Chandauli News: काशी से चंदौली-मिर्जापुर तक बने पर्यटन कॉरिडोर, बढ़ेगा रोजगार
Tourism corridor built from Kashi to Chandauli-Mirzapur; employment to rise.
असम और मेघालय टैक्सी यूनियनों के बीच गतिरोध सुलझा लिया गया : पर्यटन मंत्री
मेघालय के पर्यटन मंत्री टिमोथी डी. शिरा ने मंगलवार को कहा कि 19 अगस्त को हुई हिंसा के बाद सड़क जाम करने से मेघालय और असम के टूरिस्ट टैक्सी संगठनों के बीच जो...
बोधगया में संसदीय स्थायी समिति की बैठक में गया-बोधगया कॉरिडोर को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने पर चर्चा हुई। 1200 करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ फल्गु नदी में सालभर पानी रखने की योजना से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
राजस्थान पर्यटन में घरेलू पर्यटकों का दबदबा, विदेशी यात्राओं में जयपुर सबसे आगे
राजस्थान में जनवरी-जून 2026 के दौरान 10.92 करोड़ पर्यटक यात्राएं दर्ज हुईं। घरेलू पर्यटन में सीकर आगे रहा, जबकि विदेशी पर्यटकों की यात्राओं में जयपुर शीर्ष पर रहा। हाड़ौती और मारवाड़ की भी मजबूत मौजूदगी रही।
राजगीर (नालंदा), 25 अगस्त . परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में 19 सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने Tuesday को बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा किया. नालंदा-राजगीर क्षेत्र के अध्ययन दौरे के क्रम में विश्वविद्यालय परिसर पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का वैदिक मंत्रोच्चार के ... Read more
भारत में कई अद्भुत चमत्कार और रहस्यमय मंदिरों का खजाना है। यहां पर आपको कई प्राचीन मंदिर देखने को मिलेंगे। हर मंदिर की एक अलग विशेषता है। राजस्थान के सीकर जिले में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शता है। इस मंदिर का नाम है जीणा माता। यह मंदिर मां जीण भवानी को समर्पित है। रक्षाबंधन पर अपने भाई के साथ यहां दर्शन के लिए आप जरुर जा सकते हैं। यह मंदिर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है और यहां मां जीण माता के साथ उनके भाई हर्ष की भी पूजा की जाती है। आइए आपको इस मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बताते हैं। राजस्थान में कहां स्थित है भाई-बहन को समर्पित जीण माता का मंदिर? राजस्थान के सीकर जिले में जीणमाता गांव में यह मंदिर स्थित है। यहां पर मुख्य रुप से मां जीण की पूजा होती है। राखी के समय यहां लोग दर्शन के लिए जरुर जाते हैं। इस दौरान यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। यह मंदिर खाटू श्याम से 25-30 किमी की दूरी पर स्थित है। कैसे पहुंचे? - अगर आप सीकर शहर से यहां जाएंगे, तो आपको 29 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। यदि आप जयपुर से जा रहे हैं, तो आपको 110 किमी का सफर तय करना होगा। जयपुर से पहुंचने के लिए करीब 3 घंटे का समय लगेगा। - जो भाई-बहन दूसरे शहरों से आने का प्लान कर रहे हैं, वह ट्रेन से जा सकते हैं। इसके लिए आपको रींगस जंक्शन तक ट्रेन टिकट बुक करानी पड़ेगी। - सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर एयरपोर्ट है, यहां से आप मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए बस की क्या सुविधा है? - राजस्थान से आपको सीकर जिले से मंदिर के लिए बस मिल जाएगी। आसपास के शहरों से भी सीकर जिले के लिए बस जाती है। - जयपुर से आप सीकर के लिए पहले बस लें। इसके बाद सीकर पहुंचकर जीण माता मंदिर के लिए शेयरिंग टैक्सी या ऑटो बुक कर सकते हैं। जीण माता मंदिर यह मंदिर भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा है, इसलिए रक्षाबंधन के समय भीड़ थोड़ी देखने को मिल सकती है। किसी भी साधन से जा रहे हैं, तो समय का जरुर ध्यान रखें। जीण माता मंदिर पहाड़ी पर स्थित है, इसलिए जीण माता मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 200 से 300 मीटर पैदल चलना पड़ता है। रास्ते में करीब 200 सीढ़िया मिलेगी। इन्हें चढ़ने में आधे घंटे का समय लग जाएगा। View this post on Instagram A post shared by Aryan Parashar (@aryanpujari_jeenmata)
नालंदा पहुंची 19 सांसदों की टीम, शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने पर हुआ मंथन
25 अगस्त, मंगलवार: नालंदा में 19 सांसदों वाली संयुक्त संसदीय स्थायी समिति की टीम ने नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा किया। समिति ने शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति, पर्यावरण और भविष्य की योजनाओं पर जानकारी ली। गया, राजगीर और नालंदा को जोड़कर पर्यटन गलियारा विकसित करने पर भी चर्चा हुई।
घरेलू पर्यटन बना राजस्थान की सबसे बड़ी ताकत, छह महीने में 10.92 करोड़ पर्यटक यात्राएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘देखो अपना देश’ विजन में घरेलू पर्यटन को दिए जा रहे महत्व और राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी के राजस्थान को देश-दुनिया...
एडवेंचर लवर्स के लिए खुशखबरी! नए अवतार में आ रही KTM 390 Adventure, जानें कब होगी लॉन्च
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कई राज्यों में होगी भारी बारिश, ट्रैवल से पहले जानें IMD अलर्ट
Rain forecast Delhi-NCR: अगर आप इस हफ्ते कहीं घूमने जा रहे हैं तो निकलने से पहले मौसम का हाल जरूर चेक कर लें. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है.
Travel Tips: बारिश के इस मौसम में आप भी जा सकते है इस बार घूमने के लिए इन जगहों पर
इंटरनेट डेस्क। बारिश का सीजन चल रहा है और इस सीजन में हर किसी का मन घूमने का करता है। ऐसे में आप भी अगर दोस्तों या फिर परिवार के साथ में घूमने जाने की सोच रहे हैं तो इस बार घूमने का प्लान बना सकते है असम का। इस समय असम घूमने के लिए एक परेफेक्ट जगह है। ऐसे में आपको एक बार यहां की यात्रा जरूर करनी चाहिए। डिब्रूगढ़ जाए आप घूमने के लिए असम आ रहे है तो आपने यहां की चाय के बारे में खूब सुना होगा। यहां सबसे अधिक चाय के बागान आपको मिलेंगे। लेकिन अगर असली असम टी का मजा लेना है तो आपको डिब्रूगढ़ जाना चाहिए। जोरहाट इसके साथ ही आप जोरहाट भी जा सकते है। यहां भी आपको देखने को बहुत कुछ मिल जाएगा। जोरहाट में भी आपको चाय के बागान के साथ साथ वर्ल्ड फेमस टोक्लाई टी रिसर्च सेंटर भी देखने को मिलेगा। pc- gnttv.com
सीढ़ीनुमा चट्टानों पर सैकड़ों लोग हैं। कोई परिवार बच्चों के साथ पानी की फुहार में खड़ा है, कोई मोबाइल से वीडियो बना रहा है, कोई चट्टानों पर बैठकर झरने को निहार रहा है।
जन्माष्टमी पर दिल्ली से द्वारका कैसे जाएं और कितना होगा खर्चा? जानिए पूरा बजट और ट्रैवल प्लान
जन्माष्टमी के दिन द्वारकाधीश के दर्शन करने का प्लान कर रहे हैं, तो दिल्ली से द्वारका तक जाने का पूरा ट्रैवल प्लान जान लीजिए। हम आपको आने-जाने और ठहरने का खर्चा बताने जा रहे हैं।
वेडिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने की पर्यटन मंत्री से मुलाकात, आगरा में होगा वेडिंग एक्सपो
रायसेन जिले की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख पहचान दिलाने की मांग को लेकर सामाजिक संगठन ‘टीम समाधान’ ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सोमवार देर शाम के ज्ञापन सौंपा। इसमें जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़कर ‘राष्ट्रीय पर्यटन सर्किट’ के रूप में विकसित करने तथा रायसेन को देश का प्रमुख पर्यटन जिला घोषित करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि रायसेन जिला मानव सभ्यता के प्रारंभिक इतिहास से लेकर प्राचीन, गुप्तकालीन और मध्यकालीन स्थापत्य तक की समृद्ध विरासत समेटे हुए है। जिले में भीमबेटका, भोजपुर, रायसेन किला, सांची, सतधारा और सुनारी जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। दो दिवसीय पर्यटन सर्किट का प्रस्ताव‘टीम समाधान’ ने पर्यटकों के लिए 2 दिवसीय विशेष पर्यटन परिपथ का प्रस्ताव दिया है। पहले दिन भीमबेटका, भोजपुर और रायसेन किला को शामिल किया गया है। भीमबेटका में हजारों वर्ष पुरानी शैल कला और मानव जीवन के प्राचीन साक्ष्य मौजूद हैं। भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर अपनी विशाल शिवलिंग प्रतिमा और अद्भुत स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है। वहीं रायसेन किला अपनी ऐतिहासिक संरचनाओं, जल प्रबंधन व्यवस्था और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण प्रमुख आकर्षण है। दूसरे दिन सांची, सुनारी, सतधारा और उदयगिरि गुफाओं को जोड़ा गया है। सांची के विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्मारकों के साथ सुनारी और सतधारा के प्राचीन बौद्ध अवशेषों को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता देने की मांग की गई। उदयगिरि की गुप्तकालीन गुफाओं में भगवान विष्णु के विशाल वराह स्वरूप सहित कई ऐतिहासिक शिल्प मौजूद हैं। 2000 से अधिक शैल चित्रों के संरक्षण की मांगज्ञापन में रायसेन जिले में मौजूद 2000 से अधिक आदिमानव कालीन शैल चित्रों और रॉक पेंटिंग्स का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने इन धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की मांग करते हुए रायसेन को ‘शैल चित्रों की राजधानी’ के रूप में पहचान दिलाने की बात कही। संगठन ने पर्यटन मंत्रालय और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की वेबसाइटों पर इस सर्किट को प्रमुखता से प्रदर्शित करने तथा सुनारी-सतधारा के मार्ग और पर्यटक सुविधाओं में सुधार की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि व्यवस्थित विकास से रायसेन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिल सकती है।
गयाजी में संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय झा और जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा ने 1996 के भारत-बांग्लादेश गंगा जल समझौते की समीक्षा करने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि यह समझौता 30 वर्षों के लिए हुआ था, जिसकी अवधि 12 दिसंबर को समाप्त हो रही है। इस समझौते का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। अगर कोई नया राजनयिक समझौता होता है, तो उसमें बिहार के हितों की अनदेखी बिल्कुल नहीं की जानी चाहिए। संजय झा ने कहा कि 1996 में जब यह समझौता हुआ था, तब बिहार की आबादी लगभग सवा सात करोड़ थी, जो अब बढ़कर 13 करोड़ से अधिक हो चुकी है। समझौता 5 वर्षों के लिए होता है। बावजूद इसके बिहार के हित की अनदेखी कर लंबी अवधि के लिए किया गया जो गलत हुआ। बिहार की आबादी बढ़ने से पानी की जरूरत दोगुनी हो चुकी है। सिंचाई, उद्योग और पेयजल के लिए पानी की सख्त आवश्यकता है। हमारे सामने से गंगा नदी बहती है, लेकिन हम इसका पानी उपयोग नहीं कर पाते। तत्कालीन केंद्र और राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण बिहार के हितों से समझौता किया गया था। अब उत्तर और दक्षिण बिहार दोनों क्षेत्रों में पानी का संकट तेजी से बढ़ रहा है। लेयर भाग रहे हैं। देवघाट और रबर डैम का निरीक्षण संसदीय समिति का नेतृत्व करते हुए संजय झा 18 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बोधगया और गयाजी के दौरे पर हैं। समिति पर्यटन विकास और बजट घोषणाओं की समीक्षा कर रही है। मंगलवार सुबह संजय झा ने विष्णुपद मंदिर में लगभग 15 मिनट तक पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने फल्गु नदी के देवघाट और रबर डैम का निरीक्षण किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार द्वारा बनाए गए रबर डैम के कारण फल्गु नदी में पानी उपलब्ध रहता है। गयाजी में पिंड दान और बोधगया में बौद्ध श्रद्धालुओं का साल भर आना-जाना लगा रहता है। इसलिए फल्गु नदी में स्थायी और स्वच्छ जल बनाए रखना बेहद जरूरी है। फल्गु नदी को सोन नदी से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम चल रहा है। 'कॉरिडोर की रूपरेखा तय हो चुकी है' संजय झा ने आगे कहा कि केंद्र के बजट में गयाजी और बोधगया के लिए कॉरिडोर की घोषणा की गई है। लगभग 1200 करोड़ रुपए की इस महात्वाकांक्षी योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जमा हो चुकी है। दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कॉरिडोर की रूपरेखा तय की जा चुकी है। विष्णुपद या फिर बोधगया कॉरिडोर हो इन दोनों का अस्तित्व फल्गु नदी से है। कॉरिडोर की महत्ता व आकर्षण के लिए फल्गु में सालोभर जल प्रवाह जरूरी है। इसमें सोन का पानी लाने का न केवल प्रयास होगा बल्कि इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। इस पर काम तेजी से चल रहा है। गयाजी पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा संजय झा ने दावा किया कि कॉरिडोर और पर्यटन योजनाओं के पूरा होने के बाद गयाजी-बोधगया का पूरा क्षेत्र पूरी तरह बदल जाएगा। यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद देश का सबसे बड़ा और प्रमुख पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा। 15 वर्ष पहले कोई नहीं जानता था कि बोधगया पर्यटन क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा गेम चेंजर होगा। आज यह सभी बातें पूरे विश्व को नजर आ रही है।
Russian Woman In India: अलेना लिखती हैं, 'मैं कह सकती हूं कि मेरी जिंदगी 'पहले' और 'बाद' में बंट गई है. भारत आने के बाद, मेरा पुराना रूप खत्म हो गया और एक नया रूप फिर से जन्म ले रहा है. शुक्रिया, भारत माता. मैं बार-बार आपके पास वापस आऊंगी.'
परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति (पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ऑन ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म एंड कल्चर) के सदस्य आज नालंदा दौरे पर रहेंगे। राजगीर के ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेंगे। बिहार की संस्कृति और विरासत को जानेंगे। राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा की अध्यक्षता वाली इस 31 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति में सांसद सुधा मूर्ति, इमरान प्रतापगढ़ी, जी बाबूराव, मोहम्मद नदीमुल हक, जागेश के झाला, एस कल्याणासुंदरम, एस फांगनोन कोन्याक और सुरेंद्र सिंह नागर समेत दोनों सदनों के प्रमुख सदस्य शामिल हैं। यह केंद्रीय टीम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन आने वाली धरोहरों, पर्यटन सुविधाओं तथा विकास कार्यों का जमीनी स्तर पर निरीक्षण व समीक्षा करेगी। विश्वविद्यालय के नए परिसर से प्राचीन भग्नावशेष तक का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार, संसदीय समिति सुबह 11:00 बजे गया जी से सड़क मार्ग (NH-120) द्वारा राजगीर के लिए प्रस्थान करेगी। दोपहर 1:00 बजे समिति नालंदा विश्वविद्यालय के नए अंतरराष्ट्रीय परिसर पहुंचेगी, जहां परिसर के अवलोकन के बाद दोपहर भोज का आयोजन होगा। इसके बाद दोपहर 3:00 बजे टीम प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष (विश्व धरोहर स्थल) के लिए रवाना होगी और 3:30 बजे से प्राचीन धरोहर का अवलोकन करेगी। शाम 4:00 बजे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (राजगीर) में 'हाई टी' प्रस्तावित है, जिसके बाद शाम 5:00 बजे समिति NH-20 एवं NH-31 के रास्ते सड़क मार्ग से पटना के लिए प्रस्थान कर जाएगी। गयाजी सीमा से पटना सीमा तक 58 स्थानों पर कड़ी चौकसी समिति के दौरे को लेकर नालंदा जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। विधि-व्यवस्था और सुगम यातायात के लिए जिला सीमा राजगीर (वनगंगा) से लेकर बख्तियारपुर मार्ग (धोवापुल, हरनौत) तक 58 प्रमुख स्थलों पर दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों और पुलिस बल की संयुक्त तैनाती की गई है। वनगंगा, जरादेवी मंदिर, छबिलापुर मोड़, सिलाव बाजार, पावापुरी मोड़, दीपनगर, कोसुक पुल, कारगिल चौक और भागनबिगहा जैसे संवेदनशील बिंदुओं पर विशेष निगरानी रहेगी। सभी प्रतिनियुक्त अधिकारियों को वीआईपी काफिले के पहुंचने से दो घंटे पहले ही ड्यूटी स्थल पर मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है। एंटी-सबोटाज चेकिंग, मेडिकल टीम और फायर ब्रिगेड सक्रिय सुरक्षा व्यवस्था के तहत विशेष शाखा द्वारा सभी भ्रमण स्थलों तथा रूट में पड़ने वाले पुल-पुलियों की एंटी-सबोटाज जांच कराई जा रही है। नालंदा विश्वविद्यालय, भग्नावशेष और कन्वेंशन सेंटर में सुरक्षा जांच के लिए डीएफएमडी और सीआईएटी बल तैनात रहेंगे। आपात स्थिति से निपटने के लिए मॉडल अस्पताल बिहारशरीफ, विम्स पावापुरी और अनुमंडलीय अस्पताल राजगीर में ऑपरेशन थिएटर तैयार रखने के साथ-साथ जीवन रक्षक दवाओं से लैस एंबुलेंस को कारकेड के साथ शामिल किया गया है।
मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन में 2200 साल पुराने वैश्य टेकरी स्तूप को विकसित कर बुद्ध लोक बनाने की तैयारी में है। इसके लिए केंद्र से उत्खनन अनुमति मांगी गई है।
मध्य प्रदेश सरकार श्रीकृष्ण पाथेय के तहत भगवान कृष्ण से जुड़ी लोक कलाओं, स्थलों और पर्यटन सर्किट को बढ़ावा देगी। उज्जैन का सांदीपनि आश्रम इसका मुख्य केंद्र रहेगा।
CM Yogi ने दिए Invest UP को निर्देश, जापानी निवेश और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी कम्पनियों के निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से सोमवार को ‘इन्वेस्ट यूपी’ तथा अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार 240 लोगों के प्रतिनिधिमण्डल का प्रदेश में आगमन हुआ और इस यात्रा में जापान से आए अतिथियों ने राज्य में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना की, ऐसे में जापान व उत्तर प्रदेश के बीच निरन्तर संवाद कर निवेश के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए। राज्य सरकार द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बैठक में मुख्यमंत्री को जापान के प्रतिनिधिमण्डल की ओर से किए गए सभी समझौतों (एमओयू) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान में सितम्बर, अक्टूबर एवं दिसम्बर में होने वाले विभिन्न वैश्विक आयोजनों में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमण्डल को भी भेजा जाए, जिनमें मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, उद्योगपतियों के साथ ही सम्बन्धित क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। आदित्यनाथ ने कहा कि जापानी के प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और यामानाशी प्रान्त सहित जापान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार की सम्भावनाओं को सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि ‘इन्वेस्ट यूपी’ में अलग से यामानाशी जापान डेस्क बनायी जाए, ताकि इसके जरिए निरन्तर संवाद होता रहे। उन्होंने हर तीसरे महीने इसकी प्रगति की रिपोर्ट भी लेने के भी निर्देश दिये। बयान के मुताबिक, उप्र-जापान इन्वेस्टमेंट समिट 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित बहुभाषी मंच भाषिणी ने की रुकावटों को दूर करके और भारतीय एवं जापानी निवेशकों और हितधारकों के बीच आसानी से बातचीत मुमकिन बनाकर अहम भूमिका निभाई। राज्य की निवेश संवर्धन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी और भाषिणी के बीच एक खास सहयोग के तहत, समिट के दौरान इस तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया। बयान में कहा गया है कि हिंदी, अंग्रेजी और जापानी भाषाओं के बीच तुरंत होने वाले अनुवाद और लिप्यांतरण से दोनों देशों के प्रतिनिधियों को अपनी पसंद की भाषाओं में बातचीत करने और चर्चाओं को समझने में मदद मिली।
शेरगढ़ में पर्यटन विकास पर मंथन किया
भास्कर न्यूज| सकतपुर नदीपार क्षेत्र के शेरगढ़ के इतिहास, पुरातत्व, पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विशेष सेमिनार आयोजित किया गया। इंटेक बारां चैप्टर ने बारां से शेरगढ़ तक विरासत यात्रा, सेमिनार का आयोजन किया। इतिहास व राकेश शर्मा ने पावर पॉइंट प्रजेंटेशन से शेरगढ़ के इतिहास, पुरासंपदा, कई धर्मों के स्मारकों पर प्रस्तुति दी। सेमिनार में इंटेक एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन विष्णु कुमार साबू मुख्य अतिथि थे। मुख्य वक्ता राकेश शर्मा ने शेरगढ़ के इतिहास, स्थापत्य, पुरातात्विक महत्व, ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रजेंटेशन दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंटेक सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत पाटनी ने की। इंटेक एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, लायंस क्लब श्रीजी के संरक्षक कुंजबिहारी नागर भी मौजूद थे। वक्ताओं ने हाड़ौती में पर्यटन विकास, पुरासंपदा संरक्षण पर विचार रखे। सेमिनार के बाद करीब 50 प्रतिभागियों ने शेरगढ़ के दोनों किलों का भ्रमण किया। राकेश शर्मा ने हर स्मारक का इतिहास, कला, निर्माण की जानकारी दी। सेमिनार में शेरगढ़ के ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व के साथ यहां पर्यटन व विकास की संभावनाओं पर चर्चा हुई। विष्णु साबू और कन्वीनर जितेंद्र शर्मा ने कहा कि इंटेक बारां चैप्टर शेरगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखते हुए इसे जिले के प्रमुख हेरिटेज व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर राज्य सरकार और संबंधित विभागों से समन्वय कर काम कराएगा। इंटेक बारां चैप्टर की वार्षिक बैठक भी हुई। जिसमें आगामी गतिविधियों, विरासत संरक्षण के काम, जिले के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण की भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। जिले के इतिहास प्रेमियों, पुरातत्व व विरासत में रुचि रखने वाले नागरिकों, इंटेक सदस्यों से सहभागिता का आह्वान किया गया।
UP-Japan Relations: CM योगी का बड़ा प्लान, जापानी निवेश और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी कंपनियों के निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को इन्वेस्ट यूपी व अन्य विभागों के अधिकारियों की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार 240 लोगों के प्रतिनिधिमंडल का प्रदेश में आगमन हुआ। इस ...
पूर्णिया के बड़हरा कोठी स्थित बाबा वरुणेश्वर धाम में सावन के अंतिम सोमवार को भव्य श्रावणी मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बिहार सरकार के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल और मंत्री लेशी सिंह ने धाम को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने और श्रावणी मेले को राजकीय महोत्सव घोषित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में भेजने की घोषणा की। दोनों मंत्रियों ने बाबा वरुणेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया। उन्होंने राज्य की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद, मंत्रियों ने रुपौली विधायक कलाधर प्रसाद मंडल की उपस्थिति में संयुक्त रूप से श्रावणी मेला महोत्सव का उद्घाटन किया। जलाभिषेक और मेले के उद्घाटन के अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। शिवगंगा के जीर्णोद्धार के लिए 25 लाख रुपए स्वीकृत होंगे मंत्री डॉ. दिलीप जयसवाल ने कहा कि बाबा वरुणेश्वर धाम इस क्षेत्र का दूसरा बाबा धाम है, जहां लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था जुड़ी है। धाम परिसर स्थित ऐतिहासिक शिवगंगा के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए सरकार 25 लाख रुपए की राशि स्वीकृत करेगी। इस राशि से शिवगंगा परिसर में आकर्षक फव्वारे, श्रद्धालुओं के बैठने की उत्तम व्यवस्था और पर्याप्त लाइटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। आगामी 1 से 2 साल में मंदिर परिसर में एक सुव्यवस्थित विवाह मंडप का निर्माण कराया जाएगा। ऐतिहासिक धरोहर है वरुणेश्वर धाम- लेसी सिंहबिहार सरकार की मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि बाबा वरुणेश्वर महादेव एक अपरूपी शिवलिंग हैं और इस स्थान का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि वैदिक काल में वरुण ऋषि ने इसी पावन स्थल पर कठिन तपस्या और पूजा-अर्चना की थी, जिसके कारण इस तीर्थ स्थल का नाम वरुणेश्वर धाम पड़ा। मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि इस बार सरकारी स्तर पर श्रावणी मेले का भव्य आयोजन किया गया है।
85 लाख की नौकरी छोड़ बना ट्रैवल क्रिएटर, अब है कितनी कमाई
सक्षम राज सेठ नाम के एक शख्स ने 85 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर फुल-टाइम ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर बनने का साहसिक फैसला लिया. वहीं, उनकी पार्टनर स्मृति सिडाना सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और इस सफर में उनका पूरा साथ दे रही हैं.
Gaya और Bangkok के बीच IndiGo की सीधी उड़ानें, बिहार में बढ़ेगा पर्यटन और विकास
इंडिगो 26 अक्टूबर से बिहार के गया और बैंकॉक के बीच नॉन-स्टॉप, हफ़्ते में दो बार चलने वाली उड़ानें शुरू करेगी। इस नए रूट का मकसद भारत और थाईलैंड के बीच एयरलाइन के बढ़ते नेटवर्क को और बेहतर बनाना है। साथ ही, यह गया और बैंकॉक के बीच सीधा हवाई संपर्क भी देगा; ये दोनों शहर ऐतिहासिक रूप से बौद्ध विरासत से जुड़े रहे हैं। इस सेवा से बिहार से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होने की भी उम्मीद है, जिससे इस इलाके में पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसे भी पढ़ें: Alaska Plane Crash | अमेरिका के अलास्का में बड़ा हादसा! 8 लोगों को ले जा रहा विशेष विमान दुर्घटनाग्रस्त, तलाश अभियान जारी इसी से जुड़ी एक और खबर है कि भारत की घरेलू एयरलाइंस ने जनवरी से मई 2026 के बीच 729.40 लाख यात्रियों को यात्रा कराई। यह पिछले साल इसी अवधि में 715.70 लाख यात्रियों की तुलना में 1.91 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी है। अकेले मई महीने में एयरलाइंस ने 153.90 लाख यात्रियों को यात्रा कराई, जो पिछले महीने की तुलना में 9.49 प्रतिशत ज़्यादा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, इंडिगो ने मई में 99.91 लाख यात्रियों को यात्रा कराकर 64.9 प्रतिशत के साथ मार्केट में अपनी बढ़त बनाए रखी। इसके बाद एयर इंडिया ग्रुप का नंबर रहा, जिसकी हिस्सेदारी 25.6 प्रतिशत (39.33 लाख यात्री) थी, जबकि आकासा एयर की हिस्सेदारी 5.8 प्रतिशत (8.90 लाख यात्री) रही। बाकी हिस्सेदारी स्पाइसजेट, स्टार एयर, फ्लाई91, अलायंस एयर और इंडियावन एयर की रही। मई में पैसेंजर लोड फ़ैक्टर में अच्छी परफ़ॉर्मेंस दिखी; अकासा एयर 92.5% के साथ सबसे आगे रही, इसके बाद स्पाइसजेट (87.4%), इंडिगो (86.4%) और एयर इंडिया ग्रुप (83.5%) का नंबर रहा। एलायंस एयर का आंकड़ा 61.2% और इंडियावन एयर का 53.5% रहा। इसे भी पढ़ें: Delhi की Heavy Rain से बिगड़े हालात, 15 Flights Jaipur समेत अन्य शहरों में डायवर्ट कुल कैंसिलेशन रेट कम रहा, जो 0.55% था। अकासा एयर का कैंसिलेशन रेट सबसे कम 0.14% था, जबकि इंडियावन एयर का सबसे ज़्यादा 5.58% था। उड़ानें मुख्य रूप से तकनीकी दिक्कतों (45.1%), ऑपरेशनल कारणों (26.6%) और मौसम की स्थिति (15.3%) के कारण रद्द हुईं। दस प्रमुख एयरपोर्ट—बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, कोचीन, गुवाहाटी और लखनऊ—पर समय पर उड़ान भरने (OTP) के मामले में काफ़ी अंतर देखा गया। प्रमुख एयरलाइंस में इंडिगो ने सबसे अच्छा OTP (82.8%) हासिल किया, इसके बाद अकासा एयर (78.3%) और एयर इंडिया ग्रुप (74.5%) रहे। स्पाइसजेट का OTP सबसे कम 26.5% दर्ज किया गया।
क्या आप कभी भारत के ऐसे इलाके में घूमने गए हैं, जहां की सड़कें एकदम जिगजैग हों। ऐसा सफर देखकर या सोचकर ही रोमांचक लगता है। कुछ ऐसा ही है सिक्किम का ऑफ बीट लोकेशन है। जिसका नाम जुलूक है। अगर आप भी हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड जाकर ऊब चुके हैं, तो इस बार आपको सिक्कम जाने का प्लान करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सिक्किम के छोटे से गांव जुलूक के बारे में बताने जा रहे हैं। सिक्किम का जन्नत भारत के सिक्किम राज्य के पूर्वी जिले में स्थित एक बेहद छोटा और खूबसूरत गांव जुलूक है। जुलूक आपको जन्नत की सैर इसी धरती पर करा सकता है। बादलों के ऊपर बसा यह गांव समुद्र तल से करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसको आप हनीमून डेस्टिनेशन या फैमिली ट्रिप बना सकती हैं। आपको यहां आकर निराशा नहीं होगी। इसे भी पढ़ें: IRCTC Northeast Package: अब किस्तों में चुकाएं पैसे, मुंबई से Gangtok-Darjeeling ट्रिप में Flight और Guide भी शामिल सिल्क रूट का हिस्सा शायद आपको पता न हो जुलूक कभी सिल्क रूट का हिस्सा था। इसके व्यापार मार्ग की बात करें, तो यह मार्ग जेलेपा मुख्य पहाड़ी दर्रे को तिब्बत के ल्हासा तक जोड़ता था। जुलूक में क्या करें एक्सप्लोर अगर आप भी जुलूक घूमने का मन बना रहे हैं, तो आपको इन खास जगहों को जरूर एक्सप्लोर करना चाहिए। थंबी व्यू पॉइंट थंबी व्यू पॉइंट से आपको कंचनजंघा की चोटियां साफ देखने को मिल सकती हैं। क्योंकि थंबी व्यू पॉइंट से कंचनजंघा सिर्फ 10 से 12 किमी की दूरी पर है। नाथंग वैली नाथंग वैली पर जाकर आप एक गाना तो जरूर गुनगुनाएंगे, 'बादल पर पांव हैं', क्योंकि वाकई में आपके पैर बादलों के बीच होंगे। एलीफेंट लेक ओल्ड सिल्क रूट पर आपको सिर्फ बादल ही नहीं बल्कि एलिफेंट लेक भी देखने को मिलेगी। इसको कुपूप झील या बिटांग छो भी कहते हैं। इस झील का आकार कुछ-कुछ हाथी जैसा दिखता है। जिग-जैग रास्ते यहां जाकर अगर आप रोड ट्रिप पर नहीं गए हैं तो मतलब आपने जुलूक को सही से नहीं एक्सप्लोर किया। यहां के जिग-जैग मोड़ ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। जानें कब और कैसे जाएं यहां पर जाने के लिए मार्च से लेकर मई और सितंबर से नवंबर तक का समय बेस्ट है। अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं, तो न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन और हवाई मार्ग के लिए बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचे। इसके बाद गंगटोक और रोंगली होते हुए सड़क यात्रा करनी होगी।
स्पीति की यात्रा गर्मी और सर्दी दोनों मौसमों में संभव है, लेकिन सर्दियों में पूरी घाटी बर्फ से ढक जाती है। प्राकृतिक सौंदर्य का पूरा आनंद लेने के लिए गर्मी का मौसम सर्वाधिक उपयुक्त रहता है।
‘इनोवेशन इन गवर्नेंस’ श्रेणी में जगह पाने वाली इस सफारी में ग्लास स्काईवॉक, सस्पेंशन ब्रिज, जिप लाइन, नेचर कैंप और प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीव सफारी जैसी सुविधाएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
Udhampur News: देखरेख के अभाव में खंडहर बन रही पर्यटन विभाग की इमारत
देखरेख के अभाव में खंडहर बन रही पर्यटन विभाग की इमारत
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नए पर्यटन स्थलों को किया जाएगा विकसित : बगौली
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South Africa Tourism ने 2026 तक 1 लाख भारतीय पर्यटकों को लुभाने की बनाई योजना
संदीप दहियाजयपुर, 23 अगस्त दक्षिण अफ्रीकी पर्यटन के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) इस्माइल डॉकराट ने कहा कि युवा और नए अनुभवों की तलाश में रहने वाले पर्यटकों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए दक्षिण अफ्रीका ने 2026 में एक लाख भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। जयपुर में हाल में हुई ‘ब्रिक्स’ (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) पर्यटन कार्य समूह की बैठक में शामिल होने आए डॉकराट ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “भारत हमारे सबसे महत्वपूर्ण विकास बाजारों में से एक है और 2026 में हमारा लक्ष्य एक लाख भारतीय पर्यटकों के आगमन तक पहुंचना है। इससे हम महामारी से पहले के स्तर के करीब पहुंच जाएंगे।”उन्होंने कहा कि 2025 में करीब 70,000 भारतीय पर्यटक दक्षिण अफ्रीका गए थे। अगले तीन वर्षों में एक लाख के आंकड़े से आगे निरंतर वृद्धि हासिल करने के लिए वीजा सुविधा और हवाई संपर्क को प्रमुख प्राथमिकता दी जा रही है। डॉकराट ने कहा, ‘‘भारतीय पर्यटकों की पसंद में बड़ा बदलाव आया है। परिवार और समूह के साथ यात्रा का चलन कायम है, लेकिन अब रोमांच, अनुभव आधारित पर्यटन, डेस्टिनेशन वेडिंग, प्रोत्साहन यात्राओं और युवा पर्यटन की मांग भी बढ़ रही है। भारतीय पर्यटक खान-पान और वाइन, संस्कृति, खुद वाहन चलाकर यात्राएं करने तथा अनूठे वन्यजीव अनुभवों में रुचि दिखा रहे हैं।’’उन्होंने कि केपटाउन और जोहान्सबर्ग हमेशा मुख्य पड़ाव रहेंगे, लेकिन दक्षिण अफ्रीकी पर्यटन भारतीय यात्रियों को देश की व्यापक विविधता खोजने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। विनलैंड्स, गार्डन रूट, क्वाज़ुलू-नताल और म्पुमालंगा के अलावा समुद्री, खान-पान, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन पर भी जोर दिया जा रहा है। डॉकराट ने राजस्थान को भी दक्षिण अफ्रीका के लिए महत्वपूर्ण उभरता बाजार बताया। उन्होंने कहा, “राजस्थान और दक्षिण अफ्रीका में विरासत, वन्यजीव, विवाह और अनुभव आधारित पर्यटन को लेकर काफी समानताएं हैं।”उन्होंने कहा कि भारतीय पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए वीजा और हवाई संपर्क सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं जिसके लिए दक्षिण अफ्रीका ने ‘ट्रस्टेड टूर ऑपरेटर स्कीम’ शुरू की है और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ईटीए) के जरिए अधिक डिजिटल वीजा प्रक्रिया की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सीधी हवाई सेवा शुरू करना भी उसके एजेंडे में है। पर्यटन विभाग दिल्ली और मुंबई के अलावा अहमदाबाद, कोलकाता, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहरों में प्रचार अभियान, कारोबारी संपर्क, प्रशिक्षण कार्यक्रम और रोड शो कर रहा है। डॉकराट ने कहा कि 2027 में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाला पुरुष क्रिकेट विश्व कप भारत से पर्यटकों को आकर्षित करने का बड़ा अवसर होगा। ब्रिक्स पर्यटन सहयोग पर उन्होंने कहा कि इसका लाभ केवल प्रचार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यात्रा को आसान बनाने पर भी जोर होना चाहिए। उन्होंने हवाई संपर्क, पर्यटन निवेश, कारोबार और सम्मेलन पर्यटन में सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में ब्रिक्स देशों के लिए साझा पर्यटक वीजा की संभावना तलाशी जा सकती है। हालांकि, वीजा नीति संबंधित देशों की सरकारों और आव्रजन अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आती है।
भारत में यहां सबसे पहले होता है सनराइज, ट्रैवल बकेट लिस्ट में शामिल करें ये जगह, जानें कैसे पहुंचें
आज हम आपको अरुणाचल प्रदेश की एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां भारत में सबसे पहला सनराइज देखने को मिलता है. यहां पहुंचने के लिए आपको थोड़ी ट्रैकिंग भी करनी पड़ेगी.
गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनगढ़ के पास रविवार को ब्रेक फेल होने के कारण एक टेंपो ट्रेवल्स सड़क पर ही पलट गया। DCR से मिली सूचना के अनुसार वाहन में 17 यात्री सवार थे, जिनमें कुछ यात्रियों को हल्की चोटें आई हैं।
लद्दाख में पर्यटन को लगेंगे नए पंख, थोइस एयरबेस से दिसंबर तक शुरू हो सकती है नागरिक उड़ान सेवा
नुब्रा घाटी के थोइस एयरबेस से अब नागरिक हवाई सेवा शुरू होगी, जिसका लक्ष्य दिसंबर तक है।
धमतरी के रुद्री बांध में शुरू हुई कयाकिंग अकादमी पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन गई है। हरियाली, बांध की विशाल जलराशि और कयाकिंग का रोमांच सैलानियों को खूब लुभा रहा है।
उद्घाटन सत्र के दौरान 125 से अधिक कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकनृत्यों में गोटीपुआ, संबलपुरी, पशु मुखौटा और पाइका नृत्य की प्रस्तुति ने खूब वाहवाही बटोरी।
Mohali News: क्लासमेट ट्रैवल एजेंट ने 14 लाख लेकर विदेश नहीं भेजा, दंपती ने सल्फास खाकर दी जान
Couple commits suicide by consuming Celphos after travel agent takes 14 lakh but fails to send them abroad
Bajaj इस साल लॉन्च कर सकता है नई Adventure बाइक, जानिए कितनी होगी कीमत इंजन और पावर
Bajaj Adventure Bike: बजट सेगमेंट में अपनी पहली एडवेंचर बाइक उतारने की तैयारी कर रहा है। आइए जानते हैं कि इसमें क्या-क्या संभावित फीचर्स और इंजन मिल सकते हैं।
यूपी और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच समझौता, रोजगार और पर्यटन बढ़ेगा
यूपी और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच शुक्रवार को ग्रीन हाइड्रोजन पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दस्तखत हुए। इसके तहत यूपी में हर साल एक मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
नैनीताल में बूंदाबांदी के बाद भी 15 सड़कें बंद, पर्यटन पर असर; येलो अलर्ट जारी
नैनीताल में हल्की बूंदाबांदी के बाद मौसम सुहावना रहा, लेकिन लगातार बारिश से पर्यटकों की संख्या कम रही और होटल खाली पड़े हैं। जिले में 15 सड़कें अभी भी बंद हैं, जबकि मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए हल्की से मध्यम बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
काशीपुर का तुमड़िया डैम जल्द ही साहसिक पर्यटन (एडवेंचर टूरिज्म) के शौकीनों के लिए एक नया और प्रमुख आकर्षण बनने जा रहा है। यहां पर्यटकों को डैम के शांत और प्राकृतिक परिवेश के बीच मोटर बोट राइडिंग का रोमांच मिलेगा।
Udhampur News: देसा की अनछुई खूबसूरती को पर्यटन मानचित्र पर लाने की जरूरत
देसा की अनछुई खूबसूरती को पर्यटन मानचित्र पर लाने की जरूरत
जापान में यूपी पर्यटन का नया प्रवेश द्वार बनेगा 'यामानाशी', सीएम योगी की मौजूदगी में MoU पर हुए साइन
उत्तर प्रदेश सरकार ने जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के साथ बौद्ध, आध्यात्मिक और वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य यामानाशी को जापान में यूपी पर्यटन का प्रवेश द्वार बनाना और जापानी पर्यटकों को राज्य के बौद्ध स्थलों से जोड़ना है।
जयपुर में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा- BRICS देशों के बीच पर्यटन सहयोग को मजबूत करने के लिए जयपुर डिक्लेरेशन तैयार किए गया है। इसमें सदस्य देशों के सहयोग का फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। ब्रिक्स पर्यटन कार्य समूह की 19 और 20 अगस्त को आयोजित बैठक में सदस्य देशों के बीच पर्यटन क्षेत्र में सहयोग को को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस पर बैठक की चर्चाओं पर मीडिया से शुक्रवार को बात करते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह कहा। उन्होंने कहा- भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत पर्यटन ट्रैक की थीम बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी रखी गई। बैठक में पर्यटन क्षेत्र की चार प्रमुख प्राथमिकताओं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यटन, सतत और जिम्मेदार पर्यटन, पर्यटन क्षेत्र में कौशल और क्षमता निर्माण और यात्रा सुविधा पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा- चीन के मंत्री ने जानकारी दी है कि उन्होंने 55 देशों में वीजा फ्री एंट्री शुरू की है। विदेशी प्रतिनिधियों ने बगरू प्रिंटिंग, मीणा बुनाई, लाख की चूड़ी निर्माण और मिट्टी और कागज से बने हस्तशिल्प देखा। पर्यटन में होगा एआई का इस्तेमाल शेखावत ने कहा- पर्यटन क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में BRICS देशों के बीच एआई के जिम्मेदार और मानव-केंद्रित उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। तकनीक का इस्तेमाल पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, पर्यटन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने और क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा- बदलती तकनीक के साथ पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाले मानव संसाधन को भी तैयार करना जरूरी है। इसके लिए BRICS देशों के बीच प्रशिक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा। एक दशक में तीन गुना से ज्यादा बढ़ा घरेलू पर्यटन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा- भारत में घरेलू पर्यटन में एक दशक के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। देशी पर्यटकों की यात्राओं में तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। भारत की भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता उसे वैश्विक पर्यटन के क्षेत्र में विशेष अवसर देती है। उन्होंने कहा- देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद प्राकृतिक, सांस्कृतिक और विरासत स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के सामने प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। इसके लिए पर्यटन उत्पादों के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी, निवेश और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यावरण-संसाधनों से पर्यटन में चुनौतियां शेखावत ने कहा- दुनिया के कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर अत्यधिक पर्यटन के कारण पर्यावरण, संसाधनों और स्थानीय समुदायों के सामने नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं। इसलिए पर्यटन का विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी और हित भी सुनिश्चित हों। उन्होंने बताया- भारत में डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन की व्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। सीमलेस ट्रैवल पर भी हुई चर्चा BRICS देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सीमलेस ट्रैवल पर भी चर्चा हुई। शेखावत ने कहा- प्रत्येक देश की वीजा व्यवस्था उसके अपने नियमों और नीतियों के अनुसार तय होती है, लेकिन यात्रियों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने और असुविधा कम करने की दिशा में सभी देश मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत की ई-वीजा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा- कई देशों के पर्यटक घर या कार्यालय से ऑनलाइन आवेदन कर भारत आने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आसान यात्रा व्यवस्था से BRICS देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने में मदद मिलेगी। विदेशी प्रतिनिधियों ने देखा राजस्थान का हेरिटेज और कल्चर जयपुर बैठक में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की समृद्ध विरासत, संस्कृति और पारंपरिक कला से भी परिचित कराया गया। प्रतिनिधियों ने हवामहल, सिटी पैलेस और आमेर किले जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें राजस्थान की पारंपरिक कला एवं शिल्प की झलक भी दिखाई गई। इन गतिविधियों के माध्यम से राजस्थान की सदियों पुरानी कला परंपराओं और स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया गया। ‘टूरिज्म केवल स्मारकों का भ्रमण नहीं’ शेखावत ने कहा- भारत के लिए पर्यटन केवल स्मारकों के भ्रमण तक सीमित नहीं है। पर्यटन देश की संस्कृति, परंपराओं, जीवनशैली और विविधता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम है। पर्यटन के माध्यम से विभिन्न देशों के लोगों और सभ्यताओं को एक-दूसरे के करीब लाया जा सकता है। उन्होंने कहा- पर्यटन को अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ रोजगार के अवसर पैदा करने, स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद बढ़ाने का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
Uttarakhand Monsoon Travel: अगस्त के बाद घूमने के लिए पहाड़ के ये कम भीड़ वाले डेस्टिनेशन
उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, खासकर मानसून में यहां के पर्वतीय इलाके मनमोहक लगते हैं।
Travel Tips: तुर्कमेनिस्तान का वह नरक द्वार जहाँ 1971 से नहीं बुझी आग, जानिए Karakum Desert का सच
दुनिया में आपको कई ऐसी अनोखी जगहें मिलेंगी, जिनके बार में जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा। ऐसी ही एक जगह मध्य एशियाई के देश तुर्कमेनिस्तान में है। यहां पर काराकुम रेगिस्तान को नरक का दरवाजा भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कोई पैर नहीं रख सकता है। काराकुम रेगिस्तान में डेवरेज गांव के पास में यह रेगिस्तान में है। जिसको 'शाइनिंग काराकुम' के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि रेगिस्तान का एक हिस्सा हमेशा आग की तरह चमकता रहता है। ऐसे में अगर आप भी यह सोच रहे है कि इसको नरक का दरवाजा क्यों कहा जाता है, तो आज इस आर्टिकल में हम आपको इस जगह के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2026: भारतीय रेलवे का बड़ा तोहफा, इन Routes पर चलेंगी Raksha Bandhan Special Trains क्यों कहते हैं नरक का दरवाजा साल 1971 में मध्य एशिया के काराकुम रेगिस्तान में एक ऐसी घटना हुई। जिस कारण रेगिस्तान में आग लगाना पड़ा। साल 1971 में तेल भंडार की खोज में सोवियत संघ के भूवैज्ञानिक का एक ग्रुप काराकुम रेगिस्तान आया था। यहां पर उनको एक ऐसी जगह मिल भी गई। जहां पर वैज्ञानिकों को लगा कि तेल भंडार होगा। उन्होंने प्राकृतिक गैस के एक बड़े भंडार के ऊपर खुदाई करना शुरू किया। लेकिन उनको इसके नतीजे के बारे में नहीं पता था। जब खुदाई के लिए उन्होंने उस हिस्से पर भारी मशीनें लगाईं। तो जमीन मशीनों का जोर न सह पाए और जमीन अंदर की ओर धंसने लगी। जिस कारण कई जगहों पर गड्ढा बनता चला गया। एक गड्ढे से निकलने लगी गैस बता दें कि रेगिस्तान में जगह-जगह गड्ढे बन रहे थे। लेकिन एक गड्ढा सबसे बड़ा था। यह गड्ढा करीब 230 फीट चौड़ा और 65 फीट गहरा था। जिसके बाद वैज्ञानिकों को चिंता सताने लगी। क्योंकि इस गड्ढे से लगातार प्राकृतिक गैस बाहर निकल रही थी। हालांकि यह गैस जहरीली नहीं थी, लेकिन फिर भी यह ऑक्सीजन को बदल देती थी। जिस कारण सांस ले पाना मुश्किल हो जाता है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी रेगिस्तान में रहने वाले जानवरों को होती थी। क्योंकि गड्ढे में गिरने से जानवर की फौरन मौत हो जाती। ऐसे में वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर यहां ब्लास्ट करना हो तो सिर्फ 5% मीथेन की मात्रा काफी होगी। इसलिए उन्होंने सोचा कि इसमें आग लगा दी जाए। अभी तक जल रही आग आपको जानकर हैरानी होगी कि यह आग अभी तक जल रही है। तुर्कमेनिस्तान के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जब गड्ढे में मौजूद प्राकृतिक गैस खत्म हो जाएगी, तो यह आग अपने आप बुझ जाएगी। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है और यह आग जल रही है। साल 2010 में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति कुरबानगुली बर्डीमुखामेदोव भी इस गड्ढे का दौरा करने के लिए यहां पहुंचे थे। रेगस्तान में भभकने वाली इस आग को देखकर उन्होंने भी चिंता जताई थी। इससे आसपास के गैस क्षेत्रों को भी खतरा हो सकता है।
दियोटसिद्ध: उतराई पर पलटा टेंपो ट्रैवलर, बाल-बाल टला बड़ा हादसा
दियोटसिद्ध: उतराई पर पलटा टेंपो ट्रैवलर, बाल-बाल टला बड़ा हादसा
जमुई जिले के खैरा प्रखंड की अरुणमाबांक पंचायत स्थित परासी में पर्यटन स्थल विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। गुरुवार को जिलाधिकारी नवीन ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण कर पर्यटन विकास की संभावनाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि परासी पर्यटन के लिए उपयुक्त क्षेत्र है, जहां एडवेंचर और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों के विकास की पर्याप्त संभावनाएं हैं। सिर्फ मंदिर नहीं, पर्यटकों को मिलेगा पूरा पैकेज निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पर्यटन को व्यापक रूप से विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन का मतलब केवल किसी एक धार्मिक स्थल का दर्शन कराना नहीं है, बल्कि पर्यटकों के लिए एक संपूर्ण पैकेज तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल गिद्धेश्वर मंदिर दिखाकर पर्यटन को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। धार्मिक स्थलों के साथ पर्यटकों को एडवेंचर, मनोरंजन और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव भी मिलना चाहिए। बड़े जलाशय में बोटिंग की संभावना डीएम ने कहा कि आज की जीवनशैली में लोग तनावग्रस्त रहते हैं। ऐसे में प्राकृतिक वातावरण और शांत स्थान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। परासी और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन के लिए कई संसाधन पहले से मौजूद हैं। यहां एक बड़ा जलाशय है, जहां बोटिंग जैसी गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं। गिद्धेश्वर और लछुआड़ मंदिर को भी जोड़ा जाएगा परासी के आसपास गिद्धेश्वर मंदिर और लछुआड़ मंदिर जैसे धार्मिक स्थल भी स्थित हैं। जिलाधिकारी ने इन सभी स्थानों को एकीकृत कर बेहतर पर्यटन मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया। इससे जमुई में बाहरी पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर भी पैदा होंगे। कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को पर्यटन विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। प्रशासन की इस पहल से क्षेत्र के लोगों में पर्यटन विकास को लेकर नई उम्मीद जगी है।
उदयपुर के भविष्य का स्वरूप कैसा होगा, शहर में विकास की रफ्तार किस दिशा में जाएगी और तकनीक से लेकर पर्यटन तक किन क्षेत्रों में नए अवसर बनेंगे-इन सवालों की झलक होटल योइस में शुरू हुई तीन दिवसीय मेगा प्रदर्शनी ‘उज्ज्वल राजस्थान 3.0’ में देखने को मिल रही है। गुरुवार को प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। इस बार प्रदर्शनी की खास थीम ‘फ्यूचर ऑफ उदयपुर’ रखी गई है। 22 अगस्त तक चलने वाली यह प्रदर्शनी रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी में उदयपुर के इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, औद्योगिक विकास, शिक्षा, तकनीक, स्थिरता और सामाजिक-आर्थिक प्रगति की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया है। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता एवं वनांचल शिक्षा समिति की महामंत्री डॉ. रजनी पी. रावत ने अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में ‘विकसित राजस्थान’ और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में उदयपुर की भूमिका को भी सामने रखा गया है। अलग-अलग स्टॉल और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के जरिए केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यों की जानकारी दी जा रही है। लाइव डेमोंस्ट्रेशन और विशेषज्ञों से संवाद के जरिए लोगों को नई तकनीकों और सरकारी पहलों को समझने का अवसर मिल रहा है। छात्रों, युवाओं, किसानों और उद्यमियों पर विशेष फोकस प्रदर्शनी को आम नागरिकों के साथ छात्रों, युवाओं, किसानों और उद्यमियों के लिए भी उपयोगी बनाया गया है। यहां करियर के अवसर, कौशल विकास, उभरती तकनीक, उद्यमिता और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। उदयपुर में 21 अगस्त से होम एंड लाइफस्टाइल अपग्रेड फेस्टिवल घर को आधुनिक और आकर्षक बनाने के साथ नई तकनीक व डिजाइन से जुड़ी सुविधाओं को एक ही जगह देखने का मौका उदयपुर के 100 फीट रोड स्थित शुभ केसर गार्डन में 21 से 23 अगस्त तक होम एंड लाइफस्टाइल अपग्रेड फेस्टिवल में मिलेगा। फेस्टिवल में लगाए जाएंगे 15 से ज्यादा स्टॉल और 5 से ज्यादा लाइव मॉकअप रिद्धि सिद्धी ग्रुप के निदेशक पंकज जैन और अनिल जैन ने बताया कि फेस्टिवल में इंटीरियर, फर्नीचर, मॉड्यूलर किचन, लाइटिंग, इलेक्ट्रिकल, सैनिटरीवेयर, बाथ फिटिंग, पाइप्स, टैंक, बैटरी-सोलर, फर्निशिंग और रियल एस्टेट सहित घर और आधुनिक लाइफस्टाइल से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। आयोजक हर्षल जैन के अनुसार, फेस्टिवल में 15 से अधिक स्टॉल और 5 से ज्यादा लाइव मॉकअप लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से लोग उत्पादों के उपयोग और डिजाइन को वास्तविक रूप में समझ सकेंगे। एक्सपो के प्रबंधक आयुष वक्तावत व हंसमुख डागरिया ने बताया कि आर्किटेक्ट्स, बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स और आम उपभोक्ताओं को विशेषज्ञों से सलाह लेने और विभिन्न उत्पादों की तुलना करने का अवसर मिलेगा। समारोह में विशिष्ट अतिथि निधि त्रिवेणी, इकोसिस्टम एंगेजमेंट मैनेजर-वेस्ट, भाषिणी, इसरो के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग के वैज्ञानिक-जी एवं ग्रुप हेड डॉ. हरि शंकर श्रीवास्तव, एलआईसी के डिविजनल मैनेजर रवि कुमार नेगी और गुजरात इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड अल्पेश मधाद मौजूद रहे।
जापान संग विकास की उड़ान भरेगा यूपी, लखनऊ में निवेश, एमएसएमई और पर्यटन पर महामंथन
जापानी प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश में निवेश, उद्योग, शिक्षा, पर्यटन, स्वास्थ्य और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा के लिए लखनऊ पहुंचा है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के साथ ही विभिन्न सेक्टोरल सत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी की नींव रखी जाएगी।
मुजफ्फरपुर-सोनबरसा फोरलेन से उत्तर बिहार में सुगम होगा आवागमन, पर्यटन स्थलों को भी जोड़ेगा NH 22
NH 22 Highway Bihar: केंद्रीय कैबिनेट ने मुजफ्फरपुर से नेपाल सीमा पर सोनबरसा तक 83 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क परियोजना को मंजूरी दी है। करीब 3590 करोड़ की लागत से बनने वाली यह सड़क उत्तर बिहार में आवागमन को सुगम बनाएगी।
चित्रकूट के रामसैया में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए डीएम पुलकित गर्ग और एसपी अरुण कुमार सिंह ने गुरुवार को औचक निरीक्षण किया। इस स्थल का विकास लगभग दो करोड़ रुपए की परियोजना से किया जाएगा। अधिकारियों ने प्रस्तावित कार्यों का जायजा लिया और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। पर्यटन विभाग द्वारा यहां एक प्रवेश द्वार का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, श्रद्धालुओं के लिए यात्री शेड और रैन बसेरा विकसित किया जाएगा। रैन बसेरे में गर्मी से बचाव के लिए कूलर और पंखों की व्यवस्था भी की जाएगी। पास के एक अन्य यात्री शेड में पुलिस चौकी बनाने का भी प्रस्ताव है, जिससे बढ़ती भीड़ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। अधिकारियों ने बताया कि रामसैया धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहां साल भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। परियोजना पूरी होने पर यात्रियों को बैठने, ठहरने और सुरक्षा सहित कई सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी। डीएम और एसपी ने निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से और समय पर पूरा करने पर जोर दिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास काल में भगवान श्रीराम ने माता जानकी के साथ रामसैया में समय व्यतीत किया था। यहां एक शिला पर आज भी उनके बैठने के चिन्ह मौजूद बताए जाते हैं। इसी धार्मिक महत्व के कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। रामसैया के विकास से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सुविधाओं से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। निरीक्षण के दौरान भाजपा नेता अश्वनी अवस्थी, अनूप पांडे, अशोक मिश्रा और बंसी बिहारी चौबे सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
डिंडौरी निवासी बस संचालक संजय केशवानी और साधना केशवानी के खिलाफ कुछ दिन पहले EOW ने जांच की थी। अब संजय केशवानी से जुड़े आकाश ट्रैवल्स के खिलाफ चेक बाउंस मामले में जबलपुर जिला न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने वारंट की तामील के लिए डिंडौरी पुलिस को निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को होगी। जबलपुर निवासी डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मूल रूप से डिंडौरी निवासी बिलैया के पड़ोस में आकाश ट्रैवल्स के संचालक संजय केशवानी और उनकी पत्नी साधना केशवानी रहते थे। दोनों ने अक्टूबर 2023 में व्यापार के लिए उनसे साढ़े 12 लाख रुपए उधार लिए थे। उन्होंने रकम लौटाने के लिए दो महीने का समय मांगा था। भरोसा कर बिलैया ने उन्हें रुपए दे दिए। दो महीने बाद रकम वापस मांगने पर दंपती ने टालमटोल की और जल्द रुपए लौटाने का आश्वासन दिया। सितंबर 2024 में संजय केशवानी ने बिलैया को साढ़े 12 लाख रुपए के चेक दिए, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए। शिकायत के मुताबिक, संजय ने IDBI बैंक का 6.50 लाख रुपए का एक चेक, स्टेट बैंक डिंडौरी के दो चेक और HDFC बैंक के पांच चेक दिए थे। सभी चेक अनादरित हो गए। इसके बाद 26 सितंबर 2024 को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन संजय केशवानी ने उसका भी जवाब नहीं दिया। डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया और डॉ. शोभना बिलैया ने बाउंस हुए चेक कोर्ट में पेश किए और मामले दर्ज कराए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिव्यकृष्ण के अनुसार, संजय केशवानी ने जिस खाते के चेक दिए थे, वह काफी समय पहले ही बंद हो चुका था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद जानबूझकर उन्हीं खातों के चेक जारी किए गए। सुनवाई के दौरान आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जबलपुर जिला न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वारंट की तामील और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डिंडौरी पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालयीन रिकॉर्ड में एक मामले में डॉ. शोभना बिलैया बनाम साधना केशवानी और दूसरे में डॉ. श्रीकृष्ण बिलैया बनाम मेसर्स आकाश ऑटोमोबाइल्स/आकाश रोडवेज डिंडौरी प्राइवेट लिमिटेड एवं संजय केशवानी का उल्लेख है। दोनों मामलों में अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को निर्धारित है। गौरतलब है कि संजय केशवानी और साधना केशवानी के खिलाफ पहले भी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से जुड़ा मामला सामने आ चुका है। डिंडौरी में बस संचालन और टैक्स से संबंधित शिकायत पर EOW जबलपुर ने कार्रवाई की थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2006 से 2025 के बीच संचालित बसों के टैक्स भुगतान में कथित अनियमितताओं की शिकायत पर जांच की गई थी और संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी में एक साइनिंग सेरेमनी आयोजित की गई। जापान के राज्यपाल कोटारो नागासाकी और यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष ने अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर किए।
मेचका गांव के पास मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित पौराणिक मुचुकुंद ऋषि की यह पावन तपोस्थली श्रद्धालुओं की आस्था के साथ ही पर्यटकों को बेहद आकर्षित कर रही है।
वियतनाम भारतीय पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जगहों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां पर्यटकों को मिलने वाली हर तरह की सुविधा है। जिन यात्रियों को समुद्र के किनारे समय बिताना अच्छा लगता है, उनके लिए यहां पर कई खूबसूरत बीच हैं। एडवेंचर और ऐतिहासिक जगहों पर घूमने के लिए कई जगहें हैं। वियतनाम की संस्कृति भी पर्यटकों का काफी आकर्षित करती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको वियतनाम की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं। जिस कारण हर साल लाखों की संख्या में भारतीय पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते हैं। इसे भी पढ़ें: Delhi to Agra Travel Guide: मानसून की फुहारों के बीच ताजमहल और Baby Taj का दीदार, एक दिन की छुट्टी के लिए परफेक्ट One-Day Trip आसान वीजा प्रोसेस वियतनाम जाने के लिए भारतीयों को वीजा प्रोसेस के लिए ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ती है। ई-वीजा के जरिए आवेदन करने पर 90 दिनों के अंदर आप वियतनाम यात्रा पर जा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के कारण भारतीयों को वीजा के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के दौरान भारतीयों को पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख, एक्सपायरी डेट, पासपोर्ट साइज फोटो, पासपोर्ट के बायोडाटा की फोटो और पर्सनल जानकारी जैसी जानकारी देनी होती है। वहीं यात्रा से 2 सप्ताह पहले आवेदन करना सही होता है। घूमना है आसान वियतनाम की मुद्रा को डोंग कहते हैं, जोकि भारत के रुपए के मुकाबले सस्ती है। भारतीय रुपए की तुलना में वियतनाम के डोंग की वैल्यू काफी कम है। भारतीय 1 रुपया करीब 275 वियतनामी डोंग के बराबर है। अगर आप 100 रुपए खर्चा करती हैं, तो यह 27,500 वियतनामी डोंग के बराबर होगा। इसलिए यहां पर भारतीयों को घूमना सस्ता पड़ता है। वहीं यहां पर रहना, खाना, घूमना आदि भारतीय पर्यटकों को सस्ता लगता है। कई बेहद खूबसूरत जगहें वियतनाम जाने का एक कारण यह भी है कि यहां पर खूबसूरत जगहों की भरमार है। यहां समुद्र तट, नदियां, पहाड़, गुफाएं और ऐतिहासिक स्थल आदि सभी चीजें आपको एक ही जगह पर मिल जाती है। इस तरह से आपका विदेश ट्रिप पूरा लगता है। यहां का हा लॉन्ग बे जगह नीले पानी और चूना पत्थर की के लिए काफी फेमस माना जाता है। वहीं दा नांग एक बेहद खूबसूरत बीच है। आप हो ची मिन्ह सिटी में शॉपिंग कर सकती हैं। तो हनोई में वियतनाम की संस्कृति को बेहद करीब से देखने और समझने का मौका मिलता है।
Gaurav Khanna माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर निकले, बारिश में फंसे तो ऐसे किया एन्जॉय
एक्टर गौरव खन्ना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं। एक्टर लगातार अपने फैंस के साथ अपनी जिंदगी से जुड़े अपडेट शेयर कर रहे हैं। हाल ही में गौरव ने एक नया वीडियो शेयर कर बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ मसूरी वेकेशन पर गए हैं। गौरव ने वीडियो में उस कार की झलक भी दिखाई, जिसमें वह अपनी मां और पिता के साथ सफर कर रहे हैं। पहाड़ों की ओर जाते हुए गौरव काफी खुश नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा, बादलों के बीच में जाते हुए। इस वीडियो के साथ उन्होंने मसूरी का नाम भी लिखा। बारिश में फंसे गौरव खन्ना मसूरी पहुंचने के बाद गौरव ने एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें वह बारिश का मजा लेते नजर आए। उन्होंने बताया कि वहां बारिश काफी तेज हो रही थी। गौरव ने कहा कि उन्होंने छतरी भी ली थी, लेकिन तेज बारिश की वजह से उनके हाल खराब हो गए। इसके बाद गौरव एक रेस्टोरेंट में चाय पीते नजर आए। उन्होंने कहा कि ट्रिप पर इतनी बारिश में आएंगे तो ऐसा होना ही है, लेकिन यही तो ट्रिप का मजा है। वीडियो के आखिर में गौरव ने मजाकिया अंदाज में कहा, मजा भी है। इसे भी पढ़ें: Tumbbad 2 की रेकी के दौरान हुआ बड़ा खुलासा: उसी खौफनाक हवेली में टीम को मिला 8 साल पुराना रहस्यमयी खजाना! फैंस ने गौरव के वेकेशन को बताया जरूरी गौरव खन्ना के ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फैंस को उनका अपने माता-पिता के साथ समय बिताना काफी पसंद आ रहा है। कई फैंस का मानना है कि गौरव को इस तरह के ब्रेक और वेकेशन की जरूरत थी। कुछ फैंस ने गौरव और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के रिश्ते को लेकर भी कमेंट किए। फैंस का कहना है कि आकांक्षा से अलग रहने के बाद गौरव के लिए परिवार के साथ समय बिताना और घूमना अच्छा है। इसे भी पढ़ें: Pune में घर खरीदने के बाद अब शादी की जिम्मेदारियों पर क्या बोले Parth Samthaan गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला का अभी तक नहीं हुआ तलाक गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला की शादी और तलाक को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। लॉकअप 2 में गौरव, आकांक्षा को सपोर्ट करने पहुंचे थे। उस दौरान एक्टर ने बताया था कि दोनों अभी भी कानूनी तौर पर शादीशुदा हैं और उनका तलाक नहीं हुआ है। वहीं, लॉकअप 2 के बाद आकांक्षा चमोला ने भी बताया था कि अभी तक तलाक के पेपर साइन नहीं हुए हैं। फिलहाल दोनों अपने-अपने प्रोजेक्ट्स में बिजी हैं। इस बीच गौरव अपने माता-पिता के साथ मसूरी ट्रिप का आनंद लेते नजर आ रहे हैं।
क्या आप भी दिल्ली की भागदौड़ में परेशान हो गए हैं। बस आपको एक दिन ब्रेक लेना है, तो यह लेख आपके लिए है। वीकेंड पर घूमने के लिए आप दिल्ली से बेहद नजदीक इस जगह पर जरुर जा सकते हैं। यहां पर आपको इतिहास, खूबसूरती और अच्छा खाना तीनों एक साथ मिल जाएंगे। इस ट्रिप के लिए आपको ज्यादा दिन की छुट्टी लेनी की भी जरुरत नहीं है। आगरा में कई मशहूर जगहें जहां आप जरुर जाएं। मानसून के समय आगरा का मौसम बेहद प्यारा और खूबसूरत रहता है, तो चलिए बिना देर किए आपको बताते हैं एक दिन की छोटी ट्रिप के बारे में- आगरा में देखें ताजमहल आगरा जाएं और आप ताजमहल न देखें, ऐसा कुछ हो नहीं सकता। सफेद संगमरमर से बना हुआ यह मकबरा मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। आपको बताते चलें कि यह यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल है। मानसून के दौरान जब काले बादल छाए रहते हैं, तो ताजमहल का नजारा और भी खूबसूरत दिखता है। फोटो क्लिक करने के लिए शानदार व्यू बन जाता है। आगरा फोर्ट घूमें दिल्ली से आगरा की दूरी करीब 230 से 240 किलोमीटर है। ताजमहल घूमने के बाद आप आगरा फोर्ट देखने जरुर जाएं। लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ यह किला यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल हैं। एक समय में यह मुगल बादशाहों के लिए सत्ता और रहने की जगह थी। वैसे यह ताजमहल से ज्यादा दूर नहीं है। किले के अंदर बड़े आंगन, महल और मुगर दौर की चीजें देखने को मिलती है। मेहताब बाग में मिलेगा ताज का अलग नजारा भीड़ से हटकर घूमना चाहती हैं, तो मेहताब बाग जा सकती हैं। यहां से दूर बैठकर ताजमहल के दीदर किए जा सकते हैं। खासतौर पर यह यमुना नदी के दूसरी तरफ बना मुगल गार्डन है और यहां से ताजमहल सबसे सुंदर नजर आता है। बेबी ताज भी देख सकती हैं आप यदि आप ट्रिप का समय का मैनेज कर लें, तो आप इत्माद-उद-दौला का मकबरा देखने भी जा सकते हैं। इसको बेबी ताज कहा जाता है। सफेद मार्बल, डिजाइन और काम इसको और भी सुंदर बना दिया है। जिन लोगों को भीड़ दूर रहना पसंद उनके लिए यह जगह बेहद खास है। मानसून में ट्रिप प्लान करते समय रखें ये बातें सबसे बढ़िया समय है मानसून के दौरान ट्रिप प्लान करने का। इस बात का ध्यान रखें कि पूरे दिन का शेड्यूल न रखें। आप भी एक दिन के लिए ऐसे ट्रिप का प्लान कर सकती हैं। - सुबह दिल्ली से आगरा के लिए निकलें। - सबसे पहले आप ताजमहल देखने जाएं। - दोपहर के समय खाना और थोड़ा आराम करें। - शाम के समय आप मेहताब बाग घूम सकते हैं। - अगर समय बचे तो बेबी ताज देख सकते हैं। - रात के समय दिल्ली के लिए वापस निकलें।
चंदेरी को भगवान श्रीकृष्ण की बुआ श्रुति के बेटे शिशुपाल की राजधानी माना जाता है। उस दौरान इसका उल्लेख चेदी राज्य के रूप में मिलता है। चंदेरी की रणनीतिक स्थिति में इसके समृद्धि की बड़ी वजह रही। कभी चंद्रगिरि कहा जाने वाला चंदेरी, बुंदेलखंड और मालवा की सीमा पर बसा है। जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। यहां पर मालवा के सुल्तानों और बुंदेल के राजपूतों द्वारा बनवाई गई तमाम इमारतें देखी जा सकती हैं। नदी किनारे गुफाओं में बने शैलचित्र सांस्कृतिक वैभव और कलात्मक सौंदर्य का परिचय देते हैं। यहां के शैलचित्रों को देखकर कहा जा सकता है कि चंदेरी प्रागैतिहासिक काल से एक जीवंत शहर है। चंदेरी साड़ियों से तो सभी वाकिफ हैं, चंदेरी साड़ियां अपने शिल्प और नफासत के लिए फेमस हैं। इसे भी पढ़ें: Monsoon Tourism 2026: भीड़भाड़ से दूर शांति देंगे ये 4 Budget Friendly Destinations, आज ही करें अपने ट्रिप का Plan जानें चंदेरी में कहां घूमें कोशक महल वहीं खिलजी वंश के शासनकाल में यह महल इस्लामी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। चतुर्भुज आकार में निर्मित इस त्रि-स्तरीय महल के विशाल द्वार, झरोखे, खुले गलियारे इसकी स्थायपत्य कला को अनुपम बनाते हैं। इस महल के छत से दिखने वाले प्राकृतिक दृश्य इसकी शोभा को दोगुना कर देती है। कोशल इमारत के हर कक्ष के छत की डिजाइन बेहद अनोखा है। शुरूआत में 7 मंजिला इमारत के रूप में यह ढांचा सिर्फ 3 मंजिलों तक पूरा हो सका। चंदेरी किला चंदेरी किला शहर से 71 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला अभी भी शान से खड़ा है। यह किला कभी अभेद्य दुर्ग की तरह रहा होगा। यह किला 5 किमी लंबी दीवार से घिरा है। किले तक पहुंचने के तीन रास्ते हैं: पहला पक्का रास्ता है, जिससे आप गाड़ी से किले तक जा सकते हैं। दूसरा रास्ता खूनी दरवाजा है, जहां से पैदल पहुंचा जा सकता है। खूनी दरवाजा लकड़ी का बड़ा द्वार है। इस पर मालवा के सुल्तान कैदियों के शवों को लटका देते थे। बताया जाता है कि जब बाबर ने किले की घेराबंदी की थी। तो यह सच में खून से नहा गया था। इसको आखिरी किला कहा जाता था, यानी जब शासक को पता होता था कि उसकी हार होना निश्चित है। वह यहीं से युद्ध करते थे, जिससे तहखाने से निकलकर सुरक्षित जा सकें। बत्तीसी बावड़ी चौकोर, गोल और समकोण बावड़ियों से भरा यह अफगान वास्तुकला की निशानी है। इसकी सुंदर सीढ़ियों के ऊपर बने बीच में स्वागत द्वारों ने इसको अधिक भव्य बनाया है। 60-60 फीट लंबी-चौड़ी बावड़ी आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां पर आपको एक फारसी में लिखा शिलालेख भी मिलेगा। जिसका अर्थ है, जो स्वर्ग की झलक देखना चाहता है, वह यहां पर थोड़ा विश्राम करें, क्योंकि स्वर्ग इसी की तरह है। कटी घाटी इसको विशाल चट्टान को तराश कर बनाया गया है। चंदेरी के दक्षिणी किनारे पर स्थित यह मार्ग बुंदेलखंड और मालवा के बीच एक कड़ी का काम करता था। मालवा के सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी के स्वागत के लिए इसको रातों-रात बनाया गया था। लेकिन इस दरवाजे में कुंडे या टिकाव के लिए राजमिस्त्री ने जगह नहीं छोड़ी थी। इस कमी को देखते हुए जिमन खान ने मिस्त्री को मेहनताना देने से इंकार दिया। इससे दुखी होकर मिस्त्री ने आत्महत्या कर ली। तब से यह कटी घाटी गेट बिना दरवाजे के खड़ा है। शहजादी का रोजा चंदेरी के गवर्नर की बेटी मेहरुनिस्सा और एक सेनापति के अमर प्रेम का प्रतीक यह मकबरा है। इसको 15वीं शताब्दी में गवर्नर ने बनवाया था। गवर्नर ने दोनों को अलग करने के लिए सेनापति को युद्ध में भेजा और सैनिकों को निर्देश दिए कि वह जीवित वापस न आ पाए। यह जानकारी मिलने पर शहजादी ने रोजे रखे थे। घायल होने के बाद भी सेनापति बच गया और वापस चंदेरी आ गया। जब मेहरुन्निसा उससे मिली, तो वह सेनापति अंतिम सांसे ले रहा था। उसी दौरान शहजादी ने भी प्राण त्याग दिए। रोजा रखने के कारण इस मकबरे का नाम 'शहजादी का रोजा' पड़ा। बाद में दोनों प्रेमियों को गवर्नर ने इस मकबरे में साथ दफनाया। यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ललितुर है। वहीं भोपाल एयरपोर्ट से कैब लेकर भी यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। बुंदेली खानों का स्वाद लें, जैसे मक्के की रोटी, दाल बाफला, रसखीर और सूजी के लड्डू। चंदेरी घूमने का सबसे सही समय अक्तूबर से लेकर मार्च के बीच का है। दो लोगों के एक दिन रहने और खाने का अनुमानित खर्च 2.5 से 3 हजार रुपए तक है। यहां का मौसम अधिकतम 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
क्या आप भी अगस्त में घूमने का बना रहे हैं प्लान और आपका बजट भी लिमिटेड है, तो यह लेख आपके लिए है। वैसे इस महीने के घूमने का एक अलग ही अनुभव होता है, हर तरफ हरियाली और सुकून वाला मौसम होता है। इस बार आप कम बजट में भी कम भीड़ वाली जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि किसी शांत और खूबसूरत जगहों पर जाने का प्लान। अगस्त में घूमने के लिए 4 बजट-फ्रेंडली डेस्टिनेशंस वैसे तो भारत में घूमने के लिए कई छिपी हुई जगहें, जहां पर काफी शांति देखने को मिलती है। आइए आपको इन जगहों के बारे में बताते हैं- जंजैहली घाटी (हिमाचल प्रदेश) शिमला और मनाली के शोर-शराबे से दूर आप हिमाचल प्रदेश के की इस खूबसूरत जगह पर जा सकते हैं। मंडी जिले में स्थित जंजैहली घाटी, जहां मानसून के समय सेब के बागान और हरे-भरे मखमली मैदान देखने के लायक होते है। यह जगह ट्रेकिंग और नेचर वॉक के लिए शौकीनों के लिए बेस्ट है। कैसे पहुंचे? - दिल्ली से जंजैहली घाटी पहुंचने के लिए सबसे पहले ISBT कश्मीरी गेट से मंडी/ओट के लिए सीधी HRTC या प्राइवेट वोल्वो बस पकड़ लें। - मंडी से जंजैहली की दूरी करीब 85 किमी है, आपको यहां से स्थानीय बस या प्राइवेट टैक्सी मिल जाएगी। - आप चाहे, तो दिल्ली से चंडीगढ़ या ऊना हिमाचल तक ट्रेन लें। इसके बाद बस या टैक्सी से करीब 5-6 घंटे में यहां पहुंच जाए। ओरछा और गढ़कुंडार (मध्य प्रदेश) मध्य प्रदेश या आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग, यहां पर जरुर जाएं। यहां आपको बेतवा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक कस्बा ओरछा और पास ही स्थित गढ़कुंडार का किला देखने का गजब का अनुभव प्राप्त होगा। मानसून के समय जंगलों के बीच बने प्राचीन महल, छतरियां और नदियां आपके ट्रिप को यादगार बना देगी। जिन लोगों को फोटोग्राफी और इतिहास जानने का शौक है, वो लोग इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। ऐसे पहुंचें - - ओरछा और गढ़कुंडार जाने के लिए आप झांसी वीरांगना लक्ष्मीबाई, झांसी रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा। - स्टेशन के बाहर से ऑटो या टैक्सी आसानी से मिल जाएंगे। आप लोकल बस से भी यहां तक पहुंच सकते हैं। - यहां पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट ग्वालियर है। वहीं, एयरपोर्ट से ओरछा की दूरी करीब 130 किमी है। भंडारदरा और घाटघर (महाराष्ट्र) यदि आपको झरने देखने का काफी शौक है, तो आप अगस्त के महीने में आप इस जगह को जरुर एक्सप्लोर करें। मुंबई और पुणे के पास बसा भंडारदरा का घाटघर क्षेत्र घूमने के लिए सबसे बेस्ट है। मानसून के दौरान पूरी तरह धुंध और सैकड़ों मौसमी झरने देखने को मिलते हैं। यहां पर रंधा फॉल्स और आर्थर लेक अगस्त की बारिश में अपने पूरे शबाब पर होते हैं। कैसे पहुंचे? - इस जगह पर पहुंचने के लिए आपको नजदीकी बड़े शहर मुंबई, पुणे या नाशिक हैं। - आपको यहां आने के लिए मुंबई (BOM) पुणे (PNQ) या नाशिक (ISK) की डायरेक्ट फ्लाइट ले सकते हैं। - मुंबई से भंडारदरा करीब 165 किमी और नाशिक से लगभग 70 किमी दूर है। कसार देवी (उत्तराखंड) अगस्त के महीने में घूमने के लिए अल्मोड़ा के पास बसा कसार देवी भी एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यहां मानसून के समय बादल पहाड़ियों को छूकर गुजरते हैं, जिससे नजारा काफी अद्भुत लगता है। कसार देवी अपनी चुंबकीय ऊर्जा और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां पर आप दोस्तों और फैमिली के साथ घूमने जा सकते हैं। ऐसे पहुंचे - कसार देवी जाने के लिए आप काठगोदाम या हल्द्वानी स्टेशन तक जा सकते हैं। - स्टेशन पहुंचते ही आपको बहार अल्मोड़ा या कसार देवी के लिए शेयरिंग टैक्सी और बसें मिल जाएगी। - यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर (PGH) है, जो कि कसार देवी से करीब 125 किमी दूर है।
Travel Tips: बारिश के मौसम में जन्नत लगती हैं ये वादियां, Monsoon में एक्सप्लोर करें Hill Stations
बारिश के मौसम में घूमने का मजा ही अलग होता है। क्योंकि इस मौसम में चारों ओर हरियाली, बादलों से ढके पहाड़, ठंडी-ठंडी हवाएं और रिमझिम फुहारें लोगों को खूब भाती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस मॉनसून कहीं घूमने का प्लान कर रही हैं, तो आप साउथ इंडिया के कुछ फेमस हिल स्टेशन को एक्सप्लोर कर सकती हैं। यहां बारिश में नेचर की खूबसूरती इस कदर बढ़ जाती है, जिसको देखकर लगता है मानो स्वर्ग में आ गए हों। साउथ इंडिया के हिल स्टेशन अपने चाय के बागानों, झरनों, हिल स्टेशनों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां की वादियां खूबसूरत और हरी-भरी हो जाती हैं। वहीं कई जगहों पर बादल इतने नीचे आ जाते हैं कि ऐसा लगता है कि हम बादलों के बीच खड़े हैं। तो आइए जानते हैं साउथ इंडिया की इन खूबसूरत जगहों के बारे में। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: Switzerland on a Budget? ये 4 Indian Destinations देंगे आपको यूरोप जैसी हसीन वादियों का अनुभव मुन्नार मॉनसून में केरल के मुन्नार की खूबसूरती भी गई गुना बढ़ जाती है। यहां चाय के खूबसूरत बागान, ठंडी-ठंडी हवाएं और धुंध से ढके पहाड़ लोगों की ट्रिप को यादगार बना देते हैं। बारिश के बाद यहां की हरियाली निखर जाती है। ऐसे में अगर आप भी नेचर लवर हैं, या फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। कूर्ग कर्नाटक का कूर्ग भी मॉनसून में देखने लायक होता है। इसकी खूबसूरती के कारण कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। मॉनसून में यहां पहाड़, कॉफी के बागानों और झरनों की खूबसूरती बढ़ जाती है। कूर्ग खूबसूरत होने के साथ शांत भी है। चिकमगलूर कर्नाटक का चिकमगलूर पिछले कुछ सालों से लोगों की पसंदीदा जगह बन चुकी है। मॉनसून में यहां हरी-भरी घाटियां और बादलों से ढके पहाड़ देखने को मिलेंगे। यहां आप शहर की भागदौड़ से दूर सुकून के कुछ पल बिता सकते हैं। यह एक शानदार डेस्टिनेशन है। कोडाइकनाल तमिलनाडु का कोडाइकनाल हिल स्टेशन मानसून में बेहद खूबसूरत लगने लगता है। यहां की घाटियां, झीलें और व्यू पॉइंट बारिश के मौसम में बहुत ज्यादार सुंदर नजर आते हैं। अगर आपको भी प्रकृति से प्यार है और नेचर के बीच समय बिताना अच्छा लगता है, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। वायनाड केरल की खूबसूरती के बारे में तो आप सभी ने सुना होगा। इसको God's Own Country भी कहा जाता है। वहीं केरल का वायनाड भी मॉनसून में बेहद खूबसूरत लगता है। यहां लेक, गुफाएं, घने जंगल और कई बेहद शानदार झरने देखने लायक होते हैं। अगर आपको ट्रेकिंग और नेचर वॉक पसंद है, तो यह जगह आपके लिए बेस्ट है। ऊटी तमिलनाडु का ऊटी हिल स्टेशन भी बेहद खूबसूरत है। मॉनसून में यहां के चाय के बागान, पहाड़ और बगीचे खिल उठते हैं। अगर आप भी ऊटी आती हैं, तो पायकारा फॉल्स जाना न भूलें। इन बातों का ध्यान बारिश में मौसम की जानकारी लेने के बाद ही ट्रिप प्लान करें। छाता, रेनकोट और अच्छी ग्रिप वाले शूज साथ रखें। लोकल गाइडलाइंस को जरूर फॉलो करें।
हर किसी को घूमने-फिरने का शौक होता है और विदेश तो हर कोई जाना चाहता है। खासकर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत जगह, जहां बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत नजारे, हरे-भरे मैदान देखने को मिलते हैं। लेकिन यहां जाना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। होटल, फ्लाइट, खाना-पीना, घूमने आदि का खर्च लाखों में पहुंच जाता है। इस कारण कई लोगों का यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में ऐसी कुछ जगहें हैं, जिनको देखकर आपको यूरोप वाली फीलिंग आएगी। इन जगहों पर आपको खूबसूरत लेक्स, बर्फीले पहाड़, हसीन वादियां और कलरफुल फ्लावर्स देखने को मिलेंगी। ऐसे में अगर आपका बजट कम है और ऐसी जगहों को एक्सप्लोर करना चाहती हैं, तो आपको ऐसा महसूस होगा कि आप स्विट्जरलैंड पहुंच गई हैं। इसे भी पढ़ें: Long Weekend Travel Plan: अगस्त की छुट्टियों में Udaipur और Coorg की हरियाली और Monsoon नजारों का उठाएं लुत्फ खज्जियार ज्यादातर लोग खज्जियार को भारत का 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। हिमाचल के चंबा में स्थित यह जगह हरी-भरी घास, देवदार के घने जंगलों और खूबसूरत मैदानों के लिए जानी जाती है। यहां का खज्जियार लेक वालर एरिया देखने में किसी यूरोपियन पोस्टकार्ड जैसा लगता है। मॉनसून और गर्मियों में यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। अगर आप भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती हैं, तो आपको खज्जियार आना चाहिए। युमथांग वैली सिक्किम की युमथांग वैली को वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है। यह जगह स्विट्जरलैंड जैसी लगती है। यहां पर दूर-दूर तक फैले फूलों के मैदान, सुंदर नदियां, बर्फ से ढके पहाड़ किसी यूरोपियन देश वाला फील देती हैं। गर्मियों में यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। जिससे पूरी वैली बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। ऐसे में अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। गुलमर्ग माना जाता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर है। यहां के गुलमर्ग की गिनती भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस में होती है। गुलमर्ग के बेहद खूबसूरत पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ठंडी वादियां यहां आने वाले पर्यटकों को स्विट्जरलैंड की याद दिलाती हैं। गर्मियों में यहां की हरियाली और फूलों से भरे मैदान देखने लायक होते हैं। मुनस्यारी अगर आप किसी शांत जगह पर स्विट्जरलैंड वाला फील लेना चाहती हैं। तो आप मुनस्यारी जा सकती हैं। यह जगह अपने शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। अगर आपको भी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिताना चाहती हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।
राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
घुमक्कड़ लोगों को घूमने का सिर्फ मौका ही चाहिए। अगर आप भी अगस्त में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको बता दें कि, इस महीने में लंबी छुट्टी मिलने वाली है। दरअसल, 15 अगस्त को शनिवार है और इसके अगले दिन रविवार है। वहीं, आप 14 अगस्त यानी के शुक्रवार की एक छुट्टी ले लें तो आपके पास करीब तीन दिनों का समय हो जाएगा। इन तीन दिनों में आप किसी भी अच्छी जगह पर घूमने जा सकते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि अगस्त के महीने में किन जगहों पर घूमने जा सकते हैं। आइए आपको बताते हैं Independenc Day Weekend पर 3 दिन की छोटी-सी ट्रिप का प्लान बना सकती हैं। मसूरी उत्तराखंड यदि आप शहर की भीड़ और शोर से दूर, कहीं सुकून भरी जगह पर घूमने जा रहे हैं, तो आप मसूरी जा रही है। अगस्त में यहां पर बारिश होती है। जिससे पहाड़िया हरी-भरी नजर आती हैं। बादलों से घिरे पहाड़ और ठंडा मौसम आपको शांति का एहसास कराएगा। तीन दिन में आप माल रोड पर बिंदास होकर घूम सकते हैं, आसपास के नजारे देख सकते हैं। ध्यान रखें कि मौसम को देखकर ही ट्रिप का प्लान बनाएं। क्योंकि इस दौरान यहां बारिश भी हो सकती है। मुन्नार, केरल बरसात के मौसम में केरल के मुन्नार का नजारा भी काफी खूबसूरत देखने को मिलता है। मुन्नार अपने चाय के बागानों और पहाड़ी नजारों के लिए काफी लोकप्रिय है। ऐसे में आप आपको हरियाली पसंद है, तो आप 3 दिन के लिए यहां जा सकती हैं। बारिश में मुन्नार जाते समय छाता और रेनकोट साथ जरुर रख लें। कूर्ग, कर्नाटक मानसून के समय कूर्ग का घूमने का एक अलग ही मजा होता है। कर्नाटक टूरिज्म के अनुसार, बरसात के समय यहां का मौसम कॉफी के बागान हरे-भरे हो जाते हैं और धुंध से पहाड़ियों का नजारा और भी सुंदर दिखता है। सुंदर से हरे-भरे कॉफी के बगान, पहाड़ और झरने देख सकती हैं। Abbey Falls कूर्ग की सबसे खूबसूरत जगह है। आप यहां जरुर जाएं। जब आप यहां जाने का प्लान बनाएं, तो एक बार मौसम की जानकारी जरुर लें। उदयपुर, राजस्थान मानसून के समय आप झील, महल और सुंदर शहर देखना चाहते हैं, तो आप इस बार स्वतंत्रता दिवस की लॉन्ग छुट्टियों पर राजस्थान के उदयपुर जा सकती हैं। अगस्त में यहां की खूबसूरती देखने के लायक होती है। तीन की ट्रिप के अंदर आप सिटी पैलेस, पिछोला लेक और पुराने शहर के आसपास घूम सकते हैं। ट्रिप पर जाने से पहले इन चीजों पर ध्यान दें - अगस्त के समय पहाड़ों पर भारी बारिश होती है, इसलिए जाने से पहले मौसम का हाल और रास्ते जरुर चेक करें। - ट्रेन और फ्लाइट की टिकट पहले ही बुक कर लें। इसके साथ ही होटल रुम पहले से बुक कर लें। - बरसात से बचने के लिए आप वॉटरप्रूफ बैग, छाता, रेनकॉट और क्विक-ड्राय कपड़े अपने साथ ले जाएं। - बरसात के समय रास्तों में फिसलन अधिक देखने को मिलती है, इसलिए अच्छी ग्रिप वाले स्पोर्ट्स या ट्रैकिंग शूज ही पहनें।
दिल्ली से उज्जैन पहुंचने का सबसे सस्ता तरीका कौन सा? जानिए किराया और पूरा ट्रैवल प्लान
Ujjain Travel Plan: सावन के दिनों में महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन जाने का प्लान कर रहे हैं, तो हम आपको बताएंगे दिल्ली से जाने पर कितना खर्चा आएगा। चलिए आपको पूरा ट्रैवल प्लान समझाते हैं।
सावन का विशेष महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस दौरान भक्तजन भगवान शिव के मंदिरों के दर्शन करने जाते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर उज्जैन के दर्शन के लिए मध्य प्रदेश जरुर आते हैं। दरअसल, उज्जैन की यात्रा न केवल महाकाल मंदिर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस शहर के कोने-कोने में अध्यात्म, पौराणिक कथाएं और अद्भुत वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है। अगर आप भी उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो महाकाल दर्शन के अलावा बाद आप इन 5 प्रमुख स्थलों का भी भ्रमण करती है। महांकाल मंदिर के आसपास घूमने की 5 जगह मंगलनाथ मंदिर यदि आप उज्जैन महाकाल मंदिर जा रहे हैं, तो शिप्रा नदी के किनारे पहाड़ी पर स्थित मंगलनाथ मंदिर भी जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान को मंगल ग्रह (मंगल देव) का जन्मस्थान माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष या मांगलिक दोष होता है, वे यहां जरुर आएं और विशेष भात पूजा व शांति अनुष्ठान पूजा करवाएं। यदि आप महाकाल मंदिर से ऑटो या कैब बुक कर इस मंदिर तक जा सकते हैं। प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित चिंतामन गणेश मंदिर सबसे लोकप्रिय और प्राचीन है। माना जाता है कि यहां श्रद्धापूर्वक दर्शन करने से भक्तों की सभी चिंताएं दूर हो जाती है और मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। अगर आप नए काम की शुरुआत या गाड़ी खरीदने पर लोग सबसे पहले यहां आशीर्वाद लेने जरुर आएं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले महाकाल मंदिर से लोकल ई-रिक्शा मिल जाएगा। ऐतिहासिक गोमती कुंड अगर आप उज्जैन जा रहे हैं, तो महर्षि सांदीपनि आश्रम परिसर स्थित गोमती कुंड एक प्राचीन जलकुंड है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, अपने गुरु की सेवा और उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने सभी पवित्र नदियों के जल को यहां एकत्रित किया था। वैसे आज भी इस कुंड का पानी पवित्र माना जाता है। यहां पर जाने के लिए आप रिक्शा लेकर जा सकते हैं। इस्कॉन मंदिर उज्जैन का इस्कॉन मंदिर घूमने के लिए एकदम परफेक्ट है। ऐसे में आप महाकाल दर्शन के बाद यहां जरुर जा सकती हैं। संगमरमर के पत्थरों से बने इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी विराजमान हैं। यहां का शांत वातावरण, हरी-भरी वाटिका और शाम की आरती में होने वाला कीर्तन भक्ति में डूबो देता है। आप महाकाल मंदिर से सीधा कैब करके यहां पहुंच सकते हैं। भव्य चार धाम मंदिर उज्जैन के महाकाल मंदिर मार्ग के नजदीक स्थित चार धाम मंदिर एक अनोखा और सुंदर धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की स्थापना इसलिए की गई थी कि जो लोग देश के चार मुख्य धामों की यात्रा नहीं कर पाए, वे एक ही स्थान पर चारों धाम के दर्शन कर सकें। आपको इस मंदिर में बद्रीनाख, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। यहां पर वैष्णो देवी के जैसी गुफा भी स्थित है। कैसे पहुंचे उज्जैन? उज्जैन जाने के लिए आप किसी भी रेलवे स्टेशन से उज्जैन जंक्शन तक की टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा, आप हवाई जहाज से भी जा सकते हैं, तो उज्जैन के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर अंतर्राष्टीय हवाई अड्डा है। जब आप इंदौर-उज्जैन पहुंच जाएंगे, तो वहां से बस या कैब को बुक कर सकते हैं।
Travel Tips: पहले ज्योतिर्लिंग की भव्यता का अनुभव, जानें Diu Airport और Veraval से पहुंचने का रास्ता
सावन में भगवान शिव के दर्शन के लिए इस बार अगर आप भी गुजरात के सोमनाथ मंदिर जाने का सोच रही हैं। तो आपको मंदिर से जुड़ी जानकारी पता होनी चाहिए। भगवान शिव को समर्पित सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर अपने शांत वातावरण, भव्य वास्तुकला और समुद्र किनारे स्थित होने की वजह से देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सोमनाथ मंदिर में दर्शन से जुड़े नियमों के बारे में और यहां तक कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी देने जा रहे हैं। ऐसे जाएं गुजरात के सोमनाथ मंदिर सोमनाथ मंदिर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल या सोमनाथ है। इस दौरान आप दीव एयरपोर्ट से भी दर्शन के लिए आ सकती हैं। सोमनाथ मंदिर तक जाने के लिए भारत के करीब सभी बड़े शहरों से सीधी ट्रेन और फ्लाइट मिल जाती है। लेकिन अगर बजट में यहां आना चाहती हैं, तो ट्रेन से आना चाहिए। गुजरात राज्य के सोमनाथ जिले में वेरावल स्टेशन है। यहां से मंदिर की दूरी करीब 6 से 7 किमी है। दीव एयरपोर्ट से मंदिर की दूरी करीब 82 किमी है। यहां तक पहुंचने में आपको 1 घंटे का समय लग जाएगा। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: अगस्त में लद्दाख की हसीन वादियों का उठाएं लुत्फ, जानें Booking Details और Full Cost मंदिर के दर्शन से जुड़े जरूरी नियम सोमनाथ मंदिर में कैमरा, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर जाने की अनुमति नहीं है। एंट्री गेट के पास ही आपको क्लॉक रूम मिलेगा, यहां पर सामान जमा करवाना होगा। मंदिर में प्रवेश से पहले सिक्योरिटी जांच कराना जरूरी है। मंदिर दर्शन के लिए मर्यादित कपड़े पहनकर जाने पर ही एंट्री मिलेगी। दर्शन के लिए आपको लंबी लाइन में लगना पड़ सकता है। मंदिर परिसर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की इजाजत नहीं है। वहीं नियम फॉलो न करने पर आप पर फाइन लग सकता है। आरती के दौरान भक्तों की संख्या ज्यादा होती है। इसलिए समय से पहले पहुंचें। सोमनाथ मंदिर में दर्शन का समय सोमनाथ मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट https://somnath.org/ के मुताबिक मंदिर रोजाना सुबह 06:00 बजे से लेकर रात को 10:00 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में रोजाना 3 बार आरती होती है। ऐसे में आप अपने हिसाब से दर्शन का समय प्लान कर सकती हैं। जिससे कि आपको आरती में शामिल होने का मौका मिल जाए। मंगला आरती का समय - सुबह 7:00 बजे राजभोग आरती का समय - दोपहर 12:00 बजे संध्या आरती का समय - शाम 7:00 बजे मंदिर में शाम को लाइट एंड शो भी होता है। रात को 08:00 बजे से 09:00 बजे तक इस शो का आयोजन होता है। हालांकि मौसम के हिसाब से इसका समय बदल सकता है। सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए गुजरात गए लोग अगले दिन भालका तीर्थ, गीता मंदिर, त्रिवेणी संगम, बाण स्तंभ और प्रभास पाटन संग्रहालय भी घूम सकते हैं।
Travel Tips: अगस्त में लद्दाख की हसीन वादियों का उठाएं लुत्फ, जानें Booking Details और Full Cost
क्या आप भी रोजमर्रा की भागदौड़ से थक गए हैं और किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं। जहां पर आसमान सीधे जमीन से मिलता है। ऐसा सुकून मिले, जो आपकी सारी थकान को मिटा दे। नीली झीलें, सुकून भरी ठंडी हवाएं और ऊंचे-ऊंचे पहाड़। दरअसल, हम लद्दाख की बात कर रहे हैं, जो हर घुमक्कड़ की बकेट लिस्ट का अल्टीमेट सपना है। अगर आप भी इस दुनिया को अपनी आंखों से देखने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है। बता दें कि IRCTC ने आपकी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए बेहद खास टूर पैकेज पेश किया है, जिसका नाम 'लेह विद तुरतक' है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस ट्रिप की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: किन्नौर कैलाश यात्रा का हुआ आगाज: Registration से लेकर Trekking तक, Delhi से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरी Travel Guide टूर पैकेज की डिटेल्स यह टूर पैकेज 6 रात और 7 दिन का है जोकि 'कम्फर्ट' क्लास का फिक्स्ड डिपार्चर फ्लाइट पैकेज है। इसकी शुरूआत हैदराबाद से होगी। यह ट्रिप 13 अगस्त 2026 को शुरू होगा। इस सफर में पर्यटक लद्दाख की सबसे खूबसूरत और फेमस जगहों को एक्सप्लोर कर सकेंगे। कहां-कहां घूमेंगे यात्री पहले दिन लेह पहुंचकर यात्री आराम करेंगे। जिससे कि वहां के मौसम में ढल सकें। शाम को लोकल मार्केट को एक्सप्लोर करेंगे और अगले दिन लेह पैलेस, शांति स्तूप और भारतीय सेना को समर्पित 'हॉल ऑफ फेम' दिखाया जाएगा। शाम वैली यहां पर यात्रियों को गुरुद्वारा पत्थर साहिब के दर्शन होंगे और आप 'मैग्नेटिक हिल' के उस रहस्यमयी खिंचाव को स्वयं महसूस कर सकेंगे। नुब्रा वैली यात्रा के तीसरे दिन आपको दीक्षित और हुंडर गांव ले जाया जाएगा। यहां आप अपने खर्च पर ऊंट की सवारी का लुत्फ ले सकते हैं। तुरतुक वहीं यात्रा के चौथे दिन भारत के सबसे उत्तरी कोने में बसे तुरतुक गांव को एक्सप्लोर करेंगे। यहां की लाइफस्टाइल और संस्कृति बेहद अनोखी है। पैंगोंग झील वहीं यात्रा के 5वें दिन 120 किमी लंबी, खारे पानी की उस अद्भुत पैंगोंग झील को देखेंगे। यह झील फिल्म '3 इडियट्स' के बाद से टूरिस्ट्स की पहली पसंद बन गई है। यह झील भारत और चीन दोनों देशों में फैली है। वापसी का सफर पैंगोंग से लेग वापस आते समय रास्ते में थिकसे मॉनेस्ट्री, चांगला पास और शे पैलेस के नजारे भी देखने को मिलेंगे। पैकेज में क्या-क्या मिलेगा हैदराबाद से लेह तक आने-जाने की फ्लाइट की टिकट है। स्टे का पूरा इंतजाम है, लेह में 3 रातें, 2 रातें नुब्रा और 1 रात पैंगोंग में स्टे होगा। इस पूरे ट्रिप में 6 बार सुबह का नाश्ता, 6 बार दोपहर का खाना और 6 बार रात का डिनर होगा। घूमने-फिरने के लिए शेयरिंग वाली नॉन-एसी गाड़ी की सुविधा मिलेगी। जरूरी इनर लाइन परमिट, ट्रैवल इंश्योरेंस और स्मारकों की टिकट उपलब्ध होंगे। दूसरे दिन से लेकर छठे दिन तक टूर गाइड और एक खास कल्चरल शो देखने को मिलेगा। हर व्यक्ति को हर दिन एक लीटर पानी की बोतल मिलेगी। इमरजेंसी के लिए गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर और सफर में सहायता के लिए IRCTC टूर मैनेजर होंगे। कितना आएगा खर्च अगर आप अकेले सफर पर जाने हैं, तो आपको 55,640 रुपए देने होंगे। वहीं दोनों लोगों के यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति किराया 54,380 रुपए देने होंगे। वहीं तीन लोगों संग यात्रा करने पर 48,730 रुपए देने होंगे। अगर आपके साथ 5 से 11 साल का बच्चा है, तो बेड के साथ 36,970 रुपए देने होंगे। लेकिन बच्चों के साथ बिना बेड के 35,780 रुपए देने होंगे। वहीं ट्रिप पर 2 से 4 साल के बच्चे का किराया 35,720 रुपए है। इन बातों का रखें ध्यान ज्यादा ऊंचाई और कम ऑक्सीजन के कारण 'एक्यूट माउंटेन सिकनेस' की समस्या हो सकती है। इसलिए लेह पहुंचने का पहला दिन पूरी तरह से आराम के लिए रखा जाता है। यात्रा से निकलने से पहले आप डॉक्टर से पूछकर कुछ दवाओं को अपने साथ रखें। शरीर को हाइड्रेटेड रखें, इसके लिए समय-समय पर इलेक्ट्रोलाइट्स, ग्लूकोज और पानी आदि पीते रहें। वहीं इस दौरान ज्यादा खाना, शराब और एंटी डिप्रेसेंट दवाओं को लेने से बचना चाहिए। नुब्रा और पैंगोंग के टेंट/कैंप्स लाइट सिर्फ कुछ घंटों के लिए आती है। सुबह नहाने के लिए सोलर या बाल्टी में गर्म पानी मिलता है। पैंगोंग में वाई-फाई, एटीएम, मोबाइल नेटवर्क, बैंक या पेट्रोल पंप की सुविधा नहीं है। इसलिए अपने साथ जरूरी दवाएं और कैश लेकर आएं। अगर आप ट्रिपल शेयरिंग का रूम लेते हैं, तो तीसरे व्यक्ति के लिए सिर्फ एक एक्स्ट्रा गद्दा दिया जाएगा।
सावन का महीना शुरु हो चुका है। ऐसे में शिव भक्त अलग-अलग तीर्थस्थल पर जाने का प्लान करते हैं। इन्हीं में से एक है किन्नौर कैलाश यात्रा। यहां पर जाने का हर किसी का सपना होता है। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध किन्नौर कैलाश यात्रा है, जहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वैसे यहां पर पहुंचने के लिए कठिन ट्रेक से गुजरना पड़ता है। यदि आप इस बार किन्नौर कैलाश जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले इस बारे में सभी जानकारी जान लें। बता दें कि, इस साल 30 जुलाई से किन्नौर कैलाश यात्रा शुरु हो चुकी है, जो कि 10 अगस्त तक चलने वाली है। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनमुति नहीं दी जाएगी। यद आप दिल्ली से यहा पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार यह ट्रैवल गाइड को जरुर देंख लें। किन्नौर कैलाश यात्रा क्यों है खास? आपको बताते चलें कि, हिमाचल प्रदेस के किन्नौर जिले में स्थित किन्नौर कैलाश भगवान शिव का पवित्र धाम है। यहां पर मौजूद प्राकृतिक शिवलिंग जैसी विशाल चट्टान श्रद्धालुओं के लिए आस्था केंद्र हैं। हर साल सावन में हजारों यहां पर हजारों भक्तजन आते हैं। आपको बता दें कि, यह ट्रेक आसान नहीं है, इसलिए बेहद जरुरी है फिजिकली फिट होना। दिल्ली से कैसे जाएं? पहला स्टेज- दिल्ली से शिमला बता दें कि, दिल्ली से शिमला की दूरी करीब 340-360 किलोमीटर है। इधर से आप बस से भी जा सकते हैं। दूसरा स्टेज- शिमला से रिकांग पियो जब आप शिमला पहुंच जाएंगे, तो रिकांग पियो जाना होगा। जिसकी दूरी करबी 220 किलोमीटर है। यहां से आपको हिमाचल रोडवेज और प्राइवेट बसें दोनों ही मिल जाएंगी। चाहे आप टैक्सी से भी जा सकते हैं। तीसरा स्टेज- रिकांग पियो से टांगलिंग गांव टांगलिंग गांव ही यात्रा का बेस कैंप माना जाता है। बता दें कि, यहीं से किन्नौर कैलाश ट्रेक शुरु होता है। कितना कठिन ट्रैक है? दरअसल, किन्नौर कैलाश ट्रेक की गिनती सबसे कठिन ट्रेक में से एक है। ट्रेकिंग की शुरुआत टांगलिंग गांव से होती है। रास्ते में मिलिंग खाटा और पार्वती कुंड जैसे कहई पड़ाव आते हैं। फिर यहां पर भक्तजन पहुंचते हैं। बता दें कि, यहां की ऊंचाई बहुत ज्यादा है, जिस कारण से सांस फूलना और थकान महसूस होना आम बात है। इसलिए जल्दबाजी करने की बजाय धीरे-धीरे चढ़ाई करें। सबसे जरुरी रजिस्ट्रेशन कराना - आप बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा नहीं कर सकते हैं। - मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मैंडेटरी है। - प्रत्येक दिन 375 श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति मिलेगी। - आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से आप रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। यात्रा में क्या-क्या साथ रखें? - अपने साथ रेनकोट या पोंचो रखें - मौसम बदलता रहता है इसलिए वुलेन जैकेट रखें। - अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें। - टॉर्च अपने साथ रखें। - पानी की बॉटल, जरुरी दवाइयां। - ट्रेकिंग स्टिक - इसके साथ ही खाने के लिए स्नैक्स अपने साथ रखें। यात्रा के समय किन बातों का ध्यान रखें - भूलकर भी शॉर्टकट रास्ते पर न जाए। - अकेले ट्रेक करने से बचें। - प्लास्टिक और कचरा को रास्ते में न फेंके। - यदि मौसम खराब है, तो आगे बढ़ने की कोशिश न करें। - प्रशासन और लोकल गाइड के निर्देशों का पालन करें। - अगर आपको ट्रेकिंग के दौरान कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत आराम करें। कितने दिन का प्लान बनाएं? -पहला दिन: दिल्ली से शिमला - दूसरा दिन: शिमला से रिकांग पियो - तीसरा दिन- टांगलिंग पहुंचकर ट्रेक की शुरुआत होगी - चौथा दिन- किन्नौर कैलाश दर्शन और वापसी - पांचवां दिन: रिकांग पियो से दिल्ली की वापसी
दिल्ली से केदारनाथ कैसे जाएं और कितना होगा खर्चा? जानिए पूरा बजट और ट्रैवल प्लान
Kedarnath Yatra Travel Plan: सावन के महीने में लोग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र धाम केदारनाथ के दर्शन के लिए जाते हैं। अगर आप भी भगवान शिव के दर्शन करने का मन बना रहे हैं, तो यहां पूरा बजट प्लान और रूट जान लीजिए।
क्या आप भी अगस्त में घूमने का प्लान बना रहे हैं। बरसात के मौसम में घूमने का एक अलग ही मजा होता। चारों तरफ हरियाली और सुकून भरा मौसम होता है। इस बीच, भारतीय रेलवे ने अगस्त 2026 के कई टूर पैकेज को लाइव किया है। इन पैकेज की सबसे बड़ी खासियत यह ही कि इनमें भारत के फेमस हिल स्टेशन, प्राकृतिक पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक विरासत से संबंधित कई जगहों पर घूमने का अवसर प्राप्त होगा। मानसून के दौरान शिमला, मनाली, दार्जिलिंग, ऊटी, मुन्नार और नैनीताल जैसी जगहों पर भी इन पैकेज के जरिए मस्त घूमा जा सकता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं मानसून के समय घूमने का शानदार पैकेज। IRCTC के अगस्त टूर पैकेज से सिक्किम जाएं घूमने बारिश के मौसम में सिक्किम का नजारा देखने लायक होता है। अगस्त के महीने में यदि आप भी सुंदर पहाड़ी और बदलों के बीच खोना चाहते हैं, तो आप सिक्किम टूर पैकेज जरुर बुक करें। यहां के खूबसूरत झरने, हरे-भरे पहाड़ और करीब से उड़ते हुए बादल आपको देखने को मिल जाएंगे। वैसे यह जगह प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है, इसके साथ ही यहां पर शांति काफी देखने को मिलती है। पैकेज की डिटेल्स - पैकेज का नाम SIKKIM SILVER - पैकेज कोड: EHH121 - समय: 5 रातें/6 दिन - पैकेज की शुरुआत: बागडोगरा / न्यू जलपाईगुड़ी - डेस्टिनेशन (घूमने की जगहें): दार्जिलिंग / गंगटोक / कलिम्पोंग - पैकेज की शुरुआत: 03 अगस्त 2026 - यात्रा कैसे होगी? बस सिक्किम टूर पैकेज फीस क्या है? गौरतलब है कि सिक्किम में गाड़ियों का किराया काफी ज्यादा होता है, ऐसे में आप पैकेज से जाएंगी ,तो आपको काफी फायदा मिलेगा। इस पैकेज में आपको 5 रातें/6 दिन के लिए होटल, घूमना-खाना और इंश्योरेंस जैसी तमाम सुविधाएं इसमें शामिल है। वैसे आप अलग बुक करेंगी तो आपको काफी महंगा पड़ सकता है। पैकेज फीस - 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति फीस ₹29,350 है। - 3 लोगों के साथ यात्रा करने पर पैकेज फीस प्रति व्यक्ति ₹22,700 है। - 4 लोगों का ग्रुप: ₹22,500 प्रति व्यक्ति - 6 लोगों का ग्रुप: ₹18,610 प्रति व्यक्ति Deluxe कैटेगरी - 2 लोगों के साथ यात्रा करने पर ₹37,350 प्रति व्यक्ति फीस होगी। - 3 लोगों के साथ यात्रा करने पर ₹28,700 प्रति व्यक्ति फीस देनी होगी। - 4 लोगों का ग्रुप: ₹30,500 प्रति व्यक्ति -6 लोगों का ग्रुप: ₹26,610 प्रति व्यक्ति सिक्किम पैकेज में क्या सुविधाएं मिल रही हैं? दरअसल, पिक-सीजन के मुकाबले प्रति व्यक्ति 8000 से 10,000 रुपये की सीधी बचत देखने को मिलेगी। इसके अतिरिक्त कई जगहों के लिए परमिट बनवाना पड़ता है। इस पैकेज को बुक करने से ट्रांसपोर्ट और होटल का मैनेजमेंट टूर कंपनी करती है। इसलिए आपका समय और मेहनत दोनों ही बच जाएंगे। - होटल प्रति व्यक्ति के अनुसार है। - जहां भी आप इस पैकेज में घूमने जाएंगे, वहां आप शेयरिंग वाहन से जाएंगे। - नाश्ता और रात का भोजन शामिल है। - इस पैकेज में आपको यात्रा बीमा भी मिलेगा।
देश के ज्यादातर राज्यों में मानसून ने दस्तक दे दी है। कई जगहों पर बारिश से मौसम बेहद सुहावना हो गया है। तो कहीं बादल आफत बनकर बरसते हैं, तो कई पहाड़ी इलाकों पर लैंडस्लाइड, सड़कें बंद होने की समस्याएं देखने को मिल रही है। ऐसे में अगर आप भी इन जगहों पर घूमने की प्लानिंग कर रहे थे, तो इस यात्रा को टालना बेहतर होगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि आपको अपनी छुट्टियां पूरी तरह से कैंसिल करने की जरूरत नहीं है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 4 ऐसे हिल स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं कि मानसून के दौरान आप इन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। वहीं यह जगहें सेफ भी हैं और आपकी ट्रिप भी यादगार बनेगी। शिमला मॉनसून में घूमने के लिए शिमला अच्छी जगह है। पहाड़ों की रानी कहलाने वाला शिमला मॉनसून के दौरान बेहद खूबसूरत नजर आता है। यहां पर आप जाखू मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। चाय के साथ पहाड़ों पर तैरते बादलों और मनमोहक नजारों का आनंद ले सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Travel Tips: मानसून सीजन में बना लें तमिलनाडु के इन 5 हिल स्टेशंस का प्लान, हमेशा कि लिए यादगार बन जाएगी ट्रिप कूनूर मॉनसून में आप तमिलनाडु में स्थित कुनूर भी घूमने के लिए जा सकते हैं। यह एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। यहां पर हरे-भरे चाय के बागान और भी अधिक खूबसूरत दिखते हैं। यहां पर सिम्स पार्क एक्सप्लोर कर सकते हैं। इसके अलावा आप लैम्ब्स रॉक और डॉल्फिन्स नोज जैसे शानदार नजारों का आनंद ले सकते हैं। वहीं आप फेमस नीलगिरि रेलवे की सवारी का मजा ले सकती हैं। अगर आप भी फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है। माउंट आबू बारिश के मौसम में आप माउंट आबू भी घूमने जा सकते हैं। यह राजस्थान का ऐसा हिल स्टेशन है, जो बारिश के मौसम में हरियाली से खिल उठता है और इसकी खूबसूरती भी देखने लायक होती है। ऐसे में अगर आप भी किसी ऐसी जगह घूमने जाना चाहते हैं, जहां पर लैंडस्लाइड न हो। तो यह एक परफेक्ट जगह है। सापुतारा मॉनसून में शांति का अनुभव करने के लिए आप गुजरात के सापुतारा हिल स्टेशन को एक्सप्लोर कर सकते हैं। बारिश के मौसम में इस हिल स्टेशन की खूबसूरती दोगुनी हो जाती है। वहीं यहां की हरियाली और झरनों की खूबसूरती आपका दिल जीत लेगी। सातपुरी झील में आप बोटिंग भी कर सकते हैं। वहीं रोपवे की सवारी कर शानदार दृश्य देख सकते हैं।
बीते दिनों कुछ ऐसी खबरें देखने और सुनने मिली हैं, जिनसे पर्यटन पर नयी बहस शुरु होने की गुंजाइश बनी है। पर्यटन की भारत में प्राचीन परंपरा रही है।
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कैंसर के ट्रीटमेंट जंग के बीच वेकेशन मनाने मालदीव पहुंचीं हिना खान, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
टीवी एक्ट्रेस हिना खान भले ही कैंसर से जंग लड़ रही हैं, लेकिन वह अपनी लाइफ को खुलकर जी रही हैं। इस गंभीर बीमारी से जंग लड़ते हुए वह लाइफ का हर पल एंजॉय कर रही हैं। हिना खान इन दिनों मालदीव में वेकेशन एंजॉय कर रही हैं। मालदीव में वेकेशन मनाते हुए ...
सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पंड्या और उनकी पत्नी नतासा स्टेनकोविक के अलग होने की अफवाहें जोरों पर हैं। यह सब तब शुरू हुआ जब नतासा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से 'पांड्या' उपनाम हटा दिया। प्रशंसकों ने यह भी देखा कि वह आईपीएल मैचों के दौरान स्टैंड्स से गायब थीं। हालांकि, तमाम अटकलों के बावजूद इस जोड़े ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि हार्दिक विदेश में किसी अज्ञात स्थान पर छुट्टियां मना रहे हैं। विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें। इसे भी पढ़ें: Shabana Azmi ने Shashi Kapoor के साथ इंटीमेट सीन करने से किया था इंकार, सुपरस्टार ने कह दिया था एक्ट्रेस को 'बेवकूफ लड़की' | Read All About नताशा स्टेनकोविक से अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक पंड्या विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं हार्दिक पंड्या की पत्नी नतासा स्टेनकोविक के साथ निजी जिंदगी हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। क्रिकबज द्वारा रविवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अलगाव की अफवाहों के बीच क्रिकेटर विदेश में छुट्टियां मना रहे हैं। अभी लोकेशन का नाम सामने नहीं आया है। इसे भी पढ़ें: Anant Ambani और Radhika Merchant Pre-Wedding Party! तारों भरी रात से लेकर टोगा पार्टी तक, जानें इस बार क्या-क्या होगा खास यह बताया गया है कि इंडियन प्रीमियर लीग से अपनी टीम के बाहर होने के बाद क्रिकेटर ने देश छोड़ दिया। कठिन अवधि के बाद तरोताजा होने के लिए, उन्होंने विदेश में एक सप्ताह की छुट्टी का विकल्प चुना। हार्दिक के शीघ्र ही न्यूयॉर्क में टी20 विश्व कप 2024 के अभ्यास सत्र के लिए भारतीय टीम में फिर से शामिल होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, आईपीएल 2024 में मुंबई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा की जगह हार्दिक के नेतृत्व की काफी आलोचना हुई। पूरे सीज़न में भारतीय क्रिकेटर को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस बीच, वह पेशेवर असफलताओं से जूझ रहे थे। उनकी निजी जिंदगी सुर्खियों में आ गई। कुछ दिन पहले हार्दिक ने अपने सोशल मीडिया पर ढेर सारी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। वीडियो में उन्हें पूल में तैरते हुए अच्छा समय बिताते हुए दिखाया गया, जबकि फोटो में वह एक खूबसूरत बैकग्राउंड के साथ पोज दे रहे थे। इसे छोटा और सरल रखते हुए, उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, रिचार्जिंग। पोस्ट के जवाब में, कई प्रशंसकों ने उनके टिप्पणी अनुभाग में बाढ़ ला दी, अपना अटूट समर्थन दिखाया और आगामी विश्व कप के लिए उनकी जय-जयकार की। एक यूजर ने लिखा, “हार्दिक पंड्या जल्द ही टी20 वर्ल्ड कप में वापस आ रहे हैं,” एक अन्य फैन ने लिखा, “हार्दिक टी20 में अपने पुराने मॉडल के साथ आएं और अपने नफरत करने वालों को चुप करा दें। जबकि एक तीसरे फैन ने लिखा, “मजबूत वापसी भाई।” इसके अतिरिक्त, एक प्रशंसक ने लिखा, अपना भाई शेर था और रहेगा तू टेंशन माउंट लेना रे। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, कोई बात नहीं हम सब आपके साथ हार्दिक हमारे हीरो हैं। एक अन्य प्रशंसक ने कहा, हार्दिक भाई विश्व कप में वापसी करेगा। हार्दिका पंड्या की पत्नी नतासा ने अलगाव की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी दूसरी ओर, अलगाव की अफवाहों के बीच हार्दिक की पत्नी को शनिवार को पहली बार शहर में देखा गया। अपनी नवीनतम आउटिंग में, उन्हें एक कैफे से बाहर निकलते समय एक करीबी दोस्त के साथ देखा गया था। जाने से पहले एक्ट्रेस ने शटरबग्स के लिए पोज दिए। दरअसल, एक पिता ने उनसे तलाक के बारे में पूछा। हालांकि, इसके जवाब में एक्ट्रेस ने सवाल को नजरअंदाज करने का फैसला किया और सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखी. जाने से पहले, उसने बस इतना कहा, बहुत-बहुत धन्यवाद और अपनी प्रतीक्षारत कार की ओर बढ़ गई। अपनी नवीनतम आउटिंग के दौरान, जब वह अपने दोस्त के साथ एक कैफे से बाहर निकली, तो उसे गुलाबी शर्ट के साथ सफेद टॉप और शॉर्ट्स पहने देखा गया। दो महीने पहले एक नौका पर बॉलीवुड अभिनेत्री को प्रस्ताव देने के बाद, हार्दिक और नतासा ने लगभग चार साल पहले 31 मई, 2020 को शादी कर ली थी। उनके पहले बच्चे, अगस्त्य का जन्म 30 जुलाई, 2020 को हुआ था। अपनी तीसरी शादी की सालगिरह मनाते हुए, हार्दिक और नतासा ने उदयपुर में एक भव्य समारोह के साथ अपनी प्रतिज्ञाओं को भी नवीनीकृत किया था। View this post on Instagram A post shared by Hardik Himanshu Pandya (@hardikpandya93) View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani)
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एक बार फिर सिनेमा घरो में दस्तक देने जा रही है क्रिस्टोफ़र नोलन की स्पेस एडवेंचर फिल्मInterstellar,10वीं सालगिरह पर होगी री-रिलीज़

