अमेरिका और ईरान के महायुद्ध पर ट्रंप का सबसे बड़ा ऐलान,ईरान का खेल खत्म, हमारा मिशन लगभग पूरा
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका की बड़ी चूक ,स्ट्रिप क्लब में डांसर के सामने सीक्रेट उगल रहे सैनिक
इधर ट्रंप दे रहे थे पाषाण युग में धकेलने की धमकी, उधर ईरान ने इजरायल पर दाग दीं ताबड़तोड़ मिसाइलें
अमेरिका सुप्रीम कोर्ट में जन्मजात नागरिकता पर हुई तीखी बहस, एच-1बी वीजा धारक भारतीयों में बढ़ी चिंता
मेरिकी सुप्रीम कोर्ट में स्थानीय समयानुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मजात नागरिकता समाप्त करने के उनके आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की
इंडोनेशिया में आया 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, तटीय क्षेत्रों में सुनामी की चेतावनी
इंडोनेशिया में जबरदस्त भूकंप आया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि गुरुवार तड़के पूर्वी इंडोनेशिया के तट से दूर समुद्र में 7.4 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया
ट्रंप की धमकी: समझौता न हुआ तो ईरान को भेज देंगे पाषाण युग में
ईरान के खिलाफ युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही भ्रमित दिख रहे हैं वह कभी कहते हैं कि वह ईरान के विरुद्ध अपने अभियान को खत्म कर सकते हैं तो कहीं ईरान को धमकाते दिखते हैं
नासा का आर्टेमिस-2 आज लॉन्च, 10 दिन चांद के चारों ओर सफर
नासा के चार अंतरिक्ष यात्री एक ऐसे मिशन पर रवाना होने वाले हैं, जिसमें वे चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे
कोलिन मैकडॉनल्ड बने संयुक्त राज्य अमेरिका के सहायक अटॉर्नी जनरल, जेडी वेंस ने दिलाई शपथ
संयुक्त राज्य अमेरिका में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। उन्होंने कोलिन मैकडॉनल्ड को सहायक अटॉर्नी जनरल पद की शपथ दिलाई
‘डेढ़ महीने से मुझे ‘महाराजा’ पनिशमेंट दी जा रही थी, जिसमें सिर के बल डेढ़-डेढ़ घंटे रहना होता था। एक दिन मैं बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ले रहा था। तभी एक जोरदार पंच मेरे सिर पर लगा और मैं गिर पड़ा। अफसर चिल्लाए- चेतन, उठो और लड़ो। मैंने कहा- अब नहीं लड़ पाऊंगा, सर। लेकिन उन्होंने कहा- नहीं चेतन, तुम्हें भिड़ना होगा। आखिरकार मैं न चाहते हुए भी उठा और ट्रेनिंग पूरी की। आर्मी की ट्रेनिंग ऐसे ही होती है। हालत बहुत खराब हो चुकी थी। ट्रेनिंग खत्म कर लौटते वक्त अचानक आंखों के सामने अंधेरा छा गया और मैं जमीन पर गिर पड़ा। उसके बाद मुझे कुछ याद नहीं। 8 महीने कोमा में रहा। जब होश आया, तो खुद को अस्पताल में पाया। मेरा आधा शरीर पैरालाइज्ड हो चुका था। उसके बाद में मुझे नौकरी से बाहर कर दिया गया। मेरी तरह ही ट्रेनिंग के दौरान घायल हुए अब तक लगभग 450 लोग सेना से बाहर हो चुके हैं, जिनकी जिंदगी बर्बाद हो गई।’, चेतन चौधरी बताते हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ‘ब्लैकबोर्ड’ में इस बार उन आर्मी जवानों की कहानी है, जिन्हें ट्रेनिंग के दौरान चोट लगी और अंग खराब होने पर नौकरी से बाहर कर दिया गया। चेतन अपने परिवार के साथ गाजियाबाद में रहते हैं। आर्मी में भर्ती होने के बाद उनकी ट्रेनिंग बिहार के पटना में हो रही थी, जहां उन्हें सिर में चोट लगी और उनका आधा शरीर पैरालाइज्ड हो गया। इसके बाद उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया। चार महीने पहले ही उनकी शादी हुई है। चेतन से मिलने जब मैं उनके घर पहुंचा, तो उन्होंने कहा, 'सॉरी सर, मैं आपका नाम भूल गया। आपने आने से पहले क्या नाम बताया था?’ सकुचाते हुए 27 साल के चेतन चौधरी हाथ मिलाते हुए मुझसे पूछते हैं। मैं दोबारा नाम बताता हूं, तो कहते हैं- अरे, हां याद आया! आपके आने से कुछ देर पहले तक मुझे याद था, लेकिन अचानक भूल गया। सिर में चोट लगने से कोमा में चला गया था। तब से मेरी शॉर्ट-टर्म मेमोरी यानी याददाश्त कमजोर हो गई है। अब कुछ देर पहले कही गई बातें भूल जाता हूं।’ यहां तक कि सिर की चोट से मेरी आंखों की रोशनी भी कमजोर हो गई है। इससे आपका चेहरा कैसा है, मुझे ठीक से नहीं दिखाई दे रहा है। आपसे बात करने के लिए मैंने आंख घुमाकर आपकी ओर सेट की है, तब आपको थोड़ा ठीक से देख पा रहा हूं। लेकिन अब भी आपकी दो तस्वीरें दिख रही हैं। एक तस्वीर में आप सामने बैठे हुए दिख रहे हैं तो दूसरी तस्वीर में उसी के ठीक बाई तरफ। दरअसल, आर्मी के ट्रेनिंग में एक हादसे में 8 महीने कोमा में रहा था। सिर में चोट लगने से शरीर का दाया हिस्सा और बाया पैर पैरालाइज्ड हो गया। बाए पैर से चल नहीं पाता। बेकार होने के कारण मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। मैंने पूछा- याद है कि क्या हुआ था? चेतन कहते हैं- मैं बिहार के गया में ओटीए- यानी ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में ट्रेनिंग ले रहा था। करीब चार महीने हुए थे। 26 अप्रैल 2015 की बात है। सुबह करीब 8 बजे थे। उस दिन बॉक्सिंग की ट्रेनिंग चल रही थी। मैंने उससे पहले कभी बॉक्सिंग नहीं की थी। तभी एक पंच मेरे सिर की बाईं तरफ लगा। आंखों के सामने अंधेरा छा गया। गिर पड़ा। मैंने अफसरों से कहा- अब बॉक्सिंग नहीं कर पाऊंगा, सर। अफसर दबाव डालते हुए कह रहे थे- ‘चेतन, दिस इज माय ऑर्डर, यू हैव टू फॉलो’। यानी यह मेरा आदेश है, तुम्हें मानना पड़ेगा। मै उठा और किसी तरह ट्रेनिंग पूरी की। इससे पहले करीब डेढ़ महीने तक मुझे ‘महाराजा’ पनिशमेंट दी जा रही थी- यानी रोज डेढ़-डेढ़ घंटे सिर के बल रहना होता था। इसे ट्रेनिंग का सामान्य हिस्सा माना जाता है। बॉक्सिंग खत्म होने के बाद मैं लौट रहा था कि अचानक चक्कर आया और चीखते हुए जमीन पर गिर पड़ा। साथ में चल रहे दोस्त हर्ष से कहा- ‘हर्ष, मैं मर गया… कुछ दिखाई नहीं दे रहा।’ उसके बाद मुझे कुछ याद नहीं। जब होश आया, तो तीन दिन पहले की कोई बात याद नहीं थी। उधर, 27 अप्रैल को घर पर फोन आया कि आपके बेटे की तबीयत खराब है, आप पटना आ जाइए। वह एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती है। सबसे पहले मेरे नानाजी फ्लाइट से पहुंचे, फिर मम्मी-पापा भी पहुंच गए। मैं वेंटिलेटर पर था। मम्मी मेरी हालत में देखकर जमीन पर गिर पड़ीं। कुछ देर बाद उन्हें होश आया। डॉक्टर ने बताया कि गहरी चोट की वजह से सिर के एक हिस्से में खून जम गया था, जिसे ऑपरेशन करके हटा दिया गया है। उन्होंने कहा- अगर गया में 12 घंटे के भीतर ऑपरेशन हो जाता, तो बचने की संभावना ज्यादा थी। अब 14 घंटे बाद ऑपरेशन हुआ है, इसलिए 24 से 48 घंटे में होश आ गया तो ठीक, नहीं तो आपका बेटा नहीं बचेगा। इनके शरीर का ऊपर का दाहिना हिस्सा और निचला बायां हिस्सा पैरालाइज्ड हो चुका है। यह सुनने पर परिवार के लिए एक-एक पल काटना मुश्किल हो गया। मैं घर का इकलौता बेटा था। मम्मी वहां मौजूद आर्मी अफसरों से कह रही थीं- हमने 6 फीट का हट्टा-कट्टा 17 साल का बेटा दिया था, आपने विकलांग बना दिया? अब यह पूरी जिंदगी कैसे जीएगा? सीमा पर शहीद होता, तो तिरंगे में लिपटकर घर आता, लेकिन यह तो जीते-जी मर गया? करीब 2 महीने पटना के उस अस्पताल में भर्ती रहा। पेशाब-लैट्रिंग सब बेड पर कर रहा था। पाइप के सहारे पतला खाना अंदर डाला जा रहा था। उसके बाद मुझे दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया, जहां 6 महीने रहा। इस तरह कुल 8 महीने कोमा में रहा। अक्टूबर का महीना था। व्हीलचेयर पर था। अचानक मैं कोमा से बाहर आ गया। इधर-उधर देखकर, तो सोचने लगा- मैं तो एकेडमी में था, यहां हॉस्पिटल में कैसे आ गया। चोट लगने से तीन दिन पहले की बातें ही याद थीं। मुझे परेशान देख पापा कहने लगे- बेटा, तुम्हें बहुत तेज बुखार हुआ था। इसलिए यहां लाए हैं, लेकिन समझ गया था- जरूर कुछ बड़ी घटना हुई है। बाद में धीरे-धीरे सब पता चला। उस दौरान मुझे हर रोज चार-चार इंजेक्शन लग रहे थे। एक इंजेक्शन की कीमत ढाई लाख थी। हालांकि, सारे पैसे आर्मी ही खर्च कर रही थी। लेकिन 26 अक्टूबर 2016 को आर्मी ने मुझे 100 फीसदी विकलांग माना। नौकरी से निकाल दिया।बदले में 45 हजार रुपए दे रही थी। उस समय लगा कि- मेरी जान की कीमत केवल 45 हजार रुपए लगाई गई है। उसके बाद डेढ़ साल तक बिस्तर पर रहा। इस दौरान सिर्फ 34 किलो का रह गया था। कंकाल लग रहा था। मां मुझे बिस्तर पर ही लैट्रिंग-पेशाब कराती थीं। मुझे शर्म आती थी, लेकिन वह कहती- तुम समझो कि मुझे 3 साल का दूसरा बेटा हुआ है। उसकी सू-सू, पॉटी कर रही हूं। सोचिए मां ऐसी ही होती हैं। वह अपने बच्चे की देखभाल के लिए कोई न कोई बहाना खोज लेती हैं। यह कहते-कहते चेतन की आंखें डबडबा जाती हैं। वह कहते हैं- मम्मी-पापा मेरे सामने तो कभी नहीं रोते, लेकिन छुपकर अक्सर रोते थे। चेतन अपने सिर का बाया हिस्सा दिखाने लगते हैं, जो ऑपरेशन के कारण नारियल के छिलके की तरह दो हिस्सों में नजर आ रहा है। कहते हैं- सेना में अफसर बनने गया था, लेकिन विकलांग बनकर आ गया। मेरी चार पीढ़ियां सेना में रहीं। पापा भी सेना में थे। बचपन से वर्दी देखते हुए बड़ा हुआ था। पापा चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनूं, लेकिन मेरा सपना फौज में जाने का था। 12वीं के बाद SSB यानी सर्विस सिलेक्शन बोर्ड का फॉर्म भरा और मेरा सिलेक्शन हो गया था। मुझे नहीं पता था कि इस तरह मैं उस सपने को केवल छूकर वापस लौट आऊंगा। इस बातचीत के दौरान मेरी नजर चेतन के ड्राइंग रूम की दीवारों पर गई उनकी वर्दी वाली कई तस्वीरें दिखती हैं। चेतन कहते हैं, ‘ये तस्वीरें तब की हैं मैं जब मेरे घर वाले और सभी मान चुके थे कि अब मैं सेना में अफसर बन चुका हूं। पूरा परिवार खुश था। जब थोड़ा ठीक हुआ अस्पताल से घर आया तो लेटे-लेटे सोचता- अब क्या ही जिंदगी बची है। आत्महत्या करके सारा किस्सा खत्म कर दूं! लेकिन मां-बाप का चेहरा देखकर रुक जाता था। घर पर रिश्तेदार मुझे देखने आते तो कहते- सेना में भर्ती होने के बाद वहां से कोई भला कैसे बाहर आ सकता है। नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। लेकिन हकीकत यह है कि ट्रेनिंग के दौरान इस तरह बीच में पैरालाइज्ड होने पर सेना में कोई जगह नहीं बचती। हमें मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया जाता है। अब मेरी जो हालत है, इसका कोई तो जिम्मेदार होगा ही। चोट लगने के 12 घंटे के भीतर अगर मेरी सर्जरी हो जाती, तो मैं शायद इतना ज्यादा बेकार न होता, कहते हुए चेतन का गला सूखने लगता है। सामने रखी पानी की बोतल तुरंत उनकी तरफ बढ़ा देता हूं। पानी पीकर वह कहते हैं- ज्यादा बोलने से गला सूख जाता है। गले की सर्जरी हुई है। आपको गर्दन में एक छेद दिख रहा होगा। इसकी नस काम नहीं कर रही थी। यही नहीं, हादसे के बाद तो मेरे हाथ भी बहुत कांपते थे। लगते थे कि मेरे शरीर का हिस्सा ही नहीं हैं। थेरेपी और एक्सरसाइज की बदौलत काफी ठीक हुए, लेकिन बाएं पैर से अब भी नहीं चल पाता। रोज थेरेपी लेता हूं। घुटने में सपोर्ट सिस्टम लगाता हूं, तब इस पैर से थोड़ा चल पाता हूं। आर्मी का सारा पैसा मेरे शरीर के इलाज में खर्च हो रहा है। मैं तो थोड़ा भाग्यशाली हूं कि कम-से-कम मेरी ऐसी हालत तो है, वर्ना ट्रेनिंग के दौरान ऐसे लोग भी निकाले गए हैं, जिनकी पूरी जिंदगी व्हीलचेयर पर चली गई है। मैं पढ़ने में तेज रहा हूं, इसलिए यादाश्त कम होने पर भी पढ़ाई शुरू की। दो साल पहले ही मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में मेरी नौकरी लगी है। अब जाकर पैसे की दिक्कत दूर हुई है। लेकिन आज भी मैं हर रात सेना की वर्दी वाली इस फोटो को देखता हूं। इससे बातें करता हूं कि- चेतन तुझे फिर से ठीक होकर ऐसा ही दिखना है। उसके बाद सोता हूं। शादी में क्या दिक्कत आई? मैंने तो सोच लिया था कि शादी नहीं करूंगा। जब पैरालाइज्ड पार्ट थोड़ा ठीक हुआ, नौकर लगी तब कुछ रिश्ते आए। जो भी देखने आता, शादी से मना कर देता। आखिर में मेरी बहन ने एक रिश्ता तय किया। चेतन से मिलने के बाद मैं दिल्ली के नारायणा विहार पहुंचा। मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए कैट की तैयारी कर रहे आशीष के पास। आशीष उत्तर प्रदेश के मथुरा के रहने वाले हैं। वह कहते हैं- अप्रैल 2022 में मैंने NDA की परीक्षा पास करके सेना में भर्ती हुआ था। पापा भी सेना में थे। जब मैंने नौकरी ज्वाइन की, तब लगा कि अब तो लाइफ सेट हो गई है। पापा से कहा- अब आपको नौकरी करने की जरूरत नहीं है। 18 साल आप नौकरी कर चुके हैं। वीआरएस लेकर अब घर रहिए। मेरी बात मानकर उन्होंने वीआरएस ले ली और घर पर रहने लगे। लेकिन जुलाई 2022 आते-आते सब कुछ बदल गया। मैं पुणे की आर्मी इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग ले रहा था। सेना में भर्ती हुए महज 4 महीने हुए थे। उस दिन 10 मीटर की तैराकी की ट्रेनिंग हो रही थी। जैसे ही मैंने पानी में छलांग लगाई। पानी के दबाव से मेरे दाएं कंधे की नस ऊपर की ओर खिसक गई। गंभीर रूप से घायल हो गया। मुझे पानी से निकालकर तुरंत पुणे के आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उस दौरान घर वाले फोन करते, तो कहता- सब ठीक है। हल्की चोट लगी है, जल्दी ठीक हो जाऊंगा। खैर, वहां डॉक्टर ने कंधे की सर्जरी की। इस तरह अक्टूबर तक एकेडमी में रहा। एक दिन आर्मी वालों ने कहा कि वह मुझे ट्रेनिंग से निकाला जा रहा है। उसके बाद घर वालों को बताया। मैं तो डिप्रेशन में चला गया। सोच रहा था कि यह क्या हो गया। ट्रेनिंग के दौरान सेना के लोग भले हमें अपना न मानें, लेकिन हम तो खुद को सेना का आदमी मान बैठते हैं। लेकिन सच यह है कि बिना ट्रेनिंग पूरी किए कोई सेना का नहीं होता। इस तरह मुझे सेना की नौकरी से निकाल दिया गया। पूरा घर परेशान था। उस दौरान गांव का एक लड़का लेफ्टिनेंट बनकर आया। लोगों ने फूल-माला से उसका स्वागत किया। उस दिन मुझे देखकर मेरी मां फूट-फूटकर रोई थीं। मेरा कंधा अब ऐसा हो गया कि हल्का जोर पड़े तो खिसक जाता है। गेंद नहीं फेंक सकता। न कोई भारी काम कर पाता हूं। अब तो ये हमेशा ऐसा ही रहेगा। बस एक चीज से संतोष कर लेता हूं कि चलो बाकी शरीर तो ठीक है न। इस तरह आर्मी के सपने देखते हुए मेरे 3 साल बर्बाद हो गए। वहां से आने के बाद 2025 में दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। साथ-साथ कैट एग्जाम की तैयारी कर रहा हूं। चेतन और आशीष से मिलने के बाद मैं दिल्ली के करोल बाग पहुंचा। यहां यूपीएससी की तैयारी कर रहे यश्मित कौशिक से मुलाकात हुई। यश्मित हरियाणा के बहादुरगढ़ के रहने वाले हैं। कुछ दिन पहले जब इनसे उनके गांव आकर मिलने की बात हुई थी, तब इन्होंने मना कर दिया था। यश्मित कहते हैं, ‘दरअसल गांव में मम्मी-पापा के सामने ये सारी बातें नहीं करना चाहता था। मेरे घर में तो कोई सेना में था भी नहीं। पापा टीचर थे। मैं पायलट बनना चाहता था, लेकिन कम दिखाई देने की वजह से पायलट नहीं बन पाया। ‘लक्ष्य’ जैसी देशभक्ति फिल्में देखी थी, तभी से सेना में जाने का मन हुआ था। 2021 का बात है। मैंने NDA की परीक्षा पास की और नौकर लग गई। 2 साल बीता। ढाई किलोमीटर की एक रनिंग के दौरान मेरे पैर में फ्रैक्चर आ गया। कुल्हे से सटी पैर की हड्डी टूट गई। पहले तो हेयर लाइन फ्रैक्चर था। यानि हल्का-हल्का क्रैक हुआ। मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। फिर धीरे-धीरे क्रैक ऐसा बढ़ा कि हड्डी टूट गई। अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई महीने व्हीलचेयर पर रहा। बाद में मुझे सेना से निकाल दिया गया। मेरा सपना वहीं का वहीं रह गया। पापा बार-बार समझाते हैं। कोई बात नहीं, कम-से-कम तू तो सही सलामत है। कुछ और कर लेना। जबकि अफसर होने का ख्वाब देखते हुए बड़ा हुआ था। फिलहाल, अब दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रहा हूं। सेना में अभी जो नियम है, उसके मुताबिक 4 साल की ट्रेनिंग के दौरान अगर किसी जवान का अंग गंभीर रूप से खराब हो जाए या उसकी मौत हो जाए, तो उसे मुआवजे में कुछ रुपए देकर ट्रेनिंग के बीच से ही नौकरी से निकाल दिया जाता है। वह सेना का हिस्सा नहीं माना जाता। न ही कोई सुविधा मिलती है। इस तरह अब तक लगभग 450 लोगों को बोर्डआउट यानी ट्रेनिंग के दौरान बाहर किया गया है। कई ऐसे कैंडिडेट भी हैं, जो पूरी तरह से विकलंगा हो गए हैं। इसको लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में गया है। वहां हम सभी की मांग है कि हमें सेना की तरफ से या तो पूर्वा सैनिक का दर्जा दिया जाए या सेना में ही कोई टेबल जॉब। यानी हल्की-फुल्की मेहनत वाली नौकरी। ------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड- सिर्फ पीरियड्स में नहा पाती हैं महिलाएं:कम खाती हैं, ताकि शौच न जाना पड़े; बोलीं- नमक के खेत में ही पैदा हुए, इसी में मर जाएंगे चिलचिलाती धूप में दूर तक फैला नमक का मैदान इतनी तेज चमक रहा है कि आंखों में चुभ रहा है। दूर तक कहीं छांव नहीं। अचानक एक महिला, रमिला, काम छोड़कर धीरे से कहती हैं- ‘दिन में हम शौच नहीं जाते… लोग देख लेंगे। इसलिए खाना भी कम खाते हैं… ताकि बार-बार जाना न पड़े…पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- भूख के बजाय, दवाओं के ट्रायल से मरना अच्छा:बच्चों को तो 25 लाख मिल जाएंगे; उन्हें रिसर्च के लिए खून चाहिए, हमें पैसा ‘किसे अच्छा लगता है कि वह पैसे के लिए अपनी जान की बाजी लगाए, लेकिन मुझे लगानी पड़ती है। अगर मर भी गई तो बच्चों को 20-25 लाख मिलेंगे। कम से कम उनकी जिंदगी तो बेहतर हो जाएगी। अभी तक खुद पर दवाओं के ट्रायल में 4 बार पास हुई हूं।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
बात जुलाई-अगस्त 1959 की है। जगह थी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास और सुबह का वक्त। पीएम जवाहर लाल नेहरू, उनकी बेटी इंदिरा गांधी और दामाद फिरोज गांधी नाश्ता कर रहे थे। नेहरू थोड़े परेशान लग रहे थे। फिरोज के चेहरे पर भी तनाव था, लेकिन उस वक्त की कांग्रेस अध्यक्ष इंदिरा गुस्से में थीं। फिरोज ने इंदिरा की तरफ इशारा करते हुए कहा- ‘यह बिल्कुल भी सही नहीं है। आप लोगों को डरा रही हैं। आप फासीवादी हो।’ इतना सुनते ही इंदिरा भड़क गईं। उन्होंने कहा- ‘आप मुझे फासीवादी कह रहे हैं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगी।’ वह उठकर कमरे से बाहर चली गईं। इस किस्से का जिक्र स्वीडन के लेखक और जर्नलिस्ट बर्टिल फाक अपनी किताब ‘फिरोज द फॉरगॉटन गांधी’ में किया है। दरअसल, तब नाश्ते की टेबल पर केरल, यानी अब के केरलम के सियासी हालातों की चर्चा हो रही थी। केरलम में वामपंथी सरकार बर्खास्त कर दी गई थी। फिरोज, इस फैसले के खिलाफ थे। उन्हें लगता था कि इंदिरा ने अपनी जिद पर लेफ्ट सरकार बर्खास्त की है। ये दुनिया में कम्युनिस्टों की पहली चुनी हुई सरकार थी और अब 67 साल बाद देश में इकलौता केरलम ही है, जहां वामपंथी सरकार बची है। पश्चिम बंगाल में लगातार 34 साल राज करने वाली लेफ्ट का ना कोई सांसद है ना विधायक। त्रिपुरा में 25 साल सत्ता में रही लेफ्ट आज मुख्य विपक्षी पार्टी भी नहीं बची। इलेक्शन एक्सप्लेनर में हम जानेंगे कि आखिर लेफ्ट केरलम में ही क्यों सर्वाइव कर रहा है… शुरुआत भारत में लेफ्ट के जन्म से करते हैं… 17 अक्टूबर 1920 को उज्बेकिस्तान के ताशकंद में अमेरिकी और रूसी कम्युनिस्टों ने पहली बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) बनाने का ऐलान किया। तब पहले विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन मुसलमानों के ऑटोमन साम्राज्य के टुकड़े कर चुका था। तुर्की के खलीफा, यानी मुसलमानों की सबसे बड़ी धार्मिक और राजनीतिक सत्ता खत्म हो चुकी थी। भारत में खलीफा के समर्थन में खिलाफत आंदोलन चल रहा था। जैसे ही CPI बनाने का ऐलान हुआ, खिलाफत आंदोलन से जुड़े नौजवान बड़ी संख्या में इसमें शामिल हो गए। बावजूद इसके भारतीय कम्युनिस्टों का कहना था कि पार्टी विदेश में बनी है, इसलिए आमलोग इससे नहीं जुड़ रहे। नतीजन 1925 में कानपुर में एक बार फिर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) बनाने का ऐलान हुआ। जल्द इससे गरीब और मजदूर जुड़ गए और अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए। नाराज अंग्रेजों ने 1934 में इस पर बैन लगा दिया। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ, लेकिन कम्युनिस्ट इसमें शामिल नहीं हुए। बदले में अंग्रेजों ने कम्युनिस्ट संगठनों से पाबंदी हटा ली। दरअसल, तब दूसरे विश्वुयुद्ध में कम्युनिस्टों का गढ़, यानी सोवियत संघ, ब्रिटेन के साथ मिलकर हिटलर से लड़ रहा था, इसलिए कम्युनिस्ट अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन नहीं करना चाहते थे। अब बात केरलम की… 1956 में त्रावणकोर, कोचीन और मालाबार को मिलाकर एक नया राज्य बना- केरल। मार्च 1957 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। 126 सीटों वालीं विधानसभा में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI को 60 सीट मिली। 5 निर्दलीय को मिलाकर उसने सरकार बना ली। ये दुनिया में वामपंथियों की पहली चुनी हुई सरकार थी। ईएमएस नंबूदिरीपाद ने मुख्यमंत्री बनने के एक हफ्ते बाद ही दो बड़े कानून लागू किए। पहला- भूमि सुधार कानून और दूसरा- शिक्षा में सुधार को लेकर। भूमि सुधार कानून के बाद बटाईदार किसानों को जमीन खरीदने की छूट मिल गई। लैंडहोल्डिंग की लिमिट तय हो गई। वहीं, एजुकेशन बिल के जरिए प्राइवेट संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए सख्त नियम बना दिए। दोनों कानूनों से आम लोगों का एक बड़ा वर्ग खुश था, लेकिन कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को ये बिल रास नहीं आए। केरलम के चर्च और नायर कम्युनिटी भी विरोध में उतर गए। दोनों के पास केरलम में सबसे ज्यादा स्कूल और चैरिटेबल ट्रस्ट थे। इसी बीच केरलम के स्कूल-कॉलेजों से गांधी की तस्वीर हटाकर माओ और स्टालिन की तस्वीर लगाई जाने लगीं। कहा जाने लगा कि नंबूदिरीपाद की सरकार बनाने के लिए कम्युनिस्ट देशों ने फंड भेजे हैं। केरलम के गांधी कहे जाने वाले मन्नथ पिल्लई की अगुवाई में लाखों लोग सड़कों पर उतर गए। आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। हजारों लोग जेल में डाल दिए गए। इसी बीच मछुआरे कम्युनिटी की एक प्रेग्नेट महिला की पुलिस लाठी चार्ज में जान चली गई। आंदोलन और भड़क उठा। जगह-जगह हिंसा होने लगीं। इंदिरा गांधी सहित कांग्रेस के कई लोग केरलम की कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त करना चाहते थे। उनके लिए ये आंदोलन एक मौके जैसा था, लेकिन पीएम नेहरू ऐसा करने के लिए तैयार नहीं थे। उनका मानना था कि चुनी हुई सरकार को बर्खास्त करने से दुनिया में अच्छा संदेश नहीं जाएगा। 2 फरवरी 1959 को इंदिरा गांधी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। इसके बाद वो केरलम गईं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नेहरू को सौंप दी। 31 जुलाई 1959 को केरलम सरकार बर्खास्त कर दी गई। तब कम्युनिस्ट अखबार न्यू एज ने लिखा था- ‘जवाहरलाल नेहरू आपको इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।’ 1960 में केरलम में फिर से चुनाव हुए। कांग्रेस ने इंडियन मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन कर लिया। फिरोज गांधी, इंदिरा के इस फैसले से खुश नहीं थे। उन्होंने कांग्रेस सांसदों की एक मीटिंग में कहा- ‘कांग्रेस कहां है? कांग्रेस के सिद्धांत कहां हैं? क्या कांग्रेस इतनी नीचे गिर गई है कि हम सांप्रदायिक तत्वों, जातिवादी नेताओं और उन लोगों के इशारों पर चलने लगेंगे जो लोगों में धार्मिक भावनाएं भड़काते हैं।’ हालांकि, कांग्रेस ने प्रजा सोशिलिस्ट पार्टी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन किया और चुनाव में 95 सीटें जीत ली, जबकि लेफ्ट 29 सीटों पर सिमट गई। प्रजा सोशिलिस्ट के पीए थानू पिल्लई सीएम बने, लेकिन दो साल बाद कांग्रेस ने थानू को राज्यपाल बनाकर खुद का मुख्यमंत्री बना दिया। चीन की जंग के बाद दो धड़ों में बंट गया लेफ्ट 1962 की जंग में कम्युनिस्ट पार्टी के कई नेताओं को चीन का समर्थन करने के आरोप में जेल में डाल दिया गया। उसी दौरान कम्युनिस्ट पार्टी दो धड़ों में बंट गई। चीन की नीतियों का समर्थन करने वाले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPI-M और सोवियत संघ का समर्थन करने वाले CPI बने रहे। हालांकि, 1967 के चुनाव में लेफ्ट ने फिर से सत्ता में वापसी कर ली। तब CPI-M ने 52 और CPI को 19 सीटें मिलीं। सीपीआई एम के नंबूदिरीपाद दूसरी बार सीएम बने। उसके बाद 1970 और 1978 के चुनाव में भी लेफ्ट की सरकार बनी। जनवरी 1980 में लेफ्ट ने सात दलों को मिलाकर गठबंधन बनाया, जिसे लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF कहा गया। लेफ्ट की तर्ज पर कांग्रेस ने भी एक गठबंधन बनाया, जिसे यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी UDF कहा गया। आखिर लेफ्ट का दबदबा केरलम में ही क्यों बचा है? 5 बड़ी वजहें… 1. भूमि सुधार आंदोलन : भूमिहीन किसान और मजदूर लेफ्ट की तरफ शिफ्ट हो गए सीनियर जर्नलिस्ट नवीन जोशी बताते हैं- ‘लेफ्ट की सरकार ने गरीब और मजदूरों को राशन के बजाय जमीन का टुकड़ा दिया। कमाने का जरिया दिया। आय के संसाधनों पर हिस्सेदारी दी। इससे उनका झुकाव लेफ्ट की तरफ हो गया और आज भी वे उससे जुड़े हुए हैं।’ 2. ट्रेड यूनियन बनाकर लेफ्ट ने लाखों मजदूरों को वोटर बना लिया 3. आइडियोलॉजी के बजाय पावर और पैसे के जरिए पॉलिटकल मैनेजमेंट केरलम के सीनियर जर्नलिस्ट कैलाश के मुताबिक… 4. मुफ्त शिक्षा और प्राइवेट स्कूलों को भी सरकारी फंड देना 5. लेफ्ट और कांग्रेस के बीच लड़ाई, कोई तीसरा विकल्प नहीं पॉलिटिकल एक्सपर्ट और केरलम यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी प्रोफेसर जयप्रसाद के मुताबिक… केरल में तीसरा मोर्चा यानी बीजेपी के नहीं आने की एक वजह 30% आबादी वाली मुस्लिम कम्युनिटी भी है। दरअसल, उत्तर भारत की तरह केरल में मुस्लिम आक्रांता के रूप में नहीं आए। यहां वे कारोबारी बनकर आए थे। इसलिए यहां उत्तर भारत की तरह हिंदू-मुस्लिम पॉलिटिक्स नहीं हो पाती। यहां ध्रुवीकरण मुश्किल है। लेफ्ट के लिए इस बार का चुनाव मुश्किल क्यों हैं? 3 बड़ी वजह… 1. लोकसभा के हिसाब से 111 पर UDF आगे, LDF को महज 18 पर बढ़त 2. लोकल चुनावों में लेफ्ट वाले LDF को 30-35% तक नुकसान 3. तीसरे मोर्चे के रूप में बीजेपी की बढ़ती सेंधमारी पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर जयप्रसाद बताते हैं- ‘अब कांग्रेस और लेफ्ट का ट्रेडिशनल फॉर्म कमजोर पड़ रहा है। कम्युनिस्ट के बड़े-बड़े नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी और कांग्रेस में जा रहे हैं। उनके खिलाफ करप्शन के चार्ज हैं। मुस्लिम माइनोरिटी कांग्रेस की तरफ जा रही है। ऐसे में इस बार का चुनाव लेफ्ट के लिए बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।’ ***** इलेक्शन एक्सप्लेनर से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… बंगाल में 5% वोट बढ़े, तो बीजेपी नंबर-1 बनेगी:मुस्लिम एकजुट हुए, तो असम फिसल जाएगा; 5 राज्यों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 5% वोटर खिसके, तो बीजेपी नंबर-1 पार्टी बन सकती है। लेकिन अगर असम के 34% मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिमंता बिस्व सरमा की सरकार का लौटना मुश्किल हो जाएगा। अगले 30 दिनों में भारत के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इलेक्शन एक्सप्लेनर में जानेंगे आखिर इन पांचों प्रदेशों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा है…पूरी खबर पढ़िए…
पाकिस्तान : नौकरी में आरक्षण लागू न होने से बढ़ी बेरोजगारी और भेदभाव से ट्रांसजेंडर समुदाय परेशान
पाकिस्तान के फैसलाबाद में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने भेदभाव और 'ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अधिनियम 2018' के सही ढंग से लागू नहीं होने पर चिंता व्यक्त की है
कराची में बेटियां भी सुरक्षित नहीं, अपहरण और जबरन शादी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
पाकिस्तान के कराची में ईसाई समूहों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। उन्होंने देश भर में अपने समुदाय की नाबालिग लड़कियों के साथ जबरदस्ती शादी और धर्म-परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई
शिकागो,अप्रैल2026–हयात होटल्स कॉर्पोरेशन ने आज भारत में अपने बिज़नेस के विस्तार के अगले पड़ाव के तहत विकास चावला की नियुक्ति की घोषणा की है। उन्हें‘प्रेसिडेंट – भारत और दक्षिण-पश्चिम एशिया‘की नई और महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। यह नियुक्ति1अप्रैल2026से प्रभावी होगी। यह नया पद हयात की भारत में तेज़ी से विस्तार करने और अपने ब्रांड ... Read more
ईरान से सीजफायर की गुहार, ट्रंप बोले– होर्मुज स्ट्रेट खुलने तक नहीं समझौता!
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से संघर्ष विराम को लेकर बड़ा दावा किया है। 'नए शासन के राष्ट्रपति' की गुजारिश और 'सीजफायर' की शर्त को लेकर एक बार फिर अपने ट्रुथ सोशल पर बयान दिया है
अमेरिकी पत्रकार को अगवा कर क्या ईरान ने लिया बदला? इराक के जिस संगठन पर शक वो है IRGC का समर्थक
मंगलवार को अज्ञात हमलावरों ने पत्रकार शेली किटल्सन का अपहरण कर लिया। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और अपहरणकर्ताओं की तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
ईरान में क्रूर शासन के खिलाफ हमारे संघर्ष की दहाड़ पूरी दुनिया सुन रही : नेतन्याहू
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि मेरे भाइयों और बहनों, इजरायल के नागरिकों, इस स्वतंत्रता के पर्व की पूर्व संध्या पर इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत है
ईरान संघर्ष पर राष्ट्र को संबोधित करेंगे राष्ट्रपति ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं
होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर अपनी नीति बदल सकता है अमेरिका, ट्रंप ने दिए संकेत
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर अमेरिका अपनी नीति बदल सकता है
अमेरिकी हमलों से कमांड ढांचे में संकट, मुश्किल में ईरानी सेना: पीट हेगसेथ
अमेरिका ने कहा कि ईरान के खिलाफ उसका चल रहा सैन्य अभियान देश की सशस्त्र सेनाओं को कमजोर कर रहा है। ईरानी सेना का मनोबल गिर रहा है, सैनिक भाग रहे हैं और अहम कर्मियों की कमी हो रही है
क्रीमिया में बड़ा विमान हादसा: एएन-26 क्रैश, 29 की मौत
बुधवार सुबह रूस के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि क्रीमिया में रूसी सेना का एक एएन-26 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 6 चालक दल के सदस्य और 23 यात्रियों की मौत हो गई
20 मार्च, 1942 को केरलम के कोझिकोड के चेल्लापुरम में दत्तोपंत ठेंगड़ी ने 12 स्वयंसेवकों के साथ RSS की पहली शाखा शुरू की थी। अब ये बढ़कर 5 हजार हो चुकी हैं। 84 हजार लोग रोज आते हैं। 2 लाख एक्टिव मेंबर्स हैं। फिर भी राजधानी तिरुवनंतपुरम में BJP का एक मेयर जिताने में RSS को 84 साल लग गए। और सिर्फ एक साल पहले ही त्रिशूर सीट से BJP के पहले सांसद सुरेश गोपी जीत पाए। 9 अप्रैल को केरलम में विधानसभा चुनाव के लिए 140 सीटों पर वोटिंग है। RSS और BJP के लिए केरलम चैलेंज बना हुआ है। BJP का दावा है कि इस राजनीतिक हिंसा में 300 से ज्यादा स्वयंसेवकों-कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई। इसके बाद भी पार्टी का वोट परसेंट तो बढ़ रहा है, लेकिन सीटों में कन्वर्ट नहीं होता। क्या इस बार RSS की 5 हजार शाखाएं BJP के लिए कमाल कर पाएंगी, पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… ‘पति का हाथ काटकर फेंक दिया था, हमने बदला ले लिया’RSS के लिए केरलम में सबसे बड़ा चैलेंज राजनीतिक हिंसा रहा है। ये हिंसा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI (M), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया यानी SDPI और कांग्रेस के कैडर के साथ होती रही है। कोझिकोड में RSS के मेन ऑफिस में एक पूरी दीवार पर इन लोगों की फोटो लगी हैं। इन्हीं में से एक हैं, 2017 में हिंसा का शिकार हुए राजेश। आरोप है कि CPM के 15 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने राजेश का मर्डर कर दिया था। उन पर 40 से ज्यादा वार किए और एक हाथ काट दिया। तिरुवनंतपुरम के श्रीकारयम् में हम राजेश की पत्नी रीना से उनके घर पर मिले। शाम के करीब 6 बजे पहुंचे। रीना उल्लूर में स्मृति ईरानी और प्रकाश जावड़ेकर की चुनावी सभा में जाने की तैयारी कर रही थीं। पति का जिक्र होते ही रीना रोने लगती हैं। वे बताती हैं, ‘राजेश कदांबली में शाखा से लौटे थे। दूध लाने की बात कहकर घर से निकल गए। CPM के गुंडों ने उन्हें बहुत बेरहमी से मारा। मेरे दो बेटे हैं, घरों में छोटा-मोटा काम करके उन्हें पढ़ा रही हूं। हमने यहां (वार्ड में) उन्हें हराकर पति की हत्या का बदला ले लिया है।’ श्रीकारयम् में काफी कुछ बदल चुका है। 3 महीने पहले हुए कॉर्पोरेशन के चुनाव में रीना के वार्ड से BJP की स्वाति पार्षद चुनी गई हैं। रीना के मुताबिक, अब मोहल्ले में RSS की रेगुलर शाखा लग रही है। इस विधानसभा सीट से BJP ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरलीधरन को कैंडिडेट बनाया है। रीना उनकी जीत को लेकर कॉन्फिडेंट हैं। इसी घर में राजेश के माता-पिता भी रहते हैं। मां बताती हैं, ‘बेटे की मौत से पति को गहरा सदमा लगा। वे बेहोश हो गए। अब भी कुछ देर में सब भूल जाते हैं।’ बगल में बैठे राजेश के पिता कहते हैं, ‘मुझे TV से पता चला कि बेटे की मौत हो गई। केंद्र सरकार हमें पेंशन देना चाहती है, लेकिन CPM सरकार ने सब अटका दिया। हमें बार-बार परेशान कर रही है।’ ‘राजेश को मार दिया, लेकिन शाखा बंद नहीं करा पाए’राजेश का CPM के लोगों से शाखा को लेकर विवाद हुआ था। अब ये शाखा इडावाकोड चला रहे हैं। वे कहते हैं, ‘राजेश की वाइफ रीना को कोई मदद नहीं मिली। बच्चों को पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है। कई बार खाने के पैसे नहीं होते।’ इडावाकोड आगे बताते हैं, ‘शाखा अब भी शाम को 7:30 से 8:30 बजे तक लगती है। इसमें 22 लोग आते हैं। RSS के लोग रीना के परिवार की मदद करते हैं। बच्चों को फ्री ट्यूशन पढ़ाते हैं। CPM सरकार अब भी बदला ले रही है। ओणम पर बिजली-पानी काट दिया था। BJP की पार्षद बनी, तो 15 दिन तक पानी नहीं आया।’ केरलम में इस बार RSS और BJP कितने कॉन्फिडेंट 3.61 करोड़ आबादी वाले केरलम में करीब 53% आबादी हिंदू हैं। हम ग्राउंड पर RSS के लिए काम कर रहे लोगों को ढूंढते हुए संगठन से जुड़े अखबार जन्मभूमि के दफ्तर पहुंचे। यहां RSS के केरलम नॉर्थ प्रांत के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों से मिले। दोनों से साफ कह दिया कि यहां हुई बातें अनऑफिशियल ही होंगी। हमारे नाम का कहीं जिक्र नहीं होगा। चुनाव से जुड़ी तैयारियों के सवाल पर बोले, ‘हम यहां सरकार बनाने नहीं, जगह बनाने के लिए लड़ रहे हैं। हमारा फोकस 20 से 25 सीटों पर है] जहां हमने पिछले सालों में मजबूती से पैर जमाए हैं। इनमें 7 से 10 सीटों पर जीत की संभावना दिख रही है।’ ‘25% हिंदू वोटर्स हमारे, ईसाइयों को भी जोड़ना होगा’RSS के पदाधिकारी बताते हैं, ‘संघ केरलम में हमेशा से मजबूत है। यहां 50% वोटर्स हिंदू हैं। 25% BJP के समर्थक हैं। बाकी 25% CPM के हैं। यही हमारे लिए चैलेंज है।’ RSS इतना मजबूत है, तो BJP स्ट्रगल क्यों कर रही है? इस पर वे कहते हैं, ‘संघ आइडोलॉजी के लेवल पर लोगों को जोड़ चुका है। चुनाव जीतने के लिए हमें 25 में से करीब 15% वोट और जोड़ने होंगे। हिंदू तो जुड़े ही हैं, लेकिन क्रिश्चियन वोट भी हमारे लिए अहम है।’ ‘क्रिश्चियन और मुस्लिम हमेशा से कांग्रेस के वोटर रहे हैं। अभी हुए कॉर्पोरेशन चुनाव में हमारे कई क्रिश्चियन उम्मीदवार जीते हैं। हम यहां क्रिश्चियन परिवारों तक पहुंच रहे हैं और उन्हें राष्ट्र प्रेम के बारे में बता रहे हैं। हमारा लक्ष्य एक लाख परिवारों तक पहुंचना है।’ BJP ने 31 मार्च को अपना संकल्प पत्र जारी किया है। इसके जरिए भी क्रिश्चियन वोट साधने की कोशिश की गई है। संकल्प पत्र में कहा गया है कि साल में दो बार LPG सिलेंडर पर सब्सिडी मिलेगी। ये सब्सिडी ओणम और क्रिसमस पर मिलेगी। एक्सपर्ट बोले- BJP को जीतने में 10 साल से ज्यादा लगेंगेRSS को करीब से समझने वाले सीनियर जर्नलिस्ट कैलाश भी संघ के पदाधिकारियों के दावे को सही मानते हैं। वे कहते हैं, ‘केंद्र में BJP के आने से धीरे–धीरे माहौल बदल रहा है, नेचुरली BJP का वोट शेयर बढ़ रहा है।’ ‘यहां संघ के इफेक्टिव नहीं होने के पीछे वजह है कि ये धार्मिक तौर पर सेंसेटिव स्टेट है। कम्युनिस्ट का ट्रेंड रहा है। अब हिंदु एकजुट हो रहे हैं। मुस्लिम भी एक तरफ जा रहे हैं। क्रिश्चियन का एक धड़ा BJP की तरफ खिसक रहा है। कई क्रिश्चियन इंटेलेक्चुअल RSS और BJP से जुड़े हैं। हालांकि, जिस स्पीड से ये सब हो रहा है, अभी BJP को केरलम जीतने में 10 साल से ज्यादा लग जाएंगे।’ BJP की पहली मेयर बोलीं- CPM दंगा कराना चाहती हैतिरुवनंतपुरम में हमारी मुलाकात BJP पार्षद स्वाति से हुई। वे सिर्फ 25 साल की हैं। दिसंबर में हुए कॉर्पोरेशन चुनाव में जीत के बाद राज्य में BJP का प्रमुख चेहरा बन गई हैं। स्वाति बताती हैं, ‘ये जीत ऐसे ही हासिल नहीं हुई। मैं चुनाव से पहले हर घर गई। हर परिवार को 6 से 7 बार काॅल किया। पीएम की योजनाओं को घर-घर पहुंचाने के वादे ने भी लोगों का समर्थन दिलाया।’ विधानसभा चुनाव में कौन जीतेगा, इस सवाल पर स्वाति कहती हैं, ‘हमारी सीट काराकोटम है। पूरी उम्मीद है कि BJP उम्मीदवार मुरलीधरन जीत जाएंगे। समर्थन बढ़ता देख CPM यहां धार्मिक इश्यू पैदा कर रही है। वे हिंदु-मुस्लिम को लड़ाना चाहते हैं। चुनावी सभाओं में कह रहे हैं कि BJP वाले मुस्लिमों की हत्या कराते हैं।’ तिरुवनंतपुरम BJP ऑफिस- रील्स, मीम्स, मैसेज और वीडियोज स्वाति से बातचीत के बाद हम तिरुवनंतपुरम में BJP के दफ्तर पहुंचे। BJP के नेशनल जनरल सेक्रेटरी और केरलम प्रभारी विनोद तावड़े यहां डेरा डाले हुए हैं। महाराष्ट्र से कुछ विधायक भी आए हैं, जो 24 घंटे चुनाव की वर्किंग में शामिल हैं। हर फ्लोर पर यंग प्रोफेशनल्स काम करते नजर आ रहे हैं। तीसरे फ्लोर पर पार्टी का सोशल मीडिया वॉर रूम है। टीम के इंचार्ज युवराज बताते हैं, ‘इस काम में हमारा मुकाबला कोई नहीं कर सकता। हम लगातार रील्स, मीम्स, मैसेज, वीडियो सोशल मीडिया पर भेज रहे हैं। मैं केरलम BJP में युवा मोर्चा का पदाधिकारी भी हूं। तिरुवनंतपुरम की 3 सीटों पर हमें जीत पक्की लग रही है।’ इस दफ्तर से 5 किमी दूर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का ऑफिस है। कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी है। उनके लिए मछली–चावल और रसम तैयार है। कोल्लम जिले से आए कार्यकर्ता प्रदीप बताते हैं, ‘46 साल से BJP में हूं। इस बार कम से कम 15 सीटें तो मिलेंगी। अब हम पहले की तरह CPM से नहीं डरते हैं।’ हमने इस मसले पर राजीव चंद्रशेखर से भी बात की। वे कहते हैं, ‘पहले यहां BJP कमजोर थी, इसीलिए RSS को CPM के वायलेंस का सामना करना पड़ा। काफी लोग शहीद हुए।’ पार्टी की तैयारियों पर वे कहते हैं, ‘सभी 140 सीटों पर चुनाव लड़ने और जीतने का टारगेट है।’ ‘केरलम में टू-पार्टी सिस्टम खत्म हो रहा, मोदी के आने से कांग्रेस की साख कम हुई’ केरल यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर जयप्रसाद का मानना है कि राज्य में टू-पार्टी सिस्टम खत्म होता दिख रहा है। वे कहते हैं, ‘मोदी प्रधानमंत्री बने तो दो बातें हुईं, कांग्रेस की साख कम हुई और स्टेट की पार्टियों की पॉपुलैरिटी घट गई।' 'पहले यहां 95% वोट LDF और UDF में बंट जाता था। अब BJP का 15% वोट पक्का है। पिछले चुनाव में करीब 20% हो गया था। लेफ्ट ढलान की तरफ है, नेता पुराने हो चुके हैं। नए नेता नहीं हैं। कांग्रेस और मुस्लिम लीग का भी यही हाल है। लोगों को लीडर नहीं नजर आ रहा।’ जयप्रसाद आगे कहते हैं, ‘केरलम में हर सीट पर 25 से 34% मुस्लिम BJP के लिए सबसे बड़ा चैलेंज हैं। CPM और कांग्रेस इसी वोट को BJP की हार के लिए एकजुट रखते हैं। क्रिश्चियन कम्युनिटी 18 से 20% हैं, ये कांग्रेस के वोटर हैं, लेकिन अब BJP की तरफ झुक रहे हैं। इस बार BJP को 22 से 25% वोट शेयर आने की संभावना है।’ ……………………………….केरलम चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए 46 लाख कुडुंबश्री दीदियां लेफ्ट की वोटर, कैसे सेंध लगाएगी BJP केरलम सरकार की कुडुंबश्री योजना से 46 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, यानी राज्य के हर दूसरे घर में एक कुडुंबश्री मेंबर है। ये महिलाएं बिजनेस तो चलाती ही हैं, साथ में चुनाव लड़ती भी हैं और हार-जीत तय भी करती हैं। 2021 में चुनाव जीतने वाले गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF को 48% महिलाओं ने वोट दिए थे। BJP इनमें सेंधमारी की कोशिश कर रही है। पढ़िए पूरी खबर...
‘शादी के बाद मुझे बेटा नहीं हो रहा था। ससुराल में ताने मिलते थे। तंग आकर मैं कैप्टन बाबा के पास गई। अप्रैल, 2022 से दिसंबर 2024 तक नासिक में उसके ऑफिस जाती रही। बाबा ने गारंटी दी कि तंत्र-पूजा से सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने मुझे तांबे के लोटे से पानी पिलाया और कुछ खाने को दिया। थोड़ी देर बाद मेरा सिर घूमने लगा और शरीर सुन्न पड़ गया। इसी का फायदा उठाकर बाबा ने मेरा रेप किया और बोला- मैं शिव का अवतार हूं, मेरे साथ संबंध बनाकर तुम पवित्र हो गई हो।’ यह आपबीती 36 साल की उस पीड़िता की है, जिसकी शिकायत पर नासिक पुलिस ने अशोक कुमार खरात उर्फ ‘कैप्टन बाबा’ को गिरफ्तार किया है। दैनिक भास्कर ने जांच के लिए बनी SIT की एक अफसर से बात की। उन्होंने बताया कि इस मामले में नरबलि दिए जाने का शक है। अभी जांच चल रही है। खरात 1 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में है। SIT को पता चला है खरात ने 150 से ज्यादा महिलाओं का शोषण किया है। पढ़िए जांच टीम को अब तक क्या-क्या मिला है। 150 महिलाएं, 10 FIR, ऑफिस-प्रॉपर्टी सील, लेनदेन की जांच कर रही पुलिस18 मार्च को नासिक पुलिस ने अशोक खरात को अरेस्ट कर लिया। SIT के मुताबिक, उसने 150 से ज्यादा महिलाओं का शोषण किया है। एक पीड़िता ने बताया कि खरात पूजा के वक्त धार्मिक पत्थर बताकर चिंचोका बेचता था। मराठी में इमली को चिंच और उसके बीज को चिंचोका कहते हैं। खरात इनके बदले 10 हजार से 1 लाख रुपए तक लेता था। पुलिस ने खरात का ऑफिस और प्रॉपर्टी को सील कर दिया है। बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। उनके पैसों के लेन-देन की जांच की जा रही रही है। पहली विक्टिमजादूई पानी दिया, संबंध बनाए, प्रेग्नेंट होने पर अबॉर्शन करायाइस विक्टिम ने नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है। उसके मुताबिक, वह फरवरी 2020 से 18 मार्च 2026 तक अशोक खरात के संपर्क में थी। खरात ने उसे अपने ऑफिस बुलाया था। तांबे की बोतल में जादूई पानी पीने को दिया। फिर धार्मिक रस्म की आड़ में 6 साल तक शारीरिक संबंध बनाए। वह प्रेग्नेंट हुई, तो खरात ने हर्बल दवा बताकर गोलियां खिलाईं। इससे उसका अबॉर्शन हो गया। पीड़िता ने बताया है कि अशोक खरात कहता था कि अगर वह धार्मिक रस्म नहीं करेगी, तो ठीक होने के बजाय वह और उसका परिवार मुश्किल में पड़ जाएंगे। दूसरी विक्टिमप्रेग्नेंसी के दौरान बुलाया, शरीर पर यूरिन फेंका, पूजा के नाम पर रेप कियाशिकायत के मुताबिक, बाबा ने नवंबर 2023 से दिसंबर 2025 तक प्रेग्नेंसी के दौरान धार्मिक अनुष्ठान के बहाने नासिक ऑफिस में बुलाया। इस दौरान खरात ने पेट-सीने पर हाथ फेरा। अपना यूरिन छिड़का। पूजा के नाम पर प्राइवेट पार्ट को छुआ और फिर रेप किया। विक्टिम ने विरोध किया तो बाबा ने जान से मारने की धमकी दी। तीसरी विक्टिमबाबा बोला- मेरे पास दिव्य शक्ति, छूने से ठीक हो जाओगीसरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज तीसरी FIR में विक्टिम ने बताया, ‘12 अक्टूबर, 2024 की सुबह करीब 11 बजे मैं पति के साथ अशोक खरात से मिलने उसके ऑफिस गई थी। बाबा ने पति को बाहर भेज दिया। समस्या बताने पर हाथ में काला पत्थर घुमाकर कान में मंत्र पढ़े। सिर और पीठ पर हाथ फेरा। इसी दौरान बाबा ने सीने पर छुआ। मैं घबराने लगी तो बाबा बोला कि डरो मत, तुम मेरे यहां हो। मेरे पास दिव्य शक्ति है। मेरे छूने से तुम ठीक हो जाओगी। मैंने तुम्हें पवित्र कर दिया है।’ चौथी विक्टिम‘मैं शिव का अवतार, तुम्हें पवित्र कर दूंगा, मना किया तो नाग डस लेंगे’पीड़िता बताती हैं, ‘जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच अशोक खरात ने कई बार रेप किया। फोन पर धमकी देता था। कहता था कि मैं शिव का अवतार हूं। मेरे पास दिव्य शक्ति हैं। मैं तुम्हें पवित्र कर दूंगा। अगर तुमने मना किया तो तुम्हारे बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा। उन्हें नाग डस लेंगे। उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।’ मर्चेंट नेवी से रिटायरमेंट, गांव में बनाया ‘कैप्टन बाबा’ का मंदिरअशोक खरात नासिक के कहांडलवाडी गांव का रहने वाला है। उसने BSc तक पढ़ाई की। फिर मर्चेंट नेवी में 22 साल तक कैप्टन के पद पर काम किया। नौकरी के बाद 2010 में घर लौट आया। आसपास के इलाके में उसकी छवि रिटायर्ड अधिकारी जैसी थी। केस की जांच के लिए बनी SIT में शामिल एक अफसर बताते हैं, ‘लौटने के बाद अशोक ने मीरगांव तालुका के पास 20 एकड़ जमीन खरीदी। यहां उसने देवस्थान बनवाया, जिसे ईशान्येश्वर महादेव मंदिर नाम दिया। 2016-17 तक ये मंदिर नासिक का तीर्थ बन गया। हर सोमवार और शिवरात्रि पर भीड़ जुटने लगी। खरात का मंदिर होने की वजह से लोग उसे कैप्टन बाबा का मंदिर बोलने लगे।’ ‘मंदिर की वजह से अशोक खरात की पॉपुलरिटी भी बढ़ने लगी। चंदा आने लगा, तो खरात ने और जमीनें खरीदीं। नासिक के कनाडा कॉर्नर इलाके में 'ओक्स प्रॉपर्टीज' नाम से दफ्तर खोला। यहीं वो लोगों का भविष्य बताता था। समस्या दूर करने के लिए पूजा-अनुष्ठान करवाने लगा।’ पुलिस के मुताबिक, खरात के गलत कामों का खुलासा 17 मार्च, 2026 को हुआ, जब 35 साल की एक महिला ने उसके खिलाफ केस दर्ज करवाया। उसने आरोप लगाया कि खरात ने दैवीय शक्तियों का दावा करके भरोसा जीता। समस्या दूर करने के लिए ऑफिस बुलाया। फिर नशीला पानी पिलाकर रेप किया। सरकार से मिले सवा करोड़ रुपए, चंदे से बनाया 18 करोड़ का फार्महाउस18 मार्च को अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में बताया था कि अशोक खरात के पास 40 करोड़ 87 लाख रुपए की संपत्ति है। 2017-18 में ईशान्येश्वर देवस्थान के डेवलपमेंट के लिए 25 लाख रुपए का सरकारी फंड दिया गया था। इससे पहले राज्य सरकार ने 1.05 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। आसपास के लोग दावा करते हैं कि खरात ने मंदिर में आने वाले दान और फंडिंग से मीरगांव में 16 एकड़ में आलीशान फार्महाउस बनवाया। इस पर 18 करोड़ रुपए खर्च हुए। यहां छुट्टियों में आता था। पुलिस के मुताबिक, खरात के नासिक वाले दफ्तर में भी लोगों की लंबी लाइन लगती थी। उसके भक्तों में सरकारी अधिकारी, नेता, डॉक्टर और बड़े बिजनेसमैन शामिल थे। CM-मंत्रियों के आने से रुतबा बढ़ा, एकनाथ शिंदे ने गोशाला के लिए दान दियामहाराष्ट्र के सीनियर जर्नलिस्ट वरुण सिंह कहते हैं, ‘ईशान्येश्वर देवस्थान में हाईप्रोफाइल लोग दर्शन के लिए जाते थे। नवंबर 2022 में CM रहते हुए एकनाथ शिंदे भी आए थे। उनके साथ पत्नी लता शिंदे, राजस्व मंत्री रहे राधाकृष्ण विखे पाटिल और प्राथमिक शिक्षा मंत्री रहे दीपक केसकर भी थे। शिंदे ने मंदिर की गोशाला के लिए दान भी दिया था। मुख्यमंत्री के आने से अशोक खरात का रुतबा और बढ़ गया।’ ‘महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रहीं रूपाली चाकंकर खरात ट्रस्ट की नामित सदस्य हैं। बाबा की गिरफ्तारी के कुछ घंटों के भीतर ही उनकी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इसमें रुपाली खरात के पैर पर सिर रखकर प्रणाम कर रही हैं। एक फोटो में वे खरात के लिए छाता पकड़े हुए थीं।’ सोर्स ये भी बताते हैं कि शिवसेना लीडर दीपक केसरकर ने अशोक खरात के भाई दिलीप को फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्कूलों और कॉलेजों के लिए सरकारी मंजूरी लेने में मदद की थी। सरकारी वकील बोले- केमिकल देकर दिमाग कंट्रोल करता था खरातखरात के वीडियो वायरल होने के बाद विक्टिम और उनके परिवार वाले सामने नहीं आ रहे हैं। उसके खिलाफ FIR दर्ज कराने वाली महिला के एक रिश्तेदार ने हमें पीड़ित पक्ष के वकील एमवाई काले का नंबर दिया। काले नासिक कोर्ट में सरकारी वकील हैं। वे दावा करते हैं कि खरात दैवीय शक्ति का झूठा दावा और केमिकल देकर महिलाओं के दिमाग पर कंट्रोल करता था। वो महिलाओं को हिप्नोटाइज और टॉर्चर करता था। जांच में सामने आया है कि उसने मोबाइल और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क से डेटा डिलीट कर दिया है। अब जांच का मुख्य हिस्सा उसकी पर्सनल चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिलीट वीडियो रिकवर करना होगा। खरात ने एक CA की मदद से करीब 100 करोड़ रुपए दुबई भेजे थे। ये CA गिरफ्तारी के डर से खरात के खिलाफ गवाही दे सकता है। जांच अधिकारी बोले- पूजा की आड़ में नरबलि देने का भी शकमामले की जांच रही SIT के सीनियर ऑफिसर किरण कुमार सूर्यवंशी के मुताबिक, ‘खरात के पास मिले कारतूसों में से कुछ खोखे गायब हैं। जांच की जा रही है। हमें ये भी शक है कि आरोपी ने कुछ रस्मों में नरबलि दी हो। खरात खुद को सिद्ध पुरुष बताकर धोखा दे रहा था। नकली सांप और बाघ का इस्तेमाल करके डर पैदा करता था। कस्तूरी का इस्तेमाल कर रहा था। उस पर शक है कि उसने वाइल्डलाइफ एक्ट का भी उल्लंघन किया है।’ हमने खरात पर लगे आरोपों पर उनके वकील सचिन भाटे से भी बात की। उन्होंने मामला कोर्ट में होने का हवाला देकर कुछ कहने से इनकार कर दिया। …………………………. ये रिपोर्ट भी पढ़ें क्या मुख्तार अंसारी की मौत के पीछे 5 करोड़:2 साल बाद भी बैरक नंबर-16 सील मुख्तार को गुजरे 2 साल हो गए। परिवार अब भी केस लड़ रहा है। 172 दिन चली जांच में मुख्तार की मौत की वजह हार्ट अटैक को बताया गया। कानूनी प्रक्रिया की वजह से जेल में मुख्तार के कपड़ों से लेकर बैरक तक, सब सील है। उनके बड़े भाई और गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी भी मौत को सरकार और जेल प्रशासन की मिलीभगत मानते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
‘जो जमीन आपने पसंद की है, उसकी कीमत 15 करोड़ 60 लाख है। नेता को 50 हजार प्रति कट्टा और माफिया को 30 हजार प्रति कट्टा देना होगा।’ ‘यानी साढ़े छह बीघा जमीन पर नेता को 1 करोड़ और माफिया को 40 लाख देना होंगे। इसके बाद कोई तकलीफ नहीं होगी। सिंडिकेट सब संभाल लेगा’ यह खुलासा भास्कर के हिडन कैमरे पर सिंडिकेट माफियाओं ने किया है। अधिकतर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस यानी TMC से जुड़े हैं। हालांकि, शुभेंदु अधिकारी, अर्जुन सिंह, बैशाली डालमिया, रुद्रनील घोष जैसे जिन TMC नेताओं पर पहले BJP सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाती थी, वो अब BJP में ही शामिल हो चुके हैं। 4 नेता और 4 माफिया भास्कर के कैमरे पर बात करते हुए रिकॉर्ड हुए। भास्कर रिपोर्टर ने कंसल्टेंसी कंपनी का मेंबर बनकर सिंडिकेट से जुड़े लोगों से मुलाकात की। 'जमीन पसंद करो, बाकी हम संभाल लेंगे' पहली मुलाकात : राजू पाल ये कौन हैं : मोगरा ग्राम-2, हुगली की प्रधान के पति हैं। TMC के सक्रिय कार्यकर्ता हैं रिपोर्टर: कोलकाता में स्कूल खोलने के लिए जमीन चाहते हैं राजू पाल: कितनी चाहिए रिपोर्टर: 5 बीघा राजू पाल: ठीक है, आप नंबर दे जाइए। 4-5 जगह दिखा देंगे। जो पसंद आए, उसी के मालिक से बात करवा देंगे रिपोर्टर: पेपर सही रहेगा राजू पाल: बिल्कुल सही रहेगा रिपोर्टर: सुना है यहां सिंडिकेट सिस्टम भी मैनेज करना होता है राजू पाल: वो हमारे ऊपर छोड़ दीजिए। सिंडिकेट के लोग हमारे साथ हैं रिपोर्टर : उन्हें क्या देना पड़ता है राजू पाल : सब बता देंगे, पहले जमीन पसंद कीजिए। यहां सिंडिकेट के मालिक को ‘चाचा’ कहते हैं रिपोर्टर : उन्हीं के जरिए काम होगा राजू पाल : बिल्कुल, जहां जमीन पसंद आएगी, वहीं से सब होगा अन्य व्यक्ति: जो बिल्डर को चाहिए, वो सब मिलेगा राजू पाल : चाचा का ईंट भट्ठा है, ईंट, सीमेंट, पत्थर, सब मिलेगा ‘यहां पूरा कंट्रोल हमारा है, कोई दिक्कत नहीं’ दूसरी मुलाकात : देवराज पाल ये कौन हैं : बांसबेड़िया में TMC के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रहे, अभी एक्टिव मेंबर राजू के साथी सूरज ने जमीन दिखाई। फिर राजू मिला और मोगरा में सिंडिकेट चलाने वाले देवराज पाल के ऑफिस ले गया। राजू ने बातचीत में कहा कि वे सभी एक ही सिंडिकेट का हिस्सा हैं और देवराज पाल इस इलाके में सिंडिकेट चलाता है। राजू पाल : सिंगूर में आपको दिक्कत हो रही है, यहां नहीं होगी। हम सब सिंडिकेट के आदमी हैं। देवराज सिंडिकेट के मालिक हैं, और ‘चाचा’ हेड हैं रिपोर्टर : ठीक है देवराज पाल : कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा। यहां पूरा कंट्रोल है जमीन पसंद आने की बात कहकर हमने सिंडिकेट चार्ज और निर्माण प्रक्रिया समझी… रिपोर्टर : काम शुरू होगा तो सिंडिकेट सिस्टम कैसे चलेगा राजू पाल : पॉलिटिकल और सिंडिकेट चार्ज हम संभाल लेंगे रिपोर्टर : कितना देना होगा राजू पाल : 25 लाख रुपए रिपोर्टर : इसमें सब शामिल रहेगा राजू पाल : हां, सब कुछ रिपोर्टर: क्या निर्माण सामग्री सिंडिकेट से ही लेनी होगी राजू पाल: हां, जो चाहिए, बालू, गिट्टी सब हम देंगे सूरज सिंह: ठेकेदार भी हमारा ही है, बाहर से कराओगे तो खर्च बढ़ेगा राजू पाल: देवराज भैया ठेकेदार हैं रिपोर्टर: अगर हम अपना ठेकेदार रखें राजू पाल: तब पूछना पड़ेगा। लेकिन माल सिंडिकेट से ही लेना होगा रिपोर्टर: अगर सिंडिकेट से माल नहीं लिया तो सूरज सिंह: आपका कोई काम नहीं होगा राजू पाल: एक गाड़ी बालू भी नहीं मिलेगी रिपोर्टर: पेमेंट कैसे होगा राजू पाल: 25 लाख कैश में देना होगा। हमारे ऊपर भी एक बॉस है, जो पूरे जिले को देखता है रिपोर्टर : कौन राजू पाल: ‘केडी’ नाम चलता है राजू पाल: वो तय करता है किसे टिकट मिलेगा, कौन आगे जाएगा 'नेता और माफिया दोनों को मैं कंट्रोल करता हूं' तीसरी मुलाकात : सुब्रत दास ये कौन हैं : नदिया दक्षिण यूथ तृणमूल कांग्रेस एक्सटेंडेड कमिटी के जिला सचिव होटल प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने की बात कहकर हम सुब्रत से मिले… रिपोर्टर: हमें करीब 5 बीघा जमीन चाहिए, फ्रंट अच्छा हो और मेन रोड पर हो सुब्रत दास: कल्याणी मोड़ के पास एक जमीन है, करीब साढ़े छह बीघा, 80 फीट फ्रंट रिपोर्टर: हम होटल-रिजॉर्ट बनाना चाहते हैं, बजट का कोई इश्यू नहीं अन्य व्यक्ति: आप यहां होटल बनाएंगे तो AIIMS के डॉक्टर भी रुकेंगे, फायदा होगा रिपोर्टर: यहां सिंडिकेट कैसे चलता है सुब्रत दास: यहां भी बाहुबली और नेता मिलकर सिंडिकेट चलाते हैं अन्य व्यक्ति: सुब्रत भैया जिले के यूथ सेक्रेटरी हैं, सब मैनेज हो जाएगा सुब्रत दास: आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, पॉलिटिकल और लोकल दोनों हम संभाल लेंगे अन्य व्यक्ति: यहां जो माफिया राज है, सब भइया के अंडर है सुब्रत दास: नेता और माफिया दोनों को मैं कंट्रोल करता हूं जमीन दिखाने के बाद जब हमने कुल खर्च पूछा तो सिंडिकेट और नेताओं को देने वाली रकम का खुलासा हुआ रिपोर्टर : जमीन की कीमत सुब्रत दास: करीब 15 करोड़ 60 लाख रिपोर्टर: सिंडिकेट का कितना सुब्रत दास: नेता को 50 हजार प्रति कट्टा, माफिया को 30 हजार प्रति कट्टा (करीब साढ़े छह बीघा जमीन पर यह रकम लगभग 1 करोड़ रुपए बैठती है, जो कैश में देनी होगी) रिपोर्टर: माफिया का काम क्या होता है सुब्रत दास: कोई डिस्टर्बेंस होगा तो माफिया संभालेगा, जरूरत पड़ी तो मारपीट भी रिपोर्टर: नेताओं को क्यों देना पड़ेगा सुब्रत दास: यह TMC का जमाना है, जो पावर में रहेगा उसे देना पड़ेगा। MLA, MP सब शामिल हैं रिपोर्टर: अगर नहीं दें तो सुब्रत दास: काम रुकवा देंगे, लेबर भगा देंगे, डिस्टर्बेंस करेंगे रिपोर्टर: क्या हम अपना माल खुद ला सकते हैं सुब्रत दास: नहीं, लोकल से ही लेना पड़ेगा। हम बताएंगे किससे लेना है रिपोर्टर : पेमेंट कैसे होगा सुब्रत दास: सब कैश में होगा। 50% रजिस्ट्रेशन के समय। बाकी काम शुरू होने पर '10 लाख लूंगा, सारे झमेले संभालूंगा' चौथी मुलाकात : एमडी जाकिर ये कौन हैं : टीएमसी कार्यकर्ता और सिंडिकेट ऑपरेटर जाकिर से उसके घर पर मुलाकात हुई। हमने होटल के लिए जमीन की बात छेड़ी। बातचीत में जाकिर सिंडिकेट से दूरी बनाता दिखा, लेकिन उसके साथी ने साफ कर दिया कि नेता और सिंडिकेट एक ही हैं। एमडी जाकिर: इस एरिया में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी रिपोर्टर: नेता या सिंडिकेट साथी: नेता और सिंडिकेट सब एक ही है एमडी जाकिर: वो नेता भी है और सिंडिकेट भी साथी: यहां का नेता भी जाकिर दा और सिंडिकेट भी वही है रिपोर्टर: मतलब जाकिर दा खुद सिंडिकेट हैं एमडी जाकिर: आपको प्रॉब्लम नहीं होगा बाद में जाकिर ने जमीन से जुड़े किसी भी झमेले को संभालने के लिए 10 लाख रुपए मांगे। एमडी जाकिर: टोटल साढ़े पांच बीघा लैंड है, 10 लाख लगेगा रिपोर्टर: किसको देना है एमडी जाकिर: मैं ही सब संभालूंगा अब तक तीन ऐसे लोगों से मुलाकात हो चुकी थी, जो नेता भी हैं और सिंडिकेट का हिस्सा भी। इससे साफ हुआ कि यह सिस्टम बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं। 'थाना-विधायक सब को पैसा जाएगा' पांचवी मुलाकात : बिभाकर प्रसाद उर्फ मोनू ये कौन है : सिंडिकेट ऑपरेटर, स्थानीय विधायक से रिश्तेदारी का दावा किया बिभाकर: होटल लाइन के लिए जमीन हो जाएगी रिपोर्टर: रेट क्या है? बिभाकर: 3 बीघा रेडी प्रॉपर्टी 10 करोड़ बिभाकर: खर्चा 50 लाख पड़ेगा रिपोर्टर: किस बात का बिभाकर: थाना, लोकल, एमएलए सब रिपोर्टर: सिंडिकेट कौन देखता है बिभाकर: हम ही रिपोर्टर: पैसा कैसे देना होगा बिभाकर: कैश में रिपोर्टर: अगर अपना कॉन्ट्रैक्टर लाएं बिभाकर: पूरे कंस्ट्रक्शन बजट का 10% देना पड़ेगा रिपोर्टर: नहीं दिया तो बिभाकर: डिस्टर्ब होगा… यहां 200 रुपए में मर्डर हो जाता है बिभाकर ने यह भी दावा किया कि स्थानीय विधायक उसका रिश्तेदार है (भास्कर इसकी पुष्टि नहीं करता) इसके बाद हम बामनगाछी पहुंचे, जहां हुसैन अली, मासूम अली और मफिजूल इस्लाम से मुलाकात हुई। ये तीनों सिंडिकेट ऑपरेटर हैं। मासूम अली: लैंड सिंडिकेट का है हुसैन अली: हम सिंडिकेट के मेम्बर हैं रिपोर्टर: सिंडिकेट को क्या देना होगा हुसैन अली: प्रोजेक्ट का 2% रिपोर्टर: इसके अलावा हुसैन अली: बालू, पत्थर, गिट्टी हमसे ही लेना होगा रिपोर्टर: पैसा कैसे जाएगा हुसैन अली: कैश में रिपोर्टर: पैसा किसे जाता है मफिजूल इस्लाम: छोटे से बड़े तक… एमएलए तक जाता है रिपोर्टर: सिस्टम कैसे बना मफिजूल इस्लाम: नेता लोग बनाया… सीधे नहीं ले सकते, सिंडिकेट से जाता है मफिजूल के मुताबिक, कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले सिंडिकेट से परमिशन जरूरी है। एक बार परमिशन मिल जाए तो पुलिस, प्रशासन या नेता कोई दखल नहीं देता। जांच में यह भी सामने आया कि ये लोग भले आधिकारिक तौर पर पार्टी में पद पर न हों, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े हैं। सिंडिकेट से जुड़े सप्लायर्स से माल खरीदने का दबाव कोलकाता के दमदम इलाके में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने वाले एक प्रॉपर्टी डीलर कहते हैं, ‘सिंडिकेट सिस्टम केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल में अलग-अलग लेवल पर है।’ ‘इस सिस्टम की वजह से बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टरों पर यह दबाव बनाया जाता है कि वे निर्माण सामग्री केवल सिंडिकेट से जुड़े सप्लायरों से ही खरीदें। अगर कोई कॉन्ट्रैक्टर ऐसा करने से इनकार करता है, तो उससे एकमुश्त बड़ी रकम देने के लिए कहा जाता है।’ ‘इसलिए कॉन्ट्रैक्टर की लागत काफी बढ़ जाती है। फिर बिल्डर को प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ानी पड़ती है, इसका असर खरीदारों पर पड़ता है।’ डीलर ने यह भी बताया कि ‘सिंडिकेट के इस पूरे तंत्र में किसी एक राजनीतिक दल का वर्चस्व नहीं होता बल्कि जिस इलाके में जिसका प्रभाव है, वहां उसका सिंडिकेट काम करता है।’ सिंडिकेट वाले नेता ही अब BJP में शामिल हो रहे सीनियर जर्नलिस्ट गौतम लाहिरी कहते हैं कि, ‘जो भी सरकारी स्कीम्स हैं, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना इसका फायदा कोई तभी ले सकता है, जब वे लोकल सिंडिकेट के साथ मिलकर काम करे। वरना आपको स्कीम का फायदा ही नहीं मिल सकेगा। सिंडिकेट के लोग ही इलेक्शन के वक्त वोटर्स को बुलाने, बूथ पर हंगामा करने, कहीं–कहीं बोगस वोट डलवाने जैसे काम करते हैं।’ ‘कई ऐसे नेता हैं, जिन पर सिंडिकेट राज के आरोप लगे और अब वो बीजेपी में शामिल हो गए। टीएमसी ने कई नेताओं पर एक्शन भी लिया है। जैसे, पार्थ चटर्जी को इस बार टिकट नहीं दिया। कोलकाता में छोटे व्यापारियों को भी लोकल लीडर्स को हफ्ता देना पड़ता है। सिंडिकेट में सीधे पैसा नहीं लिया जाता बल्कि सामान और सर्विस लेने के लिए मजबूर किया जाता है।’ एक लाख से ज्यादा कंपनियां बंगाल में रजिस्टर्ड हुईं टीएमसी प्रवक्ता प्रदीप्त मुखर्जी कहते हैं कि, ‘2020 से पहले जिन नेताओं पर बीजेपी सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाती थी, उनमें से कई आज खुद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। शुभेंदु अधिकारी इनमें बड़ा नाम हैं।’ ‘कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय के मुताबिक, ममता बनर्जी के कार्यकाल में एक लाख से ज्यादा कंपनियां बंगाल में रजिस्टर्ड हुईं। अगर कोई केवल आरोप लगाना चाहता है तो वह अलग बात है, लेकिन जो लोग डेटा के आधार पर बात करना चाहते हैं, उन्हें सामने आना चाहिए।’ वहीं बीजेपी के मीडिया पैनलिस्ट सजल घोष कहते हैं, ‘आप घर में एक टॉयलेट बनाओ या एक प्रेयर रूम, अपनी मर्जी से ईंट, बालू, गिट्टी नहीं खरीद सकते। ममता दीदी कहती हैं, जो सिंडिकेट करेगा वो टीएमसी में नहीं रहेगा, लेकिन वही लोग विधायक, मेयर, चेयरमैन बन रहे हैं।’ कॉन्क्लूजन : भास्कर की पड़ताल में पता चलता है कि, पश्चिम बंगाल में जमीन खरीदनी हो, निर्माण करना हो या बिजनेस शुरू करना हो, सिंडिकेट का साथ जरूरी है। निर्माण सामग्री से लेकर सुरक्षा और काम रुकवाने-चलवाने तक पूरा सिस्टम इसी नेटवर्क के हाथ में है। सरकार सिंडिकेट सिस्टम खत्म करने की बात जरूर कहती है, लेकिन ग्राउंड रियल्टी इससे अलग है। ………………………………. आप ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं आपको ट्रेन का तत्काल टिकट क्यों नहीं मिलता:ये 5वीं फेल गैंग की करामात, सरगना बेल पर; IIT वाले अफसरों के पास भी इसका इलाज नहीं अवैध सॉफ्टवेयर्स से ट्रेनों के तत्काल टिकट बुक हो रहे हैं। एक आम यात्री जितनी देर में IRCTC ऐप पर डिटेल भर पाता है, उससे भी कम वक्त में ये सॉफ्टवेयर टिकट बुक कर देते हैं। 25 से 30 सेकंड्स में एक टिकट बुक हो जाती है। फिर इन टिकट्स को 300 से 500 रुपए तक का कमीशन लेकर बेचा जाता है। फेस्टिवल टाइम में कमीशन चार गुना तक हो जाता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…।
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का सख्त रुख, ईरान को खुली चेतावनी
अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा कि वॉशिंगटन पहले ही ऐसे कदम उठा चुका है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट को चालू रखा जा सके, भले ही ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी हो
बलूचिस्तान में 30 से अधिक हमलों में मारे गए पाकिस्तानी सेना के कई सैनिक : बीएलए
बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दावा किया कि उसने बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ 30 से अधिक समन्वित हमले किए, जिनमें कई सैनिकों की मौत हुई और कई अन्य घायल हो गए
सफा ने अपने बयान में ‘न्यूक्लियर विंटर’ (परमाणु हमले के बाद वैश्विक जलवायु पर पड़ने वाला गंभीर प्रभाव) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा इस खतरे को दुनिया के सामने लाने की कोशिश है, ताकि समय रहते इसे टाला जा सके।
महायुद्ध के बीच इजरायल बोला भारत है बेहतरीन मध्यस्थ, ईरान ने भी अमेरिका से बातचीत को मारी ठोकर
होर्मुज जलडमरूमध्य खोले बिना ईरान से जंग खत्म करेंगे ट्रंप, नेतन्याहू और अरब देशों ने बढ़ाई टेंशन
ट्रंप का दावा: जल्द पता चल जाएगा कि ईरान के संसद अध्यक्ष अमेरिका के साथ काम करना चाहते हैं या नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा है कि करीब एक हफ्ते में यह साफ हो जाएगा कि ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं या नहीं
लेबनान में यूएन शांतिसैनिकों पर हमला: फ्रांस के विदेश मंत्री ने की इजरायल की कड़े शब्दों में निंदा
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने इजरायल की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि लेबनान के नकौरा क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना (यूएनआईएफआईएल) के साथ “गंभीर घटनाएं” हुई हैं
ईरान युद्ध का बिल अरब देशों से वसूलेंगे ट्रंप?
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अरब देशों से ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इजरायल युद्ध से जुड़े खर्चों को उठाने में मदद मांगने में काफी दिलचस्पी रखेंगे
सुबह करीब 10 बजे का वक्त। मिट्टी से लिपा-पुता एक कच्चा घर। बाहर सिर मुंडाए दो महिलाएं बैठी हैं। उम्र करीब 38-40 साल। ऊपरी बदन लगभग नंगा। बाकी शरीर पर नाम मात्र के कपड़े। छाती छिपाने के लिए मोतियों और कौड़ियों से बनी मालाएं। गले में एल्युमीनियम के ढेर सारे छल्ले भी। हाथों में अंगूठी और कानों में दो अलग-अलग तरह की बालियां। ये हैं बोंडा सुमदाय की महिलाएं। मैं मनीषा भल्ला दैनिक भास्कर की खास सीरीज ‘हम लोग’ में लाई हूं इसी बोंडा समुदाय की कहानी। मैं पहुंची हूं दिल्ली से 1700 किलोमीटर दूर ओडिशा के बोंडा हिल्स… अब सिर्फ 9,200 बोंडा लोग बचे हैं। इनसे मिलने पर पाबंदी है। सरकार को डर है कि घुलने-मिलने से बोंडा संस्कृति खत्म न हो जाए। बेहद जरूरी होने पर ही इनसे मिलने की परमिशन मिलती है। सो मैं बोंडा डेवलपमेंट एजेंसी के ऑफिस पहुंच गई। ये दफ्तर गांव की शुरुआत में ही है। बोंडा प्रोजेक्ट हिल्स के प्रोजेक्ट मैनेजर शशिकांत समांतारे से मिली। उन्होंने लक्ष्मी नाम के एक शख्स को मेरे साथ कर दिया। कह तो वो ये रहे थे कि लक्ष्मी मेरी मदद करेंगे, लेकिन वो मुझ पर नजर रख रहे थे। लक्ष्मी गांव की तरफ चलते हुए बताते हैं कि- ‘10 साल पहले तक बोंडा महिलाएं बिना कपड़ों के रहती थीं। सिर्फ प्राइवेट पार्ट एक छोटे से कपड़े से ढक लेती थीं, जिसे रिंगा कहते हैं। ऊपरी हिस्से पर केवल मोतियों की माला पहनती थीं।’ हम गांव में घुसे ही थे कि चिकनी मिट्टी से खिलौने बनाते बच्चे नजर आने लगे। हमें देखते ही हंसने लगे। शायद उन्हें मेरा पहनावा अजीब लग रहा था। मैं कार्गो पैंट और टीशर्ट जो पहने थी। सुबह का वक्त था, कई महिलाएं घर के बाहर झाड़ू लगा रही थीं। मेरे साथी लक्ष्मी ने एक कोने की तरफ इशारा किया और बोले- ‘कल रात यहीं गांव की लड़कियां डांस कर रही थीं। लड़के देख रहे थे। इस दौरान कुछ लड़कों ने लड़कियों को पसंद कर लिया। हमारे यहां शादियों की शुरुआत ऐसे ही होती है। डांस करती लड़कियों को लड़के पसंद करते हैं। अपनी पसंद परिवार को बताते हैं। फिर उनका परिवार शराब की बोतल, चूड़ी और अंगूठी लेकर लड़की के घर पहुंचता है। शादी का प्रस्ताव रखता है, लेकिन लड़की वाले इनकार कर देते हैं। लड़के वाले दोबारा आते हैं। लड़की वाले फिर मना कर देते हैं। ये सिलसिला डेढ़ साल तक चलता है। आखिरकार एक दिन लड़के वाले लड़की के घर आते हैं और उसका पूरा घर तहस-नहस कर देते हैं। तब जाकर लड़की वाले शादी के लिए हामी भरते हैं। सुनने में ये थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये सब रिवाज है, कोई दुश्मनी नहीं। आखिर लड़के वाले, लड़की के परिवार को मुर्गी, सुअर और बकरी देकर रिश्ता पक्का कर देते हैं।’ ‘इसके बाद शादी कैसे होती है?’ मैंने पूछा ‘हमारे यहां बारात दूल्हे के घर की महिलाएं लेकर जाती हैं, मर्द नहीं। गीत गाती, नाचती ये महिलाएं पैदल लड़की के घर पहुंचती हैं। लड़की को शादी का जोड़ा पहनाती हैं। ये जोड़ा भी लड़के वालों की तरफ से ही आता है। फिर ये महिलाएं लड़की को अपने साथ घर ले आती हैं। जब लड़की ससुराल की चौखट पर पहुंचती है, तो पुरोहित उसी चौखट पर मुर्गी की बलि देता है। मुर्गी के खून से पुरोहित लड़की और लड़के का तिलक करता है। यहीं पर लड़की की एक छोटी सी परीक्षा होती है। उसे चावल पकाकर पूरे परिवार को खिलाना होता है। इसके बाद से दुल्हन शादीशुदा मानी जाती है और उसे बहू का दर्जा मिल जाता है।’ एक घर के बाहर एक महिला और पुरुष बैठे बात कर रहे हैं। हाव-भाव से लग रहा है कि पति-पत्नी हैं। पत्नी की उम्र ज्यादा और पति की कम लगा रही है। मैंने लक्ष्मी को उनसे मिलवाने का इशारा किया। महिला का नाम है सोगी। मैंने सोगी से पूछा, ‘ये आपके पति हैं?’ जवाब मिला ‘हां’ लेकिन इनकी उम्र तो आपसे काफी कम लग रही है? सोगी मुस्कुराईं और बोलीं- ‘मेरा पति मुझसे आठ साल छोटा है। हमारे यहां 10 साल के लड़के की शादी कर दी जाती है, लेकिन लड़की की उम्र कम से कम 18 साल होती है। हर रिश्ते में जरूरी है कि लड़की, लड़के से बड़ी हो। इसकी वजह तो किसी को नहीं मालूम, लेकिन यही नियम है। आज तक किसी ने इसे नहीं तोड़ा है।’ बोंडा लोग हिंदी या उड़िया नहीं जानते। इनकी भाषा रेमो है। इन्हें हिंदी में केवल एक वाक्य बोलना आता है कि पैसा दे, पैसा दे। इन्हें पता लग गया है कि बाहरी इनके गांव आकर तस्वीरें खींचते हैं। फिर उससे पैसा कमाते हैं। इसलिए फोटो खींचने या वीडियो बनाने पर आपको हर बोंडा को पैसे देने होते हैं। गांव में मिट्टी और घास-फूस से बने कुल 1900 घर हैं। सरकारी योजना के तहत इनमें से 1200 घरों को ढहाकर नए पक्के घर बनाए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार ने दो-दो लाख रुपए दिए हैं। जगह-जगह मलबा और बल्लियां रखी हुई हैं। एक घर के बाहर महिला झाड़ू लगा रही है। मैं उनसे मिलने पहुंची तो उन्होंने घर के अंदर आने के लिए कहा। महिला का नाम है चुनकी धंधमाझी। वो मुझे अपनी रसोई में ले गईं। पूरी तरह से मिट्टी से लिपी हुई एकदम साफ-सुथरी रसोई। यहां मिट्टी के कई चूल्हे बने हैं। दो पर दाल, सब्जी और एक पर चावल पक रहा है। पास में सिर्फ तेल, नमक और मिर्च रखे हैं। दीवार पर कुछ पॉलिथीन टंगी हैं। बोंडा समुदाय के घरों में ऐसी एक बड़ी रसोई के अलावा सिर्फ एक कमरा होता है। इनके घरों में बिस्तर नहीं होते, कपड़े और बर्तन भी गिने चुने। चुनकी से मैंने बोंडा महिलाओं की पहनावे के बारे में पूछा। वो बताने लगीं कि ‘मोतियों और कौड़ियों की जो माला वे पहनती हैं उसे लुबैदक कहते हैं। एल्युमीनियम के छल्लेनुमा गहने को उसुन्गु कहते हैं। चुनकी बताती हैं कि ‘महिलाओं के इस तरह से सजने संवरने के पीछे कहते हैं कि एक बार माता सीता नहा रही थीं। बोंडा समुदाय के लोग उन्हें देखकर हंसने लगे। नाराज सीता ने उन्हें हमेशा वस्त्रहीन रहने का श्राप दे दिया। ये सुनते हो बोंडा लोग माफी मांगने लगे। तब माता सीता ने अपनी धोती फाड़कर एक छोटा सा टुकड़ा महिलाओं को दिया। ये कपड़ा महिलाओं के निचले हिस्से को ढकने के लिए था। जिसे ये लोग रिंगा कहते हैं।’ बात करते हुए चुनकी चूल्हे पर खाना बना रही हैं। चूल्हे के ठीक ऊपर लकड़ी का एक छोटा झूला टंगा है। इस पर यह लोग मांस भूनते हैं। फिलहाल इस पर बींस भुन रही है। रसोई से अंदर की तरफ एक बड़ा कमरा है। जिसमें पलंग पर धान, छोटे-छोटे टमाटर, प्याज, चावल रखे हैं। पास ही एल्युमीनियम के पतीले में भात यानी पका चावल रखा है। एक मटके में भी कुछ रखा है। पूछने पर चुनकी बोलीं- ‘इसमें मंडिया है।’ चखा तो एकदम खट्टे दही जैसा लगा। दरअसल, मंडिया इनका स्थानीय अनाज है जिसे पानी में नमक और हल्दी डालकर पकाया जाता है। इसे ये लोग चावल के साथ खाते हैं। चुनकी बताती हैं कि भात, गाय का मांस, सुअर का मांस और बींस की सब्जी हमारा पारंपरिक खाना है। यहां से मेरे साथी लक्ष्मी मुझे अपने घर ले गए। पहुंचते ही मेरे सामने शराब रख दी। बोले- ये हमारी अपनी बनाई शराब है। मेहमानों को यही पिलाते हैं। ये शराब एक खास तरह के बर्तन में दी। ये बर्तन डाल पर ही सूखी हुई लौकी से बना है। इसे चखा तो स्वाद चावल की मांड़ जैसा थोड़ा कड़वा और खट्टा लगा। ये सलभ नाम के पेड़ के पत्तों के रस से बनती है। एक ही कुल में शादी पाप मानी जाती है। अगर कोई अपने ही कुल में शादी कर ले तो उसे समाज से बेदखल कर देता है। जुर्माने के तौर पर एक गाय या बैल और कुछ पैसे भी देने पड़ते हैं। शादी के बाद अगर लड़की किसी लड़के को छोड़ दे, तो उसके परिवार पर जुर्माना लगाया जाता है। लड़का अगर लड़की को छोड़ दे तो उसे भी यही सजा दी जाती है। परिवार की मर्जी के बिना अपनी जाति से बाहर शादी करने पर लड़का-लड़की को समाज से बाहर कर दिया जाता है। कुछ समय बाद मामला दोबारा देख कर जुर्माना लगाया जाता है। उन्हें गांव में दावत देनी पड़ती है। तब जाकर समाज में शामिल किया जाता है। हालांकि, उनके हाथ से खाना-पानी नहीं लिया जाता, सिर्फ सूखा अनाज ही स्वीकार होता है। अब ये परंपराएं धीरे-धीरे बदल रही हैं।' बोंडा समुदाय की अपनी अदालत है। एक पेड़ के नीचे पत्थरों से बना प्लेटफॉर्म है, जहां यह स्थानीय झगड़े सुलझाते हैं। लक्ष्मी के घर में ही बोंडा समुदाय के रघुनाथ सीसा मिले। वो बताते हैं कि 'हमारे यहां मृत्यु के बाद जलाने का रिवाज है। मौत के बाद एक या दो महीने के बाद पूरे गांव को भोज दिया जाता है, जिसमें चावल और गौ-मांस खिलाया जाता है। इसे एकोस्याह कहते हैं। बोंडा समुदाय के त्योहार यहां की रौनक हैं। फसल कटने के बाद पूस का त्योहार जनवरी में आता है। उस दिन नए कपड़े खरीदे जाते हैं। बींस की सब्जी, पहाड़ और पेड़ों की पूजा की जाती है। पूजा में किसी प्रकार की कोई मूर्ति नहीं होती है। बल्कि अपने पुरखों को याद किया जाता है। उस दिन पारंपरिक डांस मेमे भी किया जाता है। इस त्योहार को अन्नूआल झातिमारा कहते हैं। इस त्योहार को पुरानी दुश्मनी खत्म करने के लिए मनाया जाता है। सबसे पहले गांव का पुरोहित देवता को मुर्गी समेत कुछ पक्षियों की बलि देता है। अनाज और शराब चढ़ाई जाती है। उसके बाद लोग एक-दूसरे से अपनी दुश्मनी खत्म करते हैं। सभी एक-दूसरे को सलभ पेड़ की शाखा से मारते हैं। इतना मारते हैं कि पिटने वाले का खून निकल आए और उनका सारा गुस्सा उतर जाए। गुस्सा निकलने के बाद एक-दूसरे को गले लगाते हैं। फिर महिलाएं उनके घावों पर हल्दी लगाती है। ये लोग हर साल एक पाठखंडा यात्रा निकलते हैं। यह बोंडा समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार है। जिसमें तलवार की पूजा की जाती है। ये तलवार सौ साल पुरानी होती है। इसे पुराने बरगद के पेड़ में छिपाकर टांगा जाता है। ताकि किसी को दिखे ना। हर साल पुजारी ही उसे नीचे उतारता है। फिर इससे बकरे की बलि दी जाती है और तलवार की पूजा की जाती है। यह तलवार इन लोगों के पूर्वजों की है। तलवार की पूजा में हमेशा ओडिशा के जेपोर राज घराने के लोग शामिल होते हैं। माना जाता है कि ये लोग जेपोर के राजा के सिपाही थे। बीते साल जेपोर के राजा इनकी यात्रा में शामिल होने के लिए आए थे। इस दिन बोंडा समुदाय के 12 गांव के लोग इकट्ठा होते हैं। मेमे डांस भी किया जाता है। इसी तरह से अक्टूबर-नवंबर में डंगर पूजा होती है, जिसमें मुर्गी की बलि दी जाती है। दो अंडे फोड़े जाते हैं। अगर घर में किसी के साथ कुछ बुरा हो जाए तो डुमा पूजा करते हैं। इसमें घर के अंदर मिट्टी की एक आकृति बनाई जाती है। जो उनके किसी पूर्वज की होती है। इस आकृति में आत्मा बुलाते हैं और उसकी पूजा करते हैं। आत्मा को बींस, सुअर और गाय के मांस का भोग लगाते हैं। बोंडा समुदाय के ये लोग ओडिशा के मलकानगिरी जिले से 85 किलोमीटर दूर बोंडा हिल्स पर रहते हैं। पहाड़ों पर बसे इस गांव में ये लोग कांगो, काजू, स्ट्रॉबेरी, आम, बांस, फूल झाड़ू, कटहल और आंवला की खेती करते हैं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए ऐसे ही अनोखे वांचू लोगों की कहानी…. ---------------------------------------------------- 1- 100 किलो का पत्थर उठाया, लड़की बोली- तुमसे करूंगी शादी:औरतें 5 पति भी रख सकती हैं, 1800 अनोखे ‘टोडा’ लोगों की कहानी सुबह की हल्की धुंध अभी पहाड़ियों से हटी नहीं है। घास पर जमी ओस चमक रही है। मैदान के किनारे जंगल में एक पुराने पेड़ के नीचे लोग जमा हुए हैं। इसी पेड़ के नीचे एक बड़ा इम्तिहान होने वाला है। पूरी कहानी यहां पढ़ें
शुरुआत बिंदू की कहानी से। तिरुवनंतपुरम के पल्लीचल गांव में रहने वाली बिंदू की शादी 16 साल की उम्र में हो गई थी। ससुराल में खाने के भी लाले थे। बिंदू पढ़ी-लिखी थीं। बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगीं। पहली कमाई 10 रुपए थी। धीरे-धीरे कमाई बढ़ी, तो बिंदू संस्कृत से ग्रेजुएशन करने लगीं। वहीं उनके आचार्य ने आयुर्वेद बिजनेस का आइडिया दिया। बिंदू ने सास से एक हजार रुपए उधार लिए। केरलम सरकार की कुडुंबश्री योजना से मदद ली और काम शुरू कर दिया। ये 2006 की बात है। अब बिंदू अपनी कंपनी चलाती हैं। 3 से 4 लाख रुपए महीने का बिजनेस है। 40 से ज्यादा देशों के लोग उनसे बिजनेस मॉडल समझने आ चुके हैं। सब उन्हें दीदी बुलाते हैं। बिंदू मानती हैं कि उनकी लाइफ कुडुंबश्री ने बदली है। केरलम सरकार की इस योजना से 46 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, यानी राज्य के हर दूसरे घर में एक कुडुंबश्री मेंबर है। ये महिलाएं बिजनेस तो चलाती ही हैं, साथ में चुनाव लड़ती भी हैं और हार-जीत तय भी करती हैं। कुडुंबश्री में लेफ्ट का दबदबा, विजयन को दूसरी बार सत्ता दिलाई2021 में चुनाव जीतने वाले गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF को 48% महिलाओं ने वोट दिए थे। ये मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की सत्ता में वापसी की बड़ी वजह मानी गई। नवंबर 2023 से नवंबर 2025 में देश के 15 राज्यों में चुनाव हुए हैं। इनमें से 10 में महिलाओं को पैसे देने वाली कैश स्कीम लागू की गईं या वादा किया गया। 10 में से 9 राज्यों में योजना कारगर रही। मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा, झारखंड, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, ओडिशा में महिलाओं के लिए हर महीने पैसे वाली स्कीम लाने वाली पार्टियों को एकतरफा जीत मिली। केरलम की 140 सीटों के लिए 9 अप्रैल को वोटिंग होनी है। यहां कुडुंबश्री गेमचेंजर हो सकती है। अब तक इस बिजनेस मॉडल पर लेफ्ट का कब्जा था, लेकिन अब कांग्रेस और BJP भी सेंधमारी कर रही हैं। बिंदू की कहानी से समझिए कुडुंबश्री कितनी अहमबिंदू की आयुराज इंडस्ट्री के नाम से आयुर्वेद कंपनी है। वे 15 तरह के प्रोडक्ट बेचती हैं। 5 प्रोडक्ट ब्राह्मी के हैं, जिसमें हेयर ऑयल, फेसवॉश, शहद, जैम, मिक्स पैक शामिल हैं। बिंदु केरलम में आयुर्वेद आइकाॅन बन चुकी हैं। कुडुंबश्री से जुड़ी महिलाओं को ट्रेनिंग देने जाती हैं। 2012, 2014, 2016 में राज्य और केंद्र सरकार से बेस्ट आंत्रप्रेन्योर अवॉर्ड मिला है। आयुर्वेद पर किताब लिख रही हैं। बिंदू बताती हैं, ‘पहली बार ब्राह्मी ऑयल बनाकर फ्री में पड़ोसियों को दिया था। उन्हें बहुत पसंद नहीं आया। तभी पता चला कि तिरुवनंतपुरम में कुडुंबश्री फेयर लगा है। वहां स्टॉल लगाया। 24 बॉटल ऑयल तैयार किया था। 2 घंटे में सब बिक गया। इसी से हिम्मत बढ़ी। मैं कुडुंबश्री मिशन से जुड़ गई। वहां से लोन लेकर घर में मशीन लगवाई। काम चल निकला।’ 1998 में कुडुंबश्री की शुरुआत, विजयन सरकार की सबसे बड़ी ताकतकेरलम में बिंदु की तरह लाखों कहानियां हैं। इससे जुड़ी महिलाओं के बिजनेस हैं, वे कैंटीन, जूस का प्लांट चलाती हैं। 17 मई, 1998 को शुरू हुआ। तब LDF के ईके नयनार मुख्यमंत्री थे। योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने मल्लापुरम से की थी। योजना का मकसद गरीबी खत्म करना और महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाना था। अब ये मिशन दुनिया में महिलाओं का सबसे बड़ा ग्रुप बन चुका है। अब कुडुंबश्री के ऑफिस चलिए, देखिए वहां क्या होता हैकुडुंबश्री का ऑफिस राजधानी तिरुवनंतपुरम में है। सीढ़ियां चढ़ते ही सीएम पिनराई विजयन की फोटो और LDF का पोस्टर दिखता है। चुनावी माहौल में कुडुंबश्री की बातें हो रही हैं। दिसंबर, 2025 में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में ग्राम, ब्लॉक, जिला पंचायत, म्युनिसिपालिटी, कॉर्पोरेशन लेवल पर 17,082 कुडुंबश्री वॉलंटियर्स ने चुनाव लड़ा। इनमें 7,210 जीत गईं। ऑफिस में महिलाओं की क्लास चल रही है। पूरे केरलम से करीब 40 महिलाएं आई हुई थीं, जिन्होंने एक-दो साल पहले ही बिजनेस शुरू किया है। अधिकारी बोले- ग्राउंड पर राजनीति है, बात करूंगा तो झापड़ खाऊंगाहमने महिलाओं को ट्रेनिंग दे रहे अधिकारी से बात की। वे अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते। अधिकारी कहते हैं, ‘हम ट्रेनिंग, डोनेशन और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को मिशन से जोड़ने की बात करते हैं। अगर मैं यहां पॉलिटिकल बात करूंगा, तो झापड़ खाने को मिलेगा।’ ‘हकीकत यही है कि ये महिलाएं किसी न किसी पार्टी से जुड़ी हैं। 10 साल से LDF की सरकार है, जाहिर सी बात है कि उससे प्रभावित महिलाएं ज्यादा मिलेंगी। विजयन सरकार ने पिछले साल में अच्छा खासा बजट भी दिया है।’ 10 लाख लोन लेकर कैंटीन खोला, हर महीने 7 लाख रुपए कमाई50 साल की सुनिता तिरुवनंतपुरम में कैंटीन चलाती हैं। वे बताती हैं, ‘बेटे और पति बाहर काम करते हैं। घर पर मन नहीं लगता था, इसलिए मैंने 2024 में कैंटीन शुरू किया। कुडुंबश्री से जुड़ी, 10 लाख रुपए लोन लिया। आज कैंटीन में 21 महिलाएं काम कर रही हैं। उन्हें 700 से 1300 रुपए रोज मेहनताना देती हूं। महीने में 6 से 7 लाख रुपए की कमाई हो जाती है।’ चुनाव पर सुनिता कहती हैं, इस बार थोड़ा मुश्किल है। BJP अच्छी फाइट में है। तिरुवनंतपुरम में तीन सीटों पर मजबूत है। हालांकि, कुडुंबश्री की महिलाएं LDF को ही वोट देंगी। कुडुंबश्री के जरिए राजनीति में आईं महिलाएंसिंधू शशि LDF से जुड़ी हैं। वे मलयालम में बताती हैं, ‘20 साल से कुडुंबश्री से जुड़ी हूं। मेरी टीम सिलाई–बुनाई करती हैं। नगर निगम चुनाव में कुडुंबश्री से जुड़ी 10 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था, इनमें से 5 जीत गईं। ज्यादातर LDF से जुड़ी हैं। महिलाओं की इतनी तरक्की मौजूदा सरकार की वजह से हुई है, तो हम उसे कैसे छोड़ सकते हैं।’ एक्सपर्ट बोले- कुडुंबश्री का वोट LDF को मिलेगातिरुवनंतपुरम के सीनियर जर्नलिस्ट अजय कुमार बताते हैं कि कुडुंबश्री की शुरुआत के बाद ज्यादातर LDF की सरकार रही है। उसने समय-समय पर फंड भी बढ़ाया है। ऐसे में कुडुंबश्री का बड़ा तबका LDF और विजयन सरकार को ही वोट करेगा। ये उनके लिए फायदे का मिशन है। LDF कुडुंबश्री को अपनी राजनीति में इस्तेमाल भी करता है। जन्मभूमि अखबार के एडिटर प्रदीप बताते हैं सरकार चला रही पार्टी CPI(M) ने कुडुंबश्री का कैरेक्टर बदल दिया है। कार्यकर्ताओं को इसकी यूनिट में नौकरी दी है। कुडुंबश्री को CPI(M) के नेता वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने इसमें अपनी राजनीति को मिक्स कर दिया है। उनका यूनियन भी ग्राउंड पर कुडुंबश्री के साथ मिलकर काम कर रहा है। कुडुंबश्री पर BJP-कांग्रेस के वादे BJP: राजनीति का दखल खत्म करेंगे, मार्केट मुहैया कराएंगेBJP ने महिलाओं के दम पर मध्यप्रदेश, हरियाणा और बिहार में एकतरफा जीत हासिल की। केरलम में महिलाओं को अपने पाले में करने की चुनौती है। पार्टी ने 11 मार्च को जारी संकल्प पत्र में कुडुंबश्री को भी शामिल किया है। वादा किया है कि इसकी यूनिट का दायरा बढ़ाकर इसे लघु उद्योग में बदलेेंगे। फंड मैनेजमेंट को पारदर्शी बनाएंगे, ताकि राजनीतिक दखल कम हो। कुडुंबश्री के बनाए प्रोडक्ट को इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा गरीबी रेखा से नीचे रह रही महिलाओं को हर महीने पैसे देना, साल में 6 मुफ्त सिलेंडर, स्कॉलरशिप और सस्ते कर्ज जैसे वादे भी हैं। कांग्रेस: 5 लाख रुपए का ब्याज मुक्त कर्जराहुल गांधी ने 25 मार्च को कोच्चि में UDF का गारंटी कार्ड जारी किया। इसमें कुडुंबश्री के जरिए बच्चों के लिए नर्सरी और क्रेच चलाने की योजना है। इसके अलावा महिलाओं को 5 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त कर्ज देने का वादा किया है। …………………………असम से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंगांव के हर घर में तांत्रिक, चुनाव में काला जादू करवाने आ रहे नेता असम का मायोंग गांव काले जादू की राजधानी कहा जाता है। यहां के घर में तांत्रिक है। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
ईरान के खजाने पर ट्रंप की नजर खार्ग द्वीप पर कब्जे की खुली धमकी, क्या अमेरिका छेड़ेगा जमीनी जंग?
संकट गहराने के साथ ही क्यूबा अगला निशाना होगा : ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि क्यूबा “अगला होगा” जो पतन का सामना करेगा
ईरान का भारी जल संयंत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त, संचालन बंदः आईएईए
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने कहा है कि मध्य ईरान के खोंडाब में स्थित ईरान का भारी जल उत्पादन संयंत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और अब चल नहीं रहा है
ईरान में ग्राउंड पर सेना तैनात करने की संभावना को लेकर अमेरिका के सीनेटरों में गहरी चिंता है। अमेरिका के वरिष्ठ नेताओं ने बढ़ते खतरों, साफ मकसद और कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत पर जोर दिया है
ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी, जमीनी हमले की स्थिति में दी जवाबी कार्रवाई की धमकी
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा
गाजा में हमास के दस हथियारबंद लड़ाकों को निशाना बनाया : इजरायल
इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार रात सैन्य कार्रवाई में उसने गाजा पट्टी में लगभग दस हथियारबंद लड़ाकों को मार गिराया
अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 5% वोटर खिसके, तो बीजेपी नंबर-1 पार्टी बन सकती है। लेकिन अगर असम के 34% मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिमंत बिस्व सरमा की सरकार का लौटना मुश्किल हो जाएगा। अगले 30 दिनों में भारत के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इलेक्शन एक्सप्लेनर में जानेंगे आखिर इन पांचों प्रदेशों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा है… ***** ये भी खबर पढ़िए… CEC ज्ञानेश कुमार ने चुनावी तारीखें बताईं, विपक्ष उन्हें पद से हटाने की तैयारी कर रहा; क्या ममता बनर्जी का राजनीतिक दांव चुनाव ऐलान से पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की अगुआई में विपक्ष नेु मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग का नोटिस दिया। सड़कों पर प्रदर्शन कर रही TMC का आरोप है कि ज्ञानेश SIR के जरिए वोट काटकर बीजेपी को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिका ने ईरान जंग में डुअल ट्रैक स्ट्रैटजी अपनाई है। यानी एक तरफ जंग रोकने के लिए डिप्लोमैटिक चैनल से बातचीत की कोशिशें हो रही हैं। दूसरी तरफ ‘फाइनल ब्लो’ यानी अंतिम प्रहार की तैयारी है, जिसमें जमीनी सैनिक भी शामिल होंगे। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अभी तक जमीनी हमले की मंजूरी नहीं दी है। 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के 3500 अमेरिकी सैनिक मिडिल ईस्ट पहुंच चुके हैं। उनके साथ ट्रांसपोर्ट और लड़ाकू विमान भी भेजे गए हैं। हजारों अतिरिक्त सैनिक, टैंक, जंगी बेड़े, फाइटर जेट्स भेजने की योजना है। ईरान के अंग्रेजी अखबार तेहरान टाइम्स ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैनिकों ने ईरान की जमीन पर कदम रखा, तो ताबूत में वापस लौटेंगे। अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर लिखा- नर्क में आपका स्वागत है। आखिर अमेरिका के ‘अंतिम प्रहार’ का प्लान क्या है, ईरान कैसे मुकाबला करेगा और इसका असर क्या होगा; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… ईरान की जियोग्राफी और जंग के खर्च को देखते हुए, अमेरिका फुल स्केल वॉर के बजाए 3 संभावित जमीनी टारगेट पर हमले कर सकता है... ***** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल और अजीत सिंह -------- ये खबर भी पढ़िए…क्या पूरे मिडिल ईस्ट पर नेतन्याहू की नजर:'ग्रेटर इजराइल' क्या है, जिसके लिए ईरान जंग के बीच लेबनान पर कब्जा कर रहा इजराइल पूरी दुनिया की नजर ईरान जंग पर टिकी है। उधर इजराइल तेजी से लेबनान पर जमीनी कब्जा करने में जुटा है। 20% जमीन खाली करा ली है और अपने सैन्य ठिकाने जमा रहा है। इजराइल का कहना है कि वो हिजबुल्ला के सैन्य ढांचे और हथियारों को खत्म करना चाहता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू ‘ग्रेटर इजराइल’ को हकीकत बनाने में जुटे हैं। पूरी खबर पढ़िए…
तपती धूप में सड़क किनारे एक महिला कुर्सी पर बेसुध सी बैठी है। एक शख्स उसके सिर पर लकड़ी का सूप रखकर कुछ बुदबुदाता है। सूप में पानी डालता है। फिर वही पानी मिट्टी के बर्तन में महिला को दे देता है। गुवाहाटी की रहने वाली ये महिला कुछ दिनों से बीमार है। मंत्र पढ़ने वाला शख्स तांत्रिक है, जो काले जादू से उसका इलाज कर रहा है। महिला के साथ आया लड़का उसे सहारा देकर उठाता है और दोनों चले जाते हैं। ये जगह है असम का मायोंग गांव। करीब तीन हजार आबादी वाले मायोंग गांव को काले जादू की राजधानी कहा जाता है। माना जाता है कि इस गांव के लोग सदियों से जादू-टोना और तंत्र विद्या में माहिर हैं। दावा करते हैं कि उनके मंत्र इतने शक्तिशाली हैं कि इंसान को हवा में गायब कर दें या उसे जानवर बना दें। एक किस्सा ये भी है कि दिल्ली के सुल्तान तुगलक की सेना के एक लाख सैनिक यहां के जंगल में गायब कर दिए गए थे। असम में 9 अप्रैल को चुनाव, जादू-टोना कराने आने लगे नेतामायोंग गांव गुवाहाटी से करीब 50 किमी दूर ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा है। पास में पोबितोरा वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी है, जो एक सींग वाले गैंडों के लिए मशहूर है। हम 27 मार्च को मायोंग पहुंचे थे। असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी हैं। इसलिए नेता और मंत्री भी जीत के लिए जादू-टोना करवाने मायोंग आने लगे हैं। हालांकि गांव में कहीं नेताओं के बैनर-पोस्टर नहीं हैं। बस कुछ घरों पर BJP के झंडे लगे हैं। यह गांव जागीरोड विधानसभा सीट में आता है। BJP के पीजूष हजारिका विधायक हैं। वे हिमंता सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उनके करीबी माने जाते हैं। पीजूष लगातार तीसरी बार इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के बुबुल दास से है। तांत्रिक का दावा- विधायक जीत के लिए टोटका करवाकर गएगांववाले दावा करते हैं कि नेता यहां वोट मांगने नहीं, जादू-टोना करवाने आते हैं। गांव के तांत्रिक कैमरे पर नेताओं के नाम नहीं बताते। कैमरा बंद होने पर एक शख्स दावा करते हैं कि विधायक पीजूष हजारिका अक्सर यहां आते हैं। 10 दिन पहले भी परिवार के साथ आए थे। वे जीत के लिए तंत्र करवाकर गए हैं। हमने पूछा- पूजा के लिए कितने पैसे देते हैं? जवाब मिला- हम पैसा नहीं मांगते। पूजा कराने वाला इच्छा से जो दे दे। विधायक से पैसे नहीं लेते। हर घर में तांत्रिक, यहां आने वाले हर शख्स का रिकॉर्डगांव के अंदर लाइन से कुछ दुकानें बनी हैं। इनमे से एक में विपुल मेधी की हार्डवेयर की दुकान है। विपुल गांव के सबसे बड़े तांत्रिक परिवार से हैं। ये परिवार पीढ़ियों से तंत्र साधना करता आया है। 45 साल के विपुल को उनके पिता ने यह विद्या सिखाई थी। विपुल बताते हैं कि गांव के हर घर में एक तांत्रिक जरूर है। यहां लोग बीमारी, कोई मानसिक समस्या जैसी परेशानियां लेकर आते हैं। कुछ तो दुश्मन को मरवाने का काम भी लाते हैं, लेकिन हम गलत काम के लिए मना कर देते हैं। पूजा से पहले ही पूछ लेते हैं कि उनकी मंशा क्या है। मैंने एक डायरी बनाई है, जिसमें तंत्र साधना के लिए आने वाले लोगों के नाम लिखता हूं, ताकि अगर कोई गलत काम के लिए आए, तो हमें आगे भी पता रहे।’ आपके पास कोई नेता आता है? विपुल मेधी बताते हैं, नेता, बड़े लोग, सब आते हैं। सबकी अपनी-अपनी समस्या होती हैं। कोई किसी को हराने के लिए आता है, तो हम भगा देते हैं। ‘मोहम्मद शाह की सेना गायब, औरंगजेब का सेनापति भागा’विपुल के चैंबर के बाहर गांव के लोग बैठे थे। कैमरे पर नहीं बोले, लेकिन पुराने किस्से सुनाने लगे। एक बुजुर्ग बोले कि दिल्ली सल्तनत के मुहम्मद शाह ने 1337 में यहां चढ़ाई की थी। एक लाख घुड़सवार लेकर आए थे। मायोंग के जंगलों में पूरी सेना गायब हो गई।’ ‘मुगल बादशाह औरंगजेब की तरफ से जयपुर के राजा राम सिंह ने भी हमला किया। उसने मायोंग के बारे में सुन रखा था। तब मायोंग के जादू की खबर देशभर में फैली हुई थी। हारने की नौबत आई तो राम सिंह को भी संधि करके लौटना पड़ा। गांव में एक बार खुदाई की गई, तो पुरानी तलवारें और मंत्र लिखी तांबे की प्लेट मिली थीं। ये चीजें गांव के म्यूजियम में रखी हैं।’ इंसानों की बलि का इतिहास, श्मशान में साधना करते तांत्रिकगांव से करीब एक किमी दूर जंगल में मंदिर बना है। गांव के लोग बताते हैं कि यहां 18वीं सदी तक तंत्र साधना के लिए इंसानों की बलि दी जाती थी। अंग्रेजों ने इस पर रोक लगा दी। कच्चे रास्ते से होते हुए हम मंदिर तक पहुंचे। यहां एक बड़ी चट्टान है। ये जगह पहाड़ों से घिरी है। यहां एक कुंड है, जिससे गांव के लोग पीने का पानी ले जाते हैं। यहां से हम वापस गांव पहुंचे और जंतू मंडल से मिले। वे गांव के सबसे बुजुर्ग तांत्रिक हैं। उम्र 100 साल बताते हैं। 14 साल के थे, तभी से तंत्र साधना कर रहे हैं। इस काम से घर नहीं चल पाता, इसलिए परिवार के बाकी लोग खेती करते हैं। जंतू अमावस्या और पूर्णिमा को साधना के लिए श्मशान जाते हैं। वे बताते हैं, ‘मैं सिर्फ बीमार लोगों का इलाज करता हूं।’ क्या कोई गलत इरादे से पूजा कराने आता है? जंतू कहते हैं, ‘हां, लोग आते तो हैं, लेकिन मैं उनका काम नहीं करता। बोल देता हूं कि मुझे ये सब नहीं आता।’ नेता भी आते हैं? जंतू दावा करते हैं कि एक बार दिल्ली से एक नेता आया था। बोला कि उसे मंत्री बनना है। मैंने साफ कह दिया कि ऐसा उपाय हमारे पास नहीं है। असम के भी कुछ लोग आए हैं, लेकिन हम जीत-हार के लिए उपाय नहीं बताते। तंत्र सीखने वालों में काशी से कश्मीर तक के लाेग, 25 साल का फकन भीगांव के मंदिर में 25 साल के फकन बोरो मिले। मायोंग के रहने वाले हैं। स्कूल जाते थे, लेकिन पढ़ाई बीच में छोड़ दी। 3 महीने पहले साधना शुरू की है। वे कहते हैं कि नई पीढ़ी इस विद्या से दूर जा रही है। लोग नौकरी और दूसरे कामों में लग रहे हैं। मुझे ईश्वर की महिमा यहां खींच लाई। फकन आगे बताते हैं, ‘यहां कई तरह की तांत्रिक परंपराएं हैं। अमावस्या पर तांत्रिक शरीर में छेद करके या आग के साथ पूजा करते हैं। ये सब बिना मंत्र के नहीं होता, वरना जान जा सकती है।’ फकन दावा करते हैं कि गांव में काशी से कश्मीर तक के लोग आते हैं। कोई तंत्र विद्या सीखने, कोई वशीकरण, कोई मारण, यानी दूसरे को मारने की विद्या सीखने आता है। हालांकि, सरकार ने इस पर बैन लगा दिया है।’ मायोंग में कैसे शुरू हुआ जादू-टोना, महाभारत से कनेक्शनमायोंग पहले छोटा सा राज्य था। इसके आखिरी राजा बरूआ या देका परिवार से थे। फिलहाल कोई राजा नहीं है। सांस्कृतिक तौर पर एक व्यक्ति को राजा की उपाधि दी जाती है। अभी ये उपाधि मयूरभंज नारायण के पास है। वे म्यूजियम के बाहर बैठे मिले। साधारण वेशभूषा और रहन-सहन। हमने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन वे तैयार नहीं हुए और उठकर चले गए। मायोंग का म्यूजियम 2002 में बना था। इसमें तंत्र-मंत्र की किताबें, हथियार और पुरानी चीजें रखी हैं। गांव के डॉ. उप्पल नाथ म्यूजियम के फाउंडर हैं। वे बताते हैं, ‘लोककथाओं के मुताबिक, मायोंग का संबंध भीम और हिंडिंबा के बेटे घटोत्कच से है। घटोत्कच और उसके वंशज तंत्र शक्तियों में निपुण थे और यहीं रहते थे।’ ‘एक मान्यता यह भी है कि मायोंग शब्द माया से बना है, यानी यह भ्रम और जादू की भूमि है। मायोंग का संबंध कामाख्या मंदिर से भी है, जो तंत्र साधना का बड़ा केंद्र है। कामाख्या मुख्य केंद्र और मायोंग उसके सब-सेंटर की तरह था।’ मायोंग की महिलाएं बोलीं- वक्त बदल रहा, बच्चों के लिए काम चाहिए 56 साल की निरूपमा देवी कहती हैं कि मायोंग में चीजें बदल रही हैं। गांव के लड़के बाहर जाकर नौकरी कर रहे हैं। नई पीढ़ी पढ़ाई और तकनीक की तरफ जा रही है। यहां कंप्यूटर सिखाने के लिए स्कूल खुल गया है। बच्चे अब पुरानी चीजों से हटकर नए काम करना चाहते हैं। चुनाव के बारे में निरूपमा कहती हैं कि यहां नेता खुद नहीं आते, उनके कार्यकर्ता आते हैं। लोग भी मदद करने वाले को वोट देते हैं। 50 साल की नीलम मुनि देवी का बेटा ITI में पढ़ाई कर रहा है। वे चाहती हैं कि पढ़ाई के बाद बेटे की नौकरी लग जाए। चुनाव पर कहती हैं, ‘गांव में महिलाओं को कोई खास दिक्कत नहीं है। हम मर्जी से वोट डालते हैं। हम चाहते हैं कि बच्चे को यहीं नौकरी मिल जाए, ताकि बाहर जाने की जरूरत न पड़े।’ …………….ये खबर भी पढ़ें… CM हिमंता के बयान बदले, सियासत वही ‘हमारे मुख्यमंत्री हमें पहचानते तक नहीं, हमें गालियां देते हैं। बांग्लादेश जाने को कहते हैं। हम बांग्लादेश के नहीं, असम के हैं। हमारे पास सारे कागज हैं, लेकिन क्या कर सकते हैं। वे मुख्यमंत्री हैं, बड़े आदमी हैं। हम तो कुछ भी नहीं।’ ये बेबसी असम के कामरूप जिले के सोंताली गांव में रहने वाले मोफिज अली की है। पूरी खबर पढ़ें…
अफगानिस्तान में भारी बारिश का कहर, बाढ़ और भूस्खलन से 17 की मौत, 26 घायल
अफगानिस्तान में पिछले 24 घंटों के दौरान बारिश से जुड़ी दुर्घटनाओं में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई

