राय और ब्लॉग्स / बूमलाइव
बूम ने पाया कि मूल वीडियो में पीएम मोदी परीक्षा पद्धति में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा कर रहे थे. कई AI डिटेक्शन टूल्स ने भी वायर
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो वाराणसी फैमिली कोर्ट का है, जहां न्यायालय परिसर के भीतर पति-पत्नी के बीच मारपीट का यह मामला सामने आया था.
बूम ने पाया कि वायरल तस्वीर फेक है. OpenAI के इमेज वेरिफिकेशन टूल ने संकेत दिया कि इसे OpenAI के AI टूल्स की मदद से बनाया गया है.
बूम ने पाया वायरल हो रहा एक वीडियो AI की मदद से क्रिएट किया गया है, वहीं दूसरा वीडियो Simran SK नाम की एक क्रिएटर द्वारा बनाया गया नाटकीय वीडियो है.
बूम ने पाया वायरल वीडियो में शामिल दो क्लिप साल 2024 की हैं, जबकि तीसरी क्लिप 3 मई को हुई NEET परीक्षा के बाद की है, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था.
बूम ने पाया कि धर्मेंद्र प्रधान ने मूल वीडियो 18 जून को शेयर किया था, जिसमें वह ओड़िया में शीतल षष्ठी के त्यौहार पर बोल रहे हैं. कई AI डिटेक्शन टूल्स न
दिल्ली पुलिस ने इन दावों का खंडन करते हुए बताया कि किसी प्रदर्शनकारी की मौत नहीं हुई. दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में गंभीर रूप से घायल एक म
बूम ने पाया कि 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक लाठीचार्ज किया, जिसमें कई लोगों को गंभीर छोटे आईं.
बूम ने पाया कि अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का यह वीडियो मुंबई स्थित रीगल सिनेमा के पास का है. इसका सीजेपी प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है.
बूम ने पाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat producer (गेहूं उत्पादक) बताया था.
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में मुहर्रम जुलूस के दौरान दिखाए गए करतब का है. इसका राजस्थान के श्रीगंगानगर गैंगरेप मामले से कोई सं
बूम ने पाया कि पीड़िता के नाम पर वायरल हो रहे ज्यादातर वीडियो पुराने और अलग-अलग घटनाओं से संबंधित हैं.
बूम ने पाया कि यह वीडियो बांग्लादेश के फरीदपुर का है, जहां एक महिला ने अपने पति के अन्य महिलाओं के साथ कथित संबंधों से नाराज होकर उसका प्राइवेट पार्ट
OpenAI के इमेज वेरिफिकेशन टूल ने संकेत दिया कि यह तस्वीर OpenAI की मदद से बनाई गई है.
बूम ने जांच में पाया कि पर्यटकों की भारी भीड़ वाला यह वायरल वीडियो हाल का नहीं बल्कि साल 2023 का है.
बूम ने पाया कि वीडियो साल 2014 का है. यह प्रदर्शन दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में मोरल पुलिसिंग के विरोध में चलाए गए 'किस ऑफ लव' कैंप
बूम ने पाया कि बीजेपी नेता स्मृति ईरानी और मनोज तिवारी ने राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है. न्यूज24 और नवभारत टाइम्स ने दोनों ग्
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो में डांस कर रही महिला केतन अग्रवाल मर्डर केस की आरोपी सिया गोयल नहीं बल्कि कंटेंट क्रिएटर अनुष्का वाणी हैं.
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो बांग्लादेश के पाबना जिले का है, जहां शहादत हुसैन नाम के एक व्यक्ति की करंट लगने से मौत हो गई थी. इस घटना का दीपू दास की हत
बूम ने पाया कि वीडियो 3 फरवरी 2026 का है, तब उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 में एनकाउंटर का समर्थन करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि पुलिस गोली
बरेली पुलिस ने बूम को बताया कि इस मामले में दो युवकों पर कार्रवाई की गई है, जो कि हिंदू समुदाय से आते हैं. इन्हीं युवकों ने एक 11 वर्षीय लड़के से 'पाकि
बूम ने पाया कि वीडियो ढाका के जात्राबारी का है, जहां 16 जून 2026 को मोबाइल चोरी के आरोप में भीड़ ने एक युवक के साथ मारपीट की थी.
बूम ने पाया कि वीडियो साल 2023 का है, तब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गैंगेस्टर अतीक अहमद की हत्या पर ये प्रतिक्रिया दी थी.
बूम ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो बांग्लादेश के मीरपुर का है, जहां चोरी के आरोप में एक युवती को पकड़कर उसके साथ मारपीट की गई थी.
बूम ने पाया वायरल फुटेज कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित गली अंजनेय स्वामी मंदिर में हुई हेराफेरी से जुड़ा है, जोकि साल 2024 में चर्चा में आया था.
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है. कई एआई डिटेक्शन टूल्स भी इसकी पुष्टि करते हैं.
वायरल वीडियो को शूट करने वाले मुबारक हुसैन ने बूम को बताया कि घटना 11 जून को आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम स्टेशन के पास की है.
बूम ने वीडियो में दिख रहे सब इंस्पेक्टर सुशांत यादव से संपर्क किया जिन्होंने वायरल दावे का खंडन करते हुए बताया कि उन्होंने यह वीडियो साल 2025 में रिकॉ
बूम ने पाया कि वीडियो दिसंबर 2024 का है, तब केरल के एक NCC कैंप में लेफ्टिनेंट कर्नल करनैल सिंह पर फूड पॉइजनिंग से जुड़े आरोपों के बाद हमला हुआ था.
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो और तस्वीर प्रदर्शन के वास्तविक दृश्य नहीं दिखाते, बल्कि इनमें एआई की मदद से छेड़छाड़ की गई है.
बूम ने वीडियो बनाने वाले कंटेट क्रिएटर से संपर्क किया जिन्होंने बताया कि उन्होंने पटना के असली विजुअल में एआई की मदद से लाइटिंग बढ़ाकर दिखाया है.
बूम ने पाया वीडियो के साथ किया गया सांप्रदायिक दावा गलत है. घटना 2 मार्च 2026 की है, जहां बांग्लादेश के रूपगंज में चोरी के आरोप में तीन मुस्लिम महिलाओ
बूम ने पाया कि भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी मूल वीडियो में देश की सैन्य तैयारियों पर बात कर रहे हैं.
बूम ने पाया कि वीडियो मध्य प्रदेश के मंदसौर का है, जहां एक युवक की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपी घटनास्थल पर ले जाने के दौरान लंगड़ाते हुए नजर आए
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो में आरोपी असद नहीं है. वीडियो में नजर आ रहा युवक करण है, जो अप्रैल 2026 में दिल्ली के शालीमार बाग में हुई एक हत्या के मामल
बूम ने वीडियो को शूट करने वाले शेख अली से संपर्क किया जिन्होंने पुष्टि की कि फुटेज में लोग इस साल जनवरी में आयोजित हुए हुगली इज्तिमा में भाग लेते नजर
बूम ने पाया कि वायरल हो रहे दोनों वीडियो फरवरी 2026 से इंटरनेट पर मौजूद हैं और अलग-अलग घटनाओं से संबंधित हैं.
बूम ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो में नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग (Helle Lyng) का सवाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमानों को हुए नुकसान के बारे में नही
बूम ने जांच में पाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ नजर आ रही यह महिला मॉडर्न कॉलेज पुणे की प्रिंसिपल निवेदिता एकबोटे हैं.
The Hindu ने वायरल पेपर क्लिप का खंडन करते हुए बताया कि यह उनके आर्काइव का असली पेज नहीं है.
बूम ने पाया कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने Agitation शब्द का इस्तेमाल किया था जिसे एजुकेशन समझकर गलत दावा किया जा रहा है.
बूम ने पाया कि यूपी के मेरठ में 6 मस्जिदें तोड़ने और मुसलमानों के घरों में आगजनी का दावा गलत है. यह वीडियो हापुड़ में महाराणा प्रताप की जयंती के दौरान
आईपीएस अधिकारी के करीबी सूत्रों ने बूम को बताया कि उनके पास ऐसी कोई सूचना नहीं आई है और वह फिलहाल प्रयागराज में ही पोस्टेड हैं.
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो साल 2025 का है, जब बंगाल बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता में पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात की
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का है, जहां लोगों ने टी20 विश्व कप में भारत की जीत का जश्न मनाया था.
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों से पहले के हैं और अलग-अलग घटनाओं से जुड़े हैं.
बूम ने पाया कि दोनों वीडियो पुराने हैं और अलग-अलग घटनाओं से संबंधित हैं. इनमें से एक महाराष्ट्र से और दूसरा वीडियो बांग्लादेश से है.
बूम ने पाया कि यह वीडियो पुराना है, तब बांग्लादेश के कप्ताई लेक (Kaptai lake) में एक नाव हादसे का शिकार हो गई थी.
बूम ने पाया कि यह वीडियो पुराना है. यह इस साल मार्च में कोलकाता के हावड़ा ब्रिज पर होली के जश्न को दिखाता है.
बूम से बातचीत में झालमुड़ी विक्रेता विक्रम शॉ ने पुष्टि की है कि वायरल दावा गलत है और वह एसपीजी का हिस्सा नहीं हैं.

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