पिथौरागढ़ के पहाड़ों में भारत-मंगोलिया ने आतंकवाद रोधी अभियानों की ट्रेनिंग की
पिथौरागढ़ के पहाड़ों में भारत-मंगोलिया ने आतंकवाद रोधी अभियानों की ट्रेनिंग की
New Delhi, 1 अक्टूबर . India में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कैप्टन स्मित मच्छार के शौर्य की तारीफ की है. उन्होंने कहा, “हम कैसे आतंकवाद का मिल कर सामना कर सकते हैं और आतंक के सामने घुटने नहीं टेकते उसकी ये ‘बेहतरीन मिसाल’ है.” Thursday को से विशेष साक्षात्कार में रूवेन ने अपने ... Read more
हम मिलकर आतंकवाद से कैसे लड़ सकते हैं, इसकी बेहतरीन मिसाल कैप्टन स्मित ने पेश की: इजरायली राजदूत (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)
मारा गया पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मोस्ट वांटेड आतंकवादी मूसा
इंटरनेट डेस्क। पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मोस्ट वांटेड आतंकवादी सुलेमान शाह उर्फ 'मूसा' राष्ट्रीय राइफल्स के साथ मुठभेड़ में ढेर हो गया है। ये आतंकी मंगलवार रात कश्मीर के बडगाम जिले के ऊंचाई वाले इलाके में मारा गया। लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर मूसा जम्मू-कश्मीर में कई हमलों में शामिल होने के कारण वांछित था। मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। वह 5 सितंबर को यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ से बच निकला था, हालांकि इस दौरान उसका करीबी साथी यासिर मारा गया था। हालांकि, मारे गए आतंकवादी के बारे में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। खबरों के अनुसार, सेना ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस संबंध में जानकारी दी कि अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मध्य कश्मीर के कोराग, यूसमर्ग के सामान्य क्षेत्र में अभियान शुरू किया था। जवानों द्वारा चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद एक आतंकवादी को मारा गया। PC:livehindustan अपडेट खबरों के लिए हमारा वॉट्सएप चैनल फोलो करें
आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने के मुद्दे पर बिम्सटेक बैठक, भारत ने की मेजबानी
भारत ने 28 और 29 सितंबर को नई दिल्ली में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए बिम्सटेक ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप की 11वीं बैठक की मेजबानी की।
New Delhi, 29 सितंबर . India Government की मेजबानी में, आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम पर नियंत्रण को लेकर बिम्सटेक जॉइंट वर्किंग ग्रुप (जेडब्ल्यूजी-सीटीटीसी) यानि संयुक्त कार्य समूह की 11वीं बैठक 28-29 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित की गई. इस बैठक में बिम्सटेक के सभी सदस्य देशों (बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और ... Read more
जिनेवा में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान से कहा साफ, ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन आतंकवाद नहीं’
जिनेवा, 29 सितंबर . Pakistan के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकार नियमों के उल्लंघन की चर्चा जिनेवा प्रेस क्लब में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में हुई. Tuesday को कई कश्मीरी नेता, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकारों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने Pakistan को खरी-खरी सुनाई. यह कॉन्फ्रेंस जिनेवा में चल रहे यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स ... Read more
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने अमेरिका को घेरा: पाक से नजदीकी बढ़ाने पर जताया ऐतराज, कहा— इससे भारत-US रिश्तों पर असर
संयुक्त राष्ट्र में एस जयशंकर का कड़ा संदेश: आतंकवाद पर पाकिस्तान बेनकाब
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद और वैश्विक कूटनीति के मुद्दे पर दुनिया को आईना दिखाया है। न्यूयॉर्क में दिए गए अपने प्रभावशाली भाषण में उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान को 'आतंकवाद का मुख्य केंद्र' और 'सीरियल प्रैक्टीशनर' करार देते हुए उसकी पोल खोल दी। इसके साथ ही, उन्होंने चीन और अन्य महाशक्तियों को भी चेताया कि भू-राजनीतिक स्वार्थों के लिए वैश्विक नियमों और व्यापारिक मार्गों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।आतंकवाद पर पाकिस्तान को दो टूक: नहीं चलेगी ड्रामेबाजीविदेश मंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं या सीमा पार से प्रायोजित हिंसा करते हैं, उन्हें अब वैश्विक मंचों पर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और दोस्ती की बातें एक साथ नहीं चल सकतीं। भारत ने साफ कर दिया है कि देश अपनी सुरक्षा के लिए आतंकवाद के खिलाफ हर जरूरी कदम उठाने के अपने अधिकार का पूरी तरह से पालन करेगा। आतंकवाद को सामान्य ठहराने और इसके नतीजों से बचने की कोई भी कोशिश अब कामयाब नहीं होने वाली।ग्लोबल साउथ की आवाज और चीन की नीतियों पर परोक्ष प्रहारभाषण के दौरान एस जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बिना नाम लिए चीन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि गैर-बाजार प्रथाओं और मार्केट डिनायल (बाजार तक पहुंच रोकने) के जरिए विकासशील देशों और 'ग्लोबल साउथ' के औद्योगीकरण के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है। तकनीक जो कभी उम्मीद की किरण हुआ करती थी, आज वह चिंता और अविश्वास का स्रोत बनती जा रही है। उन्होंने सप्लाई चेन को बाधित करने और संसाधनों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति की भी कड़ी आलोचना की।भू-राजनीतिक संकट और दुनिया के सामने मंडराता खतराविदेश मंत्री ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया आज खड्ड के मुहाने पर खड़ी है। युद्ध और संघर्षों का खामियाजा उन देशों को भुगतना पड़ रहा है जिनका उन लड़ाइयों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। खाद्य सुरक्षा, ईंधन, उर्वरक और वित्त (4F संकट) को लेकर दुनिया गंभीर दौर से गुजर रही है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने को उन्होंने पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया, जो सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार और स्थिरता को चुनौती देता है।महात्मा गांधी के संदेश से शांति का आह्वानअपने ऐतिहासिक संबोधन के अंत में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा और उनके संदेश को याद किया। उन्होंने दुनिया को याद दिलाते हुए कहा कि 'शांति का कोई रास्ता नहीं है, बल्कि शांति ही एकमात्र रास्ता है'। भारत ने एक बार फिर दोहराया कि युद्ध और हिंसा के दौर को पीछे छोड़कर संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का समय आ गया है, और वैश्विक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनना होगा।
'आतंकवाद के खतरे को समझे बिना...' US-पाक रिश्तों पर बोले जयशंकर
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका और पाकिस्तान के बढ़ते संबंधों पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा, खासकर सीमा पार आतंकवाद को लेकर पश्चिमी देशों का रुख साफ नहीं होने तक द्विपक्षीय रिश्तों में मजबूती नहीं आ सकती. जयशंकर ने आतंकवाद को सबसे अहम मुद्दा बताया और कहा कि साझेदारों को भारत की संवेदनशीलता समझनी होगी.
आतंकवाद पर भारत की चिंताओं पर अमेरिका की असंवेदनशीलता आपसी रिश्तों के लिए समस्या : जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं के प्रति अमेरिका का असंवेदनशील होना दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक समस्या है।
अमेरिका में ही जयशंकर ने ट्रंप सरकार को सुनाया, कहा- पाकिस्तानी आतंकवाद पर हमारी नहीं सुनोगे तो...
जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद अमेरिका और पाकिस्तान के संंबंधों में सुधार देखा गया है. ऐसे में भारत से अमेरिका के रिश्तों पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है? इसका जवाब भारत के विदेश मंत्री के बयान में देखने को मिला.
आतंकवाद पर अमेरिका को जयशंकर की दो टूक, बोले- हमारी सुरक्षा चिंताओं को न समझना रिश्तों के लिए समस्या
एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों की चुनौतियों पर कहा कि भारत की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त गंभीरता से न समझना रिश्तों को प्रभावित करता है। आतंकवाद और व्यापार पर भी बोले।
भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी की तलवारें खिंची हुई हों, भले ही हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र के दौरान दोनों देशों के बीच चले वाकयुद्ध को पूरी दुनिया ने देखा हो, लेकिन भारत ने पाकिस्तान की अध्यक्षता में हुई शंघाई सहयोग संगठन यानि एससीओ की राष्ट्रीय समन्वयक बैठक में हिस्सा लेकर दुनिया को एक बड़ा कूटनीतिक संदेश दे दिया है। 28 से 30 सितंबर तक इस्लामाबाद में हो रही इस बैठक में भारत की ओर से संयुक्त सचिव आलोक डिमरी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पाकिस्तान की 2026-27 की अध्यक्षता में यह पहली बड़ी बैठक है, जिसमें संगठन के आगामी कार्यक्रमों और बैठकों का कैलेंडर तय किया जाना है। भारत की इस भागीदारी ने साफ कर दिया है कि नई दिल्ली बहुपक्षीय मंचों से पीछे हटने की बजाय वहां अपनी रणनीतिक मौजूदगी और प्रभाव को और मजबूत करने की नीति पर आगे बढ़ रही है। साथ ही, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारत का कड़ा रुख भी बरकरार है। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान ने अपनी अध्यक्षता के लिए ‘दृष्टि को कार्रवाई में बदलना: संपर्क, नवाचार और साझा समृद्धि’ का विषय चुना है। इस एजेंडे के जरिए इस्लामाबाद क्षेत्रीय संपर्क, आर्थिक सहयोग, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने का संदेश देना चाहता है। लेकिन पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जिस मंच को वह अपनी कूटनीतिक सक्रियता दिखाने के अवसर के रूप में पेश कर रहा है, उसी मंच पर भारत लगातार आतंकवाद के प्रश्न को केंद्रीय सुरक्षा मुद्दे के रूप में सामने रखता आया है। इसे भी पढ़ें: UN में भारत का पाकिस्तान पर जोरदार पलटवार, कश्मीर से ओसामा तक की याद दिलाई उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय स्तर पर लंबे समय से कोई सार्थक व्यापक संवाद नहीं है। इसके बावजूद भारत ने शंघाई सहयोग संगठन के बहुपक्षीय ढांचे को द्विपक्षीय विवादों से अलग रखा है। यही नई दिल्ली की कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण पहलू है। पाकिस्तान के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों की बहाली और बहुपक्षीय मंच पर भारत की भागीदारी, दोनों को अलग-अलग रखा गया है। यहीं पाकिस्तान की कूटनीतिक चुनौती स्पष्ट होती है। इस्लामाबाद को एससीओ की अध्यक्षता मिली है, लेकिन भारत के साथ उसके संबंधों में वह परिस्थितियां अब भी मौजूद हैं जिनके कारण व्यापक द्विपक्षीय संवाद बंद पड़ा है। इसके बावजूद भारत पाकिस्तान की मेजबानी में होने वाली संगठनात्मक बैठकों में भाग लेकर यह संदेश दे रहा है कि बहुपक्षीय संस्थाओं को बंधक बनाकर द्विपक्षीय विवादों का समाधान नहीं किया जा सकता। हम आपको यह भी बता दें कि भारत के एजेंडे में आतंकवाद का मुद्दा एक बार फिर सबसे ऊपर रहने वाला है। खास बात यह है कि इस बार जवाब पाकिस्तान की जमीन पर, उसी के मंच पर दिया जाएगा। पाकिस्तान जब एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की अध्यक्षता कर रहा है, तब भारत के लिए यह मंच इस्लामाबाद को आतंकवाद के सवाल पर सीधे घेरने का महत्वपूर्ण अवसर है। नई दिल्ली लगातार आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की मांग करती रही है। साथ ही भारत सीमा पार आतंकवाद तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई को पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की बुनियादी शर्त मानता है। ऐसे में एससीओ के मंच से पाकिस्तान में ही आतंकवाद का मुद्दा उठाना इस्लामाबाद के लिए कहीं अधिक कड़ा कूटनीतिक संदेश होगा। साथ ही कनेक्टिविटी के सवाल पर भी भारत की स्थिति स्पष्ट है। नई दिल्ली एससीओ के संपर्क और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग से जुड़े प्रयासों का समर्थन करती है, लेकिन उसकी स्पष्ट शर्त है कि ऐसी कोई भी परियोजना सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन नहीं कर सकती। यानी भारत संपर्क के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह संपर्क के नाम पर विवादित क्षेत्रों अथवा संप्रभुता से जुड़े सिद्धांतों को दरकिनार करने के खिलाफ अपनी स्थिति कायम रखता है। भारत की यही नीति पिछले वर्षों में भी दिखाई दी है। 2017 में एससीओ का पूर्ण सदस्य बनने के बाद भारत ने संगठन की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। अक्टूबर 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर पाकिस्तान में एससीओ के शासनाध्यक्षों की बैठक में शामिल हुए थे। जुलाई 2026 में भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल सीमा सुरक्षा से जुड़े एससीओ कार्यक्रम के लिए इस्लामाबाद गया था। भारतीय अधिकारी एससीओ के आतंकवाद-रोधी ढांचे से जुड़े अभ्यासों और विशेषज्ञ बैठकों में भी भाग लेते रहे हैं। अब नजर 2027 पर है। पाकिस्तान अगस्त 2027 में इस्लामाबाद में एससीओ राष्ट्राध्यक्ष शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि संगठन के सभी सदस्य देशों के नेताओं को निमंत्रण दिया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। लेकिन निमंत्रण मिलना और प्रधानमंत्री का पाकिस्तान जाना दो अलग-अलग विषय हैं। हम आपको यह भी बता दें कि शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने थे। बाद में ईरान और बेलारूस भी इसमें शामिल हुए। संगठन का दायरा सुरक्षा से लेकर आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क और आतंकवाद, अलगाववाद तथा उग्रवाद के खिलाफ सहयोग तक फैला हुआ है। बहरहाल, इस्लामाबाद की बैठक महज एक प्रशासनिक बैठक नहीं है। पाकिस्तान इसे अपनी अध्यक्षता के प्रभाव को स्थापित करने के अवसर के रूप में देख रहा है, जबकि भारत इसी मंच का इस्तेमाल अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं, आतंकवाद-विरोधी दृष्टिकोण और क्षेत्रीय संपर्क संबंधी सिद्धांतों को मजबूती से रखने के लिए कर रहा है। पाकिस्तान के सामने चुनौती यह है कि संगठन की अध्यक्षता उसके हाथ में होने के बावजूद भारत की भागीदारी उसकी शर्तों पर नहीं, बल्कि भारत की घोषित रणनीतिक प्राथमिकताओं के साथ आगे बढ़ रही है। यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सामरिक और कूटनीतिक संदेश है। -नीरज कुमार दुबे
MBBS की 4 सीटें अब आतंकवाद पीड़ितों के पत्नी-बच्चों को, NEET अनिवार्य, 3 कैटेगरी में प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने केंद्रीय पूल से MBBS की 4 सीटें आतंकवाद के शिकार नागरिकों के जीवनसाथी और बच्चों के लिए आवंटित की हैं। इनके लिए निर्धारित विभिन्न मेडिकल कॉलेजों या संस्थानों में प्रवेश में उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी
आतंकवाद पर सख्त: भारत का रूख कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अब वैश्विक समुदाय के रवैये में भी बदलाव जरूरी

