तिरंगे की कहानी: एक झंडा, जिसने भारत की पहचान बदल दी
7 अगस्त 1906 की पहली दस्तक से 15 अगस्त 1947 की आजादी तक—राष्ट्रीय ध्वज ने भी तय किया लंबा सफर।
नासा और इसरो:द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में हुई अहम पहल,भारत के स्पेस विजन-2047 को मिलेगी गति
ललित सुरजन की कलम से स्नोडन : अपराधी नहीं, विश्व नागरिक
'यह सबको पता है कि पिछले पच्चीस साल से भारत लगातार अमेरिकापरस्ती कर रहा है
मक्का समझौता : बदलता शक्ति-संतुलन और भारत की चुनौती
नई परिस्थितियों में भारत को यही बढ़त बनाए रखनी होगी—शोर से नहीं, शक्ति और रणनीति से।
मंगल मिलन में तिरंगा और भागवत कथा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसद को राजनैतिक प्रहसन के मंच में तब्दील करने में लगातार लगे हुए हैं।
एफसीआरए और कुछ गंभीर सवाल: कानून सबसे ऊपर... क्या राष्ट्रीय हित की रक्षा, विदेशी असर पर अंकुश लगाना है लक्ष्य?
विचार: नए रूप में सामने आता गांधीवाद
नई पीढ़ी के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है। यदि नई पीढ़ी स्वयं लोकतांत्रिक मूल्यों का उदाहरण बनेगी तो बदलाव भी आएगा और लोकतंत्र भी मजबूत होगा और शायद यही 21वीं सदी का सबसे सच्चा गांधीवाद है।
जागरण संपादकीय: जेपीसी में एफसीआरए
इसे देखते हुए एफसीआरए में उपयुक्त संशोधन किए ही जाने चाहिए। इसलिए और भी, क्योंकि संप्रभु देश को यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि विदेशी धन का दुरुपयोग न होने पाए।
ग्वालियर में मोबाइल चोर को पकड़ती बहनों का वीडियो झूठे सांप्रदायिक दावे से वायरल
बूम से बातचीत में ग्वालियर पुलिस ने पुष्टि की कि वीडियो में दिख रहा आरोपी मुस्लिम नहीं है और उसकी पहचान मनप्रीत सिंह के रूप में की गई है.
BJP ने झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज का बताकर शेयर किया पटना का वीडियो
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो 22 जुलाई को बिहार की राजधानी पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज का है, जिसे बीजेपी ने गलत तरीके से झारखंड का बताकर शेयर किया है.
नदी में मगरमच्छ के सामने बच्चे का बेखौफ अंदाज, वीडियो ने मचाई सनसनी
नदी के पानी में मगरमच्छ को देखकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक बच्चे का बिल्कुल अलग ही अंदाज देखने को मिला। वीडियो में बच्चा नदी में एक छोटी नाव के पास बने फ्लोटिंग बोर्ड पर आराम से नजर आ रहा है। इसी दौरान एक मगरमच्छ तैरता हुआ उसके बेहद करीब पहुंच जाता है।
कपालभाति निकालता है शरीर के टॉक्सिन बाहर
नई दिल्ली, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा, कब्ज, साइनस, अस्थमा और तनाव आम हो गया है।
Independence Day 2026: आजाद भारत की युवा पीढ़ियों का राष्ट्र निर्माण में योगदान
युवा लोकतंत्र को मजबूती देने में, युवा मतदान के प्रतिशत में वृद्धि करके देश हित में कार्य करने वाले योग्य व्यक्ति को संसद में पहुंचा सकते हैं ताकि युवाओं के आम जनमानस से जुड़े सवालों पर बहस हो और समाधान संभव हो।
शुक्र कैसे बना सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह?: कभी था पानी और महासागर, सूरज के सबसे करीब नहीं फिर भी इतना तापमान
नागरिक को टावर पर चढ़ना ही क्यों पड़े?: जमीन से नहीं पहुंचती फरियाद, न्याय के लिए ऊंचाई को सहारा बना रहे लोग uttar-pradesh-tank-tower-protest-public-grievances-administration
तस्वीर का दूसरा पहलू: युवाओं की बेरोजगारी घटी, लेकिन ग्रेजुएट नौकरी के लिए अब भी परेशान; क्या है बड़ी चुनौती? india-graduate-unemployment-youth-jobs-higher-education-state-of-working-india-2026
जलवायु के मौन संकेत: गर्म होते महासागर और ताकतवर अल-नीनो का खतरा
जलवायु के मौन संकेत: गर्म होते महासागर और ताकतवर अल-नीनो का खतरा global-ocean-temperature-july-record-el-nino-climate-change-india-impact
राजधानी दिल्ली को सिर्फ ट्रांजिट सिटी के बजाय देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए पूर्ण पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने मंगलवार को चार नए आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट शुरू किए।
म्यूचुअल फंड में बदला निवेशकों का रुख: 30 महीने बाद लार्जकैप से निकाला पैसा; अब स्मॉलकैप में कितना निवेश बढ़ा?
ललित सुरजन की कलम से तपती धूप में सड़क का सफर
'हरदा जाते समय हमने सोचा कि फोरलेन छोड़कर बैतूल के पहले बैतूलबाजार में निर्मित बालाजीपुरम में रुककर चाय पी लेंगे।
प्रवासी शिविर जगती का माहौल मंगलवार को बदला-बदला नजर आया।
अभी आंदोलन से उभरी आग यह ठंडी पड़े उससे पहले रांची के बच्चों ने अपने प्रदेश की प्रतियोगिता परीक्षाओं की बदहाली के सवाल को उठाया।
संसद में गतिरोध और सुविधा का लोकतंत्र
संसद के मानसून सत्र को खत्म होने में बस दो दिन बचे हैं। 13 अगस्त को सत्र खत्म हो जाएगा।
युवा शक्ति को मिले दिशा, सपनों को मिले उड़ान
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस (12 अगस्त 2026) पर विशेषः युवा केवल उम्र की एक अवस्था नहीं, बल्कि ऊर्जा, साहस, कल्पना, परिवर्तन और नवसृजन की चेतना का नाम है। जिस समाज की युवा शक्ति जाग्रत, संवेदनशील और रचनात्मक होती है, वह समाज परिवर्तन की नई इबारत लिखता है। इसके विपरीत जब युवा ऊर्जा दिशाहीन हो जाती है ... Read more
विचार: एक बड़ा उद्यम बना मिलावटखोरी
देश में ऐसे सरकारी विभागों की कमी नहीं, जो जिस काम के लिए बने हैं, वही कर पाने में बुरी तरह नाकाम हैं। परिणाम यह है कि गुणवत्ता के मानकों की हर कहीं अनदेखी हो रही है।
विचार: आसान नहीं साइबर अपराधों पर अंकुश
डाटा सिक्योरिटी काउंसिल आफ इंडिया यानी डीएससीआइ द्वारा समय-समय पर साइबर क्राइम की जांच-पड़ताल से संबंधित पुस्तक प्रकाशित की गई है, जो काफी उपयोगी है।
जागरण संपादकीय: संसद में सड़क की राजनीति
यह ठीक नहीं कि संसद में विधेयक बिना चर्चा के पारित हो जाए, लेकिन ऐसा हो रहा है। इसके लिए विपक्ष ही अधिक जिम्मेदार है।
अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ के दावे से बांग्लादेश सीमा का वीडियो वायरल
बूम ने पाया कि वीडियो चांपाईनवाबगंज के शिबगंज सीमा क्षेत्र पर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच हुई कहासुनी का है.
Atal Pension Scheme: क्या आपको मिल सकती है 5000 रुपये की पेंशन?
भारत सरकार द्वारा संचालित अटल पेंशन योजना (Atal Pension Yojana - APY) देश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और आम नागरिकों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक लोकप्रिय सामाजिक सुरक्षा योजना है। इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की गारंटीड न्यूनतम मासिक पेंशन मिलती है। अटल पेंशन योजना (APY) 2026 क्या है? अटल पेंशन योजना 2026 एक सरकारी रिटायरमेंट स्कीम है, जिसे PFRDA रेगुलेट करता है। यह हर काम करने वाले भारतीय को सब्सक्राइबर के 60 साल का होने के बाद ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 की गारंटीड मंथली पेंशन देती है। यह अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर के लाखों लोगों के लिए बनाई गई है - दुकानदार, ड्राइवर, डिलीवरी वर्कर, घरेलू हेल्पर, किसान और सेल्फ-एम्प्लॉयड — जिनके पास EPF या फॉर्मल पेंशन नहीं है। जब आप जवान होते हैं तो आप हर महीने थोड़ी सी रकम देते हैं, यह आपके बैंक अकाउंट से ऑटो-डेबिट हो जाती है और 60 साल की उम्र से आपको ज़िंदगी भर एक फिक्स्ड पेंशन मिलती है। किसे और कैसे मिलेगी 5,000 रुपये मासिक पेंशन? अटल पेंशन योजना के तहत 5,000 रुपये की अधिकतम मासिक पेंशन प्राप्त करने की शर्तें और प्रक्रिया निम्नलिखित हैं: - पात्रता और आयु सीमा: 18 से 40 वर्ष के बीच का कोई भी भारतीय नागरिक इस योजना से जुड़ सकता है। - 20 वर्षों का न्यूनतम योगदान: योजना के नियमानुसार, 60 वर्ष की आयु में पेंशन शुरू होने के लिए कम से कम 20 वर्षों तक नियमित योगदान करना अनिवार्य है। - योगदान की राशि उम्र पर आधारित: 5,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन पाने के लिए आपकी मासिक किस्त (Premium) इस बात पर निर्भर करती है कि आपने किस उम्र में अकाउंट खुलवाया है। - यदि आप 18 वर्ष की आयु में जुड़ते हैं तो 5,000 रुपये की पेंशन के लिए आपको प्रति माह केवल 210 रुपये जमा करने होंगे। - यदि आप 30 वर्ष की आयु में जुड़ते हैं तो आपको प्रति माह 577 रुपये जमा करने होंगे। - यदि आप अंतिम सीमा यानी 40 वर्ष की आयु में जुड़ते हैं तो आपको प्रति माह 1,454 रुपये का योगदान देना होगा। अटल पेंशन योजना की मुख्य विशेषताएं और नियम - आयकर दाताओं पर प्रतिबंध: 1 अक्टूबर 2022 से लागू नए नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति इनकम टैक्स भरते हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं। - ऑटो-डेबिट सुविधा: बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते से आपकी तय किस्त (मासिक, तिमाही या छमाही) अपने आप कट जाती है। - पति/पत्नी को सुरक्षा: सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद समान पेंशन राशि (5,000 रुपये प्रतिमाह) उनके जीवनसाथी को मिलती है। - नॉमिनी को कॉरपस राशि: पति और पत्नी दोनों के निधन के बाद संचित पेंशन फंड (लगभग 8.5 लाख रुपये) नामांकित व्यक्ति (Nominee) को सौंप दिया जाता है। - टैक्स लाभ: इस योजना में जमा की गई राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80CCD (1) और 80CCD (1B) के तहत कर छूट का लाभ भी मिलता है। कौन एलिजिबल है ? - कोई भी भारतीय नागरिक जिसकी उम्र 18 से 40 साल के बीच हो - सेविंग्स बैंक अकाउंट या पोस्ट-ऑफिस सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए - अकाउंट से जुड़ा एक वैलिड आधार नंबर होना चाहिए - एक रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर (ट्रांज़ैक्शन और बैलेंस अलर्ट के लिए) होना चाहिए अटल पेंशन योजना के फायदे - एक आम फ़ायदा जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, वह यह है कि आपकी ज़िंदगी के बाद आपकी सेविंग्स का क्या होता है। जहाँ ज़्यादातर लोग पेंशन पेमेंट पर ध्यान देते हैं, वहीं अटल पेंशन योजना (APY) आपके परिवार के लिए एक मज़बूत फ़ाइनेंशियल सेफ़्टी नेट भी देती है। - आपकी मौत होने पर आपके जीवनसाथी को बिना किसी रुकावट के वही पेंशन मिलती रहती है। आपके और आपके जीवनसाथी दोनों के गुज़र जाने के बाद पूरी जमा की गई रकमआपके नॉमिनी को ट्रांसफ़र कर दी जाती है। इससे यह पक्का होता है कि आपकी सेविंग्स आपके परिवार को फ़ायदा पहुँचाती रहे और डूबे नहीं। अप्लाई / एनरोल कैसे करें - स्टेप-बाय-स्टेप 2026 - पक्का करें कि आपका सेविंग्स अकाउंट है: आपके पास एक एक्टिव सेविंग्स बैंक अकाउंट या पोस्ट-ऑफिस सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए जो आपके आधार से लिंक हो और एक चालू मोबाइल नंबर हो। - अपना पेंशन स्लैब चुनें: तय करें कि आपको 60 साल के बाद कितनी पेंशन चाहिए - ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 हर महीने। पेंशन जितनी ज़्यादा होगी, मंथली कंट्रीब्यूशन भी उतना ही ज़्यादा होगा। - अपना कंट्रीब्यूशन चेक करें: अपनी अभी की उम्र के हिसाब से अपनी सही मंथली रकम देखने के लिए ऑफिशियल APY कंट्रीब्यूशन चार्ट का इस्तेमाल करें। एक मोटे तौर पर, 18 साल की उम्र में ₹5,000 पेंशन के लिए जुड़ने पर लगभग ₹210/महीना खर्च आता है, जबकि 40 साल की उम्र में उतनी ही पेंशन के लिए जुड़ने पर लगभग ₹1,454/महीना खर्च आता है। - नेट बैंकिंग या ब्रांच से अप्लाई करें: अपने बैंक के नेट बैंकिंग में लॉग इन करें और अटल पेंशन योजना देखें, या अपने बैंक या पोस्ट-ऑफिस ब्रांच में जाकर APY रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म मांगें। आप enps.nsdl.com के ज़रिए भी एनरोल कर सकते हैं। - APY फ़ॉर्म भरें और आधार दें: अपना आधार नंबर, मोबाइल नंबर, नॉमिनी की जानकारी और चुनी हुई पेंशन रकम डालें। आपकी पहचान वेरिफ़ाई करने के लिए आधार-बेस्ड eKYC का इस्तेमाल किया जाता है। - ऑटो-डेबिट सेट अप करें: अपने सेविंग्स अकाउंट से अपने कंट्रीब्यूशन के ऑटो-डेबिट को ऑथराइज़ करें। आप मंथली, क्वार्टरली या हाफ-ईयरली डिडक्शन चुन सकते हैं। - काफ़ी बैलेंस रखें: ऑटो-डेबिट की तारीख पर काफ़ी बैलेंस रखें ताकि कंट्रीब्यूशन बिना किसी पेनल्टी के हो जाए। - अपना PRAN पाएं: एनरोल होने के बाद आपको एक PRAN (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) मिलेगा। आप इसका इस्तेमाल अपना APY स्टेटमेंट और पेंशन स्टेटस चेक करने के लिए करेंगे। - जे. पी. शुक्ला
फ्रेशर्स के लिए नौकरी के बढ़े अवसर
नई दिल्ली, सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की दूसरी छमाही (जुलाई-दिसंबर) के दौरान भारत में फ्रेशर्स के लिए रोजगार के अवसर बेहतर हुए हैं।
भारत, चीन पर निर्भरता कम करने के लिए ला रहा पीएलआई स्कीम
नई दिल्ली, भारत पॉलीसिलिकॉन के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) लाने की तैयार कर रहा है।
फैक्ट चेक: आरक्षण खत्म करने के दावे से मायावती का फर्जी बयान वायरल
मायावती ने अपने एक्स हैंडल पर ठीक इससे उलट कहा कि आरक्षण सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति का महत्वपूर्ण साधन है. इसपर राजनीति नहीं करना चाहिए.
नई स्टडी : बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ने की असली वजह सामने आयी
नई दिल्ली, आज के समय में बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना माता-पिता के लिए आसान नहीं है। पढ़ाई, मनोरंजन से लेकर कभी-कभी बच्चे को शांत कराने तक, मोबाइल, टीवी या टैबलेट परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। इस बीच फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एफआईयू) की एक नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन : बैठकर काम करने वालो की समस्याओ के लिए रामबाण, जाने इसके हेल्थ बेनिफिट्स
नई दिल्ली, लंबे समय तक बैठे रहने, कंधा जकड़े रहने और पैरों में खिंचाव आम हो गया है। ऐसे में योग सिर्फ शरीर को मोड़ने का नाम नहीं है, बल्कि खुद से जुड़ने का एक जरिया है। ऐसे ही योग पद्धति में ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन सबसे शरीर की जकड़न खोलने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने समेत कई शारीरिक स्वास्थ संबंधित समस्याओं का समाधान है।
अंतरिक्ष विज्ञान कीनई पहेली: ग्रैवास्टार में ब्लैक होल की तरह सिंगुलैरिटी या इवेंट होराइजन नहीं, इसके भीतर डार्क एनर्जी
मुद्दा: मानसून का बदलना अब एक स्थायी संकट, जलवायु परिवर्तन की कहानी भी छिपी
मुद्दा:मानसून का बदलना अब एक स्थायी संकट,जलवायु परिवर्तन की कहानी भी छिपी
Mental Strength: दूसरों की नजरों से खुद को देखना छोड़िए, कमियों और खूबियों को स्वयं पहचानना क्यों जरूरी?
Asia: एशिया में बदल रहा शक्ति संतुलन, क्या अमेरिका के भरोसे से आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा संभालेंगे भारत जैसे देश?
गीतों के राज कुमार गोपाल सिंह नेपाली के ११६वें जन्मदिन (११ अगस्त) पर विशेष
सुप्रसिद्ध कवि, लेखक और पत्रकार स्व. गोपाल सिंह नेपाली का आज जन्म दिन है। आज ११ अगस्त १९११ के दिन बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बेतिया में उनका जन्म हुआ था।चूंकि उनका जन्म जन्माष्टमी के दिन हुआ था इसलिए पिता रेल बहादुर ने इनका नाम गोपाल रखा, गोपाल बहादुर सिंह। बाद में इन्होंने अपना ... Read more
ललित सुरजन की कलम से देशबन्धु : चौथा खंभा बनने से इंकार- 24
'यह एक अटपटी सच्चाई है कि दिग्विजय सिंह एक ओर जहां नौकरशाहों के सहारे प्रदेश चला रहे थे;
सत्ता जो फ़ैसला लेने से बचती है
समुद्री 'साझेदारी सिद्धांत' संयुक्त वक्तव्यों में प्रभावशाली लगता है पर उसी समुद्र में चीन की बंदरगाह-निर्माण की तुलना में भारत धीमी गति से आगे बढ़ता है।
शाह से जवाबदेही की मांग की बाढ़ में बहा मानसून सत्र
हैरानी की बात नहीं है कि संसद के मानसून सत्र का तीसरा और आखिरी सप्ताह भी गतिरोध पर ही खत्म होने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।
जंतर मंतर के बाद रांची में लाठीचार्ज: झारखंड के छात्र आंदोलन पर पुलिस की सख्ती, CM हेमंत की अगली रणनीति क्या?
जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप
यूरोप में जो लोग समझते थे कि जलवायु परिवर्तन भविष्य की पीढ़ियों के लिए समस्या है उन्हें इस बार की गर्मियों ने सच्चाई बता दी है. जलवायु परिवर्तन के महंगे और जीवन बदलने वाले आर्थिक नतीजे यूरोप को अपनी चपेट में ले चुके हैं
विचार: कब मिलेगी भाषाई पराधीनता से मुक्ति
किसी के उच्चारण का उपहास करना उपहास करने वाले व्यक्ति की मानसिक पराधीनता का सबसे बड़ा प्रमाण होता है और विश्व की किसी भी संस्कृति में मानसिक रूप से पराधीन व्यक्ति कभी भी सम्मान योग्य नहीं होता।
विचार: सुधार की मांग करता लोकतंत्र
विपक्ष को समझना होगा कि जनता की रुचि इसमें नहीं है कि आप मोदी सरकार को हटाएं, उसकी रुचि इसमें अधिक होगी कि आप उससे बेहतर क्या करेंगे?
कुंभिनासी : लंका से मथुरा तक जाती एक विस्मृत पौराणिक गाथा
भारतकीपौराणिकस्मृतिमेंकुछकथाएँऐसीहैं,जोमुख्यआख्यानोंकेपीछेरहजातीहैं।रामायणकानामआतेहीहमारेसामनेराम,सीता,लक्ष्मण,भरत,हनुमानऔररावणकेविराटचरित्रउभरतेहैं।विभीषण,कुंभकर्णऔरशूर्पणखाभीहमारीसामूहिकस्मृतिकाहिस्साहैं।लेकिनउसीविशालकथा-परंपरामेंएकस्त्रीऐसीभीहै,जिसकीकहानीलंकाकेराजमहलसेआरंभहोकरयमुनाकेकिनारेबसेमधुवनतकपहुँचतीहैऔरअंततःमथुराकीप्राचीनस्मृतिसेजुड़जातीहै। उसकानामहै“कुंभिनासी”। कहींउन्हेंकुंभिनीकहागयाहै,कहींकुम्भीनसी।लोकप्रियकथाओंमेंउन्हेंरावणकीबहनकेरूपमेंयादकियाजाताहै।लेकिनजबरामायणकीअलग-अलगपरंपराओंऔरवंश-विवरणोंकोसाथरखकरदेखाजाताहै,तोउनकासंबंधकुछअधिकजटिलदिखाईदेताहै।यहीजटिलताइसकथाकोऔररोचकबनातीहै।कुंभिनासीकीकहानीकेवलएकराक्षसीस्त्रीकीकथानहींहै।यहपरिवार,सत्ता,प्रेम,प्रतिशोध,विवेकऔरनियतिकीऐसीकहानीहै,जिसकेएकछोरपरलंकाहैऔरदूसरेछोरपरमथुरा। औरइनदोनोंकेबीचखड़ीहै–एकस्त्री। लंकाकेराजवंशसेजुड़ीएकस्त्री रामायणकीवंश-परंपरामेंकुंभिनासीकासंबंधलंकाकेराक्षस-कुलसेअत्यंतनिकटबतायागयाहै।विभीषणजबरावणकोउनकेअपहरणकासमाचारदेतेहैं,तोउनकेसंबंधकोमातृकुलकेमाध्यमसेसमझातेहैं।वेउन्हेंभाइयोंकीबहनकेसमानबतातेहैं।इसीकारणबादकीलोकप्रियपरंपरामेंकुंभिनासीकोरावणकीबहनकेरूपमेंजानागया।लेकिनरामायणकीकथामेंएकदूसरावंश-विवरणभीमिलताहै,जिसमेंकुंभिनासीकोविश्वावसुऔरअनलाकीपुत्रीतथामधुकीपत्नीकहागयाहै।उन्हींसेलवणनामकपुत्रकाजन्मबतायागयाहै।इसलिएकुंभिनासीकोलेकरसबसेसावधानीपूर्णबातयहीहोगीकिउन्हेंरावणकेमातृकुलसेअत्यंतनिकटतारखनेवालीस्त्रीकहाजाए,जिसेकथामेंबहनकेसमानसंबोधितकियागयाहै। भारतीयप्राचीनआख्यानोंमेंरिश्तोंकीभाषाहमेशाआधुनिकजैविकसंबंधोंजैसीसीधीरेखामेंनहींचलती।मातृकुल,पितृकुलऔरकुल-संबंधोंकीअपनीसामाजिकसंरचनाथी।संभवतःइसीकारणकुंभिनासीकीपहचानअलग-अलगपाठ-परंपराओंमेंकुछभिन्नरूपोंमेंदिखाईदेतीहै। लेकिनउनकेजीवनकीअगलीघटनाबिल्कुलस्पष्टहै;औरयहींसेकहानीमेंएकनयामोड़आताहै। मधुकाआगमन उससमयलंकामेंशक्तिकाकेंद्ररावणथा।उसकीमहत्वाकांक्षासीमाओंसेपरेफैलचुकीथी।वहविजय-अभियानपरथाऔरउसकेपीछेलंकाकीसत्ता,सेनाऔरराजकीयप्रतिष्ठाकाभारथा। इसीसमयएकशक्तिशालीराक्षसलंकापहुँचा। उसकानामथा“मधु”। मधुकेवलबलवानहीनहींथा।रामायणकीपरंपरामेंउसकाचित्रणलवणासुरसेबिल्कुलअलगदिखाईदेताहै।वहब्राह्मणोंकासम्मानकरताथा,शरणागतकीरक्षाकरताथाऔरदेवताओंकेसाथभीमैत्रीपूर्णसंबंधरखनेवालाबतायागयाहै।उसकेव्यक्तित्वमेंशक्तिथी,लेकिनवहशक्तिअभीतकअनियंत्रितहिंसामेंनहींबदलीथी। लेकिनकुंभिनासीकोदेखकरमधुकामनबदलगया। उसनेकुंभिनासीकोबलपूर्वकअपनेसाथलेलिया। यहघटनाउससमयहुईजबलंकाकेराजपरिवारकेप्रमुखसदस्यअलग-अलगकार्योंमेंव्यस्तथे।रावणविजय-अभियानपरथा,विभीषणअपनेधार्मिककर्ममेंलगेथेऔरकुंभकर्णनिद्रामेंथा।मधुनेअवसरकालाभउठायाऔरकुंभिनासीकोअपनेसाथमधुपुरीलेगया।कुंभिनासीकायहहरणकेवलएकस्त्रीकेजीवनमेंआएसंकटकीघटनानहींथी।यहआनेवालेएकबड़ेसंघर्षकाबीजथा। क्योंकिकुंभिनासीजिसपरिवारसेआतीथीं,वहाँअपमानकाउत्तरप्रायःतलवारसेदियाजाताथा। औररावणकोजबयहसमाचारमिला,तोउसकाक्रोधस्वाभाविकहीथा। रावणकेलिएयहकेवलकिसीस्त्रीकाअपहरणनहींथा। यहउसकेकुलकोदीगईचुनौतीथी। उसनेअपनीसेनासंगठितकीऔरमधुकीनगरीकीओरबढ़चला। मधुपुरीपहुँचकररावणनेमधुकोखोजा,लेकिनवहवहाँउपस्थितनहींथा।वहाँउसेअपनीहीसंबंधिनीकुंभिनासीदिखाईदी। रावणकाक्रोधअभीशांतनहींहुआथा। लेकिनकुंभिनासीनेउसेदेखतेहीभयसेउसकेचरणपकड़लिए। उनकेसामनेदोपुरुषथे—एकउनकाभाईऔरदूसराउनकापति। औरदोनोंकेबीचशीघ्रहीरक्तपातहोनेवालाथा। कुंभिनासीनेरावणसेअपनेपतिकेप्राणोंकीरक्षाकीप्रार्थनाकी। उन्होंनेअपनेलिएकुछनहींमाँगा। उन्होंनेकेवलइतनाकहाकियदिमधुमारागयातोउनकाजीवनविधवाकेरूपमेंसमाप्तहोजाएगा।उन्होंनेअपनेपतिकेअपराधकेबावजूदउसकेप्राणोंकीयाचनाकी। रावणकाहृदयपिघलगया। उसनेअपनीसंबंधिनीकीप्रार्थनास्वीकारकरली। मधुकोक्षमाकरदियागया। लेकिनबातयहींसमाप्तनहींहुई। रावणनेमधुकोअपनाशत्रुबनानेकेबजायअपनासहयोगीबनालिया।वहचाहताथाकिमधुउसकेसाथदेवताओंकेविरुद्धहोनेवालेअभियानमेंसहयोगकरे। कुंभिनासीनेमधुकोजगायाऔरउसेरावणकेप्रस्तावसेअवगतकराया। मधुनेप्रस्तावस्वीकारकरलिया। इसप्रकारजिसघटनाकीशुरुआतअपहरणऔरप्रतिशोधसेहुईथी,उसकाअंतसंबंधऔरराजनीतिकमैत्रीमेंहुआ।यहकुंभिनासीकेचरित्रकासबसेमहत्वपूर्णक्षणथा। उन्होंनेयुद्धनहींलड़ा। उन्होंनेकोईअस्त्रनहींउठाया। लेकिनउन्होंनेदोशक्तिशालीपुरुषोंकेबीचहोनेवालायुद्धरोकदिया। उनकाहथियारथा–संबंधऔरसंवाद। शिवकावरदान मधुकीशक्तिकेवलउसकीसेनायाउसकेव्यक्तिगतपराक्रममेंनहींथी। उसकेपासभगवानशिवकादियाहुआएकअद्भुतअस्त्रभीथा। रामायणकीकथाकेअनुसारमधुनेघोरतपस्यासेरुद्रकोप्रसन्नकियाथा।उसकीतपस्यासेप्रसन्नहोकरशिवनेउसेएकदिव्यशूलप्रदानकिया। उसअस्त्रकीशक्तिअसाधारणथी। जबतकवहअस्त्रमधुकेहाथमेंरहता,उसेयुद्धमेंपराजितकरनाअत्यंतकठिनथा।वहउसव्यक्तिकाविनाशकरदेताजोमधुकोयुद्धकेलिएचुनौतीदेताऔरफिरवापसअपनेस्वामीकेपासलौटआता। मधुनेशिवसेप्रार्थनाकीकियहशक्तिउसकेवंशमेंबनीरहे। तबउसेबतायागयाकियहवरदानउसकेपुत्रतकपहुँचेगा। जबतकवहदिव्यशूलउसकेपुत्रकेहाथमेंरहेगा,वहसंसारकेप्राणियोंकेलिएलगभगअवध्यरहेगा।मधुनेउसवरदानकोस्वीकारकिया। लेकिनउसेशायदयहपतानहींथाकिभविष्यमेंयहीवरदानउसकेपुत्रकेलिएशक्तिसेअधिकअहंकारकाकारणबननेवालाहै। कुंभिनासीऔरलवणासुर मधुऔरकुंभिनासीकेघरएकपुत्रकाजन्महुआ। ... Read more
विदेशी फंडिंग के नियमन में एक अहम मोड़: प्रावधानों को लेकर जो थोड़े संदेह हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए
जेन-जी को जेन-जी ही रहने दें: देश का सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक ताना-बाना जटिलतम, युवा पीढ़ी के पास 'जादुई छड़ी’ नहीं...
मुस्लिम नाटो की राह: बदलती सामरिक तस्वीर में नए आयाम के संकेत से PAK उत्साहित, भारत को सतर्क रहने की जरूरत
प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए साल 2026 का अगस्त महीना एक अविस्मरणीय और अद्भुत अनुभव लेकर आ रहा है।
ललित सुरजन की कलम से परीक्षा की एक और घड़ी
'असम और पूर्वोत्तर प्रांतों की समस्या आज की नहीं है। वहां सिर्फ हिन्दू और मुसलमान का प्रश्न नहीं है, बात सिर्फ बंगलादेशियों के अवैध अप्रवासन की नहीं है।
असोहा/अचलगंज क्षेत्र में रविवार को हुई बारिश के चलते कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवेपर फिर दस जगहों पर सड़क धंस गई।
उपभोक्तावादी विनाश से आदिवासी आर्थिकी ही बचाएगी
कथित मुख्यधारा ने जनजातीय राजवंशों का राजपूतीकरण किया तो जनजातीय देवी-देवताओं का ब्राह्मणीकरण।
विधानसभा घेराव से पहले रांची में पुलिस अलर्ट, छात्रों को रोकने के लिए कंटीले तारों की बैरिकेडिंग
जागरण संपादकीय: मेटा को चेतावनी
अभी हाल में मेटा ने प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो को हटाने को लेकर जो माफी मांगी, उसे खारिज कर सरकार ने उचित ही किया।
विचार: साधना, सेवा और समरसता की यात्रा
यात्रा पूर्ण होने पर मन में यह विचार बार-बार आया कि भारत को केवल पुस्तकों से नहीं समझा जा सकता। उसे समझना-जीना हो तो ऐसी आध्यात्मिक यात्रा पर चलना पड़ता है।
विचार: खाड़ी पर ऊर्जा निर्भरता के खतरे
असली और स्थायी समाधान ऊर्जा की आत्मनिर्भरता हासिल करने में है, जो स्वच्छ ऊर्जा से ही हासिल हो सकती है।
शिक्षा व्यवस्था अब सुधरेगी या नए संकट में डूब जाएगी
देश में परीक्षा-प्रणाली में सुधार की मांग व्यापक छात्र आंदोलन के बाद तेज हुई है। छात्र पेपर लीक से कहीं अधिक नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने से आक्रोशित थे। दरअसल, उपलब्ध तथ्यों और जांच के आधार पर सरकार और एनटीए ने स्वयं…
आभासी दुनिया में टूट रहे आधुनिक परिवार
सभ्यता को सबसे गहरा घाव किसी युद्ध, महामारी या आर्थिक संकट ने नहीं, उस चमकती स्क्रीन ने दिया है, जिसे हमने सुविधा समझकर जीवन का केंद्र बना लिया। इतिहास में पहली बार संवाद के साधन सबसे अधिक हैं, पर संवाद सबसे कम है…
साइबर अपराध रोकने की सर्वोच्च पहल
मुंबई में एक व्यक्ति ने आतंक-निरोधी एजेंसी का कथित अधिकारी बनकर एक रिटायर डॉक्टर को फोन किया और आतंकियों को धन देने का आरोप लगाते हुए उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया। पीड़ित डॉक्टर ने डरकर उस ‘अधिकारी’ को…
भारतीय आकाश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी सेवा का सपना साकार होने की ओर बढ़ चला है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने विश्वास जताया है कि भारत में 2028 तक इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी सेवा शुरू हो जाएगी…
आपकी एक गलती ला सकती है डायरिया, जानिए बचाव का सही तरीका
नई दिल्ली, डायरिया यानी दस्त एक आम बीमारी लग सकती है, लेकिन अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो यह खासकर छोटे बच्चों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। हालांकि डायरिया से बचाव कोई मुश्किल काम नहीं है। हमारी रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें बच्चों और पूरे परिवार को इस बीमारी से काफी हद तक सुरक्षित रख सकती हैं।
आयुर्वेद का राज : सुबह जल्दी उठकर ऐसे पाए हेल्दी और एनर्जेटिक दिन
नई दिल्ली, आजकल देर रात तक जागना और सुबह देर से उठना आम बात हो गई है। लेकिन यही आदत आगे चलकर बीमारियों का कारण बन जाती है। आयुर्वेदिक परंपरा में ब्रह्ममुहूर्ते उत्तिष्ठेत् यानी ब्रह्ममुहूर्त में उठने की सलाह दी गई है। माना जाता है कि दिन की शुरुआत अगर सही तरीके से हो, तो उसका सकारात्मक असर शरीर और मन दोनों पर पड़ सकता है।
यूपी एनएचएम की सलाह- स्नैक में सेहत का रखें ध्यान, ऐसे करे सही चुनाव
नई दिल्ली, आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर भूख लगने पर आसानी से मिल जाने वाली चीजें खा लेते हैं, जैसे चाय के साथ समोसा, कचौड़ी, चिप्स, नमकीन, मिठाई या पेस्ट्री। इन चीजों का स्वाद अच्छा होता है और थोड़ी देर के लिए पेट भी भर जाता है लेकिन अगर ऐसी चीजें रोज खाने की आदत बन जाए तो वजन बढ़ने और दूसरी स्वास्थ्य परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है।
नशे के खिलाफ लड़ाई को जनआंदोलन बनाएं:सरकार की कोशिश के साथ परिवार, स्कूल भी जुड़ें,संयुक्त प्रयास ही समाधान
'राष्ट्र विरोधी' अवधारणा की यात्रा: शब्दों या लेखन में असहमति से कमजोरी नहीं, अधिक न्यायपूर्ण, नैतिक बनेगा देश
नेपाल को दोबारा वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग तेज हो गई है।
मथुरा के राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में रविवार को हवन यज्ञ और शिला पूजन के साथ ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर कारसेवा का शंखनाद होगा। इसकी तैयारियां जोरों पर चल रहीं हैं और साधु-संत भी पहुंचना शुरू हो गए हैं।
09 August 2026 Rashifal: आज का दिन आपके लिए कैसा रहने वाला है, आइए इस राशिफल से जानते हैं।
शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक का समर्थन किया है, जो भाजपा के साथ उनके संबंधों में सुधार का संकेत है। यह कदम मोदी सरकार की विधेयक को शीघ्र पारित कराने की गंभीरता को दर्शाता है, जिससे महिला आरक्षण लागू होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
विचार: दोयम दर्जे के निर्माण का सिलसिला
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के तुरंत बाद धंसने से देश में बुनियादी ढांचे के निर्माण की खराब गुणवत्ता उजागर हुई है
अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन ने रखी आजादी की नींव
आज से ठीक 84 साल पहले 9 अगस्त, 1942 को देश की सड़कों पर ऐसा जनसैलाब उमड़ आया था, जिसकी स्मृतियां आज भी भारतीयों को प्रेरित करती हैं। 9 अगस्त को ही ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत हुई थी…
स्वतंत्रता दिवस के बारे में क्या मैं बताऊं कैसे कह दूं कि, आजाद भारत में मैं रहता हूं, स्वतंत्रता दिवस को, किस खुशी में मैं मनाऊं देखकर देश की हालत, चिन्ता में मैं रहता हूं। कहां खो गए वे हंसते-खेलते आपसी भाईचारे उन खुशी के हर पल को याद मैं करता हूं, माना बहुत विकास, ... Read more
भारत की आत्मा एवं प्रकृति के संरक्षक हैं आदिवासी
विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त 2026) पर विशेषः विश्व आदिवासी दिवस केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजनभर नहीं है, बल्कि यह उस मूल चेतना का अभिनंदन है जिसने मानव सभ्यता को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की कला सिखाई। भारत के आदिवासी समुदाय केवल जनसंख्या का एक वर्ग नहीं हैं, बल्कि वे इस राष्ट्र की सांस्कृतिक ... Read more
अपनी आजादी की 80वीं वर्षगांठ की ओर खिसकते हमारे देश की सबसे बड़ी चुनौती यही है। हमें अपनी प्रतिभाओं के संरक्षण और संवर्द्धन पर ईमानदारी से काम करना होगा। इसी पर हमारी तरक्की, सामाजिक विकास और सीमाओं की सुरक्षा का भार टिका हुआ है…
टेलीमैटिक्स के सहारे अब आपके गाड़ी चलाने के तरीके से तय होगा बीमा प्रीमियम, समझिए कैसे?
किसी भी वाहन धारक के लिए थर्ड पार्टी बीमा बहुत जरूरी होता है, ताकि दुर्घटना की स्थिति में तीसरे व्यक्ति को हुई जान-माल की क्षति की भरपाई की जा सके। लेकिन बीमा कम्पनियों ने अब जो नया रुख अख्तियार किया है, उसका सार-सत्य यह है कि अब आपके गाड़ी चलाने के तरीके से ही यह तय होगा कि आपको कितना बीमा प्रीमियम देना होगा। यानी कि रफ ड्राइविंग करने वालों को अब ज्यादा बीमा प्रीमियम अदा करना पड़ेगा। इस हेतु बीमा कम्पनियों ने टेलीमैटिक्स तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है। वस्तुतः टेलीमैटिक्स (Telematics) एक ऐसी तकनीक है, जिसमें वाहन में लगे सेंसर, जीपीएस, मोबाइल ऐप या OBD (On-Board Diagnostics) डिवाइस के जरिए गाड़ी चलाने से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाता है। फिर बीमा कंपनियां इस डेटा का विश्लेषण करके यह तय करती हैं कि चालक कितना सुरक्षित वाहन चलाता है और उसी के आधार पर अब बीमा प्रीमियम भी तय किया जा सकता है। इससे वाहन धारकों और चालकों की जेब कटनी स्वाभाविक है। इसे भी पढ़ें: बैलेंस होने के बाद भी इन वजहों से ब्लैकलिस्ट हो सकता है फास्टैग कार्ड, ऐसे कर सकते हैं ठीक # जानिए, टेलीमैटिक्स कैसे काम करती है? आपको पता होना चाहिए कि दिन प्रतिदिन तकनीकी दुनिया में नए नए बदलाव आ रहे हैं। इसी तरह से टेलीमैटिक्स तकनीक भी है जो आपके वाहन में लगी होती है और निम्नलिखित जानकारियां रिकॉर्ड करती है:- वह वाहन की गति (Speed), अचानक ब्रेक लगाने या तेज एक्सेलरेशन की आदत, तीखे मोड़ (Harsh Cornering), रात में वाहन चलाने की आवृत्ति, प्रतिदिन या प्रतिवर्ष तय की गई दूरी, दुर्घटना या टक्कर की जानकारी, वाहन की लोकेशन और यात्रा का पैटर्न भी समझती है और उसका विश्लेषण करती है। # समझिए, इससे बीमा प्रीमियम कैसे तय होगा? सुरक्षित चालक: यदि आप नियमों का पालन करते हैं, सीमित गति रखते हैं और सावधानी से वाहन चलाते हैं, तो प्रीमियम कम हो सकता है। जोखिमपूर्ण चालक: तेज रफ्तार, बार-बार अचानक ब्रेक, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन जैसी आदतें प्रीमियम बढ़ा सकती हैं। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं- अच्छे ड्राइवरों को कम प्रीमियम का लाभ। सड़क सुरक्षा को बढ़ावा। दुर्घटना होने पर तेज क्लेम प्रक्रिया। चोरी होने पर वाहन की लोकेशन ट्रैक करने में मदद। ड्राइविंग व्यवहार सुधारने के लिए फीडबैक। इससे जुड़ी संभावित चुनौतियां इसप्रकार हैं- निजता (Privacy) को लेकर चिंता। हर समय लोकेशन और ड्राइविंग डेटा रिकॉर्ड होना। डेटा सुरक्षा और उसके दुरुपयोग का जोखिम। भारत में स्थिति निम्नलिखित है:- भारत में कुछ बीमा कंपनियां Usage-Based Insurance (UBI) और Pay As You Drive/Pay How You Drive जैसे मॉडल पर टेलीमैटिक्स आधारित मोटर बीमा योजनाएं शुरू कर चुकी हैं। भविष्य में यह व्यवस्था और व्यापक होने की संभावना है। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि टेलीमैटिक्स मोटर बीमा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। अब केवल वाहन का मॉडल या इंजन क्षमता ही नहीं, बल्कि आप वाहन कितनी जिम्मेदारी से चलाते हैं, यह भी आपके बीमा प्रीमियम को प्रभावित कर सकता है। इससे सुरक्षित ड्राइविंग को प्रोत्साहन मिलेगा और जिम्मेदार चालकों को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
रोज 5 मिनट पिंच मयूरासन और मिलेंगे मजबूत कंधे और फिट बॉडी
नई दिल्ली, बढ़ती उम्र और कामकाज के बीच शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। आगे चलकर यही शारीरिक समस्याएं बड़ी बीमारियों का कारण बनती है। हालांकि, योग और नियमित खान-पान से इस पर सुधार किया जा सकता है। ऐसे ही चुनौतीपूर्ण और शक्तिशाली आसनों में से एक है पिंच मयूरासन, जिसे अंग्रेजी में 'फेदर पीकॉक पोज' भी कहा जाता है।
बच्चों की ग्रोथ के लिए फल और सब्जियां जरुरी, उम्र के हिसाब से दें मात्रा
नई दिल्ली, बच्चों की अच्छी सेहत और सही विकास के लिए फल और सब्जियां बहुत जरूरी हैं। छोटी उम्र में बच्चे जो खाना सीखते हैं, उसका असर उनकी आगे की खाने की आदतों पर भी पड़ता है। इसलिए शुरुआत से ही बच्चों को अलग-अलग तरह की सब्जियां और फल खिलाने की कोशिश करनी चाहिए।
अगस्त क्रांति विशेष: जब बिना सेनापति के जीती गई जंग
जब औपनिवेशिक सत्ता ने नेतृत्व को सलाखों के पीछे धकेला, तो भारत का आम नागरिक स्वयं अपना नेता बन गया।
'बातचीत जारी रहेगी, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे': पेजेशकियन की अमेरिका को धमकी; होर्मुज के पास दो धमाके
यह गतिरोध टूटे:लोकतंत्र में जीत केवल विधेयक पारित कराने में नहीं, असहमति के बावजूद, सहमति का रास्ता खोजने में
मनोनयन की संवैधानिक मर्यादा: सत्ता बचाने का रास्ता या विशेषज्ञों के लिए संवैधानिक खिड़की?
संविधान में मनोनयन का उद्देश्य विशेषज्ञता और विशिष्ट अनुभव वाले लोगों को विधायिका में लाना था।
Aaj Ka Rashifal: इन 4 राशि वालों का किस्मत देगी साथ, धन लाभ से लेकर मान-सम्मान तक बनेंगे योग
8 August 2026 Rashifal: आज का दिन आपके लिए कैसा रहने वाला है, आइए इस राशिफल से जानते हैं।
जीवन धारा: तकनीक मशीनों की मोहताज नहीं होती, समझें नवाचार की ताकत
जीवन धारा: तकनीक मशीनों की मोहताज नहीं होती, समझें नवाचार की ताकत--Great Technology Emerge Without Big Machines? C V Raman Lesson on Innovation
एआई एक नशे जैसा है: आसान जवाबों की लत कहीं युवाओं से संघर्ष की सीख तो नहीं छीन रही; उठ रहे गंभीर सवाल--AI Becoming an Addiction, How Overdependence May Affect Thinking and Learning
मुद्दा: क्या हर मानसून में बारिश ही दोषी है? नई सड़कें धंसने और शहरों के डूबने से निर्माण व्यवस्था पर उठे सवाल-Monsoon and Infrastructure: Why Are Roads Sinking and Cities Flooding Every Year
अनुसंधान अब रफ्तार पकड़ेगा: निजी क्षेत्र पहली बार सरकारी से अधिक, पहिया घूमना शुरू हुआ है, अब और तेजी से...
असहमति से नफ़रत तक: लोकतंत्र की नैतिक परीक्षा
सत्याग्रह का उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी को पराजित करना नहीं, बल्कि उसके भीतर सोई हुई नैतिक संवेदना को जगाना है।
रेपो दर पर रिजर्व बैंक का बड़ा फैसला
रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति में ज़्यादा उदार रुख अपनाकर अर्थव्यवस्था की विकास दर को बढ़ावा देने का जोखिम उठाया है।

