डिजिटल समाचार स्रोत

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पश्चिम एशिया में बदला शक्ति संतुलन: हमलों में 16 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आठ देशों में फैले अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों पर हमले हुए। इनमें कुवैत, कतर और इराक जैसे देश शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ ठिकानों को गंभीर क्षति पहुंचने की बात कही गई है।

देशबन्धु 3 May 2026 2:51 pm

होर्मुज में सख्ती बढ़ाने के डोनाल्‍ड ट्रंप ने दिए संकेत, ईरान बोला- फिर भड़क सकता है युद्ध

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य केंद्र बना हुआ है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि इस मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति में और अधिक व्यवधान आ सकता है।

देशबन्धु 3 May 2026 2:16 pm

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की हालत बेहद गंभीर, ICU में भर्ती; अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

नरगिस मोहम्मदी से जुड़े एक फाउंडेशन ने उनकी सेहत को लेकर चिंताजनक जानकारी साझा की है। फाउंडेशन के अनुसार, नरगिस को अस्पताल ले जाने से पहले दो बार बेहोशी की स्थिति का सामना करना पड़ा।

देशबन्धु 3 May 2026 2:03 pm

टैंकर ट्रैकर्स फर्म का दावा, 'ईरानी सुपरटैंकर ने यूएस नाकाबंदी को दिया चकमा'

ईरान का एक सुपरटैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक पहुंच गया है। मॉनिटरिंग फर्म 'टैंकरट्रैकर्सडॉटकॉम' के अनुसार, जहाज लगभग 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर वहां से निकल गया

देशबन्धु 3 May 2026 10:09 am

अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई को 'पाइरेसी' बताने पर विवाद, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की उठाई मांग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर विवाद और गहरा गया है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों की जब्ती कार्रवाई को पाइरेट्स जैसा (समुद्री लुटेरों) बताया

देशबन्धु 3 May 2026 9:22 am

ईरान के प्रस्ताव पर ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से भेजे गए नए प्रस्ताव पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह जल्द ही इसकी समीक्षा करेंगे, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि यह स्वीकार्य होगा

देशबन्धु 3 May 2026 9:08 am

बांग्लादेश बार एसोसिएशन चुनाव: अवामी लीग से जुड़े वकीलों के नामांकन रद्द होने पर वैश्विक आलोचना

बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने 13-14 मई को होने वाले चुनाव के लिए 90 में से 42 वकीलों के नामांकन पत्र यह कहते हुए खारिज कर दिए कि उनका अवामी लीग से संबंध है

देशबन्धु 3 May 2026 7:10 am

पाकिस्तान: मानवाधिकार वकीलों की अपील सुनवाई में देरी पर अधिकार संगठन चिंतित

पाकिस्तान के मानवाधिकार परिषद (एचआरसी-पाकिस्तान) ने शनिवार को सरकार और संबंधित न्यायिक अधिकारियों से मानवाधिकार वकील ईमान ज़ैनब मजारी-हाज़िर और हादी अली चट्ठा के कानूनी अधिकारों की तत्काल रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की

देशबन्धु 3 May 2026 6:50 am

तिब्बत में चीन के कथित अत्याचारों पर अमेरिका का सख्त रुख, नया बिल पेश

अमेरिका के सीनेटर रिक स्कॉट और जेफ मर्कले ने हाल ही में 'तिब्बत एट्रोसिटीज डिटरमिनेशन एक्ट' पेश किया है

देशबन्धु 3 May 2026 6:30 am

आईडीएफ का सबसे बड़ा वार, हिजबुल्लाह के 120 ठिकाने ध्वस्त

इजराइल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने बताया कि उसने हिजबुल्लाह के लगभग 120 ठिकानों पर हमला किया है

देशबन्धु 3 May 2026 6:16 am

दक्षिण कोरिया-ईरान में बातचीत, होर्मुज स्ट्रेट पर सुरक्षित आवाजाही शुरू करने की अपील

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बात की और होर्मुज स्‍ट्रेट से फिर से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही शुरू करने की अपील की।

देशबन्धु 3 May 2026 6:00 am

संडे जज्बात-तीन बार कैंसर से लड़ी, फिर पति को हुआ:हमने कई बार मौत को करीब से देखकर नौकरी-कारोबार छोड़ा, चरखे में सुकून तलाश लिया

मैं ललिता हूं और हरियाणा के रोहतक की रहने वाली हूं। कभी मेरी पहचान एक फैशन डिजाइनर के तौर पर थी। रसूखदार परिवारों से कपड़ों के ऑर्डर मिलते थे। रंग, कपड़े, डिजाइन और ग्लैमर की दुनिया में मेरी पहचान थी। मेरे पति अपना बिजनेस संभालते थे। जिंदगी आराम से गुजर रही थी और पैसों की भी कोई कमी नहीं थी। मुझे लगता था कि जिंदगी ने मुझे सब कुछ दे दिया है, लेकिन सिर्फ 15 साल की उम्र में मुझे दो बार टीबी हुई। बड़ी मुश्किल से उससे उबरी, लेकिन असली लड़ाई अभी बाकी थी। आगे चलकर कैंसर ने मुझे तीन बार अपनी चपेट में लिया और एक बार मेरे पति को भी। साल 1995। मेरी उम्र थी 19 साल। दिल्ली में पढ़ाई कर रही थी, तभी एक दिन ब्रेस्ट में तेज दर्द उठा। पहले लगा नॉर्मल समस्या होगी, लेकिन दर्द बढ़ता गया। घबराकर मैंने पापा को बताया और उन्होंने तुरंत मुझे रोहतक बुला लिया। जांच में डॉक्टरों ने बताया कि ब्रेस्ट में गांठ है। उस दौर में मैमोग्राफी जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। 19 साल की उम्र में पहली बार ऑपरेशन थिएटर के बाहर खड़ी मैं डर से कांप रही थी, लेकिन सर्जरी सफल रही और गांठ निकाल दी गई। मेरे ऑपरेशन के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि घर पर एक और तूफान आ गया। पिता को लिवर कैंसर होने का पता चला। वह रिटायर्ड अफसर थे, मजबूत इंसान थे, लेकिन कुछ ही महीनों में बीमारी ने उन्हें मुझसे छीन लिया। पिता मेरे लिए पैसा और प्रॉपर्टी छोड़ गए थे, इसलिए भविष्य की चिंता नहीं थी, लेकिन जिस इंसान के भरोसे मैं खड़ी थी, वही चला गया। मां से मुझे कभी वह अपनापन नहीं मिला। बचपन से घर में काम करने वाली अम्मा ने मुझे पाला, जिन्हें मैं आज भी ‘हंसो मां’ कहती हूं। पापा के जाने के बाद खुद को संभालना मेरी जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाइयों में से एक था। 1997 में मैंने सोचा था कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है। मैं पढ़ाई के लिए दोबारा दिल्ली आ गई थी, लेकिन तभी नाभी के पास तेज दर्द शुरू हुआ। जांच में पता चला कि मुझे बार्थोलिन ग्लैंड कैंसर है, जो वजाइना के हिस्से में होता है। दूसरी बार ‘कैंसर’ शब्द सुनते ही मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। पापा अब इस दुनिया में नहीं थे और मां ने साफ कह दिया- ‘मैं ऑपरेशन के लिए नहीं आऊंगी।’ यह सुनकर मुझे दुख कम, खालीपन ज्यादा महसूस हुआ। आखिर में मैंने दोस्तों को सब बताया। वही मेरे परिवार की तरह खड़े रहे। उन्होंने अस्पताल के चक्कर लगाए, हिम्मत दी और सर्जरी करवाई। लगा कि लड़ाई खत्म हो गई… लेकिन सिर्फ छह महीने बाद उसी जगह फिर दर्द शुरू हो गया, जहां कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। जैसे ही लगा कि जिंदगी फिर सामान्य हो रही है, डॉक्टरों ने बताया कि बार्थोलिन ग्लैंड में कैंसर दोबारा लौट आया है। मुझे फिर ऑपरेशन थिएटर में जाना पड़ा। सर्जरी हुई। धीरे-धीरे संभल रही थी कि छह महीने के भीतर मेरी तबीयत फिर बिगड़ गई। जांच रिपोर्ट ने एक और झटका दिया- इस बार कैंसर फैलोपियन ट्यूब के हिस्से तक पहुंच चुका था। इलाज लंबा, दर्दनाक और थका देने वाला था, लेकिन डॉक्टर किसी तरह मेरी फैलोपियन ट्यूब बचाने में कामयाब रहे। मैं बार-बार कैंसर को हराने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हर अस्पताल के कमरे में मुझे पापा की गैरमौजूदगी सबसे ज्यादा चुभती थी। कैंसर की लंबी लड़ाई लड़कर जब घर लौटी, तो घर में मां रोज शादी के लिए दबाव बनाने लगीं। मैं मानसिक रूप से इतनी थक चुकी थी कि बस उस माहौल से बाहर निकलना चाहती थी। तब मेरी उम्र 28 साल थी। एक जाट लड़के को पसंद करती थी। मैंने उससे शादी करने का फैसला कर लिया। उसे और उसके परिवार को साफ बता दिया था कि मैं कैंसर सर्वाइवर हूं। मुझे लगा था कैंसर सर्वाइवर होना उनके लिए सबसे बड़ा सवाल होगा, लेकिन उन्हें मेरे कैंसर से नहीं, मेरी उम्र से परेशानी थी- मैं उनके बेटे से पांच साल बड़ी थी। आखिरकार शादी हो गई। लेकिन ससुराल पहुंचते ही एक नई लड़ाई शुरू हो गई। मुझसे घूंघट करने को कहा जाता, हर बात पर रोक-टोक होती। हॉस्टल में पली मेरी आजाद जिंदगी अचानक परंपराओं के घेरे में कैद की जाने लगी। घूंघट न करने पर अक्सर झगड़े होते। आखिरकार रोज के तनाव से तंग आकर मैं पति के साथ अलग रहने लगी। किराए के छोटे से घर में नई शुरुआत की और फैशन डिजाइनिंग सीखी। मैंने बीएएमएस की पढ़ाई की थी। इसलिए शौक में आयुर्वेद की प्रैक्टिस करती थी और साथ ही कपड़े डिजाइन कर अच्छी कमाई भी हो रही थी। शादी को छह साल हो चुके थे और हमारा एक साल का बेटा था। जिंदगी आखिरकार सामान्य लगने लगी थी। फिर एक दिन सब बदल गया। मैं रोहतक से बाहर थी, तभी पति का फोन आया- ‘मेरा मुंह खुलना बंद हो गया है, डॉक्टर के पास जा रहा हूं।’ मैं घबरा गई। तुरंत वापस लौटी और उन्हें अस्पताल लेकर गई। जांच में पता चला कि उन्हें गले का कैंसर है। पति एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे। 45 बार कीमोथेरेपी हुई। पैसों की कमी नहीं थी, लेकिन अपनों का साथ नहीं था। मेरी सास अपने बेटे को देखने तक नहीं आईं। उनकी सर्जरी 12 घंटे चली- सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक। बाहर मैं एक साल के बच्चे को गोद में लेकर बैठी थी और अंदर पति जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे थे। तीन महीने बाद उनकी हालत सुधरने लगी। उन दिनों मैं अपनी आयुर्वेद की पढ़ाई के भरोसे जड़ी-बूटियों का काढ़ा बनाती थी, जिससे उनकी रिकवरी में सहारा मिला। पति के ठीक होने के बाद भी हमारे भीतर का डर खत्म नहीं हुआ। हम दोनों मौत को इतने करीब से देख चुके थे कि पैसा, बिजनेस और भाग-दौड़ अचानक बहुत छोटे लगने लगे। हमने तय किया- अब जिंदगी सिर्फ कमाने के लिए नहीं, सुकून से जीने के लिए होगी। मेरे पति ने अपना एग्रीकल्चर प्रोडक्ट बिजनेस छोड़ दिया। मैं फैशन डिजाइनिंग कर रही थी, लेकिन जिंदगी मुझे एक बिल्कुल नए रास्ते की ओर ले जा रही थी। एक दिन मुझे रेडियो के टॉक शो में बुलाया गया। वहां डायरेक्टर ने एक कपड़ा मेरी तरफ बढ़ाया और पूछा- बताओ, यह किस धागे से बना है? मैं जवाब नहीं दे पाई। उन्होंने कहा- तुम फैशन डिजाइनर हो और इसे नहीं पहचानतीं? यह रेजा कपास है। उनकी बात मेरे दिल पर लग गई। मैंने तुरंत कहा- मुझे 15 दिन दीजिए, मैं इसके बारे में सब जानकर लौटूंगी। मैंने इंटरनेट खंगाला, लोगों से पूछा, रिकॉर्ड ढूंढ़े- लेकिन कुछ नहीं मिला। आखिरकार पुरानी किताबों में इसका जिक्र मिला। कबीरदास और गरीबदास की रचनाओं में रेजा कपास पर बातें मिलीं, जिसे पढ़कर लगा कि मैं किसी भूली हुई विरासत के पीछे चल पड़ी हूं। रेजा सूत की कहानी ने मुझे भीतर तक बेचैन कर दिया। मैंने तय किया कि सिर्फ इसके बारे में पढ़ना नहीं, इसे अपने हाथों से समझना है। हरियाणा में एक पुराने मुस्लिम परिवार का पता चला, जो पीढ़ियों से चरखा चलाना सिखाता था। मैं उनके पास गई, चरखा सीखा और फिर एक चरखा अपने घर लेकर आई। मैंने अपने पति को भी यह सिखाया। हैरानी की बात यह थी कि जिस मन ने सालों तक अस्पताल, कैंसर और मौत का डर झेला था, उसे चरखे की आवाज में शांति मिलने लगी। धीरे-धीरे चरखा हमारे लिए सिर्फ हुनर नहीं, मानसिक इलाज जैसा बन गया। फिर मुझे लगा कि अगर इसने हमें सुकून दिया है, तो शायद उन लोगों को भी दे सकता है, जिनकी जिंदगी दुखों से भरी है। मैं जेलों में गई और कैदियों को चरखा सिखाना शुरू किया। उनके हाथों से निकला सूत कपड़ों में बदलता और उन्हें यह एहसास देता कि वे अब भी किसी काम के हैं। बाद में हमने हैंडलूम की मशीन पर धागों को कातना शुरू किया। अब तक मेरी सोच नहीं बदली थी। मेरा काम भी बदल गया था। मैंने हरियाणा में 1970 में खत्म हो चुकी रेजा कपास की खेती को फिर से जिंदा करने की ठानी। बड़ी मशक्कत से इसके बीज खोज पाई। आज मैं किसानों को रेजा कपास का बीज देती हूं और उनसे इसकी खेती करवाती हूं। उसी कपास से खादी के कपड़े बनाती हूं। उन कपड़ों पर डिजाइन खुद तैयार करती हूं। आज ये कपड़े देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच रहे हैं। मेरी जानकारी में पूरे भारत में सिर्फ मैं ही रेजा कपास से डिजाइनर कपड़े बना रही हूं। लेकिन मेरी असली कमाई कपड़े नहीं। यह धागा है। जब यह घूमता है, तो मेरे भीतर का शोर धीमा पड़ जाता है। हर धागे के साथ लगता है कि मैं अपने टूटे हिस्सों को फिर से जोड़ रही हूं। हमने जिंदगी बहुत तेज भागकर जी थी- बीमारी, पैसा, बिजनेस, अस्पताल… सब देखा। अब हमने धीरे जीना सीखा है। आज भी मेरे पास घर, पैसा और सुविधाएं हैं, लेकिन सबसे बड़ी दौलत शांति है। पहले मैं सिर्फ कपड़े बुनती थी, अब अपनी जिंदगी को फिर से बुन रही हूं। (ललिता ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-हम अधेड़ कुंवारे कौवों जैसे अपशकुन माने जाते हैं:सरकार हमें देती है पेंशन, जाने कितने जानवरों से रेप करते पकड़े गए लोग मुझे मेरे नाम से कम, रं@#% कहकर ज्यादा बुलाते हैं। मुझे शुभ कामों से दूर रखा जाता है। गलती से पहुंच जाऊं तो लोगों का चेहरा उतर जाता है। मैं वीरेंद्र दून। हरियाणा के जिला हांसी के गांव पेटवाड़ का रहने वाला हूं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-मैंने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने मुझे झकझोर दिया था मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 3 May 2026 5:38 am

खसरे की चपेट में बांग्लादेश, यूनुस सरकार की नीतिगत बदलाव बना कारण

बांग्लादेश इस समय खसरे (मीजल्स) की गंभीर महामारी से जूझ रहा है। मार्च मध्य से अब तक देश में 32,000 से अधिक संदिग्ध मामले और 250 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें अधिकांश छोटे बच्चे शामिल हैं।

देशबन्धु 2 May 2026 11:44 pm

ईरान के जंजान में भीषण धमाका, रिवोल्यूशनरी गार्ड के 14 जवानों की मौत

ईरानी मीडिया और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह विस्फोट उस समय हुआ जब आईआरजीसी के जवान इलाके में बचे हुए गोला-बारूद और क्लस्टर बमों को हटाने और निष्क्रिय करने का काम कर रहे थे।

देशबन्धु 2 May 2026 1:03 pm

जर्मनी से 5,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की योजना बना रहा पेंटागन: मीडिया

पेंटागन जर्मनी से करीब 5,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की योजना बना रहा है, ऐसा एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने बताया।

देशबन्धु 2 May 2026 9:10 am

अमेरिका ने ट्रेड डील तोड़ी तो ऑटो टैरिफ पर हमारे ‘सभी विकल्प खुले’: यूरोपीय यूनियन

यूरोपीय यूनियन ने कहा कि यदि अमेरिका साझा व्यापार समझौते के विपरीत कदम उठाता है, तो वह अपने हितों की रक्षा के लिए “सभी विकल्प खुले” रखेगा

देशबन्धु 2 May 2026 9:02 am

ईरान से बातचीत अनिश्चित, समझौते और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प खुले: ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है

देशबन्धु 2 May 2026 8:20 am

पाकिस्तान : बलूचिस्तान में सड़क निर्माण साइट हमले की बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने ली जिम्मेदारी

बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (बीआरजी) ने शुक्रवार को 29 अप्रैल को हुए हमले की ज‍िम्मेदारी ली

देशबन्धु 2 May 2026 7:40 am

पाकिस्तान : खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस वाहन पर रॉकेट से हमला, एक कांस्टेबल की मौत, दो घायल

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू शहर में कंगर जान बहादुर इलाके में सशस्त्र हमलावरों ने एक पुलिस वाहन को रॉकेट हमले का निशाना बनाया, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई और दो अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए।

देशबन्धु 2 May 2026 5:20 am

'राष्ट्रीय मजदूर दिवस' पर थाईलैंड में कामकाजी ढांचे में बड़ा बदलाव, गुड जॉब इकोनॉमी पर जोर

थाईलैंड सरकार ने 'राष्ट्रीय मजदूर दिवस' के मौके पर कामकाजी ढांचे में बड़े बदलाव की घोषणा की। तेजी से बदलती भू-राजनीतिक चुनौतियों और तकनीकी बदलावों के बीच सरकार ने यह फैसला ल‍िया।

देशबन्धु 2 May 2026 4:40 am

ट्रंप का बड़ा फैसला: यूरोपीय कारों पर 25% टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यूरोपीय संघ से आने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया है

देशबन्धु 2 May 2026 4:17 am

ईरान को लेकर अमेरिका की नई रणनीति, हाइपरसोनिक हमले का विकल्प, बचे हुए ईरानी नेता टारगेट पर

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ एक अहम बैठक की। इस दौरान ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के कई विकल्पों पर चर्चा की गई।

देशबन्धु 1 May 2026 4:07 pm

असम के सीएम हिमंता सरमा के बयान पर बांग्लादेश की आपत्ति, भारतीय उच्चायुक्त को किया तलब

सरमा ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि असम अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करता रहेगा और ऐसे लोगों को वापस भेजने का अभियान जारी रहेगा। इस पोस्ट के साथ उन्होंने उन लोगों की दो तस्वीरें भी साझा की थीं, हालांकि उनकी पहचान छिपाने के लिए चेहरों को धुंधला कर दिया गया था। इसी पोस्ट की भाषा और शैली को लेकर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई है।

देशबन्धु 1 May 2026 10:42 am

ईरानी विदेश मंत्री ने लेबनान पर इजरायली हमलों को बताया 'क्रूर'

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और लेबनान की संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने लेबनान के खिलाफ इजरायल की “आक्रामक” कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है।

देशबन्धु 1 May 2026 9:53 am

ट्रंप का दावा-ईरान हुआ कमजोर, करना चाहता है समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान काफी कमजोर हो गया है और बातचीत के लिए उत्सुक है। हालांकि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव अब भी बना हुआ है।

देशबन्धु 1 May 2026 9:05 am

म्यांमार की नेता आंग सान सू की जेल से रिहा, घर में नजरबंद

म्यांमार की नेता आंग सान सू की को जेल से रिहा कर दिया गया है। उन्हें नजरबंदी (हाउस अरेस्ट) में भेज दिया गया है

देशबन्धु 1 May 2026 8:45 am

गाजियाबाद में क्या AC फटने से भयंकर आग लगी:ज्यादा गर्मी में AC में ब्लास्ट क्यों हो जाता है, इससे बचने के क्या तरीके

गाजियाबाद के एक हाईराइस टावर में 29 अप्रैल को आग लग गई। देखते ही देखते 7 मंजिलों में आग फैल गई। आग लगने का कारण एक फ्लैट में AC ब्लास्ट होना बताया जा रहा है। इससे पहले 28 अप्रैल को नोएडा में भी एक घर में AC का मेन स्विच ऑफ नहीं था, जिससे ब्लास्ट हो गया। आखिर गर्मी बढ़ने से AC ब्लास्ट क्यों होने लगते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में... सवाल-1: गाजियाबाद में AC फटने का मामला क्या है? जवाब: गाजियाबाद की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में 29 अप्रैल को आग लगी, देखते ही देखते 12वीं मंजिल तक पहुंच गई… सवाल-2: आखिर ज्यादा गर्मी में AC फट क्यों जाता है? जवाब: सबसे पहले समझिए कि AC काम कैसे करता है… अब समझते हैं कि गर्मी में AC के सिस्टम में क्या गड़बड़ी होती है, जिससे यह ब्लास्ट हो जाता है… 1. कंप्रेसर का ओवरहीट होना गर्मियों में बाहर का तापमान 45C+ होता है। AC का कंप्रेसर आउटडोर यूनिट में होने के कारण पहले से ही गर्म हवा में काम करता है। लगातार बिना रुके चलने से कंप्रेसर ज्यादा गर्म हो जाता है। दबाव इतना बढ़ जाता है कि वह फट जाता है। 2. रेफ्रिजरेंट गैस का रिसाव AC में R-22 या R-410A जैसी गैस होती है। यह कमरे की गर्मी को बाहर ले जाने का काम करती है, जिससे कमरा ठंडा हो जाए। यह गैस ज्वलनशील होती है, यानी हल्की सी चिंगारी से भी आग पकड़ सकती है। अगर पाइप या वॉल्व में लीकेज हो जिससे गैस बाहर आ रही है, तो आग लग सकती है। 3. शॉर्ट सर्किट और खराब वायरिंग खराब वायरिंग और एक ही ओवरलोडेड सॉकेट का इस्तेमाल शॉर्ट सर्किट की सबसे बड़ी वजह है। गर्मियों में घर के सभी AC, पंखे, फ्रिज एक साथ चलते हैं, जिससे बिजली का बोझ बढ़ जाता है। ऐसे में शॉर्ट सर्किट हो सकता है। 4. पुराने AC का समय पर मैनटेनेंस न होना बिना सर्विसिंग के AC के फिल्टर बंद हो जाते हैं। AC के अंदर एक ब्लोअर फैन होता है, जो फिल्टर के जरिए हवा खींचता है। धूल के कारण अगर यह बंद हो जाए, तो फैन को हवा खींचने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है। इससे मोटर गर्म हो जाती है और लाग लग सकती है। जब हवा फैन तक आती ही नहीं तो रेफ्रिजरेंट गैस उसे ठंडी नहीं कर पाती। कंप्रेसर को लगता है कि कमरा अभी भी गर्म है और वह भी ज्यादा ताकत से काम करने लगता है। इससे भी कंप्रेसर फटने का खतरा होता है। 5. हाईराइज बिल्डिंग में आग का तेजी से फैलना हाईराइज बिल्डिंग में आग नीचे से ऊपर तेजी से जाती है क्योंकि गर्म हवा हमेशा ऊपर उठती है। इसे स्टैक इफेक्ट कहा जाता है। अगर बिल्डिंग में लिफ्ट शाफ्ट खुला हो, AC डक्ट्स जुड़े हों, वेंटिलेशन सिस्टम कमजोर हो या फायर डोर सही से बंद न हों, तो पूरा ढांचा चिमनी की तरह काम करने लगता है। सवाल-3: क्या इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी है? जवाब: पिछले कुछ महीनों में AC ब्लास्ट के कई मामले सामने आ चुके हैं। फरीदाबाद, 8 सितंबर 2025: AC ब्लास्ट से परिवार के 3 लोग, पालतू कुत्ते की मौत तेलंगाना, 25 जनवरी: हॉस्टल में AC ब्लास्ट, 6 लड़कियां बेहोश हुई विजयवाड़ा, 25 अप्रैल: शॉर्ट सर्किट से AC का कंप्रेसर फटा नोएडा, 28 अप्रैल: मेन स्विच बंद न करने से AC ब्लास्ट हुआ सवाल-4: गर्मी बढ़ने पर अचानक AC में ब्लास्ट न हो, इसके लिए क्या सावधानी जरूरी? जवाब: गर्मी में अचानक AC ब्लास्ट न हो इसके लिए कुछ सावधानियां रखी जा सकती हैं… ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास ---------------------------------ये खबर भी पढ़ें… पंखे आग उगलते हैं, रात में भी राहत क्यों नहीं:भारत की गर्म रातें कैसे बन रहीं साइलेंट किलर; इससे कैसे बचें भारत में गर्मी का मतलब अब सिर्फ दोपहर की झुलसाने वाली धूप नहीं रह गया है। अब सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिलती। रात 11 बजे भी दीवारें गर्म रहती हैं, पंखे गर्म हवा फेंकते हैं और कूलर-एसी भी कई बार बेअसर लगते हैं। वैज्ञानिक इसे ‘वार्म नाइट्स’ कहते हैं। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 30 Apr 2026 4:08 pm

अमेरिका की महिला सांसद ने ट्रंप की दिमागी हालत पर उठाए सवाल, भरी सभा में रक्षा मंत्री से पूछा- क्या वो कमांडर इन चीफ रहने लायक हैं?

सारा जैकब्स के इस सवाल पर रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे राष्ट्रपति का अपमान बताते हुए कहा कि इस तरह के सवाल न केवल अनुचित हैं, बल्कि देश के सर्वोच्च पद की गरिमा के खिलाफ भी हैं। हेगसेथ ने पलटवार करते हुए जैकब्स से पूछा कि क्या उन्होंने यही सवाल पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन से उनके कार्यकाल के दौरान कभी पूछा था।

देशबन्धु 30 Apr 2026 2:23 pm

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वोटिंग राइट्स एक्ट कमजोर, ओबामा-हैरिस ने बताया लोकतंत्र के लिए काला दिन

अदालत ने लुइसियाना बनाम कैलाइस मामले में 6-3 के बहुमत से ऐसा निर्णय दिया है, जिससे वोटिंग राइट्स एक्ट (VRA) की धारा 2 का प्रभाव काफी हद तक सीमित हो गया है। इस फैसले के बाद अब चुनावी क्षेत्रों के नक्शों को नस्लीय आधार पर चुनौती देना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो जाएगा।

देशबन्धु 30 Apr 2026 11:38 am

अमेरिकी संसद में रणनीतिक संतुलन को लेकर बहस, इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पर चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी सांसदों ने चिंता जाहिर की है कि वर्तमान हालातों में कहीं अमेरिका का ध्यान चीन पर से न हट जाए

देशबन्धु 30 Apr 2026 10:17 am

ब्लैकबोर्ड- स्टाम्प पेपर पर 1.5 लाख में खरीदी बीवी:मामा ने कमीशन खाया, शादी के 4 दिन बाद भागी- जितने हाथों बिकती, कीमत बढ़ती जाती

मध्य प्रदेश का शिवपुरी जिला। पथरीले खेतों और अलसाई सड़क से होते हुए 40 किलोमीटर दूर एक तहसील है- पोहरी। गर्मी की धूप में डामर की सड़कें ऐसी तप रही हैं कि गलती से पैर पड़े तो छाले पड़ जाएं। दूर से ही कुछ घर नजर आने लगे। एक घर के सामने भीड़ लगी है। दो हट्टे-कट्टे मर्द जोर-जोर से चिल्ला रहे हैं- ‘हमने इस मौड़ी को 20 हजार रुपए में खरीदकर अपनी बहू बनाया था। अब ये तेरे साथ रहने लगी। अगर तू इसे अपने घर में रखेगा तो झगड़ा देना पड़ेगा। पैसा देना पड़ेगा। इसकी दूसरी शादी है, इसलिए कीमत और बढ़ जाएगी।’ फिर बोली लगनी शुरू हुई। आखिरकार 40 हजार कीमत तय हुई। एक शख्स ने हाथ जोड़कर कहा- ‘इतना पैसा तो नहीं है, साहूकार से उधार लेकर आता हूं।’ पूछने पर पता चला कि इस इलाके में शादी के लिए लड़कियां खरीद कर ही लाई जाती हैं। वो भी बकायदा स्टाम्प पेपर के साथ। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज कहानी मध्य प्रदेश के इसी इलाके से, जहां स्टाम्प पर तय हो रही शादी के लिए लड़कियों की कीमत… मैंने पास खड़े शख्स से पूछा- ‘झगड़ा देना पड़ेगा का क्या मतलब होता है?’ वो बोले- ‘यहां झगड़ा का मतलब लड़की की खरीददारी करना होता है। आदिवासी समुदाय में पहली शादी के बाद दूसरी या तीसरी शादी होने पर झगड़ा देना पड़ता है, यानी एक तय रकम देनी होती है। यह रिवाज है। पहली, दूसरी, तीसरी… शादी को इनके समुदाय में हाथ से गुजरना कहते हैं। जितनी शादियां होंगी, लड़की की कीमत उतनी बढ़ती जाएगी। जैसे- कोई 50 हजार में लड़की खरीद कर लाया, फिर वो लड़की कुछ दिन रही और दूसरे घर चली गई तो पहली शादी वाली फैमिली 50 हजार से ज्यादा लेगी, तब उस लड़की को दूसरे पति के साथ रहने देगी। ऐसे रेट बढ़ता रहता है। अब तक यहां खड़ी भीड़ घर की तरफ लौट गई थी। घर के सामने पेड़ के नीचे चेहरे पर मासूमियत लिए एक लड़की बैठी है, जिसकी कीमत 40 हजार तय हुई है। नाम- बबीता। कुछ देर बात करने के बाद वो सहज हुईं। शादी के बारे में पूछते ही बोलीं- कुछ दिन पहले मेरी दूसरी शादी सोनवीर से हुई है। वो मुझसे दो साल छोटा है। ‘पहली शादी कहां हुई थी’ ‘पहली शादी जिससे हुई थी, वो खूब-मारता पीटता था। शराब पीकर रात-रातभर मुझे मोटर साइकिल पर बिठाकर अपने दूसरे-तीसरे रिश्तेदारों के यहां घुमाता रहता था। मना करती थी, तो वह और मारता था। बीवी उसकी थी, लेकिन अपने रिश्तेदारों के यहां मुझे रात में सुला देता था। नींद में मेरे साथ क्या होता होगा, क्या नहीं, मुझे नहीं पता। इसलिए मैं एक दिन मायके भाग आई। कुछ दिन बाद ही सोनवीर से शादी कर ली। डेढ़ साल से हम दोनों एक-दूसरे को जानते थे।’ अब तक सोनवीर भी साहूकार से पैसे उधार लेकर लौट आए थे। वो भी बबीता के पास ही बैठ गए। कितनी उम्र होगी आपकी? मैंने बबीता से पूछा ‘मुझे नहीं पता कि मेरी कितनी उमर होगी।’ सोनवीर धीरे से बोलते हैं, ‘21, 22 साल होगी। 40 हजार रुपए साहूकारों से ब्याज लेकर इसके पहले ससुराल वालों को दे रहा हूं। अब क्या कर सकता हूं। मुझसे शादी नहीं होती, तो कोई इसका गलत फायदा उठाता।’ सोनवीर के एक रिश्तेदार भी यहीं पर बैठे हुए हैं। कहते हैं, ‘पहली शादी के बाद, दूसरी-तीसरी शादी के लिए सब पैसा देकर ही लड़की लाते हैं। अब ये लड़की यदि दूसरे-तीसरे घर में जाएगी, तो इसका रेट बढ़ता जाएगा। जैसे ये लड़की अब हमारे घर में 40 हजार रुपए में आई है। अब ये किसी तीसरे घर में गई, तो हम लोग कम-से-कम 80 हजार रुपए तो लेंगे ही।’ ऐसे लड़की खरीदकर लाने में डर नहीं लगता? ‘किस बात का डर। यहां बड़े-बड़े लोगों के घर में लड़कियां दूसरे जगह से ज्यादा-ज्यादा कीमत पर खरीदकर लाई जाती हैं। लोग डरते हैं इसलिए बताते नहीं हैं। हमारा एक पड़ोसी है राकेश- उसकी बीवी कुछ दिन पहले भाग गई। साथ में तीन साल के बेटे को भी लेकर चली गई।’ कुछ देर बाद राकेश से मेरी मुलाकात हुई। वह परेशान हैं, लेकिन कैमरे पर एक शब्द नहीं बोलना चाहते। कहते हैं, ‘4 साल पहले शादी हुई थी। उससे एक बेटा भी है और दोबारा पेट से है। शादी का कागज-पत्तर सब बनवाया था। कुछ दिन पहले ही बेटे को लेकर पता नहीं कहां भाग गई। 30 हजार रुपए में शहडोल से खरीदकर लाया था। मंदिर में शादी हुई थी। अब वह लड़का मुझे वापस कर दे, तो जान में जान आए। इसी चिंता में 10 दिन से खाना नहीं खाया है। दिनभर बेटे की याद आती है, लेकिन उसकी मां कसाई निकली। पूरी रकम चुकाई थी। तीन साल से अच्छे से रह भी रहे थे हम दोनों, तब भी भाग गई। मेरा 6-7 महीने का बच्चा उसके पेट में पल रहा है। पता नहीं, अब किसके हाथ चली गई। मिल जाए, तो इसकी खाल उधेड़ लूंगा,’ बीवी को गाली देते हुए राकेश चले जाते हैं। इसके बाद मेरी मुलाकात मुकेश नाम के शख्स से हुई। वो बताते हैं, ‘यहां इतनी गरीबी है कि अच्छे-अच्छे लोगों की शादी नहीं हो पाती है। इसलिए कई लोग ओडिशा, झारखंड, बिहार से लड़की लेकर आते हैं। ये ऐसी लड़कियां होती हैं, जिनके परिवार में अमूमन कोई नहीं होता। दलाल लड़के के परिवार से पैसे लेकर शादी करवाता है। शादी के बाद जब लड़कियों को दो वक्त का खाना नसीब होने लगता है, तो यहीं की होकर रह जाती हैं। हालांकि, कुछ लड़कियां पैसों की लालच में फिर से भाग जाती हैं। लड़कियों की कीमत 10-20 हजार रुपए से लेकर 2-2 लाख तक होती है।’ यहां से निकलकर मैं गांव के बाहर एक ढाबे पर पहुंचा। सामने अधेड़ उम्र का आदमी भट्ठी में रोटियां सेंक रहा था। मैंने उससे रास्ता पूछने के बहाने बातचीत शुरू की। जब वो सहज होने लगा तो धीरे से पूछा- ‘यहां दूसरे राज्यों से लड़कियां लाई जाती है?’ वो दबी जुबान में बोला, ‘यहां ज्यादातर घरों की बहुएं ऐसे ही लाई गई हैं, लेकिन कोई बात नहीं करेगा। कोई 30 साल पहले ओडिशा से लड़की लेकर आया, तो कोई बिहार से। बहुतों का घर बस गया और कईयों का उजड़ भी गया। पैसा भी चला गया और लड़की भी।’ ‘तो जो लड़कियां भाग जाती हैं, उनकी कोई खोज खबर नहीं मिलती?’, मैंने पूछा ‘इतनी दूर से लाते हैं। ज्यादातर के तो रिश्तेदारों का भी पता नहीं होता, कहां ही खोज पाएंगे। इसलिए अब जो लड़कियां यहां आ चुकी हैं, वही अपने रिश्तेदारी में शादी करा देती हैं। सामने ही चाय वाला है। उसकी भाभी ओडिशा से हैं। अब अपने देवर की शादी भी ओडिशा में ही करवा रही है। आप गांव में घूम जाएंगे, लेकिन कोई बात नहीं करेगा। सब डरते हैं कि उसका बसा-बसाया घर उजड़ जाएगा। कौन जाएगा मुसीबत मोल लेने।’ यहां लड़कियां कम हैं या बेरोजगारी की वजह से कोई अपनी लड़की नहीं देता? ‘शिवपुरी में लड़कियों की आबादी बहुत कम है न! हजार मर्दों पर 800 के करीब लड़कियां हैं। इसलिए बरसों से दूसरे राज्यों से, मध्य प्रदेश के ही अलग-अलग शहरों से लड़कियों को खरीदकर लाते रहे हैं। यह कोई नया नहीं है।’ तभी एक लंगड़ाता हुआ आदमी आ जाता है। बात सुनकर माथा पीटते हुए कहता है, ‘कुछ ही दिन पहले छतरपुर से लड़की खरीदकर लाया था। लाखों रुपए दिए थे। अब न लुगाई रही, न पैसा। सब लुट गया, बर्बाद हो गया। लड़की शादी के 4 दिन बाद ही भाग गई। गहना-जेवर सब ले गई।’ ‘नाम क्या है आपका, कितनी उम्र है?' ‘भरत नाम है, 30 साल का हूं।’ ‘कैसे शादी हुई थी आपकी?’, पूछते हुए मैं कैमरा लगाने लगता हूं। भरत घबराकर उठ खड़े होते हैं। ‘मैं नहीं बात करूंगा। इज्जत लुट गई, अब क्या बात करूं। वीडियो बनाओगे। समाज में बदनामी होगी। मामा ने शादी कराकर सब बर्बाद कर दिया,’ कहते हुए जाने लगते हैं। काफी देर बातचीत के बाद भरत चेहरा ढंककर बात करने को राजी होते हैं। कहते हैं, ‘चार साल पहले की बात है। बाइक से एक्सिडेंट हो गया था। दायां पैर 8 हिस्से में टूट गया। ऑपरेशन हुआ तो लोहे की रॉड डल गई। पैर घुटने से मुड़ता ही नहीं है। ढाई महीने बिस्तर पर रहा। शरीर पूरा गल गया। जब ठीक होकर थोड़ा-बहुत चलने लगा, तब रिश्तेदारी में सब मां से कहने लगे- बेटे की शादी कर लो। लड़की दिलवा देंगे। बुढ़ापे का सहारा हो जाएगा। कब तक अकेले चूल्हे में जलती रहोगी। मैंने मां से कहा- लड़की खरीदने में बहुत फ्रॉड होता है। लड़की कैसी है, क्या पता। नहीं करेंगे शादी। फिर एक दिन मेरे मामा घर आए। बोले- लड़की की गारंटी मैं लूंगा। तुम पैसे खर्च करो। अच्छी लड़की ढूंढ़कर लाऊंगा।’ कितने रुपए पर बात हुई थी? ‘डेढ़ लाख रुपए में सौदा पक्का हुआ। मामा ने एक जानने वाले से बात करके लड़की का फोटो मंगवाया। गोरा चेहरा, नैन-नक्श भी ठीक थे। मैं हां कर दी। लगा कि मेरा वंश आगे बढ़ेगा। फरवरी महीने की बात है। हल्की-हल्की ठंड थी। लड़की को छतरपुर से यहां लाने के लिए 10 हजार रुपए गाड़ी का भाड़ा दिया। लड़की के साथ उसका एक भाई, बुआ और दलाल भी था। सभी लोग यहां के मंदिर में आए। मामा ने मुझसे पैसे लेकर लड़की वालों को दे दिए। एक कमरे में हम दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाया, मिठाई खिलाई। स्टाम्प पेपर पर राजीनामा लिखवाकर शादी पक्की हो गई। लड़की को लेकर हम लोग गांव लौट आए। जैसे एक पति-पत्नी एक कमरे में रहते हैं, हम भी रहने लगे। मां उसे खाना बनाकर खिलाती थी कि नई-नई बहू है। शादी की पहली रात जब मैंने उससे पहले पति के बारे में पूछा तो बोली एक बच्चा था उससे, लेकिन वह मर गया। चौथे दिन की बात है। वह कहने लगी- शहर जाकर माता के मंदिर में माथा टेकना है। हम दोनों सुबह-सुबह बस से मंदिर के लिए निकल गए। मैं तो पैर की वजह से सीढ़ी चढ़ नहीं पाता। इसलिए वो बोली- तुम यहीं पर रुको। मैं पूजा करके आती हूं। वो जो मंदिर की सीढ़ियां चढ़ी कि दोबारा लौटी ही नहीं। शादी में सोने का मंगलसूत्र चढ़ाया था, वह भी लेकर चली गई।’ आप मंदिर के नीचे ही इंतजार कर रहे थे? ‘हां, शाम तक राह ताकता रहा। जब नहीं आई, तब घर वालों को फोनकर बताया कि भाग गई है। एक रोज उसका फोन आया। पीछे से बच्चों के रोने की आवाज आ रही थी। पूछने पर बोली कि ये मेरे ही बच्चे हैं। तीन बच्चों की मां हूं। गाली देते हुए फोन काट दिया। लड़की भी गई, महाजन से कर्ज लेकर जो पैसे दिए थे डेढ़-दो लाख रुपए वो भी गए। सब पानी में चला गया। मामा ने कमीशन खाकर हमें कहीं का नहीं छोड़ा। अब कहां से इतने पैसे चुकाऊंगा,’ कहते-कहते भरत फिर से सामने बैठे मामा से लड़ने लगते हैं। बार-बार वह मामा को कह रहे हैं, ‘तुमने लड़की की गारंटी ली थी। अब बताओ, कहां गई लड़की।’ मामा कुर्सी पर सिर झुकाए बैठे हुए हैं। पूछने पर कहते हैं, ‘मेरे जानने वाले की बीज की दुकान थी। मैंने कहा था कि कोई लड़की हो तो बताना, भांजे को शादी करानी है। उसी ने रिश्ता करवाया था। वह तो 2 लाख रुपए मांग रहा था। मैंने कम करके डेढ़ लाख में पक्का किया था। नहीं पता था कि मौड़ी चार दिन में ही भाग जाएगी। अब पुलिस में मामला दर्ज कराने जाऊं, तो लाज लगती है। डर भी लगता है कि पुलिस कहीं हमें ही न टांग दे। इधर रिश्तेदार दिन-रात मेरी छाती पर चढ़े रहते हैं कि पैसे लौटाओ। मैं क्या करूं। मैंने थोड़े न पैसा लिया है।’ नोट- पहचान छिपाने के लिए लोगों के नाम बदले गए हैं। -------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें2- ब्लैकबोर्ड-जान बचानी थी, तो सिर पर बांध ली भगवा पट्टी:दंगे की तस्वीर ने मेरी जिंदगी बर्बाद की- हिंदुत्व का चेहरा बना, लेकिन मिला कुछ नहीं 2002 गुजरात दंगे के दो पोस्टर बॉय की कहानी, जिनमें हिंदुत्व का चेहरा बने मोची अशोक परमार आज दो वक्त की रोटी को मोहताज हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात सड़क पर सोते हैं। वे उस वक्त 27 साल के थे। आज 51 साल के हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 30 Apr 2026 4:58 am