बांग्लादेश चुनाव से पहले बढ़ा विवाद, बीएनपी ने जमात पर फासीवादी प्रोपेगेंडा फैलाने का लगाया आरोप
Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़ गया है.
Us Smithsonian Museum: अमेरिका के स्मिथसोनियन के नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने बड़ा फैसला लिया है. म्यूजियम ने तमिलनाडु के मंदिरों से जुड़ी तीन ऐतिहासिक कांस्य मूर्तियां भारत को लौटाने का ऐलान किया है. जांच में साफ हुआ कि ये मूर्तियां कई दशक पहले गलत तरीके से मंदिरों से हटाई गई थीं. इनमें से एक मूर्ति, शिव नटराज, भारत सरकार की सहमति से लंबे समय के लिए अमेरिका में ही प्रदर्शित की जाएगी.
iran us conflict:अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान पर पहले हमला कर सकता है. जवाब में ईरान ने भी खुली चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का करारा और विनाशकारी जवाब दिया जाएगा.
ट्रंप के अफसर ने ChatGPT पर डाले गोपनीय दस्तावेज, सुरक्षा सिस्टम ने जारी किया अलर्ट
US Cyber Security: अमेरिका में साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. ट्रंप प्रशासन द्वारा नियुक्त साइबर एजेंसी CISA के कार्यवाहक प्रमुख पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी काम से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज पब्लिक ChatGPT में अपलोड कर दिए. इसके बाद सुरक्षा सिस्टम ने अलर्ट जारी कर दिया.
कौन हैं वो नन जो चर्च ऑफ इंग्लैंड की बनीं पहली महिला आर्कबिशप, 105 पुरुषों के बाद मिली जिम्मेदारी
Sarah Mullally: 63 साल की सारा मुलली कैंटरबरी की आर्कबिशप बन गईं हैं. इस जिम्मेदारी के बाद मुलैली चर्च ऑफ इंग्लैंड को लीड करने वाली पहली महिला बन गईं हैं.
अजित पवार की खबर के बीच एक और विमान हादसा, प्लेन क्रैश में गई 15 लोगों की जान
Colombian Plane Crash Near Venezuela: अभी हम महाराष्ट्र के बारामती में हुए प्लेन हादसे से उबरे नहीं थे कि, वेनेजुएला सीमा पर भी एक बड़ा विमान हादसा हो गया है. 15 लोगों को ले जा रहा एक छोटा कमर्शियल विमान जो कि Beechcraft 1900 मॉडल का था, वेनेजुएला सीमा के पास क्रैश हो गया. दुख की बात ये है कि इस हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो चुकी है.
28 जनवरी 2025 की सुबह 8.10 बजे… मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक 6 सीटर लियरजेट- 45XR विमान ने उड़ान भरी। इसमें महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार, उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर, 2 पायलट और एक फ्लाइट अटेंडेंट सवार थी। उन्हें बारामती की 250 किलोमीटर की दूरी 30 मिनट में तय करनी थी। लेकिन 35 मिनट बाद ये प्लेन आग के गोले में बदल गया। 3D मैप, वीडियो और AI के जरिए देखिए अजित पवार के प्लेन क्रैश की मिनट-टू-मिनट पूरी कहानी, वीडियो देखने के लिए ऊपर तस्वीर पर क्लिक कीजिए…
महाराष्ट्र का बारामती, अजित पवार का यहां सिक्का चलता था। 8 बार विधायक और एक बार सांसद बने। बारामती में ही आखिरी सांस भी ली। अजित पवार ने 28 जनवरी की सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी। करीब 40 मिनट में प्लेन बारामती पहुंच गया। लैंडिंग के आखिरी पलों में हादसा हुआ। पायलट ने लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। दूसरी कोशिश में 8:46 बजे प्लेन रनवे के पास क्रैश हो गया। शुरुआती रिपोर्ट में आया है कि पहली बार में पायलट को रनवे नहीं दिखा था। उस वक्त विजिबिलिटी 3 हजार मीटर थी, जो कम से कम 5 हजार मीटर होनी थी। दैनिक भास्कर ने हादसे की वजहों की पड़ताल की। इसमें तीन सवाल निकलकर सामने आए। 1. हादसे की वजह क्या है, प्लेन में तकनीकी खराबी या खराब मौसम? 2. क्या लैंडिंग के वक्त नियमों का पालन नहीं किया गया? 3. क्या हादसा मैनुअल और इंस्ट्रूमेंट प्रोसीजर के कन्फ्यूजन में हुआ? इन सवालों के जवाब के लिए हमने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इनवेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB की दो रिपोर्ट्स की पड़ताल कीं। ये रिपोर्ट बारामती एयरपोर्ट पर हुए हादसों से जुड़ी हैं। पहला हादसा: 20 सितंबर 2021 क्या हुआ: रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी का एयरक्राफ्ट क्रैश इसकी रिपोर्ट में मौसम की जानकारी वाले पेज पर लिखा है कि बारामती एयरपोर्ट पर मौसम विभाग से रिकॉग्नाइज्ड कोई ऑफिस नहीं है। यहां पुणे ऑफिस से मौसम की जानकारी ली जाती है। हालांकि रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी का वेदर इंस्ट्रूमेंट है, जो मौसम की मॉनिटरिंग करता है। दूसरा हादसा: 25 जुलाई, 2022 क्या हुआ: ट्रेनिंग एयरक्राॅफ्ट दुर्घटनाग्रस्तजांच रिपोर्ट में लिखा है कि बारामती एयरपोर्ट पर एक ही रनवे है। ये दो साइड से है। इसे रनवे 11 और 29 कहा जाता है। रनवे विजुअल अप्रोच वाला है, यानी इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल तभी करना चाहिए, जब विजिबिलिटी 5 किमी या इससे ज्यादा हो। कम विजिबिलिटी होने पर यहां लैंडिंग खतरनाक हो सकती है। यही वजह है कि इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल सिर्फ पायलट ट्रेनिंग के लिए होता है। विजुअल अप्रोच वाले रनवे को समझने के लिए हमने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA में फ्लाइट इंस्पेक्टर रह चुके कैप्टन प्रशांत ढल्ला से बात की। वे कहते हैं कि एयरपोर्ट पर विजिबिलटी के हिसाब से दो कैटेगरी है। 1. विजुअल फ्लाइट रूल्स 2. इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स विजुअल अप्रोच के लिए विजिबिलिटी कम से कम 5 किमी होनी चाहिए। ये पायलट को बताया जाता है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल के कंट्रोलर को भी जानकारी दी जाती है कि आप तभी विजुअल अप्रोच के लिए सहमति देंगे, जब 5 किमी की विजिबिलिटी हो। इसके बाद पायलट इंस्ट्रूमेंट यानी टेक्निकल अप्रोच को फॉलो नहीं करता है। इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स को 5 और खासकर 3 किमी से कम की विजिबिलिटी के दौरान फॉलो करना होता है। बारामती एयरपोर्ट पर बड़े एयरपोर्ट की तरह कम विजिबिलिटी के दौरान लैंडिंग के इंतजाम नहीं है। यहां पायलट को रनवे देखकर ही प्लेन उतारना होता है। हादसे के वक्त विजिबिलिटी करीब 3 हजार मीटर थी। यानी इस एयरपोर्ट पर विजुअली लैंडिंग नहीं हो सकती थी। ऐसे में इंस्ट्रूमेंट के जरिए ही लैंडिंग हो सकती है। एक्सपर्ट बोले- रेडिएशन फॉग हादसे का बड़ा फैक्टर DGCA के पूर्व अधिकारी कैप्टन प्रशांत ढल्ला बताते हैं, ‘इस हादसे में खराब मौसम बड़ा फैक्टर हो सकता है। बारामती एयरपोर्ट पर रेडिएशन फॉग होता है। मतलब रात में 2 बजे से सुबह 8-9 बजे तक एक लेयर बन जाती है। हादसे की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट ने लैंडिंग के लिए दो बार कोशिश की थी। दूसरी बार में हादसा हो गया।’ हादसे के चश्मदीद पिंटू सरडे ने भी दैनिक भास्कर को कोहरे की बात बताई है। वे कहते हैं, ‘सुबह-सुबह कोहरा था, कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हमने देखा कि प्लेन ने एक बार उतरने की कोशिश की, लेकिन रनवे तो ऊपर था। हमने सोचा कि ये प्लेन रनवे की ओर क्यों नहीं जा रहा है। दूसरी बार उतरने की कोशिश करते हुए प्लेन गिर गया।’ ‘हम भागकर पहुंचे। वहां बहुत आग लगी हुई थी। इसलिए हममे से कोई आगे नहीं जा पाया। 4-5 लोग जमीन पर पड़े थे। डॉक्युमेंट पड़े थे। हमने पुलिस को फोन किया। इसके बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आ गईं। तब पता चला कि प्लेन में अजित दादा थे। हमने उनकी डेडबॉडी भी देखी।’ डॉ. प्रशांत ढल्ला के दावे के बाद हमने दुनियाभर के एयरोस्पेस में फ्लाइट्स पर नजर रखने वाली संस्था फ्लाइटरडार 24 की रिपोर्ट देखी। इसके मुताबिक, प्लेन सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ा था। बारामती एयरपोर्ट के रनवे 11 पर उतरने की कोशिश की। प्लेन से आखिरी सिग्नल सुबह 8:43 बजे मिला था। रिपोर्ट में 2 बड़ी लापरवाहियों का जिक्र पहली: बारामती एयरपोर्ट पर ऑटोमेटिक वेदर रिपोर्टिंग सिस्टम नहीं है। लिहाजा, प्लेन लैंडिंग से पहले मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से मिल रहे फोरकास्ट डेटा या बारामती एयरपोर्ट की पिछली जानकारी के आधार पर उड़ रहा था। मुंबई एयरपोर्ट बारामती से करीब 200 किलोमीटर दूर है। वहां के मौसम का डेटा बारामती के लिए सटीक नहीं हो सकता। इसलिए पायलटों को लैंडिंग के वक्त मुश्किल आई। दूसरी: हादसे के वक्त बारामती एयरपोर्ट के लोकल टावर पर स्टाफ नहीं था। स्टाफ होता तो पायलटों को मौसम का सही अनुमान मिल पाता और सही लैडिंग हो सकती थी। मैनुअल और इंस्ट्रूमेंट प्रोसीजर के कन्फ्यूजन में तो नहीं हुआ हादसासिविल एविएशन मिनिस्ट्री की तरफ से जारी रिपोर्ट में लिखा है कि प्लेन बारामती एयरपोर्ट से करीब 55 किमी दूर था, तब पायलट ने पुणे एटीसी से कम्युनिकेशन किया था। वहां से कहा गया कि पायलट अपने विवेक से ही लैंडिंग करे। उसी समय क्रू ने विजिबिलिटी के बारे में पूछा था। बताया गया कि विजिबिलिटी 3 हजार मीटर के आसपास है। ये विजुअल लैंडिंग अप्रोच के लिए जरूरी 5 किमी की विजिबिलिटी से कम थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बारामती एयरपोर्ट विजुअल लैंडिंग अप्रोच के लिए ही बना है। इसलिए पायलट ने रनवे देखने के बाद उसी अप्रोच को अपनाया। रिपोर्ट में भी लिखा है कि पहले अप्रोच में रनवे नहीं दिखा था। इसलिए दोबारा कोशिश की गई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पायलट को रनवे दिख रहा था। आशंका है कि पायलट को मैनुअल और इंस्ट्रूमेंट प्रोसीजर फॉलो करने में कन्फ्यूजन हुआ होगा। AAIB की पुरानी जांच रिपोर्ट में बारामती एयरपोर्ट के बारे में लिखा है। इसके मुताबिक, विजुअल अप्रोच वाले रनवे पर बेसिक मार्किंग होती हैं। इन्हें जेट प्लेन ऑपरेशन के लिए सही नहीं माना जाता। सरकार ने कहा- विजिबिलिटी बहुत खराब थी, हादसे की जांच कराएंगे इस हादसे पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा है कि पूरे मामले की जांच पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से की जाएगी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, लैंडिंग के समय मौके पर विजिबिलिटी बहुत खराब थी। लैंडिंग से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने पायलट से पूछा था कि क्या रनवे दिखाई दे रहा है। पायलट ने बताया था कि रनवे नजर नहीं आ रहा है। इसके बाद प्लेन दोबारा लैंडिंग के लिए लौटा। इस दौरान ATC ने फिर से पायलट से रनवे की विजिबिलिटी के बारे में पूछा। पायलट ने रनवे दिखाई देने की बात कही। लैंडिंग की परमिशन मिलने के बाद विमान हादसे का शिकार हो गया। दैनिक भास्कर ने इस पर एविएशन एक्सपर्ट कैप्टन मोहन रंगनाथ से भी बात की। उनसे 3 सवाल पूछे। पढ़िए जवाब... सवाल: क्या बारामती जैसी छोटी हवाई पट्टियों पर सुबह उड़ान जोखिम भरी होती है? जवाब: हां, बारामती जैसी जगहों पर इंस्ट्रुमेंट लैंडिंग सिस्टम की सुविधा नहीं होती। वहां सुरक्षित लैंडिंग के लिए बहुत ज्यादा विजिबिलिटी की जरूरत होती है। सर्दियों में सुबह विजिबिलिटी अक्सर न्यूनतम सीमा से बहुत कम होती है। ये उड़ानों के लिए जोखिम पैदा करती है। सवाल: बारामती में विजिबिलिटी, तापमान और हवा का पैटर्न सुबह की उड़ानों को कैसे प्रभावित करता है?जवाब: सर्दियों में इस एरिया में हल्का कोहरा या धुंध रहती है। इससे सुबह की उड़ानों के लिए मुश्किल होती है। कम विजिबिलिटी की वजह से रनवे को देख पाना मुश्किल होता है। ये स्थिति ऐसे हादसों की वजह बनती है। सवाल: बारामती एयरपोर्ट पर वेदर कंट्रोल सिस्टम न होने से प्लेन मुंबई एयरपोर्ट से मिल रहे डेटा के आधार पर उड़ रहा था। क्या ऐसा मुमकिन है ? जवाब: 28 जनवरी की दोपहर 12 बजे मेरी फ्लाइट मुंबई में लैंड हुई थी। तब विजिबिलिटी सिर्फ 2500 मीटर थी। इस लिहाज से बारामती में सुबह 8 बजे की विजिबिलिटी देखें तो वह 2500 मीटर से कम रही होगी। दोनों एयरपोर्ट्स के बीच की दूरी करीब 200 किमी है। दोनों जगहों की विजिबिलिटी एक समय पर एक जैसी नहीं हो सकती। लिहाजा, विमान को किसी दूसरे एयरपोर्ट के वेदर फॉर कास्टिंग सिस्टम के मुताबिक उड़ाने में मुश्किल हो सकती है। बारामती अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड, इसलिए नियमों के उल्लंघन की आशंका ज्यादाबारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए लोकल ऑपरेटर्स से कोऑर्डिनेट करना पड़ता है। ये एयरपोर्ट अनकंट्रोल्ड एयर फील्ड है, यानी यहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल नहीं है। यहां ट्रैफिक की इन्फॉर्मेशन एयरपोर्ट से चल रहे फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन के पायलट या इंस्ट्रक्टर देते हैं। उड़ान के लिए ऑनसाइट ऑपरेटर से कोऑर्डिनेट करना होता है, जो अभी रिलायंस एयरपोर्ट डेवलपमेंट ग्रुप है। ये महाराष्ट्र इंड्रस्टियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की सहायक कंपनी है। लोकल प्रोसेस और पार्किंग अवेलेबिलिटी के लिए फ्लाइट स्कूल कार्वर एविएशन प्राइवेट लिमिटेड से कॉन्टैक्ट करना होता है। कार्वर एविऐशन बारामती एयरपोर्ट के एडवाइजरी टावर का मैनेजमेंट करता है। उड़ान की परमिशन DGCA से मिलती है। DGCA भारत में सभी नॉन शेड्यूल्ड और प्राइवेट फ्लाइट की परमिशन देने वाली प्राइमरी अथॉरिटी है। 2022 में बारामती में प्लेन क्रैश के बाद बनी AAIB की रिपोर्ट में लिखा है कि अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड होने की वजह से नियमों के उल्लंघन की आशंका रहती है। बारामती में खुलेआम उल्लंघन हुए भी हैं। चश्मदीद बोले- प्लेन नीचे आया, गिरने के बाद 4-5 ब्लास्ट हुए दैनिक भास्कर ने हादसे के वक्त मौजूद लोगों से बात की। एयरपोर्ट बारामती शहर से करीब 8 किमी दूर है। रनवे के आसपास खेत हैं। प्लेन क्रैश होने के बाद खेतों में काम कर रहे लोग मदद के लिए आए। एक महिला बताती हैं, ‘पहले विमान ऊपर गया, फिर गांव की तरफ नीचे की ओर आया। इसके बाद हवा में घूमा और जमीन से टकरा गया। प्लेन के टुकड़े हमारे घरों तक आकर गिरे।’ एक और चश्मदीद बताते हैं, ‘लग रहा था कि प्लेन एयर स्ट्रिप पर उतर रहा है, लेकिन वो क्रैश हो गया। बहुत जबरदस्त विस्फोट हुआ। पूरे प्लेन में आग लगी थी। 4–5 विस्फोट हुए। आग ज्यादा थी, इसलिए हम मदद नहीं कर पाए।’ यहीं मिले दीपक हादसे वाली जगह से डेडबॉडी निकालने वालों में शामिल थे। वे बताते हैं, ‘मेरे पास फोन आया था कि एक प्लेन गिरा है। अफवाह है कि उसमें अजित दादा हैं। मैं आया तब आग बुझ गई थी। शुरुआत में हमने तीन डेडबॉडी निकालीं। अजित दादा की पहचान नहीं हो पा रही थी। घड़ी से उनकी पहचान की गई।’ अजित पवार जिस प्लेन में सवार थे, उसके बारे में जानिए… अजित पवार के निधन के बाद से बारामती में मार्केट बंद, मुंबई में पोस्टर हटाए अजित पवार के निधन की खबर सुनते ही मुंबई के नरीमन पॉइंट पर NCP ऑफिस में कार्यकर्ता जुट गए। ऑफिस में लगे पोस्टर-बैनर हटा दिए गए। कई कार्यकर्ता रोते दिखे। मुंबई में वर्ली की महिला मोर्चा अध्यक्ष नीलम प्रकाश कांबले मोबाइल में अजित पवार की फोटो दिखाते हुए कहती हैं, ‘दादा की यादें मेरे साथ हैं। मैंने उन्हें राखी बांधी थी। सब उनके पास जाने से डरते थे, मैं आवाज लगाती थी दादा-दादा, वे तुरंत मुस्कुराते हुए आते थे, फोटो खिंचवाते थे।’ बायकुला की सुवर्णा हांडे रोते हुए कहती हैं, ‘मैं मिडिल क्लास से हूं। दादा की वजह से इतनी पहचान हो गई कि लोगों के काम कराती हूं। दादा कहते थे कि बस काम करते रहो। हम हर बार उम्मीद लेकर आते थे कि दादा मिलेंगे। आज भी इसी उम्मीद से आए थे।’ ‘हमारी सरकार से एक ही मांग है, ये जो भी हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए। ये बहुत बड़ा हादसा है। हमें इसके पीछे साजिश लग रही है। सरकार को सच सामने लाना चाहिए।’ बारामती में 57 साल से पवार परिवार का दबदबाहादसे के बाद सभी डेड बॉडी बारामती के पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर मेडिकल कॉलेज लाई गईं। अजित पवार के समर्थक अस्पताल पहुंचने लगे। हालात संभालने के लिए हॉस्पिटल के आसपास पुलिस तैनात कर दी गई। बारामती सीट पवार परिवार का गढ़ रही है। पहले NCP लीडर शरद पवार यहां से चुनाव जीतते थे, फिर अजित पवार जीतने लगे। अजित पवार और शरद पवार के अलग होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ा। अजित पवार यहां से चुनाव जीतते रहे। उनके सम्मान में शहर के दुकानदारों ने मार्केट बंद कर दिया। 1967 में शरद पवार पहली बार बारामती से विधायक चुने गए थे। इसके बाद लगातार 6 बार चुनाव जीते। 1991 के उपचुनाव में शरद पवार ने ये सीट भतीजे अजित पवार को दे दी। तब से इस सीट से अजित पवार ही विधायक थे। जुलाई, 2023 में अजित पवार ने बगावत कर दी और शरद पवार की पार्टी NCP पर दावा ठोक दिया। अजित पवार बारामती से 8 बार चुनाव जीते थे। 2024 के विधानसभा चुनाव में चाचा शरद पवार ने उनके सामने युगेंद्र पवार को उतार दिया था। युगेंद्र, अजित पवार के भाई श्रीनिवास के बेटे हैं। 57 साल में ये पहला मौका था, जब विधानसभा चुनाव में पवार परिवार के दो कैंडिडेट आमने-सामने थे। ये खबर भी पढ़िए… हवा में चक्कर काटकर क्रैश, अजित पवार का विमान आग का गोला कैसे बना अजित पवार जिस लियरजेट-45 प्लेन से सफर कर रहे थे, उसे प्राइवेट जेट और चार्टर्ड फ्लाइट मुहैया करवाने वाली दिल्ली की VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ऑपरेट करती है। ये प्लेन 16 साल पुराना था। प्लेन क्रैश कैसे हुआ, संभावित वजहें कौन-सी हो सकती हैं और इस तरह के क्रैश में पहले किन नेताओं की जान गई, पढ़िए भास्कर एक्सप्लेनर…
‘2021 की बात है। दोपहर के 2 बज रहे थे। मैं अपनी सहेली के घर कुछ काम से जा रही थी। अचानक दो लड़के दौड़ते हुए मेरी तरफ आए। उन्होंने मुझे जबरदस्ती एक बोलेरो गाड़ी में बैठा लिया। मैं चीख-चीखकर पूछ रही थी- मुझे कहां ले जा रहे हो। तभी एक लड़के ने थप्पड़ मारा और रूमाल से मेरा मुंह दबाते हुए बोला- चुपचाप बैठी रहो। सागर जिले में सब तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद मुझे कुछ भी याद नहीं…। 10 घंटे बाद होश आया तब रात के 10 बज रहे थे। मैं एक कमरे की फर्श पर अधमरी पड़ी थी। शरीर पर नाम मात्र के कपड़े बचे थे। तीन दिन बाद पता चला कि एक रिश्तेदार ने मुझे एक लाख रुपए में बेच दिया है।’ बोलते-बोलते 21 साल की रीता फूट-फूटकर रोने लगती हैं। उनके हाथ-पांव कांपने लगते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में हर दिन 43 लड़कियों के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इनमें से कुछ की खोज-खबर मिल पाती है, तो कुछ का कभी पता नहीं चलता। स्याह कहानियों की सीरीज ‘ब्लैकबोर्ड’ में इस बार कहानी गायब हुई इन्हीं लड़कियों की… रीता की तरह ही प्रेमी संग भागी लगभग 14 साल की लड़की का कुछ पता नहीं है। वह इस समय अपने प्रेमी के घर नहीं है। मजदूरी मांगने गए दो लड़के रात में गायब हुए, जिनका आज तक पता नहीं लगा है। मैं रीता की कहानी जानने के लिए उनके घर मध्यप्रदेश के रायसेन पहुंचा। रीता इन दिनों रायसेन जिले के सोडरपुर गांव में अपने ससुराल में रह रही हैं। घर में उनके पति और दो बच्चे हैं। जब उनसे बात करने पहुंचा तो उनकी सास की तेरहवीं थी। घर पर उनकी मां, भाई और रिश्तेदार… सभी आए हुए थे। वह घर पर बातचीत करने में असहज होती हैं, लिहाजा मुझे बगल के चचेरे ससुर राधेश्याम विश्वकर्मा के घर लेकर जाती हैं। उनसे कुछ पूछता उससे पहले ही वो धीमी आवाज में कहने लगीं, ‘वहां हर दिन मेरा रेप होता था। घर वापस कैसे आई, मैं ही जानती हूं। भरोसा नहीं था कि वापस आ पाऊंगी। लग रहा था, अब तो घर मेरी लाश ही जाएगी। पता नहीं घर वालों को मेरी लाश भी नसीब होगी या नहीं। आज भी उन दिनों को याद करती हूं तो मेरी रूह कांप जाती है।' वह बताती हैं, ‘उन 10 दिनों में मेरा इतना बुरा हाल किया गया कि अब भी उस घटना को याद करती हूं, तो लगता है कि अच्छा होता कि मर गई होती। उन लोगों ने मुझे एक कमरे में बंद कर रखा था। कमरा इतना छोटा था कि पलंग के बगल में केवल पैर रखने की जगह बचती थी। उस वक्त मैं 16 साल की थी। जब होश आया, तो मैंने पूछा- मुझे यहां क्यों लाए हो? मुझे घर जाना है। मां-बाप इंतजार कर रहे होंगे। तभी एक 35-36 साल का आदमी आया और थप्पड़ मारते हुए बोला- अब तो तुम मेरी हो। यहां से कहीं नहीं जा सकती। मेरे साथ ही रहना होगा। चुपचाप खाना खाओ और सो जाओ। उसके हाथ में खाने की थाली थी। वह पलंग पर बैठ गया और जबर्दस्ती मुझे भी बिठाने लगा। उसने शराब पी रखी थी। बगल के कमरे में दो महिलाएं और दो मर्द आपस में बातचीत कर रहे थे- एक लाख रुपए में 16-17 साल की मोड़ी (लड़की) खरीदी है। कौन-ही इसे खोजने आएगा। जैसा चाहो, वैसे रखो। इधर, पलंग पर बैठे आदमी ने अचानक जोर से मेरी गर्दन पकड़ी और मेरे मुंह में रोटियां ठूसने लगा। मैं खाते-खाते ही बेहोश हो गई। सुबह उठी, तो शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। पूरे शरीर में दर्द हो रहा था। मैं पलंग के नीचे पड़ी थी। हाथ-पैर बंधे थे और चादर खून से लथपथ थी। आंख खुलते ही मैं चीखने लगी। तब उस आदमी ने मेरे हाथ-पैर में बंधी रस्सी खोली। मुझसे चला भी नहीं जा रहा था। मैं फूट-फूटकर रोने लगी। अगले 10 दिनों तक वो आदमी हर रोज शराब पीकर आता। मेरे हाथ-पैर बांधकर गलत काम करता था। मेरा रेप करता था। मैं बेहोश हो जाती थी। बेहोश होने के बाद जानवर की तरह वह आदमी मुझे रात में बांध देता था।’ रीता के दोनों पैर काले पड़ गए थे। मेरी नजर उन पर पड़ी, तो कहने लगीं, ‘ये उसी रस्सी के निशान हैं। 11वें दिन वह आदमी बहुत शराब पी कर आया। उस दिन मैंने उसकी जेब से अपना मोबाइल निकाल लिया। चुपके से अपने घर वालों को फोन किया। तब जाकर उन्हें पता चला कि मैं कहां हूं? उधर, मेरे घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल था। मां हर रोज थाने का चक्कर लगा रही थीं। थानेदार मुझे खोजने के बदले मां से कहता- कहीं चली गई होगी। आ जाएगी, दो-चार दिन में। तब तक मेरे अपहरण की बात चारों तरफ फैल गई थी। लोगों को पता चल गया था कि मेरे एक रिश्तेदार ने गांव के दो लोगों के साथ मिलकर एक लाख रुपए में मुझे बेच दिया है। उसके बाद मां, पापा के साथ कुछ लोग मुझे खोजते-खोजते सागर आ गए। शाम का वक्त रहा होगा। जिन लोगों ने मुझे खरीदा था, वे लाठी-डंडे लेकर घर के बाहर खड़े हो गए। जोर-जोर से चीख रहे थे- तुम्हारी बेटी को पैसे देकर खरीदा है हमने। दम है, तो वापस ले जाओ। तब तक लोकल पुलिस भी वहां आ गई। जैसे ही मौका मिला मैं अपनी मां के साथ वहां से निकल गई। रायसेन जाने वाली बस में बैठ गई। उन लोगों ने 10 किलोमीटर तक बस का पीछा भी किया। जब अपने गांव आई, तो जिन लोगों ने मुझे बेचा था, उन लोगों ने मेरी मां को मारना शुरू कर दिया। मैं तुरंत भागते हुए थाने गई। फिर FIR दर्ज हुई, लेकिन आज तक उस केस में कुछ नहीं हुआ। तीन साल बीतने के बाद भी केस खोला नहीं गया है।’ यह बातचीत चल ही रही थी कि रीता के पति और मां उन्हें बुलाने आ जाते हैं। जाते-जाते रीता कहती हैं, ‘मेरी तो शादी भी नहीं हो रही थी। 2022 में मां-पापा कई रिश्ते देखने गए। जैसे ही उन्हें पता चलता कि मुझे ही 1 लाख रुपए में बेचा गया था। वे रिश्ते से मना कर देते। कहते- 10 दिन पराए के घर में रहकर आई है। पता नहीं कितने लोगों ने संबंध बनाए होंगे। ऐसी लड़की से हम शादी नहीं करेंगे। काफी मुश्किल से मेरा रिश्ता हुआ। मां ने मेरे ससुराल वालों से जब शादी की बात रखी तो उन्होंने हां कर दी। साल 2022 में मेरी शादी हुई। अब दो बच्चे हैं। शादी के कई महीने बाद भी लगता था कि काश! उस रोज मर गई होती। कई बार आत्महत्या भी करना चाहती थी, लेकिन मां-भाई का मुंह देखकर रुक जाती थी। सोचती थी कि उन्होंने मुझे खेत में मेहनत-मजदूरी करके पाला-पोसा है। मर गई, तो उनका क्या होगा।’ रीता से मिलने के बाद मैं उसी जिले के सोडरपुर गांव से जमुनिया होते हुए उदयपुरा गांव की ओर निकला। रास्ते में गुलाब सिंह बंसल का घर आता है। उनकी चार बेटियां हैं। सबसे छोटी बेटी पूजा आज से पांच साल पहले 2020 में घर से गायब हो गई थी। कुछ महीने पहले ही गुलाब सिंह को लकवा मार गया है। अब उनका हर दिन खाट पर ही गुजर रहा है। बच्ची के बारे में पूछते ही उनकी पत्नी मुन्नी बाई रोने लगती हैं। कहती हैं, ‘मेरी मोड़ी (बेटी) जिंदा है या मर गई। क्या किया उन लोगों ने, कुछ पता नहीं। 2020 की बात है। मैं खेत में काम करने गई थी। पूजा उस समय 9वीं क्लास में पढ़ती थी। हर रोज की तरह उस दिन भी स्कूल गई थी। शाम को मैं जब वापस घर आई, तो वह स्कूल से नहीं लौटी थी। स्कूल जाकर पता किया तो वहां भी नहीं थी। मुझे लगा किसी सहेली के घर गई होगी, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। तब मैं थाने में शिकायत करने पहुंची।’ यह कहते हुए मुन्नी बाई पूजा की बैंक पासबुक ले आईं। इसी में उसकी पासपोर्ट साइज फोटो लगी हुई है। मुन्नी बाई के पास अपनी बेटी की केवल यही फोटो है। बेटी की फोटो देखते ही वो रोने लगती हैं। आंचल से आंसू पोंछते हुए वह कहती हैं, ‘जब भी उसकी याद आती है, तो यही फोटो देख लेती हूं। इसके पहले भी वो एक बार गायब हुई थी। दरअसल, विदिशा के एक लड़के से उसकी दोस्ती थी। वो लड़का अक्सर हमारे घर के आस-पास आता था। तभी दोस्ती हुई होगी। एक दिन वो मेरी लड़की को भगाकर विदिशा ले गया। हमने पुलिस में शिकायत की। तब एक महीने बाद पुलिस उसे विदिशा से खोज कर लाई थी। वापस आने के दूसरे-तीसरे दिन ही वह फिर से शाम को भाग गई। उस दिन मैं बरामदे में खाना बना रही थी। उसने मुझसे कहा- मैं खेत से शौच करके आती हूं। आज तक नहीं लौटी। पुलिस वालों से मैंने फिर शिकायत की, तो उन्होंने मुझे गाली देते हुए भगा दिया। कहने लगे- तुम्हारी बेटी आशिकी के चक्कर में भागी है। फिर चली गई होगाी अपने प्रेमी के साथ। मुझे इस बात पर भरोसा नहीं होता। मैंने उसे लड़के के गांव में अपनी बेटी के बारे में पता करवाया। वो वहां नहीं है। पता नहीं, उस लड़के ने बेटी का क्या किया। कहीं बेच दिया होगा या मार दिया होगा। मैं तो सोचकर ही सुन्न हो जाती हूं। हर दिन उसके एक फोन का इंतजार रहता है। 5 साल बीत गए, लेकिन उसने कभी फोन नहीं किया। जिंदा रहती, तो वह जरूर फोन करती। वह लड़का तो गांव में ही रहता है। अब तो पता करके थक-हार गई हूं।’ मैं पूजा की फोटो मोबाइल में कैद करके उदयपुरा निकल पड़ता हूं। करीब 60 किलोमीटर दूर एक कस्बा आता है- धौलश्री। 2017 में यहां से दो बच्चे एक ही रात में गायब हो गए थे। आज तक उनकी कोई खबर नहीं है। यहां की सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता आर्या भी मेरे साथ होती हैं। वह मुझे उस गांव के एक मलखान परिवार के यहां लेकर जाती हैं। वहां पर रेवाराम धनक और मुल्लु धनक बातचीत के लिए आते हैं। इन दोनों के बच्चे गायब हैं। डरते हुए रेवाराम कहते हैं, ‘मेरे घर के पास ही रघुवंशी समाज के लोगों का घर है, जिनके यहां आखिरी बार मेरा मोड़ा (बेटा) गया था। अपने घर पर उसको लेकर खुलकर बोल नहीं सकता, न रो सकता हूं। इसीलिए बात करने के लिए आपको यहां बुलाया है।’ रेवाराम के बगल में उनकी पत्नी धनवंती देवी भी हैं। धनवंती का गला अपने बेटे सीताराम का नाम सुनते ही रूंध जाता है। वह कहती हैं, ‘15 जनवरी 2017 की बात है। मोढ़ा खेत में फसल पर दवा छिड़कर घर आया। बोला- माई, खाना दे दो। मजदूरी लेने के लिए रघुवंशी मालिक के यहां जाना है। मेरे घर के सामने ही मुल्लु धनक का भी घर है। उनका पोता प्रमोद भी मेरे बेटे के साथ ही खेत से आया था। दोनों ने खाना खाया। तब तक रात के 9 बज चुके थे। घर के पास के ही चबूतरे के पास दोनों मोबाइल पर कुछ देख रहे थे। कुछ देर बाद वे रघुवंशी के यहां पैसे मांगने गए। उधर, जब मैं घर से बाहर निकली, तो देखा- कई गाड़ियां रोड पर खड़ी थीं। मुझे लगा रघुवंशी बड़ा जमींदार है, कोई उसके घर आया होगा, लेकिन उस रात के बाद मेरा बेटा कभी वापस नहीं लौटा। लगभग 2 घंटे बाद जब हमने उसके मोबाइल पर फोन किया, तो बंद था। हालांकि उस दिन मुझे लगा कि किसी दोस्त के यहां चला गया होगा। सुबह हुई, तब भी वह नहीं आया। फिर मैंने अपने पति से कहा- मोढ़ा कल रात गया था, अभी तक नहीं लौटा है। वह पता करने रघुवंशी के घर पहुंचे। उस दिन रघुवंशी बोला- मेरे घर से वह रात में ही मजदूरी लेकर चला गया था, मुझे नहीं पता वो कहां है। उन्होंने मेरे पति को गाली देते हुए भगा दिया। उसके बाद से हम थानों का चक्कर लगाने लगे। घर में लड़के की जितनी फोटो थी, सभी इश्तेहार के लिए दे दिया, लेकिन आज तक उसकी कोई खबर नहीं लगी।’ बेटे की कोई तस्वीर? वे दोनों मुझे अपने घर लेकर चलते हैं। धनवंती एक पॉलिथिन में मौजूद कुछ कागजों के बीच से एक फोटो निकालकर दिखाती हैं। यह सरस्वती पूजा के दौरान मौजूद उनके बेटे की तस्वीर है। उस वक्त सीताराम की उम्र 14 साल थी। फोटो की धूल पोंछते हुए धनवंती कहती हैं, ‘हर दिन आस लगती रहती है कि बेटा अब आएगा। वह दो बेटों में सबसे छोटा था। पता नहीं कहां चला गया।’ धनवंती के पड़ोसी मुल्लू धनक भी अपने पोते की पासपोर्ट साइज फोटो लेकर आते हैं। कहते हैं, ‘एक ही पोता था। उसके गायब होने के बाद से ही मेरे बेटे ने गांव छोड़ दिया। कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते हुए हमारा तो सब कुछ बिक चुका है। एक तारीख के 5 हजार रुपए खर्च होते हैं। पूरे मध्य प्रदेश में जिसने जहां भी जाने को कहा, जाकर हमने खोजा, लेकिन दोनों लड़कों का कुछ पता नहीं चला। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि दोनों की बलि दे दी गई होगी। किसी ने कहा कि रघुवंशी अपनी फसल में दवा छिड़कवाने के लिए किसी दूसरे प्रदेश में लेकर चले गए होंगे। पता नहीं हमारा बेटा कैसा होगा।’ सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता इन बच्चे-बच्चियों के गायब होने के बारे में बताती हैं, ‘कुछ लड़कियां तो प्रेम प्रसंग में गायब हो जाती हैं। कुछ को शादी के लिए अगवा कर लिया जाता है। उसके बाद दलाल उन्हें दूसरे राज्यों में बेच देते हैं। ये सभी लड़कियां गरीब परिवार की होती हैं। कई बार इन इलाकों में हरियाणा-पंजाब के लड़के फसल कटाई के लिए आते हैं। वे इन लड़कियों को राजश्री गुटखा देकर फंसाते हैं। लड़कियां उसकी लालच में उनके साथ चली जाती हैं। बाद में वे लड़के उन्हें कहीं बेच देते हैं। यही लड़कों के साथ भी होता है। कम उम्र के गरीब परिवार के लड़कों को खरीदकर उनसे बंधुआ मजदूरी कराई जाती है। असली वजह गरीबी और अशिक्षा है।’ (स्टोरी में रीता बदला हुआ नाम है) -------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड- साहूकारों ने कंबोडिया ले जाकर किडनी बेच दी:1 लाख का कर्ज 74 लाख हुआ, घाव देख बच्चे पूछते हैं- पापा ने किडनी क्यों बेची ‘तुम्हें 8 लाख रुपए का कर्ज लिए हुए दो साल हो चुके हैं। कब तक लौटाओगे? तुम्हारे पास न अब जमीन बची है, न जायदाद। ट्रैक्टर, गाड़ी- सब बिक गए। अब क्या बेचकर पैसे दोगे? तुम ह%$#मी सिर्फ कर्ज लेना जानते हो, देना नहीं। जब चुकाने की औकात नहीं थी, तो लिया क्यों? अब इस घर को बेचकर पैसे चुकाओ। नहीं तो…’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-पापा को फांसी दिलाकर आत्महत्या कर लूंगी:कहते थे ब्राह्मण होकर नीच से शादी कैसे की, गोली मारकर बोले- अब मैं बहुत खुश हूं हम दोनों की लव मैरिज को तीन महीने बीत चुके थे। लग रहा था कि अब घर वाले शांत हो गए हैं और हमारी जिंदगी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं रह गया है, लेकिन 5 अगस्त 2025 की शाम, करीब 5 बजे, सब कुछ बदल गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को बड़ी धमकी दी है. उन्होंने ट्रूथ पर कहा कि अगर ईरान बातचीत के मेज पर नहीं आता है, तो इसबार और भी बड़ा हमला किया जाएगा. हालांकि, ईरान की ओर से कहा गया है कि धमकियों के बीच बातचीत का माहौल नहीं बन सकता.
एक बटन, तबाही तय! इस देश के पास है दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल, जानें खासियत
World Most Powerful Missile: जब देशों के बीच युद्ध होता है तो मिसाइल सिस्टम निर्णायक भूमिका में होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे घातक मिसाइल कौन-सी है और ये किस देश के पास है. चलिए दुनिया की सबसे घातक मिसाइल के बारे में जानते हैं
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसी हफ्ते दक्षिण कोरिया पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी थी. हालांकि अब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका प्रशासन दक्षिण कोरिया के साथ टैरिफ के मुद्दे पर 'कुछ' समाधान निकालेगा.
‘जब प्लेन नीचे आ रहा था, तो 100 फीट ऊपर से ही लगने लगा कि ये क्रैश हो जाएगा।’ ‘अजित पवार का प्लेन लैंडिंग से पहले करीब 35 मिनट तक हवा में घूमता रहा था।’ ‘अजित पवार का प्लेन रनवे के करीब आकर वापस हवा में गया और चक्कर खाकर वापस गिर गया’ महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट के पास मौजूद प्रत्यक्षदर्शी ये बातें बता रहे हैं। इसी क्रैश में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पावर की 5 लोगों के साथ मौत हो गई। पवार ने सुबह 8 बजे मिड साइज बिजनेस चार्टर्ड जेट Learjet-45 में मुंबई से उड़ान भरी थी। अजित पवार का प्लेन क्रैश कैसे हुआ, संभावित वजहें कौन-सी हो सकती हैं और इस तरह के क्रैश में पहले किन नेताओं की जान गई; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… किस प्लेन में सफर कर रहे थे अजित पवार? प्लेन क्रैश कैसे हुआ होगा? प्लेन क्रैश होने के पीछे क्या वजह हो सकती हैं? DGCA के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, अब इस हादसे की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में विमान के मलबे के फैलाव, दिशा, गति और टकराव के असर का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए पूरे क्रैश साइट की फोटोग्राफी और टेक्निकल एनालिसिस किया जा रहा है। हालाकि पहली नजर में प्लेन क्रैश की 4 संभावित वजहें हो सकती हैं... 1. इंजन या कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी समस्या 2. पायलट एरर 3. हवा की गति और खराब मौसम 4. रनवे में खराबी प्लेन क्रैश में पहले भी किन नेताओं की मौत हुई? गुजरात के सीएम बलवंतरी मेहता: 1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू होने से पहले भुज सीमा के पास गुजरात के सीएम बलवंतरी मेहता का एयरक्राफ्ट पाकिस्तान ने मार गिराया था। सीएम सहित 7 लोगों की हादसे में मौत हो गई थी। संजय गांधी: इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी एक नेता और पायलट थे। 1980 में दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट के पास एक छोटा विमान उड़ाते समय उनका प्लेन क्रैश हो गया, जिसमें संजय की जान चली गई। माधवराव सिंधिया: सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। 2001 में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में उनका निजी विमान क्रैश हो गया था। उनके साथ 4 पत्रकारों की भी मौत हुई थी। जी.एम.सी. बालयोगी: 2002 में जब तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बालयोगी की आंध्र प्रदेश में हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हुई। दोर्जी खांढू: 2011 में अरूणाचल के मुख्यमंत्री दोर्जी खांढू अपने जेट से ईटानगर जा रहे थे। 13,000 फीट की ऊंचाई पर उनके विमान से संपर्क टूट गया। 5 दिन बाद उनका शव और हेलीकॉप्टर के पार्ट बरामद हुए। विजय रूपाणी: 12 जून 2025 को अहमदाबाद में एयर इंडिया का प्लेन क्रैश हुआ था। इसमें 260 लोगों की मौत हुई थी। इनमें गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी भी शामिल थे।
Senator Warner on India-America relations: सीनेटर वार्नर ने कहा कि अमेरिका-भारत संबंध तनावपूर्ण हैं और व्यापारिक विवाद, टैरिफ तथा विश्वास की कमी रिश्तों को कमजोर कर रही है. उन्होंने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान-भारत हालिया तनाव अमेरिका की बजाय दोनों देशों की बातचीत से सुलझा था.
Missile explosions in japan sea: उत्तर कोरिया ने समुद्र की ओर मिसाइलें दागकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है, जबकि दक्षिण कोरिया और जापान ने इसकी पुष्टि की है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम पार्टी कांग्रेस से पहले अपनी सैन्य ताकत दिखाने और कड़ा संदेश देने के लिए उठाया गया है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की और मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील की है. अमेरिकी धमकियों को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बताया है. IRGC ने पड़ोसियों को चेताया है किकिसी तरह उनकी जमीन का उपयोग अमेरिका या कोई भी जंग के लिए न करे.
President Trump roared in Iowa rally: डोनाल्ड ट्रंप ने आयोवा रैली में एक बार फिर 2020 चुनाव को धांधली वाला बताते हुए समर्थकों में जोश भरा और दोबारा राष्ट्रपति पद की दावेदारी के संकेत दिए हैं. आने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले उनके बयानों और सक्रिय प्रचार से अमेरिकी राजनीति में हलचल और तेज होने की उम्मीद है.
नाम भले ही हो नूरी, मादुरो की तरह ट्रंप को लेकिन ये इराकी नेता भी नहीं पसंद; वजह जानकर चौंक जाएंगे
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इराक को बड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर अगर नूरी अल-मलिकी सत्ता में वापस आते हैं तो अमेरिका इराक को सपोर्ट नहीं करेगा.
Trump announces armada heading towards Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर एक नई अमेरिकी “आर्माडा” भेजने का ऐलान किया है. इसमें अत्याधुनिक विध्वंसक युद्धपोत और लड़ाकू विमान शामिल हैं. ट्रंप ने दबाव के साथ बातचीत की उम्मीद जताई है. इस कदम से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है और ईरान के सामने जंग या समझौते का विकल्प रह गया है.
Texas Freezes H1b Visa: अमेरिका के टेक्सास राज्य में विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा झटका लगा है. गवर्नर ग्रेग एबॉट ने सभी राज्य एजेंसियों और सरकारी यूनिवर्सिटीज को नए H-1B वीजा पर भर्ती रोकने का आदेश दे दिया है. यह रोक 31 मई 2027 तक लागू रहेगी. इस फैसले का सीधा असर हजारों विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीयों पर पड़ सकता है.
थाईलैंड के घने जंगली इलाके माईसोट के रास्ते इंटरनेशनल बॉर्डर क्रॉस करने पर म्यांमार का शहर आता है, म्यावड्डी। ये कोई आम शहर नहीं है, कई देशों की पुलिस, इंटरपोल और अमेरिका की खुफिया एजेंसी FBI ने इसे खतरनाक शहरों की लिस्ट में डाला हुआ है। इस शहर की किसी बिल्डिंग में पहुंच गए, तो बिना पैसा दिए रिहाई नामुमकिन है। म्यावड्डी फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले गैंग्स का अड्डा है। शहर में घुसते ही 20-20 फीट कंटीले तारों से घिरी इमारतें हैं, जहां अंदर जाना तो मुमकिन है, लेकिन बाहर सिर्फ गैंग की मर्जी से आ सकते हैं। हैदराबाद के उस्मान नगर की रहने वाली नाजिया अली पिछले 12 दिन से बेटे सज्जाद की आवाज सुनने को तरस गई हैं। नाजिया बताती हैं, ‘15 जनवरी को उसका कॉल आया, उसने धीमी आवाज में कहा- अम्मी मुझे किडनैप कर लिया है। मुझे नहीं पता मैं कहां हूं, थाईलैंड या म्यांमार है। मुझे एक बंद कमरे में रखा है। यहां हैदराबाद के दो और लोग हैं। दूसरे भारतीय लड़के-लड़कियां भी हैं। हमसे 18-18 घंटे काम करवाते हैं। मना करो तो डंडे और लोहे की रॉड से पीटते हैं। अम्मी ये मेरा आखिरी कॉल है...प्लीज मुझे बचा लो।' 23 साल के मीर सज्जाद अली उन 16 भारतीय युवाओं में शामिल हैं, जो हाई-प्रोफाइल नौकरी के वादे पर पिछले साल बैंकॉक गए थे। अब ये भी दूसरे हजारों लोगों की तरह म्यावड्डी में बंद हैं। दैनिक भास्कर ने इन युवाओं के परिवारों से बात की। बातचीत में सामने आया कि थाईलैंड-म्यांमार बॉर्डर पर नौकरी का ऑफर देने के बहाने चल रहा ये नेटवर्क असल में एक टारगेटेड किडनैपिंग रैकेट है। ये बीते 3 साल में भारत के 500 से ज्यादा युवाओं को शिकार बना चुका है। इसके टारगेट पर चीन, नेपाल, श्रीलंका और वियतनाम जैसे एशियाई देशों के युवा भी हैं। एक लाख रुपए सैलरी और लग्जरी विला में रहने का ऑफरउस्मान नगर मोहल्ला हैदराबाद सिटी के बीचोंबीच है। सज्जाद यहीं पर मां नाजिया अली के साथ रहते थे। पिता मीर अली कुवैत सिटी में काम करते हैं। परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं इसीलिए सज्जाद कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़कर पार्ट-टाइम काम करने लगे। बीच-बीच में वो ऑनलाइन नौकरियां भी खोज रहे थे। हमें घर पर सज्जाद के चचेरे भाई मेहदी अली मिले। उन्होंने ही आखिरी बार सज्जाद की मां नाजिया से फोन पर उसकी बात करवाई थी। मेहदी कहते हैं, ‘थाईलैंड जाने से पहले सज्जाद ने नौकरी के बारे में बताया था। उसे इंस्टाग्राम के जरिए इस जॉब के बारे में पता चला था।‘ ‘अप्लाई करने के बाद उसे कंपनी की तरफ से वीडियो कॉल आया। वहां के अधिकारियों ने उसे खूबसूरत विला दिखाया, जिसमें स्विमिंग पूल और कई सुविधाएं थीं। उसे बताया गया कि यही उसका वर्किंग एरिया है। कंपनी वाले एक लाख रुपए मंथली सैलरी दे रहे थे।‘ ‘शर्त बस यही थी कि उसे जल्द से जल्द बैंकॉक आना होगा, नहीं तो इस पोस्ट पर किसी और को रख लिया जाएगा। सज्जाद ने अम्मी-अब्बू को नौकरी के बारे में नहीं बताया। बस इतना कहा कि कुछ दिन के लिए वो छुट्टी पर बाहर घूमने जा रहा है। बैंकॉक पहुंचने के बाद उसने मां को फोन कर बताया कि उसे वहीं एक कॉल सेंटर में नौकरी मिल गई है।‘ 15 जनवरी को आखिरी कॉल आई, बोला- मैं फंस गया हूं सज्जाद की मां नाजिया बताती हैं, ‘मैं बहुत खुश थी कि बेटे की विदेश में नौकरी लगी है। उसने बताया था कि बैंकॉक के एक नामचीन कॉल सेंटर में डिजिटल सेल्स एग्जीक्यूटिव की जॉब है। रहने के लिए स्विमिंग पूल वाला लग्जरी विला मिला है। दिन में 6-8 घंटे काम और हर महीने 1 लाख रुपए सैलरी मिलेगी।‘ ‘पिछले साल जुलाई में मोहर्रम के बाद सज्जाद हैदराबाद से बैंकॉक गया था, उसके बाद से नहीं लौटा। मैंने उसे लौटने के लिए बहुत मनाया, लेकिन उसने मना कर दिया। वो वीडियो कॉल करके अपना ऑफिस दिखाता, कहता कि यहां सब ठीक है। मैं जल्द घर आऊंगा। नवंबर के बाद से उसने कॉल करना भी कम कर दिया।‘ ‘दिसंबर में एक बार उसका फोन आया, लेकिन उसके बाद कोई बात नहीं हुई। 15 जनवरी को आखिरी बार सज्जाद का फोन आया। वो घबराया हुआ था, उसने बताया कि उसकी आंख पर पट्टी बांधकर उसे थाईलैंड से बाहर एक बड़े से हॉल में कैद कर दिया गया है।’ नाजिया के मुताबिक, सज्जाद डर के कारण बहुत धीमी आवाज में बात कर रहा था। उसने बताया कि जिस जगह उसे कैद किया गया है, वहां भारत के 16 और लोग बंधक हैं। किडनैपर 18-18 घंटे काम करवाते हैं। मना करने पर कपड़े उतारकर वीडियो बनाते हैं, शरीर पर बिजली का करंट लगाते हैं। लोहे की रॉड और डंडों से मारते हैं। म्यांमार में 16 भारतीय बंधक बनाए गए, लेकिन मदद नहीं मिलीसज्जाद के परिवार का हर दिन तनाव में बीत रहा है। पिता कुवैत में हैं, ऐसे में मां नाजिया ने विदेश मंत्रालय और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी से मिलकर बेटे की सुरक्षित वापसी की गुजारिश की है। मामले की गंभीरता को देखते असदुद्दीन ओवैसी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की है। उन्होंने 'X' पर म्यांमार में फंसे 16 भारतीयों की वापसी के लिए विदेश मंत्रालय से मदद की अपील की है। सज्जाद के साथ अरशद और समीर भी फंसेसज्जाद के साथ हैदराबाद की बंजारा हिल्स के अरशद और समीर खान भी म्यांमार में कैद हैं। समीर हैदराबाद में एक IT कंपनी में काम करते थे। पिछले साल उन्हें म्यांमार में अच्छी नौकरी का ऑफर मिला था। जॉइनिंग के लिए गए और वहीं फंस गए। समीर का घर मौला अली इलाके में है। यहां हमें उनकी मां उनीसा मिलीं। वो बेटे की सलामती के लिए फिक्रमंद हैं। उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से मना कर दिया। हमने वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि किडनैपर्स ने धमकी दी है। अगर मीडिया या पुलिस से बात की तो वे समीर को मारेंगे-पीटेंगे। उनीसा ऑफ कैमरा बताती हैं, ‘म्यांमार में किडनैपर समीर से ऑनलाइन धोखाधड़ी का काम करवा रहे हैं। 24 घंटे बंदूक लिए लोग उसकी निगरानी करते हैं। उसे हर दिन नए-नए टास्क दिए जाते हैं। मना करने पर फिजिकल टॉर्चर किया जा रहा है। उसका पासपोर्ट और फोन तक जब्त कर लिया है। बड़ी मुश्किल से उसने किसी दूसरे के फोन से हमें अपना हाल बताया।' समीर के परिवार के मुताबिक, उसे थाईलैंड में 1500 डॉलर सैलरी पर नौकरी देने की बात कही गई थी, लेकिन बंधक बना लिया गया। परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं कि उसे छुड़वा सकें। समीर के लिए परेशान उनका परिवार नहीं चाहता है कि मीडिया में उसकी फोटो आए। हालांकि उसे छुड़ाने के लिए परिवार पुलिस और विदेश मंत्रालय से संपर्क कर रहा है। अब जानते हैं कि ये किडनैपिंग नेटवर्क कैसे ऑपरेट होता है… म्यावड्डी: नौकरी के नाम पर युवाओं को ‘साइबर स्लेव’ बनाने का अड्डा दैनिक भास्कर ने बंधक बनाए गए युवाओं के हालात जानने के लिए म्यांमार में इंडिया एम्बेसी से कॉन्टैक्ट किया। हमें कई भारतीयों के म्यांमार में बंधक बनाए जाने की जानकारी मिली। एम्बेसी के एक अफसर ने बताया कि लोगों की तलाश की जा रही है। हमने उनके परिवार से भी संपर्क किया है। युवाओं के डॉक्यूमेंट्स और जरूरी डिटेल मांगी गई है। उसी के आधार पर उन्हें खोजा जा रहा है। अफसर ने बताया कि बीते 3 साल में म्यांमार में भारतीयों को बंधक बनाए जाने के मामले बढ़े हैं। 2023 से अब तक 500 से ज्यादा भारतीय बंधक बनाए गए हैं। ये टारगेटेड किडनैपिंग गिरोह थाईलैंड-म्यांमार से सटे बॉर्डर वाले इलाकों में एक्टिव हैं। सबसे ज्यादा मामले म्यावड्डी इलाके के हैं, जहां नौकरी के नाम पर लोगों के साथ स्कैम होते रहे हैं। पिछले साल नवंबर में म्यावड्डी टाउन में बने कई कॉल सेंटरों से अलग-अलग देशों के करीब 370 लोगों को बचाया गया। इनमें 55 आंध्र प्रदेश के नागरिक थे, जिन्हें 3 उड़ानों के जरिए भारत भेजा गया। इनमें से एक विशाखापट्टनम के रहने वाले 30 साल के इमरान अंसारी (बदला हुआ नाम) हैं। इमरान फरवरी 2025 में म्यांमार गए थे और करीब 10 महीने वहां रहे। म्यांमार में फंसे IT इंजीनियर की आपबीती आंध्र प्रदेश के इमरान की तरह ही म्यांमार में 500 से ज्यादा भारतीय IT प्रोफेशनल्स गुलामों की तरह रखे गए हैं। इनमें करीब 15 से 20 लड़कियां भी शामिल हैं। इमरान के मुताबिक, थाईलैंड बॉर्डर से सटे म्यावड्डी टाउन में अलग-अलग देशों के 6 हजार से ज्यादा नौजवानों को 'साइबर स्लेव' बनाकर काम कराया जा रहा है। इनमें भारत के अलावा पाकिस्तान, चीन, नेपाल, श्रीलंका और मिडिल ईस्ट देशों के लोग हैं। म्यावड्डी इलाका बड़ी-बड़ी इमारतों से घिरा हुआ है। इन्हें कॉमर्शियल पार्क बोला जाता है। इन्हीं में अवैध कॉल सेंटर्स चलते हैं। यहां थाईलैंड के रास्ते बॉर्डर पार करवाकर लोगों को लाया जाता है। फिर उन्हें डेटिंग एप के जरिए कम उम्र के लोगों को फंसाने, साइबर फ्रॉड और जॉब स्कैम जैसे टास्क दिए जाते हैं। आप कैसे म्यांमार पहुंचे, कौन सी कंपनी में नौकरी लगी? इमरान कहते हैं, ‘म्यांमार जाने से पहले मैं विशाखापट्टनम में एक प्राइवेट IT कंपनी में काम करता था। दिसंबर 2024 में मुझे टेलीग्राम पर जॉब सीकर्स ग्रुप में यांग OKX ग्रुप के बारे में पता चला। ये कंपनी IT प्रोफेशनल्स को थाईलैंड और म्यांमार में अच्छे सैलरी पैकेज पर रख रही थी।‘ ‘टेलीग्राम पर ही ऑनलाइन लिंक के जरिए मैंने जॉब के लिए अप्लाई किया। 28 दिसंबर 2024 को इंटरव्यू के बाद मुझे हर महीने 1200 डॉलर के सैलरी पैकेज पर नौकरी मिली। 12 फरवरी 2025 को मैं 4 और लोगों के साथ थाईलैंड पहुंच गया।‘ इमरान आगे कहते हैं, ‘म्यावड्डी में 370 लोगों के साथ मैं करीब 10 महीने तक रहा। वहां मुझसे बेटिंग एप्स पर लोगों से ऑनलाइन फ्रॉड कराया गया। महिलाओं की फर्जी आईडी बनाकर डेटिंग एप्स का काम करवाया गया। टारगेट पूरा नहीं होता था, तो लोहे की जंजीरों से हाथ बांधकर डंडे से पीटा जाता था। कई दिनों तक भूखा रखते थे।’ ‘जब तक मैं कैद में था, कोई भी काम मर्जी से करने की इजाजत नहीं थी। हफ्ते में सिर्फ एक घंटे के लिए फोन दिया जाता था। उसी दौरान मैंने इंस्टाग्राम के जरिए अपनी बात घरवालों तक पहुंचाई।‘ ‘घरवालों ने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया, मीडिया में खबर फैल गई। पता चला कि मेरे जैसे आंध्र प्रदेश के 55 और लोग म्यांमार में बंधक हैं। हमारे केस में CM चंद्रबाबू नायडू ने PM नरेंद्र मोदी से बात की। PMO और म्यांमार आर्मी की मदद से आखिरकार 370 लोग 21 नवंबर, 2025 को आंध्रप्रदेश लौट आए।‘ जॉब-स्कैम सिंडिकेट के लिए म्यावड्डी सबसे मुफीद क्यों?इस सवाल के जवाब में भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी कहते हैं, ‘2019 में भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ था, ताकि मानव तस्करी के शिकार लोगों को बचाया जा सके। साथ ही ऐसे सिंडिकेट्स पर लगाम लगाई जा सके, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।‘ ‘2021 में थाईलैंड बॉर्डर से सटे इलाकों में म्यांमार की सैन्य सरकार का प्रभाव सीमित हो गया और यहां के लोकल थ्री ब्रदर्स गैंग और मिलिशिया मिलिटेंट ग्रुप्स जैसे उग्रवादी संगठन हावी हो गए। इससे भारत-म्यांमार के बीच हुआ समझौता बीच में ही अटक गया।‘ ‘बॉर्डर एरियाज में सेना के सीमित प्रभाव के कारण म्यावड्डी और आस-पास के इलाके ह्यूमन ट्रैफिकिंग के लिए बदनाम हो गए हैं। चीन की मदद से ऐसे सिंडिकेट्स फल-फूल रहे हैं।‘ ज्यादा सैलरी का लालच ऐसे सिंडिकेट्स का सबसे बड़ा हथियारथाईलैंड-म्यांमार सीमा पर एक्टिव फेक जॉब सिंडिकेट पर हमने साउथ एशियन (SAARC) यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ एक्सटर्नल रिलेशन्स के सीनियर प्रोफेसर डॉ. धनंजय त्रिपाठी से बात की। वो कहते हैं, ‘ज्यादा सैलरी का लालच ह्यूमन ट्रैफिकिंग का सबसे बड़ा हथियार है। थाईलैंड में फर्जी IT नौकरियों के नाम पर युवाओं को 2,000 से 5,000 डॉलर की सैलरी का सपना दिखाया जाता है, जबकि असल में ये तरीका उन्हें अगवा कर पैसा कमाने का जरिया बन चुका है।‘ 'वीजा ऑन अराइवल जैसी सुविधाओं का फायदा उठाकर साउथ एशियाई देशों के युवाओं को पहले थाईलैंड लाया जाता है, फिर थाईलैंड के जंगली इलाके माईसोट के रास्ते उन्हें अवैध रूप से म्यावड्डी पहुंचाया जाता है। वहां उनसे मनमाने तरीके से गलत काम करवाए जाते हैं।‘ '2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार में बेरोजगारी बढ़ी है। राजनीतिक अस्थिरता के कारण गैरकानूनी गिरोह मजबूत हुए, जो सीमा पार फर्जी जॉब नेटवर्क को पनपने का मौका दे रहे हैं।' 2021 से 2025 के बीच म्यांमार में फंसे 500 भारतीयों को छुड़ाया गयामार्च 2023 में हुए बिम्सटेक सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने म्यांमार के विदेश मंत्री एचई. यू थान स्वे से बात की। उन्होंने ह्यूमन और ड्रग्स की तस्करी जैसे मुद्दों पर जोर दिया। साथ ही भारतीय बंधकों की जल्द वतन वापसी के लिए मदद की अपील की थी। भारतीयों को म्यांमार में बंधक बनाए जाने का मुद्दा 2025 में लोकसभा में भी उठा। इस पर विदेश मंत्रालय ने जवाब देते हुए बताया कि भारतीय अधिकारी, बैंकॉक और म्यांमार में फंसे लोगों को बचाने और उन्हें भारत वापस लाने के लिए काम कर रहे हैं। 2021 से नवंबर 2025 के बीच करीब 500 लोगों को भारत वापस लाया गया है।....................ये खबर भी पढ़ें...‘हमें बचा लो, बांग्लादेश में मर जाएंगे‘ 'पुलिस ने हमें मारपीट कर जबरदस्ती बांग्लादेश भेज दिया। हमारे पास न खाने-पीने के लिए कुछ है और न रहने की जगह। हम बहुत तकलीफ में हैं, हमें यहां से निकाल लो वरना मर जाएंगे। हमें भारत लौटना है। बच्चे भी पास नहीं हैं।' 65 साल की अलकन बीबी बांग्लादेश से फोन कर रिश्तेदारों से मदद मांग रही हैं। पूरी खबर पढ़िए...
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की एक लीक हुई फोटो ने सोशल मीडिया पर बड़ी गंभीर चर्चा शुरू कर दी है. इस फोटो में नेतन्याहू, सिक्योरिटी को लेकर थोड़े से परेशान, लेकिन सजग दिख रहे हैं. उनकी ये तस्वीर कैसे पब्लिक डोमेन में आई.
Iran-America Cinflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही खटपट को लेकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह कभी भी जंग में बदल सकता है, हालांकि इसबार मिडिल ईस्ट ने ट्रंप से मुंह फेर लिया है.
जापान में एक महिला ने एक ही कंपनी में 65 साल एक ही नौकरी की. उसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है. बताया जाता है कि उसने साल 1956 में कंपनी को ज्वाइन किया था, उसके बाद से वह उसी कंपनी का हिस्सा रही.
संयुक्त अरब अमीरात के एक मशहूर उद्योगपति ने अपनी कंपनी के कर्मचारियों के लिए खास पहल की घोषणा की है. उनका कहना है कि जो भी कंपनी का कर्मचारी इस साल शादी करेगा उसको 12 लाख रुपये का शादी ग्रांट दिया जाएगा.
Homes Sale One Day 740 Crore:हॉन्ग कॉन्ग में लग्जरी घरों की खरीद-फरोख्त एक बार फिर तेज होती दिख रही है. सिर्फ एक ही दिन में करीब करीब 740 करोड़ रुपये के महंगे घर बिके हैं. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि खरीदार और निवेशक एक बार फिर प्रॉपर्टी मार्केट में लौट रहे हैं.
US Aircraft Carrier Middle East: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका का विशाल युद्धपोत USS Abraham Lincoln खुद को छिपाकर समुद्र में घूम रहा है. इस जहाज ने अपने ट्रैकर्स बंद कर दिए हैं. जिससे ईरान इसकी सही लोकेशन न जान सके. ईरान इसे ढूंढने के लिए सैटेलाइट और ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. वहीं अमेरिकी नौसेना रफ्तार, खामोशी और इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों के सहारे इसे सुरक्षित रखे हुए है.
Ebola Virus Mutation: चीनी वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस में एक ऐसे महत्वपूर्ण म्यूटेशन की पहचान की है. जिसने एक बड़े प्रकोप के दौरान वायरस की संक्रमण क्षमता को काफी बढ़ा दिया था. यह खोज महामारी निगरानी और दवा विकास के लिहाज से अहम मानी जा रही है.
Govt moves to merge Bida, Beza, Bepza, Mida: शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से ही बांग्लादेश में कोहराम मचा हुआ है. राजनीतिक उथल-पुथल, विरोध-प्रदर्शन, अर्थव्यवस्था पर दबाव और फरवरी में होने वाले चुनाव से पहले यूनुस की अंतरिम सरकार ने एकदम धमाकेदार फैसला लिया है.बीडा, बेजा-बेप्जा और मिडा जैसी सारी प्रमुख निवेश एजेंसियों को एक ही संस्था में मर्ज कर दिया है. आइए जानते हैं इसका क्या होगा असर.
Keir Starmer China trip:ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सख्त बयान देने के बाद अब चीन के दौरे पर जा रहे हैं. इस यात्रा को ब्रिटेन की बदली हुई विदेश नीति के तौर पर देखा जा रहा है. जिसके बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या इससे अमेरिका-ब्रिटेन रिश्तों में टकराव बढ़ेगा या चीन संतुलन साधेगा?
India Rejects Pakistan False Claims: भारत ने UN में पाकिस्तान के लगाए आरोपों का कड़ा जवाब दिया है. भारत ने साफ कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान जो बातें कह रहा है, वे झूठी और अपने फायदे के लिए गढ़ी जा रही हैं. भारत ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है. इस मुद्दे पर पाकिस्तान को बोलने का कोई हक नहीं है.
Lula da Silva confirms India visit: ब्राजील के राष्ट्रपति लुला फरवरी में भारत का दौरा करेंगे, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे. मोदी और लुला ने व्यापार, निवेश, रक्षा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है.
अमेरिका पर निर्भरता से परेशान ईयू, भारत बना नई उम्मीद
भारत और यूरोपीय यूनियन के लिए 27 जनवरी का दिन बेहद अहम और ऐतिहासिक माना जा रहा है। दरअसल, मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौता हो सकता है
भारत में किसी अज्ञात स्थान पर मौजूद बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने Zee नेटवर्क से एक्सक्लूसिव बातचीत की है. उन्होंने हिंदुओं पर हमले, अर्थव्यवस्था को नुकसान, भारत और बीएनपी के रिश्तों समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने यह भी बताया कि भारत पड़ोसी देश से क्या चाहता है?
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर चीन के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बधाई संदेश भेजा
बलूचिस्तान बना मौत की कोठरी: 1,200 से ज्यादा लोग जबरन गायब
मानवाधिकार समूह बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने बताया कि 2025 में 1,200 से ज्यादा लोगों को जबरदस्ती गायब किया गया और लगभग 200 एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हत्याएं दर्ज की गईं
भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आज मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA का ऐलान हो सकता है। इससे 200 करोड़ लोगों का साझा मार्केट तैयार होगा, जो दुनिया की 25% GDP कवर करेगा। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन दोनों ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा है। इसे डोनाल्ड ट्रम्प के अनाप-शनाप टैरिफ का जवाब माना जा रहा है। क्या है ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’, इस समझौते से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और क्या इससे ट्रम्प के टैरिफ की भरपाई हो पाएगी; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: भारत-EU के बीच होने वाली ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्या है? जवाबः जब दो या ज्यादा देश आपस में ये तय कर लेते हैं कि वे एक-दूसरे के सामान और सेवाओं पर टैक्स, पाबंदियां और रुकावटें कम या खत्म कर देंगे, तो उसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो FTA व्यापार का ‘टोल फ्री हाईवे’ है। बीते 4 साल में भारत 7 FTA साइन कर चुका है, जिसमें यूके, ओमान, न्यूजीलैंड शामिल हैं। अब 27 जनवरी को यूरोपियन यूनियन के साथ भी FTA की घोषणा हो सकती है। भारत-EU के बीच होने वाली ट्रेड डील 3 बड़ी वजहों से ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कही जा रही है… लंदन के इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की सीनियर एनालिस्ट सुमेधा दासगुप्ता के मुताबिक, ‘मौजूदा हालातों की वजह से व्यापार डगमगा रहा है। ऐसे में भारत और EU को भरोसेमंद ट्रेड पार्टनर की जरूरत है। भारत अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करना चाहता है। जबकि EU चीन पर निर्भरता घटाना चाहता है, जिसे वह भरोसेमंद नहीं मानता।’ सवाल-2: भारत और EU इस डील पर साइन करने के लिए कैसे राजी हुए? जवाब: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ट्रेड डील को लेकर जून 2007 में बातचीत शुरू हुई। तब इसे व्यापक व्यापार और निवेश समझौता यानी BTIA कहा गया। तब भारत की तरफ से इसकी अगुवाई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कर रहे थे। 15 दौर की बैठक हुई, लेकिन 2013 में BTIA की बातचीत पूरी तरह थम गई। EU चाहता था कि उसके 95% से ज्यादा एक्सपोर्ट पर टैरिफ खत्म किया जाए, जबकि भारत सिर्फ 90% तक ही तैयार था। इसके अलावा इन 5 बड़ी वजहों से भी डील ठंडे बस्ते में चली गई… जून-जुलाई 2022 में भारत-EU के बीच FTA की बात दोबारा शुरू हुई। तब से लेकर अक्टूबर 2025 तक दोनों पक्षों के अधिकारियों ने 14 मीटिंग्स की। इन बैठकों में 2007 से 2013 तक तय हुए मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ये तय हुआ कि… भारत के कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने पिछले हफ्ते बताया कि भारत और EU के बीच डील के 24 में से 20 चैप्टरों पर बात पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट्स हैं कि 27 जनवरी को दिल्ली में होने वाले 16वीं भारत-यूरोपीय यूनियन समिट दोनों पक्ष FTA साइन कर सकते हैं। सवाल-3: इस समझौते से भारत को क्या फायदा होगा? जवाब: भारत ने 2025 में EU देशों को 6.8 लाख करोड़ रुपए का सामान बेचा। वहीं EU से 5.5 लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदा। भारत-EU की ट्रेड डील से भारत के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा… यूरोप में भारतीय कपड़े ज्यादा बिकेंगे भारत में लग सकती हैं यूरोप की डिफेंस फैक्ट्रियां 20% बढ़ सकता है फार्मा और केमिकल ट्रेड कार्बन टैक्स से राहत की उम्मीद इसके अलावा भारत के लोगों को यूरोपियन शराब, यूरोपियन कारें और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे, क्योंकि इन पर लगने वाले प्रीमियम टैरिफ कम हो जाएगा। सवाल-4: इस समझौते से यूरोपियन देशों को क्या फायदा होगा? जवाब: भारत-EU की ट्रेड डील से यूरोपियन यूनियन के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा… भारत में यूरोपीय शराब और वाइन की खपत बढ़ेगी भारत में यूरोपीय कारों की डिमांड बढ़ेगी इसके अलावा यूरोप के आईटी, इंजीनियरिंग, बिजनेस सर्विसेज और टेलीकॉम जैसे हाई-वैल्यू सर्विस सेक्टर को भी भारत में ज्यादा मौके मिलेंगे। क्योंकि इन सेक्टर में दूसरे देशों के मुकाबले टैरिफ कम लगेगा। सवाल-5: क्या भारत-EU की ट्रेड डील ट्रम्प के टैरिफ का जवाब बनेगी? जवाब: ट्रम्प ने भारत के सामानों पर फिलहाल 50% टैरिफ लगा रखा है, जो उनके सत्ता में आने से पहले 10% से भी कम था। इससे भारत के एक्सपोर्ट पर बेहद नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, नवंबर 2025 में भारत का वस्तु निर्यात करीब 3 लाख करोड़ रूपए रहा। ये साल 2024 से 11% कम था। सिर्फ अमेरिका को जाने वाले निर्यात में 28.5% की कमी आई। मई 2025 में भारत ने अमेरिका को लगभग 80 हजार करोड़ का निर्यात किया था। अक्टूबर में ये घटकर 56 हजार करोड़ रूपए रह गया। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को होने वाला निर्यात साल 2024–2025 के 86.5 अरब डॉलर से घटकर 2025–2026 में करीब 50 अरब डॉलर रह सकता है। यानी भारतीय घरेलू बाजार को 3 लाख करोड़ रूपए का नुकसान होगा। सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल, ज्वेलरी, झींगा (श्रिंप) और कालीन जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा। द हिंदू के मुताबिक, इन सेक्टरों में निर्यात के करीब 70% तक गिरने की आशंका है, इससे लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। अमेरिका को होने वाले इस निर्यात पर बढ़े टैरिफ का असर जमीन पर दिखने लगा है। सूरत जैसे प्रमुख हब से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक हीरों के उत्पादन में कटौती शुरू हो चुकी है। सूरत की हीरा पॉलिशिंग इंडस्ट्री 12 लाख लोगों को रोजगार देती है। अर्थशास्त्री शरद कोहली कहते हैं ट्रेड डील के तहत कम से कम 90% चीजों पर टैरिफ जीरो हो जाएगा। इससे भारतीय सामान चीन जितना सस्ता हो सकता है और यूरोप में इसकी डिमांड भी बढ़ेगी। ट्रंप के टैरिफ की वजह से भारत को हीरों और जेम्स में जो नुकसान हुआ है, यहां से उसकी भरपाई हो सकती है। हालांकि, पूरी भरपाई के बारे में कहना संभव नहीं है। लेकिन 3 से 4 सालों में EU–भारत के बीच का व्यापार करीब 22 लाख करोड़ तक जा सकता है। सवाल-6: भारत-EU ट्रेड डील अमेरिका के लिए कैसे मुश्किलें पैदा करेगा? जवाबः EU और भारत के करीब आने से अमेरिका के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं… अंतरराष्ट्रीय मामलों में JNU के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह के मुताबिक, ‘ट्रंप के टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने से अमेरिका के रणनीतिक साझेदारों को पुरानी व्यापारिक व्यवस्थाओं के विकल्प तलाशने पर मजबूर होना पड़ा है। इससे भारत-EU के बीच FTA महज आर्थिक मजबूरी का नतीजा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक फैसला बन जाता है, जहां दो लोकतांत्रिक साझेदार वैश्विक आर्थिक ढांचे को नया आकार दे रहे हैं।’ यूरोप और अमेरिका पारंपरिक मित्र रहे हैं। ये रिश्ते 100 साल से ज्यादा पुराने हैं। लेकिन कुछ वक्त से अमेरिकी टैरिफ और ग्रीनलैंड को लेकर रिश्ते बिगड़े हैं। वहीं, भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए गए हैं। स्वर्ण सिंह कहते हैं, ‘इन घटनाओं ने EU को NATO से इतर साझेदारियां तलाशने की इच्छा को और मजबूत किया है। इसलिए EU–India FTA केवल आर्थिक कूटनीति तक सीमित न रहकर, अमेरिका के खिलाफ EU के लिए एक जियो-पॉलिटिकल इंश्योरेंस के रूप में सामने आता है।’ ----------------- भारत-EU से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... यूरोपीय यूनियन ने भारत से रक्षा समझौते को मंजूरी दी: EU बोला- आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में मदद मिलेगी यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते (सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट) को मंजूरी दे दी है। अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस पर साइन होंगे। पूरी खबर पढ़ें...
बिहार के मोतिहारी जिले का कैथवलिया गांव इन दिनों चर्चा में है। दरअसल, यहां अयोध्या के राम मंदिर से भी ऊंचा ‘विराट रामायण मंदिर’ बन रहा है। मंदिर में दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित किया जा चुका है। इस शिवलिंग की ऊंचाई 56 फीट है। दैनिक भास्कर रिपोर्टर नीरज झा मंदिर की भव्यता को रिपोर्ट करने कैथवलिया गांव पहुंचे। प्रोजेक्ट अधिकारियों से बातचीत के आधार पर नीरज बताते हैं कि विराट रामायण मंदिर 270 फीट ऊंचा होगा, जबकि अयोध्या का राम मंदिर 161 फीट ऊंचा है। वहीं, विराट रामायण मंदिर का परिसर 120 एकड़ है, जबकि अयोध्या का राम मंदिर 70 एकड़ में फैला है। इस लिहाज से यह मंदिर अयोध्या के राम मंदिर का 1.7 गुना होगा। इसको बनाने में करीब 1,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। मंदिर का प्लेटफॉर्म यानी बेस बन चुका है। शिलान्यास के बाद से आसपास के इलाकों में जमीन की कीमतें 100 गुना तक बढ़ चुकी हैं। इस मंदिर को पटना का महावीर मंदिर न्यास बोर्ड बनवा रहा है। बोर्ड के सुपरिंटेंडेंट सायन कुणाल बताते हैं कि 17 जनवरी 2026 को स्थापित शिवलिंग की पूजा साल 2027 से शुरू होगी। मंदिर में वाल्मीकि, विश्वामित्र, दशरथ जैसे रामायण के 22 प्रमुख पात्रों की भव्य मूर्तियां भी लगेंगी। इसे बनाने के लिए RO का पानी, करीब 3 लाख क्विंटल सरिया और राजस्थान के लाल पत्थर का इस्तेमाल हो रहा है। विराट रामायण मंदिर से जुड़ी सभी अहम जानकारियां 11 स्लाइड्स में देखिए। टेंपल सुपरिंटेंडेंट के. सुधाकरण बताते हैं, 'कुणाल किशोर का ये ड्रीम प्रोजेक्ट है। उन्हीं की ख्वाहिश थी कि इसमें गुरुकुल की तरह एक रामायण यूनिवर्सिटी भी खोली जाए। बाद में इसमें इस्कान मंदिर की तरह सालाना सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू किया जाएगा।' मंदिर को डिजाइन करने वाले आर्किटेक्ट नवरत्न रघुवंशी बताते हैं, 'विराट रामायण मंदिर का मॉडल तीन बार बदला गया। आखिरकार मंदिर का मॉडल बनाने में 5 साल लगे, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर को भेजकर फाइनल किया गया।' ग्राफिक्स- अजीत सिंह
35 साल के शेख मुकंदर मोहम्मद सुबह होने से पहले ही काम के लिए घर से निकल गए थे। तारीख 14 जनवरी थी। ओडिशा के बालासोर में रहने वाले मुकंदर राजमिस्त्री थे। राजमिस्त्री का काम न मिलने पर गाड़ियां लोड करते थे। उस दिन उन्हें लोडिंग का ही काम मिला था। परिवार शाम को लौटने का इंतजार कर रहा था, तभी फोन आया कि मुकंदर हॉस्पिटल में हैं। पता चला कि भीड़ ने उन्हें गो-तस्करी के आरोप में बुरी तरह पीटा है। कुछ घंटे इलाज के बाद मुकंदर ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मॉब लिंचिंग की धारा के तहत 6 लोगों को अरेस्ट किया है। ज्यादातर आरोपियों की उम्र 22 से 25 साल है। सभी हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हैं। आरोप है कि इन लोगों ने मुकंदर को लाठी-डंडों से पीटा, जय श्रीराम के नारे लगवाए। पिटाई का वीडियो भी बनाया, जो बाद में वायरल हो गया। मुकंदर की हत्या के आरोपी जेल में हैं, लेकिन सजा मुकंदर का परिवार भुगत रहा है। बीवी मनौरी की गोद में दो महीने की बेटी है। अब्बू को 6-7 साल पहले लकवा मार गया था, इसलिए चल नहीं पाते। दीवार से टिककर बैठे रहते हैं। कुल 6 लोगों का परिवार है, जिसकी जिम्मेदारी मुकंदर पर थी। परिवार को मदद के तौर पर तहसीलदार से 20 हजार रुपए मिले हैं। इस पर मनौरी कहती हैं, ‘20 हजार रुपए में क्या होगा। इतने पैसे तो शौहर को सुपुर्दे-खाक करने में खर्च हो गए।’ भीड़ के हमले का वही पैटर्न, गो तस्करी के शक में गाड़ी रोकी, बुरी तरह पिटाईशेख मुकंदर मोहम्मद बालासोर के अस्तिया गांव में रहते थे। इस गांव से करीब 15 किमी दूर ही चांदीपुर रेंज है, जहां भारत की सबसे ताकतवर मिसाइलों के परीक्षण होते हैं। मुकंदर के परिवार के पास खेत नहीं थे, इसलिए उन्होंने पढ़ाई नहीं की और राजमिस्त्री का काम सीख लिया। दिन में 500 रुपए कमाते थे। मकर संक्रांति की वजह से राजमिस्त्री का काम मिलने की उम्मीद नहीं थी, इसलिए वे 14 जनवरी को लोडिंग का काम करने चले गए। उनकी गाड़ी जयदेव कस्बे से गुजर रही थी। वैन में मुकंदर के साथ ड्राइवर भी था। रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि गाड़ी रुकते ही सभी मुकंदर और ड्राइवर को पीटने लगे। ड्राइवर तो बचकर भाग निकला, लेकिन मुकंदर को डंडों और प्लास्टिक के पाइप से पीटा गया। खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मुकंदर को बालासोर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उसी दिन मुकंदर की मौत हो गई। शुरुआत में परिवार को लगा कि ये मामला लूटपाट का है। फिर घटना का वीडियो सामने आया। इसमें दिख रहा है कि कुछ लोग मुकंदर को पीट रहे हैं। ‘जय श्रीराम’ और ‘गाय मेरी माता है’ बोलने के लिए कह रहे हैं। जान बचाने के लिए मुकंदर सब बोलते जाते हैं, लेकिन भीड़ ने पीटना बंद नहीं किया। मुकंदर के घर में अब एक बेवा, तीन बच्चे और बीमार पिताअस्तिया गांव में घास-पूस के छप्पर और मिट्टी की दीवारों से बने घर में मुकंदर का परिवार रहता है। घर में 65 साल के अब्बू शेख सादर मोहम्मद हैं। लकवे की वजह से बीमार रहते हैं। बेटे की मौत के बाद खाना भी बंद कर दिया है। मुकंदर के चचेरे भाई 23 साल के शेख जितेंद्र मोहम्मद ने उन्हें आंखों के सामने तड़पते देखा था। वे दावा करते हैं कि जिस पिकअप गाड़ी में मुकंदर थे, वह खाली थी। तस्करी या किसी और गलत काम का सवाल ही नहीं उठता। वैन का ड्राइवर लापता है। उसकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। जितेंद्र बताते हैं, ‘14 जनवरी को भाई की राजमिस्त्री के काम से छुट्टी थी। इसके बावजूद वे सुबह करीब 4 बजे घर से निकल गए थे। वे धामरा-चांदीपुर रोड की ओर गए थे। सुबह करीब 7 बजे फोन आया कि जिला अस्पताल आ जाओ, मुकंदर का एक्सीडेंट हुआ है। मैं तुरंत अम्मी और भाभी को लेकर निकल गया।’ हम करीब 8 बजे अस्पताल पहुंचे। भाई बुरी तरह जख्मी थे। दर्द से तड़प रहे थे। शरीर का कोई हिस्सा नहीं था, जहां चोट न लगी हो। मैंने पूछा कि क्या आपको किसी ने मारा है। उन्होंने सिर हिलाकर हां में जवाब दिया। उन्होंने भाभी को पीटने वालों के नाम भी बताए थे। ‘शुरुआत में हमें लगा कि यह लूटपाट का मामला है। तब तक धार्मिक एंगल सामने नहीं आया था। वीडियो वायरल होने से पूरी बात पता चली। मैंने सोचा कि मेरी पत्नी को हॉस्पिटल लाना चाहिए। इसलिए मैं उसे लेने ससुराल चला गया। लौटते वक्त फोन आया कि भाई की तबीयत बिगड़ रही है। मैं हॉस्पिटल पहुंचा, तो डॉक्टर ने अपने केबिन में बुलाकर कहा कि मुकंदर अब दुनिया में नहीं रहे।’ पत्नी बोलीं- पति दर्द से छटपटा रहे थे, कुछ बोल भी नहीं पाएमुकंदर की पत्नी मनौरी को पता नहीं था कि वे किस वक्त घर से निकले। उन्होंने सोचा रोज की तरह काम पर गए होंगे। यही सोचकर वे बच्चों के साथ घर पर रहीं। पति की खबर मिलते ही, हॉस्पिटल पहुंची। मनौरी बताती हैं, ‘उनकी हालत बहुत नाजुक थी। वे दर्द से छटपटा रहे थे। ठीक से बोल भी नहीं पाए। इतना जरूर बताया कि उन्हें किन लोगों ने पीटा है। इशारे से बताया कि 10 से ज्यादा थे। सभी के नाम नहीं बता सके। कुछ देर में उनकी सांसें थम गईं।’ दो महीने की बेटी को गोद में लिए बैठीं मनौरी रोने लगती हैं। कहती हैं, ‘वही एक कमाने वाले थे। रोज के 500 रुपए मिलते थे। उसी से घर चलता था। ससुर बीमार रहते हैं, उनकी भी जिम्मेदारी उठाते थे।’ क्या सरकार से कोई मदद मिली? मनौरी जवाब देती हैं, ‘नहीं, तहसीलदार घर आए थे। रेड क्रॉस फंड से 20 हजार रुपए दिए हैं। इतने में क्या होता है। क्या 20 हजार रुपए से इन बच्चों को पढ़ा पाऊंगी।’ रिश्तेदार बोले- मुकंदर गो तस्करी कर रहा होता, तो मजदूरी क्यों करतामुकंदर के रिश्तेदार हुसैन बताते हैं, ‘मुकंदर को जहां भी काम मिलता, वो चला जाता था। घटना वाले दिन वो मछली की पेटियां लोड करने गया था। तभी भीड़ ने घेर लिया। ये सुबह 4 से 5 बजे के बीच की बात है।’ हुसैन 14 जनवरी की शाम करीब 5 बजे अस्पताल पहुंचे थे। तब मुकंदर की बॉडी का पोस्टमॉर्टम हो चुका था। सबने तय किया कि FIR कराएंगे। सभी 8:30 बजे सदर थाने गए और केस दर्ज कराया। हुसैन बताते हैं, ‘सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने स्टोरी डाली थी। इसमें मुकंदर को पीटते दिखाया था। उससे जय श्रीराम के नारे लगवाए जा रहे थे। जय श्री राम कहने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन जबरदस्ती नारे लगवाना गलत है।’ 14 जनवरी की रात करीब 10 बजे मुकंदर की बॉडी घर लाई गई। 15 जनवरी को दोपहर 3 बजे उन्हें सुपुर्दे-खाक किया गया। एसडीपीओ ने परिवार को भरोसा दिया कि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गो-तस्करी के आरोपों पर हुसैन सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘कोई कह रहा है गाड़ी में गाय थी, कोई कह रहा है कि गाड़ी खाली थी। अगर गाय थी, तो पुलिस को खबर देनी थी। पुलिस ने बताया कि मौके से एक गाय मिली है। गाय गाड़ी के अंदर थी या बाहर, यह साफ नहीं हो पाया है। इसकी जांच होनी चाहिए।’ पुलिस को मौके से घायल गाय मिली, मुकंदर की हत्या में 6 नामपुलिस को मौके पर जख्मी हालत में एक गाय मिली। उसे गोशाला भिजवा दिया। पुलिसवाले पिकअप वैन जब्त कर थाने ले गए। उसी दिन शाम को मुकंदर के भाई जितेंद्र मोहम्मद ने 5 लोगों पर हत्या का आरोप लगाकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने BNS की धारा 103(2) के तहत FIR दर्ज की है। ये धारा मॉब लिंचिंग में लगाई जाती है। इसमें उम्रकैद से लेकर मौत तक की सजा हो सकती है। पुलिस के मुताबिक, पांच नामजद आरोपियों में से तीन घटना वाली जगह मौजूद थे। तीनों को अरेस्ट कर कोर्ट में पेश किया गया। इनमें 25 साल का सरोज कुमार बेहेरा उर्फ पिंटू , 29 साल का चिन्मय कुमार दास उर्फ चिनु और 22 साल का सागर मोहालिक उर्फ चंदू शामिल हैं। बाकी दो आरोपियों को सबूत न मिलने पर छोड़ दिया गया। वीडियो फुटेज के आधार पर बाद में तीन और आरोपी गिरफ्तार किए गए। इनमें 24 साल का आशीष कुमार नायक उर्फ लिपु, 24 साल का रमेश दास और 25 साल का चंदू दास शामिल हैं। गोसेवा संस्था का दावा- तेज रफ्तार की वजह से गाड़ी पलटी, पिटाई से मौत नहींबालासोर में मां भारती गोसेवा केंद्र के सचिव जितेंद्र स्वाईं के मुताबिक, ये पूरी घटना उनके घर के पास हुई। ये एरिया सदर थाना क्षेत्र के सुंदरी में आता है। जितेंद्र बताते हैं, ‘ओडिशा में गोकशी की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इसे रोकने के लिए बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने कई बार पुलिस, जिला प्रशासन और सरकार से शिकायतें की हैं। फिर भी गोकशी नहीं रुकी।’ जितेंद्र दावा करते हैं, ये एरिया गोकशी का केंद्र माना जाता है। यह बात स्थानीय पुलिस को भी पता है। मुकंदर के बारे में वे बताते हैं, ‘उस दिन सुबह कुछ लोग टहल रहे थे। पिकअप वाहन के ड्राइवर को लगा कि उसे पकड़ने आ रहे हैं। घबराहट में उसने तेज रफ्तार से गाड़ी मोड़ दी, इससे वह पलट गई। गाड़ी पलटते ही ड्राइवर भाग गया। हेल्पर मुकंदर अंदर ही फंसा रह गया। वहां मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकाला और पानी पिलाया।’ जितेंद्र के मुताबिक, मुकंदर की हालत बिगड़ती दिखी, तो लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को फोन किया। कई बार कॉल करने के बाद पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची और करीब 7 बजे मुकंदर को अस्पताल में भर्ती कराया। दोपहर 3 बजे पता चला कि मुकंदर की मौत हो गई। वायरल वीडियो के बारे में जितेंद्र कहते हैं कि वीडियो की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। जितेंद्र कहते हैं, ‘मौत को सीधे तौर पर हत्या कहना जल्दबाजी होगी। अस्पताल में मौत जरूर हुई है, लेकिन असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ होगी। FIR में पवन भोई का नाम है। वह समर्पित गोरक्षक है। बापू पंडा जिम चलाते हैं, उनका क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। बजरंग दल के बालासोर सह-प्रमुख पिंटू का नाम भी है। वे मौके पर मौजूद ही नहीं थे।' 'हो सकता है कुछ लोग मॉर्निंग वॉक के लिए वहां गए हों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया हो। ऐसा है, तो इसके लिए किसी संगठन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।’ इस बारे में हमने बालासोर एसपी प्रत्यूष दिवाकर से भी बात की। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वीडियो के आधार पर आरोपियों को पकड़ा गया है। अभी हम मामले की जांच कर रहे हैं। ................................. ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िएतलवार बांटी, जेल गए, बोले- बाहर निकलकर फिर बांटेंगे 21 सेकेंड का एक वीडियो है। इसमें दिख रहे लोगों के हाथ में तलवारें और फरसे हैं। सभी एक घर के सामने रुकते हैं। घर से बाहर निकले शख्स को तलवार थमा देते हैं। ये वीडियो 29 दिसंबर का है। तलवार बांटने वाले हिंदू रक्षा दल के सदस्य थे। वीडियो सामने आने के बाद सभी को अरेस्ट कर लिया गया। संगठन का कहना है कि सदस्यों को जमानत मिलेगी, तो फिर से तलवार बांटेंगे। पढ़िए पूरी खबर...
चीन की छन यूफेई ने इंडोनेशिया बैडमिंटन मास्टर्स 2026 का महिला एकल खिताब जीता
वर्ष 2026 की इंडोनेशिया बैडमिंटन मास्टर्स प्रतियोगिता का फाइनल 25 जनवरी को जकार्ता में आयोजित हुआ
चीन में मोटर वाहनों और नई ऊर्जा वाहनों की संख्या में तेज बढ़ोतरी
चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में पूरे चीन में मोटर वाहनों की कुल संख्या बढ़कर 46.9 करोड़ तक पहुंच गई
Donald Trump:वेनेजुएला से क्यूबा, ईरान से तूरान, गाजा से अफगानिस्तान, UN से NATO और WHO तक सबको धमका चुके ट्रंप अनप्रिडिक्टेबल हो गए हैं. धमकाने फिर पलट जाने की उनकी आदत को कूटनीति के जानकार 'मैडमैन थ्योरी' यानी पागलों वाला सिद्धांत कहते हैं. आइए इस मैडमैन थ्योरी के साथ-साथ उसके फायदे और नुकसान के बारे में आपको बताते हैं.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान के सबसे बड़े और अहम इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन (ऑपरेशन) से जुड़ी संभावित डील को खत्म कर दिया है। UAE ने एयरपोर्ट को लीज पर लेने या उसके प्रबंधन में शामिल होने की योजना से खुद को अलग कर लिया है।
DNA: ईरान Vs अमेरिका..नया अपडेट क्या? खलीफा के एटम बम से डर गए ट्रंप?
Iran News:अमेरिकी नौसेना का सबसे विध्वंसक बेड़ा ईरान के अहाते में आकर खड़ा हो चुका है. आशंका जताई जा रही है किसी भी वक्त तेहरान में तबाही की घंटी बज सकती है. हालांकि ऐसी आशंका पिछले चार दिनों से जताई जा रही है. इस बीच अब दावा किया जा रहा है कि खलीफा ने परमाणु शक्ति हासिल कर ली है.
DNA: पहले पूछा धर्म फिर मारा चाकू, अमेरिका में पहलगाम जैसा हमला, दरवाजे तक पहुंची नफरती सोच
Attack in US:अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में एक शख्स को धर्म पूछकर मारा गया. वॉशिंगटन के पार्कलैंड में ये हमला हुआ है. एक शख्स पर और उसके पालतू कुत्ते पर जानलेवा हमला किया गया.
Sheikh Hasina On Bangladesh Condition:बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने Zee Network के सहयोगी WION के साथ बातचीत में अपने मुल्क की स्थिति पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि अगर वह बांग्लादेश जाएंगी तो उनकी पहली प्राथमिकता क्या होगी. इसके अलावा उन्होंने उस्मान हादी पर भी बातचीत की.
DNA: जिनपिंग ने समय रहते तख्तापलट की साजिश को नाकाम कर दिया और ट्रंप का प्लान चौपट कर दिया. जिस ट्रंप पर जिनपिंग के तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप लग रहा है. जो ट्रंप वेनेजुएला में तख्तापलट करवाते हैं.ईरान में तख्तापलट की कोशिश में हैं. उनकी खुद की कुर्सी इस वक्त खतरे में लग रही है. अमेरिका में ट्रंप के तख्तापलट की बात क्यों की जा रही है. आज हम उसी के बारे में बात करने वाले हैं.
अमेरिका में बर्फीले तूफान का कहर, हवा में क्रैश हो गया उड़ता विमान; 7 की मौत
फेडरल अधिकारियों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की रिकॉर्डिंग के अनुसार, जेट टेकऑफ की कोशिश करते समय पलट गया और उसमें आग लग गई. यह रविवार शाम 7:45 बजे के आसपास एयरफील्ड पर क्रैश हो गया. फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड जांच कर रहे हैं.
जिसने लिया इंटरव्यू उसको ही मिल गई नौकरी, भर्ती के नाम पर उम्मीदवार को लगा दिया चूना
Interviewer Took Candidate Job: सोशल मीडिया पर एक शख्स ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे इंटरव्यू लेने वाले शख्स ने ही उसका पद छीन लिया.
उत्तर अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित ग्रीनलैंड अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है. ग्रीनलैंड को जो एक बार देख लेता है वह इसकी सुंदरता का कायल हो जाता है. इस समय ग्रीनलैंड काफी चर्चा के केंद्र में है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह ग्रीनलैंड को कब्जे में लेना चाहते हैं.
UAE में कंटेंट बनाना अब आसान नहीं, इंफ्लूएंसर्स को 31 जनवरी तक लेना होगा ये परमिट; वरना मिलेगी सजा
UAE Advertiser Permit Deadline: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कंटेंट क्रिएटर्स और एडवरटाइजर्स को किसी भी तरह का प्रोमोशनल कंटेंट पोस्ट करने पर एक नियम का पालन करना होगा.
Largest Underground City In Cappadocia: तुर्की के कप्पाडोसिया शहर में एक विशाल भूमिगत शहर का पता चला है. इसमें कभी 20,000 लोग रहते थे.
पिछले साल के भारत-पाक संघर्ष का ज़िक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, 'पाकिस्तान और भारतीय वायु सेना के बीच इस (मई 2025) टकराव में शुरू में पाकिस्तान ने कई दुश्मन लड़ाकू विमानों को गिराकर एक साफ़ सामरिक जीत हासिल की, लेकिन फिर भारतीय क्षेत्र पर हमले करने में बड़े पैमाने पर नाकाम रहा क्योंकि उनका मुकाबला एक इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम ने किया था.
ट्रंप ने दी धमकी तो कनाडा को याद आए पीएम मोदी, भारत आएंगे मार्क कार्नी; कई डील्स पर होंगे दस्तखत
ट्रंप की धमकियों से जूझ रहे कनाडा को अब भारत की याद आई है. बताया जा रहा है कि मार्च के पहले सप्ताह में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी भारत की यात्रा कर सकते हैं. ये यात्रा कई मायनों में खास मानी जा रही है.
Alina amir video: अलीना ने उनकी वीडियो बनाने वाले युवक के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है. उन्होंने वीडियो के जरिए लोगों से अपील की है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर कोई इस वीडियो बनाने वाले शख्स के बारे में जानकारी देगा तो वो उसे नकद पुरस्कार भी देंगी.
Norway Laerdal Tunnel: फिल्मों में आपने कई गाड़ियों को बड़ी-बड़ी खूबसूरत सुरंगों से होकर गुजरते हुए देखा होगा, हालांकि यूरोप के एक देश में आपको असल जीवन में यह नजारा देखने को मिल जाएगा.
Republic Day Parade:भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (US Ambassador Sergio Gor) ने गणतंत्र दिवस की परेड में अमेरिकी विमान भी शामिल किए जाने को भारत और अमेरिका के मजबूत रिश्तों का प्रतीक बताया है. गोर ने ये भी कहा उम्मीद है नई दिल्ली के साथ वाशिंगटन की ट्रेड डील भी एक दिन हो जाएगी.
यूक्रेन से जंग के बीच रूस में काम करने वाले नहीं बचे! अब भारत से मंगवाएगा इतने हजार कारीगर
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की युवा, स्किल्ड और मेहनती वर्कफोर्स रूस में तीन मिलियन स्किल्ड प्रोफेशनल्स की अनुमानित कमी को पूरा करने में मदद कर सकती है. रूस में कम से कम 5,00,000 सेमी-स्किल्ड मज़दूरों की मांग बताई जा रही है, जो उन कारणों में से एक है जो मॉस्को को दोस्त देशों से संपर्क करने के लिए प्रेरित कर रहा है.
बलूचिस्तान में पाक सेना का आतंक, घरों से उठाए जा रहे लोग, परिवारों में डर का माहौल
Balochistan News: 24 जनवरी को केच के दश्त इलाके में भी पाकिस्तानी सेना ने घर पर छापे के दौरान तीन अन्य नागरिकों यासीन, बशीर और अब्दुल्ला को जबरन गायब किया था. उसी दिन केच के ही जोसक इलाके से पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वाड ने वाजो जान मुहम्मद को जबरन गायब किया था.
आज मेटे फ्रेडरिक्सन दुनिया की सबसे जटिल कूटनीतिक चुनौतियों में से एक के केंद्र में हैं। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी ने यूरोप की संप्रभुता और सुरक्षा संतुलन पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया। ऐसे समय में फ्रेडरिक्सन ने महीनों तक बेहद नाजुक संतुलन साधे रखा।
ग्रीनलैंड पर अमेरिका‑यूरोप रिश्तों में बढ़ता अविश्वास,यूरोप की एकजुटता से ढीले पड़े ट्रंप के तेवर
यूरोपीय नेताओं के हालिया बयानों से साफ हो गया है कि अमेरिका के साथ ‘हर हाल में साथ’ वाली नीति अब अतीत की बात हो चुकी है। यूरोप ने यह तय किया है कि वह न तो ब्लैकमेल वाली कूटनीति स्वीकार करेगा और न ही किसी दबाव में आकर अपने मूल हितों से समझौता करेगा।
यूनुस के राज में क्या बांग्लादेश में मनाया गया भारत का 77वां गणतंत्र दिवस? जानिए ढाका की पूरी कहानी
Indian community celebrate 77th Republic Day in Bangladesh: 26 जनवरी को देश-दुनिया में भारत का 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया जा रहा है. क्या बांग्लादेश में भी26 जनवरी कोयूनुस के राज में भारत का 77वां गणतंत्र दिवस मनाया गया. जानें सच्चाई.
US bangor airport private jet crash: अमेरिका के बैंगोर एयरपोर्ट पर 8 लोगों को ले जा रहा एक प्राइवेट बिजनेस जेट टेकऑफ के दौरान क्रैश हो गया है. अभी तक किसी के मरने की खबर नहीं आई है. कहा जा रहा है कि दुर्घटना एक बर्फीले तूफान की वजह से हुई है.
फिलीपींस में फेरी हादसा, 13 की मौत और 100 से अधिक लापता
सोमवार तड़के दक्षिणी फिलीपींस के बासिलान प्रांत के पास समुद्र में एक द्वीपों के बीच चलने वाली (इंटर-आइलैंड) फेरी डूब गई
China recalled his two pandas: जापान में फिलहाल सिर्फ 2 पांडा थे. जिन्हें चीन ने टोक्यो और बीजिंग के रिश्ते में आई खटास के कारण वापस बुला लिया है. जिससे वहा के लोग काफी नाखुश हैं. आज हम जानेंगे कि पांडा जापान के लिए क्यों इतना जरूरी है, और वापस जाने से देश को 20 अरब येन का नुकसान कैसे होगा.
मेरी मां अमेरिकी नागरिक हैं, अपराधी नहीं... ICE एजेंटों की पूछताछ पर भड़की भारतीय मूल की डॉक्टर
USA: भारतीय-अमेरिकी डॉक्टर निशा पटेल ने आरोप लगाया कि टेक्सास के एक मॉल में ICE एजेंटों ने उनकी बुजुर्ग मां को लहजे के आधार पर रोका और पूछताछ की. डॉक्टर ने कहा कि 47 साल से मेरी मां अमेरिका में रह रहीं और अमेरिकी नागरिक होने के बावजूद उन्हें पासपोर्ट दिखाना पड़ा. पटेल ने कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ अपराधियों तक सीमित नहीं है.
Barack Obama on Minneapolis case: मिनियापोलिस में एलेक्स प्रेट्टी की गोली लगने से मौत पर बराक और मिशेल ओबामा ने एजेंसी और सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाया है. ओबामा ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है जिसमें उन्होंने सरकार को दोषी ठहराया है.
हर 26 जनवरी की सुबह, जब धुंध को चीरती सूरज की किरणें दिल्ली के कर्तव्य पथ पर पड़ती हैं, तो वे केवल सैन्य रेजिमेंटों और रंगीन झांकियों को ही रोशन नहीं करतीं, वे परेड की हजारों साल पुराने इतिहास को भी छूती हैं। प्राचीन रोम में सैन्य परेड दुश्मन के खून से पूरी होती थी, जबकि मिस्र में परेड राजा को देवता की शक्ति पाने का जरिया थी। रूस की परेड का जासूसों को इंतजार रहता था, लेकिन आधुनिक दुनिया में पश्चिमी देश परेड से कतराने लगे। आखिर परेड का इतिहास क्या है, भारत हर साल क्यों करता है फौज और हथियारों की नुमाइश और पश्चिमी देश इससे क्यों कतराते हैं; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… आज से करीब चार हजार साल पहले। नील नदी के किनारे पूरा मिस्र सांस रोककर फराओ यानी अपने राजा का इंतजार कर रहा था। उसी दिन फराओ सेनुसरेत प्रथम, दक्षिण मिस्र पर विजय हासिल कर लौट रहे थे। सजे-धजे सैनिकों के पीछे लोगों की भीड उमड़ पड़ी। सैनिकों के आगे पुजारी चल रहे थे और सबसे आगे स्वयं सेनुसरेत। वे केवल युद्ध से नहीं लौट रहे थे, वे देवता से मिलने जा रहे थे और देवता बनकर लौटने वाले थे। यहीं से प्राचीन मिस्र के ‘ओपेट’ उत्सव की परंपरा ने आकार लिया। शुरुआत में यह विजय का उत्सव था, लेकिन जब जीतने को कुछ नहीं बचा, तब राजा के देवत्व की यात्रा ही परेड बन गई। मिस्रवासियों का विश्वास था कि समय के साथ फराओ की शक्तियां कमजोर पड़ने लगती हैं। उसे दोबारा ईश्वरीय शक्ति प्राप्त करनी होती थी। कर्नाक मंदिर से लक्सर मंदिर तक निकलने वाला यह विशाल जुलूस लगभग सत्ताइस दिनों तक चलता था। लेकिन इस परेड में एक रोचक रहस्य भी छिपा था। हर वर्ष यह तय नहीं होता था कि जुलूस जमीन से जाएगा या नील नदी के रास्ते। यह निर्णय नदी के मिजाज पर निर्भर करता था। यदि जल स्तर ऊंचा होता, तो देवता और फराओ नौकाओं पर सवार होकर यात्रा करते। यदि पानी कम होता, तो जुलूस सड़कों से होकर गुजरता। करीब तीन हजार पांच सौ साल पहले रानी हत्शेपसुत ने इस यात्रा को और अधिक भव्य बना दिया। उसने मार्ग में छह नौका स्टेशन बनवाए। हर स्टेशन पर जुलूस रुकता, देवताओं को बलि और भेंट चढ़ाई जाती और पुजारी घोषणा करते कि फराओ की आत्मा ईश्वरीय आत्मा से एकाकार हो रही है। जब उत्सव समाप्त होता, तो फराओ वही व्यक्ति नहीं रहता जो वह यात्रा से पहले था। लोगों का विश्वास था कि वह नए सिरे से जन्मा है। देवताओं की कृपा से पूरे मिस्र पर शासन करने के लिए फिर से सशक्त। लेकिन इतिहास यहीं ठहरता नहीं। रोम के उदय के साथ मिस्रवासियों को यह समझ में आने लगा कि फराओ की आत्मा और देवताओं की आत्मा के बीच कोई दिव्य संबंध नहीं था। सत्ता बदली, विश्वास बदले और परेड का रास्ता मिस्र से हटकर रोम की सड़कों तक पहुंच गया। प्राचीन रोम का ट्रायम्फ यानी एक दिन का देवता दो हजार साल पहले प्राचीन रोम में परेड यह तय करती थी कि सत्ता किसके हाथ में है। यहां परेड को ट्रायम्फ कहा जाता था, यानी विजय की सार्वजनिक नुमाइश। यह केवल एक जुलूस नहीं था, बल्कि राज्य द्वारा रचा गया ऐसा तमाशा था, जिसमें हारे हुए दुश्मनों को पहले अपमानित किया जाता और फिर मार दिया जाता था। उनके परिवारों को गुलाम बना लिया जाता था। उस समय रोम में संसद का शासन था। जब संसद से ट्रायम्फ की अनुमति मिलती, तो पूरा शहर समझ जाता कि रोम की सेना ने कोई साधारण नहीं, बल्कि बहुत बड़ी जीत हासिल की है। विजयी सेनापति रोम की पवित्र सड़क साक्रा विया से गुजरता था। वह चार घोडों वाले रथ पर खड़ा होता। उसका चेहरा लाल रंग से रंगा जाता था, ठीक उसी रंग में, जैसा देवता जूपिटर की मूर्ति का होता था। कुछ घंटों के लिए वह सेनापति मनुष्य नहीं रहता था। वह देवता बन जाता था। लेकिन इसी दृश्य में रोमन सत्ता की सबसे गहरी समझ छिपी थी। उसी रथ पर, उसके पीछे, एक गुलाम खड़ा रहता था। उसका काम कोई हथियार उठाना नहीं था। वह बस धीरे–धीरे उसके कान में फुसफुसाता रहता था- ‘याद रखो, तुम केवल एक मरणशील मनुष्य हो। तुम केवल एक दिन के देवता हो।’ जब परेड का अंत खून से होता था रोम में हर जीत पर ट्रायम्फ नहीं मिलता था। इसके लिए सीनेट ने एक कठोर नियम तय किया था। ट्रायम्फ पाने के लिए एक ही युद्ध में कम से कम पांच हजार दुश्मन सैनिकों का मारा जाना अनिवार्य था। यह केवल एक आंकड़ा नहीं था। यह एक स्पष्ट संदेश था कि रोमन सत्ता सस्ती और छोटी जीतों से संतुष्ट नहीं होती। ट्रायम्फ का सबसे असरदार हिस्सा जीते हुए जनरल की अगुआई नहीं थी। असली प्रभाव उस दृश्य का होता था, जिसे देखने के लिए जनता आती थी। सोना, चांदी, हथियार, दुश्मन की नावों के टूटे हुए हिस्से। सब कुछ जुलूस में प्रदर्शित किया जाता था, लेकिन सबसे भयावह दृश्य होते थे जंजीरों में बंधे दुश्मन राजा और सेनापति। जनता इनका इंतजार करती थी। आम रोमन नागरिकों ने आज से करीब 2072 साल पहले वर्सिंगजेटोरिक्स नाम के एक सेनापति को अपमानित होते देखा था। परेड के अंत में, शहर के एक चौराहे पर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया। वह केवल 36 साल का था। आज से करीब 1750 साल पहले पालमाइरा साम्राज्य की रानी जेनोबिया को भी ट्रायम्फ परेड में घुमाया गया था। यह साम्राज्य आज के फिलिस्तीन, मिस्र और अरब के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ था। जेनोबिया को उसके सभी सोने के गहने पहनाकर परेड करवाई गई थी। भारी वजन के कारण वह चलते–चलते गिर पड़ती थी और जनता को इसमें क्रूर आनंद मिलता था। उसे बस मारा नहीं गया था। ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी, अजीत सिंह और अंकित द्विवेदी ***** गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए... रिपब्लिक डे पर चीफ गेस्ट की कुर्सी कितनी कीमती: पहली बार यूरोपियन यूनियन को न्योता क्यों मिला रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट आमतौर पर उन्हीं देशों से होते हैं, जहां भारत तवज्जो देना चाहता है। 77वें गणतंत्र दिवस परेड के लिए भारत ने यूरोपीय यूनियन के टॉप-2 लीडर्स को चीफ गेस्ट बनाया है- उर्सुला वॉन और एंतोनियो कोस्टो। पूरी खबर पढ़िए...
पंजाब के अजनाला में एक कुआं है। इस कुएं की खुदाई से 282 सैनिकों के कंकाल निकले। ये कंकाल अब भी कुएं के पास एक लोहे के बक्से में बंद पड़े हैं। ये 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले शहीदों के हैं। केंद्र, राज्य सरकार और ASI में से कोई भी न तो इनके अंतिम संस्कार के लिए वक्त निकाल पाए हैं, न ही इन्हें किसी म्यूजियम में रखा जा सका है। पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि कैसे सुरेंद्र कोछड़ नाम के शख्स ने इस नरसंहार को इतिहास के पन्नों से ढूंढा और फिर कुएं की खुदाई करवाकर इसे साबित कर दिया। होना तो ये चाहिए था कि बाकी शहीदों की तरह इनकी पहचान होती, सम्मान मिलता और अंतिम संस्कार होता, लेकिन सरकारें 168 साल गुजरने के बाद भी चिट्ठियां लिखकर खानापूर्ति कर रही हैं। इन कंकालों की वैज्ञानिक जांच और DNA सैंपलिंग की भी कोशिशें हुई हैं। जांच से ये तक साबित हो रहा है कि सैनिक पूर्वी यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड के रहने वाले थे। दो से तीन परिवार भी सामने आए, लेकिन अवशेष लोहे के बक्से में कैद हैं। दैनिक भास्कर ने कंकालों की जांच करने वाले और सैनिकों के संभावित परिवार के लोगों से बात की। कनाडा से आया ईमेल, शायद कंकाल मेरे दादा का हैइन कंकालों और अवशेषों की वैज्ञानिक जांच में शामिल BHU के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं, ‘2023 में सर्दियों की रात थी। मैं किसी रिसर्च वर्क में बिजी था। तभी एक ईमेल आया। ये ईमेल कनाडा से किसी ने भेजा था। इसमें लिखा था कि मेरे दादा ब्रिटिश राज में सैनिक थे और 1857 के आसपास अचानक गायब हो गए थे। कभी नहीं मिले, न लौटे। अंग्रेज सरकार ने हमारे परिवार के खिलाफ वारंट भी निकाला था। हम पहले यूपी में रहते थे, फिर भागकर तमिलनाडु चले गए थे। सिर्फ हम ही नहीं, तमिलनाडु के संथूर में कई ऐसे परिवार हैं, जो 1857 में यूपी से शिफ्ट होकर आए थे।’ ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं, ‘पहली बार ये ईमेल पढ़कर मैं भावुक हो गया। एक नई उम्मीद दिखी कि शायद इन कंकालों की पहचान शुरू हो पाए। हमें इतना पता चल चुका था कि अजनाला के सूखे कुएं में जिन सैनिकों को दफनाया गया, वे उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, झारखंड समेत गंगा घाटी के आसपास के रहने वाले हैं। शायद उनके परिवार मिल जाएं, तो अंतिम संस्कार और सम्मान दोनों मिल सके।’ अंग्रेजों ने सैनिकों की लाशों पर चूना-कोयला डाला, फिर कुआं बंद कर दियासुरेंद्र कोछड़ की कोशिशों के बाद 2014 में खुदाई हुई और अवशेष सामने आए। इन कंकालों की जांच के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जेएस सहरावत की लीडरशिप में एक टीम बनी। इस टीम में BHU के प्रोफेसर बीरबल साहनी, प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और द सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) हैदराबाद के एक्सपर्ट शामिल हैं। दैनिक भास्कर ने प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे से साइंटिफिक फाइंडिंग्स पर बात की। वे बताते हैं, ‘मुझे जालियांवाला बाग हत्याकांड की जानकारी थी, लेकिन अजनाला केस कभी नहीं सुना था। अजनाला में कंकाल मिले, तो जांच की जिम्मेदारी अलग-अलग टीम को दी गई। हम लोग हैदराबाद के साथ मिलकर काम करने लगे।’ ‘कुएं की खुदाई सही तरीके से न होने से ज्यादातर सैंपल खराब हो चुके थे। कंकाल से डीएनए निकालने में इसलिए भी दिक्कत हुई क्योंकि अंग्रेजों ने सैनिकों को कुएं में डालने के बाद जानबूझकर उसमें चूना और कोयला डाल दिया था। इसके साथ मिट्टी भर दी थी। इससे हर लाश तक कोयला और चूना पहुंच गया था। ये दोनों चीजें डीएनए को खराब कर देती हैं।’ 'हमें शुरू में 244 सैंपल मिले थे। 100 के आसपास हैदराबाद लैब भेजे गए थे। केवल 50 सैंपल से ही हम डीएनए अलग निकाल पाए। इसकी जांच आगे बढ़ती गई और रिजल्ट आने लगे। तब पता चला कि अजनाला कुएं में मरने वाले सैनिक तो गंगा घाटी के ही लोग थे। यानी हमारे वाराणसी के आसपास वाले यूपी-बिहार के ही सैनिक थे।’ दांतों की बनावट और गंगा के पानी ने कराई पहचानप्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक, ‘हमें कंकालों से निकाले गए दांतों के सैंपल से रिजल्ट मिले। ये दांत काफी मजबूत थे। सैंपल की जांच से पता चला कि मरने वाले सैनिक ज्यादातर 21 से 42 साल के थे। उनकी लंबाई काफी अच्छी थी। वे दांतों का काफी ध्यान रखते थे। इसलिए दांत अच्छी हालत में मिले थे।’ ‘दांतों की जांच से ये भी पता चल जाता है कि इंसान किस इलाके का पानी पीता था। हर पानी में कार्बन और ऑक्सीजन की अलग-अलग मात्रा होती है। कंकालों से अलग-अलग डीएनए सैंपल लेकर जांच करने वाली टीम भी अलग-अलग काम कर रही थी। सभी टीम के रिजल्ट एक जैसे ही आए।’ प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे आगे बताते हैं, ‘हमें पहले ये डाउट था कि ये सैनिक पंजाब या फिर पाकिस्तान के इलाके के रहने वाले भी हो सकते हैं। एक शक ये भी था कि कहीं ये कंकाल 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के समय हुई किसी घटना से संबंधित तो नहीं हैं। हालांकि जांच से साफ हो गया कि ये 1857 के हैं और गंगा घाटी के आसपास रहने वाले लोग थे।’ ‘हालांकि मरने वाले किसी एक राज्य के नहीं थे। हमारी पड़ताल में ये भी पता चला कि 26वीं नेटिव इन्फैंट्री बटालियन के सैनिक पूर्वी यूपी, बिहार, बंगाल और झारखंड के आसपास के थे। ये पूरा गंगा घाटी वाला इलाका ही है। इनमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, मुस्लिम और दलित लोग भी थे।’ ‘न्यूक्लियर DNA जांच से तो हम सैनिकों के जिले भी बता देंगे’कंकालों की जांच पर प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया, ‘अभी तक की जांच में सैनिकों को अपनी मां से मिले माइटोकॉन्ड्रियल DNA की मदद से जानकारियां मिली हैं। ये DNA मां से बच्चों में ट्रांसफर होता है। 168 साल पहले भी जो माइटोकॉन्ड्रियल DNA था, वही आज भी उस एरिया की महिलाओं के DNA में मौजूद है।’ कई परिवारों ने फोन-मेल किए, ब्रिटेन मदद करे तो आसानी होगीइन शहीदों के परिवारों को ढूंढने के सवाल पर प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं, ‘हम परिवारों को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। हमें ये पता है कि ब्रिटिश हर चीज का हिसाब-किताब लिखित में रखते थे। उनके आर्काइव में इन सैनिकों के नाम जरूर होंगे, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने आज तक गृह मंत्रालय और PMO को जवाब ही नहीं दिया।' 'चैलेंज ये है कि ये अब से 6-7 पीढ़ी पहले की बात है। हमें खुशी है कि 2022 में रिसर्च रिपोर्ट मीडिया में सामने आने के बाद अब तक कई लोग हमसे संपर्क कर चुके हैं। इन लोगों के दादा या परदादा ब्रिटिश आर्मी में थे। एकाएक गायब हो गए।’ इन परिवारों के खिलाफ वारंट तक निकले और कुछ देश के अलग-अलग इलाकों में भाग गए थे। ऐसा ही एक केस कनाडा से समीर पांडे का भी है। उन्हें लगता है कि शहीद सैनिकों में उनकी छठी पीढ़ी के दादा प्रकाश पांडे हो सकते हैं। प्रकाश पांडे ने लाहौर की मियां मीर छावनी में विद्रोह शुरू कियाकनाडा से दावा करने वाले समीर पांडे का अंदाजा है कि उनके परदादा प्रकाश पांडे का कंकाल भी इन शहीदों में शामिल हो सकता है। प्रकाश पांडे ने ही लाहौर की मियां मीर छावनी में अंग्रेज अधिकारी स्पेंसर को तलवार से मारकर विद्रोह शुरू किया था। फिर इन्हीं भारतीय सैनिकों को रावी नदी के पास से गिरफ्तार कर अंग्रेजों ने अजनाला के कुएं में दफना दिया था। प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक, ‘प्रकाश पांडे का पता हम समीर से मिले DNA की जांच से कर सकते हैं। समीर ने बताया है कि उनका परिवार यूपी के रायबरेली से है। वहां से 4 सिपाही थे, जो 26वीं बटालियन में थे। 1857 के बाद ये सैनिक गायब हुए तो परिवार के खिलाफ वारंट निकला और चारों परिवार चेन्नई के पास में संथूर गांव चले गए। हम लोग इस गांव में जाकर भी जांच करने की योजना बना रहे हैं।’ ‘दादा को अंग्रेजों ने मारा, फिर हमें भागने के लिए मजबूर किया’दैनिक भास्कर ने कनाडा में मौजूद समीर पांडे से भी बात की। समीर वहां जॉब करते हैं, लेकिन अगले एक साल में रिटायर होने के बाद इंडिया लौटने वाले हैं। समीर पांडे बताते हैं, ‘हमें खबरों के जरिए पता चला था कि अजनाला में 1857 क्रांति के सिपाहियों के कंकाल मिले हैं। इसी खबर में ज्ञानेश्वर चौबे का नाम था और मैंने उन्हें ईमेल से संपर्क किया। मेरे पूर्वज भी इसी बटालियन में थे। हमारे परिवार के सैनिक थे, जिन्हें 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी।’ ‘अंग्रेजों ने हमारे परिवार के लोगों को काफी परेशान किया था। मेरे दादा से पहले वाली पीढ़ी इससे परेशान होकर साउथ इंडिया शिफ्ट हो गई। मेरे दादाजी का जन्म भी चेन्नई के पास हुआ था। मेरे कई रिश्तेदार चेन्नई और आसपास रह रहे हैं। ब्रिटिश सरकार 26वीं बटालियन के सभी सिपाहियों के नाम की लिस्ट दे दे, तो नाम और घर की जानकारी मिल सकती है।’ समीर पांडे के अलावा दैनिक भास्कर ने संथूर गांव में रहने वाले उदय कुमार से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि हमारी पीढ़ी यूपी के कन्नौज की रहने वाली थी। 1857 में अंग्रेजों ने वारंट निकाला तो संथूर आ गए। तब से हमारी अगली पीढ़ियां यहीं रह रही हैं।’ ‘दो साल पहले से हम लोग अजनाला कुएं में मिले कंकाल की जांच करने वाली टीम के संपर्क में हैं। अभी हमारा DNA सैंपल नहीं लिया गया है। हम चाहते हैं कि 1857 क्रांति में जो सिपाही थे, उन सभी की पहचान हो। उन सभी परिवारों के साथ इंसाफ हो। उन शहीदों की पहचान हो और उन्हें सम्मान मिल सके। कम से कम उनका अंतिम संस्कार तो ठीक से किया जाए।’......................................... स्टोरी का पहला पार्ट यहां पढ़िएअंग्रेजों ने कुएं में जिंदा दफनाया, हत्यारे अफसर के नाम पर अमृतसर में सड़क पंजाब के अजनाला में गुरुद्वारा सिंह सभा के कैंपस में एक कुआं है। इसे ‘शहीदों का कुआं या ‘कलियांवाला खोह’ कहा जाता है। यहीं एक लोहे का बक्सा है। इस बक्से में इंसानों की हड्डियां भरकर रखी गई हैं। ये हड्डियां 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले 282 सैनिकों की हैं। इन सैनिकों को इस कुएं में जिंदा दफना दिया गया था। इनकी आज तक पहचान नहीं हो सकी। वहीं मारने वाले अफसर कूपर के नाम पर अमृतसर में आज भी सड़क है। पढ़िए पूरी खबर...
भारत में शेख हसीना के भाषण से तिलमिलाई बांग्लादेश सरकार, चुनाव से पहले राजनीतिक अस्थिरता की चेतावनी
ढाका का कहना है कि शेख हसीना की टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब देश में आगामी संसदीय चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और इससे राजनीतिक अस्थिरता, तनाव तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
हसीना की सरकार गिराने का प्लाट अमेरिका ने रचा? लीक रिकॉर्डिंग से आया सियासी भूचाल!
Sheikh Hasina coup: बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट और मोहम्मद यूनुस को उनकी जगह बिठाने की साजिश किसने रची थी. इस अबूझ और अनसुलझी पहले को सुलझा लिए जाने का दावा किया जा रहा है. एक रिकॉर्डिंग ने 2-2 देशों में सियासी भूचाल कैसे उठा दिया और क्या है उस रिकॉर्डिंग में आइए बताते हैं.
‘जिन, जियान, आजादी’ से फिर गूंजने लगा ईरान, क्या है इस नारे का मतलब,जिससे दहशत में आया खलीफा?
Iran Women Protest News: खामेनेई के जबरदस्त दमन के बावजूद ईरान में फिर से विरोध विरोध प्रदर्शन की चिंगारी सुलगनी शुरू हो गई है. इस बार विरोध का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं. जिन्होंने ‘जिन, जियान, आजादी’ का नारा बुलंद कर युद्धघोष कर दिया है.
फ्रांस की नेवी की करतूत, रूसी शैडो टैंकर के भारतीय कैप्टन को हिरासत में लिया; क्यों उठाया ऐसा कदम?
फ्रांस की नेवी ने कथित तौर पर एक संदग्ध रूसी तेल टैंकर को पकड़ा है. इतना ही नहीं नेवी ने जहाज में सवार भारतीयक कैप्टन को भी हिरासत में ले लिया है. बताया जा रहा है जहाज में सवार अन्य सभी क्रू सदस्यों को जहाज में ही रखा गया है.
अमेरिका से टेक्निकल सपोर्ट हटाएगा EU! ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से आ चुका है तंग
यूरोप का ज्यादातर डेटा अमेरिकी क्लाउड सर्विसेज पर स्टोर होता है. अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों के पास यूरोप के दो-तिहाई से ज्यादा मार्केट का मालिकाना हक है, जबकि ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी अमेरिका-बेस्ड एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आगे हैं.
दुनिया शराब की लत से दूर हो रही है? बड़े ब्रैंड्स का स्टाक धड़ाम! रोकना पड़ा प्रोडक्शन
Gen Z: दुनियाभर में जेन ज़ी आबादी से जुड़ी नई-नई चीजें देखने सुनने को मिल रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के GEN Z अपनी पहले की पीढ़ी से ज्यादा सात्विक है, खासकर शराब की लत से कोसों दूर हैं. कहीं इसी वजह से लिकर बनाने वाली कंपनियों का भट्टा तो नहीं बैठ रहा, आइए जानते हैं.
पहले विष्णु मूर्ति हटाई, अब लगा दी बुद्ध प्रतिमा; क्या फिर भिड़ने जा रहे थाईलैंड-कंबोडिया?
Thailand-Cambodia News in Hindi: थाईलैंड ने कंबोडिया के साथ लगने वाले विवादित बॉर्डर पर पहले भगवान विष्णु की प्रतिमा हटाई थी. अब वहां पर गौतम बुद्ध की प्रतिमा लगा दी गई है. इस पर कंबोडिया भड़क गया है.
ना रस्सी ना जाल... ताइवान की सबसे ऊंची इमारत पर चढ़ा शख्स, 91 मिनट में किया हैरतअंगेज कारनामा
Shocking News: अमेरिकी रॉक क्लाइंबर एलेक्स होनोल्ड (40 वर्षीय) ने संडे को बिना किसी रस्सी या सेफ्टी इक्विपमेंट के ताइवान की सबसे ऊंची गगनचुंबी इमारत ताइपे 101 की चढ़ाई की. होनोल्ड ने ऐसा कर सबको हैरान कर दिया है. चलिए विस्तार से जानते हैं.
ग्रीनलैंड की राजधानी Nuuk की अचानक बत्ती गुल, ट्रंप का हमला नहीं; फिर क्या थी वजह?
Greenland: ट्रंप की बुरी नजर के चलते ग्रीनलैंड लगातार लाइमलाइट में है. ग्रीनलैंड पर कब्जे की खुली धमकी से सहमें लोगों की धड़कने उस वक्त बढ़ गईं जब अचानक राजधानी और आस-पास की बत्ती अचानक गुल हो गई. किसी बर्फीले तूफान का अलर्ट नहीं था, ऐसे में कुछ लोग अनहोनी की आशंका से सिहर उठे.
Ayatollah Ali Khamenei: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई किलेबंद बंकर में रह रहे हैं और उनके बेटे मसूद प्रशासनिक काम संभाल रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी हमले की आशंका बढ़ी है. इस बीच, ईरान ने चेतावनी दी है कि खामेनेई पर हमला युद्ध माना जाएगा.
trump on minnesota protests: मिनेसोटा में अवैध प्रवासियों और पुलिस संघर्ष के बाद भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे अरबों डॉलर की चोरी छिपाने वाला कवर अप बताया है. उन्होंने सैंक्चुअरी शहरों में फेडरल फंडिंग रोकने और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.
India spain IPOI deal: भारत ने स्पेन के IPOI में शामिल होने का स्वागत किया है, जिससे हिंद महासागर में भारत की समुद्री साझेदारी और मजबूत हुई है. यह कदम भारत के नेतृत्व पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दिखाता है और क्षेत्र में सुरक्षा व सहयोग को नया बूस्ट देता है.
अमेरिका के मिनियापोलिस में हंगामे के बीच फेडरल एजेंट्स ने ली एक और जान, तनाव बढ़ा
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की ओर से अवैध अप्रवासियों के खिलाफ चलाए जा रहे अब तक के सबसे बड़े इमिग्रेशन अभियान ने एक बार फिर हिंसक मोड़ ले लिया है। मिनेसोटा में फेडरल इमिग्रेशन अधिकारियों की गोलीबारी में 51 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई।
कनाडा में भारतीय मूल के शख्स की मौत, किसपर घूम रही है शक की सूई? पुलिस ने उठाया राज से पर्दा
Canada News: कनाडा में एक भारतीय मूल के युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई, इस हत्या के बाद दहशत फैल गई. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और उन्हें शक है कि उसकी मौत टारगेट किलिंग के दौरान हुई है.
अफगानिस्तान युद्ध को लेकर NATO से भिड़ा US, इटली की PM मेलोनी ने निकाल दी ट्रंप की सारी हेकड़ी
NATO Vs Trump: इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने अफगानिस्तान में नाटो (NATO) सहयोगियों की भूमिका पर डोनाल्ड ट्रंप के बयान की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि ऐसे दावे 9/11 के बाद नाटो की एकजुटता और इटली के सहयोग को नजरअंदाज करते हैं. मेलोनी ने नाटो सहयोगियों के योगदान और पारस्परिक सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया.
बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, हैवानों ने गैराज में सोते हुए चंचल को जिंदा जलाया
Bangladesh Violence:बांग्लादेश के नरसिंगदी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जानकारी के अनुसार, यहां 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल भौमिक को उसकी दुकान के अंदर सोते समय जिंदा जला दिया गया.
अमेरिका में बर्फीले तूफान का कहर, 20 राज्यों में इमरजेंसी घोषित
अमेरिका के बड़े हिस्से में आए भंयकर शीतकालीन तूफान ने भारी बर्फ और जमाव वाली बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई इलाकों में तापमान सामान्य से बहुत नीचे चला गया
अमेरिका की नई रक्षा रणनीति शक्ति के दम पर शांति की तलाश
अमेरिका का कहना है कि वह अपने संभावित विरोधियों के साथ एक सम्मानजनक और टिकाऊ शांति चाहता है
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, जल्द मिल सकती है मंजूरी
भारत और अमेरिका के अधिकारी प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में लगे हैं। समझौते के अधिकतर मुद्दों पर दोनों देशों की सहमति बन चुकी है
Albania News: ईरान में काफी संख्या में लोग सड़कों पर हैं, इसी बीच अल्बानिया की राजधानी तिराना में हजारों लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में सड़कों पर उतर आए हैं. यहां पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प भी हुई.
आरएमबी के अंतर्राष्ट्रीयकरण को व्यवस्थित रूप से बढ़ाता रहेगा चीन
हाल ही में चाइना मीडिया ग्रुप ने चीन के केंद्रीय बैंक के रूप में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) गवर्नर पैन कोंगशेंग का विशेष साक्षात्कार लिया।

