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यूक्रेन पर एक और बड़े हमले का खतरा: राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूरोप से मांगी तत्काल मदद, सुरक्षा बढ़ाने की अपील

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया क‍ि हमारे देश पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे गए। अभी भी अलग-अलग इलाकों में एयर-रेड अलर्ट भी एक्टिव हैं। खुफ‍िया जानकारी है क‍ि आज रात भी एक और बड़ा हमला हो सकता है। हम हवाई खतरों का सामना कर रहे हैं।

देशबन्धु 3 Jun 2026 9:21 pm

कुवैत एयरपोर्ट हमले में भारतीय नागरिक की मौत, भारतीय दूतावास ने जताया गहरा दुख

कुवैत में मौजूद भारतीय दूतावास ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में मारे गए शख्स की पहचान भारतीय नागरिक के तौर पर की है। कुवैत ने बुधवार ईरान की ओर से हुए बैलिस्टिक और ड्रोन अटैक की जानकारी दी थी।

देशबन्धु 3 Jun 2026 8:33 pm

आज का एक्सप्लेनर:सबसे अमीर सीएम डीके शिवकुमार की कहानी; जमीन बेचकर चुनाव लड़ा, ED ने पकड़ा तो रो पड़े, जेल में मिलने पहुंचीं सोनिया गांधी

बात अक्टूबर 1999 की है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 224 में 132 सीटें जीतीं। एसएम कृष्णा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले थे। कृष्णा के करीबी थे 37 साल के डीके शिवकुमार। इतने करीबी कि नए मंत्रिमंडल की लिस्ट भी दोनों ने साथ मिलकर तैयार की। लेकिन एक रात पहले कांग्रेस हाईकमान से मिली फाइनल लिस्ट में डीके का ही नाम नहीं था। डीके निराश और बेचैन हो गए। उन्होंने रात में ही अपने ज्योतिषी राजगुरु बेल्लूर शंकरनारायण द्वारकानाथ से सलाह मांगी। ज्योतिषी ने कहा- 'जब तक तुम खुद दरवाजा नहीं खोलोगे और मंत्री पद की मांग नहीं करोगे, यह नहीं मिलेगा।' डीके को बात लग गई। लेकिन संभावित मंत्रियों की लिस्ट राज्यपाल को भेजी जा चुकी थी। डीके आधी रात ही एसएम कृष्णा के घर जा पहुंचे। पता चला कि कृष्णा सो रहे हैं, लेकिन डीके ने उन्हें जगाकर कहा- 'आप मेरे बिना मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ले सकते।' अगले दिन, यानी 11 अक्टूबर 1999 को जब एसएम कृष्णा ने शपथ ली, तब डीके भी मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। बाद में डीके ने खुद ये किस्सा सुनाते हुए कहा- 'ज्योतिषी द्वारकानाथ ने मुझसे कहा था कि सत्ता छीननी पड़ती है और मैंने उनकी सलाह मानी।' 27 साल बाद आज 'डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार' उर्फ डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया को हटाकर कर्नाटक के 18वें मुख्यमंत्री की शपथ ली है। आज के एक्सप्लेनर में डीके शिवकुमार की पूरी कहानी… साउथ बेंगलुरु जिले में अर्कावती नदी के किनारे बसा है कनकपुरा शहर। यहीं के वोक्कालिगा किसान परिवार में 15 मई 1962 को डीके पैदा हुए। कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था, लेकिन राजनीति में शुरुआत से ही दिलचस्पी थी। 18 साल की उम्र में डीके कांग्रेस की स्टू़डेंट विंग NSUI से जुड़ गए। जल्द ही NSUI के बेंगलुरु जिला अध्यक्ष बन गए। बेंगलुरु के राम नारायण चेल्लाराम कॉलेज में पढ़ने पहुंचे, तो इंडियन यूथ कांग्रेस जॉइन कर ली। साल 1979 डीके की जिंदगी में टर्निंग पॉइंट बना। कर्नाटक के पहले मुख्यमंत्री देवराज उर्स की इंदिरा गांधी से अनबन हो गई थी। देवराज ने पार्टी तोड़ी। NSUI और यूथ कांग्रेस में भी फूट पड़ी। कांग्रेस लीडरशिप ने कैडर बचाने का जिम्मा डीके को सौंपा। उन्हें यूथ कांग्रेस का स्टेट जनरल सेक्रेटरी बना दिया गया। डीके ने इतनी जिम्मेदारी से काम किया कि कांग्रेस में उनकी पैठ बनती गई। फिर साल आया 1985। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। कांग्रेस राज्य में अपनी खोई जमीन वापस चाहती थी। वहीं, जेपी आंदोलन और इमरजेंसी से निकली जनता पार्टी दूसरी बार सत्ता में आना चाहती थी। जनता पार्टी में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले एचडी देवगौड़ा ने दो सीटों से पर्चा भरा- हासन जिले की होलेनरसीपुर और बेंगलुरु की साथनूर। देवगौड़ा राज्य के रसूखदार वोक्कालिगा समुदाय से आते थे। उन्हें 'मण्णिन मगा' यानी धरती पुत्र कहा जाता था। कांग्रेस ने देवगौड़ा के खिलाफ साथनूर सीट से वोक्कालिगा समुदाय के ही 23 साल के डीके शिवकुमार को टिकट दिया। डीके ने चुनाव लड़ने के लिए बेंगलुरु के पास की पुश्तैनी जमीन बेच दी। कड़ा मुकाबला हुआ। 4 बार के विधायक और दो बार नेता प्रतिपक्ष रहे देवगौड़ा सिर्फ 15 हजार वोटों से जीत पाए। डीके हारकर भी टॉप लीडरशिप के करीबी बन गए। देवगौड़ा से हार के बावजूद डीके 4 साल तक साथनूर सीट पर डटे रहे। जिसका फायदा 1989 में मिला। डीके ने जनता पार्टी के यूके स्वामी को 13 हजार वोटों से हराया। इस साल कांग्रेस ने 224 में से 178 सीटें जीतकर सरकार बनाई। फिर अक्टूबर 1990 में कांग्रेस के एस बंगारप्पा सीएम बने और 29 साल के डीके मंत्री। वे तब सबसे कम उम्र के मंत्री थे। डीके को झटका तब लगा, जब 1994 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस से टिकट ही नहीं मिला। वजह थी- पार्टी में गुटबाजी और जातीय समीकरण। हालांकि डीके निर्दलीय चुनाव जीते। कांग्रेस के बी रमेश तीसरे नंबर पर रहे। कांग्रेस आलाकमान समझ गया कि डीके को साथ रखने में ही पार्टी का फायदा है। 1995 के आखिर में डीके की कांग्रेस में वापसी हो गई। 1999 में उन्हें फिर मंत्री बनाया गया। डीके ने साथनूर से लगातार 4 विधानसभा चुनाव जीते। 2008 के परिसीमन में साथनूर सीट कनकपुरा में शामिल हो गई। इसके बाद डीके ने कनकपुरा से चुनाव लड़ा और लगातार 4 बार जीते। सभी 8 चुनावों में डीके को हमेशा 45% से ज्यादा वोट मिले हैं। 1985 के चुनाव से ही डीके और देवगौड़ा परिवार की राजनीतिक अदावत रही है। 1999 के चुनाव में साथनूर सीट पर डीके के सामने देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी खड़े हुए। डीके ने 14 हजार वोटों से हराया। हालांकि 2002 में कनकपुरा लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में वो देवगौड़ा से हार गए। 2004 के लोकसभा चुनाव हुए। कनकपुरा से देवगौड़ा ने पर्चा भरा। डीके ने सियासी गणित लगाया और 37 साल की पत्रकार तेजस्विनी गौड़ा को टिकट दिलवा दिया। तेजस्विनी का नाम नॉमिनेशन की आखिरी तारीख को ही तय हुआ था। तेजस्विनी ने देवगौड़ा को 1.16 लाख वोटों से हरा दिया। ये चौंकाने वाली बात इसलिए थी, क्योंकि तेजस्विनी का यह पहला चुनाव था। जबकि देवगौड़ा 6 दशकों से राजनीति कर रहे थे और प्रधानमंत्री रह चुके थे। इस जीत से डीके की साख इतनी मजबूत हुई कि समर्थक उन्हें 'कनकपुरदा बंदे' यानी कनकपुरा की चट्टान बुलाने लगे। राजनीति में शिवकुमार का कद और बिजनेस तेजी से बढ़ा। किताब 'डीके शिवकुमार: कांग्रेस क्राइसिस मैनेजर, कर्नाटक किंगमेकर' लिखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट रशीद किदवई बताते हैं, 'जब भी कांग्रेस आलाकमान को फंड या क्राइसिस मैनेजमेंट की जरूरत पड़ी, उन्हें डीके की याद आई। डीके कई बार कांग्रेस के संकटमोचक साबित हुए।’ किस्सा-1: महाराष्ट्र सरकार बचाने के लिए 40 विधायक बेंगलुरू ले गए जून 2002 की बात है। महाराष्ट्र में कांग्रेस की अगुवाई वाले डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार थी। कांग्रेस के विलासराव देशमुख 30 महीने से मुख्यमंत्री थे। अचानक 9 विधायकों ने कह दिया कि वे देशमुख सरकार को समर्थन नहीं देंगे। बीजेपी की अगुआई वाला विपक्ष देशमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ गया। कांग्रेस को और विधायक टूटने का डर था। कांग्रेस आलाकमान ने संकट में डीके को जिम्मेदारी सौंपी। डीके ने रातोंरात महाराष्ट्र कांग्रेस के 40 विधायकों बेंगलुरू शिफ्ट किया। एक हफ्ते तक उन्हें कड़ी सुरक्षा में अपने ईगलटन रिसोर्ट में रखा। टूट नहीं हो सकी और फ्लोर टेस्ट में देशमुख की कुर्सी बच गई। किस्सा-2: गुजरात के राज्यसभा चुनाव के लिए 44 विधायक एयरलिफ्ट किए 2017 में डीके ने गुजरात में भी ऐसा ही किया। राज्यसभा चुनाव हो रहे थे। सोनिया गांधी के करीबी और राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल गुजरात से राज्यसभा चुनाव लड़ रहे थे। कांग्रेस को डर था कि उनके विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इससे अहमद पटेल हार जाते। आलाकमान ने फिर डीके को याद किया। रातोंरात डीके ने गुजरात कांग्रेस के 44 विधायकों को अहमदाबाद से एयरलिफ्ट किया। उन्हें बेंगलुरू के ईगलटन रिसॉर्ट में ठहराया। कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए डीके खुद रिसॉर्ट में ठहरे। 2 अगस्त की सुबह इनकम टैक्स अधिकारियों ने डीके शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश के दिल्ली और बेंगलुरू में मौजूद करीब 60 ठिकानों पर छापे मारे। एक टीम ईगलटन रिसॉर्ट भी पहुंची। जब अधिकारी डीके के कमरे में घुसे तो वे उस वक्त सोकर उठे ही थे। डीके ने कहा, ‘आप अपनी जांच कीजिए। लेकिन मैं अपने मेहमानों को छोड़कर कहीं नहीं जाउंगा।’ उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि कोई भी अधिकारी गुजरात के विधायकों के कमरे में न जाए। 8 अगस्त 2017 को वोटिंग हुई। डीके खुद सभी विधायकों को लेकर कड़ी सुरक्षा में अहमदाबाद पहुंचे। नतीजा आया तो अहमद पटेल चुनाव जीत गए। उन्होंने जीत का क्रेडिट डीके को दिया। कहा जाने लगा कि डीके ने ऐसा करके बीजेपी के ‘चाणक्य’ अमित शाह को सीधी चुनौती दी। रशीद किदवई बताते हैं, ‘2017 में डीके पर बीजेपी जॉइन करने का एक अनकहा दबाव था। फिर भी उन्होंने कांग्रेस की वफादारी चुनी।’ किस्सा-3: कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस-JDS गठजोड़ किया 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 104 विधायकों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से 11 कम। राज्यपाल ने बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को सीएम पद की शपथ दिला दी। कांग्रेस के पास 79 और देवगौड़ा की JDS के पास 37 सीटें थीं। बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए दोनों ने गठबंधन कर लिया और बहुमत जुटाया। लेकिन विधायक टूटने का डर था। डीके फिर संकटमोचक बने। उन्होंने कांग्रेस के 43 विधायकों को बेंगलुरू के एक रिसॉर्ट में जमा किया। सभी के मोबाइल फोन ले लिए और उन पर नजर रखी। असंतुष्ट विधायकों को संभाला और सुनिश्चित किया कि गठबधंन में किसी भी तरह की फूट न पड़े। नतीजतन येदियुरप्पा बहुमत साबित नहीं कर पाए। एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस-JDS गठजोड़ की सरकार बनी। डीके शिवकुमार का माइनिंग, रियल एस्टेट, एजुकेशन और ट्रांसपोर्ट का कारोबार है। 2018 के चुनावी हलफनामे में 860 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित है। तब वे देश के सबसे रईस विधायकों में शुमार थे। डीके पर टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के कई आरोप हैं। ऐसे ही एक मामले में ED ने उनसे लगातार 4 दिन तक पूछताछ की और 3 सितंबर 2019 को गणेश चतुर्थी के दिन गिरफ्तार कर लिया। डीके भावुक हो गए। लोगों ने उस कद्दावर नेता की आंख में आंसू देखे, जो कभी सीधे अमित शाह से भिड़ गया था। शिवकुमार के एक नजदीकी ने कहा था, 'यह कोई राजनीतिक नाटक नहीं था। वोक्कालिगा समुदाय के लोग गणेश चतुर्थी से बहुत गहराई से जुड़े हैं। डीके के साथ जैसा बर्ताव किया गया, इस क्षेत्र के समुदाय पर इसका प्रभाव पड़ना तय है।’ करीब 50 दिन तक डीके को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया। इस दौरान सोनिया गांधी उनसे मिलने जेल पहुंची। 13 मई 2023 को जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो डीके ने कहा, ‘मैं भूल नहीं सकता कि श्रीमती सोनिया गांधी मुझसे जेल में मिलने आई थीं। बीजेपी के लोगों ने मुझे जेल में डाल दिया था। तब मैंने पद पर रहने के बदले जेल में रहना चुना। सोनिया, राहुल से वादा किया था कि कर्नाटक जीतकर दिलाऊंगा। आज वादा पूरा हुआ।’ कांग्रेस को लंबे वक्त से कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल ने हाल में सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट लिखा- ‘डीके आर्थिक अपराध के आरोप में जेल गए थे। उन्हें आर्थिक अपराध वाले बाकी कैदियों के साथ रखा गया। उनमें से कई लोगों की डीके से दोस्ती हो गई। ज्यादातर गरीब लोग थे और बहुत छोटे आरोपों में जेल में बंद थे। जैसे- पत्नी को गुजारा भत्ता न दे पाना और जमीन के झगड़े। बाद में डीके को जमानत मिल गई। बाहर आकर उन्होंने जेल की दोस्ती निभाई। भारी भरकम वकीलों की एक फौज खड़ी करके जेल के दोस्तों की जमानत करवाई। उनमें से एक उनके दिल्ली वाले घर पर काम करता था, जो आजकल अपने जमीन के मसले को सुलझाने गांव गया हुआ है। दूसरे को बेंगलुरू के अपने मॉल में नौकरी पर रखा। ऐसे ही कई और लोगों को सलाखों के पीछे से निकालकर काम दिलवाया।’ जुलाई 2020 में कांग्रेस आलाकमान ने डीके को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया। उनकी मेहनत और इलेक्शन मैनेजमेंट की बदौलत कांग्रेस 135 सीटें जीतीं। डीके ने सीएम की कुर्सी पर दावा ठोका। उन्हें सिद्धारमैया से चुनौती मिली। बंद कमरे में 5 दिन मैराथन बैठकें हुईं। आखिरकार 19 मई 2023 को तय हुआ कि सिद्धा सीएम और डीके डिप्टी सीएम बनेंगे। सिद्धारमैया का अनुभव और सामाजिक समीकरण भारी पड़ा। वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल बताते हैं, ‘कांग्रेस आलाकमान की उस मीटिंग में तय किया गया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। तब डीके चाहते थे कि इस फैसले का ऐलान किया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।' 20 नवंबर 2025 को जब सिद्धा के कार्यकाल के ढाई साल पूरे हुए, तब भी लामबंदियां और बयानबाजियां शुरू हुईं। डीके और उनके समर्थक ‘सीक्रेट डील’ को पूरा करने का दबाव बना रहे थे, जबकि सिद्धा इससे इनकार कर रहे थे। आलाकमान ने दोनों नेताओं को समझाया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। डीके के सीएम बनने की भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषी द्वारकानाथ ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, ‘सत्ता की खींचतान में डीके डिप्रेशन में थे। इतना ज्यादा कि वे रोने लगते थे।’ 20 मई 2026 को सिद्धा के 3 साल पूरे हुए। बदलाव की चर्चा फिर से शुरू हुई। कांग्रेस आलाकमान ने सीएम सिद्धा और डिप्टी सीएम डीके दिल्ली तलब किया। दोनों से कहा गया- आप 26 मई की सुबह 11 बजे तक दिल्ली के इंदिरा भवन (कांग्रेस मुख्यालय) पहुंचे। करीब 6 घंटे तक बातचीत चली। राहुल ने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से भी बातचीत की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनिया और प्रियंका चाहती थीं कि कर्नाटक में सीएम परिवर्तन हो। अलाकमान ने तय किया कि डीके सीएम बनेंगे और सिद्धारमैया की केंद्र में भूमिका बढ़ेगी। 28 मई को सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया। 30 मई को डीके विधायक दल के नेता चुने गए और 3 जून को कर्नाटक के 18वें सीएम के रूप में शपथ ली। 1413.7 करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ डीके आज देश के सबसे रईस मुख्यमंत्री हैं। उनके ज्योतिषी की वो लाइन एक बार फिर सही साबित हुई कि सत्ता छीननी पड़ती है। --------------- कर्नाटक से जुड़ी भी खबर पढ़िए… कर्नाटक में सीएम बदलने के पीछे की कहानी; कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक या बीजेपी के भाग्य खुले, दांव पर हैं 62% अहिंदा वोटर्स कर्नाटक में कांग्रेस ने कार्यकाल के बीच सीएम बदल दिया। 77 साल के सिद्धारमैया की जगह 64 साल के डीके शिवकुमार ले रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये फैसला एक सीक्रेट डील के तहत हुआ। लेकिन बीजेपी को दो तैयार मुद्दे मिल गए- ओबीसी नेता की अनदेखी और दागदार छवि वाले नेता को कुर्सी। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 3 Jun 2026 4:51 pm

ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना, अमेरिका का केश्म आइलैंड पर पलटवार

ईरान की विशिष्ट सैन्य शाखा 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स' (IRGC) ने आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर बड़ा हमला किया है।

देशबन्धु 3 Jun 2026 11:23 am

चीन-रूस की खुफिया गतिविधियों का केंद्र क्यूबा अमेरिका के लिए बढ़ता खतरा: मार्को रुबियो

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा को 'विफल देश' और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बढ़ता हुआ खतरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि क्यूबा में चीन और रूस की खुफिया गतिविधियां चल रही हैं और वह पूरे लैटिन अमेरिका में अमेरिका-विरोधी गतिविधियों को समर्थन देता है।

देशबन्धु 3 Jun 2026 9:40 am

इजरायल-लेबनान के बीच वार्ता का नया दौर शुरू, संघर्षविराम पर बनी सहमति की उम्मीद

इजरायल और लेबनान के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से वॉशिंगटन में प्रत्यक्ष वार्ता का नया दौर शुरू हो गया है

देशबन्धु 3 Jun 2026 9:00 am

बांग्लादेश के साथ साझा नदियों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय व्यवस्था बनाई गई: विदेश मंत्रालय

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और बांग्लादेश के बीच साझी नदियों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए एक द्विपक्षीय सिस्टम है

देशबन्धु 3 Jun 2026 8:00 am

भारत की पाक-ईयू बयान में जम्मू-कश्मीर के जिक्र पर दो टूक, विदेश मंत्रालय ने दी सलाह

भारत ने पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (ईयू) के संयुक्त बयान में भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बेवजह जिक्र को पूरी तरह से खारिज कर दिया

देशबन्धु 3 Jun 2026 6:00 am

सैनी-सुवेंदु-योगी, BJP का ट्रिपल इंजन पंजाब मिशन:5 महीनों में सैनी के 45 दौरे, यूपी-बंगाल मॉडल का वादा; 33% OBC वोट टारगेट

तारीख- 1 मई, जगह- पंजाब के नवांशहर का पोजेवाल इलाका। गरीबदासी संप्रदाय के सद्गुरू ब्रह्मानंद भूरीवाले का 24वां निर्वाण दिवस। केसरिया पगड़ी बांधे हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी ने मंच से पहले संत के लिए कुछ लाइनें बोलीं। फिर पंजाबी में कहा, 'पंजाब का विकास तभी होगा, जब यहां नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार बनेगी।’ पंजाब में सैनी का ये कार्यक्रम विधानसभा चुनाव के लिए BJP के ‘पंजाब प्लान’ की झलक है। सोर्स बताते हैं कि पिछले 6-7 महीनों में सैनी पंजाब में 45 से ज्यादा दौरे और 65 से ज्यादा कार्यक्रम कर चुके हैं। अगले महीने उनके 4 दौरे पहले से तय हैं। पिछले साल उन्होंने पंजाब के करीब 20-22 दौरे किए थे। इनके जरिए राज्य की 33% OBC आबादी पर नजर है। पंजाब में BJP 117 विधानसभा सीटों में से 40 सीटें टागरेट कर रही है। पंजाब में नायब सिंह सैनी सबसे पहले क्यों एक्टिव? पटियाला ग्रामीण (उत्तर) के BJP अध्यक्ष जसपाल सिंह गगरोली कहते हैं, 'पंजाब और हरियाणा की संस्कृति से लेकर जमीन पर मौजूद सीमाएं आपस में घुली-मिली हैं। नायब सिंह सैनी अंबाला से हैं, लेकिन धराप्रवाह पंजाबी बोलते हैं। CM बनने से पहले करीब 3 साल पंजाब में OBC मोर्चा के प्रभारी रहे हैं। वो BJP संगठन में एक-एक कार्यकर्ता को नाम से जानते हैं। चुनाव में उनकी भूमिका नहीं होगी, तो किसकी होगी?' अमृतसर ग्रामीण के BJP अध्यक्ष अमरपाल सिंह बोनी कहते हैं, 'वे संगठन में मजबूती से जमे हैं, इसलिए पंजाब के लिए उनसे मजबूत और जमीनी किरदार कोई नहीं। हरियाणा में किए सैनी के कामों की चर्चा तुरंत पंजाब पहुंच जाती है। व्यापारी बिरादरी उनसे बहुत खुश है, क्योंकि उन्होंने बिजनेस के लिए सिस्टम पहले से आसान किया है।' नायब सिर्फ पुलिया, वोट ट्रांसफर होना मुश्किल पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रो. राजिंदर पाल सिंह कहते हैं, ‘नायब सिंह पंजाब में पुलिया की तरह काम कर सकते हैं, लेकिन वोट ट्रांसफर होना मुश्किल हैं। वो पगड़ी बांध लें, पंजाबी बोल लें, लेकिन उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावी नहीं कि वोट ट्रांसफर करा सके। वो अलोकप्रिय भी नहीं हैं, इसलिए पार्टी उनके जरिए पंजाब टटोलने की कोशिश कर रही है।’ ’चुनाव के 8-10 महीने पहले नायब की लॉन्चिंग बुरी भी नहीं, वैसे भी पंजाब में OBC वोट बैंक अब तक किसी भी पार्टी ने एक्सप्लोर नहीं किया है। BJP अब सैनी को आगे करके इसे एक्सप्लोर कर रही है। वैसे चुनाव से 2-3 महीने पहले ही पॉलिटिकल सिनैरियो साफ होता है, इसलिए ये वोटर कितना एकजुट होगा, अभी कहना जल्दबाजी है।’ वहीं पॉलिटिकल एक्सपर्ट बलजीत पाल कहते हैं, ‘पंजाब में नायब की पकड़ मजबूत है। वो यहां 2-3 साल OBC मोर्चा के प्रभारी रहे हैं, इसलिए उनके असर को कम करके देखना ठीक नहीं।‘ पंजाब में BJP का सिख जाट बनाम गैर सिख मॉडल प्रो. राजिंदर पाल कहते हैं, ‘हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के जाट बनाम गैर-जाट मॉडल को BJP पंजाब में भी इस्तेमाल कर रही है। यहां सिख जाट करीब 25% है, जो जमींदार या बड़े किसान हैं। BJP इनके बजाय गैर जाट वर्ग पर फोकस कर रही है।‘ ‘BJP यहां OBC और दलितों को मिलाकर सिख जाट बनाम गैर जाट का फॉर्मूला तैयार कर रही है। OBC वाला प्रयोग नया है और कारगर साबित हो सकता है। हालांकि OBC को एकजुट करने के लिए कुछ बड़ा करना होगा, जिसकी झलक अब तक नहीं दिखी है।‘ पंजाब में CM योगी और सुवेंदु का बंगाल मॉडल कितना कारगर पटियाला ग्रामीण के BJP अध्यक्ष जसपाल बताते हैं, 'लॉ एंड ऑर्डर ठीक करने के लिए यहां योगी बाबा का बुलडोजर मॉडल ही चलेगा। पंजाब में लोग योगी आदित्यनाथ जैसे CM की डिमांड करते हैं।' अमृतसर ग्रामीण के BJP अध्यक्ष अमृतपाल सिंह बोनी भी यही बात दोहराते हैं। दिल्ली BJP में सूत्र बताते हैं, 'नायब के अलावा शाह-योगी की रैलियों की भी डिमांड आई है। बंगाल में सुवेंदु अधिकारी जैसे काम कर रहे हैं, चुनाव करीब आने पर वो भी पंजाब में नजर आएंगे।' हालांकि प्रो. राजिंदर का कहना है कि पंजाब में हिंदू-मुस्लिम नहीं कर सकते, इसलिए यहां ना बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा है और ना रोहिंग्या का। सुवेंदु बंगाल में चेहरा हैं, पंजाब में नहीं। कोई बाहरी पंजाब नहीं जिता सकता।‘ पंजाब में दलित वोटर के लिए BJP का रोडमैप… इस्लाम की जगह मौत कुबूल करने वाले संत का किस्सा गूंजेगा BJP सोर्सेज बताते हैं, ‘दलित संतों की लिस्ट तैयार हो रही है। इनके जरिए 33% दलित आबादी टारगेट की जाएगी। इसमें सबसे बड़ा नाम गुरु गोबिंद सिंह के शिष्य तेगबहादुर और औरंगजेब की सेना के बीच से गुरु तेगबहादुर का सिर निकालकर लाने वाले संत जैता सिंह का है।‘ सबसे ज्यादा कन्वर्जन वाले इलाकों में दलित संतों के बड़े कार्यक्रम कराए जाएंगे। जैता सिंह के कार्यक्रम से इन दलित संतों को याद करने की शुरुआत होगी। पंजाब में 56 अमृतधारी सिख संत हैं, जिसमें से 37 दलित हैं, जिन्हें BJP टारगेट कर रही है। दलित वर्ग को साधने के लिए यहां BJP से ज्यादा काम RSS कर रही है। दिल्ली BJP एक्टिव, लेकिन पंजाब में कार्यकर्ता खफा बंगाल जैसे नतीजों के लिए कई नायक चाहिए, राघव पर भरोसा डुबोएगा राघव को BJP में लाने और भरोसा जताने से पंजाब में कार्यकर्ताओं का एक धड़ा नाराज है। वे नायब सिंह के एक्टिव होने को अच्छा बताते हैं, लेकिन गुस्सा भी जताते हैं। नाम न छापने की शर्त पर वे इसकी 4 वजहें बताते हैं। 1. नायब का आना पॉजिटिव है, लेकिन पार्टी के बड़े लीडर्स के दौरे होने चाहिए। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के ऐलान से कुछ नहीं होगा। 2. हमारे पास कोई CM फेस नहीं है। केजरीवाल के सामने एक चेहरा चाहिए, तभी फायदा होगा। बंगाल तभी जीते, जब लड़ाई सुवेंदु अधिकारी बनाम ममता बनर्जी हुई। 3. राघव चड्ढा और उनके साथियों को शामिल करने का फैसला ऊपर से ले लिया गया। क्या पंजाब में उनकी जमीनी पकड़ है, क्या वो क्राउड पुलर हैं, कम से कम कार्यकर्ताओं से पूछना चाहिए था। 4. पंजाब को लूटने वालों में एक नाम राघव चड्ढा का भी है। अगर उन्हें CM फेस बनाया गया, तो ये पार्टी की सबसे बड़ी भूल होगी। BJP के लिए पंजाब जीतने के दो ही रास्ते 1. अकाली दल के असंतुष्ट धड़े से गठजोड़प्रो. राजिंदर पाल कहते हैं, ‘BJP ने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा भले कर दी, लेकिन अमित शाह अकाली दल के असंतुष्ट नेताओं से चुपचाप मिल रहे हैं। 2025 में अकाली दल औपचारिक रूप से बंट चुका है। वे नए बने अकाली दल के अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह से मेलजोल बढ़ा रहे हैं। मुमकिन है कि वो चुनाव से 2-3 महीने पहले गठबंधन कर लें। 2. AAP और भगवंत मान को तोड़ ले BJPपंजाब में AAP से 7 लोग पहले टूट चुके हैं। अगर और लोग टूटकर BJP के साथ जाते हैं, तो बड़ा फायदा मिल सकता है। वैसे भी पार्टी में भगवंत मान की जो स्थिति है, वो सब जानते हैं। वो नाम के CM हैं। सरकार केजरीवाल और सिसोदिया ही चला रहे हैं। पंजाब में मान के बराबर कोई लोकप्रिय चेहरा नहीं है। AAP बोली- लोकल चुनाव में कैंडिडेट नहीं मिले, विधानसभा कैसे लड़ेगीपंजाब में आम आदमी पार्टी के स्पोक्सपर्सन नील गर्ग कहते हैं, ‘BJP की तैयारियों का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि पंजाब में 29 मई को 1977 वार्ड में लोकल चुनाव हुए। इसमें BJP को 616 सीटों पर तो कैंडिडेट नहीं मिले। जिन वार्ड में पार्टी ने चुनाव लड़ा, उनमें से 1142 कैंडिडेट की जमानत जब्त हो गई। पंजाब में जमीन पर BJP की यही सच्चाई है।‘ ‘ये पार्टी सिर्फ ED, CBI और बाकी एजेंसियों के दम पर चुनाव प्रभावित करना जानती है। रही बात नायब सिंह की, तो पहले वो अपना घर संभाल लें, जहां जनता ने उन्हें चुनकर मुख्यमंत्री बनाया है। हरियाणा में लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ा हुआ है। किसान और रोजगार सबकी हालत खराब है।‘ ……………….पंजाब की ये स्टोरी भी पढ़ें… पंजाब में क्या 38% दलित दिलाएंगे BJP को जीत पंजाब में विधानसभा चुनाव को करीब एक साल बाकी है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने ‘पंजाब विजय प्लान’ लॉक कर लिया है। गृह मंत्री अमित शाह भी साफ कर चुके हैं कि BJP पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 3 Jun 2026 5:07 am

ईरान पर नेतन्याहू का वार: “हमारे अस्तित्व के लिए खतरा नहीं बनेगा”

इजरायल की मोसाद इंटेलिजेंस एजेंसी के नए डायरेक्टर के तौर पर रोमन गॉफमैन ने मंगलवार को शपथ ली

देशबन्धु 3 Jun 2026 4:54 am

एआई से निवेश तक, भारत करेगा 25 नेपाली स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने में मदद

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भारत-नेपाल स्टार्टअप पार्टनरशिप नेटवर्क (इन-स्पैन) कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य नेपाली स्टार्टअप उद्यमियों को भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के साथ सीखने, सहयोग करने और नए अवसर हासिल करने का मंच उपलब्ध कराना है।

देशबन्धु 2 Jun 2026 11:06 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या TMC बिखरने वाली है, 4 संकेत; बंगाल में एकबार सत्ता जाने के बाद पार्टियां कभी वापसी क्यों नहीं कर पातीं

बंगाल में आजादी के बाद से ही एक ट्रेंड है। जो पार्टी सत्ता से एकबार बेदखल हुई, वो कभी लौट नहीं सकी। सिर्फ कांग्रेस एक अपवाद है। 2026 का बंगाल चुनाव हारने के बाद TMC भी सबसे मुश्किल दौर में है। क्या ममता बनर्जी TMC को संकट से निकालकर वापसी कर पाएंगी या उनके हाथ से पार्टी फिसल जाएगी; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: ममता की TMC पर कितना बड़ा संकट है? जवाबः TMC पर आए संकट को 4 संकेतों से समझिए… 1. TMC के सांसद, नेता और सभासदों तक के इस्तीफे 2. दावा- भाजपा के संपर्क में TMC के 75% सांसद-विधायक 3. 80 में सिर्फ 20 विधायक ही ममता की मीटिंग में पहुंचे 4. TMC के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले सवाल-2: पार्टी को बचाने के लिए ममता बनर्जी क्या कर रहीं? जवाबः ममता बनर्जी दो तरह की स्ट्रैटेजी पर काम कर रही हैं, पहली- मजबूत और जुझारू दिखो, दूसरी- पॉलिटिकली रिलेवेंट बने रहो। चुनाव में हार के बाद पहली बार किसी सीएम ने इस्तीफा देने से मना कर दिया। जानकार बताते हैं कि ममता ने ‘मैं नहीं झुकूंगी’ वाला संदेश देने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए ऐसा किया। चुनाव बाद TMC कार्यकर्ताओं के साथ हो रही हिंसा और 30 मई को अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को भी ममता ने आक्रामक तरीके से उठाया। TMC इन घटनाओं के विरोध में पूरे राज्य में पॉलिटिकल कैंपेन खड़ा करने की कोशिश कर रही है। ममता ने 2 जून को कोलकाता के धर्मतला बस स्टैंड के पास प्रोटेस्ट किया। ममता ने एक मेगाफोन से भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमें मंच बनाने या माइक्रोफोन इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी गई। लेकिन मैं लड़ूंगी या मर जाऊंगी।’ ममता ने कहा, ‘बंगाल में पुलिस वाले TMC नेताओं को धमका रहे हैं। इस मुश्किल समय में मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ूंगी।’ ममता कई मुद्दों पर INDIA ब्लॉक से अलग लीक पर चलती दिखती थीं। हालांकि चुनाव हारने के बाद उनका नया रुख दिखा। वह नेशनल लेवल पर विपक्ष की राजनीति में TMC की हिस्सेदारी और प्रभाव को कमजोर नहीं होने देना चाहतीं। चुनाव हारते ही 5 मई को ममता ने कहा, ‘मेरा टारगेट बहुत क्लियर है। मैं INDIA टीम को मजबूत करूंगी... सोनिया जी, राहुल, अरविंद केजरीवाल, हेमंत सोरेन…सभी ने मुझे फोन किया। सभी INDIA गठबंधन के सहयोगी मेरे साथ हैं। आने वाले दिनों में हमारी एकजुटता और मजबूत होगी।’ सवाल-3: ममता की कोशिशों के बावजूद क्या वाकई TMC बिखर सकती है? जवाबः पश्चिम बंगाल को करीब से समझने वाले एक्सपर्ट्स के बीच राय बंटी हुई है। पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक प्रभाकर मणि तिवारी का मानना है कि TMC बिखर जाएगी। वो कहते हैं, ‘ममता 2011 में सत्ता में आईं, तो धीरे-धीरे उन्होंने भी CPM को खत्म कर दिया था। बीजेपी भी बंगाल में विपक्ष को खत्म करना चाहती है। बीजेपी की कोशिश रहेगी कि TMC के आधे से ज्यादा विधायक अलग हो जाएं, जिससे उपचुनाव भी न कराना पड़े। हालांकि अगले 2-3 महीने तक TMC में किसी बड़ी टूट की आशंका नहीं है।’ वहीं, वरिष्ठ पत्रकार शिखा मुखर्जी मानती हैं कि TMC में कोई बड़ा विभाजन होता नहीं दिख रहा। वो कहती हैं, ‘इसका कोई साफ संकेत नहीं है कि बीजेपी TMC नेताओं को बीजेपी में शामिल होने के लिए उकसा रही है।’ बंगाल बीजेपी के बड़े नेताओं के बयानों से भी लगता है कि बीजेपी बागियों को खुला न्योता नहीं देना चाहती… हालांकि जीत के बाद 5 मई को सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता का राजनीतिक निर्वासन शुरू हो गया है। बंगाल में TMC के कई सांसद और कार्यकर्ता उनके साथ जुड़ेंगे। शिखा मुखर्जी कहती हैं कि बीजेपी फिर भी TMC को कमजोर करने के लिए कुछ विधायकों को अपने पाले में जरूर ले सकती है। सवाल-4: क्या बंगाल की सत्ता में टीएमसी वापसी कर पाएगी? जवाबः 1977 तक बंगाल में कांग्रेस 25 साल शासन में रही। हालांकि, बीच में 1967 से 1972 तक यूनाइटेड फ्रंट भी सत्ता में आई। फिर 34 साल लेफ्ट फ्रंट की सरकार चली। 2011 में सीएम बनीं ममता 2026 तक काबिज रहीं। यानी बंगाल में जो आता है, सालों तक छा जाता है। अब बीजेपी सत्ता में है। 4 वजहों से TMC की भी सत्ता में वापसी मुश्किल लगती है… 1. कैडर बेस नई पार्टी में शिफ्ट हो जाता है 2. दिल्ली बनाम बंगाल का नैरेटिव खत्म 3. ममता की जगह सुवेंदु का ‘पर्सनैलिटी कल्ट’ 4. वोटबैंक की सटीक चुनावी इंजीनियरिंग ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------पश्चिम बंगाल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…बंगाल में गाय की कुर्बानी पर रोक, हिंदू क्यों नाराज:बोले- दीदी से परेशान होकर सरकार बदली, BJP ने 2500 करोड़ का धंधा बिगाड़ा पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में रहने वाले सुखदेव मंडल खेती-किसानी करते हैं। इसी से परिवार का खर्च चलता है। इस साल बेटी की शादी करनी है, इसलिए सालभर पहले बैंक से लोन लेकर मवेशी खरीदे। उम्मीद थी कि बकरीद पर बिक जाएंगे और शादी-ब्याह का खर्च निकल जाएगा, लेकिन बंगाल सरकार के एक फैसले ने उनकी उम्मीद तोड़ दी। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 2 Jun 2026 6:44 pm

अमेरिका में फिर अंधाधुंध गोलीबारी: आयोवा में बंदूकधारी ने मचाया तांडव, हमले में 7 लोगों की दर्दनाक मौत

अमेरिका से एक बार फिर गोलीबारी की दहला देने वाली खबर आई। आयोवा के मस्कटाइन में अलग-अलग जगहों पर फायरिंग के बाद संदिग्ध बंदूकधारी समेत सात लोग मृत पाए गए।

देशबन्धु 2 Jun 2026 3:49 pm

रूस-यूक्रेन युद्ध: यूक्रेन के कई शहरों पर रूस का अब तक का सबसे बड़ा हमला, कम से कम 13 लोगों की मौत, भारी तबाही

यूक्रेन पर रूस के मिसाइल और ड्रोन हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गयी है। इनमें से नौ लोग निप्रो में और चार राजधानी कीव में मारे गये।

देशबन्धु 2 Jun 2026 2:51 pm

ट्रंप के बेरूत पर हमला रुकवाने के दावे पर क्या कहती है अमेरिकी मीडिया?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उनकी सीधी अपील के बाद बेरूत में होने वाला एक सैन्य अभियान रोक दिया

देशबन्धु 2 Jun 2026 10:41 am

यूएस सीनेटरों का आरोप: ट्रंप प्रशासन की लापरवाही से चीन तक पहुंच सकती है उन्नत एआई तकनीक

अमेरिका की दो वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उसने अमेरिकी निर्यात नियंत्रण नियमों में एक ऐसी खामी रहने दी

देशबन्धु 2 Jun 2026 9:45 am

ट्रंप ने लगाया ईरान पर बातचीत को लंबा खींचने का आरोप, कहा- वार्ता बंद होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई खास चिंता नहीं है कि ईरान अमेरिका के साथ चल रही बातचीत रोक सकता है। उनका कहना था कि ईरान ने बातचीत में बहुत ज्यादा समय लिया है और उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही ट्रंप प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

देशबन्धु 2 Jun 2026 8:48 am

इटली के दक्षिणी कैलाब्रिया क्षेत्र के तट पर 6.1 तीव्रता का भूकंप आया

इटली के दक्षिणी कैलाब्रिया क्षेत्र के तट के पास 6.1 तीव्रता का भूकंप आया। अधिकारियों के अनुसार, भूकंप का केंद्र समुद्र में था और इसकी गहराई काफी अधिक होने के कारण बड़े नुकसान की आशंका कम रही।

देशबन्धु 2 Jun 2026 8:45 am

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोले, ईरान से बातचीत जारी, इजरायल नहीं करेगा हिज्बुल्लाह पर हमला

ईरानी मीडिया ने दावा किया कि सीजफायर को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत रोक दी गई है। ईरानी मीडिया की ओर से किए गए दावे के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है।

देशबन्धु 2 Jun 2026 8:43 am

कैमरा देखकर भागे चोलानाइकन, गुफा में छिपने लगे:मानते हैं कि शक्ति चली जाएगी, गुफाओं में रहने वाली एशिया की आखिरी जनजाति, 250 ही बचे

सुबह का वक्त, हल्की धुंध, घने जंगल में अजीब सी आवाजें आ रही हैं। 5 घंटे तक पैदल चलने के बाद चट्‌टानों पर कुछ लोग नजर आते हैं। नजदीक पहुंचे तो देखा चट्‌टानों में छोटी-बड़ी काली गुफाएं हैं। हमें देखते ही उनमें से कुछ छिप-छिपकर गुफाओं में जाने लगे। थोड़ी देर बाद डरे-सहमे कुछ लोग हमारे करीब आए। मैंने कैमरा निकाला तो वो अजीब हाव-भाव दिखाने लगे। मेरे साथी बोले- ये आपको नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस बीच, उन्हीं में से एक बुजुर्ग आगे आया और कैमरे की ओर इशारा करते हुए अपनी भाषा में बोला- इसे दूर करो, ये हमारी शक्ति खींच लेगा। मैंने तुरंत कैमरा हटा लिया। ये बात मुझे मेरे साथी ने समझाई। अपने साथी के जरिए बुजुर्ग से पूछा– आप लोग गुफाओं में क्यों रहते हैं? बुजुर्ग हमें अपनी गुफा के पास ले गया। एक ओर इशारा करते हुए कहा- यहां हमारे बुजुर्ग सोए हैं। हम उन्हें छोड़कर नहीं जाते। ये हमारी गुफाओं के रक्षक हैं। हम अपने परिवार के लोगों को भी यहीं दफनाते हैं। ये किस्सा है चोलानाइकन जनजाति का, जो 21वीं सदी में भी घने जंगलों के बीच गुफाओं में रहती है। इनसे मिलने पहुंचे थे पर्यावरणविद केए शाहजी। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं इसी चोलानाइकन जनजाति की कहानी। चोलानाइकन जनजाति के करीब 250 लोग ही बचे हैं, जो केरलम के मलप्पुरम जिले के नीलांबूर के जंगलों में बसे हैं। जब मैं इनसे मिलने जंगल पहुंची तो रोक दिया गया। केरलम सरकार ने हाल ही में चोलानाइकन लोगों से जंगल में जाकर मिलने पर सख्त पाबंदी लगा दी है। केए शाहजी वो आखिरी शख्स हैं, जो इनकी गुफाओं तक पहुंचे हैं। शाहजी ने चोलानाइकन की गुफाएं और उनके रहन-सहन को करीब से देखा है। मेरी शाहजी से मुलाकात नीलांबूर जंगलों के मुहाने पर हुई। वहीं उन्होंने ये पूरी कहानी सुनाई। यह जंगल वायनाड के करीब है। मैंने प्रशासन से चोलानाइकन की गुफाओं तक जाने की मंजूरी मांगी, लेकिन अफसर नहीं माने। लगातार प्रयास करने के बाद वन विभाग के अफसरों ने सिर्फ दो चोलानाइकन परिवारों से मिलने की मंजूरी दी। ये दो परिवार जंगल के मुहाने पर रहते हैं। इन्हें सरकार ने कच्चे घर भी बनाकर दिए हैं। बाकी 20-25 परिवार जंगल में ही गुफाओं में रहते हैं। इजाजत मिलते ही मैं अपने साथी राम कुमार और बालकृष्णन के साथ वायनाड से नीलांबूर के जंगलों की ओर निकल पड़ी। रास्ते में बालकृष्णन बताते हैं कि चोलानाइकन बाहरी लोगों से डरते हैं, जल्द बातचीत के लिए तैयार नहीं होते। ये पहाड़ों को देवता मानते हैं। गर्मियों के मौसम में नदियों के किनारे झोपड़ी बनाते हैं। मानसून और ठंड में वापस गुफाओं में लौट जाते हैं। ये जंगल से आमतौर पर बाहर नहीं आते। फिर ये दो परिवार यहां क्यों रहते हैं? कभी-कभी कुछ सामान वगैरह लेने के लिए चोलानाइकन जंगल से बाहर आते हैं। थोड़े दिन इन कच्चे घरों में रहते हैं। प्रशासन इनकी निगरानी करता है, ताकि कोई इन्हें परेशान न करे। बाद में जंगल के बीचोबीच अपनी गुफाओं में लौट जाते हैं। नीलांबूर के आगे करीब 20 किलोमीटर के बाद सड़क खत्म हो जाती है। आगे का सफर यहां से पैदल ही तय करना होगा। हम तीनों पथरीले रास्तों से होते हुए तो जंगल के मुहाने पर पहुंचे। यहां चारों ओर पक्षियों की आवाज आ रही है। अचानक दो कच्चे घर दिखाई देते हैं। तभी बालकृष्णन कहते हैं- चोलानाइकन के दो परिवार वहीं रह रहे हैं। हम उन घरों की ओर बढ़े, तो कुत्ते भौंककर स्वागत करते हैं। घरों के करीब पहुंचते ही एक आदमी दिखता है। बालकृष्णन बताते हैं– ये मुरगन है। इस बीच, मुरगन अपने काम में लगा रहा, हमें देखा तक नहीं। वह जमीन पर बैठे-बैठे कटहल को फोड़कर उसके बीजों को खा रहा है। बालकृष्णन ने उसी की भाषा में पूछा- यह कहां से लाए हो? वह बताता है- जंगल से एक आदमी लेकर आया था। अभी वो और फल लेने जंगल गया है। इस दौरान, जब मैं इस बातचीत का वीडियो बना रही थी, तो मुरगन कुछ कहते-कहते रुक गया। बालकृष्णन के थोड़ा समझाने के बाद मुरगन मान गया। वह बताता है- गर्मी से एक महीने पहले जंगल से कटहल लाते हैं। इसे उबालते हैं। इसके बाद, इसमें शहद और मिर्च डालकर छोटे–छोटे गोले बनाकर खाते हैं। बालकृष्णन बताते हैं- 'इनके पास हर बीमारी का इलाज जंगल में ही है। ये हर तरह की जड़ी–बूटी पहचानते हैं। बालकृष्णन, मुरगन से पूछता है कि तुम्हारे यहां शादी कैसे होती है?' वो बताता है- ‘जब लड़की को लड़का पसंद कर लेता है, तो हमारे मुखिया और गांव के बुजुर्ग एक जगह सभी को बुलाते हैं। वहां वे तुलसी की दो माला बनाकर दोनों को देते हैं। लड़का, लड़की एक दूसरे को माला पहनाते हैं। इसके बाद, दोनों साथ रहने लगते हैं। उन्हें अलग से एक गुफा भी दे दी जाती है। किसी तरह का कोई भोज या लेन-देन नहीं होता।’ इतने में एक महिला आती हैं। दुबली-पतली, घुंघराले बालों वाली। बालकृष्णन ने नाम पूछा, तो बोली- बिंदु। मुझे देखते ही वह गुफा के दूसरी ओर चली जाती है और वहां कुछ सुखाने लगती है। बालकृष्णन पास में जाकर पूछते हैं- यह क्या कर रही हो? वो बताती है- ये काली मिर्च है, इसे सुखा रही हूं। जंगली शहद और काली मिर्च बेचकर थोड़ा बहुत पैसा मिल जाता है। इस दौरान मैं उनके घर में झांकती हूं, तो मुरगन–बिंदु मुझे गौर से देखते हैं। घर की दीवारें गंदी थीं और चारों तरफ धूल ही धूल है। नीचे दाल–चावल बिखरे पड़े हैं। शायद एक–दो दिन पहले उन्हें किसी ने राशन किट दी थी। जंगल से लाई गई सब्जियां हैं और नींबू भी रखे हैं। रसोई में सिर्फ 2–3 एल्युमिनियम के बर्तन दिखाई दिए। न मसाला, न नमक, न तेल। मुरगन, बालकृष्ण को बताता है कि हम जंगलों से कुछ भी तोड़कर सीधे ही खा लेते हैं, पकाते नहीं हैं। आग में मछली भून लेते हैं या चावल उबालकर कांजी बनाते हैं। तभी, मेरे साथी राम कुमार ने मुझे आवाज दी। मैं बाहर निकली, तो उन्होंने मुझे घर के पास से ही एक हल्दी की गांठ निकालकर दी। कहा– 'इसकी खुशबू लेकर देखिए।' मैंने सूंघी तो, वाकई हल्दी की ऐसी खुशबू मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। राम कुमार ने बताया– दुनिया में आपको इससे ज्यादा शुद्ध हल्दी कहीं नहीं मिलेगी। चोलानाइकन इसे खाते हैं। घाव होने पर शरीर पर लगाते हैं। इसके बाद राम कुमार ने एक पेड़ से पत्ता तोड़कर दिया। कहा- ये तेजपत्ता है। उसकी खुशबू भी लाजवाब थी। मैंने पूछा- जंगल में हर समय फल-फूल नहीं होते, ऐसे में ये क्या खाते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– चोलानाइकन जंगल से शहद इकट्ठा करते हैं। बांस के लंबे खोखले डंडों में भरकर इसे हल्की आंच पर गर्म करते हैं। इसके बाद इसे मिट्टी में दबा देते हैं। जब जंगल में खाने के लिए कुछ नहीं मिलता, तब ये लोग इस शहद को बाहर निकालकर उसमें पानी मिलाते हैं और पके चावल से खाते हैं। क्या, इनके नाम भी खास होते हैं? बालकृष्णन बताते हैं– ‘हर चोलानाइकन की गुफा का एक नाम होता है, इसलिए गुफा के नाम से ही परिवार पहचाने जाते हैं। ये लोग भले ही संख्या में कम हैं, लेकिन अपने मुखिया की हर बात मानते हैं।’ ‘कौन सा परिवार किस गुफा में रहेगा, कब जंगल में नई जगह जाना है या शहद का बंटवारा कैसे होगा, ये सब मुखिया ही तय करता है।’ चोलानाइकन छोटे–छोटे कबीलों में जंगलों में अलग-अलग जगह रहते हैं। हर कबीले का एक मुखिया होता है। कबीले आपस में बहुत मेल-जोल नहीं रखते। क्या चोलानाइकन कोई उत्सव भी मनाते हैं? दैवओट्टू, इनका एक पारंपरिक उत्सव है। यह आमतौर पर अप्रैल में होता है। इस उत्सव के लिए हर परिवार शहद एकत्रित करता है। फिर शहद का एक हिस्सा पर्वत और पुरखों को अर्पित करते हैं। क्या आपको पता है, चोलानाइकन तारों को देखकर मौसम का हाल बता देते हैं। मैंने पूछा- कैसे? वो बताते हैं- ये लोग तारों की स्थिति और उनकी चमक के आधार पर मानसून के आने का अनुमान लगा लेते हैं। साथ ही, अपनी गुफा बदल लेते हैं। भारी बारिश से बचने के लिए ये लोग पहाड़ों पर बनी गुफाओं में चले जाते हैं। मौत के बाद मिट्टी से दूरी… लाश को पत्तों–बेलों से ढंकते हैं बालकृष्णन बताते हैं कि चोलनाइकन समुदाय में अंतिम संस्कार अनूठे तरीके से होता है। मौैत के बाद वे एक गहरा गड्ढा खोदते हैं। लाश को बेलों और पत्तों में लपेटकर उसमें रखते हैं। ऊपर से मिट्टी नहीं डालते, बल्कि गड्ढे को सूखी लकड़ियों और पत्तों से ढंक देते हैं। वे इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि मिट्टी का एक भी कण शव को न छू पाए। ऐसा क्यों? चोलनाइकन के लिए मिट्टी 'संसार का भार' है। शव को मिट्टी से दूर रखने के पीछे उनकी गहरी आस्था है। उनका मानना है कि ऐसा करने से मृतक की आत्मा बिना किसी सांसारिक बंधन में उलझे, जंगल की हवाओं और पेड़ों की चेतना में विलीन हो जाती है। अब शाम होने वाली है। हम वापस वायनाड की ओर निकल पड़ते हैं। अगले दिन, वायनाड में पर्यावरणविद केए शाहजी के घर पहुंची। शाहजी बताते हैं- बारिश के दिन थे। जब मैं पहली बार चोलानाइकन लोगों की गुफा के पास पहुंचा, तो लगा जैसे किसी दूसरी सदी में आ गया हूं। मैंने चोलानाइकन के बीच रात गुजारी है। रात में हाथियों की चिंघाड़ पूरे जंगल में गूंज रही थी। गुफाओं के पास तक भी कुछ हाथी आ गए थे, लेकिन चोलानाइकन पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। वो रात मैंने करवटें बदल–बदल कर गुजारी। चोलानाइकन की खासियत बताता हूं। वे पक्षियों की चहचहाहट, हवा का रुख और पेड़ों की पत्तियों के हिलने के तरीके से बता सकते हैं कि बारिश कब होगी या जंगल में खतरा कितना करीब है। ‘वे कौन सी भाषा बोलते हैं?’ चोलानाइकन अपनी भाषा को 'चोलानाइक्कन' कहते हैं। इस भाषा में मलयालम के अलावा तमिल और कन्नड़ के भी कुछ शब्द मिलते हैं। शाहजी से मिलकर मैं वायनाड के स्थानीय पत्रकार दीपक कुमार के घर पहुंची। दीपक भी चोलानाइकन और उनकी गुफाओं को करीब से देख चुके हैं। कुछ बताने से पहले वो मुझे चोलानाइकन की तस्वीरें दिखाते हैं। इसके बाद वे कहते हैं- ये लोग अपने पूर्वजों की तरह गुफाओं में ही रहना पसंद करते हैं। सरकार ने जंगल में इनके लिए घर बनाकर दिए हैं, लेकिन वह अधूरे हैं। वे बताते हैं– चोलानाइकन समुदाय की एक महिला को गर्भवती होने पर वायनाड के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन वह रात में ही वहां से चली गई। अफरा–तफरी मच गई। आखिर, वह जंगल में अपने लोगों के बीच मिली। ऐसे और भी किस्से हैं। लेकिन सबसे बड़ा संकट यह है कि यदि इस जनजाति को नहीं संभाला गया तो ये ‘केवमैन’ जंगलों में ही खत्म हो जाएंगे। --------------------------------------- 1- ‘-10C में मौत, लेकिन हम करते हैं नंगे बदन तपस्या’:ध्यान में ही थम जाती हैं हमारी सांसें, मरने के 15 दिन बाद अंतिम संस्कार हिमालय। 3,600 मीटर की ऊंचाई पर यहां पारा -10 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क चुका है। हवा में ऑक्सीजन इतनी कम है कि हर सांस एक जद्दोजहद है। लेकिन इन बर्फीली हवाओं के बीच, सामने जो कुछ दिख रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यहां नजर आ रही छोटी-छोटी गुफाओं और पत्थरों पर कुछ लोग नंगे बदन आंखें बंद किए बैठे हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- मुर्गी का कलेजा चीरकर कहा, ये चोर नहीं है:ससुराल पहुंचते ही बलि देती है दुल्हन, कटे सिर को मंदिर मानते हैं गालो सुबह के 7 बजे हैं। अरुणाचल प्रदेश की एक पहाड़ी बस्ती में हूं। यहं एक घर पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्हीं के बीच एक लड़का परेशान खड़ा है। थोड़ी देर में घर से एक बुजुर्ग बाहर आते हैं। काले कपड़े में, बाघ की खाल का जैकेट पहने। कंधे पर धनुष, पीठ पर तीरों से भरा तरकश लिए और सिर पर टोपी लगाए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 2 Jun 2026 7:21 am

राहुल से मीटिंग के बाद सिद्धारमैया ने मांगे 48 घंटे:पहले 4 बातें मनवाईं, फिर इस्तीफा; डीके को CM बनाकर कांग्रेस क्या साध रही

28 मई 2026, 77 साल के सिद्धारमैया ने कर्नाटक के CM पद से इस्तीफा दिया, अब 64 साल के डीके शिवकुमार 3 जून को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। ये फैसला अचानक नहीं लिया गया। 4 मई को दिल्ली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ सिद्धारमैया की बैठक हुई। इसमें उन्हें नेतृत्व परिवर्तन के लिए कहा गया। सिद्धारमैया ने 48 घंटे का वक्त मांगा और वादा पूरा करते हुए इस्तीफा दे दिया। CM पद छोड़ने के लिए आखिर कैसे माने सिद्धारमैया? कर्नाटक के सीनियर जर्नलिस्ट गौतम शंकर कहते हैं, ‘कांग्रेस सत्ता परिवर्तन को भले सहजता से पेश कर रही, लेकिन सिद्धारमैया का करियर देखने के बाद मैं कह सकता हूं कि इतनी आसानी से पद छोड़ देना, उनके स्वभाव के विपरीत है। उन्होंने 1996 में जेएच पटेल और 2004 में धर्म सिंह को कर्नाटक का CM बनाए जाने को खुली चुनौती दी थी। इसी अड़ियल रुख के कारण 2005 में पूर्व PM देवगौड़ा ने उन्हें JDS से निकाल दिया था।’ इस बार क्या बदला? गौतम जवाब में कहते हैं, ‘अहिंदा गुट के कुछ नेताओं से जानकारी मिली है कि सिद्धारमैया ने 4 प्रमुख मांगें रखीं।’ 1. तीन डिप्टी CM का पद। 2. कैबिनेट में वफादारों के लिए अहम विभाग। 3. MLC बेटे यतींद्र को कैबिनेट में जगह और बड़ी जिम्मेदारी। 4. कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने में उनकी सलाह जरूरी। इसकी ज्यादा संभावना है कि सतीश जारकीहोली को नया अध्यक्ष बनाया जाए।वे एक शक्तिशाली ST नेता हैं और खुद को अगले अहिंदा नेता के रूप में भी स्थापित कर रहे हैं। गौतम आगे कहते हैं, ‘सीट छोड़ने के बाद सिद्धारमैया सबसे पहले बेटे यतींद्र के साथ दिल्ली गए। 29 मई को उन्होंने बेटे की मुलाकात सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कराई। इससे लगभग तय है कि अबकी यतींद्र को कैबिनेट में शामिल किया जाए।’ कर्नाटक की पॉलिटिक्स पर करीब से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट केए शाजी कहते हैं, ‘पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों से पता चला है कि सिद्धारमैया बेटे यतींद्र के लिए डिप्टी CM का पद या फिर पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, उद्योग और जल संसाधन विभाग और मेडिकल एजुकेशन जैसे विभाग चाहते हैं।‘ सिद्धारमैया गुट खुश नहीं, लेकिन फैसला माना सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले विधायक अशोक एम.पट्टन बताते हैं, ‘ये पहले से तय था कि हाईकमान से जो भी निर्देश होगा, दोनों नेता (सिद्धारमैया और शिवकुमार) मानेंगे। अब जब डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे, तो सभी उनके साथ हैं।‘ ‘पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले विधायकों ने आलाकमान तक संदेश पहुंचाया है कि अगर हमारे (अहिंदा) इतने बड़े नेता को पद से हटाया जा रहा है, तो भविष्य में भी इस वर्ग के हितों और प्रतिनिधित्व का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए।‘ केरल चुनाव की वजह से टाली गई CM बदलने की कवायद कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनाव में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनकर उभरे। इसे देखते हुए फॉर्मूला निकाला गया कि दोनों ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। नवंबर 2025 में सिद्धारमैया के ढाई साल पूरे हो गए, लेकिन वो तब भी CM बने रहने पर अड़े रहे। कर्नाटक कांग्रेस से जुड़े सोर्स के मुताबिक, तय फॉर्मूले के हिसाब से दिसंबर 2025 से शिवकुमार को CM पद संभालना था, लेकिन राहुल गांधी समेत पार्टी के सभी सीनियर लीडर केरल में चुनावों की तैयारियों में व्यस्त थे, इसलिए तब ये बदलाव नहीं हो सका। नए CM के लिए क्या चैलेंज…वोक्कालिगा को एक रखना डीके के सामने चुनौती कांग्रेस सोर्सेज के मुताबिक, नई सरकार में 4 डिप्टी CM और 6 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। शिवकुमार प्रभावशाली वोक्कालिगा कम्युनिटी से हैं। राज्य में इनकी हिस्सेदारी करीब 15% है। CM बनते शिवकुमार का सबसे बड़ा टारगेट पूरे वोक्कालिगा वोटबैंक को कांग्रेस के पक्ष में करना होगा। ऐसे में BJP की सहयोगी पार्टी JD(S) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के लिए वोक्कालिगा वोटरों का समर्थन हासिल कर पाना मुश्किल हो सकता है। BJP की भी टेंशन बढ़ीBJP के एक सोर्स बताते हैं कि शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद JD(S) के अंदर टूट-फूट की आशंका भी बढ़ जाएगी। सोर्स के मुताबिक, शिवकुमार ये तय करेंगे कि JD(S) के नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा कांग्रेस में आए। JD(S) के लिए अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा राज्य की सबसे बड़ी कम्युनिटी लिंगायत को साधना भी चुनौती है। ये BJP के सपोर्टर रहे हैं। पार्टी लीडर और कर्नाटक के पूर्व CM बीएस येदियुरप्पा की बढ़ती उम्र के चलते पार्टी का इन पर कंट्रोल कम हो रहा है। ऐसे में BJP के नेतृत्व वाली NDA अगले चुनाव में सिर्फ एंटी-इनकंबेंसी के भरोसे नहीं रह सकती। उसे कांग्रेस को चुनौती देने के लिए नई रणनीति और मुद्दे तलाशने होंगे। डीके का कर्नाटक के लिए रोडमैप शिवकुमार की पहचान मनी और पावर के दम पर काम करने वाले लीडर की रही है। अब CM बनकर उन्हें अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित करनी है। सीनियर जर्नलिस्ट गौतम शंकर के मुताबिक, CM बनने के बाद शिवकुमार को सबसे पहले ये तय करना होगा कि राज्य कर्ज में न डूबे और टैक्सपेयर्स पर ज्यादा बोझ न बढ़े। उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कई मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए थे, लेकिन सभी फंड की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें बेंगलुरु में 40 किलोमीटर की टनल परियोजना शामिल है, जिसे 40,000 करोड़ से ज्यादा की लागत से शहर को जाम मुक्त करने के लिए बनाया जाना है। इस प्रोजेक्ट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं, लिहाजा इसपर काम जल्द पूरा करना चाहिए। गौतम कहते हैं, ‘राज्य के सिंचाई मंत्री के रूप में डीके ने कावेरी नदी पर मेकेदातु संतुलन जलाशय और पेयजल परियोजना के लिए केंद्र से मंजूरी लेने में कड़ी मेहनत की है। इसकी लागत करीब 14,000 करोड़ है। वे CM बनते ही ये प्रोजेक्ट शुरू करेंगे। इसके अलावा परिवहन और लॉ एंड ऑर्डर कंट्रोल की दिशा में सरकार बड़े फैसले ले सकती है।’ ………………….. ये खबर भी पढ़ें… 5 दिन मीटिंग, प्रियंका एक्टिव, तब सतीशन बने केरलम CM 10 दिन की माथापच्ची के बाद आखिर कांग्रेस ने केरलम का CM तय कर लिया। राज्य में पार्टी के सबसे बड़े लीडर वीडी सतीशन नए CM होंगे। राहुल के भरोसेमंद केसी वेणुगोपाल और सबसे अनुभवी रमेश चेन्नीथला भी दावेदार थे। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 2 Jun 2026 4:58 am

आज का एक्सप्लेनर:क्या नेपाल ने वाकई भारत के इलाकों पर कब्जा किया; पीएम बालेन शाह का दावा उनका ही नुकसान कैसे करेगा

पीएम बालेन शाह ने रविवार को दावा किया- नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। मामले ने तूल पकड़ा, तो नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। क्या वाकई नेपाल ने भारत की जमीन कब्जा की है और बालेन का दावा उनका ही नुकसान कैसे कर सकता है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बालेन शाह ने क्या दावे किए, जिसपर हंगामा मच गया? जवाबः नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद मार्च 2026 में चुनाव हुए। पुरानी पार्टियां और नेता बुरी तरह हार गए। बालेन शाह की अगुवाई में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिला। 35 साल के बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। पीएम बनने के 65 दिन बाद 31 मई को बालेन संसद में पहला भाषण देने पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ सांसदों ने उनसे भारत-नेपाल सीमा विवाद पर सवाल पूछा। जवाब में बालेन ने 2 बड़ी बातें कहीं… इन बयानों के बाद नेपाल की संसद में हंगामा मचा। विपक्षी दलों ने उनसे सबूत मांगे। बयान को संसद की कार्रवाई से हटाने की मांग की गई। प्रधानमंत्री को माफी मांगने के लिए कहा जाने लगा। नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री कमल थापा ने X पर लिखा ‘उन्हें जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह कौन-सी जगह है और उसके क्या सबूत हैं। उन्हें तुरंत उस गलती को सुधारना चाहिए और सम्मानपूर्वक वह जमीन भारत को वापस कर देनी चाहिए।’ विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के नेता वासना थापा ने कहा, ‘हमें जल्द सूचित किया जाना चाहिए था कि किस भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। यह एक गंभीर और आपत्तिजनक मुद्दा है। इस बयान को संसद के रिकॉर्ड से भी हटाना चाहिए।’ हालांकि नेपाल में पत्रकारों और राजनयिकों के एक धड़े ने पीएम बालेन की साफगोई और सीमा विवाद को इतनी मजबूती से उठाने की तारीफ भी की है। सवाल-2: क्या वाकई नेपाल ने भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है? जवाबः नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पीएम के बयान पर खुद स्पष्टीकरण जारी किया। लिखा- ‘प्रधानमंत्री भारत के इलाकों पर कब्जे की नहीं, 'क्रॉस-बॉर्डर ऑक्यूपेशन' की बात कर रहे थे।’ क्रॉस-बॉर्डर ऑक्यूपेशन यानी एक देश की जमीन को दूसरे देश के नागरिक खेती-बाड़ी, रहने के लिए और दूसरे कामों में इस्तेमाल करते हैं। दरअसल, भारत और नेपाल के बीच करीब 1,751 किमी लंबी सीमा है। इसमें पहाड़ी इलाके, नदियां और समतल जमीन है। ज्यादातर ओपेन बॉर्डर है, यानी दोनों देशों के बीच में कोई फेंसिंग नहीं है। जिन इलाकों में जमीन समतल है, वहां दोनों तरफ कुछ जमीन ‘नो-मेंस लैंड’ रखी जाती है। बॉर्डर पिलर के दोनों तरफ 10-10 गज की पट्टी होती है, इसलिए इसे दसगजा भी कहते हैं। इस जमीन पर दोनों देशों के नागरिकों को स्थायी निर्माण, मकान, दुकान या खेती करने की अनुमति नहीं होती। बिहार के सीमावर्ती इलाकों से भास्कर रिपोर्टर बताते हैं कि सीमा के कई इलाकों में 500 मीटर तक कोई पिलर नहीं है। यहां लोग अपना कब्जा बढ़ा लेते हैं। दोनों तरफ के किसान अपनी जमीन के साथ नो-मेंस लैंड की जमीन पर भी खेत जोतकर बुआई कर लेते हैं। कई जगहों पर लोगों ने टीन शेड लगाकर भैंसें और बकरियां भी बांधी हुई हैं। भारत की सशस्त्र सीमा बल और नेपाल सशस्त्र पुलिस मिलकर इस क्षेत्र में कब्जे हटाने के अभियान चलाते रहते हैं। इसके अलावा भी पिछले सालों में क्रॉस बॉर्डर अतिक्रमण की कुछ रिपोर्ट मिलती हैं… सवाल-3: बालेन शाह का दावा उनका ही नुकसान कैसे करेगा? जवाबः उनके दावे से 3 मुश्किलें पैदा होंगी… 1. नेपाल की कूटनीतिक स्थिति कमजोर होगी 2. ब्रिटेन शामिल हुआ, तो मामला और उलझ जाएगा 3. बालेन शाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठे सवाल-4: भारत के लिए इस बयान के मायने क्या हैं? जवाबः ​​बालेन शाह के ताजा बयान पर फिलहाल भारत ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि पिछले दिनों सीमा विवाद के सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल के ये क्षेत्रीय दावे न तो सही हैं और न ही किसी ऐतिहासिक तथ्य या सबूत पर आधारित हैं। पीएम बनने के बाद पिछले 65 दिनों में बालेन शाह ने कई ऐसे काम किए, जिससे भारत के डिप्लोमैटिक गलियारों में हलचल है… भारतीय राजदूत को विशेष दर्जा नहीं दिया: परंपरा के मुताबिक, नेपाल में नए पीएम भारतीय राजदूत से अलग से शिष्टाचार मुलाकात करते हैं। बालेन शाह ने भारतीय राजदूत से अलग से मिलने के बजाय सभी देशों के राजदूतों से सामूहिक मुलाकात की। इससे यह संदेश गया कि उनकी सरकार भारत को कोई विशेष तरजीह नहीं देना चाहती। मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति जताई: 4 जुलाई से मानसरोवर यात्रा शुरू होनी है। इसके लिए श्रद्धालु भारत से लिपुलेख पास होते हुए चीन के तिब्बत जाते हैं। नेपाली विदेश मंत्रालय ने इस पर आपत्ति जताई है और कहा है कि लिपुलेख उनका इलाका है। उन्होंने भारत और चीन को भी चिट्ठी लिखकर अपना स्टैंड साफ किया है। भारतीय विदेश सचिव से नहीं मिले: मई 2026 में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री नेपाल जाकर बालेन शाह को भारत आने का आधिकारिक न्योता देने वाले थे। लेकिन, बालेन ने उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया और दौरा रद्द हो गया। पीएम बनने के बाद भारत नहीं आए: ये परंपरा रही है कि पद संभलाने के बाद नेपाली प्रधानमंत्री भारत का दौरा करते हैं। लेकिन बालेन ने कार्यभार संभालते ही यह घोषणा कर दी कि वे कार्यकाल के पहले साल किसी भी देश के आधिकारिक दौरे पर नहीं जाएंगे। राजन कुमार के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पीएम बालेन शाह के बयान पर सफाई दे दी है। इसलिए भारत अभी इस पर कड़ा रुख नहीं अपनाएगा। भारत-नेपाल का सीमा विवाद उतना जटिल भी नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। इस बीच बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने 5 दिन के भारत दौरे पर आए हैं। वे बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात करेंगे। इस दौरान हुई बातचीत से नेपाल की नई सरकार का रुख और साफ हो सकता है। सवाल-5: भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद क्या है? जवाबः भारत के पांच राज्यों से नेपाल की सीमा लगती है- उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम। इनमें उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा की लंबाई 173 किलोमीटर है। उत्तराखंड की सीमा चीन से भी लगती है। इसी सीमा से जुड़े तीन इलाके- लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी विवाद की वजह हैं। नेपाल इन्हें अपना हिस्सा बताता है, जबकि भारत इस दावे को खारिज करता आया है। ये पूरा इलाका लगभग 338 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यानी रायपुर शहर जितना बड़ा। भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद करीब 210 साल पुराना है… उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मौजूद कालापानी भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद जरूरी है। मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्री इसी इलाके के लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरते हैं। यहां से चीनी सेना पर नजर रखना आसान है। इसीलिए चीन इसे लेकर नेपाल को उकसाता रहता है। 1962 के युद्ध के बाद लिपुलेख दर्रा बंद भी हुआ। हालांकि 2015 में हुए भारत-चीन समझौते के बाद इसे दोबारा खोला गया। मई 2020 में भारत ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को आसान बनाने के लिए पिथौरागढ़ से लेकर लिपुलेख दर्रे तक 80 किमी की सड़क बनाई, जिस पर नेपाल ने नाराजगी जताई थी। 15 मई 2020 को तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष एम.एम नरवणे ने कहा था कि नेपाल ऐसा किसी और के बहकावे में कर रहा है। नरवणे का इशारा चीन की ओर था। इसके बाद जून 2020 में नेपाल की संसद ने एक नया नक्शा मंजूर किया था, जिसमें इन इलाकों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नेपाल का दावा ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। ---------- पुरी खबर पढ़िए… 15 दिन में सैलरी, अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूल में: पीएम बालेन शाह के 30 दिनों की कहानी; नेपाल को बदलेंगे या तानाशाह बनेंगे 27 मार्च 2026 को 35 साल के बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पीएम बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवा दिया गया। सरकारी दफ्तरों से नेताओं की तस्वीरें उतरवा दी गईं। छात्र राजनीति पर रोक लगा दी गई। अब अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना होगा, जबकि कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी मिलेगी। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 2 Jun 2026 4:56 am

शादी के कुछ घंटे बाद बड़ा हादसा: अमेरिका में हेलीकॉप्टर क्रैश में भारतीय मूल के पायलट की मौत, दुल्हन घायल

भारतीय मूल के एक 26 वर्षीय पायलट की शादी के कुछ ही घंटों बाद हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं और कई घंटों तक मलबे में फंसी रहीं। यह घटना न केवल परिवार के लिए, बल्कि शादी समारोह में शामिल सैकड़ों मेहमानों के लिए भी अविश्वसनीय सदमे जैसी रही।

देशबन्धु 1 Jun 2026 12:59 pm

पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले; कुवैत पर भी हुआ अटैक

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई, जिसमें ईरान ने अमेरिकी MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को निशाना बनाकर मार गिराया था। अमेरिका का कहना है कि यह ड्रोन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था।

देशबन्धु 1 Jun 2026 11:49 am

ईरान में सियासी हलचल तेज: राष्ट्रपति पेजेशकियान के इस्तीफे की खबरों पर विवाद, राष्ट्रपति कार्यालय ने किया खारिज

ईरान इंटरनेशनल और कुछ अन्य विदेशी मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों में कहा गया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने एक पत्र के माध्यम से सर्वोच्च नेता को अपना इस्तीफा भेजा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्होंने लिखा है कि हाल के महीनों में सरकार की भूमिका कमजोर हुई है।

देशबन्धु 1 Jun 2026 11:17 am

इटली में इबोला का संदिग्ध मामला, कांगो से लौटे मरीज को आइसोलेशन में रखा गया

इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कैग्लियारी में इबोला के एक संदिग्ध मामले की जांच चल रही है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह मरीज हाल ही में कांगो से लौटा था और इस समय सार्डिनिया की राजधानी में मौजूद है।

देशबन्धु 1 Jun 2026 9:50 am

क्या IPL का डाउनफॉल शुरू:टीवी दर्शक 26% घटे, विदेशी खिलाड़ी आधा सीजन ही खेल रहे; टॉप एक्सपर्ट्स ने बताईं असली वजहें और समाधान

29 मई की शाम। फोन पर नोटिफिकेशन आया- राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी सेंचुरी के करीब हैं। मैंने जियो हॉटस्टार खोला, लाइव मैच चला लिया। तभी ध्यान आया कि इस पूरे सीजन में पहला मैच लाइव देख रही हूं। बाकी दो महीने? बस हाइलाइट्स, स्कोर अपडेट्स और कभी-कभी रील्स। न्यूजरूम में पूछा तो कई और क्रिकेट के दीवानों का यही हाल था। थोड़ी रिसर्च की तो और परतें खुलती गईं। इस साल IPL के फर्स्ट हाफ में टीवी व्यूअरशिप 26% गिरी है। स्पॉन्सर 65 से 45 रह गए हैं। ईडन गार्डन जैसे स्टेडियम भी कुछ मैचों में आधे ही भर पाए। कई विदेशी खिलाड़ियों ने भी आधे सीजन बाद टीम को जॉइन किया। तो क्या IPL का डाउनफॉल शुरू हो गया है? या यह सिर्फ एक स्पीड ब्रेकर है जिसे आसानी से पार किया जा सकता है; इस मंडे मेगा इसी की कहानी… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा ------------ ये खबर भी पढ़िए आज का एक्सप्लेनर: हार्दिक, पंत, रहाणे...आखिर IPL 2026 कप्तानों पर भारी क्यों पड़ गया, क्या अगले सीजन 50% कप्तान बदलेंगे; किन नए चेहरों को मौका IPL का ये सीजन कई कप्तानों के लिए अच्छा नहीं गुजरा। पहले हार्दिक पांड्या और ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी खत्म होने की खबरें आईं, फिर ऋषभ पंत का इस्तीफा आ गया...लिस्ट में और भी कई नाम शामिल हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 1 Jun 2026 5:23 am

चीन में अवैध खनन के दौरान खदान धंसी, 5 लोगों की मौत

चीन के युनान प्रांत में रविवार तड़के अवैध खनन गतिविधियों के दौरान खदान धंसने से पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया।

देशबन्धु 31 May 2026 10:38 pm

आज का एक्सप्लेनर:हार्दिक, पंत, रहाणे...आखिर IPL 2026 कप्तानों पर भारी क्यों पड़ गया, क्या अगले सीजन 50% कप्तान बदलेंगे; किन नए चेहरों को मौका

IPL का ये सीजन कई कप्तानों के लिए अच्छा नहीं गुजरा। पहले हार्दिक पांड्या और ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी खत्म होने की खबरें आईं, फिर ऋषभ पंत का इस्तीफा आ गया...लिस्ट में और भी कई नाम शामिल हैं। आखिर इन कप्तानों के साथ ऐसा क्यों हुआ, परफॉरमेंस आड़े आई या टीमों को नए चेहरों की तलाश, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… ऋषभ पंत: 27 करोड़ में बिके, LSG आखिरी पायदान पर, दिया इस्तीफा IPL 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स, यानी LSG पॉइंट्स टेबल में सबसे निचले पायदान पर रही। 30 मई को LSG ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि फ्रेंचाइजी ने ऋषभ के कप्तानी छोड़ने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। LSG के क्रिकेट डायरेक्टर टॉम मूडी के मुताबिक, ‘पंत ने खुद कप्तानी से हटने की इच्छा जताई थी और फ्रेंचाइजी ने उनके फैसले को सम्मानपूर्वक स्वीकार कर लिया। ऐसा फैसला लेना कभी आसान नहीं होता।' पंत के इस्तीफा देने के पीछे 3 बड़े फैक्टर हो सकते हैं… 1. टीम का खराब प्रदर्शन, पंत प्रेशर मैनेज नहीं कर पाए 2. IPL के सबसे महंगे खिलाड़ी, लेकिन परफॉरमेंस उम्मीद से कम 3. LSG के मालिक संजीव से अनबन की खबर हार्दिक पांड्या: कोचों की बात नहीं मानी, मुंबई इंडियंस 9वें पायदान पर रही 28 मई को इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि मुंबई इंडियंस, यानी MI के कप्तान के बतौर हार्दिक पांड्या का टेन्योर खत्म होने वाला है। टीम में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इसकी शुरुआत कप्तान से होगी। अखबार ने टीम से जुड़े 3 सोर्सेज के हवाले से बताया, ‘टीम का मैनेजमेंट हार्दिक को आगे कप्तान बनाए रखना नहीं चाहता। आने वाले दिनों में इंट्रोस्पेक्शन होगा। कई सवालों के जवाब देने होंगे। उसके बाद तय होगा कि क्या हार्दिक कप्तान बने रहेंगे या सिर्फ प्लेयर की तरह टीम में रहेंगे?’ हार्दिक की कप्तानी जाने के पीछे 3 बड़े फैक्टर हो सकते हैं.. 1. MI की खराब परफॉरमेंस, सीनियर खिलाड़ी भी नाकाम रहे 2. मिड-ऑर्डर में हार्दिक का परफॉरमेंस अच्छा नहीं रहा 3. कोचों से अंदरूनी विवाद ऋतुराज गायकवाड़: 3 सीजन से कप्तान, CSK 8वें पायदान पर रही पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने 19 मई को क्रिकबज से कहा, 'IPL 2027 में ऋतुराज ही चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान होंगे, ये कहा नहीं जा सकता। CSK के लिए खेल चुके ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी मौजूदा सीजन में गायकवाड़ की परफॉर्मेंस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'कप्तानी के प्रेशर के चलते वे बल्लेबाजी में भी कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं।’ ऋतुराज की कप्तानी जाने के 3 बड़े फैक्टर हो सकते हैं… 1. CSK की कमजोर परफॉर्मेंस, गायकवाड़ प्लेयर्स को मैनेज नहीं कर पाए 2. ओपनर के तौर पर ऋतुरात का प्रदर्शन खराब रहा 3. तीन सीजन से कप्तान, एक बार भी प्लेऑफ तक नहीं ले जा पाए अजिंक्य रहाणे: KKR दूसरी बार प्लेऑफ तक नहीं पहुंची, 7वें पायदान पर फिनिश 15 मई 2026 को आउटलुक इंडिया मैगजीन ने सोर्सेज के हवाले से तीन IPL कप्तानों के नाम दिए, जिनसे कप्तानी छीनी जा सकती है। इस रिपोर्ट में ऋतुराज गायकवाड़, अक्षर पटेल और अजिंक्य रहाणे का नाम था। आउटलुक के मुताबिक, ‘रहाणे को KKR की कप्तानी मिलना 'फोर्स्ड कॉल' यानी मजबूरी में लिया फैसला था, क्योंकि टीम के पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था।’ KKR ने 2024 में श्रेयस अय्यर की कप्तानी में 10 साल के इंतजार के बाद IPL खिताब जीता। हालांकि, 2025 में अय्यर पंजाब किंग्स में शामिल हो गए थे। 3 फैक्टर जिनके चलते रहाणे की कप्तानी छिन सकती है… 1. KKR का निराशाजनक सीजन, लगातार दूसरी बार प्लेऑफ से बाहर 2. एज फैक्टर और इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी 3. स्लो-बैटिंग और स्ट्राइक रेट पर सवाल इन 4 कप्तानों के अलावा दिल्ली कैपिटल्स (DC) के कप्तान अक्षर पटेल की कप्तानी पर भी सवाल हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, ‘अक्षर बतौर कप्तान पूरी तरह नाकाम रहे। फैसले लेने के लिए वे ज्यादातर कोच हेमांग बदानी और वेणुगोपाल राव पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर अगले साल उनकी कप्तानी बरकरार रहना एक चमत्कार ही होगा।’ सवाल-1: इन टीमों के नए कप्तान कौन हो सकते हैं? जवाब: 5 टीमों के नए कप्तान के लिए सबसे बड़े दावेदार हैं… LSG : मिशेल मार्श ESPN के मुताबिक LSG अगले कप्तान की दौड़ में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मिचेल मार्श का नाम सबसे आगे है, मार्श पिछले दो सीजन से टीम के टॉप स्कोरर भी रहे हैं। इसके अलावा भारतीय युवा खिलाड़ी आयुष बडोनी के नाम की भी चर्चा है। MI: तिलक वर्मा MI के पास जसप्रीत बुमराह और सूर्यकुमार यादव का विकल्प है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैनेजमेंट युवा बैटर तिलक वर्मा पर दांव खेल सकता है। CSK: संजू सैमसन पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी के मुताबिक, 'CSK IPL 2027 के लिए संजू सैमसन को चुनेगी। उनके पास RR की कप्तानी का अनुभव है और वे ऋतुराज से बेहतर फॉर्म में हैं।’ KKR: रिंकू सिंह क्रिकट्रैकर की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘KKR मैनेजमेंट 2027 में टीम की कप्तानी रिंकू सिंह को सौंप सकता है। टीम के CEO वेंकी मैसूर ने IPL 2026 से पहले उन्हें वाइस-कैप्टन बनाकर इसका संकेत दे दिया था।’ DC: ट्रिस्टन स्टब्स DC के पास मौजूदा वाइस-कैप्टन केएल राहुल का विकल्प है। हालांकि, जब वे पहले ही कप्तान बनने से मना कर चुके हैं। IPL 2026 में अक्षर की गैर-मौजूदगी में डेविड मिलर और ट्रिस्टन स्टब्स ने कप्तानी संभाली। स्टब्स युवा हैं, टीम उन्हें कप्तान बना सकती है।***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- IPL से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… IPL 2026 ने दिए भारत को 10 फ्यूचर स्टार्स:सूर्यवंशी ने 776 रन बनाए, प्रिंस ने कोहली को बोल्ड किया; रसिख खेलेंगे फाइनल IPL का फाइनल आज अहमदाबाद में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाएगा। इस सीजन में कई अनकैप्ड खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से टीमों की जीत में अहम भूमिका निभाई। वैभव सूर्यवंशी, प्रिंस यादव, प्रफुल हिंगे और आयुष म्हात्रे जैसे युवा सितारे चर्चा में रहे। स्टोरी में ऐसे ही 10 अनकैप्ड भारतीय प्लेयर्स, जो आने वाले समय में टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 31 May 2026 6:40 pm

ईरान परमाणु हथियार पर सहमत: ट्रंप बोले– न बनाएंगे, न खरीदेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा क‍ि उनकी सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करे

देशबन्धु 31 May 2026 10:15 am

ईरान की चेतावनी: होर्मुज स्‍ट्रेट से आवाजाही केवल उसकी अनुमति से होगी, अमेरिकी दखल पर होगी कार्रवाई

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) नेवी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका होर्मुज स्‍ट्रेट के 'प्रबंधन' में किसी भी तरह का दखल देता है, तो उसे कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

देशबन्धु 31 May 2026 10:03 am

ईरान-अमेरिका तनाव: आईआरजीसी ने अमेरिकी ड्रोन गिराने का दावा

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने रविवार को एक बयान में कहा कि उसने अमेरिका के एमक्‍यू-1 ड्रोन को मार गिराया है। यह जानकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी ने दी।

देशबन्धु 31 May 2026 8:50 am

दुनिया के तीसरा सबसे बड़े न्यूक्लियर प्लांट पर ड्रोन हमला, रोसाटॉम प्रमुख बोले-यूक्रेनी सेना ने हद पार की

रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम के डायरेक्टर जनरल एलेक्सी लिखाचेव ने बताया कि शनिवार दोपहर को एक यूक्रेनी लड़ाकू ड्रोन ने जापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट (एनपीपी) की यूनिट 6 के टर्बाइन हॉल पर हमला किया।

देशबन्धु 31 May 2026 8:00 am

2024 NEET केस बताता है, 2026 पेपर लीक तय था:45 में से 44 को जमानत, मास्टरमाइंड पर केस नहीं; नाम बदले लेकिन मॉडल वही

5 मई 2024, NEET-UG का एग्जाम था। पेपर शुरू होने से पहले ही पता चला कि पेपर लीक हो गया है। मुख्य सेंटर पटना बताया गया, जहां साल्वर गैंग ने एक रात पहले कुछ स्टूडेंट्स को एग्जाम में आने वाले सवाल-जवाब रटवाए। इसके अलावा भी कई गड़बड़ियां सामने आईं। एग्जाम कैंसिल नहीं हुआ लेकिन आगे ऐसा न हो, इसके लिए NTA ने फुल-प्रूफ सिस्टम बनाने का दावा किया। एक कमेटी बनाई गई और उसकी सिफारिशें लागू भी की गईं। 2026 में फिर लीक हुआ और एग्जाम कैंसिल करना पड़ा। हमने 2024 के NEET पेपर लीक से जुड़े केस रिकॉर्ड, CBI चार्जशीट और पटना हाईकोर्ट के आदेश खंगाले। छानबीन और पकड़े गए लोगों के लगातार जमानत पर बाहर आने का ये सिलसिला पहले ही बता रहा था कि जल्द ही फिर पेपर लीक होना तय है। पड़ताल में 3 बड़ी बातें सामने आईं… 1. 46 गिरफ्तारियां हुईं, लगभग सभी जमानत पर बाहर केस में पहले बिहार EOW और बाद में CBI ने जांच की। कुल 46 लोग गिरफ्तार किए गए। इनमें से 45 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई और 44 जमानत पर बाहर आ चुके हैं। मीडिया में मास्टरमाइंड बताए गए संजीव मुखिया के खिलाफ CBI को ज्यादा सबूत नहीं मिले, इसलिए उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं हुई और उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई। ज्यादातर आरोपी सशर्त जमानत पर हैं। सिर्फ अमित प्रसाद महाराणा को जमानत नहीं मिली है। मामले का ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है। 2. नाम बदले, लेकिन कोचिंग नेटवर्क का मॉडल वही रहा 2024 और 2026 के मामलों में आरोपियों के नाम अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों मामलों में कोचिंग और एडमिशन कंसल्टेंसी से जुड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आई। 2024 की जांच में ऐसे लोगों का नाम आया, जो पहले भी एंट्रेंस एग्जाम में डमी कैंडिडेट और सॉल्वर नेटवर्क से जुड़े रहे थे। इनमें कुछ आरोपी जमानत मिलने के बाद शिक्षा और काउंसलिंग के कारोबार में फिर एक्टिव मिले। 3. पांच महीने पहले से भरोसा था कि पेपर लीक करा लेंगे पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े प्रमुख आरोपी को 2024 में भरोसा था कि वो झारखंड के एक एग्जाम सेंटर के स्ट्रॉन्ग रूम से पेपर हासिल कर लेंगे। इसे देखते हुए उन्होंने एग्जाम से करीब पांच महीने पहले तैयारी शुरू कर दी। सॉल्वर गैंग तैयार किए, डमी कैंडिडेट्स की तलाश हुई और एग्जाम से पहले फ्लाइट और ट्रेन टिकट तक बुक करा दिए गए। 2023 में भी लीक करा लेने के दावे किए थे। भले 2026 केस में अलग लोग हैं, लेकिन पैटर्न सेम ही फॉलो हो रहा है। 2024 पेपर लीक नेटवर्क के 5 किरदार 2024 NEET पेपर लीक केस में जांच एजेंसियों ने जिस नेटवर्क का खुलासा किया, उसमें 5 प्रमुख किरदार सामने आए। इनमें से चार आरोपियों को 271 से 279 दिनों के अंदर ही जमानत मिल गई। वहीं, कथित मास्टरमाइंड बताए गए संजीव मुखिया के खिलाफ CBI चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर सकी। 1. संजीव मुखियाकथित मास्टरमाइंड, लेकिन सबूत नहीं99 दिनों में जमानत मिली संजीव मुखिया को 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया। शुरुआती जांच में उसका नाम सामने आया, लेकिन CBI को पर्याप्त सबूत नहीं मिले। 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर 2 अगस्त 2025 को उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई। हालांकि दूसरे मामलों में राहत न मिलने के कारण वो अभी जेल में है। 2. अमित कुमार सिंहसॉल्वर और कोचिंग नेटवर्क का कोऑर्डिनेटर279 दिन बाद जमानत मिली झारखंड का रहने वाला अमित कुमार सिंह नेटवर्क के प्रमुख ऑपरेटरों में था। CBI के मुताबिक, उसने राजस्थान, बिहार, झारखंड और ओडिशा से कैंडिडेट और सॉल्वर जुटाए। एग्जाम से महीनों पहले तैयारी शुरू कर दी गई थी। सॉल्वरों के आने-जाने तक की एडवांस बुकिंग कराई थी। जांच में कई कोचिंग एजेंट्स और कंसल्टेंसी नेटवर्क से उसके संबंध सामने आए। 2 जुलाई 2024 को उसे गिरफ्तार किया गया, लेकिन साल भर के अंदर ही 7 मई 2025 को जमानत मिल गई। 3. पंकज कुमार उर्फ आदित्यपेपर चोरी से लेकर सबूत मिटाने तक साजिश में शामिल272 दिन बाद जमानत मिली CBI के मुताबिक, पंकज कुमार ने एग्जाम का पेपर हासिल करने, उसे सॉल्वरों तक पहुंचाने और बाद में सबूत मिटाने में अहम भूमिका निभाई। उसने हजारीबाग के ओएसिस स्कूल से NEET का पेपर चुराकर फोटो खींची थी। फिर इसे राज गेस्ट हाउस भेजकर 9 से ज्यादा सॉल्वर से हल कराया। इसके बाद सॉल्वड पेपर की PDF बनाकर पटना, बोकारो और भुवनेश्वर भेजा, जहां पहले से जुटाए गए NEET कैंडिडेट को पेपर रटवाया गया था। हजारीबाग के राज गेस्ट हाउस और सिंदूर हाउस में इसी की मदद से कैंडिडेट को पेपर रटवाया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि पेपर लीक में जिन-जिन फोन का इस्तेमाल किया गया, पंकज ने वो सभी 16 फोन नष्ट कराए, ताकि सबूत ना मिले। पंकज को 17 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया गया था। वो एक साल भी जेल में नहीं रहा, 15 मई 2025 को सशर्त जमानत पर बाहर आ गया था। 4. राकेश रंजन उर्फ रॉकीपेपर लीक नेटवर्क का ऑपरेटरकरीब 271 दिन बाद जमानत मिली CBI ने राकेश को पेपर लीक नेटवर्क के मुख्य ऑपरेटरों में से एक बताया। ओएसिस स्कूल से पेपर लीक कराने में पंकज के साथ वो भी शामिल था। उसने पंकज से सॉल्व पेपर की PDF अपने साथी शशिकांत पासवान के फोन पर मंगवाई, जिसे हजारीबाग के सिंदूर हाउस में कैंडिडेट्स को रटवाया गया था। राकेश पूरे नेटवर्क की निगरानी कर रहा था। उसी के कहने पर पटना के लर्न प्ले स्कूल में उसके दोस्त बलदेव कुमार उर्फ चिंटू के फोन पर NEET का सॉल्वड पेपर भेजा गया था। वो गिरफ्तारी को लेकर पहले से अलर्ट था, इसीलिए पेपर लीक से जुड़ा कोई डॉक्यूमेंट उसने अपने फोन पर नहीं मंगाया था। 10 जुलाई 2024 को उसे अरेस्ट किया गया और 5 अक्टूबर 2024 को उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी। पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राकेश के वकील ने यही दावा किया कि उसके पास से लीक से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं मिले। 4 जुलाई 2025 को पटना हाईकोर्ट से राकेश को सशर्त जमानत मिल गई। 5. रंजीत कुमार बेउराकाउंसलिंग सेंटर से उम्मीदवारों तक पहुंचकरीब 276 दिन बाद मिली जमानत भुवनेश्वर में रंजीत कुमार बेउरा के नाम से एक ट्रस्ट और कई कंपनियां हैं। वो एक काउंसलिंग सेंटर, करियर एकेडमी एजुकेशन ट्रस्ट (CAET) का चेयरमैन है, जबकि अमित प्रसाद महाराणा और धीरेन इसी ट्रस्ट के डायरेक्टर हैं। 2024 NEET पेपर लीक मामले में रंजीत के साथ अमित प्रसाद और धीरेन को भी गिरफ्तार किया गया था। अमित ही अकेला आरोपी है, जिसे अब तक जमानत नहीं मिली है। CBI जांच में पता चला कि इनके काउंसलिंग सेंटर में इंजीनियरिंग और मेडिकल स्टूडेंट आते हैं। ये पहले स्टूडेंट और उनके पेरेंट्स से मिलकर डिटेल नोट करते हैं। फिर इनमें से ऐसे स्टूडेंट की लिस्ट बनाते हैं, जो अच्छा पैसा खर्च कर सकते हैं। इसके बाद एकेडमी का स्टाफ उन्हें अलग से अप्रोच कर समझाता कि उनके बच्चे को ज्यादा से ज्यादा नंबर कैसे मिल सकते हैं। कैसे सरकारी कॉलेज में भी एडमिशन मिल सकता है। फिर एग्जाम से पहले सॉल्वड पेपर का दावा कर लाखों रुपए की डील होती है। रंजीत की टीम ने NEET 2024 एग्जाम का फॉर्म भरते वक्त ही अपने 17 कैंडिडेट का सेंटर ओडिशा के बजाय झारखंड के हजारीबाग डलवाया था, जहां से पेपर लीक हुआ था। CBI ने सभी 17 स्टूडेंट की पहचान कर ली थी। इन्हें हजारीबाग के राज गेस्ट हाउस और सिंदूर हाउस में एग्जाम से पहले पेपर रटवाया गया था। CBI जांच में रंजीत के फोन की लोकेशन भी 3 मई से 5 मई 2024 तक हजारीबाग में ही मिली थी। पटना हाईकोर्ट में जमानत के लिए पेश हुए रंजीत के वकील ने दावा किया था कि 3 अगस्त 2023 को उसने अपनी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन कराया था। वे जरूरतमंद और गरीब बच्चों की काउंसलिंग में मदद करते हैं। CBI को इनके पास से कोई सबूत नहीं मिला, जिससे पेपर लीक का संबंध हो। 6 मई 2025 को पटना हाई कोर्ट ने रंजीत को सशर्त जमानत दे दी थी। जमानत पर बाहर आकर रंजीत फिर से अपना करियर काउंसलिंग सेंटर चला रहा है। दैनिक भास्कर ने एक कैंडिडेट के पेरेंट बनकर फोन पर रंजीत से बात की। उसने कहा कि अभी हम 40 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपए में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज दिला सकते हैं। हमने सरकारी कॉलेज में दाखिले के लिए पूछा, तो रंजीत ने कहा कि पहले ऑफिस आइए, आमने-सामने बात होगी। सब फोन पर नहीं बता सकते। वकील बोले- CBI जांच खत्म, जमानत लेना आरोपी का हक नीट पेपर लीकल केस में एक के बाद एक आरोपियों को कैसे जमानत मिलती गई, ये जानने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विनीत जिंदल और पटना हाईकोर्ट के वकील आकाश शंकर से बात की। आकाश लीक में गिरफ्तार एक आरोपी के वकील भी हैं। वे बताते हैं, ‘2024 के NEET पेपर लीक में पहले पटना की शास्त्री नगर पुलिस ने FIR की, बाद में EOW ने जांच की। फिर केस CBI को ट्रांसफर हो गया। अभी केस में चार्जफ्रेम हो रहे हैं और ट्रायल शुरू होना बाकी है। CBI जांच खत्म हो गई थी, इसलिए जमानत लेना आरोपी का हक है। सभी सशर्त जमानत पर बाहर हैं। ट्रायल के समय सभी को हर तारीख पर आना होगा। कोई सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।‘ ‘दूसरी बात, आरोपियों के पास से IPC धारा-409 के तहत लीक हुआ पेपर रिकवर नहीं हुआ, इसलिए सीधे मटीरियल ऑफ एविडेंस नहीं मिला है। इस वजह से भी कई आरोपियों को जल्दी जमानत मिल गई। अगर CBI किसी भी आरोपी के खिलाफ सीधे सबूत पेश कर सकी, तो उसे IPC की धारा-409 के तहत आजीवन कारावास हो सकती है।‘ अब 2026 NEET लीक की बात2024 NEET लीक की जांच और जमानत के सिलसिलों से साफ है कि 2026 में भी सामने आए नामों को ज्यादा दिन जेल में नहीं रखा जा सकता। यहां भी IPC धारा-409 के तहत लीक हुआ पेपर रिकवर होने की संभावना कम है। आरोप है कि केमिस्ट्री लेक्चरर पीवी कुलकर्णी की पहुंच पेपर तक थी और इन्होंने रटकर ये लीक किया, ऐसे में पेपर की रिकवरी होनी मुश्किल है। कोर्ट में ये साबित करना और मुश्किल होगा। अन्य आरोपियों मनीषा वाघमारे, मनोज शिरूरे, तेजस हर्षदकुमार शाह और मनीष संजय हवलदार पर तो सिर्फ लीक नेटवर्क में शामिल होने, पेपर खरीदने और बच्चों को मुहैया कराने के ही आरोप हैं। …………………… ये खबर भी पढ़ें… NEET पेपर लीक का ब्यूटीशियन कनेक्शन NEET पेपर लीक की कड़ियां अब जुड़ने लगी हैं। इस मामले में पहले केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और फिर बॉटनी लेक्चरर मनीषा मांधरे अरेस्ट हुईं। अब NEET एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अफसर के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 31 May 2026 5:29 am

अफगान प्रवासियों को ले जा रहा ट्रक पलटा, 18 लोगों की मौत और 35 घायल

पाकिस्तान से लौटे अफगानी प्रवासियों को ले जा रहे ट्रक के साथ एक बड़ा हादसा हो गया। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार सुबह पाकिस्तान से लौटे अफगानी प्रवासियों को ले जा रहे एक ट्रक के पलट जाने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। इनमें 10 बच्चे और पांच महिलाएं शामिल हैं। घटना में दर्जनों लोग घायल हो गए।

देशबन्धु 31 May 2026 5:10 am