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Russian Army में फंसे 139 भारतीयों की घर वापसी, MEA ने Job Fraud को लेकर नागरिकों को किया सावधान
विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को भारतीय नागरिकों को विदेशों में नौकरी दिलाने वाली धोखाधड़ी करने वाली एजेंसियों के बारे में कड़ी चेतावनी जारी की। मंत्रालय ने बताया कि राजनयिक कोशिशों से रूसी सेना में शामिल 139 भारतीयों को छुड़ा लिया गया है और लगभग दो दर्जन अन्य लोगों को भी छुड़ाने की कोशिशें जारी हैं। राष्ट्रीय राजधानी में हर दो हफ़्ते में होने वाली मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नौकरी चाहने वालों से कहा कि वे विदेश में नौकरी के ऑफ़र पर विचार करते समय बहुत सावधानी बरतें। जायसवाल ने कहा हम रूसी सेना में बचे हुए भारतीय नागरिकों को छुड़ाने के लिए रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में हैं। अब तक हमारी कोशिशों से 139 भारतीय नागरिकों को छुड़ाया जा चुका है। हम बाकी बचे लगभग दो दर्जन भारतीय नागरिकों को भी छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके बारे में खबर है कि वे रूसी सेना में हैं। खतरनाक मानव तस्करों से जुड़े खतरों का ज़िक्र करते हुए जायसवाल ने कहा हम एक बार फिर अपने लोगों को उन नौकरी के ऑफ़र के बारे में सावधान करना चाहते हैं जिनमें जोखिम हो और जो बेईमान लोगों या एजेंसियों की तरफ़ से दिए गए हों। MEA का यह अपडेट उसी दिन आया जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित परिवारों को राहत पहुँचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई ज़रूरी निर्देश जारी किए। रूस-यूक्रेन संघर्ष में फँसाए गए भारतीय नागरिकों के रिश्तेदारों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने MEA को एक खास नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया, जिसकी संपर्क जानकारी सीधे पीड़ित परिवारों के साथ साझा की जाएगी। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: 280 अटैक ड्रोन और मिसाइल बारिश से दहला यूक्रेन, Zelensky ने बताया 'रूसी आतंक' का खौफनाक मंजर कोर्ट ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि वह शवों की पहचान के लिए DNA जाँच की सुविधा दे, मुफ़्त कानूनी मदद मुहैया कराए और मुआवज़े के दावों व स्वदेश वापसी से जुड़े दस्तावेज़ों का अनुवाद करवाए। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को यह भी निर्देश दिया कि वह प्रभावित परिवारों के लिए एक कंबाइंड डॉकेट (जानकारी का सेट) तैयार करे। इसे स्थानीय भाषाओं में अनुवादित किया जाना चाहिए और इसमें रूसी अधिकारियों के सामने मुआवज़े का दावा करने की प्रक्रिया समझाई जानी चाहिए। कोर्ट ने साफ़ किया कि मुआवज़े के दावे विदेश मंत्रालय के ज़रिए भेजे जाएंगे, लेकिन इनके पेंडिंग रहने की वजह से शवों की वापसी या अंतिम संस्कार में देरी नहीं होनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: MEA Press Conference : Pakistan पर India का अब तक का सबसे बड़ा हमला, विदेश मंत्रालय ने दुनिया के सामने खोली आतंकिस्तान की पूरी पोल कोर्ट ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों के सदस्य सचिवों को यह भी निर्देश दिया कि वे प्रभावित परिवारों को मुआवज़े का दावा करने और DNA टेस्टिंग में मदद के लिए मुफ़्त कानूनी सहायता दें। विदेश मंत्रालय से यह भी कहा गया कि वह रूसी अधिकारियों से मिले उन दस्तावेज़ों का अनुवादित वर्शन उपलब्ध कराए जो शवों की वापसी और मुआवज़े के दावों से संबंधित हैं। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि 2024 और 2025 में, कई भारतीय युवा अलग-अलग वीज़ा पर रूस गए थे, क्योंकि उन्हें कंस्ट्रक्शन, हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर में नौकरी का वादा किया गया था। हालाँकि, वहाँ पहुँचने पर उनके पासपोर्ट और पहचान के दस्तावेज़ ज़ब्त कर लिए गए और उन्हें रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया, जिसके बाद उन्हें लड़ाई के मोर्चे पर भेज दिया गया।
Balochistan में Pakistani Army पर भीषण हमला, UBA और BRG के धमाकों में 8 जवानों की मौत
बलूचिस्तान के कच्छी ज़िले में हुए अलग-अलग हमलों की ज़िम्मेदारी दो बलूच हथियारबंद गुटों - यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA) और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) - ने ली है। इस दौरान इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और हथियारबंद लड़ाकों के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी होती रहीं। रिपोर्ट के अनुसार, कच्छी के सन्नी इलाके में एक धमाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की एक गाड़ी को निशाना बनाया गया, जबकि आस-पास के इलाकों से भी गोलीबारी की खबरें मिलीं। UBA के प्रवक्ता मज़ार बलूच ने एक बयान में कहा कि उनके गुट ने धादर और सन्नी के बीच चिघार्डी इलाके में पाकिस्तानी बलों के सात गाड़ियों वाले काफिले में शामिल एक गाड़ी पर रिमोट-कंट्रोल विस्फोटक डिवाइस से हमला किया। प्रवक्ता ने बताया कि हमला तब हुआ जब काफिला एक मिलिट्री चेकपॉइंट की ओर जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि इस हमले में आठ जवान मौके पर ही मारे गए और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इसे भी पढ़ें: Pakistan के Balochistan में कोयला खदान विस्फोट, 34 खनिकों की मौत और बचाव अभियान जारी उन्होंने आगे आरोप लगाया कि UBA के लड़ाकों ने इलाके से पीछे हटने से पहले काफिले की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों के साथ थोड़ी देर गोलीबारी की। TBP की रिपोर्ट के अनुसार, मज़ार बलूच ने कहा हमारा संगठन, UBA, इस हमले की ज़िम्मेदारी लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज़ाद बलूचिस्तान बनने तक ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे। इस बीच, बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने बताया कि उसके लड़ाके बुधवार सुबह 7:00 बजे से पाकिस्तानी सेना के दो अलग-अलग काफिलों पर हमले कर रहे थे। संगठन ने दावा किया कि बयान जारी होने के समय भी झड़पें जारी थीं। इसे भी पढ़ें: Balochistan Civil War Like Situation: बलूचिस्तान में बेकाबू हुए हालात, Army और Rebels के बीच खूनी संघर्ष तेज़ समूह ने कहा कि वह बाद में इन झड़पों के बारे में विस्तार से बयान जारी करेगा। एक अलग बयान में, BRG के प्रवक्ता दोस्तैन बलूच ने कहा कि समूह ने कच्छी के धादर इलाके में सरकारी सिंचाई विभाग के दफ़्तर को निशाना बनाया और वहां विस्फोटक उपकरण लगाए।
Saudi Arabia ने समुद्री सुरक्षा के लिए बनाया 14 देशों का गठबंधन, लेकिन ओमान और UAE क्यों रहे अलग? जानें वजह
Russia-Ukraine War में China की 'चुपचाप' मदद, US Weapon Stock खत्म होने से बढ़ी Xi Jinping की ताकत
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐसी लड़ाई में अमेरिका को उलझा दिया है जिसे शायद जीता नहीं जा सकता, और इससे चीन की स्थिति मज़बूत हुई है। इसके अलावा, बीजिंग दुनिया भर में अपना असर बढ़ा रहा है और यूक्रेन और पश्चिमी देशों के साथ रूस की लड़ाई में चुपचाप उसका साथ भी दे रहा है। अमेरिका के मिसाइल और हथियारों का स्टॉक कम होने की बात लंबे समय से पता है - और ईरान युद्ध ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है - जिसका सीधा फ़ायदा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मिल रहा है। बहुत मुमकिन है कि चीन और रूस अपनी अगली चालों (क्रमशः ताइवान और यूक्रेन के ख़िलाफ़) की योजना बनाते समय इस बात को ध्यान में रख रहे हों। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में फंसे भारतीयों पर Supreme Court सख्त, MEA को नोडल अफसर नियुक्त करने का आदेश जैसा कि ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सीनियर एनालिस्ट डॉ. मैल्कम डेविस ने कहा यह बात उतनी ही पक्की है जितनी कि दिन के बाद रात का आना यह स्थिति अब अमेरिकी सैन्य क्षमता के लिए एक बहुत ही खतरनाक संकट पैदा कर रही है और यह संकट एक दशक या एक-दो साल बाद नहीं, बल्कि अभी आ रहा है। बेशक, रूस को समर्थन देने के मामले में चीन का रवैया उत्तर कोरिया जितना खुला नहीं रहा है। बीजिंग ने न तो तोप का चारा बनने वाले सैनिक भेजे हैं और न ही मिसाइलें बेची हैं, लेकिन फिर भी वह यूक्रेन में व्लादिमीर पुतिन की लंबी खिंचती लड़ाई का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने चीन को रूस की लड़ाई को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाने वाला बताया है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बीजिंग की तथाकथित तटस्थता असल में वैसी नहीं है। यह शुरू से ही एक दिखावा रहा है; चीन ने तुरंत मॉस्को की बातों को दोहराया और यहाँ तक कि अनिवार्य कोर्स भी चलाए, जिनमें शिक्षकों और लेक्चररों को यह बताया गया कि पुतिन की लड़ाई के बारे में आधिकारिक नैरेटिव को कैसे पेश किया जाए। तब से चीन अपनी इस बात पर अडिग रहा है। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: Trump की शांति पहल के बीच Kyiv पर मिसाइल वर्षा, क्या पुतिन अब और बढ़ाएंगे युद्ध? चीन अपनी आलोचना को लेकर बहुत सोच-समझकर कदम उठाता है। जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तुरंत कहा, चाहे कोई भी वजह हो, बिना सोचे-समझे ताकत का इस्तेमाल मंज़ूर नहीं है, और बेगुनाह नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर किसी भी हमले की निंदा की जानी चाहिए। फिर भी, यूक्रेन के खिलाफ पुतिन की चार साल से ज़्यादा चली लड़ाई में, चीन ने मॉस्को को सिर्फ़ एक ही चेतावनी दी है कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करे। यह बात ही चीन के दोहरे रवैये को दिखाती है। इसके बावजूद, रूस में जन्मे पूर्व शतरंज ग्रैंडमास्टर गैरी कास्पारोव ने कहा, चीन बिना किसी बुरे नतीजे के रूस की सीधे और परोक्ष रूप से मदद करता है। रूस की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने के बावजूद, उसे कोई खास सज़ा नहीं मिली है। हाँ, कुछ चीनी कंपनियों पर अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन उन्हें कोई खास राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना पड़ा है। तो फिर, रूस के लिए चीन का समर्थन किस तरह का है? काम के बँटवारे के तहत, मॉस्को 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी' (PLA) को लड़ाई के गुर सिखाता है, जबकि बदले में चीन रूस को इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और मशीनरी भेजता है ताकि उसके सैन्य-औद्योगिक ढांचे को मदद मिल सके। चीन रूस से लड़ाई के सबक सीखने के लिए उत्सुक है, क्योंकि ये सीधे तौर पर ताइवान को लेकर उसकी सैन्य योजनाओं से जुड़े हैं।
Xinjiang Victims Database का बड़ा खुलासा, China के Detention Campaign से 1.4 लाख Uyghur Kids हुए अलग
'उइघुर टाइम्स' के हवाले से 'शिनजियांग विक्टिम्स डेटाबेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस डेटाबेस द्वारा प्रकाशित एक नए विश्लेषण में अनुमान लगाया गया है कि 2018 के अंत तक, चीन के बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने के अभियान के कारण उइघुर मातृभूमि के दक्षिणी इलाकों के चार प्रान्तों में कम से कम 143,228 बच्चे (जिनमें ज़्यादातर उइघुर थे) अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों से अलग हो गए थे। 27 जुलाई को प्रकाशित यह विश्लेषण काशगर प्रान्त के कोनाशेहर (शुफू) काउंटी के विस्तृत दस्तावेज़ों पर आधारित है। यहाँ शोधकर्ताओं ने हिरासत से जुड़े डेटा के साथ-साथ चीन सरकार के लीक हुए रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके पारिवारिक रिश्तों की जानकारी जुटाई। रिपोर्ट के अनुसार, यह अध्ययन उइघुर परिवारों और बच्चों पर चीन के बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने के अभियान के असर का अब तक का सबसे व्यापक अनुमान पेश करता है। इसे भी पढ़ें: China ने नई Sports Development Plan से 2030 तक विश्व-अग्रणी खेल शक्ति बनने का लक्ष्य रखा 'शिनजियांग विक्टिम्स डेटाबेस' के अनुसार, शोधकर्ताओं ने कोनाशेहर काउंटी में ऐसे 21,809 लोगों की पहचान की, जिन्हें 2017 से लंबे समय तक हिरासत में रखा गया था। घर के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और पारिवारिक रिश्तों के डेटा का विश्लेषण करके, उन्होंने ऐसे 3,772 बच्चों की जानकारी दर्ज की जो अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों के हिरासत में लिए जाने के बाद पीछे छूट गए थे। रिपोर्ट में इस संख्या को एक न्यूनतम अनुमान बताया गया है और कहा गया है कि जैसे-जैसे और सरकारी दस्तावेज़ उपलब्ध होंगे, और मामले सामने आ सकते हैं। विश्लेषण में पाया गया कि प्रभावित परिवारों में अक्सर कई बच्चे थे। जिन परिवारों में माता-पिता को हिरासत में लिया गया था, उनमें औसतन 2.4 बच्चे प्रभावित हुए, जबकि 700 से ज़्यादा परिवारों में तीन या उससे ज़्यादा बच्चे अपने माता-पिता से अलग हो गए थे। हालांकि उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि कई बच्चों को बोर्डिंग स्कूलों में रखा गया या रिश्तेदारों ने उनकी देखभाल की, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा दस्तावेजों से हर प्रभावित बच्चे के भविष्य के बारे में पता नहीं लगाया जा सकता। इसे भी पढ़ें: OpenAI और Anthropic AI आउटपुट का चीनी सेना ने रक्षा प्रणालियों के लिए किया उपयोग इस अध्ययन में माता-पिता को हिरासत में लेने के एक बार-बार दिखने वाले पैटर्न की भी पहचान की गई। नतीजों के अनुसार, दर्ज किए गए ज़्यादातर मामलों में पहले पिताओं को हिरासत में लिया गया, जिन्हें अक्सर 2017 के दौरान लंबी जेल की सज़ा हुई, जबकि माताओं को बाद में 2018 में नज़रबंदी कैंपों में भेजा गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन परिवारों में हिरासत की समय-सीमा का साफ़ तौर पर पता लगाया जा सका, उनमें से लगभग 56 प्रतिशत मामलों में यही क्रम देखा गया।
Lyari में Gangster Uzair Baloch के भाई को मारी गोली, क्या फिर शुरू होगा खूनी Gang War?
कराची के लियारी इलाके में अपने घर के बाहर गोली लगने से पाकिस्तानी गैंगस्टर उज़ैर बलोच का भाई ज़ुबैर बलोच गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना में दो राहगीर भी घायल हुए, जिन्हें मेडिकल मदद दी गई। मीडिया की कई रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना गुरुवार शाम को हुई। 40 साल के ज़ुबैर की छाती और पेट में गोली लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए; इसके बाद उन्हें इलाज के लिए कराची के सिविल अस्पताल ले जाया गया। पाकिस्तान के प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक 'डॉन' ने खबर दी है कि हमलावर मोटरसाइकिल पर आए थे और उनके चेहरे ढके हुए थे। ज़ुबैर, जिनकी सर्जरी हो चुकी है, सिंगु लेन में अपने घर के बाहर बैठे थे, तभी बाइक पर सवार दो हमलावरों ने उन पर गोली चलाई। पास ही मौजूद एक दुकानदार के जवाबी फायरिंग करने पर वे मौके से भाग गए। इसे भी पढ़ें: Pakistan Economic Crisis: महंगाई की मार से कराह रहा ट्रांसजेंडर समुदाय, Karachi में सड़कों पर उतरा प्रदर्शनकारी सभी पहलुओं की जांच की जा रही है साउथ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) सैयद असद रज़ा ने 'डॉन' को बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है और मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पाकिस्तानी अखबार ने एक सामाजिक कार्यकर्ता का हवाला देते हुए यह भी बताया कि ज़ुबैर हाल ही में एक 'राजनीतिक पार्टी' में शामिल हुए थे। इस घटना से लियारी में एक और गैंग वॉर (गिरोहों के बीच संघर्ष) का डर पैदा हो गया है। 'डॉन' के अनुसार, ईरान और दुबई भाग गए कई गैंगस्टर, अमेरिका (US) और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद लियारी लौट आए हैं। इसे भी पढ़ें: वर्दी उतारकर लड़ो चुनाव...Pakistan में सेना-सियासत में घमासान, Maulana Fazlur Rehman की Asim Munir को सीधी चुनौती उज़ैर बलोच पाकिस्तानी जेल में बंद है ज़ुबैर बलोच, उज़ैर बलोच का 40 साल का भाई है। उज़ैर बलोच प्रतिबंधित 'पीपल्स अमन कमेटी' (PAC) का पूर्व प्रमुख था। उसे पाकिस्तान के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में से एक माना जाता है। 2009 में पुलिस मुठभेड़ में रहमान डकैत के मारे जाने के बाद, उज़ैर ने लियारी के अंडरवर्ल्ड में अपना नाम बनाया और उस पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। पाकिस्तान के जियो न्यूज़ के अनुसार, उज़ैर के खिलाफ 100 से अधिक मामलों में जांच चल रही है। इन मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी, पुलिस और रेंजर्स पर हमले और विदेशी खुफिया एजेंसियों के लिए जासूसी करना शामिल है। उसे 30 जनवरी 2016 को पाकिस्तानी रेंजर्स ने कराची में चुपके से घुसने की कोशिश करते समय गिरफ्तार किया था। अप्रैल 2020 में, जासूसी के आरोपों के चलते एक पाकिस्तानी अदालत ने उसे 12 साल की जेल की सज़ा सुनाई थी।
Ceuta में मोरक्को से दाखिल हुए 60000 प्रवासी, Spain के प्रधानमंत्री ने की निंदा
पिछले 24 घंटों में मोरक्को से लगभग 60,000 प्रवासी स्पेन के सेउटा में दाखिल हुए हैं। सेउटा के प्रशासनिक प्रमुख ने यह जानकारी दी। यह संख्या सेउटा शहर की नियमित जनसंख्या के 70 फीसद के बराबर है। सेउटा के प्रशासनिक प्रमुख जुआन जीसस विवास के अनुसार प्रवासन की इस प्रक्रिया में कम से कम 34 लोगों की मौत हो गयी। उन्होंने शुक्रवार को कहा, ‘‘ सेउटा जिस स्थिति से गुज़र रहा है, वह बिल्कुल भी टिकाऊ नहीं है।’’बृहस्पतिवार को सीमा पर भड़का संकट शुक्रवार को भी जारी रहा जहां सीमा के मोरक्को वाले क्षेत्र में सुरक्षाबलों एवं प्रवासियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने शुक्रवार को सेउटा में अपने संबोधन में सीमा उल्लंघन की निंदा की और इन घटनाओं को ‘स्पेन की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन’ बताया। स्पेन के नेता ने मानव तस्करों को दोषी ठहराते हुए कहा कि वे ‘बहुत से युवाओं को बहकाते हैं और अंततः उनमें से कई को मौत के मुंह में धकेल देते हैं - चाहे वह समुद्र में हो या, जैसा कि इस मामले में हुआ, स्पेन की सीमा पर स्वायत्त शहर सेउटा में।’’सीमा के सीधे प्रसारण में नजर आ रहा है कि सेउटा के ऊपर एक पहाड़ी पर सैकड़ों प्रवासी जमा थे, जिन्हें मोरक्को की सेना ने आंसू गैस के गोले दागकर तितर-बितर कर दिया, जबकि अन्य लोग तैरकर स्पेनिश क्षेत्र की ओर बढ़ते रहे।
नितेश तिवारी की 4 हजार करोड़ की लागत से बनी फिल्म 'रामायण' का ट्रेलर आते ही सोशल मीडिया पर डिबेट शुरू हो गई। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले 'ग्लैमरस लुक' पर मीम बन रहे। रणबीर कपूर की राम के रूप में कास्टिंग पर भी सवाल उठे और यश के रावण और साई पल्लवी के सीता का किरदार निभाने को लेकर भी लोग दो खेमे में बंटे हैं। असलियत में कैसे दिखते रहे होंगे रामायण के किरदार; इसके लिए हमने सबसे प्रामाणिक ग्रंथ वाल्मीकि रामायण का सहारा लिया है। इन किरदारों को कुछ पुरानी मूर्तियों और पेंटिंग्स के जरिए भी देखेंगे… ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:सैयारा ने पहले हफ्ते 175 करोड़ कमाए; पुरानी लव स्टोरी, कोई बड़ा स्टार नहीं, फिर सिनेमाघरों में रो-रोकर बेहोश क्यों हो रहे लोग सैयारा मूवी देखने पहुंची एक लड़की इतना रोई कि थिएटर में ही बेहोश हो गई। एक लड़का दहाड़ें मारकर छाती पीटने लगा। ऐसे वायरल वीडियोज के बीच मोहित सूरी की फिल्म ने एक हफ्ते में 175 करोड़ रुपए कमा लिए हैं। फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श इसे ऐतिहासिक मानते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
दुनियाभर में अपनी अदम्य साहस और पर्वतारोहण के रिकॉर्ड्स के लिए पहचाने जाने वाले नेपाल के नामचीन पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (Nimsdai Purja) और उनका 10 सदस्यीय दल पाकिस्तान की खतरनाक ब्रॉड पीक पर लापता हो गया है। जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित 8,047 मीटर ऊंची इस बर्फीली चोटी पर चढ़ाई के दौरान अचानक आए एक भीषण हिमस्खलन की चपेट में पूरा दल आ गया है। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद से पर्वतारोहियों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण जगत में हड़कंप मच गया है।ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन और लापता दल की पूरी डिटेलपाकिस्तान के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे काराकोरम पर्वतमाला में स्थित ब्रॉड पीक पर हुआ। दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची और चढ़ाई के लिहाज से बेहद जोखिम भरी इस चोटी पर अचानक आए हिमस्खलन ने पर्वतारोहियों को अपनी चपेट में ले लिया। लापता हुए 10 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय दल में एक अमेरिकी, एक चीनी, एक ओमानी और पांच नेपाली नागरिक शामिल हैं, जिनका नेतृत्व खुद प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा कर रहे थे। खराब मौसम और दुर्गम इलाके के कारण तुरंत संपर्क साधना संभव नहीं हो पाया था।शुक्रवार सुबह से शुरू हुआ हेलिकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशनबीबीसी और अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान की रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने हालात का जायजा लेते हुए शुक्रवार सुबह मौसम के साफ होने पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है। लापता पर्वतारोहियों की तलाश के लिए विशेष हेलिकॉप्टर्स की मदद ली जा रही है। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान ने इस कठिन घड़ी में अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय के एकजुट होने की बात कही है, जबकि रेस्क्यू टीमें लगातार बर्फीले इलाकों में जीवन बचाने की उम्मीद के साथ खोजबीन में जुटी हुई हैं।कौन हैं रिकॉर्ड होल्डर पर्वतारोही निर्मल पुर्जालापता पर्वतारोही निर्मल पुर्जा नेपाल के एक प्रतिष्ठित पर्वतारोही हैं, जो ब्रिटिश सेना की प्रतिष्ठित रॉयल मरीन यूनिट में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। साल 2012 में माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचने के बाद उनके भीतर पर्वतारोहण का ऐसा जुनून जागा कि उन्होंने इतिहास रच दिया। साल 2019 में निर्मल पुर्जा ने महज 6 महीने और 6 दिन के रिकॉर्ड समय में दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंची सभी 14 चोटियों को फतह करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने एवरेस्ट, मकालू और ल्होत्से जैसी कठिन चोटियों को महज 48 घंटे के भीतर फतह करने का अनूठा कारनामा भी किया है। उनकी इस असाधारण जीवनयात्रा पर '14 पीक्स: नथिंग इज इंपॉसिबल' नाम से एक चर्चित डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है। फिलहाल, मौसम की दुश्वारियों के बीच रेस्क्यू टीमों के सामने लापता दल को सुरक्षित ढूंढ निकालना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मध्य एशिया की भू-राजनीति में इस वक्त एक ऐसा रहस्य गहराया हुआ है जिसने अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA और इजरायल की कुख्यात एजेंसी मोसाद (Mossad) दोनों की नींद उड़ा रखी है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) म पिछले पांच महीनों से पूरी तरह से नजरों से ओझल हैं और दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसियां भी उनका सुराग लगाने में नाकाम साबित हो रही हैं। अपने पिता अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता की बागडोर संभालने वाले मोजतबा ने अब तक एक बार भी कोई सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय गलियारों में उनके ठिकाने और स्वास्थ्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।CIA और मोसाद का हाई-प्रियोरिटी ऑपरेशन, फिर भी कोई सुराग नहींमीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों ने ईरानी सुप्रीम लीडर की सही लोकेशन का पता लगाने के लिए एक विशेष हाई-प्रियोरिटी ऑपरेशन शुरू कर रखा है। फरवरी महीने में हुए हमलों के दौरान अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत के बाद मोजतबा के भी गंभीर रूप से घायल होने और यहां तक कि उनकी मौत के दावे किए गए थे। हालांकि, 8 मार्च को उन्हें आधिकारिक तौर पर ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया गया, लेकिन पिछले पांच महीनों में उन्होंने न तो कभी टीवी पर कोई संबोधन दिया और न ही वे अपने पिता के जनाजे में शामिल हुए। एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी पहेली यह है कि उनका कोई भी डिजिटल फुटप्रिंट या सुराग हाथ नहीं लग रहा है।'कोई फोन नहीं, कोई लैपटॉप नहीं': बेहद गोपनीय है कार्यशैलीईरानी सुप्रीम लीडर की सुरक्षा और गोपनीयता इतनी चाक-चौबंद है कि खुफिया विशेषज्ञों के होश उड़े हुए हैं। एक वरिष्ठ खुफिया सूत्र के हवाले से सामने आया है कि पिछले पांच महीनों में मोजतबा की तरफ से कोई फोन कॉल, कोई लैपटॉप इस्तेमाल या किसी भी तरह का डिजिटल संपर्क नहीं किया गया है। अपने पिता अली खामेनेई के विपरीत—जो अक्सर सोशल मीडिया और टेलीविजन के माध्यम से संदेश जारी करते थे—मोजतबा पूरी तरह से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर हो चुके हैं। वे केवल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बेहद भरोसेमंद और चुनिंदा सहयोगियों के जरिए अपने हाथ से लिखे गए लिखित बयान ही बाहर भेज रहे हैं, जिससे उनकी लोकेशन को किसी भी तकनीकी सर्विलांस से ट्रैक कर पाना नामुमकिन हो गया है।अंडरग्राउंड बंकर या गुप्त सुरंगों का नेटवर्क? कहां छिपे हैं मोजतबा?इंटेलिजेंस विश्लेषकों का यह मानना है कि मोजतबा खामेनेई इस समय राजधानी तेहरान के किसी बेहद सुरक्षित और गुप्त अंडरग्राउंड बंकर में छिपे हो सकते हैं। इसके अलावा यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि वे ईरान के धार्मिक और पवित्र शहर कॉम के आसपास बने जटिल सुरंगों के नेटवर्क से देश की सत्ता चला रहे हैं। हालांकि, हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दावा किया था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम लीडर से मुलाकात की है, लेकिन इस दावे के समर्थन में कोई भी ठोस सबूत या तस्वीर सामने नहीं आई है, जिससे रहस्य और अधिक गहराता जा रहा है।
भारत के पड़ोसी मुल्क नेपाल में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच भड़की हिंसक झड़पों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अब तक हुई खूनी हिंसा और आगजनी में 3 लोगों की जान जा चुकी है, जिसके बाद से भारत की सीमा से लगे कई प्रमुख जिलों में तनाव चरम पर है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू बढ़ा दिया है। इस बीच, देश के प्रधानमंत्री बालेन शाह खुद मोर्चे पर आ गए हैं और उन्होंने एक उच्चस्तरीय सर्वदलीय बैठक बुलाने के साथ-साथ नागरिकों से शांति और संयम बरतने की पुरजोर अपील की है।चार जिलों में बढ़ा अनिश्चितकालीन कर्फ्यू, तेराई क्षेत्र में तनावनेपाल के दक्षिण तेराई क्षेत्र में स्थिति बेहद विस्फोटक बनी हुई है। ताजा आधिकारिक आदेशों के अनुसार, भारत की सीमा से लगे सप्तारी जिले में भी अनिश्चितकालीन कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है, जिससे पाबंदी वाले जिलों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई है। इससे पहले सुनसरी, धानुषा और सिराहा जिलों में भी सख्त कर्फ्यू लागू किया गया था। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, गोलबाजार क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शनकारियों ने भारी उपद्रव मचाते हुए एक शॉपिंग मॉल को आग के हवाले कर दिया था, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने पड़े।कैसे भड़की थी हिंसा? उत्सव के विवाद से लेकर पुलिस फायरिंग तकइस पूरे तनाव की शुरुआत सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज इलाके में हुई थी, जहां एक उत्सव के दौरान दो धार्मिक समुदायों के बीच मामूली बात पर खूनी संघर्ष छिड़ गया था। उग्र भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को गोलीबारी करनी पड़ी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद यह हिंसा मधेश क्षेत्र तक फैल गई, जहां सिराहा जिले में एक किशोर की मौत हो गई और इलाज के दौरान एक अन्य घायल ने भी दम तोड़ दिया। इस दौरान झड़प में पुलिस कांस्टेबल नारद पेरियार को भी गोली लगने की खबर सामने आई है।प्रधानमंत्री बालेन शाह की राष्ट्र के नाम अपील, बुलाई सर्वदलीय बैठकबिगड़ते हालातों के बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह ने टेलीविजन के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित किया और देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की। पीएम शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार इस पूरी हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाएगी तथा इसके लिए जिम्मेदार उपद्रवियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। स्थिति को तुरंत नियंत्रित करने के लिए काठमांडू में एक आपातकालीन सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से यह भी विशेष आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली अफवाहों, भ्रामक जानकारियों और नफरत फैलाने वाले संदेशों से दूर रहें तथा देश में आपसी भाईचारा बनाए रखें।
कराची का कुख्यात ल्यारी इलाका एक बार फिर से खूनी संघर्ष और गैंगवॉर की आग सुलगने के कारण सुर्खियों में आ गया है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ल्यारी के चाकीवारा थाना क्षेत्र में एक अज्ञात हमलावरों द्वारा की गई ताबड़तोड़ गोलीबारी में कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच का भाई जुबैर बलोच गंभीर रूप से घायल हो गया है। इस सनसनीखेज हमले के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। स्थानीय अस्पताल में जुबैर बलोच की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जबकि पुलिस इस हाई-प्रोफाइल हमले के पीछे की असली साजिश को बेनकाब करने में जुट गई है।मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने बरसाईं अंधाधुंध गोलियांपाकिस्तानी पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना तब घटी जब जुबैर बलोच अपने घर के बाहर शांति से बैठा हुआ था। अचानक मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए दो अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस अचानक हुए जानलेवा हमले में जुबैर को कई गोलियां लगीं, जिससे वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा। इस गोलीबारी की चपेट में आने से आसपास से गुजर रहे दो अन्य आम नागरिक भी घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद तीनों घायलों को इलाज के लिए कराची के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।आपराधिक इतिहास और राजनीतिक रंजिश की आशंकापाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच की गैर-मौजूदगी में उसका भाई जुबैर बलोच भी आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है। पुलिस अधिकारी सैयद असद रजा ने पुष्टि की है कि जुबैर के खिलाफ विभिन्न थानों में करीब सात आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह पहले भी कई बार जेल की हवा खा चुका है। शुरुआती जांच में पुलिस यह भी अंदेशा जता रही है कि हाल ही में जुबैर द्वारा किसी राजनीतिक पार्टी का दामन थामने और इलाके में झंडे-पोस्टर लगाने को लेकर उपजे विवाद के चलते विरोधियों ने इस वारदात को अंजाम दिया हो। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हमलावरों की तलाश में जुบैर के ठिकानों पर दबिश दे रही है।गैंगवॉर की वापसी और खाड़ी देशों से लौट रहे अपराधियों का खौफइस घटना के बाद ल्यारी में एक बार फिर पुराने दिनों की तरह गैंगवॉर भड़कने की आशंका तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि कराची ऑपरेशन के बाद जो गैंगस्टर और अपराधी भागकर ईरान और खाड़ी के देशों में छिप गए थे, वे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव और क्षेत्रीय युद्धों के कारण वापस पाकिस्तान लौटने लगे हैं। यही वजह है कि ल्यारी में वर्चस्व की लड़ाई एक बार फिर सिर उठा रही है। गौरतलब है कि ल्यारी का यह पूरा आपराधिक और राजनीतिक सिंडिकेट पहले भी बॉलीवुड फिल्मों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रह चुका है, जहां उजैर बलोच जैसे अपराधियों का आतंक जगजाहिर है।
भारत की राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में समाप्त हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की गूंज अब पड़ोसी देश पाकिस्तान तक सुनाई देने लगी है। भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चले उग्र युवा आंदोलन के बाद अब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी को भी 'कॉकरोचों' का खौफ सताने लगा है। नकवी ने सार्वजनिक रूप से आशंका जताई है कि यदि पाकिस्तानी युवाओं का असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा, तो ये 'कॉकरोच' मिलकर पूरे सिस्टम को पलट कर रख देंगे।पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का बड़ा बयानएक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और गहराते आर्थिक संकट खुलकर स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस समय भारी-भरकम कर्ज के जाल में फंस चुका है और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे महंगाई चरम पर है। नकवी ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार युवाओं की उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि आप उन्हें युवा कहें या कॉकरोच, लेकिन जब ये एक साथ सड़कों पर उतरेंगे, तो मौजूदा सत्ता और सिस्टम को पूरी तरह पलट देंगे।'पिछले 70 सालों से पूरी तरह ढह चुका है पाकिस्तान का सिस्टम'पाकिस्तान की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए गृह मंत्री नकवी ने माना कि देश का प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले 70 वर्षों से इस नाकाबिल सिस्टम को जबरन घसीटा जा रहा है, लेकिन अब सुधार की गुंजाइश कम और कर्ज लेने की आदत ज्यादा हो गई है। बजट का अधिकांश हिस्सा केवल नए कर्ज चुकाने और पुराने ऋणों को संभालने में ही निकल जाता है, जिससे आम जनता और खास तौर पर युवाओं में सरकार के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा सुलग रहा है।भारत में अभिजीत दीपके के आंदोलन और CJP का असरविशेषज्ञों का मानना है कि मोहसिन नकवी के मुंह से 'कॉकरोच' शब्द का यह इस्तेमाल भारत में हाल ही में हुए उस युवा आंदोलन से प्रेरित है, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले अभिजीत दीपके के नेतृत्व में महीनों तक ऐतिहासिक प्रदर्शन चला था। इस दबाव के चलते तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। भारत के इस सफल युवा विद्रोह से सहमे पाकिस्तानी हुक्मरानों को अब अपने ही देश में युवाओं के बड़े विद्रोह का डर सताने लगा है।
Nepal के सप्तरी जिले में सांप्रदायिक तनाव के बाद अनिश्चितकालीन Curfew लागू किया गया
(शिरीष बी. प्रधान)काठमांडू, 31 जुलाई नेपाल के अधिकारियों ने सुनसरी जिले में हाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में प्रदर्शन शुरू होने के बाद शुक्रवार को भारत की सीमा से लगे सप्तरी जिले के कुछ हिस्सों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तनावपूर्ण स्थिति पर गहरी चिंता जताई है तथा लोगों से शांति, एकता व संयम बनाए रखने की अपील की। सप्तरी जिला प्रशासन कार्यालय ने एहतियाती कदम के तौर पर राजबिराज नगरपालिका के कुछ हिस्सों में सुबह आठ बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया। यह फैसला सांप्रदायिक झड़पों के विरोध में कुछ समूहों द्वारा प्रदर्शन किए जाने के बाद लिया गया। सप्ताहांत में सुनसरी में सांप्रदायिक झड़पें शुरू होने के बाद से नेपाल के कई जिलों में तनाव बना हुआ है। अधिकारियों ने इस कारण कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू की तथा सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। इस नए आदेश के बाद अब चार जिलों में कर्फ्यू लागू हो गया है। नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में भारत की सीमा से लगे सुनसरी, धनुषा और सिरहा जिलों के कुछ हिस्सों में पहले से ही कर्फ्यू लागू है। अधिकारियों को तनाव को नियंत्रित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। रविवार को दो धार्मिक समुदायों के कार्यक्रमों के दौरान हुए विवाद के बाद आपस में भिड़े समूहों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षा कर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। हिंसा उस समय शुरू हुई, जब अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे दोनों समुदायों के लोगों के बीच लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे लगाने को लेकर विवाद हो गया। बातचीत के दौरान हुई बहस ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। बृहस्पतिवार को हिंसा मधेश प्रांत तक फैल गई, जहां सिरहा जिले में हुई झड़पों में एक नाबालिग की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि सुनसरी में हुई हिंसा में घायल एक व्यक्ति की कोशी प्रांत में मौत हो गई। सहायक मुख्य जिला अधिकारी होम प्रसाद घिमिरे ने बताया कि इस बीच, सीमा से लगे सरलाही जिले की जिला सुरक्षा समिति ने फैसला लिया कि सीमा पार से नेपाल में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा।
इजरायल ने तोड़ दी हिज्बुल्लाह की कमर! साउथ लेबनान में तबाह कर दिया उसका अंडरग्राउंड टनल नेटवर्क
इजरायल डिफेंस फोर्सेज ने साउथ लेबनान में कई अहम अंडरग्राउंड सुरंगों को नष्ट कर दिया है। यहीं, हिज्बुल्लाह का सेंट्रल कमांड सेंटर था, जिससे हमलों के निर्देश दिए जाते थे।
स्पेन में बड़ा प्रवासी संकट! समुद्र के रास्ते पहुंचे 49 हजार लोग, बॉर्डर पर भगदड़ में गई 18 लोगों की जान
भारत-चीन रिश्तों में नई पहल, गलवान के बाद पहली बार दिल्ली पहुंचेंगे शी जिनपिंग; क्यों अहम है ये दौरा?
पाकिस्तान में नई ‘कॉकरोच पार्टी’ से हलचल, गृहमंत्री को सता रहा बगावत का डर, जाने पूरा मामला
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PM-किसान पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा, Business Hindi News Hindustan मोदी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा! 2031 तक जारी रहेगी पीएम किसान योजना, कैबिनेट ने लगाई मुहर India TV Hindi सोलर से खेलो तक... संसद में हंगामे के बीच मोदी कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले Jagran PM Kisan:क्या दूसरे के खेत में काम करने वाले किसान ले सकते हैं पीएम किसान योजना का लाभ? यहां दूर करें कंफ्यूजन Amar Ujala मोदी सरकार ने पीएम किसान योजना को 5 साल और बढ़ाया, 3.15 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च Jansatta
नेपाल में कांवड़ यात्रा के दौरान हिंसा भड़की, फुटेज में देंखे 2 की मौत; सुनसरी और सिराहा के कई इलाकों में कर्फ्यू, पुलिस ने की फायरिंग
अमेरिकी सीनेट में ईरान पर सैन्य कार्रवाई सीमित करने का प्रस्ताव खारिज, वीडियो में जाने ट्रम्प को राहत; संसद की मंजूरी वाला नियम फिलहाल टला
भारत मालदीव में डिजिटल लेनदेन सेवा शुरू
माले/ नई दिल्ली। मालदीव मोनेटरी अथॉरिटी (एमएमए) ने मालदीव की तत्काल भुगतान प्रणाली 'फवारा' और भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) केबीच एकीकरण के सफल शुभारंभ की घोषणा कर दी है। यह मालदीव और भारत केबीच सीमापार डिजिटल वित्तीय संपर्क और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में एक रूपांतरकारी उपलब्धि है। रियल टाइम ट्रांसफर सेवा...
अभिजीत दीपके के आंदोलन के बाद थर-थर कांप रहा पाकिस्तान, गृह मंत्री बोले- कॉकरोच सबकुछ पलट देंगे
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी को कॉकरोचों का डर सताने लगा है। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि कॉकरोच सबकुछ पलट देंगे। भारत में अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हुए सीजेपी के आंदोलन के चलते धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा है।
नेपाल में भड़की हिंसा का कहर: 4 नए जिलों में बढ़ा तनाव, कई शहरों में लगा कर्फ्यू, सेना हाई अलर्ट पर
नेपाल में भड़की हिंसा की आग अब और भी भयावह रूप लेती जा रही है. देश के चार और जिलों में अचानक तनाव बढ़ने के बाद स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है. हालात की गंभीरता को देखते हुए कई प्रमुख शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है, वहीं शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए नेपाली सेना को हाई अलर्ट पर तैनात कर दिया गया है.कई शहरों में लगा कर्फ्यू और थमे वाहनों के पहिएहिंसा के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियातन कड़े कदम उठाए हैं. जिन इलाकों में उपद्रव और झड़पों की आशंका थी, वहां पूरी तरह से कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही बंद है और सुरक्षाबल चप्पे-चप्पे पर गश्त लगा रहे हैं. अचानक लगे कर्फ्यू की वजह से आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है.शांति व्यवस्था कायम करने के लिए सेना हाई अलर्ट परउपद्रवियों पर नकेल कसने और हालात को बेकाबू होने से रोकने के लिए नेपाली सेना को अलर्ट मोड पर रखा गया है. संवेदनशील इलाकों और मुख्य चौराहों पर सेना की फ्लैग मार्च शुरू कर दी गई है. प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि माहौल बिगाड़ने या कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही पड़ोसी जिलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है.
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय निवासियों पर वहां की सेना और सुरक्षाबलों का भयानक अत्याचार चरम पर पहुंच गया है. अपनी बुनियादी जरूरतों, आटे-बिजली की किल्लत, भारी-भरकम बिलों और आर्थिक बदहाली के खिलाफ आवाज उठा रही निहत्थी अवाम पर गोलियां बरसाकर पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरी हमदर्दी का उसका दावा केवल एक ढोंग है.125 से अधिक निर्दोषों की मौत और महिलाओं पर बर्बरताशुरुआती रिपोर्टों में नुकसान कम आंका जा रहा था, लेकिन स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार सेना की गोलीबारी में अब तक 125 से ज्यादा बेगुनाह लोग जान गंवा चुके हैं. रावलकोट, मीरपुर और कोटली जैसे शहरों में अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया. पुलिस व सेना के लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल से 50 से अधिक महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुई हैं. इस दरिंदगी को छिपाने के लिए PoK में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं, फिर भी सच उजागर होने पर वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला.संयुक्त राष्ट्र ने लगाई कड़ी फटकारसंयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने इस स्थिति पर गहरा दुख जताते हुए पाकिस्तान को सख्त कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाना, नागरिकों को अपराधी ठहराना और अत्यधिक बल प्रयोग करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का सीधा उल्लंघन है. संयुक्त राष्ट्र की इस टिप्पणी ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की बची-कुची साख भी खत्म कर दी है.'मुजफ्फराबाद मार्च' के साथ आंदोलन फिर शुरू'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा यह जनआंदोलन पाकिस्तान की गोलियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है. समिति के नेताओं ने साफ किया कि अपने शहीदों का अंतिम संस्कार करने और घायलों के इलाज के लिए आंदोलन को कुछ समय रोका गया था, लेकिन अब 'मुजफ्फराबाद मार्च' को और अधिक मजबूती के साथ दोबारा शुरू कर दिया गया है. जनता का संकल्प है कि जब तक सैन्य तानाशाही का अंत नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा.क्यों भड़की आक्रोश की आग और क्या है 12 सीटों का विवाद?PoK के लोग लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा और महंगे बिजली बिलों से त्रस्त हैं. इस आर्थिक शोषण के साथ-साथ राजनीतिक अधिकारों का भी हनन किया जा रहा है. PoK विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के नाम पर 12 सीटें आरक्षित रखी गई हैं. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन 12 सीटों का गलत इस्तेमाल करके अपनी मनपसंद कठपुतली सरकार बनाता है. प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि इन आरक्षित सीटों को तुरंत खत्म किया जाए ताकि PoK के मूल निवासियों को उनका वास्तविक राजनीतिक हक मिल सके.
आधी रात को डोली धरती! भारत के पड़ोस में 2 घंटे के भीतर 4 बार आए तेज भूकंप, झटकों से कांप उठे दो देश
भारत के पड़ोसी देशों से आधी रात को एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है, जहां प्रकृति के एक भीषण झटके ने हजारों लोगों की नींद उड़ा दी। देर रात जब लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी अचानक जमीन तेजी से हिलने लगी। महज 2 घंटे के भीतर एक के बाद एक लगातार 4 बार आए तेज भूकंप (Earthquake) के झटकों से दो देश पूरी तरह कांप उठे। झटके इतने जोरदार थे कि लोग दहशत के मारे अपने बच्चों और परिवारों को लेकर आधी रात को ही कड़ाके की ठंड और अंधेरे में सड़कों की तरफ भागने लगे। सोशल मीडिया पर इस प्राकृतिक आपदा के बाद की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।महज 120 मिनट में चार बार महसूस किए गए तगड़े झटकेमौसम और भूगर्भीय हलचलों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक, पहला झटका बेहद तीव्र था, जिसके तुरंत बाद लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला कि एक के बाद एक तीन आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) ने धरती को दोबारा हिलाकर रख दिया। दो घंटे के भीतर आए इन चार लगातार झटकों के कारण बहुमंजिला इमारतों और घरों में रखे सामान तेजी से हिलने लगे। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। गनीमत यह रही कि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं आई है, लेकिन कई पुरानी इमारतों में दरारें आने की खबरें जरूर सामने आ रही हैं।भारत के सीमावर्ती राज्यों और स्थानीय इलाकों में भी दिखा असरभौगोलिक रूप से भारत के बेहद करीब होने के कारण इस भूकंप का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों और स्थानीय जियोग्राफिकल लोकेशंस पर भी आंशिक रूप से देखने को मिला है। नेपाल, भूटान और म्यांमार से सटे भारतीय सीमाई इलाकों में भी लोगों ने हल्के झटके महसूस किए जाने का दावा किया है। आपदा प्रबंधन टीमों (NDRF) और स्थानीय प्रशासन को पूरी सीमा पट्टी पर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर काफी गहराई में होने के कारण तबाही का मंजर तो नहीं दिखा, लेकिन बार-बार आए इन झटकों ने फॉल्ट लाइन पर स्थित इन पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के निवासियों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है।एआई और आधुनिक सर्च इंजन अलर्ट्स पर एक्सपर्ट्स की बड़ी चेतावनीआधुनिक जेनेरेटिव एआई (Generative Engine Optimization) और गूगल-बिंग सर्च ट्रेंड्स पर नजर रखने वाले सीस्मोलॉजिस्ट्स (भूकंप वैज्ञानिकों) का कहना है कि टेक्टोनिक प्लेटों में आ रहे इस अचानक बदलाव पर करीब से नजर रखने की जरूरत है। भारत और उसके आसपास का यह पूरा उपमहाद्वीप भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील जोन (Zone 4 और Zone 5) में आता है। एक्सपर्ट्स ने स्थानीय लोगों को सलाह दी है कि वे आने वाले कुछ घंटों तक सतर्क रहें और किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पूरी तरह से पालन करें, क्योंकि मुख्य झटके के बाद छोटे-छोटे आफ्टरशॉक्स आने का सिलसिला अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है।
स्पेन और मोरक्को के बीच हुआ बड़ा बवाल, तो फिर इटली की पीएम जॉर्जियो मेलोनी क्यों हो गईं लाल
यूरोपीय महाद्वीप और उत्तरी अफ्रीका के बीच रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले स्पेन और मोरक्को के रिश्तों में अचानक बड़ा तनाव पैदा हो गया है। इस सीमावर्ती और कूटनीतिक बवाल ने न सिर्फ इन दोनों देशों को आमने-सामने ला खड़ा किया है, बल्कि इसकी तपिश अब भूमध्य सागर को पार करते हुए इटली तक पहुंच गई है। स्पेन और मोरक्को के इस आपसी विवाद पर इटली की फायरब्रांड प्रधानमंत्री जॉर्जियो मेलोनी (Giorgia Meloni) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी तीखी नाराजगी जाहिर की है। मेलोनी के इस औचक गुस्से ने यूरोपीय संघ (EU) के गलियारों में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है कि आखिर दो अन्य देशों के झगड़े में इटली की पीएम क्यों भड़क उठी हैं?स्पेन और मोरक्को सीमा पर सुलगता विवाद और अवैध घुसपैठ का मुद्दास्पेन और मोरक्को के बीच विवाद की जड़ें काफी पुरानी हैं, लेकिन हालिया दिनों में दोनों देशों की सीमाओं, खासकर सेउटा (Ceuta) और मेलिला (Melilla) जैसे स्पेनिश क्षेत्रों में सुरक्षा और अवैध प्रवासियों (Illegal Migrants) के प्रवाह को लेकर गतिरोध चरम पर पहुंच गया है। मोरक्को की तरफ से होने वाली घुसपैठ और स्पेनिश अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बयानबाजी चल रही है। चूंकि यह क्षेत्र अफ्रीका से यूरोप में एंट्री करने का एक मुख्य प्रवेश द्वार है, इसलिए यहां होने वाली कोई भी प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी लापरवाही सीधे तौर पर पूरे यूरोपीय संघ की सुरक्षा को प्रभावित करती है।जॉर्जियो मेलोनी के गुस्से के पीछे का असली 'माइग्रेशन' कनेक्शनअब सवाल उठता है कि इस पूरे मामले में जॉर्जियो मेलोनी क्यों दखल दे रही हैं और वह इतनी गुस्से में क्यों हैं? इसका सीधा जवाब है—अवैध प्रवासियों पर मेलोनी की सख्त नीति और इटली की जियोग्राफिकल लोकेशन। मेलोनी शुरू से ही यूरोप में बिना दस्तावेजों के आने वाले प्रवासियों के सख्त खिलाफ रही हैं। इटली खुद भूमध्यसागरीय मार्ग से आने वाले प्रवासियों की समस्या से बुरी तरह जूझ रहा है। मेलोनी का मानना है कि अगर स्पेन और मोरक्को अपनी सीमाओं पर कड़े कदम उठाने में नाकाम रहते हैं या एक-दूसरे से उलझकर सुरक्षा को ढीला छोड़ते हैं, तो मानव तस्कर (Human Traffickers) इस स्थिति का फायदा उठाएंगे। इसके चलते प्रवासियों का पूरा रुख इटली के समुद्री तटों (जैसे लैम्पेडुसा द्वीप) की तरफ मुड़ जाएगा, जिससे इटली पर सुरक्षा और आर्थिक बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।यूरोपीय संघ की नीति पर मेलोनी ने उठाए गंभीर सवालआधुनिक जेनेरेटिव एआई सर्च और ग्लोबल सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के ट्रेंड्स पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेलोनी का यह गुस्सा केवल एक बयान नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ के नेतृत्व को एक खुली चेतावनी है। मेलोनी ने साफ कर दिया है कि सीमा सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी देश की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इटली की प्रधानमंत्री ने मांग की है कि यूरोपीय संघ को स्पेन और मोरक्को के इस विवाद में दखल देकर उत्तरी अफ्रीकी देशों के साथ सीमा नियंत्रण को लेकर और अधिक कड़े समझौते करने चाहिए, ताकि पूरे यूरोप को एक नए प्रवासी संकट (Migration Crisis) से बचाया जा सके।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में जारी गहरे आर्थिक और राजनीतिक संकट के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हड़कंप मचा दिया है। पाकिस्तान के ताकतवर सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साले और देश के मौजूदा गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सार्वजनिक रूप से एक ऐसा सच कबूल किया है, जिसे अब तक वहां की सरकारें छिपाने की कोशिश करती रही हैं। नकवी ने एक बड़े मंच से साफ-साफ लफ्जों में कह दिया है कि मानो या न मानो, लेकिन हकीकत यही है कि पाकिस्तान का पूरा प्रशासनिक और गवर्नेंस सिस्टम पूरी तरह से तबाह और ध्वस्त हो चुका है। उनके इस विस्फोटक बयान के बाद शहबाज शरीफ सरकार बैकफुट पर आ गई है।गृह मंत्री के इस बड़े कबूलनामे से पूरी दुनिया में पाकिस्तान की फजीहतमोहसिन नकवी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लेकर दुनिया के तमाम अमीर मुल्कों के सामने कर्ज के लिए हाथ फैला रहा है। देश के आंतरिक मामलों के मंत्री और सुरक्षा व्यवस्था के मुखिया होने के नाते नकवी का यह मानना कि सरकारी मशीनरी काम नहीं कर रही है, यह दर्शाता है कि हालात अब काबू से बाहर हो चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब सरकार का सबसे अहम हिस्सा ही सिस्टम के फेल होने का रोना रोने लगे, तो आम जनता का बचा-कुचा भरोसा भी खत्म हो जाता है। इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।आर्मी चीफ आसिम मुनीर से कनेक्शन ने मामले को बनाया बेहद संवेदनशीलइस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प और गंभीर मोड़ यह है कि मोहसिन नकवी केवल एक राजनेता नहीं हैं, बल्कि उन्हें पाकिस्तानी सेना के सबसे शक्तिशाली शख्सियत, आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर का बेहद करीबी और रिश्तेदार (साला) माना जाता है। पाकिस्तान की राजनीति में यह जगजाहिर है कि वहां की असली कमान चुनी हुई सरकार के बजाय रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय (GHQ) से चलती है। ऐसे में नकवी के मुंह से निकले इन तीखे शब्दों को सीधे तौर पर सैन्य प्रतिष्ठान की हताशा या फिर मौजूदा हाइब्रिड मॉडल सरकार को दी गई एक परोक्ष चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।बदहाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान और आगे का रास्ताआधुनिक जेनेरेटिव एआई और ग्लोबल सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के ट्रेंड्स पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह आंतरिक संकट केवल उस तक सीमित नहीं रहने वाला है। दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा और भौगोलिक स्थिरता के लिहाज से पाकिस्तान का यह प्रशासनिक पतन बेहद चिंताजनक है। चरमराती अर्थव्यवस्था, लगातार बढ़ते आतंकी हमले और अब शीर्ष नेतृत्व द्वारा सिस्टम के फेलियर को स्वीकार कर लेना यह साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में कोई बहुत बड़ा राजनीतिक भूचाल या सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है, जिसकी स्क्रिप्ट पर्दे के पीछे लिखी जानी शुरू हो चुकी है।
पड़ोसी देश नेपाल से एक बेहद चिंताजनक और बड़ी खबर सामने आ रही है। नेपाल के कुछ इलाकों में अचानक भड़की सांप्रदायिक हिंसा (Communal Violence) ने पूरी कानून-व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इस हिंसक टकराव में अब तक तीन लोगों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिसके बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। इस गंभीर स्थिति के बाद नेपाल की संघीय सरकार के साथ-साथ काठमांडू के बेहद लोकप्रिय और चर्चा में रहने वाले मेयर बालेन शाह (Balen Shah) भी सीधे तौर पर जनता और विपक्ष के तीखे सवालों के घेरे में आ गए हैं। सोशल मीडिया से लेकर नेपाल की संसद तक इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।तीन मौतों के बाद भड़का गुस्सा और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालनेपाल के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, दो गुटों के बीच मामूली विवाद से शुरू हुई यह घटना देखते ही देखते बड़े सांप्रदायिक तनाव में तब्दील हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा, लेकिन तब तक उपद्रवियों ने भारी नुकसान पहुंचा दिया था। इस हिंसा में तीन नागरिकों की जान जाने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी और खुफिया तंत्र की विफलता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालात को काबू में करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और कुछ जगहों पर कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।मेयर बालेन शाह और संघीय सरकार के बीच कूटनीतिक तनातनीइस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब काठमांडू के मेयर बालेन शाह पर इस तनाव को सही समय पर न संभाल पाने और सोशल मीडिया पर भड़काऊ माहौल को रोकने में नाकाम रहने के आरोप लगे। बालेन शाह, जो अपने आक्रामक अंदाज और स्वतंत्र कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, इस समय नेपाल की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों के निशाने पर हैं। आलोचकों का कहना है कि जब देश का एक हिस्सा सुलग रहा था, तब स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच बेहतर तालमेल की भारी कमी दिखी। वहीं, बालेन शाह के समर्थकों का दावा है कि यह उनके बढ़ते राजनीतिक कद को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है।भारत-नेपाल सीमा और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा का हाई अलर्टइस सांप्रदायिक झड़प का असर नेपाल के सीमावर्ती इलाकों पर भी देखने को मिल रहा है। भौगोलिक रूप से भारत से सटे होने के कारण दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बल भी अलर्ट मोड पर आ गए हैं। नेपाल में होने वाली किसी भी बड़ी उथल-पुथल का असर सीधे तौर पर भारत के सीमावर्ती राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार के सामाजिक ताने-बाने पर भी पड़ता है। जेनेरेटिव एआई और आधुनिक वैश्विक सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के ट्रेंड्स को देखें तो अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर नेपाल सरकार ने समय रहते इस सांप्रदायिक आग को पूरी तरह नहीं बुझाया, तो इसका दूरगामी असर देश के पर्यटन और आर्थिक मोर्चे पर भी पड़ सकता है।
चीन, तिब्बत और नेपाल में महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके, कुछ ही घंटों में कई बार हिली धरती
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, शुक्रवार सुबह कुछ ही घंटों में चीन, तिब्बत और नेपाल के कई हिस्सों में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। इनमें सबसे तेज भूकंप चीन में आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई।
आधुनिक तकनीक और विकास के मामले में दुनिया भर में मिसाल कायम करने वाला जापान इन दिनों एक बेहद अहम और रणनीतिक योजना पर काम कर रहा है। जापान सरकार टोक्यो के अलावा एक 'दूसरी राजधानी' (Second Capital / Backup Capital) स्थापित करने की योजना को आगे बढ़ा रही है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में टोक्यो में कोई भीषण भूकंप या प्राकृतिक आपदा आती है, तो देश की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकार और आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से सुरक्षित रहें और बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलती रहें। आइए जानते हैं कि इस रेस में कौन-कौन से प्रमुख शहर शामिल हैं और उनकी क्या खासियतें हैं।1. ओसाका (Osaka): सबसे मजबूत और अग्रणी दावेदारजापान की दूसरी राजधानी बनने की इस रेस में ओसाका को सबसे आगे और सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।ओसाका टोक्यो के बाद जापान का दूसरा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण महानगर (Metropolitan Area) है।इसके पास विशाल आर्थिक महत्व, मजबूत कमर्शियल नेटवर्क और एक विकसित शहरी बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पहले से मौजूद है।यहां बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और व्यावसायिक संचालन करने की पूरी क्षमता है, जो इसे इस दर्जे के लिए सबसे मुफीद बनाती है।2. नागोया और आइची (Aichi / Nagoya): देश का प्रमुख इंडस्ट्रियल हबआइची प्रिफेक्चर और उसके मुख्य शहर नागोया ने भी आधिकारिक तौर पर इसके लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।यहां के प्रशासकों का दावा है कि नागोया और आइची क्षेत्र के पास देश की दूसरी राजधानी के रूप में कार्य करने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक, राजनीतिक और औद्योगिक सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।यह क्षेत्र जापान के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल हब के रूप में जाना जाता है, जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।3. फुकुओका (Fukuoka): पश्चिमी जापान का तेजी से उभरता केंद्रफुकुओका प्रिफेक्चर ने स्थानीय नगर पालिकाओं और बिजनेस कम्युनिटी के साथ मिलकर इस रेस में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।यह पश्चिमी जापान का एक प्रमुख और तेजी से उभरता हुआ आर्थिक व व्यापारिक केंद्र है।इसकी भौगोलिक स्थिति और आधुनिक कनेक्टिविटी इसे आपदा प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों के लिहाज से एक बेहद सुरक्षित और सक्षम विकल्प बनाती है।(इन प्रमुख शहरों के अलावा होक्काइडो (Hokkaido) और मियागी (Miyagi) जैसे प्रिफेक्चर भी इस योजना के तहत अपनी हिस्सेदारी और संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।)
अमेरिका में नौकरी के लिए विदेशी छात्रों को देंगे 1 लाख डॉलर शुल्क, भारतीय छात्रों पर पड़ेगा बड़ा असर
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसके तहत वहां की यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने वाले विदेशी छात्रों को नौकरी करने के लिए 1 लाख डॉलर (करीब 96 लाख रुपये) तक का शुल्क देना पड़ सकता है।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। प्रांतीय राजधानी क्वेटा के बाहरी इलाके में स्थित एक कोयला खदान में मीथेन गैस के रिसाव के कारण जोरदार धमाका हो गया। इस खौफनाक हादसे में कम से कम 18 खनिकों की मौके पर ही मौत हो गई है। वहीं, लगभग 24 मजदूर अभी भी खदान के मलबे में बुरी तरह फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी है।1200 मीटर गहरी खदान में जिंदगी की जद्दोजहदराहत और बचाव टीमें 1,200 मीटर की गहराई में फंसे 24 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कड़ी मशक्कत कर रही हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मीथेन गैस के धमाके के बाद ऑक्सीजन का स्तर शून्य हो जाता है, जिससे फंसे हुए मजदूरों के जिंदा बचने की उम्मीद बहुत कम रह गई है। फिर भी, जब तक हर एक मजदूर का पता नहीं चल जाता, तलाश जारी रहेगी।परिजनों का बुरा हाल और मुआवजे का ऐलानइस दर्दनाक घटना के बाद से ही खदान के बाहर मजदूरों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। बलूचिस्तान के खदान मंत्री शोएब नोशेरवानी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख पाकिस्तानी रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। लेबर यूनियन ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसके बाद सरकार ने हादसे के कारणों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
मिडिल ईस्ट में सालों से चल रहे खूनी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में शांति स्थापित करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते का ऐलान किया है। इस डील के तहत यह तय किया गया है कि हमास अपने सभी हथियार डाल देगा और इसके बदले इजराइली सेना गाजा से पूरी तरह वापस लौट जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने इसे 'शांति परिषद' (Board of Peace) की एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। लेकिन इस घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और खुद हमास इस समझौते को पूरी तरह से मानेंगे? आइए इस बहुचर्चित डील की जमीनी हकीकत को समझते हैं।कैसे लागू होगा ट्रंप का यह शांति फार्मूला?ट्रंप द्वारा पेश किए गए इस शांति रोडमैप के मुताबिक, हमास का निरस्त्रीकरण एक झटके में नहीं, बल्कि कई चरणों में होगा। योजना यह है कि गाजा में मौजूद सभी छोटे-बड़े हथियार और सैन्य ठिकाने एक नई फिलिस्तीनी तकनीकी सरकार (NCAG) और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) के नियंत्रण में सौंप दिए जाएंगे। जैसे-जैसे हमास अपने हथियार सौंपने की प्रक्रिया पूरी करेगा, वैसे-वैसे इजरायली सेना गाजा पट्टी से अपने कदम पीछे खींचना शुरू कर देगी। अमेरिका का मानना है कि इससे इजरायल को अपनी सुरक्षा की गारंटी मिलेगी और गाजा के आम नागरिकों को फिर से एक सुरक्षित जीवन मिल सकेगा।क्या नेतन्याहू और हमास इस डील को मानेंगे?भले ही अमेरिका ने इस समझौते को एक बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया हो, लेकिन राह अभी इतनी आसान नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने अभी तक इस प्रस्ताव पर आधिकारिक तौर पर अपनी मुहर नहीं लगाई है। नेतन्याहू सरकार का साफ कहना है कि इजरायली सेना के पीछे हटने से पहले गाजा का पूरी तरह से सैन्यीकरण खत्म होना चाहिए। इजरायल किसी भी शर्त पर हमास के पास एक भी हथियार छोड़ने के पक्ष में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, हमास की ओर से भी अभी तक कोई सीधा बयान नहीं आया है, हालांकि मिस्र की राजधानी काहिरा में मध्यस्थों (कतर, मिस्र और तुर्की) के साथ उसकी बातचीत काफी एडवांस स्टेज में चल रही है।आगे का रास्ता क्या है?अगर यह डील अपने तय स्वरूप में लागू हो जाती है, तो यह मध्य पूर्व के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट साबित होगी। लेकिन कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह से दूर नहीं किया जाता और हमास जमीनी स्तर पर अपने हथियार नहीं सौंपता, तब तक यह समझौता सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले कुछ दिनों में काहिरा में होने वाली अहम बैठकों में क्या ठोस नतीजा निकलकर सामने आता है।
ईरान युद्ध पर ट्रंप का नियंत्रण: नेतन्याहू ने किया बड़ा खुलासा
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान युद्ध से जुड़े सभी निर्णय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही ले रहे हैं
ईरान और अमेरिका में जारी तनातनी के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन के अल अजराक एयर बेस पर अमेरिका के जवाबी हमले का दावा किया
20वीं सीपीसी केंद्रीय कमेटी का पांचवां पूर्णाधिवेशन अक्टूबर में आयोजित होगा
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) केंद्रीय कमेटी के पोलित ब्यूरो ने बैठक कर फैसला किया कि इस अक्टूबर में 20वीं सीपीसी केंद्रीय कमेटी का पांचवां पूर्णाधिवेशन पेइचिंग में आयोजित होगा।
बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे लोगों पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है और महिलाओं को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है
दुर्लभ बीमारियों की सीरीज- ‘ऐ जिंदगी’ में आज कहानी वंदना कटारिया की, जिसके लिए मैं नीरज झा पहुंचा हूं गुजरात के जैतपुर शहर- वक्त- शाम के करीब 4 बजे। मूसलाधार बारिश हो रही है। जैतपुर की तंग गलियों से गुजरते हुए एक शख्स से पूछा- वंदना कटारिया का घर कहां है? उसने एक पुरानी तीन मंजिला बिल्डिंग की ओर इशारा करते हुए कहा- वो कोने वाली दुकान वंदना दीदी की है। वहीं मिलेंगी। छोटी-सी दुकान में कुर्सी पर एक औरत बैठी हैं। दुकान पर एक शख्स आया। बोला- वंदना दीदी, चिप्स का पैकेट देना। पास ही एक छोटी टेबल रखी थी। ग्राहक ने उसी पर 10 रुपए रख दिए। वंदना ने इस सिक्के की तरफ हाथ की बजाय पैर बढ़ाया। लेकिन उनके पैर कंपकंपाते हुए पहले दाईं फिर बाईं ओर मुड़ गए। उन्होंने दोबारा कोशिश की। इस बार दोनों पैरों के पंजे से सिक्के को छू तो लिया, लेकिन पकड़ नहीं पाईं। इसके बाद तीसरी, फिर चौथी कोशिश… आखिरकार बड़ी मशक्कत के बाद दाएं पैर की उंगलियां ने किसी तरह सिक्के को दबोच लिया। फिर उन्होंने धीरे-धीरे पैर खींचते हुए सिक्के को टेबल के एक कोने तक सरका लिया। …लेकिन अभी एक और परीक्षा बाकी है। ग्राहक को चिप्स देना। वंदना कुर्सी पर बैठी-बैठी दूसरी ओर मुड़ी। पहले गर्दन, फिर कंधे और फिर कमर, लेकिन शरीर का एक हिस्सा, दूसरे हिस्से का साथ नहीं देता। एक पल के लिए उनका संतुलन बिगड़ा। ऐसा लगा कि कुर्सी से गिर पड़ेंगी। उन्होंने खुद को संभाला और दीवार पर टंगे चिप्स के पैकेट की ओर पैर बढ़ाया। पैरों की उंगलियों से धीरे-धीरे चिप्स का पैकेट खींचकर टेबल पर रख दिया। ग्राहक ने पैकेट उठाया और चला गया। वंदना जस की तस कुर्सी पर बैठ गईं। जो काम अमूमन कुछ सेकंड में हो जाते हैं, उन्हें पूरा करने में वंदना को कई मिनट लग जाते हैं। वजह - शरीर उनके कंट्रोल में नहीं है। हाथ कंपकंपाते हैं। गर्दन सीधी नहीं रहती, बार-बार झटक जाती है। होंठ हिलते हैं, लेकिन शब्द मुंह से बाहर निकलते-निकलते खो जाते हैं। बैठना, चलना, बोलना, खाना, पीना जैसे काम वंदना के लिए हर दिन की जद्दोजहद बन चुके हैं। तभी, एक बुजुर्ग आए। बाल काले-सफेद, चेहरे पर झुर्रियां। उन्होंने अपना नाम अशोक मेहता बताया। वे कहते हैं- 22 साल से मैं इसकी देखभाल कर रहा हूं। न इसकी मां है, न बाप। एक भाई है, वो भी सिर्फ नाम का। बिल्डिंग के गेट के पास मेरी फल की दुकान है। इसलिए वंदना की दुकान भी यहीं खुलवा दी, ताकि नजर रहे। अशोक यह कहते-कहते रुक गए। फिर बोले- दिनभर घर में अकेली बैठी रहे, उससे अच्छा है यहां लोगों के बीच बैठे। पहले इसी दुकान में एसटीडी-पीसीओ चलता था। वक्त बदला, तो उसे बंद करना पड़ा। अब चिप्स, नमकीन और बिस्किट रख दिए हैं। कोई ग्राहक आ जाए, तो 50–100 रुपए मिल जाते हैं। इससे ज्यादा खुशी उसे इस बात पर होती है कि वह अपने दम पर कुछ कर रही है। यह बिल्डिंग, यह मार्केट, सब इसके पिता का है। तभी बच्ची का हाथ थामे सीढ़ियों से एक शख्स उतरा। कुछ पूछने से पहले ही बोला- मैं भावेश हूं, वंदना का छोटा भाई। वंदना के बारे में बात करने से मना करते हुए वो कहते हैं- माफ कीजिए, मैं कुछ नहीं बता पाऊंगा। जो भी बात करनी है, अशोक भाई या उनके छोटे भाई हितेश से कर लीजिए। मेरी बेटी 6 साल की है, लेकिन दिखती 6 महीने की बच्ची जैसी। डॉक्टरों ने कहा है कि उसे वंदना जैसी बीमारी है। अब बताइए, पहले अपनी बेटी को संभालूं या 45 साल की बहन को? इतना कहकर वो चले गए। अशोक कुछ पल तक भावेश को जाते हुए देखते रहे। फिर बोले- बातें बनाना आसान है। अपने खून का साथ आखिर कौन छोड़ता है। मां-बाप थे, तब तक घर भी एक था और परिवार भी। उनके जाने के बाद सब बदल गया। इस बिल्डिंग की दुकानों के एक हिस्से से वंदना को महीने का 12 हजार रुपए किराया मिलता है। इसी से उसका गुजारा चलता है। मैं फल की रेहड़ी लगाता हूं। जितना बनता है, कर देता हूं, लेकिन हर जरूरत पूरी करने की हैसियत कहां है। मेरी आंखें अगर अभी मुंद जाएं, तो इसे पूछने वाला कोई नहीं। मैं तो खुद को धनवान समझता हूं कि भगवान ने इसके लिए मुझे भेजा है। अंतिम सांस तक इसकी सेवा करूंगा। चलिए, अब इसे घर ले चलते हैं। आगे की बात वहीं करेंगे। अशोक वंदना को कुर्सी से उठाते हैं। कुर्सी के पास ही उसकी जूतियां रखी हैं। वंदना दोनों पैरों को धीरे-धीरे जूतियों की तरफ बढ़ाती हैं, लेकिन पैर सीधे जूतियों तक पहुंचते ही नहीं। कभी दायां पैर दूसरी तरफ मुड़ जाता, तो कभी बायां पैर। वह गहरी सांस लेकर फिर कोशिश करती हैं, लेकिन शरीर धोखा दे जाता है। ये सिलसिला करीब 1 मिनट तक चला। तब कहीं जाकर वंदना के दोनों पैर जूतियों के भीतर पहुंचे। अशोक के सहारे वंदना ने धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ाए, लेकिन पैर बार-बार अपनी दिशा बदलते हैं। अशोक तुरंत उन्हें संभालते हैं। दो-तीन कदम चलने के बाद वंदना के शरीर का संतुलन डगमगाया। हाथ कांपने लगे। चेहरा भी सिकुड़ गया। ऐसा लगा, जैसे शरीर का हर अंग रुक जाने की जिद कर रहा हो। दोनों धीरे-धीरे कमरे की तरफ बढ़े। चलते-चलते अशोक बताते हैं- छह साल पहले इसकी मां चल बसीं। जब तक वह थीं, वंदना उन्हीं के साथ ऊपर वाले कमरे में रहती थी। इसके भैया-भाभी भी साथ रहते थे। मां का स्वभाव सख्त था, इसलिए सब वंदना का ध्यान रखते थे। उनके जाने के बाद, कोई इसकी देखभाल नहीं करता था। अकेली पड़ी रहती थी। तब मैंने इसे नीचे वाले कमरे में शिफ्ट किया। अब यहीं रहती है। जिस दुकान में आपने इसे बैठे देखा, वहीं मैं खाना भी बनाता हूं। पहले इसे अपने हाथों से खिलाता हूं, फिर खुद खाता हूं। अशोक कमरे के एक कोने की ओर इशारा करते हैं। कहते हैं- वहां फर्श पर गद्दा बिछा है। वंदना वहीं सोती है। बार-बार पलंग पर चढ़ाना-उतारना मुश्किल होता है, इसलिए जमीन पर सुला देता हूं सुबह एक हेल्पर आती है। वही इसे नहलाती है, कपड़े बदलवाती है, झाड़ू-पोंछा करती है। बाकी दिनभर जो बन पड़ता है, मैं कर देता हूं। आप इनके क्या लगते हैं? कुछ पल तक चुप रहने के बाद अशोक बताते हैं- मैं कोई नहीं हूं। न रिश्तेदार, न पड़ोसी। 1998 की बात है। मैं यहीं बिल्डिंग के बाहर फल की रेहड़ी लगाता था। तभी वंदना के पिता मनीलाल कटारिया से पहचान हुई। मनीलाल भाई, वंदना को जान से ज्यादा चाहते थे। हमेशा कहते थे- ये मेरी पहली संतान है। जब तक जिंदा हूं, इसे किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगा। उन्हें शराब की लत थी। एक दिन तबीयत इतनी बिगड़ी कि अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मैं ही लेकर गया था। जांच में पता चला कि पेट में पानी भर गया है। तब वंदना 17 साल की थी। तीसरे दिन डॉक्टरों ने कह दिया कि अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। आखिरी वक्त में मनीलाल भाई ने मुझे बुलाया। मेरा हाथ पकड़ा और कहा- अशोक भाई, एक जिम्मेदारी देकर जा रहा हूं। मेरे बाद मेरी वंदना का ख्याल रखना। मैं जानता हूं, मेरे जाने के बाद इसे कोई नहीं देखेगा। मैंने उनसे वादा किया- जब तक मेरी सांस चलेगी, तब तक वंदना कभी अकेली नहीं होगी। उस एक वचन ने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी। घर में कई बार मेरी शादी की बात चली। हर बार मैंने मना कर दिया। कहा- मैं हनुमान भक्त हूं। ब्रह्मचर्य का पालन करूंगा। न शादी करूंगा, न अपना परिवार बसाऊंगा। डर था, अगर मेरा अपना परिवार हो गया, तो कहीं मनीलाल भाई को दिया हुआ वचन अधूरा न रह जाए। बोलते-बोलते अशोक उठ जाते हैं। कहते हैं- ये सब मत पूछिए। दिल दुखता है। कुछ देर बाद उन्होंने एक स्ट्रॉ लगी बोतल वंदना की तरफ बढ़ा दी। वो पैर से बोतल को पकड़कर मुंह तक ले जाती हैं। एक घूंट पानी खींचती हैं। लेकिन पानी निगलना भी उनके लिए आसान नहीं है। जैसे ही पानी गले से नीचे उतरा, वंदना की गर्दन झटके से पीछे की ओर खिंच गई। चेहरे की मांसपेशियां तन गईं। मानो शरीर में किसी ने करंट दौड़ा दिया हो। अशोक कहते हैं- इसके शरीर का कोई भी अंग इसके कंट्रोल में नहीं है। जो हरकतें आप देख रहे हैं, इन्हीं के साथ इसने पूरी जिंदगी काटी है। 1981 में इसका जन्म हुआ था। तारीख याद नहीं। इसकी मां होतीं, तो आपको बता देतीं। वंदना के जन्म वाले दिन तो किसी को कुछ समझ नहीं आया। लेकिन दूसरे दिन उसके हाथ-पैर अपने आप कांप रहे थे। मां-बाप को लगा कि शायद नवजात बच्चे में ऐसा होता होगा। लेकिन महीने बीतते गए, चिंता बढ़ती गई। वंदना दिनभर बिस्तर पर पड़ी रहती थी। वंदना के पिता उसे पहले जैतपुर के डॉक्टरों के पास ले गए। फिर राजकोट। लेकिन हर जगह डॉक्टरों ने यही कहा- दिमाग या नसों से जुड़ी कोई बड़ी बीमारी है। यहां जांच नहीं होगी। किसी बड़े अस्पताल ले जाइए। इसके बाद, वंदना को अहमदाबाद, मुंबई, डॉक्टरों ने जहां भेजा, मनीलाल वहां पहुंच गए। कई जांचों के बाद डॉक्टरों ने बीमारी का नाम बताया- सेरेब्रल पाल्सी (सीपी)। और कहा- बीमारी के साथ ही इसे जीना होगा। वंदना के चार साल बाद छोटा भाई भावेश हुआ। वो एकदम ठीक था। लेकिन 1998 में मनीलाल भाई की मौत के बाद पूरा घर बिखर गया। मेरा छोटा भाई हितेश ही उनका अस्थि कलश लेकर हरिद्वार गया था। मनीलाल भाई मुझसे कहते थे- अशोक, बेटी के इलाज में 5 लाख रुपए लगा दिए। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़़ा। पिता के जाने के बाद वंदना की पूरी दुनिया उसकी मां बन गईं। वो प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थीं। मां ही उसे नहलाती थीं, कपड़े पहनाती थीं, खाना खिलाती थीं। पिता के जाने के बाद भी वंदना की मां ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। 2004 में मुंबई के मशहूर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अशोक जौहरी का पता चला। बताया गया कि वह साल में कुछ दिन मुंबई में मरीज देखते हैं, बाकी समय विदेश में रहते हैं। बड़ी मुश्किल से अपॉइंटमेंट मिला। लेकिन किस्मत ने यहां भी साथ नहीं दिया। जिस दिन वंदना को दिखाना था, उससे ठीक दो दिन पहले भावेश का एक्सीडेंट हो गया। वह 15 दिनों तक भर्ती रहा। हालात ऐसे बने कि वंदना को मुंबई नहीं ले जा पाए। धीरे-धीरे परिवार ने भी मान लिया कि जब कोई इलाज ही नहीं है, तो अस्पतालों के चक्कर काटने से क्या फायदा। वक्त गुजरता गया। मां के जाते ही भाई इसी बिल्डिंग में अलग रहने लगा। उसका अपना परिवार है। पत्नी है, बच्चे हैं, उसकी भी अपनी जिम्मेदारियां हैं। इसी बीच मेरी नजर वंदना के कमरे की दीवारों पर पड़ी। जगह-जगह अमिताभ और अभिषेक बच्चन की तस्वीरें लगी हैं। क्या आप अमिताभ बच्चन की फैन हैं? वंदना गर्दन को संभालने की कोशिश करती हैं। शब्दों को बाहर आने में वक्त लगता है। फिर रुकते-रुकते कहती हैं- बचपन से पसंद करती हूं। एक बार उनसे मिलने के लिए फाइल भी तैयार की थी। एक शूटिंग के लिए वो यहां आए थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। आखिरी इच्छा है एक बार अमिताभ बच्चन से मिल लूं। इतना कहते ही वो जमीन पर घिसटते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करती हैं। गर्दन को मोड़कर धीमी आवाज में कहती हैं- कई बार दिल करता था कि अपनी जिंदगी खत्म कर दूं। मन में बार-बार सवाल उठता था कि भगवान ने मुझे ऐसी जिंदगी क्यों दी, जहां हर जरूरत के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। फिर मां की बात याद आ जाती है। वो कहती थीं- कोई कमजोर नहीं होता। भगवान हर इंसान को किसी खास वजह से भेजते हैं। बस इन्हीं शब्दों ने मुझे संभाल रखा है। मां की वजह से ही मैं बीकॉम कर पाई। उन्होंने डिस्टेंस लर्निंग से मुझे पढ़ाया। मैं लिख नहीं पाती थी, इसलिए परीक्षा देने मेरे साथ राइटर बैठता था। इतने में अशोक के भाई हितेश आए। वे जैतपुर बस स्टैंड के पास अपनी दुकान चलाते हैं। वे बताते हैं- मेरी अपनी जिम्मेदारियां हैं, लेकिन वंदना को देखकर यही लगता है कि अगर मेरी बच्ची के साथ ऐसा होता, तो क्या मैं उसे अकेला छोड़ देता। इसकी जितनी सेवा बन पड़ती है, हम लोग करते हैं। सरकार की तरफ से आज तक कोई बड़ी मदद नहीं मिली। हर महीने सिर्फ एक हजार रुपए मिलते हैं। कई लोग आए। मदद का भरोसा दिया,. लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। वंदना से मिलने के बाद बतौर रिपोर्टर मैं अहमदाबाद के रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस पहुंचा। यहां पीडियाट्रिक न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. संजीव मेहता से मिला। डॉ. मेहता, वंदना के बारे बताते हैं- हमारे शरीर का हर हिस्सा दिमाग के इशारों पर काम करता है। उठना, बैठना, चलना, बोलना, खाना निगलना और हाथ-पैर हिलाना, हर काम का आदेश दिमाग देता है। अगर दिमाग का वह हिस्सा, जो इन गतिविधियों को नियंत्रित करता है, ठीक से विकसित नहीं होता, तो बच्चे को सेरेब्रल पाल्सी हो सकती है। इसकी शुरुआत अक्सर मां के गर्भ में ही हो जाती है। जब बच्चे का दिमाग बन रहा होता है, तब उसकी कुछ कोशिकाएं और तंत्रिका मार्ग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। कई मामलों में LIS1, DCX, TUBA1A और ARX जैसे जीन में गड़बड़ी भी इसकी वजह बनती है। हालांकि हर मामला जेनेटिक नहीं होता। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली दिक्कतें भी इसका कारण बन सकती हैं। डॉ. मेहता बताते हैं कि लेबर पेन शुरू होने के बाद अगर प्रसव लंबा खिंच जाए या समय रहते सामान्य प्रसव और सर्जरी के बीच फैसला न लिया जा सके, तो बच्चे के दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे दिमाग की कोशिकाओं को स्थायी नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे का रोना बहुत जरूरी माना जाता है। इससे उसके फेफड़े ठीक से काम करने लगते हैं और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है। वंदना के लक्षण एटेक्सिक सेरेब्रल पाल्सी से मिलते हैं। यह बीमारी का सबसे दुर्लभ प्रकार माना जाता है। इसमें शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और हाथ-पैर लगातार कांपते रहते हैं। डॉ. मेहता कहते हैं कि फिलहाल सेरेब्रल पाल्सी का कोई स्थायी इलाज नहीं है। दिमाग के क्षतिग्रस्त हिस्से की सर्जरी भी संभव नहीं है। अगर मरीज खुद बैठ सकता है और कुछ काम कर सकता है, तो उसकी उम्र 50-55 साल तक हो सकती है। गर्भावस्था के 24 से 28 सप्ताह के बाद भ्रूण का एमआरआई करके पता लगाया जा सकता है कि बच्चे का दिमाग विकसित हो रहा है या नहीं। —------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पढ़ें… 1- शादी के दिन आंतें फटीं, 5 महीने खुला रहा पेट:सूप पिया तो छाती से बह निकला, हनीमून पर भी नहीं जा पाया 6 मार्च 2022 की शाम। कोलकाता के एक बैंक्वेट हॉल में हमारी शादी की पार्टी चल रही थी। मेहमानों की भीड़ थी। सभी बधाइयां दे रहे थे, फोटो खिंचवा रहे थे। कोई लिफाफा दे रहा था, तो कोई गिफ्ट। सामने पूरा परिवार, रिश्तेदार और दोस्त गानों की धुन पर झूम रहे थे। इसी बीच, मेरे पेट में तेज दर्द उठा। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें… 2- सिर से जुड़ीं दो बहनें अब अलग नहीं होना चाहतीं: सलमान खान ने बहन बनाया, इलाज का वादा किया, अब फोन तक नहीं उठाते ये हैं सबा और फरहा। उम्र 24 साल। दोनों का जन्म एक दिन, एक समय और एक ही मां की कोख से हुआ, सो ये जुड़वां कहलाती हैं। लेकिन… इनके जिस्म अलग-अलग नहीं, सिर से आपस में जुड़े हैं। वो भी इस तरह कि दोनों एक दूसरे को देख नहीं सकतीं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें…
यूक्रेन के कार्यवाहक विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से फोन पर बात की। इस चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की और यूक्रेन में जारी युद्ध के वैश्विक प्रभावों पर विचार साझा किए।
मध्य फिलीपींस के ओरिएंटल मिंडोरो प्रांत में फिलीपीन सेना के जवानों के साथ मुठभेड़ में दो कथित न्यू पीपुल्स आर्मी (एनपीए) सदस्यों की मौत हो गई। वहीं एक सदस्य को गिरफ्तार कर लिया गया।
चीन ने थ्येनल्येन-3 01 उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया
चीन ने 29 जुलाई को थ्येनल्येन-3 01 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। शाम 7 बजकर 50 मिनट पर चीन ने वनछांग अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से लांग मार्च-7ए वाहक रॉकेट के जरिए इस उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा
जापान भूकंप: कुमामोटो में 34 लोगों ने गंवाई जान, नौ मामलों में मौत की असली वजह की जांच जारी
जापान के कुमामोटो प्रीफेक्चर भूकंप हादसे के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। हालांकि, मामले की जांच चल रही है कि इन मौतों का सीधा संबंध रिक्टर स्केल पर 7.1 तीव्रता वाले भूकंप से था या नहीं। प्रीफेक्चरल डिजास्टर रिस्पॉन्स हेडक्वार्टर के अनुसार, इनमें नौ मामलों की जांच चल रही है।
क्या ईरान को घेरने की ट्रंप की जिद में भारत को भी चुकानी पड़ेगी बड़ी कीमत?
वैश्विक कूटनीति के मंच पर एक बार फिर बड़ा भूचाल आता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को घुटनों पर लाने के लिए इस बार सैन्य मिसाइलों के बजाय 'टैरिफ' को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने का संकेत दिया है। सीधे तौर पर सेना भेजने या हवाई हमलों के बजाय ट्रंप प्रशासन का ध्यान अब ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने पर केंद्रित है। लेकिन इस कड़े फैसले की गूंज सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसका सीधा और गहरा असर भारत और चीन जैसे बड़े एशियाई देशों पर पड़ता दिख रहा है।मिसाइल की जगह 'टैरिफ वार' का पैंतरासैन्य संघर्ष में होने वाले भारी नुकसान से बचने के लिए अमेरिका अब 'सेकेंडरी प्रतिबंधों' और भारी आयात शुल्क (टैरिफ) की रणनीति पर काम कर रहा है। रणनीति बेहद साफ है: जो भी देश या विदेशी कंपनियां ईरान के साथ व्यापार करेंगी या वहां से कच्चा तेल खरीदेंगी, अमेरिका उन पर भारी पेनल्टी और टैरिफ लगाएगा। इसका मकसद ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजर से पूरी तरह से अलग-थलग करना है, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को मिलने वाला रेवेन्यू रुक जाए।निशाने पर भारत और चीन क्यों?ट्रंप की इस सख्त नीति के केंद्र में सीधे तौर पर चीन और भारत आते हैं। चीन वर्तमान में ईरान के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापारिक लेनदेन होता है। अगर अमेरिका ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो अमेरिकी बाजार में चीनी सामान और महंगा हो जाएगा, जिससे बीजिंग की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा।दूसरी तरफ भारत के लिए भी यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। भारत भले ही अमेरिकी दबाव के बाद ईरान से तेल का आयात कम कर चुका हो, लेकिन चाबहार पोर्ट जैसी सामरिक परियोजनाओं और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए ईरान के साथ भारत के रिश्ते बेहद अहम हैं। यदि अमेरिका ईरान के साथ हर तरह के आर्थिक संबंधों पर सख्ती बरतता है, तो भारत को अपने कूटनीतिक संतुलन और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?अगर यह आर्थिक युद्ध इसी दिशा में आगे बढ़ता है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि ट्रंप के इस कड़े फैसले के सामने भारत और चीन अपनी-अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को बचाते हुए किस तरह का कूटनीतिक रुख अपनाते हैं।
नेपाल का 'चाइना डायरेक्ट प्रोक्योरमेंट' ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लॉन्च
नेपाल का पहला ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'चाइना मार्केट' 29 जुलाई को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया, जो नेपाली उपभोक्ताओं को चीनी कारखानों से सीधे प्राप्त माल उपलब्ध कराता है।
संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों में हंगामा और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़े लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। खड़गे ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी जा रही है। बाद में उनके 'मनुस्मृति' संबंधी बयान पर हंगामा हुआ और सभापति ने टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए। वहीं, लोकसभा में राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। सुबह 11 बजे राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई। दोपहर 2 बजे कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया। विधेयक पर चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में भर्ती परीक्षाओं के लिए यूपीएससी, एसएससी, आईबीपीएस और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए एनटीए जैसी प्रमुख एजेंसियां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा एजेंसी बनाने का सुझाव 1992 में आया था। एनडीए सरकार, यूपीए का अधूरा काम पूरा कर रही है। नेता प्रतिपक्ष खड़गे चर्चा में शामिल हुए। आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी जा रही है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि एक दिन संबंधित सदस्य को कमरे से बाहर खींचकर लाएंगे। इस टिप्पणी के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। खड़गे बोले- शिक्षण संस्थानों में आरएसएस का दखल इसके बाद खड़गे ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थानों में आरएसएस का दखल बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 'मनुस्मृति' मानने वालों की संख्या बढ़ने से शूद्रों का पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा शुरू हो गया। नड्डा ने कहा- खड़गे का बयान तथ्यों से परे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि खड़गे का बयान तथ्यों से परे है और इससे अशांति फैल सकती है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 'मनुस्मृति' संबंधी टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए। खड़गे ने कहा कि सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कानून तो बना दिया, लेकिन उसे रोकने की व्यवस्था क्या की गई, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था, तब धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया। सरकार जो कहती है, उसका उल्टा करती है। अगर शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आगे भी पेपर लीक की घटनाएं होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन अब तक किसी को सजा नहीं मिली। 2024 के पेपर लीक मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों को क्लीनचिट मिल गई। लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण कुछ ही देर में दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी सांसदों की मांग थी कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह माफी मांगें। दोपहर 2 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन संध्या राय ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। इस दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही फिर 3 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। साढ़े 3 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। सरकार ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया, जिस पर चर्चा हुई। सांसद संबित पात्रा ने कहा- गांधी परिवार की सरकारों ने गांधी परिवार को तो ऊपर रखा, लेकिन वंदे मातरम् को ऊपर नहीं रखा।वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चुनाव: तनाव कम करने की कोशिश या नई चुनौती?
आरक्षित सीटों के मुद्दे पर कई हफ्तों तक चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चुनाव हो रहा है. एक स्थानीय संगठन ने इन चुनावों के बहिष्कार की मांग की है
प्राइड परेड के साथ बर्लिन के जीवन मूल्यों पर हमला हुआ है
लोगों का कहना है बर्लिन के प्राइड फेस्टिवल पर हमला इस शहर और उन सारे मूल्यों पर हमला है जिनके लिए बर्लिन मुस्तैदी से डटा है. इसकी विविधता, इसकी उदारता और आजादी में भरोसा, इन सब पर हमला हुआ है
56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा में इन दिनों 14 से 29 साल वाली जेन-जी के स्लैंग गूंज रहे हैं। कोई सांसद ‘वास्तेगुना-हुइंया’ और ‘कुच्चु-पुच्चु’ बोल रहा, तो किसी के भाषण में ‘डेलुलू’ और ‘क्लॉक्ड इट’ का इस्तेमाल हुआ। आखिर इन शब्दों के मतलब क्या हैं और जेन-जी के स्लैंग संसद क्यों पहुंच गए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: जेन-जी के कौन से स्लैंग संसद में गूंजे?जवाबः मानसून सत्र में एंटी-पेपर लीक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में ये 6 स्लैंग चर्चा में आए… 1. MIA 2. FOMO 3. DELULU 4. VASTEGUNA HUIYA 5. KUCHU-PUCHU 6. CLOCKED IT सवाल-2: जेन-जी के कुछ और मशहूर स्लैंग कौन से हैं?जवाबः सवाल-3: इंस्टाग्राम और स्नैपचैट से निकलकर संसद क्यों पहुंचे ये स्लैंग?जवाबः 3 वजहें हैं…1. कॉकरोच जनता पार्टी का सुपरहिट मूवमेंट 2. मौजूदा राजनीति में जेन-जी का असर 3. 2029 में जेन-जी सबसे बड़ा वोटर ग्रुप सवाल-4: क्या पहले भी संसद ऐसे मशहूर शब्दों या मुहावरों को अपनाती रही है?जवाबः हां, इसके कुछ उदाहरण देखिए… 1. 'हाउ इज द जोश?’ 2. ‘जय हो’ फिल्म स्लमडॉग मिलिनेयर में ए. आर. रहमान के इस गाने को 2009 में ऑस्कर मिला। कांग्रेस ने तब लोकसभा चुनाव के दौरान इसका खूब इस्तेमाल किया था। अक्सर राजनीतिक रैलियों में इसकी धुन बजती है। 3. ‘खेला होबे’ सवाल-5: संसद में ऐसे स्लैंग के इस्तेमाल पर जेन-जी क्या सोचते हैं?जवाबः जेन-जी मोटे तौर पर दो बातें कह रहे हैं… 1. हमारे स्लैंग गलत संदर्भ में इस्तेमाल हो रहे ‘Delulu का इस्तेमाल हम ज्यादातर पॉजिटिव तरीके से करते हैं, जैसे किसी फैंटेसी में होना। हम ‘Delulu is Solulu’ भी बोलते हैं, जिसका मतलब है- खुद को जानबूझकर पॉजिटिव डेल्यूजन में रखना, ताकि वो सपने पूरे हो जाएं। नेता Delulu जैसे कई स्लैंग गलत संदर्भ में इस्तेमाल कर रहे, इसलिए हम उनसे कनेक्ट नहीं हो सकते।’ 2. हमको कॉपी करने के बजाय अपने काम पर ध्यान दें ‘इस कॉपीकैट से जेन-जी पर कोई अच्छा असर नहीं पड़ने वाला। इसके बजाय नेता अपने काम पर ध्यान दें। हमारे लिए बेहतर मौके बनाएंगे, तो हमें ज्यादा खुशी होगी।’ ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो 6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ पूरी खबर पढ़ें…
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सुलग रही जंग के बीच पाकिस्तान का एक बार फिर बेहद दोगला और खतरनाक चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है। एक तरफ जहां पाकिस्तान अमेरिका को खुश करने के लिए दोनों देशों के बीच शांति मध्यस्थ बनने का नाटक कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से वह ईरान को चीनी हथियार पहुंचाने के गुप्त खेल में जुटा हुआ है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया है, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान और चीन की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।अमेरिका-ईरान जंग के बीच पाकिस्तान का खतरनाक डबल गेमवर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले चुका है। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए ईरानी हमलों के जवाब में अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर बड़ा पलटवार किया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान खुद को एक तटस्थ और जिम्मेदार देश के रूप में पेश करते हुए शांति समझौते की मध्यस्थता कराने का दावा कर रहा था। लेकिन रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान के इस नकाब को पूरी तरह से उतार कर रख दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल करके चीन के अत्याधुनिक हथियार चोरी-छिपे ईरान तक पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे अमेरिका का नाराज होना लाजिमी है।क्या है चीन और ईरान के बीच हथियारों की इस सीक्रेट डील का सच?सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अपनी सैन्य ताकत और एयर डिफेंस सिस्टम को अचूक बनाने के लिए चीन से भारी मात्रा में हथियार खरीद रहा है। इस गुप्त डील के तहत ईरान लगभग 300 से 400 'मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम' (MANPADS) हासिल कर रहा है, जिसकी कुल कीमत करीब 60 से 70 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में 500 से 580 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस पूरी रक्षा डील में चीन की अत्याधुनिक QW-12 और FN-16 शोल्डर-फायर्ड मिसाइलें शामिल हैं, जो ईरानी सेना को अमेरिकी हमलों और मिसाइलों का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम बना सकती हैं।कैसे अंजाम दिया जा रहा है हथियारों की इस तस्करी का खेल?खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन और ईरान के बीच हो रही इस हथियारों की सप्लाई का ट्रांजिट रूट पाकिस्तान से होकर गुजर रहा है। योजना के तहत चीन के पश्चिमी हिस्से यानी उरुमकी से हथियारों की यह खेप सबसे पहले पाकिस्तान पहुंचती है। इसके बाद पाकिस्तानी सैन्य और साजो-सामान के नेटवर्क की आड़ में इन घातक हथियारों को सड़क या हवाई मार्ग के जरिए सुरक्षित रूप से ईरान की सीमा तक पहुंचा दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और सैन्य तंत्र की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी और नाराजगीओवल ऑफिस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर गहरी हैरानी और नाराजगी जाहिर की है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे वादा किया था कि चीन ईरान को किसी भी प्रकार की हथियार सप्लाई नहीं करेगा। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि यह खबर सच साबित होती है, तो इससे उन्हें और अमेरिका को बेहद निराशा होगी, और आने वाले कूटनीतिक बैठकों में इस पर कड़ा रुख अपनाया जा सकता है। उधर, इस बड़े खुलासे के बाद से पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR और चीनी विदेश मंत्रालय ने इन तमाम रिपोर्टों को सिरे से खारिज करते हुए लीपापोती शुरू कर दी है।
दशकों से भीषण भूकंपों और प्राकृतिक आपदाओं के साये में जी रहे जापान ने भविष्य के किसी बड़े खतरे से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। जापान सरकार ने देश की मौजूदा राजधानी टोक्यो के अलावा एक 'बैकअप कैपिटल' यानी दूसरी वैकल्पिक राजधानी स्थापित करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जापानी संसद ने जुलाई में एक नया कानून भी पारित कर दिया है, ताकि आपातकाल के दौरान देश की सत्ता और व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, इस फैसले को लेकर देश की राजनीति में तीखा विरोध और घमासान भी शुरू हो गया है।क्यों पड़ी जापान को दूसरी राजधानी बनाने की जरूरत?ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए कानून को लाने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में किसी भीषण भूकंप की वजह से टोक्यो पूरी तरह तबाह हो जाता है, तब भी देश की शासन व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज में कोई रुकावट न आए। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 30 वर्षों के भीतर टोक्यो महानगर क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर 7 या उससे अधिक तीव्रता का एक महाप्रलयकारी भूकंप आ सकता है। यदि ऐसा होता है, तो जापान का प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद भवन, तमाम केंद्रीय मंत्रालय और देश के मुख्य आर्थिक संस्थान एक ही झटके में पूरी तरह ठप हो सकते हैं।टोक्यो पर है देश की अर्थव्यवस्था और आबादी का सबसे बड़ा बोझवर्तमान समय में पूरे जापान देश का आर्थिक और प्रशासनिक भार अकेले टोक्यो पर टिका हुआ है। देश की 30 प्रतिशत से अधिक आबादी इसी क्षेत्र में निवास करती है, जबकि जापान की कुल जीडीपी का लगभग पांचवां हिस्सा अकेले टोक्यो से ही आता है। इसके अलावा, देश की 50 प्रतिशत से ज्यादा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां भी यहीं से संचालित होती हैं। सरकार का मानना है कि दूसरी राजधानी बन जाने से न केवल देश को प्राकृतिक आपदाओं के वक्त सुरक्षा कवच मिलेगा, बल्कि टोक्यो के बाहर के अन्य क्षेत्रीय शहरों में भी रोजगार, निवेश और समग्र विकास तेजी से पहुंचेगा।कौन-से शहर हैं बैकअप कैपिटल की रेस में शामिल?जापानी संसद द्वारा पारित किए गए नए कानून में अभी किसी एक निश्चित शहर का नाम फाइनल नहीं किया गया है। इसके बजाय देश के विभिन्न राज्यों को इसके लिए आवेदन करने की पूरी छूट दी गई है, हालांकि इस पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री द्वारा लगाई जाएगी। इस रेस में आईची, ओसाका, फुकुओका, होक्काइडो और मियागी जैसे प्रमुख राज्यों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। सरकार की तरफ से यह शर्त रखी गई है कि चुने जाने वाले वैकल्पिक शहर में टोक्यो के साथ एक ही समय में भूकंप आने का जोखिम न्यूनतम होना चाहिए और वहां प्रशासनिक व आर्थिक बुनियादी ढांचा पहले से ही मजबूत स्थिति में होना चाहिए।क्यों छिड़ गया है जापान की राजनीति में सियासी संग्राम?भले ही राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से यह योजना बेहद जरूरी लग रही हो, लेकिन जापान के राजनीतिक गलियारों में इस पर भारी घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दलों का कड़ा आरोप है कि यह बिल प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की गठबंधन सरकार की सहयोगी पार्टी 'जापान इनोवेशन पार्टी' को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है, क्योंकि ओसाका इस पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इसके साथ ही, आलोचकों का कहना है कि सरकार ने अभी तक इस विशाल परियोजना की कुल लागत और भविष्य के आर्थिक फायदों का कोई स्पष्ट आंकड़ा जनता के सामने नहीं रखा है, जिससे देश के सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में आतंकवाद का एक बेहद खौफनाक चेहरा सामने आया है। तुर्बत के पास केच जिले में कुछ दिन पहले अगवा किए गए छह निर्दोष मजदूरों के शव बरामद होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सुरक्षा बलों ने इस जघन्य हत्याकांड के लिए प्रतिबंधित आतंकी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) को जिम्मेदार ठहराया है। इस खूनी खेल के बाद से क्षेत्र में काम कर रहे अन्य श्रमिकों और विकास परियोजनाओं से जुड़े लोगों के बीच भारी दहशत का माहौल पैदा हो गया है।क्या है पूरा मामला और कैसे दिया गया वारदात को अंजामसुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह खूनी सिलसिला 27 जुलाई को केच जिले के क्लाटुक इलाके से शुरू हुआ था। भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह ने विकास कार्यों में लगे मजदूरों के काफिले को बलपूर्वक रोक लिया। इस दौरान आतंकवादियों ने खैबर पख्तूनख्वा के स्वाबी जिले के रहने वाले जावेद नामक मजदूर की मौके पर ही गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद आंतकवादी छह अन्य मजदूरों को जबरन अगवा करके किसी अज्ञात ठिकाने पर ले गए थे। कई दिनों की तलाश के बाद आखिरकार तुर्बत के एक सुनसान और दूरदराज इलाके से इन सभी छह बंधक मजदूरों के शव बरामद किए गए। शवों की गंभीर हालत को देखकर साफ पता चलता है कि आतंकवादियों ने उन्हें बेहद बेदर्दी से मौत के घाट उतारा था। सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मारे गए इन मजदूरों में पंजाब प्रांत के चार और खैबर पख्तूनख्वा के दो मजदूर शामिल थे, जो बलूचिस्तान में विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे।BLए की रणनीति में खतरनाक बदलाव, चीनी परियोजनाओं को निशानाखुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, इस हमले को बलूच लिबरेशन आर्मी की ऑपरेशनल रणनीति में एक बड़े और खतरनाक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अतीत में यह संगठन मुख्य रूप से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सैन्य चौकियों को अपना निशाना बनाता था, लेकिन अब इसने अपनी रणनीति बदलते हुए चीनी निवेश, माइनिंग ऑपरेशंस और खनिज विकास से जुड़ी परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों, इंजीनियरों, ठेकेदारों और यहां तक कि स्थानीय नागरिकों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। संगठन का मुख्य उद्देश्य इन आर्थिक और ढांचागत परियोजनाओं को पूरी तरह से ठप करना और क्षेत्र में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मन में गहरा खौफ पैदा करना है।स्थानीय और बाहरी मजदूरों के लिए सीधी चेतावनीआतंकी संगठन BLA ने अपनी धमकियों में साफ कर दिया है कि चीन के सहयोग से चल रही किसी भी परियोजना, खदान या खनिज स्थल के आसपास काम करने वाले लोग तुरंत उन जगहों को छोड़ दें। यह खुली चेतावनी केवल दूसरे प्रांतों से रोजी-रोटी कमाने आए मजदूरों के लिए ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी और चीनी विकास परियोजनाओं से जुड़े स्थानीय मजदूरों, इंजीनियरों, अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए भी जारी की गई है। जानकारों का मानना है कि इन सुनियोजित हमलों के जरिए आतंकवादी बलूचिस्तान में चल रही आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचना चाहते हैं।पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी खौफनाक घटनाएंतुर्बत की यह घटना कोई पहली या अकेली वारदात नहीं है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इस घटना से ठीक पहले मश्केल इलाके में हुए एक अन्य हमले में कम से कम पांच और मजदूरों की जान चली गई थी। ये लगातार होती घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि बलूचिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में आतंकवादियों द्वारा हिंसा का एक सुनियोजित पैटर्न चलाया जा रहा है। कुछ हफ्ते पहले ही मस्तुंग जिले में हुए एक बड़े हमले की जिम्मेदारी भी BLA ने ली थी, जिसमें दर्जनों पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया था। बहरहाल, इन ताजा हत्याओं के बाद से बलूचिस्तान में काम कर रहे कामगारों की सुरक्षा एक बार फिर सबसे बड़ा सवाल बन गई है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि महत्वपूर्ण सेवाओं और रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों द्वारा विकसित रोबोट का बढ़ता उपयोग भविष्य में सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। सरकार को आशंका है कि यदि किसी भू-राजनीतिक तनाव या आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधान की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इन रोबोटों की उपलब्धता और संचालन प्रभावित हो सकता है।
हॉलीवुड की मशहूर पॉप स्टार कैटी पेरी और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कुछ बेहद चौंकाने वाली तस्वीरें इस वक्त इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन वायरल तस्वीरों में जस्टिन ट्रूडो समंदर किनारे कैटी पेरी की पीठ पर सनस्क्रीन लगाते हुए नजर आ रहे हैं। दोनों के बीच की यह खास और रोमांटिक बॉन्डिंग सोशल मीडिया पर आते ही टॉक ऑफ द टाउन बन गई है और लोग दोनों के रिश्तों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाने लगे हैं।वायरल तस्वीरों के पीछे की क्या है असली कहानीतस्वीरें सामने आते ही नेटिजन्स के बीच बहस का दौर शुरू हो गया है। समंदर के खूबसूरत बैकड्रॉप में क्लिक की गई इन फोटोज में दोनों ही बेहद रिलैक्स और एक-दूसरे के करीब दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन तस्वीरों के सोशल मीडिया पर छाने के बाद कई तकनीकी और मीडिया एक्सपर्ट्स ने इस पर अपनी राय दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है, जहां डीपफेक और एआई-जनरेटेड इमेज (AI Generated Pics) के जरिए किसी भी नामचीन हस्ती को किसी के भी साथ फ्रेम में दिखाया जा सकता है। ऐसे में कई लोग इसे एआई का कमाल भी बता रहे हैं, जिसने पहली नजर में सबको धोखा दे दिया।फैंस और नेटिजन्स का रिएक्शन और कमेंट्स की बाढ़जस्टिन ट्रूडो अपनी पर्सनल लाइफ और लुक्स को लेकर हमेशा से ही सुर्खियों में रहे हैं, वहीं कैटी पेरी की दुनिया भर में तगड़ी फैन फॉलोइंग है। जैसे ही ये तस्वीरें एक्स (पहले ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर वायरल हुईं, फैंस ने इस पर मजेदार मीम्स और कमेंट्स की बौछार कर दी। कुछ यूजर्स ने इसे साल का सबसे बड़ा सरप्राइज अफेयर बताया, तो वहीं ज्यादातर समझदार यूजर्स ने इसे फेक बताते हुए साझा न करने की सलाह दी। फिलहाल दोनों ही स्टार्स की तरफ से इन वायरल हो रही तस्वीरों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।सेलिब्रिटीज और राजनेताओं के फेक एआई कंटेंट्स का बढ़ता खतराइस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर इंटरनेट पर डीपफेक और एआई की मदद से बनने वाली भ्रामक तस्वीरों के खतरे को उजागर कर दिया है। पिछले कुछ समय में वैश्विक नेताओं से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड के बड़े कलाकारों की ऐसी कई फर्जी तस्वीरें और वीडियो सामने आ चुके हैं, जो हूबहू असली जैसे लगते हैं। यही वजह है कि गूगल डिस्कवर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब ऐसी एआई जनरेटेड तस्वीरों को लेकर बेहद सख्त नीतियां अपना रहे हैं ताकि यूजर्स तक सिर्फ सही और प्रामाणिक जानकारी ही पहुंच सके।
चीन-ईरान डिफेंस डील से हड़कंप: अमेरिका ने तुरंत लिया बड़ा एक्शन, पाकिस्तान भी रडार पर
मिडल ईस्ट में भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर तेजी से बदलते दिख रहे हैं। चीन द्वारा ईरान को आधुनिक एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम सप्लाई करने की खबर सामने आते ही वैश्विक महाशक्तियों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस रणनीतिक कदम से भड़के अमेरिका ने बिना वक्त गंवाए बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीजिंग और तेहरान के बीच हो रही इस बड़ी सैन्य डील की आंच भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान तक भी पहुंच गई है, जिसे अमेरिकी प्रशासन ने अपने रडार पर ले लिया है।चीन और ईरान के बीच इस बड़ी सैन्य डील के क्या हैं मायनेरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी मिडल ईस्ट में अमेरिकी और इजरायली प्रभाव को सीधे तौर पर चुनौती देने की एक बड़ी कोशिश है। चीन द्वारा ईरान को दिए जा रहे उन्नत एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम से ईरानी हवाई क्षेत्र की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी। इस खबर के सार्वजनिक होते ही वॉशिंगटन के नीति निर्माताओं में खलबली मच गई। अमेरिका ने इसे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानते हुए चीन और ईरान से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ तत्काल कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।इस डिफेंस डील की आंच में पाकिस्तान कैसे आया अमेरिकी रडार परइस पूरे मामले में पाकिस्तान का नाम जुड़ने से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। खुफिया रिपोर्टों और वैश्विक विश्लेषकों का दावा है कि चीन द्वारा ईरान को भेजे जा रहे सैन्य उपकरणों, कलपुर्जों या तकनीकी ट्रांसफर के लिए पाकिस्तानी जमीन, बंदरगाहों या कुछ संदिग्ध लॉजिस्टिक कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने का अंदेशा है। अमेरिका ने हाल के दिनों में पाकिस्तान की कई कंपनियों पर मिसाइल और सैन्य प्रोग्राम में मदद करने के आरोप में प्रतिबंध लगाए हैं। इस ताजा घटनाक्रम के बाद अमेरिकी जांच एजेंसियां इस्लामाबाद की हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रख रही हैं।वैश्विक प्रतिबंधों का खतरा और एशिया-मिडल ईस्ट पर इसका बड़ा असरबीजिंग, तेहरान और इस्लामाबाद के इस कथित सैन्य त्रिकोण पर अमेरिका की पैनी नजर से आने वाले दिनों में कड़े प्रतिबंधों का एक नया दौर शुरू हो सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर पाकिस्तान की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उस पर अमेरिकी आर्थिक मदद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले फंड को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। वहीं, भारत के दृष्टिकोण से भी यह बेहद संवेदनशील मामला है, क्योंकि पश्चिमी सीमा पर चीनी दखल का बढ़ना और मिडल ईस्ट में अस्थिरता का सीधा असर दक्षिण एशियाई सुरक्षा और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर पड़ेगा।
सऊदी ने पाकिस्तान को दिया बड़ा वित्तीय सहारा, 5 अरब डॉलर का भारी-भरकम कर्ज तीसरी बार रोलओवर
वैश्विक कूटनीति और गहरे आर्थिक संकट के बीच सऊदी अरब ने एक बार फिर अपने पुराने सहयोगी देश पाकिस्तान की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। गंभीर विदेशी मुद्रा संकट और नकदी की किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान को सऊदी अरब ने एक बड़ी राहत देते हुए उसके 5 अरब डॉलर के केंद्रीय बैंक डिपॉजिट (कर्ज) को तीसरी बार रोलओवर यानी आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय गलियारों में दोनों देशों के बीच की पुरानी वफादारी और रणनीतिक साझेदारी के इनाम के रूप में देखा जा रहा है।डिफॉल्ट होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान को मिली बड़ी संजीवनीपाकिस्तान पिछले काफी समय से अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है, जहां उसे हर वक्त विदेशी कर्ज चुकाने और देश चलाने के लिए बाहरी मदद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सऊदी अरब द्वारा 5 अरब डॉलर की इस रकम को वापस न मांगकर उसकी अवधि बढ़ाने से पाकिस्तान को तात्कालिक राहत मिली है। यदि सऊदी यह कदम नहीं उठाता, तो पाकिस्तान के सामने विदेशी भुगतानों को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो जाता और देश डिफॉल्ट की स्थिति में आ सकता था। इस वित्तीय मदद से पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान) को अपने घटते विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने में बड़ी मदद मिलेगी।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों और लोन के लिए क्यों था यह जरूरीदरअसल, पाकिस्तान इस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से एक बड़े बेलआउट पैकेज की उम्मीद लगाए बैठा है। आईएमएफ की सबसे बड़ी शर्तों में से एक यह होती है कि पाकिस्तान के जो मित्र देश (जैसे सऊदी अरब, चीन और यूएई) हैं, वे अपने दिए गए पुराने कर्जों की रोलओवर गारंटी दें। सऊदी अरब के इस ताजा फैसले के बाद अब पाकिस्तान के लिए आईएमएफ से नया कर्ज मिलने का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी का यह कदम पूरी तरह से राजनीतिक और रणनीतिक है, क्योंकि वह दक्षिण एशिया में अपने इस पारंपरिक सहयोगी को पूरी तरह बिखरने नहीं देना चाहता।घरेलू मोर्चे पर शहबाज सरकार को बड़ी सियासी राहतइस फैसले से न केवल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सांस लेने की जगह मिली है, बल्कि घरेलू मोर्चे पर मुश्किलों से घिरी शहबाज शरीफ सरकार को भी एक बड़ी राजनीतिक राहत मिली है। विपक्ष के तीखे हमलों और जनता में बढ़ती महंगाई के गुस्से के बीच सरकार अब इस वित्तीय सहायता को अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश कर रही है। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि कर्ज का रोलओवर होना केवल एक अस्थाई समाधान है। जब तक पाकिस्तान अपने आंतरिक कर ढांचे, निर्यात और बुनियादी आर्थिक नीतियों में कड़े सुधार नहीं करता, तब तक कर्ज के इस जाल से बाहर निकलना नामुमकिन होगा।
US-Iran War Big Update: मिडिल ईस्ट युद्ध में हुई सऊदी अरब की सरप्राइज एंट्री
मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब अपने सबसे भयावह मोड़ पर पहुंच चुका है। कूटनीतिक वार्ताओं का दौर पूरी तरह समाप्त होने के बाद मोर्चे पर सबसे बड़ा उलटफेर तब देखा गया, जब सऊदी अरब ने अपनी पुरानी निष्पक्षता छोड़कर अमेरिका का खुलकर साथ देने का फैसला किया। इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की वायुसेना ने संयुक्त रूप से हमला बोलकर ईरान समर्थित गुटों के लॉजिस्टिक्स डिपो और हथियारों के ठिकानों को तबाह कर दिया है। इस भीषण एयरस्ट्राइक में 20 लड़ाकों और 6 ईरानी सैन्य सलाहकारों की मौत हो चुकी है, जिससे इस क्षेत्रीय संघर्ष का संतुलन पूरी तरह बदल गया है।जॉर्डन एयरबेस पर मिसाइल दागने के बाद भड़का अमेरिकातनाव की यह नई चिंगारी तब सुलगी जब ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस 'मुवफ्फक साल्टी' को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते सभी मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पलटवार करते हुए ईरान के अंदर कई सैन्य ठिकानों पर फिर से घातक बमबारी शुरू कर दी। वाशिंगटन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कूटनीति के लिए दिया गया पांच दिनों का विराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।मिस्र के तटीय क्षेत्र तक फैला जंग का दायराइराक में हुई भीषण एयरस्ट्राइक के अलावा, संघर्ष की लपटें अब मिस्र तक भी पहुंच गई हैं। मिस्र के 'दमिएटा' बंदरगाह के पास खड़े अमेरिका के स्वामित्व वाले दो लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकरों पर संदिग्ध ड्रोन से हमला किया गया है। अब तक इस युद्ध से अछूते रहे मिस्र के समुद्री क्षेत्र में यह हमला इस बात का बड़ा सबूत है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय सीमाओं को लांघकर पूरे मध्य-पूर्व को निगलने के लिए तैयार खड़ा है।सऊदी अरब की एंट्री से कैसे पलटा पूरा गेम?अब तक इस जंग से दूरी बनाए रखने वाले सऊदी अरब ने अपने तेल प्रतिष्ठानों पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिका से हाथ मिला लिया है। सऊदी की इस सैन्य सहभागिता से इराक, सीरिया और यमन में सक्रिय ईरान समर्थक संगठनों जैसे 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस' (PMF) और 'हूती' विद्रोहियों पर दोहरी मार पड़ रही है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान युद्ध विराम की मिन्नतें कर रहा है, लेकिन अमेरिका उन्हें करारा जवाब देगा। ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि अब हमारी बारी है और हम उन पर बहुत जोरदार प्रहार करने जा रहे हैं।वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर मंडराया गहरा संकटयुद्ध के विकराल रूप धारण करने से विश्व अर्थव्यवस्था पर संकट गहरा गया है। थिंक टैंक CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार मिसाइल इंटरसेप्ट करने से अमेरिका के 'पैट्रियट' और 'थाड' इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक कम हो गया है। वहीं दूसरी ओर, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही ठप होने से कच्चे तेल और एलपीजी की वैश्विक सप्लाई रुकने की कगार पर है। अगर स्थिति नहीं संभली तो आने वाले दिनों में दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और ऊर्जा के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जो एक अंतरराष्ट्रीय मंदी का कारण बन सकती है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' ने अपनी पॉलिसी बैठक में लगातार पांचवीं बार ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए इन्हें 3.50% से 3.75% की सीमा पर बरकरार रखा है। हालांकि, फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की सख्त टिप्पणियों और महंगाई के खिलाफ लंबी लड़ाई की चेतावनी ने अमेरिकी बाजारों का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया।फेड के फैसले के तुरंत बाद वॉल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली का माहौल बन गया, जिससे डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1100 अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह अप्रैल 2025 के बाद अमेरिकी बाजार के लिए एक दिन का सबसे खराब प्रदर्शन रहा।वॉल स्ट्रीट में मंदी: डाऊ जोन्स और नैस्डैक धराशाईफेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर रुख कड़ा बनाए रखने के कारण प्रमुख अमेरिकी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए:डाऊ जोन्स (Dow Jones): 1,100 से अधिक अंक (2.19%) टूटकर बंद हुआ।S&P 500: 1.5% की कमजोरी के साथ बंद हुआ।नैस्डैक कम्पोजिट (Nasdaq): 1.7% गिरा, जबकि नैस्डैक 100 में 2% से अधिक की गिरावट आई जिससे यह तकनीकी करेक्शन (Technical Correction) के दायरे में प्रवेश कर गया।2007 के बाद उच्चतम स्तर पर पहुंची 30 साल की बॉन्ड यील्डफेड की मौद्रिक नीति के बाद अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में जबरदस्त उछाल देखा गया। ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका से बॉन्ड यील्ड में तेजी आई:10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: एक बार फिर उछलकर 4.7% पर पहुंच गई।30 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: बढ़कर 5.21% हो गई, जो साल 2007 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।पॉलिसी बैठक में गहराया मतभेद: 3 सदस्यों ने उठाई दरें बढ़ाने की मांगइस बार फेड की ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के भीतर सर्वसम्मति देखने को नहीं मिली। 9 सदस्यों ने दरें यथावत रखने का समर्थन किया, जबकि 3 प्रमुख सदस्यों ने इस फैसले पर असहमति (Dissent) जताई:लॉरी लोगन (प्रेसिडेंट, डलास फेड)नील काशकारी (प्रेसिडेंट, मिनियापोलिस फेड)बेथ हैमैक (प्रेसिडेंट, क्लीवलैंड फेड)इन तीनों अधिकारियों का तर्क था कि चूंकि अमेरिका में महंगाई पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से 2% के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की सख्त जरूरत है।फेड चेयरमैन केविन वॉर्श का बयान: 'जादुई समाधान नहीं, लंबी होगी लड़ाई'पॉलिसी की घोषणा करते हुए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने स्पष्ट किया कि महंगाई पर काबू पाना इतना आसान नहीं होगा।केविन वॉर्श के मुख्य बिंदु:बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और ऐसे में कोई जल्दबाजी में पूर्वानुमान लगाना गलत होगा।महंगाई के खिलाफ हमारी लड़ाई लंबी और मुश्किल होगी। इसका कोई जादुई समाधान (Magic Solution) नहीं है।चीजें 1-2 दिनों या हफ्तों में ठीक नहीं होंगी। महंगाई को 2% के लक्ष्य तक लाने में अभी और वक्त लगेगा।अर्थव्यवस्था का हाल: ग्रोथ मजबूत, पर सप्लाई चेन में अड़चनेंफेड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी हुई है। देश में नौकरियों के आंकड़े और उत्पादकता सकारात्मक हैं। हालांकि, वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण ऊर्जा और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने में चुनौती आ रही है।
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए ईरानी मिसाइल हमले के ठीक एक दिन बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आग पूरी तरह भड़क उठी है। गुरुवार (30 जुलाई) तड़के अमेरिकी वायुसेना ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बाद ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक शुरू कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए लिया गया एक निर्णायक और कड़ा कदम बताया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी ठिकानों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।परमाणु प्लांट के पास गूंजे धमाके: दहल उठे ईरान के कई प्रांतअमेरिकी फाइटर जेट्स के हमले शुरू होते ही पूरे ईरान में हड़कंप मच गया। ईरान के सरकारी मीडिया और टीवी चैनलों के अनुसार, देश के दक्षिणी और तटीय इलाकों में सिलसिलेवार जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सबसे ज्यादा घबराहट बुशेहर प्रांत में देखी गई, जहां ईरान का इकलौता मुख्य परमाणु पावर प्लांट स्थित है। इसके अलावा खुजेस्तान के अबादान क्षेत्र और होर्मोज़गान प्रांत के रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास सहित किश, क़ेश्म और अबू मूसा द्वीपों पर भी मिसाइलें गिरीं और कई ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है।'अब हमारी बारी है'— ट्रंप की सीधी चेतावनी और 5 दिनों का विराम समाप्तहमले से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कड़ा संदेश देते हुए कहा था कि अब जवाब देने की बारी अमेरिका की है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने जॉर्डन पर दागी मिसाइलों को गलती बताते हुए हमला न करने का अनुरोध किया था, जिसे खारिज कर दिया गया। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा, हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे और उन्हें अच्छी तरह पता है कि क्या होने वाला है। अमेरिका ने पिछले शुक्रवार से हमलों में पांच दिनों का जो विराम लिया था, वह अब खत्म हो चुका है और सैन्य ऑपरेशन दोबारा तेज कर दिया गया है।इराक में अमेरिका-सऊदी का साझा अटैक: 20 लड़ाकों की मौत से हड़कंपईरान पर सीधे हमले के साथ-साथ इराक में भी अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त सेनाओं ने बड़ा ऑपरेशन चलाया। दोनों देशों की वायुसेना ने इराक में मौजूद ईरान समर्थित सशस्त्र समूह 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस' (PMF) के हथियारों के डिपो और लॉजिस्टिक्स सेंटरों को निशाना बनाया। इस हवाई हमले में पीएमएफ के कम से कम 20 लड़ाकों की मौत हो गई और 32 से अधिक घायल हुए हैं। बगदाद, निनवे और बसरा समेत सात प्रांतों में हुए इस हमले के बाद इराक के प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई है।ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की जंग जारी रखने की कसमदूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की एयरोस्पेस फ़ोर्स ने अमेरिकी कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। आईआरजीसी ने दावा किया कि उन्होंने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयरबेस और सेंटकॉम (CENTCOM) के मुख्यालय को कई बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरान की सेना का कहना है कि जब तक अमेरिका का आक्रामक रुख और उसकी धमकियां बंद नहीं होंगी, तब तक उनका यह जवाबी प्रतिरोध पूरी ताकत से जारी रहेगा। दोनों महाशक्तियों के बीच छिड़े इस युद्ध से पूरे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
अपनी नाकामी छिपाने के लिए यूक्रेन आम नागरिकों को बना रहा निशाना : मारिया जाखारोवा
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने रूस के कई अहम सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर यूक्रेन के हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए यूक्रेन नागरिक ढांचे पर हमले कर रहा है
अमेरिका का ईरान पर एयरस्ट्राइक, तेहरान में कई ठिकाने निशाने पर
पश्चिम एशिया में हालात फिर बिगड़ गए हैं। अमेरिका ने ईरान पर ताज़ा हवाई हमले किए हैं। यह कदम उस चेतावनी के बाद उठाया गया जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर हुए हमले का जवाब ज़रूर दिया जाएगा
जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले के बाद ट्रंप की ईरान को चेतावनी, बोले- चुकानी होगी कीमत
जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हुए एक कथित ईरानी मिसाइल हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिका पूरी ताकत के साथ जवाब देगा
जंगल की आग से जूझ रहे फ्रांस और स्पेन, मदद के लिए आगे आए यूरोपीय देश
यूरोप में जंगल की आग से जूझ रहे फ्रांस और स्पेन को रोमानिया, ग्रीस और पोलैंड का समर्थन मिल रहा है। यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इन देशों की एकजुटता की सराहना की है
एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में संयुक्त वक्तव्य पारित
26 से 28 जुलाई तक चीन के शनचन शहर में एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) का वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में 2026 एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन संयुक्त वक्तव्य पारित किया गया
मैं आठवीं क्लास में था। नाम था अंकिता यादव। मेरे ही क्लास के दूसरे सेक्शन में प्रिया नाम की एक लड़की थी। बहुत पसंद थी वो मुझे। जब भी वो आस-पास होती मुझे अजीब सा महसूस होता। बस लगता कि उसे देखता रहूं। उससे बातें करूं। अब आप सोच रहे होंगे मेरा नाम लड़कियों जैसा, लेकिन बातें तो लड़कों जैसी हैं। सही सोचा आपने। हां, तब मैं शरीर से तो लड़की था, लेकिन मेरे भीतर एक लड़का था। भीतर का वो लड़का हमेशा घुटता रहता। मैं खुद से पूछता, दुनिया के लिए तो मैं लड़की हूं, ऐसे में जिस लड़की से प्यार करता हूं, उसे ये कैसे बताऊं। किस मुंह बताऊं। भास्कर सीरीज ब्लैकबोर्ड में मैं मनीषा भल्ला आज कहानी लाई हूं मनवीर की, जो पहले अंकिता थे, लेकिन सर्जरी से जेंडर चेंज करवा लिया इस दौरान उनके साथ क्या-क्या हुआ, सुनिए उन्हीं की जुबानी… जैसा कि मैंने ऊपर बताया मुझे प्रिया पसंद तो थी, लेकिन उससे कहने की हिम्मत नहीं हुई। तब मैंने उसके बारे में अपनी दोस्त मतलब सहेली आकांक्षा को बताया। वो चौंक गई और कहने लगी- ‘तू तो खुद लड़की है। ये कैसी बातें कर रही है। मैंने उससे कहा- भले ही मैं लड़की दिखता हूं, लेकिन मुझे लड़कों की तरह रहना पसंद है। मुझे शर्ट-पैंट पहनकर घूमना पसंद था। लड़कियों वाले कपड़ों में दम घुटता था। लंबे बाल संवारना मेरे लिए मुसीबत थी। हर बार उन्हें काटकर फेंकने का मन करता था। धीरे-धीरे ये बात पूरे स्कूल में फैल गई। सब मजाक उड़ाने लगे। एक दिन मैं वॉशरूम जा रहा था, तभी क्लास के कुछ लड़कों ने घेर लिया। कहने लगे- ‘तू तो हमारी तरह है ना। तू भी लड़का है ना, तभी तुझे भी हमारी तरह लड़कियां पसंद हैं। ब्यॉज टॉयलेट में चल, लड़कियों के टॉयलेट में क्यों जा रही है।’ ये बातें सुनकर मैं इतना घबरा गया कि पेट दर्द का बहाना बनाकर घर चला गया। अगले दिन पूरे स्कूल में ये बात फैल चुकी थी कि अंकिता दिखती भले ही लड़की है, लेकिन है वो लड़का। जब मैं दोबारा टॉयलेट गया तो कुछ सीनियर्स और क्लास की लड़कियों ने घेर लिया। उन्होंने जबरदस्ती मेरी सलवार उतारी और प्राइवेट पार्ट चेक किया। फिर ये कहते हुए वहां से चले गए- अरे तू तो लड़की है। फिर तुझे लड़कियां क्यों पसंद हैं। उस वक्त मेरे मन में क्या चल रहा था ये शायद ही कोई समझ पाएगा। ऐसा लग रहा था कि आत्महत्या करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। किसी भी ट्रांसजेंडर की पहली लड़ाई परिवार और स्कूल से शुरू होती है। हम लोग दिल्ली के नजफगढ़ में रहते थे। मैं 6 भाई-बहनों में सबसे छोटा था। पापा चाय की दुकान लगाते थे। इसी से घर के 9 लोगों का खर्च चलता था। मेरे पैदा होने के बाद खर्च और बढ़ गया। ढाई साल का हुआ तो पापा को लकवा मार गया। वो बिस्तर पर आ गए। घर चलाने की जिम्मेदारी मां पर आ गई और वो दुकान पर बैठने लगी। तब किसी रिश्तेदार ने मां से कह दिया कि तुम्हारी छोटी बेटी मनहूस है। जबसे वो पैदा हुई है पूरा घर मुसीबतों से घिरा है। उसके बाद से भाई-बहनों समेत सभी रिश्तेदारों ने मनहूस कहना शुरू कर दिया। समय बीतता गया और मेरे ही घर में मेरे खिलाफ नफरत बढ़ने लगी। एकबार बड़ी बहन को देखने के लिए लड़के वाले घर आ रहे थे। सब तैयारियों में जुटे थे। मैंने मां से पूछा, क्या मेहमान आने वाले हैं? मां से पहले ही बड़ा भाई बोलने लगा- अगर तू उनके सामने आई तो मार-मार के हाथ-पैर तोड़ दूंगा। मनहूस, तेरी वजह से रिश्ता जुड़ने से पहले ही टूट जाएगा। मैं रोते हुए वहां से उठकर चला गया। जब मैं 10-11 साल का था तो मेरी उम्र की लड़कियां गुड्डे गुड़ियों से खेलती थीं, लेकिन मुझे तो लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना अच्छा लगता था। छठवीं क्लास की बात है। एक दिन कुछ लड़के घर आए। कहने लगे क्रिकेट खेलने चलो। उस वक्त पापा घर पर ही थे। वो सुनते ही चीखने लगे-’लड़कों के साथ खेलने जाएगी, बाहर निकली तो टांगे तोड़ दूंगा। जैसे बाकी बहनें घर पर रहती हैं, वैसे ही तू भी रह।’ पापा को चीखते हुए सुनकर मैं कांपने लगा। फिर भी हिम्मत जुटाकर रोते हुए बड़ी बहन से बोला- पापा से कहो मुझे इनके साथ बाहर जाने दें। मैं भी इनमें से ही हूं।’ लेकिन पापा ने एक न सुनी। मुझे कोई नहीं समझता था। इसलिए मैं अपनी सारी बातें डायरी में लिखता था। ये बात भी मैंने डायरी में लिखी थी। एक दिन किसी ने बड़ी बहन को बता दिया कि मुझे लड़कियां पसंद हैं। उसने घर आकर भाई-बहन, मम्मी, सबको बता दिया। तभी बड़े भाई को मेरी डायरी भी मिल गई। उसने सब पढ़ लिया। उस दिन मम्मी और दादी के अलावा सभी ने मुझे पीटा। तब तक पीटा, जब तक सब थक नहीं गए। उस दिन से भाई मुझे हिजड़ा कहने लगा। धीरे-धीरे पैसों की तंगी होने लगी। भाई ने घर में पैसे देना बंद कर दिया। कहने लगा कि इसे खिलाने के लिए पैसे नहीं हैं। मेरे पास चप्पल तक नहीं थी। नंगे पैर स्कूल जाता था। लड़कों वाले कपड़े पहनता था, वो भी भाई ने जला दिए। रिश्तेदारों से उतरन मांग कर पहनना पड़ा। मजबूरी में फुटपाथ पर चादर बिछा कर सब्जी बेची। कॉस्मेटिक और मिट्टी के बर्तन बेचे। जब थककर घर लौटता तो चुपचाप एक कोने में पड़ा रहता। जिस किसी का कोई काम बिगड़ जाता तो वो मुझे जिम्मेदार ठहराकर पीटने लगता। पड़ोस में ही मेरा एक रिश्ते का भाई रहता था। अक्सर घर आया करता था। एकबार वो आया तो घर पर कोई नहीं था। वो मेरे कमरे में घुस आया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। जब तक मुझे कुछ समझ आता वो जबरदस्ती करने लगा। उसने मेरा रेप किया। मैं मदद के लिए चीख रहा था। उसने मुझे धमकी दी कि तेरी बात पर कौन भरोसा करेगा। घरवाले तो तेरी शक्ल तक नहीं देखना चाहते, घर से भी निकाल देंगे। उस दिन के बाद से उसे जब भी मौका मिलता वो घर आ जाता। रेप करता और धमकी देकर चला जाता। उसने परिवार के कुछ और लड़कों को इसबारे में बता दिया। वो लड़के भी मेरा रेप करने लगे। लगातार तीन साल तक मेरे साथ ये सब होता रहा लेकिन मैं घरवालों को बता नहीं सका। हालांकि मैं उन लड़कों का नाम नहीं लूंगा। वरना मां दुखी हो जाएगी। 2013 में पापा की मौत हो गई। उसके बाद भाई के हौसले और बुलंद हो गए। वो कहने लगा कि मुझे कहीं बेच आएगा। मैं जब भी उसकी सामने आता, पीटने लगता। एक दिन मैं कूलर अपनी तरफ घुमाकर सो गया। इस बात पर उसने मुझे बहुत पीटा। चारपाई से उठाकर नीचे पटक दिया। दीवार पर सिर दे मारा। पास ही एक प्रेस पड़ी थी। वो उठाकर मेरे सिर पर मार दी। खून बहने लगा तो बहन और जीजा अस्पताल ले गए। अगले दिन जब सोकर उठा तो दादी और मां मेरे सिरहाने बैठे थे। कहने लगे कि तू ये घर छोड़कर चला जा। वरना भाई तुझे मार डालेगा। हम तुझे जिंदा देखना चाहते हैं। मैंने मां के पैर पकड़ लिए। गिड़गिड़ाने लगा कि मां, कहां जाऊं मैं। मां ने रोते हुए कहा- कहीं भी चला जा, कम से कम जिंदा तो रहेगा। उसके बाद मैंने घर छोड़ दिया। तब तक बारहवीं हो चुकी थी। सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिल गई। नजफगढ़ में ही किराए का कमरा लेकर रहने लगा। कुछ ऐसे लोगों से दोस्ती हुई जो मेरी ही तरह थे यानी लड़की के शरीर में लड़के थे। वो अक्सर मुझसे मिलने आया करते थे। मकान मालिक को वो लोग पसंद नहीं आए और उसने कमरा खाली करवा लिया। तब तक कोरोना भी फैल चुका था। मैं सामान लिए पूरा दिन यहां-वहां भटकता रहा, लेकिन एक भी कमरा नहीं मिला। मैंने अपने कई जानने वालों को भी फोन किया, लेकिन सबने मना कर दिया। जब अंधेरा होने लगा तो वापस घर लौट जाने के अलावा मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा। घर पहुंचकर मां को सारी बात बताई। उन्होंने कहा- ‘भाई से दूर रहना, उसकी नजरों के सामने मत आना।’ एक-दो दिन बीते ही थे कि फिर वही सब होने लगा। रोज-रोज की मारपीट। एक महीने बाद मां और दादी के कहने- लगे घर छोड़ दे। मैंने फिर घर छोड़ दिया। किसी तरह एक कमरा किराए पर लेकर रहने लगा। जब मां से मिलना होता तो नजफगढ़ बैंक या किसी चाय की दुकान पर उन्हें बुला लेता। यूं ही सड़कों पर समय गुजरने लगा। कुछ महीने बाद पता चला कि बड़े भाई की अचानक मौत हो गई। सुनकर बुरा तो लगा लेकिन उतना नहीं। बस यूं कहिए कि जो हुआ ठीक हुआ। भाई की मौत के बाद फिर मेरा घर आना-जाना शुरू हुआ। आखिर मैंने तय किया कि अब सर्जरी करवाऊंगा। मम्मी और दादी को सर्जरी के बारे में बताया। वो कहने लगीं कि अगर तुम ये करवाकर खुश रहोगे तो करवा लो। तुम्हारी खुशी में ही हमारी खुशी है। छोटी-मोटी नौकरी से जो भी पैसे जोड़े थे, उससे इलाज शुरू हुआ। इसके लिए सबसे पहले जीआईडी सर्टिफिकेट यानी जेंडर आईडेंटिटी डिसऑर्डर सर्फिकेट की जरूरत होती है। जिसके लिए मैं मनोचिकित्सक के पास गया। इसमें काउंसलिंग से जायजा लिया गया कि मैं सच में ट्रांस हूं या नहीं। तीन सेशन होने के बाद जीआईडी सर्टिफिकेट मिला। इसके बाद हार्मोन हेल्थ के डॉक्टर यानी एंडोक्रोनॉलिस्ट के पास गया। उसने हार्मोनल टेस्ट करवाए और रिपोर्ट के हिसाब से हार्मोन बदलने वाले इंजेक्शन देने शुरू किए। यह इंजेक्शन किसी भी सर्जरी करवाने वाले को सारी जिंदगी लेने होते हैं। शरीर के हार्मोन जेंडर के अनुसार बदलते रहके हैं, इसलिए हर तीन महीने में ब्लड टेस्ट भी करवाने पड़ते हैं। इसमें हर महीने करीब 5 हजार रुपये का खर्च आता। इस पूरी प्रोसेस में एक से डेढ़ साल लग गया। तब जाकर 2024 के आखिरी में सर्जरी हुई, जिसमें ब्रेस्ट और यूटेरस हटा दिया गया। फिर बारी आई टीजी यानी ट्रांस जेंडर कार्ड लेने की। इसी से सभी दस्तावेजों में नाम और जेंडर बदलता है। इसके लिए मैंने डीएम ऑफिस में अप्लाई किया। तीन साल तक इस कार्ड के लिए चक्कर काटता रहा। एकबार तो वहां बैठे अधिकारी ने इतना तक कह दिया कि 'पैंट उतारकर दिखाओ, तब तो पता चलेगा जेंडर सच में बदला है या नहीं।' ये सुनते ही वहां बैठे सभी लोग हंसने लगे। मैं शर्मिंदा होकर वहां से चला आया। फिर भी कार्ड जरूरी था इसलिए हर रोज पहुंच जाता था। वेरिफिकेश के लिए एक टीम मेरे मोहल्ले में पहुंची और पूछने लगी कि यहां कोई हिजड़ा रहता है, जिसने टीजी कार्ड के लिए अप्लाई किया है। उस दिन के बाद से पूरा मोहल्ला मेरा मजाक उड़ाने लगा। आखिरकार मुझे वो मोहल्ला छोड़ना पड़ा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। 2019 में जो ट्रांसजेंडर एक्ट आया था उसमें इसी साल मार्च में बदलाव भी हुआ है। उसके अनुसार अब डीएम ऑफिस में मेडिकल बोर्ड बैठेगा। जो निर्णय लेगा कि अप्लाई करने वाला ट्रांस है भी या नहीं। टीजी कार्ड के लिए वेबसाइट से ही अप्लाई करना होगा। सर्जरी हुए लगभग दो साल हो चुके हैं लेकिन अब तक मेरा पैन कार्ड नहीं बन पाया है। जिसकी वजह से पीएफ के लिए अप्लाई नहीं कर पा रहा हूं। मुझे पैसों की सख्त जरूरत हैं, इसलिए दिन-रात सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता हूं। सर्जरी के बाद जिंदगी में काफी कुछ बदल गया, लेकिन पुरानी जिंदगी को जब भी याद करता हूं तो तकलीफ होती है। शायद वो सब जिंदगी में कभी भूल नहीं पाऊंगा। मैं जो भी था, जैसा भी था सब ऊपर वाले ने किया था, लेकिन सजा मुझे मिली। ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-8 पुलिसवालों को मारने वाले विकास दुबे की बीवी हूं:आज वो जिंदा होते तो थप्पड़ मारती, बच्चे बाप का नाम तक नहीं सुनना चाहते साल 2020, 2-3 जुलाई की दरमियानी रात। मैं अपने छोटे बेटे के साथ लखनऊ वाले घर पर सो रही थी। बड़ा बेटा उन दिनों छुट्टी पर मॉस्को से इंडिया आया हुआ था और अपनी चाची के घर पर था। रात 2 बजे अचानक फोन बजा। पूरी कहानी यहां पढ़ें… 2- ब्लैकबोर्ड-पत्नी की साड़ी-पेटीकोट धोता हूं, झाडू-पोंछा करता हूं:दोस्त कहते हैं- ये मर्द नहीं, हाउस हसबैंड बनने से भाइयों की शादी नहीं हो रही कहानी ऐसे मर्द की जो पैसे कमाने बाहर नहीं जाता। घर पर रहकर झाड़ू-पोंछा करता है। बरतन धोता है। खाना बनाता है। वो हाउस हसबैंड है। ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहां हाउस वाइफ होती हैं। पूरी कहानी यहां पढ़ें
संसद के मानसून सत्र में बुधवार को एक बार फिर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टकराहट पैदा कर दी। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन चलाने का आदेश देने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने अपने भाषण के दौरान 'विद्यार्थी, इडियट और अंधभक्त' शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्ता पक्ष के सांसद लगातार टोकते रहे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे, जबकि राहुल ने सदन में आरोप लगाया कि उनका माइक बंद कर दिया गया। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। प्रश्नकाल के दौरान ही विपक्षी दलों के सदस्य नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के कारण अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन सदस्य एनके प्रेमचंद्रन ने सदस्यों से सदन के पटल पर दस्तावेज रखने की प्रक्रिया पूरी कराई, लेकिन विपक्षी सांसद 'गृहमंत्री सदन में आओ' के नारे लगाते रहे। हंगामा थमने के बजाय और तेज होता गया। करीब 12 बजकर 6 मिनट पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला सदन की कार्यवाही संभालने के लिए आसन पर पहुंचे। लगातार हो रही नारेबाजी पर उन्होंने नाराजगी जताई और सदन को चलने देने की अपील की। इसके बाद सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने विधेयक पर अपनी बात रखी और परीक्षा प्रणाली तथा नकल रोकने के उपायों को लेकर सरकार से सवाल किए। करीब 12 बजकर 59 मिनट पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चर्चा में हिस्सा लेने के लिए खड़े हुए। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और खासकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर तीखे हमले किए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पैलेट गन चलाने का आदेश अमित शाह ने दिया था। उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए 'विद्यार्थी, इडियट और अंधभक्त' टिप्पणी भी की, जिस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। राहुल गांधी के आरोपों के बाद सदन का माहौल और गरमा गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तत्काल खड़े हुए और कहा कि नेता प्रतिपक्ष बेहद गंभीर आरोप लगा रहे हैं, इसलिए उन्हें सदन में इसका प्रमाण देना चाहिए। सत्ता पक्ष के सांसद भी राहुल गांधी के बयान का विरोध करते हुए बार-बार उन्हें टोकते रहे। इसी दौरान राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि उनका माइक बंद कर दिया गया है और उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा। इस मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। लगातार बढ़ते शोर-शराबे और हंगामे के बीच अध्यक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर बाद जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान गोली चलाने का आदेश कोई मंत्री नहीं देता, बल्कि कानून के अनुसार यह अधिकार कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास होता है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को गैरजिम्मेदाराना और तथ्यों से परे बताया। इस दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे, लेकिन हंगामे के बीच ही लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। राज्यसभा में भी हंगामा उधर राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों से आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। इसके बाद प्रश्नकाल शुरू हुआ, लेकिन विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई। बहस के दौरान बिहार से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद प्रोफेसर मनोज झा ने सरकार की नीतियों और विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी बात रखी। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर भी तीखी बहस देखने को मिली। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
पीओके हिंसा को लेकर ब्रिटेन में विरोध, लोगों ने पाक दूतावास के बाहर किया प्रदर्शन
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चल रहे तनाव के बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के समर्थन में ब्रिटिश कश्मीरियों ने बर्मिंघम में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया।
US-Iran War Escalation: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा नया संग्राम, बेकाबू हुए हालात
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए भीषण मिसाइल हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधी जंग छिड़ने की आशंका काफी गहरी हो गई है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्तों से तनाव कम करने और सीधी मुठभेड़ से बचने के प्रयास जारी थे, लेकिन जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाए जाने के बाद स्थितियां पूरी तरह बेकाबू होती दिख रही हैं।ट्रंप की ईरान को सीधी चेतावनी: 'देंगे अब तक का सबसे सख्त सैन्य जवाब'जॉर्डन में हुए हमलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। एक अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल से बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी ठिकानों पर हुए इस दुस्साहसिक हमले का जवाब पूरी सैन्य ताकत से दिया जाएगा। ईरान की ओर से जॉर्डन की तरफ दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों के बाद ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उन्होंने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सेंट्रल कमांड और एयरबेस को कई मिसाइलों से निशाना बनाया है। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उसने हवा में ही ईरान की पांच मिसाइलों को नष्ट कर दिया। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा रहेगा, उनकी सैन्य कार्रवाइयां जारी रहेंगी।युद्ध में सऊदी अरब की सीधी एंट्री: इराक में अमेरिका के साथ मिलकर की एयरस्ट्राइकतनाव की इस आग में अब सऊदी अरब भी खुलकर कूद पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान से ठीक पहले अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त वायुसेना ने इराक में मौजूद ईरान समर्थित गुटों पर भारी एयरस्ट्राइक की। इस कार्रवाई में बगदाद समेत 7 प्रांतों में हथियारों के ठिकानों और लॉजिस्टिक्स डिपो को निशाना बनाया गया। इराक के हशद अल-शाबी (पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज) समूह ने इन हमलों में अपने 20 से अधिक लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि की है। सऊदी अरब का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई उसके तेल प्रतिष्ठानों पर ईरान समर्थित समूहों द्वारा किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के विरोध में की गई है।होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर कब्जा: दुनिया पर मंडराया तेल संकटमिसाइल हमलों के साथ-साथ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल परिवहन मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में भी तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रणनीतिक समुद्री मार्ग में तीन विदेशी तेल टैंकरों को रोकने का दावा करते हुए कहा कि इस रास्ते पर उनका पूर्ण नियंत्रण है। होर्मुज में बढ़ी इस सैन्य हलचल और सऊदी के तेल निर्यात पर बने खतरे की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता फैल गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें एक बार फिर उछलने लगी हैं।
अभिजीत दीपके ने दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने मंगलवार को कहा- 'कई राज्यों में पुलिस स्टूडेंट्स को परेशान कर रही है। सरकार छात्रों को डराना-धमकाना और डिटेन करना बंद करे। अगर ये जारी रहा, तो हम दोबारा बहुत बड़ा आंदोलन करेंगे।’ आखिर जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों के साथ हो क्या रहा है, क्या वाकई सरकार वादाखिलाफी कर रही, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: जंतर मंतर के प्रदर्शनकारियों के साथ क्या हो रहा है?जवाबः तीन तरह के बर्ताव सामने आए हैं… 1. प्रोटेस्टर्स को ट्रैक करके अपमानित किया जा रहा 2. कई राज्यों में दर्ज FIR रद्द की जा रहीं 3. कुछ जगह FIR रद्द नहीं, पुलिस एक्शन ले रही सवाल-2: तो क्या सरकार CJP से वादाखिलाफी कर रही है?जवाबः CJP और सरकार के बीच 3 दौर की बातचीत के बाद 25 जुलाई को प्रोटेस्ट खत्म हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा दोनों पक्षों के बीच कुछ बातें तय हुई थीं। मसलन- बीजेपी शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR वापस ली जाएंगी, सरकार मंगलवार तक इसकी लिखित गारंटी देगी, NEET पेपर लीक की वजह से जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों को अधिकतम मुआवजा और शिक्षा सुधार के चार्टर पर सरकार काम करेगी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन बातों पर सहमति जताई थी। हालांकि अब कॉकरोच जनता पार्टी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रही है। CJP का कहना है कि अब तक सरकार की तरफ से प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस करने की लिखित गारंटी नहीं मिली है। उलटे पुलिस प्रोटेस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। CJP ने ये भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से पुलिस को दर्ज FIR में जांच जारी रखने की इजाजत मिल गई है। ये सरकार के आश्वासन से बिल्कुल उलट है। इस आदेश को मंजूर नहीं करेंगे। सवाल-3: आखिर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्या कहा, जिसका विरोध कर रहे CJP नेता?जवाबः 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने CJP प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस कार्रवाई की जांच को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और ये संवैधानिक अधिकार है। पहली नजर में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत दिखती है। जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कानून तोड़ने वालों को भी सजा मिलनी चाहिए। 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा- CJP का कहना है कि प्रदर्शनकारियों पर केस खत्म करने में हमें शर्तें मंजूर नहीं। सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिक इस्तेमाल सरकार के फायदे के लिए नहीं होना चाहिए। पूरे देश के सामने एक गंभीर आश्वासन दिया गया था। उसका सम्मान किया जाना चाहिए। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगर प्रोटेस्ट में अपराधी खुले घूम रहे थे, तो दिल्ली पुलिस को उनके पुराने मामलों में जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का रुख करना चाहिए। सरकार पुराने आरोपियों के बहाने का इस्तेमाल FIR जारी रखने के लिए नहीं कर सकती। अगर सरकार को इसकी छूट दी गई, तो वह निश्चित तौर पर इसका इस्तेमाल करेगी। सवाल-4: क्या जमानत पर चल रहे आरोपी प्रोटेस्ट में शामिल नहीं हो सकते?जवाब: अगर किसी मामले में कोई आरोपी है, तो इससे उसके किसी प्रोटेस्ट में शामिल होने का अधिकार नहीं छीना जा सकता। अभिव्यक्ति की आजादी के तहत उसे प्रोटेस्ट में शामिल होने का अधिकार है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि दिल्ली प्रोटेस्ट के मामले में एक पेच ये है कि आयोजकों ने शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट की बात कही थी। उन्होंने प्रोटेस्ट के दौरान ये आरोप भी लगाया कि सत्तारूढ़ बीजेपी के इशारे पर अराजक तत्व शामिल हो गए हैं और प्रोटेस्ट को बदनाम करने की कोशिश में है। ऐसे में पुलिस ये जांच कर सकती है कि प्रोटेस्ट में शामिल लोग कौन थे, उनका इरादा प्रोटेस्ट का था या कोई गड़बड़ी करने का था। कानून में ये भी प्रावधान हैं कि अगर किसी व्यक्ति के शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो, तो पुलिस उसे हिरासत में ले सकती है। पश्चिम बंगाल में तो इसके लिए हाल ही में ‘पब्लिक सेफ्टी और कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्ट’ बनाया गया है। सवाल-5: दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर अब तक केस वापस क्यों नहीं लिए गए?जवाबः सामान्य तौर पर कोई मामला दर्ज हो जाए, तो पुलिस चार्जशीट में उसे खत्म कर सकती है, क्लोजर रिपोर्ट लगा सकती है या फिर सुनवाई के दौरान कोर्ट FIR रद्द करने के आदेश दे सकता है।दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे भी अब तक सरकार से कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने पर पुलिस ने अपनी तरफ से जो मामले दर्ज किए हैं, उन्हें वापस लेने के लिए उपराज्यपाल से अनुरोध करेगी। उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद पुलिस कोर्ट को इसकी सूचना देगी।कई पत्रकारों ने अपने ऊपर हमले के मामले में केस दर्ज करवाए हैं, वो इतनी आसानी से वापस नहीं होंगे। उसके लिए उनकी सहमति जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने घायल हुए पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों में भी जांच की बात कही है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि प्रदर्शन की आड़ में पुलिस पर हमला करने या वाहन जलाने वाले उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। इधर सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए SIT बनाने से पहले केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार को अपना पक्ष रखने का समय दिया है। महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को भी नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। ऐसे में कॉकरोच पार्टी और सरकार के बीच ये तनातनी लंबी खिंच सकती है। सवाल-6: क्या कॉकरोच पार्टी दोबारा प्रदर्शन शुरू कर सकती है? जवाब: कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट NEET पेपर लीक को लेकर था। CJP का कहना है कि वो आगे भी स्टूडेंट्स के मुद्दे को लेकर एक्टिव रहेगी। इन मुद्दों पर उन्हें युवाओं का समर्थन मिल सकता है। छात्रों पर कोई कार्रवाई न हो, इसका निर्देश सुप्रीम कोर्ट दे ही चुका है। हालांकि प्रोटेस्ट में शामिल पुराने आरोपियों पर दर्ज FIR वापस लेने का मामला पेचीदा है। इस मुद्दे पर CJP दोबारा उतना समर्थन जुटा पाए, ये आसान नहीं है। पॉलिटिकल एनालिस्ट विजय त्रिवेदी कहते हैं, ‘कोई विवाद बातचीत की टेबल तक आ जाए, तो दोबारा उतना नहीं बढ़ता। CJP की कुछ मांगें मान ली गई हैं। आगे भी बातचीत से रास्ता निकलने की उम्मीद है। सरकार भी कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगी, जिसे नए सिरे से उसका विरोध शुरू हो जाए।' ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो
'ना फांसी की चिंता, ना जेल का डर': शेख हसीना ने किया स्वदेश लौटने का बड़ा ऐलान, बताई तारीख
बांग्लादेश की बेदखल हो चुकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान देते हुए ऐलान किया है कि वे गिरफ्तारी, जेल की सलाखों या मौत की सजा जैसी तमाम डरावनी आशंकाओं के बावजूद इसी साल दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। पिछले साल अगस्त 2024 में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद देश छोड़कर भारत की राजधानी नई दिल्ली में शरण लेने वाली शेख हसीना ने साफ कर दिया है कि स्वदेश लौटने पर उनके साथ जो भी होगा, वे उसका सामना करने से पीछे नहीं हटेंगी। प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी एएफपी को ईमेल के जरिए दिए गए अपने एक विस्तृत जवाब में शेख हसीना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि उनकी जान को खतरा है, उन्हें मारा जा सकता है, गिरफ्तार किया जा सकता है या जेल में डाला जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद वे वापस लौटना चाहती हैं क्योंकि उनके देश के आम लोग उन्हें पुकार रहे हैं।अदालत की मौत की सजा और अपनों की धरती पर अंतिम सांस की इच्छाइससे पहले रॉयटर्स को दिए गए एक इंटरव्यू में भी शेख हसीना ने इस बात को दोहराया था कि वे और उनके सभी राजनीतिक सहयोगी अपना निर्वासन समाप्त करके बहुत जल्द बांग्लादेश लौटेंगे और वहां की अदालतों के सामने कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा था कि उनकी अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार भीषण अत्याचार और उत्पीड़न किया जा रहा है, और यदि उनकी किस्मत में मौत भी लिखी है, तो वे चाहती हैं कि वह उनकी अपनी मातृभूमि की सरजमीं पर आए, जहां उनके माता-पिता को दफनाया गया है और जहां उनका खून बहा था। गौरतलब है कि बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण यानी आईसीटी द्वारा शेख हसीना को उनकी गैर-मौजूदगी में ही मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, जो उन्हें साल 2024 में छात्रों के ऐतिहासिक और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों से सख्ती से निपटने के उनके तौर-तरीकों के चलते दी गई थी।साल 2024 के छात्र आंदोलन और सत्ता परिवर्तन की पूरी कहानीयह पूरा राजनीतिक संकट साल 2024 की गर्मियों में तब शुरू हुआ था जब सरकारी नौकरियों में चली आ रही विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत की थी। हालांकि, सुरक्षा बलों और प्रशासन द्वारा अपनाई गई कड़ी कार्रवाई के बाद यह छात्र आंदोलन तेजी से एक राष्ट्रव्यापी सरकार विरोधी जन-आंदोलन में तब्दील हो गया, जिसमें महीनों तक चले संघर्ष के दौरान हजारों लोग घायल हुए और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। विरोध प्रदर्शनों के पूरी तरह उग्र होने और बेकाबू हालात के बाद अगस्त 2024 में शेख हसीना को आखिरकार अपने प्रधानमंत्री पद से अचानक इस्तीफा देना पड़ा था और देश छोड़कर भारत आना पड़ा था। इस सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद बांग्लादेश की नई व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने उनके और उनके कई पूर्व सहयोगियों पर मानवता के खिलाफ अपराधों के गंभीर मामले दर्ज किए, जबकि उनकी पार्टी अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।तारिक रहमान का नया शासन और बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक सियासतबांग्लादेश की इस बड़ी राजनीतिक उठापटक के बीच हाल ही में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के प्रमुख तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में आधिकारिक तौर पर शपथ ले ली है, जिसके साथ वे दशकों के लंबे अंतराल के बाद बांग्लादेश के पहले निर्वाचित पुरुष प्रधानमंत्री बन गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश की सियासत लंबे समय तक शेख हसीना और तारिक रहमान की माता तथा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बीच की आपसी प्रतिद्वंद्विता के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जिसे देश के लोग अक्सर बेगमों की जंग के रूप में याद किया करते थे। अब ऐसे में शेख हसीना के दिसंबर तक वतन लौटने के इस सनसनीखेज ऐलान ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की राजनीति में खलबली मचा दी है और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बांग्लादेश की नई सरकार और न्यायपालिका इस पर क्या रुख अपनाती है।
रूस से लगातार कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर बड़ा और शिकंजा कसने के लिए अमेरिकी संसद ने एक बेहद सख्त प्रतिबंध विधेयक को प्रक्रियागत वोटिंग के जरिए पास कर दिया है। अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर ने इस दौरान बिना किसी लाग-लपेट के खुलकर कहा है कि इस नए और कड़े कानून का मुख्य निशाना भारत और चीन जैसे देश हैं, जो लगातार मॉस्को से ऊर्जा संसाधन खरीदकर उसकी सैन्य ताकत और रूस-यूक्रेन युद्ध को आर्थिक रूप से समर्थन दे रहे हैं। इस प्रस्तावित बिल के प्रावधानों के मुताबिक यदि यह पूरी तरह से कानून बनता है, तो रूस से व्यापार करने या ऊर्जा खरीदने वाले देशों के उत्पादों पर अमेरिका में भारी-भरकम 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क यानी टैरिफ लगाया जा सकता है, जिसका सबसे सीधा और गहरा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर पड़ना तय माना जा रहा है।सीनेट में भारी बहुमत से मिला समर्थन और राजनीतिक पृष्ठभूमिदक्षिण कैरोलिना के दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की स्मृति में लाए गए इस महत्वपूर्ण 'लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' पर अमेरिकी सीनेट के भीतर भारी बहुमत के साथ 86-12 के अंतर से क्लोजर मोशन पास कर दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि यह मतदान ठीक उसी दिन संपन्न हुआ जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने के लिए वाशिंगटन पहुंचे थे और उन्होंने दिवंगत सीनेटर ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अमेरिकी सीनेटरों का यह आक्रामक रुख यह साफ संकेत दे रहा है कि वाशिंगटन अब मास्को के साथ ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए पूरी तरह से मानसिक रूप से तैयार हो रहा है।मित्र देशों को नहीं, बल्कि चीन और भारत को है टार्गेटएक विशेष प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर से इस बिल के अंतरराष्ट्रीय प्रभावों के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में बयान देते हुए कहा कि इस कानून का मसौदा बहुत ही करीने से डिजाइन किया गया है ताकि अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी देशों पर इसका कोई नकारात्मक असर न पड़े, बल्कि इसका पूरा वार सीधे तौर पर चीन और भारत पर पड़े। सीनेटर विकर ने भारत और चीन की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पूरे मामले में यही देश मुख्य कसूरवार हैं क्योंकि वे भारी मात्रा में रूस का तेल और गैस खरीद रहे हैं जिससे रूसी युद्ध मशीन को लगातार ईंधन मिल रहा है और वे वैश्विक मंच पर अमेरिकी हितों के अनुकूल काम नहीं कर रहे हैं।भारत का रणनीतिक रुख और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडराता खतराभारत सरकार की ओर से इस मामले पर पहले ही बेहद स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाया गया है, जिसमें नई दिल्ली ने बार-बार यह दोहराया है कि रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना देश के राष्ट्रीय हितों और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए बेहद आवश्यक है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इस 100 प्रतिशत टैरिफ वाले प्रावधान को कानून का रूप देता है, तो इससे न सिर्फ द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों में भारी तनाव पैदा होगा बल्कि पहले से ही दबाव झेल रहा वैश्विक ऊर्जा बाजार और अधिक अस्थिर हो जाएगा।
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में विधानसभा चुनावों के माहौल के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण और खूनी हो चुके हैं। चुनाव प्रक्रिया के दौरान पिछले 48 घंटों में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई में कम से कम 30 आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। जम्मू-कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC के अनुसार, इस खूनी संघर्ष में सोमवार को 25 और मंगलवार को 5 लोगों की जान चली गई है। यह चुनाव पूरी तरह से भारी राजनीतिक अशांति, हथियारों के बल पर की गई कार्रवाई, बड़े पैमाने पर धांधली और संपूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच संपन्न हुए हैं। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय लोगों का साफ तौर पर आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सीधे तौर पर अंधाधुंध गोलियां चलाई हैं और इस क्षेत्र को आतंक के साए में धकेल दिया है।एमनेस्टी इंटरनेशनल की कड़ी निंदा और स्वतंत्र जांच की मांगइस भीषण मानवाधिकार उल्लंघन और हिंसक घटनाओं के बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एमनेस्टी साउथ एशिया की एक्टिंग डायरेक्टर इसाबेल लैसी ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा है कि पीओके में सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई यह कार्रवाई पाकिस्तान की उस पुरानी और गैर-कानूनी हिंसा की परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत वह हर आवाज को दबाना चाहता है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मांग की है कि सुरक्षा बलों द्वारा किए गए इस बल प्रयोग की तुरंत, पूरी तरह से स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। संगठन ने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई है कि पिछले 5 जून से पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह से ठप हैं, जिससे जमीनी हकीकत दुनिया के सामने आने से रोकी जा रही है। एमनेस्टी ने पाकिस्तान सरकार से तत्काल सभी संचार माध्यमों को बहाल करने और स्वतंत्र मीडिया तथा पर्यवेक्षकों को इलाके में प्रवेश की अनुमति देने की मांग की है।क्या है पूरा आंदोलन और क्यों भड़का है इस्लामाबाद का गुस्सायह पूरा विवाद और जनआंदोलन मूल रूप से जम्मू-कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC के नेतृत्व में शुरू हुआ था। इस आंदोलन की शुरुआत पीओके विधानसभा में उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की मांग के साथ हुई थी, जो साल 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान की मुख्य भूमि में जाकर बस गए थे। समय के साथ यह मांग पाकिस्तानी शासन के खिलाफ इस इलाके में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा जन-विद्रोह बन गया, जिसमें इस्लामाबाद के अवैध नियंत्रण और पाकिस्तानी सेना के दमनकारी रवैये का जमकर विरोध किया जा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानूनों का हवाला देते हुए प्रतिबंध तक लगा दिया है। हिंसा का यह दौर केवल पिछले दो दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि जून की शुरुआत से अब तक इस पूरे आंदोलन में कुल 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी दोनों शामिल हैं।चुनाव के बीच JAAC संस्थापक के भाई की हत्या और विदेशों में प्रदर्शनपाकिस्तानी सेना की इस क्रूर कार्रवाई का दायरा आम नागरिकों से लेकर आंदोलन के प्रमुख नेताओं के परिवारों तक फैल चुका है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, JAAC कोर टीम के सदस्य इम्तियाज असलम ने खुलासा किया है कि इस दमनकारी कार्रवाई के दौरान आंदोलन के संस्थापक उमर नजीर कश्मीरी के छोटे भाई उस्मान नजीर को भी मौत के घाट उतार दिया गया है। इस अमानवीय हत्या और पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के विरोध में विदेशों में भी गुस्सा फूट पड़ा है। यूनाइटेड किंगडम के ब्रैडफोर्ड शहर में स्थित पाकिस्तानी कॉन्सुलेट के बाहर बड़ी संख्या में JAAC समर्थकों और प्रवासी कश्मीरी समुदाय के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया तथा पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। JAAC के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने की शुरुआत से लेकर अब तक पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र में कम से कम 67 लोगों को अपनी गोलियों का शिकार बनाया है, जिससे पीओके के भीतर और बाहर भारी आक्रोश का माहौल है।
पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के रक्षा समीकरणों में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आ रहा है। आर्थिक बदहाली और भारी कर्ज के जाल में फंसे पाकिस्तान ने अपनी रणनीतिक स्थिति का फायदा उठाते हुए खाड़ी देशों के साथ सैन्य गठजोड़ बढ़ाना शुरू कर दिया है। सऊदी अरब के साथ हालिया रक्षा समझौतों के ठीक बाद, अब पाकिस्तान ने कुवैत के साथ एक बड़ी और महत्वपूर्ण डिफेंस डील पर मुहर लगा दी है। इस नए घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों और भारतीय रक्षा गलियारों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या खाड़ी देशों का यह बदला हुआ रुख नई दिल्ली के लिए किसी रणनीतिक चुनौती का संकेत है।कुवैत और पाकिस्तान के बीच क्या है यह नया सैन्य समझौतापाकिस्तान और कुवैत के बीच हुए इस नए रक्षा समझौते के तहत मुख्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त युद्धाभ्यास, खुफिया जानकारी साझा करने और तकनीकी सहयोग को शामिल किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की सेना कुवैती सशस्त्र बलों को आधुनिक युद्ध कौशल और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए ट्रेनिंग देगी। इसके बदले में कुवैत से पाकिस्तान को मोटी रकम और वित्तीय मदद मिलने की उम्मीद है, जिसकी उसकी डूबती अर्थव्यवस्था को इस वक्त सख्त जरूरत है। विश्लेषक इसे पाकिस्तान की 'मिलिट्री डिप्लोमेसी' का हिस्सा मान रहे हैं, जिसके जरिए वह तेल समृद्ध देशों से नकद डॉलर जुटाने की कोशिश में है।सऊदी अरब के साथ पहले ही हो चुका है बड़ा गठजोड़कुवैत से पहले पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को एक नए स्तर पर पहुंचाया था। सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती और वहां की रॉयल सऊदी लैंड फोर्सेस को ट्रेनिंग देने के बदले रियाद हमेशा से इस्लामाबाद का बड़ा मददगार रहा है। हाल के महीनों में दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी हाथ मिलाया है। अब इसी तर्ज पर कुवैत को भी अपने पाले में लाकर पाकिस्तान ने यह साबित करने की कोशिश की है कि खाड़ी देशों की सुरक्षा में उसकी सेना की भूमिका आज भी काफी महत्वपूर्ण बनी हुई है।क्या भारत के लिए सच में खड़ी हो सकती है कोई चुनौतीइस डिफेंस डील के सामने आने के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इसका भारत पर कोई विपरीत असर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि भारत को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने खाड़ी देशों, विशेषकर सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के साथ अभूतपूर्व रणनीतिक और आर्थिक संबंध स्थापित किए हैं। खाड़ी देश भली-भांति जानते हैं कि भारत एक बहुत बड़ा बाजार और मजबूत आर्थिक शक्ति है, जिसे वे किसी भी हाल में नाराज नहीं करना चाहेंगे। पाकिस्तान के साथ इन देशों का समझौता केवल द्विपक्षीय सुरक्षा जरूरतों और उनकी अपनी आंतरिक सुरक्षा तक ही सीमित है।बदलते दौर में जनरेटिव सर्च और एआई सुरक्षा के मायनेआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) और रक्षा कूटनीति के विश्लेषकों का कहना है कि यह डील सीधे तौर पर भारत विरोधी किसी एजेंडे का हिस्सा नहीं है। कुवैत और सऊदी अरब जैसे देश अपनी सेनाओं को आधुनिक बनाने के लिए पाकिस्तान के सस्ते और अनुभवी मानव संसाधन (मैनपावर) का उपयोग कर रहे हैं। भारत की विशाल सैन्य क्षमता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन (जैसे ब्रह्मोस और तेजस का निर्यात) और मजबूत वैश्विक छवि के सामने पाकिस्तान की यह छटपटाहट महज अपनी अर्थव्यवस्था को वेंटिलेटर पर बनाए रखने की एक कोशिश भर है, जिससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई सीधा खतरा नहीं दिखता।
मिडिल ईस्ट में ड्रैगन का बड़ा धमाका: ईरान को ₹610 करोड़ के घातक मिसाइल डिफेंस सिस्टम दे रहा चीन
पश्चिम एशिया (Middle East) के सुलगते हालातों के बीच एक ऐसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है, जो वैश्विक महाशक्तियों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा सकती है। लंबे समय से पर्दे के पीछे से चालें चलने वाले चीन ने अब इस क्षेत्र में खुला खेल शुरू कर दिया है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, चीन जल्द ही ईरान को ₹610 करोड़ (लगभग 73 मिलियन डॉलर) की कीमत वाले अत्याधुनिक मैनपैड्स (MANPADS - मैन-पोर्टेबल एयर-डिफेंस सिस्टम) की एक बड़ी खेप सौंपने जा रहा है। ड्रैगन के इस कदम से न सिर्फ पश्चिम एशिया का सैन्य संतुलन बदलने की आशंका है, बल्कि अमेरिकी रक्षा खेमे में भी खलबली मच गई है।क्या होते हैं मैनपैड्स और क्यों इतने खतरनाक हैं ये हथियारमैनपैड्स (MANPADS) असल में कंधे पर रखकर दागी जाने वाली बेहद हल्की और घातक मिसाइलें होती हैं, जिनका इस्तेमाल कम ऊंचाई पर उड़ने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को पलक झपकते ही मार गिराने के लिए किया जाता है। इन्हें एक या दो सैनिकों द्वारा आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है और बेहद कम समय में फायर किया जा सकता है। ईरान को इन चीनी मिसाइलों के मिलने से उसकी हवाई सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी, जिससे खाड़ी क्षेत्र में किसी भी संभावित हवाई हमले या रीइंजीनियरिंग ऑपरेशंस को नाकाम करने की उसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।चीन और ईरान के बीच गहराता रणनीतिक गठजोड़यह बड़ी सैन्य डील चीन और ईरान के बीच बढ़ते उस मजबूत आर्थिक और रणनीतिक गठबंधन का हिस्सा है, जो पिछले कुछ वर्षों में तेजी से उभरा है। अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों (Western Sanctions) से घिरे ईरान को चीन का यह खुला समर्थन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन इस सौदे के जरिए न सिर्फ ईरान से सस्ते कच्चे तेल की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना चाहता है, बल्कि वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी वर्चस्व को सीधी चुनौती देने की तैयारी कर चुका है।अमेरिका और इजरायल के लिए पैदा हुआ नया सिरदर्दचीन के इस कदम से सबसे बड़ा झटका अमेरिका और उसके सबसे करीबी सहयोगी इजरायल को लगा है। इजरायल और ईरान के बीच जारी सीधे टकराव के माहौल में ईरान को इतने आधुनिक हथियारों की सप्लाई मिलना इजरायली वायुसेना की रणनीतिक बढ़त के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके साथ ही, पेंटागन को डर है कि ये चीनी हथियार ईरान समर्थित अन्य गुटों (जैसे हूती विद्रोही या हिजबुल्लाह) के हाथों में भी पहुंच सकते हैं, जिससे लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना और वाणिज्यिक जहाजों पर खतरा और अधिक गहरा हो जाएगा।वैश्विक व्यापार और एआई सर्च के नजरिए से बड़े मायनेआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) और वैश्विक सुरक्षा के समीकरणों को देखें तो चीन का यह खुला हस्तक्षेप आने वाले समय में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को अस्थिर कर सकता है। यदि इस डील के जवाब में पश्चिमी देश चीन या ईरान पर नए कड़े प्रतिबंध लगाते हैं, तो वैश्विक सप्लाई चेन एक बार फिर बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीजिंग और तेहरान के इस नए सैन्य गठजोड़ पर वॉशिंगटन और यूरोपीय देश क्या जवाबी कदम उठाते हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के मैदान से एक बेहद विचलित करने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। ब्लैक सी यानी काले सागर के बेहद अशांत और खतरनाक वॉर जोन में एक मालवाहक जहाज फंसा हुआ है, जिसे अब 'मौत का जहाज' कहा जा रहा है। इस जहाज पर 13 भारतीय क्रू मेंबर (नाविक) सवार हैं, जिनकी जान इस वक्त बेहद गंभीर खतरे में है। युद्ध क्षेत्र के बिल्कुल बीचों-बीच फंसे होने के कारण इस जहाज के ऊपर से लगातार आत्मघाती ड्रोन और खतरनाक मिसाइलें गुजर रही हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि इन भारतीय नागरिकों के लिए मौत हर सेकंड महज कुछ इंच की दूरी पर खड़ी नजर आ रही है।युद्ध के सबसे खतरनाक हॉटस्पॉट में फंसा कमर्शियल वेसलयह पूरा मामला काले सागर के उस समुद्री हिस्से का है जहां रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ठिकानों पर लगातार हवाई और समुद्री हमले कर रहे हैं। फंसे हुए भारतीय क्रू मेंबर्स ने बेहद डरावने वीडियो और संदेश भेजकर अपनी आपबीती सुनाई है। उनके मुताबिक, जहाज के आसपास के पानी में लगातार धमाके हो रहे हैं और रात के समय आसमान मिसाइलों की रोशनी से दहल उठता है। दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे पर हमले करने के लिए जिस रूट का इस्तेमाल कर रही हैं, यह बदकिस्मत जहाज ठीक उसी के नीचे फंसा हुआ है, जिससे किसी भी वक्त इस पर सीधे हमले की आशंका बनी हुई है।राशन और पीने के पानी की भारी किल्लतजहाज पर फंसे इन 13 भारतीयों की मुश्किलें सिर्फ आसमान से बरसती मौत तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जहाज के भीतर के हालात भी बद से बदतर हो चुके हैं। पिछले कई दिनों से युद्ध क्षेत्र में फंसे होने के कारण जहाज पर मौजूद खाने-पीने का राशन लगभग खत्म होने की कगार पर है। पीने के साफ पानी की भारी किल्लत हो गई है और बिजली सप्लाई भी रुक-रुक कर आ रही है। मानसिक तनाव और मौत के साए में जीने के कारण कई क्रू मेंबर्स की तबीयत भी बिगड़ने लगी है, लेकिन इस हाई-रिस्क वॉर ज़ोन में किसी भी तरह की मेडिकल मदद का पहुंचना फिलहाल नामुमकिन बना हुआ है।भारत सरकार और डिप्लोमैटिक चैनल्स हुए एक्टिवइस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। भारतीय राजनयिक लगातार रूस और यूक्रेन दोनों देशों के दूतावासों और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क साध रहे हैं ताकि एक सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर (Safe Maritime Corridor) बनाकर इन 13 निर्दोष भारतीयों को वहां से सकुशल निकाला जा सके। हालांकि, युद्ध क्षेत्र में लगातार जारी बमबारी और माइनफील्ड्स (समुद्री बारूदी सुरंगों) की मौजूदगी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।परिजनों की बढ़ी धड़कनें, वतन वापसी के लिए लगाई गुहारइधर भारत में फंसे हुए क्रू मेंबर्स के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। मुंबई, केरल और तमिलनाडु समेत देश के विभिन्न हिस्सों के रहने वाले इन नाविकों के परिजनों ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय से हाथ जोड़कर भावुक अपील की है कि उनके बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए। सोशल मीडिया पर भी इन नाविकों को बचाने के लिए मुहिम तेज हो गई है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि जब तक दोनों देशों की तरफ से सीजफायर या किसी विशेष रेस्क्यू विंडो की मंजूरी नहीं मिलती, तब तक इन भारतीयों के लिए हर एक पल भारी रहने वाला है।
होर्मुज संकट पर ओमान का मास्टरस्ट्रोक: पेश किया धांसू शांति प्लान, क्या मान जाएगा ईरान
मध्य पूर्व (Middle East) में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव को कम करने के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz Crisis) में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए पड़ोसी देश ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। ओमान ने इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा और शांति बहाली के लिए एक बेहद मजबूत और व्यावहारिक प्लान पेश किया है। कूटनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर इस योजना पर आम सहमति बन जाती है, तो वैश्विक तेल संकट का बड़ा खतरा टल सकता है।वैश्विक तेल सप्लाई के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्यरणनीतिक और आर्थिक रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी दुनिया के लिए एक जीवन रेखा (Lifeline) की तरह है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। पूरी दुनिया में समुद्र के रास्ते होने वाले कुल कच्चे तेल (Crude Oil) के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा यानी करीब 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत, चीन और जापान जैसे बड़े एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर इस रूट की स्थिरता पर निर्भर करती है। ऐसे में यहां मामूली सा भी तनाव वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर पहुंचा देता है।ओमान के धांसू प्लान में ऐसा क्या है खासओमान हमेशा से ही खाड़ी देशों के बीच एक तटस्थ और शांतिप्रिय मध्यस्थ के रूप में जाना जाता रहा है। ओमान द्वारा पेश किए गए इस नए शांति प्रस्ताव में सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखा गया है। इस प्लान के तहत होर्मुज क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Ships) की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने, क्षेत्र में सैन्य जमावड़े को कम करने और किसी भी संभावित टकराव को रोकने के लिए एक ज्वाइंट नेविगेशन मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने का सुझाव दिया गया है। ओमान की कोशिश है कि अमेरिका, पश्चिमी देशों और ईरान के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई में कमर्शियल रूट को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करवा दिया जाए।क्या ईरान इस समझौते के लिए तैयार होगाइस पूरे विवाद की मुख्य चाबी ईरान के पास है, जो होर्मुज के उत्तरी हिस्से पर पूरा नियंत्रण रखता है। अतीत में कई बार तनाव बढ़ने पर ईरान ने इस मार्ग को ब्लॉक करने की धमकियां दी हैं, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ उसका टकराव सीधा हो जाता है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक प्रतिबंधों (Economic Sanctions) और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहे ईरान के लिए ओमान का यह प्रस्ताव एक सुरक्षित एग्जिट रूट साबित हो सकता है। ओमान के ईरान के साथ बेहद करीबी और दोस्ताना संबंध हैं, इसलिए माना जा रहा है कि बैकचैनल कूटनीति के जरिए ईरान को इस समझौते के टेबल पर लाया जा सकता है।भारत और दुनिया पर इस शांति समझौते का क्या होगा असरयदि ओमान की यह पंचायत सफल रहती है और ईरान इस धांसू प्लान को मान लेता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बहुत बड़ी राहत होगी। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए इस रूट पर शांति रहने से देश में तेल की कीमतें स्थिर रहेंगी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में कमी आएगी। इसके अलावा, एआई सर्च इंजन और मॉडर्न जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में भी वैश्विक बाजारों में इस खबर से भारी सकारात्मकता देखने को मिल सकती है, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी आने की पूरी संभावना है।
Russia-Ukraine War: यूक्रेन के पास फंसे 13 भारतीय नाविक, IMO ने सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता
यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को कहा कि चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर फंसे मालवाहक जहाज एमवी आमिर1 सवार भारतीय नाविकों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
वाशिंगटन से आ रही दो बड़ी खबरों ने भारतीय अर्थव्यवस्था, आईटी उद्योग, छात्रों और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में उठाए गए दो नए विधायी कदमों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया तनाव देखने को मिल सकता है। एक तरफ जहां अमेरिकी सीनेट में H-1B वीजा प्रक्रिया को बेहद कड़ा करने वाला बिल पेश किया गया है, वहीं दूसरी तरफ रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने के लिए भारी बहुमत से 'रूस प्रतिबंध विधेयक' पास हुआ है। यदि ये दोनों प्रस्ताव कानून की शक्ल लेते हैं, तो इसका सीधा असर भारत के आईटी पेशेवरों, अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों, देश के निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा।1. 'एंड H-1B एब्यूज एक्ट': 3 साल की रोक और 1 लाख डॉलर फीस का प्रस्तावअमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन सीनेटर टिम शीही द्वारा 'End H-1B Abuse Act' नाम से एक नया विधेयक पेश किया गया है। इस बिल में अमेरिका में विदेशी कुशल कर्मचारियों को दिए जाने वाले H-1B वीजा नियमों में कई सख्त बदलावों की सिफारिश की गई है।H-1B वीजा बिल से भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर असर:नए वीजा पर 3 साल का बैन: बिल में अगले तीन वर्षों के लिए नए H-1B वीजा जारी करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इससे अमेरिका जाकर काम करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय डॉक्टरों, इंजीनियरों और आईटी विशेषज्ञों को बड़ा झटका लग सकता है।1 लाख डॉलर का भारी शुल्क: हर H-1B वीजा आवेदन पर 1,00,000 डॉलर का अनिवार्य शुल्क लगाने का प्रावधान है। इतनी अधिक लागत के कारण भारतीय आईटी दिग्गज (जैसे TCS, Infosys, Wipro) और अमेरिकी कंपनियां भारत से प्रतिभाओं को अमेरिका बुलाने से बचेंगी।OPT व्यवस्था समाप्त करने का प्रस्ताव: अमेरिकी विश्वविद्यालयों से शिक्षा पूरी करने के बाद वहां काम का अनुभव प्राप्त करने के लिए मिलने वाली 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) सुविधा को खत्म करने की बात कही गई है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद वहां नौकरी पाना लगभग असंभव हो जाएगा।आश्रितों (Dependents) पर रोक: H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी और बच्चों के अमेरिका आने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है, जिससे पेशेवर अपने परिवार को साथ नहीं ले जा सकेंगे।2. 'रूस प्रतिबंध विधेयक': भारतीय सामानों पर 100% टैरिफ का खतराअमेरिकी सीनेट में 86-12 के भारी बहुमत से पारित हुआ 'रूस प्रतिबंध विधेयक' भारत के लिए दूसरी बड़ी चिंता का विषय है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है। चीन के बाद भारत, रूस से कच्चा तेल आयात करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है।इस कानून का भारत के व्यापार और अर्थ व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?भारतीय निर्यात पर 100% तक टैरिफ: इस विधेयक के तहत अमेरिका, रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों से आने वाले सामान पर 100% तक का शुल्क (टैरिफ) लगा सकता है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद बेहद महंगे हो जाएंगे और देश के निर्यात को भारी नुकसान होगा।रिफाइनरियों पर वित्तीय संकट: जून 2026 में भारत का रूसी तेल आयात 34% बढ़ा था। IOC, BPCL और रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूस से व्यापार जारी रखना अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग बाधाओं के कारण मुश्किल हो सकता है।पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई बढ़ने की आशंका: मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति पहले ही प्रभावित है। ऐसे में यदि अमेरिकी दबाव में भारत को रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल बंद करना पड़ता है, तो देश में ईंधन की कीमतें और आम महंगाई तेजी से बढ़ सकती हैं।द्विपक्षीय संबंध और भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता के सामने चुनौतीयह पहला मौका नहीं है जब व्यापारिक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तनाव देखा जा रहा है। इससे पहले अगस्त 2025 में जब अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, तब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता पूरी तरह रुक गई थी। अब 100% टैरिफ का खतरा दोनों देशों के कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को और अधिक संवेदनशील मोड़ पर ला सकता है। भारत हमेशा अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और विदेश नीति के फैसले स्वतंत्र रूप से लेता आया है, लेकिन अमेरिकी संसद के ये कदम भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को सीधी चुनौती देते नजर आ रहे हैं।वर्तमान स्थिति: क्या ये फैसले तुरंत लागू हो गए हैं?राहत की बात यह है कि ये दोनों प्रस्ताव अभी पूरी तरह कानून नहीं बने हैं:H-1B वीजा से जुड़ा बिल फिलहाल अमेरिकी सीनेट में केवल पेश किया गया है।रूस प्रतिबंध विधेयक सीनेट से पास होकर विधायी प्रक्रिया के अगले चरण में है।इन दोनों प्रस्तावों को अंतिम रूप से कानून बनने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) से मंजूरी मिलना और अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। इसलिए, जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक H-1B वीजा और भारत का अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार मौजूदा नियमों के तहत ही जारी रहेगा।(डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट अमेरिकी संसद (सीनेट) में पेश किए गए विधेयकों, विधायी दस्तावेजों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।)
इराक में अमेरिका-सऊदी के एयरस्ट्राइक, ईरान की मिसाइल जवाबी कार्रवाई; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
अमेरिकी सेना ने ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों को बनाया निशाना, ईरान ने आरोपों से किया इनकार; जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस और सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ी
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और सऊदी अरब की सेना ने एक संयुक्त अभियान चलाकर पूर्वी इराक में स्थित ईरान समर्थित मिलिशिया के कई ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए हैं। यह सैन्य कार्रवाई पिछले 72 घंटों के दौरान अमेरिकी ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में की गई है।दूसरी ओर, इस एयरस्ट्राइक के ठीक बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजर रहे 3 अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों को जब्त कर आगे बढ़ने से रोक दिया है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार पर सीधा संकट मंडराने लगा है।जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य बेस पर हमला नाकाममिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान को लेकर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के तुरंत बाद जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गईं।एयर डिफेंस की सफलता: CENTCOM के मुताबिक, जॉर्डन में तैनात अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते सभी मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।कोई नुकसान नहीं: हमले की इस कोशिश में अमेरिकी सैनिकों या बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।व्हाइट हाउस अलर्ट: इस हमले की तात्कालिक जानकारी राष्ट्रपति ट्रम्प और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को दे दी गई है।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की बड़ी कार्रवाईवैश्विक ईंधन आपूर्ति के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में ईरान की ओर से की गई कार्रवाई ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, IRGC ने दावा किया है कि तीन तेल टैंकरों ने पहले दी गई चेतावनियों का उल्लंघन किया था, जिसके बाद उन्हें बलपूर्वक रोक दिया गया।घटनाक्रम (Event)स्थान (Location)मुख्य विवरण (Details)संयुक्त एयरस्ट्राइकपूर्वी इराकअमेरिका व सऊदी अरब द्वारा हथियारों और सैन्य लॉजिस्टिक्स डिपो पर हमलामिसाइल हमलाजॉर्डन (US बेस)ईरान समर्थित समूहों द्वारा दागी गई मिसाइलें हवा में ध्वस्ततेल टैंकर जब्तीस्ट्रेट ऑफ होर्मुजIRGC ने चेतावनी उल्लंघन का हवाला देकर 3 टैंकरों को रोकाशिपिंग कंपनियों ने बदले रूट, नौसैनिक बेड़े मुस्तैदखाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य टकराव को देखते हुए कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अलर्ट जारी कर दिया है।मार्ग में बदलाव: कंपनियों ने जोखिम वाले समुद्री रास्तों के बजाय लंबे और सुरक्षित विकल्पों की समीक्षा शुरू कर दी है।सुरक्षा में इजाफा: कमर्शियल जहाजों पर अतिरिक्त निजी सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती की जा रही है और बीमा (Insurance) कवर की समीक्षा की जा रही है।अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी: फिलहाल क्षेत्र में अमेरिका के 20 से ज्यादा युद्धपोत और नौसैनिक जहाज गश्त कर रहे हैं, जो ईरान के आसपास समुद्री नाकेबंदी अभियानों में शामिल हैं।CENTCOM ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि फरवरी से अप्रैल 2026 के दौरान इराक में अमेरिकी ठिकानों पर 600 से ज्यादा हमलों के प्रयासों में ईरान समर्थित समूहों का हाथ रहा है। यदि ये समूह अपनी भड़काऊ गतिविधियां बंद नहीं करते हैं, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश आगे भी कठोर सैन्य कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
व्हाइट हाउस में डिप्लोमैटिक ड्रामा: ट्रंप से मिले जेलेंस्की और नेतन्याहू
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अलग-अलग बैठकें कीं
ओवल ऑफिस में ट्रंप और जेलेंस्की की बैठक, पैट्रियट सिस्टम और कूटनीति पर हुई बातचीत
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। जेलेंस्की ने बताया कि इस दौरान यूक्रेन की सुरक्षा, शांति की कोशिशों और आगे की कूटनीतिक बातचीत को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की
यूक्रेन बंदरगाह पर फंसे भारतीय: ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा
यूक्रेन के चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर खड़े मालवाहक जहाज एमवी अमीर-1 पर सवार 13 भारतीय नाविकों सहित कुल 15 सदस्य लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच फंसे हुए हैं
ग्रीस में भारतीय राजदूत की अहम मुलाकातें, रक्षा, रोजगार और पर्यटन पर हुई चर्चा
ग्रीस में भारत के राजदूत रवि शंकर ने हेलेनिक एयर फोर्स जनरल स्टाफ के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डेमोस्थनीज ग्रिगोरियाडिस से मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने भारत और ग्रीस की वायु सेनाओं के बीच चल रहे सहयोग और नई पहलों पर चर्चा की।
जापान में भूकंप पीड़ितों के प्रति विदेश मंत्री ने जताई संवेदना, मदद और एकजुटता का दिया भरोसा
विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने जापान के कुमामोटो प्रांत में आए भूकंप की खबर पर चिंता जताई।
जापान के कुमामोटो प्रांत के काशिमा टाउन में एक बड़े शॉपिंग सेंटर में विस्फोट हुआ। इस घटना में कई लोग फंस गए और कई घायल हो गए। जापान के सरकारी प्रसारक एनएचके ने यह जानकारी दी।
अमेरिका से मुआवजा लेने वाले जहाजों को होर्मुज से निकलने की अनुमति नहीं : ईरान
ईरान की सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के मुताबिक, ईरान के मुख्य सैन्य कमान, खात्म अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स ने कहा कि जो भी देश या कंपनी ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों से मुआवजा स्वीकार करेगी
Hong Kong, July 28, 2026:The R|Elan™ Circular Design Challenge (RCDC) – India’s leading platform for circular innovation in fashion and textiles, presented by Reliance Industries Ltd.’s R|Elan™, the United Nations in India and Lakm Fashion Week – announced its distinguished APAC Jury, which convened to evaluate this year’s cohort of pioneering circular design innovations. Bringing ... Read more
शी चिनफिंग ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति से बातचीत की
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पेइचिंग के जन वृहद भवन में चीनी की यात्रा पर आए स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से बातचीत की।

