चुनाव उनके - व्यवस्था हमारी (व्यंग्य)
दुनिया जानती है, हमारे यहां चुनाव आन, बान और शान से होते हैं। किसी भी स्तर का चुनाव कराने की व्यवस्था करने में हम सिद्धहस्त हैं। हर तरह का चुनाव इतने सौम्य, सरल, सहज, सहयोगी, नैतिक और मानवीय तरीके से होता है कि हमारी व्यवस्था महान मानी जाने लगी है। विश्वगुरुओं की पवित्र धरती के वासी हैं हम। स्वाभाविक है इन वजहों से दुनिया भर में इज्ज़त बढ़ जाती है। विद्वान लोग अपने अपने नजरिए से इसे देखते और समझते हैं। दूसरे देशों के राजनेता और शक्तिशाली शासक हमारी कई व्यवस्थाओं को पसंद करने लगते हैं और चाहते हैं कि उनके देश में ऐसी चुनाव व्यवस्था हो ताकि उनके यहां भी हमारी जैसी आन, बान और शान रहने लगे। पिछले दिनों दुनिया के सबसे ज़्यादा ताक़तवर शासक ने अपनी मानसिक इच्छा ज़ाहिर की कि उनके देश में भी विश्वगुरुओं के देश जैसी चुनाव व्यवस्था होनी चाहिए। ‘अपना देश बचाओ’ अभियान के अंतर्गत कहा कि मतदान के लिए वैध पहचान पत्र ज़रूरी है। वे हमारी चुनाव व्यवस्था से बहुत खुश हैं लगता है वे हमारी दूसरी विशेषताएं भी समाहित करना चाहते हैं। जैसा शोर शराबा, जुलूस, पोस्टर, बैनर, अपशब्द, मार पिटाई वगैरा यहां होते हैं वैसे ही वहां भी हों। चुनावी उम्मीदवार एक दूसरे पर व्यक्तिगत, पारिवारिक, क्षेत्रीय, धार्मिक और जातीय छींटाकशी करें। ऐसे प्रभावशाली नारों से उदगार प्रकट करें कि खूब सारी भावनाओं को ठेस पहुंचे। इसे भी पढ़ें: बरसात में तैरते अवसर (व्यंग्य) वे यह भी चाहते होंगे कि चुनाव में ऐसे वायदे किए जाएं जिनको पूरा करने की उम्मीद न हो। ऐसा लगे रंगीन ख़्वाब दिखाए जा रहे हैं। ऐसे लोग चुनाव लड़ सकें जिनकी कोई सामाजिक, नैतिक और शैक्षिक योग्यता न हो। ऐसे लोगों को उम्मीदवार बना दिया जाए जिनकी जाति, सम्प्रदाय और धर्म के इतने वोटर उनके चुनाव क्षेत्र में हों कि चुनाव हारने की कोई गुंजाइश न हो। अधिकतर उम्मीदवारों का स्वच्छता, पर्यावरण और जन सुविधाओं से कोई नाता न हो। उन पर संजीदा किस्म के दर्जनों मुकदमे दायर हों जिनकी लिस्ट जारी की जाए तो उनके क्षेत्र वासियों को गर्व महसूस हो कि क्या आन, बान और शान वाला उम्मीदवार खड़ा किया है। अगर ऐसा व्यक्ति जीत जाए तो मनमाने काम करे। जनता की पीठ पर अपनी इच्छाओं की कीलें ठोके। सबसे नकली प्यार से बोले और झूठे सहयोग की जफ्फियां डालें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उल्लू बन सकें। ऐसी पार्टी टिकट दे जिसे घोड़ों के व्यापार का अच्छा खासा अनुभव हो। चुनावी सभाओं में महिलाओं को टिकट देने की बात जोर शोर से करे लेकिन वास्तव में ऐसा बिलकुल न करे। महिलाओं की वोट हथियाने के लिए जो हो सके करे। अनपढ़ कुबुद्धि लोग चुनाव लड़ें और जीत भी जाएं और पढ़े लिखे प्रशासकों को पढाएं और समझाएं। चुनाव में जितना धन खर्च करें उससे बहुत कम बताया जाए ताकि भ्रष्टाचार जैसी ज़रूरी संस्कृति निरंतर पनपती रहे। आशा है शक्तिशाली शासक चुनावी सफलता के लिए विश्वगुरुकुल के ख्याति प्राप्त सुझाव ज़रूर अपनी चुनाव प्रणाली में सम्मिलित करेंगे और अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी मानते हुए हमारा शुक्रिया अदा भी करेंगे। - संतोष उत्सुक
‘बिका हुआ माल वापस नहीं होगा’ लिखकर दुकानदार आपको नहीं कर सकता परेशान! जानिए आपका असली अधिकार
दुकानों पर अक्सर एक बोर्ड लगा दिखाई देता है- “बिका हुआ माल वापस नहीं होगा”, “No Return, No Exchange” या “No Refund”। ऐसे बोर्ड देखकर कई ग्राहक मान लेते हैं कि सामान में खराबी निकलने पर भी दुकानदार उसे वापस लेने, बदलने या पैसा लौटाने के लिए बाध्य नहीं है। लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है। भारत में उपभोक्ताओं को Consumer Protection Act, 2019 के तहत कई अधिकार मिले हैं। नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) के उपभोक्ता हैंडबुक में भी स्पष्ट किया गया है कि “Goods once sold will not be taken back”, “No exchange” या “No refund under any circumstances” जैसे बोर्ड अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आ सकते हैं और ऐसे बोर्ड अपने आप उपभोक्ता के कानूनी अधिकार खत्म नहीं कर देते। क्या दुकानदार हर सामान वापस लेने के लिए बाध्य है? यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। केवल इसलिए कि ग्राहक ने सामान खरीदने के बाद अपना मन बदल लिया, हर स्थिति में दुकानदार को सामान वापस लेकर रिफंड देना अनिवार्य नहीं हो जाता। लेकिन यदि सामान में: - निर्माण संबंधी खराबी हो, - सामान विज्ञापन या बताए गए विवरण के अनुरूप न हो, - गलत उत्पाद दिया गया हो, - सामान नकली या दोषपूर्ण हो, - गुणवत्ता, मात्रा या कीमत को लेकर गलत जानकारी दी गई हो, तो उपभोक्ता को शिकायत और उचित राहत मांगने का अधिकार है। दुकानदार का ‘नो रिफंड’ बोर्ड क्यों हमेशा अंतिम फैसला नहीं है? दुकानदार अपनी दुकान की रिटर्न पॉलिसी बना सकता है, लेकिन वह ऐसी पॉलिसी के जरिए कानून के तहत मिलने वाले उपभोक्ता अधिकारों को खत्म नहीं कर सकता। यदि वस्तु में वास्तविक दोष है या उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापार व्यवहार हुआ है तो केवल “बिका हुआ माल वापस नहीं होगा” लिख देने से दुकानदार की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। इसे भी पढ़ें: क्या आपने ज़ीरो बैलेंस पर खुलवाया पीएम जन धन खाता? 10000 तक ओवरड्राफ्ट की सुविधा, संख्या 59 करोड़ के पार उपभोक्ता को क्या राहत मिल सकती है? Consumer Protection Act के तहत उपभोक्ता आयोग, मामले की परिस्थितियों के आधार पर: - सामान की खराबी दूर करने, - दोषपूर्ण सामान बदलने, - भुगतान की गई राशि वापस करने, - हुए नुकसान के लिए मुआवजा देने, - अनुचित व्यापार व्यवहार बंद करने जैसे आदेश दे सकता है। खरीदारी के बाद क्या संभालकर रखें? किसी विवाद की स्थिति में ये चीजें आपके काम आ सकती हैं: - खरीद का बिल या कैश मेमो - ऑनलाइन ऑर्डर की रसीद - भुगतान का प्रमाण - प्रोडक्ट की फोटो या वीडियो - दुकानदार या कंपनी के साथ हुई बातचीत - वारंटी या गारंटी कार्ड बिल लेना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि शिकायत के दौरान यह खरीदारी का महत्वपूर्ण प्रमाण बन सकता है। दुकानदार सामान बदलने या पैसा लौटाने से मना करे तो क्या करें? सबसे पहले दुकानदार या कंपनी को लिखित या डिजिटल माध्यम से अपनी शिकायत बताएं। यदि समाधान नहीं मिलता है तो National Consumer Helpline (NCH) के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता क्या करें: - टोल-फ्री नंबर 1915 पर संपर्क कर सकते हैं। - 1800-11-4000 पर भी शिकायत संबंधी सहायता ली जा सकती है। - WhatsApp नंबर 8800001915 का उपयोग किया जा सकता है। - NCH पोर्टल, मोबाइल ऐप और UMANG ऐप के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। NCH देशभर के उपभोक्ताओं के लिए प्री-लिटिगेशन शिकायत निवारण मंच के रूप में काम करता है और 17 भाषाओं में शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। उपभोक्ता आयोग में कब जा सकते हैं? यदि कंपनी या दुकानदार से समस्या का समाधान नहीं होता तो उपभोक्ता उचित Consumer Commission में शिकायत कर सकता है। Consumer Protection Act के तहत उपभोक्ता को दोषपूर्ण सामान, सेवा में कमी, अनुचित व्यापार व्यवहार और अन्य उपभोक्ता विवादों में राहत मांगने का अधिकार है। एक कंज्यूमर के तौर पर कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत आपके पास कई अधिकार हैं: 1. सुरक्षा का अधिकार: आप उन सामानों से सुरक्षित हैं जो जान और माल के लिए खतरनाक हैं। 2. जानकारी पाने का अधिकार: आपको सामान खरीदने से पहले उसकी क्वालिटी, मात्रा और कीमत जानने का अधिकार है। 3. चुनने का अधिकार: आपको अच्छी कीमतों पर अलग-अलग तरह के सामान और सर्विस मिलनी चाहिए। 4. सुने जाने का अधिकार: आपके हितों पर सही फोरम में विचार किया जाना चाहिए। 5. मुआवजे का अधिकार: अगर आपको खराब सामान या गलत तरीकों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो आप मुआवज़ा मांग सकते हैं। अगर कोई दुकानदार आपको परेशान करता है या आपके अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो आप दुकानदार को लीगल नोटिस देकर कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं, जो सुधार की मांग करने के लिए एक फॉर्मल कम्युनिकेशन का काम करता है। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट ऐसी शिकायतों को दूर करने और यह पक्का करने के लिए एक फ्रेमवर्क देता है कि आपके अधिकारों का सम्मान किया जाए। हालांकि, केवल पसंद बदल जाने या बिना किसी दोष के सामान वापस करने का अधिकार हर मामले में स्वतः नहीं मिलता। इसलिए खरीदारी से पहले रिटर्न और एक्सचेंज पॉलिसी पढ़ें, बिल जरूर लें और समस्या होने पर पहले दुकानदार या कंपनी से संपर्क करें। समाधान न मिलने पर National Consumer Helpline या Consumer Commission का सहारा लिया जा सकता है। - जे. पी. शुक्ला
देश में बैंकिंग सुविधाओं को हर व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) आज दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजनाओं में शामिल है। इस योजना के तहत बिना बैंक खाता रखने वाले लोगों को जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खोलने की सुविधा दी जाती है। इसके साथ ही पात्र खाताधारकों को 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा समेत कई अन्य लाभ मिल सकते हैं। वित्त मंत्रालय की ताजा जानकारी के अनुसार, 26 अगस्त 2026 तक देश में प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 59.15 करोड़ खाते खोले जा चुके थे। इससे पहले 19 अगस्त 2026 तक खातों की संख्या 59.09 करोड़ दर्ज की गई थी। क्या है प्रधानमंत्री जन धन योजना? प्रधानमंत्री जन धन योजना को 28 अगस्त 2014 को राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन के रूप में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य बैंकिंग सुविधा से वंचित लोगों को बचत खाता, बीमा, पेंशन, ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ना है। इसे भी पढ़ें: आधार कार्ड दिखाइए तीन लाख का लोन ले जाइए, जानें क्या है ये स्कीम और सच्चाई योजना के तहत पात्र व्यक्ति बैंक शाखा या बैंक मित्र के माध्यम से बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBD Account) खोल सकता है। क्या जन धन खाता जीरो बैलेंस पर खुलता है? हां। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले जाने वाले बेसिक बैंक खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की अनिवार्यता नहीं होती। योजना की मुख्य सुविधाएं: - जीरो बैलेंस पर बैंक खाता। - जमा राशि पर बैंक के नियमों के अनुसार ब्याज। - RuPay डेबिट कार्ड की सुविधा। - सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे खाते में पाने के लिए DBT की सुविधा। - पात्र खाताधारकों को 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा। - बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने का अवसर। क्या हर खाताधारक को मिलेंगे 10,000 रुपये? यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। जन धन खाता खोलते ही सभी लोगों को 10,000 रुपये नहीं मिल जाते। जन धन योजना में 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा केवल पात्र खाताधारकों के लिए उपलब्ध है। ओवरड्राफ्ट का मतलब बैंक द्वारा तय शर्तों के आधार पर खाते में उपलब्ध बैलेंस से अधिक राशि निकालने की सुविधा है। यह मुफ्त सरकारी सहायता नहीं, बल्कि एक प्रकार की बैंकिंग क्रेडिट सुविधा है, जिसे नियमों के अनुसार वापस करना होता है। ओवरड्राफ्ट सुविधा के लिए क्या है नियम? ओवरड्राफ्ट की सुविधा बैंक की पात्रता शर्तों के अधीन होती है। बैंक खाते के संचालन, ग्राहक की पात्रता और अन्य नियमों के आधार पर फैसला करते हैं कि खाताधारक को कितनी ओवरड्राफ्ट सीमा मिलेगी। इसलिए - - सभी जन धन खाताधारकों को अपने आप 10,000 रुपये नहीं मिलते। - ओवरड्राफ्ट की राशि बैंक की मंजूरी और पात्रता पर निर्भर करती है। - यह राशि बाद में चुकानी होती है। - खाते से जुड़ी शर्तों की जानकारी अपने बैंक से लेना जरूरी है। कितनी महिलाओं के पास हैं जन धन खाते? वित्त मंत्रालय की 19 अगस्त 2026 तक की जानकारी के अनुसार, देश में 32.92 करोड़ महिला लाभार्थियों के जन धन खाते थे। वहीं, बड़ी संख्या में खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। 26 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार कुल 59.15 करोड़ खातों में से लगभग 32.96 करोड़ खाते महिला लाभार्थियों के थे। RuPay कार्ड पर कितना बीमा मिलता है? PMJDY के तहत RuPay डेबिट कार्ड की सुविधा भी दी जाती है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए नए पात्र PMJDY खातों के RuPay कार्ड पर नियमों और शर्तों के अनुसार 2 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध है। पुराने खातों के लिए अलग शर्तें और कवर लागू हो सकते हैं। जन धन खाता कहां खुलवाएं? जन धन खाता खुलवाने के लिए: - नजदीकी बैंक शाखा जाएं। - बैंक मित्र या Business Correspondent से संपर्क करें। - बैंक से जरूरी दस्तावेजों की जानकारी लें। - खाता खोलने से पहले KYC नियमों को समझें। योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक PMJDY पोर्टल और टोल-फ्री नंबर 1800 11 0001 तथा 1800 180 1111 का उपयोग किया जा सकता है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध है और योजना के खातों की संख्या अब 59 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। पात्र खाताधारकों को 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिल सकती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 10,000 रुपये सभी खाताधारकों को स्वतः नहीं मिलते और ओवरड्राफ्ट एक क्रेडिट सुविधा है, जिसे बैंक की शर्तों के अनुसार वापस करना होता है। इसलिए ओवरड्राफ्ट लेने से पहले अपने बैंक से ब्याज, पात्रता और भुगतान की शर्तों की पूरी जानकारी जरूर लें। - जे. पी. शुक्ला
क्या ऑफिस में प्रमोशन नहीं चाहती महिलाएं?
कुछ वैश्विक स्टडी दिखाती हैं कि कई महिलाएं अपने वर्कप्लेस में आगे बढ़कर 'लीन इन' होने के बजाए 'लीन आउट' हो रही हैं.
शाकाहार है स्वस्थ और संतुलित दुनिया का आधार
विश्व शाकाहार दिवस (1 अक्टूबर 2026) पर विशेषः बढ़ती बीमारियों, तनावपूर्ण जीवन और पर्यावरणीय संकटों के बीच मनुष्य को अपने खानपान पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। जीवन की गुणवत्ता और निरोगता के लिए आहार में परिवर्तन के स्वर आज दुनिया के अनेक हिस्सों में सुनाई दे रहे हैं। ... Read more
पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने पांच विभागों में ग्रुप-बी के विभिन्न पदों पर भर्ती निकाली है। इच्छुक उम्मीदवार 22 अक्तूबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। भर्ती से जुड़ी योग्यता और आयु सीमा की जानकारी यहां देखें।
विश्व साहित्य का आकाश: बोर्खेज- नहीं मिला नोबेल पुरस्कार
बोर्खेज ने कविता, कहानी, लेख लिखे, मगर उपन्यास न लिखा। मान्यता है, जब तक आप उपन्यास नहीं लिखते हैं, आप साहित्यकार नहीं कहलाते हैं। उन्हें नोबेल मिलने का एक कारण यह भी रहा।
सड़कें, महिलाएं और कड़वी हकीकत: दिल्ली से बिहार तक की घटनाएं पूछ रहीं तीखे सवाल,अंधेरे में डराना कितना आसान?
सुप्रीम कोर्ट की चिंताएं: कठघरे में सरकार, कानून व्यवस्था से लेकर शिक्षा तक एकसाथ पांच से अधिक मामले
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जीवन धारा: जीवन को भाग्य के हवाले मत करो
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दूसरा पहलू: 'ओम जय जगदीश हरे' जिसने घर-घर पहुंचाई, उस शख्स की कहानी कितनी दिलचस्प है?
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1 अक्तूबर से नए नियम: कल से होने जा रहे हैं ये जरूरी बदलाव, जानें क्या बदलेगा और क्या नहीं
1 अक्तूबर 2026 से LPG सब्सिडी, FD और जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े कई नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं।
आज का राशिफल: वृश्चिक राशि वाले खानपान पर विशेष ध्यान दें, पढ़ें 30 सितंबर का राशिफल
आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। जरूरत और इच्छा के बीच अंतर समझकर खर्च करेंगे तो आने वाले समय में आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उत्तर पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र के बदरपुर खादर गांव के करीब 4,000 लोग आज भी बिजली, पानी, स्वास्थ्य और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ललित सुरजन की कलम से कांग्रेस: ठोस कदम उठाने की जरूरत
'कांग्रेस भले ही देश की सबसे पुरानी पार्टी हो, लेकिन उसके शीर्ष नेतृत्व को याद रखना चाहिए कि बदलते हुए समय के साथ नए औजारों की भी जरूरत होती है।
भारत की नज़र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट पर
कई देशों से मज़बूत समर्थन के बावजूद, महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं।
गांधी की भागीदारी उनके सभी अखबारों में भरपूर थी लेकिन इसमें शायद सबसे ज्यादा थी।
एआई से जुड़े महाविनाश के खतरेः नियंत्रित कमान जरूरी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आज मानव सभ्यता की सबसे प्रभावशाली तकनीकी उपलब्धियों में शामिल है। चिकित्सा, शिक्षा, अंतरिक्ष, विज्ञान, कृषि, उद्योग और प्रशासन से लेकर रोजमर्रा के जीवन तक इसके उपयोग ने विकास की गति को अभूतपूर्व बनाया है। लेकिन जितनी तेजी से एआई की क्षमताएं बढ़ रही हैं, उतनी ही गंभीरता से उसके दुरुपयोग ... Read more
विचार: एक और हारी हुई लड़ाई लड़ता विपक्ष
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना अभियान तेज कर रहा है
विचार: अस्थिरता से घिरा पाकिस्तान
पाकिस्तान इस समय राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और बिगड़ती आंतरिक सुरक्षा जैसी कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, जिसमें टीटीपी और बीएलए का बढ़ता आतंकवाद प्रमुख है
सुप्रीम कोर्ट ने महंगी दवाओं, खासकर कैंसर की दवाओं की मनमानी कीमतों पर कड़ी आपत्ति जताई है, इसे 'सामूहिक संहार' और 'दिनदहाड़े डकैती' बताया
इंसान और प्रकृति ने मिलकर बनाए जिंदा जड़ों वाले पुल
मेघालय, यानी ‘मेघों का घर’, अपनी असीम प्राकृतिक सुंदरता और रिमझिम बारिश के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस खूबसूरत राज्य में एक ऐसा आश्चर्य छिपा है, जो मानव बुद्धिमत्ता और प्रकृति के अद्भुत तालमेल की…
बाजार में गिरावट को कैसे रोका जाए
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भी गिरावट जारी रही। सोमवार को जहां सेंसेक्स और निफ्टी छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए, वहीं कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन भी निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए…
आधार कार्ड दिखाइए तीन लाख का लोन ले जाइए, जानें क्या है ये स्कीम और सच्चाई
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ के तहत सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर हर व्यक्ति को 3 लाख रुपये तक का लोन दिया जा रहा है। वीडियो और विज्ञापनों में लोगों को आकर्षित करने के लिए कहा जा रहा है कि आधार कार्ड दिखाइए और आसानी से लाखों रुपये का कर्ज पाइए। लेकिन क्या वास्तव में केंद्र सरकार ऐसी कोई योजना चला रही है? इस दावे की सच्चाई जानना जरूरी है, क्योंकि फर्जी सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों से व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। इसे भी पढ़ें: अटल पेंशन योजना: अगर 60 की आयु के बाद हर महीने 5 हजार रुपये की पेंशन लेना चाहते हैं तो ऐसे करें आवेदन क्या है वायरल दावा? सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे में कहा जा रहा है कि: - केंद्र सरकार ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ चला रही है। - हर व्यक्ति को 3 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है। - लोन के लिए केवल आधार कार्ड की जरूरत है। - प्रक्रिया आसान और तुरंत लोन मिलने वाली बताई जा रही है। हालांकि, इस दावे को सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी ने फर्जी बताया है। PIB Fact Check ने क्या कहा? PIB Fact Check के अनुसार, ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ के तहत आधार कार्ड पर हर व्यक्ति को 3 लाख रुपये का लोन देने का दावा फर्जी है। केंद्र सरकार ऐसी कोई योजना नहीं चला रही है। ऐसे में सरकार ने लोगों को लुभावने दावों और फर्जी योजनाओं से सावधान रहने की सलाह दी है। क्या सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर मिल सकता है 3 लाख का लोन? इस सवाल का सीधा जवाब है - नहीं, केंद्र सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है जिसमें सिर्फ आधार कार्ड दिखाने पर हर व्यक्ति को 3 लाख रुपये का लोन मिल जाए। किसी भी वैध बैंक या वित्तीय संस्था से लोन लेने के लिए आमतौर पर: - पहचान संबंधी दस्तावेज - पता प्रमाण - आय या कारोबार से जुड़ी जानकारी - बैंकिंग रिकॉर्ड - पात्रता की जांच जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं। लोन की शर्तें संबंधित बैंक और योजना के अनुसार अलग-अलग होती हैं। फिर 3 लाख रुपये के लोन वाली बात कहां से आई? केंद्र सरकार की कुछ वास्तविक योजनाओं में पात्र लाभार्थियों को लोन की सुविधा मिलती है। उदाहरण के लिए, पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पात्र पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए बिना संपार्श्विक 3 लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान है। हालांकि, यह सभी लोगों के लिए केवल आधार कार्ड के आधार पर मिलने वाला लोन नहीं है। योजना के लिए तय पात्रता और अन्य शर्तें भी लागू होती हैं। इसलिए पीएम विश्वकर्मा जैसी वास्तविक योजना और फर्जी ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ के दावे में अंतर समझना जरूरी है। ऐसे फर्जी लोन ऑफर से कैसे बचें? यदि आपको सोशल मीडिया, WhatsApp, YouTube या SMS पर 3 लाख रुपये के सरकारी लोन का ऑफर मिले, तो: - किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। - आधार नंबर और बैंकिंग जानकारी साझा न करें। - OTP, ATM PIN या UPI PIN किसी को न बताएं। - लोन के नाम पर पहले पैसे जमा करने से बचें। - अनजान ऐप डाउनलोड न करें। - योजना की जानकारी आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर जांचें। असली सरकारी योजनाओं की जानकारी कहां देखें? केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के लिए MyScheme पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, किसी संदिग्ध सरकारी दावे की सच्चाई जानने के लिए PIB Fact Check की आधिकारिक जानकारी देखना बेहतर है। सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर ‘प्रधानमंत्री लोन योजना’ के तहत 3 लाख रुपये मिलने का वायरल दावा फर्जी है। केंद्र सरकार ऐसी कोई योजना नहीं चला रही है। PIB Fact Check ने भी इस दावे को गलत बताया है। हालांकि, पीएम विश्वकर्मा जैसी कुछ वास्तविक सरकारी योजनाओं में पात्र लोगों को 3 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है, लेकिन इसके लिए निर्धारित पात्रता और शर्तें पूरी करनी होती हैं। इसलिए किसी भी आकर्षक लोन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी जानकारी केवल आधिकारिक सरकारी माध्यम से जरूर जांच लें। - जे. पी. शुक्ला
अटल पेंशन योजना (APY) केंद्र सरकार की गारंटीकृत पेंशन योजना है, जिसे पेंशन फण्ड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट ऑथोरिटी (PFRDA) संचालित करता है, जिसमें 60 वर्ष की उम्र के बाद चुनी गई योजना के अनुसार ₹1,000 से ₹5,000 तक की न्यूनतम मासिक पेंशन मिलती है। सवाल है कि अब कौन ले सकता है यह पेंशन? तो पात्रता की शर्तें हैं कि आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए। उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।उसके पास बचत बैंक खाता (SBA) या पोस्ट ऑफिस सेविंग्स एकॉउंट (POSA) होना चाहिए। खास बात यह है कि 1 अक्टूबर 2022 से आयकरदाता व्यक्ति APY में नया खाता नहीं खोल सकता। हालांकि, जो व्यक्ति उस तारीख से पहले APY में शामिल हो चुका था, उसके लिए अलग नियम लागू हैं। ₹5,000 पेंशन के लिए कितना योगदान? ₹5,000 की पेंशन के लिए योगदान आपकी उम्र और योगदान अवधि पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर आधिकारिक APY सामग्री में: इसे भी पढ़ें: Atal Pension Scheme: क्या आपको मिल सकती है 5000 रुपये की पेंशन? ये आधिकारिक प्रकाशित योगदान-सारणी के संकेतात्मक आंकड़े हैं। # जानिए, आवेदन कैसे करें? ऑफलाइन तरीका सबसे आसान है: एक, आप अपने बैंक या पोस्ट ऑफिस की शाखा में जाएं। दो, APY Registration Form मांगें। तीन, नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, बैंक खाता, आधार आदि विवरण भरें। चार, ₹1,000/₹2,000/₹3,000/₹4,000/₹5,000 में अपनी पेंशन राशि चुनें। पांच, बैंक खाते से ऑटो-डेबिट की अनुमति दें। छह, फॉर्म जमा करने के बाद बैंक/पोस्ट ऑफिस से PRAN और पंजीकरण की पुष्टि प्राप्त करें। आधिकारिक फॉर्म में मासिक, त्रैमासिक या छमाही योगदान का विकल्प भी दिया गया है। सात, अटल पेंशन योजना की आधिकारिक जानकारी और फॉर्म सरकारी वेबसाइट https://jansuraksha.gov.in पर उपलब6 है। # जानिए, मृत्यु के बाद क्या होगा? APY की खास बात यह है कि सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी को वही पेंशन राशि मिलती रहती है। सब्सक्राइबर और जीवनसाथी दोनों की मृत्यु के बाद निर्धारित पेंशन संपत्ति नामित व्यक्ति को मिलती है, यानी निर्धारित ₹8.5 लाख का कॉर्पस नामित व्यक्ति को मिलता है। बस इतना ध्यान रखें कि ₹5,000 कोई तत्काल मिलने वाली पेंशन नहीं है। इसके लिए पात्र उम्र में APY में शामिल होकर निर्धारित योगदान करना होता है और 60 वर्ष की उम्र के बाद गारंटीकृत न्यूनतम पेंशन मिलती है। # ₹5,000 मासिक गारंटीकृत पेंशन के लिए उम्र के हिसाब से पूरी APY गणना यहां पर मैं ₹5,000 मासिक गारंटीकृत पेंशन के लिए उम्र के हिसाब से पूरी APY गणना दी गई है। आधिकारिक APY तालिका के अनुसार योगदान उम्र बढ़ने के साथ काफी तेजी से बढ़ता है। # गणना: मासिक योगदान 12 योगदान के वर्ष. उदाहरण के लिए, 18 साल की उम्र में जुड़ने पर ₹210 12 42 = ₹1,05,840 कुल योगदान होगा। आधिकारिक APY दस्तावेज में भी 18 वर्ष पर ₹210 और 40 वर्ष पर ₹1,454 मासिक योगदान निर्धारित है। # अटल पेंशन योजना (APY) में 18 से 40 वर्ष की हर प्रवेश उम्र पर ₹1,000 से ₹5,000 तक की पेंशन के लिए मासिक योगदान के बारे में अवगत होइए अटल पेंशन योजना (APY) में 18 से 40 वर्ष की हर प्रवेश उम्र पर ₹1,000 से ₹5,000 तक की पेंशन के लिए मासिक योगदान दिया गया है। ये आंकड़े PFRDA की आधिकारिक APY तालिका से लिए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह हैं कि 18 साल की उम्र में शुरू करने पर ₹210/माह में ₹5,000 मासिक पेंशन का लक्ष्य है, जबकि 30 साल की उम्र में यही योगदान ₹577/माह हो जाता है। 40 साल की उम्र में ₹1,454/माह देना होगा। यानी जितनी कम उम्र में APY शुरू करेंगे, मासिक योगदान उतना कम रहेगा। तभी 60 वर्ष की उम्र के बाद चुनी गई राशि—₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000— की न्यूनतम गारंटीकृत मासिक पेंशन मिलती है। बस एक जरूरी सावधानी बरतिए : वह यह कि ऊपर के ₹1.06 लाख से ₹3.49 लाख तक के आंकड़े केवल आपके द्वारा किए जाने वाले निर्धारित योगदान का योग हैं। इसे निवेश पर मिलने वाले रिटर्न की तरह नहीं समझना चाहिए; APY में ₹5,000 पेंशन सरकार द्वारा गारंटीकृत न्यूनतम पेंशन है। बस इतना ध्यान रहे कि 1 अक्टूबर 2022 से जो व्यक्ति आयकरदाता है या रहा है, वह नया APY खाता नहीं खोल सकता है। PFRDA की आधिकारिक APY जानकारी विभागीय वेबसाइट https://pfrda.org.in/hi/schemes/atal-pension-yojana-apy) पर उपलब्ध रहती है, जहां पर जाकर आप खुद से चेक कर सकते हैं। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
LPU रेप-सुसाइड मामले में अमित शाह के रिश्तेदार की संलिप्तता बताते SP का AI वीडियो वायरल
वीडियो में एआई की मदद से छेड़छाड़ की गई है. मूल वीडियो में फगवाड़ा एसपी LPU मामले पर बात करते हुए अमित शाह के किसी संबंधी की संलिप्तता की बात नहीं कर रहे हैं.
सुरक्षा चिंताओं के चलते ओपनएआई ने नए मॉडल का लॉन्च रोका
वाशिंगटन, अमेरिकी एआई कंपनी ओपनएआई ने अपने नए एआई मॉडल के लॉन्च को रोक दिया है।
एशियन गेम्स पुरुष क्रिकेट में चारों क्वार्टर फाइनल बारिश की भेंट चढ़ गए। बिना एक भी गेंद खेले भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश ने सेमीफाइनल में जगह बनाई।
पेरिस फैशन वीक से अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आई हैं, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इनमें एक्ट्रेस का शानदार अंदाज देखने को मिल रहा है।
जीवन धारा: क्रोध को हावी मत होने दीजिए, विचार करके कदम बढ़ाने का कारगर सूत्र अपनाएं
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ज्यादा जरूरी है भरोसे की सूची: चुनाव आयोग सरकारी विभाग नहीं; आईटी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच, निगरानी जरूरी
पितृ पक्ष: मौन होती मुंडेरें औरकौवे की लौटती याद,विज्ञान भी कौवे को साधारण पक्षी मानने से कहीं आगे जाता है
मौसम बेमौसम:कई राज्यों में लगातार बारिश असामान्य बदलाव के संकेत,समाधान की दिशा में गंभीर कदम उठाने ही होंगे
सिनेमाघरों में रिलीज हुई 'पैराडाइज' और 'द वन' के बीच सोमवार को कड़ी टक्कर देखने को मिली। इसके अलावा 'हनुमान अंश' थमने का नाम नहीं ले रही है। फिल्म 400 करोड़ से ज्यादा कमाई कर चुकी है। आइए जानते हैं फिल्मों का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन।
ललित सुरजन की कलम से - मसीहा की तलाश?
'क्रिकेट प्रेमियों को यह प्रसंग अवश्य याद होगा। 1971 में अजीत वाडेकर की कप्तानी में भारत ने विदेश में दो टेस्ट श्रंखलाएं शानदार तरीके से जीती थीं
राजिंदर चौधरी पहले तो 'संसदीय समिति' की सिफ़ारिश के अनुरूप यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी तरह की परीक्षाएं न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के लिए आवश्यक पूर्व परीक्षा पर आधारित हों, यानी नीट/टीईई की परीक्षा विषय-वस्तु एवं स्तर, दोनों तरह से 12वीं की परीक्षा के अनुरूप हो। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों में से कुछ को चिह्नित करने के लिए न तो जवाब देने की गति को आधार बनाना चाहिए और न ही जटिलता को। कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) और युवाओं के हाल के आन्दोलन के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं का मुद्दा चर्चा में है। खबरें आ रही हैं कि भारत सरकार 'नीट' जैसी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। 'सुपर 30' से प्रोत्साहित होकर हरियाणा सरकार ने 'सुपर 100' शुरू किया जो अब 'सुपर 500' किया जा रहा है। इनमें चयनित बच्चों को होस्टल में रखकर परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाएगी और ख़र्च सरकार उठाएगी। ये उपाय समता-मूलक लग सकते हैं; जो बच्चे महंगी कोचिंग का बोझ नहीं उठा सकते, उनके लिए निशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराना समता की ओर उठाया कदम लग सकता है, परन्तु कोचिंग (या ट्यूशन) की ज़रूरत ही क्यों पड़े? स्कूली शिक्षा ही पर्याप्त क्यों न हो? क्यों बच्चों पर दोहरा बोझ हो? क्यों स्वतन्त्र अध्ययन-मनन के स्थान पर बच्चे का अधिकांश समय कक्षा में ही बीते? इन प्रश्नों पर विचार करना ज़रूरी है। कोचिंग की ज़रूरत के दो ही कारण हो सकते हैं- या तो स्कूल अपना काम ठीक से नहीं करते या परीक्षाओं का स्तर स्कूल की पढ़ाई से ऊपर का है। दोनों परिस्थितियों में असफलता व्यवस्थागत है, न कि व्यक्तिगत। ऐसा नहीं है कि सरकार को इसका अहसास नहीं है। एक साल पहले ही, 17 जून 2025 को, भारत सरकार ने 'कोचिंग सम्बन्धी मुद्दों पर विचार करने और विद्यार्थियों की कोचिंग पर निर्भरता घटाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति' का गठन किया गया था। समिति को 'विद्यार्थियों की कोचिंग पर निर्भरता कम करने के उपाय सुझाने' थे और 'फर्जी' स्कूलों के पनपने की समस्या पर भी विचार करना था। इस कमेटी को हर माह मंत्री को रिपोर्ट करना था, परन्तु अब तक इसकी कोई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। खबरों में इसकी सिफारिशों का ज़िक्र अवश्य आया है, लेकिन संसद के पटल पर दिसंबर 25 में रखी गई 'संसदीय समिति' की 371वीं रिपोर्ट में स्पष्ट सिफ़ारिश की गई है कि 'यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रश्न-पत्र स्कूल परीक्षाओं के पाठ्यक्रम से मेल खाते हों, ताकि एक समानांतर पाठ्यक्रम और उससे जुड़े कोचिंग सेंटर उद्योग के पनपने से बचा जा सके।' असल में कोचिंग को बढ़ावा मिलने का बड़ा कारण यही है - दाखिला परीक्षाओं में प्रश्नों का स्तर स्कूल की किसी भी परीक्षा के स्तर से बहुत ऊपर का होता है। जिन परीक्षाओं में स्तर जटिल नहीं होता, वहां गति महत्वपूर्ण हो जाती है, यानी प्रश्न ज़्यादा और समय कम। इन दोनों कारणों से कोचिंग का रुझान दाखिलों और नौकरी के लिए बढ़ता जा रहा है। जटिल प्रश्नों, अपेक्षित न्यूनतम योग्यता से ऊपर के प्रश्नों या कम समय में ज़्यादा प्रश्नों की ज़रूरत क्यों पड़ती है? ताकि लाखों अभ्यर्थियों में से कुछ को चुना जा सके, परन्तु यह अंतर ही मुख्य समस्या है। इस अंतर को ख़त्म करना होगा। क्यों देश भर से लोग दिल्ली विश्वविद्यालय में ही आयें? क्या हर कालेज उच्च स्तरीय नहीं होना चाहिए? क्या हर डाक्टर और हर इंजीनियर को सक्षम नहीं होना चाहिए? क्या हर पीएचडी को समाज उपयोगी शोध नहीं करना चाहिए? क्या 'पीएम श्री' स्कूलों में जो सुविधाएं हैं (या होनी चाहिए), उनमें ऐसे क्या विशेष उपकरण हैं जो हर स्कूल में नहीं होने चाहिए? जब तक गरिमापूर्ण आजीविका के अवसर और उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थान सीमित रहेंगे, तब तक कोचिंग का बोलबाला रहेगा, स्कूल 'फर्जी स्कूल' बनकर रह जायेंगे और पेपर लीक माफिया सक्रिय रहेगा। क्या इसका अर्थ यह है कि जब तक ये बुनियादी प्रश्न हल नहीं होते तब तक कुछ नहीं हो सकता? नहीं, तात्कालिक रूप से भी काफ़ी कुछ हो सकता है। सबसे पहले तो 'संसदीय समिति' की सिफ़ारिश के अनुरूप यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी तरह की परीक्षाएं न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के लिए आवश्यक पूर्व परीक्षा पर आधारित हों, यानी नीट/टीईई की परीक्षा विषय-वस्तु एवं स्तर, दोनों तरह से 12वीं की परीक्षा के अनुरूप हो। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों में से कुछ को चिह्नित करने के लिए न तो जवाब देने की गति को आधार बनाना चाहिए और न ही जटिलता को। परीक्षक समझ और उस आधार पर अभ्यर्थी को जांचे जो सभी विद्यार्थियों को सहज उपलब्ध हो। ऐसा करना न केवल समता-मूलक है, अपितु बच्चों पर किशोरावस्था में पड़ने वाले अनावश्यक तनाव को भी कम करने के लिए ज़रूरी है। परीक्षाओं के प्रश्नों के स्वरूप का भी सुधार होना चाहिए। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के मूल्यांकन के लिए मशीनों के प्रयोग को सुलभ बनाने के लिए अधिकांशत: प्रतियोगी परीक्षायें बहुविकल्पीय प्रश्नों तक सीमित हो जाती हैं। पूरी तरह बहुविकल्पीय प्रश्नों पर निर्भर होने के स्थान पर संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्नों और लम्बे प्रश्नों का भी उपयोग किया जाए। क्यों स्वयं गणना करने के स्थान पर उपलब्ध विकल्पों में से ही चुनने को कहा जाए? विद्यार्थी की समझ और उपयोग की जांच हो, न कि याददाश्त और लिखने की गति की। ऐसे प्रश्न होने पर मूल्यांकन मशीन द्वारा नहीं हो पायेगा और व्यक्तियों की ज़रूरत होगी। ऐसा करने पर दो दिक्कतें हो सकती हैं, परन्तु उनका भी सहज उपाय है। एक समस्या भेदभाव की हो सकती है जिससे बचने के लिए हर उत्तर पुस्तिका को मूल्यांकन के पश्चात सार्वजनिक कर दिया जाए और पुनर्मूल्यांकन सुलभ बनाया जाए। इसके अलावा हर साक्षात्कार के वीडियो भी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध होने चाहिए। ऐसा करने से भेदभाव और सिफ़ारिश पर काफ़ी हद तक रोक लग सकती है। मशीनों से मूल्यांकन न करवाकर व्यक्तियों से मूल्यांकन करवाने से दूसरी समस्या यह होगी कि इसमें समय और संसाधन अधिक लगेंगे, परन्तु विचार करने पर आप पायेंगे कि ग़ैर-मशीनी मूल्यांकन में लगने वाला अतिरिक्त समय और संसाधन रटने और कोचिंग पर लगने वाले समय और संसाधनों से कम ही होगा। इन तात्कालिक उपायों से पेपर लीक करने-कराने का प्रलोभन ख़त्म तो नहीं होगा, परन्तु कम हो जाएगा। इसके साथ ही कोचिंग और ट्यूशन की ज़रूरत भी काफ़ी कम हो जायेगी, 'फर्जी' स्कूल भी कम हो जायेंगे। कोचिंग और ट्यूशन को बैन भले ही न किया जाए, परन्तु इनको शिक्षण संस्थाओं की असफलता का पैमाना माना जाए। जिस राज्य/जिले/शहर में कोचिंग संस्थान बढ़ें, इसे उस क्षेत्र के शिक्षा अधिकारियों की असफलता माना जाए। उपरोक्त उपायों के बिना पेपर लीक की मांग और आपूर्ति कराने वाले बने रहेंगे। अगर यह सब दूर की कौड़ी लगता है तो ऐसा समाज/सरकार अपनी शिक्षण संस्थाओं को ठीक से चला नहीं सकती, उससे यह आशा करना कि पेपर लीक पर रोक लगा लेगी सपना ही रहेगा। सरकारी स्कूलों को छोड़कर हम निजी स्कूलों की ओर गए, परन्तु क्या निजी स्कूलों में भी बिना ट्यूशन और कोचिंग के काम चल रहा है? सरकारें चंद बच्चों को मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराने की बजाय इस पर विचार करें कि कोचिंग कम कैसे हो? (लेखक सेवानिवृत प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक हरियाणा हैं।)
ट्रंप-शी मुलाकात : भारतीय रणनीति की परीक्षा
ट्रंप-शी मुलाकात का केंद्रीय सबक यह है कि प्रतिद्वंद्विता कम नहीं हो रही, बल्कि अधिक व्यवस्थित ढंग से संभाली जा रही है
एक्सप्लेनर: उरी हमले के बाद कैसे एलओसी पारकर भारतीय सेना ने आतंकी ठिकानों को किया तबाह, 10 साल पहले क्या हुआ?
धर्मनगरी सहित मां वैष्णो देवी के दरबार में सोमवार को सर्द हवाओं के बीच श्रद्धालुओं की मां वैष्णो देवी यात्रा लगातार जारी रही। रविवार रात मौसम ने करवट ली और बूंदाबांदी भी हुई।
विचार: अमेरिकी बाजार का विकल्प खोजे भारत
अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर जबरन श्रम से जुड़े टैरिफ पहले ही लगा रखा है, जिससे भारत पर अमेरिका के मौजूदा टैरिफ 10 प्रतिशत और हो गए हैं।
विचार: यूपी लिखेगा राष्ट्रीय राजनीति की पटकथा
आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में से सबसे अधिक राजनीतिक सरगर्मी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रही है।
जागरण संपादकीय: कोचिंग पर निर्भरता
आखिर जब पाठ्यक्रम एक है तो स्कूली और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नों का स्तर अलग-अलग क्यों? निःसंदेह यह अंतर इसलिए आया, क्योंकि शिक्षा बोर्डों का उद्देश्य अधिक से अधिक छात्रों को 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में सफल बनाना होता है और वह भी अच्छे नंबरों से।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने असली और नकली पनीर के बीच स्पष्ट अंतर करने की दिशा में जो पहल की है, वह उपभोक्ता अधिकार, खाद्य सुरक्षा और ईमानदार डेयरी उद्योग- तीनों के हित में…
गुजरात से कन्या कुमारी तक फैले पश्चिमी घाट की चिंता
देश में बाढ़ और सूखे से सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें अब लगभग आम बात हो गई हैं। कुछ समय के लिए सदमा लगता है, बेबसी महसूस होती है और गुस्सा भी आता है, लेकिन फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है। समस्या की जड़ तक…
सर्जिकल स्ट्राइक से हुआ जो हासिल
वह 29 सितंबर, 2016 की भोर थी, जब भारतीय सेना द्वारा पीओके में घुसकर आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने की खबर मीडिया में प्रसारित हुई। बेशक, पहले भी ऐसी सैन्य कार्रवाइयां होती रही हैं, मगर यह पहला मौका था…
राष्ट्रीय राजधानी और उत्तर भारत में प्रदूषण के चरम दिन फिर आ रहे हैं। इस मोर्चे पर समय रहते दिल्ली और हरियाणा की तैयारी खासतौर पर ध्यान खींच रही है। पराली जलाने पर रोक के लिए हरियाणा ने उपाय किए हैं, तो दिल्ली ने भी…
स्पेसएक्स स्टारशिप रॉकेट : 14वीं परीक्षण उड़ान करेगा लॉन्च
नई दिल्ली, एलन मस्क के नेतृत्व वाली स्पेसएक्स सोमवार को अपने स्टारशिप रॉकेट की 14वीं परीक्षण उड़ान लॉन्च करने जा रही है। यह मिशन अंतरिक्ष यान की पहली कक्षीय उड़ान का प्रयास होगा।
हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचा प्रदूषण, उत्तराखंड से एवरेस्ट तक प्रदूषण के मिले गंभीर संकेत
अधिक चौंकाने वाले प्रमाण नेपाल के एवरेस्ट क्षेत्र से मिले हैं। शोधकर्ताओं को खुंबू घाटी में 2,860 से 5,364 मीटर तक किए गए माप में आठ घंटे की ओजोन सांद्रता कुछ अवसरों पर 100 पीपीबी से ऊपर मिली।
दूसरा पहलू: एक पोटली में कश्मीर से कराची तक का भारत, तीर्थ पुरोहितों के पास दर्ज है इतिहास
दूसरा पहलू: एक पोटली में कश्मीर से कराची तक का भारत, तीर्थ पुरोहितों के पास दर्ज है इतिहास
विचार: भारत के लिए वरदान साबित हो सकता है एआई
एआई एक शक्तिशाली तकनीक है जो भारत के लिए वरदान साबित हो सकती है, बावजूद इसके कि इसके साथ कुछ डर और चुनौतियां जुड़ी हैं।
प्रकृति को लीलती भोजन की जूठन:भारत अब भी भोजन बर्बादी मामले में दूसरे नंबर पर,दंडनीय अपराध घोषित करे सरकार
विचार: जिम्मेदार एआई में है मानवता का हित
एआई अब हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है, लेकिन इसके दुरुपयोग, स्वायत्तता और गलत सूचना के प्रसार से जुड़े संभावित खतरे भी हैं।
एसएससी सीजीएल 2026: 30 सितंबर को होने वाली टियर-1 परीक्षा का प्रवेश पत्र जारी, ऐसे करें डाउनलोड
SSC CGL Tier 1 Admit Card 2026: एसएससी सीजीएल टियर-1 का प्रवेश पत्र जारी हो गया है। फिलहाल 30 सितंबर को परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी इसे डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा 30 सितंबर से 30 अक्तूबर तक तीन पालियों में होगी।
सिनेमाघरों में बीते हफ्ते सिद्धार्थ मल्होत्रा और नानी की फिल्में रिलीज हुई हैं। इसके अलावा 'हनुमान अंश', 'मिर्जापुर' जैसी फिल्में पहले से लगी हुई हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इन सभी ने अभी तक कितना कलेक्शन किया है?
जम्मू कश्मीर सरकार ने अपनी विश्व चैंपियन खो-खो खिलाड़ी नाजिया बीबी के लिए महज 40 हजार रुपये के इनाम का एलान किया था।
ललित सुरजन की कलम से हिमाचल प्रदेश-2 : आरामकुर्सी पर पसरा जलप्रपात
हम जब धर्मशाला पहुंचे थे तब मौसम खुला हुआ था, लेकिन रात अच्छी-खासी बारिश हुई थी, सुबह भी रिमझिम हो रही थी।
राजधानी में अन्य राज्यों के भवनों की तर्ज पर अब दिल्ली सरकार का अपना पहला भव्य स्टेट गेस्ट हाउस ‘दिल्ली सदन’ आकार लेने जा रहा है।
मैदान से लेकर पहाड़ तक भारी बारिश व बर्फबारी के चलते यूपी से लेकर नेपाल तक हालात खराब हैं।
अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन : राष्ट्रपति शी का दबदबा, और ट्रंप के पत्ते
एआई के मुद्दे पर, राष्ट्रपति शी ने एआई विकास पर ज़रूरत से ज़्यादा नियंत्रण का विरोध किया और ओपन-सोर्स एआई का समर्थन किया।
सपा-कांग्रेस मिलते हैं तो एक और एक ग्यारह, झगड़ते हैं तो जीरो!
ओवैसी तो बंगाल बिहार हर जगह थे मगर उत्तर प्रदेश में मायावती भी हैं। विपक्ष को यहां कई मोर्चों पर लड़ना है।
छात्रों के हिंसक विरोध के बाद लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए रेगुलर क्लास सस्पेंड कर दी हैं और मिड-टर्म परीक्षाएं टाल दी हैं।
सदैव प्रेरित करने वाले विराट व्यक्तित्व: पीएम नरेंद्र मोदी
अशोक सिंहल जी ने हर क्षण इस महान राष्ट्र के उत्कर्ष का ही स्वप्न देखा था। हम उनके सपनों को साकार करने के संकल्प को फिर दोहराएं।
जागरण संपादकीय: अस्थिर मौसम की चुनौती
यह ध्यान रहे कि चाहे अतिवृष्टि हो या अल्पवृष्टि, दोनों ही खाद्य सुरक्षा को संकट में डालने का काम करती हैं और खाद्य सुरक्षा के समक्ष संकट पैदा होने से अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बढ़ती हैं।
तनाव और खराब पाचन से परेशान? करें ये योगासन
नई दिल्ली, योग हमारे शरीर और मन को स्वस्थ रखने का सबसे प्राकृतिक तरीका है। ऐसे ही एक सरल और लाभकारी योगासन का नाम है शशकासन। शशक शब्द का अर्थ होता है खरगोश। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर की आकृति खरगोश जैसी बन जाती है, इसलिए इसे शशकासन कहा जाता है। यह आसन दिखने में जितना सरल है, इसके लाभ उतने ही प्रभावशाली हैं।
15 Years Of Manish Malhotra Mijwan: बीती रात मुंबई में मशहूर फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा का खास 'मिजवान वेलफेयर फैशन शो' आयोजित हुआ। यहां कई सेलेब्स ने शिरकत की। विक्की कौशल और आलिया भट्ट ने साथ में रैंप वॉक कर महफिल लूट ली।
श्राद्ध पक्ष 2026: पितृ कर्म के लिए कौन सा समय है सबसे शुभ? जानिए 4 खास मुहूर्त
पितृ पक्ष में पितरों की आत्मिक शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। शास्त्रों में इन कर्मों के लिए कुछ विशेष काल बताए गए हैं। आइए जानते हैं श्राद्ध कर्म के शुभ समय और मुहूर्त।
आज का राशिफल 27 सितंबर: मेष, मिथुन और कुंभ राशि वालों को मिल सकते हैं नए अवसर , पढ़ें दैनिक राशिफल
Aaj Ka Rashifal 27 September 2026: आज ग्रह-नक्षत्रों की चाल का असर सभी राशियों पर अलग-अलग देखने को मिल सकता है। जानें मेष से मकर तक किन राशियों के लिए दिन खास रहेगा और किन मामलों में सावधानी जरूरी होगी।
जानना जरूरी है: जरासंध से युद्ध में कृष्ण ने क्यों छोड़ा रण? महाभारत काल में भीम ने किया था वध, जानिए कथा
पितृपक्ष 2026: कितने प्रकार के होते हैं श्राद्ध कर्म? जानिए 12 प्रमुख प्रकार और उनका महत्व
पितृ पक्ष में पितरों की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में श्राद्ध के अलग-अलग प्रकार और उनके उद्देश्य बताए गए हैं।
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर रविवार को दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में पर्यटकों को निशुल्क प्रवेश मिलेगा।
तालिबान अब फरीबा से कैसे नफरत कर पाएगा
पड़ोस में एक मुल्क है, जो कभी हमारे पुरखों द्वारा शासित होता था। पुराण बांचने वाले बताते हैं कि गांधारी वहीं के एक रजवाड़े की बेटी थीं; इतिहास कहता है कि बामियान की बुद्ध प्रतिमाएं, पृथ्वीराज चौहान की समाधि इस बात की साक्षी…
विचार: चुनाव आयोग के विवाद पर विराम
किसी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान मतभेद होना स्वाभाविक हैं। इन्हें तूल देने का कोई औचित्य नहीं बनता, लेकिन ऐसा ही किया गया।
जागरण संपादकीय: संदेह का निराकरण
वैसे तो तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक और उसके बाद जारी बयान ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ छेड़े गए विपक्ष के अभियान की हवा निकाल दी है, लेकिन यह तय है कि वह चुप नहीं बैठने वाला।
इस दौर में निरंकुश सत्तानायकों को नियंत्रित करने के लिए न कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था बची है और न विचार। यह अकारण नहीं है कि जंगें भड़क रही हैं और समूची दुनिया की अर्थव्यवस्था सतहगामी है। ऐसा लगता है, मौजूदा दुनिया को कमजोर और निर्धन मुल्कों या इंसानों की जरूरत नहीं रह बची है…
नॉमिनी नहीं बनाया है तो म्यूचुअल फंड का पैसा किस प्रक्रिया से मिलता है? यहां जानें जरूरी बातें
आजकल किसी भी बैंकिंग व्यवहार में नॉमिनी को दर्ज किया जाना आम बात है, फिर भी यदि किसी वजह से म्यूचुअल फंड निवेशक की नॉमिनी दर्ज नहीं है, तब भी निवेश का पैसा खत्म नहीं होता, बल्कि निवेशक की मृत्यु के बाद यूनिट्स/रिडेम्पशन की रकम कानूनी उत्तराधिकारी (legal heirs) को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मिलती है। हालांकि, नॉमिनी होने की तुलना में प्रक्रिया अधिक लंबी और दस्तावेज़-आधारित हो सकती है। इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि नॉमिनी नहीं होने पर पैसा कैसे मिलता है? इसके लिए किन-किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। आइए जानते हैं क्रमबद्ध रूप से- पहला, सबसे पहले मृत्यु प्रमाणपत्र निवेशक के निधन का आधिकारिक Death Certificate प्रस्तुत करना होता है। दूसरा, उत्तराधिकारी की पहचान यदि नॉमिनी नहीं है, तो AMC/RTA आम तौर पर यह देखता है कि दावा करने वाला व्यक्ति मृतक का वैध उत्तराधिकारी है या नहीं। इसके लिए परिस्थितियों के अनुसार इनमें से दस्तावेज मांगे जा सकते हैं: (i) Legal Heir Certificate, (ii) Succession Certificate, (iii) Will/वसीयत, (iv) Probate/Letters of Administration, (v) अन्य आवश्यक कानूनी दस्तावेज। इसे भी पढ़ें: आधार में मोबाइल नंबर से लेकर पता तक घर बैठे बदलें: 2026 की पूरी प्रक्रिया, शुल्क और जरूरी दस्तावेज तीसरा, छोटे दावे में प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हो सकती है, यदि निवेश की कुल रकम निर्धारित सीमा के भीतर है, तो संबंधित AMC/RTA अपनी policy के अनुसार indemnity/affidavit, declaration, KYC और अन्य दस्तावेजों के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया कर सकता है। सीमा और दस्तावेज AMC/RTA के नियमों पर निर्भर करते हैं। चौथा, कई कानूनी वारिस हों तो यदि मृतक के एक से अधिक legal heirs हैं, तो सभी के दावे/सहमति की आवश्यकता पड़ सकती है। एक वारिस को पैसा देने के लिए दूसरे वारिसों की NOC/consent भी मांगी जा सकती है। पांचवां, वसीयत होने पर यदि मृतक ने वैध Will छोड़ी है, तो उसी के आधार पर अधिकार निर्धारित किया जा सकता है। बड़े या विवादित मामलों में probate अथवा succession-related court documents की जरूरत पड़ सकती है। एक महत्वपूर्ण फर्क समझिए। Nominee = हमेशा अंतिम मालिक नहीं। नॉमिनी की भूमिका मुख्यतः निवेश/संपत्ति को प्राप्त करने और आगे उचित प्रक्रिया में रखने/हस्तांतरित करने से जुड़ी होती है। वास्तविक उत्तराधिकार का निर्धारण लागू succession law और वैध वसीयत के आधार पर हो सकता है। उदाहरण: मान लीजिए किसी व्यक्ति के म्यूचुअल फंड में ₹10 लाख हैं और उन्होंने कोई nominee नहीं बनाया। मृत्यु के बाद उनकी पत्नी और दो बच्चे दावा करते हैं। ऐसे मामले में AMC/RTA सीधे किसी एक व्यक्ति को पैसा देने के बजाय: 1. मृत्यु प्रमाणपत्र, 2. KYC, 3. legal-heir/succession documents, 4. अन्य वारिसों की consent/NOC आदि मांग सकता है। दस्तावेज पूरे होने के बाद units को redeem/transfer करके निर्धारित बैंक खाते में राशि दी जा सकती है। सच कहूं तो म्यूचुअल फंड निवेशक की मृत्यु के बाद पैसा किसे और कैसे मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि Nominee, Joint Holder और Will में से क्या मौजूद है। म्यूचुअल फंड निवेशक की मृत्यु के बाद पैसा पाने की पूरी प्रक्रिया इस प्रकार है:- एक, Nominee बना हुआ है, यह सबसे आसान स्थिति है। नॉमिनी को संबंधित AMC/RTA के पास मृत्यु की सूचना देकर दावा करना होता है। सामान्यतः मांगे जाने वाले दस्तावेज हैं: मृत्यु प्रमाणपत्र, नॉमिनी का PAN/KYC, बैंक खाते का विवरण, Claim/ Transmission Form, मृतक के म्यूचुअल फंड खाते/फोलियो की जानकारी और अन्य दस्तावेज, जैसा AMC/RTA मांगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद units को नॉमिनी के नाम transmit किया जा सकता है या लागू प्रक्रिया के अनुसार उनका redemption किया जा सकता है। हमेशा ये बात ध्यान रखें कि नॉमिनी होना और अंतिम कानूनी उत्तराधिकारी होना हमेशा एक ही बात नहीं है। उत्तराधिकार का अंतिम अधिकार लागू succession law और वैध Will के अनुसार तय हो सकता है। दो, Joint Holding है: यदि म्यूचुअल फंड folio में दो या अधिक joint holders हैं, तो मृत्यु के बाद प्रक्रिया holding mode पर निर्भर करती है। उदाहरण: A & B — Joint Holding. यदि A की मृत्यु हो जाती है, तो surviving holder B को मृत्यु प्रमाणपत्र और निर्धारित transmission documents देकर units अपने नाम कराने की प्रक्रिया करनी होती है। यह स्थिति सामान्यतः अकेले निवेशक के बिना nominee होने की तुलना में सरल होती है। तीन, Nominee नहीं है, लेकिन Will है: यहां मामला थोड़ा अलग हो जाता है। यदि निवेशक ने वैध Will (वसीयत) बनाई है, तो Will में बताए गए beneficiary/legatee के आधार पर दावा किया जा सकता है। सामान्यतः जरूरत पड़ सकती है: Death Certificate, Will की copy, Claim/Transmission Form, PAN/KYC, बैंक विवरण, अन्य legal documents. कुछ मामलों में Probate/Letters of Administration आदि की आवश्यकता हो सकती है—विशेषकर जब मामला बड़ा हो, विवाद हो या लागू कानून/क्षेत्राधिकार के अनुसार इसकी आवश्यकता हो। चार, Nominee भी नहीं और Will भी नहीं: यही स्थिति परिवार के लिए सबसे अधिक कागजी कार्रवाई वाली हो सकती है। तब दावा legal heirs द्वारा किया जाता है। परिवार को पहले यह स्थापित करना पड़ सकता है कि मृतक के वैध उत्तराधिकारी कौन हैं। हर मामले में सभी दस्तावेज जरूरी नहीं होते। दस्तावेजों की आवश्यकता निवेश की राशि, उत्तराधिकार की स्थिति, Will और AMC/RTA की लागू प्रक्रिया के अनुसार बदल सकती है। पांचवां, कई Legal Heirs हों तो क्या होगा?: मान लीजिए मृतक के पीछे: पत्नी, एक बेटा, एक बेटी, तीन संभावित legal heirs हैं। ऐसे में AMC/RTA यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि किसी एक व्यक्ति को भुगतान करने से दूसरे वैध उत्तराधिकारियों के अधिकार प्रभावित न हों। इसलिए परिस्थितियों के अनुसार: सभी वारिसों की consent/NOC, एक व्यक्ति को transmission/payment या कानूनी उत्तराधिकार दस्तावेज, संबंधित वारिसों के अधिकार के अनुसार वितरण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। यदि परिवार में विवाद है, तो मामला अदालत तक भी जा सकता है। छठा, अगर निवेशक पर कर्ज भी था?: यह महत्वपूर्ण बिंदु है। मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकार मिलने का अर्थ यह नहीं कि उससे जुड़े वैध दायित्व स्वतः समाप्त हो जाते हैं। यदि कोई ऋण/कानूनी दावा है, तो उसकी स्थिति अलग से देखनी पड़ सकती है। इसलिए बड़ी रकम वाले निवेश में Will और Nomination और व्यवस्थित financial records रखना बहुत उपयोगी है। सातवां, सबसे जरूरी दस्तावेजों की Master Checklist: परिवार को पहले से एक सुरक्षित जगह पर ये रिकॉर्ड रखना चाहिए: निवेश से जुड़े दस्तावेज: AMC के नाम, Folio Number, Scheme Name, Statement of Account, PAN, Nominee details, Holding mode — Single/Joint, Distributor/Platform details. मृत्यु के बाद: Death Certificate, Claim/Transmission Form, Claimant का PAN, KYC documents, Bank proof/cancelled cheque, Legal Heir Certificate, जहां आवश्यक हो, Will, यदि मौजूद हो, Succession/Probate documents, जहां आवश्यक हो, NOC/Consent, जहां आवश्यक हो, Indemnity/Affidavit, जहां आवश्यक हो। # एक बहुत उपयोगी Financial Safety File बनाइए परिवार की सुविधा के लिए एक “Financial Information File” बनाकर उसमें यह सूची रखें: Bank Accounts, Mutual Funds, Insurance, PPF, EPF, NPS, Demat/Shares, Bonds, Property and Loans. हर निवेश के सामने लिखें: संस्था | Account/Folio No. | Nominee | Approx. Value | संबंधित दस्तावेज, लेकिन OTP, UPI PIN, ATM PIN, Internet Banking Password या अन्य संवेदनशील पासवर्ड इस फाइल में खुले रूप में न रखें। # सबसे बेहतर व्यवस्था क्या है? यदि आप चाहते हैं कि मृत्यु के बाद परिवार को कम से कम परेशानी हो, तो आदर्श रूप से: Nominee, Valid Will, Updated KYC, सही Bank Details और परिवार को investments की जानकारी- इन पांचों को व्यवस्थित रखें। Nominee अकेला पर्याप्त नहीं है, और Will होने पर भी nominee details अपडेट रखना उपयोगी है। # निवेशकों के लिए सबसे जरूरी सलाह अगर आपने अभी तक म्यूचुअल फंड में nomination नहीं किया है, तो इसे जल्द पूरा करना बेहतर है। इससे मृत्यु के बाद परिवार को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और देरी से बचाया जा सकता है। और यदि आपके पास कई म्यूचुअल फंड हैं, तो हर folio में nominee की स्थिति जरूर जांचें—सिर्फ एक फंड में nominee दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। - कमलेश पांडेय वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
सेहत के लिए वरदान है फाइबर, रोज कितना खाना चाहिए ? जाने सही मात्रा और फायदे
नई दिल्ली, सेहतमंद रहने के लिए सिर्फ भरपूर खाना जरूरी नहीं है, बल्कि संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना बेहद जरूरी है। हमारी रोज की डाइट में फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना हेल्दी ईटिंग प्लान का अहम हिस्सा है। फाइबर और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है।
शरीर संतुलन में चले तो करे अष्टावक्रासन
नई दिल्ली, योग केवल शरीर को लचीला बनाने की क्रिय नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा को संतुलित करने का एक प्राचीन मार्ग है। भारतीय योग परंपरा में अष्टावक्रासन एक ऐसा योगासन है, जो बाजुओं में मजबूती, पेट की मांसपेशियों में कसाव और मानसिक स्थिरता लाने के लिए जाना जाता है।
Rashifal 26 September 2026: आज का दिन कुछ राशियों के लिए करियर और आर्थिक मामलों में नए अवसर लेकर आ सकता है, तो कुछ लोगों को रिश्तों और फैसलों में सावधानी बरतनी होगी। जानें मेष, कर्क, सिंह, कन्या, कुंभ और मकर राशि वालों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।
विकास की दौड़ में हांफती नदियां:गंगा-यमुना को जीवित मानव का दर्जा! ऐसे कानूनी नवाचार कड़ाई से लागू करना जरूरी
फिर हादसा, फिर सवाल: कागजी नियमों से सुरक्षा नहीं,जमीनी स्तर पर सख्त और निरंतर औचक निरीक्षण सबसे जरूरी कदम
राजनीतिक दखलंदाजी से खराब होता टाटा गु्रप का नाम
टाटा गु्रप में हुए हाल के घटनाक्रम से कई लोगों को बेचैनी महसूस हो सकती है।
सितंबर के आखिरी हफ्ते में पहाड़ से लेकर मैदान तक भारी बारिश से बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
27 सितम्बर विश्व नदी दिवस, नदियां बचेंगी तो बचेगा जीवन: नदी संरक्षण की चुनौती
भारत को नदियों का देश माना जाता है तथा यहां छोटी और बड़ी नदियों को मिलाकर लगभग 4000 से अधिक नदियां है।
पेड़ों के आसपास की मिट्टी में कई तरह के जंतु होते हैं। कीड़े-मकोड़ों का भी वास होता है।
जीवन के अन्तिम पड़ाव में- अपनों रिश्तो की अहमियत समझिये!
परिवार का इस दुनिया मे कोई भी सानी नही है। मगर रिश्ता यहाँ का कोई भी हो बेमानी नही है। कुछ लोग कहते है कि सभी साथ छोड़ जाते है। जीवनभर साथ देती किसी की भी जवानी नही है। आप है इसलिए अच्छा लगता हैं कहने के लिए , लिखने के लिए यह बात अच्छी ... Read more
विचार: तकनीक के मोर्चे पर छाप छोड़ता भारत
भारत भविष्य की तकनीकों, जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग, फोटोनिक्स, आप्टोइलेक्ट्रानिक्स और एआइ के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए चिप्स के क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को तत्पर है।
विचार: संवेदना के साथ न्याय भी सुनिश्चित हो
दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई हो और आरोप असत्य या दुर्भावनापूर्ण सिद्ध होने पर निर्दोष व्यक्ति का सम्मान लौटाया जाए।
जागरण संपादकीय: अनुत्तरित प्रश्न
चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा की रक्षा करना और उसे अपुष्ट-अनर्गल आरोपों से बचाना अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी नहीं। यह जिम्मेदारी दोनों चुनाव आयुक्तों की भी है।
भारत: स्कूलों के 50 मीटर दायरे से दूर होगा जंक फूड?
बच्चों में मोटापा रोकने के लिए भारत सरकार स्कूलों के आसपास हाई फैट, शुगर और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री सीमित करने पर विचार कर रही है
बेटियों को बुरी नजरों से कैसे बचाया जाए
यह खेद की बात है कि संस्कार के युग में व्यभिचार का दौर चल गया। खेद है कि समता पर आधारित हमारे भारत राष्ट्र में, असम्माननीय कर्म चलन-सा बनता जा रहा। खेद यह भी है कि जो बालिका साइकिल पर बैठ स्कूल चल पड़ी थी, उसी को दरिंदों ने समूह बनाकर अपना निशाना बनाया…

