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जर्मनी फिर करेगा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीट के लिए दावेदारी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट का चुनाव हारने के बाद जर्मनी ने 2035-36 और 2043-44 कार्यकाल के लिए फिर से दावेदारी करने का ऐलान किया है. जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने शुक्रवार को घोषणा की कि देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2035-36 कार्यकाल के लिए फिर से चुनाव लड़ेगा. यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब दो दिन पहले ही जर्मनी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. मैर्त्स ने यह ऐलान मोंटेनेग्रो में यूरोपीय संघ और पश्चिमी बाल्कन देशों के शिखर सम्मेलन में किया. संयुक्त राष्ट्र महासभा में 3 जून को हुए मतदान में जर्मनी को ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल के मुकाबले हार मिली थी. सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए जर्मनी को 104 वोट मिले, जबकि जीत के लिए 127 वोटों के दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी. पुर्तगाल को 134 और ऑस्ट्रिया को 131 वोट मिले. संयुक्त राष्ट्र के कुल 193 सदस्य देश हैं. यह पहली बार था जब जर्मनी सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता हासिल करने में असफल रहा. इससे पहले जर्मनी छह बार सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है और सबसे हाल में उसने 2019-20 कार्यकाल में सीट संभाली थी. हार के कारणों की जांच विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने इस हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा के आदेश दिए हैं. चांसलर मैर्त्स ने वाडेफुल को अपना पूरा समर्थन देते हुए कहा कि इस बार जर्मनी शुरुआत से ही लंबी अवधि की तैयारी करेगा. उन्होंने 2035-36 और 2043-44 दोनों कार्यकालों के लिए जर्मनी की नई उम्मीदवारी की घोषणा की. जर्मननी बहुत समय से स्थायी सीट की मांग करता रहा है. मैर्त्स ने कहा कि स्वीडन की दावेदारी को देखते हुए वह यूरोपीय संघ के भीतर यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि यूरोप से केवल सीमित संख्या में उम्मीदवार मैदान में हो और खासकर यूरोपीय संघ के भीतर से अतिरिक्त प्रतिस्पर्धी दावेदारी न आए. चांसलर ने वाडेफुल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में इस अभियान के लिए कड़ी मेहनत की. मैर्त्स ने यह भी कहा कि जर्मनी की मौजूदा दावेदारी कई साल पहले घोषित हुई थी, लेकिन बहुत देर से सक्रिय तैयारी शुरू हुई. वाडेफुल ने भी माना कि संयुक्त राष्ट्र में मिला परिणाम संतोषजनक नहीं था. न्यूयॉर्क से मेक्सिको पहुंचे वाडेफुल ने कहा कि अब अगली चुनौती की तैयारी शुरू हो चुकी है. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल को शुरुआत से ही बढ़त हासिल थी और जर्मनी ने अपेक्षाकृत देर से अपनी सक्रिय दावेदारी शुरू की. उन्होंने कहा कि जर्मन सरकार ने इस हार से पहला निष्कर्ष निकालते हुए भविष्य के कार्यकालों के लिए अभी से उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है. वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी दुनियाभर में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा, खासकर यूरोप में. समर्थन कम नहीं करेगा जर्मनी इस बीच मेक्सिको सिटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वाडेफुल ने उन मांगों को खारिज कर दिया, जिनमें सुरक्षा परिषद चुनाव हारने के बाद संयुक्त राष्ट्र को दी जाने वाली जर्मनी की आर्थिक सहायता घटाने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने वाली सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक संस्था बनी हुई है और जर्मनी इसमें पूरी तरह सक्रिय रहेगा. वाडेफुल ने कहा कि संकट और संघर्षों के समाधान के मामले में संयुक्त राष्ट्र से अधिक वैधता रखने वाली कोई दूसरी संस्था नहीं है. उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब जर्मनी के हेसे राज्य के अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री मानफ्रेड पेंट्स ने सुझाव दिया था कि सुरक्षा परिषद सीट नहीं मिलने के बाद जर्मनी संयुक्त राष्ट्र को अपनी वित्तीय सहायता कम करने पर विचार कर सकता है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं. इनमें अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो शक्ति है. बाकी 10 अस्थायी सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं. जर्मनी की हालिया हार को उसकी कूटनीतिक रणनीति के लिए एक झटका माना जा रहा है, लेकिन बर्लिन ने साफ कर दिया है कि वह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखेगा और भविष्य में फिर से सुरक्षा परिषद की सीट हासिल करने का प्रयास करेगा. विवेक कुमार (डीपीए, रॉयटर्स)

देशबन्धु 8 Jun 2026 12:50 am

एएफडी की जीत को लेकर जर्मनी में चिंता बढ़ी

पूर्वी जर्मनी में स्थानीय चुनावों से पहले दक्षिणपंथी एएफडी की मजबूत स्थिति और बढ़ते जनसमर्थन ने मुख्यधारा की पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है

देशबन्धु 8 Jun 2026 12:43 am

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वार्श का किया समर्थन, रेट कम करने पर दिया जोर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए बने फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वार्श पर भरोसा जताया और कहा कि वह शानदार हैं और उन्हें मॉनेटरी पॉलिसी पर अपने फैसले खुद लेने चाहिए।

देशबन्धु 7 Jun 2026 11:36 pm

इजरायल में गोलीबारी से हड़कंप: एक की मौत और कई घायल, पीएम नेतन्याहू ने सुरक्षा स्थिति का लिया जायजा

इजरायल के केंद्रीय इलाके कोचाव याइर के पास हुई गोलीबारी की घटना ने पूरे देश में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर है।

देशबन्धु 7 Jun 2026 9:03 pm

आज का एक्सप्लेनर:अन्नामलाई वो करना चाहते थे, जो विजय थलापति ने किया; बीजेपी छोड़ने की असली वजह क्या, अब कौन-सा आंदोलन खड़ा कर रहे

2 जून को तमिलनाडु बीजेपी के नेता के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दिया। 3 दिन मान-मनौव्वल के बाद जब इस्तीफा मंजूर हुआ, तो अन्नामलाई ने अपने नए ‘पॉलिटिकल मूवमेंट’ का ऐलान कर दिया। ये पार्टी 2031 में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। कहा जा रहा है कि अन्नामलाई बीजेपी में रहते वो हासिल कर सकते थे, जो सीएम विजय थलापति ने किया। जबकि कांग्रेस का कहना है कि अन्नामलाई बीजेपी की ही B टीम बना रहे हैं। आखिर अन्नामलाई के बीजेपी से किनारा करने की इनसाइड स्टोरी क्या है, क्या अन्नामलाई विजय थालापति की तरह बीजेपी को बड़ी जीत दिला सकते थे, आगे के प्लान की क्या सच्चाई, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अन्नामलाई के बीजेपी से इस्तीफा देने की इनसाइड स्टोरी क्या है? जवाब: अन्नामलाई ने अगस्त 2020 को BJP जॉइन की औरे 11 महीने बाद 16 जुलाई 2021 को उन्हें BJP प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। दरअसल, तमिलनाडु में पिछले 60 सालों से एक अलग तरह की राजनीति होती आई है, जिसे ‘द्रविड़ पॉलिटिक्स’ कहते हैं। इसी द्रविड़ पॉलिटिक्स के सहारे पार्टियां DMK और AIADMK 60 सालों तक लगातार सत्ता में रहीं। अन्नामलाई ने बीजेपी में रहते द्रविड़ पॉलिटिक्स का काट निकालने की कोशिश की, लेकिन उनका ये मिशन सफल नहीं हो पाया। सवाल-2: आखिर तमिलनाडु की द्रविड़ पॉलिटिक्स है क्या? जवाब: इसकी शुरुआत होती है- आर्य बनाम द्रविड़ की बहस से। जर्मन भाषाविद मैक्स मूलर जैसे कई विद्वानों ने दावा किया कि 1500 ईसापूर्व आर्य नाम की एक जाति ने भारतीय उपमहाद्वीप पर हमला किया। इनकी भाषा संस्कृत थी। वहीं दक्षिण भारत में बोली जाने वाली भाषाओं- तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम को द्रविड़ भाषा कहा गया। ब्रिटिश शासन के दौरान ये सोच बनी कि द्रविड़ भाषाएं आर्यों की भाषा से कमतर हैं। इसी भाषाई आधार पर देश के लोगों में एक बंटवारा हुआ- आर्य बनाम द्रविड़। फिर 20वीं सदी की शुरुआत में मद्रास में द्रविड़ सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन खड़ा हुआ। शुरुआती द्रविड़ नेता ब्राह्मणों के भी विरोधी थे। उसकी वजह थी कि मद्रास प्रेसिडेंसी में सिर्फ 3% ब्राह्मण सरकारी विभागों में करीब 70% प्रमुख पदों पर काबिज थे। गैर-ब्राह्मण नेताओं का मानना था कि ब्राह्मण दक्षिण के मूल निवासी नहीं हैं, बल्कि आर्य हैं और बाहरी हैं। द्रविड़ आंदोलन मूलतः 3 बातों पर टिका था- इन्हीं तीन बातों पर दो बड़ी द्रविड़ राजनीतिक पार्टियां बनीं… 1. DMK: अन्नादुरई पहले गैर कांग्रेसी CM बने 2. AIADMK, एक्टर MG रामचंद्रन सीएम बने 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद से AIADMK कमजोर पड़ती गई। EPS अभी इसके नेता हैं। इधर DMK की कमान एम.के. स्टालिन के हाथों में है। 2021 से 2026 तक उनकी सरकार रही। DMK और AIADMK आज भी द्रविड़ पॉलिटिक्स को सबसे ऊपर रखती हैं। तमिल प्राइड, सेकुलरिज्म और एंटी-हिंदी कल्चर के अपने स्टैंड के लिए जानी जाती हैं। हालांकि दोनों में मूल अंतर ये है कि DMK पेरियार की सोच, एंटी-ब्राह्मण रेशनलिज्म जैसे मुद्दों पर ज्यादा सख्त है। जबकि AIADMK उतना कट्टर नहीं है। इसीलिए AIADMK और BJP का गठबंधन भी हुआ। हालांकि अन्नामलाई द्रविड़ पॉलिटिक्स के बजाय नए तरीके से बीजेपी को सत्ता में लाना चाहते थे। अन्ना से विवाद के चलते बीजेपी इसमें सफल नहीं हुई, लेकिन सिर्फ 2 साल पहले TVK को लॉन्च करने वाले विजय थलापति इसमें सफल हो गए। सवाल-3: तमिलनाडु में ऐसा क्या करना चाहते थे अन्नामलाई, जिस पर बीजेपी से विवाद हुआ? जवाब: तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद अन्नामलाई ने बीजेपी की पॉलिटिक्स और द्रविड़ पॉलिटिक्स के अलावा एक तीसरी तरह की पॉलिटिक्स की… इस्तीफे के बाद अन्ना का तमिलनाडु में तीसरे तरह की पॉलिटिक्स का एक्सपेरिमेंट रुक गया। हालांकि अन्ना की पॉलिटिकल वैक्यूम वाली बात सही साबित हुई। उन्होंने द्रविड़ राजनीति को जितना कमजोर किया, उसका फायदा विजय को हुआ। अन्ना द्रविड़ राजनीति को राष्ट्रवाद से हराना चाहते थे, वहीं विजय ने यही काम अपने ‘नए द्रविड़वाद’ से किया। विजय ने 2 फरवरी 2024 को जब तमिलगा वेत्री कझगम, TVK बनाई तब कहा था, ‘हम द्रविड़ राष्ट्रवाद को तमिल राष्ट्रवाद से अलग नहीं करेंगे। ये दोनों इस धरती की दो आंखें हैं।’ यानी विजय ने भी द्रविड़ राजनीति को ऊपर रखा, लेकिन थोड़ा अलग तरह से। पॉलिटिकल एनालिस्ट आर. राजगोपालन कहते हैं कि ये विजय की नई द्रविड़ विचारधारा है। DMK के आइकॉन पेरियार और करुणानिधि हैं और AIADMK के आइकॉन MGR और जयललिता। जबकि विजय ने 5 बड़ी शख्सियत- कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज, पेरियार, महिला स्वतंत्रता सेनानी वेलु नाच्चियार और अंजलाई अम्माल और भीमराव आंबेडकर को अपना आदर्श बताया। TVK का आधिकारिक नारा है, 'पिरप्पोक्कुम एल्ला उयिर्क्कुम' यानी 'जन्म से सभी जीव समान हैं।' ये DMK और AIADMK की आर्यन बनाम द्रविड़ पॉलिटिक्स की लाइन से अलग है। TVK के नाम में द्रविड़ शब्द तक नहीं है। विजय ने चुनाव में ज्यादा कट्टर द्रविड़वादी मानी जाने वाली DMK का पुरजोर विरोध किया। जबकि AIADMK और उसके नेता EPS को लेकर अपना रुख रखा। सवाल-4: अन्नामलाई का आगे का प्लान क्या, क्या इसमें सफल होंगे? जवाब: अन्नामलाई ने कहा, 'पहले मैं लोगों को आंदोलन से जोडूंगा, फिर उन्हें ट्रेनिंग देकर इसे पॉलिटिकल पार्टी बनाऊंगा।' अन्नामलाई ने WetheLeaders.org नाम का एक पोर्टल बनाया है। 5 जून को पोर्टल शुरू होने के सिर्फ 10 घंटे के भीतर 10 लाख लोगों ने इस पर रजिस्ट्रेशन करा लिया। अन्नामलाई ने कोयंबटूर में ‘एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स’ बनाकर युवाओं को राजनीति की ट्रेनिंग देने का ऐलान भी किया है। उन्होंने कहा, ‘इस सेंटर में मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके उन लोगों को ट्रेन किया जाएगा, जो राजनीति में आना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता। मैं कुछ सबसे प्रतिभाशाली लोगों को राजनीति में लाकर प्रदेश की राजनीतिक भाषा बदलना चाहता हूं।’ अन्नामलाई का कहना है कि 2031 के विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय निकाय चुनावों में भी अपने उम्मीदवार उतारेंगे। पार्टी BJP को भी उसी नजरिए से देखेगी जैसे DMK, AIADMK या दूसरी पार्टियों को।’ तमिलनाडु BJP प्रदेश उपाध्यक्ष करु नागराजन सहित कई बीजेपी नेता भी इस्तीफा देकर अन्नामलाई से जुड़ गए हैं। नागराजन ने कहा है, ‘मेरे साथ कई और BJP नेता भी हैं, जिन्होंने अन्नामलाई के प्रति समर्थन जताया है।' पॉलिटिकल एनालिस्ट आर. राजगोपालन कहते हैं, ‘10-15 सालों तक तमिलनाडु में TVK की प्रासंगिकता बनी रह सकती है। लेकिन अगर अन्नामलाई अलग पार्टी बनाते हैं, तो DMK नेता उदयनिधि के अलावा यह TVK के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर सकती है।’ हालांकि तमिलनाडु के सीनियर जर्नलिस्ट आर. रंगराज कहते हैं कि अन्नामलाई के आंदोलन का असर सीमित ही रहेगा, क्योंकि TVK पहले ही युवाओं को अपने साथ जोड़ चुकी है। अभी हम ये भी नहीं जानते कि ये पार्टी पूरी तरह से अन्नामलाई की है या इसमें BJP का समर्थन भी है।' तमिलनाडु के कांग्रेस नेता और सांसद मणिकम टैगोर ने भी X पर लिखा, 'तमिलनाडु के लिए प्लान-बी तैयार है और इसके पीछे RSS का भी हाथ है।' सवाल-5: तो क्या अन्नामलाई के इस प्लान के पीछे बीजेपी है? जवाब: पॉलिटिकल एनालिस्ट निहार नलिनी सारंगी कहती हैं, ‘अन्नामलाई BJP से इस्तीफा देते हैं, फिर गृहमंत्री के घर पर उनसे मिलते हैं और उसी दिन नई पार्टी का ऐलान कर देते हैं। वो भी उस राज्य में जहां BJP अभी-अभी बुरी तरह हारी है। अन्नमलाई की ये विदाई बड़ी कंट्रोल्ड दिखती है।’ सारंगी के मुताबिक, ‘कोई आदमी गृहमंत्री से पार्टी छोड़ने के बाद नहीं मिलता, बल्कि तब मिलता है, जब उसे नई चाबियां सौंपी जाती हैं। इसका संकेत ये है कि अन्नामलाई ने इस्तीफे में BJP के लिए कोई कड़वी बात नहीं लिखी। PM मोदी की तारीफ की और पार्टी को धन्यवाद भी दिया।’ सारंगी कहती हैं, ‘अन्नामलाई की नई पार्टी BJP के लिए कोई चैलेंज नहीं, बल्कि TVK की प्रतिद्वंद्वी है। इसका टारगेट TVK की तरह OBC समुदाय, शहरी मिडिल क्लास और उन युवा वोटर्स को जोड़ना होगा, जो द्रविड़ियन राजनीति से थक चुके हैं। इसी वोटबैंक ने TVK को 108 सीटें दिलाईं और BJP इस ट्रेंड से अनजान नहीं है।’ आर. रंगराज भी कहते हैं, ‘तमिलनाडु में BJP ने ही अन्नामलाई को नई पार्टी बनाने के लिए बढ़ावा दिया है, क्योंकि अभी बीजेपी AIADMK के साथ मिलकर जैसी राजनीति कर रही है, उसमें अन्नामलाई के लिए कोई स्पेस नहीं बचता।' आर. राजगोपालन के मुताबिक, 'अन्नामलाई उन युवा वोटर्स को खींच सकते हैं, जिन तक BJP अपनी मौजूदा पहचान के साथ नहीं पहुंच सकती। उन्हें RSS का साइलेंट सपोर्ट भी मिल सकता है। ऐसे में बीजेपी, AIADMK गठबंधन में रह सकते हैं, जबकि अन्नामलाई अपने पुराने रवैये से DMK और AIADMK दोनों के वोट काट सकते हैं।' हालांकि, तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कहा है कि बीजेपी नेतृत्व ने अन्नामलाई के आंदोलन को कोई समर्थन नहीं दिया है। BJP नेताओं से अपील है कि वे किसी भी बहकावे में आकर इस मूवमेंट में शामिल न हों।’ *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------तमिलनाडु से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… शराब दुकानें बंद, 200 यूनिट बिजली फ्री, गोल्ड चेन भी देंगे; फिल्मी हीरो जैसे फैसले ले रहे CM विजय, कितना महंगा पड़ेगा CM बनते ही थलापति विजय किसी फिल्मी नायक की तरह फैसले ले रहे हैं। 48 घंटे में ही 700 से ज्यादा शराब की दुकानें बंद कराने का आदेश दिया। शपथ के मंच से ही 200 यूनिट फ्री बिजली का ऐलान कर दिया था। सोने की चेन, अंगूठी और कैश देने का भी वादा किया है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 7 Jun 2026 7:06 pm

पाकिस्तान में बढ़ा गृहयुद्ध जैसा संकट: सिंध में गहराया भारी जल संकट, पंजाब प्रांत पर लगाया तय हिस्से से अधिक पानी चोरी करने का आरोप

पाकिस्तान के दो प्रांत पानी बंटवारे को लेकर आपस में भिड़े हुए हैं। हालात बेकाबू होते जा रहे हैं, लेकिन हुक्मरान बेफिक्र हैं। स्थानीय मीडिया का दावा है कि सिंध प्रांत में खरीफ सीजन के दौरान गंभीर जल संकट पैदा हो गया है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पहले ही जलवायु परिवर्तन, घटते जल संसाधनों और कृषि चुनौतियों से जूझ रहा है।

देशबन्धु 7 Jun 2026 7:05 pm

जंतर-मंतर पर ‘मैं भी अन्ना’ की जगह ‘मैं हूं कॉकरोच’:5 घंटे का प्रोटेस्ट, उम्मीद से कम भीड़; कॉकरोच जनता पार्टी को क्या मिला

कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके 6 जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर 7.30 बजे आ गए थे, लेकिन बाहर आने में डेढ़ घंटे से ज्यादा वक्त लगा। सुबह 9 बजे के बाद बाहर निकले। सीधे गाड़ी में बैठे और जंतर-मंतर पहुंच गए। यहां पार्टी का पहला प्रोटेस्ट होना था। 5 अप्रैल, 2011 इसी जंतर-मंतर पर एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने आमरण अनशन से करप्शन के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। तब नारे लगे थे- मैं भी अन्ना। इस बार आंदोलन का मकसद एजुकेशन सिस्टम में बदलाव है। नारा है- मैं हूं कॉकरोच। पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2.2 करोड़ फॉलोअर हैं। जंतर-मंतर पर उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं आई, लेकिन पहली बार पार्टी जमीन पर दिखाई दी। सवाल है कि पार्टी को प्रोटेस्ट से क्या हासिल हुआ… 1. मीम पार्टी का टैग हटा, पेपर लीक का मुद्दा दोबारा ट्रेंड में लाए 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और अन्य तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं।’ इसी से कॉकरोच जनता पार्टी ऑनलाइन मूवमेंट के तौर पर शुरू हुई। हर दिन लाखों लोग जुड़ने लगे। कहा गया कि पार्टी सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित है। 6 जून के प्रोटेस्ट से पार्टी ये साबित कर गई कि वो जमीन पर भी मौजूद है। इस प्रोटेस्ट में हर उम्र के लोग शामिल हुए। देश के अलग-अलग हिस्सों से भी लोग आए। पार्टी जमीन पर भले बहुत भीड़ नहीं जुटा पाई, लेकिन सोशल मीडिया पर NEET और पेपर लीक के मुद्दे को फिर से ट्रेंड करा दिया। 2. अभिजीत ही पार्टी का चेहरा, सबसे ज्यादा एक्टिव रहे स्टेज पर सबसे ज्यादा अभिजीत दीपके ही एक्टिव दिखे। हालांकि चीफ स्पोक्सपर्सन सौरव दास और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी कुछ देर स्पीच दी। अभिजीत के टारगेट पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान रहे। उन्होंने मंच से शिक्षा मंत्री को रिजाइन करने का अल्टीमेटम दिया। ऐसा नहीं होने पर अगले शनिवार को दोबारा प्रोटेस्ट की बात कही। 3. अन्ना आंदोलन जैसी कोशिश, लेकिन उतने असरदार नहीं सीनियर रिपोर्टर निखिल वाथ कहते हैं कि लोग इस प्रदर्शन में अन्ना आंदोलन की झलक ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि हालात में कुछ समानताएं हैं। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, NEET और CBSE एग्जाम में गड़बड़ी जैसे आरोप लग रहे हैं। अगले चुनाव में 3 साल बचे हैं। अन्ना आंदोलन के वक्त भी चुनाव में तीन साल बाकी थे। लोगों में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा था। फिर भी ये प्रोटेस्ट अन्ना आंदोलन जितना असरदार नहीं है। आगे क्या होगा…निखिल कहते हैं, ‘प्रोटेस्ट के दौरान कोई बड़ी घटना नहीं हुई। कुछ लोग प्रोटेस्ट का विरोध करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटा दिया ताकि टकराव न हो। प्रोटेस्ट में किसी भी तरह का ड्रामा नहीं हुआ, जिससे लोगों के बीच इसकी रिकॉल वैल्यू कम हो सकती है। अगर शनिवार को दोबारा प्रदर्शन होता है, तो और भीड़ जुटानी होगी, नहीं तो आंदोलन लोगों के जेहन से जल्दी ही उतर सकता है।’ पार्टी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां 1. फॉलोअर्स को वोटर्स में बदलना जंतर-मंतर की कम भीड़ ने साबित किया कि पार्टी को अभी सोशल मीडिया से निकलकर जमीनी स्तर पर ब्लॉक और जिला कमेटियां बनानी होंगी। पार्टी के पास पॉलिटिक्स का बिल्कुल अनुभव नहीं है। सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की ताकत तो है, लेकिन सवाल है कि अगर वे चुनाव में उतरते हैं तो क्या इसे वोट बैंक में बदल पाएंगे। 2. अन्ना आंदोलन जैसा मददगार कैडर नहीं 2011 के अन्ना आंदोलन की कामयाबी के पीछे अलग-अलग संगठनों का समर्थन था। कॉकरोच जनता पार्टी के पास कैडर नहीं है। उसका पूरा आधार क्लिक एक्टिविज्म पर टिका है। इंस्टाग्राम पर 2.2 करोड़ फॉलोअर्स होना डिजिटल उपलब्धि तो है, लेकिन इस वर्चुअल कैडर के पास न लीडर हैं और न ही बूथ मैनेजमेंट की कोई समझ। 3. सिंगल पॉइंट एजेंडा नहीं कामयाब राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन की पहली शर्त सिंगल पॉइंट एजेंडा है। अन्ना आंदोलन का एक साफ मकसद था- लोकपाल बिल। इससे लोग जुड़ गए। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में आए लोगों में कोई मणिपुर की बात कर रहा था, कोई टैक्स और पानी के संकट की, तो कोई करप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर की। पार्टी को स्पष्ट राष्ट्रीय नीति और एजेंडा सामने रखना होगा। प्रोटेस्ट में पहुंचे लोगों की बातहमने प्रोटेस्ट में आए लोगों से समझने की कोशिश की कि उन्हें इससे क्या उम्मीदें हैं। चेहरे पर कॉकरोच का मास्क लगाकर आए गोल्डी 30 साल के हैं। दिल्ली के राजौरी गार्डन में रहते हैं। आंदोलन में आने की वजह बताते हैं, ‘22 लाख बच्चे नीट का एग्जाम दे रहे थे, पेपर लीक हो गया, SSC में 50 लाख बच्चे एग्जाम दे रहे थे, CBSE की साइट कोलेप्स हो गई। सरकार कर क्या रही है।’ ‘अनपढ़ हूं, लेकिन जानता हूं बच्चों को कॉकरोच नहीं बोलना चाहिए’ दिल्ली के तीमारपुर से आए 68 साल के बुजुर्ग बोले, ‘हमारे बच्चों के साथ बार-बार खिलवाड़ हो रहा है। इसका हमें भी दर्द होता है। आप उन्हें कीड़े-मकोड़े बोल रहे हो। ये बोलने का अधिकार किसने दिया। इसलिए जरूरी है कि हम जवाब दें। मैं अनपढ़ हूं, लेकिन जानता हूं कि बच्चों को कॉकरोच नहीं बोलना चाहिए।’ असम से आईं जून अभी दिल्ली में रहती हैं। वे कहती हैं, ‘नॉर्थ ईस्ट में मणिपुर जल रहा है। सरकार कुछ नहीं कर रही है। वहां के युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है। यहां भी भविष्य दांव पर है। कॉकरोच जनता पार्टी का अभी जमीन पर तो असर नहीं दिख रहा है, लेकिन जिस तरह ये सोशल मीडिया पर हैं, उससे लग रहा है कि बदलाव होगा।’ …………………………. प्रोटेस्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा, अगले शनिवार फिर जंतर-मंतर पर जुटने का ऐलान NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 5 घंटे प्रदर्शन किया। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा था कि मंत्री आज शाम 5 बजे तक इस्तीफा दें, नहीं तो पूरे देश में प्रदर्शन किया जाएगा। अगले शनिवार, यानी 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन करेंगे। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 7 Jun 2026 5:32 am

लेनिनग्राद में रूस ने गिराए 144 यूक्रेनी ड्रोन

रूसी एयर डिफेंस फोर्स ने लेनिनग्राद इलाके में हवाई हमले के दौरान 144 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। यह जानकारी इलाके के गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज्डेंको ने शनिवार को सोशल मीडिया पर दी।

देशबन्धु 7 Jun 2026 4:53 am

ट्रंप ने जेलेंस्की के ओपन लेटर के बाद कहा, 'रूस और यूक्रेन को विवाद आपस में सुलझाने दें'

व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लिखे गए ओपन लेटर और उनसे मुलाकात के प्रस्ताव का जिक्र किया

देशबन्धु 6 Jun 2026 10:49 pm

आज का एक्सप्लेनर:धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा क्यों नहीं देने वाले, 4 संकेत समझिए; आखिर कॉकरोच जनता पार्टी उन्हीं के पीछे क्यों पड़ी

कॉकरोच जनता पार्टी के पहले जमीनी प्रोटेस्ट की इकलौती मांग है- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो! NEET पेपर लीक को 5 हफ्ते और CBSE मार्किंग में गड़बड़ी को 3 हफ्ते हो गए। विपक्षी पार्टियां भी लगातार शिक्षामंत्री को हटाने की मांग कर रही हैं। लेकिन क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा? फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा। आज के एक्सप्लेनर में पैटर्न, संकेत और एक्सपर्ट्स के हवाले से पूरी कहानी… 4 संकेतों से समझिए… 1. बीजेपी सरकार में इस्तीफे नहीं होते 2. इस्तीफे का राजनीतिक मतलब निकलेगा कि सरकार से गलती हुई 3. धर्मेंद्र प्रधान की ‘डिलीवरी लीडर’ वाली छवि, PMO के करीबी 4. इस्तीफे की जगह सिस्टम सुधारने का नैरेटिव सरकार ये नैरेटिव बना रही है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जगह, सिस्टम को सुधार रहे हैं। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं… 7 जुलाई 2021 से धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री हैं। राहुल गांधी का कहना है कोई एग्जाम ईमानदारी से नहीं हुआ। 1 करोड़ बच्चों पर असर पड़ा है। पूरी शिक्षा व्यवस्था बर्बाद कर दी है। अभिजीत दीपके ने कहा- ‘शिक्षामंत्री को इस्तीफा देना चाहिए, अब तक 5 स्टूडेंट सुसाइड कर चुके हैं।’ धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में 5 बड़े एग्जाम में गड़बड़ियों के आरोप लगते हैं… 1. NEET 2024 में गड़बड़ी, पेपर लीक 2. UGC NET 2024 में गड़बड़ी संसद की स्थायी समिति की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में NTA के जरिए हुए 14 एग्जाम में से कम से कम 5 में पेपर लीक, पेपर में गलतियां, रिजल्ट में देरी जैसी दिक्कतें हुईं। UGC-NET, CSIR-NET और NEET-PG के एग्जाम रोकने पड़े और CUET-UG और PG का रिजल्ट आने में देरी हुई। 3. NEET 2026 पेपर लीक 4. CBSE 12th बोर्ड मार्किंग में गड़बड़ी 5. CUET 2026 में गड़बड़ी चर्चा है कि 15 जून के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल और बीजेपी के संगठन में बदलाव होने वाला है। सरकार के सामने 2 विकल्प हैं… ऐसा पहले भी हो चुका है… नवंबर 2014 में सुरेश प्रभु को केंद्रीय रेल मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में कई रेल हादसे हुए, जिनको लेकर विपक्ष ने उनके इस्तीफे की मांग की। अगस्त 2017 में प्रभु ने इस्तीफे पेशकश भी की। मोदी सरकार में ऐसा करने वाले प्रभु इकलौते मंत्री हैं। हालांकि सरकार ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया। एक महीने बाद उन्हें कॉमर्स मिनिस्ट्री में शिफ्ट कर दिया गया। वे 2 साल तक मंत्री रहे। 2019 के बाद वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना पाए। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी के पास थी। तब इस मंत्रालय का नाम मानव संसाधन विकास मंत्रालय था। कुर्सी संभालते ही स्मृति सुर्खियों में आ गईं। वजह उनकी डिग्री और रोहित वेमुला सुसाइड मामला और JNU में 'भारत विरोधी नारे' जैसे मामलों में उनके बयान। विपक्षी दलों से लेकर सोशल मीडिया तक स्मृति का इस्तीफा मांगे जाने लगा। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। 2016 में कैबिनेट में बदलाव हुआ, तो स्मृति को कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया। बाद में उन्होंने महिला बाल विकास, सूचना एवं प्रसारण, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालाय मिले, लेकिन 2024 में वे मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना पाईं। मई 2014 से अब तक मोदी सरकार में 4 बार बड़े बदलाव हुए हैं, जिनमें मंत्रियों के इस्तीफे या विभाग बदले गए और नए चेहरे जोड़े गए। सबसे बड़ा बदलाव जुलाई 2021 में हुआ, जब 12 सीनियर कैबिनेट और राज्य मंत्रियों को हटाया गया था। इनमें स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक जैसे बड़े नाम शामिल थे। इसी बदलाव में धर्मेंद्र प्रधान को प्रमोट कर शिक्षा मंत्री बनाया गया था। रशीद किदवई बताते हैं, ‘मोदी सरकार ऐसी कोई नजीर नहीं बनाना चाहती है कि दबाव में मंत्री का इस्तीफा हुआ। अगर धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, तो सरकार इसे रूटीन प्रोसेस की तरह पेश कर सकती है। कहा जा रहा है कि कैबिनेट रिशफल हो सकता है। कुछ लोग संगठन में जाएंगे, कुछ लोग सरकार में आएंगे।’ ----- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:क्या कॉकरोच पार्टी का राजनीति में उतरना तय, अभिजीत दीपके बोले- लड़ाई लंबी चलेगी; 9 सवालों के जवाब कॉकरोच जनता पार्टी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने X पर लिखा- हम कीड़े-मकोड़े, लेकिन लड़ने में सक्षम। फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी कहा कि ये लड़ाई लंबी चलेगी। 20 दिन पहले चीफ जस्टिस के बयान से पैदा हुए इस व्यंगात्मक ऑनलाइन कैंपेन ने कुछ घंटों में बीजेपी से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स जुटा लिए थे। अब ये इंटरनेट से निकलकर सड़क पर उतर गया है। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 6 Jun 2026 6:05 pm

कॉकरोच कभी मरते क्यों नहीं:बिना संबंध बनाए बच्चे, सिर कटने पर भी जिंदा; डायनासोर से भी सीनियर कॉकरोच के रोचक किस्से

कॉकरोच जनता पार्टी इंटरनेट से सड़क पर उतर चुकी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों लोग जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे। कॉकरोच पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने अकाउंट ब्लॉक होने पर कहा भी था- ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं।’ बात सच भी है। कॉकरोच इस दुनिया में डायनासोर से भी पहले आए। सिर कट जाए, हफ्तों खाना न मिले फिर भी जिंदा रहते हैं। बिना नर के भी बच्चा पैदा कर सकते हैं। भास्कर एक्सप्लेनर में इस वक्त के सबसे पॉपुलर प्राणी कॉकरोच की कहानी... **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा **** Reference: https://www.researchgate.net/publication/395390819_The_Cockroach_An_Analysis_of_Resilience_through_Biomathematical_Calculus https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9753028/ https://academic.oup.com/mbe/article/35/4/1035/4951729?login=false https://pursuit.unimelb.edu.au/articles/would-cockroaches-really-survive-a-nuclear-apocalypse Cockroach Fossil: https://www.digitalatlasofancientlife.org/ve/living-fossils/insects-and-arachnids/ Book:Cockroaches: Ecology, Behavior and Natural History by William J. Bell, Louis M. Roth and Christine A. Nalepa------ ये खबर भी पढ़िए... जमीन पर उतर रही कॉकरोच पार्टी; कौन-कौन साथ, आगे का रोडमैप, सरकार कैसे निपटेगी; 9 सवालों में पूरी कहानी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत पहुंचने के बाद करीब एक घंटे एयरपोर्ट केअंदर रहे। प्रोटेस्ट की परमिशन मिलने के बाद अभिजीत और CJP के समर्थक जंतर-मंतर पहुंच चुके हैं। बड़ी संख्या में फोर्सेज भी तैनात हैं।

दैनिक भास्कर 6 Jun 2026 1:55 pm

अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति पर लगाई रोक, भारत समेत 39 देशों के प्रवासियों को राहत

ट्रंप प्रशासन ने वर्ष 2025 में आव्रजन नियमों में बदलाव करते हुए कई देशों के नागरिकों के लिए अमेरिका में रहने और विभिन्न प्रकार की आव्रजन सेवाएं प्राप्त करने की प्रक्रिया को कठिन बना दिया था।

देशबन्धु 6 Jun 2026 12:22 pm

भारत को SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने को तैयार रूस, संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव; पुतिन बोले- मोदी पर दबाव बेअसर

पुतिन ने कहा कि रूस ने पहले भी भारत को इस पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास में साझेदार बनने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा, हमने भारत में अपने मित्रों को इस कार्यक्रम में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। हमें लगता है कि यह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लड़ाकू विमानों में से एक है, लेकिन भारतीय पक्ष ने कहा था कि वह इस पर विचार करेगा।

देशबन्धु 6 Jun 2026 11:55 am

अमेरिकी जॉब मार्केट में बूम: ट्रंप ने थपथपाई अपनी पीठ, ब्याज दरें न घटाने पर फेड को लताड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मई में उम्मीद से ज्यादा नौकरियों में बढ़ोतरी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि रोजगार के ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि ईरान के साथ जारी तनाव के बावजूद अर्थव्यवस्था अनुमान से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

देशबन्धु 6 Jun 2026 11:54 am

ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को 'किसी न किसी तरह' खत्म कर दिया जाएगा : डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ टकराव खत्म होने के करीब है और उन्होंने ऐलान किया कि तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को 'किसी न किसी तरह' रोका जाएगा।

देशबन्धु 6 Jun 2026 9:38 am

लेबनानी राष्ट्रपति का ईरान पर तीखा हमला, कहा- अमेरिका से बातचीत के लिए हमारा इस्तेमाल बंद हो

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिका के साथ बातचीत में लेबनान का इस्तेमाल 'मोल-भाव के मोहरे' के रूप में करने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की है

देशबन्धु 6 Jun 2026 8:40 am

अमेरिका ने ब्रिटेन, डेनमार्क और कुवैत को लगभग 3 अरब डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दी

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ब्रिटेन, डेनमार्क और कुवैत को लगभग 3 अरब डॉलर के संभावित विदेशी सैन्य सौदों को मंजूरी दे दी है। इनमें लंबी दूरी की मारक मिसाइलें, विमान सुरक्षा प्रणाली और ड्रोन-रोधी प्लेटफॉर्म शामिल हैं

देशबन्धु 6 Jun 2026 8:30 am

अमेरिका ने मार गिराए ईरान के ड्रोन, रडार ठिकानों पर किए हमले

अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहे ईरान के चार हमलावर ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। इसके साथ ही, अमेरिका सेना ने ईरान के तटीय रडार ठिकानों पर हमले किए हैं।

देशबन्धु 6 Jun 2026 8:21 am

‘आर्मी के साथ आतंकियों से लड़े, सरकार ने घर उजाड़ा’:मंत्री बोले- पता नहीं किसने आदेश दिया; वन विभाग ने तोड़ी 60 साल पुरानी बस्ती

80 साल के अब्दुल रज्जाक अपने टूटे घर के मलबे के पास उदास बैठे रहते हैं। 2001 में वे कश्मीर से भागकर जम्मू आए थे। सिधरा एरिया में घर बनाया। 25 साल हो गए रहते हुए। 19 मई को वन विभाग वाले बुलडोजर लेकर आए और अब्दुल समेत करीब 25 घर तोड़ दिए। ये दूसरी बार है, जब अब्दुल बेघर हुए हैं। इससे पहले आतंकियों के डर से घर छोड़ा था। आतंकियों ने हिंदुस्तानी मुखबिर बताकर तीन दोस्तों के गले रेत दिए थे। जान बचाने के लिए अब्दुल जम्मू आ गए। अभी जम्मू में गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही है। अब्दुल टीन की जिस छत के नीचे बैठे मिले, वह 43 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में तप रही थी। बच्चे जमीन पर सोए थे। यही हाल बाकी परिवारों का भी है। ये सभी गुज्जर और बकरवाल समुदाय से हैं, जो आतंकवाद से बचने के लिए कश्मीर से पलायन करके आए थे। उनका आरोप है कि हमें बताया नहीं गया कि आखिर घर क्यों तोड़े गए। वहीं, प्रशासन का कहना है कि ये घर वन विभाग की जमीन पर कब्जा करके बनाए गए थे। ये बस्ती करीब 60 साल पुरानी थी। अब्दुल की कहानी से समझिए सिधरा में क्या हुआ… अब्दुल साउथ कश्मीर के कोकेरनाग में रहते थे। काशवान गांव में घर था। अब्दुल ने 2001 में कश्मीर छोड़ा, तब आतंकवाद चरम पर था। इसी साल जम्मू-कश्मीर विधानसभा और श्रीनगर एयरपोर्ट पर हमला हुआ। इसी साल आतंकियों ने श्रीनगर के महजूर नगर में 6 सिखों, डोडा में 43 और राजौरी में 15 हिंदुओं की हत्या कर दी थी। अब्दुल बताते हैं, ‘आतंकियों को रोकने के लिए हमने सेना को अपने गांव में बुलाया था। इसलिए हम उनके टारगेट पर आ गए। आतंकी कहते थे कि तुम आर्मी के साथ रहते हो। हिंदुस्तानी मुखबिर हो। तुम्हारा खानदान खत्म कर देंगे। इसलिए मुझे घर छोड़ना पड़ा। घर कच्चा हो या पक्का, कौन छोड़ सकता है, लेकिन हमें छोड़ना पड़ा।’ अब्दुल थोड़ा चुप होते हैं, फिर कहते हैं, ‘अब ये वक्त आया है। फिर घर टूट गया। कोई नोटिस नहीं मिला। वन विभाग के स्टाफ के साथ पुलिसवाले आए और बाहर निकलने के लिए कहा। तब पता चला कि घर टूटने वाला है। हमें दूर धकेल दिया गया। सामान तक नहीं बचा पाए। बर्तन, कागजात सब मलबे के नीचे दब गए। रिलीफ कमिश्नर ऑफिस से माइग्रेंट राशन कार्ड मिला था, वो भी मिट्‌टी में दबा है। रज्जाक और उनकी पत्नी खातून रजिस्टर्ड कश्मीरी माइग्रेंट हैं। मुफ्त राशन के साथ परिवार के हर सदस्य को 3,250 रुपए महीना सरकारी मदद मिलती है। दामाद मंजूर अहमद, बेटी जरीना बेगम, उनके बच्चे समीर और अफसाना, सभी रजिस्टर्ड माइग्रेंट हैं। उनका घर भी तोड़ दिया गया। सभी टूटे घरों की जमीन पर लगाए तंबुओं में रह रहे हैं। दूसरा किरदार: समीया प्रभावित लोगों में समीया का परिवार भी शामिल है। घर में कुल 9 लोग हैं, 6 बहनें, एक भाई और अम्मी-अब्बू। समीया कहती हैं, ‘हम यहीं पैदा हुए और यहीं बड़े हुए। जिस रात हमारा घर गिराया गया, तभी से खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। दिन में गर्मी से बचने के लिए पेड़ों के नीचे बैठे रहते हैं और रात में खुले में सोते हैं। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। उनकी हालत बहुत खराब है।’ 30 साल के इनायत अली बताते हैं, ‘बुलडोजर की कार्रवाई सुबह बहुत जल्दी की गई। हम लोग इसके लिए तैयार नहीं थे। सुबह करीब 4:30 बजे मैं नमाज पढ़कर उठा ही था कि बाहर शोर सुनाई दिया। बुलडोजर पहले ही आ गए थे। पुलिसवाले लोगों को बाहर खींच रहे थे। बच्चों को भी बाहर निकाल दिया। 40 से 50 पुलिसवाले थे। हमें कुछ भी निकालने का वक्त नहीं मिला। सब कुछ खत्म हो गया।’ ‘जम्मू-कश्मीर में करीब एक लाख प्रवासी रजिस्टर्ड हैं। हम सरकारी मदद पर ही जिंदा हैं। हर महीने की मदद और राशन, हमारे पास बस यही है। हमें नहीं पता सरकार ने हमारे घर क्यों तोड़े। फिर उसी सरकार ने हमें तंबू और चादरें दी हैं। लोग भी खाना और जरूरी सामान दे रहे हैं। इसी तरह गुजारा चल रहा है।’ तीसरा किरदार: फातिमा बी 60 साल की फातिमा बी का घर भी गिरा दिया गया। वे बताती हैं, ‘हम बैठे हुए थे, तभी अचानक इलाके को घेर लिया गया। कुछ ही मिनटों में घर तोड़ना शुरू कर दिया। हम पूछते रहे कि हमारी गलती क्या है। हमारे पास सारे कागज हैं। आधार कार्ड, बिजली और पानी के बिल देख लो। आखिर किस आधार पर हमें हटा रहे हो। हमने घर बनाने के लिए 30 लाख रुपए का लोन लिया है।’ ‘हमसे कहा कि तुम कश्मीरी हो। यहां 50 साल से गुज्जर और बकरवाल रह रहे हैं। अगर हम कश्मीरी हैं, तो हमारी भी पहचान होनी चाहिए। किसी ने हमारी बात नहीं सुनी।’ BJP का आरोप: उमर अब्दुल्ला सरकार कब्जे के जरिए डेमोग्राफी बदल रही सिधरा की इस बस्ती के बारे में दावा है कि ये कब्जा करके बसाई गई थी। इसे हटाने मई में प्रदर्शन भी हुआ था। 13 मई को BJP विधायक विक्रम रंधावा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सिधरा में जम्मू-नागरोटा नेशनल हाईवे को दो घंटे तक बंद कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर जम्मू में अतिक्रमण को बढ़ावा देने और क्षेत्र की डेमोग्राफी बदलने का आरोप लगाया। इसके तुरंत बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी। वन विभाग के अधिकारी पुलिस के साथ बुलडोजर लेकर आए और महामाया मंदिर के पास बसी बस्ती हटाकर एरिया खाली करा लिया। मंत्री बोले- सरकार को नहीं पता बस्ती उजाड़ने का आदेश किसने दिया इस एक्शन पर सवाल भी उठ रहे हैं कि कार्रवाई का आदेश किसने दिया था। प्रभावितों से मिलने पहुंचे वन, पर्यावरण एवं जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद राणा ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘ये कार्रवाई सरकार की जानकारी के बिना की गई। मैंने अफसरों से बात की, इससे समझ आया कि किसी भी विभाग ने घर तोड़ने का आदेश नहीं दिया था। सरकार में किसी ने भी निर्देश जारी नहीं किए, तो यह कैसे हुआ। मामले की जांच के लिए दो कमेटियां बनाई गई हैं, जो जिम्मेदारी तय करेंगी।’ उधर, जम्मू के मुख्य वन संरक्षक डॉ. वीएस सेंथिल कुमार बताते हैं कि सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है। इसके बाद सारे फैक्ट्स सामने आ जाएंगे। अब्दुल्ला सरकार बनने के बाद सरकारी जमीन पर बने 1400 घर-दुकानें तोड़ी गईं अक्टूबर 2024 में उमर अब्दुल्ला की सरकार बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में 1400 से ज्यादा घर और दुकान अवैध बताकर तोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री उमर उब्दुल्ला ने विधानसभा के विंटर सेशन में बताया कि इनमें 1,194 घर और 231 कमर्शियल प्रॉपर्टी शामिल हैं। हाल ही में सरकार ने विधानसभा में बताया कि जम्मू-कश्मीर में 17.27 लाख कनाल सरकारी जमीन पर कब्जा था। इसमें से 14.29 लाख कनाल जमीन खाली कराई जा चुकी है। जम्मू रीजन इस लिस्ट में सबसे ऊपर है, जहां 14 लाख कनाल से ज्यादा सरकारी जमीन पर कब्जा है। ……………………………..जम्मू-कश्मीर से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंवंदे भारत से 5 घंटे में जम्मू से श्रीनगर, 855 रुपए किराया, सुरक्षा में CORAS कमांडो 30 अप्रैल से जम्मू और श्रीनगर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस चलने से घाटी में बदलाव दिख रहा है। पहले कश्मीर से जम्मू जाने के लिए नेशनल हाईवे ही इकलौता रास्ता था। वो भी लैंडस्लाइड या बर्फबारी की वजह से अक्सर बंद हो जाता है। जम्मू-श्रीनगर के बीच 270 किमी की दूरी है। यहां रोड कनेक्टिविटी हमेशा बड़ी चुनौती रही है। वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू होने से ये सफर सिर्फ 5 घंटे का रह गया है। किराया सिर्फ 855 रुपए। सुरक्षा की वजह इस ट्रेन में CORAS कमांडो तैनात रहते हैं। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 6 Jun 2026 5:21 am

अमेरिकी सामाजिक कार्यकर्ता एरिन ब्रोकोविच के निशाने पर क्यों हैं एआई के डाटा सेंटर

क्या आपके इलाके में भी कोई नया डाटा सेंटर बनने जा रहा है? आज अमेरिका के बहुत से लोग इस सवाल का जवाब ‘हां’ में दे पा रहे हैं और यह मुमकिन हुआ है एरिन ब्रोकोविच की ओर से बनाए गए एक मैप की वजह से

देशबन्धु 6 Jun 2026 12:38 am

पूर्वज नाजी थे ये पता चलने पर जर्मनी में कैसा लगता है

जर्मनी के बहुत से लोग इन दिनों अपने पूर्वजों के नाजी शासन से जुड़े होने की जानकारी ढूंढ रहे हैं. अमेरिका से जारी दस्तावेजों ने इसका पता लगाना आसान कर दिया है, हालांकि जवाबों का सामना आसान नहीं है

देशबन्धु 6 Jun 2026 12:35 am

बलात्कार के आरोपी पति पर मुकदमा जर्मन कानूनी दांवपेंच में फंसा

जर्मनी की एक महिला का पूर्व पति नशीली दवाएं दे कर उसे डेढ़ दशकों तक यौन प्रताड़ना देता रहा. मामला सामने आने पर पता चला है कि इनमें से ज्यादातर कथित अपराधों की जांच नहीं हो सकती. जर्मन कानून ने मुश्किल खड़ी कर दी है

देशबन्धु 6 Jun 2026 12:03 am

ईयू में शरण से वंचित लोगों को बाहर के देशों के रिटर्न हब भेजा जाएगा

यूरोप में जिन शरणार्थियों को शरण नहीं मिलती या फिर जिनके मूल देश के बारे में जानकारी नहीं हो, उन्हें अब यूरोपीय संघ के बाहर के किसी देश में रखा जाएगा

देशबन्धु 5 Jun 2026 11:51 pm

रूस के आर्थिक फोरम में हिस्सा लेंगे जर्मन नेता और कारोबारी

चार साल बाद जर्मन कंपनियां और धुर दक्षिणपंथी नेता रूसी अर्थिक मंच में शामिल होने जा रहे हैं. रूस में व्यापार के बारे में क्या सोचती हैं जर्मन कंपनियां

देशबन्धु 5 Jun 2026 11:44 pm

नेपाल में शुरू हुई उबर की सेवाएं, दक्षिण एशिया में बढ़ाई मौजूदगी

अमेरिकी राइड-हेलिंग कंपनी उबर ने नेपाल में आधिकारिक रूप से अपनी सेवाएं शुरू कर दीं। इसके साथ ही नेपाल दक्षिण एशिया में पिछले एक दशक के दौरान उबर का पहला नया बाजार बन गया है।

देशबन्धु 5 Jun 2026 11:22 pm

आज का एक्सप्लेनर:अभिजीत दीपके ने दिल्ली के लिए उड़ान भरी; कॉकरोच जनता पार्टी का अब क्या होने वाला है, 9 सवालों में पूरी कहानी

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके अमेरिका से उड़ान भर चुके हैं। उन्होंने X पर लिखा- भारत के लिए निकल गया हूं। मैं अपना भविष्य संविधान के हाथों में छोड़ता हूं। जय भीम। 20 दिन पहले चीफ जस्टिस के बयान से पैदा हुआ एक व्यंगात्मक ऑनलाइन कैंपेन, जिसने कुछ घंटों में बीजेपी से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स जुटा लिए। अब इंटरनेट से निकलकर सड़क पर उतरने जा रहा है। आगे क्या होगा, जमीन पर कुछ कर पाएंगे या सरकार कैम्पेन कुचल देगी; लोगों के मन में उठ रहे 9 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या वाकई इंटरनेट से निकल सड़क पर उतरने वाले हैं कॉकरोच? जवाबः हां। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने 1 जून को एक वीडियो में बताया, '6 जून की सुबह मैं दिल्ली आ रहा हूं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने। आप सभी एयरपोर्ट आकर मुझसे मिलें। हम सब मिलकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे।' 3 जून को कॉकरोच पार्टी ने दिल्ली में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें खोजी पत्रकार सौरव दास, IIT कानपुर से पढ़े और मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म ‘मैकिन्से एंड कंपनी’ में काम कर चुके आशुतोष रांका, पॉलिटिकल रिसर्चर और फिल्ममेकर विजेता दहिया पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर शामिल हुए। 4 जून को अभिजीत ने X पर एक और वीडियो जारी करते हुए समर्थकों को एयरपोर्ट आने से मना किया। दीपके ने कहा, ‘मैं खुद पुलिस स्टेशन आऊंगा और फिर हम सब वहां से जंतर-मंतर के लिए बढ़ेंगे, क्योंकि इतने लोगों के एयरपोर्ट पर इकट्ठा होने से जनता और सुरक्षा बलों को असुविधा होगी।’ सवाल-2: ये लोग सड़क पर उतरकर चाहते क्या हैं? जवाबः कॉकरोच पार्टी की सबसे बड़ी मांग है केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। दीपके ने X पर जारी वीडियो में कहा, 'NEET का एग्जाम रद्द होने से 5 स्टूडेंट्स ने सुसाइड किया। CBSE, CUET और SSC जैसे एग्जाम में गड़बड़ी से लाखों बच्चे प्रभावित हुए। इसे लेकर देश के अलग-अलग शहरों में आंदोलन हुए, फिर भी प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया। इस देश में सरकार की जवाबदेही नहीं रह गई है। ऐसा कब तक चलेगा?’ CJP मुख्य प्रवक्ता सौरव दास का भी कहना है कि प्रधान के इस्तीफे के लिए वेबसाइट पर डाली गई पिटीशन का अब तक 8 लाख से ज्यादा लोग समर्थन कर चुके हैं, जो साबित करते हैं कि स्टूडेंट्स का गुस्सा अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है। सवाल-3: क्या दिल्ली में प्रोटेस्ट करने की अनुमति मिलेगी? जवाबः अनुमति मिलने की उम्मीद कम है। संविधान के आर्टिकल 19 के तहत, 'सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना किसी हथियार के इकट्ठा होने का अधिकार है।' दिल्ली का जंतर-मंतर प्रदर्शन की नियत जगह है। हालांकि कानूनी अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस से 7 दिन पहले लिखित परमिशन लेनी पड़ती है। दिल्ली पुलिस की गाइडलाइंस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच ही होना चाहिए। अस्थायी तंबू नहीं लगाए जा सकते। एक दिन में 1,000 से ज्यादा लोग हिस्सा नहीं ले सकते।' जबकि CJP की तरफ से अभिजीत 6 जून को प्रोटेस्ट के दिन ही पुलिस से इसकी अनुमति लेने जाएंगे। प्रोटेस्ट में काफी भीड़ होने का अनुमान है। प्रवक्ता विजेता दहिया ने परमिशन न लेने को पार्टी की स्ट्रैटेजी का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, ‘इस शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट के पीछे लोगों की भावनाएं हैं। लोग अभिजीत के साथ जुड़े हैं। इसीलिए हमने तय किया कि अभिजीत खुद पुलिस से मिलकर परमिशन मांगेंगे। हमें उम्मीद है कि प्रशासन हमें अनुमति देगा।’ अगर अभिजीत और उनके साथ जुटे लोग बिना परमिशन प्रोटेस्ट कोशिश करते हैं, तो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। अगर प्रशासन को अव्यवस्था फैलने के संकेत मिलते हैं, तो वो प्रोटेस्ट वाली जगह पर BNSS की धारा 163 लागू कर सकता है। पुरानी CrPC में इसे धारा 144 कहते थे। इसके तहत पुलिस 5 या लोगों को इकठ्ठा होने पर रोक लगा सकती है। ये रोक 60 दिन तक लागू रह सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा था कि बड़े विरोध प्रदर्शनों में खुफिया इनपुट्स के आधार पर भी इस तरह के आदेश दे सकती है और इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है। सवाल-4: क्या राजनीतिक पार्टी बनाने का भी इरादा है, उसके लिए क्या-क्या करना होगा? जवाबः अभिजीत ने शुरुआत में कहा था कि उनका कोई राजनीतिक पार्टी बनाने का इरादा नहीं है। हालांकि अब जिस तरह जमीन पर प्रदर्शन की तैयारी है, प्रवक्ता नियुक्त किए गए, प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही और जाने-माने लोग जुड़ रहे हैं, उससे राजनीतिक पार्टी के संकेत मिलते हैं। राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट, 1951 की धारा 29 (A) के तहत पार्टी बनाने के ऐलान से 30 दिनों के अंदर चुनाव आयोग में आवेदन देना होता है। पार्टी में कम से कम 100 भारतीय मेंबर होने चाहिए। पार्टी का संविधान, संगठन बनाने की प्रक्रिया, पद पाने वाले लोगों के कार्यकाल वगैरह के बारे में भी बताना होता है। एक पेच ये भी है कि हरियाणा में पानीपत के रहने वाले वकील सुधीर जाखर ने खुद को CJP का राष्ट्रीय संयोजक बताते हुए 25 मई को इसे पार्टी के तौर पर रजिस्टर करने के लिए चुनाव आयोग में अप्लाई किया था। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था, 'जब दीपके ने भारत आने से इनकार किया, तो हमें लगा कि कोई और इसका रजिस्ट्रेशन करवाकर दुरुपयोग करता है, इससे पूरा आंदोलन बेकार हो जाएगा। इसलिए हमने खुद इसका निर्णय लिया।' हालांकि इस पर अभिजीत का कोई बयान नहीं आया है। सवाल-5: राजनीतिक पार्टी बन गई, तो क्या चुनाव निशान ‘कॉकरोच’ मिलेगा? जवाबः फिलहाल कॉकरोच चुनाव निशान किसी को नहीं मिल सकता। दरअसल, चुनाव आयोग के इलेक्शन सिंबल रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट ऑर्डर, 1968 के तहत नई रजिस्टर्ड पार्टियों को ‘फ्री सिंबल लिस्ट’ से चुनाव निशान मिलता है। इसमें लैंडलाइन फोन, लैपटॉप, टीवी, ताला-चाबी, फूलगोभी, साबुनदानी और स्टेपलर जैसे 200 से ज्यादा सिंबल हैं। 1991 से चुनाव आयोग ने पक्षी या जानवरों से जुड़े सिंबल देने बंद कर दिए हैं। कॉकरोच को कीट की श्रेणी में रखा जाता है। इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है कि इसे आधिकारिक तौर पर जानवरों में रखा जाएगा या नहीं। CJP ने अपने सिंबल में मोबाइल फोन की स्क्रीन के अंदर एक कोचरोच दिखाया था। अगर वे मोबाइल फोन का सिंबल मांगते हैं, तो भी मुश्किल है, क्योंकि मोबाइल फोन ‘फ्री सिंबल’ की लिस्ट में नहीं है। सवाल-6: क्या अभिजीत दीपके ही इसके प्रेसिडेंट बनेंगे, उनकी कहानी क्या है? जवाबः अभी तक CJP का चेहरा अभिजीत दीपके हैं। उनके भारत आने को लेकर हो रही तैयारियां और CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ये साफ है कि आगे भी अभिजीत ही मुख्य भूमिका में होंगे। 30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। अभिजीत AAP के IT सेल के चीफ अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए AAP छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर अभिजीत X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। सवाल-7: जेन-जी के अलावा CJP से कौन-से बड़े चेहरे जुड़े, कहीं से फंडिंग भी मिल रही? जवाबः 6 जून को CJP के प्रोटेस्ट में कई बड़ी हस्तियां शामिल होंगी… सोनम वांगचुक, शिक्षाविद: वांगचुक ने 2 जून को X पर वीडियो जारी करके कहा, 'मैं CJP के आंदोलन से जुड़ने आ रहा हूं। CJP वाले देशप्रेमी लोग हैं, आप भी उनके साथ जुड़ना चाहिए।’ प्रकाश राज, फिल्म अभिनेता: अभिनेता प्रकाश राज ने X पर लिखा, ‘मैं शूटिंग के लिए फिलहाल दिल्ली से बहुत दूर हूं, लेकिन फिर भी मैं CJP के आंदोलन में पहुंचे की पूरी कोशिश करूंगा।’ अमित जोगी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ अध्यक्ष: छत्तीसगढ़ के पहले CM अजीत जोगी के बेटे और JCC अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा, 'छत्तीसगढ़ में कॉकरोच को झेंगुरा कहते हैं और जंतर-मंतर पर झेंगुरा पहुंच रहा है। हम CJP को समर्थन देने वालीं देश की पहली पार्टी बनेंगे।’ इसके अलावा एक्टर अतुल कुलकर्णी, दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के पूर्व अध्यक्ष रौनक खत्री, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI की अध्यक्ष आइशे घोष भी प्रोटेस्ट में शामिल होंगी। अभी तक CJP की फंडिंग के कोई सोर्स का भी कोई पुख्ता सबूत नहीं है। 3 जून को प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, ‘हमें फंडिंग की जरूरत क्यों पड़ेगी? हमारे पीछे जो पार्टी का पोस्टर लगा है, वो 200 रुपए का है, लोग प्रोटेस्ट में अपने खर्चे पर आ सकते हैं। ये नैरेटिव आंदोलन को भटकाने के लिए खड़ा किया जा रहा है।’ CJP की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, ‘पार्टी पूरी तरह कम्युनिटी फंडिंग यानी आंदोलन से जुड़े लोगों से मिले पैसों पर काम करती है। किसी राजनीतिक संगठन या प्राइवेट कंपनी से डोनेशन नहीं लेगी।’ सवाल-8: कॉकरोच पार्टी को लेकर सरकार का रुख क्या है? जवाबः अभिजीत और उनकी CJP पर आरोप हैं कि उनके पीछे एंटी नेशनल ताकतें और विदेशी फंडिंग है। भारतीय खुफिया एजेंसी IB ने CJP के पहले X हैंडल को ब्लॉक करने का इनपुट दिया था। इसमें कहा गया, ‘हैंडल का भड़काऊ कॉन्टेंट देश के युवाओं के बीच फैल रहा था। इससे देश की नेशनल सिक्योरिटी को खतरा हो सकता था।’ इसके बाद सरकार ने X को भारत में CJP के हैंडल पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। 22 मई को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने X पर लिखा था, ‘अभिजीत को बोस्टन जाने के लिए किसने पैसा दिया? क्या सोरोस फाउंडेशन उनके रहने-खाने का खर्च उठा रहा है? क्या विपक्षी दल देश को तोड़ने के लिए विदेशी ताकतों से मदद ले रहे हैं?’ ऐसे में सरकार 6 जून के प्रोटेस्ट को नहीं होने देना चाहेगी। प्रशासन नियमों का हवाला दे सकता है। न मानने पर या हिंसा की स्थिति में अभिजीत और साथियों को हिरासत में भी लिया जा सकता है। हालांकि इससे कॉकरोच पार्टी के पक्ष में सहानुभूति की लहर उठने का खतरा है।एक विकल्प ये भी है कि सरकार प्रोटेस्ट होने दे और कॉकरोच पार्टी को एक सटायर मूवमेंट की तरह ही ट्रीट करे, जिससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होने वाला। सवाल-9: क्या ऐसी किसी पार्टी के लिए फिलहाल भारत की राजनीति में जगह है? जवाबः कॉकरोच पार्टी के उभार की टाइमिंग और मुद्दे इसे मौजूदा राजनीति में प्रासंगिक बनाते हैं। पॉलिटिक एनालिस्ट योगेंद्र यादव कहते हैं, 'देश के भीतर एक छटपटाहट है। जब सरकार संस्थाओं पर कब्जा कर लेती है और पूर्णसत्ता स्थापित करती है, तब विद्रोह अनपेक्षित जगहों से पैदा होता है। जैसे- 1971 में इंदिरा गांधी की भारी जीत के बाद 1974 में जयप्रकाश आंदोलन हुआ। 2009 में कांग्रेस की जीत के बाद 2011 में अन्ना आंदोलन और 2019 में पीएम मोदी के दूसरी बार सत्ता में आने के 2 साल बाद किसान आंदोलन हुआ।’ वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर कहते हैं, ‘युवा निराश है, इसीलिए इससे जुड़ रहा है। उम्मीद है कि इसके पीछे जो लोग हैं, वो इस एनर्जी को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में लाने का रास्ता निकाल लेंगे या फिर अपने वोट के जरिए बदलाव की आवाज बनेंगे।’ *****रिसर्च - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- ये जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 दिन में बीजेपी-कांग्रेस को पछाड़ा, इंस्टा पर डेढ़ करोड़+ फॉलोअर्स; ये सिर्फ मजाक है या बदलाव की आहट BJP और कांग्रेस ने 2014 में इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। 12 साल में बीजेपी के 88 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हुए हैं। लेकिन महज 5 दिन पहले बनी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने इन दोनों आंकड़ों को छोटा साबित कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 5 Jun 2026 6:16 pm

ईरान से बातचीत जारी, कूटनीति से या सैन्य कार्रवाई से, जीत हमारी होगी: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी भी जारी है। चाहे कूटनीति से हो या सैन्य कार्रवाई से, आखिर में जीत अमेर‍िका की ही होगी

देशबन्धु 5 Jun 2026 9:46 am

ईरान के बाद क्यूबा पर फोकस करेंगे ट्रंप, सख्त रुख के दिए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप ने गुरुवार को क्यूबा को एक 'विफल देश' बताया। उन्होंने कहा कि वहां की साम्यवादी सरकार पर दबाव बढ़ रहा है और ईरान से जुड़े मौजूदा मुद्दों के निपटारे के बाद उनका प्रशासन क्यूबा पर अधिक ध्यान देगा।

देशबन्धु 5 Jun 2026 9:06 am

भारत पर दबाव डालने की नीति अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए हानिकारक: पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालना 'अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय रिश्तों के लिए नुकसानदायक' है।

देशबन्धु 5 Jun 2026 7:59 am

17 की उम्र में हो गई 70 साल की बूढ़ी:झुर्रियों से खाल लटकी, भूत कहते हैं लोग; प्रोजेरिया से बीमार बहनों की कहानी

19 साल की राजकुमारी और 17 साल की रोशनी घर की चौखट पर बैठी हैं। यूं तो यह उम्र अपने लंबे बाल संवारने और चेहरा निखारने की है। दोस्तों के साथ खिलखिलाने और अपनी सतरंगी दुनिया बुनने की है, लेकिन ये दोनों बहनें 70 साल की किसी बूढ़ी जैसी हो चली हैं। दोनों के चेहरों की खाल गर्दन तक लटकी है। हाथ-पैर की खाल सिकुड़ चुकी है। सिर के बाल काफी हद तक झड़ चुके हैं। रह-रहकर तेज खांसी उठती है। कमजोरी इतनी कि चलना–फिरना मुश्किल है। चेहरा छोटा, नाक नुकीली और पूरा जिस्म वक्त से पहले ढल चुकी लाचार काया जैसा दिखता है। दरअसल, राजकुमारी और रोशनी, 80 लाख लोगों में से किसी एक को होने वाली जानलेवा जेनेटिक बीमारी से जूझ रहीं हैं। इन बहनों का एक छोटा भाई 7 साल की उम्र में ऐसे ही बूढ़ा होकर मर चुका है। भारत में इस तरह के अब तक सिर्फ 16 केस सामने आए हैं। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज- ऐ जिंदगी में मैं नीरज झा पहुंचा हूं मध्य प्रदेश में रायसेन जिले के गांव सालेर। आज कहानी, बचपन में बूढ़ा कर देने वाली ‘प्रोजेरिया’ नाम की बीमारी से जूझ रही दो बहनों की… सुबह के 10 बजे हैं। सालेर गांव के एक घर के बाहर गेहूं की बोरियां का ढेर लगा है। पास ही, एक बुजुर्ग बैठे हैं, जिन्होंने अपना नाम– रंजीत बैरागी बताया। उम्र 55 साल। ठीक सामने, उनकी पत्नी गणेशी बाई सूप से गेहूं फटककर भूसा और मिट्‌टी अलग कर रही हैं। राजकुमारी और रोशनी इन्हीं की बेटियां हैं। घर की दहलीज से किसी बुजुर्ग की तरह जोर-जोर से खांसने की आवाज आ रही है। तभी, गणेशी बाई मुंह में साड़ी का पल्लू दबाए बताती हैं– जो सामने बैठी है, वो मेरी बेटी रोशनी है। सिर्फ 17 साल की है। मैं 50 साल की हूं, लेकिन रोशनी मुझसे 20 साल बड़ी लगती है।’ तभी रोशनी की बहन राजकुमारी भी घर की दीवार के सहारे लंगड़ाते हुए बाहर आकर बैठ गई। गणेशी राजकुमारी की तरफ इशारा करते हुए कहती हैं– ‘ये रोशनी से दो साल बड़ी है। इसका भी यही हाल है। मेरी ये दोनों औलादें जिंदा होकर भी मरे के समान हैं। इनकी कौन सी सांस आखिरी होगी, इन्हें कब अस्पताल लेकर भागना पड़े, कोई नहीं जानता। इसी डर से पाई-पाई जोड़कर मोटरसाइकल खरीदी बात करते-करते गणेशी की आंखें भर आईं। वो खुद को संभालते हुए बोलीं– ‘ऐसा नहीं है कि मेरे सभी बच्चे ऐसे हैं। 5 बच्चे थे, जिसमें से एक को भगवान ने बुला लिया, अब 4 बचे हैं। तीन बेटी और एक बेटा है। बेटा और एक बेटी, एकदम ठीक हैं। रोशनी और राजकुमारी को देखती हूं, तो दुख होता है। पता नहीं, ऊपर वाले की क्या मर्जी थी। पैदा होते ही भगवान इन्हें अपने पास बुला लेता, तो अच्छा होता। मां-बाप जिस उम्र में बेटियों की शादी के सपने देखते हैं, उस उम्र में दोनों बूढ़ी दिखने लगीं। अब आगे क्या होगा। इनकी इस हालत की वजह से मेरे बेटे और दूसरी बेटी की शादी बड़ी मिन्नतों से हुई।' ‘दरअसल, जब बेटी प्रियंका के रिश्ते की बात चलती थी, तो रिश्तेदार मुंह मोड़ लेते थे। कहते थे–अरे! इसके घर में तो दो-दो बूढ़ी लड़कियां हैं, इनके यहां कौन शादी करेगा? कहीं हमारे घर भी ऐसे ही बच्चे पैदा हो गए तो!’ काफी मुश्किलों के बाद उसकी शादी हो पाई। बेटे को भी कोई अपनी बेटी देने को तैयार नहीं था। बहुत हाथ जोड़े, तब कहीं जाकर बेटे का ब्याह हुआ।’ इतने में एक बच्ची दौड़ते हुए आई। गणेशी बताती हैं– ‘ये प्रियंका की बेटी है, मेरी नातिन। देखिए, एकदम भली–चंगी है, इसे ऐसी कोई बीमारी नहीं है।’ खाट पर बैठी रोशनी और राजकुमारी, हमारी बातें सुन रही हैं। इस दौरान रोशनी बोल पड़ी– 'मैं 17 साल की हूं। बाकी बच्चों की तरह स्कूल जाना, गांव में घूमना, सजना–संवरना चाहती हूं। जैसी मेरी दीदी की शादी हुई, वैसी मेरी भी हो, लेकिन क्या करूं, बूढ़ी दिखती हूं। मैं तो कभी आईना भी नहीं देखती, गलती से देख लूं, तो डर जाती हूं। भगवान से हमेशा शिकायत करती हूं– कैसा चेहरा बना दिया? हालत ऐसी है कि ज्यादा बात करती हूं या 100-200 मीटर चलती हूं, तो सांस फूल जाती है। लगता है, प्राण निकल जाएंगे। चाहकर भी मां की मदद नहीं कर सकती। वह सारा काम अकेले करती हैं।’ अपनी बहन राजकुमारी की तरफ इशारा करते हुए रोशनी कहती हैं- दीदी भी विकलांग हैं। उन्होंने तो स्कूल का मुंह भी नहीं देखा। मैं 5वीं तक पढ़ी हूं। स्कूल जाती थी, तो सब बुढ़िया-बुढ़िया कहकर चिढ़ाते थे। एक दिन स्कूल में ही तबीयत बिगड़ गई तो फिर दोबारा नहीं गई। स्कूल से नाम कट गया।’ रोशनी की बहन राजकुमारी से कुछ पूछने की कोशिश की तो उसने सिर हिलाकर मना कर दिया। टोकते हुए, गणेशी बाई बोलीं- यह मंदबुद्धि है, ठीक से बोल नहीं पाती। ये दोनों जैसे ही दो–दो साल की हुई, तो गालों की चमड़ी लटकने लगी। जब ये घर से बाहर निकलतीं तो गांव के लोग इन्हें भूत कहकर चिढ़ाते। हमने इनका घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। कुछ लोगों ने कहा- शहर जाकर दिखाओ। पैसे जुटाकर इन्हें भोपाल के अस्पताल ले गई। वहां सब इन्हें देखते ही हंसने लगे। कहने लगे- ये कैसी बीमारी है। इतनी कम उम्र में बुढ़िया लग रहीं। डॉक्टर ने कहा- इनका कुछ नहीं होने वाला। जब तक जिंदा है, सेवा करो। धीरे-धीरे इनकी तबीयत खराब होने लगी। अभी भी खांसी का इलाज चल रहा है। सरकार पेंशन के नाम पर 600 रुपए महीना देती है, इससे ज्यादा की तो दवा आ जाती है। 'जब तक हम जिंदा हैं, सेवा करेंगे। हमारे मरने के बाद इनका क्या होगा, पता नहीं। भगवान से कहती हूं कि मेरे सामने ही इन दोनों को उठा लो।’, ये कहते ही गणेशी के आंसू बहने लगते हैं। कुछ देर बाद, गणेशी फिर बोलीं– ‘बेटियों का दर्द अपनी जगह है, लेकिन समाज हमें रोज मारता है। रिश्तेदार हों या आस-पड़ोस वाले, कोई हमारे यहां खाना तो दूर, पानी भी नहीं पीता। उन्हें लगता है कुछ खाया–पीया तो बीमारी लग जाएगी।' ‘जो बेटा इस दुनिया में नहीं रहा, उसे भी यही बीमारी थी?’ गणेशी कहती हैं– रोशनी के बाद, साल 2011 में एक बेटा हुआ। देखने में सुंदर था, इसलिए नाम राजकुमार रखा। सालभर भी नहीं हुआ था कि उसका सिर अजीब दिखने लगा। बाल झड़ने लगे। गाल और गर्दन की चमड़ी लटकने लगी। वह बूढ़ा दिखने लगा। घर वाले ताने देते, कहते– कैसा बेटा पैदा किया। यह तो बच्चे जैसा दिखता ही नहीं है। तब अस्पताल हमारे गांव से 70 किमी दूर था, इसलिए गांव के वैद्य को दिखाया। वैद्य बोला- बेटा बड़ा होगा, तो ठीक हो जाएगा, लेकिन 7 साल की उम्र में ही वो चल बसा। इतना कहकर गणेशी उठीं और भीतर से बेटे राजकुमार की फोटो और अस्पताल के कुछ कागज लेकर आईं और दिखाने लगीं। अस्पताल के कागजों में बीमारी का नाम लिखा है– प्रोजेरिया। फिर बताती हैं– जब राजकुमारी और रोशनी पैदा हुईं, तो एक साल बाद ही बूढ़ी नजर आने लगीं। पति और सास ने ताने कसे, गालियां दीं। सास कहती थीं- ‘कैसी बूढ़ी बेटियां पैदा की हो, किसी काम की नहीं हैं।’ पति भी रोज जलील करता– 'कैसी औरत से पाला पड़ा है, जो सिर्फ बूढ़ी औलादों को जन्म दे रही है।' लेकिन, अब कोई कुछ भी बोले फर्क नहीं पड़ता। बगल में रंजीत बैरागी चुपचाप बैठे हैं। गणेशी बोलती हैं– ‘ये ऊंचा सुनते हैं। बिजली गिरी थी न, तो इनका कान खराब हो गया।’ इतने में, घर के सामने बाइक रुकती है। गणेशी कहती है– ये मेरा बेटा लखन है। इसे ऐसी कोई बीमारी नहीं है। लखन बताता है- रोशनी और राजकुमारी दोनों को रायसेन और भोपाल के कई अस्पतालों में दिखाया, लेकिन डॉक्टरों ने मदद नहीं की। देखते ही बोल देते हैं- इनका कोई इलाज नहीं है। जब तक जिंदा है, खिलाओ-पिलाओ। लोग जब इन्हें देखकर हंसते हैं, तो मुझे शर्म आती है। दोनों बहनों की हालत देखने और परिवार का दर्द सुनने के बाद मैं दिल्ली चल पड़ा। वहां सर गंगाराम अस्पताल के जेनेटिक डिपार्टमेंट पहुंचा। यहां मेरी मुलाकात एचओडी डॉ. रतना दुआ पुरी से हुई। रोशनी और राजकुमारी की बीमारी का जिक्र किया, तो डॉ. रतना कहती हैं– ‘यह रेयर डिजीज है। इसका कोई इलाज नहीं है। भारत में बहुत ही कम केस हैं। माता-पिता से बच्चे के शरीर में करीब 20 हजार जीन्स आते हैं। गर्भधारण के दौरान बच्चे के जीन्स में अचानक आई एक मामूली सी जेनेटिक गड़बड़ी, इस लाइलाज बीमारी की वजह बनती है। इस बीमारी के साथ पैदा होने वाले बच्चों की चमड़ी शुरुआत से ही बहुत कमजोर होने लगती है। दरअसल, हमारी त्वचा की कोशिकाओं को आपस में बांधने वाला जो जोड़ या बॉन्ड होता है, वह ठीक से काम नहीं करता। नतीजा– त्वचा ढीली पड़ जाती है और झुर्रियां बचपन में ही दस्तक दे देती हैं। बच्चा पहला साल पूरा भी नहीं कर पाता कि वह धीरे-धीरे बूढ़ा दिखने लगता है। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो हमारी त्वचा को मजबूत रखने वाला प्रोटीन इस बीमारी के कारण दूषित होने लगता है, जिसे 'प्रोजेरिन' कहते हैं। यह दूषित प्रोटीन कोशिकाओं के ढांचे को पूरी तरह हिला देता है और बच्चे समय से पहले ही बूढ़े होने लगते हैं। इसके कारण अस्थमा और हार्ट की बीमारियां भी होने लगती हैं। प्रोजेरिया से जूझ रही ये दोनों बहनें कब तक जिंदा रह पाएंगी, कहना मुश्किल है। रोशनी और राजकुमारी की दुर्लभ बीमारी को समेटे मैं अगली कहानी के लिए हैदराबाद निकल पड़ता हूं। ------------------------------------- 1- 14 की उम्र में शरीर बना 'पेड़ की छाल’:उठो या बैठो फटने लगती है चमड़ी, मन करता है छीलकर फेंक दूं; देश का अकेला केस दोपहर के 1 बजे हैं। जंगल के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर कार हिचकोले खा रही है। तेज गर्मी से गला लगातार सूख रहा है। करीब 2 घंटे बाद जंगलों में कुछ झोपड़ियां नजर आती हैं। इन्हीं झोपड़ियों में से एक के सामने हमारी कार रुकी। झोपड़ी के बाहर एक लड़की बेजान सी खड़ी नजर आई। उसकी मटमैली शर्ट और हाफ पैंट के बाहर जितना भी शरीर दिख रहा है, वह बेहद डरावना है। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 5 Jun 2026 5:17 am

श्रीलंका में बुजुर्गों के केयर सेंटर में लगी भीषण आग, 12 लोगों की मौत और कई घायल

श्रीलंका में बुजुर्गों के केयर सेंटर में भीषण आग लगने की घटना सामने आई है, जिसमें जानमाल का बेहद नुकसान हुआ। स्थानीय पुलिस ने गुरुवार को बताया कि श्रीलंका के पश्चिमी प्रांत में बुधवार देर शाम एक बुजुर्गों के केयर सेंटर में लगी आग में 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

देशबन्धु 4 Jun 2026 11:26 pm

इजरायल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में युद्धविराम पर बनी सहमति

इजरायल और लेबनान ने वॉशिंगटन में दो दिनों तक चली अमेरिका की मध्यस्थता वाली बातचीत के बाद युद्धविराम लागू करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने आगे भी सीधे बातचीत जारी रखने और सुरक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने का वादा किया है, ताकि दक्षिणी लेबनान में किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र समूह की वापसी रोकी जा सके।

देशबन्धु 4 Jun 2026 10:46 pm

आज का एक्सप्लेनर:TMC के बागी विधायक बीजेपी में क्यों नहीं गए; कौन हैं बंगाल के नए नेता विपक्ष ऋतब्रत बनर्जी, क्या वही TMC चलाएंगे

6 मई की शाम। बंगाल चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी ने घर पर TMC विधायकों की बैठक बुलाई। इसमें अभिषेक बनर्जी की चुनावी भूमिका की तारीफ करते हुए खड़े होकर तालियां बजाने को कहा। कुछ विधायक खड़े हुए। कुछ चुपचाप बैठे रहे। बैठे रहने वालों में एक थे ऋतब्रत बनर्जी। ठीक 29 दिन बाद वही ऋतब्रत बंगाल विधानसभा के नेता विपक्ष बन चुके हैं। उन्होंने 58 बागी विधायकों को साथ लेकर असली TMC का दावा किया है। आखिर ये सब हुआ कैसे, कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी और क्या TMC को बीजेपी खत्म कर देगी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: TMC में 58 बागी विधायकों का अलग धड़ा कैसे बन गया? जवाबः 4 मई को पश्चिम बंगाल में चुनाव के नतीजे आए। 41% वोट शेयर के बावजूद TMC सिर्फ 80 सीटें जीत पाई। बीजेपी को 207 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला। 6 मई की मीटिंग का किस्सा हमने ऊपर सुनाया। पश्चिम बंगाल की सीनियर पत्रकार शिखा मुखर्जी बताती हैं कि ममता उस बैठक में भतीजे अभिषेक की तारीफ कर रही थीं, जबकि ऋतब्रत बनर्जी, संदीपन साहा और कुणाल घोष जैसे नेता अभिषेक बनर्जी और I-PAC को हार का जिम्मेदार ठहरा रहे थे। IPAC ने ही टीएमसी के चुनावी प्रचार का जिम्मा संभाला था। टीएमसी में बगावत का असली खेल शुरू हुआ 22 मई से। पश्चिम बंगाल के सीनियर पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं, ‘22 मई को ऋतब्रत राज्यसभा की कुछ औपचारिकताओं के सिलसिले में दिल्ली गए थे। इसी दिन CM शुभेंदु अधिकारी भी दिल्ली स्थित बंग भवन में मौजूद थे। लंच पर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई।’ बंगाल लौटने के बाद ऋतब्रत ने अभिषेक बनर्जी से असंतुष्ट नेताओं को एकजुट करना शुरू किया। ऋतब्रत की कोशिश तब सफल हुई, जब ममता की 31 मई की बैठक में 80 में से 20 विधायक ही पहुंचे। 1 जून की रात कोलकाता के एक हॉस्टल में ऋतब्रत की TMC विधायकों के साथ बैठक की खबरें सामने आईं, तो बगावत की अटकलों पर मुहर लग गई। 1 जून को ममता ने ऋतब्रत और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की वजह से TMC से बाहर कर दिया। 4 जून की सुबह ममता ने TMC का पूरा संगठन भंग करने का ऐलान किया। शाम तक खबर आ गई ऋतब्रत ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु को 58 बागी विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंपा है। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया और विधानसभा में विपक्ष के नेता के कमरे की चाबी ऋतब्रत को सौंप दी। शिखा मुखर्जी बताती हैं कि ऋतब्रत मुस्लिम विधायकों के समर्थन के बिना पार्टी नहीं तोड़ सकते थे, क्योंकि 80 में से 34 विधायक मुस्लिम थे। इसीलिए नेता विपक्ष बनने के बाद ऋतब्रत ने 4 डिप्टी लीडर चुने हैं, जिनमें से दो मुस्लिम हैं- सबीना यास्मीन और जावेद अहमद खान। वहीं अख्रुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है।’ ममता ने विधानसभा स्पीकर रथींद्र दास की भूमिका पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, 'जिस नेता को 2 दिन पहले पार्टी से निकाला गया, उसे स्पीकर विपक्ष का नेता कैसे चुन सकते हैं? ऋतब्रत के पास पार्टी का लेटरहेड भी नहीं था, उन्होंने कोरे कागज पर रिजॉल्यूशन लिखकर स्पीकर को भेजा, फिर भी स्पीकर ने उसे स्वीकार कैसे कर लिया?' सवाल-2: ममता की जमीन खिसकाने वाले ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं? जवाबः 47 साल के ऋतब्रत बनर्जी कोलकाता के रहने वाले हैं। 1990 के दशक में उन्होंने वामपंथी स्टूडेंट पॉलिटिक्स से शुरूआत की। वो CPI (M) की स्टूडेंट विंग स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI के जनरल सेक्रेटरी बने। ऋतब्रत करीब 8 साल तक SFI से जुड़े रहे। बेबाक भाषणों की बदौलत उनकी छवि युवा वामपंथी नेता के तौर पर मजबूत हुई। कहा जाता है कि वो CPI(M) के महासचिव रहे दिवंगत सीताराम येचुरी के भी करीबी थे। 2011 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए ममता बनर्जी ने कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट खाली कर दी। उपचुनाव में CPI (M) ने ऋतब्रत को उम्मीदवार बनाया, लेकिन वो चुनाव हार गए। 2014 में CPI (M) ने सिर्फ 35 साल के ऋतब्रत को राज्यसभा सांसद बना दिया। उन्हें एपल की स्मार्टवॉच और मोंटब्लैंक पेन जैसी महंगी चीजों का इस्तेमाल करते देखा गया। कहा जाता है कि ‘लग्जरी लाइफस्टाइल’ के चलते CPI (M) के टॉप लीडर्स से उनके मतभेद हो गए थे। 2017 में एक इंटरव्यू में ऋतब्रत ने कहा कि उनकी लड़ाई प्रकाश करात, वृंदा करात जैसे लीडर्स से है। इस बयान के कुछ ही दिन बाद CPI(M) ने उन्हें पहले सस्पेंड किया और फिर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसी साल ऋतब्रत के साथ एक और विवाद हुआ। एक महिला ने उन पर शादी का झूठा वादा करके बलात्कार का आरोप लगाया। ऋतब्रत ने महिला पर उन्हें ब्लैकमेल करके पैसा उगाही की कोशिश करने का आरोप लगाया। 2018 में ऋतब्रत TMC में शामिल हो गए। उन्हें TMC की ‘ट्राइबल वेलफेयर कमेटी’ का संयोजक बनाया गया। जल्द ही वे TMC की मजदूर शाखा कही जाने वाली ‘इंडियन नेशनल तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ यानी INTTUC के स्टेट प्रेसिडेंट बन गए। 2024 में TMC से राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ममता सरकार का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद TMC ने ऋतब्रत को उनकी जगह राज्यसभा भेज दिया। तब अभिषेक बनर्जी ने तारीफ करते हुए कहा था, 'ऋतब्रत ने संगठन को मजबूत करने और पूरे राज्य में ट्रेड यूनियन वर्कर्स के हक के लिए काम किया है। भले थोड़ा समय मिले, लेकिन आखिर समर्पण और कड़ी मेहनत का फल जरूर मिलता है।’ 2 अप्रैल 2026 को ऋतब्रत का राज्यसभा क्रायकाल खत्म हुआ। इसके बाद TMC ने उन्हें उलुबेरिया पूर्व विधानसभा सीट से टिकट दिया। प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं कि ऋतब्रत में बड़े नेताओं के करीब बने रहने की खूबी है। वे CPI(M) की सरकार में पूर्व सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्या के करीब रहे, जिसकी बदौलत उन्हें 2011 में विधानसभा का टिकट मिला और चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने 2014 में उन्हें राज्यसभा भेज दिया। इसके बाद TMC में रहते हुए वे शुभेंदु के करीब आए, जिसका फायदा उन्हें अब जाकर मिलता हुआ दिख रहा है। सवाल-3: क्या ऋतब्रत 60 विधायकों के साथ TMC हथिया लेंगे? जवाबः बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनने के बाद ऋतब्रत ने कहा, ‘हम विधानसभा में TMC का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। TMC की टिकट पर जीते 60 विधायक एकजुट हैं। 2 लोग फिलहाल राज्य से बाहर हैं। ममता बनर्जी से अनुरोध करते हैं कि वे हमारी सलाहकार बनें और हमारा मार्गदर्शन करें। हम एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। सदन में मजबूती से बीजेपी का सामना करेंगे।’ ऋतब्रत ने रथींद्र दास को बागी नेताओं की सहमति वाला जो पत्र भेजा, वो TMC के लेटरपैड के बजाय सफेद कागज पर लिखा गया था। इसमें ममता बनर्जी को ही TMC का नेता बताया गया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता। यानी ऋतब्रत खुले तौर पर दो संकेत दे रहे हैं। पहला- ममता बनर्जी कॉम्प्रोमाइज करके TMC की प्रतीकात्मक नेता बनी रह सकती हैं, दूसरा- वो बागी विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल नहीं होंगे। TMC के एक सीनियर सांसद ने दावा किया, 'जल्द ही TMC के सांसदों में भी फूट पड़ सकती है। यह TMC के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी। एकनाथ शिंदे और अजीत पवार की तरह, बागी TMC सांसदों को भी चुनाव निशान और पार्टी के नाम का अधिकार मिल जाएगा।' दरअसल, अगर किसी पार्टी के कुल विधायकों में से दो-तिहाई या उससे ज्यादा विधायक अलग गुट बना लें और पार्टी के नेता के बजाय किसी और को लीडर मान लें, तो ऐसी स्थिति में दल-बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। उल्टा पार्टी के चुनाव निशान पर भी इसी गुट का दावा मजबूत माना जाता है। कई जानकारों का मानना है कि फिलहाल बीजेपी नहीं चाहती कि TMC पूरी तरह टूट जाए या उसके बागी धड़े का उनमें विलय हो जाए। सवाल-4: क्या वाकई बीजेपी नहीं चाहती बंगाल में TMC बिखर जाए? जवाबः भाजपा सांसद सौमित्र खान ने दावा किया था कि TMC के लगभग 50 विधायक और 20 सांसद हमारे संपर्क में हैं। अगर आलाकमान चाहे, तो आज ही TMC का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बागी विधायकों ने बीजेपी से संपर्क भी किया था, लेकिन बीजेपी ने उनके लिए दरवाजा नहीं खोला, क्योंकि उसे सरकार बनाने के लिए संख्याबल की जरूरत नहीं है। पॉलिटिकल एनालिस्ट और पत्रकार सायंतन घोष X पर लिखते हैं… प्रभाकर मणि तिवारी बताते हैं, ‘ऋतब्रत के इस सकारात्मक विरोध वाले बयान और शुभेंदु से उनकी पुरानी नजदीकियों से राजनीतिक हलकों में यही चर्चा है कि ऋतब्रत का गुट BJP की बी-टीम बनकर रह जाएगा।’ पश्चिम बंगाल के सीनियर पत्रकार स्निग्धेंदु भट्टाचार्य बताते हैं, '2024 में भाजपा ने ओडिशा में चुनाव जीतने के बावजूद विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल का अस्तित्व बनाए रखने में मदद की थी, ताकि राज्य में कांग्रेस फिर से एक्टिव न हो सके। पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है।' सवाल-5: क्या TMC के बिखरने से वाकई लेफ्ट-कांग्रेस का फायदा होगा? जवाबः 2026 के बंगाल चुनाव में कांगेस 2 और CPI(M) सिर्फ 1 सीट जीती है। हालांकि दोनों का वोट शेयर मिलाकर करीब 7.5% है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि TMC के कमजोर होने से बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट की भूमिका बढ़ सकती है… हालांकि प्रसून आचार्य जोर देते हैं कि ममता के लिए पार्टी की अंदरूनी कलह बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अचानक उनका प्रभाव खत्म हो जाएगा और वोटबैंक लेफ्ट या कांग्रेस में शिफ्ट हो जाएगा। *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- बंगाल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… क्या TMC बिखरने वाली है, 4 संकेत; बंगाल में एकबार सत्ता जाने के बाद पार्टियां कभी वापसी क्यों नहीं कर पातीं बंगाल में आजादी के बाद से ही एक ट्रेंड है। जो पार्टी सत्ता से एकबार बेदखल हुई, वो कभी लौट नहीं सकी। सिर्फ कांग्रेस एक अपवाद है। 2026 का बंगाल चुनाव हारने के बाद TMC भी सबसे मुश्किल दौर में है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 4 Jun 2026 6:26 pm