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पटना हाईकोर्ट को मिली नई मुख्य न्यायाधीश:मीनाक्षी एम. राय को बिहार के राज्यपाल ने दिलाई शपथ, सिक्किम की पहली महिला सिविल जज भी रहीं हैं

पटना उच्च न्यायालय की नई मुख्य न्यायाधीश के रूप में वरिष्ठ न्यायाधीश मीनाक्षी एम. राय ने आज पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। लोकभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें शपथ दिलाई। इसके साथ ही उन्होंने पटना हाईकोर्ट की 48वीं मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल लिया। न्यायिक क्षेत्र में लंबे अनुभव और उल्लेखनीय सेवाओं के कारण उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकभवन में हुआ शपथ ग्रहण समारोह राजधानी पटना स्थित लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्य के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, न्यायपालिका और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे। समारोह के दौरान राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने मीनाक्षी एम. राय को मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। शपथ के बाद संभाला पदभार शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी एम. राय पटना हाईकोर्ट पहुंचीं, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। उनके स्वागत के लिए उच्च न्यायालय परिसर में विशेष व्यवस्था की गई थी। दोपहर एक बजे पटना हाईकोर्ट में उनके सम्मान में एक विशेष समारोह का आयोजन भी किया गया, जिसमें न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। जस्टिस संगम कुमार साहू का लिया स्थान मीनाक्षी एम. राय ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर जस्टिस संगम कुमार साहू का स्थान लिया है। जस्टिस साहू 4 जून को सेवानिवृत्त हुए थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो गया था, जिसे अब मीनाक्षी एम. राय ने संभाल लिया है। वह पटना हाईकोर्ट की 48वीं मुख्य न्यायाधीश हैं। सिक्किम में हुआ जन्म, दिल्ली में पूरी की उच्च शिक्षा मीनाक्षी एम. राय का जन्म 12 जुलाई 1964 को सिक्किम में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और कानून के क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया। दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में की वकालत वर्ष 1990 में मीनाक्षी एम. राय दिल्ली बार में नामांकित हुईं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। वकालत के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में अपनी सेवाएं दीं और कानून की गहरी समझ विकसित की। उसी वर्ष उन्होंने सिक्किम न्यायिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सह सिविल जज के पद पर नियुक्त हुईं। इस नियुक्ति के साथ वह सिक्किम में इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला बनीं। यह उपलब्धि उनके न्यायिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती है। न्यायिक सेवा में निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां अपने लंबे न्यायिक करियर में मीनाक्षी एम. राय ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट की न्यायाधीश, रजिस्ट्रार जनरल, एनडीपीएस कोर्ट की न्यायाधीश तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत विशेष न्यायाधीश जैसी जिम्मेदारियां संभालीं। विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक पदों पर उनके अनुभव ने उन्हें एक कुशल और अनुभवी न्यायाधीश के रूप में स्थापित किया। 2015 में बनीं सिक्किम हाईकोर्ट की न्यायाधीश उनकी कार्यकुशलता और न्यायिक अनुभव को देखते हुए 15 अप्रैल 2015 को उन्हें सिक्किम हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और न्यायिक प्रशासन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 मई 2026 को केंद्र सरकार से मीनाक्षी एम. राय को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर उनकी नियुक्ति अधिसूचित की गई और उन्होंने शुक्रवार को शपथ ग्रहण कर पदभार संभाल लिया।

दैनिक भास्कर 5 Jun 2026 1:31 pm

ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में SIR शुरू:इन राज्यों में अगले साल चुनाव; 28 जून तक फॉर्म नहीं दिया तो छूट सकता है नाम

चुनाव आयोग ने ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का तीसरा चरण शुरू कर दिया है। इन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। निर्वाचन आयोग ने 14 मई को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 की धारा 21 के तहत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का आदेश दिया था। उसी प्रक्रिया के तहत अब ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में 30 मई से एन्यूमरेशन फेज शुरू हो गया है। SIR के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का वेरिफिकेशन करेंगे और फॉर्म जमा कराएंगे। आयोग ने कहा है कि 28 जून 2026 तक जिन लोगों के फॉर्म चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) को मिल जाएंगे, उनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएंगे। पात्र नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर न रहे आयोग ने कहा है कि SIR अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि कोई भी पात्र नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। 18 साल या उससे ज्यादा उम्र का हर भारतीय नागरिक, जो किसी कानून के तहत अयोग्य घोषित नहीं है, वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने का हकदार है। BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाएंगे राजनीतिक दल भी जुटाएंगे आवेदन चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बूथ लेवल एजेंट (BLA) को भी फॉर्म एकत्र करने की अनुमति दी है। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के BLA रोजाना 50 तक फॉर्म लोगों से लेकर ड्राफ्ट प्रकाशन से पहले BLO को सौंप सकेंगे। आयोग का कहना है कि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दल जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त BLA भी नियुक्त कर सकते हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया तेजी और सुचारु तरीके से पूरी हो सके। आयोग ने सहयोग की अपील की चुनाव आयोग ने सभी पात्र मतदाताओं से इस प्रक्रिया में भाग लेने और घर-घर पहुंचने वाले चुनाव अधिकारियों को सहयोग देने की अपील की है। आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए चलाया जा रहा है। 14 मई: 19 राज्य-UT में SIR का ऐलान, यहां 37 करोड़ वोटर्स चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन होगा। पूरी खबर पढ़ें… करीब 4 लाख BLO, 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट तैनात होंगे चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे फेज की SIR प्रक्रिया में 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तैनात होंगे। BLO की मदद के लिए राजनीतिक पार्टियों की तरफ नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी शामिल रहेंगे। SIR फेज 1-2 : 10 राज्य, 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हुए चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। पहले फेज के तहत, बिहार में सबसे पहले SIR हुआ था। दूसरे फेज के तहत 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुआ। चुनाव आयोग ने बताया कि पहले दो फेज में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया था। इस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में शामिल हुए। SIR: भारत में 21 साल बाद हो रहा वोटर लिस्ट का रिविजन SIR (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट की पूरी तरह से जांच और अपडेट किया जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि वोटर लिस्ट में सिर्फ पात्र और सही मतदाताओं के नाम हों। भारत में SIR करीब 21 साल बाद हो रहा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इससे पहले देशभर में ऐसा बड़ा अभियान 2002 से 2004 के बीच चला था। चुनाव आयोग ने बताया था कि देश में SIR की प्रक्रिया आठवीं बार हो रही है। ……………… SIR से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- SIR अवैध नहीं: चुनाव आयोग शर्तों के साथ नागरिकता जांच सकता है; SIR में 13 राज्य-UT में 7.41 करोड़ नाम कटे सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को वैध और संवैधानिक करार दिया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने बुधवार को कहा था कि SIR मनमाना नहीं है और चुनाव आयोग को यह प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन यह फैसला सिर्फ चुनावी उद्देश्यों तक सीमित रहेगा। किसी व्यक्ति को अंतिम रूप से गैर-नागरिक घोषित करने का अधिकार आयोग के पास नहीं होगा। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 31 May 2026 7:20 pm