 05:00 बजे से 09:00 बजे तक है। वहीं जन्माष्टमी के मौके पर आम दिनों से ज्यादा भीड़ होती है, इसलिए समय में बदलाव हो सकता है। मंदिर में क्या खास देखें मंदिर में दर्शन करने के अलावा बहुत कुछ देख सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के द्वारकाधीश रूप के दर्शन करें। मंदिर की खूबसूरत नक्काशी और ऊंचा शिखर देख सकते हैं। मंदिर के आसपास बने छोटे मंदिर देख सकते हैं। अरब सागर के पास का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। गोमती क्रीक के पास सुदामा सेतु देख सकते हैं। दिल्ली से ऐसे पहुंचे द्वारका दिल्ली से द्वारका काफी दूर है। इसलिए आपको ट्रिप की सही प्लानिंग करनी होगी। आप ट्रेन से द्वारका पहुंचने के लिए दिल्ली से ट्रेन ले सकती हैं। यह बजट फ्रेंडली ऑप्शन है। दिल्ली से द्वारका की दूरी करीब 1325 से 1335 किमी है। ऐसे में आपको द्वारका पहुंचने के लिए 23 से 24 घंटे का समय लग सकता है। इसके अलावा आप फ्लाइट से भी द्वारका जा सकती हैं। द्वारका का सबसे नजदीकी एयर कनेक्शन जामनगर और पोरबंदर है। द्वारका से पोरबंदर एयरपोर्ट की दूरी करीब 136 किमी है। वहीं जामनगर एयरपोर्ट की दूरी 105 किमी है। यहां पहुंचकर आप बस या कैब से द्वारका जा सकती हैं। वहीं अगर आप फ्लाइट या ट्रेन से नहीं जाना चाहती हैं, तो रोड ट्रिप प्लान कर सकती हैं। हालांकि रोड ट्रिप थोड़ा थकान भरी रह सकती है। क्योंकि इसकी दूरी करीब 1450 से 1460 किमी है। इन जगहों को भी करें एक्स्प्लोर अब आप द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने के बाद यहां और भी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। बेट द्वारका मंदिर में दर्शन करने के बाद आप बेट द्वारका भी जा सकती हैं। यह समुद्र के पास बसा एक आइलैंड है और यहां पर मंदिर भी है। माना जाता है कि यह श्रीकृष्ण का निवास स्थान है। यहां पर विष्णु, शिव, लक्ष्मी-नारायण और हनुमान आदि के मंदिर है। ध्यान रकें कि शाम के समय यहां घूमने के लिए न जाएं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारका में आप भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी कर सकती हैं। मंदिर के पास गोपी तालाब तीर्थ भी है। यह जगह भगवान कृष्ण और गोपियों से जुड़ी है। अगर आप धार्मिक जगहों में दिलचस्पी रखती हैं, तो द्वारका ट्रिप में इसे जरूर शामिल करें। रुक्मिणी देवी मंदिर द्वारका जाने पर आप रुक्मिणी देवी मंदिर के दर्शन भी करें। मंदिर की बाहरी दीवारों पर आपके देवी-देवताओं और अलग-अलग आकृतियों की नक्काशी देखने को मिलेगी। माना जाता है कि यह मंदिर 12वीं सदी से है। शिवराजपुर बीच आप मंदिर और धार्मिक जगहों को एक्सप्लोर करने के बाद शिवराजपुर बीच भी जा सकती हैं। यह द्वारका से करीब 12 किमी की दूरी पर है। अगर आप भी एडवेंचर के शौकीन हैं, तो यहां पर स्नॉर्कलिंग, बनाना राइड, स्कूबा डाइविंग जैसी एक्टिविटी कर सकती हैं। यहां पर जाने का समय सुबह 8 बजे से शाम के 7 बजे तक हैं। वहीं एंट्री के लिए आपको 30 रुपए का टिकट लेना होगा। जानिए द्वारका में कहां रुकें द्वारका में रुकने के लिए आपको आप होटल और टूरिस्ट स्टे मिल जाएंगे। लेकिन जन्माष्टमी के मौके पर भीड़ अधिक रहती है। इसलिए होटल आदि पहले से बुक कर लें। ध्यान रहे कि होटल मंदिर से ज्यादा दूर न हो। ऐसी जगह पर स्टे लें, जहां से मंदिर और अन्य जगहों तक आसानी से पहुंच सकें। खाने में क्या ट्राई करना चाहिए द्वारका में आप गुजरात का लोकल खाने का स्वाद ले सकती हैं। गुजराती थाली, खमण, जलेबी-फाफड़ा और दूसरी गुजराती चीजों को ट्राई करें। इससे आपकी ट्रिप अधिक मजेदार हो जाएगी। वहीं अगर आप जन्माष्टमी के मौके पर व्रत रखती हैं, तो बता दें कि आपको होटल या आसपास के भोजनालय में फलाहार खाना भी मिल जाएगा। इन बातों का रखें ध्यान जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में अधिक भीड़ हो सकती है, इसलिए समय से पहुंचें। ट्रेन, होटल या फ्लाइट आदि की बुकिंग पहले से कर लें। बेट द्वारका जाने के दौरान वापसी की टैक्सी भी पहले बुक कर लें। समुद्र के किनारे जाने के दौरान नियमों का पालन करें। गर्मी और उसम को देखते हुए पानी भी अपने साथ रखें।
Tripura Tourism Plan: जानिए क्यों खास हैं उनाकोटी की रहस्यमयी मूर्तियां और Ujjayanta Palace
भारत में विविधता का देश है और यहां पर घूमने के लिए कई सारी जगहें मौजूद है। अगर आप नॉर्थ-ईस्ट जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आप त्रिपुरा जरुर जाएं। यहां पर आपकों संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के नजारे देखने को मिलेंगे। त्रिपुरा में एकदम शांत वातावरण देखने को मिलता है। हरी-भरी पहाड़ियों का एक अलग ही अनुभव देता है। आइए आपको त्रिपुरा के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं। त्रिपुरा की खूबसूरत जगहें त्रिपुरा के इतिहास और विरासत जानने के लिए आपको यहां उज्जयंत पैलेस देखने को मिलेगा। रुद्रसागर झील के बीचों-बीच स्थित नीरमहल एक बेहद सुंदर वॉटर पैलेस है और भारत का सबसे बड़ा जल महल है। उनाकोटी त्रिपुरा का प्राचीन रॉक-कट तीर्थ स्थल है। यहां भगवान शिव की विशाल मूर्तियां हैं, जो घने जंगलों के बीच पत्थरों पर उकेरी गई हैं। यह जगह बेहद ही खूबसूरत है। त्रिपुरा की कला और हस्तशिल्प त्रिपुरा की कला की बात करें, तो यहां मुख्य रुप से बांस और बेत के काम पर आधारित कला है। यहां के लोकल कारीगर बांस के फर्नीचर, बास्केट, डेकोरेशन पीस और बर्तन बनाते हैं, इसके अलावा, त्रिपुरा में रेशा नाम का एक पारंपरिक बुना हुआ कपड़ा काफी मशहूर है। इसको महिलाएं ऊपरी वस्त्र के तौर पर पहनती हैं। वहीं यहां का खान-पान काफी सदा होता है। त्रिपुरा की पारंपरिक डिश मुई बोरोक बेहद ही स्वादिष्ट होती है। इसे फर्मेंट की गई मछली के पेस्ट से बनाया जाता है। बांगुई राइस भी यहां के खान-पान का मुख्य हिस्सा है।
अगर आपकी सेक्स लाइफ थोड़ी बोरिंग या एक जैसी हो गई है, तो पार्टनर के साथ कहीं घूमने जाना अच्छा आइडिया हो सकता है। रोज की भागदौड़ से दूर छुट्टियों का माहौल आपको और आपके पार्टनर को एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का मौका देता है। नए माहौल में रोमांस और नजदीकियां रिश्ते में एक नई ताजगी ला सकती हैं। लेकिन छुट्टियों में इंटीमेसी को बेहतर बनाने के लिए कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसे ही 10 आसान टिप्स, जो आपके कपल टाइम को और खास बना सकते हैं। अपनी पसंद की चीजें साथ लेकर जाएं अगर आपके लिए कोई खास चीज रोमांटिक माहौल बनाने में मदद करती है, तो उसे ट्रिप पर साथ ले जा सकते हैं। यह आपकी पसंद की कोई रोमांटिक एक्सेसरी, परफ्यूम, आरामदायक नाइटवियर या दूसरी पसंदीदा चीज हो सकती है। ध्यान रखें कि जो भी चीज आप इस्तेमाल करें, उसमें दोनों पार्टनर की सहमति और सहजता सबसे जरूरी है। सिर्फ बेड तक सीमित न रहें होटल का कमरा सिर्फ सोने के लिए नहीं होता। छुट्टियों में आप कमरे के माहौल को थोड़ा अलग और रोमांटिक बना सकते हैं। कमरे की लाइटिंग, खुशबू और म्यूजिक जैसी छोटी चीजें भी मूड को बेहतर कर सकती हैं। हालांकि, किसी भी तरह की एक्टिविटी में होटल की संपत्ति और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। इसे भी पढ़ें: Long Distance Relationship में बढ़ रही हैं दूरियां? नजदीकियां बढ़ाने में मदद कर सकता है Phone Sex दोपहर का समय भी आजमाएं रोजमर्रा की जिंदगी में कपल्स अक्सर अपनी व्यस्त दिनचर्या के हिसाब से ही इंटीमेट होते हैं। छुट्टियों में आपके पास समय की थोड़ी ज्यादा आजादी होती है। इसलिए अगर आमतौर पर आपके पास सिर्फ रात या सुबह का समय होता है, तो छुट्टी के दौरान दिन में भी एक-दूसरे के साथ रोमांटिक समय बिताया जा सकता है। जल्दबाजी न करें काम, घर और रोज की जिम्मेदारियों के बीच कपल्स के पास अक्सर एक-दूसरे के लिए पर्याप्त समय नहीं होता। छुट्टियां इस रफ्तार को थोड़ा धीमा करने का अच्छा मौका देती हैं। एक-दूसरे के साथ आराम से समय बिताएं, बातचीत करें और बिना किसी जल्दबाजी के पल को एंजॉय करें। यहां मकसद किसी तरह का दबाव बनाना नहीं, बल्कि साथ में अच्छा समय बिताना है। छुट्टियों में काम को थोड़ा दूर रखें अगर आप छुट्टियों पर भी लगातार ईमेल, ऑफिस चैट या काम के मैसेज चेक करते रहेंगे, तो आपका दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाएगा। इसलिए जहां संभव हो, काम से ब्रेक लें। लैपटॉप और ऑफिस नोटिफिकेशन को कुछ समय के लिए दूर रखना आपको और आपके पार्टनर को एक-दूसरे पर ध्यान देने में मदद कर सकता है। अपने शरीर और भावनाओं पर ध्यान दें छुट्टियां खुद को रिलैक्स करने और अपने पार्टनर के साथ जुड़ने का अच्छा समय होती हैं। अपने आसपास के माहौल को महसूस करें और पार्टनर के साथ बिताए जा रहे समय पर ध्यान दें। नए माहौल, नई जगह और पार्टनर की मौजूदगी को महसूस करने से रोमांटिक कनेक्शन और बेहतर हो सकता है। ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं इंटीमेसी के दौरान ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल आराम और सुविधा बढ़ाने में मदद कर सकता है। खासतौर पर अगर ड्रायनेस या असहजता महसूस हो रही हो, तो सही ल्यूब्रिकेंट उपयोगी हो सकता है। ट्रिप पर जाने से पहले इसे साथ रखना भी एक अच्छा विकल्प है। अगर किसी प्रोडक्ट से जलन या परेशानी हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें। खुद को पूरी तरह रिलैक्स रखें कई बार इंटीमेसी के दौरान लोग काम, तनाव या दूसरी बातों के बारे में सोचते रहते हैं। इससे वे उस पल को पूरी तरह एंजॉय नहीं कर पाते। छुट्टियों में खुद को थोड़ा रिलैक्स करने की कोशिश करें। किसी तरह की परफॉर्मेंस या उम्मीद का दबाव न बनाएं और अपने पार्टनर के साथ सहज तरीके से समय बिताएं। इसे भी पढ़ें: Couples Special: बोरिंग Sex Life को रोमांचक बनाने के लिए ट्राई करें ये 4 नई Sex Positions यह न गिनें कि कितनी बार इंटीमेट हुए छुट्टियों में ज्यादा रोमांस होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको हर दिन या बार-बार इंटीमेट होना ही चाहिए। हर कपल की पसंद और कम्फर्ट अलग होता है। इसलिए खुद पर या पार्टनर पर कोई दबाव न डालें। अगर छुट्टी के माहौल में ढलने में थोड़ा समय लग रहा है, तो यह बिल्कुल सामान्य है। कुछ नया आजमाने की कोशिश करें छुट्टियां रिश्ते में कुछ नया करने का अच्छा मौका हो सकती हैं। आप कोई नया रोमांटिक आइडिया, नई एक्टिविटी या ऐसी चीज आजमा सकते हैं जिसे दोनों पार्टनर पहले से करने की इच्छा रखते हों। लेकिन यहां भी दोनों की सहमति और सहजता सबसे जरूरी है। अगर किसी एक पार्टनर को कोई चीज पसंद नहीं है, तो उसे करने का दबाव नहीं होना चाहिए। छुट्टियों में रोमांस का असली मतलब वेकेशन सेक्स या छुट्टियों में इंटीमेसी का मतलब सिर्फ सेक्स नहीं है। असल में यह अपने पार्टनर के साथ बिना रोजमर्रा के तनाव के क्वालिटी टाइम बिताने और रिश्ते में नजदीकी बढ़ाने का मौका है। इसलिए छुट्टी के दौरान खुद पर किसी तरह का दबाव न डालें। साथ में घूमना, बातें करना, एक-दूसरे को समय देना और छोटे-छोटे रोमांटिक पल भी रिश्ते को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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Travel Tips: शिमला-मनाली के बजाय Jibhi के Offbeat Locations बन रहे पर्यटकों की पहली पसंद
हिमाचल प्रदेश का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में सबसे पहले शिमला और मनाली का नाम आता है। इसके अलावा लोग और दूसरी जगहों के बारे में बहुत कम जानते हैं। ऐसे में अगर आप भी हिमाचल प्रदेश घूमने का मन बना रही हैं, तो आप हिमाचल की ऑफबीट लोकेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हिमाचल प्रदेश की छिपे खजाने जिभी के बारे में बताने जा रह हैं। ऑफबीट लोकेशन जिभी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बंजार घाटी स्थिति जिभी आपको सुकून का एहसास दिलाएगा। क्योंकि 5000 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद यह जगह अन्य टूरिस्ट स्पॉट की तरह भीड़भाड़ वाली नहीं है। वहीं दूरी की बात की जाए, तो यह जगह मनाली से करीब 100 किमी दूर और मंदिर से करीब 50 किमी दूर है। इसे भी पढ़ें: Travel Plan Breakdown: दिल्ली से ₹5000 के बजट में घूमें ये 3 शहर, जानें ट्रांसपोर्ट और होटल का पूरा खर्च जिभी कैबाइन्स नामक ट्री हाउस, लकड़ी और घने देवदार के जंगलों के लिए जानी जाती है। आप आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करते हैं, तो जिभी के सुंदर झरने और प्राकृतिक नजारे आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। जिभी में इन जगहों को करें एक्सप्लोर दुनिया की भीड़भाड़ से दूर हिमाचल प्रदेश की यह ऑफबीट लोकेशन कई मायनों में बेहद खास है। तो आइए जानते हैं कि आप जिभी में क्या-क्या एक्सप्लोर कर सकते हैं। रघुपुर किला रघुपुर किला वैसे तो अब खंडहरों में गिना जाता है। लेकिन 11,155 फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस किले से कुल्लू और मंडी के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाया जा सकता है। जालोरी पास जिभी से करीब 12-14 किमी दूर और करीब 10 हजार फीट स्थित जालोरी पास एक माउंटेन है। यहां पर बर्फ से ढकी पहाड़ियां हसीन वादियों से कम नहीं लगती हैं। श्रृंग ऋषि मंदिर जिभी से थोड़ी ही दूर पर बग्गी गांव में स्थित श्रृंग ऋषि मंदिर है। जो यहां के स्थानीय देवता श्रृंग ऋषि को समर्पित है। श्रृंग ऋषि को कुल्लू के 18 देवताओं में से एक माना जाता है। जिनका संबंध रामायण काल से है। यही कारण है कि इस मंदिर में दर्शन के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग भीड़ उमड़ती है। सेरोलसर झील जालोरी से करीब 5 किमी दूर सेरोलसर झील है। जिसके बारे में स्थानीय लोगों का मानना है कि इस झील के पानी में औषधीय गुण हैं। झील के किनारे बैठकर बहुत सुकून मिलता है। ऐसे में प्रकृति प्रेमियों को यहां आकर निराशा नहीं होगी।
घुमक्कड़ लोग हमेशा घूमने के लिए तैयार रहते हैं। यह लोग हमेशा कही न कहीं का प्लान बनाते रहते हैं। सितंबर का महीना घूमने के लिहाज से खास माना जाता है। इस दौरान कई जगहों पर बारिश होती है, इसलिए मौसम सुहाना होता है। बरसात के बाद से हर जगह खूबसूरती चरम पर पहुंच जाती है और आसपास का नजारा काफी फ्रेश नजर आता है। परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ कुछ दिनों की छुट्टी पर जाना अच्छा हो सकता है। आइए आपको बताते हैं करीब 5000 रुपये में बजट में आप कहां घूम सकते हैं। पुष्कर, राजस्थान यदि आप पहाड़ों की जगह पर किसी झील और मंदिर वाली जगहों को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो आप राजस्थान के पुष्कर जा सकते हैं। यहां की झीलें घूमना, ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करना और बाजारों में घूमना आपको मजेदार लगेगा। इस मौसम में यहां गर्मी कम होती है। - दिल्ली से दूरी-करीब 430 किमी है। - समय- लगभग 7-9 घंटे का समय लग जाता है। - घूमने के लिए पुष्कर झील, ब्रह्मा मंदिर, घाट और लोकल बाजार घूमने जा सकते हैं। बजट फ्रेंडली होटल लें, लोकल स्ट्रीट से खाना खाएं। होटल को बुकिंग ऑनलाइन ही करें। ऋषिकेश, उत्तराखंड योग नगरी ऋषिकेश धार्मिक दृष्टि से तो खास है, लेकिन यह जगह एडवेंचर के लिए भी काफी लोकप्रिय है। सुबह की आरती से लेकर मंदिरों के दर्शन तक, यहां पर आप सब कुछ देख सकते है। रिवर राफ्टिंग कर सकते हैं और भी कई एक्टिविटीज कर सकते हैं। - दिल्ली से दूरी करीब 240 किमी। - समय- लगभग 5 से 6 घंटे का समय लग जाता है। - होटल के लिए कम से कम 1200 से 1500 रुपये में रुम मिल जाएगा। - 5000 हजार में ट्रिप को करने के लिए पैदल या शेयरिगं ऑटो से घूमें और महंगे कैफे से बचें। अमृतसर, पंजाब बजट फ्रेंडली ट्रिप के लिए आप पंजाब घूमने जा सकते हैं। अमृतसर में धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों तरह की जगहें देखने को मिल जाएगी। सबसे फेमस यहां पर स्वर्ण मंदिर है, जिसकी खूबसूरती काफी देखने के लायक है और माहौल भी शांत देखने को मिलेगा। वहीं, आप अटारी-वाघा बॉर्डर भी घूमने जा सकते हैं। -दिल्ली से दूरी- लगभग 450 किमी -समय- लगभग 7 से 8 घंटे लग सकते हैं। इस ट्रिप के दौरान आप खाने पर खर्च बचा सकते हैं, गुरुद्वारे में खाना खा सकते हैं। वहीं, आप लोकल स्ट्रीट पर फूड खा सकते हैं। महंगे होटल पर खाना खाने से बचें।
भारत में कई अद्भुत चमत्कार और रहस्यमय मंदिरों का खजाना है। यहां पर आपको कई प्राचीन मंदिर देखने को मिलेंगे। हर मंदिर की एक अलग विशेषता है। राजस्थान के सीकर जिले में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शता है। इस मंदिर का नाम है जीणा माता। यह मंदिर मां जीण भवानी को समर्पित है। रक्षाबंधन पर अपने भाई के साथ यहां दर्शन के लिए आप जरुर जा सकते हैं। यह मंदिर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है और यहां मां जीण माता के साथ उनके भाई हर्ष की भी पूजा की जाती है। आइए आपको इस मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बताते हैं। राजस्थान में कहां स्थित है भाई-बहन को समर्पित जीण माता का मंदिर? राजस्थान के सीकर जिले में जीणमाता गांव में यह मंदिर स्थित है। यहां पर मुख्य रुप से मां जीण की पूजा होती है। राखी के समय यहां लोग दर्शन के लिए जरुर जाते हैं। इस दौरान यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। यह मंदिर खाटू श्याम से 25-30 किमी की दूरी पर स्थित है। कैसे पहुंचे? - अगर आप सीकर शहर से यहां जाएंगे, तो आपको 29 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। यदि आप जयपुर से जा रहे हैं, तो आपको 110 किमी का सफर तय करना होगा। जयपुर से पहुंचने के लिए करीब 3 घंटे का समय लगेगा। - जो भाई-बहन दूसरे शहरों से आने का प्लान कर रहे हैं, वह ट्रेन से जा सकते हैं। इसके लिए आपको रींगस जंक्शन तक ट्रेन टिकट बुक करानी पड़ेगी। - सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर एयरपोर्ट है, यहां से आप मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए बस की क्या सुविधा है? - राजस्थान से आपको सीकर जिले से मंदिर के लिए बस मिल जाएगी। आसपास के शहरों से भी सीकर जिले के लिए बस जाती है। - जयपुर से आप सीकर के लिए पहले बस लें। इसके बाद सीकर पहुंचकर जीण माता मंदिर के लिए शेयरिंग टैक्सी या ऑटो बुक कर सकते हैं। जीण माता मंदिर यह मंदिर भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा है, इसलिए रक्षाबंधन के समय भीड़ थोड़ी देखने को मिल सकती है। किसी भी साधन से जा रहे हैं, तो समय का जरुर ध्यान रखें। जीण माता मंदिर पहाड़ी पर स्थित है, इसलिए जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 200 से 300 मीटर पैदल चलना पड़ता है। रास्ते में करीब 200 सीढ़िया मिलेगी। इन्हें चढ़ने में आधे घंटे का समय लग जाएगा। View this post on Instagram A post shared by Aryan Parashar (@aryanpujari_jeenmata)
प्रेग्नेंट दीपिका और बेटी दुआ को लेकर वेकेशन पर निकले रणवीर सिंह! बेबी बंप फोटोज देख चहक उठे फैंस
Ranveer Singh Deepika Padukone Photos Fact Check:
क्या आप कभी भारत के ऐसे इलाके में घूमने गए हैं, जहां की सड़कें एकदम जिगजैग हों। ऐसा सफर देखकर या सोचकर ही रोमांचक लगता है। कुछ ऐसा ही है सिक्किम का ऑफ बीट लोकेशन है। जिसका नाम जुलूक है। अगर आप भी हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड जाकर ऊब चुके हैं, तो इस बार आपको सिक्कम जाने का प्लान करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सिक्किम के छोटे से गांव जुलूक के बारे में बताने जा रहे हैं। सिक्किम का जन्नत भारत के सिक्किम राज्य के पूर्वी जिले में स्थित एक बेहद छोटा और खूबसूरत गांव जुलूक है। जुलूक आपको जन्नत की सैर इसी धरती पर करा सकता है। बादलों के ऊपर बसा यह गांव समुद्र तल से करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसको आप हनीमून डेस्टिनेशन या फैमिली ट्रिप बना सकती हैं। आपको यहां आकर निराशा नहीं होगी। इसे भी पढ़ें: IRCTC Northeast Package: अब किस्तों में चुकाएं पैसे, मुंबई से Gangtok-Darjeeling ट्रिप में Flight और Guide भी शामिल सिल्क रूट का हिस्सा शायद आपको पता न हो जुलूक कभी सिल्क रूट का हिस्सा था। इसके व्यापार मार्ग की बात करें, तो यह मार्ग जेलेपा मुख्य पहाड़ी दर्रे को तिब्बत के ल्हासा तक जोड़ता था। जुलूक में क्या करें एक्सप्लोर अगर आप भी जुलूक घूमने का मन बना रहे हैं, तो आपको इन खास जगहों को जरूर एक्सप्लोर करना चाहिए। थंबी व्यू पॉइंट थंबी व्यू पॉइंट से आपको कंचनजंघा की चोटियां साफ देखने को मिल सकती हैं। क्योंकि थंबी व्यू पॉइंट से कंचनजंघा सिर्फ 10 से 12 किमी की दूरी पर है। नाथंग वैली नाथंग वैली पर जाकर आप एक गाना तो जरूर गुनगुनाएंगे, 'बादल पर पांव हैं', क्योंकि वाकई में आपके पैर बादलों के बीच होंगे। एलीफेंट लेक ओल्ड सिल्क रूट पर आपको सिर्फ बादल ही नहीं बल्कि एलिफेंट लेक भी देखने को मिलेगी। इसको कुपूप झील या बिटांग छो भी कहते हैं। इस झील का आकार कुछ-कुछ हाथी जैसा दिखता है। जिग-जैग रास्ते यहां जाकर अगर आप रोड ट्रिप पर नहीं गए हैं तो मतलब आपने जुलूक को सही से नहीं एक्सप्लोर किया। यहां के जिग-जैग मोड़ ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। जानें कब और कैसे जाएं यहां पर जाने के लिए मार्च से लेकर मई और सितंबर से नवंबर तक का समय बेस्ट है। अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं, तो न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन और हवाई मार्ग के लिए बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचे। इसके बाद गंगटोक और रोंगली होते हुए सड़क यात्रा करनी होगी।
Travel Tips: तुर्कमेनिस्तान का वह नरक द्वार जहाँ 1971 से नहीं बुझी आग, जानिए Karakum Desert का सच
दुनिया में आपको कई ऐसी अनोखी जगहें मिलेंगी, जिनके बार में जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा। ऐसी ही एक जगह मध्य एशियाई के देश तुर्कमेनिस्तान में है। यहां पर काराकुम रेगिस्तान को नरक का दरवाजा भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कोई पैर नहीं रख सकता है। काराकुम रेगिस्तान में डेवरेज गांव के पास में यह रेगिस्तान में है। जिसको 'शाइनिंग काराकुम' के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि रेगिस्तान का एक हिस्सा हमेशा आग की तरह चमकता रहता है। ऐसे में अगर आप भी यह सोच रहे है कि इसको नरक का दरवाजा क्यों कहा जाता है, तो आज इस आर्टिकल में हम आपको इस जगह के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2026: भारतीय रेलवे का बड़ा तोहफा, इन Routes पर चलेंगी Raksha Bandhan Special Trains क्यों कहते हैं नरक का दरवाजा साल 1971 में मध्य एशिया के काराकुम रेगिस्तान में एक ऐसी घटना हुई। जिस कारण रेगिस्तान में आग लगाना पड़ा। साल 1971 में तेल भंडार की खोज में सोवियत संघ के भूवैज्ञानिक का एक ग्रुप काराकुम रेगिस्तान आया था। यहां पर उनको एक ऐसी जगह मिल भी गई। जहां पर वैज्ञानिकों को लगा कि तेल भंडार होगा। उन्होंने प्राकृतिक गैस के एक बड़े भंडार के ऊपर खुदाई करना शुरू किया। लेकिन उनको इसके नतीजे के बारे में नहीं पता था। जब खुदाई के लिए उन्होंने उस हिस्से पर भारी मशीनें लगाईं। तो जमीन मशीनों का जोर न सह पाए और जमीन अंदर की ओर धंसने लगी। जिस कारण कई जगहों पर गड्ढा बनता चला गया। एक गड्ढे से निकलने लगी गैस बता दें कि रेगिस्तान में जगह-जगह गड्ढे बन रहे थे। लेकिन एक गड्ढा सबसे बड़ा था। यह गड्ढा करीब 230 फीट चौड़ा और 65 फीट गहरा था। जिसके बाद वैज्ञानिकों को चिंता सताने लगी। क्योंकि इस गड्ढे से लगातार प्राकृतिक गैस बाहर निकल रही थी। हालांकि यह गैस जहरीली नहीं थी, लेकिन फिर भी यह ऑक्सीजन को बदल देती थी। जिस कारण सांस ले पाना मुश्किल हो जाता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी रेगिस्तान में रहने वाले जानवरों को होती थी। क्योंकि गड्ढे में गिरने से जानवर की फौरन मौत हो जाती। ऐसे में वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर यहां ब्लास्ट करना हो तो सिर्फ 5% मीथेन की मात्रा काफी होगी। इसलिए उन्होंने सोचा कि इसमें आग लगा दी जाए। अभी तक जल रही आग आपको जानकर हैरानी होगी कि यह आग अभी तक जल रही है। तुर्कमेनिस्तान के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जब गड्ढे में मौजूद प्राकृतिक गैस खत्म हो जाएगी, तो यह आग अपने आप बुझ जाएगी। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है और यह आग जल रही है। साल 2010 में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति कुरबानगुली बर्डीमुखामेदोव भी इस गड्ढे का दौरा करने के लिए यहां पहुंचे थे। रेगस्तान में भभकने वाली इस आग को देखकर उन्होंने भी चिंता जताई थी। इससे आसपास के गैस क्षेत्रों को भी खतरा हो सकता है।
वियतनाम भारतीय पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जगहों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां पर्यटकों को मिलने वाली हर तरह की सुविधा है। जिन यात्रियों को समुद्र के किनारे समय बिताना अच्छा लगता है, उनके लिए यहां पर कई खूबसूरत बीच हैं। एडवेंचर और ऐतिहासिक जगहों पर घूमने के लिए कई जगहें हैं। वियतनाम की संस्कृति भी पर्यटकों का काफी आकर्षित करती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वियतनाम की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं। जिस कारण हर साल लाखों की संख्या में भारतीय पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते हैं। इसे भी पढ़ें: Delhi to Agra Travel Guide: मानसून की फुहारों के बीच ताजमहल और Baby Taj का दीदार, एक दिन की छुट्टी के लिए परफेक्ट One-Day Trip आसान वीजा प्रोसेस वियतनाम जाने के लिए भारतीयों को वीजा प्रोसेस के लिए ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ती है। ई-वीजा के जरिए आवेदन करने पर 90 दिनों के अंदर आप वियतनाम यात्रा पर जा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के कारण भारतीयों को वीजा के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के दौरान भारतीयों को पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख, एक्सपायरी डेट, पासपोर्ट साइज फोटो, पासपोर्ट के बायोडाटा की फोटो और पर्सनल जानकारी जैसी जानकारी देनी होती है। वहीं यात्रा से 2 सप्ताह पहले आवेदन करना सही होता है। घूमना है आसान वियतनाम की मुद्रा को डोंग कहते हैं, जोकि भारत के रुपए के मुकाबले सस्ती है। भारतीय रुपए की तुलना में वियतनाम के डोंग की वैल्यू काफी कम है। भारतीय 1 रुपया करीब 275 वियतनामी डोंग के बराबर है। अगर आप 100 रुपए खर्चा करती हैं, तो यह 27,500 वियतनामी डोंग के बराबर होगा। इसलिए यहां पर भारतीयों को घूमना सस्ता पड़ता है। वहीं यहां पर रहना, खाना, घूमना आदि भारतीय पर्यटकों को सस्ता लगता है। कई बेहद खूबसूरत जगहें वियतनाम जाने का एक कारण यह भी है कि यहां पर खूबसूरत जगहों की भरमार है। यहां समुद्र तट, नदियां, पहाड़, गुफाएं और ऐतिहासिक स्थल आदि सभी चीजें आपको एक ही जगह पर मिल जाती है। इस तरह से आपका विदेश ट्रिप पूरा लगता है। यहां का हा लॉन्ग बे जगह नीले पानी और चूना पत्थर की के लिए काफी फेमस माना जाता है। वहीं दा नांग एक बेहद खूबसूरत बीच है। आप हो ची मिन्ह सिटी में शॉपिंग कर सकती हैं। तो हनोई में वियतनाम की संस्कृति को बेहद करीब से देखने और समझने का मौका मिलता है।
Gaurav Khanna माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर निकले, बारिश में फंसे तो ऐसे किया एन्जॉय
एक्टर गौरव खन्ना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। एक्टर लगातार अपने फैंस के साथ अपनी जिंदगी से जुड़े अपडेट शेयर कर रहे हैं। हाल ही में गौरव ने एक नया वीडियो शेयर कर बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर गए हैं। गौरव ने वीडियो में उस कार की झलक भी दिखाई, जिसमें वह अपनी मां और पिता के साथ सफर कर रहे हैं। पहाड़ों की ओर जाते हुए गौरव काफी खुश नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा, बादलों के बीच में जाते हुए। इस वीडियो के साथ उन्होंने मसूरी का नाम भी लिखा। बारिश में फंसे गौरव खन्ना मसूरी पहुंचने के बाद गौरव ने एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें वह बारिश का मजा लेते नजर आए। उन्होंने बताया कि वहां बारिश काफी तेज हो रही थी। गौरव ने कहा कि उन्होंने छतरी भी ली थी, लेकिन तेज बारिश की वजह से उनके हाल खराब हो गए। इसके बाद गौरव एक रेस्टोरेंट में चाय पीते नजर आए। उन्होंने कहा कि ट्रिप पर इतनी बारिश में आएंगे तो ऐसा होना ही है, लेकिन यही तो ट्रिप का मजा है। वीडियो के आखिर में गौरव ने मजाकिया अंदाज में कहा, मजा भी है। इसे भी पढ़ें: Tumbbad 2 की रेकी के दौरान हुआ बड़ा खुलासा: उसी खौफनाक हवेली में टीम को मिला 8 साल पुराना रहस्यमयी खजाना! फैंस ने गौरव के वेकेशन को बताया जरूरी गौरव खन्ना के ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फैंस को उनका अपने माता-पिता के साथ समय बिताना काफी पसंद आ रहा है। कई फैंस का मानना है कि गौरव को इस तरह के ब्रेक और वेकेशन की जरूरत थी। कुछ फैंस ने गौरव और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के रिश्ते को लेकर भी कमेंट किए। फैंस का कहना है कि आकांक्षा से अलग रहने के बाद गौरव के लिए परिवार के साथ समय बिताना और घूमना अच्छा है। इसे भी पढ़ें: Pune में घर खरीदने के बाद अब शादी की जिम्मेदारियों पर क्या बोले Parth Samthaan गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला का अभी तक नहीं हुआ तलाक गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला की शादी और तलाक को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। लॉकअप 2 में गौरव, आकांक्षा को सपोर्ट करने पहुंचे थे। उस दौरान एक्टर ने बताया था कि दोनों अभी भी कानूनी तौर पर शादीशुदा हैं और उनका तलाक नहीं हुआ है। वहीं, लॉकअप 2 के बाद आकांक्षा चमोला ने भी बताया था कि अभी तक तलाक के पेपर साइन नहीं हुए हैं। फिलहाल दोनों अपने-अपने प्रोजेक्ट्स में बिजी हैं। इस बीच गौरव अपने माता-पिता के साथ मसूरी ट्रिप का आनंद लेते नजर आ रहे हैं।
क्या आप भी दिल्ली की भागदौड़ में परेशान हो गए हैं। बस आपको एक दिन ब्रेक लेना है, तो यह लेख आपके लिए है। वीकेंड पर घूमने के लिए आप दिल्ली से बेहद नजदीक इस जगह पर जरुर जा सकते हैं। यहां पर आपको इतिहास, खूबसूरती और अच्छा खाना तीनों एक साथ मिल जाएंगे। इस ट्रिप के लिए आपको ज्यादा दिन की छुट्टी लेनी की भी जरुरत नहीं है। आगरा में कई मशहूर जगहें जहां आप जरुर जाएं। मानसून के समय आगरा का मौसम बेहद प्यारा और खूबसूरत रहता है, तो चलिए बिना देर किए आपको बताते हैं एक दिन की छोटी ट्रिप के बारे में- आगरा में देखें ताजमहल आगरा जाएं और आप ताजमहल न देखें, ऐसा कुछ हो नहीं सकता। सफेद संगमरमर से बना हुआ यह मकबरा मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। आपको बताते चलें कि यह यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल है। मानसून के दौरान जब काले बादल छाए रहते हैं, तो ताजमहल का नजारा और भी खूबसूरत दिखता है। फोटो क्लिक करने के लिए शानदार व्यू बन जाता है। आगरा फोर्ट घूमें दिल्ली से आगरा की दूरी करीब 230 से 240 किलोमीटर है। ताजमहल घूमने के बाद आप आगरा फोर्ट देखने जरुर जाएं। लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ यह किला यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल हैं। एक समय में यह मुगल बादशाहों के लिए सत्ता और रहने की जगह थी। वैसे यह ताजमहल से ज्यादा दूर नहीं है। किले के अंदर बड़े आंगन, महल और मुगर दौर की चीजें देखने को मिलती है। मेहताब बाग में मिलेगा ताज का अलग नजारा भीड़ से हटकर घूमना चाहती हैं, तो मेहताब बाग जा सकती हैं। यहां से दूर बैठकर ताजमहल के दीदर किए जा सकते हैं। खासतौर पर यह यमुना नदी के दूसरी तरफ बना मुगल गार्डन है और यहां से ताजमहल सबसे सुंदर नजर आता है। बेबी ताज भी देख सकती हैं आप यदि आप ट्रिप का समय का मैनेज कर लें, तो आप इत्माद-उद-दौला का मकबरा देखने भी जा सकते हैं। इसको बेबी ताज कहा जाता है। सफेद मार्बल, डिजाइन और काम इसको और भी सुंदर बना दिया है। जिन लोगों को भीड़ दूर रहना पसंद उनके लिए यह जगह बेहद खास है। मानसून में ट्रिप प्लान करते समय रखें ये बातें सबसे बढ़िया समय है मानसून के दौरान ट्रिप प्लान करने का। इस बात का ध्यान रखें कि पूरे दिन का शेड्यूल न रखें। आप भी एक दिन के लिए ऐसे ट्रिप का प्लान कर सकती हैं। - सुबह दिल्ली से आगरा के लिए निकलें। - सबसे पहले आप ताजमहल देखने जाएं। - दोपहर के समय खाना और थोड़ा आराम करें। - शाम के समय आप मेहताब बाग घूम सकते हैं। - अगर समय बचे तो बेबी ताज देख सकते हैं। - रात के समय दिल्ली के लिए वापस निकलें।
चंदेरी को भगवान श्रीकृष्ण की बुआ श्रुति के बेटे शिशुपाल की राजधानी माना जाता है। उस दौरान इसका उल्लेख चेदी राज्य के रूप में मिलता है। चंदेरी की रणनीतिक स्थिति में इसके समृद्धि की बड़ी वजह रही। कभी चंद्रगिरि कहा जाने वाला चंदेरी, बुंदेलखंड और मालवा की सीमा पर बसा है। जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। यहां पर मालवा के सुल्तानों और बुंदेल के राजपूतों द्वारा बनवाई गई तमाम इमारतें देखी जा सकती हैं। नदी किनारे गुफाओं में बने शैलचित्र सांस्कृतिक वैभव और कलात्मक सौंदर्य का परिचय देते हैं। यहां के शैलचित्रों को देखकर कहा जा सकता है कि चंदेरी प्रागैतिहासिक काल से एक जीवंत शहर है। चंदेरी साड़ियों से तो सभी वाकिफ हैं, चंदेरी साड़ियां अपने शिल्प और नफासत के लिए फेमस हैं। इसे भी पढ़ें: Monsoon Tourism 2026: भीड़भाड़ से दूर शांति देंगे ये 4 Budget Friendly Destinations, आज ही करें अपने ट्रिप का Plan जानें चंदेरी में कहां घूमें कोशक महल वहीं खिलजी वंश के शासनकाल में यह महल इस्लामी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चतुर्भुज आकार में निर्मित इस त्रि-स्तरीय महल के विशाल द्वार, झरोखे, खुले गलियारे इसकी स्थायपत्य कला को अनुपम बनाते हैं। इस महल के छत से दिखने वाले प्राकृतिक दृश्य इसकी शोभा को दोगुना कर देती है। कोशल इमारत के हर कक्ष के छत की डिजाइन बेहद अनोखा है। शुरूआत में 7 मंजिला इमारत के रूप में यह ढांचा सिर्फ 3 मंजिलों तक पूरा हो सका। चंदेरी किला चंदेरी किला शहर से 71 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला अभी भी शान से खड़ा है। यह किला कभी अभेद्य दुर्ग की तरह रहा होगा। यह किला 5 किमी लंबी दीवार से घिरा है। किले तक पहुंचने के तीन रास्ते हैं: पहला पक्का रास्ता है, जिससे आप गाड़ी से किले तक जा सकते हैं। दूसरा रास्ता खूनी दरवाजा है, जहां से पैदल पहुंचा जा सकता है। खूनी दरवाजा लकड़ी का बड़ा द्वार है। इस पर मालवा के सुल्तान कैदियों के शवों को लटका देते थे। बताया जाता है कि जब बाबर ने किले की घेराबंदी की थी। तो यह सच में खून से नहा गया था। इसको आखिरी किला कहा जाता था, यानी जब शासक को पता होता था कि उसकी हार होना निश्चित है। वह यहीं से युद्ध करते थे, जिससे तहखाने से निकलकर सुरक्षित जा सकें। बत्तीसी बावड़ी चौकोर, गोल और समकोण बावड़ियों से भरा यह अफगान वास्तुकला की निशानी है। इसकी सुंदर सीढ़ियों के ऊपर बने बीच में स्वागत द्वारों ने इसको अधिक भव्य बनाया है। 60-60 फीट लंबी-चौड़ी बावड़ी आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां पर आपको एक फारसी में लिखा शिलालेख भी मिलेगा। जिसका अर्थ है, जो स्वर्ग की झलक देखना चाहता है, वह यहां पर थोड़ा विश्राम करें, क्योंकि स्वर्ग इसी की तरह है। कटी घाटी इसको विशाल चट्टान को तराश कर बनाया गया है। चंदेरी के दक्षिणी किनारे पर स्थित यह मार्ग बुंदेलखंड और मालवा के बीच एक कड़ी का काम करता था। मालवा के सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी के स्वागत के लिए इसको रातों-रात बनाया गया था। लेकिन इस दरवाजे में कुंडे या टिकाव के लिए राजमिस्त्री ने जगह नहीं छोड़ी थी। इस कमी को देखते हुए जिमन खान ने मिस्त्री को मेहनताना देने से इंकार दिया। इससे दुखी होकर मिस्त्री ने आत्महत्या कर ली। तब से यह कटी घाटी गेट बिना दरवाजे के खड़ा है। शहजादी का रोजा चंदेरी के गवर्नर की बेटी मेहरुनिस्सा और एक सेनापति के अमर प्रेम का प्रतीक यह मकबरा है। इसको 15वीं शताब्दी में गवर्नर ने बनवाया था। गवर्नर ने दोनों को अलग करने के लिए सेनापति को युद्ध में भेजा और सैनिकों को निर्देश दिए कि वह जीवित वापस न आ पाए। यह जानकारी मिलने पर शहजादी ने रोजे रखे थे। घायल होने के बाद भी सेनापति बच गया और वापस चंदेरी आ गया। जब मेहरुन्निसा उससे मिली, तो वह सेनापति अंतिम सांसे ले रहा था। उसी दौरान शहजादी ने भी प्राण त्याग दिए। रोजा रखने के कारण इस मकबरे का नाम 'शहजादी का रोजा' पड़ा। बाद में दोनों प्रेमियों को गवर्नर ने इस मकबरे में साथ दफनाया। यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ललितुर है। वहीं भोपाल एयरपोर्ट से कैब लेकर भी यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। बुंदेली खानों का स्वाद लें, जैसे मक्के की रोटी, दाल बाफला, रसखीर और सूजी के लड्डू। चंदेरी घूमने का सबसे सही समय अक्तूबर से लेकर मार्च के बीच का है। दो लोगों के एक दिन रहने और खाने का अनुमानित खर्च 2.5 से 3 हजार रुपए तक है। यहां का मौसम अधिकतम 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
क्या आप भी अगस्त में घूमने का बना रहे हैं प्लान और आपका बजट भी लिमिटेड है, तो यह लेख आपके लिए है। वैसे इस महीने के घूमने का एक अलग ही अनुभव होता है, हर तरफ हरियाली और सुकून वाला मौसम होता है। इस बार आप कम बजट में भी कम भीड़ वाली जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि किसी शांत और खूबसूरत जगहों पर जाने का प्लान। अगस्त में घूमने के लिए 4 बजट-फ्रेंडली डेस्टिनेशंस वैसे तो भारत में घूमने के लिए कई छिपी हुई जगहें, जहां पर काफी शांति देखने को मिलती है। आइए आपको इन जगहों के बारे में बताते हैं- जंजैहली घाटी (हिमाचल प्रदेश) शिमला और मनाली के शोर-शराबे से दूर आप हिमाचल प्रदेश के की इस खूबसूरत जगह पर जा सकते हैं। मंडी जिले में स्थित जंजैहली घाटी, जहां मानसून के समय सेब के बागान और हरे-भरे मखमली मैदान देखने के लायक होते है। यह जगह ट्रेकिंग और नेचर वॉक के लिए शौकीनों के लिए बेस्ट है। कैसे पहुंचे? - दिल्ली से जंजैहली घाटी पहुंचने के लिए सबसे पहले ISBT कश्मीरी गेट से मंडी/ओट के लिए सीधी HRTC या प्राइवेट वोल्वो बस पकड़ लें। - मंडी से जंजैहली की दूरी करीब 85 किमी है, आपको यहां से स्थानीय बस या प्राइवेट टैक्सी मिल जाएगी। - आप चाहे, तो दिल्ली से चंडीगढ़ या ऊना हिमाचल तक ट्रेन लें। इसके बाद बस या टैक्सी से करीब 5-6 घंटे में यहां पहुंच जाए। ओरछा और गढ़कुंडार (मध्य प्रदेश) मध्य प्रदेश या आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग, यहां पर जरुर जाएं। यहां आपको बेतवा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक कस्बा ओरछा और पास ही स्थित गढ़कुंडार का किला देखने का गजब का अनुभव प्राप्त होगा। मानसून के समय जंगलों के बीच बने प्राचीन महल, छतरियां और नदियां आपके ट्रिप को यादगार बना देगी। जिन लोगों को फोटोग्राफी और इतिहास जानने का शौक है, वो लोग इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। ऐसे पहुंचें - - ओरछा और गढ़कुंडार जाने के लिए आप झांसी वीरांगना लक्ष्मीबाई, झांसी रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा। - स्टेशन के बाहर से ऑटो या टैक्सी आसानी से मिल जाएंगे। आप लोकल बस से भी यहां तक पहुंच सकते हैं। - यहां पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट ग्वालियर है। वहीं, एयरपोर्ट से ओरछा की दूरी करीब 130 किमी है। भंडारदरा और घाटघर (महाराष्ट्र) यदि आपको झरने देखने का काफी शौक है, तो आप अगस्त के महीने में आप इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। मुंबई और पुणे के पास बसा भंडारदरा का घाटघर क्षेत्र घूमने के लिए सबसे बेस्ट है। मानसून के दौरान पूरी तरह धुंध और सैकड़ों मौसमी झरने देखने को मिलते हैं। यहां पर रंधा फॉल्स और आर्थर लेक अगस्त की बारिश में अपने पूरे शबाब पर होते हैं। कैसे पहुंचे? - इस जगह पर पहुंचने के लिए आपको नजदीकी बड़े शहर मुंबई, पुणे या नाशिक हैं। - आपको यहां आने के लिए मुंबई (BOM) पुणे (PNQ) या नाशिक (ISK) की डायरेक्ट फ्लाइट ले सकते हैं। - मुंबई से भंडारदरा करीब 165 किमी और नाशिक से लगभग 70 किमी दूर है। कसार देवी (उत्तराखंड) अगस्त के महीने में घूमने के लिए अल्मोड़ा के पास बसा कसार देवी भी एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यहां मानसून के समय बादल पहाड़ियों को छूकर गुजरते हैं, जिससे नजारा काफी अद्भुत लगता है। कसार देवी अपनी चुंबकीय ऊर्जा और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां पर आप दोस्तों और फैमिली के साथ घूमने जा सकते हैं। ऐसे पहुंचे - कसार देवी जाने के लिए आप काठगोदाम या हल्द्वानी स्टेशन तक जा सकते हैं। - स्टेशन पहुंचते ही आपको बहार अल्मोड़ा या कसार देवी के लिए शेयरिंग टैक्सी और बसें मिल जाएगी। - यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर (PGH) है, जो कि कसार देवी से करीब 125 किमी दूर है।
सावन का महीना भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए सबसे पहले खास होता है। इस दौरान शिवभक्तों की मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। अगर आप भी इस महीने कहीं घूमने के साथ-साथ भोलेनाथ के दर्शन करना चाहती हैं। तो हिमाचल प्रदेश एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जो ऊंचाई पर बने हुए हैं। इस शिव मंदिरों तक पहुंचने का सफर उतना ही खूबसूरत होता है, जितने सुंदर यहां के नजारे होते हैं। बिजली महादेव मंदिर कुल्लू में ऊंचे पहाड़ों पर स्थित बिजली महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश का सबसे फेमस शिव मंदिर है। यह मंदिर करीब 2,460 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां से कुल्लू और पार्वती वैली का खूबसूरत नजारा बेहद साफ दिखता है। मंदिर की मान्यता है कि समय-समय पर शिवलिंग पर बिजली गिरती है। फिर पारंपरिक तरीके से पुजारी शिवलिंग को जोड़ते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर का नाम बिजली महादेव रखा गया है। इसे भी पढ़ें: Amarnath Yatra Rituals: कैसे करें बाबा बर्फानी की पूजा और क्या है प्रसाद वितरण का सही तरीका बैजनाथ शिव मंदिर हिमाचल के कांगड़ा जिले में बैजनाथ मंदिर भी है। जो भोलेनाथ को समर्पित है। यह धौलाधार पर्वत की तलहटी में बना हुआ है। भगवान शिव का यह मंदिर अपनी खूबसूरत पत्थर की नक्काशी और अपने पुराने इतिहास के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि रावण भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यहीं पर तपस्या की थी। सावन के महीने में यहां पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। मणिमहेश चंबा जिले में स्थित मणिमहेश भगवान भोलनाथ का सबसे पवित्र स्थल है। यहां मणिमहेश लेक और इसके पीछे दिखने वाली मणिमहेश पीक बेहद खूबसूरत लगती है। सावन और जन्माष्टमी के आसपास यहां पर मणिमहेश यात्रा भी निकलती है। समुद्र तल से मणिमहेश कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 5,653 मीटर बताई जाती है। अर्द्धनारीश्वर मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर को छोटी काशी भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से एक अर्द्धनारीश्वर मंदिर है। जोकि भगवान शिव और मां पार्वती की शक्ति का प्रतीक है। पहाड़ों के बीच बसे इस शहर का धार्मिक माहौल सावन के महीने में अधिक खास हो जाता है। इन बातों का रखें ध्यान अगर आप भी सावन के महीने में हिमाचल के ऊंचाई वाले शिव मंदिरों में जाने का प्लान बना रहे हैं। तो मौसम की जानकारी पहले ले लें। क्योंकि बारिश की वजह से कई जगह सड़कें फिसलने वाली हो सकती है। इसलिए अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें। साथ में छाता या रेनकोट रख लें। ट्रैकिंग वाले मंदिरों में तब जाएं, जब आप फिजिकली फिट हों।
हर किसी को घूमने-फिरने का शौक होता है और विदेश तो हर कोई जाना चाहता है। खासकर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत जगह, जहां बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत नजारे, हरे-भरे मैदान देखने को मिलते हैं। लेकिन यहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। होटल, फ्लाइट, खाना-पीना, घूमने आदि का खर्च लाखों में पहुंच जाता है। इस कारण कई लोगों का यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिनको देखकर आपको यूरोप वाली फीलिंग आएगी। इन जगहों पर आपको खूबसूरत लेक्स, बर्फीले पहाड़, हसीन वादियां और कलरफुल फ्लावर्स देखने को मिलेंगी। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आपको ऐसा महसूस होगा कि आप स्विट्जरलैंड पहुंच गई हैं। इसे भी पढ़ें: Long Weekend Travel Plan: अगस्त की छुट्टियों में Udaipur और Coorg की हरियाली और Monsoon नजारों का उठाएं लुत्फ खज्जियार ज्यादातर लोग खज्जियार को भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। हिमाचल के चंबा में स्थित यह जगह हरी-भरी घास, देवदार के घने जंगलों और खूबसूरत मैदानों के लिए जानी जाती है। यहां का खज्जियार लेक वालर एरिया देखने में किसी यूरोपियन पोस्टकार्ड जैसा लगता है। मॉनसून और गर्मियों में यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। अगर आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती हैं, तो आपको खज्जियार आना चाहिए। युमथांग वैली सिक्किम की युमथांग वैली को वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है। यह जगह स्विट्जरलैंड जैसी लगती है। यहां पर दूर-दूर तक फैले फूलों के मैदान, सुंदर नदियां, बर्फ से ढके पहाड़ किसी यूरोपियन देश वाला फील देती हैं। गर्मियों में यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जिससे पूरी वैली बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। ऐसे में अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। गुलमर्ग माना जाता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर है। यहां के गुलमर्ग की गिनती भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस में होती है। गुलमर्ग के बेहद खूबसूरत पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ठंडी वादियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्विट्जरलैंड की याद दिलाती हैं। गर्मियों में यहां की हरियाली और फूलों से भरे मैदान देखने लायक होते हैं। मुनस्यारी अगर आप किसी शांत जगह पर स्विट्जरलैंड वाला फील लेना चाहती हैं। तो आप मुनस्यारी जा सकती हैं। यह जगह अपने शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। अगर आपको भी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहती हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।
राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
बीते दिनों कुछ ऐसी खबरें देखने और सुनने मिली हैं, जिनसे पर्यटन पर नयी बहस शुरु होने की गुंजाइश बनी है। पर्यटन की भारत में प्राचीन परंपरा रही है।
कड़कड़ाती सर्दी में बिकिनी पहन पूल में उतरीं रुबीना दिलैक, जापान वेकेशन की दिखाई झलक
टीवी की संस्कारी बहू रुबीना दिलैक रियल लाइफ में काफी ग्लैमरस हैं। वह अक्सर फैंस के साथ अपनी हॉट एंड सिजलिंग तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। रुबीना वह छोटे पर्दे की हाई पेड एक्ट्रेसेस में शुमार है। हाल ही में रुबीना ने अपनी जापान ट्रिप की तस्वीरें फैंस ...
स्विमिंग पूल किनारे मोनालिसा का सिजलिंग अंदाज, वेकेशन से शेयर की बोल्ड तस्वीरें
भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा हिंदी टीवी इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी मोनालिसा की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। वह अपनी ग्लैमरस तस्वीरों से तहलका मचाती रहती हैं। मोनालिसा इन दिनों थाइलैंड में वेकेशन एंजॉय कर रही ...
गोवा में वेकेशन एंजॉय कर रहीं कृष्णा श्रॉफ, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
कृष्णा श्रॉफ निश्चित रूप से जानती हैं कि लोगों का ध्यान कैसे आकर्षित करना है- चाहे वह उनकी MMA चॉप्स हों या उनकी वेकेशन की तस्वीरें। कृष्णा इस दिनों गोवा की धूप और बीच पर छुट्टियां मना रही हैं। इसी बीच कृष्णा श्रॉफ ने सोशल मीडिया पर अपनी ट्रॉपिकल ...
कैंसर के ट्रीटमेंट जंग के बीच वेकेशन मनाने मालदीव पहुंचीं हिना खान, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
टीवी एक्ट्रेस हिना खान भले ही कैंसर से जंग लड़ रही हैं, लेकिन वह अपनी लाइफ को खुलकर जी रही हैं। इस गंभीर बीमारी से जंग लड़ते हुए वह लाइफ का हर पल एंजॉय कर रही हैं। हिना खान इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजॉय कर रही हैं। मालदीव में वेकेशन मनाते हुए ...
सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पंड्या और उनकी पत्नी नतासा स्टेनकोविक के अलग होने की अफवाहें जोरों पर हैं। यह सब तब शुरू हुआ जब नतासा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से 'पांड्या' उपनाम हटा दिया। प्रशंसकों ने यह भी देखा कि वह आईपीएल मैचों के दौरान स्टैंड्स से गायब थीं। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद इस जोड़े ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि हार्दिक विदेश में किसी अज्ञात स्थान पर छुट्टियां मना रहे हैं। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें: Shabana Azmi ने Shashi Kapoor के साथ इंटीमेट सीन करने से किया था इंकार, सुपरस्टार ने कह दिया था एक्ट्रेस को 'बेवकूफ लड़की' | Read All About नताशा स्टेनकोविक से अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक पंड्या विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं हार्दिक पंड्या की पत्नी नतासा स्टेनकोविक के साथ निजी जिंदगी हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकबज द्वारा रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अलगाव की अफवाहों के बीच क्रिकेटर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं। अभी लोकेशन का नाम सामने नहीं आया है। इसे भी पढ़ें: Anant Ambani और Radhika Merchant Pre-Wedding Party! तारों भरी रात से लेकर टोगा पार्टी तक, जानें इस बार क्या-क्या होगा खास यह बताया गया है कि इंडियन प्रीमियर लीग से अपनी टीम के बाहर होने के बाद क्रिकेटर ने देश छोड़ दिया। कठिन अवधि के बाद तरोताजा होने के लिए, उन्होंने विदेश में एक सप्ताह की छुट्टी का विकल्प चुना। हार्दिक के शीघ्र ही न्यूयॉर्क में टी20 विश्व कप 2024 के अभ्यास सत्र के लिए भारतीय टीम में फिर से शामिल होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, आईपीएल 2024 में मुंबई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा की जगह हार्दिक के नेतृत्व की काफी आलोचना हुई। पूरे सीज़न में भारतीय क्रिकेटर को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच, वह पेशेवर असफलताओं से जूझ रहे थे। उनकी निजी जिंदगी सुर्खियों में आ गई। कुछ दिन पहले हार्दिक ने अपने सोशल मीडिया पर ढेर सारी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। वीडियो में उन्हें पूल में तैरते हुए अच्छा समय बिताते हुए दिखाया गया, जबकि फोटो में वह एक खूबसूरत बैकग्राउंड के साथ पोज दे रहे थे। इसे छोटा और सरल रखते हुए, उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, रिचार्जिंग। पोस्ट के जवाब में, कई प्रशंसकों ने उनके टिप्पणी अनुभाग में बाढ़ ला दी, अपना अटूट समर्थन दिखाया और आगामी विश्व कप के लिए उनकी जय-जयकार की। एक यूजर ने लिखा, “हार्दिक पंड्या जल्द ही टी20 वर्ल्ड कप में वापस आ रहे हैं,” एक अन्य फैन ने लिखा, “हार्दिक टी20 में अपने पुराने मॉडल के साथ आएं और अपने नफरत करने वालों को चुप करा दें। जबकि एक तीसरे फैन ने लिखा, “मजबूत वापसी भाई।” इसके अतिरिक्त, एक प्रशंसक ने लिखा, अपना भाई शेर था और रहेगा तू टेंशन माउंट लेना रे। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, कोई बात नहीं हम सब आपके साथ हार्दिक हमारे हीरो हैं। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, हार्दिक भाई विश्व कप में वापसी करेगा। हार्दिका पंड्या की पत्नी नतासा ने अलगाव की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी दूसरी ओर, अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक की पत्नी को शनिवार को पहली बार शहर में देखा गया। अपनी नवीनतम आउटिंग में, उन्हें एक कैफे से बाहर निकलते समय एक करीबी दोस्त के साथ देखा गया था। जाने से पहले एक्ट्रेस ने शटरबग्स के लिए पोज दिए। दरअसल, एक पिता ने उनसे तलाक के बारे में पूछा। हालांकि, इसके जवाब में एक्ट्रेस ने सवाल को नजरअंदाज करने का फैसला किया और सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखी. जाने से पहले, उसने बस इतना कहा, बहुत-बहुत धन्यवाद और अपनी प्रतीक्षारत कार की ओर बढ़ गई। अपनी नवीनतम आउटिंग के दौरान, जब वह अपने दोस्त के साथ एक कैफे से बाहर निकली, तो उसे गुलाबी शर्ट के साथ सफेद टॉप और शॉर्ट्स पहने देखा गया। दो महीने पहले एक नौका पर बॉलीवुड अभिनेत्री को प्रस्ताव देने के बाद, हार्दिक और नतासा ने लगभग चार साल पहले 31 मई, 2020 को शादी कर ली थी। उनके पहले बच्चे, अगस्त्य का जन्म 30 जुलाई, 2020 को हुआ था। अपनी तीसरी शादी की सालगिरह मनाते हुए, हार्दिक और नतासा ने उदयपुर में एक भव्य समारोह के साथ अपनी प्रतिज्ञाओं को भी नवीनीकृत किया था। View this post on Instagram A post shared by Hardik Himanshu Pandya (@hardikpandya93) View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)
शादी के तीन महीने बाद हनीमून पर निकलेRakul Preet Singh औरJackky Bhagnani, वेकेशन से वायरल हुई एक्ट्रेस की तस्वीरें
एक बार फिर सिनेमा घरो में दस्तक देने जा रही है क्रिस्टोफ़र नोलन की स्पेस एडवेंचर फिल्मInterstellar,10वीं सालगिरह पर होगी री-रिलीज़

