पंजाब के अमृतसर स्थित श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार रात उस समय हड़कंप मच गया, जब एयरपोर्ट के अति-संवेदनशील ऑपरेशनल एरिया और रनवे के आसपास दो से चार संदिग्ध ड्रोन मंडराते देखे गए। रात करीब 10 बजे संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने तुरंत हाई अलर्ट जारी कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये संदिग्ध उड़ने वाली चीज़ें राजाला गांव की दिशा से एयरपोर्ट परिसर की ओर आती दिखाई दीं। ये कुछ मिनटों तक रनवे और आसपास के संवेदनशील इलाकों के ऊपर मंडराती रहीं, जिससे हवाई यातायात सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया। इसे भी पढ़ें: Satya Niketan Building Collapse | दिल्ली में इमारत ढहने से छह लोगों की मौत, मलबे से 11 लोगों को निकाला गया शुरुआती जानकारी के मुताबिक, संदिग्ध ड्रोन राजाला गांव की तरफ से एयरपोर्ट की ओर आते हुए देखे गए। बताया जा रहा है कि ये उड़ने वाली चीज़ें कुछ मिनटों तक रनवे और दूसरे संवेदनशील इलाकों के ऊपर मंडराती रहीं। इसे भी पढ़ें: Mexico के Temascalcingo में आतिशबाजी सामग्री फटने से 10 की मौत, 64 जख्मी सात फ्लाइट्स का रूट बदला गया सुरक्षा के लिहाज़ से, आने वाली सात फ्लाइट्स का रूट बदलकर उन्हें दिल्ली और चंडीगढ़ भेजा गया। प्रभावित फ्लाइट्स ये थीं: मलेशिया एयरलाइंस (MH-118): कुआलालंपुर से अमृतसर (दिल्ली भेजा गया) इंडिगो (6E-5028): मुंबई से अमृतसर (चंडीगढ़ भेजा गया) इंडिगो (6E-2045): दिल्ली से अमृतसर (चंडीगढ़ भेजा गया) एयर इंडिया (AI-479): दिल्ली से अमृतसर (दिल्ली भेजा गया) एयर इंडिया (AI-855): दिल्ली से अमृतसर (दिल्ली वापस भेजा गया) इंडिगो (6E-1428): शारजाह से अमृतसर (दिल्ली भेजा गया) एयर इंडिया एक्सप्रेस (IX-138): शारजाह से अमृतसर (दिल्ली भेजा गया) भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास अमृतसर एयरपोर्ट अमृतसर शहर के सेंटर से उत्तर-पश्चिम में करीब 11 किमी दूर राजा सांसी में स्थित श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पंजाब का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है। सिखों के चौथे गुरु और अमृतसर के संस्थापक गुरु राम दास के नाम पर बने इस एयरपोर्ट को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाद उत्तरी भारत का दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट माना जाता है। यह बताना ज़रूरी है कि यह एयरपोर्ट भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से हवाई दूरी के हिसाब से 30 किमी (करीब 18.6 मील) से भी कम दूरी पर है, इसलिए सुरक्षा के नज़रिए से इंटरनेशनल बॉर्डर के पास इसकी मौजूदगी बहुत अहम है। LoC के पास संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए सूत्रों ने शनिवार को बताया कि अगस्त में जम्मू-कश्मीर के राजौरी ज़िले में पाकिस्तानी ड्रोन की संदिग्ध गतिविधि देखी गई थी, लेकिन भारतीय सेना ने इस घुसपैठ को नाकाम कर दिया और बाद में लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LoC) के पास सर्च ऑपरेशन चलाया। सुबह करीब 8.05 बजे नौशेरा सेक्टर के रुमलिधारा इलाके के पास तीन ड्रोन भारतीय हवाई क्षेत्र में घुस आए थे। हालांकि, 22वीं जम्मू-कश्मीर राइफल्स (JAK RIF) के जवानों ने उन्हें देख लिया और तुरंत काउंटर-ड्रोन सिस्टम एक्टिवेट कर दिए, जिससे ड्रोन को वापस लौटना पड़ा। सूत्रों ने इंडिया टीवी को बताया, तेज़ कार्रवाई के कारण तीनों ड्रोन को सीमा पार वापस लौटना पड़ा; एहतियात के तौर पर इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है। Read LatestNational News in Hindi only on Prabhasakshi
आज ही के दिन यानी की 05 सितंबर को मदर टेरेसा का निधन हो गया था। उन्होंने अपना पूरी जीवन दीन-दुखियों की सेवा में लगा दिया था। वह बीमार, अनाथ, गरीब, असहाय लोगों की मदद और सेवा किया करती थीं। वह 19 साल की उम्र में भारत आ गई थीं। वह पहले शिक्षिका बनीं और फिर बाद में गरीबों और असहायों की सेवा और मदद करने लगीं। वहीं सेवा कार्यों के लिए उनको नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर मदर टेरेसा के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... जन्म और परिवार यूगोस्लाविया में 26 अगस्त 1910 को मदर टेरेसा का जन्म हुआ था। इनका असली नाम नाम एग्नेस गोंझा बोयाजिजू था। वहीं 18 साल की उम्र में वह दीक्षा लेकर सिस्टर टेरेसा बनी थीं। इसे भी पढ़ें: Guru Ramdas Death Anniversary: 30 रागों में रचे 638 शब्द, सिखों के चौथे गुरु ने कैसे रखा Amritsar का आधार जब भारत आईं मदर टेरेसा साल 1929 में मदर टेरेसा भारत आईं और अध्यापन का कार्य करने लगी। वहीं कोलकाला में पढ़ाने के दौरान उन्होंने लोगों की गरीबी को देखा और कच्ची बस्तियों में जाकर सेवा कार्य करने लगीं। वहीं सेवा कार्य के लिए मदर टेरेसा ने 07 अक्तूबर 1950 को मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की। इसके जरिए वह लंबे समय तक बीमार, गरीब और अनाथ लोगों की सेवा में जुटी रहीं। वहीं साल 1948 में मदर टेरेसा ने स्वेच्छा से भारत की नागरिकता ग्रहण की। उन्होंने अपनी मिशनरीज के जरिए उस दौरान समाज से बहिष्कृत समझे जाने वाले तपेदिक और कुष्ठ रोगियों की सेवा की। नोबेल शांति पुरस्कार मदर टेरेसा के सेवा कार्यों को देखते हुए साल 1979 में उनको नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन उन्होंने प्राइज मनी लेने से इंकार कर दिया और इसको भारत के गरीब लोगों में दान करने के लिए कहा। साल 1980 में भारत सरकार द्वारा मदर टेरेसा को सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। इसके अलावा रोमन कैथोलिक चर्च ने भी उनको कलकत्ता की संत टेरेसा के नाम से नवाजा। मृत्यु वहीं 05 सितंबर 1997 को दिल का दौरा पड़ने से मदर टेरेसा निधन हो गया था।
सिख धर्म के चौथे गुरु, गुरु रामदास का का 01 सितंबर को निधन हो गया था। वह सिख धर्म के चौथे गुरु थे। उन्होंने चार उपमाओं की रचना करके सिख धर्म को अधिक मजबूत करने का कार्य किया था। गुरु रामदास जी सात वर्षों तक सिखों के गुरु रहे थे। वह 01 सितंबर 1574 को सिखों के चौथे गुरु बने थे। इसके अलावा गुरु रामदास ने अमृतसर शहर बसाया था। इस शहर को पहले रामदासपुर के नाम से जाना जाता था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी पर गुरु रामदास के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में जन्म और परिवार चूना मंडी में 24 सितंबर 1534 को गुरु रामदास का जन्म हुआ था। यह जगह वर्तमान समय में पाकिस्तान के लाहौर में है। इनके पिता का नाम हरिदास मल सोढी और मां का नाम अनूप देवी था। इनका असली नाम जेठा जी था। जब उनको गुरु पद मिला, तो उनको रामदास नाम मिला। इनके माता-पिता की मृत्यु बचपन में ही हो गई थी। जिसके बाद इनका पालन-पोषण नानी ने किया था। इसे भी पढ़ें: Bal Gangadhar Tilak Death Anniversary: पत्रकारिता के जरिए ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाने वाले Bal Gangadhar Tilak तीसरे सिख गुरु से मिले जब जेठाजी अपनी नानी के पास रहते थे, तो वह पहली बार सिखों के तीसरे नानक, गुरु अमर दास से मिले थे। इस मुलाकात के दौरान वह इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने नानक अमरदास के पास रहकर उनकी सेवा का विचार बना लिया। वहीं गुरु अमरदास ने अपनी छोटी बेटी का विवाह रामदास से कराया था। इसी दौरान जब गुरु अमरदास को यह एहसास हुआ कि उनको अब सिखों के अगले गुरु का चयन करना चाहिए, तो उन्होंने गुरु रामदास की परीक्षा ली। इस परीक्षा में गुरु रामदास सफल हुए। गुरु गद्दी पर बैठे रामदास जिसके बाद गुरु अमरदास ने बाबा बूढ़ा जी से रामदास का तिलक कराया और गुरुगद्दी सौंपी। इसके बाद गुरु अमरदास ने जेठा जी को संगत से परिचित कराते हुए बताया कि यह सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास हैं। अमृतसर शहर बसाया गुरु गद्दी पर बैठने के बाद रामदास ने सिख संगत की भलाई के लिए अनेकों कार्य किए थे। उन्होंने चक रामदास पुर नामक नगर बसाया। जिसको आज के समय में हम सभी अमृतसर शहर के नाम से जानते हैं। इसके अलावा उन्होंने नगर के बीचोबीच एक बड़े जल सरोवर का निर्माण कराया था। गुरु रामदास ने 'आनंद कारज' यानी की सिखों के विवाह में पढ़े जाने वाले फेरों की रचना की। गुरु रामदास ने बताया कि अब से आनंद कारज की मर्यादा के तहत ही सिख विवाह किए जाएंगे। गुरु रामदास ने अपने पूरे जीवनकाल में 30 राहों में 638 शब्द लिखे। जिनमें 246 पौउड़ी, 136 श्लोक, 31 अष्टपदी और 8 वारां है। इन सभी को गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया। मृत्यु वहीं 01 सितंबर 1581 को पंजाब के गोइंदवाल साहिब में सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास का निधन हो गया।

